परिचय
इस वीडियो में यूपीएससी की इकॉनमी की तैयारी के लिए महत्वपूर्ण बातों को विस्तार से समझाया गया है। यह वीडियो यूपीएससी की आर्थिक अवधारणाओं को प्रीलिम्स, मेंस, और इंटरव्यू के लिए पर्याप्त बनाने का उद्देश्य रखता है।
इकॉनमी का परिचय
- इकॉनमी का अर्थ: हाउसहोल्ड मैनेजमेंट पर आधारित अध्ययन, यानी सीमित संसाधनों के बीच विकल्प चुनना।
- अंतर: इकॉनमिक्स (अध्ययन) और इकॉनमी (व्यवहार में लागू)।
माइक्रो और मैक्रो इकॉनमिक्स
- माइक्रो: व्यक्तिगत इकाइयों (उपभोक्ता, फर्म) के निर्णय।
- मैक्रो: संपूर्ण देश की आर्थिक गतिविधियां जैसे GDP, महंगाई आदि।
- यूपीएससी में मैक्रो पर ज्यादा जोर होता है, माइक्रो से भी कुछ सवाल आते हैं। इसके विस्तृत अध्ययन के लिए UPSC इकॉनमी स्टडी गाइड: माइक्रो, मैक्रो से थ्योरी ऑफ़ फर्म तक देखें।
डिमांड और सप्लाई के सिद्धांत
- लॉ ऑफ डिमांड: कीमत बढ़ने पर मांग घटती है, कीमत घटने पर मांग बढ़ती है (नॉर्मल गुड्स)।
- इलास्टिसिटी: कीमत परिवर्तन पर मांग या आपूर्ति की संवेदनशीलता।
- इलास्टिक और इनइलास्टिक गुड्स के उदाहरण।
- लॉ ऑफ सप्लाई: कीमत बढ़ने पर उत्पादक अधिक उत्पादन करते हैं।
विभिन्न गुड्स की पहचान
- नॉर्मल गुड्स, इनफीरियर गुड्स, लग्जरी गुड्स
- गिफ़िन गुड्स और वेबल गुड्स जो लॉ ऑफ डिमांड के अपवाद हैं।
- सब्स्टीट्यूट और कॉम्प्लिमेंटरी गुड्स।
प्राइवेट और पब्लिक गुड्स
- एक्सक्लूडेड/नॉन-एक्सक्लूडेड
- राइवल/नॉन-राइवल
- फ्री राइडर प्रॉब्लम का परिचय
मार्केट संरचना और थ्योरी ऑफ फर्म
- मोनोपोली, ओलिगोपोली, मोनोपोलिस्टिक कंपटीशन, और परफेक्ट कंपटीशन
- प्रत्येक की विशिष्ट विशेषताएं, उदाहरण और प्रभाव
- इस विषय की विस्तार से जानकारी के लिए UPSC इकॉनमी स्टडी गाइड: माइक्रो, मैक्रो से थ्योरी ऑफ़ फर्म तक देखें।
मार्केट इक्विलिब्रियम
- सप्लाई और डिमांड का संतुलन
- मूल्य निर्धारण और इक्विलिब्रियम की प्राप्ति
अर्थव्यवस्था के प्रकार
- कैपिटलिस्ट, सोशलिस्ट, और मिक्स्ड इकॉनमी
- भारत की मिक्स्ड इकॉनमी की व्याख्या और 1991 के एलपीजी सुधारों का प्रभाव
क्लासिकल और किनेशियन इकॉनमी
- क्लासिकल थ्योरी: फ्री मार्केट, न्यूनतम सरकारी हस्तक्षेप
- किनेशियन थ्योरी: सरकार का सक्रिय हस्तक्षेप आवश्यक
- जॉन मीनार्ड किन्स के योगदान
- इस संदर्भ में अधिक पढ़ने के लिए INS 115 रिवीजन: रिवेन्यू रिकग्निशन के फाइव स्टेप्स और स्पेशल केस समझें उपयोगी होगा।
बिहेवियरल इकॉनमिक्स
- इंसानी मनोविज्ञान का इकॉनमी पर प्रभाव
- नज थ्योरी, पर्सुएशन तकनीकें, व्यवहारिक उदाहरण
फैक्टर्स ऑफ प्रोडक्शन
- भूमि, श्रम, पूंजी, उद्यमिता
- इनके मूल्य निर्धारण (रेंट, वेज, इंटरेस्ट, प्रॉफिट)
अतिरिक्त आर्थिक अवधारणाएँ
- यूटिलिटी एवं मार्जिनल यूटिलिटी
- ऑपॉर्चुनिटी कॉस्ट
- डिमिनिशिंग रिटर्न्स
- डेप्रिसिएशन और अप्रीसिएशन
निष्कर्ष
यह वीडियो यूपीएससी के लिए इकॉनमी की तैयारी में एक व्यापक गाइड के रूप में काम करता है, जिसमें सिद्धांत और प्रैक्टिकल उदाहरण दोनों शामिल हैं। इसे शुरू से अंत तक पूर्णतः समझना प्रतियोगिता परीक्षा के लिए अत्यधिक लाभकारी होगा।
यह सारांश यूपीएससी इकॉनमी के बुनियादी और उन्नत विषयों को उजागर करता है, ताकि प्रतियोगी स्पष्ट अवधारणाओं के साथ परीक्षा तैयारी कर सकें।
ये बुकलेट्स अपने आप में पूरी तरह से सफिशिएंट है आपका प्रीलिम्स मेंस इंटरव्यू सारे कंपोनेंट्स के लिए होता क्या है ना
इकॉनमी उतनी ट्रस्ट में उतनी मुश्किल है नहीं पर हमें उसको रियल लाइफ के साथ रिलेट करने में कई बार बहुत ज्यादा दिक्कत आती
है कि जब भी मान लो प्राइस जरूरत से ज्यादा होता है किसी वस्तु का जैसा कि हमने देखा इस मोबाइल फोन के केस में हेलो
एवरीवन वेलकम टू पड ओनली आई दोस्तों आज से हम एक बहुत इंपॉर्टेंट सीरीज स्टार्ट करने जा रहे हैं यह जो सीरीज है ये ये आपकी
सीरीज बेस्ड है हमारी जो यूपीएससी वाला की बुकलेट्स है उनके ऊपर देखिए यूपीएससी वाला की बुकलेट्स जो हैं वो हर पर्टिकुलर
सब्जेक्ट के लिए आती हैं ज्योग्राफी इकॉनमी पॉलिटी हिस्ट्री इस तरह से डिफरेंट डिफरेंट सब्जेक्ट सारे यहां पे इन बुक्स
के माध्यम से कवर्ड हैं अब हम जो सेशंस रन करेंगे तो मेरी तरफ से इकॉनमी के सेशंस यहां पे आपके लिए कंडक्ट किए जाएंगे ये
इकॉनमी का पार्ट वन है इसी तरह से इकॉनमी का पार्ट टू भी एक बुकलेट आपको देखने को मिल जाएंगी तो पार्ट वन भी पार्ट टू भी
सारी जो बुकलेट होगी इकॉनमी की दोनों बुकलेट्स बेसिकली वो हम इन सेशंस के माध्यम से कवर करेंगे क्या यह बात क्लियर
है ठीक है अब ये बुकलेट्स आपके लिए यूजफुल इसलिए भी बहुत ज्यादा हो जाती हैं क्योंकि इन बुकलेट्स के अंदर आपके प्रीलिम्स के भी
और मेंस के भी एंड साथ ही साथ इवन इंटरव्यू के कांसेप्ट भी इस पर्टिकुलर माध्यम से क्लियर हो जाएंगे यानी कि यह
बुकलेट्स अपने आप में पूरी तरह से सफिशिएंट है आपका प्रीलिम्स मेंस इंटरव्यू सारे कंपोनेंट्स के लिए ठीक है तो तो आज
जो हम डिस्कस करेंगे हम पहले तो थोड़ा सा इकॉनमी का ओवरव्यू लेंगे कि यूपीएससी के लिए हमें क्या-क्या चीजें यूपीएससी के
द्वारा बताई गई है क्या-क्या सिलेबस है कैसे-कैसे हम पढ़ेंगे फिर हमारा जो पहला टॉपिक है माइक्रो इकोनॉमिक्स एंड बेसिक
टर्मिनोलॉजी हम इसको आज के सेशन में डील करेंगे दोस्तों मेरा नाम ऋषभ है एंड पूरी इकॉनमी की सीरीज में आपके साथ यहां पे
डिस्कस करूंगा स्टार्टिंग करने से पहले मेरी कुछ आपसे एक्सपेक्टेशन है और आपकी कुछ मेरे से एक्सपेक्टशंस होनी चाहिए तभी
हम इस सीरीज को अच्छे से रन कर पाएंगे देखो आपकी जो मेरे हिसाब से एक्सपेक्टेशन होंगी वो यही होंगी कि सर आप सारे के सारे
कॉन्सेप्ट्स को बढ़ाएंगे जितने भी कांसेप्ट हैं बिल्कुल प्लस एट द सेम टाइम यहां पर मैं आपको स्टैटिक पार्ट तो कवर
करवाऊंगी ही एट द सेम टाइम जो भी करंट चीजें होंगी उनको भी मैं साथ में ऐड ऑन करता रहूंगा ताकि इकॉनमी जो अपने आप में
काफी एक डायनेमिक सब्जेक्ट बन जाता है वो सारी चीजें भी आपको यहीं पे करंट चीजें भी आपको यहीं पे इनकॉरपोरेटेड मिले उन
