CA Inter Corporate & Other Laws: Exam Oriented Batch - First Lecture (Preliminary Chapter)
यह CA इंटरमीडिएट के लिए चैतन्य जैन सर (CJ) का पहला लेक्चर है, जो Exam Oriented Batch के तहत शुरू किया गया है। इसमें Corporate & Other Laws के Preliminary Chapter (Chapter 1 of Companies Act) को पढ़ाया गया है।
बैच की स्ट्रैटजी और रिसोर्सेज
- लाइव + रिकॉर्डेड: बैच में 60-70% लेक्चर रिकॉर्डेड हैं, जबकि 3-4 बड़े चैप्टर लाइव पढ़ाए जाएंगे।
- अनाउंसमेंट वीडियो: बैच में एक अलग वीडियो होगी जो पूरा शेड्यूल और इंडेक्स बताएगी कि कौन सा लेक्चर लाइव है और कौन सा रिकॉर्डेड।
- रिसोर्सेज (Google Drive Link पर):
- स्टार शीट्स: हैंडराइटिंग में बने शॉर्ट नोट्स (समरी)।
- मंत्र जाप ऑडियो: हर चैप्टर के छोटे-छोटे पार्ट्स के लिए ऑडियो क्लिप्स (रिवीजन के लिए)।
- ई-बुक: दो भागों में - कॉन्सेप्ट बुक (द बुक ऑफ कानून) और क्वेश्चन बैंक (द बुक ऑफ जुनून) अलग-अलग।
- अन्य: अमेंडमेंट अपडेट्स, आईसीएआई का मटेरियल, आरटीपी/एमटीपी, प्रीवियस ईयर क्वेश्चन पेपर्स, और बहुत कुछ।
- राइटिंग प्रैक्टिस क्लासेस: नई रिकॉर्डेड क्लासेस हर चैप्टर के लिए बनाई गई हैं।
- बुक्स (फिजिकल): जिन लोगों ने प्रो या ऑप्शन लिया है, उन्हें फिजिकल बुक्स भी मिलेंगी।
Preliminary Chapter: मुख्य टॉपिक्स
सेक्शन 1: शॉर्ट टाइटल, एक्सटेंट और कमेंसमेंट
- नाम: कंपनीज़ एक्ट, 2013 (कंसॉलिडेट और अमेंड करने के लिए बनाया गया)।
- लागू होना: पूरे भारत में लागू है।
- एक्ट का स्ट्रक्चर: 470 सेक्शन, 29 चैप्टर, और 7 शेड्यूल।
- कमेंसमेंट:
- प्रेसिडेंट ने 29 अगस्त 2013 को असेंट दिया।
- 30 अगस्त 2013 को ऑफिशियल गजट में प्रकाशित हुआ।
- सेक्शन 1 तुरंत इन्फोर्स हुआ, बाकी सेक्शन फेज़ेज में लागू किए गए।
सेक्शन 2: डेफिनिशन्स (Clause System)
- सेक्शन 2 में कुल 95 डेफिनिशन्स (क्लॉज़) हैं।
- महत्वपूर्ण: सेक्शन 2 के अंदर सब-सेक्शन नहीं, बल्कि क्लॉज़ होते हैं। कारण: सारी डेफिनिशन्स एक-दूसरे से स्वतंत्र (independent) हैं।
एप्लीकेबिलिटी ऑफ कंपनीज एक्ट
- रजिस्टर्ड कंपनी: कंपनीज़ एक्ट के तहत (या पुराने 1956 एक्ट के तहत) रजिस्टर्ड कंपनी।
- स्टैच्यूटरी कंपनी: दूसरे कानूनों (जैसे LIC, SBI, बैंकिंग कंपनीज) के तहत बनी कंपनियाँ।
- नियम: कंपनीज़ एक्ट इन पर भी लागू होता है, लेकिन अगर उनके अपने कानून (इंडिविजुअल एक्ट) से कोई विवाद होता है, तो इंडिविजुअल एक्ट ही मान्य होगा (प्रीवेल करेगा)।
कंपनी की डेफिनेशन (Clause 20)
- परिभाषा: "ए कंपनी मींस अ कंपनी इनकरपोरेटेड अंडर दिस एक्ट ऑर एनी प्रीवियस कंपनी लॉ।"
- यानी केवल वही कंपनी है जो इस एक्ट (2013) या किसी पिछले एक्ट (जैसे 1956) के तहत रजिस्टर्ड है।
- महत्वपूर्ण: फॉरेन कंपनी (जैसे Apple, Unilever) क्लॉज़ 20 के तहत कंपनी नहीं हैं।
कंपनी के फीचर्स (आई टॉप क्लास निमोनिक)
- I - Incorporated Association: कम से कम सदस्य (प्राइवेट: 2, पब्लिक: 7, OPC: 1)।
- P - Perpetual Succession: सदस्यों के आने-जाने से कंपनी पर कोई असर नहीं।
- C - Common Seal: कंपनी का ऑफिशियल सिग्नेचर (अब ऑप्शनल)।
- L - Limited Liability: लायबिलिटी उसी प्रकार की कंपनी पर निर्भर करती है (Shares, Guarantee, या Unlimited)।
- A - Artificial Legal Person: कानून की नजर में एक व्यक्ति, लेकिन प्राकृतिक व्यक्ति नहीं।
- S - Separate Legal Entity: कंपनी और सदस्य अलग-अलग इकाई हैं। कंपनी अपनी संपत्ति की मालिक है, सदस्य नहीं।
डेफिनिशन पढ़ने का तरीका
- मींस: क्लोज्ड इंटरप्रिटेशन। सिर्फ उतना ही समझना है जितना लिखा है।
- इंक्लूड्स: ओपन इंटरप्रिटेशन। लिखे से ज़्यादा भी समझ सकते हैं।
- मींस एंड इंक्लूड्स: एक्सपेंडेड इंटरप्रिटेशन।
अगले टॉपिक्स (Preview)
- बॉडी कॉरपोरेट की डेफिनेशन
- कंपनी का वर्गीकरण (प्राइवेट, पब्लिक, स्मॉल, वन परसन, सेक्शन 8, आदि): यह वर्गीकरण Comprehensive Guide to Company Law: Key Concepts and Exam Preparation में विस्तार से समझाया गया है।
- 10 महत्वपूर्ण डेफिनेशन्स (फाइनेंशियल स्टेटमेंट, फाइनेंशियल ईयर, KMP, नेटवर्थ, रिलेटेड पार्टी, आदि) – इनकी गहन समझ के लिए Delhi University Company Law Exam Preparation: A Comprehensive One-Shot Revision Guide एक उपयोगी संसाधन है।
इसके अलावा, डायरेक्टर्स के नियुक्ति और पात्रता से जुड़े नियमों के लिए Comprehensive Summary of Appointment and Qualification of Directors को देखें, और कंपनी के वित्तीय पहलुओं को समझने के लिए Comprehensive Guide to Capital Markets, Insider Trading, and Regulatory Framework से सहायता लें। क्रिमिनल लॉ के सामान्य सिद्धांतों से तुलना करने के लिए Understanding the Basics of Criminal Law: Key Concepts and General Exceptions भी पढ़ा जा सकता है।
हेलो एवरीवन, व्हाट्स अप? कैसे हैं सभी लोग? आप सभी लोगों का स्वागत है बॉयज एंड गर्ल्स आ जाइए एकदम गरमा गरम ताजेताजे बैच
के अंदर। एंड दिस इज द फर्स्ट टाइम वी आर लॉन्चिंग एंड वी हैव लॉन्च्ड एक्चुअली एग्जाम ओरिएंटेड बैच फॉर योर इंटरमीडिएट
प्रिपरेशन। गाइस, बहुत ही शानदार बैच होने वाला है। आप सभी लोगों के लिए यह पहला लेक्चर एकदम गरमा गरम तरीके से मैं आप
लोगों को यहां पर प्रोवाइड कर रहा हूं। आई होप यू गाइस आर डूइंग ग्रेट। देखिए यार जितने भी बच्चे अपकमिंग अटेम्प्ट के लिए
यहां पर तैयारी कर रहे हैं, आप लोगों के लिए एग्जाम ओरिएंटेड बैच बड़ा तगड़ा होने वाला है। इसके पीछे कारण क्या है? मैं आप
लोगों को बता देता हूं। पहली चीज नाम सिर्फ एग्जाम ओरिएंटेड नहीं है। इसका काम भी वैसा ही होने वाला है। अगर मैं अपने
सब्जेक्ट की बात करूं कॉर्पोरेट एंड अदर लॉस के लिए। तो आज इस पहले लेक्चर के अंदर आई थिंक आप लोगों को ये पहला लेक्चर तो
फ्री ऑफ कॉस्ट मिलता है। आई थिंक आप लोग एक्सपीरियंस कर सकते हैं वाईटी के ऊपर। करेक्ट है। मैं इस सेशन के लिए आप लोगों
को कॉर्पोरेट एंड अदर लॉस का जो पहला चैप्टर है प्रिलिमिनरी जहां से सारी चीजें स्टार्ट होती है, मैं उसी चैप्टर को आप
लोगों के लिए यहां पर लेकर जा रहा हूं। बहुत ही शानदार तरीके से आप लोगों को यहां पर इस चैप्टर को पढ़ाया जाएगा। पहले अपनी
स्टाइल में थोड़ा सा चालू करते हैं यार इस एकदम सेशन को। मजा आना चाहिए। एनर्जी आनी चाहिए। ठीक है? चलिए आ जाइए। बॉयज एंड
गर्ल्स दिस इज सीजे एंड ये है कानून का जुनून जो आपके अंदर भी है, मेरे अंदर भी है। सो व्हाट आर वी वेटिंग फॉर?
फटाफट सीए बनते हैं एवरीवन। कम ऑन, कम ऑन, कम ऑन। बहुत ही बढ़िया गाइस, बहुत ही बढ़िया।
एकदम शानदार एनर्जी के साथ में चालू करते हैं। मेरा नाम है चैतन्य जैन एंड आई एम अ चार्टर्ड अकाउंटेंट। मैं आपको पिछले 9 10
सालों से अ लॉ पढ़ा रहा हूं एट फाउंडेशन लेवल एंड एट इंटरमीडिएट लेवल। मुझे खुद को सीए बने हुए तकरीबन तकरीबन 10 साल होने आ
गए हैं। एंड इन्हीं 9 10 सालों के अंदर आप लोगों ने बहुत प्यार दिया है। मजा आता है पढ़ने में, पढ़ाने में। चलिए तो
प्रिलिमिनरी को यहां पर स्टार्ट करते हैं। लेकिन मैं सबसे पहले आप लोगों को कुछ बेसिक्स यहां पर बता देना चाहता हूं। हम
लोग यहां पर किस तरीके से पढ़ने वाले हैं और आपको क्या-क्या चीजें रिफर करनी होगी। चलिए आ जाइए। सबसे पहली बात मैं आप लोगों
को ये बता देना चाहता हूं कि जितने भी स्टूडेंट्स हैं हो सकता है किसी ने प्रो लिया हो। है ना? हो सकता है किसी ने प्रो
ले रखा हो। हो सकता है कि कोई फास्ट ट्रैक बैच पुराना देख रहा हो या फिर हो सकता है कि कोई एग्जाम ओरिएंटेड बैच ही सिर्फ
परचेस करना चाह रहा हो। व्हाटएवर मे बी द कैटेगरी यू आर इन। कोई फर्क नहीं पड़ता है। आप लोगों को मेरे ओल्ड लेक्चर्स वहां
पर दिखेंगे। ओल्ड लेक्चर्स आपको एज इट इज वहां पर दिखेंगे। उनको रहने देना कोई दिक्कत की बात नहीं है। लेकिन मैं आप
लोगों के लिए नए तरीके से गरमा गरम लेटेस्ट लाइव प्लस रिकॉर्डेड लेक्चर्स को इस बैच में इंट्रोड्यूस कर रहा हूं फॉर द
वेरी फर्स्ट टाइम। आई नो सारा फॉर्मेट रिकॉर्डेड का है। और आप मान के चलो 60-70% रिकॉर्डेड लेक्चर्स ही आप लोगों को मिलने
वाले हैं। बट कुछ तीन-चार बड़े-बड़े चैप्टर्स मैं आपको एग्जाम ओरिएंटेड बैच के अंदर लाइव पढ़ाने वाला हूं। एंड इट इज़
गोइंग टू बी लेजेंड्री। तो पहली बात ओल्ड लेक्चर्स अगर आपके पास में है तो आपके पास में अब लेटेस्ट लेक्चर्स यहां पर आने वाले
हैं जिसमें आपको पहला लेक्चर यहां पर प्रीलिमरी का मिल रहा है। सर पूरा स्ट्रेटजी क्या रहेगी? शेड्यूल क्या
रहेगा? आप हमको बताएंगे। बेटा उसके लिए आपको बैच के अंदर अनाउंसमेंट का वीडियो देखना पड़ेगा। ये जो अनाउंसमेंट का वीडियो
है ये लेक्चर जब आपको मिल रहा होगा। आई थिंक उसके एक-द दिन बाद मिलेगा आप लोगों को। तो जब भी आप ये लेक्चर देखोगे आप बैच
के अंदर जाओगे अनाउंसमेंट के सेक्शन में आपको एक वीडियो दिखेगा नहीं दिखेगा तो एक आध दिन में आ जाएगा वहां पर मैंने आपको
पूरा इंडेक्स बनाकर दिया हुआ है कि मैं कौन सा लेक्चर आपको पहले रिकॉर्डेड फॉर्मेट में मिलेगा एंड कौन सा लेक्चर आप
लोगों को यहां पर लाइव मिलने वाला है ताकि आप उसके हिसाब से अपनी यहां पर प्लानिंग कर सकते हो और पढ़ाई कर सकते हो सर क्या
हमको पूरा एक्सेस मिलेगा स्टार शीट का बिल्कुल बेटा कैसी बात कर रहे हो बिना स्टार शीट्स के हम लोग पढ़ नहीं सकते
स्टार शीट्स क्या है जो बच्चा पहली बार देख रहा हो तो मैं आप लोगों को बता देता हूं। स्टार शीट्स कुछ समरी नोट्स होते हैं
जो मैं यहां पर प्रिपेयर करता हूं आप लोगों के लिए। और ये जो स्टार शीट्स होते हैं लेट मी शो यू अगर मेरे पास में कुछ है
तो। हां कुछ इस तरीके का एग्जांपल है। ये मेरे स्टार शीट्स होते हैं। बहुत सुंदर हैंडराइटिंग में मैं लिखता हूं आप लोगों
के लिए। बहुत सारे शॉर्ट नोट्स रहते हैं। पूरी मॉड्यूल यहां पर कवर होती है। और ये जो जितने भी स्टार शीट्स होते हैं ये तो
बेटा मैनेजमेंट एंड एडमिनिस्ट्रेशन चैप्टर के हैं। जितने भी स्टार शीट्स होगी वो आपको यहां पर मिलेगी। सर मंत्र जाप ऑडियो
क्या है? मंत्र जाप ऑडियोज़ मेरे रिवीजन के लिए शॉर्ट क्लिप्स हैं। तो आपके पास में हर एक चैप्टर को मैंने बहुत सारे
पार्ट्स में डिवाइड कर रखा है। किसी चैप्टर में सेवन, किसी चैप्टर में आठ, किसी चैप्टर में छह, किसी चैप्टर में
पांच। ऐसे मंत्र जाप ऑडियोज़ आप लोगों को मिलेंगे। नाउ ये सारी चीजें आप लोगों को कहां पर मिलने वाली है? दो-तीन चीजें और
बता देता हूं मैं। आपको मेरी ई-बुक मिलेगी। ई-बुक आपको दो तरीके से मिलेगी। Google ड्राइव लिंक पे मैंने क्या कर रखा
है? एक Google ड्राइव लिंक आपको बैच के अंदर मिलेगी। बैच में आप जैसे ही रिसोर्सेज में जाओगे रिसोर्सेज में जाने
के बाद में आपको एक पीडीएफ मिलेगी। उसमें ये Google ड्राइव लिंक रहेगी। उस पे आप क्लिक करोगे। ये सारी तमाम चीजें आपको
वहां पर मिलने वाली है। क्या एक्स्ट्रा चीज है जो मैं आपको बता रहा हूं। मेरी चैप्टर वाइज मैंने ई बुक को यहां पर
डिवाइड कर दिया है। क्वेश्चन बैंक अलग से है। कांसेप्ट बुक अलग से है। यानी कि कांसेप्ट बुक को मैं बोलता हूं द बुक ऑफ
कानून एंड मेरे क्वेश्चन बैंक को बोलता हूं द बुक ऑफ जुनून। 1 मिनट के अंदर मैं आप लोगों को दिखाने वाला हूं। ठीक है? सो
इलेक्ट्रॉनिक बुक सॉरी ई-बुक आप लोगों को यहां पर मिलने वाली है चैप्टर वाइज। स्टार शीट्स और मंत्र जाप ऑडियो आप लोगों को
Google ड्राइव लिंक में मिलेंगे। नाउ इट इज हैपनिंग फॉर द फर्स्ट टाइम। भले ही ये एग्जाम ओरिएंटेड बैच है लेकिन मैं आप
लोगों के लिए ताजा गरमा गरम आप लोगों के लिए राइटिंग प्रैक्टिस क्लासेस मैं शूट कर रहा हूं। बहुत सारी शूट हो गई है कुछ
चैप्टर्स की जो एक साथ आपको मिल जाएगी। बाकी क्लासेस की जो राइटिंग प्रैक्टिस क्लासेस है वो धीरे धीरे धीरे-धीरे आप
लोगों को मिलते जाएगी रिकॉर्डेड फॉर्मेट के अंदर। तो ये बैच अपने आप में बहुत नया होने वाला है। कंटेंट एकदम नया है।
तरोताज़ा है। नई स्टार शीटें नई तरीके से नई एनर्जी के साथ में आपको यहां पर पढ़ाया जा रहा है। आप लोगों को बहुत मजा आएगा।
अगर आप लोग अभी तक ये एग्जाम ओरिएंटेड बैच को अगर आप टारगेट नहीं कर रहे थे तो करो बेटा। आप लोगों को मजा आएगा। ठीक है? सो
समराइज करते हुए लाइव प्लस रिकॉर्डेड लेटेस्ट लेक्चर्स अनाउंसमेंट वीडियो आपको देखना है। Google ड्राइव लिंक मैं आपको 1
मिनट के अंदर दिखा रहा हूं और राइटिंग प्रैक्टिस क्लासेस भी आप लोगों को यहां पर मिलने वाली है। चलो कुछ Google ड्राइव
लिंक मेरी इस तरीके से दिखती है। उसमें मैं बहुत सारी ना एडिशनल रिसोर्सेज डालता हूं। एडिशनल रिसोर्सेज में क्या होता है
ना पढ़ते-पढ़ते ना आप लोगों को कुछ अमेंडमेंट की एक बुकलेट मैंने डाल रखी है। 2026 के लिए थी। अब 2027 के लिए नया
अमेंडमेंट बुकलेट यहां पर ऐड होगा। जो भी चेंजेस आने वाले हैं। है ना? बहुत सारे चीजें जो आपको ना जैसे प्रोस्पेक्टस पढ़ते
हो आप लोग आप लोग मेमोरेंडम पढ़ते हो तो बहुत सारी कंपनी के प्रोस्पेक्टस मेमोरेंडम वगैरह ये सारी चीजें ना मैं
यहां पर डाल के रखता हूं Google ड्राइव लिंक के ऊपर ताकि आप लोगों को रिसोर्सेज मिले। अमेंडमेंट एंड अपडेट्स यहां पर आती
है। मेरी ई-बुक कुछ आपको यहां पर दिखेगी। बहुत सारे फॉर्म्स आते हैं वो आपको यहां पर दिखेंगे। आईसीआई का मटेरियल भी आप
लोगों को यहां पर दिखेगा। मैंने आप लोगों के लिए बहुत सारी चीजें आईसीआई की मटेरियल मॉडल टेस्ट पेपर वगैरह यहां पर डाल रखे
हैं। ये मंत्र जाप ऑडियोज हैं। ये स्टार शीट्स हैं और ये आपके आरटीपीस और एमटीपीस हैं और प्रीवियस ईयर क्वेश्चन पेपर्स भी
है विद योर सजेस्टेड आंसर्स। जैसे-जैसे ये ऐड होते जाएंगे यहां पर ऐड होते जाएंगे सजेस्टेड आंसर्स के साथ में। ठीक है? तो
ये कुछ चीजें हैं जो आपको Google ड्राइव लिंक पे यहां पर मिलने वाली है। तो ये मैंने आपको छोटा सा इंट्रोडक्शन दिया है।
आज हम लोग यहां पर प्रिलिमिनरी चैप्टर को स्टार्ट करेंगे और हम लोग कोशिश करेंगे इन वन गो मतलब आपको ये वीडियो कुछ मेरे ख्याल
से अ दो ढाई तीन सवा तीन तीन सवा तीन घंटे के आसपास का कुछ आपको ये वीडियो मिलना चाहिए। 3 सवा5 घंटे के अंदर हम लोग यहां
पर कवर करेंगे। मेरी खासियत मैं आप लोगों को बता देता हूं यहां पर। जैसे ही आप टॉपिक पढ़ोगे बेटा टॉपिक के बाद में आप
लोगों को यहां पर क्वेश्चंस भी देखने के लिए मिलने वाले हैं। इसका मतलब ये है कि मैं आप लोगों को क्वेश्चंस हाथों हाथ
टॉपिक के बाद में ही सॉल्व करवा देता हूं। इसके पीछे कारण ये है कि जैसे एमसीक्यू क्वेश्चन होगा मेरी बुक में तो एमसीक्यू
क्वेश्चन आप लोगों को दिख जाएगा। आप लोगों को थ्योरिटिकल क्वेश्चन होगा तो थ्योरिटिकल क्वेश्चन आप लोगों को यहां पर
दिख जाएगा। तो क्वेश्चंस देखो एक्स्ट्रा एक्स्ट्रा क्वेश्चंस की बात तो दूर है। ये एग्जाम ओरिएंटेड है। सारे क्वेश्चंस यहां
पर कवर नहीं होते हैं। लेकिन जिन लोगों ने एग्जाम ओरिएंटेड बैच खरीदा होगा हमने इस बार प्रो भी निकाला था तो आप लोगों के पास
में बुक्स भी आएगी। है ना? जिन जिन्होंने लिया होगा वो ऑप्शन। बुक्स आएगी तो पूरी बुक्स आएगी। पूरा क्वेश्चन बैंक आएगा।
वहां से आप एक्स्ट्रा क्वेश्चन देख सकते हो। जो इंपॉर्टेंट क्वेश्चंस हैं वो यहां पर बैच के अंदर कवर होने वाला है। तो आपको
लोड लेने की जरूरत नहीं है। इस तरीके से एमसीक्यूस आएंगे और इस तरीके से उसके बाद में आपको क्वेश्चन नंबर के साथ में यहां
पर दिखेगा। जहां पर अमेंडमेंट की जरूरत है वहां पर मैंने अमेंडेड आंसर्स भी आप लोगों के लिए डाल रखे हैं। तो आप लोगों को बहुत
मजा आने वाला है। ठीक है? चलिए। तो ये सारी बातें हो गई इंट्रोडक्शन की। अब एक काम करते हैं। थोड़ा सा यहां पर मैं आप
लोगों को बुक दिखा देता हूं। ठीक है? देखिए बुक में मैंने कुछ इस तरीके से कर रखा है। आप लोगों को दिखा देता हूं। ये
मेरी कांसेप्ट बुक है अगर आप लोगों को दिख रही है तो यस कांसेप्ट बुक में आप लोगों को सबसे पहले तो यहां पर क्या दिखेंगे
सारे चैप्टर्स हैं ऑब्वियसली है ना ये 15 के 15 चैप्टर्स हैं आपका कॉर्पोरेट लॉस है करेक्ट है कॉर्पोरेट लॉ है जिसके अंदर
एलएलपी आता है और आपका अदर लॉस है कॉर्पोरेट लॉ में एलएलपी को मिलाकर 12 चैप्टर है ये आपका 70 मार्क्स का कवरेज
है। अदर लॉस आपका 30 मार्क्स का कवरेज यहां पर लेकर बैठा हुआ है। ये जो 30 मार्क्स का कवरेज है उसमें जनरल क्लॉज एट
इंटरप्रिटेशन और फेमा ऐसे कुछ चैप्टर्स यहां पर आते हैं। मैंने यहां पर आप लोगों को क्या कर रखा है? अटेमप्ट वाइज़। मैंने
यहां पर पूरी समरी बनाकर दे रखी है। किस अटेम्प्ट में कितने मार्क्स का कैसा क्वेश्चन यहां पर चैप्टर वाइज पूछा गया
है। ये मैनिफेस्टेशन पेज है। मस्त तरीके से अपना नाम लिखो यहां पर। है ना? और बोलो यार भाई साहब लिखोगे अपने नाम के आगे। किस
अटेम्प्ट में इंटरमीडिएट क्लियर करोगे? किस में फाइनल क्लियर करोगे? ये सारी बातें लिखो। अपना नाम लिखो और फटाफट सीए
तो बनना ही है। करेक्ट है? चलो। तो, यह कंपनी लॉ की बुक इस तरीके से कुछ आप लोगों को दिखेगी। मेरे चैप्टर्स हैं। अच्छी बात
मैं आप लोगों को एक बता देता हूं। जब भी आप कोई टॉपिक पढ़ोगे टॉपिक के बाद में आपको एमसीक्यू हाथों हाथ दिख जाएगा। तो
एमसीक्यू की प्रैक्टिस तो आपकी यहां पर हाथों हाथ हो जाएगी। कोई भी टॉपिक के बाद में इफ यू वांट टू सी ऑल एमसीक्यूस आर
गिवेन हियर इटसेल्फ। ठीक है? मैं आप लोगों को और दिखा देता हूं। जैसे आपने ये टॉपिक पढ़ा। है ना? आप पढ़ेंगे स्मॉल कंपनी के
बारे में। स्मॉल कंपनी के जितने भी एमसीक्यूस हैं, है ना? वो सब एमसीक्यूस यहां पर हाथों हाथ मैंने टॉपिक के बाद में
ही यहां पर डाल रखे हैं ताकि आप लोगों की प्रैक्टिस हो जाए। अब इसी के साथ में क्वेश्चन बैंक आता है। क्वेश्चन बैंक मेरा
द बुक ऑफ जुनून के हिसाब से मैंने यहां पर बना रखा है। क्योंकि कानून और जुनून हैंड इन हैंड चलते हैं। बराबर है। सबसे बेस्ट
पार्ट क्या है? मेरे क्वेश्चन बैंक के बारे में मैं आप लोगों को बता देता हूं। देखो भाई साहब हर चैप्टर के जितने
क्वेश्चंस हैं मैंने यहां पर नंबरिंग कर रखी है। जितने भी क्वेश्चंस हैं यहां पर मैंने सब नंबरिंग कर रखी है। 458
क्वेश्चंस हैं। एंड बिलीव मी ये 458 क्वेश्चंस के अलावा जो अलग नए लेटेस्ट क्वेश्चन आए हैं बेटा वो यहां पर राइटिंग
प्रैक्टिस क्लास के अंदर कवर होने वाले हैं। सो यू कैन नॉट अफोर्ड टू मिस दिस राइटिंग प्रैक्टिस क्लासेस एज वेल। आपको
ये भी देखना है और आपके ये जितने भी क्वेश्चंस हैं 458 ये क्लासेस में ही कवर होने वाले हैं। आपको अलग से कुछ भी नहीं
करना है। मैं नंबरिंग के साथ में आप लोगों को यहां पर क्लास के बीच में क्वेश्चन करवाता हूं। जो एलडीआर है वो मैंने
मार्किंग कर रखी है। लास्ट डे रिवीजन। लास्ट डे रिवीजन का मतलब ये है कि ये क्वेश्चंस आप लोग छोड़कर नहीं जा सकते
हैं। आप देखो जैसे मैंने पहले मॉड्यूल के क्वेश्चंस को रखा है। उसके बाद में अलग सेक्शन बनाया है। मैंने आरटीपी, एमटीपी और
प्रीवियस ईयर क्वेश्चंस के लिए। ये देखो ये एलडीआर की घंटी यहां पर लगा रखी है अपन ने घड़ी लगा रखी है तो आप लोगों को पता
रहेगा और टॉपिक का नाम भी लिखा हुआ है किस टॉपिक पे ये क्वेश्चन है तो हर टॉपिक से रिलेटेड जो क्वेश्चन है वो यहां पर हम
लोगों ने लगा रखा है ठीक है जो मैं होमवर्क में देता हूं वो मैं यहां पर आपको मार्किंग करवा के दे दूंगा ठीक है जो मैं
आपको करवाऊंगा वो तो ऑटोमेटिकली यहां पर कवर हो ही जाएंगे। सो आई थिंक बहुत ही सुंदर तरीके से हमने यहां पर इंट्रोडक्शन
कर लिया है। अब एक मस्त तरीके से हम लोग यहां पर इस क्लास को स्टार्ट करते हैं। आई नो शुरुआत के 10 मिनट मैंने आप लोगों के
लिए हैं इन इंट्रोड्यूसिंग एवरीथिंग। वो भी जरूरी है। हम किस तरीके से पढ़ने वाले हैं, क्या करने वाले हैं। आपको तमाम चीजें
यहां पर बैच के अंदर मिलेगी। स्टार शीट्स आप लोगों को वीडियो पॉज करके लिखना है तो आप लिख लेना। पूरी पीडीएफ चैप्टर का पूरा
वन पीडीएफ स्टार शीट का Google ड्राइव लिंक पे अपलोड हो जाता है। आपको वहां से मिल जाएगा। आप डाउनलोड कर सकते हो। आप
प्रिंट लेके पढ़ सकते हो। जैसी आपकी इच्छा। ठीक है? और राइटिंग प्रैक्टिस भी पूरी देख लेना। साथ में क्वेश्चंस अगर आप
बुक नहीं भी खोलना चाहते हो सब कुछ यहां पर कवर हो जाएगा। ठीक है? डू नॉट वरी। सो कम ऑन लेट्स स्टार्ट विद आवर चैप्टर
प्रीिलिमिनरी। चलिए गाइस। सो स्टार्ट करते हैं प्रीिलिमिनरी चैप्टर को। डेफिनेशंस एंड मच
मोर। एक्चुअली क्या है ना आपका जो प्रीलिमिनरी चैप्टर है वो चैप्टर नंबर वन आपका सिर्फ कंपनीज़ एक्ट का नहीं है। है
ना? वो आपका पूरे कंपनीज एक्ट का चैप्टर नंबर वन भी है। ये क्या हुआ इसका मतलब मैं आपको 2 मिनट के अंदर समझाता हूं। लेकिन
आगे बढ़ने के पहले मैं आप लोगों को बोलना चाहता हूं अगर आप में से कोई बच्चा पूरे सब्जेक्ट का इंट्रोडक्शन देखना चाहता है।
अगर आप ये देखना चाहते हो कॉर्पोरेट लॉ के अंदर क्या-क्या है? अदर लॉस के अंदर क्या-क्या है? क्वेश्चन पेपर का पैटर्न
कैसा रहता है? अगर आप लोग देखना चाहते हो क्वेश्चन पेपर में कैसे-कैसे क्वेश्चंस पूछे गए हैं। हमें किस तरीके से यहां पर
क्वेश्चन पेपर में क्वेश्चन का पैटर्न दिखता है। ये सारी तमाम चीजें बेटा आपको इस वीडियो के अंदर मिल जाएगी। ये वीडियो
आप लोग देख सक देख सकते हो। इंट्रोडक्शन टू द सब्जेक्ट। ये मैंने कॉर्पोरेट एंड अदर लॉस के लिए बना रखा है। 2 घंटे का
वीडियो है। अगर आप फास्ट फॉरवर्ड करके देखेंगे तो भी आपका कवरेज आपको मिल जाएगा। सो अगर यह वीडियो देखने के पहले आपको
सब्जेक्ट का इंट्रोडक्शन चाहिए प्लीज वॉच दिस वीडियो। आप लोगों को ये अवेलेबल हो जाएगा। ठीक है? चलिए स्टार्ट करते हैं।
देखो बेटा, आप लोग कंपनीज़ एक्ट ना सिर्फ फाउंडेशन लेवल पे पढ़ते हो? नहीं, फाउंडेशन लेवल पे 10% पढ़ा है आपने मुश्किल से।
इंटरमीडिएट पे अच्छा खासा कंपनीज़ एक्ट आप लोगों को पढ़ने के लिए मिलेगा और फाइनल लेवल तक ये आपका पीछा नहीं छोड़ेगा। मेरी
बात सुनो। इस चैप्टर के अंदर क्या है? मैं आपको बताता हूं। सबसे पहले किसी भी एक्ट का सेक्शन नंबर वन पढ़ना चाहिए। वो आपको
चैप्टर का नाम, चैप्टर का एक्सटेंट और चैप्टर का कमेंसमेंट आप लोगों को एक्सप्लेन करता है। चैप्टर के अ सारी
बेसिक चीजें पढ़ने के बाद में एक्ट के बारे में आप इस एक्ट की एप्लीकेबिलिटी देखोगे। अब इसके बाद में क्या होगा? एक्ट
की एप्लीकेबिलिटी देखने के बाद में इस चैप्टर के अंदर प्रीिलिमिनरी के अंदर और कुछ नहीं है बेटा। सिर्फ डेफिनेशन
डेफिनेशन डेफिनेशन डेफिनेशन ही है। ठीक है? इसके लिए मैं आप लोगों को सबसे पहले ले जाना चाहता हूं एमसीए की वेबसाइट पर।
ये क्या है? मिनिस्ट्री ऑफ कॉर्पोरेट अफेयर्स। मिनिस्ट्री ऑफ़ कॉर्पोरेट अफेयर्स आप लोग बेटा बहुत अच्छे से जानते हो। ये
एक ऐसी मिनिस्ट्री है व्हिच इज़ सोली लायबल फॉर रिस्पांसिबल फॉर द कंपनीज़ एक्ट 2013 पुराना वाला कंपनीज़ एक्ट 1956, एलएलपी
एक्ट 208, इनसॉल्वेंसी इन बैंककरप्सी कोड जिसे आईबीसी हम लोग बोलते हैं। आप फाइनल में पढ़ोगे। बराबर है। तो इसके अंदर ये
सारी चीजों को हैंडल करने वाली एक ही मिनिस्ट्री है। अगर आप एक्ट और रूल्स के अंदर जाओगे। एक्ट के अंदर आप क्लिक करोगे।
आपको ये सारे एक्ट के नाम यहां पर देखने के लिए मिलेंगे। सबसे पहले देखो अगर हम कंपनीज़ एक्ट की बात करें। अब आप देखो आप
क्या पढ़ रहे हो? चैप्टर नंबर वन। आपको लग रहा है चैप्टर नंबर वन आपके सिलेबस का चैप्टर नंबर वन है। अरे राजा चैप्टर्स
डिवाइड किए गए हैं कंपनीज़ एक्ट के अंदर भी। ये बेयर एक्ट होता है बेटा। आप देखो चैप्टर नंबर वन से शुरुआत की गई है और ये
29th चैप्टर तक आपको यहां पर देखने के लिए मिलेगा। 29 चैप्टर्स हैं इस पूरे एक्ट के अंदर। अगर आप इस एक्ट पे क्लिक करोगे
लास्ट चैप्टर पे तो आपको दिखेंगे कि टोटल 470 सेक्शंस हैं 470 इन द होल कंपनीज़ एक्ट। लास्ट में कुछ शेड्यूल्स भी है।
टोटल सेवन शेड्यूल्स हैं बेटा। ये शेड्यूल्स क्या काम करते हैं? मैं आपको थोड़ी देर में बताऊंगा। लेकिन शेड्यूल्स
के अंदर फॉर्मेट्स रहते हैं। शेड्यूल्स के अंदर बहुत सारी एक्स्ट्रा चीजें होती है। जैसे आप अकाउंट्स के अंदर देखते हो बेटा
तो आप डेप्रिसिएशन के बारे में बात करते हो। राइट? तो वो रिलेटेड शेड्यूल नंबर टू है। शेड्यूल नंबर थ्री के बारे में आप लोग
बात करते हो। योर फॉर्मेट ऑफ़ बैलेंस शीट एंड पीएनएल वो यहां पर आता है। ऐसे बहुत सारे शेड्यूल्स आपके कुछ काम के हैं। कुछ
काम के नहीं है। है ना? शेड्यूल नंबर सेवन सबसे आखिरी शेड्यूल जो है वो बात करता है। सीएसआर से रिलेटेड। ये आप इंटरमीडिएट के
अंदर पढ़ते हो। कॉर्पोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी क्या होती है? तो ये आपका पूरा कंपनीज़ एक्ट है। अगर आप चैप्टर नंबर
वन पे क्लिक करोगे बेटा आपको दो ही सेक्शंस दिखेंगे। सेक्शन नंबर वन एंड सेक्शन नंबर टू। सेक्शन नंबर वन पे अगर आप
देखोगे तो क्या लिखा हुआ है? शॉर्ट टाइटल एक्सटेंट एंड कमेंसमेंट। चलो आ जाओ। अब मेरी बात सुनो। शॉर्ट टाइटल मतलब इस एक्ट
का नाम क्या है? तो उन्होंने बोला इस एक्ट को कंपनीज़ एक्ट के नाम से जाना जाता है। एक्सटेंट मतलब ये क्या पूरे इंडिया के ऊपर
एप्लीकेबल होता है? द आंसर इज़ यस। अब मुझे एक बात बताओ सर ये एक्ट कब कमेंस हुआ कैसे हुआ ये सारी बातें मैं आप लोगों को
बताऊंगा लेकिन इस एक्ट को बनाया क्यों गया एक लाइन आप लोगों को यहां पर दिख रही होगी दिस इज एन एक्ट टू कंसोलिडेट एंड अमेंड द
लॉ रिलेटिंग टू कंपनीज़ मतलब कि देखो जब भी आपको ये जानना हो ना ये एक्ट क्यों बनाया गया है एक तो उसका छोटा नाम होता है शॉर्ट
टाइटल एक उसका एक्सटेंडेड लॉन्ग टाइटल होता है जो बताता है कि इस एक्ट को बनाया बनाया क्यों गया? जैसे देखो यहां पर क्या
लिखा हुआ है कि ये कंसोलिडेट करने के लिए बना है। क्या पुराने जो एक्ट है और पुराने 1956 वाले एक्ट को ये उठाएगा और उसको
सिर्फ कंसोलिडेट करके नहीं उसके अंदर अमेंड भी करेगा। यानी कि अमेंड करने के लिए भी है। कंसोलिडेट करने के लिए भी है।
नई चीजें भी लाएगा। पुरानी भी यहां पर रखेगा। उसको चेंज भी करेगा। तो आपको एक बात समझ में आई होगी यहां पर बेटा कि हम
लोग यहां पर क्या करेंगे? पहले सेक्शन नंबर वन को मोटा-मोटी मैंने आप लोगों को यहां पर एक्सप्लेन कर दिया है। अच्छा मुझे
एक बात बताओ अगर आप लोगों से कोई पूछेगा कि सर इस एक्ट की एप्लीकेबिलिटी कैसे हुई? भाई साहब एप्लीकेबिलिटी के बारे में एक
बात ध्यान रखना 470 के 470 देखो अगर कमेंसमेंट की हम लोग यहां पर बात करेंगे बेटा तो कमेंसमेंट आपका यहां पर आया था
प्रेसिडेंट ऑफ इंडिया ने 29th ऑफ़ अगस्त 2013 को यहां पर इसको एसेंट दी थी प्रेसिडेंट ने। बराबर है? ये ऑफिसियल
गैजेट में प्रिंट हुआ था 30th ऑफ अगस्त को। अब क्या हुआ कि इतना सब तो हो गया। बराबर है। 1956 वाला पुराना एक्ट था। नया
एक्ट एकदम से लाए तो लाए कैसे हम लोग? तो उन्होंने एप्लीकेबिलिटी में थोड़ा फेजेस में एप्लीकेबिलिटी करी। क्या फेजेस में
एप्लीकेबिलिटी करी? सेक्शन नंबर वन को तो उन्होंने इमीडिएटली 30 तारीख को यहां पर इनफोर्स कर दिया। चालू कर दिया। बाद के
कुछ 98 सेक्शंस जो है बेटा वो आपके 12th ऑफ सप्टेंबर को गए मतलब इनफोर्स हुए। उसके बाद में 143 सेक्शंस जो है वो वापस आ गए
फर्स्ट ऑफ अप्रैल 2014 को गए। इस तरीके से सो एंड एंड सो फोर्थ। यानी कि ऐसे धीरे-धीरे सेक्शंस को अप्लाई किया गया
फेजेस के अंदर पार्ट्स के अंदर। अब मेरी बात समझने की कोशिश करना। देखो मैं आप लोगों को क्या बता रहा हूं? आप ये चीजें
पढ़ोगे। इसके बाद में इमीडिएटली क्या आएगा बेटा? आपका सेक्शन नंबर टू आएगा। आप सेक्शन नंबर टू के बारे में देखो।
डेफिनेशंस हैं। हर एक एक्ट के अंदर मोस्टली कुछ एक्ट्स के अंदर नहीं है। बट हर एक एक्ट के अंदर सेक्शन नंबर टू
डेफिनेशन का होता है। अगर आप लोग देखोगे बेटा ये डेफिनेशन का वन है। ये डेफिनेशन का टू है। ये डेफिनेशन का थ्री है। अगर
मैं नीचे जाते जाऊंगा ना बेटा आप लोगों का दिमाग खराब हो जाएगा। यहां पर कितनी डेफिनेशंस है? जरा ध्यान से देखो आप लोग।
यहां पर टोटल आप लोगों को जस्ट अ सेकंड। नीचे जाते जाओ। नीचे जाते जाओ। नीचे जाते जाओ। जस्ट अ सेकंड। यह आप लोग देखो। मैं
आप लोगों को दिखा देता हूं। आ जाओ। मैं नीचे अमेंडमेंट में चले गया। थोड़ा और ऊपर आ जाओ। ये देखो आप। 95
डेफिनेशंस है टोटल जो आप लोगों को यहां पर पढ़नी रहती है प्रिलिमिनरी चैप्टर के अंदर। क्या 95 की 95 हम एक साथ पढ़ेंगे? द
आंसर इज़ नो। सर क्या आपने हमारे लिए कुछ यहां पर स्यूशन निकाल रखा है। द आंसर इज़ यस। बेटा मैंने क्या करा है? मैं इस
चैप्टर को ना आप लोगों को किस तरीके से पढ़ाता हूं? पहले मैं सबसे काम की डेफिनेशंस आप लोगों को पढ़ाता हूं। जैसे
कंपनी की डेफिनेशन पढ़ाऊंगा मैं आप लोगों को। है ना? जैसे मैं आप लोगों को यहां पर कंपनी के साथ में प्रमोटर की डेफिनेशन है।
बॉडी कॉर्पोरेट की डेफिनेशन है। है ना? कंपनीज़ कितने टाइप्स की होती है? कंपनीज़ अगर आप लोगों को याद आ रहा हो तो फाउंडेशन
का नॉलेज भी है हम लोगों का। टाइप्स ऑफ कंपनीज़ हम लोग यहां पर देखेंगे। उसके बाद में कुछ बची हुई 10 इंपॉर्टेंट डेफिनेशन
मैं आप लोगों को यहां पर पढ़ाऊंगा। सर ये 10 इंपॉर्टेंट डेफिनेशनंस कैसी-कसी हो सकती है? जरा मेरी बुक में आ जाओ। नीचे
मैं आप लोगों को दिखाता हूं। देखो सम इंपॉर्टेंट डेफिनेशंस जस्ट अ सेकंड ये देखो आप ये देखो आप सम इंपॉर्टेंट
डेफिनेशंस ये देखो आप इंपॉर्टेंट डेफिनेशन में जैसे मैं आपको फाइनेंसियल स्टेटमेंट की डेफिनेशन यहां पर दिखाऊंगा फाइनशियल
ईयर की डेफिनेशन दिखाऊंगा केएमपी क्या होता है मैनेजर और मैनेजिंग डायरेक्टर क्या होता है नेटवर्थ क्या होता है ऑफिसर
एंड ऑफिसर इन डिफॉल्ट क्या होता है रिलेटेड पार्टी है रिलेटिव है ये सब डेफिनेशंस आप लोग यहां पर देखोगे उसके बाद
में भी कुछ डेफिनेशंस आपकी यहां पर बच जाएगी जो चैप्टर्स के साथ में कवर हो जाएगी। जैसे डिपॉजिट चैप्टर नंबर फिफ्थ के
अंदर पढ़ लोगे। चार्ज चैप्टर नंबर सिक्स के अंदर पढ़ लोगे। बुक्स क्या होते हैं? बुक्स एंड पेपर क्या होता है? अकाउंट्स ऑफ
कंपनीज़ के अंदर पढ़ लोगे। है ना? आप यहां पर डिविडेंड डिविडेंड के चैप्टर में चैप्टर नंबर एट के अंदर पढ़ लोगे। बराबर
है? मेमोरेंडम इनकॉर्पोरेशन चैप्टर नंबर टू के अंदर पढ़ लोगे। प्रोस्पेक्टस चैप्टर नंबर थ्री के अंदर पढ़ लोगे। तो ऐसी कुछ
एक्स्ट्रा 18 डेफिनेशन है जो बाद में चैप्टर्स के साथ में कवर हो जाएगी। 10 इंपॉर्टेंट डेफिनेशन मैं यहां पर पढ़ाऊंगा।
लेकिन उसके पहले मैं आप लोगों को यहां पर मस्त तरीके से कंपनी की डेफिनेशन पढ़ाऊंगा। उसके फीचर्स बताऊंगा। डेफिनेशन
स्टार्ट करेंगे तो बॉडी कॉर्पोरेट हम लोग पढ़ेंगे। क्लासिफिकेशन ऑफ कैपिटल क्या होता है? प्राइवेट, पब्लिक, स्मॉल कंपनी
ऑन द बेसिस ऑफ लायबिलिटी, ऑन द बेसिस ऑफ लिस्टिंग, ऑन द बेसिस ऑफ होल्डिंग। वन पर्सन कंपनी मैं यहां पर पढ़ाऊंगा आप
लोगों को। सेक्शन एट कंपनी। और वो सारी तमाम कंपनियां पीएफआई है, डोरमेंट है। ये सब कुछ आपका यहां पर कवर होने वाला है
फॉरेन कंपनी वगैरह। ठीक है? एट लास्ट कुछ इंपॉर्टेंट डेफिनेशन जो 10 हैं वो सबसे लास्ट में मैं आप लोगों को पढ़ाने वाला
हूं। मेरी बात सुनो। कुछ दो टॉपिक्स ऐसे हैं जो चैप्टर नंबर टू के अंदर आते हैं। बट वो मैं यहां पर ही कवर करवाता हूं। इस
बात का आप लोग ध्यान रखना। मैंने यहां पर इंडेक्स में लिख रखा है। मैं आपको बता देता हूं। पहला जब आप वन पर्सन कंपनी
पढ़ते हो ना बेटा वन पर्सन कंपनी के साथ में उनके नॉमिनी से रिलेटेड एक रूल है जो चैप्टर नंबर टू के अंदर है। बट वो अलग से
पढ़ने से कोई मतलब नहीं है। उसको हम यहां पर ही कवर कर लेंगे। एक ही जगह पढ़ेंगे ओपीसी सब कुछ पढ़ के खत्म करेंगे। इसी
तरीके से जब आप सेक्शन एट कंपनी पढ़ते हो ना तो सेक्शन एट कंपनी के कन्वर्शन और उसके रिलैक्सेशन से रिलेटेड एक पॉइंट है
जो अगेन चैप्टर नंबर टू के अंदर दिया गया है। लेकिन मैं उसको यहां पर ही आप लोगों को कवर करवाता हूं। तो चलिए मैं आप लोगों
को ये बताना चाहता हूं। क्या अभी तक हम लोगों ने कुछ पढ़ा है बेटा? यस आप लोगों ने पढ़ लिया है। आप लोगों ने मेरे साथ में
शॉर्ट टाइटल एक्सटेंट और कमेंसमेंट आप लोगों ने पढ़ लिया है। देखो मैं आप लोगों को बताता हूं यहां पर सबसे पहली स्टार शीट
आप लोगों की नजरों के सामने यहां पर आने वाली है। देखो आप लोग प्रिलिमिनरी चैप्टर में सेक्शन वन एक्ट का नाम कंपनीज़ एक्ट
कंसोलिडेट एंड अमेंड प्रीवियस कंपनी लॉ पूरे होल ऑफ इंडिया में एप्लीकेबल होता है। पब्लिश करने की डेट 30th अगस्त थी।
सेक्शन नंबर वन इमीडिएटली आ गया था। बाकी को फेजेस में किया गया था। स्ट्रक्चर जो है वो 470 सेक्शन, सेवन शेड्यूल्स एंड 29
चैप्टर्स हैं। अगर आप लोग बोलोगे कि सर सेवन शेड्यूल्स के नाम चाहिए आप लोग देख सकते हो। कोई ज्यादा काम के नहीं है अभी
के लिए लेकिन आप एक ओवरऑल व्यू यहां पर बना सकते हो। चलो अब मेरी बात समझने की कोशिश करना। इसके बाद में हम लोगों को
क्या देखना है? हमको देखना है एप्लीकेबिलिटी। यानी कि ये एक्ट कैसे एप्लीकेबल होता है? देखो यार मैं वो बताऊं
उसके पहले ना आप लोगों को इन डेफिनेशनंस को पढ़ना आना चाहिए। देखो क्या होता है मैं आपको बताता हूं। जब हम कभी भी सेक्शंस
या डेफिनेशंस को रीड आउट करने की कोशिश करते हैं ना तो पता है हम लोग कैसे लिखते हैं? मैं आपको बताता हूं। आप लोग सेक्शन
नंबर लिखते हो बराबर है? देखो ये पहली डिजिट जो होती है उसको सेक्शन बोलते हैं। दूसरा जो ब्रैकेट में होता है उसे सब
सेक्शन बोलते हैं। तीसरा जो होता है उसे क्लॉज़ बोलते हैं। और उसके बाद में आता है सब क्लॉज़। लेकिन प्रॉब्लम क्या है मैं आप
लोगों को बता देता हूं। आपका जो सेक्शन नंबर टू है ना सेक्शन नंबर टू के अंदर जैसे आप यहां पर 11 लिखेंगे ब्रैकेट के
अंदर यहां पर बॉडी कॉर्पोरेट की डेफिनेशन है तो आपके ऊपर वाले कांसेप्ट के हिसाब से क्या होना चाहिए इसको हमें सब सेक्शन
बोलना चाहिए लेकिन हम इसे सब सेक्शन नहीं बोलते हैं इसके पीछे कारण है हम इसको डायरेक्टली क्लॉज़ बोलते हैं। क्यों सर आप
इसको क्लॉज़ क्यों बोल रहे हो? क्योंकि मैं आपको बताता हूं सेक्शन नंबर टू के अंदर डेफिनेशनंस दे रखी है और हर डेफिनेशन ना
इंडिपेंडेंट डेफिनेशन है बेटा। ये एक दूसरे से कनेक्टेड नहीं है। जब भी सेक्शन के अंदर सब सेक्शन होता है ना वो सारे सब
सेक्शंस एक दूसरे से कनेक्टेड होते हैं। लेकिन ये डेफिनेशंस इंडिपेंडेंट होने की वजह से देखो किसी के अंदर ब्रांच ऑफिस की
बात कर दी। फिर चार्टर्ड अकाउंटेंट की डेफिनेशन दे दी। फिर चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर की दे दी। बेटा सब कुछ अलग-अलग है।
सब कुछ अलग-अलग है। इंडिपेंडेंट है। इट इज़ अ लिस्ट ऑफ इंडिपेंडेंट डेफिनेशंस। हेंस दे आर कॉल्ड क्लॉज़ एंड दे आर नॉट कॉल्ड सब
सेक्शंस। तो आप बोलोगे सर क्लॉज़ को फिर अल्फाबेटिकली लिखते तो आप ए बी सी डी लिखते। बेटा 95 डेफिनेशनंस देनी थी। ए टू
जेड खत्म हो जाता। फिर डबल ए करना पड़ता, ए बी करना पड़ता, ए सी करना पड़ता। बहुत कंफ्यूजन हो जाता बेटा। इसकी वजह से इन
लोगों ने यहां पर इसको क्लॉज़ बोला जाता है। इसको सब सेक्शन नहीं बोला जाता है। पॉइंट नंबर वन। अब इसके बाद में मैं आपको
ले चलता हूं एप्लीकेबिलिटी समझाने के लिए। ये कंपनीज एक्ट किस-किस के ऊपर एप्लीकेबल होता है? देखना समझना मेरी बात समझना।
सबसे पहले आप ये देखो कंपनी जब भी आप समझोगे कंपनी को दो तरीके से समझना। एक कंपनी की डेफिनेशन है रजिस्टर्ड कंपनी की।
देखो रजिस्टर्ड कंपनी मतलब क्या होता है? जरा ध्यान से समझना। एप्लीकेबिलिटी समझने के लिए आपको ये समझना पड़ेगा कि कंपनीज़
कितने टाइप की हो सकती है। उसमें सबसे पहले आपको समझना पड़ेगा कंपनी की डेफिनेशन जो क्लॉज़ नंबर 20 के अंदर दे रखी है। देखा
क्लॉज़ नंबर 20। क्लॉज़ नंबर 20 हां मैंने 20 सब सेक्शन नहीं बोला है। देखो क्लॉज़ नंबर 20 क्या बोलता है? जरा इसको समझने की
कोशिश करना। क्लॉज़ नंबर 20 की अगर आप डेफिनेशन पढ़ोगे तो वो बोलता है कि सिंपल सी बात है कि अ कंपनी मींस अ कंपनी। वाह
सर वाह वाह वाह वाह वाह वाह इनकरपोरेटेड अंडर दिस एक्ट और एनी प्रीवियस कंपनी लॉ उनका कहना है ऐसी कंपनी जो हमारे एक्ट के
अंदर रजिस्टर्ड हुई है भाई साहब मेरी बात सुनो आप एग्जांपल लेना Hindstan Unilevered Hindstan Unilevered इंडिया के
अंदर इनकॉर्पोरेट हुई है पर आपको पता होना चाहिए ये जो ूनilver कंपनी है ILV कोई इंडियन कंपनी नहीं है बेटा वो बाहर की
कंपनी है उसका जो हेड क्वार्टर है बेटा वो इंग्लैंड के अंदर लेकिन मेरी बात सुनो। उनको इंडिया के अंदर
धंधा करना था। तो उन्हें इंडिया के अंदर आकर उन्होंने क्या करा? उन्होंने एक कंपनी इनकॉर्पोरेट करी। अरे मैं पूछता हूं
इनकरपोरेट कहां करी होगी? इनकॉर्पोरेट करी उन्होंने हमारे कंपनीज़ एक्ट के अंदर। कौन से? 2013 के अंदर या 1956? अरे भाई कोई भी
एक्ट हो। आपको क्या लगता है? Tata कंपनी Infosys ये बेटा 1956 के अंदर रजिस्टर्ड हुई थी। 1956 के अंदर रजिस्टर्ड हुई थी।
तो मैं आप लोगों को से ये पूछना चाहता हूं कि 220 यानी कि डेफिनेशन जो दी गई है सेक्शन टू के क्लॉज़ 20 के अंदर उसके हिसाब
से क्या यूनिil आई एनसी एक कंपनी है? द आंसर इज़ नो। अरे क्लॉज़ नंबर 20 के हिसाब से Uniilver I आई एनसी हमारी कंपनी नहीं
है। क्यों? क्योंकि ये इनकर्पोरेट हुई है किसी बाहर दूसरे देश के कानून के अंदर। इट इज नॉट इनकॉर्पोरेटेड अंडर द कंपनीज़ एक्ट
ऑफ इंडिया। चाहे 2013 वाला हो, चाहे 1956 वाला हो। इसीलिए ये डेफिनेशन बहुत काम की है बेटा। देखो इट मींस अ कंपनी
इनकरपोरेटेड अंडर दिस एक्ट और एनी प्रीवियस कंपनी लॉ। और सर ये काम हम लोग कैसे करते हैं बेटा? बहुत ही सिंपल सी बात
है। बेसिक समझते जाना। भाई साहब आपको क्या करना है? देखो मैं आपको बताता हूं। आप जब एमसीए की वेबसाइट पे जाओगे ना, है ना?
