मैनेजमेंट क्या है?
मैनेजमेंट एक प्रक्रिया है जिसमें लोगों के साथ और लोगों के द्वारा काम करवाकर संगठन के लक्ष्यों को कुशलतापूर्वक और प्रभावी ढंग से प्राप्त किया जाता है। यह संसाधनों (मानव, वित्तीय, भौतिक, सूचनात्मक और समय) का समन्वय करके संगठनात्मक उद्देश्यों को पूरा करता है।
प्रिंसिपल्स ऑफ मैनेजमेंट क्या हैं?
ये व्यापक और सामान्य दिशानिर्देश (guidelines) हैं जो प्रबंधकों को निर्णय लेने और प्रबंधकीय कार्यों को प्रभावी ढंग से करने में मदद करते हैं। ये सख्त नियम नहीं, बल्कि लचीली गाइडलाइंस हैं, जिन्हें स्थिति के अनुसार अनुकूलित किया जा सकता है।
प्रिंसिपल्स की मुख्य विशेषताएं:
- सार्वभौमिक प्रयोज्यता (Universal Applicability): स्कूल, अस्पताल, व्यवसाय, सरकारी कार्यालय या खेल टीम – हर जगह लागू।
- सामान्य दिशानिर्देश (General Guidelines): सटीक समाधान नहीं, बल्कि दिशा प्रदान करते हैं।
- लचीलापन (Flexibility): परिस्थिति और वातावरण के अनुसार संशोधित किए जा सकते हैं।
- अनुभव पर आधारित (Formed Through Experience): वर्षों के अवलोकन, प्रयोग और व्यावहारिक अनुभव से विकसित।
- कारण-प्रभाव संबंध (Cause and Effect Relationship): बताते हैं कि किसी प्रबंधकीय कार्रवाई का क्या परिणाम होगा (जैसे, उचित प्रेरणा से कर्मचारी प्रदर्शन बढ़ता है)।
- स्थिति पर निर्भरता (Depends on the Situation): प्रबंधक अपने निर्णय और कौशल से इन्हें लागू करते हैं।
प्रिंसिपल्स ऑफ मैनेजमेंट का महत्व (Importance)
- प्रबंधकों को उपयोगी अंतर्दृष्टि प्रदान करना: संगठन की स्थिति को समझने में मदद।
- संसाधनों का इष्टतम उपयोग: सीमित संसाधनों (समय, धन, सामग्री) के कुशल उपयोग के लिए मार्गदर्शन।
- वैज्ञानिक निर्णय लेना: तार्किक तर्क पर आधारित निर्णय।
- प्रबंधकों के प्रशिक्षण में सहायक: नए प्रबंधकों को बुनियादी ज्ञान प्रदान करना।
- बदलते परिवेश के अनुकूल होना: तकनीकी और बाजार बदलावों के प्रति प्रतिक्रिया का ढांचा।
- सामाजिक उत्तरदायित्व का निर्वहन: कर्मचारियों, ग्राहकों, समाज और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी।
प्रमुख योगदानकर्ता (Contributors)
1. हेनरी फ़ेयोल (Henri Fayol)
- उपनाम: फादर ऑफ एडमिनिस्ट्रेटिव मैनेजमेंट
- फोकस: शीर्ष स्तरीय प्रबंधन (Top-Level Management) – पूरे संगठन को कैसे प्रबंधित किया जाए।
- योगदान: 14 प्रिंसिपल्स ऑफ मैनेजमेंट दिए। यदि आप इनके सिद्धांतों को और गहराई से समझना चाहते हैं, तो मार्केटिंग मैनेजमेंट 2: प्रमोशन के 4 एलिमेंट्स पूरी जानकारी भी देख सकते हैं, जहां प्रबंधन के व्यावहारिक पहलुओं पर चर्चा की गई है।
2. एफ. डब्ल्यू. टेलर (F.W. Taylor)
- पूरा नाम: फ्रेडरिक विंसलो टेलर
- उपनाम: फादर ऑफ साइंटिफिक मैनेजमेंट
- फोकस: निचले स्तर (Shop Floor Level) – कर्मचारियों की उत्पादकता और दक्षता कैसे बढ़ाई जाए।
- योगदान: वैज्ञानिक प्रबंधन के सिद्धांत (Scientific Principles of Management) दिए।
फ़ेयोल ने प्रबंधन पर ध्यान दिया, टेलर ने दक्षता पर। दोनों के सिद्धांत आधुनिक प्रबंधन की नींव हैं।
प्रिंसिपल्स ऑफ मैनेजमेंट क्यों पढ़ें?