टॉपिक्स के रिगार्डिंग जैसे आज मैं जिस दिन ये लेक्चर रिकॉर्ड कर रहा हूं आज तक के सारे करंट अफेयर्स भी
इसमें इंक्लूड हो चुके होंगे ठीक है ये बात तो चलो ठीक हुई इसके अलावा अब क्योंकि देखो इकॉनमी बहुत सारे बच्चों को काफी टफ
लगती है काफी इश्यूज आते हैं समझने के लिए तो मेरी कोशिश ये रहेगी कि मैं आपको ढेर सारी एग्जांपल्स दूं ताकि एक्चुअल में ना
आप इन चीजों को समझ पाओ होता क्या है ना इकॉनमी उतनी ट्रस्ट में उतनी मुश्किल है नहीं पर हमें उसको रियल लाइफ के साथ रिलेट
करने में कई बार बहुत ज्यादा दिक्कत आती है तो मैं इंश्योर करूंगा कि मैं आपको इतनी ज्यादा एग्जांपल्स दूंगा ना कि आप
खुद रिलाइज करोगे कि आपको हर एक कांसेप्ट एग्जांपल के माध्यम से जो उसके अंडरलाइन कांसेप्ट था वो समझ आ चुका होगा इसके साथ
ही साथ जितने भी प्रीलिम्स के क्वेश्चंस होंगे लास्ट 10 इयर्स के वो मैं आपके साथ इन्हीं लेक्चर के अंदर कवर करूंगा इवन
आपको जो मेंस के क्वेश्चंस होंगे ना उनके रिगार्डिंग भी हम ज्यादातर डिस्कशन कर लेंगे तो यानी कि ना इकॉनमी के रिगार्डिंग
आपको बिल्कुल और कहीं जाने की जरूरत नहीं है इन्हीं पर्टिकुलर लेक्चर के माध्यम से आपको सारी चीजें मिलने वाली है अब यह तो
थी आपकी एक्सपेक्टेशन जो मैं कोशिश करूंगा उन एक्सपेक्टेशन प खरा उतरने के लिए अब मेरी भी आपके सा आपसे कुछ एक्सपेक्टेशन है
राइट और वो एक्सपेक्टेशन बहुत ही सिंपल है पहली बात तो यह है कि आप इस जो लेक्चर सीरीज
है इसको आप शुरू से लेकर अंत तक देखेंगे ऐसा नहीं करना कि एक लेक्चर देख लिया फिर छोड़ दिया यह मत करना इस सीरीज
को शुरू से लेकर अंत तक देखना तभी आपको ना सारे के सारे डॉट्स ऐसे कनेक्ट करते हुए मिल जाएंगे पहली चीज ये दूसरी चीज देखो
पता है क्या होता है एक ना जब मैं बात करता हूं ना स्क्रॉल करते हो शॉर्ट्स वगैरह देखते हो
कि ऐसे बस ऐसे लेटे हुए हैं लेटे-लेटे लेक्चर देखे जा रहे हैं देखो उससे ना आपकी कंसंट्रेशन कभी अच्छे से बन नहीं पाएगी तो
मेरी कोशिश यही रहेगी आपके लिए कि मैं यही चाहूंगा आपसे कि आप इन लेक्चर को पूरी कंसंट्रेशन के साथ देखिए एंड आपको पूरा
रिजल्ट तभी मिल पाएगा आर यू गेटिंग माय पॉइंट तो समझना है डेफिनेटली इंश्योर करना है कि पूरी कंसंट्रेशन के साथ शुरुआत से
लेके अंत तक आप इन लेक्चर को देखोगे बाकी ये जो मैं आपको पीडीएफ प्रोवाइड करूंगा जहां मैं आपको नोट्स दूंगा उनको आपने
प्लीज आपने रिवाइज करना है अपने एंड पे एंड जो मैं क्वेश्चंस करवा रहा हूं मेंस के प्रैक्टिस क्वेश्चन कर रहा हूं उनके
साथ भी आपने जुड़े रहना है तो आप लोगों की मेरे से एक्सपेक्टशंस हैं मैं इनको फुलफिल करने की कोशिश करूंगा मेरी आप लोगों से
एक्सपेक्टशंस है आप मेरे साथ इन चीजों को फुलफिल कर देंगे तो आई थिंक ये रिश्ता बहुत बढ़िया ढंग से चलेगा ठीक है इसके
अलावा देखो एक मेरी फेवरेट लाइन है इकॉनमी इज टेक्निकल बट नॉट टफ तो मेरी कोशिश यही है कि इन लेक्चर सीरीज के माध्यम से
इकॉनमी जो आप लोगों को थोड़ी मुश्किल लगती है वो मुश्किल ना लगे एंड जो टेक्निकल कांसेप्ट हैं उनको हम यहां पे हर चीज को
डिस्कस करते रहेंगे आप आपको कोई भी लेक्चर मेरा अच्छा लगे आप उसमें यह लाइन लिख दीजिएगा मैं समझ जाऊंगा कि आप लोगों को
लेक्चर पसंद आ गया है राइट तो स्टार्ट करें फिर आज के सेशन को यस थोड़ा सा इकॉनमी की पहले इंपॉर्टेंस जान लेते हैं
जैसे मैंने कहा था थोड़ा हमें सिलेबस समझना है थोड़ी और चीजें समझनी है अब इकॉनमी की जब मैं बात करता हूं ना तो आप
एक बात नोटिस करो ये लगभग पिछले 9 साल का डाटा हमारे सामने है अगर मैं बात करता हूं ना इकॉनमी की तो पिछले कोई भी 9 साल आप
उठा के देख लो मिनिमम 14 क्वेश्चन तो हर साल आए ही आए हैं 14 से 18 की रेंज है यानी कि अगर टोटल 100 क्वेश्चंस आते हैं
ना हमारे सामने प्रीलिम्स के अंदर कम से कम 15 क्वेश्चन के आसपास रफल आपको देखने को मिल जाएंगे इकॉनमी से यानी कि 200 नंबर
में से 30 नंबर का पेपर तो यहीं से आता है इकॉनमी से ही और अगर आप लेक्चर को अच्छे से देखते हो आई कैन से दिस विथ फुल
कॉन्फिडेंस कि आप 90 पर एक्यूरेसी तो यहां पे ला ही सकते हो कभी-कभार एक आधा क्वेश्चन प्रीलिम्स में ऐसा आ जाता है जो
थोड़ा टफ होता है जो शायद करना मुश्किल हो बट उसके अलावा 90 से 95 पर क्वेश्चन तो आप डेफिनेटली इकॉनमी के टैकल कर ही सकते हो
इसमें विदाउट अ डाउट ये चीज हो जाएगी बस कोशिश वही करनी है जो एक्सपेक्टशंस दी हुई है उनको फुलफिल करना है बाकी और
सब्जेक्ट्स का भी दे रखा है तो डेफिनेटली पॉलिटी भी इंपॉर्टेंट है और सब्जेक्ट्स भी डेफिनेटली इंपॉर्टेंट है बट इकॉनमी का हर
साल 15 16 क्वेश्चंस के करीब-करीब आना ये लगभग तय ही है चलो ठीक है अब दोस्तों बात करें मेंस की क्या मेंस में भी इंपॉर्टेंस
है बिल्कुल जब मैं बात करता हूं जनरल स्टडीज पेपर थ्री की ये पिछले 2023 साल का दिया हुआ है पर इससे पीछे भी आप कभी भी
चले जाओ आपको हर साल रिलाइज होगा कि हर साल होता क्या है हर साल दरअसल में 250 मार्क्स में से 40 पर जो पेपर होता है वो
इकॉनमी और एग्रीकल्चर को मिलाकर आता है हम दोनों डिस्कस करेंगे इकॉनमी भी डिस्कस करेंगे एग्रीकल्चरल कांसेप्ट भी डिस्कस
करेंगे यानी कि 250 में से जो 100 नंबर का पेपर होता है ना रफ ली वो हर साल 100 नंबर का पेपर मेंस में से वो इकॉनमी और
एग्रीकल्चर से ही आता है तो ये लेक्चर सीरीज की इतनी इंपॉर्टेंस होने वाली है आपके प्रीलिम्स के लिए तो समझा दिया मैंने
30 नंबर का पेपर हर साल प्रीलिम्स में एंड यहां पर लगभग 100 नंबर का पेपर आपका में देखने को मिल जाता है एंड अगर बात करें
हमारी थर्ड स्टेज इंटरव्यू की तो इंटरव्यू में भी बहुत सारे क्वेश्चंस पूछे जाते हैं जो इकॉनमी के साथ लिंक्ड होते हैं ठीक है
सर यह बात तो समझ आई थोड़ा सा मैं आपको सिलेबस बता देता हूं अगर मैं बात करता हूं आपके प्रीलिम्स की तो प्रीलिम्स में आपका
सिलेबस ये मेंशन है इकोनॉमिक एंड सोशल डेवलपमेंट सस्टेनेबल डेवलपमेंट पॉवर्टी इंक्लूजन डेमोग्राफिक सोशल सेक्टर
इनिशिएटिव एटस बस इतना ही मेंशन है प्रीलिम्स का सिलेबस आपके यूपीएससी सीएससी ने जो दिया हुआ
