अर्थव्यवस्था के क्षेत्र (Sectors of Economy)
यह सेशन विभिन्न मानदंडों के आधार पर अर्थव्यवस्था के क्षेत्रों के वर्गीकरण की व्याख्या करता है।
आर्थिक गतिविधियों के आधार पर (Based on Economic Activities)
यह सबसे सामान्य वर्गीकरण है, जिसे आमतौर पर समाचारों में पढ़ा जाता है।
- प्राइमरी सेक्टर (Primary Sector): इसमें प्राकृतिक संसाधनों का दोहन करके उत्पादन किया जाता है। उदाहरण: कृषि, खनन, मछली पकड़ना, वानिकी।
- सेकेंडरी सेक्टर (Secondary Sector): यह प्राइमरी सेक्टर द्वारा प्रदान किए गए कच्चे माल को मशीनों की सहायता से तैयार माल में बदलता है। उदाहरण: खाद्य प्रसंस्करण (गेहूं से आटा), वस्त्र निर्माण (कपास से कपड़ा), डेयरी उत्पाद (दूध से पनीर)।
- टर्शरी सेक्टर (Tertiary Sector): इसमें सेवाओं का प्रावधान शामिल है। यह अन्य दो क्षेत्रों का समर्थन करता है। उदाहरण: परिवहन, बैंकिंग, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, आईटी सेवाएं।
महत्वपूर्ण: टेलर द्वारा कपड़े सिलना एक सेवा (टर्शरी सेक्टर) है, न कि विनिर्माण, क्योंकि इसमें कपड़े का रूप नहीं बदलता, बल्कि एक सेवा प्रदान की जाती है।
- क्वार्टनरी सेक्टर (Quaternary Sector): यह टर्शरी सेक्टर का एक उप-भाग है जो ज्ञान-आधारित गतिविधियों पर केंद्रित है। उदाहरण: अनुसंधान एवं विकास (R&D), सूचना प्रौद्योगिकी (IT), परामर्श।
- क्विनरी सेक्टर (Quinary Sector): यह भी टर्शरी सेक्टर का एक उप-भाग है जिसमें उच्च-स्तरीय निर्णय लेने वाले शामिल हैं। उदाहरण: सरकार के शीर्ष अधिकारी, नीति निर्माता, सीईओ।
कर्मचारियों के रंग वर्गीकरण (Color Collar Workers)
- रेड कॉलर वर्कर्स: प्राइमरी सेक्टर में काम करने वाले (जैसे किसान, मजदूर)।
- ब्लू कॉलर वर्कर्स: सेकेंडरी सेक्टर में काम करने वाले (जैसे फैक्ट्री कर्मचारी)।
- व्हाइट कॉलर वर्कर्स: टर्शरी सेक्टर में काम करने वाले (जैसे बैंक कर्मचारी, शिक्षक)।
- गोल्ड कॉलर वर्कर्स: क्विनरी सेक्टर में काम करने वाले (जैसे शीर्ष प्रबंधक, नीति निर्माता)।
भारतीय अर्थव्यवस्था में योगदान और रोजगार
- जीडीपी योगदान:
- कृषि: लगभग 17%
- उद्योग: लगभग 27% (जिसमें विनिर्माण मात्र 14%)
- सेवाएं: लगभग 54% (सबसे बड़ा योगदान)
- रोजगार: लगभग 45% कार्यबल अभी भी कृषि (प्राइमरी सेक्टर) पर निर्भर है।
- चिंता: यह जॉबलेस ग्रोथ (Jobless Growth) का संकेत है जहां जीडीपी तो बढ़ती है, लेकिन रोजगार के अवसर नहीं बढ़ते।
स्वामित्व के आधार पर (Based on Ownership)
- पब्लिक सेक्टर: सरकार के स्वामित्व और नियंत्रण वाले उद्यम। इनका उद्देश्य लाभ नहीं, बल्कि कल्याण होता है।
- प्राइवेट सेक्टर: निजी व्यक्तियों के स्वामित्व वाले व्यवसाय। इनका उद्देश्य लाभ कमाना होता है, जिससे दक्षता और नवाचार को बढ़ावा मिलता है।
- मिक्स्ड इकोनॉमी: भारत जैसी मिश्रित अर्थव्यवस्था में दोनों क्षेत्रों की भागीदारी होती है।
कार्य स्थितियों के आधार पर (Based on Working Conditions)
- संगठित क्षेत्र (Organized Sector): कानूनी रूप से पंजीकृत व्यवसाय, जहां नौकरी की सुरक्षा, निश्चित वेतन, छुट्टियां, पेंशन आदि मिलती हैं। उदाहरण: सरकारी कार्यालय, TCS, Infosys जैसी बड़ी कंपनियां।
- असंगठित क्षेत्र (Unorganized Sector): छोटे व्यवसाय या अनियमित श्रम, जहां नौकरी की कोई सुरक्षा नहीं होती। वेतन काम पर निर्भर करता है। भारत की लगभग 85-90% आर्थिक गतिविधियां इसी क्षेत्र में होती हैं।
- गिग इकॉनमी / प्लेटफॉर्म इकॉनमी (Gig Economy): अस्थायी और लचीले काम पर आधारित एक नया उभरता हुआ क्षेत्र। उदाहरण: Zomato, Swiggy, Uber डिलीवरी पार्टनर। इन्हें सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने की आवश्यकता है।
बाजार के प्रकार (Types of Markets)
बाजार एक ऐसी प्रणाली है जहां खरीदार और विक्रेता किसी वस्तु या सेवा के आदान-प्रदान के लिए एक साथ आते हैं।
बाजार के आवश्यक तत्व
- खरीदार और विक्रेता दोनों का होना आवश्यक है।
- किसी वस्तु या सेवा की खरीद-बिक्री होनी चाहिए।
- कीमत पर दोनों पक्षों की सहमति होनी चाहिए।
विभिन्न मानदंडों के आधार पर बाजारों का वर्गीकरण
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क्षेत्र के आधार पर (Based on Area):
- स्थानीय बाजार: सब्जी मंडी, हस्तशिल्प बाजार।
- क्षेत्रीय बाजार: तमिलनाडु का वस्त्र बाजार, कानपुर का चमड़ा बाजार।
- राष्ट्रीय बाजार: FMCG उत्पाद (Tata Salt, Amul)।
- अंतर्राष्ट्रीय बाजार: भारतीय सॉफ्टवेयर, फार्मास्यूटिकल्स, ऑटोमोबाइल का निर्यात।
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समय अवधि के आधार पर (Based on Time Period):
- अति-अल्पकालीन बाजार: जल्दी खराब होने वाली वस्तुएं (फल, सब्जियां) जो 1-2 दिन में बेचनी पड़ती हैं।
- अल्पकालीन बाजार: बेकरी आइटम, डेयरी उत्पाद (20-25 दिन की शेल्फ लाइफ)।
- दीर्घकालीन बाजार: टिकाऊ वस्तुएं (गाड़ी, फर्नीचर) जो लंबे समय तक चलती हैं।
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वस्तु की मात्रा के आधार पर (Based on Quantity):
- थोक बाजार: बड़ी मात्रा में खरीद-बिक्री। उदाहरण: मंडी, सूती कपड़े का थोक बाजार।
- फुटकर बाजार: छोटी मात्रा में, आम उपभोक्ताओं के लिए। उदाहरण: स्थानीय दुकान, ऑनलाइन क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म।
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प्रतिस्पर्धा के आधार पर (Based on Competition) - सबसे महत्वपूर्ण:
परफेक्ट कॉम्पिटीशन (Perfect Competition)
यह एक आदर्श स्थिति है, जो वास्तविकता में पूरी तरह मौजूद नहीं है।
- बड़ी संख्या में खरीदार और विक्रेता।
- समरूप (Homogenous) उत्पाद - सभी उत्पाद एक जैसे होते हैं।
- पूर्ण जानकारी (Perfect Information) - सभी को कीमत, मांग-पूर्ति की पूरी जानकारी होती है।
- कीमत स्वीकारकर्ता (Price Taker) - कोई भी विक्रेता कीमत को प्रभावित नहीं कर सकता।
- मुक्त प्रवेश और निकास (Free Entry and Exit) - कोई भी आसानी से बाजार में आ-जा सकता है।
इंपरफेक्ट कॉम्पिटीशन (Imperfect Competition)
यह वास्तविक दुनिया में देखा जाने वाला बाजार है। इसके विभिन्न प्रकार हैं:
- मोनोपोली (Monopoly):
- एक ही विक्रेता होता है और उसके उत्पाद का कोई करीबी विकल्प नहीं होता।
- उदाहरण: भारतीय रेलवे (IRCTC), कुछ राज्यों में सरकारी बिजली बोर्ड।
- विशेषताएं: प्रवेश में उच्च बाधाएं, विक्रेता कीमत निर्माता होता है, उच्च लाभ, सीमित उपभोक्ता विकल्प।
- मोनोपोलिस्टिक कॉम्पिटीशन (Monopolistic Competition):
- बड़ी संख्या में विक्रेता होते हैं, लेकिन उत्पाद विभेदित (Differentiated) होते हैं।
- उदाहरण: स्मार्टफोन बाजार (Apple, Samsung, Google), फास्ट फूड, फैशन और क्लोदिंग।
- विशेषताएं: प्रवेश अपेक्षाकृत आसान, कीमत पर कुछ नियंत्रण, उच्च विज्ञापन लागत, उपभोक्ताओं के पास अधिक विकल्प।
- ओलिगोपॉली (Oligopoly):
- कुछ बड़े विक्रेता होते हैं जो एक-दूसरे पर निर्भर होते हैं।
- उदाहरण: भारत का दूरसंचार उद्योग (Jio, Airtel, Vi), ऑटोमोबाइल उद्योग।
- विशेषताएं: प्रवेश में उच्च बाधाएं (पूंजी गहन), गैर-मूल्य प्रतिस्पर्धा (गुणवत्ता और सेवा पर ध्यान), मूल्य स्थिरता।
- जोखिम: कार्टेलाइजेशन (Cartelization) का खतरा, जहां कंपनियां मिलकर कीमतें बढ़ा सकती हैं।
- मोनोप्सनी (Monopsony):
- एक ही खरीदार होता है और अनेक विक्रेता होते हैं।
- उदाहरण: रक्षा उपकरण खरीदने वाली भारत सरकार।
