प्रमोशन क्या है?
प्रमोशन का अर्थ है लोगों को आपके प्रोडक्ट के बारे में बताना, समझाना और उन्हें खरीदने के लिए कन्विंस करना।
प्रमोशन के फंक्शन:
- टेलिंग अबाउट द प्रोडक्ट: लोगों को प्रोडक्ट और उसकी उपलब्धता के बारे में जानकारी देना।
- शोइंग इट्स बेनिफिट: प्रोडक्ट के फीचर्स, उपयोग और फायदों के बारे में बताना।
- मेक पीपल बाय: ग्राहकों को खरीदने के लिए प्रेरित और कन्विंस करना।
- इनक्रीज द सेल: ज्यादा से ज्यादा प्रोडक्ट बेचने में मदद करना।
- बिल्ड द गुड इमेज: कंपनी और प्रोडक्ट की सकारात्मक सार्वजनिक छवि बनाना।
प्रमोशन के चार एलिमेंट्स
1. एडवरटाइजमेंट (विज्ञापन)
यह प्रमोशन का एक पेड (भुगतान वाला) तरीका है जिसमें प्रोडक्ट या सेवा के बारे में जानकारी देकर लोगों को खरीदने के लिए तैयार किया जाता है। उदाहरण: टीवी, अखबार, बैनर में विज्ञापन।
एडवरटाइजमेंट के फायदे
मैन्युफैक्चरर (निर्माता) के लिए:
- न्यू प्रोडक्ट लॉन्च: नए प्रोडक्ट को बाजार में पेश करने में आसानी।
- ओल्ड प्रोडक्ट डिमांड: पुराने प्रोडक्ट की मांग बनाए रखना और ग्राहकों को प्रतिस्पर्धी से दूर रखना।
- मोर सेल्स: बिक्री और मुनाफा बढ़ाना।
- ब्रांड इमेज: बाजार में अच्छा नाम और प्रतिष्ठा बनाना।
- कम्पटीशन: प्रतिस्पर्धा का सामना करने में मदद करना।
कंज्यूमर (उपभोक्ता) के लिए:
- फुल इनफॉर्मेशन: प्रोडक्ट की कीमत, गुणवत्ता और उपलब्धता के बारे में पूरी जानकारी मिलना।
- फेयर प्राइस: एमआरपी की जानकारी होने से विक्रेता द्वारा अतिरिक्त कीमत नहीं वसूली जा सकती।
- ईजी चॉइस: विभिन्न प्रोडक्ट्स की तुलना करके सबसे अच्छा चुनने में मदद।
- टाइम सेविंग: घर बैठे जानकारी मिलने से बाजार जाने की जरूरत नहीं।
- बेटर क्वालिटी: विज्ञापन देने वाली कंपनियां आमतौर पर बेहतर गुणवत्ता वाले प्रोडक्ट देती हैं।
सोसाइटी (समाज) के लिए:
- मोर जॉब: विज्ञापन उद्योग में रोजगार के अवसर बढ़ना।
- नेशनल इनकम: राष्ट्रीय आय में वृद्धि।
- बेटर लिविंग स्टैंडर्ड: नए और बेहतर प्रोडक्ट्स के बारे में जानकारी मिलने से जीवन स्तर में सुधार।
- सपोर्ट टू मीडिया: मीडिया (अखबार, टीवी) को आर्थिक सहायता।
एडवरटाइजमेंट पर आपत्तियां (नुकसान)
आर्थिक आपत्तियां:
- हाई प्राइस: विज्ञापन की लागत प्रोडक्ट की कीमत में जुड़ जाती है, जिससे ग्राहक को अधिक भुगतान करना पड़ता है।
- वेस्टेज ऑफ मनी: विज्ञापनों पर अत्यधिक खर्च को पैसे की बर्बादी माना जाता है।
- मोनोपोली: बड़ी कंपनियां अधिक बजट खर्च करके बाजार पर कब्जा कर लेती हैं, जिससे छोटी कंपनियां प्रभावित होती हैं।
- फॉल्स ऐड: झूठे विज्ञापन अस्थायी बिक्री बढ़ाते हैं लेकिन लंबे समय में ब्रांड इमेज खराब करते हैं।
- अननेसेसरी डिमांड: विज्ञापन लोगों में उन चीजों की मांग पैदा करते हैं जिनकी वास्तविक आवश्यकता नहीं होती।
सामाजिक आपत्तियां:
- बैड हैबिट: कुछ विज्ञापन धूम्रपान, शराब और जुए जैसी बुरी आदतों को बढ़ावा देते हैं।
- फॉल्स इनफॉर्मेशन: कई विज्ञापन गलत या भ्रामक जानकारी देकर लोगों को धोखा देते हैं।
- डिससैटिस्फैक्शन: विज्ञापनों में दिखाई गई चीजों की तुलना में वास्तविक प्रोडक्ट से असंतोष पैदा हो सकता है।
2. पब्लिसिटी (प्रचार)
यह किसी प्रोडक्ट या सेवा के बारे में मुफ्त समाचार या चर्चा है जो मीडिया (अखबार, टीवी) द्वारा की जाती है। इसमें कोई भुगतान नहीं करना पड़ता।
3. पर्सनल सेलिंग (व्यक्तिगत विक्रय)
इसमें विक्रेता और खरीदार के बीच आमने-सामने संवाद होता है, जिसका उद्देश्य खरीदार को प्रोडक्ट खरीदने के लिए समझाना और राजी करना होता है।
4. सेल्स प्रमोशन (विक्रय प्रोत्साहन)
यह ग्राहकों को तुरंत खरीदारी के लिए प्रेरित करने हेतु दिया जाने वाला अल्पकालिक प्रस्ताव है। उदाहरण: छूट, "खरीदें एक पाएं मुफ्त", स्क्रैच कार्ड, लकी ड्रॉ, कूपन आदि।
यदि आप EBAY क्रैश कोर्स: ड्रॉपशिपिंग, हंटिंग, लिस्टिंग और अकाउंट सेटअप की पूरी गाइड में रुचि रखते हैं, तो आप ऑनलाइन बिक्री की मूल बातें सीख सकते हैं। इसके अलावा, सीखने की योजना के लिए 30-दिवसीय AI और Google SEO योजना: नई वेबसाइट को दृश्यता दें भी उपयोगी है।
हेलो दोस्तों, मैं जीत सर और आज हम लोग स्टार्ट करने वाले हैं क्लास 12 का फोर्थ सेमेस्टर का बिजनेस स्टडीज का मोस्टेंट
चैप्टर जिसका नाम है मार्केटिंग मैनेजमेंट टू। जी हां बिल्कुल सही सुना आपने। मार्केटिंग मैनेजमेंट टू। आपको पता है
वेस्ट बंगाल काउंसिल में बहुत ऐसे चैप्टर है जो बहुत ही स्टैंडर्ड और बहुत ही लें्थी चैप्टर है और वेस्ट बंगाल काउंसिल
ने उस चैप्टर को है ना दो पार्ट में डिवाइड कर दिया। यानी सेमेस्टर थ्री में भी रखा और सेमेस्टर फोर में भी रखा
क्योंकि बहुत ही इंपॉर्टेंट सा चैप्टर है और फ्यूचर में उसका यूज़ भी बहुत ज्यादा आने वाला है जिसका सबसे बेस्ट एग्जांपल है
अकाउंट्स के दो चैप्टर पार्टनरशिप और शेयर कैपिटल और बिजनेस स्टडी का ये सबसे बड़ा चैप्टर मार्केटिंग मैनेजमेंट। तो
मार्केटिंग मैनेजमेंट ऑलरेडी आप थर्ड सेमेस्टर में पढ़ के आ रहे हैं। और ये फोर्थ सेमेस्टर में आपको उसका सेकंड पार्ट
पढ़ने को मिलेगा। जैसे आप अकाउंट्स की बात करें तो पार्टनरशिप चैप्टर आप ऑलरेडी पढ़ के आ रहे हैं। और उसमें आपने कौन-कौन सा
चैप्टर पढ़ा था? पीएल एप्रोप्रिएशन और वैल्यू्यूएशन ऑफ़ गुडविल। और आपके फोर्थ सेमेस्टर में जो है वह वही पार्टनरशिप फिर
से आ गया। लेकिन एक दो नहीं पांच चैप्टर के साथ आ गया। जिसमें पहला चैप्टर आपको पढ़ना है पीएसआर यानी प्रॉफिट शेयरिंग
रेशियो। दूसरा एडमिशन ऑफ़ पार्टनर, रिटायरमेंट ऑफ़ पार्टनर, डेथ ऑफ़ पार्टनर और डिसोल्यूशन ऑफ़ पार्टनर। पांच चैप्टर अभी
भी आपका बाकी है जो फोर्थ सेमेस्टर में आपको पढ़ना है। तो जाके पार्टनरशिप कंप्लीट होगा। अभी भी एक दो चैप्टर बचा रहेगा जो
आपको बीकॉम में पढ़ने को मिलेगा। तो सोचो कितना बड़ा जो है वो है ना रेंज है पार्टनरशिप का। और ठीक उसी तरह शेयर
कैपिटल चैप्टर आपने पढ़ा था थर्ड सेमेस्टर में वो चैप्टर में से अभी बहुत सारा पोर्शन बचा हुआ है जिसमें शेयर फॉरफीचर है
रीइशू है कैपिटल रिजर्व है पूरा का पूरा न्यूमेरिकल्स पार्ट है वो सब बचा हुआ है जो आपको फोर्थ सेमेस्टर में पढ़ना है
डिस्क्रिप्टिव और न्यूमेरिकल्स वाला यानी सम्स वाला पार्ट ठीक है थ्योरी आपने पढ़ा था शेयर कैपिटल का है ना थर्ड सेमेस्टर
में और सेम मार्केटिंग मैनेजमेंट के साथ है मार्केटिंग मैनेजमेंट में इस बार आपको प्रमोशनल पार्ट पढ़ना है यानी किसी
प्रोडक्ट को कैसे प्रमोट करते हैं किसी प्रोडक्ट को कैसे सेल करने में हेल्प करते हैं कैसे आप अपने प्रोडक्ट को सेल
करवाओगे। ये बहुत ही इंटरेस्टिंग सा टॉपिक होने वाला है। बहुत ही इंटरेस्टिंग सा चैप्टर होने वाला है। और हम लोग जानबूझ के
मार्केटिंग चैप्टर स्टार्ट किए क्योंकि हमको पता है कि अभी-अभी आप थर्ड सेमेस्टर में मार्केटिंग मैनेजमेंट पढ़ के आ रहे
हैं। तो आपको बहुत सारा कुछ बात पता है मार्केटिंग मैनेजमेंट का। थोड़ा बहुत तो आप जानते हैं मार्केटिंग मैनेजमेंट के
बारे में तो आराम से आप इस चैप्टर से उसको कनेक्ट कर पाओगे। क्योंकि जस्ट अभी-अभी थर्ड सेमेस्टर में आप वो चैप्टर पढ़ के आ
रहे हैं। तो आपसे भी ये रिक्वेस्ट है कि अगर आप बिजनेस स्टडी और अकाउंट्स पढ़ रहे हो तो वो चैप्टर से ही स्टार्ट करना जो
चैप्टर आप ऑलरेडी थर्ड सेमेस्टर में पढ़े हो क्योंकि थोड़ा बहुत बेसिक पार्ट उसका पता है आपको। उसका कांसेप्ट आपको पता है।
बहुत अच्छे से आप फोर्थ सेमेस्टर को क्या कर पाओगे? कनेक्ट कर पाओगे और कनेक्शन बहुत इंपॉर्टेंट है सर। नया चैप्टर से कभी
शुरू मत करिए। वो चैप्टर पढ़िए जो आप पहले से पढ़ चुके हैं थर्ड सेमेस्टर में। और अकाउंट्स में स्टार्ट करना पार्टनरशिप से
देखो हम लोगों ने है ना पेड कोर्स में और YouTube पे भी हम लोगों ने पेड कोर्स में और YouTube पे भी दोनों जगह हम लोगों ने
पार्टनरशिप से स्टार्ट किया क्योंकि ऑलरेडी पार्टनरशिप आप पढ़े हैं। थोड़ा बहुत तो जानते हैं। है कि नहीं? उसके बाद
पक्का हम लोग शेयर कैपिटल से ही पढ़ाएंगे और यहां देखो हम लोग जानबूझ के यही चैप्टर स्टार्ट किए क्योंकि ये चैप्टर आप ऑलरेडी
है ना थर्ड सेमेस्टर में पढ़ चुके हैं मार्केटिंग मैनेजमेंट। तो थोड़ा बहुत तो जानते होंगे मार्केटिंग मैनेजमेंट के बारे
में। बस उतना ही काफी है सर कनेक्ट करने के लिए। ठीक है? तो चलिए स्टार्ट करते हैं। लेकिन सबसे पहले वही बात कि आप सभी
लोगों का प्यार और सपोर्ट ही सबसे बड़ी ताकत है जीत सर का और जीत सर को यहां तक लाने में भी आप सभी लोगों का भरोसा है ना
आपका प्यार और सपोर्ट है। अभी तक अप्रोक्स 325 जो है वो स्टूडेंट इनरोलमेंट ले चुके हैं जीत सर के पास ऑनलाइन कोर्सेज में।
ठीक है? और यह सिर्फ और सिर्फ पॉसिबल हो पाया है आप सभी लोगों के प्यार और आपके भरोसे और आपके ट्रस्ट की वजह से कि आप एक
ऑनलाइन में बैठे है ना रिचड़ा में एक छोटे से शहर में एक छोटा सा गली में बैठा हुआ कोचिंग को आप लोगों ने इतना प्यार दिया और
पूरे बंगाल भर से है ना सभी जगह से दार्जिलिंग दुर्गापुर आसनसूल इसके अलावा जो मटिया ब्रज और इसके अलावा जो है वो
ग्रीस पार्क और पता नहीं कहां-कहां कालीघाट है ना कितने सारे बच्चे जो है वो अलग-अलग बैचेस बने हुए हैं। 21 बैचेस हम
लोग अलग-अलग बनाए हैं। अलग-अलग ज़ोन के है ना टोटल WhatsApp ग्रुप बना हुआ है। ठीक है? और हर एक में हम लोगों ने बच्चों को
ऐड किया है। ये सभी लोगों के लिए सभी चीजों के लिए आपको दिल से धन्यवाद। बस इस वीडियो को शेयर करो और अपना सपोर्ट बनाए
रखिए और आपको पढ़ाएंगे सर बिजनेस स्टडी आप देखो। ये डिस्क्रिप्टिव पेपर है ना तो आपको बहुत ध्यान से पढ़ना होगा और इतना
इजी और इतना सिंपल लैंग्वेज में पढ़ाएंगे ना मेरे भाई मजा आ जाएगा आपको क्योंकि इस बार बहुत ज्यादा चैलेंजिंग होने वाला है
अगर कोई सब्जेक्ट तो बिनेस स्टडी होने वाला है। अकाउंट्स भी बहुत ज्यादा चैलेंजिंग नहीं है। ऑब्वियसली है सवाल
बनाना है तो लेकिन अकाउंट से भी ज्यादा चैलेंजिंग होने वाला है बिज़नेस स्टडी। स्पेशली उन बच्चों के लिए जो हिंदी मीडियम
से है या जिनका राइटिंग स्किल बहुत अच्छा नहीं है वो लोग रो देंगे सर इस सेमेस्टर में। इसलिए आपको पहले से तैयार रहना होगा
और खूब अच्छे से उस समय आपको सबसे जरूरी है एक अच्छा बुक जिसकी लैंग्वेज बहुत अच्छी हो एक अच्छा नोट्स जिसका लैंग्वेज
बहुत ही अच्छा हो और एक अच्छा टीचर जो आपके टॉपिक को बहुत अच्छे से समझा दे और ताकि आप उसको अच्छे से याद करो तो इस
वीडियो को ध्यान से सुनना लास्ट तक देखना एक-एक टॉपिक क्लियर करेंगे सर इजी और एकदम सिंपल लैंग्वेज में और उसके बाद एक बार
रिवाइज मारना एक बार बुक से याद करना या आपके पास नोट्स है आप हमारा पेड कोर्स लेकर रखे हैं तो आपके पास हमारा बहुत ही
सिंपल और इजी लैंग्वेज में संजीवनी या बिज़नेस स्टडी होगा उससे याद कर कर लो और एक बार लिख लेना। एक मोटी वाली कॉपी
खरीदिए। उसमें बैठ के लिखिए अच्छे से बिज़नेस स्टडी और देखिए कितना अच्छा बिजनेस स्टडी आपका हो जाता है। तो चलिए स्टार्ट
करते हैं मार्केटिंग मैनेजमेंट। आपको पता है मार्केटिंग मैनेजमेंट का मतलब क्या होता है? मार्केटिंग मैनेजमेंट का एक्चुअल
मतलब होता है किसी भी प्रोडक्ट को सेल करवाने के लिए कंपनी जितने तरीकों का ट्रिक्स और हिक्स का यूज करती है। उसको हम
लोग एक्चुअल में मार्केटिंग बोलते हैं। और वो चीज को मैनेज करने को ही कहलाता है मार्केटिंग मैनेजमेंट। और आज हम लोग आपके
सिलेबस में जो रखा है मार्केटिंग मैनेजमेंट का फोर्थ सेमेस्टर में वो बहुत ही आसान सा टॉपिक रखा है जिसका नाम है
प्रमोशन। यानी प्रमोशन कैसे करेंगे? मान लीजिए मेरा कोई प्रोडक्ट है। है ना? और वो हम बना रहे हैं। जैसे मान लीजिए ये हम
घड़ी बना रहे हैं। स्मार्ट वॉच बना रहे हैं। अब हम चाहते हैं इस प्रोडक्ट को प्रमोट करें। तो कैसे प्रमोट करेंगे? कैसे
हम मार्केट में इसको अवेलेबल करवाएं? किस तरीके से इसको हम काम करें ताकि लोगों तक ये पहुंच सके। लोग कन्विंस हो सके। लोग
इंप्रेस हो सके हमारे प्रोडक्ट से और लोग धड़ाधड़ धड़ाधड़ मेरा प्रोडक्ट खरीदें। बस इसी टॉपिक को ऊपर पढ़ना है। तो आइए
स्टार्ट करते हैं सर आपसे पहला नंबर पार्ट है प्रमोशन। जी पहला टॉपिक आपको पढ़ना है प्रमोशन और प्रमोशन के फिर चार टॉप चार
एलिमेंट्स हैं और वही चारों एलिमेंट में पूरा चैप्टर खत्म। तो पहले चैप्टर को भी अच्छे से समझिएगा। तो सबसे पहले प्रमोशन।
प्रमोशन किसको बोलते हैं? तो प्रमोशन की अगर बात करें हम लोग देखिए प्रमोशन की अगर बात करें तो प्रमोशन
क्या है? प्रमोशन मींस टेलिंग पीपल अबाउट योर प्रोडक्ट। प्रमोशन का एक्चुअल मतलब होता