- बेहतर प्रबंधक बनने के लिए: टीम और कार्य को प्रभावी ढंग से संभालना सीखें।
- निर्णय क्षमता सुधारने के लिए: जीवन और करियर में बेहतर निर्णय लेने में मदद। यदि आप परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं, तो CA Inter Corporate Law: Exam Oriented Batch Intro & Preliminary Chapter भी आपके लिए उपयोगी हो सकता है।
- संसाधनों का प्रभावी उपयोग करने के लिए: समय, धन और प्रयास का अपव्यय कम करना।
- संगठनों की कार्यप्रणाली समझने के लिए: बड़े संगठन कैसे काम करते हैं, इसकी बुनियादी समझ विकसित करना। इसे और अधिक विस्तार से जानने के लिए यूरेटर का कोर्स, संरचना और रिलेशन: पूरी गाइड पढ़ें।
प्रबंधन के सिद्धांतों को समझने के बाद, आप इसे विभिन्न क्षेत्रों में लागू कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, EBAY क्रैश कोर्स: ड्रॉपशिपिंग, हंटिंग, लिस्टिंग और अकाउंट सेटअप की पूरी गाइड में भी संसाधन प्रबंधन के यही सिद्धांत काम आते हैं। इसके अलावा, यदि आप तकनीकी या गणितीय दृष्टिकोण से प्रबंधन सीखना चाहते हैं, तो इन्वर्स ट्रिग्नोमेट्री फंक्शन: सुपर वन शॉट बोर्ड परीक्षा तक की तैयारी से भी आपको समस्या-समाधान कौशल विकसित करने में मदद मिलेगी।
प्रिंसिपल्स ऑफ मैनेजमेंट। यह एक ऐसा टॉपिक है ना जो स्टूडेंट्स पढ़ना नहीं चाहते क्योंकि थोड़ा सा लेंथी लगता है
उनको एक टॉपिक। लेकिन एक बार वह समझ जाते हैं ना इस टॉपिक को तो उनके दिमाग से जाता नहीं है ये टॉपिक। तो एक जादुई सा टॉपिक
है ये। ये इस वीडियो में हम कवर करने वाले हैं। आने वाली दो से तीन वीडियोस प्रिंसिपल्स ऑफ मैनेजमेंट पे ही होंगी।
ठीक है? तो नमस्कार दोस्तों, मेरा नाम है सोनू सिंह और आप देख रहे हैं सोनू सिंह पीपीटी वाले। आज की इस वीडियो में हम
डिस्कस करने वाले हैं प्रिंसिपल्स ऑफ मैनेजमेंट के बारे में। ये पूरी वीडियो बेसिक्स के ऊपर होने वाली है कि क्या होता
है मैनेजमेंट? क्या होता है प्रिंसिपल्स ऑफ मैनेजमेंट? क्या इसकाेंस होता है? क्यों हमें पढ़ना चाहिए? इसके अंदर क्या
टॉप कंट्रीब्यूटर्स हैं? कौन-कौन? क्या-क्या उनके प्रिंसिपल्स दिए गए हैं? और एक्चुअल में होता क्या है? भाई सरल
शब्दों में समझेंगे कि प्रिंसिपल्स ऑफ मैनेजमेंट आपको क्यों पढ़ना चाहिए। तो लास्ट तक देखना आप इस वीडियो को ताकि आप
इस टॉपिक को अच्छे से समझ पाओ। ठीक है? और एक और बात आपके दिमाग में आ रही होगी कि बैकग्राउंड इसका ब्लैक क्यों है इस वीडियो
का? तो काफी बच्चों ने है ना कमेंट में लिखा कि यार उनको रात-रात भर पढ़ाई करनी होती है। तो वाइट बैकग्राउंड अगर होता है
तो आंखों पे बहुत ज्यादा स्ट्रेस पड़ता है। तो इसलिए मैंने ट्राई किया कुछ नया ब्लैक बैकग्राउंड के साथ। ठीक है? कोई भी
फीडबैक होगा ना इस थीम से रिलेटेड या इस प्रेजेंटेशन से रिलेटेड प्लीज कमेंट में आप लिख देना। [नाक से की जाने वाली आवाज़]
चलो बिना किसी देरी के ना स्टार्ट करते हैं प्रिंसिपल्स ऑफ मैनेजमेंट के साथ। सबसे पहले देखते हैं कि क्या मीनिंग होता
है मैनेजमेंट का। मैनेजमेंट बेसिक्स की हम सीरीज कवर कर रहे हैं। आपने मीनिंग तो अब तक समझ ही लिया होगा, दिमाग में बैठ गया
होगा। चलिए फिर से एक बार और पढ़ लेते हैं मीनिंग को। मैनेजमेंट इज द प्रोसेस ऑफ गेटिंग थिंग्स डन थ्रू एंड विद पीपल टू
अचीव ऑर्गेनाइजेशनल गोल्स एफिशिएंटली एंड इफेक्टिवली। मैनेजमेंट एक ऐसी प्रक्रिया है, एक ऐसा प्रोसेस है जिसमें आप लोगों के
साथ काम करते हो और लोगों के द्वारा काम करवाते हो। क्यों करवाते हो? ताकि ऑर्गेनाइजेशन के जो भी गोल्स हैं, जो भी
ऑब्जेक्टिव्स हैं, उसको आप एफिशिएंटली और इफेक्टिवली मीट कर सको, प्राप्त कर सको। कोई भी ऑर्गेनाइजेशन होगी, कुछ उसके गोल्स
होंगे। ठीक है? उस गोल को सही ढंग से प्राप्त करना और कम से कम रिसोर्स का वेस्टेज किए बिना प्राप्त करना उसको आप
मैनेजमेंट बोलते हो। ठीक है? किसी भी कंपनी में कोई एक मैनेजर होता है। उसके अंडर बहुत बड़ी टीम होती है। उस टीम से वो