- विशेषताएं: खरीदार कीमत निर्धारित करता है, विक्रेता खरीदार पर निर्भर होते हैं, प्रवेश में बाधाएं।
अधिक विस्तृत तैयारी के लिए, आप UPSC इकॉनमी स्टडी गाइड: माइक्रो, मैक्रो से थ्योरी ऑफ़ फर्म तक देख सकते हैं।
अभ्यास प्रश्न: दिए गए बाजार संरचनाओं (परफेक्ट कंपटीशन, मोनोपोली, मोनोपोलिस्टिक, ओलिगोपॉली) को उनकी विशेषताओं के साथ सुमेलित करें और अपना उत्तर कमेंट बॉक्स में साझा करें।
स्टडी आईक्यू आईएएस आपका सिलेक्शन हमारा मिशन। हेलो एवरीवन वेलकम टू स्टडी आईक्यू और आज हमारा सेकंड सेशन है इकॉनमी फॉर
यूपीएससी का। तो पिछले सेशन में हमने डिस्कस की थी बहुत ही फंडामेंटल चीजें कि इकोनमी और इकोनॉमिक्स में क्या डिफरेंस
है? डिफरेंट टाइप्स ऑफ इकोनॉमिक सिस्टम किस तरीके के देखने को मिलते हैं? सोशलिस्टिक, कैपिटलिस्टिक, मिक्स्ड इकॉनमी
सिस्टम एंड माइक्रो और मैकोनॉमिक्स में क्या डिफरेंस है? तो ऐसे इंपॉर्टेंट चीजें हम ऑलरेडी डिस्कस कर चुके हैं। अगर आपने
अभी तक नहीं देखा है तो एक सिंपल सा एडवाइस है भैया जाके जरूर देखिए उस सेशन को। राइट? एंड उसी की कंटिन्यूटी में आज
के लिए जो हमारे यहां पर टॉपिक्स हैं वो हम डिस्कस करेंगे कि पहली बात डिफरेंट सेक्टर्स जो हर एक इकॉनमी में देखने को
मिलते हैं। हम उनको थोड़ा यहां पर समझेंगे। राइट? एंड बेस्ड ऑन डिफरेंट पैरामीटर्स कि इकोनमिक एक्टिविटीज़ के
तरीके से कौन से हैं, ओनरशिप के तरीके से कौन से हैं। राइट? एंड सिमिलरली द टाइप ऑफ मार्केट्स जो कि आपको डिफरेंट इकॉनमीज़ में
देखने को मिलती हैं। राइट? अगेन इसमें भी फर्दर बहुत सारी क्लासिफिकेशन है। एंड सबसे क्रूशियल है आपके लिए लास्ट वाली द
बेसिस ऑफ कंपटीशन। राइट? तो बिल्कुल एंड तक इस सेशन को देखना है। बिकॉज़ इससे सवाल आपसे पूछा भी जा सकता है। चलिए तो आइए
शुरू करते हैं आज के सेशन की। ऑलराइट? तो सेक्टर्स ऑफ अ पर्टिकुलर इकॉनमी। देखिए जो आपके सेक्टर्स रहते हैं उनकी क्लासिफिकेशन
की जाती है। पहली क्लासिफिकेशन है बेस्ड ऑन द इकोनमिक एक्टिविटीज और इस चीज के बारे में आपने कहीं ना कहीं जरूर पढ़ा भी
होगा। आपने कहीं ना कहीं न्यूज़पेपर में भी देखा होगा। तो वो जो न्यूज़पेपर में हम पढ़ते हैं कि भैया प्राइमरी सेक्टर की बात
की जा रही है। सेकेंडरी सेक्टर की बात की जा रही है। वो एग्जैक्टली है क्या चीज? उसको थोड़ा जानते हैं। अब हम ये ऑलरेडी
एस्टैब्लिश कर चुके हैं प्रीवियस सेशन में कि इकॉनमी एक सिस्टम है जहां पर आपके डिफरेंट गुड्स एंड सर्विसेस प्रोड्यूस किए
जा रहे हैं। उनका डिस्ट्रीब्यूशन किया जा रहा है एंड फाइनली कंज्यूम भी किए जा रहे हैं। राइट? तो उन्हीं इकॉनमी में उस
प्रकार की इकोनॉमिक एक्टिविटीज हैं जिनकी डिफरेंट क्लासिफिकेशंस यहां पर की गई हैं। अब क्लासिफिकेशन किस तरीके से है? पहली
क्लास हमें यहां पर देखने को मिलती है प्राइमरी सेक्टर की। राइट? अब प्राइमरी सेक्टर में बेसिकली क्या कि जहां नेचुरल
रिसोर्सेज को यूज़ करके उन्हें एक्सप्लइट करके आप कोई चीज प्रोड्यूस कर रहे हैं। इकॉनमी में प्रोडक्शन ही है ना डिफरेंट
गुड्स एंड सर्विसेस की। सो व्हेन वी टॉक अबाउट द प्राइमरी सेक्टर दैट मींस वी आर प्रोड्यूसिंग सर्टेन थिंग्स बाय द यूजिंग
ऑफ़ नेचुरल रिसोर्सेज। कि वहां पर आप नेचुरल रिसोर्स को एक्सट्रैक्ट भी कर सकते हैं कि मान लीजिए आपने लैंड को यूज़ किया।
राइट? और उसके माध्यम से आपने राइस कल्टीिवेशन की। तो वो जो आपकी इकोनॉमिक एक्टिविटी है वो प्राइमरी सेक्टर में
इंक्लूड की जाएगी। वहीं पर आप किसी जमीन में खुदाई करके डिफरेंट मिनरल्स वहां से एक्सट्रैक्ट कर रहे हैं। माइनिंग की
एक्टिविटीज वहां पर कर रहे हैं। तो वहां अगेन वो जो एक्टिविटी है वो आपकी प्राइमरी सेक्टर में इंक्लूड की जाएगी। तो प्राइमरी
सेक्टर में हमेशा ध्यान रखना कि जहां नेचुरल रिसोर्सेज का यूज़ किया जा रहा है। राइट? अब अगली कैटेगरी हमारे पास यहां पर
आती है सेकेंडरी सेक्टर की। अब सेकेंडरी सेक्टर यहां पर क्या करता है कि यहां वो कुछ मशीनंस को यूज़ करके राइट? प्राइमरी
सेक्टर द्वारा जो उन्हें रॉ मटेरियल जो आउटपुट यहां पर प्रोवाइड की गई है प्राइमरी सेक्टर द्वारा उसे यूटिलाइज करता
है ताकि डिफरेंट फॉर्म में उसे कन्वर्ट कर सके। बहुत सिंपल सा एग्जांपल यहां पर लेते हैं भैया वीट की कल्टीिवेशन होती है।
राइट? दाने वहां पर देखने को मिलते हैं। अब आप उन्हीं दानों को पिसवा के अपने लिए आटा बनवा रहे हो। तो बेसिकली अब वो
ग्रन्यूल की फॉर्म से पाउडर्ड फॉर्म में कन्वर्ट की जा रही है। राइट? तो, वह जो एक्टिविटी है, वह किस में इंक्लूड की
जाएगी, भैया? वो सेकेंडरी सेक्टर में इंक्लूड की जाएगी कि जहां पर फ़ूड प्रोसेसिंग यहां पर की जा रही है। राइट?
सिमिलरली भैया आपके पास अगेन प्राइमरी सेक्टर के थ्रू आपने डेरी फार्म वहां पर खोला है। राइट? आपके पास उस प्रकार का
लाइव स्टॉक है। आप उससे दूध यहां पर निकाल रहे हैं। अगेन एक्टिविटी ऑफ़ प्राइमरी सेक्टर। बट आप उसी दूध को अब यहां पर पनीर
में कन्वर्ट कर रहे हैं। दही में कन्वर्ट कर रहे हैं। तो भैया वो जो आपकी कैटेगरी है, वो जो इकोनॉमिक एक्टिविटी है, वो
सेकेंडरी सेक्टर में इंक्लूड की जाएगी। अपार्ट फ्रॉम दैट आपने प्राइमरी सेक्टर से मान लीजिए उस प्रकार का कॉटन प्रिक्योर
किया। है ना? कॉटन की खेती की। अब उसी कॉटन को यूज़ करके आप टेक्सटाइल बना रहे हैं। तो भैया ये सेकेंडरी सेक्टर में
इंक्लूड किया जाएगा। तो ये इंपॉर्टेंट है इन दोनों के बीच में डिफरेंस पता होना। एंड दोनों कहीं ना कहीं एक दूसरे पर
डिपेंडेंट भी हैं। अगर देखा जाए प्राइमरी सेक्टर अगर की प्रोडक्शन अगर यहां पर की जा रही है तो मार्केट में डिमांड कौन
क्रिएट कर रहा है उसके लिए? सेकेंडरी सेक्टर क्रिएट कर रहा है। एंड सेकेंडरी सेक्टर को अगर अपने नए प्रोडक्ट्स यहां पर
क्रिएट करने हैं तो उस केस में प्राइमरी सेक्टर से उनको यहां पर रॉ मटेरियल तो चाहिए ही होगा। राइट? तो ये आपके लिए पहली
दो कैटेगरीज यहां पर रही। राइट? थर्ड कैटेगरी हमें यहां पर देखने को मिलती है टर्शरी सेक्टर की। तो देखिए इन दो
कैटेगरीज में जितने भी आपके गुड्स प्रोड्यूस किए जा रहे हैं उन्हें हम यहां पर क्लासिफाई कर देते हैं। थर्ड कैटेगरी
है हमारे पास यहां पर टर्शरी सेक्टर की जहां पर सर्विसेज की बात की जाती है कि जहां सर्विसेज की बात की जाती है कि जिस
प्रकार से मान लीजिए कि अब ये पर्टिकुलर सेशन यहां पर चल रहा है तो मेरे द्वारा एक सर्विस आपको प्रोवाइड की जा रही है। राइट?
अब आप इसे YouTube पे देख रहे हैं तो भैया ये सर्विस फ्री ऑफ कॉस्ट है आपके लिए। राइट? तो वो एक तरीके से टर्शरी सेक्टर
में यहां पर इंक्लूड की जाएगी। राइट? अब यहां पर एक बहुत ही अच्छा एग्जांपल आता है जो कि बहुत सारे लोगों को कंफ्यूज भी कर
देता है कि यार टेलर क्या करता है? टेलर के द्वारा जो इकोनॉमिक एक्टिविटी की जा रही है, क्या वो मैन्युफैक्चरिंग कर रहा
है या फिर वो सर्विज प्रोवाइड कर रहा है? क्योंकि देखा जाए तो टेलर क्या कर रहा है कि डिफरेंट आपके क्लॉथ को वहां पर ले रहा
है, थ्रेड को वहां पर ले रहा है। उसको यूज़ करके आपको एक पूरा स्टिच कपड़ा वहां पर बना के दे रहा है। राइट? तो देखा जाए तो उसकी
जो एक्टिविटी है वो सिर्फ एक सर्विस प्रोवाइड करने की है। उसने यहां पर कपड़े की फॉर्म चेंज नहीं की। कपड़े की फॉर्म
वैसी की वैसी रही। उसको बस एक शेप वहां पर दे दिया। राइट? तो एक सर्विज वहां पर प्रोवाइड की जा रही हैं। राइट? अब वैसे ही