है लोगों को आपके प्रोडक्ट के बारे में बताना या समझाना और साथ ही साथ एंड कन्विंसिंग देम टू बाय इट। और साथ में
उनको कन्विंस करना ताकि वो हमारा प्रोडक्ट खरीद सके। है ना? इसी चीज को हम लोग क्या बोलते हैं? प्रमोशन। तो एक्चुअल में
प्रमोशन का काम क्या है? अपने प्रोडक्ट के बारे में लोगों को बताना, उसका बेनिफिट बताना, उसका फीचर्स बताना, उसका एडवांटेज
बताना, उसके यूजेज बताना और फिर लोगों को कन्वेंस करना ताकि वो हमारा प्रोडक्ट क्या कर ले? खरीद ले। इसी का नाम तो प्रमोशन है
और इसी को लोग बोलते हैं कि प्रमोशन कर रहे हैं। है कि नहीं भाई? ये प्रमोशन हो रहा है प्रोडक्ट का। तो ये प्रमोशन हो
गया। हमने कुछ प्रोडक्ट का पिक्चर दिया है जो ब्रांडेड प्रोडक्ट है और यहां पे हम लोगों ने उसका पिक्चर दिखाया है कि इस तरह
से कंपनियां इस चीज को क्या करती है? प्रमोट करती है और तभी आप कन्विंस होते हैं कि हां यार बहुत अच्छा है तो है ना और
फिर आप वो प्रोडक्ट खरीदते हैं। ठीक है? तो ये हो गया प्रमोशन। ठीक है? अच्छा नेक्स्ट आता है फंक्शन ऑफ़ द प्रमोशन।
अच्छा जब हम लोग किसी प्रोडक्ट का प्रमोशन करते हैं तो उसके क्या-क्या फंक्शन होते हैं? किस तरीके से काम करते हैं? देखो जब
आप प्रमोट करते हो ना तो क्या-क्या चीजों को ध्यान रखते हो? सबसे पहले टेलिंग अबाउट द प्रोडक्ट। प्रोडक्ट के बारे में लोगों
को बताना। तो सबसे पहले प्रोडक्ट के बारे में लोगों को बताना कि ये प्रोडक्ट क्या है? क्या काम कर रहा है? कैसे काम कर रहा
है? वो सेकंड पार्ट है। ये प्रोडक्ट क्या है? है ना? ये पहले आपको बताना। तो टेल मी अबाउट द प्रोडक्ट एंड अवेलेबिलिटी। यानी
ये प्रोडक्ट कहां-कहां अवेलेबल है। यहां पे देखो लिखा हुआ है इट्स इनफॉर्म द कस्टमर दैट द प्रोडक्ट इज अवेलेबल। ये
कस्टमर को इन्फॉर्म करना कि हमारा प्रोडक्ट अवेलेबल है और इस इस जगह अवेलेबल है। सेकंड नंबर सेकंड नंबर सो इट्स
बेनिफिट। और उसके बाद आपको बताना है इसके बेनिफिट कि इसके क्या-क्या फायदे हैं। तो आपको बताना है इट्स स्टिल द फीचर्स एंड
यूजेज ऑफ द प्रोडक्ट। और आपको यह बताना है, यह बताना है कि आपके प्रोडक्ट के क्या-क्या फीचर्स है, क्या-क्या यूजज़ है,
क्या-क्या एडवांटेजेस है। तभी तो लोग खरीदेंगे। तो पहला पहला प्रोडक्ट के बारे में इनफॉर्म करिए। दूसरा प्रोडक्ट के
फीचर्स या ऑब्जेक्टिव या यूजेज के बारे में बताइए। और तीसरा मेक पीपल बाय। और लोगों को रेडी करना, तैयार करना क्या करने
के लिए? बाय करने के लिए। यानी खरीदने के लिए। इट्स कन्वेंस एंड इनकरेज द कस्टमर टू बाय इट। है नहीं इस प्रोडक्ट को खरीदना या
खरीदने के लिए कन्विंस करना यह तीसरा काम है सर याद नहीं रहेगा फंक्शन फंक्शन पहला बोलो पहला क्या करना प्रोडक्ट के बारे में
बताना बिल्कुल है ना लैंग्वेज देखो सर कितना इजी और सिंपल रखे हैं आपको बहुत ज्यादा ज्यादा बड़ा-बड़ा नहीं लिखना है सर
ठीक है है ना एकदम सिंपल और ईजी रखना है टू मार्क्स थ्री मार्क्स और फाइव मार्क्स के ही क्वेश्चन आने वाले हैं आपके एग्जाम
में उससे कोई बड़ा क्वेश्चन नहीं आने वाला है सबसे बड़ा क्वेश्चन पांच मार्क्स का आने वाला है पांच से ज्यादा पॉइंट लिखने
की जरूरत नहीं है पांच पॉइंट लिखो और अच्छे से एक्सप्लेन करना और ज्यादा लिखने की जरूरत जरूरत नहीं है। टू द पॉइंट लिखना
है। टू द पॉइंट। सीधी बात नो बकवास। समझ गए भाई? आप यह बिल्कुल दिमाग से निकाल दो कि लिख रहे हैं। बना बना के लिख रहे हैं।
दो पन्ना लिख दिए। टीचर खुश हो के नंबर दे दिया। पूरा काट के जीरो बैठा देगा सर। ठीक है? उसको बकवास नहीं चाहिए। सीधा बात।
देखो हम लोग सीधी बात। नो बकवास। एकदम जो बात है लिखो और निकलो। ठीक है? चलिए हम लोग अभी नोट्स भी अपना दिखाएंगे आपको कि
हम लोग नोट्स कैसे तैयार किए हैं। ठीक है? आप नोट्स देख के समझ जाएंगे कि लिखने की प्रैक्टिस के लिए हम लोग अलग से नोट्स
बनाते हैं। पढ़ाने के लिए टॉपिक समझाने के लिए ये हमारा पीपीटी है। सब चीजों के लिए हम लोग अलग-अलग स्पेशलिटी तैयार किए हैं।
ठीक है? और उसी चीज को ध्यान में रख के आपको पढ़ा रहे हैं। ठीक है? बस लास्ट तक बने रहिए। देखिए कितना मजा आएगा आपको
टॉपिक समझने में। नेक्स्ट देखो। तो सर तीन बातें हो गई। चौथा नंबर बिल्ड इंक्रीस द सेल। अच्छा जब आप प्रोडक्ट के बारे में
बताओगे, उसका बेनिफिट बताओगे, लोगों को तैयार करोगे प्रोडक्ट को खरीदने के लिए तो फिर क्या होगा? ऑटोमेटिक लोग खरीदना
स्टार्ट करेंगे। और जब लोग खरीदना स्टार्ट करेंगे तो इनक्रीस द सेल तो आपका सेल बढ़ जाएगा। इट्स हेल्प टू सेल मोर प्रोडक्ट
मोर एंड मोर प्रोडक्ट। और ये ये कौन प्रमोशन प्रमोशन जो है वो आपको हेल्प करता है ज्यादा से ज्यादा प्रोडक्ट को सेल
करवाने में। तो ये पांच फंक्शन हो गए सर आपके और बिल्ड द गुड इमेज। और देखो आप अपने प्रोडक्ट के बारे में बताओगे,
बेनिफिट बताओगे, उसको खरीदने के लिए लोगों को रेडी करोगे और जब धड़ाधड़ सेल होने लगेगा तो ऑटोमेटिक मार्केट में आपकी एक
अच्छी इमेज क्रिएट होगी। या आप अपने प्रोडक्ट के बारे में अगर प्रमोशन कर रहे हो तो लोग देख रहे हैं, जान रहे हैं, सुन
रहे हैं और उसकी वजह से आपका एक अच्छा इमेज तैयार हो जाता है कि भैया ये प्रोडक्ट तो हम जानते हैं। है ना? बहुत
अच्छा प्रोडक्ट है। हम देखें टीवी में बहुत जगह ऐड देखे हैं। अच्छा अच्छा ले लो। है ना? तो प्रमोशन करने से भी पब्लिक इमेज
अच्छी तैयार होती है आपकी। गुड इमेज तैयार होता है आपके प्रोडक्ट का। तो ये हमारा क्या हो गया? फंक्शन ऑफ प्रमोशन। देखो तो
कितना इजी है भाई। है ना? अब इसको कोई बोलेगा सर हम रट्टा मारेंगे। क्या ही रट्टा मारोगे? या आप आपको जो हम लोग
एक्सप्लेन किए हैं उसमें भी आपको रट्टा मारने वाला चीज नहीं है। देखो गुड इमेज इट्स क्रिएट द गुड नेम ऑफ द कंपनी इन अ
पब्लिक। पब्लिक में कंपनी का एक अच्छा नाम और अच्छा रेपुटेशन जो है वो क्रिएट होता है और ये होता है हम लोगों का क्या
फंक्शन। ठीक है? अगर हम आपको ये बता दें कि नोट्स में कैसे लिखेंगे? तो हम आपको नोट्स दिखाते हैं। जो हमारा पेड कोर्स का
नोट्स है हम आपको दिखाते हैं। आप देखो एक बार समझो कि कैसे हम लोग उसको रेडी करते हैं। अ इसके लिए हम आपको नोट्स दिखाने के
लिए एक मिनट बैक जाना होगा मेरे को। ठीक है? अभी हम आपको दिखाते हैं। चलो चलो ये देखो। यहां पे हम आपको दिखाते
हैं अपना नोट्स कि कैसे हम लोग तैयार किए हैं नोट्स को। ये देखिए। ये हमारा फाइनेंसियल मार्केट का
नोट्स है। अब देखो कितना डेफिनेशन। अब आप बोलोगे यहां डेफिनेशन थोड़ा सा बड़ा है। बिल्कुल बिल्कुल जो है वो बहुत बड़ा नहीं
है। बहुत छोटा भी नहीं है। बहुत एकदम मिड मिड टर्म्स पे लिखे हुआ है। ठीक है? लेकिन हम आपको सबसे मजेदार बात बताएं अपने नोट्स
का। ठीक है? कि देखो पढ़ाई नहीं कर रहे हैं। जो बात है वो आपको बता रहे हैं। आप देखो और समझो। है ना? डेफिनेशन आप पढ़ोगे।
व्हाट इज फाइनेंसियल मार्केट? हो सकता है फाइनेंसियल मार्केट पढ़े। लेकिन हमारे यहां हिंदी मीडियम के बहुत सारे बच्चे
हैं। बहुत सारे बच्चे हैं जो टॉपिक पढ़ते हैं लेकिन भूल जाते हैं कि पता नहीं क्या बताए थे। पढ़ के आप समझ ही नहीं पा रहे।
तो देखो हम लोग क्या एक नया चीज लाए हैं। लेट्स टॉक। लेट्स टॉक में क्या है ना हम लोग आपके WhatsApp लैंग्वेज WhatsApp
लैंग्वेज जानते हैं आप? अरे दिन रात जिसमें आप लगे रहते हैं उसी को WhatsApp लैंग्वेज बोलते हैं। ठीक है? है ना? तो वो
WhatsApp लैंग्वेज जो है वो हम लोग यूज़ कर रहे हैं क्योंकि वो तो आप बहुत अच्छे से समझते हैं। तो अगर आप ये समझ गए पढ़ के तो
ठीक है। लेकिन लेट्स चैट में या लेट्स टॉक में हम लोग बात करेंगे आपसे। फाइनेंसियल मार्केट एक ऐसा मार्केट है जहां पे पैसा
का लेनदेन होता है और जहां फाइनेंसियल एसेट जैसा शेयर, डिबेंचर, बॉन्ड खरीदा और बेचा जाता है। ठीक है? ये क्या है सर? ये
लेट चैट है। हर टॉपिक के साथ है। हर टॉपिक के साथ है। ठीक है? ताकि आपको समझने में बहुत हेल्प मिलेगा। ठीक है? आप आगे बढ़ोगे
तो ये देखो एक्सप्लेनेशन जो हमारा पीपीटी में एक्सप्लेनेशन हम लोग टू द पॉइंट रखे हैं ताकि हम टॉपिक समझा सके। लेकिन जब
हमारे नोट्स में आओगे तो एक्सप्लेनेशन थोड़ा सा ज्यादा है क्योंकि एग्जाम में आपको लिखना है। ठीक है? ये आप देख सकते
हैं। ऐसा अगर आप पढ़ोगे और जैसे ही ये सब फीचर्स चल रहा है, टाइप चल रहा है। लेकिन जैसे ही फीचर्स टाइप के बाद एक नया टॉपिक
देखो आ गया। टेबल प्रेजेंटेशन से हम लोग पूरे नोट्स को बनाए। अब देखो ये नया टॉपिक आ गया मनी मार्केट। अब तुम मनी मार्केट
पढ़ के समझ नहीं पाए। तो देखो ना लेट्स टॉक। लेट्स चैट में हम लोग आपको बताएंगे मनी मार्केट क्या है? तो मनी मार्केट एक
ऐसा मार्केट होता है जहां पे शॉर्ट टर्म फंड का लेनदेन होता है। मतलब एक साल से कम समय के लिए इसमें पैसा लगाया जाता है।
यानी एक दिन के लिए, हफ्ता के लिए या कुछ महीनों के लिए लगाया जाता है। देख रहे हो? कितना जबरदस्त हम लोग चीज लिखे हैं। और ये
आपके स्टडी इसको बहुत जबरदस्त बनाएगा सर। आप देखिए एक बार प्रेजेंटेशन हम लोग किस तरीके से रखे हैं और किस स्किल में जो है
वो एक-एक चीज को हम लोग बताए हैं। आपका शॉर्ट टर्म क्या है? लॉन्ग टर्म क्या है? कुछ भी नया टॉपिक आएगा तो उसका हम लोग जो
है वो लेट्स चैट में आपको एक्सप्लेन करेंगे। इन इंग्लिश में इन इंग्लिश समझते हो ना? इन इंग्लिश में मतलब हिंदी इंग्लिश
में यानी WhatsApp लैंग्वेज में। डिफरेंस बिटवीन के लिए एकदम टू द पॉइंट जो है वो लिखा हुआ है। अब जैसे देखो कैपिटल मार्केट
आ गया नया टॉपिक। तो कैपिटल मार्केट वो मार्केट होता है जहां पे लॉन्ग टर्म फंड का लेनदेन होता है। वो शॉर्ट टर्म फंड का
लेनदेन होता है। लॉन्ग टर्म फंड का लेनदेन होता है। मतलब 1 साल से ज्यादा और वहां क्या था? एक साल से कम। अब ये थोड़ी ना आप
नहीं समझ पाओगे सर। हम लोग पढ़ाएंगे भी और ऐसे आपको लेट चैट में आपको चीजों को बताएंगे और इस तरीके से एक्सप्लेन किया।
आप हमारा कोई भी लैंग्वेज भी पढ़ोगे ना जो हम लोग डिफरेंट अब सेबी क्या है उसके बारे में देखो एकदम तीन लाइन दो लाइन लिखे हैं
टू द पॉइंट एकदम और ये पूरा भरा हुआ है सर हमारा नोट्स। ठीक है? आपको हम दिखा दें। ये सारा चीज हम लोग जो है वो उसी तरीके से
डायग्रामेटिक प्रेजेंटेशन के साथ एकदम कलरफुल मोड में जो है वो आपके लिए नोट्स बनाए हैं। ठीक है? और ये सारे बच्चे जो भी
हमारे 300 प्लस बच्चों ने हमारा सब्सक्रिप्शन लिया है उन सबको अवेलेबल हो चुका है। कुछ पार्ट हम लोग जो है वो अब
अवेलेबल करवाएंगे। उन्हीं लोगों के लिए बनाए हैं। तो धीरे-धीरे काम कर रहे हैं हम लोग इसके ऊपर और ये सारे चैप्टर अलग-अलग
है। ठीक है? जैसे ये प्रमोशन आ गया मतलब कि मार्केटिंग चालू हो गया। ये पूरा पूरा कंप्लीट चैप्टर हम लोग रखे हैं। इसमें चार
चैप्टर या तीन चैप्टर हम लोग रखे हैं। और इस तरीके से हम लोग जो है वो प्रेजेंटेशन आपको दिखाएंगे। ठीक है? ये हमारा नोट्स है
जो हम लोगों ने आपको बताया। ठीक है? और इस तरीके से हम लोग आपके लिए तैयारी करवा रहे हैं। ठीक है? आशा करते हैं आपको पसंद
आएगा। जो हमारे पेड कोर्स के बच्चे हैं वह लोग जो है इस चीज को अच्छे से समझ पाएंगे। चलिए।
चलिए बढ़ते हैं आगे। आइए स्टार्ट करते हैं हम लोग। तो किस टॉपिक पर थे? हमने एक नोट्स का आपको
स्ट्रक्चर दिखाया। और ये देखो आ गया हमारा एलिमेंट्स ऑफ एलिमेंट्स ऑफ प्रमोशन। प्रमोशन के चार एलिमेंट्स हैं। और यही
एलिमेंट्स आपको पढ़ना है। चैप्टर खत्म सर। कौन-कौन सा चार? सबसे पहला एडवरटाइजमेंट, पब्लिसिटी, प्रोपोर्शनल सेलिंग और सेल्स
प्रमोशन। एडवर्टाइजमेंट के बारे में अब आपको एडवर्टाइजमेंट के बारे में नहीं पता लेकिन उसको बहुत डिटेल जानना है तो थोड़ा
सा आपको पढ़ना पड़ेगा। इसके अलावा पब्लिसिटी क्या है? पर्सनल सेलिंग क्या है? सेल्स प्रमोशन क्या है? तो चलिए
स्टार्ट करते हैं। पहले चारों का डेफिनेशन पढ़ेंगे फिर उसका डिटेल एक्सप्लेनेशन पढ़ेंगे। ठीक है? तो सबसे पहला
एडवर्टाइजमेंट किसको बोलते हैं? अब एडवर्टाइजमेंट मींस इट इज़ द पेड एडवर्टाइजमेंट क्या है? ये एक पेड प्रमोशन
है। इट इज द पेड प्रमोशन टू टेल द पीपल अबाउट योर प्रोडक्ट एंड मेक देम रेडी टू यू रेडी टू बाय इट। यानी उनको रेडी करना
क्या करने के लिए? बाय करने के लिए या मेक देम बाय इट। या उनको तैयार करना कि वो प्रोडक्ट को खरीद ले। तो यही
एडवर्टाइजमेंट का मकसद होता है ना। आप भी टीवी में जो ऐड देखते हो उसका मेन मकसद क्या है? कि आप देखो और देखने के बाद
कन्विंस हो और वो माल खरीदो। तो बस ये एडवर्टाइजमेंट है। अब आप देखो ना कितना सिंपल डेफिनेशन दिया हुआ है। एग्जांपल