एमसीए की वेबसाइट पे आप जाओगे तो आपको ये सारी चीजें देखने के लिए मिलेगी कि आप अपनी कंपनी को रजिस्टर कर सकते हो। आप
एलएलपी को रजिस्टर कर सकते हो। आप किसी को भी रजिस्टर कर सकते हो। देखो आप रजिस्टर योर कंपनी। आपको सारे फॉर्म्स मिल जाएंगे।
आप कंपनी को क्लोज कर सकते हो। आप एलएलपी को रजिस्टर कर सकते हो। लेकिन इसके लिए ना पूरा एक फॉर्मेट बना हुआ है। डायरेक्टली
मिनिस्ट्री काम नहीं करती बेटा। मिनिस्ट्री सबसे ऊपर होती है और मिनिस्ट्री का टॉप पोस्ट होता है एमसीए जो
सेक्रेटरी होता है। है ना? डायरेक्टर जनरल ऑफ कॉर्पोरेट अफेयर्स यहां पर होता है। करेक्ट है? उसके नीचे रीजनल डायरेक्टर्स
होते हैं और उसके नीचे आरओसी होती है। देखो मेरी बात सुनो। अभी बेसिक समझ रहे हैं थोड़ा उथल-पुथल चलेगा। ये पूरा एक
हैरार्की बनी हुई है। मैंने कहा कि रजिस्टर्ड कंपनी कौन सी होगी? क्लॉज़ नंबर 20 के अंदर जो हमारे एक्ट के अंदर
इनकॉर्पोरेटेड है और हमारे एक्ट के अंदर रजिस्टर्ड है। तो भाई साहब हमारे एक्ट के अंदर रजिस्टर्ड मतलब कहां? तो हमने बोला
एमसीए। एमसीए बोला कि सुनो मैंने ये काम आगे डेलीगेट कर रखा है रीजनल डायरेक्टर्स को और मैंने उसके नीचे काम दे रखा है
आरओसीस को। भाई साहब हमारे पास में टोटल 10 रीजनल डायरेक्टर्स हैं। पूरे इंडिया को डिवाइड कर रखा है अलग-अलग रीजंस के हिसाब
से। अलग-अलग रीजंस के हिसाब से। पहले ये सेवन हुआ करते थे। फिर अमेंडमेंट हुआ और इनको 10 कर दिया गया है। ये नई लोकेशनेशंस
ऐड की गई है और पुरानी शिलॉन्ग यहां से हटाई गई है। अब रीजनल डायरेक्टर्स ना बेटा ऑफिस भी होते हैं और यहां पर ना एक
इंडिविजुअल पर्सन भी बैठा हुआ रहता है। जैसे वेस्टर्न रीजन का जो आरडी है वो श्री एमके साहू है। मेरी बात सुनो। फिर उसके
नीचे 30 आरओसीस है। ये रजिस्ट्रार होते हैं। जैसे जम्मू एंड कश्मीर है। ग्वालियर है, नागपुर है। है ना? ये बेटा अभी टोटल
30 आरओसीस इंडिया के अंदर है। अगर आप गुजरात में जाओगे अहमदाबाद आरओसी में जाओगे तो आपको कीर्ति तेज यहां पर दिखेंगे
जो हमारे आरओसी है। इस लिस्ट को भी यहां पर अमेंड किया गया है। तो मेरी बात समझने की कोशिश करना कि हम लोग इनकॉर्पोरेशन के
लिए कहां जाते हैं? हम लोग इनकॉर्पोरेशन के लिए आरओसी के पास में जाते हैं। है ना? अब सुनो आरओसी को आप सारे डॉक्यूमेंट्स
दोगे और अपनी कंपनी को इनकॉर्पोरेट करोगे। बहुत अच्छी बात है। तब जाके आप यहां पर एक क्लॉज़ नंबर 20 वाली डेफिनेशन के अंदर आप
यहां पर फिट बैठोगे। जो मैं आप लोगों को यहां पर बताने की कोशिश कर रहा था। तो क्या कंपनीज़ एक्ट रजिस्टर्ड कंपनी के ऊपर
एप्लीकेबल है? द आंसर इज़ यस। लेकिन क्या इंडिया में सिर्फ कंपनीज़ एक्ट के अंदर रजिस्टर्ड ही कंपनीज़ होती है? क्या? क्या
उसके अलावा कोई कंपनीज़ नहीं होती है? क्या? होती है बेटा। होती है। जैसे मैं आप लोगों को एग्जांपल देता हूं। मेरी बात
सुनो। बहुत सारी दूसरी कंपनीज भी होती है। जैसे मुथुट Finance मुथ Finance का नाम सुना आपने? एनबीएफसी कंपनी है भाई साहब।
एनबीएफसी कंपनीज़ है। अब ये एनबीएफसी कंपनी कौन होती है? नॉन बैंकिंग फाइनेंसियल कंपनीज़ होती है। आरबीआई एक्ट के अंदर बनती
है। भाई साहब LIC है। मैं आपसे बोल रहा हूं। स्पेशल एक्ट ऑफ पार्लियामेंट के अंदर बनी हुई कंपनी LIC है। LIC इंश्योरेंस
कंपनी है। LIC का खुद का अपना एक्ट है। LIC एक्ट। मैं कह रहा हूं SBI SBI भी भाई साहब अपने आप में पूरा एक एक्ट है। SBI
एक्ट बना हुआ है। मैं आपसे पूछना चाहता हूं। HDFC बैंक है वो बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट के अंदर बनाया गया है। इलेक्ट्रिसिटी
कंपनीज़ होती है। adानी इलेक्ट्रिसिटी वगैरह ये सब अपने-अपने इंडिविजुअल एक्ट के साथ में बने हुए हैं। तो सर आप बोलना क्या
चाहते हो? मैं ये बोलना चाहता हूं क्या LIC कंपनी नहीं है? है? क्या ICIC, HDFC कंपनी नहीं है? है? क्या adानी
इलेक्ट्रिसिटी कंपनी नहीं है? हैं। लेकिन सर इनके खुद के एक्ट के अंदर बने हुए हैं। इसलिए हम लोग इनको स्टचटरी कंपनीज़ बोलते
हैं। तो एक रजिस्टर्ड कंपनी होती है। एक स्टचटरी कंपनी होती है। तो सर क्या दोनों के ऊपर यहां पर एक्ट एप्लीकेबल होता है?
उन्होंने कहा बिल्कुल दोनों के ऊपर एक्ट एप्लीकेबल होता है। रजिस्टर्ड कंपनी के ऊपर भी जो 20 क्लॉज़ वाली कंपनीज़ हैं जो
2013 में इनकॉर्पोरेट हुई हो या फिर किसी प्रीवियस कंपनी लॉ के अंडर इनकर्पोरेट हुई हो उनके ऊपर तो कंपनीज़ एक्ट एप्लीकेबल
होता है। लेकिन अदर स्टचटरी कंपनीज़ जैसे इंश्योरेंस कंपनीज़ उनका खुद का एक्ट बना हुआ है। बैंकिंग कंपनी उनका खुद का एक्ट
बना हुआ है। इलेक्ट्रिसिटी कंपनी उनका खुद का एक्ट बना हुआ है। अदर स्पेशल कंपनीज़ जो दूसरे एक्ट के अंदर बनी है जैसे एनबीएफसी
आरबीआई के अंदर भाई साहब क्या इनके ऊपर भी कंपनीज़ एक्ट एप्लीकेबल होगा? द आंसर इज़ यस होगा। लेकिन एक सबसे इंपॉर्टेंट बात
एक्सेप्ट व्हेन इट इज़ इनकंसिस्टेंट विद द इंडिविजुअल और स्पेसिफिक एक्ट। उनका कहना है ICICI बैंक कह रहा है कि मुझे
मेरे बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट ने बोला है बैलेंस शीट ऐसे बनानी है। कंपनीज़ एक्ट बोल रहा है बैलेंस शीट ऐसे बनानी है। भाई साहब
ये तो इनकंसिस्टेंसी हो गई। यहां पर तो लड़ाई हो गई। adानी इलेक्ट्रिसिटी बोल रहा है कि मुझे इलेक्ट्रिसिटी एक्ट बोलता है
कि ऐसे करो लेकिन कंपनीज़ एक्ट बोलता है कि ऐसे करो। भाई साहब अब ऐसी स्थिति में क्या होगा? देखो जब तक लड़ाई नहीं हो रही है तब
तक कंपनीज़ एक्ट एप्लीकेबल होगा। जिस चीज के बारे में उनका इंडिविजुअल एक्ट बात नहीं करता है वहां पर कंपनीज एक्ट अप्लाई
होगा। लेकिन जैसे ही इनकंसिस्टेंसी आती है तो भाई साहब जो इंडिविजुअल एक्ट होता है ना वो जीत जाता है। क्या बोला? वो जीत
जाता है। सिंपल सी बात है। इसीलिए मैंने यहां पर लिखा है एक्सेप्ट व्हेन इट इज़ इनकंसिस्टेंट विद द इंडिविजुअल एक्ट। इट
मींस इन केस ऑफ़ एनी डिस्प्यूट इंडिविजुअल एक्ट विल ओवराइड। इंडिविजुअल एक्ट यहां पर ओवराइड करेगा। तो ये एप्लीकेबिलिटी की शीट
है जो मैंने आप लोगों को बताई है। और ये टाइप्स ऑफ कंपनीज़ है मैंने रजिस्टर्ड कंपनी और स्टचटरी कंपनी आप लोगों को बताया
है। अगर इस वर्ल्ड में आप मेजरली कंपनीज़ को डिस्ट्रीब्यूट करोगे ना ये कांसेप्ट बिल्डिंग शीट है बेटा मेरी टू स्टार है।
बैंकिंग कंपनीज़ होती है। नॉन बैंकिंग कंपनीज़ होती है। नॉन बैंकिंग कंपनीज़ में जैसे फाइनेंसियल सर्विज देते हैं जो बराबर
है वो बैंकिंग नहीं करते हैं। फाइनेंसियल सर्विज देते हैं वो। और इन दोनों के अलावा जो नॉर्मल कंपनीज होती है जो ना तो
बैंकिंग होती है ना फाइनेंसियल होती है। जैसे पीडब्ल्यू एजुकेशन के अंदर है कोई दिक्कत की बात नहीं है। तो ये नॉन बैंकिंग
नॉन फाइनेंसियल कंपनीज़ होते हैं। ये जस्ट फॉर नॉलेज मैंने आप लोगों को यहां पर समझाया है। लेकिन एप्लीकेबिलिटी आई होप आप
लोगों को समझ में आ गई होगी कि कंपनीज़ एक्ट जो है वो रजिस्टर्ड कंपनी के ऊपर भी एप्लीकेबल है। जो मेरी क्लॉज़ नंबर 20 की
कंपनीज़ होती है और अदर स्टचटरी कंपनीज़ के ऊपर भी एप्लीकेबल है। लेकिन कब तक? जब तक वो इनकंसिस्टेंट नहीं है उनके इंडिविजुअल
एक्ट के हिसाब से। एज सिंपल एज दैट। एज सिंपल एज दैट। ठीक है? क्लियर है? आई होप आप लोगों को ये समझ में आ गया होगा। चलिए
मेरी बुक का एमसीक्यू नंबर वन है कि प्रोविजन ऑफ द कंपनीज़ एक्ट अप्लाई होते हैं। ऐसी कंपनी जो मेरे पुराने कंपनीज़
एक्ट के ऊपर बनी हो। उन दोनों के ऊपर भी अप्लाई होता है। कोई दिक्कत की बात नहीं है। कंपनी क्या होती है? ये आप लोग ऑलरेडी
समझ चुके हो। है ना? कंपनीज क्या होती है? आपको ऑलरेडी समझ में आ चुका है। पूरी हैरार्की आप लोगों को समझ में आ गई है।
रजिस्टर्ड कंपनी की डेफिनेशन भी आप लोग यहां पर समझ चुके हो जो क्लॉज़ नंबर 20 के अंदर हम लोगों ने यहां पर समझी है। अच्छा
मेरी बात समझने की कोशिश करना। मेरी बात समझने की कोशिश करना। स्पेशल एक्ट ऑफ पार्लियामेंट के अंडर जो बनी हुई कंपनीज
हैं उनको हम स्टचटरी कंपनीज यहां पर बोल सकते हैं। जैसे LIC स्टचटरी कंपनी है। रजिस्टर्ड कंपनी नहीं है। SBI रजिस्टर्ड
कंपनी नहीं है। स्टचटरी कंपनी है। वो SBI एक्ट 1955 बना हुआ है। उसके अंडर बनी है। LIC बनी है। LIC एक्ट 1956 के अंदर। आपको
बात समझ में आ रहा है? तो इसको ना आपको समझना पड़ेगा। स्टचटरी कंपनीज़ के ऊपर भी एप्लीकेबल है। बट जब तक इनकंसिस्टेंसी
नहीं होगी तब तक एज़ सिंपल एज़ दैट। ठीक है? आई होप आपको ये समझ में आ गया होगा। अब एक काम करते हैं। एक छोटी सी एक्सरसाइज रन
करते हैं। मैं एक टेबल बनवाता हूं। जब मैं बॉडी कॉर्पोरेट की डेफिनेशन पढ़ाता हूं ना तो मैं कंपनी और बॉडी कॉर्पोरेट के लिए दो
शीट का एग्जांपल बनाकर लाता हूं। आप लोग ना ये वाले कॉलम को अभी मत देखना। है ना? ये वाले कॉलम को आप अभी मत देखना। अभी मैं
आप लोगों को पता है सिर्फ क्या दिखा रहा हूं। मैं इतना ज़ूम कर देता हूं ताकि आप लोगों को ये दिखे। बस इतनी सी बात। देखो
मैं कंपनी का नाम बोलूंगा। आप देखना वो हमारी क्लॉज़ नंबर 20 के हिसाब से कंपनी है कि नहीं। देखो भाई साहब Reliance
Industries 2013 के अंदर बनी है अगर तो यस वो कंपनी की डेफिनेशन के अंदर आएगी। ऐसी कंपनी जो Infosys है जो पुराने 1956 एक्ट
के अंदर रजिस्टर्ड हुई है वो भी क्लॉज़ नंबर 20 के हिसाब से कंपनी है। कोई गवर्नमेंट कंपनी है वो भी अगर 1956 पुराने
वाले एक्ट के अंदर बनी है तो वो भी गवर्नमेंट कंपनी है। स्टचटरी कॉरपोरेशंस LIC क्या 20 वाली कंपनी है? नो क्या SBI
SBI एक्ट के अंदर बना है तो कंपनी है नो जो मैंने आपको अभी बताया फॉरेन कंपनीज़ यानी कि जैसे मैंने आपको बताया Apple INC
जैसे मैंने आपको बताया iilver भाई साहब ये 20 वाली कंपनी नहीं है क्योंकि ये हमारे एक्ट के अंदर रजिस्टर्ड
नहीं है। अब भाई साहब एलएलपी तो ऑब्वियसली अलग फॉर्म ऑफ़ ऑर्गेनाइजेशन है। वो कंपनी के अंदर नहीं आएगा। कोऑपरेटिव सोसाइटी
नहीं आएंगे। ट्रस्ट नहीं आएंगे, सोसाइटीज नहीं आएगी। लेकिन मुझे एक बात बताओ सेक्शन एट कंपनी जो आगे जाकर आप पढ़ोगे नॉन
प्रॉफिट ऑर्गेनाइजेशंस बनाई जाती है वो हमारे एक्ट के अंदर रजिस्टर्ड है तो उनको यहां पर कंपनी माना जाता है। ये एक छोटी
सी एक्सरसाइज है जो मैं आप लोगों को यहां पर करवाता हूं। अ ताकि अब ये यही सेम चीज ना हम लोग बॉडी कॉर्पोरेट के केस में भी
देखेंगे। चलो अब मुझे आप लोगों को ये बताना है एक फाउंडेशन की यादें ताज़ा करें क्या? मुझे एक बात बताओ क्या कंपनी सिर्फ
इतनी सी है? कि अ कंपनी इज अ कंपनी व्हिच इज इनकरपोरेटेड और रजिस्टर्ड अंडर दिस एक्ट और एनी अदर प्रीवियस कंपनी लॉ थोड़ी
आत्मा बताओ तो जस्टिस मार्शल ने और प्रोफेसर हेननी ने डेफिनेशन बनाई थी जिसके अंदर सारे फीचर्स आए थे जिसे हम लोग बोलते
हैं आई टॉप क्लास भाई साहब ये इनकॉर्पोरेटेड एसोसिएशन है आर्टिफिशियल पर्सन है जिसको लॉ क्रिएट करता है सेपरेट
लीगल एंटिटी है परपेचुअल सक्सेशन है कॉमन सील है इसके पास में खुद की पावर्स है ये खुद के नाम पे प्रॉपर्टी परचेस कर सकते
हैं। लेकिन ये सारी पावर्स वगैरह कहां लिखी जाती है? इनके चार्टर डॉक्यूमेंट के अंदर जो कि मेमोरेंडम और आर्टिकल ऑफ
एसोसिएशन होता है। सर क्या ये फीचर्स हम लोग वन बाय वन यहां पर देख सकते हैं? बेटा ये फीचर्स पे ज्यादा टाइम वेस्ट नहीं करना
है। बट मैं कुछ काम की चीजें आप लोगों को बता देता हूं। सबसे पहले सेपरेट लीगल एंटिटी एक ऐसा कांसेप्ट है जो बोलता है कि
तू तेरा देख मैं मेरा देख लूंगा। कंपनी बोल रही है सेपरेट है। लीगल एंटिटी सेपरेट है। कंपनी की अलग लीगल पर्सनालिटी है।
कंपनी के एसेट्स अलग। कंपनी की लायबिलिटीज अलग, मेंबर के एसेट्स अलग, मेंबर की लायबिलिटीज अलग। कंपनी बोलती है मेरी
प्रॉपर्टी अलग, तेरी प्रॉपर्टी अलग। कंपनी कहती है कि मैं अपने नाम पे प्रॉपर्टी, अपने नाम पर बैंक अकाउंट, मैं खुद
कॉन्ट्रैक्ट में एंटर हो सकती हूं। मैं खुद लोंस एंड लायबिलिटीज को इंकर कर सकती हूं। तू अपना जान, मैं मेरा जान हूं। भाई
साहब बहुत ही बढ़िया। लेकिन एक बहुत ही इंपॉर्टेंट बात यहां पर आती है कि सर फिर शेयरहोल्डर्स कौन होते हैं? देखो भाई साहब
शेयर होल्डर्स के केस में एक बात बता देता हूं। शेयरहोल्डर्स बोलो मेंबर्स बोलो एक ही बात है। मेंबर एक ब्रॉडर टर्म है।
मेंबर के अंदर शेयरहोल्डर्स क्यों बोला जाता है? कि जिन्होंने यहां पर कंपनी को पैसा कंट्रीब्यूट किया है जिससे कंपनी की
शेयर कैपिटल बनी है। तो हम लोग शेयर होल्डर्स हैं। पर क्या ये शेयरहोल्डर्स कभी भी कंपनी के एसेट्स के ओनर बनते हैं?
द आंसर इज़ नो। आर शेयरहोल्डर्स द ओनर ऑफ एनी एसेट्स ऑफ द कंपनी? द आंसर इज नो। शेयरहोल्डर्स ना ही
कंपनी के। प्राइवेट ओनर्स हैं एसेट्स के। मतलब मैं एक दिन कंपनी के अंदर आऊं और मैं बोलूं मैंने कंपनी की कैपिटल में पैसा
दिया है तो एक काम करो ये पंखा निकालो। ये ट्यूबलाइट निकालो। ये सब मैं ले जा रहा हूं। चेयर ले जा रहा हूं। नहीं भाई साहब
आप कंपनी के एसेट्स के ना तो प्राइवेट ओनर हो ना ही आप जॉइंट ओनर हो। तो सर फिर हम शेयरहोल्डर्स को क्या मिलेगा?
शेयरहोल्डर्स को डिविडेंड मिलेगा एज प्रॉफिट्स एज रिटर्न्स। जो आपने कंट्रीब्यूशन किया है, आपने जो कंपनी की
शेयर कैपिटल बनाई है, जिसकी वजह से हमारे इतने सारे एसेट्स क्रिएट हुए हैं। उसमें हम आपको डिविडेंड देंगे, आपको रिटर्न
देंगे। क्या डिविडेंड और रिटर्न मिलता है बस? नहीं भाई साहब, आपको ओनरशिप भी मिलती है इन द फॉर्म ऑफ वोटिंग राइट्स। आप
मीटिंग में आपको बुलाया जाता है। आपको बोला जाता है, आपको इज्जत दी जाती है कि आओ भैया थोड़ा सा आप लोग बताओ हम लोग कौन
है और आप बोलोगे उस तरीके से हम लोग यहां पर बिनेस करेंगे। आपको बात समझ में आ रही है कि नहीं आ रही है गाइज़? है ना? तो ये
हो गए यहां पर बेसिक सेपरेट लीगल एंटिटी के बारे में मैंने आप लोगों को यहां पर बताया है। बराबर है? अब मेरी बात सुनो।
सेपरेट लीगल एंटिटी जब भी मैं समझाता हूं ना मैं एक बहुत तगड़ा एग्जांपल देता हूं बेटा। वो है
एक तरफ है आपका विजय मालिया और एक तरफ है आपकी किंगफिशर। ये एग्जांपल क्यों है भाई साहब? भाई साहब किंगफिशर कंपनी आज भी चल
रही है। भले ही विजय मालिया का दीवाना निकल चुका हो। आपको बात समझ में आ रही है? देखो मेंबर
अलग होता है। विजय मालिया मेंबर था कंपनी का। करेक्ट है? लेकिन वो कंपनी अलग होती है। कंपनी अलग होती है। सिंपल सी बात है।
ठीक है? ये पहला पॉइंट कवर हुआ हम लोगों ने। परपेचुअल सक्सेशन का मतलब होता है लोग आएंगे और लोग जाएंगे। लेकिन कंपनी गोज़ ऑन
फॉर एवर। देखो मेंबर की मृत्यु या मेंबर के चेंज होने से कोई फर्क नहीं पड़ता। देखो कंपनी के शेयर्स आज मेरे पास में है।
कल और किसी के पास में रहेंगे। कोई फर्क नहीं पड़ता। कंपनी तभी खत्म होगी जब तक वो वाइंड अप नहीं हो जाती है। है ना? और इसको
बनाया किसने बेटा? लॉ ने बनाया है। तो लॉ अकेला इसको खत्म कर सकता है। मेंबर के डेथ और इनसॉल्वेंसी से इसको कोई भी फर्क नहीं
पड़ता है। इतनी पुरानी-पुरानी कंपनीज़ है। जैसे SBI 1806 से बनी हुई है। आज भी चल रही है। बेटा जैसे हमारी टाटा कंपनी है।
जब मुझे जेआरडी टाटा ने टाटा कंपनी को बनाया। आज तक टाटा कंपनी चल रही है। आज हमारे बीच में रतन टाटा सर नहीं है तो भी
कोई फर्क नहीं पड़ रहा। टाटा कंपनी आज भी चल रही है। बराबर है। अच्छा अगला पॉइंट आता है बेटा लिमिटेड लायबिलिटी। अब देखो
लिमिटेड लायबिलिटी का मतलब ये होता है कि आप कंपनी को पैसा देते हो। क्या करते हो? आप कंपनी को पैसा देते हो। राइट? बराबर
है। जो कंपनी है उसको पैसे की जरूरत पड़ेगी तो वो बैंक से लेगी। बैंक भी कितना पैसा देगा? आपको
मॉडगेज करना पड़ेगा। तो उसने लोगों से पैसा लेना चालू कर दिया। जो लोग पैसा देते हैं वो कंपनी के शेयर होल्डर्स होते हैं।
लेकिन जब आप कंपनी हो लिमिटेड बाय शेयर कैपिटल तो आपकी कंपनी में जो शेयरहोल्डर्स हैं वो जितना पैसा आपको देकर शेयर्स होल्ड
करते हैं। लेट्स से ये तीन लोग हैं। एक ने 10,000 दिया, एक ने ₹1 लाख दिया, एक ने ₹1 लाख दिया। भाई साहब एक शेयर आपका ₹10 का
है। और ₹8 कंपनी ने मांगे थे। ₹8 मेंबर ने दे दिए। तो भाई साहब ₹2 जो अनपेड है उनकी लायबिलिटी मात्र उतनी ही रहेगी। दे आर
ओनली लायबल ऑन दी अनपेड अमाउंट। अब ये सारी कंपनीज़ के केस में नहीं होता है बेटा। लिमिटेड लायबिलिटी फीचर डिपेंड होता
है कि आप किस टाइप की कंपनी हो। और आपकी कंपनी किस टाइप की है बेटा वो मैं आप लोगों को बताऊंगा। तो सिर्फ मैं आपको
ओवरव्यू देता हूं क्योंकि थोड़े टाइम के बाद में हम लोग देखेंगे। एक लिमिटेड कंपनी होती है। एक अनलिमिटेड कंपनी होती है।
लिमिटेड कंपनी बाय शेयर्स होती है और लिमिटेड कंपनी बाय गारंटी भी हो सकती है। देखो मेरी बात समझने की कोशिश करना। हम
नाम कंपनी को देते हैं लेकिन लायबिलिटी मेंबर्स की काउंट करी जाती है। जो कंपनी लिमिटेड बाय शेयर्स होगी उसके मेंबर्स की
लायबिलिटी रहेगी ओनली अप टू अनपेड अमाउंट ऑन दी शेयर्स। जितना शेयर के ऊपर जैसे ₹10 का शेयर है ₹8 दे दिया तो ₹2 उनका अनपेड
है तो मैं उतना ही पैसा दूंगा पूरे लाइफटाइम के अंदर। लेकिन कुछ कंपनीज़ ऐसी होती है जो कंपनी लिमिटेड बाय गारंटी होती
है। बेटा गारंटी वाली जो कंपनीज होती है ना वो जिनको शुरुआत में पैसे की जरूरत नहीं होती
है वो कहते हैं कि यार हम तो यहां पर ना जब मेरी हालत खराब होगी ना तब आप मुझे पैसा देना। ऐसी कंपनी बोलती है कि सुनो जब
हालत खराब होगी मतलब वाइंडिंग अप के टाइम पे। वाइंडिंग अप के टाइम पे जब मेरे एसेट्स कम हो जाएंगे मेरी लायबिलिटीज बहुत
ज्यादा रह जाएगी। तो सुनो तुम पांच लोग गारंटी देते हो क्या कि तुम मेरे बाइंडिंग अप के टाइम पे ₹1 एक लाख दोगे? द आंसर इज
यस। तो ऐसे मेंबर्स जो गारंटी देते हैं उनकी लायबिलिटी रहती है अप टू गारंटीड अमाउंट।
तो ये लिमिटेड बाय शेयर्स में अनपेड शेयर्स तक। लिमिटेड बाय गारंटी में अप टू गारंटेड अमाउंट तक लायबिलिटी रहती है और
अनलिमिटेड कंपनी वो होती है भाई साहब जिनकी मेंबर्स की लायबिलिटी भी अनलिमिटेड होती है। पर सर आपने ऐसा क्यों लिख रखा है
कि मेंबर्स की लायबिलिटी लिमिटेड बेटा अगर आप अनलिमिटेड हमेशा लायबिलिटी मानोगे तो भाई साहब एक सिंपल सी बात है। फिर क्या
होगा? आपका लिमिटेड लायबिलिटी का फीचर तहसनहस हो जाएगा। अनलिमिटेड कंपनी का मतलब यह होता है कि जब कंपनी डिसोल्यूशन में
जाएगी, जब कंपनी वाइंडिंग अप में जाएगी तो मेंबर्स की लायबिलिटी अनलिमिटेड हो जाएगी। लेकिन जब तक कंपनी का गोइंग कंसर्न चलता
है तब तक कंपनी की लायबिलिटी लिमिट मेंबर्स की लायबिलिटी लिमिटेड ही रहती है। सो ये लिमिटेड लायबिलिटी का फीचर है जो
मैंने आप लोगों को यहां पर एक्सप्लेन किया है। अगला फीचर है बेटा आर्टिफिशियल लीगल पर्सन। आर्टिफिशियल लीगल पर्सन का मतलब ये
है कि कंपनी नेचुरल बर्थ से तो पैदा हुई नहीं है। कंपनी को पैदा करने वाला कौन है बेटा? कंपनी को पैदा करने वाला तो लॉ है।
तो लॉ ने क्रिएट किया है। है ना? ये सिर्फ तभी खत्म होगी जब लॉ के हिसाब से वाइंडिंग अप होगा। देखो कंपनी वो सारे काम कर सकती
है जो एक नेचुरल पर्सन कर सकता है। लेकिन कुछ काम छोड़कर शादी नहीं कर सकती। इसको जेल नहीं भेज सकते। इस ये ओथ नहीं ले
सकती। है ना? ये सारे काम ये नहीं कर सकती और ये चकि आर्टिफिशियल पर्सन है। इसका काम करने के लिए ह्यूमन एजेंसी की जरूरत पड़ती
है। वो ह्यूमन एजेंसी कौन है बेटा? वो डायरेक्टर्स है। डायरेक्टर्स को काम करने के लिए एक कॉमन सील की आवश्यकता होती है।
इसलिए इसका अगला फीचर होता है बेटा कॉमन सील। कॉमन सील मतलब क्या होता है? ये कंपनी की ऑफिशियल सिग्नेचर होती है। कोई
भी ऑफिसर और एंप्लई इस कॉमन सील को अप्लाई कर सकते हैं, फिक्स कर सकते हैं। एक जमाने में कॉमन सील कंपलसरी हुआ करती थी। लेकिन
अमेंडमेंट आया उसके बाद से भाई साहब अब कंपनी को कॉमन सील करना ऑप्शनल है। क्या है बेटा? ऑप्शनल है। ये कंपलसरी नहीं है।
तो अगर आपके पास में कॉमन सील है तो लगा दो। अगर आपके पास में कॉमन सील नहीं है तो कौन सिग्नेचर करेगा? दो डायरेक्टर्स कर
सकते हैं या फिर या फिर एक डायरेक्टर और एक कंपनी सेक्रेटरी कर सकता है। ये दोनों में से आप कोई भी कॉम्बिनेशन यूज़ कर सकते
हो बेटा। ये मैंने आपको सारे फीचर्स यहां पर समझाएं। मैं आपको स्टार शीट दिखा देता हूं। मेरी बात समझना। देखो आई टॉप क्लास
मेरा निमोनिक है। आई स्टैंड्स फॉर इनकॉर्पोरेटेड एसोसिएशन। कंपनी इनकॉर्पोरेट करने के लिए एसोसिएशन चाहिए।
प्राइवेट के लिए दो, पब्लिक के लिए सात, ओपीसी कंपनी के लिए वन। परपेचुअल सक्सेशन का डायलॉग यह है। मेंबर्स मे कम एंड
मेंबर्स मे गो बट द कंपनीज़ गोज़ ऑन फॉर एवर। मेंबर के डेथ और मेंबर की इनसॉल्वेंसी से कंपनी पे कोई फर्क नहीं
पड़ता है। सी स्टैंड्स फॉर कॉमन सील। ऑफिशियल सिग्नेचर है। अगर कॉमन सील नहीं है, तो ये कॉम्बिनेशन आप यूज़ कर सकते हो।
ए स्टैंड्स फॉर आर्टिफिशियल पर्सन। आर्टिफिशियल पर्सन मतलब ये फिक्टिशियस पर्सन नहीं है। मतलब नकली पर्सन नहीं है।
इन द आईज ऑफ लॉ ये एकिस्ट करता है। सेपरेट लीगल एंटिटी में मैंने आप लोगों को बताया ये फीचर है जो बोलता है कि मेंबर्स आर
डिस्टिंक्ट एंड सेपरेट फ्रॉम इट्स कंपनी। आई थिंक थोड़ी सी स्क्रीन आप लोगों की हैंग हुई होगी पर वो ठीक हो गई होगी
क्योंकि शायद थोड़ा सा कैमरा स्टक हो गया था मेरा। बट एनीवे आप लोगों को मेरी आवाज आ रही होगी। तो ये ना कुछ मैंने फीचर्स आप
लोगों को बताएं। इसमें सेपरेट लीगल एंटिटी में मैंने आपको ये बता दिया कंपनी खुद की प्रॉपर्टी किसी को भी सु कर सकती है। कोई
भी कंपनी को सु कर सकता है। कॉन्ट्रैक्ट में एंटर हो सकती है। बैंक अकाउंट खुलवा सकती है। लिमिटेड लायबिलिटी के बारे में
मैंने आपको बोला कि इट डिपेंड्स ऑन द काइंड ऑफ कंपनी यू आर। तो कंपनी का क्या बफरकेशन है मैंने वो भी आप लोगों को यहां
पर एक्सप्लेन कर दिया है। तो इसी के साथ में आपका कंपनी खत्म होता है। कंपनी के जो फीचर्स है वो खत्म होते हैं। देखो मैं आप
लोगों को बता देता हूं हमने क्या-क्या पढ़ लिया। देखो अपन लोग टिकड़ी मारते जाते हैं। सेक्शन वन हो गया, एप्लीकेबिलिटी हो गई,
सेक्शन टू का क्लॉज़ 20 हो गया। है ना? और मैंने आपको सारे फीचर्स यहां पर एक्सप्लेन कर दिए हैं। अब सेक्शन नंबर टू को कैसे
पढ़ते हैं ये भी मैंने आप लोगों को बता दिया है कि क्लॉज़ बोलते हैं हम लोग। करेक्ट है ये भी मैंने आप लोगों को बता
दिया है। अब अगली डेफिनेशन जो आने वाली है वो आने वाली है बेटा बॉडी कॉर्पोरेट की। तो चलिए बॉडी कॉर्पोरेट की डेफिनेशन को हम
लोग यहां पर स्टार्ट करते हैं एकदम मस्त एनर्जी के साथ में। क्योंकि कंपनी अगर आप लोगों ने समझ लिया है बेटा तो आप बॉडी
कॉर्पोरेट को भी समझ लोगे। लेकिन उसके पहले मैं आप लोगों को एक बात बताता हूं। देखो भाई साहब जो बॉडी कॉर्पोरेट है थोड़ा
सा टर्म ना बड़ी है। क्या है? टर्म थोड़ी सी बड़ी है। लेकिन वो बताने के पहले ना मैं आप लोगों को एक चीज बताता हूं। देखो
ये जो डेफिनेशंस को पढ़ने का तरीका होता है ना वो थोड़ा सा अलग है बेटा। डेफिनेशन को पढ़ने का जो तरीका है देखो ये सेक्शन
नंबर टू ना वैसे तो सारे एक्ट के पास में होता है। राजा सारे एक्ट के पास में सेक्शन नंबर टू होता है। हर एक्ट के पास
में डेफिनेशन का सेक्शन होता है। क्यों? यूनिफॉर्मिटी बनाने के लिए लैंग्वेज को शॉर्टन करने के लिए हमारे पास सेक्शन नंबर
टू में 95 डेफिनेशन है। लेकिन जैसे कंपनीज़ एक्ट के पास में एक डेफिनेशन नहीं थी सिक्योरिटी की। उसको चाहिए थी। उसने अपना
सेक्शन नंबर टू चेक करा नहीं मिली। तो वो सिमिलर एक्ट के पास में गया सिकरा के पास में। सिकरा एक दूसरा एक्ट है। सिक्योरिटीज
कॉन्ट्रैक्ट रेगुलेशन एक्ट है। बराबर है। तो क्या आप सिमिलर एक्ट के पास में जाके डेफिनेशन को बोरो कर सकते हो? द आंसर इज़
यस। अगर उसके बाद में भी आपको नहीं मिलता है तो आप सारे एक्ट के एक्ट के पास में जा सकते हो जिसे द जनरल क्लॉज़ एक्ट बोलते
हैं। और वहां पर भी अगर आपको नहीं मिलता है तो आप डिक्शनरी मीनिंग को यहां पर यहां पर ले सकते हो। तो डेफिनेशन के
सेक्शन को कैसे यूज़ किया जाता है? मैंने आपको ये बताया है। सबसे पहले आप अपने रिस्पेक्टिव एक्ट के सेक्शन नंबर टू के
अंदर देखो। फिर आप अपने सिमिलर एक्ट के पास में जाओ। अगर आपके पास में नहीं है तो जैसे मैंने एग्जांपल लिया है सिक्योरिटी
का। अगर वहां पर भी नहीं मिलता है तो आप जनरल क्लॉज़ एक्ट के पास में जाओ। और अगर वहां पर भी नहीं मिलता है तो फिर आपको
क्या करना पड़ेगा? आपको डिक्शनरी मीनिंग यहां पर देखना पड़ेगा। नाउ देखो डेफिनेशंस को समझने के लिए आपको यह समझना पड़ेगा
डेफिनेशंस कितने तरीके से बनाई जाती है। अब आपको ना दो तरीके की डेफिनेशंस यहां पर दिखेगी। कुछ डेफिनेशंस में लिखा हुआ होता
है मींस और कुछ डेफिनेशंस में लिखा हुआ होता है इंक्लूड्स। दोनों चीजें अलग-अलग है। देखो मींस और
इंक्लूड का मतलब क्या होता है? मैं आपको बताता हूं। जैसे हमारा 20 क्लॉज़ वाला डेफिनेशन है। कंपनी मींस अ कंपनी
इनकरपोरेटेड अंडर दिस एक्ट और एनी अदर प्रीवियस कंपनी लॉ। मेरी बात सुनो। आपको समझ में आया? कंपनी जब भी डेफिनेशन में
मींस लिखा होता है। इसका मतलब खत्म। बस जितना लिखा है उतना समझना। इट इज़ क्लोज्ड फॉर इंटरप्रिटेशन।
हम बोल रहे हैं ना इस एक्ट के अंदर रजिस्टर्ड होगी वह कंपनी है या 1956 या अर्लियर प्रीवियस कंपनी लॉ में जो
रजिस्टर्ड होगी वह कंपनी है। इन दोनों के अलावा और कोई कंपनी नहीं होगा। जब भी मींस लिखा होता है ना इट इज क्लोज्ड फॉर
इंटरप्रिटेशन। जितना लिखा है उतना समझो। लेकिन कुछ डेफिनेशन जैसे होती है मैं आपको बताऊंगा। 59 क्लॉज़ के अंदर ऑफिसर है।
ऑफिसर लिखा हुआ है ना? अब ऑफिसर इंक्लूड्स डायरेक्टर, मैनेजर और केएमपी। इसका मतलब सिर्फ यही ऑफिसर होते हैं। ऐसा नहीं है।
नहीं जितना लिखा है उससे ज्यादा समझना इसे ओपन फॉर इंटरप्रिटेशन बोला जाता है। एंड कभी-कभी ना ऐसी डेफिनेशंस भी आती है जिसके
अंदर दोनों शब्द लिखे रहते हैं। मीन्स एंड इंक्लूड्स जैसे आप डेफिनेशन पढ़ोगे शेयर की। शेयर मींस अ शेयर इन द शेयर कैपिटल ऑफ
द कंपनी एंड इंक्लूड्स स्टॉक। भाई साहब इसका मतलब मींस भी है और इंक्लूड्स भी है। ये इंक्लूड लिखने से एकदम खुली डेफिनेशन
हो गई। ऐसा नहीं है। जितना लिखा है उतना समझो और थोड़ा सा ना अभी भी क्लोज्ड फॉर इंटरप्रिटेशन ही है। बट हम थोड़ा सा ना
आपको एक्सपेंड कर रहे हैं। थोड़ा सा एक्सपेंड कर रहे हैं। अब जैसे डॉक्यूमेंट की डेफिनेशन है। डॉक्यूमेंट की डेफिनेशन
में लिख दिया डॉक्यूमेंट इंक्लूड्स इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड्स। इसका ये मतलब नहीं है कि सिर्फ इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड्स
को ही हम लोग डॉक्यूमेंट बोलते हैं। तो मैंने आप लोगों को यहां पर डेफिनेशन को पढ़ना भी सिखाया है। कैसे? ये देखो आप।
मींस रेस्ट्रिक्टिव। जितना लिखा है उतना ही समझो। मिनिमम। इसे बोलते हैं हम एग्जॉस्ट। एग्जॉस्ट मतलब खत्म हो गया। बस
इतना ही है। एग्जॉस्ट। खत्म। इंक्लूड्स मतलब होता है एक्सटेंसिव। थोड़ा ज्यादा समझो। इनफाइनाइट स्कोप है। मतलब ये ओपन
फॉर इंटरप्रिटेशन है। जब इंक्लूड लिखा हुआ आता है ना तो ये रेस्ट्रिक्टेड नहीं होता है। यहां पर मीनिंग ना इंक्लूसिव बाय नेचर
है। आप ज्यादा समझ सकते हो। लेकिन जब डेफिनेशन से मींस लिखा रहता है ना वो एग्जॉस्टिव इन नेचर होती है। मतलब
एग्जैक्टली उतना ही समझना जितना यहां पर लिखा हुआ है। गॉट इट गाइज़ एवरीबॉडी? अब आ जाओ। अब मैं आप लोगों को बताता हूं। आपको
बॉडी कॉर्पोरेट की डेफिनेशन बहुत अच्छे से समझ में आएगी। मैं ऐसा क्यों बोल रहा हूं? देखो इधर आओ। बॉडी कॉर्पोरेट की डेफिनेशन
दी गई है राजा कहां पे? क्लॉज़ नंबर 11 के अंदर। है ना? देखो हमारे इंडियन लॉ के हिसाब से अगर मैं जाऊं इंडियन लॉ के हिसाब
से तो 20 वाली कंपनी मेरी रजिस्टर्ड कंपनी इंडियन कंपनी हो जाएगी कि नहीं हो जाएगी? यस। लेकिन भाई साहब क्या इसके अंदर फॉरेन
कंपनी आता है? नहीं। देखो मुझे फॉरेन कंपनी के बारे में अगर कोई लॉ बनाना है। मुझे इंडियन कंपनी के बारे में तो बनाना
है लेकिन मुझे फॉरेन कंपनी के बारे में भी बनाना है। मुझे स्टचटरी कंपनी जो आपके LIC वगैरह सारे लोग हैं उनके बारे में कोई लॉ
बनाना है। अरे ऐसी कंपनीज़ जो इंडिया के बाहर इनकर्पोरेट हुई है। मुझे उनके बारे में भी कुछ लॉ बनाना है। तो क्या मैं इन
सबके लिए एक सिंगल वर्ड यूज़ कर सकता हूं? तो उन्होंने बोला यस इसे ही बॉडी कॉर्पोरेट बोलते हैं।
इसे ही बॉडी कॉर्पोरेट बोलते हैं। लेकिन जब आप 11 वाले क्लॉज़ की डेफिनेशन पढ़ोगे ना आप डेफिनेशन पढ़कर हैरान हो जाओगे। ये
बोलता है आप पढ़ लो यहां पर क्या बोलता है? ये देख लो आप ही लोग। बॉडी कॉरपोरेट इंक्लूड्स अ कंपनी इनकॉरपोरेटेड आउटसाइड
इंडिया। भाई साहब इसका मतलब क्या है? आपने बोल दिया दिस इंक्लूड्स बॉडी कॉर्पोरेट आउटसाइड इंडिया। बस अरे इंक्लूसिव
डेफिनेशन है। इट इज ओपन फॉर इंटरप्रिटेशन। तो इसीलिए उन्होंने बॉडी कॉर्पोरेट की डेफिनेशन को थोड़ा ओपन किया कि सुनो
कौन-कौन बॉडी कॉर्पोरेट की डेफिनेशन में आएगा कौन नहीं आएगा। सब कोई आएगा सब कोई। देखो मेरी चाहे इंडियन रजिस्टर्ड कंपनी
हो, चाहे फॉरेन कंपनी हो, बॉडी कॉर्पोरेट में आएंगे। चाहे एलएलपी इंडियन हो, चाहे एलएलपी फॉरेन
हो, यह भी बॉडी कॉरपोरेट में आएंगे। आप देखते जाओ। मैं बहुत सारे एग्जांपल्स यहां पर क्रिएट करता हूं। एक काम करो ना। देखो
क्या 20 वाली कंपनी बॉडी कॉर्पोरेट में आएगी? यस। गवर्नमेंट कंपनी आएगी? यस। बॉडी कॉर्पोरेट है। कंपनी तो कंपनी है। तो
कंपनी तो बॉडी कॉर्पोरेट में आती है। सेक्शन एट कंपनी कंपनी है। बॉडी कॉर्पोरेट में आएगी। स्टचटरी कंपनीज़ हां आपको याद आ
रहा है मेरी बात सुनो ना इसको डायरेक्टली अपन अपने ऑपरेशन के पेज पे ले जाए देखो इधर आओ मैंने आपको मना किया था आप ये देखो
आप ये देखो देखो जो नॉर्मल कंपनी है वो सब बॉडी कॉर्पोरेट है भाई साहब LIC और SBI स्टैच्यूटरी कंपनीज़ थी। ये मेरे 20 क्लॉज़
नंबर के अंदर कंपनी नहीं मानी जाती थी। लेकिन ये मेरे हिसाब से बॉडी कॉरपोरेट है। आप इसी हिसाब से देखो फॉरेन कंपनी मेरी 20
वाली कंपनी नहीं है पर वो बॉडी कॉरपोरेट है। एलएलपी बॉडी कॉरपोरेट है। हां कोऑपरेटिव सोसाइटी ट्रस्ट है। ये सब ना तो
कंपनी है ना ही बॉडी कॉरपोरेट है। आपको मालूम है इसके पीछे कारण क्या है? क्योंकि बॉडी कॉर्पोरेट के अंदर भी ना
फीचर्स तो कंपनी वाले ही होते हैं। सेपरेट लीगल एंटिटी है ना? परपेचुअल सक्सेशन ये उसके अंदर भी होते हैं। लेकिन सर आपने
कोऑपरेटिव सोसाइटीज को बाहर क्यों निकाला? जैसे आपको पता है अमूल कोऑपरेटिव सोसाइटी है। अमूल कोऑपरेटिव सोसाइटी आप लोगों को
पता है अलग से। इसलिए निकाला क्योंकि कॉर्पोरेट बॉडी कॉर्पोरेट की डेफिनेशन में कोऑपरेटिव सोसाइटी को बाहर निकाला गया है।
उन्होंने बोला है कि बॉडी कॉरपोरेट डज नॉट इंक्लूड एनी कोऑपरेटिव सोसाइटी। और उन्होंने एक और बात बोली है हम उन लोगों
को भी बाहर निकाल सकते हैं जिसको सेंट्रल गवर्नमेंट टाइम टू टाइम नोटिफाई करके बाहर निकालती है। पता है किसको बाहर निकाला है
आज तक? एशियन डेवलपमेंट बैंक को। एशियन डेवलपमेंट बैंक को बाहर निकाल रखा है। ये देखो अदर बॉडी कॉरपोरेट अदर बॉडी
कॉर्पोरेट जिसको नोटिफाई करके बाहर निकाला गया है वो बॉडी कॉर्पोरेट नहीं होती है। सेक्शन एट कंपनी तो कंपनी है तो वो बॉडी
कॉर्पोरेट होगी ही होगी। इसका मतलब क्या हुआ बेटा? इसका मतलब यह हुआ कि बॉडी कॉर्पोरेट एक ब्रॉडर टर्म है। एक वाइडर
टर्म है। बॉडी कॉर्पोरेट। बॉडी कॉर्पोरेट एक ब्रॉडर और एक वाइडर टर्म है। इसके अंदर क्या आता है बेटा? इसके अंदर आ सकता है
220 वाली कंपनी आ सकती है। इसके अंदर आपकी फॉरेन कंपनी आ सकती है। है ना? इसके अंदर आपकी स्टचटरी कंपनीज़ आ सकती है। मतलब मैं
ऐसा जरूर बोल सकता हूं कि सारी कंपनीज़ बॉडी कॉर्पोरेट है पर सारी बॉडी कॉर्पोरेट कंपनीज़ नहीं होती है।
गॉट इट गाइस? एवरीबॉडी? डन है। अब मेरी बात सुनो। मैं आप लोगों को थोड़ा डेप्थ में ले जा रहा हूं। लेकिन बेटा ये सिर्फ
एक्सपीरियंस से ही आती है ये बात। मैं आपको पहले ही बता रहा हूं। और ये अनुभव है। इसकी वजह से मैं आपको बहुत सारी चीजें
एक्स्ट्रा यहां पर पढ़ा रहा हूं इस प्रीलिमरी चैप्टर के अंदर। बेटा आप बॉडी कॉर्पोरेट की डेफिनेशन सिर्फ कंपनीज़ एक्ट
में पढ़ोगे। ऐसा नहीं है। आप बॉडी कॉर्पोरेट की डेफिनेशन कंपनीज़ एक्ट में भी पढ़ोगे और एलएलपी एक्ट के अंदर भी पढ़ोगे।
दोनों के अंदर बॉडी कॉर्पोरेट की डेफिनेशन आती है। यहां पर क्लॉज़ नंबर 11 के अंदर क्या लिखी गई है? कि बॉडी कॉर्पोरेट
इंक्लूड्स कंपनी इनकॉर्पोरेटेड आउटसाइड इंडिया बट इट डज़ नॉट इंक्लूड दीज़ टू। पर बॉडी कॉर्पोरेट की डेफिनेशन जो एलएलपी
एक्ट के अंदर है ना बेटा वो अलग तरीके से दी गई है। क्योंकि देखो एलएलपी एक्ट का सेक्शन नंबर टू खुद का बना हुआ है। तो
भैया उसने अपने खुद के हिसाब से डेफिनेशन बनाई। उसने पता है वहां पर क्या लिख रखा है? उसने लिख रखा है बॉडी कॉर्पोरेट मींस
अ कंपनी एस पर क्लॉज़ नंबर 20। सबसे पहले उसने बोला कि बॉडी कॉर्पोरेट के अंदर 20 क्लॉज़ वाली कंपनी आती है। एंड इट
इंक्लूड्स व्हाट? एलएलपी इनकॉर्पोरेटेड इन इंडिया। एलएलपी इनकॉर्पोरेटेड आउटसाइड इंडिया एंड कंपनी इनकॉर्पोरेटेड आउटसाइड
इंडिया। मतलब उन्होंने पता है क्या बोला? चाहे इंडियन कंपनी हो, चाहे फॉरेन कंपनी हो। बॉडी कॉर्पोरेट में आएगी। चाहे इंडियन
एलएलपी हो, चाहे फॉरेन एलएलपी हो, बॉडी कॉर्पोरेट के अंदर आएगी। लेकिन ये क्या इंक्लूड नहीं करता है? कोऑपरेटिव सोसाइटी
ये भी इंक्लूड नहीं करता है। सेंट्रल गवर्नमेंट जिसको नोटिफाई करे उसको भी नहीं करता है। लेकिन इसके अलावा उन्होंने एक और
चीज लिखी। ये कॉरपोरेशन सोल को भी इंक्लूड नहीं करता है। कॉरपोरेशन सोल मतलब क्या है?