अगेन टर्शरी सेक्टर का जो रोल है वो इन दोनों सेक्टर्स में देखने को मिलता है। किस तरीके से? कि मान लीजिए एग्रीकल्चरल
सेक्टर में जो कि आपका प्राइमरी सेक्टर की एक्टिविटी है वहां पर अपनी कल्टीिवेशन बढ़ाने के लिए फार्मर्स ने किसी को हायर
किया। हायर किया कि भैया मुझे बताइए कि मेरी सोइल में क्या हेल्थ है उसकी? किस प्रकार के न्यूट्रिएंट्स की यहां पर उसे
आवश्यकता है। राइट? कौन से फर्टिलाइज़र्स मैं यहां पर यूज़ करूं? तो भैया टर्शरी सेक्टर का जो आपका सर्विस प्रोवाइडर है वो
सोइल की हेल्थ को टेस्ट करेगा और उसके बेसिस पर, अपनी नॉलेज के बेसिस पर फार्मर को एक इनपुट प्रोवाइड करेगा ताकि फार्मर
अपनी प्रोडक्शन यहां पर बढ़ा सके। सिमिलरली टर्शरी सेक्टर कैसे काम करता है भैया? सेकेंडरी के लिए। अब इसको भी थोड़ा समझिए
कि मान लीजिए कि भैया उस प्रकार से कोई प्रोडक्शन सेटअप है जहां पर टेक्सटाइल मैन्युफैक्चरिंग की जाती है। राइट? अब
वहां देखने को क्या मिल रहा है कि भैया बहुत सारी वेस्टेज हो रही है। तो उनके द्वारा एक नया क्वालिटी मैनेजर वहां पर
हायर किया गया ताकि भैया वेस्टेज यहां पर कम से कम की जा सके एंड प्रोडक्ट की क्वालिटी और बढ़ाई जा सके। तो वो जो
पर्टिकुलर मैनेजर है वो अपने स्किल सेट के बेसिस पर वो टेक्निक्स वहां पर इंप्लीमेंट करेगा उस इंडस्ट्री में ताकि उस प्रकार से
एश्योर किया जा सके कि क्वालिटी भी मेंटेंड रहे एंड किसी भी प्रकार का यहां पर वेस्टेज भी ना हो। राइट? अपार्ट फ्रॉम
दैट ऑल और टर्शरी सेक्टर से रिलेटेड एग्जांपल लेते हैं कि भैया ट्रांसपोर्टेशन सर्विसेस। अब सेकेंडरी सेक्टर का जो
प्रोड्यूस है उसको मार्केट तक लेके जाना है तो आपको लॉजिस्टिक तो चाहिए होगा ना। आपको एक ट्रक वहां पर हायर करना पड़ेगा।
तो जो ट्रक वाले भैया हैं वो आपका प्रोड्यूस एक जगह से दूसरी जगह लेके जा रहे हैं। मार्केट तक लेके जा रहे हैं। तो
उनके द्वारा सर्विज वहां पर प्रोवाइड की जा रही हैं। तो वेरी इंपॉर्टेंट थिंग जो कि आपको यहां पे ध्यान रखना है। अब इंडिया
के केस में अगर इस चीज को देखा जाए अगर इंडिया के केस में इन तीनों सेक्टर्स को यहां पर देखा जाए तो हमारे देश में अभी भी
सबसे बड़ा जो पॉपुलेशन बेस है वो प्राइमरी सेक्टर के ऊपर यहां पर डिपेंडेंट है। एग्रीकल्चर के ऊपर यहां डिपेंडेंट है।
राइट? सेकेंडरी सेक्टर में पोटेंशियल है कि वो नई जॉब्स क्रिएट कर सकता है। बट हम उतनी नहीं क्रिएट कर पा रहे। कारण कि भैया
उतनी अच्छी मशीनंस हमारे पास अवेलेबल नहीं है। जो हमारे प्रोडक्ट्स हैं उतने कॉम्पिटिटिव नहीं है कि भैया बाकी देशों
के जो प्रोडक्ट्स हैं बहुत सस्ते में वहां पर अवेलेबल हैं। हमारे देश के केस में थोड़ी सी दिक्कत यहां पर पाई जा रही है।
राइट? एंड टर्शरी बीइंग द लीडिंग सेक्टर की इन टर्म्स ऑफ कि भैया इनके द्वारा सबसे ज्यादा कंट्रीब्यूशन की जा रही है इंडियन
इकॉनमी में। राइट? एंड फर्दर एक्सपोर्ट्स में भी कि जहां आईटी सर्विज का एक्सपोर्ट किया जाता है, सॉफ्टवेयर सर्विज का
एक्सपोर्ट किया जाता है। राइट? तो कहीं ना कहीं ये तीनों ही सेक्टर्स हमारे लिए बहुत क्रूशियल है। एंड तीनों सेक्टर्स का अपना
ही एक सिग्निफिकेंस है कि जहां फूड ग्रेंस जो कि सभी के लिए एक बेसिक नेसेसिटी है वो भी अब प्राइमरी सेक्टर यहां पर प्रोवाइड
करेगा। एंप्लॉयमेंट के केस में सेकेंडरी यहां पर आगे है। मतलब होना चाहिए कि आपका लेबर को अब्सॉर्ब करने के लिए सेकेंडरी
सेक्टर की ग्रोथ बहुत आवश्यक है। एंड सिमिलरली टर्शरी सेक्टर जो कि आपकी नई टेक्नोलॉजीस नए स्किल सेट के ऊपर यहां पर
काम करता है। राइट? अब आप कह रहे होंगे कि भैया तीन सेक्टर बताए बात खत्म हो गई। ये बाकी दो यहां पर क्यों लिखे हैं? अब इसको
थोड़ा जानते हैं कि देखिए ये टर्शरी का ही एक अलग से सब पार्ट है। टर्शरी की कैटेगरी में एक अलग से सब पार्ट है। तो उसको यहां
पर 3a एंड 3B हम यहां पर लिख देंगे। ऑलराइट। फिर आता है हमारा क्वार्टनरी सेक्टर कि इसी टर्शरी सेक्टर में देयर आर
सर्टेन पीपल, देयर आर सर्टेन इकोनॉमिक एक्टिविटीज जो कि कंसंट्रेटेड हैं या जो कि अराउंड है ऑन द नॉलेज बेस्ड एक्टिविटीज़
है ना कि आरएडी वहां पर किया जा रहा है। आईटी सर्विज वहां पर दी जा रही हैं जो कि आपकी थोड़ी नॉलेज बेस्ड हैं। है ना? जहां
पर आपको स्किल सेट वहां पर चाहिए। तो आपकी क्वार्टनरी सेक्टर में उन्हें यहां पर इंक्लूड किया जाता है। राइट? उसी तरीके से
हमारे पास क्यूनरी सेक्टर यहां पर आता है। राइट? अब क्यूरी सेक्टर यहां पर क्या है कि भैया इसमें उन लोगों की इकोनॉमिक
एक्टिविटीज को हम इनवॉल्व करेंगे जो कि एक मेजर पॉलिसी डिसीजन का यहां पर काम कर रहे हैं। डिसीजन मेकिंग का यहां पर काम कर रहे
हैं। राइट? जिसका इंपैक्ट बहुत सारे लोगों के ऊपर यहां पर पड़ता है। जैसे सरकार के केस में बात कर ली जाए कि भैया जो आपके
सबसे ऊपर मंत्री बैठे हैं उनके द्वारा डिसीजन लिया जा रहा है कि भैया फलानी स्कीम के लिए इतना पैसा यहां पर एलोकेट
किया जाएगा। सो दे हैव दैट काइंड ऑफ़ अ डिसीजन मेकिंग पावर। इसकी वजह से वो डिसीजन वहां पर ले पा रहे हैं। तो उन्हें
हम क्वीनरी सेक्टर में यहां पर इनवॉल्व करेंगे। राइट? तो ये बेसिक सी क्लासिफिकेशन यहां पर रहती है। प्राइमरी
फर्स्ट, सेकंड, थर्ड। और ये जो दो कैटेगरीज हैं वो आपकी थर्ड की ही कैटेगरीज हैं। ऑलराइट? तो ये तो रही बेसिस ऑन
इकोनॉमिक एक्टिविटीज। अब इसी केस में यहां पर डिफरेंट सेक्टर्स को कॉलर्स भी यहां पर असाइन किए गए हैं कि
अगर हम प्राइमरी सेक्टर की एक्टिविटीज की बात करें तो उनको यहां पर कहा जाता है कि रेड कॉलर वर्कर्स
हैं। इन्हें यहां पर रेड कॉलर वर्कर्स कहा जाता है कि जो प्राइमरी सेक्टर में इकोनॉमिक एक्टिविटीज जिन लोगों के द्वारा
प्रोवाइड की जाती है। सेकेंडरी सेक्टर के केस में भैया यहां पर ब्लू कॉलर वर्कर्स कहा जाता है। एंड टर्शरी के केस में यहां
पर वाइट कॉलर वर्कर्स। अब ये एक मैं आपके लिए होमवर्क यहां पर छोड़ रहा हूं। आपको चैट बॉक्स में मेंशन करना है, कमेंट बॉक्स
में मेंशन करना है कि एग्जैक्टली यह नाम क्यों लिखे गए होंगे। राइट? क्यों यह नाम यहां पर दिए गए होंगे? और हालांकि
क्वार्टनरी के लिए कोई भी नहीं है। बट एक बहुत ही इनफॉर्मल सा नाम क्यूरी के लिए यहां पर दिया गया है कि भ ये गोल्ड कॉलर
वर्कर्स हैं। राइट? ये गोल्ड कॉलर वाले वर्कर्स हैं। गोल्ड कॉलर वाले वर्क फोर्स है जो कि उस प्रकार से यहां पर डिसीजन
मेकिंग में काम कर रहे हैं। ऑलराइट? तो आपके लिए सिंबल संभव कि आपको थोड़ा सोचना है इसके बारे में और बताना है कि भैया ये
जो पर्टिकुलर कलर्स असाइन किए गए होंगे ये क्यों किए गए होंगे। ऑलराइट चलिए ये तो रही बात पहली ऑन द बेसिस ऑफ इकोनॉमिक
एक्टिविटीज। आगे बढ़ते हैं बात करते हैं कि इन्हीं इकोनॉमिक एक्टिविटीज का कितना कंट्रीब्यूशन है इंडियन जीडीपी में या
इंडियन इकॉनमी में। अभी हम जीडीपी की बात नहीं करेंगे। उस कांसेप्ट को हम लेटर ऑन डेफिनेटली डिस्कस करेंगे। अभी हम सिर्फ
यहां पर ये जानेंगे कि एग्जैक्टली इन सभी सेक्टर्स का कितना कंट्रीब्यूशन है हमारी टोटल इकॉनमी में। राइट? अब यहां पर हम
एग्रीकल्चर फॉरेस्ट एंड फिशिंग के केस में अगर हम यहां पर बात करें तो बहुत ही लिमिटेड सा कंट्रीब्यूशन है 17% तक का।
राइट? वहीं अगर हम देखें बाकी हमारा जो इंडस्ट्रियल सेक्टर है राइट? अब इस केस में भैया आपकी
कंट्रीब्यूशन यहां पर 27% तक की देखने को मिलती है। जिसमें मैन्युफैक्चरिंग हार्डली 14% यहां पर कंट्रीब्यूट करता है। राइट?