चाहे एग्जांपल लिख सकते हो। ये एग्जांपल लिख सकते हो डोमिनोज का जो आपको साबुन, शैंपू, तेल जो भी एग्जांपल आपको अच्छा लगे
लिख सकते हैं। है ना? यहां पे एग्जांपल दिया हुआ है कि एडवरटाइजमेंट इज द टेलिंग अबाउट द प्रोडक्ट थ्रू द टीवी या
न्यूज़पेपर। किसी टीवी में या न्यूज़पेपर में या बैनर में या पोस्टर में या हैंडबल में या प्लेट में या दीवार वाल जो है वो
कलरिंग करके जैसे भी करके आप जो ऐड दे डाल रहे हैं प्रोडक्ट के बारे में बता रहे हैं उसी को हम लोग क्या बोलते हैं
एडवर्टाइजमेंट तो ये हो गया आपका एग्जांपल और ये हो गया उसका डेफिनेशन अब टीचर कहां नंबर काटेगा सर आपसे सब डेफिनेशन पूछा
व्हाट इज एडवर्टाइजमेंट आपने एडवर्टाइजमेंट का डेफिनेशन भी लिख दिया और हमारा क्या है एग्जांपल भी लिख दिया ठीक
है और हम लोग नोट्स में इस चीज को और बेहतर ढंग से जो है वो थोड़ा सा प्रेजेंट किए हैं मतलब यहां खराब नहीं किए हैं कहने
का मतलब है कि वहां एक्सप्लेन ज्यादा अच्छा से किया हुआ है क्योंकि वो आपको याद करके लिखना है और ये है पूरा टॉपिक को
समझने के लिए। ठीक है? तो ये टॉपिक समझ ये भी लिखोगे एकदम परफेक्ट है। एकदम परफेक्ट है। अगर आप हमारा पीपीटी से उठा के लिखोगे
और भी जबरदस्त होगा सर। ठीक है? चलिए आगे बढ़ते हैं। नेक्स्ट एडवर्टाइजमेंट। अब देखो एडवर्टाइजमेंट और पब्लिसिटी में क्या
फर्क है? देखो कोई न्यूज़ एजेंसी या कोई न्यूज़ कंपनी आपके बारे में अगर बता रहा है कि जीत एजुकेशन जो है वो एक अच्छी संस्था
है जो बच्चों को है ना कॉमर्स के लिए जो है वो सर्विस दे रही है और बहुत बच्चे पसंद कर रहे हैं कॉमर्स के सर्विस के बारे
में। यहां के बहुत सारे बच्चे 13 सालों से बच्चे टॉपर हो चुके हैं। हुगली और आसपास के क्षेत्रों में कोलकाता के क्षेत्रों
में बहुत सारे स्कूल टॉपर डिस्ट्रिक्ट टॉपर जो है हुए हैं। है ना? जो हुगली डिस्ट्रिक्ट में टॉपर हुए हैं। इसके बारे
में थोड़ा सा लाइन बोल दिया चार-पांच लाइन। ठीक है? कोई चीज हुआ तो। हमने कुछ एप्रिशिएट किया बच्चों को फ्री में
किताबें बांटी वो आ गया भाई न्यूज़ में तो ये क्या है ये पब्लिसिटी है जो फ्री में ही होता है लेकिन न्यूज़ चैनल या न्यूज़
एजेंसी या न्यूज़पेपर आपके बारे में कुछ छापता है ठीक है या उसने कुछ नहीं छापा है कि 13 सालों से टॉपर देने वाला एकमात्र
इंस्टट्यूट रहा हुगली डिस्ट्रिक्ट में जीत एजुकेशन ओपीसी प्राइवेट लिमिटेड और ये करके कॉलम छप गया हमारा न्यूज़पेपर में ये
हमारे लिए क्या हो गया पब्लिसिटी हो गया ये हमारी पब्लिसिटी हो गई जो बिना पैसा खर्च किए ही हमको मिल गया तो यहां देखो
फ्री न्यूज़ अबाउट योर प्रोडक्ट इन न्यूज़पेपर एंड टीवी इट इज विदाउट पेइंग याद रखना फ्री बोल दिए हैं फिर भी हम लिख
दिए विदाउट पेइंग याद रखना विदाउट पेइंग अगर आपको कोई है ना एडवरटाइजमेंट ऐड मिल जा रहा है यानी कोई आपके बारे में बता रहा
है कोई न्यूज़पेपर या टीवी चैनल तो फिर ये आपके लिए क्या कहलाएगा सर पब्लिसिटी एक पब्लिसिटी है लोग बोलते हैं ना कि भाई
अच्छी पब्लिसिटी कमा लिया ना न्यूज़ में आ गया उसका तो पूरा पब्लिसिटी हो गया है ना आपके कोचिंग का सर न्यूज़ में आ गया सर
पब्लिसिटी हो गया आपके कोचिंग का तो बहुत ऐसे लोग बोलते हैं और अगर टीवी में चल रहा है कि भाई अगर आपको कॉमर्स में टॉपर बनना
है तो जीत एजुकेशन ज्वाइन करिए तो लोग बोलते है ओ ऐड चला रहे हैं सर। ओ सर का ऐड भी चल रहा है। तो एडवरटाइजमेंट इतना तो आप
भी समझते हैं कि एडवरटाइजमेंट क्या है और पब्लिसिटी क्या है? है कि नहीं? चलो आगे बढ़ते हैं। ठीक है। हां एग्जांपल क्या हो
सकता है? न्यू चैनल हो सकता है। न्यू चैनल का कोई शो हो सकता है। न्यू प्रोडक्ट के बारे में वेरी गुड प्रोडक्ट। ऐसा कुछ बोल
दिया दैट फ्री पब्लिसिटी। ये आपके लिए फ्री पब्लिसिटी हो गया। अच्छा दो चीज पढ़े एडवरटाइजमेंट और पब्लिसिटी। नेक्स्ट आता
है पर्सनल सेलिंग। पर्सनल सेलिंग पढ़ाना पड़ेगा। अच्छा हम बता दें आपको ये चार टॉपिक के बारे में जस्ट आपको बता रहे हैं।
इसके बाद आपको इसके बारे में एक्सप्लेन हम लोग करेंगे डिटेल। ठीक है? तो चलिए आगे बढ़ते हैं। नेक्स्ट पब्लिसिटी सॉरी पर्सनल
सेलिंग। अब पर्सनल सेलिंग का मतलब क्या होता है? पर्सनल सेलिंग का मतलब होता है ठीक है? फेस टू फेस या डायरेक्ट
कम्युनिकेशन करना। आप मॉल में जाते हैं बोलते हैं भैया ये जो मोबाइल फोन है ये कितने का है? इसमें क्या-क्या फीचर्स हैं?
या आप मोबाइल शोरूम में जाते हैं और वहां मोबाइल जो का जो एजेंट है जो भी सेल सेलिंग पर्सन है उससे आप पूछते हैं कि
भैया इस मोबाइल में क्या प्रॉब्लम फीचर्स है और इसमें क्या फीचर्स है? तो वो बताएगा नहीं देखिए ये वाला जो लेंगे ना इसमें
इतना मेगापिक्सल कैमरा देगा। इसमें थोड़ा सा कम है और इसका जो है वो रैम इतना अच्छा है। इसमें जो है वो आपका 64 GB का दे रहा
है। इसमें 100 256 GB का दे रहा है। 164 GB का दे रहा है। ऐसे करके कॉन्फ़िगरेशन बता रहा है। ठीक है। आपको लग रहा है अच्छा
तब तो भैया ये वाला ज्यादा अच्छा। हां वही तो बोल रहे हैं ये वाला ज्यादा अच्छा है। तो इसका मतलब है कि आप वहां फेस टू फेस
बात कर रहे हैं ना या आपके पास कोई कॉल आया कि भैया आपको लोन चाहिए क्या? हम लोग लोन प्रोवाइड करते हैं या भैया हम लोग जो
है एक ऑफर निकाले हैं। यहां पे बगल में ही हम लोग का इलेक्ट्रिसिटी दुकान है और हम लोग ऑफर निकाले हैं दीपावली से लेके
दुर्गा पूजा से लेके दीपावली तक। अगर आप खरीदते हैं हमारे यहां फ्रिज तो जो 35,000 का फ्रिज है वो हम लोग 25,000 में देंगे।
10,000 का डिस्काउंट है आप पता कर लो फिर आके ले लेना। तो आपको लगा कि अच्छा कहां पे दुकान है? अच्छा यहां पे है। अच्छा
उसमें क्या-क्या देंगे? अच्छा ये चीज देंगे क्या? कौन सी कंपनी का है? है ना? कितना साल का वारंटी है? कुछ डैमेज तो
नहीं है। यानी फेस टू फेस बात कर रहे हैं ना? तो ये पर्सनल सेलिंग कहलाता है। ठीक है? कभी-कभी आपके घर पे कोई बेल बजाया और
आ गया भाई। है ना? टाई कोड पहन के आ गया। तुमको लगा कौन आ गया भाई? मेरा रिलेटिव तो इतना टाई कोट पहन के नहीं आएगा। अब सोच
रहे हो भाई कौन ऑफिसर आ गया। फिर वो नीचे से बैग से निकाल रहा है और बोल रहा है भैया छोटा सा पाउच शैंपू का ले लीजिए ठीक
है है ना कंपनी का प्रचार पब्लिक का मुनाफा है ना है ना फ्री में ले लीजिए और कल लगाइएगा सुबह और पसंद आएगा तो परसों
आएंगे डब्बा खरीदना तुम भी बोला ठीक है दे दो भाई तुमने ले लिया लगाए खरीदे नहीं खरीदे लेकिन पर्सनल सेलिंग तो हुआ यानी वो
आ के आपको बताया और आपको अच्छा लगा हो सकता है प्रोडक्ट क्योंकि कोई भी कंपनी अपना सैंपल का सामान थोड़ी खराब करेगी तो
आपको प्रोडक्ट बहुत अच्छा लगा यार मजा आ गया यार बहुत अच्छा शैंपू है तो है ना नेक्स्ट दिन वो आया बोला भैया शैंपू कैसा
लगा तुम बोला हां अच्छा था तो तो फिर यह डब्बा ले लो। तुम भी बोला ठीक है दे दो यार। कितने का दे रहे हो डब्बा? बोला कि
बस यह आपका जो है वो 1 लीटर का डब्बा है और यह आपको सिर्फ मिलेगा कितना रुपया में? है ना? मात्र जो है वो हम लोग 260 में रखे
हैं। तुम बोला ठीक है दे दो यार। है ना? 260 में आपने डब्बा खरीद दिया शैंू का और वो शैंपू लगाएंगे। है कि नहीं? तो ये क्या
हो गया? ये क्या हो गया? ये हो गया पर्सनल सेलिंग। पर्सनल सेलिंग मतलब देखो ना डायरेक्ट फेस टू फेस टॉक बिटवीन द सेलर
एंड बायर। देख रहे हो? लैंग्वेज देख रहे हो? एकदम सीधा सिंपल और परफेक्ट। ठीक है? है ना? टू मेक हिम बाय द प्रोडक्ट। यानी
है ना यानी क्या करना? फेस टू फेस कम्युनिकेट करना सेलर और बायर के बीच में ताकि वो प्रोडक्ट को क्या कर सके? समझा
सके, बता सके। एग्जांपल के लिए आप यहां पे दिया हुआ है। एग्जांपल आप खुद से पढ़ लीजिएगा। ठीक है? चलिए आगे बढ़ते हैं।
[गला साफ़ करने की आवाज़] है ना? आगे देखिए। सेल्स प्रमोशन। तो सेल्स प्रमोशन में क्या दिया हुआ है?
शॉर्ट टर्म ऑफर गिवेन टू द कस्टमर टू मेक देम बाय क्विकली। ठीक है? अच्छा ये हम लोग एग्जाम और एग्जांपल इसलिए लिखे हैं ना कि
आप एग्जाम में ये लिख सकते हैं और एग्जांपल के लिए हम लोग दिए हैं कि आप ये भी डाल सकते हैं। तो आपकी मर्जी है आपको
जो ठीक लगे। ठीक है? हम लोगों ने दोनों दे दिया है। ठीक है? शॉर्ट टर्म अच्छा सेल्स प्रमोशन। अब देखो क्या बोल रहा है? सेल्स
प्रमोशन। सेल को प्रमोट करना। अब सेल को कैसे प्रमोट करेंगे? तो सेल को सेल को कैसे प्रमोट करेंगे? तो सेल को
प्रमोट करने के लिए हम लोग क्या करेंगे? ध्यान दीजिएगा। शॉर्ट टर्म ऑफर गिवेन टू द कस्टमर टू मेक देम बाय क्विकली। यानी किसी
कस्टमर को शॉर्ट टर्म ऑफर देना, धमाका ऑफर, दिवाली ऑफर, होली ऑफर, बाय वन गेट वन फ्री, स्क्रैच कार्ड, लकी ड्रॉ कूपन ये सब
क्या है? ये सब एक तरह का सेल्स प्रमोशन का टेक्निक होता है जो कंपनियां यूज़ करती है। बिग बिलियन डील है ना? ये सारी चीजें
जो है एक सेल्स प्रमोशन की टेक्निक होती है। और ये शॉर्ट टर्म ऑफर होता है। अभी निकला है ना? कितने सालों? कितने साल के
लिए थोड़ी नहीं निकला है। महीनों के लिए निकला है। कुछ महीनों में खत्म हो जाएगा। 20 दिन के लिए 25 दिन के लिए। उसके बाद
खत्म हो जाएगा। ठीक है? तो ये हर साल निकलता है। एक शॉर्ट टर्म ऑफर निकलता है। सेल्स प्रमोशन बोलते हैं। ठीक है? सेल्स
प्रमोशन में क्या हो सकता है? है ना? डिस्काउंट दिया जाता है। फ्री गिफ्ट दिया जाता है। बाय वन गेट वन फ्री दिया जाता
है। ये सारे ऑफर दिए जाते हैं। ये क्या है? गिफ्ट फ्री गिफ्ट कूपन दिया जाता है। है ना? कि फ्री गिफ्ट कूपन मिलेगा। इसमें
आपको कोई ना कोई गिफ्ट मिलने वाला है। ठीक है? तो ये सब हम लोग का ऑफर है। ठीक है? अच्छा नेक्स्ट हम लोग बात करेंगे
एडवर्टाइजमेंट। अब देखो आ गया टॉपिक। चारों टॉपिक हम लोग कर लिए। अब हम लोग बात करेंगे किसका? एडवर्टाइजमेंट का।
एडवरटाइजमेंट हो गया। सेल्स पब्लिसिटी हो गया। पर्सनल सेलिंग हो गया और सेल्स प्रमोशन हो गया। सैरो टॉपिक का डेफिनेशन
हो गया। अब हम लोग इसके बारे में बात करेंगे। एडवर्टाइजमेंट का अब डिटेल पढ़ेंगे हम लोग और ध्यान दीजिएगा यहीं से
क्वेश्चन आने वाला है सर। बहुत इंपॉर्टेंट है। यहीं से क्वेश्चन आएगा। डेफिनेशन तो आपके टू मार्क्स में आ जाएगा ना। और बाकी
जो लॉन्ग क्वेश्चन होगा वो फाइव मार्क्स वाला वो यहां से आएगा। तो थोड़ा ध्यान दीजिएगा। बोला इट इज पेड द मेथड। अच्छा ये
क्या है भाई? एडवर्टाइजमेंट क्या है? इट इज द पेड मेथड टू इनफॉर्म पीपल अबाउट द प्रोडक्ट एंड सर्विसेस एंड कन्विंस देम टू
बाय इट। ठीक है? तो एडवर्टाइजमेंट क्या होता है भाई? इट इज़ द पेड। है ना? इट इज़ द पेड मेथड टू इनफॉर्म द पीपल अबाउट द
प्रोडक्ट एंड सर्विसेस एंड कन्वेंस देम टू बाय इट। यानी लोगों को कन्वेंस करना एडवर्टाइजमेंट के जरिए तो कंपनियां करती
हैं। ठीक है? और ये यहां पे एग्जांपल के लिए दिया हुआ है। जैसे Maruti Suzuki एड्स शोइंग इट्स कार। यानी Maruti Suzuki अपने
एड्स में जो है वो बहुत सारा कार दिखा रही है ऐसे करके कि ये कार हम लोगों ने ल्च किया। इस इस तरीके का वेरिएशन जो है वो
हमारे पास है। ठीक है? ये सारी चीजें जो है वो कंपनी दिखा रही है और ये एडवर्टाइजमेंट का पार्ट होता है। अब आता
है नेक्स्ट मोस्ट इंपोर्टेंट क्वेश्चन कि एडवांटेज ऑफ़ एडवर्टाइजमेंट। लेकिन आपके एग्जाम में जो एडवांटेज आता है ना वह ऐसे
पूछता है कि मैन्युफैक्चर के लिए एडवर्टाइजमेंट से क्या फायदा है या कस्टमर के लिए मैन कस्टमर के लिए क्या फायदा है
या सोसाइटी के लिए क्या फायदा है तो तीनों का फायदा आपको अलग-अलग याद रखना पड़ेगा क्योंकि एग्जाम में ऐसा भी आ सकता है कि
एडवांटेज ऑफ़ एडवर्टाइजमेंट है ना टू टू मैन्युफैक्चर मैन्युफैक्चर को क्या फायदा है या टू कस्टमर या टू द सोसाइटी तो आपको
वैसे ही लिखना होगा तो चलिए स्टार्ट करते हैं एडवांटेज ऑफ़ एडवर्टाइजमेंट ठीक है तो सबसे पहले हम लोग क्या पढ़ने जा रहे हैं
सबसे पहले हम लोग पढ़ने जा रहे हैं मैन्युफैक्चर यानी जो माल बना रहा है उसको क्या फायदा? अगर मान लीजिए हम यह घड़ी बना
रहे हैं तो मेरे को क्या फायदा है? अगर हम एडवर्टाइजमेंट कर रहे हैं तो मेरे को क्या फायदा है? तो आइए देखते हैं क्या फायदा
है। चलिए सबसे पहला फायदा है न्यू प्रोडक्ट डिमांड। यानी सबसे बड़ा फायदा यह है कि अगर हम एडवरटाइजमेंट कर रहे हैं तो
मेरा घड़ी अगर चमक गया ना तो हम कल को जो है इसके साथ कोई और ल्च कर सकते हैं। जैसे इयरफोनस वगैरह ल्च कर सकते हैं। नेक बैंड
ल्च कर सकते हैं। तो वो भी हम साथ में ल्च कर सकते हैं कि इस ये जो घड़ी था कितनी अच्छी कंपनी थी। आप लोगों ने पसंद किया।