काम करवाता है। गाइडेंस प्रोवाइड करता है ताकि वो अच्छे से जो भी उनके गोल्स हैं वो अचीव कर सकें। अगर एक लाइन में बोला जाए
ना तो मैनेजमेंट का मतलब होता है कोऑर्डिनेट करना लोगों को और रिसोर्सेज को ताकि ऑर्गेनाइजेशन के जो गोल्स हैं वो
अच्छे से अचीव हो सके। अब आप बोलोगे लोगों से तो समझ में आता है भाई वर्कर्स होते हैं, एंप्लाइजज़ होते हैं, मैनेजर्स होते
हैं। रिसोर्सेज क्या होते हैं? गोल्स आप सबको पता है कि किसी भी कंपनी का कोई भी गोल हो सकता है कि प्रॉफिट बनाना है,
सक्सेस प्राप्त करना है, विजिबिलिटी चाहिए। बहुत सारी चीजें हो सकती हैं। रिसोर्सेज कौन-कौन से हो सकते हैं? भाई
रिसोर्सेज बहुत सारे हो सकते हैं। ह्यूमन रिसोर्सेज हो सकते हैं। एंप्लॉय वर्कर्स, मैनेजर्स, फाइनेंशियल रिसोर्सेज हो सकते
हैं। मनी, कैपिटल, बजट, फिजिकल रिसोर्सेज हो सकते हैं। किसी भी कंपनी में मशीनंस होती हैं, बिल्डिंग्स होती हैं,
इक्विपमेंट्स होते हैं, कंप्यूटरटर्स होते हैं, लैपटॉप्स होते हैं। ठीक है? उसके बाद इंफॉर्मेशनेशन रिसोर्सेज हो सकते हैं।
जैसे कि डेटा हो गया, रिपोर्ट्स हो गई या नॉलेज हो गई। वो सब कुछ भी ना किसी कंपनी में सेव होता ही होता है। और सबसे जरूरी
रिसोर्स टाइम रिसोर्स हो सकता है। ठीक है? तो इन सबको अगर आप मैनेज कर रहे हो, कोऑर्डिनेट कर रहे हो सही ढंग से ताकि
आपके ऑर्गेनाइजेशनल के गोल्स अचीव हो सकें तो उसको आप मैनेजमेंट बोल दोगे। ठीक है? समझ गए आप मैनेजमेंट किसे कहते हैं? अभी
हम मुद्दे पे आते हैं। प्रिंसिपल्स ऑफ मैनेजमेंट किसे कहा जाता है? प्रिंसिपल्स का मतलब क्या होता है? स्कूल वाला
प्रिंसिपल की बात नहीं कर रहा मैं। प्रिंसिपल्स होते हैं कुछ सिद्धांत। किसी भी चीज को करने के लिए इस तरीके से की जा
सकती है वो चीज। वो सब क्या होते हैं? प्रिंसिपल्स होते हैं। प्रिंसिपल्स ऑफ़ मैनेजमेंट आर ब्रॉड एंड जर्नल गाइडलाइंस
दैट हेल्प्स मैनेजर्स मेक डिसीजंस एंड परफॉर्म मैनेजेरियल फंक्शनंस इफेक्टिवली। प्रिंसिपल्स ऑफ़ मैनेजमेंट एक ब्रॉड और
जनरल गाइडलाइंस होती हैं। बहुत ज्यादा डिटेल्ड नहीं होता है। एक ब्रॉड गाइडलाइन दे दी गई है कि भाई इस तरीके से इस काम को
किया जा सकता है या कुछ एक ऐसे टिप्स एंड ट्रिक्स हैं जिसको आप यूज़ करके इस काम को कर सकते हो। और वो जो गाइडलाइंस है वो
मैनेजर्स को उनके डिसीजन में और मैनेजरियल फंक्शनंस को परफॉर्म करने में हेल्प करती हैं। प्रिंसिपल्स कोई स्ट्रिक्ट रूल्स
नहीं होते हैं कि भाई आपको ऐसे करना ही करना है। नहीं वो बहुत फ्लैक्सिबल होते हैं। गाइडलाइंस होती हैं मैनेजेरियल
एक्शंस के लिए। ठीक है? तो ये मैनेजर्स को यह नहीं बताते कि एग्जैक्टली आपको क्या करना है। ये एक डायरेक्शन प्रोवाइड करते
हैं। गाइडेंस प्रोवाइड करते हैं। ठीक है? मैनेजर इसको अपने हिसाब से सिचुएशन के हिसाब से यूज़ कर सकता है। कोई भी उस जिस
कंपनी में वो काम कर रहा है उसका नेचर क्या है? जो प्रॉब्लम है उसका नेचर क्या है? बिजनेस एनवायरमेंट क्या है? उसके
हिसाब से इन प्रिंसिपल्स को वो यूज़ कर सकता है। एक एग्जांपल देता हूं छोटा सा। Google Maps कभी भी आपने देखा होगा। आप एक
जगह से दूसरी जगह जाने के लिए नेविगेशन ऑन करते हो। भाई वहां पे एक रास्ता दिखाता है। यही थोड़ी ना बोलता है कि इसी रास्ते
से जाना है आपको। अगर आप दूसरा रास्ता लोगे तो मैं नहीं जाने दूंगा। नहीं। आपके पास बहुत सारे और रास्ते होते हैं या आप
किसी और रास्ते पे भी निकल गए तो उस हिसाब से वह रास्ता बना देता है। ठीक है? ठीक है? तो वो एक गाइडलाइन प्रोवाइड कर रहा है
कि भाई इससे जाओगे तो आपको छोटा पड़ेगा। इससे जाओगे तो आपको ट्रैफिक कम मिलेगा। इससे जाओगे तो टोल बच जाएगा। बहुत सारी
ऐसी हैं। ठीक है? एग्जांपल्स आप समझ गए होंगे। तो प्रिंसिपल्स ऑफ़ मैनेजमेंट को अगर आप बुलेट पॉइंट्स में बोलें तो एक
जनरल गाइडलाइंस होती हैं। ये मैनेजर्स के लिए मैनेजर्स को उनके डिसीजन मेकिंग में हेल्प करती हैं। मैनेजर्स की एफिशिएंसी
