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सम्मिश्र संख्याओं का बीजगणित और ज्यामितीय निरूपण

सम्मिश्र संख्याओं का बीजगणित (Algebra of Complex Numbers)

महत्वपूर्ण परिणाम (Important Results)

  • परिणाम 1: किसी सम्मिश्र संख्या (z = a + ib) और उसके संयुग्म (z̅ = a - ib) का गुणनफल हमेशा उसके मापांक के वर्ग के बराबर होता है।
    • z · z̅ = (a + ib)(a - ib) = a² - (ib)² = a² + b² = |z|²
  • परिणाम 2: किसी सम्मिश्र संख्या के व्युत्क्रम (reciprocal) को इस प्रकार लिखा जा सकता है:
    • 1/z = z̅ / |z|²
    • इसका अर्थ है कि हर (denominator) में से सम्मिश्रता हटाने के लिए, अंश और हर को हर के संयुग्म से गुणा करें।

उदाहरण (Example):

(3 + 4i) / (2 - 3i) को सरल कीजिए।

  1. अंश (Numerator): (3 + 4i)(1 - i) = 3 - 3i + 4i - 4i² = 7 + i
  2. हर (Denominator): 2 - 3i के संयुग्म (2 + 3i) से गुणा करें और |2 - 3i|² = 4 + 9 = 13 से भाग दें।
    • (7 + i)(2 + 3i) / 13 = (14 + 21i + 2i + 3i²) / 13 = (11 + 23i) / 13
    • अतः उत्तर = 11/13 + (23/13)i
  • विशेष स्थिति (यूनिट मॉडुलर संख्या): यदि किसी संख्या का मापांक 1 है (|z| = 1), तो उसका संयुग्म उसका व्युत्क्रम होता है (z̅ = 1/z)।

भागफल (Division)

दो सम्मिश्र संख्याओं को विभाजित करने के लिए, हर को परिमेय बनाने की प्रक्रिया अपनाई जाती है।

(z₁ = a + ib) / (z₂ = c + id)

= (a + ib) / (c + id) * (c - id) / (c - id) = [(ac + bd) + i(bc - ad)] / (c² + d²)

सम्मिश्र संख्याओं का ज्यामितीय निरूपण (Geometric Interpretation)

सम्मिश्र संख्याओं को तीन तरीकों से देखा जा सकता है:

  1. बीजगणितीय संख्या (Algebraic Number): सामान्य संख्याओं की तरह जोड़ना, घटाना, गुणा, भाग करना। इसे मैट्रिसेस: परिभाषा, प्रकार और महत्वपूर्ण अवधारणाएँ से जोड़कर भी समझा जा सकता है।
  2. बिंदु (Point): एक द्वि-आयामी समतल (आर्गंड तल) में स्थित बिंदु।
  3. सदिश (Vector): एक द्वि-आयामी सदिश जिसमें परिमाण और दिशा दोनों होते हैं।

सदिश के रूप में सम्मिश्र संख्या

दो बिंदुओं (z₁ और z₂) के बीच का सदिश z₂ - z₁ होता है।

  • |z₂ - z₁| का अर्थ है दो बिंदुओं (z₁ और z₂) के बीच की दूरी।
  • arg(z₂ - z₁) का अर्थ है कि यह सदिश धनात्मक वास्तविक अक्ष (Positive Real Axis) के साथ कितना कोण बनाता है।

सम्मिश्र संख्याओं का लोकस (Locus of Complex Numbers)

1. वृत्त (Circle)

  • समीकरण: |z - z₀| = r
  • व्याख्या: z का वह बिंदुपथ जिसकी केंद्र z₀ से दूरी सदैव r (त्रिज्या) के बराबर रहती है।
  • लोकस: केंद्र (z₀) और त्रिज्या (r) वाला एक वृत्त। वर्गमूल और मापांक की अवधारणा को गहराई से समझने के लिए वर्गमूल निकालना सीखें: आसान तरीका | Square Root Tricks in Hindi पढ़ें।

2. लंब समद्विभाजक (Perpendicular Bisector)

  • समीकरण: |z - z₁| = |z - z₂|
  • व्याख्या: z उन दो बिंदुओं (z₁ और z₂) से समान दूरी पर स्थित है।
  • लोकस: रेखाखंड (z₁ और z₂ को मिलाने वाली) का लंब समद्विभाजक।

3. किरण (Ray)

  • समीकरण: arg(z - z₁) = θ (जहाँ θ एक स्थिर कोण है)
  • व्याख्या: सदिश (z - z₁) धनात्मक वास्तविक अक्ष के साथ सदैव θ कोण बनाता है।
  • लोकस: बिंदु z₁ से निकलने वाली एक किरण। (बिंदु z₁ स्वयं इसके अंतर्गत नहीं आता क्योंकि arg(0) अपरिभाषित होता है)। रीजनिंग और ज्यामिति से जुड़े अन्य विषयों के लिए रीजनिंग: ब्लड रिलेशन, डायरेक्शन और मैथमेटिकल ऑपरेशन पूरी गाइड देखें।

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