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AFM RTP MTP एडिशनल क्वेश्चंस: आसान तरीके से हल (भाग 2)

यह वीडियो एएफएम (एडवांस्ड फाइनेंशियल मैनेजमेंट) के एमटीपी/आरटीपी एग्जाम के एडिशनल क्वेश्चंस की दूसरी कड़ी है। इसमें क्वेश्चन नंबर 26 से आगे के सवालों को हल किया गया है। ये क्वेश्चंस प्रैक्टिस के लिए बहुत ज़रूरी हैं, खासकर टफ पेपर की तैयारी के लिए। सॉल्यूशन स्टेप बाय स्टेप और प्रॉपर फॉर्मेट में दिए गए हैं ताकि आप आसानी से समझ सकें और एग्जाम में लिख सकें।

क्वेश्चन 26: एडवांस कैपिटल बजटिंग (एनपीवी कैलकुलेशन)

यह एक लंबा-चौड़ा क्वेश्चन है, लेकिन कांसेप्ट बिल्कुल सिंपल है। इसमें एक कंपनी को एंबुलेंस बनाने और बेचने के प्रोजेक्ट की फाइनेंशियल वायबिलिटी (एनपीवी) निकालनी है। कैपिटल बजटिंग के मूल सिद्धांतों और विभिन्न तकनीकों की गहन समझ इस प्रश्न को हल करने में मददगार होगी।

पार्ट 1: फोर ईयर प्रोजेक्ट

  • डेटा एक्सट्रैक्शन: कंपनी 4 सालों में अलग-अलग क्वांटिटी में एंबुलेंस प्रोड्यूस और सेल करेगी।
  • एवरेज प्राइस और कॉस्ट: एंबुलेंस तीन क्वालिटी (बेसिक, स्टैंडर्ड, डीलक्स) की हैं। इनकी सेलिंग प्राइस और कन्वर्जन कॉस्ट दी गई प्रॉबबिलिटी के हिसाब से वेटेड एवरेज निकालनी है।
  • फिक्स्ड कॉस्ट: प्रोडक्शन वॉल्यूम के हिसाब से फिक्स्ड कॉस्ट अलग-अलग स्लैब में दी गई है। साल दर साल यूनिट्स के अनुसार सही कॉस्ट सेलेक्ट करें।
  • डेप्रिसिएशन: 40 करोड़ के इनिशियल इन्वेस्टमेंट पर 10 साल का SLM डेप्रिसिएशन लगेगा (4 करोड़/साल)। Finance Solver का उपयोग करके कंपाउंड इंटरेस्ट और डेप्रिसिएशन की गणना को समझना यहाँ सहायक हो सकता है।
  • कैश फ्लो कैलकुलेशन:
    • EBIT = (एवरेज सेलिंग प्राइस x क्वांटिटी) - (एवरेज कन्वर्जन कॉस्ट x क्वांटिटी) - फिक्स्ड कॉस्ट - डेप्रिसिएशन
    • PAT = EBIT - (EBIT x टैक्स रेट)
    • कैश फ्लो = PAT + डेप्रिसिएशन
  • एनपीवी कैलकुलेशन: सभी कैश फ्लो को 11% डिस्काउंट रेट से पीवी करें। एनपीवी नेगेटिव आई, इसलिए प्रोजेक्ट एक्सेप्टेबल नहीं है।

पार्ट 2: परपेच्युअल प्रोजेक्ट (5th ईयर ऑनवर्ड्स) यहां प्रोजेक्ट को अनलिमिटेड माना गया है। 4 साल बाद हर साल 450 एंबुलेंस बनेंगी।

  • टर्मिनल वैल्यू: 5th ईयर ऑनवर्ड्स के परपेच्युअल कैश फ्लो की टर्मिनल वैल्यू (TV = कैश फ्लो / डिस्काउंट रेट) निकालें और 4th ईयर के अंत में पीवी करें।
  • डेप्रिसिएशन टैक्स शील्ड: परपेच्युअल कैश फ्लो में डेप्रिसिएशन का टैक्स बेनिफिट शामिल नहीं होगा क्योंकि यह सिर्फ 10 साल के लिए है। बाकी के 6 सालों (5th से 10th ईयर) के टैक्स बेनिफिट का अलग से पीवी निकालें।
  • फाइनल एनपीवी: पार्ट 1 के 4 सालों के पीवी + पार्ट 2 की टर्मिनल वैल्यू का पीवी + डेप्रिसिएशन टैक्स शील्ड का पीवी = टोटल पीवी। इसमें से इनिशियल इन्वेस्टमेंट घटाने पर एनपीवी पॉजिटिव आती है, इसलिए प्रोजेक्ट एक्सेप्टेबल है।