एंड सर्विज के केस में अगर हम बात करें तो सबसे बड़ी कंट्रीब्यूशन 54% की कंट्रीब्यूशन यहां पर देखने को मिलती है।
बट अगर वहीं हम देखें कि भैया हमारे देश का पॉपुलेशन बेस किस सेक्टर के ऊपर ज्यादा डिपेंडेंट है? तो अभी भी भैया वो
एग्रीकल्चर ही है कि 45% ऑफ इंडियन वर्क फ़ोर्स और पॉपुलेशन इज़ स्टिल डिपेंडेंट फॉर देयर लाइवलीहुड्स ऑन दिस पर्टिकुलर
सेक्टर। राइट? बट कंट्रीब्यूशन सबसे ज्यादा यहां पर सर्विज के द्वारा की जाती है। तो यही कंसर्न है इंडियन इकॉनमी के
साथ यही कंसर्न है कि हम ईयर ऑन ईयर बेसिस पर ग्रो तो करते जा रहे हैं। राइट? बट जॉब्स हमें उतनी क्रिएट होती हुई नहीं
देखने को मिल रही। जिसकी वजह से इस फिनोमिना को कहा जाता है कि इंडियन इकॉनमी में जॉबलेस ग्रोथ देखने को मिलती है कि
सर्विज सेक्टर यहां पर प्राइम ड्राइवर है हमारी इस इकोनॉमिक ग्रोथ का। तो उस केस में भैया जॉबलेस ग्रोथ को यहां पर
आइडेंटिफाई किया जाता है। राइट? एंड क्या ये ट्रेंड हमेशा से ऐसा ही रहा है? जी नहीं। इसको भी थोड़ा यहां पर समझते हैं कि
हमेशा से ऐसा नहीं रहा है। राइट? इनिशियली वी यूज्ड टू बी अ दैट काइंड ऑफ इकॉनमी जहां पर एग्रीकल्चर की सबसे ज्यादा
कंट्रीब्यूशन यहां पर थी। राइट? ओवरऑल इकॉनमी में इंडियन इकॉनमी में एग्रीकल्चर की कंट्रीब्यूशन यहां पर सबसे ज्यादा थी।
राइट? एंड सिमिलरली हम सर्विस केस में यहां पर देख लेते हैं। एंड जो हमारा इंडस्ट्री सेगमेंट है। राइट? तो ये चेंजेस
यहां पर आए हैं कि जिसके चलते एग्रीकल्चर की कंट्रीब्यूशन यहां पर डिक्लाइन कर गई है। एंड वहीं सर्विज सेक्टर की
कंट्रीब्यूशन जो है वो यहां पर इंक्रीस कर चुकी है। राइट? मोर देन 50% यहां पर हम देख पा रहे हैं। राइट? आपको इस y एक्सिस
पे यहां पर इसको कंपेयर करना है। राइट? एंड वहीं इंडस्ट्री जो है बहुत ही स्लो ग्रोथ यहां पर देखने को मिल रही है। जिसकी
वजह से टाइम एंड अगेन मेक इन इंडिया जैसे इनिशिएटिव्स को यहां पर पुश दिया जाता है ताकि इंडिया में उस प्रकार की इंडस्ट्रियल
ग्रोथ यहां पर लाई जा सके। मैन्युफैक्चरिंग कैपेबिलिटी यहां पर एनहांस की जा सके। पीएलआई जैसी स्कीम्स
यहां पर इंट्रोड्यूस की जाती हैं। राइट? आपने इनका नाम जरूर सुना होगा और हम इन स्कीम्स को आगे जाके डिस्कस भी करेंगे।
डोंट वरी। लंबा जर्नी है। हर एक चीज को यहां पर कवर करने की पूरी कोशिश की जाएगी। ऑलराइट। तो ये तो रही बात क्या ट्रेंड
यहां पर देखने को मिला। तो ट्रेंड में जो मेजर चेंज यहां पर आया है अगर आप देखें कि सर्विज सेक्टर ने कब यहां पर ओवरकम किया
है एग्रीकल्चर और इंडस्ट्री को तो आपका 1980 या 1970 के एंड और 1980 की स्टार्टिंग के समय पे ये चीज यहां पर हुई
है। राइट? कि उसके बाद से सर्विज सेक्टर यहां पर ग्रो करना शुरू कर गया। एंड जब इकोनॉमिक रिफॉर्म्स यहां पर आए हैं 1990
के उसके बाद से तो यहां पर ग्रोथ और ज्यादा बढ़ चुकी है। राइट? चलिए तो ये बेसिक सी बात थी जो कि यहां पर हमें
डिस्कस करनी थी। चलिए ये तो रही बात इकॉनमी की क्लासिफिकेशन बेस्ड ऑन इकोनॉमिक एक्टिविटीज। सेकंड यहां पर क्लासिफिकेशन
है बेस्ड ऑन ओनरशिप। कि यहां पर ओनरशिप किसकी है? तो याद कीजिए जो हमने टाइप्स ऑफ इकोनॉमिक सिस्टम वहां पर पढ़े थे उसमें
हमने ओनरशिप की बात की थी कि भैया कहीं ना कहीं वी हैव सोशलिस्टिक प्रिंसिपल में सारी ओनरशिप सरकार के पास रहती है।
कैपिटलिस्टिक में प्राइवेट लोगों के पास रहती है। एंड मिक्स्ड इकॉनमी में दोनों के पास रहती है। राइट? तो वैसी ओनरशिप की
यहां पर बात की जा रही है कि हमारे फिर पब्लिक सेक्टर और प्राइवेट सेक्टर यहां पर देखने को मिलता है। पब्लिक सेक्टर हम किसे
कहते हैं? कभी भी आपको ये टर्म देखने को मिले कि जहां गवर्नमेंट द्वारा ओनड और कंट्रोलोल्ड एंटरप्राइजेस काम कर रहे हैं।
माने कि जो इंडस्ट्रीज वहां पर गुड्स एंड सर्विज प्रोड्यूस कर रही हैं वो सरकार के द्वारा कंट्रोल की जा रही हैं। राइट? एंड
इनका फोकस क्या रहेगा? हमने डिस्कस कर चुके हैं कि सरकार ही अगर एंटरप्राइजज़ रहेगी, वो प्रोडक्शन करेगी, तो वो प्रॉफिट
के ऊपर फोकस नहीं करेगी। वो वेलफेयर के ऊपर यहां पर फोकस करेगी। ऑलराइट। सिमिलरली दूसरा सेक्टर हमारे पास यहां पर कौन सा
आता है? बेस्ड ऑन ओनरशिप वी हैव प्राइवेट सेक्टर कि जहां पर प्राइवेटली ओनड बिनेसेस का ऑब्जेक्टिव है प्रॉफिट मेकिंग के ऊपर।
राइट? एंड कहीं ना कहीं वो प्रॉफिट मेकिंग के चलते नई गुड्स सर्विस यहां पर क्रिएट करते हैं। बेहतर से बेहतर टेक्नोलॉजी का
यहां पर यूज़ करते हैं। जिसकी वजह से उनकी एफिशिएंसी भी अच्छी देखने को मिलती है। एंड इनोवेशन के ऊपर भी वो यहां पर काम कर
पाते हैं। ऑलराइट। तो हमारे इंडिया में जो कि एक मिक्स्ड इकोनॉमिक सिस्टम यहां पर देखने को मिलता है तो उसमें दोनों की ही
यहां पर पार्टिसिपेशन है। राइट? चलिए आगे बढ़ते हैं। अब थर्ड जो क्लासिफिकेशन है किसी भी
इकॉनमी की इट इज़ बेस्ड ऑन द वर्किंग कंडीशंस कि वहां पर जो एंप्लाइजज़ काम कर रहे हैं उनकी वर्किंग कंडीशंस किस तरीके
की हैं। हालांकि हम दो ही कैटेगरीज़ के बारे में मोस्टली बात करते हैं कि ऑर्गेनाइज़्ड सेक्टर है एंड अनऑर्गेनाइज़्ड
सेक्टर है। ऑर्गेनाइज़ सेक्टर का मतलब यहां पर क्या है कि भैया जो आपके लीगली रजिस्टर्ड बिज़नेसेस हैं जो कि आपको यदि
जॉब प्रोवाइड कर रहे हैं तो सिर्फ जॉब के साथ-साथ आपको जॉब सिक्योरिटी भी है। आपके पास वहां पर लीव के प्रोविज़ंस भी हैं कि
आप छुट्टी भी वहां पर ले सकते हैं। राइट? आपको कल को कुछ हो जाए तो आपकी सैलरी वहां पर नहीं काटी जाएगी। आपको आप ऑफिस नहीं आ
पाए किसी कारणवश तो आपके पास वो सिक्योरिटी है वहां पर। है ना? ऐसा नहीं कि भ आप जिस दिन काम पे जाएं उस दिन का
पैसा आपको मिल रहा है। जिस दिन ना जाएं उस दिन नहीं मिल रहा है। अगर ऐसा सिचुएशन है तो आप खुद को अनऑर्गेनाइज्ड सेक्टर में
इंक्लूड कर सकते हैं। जहां पर हम स्मॉल बिज़नेसेस या कैजुअल लेबर की बात करते हैं। राइट? कि जो डेली बेसिस के काम के लिए
वहां पर हायर किए जाते हैं जिनका रेमुनरेशन उनके काम के ऊपर डायरेक्टली डिपेंडेंट है। है ना? कोई फिक्स्ड
रेमुनरेशन उनके लिए नहीं है। जितना काम करेंगे उतना पैसा उन्हें यहां पर मिलेगा। अब इस केस में कहीं ना कहीं ना सरकार उनको
उस प्रकार की प्रोडक्शन प्रोवाइड कर पाती है। बिकॉज़ अगेन कि सरकार चाहती है कि भैया इन सभी लोगों को पेंशन मिले या इन सभी
लोगों को सोशल सिक्योरिटी मिले, इंश्योरेंस सर्विज मिले। कुछ भी नहीं मिल पाता। ये बहुत ही लिमिटेड है टुवर्ड्स द
ऑर्गेनाइज्ड सेक्टर जो जिसमें हमें मोस्टली हम कह सकते हैं भैया सरकारी जितने भी ऑफिसिसेस हैं आपके ऑर्गेनाइज्ड हैं।
प्राइवेट कंपनी जितनी भी हैं Tata ले लीजिए या आपके TCS ले लीजिए आप Infosys ले लीजिए ये सारे आपके ऑर्गेनाइज्ड सेक्टर
में इंक्लूड किए जाते हैं। बट जो थर्ड नया सेक्टर यहां पर इमर्ज हो रहा है इन दोनों में से इमर्ज हो रहा है वो है आपका गिग
इकॉनमी या प्लेटफार्म इकॉनमी। राइट? कि अब इसमें भी कहीं ना कहीं हमें अनऑर्गेनाइज्ड सेक्टर के ज्यादा ट्रेड्स देखने को मिलते
हैं कि आपको टेंपरेरी काम यहां पर मिल रहा है। अगेन यू आर नॉट बीइंग प्रोवाइडेड अ फिक्स्ड इनकम बट आपको टेंपरेरी काम यहां
पर मिल रहा है कि अच्छा जब जितना आप काम करोगे उतना आपको पैसा मिलेगा। सिंपल सा एग्जांपल यदि आप इस प्रकार के क्विक
कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स यूज़ करते हैं। Zeeptotो हो गया, SWGI हो गया, instamart हो गया। राइट? कि इन सभी में जो काम करने
वाले डिलीवरी पार्टनर्स हैं भैया वो इसी इकॉनमी का हिस्सा हैं। इसी सेक्टर का वहां पर वो हिस्सा हैं। राइट? एंड Uber की बात
करें तो अगेन वो भी इसी सेक्टर का हिस्सा है कि जितना वो काम करेंगे उतना उनको पैसा मिलेगा। जिस दिन अगर खुदा ना खास्ता उनको
किसी तरीके से उनकी बाइक खराब हो गई है। उनको कुछ लग गई है, एक्सीडेंट हो गया है तो भैया उनको पैसा वहां पर बंद हो जाएगा।
तो कहीं ना कहीं इंडिया में जिस प्रकार से गिग इकॉनमी ऑन द राइज़ है। राइट? तो इनको उस प्रकार का सोशल सिक्योरिटी कवर
प्रोवाइड करने के ऊपर बात की जा रही है कि ताकि ये सेक्टर यहां पर प्रोटेक्टेड रहे। ऑलराइट। चलिए तो ये तीन वैसे दो
इंपॉर्टेंट कैटेगरीज हैं ऑर्गेनाइज्ड एंड अनऑर्गेनाइज्ड। उसी में से थर्ड हमें देखने को मिलती है गिग और प्लेटफार्म
वर्कर्स। राइट? कि इनकी नई इकॉनमी यहां पर क्रिएट हो रही है। अपार्ट फ्रॉम दैट इंडिया से रिलेटेडेंट चीज़ कि क्लोज टू 85
टू 90% ऑफ इंडियास इकोनॉमिक एक्टिविटीज़ वो आपकी अनऑर्गेनाइज़्ड सेक्टर की देखने को मिलती
है। जहां पर आपका कैजुअल लेबर या फिर स्मॉल टाइम कॉन्ट्रकुअल वर्क के लिए वहां पर लोगों को हायर किया जाता है। राइट?