बढ़ाने में हेल्प करती हैं। एफिशिएंसी का मतलब रिसोर्सेज की वेस्टेज नहीं होने देती हैं। प्रिंसिपल्स ऑफ़ मैनेजमेंट अगर आप
फॉलो करोगे तो आपके रिसोर्स वेस्ट नहीं होंगे। आप ऑप्टिमम यूटिलाइजेशन ऑफ रिसोर्सेज ईजीली कर सकते हो। प्रिंसिपल्स
ऑफ़ मैनेजमेंट जो भी दिए गए हैं ना वो सारी ऑर्गेनाइजेशन में हर तरीके की ऑर्गेनाइजेशन में भले ही नॉन प्रॉफिट
ऑर्गेनाइजेशन हो, कॉर्पोरेट्स हो, स्कूल हो, ठीक है? प्राइवेट ऑर्गेनाइजेशन हो सब पे एप्लीकेबल होता है। अभी देखते हैं क्या
कुछ फीचर्स होते हैं प्रिंसिपल्स ऑफ़ मैनेजमेंट के। सबसे पहले जो हमने पीछे पढ़ा यूनिवर्सल एप्लीकेबिलिटी। अगर वह स्कूल
है, हॉस्पिटल है, बिजनेस फर्म है, गवर्नमेंट ऑफिस है या कोई एक स्पोर्ट्स टीम है, वहां पे भी प्रिंसिपल्स ऑफ
मैनेजमेंट को आप यूज़ कर सकते हो। ठीक है? अभी ज्यादा डिटेल में सोचना मत कि भाई क्या हैं ऐसे प्रिंसिपल्स? बस आप ये समझ
लो कुछ गाइडलाइंस हैं। कुछ मैनेजमेंट करने की तरकीबे हैं। उनको आप यूज़ करने के बारे में डिस्कस कर रहे हो। ठीक है? सेकंड है
जर्नल गाइडलाइंस। अभी तक हम पढ़ते हुए आ रहे हैं कि मैनेजर्स को एक गाइडेंस प्रोवाइड करती हैं मैनेजर ऑफ़ प्रिंसिपल्स
ऑफ मैनेजमेंट की गाइडलाइंस। ये एग्जैक्ट सॉल्यूशन नहीं बताती है कि इस सिचुएशन में आपको क्या करना है। आपको एक डायरेक्शन
प्रोवाइड कर देंगी। थर्ड होता है फ्लैक्सिबिलिटी। जो प्रिंसिपल्स ऑफ़ मैनेजमेंट होते हैं, वो रिजिड नहीं होते
हैं कि आपको फॉलो करने ही करने हैं। आप उनको मॉडिफाई कर सकते हो। जो भी एनवायरमेंट है, सिचुएशन है, उसके हिसाब
से। फॉर्म थ्रू एक्सपीरियंस। प्रिंसिपल्स ऑफ मैनेजमेंट में जितने भी प्रिंसिपल्स दिए गए हैं ऐसे बस रात को सो के सपने में
आ गए वैसे नहीं दिए हुए हैं। इन पे बहुत सालों की ऑब्जरवेशन है, एक्सपेरिमेंटेशन है, प्रैक्टिकल एक्सपीरियंस है मैनेजर्स
का। अपनी असल जिंदगी में यूज़ किए हुए हैं। पहले इस्तेमाल किया जा चुका है। उसके बाद ही विश्वास किया गया है इन प्रिंसिपल्स ऑफ़
मैनेजमेंट पे। ठीक है? आ गई बात समझ में? नेक्स्ट होता है कॉज एंड इफेक्ट रिलेशनशिप। प्रिंसिपल्स ऑफ मैनेजमेंट एक
कॉज एंड इफेक्ट रिलेशनशिप को दर्शाता है। जो डिफरेंट मैनेजेरियल एक्शन अगर आप लोगे उसके बाद उसका आउटकम क्या होगा? वो बताता
है प्रिंसिपल्स ऑफ मैनेजमेंट कि कोई एक्शन है उसको लो तो क्यों लो उसका आउटकम होगा तो क्या होगा? ठीक है? फॉर एग्जांपल अगर
आप प्रॉपर मोटिवेशन रखोगे एंप्लाइजज़ के अंदर तो आपको एंप्लई की परफॉर्मेंस में आपको बढ़ोतरी दिखेगी। यह दिखेगा कि
एंप्लाइजज़ और अच्छा परफॉर्म कर रहे हैं। सिक्स्थ होता है डिपेंड्स ऑन दी सिचुएशन। बिल्कुल सही बात है। प्रिंसिपल्स ऑफ
मैनेजमेंट क्योंकि स्ट्रिक्टली फॉलो नहीं होते हैं। सिचुएशन के हिसाब से इनको आप मोल्ड कर सकते हो। और मैनेजर्स जो भी इसको
यूज़ कर रहे हैं अपना जजमेंट और अपना जो स्किल्स है वो यूज़ करके इन प्रिंसिपल्स को अप्लाई कर सकते हैं।ेंस
ऑफ़ प्रिंसिपल्स ऑफ़ मैनेजमेंट। प्रिंसिपल्स ऑफ़ मैनेजमेंट काेंस क्या है? क्यों कंपनीज़ को यूज़ करना चाहिए? प्रोवाइड्स यूज़फुल
इंसाइट्स टू मैनेजर्स। क्योंकि ये बहुत सालों की एक्सपीरियंस और ऑब्जरवेशन के बाद डेवलप हुए हैं। ये मैनेजर्स को
ऑर्गेनाइजेशन की सिचुएशन को समझने का हेल्प कर देते हैं। ऑप्टिमम यूटिलाइजेशन ऑफ रिसोर्सेज जैसे कि मैंने पीछे भी बताया
था कि किसी भी कंपनी के पास बहुत लिमिटेड रिसोर्सेज होते हैं। रिसोर्सेज हमने देख ही लिया था क्या-क्या होते हैं। फिजिकल
रिसोर्सेज, मनी रिसोर्सेज, टाइम होता है। तो मैनेजमेंट प्रिंसिपल्स जो होते हैं वो इन रिसोर्सेज को एफिशिएंटली यूज़ करने के
लिए गाइडेंस प्रोवाइड करते हैं। जैसे कि Google मैप्स हो गया। Google maps क्या है? Google Maps आपको शॉर्टेस्ट रास्ता
बताएगा ताकि आप पेट्रोल को कम वेस्ट करो। ठीक है? पेट्रोल क्या है? आपका रिसोर्स है। ऐसे ही कंपनीज़ में है। ठीक है?
