यह वीडियो एएफएम (एडवांस्ड फाइनेंशियल मैनेजमेंट) के एमटीपी/आरटीपी एग्जाम के एडिशनल क्वेश्चंस की दूसरी कड़ी है। इसमें क्वेश्चन नंबर 26 से आगे के सवालों को हल किया गया है। ये क्वेश्चंस प्रैक्टिस के लिए बहुत ज़रूरी हैं, खासकर टफ पेपर की तैयारी के लिए। सॉल्यूशन स्टेप बाय स्टेप और प्रॉपर फॉर्मेट में दिए गए हैं ताकि आप आसानी से समझ सकें और एग्जाम में लिख सकें।
क्वेश्चन 26: एडवांस कैपिटल बजटिंग (एनपीवी कैलकुलेशन)
यह एक लंबा-चौड़ा क्वेश्चन है, लेकिन कांसेप्ट बिल्कुल सिंपल है। इसमें एक कंपनी को एंबुलेंस बनाने और बेचने के प्रोजेक्ट की फाइनेंशियल वायबिलिटी (एनपीवी) निकालनी है। कैपिटल बजटिंग के मूल सिद्धांतों और विभिन्न तकनीकों की गहन समझ इस प्रश्न को हल करने में मददगार होगी।
पार्ट 1: फोर ईयर प्रोजेक्ट
- डेटा एक्सट्रैक्शन: कंपनी 4 सालों में अलग-अलग क्वांटिटी में एंबुलेंस प्रोड्यूस और सेल करेगी।
- एवरेज प्राइस और कॉस्ट: एंबुलेंस तीन क्वालिटी (बेसिक, स्टैंडर्ड, डीलक्स) की हैं। इनकी सेलिंग प्राइस और कन्वर्जन कॉस्ट दी गई प्रॉबबिलिटी के हिसाब से वेटेड एवरेज निकालनी है।
- फिक्स्ड कॉस्ट: प्रोडक्शन वॉल्यूम के हिसाब से फिक्स्ड कॉस्ट अलग-अलग स्लैब में दी गई है। साल दर साल यूनिट्स के अनुसार सही कॉस्ट सेलेक्ट करें।
- डेप्रिसिएशन: 40 करोड़ के इनिशियल इन्वेस्टमेंट पर 10 साल का SLM डेप्रिसिएशन लगेगा (4 करोड़/साल)। Finance Solver का उपयोग करके कंपाउंड इंटरेस्ट और डेप्रिसिएशन की गणना को समझना यहाँ सहायक हो सकता है।
- कैश फ्लो कैलकुलेशन:
- EBIT = (एवरेज सेलिंग प्राइस x क्वांटिटी) - (एवरेज कन्वर्जन कॉस्ट x क्वांटिटी) - फिक्स्ड कॉस्ट - डेप्रिसिएशन
- PAT = EBIT - (EBIT x टैक्स रेट)
- कैश फ्लो = PAT + डेप्रिसिएशन
- एनपीवी कैलकुलेशन: सभी कैश फ्लो को 11% डिस्काउंट रेट से पीवी करें। एनपीवी नेगेटिव आई, इसलिए प्रोजेक्ट एक्सेप्टेबल नहीं है।
पार्ट 2: परपेच्युअल प्रोजेक्ट (5th ईयर ऑनवर्ड्स) यहां प्रोजेक्ट को अनलिमिटेड माना गया है। 4 साल बाद हर साल 450 एंबुलेंस बनेंगी।
- टर्मिनल वैल्यू: 5th ईयर ऑनवर्ड्स के परपेच्युअल कैश फ्लो की टर्मिनल वैल्यू (TV = कैश फ्लो / डिस्काउंट रेट) निकालें और 4th ईयर के अंत में पीवी करें।
- डेप्रिसिएशन टैक्स शील्ड: परपेच्युअल कैश फ्लो में डेप्रिसिएशन का टैक्स बेनिफिट शामिल नहीं होगा क्योंकि यह सिर्फ 10 साल के लिए है। बाकी के 6 सालों (5th से 10th ईयर) के टैक्स बेनिफिट का अलग से पीवी निकालें।
- फाइनल एनपीवी: पार्ट 1 के 4 सालों के पीवी + पार्ट 2 की टर्मिनल वैल्यू का पीवी + डेप्रिसिएशन टैक्स शील्ड का पीवी = टोटल पीवी। इसमें से इनिशियल इन्वेस्टमेंट घटाने पर एनपीवी पॉजिटिव आती है, इसलिए प्रोजेक्ट एक्सेप्टेबल है।
क्वेश्चन: ऑप्टिमल डिस्पोजल टाइम (स्क्रैप वैल्यू)
इस क्वेश्चन में एक कंपनी को अपनी पुरानी कैब्स (2000 किलो) को कब बेचना है, यह तय करना है।
- डेटा:
- हर साल स्टोरेज कॉस्ट अलग (1st साल में ₹90,000, 2nd में ₹1,05,000, 3rd में ₹1,19,000)।
- प्रति किलो स्क्रैप प्राइस हर साल अलग और उसकी प्रॉबबिलिटी दी गई है। एक्सपेक्टेड प्राइस निकालें: 1st साल में ₹70/किलो, 2nd में ₹59/किलो, 3rd में ₹54.50/किलो।
- एनपीवी कैलकुलेशन:
- 1st साल एंड में बेचते हैं: (2000 किलो x ₹70) - ₹90,000 (स्टोरेज) = ₹50,000 कैश फ्लो। इसे 10% डिस्काउंट करें। एनपीवी ≈ ₹45,455
- 2nd साल एंड में बेचते हैं: (2000 x 59) - (90,000 + 1,05,000) = -₹77,000 का कैश फ्लो 2nd साल एंड में। इसे पीवी करने पर एनपीवी नेगेटिव आएगी।
- 3rd साल एंड में बेचते हैं: एनपीवी नेगेटिव आएगी।
- डिसीजन: केवल 1st साल के एंड में स्क्रैप बेचने पर पॉजिटिव एनपीवी मिल रही है। इसलिए पहले साल के एंड में ही बेच देना चाहिए।
- पार्ट 2 (सेंसिटिविटी): अगर 3rd साल की स्क्रैप प्राइस बढ़कर ₹84/किलो हो जाए, तो तीनों विकल्पों की नई एनपीवी निकालें। एनपीवी 1st और 3rd साल एंड में लगभग बराबर (₹45,454) आएगी। फिर भी 1st साल एंड में बेचना बेहतर होगा क्योंकि पैसा जल्दी मिल रहा है।
क्वेश्चन: एपीवी मेथड (एडजस्टेड प्रेजेंट वैल्यू)
यह एक डिटेल्ड क्वेश्चन है जो एपीवी मेथड के कॉन्सेप्ट को कवर करता है।
- बेस केस एनपीवी:
- इनिशियल इन्वेस्टमेंट: 390 करोड़ (लैंड + प्लांट + वर्किंग कैपिटल)
- कैश फ्लो कैलकुलेशन: रेवेन्यू, ऑपरेटिंग कॉस्ट, डेप्रिसिएशन (WDV 25%) का उपयोग करके हर साल का PAT निकालें। इसमें कैपिटल सब्सिडी (20 करोड़) जोड़ें और लैंड सेल पर कैपिटल गेन टैक्स (9 करोड़) घटाएं।
- डिस्काउंटिंग: सभी कैश फ्लो को 14% (अनलीवर्ड कॉस्ट ऑफ इक्विटी) से पीवी करें। बेस केस एनपीवी ≈ 5.35 करोड़ (पॉजिटिव)।
- इफेक्ट ऑफ फाइनेंसिंग:
- पीवी ऑफ टैक्स शील्ड ऑन इंटरेस्ट:
- गवर्नमेंट लोन (100 करोड़, 5%) पर हर साल 5 करोड़ का इंटरेस्ट, टैक्स शील्ड = 1.5 करोड़। इसे 5% से पीवी करें।
- बैंक लोन (120 करोड़, 10%): प्रिंसिपल 4 सालों में बराबर चुकता होगा। हर साल के ओपनिंग बैलेंस पर इंटरेस्ट और उस पर टैक्स शील्ड निकालें। इसे 10% से पीवी करें।
- पीवी ऑफ इंटरेस्ट सब्सिडी: गवर्नमेंट से मिली इंटरेस्ट सब्सिडी (5% का बेनिफिट) का पीवी करें।
- पीवी ऑफ फ्लोटेशन कॉस्ट सेविंग: डेट लेने से 4% फ्लोटेशन कॉस्ट (220 करोड़ पर) बच गई, इसका सीधा बेनिफिट है।
- पीवी ऑफ फाइनेंशियल डिस्ट्रेस कॉस्ट: 5वें साल में फाइनेंशियल डिस्ट्रेस की एग्जेक्टेड कॉस्ट (30 करोड़ x 10% प्रॉबबिलिटी) को 10% मार्केट रेट से पीवी करें।
- पीवी ऑफ टैक्स शील्ड ऑन इंटरेस्ट:
- फाइनल एपीवी: बेस एनपीवी + सभी फाइनेंसिंग बेनिफिट्स - फाइनेंशियल डिस्ट्रेस कॉस्ट = कुल एपीवी ≈ 22.46 करोड़। एपीवी पॉजिटिव है, इसलिए प्रोजेक्ट एक्सेप्ट करें।
क्वेश्चन: रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI)
यह क्वेश्चन 14 दिन के RSI की गणना और इंटरप्रिटेशन पर आधारित है।
- स्टेप 1: प्राइस गेन/लॉस निकालें: प्रतिदिन क्लोजिंग प्राइस के आधार पर गेन या लॉस कैलकुलेट करें।
- स्टेप 2: एवरेज गेन और एवरेज लॉस निकालें: 15वें दिन से RSI कैलकुलेशन शुरू होगी।
- 15वें दिन: पिछले 14 दिनों के कुल गेन और लॉस को 14 से डिवाइड करें।
- 16वें दिन से: पिछले दिन का एवरेज (13 दिन का) + आज का गेन/लॉस, फिर 14 से डिवाइड करें।
- स्टेप 3: RS और RSI निकालें:
- RS = एवरेज गेन / एवरेज लॉस
- RSI = 100 - (100 / (1 + RS)) या 100 x RS / (1 + RS)
- रिजल्ट: लेटेस्ट RSI ≈ 34.64 आता है, जो 30-50 की रेंज में है। इसका मतलब शेयर में बियरिश ट्रेंड है।
क्वेश्चन: ट्राई-पार्टी रेपो ट्रांजैक्शन
यह एक बैंक द्वारा दूसरे बैंक से शॉर्ट-टर्म लोन लेने और उसमें तीसरे बैंक को एजेंट के रूप में शामिल करने का केस है। डिस्ट्रीब्यूटेड सिस्टम डिजाइन में CAP थ्योरम को समझना, हालांकि एक अलग विषय है, विभिन्न पक्षों के बीच जटिल निर्णय लेने की प्रक्रिया को समझने में दृष्टिकोण प्रदान कर सकता है।
- नेचर ऑफ ट्रांजैक्शन: इसे ट्राई-पार्टी रेपो कहते हैं क्योंकि इसमें तीन पार्टियां होती हैं।
- डर्टी प्राइस कैलकुलेशन: गवर्नमेंट बॉन्ड की फेस वैल्यू (8 करोड़) पर क्लीन प्राइस (99.42%) निकालें, फिर उसमें 262 दिनों का एक्रूड इंटरेस्ट (कूपन 10%) जोड़कर डर्टी प्राइस प्राप्त करें।
- लोन अमाउंट: डर्टी प्राइस में से 2% मार्जिन काटकर लोन की राशि निकालें।
- लोन पर इंटरेस्ट और एजेंट कमीशन: लोन पर 5.65% सालाना ब्याज लगेगा और एजेंट (बैंक C) को 15% सालाना कमीशन (14 दिनों के लिए) देना होगा।
यदि आप फार्मास्यूटिकल्स या अन्य क्षेत्रों के लिए वित्तीय प्रबंधन की तैयारी कर रहे हैं, तो Pharmacovigilance परीक्षा की तैयारी से संबंधित मार्गदर्शिकाएँ भी उपयोगी हो सकती हैं।
हेलो एवरीवन राधे-धे। हम लोग एएफएम में एडिशनल क्वेश्चन देख रहे थे जिसमें जनरल इंस्टट्यूट के आरटीपी एमटीपी एग्जाम के
कुछ क्वेश्चंस हैं अपने पास। तो इनमें से अपन ने 25 नंबर तक के क्वेश्चंस प्रीवियस एडिशनल क्वेश्चन वाले वीडियो में कर लिए
थे। अब अपन आगे के कंटिन्यू कर लेते हैं क्वेश्चंस। ये क्वेश्चंस काफी इजी हैं। बस एक बार अपन गो थ्रू कर लेंगे तो आपको खुद
को समझ में आ जाएगा। तो इसमें और कोई एक्स्ट्रा टाइम आपको नहीं देना है क्योंकि ये सिर्फ एक बार प्रैक्टिस के लिए होते
हैं। इनमें से रिपीट होने के चांसेस कम होते हैं। ऐसा नहीं है कि नहीं होंगे। हो सकता है कोई एक आध क्वेश्चन आ जाए। बस
इतनी ही इनकी एडिशनल क्वेश्चन की आप एक वेटेज समझ सकते हैं एग्जाम के लिए। बट एक बार अपने को एक्स्ट्रा कॉन्फिडेंस के लिए
या टफ पेपर आए तो उसकी प्रैक्टिस के लिए एक बार देखना इनको जरूरी है। तो ये जितने भी एडिशनल क्वेश्चंस अब अपन आज की वीडियो
में करने वाले हैं। इनमें क्वेश्चंस में मैंने मार्किंग ऑलरेडी कर रखी है। कुछ जो स्पेशल पॉइंट्स हैं क्वेश्चन के। इसके
अलावा इनके सॉलशंस भी ऑलरेडी मैंने आप लोगों के लिए लिख रखे हैं, बना रखे हैं। अपन ने जो क्लास में स्टेप वाइज तरीके से
पढ़ा है, उसके अकॉर्डिंग पूरे प्रॉपर सॉल्यूशन बना रखे हैं। ताकि अपन फटाफट से सॉल्यूशन रेफर कर पाएंगे। अपना ज्यादा
टाइम उसके अंदर इनवॉल्व नहीं होगा। तो चलिए स्टार्ट करते हैं। टाइम वेस्ट करते नहीं है अपन अपना। क्वेश्चन नंबर 26 है
अपना। इससे स्टार्ट करेंगे। तो क्वेश्चन जो 26 है 25 तक के मैंने आपको प्रीवियस एडिशनल क्वेश्चंस के वीडियो में करा दिए
तो ऐसा मत बोलिएगा कि सर वो कहां गए ना वो वीडियो नहीं देखा हो तो आपने प्लीज वो जरूर देख लीजिएगा। उसके बाद अपन
कंटिन्यूटी में चल रहे हैं। तो क्वेश्चन 26 जो है ये आपके एडवांस कैपिटल बजटिंग डिसीजंस चैप्टर का क्वेश्चन है। तो इस
क्वेश्चन में क्या है? अब इस क्वेश्चन को अगर आप देखोगे तो यार सर बिल्कुल अजीब सा बड़ा सा क्वेश्चन दिखता है। बट बहुत आसान
सा क्वेश्चन है। इस क्वेश्चन में आपको एनपीवी निकालनी है प्रोजेक्ट की और डिसीजन मेकिंग करनी है। मैं आपको अगर क्वेश्चन की
थोड़ी सी हिस्ट्री बताऊं क्या हो रहा है इसमें? इस क्वेश्चन में एक कंपनी है जो हॉस्पिटल्स के अंदर ऑक्सीजन वगैरह की
सप्लाई के लिए पाइप्स वगैरह इंस्टॉल करती है। अब ये कंपनी क्या कर रही है? ये कुछ वेंस और ट्रक्स को एंबुलेंस में कन्वर्ट
करेगी यानी प्रोड्यूस करेगी। एक तरीके से एंबुलेंस बनाएगी और बेचेगी हॉस्पिटल्स को। तो एंबुलेंस प्रोड्यूस और सेल करने वाली
है ये कंपनी। तो नेक्स्ट चार साल का यानी फर्स्ट फोर इयर्स ऑफ ऑपरेशन का आपको डाटा दे रखा है कि कितनी प्रोडक्शन और सेल्स
होने वाली है। यानी जितनी एंबुलेंस प्रोड्यूस करेगी उतनी ही ये कंपनी सेल करने वाली है एंबुलेंस। तो कितनी एंबुलेंस
प्रोड्यूस एंड सॉल्व करेंगे उसकी क्वांटिटी लिखी हुई है। यानी अपने प्रोडक्ट की क्वांटिटी जो आपकी बिकने वाली
है वो आपको दे रखी है। अब इसके बाद आपको बताया गया है कि जब माल बिकेगा तो माल बिकेगा तो आपको पैसा भी मिलेगा। तो सेलिंग
प्राइस पर एंबुलेंस आपको पर यूनिट आपको दे रखी है और एंबुलेंस बनाने की कॉस्ट भी लगेगी तो कन्वर्ज़ कॉस्ट पर यूनिट दे रखी
है। क्यों दे रखी है? ताकि आप कैश फ्लो पता कर पाए। हमारा अल्टीमेटली ऑब्जेक्टिव क्या होता है? हमें इनिशियल इन्वेस्टमेंट
चाहिए होता है एनपीवी निकालने के लिए। वो स्टेप वन में वो आपको मिल जाएगा ऊपर। क्योंकि ये प्रोजेक्ट जब आप लगा रहे हो तो
आप 40 करोड़ का इन्वेस्टमेंट कर रहे हो एंबुलेंस को कन्वर्ट करने के लिए। इनिशियल इन्वेस्टमेंट हो गया। देन अपने को कैश
फ्लोस चाहिए होते हैं। तो कैश फ्लोस आपको यहां से मिलेंगे। सेलिंग प्राइस कन्वर्जन कॉस्ट। अब सेलिंग प्राइस कन्वर्जन कॉस्ट
अगर आप ध्यान से देखेंगे तो इन्होंने क्या बोला कि जब हम एंबुलेंस बनाकर बेचेंगे ना तो उसमें भी मल्टीपल कैटेगरीज है। बेसिक
क्वालिटी की एंबुलेंस स्टैंडर्ड क्वालिटी की, डीलक्स क्वालिटी की। है ना? भाई पेशेंट एंबुलेंस में आए तो उसको कैसा फील
आए? एक तो भाई गरीबों वाला फील आए बेसिक-बेसिक। एक भाई उस एंबुलेंस में PS5 रखा हुआ है। वो मस्त गेम खेलते हुए जा रहा
है पेशेंट। अरे सब वो पेशेंट है। वो कैसे गेम खेलेगा? अरे उसके साथ का बंदा मान लो गेम खेलते हुए जा रहा है। है ना? फीलिंग
आनी चाहिए ना कि भैया हम कोई लग्जरी जगह बैठे हैं। बड़े अमीर बाप की औलाद जो है वो ऐसी एंबुलेंस बुक करेंगे। तो ऐसे एक
स्टैंडर्ड क्वालिटी है, एक डीलक्स क्वालिटी की। तीन क्वालिटी की हम एंबुलेंस बनाएंगे और ये मार्केट में हम हॉस्पिटल्स
को बेचेंगे। अब तीन क्वालिटी की अलग-अलग एंबुलेंस है तो इनकी सेलिंग प्राइस और कन्वर्ज़ कॉस्ट भी अलग-अलग होगी। अब हमें
क्या पता कि सर कौन सी एंबुलेंस कितने में बिक रही है। हमारी तो टोटल एंबुलेंस की क्वांटिटी दे रखी है। तो इन्होंने इसकी
प्रोबेबिलिटी दे दी कि भैया जितनी भी एंबुलेंस बनेंग या बिकेंगी उसमें से 20% तो बेसिक क्वालिटी होंगी। 45% स्टैंडर्ड
क्वालिटी वाली होंगी और 35% होंगी डीलक्स क्वालिटी की जिसके अंदर PS5 की फैसिलिटी भी होगी। तो उसके अकॉर्डिंग आप बफरगेशन
करेंगे। यानी हमें पता है क्या करना है? सेलिंग प्राइस का एवरेज कर लेना है। और जो कन्वर्ज़ कॉस्ट है इसका भी एवरेज कर लेना
है। किससे? प्रोबेबिलिटी से। बस सिंपल सा आपका क्वेश्चन की लेंथ बढ़ा दी गई इन्होंने। ने बस और कुछ नहीं किया। इसके
बाद आपको क्या बोला? फिक्स्ड कॉस्ट दे रखी है। एंबुलेंस बनाओगे तो कुछ कुछ फिक्स्ड खर्चे भी आपके लगेंगे। ठीक है? वो
प्रोडक्शन में फिक्स्ड खर्चे क्या लगेंगे? वो आपको बता रखा है कि पर ईयर के रुपीस इन करोड़ में आपका डाटा दिया हुआ है करोड़ के
अंदर। आप कितनी यूनिट्स बनाओगे एंबुलेंस की? उस पे डिपेंड करता है प्रोडक्शन वॉल्यूम पर। अगर आप एक साल में 200 से 299
यूनिट्स बनाते हो तो इतना खर्चा। इतनी यूनिट्स के बीच में बनाते हो तो इतना खर्चा। इतनी यूनिट्स के बीच में बनाते हो
तो इतना खर्चा। यानी फिक्स बता दिया भैया आपकी फिक्स्ड कॉस्ट इन तीनों में से कोई सी भी लगेगी वो यूनिट वाइज देख लेना। अब
आप देखो पहले साल में अगर आप 250 एंबुलेंस बनाओगे तो आप बताओ कौन से स्लैब में आते हो इस वाले में तो यानी 40 करोड़ की पहले
साल की फिक्स्ड कॉस्ट सेकंड ईयर में 300 एंबुलेंस आप बनाएंगे तो 300 देखो एग्जैक्टली इस वाले स्लैब के अंदर आ रहे
हो आप सेकंड वाले में यानी 50 करोड़ की कॉस्ट है और इसके बाद 450 450 यानी 450 एंबुलेंस इस स्लैब में आती है यानी 55
करोड़ की कॉस्ट होगी ईयर थ्री और ईयर फोर के अंदर बस यही आपको टैक्स रेट दे रखी है इसके अलावा आपको बोला है कि जो
डेप्रिसिएशन है आपका इनिशियल इन्वेस्टमेंट था ना 40 करोड़ का यह वाला इसके ऊपर डेप्रिसिएशन मिलेगा एसएलएम से 10 साल का।
ठीक है? तो डेप्रिसिएशन आपका क्या करेगा? एक बार अपन कैश फ्लो में माइनस करेंगे आप ईबीआईटी निकालने के लिए। ईबीआईटी में से
टैक्स माइनस करेंगे तो आपका क्या आ जाएगा? नो पेट। इंटरेस्ट अपन माइनस नहीं करते। इस क्वेश्चन में तो लोन वगैरह कुछ है भी नहीं
इंटरेस्ट। अदरवाइज करते नहीं है हम प्रोजेक्ट। फर्म के कैश फ्लो लेते हैं। कांसेप्ट के लिए ऑलरेडी अपन ने कैपिटल
बजटिंग चैप्टर में पूरा समझा हुआ है। क्यों किस लिए करते हैं। तो यहां ये मत समझना कि सर कांसेप्ट तो डिस्कस हुआ ही
नहीं। वो ऑलरेडी अपन पढ़ चुके हैं। ये तो एक्स्ट्रा क्वेश्चंस की प्रैक्टिस चल रही है। तो अपन नोपड जो आ जाएगा उसमें अपन
क्या करेंगे? अपना डेप्रिसिएशन वापस ऐड क्योंकि वो नॉन कैश एक्सपेंस था। तो डेप्रिसिएशन फिर लेस ही क्यों किया था
ताकि इसकी टैक्स बेनिफिट ले लें अपन। तो इसलिए अपन ने किया था। तो बस ये करेंगे। आप बताइए डिस्काउंटेड है 11% आपकी। आपको
इस प्रोजेक्ट की फाइनेंसियल बायबिलिटी यानी एनपी भी निकाल के देनी है। 4 साल का प्रोजेक्ट है ये मान के चलिए आप। अब आपको
क्या बोला है? एक पॉइंट बोला है टैक्स बेनिफिट डेप्रिसिएशन के ऊपर अनऑर्ड वाला नहीं मिलेगा। कहने का मतलब क्या हुआ? आप
समझिए। ये देखो ये प्रोजेक्ट की चार साल की डिटेल दी हुई है और 4 साल का ही आपको क्या बोला है? एनपीवी निकाल दीजिए। तो 4
साल आपको कैश फ्लो मिलेंगे। एनपीवी निकल गया खत्म। यानी 4 साल में प्रोजेक्ट खत्म हो जाएगा। बट इस प्रोजेक्ट में जो
इन्वेस्टमेंट लगा था उस पे डेप्रिसिएशन तो 10 साल में मिलना था। यानी स्टार्टिंग के चार साल का डेप्रिसिएशन पे टैक्स बेनिफिट
मिल जाएगा। बट उसके बाद वाले साल का क्या? भाई उसके बाद वाले साल में इन्होंने बोला कैश फ्लो ही नहीं है तो टैक्स का बेनिफिट
कैसे मिलेगा? तो वो इग्नोर करना है। यानी बस अगर यह नहीं बोला हुआ होता तो भी अपन इसको इग्नोर ही करके चलते। तो इतना ही
ध्यान रखना है। सेकंड पार्ट फिर बाद में देखेंगे। फर्स्ट पार्ट ये है। इसके बाद आजकल जनरली मैंने बताया इंस्टट्यूट काफी
स्टूडेंट्स की गलती जो होती है वो डेसिमल्स वगैरह में हो जाती है। इंस्टट्यूट की कुछ अलग अजमशन और क्वेश्चन
में कुछ अलग। तो जनरल एजम्पशन क्या होती है वो मैंने आपको नोट्स में लिखवा रखी है। इसके अलावा इंस्टट्यूट आजकल जहां
स्पेसिफिक काम करता है क्वेश्चन में लिख देता है। पीवी फैक्टर तीन डेसिमल में ले लो। सारी रुपीज़ इन करोड़ में कैलकुलेशन
करना और तीन डेसिमल में कैलकुलेशन करना। बाकी सारी कैलकुलेशन भी। अब आप इस क्वेश्चन में इतना पढ़ने के बाद भी आप
बोलोगे कि सर मैं तो फुल वैल्यू में सॉल्व करके आ गया। रुपीज़ी इन करोड़ में नहीं किया। फिर ज़ीरो मिलेगा। यह गारंटीड है फिर
ज़ीरो ही मिलेगा। फिर मैसेज मत करना कि सर मैं तो करके आ गया क्या होगा? क्योंकि क्लियर इंस्ट्रक्शन है क्वेश्चन में। अगर
उसका वायलेशन किया तो फिर ज़ीरो ही मिलेगा। फिर ये मत बोलना कि इंस्टट्यूट के एग्जामिनर को कुछ नहीं आता। उसप इतनी
नॉलेज भी नहीं है कि अरे भाई लिखा था इन्होंने। इसलिए लिखा था कि आप ऐसी गलती ना करें। ठीक है? तो चलिए फटाफट से
क्वेश्चन देख लो। सॉल्यूशन। इनिशियल इन्वेस्टमेंट आपका 40 करोड़ का। अब कैश फ्लोस आपको चाहिए तो उसके लिए सेल प्राइस
और कन्वर्ज़ कॉस्ट पर यूनिट चाहिए। तो वो एवरेज करनी थी। तो सेल प्राइस और कन्वर्ज़ कॉस्ट मैंने देखो यहां पर एवरेज करके पता
कर ली। 5100 की 3165000 अब कितनी यूनिट्स थी एंबुलेंस सोल्ड की हर साल की आपकी यूनिट्स क्वेश्चन में गिवन थी मल्टीप्लाई
बाय सेलिंग प्राइस तो मल्टीप्लाई बाय सेलिंग प्राइस करोगे इसे करोड़ में कन्वर्ट करके लिख लेना 3 डेसिमल तक ऐसे
कन्वर्ज़ कॉस्ट को रुपीस इन करोड़ में आपने लिख लिया 3 डेसिमल तक क्वेश्चन में लिखा हुआ था इसके बाद फिक्स्ड कॉस्ट बताई हुई
थी वो अपन ने आइडेंटिफाई कर ली जिस भी स्लैब के अकॉर्डिंग आ रही थी फिर डेप्रिसिएशन आपका 40 करोड़ के
इन्वेस्टमेंट पे 10 साल यानी 44 करोड़ सर हमारा तो 4 साल का इन्वेस्टमेंट हो रहा है तो डिवाइड बाय फोर कर देंगे इसको नहीं
डेप्रिसिएशन तो इनकम टैक्स वाले 10 साल में ही देंगे। उसके बाद आपका कैश फ्लो नहीं है इसलिए टैक्स बेनिफिट नहीं मिल
रहा। वो इनकम टैक्स वालों की गलती नहीं है। ऐसा अपनी और एजमशन मत ले लेना कुछ। ठीक है? इसके बाद ईबीआईटी आ गया आपका
माइनस टैक्स कर दोगे टैक्स रेट से तो नोपैट आ जाएगा। नोपैट में आप क्या करोगे? डेप्रिसिएशन बैक करोगे। कोई कैपिटल
एक्सपेंडिचर ये सब होता है वर्किंग कैपिटल। वो सब कर देते हैं। बट ऐसा कुछ बाद वाले सालों में नहीं है। तो ये आपके
कैश फ्लोस आ गए। इन कैश फ्लोस को अब क्या करना है? पीवी करना है। 11% के डिस्काउंट रेट से तीन डेसिमल लेके आप कर लेना। हो
गया खत्म। यह आपका पीवी ऑफ कैश इनफ्लो माइनस इनिशियल इन्वेस्टमेंट एनपी नेगेटिव आ गई नहीं करना आपको एक्सेप्ट नॉट
एक्सेप्टेबल इतना आसान अब देखो सेकंड पार्ट सेकंड पार्ट में क्या बोला कि हम है ना जिंदगी भर ये काम करने वाले हैं हम
जिंदगी भर एंबुलेंस बनाएंगे और बेचेंगे केवल 4 साल का प्रोजेक्ट नहीं हमारा जिंदगी भर का है तो जिंदगी भर के फिर कैश
फ्लो भी तो चाहिए तो इन्होंने बोला चौथे साल के बाद यानी फिफ्थ ईयर ऑनवर्ड्स इन्होंने क्या बोला आफ्टर फोर्थ ईयर आप
450 एंबुलेंस हर साल बना के बेचने वाले हैं। यानी जो फोर्थ ईयर में थी ना उतनी ही क्वांटिटी फिफ्थ ईयर ऑनवर्ड्स यानी चार
साल का तो आपने पीवी कर लिया। पांचवें साल ऑनवर्ड्स आप क्या करोगे जो परपचुअल कैश फ्लो है उसकी टर्मिनल वैल्यू निकालोगे वो
फोर्थ ईयर एंड की आएगी। उसे पीवी करके जीरो टाइम पे लाओगे। उस वैल्यू को और ऐड करना है आपको जो आपने स्टार्टिंग के चार
साल की एनपीवी निकाली तो टोटल एनपीवी हो गई। ये तो अपन ने किया है ना बेसिक ये पीवी का काम है जो बेसिक में पढ़ा था जब
सिलेबस स्टार्ट किया था। सिक्योरिटी वैल्यू्यूएशन चैप्टर में भी किया था और वही कैपिटल बजटिंग में भी किया था। वही
चीज़ इस पार्ट में करनी है। ठीक है? तो ये चीज आपको अब करनी है इसमें एक स्पेशल पॉइंट है क्वेश्चन ओरिएंटेड पॉइंट है वो
देखना ध्यान से एक बार देखो तो फिफ्थ ईयर ऑनवर्ड्स कैश फ्लो पता कर लें क्या होगा परपचुअल कैश फ्लो यानी हमारे लिए हम फोर्थ
ईयर एंड में खड़े हैं फिफ्थ ईयर ऑनवर्ड्स जो जिंदगी भर मिलने वाला है तो परपचुअल कैश फ्लो में फर्स्ट कौन सा होगा फिफ्थ
ईयर परपचुअल पहला साल ये होगा तो उसका कैश फ्लो पता कर लें ताकि उससे टर्मिनल वैल्यू निकाल सकें ये बेसिक्स आपके पीवी के
स्ट्रांग होने चाहिए तभी आप क्लिक कर पाएंगे सारी चीजें तो आपकी सेलिंग प्राइस जो है वो आप ले लेंगे 450 एंबुलेंस के
अकॉर्डिंग कन्वर्ज़ कॉस्ट ले लेंगे फिक्स्ड कॉस्ट ले लेंगे। इसके अलावा क्या है? डेप्रिसिएशन। सर डेप्रिसिएशन आपने यहां पे
माइनस क्यों नहीं किया? क्योंकि पहले माइनस करते ईबीआईटी में से टैक्स लेस करते। फिर वापस से डेप्रिसिएशन ऐड बैक
करते तो हमारा कैश फ्लो आता। यहां पे आप सर डेप्रिसिएशन लेना भूल गए क्या? तो ध्यान से सुनिए। जो डेप्रिसिएशन है उसका 4
साल का बेनिफिट आप यहां तक ले चुके स्टार्टिंग के 4 साल में। डेप्रिसिएशन का बेनिफिट जो है केवल 10 साल तक मिलना है।
तो परपचुअल मिलेगा कि नहीं? हम तो परपचुअल वाला कैश फ्लो निकालने फील करिएगा। ऐसा कैश फ्लो जो जिंदगी भर चलेगा फिफ्थ ईयर
ऑनवर्ड से। तो डेप्रिसिएशन हम लेस क्यों करते हैं? क्योंकि उस पर टैक्स बेनिफिट ले सके इसलिए वापस उसको फिर बाद में ऐड बैक
कर दिया जाता है टैक्स बेनिफिट लेने के बाद। यानी एक तरीके से हमारे कैश फ्लो में हम डेप्रिसिएशन का टैक्स बेनिफिट इंक्लूड
कर लेते हैं। लेकिन अगर मैं फिफ्थ ईयर ऑनवर्ड्स वाले कैश फ्लो में डेप्रिसिएशन का टैक्स बेनिफिट ले लेता तो इसका मतलब
मैं यह मान लेता कि वो जिंदगी भर मिलेगा नहीं। 4 साल कंप्लीट हो गए। रिमेनिंग 6 साल में और मिलेगा। क्योंकि डेप्रिसिएशन
टोटल 10 साल का था। 4 साल कंप्लीट हो गए। रिमेनिंग 6 साल में डेप्रिसिएशन का बेनिफिट और मिलेगा। क्योंकि अब तो हम
बिज़नेस कंटिन्यू कर रहे हैं ना तो मिल जाएगा रिमेनिंग 6 साल में और। लेकिन परपचुअल नहीं मिलेगा। केवल छ साल के लिए
और मिलेगा। इसलिए डेप्रिसिएशन का टैक्स बेनिफिट का अलग से पीवी करेंगे। रिमेनिंग 6 साल का ये स्पेशल पॉइंट है इस क्वेश्चन
का। बस तो कंसेप्चुअली आपको सोचना है। तो एक बार मैंने डेप्रिसिएशन इग्नोर किया कि डेप्रिसिएशन नहीं है अब कुछ भी। तो उसका
कोई टैक्स बेनिफिट नहीं लिया। तो ये कैश फ्लो आ गया। ये कैश फ्लो कब का है? फिफ्थ ईयर ऑनवर्ड्स का। तो इसकी टर्मिनल वैल्यू
निकालेंगे क्योंकि परपचुअल है। तो फिफ्थ ईयर ऑनवर्ड्स का कैश फ्लो डिवाइड बाय डिस्काउंटिंग रेट, ग्रोथ रेट कुछ बताया ही
नहीं है। तो ये टर्मिनल वैल्यू फोर्थ ईयर की आ गई। फोर्थ ईयर का डिस्काउंटिंग फैक्टर लगा के ये आ गई आपकी प्रेजेंट
वैल्यू इस टर्मिनल कैश फ्लो की। तो अब आपको क्या करना है? जो स्टार्टिंग में आपने कैश फ्लो लिया था वो और इस टर्मिनल
वैल्यू का पीवी। स्टार्टिंग में जो चार साल का कैश फ्लो था इसका पीवी और इस टर्मिनल वैल्यू का पीवी। ये हो गया आपका
पीवी ऑफ़ कैश इनफ्लो। बट इसमें एक स्पेशल पॉइंट है। अभी मैंने बताया ना डेप्रिसिएशन वाला। अभी हमने टर्मिनल कैश फ्लोस जब
निकाले परपचुअल कैश फ्लोस लिए उसके अंदर हमने डेप्रिसिएशन के टैक्स बेनिफिट नहीं लिया क्योंकि वो परपचुअल नहीं है। वह केवल
6 साल और मिलेगा। तो छ साल और मिलेगा उसको तो कंसीडर करो। तो रिमेनिंग छ साल का डेप्रिसिएशन का टैक्स बेनिफिट हम कंसीडर
करने वाले हैं। रिमेनिंग छ साल यानी ईयर फाइव से लेकर ईयर 10 क्योंकि स्टार्टिंग के चार साल का मिल गया। पांचवें साल से
10वें साल का टैक्स बेनिफिट डेप्रिसिएशन पे। तो आप डायरेक्टली टैक्स बेनिफिट ही ले लो क्योंकि हम अलग से कंसीडर कर रहे हैं।
तो 4 करोड़ का हर साल का डेप्रिसिएशन है। 28% टैक्स की रेट है। यानी हर साल 1.12 करोड़ का हमें टैक्स में सेविंग होगी।
यानी एक तरीके का इनफ्लो ही है ये। इसको आप पीवी कर लो। पीवी कैसे करोगे? अब आप बताओ। पांचवें साल से लेकर 10वें साल के
पीवी फैक्टर लेना। 11% से फिफ्थ ईयर के सिक्स्थ ईयर का, सेवंथ का, एथ का, नाइंथ का, 10थ का यह छ साल के पीवी फैक्टर लेना
और उससे मल्टीप्लाई कर देना। पीवी एएफ एट 11% फॉर ईयर फाइव टू ईयर 10। बहुत ध्यान से बोल रहा हूं। यह कैलकुलेशन आपकी हो
सकता है आप में से बहुत सारे बच्चे गलत कर दें जिनके पीवी के लॉजिक हिले पड़े हैं। मैंने क्या बोला? डेप्रिसिएशन का टैक्स
बेनिफिट 6 साल और मिलेगा। तो बहुत सारे स्टूडेंट पता है क्या करेंगे? कैलकुलेटर पे 1 / 1.11 ये आ गया पहले साल का पीई
फैक्टर सर फिर सेकंड थर्ड फोर्थ फिफ्थ सिक्स्थ ये दबाया ग्रैंड टोटल किया ये आ रहा है सर 4.231 करके 4.231 आ रहा है सर
कैलकुलेटर पर ये आपने 2.787 कैसे लिख दिया क्योंकि आपको पीवी का लॉजिक ही नहीं पता आप ध्यान से सुनिएगा हम क्या कर रहे हैं
यहां पर ये मेरी 10 साल की टाइमलाइन है ये पहला साल दूसरा साल तीसरा चौथा,
पांचवा, छठा, सातवां, आठवां, नौवां, दसवां। आप जिस दिन पीवी निकाल रहे होते हो उस दिन के अकॉर्डिंग सोचो। आप पीवी कब कर
रहे हो? यहां पर कर रहे हो। आज के दिन वैल्यू देख रहे हो ऐसे केस की जहां 4 साल तक डिस्क्रीट कैश फ्लो होंगे और फिर
परपचुअल कैश फ्लो होंगे जिंदगी भर के लिए आगे के लिए। डेप्रिसिएशन यहीं तक मिलेगा। तो डेप्रिसिएशन हमने यह 4 साल का तो
स्टार्टिंग का पहले ही कंसीडर कर लिया। चार साल के कैश फ्लो में। पांचवें साल से लेकर 10वें साल तक यानी इन छ साल का
डेप्रिसिएशन का बेनिफिट लेना है टैक्स का तो पीवी फैक्टर बताओ कब के लेंगे आप यहां खड़े हो मेरे भाई यहां तो यहां से देखो
कितनी दूरी है यहां से ये पांच साल दूर है ये छ साल दूर है ये सात ये आठ ये नौ ये 10 यानी फिफ्थ ईयर का सिक्स्थ सेवंथ एथ नाइन
10थ यानी पांचवें छठे सातवें आठवें नौवें 10वें इन इन छह साल का आपको पीवी फैक्टर देखना है यानी फिफ्थ ईयर सिक्स्थ ईयर
सेवंथ एथ नाइन 10थ इन सबका पीवी फैक्टर देखना है तो कैलकुलेटर पे पता है कैसे करेंगे इसका का शॉर्टकट 1 / 1.11 करेंगे।
इसको इक्वल्स टू करेंगे जिससे कि आपको टोटल 10 इयर्स का क्या मिल जाए? ग्रैंड टोटल करके पीवीएफ स्टार्टिंग से लेकर 10थ
ईयर तक का पीवीएफ ले लेना। उसमें स्टार्टिंग के चार साल का पीवीएफ माइनस कर देना। तो फिर बचा हुआ पीवीएफ कितने साल का
होगा? इतने साल का। तो बस वो आपको करना है। तो यह एक इंपॉर्टेंट बात है जो आपको ध्यान रखनी है पीवी के लिए। मतलब पीवी अगर
आपका स्ट्रांग होगा तो आप कर पाएंगे। इसमें कुछ स्पेशल है नहीं ध्यान रखने का। अदरवाइज ये ध्यान रखना है। तो बस ये भी
बेनिफिट आपने ले लिया। इनिशियल इन्वेस्टमेंट हटाया तो अब पॉजिटिव एनपी आ गई। एक्सेप्टेबल है प्रोजेक्ट कंप्लीट है
ये क्वेश्चन आपका। तो बस स्टार्ट इस वाले में नेगेटिव था। फिर सेकंड वाले केस में पॉजिटिव हो गया तो
एक्सेप्टेबल हो गया। सॉल्यूशन जो मैं ने आपके लिए लिख रखा है वही आप प्रैक्टिस कर लीजिएगा। वही आप देख के जाइएगा। उसी से आप
एग्जाम में बना पाएंगे क्वेश्चन। इसके बाद नेक्स्ट ये क्वेश्चन देखो। यह भी वही कैपिटल बजटिंग चैप्टर का है। अब इस
क्वेश्चन में क्या है? अपनी कंपनी जो है ना वह कैब्स ऑपरेट करती है यानी टैक्सी में चलाता हूं। ठीक है?
बहुत सारी टैक्सीस मैंने खरीद रखी है और उन टैक्सीस का मेरा बिजनेस है। मतलब लोगों को टैक्सी किराए पर देता हूं मैं। तो अब
मेरी जो टैक्सी है ना उनकी यूज़फुल लाइफ होती है 10 साल। और उनमें से बहुत सारी जो टैक्सीस है ना मेरी वो पूरी 10 साल की
यूज़फुल लाइफ कंप्लीट कर चुकी है। मतलब मेरे बिजनेस में बहुत सारी टैक्सी है। उनमें से कुछ टैक्सी के जो है कुछ टैक्सी
उनकी 10 साल की यूज़फुल लाइफ कंप्लीट हो गई है और यानी वो बेकार हो चुकी हैं। अब वो मेरे बिजनेस में काम में नहीं आएंगी। उनको
क्या है? कबाड़ में फेंकना है। तो इन्होंने क्या बोला? अब हमें डिसीजन लेना है कि इनको कबाड़ में फेंके। तो क्या
तुरंत के तुरंत कबाड़ में फेंक दें? या फिर थोड़े टाइम का वेट कर लें। सर यूज़फुल लाइफ खत्म हो गई टैक्सी की। वो टैक्सी चल
ही नहीं पाएगी। ड्राइवर उसमें गियर मारने की कोशिश करेगा, रेस देने की कोशिश करेगा, वो आगे बढ़ेगी नहीं। तो उस टैक्सी का बचा
के करेंगे क्या? तो उसका रीजन इन्होंने दिया कि हम अभी कबाड़े में बेचने की जगह थोड़े दिन वेट करने का इसलिए बोल रहे हैं
क्योंकि हमें लग रहा है कि मार्केट में कबाड़े की प्राइस बढ़ने वाली है। क्योंकि जो टैक्सी है ना जो गाड़ी होती है उसमें
मेटल यूज़ होता है। मेटल की हमें लग रहा है प्राइस बढ़ेगी। तो यार नहीं थोड़े दिन वेट कर लेते हैं। कबाड़े का पैसा ज्यादा
मिल जाएगा। यह हमारे डिसीजन मेकिंग हमें करनी है। तो अब डिसीजन मेकिंग क्या है? कबाड़े को आज ही बेचना है या कबाड़े को
थोड़े टाइम रुकने के बाद बेचना है। तो उसके लिए इन्होंने कुछ सिनेरियोस बताए। इन्होंने क्या बोला? अब यह जो टैक्सी है
कबाड़ा मतलब अब मैं उसे कबाड़ा बोल रहा हूं। जो भी टैक्सी कबाड़े में है यानी वो कचरा हो चुकी है। तो ये जो कबाड़ा है अगर
मैं इसे आज नहीं बेचूंगा तो बताओ क्या होगा? मुझे इस कबाड़े को कहीं पर रखना पड़ेगा। गोडाउन में रखना पड़ेगा। अब
गोडाउन में रखूंगा तो खर्चा भी आएगा भाई। एक सिक्योरिटी गार्ड बैठाना पड़ेगा। मान लो गोडाउन रेंट का है तो रेंट भी आएगा।
इलेक्ट्रिसिटी कॉस्ट भी लगेगी। और भी बहुत सारे खर्चे होंगे गोडाउन मेंटेनेंस वगैरह के। यानी किसी भी चीज को अगर आप स्टोर
करते हो तो स्टोरेज की कॉस्ट लगती है। तो यानी इस कबाड़े को अगर मैं स्टोर करूंगा वेट करूंगा तो कबाड़े को स्टोर करना
पड़ेगा और स्टोर करूंगा तो स्टोरेज कॉस्ट लगेगी हर साल कितनी लगेगी? देखो अब आपको बताइए कि इस कबाड़े को अगर आप स्टोर करते
हो तो हर कैप के लिए आपकी ईच कैब के लिए एक कैप के लिए आपकी हर साल कितनी कॉस्ट लगेगी? एक गाड़ी का कबाड़ा स्टोर करने के
लिए। पहले साल में 90,000 की स्टोरेज कॉस्ट। दूसरे साल भी अगर मैं उसे स्टोर करके रखता हूं तो सेकंड ईयर में ₹1,5,000
की स्टोरेज कॉस्ट लगेगी। और अगर तीसरे साल भी उस कबाड़े को अपने पास रखता हूं, बेचता नहीं हूं तो तीसरे साल में ₹1,19,000 एक
गाड़ी के कबाड़े को स्टोर करने की मुझे कॉस्ट देनी पड़ेगी। यह मेरी स्टोरेज कॉस्ट है। और अगर बेच दूंगा तो यह स्टोरेज कॉस्ट
लगेगी नहीं। अब आपको क्या बताया? यह जो एक गाड़ी है मेरी, एक गाड़ी है, एक कैब है, वो 2000 किलो की है। यह क्यों बताया?
क्योंकि वो पूरी कैब कबाड़े में बिकने वाली है। तो कबाड़े में जो बिकेगी ना उसकी सेलिंग प्राइस किलो के भाव में। में
कबाड़ी में कुछ भी बिकता है तो किलो के भाव में बिकता है। आप अपने घर से कबाड़ा निकालते हो। कबाड़ी वाला आता है। भाई साहब
आपके 10 किलो पेपर हो गए। है ना? 5 किलो आपका प्लास्टिक हो गया। उसके अकॉर्डिंग भाव से पैसा देता है ना। तो ऐसे ही गाड़ी
एक गाड़ी जो है वो 2000 किलो की है। क्यों? क्योंकि कबाड़ी का पैसा जब मिलेगा वो किलो के भाव में मिलने वाला है। तो
आपको क्या बताया है? सेलिंग प्राइस क्या हो सकती है? एक्सपेक्टेड आपको दे रखी है पर केजी। पर केजी की एक्सपेक्टेड सेलिंग
प्राइस आपको बता रखी है। कि 1 किलो कबाड़े को आप बेचोगे तो आपको क्या मिलने वाला है? तो अगर आप पहले साल में बेचोगे ना तो आपको
इन तीनों में से कुछ भी मिल सकता है। 60, 70, 85। अब सर हमें कौन सा मिलेगा? तो उसकी प्रोबेबिलिटी दे रखी है यानी एवरेज
करना है। क्वेश्चन की लेंथ बढ़ाई गई है जबरदस्ती। तो हम तो एक्सपेक्टेड सेलिंग प्राइस निकाल लेंगे ना इनका एवरेज करके कि
पहले साल में ऑन एन एवरेज ये पैसा मिलेगा। ऐसे ही सेकंड ईयर में क्या मिलेगा? कबाड़े में बेचने पर इनका एवरेज। और थर्ड ईयर में
क्या मिलेगा? इनका एवरेज। अब आपको क्या बोला? कॉस्ट ऑफ कैपिटल 10% डिस्काउंटिंग करने के काम में आएगी। क्योंकि भाई देखो
मैं 1 साल बाद बेचूंगा तो क्या पैसा मिलेगा? क्या खर्चा होगा? उसका नेट करके एनपीवी आएगी। ऐसे 2 साल बाद बेचूंगा तो
क्या पैसा मिलेगा और क्या खर्चा आएगा उसकी एनपीवी आएगी ऐसे 3 साल बाद की। तो आपको आज के टाइम पे कंपेयर करना है तो पीवी करके
कंपेयर करेंगे तो उसके लिए डिस्काउंटिंग रेट चाहिए। आप बताओ कौन से साल में इसे मुझे बेचना चाहिए? अब जैसे ही आप यह
पढ़ोगे ना ऑप्टिमल ईयर फॉर डिस्पोजल यानी कैब को कब बेचूं? पहले साल के एंड में कैब बेचूं? दूसरे साल के एंड में कि तीसरे साल
के एंड में? यह आपसे पूछा गया है। अब इसको पढ़ने पर कुछ कुछ फीलिंग आती है। सर हमने पढ़ा था कैपिटल बजटिंग में ऑप्टिमम
रिप्लेसमेंट साइकिल करके एक टॉपिक। क्या वही है क्या? नहीं मेरे भाई इस टॉपिक को उस टॉपिक से मिक्स मत कर देना। हमारे पास
हमारा नजरिया पता है क्या? हम बिल्कुल रट्टे पे चलते हैं। हमने बस एक वर्ड रट्टा मार लिया ऑप्टिमल। बहुत सारे बच्चे वो
गलती करते हैं। मैं आपको साफ बता रहा हूं। इसलिए हमें क्वेश्चन टफ लगने लगते हैं जबकि इतना आसान क्वेश्चन है। ऑप्टिमल
रिप्लेसमेंट सल टॉपिक होता है। उसमें हम देखते हैं कि हमें अपनी एसेट्स को जो बिजनेस के उनको कब रिप्लेस करना चाहिए?