ये देखिए हमारा नया प्रोडक्ट ल्च हो गया। नेकबैंड ल्च कर दिए या एयर बड जो होता है वो एयर बड ल्च कर दिए ऐसा कुछ भी तो नया
प्रोडक्ट ल्च करने में सुविधा होता है कंपनी को मैन्युफैक्चर को मैन्युफैक्चर का फायदा पड़ रहा है तो एडवरटाइजमेंट अगर
बहुत अच्छा जा रहा है तो उसमें आप नया प्रोडक्ट भी ल्च कर सकते हैं दूसरा ओल्ड प्रोडक्ट का डिमांड अच्छा एडवरटाइजमेंट
कंपनियां लगातार इसलिए करती है क्योंकि वो भी चाहती है कि हमारे ओल्ड प्रोडक्ट का डिमांड हमेशा क्या रहे मेंटेन रहे यानी
बना रहे यानी लोग मूव ना कर जाएं। है ना? अब आपको पता है Colgate pepsid रोज आकर टीवी में ऐड दे रहा है या टीवी में हर जगह
ऐड आ रहा है Colgate Pepsid का। है ना? क्यों ऐड आ रहा है? क्योंकि भाई अब आप बोलोगे यार कौन नहीं जानता है Colgate PS
को तो ये लोग क्यों ऐड कर रहा है अब तो सब लोग जान गए हैं जानने के लिए नहीं वो बताता है आके रोज कि हम जिंदा है क्योंकि
जो दिखता है वो बिकता है दिखना बंद हो जाएगा तो बिकना बंद हो जाएगा इसलिए कंपनियां अपने ओल्ड प्रोडक्ट को भी मेंटेन
रखने के लिए वो ऐड चलाती है। ठीक है? तो ये याद रखिएगा न्यू प्रोडक्ट के लिए भी ओल्ड प्रोडक्ट को मेंटेन के लिए। आप इसका
अंदर पढ़ सकते हैं। रिमाइंड ओल्ड कस्टमर सो दैट दे डू नॉट बाय द अदर प्रोडक्ट। हमारे ओल्ड कस्टमर को ये रिमाइंड करते
रहते हैं कि कोई दूसरा प्रोडक्ट मत खरीद लेना भाई अभी भी हम लोग हैं। है कि नहीं? तो ये चीज है एंड हेल्प टू इंट्रोड्यूस द
न्यू प्रोडक्ट नया प्रोडक्ट इंट्रोड्यूस करने में। मोर सेल्स यानी कंपनियां ऐड करती है तो ऐड से मैन्युफैक्चर को क्या
फायदा होता है? इंक्रीस द सेल। यानी कंपनी का सेल बढ़ जाता है। कंपनी का सेल बढ़ेगा तो प्रॉफिट बढ़ेगा। तो सेल बढ़ जाता है।
और जैसे ही अगर किसी कंपनी का सेल ज्यादा हो रहा है मतलब आप मार्केट में एक अच्छा गुड नेम, गुड ब्रांड और अच्छी गुडविल
क्रिएट कर सकते हैं। तो क्रिएट द गुड नेम एंड गुडविल इन द मार्केट। इसके अलावा जो है वो फेस फेस कंपटीशन यानी हेल्प टू
कंपटीट विद द अदर कंपनीज़ और जितना अच्छा ऐड करोगे लोग आपके बारे में जानेंगे और इस तरीके से आप अपने कॉम्पिटिट से जो है वो
कंपटीट कर पाएंगे। अदरवाइज लोग आपके बारे में जानेंगे नहीं। तो सिंपल सी बात है कि लोग आपके कॉम्पिटिट का प्रोडक्ट खरीद
लेंगे। तो इसीलिए आपको ऐड डालना है। तो ये मैन्युफैक्चर के लिए फायदा है कि नया प्रोडक्ट ल्च कर पाता है। पुराने प्रोडक्ट
की के सेल को मेंटेन करके रखता है। है ना? इसके अलावा सेल करने में हेल्प करता है एडवर्टाइजमेंट। ऑब्वियसली मैन्युफैक्चर के
लिए ब्रांड इमेज क्रिएट करता है और फेस कंपटीशन यानी कंपटीशन फेस करने में क्या करता है? हेल्प करता है। ये हो गया। ठीक
है? अच्छे से याद रखेंगे। एडवांटेज ऑफ़ द एडवांटेज टू द कंज्यूमर। अब कंज्यूमर को क्या-क्या फायदा है? तो देखो कंज्यूमर को
क्या फायदा है? कस्टमर को क्या फायदा? आप एक कस्टमर हैं तो एडवर्टाइजमेंट से आपको क्या फायदा? आप बोलोगे हमको क्या फायदा
है? क्यों? बहुत सारा फायदा है। ठीक है? पहला फायदा है फुल इनेशन अबाउट द प्रोडक्ट। आपको प्रोडक्ट के बारे में पूरा
इनेशन मिलता है। है कि नहीं? कि ये प्रोडक्ट यहां यहां पे कंपनी बनाई है। इस इस तरीके का प्रोडक्ट बनाई है। अगर आपका
ये पर्पस है तो इसके लिए ये ये प्रोडक्ट लगा लो। अगर ये पर्पस है तो ये प्रोडक्ट लगा। अगर अगर जैसे कोई फेस में लगाने वाली
क्रीम ने ल्च किया तो उसने बताया कि अगर आपके आपके फेस पे छाई वगैरह आ रहा है। है ना? तो उसके लिए ये प्रोडक्ट ले लो। अगर
पिंपल्स वगैरह आ रहा है तो ये प्रोडक्ट ले लो। फेस पे ग्लो चाहिए। है ना? तो ये इंस्टेंट ग्लो चाहिए। है ना? तो ये
प्रोडक्ट ले लो। तो भैया अलग-अलग प्रोडक्ट या अलग-अलग इनफार्मेशन ये सब इनफार्मेशन आपको कहां से मिला? ऐड से ही मिला ना? ऐड
से ही तो मिला। तो बोल रहा है कि फुल इनफार्मेशन अबाउट द प्रोडक्ट। तो कस्टमर को प्रोडक्ट के बारे में या बाकी चीजों के
बारे में भी इंफॉर्मेशन मिलता है। ठीक है? यानी नॉलेज अबाउट द प्रोडक्ट। ठीक है? तो कस्टमर गेट द इनफेशन अबाउट द प्राइस,
क्वालिटी एंड द प्लेस ऑफ़ द प्रोडक्ट। जी लिखा हुआ है कि उसको प्राइस के बारे में, क्वालिटी के बारे में, प्रोडक्ट के बारे
में, एबिलिटी ऑफ़ द प्रोडक्ट के बारे में, प्लेस ऑफ़ द प्रोडक्ट के बारे में पता चलता है। नेक्स्ट फेयर प्राइस। हां बिल्कुल
फेयर प्राइस। क्योंकि देखो कभी-कभी आप देख रहे हो किसी टीवी में ऐड आता है कि अब सर्फ एक्सेल 180 में नहीं है ना? सिर्फ
150 में। तो आपको पता चला ओ 180 नहीं 150 हो गया तो फिर आप क्या करते हो दुकान में जाते हो अभी बोलेगा कि भैया एक सर्फ
एक्सेल देना बोला कि 180 180 अभी टीवी में ऐड देख के आ रहे हैं 150 बोल रहा था बोला भैया ये पुराना वाला तो काहे पुराना रखा
है भाई नया वाला दे है कि नहीं तो आपको पता चल गया ना कि भैया ये पता है कि मेरे को ये ऐड में अभी देख के आ रहे हैं या
एडवरटाइजमेंट के अलावा एडवर्टाइजमेंट में कई जगह कंपनियां एमआरपी रेट लगा देती है कि ये प्रोडक्ट हमारा इसमें ये प्रोडक्ट
इस प्राइस पे ये प्रोडक्ट इस प्राइस पे तो आपको पता चल गया है कि नहीं तो यहां पे लिखा हुआ कस्टमर नो द एमआरपी एंड
सो सेलर कैन नॉट चार्ज एक्स्ट्रा इसलिए एक्स्ट्रा चार्ज नहीं कर सकता है। नेक्स्ट तो कस्टमर को क्या फायदा इनेशन मिल रहा
है। दूसरा फियर प्राइस आपको प्राइस बहुत अच्छा पता चल जा रहा है। तीसरा ईजी चॉइस। ठीक है? आप ईजीली चॉइस कर सकते हैं
क्योंकि सारा वेरिएशन सारा बात एडवर्टाइजमेंट में ही दिखा दिया। आपके लिए काम आसान हो गया। और फट से चूज़ कर लीजिए
कि ओ मेरे लिए तो ये वाला चाहिए। तो ये वाला आपने ले लिया है कि नहीं? तो ईजी चॉइस हेल्प द कंपेयर टू द चूज़ द बेस्ट
प्रोडक्ट। यानी आपको है ना कंपेयर करके बेस्ट प्रोडक्ट चूज़ करने में भी हेल्प करवाती है कंपनी। है ना? टाइम सेविंग समय
बचता है। अब देखो ऐड में सारा कुछ आप जान गए तो फिर आपका समय तो बच गया ना। आप जाके फटाक से प्रोडक्ट ले सकते हैं। तो कस्टमर
गेट इनफेशन एट होम एंड नो नीड टू सर्च द मार्केट। इसीलिए मार्केट में सर्च करने की जरूरत नहीं है क्योंकि एडवर्टाइजमेंट में
कंपनी ने Google पे सब कुछ डाल दिया है। उसका फीचर्स, उसका एडवांटेज, उसकी सारी फंक्शन कैसे काम करता है सब कुछ डाला हुआ
है। आपका टाइम बच गया। आप सब जगह से घर में बैठ के ही अलग-अलग फिल्म Flipkart पे, Amazon पे, Meesho पे सब पे सर्च मार के
देख लिए। अच्छा यहां सबसे ज्यादा सस्ता है। यहां सबसे अच्छा है। और आपने क्या कर दिया? ऑर्डर कर दिया। आ गया आपके घर तो
एडवर्टाइजमेंट से आपका समय भी बचता है क्योंकि आपको सब कुछ पता चल रहा है। कंपनी बता भी रही है कि हमारा ये ये ब्रांच है।
अभी तुमने देखा अरे ये ब्रांच तो हमारे घर के बगल में है भाई यहीं से ले लो यार उतना दूर जाएंगे तो समय बचा ना आपका तो
एडवर्टाइजमेंट से कस्टमर को क्या फायदा है प्रोडक्ट के बारे में इंफॉर्मेशन मिल रहा है प्राइस के बारे में है ना क्वालिटी के
बारे में है ना सब कुछ के बारे में प्रोडक्ट के प्लेस के बारे में भी पता चल रहा है नेक्स्ट फेयर प्राइस फेयर प्राइस
समझ रहे हो यानी प्रोडक्ट का प्राइस कितना फेयर है कितना प्राइस लगा रहा है उसके बारे में पता चल रहा है ईजी चॉइस यानी
ईजीली आप चॉइस कर सकते हैं टाइम सेविंग यानी समय की जो है वो बचत होती है है ना और इसके साथ बेटर क्वालिटी गुड प्रोडक्ट
गुड प्रोडक्ट एंड एडवरटाइज सो कंज्यूमर गेट द बेटर क्वालिटी। देखो जनरली लोग को भी धारणा है कि देखो कंपनी ऐड कर रही है
इतना खराब प्रोडक्ट थोड़ी बनाएगी और बिल्कुल सही बात है कि ज्यादातर कंपनियां जो ऐड डालती है यानी ऐड ऐड करती है वो लोग
जनरली प्रोडक्ट अच्छा रखती है। ठीक है? क्योंकि उसको पता है कि एक बार ही बेवकूफ बनाएंगे ना। हम ऐड डाल दिए सब लोग खरीद
लिए फिर एकदम घटिया प्रोडक्ट निकला। फिर नेक्स्ट बार से रिपीट कस्टमर तो नहीं आएगा ना। तो हमारे लिए तो नुकसान हो गया। और हम
चाहेंगे कि कस्टमर रिपीट हो। तो जनरली जो बहुत ज्यादा ऐड करती है कंपनियां उनका प्रोडक्ट जनरली बहुत अच्छा होता है। तो
क्वालिटी भी बेटर होता है। ठीक है? तो ये फायदा हो गया किसका? कस्टमर का। एडवर्टाइजमेंट से। अब आता है एडवांटेज टू
द सोसाइटी। समाज को क्या फायदा है? देखो समाज को यही सबसे बड़ा फायदा है कि मोर जॉब। यानी लोगों को जॉब मिल रहा है। अरे
बहुत सारा कंपनी है। एडवर्टाइजमेंट तो आप बोलोगे एडवर्टाइजमेंट से जॉब मिल रहा है। हां, क्यों नहीं मिल नहीं रहा है। अब
एडवर्टाइजमेंट का काम जो कर रहा है वो बैनर लगा रहा है, पोस्टर लगा रहा है, हो रहा है। ये सब एडवर्टाइजमेंट का ही काम है
ना। अगर मान लीजिए Samsung कंपनी ने वेस्ट बंगाल बोर्ड में Samsung कंपनी ने वेस्ट बंगाल में पूरा अगर बोला कि भैया 1 लाख
पीस मेरे को बैनर लगाना है तो वो किसी को काम देगा। अब वो आदमी 1 लाख पीस अकेले थोड़ी छाप देगा। वो अपने अंडर में कम से
कम जो है वो 50 लोगों को रखा। ठीक है? और पूरे बंगाल में लगाने के लिए कम से कम 500 लोगों को रखा कि पूरा पूरे 500 लोगों को
जो है वो दुर्गा पूजा के टाइम पे हर गली मोहल्ला मोड़ पे जो है वो ये Samsung कंपनी का ये वाला ऐड चलना चाहिए। ठीक है?
या Jio का ये ऐड चलना चाहिए। तो उतने लोगों को तो जॉब मिला ना भाई। तो लोगों को फायदा हो रहा है कि जॉब अच्छा मिल रहा है।
है ना? नेशनल इनकम देश का नेशनल इनकम में बढ़ोतरी हो रही है। यानी बढ़ रहा है। बेटर लिविंग स्टैंडर्ड। अच्छा अच्छे-अच्छे
प्रोडक्ट आ रहे हैं मार्केट में। एडवर्टाइजमेंट से ही आपको पता चल रहा है कि अच्छा ये प्रोडक्ट नहीं ये प्रोडक्ट
लगा सकते हैं। ये प्रोडक्ट नहीं ये प्रोडक्ट लगा सकते हैं। तो आपका स्टैंडर्ड ऑफ लिविंग जो है वो हाई हो रहा है। है ना?
अब नए तरीके के प्रोडक्ट यूज़ कर रहे हैं। और लोगों का स्टैंडर्ड ऑफ लिविंग बहुत हाई हो गया। है ना? पहले एडवर्टाइजमेंट पहले
अब आप बताओ पुराने जमाने में लोग मच्छर भगाने के लिए क्या इस्तेमाल करते थे? सबसे पुराने जमाने में मतलब आदिवासी के जमाने
में नहीं बोल रहे हैं। ठीक है? थोड़ा सा कुछ दिन पहले मतलब कि 40 20 30 साल पहले आपको पता है 2030 साल पहले लोग मच्छर
भगाने के लिए आसपास जो उनका द्वार होता था द्वार समझ रहे हो घर के बाहर का जो भी है साफ सफाई कूड़ा कर कर कचरा को इकट्ठा कर
देते थे उसमें आग फूंक देते थे ठीक है है ना और वो जलता था धुआं होता था मच्छर भागता था आदमी भी भागता था ठीक है लेकिन
मच्छर भागता था ठीक है ये मेथड था आज आप कौन सा मेथड यूज़ कर रहे हैं प्लग लगाए स्विच ऑन किए मच्छर भागा आदमी आराम से सो
रहा है कि नहीं तो आपका स्टैंडर्ड ऑफ लिविंग कहां से कहां पहुंचा पहुंचा ना भाई उसके बीच में लोगों ने जो है वो अंडा का
छिलका अंडा का छिलका मतलब अंडा का जो रखने वाला जो ट्रे होता है है ना कूट का उसको लोग जलाते थे उसके बाद वो कछुआ आया कछुआ
बोलते थे ना उसको कॉयल ठीक है ऐसे जलेबी की तरह जो होता था उसको लोग जलाते थे फिर बोलता था बहुत हार्मफुल है फिर वो फास्ट
कार्ड आया कागज वाला है कि नहीं फिर एक ऑयल आता था लोग हाथ में लगाते थे क्रीम टाइप का आता था ऐसा 50 तरीके की स्प्रे
आया कितना सारा मच्छर को मारने के लिए वो बैडमिंटन वाला आता था है ना तो उसमें मच्छर चपकते ही मर जाता था इलेक्ट्रिक शॉट
लगता था ऐसा कितने सारा आया अभी तक स्टैंडर्ड ऑफ लिविंग कितना हाई हुआ। तो एडवर्टाइजमेंट में ही आप सब ने देखा और
आपने यूज़ करते गए, यूज़ करते गए, यूज़ करते गए और आज हमारा स्टैंडर्ड ऑफ लिविंग इस तरीके से आया। तो बोला पीपल नो अबाउट द
न्यू एंड बेटर प्रोडक्ट। ठीक है? नेक्स्ट सपोर्ट मीडिया यानी सपोर्ट मीडिया, न्यूज़पेपर, टीवी इन सभी के जरिए मीडिया
को सपोर्ट मिलता है। तो ये भी समाज के लिए एक फायदा है कि मीडिया को सपोर्ट मिल रहा है कि उन लोगों को ऐड मिल रहा है और तभी
वो लोग चला पा रहा है। ठीक है? और हेल्थ जितना भी न्यूज़ चैनल चल रहा है उसका मेन कमाई कहां से? टीआरपी हो रहा है। टीआरपी
कहां से आ रहा है। ठीक है? जितना ऐड चलेगा उतना ही ना टीआरपी होगा। तो न्यूज़ देख के लोग देख रहे हैं और उसके साथ-साथ लोग क्या
देख रहे हैं? ऐड भी देख रहे हैं। तो एडवर्टाइजमेंट कंपनी से पैसा आ रहा है और टीआरपी बढ़ रहा है तो उसका उसका पैसा आ
रहा है। तो यही कमाई है ना? तो ऐड से ही कमाई है। कोई भी न्यूज़पेपर का देख रहे हो न्यूज़पेपर का कोई कोई फर्स्ट पेज खोलोगे
तो बड़ा सा जो है वो किसी कंपनी का ऐड डाला हुआ है। ठीक है? तुमको लगेगा ये क्या आ गया? एडवर्टाइजमेंट बुक खरीद लिया क्या?