गाइडेंस प्रोवाइड करेगा कि आप एंप्लई को इस तरीके से अगर आप मैनेज करते हो तो आप ज्यादा टाइम वेस्ट नहीं करोगे। ज्यादा
उनके ऊपर सैलरी नहीं उड़ाओगे। ठीक है? थर्ड होता है साइंटिफिक डिसीजन मेकिंग। प्रिंसिपल्स ऑफ़ मैनेजमेंट में जितने भी
प्रिंसिपल्स दिए गए हैं, वो ऐसा नहीं दिया गया है कि बस सोच लिया रात को और सुबह प्रिंसिपल्स दे दिए। नहीं। लॉजिकल रीजनिंग
के ऊपर बेस्ड है कि एंप्लई को अगर इस सिचुएशन में आप रखते हो, तो वह ऐसा रिएक्ट करेगा। ठीक है? साइंटिफिक डिसीजन मेकिंग
आप कर सकते हो अगर आप प्रिंसिपल्स ऑफ़ मैनेजमेंट यूज़ कर रहे हो तो। फोर्थ होता है हेल्प्स इन ट्रेनिंग
मैनेजर्स। जो नए मैनेजर्स हैं उनको नहीं पता है कि कैसे टीम्स को मैनेज करना है। वो प्रिंसिपल्स ऑफ़ मैनेजमेंट से एक बेसिक
सीख सकते हैं कि भाई ये सारी चीजें कर सकते हैं। जैसे डिवीज़ ऑफ़ लेबर है, डिवीज़ ऑफ़ वर्क है, टाइम स्टडी है, मोशन स्टडी
है। बहुत सारे प्रिंसिपल्स हैं। ठीक है? वो आने वाली वीडियोस में हम डिस्कस करेंगे। फिफ्थ हैप्टिंग टू चेंजिंग
एनवायरमेंट। बिजनेस कंडीशंस बहुत जल्दी-जल्दी चेंज हो रही हैं। जैसे अभी एआई वगैरह आ गया है तो उससे बहुत चेंज हो
रहा है। टेक्नोलॉजी में चेंज हो रहा है। कस्टमर्स की प्रेफरेंस में चेंज हो रहा है। है ना? तो जो ये प्रिंसिपल्स हैं वो
एक फ्रेमवर्क प्रोवाइड कर देते हैं। एक बेस प्रोवाइड कर देते हैं कि कैसे रिस्पॉन्ड करना है इन चेंजेस को। क्योंकि
अगर कुछ चेंज हो रहा है तो जरूरी नहीं है कि मैनेजर्स को सब कुछ आना ही आना चाहिए। अगर मैनेजर्स को मैनेज करना भी आता है ना
अच्छे से तो भी वो बहुत बड़ी बात होती है। और वो मैनेज करना कहां से सीखेंगे? कहां से उनको गाइडलाइंस मिलेंगी? प्रिंसिपल्स
ऑफ मैनेजमेंट से। लास्ट होता है इसकाेंस फुलफिलिंग सोशल रिस्पांसिबिलिटी। अब प्रिंसिपल्स ऑफ़
मैनेजमेंट में कोई भी कंपनी रिस्पांसिबल होती है अपने एंप्लाइजज़ के प्रति, कस्टमर्स के प्रति, सोसाइटी के प्रति और
एनवायरमेंट के प्रति। प्रिंसिपल्स ऑफ मैनेजमेंट में कुछ ऐसे प्रिंसिपल्स भी दिए गए हैं जिससे कंपनीज़ को एनकरेजमेंट मिलती
है कि कैसे वो रिस्पांसिबली काम कर सकती हैं। ठीक है? नेक्स्ट होता है कंट्रीब्यूटर्स टू मैनेजमेंट प्रिंसिपल्स।
अब मैनेजमेंट प्रिंसिपल्स के कुछ दो कंट्रीब्यूटर्स हैं। दो ही नहीं हैं। बहुत सारे हैं लेकिन जो मेजर हैं वो ये दो हैं।
ठीक है? हेनरी फओल एंड एफडब्ल्यू टेलर। हेनरी फयल आपने पहले भी नाम सुना होगा। नहीं भी सुना है तो कोई दिक्कत वाली बात
नहीं है। हेनरी फल ऐसे कंट्रीब्यूटर थे जिनको फादर ऑफ एडमिनिस्ट्रेटिव मैनेजमेंट के नाम से भी जाना जाता है।
एडमिनिस्ट्रेटिव मतलब टॉप लेवल मैनेजमेंट हो गया क्योंकि इन्होंने बहुत सारे ऐसे प्रिंसिपल्स निकाले जो टॉप लेवल का अगर
कोई बंदा है ना किसी भी कंपनी में डायरेक्टर लेवल का या सीईओ लेवल का वो ईजीली अप्लाई कर सकता है। तो इन्होंने कुछ
14 प्रिंसिपल्स ऑफ मैनेजमेंट निकाले जो अभी तक यूज़ में आते हैं। उसके बाद है एफडब्ल्यू टेलर। फ्रेडरिक विंसलॉ टेलर