कितने टाइम में रिप्लेस करना चाहिए ऑप्टिमली? वो बिल्कुल डिफरेंट टॉपिक है। यहां पे तो यह है कबाड़ा बेचे कब? पहले
साल के एंड में, दूसरे साल के एंड में, तीसरे साल के एंड में। बस सिंपल सा जहां ज्यादा फायदा मिलेगा उसमें बेचेंगे। पहले
साल ज्यादा फायदा लगेगा बेचने में तब बेच देंगे। दूसरे में लगेगा, तीसरे में लगेगा तब बेच देंगे। वो कैलकुलेशन होगी एनपीवी
के बेसिस पर। तो एनपीवी निकालनी है। सेकंड पार्ट देखेंगे। सेकंड पार्ट एक्स्ट्रा वर्किंग और कुछ भी नहीं है। पीवी फैक्टर
आपको दे रखे हैं चार डेसिमल में। तो यही काम में लेने पड़ेंगे अब आपको। आप अपनी मर्जी से मत ले लीजिएगा। इन्होंने क्या
बोला? जो स्क्रैप की रेट है यानी ये जो रेट आप निकालोगे पर केजी की ये तो आपको दो डेसिमल पॉइंट में लेनी है। बाकी सारी
कैलकुलेशन होल नंबर में राउंड ऑफ करनी है। यानी डेसिमल नहीं आना चाहिए बाकी कैलकुलेशंस में फुल नंबर में। तो ये बोल
दिया तो यही फॉलो करना है। अब अपनी मर्जी से राउंडिंग ऑफ नहीं कर सकते आप। तो आजकल ये काफी जगह इंस्टट्यूट करने लग गया ताकि
आपकी एग्जाम में इस वजह से मार्क्स ना डिडक्ट हो। तो देख लीजिए अब इसका सॉलशन। एक्सपेक्टेड सेलिंग प्राइस पता कर लो।
कबाड़ा बिकने की प्राइस हर साल की। फर्स्ट ईयर की ये आएगी एवरेज करके सेकंड की ये थर्ड की। अब डिसीजन मेकिंग करनी है आपको
कब बेचे? तो पहले साल बेचोगे तो बताओ क्या होगा? फर्स्ट ईयर एंड में अगर मैं बेचूंगा तो फर्स्ट ईयर एंड में मुझे क्या है? 2000
किलो का कितना पैसा मिलेगा? फर्स्ट ईयर में ₹70 के अकॉर्डिंग। तो यह पैसा मुझे मिलेगा पहले साल में। लेकिन पहले साल में
बेचूंगा फर्स्ट ईयर एंड में। हम यह मान के चल फर्स्ट ईयर एंड की बात चल रही है क्योंकि उसके पहले का कोई डाटा है भी
नहीं। तो फर्स्ट ईयर एंड में आप एक साल स्टोर करके रखोगे उस कैप को तो स्टोरेज की कॉस्ट भी आएगी ₹90,000 भाई आप बेचोगे एक
साल के एंड में तो एक साल स्टोर करने की कोस्ट भी तो आएगी। पहले साल की ₹900 है। तो यानी नेट आपके ₹00 की कमाई हो जाएगी इस
कबाड़े से। तो यह कब होगी? 1 साल बाद। पीवी कर लो 10% के पीवी फैक्टर से। तो यह आ जाएगा एनपीवी। बस हो गया। अब सेकंड ईयर
में अगर डिस्पोज करते हैं तो क्या होगा? तो कैश फ्लो अब दो साल के होंगे। क्यों? क्योंकि सेकंड ईयर में बेचोगे तो पहले साल
स्टोर करूंगा पहले साल की स्टोरेज कॉस्ट। दूसरे साल स्टोर करूंगा दूसरे साल की स्टोरेज कॉस्ट। और पैसा मिलेगा कब? सेकंड
ईयर एंड में। क्योंकि बेचूंगा सेकंड ईयर एंड में। तो सेकंड ईयर एंड में किस प्राइस पर बिकेगा? वो मैंने ये पता कर ली 59। तो
देखो इनफ्लो तो आएगा सेकंड ईयर एंड में। और स्टोरेज कॉस्ट कब लगेगी? फर्स्ट ईयर और सेकंड ईयर दोनों की लगेगी। तो ये आपके कैश
फ्लो आ गए 2 साल के। पीवी किया 10% से तो ये आ गई आपकी पीवी वैल्यू। इसका नेट कर लिया तो एनपीवी। ऐसे ही अगर तीसरे साल में
बेचता हूं तो 3 साल की स्टोरेज कॉस्ट लगेगी। थर्ड ईयर एंड में जो थर्ड ईयर की प्राइस के अकॉर्डिंग पैसा आ जाएगा। तो अगर
पीवी करेंगे तो यह आ गया नेगेटिव एनपीवी। अगर आप देखोगे तो सेकंड और थर्ड ईयर में बेचते हो तो नेगेटिव एनपी एनपीवी है। बस
केवल फर्स्ट केस में पॉजिटिव है। तो यानी आप पहले साल के एंड में बेचो उसी में फायदा है। सेकंड पार्ट क्वेश्चन का। सेकंड
पार्ट क्वेश्चन का क्या बोलता है? आप बताइए। अगर थर्ड ईयर एंड में जो सेल प्राइस है ना वह चेंज होकर यह हो जाती है
तो क्या होगा? क्या आपका डिसीजन बदलेगा? भाई हमने किस उम्मीद पर इस कबाड़े को अपने पास रख के रखा? हमें यह था कि फ्यूचर में
मेटल की प्राइस बढ़ेगी। बट अगर आप यहां पे ध्यान से देखोगे ना फ्यूचर में मेटल की प्राइस बढ़ने की जगह गिर रही थी। इसलिए तो
नेगेटिव एनपीवीआई। लेकिन अब इन्होंने क्या बोला कि देखो फर्स्ट और सेकंड ईयर में तो कुछ चेंज नहीं
हुआ। लेकिन थर्ड ईयर में अचानक से देखो मेटल की प्राइस ये हो गई। तो आप बताओ क्या डिसीजन बदलेगा? तो देखो फर्स्ट ईयर की
कैलकुलेशन सेम रहेगी। सेकंड ईयर वाली कैलकुलेशन भी सेम रहेगी क्योंकि उनमें तो कोई चेंज हुआ ही नहीं। थर्ड ईयर तक अगर
मैं होल्ड करता हूं तो कैलकुलेशन बदलेगी। तो इस बार अब आप देखो थर्ड ईयर की अंदर अगर मैं सेल करता हूं तो क्या कैश फ्लो
होंगे वो रिवाइज अपन निकालेंगे। तो एक्सपेक्टेड सेलिंग प्राइस ईयर थ्री की ये आ गई। तो थर्ड ईयर में बेचेंगे तो ये
इनफ्लॉय आएगा और थर्ड ईयर तक होल्ड करेंगे तो ये 3 साल की स्टोरेज कॉस्ट लगेगी। तो अब की बार एनपीवी किया तो ये आया 45454
यानी ये बिल्कुल सेम वही आया अमाउंट जो पहले साल अगर आप होल्ड करके बेच देते हो। देखो पहले साल में बेच देते हो तो भी यही
एनपीवी थी ना ₹1 ज्यादा ही थी तो इन्होंने क्या आंसर दिया अरे भाई इनडिफरेंट है अगर आप पहले साल के एंड में बेच देते हो तो भी
वही एनपीवी है और तीसरे साल का वेट करते हो तो भी वही एनपीवी है तो अभी भी आंसर क्या होगा पहले साल में ही बेच दो क्यों
वेट करना जब सेम पैसा मिल रहा है अगर मैं आपको बोलूं कि बेटा आज तेरे को ₹10 दूंगा और तू कल आएगा तो भी ₹10 दूंगा आप बोलोगे
अरे सर आज ही दे दो फिर क्यों एक दिन का वेट कराना समझ में आई बात तो यानी क्यों वेट करना फिर एक साल के एंड में ही बेच के
नक्की करो अगर सेम पैसा ही मिलना सेम एनपी भी आनी है। खत्म। तो ये आपका क्वेश्चन कंप्लीट है। सेकंड
पार्ट इसका। ये क्वेश्चन देखो। ये भी कैपिटल बजटिंग का है। एपीवी मेथड का ये क्वेश्चन है आप लोगों के पास। ये क्वेश्चन
आपको काफी लें्थी सा देखने को मिलता है। ये काफी लेंथी क्वेश्चन है। इतना बड़ा है सर। बट बहुत आसान क्वेश्चन है एपीवी मेथड
का। एपीवी मेथड में देखो मैंने आपको एडिशनल जब प्रैक्टिकल कांसेप्ट्स पढ़ाए थे उसमें मैंने बताया था कि इंस्टट्यूट जो है
एपीवी मेथड पे एक डिटेल्ड क्वेश्चन उन्होंने दे रखा है एमटीपी वाला वो उसी का अपन रेफरेंस ले रहे हैं वही क्वेश्चन है
तो उसमें मैंने बताया था क्या एक्स्ट्रा बातें ध्यान रखनी है जो मॉड्यूल में नहीं दे रखा है इन्होंने इस क्वेश्चन में दे
रखा है तो इसके लिए अपन ने एपी एपीवी मेथड को और डिटेल में देखा बाकी चैप्टर के अंदर अपन ने यहां तक का पार्ट तो देखा था कि
बेस एंड पीवी ले लो प्रोजेक्ट के कैश फ्लोस को केई से पीवी करके और इंटरेस्ट की टैक्स शील्ड आप पीवी कर लो टैक्स शील्ड ऑन
इंटरेस्ट का। इसके अलावा यह कॉम्पोनेंट्स और देखे थे कि डेप्ट लेने की वजह से फ्लोटेशन कॉस्ट में सेविंग होगी। वह भी
आपको प्लस करनी है। अगर आपने लोन जो लिया है वह सब्सिडी पे मिला है तो इंटरेस्ट की सब्सिडी को आपको पीवी करना है उस
एप्लीकेबल इंटरेस्ट रेट से और फाइनेंशियल डिस्ट्रेस कॉस्ट डे डे की वजह से कुछ आपको फाइनेंशियल टेंशन होने वाली है। उसकी वजह
से कुछ कॉस्ट आने वाली है। तो उसका आप पीवी कर लीजिएगा मार्केट इंटरेस्ट रेट से। तो बस यही सारी चीजें इस क्वेश्चन में
होंगी। तो देखिए यह क्वेश्चन एपीवी मेथड से आपको कैलकुलेशन करनी है। ठीक है? पहले भी लिख दिया और बाद में भी
लिखेगा क्वेश्चन में। देखो क्वेश्चन की रिक्वायरमेंट मैं आपको बताऊं। रिक्वायरमेंट बहुत सिंपल सी है। अरे सर
बहुत सारी रिक्वायरमेंट है। बट सिंपल है। ध्यान से सुनो। बेस केस एनपीवी। एपीवी मेथड में सबसे पहले क्या चाहिए होता है?
बेस केस एनपीवी यानी एपीवी मेथड में जो भी चीजें चाहिए होती है ना उनको टुकड़ों में निकलवाएगा और लास्ट में बोलेगा एपीवी मेथड
से एपीवी निकाल दो। एडजस्टेड प्रेजेंट वैल्यू निकाल दो। तो देखो बेस केस एनपीवी अगर प्रोजेक्ट को हमने इक्विटी से ही
फाइनेंस है यानी डेप्ट ली नहीं है तो यानी वह बेस एनपीवी होती है। इसके बाद इंटरेस्ट टैक्स शील्ड जो भी आपने लोन ले रखे हैं
उसका पीवी कर लो क्योंकि वो ऐड करना पड़ता है। तो इस क्वेश्चन में दो लोन लेंगे। एक ही प्रोजेक्ट पे अपन दो लोन लेंगे। वो
कितने भी हो सकते हैं? तो दोनों लोन की इंटरेस्ट टैक्स सेविंग जो भी होगी इंटरेस्ट पे टैक्स सेविंग उसका पीवी कर
देंगे। गवर्नमेंट से जो लोन लिया हुआ है ना इस क्वेश्चन में एक लोन गवर्नमेंट से लिया है। एक बैंक से लिया है। गवर्नमेंट
वाला लोन जो होगा ना उस पे सब्सिडी मिली है गवर्नमेंट से सस्ती इंटरेस्ट रेट पे उसका भी पीवी करेंगे। फ्लोटेशन कॉस्ट की
सेविंग होगी क्योंकि डे अपन ने ले रखी है तो उस पर अगर डे नहीं लेते तो इक्विटी इशू करना पड़ता है और इक्विटी पर फ्लोटेशन
कॉस्ट लगती है वह क्वेश्चन में दे रखी है तो उसका आपको बेनिफिट होगा फाइनेंसियल डिस्ट्रेस कॉस्ट क्वेश्चन में बता रखी है
उसका पीवी करना है इसके अलावा फिर एपीवी बता दो यानी आपको क्या करना है बेस एनपीवी में ये सारी चीजें ऐड करनी है और
फाइनेंसियल डिस्ट्रेस कॉस्ट क्या होती है माइनस हो जाती है फिर बताना है प्रोजेक्ट एक्सेप्ट की रिजेक्ट यानी पॉजिटिव है तो
एक्सेप्ट नेगेटिव रिजेक्ट सिंपल सा क्वेश्चन है चार डेसिमल में पीवी फैक्टर लेने सारी कैलकुलेशन रुपीज इन करोड़ में
करोगे दो डेसिमल में राउंड ऑफ होंगी बाकी सारी कैलकुलेशंस देखो डाटा एक बार आपको क्या बोला है जो
प्रोजेक्ट आप लगाने वाले हो इस प्रोजेक्ट की इन्वेस्टमेंट की डिटेल सबसे पहले लैंड एंड बिल्डिंग प्लांट एंड मशीनरी इनिशियल
वर्किंग कैपिटल तो यही तो होता है आपका इनिशियल इन्वेस्टमेंट आप बेस केस एनपीवी से चालू करते जाओ सॉल्यूशन
तो सबसे पहले इनिशियल इन्वेस्टमेंट ये आ गया इन तीनों का टोटल 390 करोड़ लैंड लिया है प्लांट एंड मशीनरी लिया है और इनिशियल
वर्किंग कैपिटल प्रोजेक्ट पास साल तक चलेगा तो पांचव साल के एंड में क्या होगा? वर्किंग कैपिटल रिलीज हो जाती है। ये अपन
ने कांसेप्ट में पढ़ा था कैपिटल बजटिंग में। जबकि इन्होंने क्वेश्चन में लिख भी दिया कि पांचव साल में कैपिटल वर्किंग
कैपिटल वापस आ जाएगी। नहीं बोलता तो भी आती है। ऐसा मत बोलना क्वेश्चन में बोला है इसलिए ये कांसेप्ट था।
[नाक से की जाने वाली आवाज़] इसके बाद जो लैंड है ना जो अपन ने इनिशियली खरीदा था। यह जो लैंड है यह भी पांचव साल के एंड में
हम 150 करोड़ में बेचेंगे। लिया कितने था? 120 करोड़ में। तो यानी इस पे 30 करोड़ का कैपिटल गेन होगा। तो कैपिटल गेन टैक्स भी
लास्ट ईयर में आएगा। सेल वैल्यू ऑफ़ लैंड आएगी लास्ट ईयर में और लास्ट ईयर में 30 करोड़ पे जो भी टैक्स रेट है टैक्स रेट
आपको क्वेश्चन में यहां पे आपको दे रखी है 30% तो इस पे आपका टैक्स भी बनेगा याद है ना अपन ने पूरे कांसेप्ट पढ़े हुए हैं कुछ
भी नया नहीं है इस क्वेश्चन में बाकी फिर सर लैंड पे कुछ डेप्रिसिएशन भी होगा क्या नहीं लैंड पे डेप्रिसिएशन नहीं होता है ये
कॉमन सेंस हम जानते हैं लैंड थोड़ी डेप्रिशिएट होती है और बाकी क्वेश्चन में लिखा भी है तो यानी 30 करोड़ का ही कैपिटल
गेन ऑटोमेटिकली हो जाएगा इसके बाद जो प्लांट एंड मशीनरी ली है पांचवें साल के एंड में इसकी भी साल्वेज वैल्यू होगी
आफ्टर टैक्स दे रखी है 24 करोड़ तो बस यह भी डायरेक्टली आपको पांचव साल के एंड में मिल जाएगी। इसमें टैक्स का बेनिफिट नहीं
लेना अलग से क्योंकि आफ्टर टैक्स कंसीडर करके है। सिमिलर क्वेश्चन अपने पास ऑलरेडी बुक में था पहले भी जो प्लांट एंड मशीनरी
है जो अपन ने इनिशियली खरीदी थी। इस पे डेप्रिसिएशन है डब्ल्यूडीवी मेथड से 25% पर एनम। तो वो कैश फ्लोस हर साल के
निकालने में काम में आएगा। आपको हर साल के कैश फ्लोस का डाटा दे रखा है। रेवेन्यू कितना होगा? और ऑपरेटिंग कॉस्ट ऑपरेटिंग
कॉस्ट बिफोर डेप्रिसिएशन एंड इंटरेस्ट। यानी इसमें से इंटरेस्ट का खर्चा भी लेस नहीं किया और डेप्रिसिएशन भी लेस नहीं कर
रखा है। एक्सक्लूडिंग डेप्रिसिएशन। ठीक है? तो इंटरेस्ट तो वैसे भी लेस नहीं करना। डेप्रिसिएशन हमें लेस करना पड़ेगा।
तो कैलकुलेट करना पड़ेगा प्लांट एंड मशीनरी का डेप्रिसिएशन। इसके अलावा क्या बोला है? एनुअल मेंटेनेंस का खर्चा है जो
ऑलरेडी इंक्लूडेड है इस कोस्ट में। तो इसको कुछ नहीं करना बस। ये जानबूझ के क्वेश्चन को बड़ा बनाने के लिए दे रखा है।
अरे ठीक है। खर्चा है। खर्चा इंक्लूडेड है इसमें। कुछ नहीं। इनफ्लेशन हमने ऑलरेडी इनकर्पोरेट कर रखा है। इनफ्लेशन भी कंसीडर
होना चाहिए। तो इसका भी कुछ नहीं करना अलग से। टैक्स रेट ठीक है। यह काम में ले लेंगे। टैक्स जिस साल का है उसी साल में
पे होगा। ठीक है? इसका कोई रेलेवेंस नहीं है। इसके बाद फाइनेंसिंग की बता रखी है। प्रोजेक्ट जो है अब यह तो बेस केस एनपीवी
के लिए डाटा हो गया। अब प्रोजेक्ट जो है उसके लिए हम लोन भी लेंगे। लोन कहां से लेंगे? गवर्नमेंट से 100 करोड़ का लोन
लेंगे 5% के ब्याज पर। जबकि मार्केट में 10% ब्याज की रेट चल रही है। गवर्नमेंट को एक साथ 5 साल बाद पूरा प्रिंसिपल रिपे
करेंगे। यानी यहां पे इंटरेस्ट सब्सिडी भी है 5% की। हमें 10% वाला लोन 5% में मिला। यानी फायदा कितने का हुआ? 5% का फायदा
हुआ। 10 - 5 बैंक से भी एक लोन लिया है 120 करोड़ का। यानी 100 करोड़ का गवर्नमेंट से 120 का बैंक से। यह 10% पे
लिया मार्केट रेट पर। बैंक वाले को देखो प्रिंसिपल कब पे करेंगे? इक्वली पे करेंगे ईयर टू से ईयर फाइव। यह इंपॉर्टेंट है
क्योंकि इसका इंटरेस्ट इसी के अकॉर्डिंग आएगा। हम ऐसी कैलकुलेशन एफआर में काफी करते हैं फाइनेंसियल इंस्ट्रूमेंट्स
चैप्टर के अंदर अपन लोग। ठीक है? तो यहां पर आपका इंस्टॉलमेंट में प्रिंसिपल जा रहा है। पहले साल कुछ पेमेंट नहीं है
प्रिंसिपल का। ईयर टू से ईयर फाइव यानी 2 3 4 5 चार साल के अंदर प्रिंसिपल रिपे होगा 120 करोड़ का। तो यानी हर साल 30-30
करोड़ का रीपेमेंट होगा ईयर टू से लेकर ईयर फाइव तो उसके अकॉर्डिंग इंटरेस्ट का पेमेंट पता चलेगा अपने को। इंटरेस्ट का
पेमेंट एनुअली होगा। इसके अलावा बचा हुआ प्रोजेक्ट में जो भी पैसा चाहिए वह इक्विटी से आएगा। तो आप खुद सोचो 100
करोड़ यहां से ले लिया 120 यहां से। 220 करोड़। हमें टोटल चाहिए कितना? 390 करोड़ इनिशियल इन्वेस्टमेंट। यानी बचा हुआ जो
आपका अमाउंट है 170 करोड़ वो इक्विटी से ले रहे होंगे। वो कोई काम का नहीं है। बट एक बार मैंने नॉलेज के लिए बताया आपको।
इसके अलावा आपको और भी इनफेशन दे रखी है फाइनेंसिंग साइड के इफेक्ट्स। यानी जो आपने लोन लिया उसकी वजह से क्या-क्या आपके
इंपैक्ट्स आते हैं। एक तो देखो इशू कॉस्ट बच गई आपकी फ्लोटेशन कॉस्ट। अगर आप इक्विटी से लोन लेते हो तो फ्लोटेशन कॉस्ट
आती 4% जितना इक्विटी रेज करते हैं। यानी जितना लोन लिया उस पे ये बच गई। तो ये बाद में अपन इफेक्ट ऑफ डे में डालेंगे पीवी ऑफ़
फ्लोटेशन कॉस्ट। इसके अलावा ये कैपिटल सब्सिडी ये क्या चीज है? वो सर इंटरेस्ट की सब्सिडी नहीं। ये अलग चीज है। यह क्या
है? गवर्नमेंट ने अपन जहां प्रोजेक्ट लगा रहे हैं ना उस प्रोजेक्ट को लगाने के लिए मेरे को ₹20 करोड़ की कैपिटल सब्सिडी और
दी। कैपिटल के रूप में प्रोवाइड करवाया गवर्नमेंट ने फ्री में पैसा। यह कब? फर्स्ट ईयर के एंड में। और इस सब्सिडी पे
कोई टैक्स भी नहीं लगेगा। यह फ्री का पैसा। इस पे टैक्स भी नहीं भर रहा। तो यानी फर्स्ट ईयर एंड में यह कैश फ्लो भी
कंसीडर कर लेना। यह नॉर्मल ऊपर कैश फ्लो में कंसीडर होगा नॉर्मल। ठीक है? इसके अलावा फाइनेंसियल डिस्ट्रेस कॉस्ट भी
लगेगी डे की वजह से। तो जो डेप्ट ले रखी है उसकी वजह से मुझे क्या लग रहा है? 30 करोड़ की पांचवें साल के एंड में
फाइनेंसियल डिस्ट्रेस कॉस्ट आ सकती है। यह एक्सपेक्टेड कॉस्ट होती है। तो इसकी प्रोबेबिलिटी भी देगा। तो यह रही
प्रोबेबिलिटी इससे मल्टीप्लाई करके पीवी करेंगे। जो लैंड है वह पांचव साल के एंड में बिकेगी ऊपर बता दिया था तो बिकेगी तो
उस पर क्या लगेगा कैपिटल गेन टैक्स भी लगेगा नॉर्मल टैक्स रेट से वह लगाना है अपने को अब आपको अनलीवर कॉस्ट ऑफ इक्विटी
दे रखी है कि इसी से पीवी करना है अपने को यह आपको बता रखा है सिमिलर फर्म में भी देखोगे तो मार्केट वैल्यू डेप्ट रेशियो
निल है यानी डेप्ट वगैरह नहीं है सिमिलर में तो यह कोई काम का भी नहीं है ऑपरेटिंग कैश फ्लोस को डिस्काउंट 14% से करना नहीं
बोलता तो भी इसी से करते यह तो अपन को पता ही है बस खत्म यह क्वेश्चन का डाटा रीड कर दिया बेस के एनपी भी निकालते हैं देखो
रेवेन्यू आपको दे रखा था 5 साल का डायरेक्टली क्वेश्चन में ऑपरेटिंग कॉस्ट दे रखी थी प्लांट एंड मशीनरी पर
डेप्रिसिएशन 25% डब्ल्यूडीवी से देखो वह कैलकुलेशन करी डब्ल्यूडीवी मेथड से डेप्रिसिएशन ये आप जानते हो ओपनिंग माइनस
डेप्रिसिएशन तो ये आपने कर दिया ईबीआईटी आया टैक्स माइनस कर दोगे नोपैट आएगा डेप्रिसिएशन वापस ऐड बैक किया अब ध्यान से
सुनते जाइएगा इस क्वेश्चन में एक्स्ट्रा कैश फ्लो दिया फर्स्ट ईयर में हमें कैपिटल सब्सिडी भी गवर्नमेंट से मिल रही है 20
करोड़ का वो भी ले लो सर ये ऊपर क्यों नहीं लिया भाई इस कैपिटल सब्सिडी पे टैक्स नहीं है नॉट टैक्सेबल साफ लिखा क्वेश्चन
में इस पे टैक्स नहीं है। अगर इस पे भी टैक्स होता तो मैं यहां प्लस कर लेता कैपिटल सब्सिडी। ठीक है? लेकिन यहां कर
लेता तो टैक्स पेमेंट हो जाता। इसलिए इसको बाद में अलग से प्लस किया मैंने। इसके अलावा लास्ट ईयर में स्पेशल कैश फ्लो है।
एक तो वर्किंग कैपिटल जो स्टार्टिंग में लगी थी वो वापस रिलीज होगी। कितनी वर्किंग कैपिटल थी? 30 की तो 30 करोड़ ये आ
जाएंगे। इसके अलावा लास्ट ईयर में क्या होगा? आपकी लैंड की साल्वेज वैल्यू आपको मिलेगी और प्लांटेड मशीनरी की मिलेगी।
लैंड की 150 करोड़, प्लांटेड मशीनरी 24 करोड़। यह तो आफ्टर टैक्स थी लेकिन लैंड वाली 150 करोड़ है। 120 करोड़ की लैंड है।
कोई डेप्रिसिएशन तो है ही नहीं। स्टार्टिंग में थी ना 120 करोड़ की तो यानी 30 करोड़ का कैपिटल गेन हुआ है अपना।
उस पे आपको टैक्स भरना पड़ेगा। तो देखो 30 करोड़ के कैपिटल गेन पे 30% टैक्स यानी 9 करोड़ का टैक्स का पेमेंट भी होगा लैंड की
सेल पर आपका। तो ये आपके कैश फ्लोस आ गए। इसको बस 14% की रेट से पीवी कर लिया। तो ये आ गई आपकी पीवी ऑफ़ इनफ्लोस माइनस
इनिशियल इन्वेस्टमेंट बेस एनपी। अब आगे तो क्या ही यह यही सारी चीजें पूछेगा। पीवी ऑफ़ टैक्स शील्ड ऑन इंटरेस्ट। तो इंटरेस्ट
के जो टैक्स सेविंग होगी उस पे पीवी अब इंटरेस्ट दो लोन है अपने गवर्नमेंट और बैंक तो पहले गवर्नमेंट वाले लोन की बात
करते हैं। गवर्नमेंट का जो लोन था 100 करोड़ का है। 5% की ब्याज पर मिला है। तो यह मेरा इंटरेस्ट होगा हर साल का
गवर्नमेंट के लोन पर और 30% टैक्स रेट है। यानी इतना टैक्स की सेविंग होगी इंटरेस्ट के ऊपर 5 साल तक। 5 साल का लोन है। तो
इसको पीवी करेंगे किससे? लोन किस रेट पे है? कॉस्ट ऑफ डेप्ट क्या है? 5% तो 5% फॉर 5 इयर्स इसका पीवीएफ लेके आ गया।
टर्म लोन जो बैंक से लोन लिया है। अब बैंक से जो लोन लिया है ना उसका इंटरेस्ट कितना है सर? 10% पे लोन लिया 120 करोड़ का।
तो सर इसका हर साल का इंटरेस्ट 12 करोड़ होगा। बस यही गलती कर दोगे। ध्यान से देखो। इसमें प्रिंसिपल इक्वली पे भी होगा
तो प्रिंसिपल कम होता जाएगा तो आपका इंटरेस्ट भी कम होगा ईयर टू से ईयर फाइव में। तो पहले आप पता करो इंटरेस्ट का
पेमेंट कितना होगा हर साल। तो पहले साल का जो ओपनिंग प्रिंसिपल 120 करोड़ तो इस पे आपका इंटरेस्ट लगेगा ओपनिंग पे। पहले साल
कुछ रीपेमेंट हुआ नहीं। सेकंड ईयर से रीपेमेंट होना चालू होगा। 30-30 करोड़ हर साल। यह मैंने ऑलरेडी कैलकुलेशन में दिखा
दिया था। तो इसके अकॉर्डिंग हर साल मैंने क्लोजिंग प्रिंसिपल और ओपनिंग प्रिंसिपल पता किया। इंटरेस्ट जो लगता है ओपनिंग पर
देना पड़ता है। यह सब लॉजिक की बातें ऑलरेडी बेसिक्स में डिस्कस हो चुकी है अपनी। तो आपका हर साल का इंटरेस्ट का
पेमेंट मिल गया। इसका इंटरेस्ट के पेमेंट पे टैक्स की सेविंग होगी 30% से। तो ये आ गई टैक्स सेविंग हर साल की। इसको पीवी
करेंगे कॉस्ट ऑफ डेप्ट। अब बताओ यह जो लोन है इसकी कॉस्ट ऑफ डेप्ट क्या है? 10% तो स्पेलिंग में यह ध्यान रखना। दोनों लोन की
कॉस्ट ऑफ डेप्ट अलग थी। इसकी 5% थी। इसकी 10 तो ठीक है। उसके अकॉर्डिंग पीवी किया है। तो पीवी ऑफ़ टैक्स शील्ड ऑन बैंक लोन
यह मिल गया आपको। इसके बाद इंटरेस्ट की सब्सिडी जो आपसे गवर्नमेंट लोन के ऊपर मिला है इंटरेस्ट सब्सिडी उसकी आपको पीवी
करना है तो गवर्नमेंट लोन 100 करोड़ का था 10% मार्केट रेट 5% पे लोन मिला है यानी 5% का बेनिफिट तो यानी 5 करोड़ का आपका
बेनिफिट इंटरेस्ट में हर साल हो रहा है पर एनम इसका पीवी करना है 5 साल के लिए किससे एप्लीकेबल इंटरेस्ट रेट इस लोन पे क्या 5%
भी तो मिला है तो बस उसी से यह आपके आ गई इंटरेस्ट सब्सिडी का पीवी इसके अलावा फ्लोटेशन कॉस्ट में सेविंग तो आपने लोन
कितना लिया 100 करोड़ का गवर्नमेंट से 120 करोड़ का बैंक से तो 220 करोड़ ोड़ का लोन लिया है। अगर यह नहीं लेते तो इसकी जगह
इक्विटी आता। उसमें 4% आपकी फ्लोटेशन कॉस्ट लगती आगे उसकी सेविंग। यह हमेशा पीवी के फॉर्म में ही होगी। क्योंकि यह तो
ज़ीरो टाइम पर ही होती है ना। लोन रेज करना या इशू इक्विटी रेज़ करना ये तो जीरो टाइम पर होता है। तो ये स्टार्टिंग की कॉस्ट
है। फाइनेंशियल डिस्ट्रेस की कॉस्ट आपकी 30 करोड़ की नजर आ रही है। 10% प्रोबेबिलिटी यानी 3 करोड़ आपको लग रहा है
होगी। कब होगी? पांचव साल के एंड में। तो इसका डायरेक्टली पीवी फैक्टर लगा दिया। किससे? मार्केट इंटरेस्ट रेट जो कि है 10%
क्योंकि यह जनरल कॉस्ट है तो इसके ऊपर मार्केट इंटरेस्ट रेट लगाते हैं। यह बताया था लॉजिक मैंने आपको एपीवी कैसे आएगी? बेस
एनपीवी टैक्स शील्ड लोन इंटरेस्ट दो लोन थे उनकी आ गई। यह आ गई आपकी फ्लोटेशन कॉस्ट की सेविंग। यह आपकी इंटरेस्ट
सब्सिडी की सेविंग और यह माइनस हो गई फाइनेंसियल डिस्ट्रेस कॉस्ट का पीवी। एपीवी पॉजिटिव है इसलिए प्रोजेक्ट
एक्सेप्ट हो जाएगा। यह कंप्लीट आपका क्वेश्चन। इसके बाद नेक्स्ट क्वेश्चन है सिक्योरिटी
एनालिसिस चैप्टर का आपका रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स। यह जो टॉपिक है यह मैंने आपको एडिशनल कांसेप्ट्स में पढ़ाया था क्योंकि
इंस्टट्यूट ने मॉड्यूल में ऐसा कोई टॉपिक नहीं दे रखा है। बस इसका क्वेश्चन आरटीपी में डाल दिया तो अपन को वो क्वेश्चन के
वजह से ये कांसेप्ट पढ़ना पड़ा क्योंकि ये सिलेबस का पार्ट ही नहीं था। फिर भी पढ़ना पड़ रहा है। क्या करें? महान इंस्टट्यूट
है। तो कुछ कर नहीं सकते आप। तो ये मैंने आपको पढ़ाया पढ़ाया था। काफी आसान टॉपिक है। टॉपिक में कोई समस्या नहीं है। ईजी
टॉपिक है और इसका एक एग्जांपल भी लिया था मैंने और पूरे एग्जांपल से प्रॉपर्ली समझा दिया था। तो बहुत आसान है। बस अगर ये
एग्जांपल आपने कर लिया था तो इस क्वेश्चन में अब कुछ नहीं है। यहां से फटाफट से देखो हमें क्या करना पड़ता है? जितने टाइम
का आरएसआई निकालना होता है। तो इस क्वेश्चन में अगर आप देखोगे तो 14 डे का आरएसआई है। तो इसके बेसिस पे बताना है
प्रोजेक्ट बुलिश ट्रेंड शेयर बुलिश ट्रेंड में है कि बयरिश ट्रेंड में है। यानी शेयर की प्राइस बढ़ने वाले ट्रेंड नजर आ रही है
गिरने वाली। तो आपको 20 दिन का शेयर की प्राइस का डाटा दिया हुआ है। A लिमिटेड की शेयर की प्राइस का 20 दिन का डाटा। अब सर
डाटा में बहुत कुछ है। एक बार फटाफट से बताता हूं। इसमें क्या करते हो आप लोग? इसमें आप डेली जो शेयर की प्राइस में गेन
या लॉस हो रहा है वो पता करते हो क्लोजिंग प्राइस से कंपेयर करके। अब यहां पे देखोगे ओपनिंग प्राइस, हाई प्राइस, लो प्राइस,
क्लोज प्राइस क्या-क्या है ये? अपने लिए ये सब कुछ काम की नहीं है। ये मैं आपको पहले ही बता चुका हूं। ओपनिंग, हाई और लो
प्राइस कोई काम की नहीं होती। और ये क्या होती है? ये ऑलरेडी मैंने कांसेप्ट की वीडियो में डिस्कस कर दिया था। तो
क्लोजिंग प्राइस से डेली का गेन लॉस आएगा। तो डेली का गेन लॉस निकाल लेंगे। उसके बाद सेकंड स्टेप में क्या करेंगे? एवरेज गेन
लॉस निकालना चालू करेंगे। n + 1 डे ऑनव्स क्योंकि 14 डे का आरएसआई चाहिए। यानी 14 डे का डाटा कंसीडर करने के बाद आपको
आरएसआई निकालना है। तो 14 दिन का गेन लॉस आपके पास होना चाहिए। तो 14 दिन का गेन लॉस कब होगा? 15व दिन से होगा आपके पास।
क्योंकि पहले दिन पहले दिन कभी भी आप गेन लॉस निकाल नहीं पाओगे। क्यों? क्योंकि पहले दिन की क्लोजिंग प्राइस ये है। आप
गेन लॉस कैसे निकालते हो? पिछले दिन की क्लोजिंग प्राइस और आज की क्लोजिंग प्राइस। तो आज की क्लोजिंग प्राइस तो है।
पिछले दिन की क्या थी? वो नहीं है पहले दिन पर। तो इसलिए पहले दिन का गेन लॉस तो आ ही नहीं पाएगा। इसलिए 15th डे को आपका
पहली बार क्या कैलकुलेट होगा? आरएसआई। तो एवरेज गेन एवरेज लॉस निकलेगा हर दिन का 15th डे ऑनवर्ड्स इस क्वेश्चन में और आर
एस आएगा। आर एस कैसे आएगा? रिलेटिव स्ट्रेंथ एवरेज गेन डिवाइड बाय एवरेज लॉस। फिर क्या करेंगे हम? इस रिलेटिव स्ट्रेंथ
को एक 100 के स्केल पर कन्वर्ट कर देंगे RSI ठीक है? ताकि हम मेज़रमेंट आसानी से कर पाएं। उसका डिसीजन मेकिंग कर पाएं। तो,
100 * RS / 1 + RS ये पूरा लॉजिकली आपको एक्सप्लेन किया था। फिर उसका इंटरप्रिटेशन आपको बता दिया था मैंने। तो ये पूरा
प्रोसेस है। अब इस क्वेश्चन में आप कर लोगे कोई दिक्कत नहीं है। मैं अभी फटाफट करवा भी दूंगा। उससे पहले एक क्लेरिफिकेशन
वापस कर देता हूं। जो स्टूडेंट इतना बोलने के बाद भी नहीं समझ पाते उनके लिए क्लेरिफिकेशन है। डाउट क्या आ सकता है? सर
पहले दिन पर आपने बोला गेन लॉस पॉसिबल नहीं है। बट सर इस क्वेश्चन में तो है ना पॉसिबल। ओपन प्राइस दे भी तो दे रखी है
सर। पहले दिन की ओपनिंग प्राइस। सर पहले दिन की ओपनिंग प्राइस है और क्लोजिंग प्राइस। यानी यह जो ओपनिंग प्राइस है सर
ये पिछले दिन की क्लोजिंग ही तो होगी। तो आप पहले दिन भी तो गेन लॉस निकाल सकते हो। आपने ऐसा कैसे बोला? तो मेरे भाई फिर आपने
समझा ही नहीं ओपन प्राइस का मतलब आप जाके लेक्चर सुनिएगा सिक्योरिटी एनालिसिस का या फिर ये जो प्रैक्टिकल कांसेप्ट वाला
लेक्चर था इसमें भी मैंने बता ही दी है सेम चीज जो शेयर होता है ना आज के दिन अगर मार्केट
में 334 पर क्लोज हो रहा है तो जरूरी नहीं है अगले दिन इसी प्राइस पर ओपन हो सर इस क्वेश्चन
में तो हो रहा है देखो अगले दिन सेम प्राइस पर ओपन हो रहा है तो एक बार अगले दिन का देखो आप इसी दिन का देखो 334.35 पर
क्लोज हो रहा है और अगले दिन देखो कितने पर ओपन हुआ 334.14 ठीक है? तो शेयर जिस प्राइस पर क्लोज होता
है, जरूरी नहीं है अगले दिन उसी पर ओपन हो। यह एफआर अकाउंट्स नहीं है कि क्लोजिंग बैलेंस इक्व टू अगले दिन का ओपनिंग
बैलेंस। अकाउंट्स और एएफएम बहुत डिफरेंट सब्जेक्ट है। तो इनको डिफरेंट ही रहने दो। ठीक है? इसमें जबरदस्ती हरकतें मत करना।
तो ये ओपन कोई काम की नहीं है आपकी प्राइस। चलिए अब डेली का गेन लॉस निकाल लेते हैं और फिर कैलकुलेशन दो डेसिमल
पॉइंट्स में सारी कैलकुलेशन राउंड ऑफ करना है। तो आप कर दीजिएगा। तो डेली का गेन लॉस आपका 20 दिन का आपके पास डाटा दे रखा है।
गेन और लॉस गेन लॉस पहले दिन पॉसिबल नहीं है। सेकंड डे देखो सेकंड डे की प्राइस ये है। फर्स्ट डे की यदि यानी प्राइस गिर गई
यानी लॉस। फिर और प्राइस गिर गई लॉस। इस तरीके से आप पता कर लेंगे गेन है कि लॉस है। तो ये आपको गेन लॉस मिल गया। फिर आपको
क्या करना है? 14 डे आरएसआई के लिए एवरेज गेन लॉस चाहिए। n + 1 वन डे ऑनवर्ड्स। 14 डे आरएसआई यानी 15th डे से। 15th डे से
लेके 20 डे का आप आरएसआई निकाल पाओगे। क्योंकि 14 दिन का डाटा चाहिए। तो 15व दिन आपके पास 14 दिन का गेन लॉस होगा। देख लो
आप यहां से अगर आप देखोगे तो 15व दिन को मिलाकर अगर आप देखोगे तो 14 दिन तक का आपके पास गेन लॉस अवेलेबल है। तो आप एवरेज
कर दो डिवाइड बाय 14 करके जो भी डाटा है गेन का डाटा डिवाइड बाय 14 लॉस प्लस करके डिवाइड बाय 14 एवरेज गेन लॉस आ जाएगा।
एवरेज गेन डिवाइड बाय एवरेज लॉस ये आ गया आपका आरs rs * 100 / 1 + rs करोगे ये आ जाएगा आरएसआई ऐसे बाकी दिन का भी करोगे बस
बाकी दिन में एवरेज गेन या एवरेज लॉस निकालने का तरीका मैंने बताया था शॉर्टकट क्या करता है फॉलो आरएसआई में पिछले दिन
का एवरेज गेन यह कितने टाइम का? n - 1 यानी 13 डेज का। प्लस आज का दिन। आज का दिन कौन सा? 16वा। तो 16वें दिन का गेन
कितना है यह? यह यह प्लस करना डिवाइड बाय 14 ऐसे लॉस के लिए करना। सेम ऐसे ही बाद वाले दिन में करना है। एवरेज गेन लॉस के
लिए यह आपको आरएस आरएसआई मिल जाएगा। लास्ट आरएसआई आपका कितना है? 34.64 लेटेस्ट। यह किस रेंज में है? 30 से 50 की रेंज में।
30 से 50 की रेंज में है। यानी बियरिश ट्रेंड के अंदर है। खत्म। तो यह आपका क्वेश्चन कंप्लीट है। इसके बाद
यह क्वेश्चन देखिए सिक्योरिटी वैल्यूएशन चैप्टर का है। यह जो क्वेश्चन है यह ऑलरेडी अपन ने किया है सिक्योरिटी
वैल्यू्यूएशन चैप्टर में डिट्टो सेम क्वेश्चन मनी मार्केट इंस्ट्रूमेंट में मनी मार्केट इंस्ट्रूमेंट में अपन ने रेपो
ट्रांजैक्शन रिपर्चेस एग्रीमेंट पढ़े थे। ठीक है? अगर आपको ध्यान हो तो एक बैंक जो है दूसरे बैंक को लोन पे पैसा देता है या
एक बैंक दूसरे बैंक से लोन लेता है वह वाला केस शॉर्ट टर्म के लिए। तो यह डिट्टो सेम क्वेश्चन पढ़ा था और जो कैलकुलेशन है
जो डाटा के फिगर्स हैं वह भी डिट्टो सेम है। यह तीन पार्ट मतलब यह क्वेश्चन फिर दोबारा लेने का पर्पस क्या है? ये एमटीपी
में आया बट इसमें थोड़ा सा कुछ चेंज किया। दो पार्ट एक्स्ट्रा डाल दिए। तो इसकी वजह से मैंने यह ले रखा है आपके पास। तो एक
बार देख लेंगे कुछ भी स्पेशल नहीं है यह। फटाफट से हो जाएगा। एक एमएफए है। कोई बैंक होगा जिसने 14 डेज का रेपो किया है एमएफबी
के साथ। और इस रेपो ट्रांजैक्शन को करवाने के लिए एक एजेंट की हेल्प ली गई बैंक सी जिसने 15% पर एनम का कमीशन चार्ज किया।
नॉमिनल वैल्यू ऑफ़ सिक्योरिटीज, फेस वैल्यू ऑफ़ सिक्योरिटीज। अब ये क्या चीज आ गई? बस ये समझना चाहिए। ये जो चीज है ना ये आपका
रेपो ट्रांजैक्शन का नेचर बताती है। जब प्रैक्टिकल चैप्टर का जो थ्योरी होगा ना उसमें भी ये सेम चीज कवर होती है। आपकी
प्रैक्टिकल सिक्योरिटी इवैल्यूएशन चैप्टर का थ्योरी वाला पोर्शन। जैसे अपन ने प्रैक्टिकल पोर्शन पढ़ा। लास्ट में जो
थ्यरी वीडियो रहेगा उसमें भी यह पोर्शन कवर होता है। इसे हम बोलते हैं ट्राई पार्टी रेपो जहां तीन पार्टी आ गई एक रेपो
ट्रांजैक्शन में। तीन पार्टी इन्वॉल्व हो गई। बैंक ए, बैंक बी और बैंक सी। तीन बैंक इन्वॉल्व हो गए। बैंक ए और बी तो आपस में
रेपो ट्रांजैक्शन कर रहे हैं। बैंक सी क्या कर रहा है? उनका एजेंट बना हुआ है। तो देखिए
मैंने इसमें एक डायग्राम से अगर आपको बताऊं बैंक ए जो क्या कर रहा है? लोन ले रहा है
बैंक बी से। कैसे ले रहा है बैंक यह लोन? मैं अपने पास कुछ गवर्नमेंट सिक्योरिटीज है वह गिरवी
रखूंगा बैंक बी के पास और उसके बदले लोन लूंगा। यह मैं काम करता हूं। तो जो गवर्नमेंट सिक्योरिटीज गिरवी रखता हूं
उनकी फेस वैल्यू होती है उसे हम बोलते हैं नॉमिनल वैल्यू। तो जो बैंक सी है ना अब मैंने बैंक बी के पास गया। लोन लिया तो
इसके लिए अरेंजमेंट कराने के लिए एक एजेंट को पकड़ा। बैंक सी। मैं नहीं जानता था बैंक बी को कि यह ट्रांजैक्शन पे मुझे कौन
लोन दे सकता है। तो मैं बैंक सी को पास गया। दलाल है यह। दलालों का काम ही ये होता है। वो आपको इंसान ढूंढ के लाके दे
देते हैं। बस उनको दलाली दे दो। इसको कमीशन दे दो। बैंक सी ने बोला कि मैं दिलवा दूंगा लोन बैंक बी से। मुझे तू क्या
करना है? जितनी भी गवर्नमेंट सिक्योरिटी तू गिरवी रखेगा ना जितनी फेस वैल्यू की उसका 15% पर एनम के अकॉर्डिंग कमीशन दे
देना। यानी जितने टाइम का तू लोन लेगा उस लोन के अकॉर्डिंग मेरा कमीशन बन जाएगा।15% पर एनम पर एनम यानी एक साल में कितने दिन
होंगे? इस क्वेश्चन में लिखा है 360 दिन। यानी 360 दिन का कमीशन है15%। मैं लोन कितने दिन का ले रहा हूं? 14 दिन। तो उसके
अकॉर्डिंग कमीशन बन जाएगा। तो बस यह कॉस्ट आपको और एक्स्ट्रा कैलकुलेट होगी इस क्वेश्चन में। तो सबसे पहली चीज तो इस
वाले ट्रांजैक्शन को आप क्या बोलोगे? वो आपसे पूछा गया। तो मैंने बताया थ्यरिटिकल जो पार्ट होगा आपके सिक्योरिटी वैल्यूएशन
चैप्टर का वहां कवर है अपने इसे बोलते हैं ट्राई पार्टी रेपो। तीन पार्टी इन्वॉल्व हो गए तो ट्राई पार्टी रेपो। इसके बाद
देखो अब अब मैंने बैंक ए हूं। बैंक व्यू की बात करते हैं। अब मैंने क्या किया? मेरे पास गवर्नमेंट ऑफ इंडिया के बोंड्स
थे 10% के कूपन इंटरेस्ट वाले। इनको मैंने सामने वाले के पास गिरवी रखा। किस रेपो रेट पर? यानी मैं इंटरेस्ट पे करूंगा इस
लोन के ऊपर 5.65% से। यह 10% तो गवर्नमेंट बोंड की कूपन रेट थी। नॉमिनल वैल्यू इन गवर्नमेंट बोंड जिनको गिरवी रखा उनकी फेस
वैल्यू कितनी है? 8 करोड़ टोटल बोंड्स की। क्लीन प्राइस 99.42 क्लीन प्राइस वो प्राइस जिसमें पिछली लास्ट जब यह बॉन्ड पे
इंटरेस्ट दिया गया था। उस डेट पे क्या प्राइस थी? आज की डेट तक का एक्रूड इंटरेस्ट इसमें जुड़ा हुआ नहीं है। वह
जोड़ देंगे तो डर्ट प्राइस आ जाती है। तो एक्सक्लूडिंग एक्रूड इंटरेस्ट इन्होंने खुद ने बता दिया।
मार्जिन रिक्वायरमेंट 2% है। यानी जितने अमाउंट का बोंड मैं गिरवी रखूंगा उतने अमाउंट का मुझे लोन नहीं मिलेगा। उसमें से
मार्जिन कट होता है। एक्रूड डेट ऑफ इंटरेस्ट इंटरेस्ट कितने हैं? मतलब यह जो गवर्नमेंट बॉन्ड मैं गिरवी रख रहा हूं इस
बॉन्ड के ऊपर 262 डेज से कोई इंटरेस्ट नहीं मिला है। तो इतना मैं इस क्लीन प्राइस में जोड़ दूंगा तो इसकी डर्टी
प्राइस आ जाएगी। डर्टी प्राइस के बेसिस पर मुझे लोन मिलता है। ये सब अपन कांसेप्ट में पढ़ते हैं। सेम क्वेश्चन है। सेम डाटा
या कुछ भी अलग नहीं है। तो फटाफट से देखो डर्टी प्राइस पूछी है। फर्स्ट लेग में मेरे पास कितना पैसा आएगा? फर्स्ट लेग
मतलब लोन में पैसा कितना आएगा? स्टार्ट प्रोसीड्स रीपेमेंट एट मैच्योरिटी 14 दिन बाद लोन का रीपेमेंट पे कितना अमाउंट
दूंगा यानी सेकंड लेग जिसे आप बोलते हैं। इसके बाद लास्ट पार्ट अपन देख लेंगे। सारी कैलकुलेशन रुपीज में आपको फोर डेसिमल
पॉइंट्स के अंदर करनी है। तो देखो सबसे पहले क्लीन प्राइस में आप 262 डेज का अक्रूड इंटरेस्ट जोड़ देंगे।
अब क्लीन प्राइस जो है एक सिंगल बॉन्ड की है। 8 करोड़ की फेस वैल्यू की बॉन्ड है। पर वो तो टोटल है। तो सिंगल बॉन्ड की फेस
वैल्यू नहीं दे रखी है। तो ₹100 मानते हैं अपन। 10% कूपन रेट थी बॉन्ड के ऊपर। तो यह आपका हो गया डर्टी प्राइस आ गई एक्रूड
इंटरेस्ट जोड़ने के बाद फर्स्ट लाख प्रोसीड्स कितनी होगी ₹8 करोड़ के बोंड ₹100 की फेस वैल्यू वाले तो नंबर ऑफ
बोंड्स आ गए मल्टीप्लाई बाय डर्टी प्राइस तो इतना अमाउंट ऑफ लोन मुझे मिलना चाहिए बट सामने वाला 2% मार्जिन काट के मुझे
इतना पैसा देगा सेकंड लेग यानी रीपेमेंट क्या करूंगा जो पैसा मुझे लोन का मिला था उस पे इंटरेस्ट चुकाऊंगा 5.65% जो मेरी
रेपो रेट थी 14 दिन का लोन था तो 14 दिन का ब्याज इतना बनता है यह हो गया सेकंड लेग का पेमेंट अब आपसे लास्ट पार्ट देख
लीजिए क्या पूछा है आपसे पूछा है इफेक्टिव एनुअल कॉस्ट क्या पड़ी बैंक एकको मेरे को ये लोन लेने पर इफेक्टिव एनुअल कॉस्ट क्या
पड़ी अगर आपको ध्यान हो मनी मार्केट इंस्ट्रूमेंट चैप्टर में मैंने एक इफेक्टिव कॉस्ट का टॉपिक और पढ़ाया था
जिसमें कमर्शियल पेपर का एक क्वेश्चन भी करा था कि नेट प्रोसीड्स जो अपने को मिलती है मनी मार्केट इंस्ट्रूमेंट में लोन लेने
के थ्रू उसके ऊपर हमारा इफेक्टिव खर्चा क्या आया वो निकालना है तो इफेक्टिव खर्चा न्यूमैरेटर में डिनोमिनेटर में नेट
प्रोसीड्स ये अपन ने किया हुआ है कमर्शियल पेपर वाले क्वेश्चन में ये बस इस क्वेश्चन में डाल दिया तो इस लोन के ऊपर मेरा खर्चा
क्या आया एक तो देखो इस लोन को स्टार्टिंग में मैंने लिया था तो मुझे इतने का मिला था। जब मैंने इस लोन का पैसा चुकाया तो
मुझे इतना चुकाना पड़ा। यानी एक तरीके से यह इंटरेस्ट है। यही तो इंटरेस्ट है और यहां से भी दिख भी रहा है रेपो इंटरेस्ट
है। यानी यह इंटरेस्ट का खर्चा। यह इंटरेस्ट का खर्चा आया मेरा इस लोन पे रेपो इंटरेस्ट। इसके अलावा एक और खर्चा
है। यह लोन मैंने खुद से नहीं लिया। मैंने एक दलाल को पकड़ा। एजेंट को पकड़ा। और एजेंट को अगर आप पकड़ते हो तो वो कमीशन
दलाली चार्ज करता है। उसने115% कमीशन मांगा था पर एनम। नॉमिनल वैल्यू ऑफ सिक्योरिटीज। तो जो गवर्नमेंट बोंड मैंने
गिरवी रखा था उसकी नॉमिनल वैल्यू कितनी 8 करोड़ 8 करोड़ का15% उसने लिया होगा एनुअल के अकॉर्डिंग यानी मैंने तो 14 दिन का लोन
लिया था तो 14 दिन के अकॉर्डिंग कितना खर्चा बनता है कमीशन का तो कमीशन कॉस्ट 8 करोड़ 15% * 14/360 यह कमीशन का खर्चा तो
बस यह टोटल कॉस्ट लगी है कमीशन का खर्चा और रेपो का इंटरेस्ट किसके ऊपर जो लोन का पैसा मुझे मिला था लोन में यही तो पैसा
मिला था स्टार्ट प्रोसीड्स इसके ऊपर मल्टीप्लाई बाय 100 यानी परसेंटेज में आपकी कॉस्ट आ गई बट यह कॉस्ट कितने टाइम
की है 14 दिन की कॉस्ट है अब आपको जो कॉस्ट बतानी होती है इफेक्टिव आपसे पूछी गई है एनुअलाइज्ड क्या बतानी है
एनुअलाइज्ड यानी पर एनम में कन्वर्ट करना है तो इसे पर एनम में कैसे कन्वर्ट करोगे 14 दिन की है तो मल्टीप्लाई बाय 360
क्योंकि इस क्वेश्चन में पर एनम में 360 दिन है बस हो गया [नाक से की जाने वाली आवाज़]