चलिए आगे बढ़ते हैं। अब मार्केट के बारे में थोड़ा बात करते हैं। बट बिफोर दैट एक छोटी सी इनफेशन आप
सभी के लिए जो सिविल सर्विज की यहां पर तैयारी कर रहे हैं कि हमारे द्वारा 11th अप्रैल को नया बैच शुरू किया जा रहा है।
अब ये बैच की खास बात क्या है कि ये आपका प्रीलिम्स से लेकर इंटरव्यू तक की जो पूरी प्रोसेस है। राइट? उस पूरी प्रोसेस को
यहां पर कवर करता है। कि 11th अप्रैल से आपकी यहां पर क्लासेस शुरू हो जाएंगी। अब ऑब्जेक्टिव पहले क्या रखा जाएगा कि आपका
जितने भी सब्जेक्ट्स हैं उन सभी का कंटेंट कवरेज यहां पर की जा सके। आपके बेसिक्स, आपका स्टैटिक पोर्शन आपको करंट अफेयर के
साथ अपडेट किया जा सके। राइट? एंड साथ के साथ आपकी प्रीलिम्स के लिए भी तैयारी यहां पर करवाई जा सके। एंड इसमें आपका मेंस
आंसर राइटिंग ये सभी चीजें इन्वॉल्वड हैं। एंड बेहतर प्रिपरेशन के लिए आपके कॉन्स्टेंटली यहां पर टेस्ट कंडक्ट किए
जाएंगे। एंड द पर्सन हु इज़ गोइंग टू परफॉर्म वेल इन दोज़ टेस्ट उनको वहां पर कैश रिवॉर्ड्स भी दिए जाएंगे। अपार्ट
फ्रॉम दैट अगर आप अपना प्रीलिम्स यहां पर क्लियर कर लेते हैं तो भैया आपका जितना भी अमाउंट आप पे करोगे वो कंप्लीटली आपको
रिफंड कर दिया जाएगा। तो डेफिनेटली जाके चेक आउट कीजिए इस कोर्स को। एआरजी लाइफ मेरा कूपन कोड है। आप यहां पर यूज़ कर सकते
हैं फॉर द मैक्सिमम डिस्काउंट्स। चलिए कमिंग बैक टू द पॉइंट कि जहां पर हम मार्केट्स के बारे में अब बात करते हैं कि
एग्जैक्टली मार्केट कहां किसे जाता है। है ना? अभी तक हमने टाइप्स ऑफ इकॉनमी या टाइप्स ऑफ़ सेक्टर्स वहां पर देख लिए बेस्ड
ऑन डिफरेंट पैराटर्स कि कौन-कौन से सेक्टर्स देखिए इकॉनमी में देखने को मिलते हैं। अब हम बात करते हैं मार्केट के केस
में कि अब मार्केट की किस तरीके की टाइप्स थी। बट मार्केट को समझने से पहले, मार्केट की टाइप्स समझने से पहले मार्केट
एग्जैक्टली है क्या चीज़? उसको जानना बहुत जरूरी है यार। बचपन में मतलब मेरे साथ तो होता था शायद आपके साथ भी होता होगा।
मां-बाप भेज देते थे कि भैया ये वाली चीज जाके दुकान से ले आओ। है ना? आप बोलते हैं कि मार्केट से जाके ले आओ। तो एग्जैक्टली
मार्केट में हो क्या रहा है? मार्केट में एक तरीके से आपके डिफरेंट गुड्स एंड सर्विज का एक्सचेंज हो रहा है कि वहां पर
कुछ लोग बेचने बैठे हैं और कुछ लोग खरीदने बैठे हैं। आप लोग घर से जा रहे हो खरीदने के लिए तो आप लोग यहां पर बायरर्स
कहलाओगे। और जो दुकानदार वहां पर बैठा वही है वो सेलर कहलाएगा। तो इकोनॉमिक्स में जो टर्म मार्केट है इट रेफर्स टू द सिस्टम
जहां पर एक्सचेंज होता हुआ देखने को मिल रहा है बिटवीन द बयरर्स एंड द सेलर्स ऑफ अ पर्टिकुलर कमोडिटी है ना कोई भी चीज वहां
पर खरीदी या बेची जा रही है। राइट? अब किसी भी मार्केट के कुछ इंपॉर्टेंट कररेक्टरिस्टिक्स रहेंगे। राइट? जैसे कि
पहली बात कि वहां पर आपके बायर्स और सेलर्स होने चाहिए कि कोई बेचने वाला कोई खरीदने वाला होना चाहिए तभी वो मार्केट
कहलाएगी। अदरवाइज भैया मार्केट तो फिर कहां ही रहेगा कि अगर बस वहां पर सिर्फ बेचने वाले बैठे हैं तब भी वो मार्केट
नहीं है। अगर वहां पर खरीदने वाले चले गए हैं बट वहां पर बेचने वाला कोई नहीं है तो भी भैया वो मार्केट नहीं है। राइट? अपार्ट
फ्रॉम दैट किसी ना किसी चीज का यहां पर खरीद या बिक्री होनी बहुत जरूरी है। है ना? बाइंग और सेलिंग होनी यहां पर बहुत
जरूरी है। प्राइस दोनों के बीच में एग्रीबल होना चाहिए। बायर और सेलर के बीच में कि किस प्राइस पर वो चीज़ खरीदी जाएगी।
किस प्राइस पर वो कमोडिटी खरीदी जाएगी। जैसे आप चावल लेने गए हैं तो वहां पर आप चावल की जब पेमेंट करोगे तो भैया उस पे
प्राइस सेट करोगे ना कि भैया 5 किलो आपने चावल लिया है तो आप सेट करोगे अच्छा भैया कितना पैसा इसका देना है वो ₹250 बोलेंगे
तो आपके ₹50 ₹250 यहां पर जब दिए जाएंगे तो दैट मींस यू आर अग्रीइंग टू दैट पर्टिकुलर प्राइस राइट एंड कहीं ना कहीं
आपका डायरेक्ट या फिर इनडायरेक्ट एक्सचेंज यहां पर देखने को मिलेगा। तो ये इंपॉर्टेंट कैरेक्टरिस्टिक्स हैं कि जहां
पर आपके ऐसे गुड्स एंड सर्विसेस आपस में एक्सचेंज किए जाते हैं, बेचे जाते हैं एट अ सर्टेन प्राइस। ऑलराइट। तो अब इसी केस
में हम थोड़ा इसको और अच्छे से समझते हैं कि भ डिफरेंट टाइप्स किस तरीके के यहां पर देखने को मिलते हैं। तो मार्केट को हम
यहां पर डिवाइड करते हैं बेस्ड ऑन डिफरेंट पैराटर्स। पहला आता है कि भैया कौन से एरिया में ऑपरेट किया जा रहा है। कौन से
एरिया में आपके इस प्रकार के एक्सचेंज किए जा रहे हैं। राइट? फिर सेकंड कैटेगरी आती है ऑन द बेसिस ऑफ टाइम कि भैया कितने
ड्यूरेशन का आपका वो एक्सचेंज है। कितने ड्यूरेशन की आपकी वो मार्केट वहां पर काम कर रही है। थर्ड कितनी क्वांटिटी ऑफ द
कमोडिटी वहां पर एक्सचेंज की जा रही है। एंड फोर्थ किस प्रकार का कंपटीशन यहां पर है? तो कंपटीशन वाला पॉइंट तो हमारे लिए
बहुत क्रूशियल है जिसमें हम डिफरेंट फॉर्म्स ऑफ़ मार्केट यहां पर डिस्कस करेंगे। डिफरेंट टाइप्स वहां पर डिस्कस
करेंगे। ऑलराइट माफी चाहूंगा। तो बेस्ड ऑन द एरिया ऑफ़ अप्रोच है ना कि जो आपका एरिया है उसके
हिसाब से आप क्या कहते हो कि भैया आपकी लोकल मार्केट भी है कि भैया जो आपकी वेजिटेबल ऑफ फ्रूट मार्केट्स जो मंडीज
वहां पर लगती हैं है ना आपके घरों के आसपास या लोकल हैंडीक्राफ्ट वाली मार्केट है तो भैया आपकी लोकल मार्केट में
आइडेंटिफाई की जाएगी वहीं रीजनल मार्केट कि भैया आपकी किसी स्टेट की मार्केट है प्रोविंशियल मार्केट जिसे हम यहां पर कह
सकते हैं राइट कि आपकी जैसे टेक्सटाइल मार्केट है तमिलनाडु में लेदर मार्केट है आपकी कानपुर में कि उस रीजन तक
कंसोड्रेटेड है उस रीजन के अराउंड वही सबसे ज्यादा चीज वहां पर बेची जाती है राइट तो आपकी आपकी रीजनल मार्केट यहां पर
कहलाएगी। फिर आती है आपकी नेशनल मार्केट जिसका ट्रेड या जिसका एक्सचेंज देश के कोने-कोने में है। है ना? एफएमसीजी
प्रोडक्ट्स आपके बनाए देश के किसी कोने में जा रहे हैं। कंसमशन उनकी कहीं और हो रही है। राइट? वैसे Tata साt, Amul Milk
के सारे के सारे आपके देश के हर एक कोने में आपको अवेलेबल मिलेंगे। तो आपके नेशनल मार्केट में इन्हें इंक्लूड किया जाएगा।
एंड वहीं फर्दर फिर हम आगे जाते हैं इंटरनेशनल मार्केट पे कि जहां आपके इंडियन प्रोडक्ट्स का हम एक्सपोर्ट भी कर रहे
हैं। राइट? एंड बाहर के प्रोडक्ट्स को यहां पर कंज्यूम भी कर रहे हैं। राइट? तो हमारे इंडियन सॉफ्टवेयर एक्सपोर्ट,
फार्मासटिकल एक्सपोर्ट्स, ऑटोमोबाइल एक्सपोर्ट्स ये सारे इसी में इंक्लूड किए जाएंगे कि जहां पर क्रॉस बॉर्डर
ट्रांजैक्शन होता हुआ देखने को मिल रहा है। क्रॉस बॉर्डर यहां पर मूवमेंट हो रही है उन गुड्स एंड सर्विज की ताकि उनकी
कंसमशन वहां पर हो सके और उससे रिलेटेड वहां पर वैल्यू प्रोड्यूसर को मिल सके। राइट? तो बेस्ड ऑन द एरिया कि कौन से
एरिया में वहां पर वो ऑपरेट कर रहे हैं। इस प्रकार की क्लासिफिकेशन हमें देखने को मिलती है। राइट? सेकंड फिर यहां पर आता है
बेस्ड ऑन टाइम पीरियड कि टाइम पीरियड के हिसाब से। अब इसमें ना बहुत सिंपल तरीके से आपको समझ में आ जाएगा। पहली कैटेगरी
आपकी वेरी शॉर्ट पीरियड मार्केट कि जहां पर आपके पेरिशेबल जो गुड्स हैं पेरिशेबल का मतलब क्या रहता है भैया जो जल्दी खराब
हो जाते हैं, सड़ जाते हैं। राइट? जैसे आपके फ्रूट्स और वेजिटेबल्स हो गए। राइट? तो आपकी बहुत शॉर्ट पीरियड की मार्केट है
कि जब आपका प्रोड्यूस हुआ तो उसके विदिन फाइव टू 10 डेज, फाइव टू 10 डेज भी मैक्सिमम बोल रहा हूं कि बहुत ही शॉर्ट
पीरियड में आपकी इनकी खरीद बिक्री वहां पर हो जाएगी। की बाइंग और सेलिंग यहां पर हो जाएगी। राइट? इससे थोड़ी सी ज्यादा
ड्यूरेशन कि हम उसे शॉर्ट पीरियड मार्केट यहां पर कहते हैं कि जहां पर आपके बेकरी आइटम्स की बात की जाती है, डेरी
प्रोडक्ट्स की बात की जिनका एटलीस्ट ड्यूरेशन आपका 30 तक 20 से 25 दिन तक का वहां पर देखने को मिलता है। राइट? वो आपकी