ठीक है अब इसको पढ़ के तो सर बहुत ज्यादा कुछ समझ नहीं आ रहा ये तो बस डेढ़ लाइन दी हुई है यूपीएससी ने इसको देख के हम कैसे
बता पाएंगे तो यहां पर रोल आ जाता है कि हमारी जो अप्रोच होनी चाहिए वो हमें पी वाई क्यूज हमें हेल्प करेंगे समझने के लिए
कि किस तरह यूपीएससी क्वेश्चंस पूछता है देखो यूपीएससी के कुछ क्वेश्चन ऐसे होते हैं जो प्योर कांसेप्चुअल अंडरस्टैंडिंग
के ऊपर बेस्ड होते हैं मैं आपको एक एग्जांपल देता हूं जैसे यहां पर आप नोटिस कर पाओगे ये आपके सामने क्वेश्चन है यहां
पर पूछा गया कि जो आरबी ई है इट वर्क्स एज लेंडर ऑफ लास्ट रिजॉर्ट ये प्योर आपका कांसेप्चुअल क्वेश्चन है अगर आपने
कांसेप्ट अच्छे से समझा हुआ है तो यह क्वेश्चन आप चुटकियों में कर लोगे तो एक तो कुछ क्वेश्चन ऐसे आते हैं जो कांसेप्ट
के ऊपर बेस्ड होते हैं इसके अलावा अगर मैं बात करूं कुछ क्वेश्चन ऐसे होंगे जो करंट अफेयर से इंस्पायर्ड होंगे करंट में
क्या-क्या चीजें चल रही हैं मान लो कुछ रेपो रेट इंक्रीज हुआ तो उसका क्या इफेक्ट हमें देखने को मिला वैसा क्वेश्चन
यूपीएससी अपने एग्जाम में पूछ लेगा कुछ और आरबीआई के द्वारा या और आपका एनपीसीआई के द्वारा कुछ नया टिव आता है उसके ऊपर
क्वेश्चन पूछ लेगा प्लस एट द सेम टाइम आप जानते होंगे जो बजट होता है अभी कुछ दिन पहले हमारी फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला
सीतारमन जी के द्वारा बजट पेश किया गया तो उस बजट के अंदर क्या-क्या अनाउंसमेंट्स हुई है क्या-क्या बारे में डिस्कशन हुआ है
वहां से यूपीएससी क्वेश्चन पूछ लेता है इसके साथ मैं बात करूं आपका एक बहुत इंपॉर्टेंट डॉक्यूमेंट आता है इकोनॉमिक
सर्वे का इकोनॉमिक सर्वे एक तरह के इकोनॉमिक्स के बच्चों के लिए बाइबल है गीता है राइट तो उससे आपको पढ़ना पड़ेगा
मैं आपके साथ डिस्कस कर लूंगा इकोनॉमिक सर्वे भी उसमें बहुत अच्छे से कांसेप्ट डिस्कस किए होते हैं तो उनको भी हम
समझेंगे राइट दैट इज वन ऑफ द की एरियाज जहां से यूपीएससी सवाल पूछता है कुछ टर्मिनोलॉजी होती है टर्म्स के ऊपर
क्वेश्चन पूछ लेता है राइट या फिर इनमें से किसी चीज का कॉमिनेशन कि कांसेप्ट के साथ करंट अफेयर्स को इंटीग्रेट कर दिया
इकोनॉमिक सर्वे में कुछ डाटा दिया था उसको स्टैटिक पोर्शन के साथ लिंक कर दिया ऐसे कुछ कॉमिनेशन के वाले क्वेश्चंस हमें
देखने को मिल जाते हैं जो कि यूपीएससी हमसे पूछता है ठीक है कुछ एक एग्जांपल जैसे मैं मैं आपको बता रहा हूं जैसे ये
क्वेश्चन था ये चीज थोड़ी करंट अफेयर्स से इंस्पायर्ड है यहां पर जैसे पूछा गया है कि रुपया का जो गिर रहा है हमारा कई बार
आप न्यूज़पेपर में पढ़ते भी होंगे कि रुपया नीचे गिर रहा है नीचे गिर रहा है डॉलर मजबूत हो रहा है रुपया कमजोर हो रहा
है ये जो चीज है राइट ये करंट अफेयर से थोड़ा सा इंस्पायर्ड है बाकी हालांकि हम स्टैटिक में पढ़ते हैं पर क्योंकि करंट
में ये बहुत ज्यादा न्यूज़ में रही होगी उस समय तो इसके ऊपर क्वेश्चन पूछ लिया इसके अलावा अगर मैं और बात करूं जैसे कुछ
क्वेश्चन ऐसे होते हैं जो थोड़े अ करंट अफेयर्स के भी होते हैं क्योंकि ये कोल्स के रिगार्डिंग उस समय काफी सारे चेंजेज आए
थे प्लस एट द सेम टाइम थोड़े से लॉजिकल भी होते हैं जहां पर कुछ लॉजिक के इस्तेमाल से हम क्वेश्चंस तक पहुंच पाएंगे
जैसे-जैसे आगे हम क्वेश्चंस करते रहेंगे ना मैं आपको बताता रहूंगा लॉजिक भी कहां-कहां पे अप्लाई करना है कहां-कहां पे
स्टैटिक और करंट नॉलेज को आपको अप्लाई करना है ठीक है तो ये सारे एग्जांपल्स तो हो गए हमारे प्रीलिम्स के लिए राइट अब
प्रीलिम्स वाले ऐसे ही और क्वेश्चंस भी हैं बट इनको हम आगे डिस्कस करेंगे जब इंडिविजुअल टॉपिक्स हम डिस्कस करेंगे तो
ऐसे कुछ क्वेश्चंस आते हैं ठीक है ये बात तो हुई हमारी प्रीलिम्स की अप्रोच की अब अगर मैं बात करूं दोस्तों मेंस की अब देखो
मेंस में अच्छी बात पता क्या है मेंस में अच्छी बात ये है कि पूरा का पूरा सिलेबस यूपीएससी ने वर्ड बाय वर्ड मेंशन कर रखा
है प्रिलिम्स में तो डेढ़ लाइन थी ना यहां पर बहुत डिटेल में मेंशन है कैसे सर देखो यहां पर जो पॉइंट्स यूपीएस वगैरह मेंशन है
वो ये है कि हमें इंडियन इकॉनमी के रिगार्डिंग जो इश्यूज हैं जैसे प्लानिंग मोबिलाइजेशन ऑफ रिसोर्सेस ग्रोथ डेवलपमेंट
एंप्लॉयमेंट इनके रिगार्डिंग पता होना चाहिए अब यह कुछ चीजें मैंने यहां पे आपके सामने हाईलाइट कर रखी हैं डायरेक्ट इनके
ऊपर क्वेश्चन आ जाता है कई बार क्वेश्चन आया है ग्रोथ के ऊपर काफी बार क्वेश्चन डेवलपमेंट के ऊपर आया है क्वेश्चन इसके
ऊपर आ रखा है कि आखिर इंक्लूसिव ग्रोथ क्या होती है क्या इंडिया में ऐसा ग्रोथ प्रोसेस चल रहा है या नहीं चल रहा एंड
कैसे हम इसको ला सकते हैं ऐसे क्वेश्चन आए हुए हैं गवर्नमेंट बजटिंग के ऊपर क्वेश्चन आए हुए हैं आई थिंक 2021 के पेपर में
कैपिटल और रेवेन्यू के बीच में अंतर बता पूछा गया था लिबरलाइज का क्या इफेक्ट है आपकी इकॉनमी के अंदर इंफ्रास्ट्रक्चर के
अंदर बहुत सारे क्वेश्चन आते हैं जैसे आपके एनर्जी के रिगार्डिंग राइट रिन्यूएबल एनर्जी के बारे में कई बार पूछ लेता है
हाइड्रोजन एनर्जी के बारे में पूछ लेता है उसके अलावा अगर मैं बात करूं बाकी और सेक्टर्स आपके रोड्स रेलवेज एयरपोर्ट्स
इनके ऊपर क्वेश्चन आ जाते हैं आपका इन्वेस्टमेंट मॉडल ये सारा सिलेबस आपका इकॉनमी का है मेंस के पर्सपेक्टिव से सर
क्या ये सारा का सारा सिलेबस हम पढ़ेंगे आंसर इज यस हर एक कॉम्पोनेंट को हम अच्छे से डिटेल में डिस्कस करते रहेंगे आने वाले
लेक्चर के अंदर ये था इकॉनमी वाला पार्ट मैंने आपको बताया था कि हर साल मेंस में 100 नंबर का पेपर आता है जहां पर कुछ
पार्ट इकॉनमी का होता है वो वाला पार्ट ये रहा उसके अलावा जो बाकी पार्ट होता है वो होता है हमारा एग्रीकल्चर वाला पार्ट अब
एग्रीकल्चर में भी सिलेबस दे रखा है और एग्रीकल्चर में अभी दो मिनट बाद ही मैं आपको बताऊंगा कि एग्रीकल्चर में इतनी
ज्यादा रेपुटेशन देखने को मिलती है ना कि आप बोलोगे यार ये तो डायरेक्टली क्वेश्चन यूपीएससी सिलेबस से ही पूछ रहा है जैसे