क्वेश्चन: ऑप्टिमल डिस्पोजल टाइम (स्क्रैप वैल्यू)

इस क्वेश्चन में एक कंपनी को अपनी पुरानी कैब्स (2000 किलो) को कब बेचना है, यह तय करना है।

  • डेटा:
    • हर साल स्टोरेज कॉस्ट अलग (1st साल में ₹90,000, 2nd में ₹1,05,000, 3rd में ₹1,19,000)।
    • प्रति किलो स्क्रैप प्राइस हर साल अलग और उसकी प्रॉबबिलिटी दी गई है। एक्सपेक्टेड प्राइस निकालें: 1st साल में ₹70/किलो, 2nd में ₹59/किलो, 3rd में ₹54.50/किलो।
  • एनपीवी कैलकुलेशन:
    • 1st साल एंड में बेचते हैं: (2000 किलो x ₹70) - ₹90,000 (स्टोरेज) = ₹50,000 कैश फ्लो। इसे 10% डिस्काउंट करें। एनपीवी ≈ ₹45,455
    • 2nd साल एंड में बेचते हैं: (2000 x 59) - (90,000 + 1,05,000) = -₹77,000 का कैश फ्लो 2nd साल एंड में। इसे पीवी करने पर एनपीवी नेगेटिव आएगी।
    • 3rd साल एंड में बेचते हैं: एनपीवी नेगेटिव आएगी।
  • डिसीजन: केवल 1st साल के एंड में स्क्रैप बेचने पर पॉजिटिव एनपीवी मिल रही है। इसलिए पहले साल के एंड में ही बेच देना चाहिए।
  • पार्ट 2 (सेंसिटिविटी): अगर 3rd साल की स्क्रैप प्राइस बढ़कर ₹84/किलो हो जाए, तो तीनों विकल्पों की नई एनपीवी निकालें। एनपीवी 1st और 3rd साल एंड में लगभग बराबर (₹45,454) आएगी। फिर भी 1st साल एंड में बेचना बेहतर होगा क्योंकि पैसा जल्दी मिल रहा है।

क्वेश्चन: एपीवी मेथड (एडजस्टेड प्रेजेंट वैल्यू)

यह एक डिटेल्ड क्वेश्चन है जो एपीवी मेथड के कॉन्सेप्ट को कवर करता है।

  • बेस केस एनपीवी:
    • इनिशियल इन्वेस्टमेंट: 390 करोड़ (लैंड + प्लांट + वर्किंग कैपिटल)
    • कैश फ्लो कैलकुलेशन: रेवेन्यू, ऑपरेटिंग कॉस्ट, डेप्रिसिएशन (WDV 25%) का उपयोग करके हर साल का PAT निकालें। इसमें कैपिटल सब्सिडी (20 करोड़) जोड़ें और लैंड सेल पर कैपिटल गेन टैक्स (9 करोड़) घटाएं।
    • डिस्काउंटिंग: सभी कैश फ्लो को 14% (अनलीवर्ड कॉस्ट ऑफ इक्विटी) से पीवी करें। बेस केस एनपीवी ≈ 5.35 करोड़ (पॉजिटिव)।
  • इफेक्ट ऑफ फाइनेंसिंग:
    • पीवी ऑफ टैक्स शील्ड ऑन इंटरेस्ट:
      • गवर्नमेंट लोन (100 करोड़, 5%) पर हर साल 5 करोड़ का इंटरेस्ट, टैक्स शील्ड = 1.5 करोड़। इसे 5% से पीवी करें।
      • बैंक लोन (120 करोड़, 10%): प्रिंसिपल 4 सालों में बराबर चुकता होगा। हर साल के ओपनिंग बैलेंस पर इंटरेस्ट और उस पर टैक्स शील्ड निकालें। इसे 10% से पीवी करें।
    • पीवी ऑफ इंटरेस्ट सब्सिडी: गवर्नमेंट से मिली इंटरेस्ट सब्सिडी (5% का बेनिफिट) का पीवी करें।
    • पीवी ऑफ फ्लोटेशन कॉस्ट सेविंग: डेट लेने से 4% फ्लोटेशन कॉस्ट (220 करोड़ पर) बच गई, इसका सीधा बेनिफिट है।
    • पीवी ऑफ फाइनेंशियल डिस्ट्रेस कॉस्ट: 5वें साल में फाइनेंशियल डिस्ट्रेस की एग्जेक्टेड कॉस्ट (30 करोड़ x 10% प्रॉबबिलिटी) को 10% मार्केट रेट से पीवी करें।
  • फाइनल एपीवी: बेस एनपीवी + सभी फाइनेंसिंग बेनिफिट्स - फाइनेंशियल डिस्ट्रेस कॉस्ट = कुल एपीवी ≈ 22.46 करोड़। एपीवी पॉजिटिव है, इसलिए प्रोजेक्ट एक्सेप्ट करें।