शॉर्ट पीरियड मार्केट आ गई। एंड फिर वी हैव लॉन्ग पीरियड मार्केट जहां पर भैया आपका प्रोडक्ट ड्यूरेबल नेचर का
है। यहां पर जो आपका प्रोडक्ट है वो ड्यूरेबल नेचर का है। लंबे समय तक आप उसको वहां पर यूज़ कर सकते हैं। है ना? कि
गाड़ी वहां पर खड़ी है तो भैया 3 महीने बाद भी बिक जाएगी। राइट? शॉर्ट पीरियड मार्केट में अगर आपका डेरी प्रोडक्ट पनीर
वहां पर आया तो उसको 15 से 20 दिन में डेफिनेटली बेचना ही पड़ेगा। है कि नहीं? बेकरी आइटम्स की भी अपनी एक्सपायरी वहां
सेल्फ लाइफ रहेगी। राइट? तो उसके टाइम पीरियड में बेचना ही पड़ेगा। एंड वहीं शॉर्ट जो आपकी वेरी शॉर्ट पीरियड मार्केट
है उसमें तो भैया बिल्कुल पेरिशेबल कमोडिटीज हैं जो शायद एक से दो दिन में भी वहां पर खराब हो जाए। तो उनकी तो सेलिंग
वहां पर करनी ही करनी पड़ेगी। राइट? तो ये रहा आपका ऑन द बेसिस ऑफ़ टाइम पीरियड। थर्ड फिर हमारे पास यहां पर आता है ऑन द बेसिस
ऑफ द क्वांटिटी ऑफ द प्रोडक्ट कि कितनी क्वांटिटी में वहां पर ट्रेड किया जा रहा है। कितनी क्वांटिटी में वहां पर एक्सचेंज
किया जा रहा है उसके बेसिस पर। तो यहां पर अगेन वी हैव टू कैटेगरीज होलसेल मार्केट एज वेल ऐ रिटेल मार्केट। राइट? अब होलसेल
मार्केट यहां पर क्या कहती है कि जहां पर आपका जो गुड्स का परचेस या सेलिंग यहां पर की जा रही है वो आपका ज्यादा क्वांटिटी
में किया जा रहा है। जब आप होलसेल में कोई चीज खरीदते हो। राइट? जैसे आपकी मंडी में आप जाएंगे अगर आपको मान लीजिए आपके घर पे
कोई फंक्शन है। राइट? और उस समय पे आपको बहुत सारे सब्जियां वहां पर खरीदनी है तो आप नॉर्मल दुकान में ना जाते हुए आप
होलसेल वाली दुकान पे जाएंगे। मंडी वाली दुकान में जाएंगे ताकि भैया आपको अच्छे प्राइस पर फ्रेश फ्रूट्स और वेजिटेबल्स
वहां पर मिल सके। राइट? तो वो आपके लिए होलसेल मार्केट है। वैसे ही अगर आपको मान लीजिए अपना कोई कपड़े का काम शुरू करना
है। राइट? तो उससे रिलेटेड अब आपको रॉ मटेरियल वहां पर नॉर्मल फैब्रिक वहां पर चाहिए। तो आप नॉर्मल दुकान में ना जाते
हुए जहां पर प्रोडक्शन हो रही है जहां पर होलसेल मार्केट है आप वहां पर अप्रोच करेंगे जहां पर आप क्वांटिटी में उस चीज
को प्रोड्यूस कर सकें बल्क क्वांटिटी में उस चीज को वहां पर प्रक्योर कर सकें परचेस कर सकें राइट ये तो रही आपकी होलसेल
मार्केट फिर वही हमारी रिटेल मार्केट अब ये हमारे लिए है जहां आम कंज्यूमर की बात की जाती है अब आपको कोई चीज खरीदनी है तो
आप जाके दुकान पे जाके खरीद रहे हैं अब ऐसा तो नहीं कि अगर आपको मैगी का पैकेट खरीदना है तो आप भैया बोल रहे हैं कि नहीं
भैया तीन कार्टन बांध के दे दो नहीं आप तो एक पैकेट या दो पैकेट वहां पर खरीदोगे राइट अपनी खुद की कंसम्पशन के लिए राइट या
या फिर आपकी अब ऑनलाइन रिटेल मार्केट जो क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स हैं वहां पर भी आप इस प्रकार की रिटेल मार्केटिंग ही करते
हैं। राइट? कि रिटेल मार्केट के थ्रू अपने गुड्स कमोडिटीज वहां पर परचेस करते हैं। राइट? तो ये बेसिकली हमारे पास बेस्ड है
ऑन द क्वांटिटी ऑफ़ द कमोडिटी। राइट? चलिए आगे फिर हमारे पास यहां पर आता है बेस्ड ऑन मार्केट कंपटीशन। तो मार्केट कंपटीशन
को हालांकि इनिशियली कैटेगराइज़ किया गया है परफेक्ट और इंपपरफेक्ट कंपटीशन में। सबसे पहले देखते हैं यहां पर परफेक्ट
कंपटीशन क्या कहता है? देखिए जाहिर सी बात है अगर आप मार्केट में जा रहे हैं, आप सब्जी मंडी में जा रहे हैं कुछ सामान
खरीदने के लिए और उस समय पे आपको बहुत सारे प्लेयर्स वहां पर देखने को मिल रहे हैं जो बाय जो सेलर्स हैं, है ना? जो अपना
प्रोड्यूस वहां पर बेचना चाहते हैं। तो जिसका बेस्ट प्रोड्यूस आपको लगेगा आप उसको खरीद पाओगे ईज़ली। जाहिर सी बात है। राइट?
एंड कहीं ना कहीं अब ये डिपेंडेंसी बन जाती है सेलर की कि भ अब मेरे पास बायर आएगा तभी मैं उसको बेच पाऊंगा। राइट? बट
यहां पर हम क्या करेंगे? सिर्फ और सिर्फ आपके पास बायरर्स ही बहुत सेलर्स ही बहुत सारे नहीं है। एट द सेम टाइम उस मंडी में
बायरर्स भी बहुत सारे हैं। राइट? कि जहां पर खरीदने वाले भी बहुत सारे हैं और बेचने वाले भी बहुत सारे देखने को मिलते हैं। तो
ऐसा आपका परफेक्ट कंपटीशन वहां पर रहता है। एंड जो प्रोडक्ट का नेचर है वो होमोजेनियस है। ऑलमोस्ट सिमिलर प्रोडक्ट्स
वहां पर सभी लोग बेच रहे हैं। राइट? तो जिसका जो प्रोडक्ट वहां पर ठीक लगेगा वो वहां पर बिक जाएगा। एक परफेक्ट कंपटीशन की
ये एसेंस है। ठीक है जी? और ईजीली वहां पर आपका फ्री एंट्री और एग्जिट भी वहां पर मार्केट से हो सकता है कि जो प्रोड्यूसर
है वो अपना प्रोडक्ट मार्केट से निकाल भी सकता है और ईज़ली उसको बेच भी सकता है। है ना? कोई ऐसे बैरियर नहीं है कि भैया उसको
बेचने में बहुत दिक्कत आ रही है। बट इंपपरफेक्ट कंपटीशन के केस में हमें डिफरेंट कैटेगरीज देखने को मिलती हैं।
मोनोपोली, ओलगोपोली, मोनोपोलिस्टिक एंड मोनोप्सनी। तो उन सभी को हम डिस्कस करेंगे टर्म बाय 10। एक बार परफेक्ट कंपटीशन को
और अच्छे से यहां पर समझते हैं कि परफेक्ट कंपटीशन एग्जैक्टली है क्या? राइट? तो पहला इंपॉर्टेंट हमने कररेक्टरिस्टिक यहां
पर कहा कि बहुत सारे बयरर्स और सेलर्स यहां पर देखने को मिलते हैं। ठीक है जी। ताकि कोई भी एक एंटिटी ना ही सेलर्स के
केस में और ना ही बायरर्स के केस में उस मार्केट को वहां पर डोमिनेट करे। क्योंकि अगर हम देखें कि भैया बहुत सारे बायरर्स
हैं। ठीक है जी? और बहुत लिमिटेड सेलर्स हैं। तो भैया जो सेलर्स यहां पर प्राइस रखेंगे उसी पे खरीदना पड़ेगा बायर को।
राइट? एंड उसका उल्टा सोचो। बहुत सारे सेलर्स हैं बट बहुत लिमिटेड बायरर्स हैं। तो भैया जो बायरर्स यहां पर प्राइस
बताएंगे भैया उसी पे फिर सेलर को बेचना पड़ेगा। तो यहां पर हम क्या करेंगे कि देयर आर मेनी बायरर्स एंड सेलर्स ताकि
किसी भी पर्टिकुलर एंटिटी की यहां पर डोमिनेशन देखने को ना मिले। राइट? अपार्ट फ्रॉम दैट होमोजेनियस प्रोडक्ट्स हैं
भैया। प्रोडक्ट्स आपके बिल्कुल आइडेंटिकल हैं। कोई डिफरेंशिएशन नहीं है। सभी के प्रोडक्ट्स बिल्कुल मिलते-जुलते देखने को
मिलते हैं। राइट? अपार्ट फ्रॉम दैट कंप्लीट इंफॉर्मेशन परफेक्ट इंफॉर्मेशन है यहां पर।
अबाउट द प्राइसेस क्या डिमांड एंड सप्लाई चल रही है सभी पार्टीज को पूरा हर एक चीज पता है और उसके बेसिस पर वहां पर आपके
गुड्स एंड सर्विज का एक्सचेंज होता हुआ देखने को मिल रहा है कि कोई ऐसी प्रकार की ओपेसिटी नहीं है कि ट्रांसफॉर्मेशन
कम्युनिकेट नहीं की जा रही है ना इनफेशन कम्युनिकेट नहीं की पूरी ट्रांसपेरेंसी है कि सभी को हर एक चीज के बारे में वहां पर
कंप्लीट नॉलेज है। राइट? अपार्ट फ्रॉम दैट कहीं ना कहीं जो मार्केट प्राइस वहां पर सेट होता है बेस्ड ऑन द डिमांड एंड सप्लाई
जो मार्केट प्राइस वहां पर सेट होता है भैया जो फर्म्स हैं भैया वो उस मार्केट सप्लाई को वहां पर एक्सेप्ट करते हैं। उस
मार्केट प्राइस को सॉरी यहां पर एक्सेप्ट करते हैं। फर्म्स जो प्रोड्यूसर्स हैं वो उस मार्केट प्राइस को वहां पर एक्सेप्ट
करते हैं। राइट? और वो किसी भी तरीके से इस प्राइस को इन्फ्लुएंस नहीं कर सकते ताकि अगेन फर्म्स की भी यहां पर डोमिनेशन
ना देखने को मिले। एंड लास्ट बट नॉट द लीस्ट वी
हैव प्री एंट्री एंड एग्जिट कि यहां पर जो फर्म्स जो प्रोड्यूसर्स हैं वो ईजीली मार्केट में एंटर भी कर सकते हैं। अपना
प्रोड्यूस ला सकते हैं। है ना? मतलब उनके ऊपर कोई रिस्ट्रिक्शन लगा कि भाई आपने यहां पर दुकान क्यों लगा दी? परफेक्ट
कंपटीशन है। कोई भी आके अपनी दुकान लगा सकता है। राइट? एंड अगर उसको अपनी दुकान बंद भी करनी है तो उस केस में भी उसके पास
पूरा ऑप्शन है कि वो मार्केट से जा भी सकता है। कोई दिक्कत वाली बात नहीं है। तो इसे हम कहते हैं परफेक्ट कंपटीशन। जरा सोच
के देखिए। क्या परफेक्ट कंपटीशन कभी एग्जिस्ट करेगा? जस्ट थिंक अबाउट इट नहीं करेगा ना तो बहुत ही आइडियल लेवल पर भैया
यह कंपटीशन मार्केट यहां पर सेट की गई है। परफेक्ट कंपटीशन 100% परफेक्ट कंपटीशन अचीव नहीं किया जा सकता। कुछ ना कुछ तो