देखिए अब अगला क्वेश्चन यह क्वेश्चन सिक्योरिटी वैल्यू्यूएशन चैप्टर का ही है आपका और यह क्वेश्चन है
बॉन्ड इम्यूनाइजेशन का। इस क्वेश्चन में आपको दो पार्ट में कुछ रिक्वायरमेंट्स है।
फर्स्ट पार्ट तक तो कोई दिक्कत आपको होनी ही नहीं चाहिए। मतलब मैं कराऊं नहीं कराऊं फर्क ही नहीं पड़ना चाहिए क्योंकि अपन ने
क्वेश्चन करे हैं बॉन्ड इम्यूनाइजेशन के सिमिलर कुछ भी नया नहीं है। सेकंड पार्ट में बेसिक आंसर है। सेकंड पार्ट जो है ऐसा
नहीं कि कोई नया कांसेप्ट है। बिल्कुल बेसिक आंसर है। बेसिक आपको बताना है। वेरीफाई करना है। मतलब फर्स्ट पार्ट में
आपने बॉन्ड इम इम्यूनाइज किया है। उसको वेरीफाई करके दिखाना है। तो सेकंड पार्ट भी अपन देखेंगे। पहले फर्स्ट पार्ट की बात
करेंगे। इस क्वेश्चन में देखो पीवी फैक्टर जहां पे भी चाहिए चार डेसिमल्स में लेने हैं। बाकी सारी कैलकुलेशन दो डेसिमल में
करनी है। साफ बोला गया है। अब इस क्वेश्चन को एक बार ब्रीफ में आपको बता दूं तो क्या है? मुझे एक लायबिलिटी का पेमेंट करना है।
क्योंकि मैं ग्रेचुटी फंड हूं। ग्रेचुटी फंड मतलब मुझे लोगों का जब ग्रेचुटी का पैसा आता है तो फंड में से दिया जाता है।
तो मैं खुद फंड वाला हूं। तो मेरे को वो पेमेंट करना पड़ेगा कब? 3 साल बाद। तो आज से 3 साल बाद मुझे 1 करोड़ 70 लाख का
पेमेंट करना है। सिंपल सी बात है। मेरी 3 साल बाद लायबिलिटी आने वाली है। अब मेरे को एक ऐसा पोर्टफोलियो क्रिएट करना है
जिससे कि मेरी ये लायबिलिटी है इम्यून हो जाए। आपको क्या बोला गया है? फर्स्ट पार्ट में देखो ऐसा पोर्टफोलियो बनाओ
इन्वेस्टमेंट ऑफ बोंड्स का। दो तरीके के बॉन्ड दे रखे हैं मार्केट में। दो बॉन्ड अवेलेबल है। एक है जीरो कूपन बॉन्ड और एक
दूसरा बॉन्ड है कॉर्पोरेट का जिसमें 6.5% का कूपन है। ये दो बॉन्ड मार्केट में अवेलेबल है। इनको यूज़ करते हुए आपको ऐसा
पोर्टफोलियो बनाना है जिससे आप इम्यून हो जाए प्राइस रिस्क और रीइन्वेस्टमेंट रिस्क। तो बॉन्ड इम्यूनाइजेशन टॉपिक में
अपन ने पढ़ा था। ये क्या करता है? आपको प्राइस और रीइन्वेस्टमेंट के रिस्क से बचाता है। कांसेप्ट सारा अपन ने चैप्टर
में पढ़ा हुआ है। तो साफ पता चल गया बॉन्ड इम्यूनाइजेशन का क्वेश्चन है। इम्यून करना है। दो तरीके के बॉन्ड अवेलेबल है। तो बस
आपको यह पता करना है कि देखो 1 करोड़ 70 लाख 3 साल बाद खर्च आपको लायबिलिटी पे करनी है। तो उसका पीवी करके जो अमाउंट
आएगा उतना अमाउंट आपको क्या करना है? बॉन्ड ए और बी यानी जीरो कूपन बॉन्ड और कॉर्पोरेट बॉन्ड में इन्वेस्ट करना है।
दोनों बॉन्ड में कितना-कितना करना है? बस वो ही निकालना है आपको। उसके लिए हम क्या करते हैं? वेट पता करते हैं और वेट कैसे
पता करे जाते हैं? ड्यूरेशन निकाल के। हमें क्या करना होता है? जो वेटेड ड्यूरेशन होगी दोनों बॉन्ड्स की उसको
इक्वल करना होता है लायबिलिटी की ड्यूरेशन के। ये बॉन्ड इम्यूनाइजेशन का कांसेप्ट है मेरे भाई। रिवाइज करके रखिएगा। नहीं
रिवाइज होगा तो सब ऊपर से जाएगा। ये मत बोलना सर कांसेप्ट तो डिस्कस करते ही नहीं हो। है ना? कुछ ऐसे लोग होते हैं जो बस
केवल ये वीडियो उठा के देखेंगे। और ये कांसेप्ट तो है ही नहीं। तो कांसेप्ट सुनोगे तब पता चलेगा ना। ये क्वेश्चन का
सॉल्विंग का वीडियो एक्स्ट्रा क्वेश्चन का। कांसेप्ट का नहीं है। तो आपको बस यह काम करना है। तो पहले अपन ड्यूरेशन पता कर
लेते हैं। इसलिए जीरो कूपन बॉन्ड और कॉर्पोरेट बॉन्ड की ड्यूरेशन कैसे पता करी जाती है? आपको वाईटीएम से पीवी करना है।
ईल्ड से पीवी करना है। तो मार्केट प्राइस आती है। जो पीवी वैल्यू होती है हर साल की और मार्केट प्राइस यानी टोटल पीवी का उससे
हम वेट पता करते हैं। हर साल का वेट इनू ईयर करके आपको ड्यूरेशन मिल जाती है। यह आपने सीखा हुआ है। तो ड्यूरेशन देखो। तो
जीरो कूपन बॉन्ड जो है यह 4 साल का है। इसमें आपको चौथे साल के एंड में जो है फेस वैल्यू जो है 10,000 की वो मिल जाएगी। आज
के दिन करंट प्राइस यह है। जीरो कूपन मोड में क्या होता है? कूपन तो कुछ मिलता नहीं है। मैच्योरिटी पे क्या मिलती है? फेस
वैल्यू मिलती है। तो बस केवल 10,000 का एक पेमेंट आने वाला है। इसमें आपकी बेंचमार्क यील्ड कर्व यानी इंटरेस्ट यील्ड रेट
मार्केट की जो जनरल वाईटीएम है वह आपको दे रखी है 6.5% तो इससे ही हम पीवी करेंगे। तो इससे अगर आप पीवी करेंगे तो 10,000 जो
है वह चौथे साल के एंड में मिलेगा। इससे पीवी किया आपने चौथे साल का पीवी फैक्टर लेके यह वैल्यू आई। यही आपकी प्राइस है।
आज के दिन क्या आप वेरीफाई भी कर सकते हैं। वेट कितना हो गया? बस यही है। एक ही है तो एक ही वेट हो गया। 1 * 4 करोगे फोर।
यानी ड्यूरेशन 4 साल ही आ जाएगी जितनी इसकी मैच्योरिटी है। क्यों? क्योंकि इसमें केवल एक ही पेमेंट होना है आपके फेस
वैल्यू का वो भी मैच्योरिटी पर। तो ऑटोमेटिकली सारा का सारा पैसा ड्यूरेशन 4 साल बाद ही रिकवर हो पाएगा। उससे पहले
रिकवर कर ही नहीं सकते आप। कॉर्पोरेट बॉन्ड मैंने इसको एक्स नाम दे दिया। इस बॉन्ड को और इसको y दे दिया। कॉर्पोरेट
बॉन्ड को मैंने y नाम दे दिया। इस बॉन्ड में क्या होगा? इसकी वैलिडिटी 2 साल की है। मैच्योरिटी इस बॉन्ड पे हर साल 6.5%
का कूपन मिलेगा। फेस वैल्यू 10,000 है। और यह आज के दिन मार्केट में पार यानी फेस वैल्यू पर ही लिस्टेड है। ठीक है? तो
इसमें क्या होगा? 6.5% कूपन यानी 650 का कूपन मिलेगा पहले साल। दूसरे साल क्या मिलेगा? 650 का कूपन और रिडमशन अमाउंट कुछ
नहीं बोला तो फेस वैल्यू यानी 10,000 पी होगा। यानी सेकंड ईयर में 10,000 + 650 का कूपन यानी 10650 मिलेगा। मार्केट रेट
6.5.5% बता ही रखी थी यील्ड। इससे पीवी किया तो यह आपकी देखो मार्केट प्राइस के बराबर आ गया। तो इसका वेट करो। यह वेट मिल
गया आपको। वेट का टोटल हमेशा वन होता है। वेट इन ईयर करोगे तो आपको क्या मिल जाएगी? ड्यूरेशन। ये आ गई ड्यूरेशन आपकी। दोनों
बॉन्ड की आपकी ड्यूरेशन आ गई इसकी 4 साल। इसकी 1.94। अब इस ड्यूरेशन का पोर्टफोलियो बनाना है। वेटेड ड्यूरेशन किसके बराबर
होनी चाहिए? लायबिलिटी की ड्यूरेशन। लायबिलिटी 3 साल बाद इंकर करनी है आपको। तो बॉन्ड x यानी जीरो कूपन बॉन्ड का वेट
कितना होना चाहिए? और यह आपका कॉर्पोरेट बॉन्ड वेट y कितना होना चाहिए? तो आपको पता चला जीरो कूपन बॉन्ड में इतना अमाउंट
डालो और वेट बाय इतना करो। अब आपका जो लायबिलिटी का पेमेंट है 3 साल बाद है उसको भी आपने क्या किया? पीवी का लिया मार्केट
रेट से 3 साल बाद का पीवी फैक्टर लेके। तो ये आ गई लायबिलिटी का आज के दिन पीवी का अमाउंट। यानी आज के दिन इतना अमाउंट आप इन
दोनों बॉन्ड में डाल दोगे। किस प्रपोर्शन में ये प्रपोर्शन अपन ने पता किया। तो जीरो कूपन बॉन्ड में इतना अमाउंट। एक
बॉन्ड की प्राइस कितनी है आज के दिन? 7773 यानी ये 932 बॉन्ड्स आएंगे। डेसिमल्स में आएंगे तो राउंड ऑफ करना पड़ेगा क्योंकि
डेसिमल्स में बॉन्ड मिलते नहीं है मार्केट में। ऐसे ही कॉर्पोरेट बॉन्ड में आपका 48.54% आप कर लोगे इस लायबिलिटी के पीवी
का। तो इसकी प्राइस कितनी है आज के दिन? यह आज के दिन फेस वैल्यू पर ही है मार्केट में। यानी 683 बॉन्ड्स राउंड ऑफ करके। हो
गया बस यही है इम्यूनाइजेशन। तो सेकंड पार्ट देखो। अब सेकंड पार्ट क्या बोल रहा है? आप बताइए जो आपने स्ट्रेटजी करी है ना
क्या इस स्ट्रेटजी से आपका पोर्टफोलियो इम्यून हो गया? वो आपको वेरीफाई करके बताना है। यानी पोर्टफोलियो की वैल्यू
बतानी है। 3 साल बाद क्या हो जाएगी? अब 3 साल बाद क्या होगी? ऑटोमेटिकली सेम ही वैल्यू आनी चाहिए क्योंकि हमने सारी
कैलकुलेशन उस अकॉर्डिंग करी है। बट इन्होंने थोड़ा ट्विस्ट किया। इन्होंने बोला कि मार्केट में सेकंड ईयर के बाद
आफ्टर एट द एंड ऑफ सेकंड ईयर इंटरेस्ट रेट मान लो मार्केट में 50 बेसिस पॉइंट्स बीपीएस यानी बेसिस पॉइंट्स यानी जो 100
बेसिस पॉइंट होते हैं वो 1% होता है 50 बेसिस पॉइंट यानी5% मार्केट में इंटरेस्ट रेट बढ़ गई 5% से सेकंड ईयर एंड में तो
थर्ड ईयर एंड की बात बताओ पोर्टफोलियो थर्ड ईयर एंड में ही तो आपका पोर्टफोलियो चाहिए था आपको लायबिलिटी का पेमेंट करना
था तभी तो चाहिए था उस दिन आपके पोर्टफोलियो की वैल्यू क्या होगी तो आपको बताना है देखो क्या वो इम्यून रहा मार्केट
में इंटरेस्ट चेंज होने पर भी बिल्कुल रहेगा। यही तो मतलब है। बॉन्ड इम्यूनाइजेशन का मतलब ही यह है कि वो
बॉन्ड इम्यून रहेगा। उसमें कुछ गड़बड़ नहीं होगी आपकी। चाहे इंटरेस्ट रेट मार्केट में बदले। तो अपन वेरीफाई करके
बताएंगे बस। तो यानी वेरिफिकेशन करना है। तो सेकंड ईयर एंड में 5% से इंटरेस्ट रेट बढ़ना। मार्केट में इंटरेस्ट रेट कितनी
थी? 6.5% 5 से बढ़ गई। यानी 7% हो गई। सेकंड ईयर एंड में। यह बहुत इंपॉर्टेंट पॉइंट है। इंटरेस्ट रेट कब बढ़ रही है?
अगर यह गलत पढ़ लोगे तो क्वेश्चन गलत होगा। यह ध्यान से सुनना। इंटरेस्ट रेट कब बढ़ रही है? सेकंड ईयर एंड में। बस यह
दिमाग में रखना। तो अब देखो आपको थर्ड ईयर एंड में पोर्टफोलियो की वैल्यू बतानी है। पोर्टफोलियो की वैल्यू कब? थर्ड ईयर एंड
में। क्योंकि उसी दिन लायबिलिटी का पेमेंट करना है। तो उस दिन देखना है कि क्या वो 1 करोड़ 70 लाख के बराबर हो रहा है हमारा
पोर्टफोलियो। क्योंकि 1 करोड़ 70 लाख की लायबिलिटी पे होनी है ना थर्ड ईयर एंड में। तो क्या उतना हो रहा है? तो वो अपन
चेक करेंगे। तो सबसे पहले हमारे पोर्टफोलियो में एक जीरो कूपन बॉन्ड है और एक कॉर्पोरेट बॉन्ड। तो जीरो कूपन बॉन्ड
की वैल्यू आप देखो। 3 साल बाद आपकी कितनी हो जाएगी? 3 साल बाद जीरो कूपन बॉन्ड की वैल्यू क्या होगी? वो आप पता करो। तो जीरो
कूपन बॉन्ड बताओ। अब 3 साल बाद क्या वैल्यू होगी? जीरो कूपन बॉन्ड की मैच्योरिटी कितनी थी? 4 साल। तो 3 साल जब
बीत जाएंगे, कंप्लीट हो जाएंगे तो एक साल बाकी होगा ना मैच्योरिटी में। जीरो कूपन बॉन्ड की मैच्योरिटी में एक साल अभी भी
बाकी होगा। तो इसकी प्राइस कैसे निकालोगे? तो दिमाग चलाओ। जीरो कूपन बॉन्ड में क्या मिलता है? सिर्फ मैच्योरिटी पर आपको फेस
वैल्यू मिलती है। तो आज आप खड़े हो थर्ड ईयर एंड में आज से एक साल बाद इसका पैसा मिलने वाला है। कितना? ₹10,000। ₹1,000 की
फेस वैल्यू थी। तो एक ₹10,000 एक साल बाद मिलेगा। तो आज मार्केट में जो इंटरेस्ट रेट है उससे अगर मैं पीवी कर लूं तो आज के
दिन की वैल्यू आ जाएगी। समझ पा रहे हो ना? एक जीरो कूपन पॉइंट की वैल्यू आज के दिन कैसे आएगी? आज का दिन कौन सा है? थर्ड ईयर
एंड। आज आप कहां खड़े हैं? यह थर्ड ईयर, यह फोर्थ ईयर। आप यहां खड़े हैं। तो 4 साल बाद यानी आज से एक साल बाद।
अब चार्ज नहीं बोलेंगे। आज से तो एक साल बाद ही मुझे पेमेंट मिलना है। मैं यहां पे खड़ा हूं। यहां वैल्यू देखनी है। तो यहां
पेमेंट मिलेगा 10,000 उसको एक साल पीवी करके ले आऊं। तो आज की वैल्यू आ गई। पर सर ये आज पैसा कैसे मिलेगा? मैच्योरिटी एक
साल बाद की है। हमें तो आज ही पैसा चाहिए थर्ड ईयर एंड में। तो भाई यह प्रैक्टिकल आंसर दे रहा हूं। इस क्वेश्चन का कोई
लॉजिक नहीं है। प्रैक्टिकल बता रहा हूं। आप मार्केट में मार्केट प्राइस पर बेच सकते हैं ना। ये मार्केट प्राइस ही तो
निकाल रहा हूं। आज के दिन इसकी मार्केट में प्राइस क्या चल रही होगी? ठीक है? तो इस प्राइस पर आप बेचते हो। मार्केट में
आपको पैसा मिल जाएगा। ये तो एक जीरो कूपन बॉन्ड की ये वैल्यू हो गई होगी। हमने कितने जीरो कूपन बॉन्ड लिए थे इम्यून करने
के लिए? 932। तो यानी 932 जीरो कूपन बॉन्ड की ये वैल्यू हो रही होगी। ठीक है? थर्ड ईयर ऐड में हमें जीरो कूपन बॉन्ड की
वैल्यू तो पता चल गई। अब कॉर्पोरेट बॉन्ड की वैल्यू पता करते हैं। यहां देखो मैंने पीवी किससे किया था? इंटरेस्ट रेटली 7%
वाली जो रिवाइज हो गई थी मार्केट में। ऑब्वियस सी बात है। अब कॉर्पोरेट बॉन्ड कॉर्पोरेट बॉन्ड जो थे ना इनकी मैच्योरिटी
तो केवल 2 साल की थी मेरे भाई। 2 साल में यानी सर आज हम खड़े हैं यहां पे थर्ड ईयर एंड पे। यह तो कॉर्पोरेट बॉन्ड तो यहीं
मैच्योर हो गया होगा दूसरे साल के एंड पे। तो इसकी वैल्यू आज क्या होगी? जो इस दिन थी वैल्यू वही होगी क्या? नहीं आप फाइनेंस
की दुनिया में हैं। फाइनेंस की दुनिया में दिमाग से सोचना पड़ता है। आप सोचो कॉर्पोरेट बॉन्ड में क्या हुआ होगा?
ये आपका पहला, दूसरा और तीसरा साल। आज आप यहां पे खड़े हो और यह बॉन्ड यहां मैच्योर हो गया था। तो आज के दिन इस बॉन्ड की
वैल्यू क्या होगी? सर जो मैच्योरिटी पे वैल्यू थी वही है क्या? नहीं मेरे भाई थोड़ा दिमाग से सोचना। आज के दिन वैल्यू
क्या होगी? आपके पास जब पैसा आता है ना कहीं से भी, आप जब फाइनेंस की दुनिया में हो, तो आप यह मान के चलते हो उस पैसे को
आप बैंक में ऐसे पटक के नहीं रखते हो कि तिजोरी में बंद करके रख दिया। उसको रीइन्वेस्ट करते रहते हो मार्केट इंटरेस्ट
रेट पर। उसको क्या करते हो? रीइन्वेस्ट करते रहते हो। खाली नहीं पड़ा रहता पैसा कि भाई तिजोरी में पड़ा है। नहीं वो
रीइन्वेस्ट होता रहेगा मार्केट इंटरेस्ट रेट पर। तो इस कॉर्पोरेट बोर्ड में हमें कब कब कैश फ्लो मिला था? एक तो पहले साल
में मिला था क्या कूपन? पहले साल में क्या मिला था? 650 का कूपन। तो वो रीइन्वेस्ट करके आज के दिन कितनी वैल्यू का हो गया
होगा वो चेक करो। तो फर्स्ट ईयर एंड पे देखो 650 का कूपन मिला था। वो रीइन्वेस्ट हुआ होगा। रीइ्वेस्ट बताओ सेकंड ईयर में
किस वैल्यू पर हुआ होगा? फर्स्ट से सेकंड ईयर मार्केट में इंटरेस्ट रेट क्या थी? 6.5%
तो * 1.065 और सेकंड ईयर के एंड पर इंटरेस्ट रेट मार्केट में कितनी हो गई?5% से बढ़ गई। 7%
हो गई। तो सेकंड ईयर में आकर वह पैसा रीइ्वेस्ट वापस किया होगा थर्ड ईयर के लिए। तो किस रेट पर किया होगा? 7% पे।
बहुत इंपॉर्टेंट चीज है। यह क्या है? सेकंड ईयर का रीइ्वेस्टमेंट और यह थर्ड
ईयर का रीइन्वेस्टमेंट। आपकी सेकंड ईयर तक मार्केट में इंटरेस्ट रेट 6.5% थी। तो फर्स्ट ईयर के एंड में जो
कैश फ्लो मिला वो सेकंड ईयर के लिए इस रेट पे रीइ्वेस्ट हुआ होगा। और थर्ड ईयर में किस रेट पे रीइवेस्ट हुआ होगा? सेकंड ईयर
एंड पे 7% रेट हो गई। तो इस पे रीइ्वेस्ट हुआ होगा। तो यानी थर्ड ईयर एंड पर ₹650 की क्या वैल्यू होगी? इसका टोटल यह है।
इसके अलावा सेकंड ईयर एंड पे इस कॉर्पोरेट बॉन्ड से आपको क्या मिला था? ₹10,000 प्रिंसिपल और ₹650 का कूपन यानी 10,650 तो
सेकंड ईयर एंड पे यह मिला तो थर्ड ईयर के लिए इसको रीइ्वेस्ट किया होगा। किस रेट पर? 7% हो गई थी मार्केट रेट। तो यह पूरा
का पूरा 7% से आपका आज कैरी हो के आया होगा। यानी यह थर्ड ईयर के लिए रीइ्वेस्ट हुआ है सिर्फ।
तो यानी इसका आज का अमाउंट कितना होगा? यह टोटल अमाउंट। तो इसका टोटल कर लेंगे। तो एक कॉर्पोरेट बॉन्ड की आज के दिन वैल्यू
है ₹12,136.21। हमने 683 कॉर्पोरेट बॉन्ड लिए थे। तो टोटल वैल्यू हो गई यह। तो अब बस कर लो आज के
दिन टोटल जीरो कूपन बॉन्ड की वैल्यू और टोटल कॉर्पोरेट बॉन्ड की वैल्यू। तो ये आ गई टोटल पोर्टफोलियो की वैल्यू। सर ये तो
कुछ अलग अमाउंट है। 1 69937 बट सर हमारी लायबिलिटी जो है वो तो 1 करोड़ 70 लाख की थी ना थर्ड ईयर एंड में। हमारा
तो पोर्टफोलियो 1 करोड़ 699000 कुछ का ही हो पाया। आपका इम्यूनाइजेशन फेल हो गया। मेरे भाई फेल नहीं हुआ। ध्यान से देखो।
अप्रोक्समेटली ₹1 करोड़ 70 लाख के बराबर ही है सर अप्रोक्सिममेटली यार तो भाई डिफरेंस देखो कितने का है डिफरेंस यहां पर है ₹693
का सिर्फ वो भी पता है क्यों है क्योंकि जब अपन ने बॉन्ड पोर्टफोलियो बनाया था ना ये डेसिमल्स में आ रहे थे आपके बॉन्ड्स और
डेसिमल्स में आप मार्केट में परचेस नहीं कर सकते थे तो उसका तो क्या ही कर सकते हैं ना तो थोड़ा बहुत राउंडिंग ऑफ का
डिफरेंस क्यों है वो भी मैंने रीज़ बता दिया कंप्लीट है ये क्वेश्चन इसके बाद यह क्वेश्चन देखो सिक्योरिटी
वैल्यू्यूएशन का ही है यह क्वेश्चन है आपका एक्सटर्नल फंडिंग रिक्वायरमेंट वाले टॉपिक का बहुत सिंपल सा टॉपिक होता है। यह
टॉपिक एक तरीके से फ्री के मार्क्स वाला ही है। अगर अगर आप इस टॉपिक को ध्यान से समझ के कर लेते हो तो इसमें सिंपल सी बात
है अगर हमारी कंपनी की हम क्या बात करते हैं? ग्रोथ बढ़ने वाली है। सेल्स की ग्रोथ हमें बढ़ानी है। तो सेल्स की ग्रोथ बढ़ेगी
तो उतनी आपकी कॉस्ट भी बढ़ेगी। कंपनी की आपको करंट एसेट, करंट लायबिलिटीज भी बढ़ेंगी। इसके अलावा कंपनी की फिक्स्ड
एसेट भी उतने परसेंटेज से बढ़ेगी जितनी आपकी ग्रोथ बढ़ने वाली है। ये अपन कांसेप्ट में पढ़ते हैं। ऑलरेडी अपन ने
इसके क्वेश्चन भी करे हुए हैं। तो आपको क्या करना है? जब सेल्स बढ़ानी है तो आपको क्या करना है? अपनी नेट एसेट्स भी बढ़ानी
पड़ती है एक तरीके से। नेट एसेट्स का मतलब क्या हुआ? फिक्स्ड एसेट प्लस करंट एसेट माइनस करंट लायबिलिटीज। यह भी उतने परसेंट
से बढ़ानी है। तो यानी ये बढ़ानी है तो इनमें एक तरीके से इन्वेस्टमेंट करना पड़ेगा। इतना पैसा हमें बिज़नेस में और
लगाना पड़ेगा। तो वो पैसा हम कैसे लगाएं? तो इन्होंने क्या बोला कि वो पैसा कैसे लगेगा? एक तो आपकी ग्रोथ बढ़ेगी सेल्स की
तो आपके पास रिटेन अर्निंग्स एक्स्ट्रा जनरेट होंगे तो वो रिटेन अर्निंग्स काम में ले लो। उसके अलावा कुछ पैसा एक्स्ट्रा
और भी चाहिए तो वो फिर आप एक्सटर्नल फंडिंग करोगे यानी डेप्ट वगैरह से रेज करोगे। तो वही हमें बताना होता है कि
एक्सटर्नल हमें फंडिंग डेप्ट के थ्रू कितनी करनी है इस क्वेश्चन में। वो आपको बताना है। तो अब आपको इंफॉर्मेशन दे रखी
है। देखो कंपनी का जो ईयर एंड हुआ है उसका सेल का डाटा दे रखा है। सेल्स कितनी थी? कॉस्ट कितनी टैक्स और नेट इनकम यानी
प्रॉफिट आफ्टर टैक्स पैड दे रखा है। यह बैलेंस शीट दे रखी है ईयर एंड की। कंपनी अगले साल क्या है? 40% सेल्स में ग्रोथ
एक्सपेक्ट कर रही है। और डिविडेंड पे आउट रेशियो अगले साल जितनी भी ग्रोथ होगी मतलब जो भी आपकी अर्निंग्स आएगी उसमें से हम
25% डिविडेंड पे कर देंगे। तो बचा हुआ रिटेंड अर्निंग्स होगा। इसके अलावा कंपनी के जितने भी खर्चे हैं, करंट एसेट, करंट
लायबिलिटी यह भी सेल से बढ़ेंगे। ऑब्वियसली यह तो कांसेप्ट है। अगर नहीं बोलता तो भी कांसेप्ट ही है। रिटेंड
अर्निंग्स के अलावा कोई इक्विटी वगैरह से पैसा नहीं लेंगे। से बस यह बताओ कि लॉन्ग टर्म डे से हमें कितना एक्सटर्नल फंडिंग
करनी पड़ेगी। अब इस क्वेश्चन में स्पेशल बात यह दो केसेस है। पहला केस एक्सटर्नल फंडिंग आपको बतानी है डेप्ट से कितनी करनी
पड़ेगी? अगर कंपनी अभी अपनी फिक्स्ड एसेट को 65% ही यूज़ कर रही है। जितनी उनकी कैपेसिटी है उसका 65% ही यूज़ कर रही है।
अब इसका क्या मतलब हुआ? यह क्वेश्चन ओरिएंटेड लॉजिकल बात है। इसके लिए आपने इंटर में जो कॉस्टिंग वगैरह पढ़ी होगी
वहां आपको यह पता होना चाहिए। उससे आप लिंक करके इस चीज को समझ पाएंगे। ये मत बोलो अरे सर ये कोई नया कांसेप्ट है ऐसा
तो हमने कुछ नहीं पढ़ा तो ऐसे तो फिर हमने कुछ भी नहीं पढ़ा क्योंकि इसमें क्या किया गया है जो इंटर में बेसिक आप पढ़ते हो ना
फिक्स्ड एसेट का कैपेसिटी यूटिलाइजेशन वगैरह तो उससे आपको पता होना चाहिए क्या चीज दे रखी है अगर एक बार समझ गए ये क्या
दे रखा है तो फिर कर पाओगे क्वेश्चन ये कोई कांसेप्ट की लाइन नहीं है कि ये कोई कांसेप्ट है भाई इस टॉपिक का नया ये कोई
कांसेप्ट नहीं है क्वेश्चन का पॉइंट है एक स्पेशल पॉइंट तो ध्यान से देख लीजिए तो हमें अगले साल 40% सेल्स में ग्रोथ चाहिए
एक्सपेक्ट कर रहे हैं हम तो हमें हमारी फिक्स्ड एसेट नेट एसेट सब कुछ 40% से बढ़ानी है। कॉस्ट भी 40% से बढ़ानी है। तो
हमें एक्स्ट्रा पैसा चाहिए होगा क्योंकि यह सब हम 40% से नेट बढ़ाएंगे। तो एक्स्ट्रा पैसा कहां से होगा? पहले तो मैं
क्या बोलता हूं? अगले साल की रिटेन अर्निंग्स काम में आ जाएंगी। बचा हुआ एक्सटर्नल फंडिंग होगा। तो पहले अगले साल
की रिटेन अर्निंग्स तो पता कर ले कि भाई अगले साल रिटेन अर्निंग्स कितनी होंगी जिनको अपन यूज़ कर लेंगे। तो पहले वो पता
कर लेते हैं। तो रिटेन अर्निंग्स एक्सपेक्टेड इन नेक्स्ट ईयर। तो अगले साल देखो सेल कितनी होगी? करंट ईयर की सेल में
40% जोड़ दो। करंट ईयर की कॉस्ट में 40% जोड़ दो। तो ये पीबीटी आ गया। टैक्स हटा दो। 30% इसका कैलकुलेट करना है। यह वाला
मत ले लेना अब क्योंकि भाई प्रॉफिट चेंज हुआ है ना। यह आ जाएगा पैट। पैट में से क्या कर रहे हैं? हम डिविडेंड अगले साल
25% पे आउट करेंगे। तो आपका रिटेंड अर्निंग्स अगले साल होगा 147। यानी जितना भी पैसा अगले साल मुझे चाहिए होगा
सेल्स को बढ़ाने के लिए इन्वेस्टमेंट के रूप में ग्रोथ के लिए इन्वेस्टमेंट के रूप में उसमें से 147 तो यह यूज़ आ जाएगा।
एक्स्ट्रा पैसा जो भी होगा वो मुझे फंडिंग के थ्रू लाना पड़ेगा। तो बस वही होगी एक्सटर्नल फंडिंग। अब कितना पैसा मुझे
चाहिए पहले वो पता कर लेते हैं। एडिशनल फंड कितना चाहिए? एडिशनल फंड अपने पास आएगा। देखो इसमें मैं एक बार आंसर दिखा
दूं फर्स्ट पार्ट का। एडिशनल फंड हमें चाहिए होगा 200 करोड़ का। 147 करोड़ तो रिटेन अर्निंग वाले काम में ले लेंगे।
यानी एक्स्ट्रा बाहर से कितना लोन लेना है? 53 करोड़। बस खत्म। यही सॉलशन है। बस ये कैलकुलेशन समझनी है कि एडिशनल फंडिंग
आई कैसे इस क्वेश्चन में? तो पहला पार्ट क्या बोलता है कि अगर आपकी फिक्स्ड एसेट 65% कैपेसिटी पर ऑपरेट कर रही है तो तो
फिक्स्ड एसेट अगर 65% कैपेसिटी पर ऑपरेट कर रही है तो क्या होगी? आप एक बार फिक्स्ड एसेट को तो भूल जाओ। फिक्स्ड एसेट
के अलावा बाकी देखो हमें क्या बढ़ाना होता है? हमारे हमें इन्वेस्टमेंट किसमें चाहिए होता है? हमें करंट एसेट बढ़ानी होती है
और करंट लायबिलिटी भी बढ़ानी होती है। तो मैं नेट वर्किंग कैपिटल बोल दूं। करंट एसेट कितनी है? 2000 और करंट लायबिलिटी है
कितनी 1500 तो 2000 - 1500 यानी नेट वर्किंग कैपिटल ₹500 की है हमारी यह भी हमें किससे बढ़ानी पड़ेगी? 40% से जितनी
सेल्स में ग्रोथ चाहिए उतनी हमें नेट वर्किंग कैपिटल भी बढ़ानी पड़ेगी। तो 40% से यह बढ़ेगी। तो 500 का 40% अगर आप
करेंगे 200 यानी हमने नेट करंट एसेट या वर्किंग कैपिटल कुछ भी बोल दीजिए उसको बढ़ाना पड़ेगा। इसके अलावा हमें हमारी
फिक्स्ड एसेट भी बढ़ानी पड़ती है। जितनी सेल्स में ग्रोथ चाहिए। तो फिक्स्ड एसेट सर 4000 है। 40% सेल्स में ग्रोथ चाहिए।
तो 4000 का 40% सर कितना होता है? इसका 40% होता है सर ₹1600। तो फिर इंक्रीज इन फिक्स्ड एसेट आपने तो निल लिख रखा है। सर
ये क्या गलती कर रहे हो? तो फिर हम क्या है क्वेश्चन को समझ नहीं पा रहे हैं। क्वेश्चन ने खेला कहां पर है? इधर ही खेला
किया गया है इस क्वेश्चन के अंदर। जो फिक्स्ड एसेट है ना, अब ध्यान से सुनिए। करेंटली हम क्या कर रहे हैं? कंपनी
फिक्स्ड एसेट का केवल 65% कैपेसिटी ही यूज़ कर रही है। क्या कर रही है? केवल करेंटली 65% ही फिक्स्ड एसेट को यूज़ कर रही है।
मान लो यह मेरी मशीन है। यह साल में 100 यूनिट्स बना सकती है। बट अभी तक कंपनी ने क्या किया? केवल इससे हर साल 65 यूनिट्स
ही बनाई है। क्या किया? 100 यूनिट्स बनाई नहीं है। कभी यानी इसका 100% यूटिलाइजेशन अभी तक किया ही नहीं है। तो यानी अब आप
देखो फिक्स्ड एसेट एक्चुअल में इन्वेस्टमेंट और करने की जरूरत है क्या? हमें 40% सेल्स में ग्रोथ चाहिए अगले साल।
तो यानी 40% की फिक्स्ड एसेट हमें और चाहिए। पर आप फील करिए इसके पीछे लॉजिक क्या होता है? यह लॉजिक अपन ने ईएफआर वाले
टॉपिक में पढ़ा था कि हमें फिक्स्ड एसेट बढ़ानी क्यों है? अरे भाई आपको सेल अगर बढ़ानी है तो आपकी फिक्स्ड एसेट की
कैपेसिटी भी तो होनी चाहिए उतनी एक्स्ट्रा यूनिट्स प्रोड्यूस करने की। तभी तो वो सेल कर पाओगे आप। फील करा आपने? तो अब आप देखो
आपकी जो 4000 करोड़ वाली फिक्स्ड एसेट है ना ये फिक्स्ड एसेट कंपनी अभी तक केवल 65% ही यूज़ कर रही थी। यानी 65 का आपको 40%
और यूज़ करना है। क्या करना है आपको? इसमें 40% और चाहिए। तो यहां पर देखो आपको क्या करना है?
इसका 40% करो। 65 का 40% तो ये आएगा 26। 65 + 26 अगर आप करेंगे तो ये आएगा 91%।
यानी आपकी फिक्स्ड एसेट 9% तो फिर भी खाली रहेगी। समझिए हमारी जो फिक्स्ड एसेट है 4000 करोड़ वाली यह 100% इनकी कैपेसिटी है
जिसमें से 65% हम करंटली यूज कर रहे हैं। हमें इनकी कैपेसिटी जितनी करंटली यूज़ हो रही है उससे 40% कैपेसिटी और बढ़ानी है।
अरे भाई मैं अभी 65 यूनिट्स प्रोड्यूस कर रहा हूं। ये मान लो आप तो ये एसेट की 100 यूनिट्स प्रोड्यूस करने की कैपेसिटी है और
मैं 65 यूनिट प्रोड्यूस कर रहा हूं। मुझे अगले साल सेल्स कितनी करनी है? 40% बढ़ानी है। तो 65 यूनिट्स अभी प्रोड्यूस कर रहा
हूं। तो 40% और बढ़ानी है। तो 65 का 40% कितना होता है? 26 यूनिट्स ही तो और अगले साल प्रोड्यूस करनी है। यानी अगले साल
मुझे टोटल यूनिट्स कितनी प्रोड्यूस करनी है? 91 और मेरी एसेट टोटल कितनी प्रोड्यूस कर सकती है? 100 तो बताओ मुझे और फिक्स्ड
एसेट खरीदने की जरूरत है क्या? हां या ना में जवाब दे दो बस। नहीं है मेरे भाई। मेरी एसेट 100 यूनिट प्रोड्यूस कर सकती है
और अगले साल मुझे 91 करनी है। यानी अभी भी इसकी पूरी कैपेसिटी यूटिलाइज नहीं हो रही है। फील करा आपने यानी फिक्स्ड एसेट में
इन्वेस्टमेंट की जरूरत ही नहीं है। क्यों? क्योंकि 65% हम अभी तक यूज़ कर रहे थे। हमें इसमें 40% और ऐड करना है। सर 65 + 40
ये तो बहुत ज्यादा जा रहा है। अरे डायरेक्टली ऐड मत कर देना। अब्सोलुटली 65 का 40% यानी 65 * 40% 26 वो 65 में ऐड
करना है। अगर मैं इसे प्रॉपर्ली अगर यहां पे मेंशन करूं किसी को कंफ्यूजन ना हो तो इसका मतलब
65 * 1 + 40% इस तरीके से आप समझिए। यानी 65 एकिस्टिंग है। इसका 40% और हम यूनिट्स
प्रोड्यूस करेंगे। यानी अगले साल भी 91% ही यूज़ होगी। यानी इसमें इन्वेस्टमेंट करना ही नहीं है। बस खत्म। तो इतनी फंडिंग
चाहिए, इतना है। रिटेन अर्निंग है तो इतना एक्स्ट्रा। अब सेकंड पार्ट अब आप आराम से कर सकते हैं। बस सेकंड पार्ट में देखो
रिटेन अर्निंग तो वही है। 147 एक्स्ट्रा फंड कितना चाहिए? तो उसके लिए पहले फंड चाहिए कितना वो पता करो। तो इनक्रीस इन
करंट नेट करंट एसेट यानी वर्किंग कैपिटल वाला तो सेम ही है। वही 200 करोड़। अब फिक्स्ड एसेट वाला देखो। सेकंड पार्ट में
इन्होंने क्या बोला? करेंटली हम फिक्स्ड एसेट को 95% कैपेसिटी पे यूज़ कर रहे हैं। हमें अगले साल 40% यूसेज और चाहिए। 40%
सेल्स और चाहिए। तो यहां पर आप क्या करेंगे? 95 का वही समझने के लिए मैं ऐसे लिख रहा हूं। वरना
सेम ही चीज है। 1 + 40% तो यानी 95 का 40% अगर आप करेंगे तो ये आता है 38%। तो 95 + 38 यानी हमें फिक्स्ड
एसेट टोटल 133% यूज़ होगी। तो भैया उसकी कैपेसिटी 100% होती है। उससे ज्यादा तो कैसे यूज कर लोगे? यानी हमें 33% समझ पा
रहे हो? कैपेसिटी 100% होती है। हमें चाहिए 133% यानी 33% एक्स्ट्रा फिक्स्ड एसेट चाहिए अब 100 के ऊपर। तो यानी 4000
करोड़ की यह फिक्स्ड एसेट है। तो इसका 33% यानी इतनी अमाउंट की फिक्स्ड एसेट और चाहिए होगी अगले साल। तो यानी इतनी आपको
टोटल अमाउंट चाहिएगा जिसमें से यह रिटेंड अर्निंग से आएगा। तो यह आपका एक्सटर्नल फंडिंग से आ जाएगा। बस यह क्वेश्चन आपका
कंप्लीट हो चुका है। इसके बाद यह क्वेश्चन देखो यह बिल्कुल बेसिक है। यह बस मैंने यहां पर इसलिए ले
लिया क्योंकि इसकी प्रेजेंटेशन क्वेश्चन की आपको अलग दिख सकती है। इसमें कुछ भी नया नहीं है। तो ये यहीं से डिस्कस कर
लेते हैं अपन। ये क्वेश्चन पोर्टफोलियो का बिल्कुल बेसिक क्वेश्चन है। आपको पोर्टफोलियो की रिटर्न और रिस्क निकालनी
है। यानी पोर्टफोलियो की एक्सपेक्टेड रिटर्न सिक्योरिटीज जितनी भी है उसकी वेटेड एवरेज करके। और पोर्टफोलियो की आपको
क्या निकालनी है? रिस्क यानी स्टैंडर्ड डेविएशन। तो उसका फार्मूला होता है आपका जो अपन ने a + b वाला जो होल स्क्वायर
वाला फार्मूला पढ़ा हुआ है उस फार्मूला के बेसिस पे आपकी पोर्टफोलियो की रिस्क आएगी वैरियंस और स्टैंडर्ड डेविएशन इस क्वेश्चन
में देखो आपको बता रखा है कि आपकी आपके पोर्टफोलियो में तीन सिक्योरिटीज में से कोई सी आप सेलेक्ट करेंगे तीन सिक्योरिटी
का डाटा है। सिक्योरिटी वन, सिक्योरिटी टू और एक रिस्क फ्री बॉन्ड है। यह भी सिक्योरिटी थ्री है। इन सिक्योरिटीज़ की
क्या-क्या रिटर्न हो सकती है? हमारे पास मल्टीपल क्वेश्चंस हैं ऐसे और इनकी प्रोबेबिलिटी दे रखी है। तो सबसे पहले तो
आपको देखो इसमें पोर्टफोलियो की एक्सपेक्टेड रिटर्न और रिस्क निकालनी है। पोर्टफोलियो भी तीन तरीके के बनाए गए। तो
क्वेश्चन बहुत लेंी है ये। इसको सॉल्व करने बैठोगे आधा 1 घंटा जाएगा आपका। है ना? एग्जाम में आ गया तो टाइम बर्बाद है
अच्छे तरीके से। तो प्रैक्टिस होनी चाहिए आपकी। इसमें नया कुछ भी नहीं है। बस टाइम टेकिंग है। तो पहले सिक्योरिटी की खुद की
रिटर्न तो निकालो। भाई इस एलएमए कंपनी में ये रिटर्न भी मिल सकती है। ये भी उनकी प्रोबेबिलिटी दे रखी है। तो इसका एवरेज
करा। ऐसे ही x y z की रिटर्न का एवरेज कर लो प्रोबेबिलिटी से और रिस्क फ्री वाली रिटर्न का एवरेज करो वो तो सेम ही रहेगी
क्योंकि रिस्क फ्री रिटर्न का मतलब ही यह हुआ उसमें चेंज नहीं हो सकता तो वो सेम है दोनों सिनेरियोस में तो सिक्योरिटीज की
आपको रिटर्न मिल जाएगी देखो ये एलएमएन की एक्स वz की ये रिस्क फ्री की एवरेज रिटर्न आ गई अब सिक्योरिटीज की रिटर्न मिल गई अब
आपको पोर्टफोलियो की रिटर्न बतानी है पोर्टफोलियो क्या है आपका तो तीन पोर्टफोलियो है पहला पोर्टफोलियो एलएमएन
और xyz में इन्वेस्टमेंट कर रहे हो आप तो एलएमए और xyz की आपके पास क्या है रिटर्न है दोनों की एलएमए की रिटर्न भी xyz की
लेकिन इनका कोवेरियंस भी साथ में चाहिए होता है और वैरियंस भी चाहिए होता है आपको। आपको पता हो पोर्टफोलियो के रिटर्न
के लिए बेसिक अपन ने खूब क्वेश्चन करे तो बस वो निकालो। तो आपने क्या किया? LMN और X YZ का वैरियंस निकाला और LMN और XYZ का
कोवेरियंस निकाला। तब जाकर आपको क्या मिल पाएगा? पोर्टफोलियो का रिस्क। तो पोर्टफोलियो A की रिटर्न आ गई और
पोर्टफोलियो A की रिस्क निकालोगे। काफी टाइम कंज्यूमिंग होगा। अब एक और पोर्टफोलियो है पोर्टफोलियो B। इसमें
एलएमएन और रिस्क फ्री में आप इन्वेस्ट करोगे। तो एलएमए और रिस्क फ्री की रिटर्न तो आपके पास है। इसका वेटेड एवरेज करके
पोर्टफोलियो की रिटर्न तो निकाल लोगे लेकिन एलएमए और रिस्क फ्री का आपको वैरियंस भी चाहिए। तो एलएमए का वैरियंस
पहले से निकाल के बैठे हो। रिस्क फ्री जो होते हैं सिक्योरिटीज उनका रिस्क जीरो होती है। तो उसका वेरिएंट डायरेक्टली आप
जीरो लिख सकते हो। आप निकालोगे तो भी ज़ीरो ही आएगा। ये अपने कांसेप्ट में लिखा हुआ भी है। तो आपका कोवेरियंस भी आपको चाहिए
होगा इन दोनों के बीच का। तो इन दोनों के बीच का कोवेरियंस क्या होगा? ज़ीरो होगा। क्योंकि इसकी रिस्क ज़ीरो है। तो कोवेरियंस
भी ज़ीरो हो जाएगा। आप निकाल के देख सकते हो वरना डायरेक्टली भी यूज कर सकते हो। इसके बाद लास्ट पोर्टफोलियो सी भी है बट
इस पोर्टफोलियो में केवल एक ही सिक्योरिटी है। तो जो एलएमए की रिटर्न है वही पोर्टफोलियो की रिटर्न हो जाएगी। जो एलएन
की वैरियंस या स्टैंडर्ड डेविएशन है वही पोर्टफोलियो का वैरियंस स्टैंडर्ड डेविएशन हो जाएगा। यह क्वेश्चन कंप्लीट हो जाएगा
बस टाइम लगेगा। इसके अलावा एक थ्योरिटिकल चीज पूछी है इसमें डिसीजन मेकिंग। बताइए क्या यह पोर्टफोलियो असेस करना है रिस्क
सीकर इन्वेस्टर के पॉइंट ऑफ व्यू से और रिस्क एवर। अब ये क्या होता है? ये बेसिक इंग्लिश वर्ड है। थोड़ा सा बस सुन लो इस
क्वेश्चन में। रिस्क सीकर और रिस्क एवर। रिस्क सीकर वर्ड पढ़ के आपको खुद को समझ में आ जाएगा। ऐसा बंदा जो रिस्क देखना
चाहता है। मतलब उसको रिस्क से परवाह नहीं है। रिस्क की परवाह नहीं है। वो रिस्क ले सकता है। ठीक है? तो डर के आगे जीतने वाला
बंदा है। यह बंदा बताओ पोर्टफोलियो में क्या देखेगा? सिर्फ रिटर्न देखेगा। आप समझो ऐसा बंदा जिसको रिस्क की परवाह नहीं
है। उसको नहीं फर्क पड़ता कि भैया उसकी पुरानी गर्लफ्रेंड भी है। उसके सामने वो दूसरी लड़की पे लाइन मार रहा है। वो नहीं
देख रहा। है ना? उसको तो बस क्या चाहिए? मैक्सिमम रिटर्न चाहिए। तो ऐसा बंदा सिर्फ मैक्सिमम रिटर्न देखेगा। तो जिस
पोर्टफोलियो में मैक्सिमम रिटर्न है वो चूज़ कर लेगा। रिस्क देखेगा ही नहीं ये। तो मैक्सिमम रिटर्न इसको पोर्टफोलियो सी में
दिखेगी। यह ले लेगा। ठीक है? इसके बाद दूसरा बंदा रिस्क एवर। रिस्क एवर यानी जो रिस्क अवॉयड करना चाहता है। यह वो बंदा
भैया मेरे को रिस्क अवॉइड करनी है। बिल्कुल भी रिस्क नहीं चाहिए। है ना? 1% भी रिस्क नहीं लेने का भैया अपने को। अपन
एकदम शांत माहौल से काम करना चाहते हैं। जिंदगी शांति से जीना चाहते हैं। कोई रिस्क नहीं चाहिए अपने को। तो रिस्क नहीं
चाहिए। यानी यह बंदा रिस्क कम से कम देखेगा और रिटर्न ज्यादा से ज्यादा देखेगा। तो ऐसा करने के लिए इसको क्या
करना पड़ेगा? इसको अगर डिसीजन मेकिंग लेनी है तो कोफिशिएंट ऑफ़ वेरिएशन के बेसिस पे देखेगा। अब कोफिशिएंट ऑफ़ वेरिएशन आपका
क्या बताता है? यह बताता है कि 1% रिटर्न कमाने के लिए आपको रिस्क कितनी लेनी पड़ रही है। यानी यह रिस्क अवॉइड करना चाहता
है। कम से कम रिस्क लेना चाहता है। तो जहां सबसे कम रिस्क होगी वो वाला ये चूज़ करेगा 1% रिटर्न कमाने के लिए। तो भाई
रिटर्न तो सेम मिल रही है और जहां सबसे कम से कम रिस्क होगी वो यह चूज़ करेगा। तो यानी कोफिशिएंट ऑफ़ वेरिएशन जिसका सबसे कम
होगा वो ये चूज़ कर लेगा जिस पोर्टफोलियो का और रिस्क का मैक्सिमम रिटर्न के अकॉर्डिंग करेगा। तो यहां अगर आप देखोगे
देखो कोफिशिएंट ऑफ वेरिएशन पोर्टफोलियो A में आपका सबसे कम है तो ये पोर्टफोलियो A चूज़ करेगा।
इसके बाद देखो नेक्स्ट क्वेश्चन अब आप लोगों का यह जो क्वेश्चन है यह आपका पोर्टफोलियो
चैप्टर का क्वेश्चन है और यह बेसिक क्वेश्चन है। मतलब इसमें आपका रिटर्न और आपके जो अपन ने पोर्टफोलियो इवैल्यूएशन के
मेथड्स देखे थे ट्रेनर रेशियो वो सब इसमें आपको काम लेके डिसीजन मेकिंग करनी है। देखिए इस क्वेश्चन में क्या है देख के
आपको लग सकता है बहुत अजीब क्वेश्चन है बट काफी ज्यादा आसान क्वेश्चन है। इस क्वेश्चन में आपको क्या बताया? दो
पोर्टफोलियो मैनेजर हैं। एक मैनेजर X है और एक मैनेजर Y है। इसका मतलब पता है क्या है? देखो मार्केट में अगर आप इन्वेस्ट
करने जाते हो ना शेयर्स वगैरह में तो मार्केट में बहुत सारे लोग होते हैं। एक बंदा है वो बोलता है कि मेरे पास से
इन्वेस्ट कराओ। एक बोलता है मेरे पास से इन्वेस्ट कराओ। मैं ऐसे-से शेयर्स में डालूंगा। मैं इतनी रिटर्न कमा के दूंगा।
दूसरा बोलता है मैं इन फलाना शेयर्स में डालूंगा। मैं इतनी रिटर्न कमा के दूंगा। यानी दो पोर्टफोलियोज़ हैं। सिंपल सी बात
है। दो पोर्टफोलियो मैनेजर का मतलब ये समझ लो। मार्केट में दो अलग-अलग पोर्टफोलियो बने हुए हैं। ये अलग शेयर्स में पैसा
डालेगा और ये अलग में डालेगा। दो पोर्टफोलियो बने हुए हैं। तो x वाला जो पोर्टफोलियो है उसने पहले साल में कितनी
रिटर्न कमाई, दूसरे में कितनी कमाई? तीसरे साल में कितनी रिटर्न कमा के दी? पर एनम की आपको रिटर्न दे रखी है। और y वाले बंदे
ने कितनी कमा के दी हर साल रिटर्न वो दे रखी है। दो पोर्टफोलियो की रिटर्न हर साल की। कोवेरियंस आपको दे रखा है मार्केट के
साथ। ठीक है? तो कोवेरियंस कब का दे रखा है? केवल ईयर थ्री का। ध्यान से देखिएगा। ईयर थ्री का कोवेरियंस है अपने पास।
कोवेरियंस परसेंटेज में है। कोवेरियंस होता किस में है? परसेंटेज स्क्वायर में। बस यह एक बढ़िया पॉइंट है इस क्वेश्चन का।
कोवेरियंस परसेंटेज स्क्वायर में होता है। ये कांसेप्ट में मैं बताता हूं। बहुत से लोग इसको रट्टा मार के परसेंट में लिख
देते हैं। बट वो करते ही गलत हो जाएगा। और इस क्वेश्चन में वो इंस्टट्यूट ने किया भी है जानबूझ के आपको ट्रिक करने के लिए। तो
कैसे काम में आएगा वो अपन देखेंगे। मार्केट जो है शेयर मार्केट यानी निफ्टी ससेक्स उसने कंपाउंडेड रिटर्न 21.74% दिया
ओवर लास्ट 3 इयर्स। इसका मतलब क्या? कंपाउंडेड रिटर्न ओवर द पीरियड। मैंने आपको बताया था टाइम वेटेड रिटर्न जो है
एक्स्ट्रा एडिशनल प्रैक्टिकल कांसेप्ट्स जो थे आपके तो जो कंपाउंडेड रिटर्न है इसका मतलब मैंने आपको क्या बताया था टोटल
रिटर्न आपने पूरे पीरियड में क्या कमाई वो आपको दे जा रही है टोटल रिटर्न पूरे पीरियड में आपने जो कमाई वो आपको गिवन है।
इसका फार्मूला क्या होता है? 1 + फर्स्ट पीरियड की रिटर्न * 1 + सेकंड पीरियड की रिटर्न * 1 + थर्ड पीरियड की रिटर्न यानी
लास्ट पीरियड रिटर्न - 1 यानी पर एनम रिटर्न टोटल पीरियड की कंपाउंडिंग रिटर्न है एक तरीके से। यानी शेयर मार्केट की
आपको कंपाउंडिंग रिटर्न दे रखी है। इसके बाद आपको क्या बोला है? शेयर मार्केट में इक्विटी मार्केट में 7% की लास्ट ईयर में
रिटर्न कमाई। यानी इक्विटी मार्केट में रिटर्न इन मार्केट 3 साल की कंपाउंडेड रिटर्न भी दे रखी है और केवल थर्ड ईयर की
इंडिविजुअल रिटर्न भी दे रखी है। क्या काम किया है वो सब देखेंगे। थर्ड ईयर का आपको मार्केट का स्टैंडर्ड डेविएशन दे रखा है।
यानी थर्ड ईयर का अलग से डाटा दे रखा है। देखो थर्ड ईयर का कोवेरियंस दे रखा है मार्केट के साथ पोर्टफोलियो का। ठीक है?