फिर पेज पलटोगे तो न्यूज़ आएगा। है ना? कोई कोई पूरा फुल पेज पे ही ऐड डाल दिया। फर्स्ट पेज पे ही डाल दिया फ्रंट पे। तो
उनका कमाई इससे बढ़ता है। हेल्दी कंपटीशन भी होता है। ठीक है? तो ये हो गया हमारा एडवांटेज ऑफ़ एडवर्टाइजमेंट। और ये तीन
तरीकों से हम लोगों ने पढ़ा किसका? सोसाइटी के लिए कस्टमर के लिए और और सोसाइटी कस्टमर के साथ-साथ किसके लिए? है
ना? अ मैन्युफैक्चर के लिए यानी कंपनी के लिए। अब हम लोग बात करेंगे ऑब्जेक्शन अगेंस्ट द एडवर्टाइजमेंट। तो
एडवर्टाइजमेंट के लिए क्या-क्या ऑब्जेक्शन है? सबसे पहला इकोन ऑब्जेक्शन मतलब कि डिसएडवांटेज। यानी एडवर्टाइजमेंट से कुछ
कमियां भी तो है, कुछ खराबियां भी तो है, कुछ बुराइयां भी तो है। तो उसके लिए हम लोग बात करेंगे क्या-क्या ऑब्जेक्शन है।
सबसे पहले दो आता है। एक इकोनॉमिक और एक सोशल। ठीक है? इकोनॉमिक और सोशल। तो सबसे पहले हम लोग इकोनॉमिक बात करेंगे। तो
इकोनमी क्या-क्या आता है? सबसे पहला आता है एडवर्टाइजमेंट की वजह से किसी भी प्रोडक्ट का प्राइस हाई हो जाता है। देखो
कितना सिंपल लिखा हुआ है। आप यहां से याद कर लो, लिख लो, आराम से चलेगा। कोई दिक्कत नहीं है। तो लिखा हुआ है कि ऐड कॉस्ट यानी
एडवर्टाइजमेंट कॉस्ट इज एडेड टू द प्रोडक्ट प्राइस। सो द कस्टमर पे मोर। ठीक है? आपको भी पता है कि एडवरटाइजमेंट की
वजह से जो है वो क्या हो रहा है। है ना? प्राइस हाई हो जा रहा है। तो प्राइस अगर हाई हो रहा है तो ये एडवर्टाइजमेंट की वजह
से हो रहा है। है कि नहीं? अब कंपनी किसी बड़े सेलिब्रिटीज को हायर किया। ठीक है? और वो सेलिब्रिटीज जो है वो आके ऐड कर रहा है
तो वो तो ₹1 करोड़ लेगा ना। अब वो ₹1 करोड़ कंपनी कहां से देगी? अपने घर से देगी। बिल्कुल भी नहीं। तो कहां से देगी? कंपनी
उस प्रोडक्ट में भी जाम जोड़ देगी। है कि नहीं? अभी अभी एक नॉर्मल सा गुटखा का प्रचार कर रहा है भाई। तीन-तीन हीरो आके
है ना? बोलो जुबा केसरी। है ना? तो ऐसा बोल रहा है भाई बोलो जुबा केसरी। तीन-तीन हीरो इतने बड़े-बड़े एक्टर चार-चार एक्टर
आके ऐड कर रहे हैं। अब बताओ आपको बोलोगे गुटखा बनाने का कंपनी है। मसाला बनाता है भाई। है ना? बताइए इतना बड़ा ऐड कर रहा
है। तो वो पैसा तो पे करेगी ना तीनों सेलिब्रिटीज को जिभ करेगी। अब वो तीनों सेलिब्रिटीज पैसा लेके चले गए ₹3 करोड़।
ठीक है? कंपनी वो 3 करोड़ कहां एडजस्ट करेगी प्राइस में ऐड करके तो प्राइस हाई होगा ना भाई ऑब्वियसली हाई होगा लॉस ऑफ़ द
गुडविल हां लॉस ऑफ़ गुडविल कब होता है ये ध्यान रखना फॉल्स एडवरटाइजमेंट गिव द टेंपरेरी सेल है ना बट स्पॉइल द ब्रांड
इमेज ऑफ़ द लेटर ठीक है देखो कभी-कभी कुछ कंपनियां समझती नहीं है और वो इंस्टेंट ऐड जो है वो चलाती है झूठ साझ गलतसलत बात बोल
के एडवर्टाइजमेंट चला दी लोग इंप्रेस हो के खरीदना स्टार्ट कर दिए बाद में पता चला कि सब बेकार था गलत था झूठ था और इससे
कंपनी का लॉन्ग टर्म ब्रांड इमेज खराब हो जाता दोबारा जब आप आओगे मार्केट में तो लोग आपको पूछेंगे भी नहीं क्योंकि लोगों
का ट्रस्ट खत्म हो चुका होता है। तो ये भी एक नुकसान है जो कि क्या करता है? आपके गुडविल को स्पॉइल करता है। इसीलिए हमेशा
जेन्युइन रखिए। है ना? और बेवकूफ बनाने की कोशिश मत करिए क्योंकि आप एक ही बार बेवकूफ बनाएंगे। बार-बार बेवकूफ नहीं बना
सकते हैं। ठीक है? नेक्स्ट आता है वेस्टेज ऑफ़ द मनी। जी बिल्कुल। है ना? लॉट्स ऑफ़ द मनी स्पेंड ऑन द ऐड व्हिच इज वेस्टेज।
बहुत कंपनियां खर्च करती है भाई। कितना करोड़ों करोड़ों रुपया खर्च करती है आप सुने होंगे सर कि कंपनी ऐड में
करोड़ों-करोड़ों रुपया खर्च कर देती है कई कई 100 करोड़ आईपीएल में कितना ऐड चलता है और वो सारे ऐड करोड़ों-करोड़ रुपए का हो
रहा है ना भाई उतना का वो सेल करके कभी जनरेट कर भी पाती है नहीं भी कर पाती है लेकिन कंपनी के पास अगर ₹500 करोड़ है तो
उसने लगा दिया भैया ₹20 करोड़ ऐड में आईपीएल में है कि नहीं तो ये वेस्टेज ऑफ मनी है किसी हद तक एक हद से ज्यादा जाएगा
तो ये वेस्टेज ऑफ मनी है नेक्स्ट मोनोपोली हां देखो ये भी है बहुत बड़ी-बड़ी कंपनियां इतना ऐड चला देती है ना भाई पूरा
का पूरा पूरा मार्केट कैप्चर कर लेती है और उससे वजह से छोटी-छोटी कंपनियां स्पॉइल हो जाती है। तो देखो क्या लिखा हुआ है?
बिग कंपनी विद द मोर बजट एंड कैपिटल कैप्चर मार्केट एंड स्पॉट फॉर्म सफर्ड। ठीक है? और मोनोपोली की वजह से बड़ी
कंपनियां इतना ऐड चला देती है। इतना ऐड चला देती है कि भाई लोगों का है ना छोटी-छोटी कंपनियां हवा हो जाती है और
लोगों को लगता है कि बस अगर कुछ खरीदना है तो यही खरीदना है। इसके अलावा और कुछ भी नहीं खरीदना है। और ये लोगों के लिए क्या
हो सकता है। है ना? कंपनियों के लिए जो है वो फायदेमंद होता है लेकिन लोगों के लिए नुकसान होता है। अननेसेसरी डिमांड है ना?
एड्स क्रिएट द डिमांड फॉर थिंग द पीपल डोंट रियली नीड्स। ठीक है? ये बहुत बड़ा पॉइंट है जो बता रहा है कि अननेसेसरी
डिमांड यानी एड्स क्रिएट द डिमांड फॉर थिंग द पीपल डोंट रियली नीड्स। यानी कभी-कभी एडवर्टाइजमेंट आपको इनकरेज करता
है वो सामान खरीदने के लिए जिस सामान का आपको एक्चुअल में जरूरत ही नहीं है। जैसे आपको आप बोल रहे बिग बिलियन डील निकला है
भाई। फेस्टिवल सीजन निकला है। Amazon का निकला है। Flipkart का निकला है। और सर इसमें देख रहे थे बहुत सस्ता सस्ता चीज
मिला है। सर हम ले लिए सर मेरे मेरा एक तो घड़ी सर पता है कितना रुपए का घड़ी था? ₹2200 का घड़ी था। और पता है सर मेरे को
ना ₹1000 में मिल गया। तो भैया तो तुम्हारे पास तो घड़ी था ही। हां। तो तो फिर तो ₹1000 भी वेस्ट हुआ ना। तुमको लग
रहा है कि फायदे में चले गए। लेकिन एक्चुअल में आप नुकसान में गए क्योंकि ₹1000 आपका चला गया जिसकी कोई जरूरत ही
नहीं थी। आपके पास ऑलरेडी घड़ी था। दो-दो घड़ी था। आपने तीसरी घड़ी ले ली और आपको लग रहा है फायदे में है। तो कभी-कभी
एडवर्टाइजमेंट देख के ही है ना आपने खरीदा चारों तरफ ऐड चल रहा है कि भाई बिग बिलियन डील चल रहा है। ये चल रहा है वो चल रहा
है। है ना? तो ये चीज जो है वो बहुत नेगेटिव जाता है। ठीक है? तो इसीलिए कभी-कभी आप उस चीज को भी खरीद लेते हो
जिसकी कोई जरूरत नहीं है। और फालतू का आप खुश हो रहे हैं। है ना? कोई कोई स्टूडेंट है फीमेल स्टूडेंट है भाई वो हमको बता रही
थी कि सर हमने एक लेडीज पर्स लिया सर। है ना? पता है सर उसका कितना दाम है सर? 5000 दाम है। और सर इधर बिग बिलियन डील सर हमको
₹300 में मिल गया। है ना? तुमको पर्स का जरूरत है? नहीं सर बहुत सारा पर्स तो भैया बहुत सारा पर्स तो उसका तो जरूरत ही नहीं
था तो फिर 3500 तो वेस्ट हुआ ना तो जो चीज की जरूरत नहीं है वो चीज भी आप खरीद ले रहे हो और आपको लग रहा है कि आपका फायदा
हो गया इसलिए जाओ मोबाइल खोलो है ना और जो भी ऑनलाइन शॉपिंग ऐप है ठीक है जिसका कोई जरूरत नहीं है आपको प्रोडक्ट का उस पे
क्लिक करो अनइंस्टॉल मार दो ठीक है नाम नहीं हम बोलेंगे किसको अनइंस्टॉल मारना है ठीक है लेकिन मार दो ज्यादा बचत होगा आपका
समझ गए भाई उस वो सबसे अच्छा डील होगा आपके लिए बिग बिलियन डील से भी अच्छा डील होगा कि भैया हमने कुछ भी नहीं खरीदा
क्योंकि हमको एक्चुअल में कुछ खास चीज का जरूरत ही नहीं था। ठीक है? तो ये ज्यादा अच्छा डील होता है। ठीक है? बाकी आपकी
मर्जी है। आपका पैसा है सर। सोशल ऑब्जेक्टिव। सोशल ऑब्जेक्टिव क्या बोलता है सर? क्रिएट मोनोपोली। ठीक है? अच्छा
सोशल ऑब्जेक्टिव में सबसे पहले मोनोपोली मोनपोली हम लोग पढ़ चुके हैं। एडवर्टाइजमेंट बहुत ज्यादा चलाओगे।
मार्केट पूरा कैप्चर कर लोगे। मोनोपोली मार्केट हो जाता है। ठीक है? वेस्टेज ऑफ द मनी। वेस्टेज ऑफ द मनी का मतलब होता है
पैसा की बर्बादी। ये भी पढ़ चुके हैं। बैड हैबिट हां। एड्स प्रमोट स्मोकिंग, अल्कोहल एंड बैड हैबिट इन द सोसाइटी। देखो कभी-कभी
कोई-कोई ऐड जो है वो लोगों के अंदर बैड हैबिट जो है वो इंप्रूव करवा रहा है। अब देखो ना बहुत सारे सर अभी हमने एग्जांपल
दिया कि तीनचार एक्टर आके और ये बता रहे हैं कि बोलो जुआ केसरी। ठीक है? है ना? तो पता नहीं कौन सा पान मसाला। ठीक है? तो जो
है वो ऐसा बता रहे हैं भाई ऐड। यानी वो तीनों हीरो जो जिस जो लोग उस उन लोग को आइडियल मानते हैं वो लोग क्या करेंगे भाई?
मतलब आप क्या बोलना चाहते हैं? आप तीनों एक्टर बोलना क्या चाहते हैं? कल से गुटखा खाएं हैं। यही बोल रहे हो ना भाई कि गुटखा
खाओ कल से। इसलिए जुबा केसरी बुलवा रहे हो। ठीक है? तो आप तो हैबिट हमारा खराब कर रहे हो। है ना? और बहुत सारे आईपीएल के
एक्टर अभी तो शायद बंद हो गया। लेकिन हम बीच में ऐड देखते थे भाई बहुत सारे अच्छे-अच्छे मतलब एक्टर जो एक्टर बोल रहे
हैं सॉरी क्रिकेटर जो अच्छा खेलते थे भाई लोग आइडियल उनको मानते हैं। लोग दिन भर उनका डीपी लगा के रखे हुए हैं। है ना?
स्टेटस में लगा के रखे हैं। वो आ के बोल रहे हैं टीम बनाओ। टीम बनाओ। ड्रीम 11 टीम बनाओ। तो भैया क्या बोल रहा है? जुआ खेलें
कल से। है ना? गुटखा खाएं, जुआ खेलें, दारू पिए? यही यही बोलना चाह रहे हो आप, ठीक है? तो भैया मैसेज तो गलत जा रहा है
ना? हर चीज का एडवर्टाइजमेंट तो अच्छा नहीं है ना। कुछ चीजें बैड हैबिट लगा रही है आपको। है कि नहीं? ये चीजें नेगेटिव
जाती है और आप ऐड देख के कर रहे हो। है कि नहीं? तो ये चीजें भी बुरा जो है वो मैसेज आता है। जैसे हम हमको याद है मेरे कॉलेज
के टाइम पे जब हम जाते थे तो कॉलेज के टाइम पे जो है वो ऐसा एक बैनर बैनर लगा था। ठीक है? और उस पे ऐसा एक आदमी सिगरेट
पी रहा है। ठीक है? और सिगरेट पी के जो है वो नीचे लिखा हुआ है। है ना? कुछ भी नहीं है। ऐड में कुछ भी नहीं है। एक आदमी
सिगरेट पी रहा है और नीचे लिखा हुआ है स्मोकिंग ऐड योर पर्सनालिटी। स्मोकिंग एट योर पर्सनालिटी। अब यह यह कितना छोटा बात
है आपके लिए क्या है सर? कुछ खास नहीं है। है ना? लेकिन वह बता रहा है कि अगर आप स्मोकिंग करते हो ना ऐसे तिरछा खड़ा हो के
ना तो देखने में बड़ा अच्छा लगते हो और तुमको लगेगा यार जब इतना अच्छा लगता है तो एक बार पी ही लेते हैं। अब बस एक बार दो
बार ही पीना होता है। उसके बाद तो फिर है ना? शुरू। ठीक है? पैकेट पे पैकेट चलेगा। है कि नहीं? तो ये भी तो आप गलत हैबिट ही
लगा रहे हो। ठीक है? लोगों को समझ में नहीं आता और ये बैड हैबिट की तरफ जाता। ठीक है? तो कभी-कभी जो है वो बैड हैबिट
क्रिएट करता है किसका? कस्टमर का। ठीक है? नेक्स्ट आता है फॉल्स इनफेशन। हां, बहुत सारा इंफॉर्मेशन होता है। एडवर्टाइजमेंट
में जितना देखते हो सारा इनफेशन सही होता है। गलत एडवर्टाइजमेंट होता है भाई। कुछ चीजें झूठ बोलता है। देख के ही आपको लगता
है हां झूठ बोल रहा है। है कि नहीं? जैसे हम एक ऐड देख रहे थे। पता नहीं कौन सी कंपनी की थी। है ना? कि वो अगर उससे मुंह
धोओगे तो एक बहुत बूढ़े आदमी थे जिनका सामने में कोई दांत नहीं था। साइड में शायद एक ठो दांत बचा हुआ था। वो सुपारी ले
रहे हैं और ऐसा फोड़ रहे हैं। सुपारी फूट जा रहा है। सुपारी समझते हो? सर वह उसको मतलब जो पान वाला होता है वह कितना प्रेशर
से वह सलोता से करता है तो टूटता है और वह दांत से फोड़ दे रहा है। तो आपको नहीं लग रहा है झूठ बोल रहा है। एकदम गलत है। है
कि नहीं? एक ऐड देख रहे थे कि कोई लड़की वो एक पर्टिकुलर शैंपू लगाती है तो वो उस बाल से ट्रक को बांध के खींच ले रही है।
झूठ बोल रहे हो भाई सीधा ऐसे थोड़ी होता है यार। तो कुछ चीजें जो है बहुत फॉल्स इंफॉर्मेशन दिया जाता है जो बिल्कुल भी
गलत होता है। ठीक है? तो ये इंफॉर्मेशन फॉल्स होता है जो लोगों को चीट कर रहा होता है। एक्चुअल में आप बेवकूफ बना रहे
हैं लोगों को और ये नहीं करना चाहिए और आप लोगों को गुमराह कर रहे हैं। अब लोग क्या सोचेंगे भाई कि फेस मतलब बाल में से शैंपू
दोगे उससे तो भाई ट्रक भी खींच लेते हैं। भाई बाल से ट्रक क्यों खींचना है यार? रस्सी से खींच लो और इंजन होगा ना चालू कर
ले भाई। है कि नहीं? ये क्या ही मतलब हुआ भाई? कोई मतलब ही नहीं हुआ। पहला बात तो एडवर्टाइजमेंट का। ऊपर से आप झूठ बोल रहे
हो। बिल्कुल झूठ बोल रहे हो। है कि नहीं? तो ये चीजें हैं। ठीक है? तो सम ऐड गिव रॉन्ग इंफॉर्मेशन एंड चीट द पीपल्स। ठीक
है? ऐड मेक द पीपल वांट मोर एंड मोर थिंग्स एंड लीडिंग टू द डिसटिस्फेक्शन। है ना? और मटेरियलिज्म होता है यानी
डिसटिस्फेक्शन भी होता है। कभी-कभी एडवर्टाइजमेंट में जो बताया जाता है या दिखाया जाता है वो बाद में डिसटिस्फाई
करता है। तो ये भी एक क्या है? ऑब्जेक्शन है। तो सोशल ऑब्जेक्शन हो गया। आशा करते हैं आप समझ पा रहे होंगे। हैं बहुत डिटेल
में हम लोग पढ़ा रहे हैं। कोई भी क्वेश्चन छोड़ोगे पता चला वही आ गया आपके एग्जाम में। और ये एमसीक्यू नहीं है कि ठीक है
कुछ भी आएगा तो रिलेटेड तो आएगा। टिक मार देंगे। टिक नहीं मारना है। प्रॉपर लिखना है। यानी प्रॉपर आपको याद रखना पड़ेगा।
ठीक है? और जो जो हम लोग पार्ट अलग-अलग बता रहे हैं, सोशल का अलग, इकोनमी का अलग पूरा याद रखना। क्या पता वो नाम देके पूछ
दे कि सोशल? तो फिर तो आप कर ही नहीं पाओगे। ठीक है? तो चलिए आगे बढ़ते हैं। नेक्स्ट रोल ऑफ द एडवर्टाइजमेंट।
एडवर्टाइजमेंट का क्या रोल है? पहला प्राइमरी रोल और दूसरा सेकेंडरी रोल। तो एडवर्टाइजमेंट का पहला प्राइमरी रोल होता
है और सेकेंडरी रोल होता है। प्राइमरी रोल, न्यू प्रोडक्ट ल्च। पहला काम क्या होता है एडवर्टाइजमेंट का कि नया प्रोडक्ट
ल्च करना। मेंटेन मार्केट में डिमांड मेंटेन करना। तीसरा क्रिएट द न्यू कस्टमर। नया कस्टमर क्रिएट करना। चौथा इंक्रीस द
सेल। मार्केट में सेल को इंक्रीस करना। और पांचवा फेस कंपटीशन यानी इस तरीके से एडवर्टाइजमेंट डालो कि कॉम्पटीिटर का जो
है वो हवा में उड़ा दे। और ये एडवर्टाइजमेंट का प्राइमरी रोल होता है। देख लीजिए अच्छे से स्क्रीनशॉट ले लेना।
ठीक है? नेक्स्ट आइए। सेकेंडरी रोल हेल्प इन डिसीजन। डिसीजन लेने में हेल्प करता है। किसका? होलसेलर एंड रिटेलर सी द ऐड
एंड डिसाइड वेदर द सेल ऑफ़ द प्रोडक्ट ऑ नॉट। कहां पे माल बेचना है और नहीं बेचना है। ये डिसीजन लेने में हेल्प करवाता है
किसको? होलसेलर रिटेलर को। स्टाफ मोटिवेशन देखो एडवर्टाइजमेंट अगर बहुत अच्छा चलता है सेकेंडरी रोल है ये उतना नहीं आता
फर्स्ट वाला ही आएगा ठीक है या अगर खाली रोल बोल दे तब तो आपका मजा है कि नहीं लिख देना कोई भी इसमें उसमें सब मिला के ठीक
है है ना या या सबसे अच्छा होगा प्राइमरी का दो-तीन पॉइंट लिख दो सेकेंडरी का दो-तीन पॉइंट लिख दो टीचर इंप्रेस हो
जाएगा वाह क्या बात है यार बच्चा तो एकदम कैटेगराइज करके लिखा है तो ये हम लोग पढ़ा रहे हैं ठीक है नहीं भी आए एग्जाम में
खाली व्हाट इज रोल ऑफ द एडवर्टाइजमेंट आए तो दोनों का थोड़ा-थोड़ा लिख दो जैसे इससे पहले हम लोग क्या पढ़ा रहे थे ऑब्लिगेशन
या डिसएडवांटेज या डीममेरिट ये पढ़ा रहे थे ना तो उसमें दो था इकोनॉमिक और सोशल अब ये एग्जाम में खाली नॉर्मल आ जाएगा।
डिसएडवांटेज तो अच्छा बात है भाई। दोनों को लिखो आप। दो-दो पॉइंट लिख दो। तीन-तीन पॉइंट करके छह पॉइंट लिख दो। टीचर इंप्रेस
हो जाएगा। क्या बात है यार? कितने अच्छे से कैटेगराइज करके लिखा हुआ है। दो पार्ट करके लिखा हुआ है बच्चा। ठीक है? नहीं भी
पूछे तो भी लिख सकते हैं सर। और पूछे तो फिर लिख सकते हैं। है कि नहीं? और कहीं-कहीं देखो बुक में पूरा साफ-साफ लिखा
हुआ है कि भाई ये रोल है। 10 ठो पॉइंट लिख दिया रोल का। कोई मतलब नहीं है। अगर कैटेगराइज है तो कैटेगरीज़ करके लिखिए। ठीक
है? तो स्टाफ भी मोटिवेटेड होता है एडवर्टाइजमेंट से। ब्रांड इमेज ऑब्वियसली ब्रांड इमेज क्रिएट होगा। मार्केट
एक्सपेंशन एडवरटाइजमेंट से आप अपने मार्केट को क्या कर पाओगे? एक्सपेंड कर पाओगे। और सपोर्ट टू द सेल्समैन। सेल्समैन
को सपोर्ट कर पाओगे। क्योंकि एडवरटाइजमेंट सेल्समैन को सपोर्ट करता है। कभी-कभी कंपनियां ऐड नहीं डालती है तो आपका
सेल्समैन जा के कितना भी कोशिश करता है माल नहीं बिकता है। और कभी-कभी कंपनी इतना ऐड डालती है कि खाली जाके प्रोडक्ट
दिखाओगे कि भैया ये प्रोडक्ट हां दे दो दे दो। जानते हैं तो बस तो रोज ही ऐड देखते हैं। दे दो भाई। है ना? दे लेते हैं लोग।
है कि नहीं? तो सेल्समैन के लिए भी प्रमोशन का काम एडवर्टाइजमेंट करता है। ठीक है? तो सपोर्ट टू द सेल्समैन। ठीक है?