फैक्टर वहां पर रहेगा जिसकी वजह से वो इंपपरफेक्ट कंपटीशन हमें देखने को मिलेगा। आइए देखते हैं तो इमपरफेक्ट कंपटीशन कैसे
हैं? तो पहली कैटेगरी यहां पर मोनोपोली मार्केट है। अब इसमें आपको नाम से ही क्लियर होगा कि मोनोपोली मार्केट का मतलब
क्या रहता है कि भ जिसकी अपनी मोनोपोली है। है ना? बेचने वाला एक ही आदमी है। सिंगल सेलर है भाई। है ना? जी। बेचने वाला
सिर्फ एक ही आदमी यहां पर देखने को मिल रहा है। सिंगल सेलर यहां पर देखने को मिल रहा है। और वही सभी चीजें यहां पर बेच रहा
है। अब इसका एग्जांपल यहां पर इंडियन रेल्वेज का ले लीजिए। अब रेलवेेज की जब भी आप टिकट बुक करते हो तो आपके पास एक ही
ऑप्शन है आईआरसीटीc। उसके अलावा कोई और तो आपको ट्रेन की टिकट नहीं यहां पर दे रहा। अगर दे भी रहा है तो ट्रेन तो आप यहां पर
रेल्वेज की ही यूज़ करोगे। उसी स्टेशन पर जाओगे। उसी ट्रेन में चढ़ोगे। है कि नहीं? राइट? स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड्स बिजली
की सप्लाई बहुत सारे स्टेट्स में अभी भी प्राइवेट पार्टीज एंटर नहीं कर पाई हैं। वहां पर सारी सप्लाई भैया बिजली विभाग
द्वारा वहां पर दी जा रही है। ब्राउजिंग के केस में Google का यहां पर एग्जांपल है कि भैया कंप्लीट डोमिनेंस है। मोनोपोली
यहां पर क्रिएट करके बैठे हैं। राइट? तो ये हमारे लिए मोनोपोली वाली मार्केट्स हैं। जहां पर आपका सिंगल सेलर है। एक ही
व्यक्ति जो कि यहां पर चीजें बेच रहा है और उसका कोई भी क्लोज सब्स्टट्यूट अवेलेबल नहीं है। अब इसका पॉइंट यहां पर क्या है
कि अगर उसका कोई क्लोज सब्स्टट्यूट अवेलेबल नहीं है तो दैट मींस उस पर्टिकुलर मार्केट में अगर किसी को एंटर करना है,
किसी प्रोड्यूसर को वहां पर एंटर करना है, सो ही विल हैव टू फेस हाई बैरियर्स ऑन एंट्री। जैसे इंडिया के केस में अगर मैं
रेल्वेज की बात करूं, अब रेलवेेज में अगर किसी प्राइवेट पार्टी को यहां पर ऑपरेट करना है, तो नहीं कर सकता ना। सरकार ने
बैरियर इतना बड़ा लगा रखा है। खुद का बैरियर वहां पर खड़ा है सरकार कि भैया नहीं कर सकते। राइट? एंड कहीं ना कहीं जो
आपका यह सेलर है यही प्राइस मेकर भी है। यह अपना ही प्राइस यहां पर सेट कर रहा है। ये अपना ही प्राइस यहां पर सेट कर रहा है।
और उसी प्राइस पर आपको वो चीज खरीदनी भी पड़ेगी। हालांकि सिंगल सेलर है तो उस केस में सप्लाई हमें स्टेबल देखने को मिल सकती
है। बट नॉट ऑलवेज है ना? थोड़ी सप्लाई स्टेबल देखने को मिल सकती है कि सिंगल सेलर एक ही चीज यहां पर प्रोवाइड कर रहा
है। तो मार्केट में सभी को पता है कि भैया यही है। इसी से लेना पड़ेगा। तो उस हिसाब से हमें सप्लाई का एक आईडिया रहेगा।
स्टेबल सप्लाई का आईडिया रहेगा। बट नॉट ऑलवेज कि हमेशा उतनी ही सप्लाई वहां पर बरकरार रहेगी। चेंजेस भी आ सकते हैं।
बिकॉज़ और कोई अल्टरनेटिव ऑप्शन यहां पर नहीं है। राइट? एंड सिर्फ मोनोपोली रहेगी तो भैया उस केस में हाई प्रॉफिट्स भी यहां
पर चार्ज किए जाएंगे। हायर प्राइसेस भी वहां पर वो सेट कर सकता है। कंज्यूमर के पास बहुत लिमिटेड चॉइस है भैया। एंड कहीं
ना कहीं नेचुरल मोनोपोली तो फिर वहां पर क्रिएट हो ही जाएगी। तो ये इंपॉर्टेंट कैरेक्टरिस्टिक्स प्रोज़ एंड क्स हैं आपके
मोनोपोली मार्केट के। जो कि फर्स्ट कैटेगरी है हमारी इंपपरफेक्ट कंपटीशन की। हमने पहले परफेक्ट यहां पर डिस्कस कर लिया
है। अब इमपरफेक्ट की फर्स्ट कैटेगरी ये रही। सेकंड कैटेगरी यहां पर आती है मोनोपोलिस्टिक कंपटीशन। अब नाउ
मोनोपोलिस्टिक कंपटीशन में बेसिकली हम क्या पॉइंट कहते हैं? थोड़ा समझना इस चीज को कि यहां पर आपके बहुत सारे बयरर्स और
सेलर्स तो हैं। देयर आर मेनी बयरर्स एंड सेलर्स। उससे कोई दिक्कत वाली बात नहीं है। थोड़ा सा परफेक्ट से थोड़ा
मिलता-जुलता यहां पर देखने को मिलता है। बट यहां जब हम परफेक्ट के केस में कह रहे थे कि प्रोडक्ट आपका होमोजेनियस है कि जो
चीज़ बेची जा रही है बिल्कुल आइडेंटिकल है। कोई फर्क नहीं है। यहां पर प्रोडक्ट में डिफरेंशिएशन देखने को मिलती है। यहां पर
प्रोडक्ट में डिफरेंशिएशन देखने को मिलती है। जैसे कि अगर हम बात करें स्मार्टफोन के केस में भ दुनिया भर के ब्रांड्स हैं।
अगर प्राइमरी मैं देखूं Apple हो गया, Google हो गया या आपका Samsung हो गया। अभी इंडियन मार्केट में यही लीड कर रहे
हैं। बट सभी के प्रोडक्ट्स का नेचर डिफरेंट है। हालांकि पर्पस सेम है बट प्रोडक्ट का नेचर वहां पर डिफरेंट है।
राइट? तो ऐसी मार्केट को हम यहां पर क्या कहेंगे? मोनोपोलिस्टिक मार्केट। कि वहां पर बेचने वाले भी काफी हैं। खरीदने वाले
भी काफी हैं। बट एट द सेम टाइम प्रोडक्ट का जो नेचर है वो भी यहां पर डिफरेंट देखने को मिल रहा है। है ना? फास्ट फूड की
चेंज होगी। सभी खाने दे रहे हैं बट सभी का डिफरेंट टेस्ट है। सभी का डिफरेंट टेक्सचर है। सभी डिफरेंट रेसिपीज को वहां पर फॉलो
कर रहे हैं। फैशन एंड क्लोथिंग। भैया सभी लोग टीशर्ट वहां पर प्रोवाइड कर रहे हैं। अब किसी की टीशर्ट भैया ₹5,000 की भी
होगी, किसी की टीशर्ट ₹1000 की भी होगी। पर्पस दोनों का सेम है। राइट? तो प्रोडक्ट का जो नेचर है वो शायद फिर भी मिलताजुलता
है। बट हां वो एक डिफरेंशिएशन वाला फैक्टर वहां पर जरूर है। किसी ना किसी पैरामीटर पे वो डिफरेंट देखने को जरूर मिलेगा।
डिज़ाइन पे डिफरेंट देखने को मिलेगा। टेक्सचर में डिफरेंट देखने को मिलेगा। वो डिफरेंशिएशन वहां पर रहेगी जिसकी वजह से
वो प्राइस भी डिफरेंट वहां पर पाया जाएगा। राइट? एंड कहीं ना कहीं जो आपके ये सेलर्स हैं उनके पास काफी हद तक प्राइस कंट्रोल
भी है। कि अगर nki की मैं बात करूं NKI अपनी वहां पर टीशर्ट्स या शूज बेच रहा है तो भी अपना प्राइस वहां पर सेट कर रहा है
ना। अगर किसी को लेना हो तो वो ले सकता है उस प्राइस पर। राइट? एंड ऐसा नहीं है कि इस पर्टिकुलर मार्केट में एंट्री करना
मुश्किल है। एंट्री करना इजी है बट उसमें सर्वाइव करना फिर मुश्किल रहेगा। एंट्री करना ईजी है बट सर्वाइव क्योंकि बहुत सारे
सेलर्स हैं ना कॉमटीशन बहुत फेयर्स है। राइट? तो कहीं ना कहीं इसका प्रो सबसे बड़ा यहां पर क्या है कि भैया कंज्यूमर की
चॉइससेस यहां पर बढ़ जाती हैं। आपके पास भी बहुत सारी ऑप्शन रहती हैं। अगर आपको कोई डिवाइस खरीदना है, कोई गैजेट खरीदना
है। राइट? बिकॉज़ बहुत मल्टीपल ब्रांड्स यहां पर अवेलेबल हैं। है कि नहीं? अब सिंस आपस में इतना कंपटीशन बरकरार रहेगा तो
बेहतर से बेहतर क्वालिटी का प्रोडक्ट यहां पर क्रिएट किया जाएगा। वर्चुअल ड्राइव इनोवेशन फैक्टर। राइट? बट अपनी अप्रोच को
और बढ़ाने के लिए, अपनी रीच को यहां पर और इंक्रीस करने के लिए जो सेलर्स हैं उनके द्वारा फिर हाई एडवरटाइजिंग कॉस्ट भी यहां
पर लगाई जाएंगी। राइट? एंड हमेशा ही प्राइस एफिशिएंट देखने को नहीं मिलेगा। बिकॉज़ कहीं ना कहीं सेलर का यहां पर एक
इन्फ्लुएंस है उस प्राइस के ऊपर। हालांकि मोनोपोली से कम है बट फिर भी सिग्निफिकेंट इन्फ्लुएंस तो यहां पर है कि वो अपने
हिसाब से इस प्राइस को सेट कर सकता है। चलिए ये सेकंड कैटेगरी यहां पर देखने को मिलती है मोनोपोलिस्टिक की। थर्ड यहां पर
आती है ओलिगोपॉली। अब ओलिगोपॉली कैसी है? इसको समझते हैं। यहां पर हम क्या कह रहे हैं कि भैया जो आपकी फर्म्स यहां पर जो
सेलर्स हैं जो आपके बेचने वाले गुड्स एंड सर्विज को बेचने वाले जो हैं वो बहुत लिमिटेड हैं और बहुत बड़े हैं। एग्जांपल
यहां पर आता है इंडिया की टेलीकॉम इंडस्ट्री। हमारे पास कौन-कौन से प्लेयर्स हैं? हमारे पास Jio है। वी हैव Airtel, वी
हैव V। है ना? चलो BSNL को भी यहां पर इंक्लूड कर लेते हैं। इसके अलावा तो और कोई ऑप्शन ही नहीं है। है कि नहीं? इसके
अलावा तो और कोई ऑप्शन है ही नहीं मार्केट में वैसे भी। राइट? तो बहुत ही कम यहां पर सेलर्स हैं। बहुत ही कम यहां पर फर्म्स
हैं और वो बड़ी फर्म्स हैं। एंड कहीं ना कहीं एक दूसरे के ऊपर डिपेंडेंट भी हैं। भैया 2016 में जब Jio ने अपने आप को
इंट्रोड्यूस किया था मार्केट में फ्री ऑफ कॉस्ट भैया बांट दिया सब कुछ। अब उसकी वजह से यहां पर Airtel को क्या करना पड़ा?