दोनों पोर्टफोलियोज़ का। थर्ड ईयर की मार्केट की अलग से रिटर्न दे रखी है। थर्ड ईयर का मार्केट का स्टैंडर्ड डेविएशन दे
रखा है। थर्ड ईयर की रिस्क फ्री रेट दे रखी है। ठीक है? तो ये थर्ड ईयर की एक तरीके से आरएम हो गई। यह आपकी आरएफ है और
यह थर्ड ईयर का स्टैंडर्ड डेविएशन ऑफ़ मार्केट है। और यह कोवेरियंस ऑफ़ पोर्टफोलियो विद मार्केट थर्ड ईयर का दे
रखा है परसेंटेज में ना कि परसेंटेज स्क्वायर में। आपको सबसे पहले क्या करना है? जो आपके पोर्टफोलियो है ना दोनों
मैनेजर के यानी दोनों पोर्टफोलियोस को इवैलुएट करना है। कैसे करना है? मार्केट से कंपेयर करना है। मार्केट के भी किससे
कंपेयर करना है? ओवर 3 ईयर पीरियड मार्केट ने लास्ट 3 साल में जो परफॉर्मेंस किया उससे कंपेयर करना है। यानी लास्ट 3 साल का
मार्केट का क्या दे रखा है? कंपाउंडेड रिटर्न दे रखा है। तो अपने दोनों पोर्टफोलियो की भी 3 साल की कंपाउंडेड
रिटर्न निकालो। बस यही है इजी सा। तो देखो कंपाउंडेड रिटर्न कैसे आएगी? पोर्टफोलियो x की 1 + फर्स्ट पीरियड की
रिटर्न * 1 + सेकंड पीरियड की रिटर्न * 1 + थर्ड पीरियड की रिटर्न -1 ऐसे ही पोर्टफोलियो y की। अब देखो पोर्टफोलियो
की आपकी रिटर्न कंपाउंडेड मार्केट की रिटर्न कंपाउंडेड 3 साल वाली तो यहां पर देखो पोर्टफोलियो ने क्या किया है ज्यादा
रिटर्न दिए है यानी आउट परफॉर्म किया है अच्छा परफॉर्म किया है यहां पर देखो पोर्टफोलियो ने मार्केट के कंपैरिजन में
कम रिटर्न दिए कितनी कम दिए है माइनस में दिया है यानी अंडर परफॉर्म पोर्टफोलियो ने मार्केट से कम परफॉर्म किया है ठीक है
यहां पर ध्यान से सुनिएगा अंडर परफॉर्म्ड वर्ड और एक होता है अंडरवैल्यूड वर्ड कुछ स्टूडेंट्स केवल अंडर अंडर पढ़ते हैं आगे
का पढ़ते ही नहीं है तो फिर वो आपका प्रॉपर रट्टा मारना चल रहा आपको थोड़ा ध्यान से पढ़ना है। अंडर परफॉर्म्ड आपसे
परफॉर्मेंस पूछी है। अंडर परफॉर्म मतलब बेकार परफॉर्मेंस दी है। और अंडरवैल्यूड का मतलब पता है क्या होता है? अच्छा है।
अंडरवैल्यूड और अंडर परफॉर्म्ड सेम नहीं होते। अंडरवैल्यूड मतलब जिसका वैल्यू्यूएशन ज्यादा होना चाहिए लेकिन
मार्केट में वो सस्ते में मिल रहा है। समझ में आया? यानी वो अच्छा है। खरीद लो उसको तो। लेकिन ये तो बेकार है। अंडर
परफॉर्मेंस इसने मार्केट से बेकार परफॉर्मेंस दिया है। दोनों अलग वर्ड्स हैं। इसके बाद देखो रिस्क एडजस्टेड
परफॉर्मेंस मेजर बताने हैं। एब्सोल्यूट प्रोपोर्शनल टर्म्स में दोनों मैनेजर के बेस्ड ऑन बीटा ऑफ पोर्टफोलियो। रिस्क
एडजस्टेड परफॉर्मेंस मेजर आपको मैंने देखो लिखवाए थे यहां पे कैसे निकालते हो आप? प्रोपोर्शनल टर्म्स में निकालना है। यानी
ट्रेनर रेशियो बीटा को यूज़ करके और एब्सोल्यूट टर्म्स में जसन अल्फा। यह प्रैक्टिकल कांसेप्ट्स जो एडिशनल थे उसमें
आपको बताया था लास्ट ईयर का यानी थर्ड ईयर का आपको निकाल के देना है। इसलिए थर्ड ईयर का अलग से डाटा था। तो थर्ड ईयर का अब
आपको क्या करना है? ट्रेनर रेशियो चाहिए यानी एक्सपेक्टेड रिटर्न ऑफ पोर्टफोलियो माइनस आपको क्या करना है? RF डिवाइड बाय
बीटा। अब थर्ड ईयर की एक्सपेक्टेड रिटर्न ऑफ़ पोर्टफोलियो अपने पास अवेलेबल है। देखो ये दोनों की थर्ड ईयर की RF आपके पास
अवेलेबल है। पोर्टफोलियो की रिटर्न चाहिए उसमें। वो भी थर्ड ईयर वाली कंपाउंडेड मत ले लेना आप। दोनों पोर्टफोलियो में आपने
लिख दी। डिवाइड में बीटा बीटा दे नहीं रखा तो दोनों का बीटा निकालना पड़ेगा। तो बीटा कैसे निकलता है? तो बीटा का फार्मूला आपका
इसमें क्या काम में आएगा? कोवेरियंस दे रखा है आपको मार्केट के साथ। तो कोवेरियंस विद मार्केट डिवाइड बाय वैरियंस ऑफ़
मार्केट। अब यहां पे ध्यान से सुनिएगा। कोवेरियंस थर्ड ईयर का इसका कितना है पोर्टफोलियो
का? ये थर्ड ईयर का मार्केट का वैरियंस कितना है? ये दे रखा है। स्टैंडर्ड डेविएशन दे रखा है। वैरियंस में कैसे
कन्वर्ट करेंगे? इसका स्क्वायर। तो 8.5 * 8.5 स्क्वायर हो जाएगा। 8.5 की पावर 2 एक ही बात है। तो न्यूमैरेटर में देखो क्या
आएगा आपका? कोवेरियंस पोर्टफोलियो x का और डिवाइड में मार्केट का स्टैंडर्ड डेविएशन का स्क्वायर यानी मैंने स्टैंडर्ड डेविएशन
दो बार मल्टीप्लाई कर दिया। सेम चीज y के लिए हो जाएगी। ठीक है? इसमें कोई दिक्कत नहीं है। आप कैलकुलेशन कर लोगे। ये हो गया
आंसर मैं मैच करा सकता हूं। बट यहां पर एक छोटी सी चीज है जो आप गलत कर सकते हो। वो बता रहा हूं मैं। मतलब ये डायरेक्टली टिक
लगवाने के लिए तो हो गया। लेकिन जहां आप 100% गलती करोगे सब कुछ चाहते हुए भी वो ट्रिक क्या करी है इंस्टट्यूट ने यहां पे?
कोवेरियंस परसेंटेज में दिया है। गलती है क्या सर? गलती नहीं है। ट्रिक खेली है। कोवेरियंस होता किसमें? परसेंटेज स्क्वायर
में। क्लास में मैंने काफी बार लिखवाया था। बहुत माइनर पॉइंट्स होते हैं ये जिसकी मैथ्स स्ट्रांग होती है। उनको पकड़ में
आते हैं। तो मैंने क्लास में स्पेसिफिकली बताया था कोवेरियंस परसेंटेज स्क्वायर में होता है। और क्यों होता है? पूरी
कैलकुलेशन से वेरीफाई करा था अपन ने। यानी दो बार परसेंट होता है इसके अंदर। यानी दो बार परसेंट। इसका मतलब दो बार 100 से
मल्टीप्लाई हो रखा है ये। अब आपको कोवेरियंस परसेंटेज में दे रखा है। इसका मतलब पता है क्या हुआ? इसका मतलब क्या
हुआ? कि यह जो कोवेरियंस है ना यह इसमें 1% इन्होंने उड़ा दिया यानी उसका एडजस्टमेंट कर दिया। यानी एक्चुअल में पता
है क्या होगा? यह 82% स्क्वायर होगा। आप समझो इन्होंने क्या दे रखा है इस वाले का?82%
मैंने क्या बोला? परसेंट का मतलब होता है मल्टीप्लाई बाय 100। यह बेसिक्स के टाइम पढ़ाता हूं मैं आपको। सबसे पहला लेक्चर
इसी से चालू करता हूं। बेसिक मैथ्स तो परसेंटेज स्क्वायर का मतलब परसेंटेज दो बार। तो एक बार वाली परसेंटेज उड़ा रखी है।
इसका मतलब मल्टीप्लाई 100 एक बार गायब कर रखा है। तो अपन मल्टीप्लाई 100 करें इसको तो क्या होगा यह? 82 परसेंटेज स्क्वायर
यानी ये 82 परसेंटेज स्क्वायर होगा। तो परसेंटेज स्क्वायर अजीब होता है ना देखने में। तो इन्होंने बोला अजीब इसको हटाते
हैं। एक काम करते हैं। एक परसेंटेज गायब करते हैं। परसेंटेज गायब करना है तो डिवाइड बाय 100 करो। तो 82 परसेंटेज
स्क्वायर में से अगर डिवाइड बाय 100 करोगे तो क्या होगा? ये डिवाइड 100 चला जाएगा। यहां पॉइंट आ जाएगा और ये परसेंटेज एक
सिंगल बच जाएगा। यानी82% बन जाएंगे। समझ में आया? तो परसेंटेज में दिया हुआ है। इससे फर्क क्या पड़ता है? देखो जल्दबाजी
में आप पता है क्या करने वाले हो? ये 82 दिया हुआ है। डिवाइड में सर क्या है? 8.5% स्टैंडर्ड डेविएशन है। हमें वैरियंस चाहिए
होता है। तो हमें 8.5 * 8.5 हम परसेंटेज वगैरह इग्नोर करते हैं। हमें इस मैथ्स में दिमाग ही नहीं लगाना होता। जो लोग मैथ्स
को रट्टा मारते आते हैं ना उनके साथ ये सबसे बड़ी प्रॉब्लम होती है जिनकी मैथ्स वीक होती है। तो यह करते ही पूरा गलत।
क्यों गलत? क्योंकि अब आप समझिएगा 8.5 में दो बार परसेंटेज आएगा क्योंकि दो बार मल्टीप्लाई हो रहा है। तो ये परसेंटेज
स्क्वायर है और ऊपर सिंगल परसेंट है। ये आपस में कट नहीं हो रहा। केवल एक परसेंटेज 1% से कट हो जाएगा। बट फिर भी 1% नीचे
बाकी रहेगा। समझ में आया? तो ऊपर क्या बचा? 82 नीचे यह 8.5% यानी085 और यह वाला परसेंट तो कट गया था यानी85 8.5 ही रहेगा
यह तो ये आएगा बीटा आपका बस ये ध्यान रखना ऐसे ही y के लिए ये स्पेशल पॉइंट है काफी इस पे मैंने जोर दिया है क्योंकि ये बेसिक
मैथ्स की बात है ये मत बोल देना ये एफएम की बात है ये एफएम की बात नहीं है ये मैथ्स की बात है यह एक ऐसा सब्जेक्ट है जो
बहुत कुछ कवरेज करता है इस सब्जेक्ट को पढ़ाने के लिए आपको मैथ्स स्ट्रांग होनी चाहिए और पढ़ने के लिए भी मैथ्स स्ट्रांग
होनी चाहिए और उसी से मैं चालू करता हूं इसके बाद देखो आपको फर्स्ट और सेकंड पार्ट में जो भी आपके रिजल्ट आए हैं उसके बेसिस
पर सजेशन देने हैं। कौन सा पोर्टफोलियो बढ़िया है। फर्स्ट पार्ट में अगर देखा जाओ तो देखा जाए तो हमने क्या किया था? 3 साल
की परफॉर्मेंस एक साथ कंपेयर करी थी। उसके अकॉर्डिंग x वाला बेटर निकला था। ठीक है? और सेकंड पार्ट में केवल लास्ट ईयर की
कंसीडर करी है। इसके अकॉर्डिंग देखा जाए तो देखो क्या हुआ? अगर आप प्रोपोर्शनल टर्म्स में देखोगे ट्रेनर रेशियो निकाला।
ट्रेनर रेशियो ज्यादा अच्छा किसका? y का। जितना ज्यादा अच्छा होता है वो बेटर है। ऐसे ही जसन अल्फा भी निकाला है। वो भी
पूछा था ना जसन अल्फा में हम क्या करते हैं? एक्सपेक्टेड रिटर्न माइनस रिक्वायर्ड रिटर्न यानी RF + बीटा RF - RF ठीक है? तो
जसन अल्फा भी Y का अच्छा है। यानी केवल लास्ट ईयर को देखा जाए जो कि सेकंड पार्ट में उसके अकॉर्डिंग Y अच्छा है और 3 साल
का ओवरऑल देखा जाए तो X अच्छा है। बस यही आपको बताना है आंसर। इसके बाद ये क्वेश्चन देखिए। अब आप लोग।
यह क्वेश्चन हमारे पास पोर्टफोलियो में डिट्टो क्वेश्चन है। सेम वैल्यूस के साथ उसका रिवर्स कैलकुलेशन कर दिया इन्होंने।
यह सिस्टमेटिक अनसिस्टेटिक रिस्क वाला पोर्टफोलियो का क्वेश्चन होता है। टोटल रिस्क निकालनी होती है आपको। तो देखो चार
सिक्योरिटी है। बीटा दे रखा है। पोर्टफोलियो में इनका वेट दे रखा है। रैंडम एरर यानी अनसिस्टेटिक रिस्क।
अनसिस्टेटिक रिस्क वैरियंस के फॉर्म में होती है। बट यहां पे भी वही सेम जो अपने मॉड्यूल का है या फिर क्वेश्चन बैंक में
मेन चैप्टर के अंदर जो क्वेश्चन है उसमें भी सेम ऐसा ही कर रखा है। ये आपको देखो स्टैंडर्ड डेविएशन के टर्म्स में। क्योंकि
वेरियंस के टर्म्स में होता तो स्क्वायर होता यहां पे लिखा हुआ। तो यानी ये स्टैंडर्ड डेविएशन के टर्म्स में हमें इसे
वैरियंस में कन्वर्ट करना पड़ेगा स्क्वायर करके। पोर्टफोलियो की रिस्क आपको दे रखी है। यानी पोर्टफोलियो की टोटल रिस्क। टोटल
रिस्क यानी सिस्टेटिक प्लस अनसिस्टेटिक। तो इस क्वेश्चन में पोर्टफोलियो की टोटल रिस्क दे दी। जो क्वेश्चन बैंक में
क्वेश्चन था ओरिजिनल चैप्टर के अंदर उसमें टोटल रिस्क निकालनी थी ये आपको। तो ये स्टैंडर्ड डेविएशन के टर्म्स में दी है ये
भी। और टोटल रिस्क इस फार्मूला में जो होती है वो वैरियंस के टर्म्स में आती है। तो हमें इसे वैरियंस में कन्वर्ट करना
पड़ेगा स्क्वायर लगाकर क्योंकि हमें फिर बैलेंसिंग फिगर कुछ निकालना है। क्या निकालना है हमें? मार्केट का स्टैंडर्ड
डेविएशन निकालना है। वो कैसे निकलेगा? देखिएगा अभी सारी कैलकुलेशन दो डेसिमल्स में करनी है। देखो सबसे पहले आप समझो
सिस्टेटिक रिस्क और अनसिस्टेटिक रिस्क दोनों मिलाकर टोटल रिस्क बनती है। अनसिस्टेटिक रिस्क इस क्वेश्चन में निकाल
सकते हैं क्या? बिल्कुल निकाल सकते हैं। अनसिस्टेटिक रिस्क का स्क्वायर होगा और इनका वेट का स्क्वायर होगा। अनसिस्टेटिक
रिस्क आ जाएगी पोर्टफोलियो की। सिस्टेटिक रिस्क उसका फार्मूला होता है बीटा स्क्वायर। पोर्टफोलियो का जो बीटा होता है
उसका स्क्वायर कर लो। मल्टीप्लाई बाय मार्केट के स्टैंडर्ड डेविएशन का स्क्वायर। यानी ये एक इक्वेशन बनेगी। उससे
मार्केट का स्टैंडर्ड डेविएशन निकल के आएगा। तो टोटल रिस्क आपको दे रखी है पोर्टफोलियो की। कितनी स्टैंडर्ड डेविएशन?
25.03 इसको वैरियंस में कन्वर्ट किया। सिस्टमेटिक रिस्क पोर्टफोलियो का बीटा इंटू मार्केट का वैरियंस। पोर्टफोलियो का
बीटा आपने वेटेड एवरेज करके निकाल लिया क्वेश्चन के डेटा से। तो पोर्टफोलियो के बीटा का स्क्वायर मल्टीप्लाई बाय मार्केट
का वैरियंस। ये अपने पास नहीं है। यही तो निकालेंगे। तो अब हम क्या करेंगे? अनसिस्टेटिक रिस्क। तो ये रैंडम एरर
स्टैंडर्ड डेविएशन के टर्म्स में इसका स्क्वायर किया, वेट का स्क्वायर किया। इनका प्लस करते जाओ। ये आ गया। अब क्या
करना है आपको? सिस्टमेटिक रिस्क प्लस अनसिस्टेटिक रिस्क इक्व टू टोटल रिस्क। यह आपकी पोर्टफोलियो थी। बस इस इक्वेशन को
सॉल्व कर लो। मार्केट का आपको क्या मिल जाएगा? स्टैंडर्ड डेविएशन जो आपसे पूछा गया है क्वेश्चन कंप्लीट है।
इसके बाद देखो ये क्वेश्चन है म्यूच्यूल फंड का। और ये जो क्वेश्चन है ट्रैकिंग एरर वाले टॉपिक का है। अब म्यूच्यूल फंड
में ट्रैकिंग एरर कोई टॉपिक है क्या? अगर आप में से किसी का ये सवाल आता है। इसका मतलब मैं आपको साफ बोल सकता हूं कि आपने
ढंग से नहीं करी है पढ़ाई। बुरा लग सकता है बहुत बच्चों को क्या जब मैं डायरेक्टली बोलता हूं ना बुरा लगता है क्योंकि मैं वो
वाले टीचर्स में नहीं आता कि मैं पुचकार हूं जबरदस्ती आपको सिंपैथी दूं है ना क्योंकि बेटा तुम फेल हो रहे हो तो भी कोई
बात नहीं फेल होना भी अच्छी बात है फेल हो के आदमी आगे बढ़ता है नहीं मैं वो नहीं हूं मेरे को वो नहीं करना मुझे पता है वो
क्यों किया जाता है ताकि मार्केट मिले है ना बच्चा है क्योंकि बच्चे को लगता है अरे कितनी सांत्वना दे रहा है मेरे को वो काम
नहीं करना है मुझे एक बार में सीए बनाना है रैंक दिलानी है क्योंकि मुझे पता है करियर उसी से बनेगा आपकी फैमिली को सपोर्ट
तभी मिलेगा यह सबसे तो मेरा फायदा होगा पुचकारने से तो तो यह जो है ट्रैकिंग एरर बहुत से बच्चों को मैं गारंटेड बोल रहा
हूं। उनको पता भी नहीं होगा यह टॉपिक एक्सिस्ट करता है। चाहे मेरे से ही पढ़ रखे होंगे। पता है क्यों नहीं पता होगा?
सर आपने पढ़ाया ही नहीं होगा। पढ़ाया है मेरे भाई। यह पूरा टॉपिक आपको पढ़ाया है। ट्रैकिंग एरर बहुत ऐसे स्पेशल कैटेगरी में
होते हैं। वो पता है क्या करते हैं? कांसेप्ट बुक कभी खोल के देखते ही नहीं है। उनके लिए कांसेप्ट बुक क्लास लेक्चर
कुछ मायने ही नहीं रखते। उनके लिए मायने क्या रखता है? क्वेश्चन बैंक इंपॉर्टेंट क्वेश्चन। बस यह सॉल्व कर लिए काम ख़। तो
ट्रैकिंग एरर म्यूचल फंड में एक टॉपिक है अपने पास जो मैंने आपको पढ़ाया था म्यूचल फंड चैप्टर के अंदर। तो यह टॉपिक पूरा
आपको समझाया था कॉसेप्चुअली और इसका एक एग्जांपल लिया था। देखो डिटेल्ड एग्जांपल ये क्लास में रेगुलर बैच में लिया हुआ है।
इवन रिवीजन वीडियो में भी मैंने ये आपको करवा रखा है। सेम एग्जांपल एज़ इट इज़ कि एक म्यूच्यूल फंड की रिटर्न है। मार्केट
बेंचमार्क की रिटर्न है। इसका मतलब क्या है? हमारे म्यूचल फंड ने बेंचमार्क को आउट परफॉर्म किया कि अंडर परफॉर्म किया। हम
उसमें ट्रैकिंग एरर से देखते हैं कि म्यूचल फंड और मार्केट में कितनी डेविएशन आ रहा है। कितना डेविएशन आ रहा है उसे
ट्रैकिंग एरर बोलते हैं। तो इसके लिए म्यूच्यूल फंड की रिटर्न में से हम मार्केट की रिटर्न माइनस करते हैं।
डिफरेंशियल यानी एक्स्ट्रा रिटर्न आपको पता चलती है। म्यूच्यूल फंड ने कितनी दी या फिर नेगेटिव कितनी दी? कम कितनी दी। इस
डिफरेंशियल रिटर्न का अपन क्या करते हैं? एवरेज करते हैं तो एवरेज डिफरेंशियल रिटर्न आपको मिल जाती है। देखो d बार
मैंने यहां पर किया हुआ है। यह d बार अगर आप देख सकते हो तो यहां पर d बार हो रखा है। यह एवरेज डिफरेंस है। एवरेज डिफरेंस
है। तो जो हर साल का डिफरेंस है उसको एवरेज डिफरेंस से माइनस करते हैं। यानी डेविएशन मिलता है। डेविएशन का स्क्वायर
करते हैं तो आपको डेटा मिल जाता है d - d बार स्क्वायर। इसको क्या करते हो? / n - 1 जितने साल का डेटा होता है उसमें से 1
माइनस करके आप डिवाइड करते हैं वैरियंस आता है अंडर रूट करते हैं स्टैंडर्ड डेविएशन आता है ट्रैकिंग एरर यानी
ट्रैकिंग एरर कुछ नहीं है स्टैंडर्ड डेविएशन ही है बस डिफरेंस रिटर्न का स्टैंडर्ड डेविएशन ये पूरा कांसेप्चुअली
बताया हुआ अभी मत बोलना सर कांसेप्ट कहां था ये तो आपने इसको फार्मूला को बता दिया तो लेक्चर सुनो ना कांसेप्ट के लिए रेगुलर
बैच वाले तब समझ में आएंगे ना कांसेप्ट केवल ये देखने से नहीं आएंगे तो पूरा कांसेप्ट आपको बता के पूरा एग्जांपल कराया
था डिट्टो ये सेम डिट्टो आपके पास ये इंस्टट्यूट ने एमटीपी में क्वेश्चन डाला है तो अब आप बोलोगे यार अरे ये नई चीज है।
ये फिर तो हम कुछ ही नहीं कर रहे हैं। फिर हम पढ़ाई ढंग से नहीं कर रहे हैं। फिर कोई कुछ नहीं कर सकता। कोई हेल्प नहीं कर सकता
अपनी। अगर टफ पेपर आया तो अब इसे टफ थोड़ी बोलोगे। ठीक है? तो मार्केट म्यूचल फंड की रिटर्न और मार्केट की रिटर्न। तो म्यूचल
फंड रिटर्न में से आप मार्केट रिटर्न माइनस करोगे। जैसे पहले साल में नेगेटिव है। फिर इस तरीके से डिफरेंस आएंगे। इन
डिफरेंस का आपने एवरेज किया। d बार आ गया। d - d बार डेविएशन आ गया। डेविएशन का स्क्वायर किया बाय n - 1 5 साल का डाटा
है। तो n / 4 तो आपका आ जाता है ट्रैकिंग एरर। तो बस यही है। यही आपसे पूछा है। आपको बताना है। फंड की परफॉर्मेंस मार्केट
के कंपेयर करके आपको बतानी है। यानी ट्रैकिंग एरर आपको बताना था। तो इसलिए इस क्वेश्चन का अलग से कुछ सशन देखने की
जरूरत ही नहीं है। अपन ने एग्जांपल कर रखा है। एग्जांपल में वैल्यू्यूज जरूर थोड़ी डिफरेंस है। बट ऑलरेडी मैंने कर रखा है।
जबकि कहीं एक्सिस्ट भी नहीं करता था। फिर भी आपको क्लास में पढ़ाया हुआ है विद एग्जांपल।
इसके बाद देखिए नेक्स्ट। यह जो क्वेश्चन है यह भी म्यूचल फंड का है। सिमिलर क्वेश्चन अपने पास आपको मिलेगा
जो अपन ने चैप्टर में ऑलरेडी पढ़ा हुआ है। तो यह जनरली एडिशनल क्वेश्चन जो अपन देख रहे हैं ना जो ऑलरेडी अपन ने पढ़ रखा है
उसी को बस तोड़ मरोड़ के थोड़े बहुत कुछ क्वेश्चन इंस्टट्यूट डालता रहता है आरटीपी एमटीपी एग्जाम्स वगैरह में एक आध बार तो
वो अपन देख लेते हैं। तो इस क्वेश्चन में देखो क्या है? म्यूच्यूल फंड की आपको एनएवी बतानी है। एनएवी पर यूनिट। अब एनएवी
के लिए आपको नेट एसेट्स चाहिए। तो नेट एसेट्स का डाटा दे रखा है। एक म्यूच्यूल फंड है। न्यू फंड ऑफर यानी उसने पहली बार
चालू किया। फेस वैल्यू 10 पर यूनिट पे उसने फंड रेिंग चालू करी। इस म्यूच्यूल फंड को 180 लाख यूनिट्स का सब्सक्रिप्शन
मिला। तो हमें देखो जब भी एनएवी निकालनी होती है तो नेट एसेट्स। नेट एसेट्स के लिए हमें क्लोजिंग क्या चाहिए होता है? कैश
बैलेंस चाहिए होता है। 1 जून 2024 को हमने फंड रेज़ किया और आज है 31st मार्च 2025 जिस दिन एनएबी निकालनी है एक तरीके से इस
साल के बिगिनिंग मान लो आप तो क्योंकि जून फर्स्ट है तो बिग मतलब इस साल के मिड के अंदर आप मान लो आपने फंड रेिंग पहली बार
करी थी वहां से पैसा आया होगा तो यह आपका आप बोल सकते हो ओपनिंग कैश बैलेंस एक तरीके से तो आप क्या बोलोगे सर ₹10 लाख
यूनिट्स पे मुझे क्या मिला 10 पर यूनिट यहां पे इसमें क्वेश्चन में सारी कैलकुलेशन टू डेसिमल्स में करनी है तो 180
लाख यूनिट्स पे ₹10 के अकॉर्डिंग पेमेंट मिला। यानी ₹1800 लाख का ₹1800 लाख का पेमेंट आपको मिला होगा। इनिशियली पैसा
आपने रे किया होगा। यह आपके पास प्रोसीड्स का पैसा आया होगा। आप यह बोलेंगे। बस इस क्वेश्चन में यही खेल किया है। आपके पास
₹100 लाख नहीं आया है। यह कोई काम की नहीं है। ₹10 लाख यूनिट्स कोई काम के नहीं है। सर क्यों काम की नहीं है? हर क्वेश्चन में
यही करते थे। इस क्वेश्चन में एक बार अगली लाइन पढ़िए। अगली लाइन क्या है? हमने एक अंडरराइटिंग का एग्रीमेंट कर रखा था। हमने
मतलब म्यूचल फंड ने। म्यूचल फंड ने क्या कर रखा था? अंडरराइटिंग का एग्रीमेंट किया था। किसने कहा? अंडरराइटिंग एग्रीमेंट फॉर
एंटायर इशू ऑफ़ 200 लाख यूनिट्स फॉर अ कमीशन ऑफ़ 2%। अब यह क्या है सर? ऐसा तो कोई कांसेप्ट आपने पढ़ाया नहीं। तो मैं
बार-बार बोलता हूं कांसेप्ट का मतलब जो है वो ऑलरेडी आप पढ़ चुके हो। कांसेप्ट तो क्या होता है भाई? म्यूच्यूल फंड की नेट
एसेट्स डिवाइड बाय एनी। बस यही है मेरे भाई। मॉड्यूल खोल लो। मैंने तो इससे ज्यादा डिटेल में आपको कांसेप्ट बताया। अब
ये कांसेप्ट नहीं है। ये क्या चीज़ है? ये आपके बेसिक्स स्ट्रांग होने चाहिए। बेसिक्स किसके? फाउंडेशन लेवल के या स्कूल
लेवल के या फिर इंटर के। तो ऐसे कोई भी पॉइंट डाले जा सकते हैं। जैसे कि सीएफएस चैप्टर की हम जब एफआर में बात करते हैं
ना, तो बहुत से बच्चे क्या समझते हैं सीएफएस में मैं एक रेफरेंस दे रहा हूं आप लोगों को ताकि आपको पता चले कि क्या
कॉन्सेप्ट है और क्या चीज ऐसी है जो बेसिक्स है जो बेसिक्स होते हैं आपने आज तक पढ़े हैं आज तक जो आपने पढ़ाई करी है
सीए फाइनल में आने से पहले जितनी भी पढ़ाई करी है तो जैसे सीएफएस कंसोलिडेशन का टॉपिक होता है ना उसमें हम बहुत सारे
एडजस्टमेंट्स करते हैं बैलेंस शीट बनाते वक्त जब मैं सीएफएस पढ़ाता हूं ना एफआर के टाइम पर तो उसमें मैं काफी सारे
एडजस्टमेंट्स आपको लिखवाता हूं और वह पढ़ाता भी हूं बट मैं वहां पर एक इंस्ट्रक्शन क्लियरली आपको देता हूं। क्या
बोलता हूं मैं हमेशा कि यह जो एडजस्टमेंट मैं आपको पढ़ा रहा हूं, यह वह एडजस्टमेंट है जो इंस्टट्यूट ने आज तक पूछे हैं। ये
एडजस्टमेंट कहीं पर इंडस के अंदर नहीं लिखे हुए हैं। इंडियास तो क्या है? लीगल ड्राफ्ट है। है ना? एफएम जो सब्जेक्ट है
मैं हमेशा बोलता हूं यह तो ओपन सब्जेक्ट है। इसकी तो कोई लिमिट ही नहीं है। लेकिन जो अकाउंट्स है इंडियास है वो तो लीगल है।
लो है। जैसे डायरेक्ट टैक्स है तो लो में जो लिखा है बस उतना ही है। उसके बाहर कुछ नहीं है। ऐसे इंडियास भी लीगली ड्राफ्टेड
है। भाई एमसीए गवर्नमेंट की तरफ से आता है। इतनाइतना लिखा हुआ है। ये अकाउंटिंग करनी है। ये ट्रीटमेंट करना है। तो
इंडियास जो होता है सीएफएस का उसमें कहीं कोई एक भी एडजस्टमेंट का जिक्र ही नहीं है कि भैया ये एडजस्टमेंट का ये ट्रीटमेंट
करना है। ये करना है। वहां एडजस्टमेंट का जिक्र ही नहीं है। वहां तो पता है क्या लिखा हुआ है? कुछ भी एडजस्टमेंट हो वो कर
देना। बस कुछ एडजस्टमेंट हो तो वो कर देना इंटर कंपनी वाले बस वो भी सिर्फ इतनी बात करता है। इसके अलावा और कोई बात करता ही
नहीं है। तो यानी इंडियास में कहीं एडजस्टमेंट है नहीं। फिर भी हम एडजस्टमेंट पढ़ाते हैं। क्यों पढ़ाते हैं? क्योंकि वो
एडजस्टमेंट अभी तक एग्जाम में क्वेश्चंस में आ रखे होते हैं। अब वो एडजस्टमेंट जब आप देखते हो तो मैं उसको जब समझाता हूं ना
मैं इतना डिटेल में जाके आपको बताता हूं कि ये एडजस्टमेंट का ये ट्रीटमेंट क्यों किया? क्योंकि ये इंडियास 110 नहीं बोल
रहा। सीएफएस नहीं बोल रहा। ये ट्रीटमेंट आप बचपन से जो पढ़ते आ रहे हो उसका एकाउंटिंग को दिमाग में रखते हुए आपको
करना पड़ रहा है। तो वो ट्रीटमेंट होते हैं और वहां मैं क्लियर बोलता हूं कि एडजस्टमेंट अभी तक जितने आ रखे हैं उसके
अकॉर्डिंग पढ़ रहे हैं। हो सकता है एग्जाम में कोई ऐसा पॉइंट डाल दे जो आपने फाउंडेशन लेवल पर पढ़ा था वो क्वेश्चन में
डाल दे। कुछ भी डाला जा सकता है। उसकी कोई लिमिट नहीं है। हजार एडजस्टमेंट 2000 एडजस्टमेंट डाले जा सकते हैं। तो आप लोगों
ने देखा होगा मैं एक चीज बताने जा रहा हूं आपको कि जो बच्चा है ना एफआर में कभी डरता है ना तो किस चैप्टर से डरता है? सीएफएस
से। और वो भी क्यों डरता है? आप देखना आपने अगर कभी एग्जाम दिए हो पहले इंटर में भी आपने सीएफएस पढ़ा होगा या फाइनल के कभी
एग्जाम दिए हो या पहली बार देंगे अपने सीनियर को देखना वो एफआर का जब पेपर दे के आते हैं बस एक ही चीज पे डिस्कशन होता है
सीएफएस में कोई नया एडजस्टमेंट आया क्या नया आ गया अरे यार आज सीएफएस में नया एडजस्टमेंट आया वो हो ही नहीं पाया सॉल्व
इसके अलावा और कोई डिस्कशन होता ही नहीं है क्योंकि एफआर में सब लिमिटेड होता है लेकिन वो जो एडजस्टमेंट होते हैं सीएफएस
के मैंने क्या बोला वो लिमिटलेस है क्योंकि वो आज तक की आपकी पढ़ाई के बेस पे कुछ भी उठाया जा सकता है सेम वही चीज
एएफएम अब एएफएम जो सब्जेक्ट है ना इसमें भाई यह तो ओपन है। इसका कोई लीगल ड्राफ्ट नहीं है कि भैया यह है वैल्यू्यूएशन के
चार टेक्निक। ये फॉलो कर लो। नहीं मेरे भाई ये ओपन है। तो इसमें तो कहीं से भी कुछ भी एडजस्टमेंट उठाए जा सकते हैं। तो
इसलिए इसमें तो अगर कभी पेपर टफ आया तो पूरे पेपर का ही जिक्र होता है। अरे भाई ये कांसेप्ट पढ़ा कि नहीं पढ़ा? तो ये
कांसेप्ट नहीं होते। ये थोड़ी कॉमन सेंस की बात होती है। है ना? तो ऐसे तो कांसेप्ट को अगर बोलोगे तो भाई स्कूल से
लेकर अभी तक जो पढ़ाई करी है वो सारी की बुक मैं ला के दे दूंगा। आपको पढ़ते रहना। तो यहां पर देखो अंडरराइटिंग के बारे में
आपने पढ़ा है बचपन से। बचपन से मतलब जब से भी अकाउंट्स आपने पढ़ना चालू करी है। तो अंडरराइटिंग का मैं एक बार मीनिंग बताता
हूं। क्या आप लोग पढ़ के आते हैं? ये आपको पूरे चैप्टर में मॉड्यूल में भी नहीं मिलेगा क्योंकि ये बेसिक बातें हैं जो आप
अभी तक पढ़ के आते हो। तो अंडरराइटिंग का मतलब क्या है? जब मान लीजिए मैं कोई पैसा रेज़ करता हूं मार्केट से तो मैं अंडराइटर
को क्या बोलता हूं? यार मार्केट में मान लो लोगों ने कम खरीदा। जैसे 180 लाख यूनिट्स ही खरीदी। अब मैंने 200 लाख
यूनिट्स की पूरी अंडरराइटिंग कर दी। यानी मैं 200 लाख यूनिट्स का इशू लेके आया था। लेकिन लोगों ने 180 लाख यूनिट ही खरीदी।
20 लाख कोई खरीदा ही नहीं। तो जो अंडरराइटर बंदा होता है ना वह खरीद लेता है। वो बची हुई यूनिट्स खरीद लेता है।
लेकिन वह फिर कमीशन लेता है अपना। ठीक है? एक बेसिक छोटा सा बताया। इसमें बहुत डिटेल प्रोसेस होता है। उस पे अपने को नहीं
जाना। बट बेसिक बात बताई। यानी मैं 200 लाख यूनिट्स का इशू लेके आया था। मार्केट में लोगों ने 180 लाख यूनिट्स ही खरीदी।
लेकिन भाई मुझे क्या मतलब? मार्केट में लोगों ने कितनी खरीदी? मैंने अंडरराइटिंग कर दी ना। अंडरराइटिंग कर दी तो मेरी तो
200 लाख यूनिट बिक जाएंगी। क्योंकि अगर लोग नहीं खरीदेंगे तो अंडराइटर खरीदेगा। तो मेरे पास तो पूरा ₹2 लाख यूनिट का ही
पैसा आएगा। तो बस ₹200 लाख यूनिट * 10 यानी ₹2000 लाख का पेमेंट आएगा। बस इसके अलावा अब इस क्वेश्चन में कुछ नहीं है। तो
बस यहां पे देखो आपका क्या होगा? ₹2000 लाख का आपका पेमेंट आएगा। 2% यह कमीशन लेगा अंडरराइटर जितना भी इशू है यानी
₹2000 लाख का 2% आपका कमीशन का पेमेंट होगा। वही आपका खर्चा होगा। तो यहां पे देखो क्लोजिंग कैश बैलेंस निकालने के लिए
अब इशू ऑफ़ यूनिट्स इतना पैसा आया आपके पास। अंडराइटिंग कमीशन चला गया 2000 लाख पर 2% इसके अलावा इनिशियली हमने इन्वेस्ट
कर दिया मार्केट में जितना पैसा आया मार्केट में लगा दिया अपन यह तो करता है म्यूचल फंड यह आपका माइनस में चला गया फिर
आपका मार्केटिंग के इनिशियल जो खर्चे होते हैं मार्केटिंग के वो लगे ₹25 लाख नया फंड आया था तो वो आपने माइनस कर दिया तो यह
पैसा आ गया इसके बाद अब आपको क्या करना है पूरे साल भर आपने जो ट्रांजैक्शन करे तो पूरे साल भर क्या किया मैंने कुछ
सिक्योरिटीज बेची 280 लाख में 250 लाख वाली तो 280 लाख आए मेरे पास मैंने कुछ सिक्योरिटीज जो है फिर परचेस करी 265 लाख
की ये चले गए ये बिल्कुल सेम क्वेश्चन क्वेश्चन है आप जो करते आए हो मैनेजमेंट एक्सपेंस वाला पॉइंट जो है इसमें मैंने
कुछ हाईलाइट कर रखा है उस हाईलाइट वाले पार्ट को एक बार छोड़ दो उससे अभी फर्क नहीं पड़ेगा अपने क्वेश्चन में एक बार आगे
का देखते हैं वो भी मैं समझाऊंगा मैनेजमेंट के एक्सपेंसेस 55 लाख के थे जिसमें से 500 आउटस्टैंडिंग है यानी पे
नहीं करे यानी बाकी के 5 लाख पे कर दिए तो 55 लाख में से 500 अभी भी एरियर में है तो 5 लाख का कैश का पेमेंट ये हो रखा है
डिविडेंड मुझे रिसीव होना है 5 लाख का जिसमें से 400 अभी भी कलेक्ट करना है मुझे यानी रिसीवेबल है 400 तो बचा हुआ 4600
मुझे मिल गया होगा 80% मैं क्या कर रहा हूं? जो भी रियलाइज़ अर्निंग्स है ना कैपिटल गेन और डिविडेंड वह 80%
डिस्ट्रीब्यूट कर रहा हूं। तो देखो डिविडेंड मेरे को रियलाइज़ कितना हुआ? 4.6 लाख। इसका 80% ये जाएगा। इसके अलावा
कैपिटल गेन मैंने जो सिक्योरिटी 250 लाख वाली 280 में बेची थी। 30 लाख का कैपिटल गेन था। इसका 80% ये डिस्ट्रीब्यूट होगा।
यह आ गया आपकी क्लोजिंग बैलेंस। अब मैनेजमेंट एक्सपेंस का एक बार डिस्कशन करूंगा। एक बार भूल जाओ क्योंकि इसका कोई
रेलेवेंसी नहीं होने वाली। बट डिस्कशन कर लेंगे अपन। क्लोजिंग कैश बैलेंस ले लिया। मार्केट वैल्यू ऑफ़ इन्वेस्टमेंट ईयर रेंट
पे कितनी हो गई वो आपको दे रखी है। ये रही। वह ले ली डिविडेंड रिसीवबल था आपका 40,000 का और मैनेजमेंट एक्सपेंसेस 500
अक्रूड लायबिलिटी में थे वह ले लिए नेगेटिव में नेट एसेट डिवाइड बाय टोटल यूनिट 200 लाख बस हो गया इतना आसान
क्वेश्चन था ये अब इस क्वेश्चन में देखो मैनेजमेंट एक्सपेंस की बात तो मैनेजमेंट एक्सपेंस का आपने वर्किंग भी बनाई है यहां
पे कुछ लिखा हुआ भी है बट क्या चीज है ये तो देखिए इस क्वेश्चन में क्या बोला अब यही वही जनरल बात लिख दिया अब जनरल
क्वेश्चन ओरिएंटेड कोई बात लिख वो क्वेश्चन से ही जज होगी इसके लिए कोई कांसेप्ट नहीं होते हैं ये आपको समझना
पड़ेगा मैनेजमेंट एक्सपेंसेस क्वेश्चन में क्या बोला? सेबी रेगुलेट कर रही है। चलो ठीक है। क्या कर रही है सेबी? सेबी ने
बोला मैनेजमेंट का खर्चा आपका 50% से ज्यादा नहीं कर सकते आप। किसका?50% एवरेज फंड इन्वेस्टेड ड्यूरिंग द ईयर। ड्यूरिंग
द ईयर आपने मैं म्यूचल फंड हूं। मैंने मार्केट में जितना भी पैसा लगाया है ड्यूरिंग द ईयर। एवरेज एवरेज मतलब ओपनिंग
पैसा मार्केट में कितना लगाया था और क्लोजिंग पैसा मार्केट में कितना लगा हुआ है। उसका एवरेज उसका. 5% से ज्यादा
मैनेजमेंट का मैं खर्चा नहीं कर सकता। एक बार पता करते हैं ये अमाउंट कितना आता। फिर इसका इंप्लिकेशन क्या होगा? तो एवरेज
फंड इन्वेस्टेड क्या है? देखो स्टार्टिंग में मैंने मार्केट में कितना इन्वेस्टमेंट किया था? इनिशियल 1780 ओपनिंग
इन्वेस्टमेंट। ईयर एंड पे इन्वेस्टमेंट कितना है मार्केट में? इन्वेस्टेड की बात हो रही है। तो कुछ बच्चे ये ले सकते हैं
मार्केट वैल्यू। ये मत ले लेना इन्वेस्टमेंट भी। हमने जो फंड इन्वेस्ट किया उसकी वैल्यू। तो मैंने ये इन्वेस्ट
किया था तो इनिशियल वैल्यू यह थी। मतलब उसकी कॉस्ट मान लो जो फंड इन्वेस्ट किया था उसकी कॉस्ट। तो ईयर एंड पे भी यही
होगी। नहीं मेरे भाई हमने कुछ सिक्योरिटीज़ बेची थी। देखो ₹50 लाख की कॉस्ट की बेची थी। तो - 250 लाख चली गई होगी। यहां कॉस्ट
लेना सेल प्राइस नहीं क्योंकि वो कॉस्ट गई होगी। उसकी जगह 265 लाख की कॉस्ट की नई खरीदी भी थी। तो क्लोजिंग हमारा
इन्वेस्टेड अमाउंट ये है। इसकी मार्केट वैल्यू ये है। ये अलग चीज है। हमें तो फंड इन्वेस्टेड से मतलब है। क्लोजिंग फंड
इन्वेस्टेड ये है। तो एवरेज कितना हुआ? ओपनिंग प्लस क्लोजिंग डिवाइड बाय टू ये इसका 5% यानी ये 8.94 लाख से ज्यादा
मैनेजमेंट एक्सपेंस मैं खर्च नहीं कर सकता। मेरा खर्चा कितना हुआ? मैनेजमेंट एक्सपेंस का 5.5 लाख। ठीक है? कोई दिक्कत
नहीं। मेरे पास लिमिट है ना यानी यह मेरी लिमिट बनी हुई है। 8.94 लाख से ज्यादा नहीं कर सकता। मेरा तो उसी लिमिट के अंदर
आ रहा है। तो कोई दिक्कत ही नहीं है। बट सर इस क्वेश्चन में मान लो मैनेजमेंट का खर्चा 10 लाख होता तो क्या करते? और यह
मैं एक बार के लिए राउंड ऑफ के लिए इसको 9 लाख पढ़ रहा हूं आपको समझाने के लिए। तो ₹1 लाख होता एक्चुअल खर्चा 10 लाख होता और
यह 9 लाख। तो क्या करते? तो यानी सेबी ने अलऊ किया 9 लाख। और मैंने एक्चुअल में ₹1 लाख खर्च कर दिया। तो 1 लाख एक्स्ट्रा ना।
तो वो खर्चा आप काउंट ही नहीं करते कैलकुलेशन में। केवल 9 लाख तक का ही खर्चा। यहां पे जो आप खर्चा ले रहे हो
मैनेजमेंट का ये 9 लाख तक का ही लेते। यानी ये जो लिमिट है यहां तक का ही लेते। बाकी खर्चा जो है जो ट्रस्टी है म्यूच्यूल
फंड का उसी को लाके रखना पड़ेगा। मतलब प्रैक्टिकल लाइफ में क्वेश्चन में वो होगा भी नहीं। अगर क्वेश्चन में वो दिया तो वो
गलत है एक तरीके से। क्योंकि प्रैक्टिकल लाइफ में म्यूचल फंड वो कभी कर ही नहीं पाएगा उतना। सेबी ने जितना अलव किया उससे
ज्यादा क्योंकि फिर उसका वायलेशन हो जाएगा। पेनल्टी लगेगी और जितना उसने एक्स्ट्रा खर्चा किया जो ट्रस्टीज है
म्यूच्यूल फंड के उनको वापस लाना पड़ेगा म्यूचल फंड में वो अमाउंट। तो प्रैक्टिकल लाइफ में वो हो ही नहीं सकता।
ठीक है? यह कंप्लीट है क्वेश्चन। तो, बस वह फालतू पॉइंट था इस क्वेश्चन का। इसके बाद यह क्वेश्चन देखो। यह क्वेश्चन म्यूचल
फंड का है। बट इस क्वेश्चन में म्यूचल फंड के अलावा कुछ बातें अलग भी है। कुछ बेसिक बातें भी
है। वो भी आपको देखनी है। इस क्वेश्चन में देखो एक पोर्टफोलियो बनाया है हमने फंड का। और इस पोर्टफोलियो में इस पोर्टफोलियो
में हमने केवल गवर्नमेंट बॉन्ड में इन्वेस्टमेंट किया वो भी डेटेड। डेटेड का मतलब जो गवर्नमेंट सिक्योरिटीज़ फिक्स डेट
पे आपकी मैच्योर होंगी। तो ये जो डेट लिखी हुई है ये 2026 में मैच्योर होगा। 2030 में 35 में 42 में 52 में वो डेट लिखी हुई
है। गवर्नमेंट बॉन्ड है तो कूपन रेट भी इनकी बता रखी है बॉन्ड की। इन बोंड की परचेस रेट आपको दे रखी है कि आपने किस
प्राइस पर इनमें इन्वेस्टमेंट किया और इनकी फेस वैल्यू है ₹100 पर बंड और मार्केट प्राइस दे रखी है ये एक तरीके से
ड्यूरेशन इयर्स में आपको दे रखी है यानी इन बॉन्ड की ड्यूरेशन रेस्पेक्टिव बॉन्ड की ड्यूरेशन निकाल के आपको दे रखी है फेस
वैल्यू बता रखी है ₹5 करोड़ की टोटल इन्वेस्टमेंट इन ईच बॉन्ड यानी मैंने अब मेरा पोर्टफोलियो अब मेरे पोर्टफोलियो में
अगर आप देखोगे ध्यान से तो पोर्टफोलियो कितने का है वो नहीं दे रखा था अभी तक अभी तक तो बॉन्ड का डाटा दे रखा था बॉन्ड की
कूपन रेट बॉन्ड की मार्केट प्राइस और फेस वैल्यू और बॉन्ड की ड्यूरेशन यह नहीं बताया मैंने कितना इन्वेस्टमेंट कर रखा
है। तो अब आपको बताया है हर बॉन्ड में मैंने ₹5 करोड़ जितनी फेस वैल्यू का इन्वेस्टमेंट किया हुआ है हर बॉन्ड में 5
करोड़ की फेस वैल्यू का। आपको सबसे पहले तो बताना है ये बॉन्ड किस टाइप का है। दूसरा फिर एनएवी निकालनी है इस फंड की और
नंबर ऑफ यूनिट्स बताई है 250 लैक्स। आपको सिंपल एवरेज में कैलकुलेशन करनी है और सारी कैलकुलेशन लैक्स में। अब ये सिंपल
एवरेज कहां काम में आएगा? यह केवल थर्ड पार्ट के लिए। उससे पहले कोई काम का नहीं है। देखेंगे रुपीज़ इन लैक्स में प्रेजेंट
करना है। तो आप देखो म्यूच्यूल फंड की एनएवी कैसे निकालते हैं? वही नेट एसेट। नेट एसेट्स में क्या म्यूचल फंड के पास