बहुत ईजीियर होता है। देखो कितना ईजी लिखा हुआ है। ऐड मेक जॉब सेल्समैनस ईज़ियर एंड कस्टमर ऑलरेडी नो द प्रोडक्ट। ठीक है?
क्योंकि कस्टमर ऑलरेडी प्रोडक्ट के बारे में जानता है। इसलिए आराम से खरीद लेता है। अब ये देखो एडवर्टाइजमेंट हमारा खत्म
हो गया। ठीक है? और हमारा नया टॉपिक आ गया क्या? पर्सनल सेलिंग। एडवर्टाइजमेंट हो गया। एडवरटाइजमेंट में एक क्वेश्चन और ऐड
करके रखिएगा। मीडिया एंड मेथड ऑफ़ एडवरटाइजमेंट। यानी आप कितने तरीकों से एडवर्टाइजमेंट कर सकते हैं? तो उसमें बस
नाम लिख देना होता है। कौन-कौन सा? बैनर्स है, पोस्टर्स है, हैंडब्स है, टीवीस है, रेडियो से। रेडियो तो आजकल नहीं होता
लेकिन फिर भी लिख सकते हैं। है ना? वाल एडवर्टाइजमेंट से कर सकते हैं। स्काई लाइट एडवर्टाइजमेंट या लाइट एडवर्टाइजमेंट कर
सकते हैं। ये सब चार पांच काफी है। हमने बहुत ज्यादा बता दिया। तो मेथड एंड मीडिया ऑफ़ एडवर्टाइजमेंट। ये लिख के रखना कॉपी
में इसको। ठीक है? इसको भी कर लेना। नेक्स्ट आते हैं हम लोग पर्सनल सेलिंग। अब पर्सनल सेलिंग क्या था? फेस टू फेस
कम्युनिकेट करना या डायरेक्ट कम्युनिकेट करके माल बेचना। ठीक है? ये देखो। व्हेन द सेलर एंड हिज रिप्रेजेंटेटिव डायरेक्टली
टॉक टू द कस्टमर एंड कन्विंस हिम टू बाय कन्वेंस हिम टू बाय द प्रोडक्ट इज कॉल्ड पर्सनल सेलिंग। पर्सनल सेलिंग तो समझते ही
हैं। डायरेक्ट सेलिंग या पर्सनल सेलिंग बोलते हैं। इसका एक और नाम है डायरेक्ट सेलिंग। तो दोनों याद रखिएगा। ठीक है?
जैसे मॉल में या फोन पर बात करके कस्टमर को कन्वेंस करना या मॉल में डायरेक्ट फेस टू फेस बात करना है या किसी शोरूम में
जाके आप कोई प्रोडक्ट के बारे में इंफॉर्मेशन ले रहे हैं। वो आपको बता रहे हैं। हम आपको उसको बता रहे हैं। तो ये
डायरेक्ट होता है। वहां पे इंस्टेंट फीडबैक भी मिल जाता है। है कि नहीं? अभी भाई तुम एडवर्टाइजमेंट डाल दिया कि ये
ऐसा-सा है। अब लोग पढ़ते-पढ़ते तुमको गाली दे रहे हैं। ऐसे थोड़ी होता है। ऐसा होता है। तो फिर नहीं समझ पाए ना। आपको तो पता
ही नहीं चला कि लोग आपके बारे में क्या सोच रहे हैं। तुम तो ऐड लगा दिया। लेकिन अगर पॉस्टल सेलिंग हुआ तो लोग संगसंग बोले
कि नहीं नहीं भाई आप गलत बोल रहे हैं ऐसा थोड़ी होता है ये चीज होता है तो तुमको लगे ओ ऐसे लोग सोच रहे हैं तो इंस्टेंट
फीडबैक मिल जाता है ये भी एक फायदा है है कि नहीं तो चलिए आगे बढ़ते हैं डायरेक्ट सेलिंग में डायरेक्ट सेलिंग में सबसे पहला
क्या होता है फेस टू फेस डायरेक्ट कांटेक्ट बिटवीन द सेलर एंड बायर सेलर और बायर के बीच में डायरेक्ट कांटेक्ट होता
है और ये सबसे बेस्ट जो है वो सेलिंग कहलाता है क्योंकि यहां पे अब आपको डायरेक्ट फीडबैक मिलेगा और आप एक्चुअली
समझ पाओगे कि माल बिकेगा कि नहीं बिकेगा। ठीक है? ये नेक्स्ट होता है पर्सनल इफेक्ट। ठीक है? तो सेल सेलर पर्सनली
कन्वेंस द बयर टू फील द नीड ऑफ़ द प्रोडक्ट। ठीक है? है ना? तो पर्सनल एफर्ट बोला सेलर पर्सनली कन्विंस द बयर टू फील द
नीड ऑफ़ द प्रोडक्ट। ठीक है? पर्सनली कन्विंस कर पाता है। ठीक है? ओरल टॉक इट इज़ डन थ्रू द थ्रू द स्पोकन वर्ड यानी ओरल
वर्ड कम्युनिकेशन होता है। डायरेक्टली हम लोग बोल पाते हैं। तो ये ये एक फायदा होता है। क्विक फीडबैक। हां बोले ना क्विक
फीडबैक। सेलर गेट द इंस्टेंट रिप्लाई फ्रॉम द बायर। वो इंस्टेंट रिप्लाई मिलता है कि अच्छा नहीं ये ऐसा नहीं ऐसा होता
है। ये ऐसा नहीं वैसा होता है। तो आपको फीडबैक मिल जाता है। बिल्ड द रिलेशन यानी एक अच्छा रिलेशनशिप क्रिएट होता है और
लॉन्ग टर्म रिलेशनशिप क्रिएट होता है। आप भी कभी अपने पापा या दादा जी के साथ किसी मार्केट में गए होंगे तो देखे होंगे किसी
कपड़े के दुकान में या किसी ज्वेलरी शॉप में या किसी मिठाई दुकान में या किसी मोदीखाना दुकान में जाते ही वो बोलते हैं
अरे गुप्ता जी आई आइए। अरे बिटिया बड़ी हो गई आपकी। अरे आपका बेटा तो बहुत बड़ा हो गया। कितने क्लास में पढ़ते हो बेटा? बैठो
बैठो चाय लाओ चाय लाओ। तो आपको लगता है यार बहुत जान पहचान है मेरे पापा का यहां पे तो। है कि नहीं? यानी वो क्या हो रहा
है? ओरल सेलिंग है। लेकिन आप अगर किसी भी ऑनलाइन कंपनी से हम नाम नहीं लेंगे। जहां से आप रोज ग्रोसरी आइटम मंगाओ फिर भी वह
पहचानेगा आपको। है ना? अगर वहां शोरूम में चले जाओ या गोडाउन में चले जाओ। बोलो कि हमको पहचानते हो रोज मंगाते हैं। 30ों दिन
ये ये मंगाते हैं। देखो बिल तो फिर भी नहीं। तो क्या हो गया? मंगाते हैं तो ठीक है। यहां क्यों आ गए? ऐसा बात करें। लेकिन
वही गुप्ता जी के दुकान से, मिश्रा जी के दुकान से, तिवारी जी के दुकान से खरीदोगे 4 दिन में ना 4 दिन में पहचान जाएंगे। तो
एक पर्सनल रिलेशनशिप भी बहुत अच्छा क्रिएट होता है फेस टू फेस सेल में। ठीक है? और ये लॉन्ग टर्म बिल्ड होता है। मतलब बहुत
लंबा रिलेशनशिप जाता है। एक बार जान पहचान हो गया तो लंबा जाता है कि हां हां भाई आपको पहचानते हैं आप ये हैं। ठीक है? तो
ये बोल रहा है हेल्प [अचानक ज़ोर से सांस लेने की आवाज़] हेल्प टू मेक द लॉन्ग टर्म कस्टमर रिलेशनशिप। जी
लॉन्ग टर्म कस्टमर रिलेशनशिप में हेल्प करता है। फ्लैक्सिबिलिटीज है। ठीक है? आप अपने हिसाब से उसको फ्लैक्सिबल कर सकते
हैं, चेंज कर सकते हैं। तो बहुत ही सिंपल पॉइंट है। आप आराम से ले लीजिए इसका स्क्रीनशॉट। और नेक्स्ट आता है क्वालिटी
ऑफ़ गुड सेल्समैन। जी मोस्ट इंपोर्टेंट क्वेश्चन सर आपके एग्जाम का। क्वालिटी ऑफ़ गुड सेल्समैन। क्वालिटी ऑफ़ गुड सेल्समैन।
मतलब आप सुने थे ना कि हमारा नेता कैसा हो? है कि नहीं? तो यहां पढ़ना है आपको कि हमारा सेल्समैन कैसा हो? तो आइए जानते हैं
सर हमारा सेल्समैन कैसा हो? तो एक सेल्समैन के लिए है ना कितनी क्वालिटी होनी चाहिए? चार क्वालिटी होनी चाहिए।
पहला फिजिकल क्वालिटी, मेंटल क्वालिटी, वोकेशनल क्वालिटी और सोशल क्वालिटी। तो आपका सेल्समैन के भीतर ये चारों क्वालिटी
होनी चाहिए। तभी एक परफेक्ट सेल्समैन आप कहलाएंगे। ठीक है? तो हमारा सेल्समैन कैसा हो? फिजिकल क्वालिटी पे बात करते हैं। आ
जाओ। फिजिकल क्वालिटी फिजिकल क्वालिटी मतलब अगर आप सेल्समैन हैं। देखो यह क्वेश्चन आपके एग्जाम के लिए तो
इंपॉर्टेंट है। आपके रियल लाइफ के लिए उससे भी ज्यादाेंट है। तो आइए बात करते हैं। है ना? पहले फिजिकल क्वालिटी के बारे
में बात करते हैं। फिजिकल क्वालिटी में क्या आता है ना? सबसे पहला एप्रेस मतलब बोल रहा है कि गुड लुकिंग सेल्समैन
अट्रैक्ट द कस्टमर ईजीली। बोल रहा है कि सबसे पहले आपका लुक वाइज जो है वो अच्छा होना चाहिए। मतलब ड्रेसिंग सेंस आपका
अच्छा होना चाहिए। है ना? ये नहीं कि बालवल पूरा बिखरा हुआ है। दाढ़ीवड़ी पूरा बना लिए हैं। भाई नाखून वखून बढ़ गया है।
जूता पिश के जगह पे चप्पल पहन के आ गए। है ना? वैसा सेल्समैन को लोग देख के लोग कैसा कर रहा है भाई? ठीक है? गुड लुक हो, अच्छी
ड्रेसिंग सेंस हो, बूट वगैरह पॉलिश हो, सेविंग वगैरह आपका अच्छा हो। ठीक है? सब कुछ बाल-वाल मेंटेन हो भाई। अच्छे
साफ-सुथरे कपड़े पहने हो, आयरन वैयरन अच्छा हो। ठीक है? आप पोलाइटली बात कर रहे हो वो सभी जरूरी है। लेकिन अभी हम फिजिकल
अपीयरेंस की बात कर रहे हैं। और फिजिकल अपीयरेंस में जो है वो गुड लुकिंग सेल्समैन अट्रैक्ट द कस्टमर ईजीली। तो
पहला हमारा सेल्समैन का फिजिकल क्वालिटी। अब फिजिकल क्वालिटी में आप गुड लुक होने चाहिए। ठीक-ठाक दिखने चाहिए। है ना? तो यह
होना चाहिए। दूसरा नंबर हेल्थ यानी गुड हेल्थ इज़ नीड टू द वर्क हार्ड। जी हेल्थ हेल्थ आपका अच्छा भैया हेल्थ तो सबसे
इंपॉर्टेंट है यार। हेल्थ ही खराब होगा। दिन भर तुम बीमार ही रहोगे तो फिर काम ही कैसे करोगे? तो सेल्समैन में सबसेेंट क्या
होना चाहिए? आपका हेल्थ अच्छा होना चाहिए। यानी आप अच्छे से सुन रहे हो, अच्छे से बोल रहे हो, आप शारीरिक रूप से फिट हो,
स्वस्थ हो तो सेल्समैन का मजा। तो दो चीज फिजिकल क्वालिटी में गुड लुकिंग और दूसरा हेल्थ अच्छा होना चाहिए। वॉइस क्लियर एंड
प्लेज़ेंट वॉइस इंप्रेस द बॉय। जी। बोलने का तरीका आपका लहजा जिसको बोलते हैं वो परफेक्ट होना चाहिए। ऐसा मत बोल दो कि
कस्टमर सुन के ही भाग जाए। कभी-कभी आप गए होंगे ना किसी दुकान में कस्टमर का सेल्समैन का बात करने का तरीका ही तुमको
पसंद है। तुम बोले भाई माल छोड़ इसके पास बहुत अच्छा माल है। लेकिन इसका बात करने का तरीका बिल्कुल अच्छा नहीं है। मैं हम
तो यहां से लेंगे ही नहीं। हम हम ₹2 ज्यादा दे के ले लेंगे। ठीक है? सस्ता है लेकिन फिर भी नहीं लेंगे। ठीक है? हम ₹2
ज्यादा देके लेंगे। लेकिन भाई बिहेवियर तो अच्छा चाहिए ना। कैसे बात कर रहा है यार? ठीक है? तो बात करने का तरीका आपका वॉइस
क्लीन एंड क्लियर होना चाहिए। ठीक है? अगर आप तोतला बोल रहे हो तो भाई कस्टमर नहीं समझ पा रहा है। ठीक है? कि वो भगवान की
देन है। लेकिन कस्टमर तो नहीं समझ पा रहा है ना। अब कस्टमर तो जो है परेशान हो जाएगा यार। क्या बोल रहा है समझ में नहीं
आ रहा। चल दूसरे दुकान में। तो ये भी प्रॉब्लम तो हमारा सेल्समैन कैसा हो? पहला फिजिकल फिट होना चाहिए। और फिजिकली फिट
में क्या होना चाहिए? गुड लुकिंग होना चाहिए। दूसरा हेल्थ अच्छा होना चाहिए। तीसरा वॉइस क्लीन एंड क्लियर होना चाहिए।
और और प्लेज़ेंट वॉइस होना चाहिए। सुनने में अच्छा लगे। आप अच्छे से बोलो, ढंग से बोलो, प्यार से बोलो। चीजों को अच्छे से
समझाइए। ये लोगों को आज के डेट में ज्यादा अच्छा पसंद है। ठीक है? तो ये सबसे जरूरी है। ड्रेसिंग सेंस नीट, ड्रेस, क्लीन,
गुड, गुड इंप्रेस। ठीक है? है तो नीट ड्रेस होना चाहिए। पहले ही बता चुके हैं। नीट एंड क्लीन होना चाहिए। तभी देखने में
सब कुछ ठीक रहेगा। और एनर्जेटिक होना चाहिए। यानी एक्टिव सेल्समैन कैन वर्क मोर एफिशिएंटली। तो एनर्जेटिक होना चाहिए।
यानी देखना कभी-कभी किसी दुकान में जाओगे। कोई छोटा बच्चा है भाई एकदम एकदम ही नया लड़का है। लेकिन देख लो ये कूद के यहां से
उतार रहा है। कार्टून खोल के दिखा रहा है। नहीं पसंद आया। 1 मिनट रुकिए। ये देखिए। ये देखिए। 10 तो माल दिखा दिया तुमको। तुम
खुद ही बोलो भाई बस बस भाई बस रुक जाओ यार। देख लेते हैं इसी में से देख लेते हैं। अब मत निकालो। है कि नहीं? बोला नहीं
नहीं कोई बात नहीं। और देखिए ना और देखिए ना। तुम बोला भाई इतना खोल दे रहा है। तुमको तो फिर फोल्ड करना पड़ेगा। कोई बात
नहीं। नहीं हम लोग का तो यही काम है। आप देखिए ना ये एनर्जी लेवल होना चाहिए सर आपके अंदर। तब माल जो है वो आपसे क्या
होगा? बिकेगा। तो फिजिकल क्वालिटी होनी चाहिए। ठीक है सर याद रहेगा? स्क्रीनशॉट ले लो। नेक्स्ट हम लोग बात करेंगे मेंटल
क्वालिटी की। हेलो हेलो हेलो आ रहा है आ रहा है बैटरी चेंज
कर लीजिए थोड़ा सा तो चलिए आगे बढ़ते हैं चलिए देखिए तो नेक्स्ट हम लोग बात करते हैं मेंटल क्वालिटीज की। मेंटल क्वालिटी
मेंटली रूप से आप फिट होने चाहिए। ठीक है? बहुत इंपॉर्टेंट चीज है भाई। मेंटली रूप से आप फिट नहीं होंगे तो फिर सेल्समैन
कैसे होंगे? तो सबसे पहला शार्प माइंड। यानी आपका माइंड क्या होना चाहिए? शार्प होना चाहिए। यानी अंडरस्टैंड द कस्टमर
साइकोलॉजी एंड हैंडल द प्रॉब्लम। आपको प्रॉब्लम हैंडल करने का जो है वो टेक्निक पता होना चाहिए। और साइकोलॉजिकली जो है वो
आप क्या होने चाहिए? फिट होने चाहिए। पहला नंबर दूसरा अलर्टनेस यानी आप ऑलवेज क्या होने चाहिए? अलर्ट होने चाहिए। तो अलर्ट
सेल्समैन जो है वो हमेशा परफेक्ट जो है वो सेल्समैनशिप निभाता है। नेक्स्ट मेमोरी सबसेेंट है सर मेमोरी। तुम कस्टमर का नाम
ही भूल जा रहा है। कस्टमर को ही भूल जा रहा है। कस्टमर क्या आर्डर दिया वही भूल जा रहा है। ठीक है? तो ऐसे थोड़ी होता है
भाई। कस्टमर को बहुत बुरा लगता है। बोलेगा अरे पहचान रहे हैं। पिछले महीने आए थे। नहीं। बोले अरे अरे पिछले महीना ये लेके
गए थे। नहीं हमको तो हम तो आपको पहली बार देख रहे हैं। कितना बुरा लगेगा उसको। चल भाई ये तो पहचान ही नहीं रहा। है कि नहीं?