कॉरपोरेशन सोल मतलब ऐसा होता है एक ऑफिस अपने आप में एंटिटी है। जैसे प्रेसिडेंट का ऑफिस है। प्राइम मिनिस्टर का ऑफिस है।
ये अपने आप में एंटिटी है। कॉरपोरेशन है। प्रेसिडेंट ऑफ इंडिया इंडिया के इतनी सारी कंपनीज़ में इन्वेस्ट करता है। लेकिन उस
ऑफिस ने इन्वेस्ट किया है। प्रेसिडेंट ने नहीं करा है। उन्हें कॉरपोरेशन सोल कहते हैं। सोल मतलब अकेला और कॉरपोरेशन। तो
बेटा उसको भी यहां पर नहीं लिखा गया है। इसके अलावा ना कुछ प्रश्न बच्चे पूछते हैं। क्या पार्टनरशिप फर्म बॉडी कॉर्पोरेट
है? नहीं। क्या एचयूएफ बॉडी कॉर्पोरेट है? नहीं। क्या आपके नेशनलाइज्ड बैंक्स जितने भी इंडिया के अंदर है वो बॉडी कॉर्पोरेट
के अंदर आएंगे? द आंसर इज़ यस। क्या पब्लिक फाइनेंसियल इंस्टीटशंस हैं जैसे LIC वगैरह ये आएंगे? द आंसर इज़ यस। सर फाइनली आप
हमको एक स्टार शीट दे दीजिए जिसमें हमको बॉडी कॉर्पोरेट की डेफिनेशन पूरी याद हो जाए। तो आ जाओ गाइस। क्लॉज़ नंबर 11
इंक्लूसिव डेफिनेशन है। बॉडी कॉर्पोरेट इंक्लूड्स कंपनी इनकॉर्पोरेटेड आउटसाइड इंडिया। बट इट डज नॉट इंक्लूड कोऑपरेटिव
एंड एनी अदर बॉडी कॉर्पोरेट नोटिफाइड बाय सेंट्रल गवर्नमेंट जैसे एशियन डेवलपमेंट बैंक नोट्स टू रिमेंबर बॉडी कॉर्पोरेट में
कंपनी जैसे फीचर्स होते हैं परपेचुअल सक्सेशन और सेपरेट लीगल एंटिटी बॉडी कॉर्पोरेट में सारी स्टचटरी कंपनीज़ भी आ
जाती है दूसरे एक्ट के अंदर जो रजिस्टर्ड कंपनीज़ है वो भी आ जाती है इंडियन कंपनी यानी कि क्लॉज़ नंबर 20 वाली भी आ जाती है।
फॉरेन कंपनी, एलएलपी, पब्लिक फाइनेंसियल इंस्टीट्यूशन, नेशनलाइज्ड बैंक सब कोई आ जाते हैं। लेकिन पार्टनरशिप फर्म, एचयूएफ,
कोऑपरेटिव ये सारे लोग इसके अंदर नहीं आते हैं। आई होप आप लोगों को बॉडी कॉर्पोरेट की डेफिनेशन एकदम अंदर से दिल के अंदर उतर
गई होगी जो मैंने आप लोगों को यहां पर एक्सप्लेन किया है। अब इसके बाद में डेफिनेशंस आती है बेटा शेयर कैपिटल की
डेफिनेशन। बेटा शेयर कैपिटल डेफिनेशन में समझने के लिए आपको देखना है ऑथराइज शेयर कैपिटल, इशूड शेयर कैपिटल, सब्सक्राइब
शेयर कैपिटल, कॉल्ड अप शेयर कैपिटल, पेड अप शेयर कैपिटल एंड कॉल्स इन अरियर। देखो बेटा मेरी बात सुनो। ऑथराइज्ड शेयर कैपिटल
आपके मेमोरेंडम के अंदर लिखी जाती है। जब आप मेमोरेंडम पढ़ोगे ना, मैं मेमोरेंडम को मां बोलता हूं। और मां के सबसे नजदीक कौन
होता है बेटा? उसका बेटा होता है सन क्लोज़। डबल एस ओ डबल एन सी एल। पता है ये क्या है? यह सारे क्लॉज़ के नाम है। आगे
बताऊंगा। कैपिटल क्लॉज़ के अंदर ऑथराइज़ शेयर कैपिटल का नाम आता है। इसीलिए इसको नॉमिनल या फिर रजिस्टर्ड शेयर कैपिटल भी
बोला जाता है। क्योंकि इसके ऊपर स्टैंप ड्यूटी दी जाती है। ये मैक्सिमम फंड्स हैं जो कंपनी पब्लिक से यूज कर सकती है अपने
पूरे लाइफ टाइम के अंदर। अब स्टैंप ड्यूटी ना स्टेट वाइज़ चलती है बेटा। अलग-अलग सब जगह चलती है। जैसे ₹100 महाराष्ट्र
गवर्नमेंट ने लगा रखा है फॉर एव्री लाख। ऐसा है। है ना? तो ₹26 लाख की अगर आपकी ₹25 लाख की ऑथराइज शेयर कैपिटल है तो आप
₹2600 की स्टैंप ड्यूटी यहां पर दोगे। अब आज कंपनी को मात्र ₹1 लाख चाहिए तो वो इशू करता है। वो इनवाइट करता है लोगों को। तो
अब जब भी आप इनवाइट करते हो ना लोगों को सब्सक्राइब करने के लिए अंडर सब्सक्राइब भी हो सकता है। ओवर सब्सक्राइब भी हो सकता
है। एट पार भी हो सकता है बेटा। जो इशूड शेयर कैपिटल में से सब्सक्राइब हो जाता है उसे सब्सक्राइब्ड शेयर कैपिटल
बोला जाता है। जो पैसा कंपनी कॉल करती है ₹10 का एक शेयर है मैंने ₹4 आज मंगवाया है वो ₹4 लाख मेरा कॉल्ड अप शेयर कैपिटल है
और जितना पैसा कंपनी के पास में बैंक अकाउंट में आ जाता है वो पूरा का पूरा मेरा पेड अप शेयर कैपिटल होता है। अगर मैं
सिंपल सी गणित की बात करूं। मैंने मंगवाया ₹10, मैंने मंगवाया ₹10, आया ₹8, आया ₹8 तो भाई साहब जो बचा हुआ रहता है वो कॉल्स
इन अरियर्स हो जाता है। लेट्स से दो ₹00 शेयरहोल्डर्स ने ₹2 नहीं दिए। मतलब ₹40,000 मेरे पास में नहीं आया। ये मेरा
कॉल्स इन अ एरियर है। अगर मैं कॉल्स इन एरियर को कॉल्ड अप से सब्ट्रैक्ट कर दूं तो मेरा पेड अप शेयर कैपिटल मुझे यहां पर
मिल जाता है। यही यहां पर डेफिनेशन है जो आप लोगों को यहां पर पढ़नी है। ये मैंने आप लोगों को
यहां पर दिखाई है। ऑथराइज्ड ये क्लॉजेस नंबर याद करना जरूरी नहीं है। आप सिर्फ इतनाइतना एक-एक लाइन याद कर सकते हो। बस
इतना आप लोगों के लिए काफी है। ठीक है? अब हम लोग आगे चलते हैं। आगे ये देखो ऑथराइज्ड शेयर कैपिटल का मैंने
एग्जांपल आप लोगों को दे रखा है। नाउ वी विल स्टार्ट विद आवर टाइप्स ऑफ कंपनीज़। देखो आप लोगों ने मेरे साथ में क्या-क्या
देख लिया मैं आप लोगों को बता देता हूं। हम और कितना आगे बढ़ चुके हैं। हम देखो यहां पर कितना आगे बढ़ चुके हैं। यहां पर
बॉडी कॉर्पोरेट भी मैंने आप लोगों को पढ़ा दिया है। एंड क्लासिफिकेशन ऑफ कैपिटल भी आप लोगों को पढ़ा दिया है। अब हम लोग यहां
पर चालू करेंगे प्राइवेट कंपनी, पब्लिक कंपनी एंड टाइप्स ऑफ कंपनीज़ के साथ में हम लोग यहां पर स्टडी चालू करने वाले हैं इस
चैप्टर के अंदर। आपको मालूम है आप टोटल कितनी डेफिनेशंस यहां पर पढ़ने वाले हो, बेटा। टाइप्स ऑफ कंपनीज़ के अंदर आप लोग
देखोगे ना बेटा आपके पास में टोटल 18 डेफिनेशंस हैं। एक देख लो आप आप देख लो मैं आपको बताता हूं। ये देखो आप अनलिमिटेड
कंपनी एक दो तीन 4 5 6 7 8 9 10 11 12 13 14 15 16 17 18 ये 18 डेफिनेशन को पता है कैसे डिवाइड किया गया है इनको डिवाइड किया
गया है पांच पार्ट्स के अंदर ऑन द बेसिस ऑफ लायबिलिटी ऑन द बेसिस ऑफ मेंबर्स ऑन द बेसिस ऑफ कंट्रोल ऑन द बेसिस ऑफ लिस्टिंग
एंड अदर्स की कैटेगरी हमको मेजरली इस चैप्टर के अंदर यही पढ़ना है। हम एक काम करते हैं। सबसे पहले हम लोग यहां पर
स्टार्ट करते हैं हमारे ऑन द बेसिस ऑफ लायबिलिटी के साथ में। सॉरी हां एक काम करते हैं। एक काम करते हैं। हां सबसे पहले
हम लोग स्टार्ट करते हैं ऑन द बेसिस ऑफ़ मेंबर्स के साथ में। क्या बोलते हो? पब्लिक देखेंगे, प्राइवेट देखेंगे। इसके
साथ में अपन लोग अपना ऑपरेशन स्टार्ट करते हैं। देखो पब्लिक और प्राइवेट कंपनी को बताने के पहले मैं आप लोगों को ना एक जगह
ले चलता हूं। आपको मालूम है बार-बार मैं ले जाता हूं एमसीए की वेबसाइट पे। जरूरी है बेटा। एमसीए की वेबसाइट पे जाना बहुत
ज्यादा जरूरी है। देखो इसके पीछे कारण क्या है? मैं आपको बताता हूं। आप एमसीए [नाक से की जाने वाली आवाज़] की वेबसाइट
पे जाओगे ना आपको बहुत सारी इनफेशन मिलेगी बच्चा। आप देखो आप यहां पर ना डेटा एंड रिपोर्ट्स में जाना। डेटा एंड रिपोर्ट्स
में जाओगे। आप रिपोर्ट्स पे क्लिक करोगे। देयर इज समथिंग कॉल्ड मंथली इंफॉर्मेशनेशन बुलेटिन जो एमसीए आप लोगों के लिए तैयार
करती है। अब ये जून तक का ना आपको लेटेस्ट मंथ तक का यहां पर अवेलेबल है कि इंडिया में कितनी प्राइवेट कंपनीज़ हैं। इंडिया
में कितनी पब्लिक कंपनीज़ हैं। मेरे पास में मार्च का ना डाउनलोडेड है। तो मैं आपको ना 31 मार्च तक का जो डाउनलोडेड है
ना वो दिखाने की कोशिश करता हूं। देखो ये मार्च 2026 का है। ये पूरी ना एक रिपोर्ट बन के तैयार होती है। इस रिपोर्ट के अंदर
ना एमसीए आपको अवेलेबल करवाता है कि वन पर्सन कंपनी इंडिया में कितनी है? प्राइवेट कितनी है? पब्लिक कितनी है?
लिमिटेड बाय शेयर्स कितनी है? लिमिटेड बाय गारंटी कितनी है? अनलिमिटेड कितनी है? एलएलपी के बारे में वो सारी चीजें। आप
देखो अगर आप ये चार्ट देखोगे ये चार्ट ये बता रहा है कि इंडिया में 31 मार्च 2026 तक 2078000 इंग्लिश बोल देता हूं ₹78000
कंपनीज़ हैं बराबर है और एक्टिव कंपनीज़ हैं। टोटल कंपनीज़ तो 31 लैक्स हैं लेकिन उसमें से एक्टिव कंपनी 20 लैक्स है। अब आप
ध्यान से इस फिगर को देखना। लिमिटेड बाय शेयर्स, लिमिटेड बाय गारंटी एंड अनलिमिटेड। अनलिमिटेड मात्र 308 कंपनीज़
हैं। इससे हमको ये मालूम चलता है कि अनलिमिटेड कंपनी का प्रैक्टिकल एप्लीकेशन बहुत कम है और वेरी वेरी वेरी वेरी
लिमिटेड कारणों की वजह से अनलिमिटेड कंपनी को बनाया जाता है एंड इट एक्सिस्ट ऑन पेपर। व्हाई आई विल टेल यू कि इसके पीछे
कारण क्या है? आपको नंबर से भी समझ में आएगा। 308 कंपनीज़ हैं मात्र। वहीं आप देखो तो मेजॉरिटी 80 90% जो कंपनीज है बेटा वो
लिमिटेड बाय शेयर्स हैं। मतलब शेयर कैपिटल वाली कंपनीज़ हैं जहां पर मेंबर्स को शेयर्स दिए गए हैं और उन्होंने कैपिटल में
कंट्रीब्यूट किया है। उसमें भी अगर आप नीचे जाओगे तो पब्लिक और प्राइवेट देखो भाई साहब 20600 कंपनीज़ में से मेजॉरिटी
कंपनीज़ मेजॉरिटीज नहीं सब्सटेंशियल नंबर ऑफ कंपनीज़ प्राइवेट कंपनीज़ हैं। 19 लैक्स यानी कि 96% ऑलमोस्ट कंपनी जितनी भी है वो
प्राइवेट है। पब्लिक कंपनीज भी कोई बहुत ज्यादा कम नहीं है भाई बहुत ज्यादा भी नहीं है। इतनी बड़ी आबादी में इतने बड़े
देश में अगर आप लोग देखो मात्र 722 कंपनीज़ पब्लिक है। मुझे उस पे भी फोकस नहीं करना है। उसमें आप लिस्टेड कंपनी
देखो 10% है मात्र 7300 7.3 के अगर मैं यहां से ऐड करूं और कंपनी लिमिटेड बैक गारंटी में अगर पब्लिक कंपनी
का लिस्टेड देखूं मात्र 14 कंपनीज़ हैं। 7313 कंपनीज़ ही लिस्टेड कंपनीज़ हैं भाई साहब इंडिया के अंदर। आप समझ रहे हो? ये
मैंने आपको क्यों दिखाया? ये मैंने आपको इसलिए दिखाया। आप लोगों को क्लेरिटी मिलेगी कि हम प्रैक्टिकली वर्ल्ड में कौन
सी कंपनीज़ को ज्यादा यूज किया जा रहा है? एंड द आंसर इज़ प्राइवेट कंपनी एंड दैट टू लिमिटेड बाय शेयर्स। लिस्टेड कंपनीज़ बहुत
ही कम है। सेबी फिर भी इनस्टेड कंपनीज़ में काम करने में अभी भी हाथ पैर मार रहा है। इतनी मिनिमम नंबर ऑफ कंपनीज़ में भी हम
लिस्टेड कंपनीज़ में इतने फ्रॉड्स को नहीं रोक पा रहे हैं। हर साल एक बड़ी कंपनी का नया फ्रॉड हमारे सामने आता है और लाखों
करोड़ों में आता है और शेयर होल्डर्स का पैसा भी डूबता है। ठीक है? बट अगेन इट्स इट्स एन ओपिनियन। हम इसमें कुछ कर नहीं
सकते। एनीवे हम लोग आगे बढ़ते हैं। आप बात समझे मैं क्या बताना चाह रहा हूं? ये पूरे बुलेटिन में ना बेटा आप लोगों को स्टेट
वाइज कंपनीज़ दिख जाएगी। है ना? देखो आप लोग को मालूम चलेगी। अभी आपने एक डोरेंट कंपनी पढ़ोगे। डोरेंट कंपनी एक तरीके से
स्लीपिंग कंपनी होती है। है ना? जिसने डोरेंट का स्टेटस ले रखा है। ₹500 कंपनीज़ है जो डोरेंट है। है ना? ऐसी कंपनी जो
लिक्विडेशन में चल रही है। ऐसी कंपनी जिनका नाम स्ट्राइक ऑफ हो गया है। भाई साहब 25,000 है ना? ये ये क्लोज्ड कंपनीज़
है। 95 लाख के ऊपर। ऐसी कंपनीज़ को क्लोज कर दिया गया है। ठीक है? रजिस्टर्ड कंपनी इतनी है, एक्टिव कंपनी इतनी है। इससे हमको
आईडिया लगता है हम किस दिशा में यहां पर आगे जा रहे हैं। चलो ओके। एनीवे अभी हम लोग आगे चलते हैं। मेरी
[गला साफ़ करने की आवाज़] बात समझना। सबसे पहले हम ऑन द बेसिस ऑफ़ मेंबर्स देख रहे हैं। तो प्राइवेट देखेंगे, पब्लिक देखेंगे
बराबर है। ओपीसी देखेंगे और स्मॉल देखेंगे। एक बात अच्छे से समझ लो। जब भी ऑन द बेसिस ऑफ मेंबर पढ़ते हो ना बेटा
बफरकेशन तो दो ही तरीके का है। एक प्राइवेट है और एक पब्लिक है। ऑन द बेसिस ऑफ मेंबर दो तरीके की कंपनी होती है। एक
प्राइवेट होती है एक पब्लिक होती है। आई थिंक आप लोगों की स्क्रीन थोड़ी सी हैंग हो गई है शायद। जस्ट अ सेकंड गाइस। जस्ट अ
सेकंड। हां जी गाइज़ इट इज़ बेटर ना। आई गेस यस। तो देखो मैं आप लोगों को बोल रहा था कि ऑन द बेसिस ऑफ़ मेंबर्स यहां पर कंपनी
हमेशा या तो प्राइवेट होगी या पब्लिक होगी। प्राइवेट की जो डेफिनेशन है बेटा क्लॉज़ नंबर 68 के अंदर है और पब्लिक की जो
डेफिनेशन है वो क्लॉज़ नंबर 71 के अंदर है। प्राइवेट कंपनी में दो स्पेशल टाइप ऑफ कंपनीज़ को यहां पर क्रिएट किया गया है। एक
वन पर्सन कंपनी है जो क्लॉज़ नंबर 62 के अंदर होता है और एक स्मॉल कंपनी है जो क्लॉज़ नंबर 85 के अंदर होता है। स्मॉल
कंपनी की डेफिनेशन अच्छे से अपडेट हुई है, अमेंड हुई है। इसको हम लोग यहां पर देखेंगे। बट यस पहले हम प्राइवेट और
पब्लिक के साथ में यहां पर चालू करते हैं और ये वाले सेक्शन को हम लोग यहां पर सबसे पहले खत्म करेंगे। ठीक है? देखो प्राइवेट
कंपनी की डेफिनेशन जब भी आप पढ़ते हो ना मैं इसको पता है किस तरीके से पढ़ाता हूं। डबल पी आर और लिमिटेड देखो प्राइवेट कंपनी
वो होती है जिसको जब फंड्स की जरूरत होती है ना वो पब्लिक के पास नहीं जा सकती। वो आम जनता के पास में नहीं जा सकती। वो जनरल
ऑफर नहीं कर सकती। स्पेसिफिक ऑफर और जनरल ऑफर ऐसी दो चीजें आपने फाउंडेशन के अंदर पढ़ी होगी। एकिस्टिंग मेंबर से पैसा ले
सकते हो। इसीलिए डबल पी बोला गया है प्रोहिबिटेड फ्रॉम इनवाइटिंग पब्लिक टू सब्सक्राइब इट्स सिक्योरिटीज। तो पब्लिक
को इनवाइट करने के लिए आप प्रोहिबिटेड हो एज सिंपल एज दैट बराबर है। अच्छा आगे की बात समझना। आगे की बात समझना सुनना। आर से
हमारा क्या है? रेस्ट्रिक्ट यानी कि ट्रांसफरेबिलिटी ऑफ़ शेयर्स। अब क्या होता है ना शेयर्स ट्रांसफरेबल तो है। ये हमको
पता है। जैसे कोई भी मूवेबल प्रॉपर्टी होती है। ऐसे शेयर्स भी मूवेबल प्रॉपर्टी के अंदर काउंट किए जाते हैं। है ना? आप
लोगों ने गुड्स की डेफिनेशन पढ़ी होगी। गुड्स की डेफिनेशन के अंदर हम लोग स्टॉक्स को शेयर्स को इंक्लूड करते हैं। मींस इट
इज़ ट्रांसफरेबल। नाउ द क्वेश्चन इज़ कि क्या आप ईजीली ट्रांसफर कर सकते हो? तो इट डिपेंड्स आप कौन सी कंपनी हो? देखो
प्राइवेट कंपनी में हमने आपको प्रोहिबिट नहीं किया है। देखो दो बातें होती है। एक शब्द होता है प्रोहिबिट करना। एक शब्द
होता है रेस्ट्रिक्ट करना। रेस्ट्रिक्ट करना मतलब ये होता है कि बेटा तू घर से बाहर जा सकता है। लेकिन 10:00 बजे के पहले
आ जाना। तो घर से बाहर जाना वर्जित नहीं है। घर से बाहर जाना पे पाबंदी लगाई हुई है कि भाई चल थोड़े समय में तू जाकर आ
जाना। लेकिन अगर मैं बोलूं तू घर से बाहर जा ही नहीं सकता। ये प्रोहिबिशन है। तो देखो एक प्राइवेट कंपनी के जो मेंबर्स हैं
ना वो अपने शेयर्स को ट्रांसफर कर सकते हैं। लेकिन किसको कर सकते हैं? खुलेआम पब्लिक को नहीं कर सकते। वो अपने मेंबर्स
को कर सकते हैं। अपने मेंबर्स के रिलेटिव्स को भी कर सकते हैं। और आगे जाके आप पढ़ोगे बेटा थोड़ा फाइनल तक आप जाओगे
कि बाहर वाले लोगों को भी ट्रांसफर करना पॉसिबल है आउटसाइडर्स को। लेकिन उसके लिए डायरेक्टर्स का बोर्ड का अप्रूवल चाहिए
रहता है। लेकिन दिस पॉइंट इज़ जस्ट फॉर नॉलेज। इसको आप अभी छोड़ दो। तो जो मेंबर्स या रिलेटिव्स को ट्रांसफर हो सके
उतना ही हमने आपको यहां पर अलऊ किया है। एंड लिमिटेड मतलब होता है कि मिनिमम दो मेंबर्स और मैक्सिमम 200 मेंबर्स प्राइवेट
कंपनी के अंदर हो सकते हैं। ये तीन तो आप बेटा पढ़ते हो आप फाउंडेशन से पढ़ते हुए आ रहे हो। लेकिन एक चौथा रेस्ट्रिक्शन ना
यहां पर और ऐड किया जाता है। और वो चौथा रेस्ट्रिक्शन पता है क्या है? डिपॉजिट नाम का। डिपॉजिट वर्ड हो सकता है आप पहली बार
सुन रहे हो। देखो डिपॉजिट ना आपका चैप्टर नंबर फिफ्थ है। है ना? आपके सिलेबस के अंदर। मैं आप लोगों को एक एग्जांपल देता
हूं। जैसे आप लोग बैंक के पास में अपना पैसा रखते हो तो आप उसे क्या बोलते हो? फिक्स्ड डिपॉजिट बोलते हो। कि बैंक को आप
अपना पैसा देते हो। आप एफडी क्रिएट करते हो और बैंक उसके बदले में आपको क्या करता है? इंटरेस्ट देता है। ऐसा कुछ तरीका ना
कंपनीज़ ने भी निकाल रखा है। कंपनीज़ कह रही है हमको पैसे की जरूरत तो है लेकिन हमको उसके बदले में सिक्योरिटीज़ इशू नहीं करनी
है। हमें सिर्फ पैसा चाहिए। हम उसके बदले में इंटरेस्ट देंगे। तो सर डिबेंचर्स भी तो होते हैं। डिबेंचर्स अगेन इट्स अ
सिक्योरिटी। है ना? डिपॉजिट के केस में क्या होता है? मैंने कंपनी को ₹10,000 दिए। कंपनी ने मुझे डिपॉजिट की एक रिसीट
बना कर दी। कंपनी ने बोला चलो एक साल के लिए पैसा आपका हमारे पास में है। हम आपको हर महीने क्वार्टरली, हाफ ईयरली, एनुअली
हम आपको इतना इंटरेस्ट देंगे। तो क्या डिपॉजिट भी एक फंड रेस करने का तरीका है? द आंसर इज़ यस। डिटेलिंग चैप्टर नंबर फिफ्थ
के अंदर होगी अच्छे से। पर क्या एक प्राइवेट कंपनी आम जनता से डिपॉजिट एक्सेप्ट कर सकती है? द आंसर इज नो। देखो
आप एक प्राइवेट कंपनी पब्लिक से किसी भी तरीके का पैसा नहीं ले सकती है। इस बात का आपको ध्यान रखना है। तो चलो इसका मतलब मैं
आपको अगर समराइज करूं ना देखो प्राइवेट कंपनी पब्लिक से पैसा नहीं ले सकती। पब्लिक ऑफर नहीं कर सकती। बेसिकली हमारा
मेन मकसद ये है। डिपॉजिट पब्लिक से नहीं ले सकती। प्राइवेट प्लेसमेंट कर सकती है। प्राइवेट प्लेसमेंट का मतलब क्या होता है?
स्पेसिफिक ऑफर मैं 200 लोगों से पैसा ले सकता हूं। आप भाई साहब 10 लोग आपको मैं एक एक ऑफर दे रहा हूं। आप पैसा दोगे मुझको
मेरी कंपनी पैसा लगाओगे। ये ये प्राइवेट प्लेसमेंट है। आप उन्हीं को बोनस उन्हीं को राइट इशू करना है। आप कर सकते हो। हमें
कोई दिक्कत की बात नहीं है। बोनस और राइट इशू क्या होता है? राइट इशू आपको नहीं पता होगा। देखो बोनस तो आपने अकाउंट से पढ़ा
होगा। राइट इशू भी एक्चुअली पढ़ा होगा या पढ़ने वाले होंगे। राइट [गला साफ़ करने की आवाज़] इशू में क्या
होता है? जो एकिस्टिंग शेयर होल्डर्स होते हैं ना उन्हीं को ऑफर किया जाता है। जैसे अगर मेरे पास में 10,000 शेयर्स हैं PW के
बराबर है। 10,000 शेयर्स हैं PW के। तो मैं 1:1 यहां पर अगर कंपनी बोलती है कि 1:1 में यहां पर आप लोगों को राइट इशू कर
रहा हूं। राइट मतलब आपका हक है। हम बाहर वालों से पैसा ले उससे पहले हम आपसे पैसा ले सकते हैं अगर आपको देना हो तो। तो 1:1
का मतलब क्या है? पुराने 10,000 के बदले मुझे नए 10,000 शेयर्स और मिलेंगे। तो मुझे ज्यादा शेयर्स मिल जाएंगे। कंपनी को
पैसा मिल जाएगा। आपको बात समझ में आ गई? अब मेरी बात सुनो। मैंने आपको क्या सिखाया है? मैंने आपको कांसेप्ट बिल्डिंग पूरी कर
दी है। कांसेप्ट बिल्डिंग शीट्स पे ध्यान रखना ये शीट्स सारी एक ही पीडीएफ के अंदर आप लोगों को बैच के अंदर मिल जाएगी। बराबर
है और आप लोगों को मस्त तरीके से मेरी Google ड्राइव लिंक पे भी मिल जाएगी। है ना? ये जैसे-जैसे कांसेप्ट बिल्डिंग शीट्स
जो होती है टू स्टार वाली ये ऑप्शनल है। अगर आप लिखना चाहो तो लिखो नहीं लिखना चाहो तो मत लिखो। लेकिन मेरा ऐसा कहना
होता है कौन से बिल्डिंग शीट्स लिखोगे तो रजिस्टर में नोट्स बहुत सुंदर बनेंगे या फिर अगर आप प्रिंट आउट वगैरह लेके पढ़ रहे
हो तो ये आपकी इच्छा है। फंड्स दो तरीके से उठाए जा सकते हैं पब्लिक से और एकिस्टिंग मेंबर से। पब्लिक से जब हम लेते
हैं तो आम जनता बोलते हैं उसे पब्लिक ऑफर बोला जाता है। लेकिन जब हम मेंबर्स से लेते हैं, एकिस्टिंग पर्सन से लेते हैं या
फिर ग्रुप ऑफ पीपल को स्पेसिफाई करके लेते हैं उसे प्राइवेट प्लेसमेंट कहते हैं और उसे स्पेसिफिक ऑफर कहते हैं। ये जनरल ऑफर
होता है। जब पहली दफा किया जाता है तो उसे आईपीओ कहते हैं। जैसे पीडब्ल्यू ने पहली बार लिस्टिंग करवाई और इनिशियल पब्लिक ऑफर
किया। जब इसी चीज को बाद में बार-बार किया जाता है तो उसे फर्दर पब्लिक ऑफर कहते हैं। और पब्लिक कंपनीज जो होती है वही
कंपनीज अपनी सिक्योरिटीज को लिस्ट करवा सकती है नेशनल स्टॉक एक्सचेंज पे बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज पे जो रिकॉग्नाइज्ड स्टॉक
एक्सचेंजेस हैं। जब कंपनीज़ पब्लिक कंपनीज़ एक लिस्टिंग एग्रीमेंट करती है स्टॉक एक्सचेंजेस के साथ में तो उन्हें लिस्टेड
कंपनीज़ बोला जाता है। बराबर है। रेस्ट्रिक्शन और प्रोहिबिशन दोनों अलग-अलग शब्द है। आप इस बात का ध्यान रखिएगा।
प्राइवेट कंपनी में ये तीन रेस्ट्रिकशंस हैं और चौथा रेस्ट्रिक्शन यहां पर डिपॉजिट का है एज सिंपल एज दैट बराबर है। तो
डेफिनेशन कुछ इस तरीके से निकल के आती है। डबल पी आरओ लिमिटेड एक कंपनी को प्राइवेट लिमिटेड हम तभी कहेंगे जब ये तीनों चीजें
फुलफिल होगी। हां, ओपीसी और स्मॉल कंपनी भी प्राइवेट कंपनी है। प्राइवेट कंपनी में मिनिमम दो मेंबर्स होते हैं। पर ओपीसी में
एक ही मेंबर होता है। राइट टू ट्रांसफर को आर्टिकल ऑफ एसोसिएशन रेस्ट्रिक्ट करके रखता है। और हां, 200 मेंबर मैक्सिमम हो
सकते हैं। तो हम 200 मेंबर की काउंटिंग यहां पर देखेंगे। बराबर है और 200 मेंबर के अंदर कौन-कौन आता है ये भी हम यहां पर
समझने की कोशिश करेंगे। अब मेरी बात समझना। अगर आपको प्राइवेट कंपनी की डेफिनेशन समझ में आ गई है तो आप बोलोगे
यार पब्लिक कंपनी तो बहुत ही चिंदी सी बात हो गई। है ना? क्योंकि प्राइवेट कंपनी अगर आपको समझ में आ गया तो पब्लिक कंपनी बहुत
ही चिंदी सी बात है। अच्छा लेकिन मैं थोड़ा सा और ऑपरेशन करना चाहूंगा। थोड़ा सा और ऑपरेशन करना चाहूंगा। है ना? मुझे
एक बात बताओ प्राइवेट कंपनी में आपने क्या बोला? मैक्सिमम 200 मेंबर्स होते हैं। है ना? क्या बोला आपने? मैक्सिमम 200 मेंबर्स
होते हैं। मेरा कहना है अगर प्राइवेट कंपनी 200 मेंबर्स क्रॉस कर दे तो देखो पहली बात तो आप कर नहीं पाओगे। अगर आपने
कर दिया अगर आपने कर दिया तो देखो आपके पास में ना दो ऑप्शंस हैं। देखो आपके पास में दो ऑप्शन है। प्राइवेट कंपनी में
मैक्सिमम 200 है। अगर 200 से ज्यादा हो गए तो आप एक काम करो 200 को कम कर दो। आप रिड्यूस कर दो। है ना? तो हम आपको
प्राइवेट का प्राइवेट रहने देंगे। अगर आपने 200 से कम नहीं किया तो भाई साहब आप 200 से ज्यादा हो तो हम आपको एक और ऑप्शन
देंगे कि चल भाई तू एक काम कर तू पब्लिक कंपनी के अंदर कन्वर्ट हो जा। चल इतना सा कर। सर हम तो ये भी नहीं करेंगे ये भी
नहीं करेंगे। तो भाई साहब फिर आपको डीम्ड पब्लिक कंपनी माना जाता है। डीम्ड पब्लिक कंपनी शब्द ऐसा है जहां पर अच्छे-अच्छे
लोग परेशान हो जाते हैं। आप आप सोचोगे वाह यार सर ये तो अच्छा हो गया ना। हम तो प्राइवेट कंपनी थे। हमने 200 से ज्यादा
मेंबर कर लिए। हम तो ऑटोमेटिकली डीम्ड कंपनी बन गए। इसका मतलब ये हुआ अब हम भी पब्लिक से पैसा ले पाएंगे। अरे लड़के ऐसा
नहीं है। डीम्ड पब्लिक कंपनी बनाकर हम तुम्हारी हालत खराब कर रहे हैं। इफ डज इट मीन दैट दिस प्राइवेट कंपनी कैन इनवाइट
पब्लिक टू सब्सक्राइब दी सिक्योरिटीज। द आंसर इज़ नो बच्चा। द आंसर इज़ नो। नहीं नहीं नहीं नहीं नहीं नहीं। हम पब्लिक
कंपनी बनाकर आपको प्रोत्साहन नहीं कर रहे हैं। हम आपकी वाहवाही नहीं कर रहे हैं। ये डीम्ड कंपनी बेनिफिट के लिए नहीं माना
जाता है। इसको माना जाता है कंप्लायंसेस के लिए और रिपोर्टिंग के लिए। हम आपकी 12 बजाएंगे। आप 200 से ज्यादा मेंबर हो गए।
आपको कन्वर्ट करने के लिए बोला आपने नहीं करा। आपको कम करने के लिए बोला आपने नहीं करा। अब पब्लिक कंपनी पे जो जो
कंप्लायंसेस लगते हैं। पब्लिक कंपनी पे जो पेनल्टीज लग सकती है। कम पब्लिक कंपनी के ऊपर जो यहां पर रिपोर्टिंग का फॉर्मेट है
वो आपको भी फॉलो करना पड़ेगा। सिंपल सी बात है। तो आपने प्राइवेट कंपनी की डेफिनेशन पढ़ी। उसके साथ में अब आप एक काम
करो। यहां पर ना एक अच्छी सी शीट देखो। देखो आपने क्या देखा? मैं आपको बता देता हूं। आपने ये वाली शीट देखी। करेक्ट है?
ये वाली शीट देखी आप लोगों ने। है ना? प्राइवेट कंपनी की डेफिनेशन देखी। उसके सम अदर इंपॉर्टेंट पॉइंट्स फॉर प्राइवेट
कंपनी। पहली बात। प्राइवेट कंपनी देखो मैंने डिपॉजिट लेने के लिए मना किया है आउटसाइडर से। पब्लिक से पैसा नहीं ले सकते
हो आप। प्राइवेट कंपनी हो। आउटसाइडर से नहीं ले सकते हो, मेंबर से ले सकते हो। पब्लिक कंपनी की जिससे इच्छा हो वो ले
सकती है। चाहे डिपॉजिट्स हो, चाहे नॉर्मल तरीके से पैसा हो। ट्रांसफर ऑफ सिक्योरिटीज के बारे में लिखा रहता है
आर्टिकल ऑफ एसोसिएशन में रेस्ट्रिक्टेड है मेंबर से और उनके रिलेटिव के अंदर ही अंदर आप कर सकते हो। मेथड्स ऑफ इशू क्या हो गया
बेटा? क्या प्राइवेट और पब्लिक के पास में सारे मेथड्स हैं। सारे मेथड्स हैं। लेकिन प्राइवेट के पास में एक मेथड नहीं है।
प्राइवेट कंपनी पब्लिक ऑफर नहीं कर सकती। बस बाकी सब कर सकती है। प्राइवेट प्लेसमेंट राइट बोनस और एंप्लाइज से भी
पैसा ले सकती है। कोई दिक्कत की बात नहीं है। देखो लोग ऐसे मिसकंसेप्शन में रहते हैं कि प्राइवेट प्लेसमेंट में प्राइवेट
शब्द आया है तो सिर्फ प्राइवेट कंपनी ही प्राइवेट प्लेसमेंट कर सकती है। ऐसा नहीं है। ऐसा नहीं है। पब्लिक कंपनी को
सिलेक्टेड ग्रुप ऑफ पीपल से पैसा लेना हो ले सकती है। उसको पब्लिक एट लार्ज से लेना है ले सकती है। पब्लिक कंपनी के पास में
दोनों ऑप्शन अवेलेबल है। पब्लिक ऑफर भी है। प्राइवेट प्लेसमेंट भी है, राइट बोनस भी है और अपने एंप्लई से भी आप पैसा ले
सकते हो। ठीक है? ये सारे रेस्ट्रिक्शन बेटा आर्टिकल के अंदर लिखे जाते हैं। और अगर 200 मेंबर्स की बात करें प्राइवेट
कंपनी अगर 200 मेंबर को एक्सीड कर लेती है, रिड्यूस नहीं करती है, कन्वर्ट नहीं करती है तो भाई साहब डीम्ड पब्लिक कंपनी
उसको माना जाता है फॉर द रिपोर्टिंग फॉर दी कंप्लायंसेस एंड नॉट फॉर दी बेनिफिट्स। मतलब बेनिफिट के साथ में मैंने लिख रखा है
हम आपको पब्लिक ऑफर नहीं मानेंगे। अब मैं आप लोगों को एक बात बता देता हूं। आप लोग परेशान मत होना। बहुत देखो यार है तो वैसे
मैं आपको बताऊं है तो वैसे ये एग्जाम ओरिएंटेड बैच बट मैं ना एक भी पॉइंट यहां पर छोड़ना नहीं चाहूंगा। मैं थोड़ा
डिटेलिंग में जाना चाहूंगा। मैंने एक्ट खोला है। एक्ट के अंदर मैं डेफिनेशंस में गया हूं। मैं एक काम करता हूं। मैं
डेफिनेशन के अंदर ना मैं आपको प्राइवेट कंपनी की डेफिनेशन खोल के दिखाता हूं। यहां पर जरा ध्यान से देखना।
[गला साफ़ करने की आवाज़] देखो इधर आ जाओ। अपन नीचे आ गए ज्यादा। हां। ये देखो आप। यह देखो आप 68 क्लॉज़ नंबर 68 क्या बोल रहा
है क्लॉज़ नंबर 68 प्राइवेट कंपनी मींस अ कंपनी हैविंग अ मिनिमम पेड अप शेयर कैपिटल एज मे बी प्रिस्राइब्ड
वापस से आ जाओ आप एक काम करो पब्लिक कंपनी के अंदर भी आ जाओ 71 के अंदर देखो 71 के अंदर पब्लिक कंपनी मींस अ कंपनी ऑब्वियसली
व्हिच इज़ नॉट अ प्राइवेट कंपनी पब्लिक कंपनी की डेफिनेशन बनाई हुई है कि जो प्राइवेट नहीं है वो पब्लिक है लेकिन आगे
सुन सुनो क्या लिखा हुआ है? एंड हैज़ अ मिनिमम पेड अप शेयर कैपिटल एज मे बी प्रिस्राइब्ड। मुझे एक बात बताओ सर मतलब
क्या कंडीशन है क्या मिनिमम पेड अप शेयर कैपिटल की? नहीं राजा ना। मेरी बात समझ लो। मैं इस पे आपको एक बात बता देता हूं।
[गला साफ़ करने की आवाज़] जब भी ये शब्द आता है ना एज मे बी प्रिस्क्राइब्ड। आपको रूल्स चेक करने पड़ते
हैं और रूल्स चेक करने के लिए आपको देखना पड़ता है रूल्स में कुछ लिखेंगे क्या? सर ये रूल्स कहां से आ गया? देखो भैया! मेरी
बात सुनो। अगर फाउंडेशन के बच्चे हो तो आईआरएफ पढ़ के आए हो। आईआरएफ पढ़ के आए हो तो आपको पता है एक्ट अलग होता है, रूल्स
अलग होते हैं। अब आप बोलोगे सर आप बार-बार एमसीए की वेबसाइट पे आ जाते हो। अरे बेटा मेरी बात सुनना। ये एक्ट एंड रूल्स लिखे
हुए हैं। देख बेटा एक्ट बनने के लिए ना पूरा तरीका वो फॉलो होता है। पहले ड्राफ्ट बनकर जाता है बिल बनकर। राज्यसभा लोकसभा
में मेजॉरिटी के साथ में पासिंग होती है। उसके बाद में मेजॉरिटी वोट्स मिलते हैं। प्रेसिडेंट की सिग्नेचर होती है। ऑफिशियल
गैजेट में प्रिंट होता है। भाई साहब ये पूरा एक्ट बनने का तरीका है। रूल्स बनने के लिए इतना तामझाम करने की जरूरत नहीं
है। मैं आपको एक चीज बता देता हूं। अगर आप लोगों को समझना ही है। रूल्स बेटा जो होते हैं ना रूल्स ये बताते हैं काम कैसे होगा?
और एक्ट ये बताता है काम क्या है? एक्ट बोलता है कि इसको पनिशमेंट देना है। रूल्स बोलते हैं पनिशमेंट कौन देगा? कितने टाइम
में देगा? कितनी पेनल्टी लगाएगा? आप इस बात को समझ लो। अब रूल्स जो होते हैं डायरेक्टली सेंट्रल गवर्नमेंट यहां पर बना
सकती है, ऑल्टर कर सकती है, चेंज कर सकती है। उसको पूरा पार्लियामेंट का रूट फॉलो करने की जरूरत नहीं होती है। अगर आप रूल्स
में जाओगे राजा [गला साफ़ करने की आवाज़] आप कंपनीज़ एक्ट चूज़ करोगे। आप यहां से चैप्टर चूज़ करोगे। लेट्स से प्रीिलिमरी
चैप्टर मैं चूज़ करूंगा। है ना? मैं डेफिनेशन के कुछ रूल्स चूज़ करना चाहूंगा। तो देखो इतने सारे रूल्स यहां पर निकल के
आते हैं। ये सारे रूल्स हैं बेटा। आप कोई भी चैप्टर उठा लो। जैसे आप चैप्टर उठाओगे शेयर कैपिटल एंड डिबेंचर्स जो आपका चौथा
चैप्टर है। चौथा चैप्टर का जो रूल है वो उसी के नाम से होता है। 2014 के रूल्स हैं। द कंपनी ब्रैकेट में शेयर कैपिटल एंड
डिबेंचर्स रूल्स 2014 है ना? ऐसे आप कोई भी चैप्टर में चले जाओ। आप चैप्टर नंबर सेवन में चले जाओ।
[गला साफ़ करने की आवाज़] मैनेजमेंट एंड एडमिनिस्ट्रेशन। मैनेजमेंट एडमिनिस्ट्रेशन में देखो यहां पर क्या लिखा हुआ है?
चैप्टर नंबर सेवन का रूल्स है द कंपनीज़ मैनेजमेंट एंड एडमिनिस्ट्रेशन रूल्स 2014। तो भाई साहब यह सारे रूल्स यहां पर होते
हैं। अब मुझे एक बात बताओ इन्होंने डेफिनेशन में लिखा है एज़ मे बी प्रिस्क्राइब्ड बराबर है एज़ मे बी
प्रिस्क्राइब्ड। रूल्स चेक करे हमने। कुछ भी प्रिस्राइब नहीं किया गया है। तो क्या कोई भी मिनिमम पेड अप शेयर कैपिटल की
रिक्वायरमेंट है। कहीं पर भी नहीं है बेटा। ना ओपीसी में ना प्राइवेट में ना पब्लिक में कहीं पर भी नहीं है। ठीक है?