कुछ क्लोजिंग कैश बैलेंस कुछ डाटा नहीं है। कुछ नहीं होगा। ये मानेंगे। मार्केट वैल्यू ऑफ़ इन्वेस्टमेंट इन्वेस्टमेंट की
मार्केट वैल्यू ले लेंगे। इसके अलावा डिविडेंड रिसीवबल ये सब कुछ नहीं है। कोई लायबिलिटी कुछ नहीं है। बस यही आएगा। अब
मार्केट वैल्यू ऑफ़ इन्वेस्टमेंट कितनी है? सर? 5 करोड़ हर बॉन्ड में टोटल हमारे पास 1 2 3 4 5 बॉन्ड है। यानी 25 करोड़। मेरे भाई
वो फेस वैल्यू है। हमें इन्वेस्टमेंट वैल्यू मार्केट वैल्यू चाहिए होती है नेवी के लिए। तो मार्केट वैल्यू कैसे आएगी? ये
रही फेस वैल्यू ₹100 है और मार्केट वैल्यू ये रही। तो हर बॉन्ड की आप मार्केट वैल्यू निकाल लोगे।
देखो अब सबसे पहले तो ये बॉन्ड किस टाइप का है? इसे हम बोलते हैं गिल्ड फंड। यह आपको थ्यरी जो वीडियो है उसमें भी देखने
को मिलेगा। म्यूच्यूल फंड का जो थ्यरी वीडियो है थ्यरी वाले नोट्स हैं उसके अंदर ये डाला हुआ है क्लियरली। ऐसा फंड ऐसा
म्यूच्यूल फंड जो गवर्नमेंट की डेटेड सिक्योरिटीज में इन्वेस्टमेंट करता है सिर्फ उसे हम गिल्ट फंड का नाम देते हैं।
जैसे आप पढ़ते हो ना इक्विटी फंड डे फंड इसे बोलेंगे गिल्ट फंड। ठीक है? जी आई एलटी गिल्ट हो गया आपको वो गिल्ट अलग होता
है। जी यू आई एलटी वाला गिल्ट नहीं है। ये गिल्ट है। बाकी ये समझ लो गवर्नमेंट में पैसा लगाना यानी गिल्ट है। गलती है आपकी।
है ना? आप पछता ही रहे हो। तो गिल्ट फंड गवर्नमेंट में पैसा लगा दिया तो आपका पछताना निश्चित है।
तो गिल्ट फंड में अब आपको क्या करना है? है एनएवी निकालनी है तो आपने देखो नंबर ऑफ यूनिट्स आपने कितनी परचेस करी है हर बॉन्ड
की वह पता कर लो आगे जो परचेस करी है म्यूच्यूल फंड ने इन्वेस्टर ने जो यूनिट्स है वो तो ये दे रखी है मैं एज अ म्यूच्यूल
फंड आगे जब शेयर्स खरीदता हूं तो नंबर ऑफ शेयर्स होते हैं बॉन्ड खरीदे हैं तो उनकी यूनिट्स होंगे तो नंबर ऑफ बॉन्ड्स या नंबर
ऑफ यूनिट्स कितनी खरीदी है हर बॉन्ड की वो भी तो चाहिए क्योंकि मेरे को मार्केट प्राइस पर बॉन्ड तो पता है पर बॉन्ड देखो
मार्केट प्राइस पता है मुझे परचेस पे लेकिन नंबर ऑफ यूनिट्स होंगी तभी तो कर पाऊंगा वो कैसे निकलेगी हर बॉन्ड में
मैंने कितना इन्वेस्टमेंट किया फेस वैल्यू में 5 करोड़ और एक बॉन्ड की फेस वैल्यू ₹100 तो यानी मैंने हर बॉन्ड में 5 लाख
यूनिट्स ली है। तो बस सिंपल हो गया। 5 लाख * हर बॉन्ड की परचेस प्राइस। तो ये आ गई इसकी मार्केट वैल्यू। यही नेट एसेट्स है
क्योंकि और कोई डाटा नहीं है। डिवाइड बाय म्यूच्यूल फंड में नंबर ऑफ यूनिट्स कितनी है? 250 लाख। तो ये आ गई एनएवी पर यूनिट।
थर्ड पार्ट देखो। अब बताइए आप क्या एक्शन लेंगे अपने रिस्क को कम करने के लिए? पोर्टफोलियो को आपको चर्न
आउट करना है। अब चर्निंग आउट सर ये क्या चीज आ गई? ये आपको नोट्स में लिखा हुआ है। कहां लिखा हुआ है? सिक्योरिटी वैल्यूएशन।
अब ये थर्ड पॉइंट के लिए सिक्योरिटी वैल्यूएशन चैप्टर में पहुंच जाओ आप। सिक्योरिटी वैल्यूएशन चैप्टर में मैंने आप
लोगों को ड्यूरेशन वाला सॉरी बॉन्ड इम्यूनाइजेशन का जो टॉपिक पढ़ाया था उसमें मैंने बताया था कि बॉन्ड इम्यूनाइज कर
लिया। उसके बाद आपको क्या करना पड़ता है? टाइम टू टाइम उसको चर्न आउट भी करना होता है। यानी चेंज भी करना पड़ता है।
पोर्टफोलियो में कुछ सिक्योरिटी को बाय करना होता है। कुछ को सेल करना होता है ताकि आपका बॉन्ड इम्यून रहे हमेशा। उसे हम
क्या बोलते हैं? चर्निंग आउट। तो ये कोई नई चीज नहीं है। ऑलरेडी आप पढ़ चुके हो। बट इस क्वेश्चन में वो कांसेप्ट जो अप्लाई
करने का तरीका है ना वो रैंडम है। इंस्टट्यूट ने अपनी एजम्पशन से अप्लाई कर रखा है। वो मैं अभी आपको बताता हूं क्या
एजम्पशन कहां पे ली हुई है और तरीका भी थोड़ा अलग है। यहां पे आपको सिंपल एवरेज से क्या बताना है? रिवाइज ड्यूरेशन
निकालनी है। देखो आप चर्निंग आउट करोगे। अगर मार्केट में इंटरेस्ट रेट पहला सिनेरियो क्या होगा? मार्केट में इंटरेस्ट
रेट आपको लग रहा है गिरने वाली है। 25 बेसिस पॉइंट से गिरने वाली है मार्केट में। और दूसरा सिनेरियो होगा मार्केट में
इंटरेस्ट रेट बढ़ने वाली है तो क्या करोगे? तो जो भी आप करोगे स्ट्रेटजी फॉलो उसके बाद आपके पोर्टफोलियो की रिवाइज
ड्यूरेशन क्या होगी वो बतानी है इन दोनों सिनेरियो में तो रिवाइज्ड ड्यूरेशन हम कैसे निकालते हैं देखो मैं अगर थोड़ा सा
याद दिलाऊं हमने बॉन्ड इम्यूनाइजेशन में क्या पढ़ा था अभी मेरा जो पोर्टफोलियो है वो पोर्टफोलियो में देखो ये पांच बॉन्ड है
इन पांचों की ड्यूरेशन दे रखी है तो हम बॉन्ड इम्यूनाइजेशन में क्या करते हैं वेटेड एवरेज करते हैं पोर्टफोलियो की
ड्यूरेशन क्या होती है वेटेड एवरेज अरे सिंगल सिंगल बॉन्ड की सिक्योरिटी की ड्यूरेशन मल्टीप्लाई बाय वेट कर दोगे तो
पूरे पोर्टफोलियो की ड्यूरेशन हो जाएगी आपकी। यही अपन ने किया हुआ है सिक्योरिटी वैल्यू्यूएशन चैप्टर में। हम वेट जो लेते
थे वो हम इन्वेस्टमेंट वैल्यू के अकॉर्डिंग लेते थे। ठीक है? हम क्या लेते थे? वेटेड एवरेज करते थे। वेटेड एवरेज। बट
इन्होंने क्या बोला? सिंपल एवरेज करो। तो एक बार पोर्टफोलियो की एकिस्टिंग ड्यूरेशन पता कर लेते हैं। कितनी है? तो
पोर्टफोलियो की एकिस्टिंग ड्यूरेशन कितनी है? हर बॉन्ड की आपको ड्यूरेशन दे रखी है। डिवाइड बाय कितने बॉन्ड है? F5 क्योंकि हम
सिंपल एवरेज कर रहे हैं। अब यहां पे ऐसे ही क्यों किया? क्योंकि क्वेश्चन में लिखा है भाई सिंपल एवरेज करना है। बस समझ में
आया इसका रोल कहां है? तो अभी हमारे पोर्टफोलियो की ड्यूरेशन करेंटली 7.85 इयर्स है। जनरली हम क्या करते हैं? जो
ड्यूरेशन निकाली जाती है वेटेड एवरेज होती है। यानी हमें जो इन्वेस्टमेंट अमाउंट था उसके बेसिस पे वेट्स लेने चाहिए थे। बट
इंस्टट्यूट सिंपल एवरेज बोल रहा है वो किया है। तो ये एक एजम्पशन है इस क्वेश्चन की जो क्वेश्चन में लिखी है। ठीक है? पहली
चीज तो यह स्पेशल। दूसरा इस क्वेश्चन में देखो क्या बोला? अब इंटरेस्ट रेट हमारे पोर्टफोलियो की
करली तो यह सिचुएशन है। यह ड्यूरेशन है। अब अगर यह बोले इंटरेस्ट रेट मार्केट में गिरने वाली है। आपको लग रहा है गिरने वाली
है। पहला सिनेरियो देखो इंटरेस्ट रेट गिरने वाली है तो आप क्या करोगे? क्या चर्निंग आउट करोगे? चर्निंग आउट का मतलब
है कौन सी सिक्योरिटी बेचोगे और कौन सी खरीदोगे? ताकि हमारा बॉन्ड इम्यून रहे। ठीक है? ये है। अब इसका आंसर हम कैसे
निकालते हैं? इसका अपना प्रैक्टिकल जो तरीका होता है वो बिल्कुल डिफरेंट होता है जो अपन ने सिक्योरिटी वैल्यूएशन चैप्टर
में किया था। इन्होंने जो आंसर लिया है वो थ्यरिटिकल सोच से लिया है। थ्यरिटिकल इसका कांसेप्ट है। वही सिक्योरिटी वैल्यू्यूएशन
के थ्यरी कांसेप्ट बुक में आपको मिलेगा। उसके थ्यरी वीडियो में भी सेम चीज देखने को मिलेगी। वहां पे भी सेम डिस्कशन होगा।
थ्योरिटिकल। एक बार मैं यहां पे कर देता हूं। थ्यरी वाला डिस्कशन। इन्होंने थ्यरी वाला पॉइंट ऑफ व्यू से आंसर दिया। थ्यरी
क्या बोलती है? थ्यरी सिर्फ इतना ही गाइडेंस देती है आपको जो बॉन्ड की थ्यरी है वो आपको गाइडेंस देती है कि अगर आपका
जो बॉन्ड है उस बॉन्ड की जो सॉरी जो आपने बॉन्ड पोर्टफोलियो बना रखा है अगर आपको लग रहा है कि मार्केट में इंटरेस्ट रेट गिरने
वाली है मार्केट में अगर आपको लग रहा है इंटरेस्ट रेट गिरने वाली है तो आप एक काम करिए शॉर्ट टर्म वाला बॉन्ड जो है ना वह
तो आप करिए बेच दीजिए शॉर्ट टर्म वाला बॉन्ड तो क्या करिए बेच दीजिए और लॉन्ग टर्म वाला बॉन्ड खरीद लीजिए शॉर्ट टर्म
वाला बॉन्ड बेच दीजिए और लॉन्ग टर्म वाला बॉन्ड खरीद लीजिए। यह स्ट्रेटजी गाइडेंस देती है। अब शॉर्ट टर्म लॉन्ग टर्म में
कौन सा कैसा क्या खरीदना है, प्रैक्टिकली कैसे करना है, वो अपन ने सिक्योरिटी वैल्यू्यूएशन में एक क्वेश्चन में किया भी
था। चर्निंग आउट अगर आपको ध्यान हो बॉन्ड इम्यूनाइजेशन कर रहा था। उसके बाद सेकंड पॉइंट में अपन ने चर्निंग आउट किया हुआ
है। बट यहां पर इन्होंने ये सिंपल स्ट्रेटजी को फॉलो करते हुए आंसर दे दिया। क्या अगर इंटरेस्ट रेट गिरने वाली है तो
आपको क्या करना है? शॉर्ट पीरियड बॉन्ड को बेचना है और लॉन्ग पीरियड बॉन्ड खरीद लेना है। अब अपने को यह नहीं बताया कि कौन सा
लॉन्ग पीरियड लेना है, कौन सा शॉर्ट पीरियड? तो इन्होंने देखा देखो लॉन्ग पीरियड बॉन्ड कौन सा है? शॉर्ट पीरियड कौन
सा है? मैंने क्या बोला ये डेट्स क्या रिप्रेजेंट करती है? बॉन्ड कब मैच्योर होगा? तो ये 2026 में मैच्योर होगा। अरे
सर 2026 तो कब का चला गया? आज प्रेजेंट देखो। अरे भाई क्वेश्चन जिस डेट पे बनाया गया होगा। मान लो ये क्वेश्चन 2020 में
बनाया गया होगा सपोज। तो उस डेट के अकॉर्डिंग 2026 फ्यूचर में होगा। तो सबसे लॉन्ग पीरियड का बॉन्ड कौन सा हुआ? 2052।
तो ये वाला तो बाय कर लो एक और। हमारे पोर्टफोलियो में पांच बॉन्ड हैं। तो हमें पांच ही रखने हैं। तो हम क्या करेंगे?
2026 वाला बॉन्ड तो बेच देंगे और 2052 वाला बाय कर लेंगे। 2026 वाला बेच देंगे। 2052 वाला बाय कर लेंगे। अब हमारे
पोर्टफोलियो की रिवाइज ड्यूरेशन क्या हो जाएगी? इसका लॉजिक बताऊंगा अभी एक बार। वो थ्यरी वाले वीडियो में भी आएगा बट यहां पे
भी बताऊंगा। एक बार रुक जाओ पहले एक बार जो इन्होंने आंसर मांगा है। तो अब हमारे पोर्टफोलियो की ड्यूरेशन क्या हो जाएगी?
देखो हमारे पोर्टफोलियो की ड्यूरेशन में इन सबको तो ले लिया एक बार। फिर हमने क्या किया? यह शॉर्ट ड्यूरेशन जिसकी थी 2026
वाले की इसको बेचा तो यह माइनस कर दो इसकी ड्यूरेशन। और जो यह लॉन्ग ड्यूरेशन वाला था
यह बाय किया अपन ने तो इसको प्लस कर दी। इसकी ड्यूरेशन क्या करी? प्लस कर दी एक और बार। क्यों? क्योंकि इसको बेच के इसको
खरीदा है ना अपन ने डिवाइड बाय फाइव। अरे सर डिवाइड बाय से कर दो। अब सेवन हो गए। नहीं मेरे भाई अल्टीमेटली पांच बॉन्ड ही
है। इसकी जगह ये वाला आ गया। तो ये तो आपस में कट गया ना। अल्टीमेटली पांच ही है। तो यानी पांच बॉन्ड की एवरेज ड्यूरेशन सिंपल
एवरेज करनी थी इसलिए डिवाइड बाय करके किया। तो अब हमारे बॉन्ड पोर्टफोलियो की ड्यूरेशन यह नजर आएगी।
अब यहां पर सर लॉजिक क्या था इसका कि लॉन्ग पीरियड वाला बॉन्ड खरीद लो और शॉर्ट ड्यूरेशन वाला बंड बेच खाओ आप। ऐसा क्यों
कर रहे हैं आप? इसके पीछे लॉजिक ध्यान से सुनिएगा। अगर हमें लग रहा है इंटरेस्ट रेट फ्यूचर में गिरने वाली है। इंटरेस्ट रेट
गिरेगी तो आप बताओ क्या होता है? बोंड के साथ ये हमने सिक्योरिटी वैल्यू्यूएशन में पढ़ा है। बहुत बेसिक बातें थी ये सब
कांसेप्ट की। अगर मार्केट में इंटरेस्ट रेट गिरती है तो क्या होगी? बॉन्ड की हमारी वैल्यू बढ़ती है। क्यों? क्योंकि
इंटरेस्ट रेट गिरेगी तो गिरी हुई इंटरेस्ट रेट से आप पीवी करोगे। आपको पता है पीवी अगर हम ज़्यादा रेट से करते हैं तो वैल्यू
कम आती है और कम रेट से पीवी करते हैं तो ज़्यादा वैल्यू आती है। वह भी लॉजिक होता है। वह सब लॉजिक आपको बताया हुआ है। तो
अगर मार्केट में इंटरेस्ट रेट कम हो गई तो कम वाली इंटरेस्ट रेट से आप पीवी करेंगे तो यानी बॉन्ड की वैल्यू बढ़ेगी। फील करो
आप। तो यानी बॉन्ड की वैल्यू बढ़ेगी। तो आप सोचो जो बॉन्ड ज्यादा टाइम तक चलने वाला है ये बॉन्ड देखो सबसे ज्यादा टाइम
का है। ये बॉन्ड 2530 साल का बॉन्ड है। एक तरीके से 25 30 साल अब आप सोचो इंटरेस्ट रेट गिरा दोगे तो 2530 साल वाले बॉन्ड को
अगर पीवी करोगे तो ये ज्यादा वैल्यू बढ़ के दिखाएगा। आप वोलेटिलिटी वाले टॉपिक पे चले जाइए। मॉडिफाइड ड्यूरेशन। आप समझिए इस
बॉन्ड की ड्यूरेशन इतनी है। इसकी वोलेटिलिटी निकालेंगे तो इसकी वोलेटिलिटी क्या आएगी? ज्यादा आएगी। जितनी ज्यादा
ड्यूरेशन होगी उतनी ज्यादा वोलेटिलिटी आएगी। समझ रहे हो? वोलेटिलिटी जितनी ज्यादा आएगी और इंटरेस्ट रेट में चेंज
होगा गिरने वाला। यानी वेटिलिटी क्या बताएगी कि प्राइस कितनी बढ़ेगी बोंड की? तो वोलेटिलिटी ज्यादा होगी तो प्राइस ज्यादा
बढ़ेगी। समझ पा रहे हो? प्राइस पे ज्यादा इंपैक्ट आएगा। वोलेटिलिटी क्या करवाएगी? जितनी ज्यादा वोलेटिलिटी आएगी उतनी ज्यादा
इंपैक्ट लेके आएगी। और वोलेटिलिटी ज्यादा कैसे आएगी? जितनी ज्यादा ड्यूरेशन होगी उतनी ज्यादा वोलेटिलिटी आएगी। क्योंकि
वोलेटिलिटी का फार्मूला क्या है? ड्यूरेशन डिवाइड बाय 1 + YTR थ्योरिटिकली दिमाग में सोचो। ये थ्योरेटिकल कांसेप्ट है। उसका
लॉजिक दे रहा हूं। तो जितनी ज्यादा ड्यूरेशन होगी उतनी ज्यादा वोलेटिलिटी और वेलेटिलिटी जितनी ज्यादा उतना ज्यादा वह
इंपैक्ट डालेगी प्राइस पर। यानी अगर बोंड की प्राइस आपकी इंटरेस्ट रेट गिरने वाली है तो भैया वोलेटिलिटी ज्यादा होगी किसी
बॉन्ड की तो उसकी प्राइस ज्यादा बढ़ेगी। तो यानी ज्यादा ड्यूरेशन वाले की ज्यादा होगी। तो इसको खरीदो और इसको बेच खाओ आप।
ठीक है? शॉर्ट वाले को बेच क्यों रहे हैं बदले में? तो उसका वही लॉजिक भाई इसकी वोलेटिलिटी सबसे कम होगी। इस पे सबसे कम
इंपैक्ट आएगा। तो इस पे सबसे कम इंपैक्ट आएगा। इसकी प्राइस सबसे कम बढ़ेगी। तो इस बॉन्ड को बेचो ना क्योंकि इसकी प्राइस
सबसे कम बढ़ेगी और इसकी सबसे ज्यादा बढ़ेगी। तो इसको बेचो और इसको और खरीदो। यह इसका कांसेप्ट था जो मैंने आपको बता
दिया। अब दूसरा सिनेरियो इसका उल्टा इंटरेस्ट रेट आपकी जो है वो बढ़ने वाली है। आपको लग रहा है। इंटरेस्ट रेट
बढ़नेगी। बढ़ने वाली है। आपको लग रहा है फ्यूचर में। इंटरेस्ट रेट बढ़ेंगी तो क्या होगी? आपकी बॉन्ड की वैल्यू कम होगी।
क्योंकि ज्यादा वटीएम होगी, ज्यादा यील्ड होगी तो बॉन्ड की वैल्यू कम होगी। डिस्काउंट रेट बढ़ेगी तो वैल्यू कम आएगी।
तो जो जितना ज्यादा टाइम पीरियड वाला बॉन्ड होगा आप सोचो। उसकी वैल्यू उतनी ज्यादा गिरेगी। अब आप अब फील करना
इंटरेस्ट रेट बढ़ने से क्या होती है? प्राइस गिरती है। तो वही सेम चीज इसकी वोलेटिलिटी सबसे ज्यादा है। तो इसमें सबसे
ज्यादा चेंज आएगा। तो सबसे ज्यादा प्राइस इसकी गिरेगी और सबसे कम प्राइस सबसे कम ड्यूरेशन वाले की गिरेगी। तो यहां पर क्या
होता है? शॉर्ट टर्म ड्यूरेशन वाले को खरीदो और लॉन्ग टर्म ड्यूरेशन वाले को बेच दो। बस वही लॉजिक है। तो यानी अबकी बार
शॉर्ट टर्म वाला खरीदो, लॉन्ग टर्म वाला बेचो। अब लॉन्ग टर्म वाला बेचना कौन सा है? यही है लॉन्ग टर्म तो 52 वाला ही
बेचो। अब शॉर्ट टर्म कौन सा है? 2026 वाला बट हमारा महान इंस्टट्यूट इस क्वेश्चन में देखो मल्टीपल एजम्पशन थी उसमें एक और
एजम्पशन घुसा दी जो कि क्वेश्चन में लिखी भी नहीं क्या अजमशन उन्होंने बोला हमें 2026 वाले बॉन्ड को खरीदने में कोई
इंटरेस्ट नहीं है हम तो 2030 वाला खरीदेंगे अपने रैंडम आंसर दे दिए रैंडम अपनी मर्जी से उनको लगा कि 2026 वाले से
ज्यादा फायदा नहीं है 2030 वाले से ज्यादा फायदा है जबकि कंसेप्चुअली बिल्कुल गलत है कॉनसेप्चुअली गलत है इन्होंने बोला हम तो
2030 वाला बाय करेंगे अब कुछ नहीं कर सकता अब आप बोलो इसका भी कांसेप्ट इसका कोई कांसेप्ट नहीं है गलत है गलत चीज गलत ही
होती है। गलत है। रेंडम आंसर है ये। ठीक है? तो यह गलत है आपका। बट जो इन्होंने ले रखा है वही लेंगे। पांचों
बॉन्ड की ड्यूरेशन का टोटल फिर ये वाला खरीदा तो इसकी ड्यूरेशन ऐड करी। ये वाला बेचा तो इसकी माइनस करी डिवाइड बाय फाइव।
ये रिवाइज ड्यूरेशन हो जाएगी। कंप्लीट है ये क्वेश्चन भी आप लोगों का। ये डेरिवेटिव्स का क्वेश्चन। सिमिलर काफी
क्वेश्चंस है। अपने पास क्वेश्चन रैंक में बहुत ईजी क्वेश्चन होते हैं। फिर भी ये क्वेश्चन क्यों रखा है? क्योंकि ये
प्रेजेंटेशन इस क्वेश्चन की थोड़ी अलग दिखती है आपको तो आपको देख के घबराहट ना हो। कुछ भी नया नहीं है। एक पॉइंट है जो
एडिशनल प्रैक्टिकल कांसेप्ट में देखा था वो और देख लेंगे। बस एक अपन ने कॉल ऑप्शन बाय किया हुआ है और एक पुट ऑप्शन बाय किया
है। कॉल ऑप्शन में प्राइस बढ़ेगी। स्ट्राइक प्राइस से ज्यादा होगी मार्केट में तो खरीदेंगे और पुट ऑप्शन में मार्केट
में प्राइस कम होगी। स्ट्राइक प्राइस ज्यादा होगी तो एक्सरसाइज करेंगे। ठीक है? क्योंकि हां राइट टू सेल होता है पुट में।
तो प्रीमियम दे रखा है मैच्योरिटी दोनों की और स्ट्राइक प्राइस दे रखी है दोनों ऑप्शंस की। अब आपको बता रखा है करंट
मार्केट प्राइस कितनी है? लोट साइज करंट मार्केट प्राइस से कोई लेना देना नहीं है। फालतू चीज़ है। लॉट साइज एक लॉट में 150
शेयर का कॉन्ट्रैक्ट होगा। आप बताओ नेट प्रॉफिट लॉस क्या होगा? अगर शेयर प्राइस 550 रहती है। मार्केट में यह हो जाती है,
ये हो जाती है। हर सिनेरियो में कंसीडर कर लेना। देखो 550 वाले में क्या होगा? कॉल ऑप्शन एक्सरसाइज नहीं होगा क्योंकि
स्ट्राइक प्राइस ज्यादा है और पुट ऑप्शन में स्ट्राइक प्राइस कम है। इसलिए एक्सरसाइज़ नहीं होगा। यानी बस प्रीमियम पे
करोगे वो कॉस्ट आएगी आपकी। ठीक है? वही नेट लॉस हो जाएगा। ऐसे इस वाले केस में 380 जब मार्केट में प्राइस हो गई तो 620
में क्यों खरीदूंगा? यानी कॉल तो एक्सरसाइज नहीं होगा। बट 480 में बेच जरूर दूंगा यानी पुट एक्सरसाइज होगा और 680 जब
प्राइस हो जाएगी तो 620 में खरीदूंगा। कॉल एक्सरसाइज होगा। पुट एक्सरसाइज नहीं होगा। तो ये तो अपन कर रखे हैं। इसमें कुछ भी
नया नहीं है। बिल्कुल भी नया नहीं था। लेकिन सेकंड पार्ट जो था क्वेश्चन का इसमें आपसे पूछा अपर एंड लोअर ब्रेक इवन
पॉइंट बताना है। ब्रेक इवन प्राइस आपको निकालना सिखाया था मैंने। लेकिन अपर एंड लोअर अब ये क्या नई चीज है? तो ये एडिशनल
प्रैक्टिकल कांसेप्ट्स में पढ़ाया था। मैंने क्या बताया था? एक होती है स्ट्रडल स्ट्रेटजी। ठीक है? स्ट्रडल स्ट्रेटजी हम
किसे बोल रहे जब हम एक कॉल ऑप्शन बाय कर लेते हैं और एक पुट ऑप्शन बाय कर लेते हैं। तो एक कॉल ऑप्शन और एक पुट ऑप्शन अगर
हम बाय करते हैं तो हमारी जो स्ट्रेटजी होती है वो क्या होती है? स्ट्रडल स्ट्रेटजी होती है। यह मैंने आप लोगों के
लिए यहां पे लिखा भी था। देखो अगर एक बंदा कॉल और पुट ऑप्शन दोनों ले ले तो उस केस में अपर और लोअर ब्रेक इवन पॉइंट निकालते
हैं आप। तो अपर ब्रेक इवन पॉइंट एक तरीके से कॉल का ब्रेक इवन मान लो यानी स्ट्राइक प्राइस ऑफ़ कॉल प्लस प्रीमियम। और लोअर
ब्रेक इवन पॉइंट यानी पुट का ब्रेक इवन मान लो। स्ट्राइक प्राइस ऑफ पुट माइनस ऑप्शन प्रीमियम। अब बस आपको क्या करना है?
आपने दोनों ऑप्शन ले रखे हैं तो प्रीमियम तो दोनों का जाएगा। इसलिए यहां पे भी दोनों का ऑप्शन प्रीमियम आप प्लस करोगे और
लोअर निकालते वक्त दोनों को माइनस करोगे। बस इतना ही फर्क है। तो यहां पर देखो आपका अपर ब्रेक इवन पॉइंट कोल की स्ट्राइक
प्राइस माइनस सॉरी प्लस ऑप्शन प्रीमियम दोनों का। 42 + 8 यानी ₹50 प्लस कर देना है। इसमें लोअर ब्रेक इवन पॉइंट स्ट्राइक
प्राइस पुट की माइनस ऑप्शन प्रीमियम दोनों का। 480 - 50 का ऑप्शन ट्री। इसके बाद यह क्वेश्चन देखो आप डेरिवेटिव्स
का। यह क्वेश्चन भी काफी आसान क्वेश्चन है। बस इसमें ब्रोकरेज वगैरह कोस्ट डाल दी तो वो
बेसिक चीज अगर बेसिक अंडरस्टैंडिंग अप्लाई करनी है। वही कोई नया कांसेप्ट बिल्कुल भी नहीं है। बेसिक अंडरस्टैंडिंग लगा के आंसर
देना है। तो देखो मैं एक स्पेककुलेटर में यानी मार्केट में मैं जुआ खेलता हूं। सट्टा लगा के पैसा कमा रहा हूं। तो मैंने
क्या कर रखा है? एक कंपनी के मई मंथ के फ्यूचर्स ले लिए। जिनकी लोड साइज है 125 शेयर्स यानी एक कॉन्ट्रैक्ट होगा 125
शेयर्स का 7750 आज के दिन फ्यूचर की प्राइस है जिस पर मैंने बाय का कॉन्ट्रैक्ट किया है यानी मैच्योरिटी पे
प्राइस बढ़ेगी तो फायदा होगा प्राइस गिरेगी तो नुकसान होगा इसके अलावा साथ में मैंने राइट किया है कॉल ऑप्शन भी कॉल
ऑप्शन राइट करने का मतलब कॉल ऑप्शन बेचा है ठीक है कॉल ऑप्शन बेचने का मतलब सामने वाले के पास राइट टू बाय है यानी मार्केट
में अगर शेयर की प्राइस बढ़ी तो वह खरीदने आएगा और मेरे नुकसान हो जाएगा अदरवाइज नहीं होगा यह अपन पढ़ते हैं कॉल ऑप्शन में
यानी प्राइस गिरेगी तो मेरे फायदा है भाई। सेल किया है। सेल करने का मतलब डाउन साइड बैटिंग यानी प्राइस गिरनी चाहिए तो फायदा
प्राइस बढ़ने पर नुकसान। यह ऑप्शन किया मैंने। 7790 स्ट्राइक प्राइस होगी इस कॉल ऑप्शन की। प्रीमियम ₹30 का था ऑप्शन का और
यहां पे भी यह कॉन्ट्रैक्ट 125 शेयर्स का है। ठीक है? अब मई 18 को अब इस क्वेश्चन का स्पेशल पॉइंट यही होगा। मई 18 को देखो।
अब मैंने जो कॉन्ट्रैक्ट किया था ना वो मई का था। देखो कॉल ऑप्शन भी मई का था और फ्यूचर्स भी मई का। मतलब प्रैक्टिकल लाइफ
में जो डेरिवेटिव्स होते हैं, फ्यूचर्स होते हैं, जैसे वो लास्ट थर्सडे को आपको सेटल होते हैं प्रैक्टिकल लाइफ में उस मंथ
के जैसे मई मंथ का है तो मई के लास्ट थर्सडे को ये मैंने आपको डेरिवेटिव चैप्टर में पढ़ाया था। क्लास में नॉलेज के नॉलेज
जब दी थी तब ये बात बताई भी थी और थ्यरी वाले पोर्शन में भी है ये अलग से डेडिकेटेडली। तो जब अपन कंसेप्चुअली क्लास
में रेगुलर बैच में बात कर रहे थे तो ये डिस्कशन अपन ने किया था कि जो एक्चुअल में प्रैक्टिकल लाइफ में सेटलमेंट होता है उस
मंथ के लास्ट थर्सडे पर हो रहा है। अब यहां पे है मे 18 तो इतना तो समझ में आ रहा है ये तो लास्ट थर्सडे नहीं होगा
क्योंकि अभी 12 दिन बाकी है। है ना? तो हो सकता है रिमेनिंग टाइम में दो बार थर्सडे आ जाए या एक बार तो कंफर्म आना ही है। तो
लास्ट तो नहीं है। यानी मैच्योरिटी नहीं आई। मैच्योरिटी से पहले मैच्योरिटी से पहले का आपको डाटा दे रखा है। यानी
मैच्योरिटी से पहले ही हम सेटल करके क्योंकि हम मार्केट में क्या कर सकते हैं? मैच्योरिटी से पहले ही गेन लॉस लेके बाहर
निकल सकते हैं कॉन्ट्रैक्ट से। तो स्पॉट प्राइस जो है वह बढ़ गई और फ्यूचर प्राइस भी बढ़ गई और कॉल प्रीमियम भी बढ़ गया।
यानी मार्केट में प्राइस बढ़ गई है हर चीज की। तो फ्यूचर प्राइस कितनी हो गई? 7780। कॉल प्रीमियम अब हो गया एक ऑप्शन का 36 और
ब्रोकरेज ट्रांजैक्शन पे लगती है। अब ये क्या नई चीज है? ये बस मैं वही बोल रहा हूं कि अब आपको खुद से क्वेश्चन में
स्पेशल पॉइंट दे दिया। खुद से दिमाग चलाना है। ब्रोकरेज यानी खर्चा। मार्केट में ट्रांजैक्शन करोगे खर्चा भी लगेगा। तो
जितना भी ट्रांजैक्शन करोगे उस पे 0.02% आपके ट्रांजैक्शन वैल्यू का खर्चा लगेगा। ब्रोकरेज कमीशन। फ्यूचर्स की जितनी भी
वैल्यू होगी उतना और ऑप्शन के केस में स्ट्राइक प्राइस नेट ऑफ कॉल प्रीमियम फॉर ऑप्शंस। ऑप्शंस के केस में जो स्ट्राइक
प्राइस है उसमें से कॉल प्रीमियम नेट कर दो, माइनस कर दो। उसके बाद जो वैल्यू आती है उस पे आपको ये ब्रोकरेज पे करनी
पड़ेगी। तो ब्रोकरेज कैसे कैलकुलेट होगी वो भी क्वेश्चन में बता रखा है क्योंकि ये क्वेश्चन ओरिएंटेड बात है। ठीक है?
क्वेश्चन वाला पॉइंट है यह। अब आपसे बताना है प्रॉफिट लॉस बताओ फ्यूचर में कितना हुआ आपको? फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट में नेट ऑफ
ट्रांजक्शन कॉस्ट यानी वही ब्रोकरेज कॉस्ट को एडजस्ट करने के बाद। तो फ्यूचर्स में प्रॉफिट लॉस कैसे आता है?
हमने कितने कॉन्ट्रैक्ट करें? नंबर ऑफ कॉन्ट्रैक्ट मल्टीप्लाई बाय कॉन्ट्रैक्ट की आपकी साइज यानी लोड साइज मल्टीप्लाई
बाय डिफरेंस बिटवीन सेटलमेंट प्राइस और जो कॉन्ट्रैक्टेड प्राइस है यह अपन लेते हैं। तो हमने कॉन्ट्रैक्ट कितने करे कुछ नहीं
बताया। तो एक कॉन्ट्रैक्ट क्या होगा? एक कॉन्ट्रैक्ट की लोड साइज कितनी है? 125 शेयर्स। तो देखो कैलकुलेट करते हैं अपन
फ्यूचर्स में। एक कॉन्ट्रैक्ट लोड साइज मल्टीप बाय आपकी सेटलमेंट प्राइस सेटलमेंट प्राइस क्या है?
7780 जो आपकी जिस दिन आप सेटलमेंट कर रहे हो मई 18 को कर रहे हो अभी मैच्योरिटी बोल दो मैच्योरिटी नहीं है उससे पहले का है तो
हमारे लिए तो सेटलमेंट है जिस दिन कर रहे हैं यह प्राइस माइनस कॉन्ट्रैक्टेड प्राइस कॉन्ट्रैक्टेड प्राइस आपकी क्या है 7750
पे फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट किया था और फ्यूचर में कॉन्ट्रैक्ट क्या किया था बाय करने का है यानी मैच्योरिटी पे प्राइस बढ़ती है तो
फायदा है तो अपनी प्राइस तो देखो 7750 से 7780 बढ़ रही है फायदा है प्रॉफिट है तो ये प्रॉफिट आ गया
यही प्रॉफिट होता है लेकिन अब ब्रोकरेज भी है तो ब्रोकरेज यानी कमीशन भी लगा होगा कॉन्ट्रैक्ट एंटर होने का कितना लगा?
जितना भी फ्यूचर की ट्रांजैक्शन वैल्यू थी ना उसका 0.02% अब ट्रांजैक्शन वैल्यू का मतलब क्या हुआ? जितने अमाउंट का
ट्रांजैक्शन था। तो अब अमाउंट का ट्रांजैक्शन तो फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट आपने पहली बार बाय का किया था तो उस वक्त आप जब
कॉन्ट्रैक्ट में एंटर किए होगे इनिशियली तब ब्रोकरेज लगी होगी। और जिस दिन कॉन्ट्रैक्ट से बाहर निकलेगे उस दिन
ब्रोकरेज लगी होगी। क्योंकि दो कॉन्ट्रैक्ट हुए हैं ना मतलब एक बार कॉन्ट्रैक्ट हुआ और एक बार उसका सेटलमेंट
हुआ। एक बार बाय का कॉन्ट्रैक्ट हुआ। और फिर 18 मई को उसका सेटलमेंट हुआ, तो उस दिन सेल का कॉन्ट्रैक्ट हुआ। समझ में आ
रहा है आपको? तो इनिशियली बाय का किया कितने का? 7750 की प्राइस पर 125 शेयर्स का एक लोड था। ठीक है? तो यही तो था मेरी
टोटल ट्रांजैक्शन वैल्यू। इसका 02% और सेटलमेंट वाले दिन प्राइस 7780 हो गई। 125 शेयर्स एक कॉन्ट्रैक्ट किया था। उसकी लोड
साइज यही है। इसका 02% तो यह मेरी कॉस्ट लगी बाय और सेल के टाइम पे यह माइनस कर दो। तो यह नेट प्रॉफिट बस।
अब देखो ऑप्शंस का आपका ऑप्शंस पे प्रॉफिट लॉस नेट ऑफ ट्रांजैक्शन कॉस्ट। अब ऑप्शंस में प्रॉफ़िट लॉस हमने क्या देखा है? हमने
जनरली ऑप्शंस में मैच्योरिटी वाला प्रॉफ़िट लॉस देखा है कि मैच्योरिटी पे गेन लॉस क्या होगा? क्योंकि हम ऑप्शंस को
एक्सरसाइज तभी करते हैं मैच्योरिटी पे या अमेरिकन ऑप्शन में होता तो उससे पहले भी कर सकते हो बट उसमें भी एक्सरसाइज प्राइस
और स्ट्राइक प्राइस आपकी कंपेयर हो जाती है। ठीक है? तो हम क्या करते हैं? एक्सरसाइज प्राइस और स्ट्राइक प्राइस को
कंपेयर करते हैं। तो जो ऑप्शन है हमने सेल किया है उसकी स्ट्राइक प्राइस है 7790। मई का कॉल ऑप्शन था जो हमने सेल करने का
कॉन्ट्रैक्ट किया था। कॉल ऑप्शन सेल किया था। प्रीमियम था 30 का तो मैं सेलर हूं। तो
मेरा पे ऑफ़ क्या होगा? वह जो मैच्योरिटी है उस पे हमें मार्केट की शेयर प्राइस से पता चलेगा। बट अगर क्या आप इस क्वेश्चन को
पढ़ेंगे तो आपको शेयर प्राइस दे रखी है मार्केट की? नहीं दे रखी। मई 18 की कोई शेयर की प्राइस नहीं दे रखी। फ्यूचर की
प्राइस दे रखी है। वो मतलब नहीं वो तो फ्यूचर्स का सेटलमेंट होना था। तो फिर सर कॉल ऑप्शन का सेटलमेंट कैसे करेंगे इसका?
इसका पे ऑफ कैसे निकालेंगे? तो अब आपको एक थोड़ी सी बात ध्यान रखनी पड़ेगी प्रैक्टिकल लाइफ की। वो क्या है? आप समझिए
जब आप ऑप्शन मैच्योर करने वाले हैं वह मई के एंड में होगा। मैंने बताया ना लास्ट थर्ड डे उस दिन आपका ऑप्शन का सेटलमेंट
होना है। उस दिन क्या आपके पास क्या होगी? शेयर की प्राइस होगी और एक्सरसाइज प्राइस को आप
कंपेयर कर सकते हैं। बट अभी हम खड़े हैं 18 मई को। यह क्या है? मई खत्म होने से पहले ही हम ऑप्शन से बाहर निकलना चाह रहे
हैं। बिल्कुल पॉसिबल है। बट उस दिन पे ऑफ नहीं होगा। भाई शेयर प्राइस से कंपेयर करके आप नहीं कर सकते। मैं बताऊं आपको
इंडिया में क्या होता है? इंडिया में केवल यूरोपियन ऑप्शन है। इंडिया [नाक से की जाने वाली आवाज़] में अमेरिकन
ऑप्शन नहीं होते। जनरली ट्रेड केवल यूरोपियन ऑप्शन ही होते हैं स्टॉक मार्केट के ऊपर इंडिया के अंदर। तो यूरोपियन ऑप्शन
क्या बोलता है कि भाई आप मैच्योरिटी पे ही पे ऑफ कर सकते हो यानी एक्सरसाइज कर सकते हो। उससे पहले आप एक्सरसाइज नहीं कर सकते।
तो उससे पहले क्या कर सकते हो? उससे पहले आप मार्केट में सेटल कर सकते हो। यानी मार्केट में मैं यह कॉन्ट्रैक्ट ही किसी
और को बेच दूं। तो बस 18 मई को अब आपको कॉल प्रीमियम दिख रहा है। कॉल प्रीमियम अब कितना हो गया? 36। तो कॉल प्रीमियम से
क्या मतलब है? था कॉल प्रीमियम तो ये सेलर था स्टार्टिंग में इसको मिला होगा इसका गेन होगा नहीं यहां पे कॉल प्रीमियम वैसे
मतलब नहीं है हम पे ऑफ्स नहीं देख रहे हम उससे पहले की बात कर रहे हैं मार्केट में ही सेटल कर देंगे तो कैसे सेटल होगा मैंने
यह ₹30 का कॉल प्रीमियम लेके बेचा था ऑप्शन अब मार्केट में ₹36 का कॉल प्रीमियम हो गया है और मैं कॉन्ट्रैक्ट से बाहर
निकलना चाहता हूं तो पहले बेचा था अब खरीद लूंगा बाहर निकलने का सिंपल सा तरीका होता है मैंने सेल का कॉन्ट्रैक्ट किया था अब
बाय का कर लूंगा समझ में आया तो ₹30 में बेचा था अब 36 पे बाय करूंगा और लॉजिकली ऐसा सोचो मैंने बेचने का किया था 30 के
कॉल प्रीमियम का। अब 36 कॉल प्रीमियम हो गया। बढ़ गया यानी नुकसान हो गया। कैसे भी सोच लो यानी यहां पे सेल का कॉन्ट्रैक्ट
किया था। बाय का करके कैंसिल आउट कर दूंगा। स्क्वेरिंग ऑफ कर दूंगा। ठीक है? तो यही मेरा क्या है? लॉस है।
क्योंकि 30 के कॉल प्रीमियम पे बेचा था। अब 36 के कॉल प्रीमियम पर बाय करूंगा। ₹6 का लॉस है। पर शेयर एक कॉन्ट्रैक्ट में
125 शेयर है। एक ही कॉन्ट्रैक्ट किया है क्योंकि और कोई इनेशन नहीं है। तो मेरा टोटल लॉस कितना आ गया ऑप्शंस पे? ₹750। अब
ब्रोकरेज भी लगी है। ब्रोकरेज कैसे लगी है? स्ट्राइक प्राइस नेट ऑफ कॉल। तो कॉल ऑप्शन की स्ट्राइक प्राइस क्या थी? 7790
माइनस कॉल प्रीमियम कितना था स्टार्टिंग में? 30 यह एक शेयर का था। 125 शेयर्स का लोड था। तो यह आपका ब्रोकरेज इनिशियल
सेटलमेंट वाले दिन वापस से मेरा लगा होगा ब्रोकरेज क्योंकि उस दिन बाय का कॉन्ट्रैक्ट हुआ है ना। तो 7790 माइनस अब
कॉल प्रीमियम हो गया 36 स्ट्राइक प्राइस माइनस कॉल प्रीमियम इंटू लॉट साइज। यह ब्रोकरेज। ये आ गया प्रॉफिट लॉस। ओवर
प्रॉफिट लॉस पूछा है। यानी फ्यूच पर प्रॉफिट हुआ था। ऑप्शन पर लॉस तो नेट प्रॉफिट यह आपका पूरा टोटल ब्रोकरेज कॉस्ट
ऑफ और फ्यूचर्स पे क्या लगी? फ्यूचर्स पे ये लगी है और ऑप्शंस पे आपकी ब्रोकरेज कॉस्ट ये लगी है। तो इनका टोटल आप कर दोगे
तो ये आ जाएगी टोटल ब्रोकरेज कॉस्ट जो आपकी लगी। बस ये क्वेश्चन है आपका। इसके बाद ये क्वेश्चन देखो। ये सिमिलर
क्वेश्चन अपन ने कर कर रखे हैं डेरिवेटिव्स के अंदर ही। ये आपका बायनॉमियल मॉडल। बायनॉमियल मॉडल में दो
अप्रोचेस होती है। एक रिस्क न्यूट्रल अप्रोच जो कि ऑप्शन बयर लगाता है। एक होती है रेप्लिकेटिंग पोर्टफोलियो अप्रोच।
डेल्टा हैेजिंग या रिस्क लेस हैज पोर्टफोलियो अप्रोच। कुछ भी बोल दीजिए। ये ऑप्शन सेलर लगाता है वैल्यू्यूएशन करने के
लिए। दोनों अप्रोच से सेम वैल्यू आती है। दोनों अप्रोच का अल्टीमेट फंडामेंटल कांसेप्ट सेम है। ये मैं आपको समझा चुका
हूं। हमारे मॉड्यूल में रिस्क न्यूट्रल वैल्यू्यूएशन मेथड से हम कैलकुलेशन करते हैं। उसी के अकॉर्डिंग सीखा है। डेल्टा
हैजिंग फिर भी मैंने आपको पढ़ाया था। और एडिशनल प्रैक्टिकल कांसेप्ट जब मैंने आपको दिए तो उसके टाइम पर डेल्टा हैजिंग को और
डिटेल में फिर मैंने डिस्कस कर दिया था इसी क्वेश्चन के पर्सपेक्टिव से। तो इसमें क्या होता है? फेयर ऑप्शन प्रीमियम कैसे
निकालते हैं? इक्वेशन बनाकर। हम क्या करते हैं? आज के दिन जो हमारा डेल्टा का मतलब होता है कि हमें इतने नंबर ऑफ शेयर्स बाय
कर लेने हैं एक कॉल ऑप्शन को सेल करने की करने के लिए। क्योंकि हम ऑप्शन सेलर के पॉइंट ऑफ व्यू से बात कर रहे हैं। तो आज
के दिन जो शेयर की प्राइस है मल्टीप्लाई बाय डेल्टा ये हमने शेयर बाय किया। हमारा पोर्टफोलियो की वैल्यू। लेकिन आज हमने
ऑप्शन सेल किया तो प्रीमियम आया भी होगा वो माइनस कर दिया तो ये नेट पोर्टफोलियो की वैल्यू आज के दिन है। मैच्योरिटी पे जो
पोर्टफोलियो की वैल्यू होगी वो भी सेम होनी चाहिए क्योंकि ये रिस्क लेस हैज पोर्टफोलियो है तो वो सेम करनी है तो
इक्वल्स टू मैच्योरिटी पे प्राइस शेयर किया है तो बढ़ेगी या गिरेगी मल्टीप्लाई बाय डेल्टा कोई सी भी उठा लो माइनस जो
प्राइस आपने उठाई उस पे पे ऑफ क्योंकि ऑप्शन सेलर है हूं तो मेरे को पे ऑफ करना पड़ सकता है यानी वो पेमेंट जाएगा तो नेट
ये वैल्यू होगी लेकिन ये मैच्योरिटी की है ये वैल्यू आज की थी तो पीवी करा था अपन ने तो यह बराबर होगी इस इक्वेशन में सारा
डाटा डाल देंगे और ऑप्शन प्रीमियम निकाल लेंगे यह आपको डेल्टा हैेजिंग यानी रेप्लिकेटिंग पोर्टफोलियो अप्रोच से मिल
जाता है आपकी ऑप्शन प्रीमियम तो बस यही करना इस क्वेश्चन में रेप्लिकेटिंग पोर्टफोलियो अप्रोच और रिस्क न्यूट्रल
दोनों मेथड से ऑप्शन प्रीमियम निकालना है। तो रिस्क न्यूट्रल तो हम जानते ही हैं वही बाइनोमियल ट्री बनाना। तो देख लो शेयर की
प्राइस आज की 6 महीने बाद मैच्योरिटी पर ये प्राइस भी हो सकती है। ये भी हो सकती है। कंटीन्यूअस कंपाउंडेड वाली रेट दे रखी
है। यानी e रे टू दी पावर rt वाला आपको करना पड़ेगा। तो उसकी वैल्यू दे रखी है। सारी कैलकुलेशन टू डेसिमल्स में करनी है
आपको और स्ट्राइक प्राइस 900 के 6 महीने का कॉल ऑप्शन है। सारा डाटा आपके पास दे रखा है। एक चीज है इस क्वेश्चन में 45%
प्रोबेबिलिटी दे रखी है प्राइस बढ़ने की। यह कुछ भी काम की नहीं होती। इसको इग्नोर करना होता है। सर
प्रोबेबिलिटी चाहिए होती है ना? चाहिए होती है रिस्क न्यूट्रल प्रोबेबिलिटी। मैंने क्लास में स्पेसिफिक नोट्स में नोट
भी डाला हुआ है कांसेप्ट बुक में कि गिवन प्रोबेबिलिटी काम में नहीं आती है। और इस क्वेश्चन में सेकंड पार्ट में ये पूछेगा
भी कि बताओ गिवन प्रोबेबिलिटी को आप यूज़ कर सकते हो नहीं कर सकते हो। तो इसका रीज़न मैंने दिया था हमें रिस्क न्यूट्रल
प्रोबेबिलिटी चाहिए होती है। तो ये मैंने नोट्स में लाइन लिखी है। मॉड्यूल में भी नहीं मिलेगी। ये नोट्स में लिखी हुई है और
ये मैंने आपको कांसेप्ट में पढ़ाई थी। वो चीज इसमें क्वेश्चन में थ्योरिटिकली पूछी भी है आपसे। तो ये कोई काम की नहीं है
आपकी प्रोबेबिलिटी अपन खुद की निकालते हैं। तो देखिए अब इसका सॉल्यूशन। तो बाइनॉमियल ट्री तो सिंपल सा है। आपका इस
वाले केस में पे ऑफ होगा। यहां पे कुछ पे ऑफ होगा नहीं। क्योंकि स्ट्राइक प्राइस 900 है। तो यहां क्यों एक्सरसाइज़ करेंगे?