इनका पूरा नाम है। ठीक है? इज़ नोन एज फादर ऑफ साइंटिफिक मैनेजमेंट। समझ रहे हो? ऊपर क्या था? एडमिनिस्ट्रेटिव मैनेजमेंट।
एफडब्ल्यू टेलर को माना जाता है फादर ऑफ साइंटिफिक मैनेजमेंट। इन्होंने शॉप फ्लोर लेवल पे कैसे एफिशिएंसी बढ़ाई जाए उसके ऊपर
इन्होंने प्रिंसिपल्स दिए हुए हैं। ठीक है? इन्होंने एक्चुअली क्या किया ना? जो नीचे के लोग थे जो लोअर लेवल हैं, वर्कर्स
वगैरह हैं, उनकी प्रोडक्टिविटी को आप कैसे बढ़ा सकते हो ताकि वेस्टेज कम से कम हो। उनके ऊपर इन्होंने प्रिंसिपल्स निकाले। तो
हेनरी फल का आप समझ गए कि टॉप लेवल मैनेजमेंट्स को क्या-क्या एकशंस लेने चाहिए। उनके लिए उन्होंने काम किया।
एफडब्ल्यू टेलर ने क्या किया कि जो लोअर लेवल मैनेजमेंट है वो अपने वर्कर्स को कैसे मैनेज करेंगे? सबोर्डिनेट्स को कैसे
मैनेज करेंगे वो निकाला। एफडब्ल्यू टेलर ने जैसे कि मैंने बताया फोकस्ड ऑन मैनेजमेंट एट द टॉप लेवल। ठीक है? टॉप
लेवल कैसे मैनेज करेगा अपनी पूरी ऑर्गेनाइजेशन को। एफडब्ल्यू टेलर ने किया फोकस्ड ऑन एफिशिएंसी एट शॉप फ्लोर लेवल।
ठीक है? शॉप फ्लोर लेवल मतलब सबसे लोअर लेवल सबोर्डिनेट लेवल जो होता है उस पे कैसे एफिशिएंसी बढ़ाई जाए। तो हेनरी फेयल
ने मैनेजमेंट के ऊपर निकाला। इन्होंने एफिशिएंसी के ऊपर निकाला। हेनरी फल ने 14 प्रिंसिपल्स दिए। इन्होंने साइंटिफिक
प्रिंसिपल्स ऑफ मैनेजमेंट दिए जो कि हम आने वाली वीडियो में पढ़ेंगे। ठीक है? ये बस बेसिक है आपको समझाने के लिए कि हम दो
कंट्रीब्यूटर्स पढ़ने वाले हैं आने वाली वीडियो में। ये दो कंट्रीब्यूटर्स बहुत पुराने हैं लेकिन अभी भी बहुत रेलेवेंट
हैं। मॉडर्न मैनेजमेंट प्रिंसिपल्स आर लार्जली बेस्ड ऑन कंट्रीब्यूशनंस ऑफ हेनरी फल एंड एफ डब्ल्यू टेलर। ठीक है? जो
मॉडर्न मैनेजमेंट प्रिंसिपल्स भी हैं ना वो भी इनसे बहुत ज्यादा इंस्पायर्ड हैं। ठीक है? तो जो बेस है ना उसको कभी नहीं
भूलना चाहिए। तो बेस आपको क्लियर हो जाएगा इन वीडियोस में। ठीक है? अभी बात करते हैं आपको ये क्यों पढ़नी चाहिए प्रिंसिपल्स ऑफ
मैनेजमेंट? आपको क्या फायदा है इससे पढ़ के? आपके सिलेबस में क्यों दिया हुआ है यह? अगर आप कोई मैनेजमेंट रिलेटेड कोर्स
कर रहे हैं, एमबीए कर रहे हैं, बीबीए कर रहे हैं या आप 12th क्लास में भी हैं, तो क्यों आपको यह आना चाहिए? सबसे पहला है टू
बिकम बेटर मैनेजर्स। अगर आपको फ्यूचर में जाकर मैनेजरियल रोल्स में अप्लाई करना है या आपको एक अच्छा लीडर बनना है कि आपको एक
टीम को लीड करना है तो आपको यह प्रिंसिपल्स ऑफ मैनेजमेंट अच्छे से आने चाहिए कि भाई प्रिंसिपल्स ऑफ मैनेजमेंट
क्या गाइडलाइंस बताते हैं कि कैसे एक टीम को मैनेज किया जाता है? कैसे काम को मैनेज किया जाता है? कैसे कंपनीज़ को मैनेज किया
जाता है? टू इंप्रूव डिसीजन मेकिंग। अब डे टू डे लाइफ में स्टूडेंट लाइफ में भी बहुत डिसीजंस लिए जाते हैं। प्रिंसिपल्स ऑफ
मैनेजमेंट आपको बहुत ऐसी गाइडलाइंस भी बताते हैं जिससे आप अपने डिसीजन मेकिंग स्किल्स को इंप्रूव कर सकते हो। ठीक है?