आगे चलते हैं। पब्लिक कंपनी की डेफिनेशन मैंने आपको एक्सप्लेन कर दी। 71 क्लॉज़ के अंदर मैंने आपको एक्सप्लेन कर दिया ना।
देखो मुझे एक बात बताओ। जो प्राइवेट नहीं है वो पब्लिक है। अरे सर क्या डेफिनेशन बनाई है? हां देखो प्राइवेट के अंदर ही
रेस्ट्रिक्शन होते हैं। अगर ये रेस्ट्रिक्शन यहां पर नहीं है मतलब ना तो डबल पी है ना आर है ना लिमिटेड है। हम
पब्लिक से पैसा ले सकते हैं। हम पब्लिक से जितना पैसा लेना हो पप्पू को पप्पू लिमिटेड को ₹100 करोड़ पब्लिक से लेना है
आप लो कोई दिक्कत की बात नहीं है। हम आपको अलव कर देंगे। आपके ऊपर कोई भी रेस्ट्रिक्शन नहीं है। बराबर है। लेकिन
मेरी बात सुनना। ना आपके ऊपर रेस्ट्रिक्शन है ना आपके ऊपर पब्लिक के पैसा लेने का रेस्ट्रिक्शन है ना आपके ऊपर हमने नंबर ऑफ
मेंबर्स का रेस्ट्रिक्शन लगाया है भाई साहब आप ना मिनिमम सेवन मेंबर्स चाहिए और मैक्सिमम की कोई लिमिट नहीं है पब्लिक
कंपनी के अंदर लेकिन पब्लिक कंपनी की जो डेफिनेशन है ना बेटा वो दो पार्ट्स के अंदर डिवाइडेड है
कितने पार्ट्स के अंदर दो पार्ट्स के अंदर डिवाइडेड है सुनो पहला पार्ट तो मैंने आपको ये बता दिया हम दूसरा पार्ट समझना
पप्पू LED एक कंपनी है जो कि पब्लिक है। उसने आम जनता से ₹100 करोड़ लिए। फिर उसने क्या करा? इसमें से 70 करोड़ इन्वेस्ट कर
दिए और एक दूसरी कंपनी को अपनी सब्सिडरी कंपनी बना ली। जिसका नाम रखा उसने खड्डा प्राइवेट लिमिटेड। अब इसकी पेड अप शेयर
कैपिटल ₹80 करोड़ थी। जिसमें से 70 करोड़ पप्पू लिमिटेड ने लगा रखे हैं। आपने होल्डिंग सब्सिडरी अभी तक नहीं पढ़ा है।
होल्डिंग कंपनी वो होती है जो बड़ी कंपनी होती है। सब्सिडरी कंपनी वो होती है जो छोटी कंपनी होती है। लेबैन की लैंग्वेज
में। होल्डिंग कंपनी वो होती है जो सब्सिडरी कंपनी के अंदर पैसा लगाती है। मोर देन 1 हाफ 50% से ज्यादा। अब ये कंपनी
के अंदर पेड अप शेयर कैपिटल 80 करोड़ है। इसमें से 70 करोड़ तो इसने लगाया है। तो ये बन गई सब्सिडरी और ये बन गई होल्डिंग।
लेकिन इनका नेचर देखो ना जो सब्सिडरी कंपनी है वो तो प्राइवेट है और जो होल्डिंग कंपनी है वो तो पब्लिक है। अब वो
बोलना क्या चाह रहे हैं सेकंड पार्ट ऑफ द डेफिनेशन में? वो ये बोलना चाह रहे हैं कि अगर कोई पब्लिक कंपनी है जो कि होल्डिंग
कंपनी है और अगर उसकी कोई सब्सिडरी है जो कि प्राइवेट कंपनी है तो ऐसी सब्सिडरी कंपनी को भी हम डीम्ड पब्लिक कंपनी मानते
हैं। इसके पीछे कारण यह है कि अगर हम ऐसी प्राइवेट कंपनी को अगर हम डीम्ड पब्लिक कंपनी ना माने तो भाई साहब इनडायरेक्टली
पब्लिक का सारा पैसा यहां पर आ चुका है। मतलब इस शानी कंपनी ने खुद को तो पब्लिक रखा लेकिन अपनी सब्सिडरी को प्राइवेट रखा
है ना अपनी सब्सिडरी को प्राइवेट रखा और सारा पब्लिक का पैसा यहां पर ले आए। इसीलिए उन्होंने दो पार्ट्स के अंदर
डेफिनेशन को यहां पर डिवाइड करा किसके अंदर बेटा? पब्लिक कंपनी के अंदर। आप देखो सेकंड पार्ट में उन्होंने बोला कि क्या ये
देखो [गला साफ़ करने की आवाज़] आप कि एक प्राइवेट कंपनी है। कलर चेंज कर लेता हूं। एक प्राइवेट कंपनी है। उसकी जो सब्सिडरी
है सॉरी आई एम सॉरी एक प्राइवेट कंपनी है वो एक होल्डिंग कंपनी की सब्सिडरी है और वो
होल्डिंग कंपनी कौन है? पब्लिक कंपनी है। तो ऐसी प्राइवेट कंपनी को भी डीम्ड पब्लिक कंपनी माना जाता है। आपको बात समझ में आ
गई गाइस? आपको बात समझ में आ गई एवरीबॉडी? देखो इसको कुछ इस तरीके से देखना आप लोग। अ पब्लिक कंपनी इज़ अ कंपनी व्हिच इज़ नॉट अ
प्राइवेट कंपनी। पॉइंट नंबर वन व्हिच मींस ना तो डबल पी ना तो आर ना लिमिटेड। कुछ इंपॉर्टेंट पॉइंट्स ये मिनिमम सेवन और
मैक्सिमम की कोई लिमिट नहीं है। डीम्ड पब्लिक कंपनी का यहां पर [गला साफ़ करने की आवाज़] पार्ट डाला गया
है। ये आपका डेफिनेशन का पहला पार्ट है। ये आपके डेफिनेशन का दूसरा पार्ट है। दूसरा पार्ट क्या बोलता है कि अगर कोई
प्राइवेट कंपनी है जो कि सब्सिडरी है किसी पब्लिक कंपनी की तो भाई साहब हम उसको डीम्ड पब्लिक कंपनी मानेंगे। भले ही उसके
आर्टिकल्स में रेस्ट्रिक्शन लगे हुए हो। आप बोल सकते हो यार मैं तो खड्डा प्राइवेट लिमिटेड हूं। मेरे आर्टिकल्स के अंदर अभी
भी रेस्ट्रिक्शन है तो आप मुझे नहीं बोल सकते कि मैं प्राइवेट कंपनी की जगह पब्लिक कंपनी हूं। नहीं आपको बोल सकते हैं
क्योंकि आपके जो पिताजी है वो पब्लिक कंपनी है। है ना? और आपके पिताजी की जो परछाई है वो आपके अंदर आएगी। आपको बात समझ
में आ गई? ठीक है? [गला साफ़ करने की आवाज़] एक एक्स्ट्रा बात मैं बता देता हूं आप
लोगों को। देखो भाई साहब डायरेक्टर्स की चर्चा होती है। एक्स्ट्रा नॉलेज बता रहा हूं। डायरेक्टर्स के केस में प्राइवेट
कंपनी में मिनिमम दो डायरेक्टर्स हैं। मैक्सिमम 15 डायरेक्टर्स हो सकते हैं। पब्लिक कंपनी में भी पब्लिक कंपनी में
मिनिमम तीन डायरेक्टर्स चाहिए। यहां पर दो है, यहां पर तीन है। लेकिन मैक्सिमम दोनों में 15 ही हो सकते हैं। पर कंपनीज़ एक्ट
आपको आगे सिखाता है जब जैसे-जैसे आप फाइनल की तरफ जाओगे कि अगर आप 15 के बिय्ड भी जाना चाहते हो तो आप स्पेशल रेोल्यूशन पास
कर सकते हो। सर ये स्पेशल रेोल्यूशन क्या होता है? हम मीटिंग बुलाते हैं। मीटिंग में मेंबर्स को बुलाते हैं। उनको बोलते
हैं कि आप वोटिंग करो। देखो टोटल कंपनी में 100 मेंबर हैं। आए 80 मेंबर। अब 80 में से जो वोट्स आए हैं फेवर में वो तीन
गुना होना चाहिए। थ्री टाइम्स होना चाहिए। देन द वोट्स पुट इन अगेंस्ट। अगर 20 लोगों ने बोला है कि हमें 15 से ज्यादा
डायरेक्टर्स नहीं चाहिए। बराबर है? तो मुझे इसका तीन गुना यानी कि 60 60 लोगों की मुझे यहां पर फेवर में वोट चाहिए। तभी
जाके स्पेशल रेोल्यूशन पास होगा और जब स्पेशल रेोल्यूशन पास होता है आप उसको थ्री टाइम्स कह दो या 75% कह दो एक ही बात
है बोलने के तरीके अलग-अलग है। तो ये आपकी प्राइवेट और पब्लिक कंपनी यहां पर खत्म होती है। अब हम लोग आगे चलते हैं।
[गला साफ़ करने की आवाज़] अब हम लोग आगे चलते हैं। मेरी बात समझना। नाउ वी शैल काउंट 200 मेंबर्स को कैसे
काउंट किया जाता है? ये आपका थोड़ा सा फाउंडेशन का नॉलेज भी है जिसको हम लोग यहां पर समझेंगे। सबसे पहले यहां पर आपको
ना तीन बातें ध्यान रखनी है। शुरुआत के दो पॉइंट्स में बेटा एग्जिस्टिंग एंप्लाइजस और फॉर्मर एंप्लाइजस की बात की गई है। मैं
2 मिनट के बाद में इसके ऊपर आऊंगा। लेकिन मैं सबसे पहले जॉइंट होल्डर्स वाले पॉइंट पे आऊंगा। जब भी आप 200 मेंबर्स को काउंट
करते हो तो 200 मेंबर्स में अगर कोई जॉइंट मेंबर है जैसे आपके सीजे सर और ए के मैम ने मिलकर कुछ शेयर्स को होल्ड कर रखा है।
जॉइंटली हम लोगों ने 1000 शेयर्स को होल्ड कर रखा है। बेटा हम लोगों को दो जिस्म नहीं एक जान माना जाएगा। हमको दो जिस्म
नहीं एक जान माना जाएगा। जॉइंट होल्डर्स को दे आर काउंटेड एज वन ओनली। एंड एक साथ कितने जॉइंट होल्डर्स हो सकते हैं? तीन।
तो जैसे मैं हूं, मेरे पापा है और मेरी वाइफ है। बस हम तीन ही मिलकर शेयर्स होल्ड कर सकते हैं। तीन से ज्यादा होल्ड नहीं कर
सकते हैं। नाउ द थिंग इज कि प्राइवेट कंपनी को अगर पैसे की जरूरत पड़ती है तो सर एक बात बताओ प्राइवेट कंपनी 200 मेंबर
से ले सकती है। द आंसर इज़ यस। सर लेकिन उसके 500 एंप्लाइजज़ हैं। क्या वो अपने एम्प्लाइज से पैसा ले सकती है? द आंसर इज़
यस। देखो 500 में से उसने 198 एंप्लाइज से पैसा लिया है। क्या हम उनको मेंबर्स की काउंटिंग में काउंट करेंगे? द आंसर इज़ नो।
हम नहीं करेंगे। देखो जो दो देखो आउट ऑफ 200 अगर 198 एंप्लाइजज़ हैं हम उनको काउंट नहीं करेंगे। मुझे एंप्लाइजज़ की 200
काउंटिंग में ये मेरा बना हुआ शब्द है बेटा। मुझे प्योर मेंबर्स चाहिए। प्योर मेंबर्स। प्योर मेंबर्स का मतलब ये है
आपके चरित्र पे कोई लांछन नहीं होना चाहिए एंप्लॉयमेंट का। देखो अगर आप एकिस्टिंग एंप्लई हो और आप मेंबर भी हो। देखो
सीक्वेंस समझना। आप पहले एंप्लई बने और फिर आप मेंबर बने। तो आज आप करंट एंप्लई हो तो हम आपको 200 में काउंट बिल्कुल भी
नहीं करेंगे। देखो एग्जांपल है कि जैसे पप्पू है ना अ लेट्स से पप्पू यहां पर अ चलो हां ऐसे समझते हैं। हां कि पप्पू यहां
पर फर्स्ट अ को जनवरी को 2024 को जनवरी 2024 को उसके पास में शेयर्स हैं कंपनी के। कंपनी के
शेयर्स हैं। मेंबर है वो। जनवरी 2024 में उसने कंपनी के शेयर्स खरीद लिए टाटा कंपनी के। मुझे नहीं पता था कि मैं इंटरव्यू
दूंगा मेरा जॉब भी लग जाएगा। मैंने इंटरव्यू दिया। मेरा जॉब लग गया। मेरा जॉब कब लगा? सेप्टेंबर के अंदर। मुझे एक बात
बताओ क्या मैं पहले मेंबर बना उसके बाद में एंप्लई बना? द आंसर इज़ यस। हमारी कंडीशन क्या है? आप पहले एंप्लई बनोगे और
फिर अगर आप मेंबर बनोगे तो हम आपको एक्सक्लूड करेंगे। लेकिन इस वाले केस में आपको ऐसा नहीं लगता। कि जनवरी में जब
पप्पू मेंबर बना कंपनी का वो प्योर मेंबर था। वो आज करंट एंप्लई है। मैं मानता हूं वो करंट एंप्लई है। लेकिन भैया मेरे बात
सुन वो प्योर मेंबर था। तो हम उसको एक्सक्लूड नहीं करेंगे। हम उसको इंक्लूड करेंगे 200 की काउंटिंग में क्योंकि वो
प्योर मेंबर है। है ना? मैं थोड़ा और ऑपरेशन करता हूं। चलो अब ऐसा करो। मैं 2020 के अंदर Tata कंपनी के अंदर एंप्लई
बना। फिर मैंने जॉब छोड़ दिया। मैंने जॉब छोड़ दिया। फिर मैंने बाद में वापस से कंपनी के शेयर्स खरीदे। मुझे एक
बात बताओ 2022 में जब मैं मेंबर बना क्या मैं करंट एंप्लई हूं? नहीं। मैं कौन हूं पता है? अब मैं एक्स या फिर फॉर्मर एंप्लई
हूं। जब मैं एक्स या फिर फॉर्मर एंप्लई होता हूं ना बेटा ये आपका दूसरा पॉइंट है। ये देखो आप। यह आपका दूसरा पॉइंट है।
[गला साफ़ करने की आवाज़] फॉर्मर एंप्लई एक्स एंप्लई एक्स एंप्लई एक्स एंप्लई जो कि मेंबर बना
जो कि मेंबर बना कब बना बेटा? जब वो एंप्लॉयमेंट में था और आज तक वो शेयर्स को होल्ड करता है। भले ही एंप्लॉयमेंट खत्म
हो चुकी हो। टोटल तीन कंडीशंस बेटा यहां पर आती है। अपने वाले एग्जांपल में यहां पर देखना आप लोग, है ना? अपने वाले
एग्जांपल में देखना बेटा आप लोग कि जब यहां पर मैं एंप्लई बना एंप्लॉयमेंट मेरा यहां पर खत्म हुआ।
क्या मैं मेंबर बना जब मैं एंप्लॉयमेंट में था द आंसर इज़ नो। देखो मेरी बात समझना। आप एक्स एंप्लई तो हो। कंडीशन नंबर
वन तो फुलफिल हो रही है। आप आज तक शेयर्स को होल्ड करते हो। कंडीशन नंबर थ्री भी फुलफिल हो रही है लेकिन कंडीशन नंबर टू
फुलफिल नहीं हो रही है क्योंकि आप ना बेटा मेंबर जब थे सॉरी जब आप एंप्लॉयमेंट में थे तब आप मेंबर नहीं बने। अगर आप यहां पर
बनते ना इस पीरियड के बीच में तो मैं आपको एक्सक्लूड कर देता। लेकिन आप जब 2022 में मेंबर बने ना बेटा आप मेरे लिए प्योर
मेंबर हो इसलिए मैं आपको इंक्लूड करूंगा। अब मैं आपको इसका ना एक और एक और फाइनल एग्जांपल बताता हूं। थोड़ा सा और समझना।
एंप्लॉयमेंट चालू हुई 2020 के अंदर। एंप्लॉयमेंट खत्म हुई 2021 के अंदर। इसके बीच में मैं मेंबर बना मैंने सेल कर दिए।
मेंबर बना मैंने सेल कर दिए। बेटा ऐसे मैं कितनी बार भी कर सकता हूं। ये मेरी मेंबरशिप नंबर वन है। मैंने एंप्लॉयमेंट
छोड़ दी। एंप्लॉयमेंट के बाद में मैं इंटरेस्टेड हूं सेकंड मेंबरशिप के अंदर। फिर जब आप बाद में आप वापस मेंबर बने
दिसंबर 2021 के अंदर तब आप प्योर मेंबर थे। आज प्रेजेंट में आप मेरे एम्प्लई नहीं हो। आप एक्स एम्प्लई हो। लेकिन क्या आप
मेंबर बने? व्हाई यू वर इन द एम्प्लॉयमेंट? द आंसर इज़ नो। मैं तो एक प्योर मेंबर बना हूं। आज तक होल्ड करता
हूं? हां। तो वापस से सेकंड कंडीशन फुलफिल नहीं हो रही है। इसलिए मैं एक्सक्लूड नहीं करूंगा। मैं इनको इंक्लूड करूंगा।
आपको बात समझ में आ गई? ये सब चीजें मैंने कैसे लिख रखी है, मैं आप लोगों को बता देता हूं। इधर आ जाओ फटाफट। ये देखो।
काउंटिंग ऑफ़ 200 मेंबर्स में जो प्रेजेंट या एग्ज़िस्टिंग एंप्लाइजज़ हैं। हु वर मेंबर्स ऑफ़ द हु आर मेंबर्स ऑफ द कंपनी एज़
वेल। देखो पहले एंप्लई लिखा है। फिर मैंने मेंबर लिखा है कि जो एंप्लई है और मेंबर भी है उनको हम एक्सक्लूड करते हैं। उनको
हम एक्सक्लूड करते हैं। ये देखो डू नॉट इंक्लूड। और दूसरा मैं फॉर्मर एंप्लई हूं। मैं पुराना एंप्लई हूं। मैं एंप्लॉयमेंट
में रहते-रहते मेंबर बना हूं। इंपॉर्टेंट बात है। सबसे इंपॉर्टेंट बात है। और मैं आज तक शेयर्स होल्ड कर रहा हूं। तो मुझे
यहां पर भी इंक्लूड नहीं करेंगे। ये मैंने एग्जांपल यहां पर बना रखा है। लैंग्वेज में अगर आप लोगों को लिखना है मेरी
फाउंडेशन की शीट है बेटा ये। जॉइंट मेंबर के लिए मैंने पॉइंट बना रखा है। और मैंने एक्स अ एग्जिस्टिंग एंप्लई के लिए और
फॉर्मर एंप्लई के लिए मैंने पॉइंट बना रखा है। और इसी के जितने एग्जांपल्स मैंने आप लोगों को यहां पर दिए हैं वो यहां पर है।
ये एग्जांपल नंबर वन, ये एग्जांपल नंबर टू, ये एग्जांपल नंबर थ्री। [गला साफ़ करने की आवाज़]
आप इन तीनों एग्जांपल से यहां पर समझ सकते हो। बहुत सिंपल तरीके से मैंने आप लोगों को यहां पर एक्सप्लेन किया है। सो ये 200
की काउंटिंग की बात यहां पर आती है। है ना? मैंने कुछ यहां पर एमसीक्यूस हैं। है ना? वो मैंने यहां पर रख रखे हैं। जैसे
मैं आप लोगों को एग्जांपल दे देता हूं। है ना? ये देखो आप। एक कंपनी है। प्राइवेट कंपनी है। 210 मेंबर हैं जिसके अंदर 11
मेंबर है। हु हैव बीन एंप्लाइजज़ ऑफ द कंपनी हैव बीन यानी पास्ट की बात कर रहे हैं। एंड एक्वायर्ड शेयर्स व्हाइल इन द
एंप्लॉयमेंट। बहुत बढ़िया। तो क्या एक्स एंप्लई है। यस। पहली कंडीशन फुलफिल हो गई। जब एंप्लॉयमेंट में थे तो तब मेंबर बने
हैं। द आंसर इज़ यस। है ना? तो आप बताओ क्या यहां पर व्हिच ऑफ द फॉलोइंग स्टेटमेंट इज करेक्ट? 210 में से हम लोग
11 को क्या करेंगे? एक्सक्लूड करेंगे। कंडीशन फुलफिल हो रही है। राइट? तो 199 मेंबर्स हो गए। तो प्राइवेट कंपनी को
कन्वर्ट होना पड़ेगा क्या? नहीं। प्राइवेट कंपनी को फोरफीट करना पड़ेगा क्या? नहीं। फॉर द पर्पस ऑफ रिकॉर्डिंग द लिमिट ऑफ़
200। 200 की लिमिट को निकालने के लिए शेयर्स ऑफ एक्स एंप्लाइजज़ ऑफ द कंपनी आर एक्सक्लूडेड। यह हमारा सही ऑप्शन है। ऐसे
बहुत सारे क्वेश्चंस हैं जो हम लोग ना बचपन से करते हुए आ रहे हैं। जैसे ये फ्लोरा एंड फना वाला क्वेश्चन हम लोग करते
हैं कि ये पब्लिक कंपनी है। 230 मेंबर हैं। ये कन्वर्ट होना चाहती है प्राइवेट में। क्वेश्चन आपसे पूछता है रिडक्शन करें
कि नहीं करें। अब डायरेक्टर और रिलेटिव है। देखो रिलेटिव भी साथ में लिखा हुआ है ना इसलिए इनको एंप्लाइजज़ नहीं मानते हैं।
तो भाई साहब इनको इंक्लूड करो। एंप्लई लिखा है मतलब एकिस्टिंग एंप्लई है। छोड़ दो। एक्स एंप्लई है जिनको शेयर्स
मिले थे जब वो एंप्लाइजज़ थे हटा दो। पांच कपल हैं। हस्बैंड वाइफ 10 लोग हैं। पांच ही मानेंगे और अदर्स 145 हैं। तो 145
जॉइंट के पांच और 50 और 50 ये आपका कितना हो गया बेटा? है ना? ये आपका हो गया 145 + 550 150 एंड
एंड 50 ये आपका 200 हो गया। तो एग्जैक्ट 200 हो रहा है। तो आपको रिडक्शन की यहां पर बिल्कुल भी जरूरत नहीं है।
क्लियर है? डन है गाइस समझ में आ गया आप सभी लोगों को है ना चलो बहुत ही सुंदर तो ये 200 का
टॉपिक हमारा यहां पर कंप्लीट होता है अब आ जाओ अगला टॉपिक अपना आता है स्मॉल कंपनी का ठीक है पब्लिक हो गया प्राइवेट हो गया
अब आता है हमारा स्मॉल कंपनी का स्मॉल कंपनी की डेफिनेशन है बेटा क्लॉज़ नंबर 85 के अंदर है एक बात को समझ लेना स्मॉल
कंपनी इज़ अ टाइप ऑफ़ प्राइवेट कंपनी ये हमेशा आपको याद होना चाहिए अब क्या हो गया मैं आप लोगों को बताता हूं देखो जो
डेफिनेशन स्मॉल कंपनी की दे रखी है ना उसमें सबसे पहले ऊपर लिख रखा है अदर दन अ पब्लिक कंपनी।
[नाक से की जाने वाली आवाज़] मतलब एक प्राइवेट कंपनी को ही आप स्मॉल कंपनी का यहां पर दर्जा दे पाओगे और किसी को नहीं
दे पाओगे। अब ये जो डेफिनेशन है ना बेटा 2013 के एक्ट में डली हुई है। कंपनीज़ एक्ट तो तब का ही है। है ना? लेकिन हाल फिलहाल
में क्या हुआ है? फर्स्ट दिसंबर 2025 से अमेंडमेंट आया। ये अमेंडमेंट बताने के पहले मैं आपको
ओरिजिनल डेफिनेशन दिखाने की कोशिश करता हूं। उन्होंने दो कंडीशन डाली। देखो स्मॉल कंपनी क्यों बनाई जा रही है? पहले आप यह
भी समझो। व्हाई? देखो स्मॉल कंपनी और स्मॉल एलएलपी दोनों के अंदर कांसेप्ट है। स्मॉल एलएलपी का भी कांसेप्ट है और स्मॉल
कंपनी का भी कांसेप्ट है। ध्यान से समझना। स्मॉल कंपनी प्राइवेट कंपनी ही है। प्राइवेट कंपनीज़ को बहुत सारे कंप्लायंसेस
होते हैं। तो स्मॉल कंपनीज़ के कंप्लायंसेस को कम कर दिया गया। रिलैक्सेशन डाल दिया गया। कैसे रिलैक्सेशन डाले आपको मालूम है?
थोड़ा नॉलेज के लिए बताता हूं। जैसे ना [गला साफ़ करने की आवाज़] स्मॉल कंपनी को कैश फ्लो स्टेटमेंट बनाने
की जरूरत नहीं है। मतलब देखो स्मॉल बिनेसेस हैं। पेपर वर्क थोड़ा सा कम चाहिए रहता है। तो ये सब तरीके निकाले गए।
पेनल्टीज इनको बहुत सारे केसेस में कम लगती है। बोर्ड मीटिंग का क्राइटेरिया इनका अलग है। है ना? एनुअल रिटर्न एक
रिटर्न है जो साल के एंड में कंपनीज़ को देना पड़ता है। तो स्मॉल कंपनी का एनुअल रिटर्न में भी थोड़ा सा रिलैक्सेशन है।
उनको इतना डिटेल्ड एनुअल रिटर्न देने की जरूरत नहीं पड़ती है। है ना? अब क्राइटेरिया क्या है। मैं आप लोगों को बता
देता हूं। देखो क्राइटेरिया दो है और दोनों क्राइटेरिया आप लोगों को फुलफिल करना है। पहला क्राइटेरिया है पेड अप शेयर
कैपिटल का और दूसरा क्राइटेरिया है टर्नओवर का एस पर योर एस पर योर लेटेस्ट यानी कि प्रीवियस फाइनेंसियल ईयर के
पीएनएल के हिसाब से। उन्होंने बोला [गला साफ़ करने की आवाज़] अगर आपकी पेड अप शेयर कैपिटल 50 लाख को
एक्सीड नहीं करती है मतलब 50 लाख है या उससे कम है एंड आपका टर्नओवर 2 करोड़ या उससे कम है डज़ नॉट एक्सीड 2 सीआर देखो
लैंग्वेज क्या है ध्यान से सुनना डज़ नॉट एक्सीड 50 लैक्स एंड डज़ नॉट एक्सीड टू सीआर मतलब आप इस अमाउंट के अगर ऊपर नहीं
निकलते हो तो हम दोनों कंडीशन अगर आप फुलफिल कर देते हो तो हम आपको स्मॉल कंपनी बोलेंगे। अब आप लोगों को पता है भाई साहब
समय बदलता है, बिजनेस बदल गया, टर्नओवर बदल गए, कंपनीज़ बहुत अंधा कर रही है। इंडिया में पैसा बहुत आ रहा है और लोग
पैसा छाप रहे हैं और बिजनेस का वॉल्यूम बढ़ चुका है। हम ऐसा नहीं बोल सकते 2013 के अंदर आपने 50 लाख की लिमिट डाली, 2
करोड़ की लिमिट डाली। ये पर्याप्त रहेगी। नहीं बेटा इसको बार-बार चेंज किया गया। 2013 में ये जो लिमिट थी बेटा ये लिमिट थी
आपकी 50 है ना? 50 लाख और 2 करोड़ की आपकी लिमिट थी। इस लिमिट को फिर बना दिया गया 2 करोड़ और 20 करोड़। है ना? 2 करोड़ और 20
करोड़। फिर इस लिमिट को बना दिया गया 4 करोड़ और 40 करोड़। एंड यही लिमिट है जो सेप्टेंबर 26 तक अटेम्प्ट तक बच्चे ये पढ़
रहे थे। बिफोर सॉरी मे 2026 के अटेम्प्ट तक बच्चे यही पढ़ रहे थे
कि 4 करोड़ का पेड अप शेयर कैपिटल 40 करोड़ का टर्नओवर। ये दोनों कंडीशन आपको फुलफिल करना है। लेकिन 1 दिसंबर
2025 को ये लिमिट अब पहुंचा दी गई है 10 करोड़ और 100 करोड़ पे। अब आप लोगों को ये जानकर ऐसा लगेगा अगला प्रश्न आएगा क्या सर
ये 10 करोड़ 100 करोड़ को हम और आगे बढ़ा सकते हैं? द आंसर इज़ नो। द आंसर इज़ नो। क्यों? मैं आपको बताता हूं। अगर आपने
डेफिनेशन ध्यान से देखी हो तो इन्होंने बोला है 50 लाख और सच हायर अमाउंट। तो सच हायर अमाउंट बढ़ाया ना हमने। 50 लाख को ₹
करोड़ पे ले गए। 4 करोड़ पे ले गए। पर कब तक ले जा सकते हैं? ऐज़ मे बी प्रिस्राइब्ड व्हिच शैल नॉट बी मोर देन 10 सीआर।
उन्होंने बोल दिया कि अगर आप रूल्स के हिसाब से इसको ऊपर ले जाओगे तो भी आप ₹10 करोड़ तक ही ले जा सकते हो। आप टॉर्नओवर को
₹ करोड़ से ज्यादा अमाउंट तक ले जा सकते हो। लेकिन मैक्सिमम आप 10 के 100 करोड़ तक ही ले जा सकते हो। तो अब क्या हो गया है?
अब हम लोग ना मैक्सिमम कैप पर पहुंच गए। अब इसके बिय्ड अगर कुछ भी करना होगा तो बेटा इन लोगों को एक्ट को अमेंड करना
पड़ेगा। सो वी हैव ऑलरेडी रीच्ड द रीच्ड दी मैक्सिमम अमाउंट 10 करोड़ एंड 100 करोड़। तो हमारी डेफिनेशन अब फाइनली क्या
बन गई है? दैट स्मॉल कंपनी इज अ कंपनी। तो मेरी बात सुनो। ये देखो ये पूरा इस तरीके से इवैल्यूएशन हुआ है। है ना? स्मॉल कंपनी
इज़ अ कंपनी। हां। देखो इधर आ जाओ। मैं आपको स्टार शीट पे ले जाता हूं। अ स्मॉल कंपनी इज़ अ कंपनी अदर देन अ पब्लिक कंपनी।
एग्जैक्टली। जिसका पेड अप शेयर कैपिटल डज़ नॉट एक्सीड 50 लाख और सच हायर अमाउंट एज मे बी प्रिस्क्राइब्ड एंड मतलब सेटिस्फाई
बोथ दी कंडीशन टर्नओवर डज़ नॉट एक्सीड टू सीआर और सच हायर अमाउंट एज मे बी प्री प्रिस्क्राइब्ड प्रिस्राइब्ड इज़ 10 करोड़
100 करोड़ क्या आपको सर 50 लाख और 2 करोड़ लिख कर आना है नहीं अमेंडमेंट रेलेवेंट फॉर सप्टेंबर 26 ऑनवर्ड्स एग्जाम दिसंबर
फर्स्ट 25 को आया है इस लिमिट को 10 करोड़ और 100 करोड़ कर दिया गया है यू कैन डायरेक्टली राइट 10 सीआर एंड 100 सीआर
हियर अगर आपको ये सब नहीं करना हो तो लेकिन कुछ कंपनीज़ ऐसी जिनको स्मॉल कंपनी का स्टेटस कभी भी नहीं मिल सकता।
एक्सेप्शन दीज़ कंपनीज़ कैन नॉट अेल दी स्टेटस ऑफ़ स्मॉल कंपनी। इसका मतलब अगर आप ऐसी कंपनीज़ को देखो तो आप लिमिट चेक करने
के लिए फटाफट चालू मत हो जाना। आप इग्नोर कर देना। और आप बोल देना इनको कभी भी स्टेटस नहीं मिलेगा। पहला होल्डिंग कंपनी
हो या सब्सिडरी कंपनी हो आपको स्टेटस नहीं मिलेगा। आप अगर कोई रजिस्टर्ड सेक्शन एट कंपनी हो
मतलब नॉन प्रॉफिट वाली आपको नहीं मिलेगा। और अगर आप किसी स्पेशल एक्ट के अंदर बनी हुई कंपनी हो बैंकिंग इंश्योरेंस वगैरह
आपको नहीं मिलेगा। ये सारे स्टेटस आप लोगों को नहीं मिलने वाले हैं। अब मैं थोड़ा सा ऑपरेशन करता
हूं तो मैं इसी तरीके से करता हूं। जैसे आपको क्वेश्चन में दिया कि A लिमिटेड है। क्वेश्चन में दिया B लिमिटेड है। A
लिमिटेड ने 62% B लिमिटेड के अंदर इन्वेस्ट कर रखा है। आपके कान खड़े हो जाने चाहिए। भाई साहब पहली चीज इन दोनों
का अगर क्राइटेरिया मैच भी हो जाए। दोनों 10 करोड़ और 100 करोड़ के नीचे भी हो। भाई साहब ये कभी भी स्माल कंपनी नहीं बन
पाएंगे। एक तो दोनों के दोनों लिमिटेड है। दोनों पब्लिक कंपनी है। पब्लिक कंपनी को स्टेटस मिलता ही नहीं है। और दोनों
होल्डिंग और सब्सिडरी है तो भी नहीं मिलता है। सेक्शन कंपनी को नहीं मिलता। बैंकिंग और इंश्योरेंस कंपनी को भी नहीं मिलेगा।
इस बात को आपको ध्यान रखना है। क्लियर है? तो ये स्मॉल कंपनी की डेफिनेशन भी आपकी यहां पर क्लियर होती है। छोटा सा एमसीक्यू
अगर आप लोगों को देखना हो तो आप लोग देख लो। यहां पर वही है कि एक कंपनी है। है ना? अ नहीं रोमा ने अपने छह दोस्तों के
साथ में मिलकर एक पब्लिक कंपनी बनाई है। पेड अप शेयर कैपिटल 2 करोड़ है और उसका जो टर्नओवर है वो 40 करोड़ के नीचे है। क्या
उसको स्मॉल कंपनी हम लोग बनाएंगे? हां नहीं बनाएंगे क्योंकि स्मॉल कंपनी का स्टेटस मात्र प्राइवेट कंपनीज़ को मिलता
है। बराबर है। कभी भी स्मॉल कंपनी का स्टेटस पब्लिक कंपनीज़ को नहीं मिलता है। सिंपल सी बात है। करेक्ट है? क्लियर है?
इसी तरीके के आप लोगों को यहां पर कुछ क्वेश्चंस हैं। ये सेक्शन एट कंपनी है। सेक्शन एट कंपनी को कभी भी स्टेटस नहीं
मिलेगा। बराबर है? ये देखो। ये एक कंपनी है। उसका ढाई करोड़ का पेड अप शेयर कैपिटल है। टर्नओवर 36 करोड़ है। क्या हम उसको
स्माल कंपनी में कैटेगराइज कर सकते हैं? बिल्कुल कर सकते हैं। क्या क्राइटेरिया होगा? 10 करोड़ का और 100 करोड़ का यहां पर
क्राइटेरिया रहेगा। सिंपल सी बात है। करेक्ट है? आ जाओ। छोटे-छोटे क्वेश्चंस हैं। आप लोग यहां पर देख लीजिएगा। है ना?
ये देखो आकाश लिमिटेड है। तो पब्लिक कंपनी है। हमेशा आपको कंपनी का नाम देखना है तो बेटा आप लोग घबराओगे नहीं। सब कुछ सही
होगा। है ना? कौन सी कंपनीज़ हैं जिनको नहीं मिलता है? तो भाई साहब आपको पता है होल्डिंग, सब्सिडरी, सेक्शन एट कंपनी,
पब्लिक कंपनी इनको नहीं मिलता है। क्लियर है? ओके गाइस अब सुनो जैसे क्वेश्चन नंबर वन मेरी बुक का है। अब ये क्या पुराने
क्वेश्चंस हैं। तो इसीलिए ना सब कुछ 10 करोड़ और 100 करोड़ के नीचे ही रहेगा। है ना? तो मोस्टली स्मॉल कंपनी का स्टेटस इन
लोगों को मिल जाएगा। जैसे आपकी ये एमएपी प्राइवेट लिमिटेड है। पेड अप शेयर कैपिटल 5 करोड़ है। टर्नओवर 35 करोड़ है। आराम से
मिल जाएगा। स्मॉल कंपनी है। द आंसर इज़ यस। अगर यह 30 करोड़ होता तो भी आंसर इज़ यस। सर ये 30 करोड़ इन लोगों ने क्यों किया?
पुराना क्वेश्चन है ना? तो मैंने अमेंडेड आंसर यहां पर बना रखा है। आपको 10 करोड़ और 100 करोड़ प्रोविजन में लिख कर आना है। एंड
प्लीज प्रॉमिस मी जब भी स्मॉल कंपनी का क्वेश्चन करोगे कभी भी एक्सेप्शन के बिना मत लिख कर आना। प्रोविज़न हमेशा लिख कर
आना। प्रोविज़न में हमेशा एक्सेप्शन होना चाहिए। एज़ सिंपल एज दैट। ठीक है? क्लियर है? ये कुछ क्वेश्चन मैं आप लोगों को
होमवर्क के लिए दे रहा हूं। है ना? ये आप लोग यहां से कर लेना। अब अगला देखो ऑन द बेसिस ऑफ़ मेंबर्स पढ़ रहे हैं हम लोग। तो
हम लोग आ चुके हैं वन पर्सन कंपनी के ऊपर। अब वन पर्सन कंपनी कौन होती है? देखो अभी तक बात सुनना। आपने प्राइवेट पढ़ा, आपने
पब्लिक पढ़ा। प्राइवेट के अंदर प्राइवेट किसके अंदर पढ़ा आपने? 68 के अंदर। पब्लिक पढ़ा 71 के अंदर। फिर आपने स्मॉल कंपनी पढ़ा
85 के अंदर। अब आप ओपीसी पढ़ रहे हो 62 के अंदर। ये सब क्लॉज़ क्लॉज़ज़ बता रहा हूं मैं आप लोगों को। ठीक है? चलो आ जाओ। तो एक
काम करते हैं। इसको स्टार्ट करते हैं। वन पर्सन कंपनी को। अच्छा टॉपिक है। छोटा सा टॉपिक है। है ना? देखो नाम ही इसका क्या
है? वन पर्सन कंपनी। अब वन पर्सन कंपनी के केस में आप बोलते हो प्राइवेट के अंदर दो चाहिए। पब्लिक के अंदर सात चाहिए। है ना?
अगर कोई एक अकेला मेंबर अगर वन पर्सन कंपनी बनाना चाहे तो क्या बना सकता है? द आंसर इज़ यस। वो बना सकता है। वन पर्सन
कंपनी का इजात ऐसा नहीं हम लोगों ने किया। बेटा वी आर मोस्टली इंस्पायर्ड फ्रॉम इंग्लिश लॉ। वी आर मोस्टली इंस्पायर्ड
फ्रॉम ऑस्ट्रेलियन लॉ। हम लोग ना बहुत सारी चीजें वहां से उठाकर लाते हैं। है ना? तो ओपीसी हमारे यहां पर नया है। एंड
यस कंपनीज एक्ट 2013 इज द फर्स्ट एक्ट जिसने ओपीसी को इंट्रोड्यूस किया है। एंड ओपीसी कंपनीज़ एकदम धड़ल्ले से बढ़ भी रही
है। बेटा अगर आप लोग ये मंथली बुलेटिन में देखोगे ना मैं आपको इस चार्ट में ले जाऊं ना तो आपने ध्यान नहीं दिया होगा। लेकिन
आप देखो ओपीसी कितनी है? हां प्राइवेट कंपनीज़ में से 79,000 और अब ये 90,000 हो चुकी है तकरीबन तकरीबन। तो 90,000 कंपनीज़
हैं। ओपीसी और बढ़ रही है बेटा। क्या ओपीसी भी प्राइवेट कंपनी होती है? यस। तो सारी ओपीसी प्राइवेट होती है क्योंकि प्राइवेट
कंपनी इज अ बिगर टर्म एंड ओपीसी एक प्राइवेट प्राइवेट कंपनी का टाइप है। है ना? एक ही पर्सन मेंबर होता है। कोई
मिनिमम पेड अप शेयर कैपिटल की रिक्वायरमेंट यहां पर भी नहीं होती है। मेरी बात समझना। ओपीसी प्राइवेट कंपनी तो
है। ऑल ओपीसीस आर प्राइवेट बट ऑल प्राइवेट्स आर नॉट ओपीसी। ओपीसी के अंदर एक पर्सन मेंबर होता है। ओपीसी के अंदर भी
सेपरेट लीगल एंटिटी और ऐसे कांसेप्ट होते हैं। अब ओपीसी में एक दिक्कत होती है। क्या दिक्कत होती है कि प्राइवेट कंपनी
है। फीचर्स आ रहे हैं। मेंबर की अगर डेथ या इनकैपेसिटी हो जाती है तो कंपनी को चलाएगा कौन? कोई तो चाहिए रहेगा बैकअप
में। अगर जो एक मेंबर है जिसे हम लोग बोलते हैं सोल मेंबर। इस सोल मेंबर की डेथ हो गई, इनकैपेसिटी हो गई। तो उसके बैकअप
के लिए एक नॉमिनी को अपॉइंट करना कंपलसरी होता है। अब ये नॉमिनी का नाम पता है कहां पर आता है? मैं मेमोरेंडम की झलक आप लोगों
को बीच-बीच में देते जा रहा हूं। मेमोरेंडम मैंने आपको पहले दिखाया था मां सन क्लॉज़। सन क्लॉज़ में एक क्लॉज़ है
कैपिटल क्लॉज़ जहां पर ऑथराइज़ शेयर कैपिटल जाती है। दूसरा क्लॉज़ बता रहा हूं जो सारी कंपनीज़ में नहीं होता है। सिर्फ ओपीसी के
अंदर होता है। जिसे हम लोग बोलते हैं नॉमिनेशन क्लॉज़। ये नॉमिनेशन क्लॉज़ में मेमोरेंडम का के अंदर यहां पर नॉमिनी का
नाम लिखते हैं कि अगर मेंबर की डेथ हो जाती है। अगर मेंबर इन कैपेसिटी के अंदर चले जाता है तो ये जो पर्सन है वो मेंबर
बनेगा। अच्छा मेरी बात सुनना जो भी नॉमिनी बनता है वो रिटर्न कंसेंट देगा। पॉइंट नंबर वन पॉइंट नंबर टू वो माइनर नहीं हो
सकता। एंड पॉइंट नंबर थ्री वो भी अपनी कंसेंट को विड्रॉ कर सकता है। कोई जबरदस्ती नहीं है। देखो आपने एक बार
नॉमिनी बना दिया। बराबर है तो ऐसा नहीं नॉमिनी वही रहेगा। देखो नॉमिनी खुद भी स्वयं सुमोटो बोल सकता है कि थैंक यू सो
मच मेरा टेन्योर अच्छा रहा। मुझे अब आपकी कंपनी का नॉमिनी नहीं रहना है। मैं जा रहा हूं। दूसरा नॉमिनी को धक्के मार के भी
निकाला जा सकता है। कौन निकालेगा? मेंबर निकालेगा। है ना? तो इट अमाउंट्स टू अ चेंज इन नॉमिनी। सही बात है। नॉमिनी चेंज
हो जाएगा। है ना? और तीसरा वो वाली सिचुएशन हो जाना कि हम यहां पर मेंबर की जगह आ गए क्योंकि मेंबर की डेथ हो गई है।
तो यस न्यू नॉमिनी के उस केस में क्या होगा? उस केस में क्या होगा कि अगर मेंबर की डेथ हो जाती है तो जो नॉमिनी है वो
मेंबर बन जाता है। और फिर नॉमिनी की पोस्ट खाली हो जाती है तो जो मेंबर है वो नॉमिनी को फिर से अपॉइंट करता है। बराबर है कोई
भी चीज करो हमारे जो लोकल पापा है लोकल पापा जानते हो ना? हमारे आरओसी जो है उसको इनफॉर्म करना पड़ेगा। लेकिन एक जस्ट फॉर
नॉलेज मैं आप लोगों को बात बता देता हूं। ये आप आगे जाके इनकरपोरेशन चैप्टर के अंदर देखोगे बेटा जब आप मेमोरेंडम का ऑल्टरेशन
पढ़ोगे क्या नॉमिनी का नाम चेंज होने से मेमोरेंडम के अंदर ऑल्टरेशन माना जाता है क्या? सर मान लो तो क्या दिक्कत की बात
है? बेटा बहुत लंबा प्रोसीजर है। मेमोरेंडम को ऑल्टर करने का प्रोसीजर होता है। आप ऐसे नहीं कर सकते। पर उन्होंने यह
बोला है कि नहीं होगा। इट डज नॉट अमाउंट टू ऑल्टरेशन ऑफ मेमोरेंडम। पर सर नॉमिनी का नाम चेंज हो रहा है। नॉमिनेशन क्लॉज़
में जाकर हम चेंज नहीं करेंगे यहां पर। नहीं करोगे। नहीं करोगे। शुरुआत में जो नॉमिनी का नाम दिया जाता है इट इज जस्ट एन
अपडेट। इट इज जस्ट एन अनाउंसमेंट फ्रॉम दी मेंबर्स पॉइंट ऑफ व्यू। मेंबर बोलता है मेरा ये नॉमिनी रहेगा। बाद में जब आप अपने
अ कहते हैं ना मेमोरेंडम के अंदर अगर आप नॉमिनी चेंज करोगे तो भाई साहब उसके लिए कंपनीज़ एक्ट ने पूरा अलग सिस्टम बना रखा
है। अलग सिस्टम बना रखा है। मेमोरेंडम पता है कंपनी और मेंबर के बीच का कॉन्ट्रैक्ट है। कंपनी और नॉमिनी के बीच का
कॉन्ट्रैक्ट नहीं है। देखो मेंबर मैं हूं। मैंने बोला कि सीजे ने बोला कि पप्पू मेरा नॉमिनी रहेगा। अब सीजे एक और डिक्लेरेशन
दे रहा है कि पप्पू नहीं रहेगा। हमारा खड्डा रहेगा। तो भाई साहब वो डिक्लेरेशन है। उसका एक अलग सिस्टम है। आपको पूरा
यहां पर बोलते हैं ना ऑल्टरेशन ऑफ मेमोरेंडम करने की जरूरत नहीं है। तो अब आप मुझसे पूछोगे कि सर तरीका क्या है? है
ना? तरीका मैं आपको बताऊंगा रूल नंबर फोर के अंदर। ये रूल नंबर फोर ना आपको चैप्टर नंबर वन में नहीं मिलता है। ये चैप्टर
नंबर टू के अंदर आता है। ये नॉमिनी से रिलेटेड बात है। आपने फाउंडेशन में नहीं पढ़ी होगी बेटा। रूल नंबर फोर पूरा है। है
ना? पर अपन इसको यहां पर ही पढ़ेंगे। पर आगे बढ़ने के पहले मैं आप लोगों को बता देता हूं कुछ एक्स्ट्रा पॉइंट्स ओपीसी से
रिलेटेड। क्या एक ही पर्सन एक से ज्यादा ओपीसी में मेंबर बन सकता है? द आंसर इज नो। क्या एक ही नॉमिनी एक से ज्यादा ओपीसी
के अंदर नॉमिनी बन सकता है? द आंसर इज़ नो। अगर पप्पू सीजे ओपीसी में नॉमिनी है तो वो डीजे ओपीसी में नहीं बन पाएगा। क्या हम
हिंदुस्तानी लोग इसमें जुगाड़ कर लेते हैं? कर लेते हैं। क्या एक पर्सन एक ओपीसी के अंदर मेंबर रहता है? और एक दूसरी ओपीसी
के अंदर नॉमिनी बन सकता है? द आंसर इज़ यस। बिल्कुल बन सकते हो। लेकिन दिक्कत कब आएगी? जब डीजे ओपीसी के अंदर डीजे जो
मेंबर है उसकी डेथ हो जाती है। अगर मेंबर की डेथ हो जाती है तो भाई साहब नॉमिनी फिर ऑटोमेटिकली मेंबर बन जाता है। तो क्या हो
जाएगा कि सीजे अपनी ओपीसी के अंदर भी मेंबर है और डीजे ओपीसी के अंदर भी मेंबर है। ऐसी स्थिति में उसे 180 डेज के अंदर
डिसाइड करना पड़ता है और उसको क्या करना पड़ता है? है आरओसी को बताना पड़ता है। ये देखो ये सारे पॉइंट नॉमिनी वाला पॉइंट
कंपलसरी ये पॉइंट बता दिया जो भी नॉमिनी की रिटर्न कंसेंट की जरूरत रहेगी। फॉर्म के अंदर जाता है आरओसी को बताना पड़ेगा।
नॉमिनी खुद विथड्रॉ कर सकता है अपनी कंसेंट और मेंबर भी उसको चेंज कर सकता है। मेंबर जब भी चेंज करेगा उसे कंपनी को और
आरओसी को इख्तला करना पड़ेगा। बताना पड़ेगा। एक पर्सन एक ही ओपीसी में मेंबर हो सकता है। एंड एक पर्सन एक ही ओपीसी में
नॉमिनी भी हो सकता है। बराबर है क्लियर है? मैं फाउंडेशन लेवल पे ये तीनों केसेस आप लोगों को बताता हूं। तो ये मेरी
कांसेप्ट बिल्डिंग शीट है आप लोगों के सामने। एक मैं डिटेल्ड एग्जांपल देता हूं। खस्ता और सस्ता ओपीसी का। ये आप सेल्फ रीड
करोगे तो आपको समझ में आ जाएगा। इसमें कोई भी बड़ी बात नहीं है। बराबर है। ठीक है? अब मेरी बात समझना। वही है यार। खस्ता
ओपीसी में खस्ता ने बनाई। सस्ता ओपीसी सस्ता ने बनाई। अब दोनों एक दूसरे की ओपीसी में नॉमिनी बन गए। किसी एक की डेथ
हो गई। तो एक पर्सन दोनों जगह यहां पर क्या बन गया? दोनों जगह मेंबर बन गया। 180 डेज के अंदर उसको यहां पर क्या करना
पड़ेगा? डिसाइड करना पड़ेगा। बच्चे ना कुछ यहां पर डाउट्स पूछते हैं कि जैसे सीजे ने सीजे ओपीसी बनाई। सीजे डीजे ओपीसी के अंदर
बराबर है अगर मेंबर बन जाता है। है ना? अगर मेंबर बन जाता है। क्या वॉलंटरी बन पाएगा? कभी भी नहीं बन पाएगा। बाय वर्च्यू
ऑफ डीजेस डेथ बनेगा। मतलब उस ओपीसी का मेंबर का मरने की वजह से मैं वहां पर नॉमिनी था इसलिए मेंबर बना हूं। ठीक है?