तो रिस्क न्यूट्रल प्रोबेबिलिटी निकालने का फार्मूला आप जानते हैं। ERT - D / U - D तो ये आपके U और D निकाल के आप P निकाल
लेंगे। 1 - P और वैल्यू ऑफ़ ऑप्शन कैसे आएगी? ये वाला पे ऑफ़ * P और ये वाला पे ऑफ़ * 1 - P / ERT तो ये आपकी आ गई वैल्यू ऑफ़
ऑप्शन। अब रेप्लिकेटिंग पोर्टफोलियो अप्रोच से डेल्टा निकालेंगे। पे ऑफ का डिफरेंस 150 - 0 और इन दोनों प्राइसेस का
डिफरेंस डिनोमिनेटर में यानी एक कॉल ऑप्शन सेल कर रहे हैं तो इतना शेयर बाय करना पड़ेगा। आज के दिन शेयर की प्राइस कितनी
है? 840 840 *51 माइनस ऑप्शन प्रीमियम इक्व टू मैच्योरिटी पे प्राइस। मैच्योरिटी पे या तो आप ये वाली प्राइस ले लो ये कोई
सी भी ले लो सेम आंसर आएगा। मैं ये वाली ले रहा हूं क्योंकि इंस्टट्यूट ने सॉल्यूशन में यह ले रखी है। 756 *51 ये
है। माइनस इस प्राइस पे पे ऑफ़ ज़ीरो। ठीक है? डिवाइडेड बाय ert ert की वैल्यू आपको पता ही है जो क्वेश्चन में आपको दे रखी
है। तो यह आप सॉल्व करेंगे तो ऑप्शन प्रीमियम आ गया। यह बस हो गया क्वेश्चन कंप्लीट। सर ऑप्शन प्रीमियम में तो देखो
डिफरेंस आपने बोला था सेम आएगा। बिल्कुल सेम है। बट डिफरेंस यहां पे तो सर नजर आ रहा है 56.09 56.49.4
पैसे का सर डिफरेंस है। ऐसे कैसे बोल सकते हो? तो वो डिफरेंस क्यों आ रहा है? उसका लॉजिक मैं आपको दे देता हूं। हमने यहां पे
जो डेल्टा लिया है, ये डेसिमल्स में लिया है। ठीक है? और उस डेल्टा के बाद जो वैल्यू्यूज आएंगी वो भी फिर डेसिमल्स में
राउंड ऑफ हो के ही आएंगी। ये जो डेल्टा है, ये रिप्रेजेंट करता है कितने नंबर ऑफ़ शेयर्स हैं। तो ये राउंड ऑफ हो रखा है
मेरे इस वजह से ये 40 पैसे का आपको डिफरेंस दिख रहा है। सेकंड पार्ट थ्योरेटिकल था वो मैंने बता ही दिया। गिवन
प्रोबेबिलिटी कम में नहीं आती। वो फालतू होती है। इसके बाद ये क्वेश्चन देखिए अब फॉरेक्स का
आपका। देखो यह क्वेश्चन काफी इजी है। बस इसमें एक पॉइंट है रोलओवर ऑफ फॉरवर्ड
कॉन्ट्रैक्ट जो एडिशनल प्रैक्टिकल टॉपिक्स में मैंने बताया था वो काम करेगा। देखो कैसे। मेरे को 18 महीने बाद $10 लाख मिलने
वाले हैं और मैं इंडियन कंपनी हूं। यानी मुझे रुपीस चाहिए। डॉलर मिलेंगे तो क्या करूंगा? बेचूंगा। तो आज आपको एक्सचेंज रेट
बता रखी है स्पोर्ट की डॉलर की और 6 महीने बाद की। अब आपको क्वेश्चन में देखो यहां पर पूछेगा कि आपको क्या करना चाहिए, क्या
नहीं करना चाहिए? वो सब अपन बात करेंगे। तो फॉरवर्ड कॉन्ट्रैक्ट करने की बात होगी। तो फॉरवर्ड कॉन्ट्रैक्ट हमें कब का करना
है? 18 महीने बाद का। आज बताओ मार्केट में 18 महीने बाद का फॉरवर्ड कॉन्ट्रैक्ट अवेलेबल है कि नहीं? मैक्सिमम 6 महीने का
है। तो क्या करें? तो हमें रोल ओवर ऑफ फॉरवर्ड करना पड़ेगा। यानी एक बार 6 महीने का करूंगा। फिर आफ्टर सिक्स मंथ वापस 6
महीने का करूंगा। फिर उसके 6 महीने बाद यानी 12व महीने के एंड पर वापस 6 महीने का करूंगा। तो बस यह सभी बताया आपको कि 6
महीने से ज्यादा का फॉरवर्ड कॉन्ट्रैक्ट आपके पास अवेलेबल नहीं है। तो आपको कुछ और सोचना पड़ेगा। तो देखो इन्होंने बोला आज
से 6 महीने बाद स्पोर्ट और सिक्स मंथ फॉरवर्ड अवेलेबल है। आज से स्टार्टिंग डेट से 12 महीने बाद स्टार्टिंग डेट से 12
महीने बाद यानी इस 6 महीने से 6 महीने बाद स्पोर्ट और 6 महीने का फॉरवर्ड और आफ्टर 18 महीने यानी मैच्योरिटी वाले दिन
स्टार्टिंग डेट से 18 महीने उस दिन केवल स्पॉट रेट दे रखी है। उस दिन फॉरवर्ड देने का मतलब ही नहीं है ना। उस दिन तो स्पॉट
रेट ही होगी। मनी मार्केट की इंटरेस्ट रेट भी दे रखी है। यानी मनी मार्केट वाले हैेजिंग भी अपन कर सकते हैं इस क्वेश्चन
में। तो दोनों से आंसर देना पड़ेगा आपको। आपको बताना है सबसे पहले तो जो कंपनी का ट्रेजरी डिपार्टमेंट है ना वो क्या बोल
रहा है इसकी हैजिंग ही मत करो क्या सही हैजिंग ना करें तो आप बोलोगे हैजिंग कर लेनी चाहिए क्यों कर लेनी चाहिए देखो आपको
डॉलर मिलने वाले हैं तो आपको डर क्या लगेगा यार डॉलर की रेट गिर ना जाए गिरेगी तो मुझे नुकसान होगा सिंपल सी बात है
क्योंकि रुपीस कम मिलेंगे तो इस क्वेश्चन में अगर आप देखो ना आज के दिन देखो डॉलर ज्यादा दिख रहा है ना फॉरवर्ड रेट देखो तो
कम दिख रही है इसका मतलब स्पोर्ट में ज्यादा है और फॉरवर्ड में कम है यानी फ्यूचर में हो सकता है डॉलर की रेट गिरने
वाली है यह यही तो रिप्रेजेंट कर रहा है या नहीं आपको डॉलर की हैजिंग कर लेनी चाहिए। हो सकता है फ्यूचर में एक्चुअल में
और भी ज्यादा गिर जाए। तो यहां पर और यह तो सिंपल सी बात है। हैे हैजिंग तो करनी ही चाहिए। तो यही आंसर होगा। हैे हैजिंग
कर लो यह तो फालतू बात है। अब बताओ दो स्ट्रेटजी बताओ जो आप इस क्वेश्चन में कर सकते हो। एक तो रोल ओवर और फॉरवर्ड होगा।
दूसरा मनी मार्केट बता दिया था। थर्ड इन दोनों अल्टरनेटिव में से बताओ कौन सा आप चूज़ करोगे। अब कैलकुलेशन करनी है। इस
क्वेश्चन में। अब देखो एक एजम्पशन क्या है? इंटरेस्ट रेट को आपको कंपाउंड करना है हर सिक्स मंथ में। यानी जो इंटरेस्ट है ना
हर 6 महीने में कंपाउंडिंग होगी। तो यह ध्यान रखना वो मनी मार्केट वाले में काम में आएगा आपके।
और एक्सचेंज रेट आपको दो डेसिमल में कैलकुलेट करनी है। बाकी सारी कैलकुलेशन होल नंबर में यानी विदाउट डेसिमल आपको
चलानी है। यह आपको बता रखा है। तो देखिए अब इस क्वेश्चन में रोल ओवर ऑफ़ फॉरवर्ड करें सबसे पहले। तो रोल ओवर ऑफ़ फॉरवर्ड
मैंने आपको बताया था क्या होता है? जब आपको जिस टाइम का फॉरवर्ड चाहिए जैसे 18 महीने का चाहिए। बट मार्केट में अवेलेबल
ही नहीं है। तो आप एक बार क्या करोगे? 6 महीने का। तो देखो यहां पर मैं आपको समझाऊं एक बार टाइमलाइन से।
यह मैंने मंथ्स लिख दिए। 6 मंथ्स, 12 मंथ्स, 18 मंथ्स। अब मैं क्या हूं? आज खड़ा हूं यहां पर जीरो टाइम पे। जीरो टाइम
पे खड़ा हूं और मेरे पास 18 महीने का फॉरवर्ड नहीं है। तो एक बार मैं यह वाला फॉरवर्ड कर लूंगा और इस दिन आकर इसको
कैंसिल करके नया फॉरवर्ड कर लूंगा अगले 6 महीने का। फिर यहां पर आके इसको कैंसिल कर दूंगा और
एक नया फॉरवर्ड कर लूंगा और 6 महीने का। तो ऑटोमेटिकली मैं यहां की हैेजिंग हो जाएगी मेरी। इसे बोलते हैं रोलओवर ऑफ़
फॉरवर्ड। यानी आप पहले जितनी भी टर्म का फॉरवर्ड अवेलेबल है वो कर लो। उसकी मैच्योरिटी पे उसे कैंसिल करो। नया
फॉरवर्ड करो। उसकी मैच्योरिटी पे उसे कैंसिल करो। नया फॉरवर्ड करो। ये प्रोसेस करते रहो। जब तक आपकी मैच्योरिटी हैज ना
हो जाए। बस सिंपल सा है। यानी फॉरवर्ड कॉन्ट्रैक्ट करना है। देखो तो अब रोलओवर और फॉरवर्ड में
कॉन्ट्रैक्ट कैंसिल होंगे। तो मैं कौन सा चार्ट बनाऊंगा? फेट ऑफ़ फॉरवर्ड वाला। क्योंकि कैंसिलेशन वाले प्रोविजन भी
लगेंगे। तो डीलर से मैंने चार्ट बनाया। डीलर कस्टमर के साथ ट्रांजैक्शन करता है और मार्केट के साथ करता है। तो कस्टमर के
साथ डीलर बताओ क्या करेगा? आप सुन हां सोचिएगा। मैं कस्टमर हूं। मुझे डॉलर क्या है? मिलेंगे। यानी मैं उसे कन्वर्ट
कराऊंगा तो डीलर के पास जाके डॉलर बेचूंगा। डॉलर बेचूंगा तभी तो मुझे रुपया मिलेगा। डॉलर बेच दूंगा कन्वर्ट कराने के
लिए। तो यानी डीलर मुझसे डॉलर बाय करेगा। यह मत बोलना सर ये बाय क्यों आया? मैं डीलर के पॉइंट ऑफ व्यू से लिख रहा हूं।
किसके पॉइंट ऑफ व्यू से? डीलर का पॉइंट ऑफ व्यू। डीलर पीओ। ठीक है? तो डीलर क्या करेगा? डॉलर बाय
करेगा मेरे से। किस रेट पे? फॉरवर्ड कॉन्ट्रैक्ट कर लूंगा जो अवेलेबल है 6 महीने का। तो डीलर डॉलर बाय करेगा तो बताओ
क्या करता है? सामने वाला जो डीलर होता है दुकानदार वो कम से कम पे खरीदता है तो कम से कम 91.9 इस पे खरीदेगा और डीलर सेम ऐसे
ही मार्केट में बेचने का कॉन्ट्रैक्ट कर लेगा। उसकी जरूरत नहीं है। मैंने रेट लिखे नहीं क्योंकि वो कुछ काम में नहीं आने
वाली इस क्वेश्चन। 6 महीने बाद मैं एज अ कस्टमर डीलर के पास जाऊंगा। भाई साहब कॉन्ट्रैक्ट कैंसिल। तो डीलर बोलेगा
मार्केट में तो मुझे बेचना है। तो मार्केट को सेटिस्फाई करने के लिए वो मार्केट में खरीद लेगा। एक और आज तो आज के दिन मार्केट
में डीलर तुरंत स्पोर्ट बाय करेगा। तो 6 महीने बाद देखो आफ्टर सिक्स मंथ्स आ जाओ आफ्टर सिक्स मंथ। आज का दिन यह है आज के
दिन डीलर मार्केट में जाके बाय करेगा डॉलर तो मार्केट में डीलर कस्टमर की हैसियत से जाता है तो वहां उसे महंगे से महंगा
मिलेगा यानी 91.7 पे बाय होगा। बस यही डिफरेंस इन दोनों के बीच का डिफरेंस होता है एक्सचेंज गेन या लॉस। देखो डीलर कस्टमर
से बाय करता है 91.9 पे लेकिन कस्टमर के कैंसिल करने की वजह से अब उसे मार्केट में 91.7 पे बाय करना पड़ा। यानी उसे फायदा हो
गया। 20 का वो पास ऑन किया जाता है कस्टमर को तो $20 पर डॉलर का फायदा हुआ है। यह गेन है कस्टमर को जाएगा। पे हम नीचे
देखेंगे फिर ये अब देखो आज के दिन कस्टमर ने कैंसिल कराया बट नया कॉन्ट्रैक्ट भी करेगा 12 मंथ्स के लिए क्योंकि आज 6 महीने
का एंड है तो नेक्स्ट सिक्स मंथ का फॉरवर्ड कॉन्ट्रैक्ट करेगा तो आज देखो नेक्स्ट सिक्स मंथ का फॉरवर्ड कॉन्ट्रैक्ट
कस्टमर यह करेगा बेचने का डॉलर तो डीलर बाय करेगा कम से कम पे ऐसे ही फिर 12 महीने बाद कस्टमर कैंसिल के
लिए बोलेगा तो डीलर को मार्केट में बाय करना पड़ेगा आफ्टर 12 मंथ्स मार्केट में डीलर बाय करने जाएगा तो क्या होगा महंगे
से महंगी रेट लगेगी यानी 91.5 इन दोनों का डिफरेंस एक्सचेंज गेन आएगा। डीलर को इतने में खरीदना पड़ता। कस्टमर से अब इतने में
खरीदा है जो कि कम है यानी गेन हो गया। वह कस्टमर को पास ऑन होगा। 12 मंथ्स के एंड में कस्टमर अब एक नया कॉन्ट्रैक्ट भी
करेगा डीलर से। नया कॉन्ट्रैक्ट क्या करेगा? 6 मंथ फॉरवर्ड का डॉलर सेल करने का यानी डीलर बाय कर रहा है कम से कम पे 90.9
18 मंथ्स के एंड पे कस्टमर क्या करेगा? डिलीवरी ले लेगा। आप कैंसिल मत कर देना। आप तो एक्चुअल मैच्योरिटी पे आ गए। तो इस
रेट पे डिलीवरी ले लेगा कस्टमर। अब आप बताओ इसमें कस्टमर को इस वाली हैेजिंग में कितना पैसा मिला? टोटल $90.9 से पैसा
कन्वर्ट हुआ $1 लाख। यही तो है फाइनल रेट लेकिन इसके अलावा बीच में दो कॉन्ट्रैक्ट कैंसिल हुए तो उस पर एक्सचेंज गेन भी हुआ
वह भी ले लो तो यह टोटल पैसा मिला अब मनी मार्केट हैेजिंग मनी मार्केट हैेजिंग क्या बोलती है फॉरेन करेंसी में आपकी देखो एसेट
है कि लायबिलिटी तो पैसा मिलेगा डॉलर में तो एसेट है तो लायबिलिटी क्रिएट करो यानी 18 महीने बाद मुझे डॉलर में कुछ पैसा पे
करना पड़े ऐसा काम करो तो डॉलर में पे करना है तो आज डॉलर में मैं लोन ले लूं कितने अमाउंट का लोन लूं कि 18 मंथ्स बाद
उसकी वैल्यू $1 लाख हो जाए तो यानी प्रिंसिपल अमाउंट ाउंट निकालना है। तो देखो सबसे पहले मुझे डॉलर में अमाउंट
मिलना है तो डॉलर में बोरो करेंगे। कितना $1 लाख 18 मंथ बाद हो जाए तो इसका प्रिंसिपल अमाउंट यानी इसको पीवी कर दो या
फिर डिवाइड में वन प्लस इंटरेस्ट रेट कर दो। वन प्लस इंटरेस्ट रेट डॉलर में लोन की इंटरेस्ट रेट देखो दे रखी है लोन की डॉलर
में कितनी? 7% ये पर ये क्या रेट है? पर एनम नहीं बोलता तो भी पर एनम होती है। अब हमारा इंटरेस्ट जो है वह हाफ ईयरली
कंपाउंड हो रहा है। सिक्स मंथ में कंपाउंड हो रहा है। क्लियरली बोला है। तो इसको 6 मंथ की रेट में कन्वर्ट करो। पहले तो 077%
को डिवाइड बाय 2 किया। अब कंपाउंड 6 मंथली होगा तो 18 महीनों में बताओ 6 महीने कितनी बार आएंगे? तीन बार वो पावर में चला
जाएगा। समझ गए ना? यह कंपाउंडिंग के बेसिक इंटरेस्ट के फार्मूलाज़ हैं। तो ये डॉलर मुझे आज बोरो करने चाहिए। बोरो करके क्या
करूंगा? डॉलर उधार पे लिया। इसको तुरंत रुपीज़ में कन्वर्ट कराऊंगा। तो यानी आज के दिन जीरो टाइम पर मैं डॉलर बेचूंगा। डॉलर
बेचूंगा तो मेरे मैं कस्टमर हूं। बेचूंगा तो कम से कम पे यानी ₹92 पे बिकेगा। तो इतने रुपीस मुझे मिल जाएंगे। इन रुपी को
मार्केट में इन्वेस्ट करूंगा और उस पे इंटरेस्ट रिटर्न के साथ विड्रॉ कर लूंगा 18 महीने बाद। तो रुपीस को इन्वेस्ट
करूंगा तो रुपीज़ में इन्वेस्टमेंट की रेट 6.4% वही सिक्स मंथ में कंपाउंडिंग होगी। तो इस 6.4 को डिवाइड बाय टू किया और यहां
पे इस वन प्लस इंटरेस्ट रेट डिवाइड बाय टू को थ्री से पावर अप कर दिया क्योंकि 6 महीने तीन बार आएंगे 18 महीनों में। तो यह
पैसा मुझे 18 महीने बाद मिलेगा। तो दोनों में दोनों केसेस में फॉरवर्ड और इसमें दोनों में सेम अमाउंट ही है। यहां पे बस
₹2000 का फर्क है। तो इन्होंने बोला अप्रोक्समेटली सेम अमाउंट है। फिर भी आप मनी मार्केट ले सकते हो। क्यों? क्योंकि
₹2000 ज्यादा है। इसलिए नहीं इन्होंने इसका रीज़न दिया कि देखो अमाउंट सेम ही है। 2000 9 करोड़ का ट्रांजैक्शन हो रहा है।
उसमें 2000 कुछ मैटर नहीं करते। इन्होंने बस इसका रीज़न क्या दिया कि मनी मार्केट में बहुत कम ट्रांजैक्शन है। फॉरवर्ड में
आप पागल हो जाओगे। प्रैक्टिकल लाइफ में हर 6 महीने में रोल ओवर कराना है। बैंक के पास जाना है। तो प्रैक्टिकल लाइफ में
ज्यादा इजी यह रहेगा आपके लिए। तो यह ले लेना। कंप्लीट है यह क्वेश्चन। इसके बाद देखो
फॉरक्स का एक और बेसिक क्वेश्चन है। यह बहुत ज्यादा इजी क्वेश्चन है। कुछ भी नहीं है इस क्वेश्चन में। तो आपको मार्केट की
कुछ रेट्स अवेलेबल है आपके पास। 1 पाउंड इक्व यूरो की रेट है। डायरेक्ट रेट 1 पाउंड और डॉलर की। 1 यूरो और डॉलर की रेट।
आपको क्या करना है? आपको बतानी है। बीड और आस्क वाली रेट निकालनी है। क्रॉस रेट। क्रॉस रेट करनी है। किसकी? यूरो पर पाउंड।
यानी 1 पाउंड इक्व यूरो क्या होगा? सर वह तो दे रखा है ना यह बस यह कंफ्यूजन हो सकता है आपको बट इसका कोई दिक्कत नहीं
आएगी आपके सॉल्यूशन में। बाकी तो क्वेश्चन बहुत आसान है। सर ये भी तो 1 पाउंड इक्व टू यूरो की रेट है। फिर आपसे पूछी क्यों
है? भाई ये डायरेक्ट रूट है। देखो मार्केट में डायरेक्ट रेट अवेलेबल है। वो दे रखी है। सारी डायरेक्ट रेट्स है। साफ बोला है
डायरेक्ट कॉस्ट। आपको क्रॉस रेट निकालनी है यानी इनडायरेक्ट रूट से जाना है। तो इनडायरेक्ट रूट से कैसे? इन दोनों रेट को
यूज़ में लेके। देखो यहां पे क्या है? 1 पाउंड इक्व डॉलर और यहां है $1 = डॉलर। तो इनको यूज़ में लेके हम क्रॉस रेट
निकालेंगे। 1 पाउंड इक्व टू यूरो कितना होता है? ठीक है? तो ये रेट आप निकालिए। क्रॉस रेट कैसे निकालनी है? बड और आस्क।
बड और आस्क किसके पॉइंट ऑफ व्यू से होते हैं? डीलर। तो डीलर के पॉइंट ऑफ व्यू से सोचिएगा। तो डीलर के पॉइंट ऑफ़ व्यू से बड
रेट का मतलब क्या हुआ? डीलर जिस रेट पे खरीदेगा यानी कम से कम रेट। ये ध्यान रखना। अब रेट किसकी है? 1 पाउंड की। तो
यानी पाउंड खरीदने की बात है। ये भी ये भी पता होना चाहिए क्या खरीदेगा? हमेशा हम खरीदते बेचते किसको हैं? बेस करेंसी वाले
को। तो बड रेट का मतलब डीलर खरीदेगा। खरीदेगा किसको? बेस रेट क्या है? बेस करेंसी है पाउंड। तो पाउंड को खरीदेगा।
डीलर खरीदता किस पे? कम से कम पे। यानी डीलर यूरो सेल कर रहा है और पाउंड को खरीद रहा है। बस ये ध्यान रखना है। ये सब बातें
दिमाग में होंगी तो कोई दिक्कत नहीं है। तो अब आपकी क्रॉस रेट कैसे निकलती है? आपको चाहिए यूरो पर पाउंड। मैंने
मैथमेटिकल ये टेक्निक एक आपको बताई थी। आपको जो रेट दे रखी है वो लिख लो। ये क्या है? डॉलर पर पाउंड। ठीक है? इसमें देखो
पाउंड डिनोमिनेटर में आ रहा है। हमें डिनोमिनेटर में चाहिए। दूसरी रेट है डॉलर पर यूरो। अब डॉलर पर यूरो अगर आप यहां पे
लिख दोगे तो आपका क्या है? यहां पे डॉलर पर पाउंड यहां डॉलर पर यूरो है। ये डॉलर से डॉलर कटेगा ही नहीं। हमें चाहिए नहीं।
यूरो तो न्यूमैरेटर में चाहिए ना। तो हम इस रेट को रिवर्स लेंगे। ये आपको टेक्निक सब सिखाई हुई है। कुछ भी नया नहीं है। तो
अब आपको यह वाली रेट पाउंड और डॉलर वाली रेट तो डायरेक्ट उठानी है और यूरो वाली रेट
इनवर्स कर देनी है। ठीक है? बट रेट भी दो-दो है। कौन सी लें? तो यहां दिमाग चलेगा। इसलिए तो बड और रास का लफड़ा कर
रखा है इन्होंने। तो हमें पाउंड की रेट दे रखी है और डीलर पाउंड बाय कर रहा है। बीड का मतलब तो कम
से कम पे करेगा डीलर और यूरो सेल कर रहा है। तो हमेशा मैंने क्रॉस रेट में आपको क्या बताया था? जो आप सेल कर रहे हो ना
उससे चालू करो। तो यूरो सेल करेगा। तो डीलर जब भी सेल करता है तो क्या करता है? ज्यादा से ज्यादा पे सेल करता है। तो यूरो
ज्यादा से ज्यादा पे सेल होगा तो ज्यादा वाली रेट यह है। अब यह तो सर 1.2375 या 9000 यह क्या है? यानी यह डेसिमल में
चारों डिजिट को रिप्लेस कर दो 9000 से। यानी 1.900 यह वाली रेट यह रिवर्स में लेनी थी। इसके
बाद यूरो सेल करे तो डॉलर मिल गए। डॉलर मुझे चाहिए नहीं है। डॉलर बेचूंगा और पाउंड खरीदूंगा इस वाली रेट से। पाउंड
खरीदेगा डीलर तो कम से कम पे मिलेगा। कम वाली रेट क्या है? 1.6025 या फिर 1.600 यहां पे खेल किया इन्होंने क्या? हाई वाली
रेट पहले लिख दी और लो वाली बाद में लिख दी। ठीक है? तो जल्दबाजी में 1.6025 मत ले लेना। वह लो नहीं है। लो है 1.600
यह आ गया। ऐसे ही आस्क रेट आस्क रेट यानी डीलर पाउंड को सेल करेगा तो पाउंड सेल करेगा देखो पाउंड सेल करेंगे तो क्या होगा
कम से सॉरी ज्यादा से ज्यादा पे बेचेगा डीलर तो डॉलर 1.6025 डॉलर क्या होगा मिलेगा डॉलर बेचेंगे डॉलर
बेचेंगे तो यानी यूरो खरीदेंगे यूरो खरीदेगा तो कम से कम पे खरीदेगा यानी 1.2375 यह आ गई रेट हो गया बस सेकंड पार्ट
में क्या बोल रहा है यह प्रूफ कर दो कि आर्बिट्रेज पॉसिबल नहीं है यानी इन्होंने खुद ने क्वेश्चन में बोल दिया आर्बिट्रेज
पॉसिबल नहीं है बस आपको प्रूफ करना प्रूफ कैसे करेंगे? आर्बिट्रेज होता है यानी गेन आपका आएगा ट्रांजैक्शन में और आर्बिट्रेज
नहीं है यानी लॉस आएगा या फिर कुछ नहीं होगा। तो देखो अगर आप पाउंड बाय कर रहे हो यूरो के अगेंस्ट डायरेक्ट रूट में यानी
मार्केट में जो डायरेक्ट रेट है ना यहां पे अब आपका हो जाएगा जो टू वाला आर्बिट्रेज होता है टू करेंसी वाला टू
कंट्री वाला टू पॉइंट आर्बिट्रेज आप डायरेक्ट रूट में तो क्या कर रहे हो पाउंड बाय कर रहे हो यहां पे पाउंड बाय करेंगे
आप एज अ कस्टमर मैं बात करूं मैं पाउंड बाय करने जाऊंगा तो महंगे से महंगा मिलेगा 1.2965 क्योंकि यह रेट महंगी वाली यह है
तो 1.2965 पे मैं बाय करूंगा और मैं सेल करूंगा क्रॉस वाली रेट। क्रॉस वाली रेट पर। क्रॉस वाली रेट मैंने निकाली
1 पाउंड की। अब सेल करूंगा तो कम से कम पे होगा एज अ कस्टमर। तो इस रेट पे सेल होगा। तो यानी लॉस आ रहा है। यानी आर्बिट्रेज
पॉसिबल नहीं है। दूसरा केस अगर मैं पाउंड सेल करूं यूरो के अगेंस्ट डायरेक्ट रूट में। यानी पाउंड मैं बेचूंगा। किस में?
डायरेक्ट वाली रेट में तो पाउंड बेचूंगा तो कम से कम पे बिकेगा 1.2950। और क्रॉस रेट में पाउंड बाय करूंगा। क्रॉस
रेट में बाय करने जाऊंगा तो महंगे से महंगा 1.2950 तो यहां पे भी कुछ नहीं आया गेन लॉस मेल हो गया तो यानी आर्बिट्रेज
पॉसिबल नहीं है प्रूव हो गया इसके बाद ये क्वेश्चन देखो ये सिमिलर क्वेश्चन है अपने पास ऑलरेडी मेन चैप्टर
में उसी का थोड़ा सा वर्जन है इसमें एक थ्यरिटिकल पॉइंट और डाल दिया और कुछ भी स्पेशल नहीं है होल नंबर में राउंड ऑफ
करनी है सब कैलकुलेशंस यानी डेसिमल्स वगैरह का चक्कर नहीं रखना अब देखो इस क्वेश्चन को समझो आप क्या डाटा दे रखा है
आपको मैं हूं एबीियन एमro बैंक एमस्टरडम में मैं
सिचुएटेड हूं। मेरी कंपनी एमस्टरडम की है। मतलब मैं बैंक जो हूं एमस्टरडम के अंदर हूं। मुझे ₹8 लाख सॉरी ₹8 करोड़ परचेस
करने हैं। एमस्टरडम में क्या चल रहा है? यूरो। यूरोप का पार्ट है तो यहां पे यूरो चल रहा है। तो मुझे ₹8 करोड़ की
रिक्वायरमेंट है। तो ₹8 करोड़ खरीद रहा हूं। क्या करूंगा? उन ₹8 करोड़ को मैं फंड करूंगा। मेरे ही खुद के अकाउंट में जो
मैंने कनरा बैंक न्यू दिल्ली में खुला रखा है। यह क्या चीज है सर? देखिए एक बार समझिएगा। मैं एम्रो बैंक एमस्टरडेडम में
हूं। मेरे यहां यूरो चलता है। अब इस बंदे को एक बार बैंक छोड़ो। जब हम इधर बैंक वर्ड पढ़ते हैं ना तो हम कंफ्यूज होने
लगते हैं क्या चल रहा है? अब आप थोड़ा सा फील करिएगा यह जो बंदा एक नॉर्मल इंसान है। इस बंदे को रुपीस का अकाउंट खुलवाना
है। रुपीस का। बताओ कहां खुलेगा? इंडिया में। तो यह इंडिया में बैंक के पास गया। कनरा बैंक में आप और हम ही नहीं खुलाते।
ये फॉरेनर्स आके कनरा बैंक में अकाउंट खुलवा रहे हैं। ऐसे बर्बाद बैंक इसका नाम भी बहुत कम लोगों ने सुना होगा। तो कनरा
बैंक के पास जाता है और उसका रुपीस का अकाउंट न्यू दिल्ली में यह खुलवा लेता है। समझ में आ रहा है? और इस अकाउंट में यह 8
करोड़ बाय करके रखना चाहता है। हो सकता है इस बंदे का यह क्या एमस्टरम का बैंक इसका कोई कस्टमर हो इंडिया में उसके लिए ये
अपना एक अकाउंट के बैंक न्यू दिल्ली में खुलवा रहा है रुपीस का। कोई भी रीज़न हो सकता है। मुझे उससे मतलब नहीं है। तो मुझे
8 करोड़ खरीदने हैं ताकि मैं अपने cरा बैंक का जो अकाउंट मैंने खुलवाया ना एक बार भूल जाओ मैं बैंक नहीं हूं। मैं एक
नॉर्मल इंसान हूं। अजय अग्रवाल है जो यूरोप में रहता है। वह इंडिया के अंदर रुपीस का एक अकाउंट खुलवाना चाहता है और
उसमें ₹8 करोड़ रखना चाहता है परचेस करके क्योंकि वह यूरोप का बंदा है तो उसके पास रुपीस तो होंगे नहीं तो मैं रुपीस परचेस
करूंगा और अपने दिल्ली वाले अकाउंट में बैंक के अकाउंट में डिपॉजिट करा दूंगा। ठीक है? यह चीज आपको बताई है। अब आपको
बोला गया है कि बताओ यह जो मेरा रुपीज़ वाला अकाउंट मैंने Canरा बैंक में खुलवाया है, इसका नेचर कैसा है? नेचर मतलब
नोस्ट्रो लोरो यह आपने अकाउंट पढ़े हैं। ठीक है? जो मैंने आपको बताए थे नोस्ट्रो वस्ट्रो लोरो अकाउंट तो वह नेचर आपको
बताना है। अब मैं फॉरेनर हूं। एमस्टरडम का बैंक हूं। मैंने अपना अकाउंट Canरा बैंक में खुलवाया तो यह क्या आवर अकाउंट विद यू
अगर आपको याद हो नोस्ट्रो का थोड़ा बहुत कुछ पूरा आपको कांसेप्ट पढ़ाया हुआ है। तो मेरा अकाउंट आपके पास मतलब मेरा अकाउंट
दूसरे बैंक में तो कनरा बैंक में मेरा अकाउंट है यह। तो यानी यह नोस्ट्रो अकाउंट है। इसे बोलते हैं नस्ट्रो योर अकाउंट विद
अस। उसे क्या बोलते हैं भाई तुम्हारा अकाउंट हमारे बैंक में खुला हुआ है यानी वोस्ट्रो अकाउंट और देयर अकाउंट यानी किसी
और का अकाउंट उस बैंक में उस जगह पर वो होता है लोरो अकाउंट तो इसमें एक लोरो अकाउंट भी होगा देखेंगे उसका एग्जांपल भी
अब आगे बनेगा अब देखो इसमें क्या बोला है जो ₹8 करोड़ मैं खरीदूंगा ना ₹8 करोड़ खरीदूंगा बदले में कुछ दूंगा देना ही
पड़ेगा तो इसमें से ₹3 करोड़ जब खरीदूंगा उसके बदले में तो मैं डॉलर दूंगा अब वो डॉलर कहां दूंगा वो डॉलर कना बैंक के डॉलर
अकाउंट जो सिटी बैंक न्यूयॉर्क में कनाडा बैंक ने खुला रखा उसमें डालूंगा और बैलेंस अमाउंट यानी 8 करोड़ में से 3 करोड़ मैं
कैसे खरीदूंगा डॉलर देकर और बचे हुए 5 करोड़ उसके बदले मैं ब्रिटिश पाउंड जो है वह कना बैंक के पाउंड अकाउंट लंदन में जमा
कराऊंगा। अब ये क्या बोल दिया था समझ ही नहीं आया। इसको समझने के लिए आपको थोड़ा प्रैक्टिकली फॉररेक्स के बारे में पता
होना चाहिए। कैसे वर्किंग होगी तो वो मैं आपको बताता हूं। इसके बाद पूछेगा भी ये कनरा बैंक का जो पाउंड वाला अकाउंट है
लंदन में वो बताओ मेरे पर्सपेक्टिव से कौन से नेचर का है? तो देखो यहां पे क्या हो रहा है। देखो जो अपना कनरा बैंक है ना
इंडिया का इसके बारे में बात करते हैं एक बार। Canरा बैंक इंडिया में रुपीज में चलता है ये बैंक। इस इस कनरा बैंक ने भी
अपने अकाउंट खुलवा रखे हैं। कहां पर? एक तो न्यूयॉर्क में सिटी बैंक में डॉलर का अकाउंट डॉलर में ट्रांजैक्शन करने के लिए
और इस इंडिया के कनरा बैंक ने लंदन में भी एक लंदन बैंक है पाउंड का उसमें अपना अकाउंट खुलवा रखा है उसमें ट्रांजैक्शन
करने के लिए तो कनरा बैंक के लिए यह दोनों अकाउंट बताओ क्या है नो ट्रू अकाउंट क्योंकि कना बैंक क्या बोलेगा आवर अकाउंट
विद यू इन बैंक के पास इसके अकाउंट बट आपको क्या बोला कि इन अकाउंट्स के सॉरी कना बैंक के लंदन अकाउंट का कना बैंक के
लंदन अकाउंट अकाउंट का आपको नेचर बताना है। कनरा बैंक के लंदन अकाउंट का आपको नेचर बताना है। किसके पर्सपेक्टिव से?
एमरो बैंक के पर्सपेक्टिव से। एमरो कौन है? अपन जो कहां बैठे हैं? यूरोप में। मेरे पर्सपेक्टिव से कनेरा ने यह जो लंदन
में बैंक अकाउंट खोल रखा है इसको मैं क्या नाम दूं? तो भैया यह उसका है। मेरा नहीं है। लोरो अकाउंट देयर देयर अकाउंट विद
देम। ठीक है? देयर यानी कनरा बैंक अकाउंट विद देम। लंदन बैंक के पास। समझ में आया? तो
देयर अकाउंट उनका अकाउंट किसी और के पास यह होता है मेरे पर्सपेक्टिव से लोअर अकाउंट।
यह हो गया फर्स्ट पार्ट। सेकंड पार्ट में अब आपको बस यह बताना है कि मैं जो रुपीस परचेस करने वाला हूं डॉलर के बदले और
पाउंड के बदले तो उसमें कितना डॉलर मुझे देना पड़ेगा? कितना पाउंड देना पड़ेगा? तो यहां पे लिखा क्या था एक्चुअल में। मैं
आपको अब थोड़ा सा समझाता हूं क्या लिखा हुआ था यहां पर। अब देखो मैं क्या है? रुपीस परचेस करूंगा।
तो रुपीस मेरे को परचेस करना है। मैं कौन हूं? यूरोप का बंदा। ध्यान से सुनना। मैं प्रैक्टिकल लाइफ की बात बता रहा हूं।
क्वेश्चन सॉल्विंग तो हो जाएगी बट मैं थोड़ी सी नॉलेज दे देता हूं इस क्वेश्चन के साथ आपको। अब मुझे रुपीस परचेस करने
हैं। मैं कौन हूं? यूरोप का बंदा। तो रुपीस बताओ कहां मिलेंगे? रुपीस चलते कहां है? इंडिया। तो मैं इंडिया में कनरा बैंक
में खाता क्यों खुलवा रहा हूं? क्योंकि कनरा बैंक में खाता खुलवाऊंगा तभी तो कना बैंक वाला रूपीस वाला बंदा दिल्ली में
बैठा हुआ रुपया दे पाएगा मुझे। तो मैं इससे खाता खुलवा के इसके अकाउंट में रुपी डलवा लूंगा। बट बदले में कनरा बैंक को मैं
क्या दूंगा? बदले में मैं कनरा बैंक को डॉलर देने को तैयार हूं। अब कनाडा बैंक को जब मैं डॉलर दूंगा बदले में इस बैंक को यह
इंडिया में बैठा है दिल्ली के अंदर यह बताओ डॉलर इस अकाउंट में अपने दिल्ली में रख पाएगा नहीं डॉलर के लिए डॉलर का अकाउंट
होना चाहिए इसलिए कनरा बैंक ने डॉलर के अंदर न्यूयॉर्क में जाके एक अकाउंट खुलवा रखा है $3 करोड़ खरीदने के लिए मैं डॉलर
दूंगा ना कनरा बैंक को इसलिए इसने ये डॉलर का अकाउंट खुला रखा है कनरा बैंक ने और ₹5 करोड़ खरीदने के लिए मैं कनरा बैंक को
क्या दे रहा हूं पाउंड दे रहा हूं तो पाउंड के लिए कनरा बैंक लंदन बैंक के पास जाके एक अकाउंट खुलवा रहा है कि उसमें वो
पाउंड पार्क कर लेगा जो मैं उसे दूंगा। समझ में आया? बस यही लिखा हुआ है इस पैराग्राफ में। आपको उससे मतलब नहीं है।
सेकंड पार्ट में बताओ कितने डॉलर और पाउंड मैं उसे दूंगा। वह बताने हैं। सिंपल सा है वही लॉजिक आपका सोचने वाला बाय सेल वाला।
तो सबसे पहले मैं $3 करोड़ खरीदूंगा डॉलर के अगेंस्ट। यानी मैं डॉलर सेल करूंगा। तो देखो डॉलर और रुपी की रेट है। तो डॉलर की
रेट है। डॉलर सेल करूंगा तो कम से कम पे सेल होगा। ₹91.3625 कन्वर्ट हो गया बस। $5 करोड़ी खरीदूंगा किसके अगेंस्ट? पाउंड के
अगेंस्ट। तो पाउंड और डॉलर की रेट है। बट मुझे तो रुपीज़ खरीदने हैं पाउंड के अगेंस्ट। तो यानी मुझे क्रॉस रेट निकालनी
पड़ेगी पाउंड और रुपीज़ की। तो मुझे क्या करना है? पाउंड सेल करना है। तो पाउंड सेल करूं सबसे पहले यहां पे सोचो। तो कम से कम
पे सेल होगा। यानी डॉलर 1.4060 ले लिया। वही क्रॉस रेट निकालने का तरीका। अब डॉलर आ गया। डॉलर भी नीचे डॉलर बेचूंगा। तो कम
से कम यानी 991.3625 रेट। तो इसे क्रॉस रेट मिल गई पाउंड और की। बस कन्वर्ट कर लिया। यानी इतने पाउंड मुझे बेचने हैं। बस
खत्म। अब यह क्वेश्चन देखो आईआरआरएम का देखो ये जो क्वेश्चन है ना
इस क्वेश्चन में आईआरआरएम तो बहुत छोटा सा है। उससे पहले इस क्वेश्चन में मेन पार्ट पता है किसका है? मेन पार्ट है सिक्योरिटी
वैल्यू्यूएशन चैप्टर का। मिक्स है एक तरीके से आप बोल सकते हैं क्या मिक्स है वह अभी अपन देखेंगे ज़ीरो कूपन बॉन्ड
अवेलेबल है मार्केट में डिफरेंट मैच्योरिटी के ईयर 1 2 3 एक साल की मैच्योरिटी के दो के तीन के कूपन मिलता
नहीं है मैच्योरिटी पे फेस वैल्यू मिलती है आपको इनकी आज की मार्केट प्राइस दे रखी है परसेंटेज ऑफ़ पार वैल्यू पार वैल्यू का
परसेंटेज अब पार वैल्यू क्या है यानी फेस वैल्यू फेस वैल्यू ज़ीरो कूपन बॉन्ड की कुछ नहीं बता रखी तो हम अस्यूम क्या करके
चलेंगे 100 ₹100 फेस वैल्यू होगी जब नहीं दे रखी होती है बॉन्ड की फेस वैल्यू ₹100 मानते
हैं सिक्योरिटी वैल्यूएशन में लिखा आया हुआ यानी उसका परसेंटेज ही अप्लाई करेंगे। यानी उसकी आज की मार्केट प्राइस यही आ
जाएगी। ऑटोमेटिकली यह मार्केट प्राइस है। बस आप तो इतना समझ के चलिए और यह फेस वैल्यू है ₹100।
अब यहां पे कुछ बताया हुआ है कि आप एबीसी पेंशन फंड है और आपने मैं एबीसी पेंशन फंड हूं। मैंने एक एसेट
एक पोर्टफोलियो बना रखा है। उस पोर्टफोलियो से मुझे 2 करोड़ की इनकम हर साल होती है। नेक्स्ट
2 साल तक। मतलब मैंने कहीं पे इन्वेस्टमेंट करा हुआ है। उससे मेरे को हर साल 2 करोड़ मिलेंगे। 2 साल तक बस खत्म हो
जाएगा। यह मेरे इन्वेस्टमेंट का डाटा मुझे दिया हुआ है अलग से कुछ। यह जीरो कूपन बॉन्ड का मार्केट का डाटा दे रखा है।
मैंने ऐसे ही मार्केट के बोंड्स में इन्वेस्टमेंट कर रखा है। ऐसे बोंड्स जो 2 साल में खत्म हो जाएंगे और अगले 2 साल में
पहले साल के एंड में 2 करोड़ की मुझे उनसे रिसीप्ट आएगी और सेकंड ईयर एंड में 2 करोड़ की रिसीप्ट आएगी। खत्म। अब इनका कुछ
आपको आज आपने कितना इन्वेस्ट किया यह सब कुछ भी नहीं दे रखा है आपको। बस इतनी सी इनेशन है। देखेंगे इसका क्या रोल होगा।
[गला साफ़ करने की आवाज़] आपको क्या बताया? सबसे पहले इंटरेस्ट रेट अगर चेंज हो जाए 10 बेसिस पॉइंट से चेंज
प्लस वाली कि माइनस वाली कुछ नहीं बोला तो उससे मतलब नहीं है ये पूछेगा कुछ और ये बस ये बोल रहा है कि आप बताओ एसेट की वैल्यू
में कितना चेंज होगा इन लाख एसेट की वैल्यू में कितना चेंज होगा अब आप इसे एक बार फील करके देखिए क्वेश्चन क्या है
मैंने सर आईआरआरएम लिखा है यहां आईआरएम जैसा तो कुछ लग नहीं रहा पूरा सिक्योरिटी वैल्यू्यूएशन है फर्स्ट पार्ट था
सिक्योरिटी वैल्यू्यूएशन में जो आपने पढ़ा था वही सेम चीज है इसके अंदर कुछ भी नया नहीं है अब क्या है थोड़ा दिमाग चलाइए
मैंने एक इन्वेस्ट मेंट किया हुआ है बॉन्ड के अंदर। ठीक है? कितना कर रखा है वो नहीं दे रखा। बॉन्ड से क्या-क्या कैश फ्लो
मिलेंगे वो दे रखे हैं। 2 करोड़ हर साल 2 साल तक। ठीक है? फिर खत्म। यह मेरी एसेट है। ठीक है? ये मेरा
इन्वेस्टमेंट है। इस इन्वेस्टमेंट की वैल्यू में कितना चेंज होगा? अगर मार्केट में इंटरेस्ट रेट 10 बेसिस
पॉइंट्स यानी 1% से चेंज हो जाए। बेसिस पॉइंट्स ऑलरेडी आपको पढ़ाया हुआ है। सब 1% से मार्केट में रेट चेंज हो जाए। तो कुछ
फील करिए एक बार बोर्ड में आपने कुछ पढ़ा था क्या? तो हमने पढ़ा था बॉन्ड ड्यूरेशन, मॉडिफाइड ड्यूरेशन यानी वोलेटिलिटी। यानी
अगर मार्केट में इंटरेस्ट रेट चेंज होगी तो हमारे इन्वेस्टमेंट बॉन्ड की वैल्यू पर क्या फर्क पड़ेगा? पढ़ा था ना आपने तो वही
तो बताना है। यानी हमें क्या करना है? हमें हमारे इस बॉन्ड पोर्टफोलियो की क्या करनी है? वोलेटिलिटी निकालनी है।
वोलेटिलिटी निकल गई तो मल्टीप्लाई बाय हम क्या करेंगे? मार्केट में चेंज इन इंटरेस्ट रेट। तो वह परसेंटेज क्या होगा?