थर्ड होता है टू यूज़ रिसोर्सेज इफेक्टिवली। जैसे कि हम अभी तक पढ़ते हुए आ रहे हैं। प्रिंसिपल्स ऑफ़ मैनेजमेंट में
रिसोर्स यूटिलाइज़ेशन बहुत अच्छे से किया जाता है ताकि अननेसेसरी वेस्टेज को कैसे जल्दी से जल्दी रिमूव किया जा सके। ठीक
है? तो अगर आपको रिसोर्सेज जो भी आपके पास रिसोर्सेज है अगर आप स्टूडेंट्स हो तो आपके पास मनी रिसोर्स है आपके पास टाइम
रिसोर्स है जिसको आप इफेक्टिवली मैनेज कर सकते हो टू अचीव गोल्स एफिशिएंटली वही सेम बात आ गई एफिशिएंटली का मतलब हो गया कि आप
ज्यादा वेस्टेज ना करो अच्छे से अपने गोल्स को प्राप्त करो वेस्टेज कम रखो ठीक है और लास्ट होता है टू अंडरस्टैंड हाउ
ऑर्गेनाइजेशंस फंक्शन ऑर्गेनाइजेशन में एक्चुअल में काम कैसे होता है कैसे ऑर्गेनाइजेशन मैनेज होती है कभी आपने सोचा
है कि इतनी बड़ी ऑर्गेनाइजेशन होती है। कैसे मैनेजर्स उसको मैनेज करते हैं? थाउजेंड्स ऑफ एंप्लाइजज़ होते हैं। लैक्स
ऑफ एंप्लाइजज़ होते हैं। बहुत सारे एंप्लाइजज़ होते हैं। कैसे वो मैनेज होता है? अगर आपको वो उसका बेस जानना है तो आप
प्रिंसिपल्स ऑफ मैनेजमेंट को पढ़ सकते हो। तो आने वाली वीडियोस में आने वाली दो वीडियोस आएंगी। सबसे इसके नेक्स्ट वाली
वीडियो हेनरी फल के 14 प्रिंसिपल्स हम पढ़ेंगे। सारे प्रिंसिपल्स को इजी एग्जांपल के साथ कवर करने की कोशिश करूंगा। आपको
लिंक इसका डिस्क्रिप्शन में मिल जाएगा हेनरी फल के 14 प्रिंसिपल्स का। वहां से जाके देख सकते हैं। आपको प्लेलिस्ट का
लिंक भी मिल जाएगा। प्लेलिस्ट में भी होगी वो वीडियो। ठीक है? तो मिलते हैं आपसे नेक्स्ट वीडियो में। अगर आपको कोई भी डाउट
है इस वीडियो में तो प्लीज नीचे कमेंट सेक्शन में लिख देना। कोई दिक्कत वाली बात नहीं है। और अगर पसंद आई वीडियो तो प्लीज
लाइक करते हुए जाना। सब्सक्राइब कर देना। अगर चैनल अच्छा लगे तो मिलते हैं आपसे नेक्स्ट वीडियो में। तब तक के लिए गुड
बाय। टेक केयर।
मैनेजमेंट एक प्रक्रिया है जिसमें संगठनात्मक लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए लोगों और संसाधनों का समन्वय किया जाता है। वहीं प्रिंसिपल्स ऑफ मैनेजमेंट सामान्य दिशानिर्देश हैं जो प्रबंधकों को निर्णय लेने और प्रबंधकीय कार्यों को प्रभावी ढंग से करने में मार्गदर्शन करते हैं। ये लचीले हैं और स्थिति के अनुसार अनुकूलित किए जा सकते हैं.
इनकी मुख्य विशेषताओं में सार्वभौमिक प्रयोज्यता शामिल है, यानी ये स्कूल, अस्पताल, व्यवसाय आदि हर जगह लागू होते हैं। ये सामान्य दिशानिर्देश हैं, लचीले हैं, अनुभव पर आधारित हैं और कारण-प्रभाव संबंध दर्शाते हैं, जैसे उचित प्रेरणा से कर्मचारी प्रदर्शन बढ़ता है.
हेनरी फ़ेयोल को 'फादर ऑफ एडमिनिस्ट्रेटिव मैनेजमेंट' कहा जाता है, जिनका फोकस शीर्ष स्तरीय प्रबंधन पर था और उन्होंने 14 प्रिंसिपल्स ऑफ मैनेजमेंट दिए। वहीं एफ. डब्ल्यू. टेलर को 'फादर ऑफ साइंटिफिक मैनेजमेंट' कहा जाता है, जिनका फोकस निचले स्तर पर कर्मचारियों की उत्पादकता और दक्षता बढ़ाने पर था.
ये प्रबंधकों को उपयोगी अंतर्दृष्टि प्रदान करते हैं, संसाधनों के इष्टतम उपयोग में मार्गदर्शन करते हैं और वैज्ञानिक निर्णय लेने में मदद करते हैं। इसके अलावा ये प्रबंधकों के प्रशिक्षण, बदलते परिवेश के अनुकूल होने और सामाजिक उत्तरदायित्व का निर्वहन करने में सहायक होते हैं.
नहीं, ये सख्त नियम नहीं हैं बल्कि लचीली दिशानिर्देश हैं। इन्हें परिस्थिति और वातावरण के अनुसार संशोधित या अनुकूलित किया जा सकता है, जिससे प्रबंधक अपने निर्णय और कौशल से इन्हें लागू कर सकते हैं.