तो ये मोस्ट यूजुअल वे है क्या? कि डिसाइड व्हिच ओपीसी एज अ मेंबर ही वांट्स टू कंटिन्यू वो डिसाइड करेगा बराबर है। इफ ही
डिस इफ ही डिसाइड्स टू कंटिन्यू सीजे ओपीसी देन सर डीजे ओपीसी का क्या होगा? डीजे ओपीसी में एक एलिजिबल मेंबर को
अपॉइंट करना पड़ेगा। सर क्या दोनों को मर्ज कर सकते हैं क्या? बच्चा ऐसा पूछते हैं लॉ में देखो ऐसा कोई अलग से मेंशन
नहीं किया गया है। 180 डेज में आपको डिसाइड करना है। इतनी बात लिखी गई है। अच्छा बच्चे ये भी पूछते हैं कि सर मेंबर
की डेथ हो गई। नॉमिनी की भी डेथ हो गई। अब क्या करें? अरे ओपीसी पर कोई इंपैक्ट आएगा क्या? नहीं। ओपीसी सेपरेट लीगल एंटिटी
होने की वजह से चालू रहेगी। लीगल रिप्रेजेंटेटिव वहां पर एक्शन में आ सकते हैं। बराबर है सर अगर मेंबर तो ठीक है।
नॉमिनी इनसॉल्वेंट हो जाता है तो सिंपल सी बात है। नॉमिनी इनसॉल्वेंट हो गया, इनकम्पटेंट हो गया। हटा दो। नया नॉमिनी
लिया आओ। ये कुछ डाउट्स है जो आप लोग यहां पर पूछते हो। अगली बात मेंबर और नॉमिनी ओपीसी के अंदर कौन बन सकता है? मात्र दो
कंडीशन आप लोगों को फॉलो करनी है। एक नेचुरल पर्सन, एक इंडियन सिटीजन। रेजिडेंट हो या ना हो हमें कोई फर्क नहीं पड़ता।
रेजिडेंट मतलब होता है पिछले साल जो 120 डेज रहा हुआ हो इंडिया के अंदर। रेजिडेंट ऑफ इंडिया वाली बातें बहुत पुरानी हो चुकी
है। मॉड्यूल के अंदर भी मिस प्रिंट बहुत सारे थे। अब सब कुछ हट चुका है। ठीक है? हम लोग इंटर लेवल पे फाउंडेशन लेवल पे यही
पढ़ते हुए आए हैं। ओनली टू कंडीशन नीड्स टू बी चेक। फर्स्ट आपका नेचुरल पर्सन होना चाहिए और आप इंडियन सिटीजन होने चाहिए।
कोई दिक्कत की बात नहीं है। क्या ओपीसी कन्वर्ट हो सकती है? क्या हम ओपीसी को एक नॉर्मल प्राइवेट कंपनी बना सकते हैं? यस।
क्या हम ओपीसी को पब्लिक कंपनी बना सकते हैं? यस। लेकिन क्या ओपीसी को सेक्शन एट कंपनी बना सकते हैं? द आंसर इज नो। नहीं
बना सकते आप। भाई साहब इसका मतलब अ सर ओपीसी को बहुत रेस्ट्रिक्टेड काम दिए गए। हां, ओपीसी एक काम और नहीं कर सकती। वो
एनबीएफसी का काम नहीं कर सकती। वो दूसरी कंपनीज में इन्वेस्ट नहीं कर सकती है। भाई साहब ये मैंने आपको आगे वाली चीजें और
बताई है। देखो ये अगली शीट एलिजिबिलिटी की कौन बन सकता है? दो कंडीशन रेजिडेंट ऑफ इंडिया हो या ना हो कोई फर्क नहीं पड़ता
है। है ना? इसके लिए आपके मॉड्यूल में एक क्वेश्चन भी दे रखा है कि क्या एक नॉन रेजिडेंट ओपीसी बना सकता है इंडिया में? द
आंसर इज़ यस। बना सकता है। ट्रू। अगर एक एनआरआई है वो भी मेंबर बनके एक ओपीसी इंडिया के अंदर बना सकता है। कोई
दिक्कत की बात नहीं है। सिंपल सी बात है। कुछ इंपॉर्टेंट पॉइंट्स क्या थे? माइनर नहीं बन पाएगा। ओपीसी प्राइवेट पब्लिक में
कन्वर्ट हो जाएगी पर सेक्शन एट में नहीं होगी। एनबीएफसी वाली और इन्वेस्टमेंट वाली एक्टिविटी वो नहीं कर सकती और कोई मिनिमम
पेड अप शेयर कैपिटल की रिक्वायरमेंट इनको भी नहीं है। गॉट इट गाइस? इसमें एक ही क्वेश्चन मुझे आप लोगों को दिखाना है। है
ना? मैं आपको बता देता हूं। जस्ट अ सेकंड। हां ये देखो ये क्वेश्चन मुझे आप लोगों को
दिखाना है। यह भाई बहन का क्वेश्चन आता है। बहुत पुराना क्वेश्चन है बेटा कि एक बंदे ने वन पर्सन कंपनी बनाई। अपनी बहन को
उसने नॉमिनी बनाया। बहन की शादी हो गई। बहन अब बाहर अब्रॉड में सेटल हो रही है फॉर गुड। फॉर गुड मतलब परमानेंटली। है ना?
अब वो बोल रही है कि मुझे मेरा नॉमिनेशन का कंसेंट विथड्रॉ करना पड़ेगा। क्वेश्चन बोल रहा है कि अगर प्रिया इंडिया
परमानेंटली छोड़ रही है तो क्या मैंडेटरी है उसको नॉमिनेशन विथड्रॉ करना? द आंसर इज नो। क्योंकि रेजिडेंशियल स्टेटस मेंटेन
करना जरूरी नहीं है। आप रेजिडेंट हो या ना हो हमें कोई फर्क नहीं पड़ता है। आप इंडियन सिटीजन अभी भी हो और आप यहां पर
नेचुरल पर्सन अभी भी हो। इन केस प्रिया विथड्रॉ कर लेती है एज अ नॉमिनी वेदर प्रशांत अपने माइनर भाई को बना सकता है
क्या? द आंसर इज़ नो। अपने माइनर भाई को भी वो नहीं बना पाएगा क्योंकि माइनर्स मेंबर या नॉमिनी नहीं बन सकते हैं। बराबर है? अब
सुनना मेरी बात समझने की कोशिश करना। ये तो बेसिक चीजें आप लोगों ने पढ़ ली है यहां पर। है ना? बेसिक चीजें आप लोगों ने
पढ़ ली है। मैं थोड़ा सा ना आप लोगों को यहां पर एक शीट देता हूं रिलैक्सेशन की कि ओपीसी और स्मॉल कंपनी को कुछ रिलैक्सेशंस
मिलते हैं। है ना? जैसे मैंने आपको बताया था ना स्मॉल कंपनी को कैश फ्लो स्टेटमेंट बनाने की जरूरत नहीं है। ओपीसी को भी
बनाने की जरूरत नहीं है। बोर्ड मीटिंग में इसको रिलैक्सेशन मिलता है। इसको भी बोर्ड मीटिंग के अंदर रिलैक्सेशन मिलता है।
एनुअल रिटर्न के साइनिंग में और एनुअल रिटर्न के बनाने में फाइल करने में रिलैक्सेशन मिलता है। इसको भी मिलता है।
है ना? लेसर कंप्लायंस, लेसर पेनल्टीज है ना? ये सारी चीजें जो है ये दोनों के अंदर होती है। इस बात का आपको ध्यान रखना है।
नाउ आई एम टेकिंग यू टू आवर रूल नंबर फोर। रूल नंबर फोर किस बारे में बात कर रहा है? जरा ध्यान से देखना बेटा। रूल नंबर फोर
बात कर रहा है रूल रिलेटेड टू नॉमिनी। नॉमिनी से रिलेटेड रूल की बात करी जा रही है। देखो मैं आपको बार-बार बोल रहा हूं।
सेकंड चैप्टर का टॉपिक है। हम इसको यहां पर कवर कर रहे हैं। देखो मेरी बात समझने की कोशिश करना। नॉमिनी आएगा जाएगा चेंज
होगा नया आएगा कंसेंट खुद ले जाएगा खुद कंसेंट छोड़ देगा कुछ भी होगा देखो जब भी चेंज होता है ना जब भी चेंज होता है ना आप
लोगों को ध्यान रखना है ओपीसी के अंदर रूल नंबर फोर जो है बेटा वो किसके बारे में बात करता है रूल नंबर फोर बात करता है कि
जब भी आप नया नॉमिनी अपॉइंट करोगे आपको उसकी कंसेंट लेनी पड़ेगी और उसका फॉर्म होता है आई एनसी3
और जब भी नया नॉमिनी आता है बराबर है पुराना गया नया नया आया मतलब चेंज हुआ। जब भी चेंज होता है आरओसी को आपको इंटिमेट
करना पड़ता है आईएसी फोर के अंदर और आई एनसी4 30 डेज के अंदर जाना चाहिए। आप ये दो फॉर्म्स को तो बेटा रट लो। फॉर्म
नंबर्स नहीं कह रहा हूं। सिचुएशन को रट लो। यही दो सिचुएशन बार-बार रिपीट होती है। जब भी नया नॉमिनी लोगे उसका कंसेंट
लेना आई एनसी3 के अंदर। जब भी कोई भी बदलाव होगा फटाफट 30 दिन के अंदर आरओसी को बता देना। अब पहली सिचुएशन क्या हो सकती
है? की तीन सिचुएशन बताने वाला हूं। पहली सिचुएशन है नॉमिनी खुद सेल्फ विथड्रॉ कर रहा है अपनी कंसेंट को। तो पुराना नॉमिनी
क्या करेगा? कंपनी को और मेंबर को नोटिस देगा कि मैं जा रहा हूं टाटा बाय-ब। मेंबर क्या करेगा? सही बात है। नॉमिनी की पोस्ट
खाली हो गई। 15 दिन में वो नया नॉमिनी अपॉइंट करेगा। जब भी नया नॉमिनी अपॉइंट होता है तो क्या होगा? वही बात आई एनसी3
और आईएसी फोर रिपीट करना है। कंसेंट लो और आईएसी फोर 30 डेज के अंदर दो। केस नंबर टू मेंबर नॉमिनी को धक्के मार के निकाल रहा
है। वंटरीली कर सकता है। बिल्कुल कर सकता है। रिप्लेस कर सकता है। किसी भी टाइम कर सकता है। सोल मेंबर क्या करेगा? एक तो
कंपनी को बताएगा कि मैं नॉमिनी को चेंज कर रहा हूं। फिर से वही नए नॉमिनी को लाएगा कंसेंट लेकर और फिर से वही चेंज के बारे
में आरओसी को बताएगा। और तीसरा केस क्या हो सकता है? ससेशन ऑफ अ मेंबर। अब मेंबर मेंबर नहीं रहा। क्यों भाई साहब? या तो
में ससेशन मतलब सीज होना, खत्म होना। मेंबर की डेथ हो गई। मेंबर इनसॉल्वेंट हो गया। तो जो पुराना नॉमिनी है वो कौन बन
गया? वो नया मेंबर बन गया। तो नॉमिनी की जगह खाली हो गई। तो अपॉइंटमेंट हमेशा 15 दिन में होता है। ऊपर भी बताया था मैंने
और अपॉइंटमेंट जब भी होगा कंसेंट के साथ में होगा। वही बात रिपीट हो रही है। और 30 दिन के अंदर आपको आरओसी को इंटिमेट करना
पड़ेगा। तो ये मैंने आपको टोटल तीन केसेस बताएं। भाई साहब एक बात का ध्यान रखना। केस नंबर वन ये रहा। है ना? केस नंबर टू
नॉमिनी को हम निकाल रहे हैं। एंड केस नंबर थ्री जब नॉमिनी बन जाता है मेंबर। इन सभी केसेस में एक बात का ध्यान रखना आपका एक
तो कंपनी को आरओसी को 30 डेज में बताना ही बताना है। आई एनसी4 के अंदर फीस देनी पड़ती है और साथ में कंसेंट को अटैच करना
पड़ता है। कंसेंट को साथ में अटैच करना पड़ता है। लेकिन बात ध्यान रखना ये पूरी लिमिट ना बेटा यहीं से चालू होती है। कहां
से? यहां से। देखो या तो वो खुद कंसेंट को उसने विड्रॉ किया हो या तो हम उसको रिप्लेस कर रहे हो या फिर जब से वो सीज
हुआ हो ये वाली जो डेट होती है ना बेटा हम यहीं से 15 दिन में अपॉइंट करते हैं इस बात का ध्यान रखना है ना और यहीं से 30
दिनों के अंदर-अंदर आप आरओसी को क्या देते हो आप आई एनसी4 देते हो ठीक है तो ये जो टाइम लिमिट है ना वो इसी डेट से चालू होती
है इसी डेट पे खत्म होती है इसके लिए मैंने बहुत सुंदर एक टेबल बना रखी है मेरी पूरी बुक के अंदर अंदर मैं आप लोगों को
दिखा देता हूं। है ना? आप देखो कुछ इस तरीके की टेबल है। ये रूल नंबर फोर है। चैप्टर नंबर टू के अंदर कवर्ड है। मैंने
आप लोगों को बताया है। है ना? तीन सिचुएशंस हैं। मैंने तीनों सिचुएशन की यहां पर हेडिंग लिखी है। एक्शन रिक्वायर्ड
कितने टाइम में है? मैंने वो लिखा है। टाइमलाइन क्या है? तो वो मैंने वो लिखा है। और प्रोसीजर क्या है? मैंने वो लिखा
है। या तो आप इसको देख सकते हो। मैं आपको बता देता हूं। इस टाइमलाइन को आप फॉलो करो जो मैंने बताया। डेट ऑफ विड्रॉल केस नंबर
वन डेट ऑफ रिप्लेसमेंट केस नंबर टू एंड डेट ऑफ सक्सेशन केस नंबर थ्री यहां से 15 दिन में अपॉइंटमेंट कंसेंट के साथ में और
30 दिन के अंदर आई एनसी4 में आपको कंपनी को बताना है आरओसी को बताना है ये मेरी स्टार्ट शीट है हमेशा ध्यान रखना कंसेंट
आई एनसी3 में है चेंज आई एनसी4 में जाएगा फीस के साथ में कंसेंट को अटैच करना और आपका मेमोरेंडम ऑफ ऑल्टरेशन की जरूरत
पड़ेगी क्या यहां पर क्रॉस कर देना आपको जरूरत नहीं पड़ेगी क्यों ऑल्टरेशन होता ही नहीं है हमने आपको बता दिया बराबर है। केस
नंबर वन, केस नंबर टू, सॉरी केस नंबर वन, केस नंबर टू एंड केस नंबर थ्री। ये लाल झंडा क्या लगा हुआ है? बार-बार यही चीज
रिपीट होती है। जो भी केस हो आई एनसी थ्री और आई एनसी फोर आप लोगों को लगता जाएगा। इस चीज को आप लोगों को यहां पर अच्छे से
लिखना है। अगर आप लोग मुझे बोलोगे कि सर कुछ इस तरीके के फॉर्म्स हम लोगों को देखने के लिए मिल सकते हैं क्या? बेटा कुछ
नहीं करना है यार। Google पे जाओ लिखो। चलो आई एन सी3 फॉर्म ये लिखो आप। मैंने सब कुछ डाल रखा है। बाय द वे आपको बता दूंगा।
ये आई एनसी3 फॉर्म देख लो। 1 पर्सन कंपनी का नॉमिनी का कंसेंट का फॉर्म है। क्या दिक्कत की बात है? लिख दो आई एनसी4 लिख दो
आई एनसी4 ये लो आप। ये आई एनसी4 खोल लो। है ना? ये आई एनसी4 आई एनसी4 में क्या लिखा हुआ है? चेंज इन मेंबर ऑफ़ नॉमिनी। तो
आपको फिर भी ये सारे फॉर्म्स चाहिए ना बेटा अगर तो मैंने ना यहां पर सब डाल रखे हैं। इंपॉर्टेंट फॉर्म्स फॉर रेफरेंस। ये
इंपॉर्टेंट फॉर्म्स फॉर रेफरेंस में चैप्टर वाइज़ बना रखा है। आप देखो अभी ये ये सेकंड चैप्टर में आएगा। सेकंड चैप्टर
में इतने सारे फॉर्म्स मैंने डाल रखे हैं। अब ये फॉर्म नंबर बच्चे कहते हैं कि सर हमको याद करना जरूरी है क्या? द आंसर इज
नो। फॉर्म नंबर्स आप लोगों को याद करना बिल्कुल भी जरूरी नहीं है बेटा। है ना? फॉर्म नंबर एमसीक्यू में एक आधी बार पूछा
गया तो पूछा गया वरना आपको इतना चेक नहीं किया जाएगा। पर चकि एज अ टीचर मेरा फर्ज बनता है। तो मैं आपको मेरी बुक के अंदर हर
चैप्टर के एंड में मैंने आईएसी जैसे चैप्टर नंबर टू है तो आई एनसी है। चैप्टर नंबर थ्री आपका प्रोस्पेक्टस आता है। तो
वहां का पूरा नाम क्या है? प्रोस्पेक्टस एंड अलॉटमेंट ऑफ़ शेयर्स। सो वहां के फॉर्म नंबर है पीएस ऐसा है। है ना? आपका शेयर
कैपिटल का एससी होता है। ऐसा है। है ना? आप लोगों का चार्जेस का सीएचजी होता है। डिपॉजिट का डीपीटी होता है। तो अपन ये बस
ऐसा ही काम है बेटा। है ना? चलो ये हो गया आप लोगों का। ध्यान रखना भाई साहब। डायरेक्टर और मेंबर के बारे में मैंने बता
दिया है। ओपीसी, प्राइवेट और पब्लिक आपका यहां पर खत्म होता है। ठीक है? क्लियर है? अब हम लोग यहां पर क्या चालू करेंगे बेटा?
हमारा ऑन द बेसिस ऑफ मेंबर्स यहां पर खत्म हो चुका है। अब हम लोग चालू करेंगे ऑन द बेसिस ऑफ अ लायबिलिटी। तो अनलिमिटेड कंपनी
देखेंगे, लिमिटेड बाय शेयर्स देखेंगे, लिमिटेड बाय गारंटी देखेंगे। आइए फटाफट स्टार्ट करते हैं। कम ऑन एवरीवन। चलो आ
जाओ। अभी देखना यहां पर क्या है ना? अनलिमिटेड कंपनी जो है, है ना? अनलिमिटेड कंपनी का डेफिनेशन है 92 क्लॉज़ के अंदर।
लिमिटेड बाय शेयर्स का है 22 के अंदर और लिमिटेड बाय गारंटी का है 21 के अंदर। आप एक बात समझ लेना यहां पर दो तरीके से
डिवीजन किया गया है ऑन द बेसिस ऑफ लायबिलिटी के अंदर एक लिमिटेड लायबिलिटी वाली कंपनी होती है और एक अनलिमिटेड
लायबिलिटी वाली कंपनी होती है। राइट लिमिटेड में भी दो है। एक लिमिटेड बाय शेयर्स हैं, एक लिमिटेड बाय गारंटी है।
अच्छा मेरी बात समझना। देखो नाम तो हम कंपनी का देते हैं कि कंपनी लिमिटेड है कि कंपनी अनलिमिटेड है। है ना? लेकिन नेचर
किसका होता है? मेंबर की लायबिलिटी का होता है। अगर लिमिटेड कंपनी है तो मेंबर की लायबिलिटी भी लिमिटेड है। अगर
अनलिमिटेड कंपनी है तो मेंबर की लायबिलिटी भी अनलिमिटेड है। अब देखो लिमिटेड बाय शेयर्स वो कंपनी होती है। है ना? जो
मेजॉरिटी हमने देखा मेजॉरिटी कंपनीज़ तो वही है लिमिटेड बाय शेयर्स ही है। मैंने आपको पूरा बताया था। देखो सुनना मेरी बात
समझना। जो भी कंपनीज़ यहां पर लिमिटेड बाय शेयर्स होती है। आज उनको एकदम ज्यादा तगड़ा शेयर कैपिटल की जरूरत है। राइट? तो वो
बोलती है कि भाई साहब मैं शेयर्स इशू करती हूं और आप मुझे पैसा दे दो और मेंबर्स की जो लायबिलिटी रहेगी वो एट एनी टाइम कंपनी
वैलिड कॉल प्लेस करेगी आपसे पैसा लेगी और आपकी लायबिलिटी कितनी रहेगी जितनी आपके पास में अनपेड अमाउंट है उतना ही रहेगा।
अच्छा मेरी बात समझना कंपनी लिमिटेड बाय गारंटी को आज कैपिटल नहीं चाहिए। इन्होंने बैंक से पैसा ले लिया है। इन्होंने
फाइनेंसियल इंस्टीट्यूशन से पैसा ले लिया है। कोई दिक्कत की बात नहीं है। यह बोलते हैं कि जिस दिन हमारी हालत खराब होगी एट द
टाइम ऑफ़ वाइंडिंग अप। मेरे एसेट्स लेट्स से रह गए ₹1000 करोड़ के। लायबिलिटीज़ हो गई 1200 करोड़ की। डेफिसिट हो गया ₹200 करोड़
का। अगर पांच मेंबर हैं। पांचों मेंबर ने यहां पर गारंटी दी है ₹40-40 करोड़ की। तो यह अप टू गारंटेड अमाउंट जो है यह आपको
यहां पर गारंटी अमाउंट दे रखा है। तो उतना गारंटी आप लोगों को देंगे। आपको बात आ गई समझ में? हां। अच्छा इसमें एक बात समझना
व्हाई? देखो जब आप कंपनी लिमिटेड बाय शेयर्स हो तो लोग तो इन्वेस्ट कर रहे हैं आपकी कंपनी के अंदर। तो यूजुअली कंपनी ऐसी
कंपनी जो बिजनेस करती है, प्रॉफिट के लिए बिजनेस करती है। बेसिकली वो कंपनी लिमिटेड बाय शेयर्स बनाती है। लोगों से पैसा लेती
है, लोग इन्वेस्ट करते हैं और उनको रिटर्न में डिविडेंड देती है। लेकिन बच्चे पूछते हैं कि सर लिमिटेड बाय गारंटी में ऐसा
क्या हो रहा है? लिमिटेड बाय गारंटी में गारंटी देने वाले लोगों को क्या फायदा है? तो मैं उनसे यह पूछता हूं क्या इन लोगों
ने कोई पैसा इन्वेस्ट किया है आज? नहीं। इन्होंने सिर्फ गारंटी दी है। तो सर जब इन्होंने पैसा इन्वेस्ट नहीं करा
है तो कंपनी क्या कर रही है? लिमिटेड बाय गारंटी वाली जो कंपनी होती है ना यूजुअली ये ना बिजनेस प्रॉफिट के लिए बनने वाली
कंपनीज़ नहीं होती है। ये नॉन प्रॉफिट वाली कंपनीज़ होती है। आप देखोगे ना यूजुअली जितने क्लब्स हैं, एसोसिएशन है, स्पोर्ट्स
के एसोसिएशन है, ट्रेड के एसोसिएशंस हैं वो सब कंपनी लिमिटेड बाय गारंटी के फॉर्मेट के अंदर बैठते हैं। तो जब आपने
इन्वेस्ट ही नहीं किया है तो हम आपको रिटर्न क्या दें? कुछ भी रिटर्न देने की जरूरत नहीं होती है। आ गई बात समझ में? तो
ये रीज़न है गारंटी कंपनी के पीछे बनाने का। क्योंकि आप लोग ये पूछते हो कि जनरली ऐसा क्यों होता है? करेक्ट है? अच्छा अब
मेरी बात सुनना। अच्छा सुनो दोनों के बीच में डिफरेंस अगर हमको करना है तो कैसे करेंगे हम लोग? मैं आपको
बताता हूं। देखो डिफरेंस ना आपको बहुत ईजीली क्लियर हो जाएगा। ये देखो आप ये देखो आप। जब आपका मेमोरेंडम बोलता है। है
ना? जब आपका मेमोरेंडम देखो मेमोरेंडम क्यों बोलेगा? अगेन भाई साहब मेमोरेंडम के अंदर एक क्लॉज़ होता है। वो क्लॉज़ होता है
लायबिलिटी क्लॉज़। सन क्लॉज़ मैंने आपको बताया ना सन क्लॉज़। सन क्लॉज़ में जो आपका एल है वो लायबिलिटी क्लॉज़ है। अगर वो
बोलता है कि हमारे मेंबर्स की जो लायबिलिटी है वो रेस्ट्रिक्टेड है गारंटेड अमाउंट तक तो आप गारंटी कंपनी हो गए। अगर
मेमोरेंडम आपका बोलता है कि अगर आपकी लायबिलिटी रेस्ट्रिक्टेड है ओनली अप टू दी अनपेड अमाउंट ऑन दी शेयर्स तो भाई साहब आप
कंपनी हो गए लिमिटेड बाय शेयर्स। ये सिर्फ वाइंडिंग अप के केस में पैसा मंगवा सकती है। गारंटी कंपनी लेकिन कंपनी लिमिटेड बाय
शेयर्स। कभी भी पैसा मंगवा सकती है। यहां पर लायबिलिटी गारंटेड अमाउंट तक रहती है। यहां पर लायबिलिटी अनपेड अमाउंट तक रहती
है। जब आपको इनिशियली ह्यूज इनिशियल कैपिटल की जरूरत नहीं होती है। है ना? क्योंकि फंड्स अरेंज अरेंज हो गए भाई बाय
बाय वे ऑफ़ बोरोइंग। सो आप गारंटी कंपनी बना दो। ये सूटेबिलिटी की बात है। लेकिन जब आपको शुरुआत में ह्यूज इनिशियल कैपिटल
रिक्वायरमेंट होती है तो आप यहां पर आते हो। सर अगर हमें इसी तरीके से समझना है अ ऑन द बेसिस ऑफ लायबिलिटी को तो हम कैसे
लिख सकते हैं मैं आपको बताता हूं। देखो ऑन द बेसिस ऑफ गारंटी ऑन द बेसिस ऑफ शेयर्स। क्लॉज़ नंबर 21 क्लॉज़ नंबर 22। ये ऐसी
कंपनी है जिसकी लायबिलिटी लिमिटेड होती है अप टू द गारंटी गिवन बाय दी मेंबर्स। मेंबर्स से आप कंट्रीब्यूट करने के लिए
सिर्फ वाइंडिंग अप में ही मंगवा सकते हो। इसे बोला जाता है टू कंट्रीब्यूट टू द एसेट्स ऑफ द कंपनी। क्यों? एसेट्स कम रह
गए। 200 करोड़ और चाहिए तो मेंबर्स कंट्रीब्यूट करके पैसा दे देंगे। क्या मेंबर्स की लायबिलिटी कभी भी गारंटी
अमाउंट के ऊपर जाएगी? द आंसर इज नो। सूटेबिलिटी जब आप बिजनेस के लिए यहां पर प्रॉफिट के लिए बिजनेस नहीं कर रहे हो आप
यहां पर। है ना? आप जनरली क्लब्स, एसोसिएशन, चैरिटेबल इंस्टीटशंस वगैरह सब लोग बनते हैं तो वो इन द फॉर्म ऑफ गारंटी
बनाते हैं। कंपनी लिमिटेड बाय शेयर्स। आप लोगों को पता है इस वाली सूटेबिलिटी के अंदर कभी भी कंपनी वैलिड कॉल करके आपसे
अनपेड अमाउंट तक का यहां पर पैसा मंगवा सकती है। लेकिन इसमें अच्छी बात ये है ये तो कंपनी लिमिटेड कंपनी की बात हुई।
अनलिमिटेड कंपनी कौन सी होती है? देखो भाई साहब अनलिमिटेड कंपनी जो होती है ना उसका नाम अनलिमिटेड होने से उसके मेंबर्स की
लायबिलिटी भी अनलिमिटेड हो जाती है। अब बात समझने की कोशिश करना। जब मेंबर्स की लायबिलिटी अनलिमिटेड हो गई। भाई साहब हेलो
ऑपरेशन करें थोड़ा सा ऑपरेशन करें गाइस इसका क्या बोलते हो देखो अनलिमिटेड कंपनी ना बहुत स्पेसिफिक रीज़ंस की वजह से बनेगी
आप लोगों ने देखा है कितनी मात्र 308 या ऐसी कुछ कंपनीज़ हैं बराबर है अनलिमिटेड कंपनीज़ क्यों भाई साहब रीज़न तो ये है पहले
आप ये बताओ आप मेंबर्स की लायबिलिटी अनलिमिटेड कर रहे हो हेलो मुझे एक बात बताओ अगर अनलिमिटेड कंपनी है तो आप ये कह
रहे हो कि आपके मेंबर्स की लायबिलिटी अनलिमिटेड हो गई तो 2 मिनट फिर आपके वो सेपरेट लीगल एंटिटी का क्या हुआ वो आपके
लिमिटेड लायबिलिटी के फीचर का क्या हुआ ये तो कंपनी कंपनी के सबसे बड़ा बेसिक फीचर को आपने हिला दिया। भाई साहब उसको यह बोला
जा रहा है कि सुनो शांति रखो। अनलिमिटेड कंपनी में जब तक कंपनी गोइंग कंसर्न होती है, जब तक कंपनी अच्छा बिजनेस कर रही है,
उसके एसेट्स भरपूर है, कोई वाइंडिंग अप की सिचुएशन नहीं आई है, तब तो मेंबर्स की लायबिलिटी लिमिटेड ही रहती है। लेकिन जब
कंपनी की हालत खराब होती है, वाइंडिंग अप के केस में तब उनकी लायबिलिटी अनलिमिटेड होती है। इसमें आप गारंटी कंपनी को सामने
रखना क्योंकि गारंटी वाली कंपनी में भी वाइंडिंग अप में पैसा लिया जाता है। अनलिमिटेड में भी वाइंडिंग अप में पैसा
लिया जाता है। लेकिन ध्यान रखना ये अनलिमिटेड लायबिलिटी के साथ में वाइंडिंग अप में खड़ा हो जाता है। लेकिन यहां पर
लिमिटेड लायबिलिटी ही रहती है जितना आपने गारंटी अमाउंट दिया है। नाउ द क्वेश्चन इज कि अनलिमिटेड कंपनीज़ बनती क्यों है?
क्योंकि यार लिमिटेड लायबिलिटी सबसे इंपॉर्टेंट फीचर है। फैमिली बिनेसेस के केस में यूजुअली ऐसा देखा जाता है। मेरी
बात सुनो। क्या होता है ना तीन-चार भाई ये धंधा कर रहे हैं। बहुत सालों से धंधा कर रहे हैं। लोग उनको पैसा दे रहे हैं तीनों
भाई को। अब उन्होंने बोला हम कंपनी बना रहे हैं। एकदम से पैसे देने वाले लोगों का ट्रस्ट कम हो जाता है। क्यों? क्योंकि
उनको पता है कंपनी अलग है। यह कंपनी के नाम पर पैसा लेंगे। है ना? और ये अगर कोई धोखा दे भी देते हैं तो ये कंपनी फंसेगी।
ये विजय मालिया नहीं फंसेगा। तो क्या होता है ना कुछ फैमिली बिज़नेसेस क्या करते हैं? कंपनी बनाना है और उसमें उनको ये भरोसा
दिलाना है कि कुछ भी अगर गलत होता है तो हम पूरी लायबिलिटी यहां पर लेंगे। अनलिमिटेड मतलब इसमें मेरा घर भी जाएगा।
पर्सनल लायबिलिटी हो गई है। तो लोग बोलते हैं कि हां सही है यार कोई दिक्कत की बात नहीं है। फैमिली बिनेस है। चारों भाई ने
कंपनी बनाई है। लेकिन चारों भाई की लायबिलिटी अनलिमिटेड है। आज नहीं जिस दिन कुछ गलत हुआ इन्होंने दिक्कत में आ गए ये
लोग। है ना? जिस दिन ये कंपनी बंद होगी सारे लोग अपना घर बेच के भी पैसा देंगे पर देंगे। तो यूजुअली एक और केस है जैसे
होल्डिंग और सब्सिडरी का होता है। कभी-कभी होल्डिंग कंपनीज़ ना स्ट्रक्चरिंग करती है। तो वो सब्सिडरी बनाती है। एसोसिएट कंपनी
बनाती है। उनको ना अनलिमिटेड नेचर का बनाती है। अनलिमिटेड नेचर का बनाती है। क्यों? क्योंकि इसके अंदर जो होल्डिंग
कंपनी है भाई साहब वो अलग नहीं हट सकती। तो स्ट्रक्चरिंग के लिए लायबिलिटी को इंटैक्ट रखने के लिए फैमिली बिनेसेस को
ट्रस्ट को बढ़ाने के लिए भाई साहब ये काम करे जाते हैं। सिंपल सी बात है। ये रीज़न है अनलिमिटेड कंपनीज़ को बनाने का। ठीक है?
आप देखो यहां पर अनलिमिटेड कंपनी। अनलिमिटेड मेंबर की लायबिलिटी कब? ओनली व्हेन कंपनी इज़ बाउंड अप। नॉट इन केस ऑफ़
गोइंग कंसर्न। कौन बुला सकता है कंट्रीब्यूट करने के लिए वाइंडिंग अप के केस में? ऑफिशियल रिसीवर को अपॉइंट किया
जाता है। ऑफिशियल लिक्विडेटर को वो पैसा मांग सकता है। एक क्वेश्चन आता है इसके अंदर। एक क्रेडिटर आया और उसने डायरेक्टली
शेयर होल्डर पे सु कर दिया कि तू मुझे पैसा दे। तो उसने बोला मुझे तो कुछ देना ही नहीं है। हां तेरी कंपनी को देना है।
तो उसने बोला कंपनी से ले। है ना? तो उसने बोला कंपनी तेरी अनलिमिटेड है। तो तेरी लायबिलिटी भी अनलिमिटेड हुई। तो वो बंदा
बोला कि देख दो बातें हैं। पहली बात अभी कंपनी वाइंडिंग अप में नहीं गई है। कंपनी का गोइंग कंसर्न है। तो मेरी लायबिलिटी
लिमिटेड है। दूसरी बात अगर पैसा मांगेगा तो वाइंडिंग अप पे ऑफिशियल लिक्विडेटर ही मांगेगा। तू नहीं मांगेगा। तो क्या कभी भी
कोई क्रेडिटर डायरेक्टली आपसे पैसा मांग सकता है। द आंसर इज़ नो। हां। लेकिन जब भी पैसा मांगा जाएगा जो मेंबर की
लायबिलिटी है वो पूरी कंपनी की लायबिलिटी के बराबर खड़ी हो जाती है। एंड एक मेंबर दूसरे मेंबर्स को कंट्रीब्यूट करने के लिए
थोड़ा सा पुश भी कर सकता है। गॉट इट गाइस आई होप आप लोगों को अब ये पूरा क्लेरिटी यहां पर मिल गया होगा। बराबर है चलो ये जो
क्वेश्चन मैं आप लोगों को बता रहा हूं बेटा वो ये वाला क्वेश्चन है। सैमुअल वाला ये सैमुअल वाला क्वेश्चन है बेटा कि यही
सैमुअल नाम का बंदा है। बराबर है। है ना? जो यहां पर मिस्टर इनोसेंट से पैसे मांग रहा है और ये क्रेडिटर है। है ना? और
सैमुअल यहां पर सक्सेसफुल होगा क्या? द आंसर इज़ नो। सैमल सक्सेसफुल नहीं होगा। ठीक है? चलो आ जाओ। अब ऑन द बेसिस ऑफ
लिस्टिंग एंड अनलिस्टेड कंपनीज़ यहां पर देखी जाती है। बहुत इंपॉर्टेंट सेक्शन है बेटा। इसको बहुत ध्यान से समझना। बहुत
ध्यान से समझना। लिस्टेड कंपनीज की जो डेफिनेशन आप लोगों ने बचपन में यानी कि फाउंडेशन में पढ़ रखी है बेटा वो आपने कुछ
भी नहीं पढ़ रखी है। देखो आपको इतनी बातें तो पता है कि रिकॉग्नाइज स्टॉक एक्सचेंजेस इंडिया में एनएससी और बीएसई है। यहां पर
ट्रेडिंग होती है। यहां पर बयरर्स भी आते हैं। यहां पर सेलर्स भी आते हैं। कोई भी सिक्योरिटीज को यहां पर ट्रेड किया जा
सकता है। आपको पता है। सारी सिक्योरिटीज में शेयर्स आ गए, डिबेंचर्स आ गए, बॉन्ड्स आ गए। सारी बातें देखो, जब तक फिजिकली
चीजें होती थी तो सर्टिफिकेट बनाए जाते थे। उसको मटेरियल मटेरियलाइज्ड फॉर्म में रखा जाता था शेयर सर्टिफिकेट प्रिंटेड
फॉर्मेट में। लेकिन जब से सारी चीजें इलेक्ट्रॉनिकली हुई है, डीमटेरियलाइजेशन हुआ है, डीमेट अकाउंट खुलवाना कंपलसरी हो
गया है। ये डीममेट अकाउंट पता है किसके पास खुलते हैं? डिपॉजिटरीज के पास में। डिपॉजिटरीज के पास में बायर और सेलर दोनों
आते हैं। अपने डिपॉजिटरीज के पास में अकाउंट खुलवाते हैं डीममेट। कंपनी भी इनके पास में अपना अकाउंट खुलवाती है। जो
मेजरली आपके डिपॉजिटरीज है बेटा वो एनएसडीएल है और आपका सीडीएसएल है। है ना? अब देखो अगला प्रश्न ये आता है कि चलो आप
लिस्ट करवा देते हो। करेक्ट है? लिस्टेड कंपनी को एडमिनिस्टर कौन करता है? सेबी करती है। ये बात हम लोगों को पता है।
राइट? कैसे होता है? कंपनी और यहां पर रिकॉग्नाइज्ड स्टॉक एक्सचेंज के बीच में एक एग्रीमेंट होता है। लिस्टिंग एग्रीमेंट
होता है कि आप हमारी सिक्योरिटीज को लिस्ट करवा दीजिए। लेकिन मेरा प्रश्न ये है। देखो पब्लिक कंपनी के अंदर ही बफकेशन है
लिस्टेड और अनलिस्टेड का। लेकिन मेरा प्रॉब्लम यह है कि आप लिस्टिंग क्यों करवाते हो? जरा इसको समझना। देखो एग्जाम
ओरिएंटेड बैच है पर बड़ी डिटेलिंग कर रहे हैं अपन शानदार। देखो जो कंपनी है ना कंपनी को अगर पैसा चाहिए कंपनी को अगर
पैसा चाहिए तो ये लोग कंपनी को पैसा देंगे। राइट? कंपनी उसके बदले में सिक्योरिटीज इशू करेगी। लेट्स से उसने
डिबेंचर इशू कर दिया। डिबेंचर क्या है? आपकी डे सिक्योरिटी है। तो ₹1 लाख के उसने सर्टिफिकेट बना कर दे दिए। इतने पीरियड के
लिए इतने परसेंटेज पे आपको इंटरेस्ट मिलेगा। है ना? अब मेरी बात समझना। ये तो कंपनी के एंगल से हुआ।
लेट्स से यहां पर आप इन्वेस्टर के एंगल से समझने की कोशिश करो। जो पैसे देने वाला इंसान है लेंडर्स लेंडर्स पैसा देने वाला
जो इंसान है उसकी उसके एंगल से अगर आप सोचोगे तो वो बोलेगा मैंने कंपनी को ₹1 लाख दिए हैं लेकिन मुझे एग्जिट मारना है
मुझे एग्जिट मारना है मतलब उसको फटाफट ना ये जो सिक्योरिटी है डिबेंचर की उसको सेल ऑफ करना है अब मुझे एक बात बताओ अगर मैं
आपको बोलूं कि हां ठीक है तू सेल कर दे और किसी को मुझे तो पैसा चाहिए मैं तो कंपनी हूं मुझे तो ₹1 लाख चाहिए चाहे तू दे तू
दे या कोई भी दे मुझे कोई मतलब नहीं है। है ना? तू ढूंढ बायर को ढूंढ। अब देखो जो ओएलx ने काम किया है वो यहां पर हुआ है।
ओलx ने क्या काम किया? ओलx ने काम किया कि यहां पर बायर और सेलर्स को मिला दिया। तो मुझे जब भी कोई गाड़ी बेचनी है मैं पोस्ट
करता हूं। सेलर वहां से आता है, अपना कोटेशन डालता है, ले जाता है। मुझे सेलर और बयर को एक दूसरे को ढूंढने की जरूरत
नहीं है। अगर आपकी सिक्योरिटीज लिस्ट होती है, यही काम यहां पर भी होता है। जस्ट इमेजिन कि ये डिबेंचर्स लिस्टेड हैं। इसका
मतलब ये है कि इनको हम लोग सेकेंडरी मार्केट में जिसे हम लोग स्टॉक मार्केट बोलते हैं। है ना? हम वहां पर ट्रेडिंग कर
सकते हैं। मुझे यहां पर सेल करना है। मैं आया। मैंने बोला कि मेरे पास में डिबेंस रखे हैं इस कंपनी के। किसी को चाहिए क्या?
उसने बोला हां, मैं लेता हूं। चल ठीक है खत्म। क्यों? क्योंकि आपका वहां पर सिक्योरिटी लिस्ट करी हुई दिख रही है।
इसका मतलब यह हुआ कि सिक्योरिटीज़ को लिस्ट करने से क्या होता है? लिक्विडिटी बेटर होती है। लिक्विडिटी बेटर होती है। आपको
बात समझ में आई? आपको बात समझ में आई? देखो कंपनी का एंगल बहुत सिंपल है। कंपनी का एंगल ये है कि अगर मेरी सिक्योरिटीज
लिस्टेड होगी तो इन्वेस्टर्स की लाइफ बहुत इजी हो जाएगी। पुराने अगर लेंडर्स चले भी गए तो सेकेंडरी मार्केट से नए लोग आ
जाएंगे। कंपनी की वैल्यू्यूएशन, गुडविल और विजिबिलिटी बहुत अच्छी हो जाती है और बोरो करने की पावर भी उसकी बढ़ जाती है। बेटा
आपको बात समझ में आ रही है? है ना? अब आप थोड़ी सी डेफिनेशन देखना मेरे साथ में। ये तो मैंने आपको बेसिक बताया कंपनी के अंदर
सॉरी इंडिया के अंदर कितनी कंपनीज़ लिस्टेड है? मैंने आपको बता दिया है। 7300 कंपनीज़ ही लिस्टेड है। ज्यादा कंपनीज़ लिस्टेड
नहीं। देखो कंपनी की जो डेफिनेशन दी गई है ना, वो तो मैंने आप लोगों को बता दिया कि लिस्ट करना क्यों अच्छा होता है? लिस्ट
करना क्यों अच्छा होता है? लिस्टेड कंपनी की डेफिनेशन क्लॉज़ नंबर 52 के अंदर है। अब ये शब्द बहुत ध्यान से सुनना कि ये
लिस्टेड कंपनी की डेफिनेशन बोला गया है कि इट इज़ अ कंपनी जिसकी कोई भी सिक्योरिटीज लिस्टेड होती है किसी भी रिकॉग्नाइज़्ड
स्टॉक एक्सचेंज के ऊपर। अब देखना ये डेफिनेशन बड़ी खतरनाक है। आप लोगों ने फाउंडेशन में भी यही पढ़ा था। लेकिन मुझे
एक बात बताओ ये एक कंपनी है। मतलब दो मिनट कंपनी में ऐसा तो नहीं लिखा कि पब्लिक कंपनी है। मतलब ये प्राइवेट पब्लिक कोई भी
हो सकती है। पॉइंट नंबर वन दूसरा इन्होंने बोला दूसरा इन्होंने बोला कि भाई साहब उसकी कोई भी सिक्योरिटी एनी सिक्योरिटी
एनी सिक्योरिटी में शेयर्स भी आ गए, डिबेंचर्स भी आ गए, बॉन्ड्स भी आ गए। राइट? और एनी रिकॉग्नाइज्ड स्टॉक एक्सचेंज
का मतलब हो गया एनएससी, बीएससी कोई भी हो गया। भाई साहब मतलब बहुत ज्यादा ओपन डेफिनेशन हो गई। मैंने आक्रमण बोला कि दो
मिनट अगर कोई भी कंपनी के अंदर प्राइवेट कंपनी भी आती है तो आप क्या ये बोलना चाह रहे हो कि प्राइवेट कंपनी लिस्टेड हो सकती
है? देखो डेफिनेशन से तो ऐसा ही लग रहा है। तो सर 2 मिनट क्या प्राइवेट कंपनी अपने शेयर्स को लिस्ट करवा सकती है? द
आंसर इज नो। प्राइवेट कंपनी अपने शेयर्स को लिस्ट नहीं करवा सकती। शेयर्स मतलब मैं इक्विटी
शेयर्स की बात कर रहा हूं। नहीं करवा सकती। हां नहीं करवा सकती। ना तो आप पब्लिक ऑफर के थ्रू कर सकते हो ना ही आप
प्राइवेट प्लेसमेंट के थ्रू कर सकते हो। 2 मिनट क्या एक प्राइवेट कंपनी अपनी डे सिक्योरिटी को इशू करवा सकती है क्या?
इलिस्ट करवा सकती है क्या? हां लिस्ट करवा सकती है क्या? तो उन्होंने बोला देख भाई तू ना तो पब्लिक ऑफर कर पाएगा। हां तू
पब्लिक ऑफर नहीं कर पाएगा। करेक्ट है। हम पब्लिक ऑफर नहीं कर पाऊंगा। पर एक प्राइवेट कंपनी अपनी डेप्ट सिक्योरिटी को
प्राइवेट प्लेसमेंट के थ्रू इशू करता है तो क्या वो लिस्ट कर सकता है? हां मैं 15 लोगों के पास में गया। मैंने बोला मुझे
₹15 करोड़ दो। मैं ₹15 करोड़ के ₹100 का एक डिबेंचर है। वो आप लोगों को इशू कर देता हूं। क्या प्राइवेट कंपनी प्राइवेट
प्लेसमेंट कर सकती है? द आंसर इज़ यस। क्या प्राइवेट प्लेसमेंट से डे सिक्योरिटीज को लिस्ट कर सकती है? द आंसर इज़ यस। 2 मिनट।
इसका मतलब क्या हुआ? आप बात समझे आपने कोई भी कंपनी बोला प्राइवेट कंपनी आपने कोई भी कंपनी बोला उसके आपने कोई भी
सिक्योरिटी बोला तो अगर किसी प्राइवेट कंपनी ने अपने डिबेंचर्स को प्राइवेटली प्लेस करवा दिया तो क्या आप उसको लिस्ट
करवा दिया तो क्या आप उसको अब लिस्टेड कंपनी मानने लग जाओगे क्या? डेफिनेशन के हिसाब से तो यही लग रहा है पर यह खतरनाक
हो जाएगा क्योंकि प्राइवेट कंपनी को हम लिस्टेड कंपनी नहीं मान सकते। इसीलिए उन लोगों ने क्या किया? पहले ओपन डेफिनेशन
बनाई कि कोई भी कंपनी किसी भी सिक्योरिटी को कोई भी रिकॉग्नाइज्ड स्टॉक एक्सचेंज पे लिस्ट कर देती है तो हम उसे लिस्टेड कंपनी
मानेंगे। लेकिन फिर हमको जरूरत पड़ी बेटा किस चीज की? हमको जरूरत पड़ी एक प्रोवाइजो की। प्रोवाइजो आप लोग समझते हो ना?
प्रोवाइजो क्या करता है? एक एडिशनल चीज को एक्सेप्शन को क्रिएट करता है। उन्होंने बोला सच क्लास ऑफ कंपनीज़ कुछ क्लास ऑफ
कंपनीज़ हैं जो अपनी सिक्योरिटीज को लिस्ट करवाती है या फिर इंटेंशन दिखाती है। है ना? इन कंसल्टेशन विद सेबी उन्होंने बोला
हम एक काम करेंगे कि हम उनको लिस्टेड कंपनी नहीं मानेंगे। आपको बात समझ में आई? बेसिकली पहले उन्होंने एक ओपन डेफिनेशन
बनाई। फिर उन्होंने एक डेफिनेशन बनाई मतलब क्लास ऑफ कंपनीज़ या क्लासेस ऑफ कंपनीज़ बराबर है हु विल हु विल नॉट बी कंसीडर्ड
एज लिस्टेड हु विल नॉट बी कंसीडर्ड एज अ लिस्टेड कंपनी मतलब उन्होंने बेसिकली एक्सेप्शन निकाला
यहां पर है ना इवन दो इवन दो हो सकता है कि शेयर्स और डिबेंचर्स उनके लिस्टेड ेड हो मतलब तभी तो एक्सेप्शन हुआ ना कि
सिक्योरिटी लिस्टेड तो है फिर भी हम आपको लिस्टेड नहीं बोल रहे हैं। ऐसा किसने बोला? ऐसा प्रोवाइजों ने बोला। अब क्या
हुआ? ये लिस्ट हम लोगों को देखनी है। इस लिस्ट के अंदर बेटा टोटल तीन बड़े-बड़े यहां पर क्या है? एक्सेंपशन दिए गए हैं।
मैंने इसको डिवाइड करा है बेटा प्राइवेट और पब्लिक कंपनी के बीच में। मैंने प्राइवेट कंपनी की एक शीट बनाई है। है ना?
और मैंने पब्लिक कंपनी की एक शीट बनाई है। मैं पहले आपको समझाता हूं। प्राइवेट कंपनी के केस में कांसेप्ट बिल्ड करते हैं हम
लोग। मुझे एक बात बताओ। पहले हम एलिमिनेट करते हैं। क्या-क्या चीज को बाहर कर देंगे? देखो क्या एक प्राइवेट कंपनी कभी
भी पब्लिक ऑफर कर सकती है? नॉट अलाउड। क्या एक प्राइवेट कंपनी प्राइवेट प्लेसमेंट कर सकती है? यस। 200 मेंबर तक
प्राइवेट प्लेसमेंट कर सकती है। आ जाओ। क्या एक प्राइवेट कंपनी कभी भी शेयर्स को चाहे प्रेफरेंस शेयर्स हो, आपके इक्विटी
शेयर्स हो। क्या उनको लिस्ट कर पाएगी? नॉट अलाउड। देखो शेयर्स को लिस्ट करना अलाउड नहीं है। पर क्या एक प्राइवेट कंपनी अपनी
डे सिक्योरिटीज को यानी कि डिबेंचर्स को लिस्ट कर सकती है? दैट इज अलाउड। दैट इज अलाउड। अब सुनना अगर मैं एक प्राइवेट
कंपनी हूं। मैं अपनी डेप्ट सिक्योरिटी को जो मैंने प्राइवेट प्लेसमेंट के थ्रू इशू करी है। अगर मैं उनको लिस्ट करवाता हूं।
सुनना। अब एक और लेयर ऐड कर रहा हूं। लेयर नंबर थ्री। कैसी डे सिक्योरिटीज कन्वर्टेबल कि नॉन कन्वर्टेबल कन्वर्टेबल
मतलब क्या होता है? ऐसे डिबेंचर्स जो फ्यूचर्स में शेयर्स बनेंगे। भाई साहब आप ये नहीं कर सकते। यू आर नॉट अलाउड। अगर आप
ऐसी सिक्योरिटीज इशू कर रहे हो जो डिबेंचर्स हैं और आप उसको फ्यूचर में शेयर्स में कन्वर्ट कर रहे हो तो आप उसको
लिस्ट नहीं कर सकते। क्योंकि बेसिकली वो क्या हो गया? इनडायरेक्टली आप अपने शेयर्स को ही लिस्ट कर रहे हो ना। आप पहले
डिबेंचर्स बना रहे हो। फिर उनको आप इक्विटी में कन्वर्ट कर रहे हो। नहीं कर सकते। तो दो मिनट फिर क्या निकल के आया?