हम इस बॉन्ड की इन्वेस्टमेंट वैल्यू पर अप्लाई करेंगे तो हमें मार्केट प्राइस में चेंज पता चल जाएगा। फिर इंटरेस्ट रेट
बढ़ती है तो उतनी बॉन्ड की वैल्यू गिरेगी और इंटरेस्ट रेट गिर रही है तो उतनी बॉन्ड की वैल्यू बढ़ेगी। यह हमने पढ़ा हुआ है।
बट हमें वो नहीं बताना कि गिर रही है, बढ़ रही है। बस चेंज बताना है। ठीक है? वो प्लस माइनस कोई भी साइड में उससे मतलब
नहीं है। तो अब उसके लिए सोचिए आपको क्या-क्या चाहिए? एक बार फील करिए इस क्वेश्चन में आपको सोचना पड़ेगा। देखो जब
भी ऐसा क्वेश्चन आए तो आप सोचो आपको दे क्या रखा है? और पूछा क्या है? तो आपसे जो पूछा है वह आपको समझ में आ रहा
है कि आपको वेलेटिलिटी मल्टीप्लाई करनी है। वेटिलिटी इन इंटरेस्ट रेट का चेंज करेंगे तो परसेंटेज चेंज इन मार्केट
प्राइस मिल जाएगा। या आप मल्टीप्लाई करेंगे आपके इन्वेस्टमेंट वैल्यू से तो आपको चेंज इन मार्केट प्राइस मिल जाएगा।
ये आपको चाहिए। तो अब आपको परसेंटेज चेंज इन इंटरेस्ट रेट तो अवेलेबल है। वोलेटिलिटी इस क्वेश्चन में अवेलेबल है
क्या? नहीं है? वोलेटिलिटी के क्या लिए आपको क्या-क्या चाहिए? ड्यूरेशन चाहिए और वाईटीएम चाहिए। क्योंकि ड्यूरेशन डिवाइड
बाय 1 + ytm उसका फार्मूला होता है। क्या ड्यूरेशन अवेलेबल है आपके पोर्टफोलियो की आपको? नहीं। ये सर दो साल है ना? अरे ये
ड्यूरेशन थोड़ी है। ड्यूरेशन निकालने का तरीका है अपने पास। क्या वटीएम अवेलेबल है? नहीं है। ठीक है? इसके अलावा
वोलेटिलिटी इन परसेंटेज चेंज इन इंटरेस्ट रेट करते हैं। तो परसेंटेज चेंज इन मार्केट प्राइस आता है। उसको मल्टीप्लाई
करते हैं हम इन्वेस्टमेंट वैल्यू से। बॉन्ड की वैल्यू से जो हमारी आज बॉन्ड की प्राइस है मार्केट प्राइस। तो बॉन्ड की
करंट मार्केट वैल्यू आपको दे रखी है। वो भी तो नहीं दे रखी। वो भी चाहिए। सर सारा ही डाटा मिसिंग है। क्वेश्चन ही गलत है
क्या सर? गलत नहीं है। दिमाग चलाना पड़ेगा। तो वह कैसे चलेगा दिमाग? आप देखिए आपको मार्केट में कुछ जीरो कूपन बॉन्ड की
फॉरवर्ड सॉरी प्राइस दे रखी है आज के दिन की मार्केट प्राइस और उनकी पार वैल्यू मैच्योरिटी आपके पास
है। तो क्या आप इससे इन जीरो कूपन ब्ड की फॉरवर्ड रेट निकाल सकते हो? आपने सिमिलर क्वेश्चन किया है ना क्वेश्चन बैंक में।
बस केवल इतना क्वेश्चन देख के याद करो। किया था क्या? किया था। फॉरवर्ड रेट निकालते थे आप हर साल की और फॉरवर्ड रेट
जो आती है उसका अगर एवरेज कर देते थे अपन ओवरऑल तो क्या हो जाती थी वाईटीएम उसे हम बोलते हैं वाईटीएम
तो हमें वाईटीएम मिल जाएगी और एक बार वाईटीएम मिल गई तो हम क्या कर सकते हैं जो इस इन्वेस्टमेंट के कैश फ्लो है इनका पीवी
कर लेंगे वाईटीएम से तो क्या मिल जाएगी मार्केट प्राइस वाईटीएम मार्केट प्राइस ये सब है तो हम ड्यूरेशन भी निकाल सकते हैं
यानी ड्यूरेशन वाईटीएम और मार्केट प्राइस ऑफ पोर्टफोलियो तीन चीजें चाहिए थी हमें तीनों चीजें हमें मिल जाएगी बस खत्म फिर
उसके बाद तो क्वेश्चन हो जाएगा। यानी हमें सबसे पहले इसकी फॉरवर्ड डेट निकालनी पड़ेगी। हमारे जीरो कूपन बॉन्ड जो अलग से
मार्केट में अवेलेबल है वो जो दे रखे हैं। तो देखो फेस वैल्यू जीरो कूपन बॉन्ड की नहीं है। तो वो हमने 100 अस्यूम करी। अब
फॉरवर्ड डेट क्यों निकाल रहे हैं? उसका लॉजिक दे दिया। अभी कैलकुलेशन दिखा रहा हूं डायरेक्टली। कैलकुलेशन आपने कर रखी
है। कुछ भी नया नहीं है। अब तो मार्केट प्राइस इक्व फेस वैल्यू डिवाइड बाय 1 + r ये इसका लॉजिक आपको मालूम है कि जो फ्यूचर
में मिलेगा उसको पीवी कर लेंगे तो मार्केट प्राइस के बराबर। तो आपको यहां पे रेट मिल जाएगी 4%। अब इस क्वेश्चन में एक खासियत
बताओ। सेकंड ईयर की फॉरवर्ड रेट भी 4% ही है और थर्ड ईयर की भी 4% ही है। आप चाहे वेरीफाई कर लेना। ये देखो सेकंड ईयर की 4%
थर्ड की 4% ये मैंने निकाल के दिखाई है वेरिफिकेशन के लिए। क्वेश्चन में ये निकालने की जरूरत नहीं है। क्यों नहीं है
सर? ये ये एजम्पशन कहां से आई? ये एजम्पशन कहां से आई? तो उसके लिए देखो नोट्स में पहली एजम्पशन आपके पास क्वेश्चन में ही
लिखी है। कि इस क्वेश्चन में आप अस्यूम करिएगा फ्लैट टर्म स्ट्रक्चर चल रहा है इंटरेस्ट रेट का। ये वही सिक्योरिटी
वैल्यू्यूएशन के थ्यरी कांसेप्ट के अंदर जो थ्योरी वाला वीडियो उसमें आपको मिलेगी। की सेम चीज वहां पे भी रिपीट होगी। यहां
पे भी बताता हूं। टर्म स्ट्रक्चर थ्योरी जो है उसमें हमने देखा था वो इंटरेस्ट रेट चेंज की बात करती है कि मार्केट में
इंटरेस्ट रेट कैसे चेंज हो रही है। तो इन्होंने क्या बोला? मार्केट में इंटरेस्ट रेट का जो स्ट्रक्चर है वो फ्लैट है।
फ्लैट टर्म स्ट्रक्चर थ्योरी है। इसका मतलब इंटरेस्ट रेट हर साल मार्केट में सेम रहने वाली है। चेंज नहीं होने वाली। तो
यानी बस यहीं से पता चल गया। फॉरवर्ड डेट एक बार जो आई वही सेम आएगी। आप वेरीफाई भी कर सकते हो। इसके अलावा बाकी कैलकुलेशन
चार डेसिमल पॉइंट्स में नंबर ऑफ आईआरएफ कांटेक्ट ये सेकंड पॉइंट में होगा। ये होल नंबर में करना है। यानी डेसिमल में आए तो
राउंड ऑफ कर देंगे। बस ये सब आपको दे रखा है। अब देखो फॉरवर्ड डेट अगर हर साल की सेम है तो उसका एवरेज भी सेम होगा। यानी
वाईटीएम भी आपका सेम होगा। वाईटीएम भी क्या है? 4% बस यही पता करना था। ये मिल गया। अब क्या है? आपके जो इन्वेस्टमेंट
पोर्टफोलियो है उसमें हर साल 2 करोड़ मिलेंगे 2 साल तक। वो आईटीएम से पीवी किया 4% से। तो क्या मिल गई मेरे पोर्टफोलियो
की इन्वेस्टमेंट वैल्यू? आज की मार्केट प्राइस। ये वेट करा वेट इनटू ईयर किया तो क्या मिल गई? ड्यूरेशन मिल गई। यही सब
चीजें तो चाहिए थी। ड्यूरेशन आ गई तो वोलेटिलिटी निकाल लो। ड्यूरेशन डिवाइड बाय 1 + ytm ये आ गई वोलेटिलिटी या मॉडिफाइड
ड्यूरेशन जिसे आप बोलते हैं। अब वोलेटिलिटी को मल्टीप्लाई कर दो। परसेंटेज चेंज इन इंटरेस्ट रेट जो कि है 1% तो ये आ
गया परसेंटेज मार्केट प्राइस का कितना चेंज होगा? तो आज मार्केट प्राइस 3.7722 करोड़ है मेरे पोर्टफोलियो की इंटू ये जो
अभी अपन ने परसेंटेज चेंज निकाला था। तो यानी ये00545 करोड़ आया। आपको लैक्स में बताना है। यहां
पे बोला हुआ है तो लैक्स में कन्वर्ट कर दिया 5405 लै का। मार्केट प्राइस ऑफ़ पोर्टफोलियो में चेंज होगा। ये प्लस का
होगा कि माइनस वो डिपेंड करेगा इंटरेस्ट रेट बढ़ रही है तो माइनस होगा। इंटरेस्ट रेट गिर रही है तो प्लस होगा। वो बताया
नहीं है। बस इतना लिख के छोड़ देना। खत्म। क्वेश्चन काफी अच्छा है ये। मतलब दिमाग चलाना पड़ेगा। बट बढ़िया क्वेश्चन है। सेकंड
देखो। अब अब आप बताओ आपका जो पोर्टफोलियो है ना जो इन्वेस्टमेंट करे गए हैं इसको हैज करना है आपको इंटरेस्ट रेट रिस्क से।
और हैेजिंग कैसे करोगे? इंटरेस्ट रेट फ्यूचर यूज़ में लोगे। जो फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट मार्केट में इंटरेस्ट रेट का
अवेलेबल है, उसकी कॉन्ट्रैक्ट वैल्यू है 1 लाख और मॉडिफाइड ड्यूरेशन है फाइव। यानी वोलेटिलिटी फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट की दे रखी
है। अब इस क्वेश्चन में आईआरआरएम का पॉइंट आ गया। अब मैंने आपको एडिशनल प्रैक्टिकल टॉपिक्स में बताया था। देखो आईआरएफ मैंने
आपको इंटरेस्ट रेट फ्यूचर पढ़ाया हुआ है आईआरआरएम चैप्टर में। बट मैंने उसमें एडिशनल प्रैक्टिकल कांसेप्ट्स में क्या
बताया था कि आपके मॉड्यूल में जो है लोन लेने के बाद का फ्यूचर होता है। बट यहां पर क्या है? ये स्पेशल केस है जब आप
ऑलरेडी एक पोर्टफोलियो में इन्वेस्टमेंट करके बैठे हो और उसको हैज करना है। ऐसा पोर्टफोलियो जिसमें इंटरमीडिएट कैश फ्लो
होता है। तो अपने पोर्टफोलियो ऐसा है जिसमें आपको क्या मिलने वाले हैं? हर साल कैश फ्लो मिलने वाले हैं। आपका जो ये
पोर्टफोलियो होता है इस क्वेश्चन में इसमें हर साल 2-2 करोड़ मिलेंगे ना। इसे बोलते हैं इंटरमीडिएट कैश फ्लो। तो ऐसे
केस में आप क्या करते हो? आपके स्टेप्स तो वही लगते हैं जो आईआरआरएम में पढ़े आपने। बस जो नंबर ऑफ आईआरएफ कॉन्ट्रैक्ट निकालते
हो उसमें जब हम एक तरीके से जो सेंसिटिविटी फैक्टर लेते हैं जैसे बीटा जिसे बोलते हैं तो वहां पे हम लेते थे लोन
के डायरेक्टली मंथ्स यहां पे हम लेंगे मॉडिफाइड ड्यूरेशन वोलेटिलिटी क्योंकि वही सेंसिटिविटी है कि इंटरेस्ट रेट में चेंज
आएगा तो उससे पोर्टफोलियो पे क्या फर्क पड़ेगा तो पोर्टफोलियो वैल्यू डिवाइड बाय फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट वैल्यू इंटू क्या करते
हैं पोर्टफोलियो की वोलेटिलिटी यानी मॉडिफाइड ड्यूरेशन और फ्यूचर की वोलेटिलिटी मॉडिफाइड ड्यूरेशन बस इतना
चेंज करना है तो हैजिंग करनी है अब हैेजिंग करनी है तो सबसे पहला स्टेप होता है कि भैया आईआरएफ शॉर्ट कर रहा है या फिर
लॉन्ग कर यानी आईआरएफ सेल करने के बाद। तो मैंने आपको एक चीज बताई थी यह आईआरआरएम चैप्टर की याद दिला देता हूं। अगर मार्केट
में इंटरेस्ट रेट बढ़ेगी तो आईआरएफ की वैल्यू गिरेगी क्योंकि आईआरएफ में अंडरलाइन एसेट बॉन्ड होता है। ठीक है? और
अगर इंटरेस्ट रेट गिरेगी तो आईआरएफ की वैल्यू बढ़ेगी। समझ में आया? यानी अल्टीमेट मैंने क्रक्स क्या दिया था? अगर
आपको इंटरेस्ट रेट बढ़ने का डर है तो आईआरएफ आप शॉर्ट कर दो और इंटरेस्ट रेट गिरने का डर है तो आईआरएफ आप बाय कर लो।
तो ये पूरा लॉजिक आईआरआर में दिया हुआ है। अब बस वही लॉजिक लगाना है। अब मेरा ऑलरेडी एक पोर्टफोलियो है। इन्वेस्टमेंट कर रखा
है मैंने। इन्वेस्टमेंट कर दिया तो उसकी कूपन रेट वगैरह सब फिक्स हो चुके हैं। आप बताओ मुझे डर किस बात का लगेगा? इंटरेस्ट
रेट गिरने का कि बढ़ने का? अब सर ये क्या है? ये कहीं आपने पढ़ाया क्या? अरे ये लॉजिकल चीज है। कोई पढ़ाने की चीज नहीं
होती ये। फिर ये तो अब आपको दिमाग खुद से इतना तो लगाना पड़ेगा। कॉमन सेंस। अब मैंने इन्वेस्टमेंट कर दिया ऑलरेडी। यह
ऑलरेडी इन्वेस्टमेंट है मेरा। तो डर किस बात का लगेगा? इंटरेस्ट रेट बढ़ने का। सर बढ़ने का कैसे? पोर्टफोलियो एसेट है सर।
इंटरेस्ट रेट गिरने का डर लगना चाहिए। अरे मेरे भाई मैंने मान लो अभी यहां पे अपन ने जो इन्वेस्टमेंट किया इसमें वाईटीएम कितनी
है? 4% एक बार के लिए मैं मान लूं यही इंटरेस्ट रेट कूपन रेट वगैरह सब यही है। तो यानी मेरी मेरा कूपन तो फिक्स हो चुका
है ना। 4% फॉर एग्जांपल मैं ये अस्यूम कर रहा हूं। यह कूपन है इसमें। तो यह तो फिक्स हो चुका है मेरा। मैंने
इन्वेस्टमेंट कर दिया। तो अब मार्केट में इंटरेस्ट रेट अगर बढ़ गई तो यार मैंने तो 4% कूपन वाले में इन्वेस्ट कर दिया।
मार्केट में लोग 5% कूपन दे रहे हैं। फील कर रहे हो आप? अगर मैंने 4% कूपन पे इन्वेस्ट कर दिया। मार्केट में 3% कूपन हो
गया। मैं खुश होऊंगा। बढ़िया हुआ। मैंने 4% कूपन में इन्वेस्ट कर दिया। अब तो मार्केट में 3% ही मिल रहा है। समझ में आई
बात आपको? तो इंटरेस्ट रेट बढ़ने का डर है। बढ़ने का डर है तो आप आईआरएफ क्या करोगे? शॉर्ट करोगे। तो ये आईआरएफ आपका
लॉन्ग पोजीशन है पोर्टफोलियो में। यानी इंटरेस्ट रेट बढ़ने का डर है तो आप आईआरएफ शॉर्ट करोगे। अब नंबर ऑफ़ आईआरएफ
कॉन्ट्रैक्ट पोर्टफोलियो की वैल्यू अपन ने निकाली थी 3.772 करोड़। फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट की वैल्यू वो करोड़ में है और
यह इन लाख में है। तो इसको भी मैंने करोड़ में कन्वर्ट कर लिया। मल्टीप्लाई बाय पोर्टफोलियो की वोलेटिलिटी और फ्यूचर
कॉन्ट्रैक्ट की वोलेटिलिटी आपको दे रखी है। ये तो ये आ गए राउंड ऑफ करके 108 कॉन्ट्रैक्ट्स। लास्ट पार्ट बिल्कुल फालतू
है। इन्होंने बोला कुछ कैलकुलेशन नहीं करनी। इन्होंने बताया कि बताओ टोटल पोजीशन जो है आपकी वो सेम रहेगी। यानी इनसेंसिटिव
रहेगी। चाहे मार्केट में इंटरेस्ट रेट चेंज भी हो जाए। यानी आपका जो पोर्टफोलियो और उसका फ्यूचर जो पोर्टफोलियो और फ्यूचर
का कॉम्बिनेशन आपने बैठाया इसकी वजह से आप इनसेंसिटिव हो जाओगे। यानी आप पे कोई फर्क नहीं पड़ेगा। तभी तो हैजिंग करी थी ताकि
हम पे कोई इंपैक्ट ना आए। क्यों? क्योंकि देखो अगर मार्केट में इंटरेस्ट रेट बढ़ी तो इंटरेस्ट रेट बढ़ने से बताओ क्या होगा?
इंटरेस्ट रेट बढ़ेगी तो मेरा पोर्टफोलियो किसका है? बॉन्ड का तो मेरे पोर्टफोलियो की वैल्यू गिरेगी। फील कर पा रहे हो? मेरे
पोर्टफोलियो की वैल्यू गिरेगी। यही तो मुझे डर था। मेरे पोर्टफोलियो की वैल्यू गिरेगी। लेकिन इंटरेस्ट रेट बढ़ेगी
पोर्टफोलियो की वैल्यू गिरेगी। मैंने आईआरएफ शॉर्ट किया हुआ है। आईआरएफ शॉर्ट करने का मतलब क्या है? आईआरएफ आपने जो
शॉर्ट किया है तो उसके अंदर जो अंडरलाइंग एसेट है वह अंडरलाइन एसेट आपने एक तरीके से बेची है तो अंडरलाइंग एसेट क्या है
उसके अंदर बॉन्ड तो इंटरेस्ट रेट बढ़ने से बॉन्ड की वैल्यू गिरी होगी यानी आईआरएफ की वैल्यू जो है वो गिरी होगी आईआरएफ की
वैल्यू 100% गिरी होगी ठीक है कंफर्म गिरी होगी तो यानी आईआरएफ शॉर्ट किया तो आईआरएफ पे मुझे क्या हुआ होगा गेन यानी जितना
मुझे पोर्टफोलियो पे लॉस हुआ होगा उतना आईआरएफ पे गेन हुआ होगा तो ये दोनों मिला के ज़ीरो हो जाएगा तो बस यही आपको दिखाना
है इक्वेशन बनाकर क्या होगा तो देखो इंटरेस्ट इंटरेस्ट रेट चेंज का मेरे पे कोई इंपैक्ट नहीं आएगा। फॉर एग्जांपल
इंटरेस्ट रेट चेंज होती है Z से। इन्होंने Z से रिप्रेजेंट कर दिया। X वZ कुछ भी रिप्रेजेंट कर दो क्योंकि दे नहीं रखा है
कुछ भी। तो ये मेरा पोर्टफोलियो जो है 3.772 करोड़ का है। इंटरेस्ट रेट चेंज का इंपैक्ट
कैसे लेते हैं? वोलेटिलिटी मल्टीप्लाई बाय इंटरेस्ट रेट चेंज। ये अगर आप पोर्टफोलियो वैल्यू से मल्टीप्लाई कर देंगे मार्केट
प्राइस से तो आपको पता चल जाएगा मार्केट प्राइस में कितना चेंज होगा। हम बात करें इंटरेस्ट रेट बढ़ेगी। तो क्योंकि वही तो
हमें डर था। तो यानी पोर्टफोलियो वैल्यू में गिरावट होगी यानी माइनस। लेकिन जो फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट है इंटरेस्ट
रेट बढ़ेगी तो फ्यूचर में फायदा होगा तो प्लस फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट कितने करे थे 108 एक कॉन्ट्रैक्ट ₹1 लाख का था इसमें फायदा
आपका कितना होगा वही वोलेटिलिटी इन इंटरेस्ट रेट का चेंज फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट की वोलेटिलिटी तो उतना ही फायदा हो जाएगा
जितना इसमें लॉस हो रहा है तो अल्टीमेटली नेट जीरो हो जाएगा रिजल्ट कंप्लीट ये क्वेश्चन इसके बाद नेक्स्ट
क्वेश्चन देखिए अब आप लोग यह जो क्वेश्चन है यह भी आपका आईआरआरएम चैप्टर का ही है और यह क्वेश्चन काफी इजी क्वेश्चन है। बस
लेंथी बहुत ज्यादा है यह क्वेश्चन। एक तरीके से मान लीजिए समझाने के पर्पस से यह क्वेश्चन। एग्जाम में आते हैं तो पूरा
डिट्टो एज इट इज नहीं आ सकते। उसको कट शॉर्ट करके देंगे। अगर डिट्टो दे दिया तो फिर तो आपका एक घंटा चला जाएगा। है ना?
40-50 मिनट तो जाने ही जाने हैं। प्रैक्टिस हुई तो एक अलग बात है। तो भी आधा घंटा तो कम से कम लग जाएगा। देखो इस
क्वेश्चन में क्या है? आज 31 दिसंबर 2025 है। हमें इंटरेस्ट रेट मार्केट में लग रहा है। वेलेटाइल है, चेंज होती रहेंग और हमें
₹ करोड़ का लोन चाहिए 6 महीने के लिए आज के दिन। मार्केट में अभी 14% पे लोन मिल रहा है।
तो ले लो सर आपको लोन चाहिए तो। अब ट्रेजर जो है वो इससे ज्यादा पे नहीं करना चाहता और अपनी इंटरेस्ट रेट इसको हैज करना चाहता
है। तो अब मार्केट में इंटरेस्ट रेट वोलेटाइल है तो उसकी हैेजिंग यह कैसे करें? उसकी बात करनी है तो उसके पास दो
तरीके हैं। आईआरएफ है और इंटरेस्ट रेट गारंटी है। इंटरेस्ट रेट फ्यूचर या इंटरेस्ट रेट गारंटी। ठीक है? वही लोन
लेने वाला केस वाला हो गया। अपने पास जो क्वेश्चन बैंक में क्वेश्चन है ना सिमिलर वही क्वेश्चन है। बस केसेस ज्यादा बन
जाएंगे और कुछ भी नया नहीं है इसमें। जो नया एक पॉइंट होगा वो भी बता दूंगा। उसका कोई रोल ही नहीं है। अब देखो कॉर्पोरेट
ट्रेजर जो है कंपनी का उसने सोचा कि एक्सपेक्ट कर रहा है कि मार्केट में जो इंटरेस्ट रेट है ना अभी ऑलमोस्ट इमीडिएटली
जो है 2% बढ़ जाएंगे। क्योंकि अभी मुझे लोन चाहिए ना 14% पे मिल रहा है बट 2% से इंटरेस्ट रेट बढ़ने का आपको नजर आ रहा है
कि इंटरेस्ट रेट 2% से बढ़ जाएगी और इसने डिसाइड किया कि वो इंटरेस्ट रेट रिस्क को हैज करेगा आईआरएफ के थ्रू ये
तरीके से तो आईआरएफ का डाटा दे रखा है इंटरेस्ट रेट फ्यूचर को वो यूज़ करना चाह रहा है तो इंटरेस्ट रेट फ्यूचर 3 मंथ्स का
मार्केट में अवेलेबल है ठीक है आपको लोन चाहिए 6 महीने का फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट की वैल्यू जो होगी वो 3 महीने के पीरियड के
लिए फ्यूचर्स की आज के दिन मार्केट प्राइस दे रखी है 86.25 फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट की प्राइस कैसे आती है? आईआरएफ में मैंने
बताया था 100 माइनस इंटरेस्ट रेट। तो सर मार्केट में इंटरेस्ट रेट आज के दिन तो 14% है। 100 - 14 86 होना चाहिए। नहीं
यहां पे फ्यूचर की प्राइस अलग है तो अलग हो सकती है। तो यानी फ्यूचर के अंदर इंटरेस्ट रेट कितनी होगी? 100 में से
कितना माइनस किया होगा? जब 86.25 आया होगा। 13.75% यानी फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट 13.75% पे हो रहा होगा। ठीक है? इसके बाद
फ्यूचर की कॉन्ट्रैक्ट साइज दे रखी है ₹ लाख की। ठीक है? इसके आगे सर कुछ लिखा हुआ है जो मैंने हाईलाइट भी कर रखा है और यह
समझ में नहीं आ रहा क्या है यह कोई काम का भी नहीं है। इग्नोर कर दो। बिल्कुल बेकार बात है। फालतू बात है ये। ये थ्यरिटिकल
वही थ्यरिटिकल में आपके पार्ट में कवर होती है। थ्यरिटिकल वीडियो में इसका कांसेप्ट आपको मिलेगा। अभी क्या लिखा हुआ
है। बट ये क्वेश्चन सॉल्विंग के लिए कुछ काम का नहीं है। थ्यरिटिकल पॉइंट है। क्या पॉइंट है? देखो फ्यूचर में क्या होता है?
फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट किया तो हमारा इंटरेस्ट रेट का फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट है। तो इंटरेस्ट रेट का चेंज जो होगा उसके
अकॉर्डिंग गेन लॉस होगा। तो आज मान लो 13.75% फ्यूचर में इंटरेस्ट रेट है फ्यूचर की। मार्केट में जो इंटरेस्ट रेट फ्यूचर
की चेंज हो के मान लो 15% हो जाती है यानी 1.25% से बढ़ गई। ठीक है? या फिर कुछ भी हो जाती है। तो इसे हम बोलते हैं चेंज। तो
इन्होंने बोला कि मिनिमम जो प्राइस मूवमेंट है वो वन टिक होगा और एक टिक की वैल्यू है 0.01% पर ईयर ऑफ द कॉन्ट्रैक्ट
साइज। सर क्या बोल दिया समझ ही नहीं आ रहा। इसका बेसिक मीनिंग मैं बताता हूं। मार्केट की एक टेक्निकल वर्डिंग है टिक।
टिक क्या है? मार्केट की टेक्निकल वर्डिंग है फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट वगैरह में जो यूज़ होती है। टिक का मतलब क्या होता है? टिक
का मतलब है कि मिनिमम चेंज कितना आएगा? इसमें ये इंटरेस्ट रेट का फ्यूचर है। तो इंटरेस्ट रेट के अंदर मार्केट में मिनिमम
चेंज कितना आ सकता है? तो यार 13.75% की इंटरेस्ट रेट है ना आज के दिन? तो मिनिमम01%
से बढ़ेगी या गिरेगी? मिनिमम इतना तो होगा। यानी मिनिमम 13.76% या 13.74%
मिनिमम चेंज ये आ सकता है। इससे कम और चेंज नहीं हो सकता कि आप बोलो 13.752% हो जाए। ऐसा नहीं मतलब टू डेसिमल्स में
रहेगी। इंटरेस्ट रेट टू डेसिमल्स में रहेगी। ये कोई काम का नहीं है। ये बिल्कुल फालतू बात है। इससे अपने को कोई लेना देना
नहीं है। ठीक है? तो इग्नोर करो इस चीज को। आगे बढ़ो। अब आपको बताना है फ्यूचर को यूज़ में लेके
हैजिंग करते हो तो तीन सिनेरियोस हैं। आप बताओ अगर इंटरेस्ट रेट 2% से बढ़ गई और फ्यूचर रेट 2% से बढ़ गई। अब ये क्या है
सर? इंटरेस्ट रेट 2% से बढ़ गई और फ्यूचर रेट। अब इंटरेस्ट रेट देखो अपने क्वेश्चन में दो थी। एक तो स्पोर्ट मार्केट में
कितनी है? तुरंत लोन लेने जाओ तो और फ्यूचर मार्केट में जो आईआरएफ है उसमें इंटरेस्ट रेट कितनी थी? 86.25 प्राइस थी।
तो उसके अकॉर्डिंग मैंने बताई थी ना 13.75% तो स्पोर्ट मार्केट में इंटरेस्ट रेट
कितनी बढ़ गई? 2% से बढ़ गए यानी 16% और फ्यूचर मार्केट में इंटरेस्ट रेट कितनी बढ़ी है? यहां पे भी 2% यानी 13.75 + 2
15.75% क्योंकि फ्यूचर का सेटलमेंट फ्यूचर प्राइस के अकॉर्डिंग फ्यूचर इंटरेस्ट रेट के
अकॉर्डिंग होगा गेन लॉस। बस ये ध्यान देना है। सेकंड केस में स्पोर्ट मार्केट में तो 2% बढ़ी है बट फ्यूचर मार्केट में केवल
1.5% बढ़ी है। थर्ड केस में इंटरेस्ट रेट स्पोर्ट मार्केट में 1% से गिरी है और फ्यूचर में 75% से मूव करी है। तो इसमें
गिरी है तो उधर भी गिरी होगी 0.75 से। ठीक है? टाइम वैल्यू ऑफ मनी वो सब इग्नोर करना है।
जैसे अपने क्वेश्चन में होता था फ्यूचर वाले में वैसा ही है। तो इंटरेस्ट रेट बिगिनिंग में देखो स्पॉट मार्केट की और
फ्यूचर मार्केट की। अब आपको लोन लेना है तो इंटरेस्ट रेट बढ़ने का डर है तो वही आईआरएफ शॉर्ट करोगे। कितने करोगे? लोन
कितने का चाहिए आपको? ₹ करोड़ का आपको लोन चाहिए। एक कॉन्ट्रैक्ट की वैल्यू कितनी है फ्यूचर की? ₹2 लाख। लोन 6 महीने का चाहिए।
फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट 3 महीने का है। लिखा हुआ है। तो यानी 200 कॉन्ट्रैक्ट आपको शॉर्ट करने पड़ेंगे। बस अब नेट इंटरेस्ट
पेमेंट निकाल लीजिए तीन सिनेरियो में। तो पहले अपन बात करेंगे फ्यूचर इंटरेस्ट रेट क्या हो गई और उसकी प्राइस क्या हो गई
फ्यूचर की तभी तो गेन लॉस निकाल पाएंगे मैच्योरिटी पे तो मैच्योरिटी पे फ्यूचर इंटरेस्ट रेट देखो क्या हो गई 2% से बढ़ी
पहले 13.75 थी फ्यूचर वाली से देखो तो इसमें टू बढ़ा दो यहां पे भी टू बढ़ी 1.5 बढ़ी थी और यहां पे75 से माइनस हुई थी अब
ये फ्यूचर की इंटरेस्ट रेट आ गई तीनों सिनेरियो में मतलब तीनों सिनेरियो अलग-अलग सॉल्व करने हैं आपको अलग-अलग सिनेरियोस
हैं ये क्वेश्चन के एक ही के तो प्राइस क्या होगी 100 माइनस फ्यूचर की इंटरेस्ट रेट 100 माइनस फ्यूचर इंटरेस्ट रेट यह
प्राइस आ जाएगी तीनों सिनेरियो में। अब गेन या लॉस तो देखो अपन जब नेट पेमेंट निकालते हैं तो एक्चुअल पेमेंट इंटरेस्ट
का लेंगे तो लॉस भी क्या है? एक तरीके का पेमेंट है। प्लस करेंगे तो गेन माइनस है इसलिए मैंने गेन को माइनस में लिया है
यहां पर। तो गेन लॉस कैसे आएगा? बाय सेल के अकॉर्डिंग अपन ने स्टार्टिंग में क्या किया था? सेल किया था। किस प्राइस पर? जो
स्टार्टिंग की प्राइस थी 86.25 इस पे सेल किया था ना। शॉर्ट किए थे कॉन्ट्रैक्ट। तो यानी अब यह वाली जो प्राइस है इस पे हम
क्या करेंगे? बाय करेंगे। तो देखो 86.25 पे सेल किया था। बाय 84.25 पे करूंगा तो गेन। ठीक है? ये क्या होगा? गेन होगा।
नंबर ऑफ कॉन्ट्रैक्ट्स एक फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट की वैल्यू इन फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट का पीरियड। यह पूरा का पूरा
आईआरआर से एज़ इट इज़ आ रहा है। तो गेन नेगेटिव में ऐसे यहां पे भी गेन आ गया और यहां पे लॉस आ गया इस सिनेरियो में
अलग-अलग इंटरेस्ट रेट वाले सिनेरियो में। एक्चुअल इंटरेस्ट एक्चुअल देखो 2 करोड़ का लोन। मार्केट में किस रेट पे मिला होगा?
इस वाले केस में 14 + 2 16% पे। इधर भी 16% पे और इधर 1% से रेट गिर गई यानी 13% पे 6 महीने का लोन। तो यह एक्चुअल
इंटरेस्ट लोन पे क्योंकि मार्केट में एक्चुअल लोन तो लिया ही है मैंने। तो नेट पेमेंट मेरा कितना हुआ? एक्चुअल इंटरेस्ट
प्लस लॉस या माइनस गेन। अब देखो इस क्वेश्चन में आपने फ्यूचर हैजिंग कर ली। उसका नेट
पेमेंट निकाल दिया। यह अपन करते हैं। बट इस क्वेश्चन में इन्होंने एक और प्रेजेंटेशन करी है। क्या? अगर हम फ्यूचर
से हैजिंग नहीं करते। आईआरएफ नहीं करते तो क्या होता? आईआरएफ नहीं करते तो हम स्टार्टिंग में तुरंत 14% पे जब लोन मिल
रहा था तुरंत ही बैंक वाले को बोलते अभी दे दे माथापच्ची नहीं करते तो 14% से मेरा इंटरेस्ट का पेमेंट होता तो फ्यूचर करने
की वजह से क्या हुआ तो यहां पे देखो यहां पे तो कोई फर्क नहीं पड़ा बट इस केस में फ्यूचर में पेमेंट 14500 का हुआ फ्यूचर
करने की वजह से यहां 14 लाख का ही होता यानी इतनी एक्स्ट्रा कॉस्ट आई यहां पे फ्यूचर में पेमेंट 1375 होता और अगर
फ्यूचर नहीं करते तो 14 होता यानी 25000 की बचत हो गई नेट गेन लॉस तो गेन नेगेटिव में दिख रहा है वही सेम
सेकंड पार्ट देखो क्वेश्चन का इंटरेस्ट रेट गारंटी का इंटरेस्ट रेट गारंटी का ऑप्शन भी था ना इसमें क्या होता है हम एक
रेट फिक्स कर लेते हैं तो हमने फिक्स कर ली इंटरेस्ट रेट गारंटी 14% पे प्रीमियम देना पड़ेगा लोन का बैंक वाले को 2% तो
यानी 14% से इंटरेस्ट रेट ऊपर हुई तो मैं 14% पे लोन ले लूंगा कम हुई तो मार्केट रेट पे लोन ले लूंगा अपन ने क्वेश्चन किया
हुआ है तो वही बताना है आपको हर सिनेरियो में कि अगर इंटरेस्ट रेट गारंटी करे तो क्या होगा फिर उसको साथ में कंपेयर भी
करना है फ्यूचर के साथ कि बताओ इंटरेस्ट रेट गारंटी चीपर है कि एक्सपेंसिव है यह बताना है फ्यूचर के कंपैरिजन में तो देखो
स्पोर्ट रेट कितनी हो गई मार्केट में वो देखो तो 14 + 2 14 + 2 14 - 1 जो क्वेश्चन में ऊपर डाटा दिया हुआ था उसी के
अकॉर्डिंग तो आप बताओ इंटरेस्ट रेट गारंटी एक्सरसाइज करूंगा क्या स्ट्राइक रेट कितनी बताई 14% तो यहां करूंगा यहां करूंगा या
मार्केट में कम हो गई तो क्यों करूंगा 14% पे तो इंटरेस्ट पेमेंट कितना होगा यहां पे 14% पे यहां 14 पे यहां 13% पे इंटरेस्ट
रेट गारंटी का प्रीमियम भी पे होगा 2% जो आपका ₹ करोड़ के अमाउंट का है तो नेट पेमेंट क्या होगा ये होगा इंटरेस्ट रेट
गारंटी में तो अब आपको कंपैरिजन करना है आईआरएफ से। तो देखो आईआरएफ में पहले वाले सिनेरियो में 14 लाख का पेमेंट है और
इंटरेस्ट रेट गारंटी करते हैं तो 1440 का तो यह एक्सपेंसिव है। सेकंड सिनेरियो में 1450 का पेमेंट था। यहां 1440 का यानी ये
चीपर है। ऐसे ही लास्ट वाले सिनेरियो में 1375 था। यहां 1340 है। यानी यहां पे भी ये चीपर है। कंप्लीट ये क्वेश्चन आपका।
इसके बाद यह क्वेश्चन देखो। नेक्स्ट ये भी आईआरआरएम का है। बेसिक क्वेश्चन है काफी। इसमें देखो दो लोगों की आपको काम करनी है।
दो बार वर्किंग करनी है दो कंपनीज़ के लिए। एक बोरोअ लोन लेने वाला बंदा और एक पैसा इन्वेस्ट कर रहा है कहीं पे। 50 लाख का
मैं लोन ले रहा हूं। पहले लोन लेने वाले की बात करते हैं। 5 साल का मैं लोन ले रहा हूं। मेरे को एप्लीकेबल इंटरेस्ट रेट है
पीएलआर प्राइम लैंडिंग रेट प्लस5%। इसका मतलब क्या हुआ? मैंने फ्लोटिंग रेट पे लोन लिया है। फ्लोटिंग रेट पे। ठीक है? उस पे
स्प्रेड भी है। स्प्रेड कोई काम का नहीं होता। जब हैेजिंग वगैरह की बात होगी तब। स्ट्राइक रेट है 8%। स्ट्राइक रेट किसकी
है? यानी यहां पर पक्का कैप या फ्लोर ऑप्शन की बात होगी। उसमें होती है स्ट्राइक रेट। प्रीमियम लमसम दे रहा हूं।
4% लोन अमाउंट का प्रीमियम देना पड़ेगा ना कैप ऑप्शन लूंगा क्योंकि लोन ले रहा हूं। लोन लेते वक्त मुझे डर क्या लगेगा
इंटरेस्ट रेट बढ़ने का तो मैं कैप ऑप्शन लूंगा। सिंपल सी बात है। 6 महीने बाद रिसेट पीरियड है 6 महीने का। यानी हर 6
महीने में इंटरेस्ट रेट रिसेट होगी मार्केट की पीएलआर फ्लोटिंग रेट। 6 महीने बाद मार्केट में इंटरेस्ट रेट 10% हो गए
तो मेरे पे एप्लीकेबल इंटरेस्ट रेट ये लग जाएगी पीएलआर के अकॉर्डिंग। तो 10% पे ब्याज देना पड़ेगा। मैंने स्ट्राइक रेट 8%
है। अगर कैप ऑप्शन ले लेता हूं तो 2% मुझे पे ऑफ मिल जाएगा। समझ पा रहे हो? ऐसे डिपॉजिटर 20 लाख मैं इन्वेस्ट करूंगा 3
साल के लिए फ्लोटिंग रेट पर। यहां पे भी 8% स्ट्राइक रेट है। अब ये किसकी होगी? फ्लोर ऑप्शन। मैं इन्वेस्टर हूं तो मुझे
डर लगेगा इंटरेस्ट रेट गिरने का तो फ्लोर ऑप्शन खरीद लूंगा। यानी अगर इस स्ट्राइक रेट से नीचे मार्केट में इंटरेस्ट रेट हुई
तो मुझे वो डिफरेंस का पे ऑफ मिल जाएगा फ्लोर ऑप्शन खरीदने पर। प्रीमियम देना पड़ेगा वही। और देखो 6 महीने बाद मार्केट
में इंटरेस्ट रेट 6% हो गई। स्ट्राइक रेट है 8% यानी 2% का मुझे पे ऑफ मिल जाएगा। तो सबसे पहले तो यह बताओ दोनों लोग कौन सी
स्ट्रेटजी फॉलो करेंगे? यह लेगा कैप ऑप्शन यह फ्लोर ऑप्शन। ये तो आंसर हो गया अपना क्वेश्चन पढ़ते-पढ़ते। ठीक है? क्या डर
लगेगा उसके अकॉर्डिंग? ये तो अपन ने पढ़ा हुआ है। सेकंड और थर्ड पार्ट इस क्वेश्चन में साथ में देखने पड़ेंगे क्योंकि उसके
अकॉर्डिंग कैलकुलेशन होगी। सेकंड पार्ट में क्या है? प्रीमियम पेड या रिसीव्ड बेस्ड ऑन स्ट्रेटजी यूज्ड इन फर्स्ट
पार्ट। फर्स्ट पार्ट में जो भी आपने स्ट्रेटजी पता करी है उसके अकॉर्डिंग प्रीमियम आपको पे करना पड़ेगा या मिलेगा
वो कैलकुलेट करके बताओ। तो मिलता कब है? जब ऑप्शन सेल करते हैं। हमने ऑप्शन सेल नहीं किया। हमने तो दोनों ने ही ऑप्शन बाय
किया है। देखो तो प्रीमियम पे करना पड़ेगा। प्रीमियम पे होगा। क्लियर है? ठीक है? अब प्रीमियम पे होगा। कितना होगा? यह
50 लाख का 4% यह 20 लाख का 5% 50 लाख का 4% और यह 20 लाख का 5% यह प्रीमियम का अमाउंट है। ये हो गया सेकंड पार्ट
कंप्लीट। देखो सेकंड पार्ट का कंसेप्चुअली इतना ही आंसर हो जाता। बट थर्ड पार्ट को एक बार अब मिक्स करते हैं। इसलिए मैंने
सेकंड और थर्ड का सॉल्यूशन एक साथ किया है। और सेकंड पार्ट में सर ये क्या लिखा हुआ है वो भी फिर अपन डिस्कस करेंगे। उसी
के अकॉर्डिंग आगे का। थर्ड पार्ट में आपको बोला है कि यह जो आपने हैेजिंग करी है ना कैप ऑप्शन फ्लोर ऑप्शन ले इसकी वजह से नेट
गेन लॉस कितना हुआ? अब आपको याद आ जाना चाहिए कैप ऑप्शन फ्लोर ऑप्शन वाले टॉपिक में मैंने आपको बताया था अगर नेट पे ऑफ या
नेट गेन लॉस ड्यू टू हैेजिंग अगर आपसे पूछता है क्वेश्चन में तो आपको क्या करना पड़ेगा? हर रिसेट डेट पर जो भी आपको पे ऑफ
मिलेगा उसमें से आपको माइनस करना है क्या? प्रीमियम एलोकेटेड टू ईच रिसेट डेट। क्योंकि ये जो प्रीमियम है ये तो इकट्ठा
पे करेंगे। बट नेट गेन लॉस बताना है तो वो तो रिसेट डेट पे ही बताएंगे। पेमेंट जब होगा पेमेंट डेट जिसे हम बोलेंगे एक तरीके
से जब एक्चुअल में पे ऑफ्स आएंगे यानी 6 महीने बाद रिसेट होगा जब तो जब पे ऑफ मुझे मिलेगा कैप ऑप्शन वाले को देखो 10%
मार्केट में हो गई तो 8% स्ट्राइक रेट थी 2% का पे ऑफ इसे मिलेगा और 8% स्ट्राइक रेट थी 6% मार्केट में हो गई इसने फ्लोर
ऑप्शन लिया था तो इसे भी 2% का पे ऑफ मिलेगा तो यह पे ऑफ मिलेगा या गेन है बट हमने प्रीमियम भी तो दिया था यह पूरा
प्रीमियम माइनस कर दो नहीं पूरा प्रीमियम तो पूरे लोन वाले पीरियड के लिए होगा यह 5 साल का लोन है ये 3 साल यह तो केवल 6
महीने का एक एक पीरियड का डाटा दिया हुआ है। तो इस इस पीरियड का नेट गेन लॉस इसलिए नेट गेन लॉस या नेट पे ऑफ पूछता है। तो
मैंने क्या बताया था? जो प्रीमियम आप टोटल पे करते हो उसे ओवर द पीरियड हर रिसेट पीरियड में हर रिसेट पीरियड में हर रिसेट
डेट पर एलोकेट करोगे। यानी ईच पेमेंट डेट के लिए आप इस प्रीमियम को एलोकेट करोगे। यानी इंस्टॉलमेंट में अगर प्रीमियम जा रहा
होता तो कितना होता वो पता करोगे। फिर आपको नेट पे ऑफ मिल जाता है। बस यह वही क्वेश्चन है। इसको देख के घबराना नहीं है।
कुछ नया कुछ भी नया नहीं है। तो यानी प्रीमियम जो आपने निकाला उसको आपको एलोकेट भी करना है हर पेमेंट डेट में। तो पहले
एबी लिमिटेड बोरोअर के लिए कर देते हैं। जैसे कैप ऑप्शन लिया। तो मेरा प्रीमियम है 20,000 जो मैं पे करूंगा। अब मुझे नेट गेन
लॉस नेट पे ऑफ निकालना है। तो मुझे प्रीमियम को हर पेमेंट डेट पे एलोकेट करना है तो एलोकेट कर दो। 20,000 का प्रीमियम
एलोकेट कैसे होगा? इसके लिए मैंने आपको बताया था पीवी करेंगे। पीवीएफ से डिवाइड करेंगे। किसका? पीवीएफ फिक्स्ड इंटरेस्ट
रेट्स फॉर नंबर ऑफ पीरियड्स जो भी आपके रिसेट पीरियड आने वाले हैं उतने पीरियड्स का पीवीएफ फिक्स्ड इंटरेस्ट रेट क्वेश्चन
में अलग से कहीं से देखोगे तो पढ़ने को नहीं मिलेगी तो इस पार्ट में दी थी आपको सेकंड पार्ट में 8% रेफरेंस रेट काम में
ले लेना इसका मतलब यह क्यों दिया इसलिए दिया कि यह फिक्स्ड इंटरेस्ट रेट की तरह आप इसको काम में ले लेना एलोकेट करते वक्त
तो यही है आपकी फिक्स्ड इंटरेस्ट रेट क्योंकि उसके बिना आप कैसे लोगे तो 8% फिक्स्ड इंटरेस्ट रेट ये पढ़ा है ना मैं
मेरे रिसेट पीरियड 6 महीने के तो इंटरेस्ट रेट हाफ करनी पड़ेगी यानी 4% अब मेरे बताओ टोटल रिसेट पीरियड कितने हैं? 5 साल का
लोन है। 6 महीने का एक पीरियड है यानी टोटल 10 पीरियड्स। तो बस 4% से 10 पीरियड्स का पीवीएफ से डिवाइड किया। ये आ
गया। हर पेमेंट डेट पे मैंने एलोकेट कर दूं प्रीमियम तो इतना बनता है। तो अब बस कुछ भी नहीं है। पे ऑफ क्या होगा? 50 लाख
के लोन पे 10% इंटरेस्ट, 8% स्ट्राइक रेट, 2% का पे ऑफ। 6 महीने का पीरियड है तो 6 महीने का पे ऑफ इतना आएगा और इतना मेरा
प्रीमियम एलोकेट होगा तो यह जाएगा। तो यह मेरा हो गया नेट गेन। ऐसे ही XY LED का टोटल प्रीमियम वही एलोकेट कर देंगे
अह वही 4% से कितने 3 साल में छ पीरियड पे इसका पे ऑफ 6% 8% 2% का पे ऑफ मिलेगा इसे भी क्योंकि इसने फ्लोर ऑप्शन लिए इंटरेस्ट
रेट गिरी है तो इसे मिलेगा पे ऑफ प्रीमियम इसका जो एलोकेट हुआ माइनस हो गया तो ये आ गया नेट गेन नेट यहां पे आपका गेन ये आ
चुका है बस कंप्लीट है ये क्वेश्चन इसके बाद ये क्वेश्चन देखो ये क्वेश्चन अगर आप देखोगे तो लगेगा बिल्कुल डिट्टो सर
किया हुआ है बिल्कुल किया हुआ है आपने बिज़नेस वैल्यू्यूएशन। बिज़नेस वैल्यू्यूएशन चैप्टर में डिट्टो सेम क्वेश्चन अपन ने कर
रखा है। ये बिल्कुल सेम वैल्यू्यूज है। वैल्यू्यूज तक भी चेंज नहीं करी इन्होंने। बट इस क्वेश्चन में एक चीज चेंज कर दी।
मैं बताता हूं ना कि देखो जो एफएम है ना इसमें बहुत सिंपल खेल है इंस्टट्यूट के पास। अगर इनको कभी भी पेपर टफ करना है।
आपको लगाना है, झटका देना है एग्जाम में। कुछ नहीं करते। ये क्या करते हैं? क्वेश्चन को रिवर्स कैलकुलेशन में कन्वर्ट
कर देते हैं। जो क्वेश्चन था उसमें फाइनल आउटकम आपको दे देंगे। आपको स्टार्टिंग का कुछ डाटा पूछ लेंगे। यानी रिवर्स
कैलकुलेशन में कन्वर्ट कर देंगे। या फिर क्या होगा? जो एकिस्टिंग कांसेप्ट्स हैं उनको ही उठाकर कोई नया क्वेश्चन फ्रेम हो
जाएगा। बस यह होता है। तो उसके लिए आपको कांसेप्ट पे नोट्स पे सीबी पर कमांड होनी चाहिए। उसमें जो कांसेप्ट दे रखे हैं,
स्टेप्स दे रखे हैं वो आपके दिमाग में चलने चाहिए। अदरवाइज आप कर ही नहीं सकते। अगर ज्यादा आप होशियार बनने की कोशिश
करोगे कुछ हो ही नहीं पाएगा। इसका यही एक फिक्स तरीका है। और वो मैं क्लास में आपको बताता भी हूं। सोचने का तरीका भी सिखाता
हूं। जब मैंने इतने क्वेश्चन आपको प्रैक्टिस कराए थे रिवर्स कैलकुलेशन के हर चैप्टर के अंदर जो जो क्वेश्चंस होते थे
तब आपको सोचने का तरीका भी सिखाया था कैसे सोचना होता है। देखो अभी फटाफट क्वेश्चन एच लिमिटेड एक कंपनी है जो B लिमिटेड को