नहीं भी पहचानते हो। बोल दो भैया हां आपको पहचान रहे तो है कि नहीं? तो ऐसा होना चाहिए। ठीक है? मेमोरी आपकी शार्प होनी
चाहिए। कोई कस्टमर आके बोला अच्छा बोला माल ला दिया आप? बोले हां हां आ गया आ गया। बैठिए ना। अच्छा थोड़ा सा भूल रहे
हैं। क्या बोले थे? हमको हम तो पूरा ही भूल रहे हैं। लेकिन हम ऐसा एहसास नहीं होने देंगे। तो मेमोरी आपकी शार्प होनी
चाहिए। अगर नहीं शार्प है तो थोड़ा स्मार्ट होने चाहिए आप। तभी आप सेल्समैन अच्छा हो सकते हैं। ठीक है? तो क्या होना
चाहिए? मेमोरी शार्प। अब कितने लोगों की मेमोरी शार्प होती है देखते ही बोलेगा अरे मिश्रा जी आइए आइए आइए अरे यार बैठिए है
ना और आप वो जो प्रोडक्ट बोले थे कब से ला के रखे हैं आप आ नहीं रहे हैं ठीक है ये देखिए ये प्रोडक्ट बोले थे ना ठीक है और
ये ला दिए हैं और आप पिछला बार इतना सामान लिए थे और ₹200 आपका बाकी था ये लीजिए अपना ₹200 ठीक है आप पॉकेट से निकाले ₹200
जो है वो दे दिए है कि नहीं तो ऐसा होना चाहिए सर फिर तुम लोग यार कितना याद है सब कुछ सारा बात ही इसको याद है है कि नहीं
तो ये कस्टमर इंप्रेस होता है आपसे तो अलर्टनेस होनी चाहिए शार्प मेमोरी होनी चाहिए है ना मेमोरी माइंड वगैरह शार्प
मेमोरी में आ जाएगा शार्प आप माइंड और मेमोरी ऑलमोस्ट सेम ही चीज है। रिमेंबर द प्रोडक्ट डिटेल एंड कस्टमर नीड्स सब कुछ
आपको पता होना चाहिए। कॉन्फिडेंस लेवल सबसे इंपॉर्टेंट चीज होता है। सर कॉन्फिडेंट है तो सेल है। याद रखना कभी भी
लाइफ में अगर आप कॉन्फिडेंट है तो सेल है। अपने प्रोडक्ट के प्रति कॉन्फिडेंस रहिए। है कि नहीं? अब मान लीजिए आप प्रोडक्ट बेच
रहे हैं। ठीक है? कुछ भी बेच रहे हैं। जैसे मिक्सर मशीन बेच रहा है। कोई कस्टमर आया बोला भैया ये मिक्सचर मशीन कितने का
दिए? 2000 का। अच्छा ये कैसे चलेगा? वो सब नहीं पता कैसे चलेगा। जा के देख लेना। इसमें किताब दिया होगा पढ़ लेना। बोलेगा
अच्छा ख़राब नहीं ना हुआ। ख़राब नहीं होगा। हम कैसे बताएं? हो भी सकता है। अभी तुम क्या ही बोलोगे? वारंटी है। हां वारंटी
है। ठीक है। वारंटी में कंपनी सर्विस अच्छा देती है। अब देखो कंपनी का बात है सर्विस देगी नहीं देगी तुम समझ लेना। तुम
खरीद लो। ठीक है। फोन करना खराब होगा तो आएगी तो आएगी। नहीं तो अब हम क्या ही बोल सकते? भैया काहे खरीद देंगे तुम्हारे जैसा
सामान। है कि नहीं? तुम तो खुद ही कॉन्फिडेंट नहीं हो। कि हां अच्छा है। हां ठीक है। हां चलेगा। पता नहीं। इतना तो
नहीं बोल पाएंगे। तो कॉन्फिडेंस अगर आप नहीं है अपने प्रोडक्ट के प्रति। ठीक है? अपने अपने सामान के प्रति अगर आप
कॉन्फिडेंस नहीं है तो हम आपसे खरीदेंगे नहीं। अगर आप मेरे से पढ़ रहे हो ट्यूशन, ठीक है? और आप खुद ही देख रहे हो सर खुद
ही कंफ्यूज है। भाई कैसे 10 बार सोच रहे हैं, बना रहे हैं, बोल रहे हैं नहीं सार मेमोरी में ये नहीं ये गलत है। नहीं नहीं
ऐसा नहीं होगा। एक मिनट रुको सोचते हैं। तो आप बोलोगे कैसा टीचर है भाई? खुद ही कॉन्फिडेंट नहीं है। कौन पढ़ेगा इससे? तो
सिंपल सी बात है। कहीं भी कॉन्फिडेंस होना चाहिए। अगर आप सेल्समैन है तो आप अपने प्रोडक्ट के प्रति कॉन्फिडेंस जो है कि
हां भाई बिल्कुल। अगर आप कोई कपड़ा ले रहे हो तुम बोलोगे भैया ये कपड़ा तो देखने में बहुत अच्छा है लेकिन मेरे को लग रहा है
इसमें बबल्स आ जाएगा। तुम बोलेगा बबल्स। क्या बात कर रहे हो? बबल्स आया ना ला के मेरे मुंह पे मारना। अब उसको भी पता है
मुंह पे थोड़ी मारेगा। है कि नहीं? लेकिन तू बोला ला के मेरे मुंह पे मारिएगा। है कि नहीं? अब कस्टमर भी डर जाएगा कि नहीं
नहीं ऐसे बोल रहा है कि मुंह पे मार देना भाई। अब मुंह पे मारने के लिए बोला है थोड़ी ना मुंह पे मारेंगे। है कि नहीं?
मतलब प्रोडक्ट अच्छा होगा। देख रहे हो? कॉन्फिडेंस लेवल देख रहे हो कैसे बोल रहा है। है ना? प्रोडक्ट खराब होता है तो
बोलता है वैसे। कॉन्फिडेंस लेवल है। बाद में बबल्स आएगा तो देखेंगे। है कि नहीं? लेकिन कॉन्फिडेंस लेवल तो हाई रखो और
कॉन्फिडेंस लेवल हाई रखिए और क्वालिटी भी अच्छा रखिए। क्यों बबल्स आएगा? है कि नहीं? मतलब रुआ आ जाता है ना जो कपड़े में
वैसा नहीं आना चाहिए। ठीक है? तो कॉन्फिडेंस लेवल आपके प्रोडक्ट के प्रति बहुत अच्छा होना चाहिए। कस्टमर इससे
इंप्रेस होता है और फट से सामान खरीद लेगा। है ना? अगर तुम उसको कॉन्फिडेंस दिला दो कि नहीं भाई बिल्कुल अच्छा है।
कितने लोग लेके गए हैं। देखिए ना हम घर में भी यूज़ कर रहे हैं इसी प्रोडक्ट को। यही वाला मिक्सचर मशीन हमारे घर में यूज़
होता है। ठीक है? तो दिखा देंगे आपको। है ना? अगर आप आप तो अक्सर आते रहते हैं। हम फोटो खींच के रखेंगे आपको दिखाएंगे। तो
बोला नहीं यार फोटो-वोटो थोड़ी देखना है। ठीक है? दे दो। कॉन्फिडेंस है कि नहीं? नेक्स्ट इमेजिनेशन। क्रिएटिव माइंड
एक्सप्लेन द प्रोडक्ट इज द बेटर वी। ठीक है? यह जरूरत नहीं है। चार पॉइंट करिए काफी है। नेक्स्ट आता है वोकेशनल
क्वालिटी। तो पहला क्वालिटी मेंटल क्वालिटी और दूसरा मेंटल क्वालिटी था और फिजिकल क्वालिटी था। दो हो गया वोकेशनल
क्वालिटी। वोकेशनल क्वालिटी क्या बोलता है? ये ये क्या बोल रहा है? प्रोडक्ट नॉलेज। यानी आपको प्रोडक्ट के बारे में
नॉलेज होना चाहिए। आपको आपकी कंपनी के बारे में नॉलेज होना चाहिए। आपको कस्टमर के बारे में नॉलेज होना चाहिए और आपको
मार्केट के बारे में नॉलेज होना चाहिए। तो नॉलेज अबाउट द प्रोडक्ट, कस्टमर, मार्केट एंड कंपनी। ये चार चीजों के बारे में आपको
नॉलेज होना चाहिए। एक साथ ही याद कर लोगे बात खत्म हो जाएगा। वोकेशनल खत्म। ठीक है? सेल टेक्निक है। यहां पे लिखा हुआ है सेल
टेक्निक आपके पास होना चाहिए। हां होना चाहिए भाई। वोकेशनल क्वालिटी बोलते हैं इसको। और सोशल क्वालिटी। सोशल मतलब समाज
के प्रति आपकी क्या क्वालिटी होनी चाहिए जिससे आप समाज को इंप्रेस कर सको। तो सबसे पहले सिंपैथी हेल्प द कस्टमर टू चूजिंग द
प्रोडक्ट। सिंपथी आपकी होनी चाहिए। यानी आप थोड़ा सा सिंपैथी वाले पर्सन होना चाहिए। बहुत रूढ़ आदमी नहीं चलता सेल्समैन
में। बहुत जो है वो बहुत अक्रू टाइप का आदमी नहीं चलता। सेल्समैन बहुत पोलाइट होना चाहिए। बहुत ही पोलाइट। ठीक है? तो
ये याद रखिएगा। ऑनेस्टी होनी चाहिए आपके अंदर। पोलाइटनेस होनी चाहिए। ये सब छोटी-छोटी चीजों को आपको ध्यान में रख के
जो है वो आपको काम करना होगा। ठीक है? तो सिंपैथी होनी चाहिए। पोलाइट होनी चाहिए। देखो पोलाइटनेस होनी चाहिए। तो सिंपैथी
होनी चाहिए। यानी कस्टमर बोल रहा है कि हमको तो समझ में नहीं आ रहा है कौन सा प्रोडक्ट ले। तो आप बोलो कोई बात नहीं। हम
बता रहे हैं। देखिए ये आपको ये पर्पस के लिए लेना है। ये प्रोडक्ट लीजिए ना सबसे बेस्ट है। है ना? तो ये होनी चाहिए।
सिंपैथी होनी चाहिए। ठीक है? अच्छा उसके बाद पोलाइटनेस होनी चाहिए। ये सबसे इंपॉर्टेंट है। देखो कभी-कभी आप कभी दीदी
या मम्मी के साथ कभी गए होंगे। है ना? किसी काम के लिए या उनके ड्रेस लेने के लिए। कभी आप मार्केट गए मम्मी बोली रुकना
थोड़ा सा देख लेते हैं। तो बोला हां हां ठीक है दे लो मम्मी। ठीक है? फिर मम्मी क्या करती है भाई? या आंटी गई साथ में या
दीदी गई साथ में। है ना? उन लोगों ने बहुत सारा साड़ी देख लिया। कितना? 15 20 50। ठीक है? और 50 देखने के बाद बोली अच्छा
नहीं लग रहा है। ठीक है? बोल के चली गई। है कि नहीं? तो फिर आपको कितना ऑकवर्ड लगता है। है कि नहीं? आपको आपको दुकानदार
देखता है। तुमको लगता है हम बोल दे भाई कि हम इनके साथ नहीं है। हम अलग आए हैं। ठीक है? ऐसा फील होता ऑकवर्ड फील होता है ना।
ठीक है? लेकिन वहां कस्टमर रड नहीं होता है। सॉरी सेल्समैन रूड नहीं होता है। ये क्या हुआ भाई? 40 पीस निकलवा दिए। बोल रहा
है अच्छा नहीं है। ये क्या मतलब? नहीं। पोलाइटली बोलता है। ठीक है भाभी जी कोई बात नहीं। लेकिन नेक्स्ट बार खरीदना होगा
तो आइएगा। अब सारा सामान देख लिए। सारा प्रोडक्ट देख लिए। हमारे पास कैसा प्रोडक्ट है। ठीक है। लेकिन आइएगा। कोई
बात नहीं ले कोई बात नहीं। हमारा तो यही काम है। है ना? ये पोलाइटनेस [गला साफ़ करने की आवाज़]
जो है वो कस्टमर को अट्रैक्ट करता है। हो सकता है उस समय वो कस्टमर ना परचेस करे। लेकिन नेक्स्ट बार आके वो आपसे सामान
खरीदेगा। तो इस चीज का भी ध्यान रखें कि पोलाइट बिहेवियर करिए। पोलाइट बिहेवियर विन द कस्टमर ट्रस्ट। ठीक है? कस्टमर के
ट्रस्ट को आप जीत सकते हो। ठीक है? ऑनेस्टी ईमानदारी सबसे इंपॉर्टेंट चीज है सर। आप ईमानदार होने चाहिए। फ्रॉड बाजी
करोगे एक बार करोगे। बेईमानी करोगे एक बार करोगे। बार-बार तो नहीं कर सकते हो ना। पांच का माल 5000 में चिपका दिए किसी को
एक ही बार ना। उसके बाद दोबारा तो नहीं कर पाओगे ना। तो आप ऑनेस्ट रहिए। ईमानदार रहिए अपने कर्तव्यों के प्रति। है ना? तो
ज्यादा अच्छा रहेगा। जो भी कस्टमर आएगा वो जानता है नहीं जेन्युइन है। ठीक है? कभी कोई कस्टमर ज्यादा पैसा दे दिया। बोला अरे
ये 500 का नोट एक्स्ट्रा दे दिया आप ये लीजिए है ना उस समय आपका जो ट्रस्ट बिल्ड होगा उस सेल्समैन के प्रति या उस कंपनी के
प्रति ये बहुत बड़ा बात होता है कह अरे यार तुम हमेशा कभी-कभी आएगा तो आंख बंद करके खरीदेगा अरे यार उस दिन ₹500 ज्यादा
दे दिए थे वापस कर दिया ये लो फ्रॉड नहीं करेगा होता है कि नहीं तो याद रखिए ऑनेस्टी बहुत इंपॉर्टेंट चीज है ठीक है
कोऑपरेशन जी कोऑपरेटिव होनी चाहिए कस्टमर के साथ हेल्पफुल नेचर टू मेक द कस्टमर हैप्पी कोऑपरेट होना चाहिए अब मान लीजिए
कोई कस्टमर सामान खरीदा उठा ही नहीं पा रहा है बोले अरे रे भाभी जी अरे भैया छोड़ दीजिए छोड़ दीजिए स्टाफ को उठाओ उठाओ उठाओ
बाइक पे लोड करो अच्छे से बांध दो उनको ठीक है भैया को भैया टोटो टोटो पे ले जाएंगे टोटो पे हम लोग बैठा देंगे अच्छे
से रख देंगे आप पकड़ के बैठ जाना चले जाना हेल्पफुल होनी चाहिए कोऑर्डिनेशन होनी चाहिए कोऑपरेटिव होनी चाहिए कभी-कभी बहुत
ज्यादा सामान ले लिए आप बोले भाई ये तो जाएगा नहीं यार बहुत ज्यादा होगा बोला कोई बात नहीं आप जाइए एड्रेस लिखवा दीजिए हम
लोग भिजवा देंगे ₹20 बस इसको दे दीजिएगा टोटो भाड़ा बोला ठीक है है कि नहीं या बहन बहन से जाएगा ₹50 दे दीजिएगा ठीक है तो ये
चीज होनी चाहिए कि कोऑपरेटिव है तो आपको लगता है यार दुकानदार बहुत अच्छा है ठीक है बहुत कोऑपरेटिव है कुछ भी प्रॉब्लम हो
तो बोलने पे कोऑपरेट करता है और यह कस्टमर के ट्रस्ट को जीतेगा और ये सब कुछ बाद में सेल में कन्वर्ट होता है सर सब कुछ। तो
हमारा सेल्समैन कैसा होना चाहिए सर? ये कितना इंपॉर्टेंट सा टॉपिक है और कितना प्यारा सा टॉपिक है। उतना ही प्यार से हम
आपको पढ़ा भी रहे हैं। अगर आप अच्छा से समझ पा रहे होंगे तो मजा आ रहा होगा सर टॉपिक को। ठीक है? नेक्स्ट आता है गुड
बिहेवियर। सबसे इंपॉर्टेंट है सर आपका बिहेवियर। देखो सेल्समैनशिप में सबसे ऊपर होता है। प्राइस से भी ऊपर होता है। है
ना? प्रोडक्ट की क्वालिटी से भी ऊपर होता है आपका बिहेवियर। सबसे इंपॉर्टेंट होता है। अगर आपका बिहेवियर खराब है ना तो
कितना भी सस्ता माल दे रहे हो, कितना भी अच्छा माल दे रहे हो, कस्टमर आपसे माल नहीं खरीदेगा, बहुत कम खरीदेगा। ठीक है?