क्वेश्चन: रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI)

यह क्वेश्चन 14 दिन के RSI की गणना और इंटरप्रिटेशन पर आधारित है।

  • स्टेप 1: प्राइस गेन/लॉस निकालें: प्रतिदिन क्लोजिंग प्राइस के आधार पर गेन या लॉस कैलकुलेट करें।
  • स्टेप 2: एवरेज गेन और एवरेज लॉस निकालें: 15वें दिन से RSI कैलकुलेशन शुरू होगी।
    • 15वें दिन: पिछले 14 दिनों के कुल गेन और लॉस को 14 से डिवाइड करें।
    • 16वें दिन से: पिछले दिन का एवरेज (13 दिन का) + आज का गेन/लॉस, फिर 14 से डिवाइड करें।
  • स्टेप 3: RS और RSI निकालें:
    • RS = एवरेज गेन / एवरेज लॉस
    • RSI = 100 - (100 / (1 + RS)) या 100 x RS / (1 + RS)
  • रिजल्ट: लेटेस्ट RSI ≈ 34.64 आता है, जो 30-50 की रेंज में है। इसका मतलब शेयर में बियरिश ट्रेंड है।

क्वेश्चन: ट्राई-पार्टी रेपो ट्रांजैक्शन

यह एक बैंक द्वारा दूसरे बैंक से शॉर्ट-टर्म लोन लेने और उसमें तीसरे बैंक को एजेंट के रूप में शामिल करने का केस है। डिस्ट्रीब्यूटेड सिस्टम डिजाइन में CAP थ्योरम को समझना, हालांकि एक अलग विषय है, विभिन्न पक्षों के बीच जटिल निर्णय लेने की प्रक्रिया को समझने में दृष्टिकोण प्रदान कर सकता है।

  • नेचर ऑफ ट्रांजैक्शन: इसे ट्राई-पार्टी रेपो कहते हैं क्योंकि इसमें तीन पार्टियां होती हैं।
  • डर्टी प्राइस कैलकुलेशन: गवर्नमेंट बॉन्ड की फेस वैल्यू (8 करोड़) पर क्लीन प्राइस (99.42%) निकालें, फिर उसमें 262 दिनों का एक्रूड इंटरेस्ट (कूपन 10%) जोड़कर डर्टी प्राइस प्राप्त करें।
  • लोन अमाउंट: डर्टी प्राइस में से 2% मार्जिन काटकर लोन की राशि निकालें।
  • लोन पर इंटरेस्ट और एजेंट कमीशन: लोन पर 5.65% सालाना ब्याज लगेगा और एजेंट (बैंक C) को 15% सालाना कमीशन (14 दिनों के लिए) देना होगा।

यदि आप फार्मास्यूटिकल्स या अन्य क्षेत्रों के लिए वित्तीय प्रबंधन की तैयारी कर रहे हैं, तो Pharmacovigilance परीक्षा की तैयारी से संबंधित मार्गदर्शिकाएँ भी उपयोगी हो सकती हैं।

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