खरीदना चाहती है। करोड़ों ऑफ रुपीज में इनकी बैलेंस शीट का डाटा दिया हुआ है 31 मार्च 2026 का। इसके नेक्स्ट डेट से हम
इसको खरीदने की बात कर रहे हैं। अगले दिन से अब हम आपको खरीद लेंगे। खरीदेंगे तो सामने वाले को कंसीडरेशन देना पड़ता है।
तो कंसीडरेशन देने के लिए हमने क्या डिसाइड किया है कि हम सामने वाले को जो पैसा देंगे ना वो फेयर वैल्यू पर शेयर के
बेसिस पर देंगे। वो इन्होंने नीचे बात लिखी हुई है। सेम क्वेश्चन होता है। तो एक बार मैं आपको ओवरव्यू दे रहा हूं। तो शेयर
कैपिटल दोनों की दे रखी है। रिजर्व्स ये बैलेंस शीट का सारा डाटा है। लायबिलिटी साइड में और कोई लायबिलिटी नहीं है। अब H
लिमिटेड देखो B को बाय कर रही है। कैसे कर रही है? इन्होंने डायरेक्टली फाइनल आंसर दे दिया। B लिमिटेड को हम इतने शेयर्स इशू
करने वाले हैं। 100 ईच वाले अपने अपने शेयर्स की फेस वैल्यू 100 होगी देखो H की और B लिमिटेड के शेयर्स की फेस वैल्यू ₹10
तो B लिमिटेड की 6.5 करोड़ की कैपिटल है यानी65 करोड़ यानी 65 लाख शेयर्स हैं B लिमिटेड के 65 लाख शेयर्स के बदले कितने
शेयर्स देंगे 1161550 तो आप एक्सचेंज रेशियो बता सकते हो कितना है 1161550
/ 65 लाख यह शायद 1787 कुछ आएगा इस क्वेश्चन में देखेंगे इसका रोल होगा इतना एक्सचेंज रेशियो यानी अपने एक शेयर उसके
एक शेयर के बदले में अपना अपना इतना शेयर दे रहा हूं। यह इसका मतलब है। वो आपको क्वेश्चन में दिया हुआ है। आपके पास जो
बिज़नेस वैल्यूशन में क्वेश्चन आया उसमें यह निकालना था एक्सचेंज रेशियो। अब उस क्वेश्चन में एक्सचेंज रेशियो निकालना
कैसे था? दोनों कंपनीज़ अपने फेयर वैल्यू ऑफ़ शेयर निकालेंगे। B लिमिटेड की फेयर वैल्यू कितनी है? और A लिमिटेड की कितनी
है? उसके बेसिस पे हम एक्सचेंज रेशियो के बेसिस पर सामने वाले को शेयर इशू करने की बात कर रहे थे। तो एक्सचेंज रेशियो
निकालना था। तो इस क्वेश्चन में भी क्या बोला? हमने एक्सचेंज रेशियो पता है कैसे डिटरमाइन किया? फेयर वैल्यू बेसिस पर
शेयर्स की फेयर वैल्यू पता करी दोनों कंपनीज़ के। तो ये 1787 का एक्सचेंज रेशियो कैसे आया? दोनों कंपनीज़ के शेयर्स की फेयर
वैल्यू का हमने प्रोप रेशियो बनाया। तो आपको क्या है? फेयर वैल्यू की कुछ रिवर्स कैलकुलेशन करनी है। फेयर वैल्यू
कैसे आएगी? नेट एसेट और अर्निंग कैपिटलाइजेशन मेथड से आप दोनों कंपनी के शेयर की वैल्यू निकालोगे और उसका एवरेज
करोगे। एवरेज करने के लिए हम कितना प्रपोर्शन देंगे? कितना वेट देंगे? नेट एसेट मेथड की वैल्यू को कितना वेट देंगे
अर्निंग कैपिटलाइजेशन मेथड की वैल्यू को देखो फेयर वैल्यू कैसे आएगी शेयर की नेट एसेट मेथड से शेयर की वैल्यू निकालो और
अर्निंग कैपिटलाइजेशन मेथड से निकालो दोनों से जो वैल्यू आई उसमें नेट एसेट वाली को कुछ वेट देंगे और अर्निंग वैल्यू
को कुछ वेट देंगे वो आ जाएगी फेयर वैल्यू उस कंपनी के शेयर की ऐसे निकालेंगे अब जो अपने पास बुक में क्वेश्चन है उसमें वेट
दे रखे हैं इस क्वेश्चन में वो वेट ही निकालने है आपको वेट निकालने हैं कितना आप दोगे नेट एसेट मेथड वाली वैल्यू को और
अर्निंग वाली वैल्यू को कितना दोगे अर्निंग कैपिटलाइजेशन मेथड वाली वैल्यू को ताकि आप फेयर वैल्यू निकाल सको और और उस
फेयर वैल्यू के बेसिस पे आप ये एक्सचेंज रेशियो सामने वाले को दे सको। समझ में आई बात? तो ये रिवर्स कैलकुलेशन है वेट
निकालने की। दोनों मेथड को कितना-कितना वेट देना है फेयर वैल्यू निकालने के लिए। सारी कैलकुलेशन चार डेसीिमल पॉइंट्स में
होंगी वेट वेट कैलकुलेशन के लिए और बाकी जो शेयर्स की कैलकुलेशन है वो दो डेसिमल पॉइंट में होगी।
आपको कुछ डेटा दे रखा है। अब डेटा क्या है? नेट एसेट मेथड और अर्निंग कैपिटलाइजेशन मेथड से वैल्यू्यूएशन का
पूरा डाटा दे रखा है। तो पहले एक बार वो वैल्यू निकाल लो। जितना मैं हमेशा बोलता हूं जब ऐसा क्वेश्चन आए जो डेटा दे रखा है
ना उससे जितना सॉल्व हो सकता है उतना तो करो एटलीस्ट ये मान लो कि आपका पूरा क्वेश्चन सॉल्व नहीं होगा बट एटलीस्ट कुछ
तो सॉल्व होगा उसके तो मार्क्स मिलेंगे स्टेप मार्किंग में और एक बार अगर थोड़ा सॉल्व करोगे तो आगे अपने आप लिंकेज बनती
चली जाएगी ये सबसे प्राइमरी पॉइंट होता है ये आप ये मान लो मैं वापस से आपको एक ट्रिक बता रहा हूं कोई भी रिवर्स
कैलकुलेशन है या नया क्वेश्चन आया ना सिंपल सा काम करना है जितना डाटा दे रखा है उससे जो सॉल्व आपसे हो सकता है उतना कर
लो एक बार आप खुद समझ जाओगे कि आगे क्या करना है तो आपको पोस्ट टैक्स मेंटनेबल प्रॉफिट दे रखे हैं। दोनों कंपनीज़ के
कैपिटलाइजेशन रेट तो अर्निंग कैपिटलाइजेशन मेथड से वैल्यू आ जाएगी। टोटल वैल्यू डिवाइड बाय दोनों कंपनीज़ के नंबर ऑफ
शेयर्स से कर देंगे तो दोनों कंपनी की पर शेयर वैल्यू आ जाएगी। क्योंकि इस क्वेश्चन में कोई डेप्ट या कैश वगैरह कुछ नहीं है
तो कुछ एडजस्ट करना नहीं पड़ेगा। ठीक है? अगर वो होता तो वो करते क्योंकि वैल्यू ऑफ़ बिज़नेस मानता है इंस्टट्यूट।
ऐसे ही नेट एसेट मेथड से वैल्यू कैसे आती है? एसेट माइनस लायबिलिटीज़ डिवाइड बाय नंबर ऑफ शेयर्स। ठीक है? यह आप कर दोगे तो
आपकी नेट एसेट मेथड से वैल्यू आएगी। वही डेप्ट वगैरह कुछ नहीं है तो वही इक्विटी की वैल्यू हो जाएगी। आपको बता रखा है H
लिमिटेड में कंटिंजेंट लायबिलिटी भी है। तो जब एक्विजिशन वगैरह की बात होती है तो कंटिंजेंट लायबिलिटी को भी कंसीडर कर लिया
जाता है। यह सेम वही क्वेश्चन है। एज इट इज उसकी वैल्यू्यूज हैं। तो इन दोनों मेथड से एक बार वैल्यू्यूएशन कर लेते हैं अपन।
बहुत आसान है। तो नेट एसेट मेथड से देखो H लिमिटेड की एसेट साइड का टोटल माइनस लायबिलिटीज़ कुछ है ही नहीं। शेयर कैपिटल
और रिजर्व्स है। लेकिन H लिमिटेड की कंटिंजेंट लायबिलिटी है। यह 300 करोड़ की माइनस करो।
डिवाइड बाय H लिमिटेड में शेयर कैपिटल 350 करोड़ की है। 100 की फेस वैल्यू यानी 3.5 करोड़ शेयर। तो यह आ गई। ऐसे ही B लिमिटेड
की शेयर की नेट एसेट मेथड से वैल्यू निकाली। इसमें कोई कंटिंजेंट लायबिलिटी नहीं है। बस यह डिवाइडेड बाय इसके नंबर ऑफ
शेयर्स कितने हैं? 6.5 करोड़ की कैपिटल 10 की फेस वैल्यू वाली यानी65 करोड़ शेयर्स। बस ये ध्यान रखना। अर्निंग कैपिटलाइजेशन
मेथड में दोनों की अर्निंग्स डिस्काउंट रेट दे रखी है। ये अर्निंग्स और ये कैपिटलाइजेशन रेट। तो 300 करोड़ डिवाइड
बाय 8% एच लिमिटेड के नंबर ऑफ शेयर्स। यहां पे 10 करोड़ बाय 8% इसके नंबर ऑफ शेयर्स। ये दोनों के शेयर की वैल्यू आ गई
इस मेथड से। अब आपको फेयर वैल्यू मेथड से शेयर की वैल्यू निकालनी है। तो क्या करो? क्या करोगे? नेट एसेट मेथड का वेट दोगे x।
अर्निंग मेथड का क्या वेट होगा? फिर ऑटोमेटिकली 1 - x h लिमिटेड के शेयर की फेयर वैल्यू बताओ
क्या होगी? एक बार इक्वेशन बनाने अपने पास वेट नहीं है। एक बार इक्वेशन बनाने हैं। वेट तो निकालने हैं तो इक्वेशन बनेगी। उसी
से वेट अपने को पता चलेंगे। तो h लिमिटेड की नेट एसेट मेथड की वैल्यू मल्टीप्लाई x प्लस इसकी अर्निंग कैपिटाइजेशन मेथड से
वैल्यू मल्टीप्लाई 1 - x ये हो गई h लिमिटेड की फेयर वैल्यू पर शेयर ऐसे ही b लिमिटेड की नेट एसेट मेथड और अर्निंग
कैपिटाइजेशन मेथड की वैल्यू में x1 - x कर दोगे तो इसकी फेयर वैल्यू आ गई तो अब आप देखो एक्सचेंज रेशियो कैसे आता है फेयर
वैल्यू के बेसिस पर देना है तो टारगेट की फेयर वैल्यू ऊपर रखोगे b लिमिटेड की डिवाइड बाय एक्वायरर की फेयर वैल्यू नीचे
रखोगे ये अपन ने मर्जर में पढ़ा है ये मर्जर वाला पॉइंट होता है इक्वल्स टू एक्सचेंज रेशियो मिल जाएगा। एक्सचेंज
रेशियो क्वेश्चन में गिवन है कितना अपन ने अपने कितने शेयर्स दिए एक्वायरर ने 1161550 टारगेट के ओरिजिनल शेयर्स कितने
थे? 65 लाख 6.5 करोड़ की कैपिटल 10 का शेयर्स ये तो किया था मैंने। उसके 65 लाख के बदले इतने शेयर्स दिए। यह होता है
एक्सचेंज रेशियो जो मैंने कैलकुलेट सॉल्व भी कर दिया था। इसको चार डेसिमल में लेना था। बोला था एक्सचेंज रेशियो। बाकी सब
कैलकुलेशन दो डेसिमल में होंगे। बस अब इस इक्वेशन को देखो। पूरा सॉल्व कर लो। मैंने यहां सॉल्विंग लिखी हुई है। आप नोट करना
चाहे कर सकते हो प्रैक्टिस के लिए। मैथमेटिक्स चाहिए इसमें और कुछ भी नहीं है। तो आपको x यानी नेट एसेट मेथड को
कितना वेट देना है वो पता चल गया। 25% यानी बचा हुआ वेट। 75% आप अर्निंग एप्लीकेशन मेथड को दोगे। क्वेश्चन कंप्लीट
है आपका। इसके बाद यह क्वेश्चन और देखिए। यह मर्ज चैप्टर का है आपका। यह क्वेश्चन देखिए
काफी बड़ा लगता है। बट बहुत ज्यादा आसान क्वेश्चन है। यह बहुत ईजी क्वेश्चन है। देखो इस क्वेश्चन में क्या है? ई लिमिटेड
एक्वायरर है और यह ए प्राइवेट लिमिटेड को खरीदना चाह रहा है। यह टारगेट कंपनी है। अब क्या है? हम 1 अप्रैल 2027 से
एक्विजिशन करना चाह रहे हैं। इस डेट को एक्वायर कर लेंगे सामने वाले को। आपको कुछ इंफॉर्मेशन दे रखी है। इंफॉर्मेशन क्या दी
है? अपन ने एक कंपनी को हायर किया कि भैया तू है ना सामने वाली कंपनी का कुछ डाटा गैदर करके ला। तो वो उसका डाटा गैदर करने
पहुंचा तो उसे पता चला सामने वाली कंपनी की कॉस्ट ऑफ कैपिटल जो है 19.30% है। ठीक है? अब यह कॉस्ट ऑफ कैपिटल पता है किसके
लिए आया है वह प्रोक्सी कंपनी की ऐसी कंपनी जो क्लोजली रिेंबल करती है टारगेट को ए प्राइवेट लिमिटेड को टी लिमिटेड एक
कंपनी है उसका डाटा उठा के लाया है लेकिन यह डाटा क्या है प्रॉक्सी कंपनी है ए प्राइवेट की यानी ए प्राइवेट लिमिटेड की
आपको कॉस्ट ऑफ कैपिटल का कोई और डाटा क्वेश्चन में देगा नहीं और ना ही कोई और तरीका देगा कैलकुलेट करने का तो अपन यही
मान लेंगे ये ए प्राइवेट लिमिटेड का ही डाटा है सिंपल सी बात है प्रॉक्सी का डाटा यूज़ कर लेंगे इसका पीई रेशियो दे रखा है
ये कुछ काम में नहीं आने वाला क्वेश्चन में ठीक है जो प्रॉक्सी कंपनी है उसकी सेम
रिस्क है, सेम बिनेस है ए प्राइवेट जैसा वो सब दे दिया। यानी सिंपल सी बात है यह हमारी टारगेट कंपनी की कॉस्ट ऑफ कैपिटल
है। टारगेट कंपनी की कॉस्ट ऑफ कैपिटल दे दी आपको। बस ये इंफॉर्मेशन है अभी तक। सिर्फ क्वेश्चन का पैराग्राफ जबरदस्ती
बड़ा करने के लिए यह फालतू माथापच्ची करी। वरना देना इतना था। काम का डाटा यही है इसमें। अब कुछ और भी इंफॉर्मेशन दी है उसी
बंदे को जो अपना मीडिएटर था यह ट्रांजैक्शन करवाने वाला था। उस बंदे ने कुछ और भी इंफॉर्मेशन बताई है। क्या
बताइए? अक्वायर की कॉस्ट ऑफ कैपिटल कितनी है? एकर की के
अक्वायर की के ठीक है देखेंगे क्या काम में आएगा बस डाटा समझो जो टारगेट कंपनी है ना क्या बताया उन्होंने अगर टारगेट कंपनी
को अपन खरीद लेते हैं तो टारगेट का जो कैश फ्लो है ना 2728 बताओ यह कौन सा ईयर है खरीदने वाला
साल जब खरीद लूंगा उस साल में जिस साल में मैं सामने वाले को खरीद लूंगा यानी अगला साल बोल सकते हैं नेक्स्ट ईयर जस्ट
क्योंकि आज हम जब खड़े हैं हम 1 अप्रैल 27 को खरीदने की बात कर रहे हैं तो ऑब्वियसली हमारा अगला साल है। इसी साल का कैश फ्लो
टारगेट का कितना हो जाएगा? अगर हम उसे खरीद लेंगे तो वो कितना कैश फ्लो जनरेट करेगी? वो करेगी 105% ऑफ़ नेट प्रॉफिट ऑफ
2627 ऑफ़ ए प्राइवेट लिमिटेड बिफोर डिडक्टिंग डायरेक्टर्स इमोल्यूमेंट्स। क्या बोल दिया? टारगेट कंपनी ने 2627 यानी
जो करंट ईयर एंड हो रहा होगा। देखो इसका 2627 करंट ईयर होगा 2728 जो अगला साल है जिसमें अपन उसे खरीद लेंगे उसका कैश फ्लो
निकालना है। तो इन्होंने क्या बोला? टारगेट कंपनी का जो नेट प्रॉफिट है डायरेक्टर का रेमुनरेशन पे करने से पहले
बिफोर डिडक्टिंग उसका 105% उसका 105% कर दोगे तो वो होगा टारगेट कंपनी का कैश फ्लो अगले साल जो जनरेट करेगी टारगेट कंपनी ये
इन्होंने बता दिया अब यहां पे सर एक वर्ड लिखा हुआ है इंक्रीज्ड बाय एन अमाउंट मतलब ये होगा कैश फ्लो या इतने से इंक्रीज होगा
ध्यान से अगर यह लाइन पढ़ोगे तो इंग्लिश आपको समझ में आएगी ठीक है तो यह बेसिक इंग्लिश आती है तो इस वजह से अपन समझ पा
रहे हैं ना तो इतने बुरे हाल नहीं है कि बेसिक इंग्लिश नहीं आती तो देखो कैश फ्लो जो है इन्होंने क्या
बोला अगर हम टारगेट को खरीद लेते हैं कौन ई लिमिटेड ई लिमिटेड अगर टारगेट को खरीद लेती है तो ई लिमिटेड का कैश फ्लो कितने
से बढ़ेगा वो बोला है मेरा कैश फ्लो कितने से बढ़ेगा मैं कौन एक्वायरर ई अगर टारगेट को खरीद लेता हूं तो टारगेट का जितना करंट
ईयर का प्रॉफिट है उसका 105% कर देंगे तो उतने से मेरा कैश फ्लो बढ़ेगा इसका मतलब पता है क्या हुआ यानी इतना पैसा टारगेट
लेके आएगा वो कैश फ्लो किसका होगा टारगेट का ही तो होगा कॉमन सेंस लगाएं तो यह कैश फ्लो कौन सा है जो टारगेट जनरेट करेगी
अगले साल मेरा कैश फ्लो बढ़ेगा कैसे यानी टारगेट जनरेट करेगी तभी तो टारगेट का कैश फ्लो जुड़ेगा अगले साल का यानी टारगेट का
कैश फ्लो है ये टारगेट का कैश फ्लो नेक्स्ट ईयर का इसके अलावा सेकंड पॉइंट में कुछ बात बोली हुई
है। इसको एक बार इग्नोर करो क्योंकि इसका रेलेवेंस थोड़ी देर में आएगा। इसको बाद में देखेंगे। है ना? अभी बोल दूंगा सब ऊपर
से कंफ्यूजन में चला जाएगा। नेट प्रॉफिट दे रखा है टारगेट का आफ्टर डिडक्शन ऑफ डायरेक्टर्स रेमुनरेशन इमोल्यूमेंट।
डायरेक्टर को पेमेंट करने के बाद नेट प्रॉफिट जो बचा वो दे रखा है इतने सारे सालों का। यह सब कोई काम का नहीं है हमारे
लिए। बेकार है। हमें तो यह वाले प्रॉफिट से मतलब है। हमें क्या बोला था? करंट ईयर का जो प्रॉफिट है एस्टेटेड दे रखा है।
यानी करंट ईयर अभी खत्म नहीं हुआ होगा। करंट ईयर के प्रॉफिट का 105% कर लेना। वो है अगले साल का कैश फ्लो टारगेट का। तो
टारगेट का करंट ईयर का प्रॉफिट यह है बट यह कैसा प्रॉफिट है जिसमें डायरेक्टर रेमुनरेशन लेस हो रखा है आफ्टर डिडक्शन
हमें चाहिए बिफोर डिडक्शन यानी डायरेक्टर रेमुनरेशन ऐड बैक करेंगे अब डायरेक्टर रेमुनरेशन कितना है वो यहां पे लिखा हुआ
है देखो टारगेट कंपनी में दो डायरेक्टर है उनको हम कितना दे रहे हैं 10% नेट प्रॉफिट का आफ्टर डिडक्टिंग दोज़ इंप्लीमेंट यानी
अब ये 10% कौन से वाले प्रॉफिट का है उस वाले नेट प्रॉफिट का जब उनका रेमुनरेशन माइनस कर दें उसका 10% यह प्रॉफिट कौन सा
है रेमुनरेशन माइनस करने वाला माइनस करने के बाद का तो इसी का 10% यानी यानी 79 करोड़ डायरेक्टर रेमुनरेशन इसमें ऐड बैक
कर देंगे। इसका ही 10% है। सर होना किसका चाहिए? बिफोर डिडक्शन वाले का। उससे मतलब नहीं हो तो किसी का भी निकाल लो। तो
मैथमेटिकली इन्होंने क्वेश्चन इजी करने के लिए क्या बोल दिया? जो नेट प्रॉफिट आफ्टर डिडक्शन वाला है ना उसका 10% कर लेना। वो
डायरेक्टर का रेमुनरेशन का अमाउंट है। तो इसमें वो अमाउंट ऐड बैक कर देंगे वापस। ठीक है? ये हो गया ये पॉइंट। यहां पे एक
पैराग्राफ वो और लिखा हुआ है। ये कोई काम का नहीं है। इसमें पता है क्या बोल रखा है? सामने वाली कंपनी का हमने मल्टीपल
तरीके से वैल्यू्यूएशन किया। उसकी हिस्ट्रील कॉस्ट के अकॉर्डिंग उसकी वैल्यू बनती है 36 करोड़। रिप्लेसमेंट कॉस्ट के
अकॉर्डिंग ये नेट एसेट एट रिप्लेसमेंट कॉस्ट मेथड। ठीक है? ये बुक वैल्यू मेथड है हिस्ट्रील कॉस्ट वाला। इसके अलावा नेट
एसेट रियलाइजेशन वाले मेथड से करते हैं तो ये 40 करोड़ की वैल्यू बनती है। यानी लिक्विडेट करने वाले हो तो। यानी यह डाटा
पता है क्या? है? नेट एसेट मेथड लगा के उसका पूरा वैल्यू्यूएशन कर लिया अपन ने। पर यह कोई काम का नहीं है। यह आपसे पूछा
ही नहीं है। यह दे रखा है। बस यह वैल्यू्यूएशन आप करके बैठे हो। आपसे क्या बोला है? मैं एक्वायरर हूं। मैं यह देखना
चाहता हूं कि मैं सामने वाली कंपनी को मैक्सिमम अमाउंट कितना दूं? उसको खरीदने के बदले मैक्सिमम कंसीडरेशन कितना दूं? सर
ये वही तो नहीं है। मैक्सिमम हम सामने वाले को शेयर कितने इशू करेंगे? अगर हम ईपीएस मेंटेन करना चाहते हैं एमपीएस या
मैक्सिमम कैश कितना देंगे ईपीएस, एमपीएस। नहीं मेरे भाई बस ये मैक्सिमम वर्ड देख के वो मत कर लेना। यह जनरल क्वेश्चन है।
बिल्कुल बेसिक क्वेश्चन है। ठीक है? मैं बताऊंगा अभी कौन से बेसिक से कनेक्ट करता है ये। बेसिक क्वेश्चन है। यहां कहीं नहीं
बोला कि एमपीएस, ईपीएस ये मेंटेन कर रहा हूं। ना ही आपको एमपीएस ईपीएस का डाटा दे रखा है। अगर कोई बच्चा मान लो उससे कनेक्ट
भी कर लेता है एक बार तो एमपीएस ईपीएस का पूरे क्वेश्चन में कोई डाटा नहीं है। आप कर ही नहीं पाओगे सॉरी। यहां जनरल बात है
कि आप मैक्सिमम कंसीडरेशन कितना देना चाहते हो। अब वो कैश में दोगे, शेयर में दोगे वो बात है ही नहीं। मैक्सिमम कितना
आप उसको दे सकते हो वो बताना है। कैलकुलेशन करोड़ में करनी है। राउंडिंग ऑफ़ चार डेसीिमल पॉइंट में करनी है। फटाफट से
देखो। बढ़िया क्वेश्चन है ये। ईजी सा क्वेश्चन है। बहुत ईजी है। एक बार समझ लिया ना तो ऐसा लगेगा। अरे क्या ही
क्वेश्चन था। आप फालतू इससे परेशान हो रहे हैं। तो देखो एडिशनल प्रैक्टिकल जो कांसेप्ट्स मैंने आपको पढ़ाए थे ना इसमें
देखो मैंने आपको मर्जर्स वाले चैप्टर के कुछ मैंने आपको बोली थी ना बेसिक फार्मूलाज़ हैं। उस बेसिक फार्मूला में एक
फार्मूला था कंबाइंड वैल्यू मर्ज फर्म की क्या होती है? बिल्कुल बेसिक बात है जो मर्जर में सबसे पहले अपन यही पढ़ते हैं। वो
बस यहां पे लिख दी मैंने और उसी को यूज़ में लेके ये क्वेश्चन बनता है एक तरीके से जो मैं एक्वायरर हूं। मैं सामने वाली
टारगेट को खरीद लूंगा तो हम बन जाएंगे कंबाइंड फॉर्म। तो इस कंबाइंड फर्म की वैल्यू क्या हो गई? मैंने क्या बोला? भाई
मेरी खुद की वैल्यू प्रीमजर सामने वाली टारगेट की प्रीमजर वैल्यू और साथ में वो सिनर्जी बेनिफिट लेके आएगा। वो मेरे साथ
जुड़ेगा तो कुछ फायदा भी तो होगा मार्केट वैल्यू में वो। यानी ये तीन चीजों को जोड़ दे तो कंबाइंड वैल्यू आ जाती है फर्म के
पास। इसी के बेस पे ये पूरा क्वेश्चन सॉल्व होने वाला है। बस इसके बेस पे कैसे सॉल्व होगा सर? देखो अब इसके बेस पे इस
क्वेश्चन को सॉल्व करने का रास्ता मिलेगा। ठीक है? इसके बेस पे क्वेश्चन सॉल्व करने का रास्ता मिलेगा। क्वेश्चन सॉल्व नहीं
होगा इससे कि क्वेश्चन में ये कैलकुलेशन नहीं करके देनी कॉम्बाइंड वैल्यू। इससे रास्ता मिलेगा कि हम मैक्सिमम अमाउंट
कितना देना चाहते हैं वो इससे पता चलेगा। बेसिक बात है यह। तो देखो मैक्सिमम अमाउंट आप टारगेट को
कितना देना चाहोगे वो इस फार्मूला से। मैंने क्या बोला इस फार्मूला से आपको रास्ता मिलेगा कि कैलकुलेशन कैसे करनी है।
यह कैलकुलेशन कुछ नहीं करनी जो इस फार्मूला में है। नहीं बस इससे आपको रास्ता मिल जाएगा। अब देखो कंबाइन वैल्यू
कैसे आती है? एक्वायरर की प्रीमजर वैल्यू। टारगेट की प्रीमजर वैल्यू और टारगेट के मेरे अंदर मिलने से सिनर्जी बेनिफिट क्या
लेके आएगा? टारगेट एक्स्ट्रा मेरे को क्या बेनिफिट दे देगा? मतलब हम दोनों एक साथ मिल जाएंगे तो हम दोनों अपने प्रॉफिट से
दोनों का प्रॉफिट मिला दे उसके अलावा क्या एक्स्ट्रा कमा पाएंगे जिससे हमारी मार्केट वैल्यू बढ़ जाएगी। ठीक है? मर्ज होते हैं
तो सिनर्जी भी आती है मार्केट वैल्यू में। ये सब चैप्टर की मेन चैप्टर की बातें हैं जो वहां पे डिस्कस हो रखी है। अब आप सोचो
मैं सामने वाले को मैक्सिमम अमाउंट कितना देना चाहूंगा? जब मैं मैं वर्ड बोल रहा हूं बार-बार तो मैं कौन हूं? एक्वायर। तो
मैं उसे कितना दे सकता हूं? मैक्सिमम फील करो। मैक्सिमम की बात हो रही है। मैक्स टू मैक्स कितना दूंगा? बारगेनिंग चलेगी जब
मैक्स टू मैक्स मैं उसे बोलूंगा देख भाई जब हमारी मर्ज होके फर्म बन जाएगी उसमें मेरा पैसा लगाओ मेरी खुद की वैल्यू होगी
जो एक्सिस्टिंग है मान लो मैं अभी 100 करोड़ का हूं तो मेरे 100 करोड़ होंगे तेरी 50 करोड़ की वैल्यू है तेरे 50 करोड़
होंगे और मान ले 2 करोड़ की तू सिनर्जी लेके आएगा तो अवायरा क्या बोलेगा देख भाई मैक्स टू मैक्स मस्ट फर्म में मेरा 100
करोड़ जितना हिस्सा तो रहना ही चाहिए बाकी हिस्सा तू लेके चला जा वापस मतलब बाकी तेरे को दे सकता हूं मैं मैक्स टू मैक्स
मैं मैक्स टू मैक्स बताओ क्या कर सकता हूं? मैं ये बोल सकता हूं कि मैं तेरे को सब कुछ दे दूंगा बट मेरा लॉस ना हो। मैक्स
टू मैक्स हम क्या करना चाहेंगे भाई? मेरा लॉस नहीं होना चाहिए। यही तो होता है मैक्सिमम का लॉजिक। मेरा लॉस नहीं होना
चाहिए। मैं जिस सिचुएशन पे आज खड़ा हूं मर्जर के बाद भी उस सिचुएशन पे रहूंगा तो मुझे कोई दिक्कत नहीं। यानी मेरी 100
करोड़ वैल्यू बाद में भी रहे तो मुझे कोई दिक्कत नहीं। यानी उसके अलावा एक्स्ट्रा वैल्यू मजर फर्म में जितनी भी होगी मर्ज
फर्म में उसके अलावा जो भी एक्स्ट्रा वैल्यू है वो तू लेके चला जा। वो तेरे को दे सकता हूं। मैं यही है ना? यानी मैं नो
गेन नो लॉस सिचुएशन पे रह सकता हूं। तो मर्ज फर्म में एक्स्ट्रा वैल्यू क्या है? टारगेट की खुद की वैल्यू प्लस टारगेट जो
सिनर्जी लेके आता है मर्जर से। यही तो होती है। तो यानी ये अमाउंट ये अमाउंट मैं सामने वाले को पे करता हूं। पे कर सकता
हूं मैक्सिमम। मैक्सिमम क्या अमाउंट पे कर सकता हूं? सामने वाले को यह वाला अमाउंट पे कर सकता हूं। ये दोनों मिलाकर। अब ये
अमाउंट मैं मैक्सिमम पे कर सकता हूं। यही लिखा है मैंने। इसको कैलकुलेट करने के भी दो तरीके हैं। दो तरीके क्या है? मैंने
आपको बताया था। एक तरीका तो क्या है? मैं टारगेट कंपनी का क्या कर लूं? वैल्यू्यूएशन कर लूं। कोई वैल्यू्यूएशन
मेथड है क्वेश्चन में? वैल्यू्यूएशन तो कर रखा है ना सर इन्होंने खुद ने। यह तो इन्होंने कर रखा है। ये इग्नोर कर दो। यह
कोई काम का नहीं है। हम खुद कोई वैल्यू्यूएशन कर सकते हैं क्या? क्या मैं टारगेट कंपनी का कैश फ्लो मेथड से कोई
वैल्यू्यूएशन कर सकता हूं? आपको याद है? एक आध क्वेश्चन थे अपने पास जिसमें अपन ने किया था डिविडेंड वाला जो वैल्यू्यूएशन
मेथड लगाया था। याद हो तो आपको तो टारगेट कंपनी के कैश फ्लो मेथड से मैं कोई वैल्यू्यूएशन कर सकता हूं। अगर हां तो बस
वो जो वैल्यू आएगी यानी अप्रोच वन क्या टारगेट कंपनी का मैं वैल्यू्यूएशन टेक्निक से वैल्यू्यूएशन कर लूं। तो इससे इसका
क्या लिंक है सर? अरे वो जो वैल्यू्यूएशन आती है पता है उस वैल्यू्यूएशन का मतलब क्या होता है? मैंने बताया था आपको मेन
चैप्टर में मर्जर पढ़ाते वक्त वो जो वैल्यू्यूएशन आप करते हो वैल्यू्यूएशन से जो वैल्यू आएगी टारगेट कंपनी की उसका मतलब
है टारगेट की खुद की वैल्यू प्लस वो जो सिनर्जी लेके आएगा वो इंक्लूड हो जाती है उसमें। क्यों? क्योंकि जब हम टारगेट का
वैल्यू्यूएशन करेंगे तो मर्जर के पर्सेक्टिव से करेंगे कि मर्जर के टाइम टारगेट क्या कैश फ्लो जनरेट करेगा मर्जर
के बाद। तो टारगेट मर्जर के बाद क्या कैश फ्लो जनरेट करेगा पता है? यह थे ना टारगेट के करंट ईयर के प्रॉफिट का 105%
यह यही तो था यही तो लिखा हुआ था टारगेट मेरे अंदर मर्ज हो जाएगा तो अगले साल क्या कैश फ्लो बढ़ा कर देगा मेरे यानी इतना कैश
फ्लो वो जनरेट करेगा ठीक है तो ये काम में लेंगे तो उससे हमें जो अमाउंट मिलेगा यानी उतना
अमाउंट मैक्सिमम मैं सामने वाले को दे पाऊंगा दूसरी अप्रोच एक और अप्रोच इसी फार्मूला से आएगी दूसरी अप्रोच तो हम
मैक्सिमम ये अमाउंट देना चाहते हैं टारगेट को तो यानी कॉम्बाइंड वैल्यू मस्ट फर्म की पता कर लूं। उसमें से प्रीमर मेरी वैल्यू
कितनी है? मर्जर से पहले एकवायरर की खुद की वैल्यू कितनी है? वो पता कर लूं। यह इसमें से माइनस कर दूंगा। तो वो वैल्यू
क्या होगी? जो टारगेट की वजह से कंपनी में आई। टारगेट की खुद की प्लस एनर्जी वो दे दूंगा। तो यानी कॉम्बाइंड वैल्यू पता कर
लूं और एक्वायरर की अपनी खुद की प्रीमजर वैल्यू पता कर लूं। मैं इसमें से माइनस कर दूं तो ये अमाउंट दे सकता हूं। बस यही है
क्वेश्चन खत्म। पहला अप्रोच आफ्टर एक्विजिशन टारगेट के कैश फ्लो से वैल्यू्यूएशन कर लूं। तो कैश फ्लो वाला
वैल्यू्यूएशन टारगेट के फ्री कैश फ्लो फॉर फर्म फर्स्ट ईयर के यानी नेक्स्ट ईयर के डिवाइड बाय q माइनस ग्रोथ रेट अब टारगेट
के कैश फ्लो देखो टारगेट के कैश फ्लो कैश फ्लो दे नहीं रखे निकालने पड़ेंगे क्या बोला था नेट प्रॉफिट बिफोर डायरेक्टरी
मॉलमेंट आफ्टर डायरेक्टरी मॉलमेंट नेट प्रॉफिट इस ईयर का दे रखा है 7.9 डायरेक्टरी मोलमेंट इसका 10% है तो वो ऐड
बैक कर दो तो यह मैंने ऐड किया ये आ गया नेट प्रॉफिट इसका क्या करना है 105% ये 105% क्या है यानी टारगेट अगले साल यह कैश
फ्लो जनरेट कर देगी अगर वो मर्ज हो जाती है यानी यह कैश फ्लो मर्ज फर्म में टारगेट की वजह से आएगा। तो इतना अमाउंट उसको दे
सकते हैं इसका वैल्यू्यूएशन। तो अब यह टारगेट का वैल्यू्यूएशन चल रहा है। तो टारगेट की क्या होगी? कॉस्ट ऑफ कैपिटल
19.3% माइनस ग्रोथ रेट। ग्रोथ रेट किसकी लेते हैं? इसमें न्यू रेट लेते हैं एक्विजिशन के बाद वाली। याद करना आप
बिज़नेस वैल्यू्यूएशन के नोट्स खोलना। ये चीज़ बिज़नेस वैल्यू्यूएशन में लिखी हुई है। बिज़नेस वैल्यू्यूएशन में जो डिविडेंड
वैल्यू्यूएशन मेथड है उसमें लिखा हुआ है क्लियरली मैंने। यहां वैल्यू्यूएशन में जब वैल्यू निकालते हैं तो माइनस में ग्रोथ
रेट आफ्टर एक्विजिशन लेते हैं। क्योंकि यह कैश फ्लो कब जनरेट करेगा? जब वो मेरी कंपनी में पार्ट बन जाएगा। तो कंपनी में
पार्ट बन जाएगा। उस वक्त का वैल्यू्यूएशन कर रहे हैं। तो ग्रोथ रेट भी तो नहीं लेनी है। आफ्टर एक्विजिशन का वैल्यू्यूएशन है।
ठीक है? तो अब नई कंपनी में ग्रोथ रेट क्या है? वो आपको अगले पॉइंट में दे रखी है। इस पॉइंट में देखो फर्स्ट लाइन में
क्या लिखा हुआ है? इसको बाद में पढ़ेंगे। क्या बोला है? प्रेडिक्टेड दैट कैश फ्लो जो है ई लिमिटेड के आफ्टर मजर 5% बढ़
जाएंगे। चाहे एक्वायर सामने वाले को एक्वायर करूं या नहीं करूं। यानी आफ्टर मर्जर भी सामने वाले को एक्वायर कर लूंगा
तब भी ई लिमिटेड के कैश फ्लो 5% से बढ़ेंगे। यानी जब सामने वाला एक्वायर हो जाएगा तो ये मर्ज फर्म बन जाएगी। यानी
मर्ज फर्म के कैश फ्लो किससे ग्रो करेंगे? 5% से। ठीक है? 2028 29 क्योंकि 2027 28 का कैश फ्लो तो दे रखा है। उसके बाद अगले
साल क्या है? 2829 उनमें तो ग्रोथ रेट देखनी है 5%। ये हो गया वैल्यूएशन कंप्लीट। बस फर्स्ट
एक अप्रोच से तो आंसर दे दिया आपने। यह हो गया आपका आंसर कंप्लीट। यहां पे भी आप कंप्लीट कर सकते हो। बट हम दूसरी अप्रोच
से भी देंगे। समझाना है मुझे आपको कि इतना वैल्यू दे दो सामने वाले को। तो इतना मैक्सिमम पे कर सकते हो आप। दूसरी अप्रोच
कंबाइंड फर्म की वैल्यू निकालूं और एक्वायरर अपनी प्रीमजर वैल्यू माइनस कर दे तो वो अमाउंट जो बचेगा वो मैक्सिमम टारगेट
को अपन पे कर सकते हैं। कॉम्बाइंड फर्म की वैल्यू कितनी है? तो वही कंबाइंड फर्म का वैल्यू्यूएशन कैश फ्लोस है। कॉम्बाइंड
फर्म के कैश फ्लोस कॉम्बाइंड फर्म की डिस्काउंटिंग रेट और कंबाइंड फर्म की ग्रोथ रेट। अब देखो कैश फ्लोस कॉम्बाइंड
फर्म के नहीं है अपने पास। डिस्काउंट रेट भी नहीं है। बट आपने तो निकाल रखी है। निकाल के दिखाऊंगा। बट ग्रोथ रेट तो है ना
यहां पे लिखी हुई थी। 5% ग्रोथ रेट रहेगी ई लिमिटेड की। चाहे सामने वाले को एक्वायर करूं या नहीं करूं? एक्वायर करूं मतलब
मस्ट फर्म की भी ग्रोथ रेट यही है। ठीक है? अब कैश फ्लो और डिस्काउंटिंग रेट चाहिए। मस्ट फर्म के कैश फ्लो कितने हैं
वो क्वेश्चन में दे रखे हैं। वो सेकंड पॉइंट में लिखा हुआ है। इसी पॉइंट में लिखा हुआ है। अब रीड करिए। ये इसलिए दे
रखा था पॉइंट। अब समझ में आया दूसरी अप्रोच के लिए। पोस्ट एक्विजिशन कैश फ्लो जो सामने वाला जनरेट कर रहा है। ठीक है?
उसको खरीदने के बाद वो जो कैश फ्लो जनरेट कर रहा है जो अभी अपन ने निकाले थे सामने वाले के वो पता क्या है? 30% है। टोटल कैश
जनरेटेड फ्रॉम कंबाइंड फॉर्म अब फील करिए क्या बोला सामने वाले का जो आपने कैश फ्लो पता किया ना एक्विजिशन के बाद सामने वाला
कितना कैश फ्लो जनरेट कर रहा है ये अपन ने पता कर लिया था यह कैश फ्लो जनरेट कर रहा है अगले साल इन्होंने बोला जो कंबाइंड
फर्म का कैश फ्लो है ना उसका यह 30% है सिर्फ तो कंबाइंड फर्म के कैश फ्लोस मिल जाएंगे यह 30% है डिवाइड बाय 30% तो
कंबाइंड फर्म में इतने कैश फ्लो जनरेट हुए होंगे यानी यह कंबाइंड फर्म के कैश फ्लो अब कॉस्ट ऑफ कैपिटल कंबाइंड फर्म की
कॉम्बाइंड फर्म की कॉस्ट ऑफ कैपिटल सर क्या होगी तो देखो टारगेट की कॉस्ट ऑफ कैपिटल है 19.3 और एक्वायरर की है 15.85
कंबाइंड फर्म में दोनों लोग मिल गए। अब कॉस्ट ऑफ कैपिटल भी दोनों की होगी यानी वेटेड एवरेज होगा इन दोनों का। तो अब देखो
एक्वायरर जो है और टारगेट जो है इनका वेटेड एवरेज करना है तो वेट कितना दें? कॉस्ट ऑफ कैपिटल का वेटेड एवरेज करना है।
तो इसका वेट देने के लिए सिंपल सा इन्होंने लॉजिक क्या लिया? कॉम्बाइंड फर्म का जो कैश फ्लो था उसमें 30% जो कैश फ्लो
थे वो टारगेट के थे। लिखा था ना जो टारगेट के कैश फ्लो थे वो 30% रिप्रेजेंट कर रहे हैं कंबाइंड फर्म के टोटल कैश फ्लोस का।
यानी 70% कैश फ्लो फिर किसके हैं? एक्वायरर के। क्योंकि वो जो 30% टारगेट के कैश फ्लोस थे वो तो वो वैल्यू थी जो
टारगेट लेके आ रहा था खुद की प्लस एनर्जी मिलाकर। यानी रिमेनिंग 70% जो कैश फ्लोस हैं वो एक्वायरर के खुद के हैं। समझ में
आया? यानी एक्वायरर की कॉस्ट ऑफ कैपिटल 70% वेट दे दो। इसको 30% दे दो। क्योंकि जो कैश फ्लोस है उसमें 30% हिस्सा टारगेट
का है और 70% एक्वायरर का है। तो यह आ गई पोस्ट ऑफ कैपिटल कंबाइंड फर्म की। बस यह आ गई कंबाइंड फर्म की वैल्यू।
अब मुझे क्या करना है? एकर की प्रीमजर मार्केट वैल्यू इसमें से माइनस करनी है। तो एकर की प्रीमजर मार्केट वैल्यू भी ऐसी
वैल्यू्यूएशन से निकालेंगे। अब एकवायर के वही फ्री कैश फ्लो क्या होंगे? डिवाइड बाय एक्वायरर की डिस्काउंट रेट और ग्रोथ रेट।
तो एक्वायरर की डिस्काउंट रेट तो आपको दे रखी है 15.85 एक्वायरर की ग्रोथ रेट बोला ही 5% ही है। क्या बोला था यह 5% चाहिए।
वह एक्वायर करूं मैं उसको या ना करूं। मैं ई लिमिटेड मेरी ग्रोथ रेट 5% फिक्स है। तो यह तो मेरी भी है। ठीक? अब बस यहां की बात
करते हैं फ्री कैश फ्लो की। एकर के फ्री कैश फ्लो कहां से आएंगे? तो भाई देखो अभी अपन ने कंबाइंड फर्म के कैश फ्लोस निकाल
लिए। यह थे कॉम्बाइंड फर्म के। यह पूरी 100% फर्म के कैश फ्लो है जिसमें 30% हिस्सा टारगेट का है। तो 70% तो वो कैश
फ्लो है ना जो एक्वायरर खुद के दम पे लेके आ रहा है। क्योंकि ये वाले जो कैश फ्लोस थे ये टारगेट के खुद के और वो सिनर्जी भी
ला रहा था। वो भी इसमें इंक्लूडेड थी। तो यानी रिमेनिंग 70% तो एक्वायरर के खुद के हैं। यानी इसको डिवाइड बाय आप क्या कर
दो? 30% * 70% कर लो तो एकर के कैश फ्लो मिल जाएंगे। या फिर कंबाइंड फर्म के आपने कैश फ्लो पता कर लिए। इसको इन 70% कर दो
तो आपको एक्वायरर के कैश फ्लो मिल जाएंगे। बस ये आ गई एकर की वैल्यू। कॉम्बाइंड फर्म की वैल्यू यह थी 255 करोड़। माइनस
एक्वायरर की वैल्यू प्रीमजर 196 करोड़ यानी 59.57 करोड़। ये आप अमाउंट पे कर सकते हैं सामने वाले को मैक्सिमम इस वाली
अप्रोच से। चार डेसिमल में बोला हुआ था इसलिए चार में कैलकुलेशन करिए। क्वेश्चन में लिखा हुआ है। कंप्लीट है बस ये
क्वेश्चन। बहुत आसान क्वेश्चन है। बस समझना है, इंटरप्रिटेशन करना है और कुछ भी नहीं था। तो यही है इस क्वेश्चन में। ये
कंप्लीट हो चुका है। इसके बाद देखिए अब आप लोग। इसके बाद और भी एडिशनल क्वेश्चंस हैं। बट इसके बाद वाले जो भी एडिशनल
क्वेश्चंस है ना यह सारे के सारे वो क्वेश्चंस हैं जो मे 26 एग्जाम में आए थे। मे 26 का एग्जाम का आप लोगों को पता है।
काफी अच्छा पेपर था। अच्छा पेपर क्यों था? क्योंकि उसमें न्यू क्वेश्चन थे। ऐसा नहीं है कि बिल्कुल ही कोई नए कांसेप्ट आ गए।
हां, कोई चार पांच मार्क्स की कुछ ऐसी चीजें भी थी जो मैंने आपको बताई भी है कि इंस्टट्यूट के मॉड्यूल में ही एक्सिस्ट
नहीं करती। बट इंस्टट्यूट [गला साफ़ करने की आवाज़] ने वो पूछी। उसका तो कुछ किया नहीं जा सकता। वो भी
मैंने आपको सब कवर करा दिया। एडिशनल प्रैक्टिकल कांसेप्ट में। तो ये जो मे 26 एग्जाम के क्वेश्चन है इनके मैंने
क्वेश्चन नंबर कौन सा है उसके रेफरेंस के साथ यहां पे लगाए हुए हैं लाइन वाइज। तो ये सारे के सारे मे 26 एग्जाम के क्वेश्चन
है यहां पर जो नीचे लगे हुए हैं। तो ये जो भी क्वेश्चन है मे 26 एग्जाम वाले इनका डेडिकेटेड मे 26 का सॉल्यूशन वीडियो है वो
आप रेफर करिएगा। ठीक है? इनका पूरा सॉल्यूशन वीडियो एक अलग से है क्योंकि उसमें पूरा मैंने मे 26 के पेपर के
अकॉर्डिंग इनका पूरा सॉल्यूशन कराया हुआ है। वही अपने कांसेप्ट के अकॉर्डिंग तो उसका अलग से वीडियो है। यानी ये क्वेश्चन
भी आपके ऑलरेडी सॉल्व हो रखे हैं। डेडिकेटेड सॉल्यूशन वीडियो है इसका आप लोगों के पास। आप लोगों को मिला हुआ है
इसका सॉल्यूशन वीडियो ऑलरेडी। तो वो सॉल्यूशन वीडियो में आपको इन सारे क्वेश्चन के सॉल्यूशन मिल जाएंगे। तो ये
आपके वीडियो का कंटेंट कंप्लीट हो चुका है आज का क्योंकि ये मे 26 के सॉल्यूशन वीडियो आपको अलग से देखना है जो ऑलरेडी
इसका आपको मैंने एक्सेस दे रखा है वीडियो का आपको प्रोवाइड करवाया हुआ है और जो बाकी क्वेश्चंस हैं एडिशनल में वो मैंने
आपको कंप्लीट करा दिए और यह जितने भी हैं मे 26 वाले यह सारे आपके मैंने पहले आपको एक्सेस दे दिए हैं। तो अभी के लिए बस इतना
ही थैंक यू सो मच राधे-धे हरे कृष्णा।
परपेच्युअल प्रोजेक्ट के लिए, पांचवें वर्ष के बाद के सालाना कैश फ्लो को परपेच्युअलिटी मानकर टर्मिनल वैल्यू (कैश फ्लो / डिस्काउंट रेट) निकाली जाती है, जिसे चौथे वर्ष के अंत में डिस्काउंट किया जाता है। चूंकि डेप्रिसिएशन सिर्फ 10 सालों के लिए है, इसलिए 5वें से 10वें वर्ष तक के डेप्रिसिएशन टैक्स शील्ड को अलग से पीवी करके कुल एनपीवी में जोड़ा जाता है।
पहले साल के अंत में स्क्रैप बेचने पर ही पॉजिटिव एनपीवी (₹45,455) मिलती है। दूसरे और तीसरे साल में स्टोरेज कॉस्ट ज्यादा होने के कारण एनपीवी नेगेटिव आती है। इसलिए, कंपनी को पहले साल के अंत में ही स्क्रैप बेच देना चाहिए।
बेस केस एनपीवी में टैक्स शील्ड ऑन इंटरेस्ट, इंटरेस्ट सब्सिडी, फ्लोटेशन कॉस्ट सेविंग जोड़ी जाती है, और फाइनेंशियल डिस्ट्रेस कॉस्ट घटाई जाती है। इन सबको मिलाकर अंतिम एपीवी लगभग 22.46 करोड़ आती है, जो पॉजिटिव है, इसलिए प्रोजेक्ट स्वीकार किया जाना चाहिए।
15वें दिन, पिछले 14 दिनों के कुल गेन और लॉस को 14 से डिवाइड करके एवरेज निकाला जाता है। 16वें दिन से, पिछले दिन के एवरेज (13 दिन के) में आज का गेन या लॉस जोड़कर फिर 14 से डिवाइड किया जाता है। इसके बाद RS और RSI फॉर्मूले से निकाला जाता है।
बॉन्ड की फेस वैल्यू पर क्लीन प्राइस (99.42%) निकालकर उसमें 262 दिनों का एक्रूड इंटरेस्ट (10% कूपन) जोड़कर डर्टी प्राइस प्राप्त की जाती है। इसके बाद, डर्टी प्राइस में से 2% मार्जिन काटकर लोन की राशि निकाली जाती है।
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