इससे आप बेहतर प्रबंधक बन सकते हैं, निर्णय क्षमता में सुधार कर सकते हैं और संसाधनों का प्रभावी उपयोग कर सकते हैं। साथ ही आपको संगठनों की कार्यप्रणाली की बुनियादी समझ विकसित होती है, जो करियर और जीवन में मददगार होती है.
ये सार्वभौमिक रूप से लागू होते हैं, न केवल व्यवसायों में बल्कि स्कूल, अस्पताल, सरकारी कार्यालय और खेल टीमों जैसे हर प्रकार के संगठन में। इससे ये सुनिश्चित होता है कि प्रबंधक कहीं भी प्रभावी ढंग से लक्ष्य प्राप्त कर सकें.
Keep this summary
Save it to LunaNotes and it becomes a real note in your library — editable, searchable, and ready to turn into flashcards or a diagram. Free to start.
Save to LunaNotesOr summarise for another video.
32K+ people have turned 65K+ videos into notes
“Very useful tool. I'm using it for the last couple weeks and I'm loving it so far. Makes learning on YouTube a great experience.”
This summary and transcript were automatically generated using AI with the Free YouTube transcript summary tool by LunaNotes.
Related summaries
AI के युग में अपना करियर बचाने और CEO बनने के 10 कठोर सबक
क्या आप जानते हैं कि आपकी प्रतिभा आपकी सफलता का केवल 20% है? इस पॉडकास्ट में लीडरशिप कोच संदीप दास ने 10 ऐसे क्रूर सबक साझा किए हैं जो आपको कॉरपोरेट जगत में आगे बढ़ने, AI से अपनी नौकरी बचाने और अपना खुद का ब्रांड बनाने में मदद करेंगे। जानिए क्यों 99% फैसले हमारा अवचेतन मन लेता है और स्टोरीटेलिंग कैसे आपकी सबसे पावरफुल स्किल बन सकती है।
Pharmacovigilance Exam Prep: Important Questions, Units & Priority Topics | Depth of Biology
इस वीडियो में, हमने फार्माकोविजिलेंस की परीक्षा के लिए सबसे महत्वपूर्ण प्रश्नों की विस्तृत रणनीति बताई है। आप सीखेंगे कि कौन से विषय 100% पूछे जाते हैं, किन यूनिट्स को प्राथमिकता देनी है, और एडवर्स ड्रग रिएक्शन, क्लिनिकल ट्रायल, फार्माकोएपिडेमियोलॉजी जैसे टॉपिक्स को आसानी से कैसे कवर करें। यह वीडियो आपकी तैयारी को फोकस्ड और प्रभावी बनाएगा।
UHV Unit 4: Harmony in Nature & Existence One Shot
इस वीडियो में Universal Human Values and Professional Ethics (UHV) की Unit 4 को एक ही वीडियो में कवर किया गया है। इसमें चारों ऑर्डर्स (Material, Plant, Animal, Human) की अंतर्संबंधता, सह-अस्तित्व (Coexistence), स्व-नियमन और स्थिरता (Recyclability & Self-Regulation) को विस्तार से समझाया गया है। साथ ही, PYQ समाधान और टेबल के साथ महत्वपूर्ण टॉपिक्स जैसे नेचर, स्पेस, यूनिट, और होलिस्टिक परसेप्शन को भी कवर किया गया है।
मार्केटिंग मैनेजमेंट 2: प्रमोशन के 4 एलिमेंट्स पूरी जानकारी
इस वीडियो में जीत सर क्लास 12 के फोर्थ सेमेस्टर के बिजनेस स्टडीज के मार्केटिंग मैनेजमेंट टू चैप्टर को कवर करते हैं। मुख्य रूप से प्रमोशन के चार एलिमेंट्स - एडवरटाइजमेंट, पब्लिसिटी, पर्सनल सेलिंग और सेल्स प्रमोशन को सरल भाषा में समझाया गया है, साथ ही एडवरटाइजमेंट के फायदे और आपत्तियों पर विस्तृत चर्चा की गई है।
स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग में CCTV और प्रोजेक्ट प्रबंधन
इस वीडियो में, अजय ने स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की है, जिसमें CCTV सिस्टम का उपयोग, प्रोजेक्ट प्रबंधन की तकनीकें, और निर्माण प्रक्रिया के दौरान ध्यान देने योग्य महत्वपूर्ण बिंदु शामिल हैं। यह जानकारी इंजीनियरिंग छात्रों और पेशेवरों के लिए अत्यंत उपयोगी है।
Most viewed summaries
A Comprehensive Guide to Using Stable Diffusion Forge UI
Explore the Stable Diffusion Forge UI, customizable settings, models, and more to enhance your image generation experience.
Kolonyalismo at Imperyalismo: Ang Kasaysayan ng Pagsakop sa Pilipinas
Tuklasin ang kasaysayan ng kolonyalismo at imperyalismo sa Pilipinas sa pamamagitan ni Ferdinand Magellan.
Mastering Inpainting with Stable Diffusion: Fix Mistakes and Enhance Your Images
Learn to fix mistakes and enhance images with Stable Diffusion's inpainting features effectively.
Pamamaraan at Patakarang Kolonyal ng mga Espanyol sa Pilipinas
Tuklasin ang mga pamamaraan at patakaran ng mga Espanyol sa Pilipinas, at ang epekto nito sa mga Pilipino.
How to Install and Configure Forge: A New Stable Diffusion Web UI
Learn to install and configure the new Forge web UI for Stable Diffusion, with tips on models and settings.
Found this summary useful?
Take it with you. One click puts it in your own LunaNotes library.
Save to LunaNotes