एग्रीकल्चर में सिलेबस क्या है मेजर क्रॉप्स कैसी हैं क्या-क्या क्रॉपिंग पैटर्न होता है अक्रॉस द कंट्री बाकी इसके
अलावा अगर मैं बात करूं स्टोरेज ट्रांसपोर्टेशन मार्केटिंग के रिगार्डिंग क्या-क्या इश्यूज आते हैं इसके अलावा
हमारी जो डायरेक्ट एंड इनडायरेक्ट फार्म सब्सिडीज होती हैं हमारा एमएसपी होता है इसकी वजह से क्या इश्यूज आते हैं हमारा जो
पीडीएस है पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम उसकी वजह से किस तरह के इशू आते हैं यह सारा हमारा सिलेबस है इसके अलावा भी कुछ
एक पार्ट्स हैं एनिमल रेयरिंग हो गया इसके अलावा आपका लैंड रिफॉर्म्स की बात कर लीजिए फूड प्रोसेसिंग की बात कर लीजिए अप
स्ट्रीम एंड डाउन स्ट्रीम की बात कर लीजिए राइट क्या-क्या रिक्वायरमेंट्स होती है यह सारा का सारा सिलेबस हम यहां पर पढ़ेंगे
अब मैंने आपको एग्रीकल्चरल सिलेबस इतनी डिटेल में इसलिए बताया क्योंकि यहां से क्वेश्चंस अक्सर पूछ लिए जाते हैं ये कुछ
क्वेश्चंस है जो यूपीएससी ने मेंस 2023 में पूछे थे इनको आप डेफिनेटली देख सकते हो इस तरह जैसे एमएसएमई के ऊपर क्वेश्चन
है डिजिटलाइजेशन के ऊपर क्वेश्चन है बेरोजगारी के ऊपर क्वेश्चन है केयर इकॉनमी मोनेटाइज इकॉनमी ये न्यूज़ में रहते हैं
उनके ऊपर क्वेश्चन है राइट और ये कुछ क्वेश्चन आपके एग्रीकल्चर के बारे में है ठीक है अब यहां पर एक्चुअल में देख इकॉनमी
का सिलेबस डेफिनेटली काफी ज्यादा है एंड उससे क्वेश्चन भी आते हैं पर एग्रीकल्चर की जब मैं बात कर रहा हूं ना तो क्वेश्चन
बहुत ही पर्टिकुलर आते हैं जैसे ई टेक्नोलॉजी पे क्वेश्चन पूछ लिया यहां पर आपसे क्वेश्चन पूछ लिया लैंड रिफॉर्म्स के
बारे में यहां पर पूछ लिया क्वेश्चन क्रॉपिंग पैटर्न के बारे में यहां पर पूछ लिया क्वेश्चन डायरेक्ट एंड इनडायरेक्ट
सब्सिडीज के बारे में चार क्वेश्चन आए ना एग्रीकल्चर से 2023 में अब ये चारों के चारों वर्ड्स आपको सिलेबस में डिट्टो मिल
जाएंगे मैं आपको दिखाता हूं जैसे ये देखो लैंड रिफॉर्म्स पे एक क्वेश्चन आया था ये देखो साफ-साफ लिखा हुआ है लैंड रिफॉर्म्स
इन इंडिया उसके अलावा एक क्वेश्चन था डायरेक्ट एंड इनडायरेक्ट फार्म सब्सिडीज के बारे में ये देखो सिलेबस में एज इट इज
पूछा गया है क्रॉपिंग पैटर्न कैसे कैसे चेंज आया ये एक क्वेश्चन पूछा गया है राइट एक क्वेश्चन था ई टेक्नोलॉजी के बारे में
ये भी एज इट इज मेंशन किया गया है तो एक्चुअल में एग्रीकल्चर में सबसे बढ़िया चीज यही है डायरेक्ट आपके सिलेबस से ही एज
इट इज क्वेश्चंस पूछने को मिल जाते हैं इनका हम इतना डिटेल में इतना अच्छे से डिस्कस करेंगे ना कि ये वाले पार्ट्स में
आपको कोई दिक्कत आने ही नहीं वाली और ये सिर्फ 2023 की बात नहीं है आप अगर उससे पीछे जाओगे ना तो सेम चीज देखने को मिलेगी
मैं आपको एग्जांपल देता हूं जैसे ये एग्रीकल्चर की बात कर रहा था यहां पर आप नोटिस करो जैसे 2022 में सवाल पूछा फूड
प्रोसेसिंग इंडस्ट्री के स्कोप एंड सिग्निफिकेंट के ऊपर ठीक है अब ये देखो यहां पे नोटिस करना ये रहा आपका फूड
प्रोसेसिंग इंडस्ट्री व्हाट इज द स्कोप एंड सिग्निफिकेंट ये पूरा का पूरा एज इट इज
आपके सिलेबस में लिखा गया है एंड यही क्वेश्चन 2022 में यूपीएससी ने हमसे पूछ लिया उसके अलावा पूछा गया था 2020 में
पूछा गया था फूड प्रोसेसिंग सेक्टर के क्या चैलेंज होते हैं क्या अपॉर्चुनिटी होती हैं ये भी सिमिलर लाइंस पे है मतलब
मैं ये नहीं कह रहा कि चारों क्वेश्चन सेम है पर सिमिलर लाइंस के ऊपर है उसके अलावा 2019 में क्वेश्चन पूछा गया कि चैलेंज को
टैकल करने के लिए सरकार की क्या पॉलिसी है एंड 2017 में भी एक सिमिलर क्वेश्चन पूछा गया तो यहां पर आपने नोटिस किया कैसे
थीम्स रिपीट हो रही है इसके अलावा 2019 में एक क्वेश्चन आया था इंटीग्रेटेड फार्मिंग सिस्टम के ऊपर कि क्या होता है
एंड कैसे मददगार है छोटे किसानों के लिए एंड सेम यही क्वेश्चन 2022 में पूछा गया तो सिमिलर क्वेश्चन यहां पर भी है तो यहां
पर भी थीम्स रिपीट हो रही है इसके अलावा माइक्रो इरिगेशन हो गया या वाटर एफिशिएंसी हो गया इसके ऊपर भी बार-बार यूपीएससी ने
क्वेश्चन पूछा हुआ है तो आप एक चीज रिलाइज कर रहे हो कि अगर हमने यूपीएससी का जो सिलेबस है मेंस के पर्सपेक्टिव से अच्छे
से पढ़ा उसको अच्छे से समझा अच्छे से प्रैक्टिस किया तो डेफिनेटली हमें मेंस वाले पश्न के अंदर कोई दिक्कत नहीं आने
वाली इंपॉर्टेंट यही है कि हर चीज का कंटेंट हमारे पास रेडी होना चाहिए हर चीज को हमने अच्छे से समझा होना चाहिए अच्छे
से पढ़ा होना चाहिए तो ये क्वेश्चन हम बहुत आराम से कर पाएंगे राइट यह होगी हमारी कंप्लीट
डिस्कशन हमारे सिलेबस के बारे में हमने क्याक टॉपिक्स पढ़ने थे उनके बारे में अब एक काम करते हैं हम चलते हैं अपने टॉपिक्स
की तरफ एकएक करके हर टॉपिक को हम समझने की कोशिश करते हैं हां जी ठीक है और भी कुछ ऐसी थीम्स है
बट ठीक है अब स्टार्ट करते हैं अपने टॉपिक से जैसे आपकी बुक में मेंशन भी है हम इकोनॉमिक्स को समझने की कोशिश करते हैं कि
आखिर इकोनॉमिक्स होती क्या है इकोनॉमिक्स दरअसल में ना आपके एक ग्रीक वर्ड से आपको देखने को मिली
है राइट अब य जो ग्रीक वर्ड था ट वास इकोनॉमिक्स ठीक आपको ध्यान में नहीं रखना आपको समझाने के लिए कोशिश कर रहा हू
अब यह जो ग्रीक वर्ड था इसका अर्थ ही यही था कि हाउसहोल्ड मैनेजमेंट के बारे में वहीं से वर्ड आया है आपका इकोनॉमिक्स
क्या है वर्ड हाउसहोल्ड मैनेजमेंट एक्चुअल में आप लोग एक चीज समझो यार जब मैं बात करता हूं इकोनॉमिक्स की
व्ट एटली इ इकोनॉमिक्स आप में से कई बच्चों को लगता होगा यार कि सर पैसों की बात होगी बैंकिंग की बात होगी फाइनेंस की
बात होगी आप लोग सही हो इकोनॉमिक्स के अंदर यह सब चीजों की बात होती है इसमें कोई डाउट
की बात नहीं है बट आप लोगों को जो बात ध्यान में यह रखनी है कि इकोनॉमिक्स से काफी ज्यादा बड़ी टर्म है क्या कहा मैंने
हर एक चीज जो आप जिंदगी में ले रहे हो ना हर एक फैसला जो आप जिंदगी में कर रहे हो वो कहीं ना कहीं इकोनॉमिक्स है आप पूछेंगे