नॉन कन्वर्टेबल। अब देखो तीन कॉम्बिनेशन क्रिएट कर रहा हूं मैं। तीन कॉम्बिनेशन सुनना। अगर कोई प्राइवेट कंपनी देखो
पब्लिक ऑफर कर नहीं सकती, शेयर्स को लिस्ट कर नहीं सकती, कन्वर्टेबल दे नहीं सकती। तो बचा क्या? मैं बताता हूं कॉम्बिनेशन।
अगर कोई प्राइवेट कंपनी प्राइवेट प्लेसमेंट के थ्रू डे सिक्योरिटीज जो कि नॉन कन्वर्टेबल है अगर उनको लिस्ट करवा
देती है तो भी हम उस कंपनी को अनलिस्टेड ही मानेंगे। ये आपका एक्सेप्शन क्रिएट हुआ। देखो इधर आओ कैसे आएगा समझ में? ये
देखो आप प्राइवेट कंपनी लिस्टेड शेयर्स तो अलाउड ही नहीं है। अदर सिक्योरिटीज यस वो लिस्ट करवा सकती
है। लेकिन कैसी? कन्वर्टेबल नहीं ओनली नॉन कन्वर्टेबल अच्छा क्या पब्लिक ऑफर कर सकती है नहीं तो
यह भी बाहर हो गया बराबर है प्राइवेट प्लेसमेंट के थ्रू आप करवा सकते हो नॉन कन्वर्टेबल डे सिक्योरिटीज को तो हम आपको
अनलिस्टेड मानेंगे बाकी ये दो चीजें तो अलाउड ही नहीं है ना अगर पब्लिक ऑफर कर दोगे तो अलाउड नहीं है कन्वर्टेबल कर दोगे
तो अलाउड नहीं है बेसिकली एक सिचुएशन निकल के आती है वो कॉम्बिनेशन ये है नीचे मैंने लिख रखा है कि व्हेन प्राइवेट कंपनी
लिस्ट इट्स डेप्ट सिक्योरिटीज व्हिच आर नॉन कन्वर्टेबल इन नेचर करेक्ट है थ्रू प्राइवेट प्लेसमेंट देन आल्सो इट इज़
कंसीडर्ड एज अनलिस्टेड कंपनी आपको बात समझ में आ गई ठीक है तो हम लोग क्या पढ़ रहे हैं बेटा लिस्टेड कंपनी की डेफिनेशन पढ़
रहे हैं। लिस्टेड कंपनी की डेफिनेशन में पहले आपने ओपन डेफिनेशन बनाई कि कोई भी कंपनी कोई भी सिक्योरिटीज़ को लिस्ट कर दे
हम उसको लिस्टेड मानेंगे। फिर हमने एक प्रोवाइज़ो बनाया। कुछ कंपनीज़ को बाहर निकाला। उसमें से मैंने सबसे पहले
प्राइवेट कंपनी को बाहर निकाल दिया। प्राइवेट कंपनी में कॉम्बिनेशन क्या आया? नॉन कन्वर्टेबल डिबेंचर्स को प्राइवेट
प्लेसमेंट पे अगर लिस्ट किया जाता है तो भी हम प्राइवेट कंपनी को अनलिस्टेड कंपनी ही मानेंगे। सिंपल सी बात है। करेक्ट है?
अब आ जाओ हम पब्लिक कंपनी के दो एक्सेप्शन की बात करते हैं। देखो पब्लिक कंपनी को लिस्टेड कंपनी कब माना जाएगा? कंपलसरीली
अगर आप लिस्टेड कंपनी कहलाना चाहते हो इंडिया के अंदर तो आपको इक्विटी शेयर्स को इंडियन स्टॉक एक्सचेंज पे लिस्ट करना
पड़ेगा। सबसे पहली बात कोई भी पब्लिक कंपनी के अगर इक्विटी शेयर्स इंडियन स्टॉक एक्सचेंज पे लिस्टेड है बात खत्म कर देना।
नो क्वेश्चंस आस्क्ड ना कोई दूसरी सिक्योरिटी चाहिए ना हमको कुछ भी चाहिए। उस कंपनी को हम लोग लिस्टेड बोलेंगे।
कभी-कभी ऐसा होता है कि आपके इक्विटी शेयर्स बाहर वाले स्टॉक एक्सचेंज के ऊपर भी
लिस्टेड होते हैं और यहां पर भी लिस्टेड होते हैं। न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज पे भी है और nसdc के ऊपर भी है। दोनों बाहर के
हैं और इंडियन पे नहीं है तो भाई साहब फिर हम आपको अनलिस्टेड मानेंगे। आप बाहर हो पर हमारे यहां पर लिस्टेड नहीं हो तो हम आपको
अनलिस्टेड मानेंगे। सर दोनों जगह है तो अगर दोनों जगह है तो हमें कोई फर्क नहीं पड़ता कि बाहर भी है तो। हमारे यहां पर तो
है ना हम आपको लिस्टेड मानेंगे। तो पहले स्टॉक एक्सचेंज के एंगल से आप समझ जाओ। पब्लिक कंपनी एक ही रूल है इंडियन स्टॉक
एक्सचेंज पे। अगर इक्विटी शेयर्स लिस्टेड है काम खत्म। लेकिन अगर इक्विटी शेयर्स आपके इंडियन स्टॉक एक्सचेंज पे लिस्टेड
नहीं है तो फिर क्या लिस्टेड है? प्रेफरेंस शेयर्स लिस्टेड है। डेप्ट लिस्टेड है। अच्छा ओ ओके। मतलब अदर
सिक्योरिटीज़ अदर सिक्योरिटीज़। हां। देखो अगर आप पब्लिक कंपनी हो आपके इक्विटी शेयर्स इंडियन स्टॉक एक्सचेंज पे लिस्टेड
नहीं है। लेकिन आपके प्रेफरेंस शेयर्स लिस्टेड हैं। कैसे प्रेफरेंस शेयर्स जो कन्वर्टेबल है
जो कन्वर्टेबल है भाई साहब अगर कन्वर्टेबल है मतलब फ्यूचर में तो आप इक्विटी शेयर बन जाओगे तो हम आपको लिस्टेड कंपनी ही
मानेंगे। लेकिन अगर प्रेफरेंस शेयर्स लिस्टेड है नॉन कन्वर्टेबल
नॉन कन्वर्टेबल वो भी पब्लिक ऑफर के थ्रू नहीं देखो अगर पब्लिक ऑफर हो जाए या फिर कन्वर्टेबल हो जाए तो तो फिर आप हमारे लिए
लिस्टेड कंपनी ही हो लेकिन अगर आपके प्रेफरेंस शेयर्स अगर आपके डिबेंचर्स जो आपने प्राइवेट प्लेसमेंट के थ्रू लिस्ट
करे हैं और वो भी नॉन कन्वर्टेबल है तो भाई साहब हम आपको अनलिस्टेड ही मानेंगे। ेंगे। अगर कन्वर्टेबल हो तो लिस्टेड हो
जाएंगे। अगर पब्लिक ऑफर हो तो लिस्टेड हो जाएंगे। अगर एक भी चीज हिल गई तो हम आपको लिस्टेड मानेंगे। ठीक है? अभी हौले-हौले
चलना। आगे चलना। धीरे से मेरे साथ में ये टेबल देखना। आपको ज्यादा क्लेरिटी मिलेगी। देखो आप ये वाली टेबल देखो। ये देख ली थी
आप लोगों ने प्राइवेट कंपनी की। पब्लिक कंपनी। देखो सबसे पहली बात पब्लिक कंपनी के अगर पब्लिक कंपनी के अगर इक्विटी
शेयर्स इंडियन स्टॉक एक्सचेंज पे लिस्टेड है। हमें कोई फर्क नहीं पड़ता। इमटेरियल है कि बाकी सिक्योरिटीज का क्या हुआ? अगर
इक्विटी शेयर्स लिस्टेड है तो आप लिस्टेड कंपनी माने जाओगे। तो ये तो एक्सेप्शन में नहीं आया। ठीक है? अगर आपके इक्विटी
शेयर्स लिस्टेड नहीं है लेकिन आपके प्रेफरेंस शेयर्स और डिबेंचर्स लिस्टेड है पर वो पब्लिक ऑफर के थ्रू है। अरे यार
पब्लिक ऑफर कर दिया ना तो आपको लिस्टेड ही मानेंगे। तो अभी भी आप एक्सेप्शन के अंदर नहीं आए। चलो सर अगर मेरे प्रेफरेंस
शेयर्स या डिबेंचर्स लिस्टेड है इक्विटी शेयर्स लिस्टेड नहीं है और मैंने सर प्राइवेट प्लेसमेंट भी कर रखा हो चलो
लेकिन वो कन्वर्टेबल है ओ मतलब वो इक्विटी शेयर्स के अंदर कन्वर्ट होंगे तो भी हम आपको लिस्टेड मानेंगे हम आपको एग्ेंप्ट
नहीं मानेंगे सर अगर मेरे इक्विटी शेयर्स इंडिया में भी लिस्टेड है और बाहर भी लिस्टेड है कोई बात
नहीं इंडिया में लिस्टेड है ना इंडिया में तो लिस्टेड है ना आपको लिस्टेड ही माना जाएगा तो सर फिर कौन से सीन में हमको एग्
किया गया है ये तो बताओ दो केसेस के अंदर दो केसेस के अंदर पहला आप हमारे यहां पर अगर लिस्टेड नहीं हो तो हम आपको बाहर
निकाल देंगे हम आपको अनलिस्टेड मानेंगे दूसरा दूसरा ये वाला कॉम्बिनेशन ऊपर जैसा ही
कॉम्बिनेशन है। कन्वर्टेबल नहीं होना चाहिए। पब्लिक ऑफर के थ्रू नहीं होना चाहिए। अगर नॉन कन्वर्टेबल है और प्राइवेट
प्लेसमेंट के थ्रू है और इक्विटी शेयर्स लिस्टेड नहीं है पर प्रेफरेंस शेयर्स और डिबेंचर्स लिस्टेड है तो भी हम आपको
अनलिस्टेड कंपनी मानेंगे। क्लियर है? जब तक ये चार चीजें फुलफिल नहीं हो जाती ऐसी पब्लिक कंपनी को
एग्ेंप्ट नहीं किया जाता है। मैं आप लोगों को बता देता हूं। देखो ये वाली मैंने दिखाई थी आप लोगों को। है ना? इसमें देखो
सबसे पहले आप लोगों ने मेरे साथ में क्या देखा? हां। सबसे पहले आप लोगों ने देखा प्राइवेट कंपनी के केस में। प्राइवेट
कंपनी के केस में अगर उसके नॉन कन्वर्टेबल डिबेंचर्स हैं, प्राइवेट प्लेसमेंट के थ्रू अगर प्लेस होते हैं, तो हम उस
प्राइवेट कंपनी को अनलिस्टेड ही मानेंगे। मतलब क्या-क्या चीजें हो गई? नॉन कन्वर्टेबल होना चाहिए, डेप्ट सिक्योरिटी
होना चाहिए और प्राइवेट प्लेसमेंट के थ्रू होना चाहिए। करेक्ट है? उसके बाद में मैंने बताया पब्लिक कंपनी इक्विटी शेयर्स
अगर नॉट लिस्टेड इन इंडिया है। है ना? पर कहीं बाहर लिस्टेड है तो भाई साहब हम आपको अनलिस्टेड ही मानेंगे। है ना? ये तो सिंपल
वाली बात हो गई। स्टॉक एक्सचेंज वाली है ना? यह दो हो गए। अब देखो पब्लिक कंपनी जिसके इक्विटी शेयर्स तो लिस्टेड नहीं है।
पॉइंट नंबर वन मतलब इंडिया में आप लिस्टेड नहीं हो लेकिन आपके नॉन कन्वर्टेबल डे सिक्योरिटीज यानी कि एनसीटी
या आपके नॉन कन्वर्टेबल प्रेफरेंस शेयर्स यानी कि एनसीपीएस एनसीपीएस बोलते हैं। है ना? या तो ये या फिर ये है ना? बट नॉन
कन्वर्टेबल होना चाहिए। नॉन कन्वर्टेबल है ना? प्राइवेट प्लेसमेंट के थ्रू अगर इशूड है प्राइवेट प्लेसमेंट के थ्रू है ना ये
आपकी क्या हो गई ये आपकी तीसरी कंडीशन हो गई राइट है ना तो हम आपको यहां पर क्या नहीं मानेंगे आपको लिस्टेड नहीं मानेंगे
इक्विटी शेयर्स लिस्टेड नहीं है डे सिक्योरिटीज या प्रेफरेंस शेयर्स लिस्टेड है जो कि नॉन कन्वर्टेबल है जो कि नॉन
कन्वर्टेबल है और प्राइवेट प्लेसमेंट के थ्रू है तो भाई साहब नॉट अ लिस्टेड कंपनी कंपनी नॉट अ लिस्टेड कंपनी। ये तीन
एक्सेप्शनंस हैं। अगर आप लोगों को चाहिए बेटा मैंने ये सुंदर सी स्टार शीट बना रखी है। आप लोगों के लिए पॉइंट बाय पॉइंट आप
इससे ना पूरा स्यूशन निकाल पाओगे कि ऐसा हो क्यों हो क्यों रहा है। आपको लॉजिक समझ में आएगा। है ना? आपको लॉजिक समझ में आएगा
बेटा। और पब्लिक कंपनी के केस में भी मैंने ऐसा बना रखा है। पर अगर आपको क्लेरिटी चाहिए तो शीट वन है और क्लेरिटी
चाहिए तो शीट टू है। यहां पर सारे कॉम्बिनेशंस जितने भी पॉसिबल है वो मैंने आप लोगों को यहां पर बता दिए हैं। ओके? आई
होप आप लोगों को ये थोड़ी सी क्लेरिटी मिली होगी। नाउ जस्ट अ सेकंड हां ठीक है। ओके कूल सुपर्ब सुपर्ब सुपर्ब
सुपर्ब चलो आ जाओ गाइस आगे बढ़ते हैं हम लोग। है ना? अब सुनो मेरी बात सुनो। अ अगर आपको थोड़ा सा क्वेश्चन देखना है। थोड़ा
सा अगर आप लोगों को क्वेश्चन देखना है। ज्यादा तो नहीं है। एक क्वेश्चन मैंने डाल रखा है कि जैसे एक कोई कंपनी है। है ना?
न्यू एज प्राइवेट लिमिटेड उसने नॉन कन्वर्टेबल डिबेंचर्स इशू करें। मतलब क्या हो गया? एनसीडी और कौन है? प्राइवेट कंपनी
है। है ना? प्राइवेट कंपनी एनसीडी इशू कर सकती है। यस। क्या वो उनको लिस्ट करवाना चाहती है। करवा सकती है। द आंसर इज़ यस।
प्राइवेटली प्लेस्ड है। चलो ठीक है। ये भी ठीक है। प्राइवेटली प्लेस्ड है। नॉन कन्वर्टेबल डिबेंचर्स हैं। मतलब ना तो
कन्वर्टेबल है ना ही पब्लिक ऑफर है। तो क्या यहां पर हम इसको लिस्टेड कंपनी मानेंगे? नहीं। हम उसको लिस्टेड कंपनी
नहीं मानेंगे। इट शैल नॉट बी कंसीडर्ड एज अ लिस्टेड कंपनी। यह बोल रहा है लिस्टेड कंपनी माना जाएगा। ये बोल रहा है माना
जाएगा। ये बोल रहा है माना जाएगा। सबको हटा देना। इट शैल नॉट बी कंसीडर्ड एज अ लिस्टेड कंपनी। एज सिंपल एज दैट। ठीक है?
क्लियर है गाइस? ओके? चलो अब आगे बढ़ते हैं। लिस्टेड और अनलिस्टेड आपका यहां पर खत्म होता है। मेरी बात समझने की कोशिश
करना। अगला टॉपिक जो आता है, अब हम देखेंगे होल्डिंग, सब्सिडरी और एसोसिएट कंपनी। होल्डिंग सब्सिडरी और एसोसिएट
कंपनी के बारे में आप लोगों ने फाउंडेशन में काफी कुछ सुन रखा होगा। लेकिन सही बात तो ये है बेटा कि आप लोगों ने थोड़ी सी
इसकी एक एक लेयर ऑफ डेप्थ है जो आप लोगों ने यहां पर आप पहली बार पढ़ने वाले हो। एक लेयर ऑफ डेप्थ है बेटा। है ना? अब वो लेयर
ऑफ डेप्थ ना काफी इंपॉर्टेंट है। मैं आपको वन बाय वन बताऊंगा। आपको काफी इजी हो जाएगा। सबसे पहले मेरी बात समझना।
होल्डिंग कंपनी जो है सब्सिडरी जो है एसोसिएट जो है होल्डिंग की जो डेफिनेशन आती है राजा वो आती है आपकी 46 क्लॉज़ के
अंदर 87 के अंदर सब्सिडरी आती है और एसोसिएट कंपनी यहां पर क्लॉज़ नंबर सिक्स के अंदर आती है सुनो मेरी बात होल्डिंग
सब्सिडरी में मैं आपको हमेशा एक बात बताता हूं जैसे पप्पू ना घड़ी खरीदने गया प्रीमियम वॉचेस खरीदने गया rx rडo lजenस
tag huer ऐसी वॉचेस खरीदने गया वो अपने एकदम चप्पल में है ना अपनी चप्पल में जाके आगे के खड़ा हुआ। किसी ने कोई भाव ही नहीं
दिया। बोल रहा कौन गरीब वॉच खरीदने आ गया। पीछे से ओनर निकल के आया खड्डा। खड्डा तो पता है खड्डा पप्पू का रिश्ता बहुत पुराना
है। खड्डा निकल के आया। उसने बोला अरे पप्पू भाई कैसे हो? और उसने गले में हाथ डाल दिया। क्या डाल दिया? उसने गले में
हाथ डाल दिया। जैसे ओनर ने देखा ओनर ने हाथ डाला है गले में। सारे के सारे एंप्लाइजस एकदम अरे अरे सर सर प्लीज आइए।
आप तो घर ले जाइए। आपको जो ले जाना है। फर्क पड़ता है कि आपका बाप कौन है। आपकी पहचान किससे है। देखो एलेक्सी का नाम आपने
कभी सुना होगा? नहीं सुना होगा। Alexi कंपनी बैंक के पास में गई कि मुझे लोन दो ₹5 करोड़ का। बैंक ने बोला चल निकल यहां
से फटाफट। Alexi ने बोला मेरे आप रिकॉर्ड्स देख लो। तो रिकॉर्ड्स देख के पता चला कि उनकी होल्डिंग कंपनी TS
प्राइवेट लिमिटेड है। भाई साहब अरे भाई साहब जब आपकी होल्डिंग कंपनी होती है ना कोई तो उससे आपकी इज्जत बनती है। होल्डिंग
कंपनी वो होती है जो आपकी कंपनी को कंट्रोल करती है। जैसे मैं एग्जांपल देता हूं। पापा का घर और बड़े पापा का घर। आप
लोगों ने देखा होगा भाई साहब मेरा भाई गाड़ी खरीदेगा कि नहीं खरीदेगा? भाई साहब बताइए क्या करना है? पापा को गाड़ी खरीदनी
है। भाई साहब बताइए क्या करना है? मम्मी बोल रही है एक नया फ्लोर बनाओ किचन नया करो। भाई साहब बताइए क्या करिए? अरे क्या
डिसीजन मेकिंग पावर वोटिंग पावर बड़े पापा के पास में है? द आंसर इज यस हमारे पास में नहीं है। तो भाई साहब होल्डिंग कंपनी
ना बड़े पापा वाली कंपनी होती है और सब्सिडरी कंपनी पापा वाली कंपनी होती है। अरे बड़े पापा बताते हैं कि मेरे घर में
कौन बहू आएगी और कौन और लड़की किसके घर जाएगी। अरे होल्डिंग कंपनी वो होती है जो सब्सिडरी कंपनी के अंदर वोटिंग पावर
कंट्रोल करती है। वोटिंग पावर का मतलब है मोर देन वन हाफ यानी कि 50% से ज्यादा और मेरे घर के अंदर कौन मेंबर्स होंगे?
मतलब मेरी कंपनी के अंदर बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स का अपॉइंटमेंट रिमूवल कंडक्ट कैसा होगा? उनका कंपोजशन
होल्डिंग कंपनी डिसाइड करती है। या तो सारे के सारे बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स का या फिर मेजॉरिटी ऑफ़ डायरेक्टर्स का। भाई साहब
ये होल्डिंग कंपनी और सब्सिडरी कंपनी का रिश्ता है एक दूसरे के साथ में। इट इज़ अ रिलेशनशिप बिटवीन वन कंपनी विद अनदर
कंपनी। नॉट विद एन इंडिविजुअल। मैं रतन टाटा सर को रतन टाटा सर को मैं टाटा कंपनी का होल्डिंग कंपनी नहीं बोल सकता क्योंकि
वो इंडिविजुअल है। इंडिविजुअल है। ये कंपनी का कंपनी से रिश्ता होता है। इस बात को आप अच्छे से समझ लेना। ऑपरेशन करने की
बात यह है कि सर यहां पर मोर देन वन हाफ लिखा हुआ है। आप हमको यह बताओ मोर देन वन हाफ ऑफ व्हाट ऑफ टोटल शेयर कैपिटल लिखा है
कि टोटल वोटिंग पावर लिखा है भाई साहब टोटल वोटिंग पावर लिखा है। मैं आप लोगों को ना एक बात प्रूफ करता हूं कि यहां पर
टोटल वोटिंग पावर का वन हाफ क्यों लिखा है? वोटिंग पावर ज्यादा इंपॉर्टेंट होती है। देखो इक्विटी शेयर्स हो, प्रेफरेंस
शेयर होल्डर्स होते हैं। प्रेफरेंस शेयर होल्डर्स के पास में जनरली कोई वोटिंग पावर नहीं होती है। सिर्फ कुछ मैटर्स के
ऊपर प्रेफरेंस शेयर होल्डर्स वोट कर सकते हैं। लेकिन इक्विटी शेयर होल्डर्स ना सारे मैटर्स पे वोट कर सकते हैं। अब इक्विटी
शेयर होल्डर्स में भी दो तरीके के यहां पर राइट्स होते हैं। एक यूनिफॉर्म जिन्हें हम लोग वनीिला कहते हैं और एक होते हैं
डीवीआर डिफरेंशियल वोटिंग राइट्स। देखो जब एक शेयर पर एक वोट मिलता है तो उसे यूनिफार्म कहते हैं। सीजे के पास में
5000 शेयर्स हैं तो 5000 वोट्स मेरे पास में। अगर डीजे के पास में 3000 शेयर्स हैं तो उसके पास में 3000 वोट्स हैं। कोई
दिक्कत की बात नहीं है। लेकिन जब इस रेश्यो को चेंज कर दिया जाता है तो उसे डिफरेंशियल वोटिंग राइट्स बोला जाता है।
यानी कि डीवीआर बोला जाता है। रेश्यो कैसा बना दिया जाता है मैं आपको बताता हूं। जैसे 10 शेयर पे एक वोट मिलेगा या एक शेयर
पे 10 वोट मिल जाएंगे। मतलब 1:1 के अलावा कोई भी कॉम्बिनेशन बनाओ। ऐसा क्यों किया जाता है? मैं आपको बताता हूं। यह ना देखो
मुझे एक बात बताओ। बाहर वाले लोग कंपनी के अंदर आते जाएंगे तो जिन लोगों ने कंपनी बनाई है वो तो बेचारे यू नो ऐसे हो जाएंगे
कि अपने घर में खाना नहीं मिल रहा है। क्यों? 10 करोड़ शेयर होल्डर्स हैं। 10 करोड़ 10 करोड़ शेयर्स हैं। उसमें से
मैंने कंपनी बनाई। मेरी कंपनी के शेयर्स मेरे पास में सिर्फ 2 करोड़ है। 8 करोड़ बाहर वाले लोगों के पास में है। मतलब उनके
8 करोड़ वोट्स हैं। मेरे 2 करोड़ वोट्स हैं। मुझे तो ये कभी भी बाहर कर देंगे। मैं जो बोलूंगा वो होगा ही नहीं। मीटिंग
में अगर मैं बोल भी दूंगा मेरे 2 करोड़ वोट्स अगेंस्ट में है तो भी बेटा फिर रेोल्यूशन तो पास हो जाएगा ना क्योंकि वो
तो 80% है। मैं तो 20% हूं सिर्फ। ऐसे में प्रमोटर लोग बड़े-बड़े लोग क्या करते हैं? डीवीआर इशू करते हैं कि तुम्हारे पास में
8 करोड़ शेयर्स तो है पर उनकी वैल्यू कितनी है? उनकी वैल्यू मात्र ₹80 लाख की है। ₹80 लाख शेयर्स की है। वो रेश्यो कम
कर देते हैं। उनकी वोटिंग पावर को डाइल्यूट कर देते हैं। इसलिए डिफरेंशियल बोला जाता है। तो सर फिर वो लोग ऐसा क्यों
करेंगे? वो लोग ऐसा क्यों करेंगे सर? हां मैं आपको बताता हूं। वो लोगों को ना डीवीआर लेने पर
डिविडेंड का बेनिफिट होता है। जो नॉर्मल शेयर होल्डर होते हैं ना उनका डिविडेंड अगर ₹10 है तो उनका ₹15 ₹12 होगा। और
नॉर्मल शेयर मार्केट में ₹100 का मिलता है तो डीवीआर 80 60 70 50 कम का मिलता है। ऐसा है। अभी देखो जैसे सीजे अगर वो
यूनिफार्म होता तो कोई दिक्कत की बात नहीं है। मेरे पास में 1.5 लाख शेयर्स हैं तो 1.5 लाख वोट्स हैं। डीजे के पास में 500
शेयर्स हैं तो 500 वोट्स हैं। लेकिन अगर यही डीवीआर होता 10:1 का मतलब 10 शेयर पे एक वोट होता तो भाई साहब क्या होता फिर
क्या होता? हां 1.5 लाख शेयर्स हैं लेकिन उनको मात्र मैं क्या मानता? मैं उनको 15,000 वोट के बराबर ही मांगता। आपको बात
समझ में आ रही है? सर इतनी बड़ी रामायण आपने क्यों करी? अरे आप समझो अगर एक कंपनी है बादशाह लिमिटेड
ये होल्डिंग है कि नहीं है? पप्पू लिमिटेड की अगर मुझे ये प्रूफ करना है तो चलो अपन एक एग्जांपल बनाते हैं। शेयर कैपिटल के
साथ में कैलकुलेशन करेंगे और वोटिंग पावर के साथ में कैलकुलेशन करेंगे। लेट्स से पप्पू लिमिटेड की शेयर कैपिटल 1 लाख
शेयर्स की है। है ना? डिनोमिनेटर में 1 लाख शेयर नीचे रखना। है ना? डिनोमिनेटर में और न्यूमैरेटर में वो कितना होल्ड
करता है? लेट्स से वो 400 शेयर्स होल्ड करता है। तो 400 / 1 लाख कितना हो गया आपका? 40% जो कि 50% से कम है। तो
होल्डिंग सब्सिडरी का रिश्ता नहीं हुआ। ये आपने शेयर कैपिटल से रेश्यो निकालने की कोशिश करी। है ना? अगर मैं ऐसा बोलूं कि 1
लाख टोटल शेयर्स हैं। उसमें से 70,000 तो यूनिफॉर्म है। तो कितने वोट्स हो गए? 70,000 वोट्स हो गए। और 300 डीवीआर है।
किस रेश्यो में है? 10:1 में तो 300 डीवीआर है। मतलब 10 शेयर पे एक ही वोट है तो 300 शेयर्स मात्र 3000 वोट के बराबर
हुए हैं। तो पता है डिनोमिनेटर में क्या आएगा? 73000 ही आएगा क्योंकि यहां पर वोटिंग पावर से मैं कैलकुलेशन कर रहा हूं।
ये 70000 और ये 3000 73000 वोट्स ही आ रहे हैं। अब कहो आप 40 वोट्स डिवाइडेड बाय 73000 वोट्स। भाई साहब अब आ रहा है 54.79
जो 50% से ज्यादा है। होल्डिंग सब्सिडरी का रिश्ता निकल गया है। आपको बात समझ में आई? भाई साहब वोटिंग पावर का देखोगे 50%
तो सही क्राइटेरिया पता चलेगा क्योंकि वोटिंग पावर से कंट्रोल आता है। मुझे उन होल्डर्स को कंट्रोल करके कोई मतलब नहीं
है जिनके पास में वोटिंग पावर नहीं है। इसीलिए डेफिनेशन बनाई गई 46 के अंदर। दो मेथड बनाए गए। दोनों में से कोई भी एक
मेथड अगर फुलफिल हो जाए तो एक को होल्डिंग बोलूंगा, एक को सब्सिडरी बोलूंगा। अगर एक कंपनी दूसरी कंपनी के बोर्ड ऑफ
डायरेक्टर्स का कंपोजिशन होल्ड करती है या तो सारे के सारे बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स का या फिर मेजॉरिटी का या फिर दूसरा मेथड कि
आप मोर देन वन हाफ ऑफ टोटल वोटिंग पावर टोटल वोटिंग पावर मोर देन वन हाफ थोड़ा सा ऑपरेशन करना मेरे साथ में सुनो इधर भाई
साहब मुझे एक बात बताओ मुझे एक बात बताओ अगर 12 डायरेक्टर्स हैं कितने 12 डायरेक्टर्स क्या चार को कंपोज़शन मैं
कंट्रोल करता हूं तो क्या होल्डिंग होगा? नहीं छह को करते हो तो एग्जैक्ट 50% है। लेकिन मुझे मेजॉरिटी चाहिए सेवन सेवन एंड
बिय्ड सेवन एंड बिय्ड की कंपोज़िशन कंपोज़शन मतलब किसको अपॉइंट करेंगे? किसको रिमूव करेंगे
वो क्या काम करेगा वगैरह-वगैरह। दूसरा भाई साहब मोर देन वन हाफ लिखा है यहां पर। देखो मेरी बात सुनो। जब भी आप एटलीस्ट
लिखते हो ना एट लीस्ट एट लीस्ट में 50% भी इंक्लूडेड होता है। है ना? जब आप लिखते हो ना 50% और मोर इसमें भी 50% इंक्लूडेड
होता है। हेलो। लेकिन जब आप लिखते हो ना, हां? बेसिकली जब आप यह लिखते हो 50% और मोर। है ना? 50% और
मोर। भाई साहब, यह नहीं है यहां पर। यहां भी 50% इंक्लूडेड होता है। लेकिन यहां पर लिखा है मोर दैन 1/2। मोर दैन 1/2 में 50%
इंक्लूडेड नहीं है। भाई साहब 50% से ज्यादा चाहिए। 50.01% भी चलेगा। लेकिन 50.01%
चाहिए। मतलब 50% से ज्यादा होना चाहिए। मोर देन वन हाफ मोर देन वन हाफ आपको बात समझ में आ गई
आपको बात समझ में आ गई गाइस एवरीबॉडी अच्छा सुनो मेरी बात सुनो मेरी बात सुनो इसका मतलब क्या हुआ इसका मतलब क्या हुआ
सब्सिडरी होल्डिंग कंपनी कौन होगा हु होल्ड्स है ना हु होल्ड्स हु कंट्रोल्स हु एक्सरसाइजेस क्या या तो कंपोजिशन या फिर
वोटिंग पावर तो फिर 87 के अंदर सब्सिडरी कंपनी कौन होगा इन वि होल्डिंग कंपनी होल्ड्स बस लैंग्वेज का चेंज है। मेथड ए
और बी तो एज इट इज़ ही रहने वाले हैं। नाउ द नेक्स्ट क्वेश्चन कम्स बेटा। हाउ हाउ? तो उन्होंने बोला आप कंट्रोल कर सकते हो
डायरेक्टली और इनडायरेक्टली दोनों तरीके से। क्या बोला उन्होंने? आप डायरेक्टली भी कंट्रोल कर सकते हो। आप इनडायरेक्टली भी
कंट्रोल कर सकते हो। अब देखो भाई साहब। डायरेक्टली मतलब क्या हुआ? डायरेक्टली मतलब क्या हुआ बेटा? होल्डिंग कंपनी ने
सब्सिडरी के अंदर डायरेक्टली यहां पर पैसा लगा रखा है। 50% से ज्यादा। अब दूसरा क्या हुआ? मैं डायरेक्टली तो नहीं लगा रहा हूं।
डायरेक्टली तो कुछ भी नहीं लगाया। लेकिन मेरी एक दूसरी सब्सिडरी है। मैंने उसको बोला कि तू उसके अंदर 62% लगा। यह होता है
इनडायरेक्टली। सर क्या इन दोनों का मिक्स कर सकता हूं मैं? आप मिक्स भी कर सकते हो। होल्डिंग ने
सब्सिडरी के अंदर लगा रखा है डायरेक्टली लेट्स से 20% और मैंने मेरी दूसरी सब्सिडरी को बोल रखा है कि तू इसके अंदर
लगा लेट्स से 42% तो मुझे कहा बताओ 42% + 20% 62% हो गया तो क्या ये जो सब्सिडरी है क्या ये होगी मेरी
सब्सिडरी द आंसर इज़ यस द आंसर इज़ यस इसका मतलब क्या हुआ मैं आपको बताता हूं देखो डायरेक्टली ली और
इनडायरेक्टली को आप लोगों को समझना पड़ेगा। देखो डायरेक्टली मतलब होता है होल्डिंग कंपनी खुद ऑन इट्स ओन पैसा लगा
रही है। मैंने 55% सब्सिडरी में लगाया। 70 65% इसके अंदर लगाया। 62% इसके अंदर लगाया। ये सब मेरी सब्सिडरीज हैं। मैं
डायरेक्टली पैसा लगा रहा हूं। इनडायरेक्टली में मैं क्या कर रहा हूं? मैं चेन इफेक्ट भी बना सकता हूं। कैसे?
दादाजी, पापा और पोता। सुनो। दादाजी ने पैसा लगाया पापा के अंदर 55% तो क्या यह मेरी सब्सिडरी हो गई? द आंसर इज़
यस। फिर मेरी सब्सिडरी ने भी आगे पैसा लगा दिया। तो ये मेरी सब्सिडरी की सब्सिडरी हो गई। उसने 62% पैसा लगा दिया। सब्सिडरी की
सब्सिडरी। तो मुझे एक बात बताओ क्या यह पोता खून तो दादा जी का ही है ना। मतलब मतलब B लिमिटेड जो है B लिमिटेड जो है वो
A लिमिटेड की सब्सिडरी है। A लिमिटेड की सब्सिडरी है जो कि सब्सिडरी है Z लिमिटेड की। तो मुझे एक बात बताओ क्या B लिमिटेड
मेरी भी सब्सिडरी हो गई? द आंसर इज़ यस। इसे हम लोग चेन इफेक्ट कहते हैं। और चेन इफेक्ट का मैजिक ये है भाई साहब कि
सबसे ऊपर वाली कंपनी को बोला जाता है अल्टीमेट होल्डिंग कंपनी। सबसे नीचे वाली कंपनी को बोला जाता है
अल्टीमेट सब्सिडरी कंपनी और बीच वाली कंपनी को बोला जाता है इंटरमीडिएट होल्डिंग कंपनी।
[गला साफ़ करने की आवाज़] आ गई बात समझ में आप लोगों को गाइस एवरीबॉडी क्लियर हुआ कि नहीं हुआ? हां। तो
देखो क्या बोलना चाहता था मैं कि होल्डिंग कंपनी डायरेक्टली पैसा लगा सकती है और होल्डिंग कंपनी डायरेक्टली और
इनडायरेक्टली भी पैसा लगा सकती है। सिंपल सी बात है। मैंने टोटल आपको ये तीन सिचुएशन यहां पर बना के दी है। आप लोग
देखो ये तीन सिचुएशन सिचुएशन नंबर वन आप डायरेक्टली लगाओ। सिचुएशन नंबर टू आप डायरेक्टली कुछ भी मत लगाओ। आप सिर्फ
इनडायरेक्टली लगाओ। और सिचुएशन नंबर थ्री दोनों का मिक्स लगाओ। आप भी लगाओ और आपकी सब्सिडरी कंपनी भी यहां पर लगा रही है।
सिंपल सी बात है। ओके? क्लियर है? आई होप आपको यहां तक समझ में आ गया होगा। देखो अपन इसको थोड़ा और क्लेरिफाई करते हैं।
कुछ इस तरीके से देखो आप इधर आओ। मैं आपको बताता हूं। मैं स्टार शीट की नंबरिंग करूंगा। आपको सब अच्छे से बताऊंगा। आप
चिंता मत करना। ये देखो आप होल्डिंग कंपनी। पहला तरीका डायरेक्टली होल्ड करें। बराबर है। दूसरा तरीका होल्डिंग कंपनी
अपनी सब्सिडरी के थ्रू करें। सब्सिडरी एक से ज्यादा भी हो सकती है। एक से ज्यादा सब्सिडरी भी हो सकती है। हां। जैसे देखो
मैंने एग्जांपल दिया। A ने की एक सब्सिडरी है B. A की दूसरी सब्सिडरी है C. अब A ने डायरेक्टली कोई भी पैसा नहीं लगाया है। ये
वाला केस है। हां। केस नंबर टू है। A ने डायरेक्टली कोई भी पैसा नहीं लगाया है। लेकिन उसकी एक सब्सिडरी ने 25% लगाया और
एक सब्सिडरी ने 26% लगाया। तो क्या D जो है वो A की सब्सिडरी हो गई? हम बोलेंगे डायरेक्टली तो ज़ीरो है। लेकिन
इनडायरेक्टली 25 और 26 51% होता है। व्हिच इज़ मोर दैन 50% तो यस होगा। आपको बात समझ में आई? यह देखो यह हमारा केस नंबर टू है
और एक होता है बेटा होल्डिंग कंपनी डायरेक्टली इनडायरेक्टली दोनों का कॉम्बिनेशन क्रिएट करती है। इसके लिए ना
मैं आपको ये वाले सारे केसेस बताता हूं। देखो मेरे साथ में दो मिनट देखना। केस नंबर थ्री का ऑपरेशन करना मेरे साथ में।
देखो जैसे A B के अंदर 60% होल्ड करता है। तो यह होल्डिंग हो गया। यह सब्सिडरी कंपनी हो गया। यह जो सब्सिडरी कंपनी है, यह C के
अंदर 20% होल्ड करती है। मतलब A क्या A भी C के अंदर डायरेक्टली कुछ होल्ड करता है? द आंसर इज यस। द आंसर इज यस। यह
देखो आप। यस। तो अगर कोई मुझसे पूछे कि A और C के बीच में रिलेशनशिप है क्या? तो मैं
बोलूंगा देखो A जो है वो डायरेक्टली 45% होल्ड करता है। और इनडायरेक्टली वो अपनी सब्सिडरी के थ्रू कौन सब्सिडरी? B के थ्रू
वो 20% होल्ड करता है। व्हिच इज़ 65%। तो मैं बोलूंगा यस यह होल्डिंग हो गया और यह सब्सिडरी हो गया। बराबर है। लेकिन मेरी
बात समझना। अगर मैं ऐसा एग्जांपल बनाऊं कि A B के अंदर मात्र 20% होल्ड करता है। तो ना तो ये होल्डिंग कंपनी है ना ही ये
सब्सिडरी कंपनी है। और B जो है वो यहां पर C के अंदर 20% होल्ड करती है। और A जो है वो डायरेक्टली इसके अंदर 45% होल्ड करता
है। और A और C के बीच में रिलेशनशिप क्या है? मैं बोलूंगा भाई साहब ए डायरेक्टली तो पैसा लगा के रखा है उसने 45% पर क्या
इनडायरेक्टली उसका कोई पैसा लगा हुआ है? द आंसर इज़ ज़ीरो। अरे इनडायरेक्टली तो हम तब काउंट करते हैं जब मेरी सब्सिडरी कंपनी
पैसा लगाती है। जब तू ही मेरी सब्सिडरी नहीं है तो तू 20% जहां पर भी लगाएगा वो मैं कैसे कैलकुलेट करूंगा? तो ये तो मात्र
45% हुआ व्हिच इज लेस देन 50% हेंस ना तो यह होल्डिंग है ना ही यह सब्सिडरी है। आपको बात समझ में आ गई? ठीक है? ओके।
अच्छा एक और ऑपरेशन करना है मुझे। लास्ट ऑपरेशन लास्ट ऑपरेशन मुझे ये करना है। मुझे एक बात बताओ Tata SS प्राइवेट
लिमिटेड के अंदर Tata SS प्राइवेट लिमिटेड आपको मालूम है Tata की जो होल्डिंग कंपनी
है वो प्राइवेट लिमिटेड कंपनी है। उसके नीचे सारी कंपनीज़ आती है TCS, Tata Motors वगैरह सब कुछ और ये इतनी बड़ी-बड़ी
लिस्टेड कंपनीज़ हैं। देखो रिलेशनशिप कंपनी टू कंपनी होता है। मैंने आपको पहले ही बताया था। अगर ईलॉन मस्क मेटा के अंदर 72%
होल्ड करता है तो ईलॉन मस्क होल्डिंग कंपनी नहीं बनेगा। ठीक है? पहली बात ये इंडिविजुअल और कंपनी
का रिलेशनशिप नहीं है। ये कंपनी और कंपनी का रिलेशनशिप है। दूसरा क्या एक कंपनी दो होल्डिंग कंपनी हो सकती है क्या? एक कंपनी
एक कंपनी की दो होल्डिंग कंपनी हो सकती है क्या? देखो ऐसा प्रश्न पूछा जाता है क्योंकि दो मेथड्स है ना बेटा। बेटा
एग्जाम ओरिएंटेड बैच है। बहुत गहराई में जा रहा हूं। प्रीलिमरी बच्चे पढ़ते नहीं है पर प्रीलिमरी का ऑपरेशन भी अलग तरीके
से करता हूं मैं बहुत ज्यादा मेरी बात सुनो पप्पू लिमिटेड और चड्डा लिमिटेड ये दोनों मुझे एक बात बताओ ऐसा हो सकता है
कि चड्डा लिमिटेड मेथड नंबर ए के हिसाब से इसका होल्डिंग कंपनी बन गया मेथड नंबर ए क्या है डायरेक्टर्स की कंपोजिशन को
कंट्रोल करना 12 डायरेक्टर थे ये सात डायरेक्टर को कंट्रोल करता है तो मेथड नंबर ए के हिसाब से ये होल्डिंग बन गया और
मेथड नंबर बी के हिसाब से ये 52% होल्ड करता है तो ये भी होल्डिंग बन गया। क्या ऐसा हो सकता है बेटा? ऑन पेपर थ्योरिटिकली
ये पॉसिबल लग रहा है। बट रियल लाइफ में पॉसिबल नहीं है। क्योंकि इट इज़ ऑफन दैट बोथ दी कंडीशंस आर ओनड बाय वन कंपनी ओनली।
भाई साहब मैं इतना बेवकूफ हूं कि मैं 52% वोटिंग पावर अपने पास रख रहा हूं। तो मेरे डायरेक्टर्स को दूसरे कंट्रोल करेगा? ऐसा
नहीं हो सकता है। थ्यरिटिकली तो यह ठीक लग रहा है लेकिन प्रैक्टिकली यह पॉसिबल बिल्कुल भी नहीं है। ऐसे डाउट क्लासेस में
आए हैं तो मैंने इन लोगों को इन सारी चीजों को अपने लेक्चर के अंदर इंक्लूड कर लिया है। बेटा इंक्लूड कर लिया है। आप बात
समझे? और दूसरी बात ये है कि अगर मैंने मीटिंग बुलाई सारे मेंबर्स की उसमें से मेजॉरिटी मेंबर्स तो मेरे कंट्रोल में
हैं। 52% तो मैं ही होल्ड करता हूं। तो मैं तो बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर्स को ऐसे ही हायर और हायर कर सकता हूं। तो ये पॉसिबल
नहीं है। या तो ये मेथड होता है या ये मेथड होता है। इट इज एन अल्टरनेटिव। आपको बात समझ में आ गई? ठीक है सर इसकी स्टार
शीट्स हम लोगों को क्या-क्या लिखनी रहेगी मैं आप लोगों को बता देता हूं। देखो सबसे पहली स्टार शीट है आपकी ये वाली। इसमें आप
होल्डिंग की और सब्सिडरी की डेफिनेशन लिखोगे। दोनों मेथड्स के बारे में लिखोगे। पॉइंट्स टू कंसीडर में लिखोगे कंपोज़िशन का
मतलब क्या होता है? फिर आप लिखोगे कि एक्सरसाइज और कंट्रोल डायरेक्टली और इनडायरेक्टली दोनों हो सकता है। फिर आप
लिखोगे उसका अगले शीट में हम लोगों ने यहां पर क्या किया है? ऑपरेशन किया है। शीट नंबर टू के अंदर या आप ये तीनों मेथड
लिखोगे। आप ये केस नंबर टू का एग्जांपल यहां पर आप बनाना चाहोगे तो आप बनाओगे। ये आपका शीट नंबर टू हो गया। बराबर है क्लियर
है? अच्छा शीट नंबर वन शीट नंबर टू। ओके सुनो मेरी बात। आगे की बात सुनना। वेट [गला साफ़ करने की आवाज़]
वेट वेट वेट वेट वेट वेट वेट वेट वेट। हां। ठीक है। ओके डन है। ये शीट्स आप लोगों की यहां पर डन होती है। अब सुनना
मेरी बात। आगे की। जब भी आप वोटिंग पावर की बात करते हो मुझे एक बात बताओ। हां। कुछ बातें आपको ध्यान
रखनी पड़ेगी। नोट्स टू कीप इन माइंड। क्या बोला मैंने? नोट्स टू कीप इन माइंड। सुनो मैं कुछ नोट्स आप लोगों को बता रहा हूं।
है ना? पहला नोट आपका ये है। वोटिंग पावर कैलकुलेट करते टाइम आप हमेशा मात्र एंड मात्र आप इक्विटी शेयर्स को ही इंक्लूड
करोगे। देखो प्रेफरेंस शेयर्स जो होते हैं उनके पास में जनरली कोई वोटिंग राइट्स नहीं होते हैं। आपके कन्वर्टेबल प्रेफरेंस
शेयर्स भी है। भाई साहब कन्वर्टेबल है। आज तो वोटिंग राइट्स नहीं है ना उनके पास में। डिबेंचर तो आउट ऑफ क्वेश्चन है। नॉन
कन्वर्टेबल डिबेंचर्स भी आउट ऑफ क्वेश्चन है। ये सारी बातें आपको नहीं करनी है। तो एक बात का आपको ध्यान रखना है यहां पर नोट
नंबर वन के अंदर यू टेक ओनली इक्विटी शेयर्स इन फोकस व्हाइल कैलकुलेटिंग टोटल वोटिंग पावर। बाकी कन्वर्टेबल प्रेफरेंस
शेयर्स को, प्रेफरेंस शेयर्स को, को डिबेंचर्स को सबको आप बाहर कर देना। अगला प्रश्न। अगला प्रश्न ये है। आप ये जो चेन
इफेक्ट बोल रहे हो सर, ये कितने लेयर्स अलाउड है सब्सिडरीज के? अगर एक कंपनी है उसकी इतनी सारी सब्सिडरीज हैं। 1 2 3 4 5
6 7 8 9 वो ऐसे हॉरिजॉन्टली हॉरिजॉन्टली मतलब क्या एक कंपनी की मल्टीपल सब्सिडरीज हो सकती
है। द आंसर इज़ यस। जितनी चाहो उतनी सब्सिडरीज आप रख सकते हो। कोई दिक्कत की बात नहीं है। लेकिन दिस इज कॉल्ड लेयर
नंबर वन। लेयर नंबर वन में आपको जितनी सब्सिडरीज रखनी है आप रखो। अब लेट्स से S3 ने बोला कि मुझे तीन सब्सिडरी बनानी है।
लेट्स से S4 ने बोला कि मुझे दो सब्सिडरी बनानी है। क्या यह वाली लेयर अलाउड है? उन्होंने कहा यह लेयर नंबर टू है। मतलब
सब्सिडरी की सब्सिडरी है। ये अलाउड है। कोई दिक्कत की बात नहीं है। लेकिन आप हॉरिजॉन्टली एक्सपैंड कर सकते हो। पर अब
आप इसके नीचे वर्टिकली एक्सपैंड नहीं कर पाओगे। अब आप बोलोगे कि मुझे लेयर नंबर थ्री बनानी है। नॉट अलाउड। ये S3A अपनी
सब्सिडरी नहीं बना सकता। S3B अपनी सब्सिडरी नहीं बना सकता। ये लेयर नंबर थ्री अलाउड नहीं है। देखो इसके पीछे कारण
है। इसके पीछे कारण ये है कि आप जब भी ना लेयर नंबर वन को ट्रेस कर सकते हो। लेयर नंबर टू को ट्रेस कर सकते हो। लेकिन लेयर
नंबर थ्री अलाउड नहीं है। गवर्नमेंट ट्रेस नहीं कर पाती कि भाई जो काम मैं नहीं कर पा रहा हूं वो मेरी सब्सिडरी की सब्सिडरी
की सब्सिडरी की सब्सिडरी करने लग जाएगी। तो भाई साहब कंप्लायंसेस को करने में बहुत ज्यादा टाइम कंज्यूमिंग हो जाता है। गॉट
इट गाइस एवरीबॉडी? हां। लेकिन ये जो लेयर का कांसेप्ट है इसका कुछ एक्सेप्शन है बेटा। क्या बोला मैंने? लेयर के कांसेप्ट
का एक्सेप्शन है। है ना? कुछ एक्सेप्शन है जहां पर दो से ज्यादा लेयर्स अलाउड होती है। रूल ऑफ टू लेयर्स ऑफ सब्सिडरी इज नॉट
एप्लीकेबल ऑन दिस थ्री केसेस। पहला केस बैंक्स के ऊपर, एनबीएफसीस के ऊपर, गवर्नमेंट कंपनी के ऊपर और इंश्योरेंस
कंपनी के ऊपर यह अलाउड है। उनको बोला है कि देखो तुम तुम्हारा रिकॉर्ड सब मेंटेन रहता है। हमें पता रहता है। तुम दो से
ज्यादा लेयर के सब्सिडरी बना सकते हो। दूसरा दूसरा क्या है? मेरी बात सुनना।
[गला साफ़ करने की आवाज़] एक्सेप्शन नंबर टू समझना। भारतीय लिमिटेड एक कंपनी है। वो विदेशी लिमिटेड को
सब्सिडरी बना रही है। मतलब मैं इंडिया में हूं और मैंने क्या करा? एक बाहर वाली कंपनी को अपना सब्सिडरी बना दिया। भाई
साहब मजा आ गया। अरे अपना वर्चस्व फैल रहा है भाई साहब भारतीयों का। वो जो भारतीय कंपनी की जो सब्सिडरी है ना विदेशी
लिमिटेड जो यूके के अंदर है भाई साहब उसकी दो सब्सिडरी है और उसकी सेकंड सब्सिडरी की भी दो सब्सिडरी है और उसकी एक और सब्सिडरी
की एक और सब्सिडरी है। अब मुझे एक बात बताओ हमारे लॉ के हिसाब से ये लेयर वन सब्सिडरी हो गई। ये लेयर टू सब्सिडरी हो
गई। आप इन सबको तो मना कर दोगे। मेरा कहना है मना क्यों कर रहे हो? अगर हमारी कोई इंडियन कंपनी एक अब्रॉड वाली कंपनी को
सब्सिडरी बना रही है। कंपनी इनकरपोरेटेड आउटसाइड इंडिया और उसके देश में यूके लॉस के हिसाब से वो अलाउड है तो तू बावला
क्यों हो रहा है? अरे बाहर मल्टीपल कंपनीज़ अपनी बन रही है ना। तो उन्होंने बोला वाइल एक्वायरिंग कंपनी इनकॉर्पोरेटेड आउटसाइड
इंडिया हु हैज़ मल्टीपल लेयर्स ऑफ सब्सिडरी कंपनीज़ दो लेयर से ज्यादा भी अलाउड है। और तीसरा है बेटा
कि जब आपकी एक होली ओड सब्सिडरी होती है और होली ओड सब्सिडरी की भी सब्सिडरी होती है तो आप क्या बोलोगे कि मेरी होली ओड
सब्सिडरी मतलब मैं उसके अंदर 1% एक्वायर करके बैठा हुआ हूं और तो ये लेयर वन हो गई और फिर वो होली ओल्ड सब्सिडरी की एक और
सब्सिडरी होगी तो आप उसको लेयर टू बोलोगे लेकिन ऐसा नहीं होता ओड सब्सिडरी को लेयर नंबर वन नहीं माना जाता है लेयर नंबर वन
यहां से कैलकुलेट होगी मतलब यह कंपनी एक और लेयर ऐड ऐड कर सकती है। ऐसा यहां पर एक्सेप्शन क्रिएट किया गया है। गॉट इट
गाइस एवरीबॉडी? क्लियर है? है ना? अब मेरी बात सुनो। एक और यहां पर एक और यहां पर नोट है। एक और नोट है। ये नोट नंबर टू था।
अब मैं आपको नोट नंबर थ्री बताता हूं। हां। नोट नंबर थ्री। ये देखो आप। नोट नंबर थ्री क्या बोलता है? कि जब आप
फिडशरी कैपेसिटी में क्या बोला मैंने? जब आप फिडशरी कैपेसिटी में दूसरी कंपनी के अंदर शेयर्स को होल्ड करते
हो तो उसे होल्डिंग और सब्सिडरी के रिलेशन के लिए कंसीडर नहीं किया जाता है। फिड्यूसरी का मतलब होता है ट्रस्ट।
फाउंडेशन में आप लोगों ने पढ़ा है मिनिस्ट्री ने क्लेरिफाई किया है नोटिफिकेशन निकाल के। शेयर्स हेल्ड बाय अ
कंपनी इन अनदर कंपनी इन फिड्यूशरी कैपेसिटी शैल नॉट बी काउंटेड फॉर दी पर्पस ऑफ डिटरमाइनिंग होल्डिंग सब्सिडरी
रिलेशनशिप। इसका एग्जांपल मैं आप लोगों को बताता हूं। फिडशरी कैपेसिटी में लेट्स से रतन टाटा सर है। रतन टाटा सर ने 72% का
इन्वेस्टमेंट कर रखा है सुविधा लिमिटेड के अंदर। बराबर है। अच्छा मेरी बात समझना। अब रतन टाटा सर के आगे पीछे कोई भी नहीं है।
एक मास्टर खैतान नाम का बच्चा है। वो माइनर है। उन्होंने बोला मैं जब तक चले जाऊंगा उसके बाद में सारी प्रॉपर्टी उसको
दे देंगे। पर आज तो नहीं दे सकते। सो अंटिल ही बिकम्स अ मेजर उन्होंने अपनी TS प्राइवेट लिमिटेड को बोला कि तुम इसके
बिहाफ पर मेरे सारे इन्वेस्टमेंट्स को होल्ड करो। अब रतन टाटा सर के सारे इन्वेस्टमेंट्स में यह सुविधा लिमिटेड का
इन्वेस्टमेंट भी आ गया 72% का। तो मुझे एक बात बताओ जब मैं यहां पर TS की बैलेंस शीट देखूंगा तो TS के इन्वेस्टमेंट में अब
क्या दिखेगा? सुविधा लिमिटेड दिखेगा। तो टाटा SS प्राइवेट लिमिटेड आप यह बोलना चाह रहे हो कि सुविधा के अंदर होल्ड करती
है 72% करती तो है लेकिन वो मिस्टर खैतान के नाम पर उनके बिहाफ पर एज अ ट्रस्टी होल्ड करती
है तो TS विल होल्ड द इन्वेस्टमेंट ऑन बिहाफ ऑफ़ मिस्टर खैतान एज अ ट्रस्टी इन अ फिडशरी कैपेसिटी बट उसको हम होल्डिंग
सब्सिडरी के रिलेशनशिप में कैलकुलेट नहीं करते। आपको बात समझ में आ गई गाइज़? क्लियर है?