Airtel को भी फ्री करना पड़ा। तो कहीं ना कहीं एक फर्म के एक्शंस की वजह से दूसरे फर्म के प्राइसेस के ऊपर भी इंपैक्ट यहां
पर पड़ता है। राइट? एंड सिंस ये जो पूरी इंडस्ट्री है टेलीकॉम इंडस्ट्री इसमें एंटर करना बहुत इजी नहीं है ना हाई कैपिटल
कॉस्ट आपको चाहिए उतना ज्यादा इंफ्रास्ट्रक्चर क्रिएट करना आपके टावर्स होने चाहिए आपकी ट्रांसमिशन लाइंस होनी
चाहिए ईच एंड एवरीथिंग पूरा नेटवर्क यहां पर क्रिएट करना आपके स्पेक्ट्रम एलोकेशन होना चाहिए तो ये सारा का सारा कैपिटल
इंटेंसिव है इसी वजह से इस मार्केट में एंटर करना ओलिगो पॉली मार्केट में एंटर करना मुश्किल रहता है हाई बैरियर्स यहां
पर देखने को मिलते हैं राइट एंड यहां पर नॉन प्राइस कंपटीशन क्या है कि यहां पर प्राइस के ऊपर इतना कंपटीशन नहीं है बाकी
सर्विज के ऊपर कंपटीशन है ना क्वालिटी के ऊपर पर कंपटीशन बहुत ज्यादा है। राइट? चलिए तो इसके प्रोज़ एंड क्स अगर हम देखें
तो हालांकि बहुत लिमिटेड सेलर्स हैं बट फियर्स कंपटीशन है जिसकी वजह से प्राइसेस ऑलमोस्ट स्टेबल रहते हैं। अगर आप देखें कि
आपके जो नेट प्लांस हैं बहुत अभी थोड़े टाइम पहले यहां पर बढ़े थे। बट ऐसा नहीं कि भैया हर दिन वहां पर बढ़ाए जा रहे हैं। वो
स्टेबिलिटी थोड़ी बहुत तो बरकरार रहेगी। राइट? एंड सिमिलर सिंस हर एक कंपनी यहां पर चाहती है कि उसका जो मार्केट शेयर है
वो यहां पर और इंक्रीस करे। सिग्निफिकेंट तरीके से इनक्रीस करे। तो इनोवेशन के ऊपर भी यहां पर काम करता है। बट एक बहुत बड़ा
रिस्क है कार्टल्स का। कि भैया अगर उन्होंने कार्टिलाइजेशन यहां पर कर दी। कार्टिलाइजेशन का मतलब यहां पर क्या है?
कि अगर तीनों ने अगर अपना ग्रुप बना लिया और तीनों ने अगर यहां पर डिसाइड कर लिया कि तीनों अपने प्राइसेस को यहां पर बढ़ा
लेते हैं तो उस केस में क्या कंज्यूमर कुछ कर पाएगा? कुछ भी नहीं कर पाएगा। राइट? वो एक्स्ट्रा प्रॉफिट भी वहां पर कमा लेंगे।
हम उनके ऊपर डिपेंडेंट भी वहां पर रहेंगे और कहीं ना कहीं वो प्राइसेस का जो इंक्रीज फैक्टर है वो हम अब्सॉर्ब भी कर
लेंगे। राइट? तो ये रिस्क है कार्टिलाइजेशन का। अब हालांकि एलगेशंस बहुत लगाई जाती हैं कि भ ऐसे
कार्टिलाइजेशन देखने को मिलती है बट अभी तक प्रूफ तो नहीं हुआ है। आपको क्या लगता है? आप जरा चैट बॉक्स में जरूर मेंशन
कीजिएगा। है ना? कमेंट बॉक्स में जरूर मेंशन कीजिएगा। राइट? एंड अगेन डिफिकल्ट है नए बिज़नेसेस के लिए कि वो इस मार्केट
में एंटर करें एंड उस प्रकार की अपनी प्रेजेंस यहां पर क्रिएट कर सकें। राइट? तो ये टेलीकॉम इंडस्ट्री में नहीं। आप
ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री में भी यहां पर देख लीजिए। ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री का भी यहां पर एग्जांपल है। लिमिटेड आपके सेलर्स हैं।
कुछ ही गाड़ियां यहां पर बिक रही हैं। उसके बियों्ड और कोई ऑप्शन ही नहीं है। है ना? लिमिटेड मॉडल्स हैं। बट हां उसमें
वेरिएंट्स बहुत सारे हैं। बट हां ये तो है कि भ सेलर्स जो हैं वो लिमिटेड हैं एंड बड़े सेलर्स हैं। है ना? और एक दूसरे के जो
प्राइसेस यहां पर सेट किए जाते हैं उनका एक दूसरे के ऊपर इंपैक्ट जरूर यहां पर पड़ता है। ऑलराइट। एंड लास्ट बट नॉट द
लीस्ट वी हैव मिनोप्सनी मार्केट। अब इसको यहां पर थोड़ा देखा जाए। अभी तक हम कहीं ना कहीं सेलर के पर्सपेक्टिव से चीजों को समझ
रहे थे कि परफेक्ट कंपटीशन में बहुत सारे सेलर्स हैं। कोई उनका इन्फ्लुएंस नहीं है मार्केट में। फिर आप मोनोपोली पे आए तो
भैया लिमिटेड सेलर है। राइट? एक ही सेलर है। पूरी मार्केट को इन्फ्लुएंस कर रहा है। प्राइस को इन्फ्लुएंस कर रहा है।
मोनोप्लिस्टिक में आए तो पता लगा कि चलो बहुत सारे सेलर्स हैं और आपस में उस पर थोड़ा बहुत कंट्रोल है प्राइसेस के ऊपर।
है ना? प्रोडक्ट डिफरेंशिएशन वहां पर देखने को मिलती है। ओलगोपॉली में फिर आपके लिमिटेड सेलर हैं बट बड़े सेलर्स हैं।
राइट? मोनोप्सनी में यहां पर सेलर की बात नहीं की जा रही। मोनोप्सनी में यहां पर बायर की बात की जा रही है। बायर की क्या
बात की जा रही है कि भैया सिंगल बायर है। एक ही बायर है जो कि वहां पर चीजें आपकी खरीदेगा और बेचने वाले यहां पर मल्टीपल
हैं। तो कहीं ना कहीं सिंगल बायर है तो भैया वही डिमांड को डिक्टेट करेगा और वही मार्केट को कंट्रोल भी करेगा। राइट? एंड
कहीं ना कहीं डिपेंडेंट सेलर्स की बायर के ऊपर है क्योंकि उनके पास और कोई अल्टरनेटिव ही नहीं है। किसी और को जाके
बेच ही नहीं सकते। है ना जी? बयर को ही वहां पर जाके बेचना पड़ेगा। अब बायर ही यहां पर कंट्रोल कर रहा है प्राइसेस को
क्योंकि कम प्राइस भी यहां पर आ सकता है। पैसिंग डिसीजन उसी के पास है। एंड मार्केट टू अगर हम देखें कि बैरियर्स कैसे हैं
एंट्री में कि कोई नई कंपनी भी इसमें एंट्री कर सकती है। भैया हाई कंट्रोल है। एंट्री चैलेंजेस बहुत सारे हैं कि नए
बायरर्स भी यहां पर नहीं आ सकते। तो इसका एग्जांपल परफेक्ट क्या है? भारत सरकार एक बहुत बड़ी बायर है उस प्रकार के डिफेंस
कमोडिटीज की। आपके आर्म्स एमिनेशन की भारत सरकार ही बाय करेगी ना। कोई और तो नहीं खरीदेगा इन चीजों को। राइट? तो जितने भी
सेलर्स हैं, आपके जितने भी कंपनीज़ हैं जो कि इस प्रकार के डिफेंस कमोडिटीज वहां पर तैयार करते हैं, उनको भारत सरकार को ही
यहां पर बेचना है। तो उसे रिप्रेजेंट किया जाता है मोनोप्सनी मार्केट के साथ। तो आई होप यहां पर ये चीज क्लियर हो गई हो।
राइट? सो दीज़ आर द टाइप ऑफ़ मार्केट्स जो कि मैं आपको कह रहा था आपके लिए बहुत क्रूशियल हैं। एंड आपको डेफिनेटली इन्हें
अच्छे से पढ़ना भी है। और ये आपके लिए एक सवाल है। आपको क्या करना है? अभी बिल्कुल इसी समय पर इस वीडियो को पॉज कर देना है।
इसको देखना है अच्छे से। इसका आंसर करना है और चैट बॉक्स और कमेंट बॉक्स में इसका आंसर जरूर मेंशन करना है। राइट? चलिए। सो
आई होप आज के सेशन में अगेन कुछ ना कुछ वैल्यू्यूएशन जरूर हुआ हो। और इसी तरीके से हमारा फोकस है कि हम पूरी इकॉनमी को
ऐसे स्टेप बाय स्टेप प्रोसेस में हर एक टॉपिक को बिल्कुल सिंपलीफाई करके उसका एग्जांपल लेके हम उसे पढ़ेंगे, समझेंगे एंड
थोड़ा कोशिश करेंगे उसको करंट कंटेंपररी स्टेट के साथ रिलेटेबल बनाने के लिए ताकि भैया करंट एग्जांपल्स को थोड़ा यहां पर यूज़
किया जा सके। ऑलराइट? तो आई होप आप सभी के लिए वैल्यूएबल रहा हो। सो दैट विल बी ऑल ऑल द वैरी बेस्ट। हैव अ गुड प्रिपरेशन।
स्टडी आईक्यू आईएएस आपका सिलेक्शन हमारा मिशन।
इन क्षेत्रों को आर्थिक गतिविधियों के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है। प्राथमिक क्षेत्र प्राकृतिक संसाधनों का दोहन करता है, द्वितीयक क्षेत्र कच्चे माल को तैयार माल में बदलता है, और तृतीयक क्षेत्र सेवाएं प्रदान करता है। उदाहरण के लिए, कृषि प्राथमिक, खाद्य प्रसंस्करण द्वितीयक, और परिवहन तृतीयक क्षेत्र के अंतर्गत आते हैं।
सेवा क्षेत्र का जीडीपी में सबसे बड़ा योगदान (लगभग 54%) है, जबकि लगभग 45% कार्यबल कृषि (प्राथमिक क्षेत्र) पर निर्भर है। यह असमानता 'जॉबलेस ग्रोथ' (बेरोजगार विकास) की चिंता पैदा करती है, जहां आर्थिक वृद्धि तो होती है लेकिन पर्याप्त रोजगार सृजन नहीं होता।
पूर्ण प्रतिस्पर्धा एक आदर्श बाजार संरचना है जहां बड़ी संख्या में विक्रेता समरूप उत्पाद बेचते हैं और कोई भी कीमत को प्रभावित नहीं कर सकता (मूल्य स्वीकारकर्ता)। अपूर्ण प्रतिस्पर्धा (एकाधिकार, एकाधिकारी प्रतिस्पर्धा, अल्पाधिकार) में विक्रेता उत्पाद विभेदन या बाजार नियंत्रण के कारण मूल्य को प्रभावित कर सकते हैं।
एकाधिकार में एक ही विक्रेता होता है (जैसे IRCTC) जो कीमत निर्धारित करता है और उसके उत्पाद का कोई विकल्प नहीं होता। एकाधिकारी प्रतिस्पर्धा में अनेक विक्रेता होते हैं (जैसे स्मार्टफोन बाजार) जो विभेदित उत्पाद बेचते हैं, जिससे कीमत पर कुछ नियंत्रण होता है लेकिन प्रवेश अपेक्षाकृत आसान होता है।
अल्पाधिकार बाजार में कुछ बड़े विक्रेता (जैसे दूरसंचार क्षेत्र में Jio, Airtel) एक-दूसरे पर निर्भर होते हैं, प्रवेश में उच्च बाधाएं होती हैं, और अक्सर गैर-मूल्य प्रतिस्पर्धा (गुणवत्ता, सेवा) पर ध्यान दिया जाता है। इसका बड़ा जोखिम कार्टेलाइजेशन (Cartelization) है, जहां कंपनियां मिलकर कीमतें बढ़ा सकती हैं।
सार्वजनिक क्षेत्र का स्वामित्व और नियंत्रण सरकार के पास होता है, जिसका उद्देश्य लाभ के बजाय सार्वजनिक कल्याण होता है (जैसे रेलवे)। इसके विपरीत, निजी क्षेत्र का स्वामित्व व्यक्तियों के पास होता है और इसका मुख्य उद्देश्य लाभ कमाना होता है, जिससे दक्षता और नवाचार को बढ़ावा मिलता है।
यह अस्थायी और लचीले काम पर आधारित एक नया उभरता क्षेत्र है, जिसमें Zomato, Swiggy, Uber जैसे प्लेटफॉर्म पर काम करने वाले लोग शामिल हैं। मुख्य चुनौती इन श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा (जैसे बीमा, पेंशन) प्रदान करना है, क्योंकि वे असंगठित क्षेत्र में आते हैं।
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