सर वो कैसे उसका बहुत ही सिंपल सा तरीका है आप एक चीज रिलाइज करो जैसे आप लोग मेरा ये लेक्चर देख रहे हो
अभी आज के समय राइट अब यह भी आपका एक फैसला है ये भी आपका एक इकोनॉमिक डिसीजन हुआ आप पूछेंगे वो कैसे देखो अगर आप मेरा
ये लेक्चर ना देख रहे हो तो आप बहुत कुछ कर सकते थे आप किसी और का लेक्चर देख सकते थे बट नहीं आपने मेरा लेक्चर देखा आपने
किसी और का लेक्चर नहीं देखा या आप इस टाइम कुछ बाहर घूम सकते थे किसी मॉल में घूम सकते थे कोई मैच देख सकते थे एनीथिंग
यू कुड हैव डन एनीथिंग इन दिस पर्टिकुलर टाइम बट आपने वो चीज ना करके यह चीज करी पता है क्यों क्योंकि आपको इस चीज में
ज्यादा बेनिफिट दिखता है ज्यादा यूटिलिटी दिखती है तो हमने जो फैसला किया हमने क्यों फैसला लिया जो भी फसा लिया वो इसलिए
लिया क्योंकि हमें उससे ज्यादा बेनिफिट दिखता है तो इकोनॉमिक्स भी कुछ नहीं है इकोनॉमिक्स जब बात करते हाउसहोल्ड
मैनेजमेंट की इसका मतलब भी यही है हम वो फैसला करते हैं जिससे हमें ज्यादा बेनिफिट होता हुआ देखने को मिले कभी भी आप एक
फैसला लेते हो ना तो उसका मतलब यह है कि आपने बाकी कुछ चीजों को छोड़ दिया आपने पीडब्ल्यू ओनली इस के साथ पढ़ना क्यों चूज
किया क्योंकि आपको लगता है यार बाकी जगह से कंपैरिजन में यहां बढ़िया पढ़ाया जा रहा है यहां हमारी जो अंडरस्टैंडिंग है वो
बढ़िया होगी आर यू गेटिंग माय पॉइंट इसी चीज का अर्थ होता है इकोनॉमिक्स पहली चीज तो यह बात समझ आनी चाहिए अब एक
जो चीज बच्चे अक्सर कंफ्यूज होते हैं वोह होते हैं इकॉनमी और इकोनॉमिक्स के बीच में काफी लोगों को लगता है कि शायद यह दोनों
टर्म सेम पर ऐसा है नहीं देखो मैंने आपको मीनिंग किसका समझाया इकोनॉमिक्स का इकोनॉमिक्स का मैं सिंपली एक लाइन में अगर
आपको बताने की कोशिश करूं इकोनॉमिक्स इ नथिंग बट द स्टडी ऑफ चॉइस जैसा मैंने आपको बोला था आपने मेरा लेक्चर देखना पसंद किया
ए क एनी अदर लेक्चर यह भी आपकी एक चॉइस है आपने यह चॉइस क्यों ली क्योंकि आपको इस चॉइस की वजह से ज्यादा बेनिफिट या ज्यादा
यूटिलिटी आपको देखने को मिलती है यूटिलिटी मतलब खुशी कह लो बेनिफिट कह लो जो भी आप कहना चाहो इस लेक्चर से आपको ज्यादा
यूटिलिटी देखने को मिलती है आपको ऐसा लगता है इसी का नाम है इकोनॉमिक्स अब यहां पर आप एक बार नोटिस करो हर किसी इंसान के पास
या दुनिया में एक्चुअल में ना जो रिसोर्सेस होते हैं वो वो हमारे क्या होते हैं वो हमारे लिमिटेड रिसोर्सेस होते हैं
वेयर एस ऑन द अदर हैंड जब मैं बात करूं हमारी नीड्स की हमारी या वांट्स की बात कर लेते हैं हमारी वांट्स क्या है हमारी
वांट्स होती है अनलिमिटेड हमें चाहिए दुनिया में सब कुछ चाहिए वी वांट एवरीथिंग इन द वर्ल्ड ठीक बात है पर हम हर चीज ले
नहीं सकते क्यों सर या तो पैसे की कमी है या दुनिया में रिसोर्सेस की कमी है रिसोर्सेस क्या होते हैं जैसे हर चीज एक
रिसोर्स ही है जैसे फॉर एग्जांपल लैंड एक रिसोर्स है राइट कैपिटल एक रिसोर्स हुआ उसी तरह से जंगल हमारे एक रिसोर्सेस है हम
चाहते तो बहुत कुछ है हमारे पास गाड़ी हो बंगला हो बैंक बैलेंस हो है ना हमें सब कुछ चाहिए तो सब कुछ पर सब कुछ तो नहीं ले
सकते क्योंकि रिसोर्सेस लिमिटेड होते हैं पर हमारी नीड्स अनलिमिटेड होती है इसी चीज को हम कैसे मैनेज कर सकते हैं कि लिमिटेड
नीड्स सॉरी लिमिटेड रिसोर्सेस के साथ हम अपनी कुछ एक वांट्स को हम कैसे पसू कर सकते हैं इसी का नाम है इकोनॉमिक्स अब आप
लोगों के जो मैं एग्जांपल दे रहा था आप लोगों के पास एक रिसोर्स है उस रिसोर्स का नाम क्या है टाइम समय समय सबके पास
अनलिमिटेड नहीं होता समय लिमिटेड होता है है ना समय लिमिटेड है व्हाट इज टाइम टाइम इज अ रिसोर्स टाइम वक्त क्या है एक
रिसोर्स है अब इस वक्त के अंदर आप कुछ ही चीजें कर सकते हो या तो मेरा लेक्चर देख सकते हो या गर्लफ्रेंड के साथ घूम सकते हो
पर आपने क्या चूज किया आपने कहा नहीं सर गर्लफ्रेंड के साथ बाद में घूम लेंगे अभी आपका लेक्चर देख लेते हैं क्यों क्योंकि
आपको मेरा लेक्चर देखने से ज्यादा यूटिलिटी फील हो रही है आपको ज्यादा बेनिफिट इससे फील हो रहा है आर यू गेटिंग
माय पॉइंट यही तो था हाउसहोल्ड मैनेजमेंट यही तो था स्टडी ऑफ चॉइसेज आपने एक चूज चुनकर दूसरी चूज नहीं चुनी क्यों क्योंकि
आपके पास रिसोर्सेस लिमिटेड थे आपने उन रिसोर्सेस लिमिटेड के साथ कैसे अपनी वांट्स को कुछ हद तक फुलफिल करने की कोशिश
करी जहां पर आपको ज्यादा बेनिफिट देखने को मिले एज कंपेयर्ड टू अदर इज नोन एज इकोनॉमिक्स तो जिंदगी में हम कोई भी फैस
लेते हैं आई रिपीट कोई भी फैस लेते हैं वो दरअसल में आपका इकोनॉमिक डिसीजन ही होता है है क्योंकि जब भी आप कोई एक फैसला लेते
हो आप कहीं ना कहीं ऑटोमेटिक फैसला लेते हो कि आपको बाकी चीजें नहीं करनी गेटिंग द पॉइंट तो यही होता है आपका इकोनॉमिक्स
इकोनॉमिक्स इज नथिंग बट द स्टडी ऑफ चॉइस या जिसको हमने देखा कि कहां से इसका ओरिजन कहां से आया था हमारे हाउसहोल्ड मैनेजमेंट
से यह चीज सर हमें समझ आ चुकी है ठीक बात फिर सर यह बात तो आपने समझा दी इकोनॉमिक्स पर यह समझ नहीं आया कि इकॉनमी क्या होती
है देखो इकॉनमी कुछ नहीं है आपकी इकोनॉमिक्स का ही इट इज जब वो एक्शन में लाई जाती है उसको हम इकॉनमी बोलते
हैं मतलब बेसिकली अगर मैं सिंपली बोलू इकोनॉमिक्स इन एक्शन इज टर्म्ड एस
इकॉनमी क्या मतलब इस चीज का जैसे मान लो मैं बोलता हूं भारतीय अर्थव्यवस्था इंडियन इकॉनमी तो यहां पर पता क्या हुआ
इकोनॉमिक्स को आप एक्शन में लेकर आए आप रियल लाइफ में उसको इंप्लीमेंट करने के लिए लेकर आए आपने बोला अमेरिकन इन इकॉनमी
या यूएस इकॉनमी इसी चीज को बोलते हैं हम इकॉनमी जब भी इकोनॉमिक्स एक्शन में आती है ना उसको हम इकॉनमी बोल देते हैं अगर आपने
नोटिस किया होगा यूपीएससी का सिलेबस तो यूपीएससी के सिलेबस में वर्ड पता है क्या यूज है इंडियन इकॉनमी हमें ये चीजें
ज्यादा पढ़नी है कि कैसे वो एप्लीकेशन में आ रही है कैसे वो एक्शन में चीज देखने को मिलती है यहां से भी कुछ एक क्वेश्चन आते
हैं हम इसको भी पढ़ेंगे बट ज्यादा जो फोकस होना चाहिए वो इधर होना चाहिए ठीक है तो एक्चुअल में क्या हुआ अगर मैं आपको