बराबर है? चलो। तो अब आपके पेजेस कौन-कौन से हो गए? मैं आप लोगों को बता देता हूं। देखो आपने पेज नंबर वन आपका ये हो गया जो
आप लोगों को लिखना है। पेज नंबर टू ये हो गया आप लोगों का। है ना? इसके बाद में आपका पेज नंबर थ्री पता है कौन सा है?
एक्सेप्शन वाला है। हां, एक काम करो। इसको पेज नंबर थ्री नहीं। पेज नंबर थ्री इसको बनाओ आप। ये
देखो। कुछ इंपॉर्टेंट पॉइंट्स मैंने एक साथ डाल दिए। होल्डिंग कंपनी खुद कंट्रोल कर सकती है। डायरेक्ट टुगेदर विद वन ऑफ़
मोर सब्सिडरीज। मेथड नंबर टू एंड थ्रू इट्स सब्सिडरीज ओनली तीन फॉर द पर्पस ऑफ़ दिस क्लॉज़ कंपनी इंक्लूड्स बॉडी कॉर्पोरेट
आल्सो। ठीक है? होल्डिंग सब्सिडरी रिलेशन कंपनीज़ के बीच में होता है। इंडिविजुअल्स के बीच में नहीं होता। नोट वन फॉर
कैलकुलेटिंग वोटिंग पावर इक्विटी शेयर्स को आप रखना। प्रेफरेंस शेयर्स को, कन्वर्टेबल को, डिबेंचर्स को सबको इग्नोर
करना। नोट नंबर टू दो लेयर्स ही अलाउड है होल्डिंग सब्सिडरी की। यह पहली लेयर, यह दूसरी लेयर। लेकिन इसके कुछ एक्सेप्शनंस
हैं। एक्सेप्शन के लिए आपको क्या करना है? अगली शीट यहां पर देखना है जो मैंने आप लोगों को बनाकर दी है। नोट नंबर थ्री क्या
है? डू नॉट काउंट शेयर्स इन द फिडशरी कैपेसिटी। इन ट्रस्ट या एज अ ट्रस्टी होल्ड किया गया
है। तो होल्डिंग सब्सिडरी का रिलेशनशिप निकालने के लिए आप इसको मत देखिए। ये तीसरी शीट है। फिड्यूशरी कैपेसिटी की चौथी
शीट है और आपकी एक्सेप्शन की ये पांचवी शीट है। टोटल ऐसी पांच शीट्स हैं जो आप लोगों को यहां पर लिखना है होल्डिंग
सब्सिडरी के चक्कर में। ठीक है? ओके। क्लियर है? अब मेरी बात सुनो। अब मेरी बात समझना। ठीक है? अगला आता है बेटा एसोसिएट
कंपनी। क्या आता है? एसोसिएट कंपनी। ये क्लॉज़ नंबर सिक्स के अंदर है। अब कंपनी वेयर अनदर कंपनी होल्ड्स सिग्निफिकेंट
इन्फ्लुएंस। अब एक बात ध्यान रखना। सिग्निफिकेंट इन्फ्लुएंस का मतलब होता है एट लीस्ट 20%
एटलीस्ट 20% मतलब 20% मिनिमम चाहिए। 19.99 भी नहीं चलेगा। पर यह सब्सिडरी कंपनी नहीं होती है। इसका इंटरप्रिटेशन यह है कि
मैक्सिमम 50% ही हो सकता है। अगर 50% से एक भी डेसिमल ज्यादा हुआ बच्चा तो फिर वो सब्सिडरी का रिलेशनशिप बन जाएगा। ठीक है?
इट इंक्लूड्स जॉइंट वेंचर। जॉइंट वेंचर के अंदर जैसे आपका आया Tata कंज्यूमर ने जॉइंट वेंचर करा स्टारbux कॉफीed के साथ
में और उन्होंने क्या बनाया? Tata Starbux तो यह Tata का भी एसोसिएट कंपनी है और यह Starbux का भी एसोसिएट कंपनी है। कौन?
Tata Starbux जैसे विस्तारा एयरलाइंस बनी थी। Tata और सिंगापुर एयरलाइंस ने मिलकर बनाई थी। तो एसोसिएट कंपनी यही होती है।
लेकिन एसोसिएट कंपनी की डेफिनेशन के दो तरीके हैं। सर क्या बात कर रहे हो? हमने फाउंडेशन में तो नहीं पढ़ा। आप पढ़ो बेटा।
अभी पढ़ो आप। आप देखो मेरी बात सुनो। मेरी बात सुनो। ऐसी कंपनी जो दूसरी कंपनी के अंदर सिग्निफिकेंट इन्फ्लुएंस होल्ड करती
है पर जो कि सब्सिडरी कंपनी नहीं है और उसके अंदर जॉइंट वेंचर इंक्लूड होता है। एटलीस्ट 20% हो गया बट मैक्सिमम 50% हो
गया। सिग्निफिकेंट इन्फ्लुएंस क्या होता है? मैंने आपको बता दिया। अब सुनना ये और के बाद में पढ़ना और कंट्रोल
ऑफ और और पार्टिसिपेशन इन बिजनेस डिसीजन अंडर एन एग्रीमेंट। उनका कहना है या तो आप 20% टोटल वोटिंग पावर को कंट्रोल कर लो
वरना अगर आप एक कंपनी हो वो पार्टिसिपेट करती है व लिमिटेड के अंदर मात्र 12% ही होल्ड करती है लेकिन व लिमिटेड के जितने
भी बिजनेस डिसीजंस हैं और मीटिंग्स हैं उन दोनों के बीच में ऐसा एग्रीमेंट हुआ है कि मैं बताऊंगी तुम वो धंधा करोगे तो बेटा
बात खत्म तो परसेंटेज के हिसाब से तो आप एसोसिएट कंपनी कंपनी नहीं हूं। लेकिन अंडर एन
एग्रीमेंट आपने ऐसा बोल रखा है कि मैं आपके सारे बिजनेस डिसीजंस में और मीटिंग्स में यहां पर पार्टिसिपेट करूंगी। तो आप
सिग्निफिकेंट इन्फ्लुएंस रखते हो। और ये जो एसोसिएट कंपनी का पॉइंट है ना बेटा एसोसिएट कंपनी का पॉइंट है। इसमें भी
फिड्यूशरी रिलेशनशिप वाला पॉइंट सेम है। कि फिड्यूसरी रिलेशनशिप को हम कंसीडर नहीं करते हैं एसोसिएट कंपनी का रिलेशनशिप चेक
करने के लिए। इसलिए आप ऊपर देखोगे ना तो ऊपर वाली स्टार शीट में मैंने यहां पर छोटा सा लिख रखा है दैट दिस रूल फिडशरी
कैपेसिटी वाला जो रूल है इट इज आल्सो एप्लीकेबल इन केस ऑफ एसोसिएट कंपनी। ठीक है? तो आओ एसोसिएट कंपनी की डेफिनेशन क्या
बनी बेटा? ये देखो क्लॉज़ नंबर सिक्स के अंदर ये देखो होल्डिंग सब्सिडरी बोला जाता है। कभी भी होल्डिंग और एसोसिएट नहीं बोला
जाता है। इस बात का ध्यान रखना। इट इज़ अ रिलेशनशिप विद अनदर कंपनी। है ना? इट मींस अ कंपनी व्हिच हैज़ सिग्निफिकेंट
इन्फ्लुएंस मिनिमम एटलीस्ट 20% बट मैक्सिमम 50% और कंट्रोल ऑफ और पार्टिसिपेशन इन द बिनेस डिसीजंस अंडर
एग्रीमेंट। अंडर एग्रीमेंट की वजह से ऐसा होता है जो सब्सिडरी कंपनी नहीं होती है और जिसके
अंदर जॉइंट वेंचर आता है और फिडशरी को हम यहां पर भी इग्नोर करते हैं। गॉट इट गाइस? यह आपकी एसोसिएट कंपनी का यहां पर सारा
हमने यहां पर डिस्कशन कर लिया है। इसी के साथ में ऑन द बेसिस ऑफ लायबिलिटीज भी हमारा यहां पर खत्म होता है। ओके नाउ
लेट्स गो अहेड। अ इसके कुछ क्वेश्चंस हैं। मैं आपको दो क्वेश्चंस ना यहां पर थोड़े से होमवर्क में दे रहा हूं। मैंने सब कुछ
यहां पर एमसीक्यूस वगैरह डाल रखे हैं। बहुत सेल्फ अंडरस्टैंडेबल है। आप लोग यहां से देख सकते हो। चूंकि एग्जाम ओरिएंटेड
है। आपको ये सारी चीजें मिलेगी तो सही। बट ये आपको खुद को करनी पड़ेगी। ये मैं होमवर्क में डाल रहा हूं। दो क्वेश्चंस
मैं आप लोगों को दे रहा हूं ऑफ माय बुक। क्वेश्चन नंबर नाइन ये आप लोगों के होमवर्क की कैटेगरी में जाएगा।
है ना? ये आपके होमवर्क की कैटेगरी में जाएगा। क्वेश्चन नंबर नाइन एंड क्वेश्चन नंबर 10। बहुत अलग क्वेश्चंस नहीं है। आप
लोगों के देखे हुए क्वेश्चंस हैं फाउंडेशन लेवल के। तो आप लोग ईजीली कर पाओगे। नाउ लेट्स कम ऑन अ द अदर क्लासेस ऑफ़ कंपनीज़।
अदर क्लासेस ऑफ कंपनीज में हम लोगों को सेक्शन एट कंपनी से लेकर पीएफआई तक यहां पर देखना है। सेक्शन एट कंपनी के बारे में
अगर मैं आप लोगों को बोलने का कोशिश करूं। ठीक है? तो सेक्शन एट कंपनी देखो हिंदुस्तान में अगर आप यहां पर कोई भी
चैरिटेबल अ पर्पस के लिए कोई भी यहां पर एंटिटी बनाना चाहते हो। आपके पास में पहला तरीका है आप कंपनी बनाओ तो सेक्शन एट
कंपनी बना सकते हो या फिर आप ट्रस्ट बना सकते हो या फिर आप एक कोऑपरेटिव सोसाइटी भी बना सकते हो। ये सब तरीके हैं जो यहां
पर इंडिया के अंदर अवेलेबल हैं। अगर आप ट्रस्ट बनाते हो तो 12 ए का आपको सर्टिफिकेट लेना पड़ता है सोसाइटी का
अलग-अलग यहां पर एक्ट्स बने हुए हैं स्टेट लेवल पर और सेंट्रल लेवल पर दोनों पे। लेट्स से हमारे एसआर के भाई हैं। हमारे
एसआर के बाबू ने एक फाउंडेशन बनाया मीर फाउंडेशन। यह जो मीर फाउंडेशन है, यह एसिड अटैक सर्वाइवर्स जितने भी वुमेन है, है
ना? उनके लिए काम करता है। उनकी फैमिलीज को सपोर्ट करता है। उनकी सर्जरीज के लिए हेल्प करता है। जो सर्वाइवर्स हैं, उनके
लिए काम करता है। ये उसका ऑब्जेक्ट है और ये उसका पर्पस है। बात ये है आप बोलोगे कि सर एक चैरिटेबल काम कर रहा है व्यक्ति तो
उसको कुछ भी करने दो ना। ऐसा नहीं होता है बेटा। कंपनी बनी है ना। कंपनी बनी है और कंपनी का ऑब्जेक्ट क्लॉज़ के अंदर ऑब्जेक्ट
होता है। आप लोगों को पता है। आप जो ऑब्जेक्ट यहां पर बना रहे हो आप उसी के लिए काम कर पाओगे। दूसरी बात गवर्नमेंट
आपको क्या करती है? गवर्नमेंट आपको हेल्प करती है। गवर्नमेंट आपको ग्रांट्स देती है। आपके पास में डोनेशंस आते हैं। तो
कभी-कभी क्या होता है कि जितना पैसा आपके पास में आया है उतना खर्च नहीं हो पाता है। तो जो भी पैसा सरप्लस आपके पास में
बचता है वो प्रॉफिट नहीं होता है। सरप्लस है। क्या वो आप डिस्ट्रीब्यूट कर सकते हो अपने मेंबर्स को एज डिविडेंड? द आंसर इज़
नो। तो पहली बात आपका अगर कोई भी पैसा बचता है आपको अपने ऑब्जेक्ट के प्रमोशन में ही लगाना है। एंड यू आर प्रोहिबिटेड
फ्रॉम पेमेंट ऑफ डिविडेंड टू योर ओन मेंबर्स। आपका चैरिटेबल ऑब्जेक्ट होना चाहिए जो आपको रजिस्टर यहां पर करना
पड़ेगा। लाइसेंस देने वाली जो एंटिटी है बेटा वो सेंट्रल गवर्नमेंट ने ये काम दे रखा है आरओसी को। पर लाइसेंस अगर वापस
लेना है रिवोक। सर ऐसा भी होता है क्या? द आंसर इज़ यस। वो काम रीजनल डायरेक्टर के पास में है। देखो वैसे तो ये कंपनी भी
लिमिटेड लायबिलिटी कंपनी के नेचर की होती है। है ना? इस कंपनी को भी अपने नाम के पीछे कुछ भी लगाने की जरूरत नहीं है। इस
कंपनी को ना तो प्राइवेट लिमिटेड लगाने की जरूरत है ना लिमिटेड लगाने की जरूरत है। बराबर है। सर लाइसेंस आप क्यों रिवोक कर
रहे हो? मैं आपको बताता हूं। रीज़न क्या है? तीन रीजंस हो सकते हैं। या तो आपने सेक्शन एट का कॉन्टवेंशन किया है या आपके
जो अफेयर्स हैं कंपनी के वो फ्रॉडुलेंट तरीके से यहां पर चलाए जा रहे हैं या फिर आपने ऐसा काम किया है जो पब्लिक इंटरेस्ट
के खिलाफ है। वन टू एंड थ्री। अगर इन तीनों में से कुछ भी काम होता है तो रीजनल डायरेक्टर क्या करेगा? मैं आपको बताता
हूं। रीजनल डायरेक्टर आपको रिटर्न नोटिस देगा। रिटर्न नोटिस देगा। कारण बताएगा। बोलेगा कि आपको मैं अपॉर्चुनिटी देता हूं।
अगर आपको कुछ बोलना है तो बोलो। ठीक है? अब इसमें क्या होगा? मैं आपको बताता हूं। क्या-क्या ऑर्डर्स यहां पर आ सकते हैं।
टोटल यहां पर तीन तरीके के ऑर्डर्स यहां पर आ सकते हैं। पहला ऑर्डर आ सकता है कि रीजनल डायरेक्टर आपको बोल सकता है कि आप
अमलगमेट हो जाओ। जैसे मीर फाउंडेशन का लाइसेंस जा रहा है। 100 करोड़ का उसके पास में फंड रखा हुआ है। अब उसका क्या होगा?
तो यहां पर रीजनल डायरेक्टर बोल सकता है कि एक काम करो आप डियर फाउंडेशन के साथ में आपको हम अमेल्गमेट कर देते हैं। लेकिन
डियर फाउंडेशन एनिमल सेफ्टी के ऊपर काम करता है। क्या हो पाएगा? द आंसर इज़ नो। वैसे भी सलमान खान चलाता है डियर
फाउंडेशन। आई डोंट नो क्यों चलाता है मुझे नहीं पता। लेकिन डीए फाउंडेशन का ऑब्जेक्ट अलग है और आपका ऑब्जेक्ट अलग है। आप एसिड
अटैक सर्वाइवस के लिए काम कर रहे हो। वह काम कर रहा है एनिमल्स के लिए। आई थिंक प्रोटेक्शन के लिए। है ना? तो उन्होंने ये
बोला हम अमलगमेशन करने देंगे बट ऑब्वियसली विद द सिमिलर ऑब्जेक्ट कंपनीज़ ओनली। दूसरा तरीका यहां पर होता है आपको वाइंडिंग अप
का बोला जा सकता है कि आप वाइंड अप हो जाओ। जब भी वाइंड अप होता है ना तो आपके एसेट्स को डिस्ट्रीब्यूट किया जाता है और
इनसॉल्वेंसी बैंककरप्स कोड के अंदर आपको डाल दिया जाता है। और तीसरा यहां पर हो सकता है कि आपको बोला जा सकता है कि अब आप
कन्वर्ट हो जाओ। सिंपल सी बात है। ठीक है? अगर आप कोई भी कॉन्ट्रावेंशन करते हो तो आपके ऊपर यह पेनल्टी लगाई जाती है। यह
पेनल्टी कंपनी के ऊपर डायरेक्टर्स और ऑफिसर्स के ऊपर रहती है। यह आप लोग यहां पर देख सकते हो। इसकी जो पहली स्टार शीट
है, वह मैं आप लोगों को बता देता हूं। है ना? उसके पहले मैं आप लोगों को कुछ बता देता हूं। सेक्शन एट कंपनी को भी कुछ
रिलैक्सेशंस दिए जाते हैं। बेटा, है ना? सेक्शन एट कंपनी को भी बहुत सारे रिलैक्सेशन दिए जाते हैं। वो क्या
रिलैक्सेशंस हैं? मैं आपको 2 मिनट के अंदर बताने वाला हूं। है ना? आप लोगों ने जैसे ओपीसी के लिए पढ़ा है ना वैसे ही है। ठीक
है? बट मैं आपको एक इंपॉर्टेंट पॉइंट बताना चाहता हूं। दो दो इंपॉर्टेंट पॉइंट। पहला पॉइंट ये है। क्या एक पार्टनरशिप
फर्म सेक्शन एट कंपनी के अंदर मेंबर बन सकती है? क्या? देखो, कितने भी इंडिविजुअल पर्सन मेंबर बनना चाहे वह सेक्शन एट कंपनी
के अंदर बन सकते हैं। वॉट इफ़ एक पार्टनरशिप फर्म है। अब पार्टनरशिप फर्म के अंदर बेसिकली क्या होते हैं? पार्टनर्स
ही होते हैं। तो पार्टनरशिप फर्म के अंदर अगर चार पार्टनर्स हैं वो एक साथ यहां पर मेंबर बनना चाहते हैं थ्रू पार्टनरशिप
फर्म। क्या वो बन सकते हैं? द आंसर इज़ यस। बिल्कुल बन सकते हो। तो पहला पॉइंट तो ये क्लियर है। अ पार्टनरशिप फर्म कैन बी अ
मेंबर इन सेक्शन एट कंपनी एज वेल। दूसरा पॉइंट बहुत इंपॉर्टेंट है। इसके ऊपर क्वेश्चन भी आता है। देखो मेमोरेंडम और
आर्टिकल को ऑल्टर करना बड़ी बात है। और मेमोरेंडम को ऑल्टर करना ज्यादा कठिन होता है आर्टिकल को ऑल्टर करने से। क्योंकि
मेमोरेंडम जो आपका है ना बेटा वो मेन डॉक्यूमेंट है। सेक्शन एट कंपनी को बोला कि अगर आपको मेमोरेंडम ऑल्टर करना है आपको
मतलब बेसिकली अपना ऑब्जेक्ट क्लॉज़ अगर अमेंड करना है तो आपको अप्रूवल लेना पड़ेगा रीजनल डायरेक्टर का।
और अगर आपको आर्टिकल ऑफ एसोसिएशन को यहां पर ऑल्टर करना है तो आपको अप्रूवल लेना पड़ेगा आरओसी का। सिंपल सी बात है। क्लियर
है? क्लियर है गाइस? अब कुछ रिलैक्सेशंस की अगर मैं बात करूं आप लोगों से। है ना? तो मैं आपको बता देता हूं। आपकी शीट नंबर
वन ये है। दिस इज़ योर शीट नंबर वन गाइज़। है ना? शीट नंबर वन में मैंने सारे पॉइंट लिख दिए हैं। पार्टनरशिप फर्म कैन बिकम अ
मेंबर। मैंने आप लोगों को बता दिया है यहां पर। आप लोग देख लो चैरिटेबल पर्पस प्रमोट करने के लिए प्रोहिबिटेड है
डिविडेंड के लिए लाइसेंस आरओसी देगा लिमिटेड कंपनी होती है ये शब्द यूज़ करने की जरूरत नहीं है रिटर्न नोटिस
अपॉर्चुनिटी देने के बाद में इन तीनों में से कोई भी कारण हुए तो रिवोक कर देंगे ऑर्डर दिया जा सकता है कन्वर्ट करने का
वाइंड अप करने का अमेल्गेमेट करने का ये तीनों चीजें मैंने आप लोगों को यहां पर बता दी है ठीक है इसमें ये तीनों काम
किसके बिना नहीं होंगे बेटा हां रिवोकेशन ऑफ लाइसेंस का काम किसको दे रखा है। अगर आपको लिखना है तो आप यहां पर लिख सकते हो
रिवोकेशन बाय रीजनल डायरेक्टर। और जब भी वाइंडिंग अप का बात आता है ना बेटा तो आपके एसेट्स को ट्रांसफर कर दिया जाता है।
हां टू अदर सेक्शन एट कंपनी है ना? और आपको डाल दिया जाता है इनसॉल्वेंसी बैंककर कोड के हिसाब से। यहां पर आपको
बोला जाता है। ठीक है? ओके? क्लियर है? तो ये आपका [गला साफ़ करने की आवाज़] अ ये आपका ये वाला पॉइंट हो गया। करेक्ट
है? इसके अलावा जो मेजर पॉइंट्स आप लोगों को लिखना है वो कौन से लिखना है मैं आपको बता देता हूं। वैसे तो इस शीट के अंदर सब
कुछ आ गया है। है ना? फिर भी अगर आपको कुछ लिखना है तो आप ये दो दो पॉइंट और लिख सकते हो जो मैंने यहां पर लिखा है। ठीक
है? मैं स्टार नहीं लगा रहा हूं बट आपको समझ में आ जाएगा। और तीसरी शीट अगर आप लोगों को लिखनी है तो आप ये रिलैक्सेशन की
शीट यहां पर लिख सकते हो। जैसे सेक्शन एट कंपनी को जनरल मीटिंग का नोटिस देने की जो बाकी सारी कंपनीज के लिए 21 डेज की
रिक्वायरमेंट है वो इसके लिए मात्र 14 डेज की रिक्वायरमेंट है। है ना? दूसरा मिनिमम नंबर ऑफ डायरेक्टर्स इनके लिए थोड़ी सी
अलग संख्या दे रखी है। है ना? इंडिपेंडेंट डायरेक्टर इनके ऊपर एप्लीकेबल नहीं होता है। बहुत सारी कमिटीज होती है जो इनको
बनाने की जरूरत नहीं होती है। बोर्ड मीटिंग से रिलैक्सेशन जो रिलेटेड है वो इनको भी दे रखा है। जैसे ओपीसी को
रिलैक्सेशंस होते हैं। जैसे कैश फ्लो स्टेटमेंट नहीं बनाना है। ओपीसी को एनुअल रिटर्न छोटा बनाकर देना अलाउड है। है ना?
ओपीसी को फाइनेंसियल स्टेटमेंट और बोर्ड रिपोर्ट की साइनिंग पर रिलैक्सेशन दे रखा है। एजीएम के प्रोविजंस ओपीसी के ऊपर
एप्लीकेबल नहीं होते हैं। बोर्ड मीटिंग से रिलैक्सेशन इनको दे रखा है। वैसे इनको भी दे रखा है।
क्लियर है? ओके एवरीवन? ये आपके लिए सेक्शन एट कंपनी है जो मैंने आप लोगों को यहां पर एक्सप्लेन किया है। है ना? सिंपल
सी बात है। ओके? आ जाओ। आगे चलते हैं। मेरी बात समझने की कोशिश करना। एक दो क्वेश्चन अगर आप लोगों को देखना हो तो
देखो। जैसे ये क्रिकेट क्लब है। है ना? ये क्रिकेट क्लब है। सुनो मेरी बात। अ क्रिकेट को प्रमोट करने के लिए
डिस्ट्रिक्ट लेवल पे है ना? इन लोगों को ये लोग मैचेस करवाते हैं। सरप्लस आ गया। अफेयर्स जो है कंपनी के वो फ्रोडुलेंटली
चल रहे हैं। डिविडेंड भी इन लोगों ने अपने मेंबर को दे दिया है। इज देयर एनी प्रोविज़ अंडर द कंपनीज़ एक्ट टू रिवोक द लाइसेंस? द
आंसर इज़ यस। है? रिवोक करने के लिए है। आपने गलत काम किया है। आपने डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूट कर दिया और आपने यहां पर
फ्रॉडेंट तरीके से अफेयर्स कर रहे हो। सिंपल सी बात है। तीन तरीके बोले जा सकते हैं। अमलगमेशन, कन्वर्शन या वाइंड अप।
कंपनी क्या वाइंड अप हो सकती है? द आंसर इज़ यस। क्या इसको मर्ज कर सकते हैं हम दूसरी नेट प्राइवेट कंपनी के साथ में? जो
नेटवर्किंग के बिनेस में? नो। हमेशा होगी तो सिमिलर ऑब्जेक्ट वाली कंपनी के साथ में होगा। कोई मिनिमम पेड अप शेयर कैपिटल की
रिक्वायरमेंट होती है क्या सेक्शन एट कंपनी को? द आंसर इज़ नो। क्या एक फर्म मेंबर बन सकती है? द आंसर इज़ यस। क्या
सेक्शन एट कंपनी डिविडेंड दे सकती है मेंबर को? द आंसर इज़ नो। सिंपल सी बात है। छोटे-छोटे क्वेश्चंस हैं गाइस। छोटे-छोटे
क्वेश्चंस हैं। अच्छा मुझे एक बात बताओ। सेक्शन अ आर्टिकल्स हैं सेक्शन एट कंपनी के। उसको उसने ऑल्टर कर दिया स्पेशल
रेोल्यूशन पास करके। है ना? एंड देयर आफ्टर इंटिमेशन फॉर द सेम हैज़ बीन गिवन टू आरओसी। अच्छा मुझे एक बात बताओ मेमोरेंडम
को ऑल्टर करने के लिए किसका अप्रूवल लगता है? मैंने आपको बताया रीजनल डायरेक्टर और आर्टिकल ऑफ एसोसिएशन के लिए किसका अप्रूवल
लगता है? आरओसी का। आपको समझ में आ रहा है ना? अप्रूवल चाहिए। अप्रूवल और इंटिमेशन में फर्क है। अप्रूवल मतलब होता है पूछना
और इंटिमेशन मतलब होता है बताना। क्या ये आपका जो ऑल्टरेशन है ये उसके एक मेंबर ने अपोज कर दिया। और उसका मेंबर कौन है?
पार्टनरशिप फर्म। उसने बोला कि ये ऑल्टरेशन आपका वैलिड नहीं है। बताओ क्या इस मेंबर ने जो अ बात उठाई है क्या वो सही
है? द आंसर इज़ यस। और क्या यह मेंबर बनके रह सकता है? यस। पार्टनरशिप फर्म कैन बिकम अ मेंबर।
भाई साहब क्यों? आपने इंटिमेशन लिया है। आपने अप्रूवल नहीं लिया है। इतने बड़े नहीं हो गए हो आप। इतने बड़े आप नहीं हुए हो।
क्लियर है? ओके गाइज़ एवरीबॉडी? चलो एक और क्वेश्चन दिखाता हूं मैं। एक और क्वेश्चन। सुनो मेरी बात। ये वाला क्वेश्चन देखो। एक
क्वेश्चन आप लोग पढ़ना शांति से। इस क्वेश्चन में जो रेड मार्किंग मैंने कर रखी है। सुनो। उसमें पता है इन्होंने क्या
लिखा? इस कंपनी ने सेक्शन एट कंपनी ने अपने आर्टिकल में एक बात लिखी कि जब भी यह
कंपनी डिॉल्व होगी तो जितने भी एसेट्स बचेंगे उन एसेट्स को हम एलोकेट कर देंगे अपने मेंबर्स के बीच में। भाई साहब आप ऐसा
नहीं कर सकते हो। जितना भी सरप्लस होता है वो मेंबर्स के बीच में एलोकेट नहीं हो सकता है। इस बात का आपको ध्यान रखना। नाउ
अंडरस्टैंड फ्यू थिंग्स। यहां तक की बात जो आपने पढ़ी है बेटा है ना? यहां तक की जो बात आप लोगों ने पढ़ी है वो तो बेसिक
चैप्टर नंबर वन के अंदर कवर्ड है। है ना? लेकिन अब मैं यहां पर कुछ कवर करने वाला हूं। सेक्शन एट कंपनी से कन्वर्शन रिलेटेड
बातें। ये कवर किया गया है बेटा सेकंड चैप्टर के अंदर। मैंने आपको पहले भी बताया था। लेकिन
हम इसको यहां पर ही कवर कर रहे हैं। देखो आरओसी के पास में पावर है। आरओसी के पास में पावर है लाइसेंस को इशू करने का।
मैं कह रहा हूं रिवोक करने का रिवोक करने का जो पावर है वह रीजनल डायरेक्टर के पास में है। आपको क्या लगता है अगर सेक्शन एट
कंपनी को किसी दूसरी कंपनी के अंदर कन्वर्ट होना है तो यह पावर भी रीजनल डायरेक्टर के पास में ही है। तो पहली बात
तो ये नक्की हो गई कि भाई साहब रीजनल डायरेक्टर ही यहां पर कन्वर्शन की बातें करता है।
क्या सेक्शन एट कंपनी एनी काइंड ऑफ कंपनी में कन्वर्ट हो सकती है? द आंसर इज़ यस बट दो कंपनीज़ को छोड़कर ओपीसी और स्मॉल। ओपीसी
और स्मॉल। देखो आप खुद एक प्राइवेट कंपनी हो। सेक्शन एट कंपनी चाहती है कि मैं एक
नॉर्मल प्राइवेट कंपनी बनूं। आप बन जाओ। देखो प्राइवेट कंपनी में दो तीन हिस्से हो गए। एक ओपीसी प्राइवेट कंपनी है। एक स्मॉल
प्राइवेट कंपनी है। आप इन दोनों में नहीं बन सकते। आप एक नॉर्मल प्राइवेट कंपनी के अंदर कन्वर्ट हो सकते हो। कोई दिक्कत की
बात नहीं है। क्लियर है गाइस? ओके। अब मेरी बात सुनो। सर अगर किसी कंपनी को कन्वर्ट करना है, सेक्शन एट कंपनी को किसी
दूसरी कंपनी में कन्वर्ट करना है, तो भाई साहब हम लोग क्या करेंगे? पावर है रीजनल डायरेक्टर के पास में। जनरल मीटिंग बुलाई
जाएगी मेंबर्स की। वोटिंग करवाई जाएगी और एसआर पास करवाया जाएगा। एसआर मतलब 75% देखो जब भी आप मीटिंग बुलाते हो, आप लोगों
को मालूम है ना? मीटिंग बुलाने के लिए सारे मेंबर्स को नोटिस देना पड़ता है और नोटिस के साथ में आपको एजेंडा लिखना पड़ता
है और एक्सप्लनेटरी स्टेटमेंट अटैच करना पड़ता है। है ना? 21 डेज की रिक्वायरमेंट नहीं है सेक्शन एट कंपनी को 14 दिन। तो
मीटिंग बुलाने के पहले 14 दिन पहले नोटिस देंगे। उसमें सारी डिटेल्स लिखेंगे, रीज़न लिखेंगे कि हम ये मीटिंग क्यों बुला रहे
हैं। पॉइंट नंबर टू। है ना? पॉइंट नंबर थ्री। कंपनी स्पेशल रेोल्यूशन पास करेगी। उसकी एक कॉपी रीजनल डायरेक्टर को देगी और
आईएसी 18 फॉर्म सबमिट करेगी। आईएसी 18 साथ में है ना एक प्रूफ दिया जाएगा कि हमने भाई साहब दूसरी अथॉरिटीज को भी दिया है
अगर जरूरत पड़ी है तो प्रूफ कैसे रजिस्टर्ड पोस्ट आपको दिखाना पड़ेगा। हां चीफ कमिश्नर ऑफ इनकम टैक्स को हमने दिया
है। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को हमने दिया है। है ना? हमने किसी भी डिपार्टमेंट को जरूरत है तो उनको भी दिया है और उनको बोला
है कि अगर आपको कोई दिक्कत है हमारे कन्वर्शन से तो आप 60 दिनों के अंदर-अंदर रिप्रेजेंटेशन करिए।
कंपनी क्या करेगी? जो भी इंफॉर्मेशन आरओसी को दी है वो एमसीए के सिस्टम पे भी डलवाएगी। एप्लीकेशन जैसे ही रीजनल
डायरेक्टर के पास में जाएगी इन सब चीजों के साथ में रीजनल डायरेक्टर बोलेगा कि आप एक हफ्ते के अंदर न्यूज़पेपर के अंदर
एडवर्टाइजमेंट दो। इसे पब्लिक नोटिस बोलते हैं। जब भी दो न्यूज़पेपर की बात आएगी बेटा इंटरमीडिएट में कंपनीज एक्ट के अंदर
हमेशा एक न्यूज़पेपर इंग्लिश होता है और एक वर्नाकुलर होता है। और ये एडवर्टाइजमेंट जाता है आई एनसी 19 के
अंदर। फाइनली कंपनी को बोला जाता है आप अपने वेबसाइट पे भी डालो। कंपनी जैसे ही आईएसी 18 का फॉर्म एसआर यानी स्पेशल
रेोल्यूशन और एसिलेटरी स्टेटमेंट की कॉपी के साथ में और आईएसी 19 में एडवर्टाइजमेंट दे देती है। रीजनल डायरेक्टर अप्रूव करता
है। ऑर्डर निकालता है। टर्म्स एंड कंडीशन बताता है। अगर वो रिजेक्ट करने वाला है तो वो अपॉर्चुनिटी ऑफ़ बीइंग हर्ट देता है।
फाइनली आपकी कंपनी को कन्वर्शन का अप्रूवल मिल जाता है। तो पोस्ट अप्रूवल आप अपनी जनरल मीटिंग वापस से बुलाओ। आप स्पेशल
रेोल्यूशन पास करके अपना नया मेमोरेंडम बनाओ। नया आर्टिकल बनाओ, आरओसी को नया मेमोरेंडम फाइल करो और नया सर्टिफिकेट ऑफ
इनकॉर्पोरेशन आपको आरओसी यहां पर देगी। ये पूरी चीज मैंने बहुत ही सुंदर तरीके से आप लोगों को एक स्टार शीट में डाल रखी है
बेटा यहां पर। आप लोग देख लो। ये आपके चैप्टर नंबर टू के अंदर आता है। कन्वर्शन ऑफ सेक्शन एट कंपनी एंड रिलैक्सेशंस।
मैंने यहां पर ही कवर कर लिया है क्योंकि सेक्शन एट और ओपीसी अब वापस से चैप्टर नंबर टू में पढ़ने की जरूरत नहीं है।
इसलिए अपना ये वीडियो हल्का सा लंबा भी हो रहा है क्योंकि मैं थोड़ा यहां पर चैप्टर नंबर टू की चीजें भी पढ़ा रहा हूं बेटा।
आप ये वाली शीट देख लो। कन्वर्शन ऑफ़ सेक्शन एट कंपनी इंटू अदर कंपनीज़। ओपीसी और स्मॉल में कन्वर्ट नहीं हो सकते। रीजनल
डायरेक्टर अप्रूवल देगा। पहले आप मीटिंग बुलाओ। एसआर पास करो। एसआर के साथ में एक्सलेटरी स्टेटमेंट अटैच करना। 14 दिन
पहले आप लोग नोटिस दो। कंपनी को रीजनल डायरेक्टर को ये इंटिमेट करना पड़ेगा कि ये देखो हमने एसआर पास कर लिया घर के अंदर
बैठे-बैठे। ये हमारा एक्सप्लटरी स्टेटमेंट है और ये आईएसी 18 है और साथ में मैं आपको प्रूफ दे रहा हूं कि मैंने इतने लोगों को
भी यहां पर रिप्रेजेंटेशन करने के लिए बोला है। एप्लीकेशन की कॉपी आईएसी 18 के साथ में आरओसी को देना सिस्टम पे चढ़ा
देंगे। जैसे ही आप एप्लीकेशन देते हो रीजनल डायरेक्टर को एक हफ्ते के अंदर-अंदर एडवरटाइजमेंट पब्लिक नोटिस जाएगा दो
न्यूज़पेपर के अंदर और कंपनी की वेबसाइट पे भी जाएगा। जैसे ही रीजनल डायरेक्टर के पास में दोनों फॉर्म्स आ जाएंगे वो अप्रूव
कर देगा। अगर नहीं कर रहा है टर्म्स एंड कंडीशन लगा रहा है। अपॉर्चुनिटी ऑफ़ बीइंग हर्ट देगा अगर डिक्लाइन कर रहा है तो
अप्रूवल के बाद में मीटिंग बुलाना, एसआर पास करना, मेमोरेंडम आर्टिकल को अमेंड करना, आरओसी के साथ में फाइलिंग करना, नया
सर्टिफिकेट ऑफ इनकॉर्पोरेशन ले लेना। गॉट इट गाइस एवरीबॉडी? यह जाके अब आपका कन्वर्शन से रिलेटेड पूरा पॉइंट यहां पर
खत्म होता है। गॉट इट? चलो आ जाओ। अगला है बेटा गवर्नमेंट कंपनी। गवर्नमेंट कंपनी बहुत सारी है लेकिन गवर्नमेंट कंपनी को
समझने के लिए डेफिनेशन को दो पार्ट्स में डिवाइड किया गया है। वन एंड टू। गवर्नमेंट कंपनी की डेफिनेशन क्लॉज़ नंबर 45 के अंदर
है। बेटा क्लॉज़ नंबर 45 के अंदर है। देखो आप लोग इधर आओ। मैं आपको बताता हूं। देखो
इन्होंने बोला गवर्नमेंट कंपनी वह होगी जिसके अंदर सेंट्रल गवर्नमेंट स्टेट गवर्नमेंट या दोनों मिलकर पैसा लगाते हैं।
कितना? नॉट लेस देन 51% ऑफ पेड अप शेयर कैपिटल और टोटल वोटिंग पावर व्हिच एवर मे बी द केस। भाई साहब यहां पर शब्द यूज़ किए
गए हैं नॉट लेस देन 51%। होल्डिंग सब्सिडरी में मोर दैन 50% था। वहां 50% नहीं 50 से ज्यादा चाहिए था।
यहां पर नॉट लेस दैन 51% है। इसका मतलब है एटलीस्ट 51% मिनिमम 51% का चेक करना है आपको। यहां 50 भी नहीं चलेगा, 50.05 भी
नहीं चलेगा। यहां 51 चलेगा और उससे ज्यादा चलेगा। अब सुनना आंध्र प्रदेश गवर्नमेंट ने मेरी कंपनी में 20% लगाया। हरियाणा
गवर्नमेंट ने 15% लगाया। सेंट्रल गवर्नमेंट ने 10% लगाया। अब सुनना इसमें दो चीजों को इग्नोर करना। एक तो अदर
गवर्नमेंट कंपनी को इग्नोर करना। कोई दूसरी गवर्नमेंट कंपनी अगर मेरे अंदर पैसा लगा रही है, मैं उसको 51 की कैलकुलेशन में
कंसीडर नहीं करता हूं। और दूसरे पीएफआई अगर मेरे अंदर पैसा लगा रहे हैं, मैं उसको भी इंक्लूड नहीं करता हूं। ये इनडायरेक्ट
है। ये इनडायरेक्ट है। मैं डायरेक्टली पैसा देखता हूं। डायरेक्टली कितना हुआ? 20, 15, 35 और 10 45। भैया 45 तो 51 से कम
है। तो हम आपको गवर्नमेंट कंपनी नहीं मानेंगे। इसका मतलब ये हुआ गवर्नमेंट कंपनी की डेफिनेशन का पहला पार्ट मैंने आप
लोगों को एक्सप्लेन किया है कि जब सेंट्रल गवर्नमेंट स्टेट गवर्नमेंट या दोनों का मिलके आपके अंदर पैसा लगता है एटलीस्ट 51%
तो मैं आपको गवर्नमेंट कंपनी बोलता हूं। लेकिन दूसरा पार्ट गवर्नमेंट कंपनी का इंक्लूड्स भी है। ये गवर्नमेंट कंपनी की
जो डेफिनेशन है बेटा ये मींस वाली भी है और इंक्लूड्स वाली भी है। आपको याद है मींस और इंक्लूड्स में क्या होता है? रहता
तो एग्जॉस्टिव है। जितना लिखा है उतना समझना। लेकिन थोड़ा सा हम इसका दायरा बढ़ा देते हैं कि जितना हमने लिखा है आप उतना
ही समझो। पॉइंट नंबर वन। लेकिन एक इंडिपेंडेंट पॉइंट उन्होंने और डाला क्या? एंड इट इंक्लूड्स ये इंक्लूड करता है एक
गवर्नमेंट कंपनी की सब्सिडरी को भी गवर्नमेंट कंपनी माना जाता है। ये देखो इंक्लूड्स अ कंपनी व्हिच इज अ सब्सिडरी
कंपनी ऑफ़ अ गवर्नमेंट कंपनी। देखो इसको कुछ इस तरीके से आप लिखोगे ना 45 क्लॉज़ को एक बात ध्यान रखना गवर्नमेंट कंपनी
प्राइवेट और पब्लिक दोनों हो सकती है पर नाम के पीछे लिमिटेड ही लगता है। पहला पार्ट नॉट लेस देन 51% डायरेक्ट
इन्वेस्टमेंट होगा। इनडायरेक्ट को इग्नोर कर देना। दूसरा पार्ट गवर्नमेंट कंपनी की सब्सिडरी कंपनी कोई भी हो उसको डीम्ड
गवर्नमेंट कंपनी माना जाता है। ध्यान रखना गवर्नमेंट कंपनी के लिए नॉट लेस देन 51% को चेक करना और यहां पर
होल्डिंग सब्सिडरी के लिए नॉट सॉरी मोर देन 50% चेक करना। इसमें क्वेश्चंस आएंगे कुछ इस तरीके से। मैं आप लोगों को बता
देता हूं तीन केसेस। पहला केस एक होल्डिंग कंपनी गवर्नमेंट कंपनी है। क्वेश्चन नहीं बोल दिया। उसकी
जो सब्सिडरी कंपनी होगी वो भी गवर्नमेंट कंपनी होगी। सेकंड पार्ट ऑफ द डेफिनेशन। किसी-किसी क्वेश्चन में ऐसा दे रखा रहेगा।
आप कैलकुलेट करना। जब यह खुद ही गवर्नमेंट कंपनी नहीं है क्योंकि यह 51% से कम है तो इसकी सब्सिडरी
भी गवर्नमेंट कंपनी नहीं होगी। सब्सिडरी कंपनी हो सकती है पर गवर्नमेंट कंपनी नहीं होगी। तीसरा आपको LIC दूसरी गवर्नमेंट
कंपनी का पैसा दिखाएंगे उनको इग्नोर कर देना। सिंपल सी बात है। ठीक है? क्लियर है गाइस? एवरीबॉडी? आई होप आपको ये समझ में
आया होगा। ये गवर्नमेंट कंपनी की डेफिनेशन है। ठीक है? ओके? डन। चलो अब मेरी बात सुनो। ये क्वेश्चन नंबर 10 है मेरी बुक
का। ये बात करता है होल्डिंग कंपनी और गवर्नमेंट कंपनी दोनों के कॉम्बिनेशन के बारे में। दोनों का कॉम्बिनेशन है बेटा
यहां पर कि जैसे एक स्टेट गवर्नमेंट ने ₹48 लाख लगा रखे हैं Y लिमिटेड के अंदर। वाई लिमिटेड की टोटल ₹95 लैक्स के शेयर्स
हैं। टोटल 95 लैक्स के शेयर्स हैं। अच्छा अगर आप मुझसे पूछोगे आपको क्या चेक करना है बेटा? आपको क्या चेक करना है? इसका 50%
47.5 होता है। तो 50% से तो सॉरी देखो गवर्नमेंट कंपनी चेक करना है तो 51% आपको चेक करना पड़ेगा। है ना? अब Y डायरेक्टली
होल्ड्स 25600 इन Z लिमिटेड व्हिच इज़ हैविंग अ शेयर कैपिटल ऑफ़ 5 लाख शेयर्स। अब देखो ये जो Y लिमिटेड है, यह Z के अंदर Z
की खुद की कितनी है? 5 लाख शेयर्स हैं। इसमें यह 2.50.660 होल्ड करता है। तो यह तो 50% से ज्यादा हो
गया। तो ये होल्डिंग कंपनी हो गई और ये सब्सिडरी कंपनी हो गई। बराबर है। Z प्राइवेट लिमिटेड क्लेम द स्टेटस ऑफ़
सब्सिडरी कंपनी जो कि वो सही बोल रहा है। आप सब्सिडरी तो हो। पर आप गवर्नमेंट कंपनी हो क्या? आप गवर्नमेंट कंपनी नहीं हो।
क्यों? अरे ये खुद ही गवर्नमेंट कंपनी नहीं है। अरे 51% कितना होता है भाई साहब? अगर आप 95 लैक्स का 51% भी लगाओगे तो
48.45 होता है और आपके अंदर गवर्नमेंट का सिर्फ 48 लाख शेयर्स ही है। तो जब आप खुद ही
गवर्नमेंट कंपनी नहीं हो तो आपकी सब्सिडरी गवर्नमेंट कंपनी कैसे हो सकती है? ऐसे क्वेश्चन आप लोगों से पूछे जा सकते हैं।
ठीक है? चलो अब अगला है हमारे पास में फॉरेन कंपनी। कम ऑन एवरीवन लेट्स स्टार्ट। देखो फॉरेन कंपनी के केस में ना आप लोगों
ने फॉरेन कंपनी वर्ड तो पहले सुन रखा है। ठीक है? लेकिन फॉरेन कंपनी में आपको एक नया वर्ड इंट्रोड्यूस करता हूं जो चैप्टर
नंबर 11 में आप लोग पढ़ोगे। कंपनी इनकरपोरेटेड आउटसाइड इंडिया जो हमारे इंडिया के कंपनीज़ एक्ट के अंदर रजिस्टर्ड
है उसे 20 क्लॉज़ के हिसाब से हम इंडियन कंपनी बोल देते हैं। जो ऑस्ट्रेलिया या बाहर किसी कंट्री के लॉ के अंदर रजिस्टर्ड
होगा उसे हम कंपनी इनकॉर्पोरेटेड आउटसाइड इंडिया बोलते हैं। अब जैसे Amazon आउटसाइड इंडिया वाली कंपनी तो इनकर्पोरेटेड है ही
सही लेकिन उसका प्लेस ऑफ बिज़नेस इंडिया के अंदर है। अब प्लेस ऑफ बिज़नेस इंडिया में डायरेक्टली भी हो सकता है। जैसे आपका
ब्रांच इंडिया के अंदर हो या इनडायरेक्टली आप जैसे इलेक्ट्रॉनिकली या फिर आप बोल रहे हो कि हम लोग हमारा एजेंट यहां पर है तो
भाई साहब हम आपका प्लेस ऑफ बिज़नेस इंडिया के अंदर बोलेंगे। एग्जांपल है Tes्ला। Tes्ला 15 जुलाई 2025 को पहली बार उसने
इंडिया के अंदर एक आउटलेट खोला। इस तारीख के पहले वो हमारे लिए सिर्फ कंपनी इनकर्पोरेटेड आउटसाइड इंडिया थी। लेकिन
आफ्टर दिस डेट जैसे ही उसका प्लेस ऑफ बिजनेस इंडिया के अंदर बना इट बिकम अ फॉरेन कंपनी फॉर अस। तो यही बात है बेटा
फॉरेन कंपनी के अंदर इट इज अ कंपनी इट इज अ कंपनी या बॉडी कॉर्पोरेट है ना जो बाहर इनकर्पोरेट हुई है जिसका प्लेस ऑफ बिनेस
इंडिया में है या तो इटसेल्फ या थ्रू एन एजेंट या तो फिजिकली या फिर इलेक्ट्रॉनिकली और वो बिजनेस में और और वो
इंडिया के अंदर बिनेस एक्टिविटी कंडक्ट करती है तो टोटल कितनी चीजें हैं बेटा वन टू एंड थ्री तीन चीजें बिनेस एक्टिविटी
कंडक्ट करते हो इन एनी अदर मैनर क्या है? इन एनी अदर मैनर यानी कि हमने ऊपर लिखा हमने ऊपर कुछ एग्जांपल दिए कि
इलेक्ट्रॉनिकली करो बाय एजेंट करो। बट इसके अलावा भी अगर आप और किसी तरीके से बिनेस एक्टिविटी कंडक्ट करते हो बेटा तो
हम आपको फॉरेन कंपनी बोलेंगे। कंपनी बॉडी कॉर्पोरेट बॉडी कॉर्पोरेट एक ब्रॉडर टर्म है। फॉरेन कंपनी तो आता ही है। उसके अंदर
हमने ऊपर पढ़ा है क्लॉज़ नंबर 11 के अंदर। बॉडी कॉर्पोरेट के अंदर कंपनी इनकर्पोरेटेड आउटसाइड इंडिया भी आता ही
है। तो आप बाहर की कंपनी हो। इंडिया में रजिस्टर्ड नहीं हो। प्लेस ऑफ बिज़नेस इंडिया में है किसी भी तरीके से या बिजनेस
एक्टिविटी आप कंडक्ट कर रहे हो इंडिया के अंदर इन एनी अदर मैनर इसको लिखो इन एनी अदर मैनर इस शब्द पे ज्यादा ध्यान दिया
गया है और भी किसी तरीके से अगर आप करते हो तो बराबर है तो आप लोग समझ जाओ कि कंपनी इनकर्पोरेट आउटसाइड इंडिया एक
ब्रॉडर टर्म है वाइडर टर्म है और फॉरेन कंपनी इज़ अ सबसेट ऑफ़ अह कंपनी इनकर्पोरेटेड आउटसाइड इंडिया बेसिकली है
ना तो हर फॉरेन कंपनी इनकर्पोरेटेड आउटसाइड इंडिया ही होगी लेकिन हर कंपनी इनकर्पोरेट आउटसाइड इंडिया
फॉरेन कंपनी हो जरूरी नहीं है क्योंकि फॉरेन कंपनी बनने के लिए बेटा आपको प्लेस ऑफ बिनेस इंडिया में डालना पड़ेगा। प्लेस
ऑफ बिनेस अगर आपका इंडिया में नहीं है तो आप एक नॉर्मल कंपनी इनकर्पोरेटेड आउटसाइड इंडिया रहोगे। जैसे मैं बताता हूं Tata SS
प्राइवेट लिमिटेड TS प्राइवेट लिमिटेड बॉडी कॉर्पोरेट तो है। 20 क्लॉज़ वाली कंपनी है। है ना? तो पर वो फॉरेन कंपनी
नहीं है। Reliance Industries LED अगेन बॉडी कॉर्पोरेट भी है। इंडियन कंपनी है। फॉरेन कंपनी नहीं है। ध्यान से सुनना।
हिंदुस्तान iilvered हिंदुस्तान illeved इंडिया के अंदर रजिस्टर हुई है। बॉडी कॉर्पोरेट भी है। एक
इंडियन कंपनी बन गई है क्योंकि 20 वाली कंपनी है पर वो फॉरेन कंपनी नहीं है। पर अगर मैं आपको बोलूं यूनilver ग्लोबल तो
भाई साहब यूनilver ग्लोबल जो है वो आपकी बॉडी कॉर्पोरेट तो है। इंडियन कंपनी नहीं है और वो मेरे लिए फॉरेन कंपनी है। आई बात
समझ में? कोई भी दूसरी कंपनी कोई भी दूसरी कंपनी आप उठा लो। भाई साहब वो बॉडी कॉर्पोरेट के अंदर आएगी। इंडियन कंपनी के
अंदर नहीं आएगी और वो अगर प्लेस ऑफ बिजनेस इंडिया के अंदर नहीं है तो भी वो फॉरेन कंपनी नहीं बोली जाएगी। तो ये छोटा सा
ऑपरेशन है जो मैंने आप लोगों के लिए यहां पर किया है। ये फॉरेन कंपनी आप लोगों का यहां पर कंप्लीट होता है। ठीक है? अच्छा
आगे चलते हैं। अगला आता है डोरमेंट कंपनी। अब डोरेंट कंपनी के केस में क्या होता है? मैं आपको बताता हूं। मैंने आज कोई ये
कंपनी बनाई। मैंने कंपनी बनाई। मैंने उसके लिए ऑफिस खरीदा। मैंने उसके लिए एप्लीकेशन बनानी है। एi को यूज करना है। बहुत खतरनाक
सॉफ्टवेयर बनाना है। उसको ट्रेडमार्क में डालना है। फिर मेरा प्रोडक्ट बनेगा 2032 के अंदर वो रेलेवेंट होगा। आज वो रेलेवेंट
नहीं है। मैं आज कंपनी बनाता हूं। पर मेरा ये प्रोडक्ट अगर और कोई ले लेगा तो भाई साहब दिक्कत हो जाएगी। तो मैं
इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट क्रिएट करता हूं एक कंपनी बनाकर उस कंपनी के नाम पर। बराबर है। क्या मैं आज धंधा कर रहा हूं?