क्योंकि आपका बिहेवियर बहुत मैटर करता है। आज के डेट में तो और ज्यादा। ठीक है? तो आपकी भाषा, आपका लैंग्वेज, आपका बिहेवियर,
आपकी पोलाइटनेस ये सब कुछ बहुत इंपॉर्टेंट मैटर करता है। तो गुड बिहेवियर, गुड मैनर्स अट्रैक्ट द मोर कस्टमर। तो मोर
कस्टमर को क्या कर रहे हो? आप अट्रैक्ट कर पा रहे हो। चलिए नेक्स्ट सोशल क्वालिटी डिफाइन द सेल्स मैनशिप
सेल्स प्रमोशन। सेल्स प्रमोशन भूल गए क्या? सेल्स को प्रमोट करना। तो सेल को हम लोग कैसे प्रमोट करेंगे? तो आइए बात करते
हैं सेल्स को कैसे प्रमोट करेंगे? सेल्स प्रमोशन। सेल्स प्रमोशन मींस द एक्टिविटीज अदर देन द एडवरटाइजिंग पब्लिसिटी एंड
पर्सनल सेलिंग दैट इनकरेज द कस्टमर बाय द प्रोडक्ट। बोल रहा है कि एडवर्टाइजमेंट, पब्लिसिटी और पर्सनल सेलिंग के अलावा जो
चीजें भी हम लोग सेल को प्रमोट करने के लिए करते हैं। सेल को प्रमोट करने के लिए ये सब तो करते ही हैं। इसको अलावा और अगर
कुछ कर रहे हो तो उसको हम लोग क्या बोलते हैं? सेल्स प्रमोशन बोलते हैं। और इसमें आ जाएगा फ्री सैंपल कूपन देना यानी फ्री
कूपन देना, गिफ्ट कूपन देना, फेयर वगैरह यानी मेला वगैरह जो पर्दा से मेला में आप काउंटर लगवा दिए वो लॉटरी टिकट सिस्टम कर
दिए। फ्री गिफ्ट ईटीसी ये सब देके आप अपने सेल को क्या कर सकते हैं? प्रमोट कर सकते हैं। तो आइए फीचर्स ऑफ़ सेल्स प्रमोशन।
सेल्स को कैसे प्रमोट करेंगे? इसके क्या-क्या फीचर्स हैं? इट्स नॉन रेकरिंग एंड डन ओनली द स्पेशल ओकेजन। जी बिल्कुल
ये नॉन रेकरिंग होता है। हमेशा नहीं निकाल सकते हैं। ये किसी ओकेजन में निकाल सकते हैं। नेक्स्ट आता है इट्स इंक्लूडिंग ऑल द
प्रमोशन एक्सपेक्ट द एडवर्टाइजमेंट, पर्सनल सेलिंग एंड पब्लिसिटी। जी। इसके भीतर क्या होता है? पर्सनल सेलिंग,
एडवर्टाइजमेंट और पब्लिसिटी को छोड़ के बाकी सब चीजें इसमें ऐड होती है। इट्स एम इट्स मेन एम टू इंक्रीस द सेल बाय
अट्रैक्टिंग बायर। बायर को अट्रैक्ट करके माल सेल करवाना इसका मेन ऐ होता है। बोला इट्स मेक द एडवरटाइजिंग एंड पर्सनल सेलिंग
मोर इफेक्टिव। ठीक है? इट्स मोटिवेट बोथ कंज्यूमर एंड डिस्ट्रीब्यूटर। कंज्यूमर और डिस्ट्रीब्यूटर दोनों को क्या करता है?
मोटिवेट करता है। अब धमाका ऑफर, दिवाली ऑफर, स्क्रैच कार्ड, कूपन कार्ड, गिफ्ट कार्ड, बाय वन गेट वन फ्री है ना? कैशबैक
ये सब दोगे तो भाई डिस्ट्रीब्यूटर भी तो खुश होगा। हां हां ऑफर निकालिए। ऑफर निकालेंगे हम लोग भी एक्सप्लेन करेंगे।
अरे धमाका ऑफर चल रहा है। अरे एक साल का गारंटी के दो साल का गारंटी है। बाय वन गेट वन फ्री। एक खरीदो दूसरा फ्री। ठीक
है? तो ये चीजें भी रहती है। एक्स्ट्रा गिफ्ट दे रहा है। ठीक है? तो ये सब चीजें भी होती है। ठीक है? तो ये फायदा होता है
को कस्टमर को और डिस्ट्रीब्यूटर को दोनों को। नेक्स्ट हम लोग बात करेंगे टेक्निक्स ऑफ द सेल्स प्रमोशन। आप कैसे सेल्स को
प्रमोट करोगे? तो सेल्स को प्रमोट करने के क्या-क्या टेक्निक हो सकते हैं? पहला फ्री सैंपल। फ्री में सामान बंटवाओ। फ्री सैंपल
होता है ना? फ्री में सामान बंटवाओ। अच्छा लगेगा तो आदमी खरीदेगा। कभी-कभी आप ट्रेन में सफर करते होंगे। देखिए भाई चूर्ण का
गोली दे रहा है सबको। है ना? आप खा रहे हो अच्छा लग रहा है। भैया एक डब्बा देना तो डब्बा खरीद लिया। है कि नहीं? कभी-कभी दो
काठी जला के ट्रेन में चढ़ गया। तुमको लग रहा है अरे यार इतना अच्छा स्मेल कहां से आ रहा है? इतना सुंदर खूबसूरत जो है वो
सुगंध कहां से आ रहा है? फिर देखो ओ धूपकाठी लिया भैया कितने का दे रहे हो धूपकाठी? सिर्फ ₹20 दे देना है तो एक हो
गया। फ्री सैंपल है। कभी आप अंगूर खरीदने गए। बोले भैया अंगूर कैसे दिए? बोला ₹200 ₹200 क्यों? खट्टा होगा तो तो ₹200 महंगा
पड़ जाएगा मेरे लिए। है ना? सब बेकार हो जाए। बोला क्या बोल रहा है? खट्टा खा के देखिए। है कि नहीं? तो आप भी खाएं। बोला
हां मीठा दे दो। तो फ्री सैंपल। है कि नहीं? अभी हम लोग जो क्लास ले रहे हैं वो भी क्या है? एक फ्री सैंपल है। हम आपके
लिए फ्री में क्लास दे रहे हैं। ठीक है? ताकि आप टॉपिक को अच्छे से समझ सके और अगर आपको हमारा पढ़ाने का तरीका अच्छा लग रहा
है तो नीचे दिए गए नंबर पे आप WhatsApp करिए। ठीक है? और कोर्स के बारे में डिटेल जानिए और कोर्स बाय कर सकते हैं। ठीक है?
हां आपको बता दें कि 11th अक्टूबर तक हमारा कोर्स था और जिसको अब बाद में हम लोगों ने 2390 कर दिया। दो दिन तक 2390 ही
चला। उसके बाद बहुत सारे बच्चों ने जो है वो कंप्लेन किया कि सर हम लोग को पता नहीं था। हम लोग का तो कॉस्टक का एग्जाम था। हम
लोग तो वीडियो ही नहीं देख रहे थे। सर हम लोग सिर्फ जो है वो पढ़ाई कर रहे थे। पता नहीं चला सर। है ना? कॉस्टक का वीडियो देख
रहे थे। उसमें तो आप ज्यादा कुछ नहीं बताए थे सर। ऐसा वैसा बहुत सारे मैसेज आए। फिर हम लोगों ने इसको नवरात्रि ऑफर में जो है
1990 ही रखा है। लेकिन हम बहुत जल्दी 2390 करेंगे क्योंकि बहुत ज्यादा ही डाउन हो गया। बस बच्चों की डिमांड पे हम लोगों ने
किया है। 1990 में अभी भी ये कोर्स अवेलेबल है। ठीक है? लेकिन ये सिर्फ जो है वो नवरात्रि यानी कहने का मतलब है कि
10वीं तक ही रहेगा 20 तारीख तक। उसके बाद 21 तारीख से 21 बहुत अच्छा शुभ दिन है। वहां से हम लोग 2390 कर देंगे। तो आप 2390
में फिर बाय करना होगा। अगर आपको हमारे पढ़ाने का तरीका नोट्स स्टडी मटेरियल सब अच्छा लग रहा है तो ऑल सब्जेक्ट हम आपको
दे रहे हैं 1990 में 10990 में 6 महीना के लिए पूरा कंप्लीट स्टडी मटेरियल नोट्स है ना लाइव क्लास रिकॉर्डेड क्लास विद
अनलिमिटेड व्यू एंड साथ में एसटी एंड स्पीड टेस्ट और साथ में 12 मॉडल प्रैक्टिस सेट ठीक है अगर आपको अच्छा लगा और चाहिए
अगर आप समझ पा रहे हैं हमारे क्लास को तो आप जरूर नीचे गए WhatsApp नंबर पे 9967615 पे WhatsApp करिए आपको पूरा डिटेल मिलेगा।
है ना? और पेमेंट करिए। संग संग हम आपको बैच में ऐड करेंगे। ऑलरेडी क्लास स्टार्ट हो चुका है। बहुत सारे क्लासेस निकल चुके
हैं। ठीक है? तो चलिए आगे बढ़ते हैं। डिस्काउंट तो फ्री सैंपल हो गया। डिस्काउंट द प्राइस कट द सम टाइम टू
इंक्रीस द सेल। तो पहला क्या होता है? कुछ दाम कम कर दिए। सेल प्रमोशन कैसे कर सकते हो? आपको अगर लग रहा है कि अपने प्रोडक्ट
का सेल का प्रमोट करना है तो फ्री सैंपल निकालो, डिस्काउंट ऑफर निकालो, लॉटरी निकाल दो या गिफ्ट कूपन निकाल दो। कूपन
निकाल दो, स्क्रैच करेगा, गिफ्ट निकलेगा। तो ये सब आप निकाल सकते हैं। ठीक है? यहां पे नेक्स्ट आता है डिफाइन पब्लिसिटी। अब
लास्ट टॉपिक हमारा चल रहा है क्या? पब्लिसिटी। पब्लिसिटी के बारे में आपको बताए थे ना क्या चीज था? फ्री में ऐड फ्री
में आपकी पब्लिसिटी हो जाना। कोई न्यूज़पेपर आपके बारे में बता दिया कि यहां यहां ये ये चीज हो रहा है। है ना? या
कोई कोई न्यूज़ चैनल आपके बारे में बता दिया। तो ये आपके लिए फ्री पब्लिसिटी हो गया। तो पब्लिसिटी मींस द गिविंग
इंफॉर्मेशनेशन अबाउट द प्रोडक्ट एंड आइडिया थ्रू द न्यूज़ मीडिया एंड लाइक द न्यूज़पेपर एंड रेडियो और टी टेलीविज़ एंड
टीवी। ठीक है? तो ये हो गया पब्लिसिटी। अभी देखो फीचर्स ऑफ़ पब्लिसिटी इट इज नॉट रिपीटेड अगेन एंड अगेन। नहीं भाई जैसे ऐड
बार-बार आता है। है ना? जबजब एडवर्टाइज मतलब प्रचार आएगा तो आपका एडवर्टाइजमेंट दिखाएगा। लेकिन न्यूज़ कंपनी बार-बार थोड़ी
रोज-रोज़ बताएगी। फिर तो लोग समझ जाएंगे ये भी ऐड है। है ना? तो ये एडवर्टाइजमेंट अगेन एंड अगेन नहीं आएगा। इट्स कैन गुड
एंड बैड फॉर द प्रोडक्ट। प्रोडक्ट के लिए अच्छा भी हो सकता है, खराब भी हो सकता है। अब न्यूज़ में आ गए आप तो या तो अच्छा के
लिए न्यूज़ में आए होंगे या तो खराब के लिए न्यूज़ में आए होंगे। है ना? तो वो अच्छा भी हो सकता है, खराब भी हो सकता है। इट्स
फ्री। जी बिल्कुल। इसके लिए कोई पैसा नहीं होता है। कंपनी न्यूज़ कंपनी को लगा। न्यूज़ एजेंसी को लगा कि भैया आपने बहुत
अच्छा कर रहे हो तो आपके बारे में बताया। ठीक है? तो कंपनी पे द नथिंग फॉर इट। ठीक है? कंपनी हैज़ नो कंट्रोल ओवर इट। कंपनी
का इस पे कोई कंट्रोल नहीं होता है। ठीक है? एंड एंड इट्स रीच ऑल टाइप ऑफ द पीपल इन द सोसाइटी। और ये न्यूज़ तो सभी लोग देख
रहे हैं ना? तो सभी लग वर्ग के लोगों के पास ये पहुंच जाता है। ऑल टाइप ऑफ द पीपल्स ऑफ़ द सोसाइटी। ठीक है? नेक्स्ट बात
करते हैं हम लोग रोल ऑफ़ पब्लिसिटी। लास्ट ही चल रहा है खत्म हो गया और बहुत अच्छे से हम लोगों ने खत्म किया टॉपिक को एक बार
वीडियो देख लेंगे पूरा चैप्टर आपकी मुट्ठी में ठीक है और पहला यही चैप्टर करना क्योंकि आपका कनेक्टिंग चैप्टर है उसके
बाद नया चैप्टर करेंगे ठीक है अच्छा उसके बाद रोल्स ऑफ द पब्लिसिटी पब्लिसिटी के क्या-क्या रोल है
[नाक से की जाने वाली आवाज़] पहला ट्रस्ट बिल्ड होता है अब पब्लिसिटी चल रहा है न्यूज़ चैनल में आपका नाम आ गया सर तो
लोगों का ट्रस्ट बिल्ड हो जाता है वाइड रीच ज्यादातर लोगों तक आप पहुंच पाओगे तो इट्स रीच ऑल टाइप ऑफ द पीपल्स ठीक है
गुडविल मार्केट में आपकी गुडविल क्रिएट हो जाती है तो गुड पब्लिसिटी इंक्रीस द कंपनीज़ गुडविल कंपनी की गुडविल बढ़ा देती
है फ्री फ्री प्रमोशन कंपनी फ्री प्रमोशन करती है। यानी कंपनी गेट द प्रमोशन एट नो कॉस्ट। बिना कॉस्ट का कंपनी का फ्री में
प्रमोशन हो गया और सेल्स ग्रोथ हां प्रमोशन हो गया तो सेल तो ग्रोथ करेगा ही आपका। तो सेल भी आपका क्या कर गया? ह कर
गया यानी ग्रोथ कर गया। ठीक है? तो ये रोल होता है पब्लिसिटी का। एडवांटेज और पब्लिसिटी में क्या फर्क है? पेड प्रमोशन
टू द सेल और ये फ्री न्यूज़ होता है। ठीक है? ये पेड होता है और ये फ्री न्यूज़ होता है। मैसेज फ्रॉम एडवरटाइजर और ये मैसेज
फ्रॉम न्यूज़ मीडिया। न्यूज़ मीडिया देता है। ठीक है? नेक्स्ट आता है कंपनी हैज़ फुल कंट्रोल। इस पे कंपनी का फुल कंट्रोल होता
है। कंपनी हैज़ नो कंट्रोल। पब्लिसिटी में कंपनी का क्या ही कंट्रोल है। न्यूज़ कंपनी दिखाया। ठीक है? अच्छा भी दिखा सकता है,
खराब भी दिखा सकता है। लेस क्रेडिटेबल। ठीक है? और ये मोर क्रेडिटेबल होता है। यानी क्रेडिट इसमें ज्यादा मिलता है।
इसमें कम मिलता है। टू इंक्रीस द सेल। ठीक है? और टू पब्लिक वेलफेयर और अवेयरनेस। ये पब्लिक वेलफेयर अवेयरनेस। आपने कुछ अच्छा
किया अवेयरनेस के लिए यानी जागरूकता लाने के लिए आपके बारे में दिखाया गया। सेल के लिए नहीं होता है। लेकिन इनडायरेक्टली
आपका सेल बढ़ जाता है। वह अलग बात है। ठीक है? और यह हो गया हमारा कंप्लीट। तो बहुत-बहुत
धन्यवाद आप सभी लोगों का वीडियो देखने के लिए अंत तक। ठीक है? आशा और उम्मीद होगी कि वीडियो अच्छा लगा होगा। प्लीज शेयर
करना, लाइक करो और कमेंट करके बताइएगा प्लीज कि वीडियो कैसा लगा। कैसा हम लोग जो है वो समझ पा रहे हैं कि नहीं हमारे
पढ़ाने के तरीकों को। तभी हम लोग उस चीज को जो है वो और अच्छे से वीडियो लेके आएंगे और भी वीडियो लेके आएंगे। तो प्लीज
लाइक कमेंट ही आपका बताएगा कि वीडियो को कितना प्यार मिल रहा है और नेक्स्ट वीडियो कब आएगा। ठीक है? जितना जल्दी वन के जाएगा
उतना जल्दी सेकंड पार्ट का वीडियो आएगा। तो मिलते हैं आपसे नेक्स्ट वीडियो में। तब तक के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद। थैंक यू।
विज्ञापन से निर्माता को नए प्रोडक्ट लॉन्च करने, पुराने प्रोडक्ट की मांग बनाए रखने और प्रतिस्पर्धा का सामना करने में मदद मिलती है। उपभोक्ता को प्रोडक्ट की पूरी जानकारी मिलती है, जिससे वे सही चुनाव कर पाते हैं, और समाज में रोजगार के अवसर बढ़ते हैं।
प्रमोशन का मुख्य उद्देश्य ग्राहकों को प्रोडक्ट के बारे में बताना, उसके फायदे समझाना और उन्हें खरीदने के लिए प्रेरित करना है। इससे बिक्री बढ़ती है, कंपनी की सकारात्मक छवि बनती है, और प्रोडक्ट की मांग बनी रहती है।
विज्ञापन से प्रोडक्ट की कीमत बढ़ सकती है, क्योंकि विज्ञापन की लागत उसमें जुड़ जाती है। इसके अलावा, झूठे या भ्रामक विज्ञापन उपभोक्ताओं को धोखा दे सकते हैं, और कुछ विज्ञापन बुरी आदतों (जैसे धूम्रपान) को बढ़ावा दे सकते हैं।
पब्लिसिटी एक मुफ्त तरीका है जिसमें मीडिया प्रोडक्ट या सेवा के बारे में समाचार या चर्चा करता है, जबकि विज्ञापन के लिए कंपनी को भुगतान करना पड़ता है। पब्लिसिटी को अक्सर अधिक विश्वसनीय माना जाता है क्योंकि यह तीसरे पक्ष द्वारा दी गई जानकारी होती है।
इसमें विक्रेता और खरीदार आमने-सामने बातचीत करते हैं, जिसमें विक्रेता प्रोडक्ट के फायदे समझाकर खरीदार को उसे खरीदने के लिए राजी करता है। यह तरीका जटिल या महंगे प्रोडक्ट के लिए विशेष रूप से प्रभावी होता है।
सेल्स प्रमोशन में अल्पकालिक प्रस्ताव शामिल होते हैं, जैसे कि छूट देना, 'खरीदें एक पाएं मुफ्त' ऑफर, स्क्रैच कार्ड, लकी ड्रॉ, और कूपन। इसका उद्देश्य ग्राहकों को तुरंत खरीदारी करने के लिए प्रेरित करना होता है।
विज्ञापन से मीडिया (अखबार, टीवी) को आर्थिक सहायता मिलती है और रोजगार के अवसर बढ़ते हैं। इसके अलावा, यह नए और बेहतर प्रोडक्ट के बारे में जानकारी देकर जीवन स्तर में सुधार लाने में मदद करता है, साथ ही राष्ट्रीय आय में वृद्धि में भी योगदान देता है।
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