इकोनॉमिक्स और इकॉनमी की बात करूं एक तो मैंने आपको ये चीज बता दी कि किस तरह से हमारे पास अनलिमिटेड वांट्स होती हैं और
हमारे पास रिसोर्सेस लिमिटेड होते हैं इनका बैलेंस करना ही अपने आप में हमें इकोनॉमिक्स बोल देते हैं कि कैसे जो
स्कार्स स्कार्स का मतलब होता है कमी दुनिया में रिसोर्सेस की कमी है स्कार्स का मतलब क्या है कमी दुनिया में रिसोर्सेस
की जो कमी होती है या लिमिटेड रिसोर्सेस होते हैं उन लिमिटेड रिसोर्सेस को हम कैसे यूज किया जाता है लोगों के द्वारा
सोसाइटीज के द्वारा ताकि वो अपनी डिमांड्स को मीट कर पाए अभी वर्ड्स पे आऊंगा माइक्रो मैक्रो के ऊपर पर अभी हमने
इकोनॉमिक्स को समझ लिया और इकोनॉमिक्स क्या थी इट इज द स्टडी ऑफ सॉरी इकॉनमी क्या थी इट इज अ स्टडी ऑफ इकोनॉमिक्स एशन
जैसे कि हो गया हमारा भारतीय अर्थव्यवस्था या इंडियन इकॉनमी तो पहली बात तो हमें इकोनॉमिक्स समझ आ गया हमें इकॉनमी और
इकोनॉमिक्स का अंतर भी समझ आ चुका है बहुत बढ़िया अब हमें यहां पर दो चीजें समझनी है एक है माइक्रो एक है मैक्रो देखो जब भी आप
कभी कहीं भी वर्ड सुनते हो ना माइक्रो या आप आप ये वर्ड सुनते हो मैक्रो क्या मतलब हुआ सर इस चीज का कहां
पर आपने कभी सुना माइक्रो वर्ड या मैक्रो वर्ड कई बार आपने सुना होगा माइक्रो मैनेज करना या मैक्रो मैनेज करना राइट माइक्रो
का मतलब होता है छोटा मैक्रो को होता है बड़े लेवल के ऊपर फॉर एग्जांपल जैसे मान लो अब यार मेरा भी तो घर है है ना मैं मैं
भी एक फैमिली में रहता हूं या मैं खुद के अपने फाइनेंस देखता हूं सिंपली मैं कुछ पैसा कमाता हूं कहीं पर पैसे खर्च करता
हूं राइट तो मेरा भी तो कुछ इकोनॉमी हुआ मेरी भी तो इकोनॉमिक्स की कुछ चीजें हुई अब यह
ना बहुत छोटे लेवल पर काम हो रहा है बहुत छोटे लेवल के ऊपर या और एग्जांपल देता हूं जैसे फिजिक्स वाला है फिजिक्स वाला एक
कंपनी है हम भी कहीं से पैसा कमाते हैं हम भी कहीं प पैसा खर्च करते हैं और भी बहुत सारे पैसे लेने पड़ते हैं जब भी हम ना ऐसे
किसी इंडिविजुअल यूनिट की बात करते हैं एक इंडिविजुअल की बात करते हैं एक फर्म की बात करते हैं तो वो बहुत ही छोटे लेवल के
ऊपर हम बात कर रहे हैं जब इस तरह से एक छोटे लेवल के ऊर चीजों की बात करी जाए ना उसको हम बोल देंगे माइक्रो इकोनॉमिक्स
वर्ड क्या है आगे तो इकोनॉमिक्स ही लगना है माइक्रो का मतलब छोटा था और उसी के साथ हमने लिंक कर दिया वेयर एज ऑन द अदर हैंड
अगर मैं बात करूं पूरे देश की लेट्स से मैं बात कर रहा हूं कि यार देश की जीडीपी इतने परसेंट से बढ़ेगी घबराना नहीं है अगर
आपने जीडीपी वर्ड पहले नहीं सुना मैं एक्सप्लेन करूंगा आने वाले चैप्टर्स के अंदर पर मैं कह रहा हूं कि देश की
अर्थव्यवस्था इस तरह से काम कर रही है देश में महंगाई इतने परसेंट से बढ़ गई अब यहां पर आप नोटिस कर रहे हो मैं एक बहुत बड़े
लेवल के ऊपर बात कर रहा हूं है कि नहीं पूरे देश की अर्थव्यवस्था की बात कर रहा हूं जब भी किसी चीज की बात ऐसे बहुत बड़े
लेवल के ऊपर होगी उसको हम बोल देंगे मैक्रो इकोनॉमिक्स आर यू गेटिंग द डिफरेंस माइक्रो मतलब छोटा मैक्रो मतलब बड़ा तो इस
तरह से हम दोनों को डिफरेंशिएबल माइक्रो इकोनॉमिक्स जो होगा वो डील करता है किसके साथ आपके डिसीजन
मेकिंग के साथ किसके डिसीजन मेकिंग आपके इंडिविजुअल इकोनॉमिक एजेंट्स की जैसे कोई कंपनी कुछ प्रोड्यूस कर रही है कोई कूमर
किसी चीज को खरीद रहा है जब उनके एक्शंस को हम यहां पे स्टडी करते हैं उनके डिसीजन मेकिंग को हम स्टडी करते हैं दैट इज
माइक्रो इकोनॉमिक्स ऑन द अदर हैंड मान लो एक देश के लेवल के ऊपर हम एग्रीगेट आउटपुट या जीडीपी या नेशनल इनकम इन चीजों को
स्टडी करते हैं दैट बिकम व्हाट मैक्रो इकोनॉमिक्स तो सिंपली अगर मैं आपको एग्जांपल से समझाने करूं यहां पर आप नोटिस
करोगे एक इंडिविजुअल एक हाउसहोल्ड एक घर हो गया एक फर्म हो गया जब भी हम इनको स्टडी करते हैं ना दैट कम्स अंडर माइक्रो
इकोनॉमिक्स जब भी हम बात करते एक सरकार की पूरी दुनिया की बात कर लेते हैं बात करते हैं नेशनल इनकम की तो उसका
हम मैक्रो इकोनॉमिक्स में इंक्लूड कर लेते हैं पहली बात तो हमें यह बात समझ आ जानी चाहिए अब देखो जब हम बात करते हैं
यूपीएससी की तो यूपीएससी के एग्जाम के लिए हमारे लिए मैक्रो इकोनॉमिक्स को समझना ज्यादा इंपॉर्टेंट है माइक्रो लेवल के ऊपर
थोड़ा ना उतना क्वेश्चंस यूपीएससी नहीं पूछ ता है क्योंकि हमें ना कल को आप जैसे आप डीएम बनोगे या आप कल को आगे फ्यूचर में
जाके सेक्रेटरी बनोगे तो आपको एक मैसिव लेवल के ऊपर फंक्शनिंग करनी पड़ती है तो आपको जो बड़ा चीजें सोचनी होती है ना वो
मैक्रो इकोनॉमिक लेवल के ऊपर ज्यादा सोचनी पड़ती है तो डेफिनेटली इंपोर्टेंट दोनों है पर यूपीएससी एग्जाम के लिए ज्यादा
इंपॉर्टेंट हमारे सामने मैक्रो इकोनॉमिक्स देखने को मिलता है माइक्रो से भी सवाल आते हैं पर कम आते हैं ज्यादातर सवाल आपके
मैक्रो इकोनॉमिक्स से ही आते हैं पहली बात तो आपको ये पता लग जानी चाहिए ठीक है यहां तक कोई इशू तो नहीं है बहुत बढ़िया अब आओ
थोड़ा और आगे आओ ठीक है ये भी थोड़ा सा और अंतर है अगर आप इसको पढ़ना चाहते हो माइक्रो मतलब छोटे छोटे कंपोनेंट्स इकॉनमी
के देखे जाते हैं इंडिविजुअल या बिजनेस डिसीजन को यहां पे ध्यान में रखा जाता है इंडिविजुअल इन्वेस्टर्स के लिए जैसे मान
लो मैं कंपनी में इन्वेस्ट करना चाहता हूं लेट्स से कंट्रीज के डिसीजन यहां पे हम स्टडी करते
हैं यहां पर ना फिस्कल एंड मॉनेटरी पॉलिसी डिसीजन इंपोर्टेंट हो जाते हैं फिस्कल का जब भी वर्ड आएगा ना आगे फिस्कल वर्ड आपको
हमेशा सरकार के साथ लिंक करना है किसके साथ गवर्नमेंट के साथ मान लो जैसे सरकार का बजट आया सरकार कितना खर्च कर रही है
सरकार कहां से टैक्स ले रही है वो सारे फिस्कल डिसीजन होते हैं मॉनेटरी डिसीजन की जब बात होगी आपको हमेशा सेंट्रल बैंक के
साथ डील करना है रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया आरबीआई क्या कर रहा है रेपो रेट को बढ़ा रहा है कम कर रहा है क्या है ये अलग से