नहीं। मैंने यहां पर छ सालों तक कोई बिजनेस एक्टिविटी नहीं करी। पर मैं आरओसी को बोलता हूं कि देख भाई ना तो मैंने
रिटर्न फाइल किया है ना मैंने यहां पर एनुअल फाइलिंग करी है। कुछ भी नहीं किया है। मैंने कोई भी सिग्निफिकेंट अकाउंटिंग
ट्रांजैक्शन नहीं करा है। मैं इनक्टिव कंपनी हूं। इनक्टिव कंपनी हूं। तो मैं 2028 में 2 साल के अंदर-अंदर मैं आरओसी के
पास में जाकर बोलता हूं कि तुम एक काम करो मुझे यहां पर डोरमेंट कंपनी का स्टेटस दे दो। तो डोरमेंट कंपनी कौन होती है बच्चा?
मैं आपको बताता हूं डोरमेंट कंपनी वो होती है जो किसी फ्यूचर प्रोजेक्ट के लिए बनाई जाती है। इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी को
रजिस्टर करने के लिए बनाई जाती है। जिसका खुद का कोई भी सिग्निफिकेंट अकाउंटिंग ट्रांजैक्शन नहीं होता है। वो खुद एक
इनक्टिव कंपनी होती है। खुद का सिग्निफिकेंट अकाउंटिंग ट्रांजैक्शन नहीं होता है। सिग्निफिकेंट अकाउंटिंग
ट्रांजैक्शन का मतलब क्या होता है? मैं आप लोगों को बता देता हूं। कभी-कभी ऐसा लगता है कि ये ट्रांजैक्शन सिग्निफिकेंट है।
बिजनेस रिलेटेड है लेकिन वो नहीं होते हैं। जैसे रोरोपा मैं क्या बोलता हूं? रो- रोपा। देखो पहला आरओ है कि आप आरओसी को
अगर कोई फीस देते हो तो वह सिग्निफिकेंट अकाउंटिंग ट्रांजैक्शन नहीं है। दूसरा आरओ है आप रिकॉर्ड्स को मेंटेन करने के लिए
ऑफिस को मेंटेन करने के लिए कुछ खर्चा करते हो वो भी एसटी नहीं है। आप यहां पर अलॉटमेंट ऑफ सिक्योरिटीज के लिए जो खर्चा
करते हो वो भी एसटी नहीं है। और अगर आप पेमेंट करते हो किसी एक्ट के बोलने पर तो वो भी नहीं है। तो आरओ आरओ पा रोरो पा जो
है भाई साहब अगर आप यह काम करते भी हो तो भी चलेगा कोई दिक्कत की बात नहीं है और इनक्टिव कंपनी इज अ टाइप इनक्टिव कंपनी
होंगे तो आपको डोरेंट कंपनी का स्टेटस मिल सकता है मतलब अगर आपने पिछले दो सालों के अंदर कोई भी बिनेस ट्रांजैक्शन नहीं करा
है कोई भी एसेट ही नहीं करा है और पिछले दो सालों में ना तो फाइनेंसियल स्टेटमेंट फाइल किया है ना ही एनुअल रिटर्न आपने
फाइल किया है तो ये आपकी फाइनल डेफिनेशन जो है कुछ निकल के आती है 455 कि इस तरीके से बराबर है। ठीक है? क्लियर है? अच्छा एक
क्वेश्चन आता है। एक क्वेश्चन आता है। मैं आपको बताता हूं। ठीक है? जैसे एक कंपनी बनी है ना? एक कंपनी बनी। वो कंपनी एक्ट
के अंदर रजिस्टर्ड हो गए 5 तारीख को जनवरी को। लेकिन 7 अप्रैल 2023 तक उन्होंने आरओसी को एक फॉर्म बनाकर नहीं दिया। आई
एनसी20। आईएसी20 पता है क्या होता है? कमेंसमेंट का फॉर्म होता है कि हमने धंधा चालू कर दिया है। क्या इसको हम क्लासिफाई
कर सकते हैं? किसके अंदर? हम उसको इनक्टिव कंपनी बोल सकते हैं। क्योंकि यार 2021 की जनवरी से चालू करो। जनवरी 22 तक आ जाओ और
जनवरी 23 तक आ जाओ। आप बैठे हो अप्रैल के अंदर। आपके दो साल कंप्लीट हो चुके हैं। और आपने यहां पर बिजनेस एक्टिविटी कोई भी
नहीं करी है। तो 455 के हिसाब से हम बोलेंगे कि कोई भी एसटी नहीं है। बराबर है। इन चारों के अलावा आपने और कोई भी काम
नहीं किया। या रोपा के अलावा तो हम आपको यहां पर क्या बोलेंगे कि आपको हम डोरेंट कंपनी का स्टेटस दे सकते हैं। आपको
इनक्टिव कंपनी हम लोग मानेंगे। ठीक है? क्लियर है? अगला आता है बेटा निधि कंपनी। निधि कंपनी ऐसी कंपनीज़ होती है
जिसको इनकॉर्पोरेट किया जाता है सेविंग्स को बढ़ाने के लिए। निधि कंपनी में सभी मेंबर्स एक दूसरे की हेल्प करते हैं। है
ना? सभी थ्रिफ्ट यानी कि सेविंग्स को हैबिट को कल्टीवेट करने के लिए ऐसी कंपनी को यहां पर बनाते हैं। ये कंपनी डिपॉजिट
लेती है अपने ही मेंबर से और अपने ही मेंबर्स को लोन देती है। इट इज अ टाइप ऑफ पब्लिक कंपनी ओनली बच्चा। नाम के पीछे
निधि लिमिटेड लगाया जाता है और जब तक ऑफिशियल गैजेट में आपका नाम नहीं आ जाता है हम आपको निधि कंपनी नहीं मानते हैं। द
लास्ट वन इज बेटा पब्लिक फाइनेंसियल इंस्टीटशंस। देखो पब्लिक शब्द का मतलब होता है मेरी बात सुनो। हम कहीं ना कहीं
गवर्नमेंट से इसको एसोसिएट करते हैं। फाइनशियल तो आपको पता है फाइनेंस रिलेटेड इंस्टीट्यूशन मतलब इंडिविजुअल नहीं है। ये
इंस्टट्यूट्स हैं। देखो पब्लिक फाइनेंसियल इंस्टीट्यूशन को ना दो इस डेफिनेशन को दो पार्ट्स में डिवाइड किया है। कुछ का तो
नाम स्पेसिफाई कर दिया है कि भैया देखो LIC है, यूनिट ट्रस्ट ऑफ इंडिया है, आईडीएफसी लिमिटेड है और भी कंपनी जिनको हम
नोटिफाई करेंगे। मतलब आपने एक तो लिस्ट बनाकर दे दी। सर 1956 वाले एक्ट के अंदर कोई कंपनी को स्टेटस मिला था पीएफआई का।
क्या 2013 के अंदर वो कंटिन्यू करेगी? करेगी। करेगी। अंटिल अनलेस स्पेसिफिकली उसे छीन लिया गया हो। आरबीआई के साथ में
कंसल्ट करके सेंट्रल गवर्नमेंट नोटिफाई करती है। अब बात ये है कि नोटिफाई किसको करेगी? देखो भाई साहब मेरी बात सुन लो।
स्पेसिफाइड की लिस्ट तो आपको बता दी। नोटिफाई करने के लिए उन्होंने बोला दो कंडीशन पूरी करो। आप ऐसी कंपनी हो जो किसी
सेंट्रल या किसी स्टेट एक्ट के अंदर रजिस्टर्ड हो। पहली कंडीशन वो तो होगी सही। कंपनी या तो सेंट्रल के अंदर होगी या
स्टेट के अंदर होगी। दूसरी बात आपके अंदर सेंट्रल गवर्नमेंट, स्टेट गवर्नमेंट या पार्टली का नॉट लेस देन 51% पैसा लगा हुआ
हो। मतलब आप गवर्नमेंट कंपनी हो। बेसिकली वो यह बोलना चाह रहे हैं वो किसी भी गवर्नमेंट कंपनी को जो फाइनेंस के अंदर
ऑलरेडी है हम उसको पीएफआई का यहां पर स्टेटस दे सकते हैं। सारी गवर्नमेंट कंपनी पीएफआई नहीं होती है पर सारी पीएफआई
गवर्नमेंट कंपनी यहां पर हो सकती है। गॉट इट गाइस? ये देखो आपका ये देखो आप ये रहा आपका स्टार्ट शीट स्पेसिफाइड नोटिफाइड के
लिए दो कंडीशन एंड हमारा यह फाइनल बात। ऐसी गवर्नमेंट कंपनी जो फाइनेंसियल सर्विज प्रोवाइड करती है उसको हम पीएफआई यहां पर
बोलेंगे। कुछ नाम लास्ट में यहां पर आता है आईएफएससी। अब ये इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विस सेंटर्स क्या होते हैं? ये स्पेशल
इकोनॉमिक ज़ोंस में इनको बनाया जाता है। देखो ये ऐसी कंपनीज़ होती है जो इंटरनेशनल फाइनेंसियल ट्रांजैक्शंस में डील करती है।
एसई जेड ऐसे एरिया होते हैं जिसको गवर्नमेंट अप्रूव करती है एक्सपोर्ट ऑफ गुड्स एंड सर्विज के लिए। एक ऐसा कैंपस
बनाया जाता है जहां पर अगर आप रजिस्टर्ड हो तो हम आपको काफी ज्यादा रिलैक्सेशंस देंगे। जैसे मुंबई के अंदर सीप्स एस जेड
है। नोएडा के अंदर एसzेड है। कांडला के अंदर एसzेड है। सबसे बड़ा आईएफएससी कंपनी का एग्जांपल है गिफ्ट सिटी व्हिच इज बीन
मेड इन गुजरात। गिफ्ट सिटी मतलब आपका यहां पर उन्होंने बनाया है जीआईएफटी गुजरात इंटरनेशनल
फाइनेंसियल टेक सिटी। यह फर्स्ट आईएफएससी है और आपको जान के अच्छा लगेगा इन आईएफएससी के खुद के स्टॉक एक्सचेंज भी
होते हैं। जैसे इसका है इंडिया आईएx है ना? इट कुड बी अ पब्लिक एंड अ प्राइवेट कंपनी बोथ। कोई दिक्कत की बात नहीं है।
चलो अब हमारे पास में यहां पर क्या बचा? कुछ इंपॉर्टेंट डेफिनेशंस बची। मैंने आप लोगों को बताया था कि मैं आपको क्या-क्या
कवर करवाऊंगा। जरा आप लोग यहां पर देख लो मेरे साथ में। कम ऑन गाइस इधर आओ। मैंने आप लोगों को बोला था कि हम लोग इस चैप्टर
में डेफिनेशंस कवर करेंगे। तो मैंने सेक्शन नंबर वन आपको कंप्लीट करवाया। है ना? मैंने आपको सेक्शन नंबर वन के साथ में
सेक्शन नंबर टू डन करा हम लोगों ने। करेक्ट है? सेक्शन वन सेक्शन टू यह सब डन हो गया। है ना? कंपनी और उसके फीचर्स डन
हो गए। करेक्ट है? प्रमोटर चैप्टर नंबर टू के अंदर कवर होगा बेटा। है ना? बॉडी कॉर्पोरेट आपका डन हो गया। सारे टाइप्स ऑफ
कंपनीज़ आपके डन हो गए। है ना? अब हमको ये तो रेफरेंस के लिए है। बाकी 18 डेफिनेशंस जो है बेटा। है ना? ये मैंने तकरीबन
तकरीबन आप लोगों को यहां पर आई थिंक ज्यादा नहीं तो 35 डेफिनेशंस तो मैंने आप लोगों को यहां पर कवर करवा दी होगी। बराबर
है। अब हमारे पास में आता है अदर इंपॉर्टेंट डेफिनेशंस। अदर इंपॉर्टेंट डेफिनेशन में मेरे पास में कुछ 10
डेफिनेशन है जो मुझे आप लोगों को यहां पर पढ़ाना है। है ना? तो 45 ऑड 50 डेफिनेशनंस जो है वो मैं आप लोगों को यहां पर पढ़ाता
हूं। सबसे पहली डेफिनेशन देखो कौन-कौन सी डेफिनेशन यहां पर हम लोग लेने वाले हैं मैं आपको बताता हूं। फाइनशियल
स्टेटमेंट्स, फाइनेंसियल ईयर, केएमपी, मैनेजर, मैनेजर डायरेक्टर, नेटवर्थ रिलेटेड पार्टी और रिलेटिव। ऐसी कुछ आठ आठ
डेफिनेशन तो 10 और आठ 18 कुछ इस तरीके से बेटा 10 और आठ 18। ये टोटल 18 डेफिनेशंस हम लोग यहां पर देख लेते हैं। सॉरी।
[नाक से की जाने वाली आवाज़] ठीक है? अदर इंपॉर्टेंट डेफिनेशंस में। अब मेरी बात समझने की कोशिश करना। देखो आपने
आपको ना देखना चाहिए जैसे एनुअल रिपोर्ट होती है किसी भी कंपनी की है ना किसी भी कंपनी की एनुअल रिपोर्ट देखोगे ना तो आप
लोगों को बहुत ज्यादा कहते हैं ना कि एक फोकस मिलेगा मैं हमेशा एडिशनल सोर्सेस के अंदर मेरे बैच के अंदर मैं डालता हूं
एनुअल रिपोर्ट्स वगैरह डालता हूं। जैसे आप ये देखो Infosys की एनुअल रिपोर्ट है। एनुअल रिपोर्ट के अंदर कंपनी का पूरा
चिट्ठा डाला जाता है। है ना? पूरा चिट्ठा डाला जाता है। है ना? अब ये Infosys की एनुअल रिपोर्ट है। आप जरा इसको ओपन करोगे।
मैं आपको पता है क्या सिखा रहा हूं? मैं केएमपी वर्ड सिखा रहा हूं। अब केएमपी वर्ड के अंदर पता है क्या-क्या आता है? मैं
आपको बताता हूं। कि मैनेजरियल पर्सनल के अंदर आपका चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर आता है। आपका सीएफओ आता है, एमडी आता है, मैनेजर
आता है, कंपनी सेक्रेटरी आता है। होल टाइम डायरेक्टर्स आते हैं। ये सब आपके केएमपी के अंदर आते हैं। हकीकत ये है बेटा
डायरेक्टर्स दो तरीके के होते हैं। एग्जीक्यूटिव और नॉन एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर्स। अगर आप यहां पर देखोगे ना
मैं आपको कुछ चीजें बताऊंगा। देखो जैसे इनके नाम के आगे क्या लिखा हुआ है। मिस्टर नंदन एम नीलकानी यह चेयरमैन भी
है और नॉन एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर है एंड नॉन इंडिपेंडेंट डायरेक्टर है यानी कि प्रमोटर है। भाई साहब अगर आप ध्यान से
देखोगे यहां पर ये चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर भी है और ये एमडी भी है। ये आपके इंडिपेंडेंट डायरेक्टर हैं। ये आपके
इंडिपेंडेंट डायरेक्टर हैं। ये आपके इंडिपेंडेंट डायरेक्टर हैं। इंडिपेंडेंट डायरेक्टर। इंडिपेंडेंट डायरेक्टर।
इंडिपेंडेंट डायरेक्टर। इंडिपेंडेंट डायरेक्टर। भाई साहब अगर आप देखो तो यहां पर बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स का नाम दे रखा
है। 1 2 3 4 है ना? 5 6 7 डायरेक्टर्स इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स हैं। कितने में से? आठ और नौ। टोटल नौ डायरेक्टर्स हैं। 1
2 3 4 5 6 7 8 9 नाइन में से सेवन डायरेक्टर्स आपके इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स हैं। क्यों ऐसा होता है? मैं आप लोगों को
बताता हूं। देखो डायरेक्टर्स एग्जीक्यूटिव होंगे जो भाई साहब मीटिंग में आते हैं, बैठते हैं। है ना? और सिर्फ बैठते नहीं
है, काम भी करवाते हैं। लेकिन नॉन एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर्स एडवाइस करते हैं। मीटिंग में आते हैं, समोसा खाते हैं,
बताते हैं कि ऐसा काम होना चाहिए। इंडिपेंडेंट डायरेक्टर अभी HDFC बैंक का हाल फिलहाल में बहुत बड़ा केस हुआ था।
HDFC बैंक के अंदर यहां पर मिस्टर अतनु चक्रवर्ती ने मार्च 2026 में रिजाइन करा। अब वह इंडिपेंडेंट डायरेक्टर भी थे।
इंडिपेंडेंट डायरेक्टर वो होता है जिसका कंपनी के साथ में कोई भी रिश्ता नहीं होता है और अगर वो रिजाइन कर दे तो भाई साहब
बहुत बड़ी बात हो जाती है। बहुत बड़ी बात हो जाती है कि HDFC का शेयर भी नीचे गिर गया था। लेकिन हालांकि उन्होंने बोला था
कि सिर्फ जो भी HDFC बैंक के अंदर सिस्टम चल रहा है वो एकदम बराबर है। लेकिन मैं उससे अलाइन नहीं हो रहा हूं इसलिए मैं अलग
हो रहा हूं। ऐसा है तो भाई साहब इंडिपेंडेंट डायरेक्टर अपनी रिपोर्ट भी देता है। वो रिजाइन कर देता है अगर भाई
साहब तो बड़ी मामला खतरनाक हो जाता है। और इंडिपेंडेंट डायरेक्टर आप फाइनल के अंदर पढ़ोगे बेटा मैक्सिमम डायरेक्टर 15 हो
सकते हैं। उसमें से 1/3 ऑफ़ टोटल डायरेक्टर आपके इंडिपेंडेंट डायरेक्टर होना ही चाहिए। 1/3 मिनिमम है। यहां पर तो सेवन
डायरेक्टर्स हैं इंडिपेंडेंट डायरेक्टर। इसीलिए इंडिपेंडेंट डायरेक्टर को एग्जीक्यूटिव नहीं नॉन एग्जीक्यूटिव
डायरेक्टर बोला गया है। नाउ अंडरस्टैंड दिस। मैंने आपको पहली डेफिनेशन क्या बताई? मैंने आपको पहली डेफिनेशन बताई केएमपी।
क्या बताई मैंने? केएमपी। की मैनेजर पर्सन के अंदर चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर भी आता है। चीफ फाइनेंसियल ऑफिसर भी आता है। एमडी
भी मैनेजिंग डायरेक्टर भी आता है। होल टाइम डायरेक्टर भी आता है। मैनेजर्स भी आते हैं और कंपनी सेक्रेटरी भी आते हैं।
देखो हरार्की कुछ इस तरीके से है। सबसे ऊपर कंपनी में चेयर पर्सन होता है। ये जेंडर न्यूट्रल वर्ड है। चेयर पर्सन मैन
वूमेन कोई भी हो सकता है। उसके नीचे बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर्स काम करते हैं। बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर्स में एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर्स
होते हैं। जैसे मैनेजिंग डायरेक्टर एग्जीक्यूटिव है। काम करने वाला इंसान है। होल टाइम डायरेक्टर काम करने वाला इंसान
है। नॉन एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर, इंडिपेंडेंट डायरेक्टर हैं। उसके साथ में कौन है? सीईओ, सीएफओ और सीएस एंड अदर
एंप्लाइज जो जस्ट बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स के एक रैंक नीचे है। उन सबको हम लोग क्या बोलते हैं बेटा? केएमपी बोलते हैं। आपको
बात आ गई समझ में? हां। देखो मैं आप लोगों को डेफिनेशन बताता हूं। सबसे पहली डेफिनेशन हम लोगों ने यहां पर क्या देखी?
केएमपी। केएमपी की डेफिनेशन में थ्री स्टार लगा रखा है। ची सीईओ, एमडी, कंपनी सेक्रेटरी, होल टाइम डायरेक्टर, सीएफओ, वन
लेवल बिलो द बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर्स एंड एस अदर ऑफिससेस एज़ मे बी प्रिस्राइब्ड। दूसरा है काम बेटा मैनेजिंग डायरेक्टर का। देखो
मेरी बात समझना। मैनेजर पढ़ो, मैनेजिंग डायरेक्टर पढ़ो। मैनेजिंग डायरेक्टर कंपलसरी डायरेक्टर होगा। उसके नाम में ही
डायरेक्टर है बेटा। है ना? ये ऐसा डायरेक्टर होता है जो बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स का हेड होता है। सब्सटेंशियल
पावर्स इनके पास में रहती है। ठीक है? कॉमन सील को लगाना, है ना? बोर्ड मीटिंग में वोट करना, चेक को इंडोर्स करना,
नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स को बनाना ये सारे काम ना मैनेजिंग डायरेक्टर के पास में होते हैं। लेकिन जो मैनेजर होता है ना
वो डायरेक्टर भी हो सकता है। वो डायरेक्टर नहीं भी हो सकता है। वो एक इंडिविजुअल होता है जो सुप्रीम मतलब उसके पास में ना
सुपरिंटेंडेंस है। वो बोल रहा है कि मैं सारा काम देखूंगा। पर हां मैं वही काम करूंगा जो बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स मुझे
डायरेक्ट करते हैं करने के लिए। है ना? ये डायरेक्टर भी हो सकता है। कोई एनी अदर पर्सन भी हो सकता है। बेसिकली मैनेजर
एंप्लई भी हो सकता है। कोई दिक्कत की बात नहीं है। अब इसके बाद में डेफिनेशन आती है फाइनेंसियल ईयर की। फाइनेंसियल ईयर की
डेफिनेशन बेटा दो तरीके से होती है। अगर आपकी कंपनी नॉर्मल तरीके से मैं बोलूं आपकी कंपनी का
अप्रैल से लेकर मार्च तक का फाइनेंसियल ईयर होता है। स्पेशल केस ये होता है। अगर आपकी कंपनी इनकॉर्पोरेट हुई है। लास्ट के
क्वार्टर में जेएफएम में जनवरी, फरवरी और मार्च है ना तो आपका जो फाइनेंसियल ईयर है वो इसी मार्च को खत्म नहीं होगा। वो अगले
साल के मार्च में खत्म होता है। मतलब हम आपको मिनिमम 3 महीना तो आपको फाइनेंसियल ईयर रखना ही पड़ेगा। अगर आप जनवरी में अ
क्या बोलते हैं? आप जनवरी में अगर आपकी कंपनी इनकर्पोरेट हुई है तो आप 3 महीने के अंदर-अंदर आ गए। हम आपको अलाऊ नहीं
करेंगे। अब आपका फाइनेंसियल ईयर खत्म होगा नेक्स्ट ईयर की 31 मार्च को। सो इफ द कंपनी इज़ इनकर्पोरेटेड ऑन और आफ्टर फर्स्ट
ऑफ जनवरी देन द फाइनेंसियल ईयर विल एंड ऑन 31 मार्च ऑफ दी नेक्स्ट फॉलोइंग ईयर। नेक्स्ट फॉलोइंग ईयर। गॉट इट? ठीक है? ये
हो गई। कितनी डेफिनेशन हो गई? वन हो गया, टू हो गया, थ्री हो गया, फोर हो गया। अब मेरी बात सुनो। अगली डेफिनेशन मैं आप
लोगों को बताता हूं। अ कौन सी करेंगे अपन? अगली डेफिनेशन एक काम करते हैं। फाइनशियल स्टेटमेंट की डेफिनेशन
बताता हूं। इसके पहले होगी छोटी सी डेफिनेशन। ये देखो फाइनशियल स्टेटमेंट की डेफिनेशन मुझे ज्यादा समझाने की जरूरत
नहीं है। फाइनेंसियल स्टेटमेंट में आपका बैलेंस शीट आएगा, पीएनएल आएगा, कैश फ्लो स्टेटमेंट आएगा, स्टेटमेंट ऑफ चेंज ऑफ
इक्विटी आएगा, एक्सप्लनेटरी नोट्स आएंगे। इसमें एक एग्जंपशन समझ लेना। कैश फ्लो स्टेटमेंट किसको बनाने की जरूरत नहीं है?
ओपीसी को, स्मॉल कंपनी को, डोरमेंट को और स्टार्टअप प्राइवेट कंपनीज़ को बनाने की जरूरत नहीं है। प्राइवेट कंपनी स्टार्टअप
का स्टेटस कौन देता है? अंडर दी मिनिस्ट्री ऑफ कॉमर्स एंड फाइनेंस डिपार्टमेंट ऑफ इंडस्ट्रियल इंडस्ट्रियल
पॉलिसी एंड प्रमोशन। बराबर है। ये डीपीआईटी से आप लोगों को यहां पर क्या मिलता है? आप लोगों को यहां पर स्टेटस
मिलता है। ओके? अब अगली डेफिनेशन बेटा यहां पर आती है रिलेटिव की। रिलेटिव की डेफिनेशन ना आप लोग बहुत बार सुनते हो और
आप लोग सोचते हो कि सर रिलेटिव में कौन आएगा कौन नहीं आएगा। देखो रिलेटिव की डेफिनेशन में मैं कुछ इस तरीके से पढ़ाता
हूं। एक इंसान है। है ना? एक इंसान है। लेट्स से यह तुम हो। तो तुम्हारे माता-पिता तुम्हारे माता-पिता फादर और मदर
आपके रिलेटिव हैं। आपके ब्रदर सिस्टर भाई और बहन आपके रिलेटिव हैं। आपके स्पाउस यानी कि आपके हस्बैंड या वाइफ आपके
रिलेटिव हैं। आपका बेटा रिलेटिव है। आपकी बेटी रिलेटिव है। आपके बेटे की वाइफ रिलेटिव है और आपके बेटी का हस्बैंड
रिलेटिव है। मतलब आपकी बहू और आपका दामाद भी रिलेटिव की डेफिनेशन के अंदर आता है। लेकिन बात सुनो आप लोगों को दिख रहा होगा
यह मैंने स्टेप्स के ऊपर बनाया। स्टेप्स के ऊपर बनाया मतलब मैंने सीडी के ऊपर बनाया। इसके पीछे कारण है बेटा। आपके फादर
और मदर में स्टेप फादर भी आएंगे, स्टेप मदर भी आएंगे। आपका स्टेप ब्रदर भी आएगा, स्टेप सिस्टर भी आएंगे। स्पाउस में स्टेप
का कोई सिस्टम नहीं होता है। आपकी सन की जो वाइफ है, वह तो आ ही रही है। डॉटर के हस्बैंड है, वह भी आ ही रहे हैं। लेकिन
मेरी बात समझ लेना। आपका स्टेप आपका स्टेप सन यहां पर इंक्लूडेड है लेकिन यहां पर स्टेप डॉटर को इंक्लूड नहीं किया
गया है। स्टेप सन को तो इंक्लूड किया गया है लेकिन स्टेप डॉटर को यहां पर इंक्लूड नहीं किया गया है। और अगर आप एचयूएफ हो तो
एचयूएफ के सारे मेंबर्स को रिलेटिव्स ही माना जाता है। गॉट इट? अब मैं आपको अच्छी चीज बताता हूं। इसके बाद में एक अच्छी
डेफिनेशन आती है बेटा रिलेटेड पार्टी की। किसकी डेफिनेशन आती है? रिलेटेड पार्टी की डेफिनेशन आती है। रिलेटेड पार्टी को समझने
के लिए ना बेटा आप लोग एक बात समझो। देखो मैं एक बात बताता हूं। जैसे एक कंपनी है। कंपनी का मैनेजर, कंपनी का डायरेक्टर,
कंपनी का केएमपी उसके लिए रिलेटेड पार्टी होगा। आपने देखा है ना कि रिलेटेड पार्टी के साथ में ट्रांजैक्शन मत करो। अगर करो
तो डिस्क्लोज़ करो। क्योंकि खतरनाक होता है बेटा। है ना? अब सुनो एक कंपनी की मैनेजर, उसका डायरेक्टर, उसका केएमपी ये सब उसके
लिए कौन होता है बेटा? उसके लिए रिलेटेड पार्टी होता है। यहां तक कि मेरे मैनेजर के जो रिलेटिव है
मेरी कंपनी के मैनेजर की जो रिलेटिव है जो वाइफ है करेक्ट है वो भी रिलेटिव होगी। रिलेटेड पार्टी होगी। और अगर मेरे मैनेजर
की जो वाइफ है वो किसी दूसरी कंपनी के अंदर डायरेक्टर है तो वो प्राइवेट कंपनी भी मेरे लिए रिलेटिव होगी। इस तरीके से
डायरेक्टर रिलेटेड पार्टी है। रिलेटिव नहीं सॉरी मैं रिलेटेड पार्टी की बात कर रहा हूं। मैं गलती से रिलेटिव बोल दिया।
हां अगर कंपनी का डायरेक्टर है और वो डायरेक्टर किसी दूसरी फर्म के अंदर पार्टनर है तो भाई साहब वो फर्म भी
रिलेटेड पार्टी हो जाएगी। मेरे डायरेक्टर का रिलेटिव तो है ही रिलेटेड पार्टी। मेरे केएमपी के रिलेटिव्स तो रिलेटेड पार्टी है
ही सही। लेकिन यह जो कनेक्टेड फर्म्स हैं, जो कनेक्टेड कंपनीज़ हैं, वो भी मेरे लिए रिलेटेड पार्टी होते हैं। अरे मेरी कंपनी
के जो डायरेक्टर्स हैं, वो अगर किसी दूसरी कंपनी के कहने पर चलते हैं तो वो दूसरी कंपनी भी मेरी रिलेटेड पार्टी हो जाएगी।
और सबसे अच्छी बात यह है कि मेरी कंपनी की खुद की होल्डिंग, सब्सिडरी, एसोसिएट, मेरी होल्डिंग की सब्सिडरी ये सब भी रिलेटेड
पार्टी होते हैं। ये देखो आ जाओ। रिलेटेड पार्टी टू द कंपनी मींस डायरेक्टर और उसके रिलेटिव्स केएमपी उसके
रिलेटिव्स। मेरी कंपनी के डायरेक्टर मैनेजर रिलेटिव अगर किसी फर्म में पार्टनर है तो वो फर्म भी रिलेटेड पार्टी है। मेरे
डायरेक्टर मैनेजर रिलेटिव किसी प्राइवेट कंपनी के अंदर मेंबर या डायरेक्टर है तो वो प्राइवेट कंपनी भी रिलेटेड पार्टी है।
अब सुनना अगर मेरी कंपनी के डायरेक्टर मैनेजर रिलेटिव किसी पब्लिक कंपनी के अंदर 2% या उससे ज्यादा पेड अप शेयर कैपिटल
होल्ड करते हैं तो यह पब्लिक कंपनी भी मेरी रिलेटेड पार्टी है। और अगर मेरे डायरेक्टर या मैनेजर
अकस्टम्ड है, उनको आदत है कि वो किसी की एडवाइस पे या किसी के इंस्ट्रक्शन पे चलते हैं तो वो बॉडी कॉर्पोरेट भी मेरी रिलेटेड
पार्टी होगी। एंड एट लास्ट मेरी कंपनी की होल्डिंग, मेरी कंपनी की सब्सिडरी, मेरी कंपनी की एसोसिएट, मेरी होल्डिंग की
सब्सिडरी जिसे फेलो सब्सिडरी बोलते हैं। ये सब मेरे रिलेटेड पार्टी की डेफिनेशन के अंदर आते हैं। ये भी डन हो गया। करेक्ट
है? मेरे ख्याल से सारी डेफिनेशंस हम लोगों ने यहां पर लगभग लगभग यहां पर कवर कर ली है।
अब दो ही डेफिनेशन है जो मुझे आप लोगों को बतानी है। एक तो मुझे नेटवर्थ की डेफिनेशन आप लोगों को यहां पर बतानी है। देखो हमने
क्या-क्या कर लिया मैं आपको बता देता हूं। फाइनेंसियल स्टेटमेंट हो गया, फाइनेंसियल ईयर हो गया, केएमपी हो गया, मैनेजर हो
गया, एमडी हो गया, रिलेटेड पार्टी हो गया और रिलेटिव हो गया। ऑफिसर एंड ऑफिसर एंड डिफॉल्ट की मैंने डेफिनेशन डाल रखी है। एक
बार आप रीड कर लेना। नेटवर्थ की डेफिनेशन जो है मुझे आप लोगों को यहां पर एक्सप्लेन करनी है। कुछ नहीं बेटा बेसिक सा
कैलकुलेशन आता है। नेटवर्थ के अंदर आपकी पेड अप शेयर कैपिटल आती है। आपके सारे रिजर्व्स आते हैं रिवैल्यूएशन रिजर्व्स को
छोड़कर। आपका सिक्योरिटी प्रीमियम अकाउंट है ऐड कर देना। पीएनएल का कोई बैलेंस है उसको एडजस्ट कर देना। हां। अब
एक्यूमुलेटेड लॉसेस को ऐसे एक्सपेंसेस को जिसको आपने डिफर कर रखा है उनको और मिसलेनियस एक्सपेंसेस जिनको रिटर्न ऑफ
नहीं किया है उनको। इन सबको आप रिमूव कर देना। बट योर नेटवर्थ डज नॉट इंक्लूड एनी डेप्रिसिएशन वि इज बीन रिटर्न बैक और एनी
डेप्रिसिएशन व्हिच इज रिलेटेड टू अमलगमेशन। ये दो चीजें यहां पर बिल्कुल भी नहीं आती
है। ये नेटवर्थ की डेफिनेशन है भाई साहब। डायरेक्टली इतना बड़ा-बड़ा क्वेश्चन पूछा जाएगा कि एक कंपनी है। है ना? अ स्टैचरी
ऑडिटर ने सर्टिफिकेट इशू करना है नेटवर्थ के ऊपर। है ना? और कंपनी कह रही है कि जो प्रॉपर्टी की फेयर वैल्यू है प्लांट एंड
इक्विपमेंट है करंट ईयर में व्हिच वास मिस्टेकनली टेकन इनू रिटेन अर्निंग्स ऑफ द कंपनी इन इट्स बुक्स ऑफ अकाउंट्स। हां
एडवाइस करो फेयर वैल्यू्यूएशन वुड बी कवर्ड इन द नेटवर्थ ऑ नॉट। भाई साहब मुझे एक बात बताओ ये प्लांट एंड मशीनरी को आपने
फेयर वैल्यू पे लाए हैं आप। बराबर है आपने उसको रिटेन अर्निंग में आपने डाल दिया है। भाई साहब नेटवर्थ बोलता है कि पेड अप शेयर
कैपिटल आएंगे। सारे रिजर्व्स आएंगे। स्पा आएगा। सिक्योरिटी प्रीमियम अकाउंट पीएनएल का बैलेंस आएगा लेकिन एक्यूमुलेटेड लॉसेस
नहीं आएंगे। डिफ़ॉर्ड एक्सपेंडिचर नहीं आएंगे और मिसलेनियस एक्सपेंडिचर नॉट रिटर्न ऑफ नहीं आएंगे। आल्सो इट डज़ नॉट
इंक्लूड एनी रिजर्व्स आउट ऑफ क्रिएटेड ऑफ रिवैल्यूएशन ऑफ़ एसेट्स। जब आप अपने एसेट्स को फेयर वैल्यू्यूएशन पे लाने की कोशिश कर
रहे हो बुक्स ऑफ अकाउंट्स के अंदर और उससे जो भी एक्स्ट्रा अमाउंट आ रहा है अगर आपने रिटेन अर्निंग में डाला है तो भाई साहब
उसे आपको एक्सक्लूड करना पड़ेगा। सिंपल सी बात है। क्लियर है गाइस? ओके। अच्छा एक क्वेश्चन यहां पर डायरेक्टली ऐसा पूछा जा
सकता है कि फ्री रिजर्व्स के बारे में बताओ। कंपनी केम अक्रॉस सर्टेन ट्रांजैक्शंस आल्सो एंड गॉट कंफ्यूज्ड एस
टू व्हाट टू बी इंक्लूडेड इन फ्री रिजर्व्स। भाई साहब फ्री रिजर्व्स में आपके पास में रिजर्व्स आते हैं जिसमें आप
बोलते हो कि सारे जनरल रिजर्व्स आएंगे। जनरल रिजर्व्स व्हिच इज अवेलेबल फॉर डिस्ट्रीब्यूशन एज डिविडेंड। जो भी पैसा
आप एज डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूट कर सकते हो ना उसको हम फ्री रिजर्व्स बोलते हैं। लेकिन इसके अंदर अनरियलाइज्ड गेंस, नोशनल
गेंस, रिवैल्यूएशन ऑफ एसेट्स ये सब नहीं आता है। अगर आप एसेट्स एंड लायबिलिटीज को उनके कैरिंग अमाउंट को आप चेंज करते हो
उसकी वजह से अगर कोई सरप्लस खड़ा होता है भाई साहब। हां, तो भाई साहब उसको हम फ्री रिजर्व्स के अंदर कैलकुलेट नहीं करते हैं।
बेसिकली इसी के साथ में हमारी सारी डेफिनेशंस यहां पर कवर कवर होती है बेटा। और अगर हम लोग यहां पर इस चैप्टर की बात
करें तो इस चैप्टर में हम लोगों ने टाइप्स ऑफ कंपनीज़ तो देखी ही सही बराबर है। लेकिन हमने कुछ ऐसे चीजें कवर करी जो चैप्टर
नंबर टू की भी है। टाइप्स ऑफ कंपनीज़ में अधिकतर समय हमारा यहां पर गया है। चैप्टर नंबर टू से मैंने ओपीसी का टॉपिक रूल नंबर
फोर और चैप्टर नंबर टू से रिलैक्सेशन एंड कन्वर्शन ऑफ़ सेक्शन एट कंपनी कवर किया है। बराबर है। और मैंने फिर आपको अदर
इंपॉर्टेंट डेफिनेशंस यहां पर टोटल एट से 10 डेफिनेशंस मैंने आप लोगों को यहां पर बता दी है। जो बची हुई डेफिनेशंस है बेटा
वो आप ऐसा मत सोचना कि हम लोगों ने कवर नहीं करी है। उसको कवर करने की जरूरत ही नहीं है। वह रिस्पेक्टिव चैप्टर्स के अंदर
कवर हो जाती है। बेटा मैंने आप लोगों को यहां तक सब कुछ कवर करवा दिया है। रिलेटिव कवर करवा दिया। रिलेटेड पार्टी कवर करवा
दिया। ऑफिसर एंड ऑफिसर डिफॉल्ट छोड़ दो। नेटवर्थ करवा दिया। एमडी मैनेजर मैंने आप लोगों को कवर करवा दिया। मैंने केएमपी
आपको कवर करवा दिया। फाइनेंसियल ईयर और फाइनेंसियल स्टेटमेंट। देखो बुक में भी मैंने सारी इंपॉर्टेंट डेफिनेशन कवर करवा
दी है और जो बची हुई डेफिनेशंस हैं ये सारी की सारी डेफिनेशंस आपके चैप्टर्स में कवर हो जाएगी। इनफैक्ट मैंने आपको फ्री
रिजर्व्स भी यहां पर कवर करवा दिया है। तो आई थिंक इसी के साथ में हमारा जो ये चैप्टर है वो यहां पर खत्म होता है। ठीक
है? आप लोग अच्छे से पढ़ाई करो। ये एग्जाम ओरिएंटेड बैच जो है बड़े धमाके के साथ में चालू होने वाला है। आगे आने वाली
रिकॉर्डिंग्स भी आप लोगों को बहुत अच्छी मिलने वाली है और मैं काफी डिटेल्ड मैनर में आप लोगों को पढ़ाने वाला हूं। सो इस
वीडियो के लिए इतना ही। अगर आपको यह एग्जाम ओरिएंटेड बैच का पहला प्रीिलिमिनरी चैप्टर अच्छा लगा हो तो प्लीज कमेंट डाउन
बिलो। मुझे बताना आप लोगों को कैसा लगा और क्या चीजें आप लोगों को चाहिए ये भी बताना। थोड़ा प्यार दिखा कर जाना एंड आई
शैल सी यू इन द नेक्स्ट वन। थैंक यू सो मच गाइस। दिस सीजे साइनिंग ऑफ फॉर टुडे। आई विल सी यू गाइस ऑल ऑफ यू टुमारो। मे बी इन
द नेक्स्ट वीडियो विथ अ डिफरेंट टॉपिक विथ अ डिफरेंट चैप्टर एंड अ लॉट मोर एनर्जी। अनंटिल देन थैंक यू सो मच। बाय-बाय। टेक
केयर। हैव अ गुड डे, हैव अ गुड नाइट। हैव अ गुड लाइफ। एंड मोस्टेंटली यू नो दिस। लव यू ऑल। थैंक यू सो मच गाइस। बाय-ब बाय
बच्चा लोग। थैंक यू। थैंक यू। थैंक यू। थैंक
The batch uses a mix of 60-70% recorded lectures and 3-4 major chapters taught live. A separate announcement video will detail the complete schedule and index, indicating which lectures are live and which are recorded. The strategy is to provide a structured yet flexible learning path covering the entire syllabus.
Students get access to a Google Drive folder containing 'Star Sheets' (handwritten summary notes), 'Mantra Jap' (revision audio clips for each chapter), and an e-book divided into a concept book ('The Book of Kanoon') and a question bank ('The Book of Junoon'). Other resources include amendment updates, ICAI materials, RTP/MTP, and previous year question papers.
The Act has 470 sections, 29 chapters, and 7 schedules. The President gave assent on August 29, 2013, and it was published in the Official Gazette on August 30, 2013. Section 1 was enforced immediately, while the remaining sections were brought into effect in phases.
Clause 20 defines a company as 'a company incorporated under this Act or any previous company law.' This means only entities registered under the 2013 Act or any earlier act (like the 1956 Act) qualify. Foreign companies like Apple or Unilever are not considered companies under this clause.
The features are: I - Incorporated Association (minimum members: 2 for private, 7 for public, 1 for OPC); P - Perpetual Succession (company continues despite member changes); C - Common Seal (optional official signature); L - Limited Liability (depends on type: shares, guarantee, or unlimited); A - Artificial Legal Person (a person in law, not a natural one); S - Separate Legal Entity (company and members are distinct).
'Means' indicates a closed interpretation, meaning the definition is exactly as written. 'Includes' allows an open interpretation, meaning the definition can be expanded beyond what is written. 'Means and includes' signifies an expanded interpretation, combining both approaches.
The Companies Act generally applies to statutory companies formed under other laws. However, if there is a conflict between the Companies Act and the individual act under which the statutory company was formed, the individual act will prevail.
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