अपने आप में चैप्टर्स हैं फिस्कल पॉलिसी भी मॉनेटरी पॉलिसी भी तो इनको डिस्कस करेंगे पर वो यहां पर हमें पढ़ने होंगे
मैक्रो इकोनॉमिक्स के अंदर मैक्रो इकोनॉमिक्स को इनकम थ्योरी के नाम से भी हम यहां पर जानते हैं ये एक बेसिक आईडिया
मिल गया हमें माइक्रो मैक्रो का राइट ठीक है ठीक है आगे बढ़ते हैं हां जी यस मैंने आपको एक टर्म सिखानी थी
स्कार्सिटी स्कार्सिटी का मतलब मैंने आपको बता ही दिया किसी भी चीज की कमी होना इज नोन ए स्कार्सिटी दुनिया में हर चीज की
कमी है हर रिसोर्स की कमी है मैंने आपको जैसा बताया टाइम भी आपका एक रिसोर्स था बिल्कुल था समय की कमी है दुनिया में दिन
में 24 ही घंटे बिल्कुल ठीक बात है दुनिया में ऐसा नहीं है कि इन्फिना पैसा है वो भी उसकी भी एक कमी हमें देखने को मिल जाती है
राइट तो हर चीज की दुनिया में हमें पेड़-पौधे भी हमें स्कार्स ही देखने को मिलते हैं हमारे कोयला हो गया पेट्रोलियम
हो गया स्कार्सिटी है हर चीज की राइट तो हमारे जो रि सोर्सेस होते हैं ना वो हमेशा क्या होते हैं स्कार्स उनके अंदर कमी होती
है वेर एज जैसे मैंने आपको कहा था हम जैसे चॉइस लेते हैं चॉइस क्या होती है किसी चीज को करना वर्सेस किसी चीज को ना करना उसी
को हम यहां पर चॉइस बोल देते हैं कि जब भी हमने आपने चूज किया इस लेक्चर को देखना दैट इज अ चॉइस राइट ये बेसिक टर्मिनोलॉजी
थी आई थिंक आपको पता होगा अब यहां पर ना कई बार बच्चे एक दो वर्ड्स के बीच में कंफ्यूज हो जाते हैं एक वर्ड है आपका नीड
और एक वर्ड है आपका वांट काफी लोगों को लगता है कि शायद दोनों सेम चीजें होंगी नहीं ऐसा है नहीं
देखो यार एक चीज समझना जैसे हम बात करते हैं कुछ ना एक इंसान की बेसिक नेसेसिटी होती है जैसे फॉर एग्जांपल आपका रोटी
कपड़ा मकान यह एक इंसान की जरूरत है नीड का मतलब क्या होता है जरूरत ही तो होता है तो जो आपका रोटी कपड़ा मकान हुआ राइट यह
ना एक बेसिक नीड है एक इंसान की ठीक है सर बिल्कुल सही बात है वेरस
हमारी वांट्स होती है वांट क्या होती है ख्वाइश है ना जैसे मेरा मन करता है कि यार मेरे पास एक
यानी कि क्लोथिंग भी दोनों में आ सकती है सिंपल क्लोथिंग है आपको कपड़ा चाहिए पहनने के लिए दैट इज अ नीड पर आप कहोगे मुझे
ब्रांडेड कपड़े चाहिए वो एक वांट बन जाती है तो आपको ना दोनों में फर्क करना आना चाहिए कि नीड क्या होती है एंड वांट क्या
होती है ये कुछ एक एग्जांपल और भी है जैसे क्लोथिंग हो गया ग्रोसरीज हो गया जो बेसिक एक्सपेंसेस हैं कुछ ऐसे खर्चे हैं जो एक
अच्छी जिंदगी जीने के लिए जरूरी होते हैं उनको बोलते हैं नीड्स वेयर एस अगर मान लो आपको कुछ मजेदार चीजें चाहिए हो ठीक है ना
आपको को प्लेन में जाना हो आपको ज्वेलरी चाहिए आपको लैपटॉप चाहिए आपको बाहर खाना खाने में बहुत मजा आता है रेस्टोरेंट्स
में अक्सर खाना खाने में बहुत मजा आता है तो ये सब आपके वांट्स बन जाते हैं तो ये क्लेरिटी आपको नीड्स और वांट्स के बीच में
होनी चाहिए ठीक है अब एक टर्म इसी के साथ और लिंक्ड है जिसका नाम है अपॉर्चुनिटी कॉस्ट क्या मतलब है इसका पहले मैं आपको
इसकी एक छोटी सी डेफिनेशन दे देता हूं अपॉर्चुनिटी कॉस्ट का मतलब होता है राइट अ पहले आप ना बेस्ट आपका आप समझना एक्चुअल
में क्या होता है आप ना नेक्स्ट बेस्ट अल्टरनेटिव सोचो किसी भी चीज
का क्या सोचो नेक्स्ट बेस्ट अल्टरनेटिव मैं आपको जो एग्जांपल दे रहा था कि अगर आप लोग मेरा लेक्चर ना देख रहे
होते तो आपके पास बहुत सारे ऑप्शंस होते क्या-क्या बताए थे कि आप मैच देख सकते हो गर्लफ्रेंड के साथ घूम सकते हो
बाहर कहीं जा सकते हो बहुत सारे काम कर सकते थे मेरा लेक्चर क्यों चूज किया था क्योंकि आप आपको यूटिलिटी सबसे ज्यादा
यहां पर दिख रही थी आपको सबसे ज्यादा खुशी या आपको ज्यादा सेटिस्फेक्शन इस लेक्चर से मिलती है इसलिए आपने यह चीज चूज करी बट
लेट्स से अगर यह ना कर रहे होते तो क्या कर रहे होते व्हाट इज द नेक्स्ट बेस्ट अल्टरनेटिव लेट्स से आपको सेकंड नंबर प
सबसे ज्यादा खुशी मिलती आफ्टर दिस लेक्चर वो अपनी गर्लफ्रेंड के साथ घूमने को भी मिलती तो वो बोलेंगे हम नेक्स्ट बेस्ट
अल्टरनेटिव अगर यह ना कर रहे होते तो क्या कर रहे होते अब हुआ क्या क्योंकि आपने मेरा लेक्चर देखा इसकी वजह से क्या हुआ आप
अपनी गर्लफ्रेंड के साथ घूमने नहीं जा पाए इसी चीज को बोलते हैं अपॉर्चुनिटी कॉस्ट आर यू गेटिंग माय पॉइंट तो अगर मैं आपको
एक छोटी सी आपको डेफिनेशन दूं आपकी अपॉर्चुनिटी कॉस्ट की तो आप इसकी एक सिंपल सी डेफिनेशन यहां पर लिख सकते हो कॉस्ट
ऑफ नेक्स्ट बेस्ट अल्टरनेटिव फॉर गन इसी को बोलते हैं क्या ऑर्च निटी कॉस्ट आर यू गेटिंग दिस पॉइंट
कॉस्ट ऑफ नेक्स्ट बेस्ट अल्टरनेटिव अल्टरनेटिव होता है इसकी जगह पे क्या तो अगर ये ना करके नेक्स्ट बेस्ट अल्टरनेटिव
क्या होता जो आपने फोर को कर दिया उसी को बोल दिया हमने अपॉर्चुनिटी कॉस्ट लेट्स से आपके पास दो ऑप्शन थे या तो आप बर्गर खा
लो या पिज़्ज़ा खा लो अब आप एक टाइम पे एक ही खा पाओगे तो आपको ना एक चीज फोर को करनी पड़ेगी अगर आपने ये खा लिया तो आपको
ये ऑप्शन चूज करना मतलब छोड़ना पड़ेगा अगर ये अगर सॉरी अगर ये खालिया तो ये छोड़ना पड़ेगा तो इसी चीज को बोलते हैं
अपॉर्चुनिटी कॉस्ट तो एक सिंपल सी अगर आप डेफिनेशन इसकी देखना चाहो हो कॉस्ट ऑफ एन अल्टरनेटिव मस्ट बी फोर गोन वो छोड़ना
पड़ेगा ठीक है ना समझो इस बात को मैंने क्या बोला अल्टरनेटिव की जो कॉस्ट होती है जो सेकंड वाला ऑप्शन होता है उसको आपको
छोड़ना पड़ेगा ताकि आप एक पर्टिकुलर एक्शन कर पाओ अगर बर्गर खाना है ना तो पिज़्ज़ा छोड़ना पड़ेगा अगर पिज़्ज़ा खाना है तो
बर्गर छोड़ना पड़ेगा इसी चीज को बोलते हैं अपॉर्चुनिटी कॉस्ट ठीक है ना एक तरह से ट्रेड ऑफ हो जाता है व्हेन यू चूज वन यू
आर लेटिंग गो ऑफ अदर थिंग दिस इज नोन एज ट्रेड ऑफ एंड इसी चीज को हम यहां पर अपॉर्चुनिटी कॉस्ट के नाम से डिनोट करते
हैं य यूपीएससी ने यहां से एक सवाल पूछा भी गया है जो कि लेक्चर के एंड में हम यहां पे इसको डिस्कस भी करेंगे ठीक है अब
आते हैं अपने माइक्रो इकोनॉमिक्स के फंडामेंटल कांसेप्ट के ऊपर पहला कांसेप्ट हम पढ़ेंगे लॉ ऑफ डिमांड के बारे में अब
आप पूछेंगे ये क्या है सर लॉ ऑफ डिमांड बड़ा ही इंटरेस्टिंग कांसेप्ट है अभी ना आधे घंटे के मतलब 15 20 मिनट
बाद आपके ना डिफरेंट टाइप ऑफ गुड्स आएंगे अभी फिलहाल के लिए हम मान के चलते हैं कि जो हम वस्तुओं की बात करें वो अपने आप
नर्मल गुड है चिंता नहीं करनी मैं समझाऊ बाद में कि नॉर्मल गुड क्या होते हैं और और किसकिस तरह के गुड होते हैं पर अभी के
लिए आप मान के चलो कोई सिंपल कोई नर्मल वस्तु है ठीक है अब होता पता क्या है लॉ ऑफ डिमांड क्या
कहता है डिमांड क्या होता है आपकी तरफ से जैसे मान लो एक हमारा प्रोड्यूसर है और एक हमारा कंज्यूमर
है कोई कोई बंदा किसी चीज को बना रहा है कोई बंदा उस चीज को खरीद रहा है है ना या
कस्टमर भी कह सकते हो कंज्यूमर ना लिख के मैं इसको कस्टमर लिख देता हूं थोड़ा सा अंतर होता है हालांकि इतना टेक्निकल चीजें
यूपीएससी नहीं पूछेगा बट ठीक है एक प्रोड्यूसर होता है जो वस्तु को बनाता है एक कस्टमर होता है जो उस चीज को खरीदता है
ठीक है अब जब हम बात कर रहे हैं डिमांड की डिमांड कौन करेगा आप बोलेंगे सर डिमांड करेगा एक कस्टमर बिल्कुल करेगा है ना
डिमांड कहां से आएगी कस्टमर से ही तो आएगी कस्टमर चाहेगा कि यार मैं ये चीज खरीदना चाहता हूं ठीक है ठीक है ठीक है अब आप लोग
मुझे एक चीज बताओ जैसे मैं आपको एग्जांपल देता हूं लेटस से आपके पास यह वाली एक बटल है जैसे एक्वा फीना की बटल है जिसकी भी है
ठीक है मान लो एक कोक की बोतल थी अपने पास एक मैंने क्या कहा एक कोक की बोतल थी कोका कोला की हमारे पास एक बोतल थी अब एक
कस्टमर चाहता है एक कोका कोला खरीदना ठीक है ठीक है कस्टमर कोका कोला खरीदना चाहता है लेट्स से आज एक कोक की
बोतल आ रही है 4 की एक कोक की बोतल 600 वाली ₹ की आ रही है ठीक है अगर मान लो कल को ये कोक की बॉटल
सस्ती हो जाए मान लो ₹ हो जाए तो आपके लिए आप क्या हो कस्टमर तो कस्टमर के लिए बॉटल सस्ती हो जाएगी
बिल्कुल सर सस्ती हो जाएगी बॉटल बिल्कुल कोई डाउट ही नहीं है इसके अंदर और जब कोई चीज सस्ती हो जाती है तो आपको ज्यादा
कंज्यूम करना चाहते हैं आर यू गेटिंग माय पॉइंट क्योंकि वो चीज सस्ती हो गई है अब आप सोचोगे यार मैं एक ना करके डेढ़ बोतल
भी पी सकता हूं दो बोतल भी पी सकता हूं ठीक है या और सस्ती कर दो मान लो अगर आपको नहीं समझ आ रहा आप मान लो 20 आप बोलोगे कि
600 एए वाली बोतल पहले 40 की आती थी अब वो 0 की होगी तो हो सकता है ना कि पहले अगर आप एक बॉटल खरीदते अब आप सोच लेते यार चलो
कोई नहीं थोड़ा ज्यादा खरीद लेते हैं आर यू गेटिंग माय पॉइंट तो हो पता क्या रहा है इस केस में हमने नोटिस किया कि जब किसी
वस्तु का दाम कम हुआ जब किसी चीज का प्राइस कम हुआ तो उसकी डिमांड बढ़ गई आर यू अग्री टू दिस फैक्ट ऑन द अदर हैंड मान
लेते हैं कि कोक की बोटल लेट से 80 की हो गई काफी महंगी हो गई सर बोतल तो अब आपके दिमाग में थोड़ा आएगा यार महंगी हो गई है
बोटल कोक की एक काम करते हैं कुछ और पी लेते हैं रसना पी लेते हैं घर पे कुछ शिकंजी बना के पी लेते हैं आप कोक पीना
शायद थोड़ा कम कर दोगे उस केस के अंदर तो यही बोलता है लॉ ऑफ डिमांड क्या बोलता है कि जब अगर कोई नॉर्मल गुड है उस केस में
अगर मान लीजिए किसी चीज का दाम बढ़ रहा है ना किसी चीज का प्राइस बढ़ रहा है तो कस्टमर की डिमांड थोड़ी कम हो जाती है ऑन
द अदर हैंड अगर मान लो किसी चीज का प्राइस बढ़ रहा है उस अ मतलब बढ़ रहा है तो डिमांड कम और अगर प्राइस कम हो रहा है तो
डिमांड बढ़ जाती है तो ये उल्टा रिलेशनशिप होता है डिमांड और प्राइस के अंदर मैं फिर से बोल रहा हूं अभी फिलहाल हम नॉर्मल
गुड्स को पढ़ रहे हैं हम और गुड्स को पढ़ेंगे उनके केस में थोड़े डिफरेंट रिलेशनशिप भी आते हैं पर अभी नॉर्मल गुड्स
के हिसाब से ये चीज हमें समझनी पड़ेगी कि लॉ ऑफ डिमांड कहता क्या है सिंपल सी चीज कहता है लॉ ऑफ डिमांड कि अगर कोई वस्तु
नॉर्मल गुड है उस केस में क्या होगा अगर उसका दाम इंक्रीज होगा अगर उसका प्राइस इंक्रीज होगा तो उसकी डिमांड कम हो जाएगी
अगर उसका प्राइस कम हो रहा है नीचे जा रहा है प्राइस तो उसकी डिमांड बढ़ जाएगी दैट इज व्हाट लॉ ऑफ डिमांड स्टेट्स थोड़ा सा
इसको और हम यहां पे डिस्कस कर लेते हैं ये एक तरह से ना एक ग्राफ आपको देखने को मिल जाएगा ये ग्राफ क्या दिखा रहा है ये ग्राफ
यही दिखा रहा है लेट्स से आपने y एक्सिस पे लगा दिया क्या प्राइस किसी चीज का कितना प्राइस है एंड यहां पर x एक्सिस के
ऊपर आपने दिखा दिया कितनी क्वांटिटी डिमांड है फॉर एग्जांपल मान लेते हैं आपने ये वाला
पॉइंट लिया ये वाला ये क्या है ये वाले पॉइंट के ऊपर आपका प्राइस है किसी चीज का ₹ जब इस चीज का प्राइस है ₹ इसकी डिमांड
कितनी है डिमांड इसकी है दो तो यानी कि जब एक वस्तु का प्राइस होता है ₹ तो उसकी डिमांड आती है दो यूनिट की अगर लेट्स से
कोई सोचे यार इसकी ना प्राइस कम कर देते हैं प्राइस अब कम आ गया पहले ₹ था अब ₹ कर दिया जैसे आपने प्राइस ₹ किया ना इसकी
डिमांड बढ गई इसकी डिमांड अब हो गई चार यूनिट तो क्या आप नोटिस कर पा रहे हो इस तरह का आपको रिलेशनशिप देखने को मिलता है
प्राइस और डिमांड के बीच में तो क्या कहता है लॉ ऑफ डिमांड लॉ ऑफ डिमांड ये स्टेट करता है कि अगर मान लीजिए सब चीजें इक्वल
रहे और जो प्राइस होता है प्राइस ऑफ अ गुड और सर्विस जैसे जैसे बढ़ेगा किसी जिस का प्राइस बढ़ रहा है तो कंज्यूमर की डिमांड
उस केस में कम हो जाती है दैट इज द पॉइंट ऑफ लॉ ऑफ डिमांड सर कुछ एग्जांपल दे सकते हो
बिल्कुल दूंगा और ये ना एक्चुअल में सच्चा एग्जांपल है मैं कोई ऐसे हवा में नहीं बना रहा ठीक है ना आप लोगों को जिन लोगों ने
थोड़ा केस स्टडीज पढ़ने में शौक होता है ना मैं उनको एक एग्जांपल से देता हूं जैसे आप लोग नाय पार्ले जीी का एग्जांपल देखना
इसकी ना हावर्ड बिजनेस रिव्यू ने भी यहां पर स्टडी करी थी इसके बारे में बहुत ही इंटरेस्टिंग स्टडी है अगर आप में से कोई
एमबीए वगैरह कर रहे है ना उन्होने ये केस स्टडी पढ़ी होगी एक टाइम था आज से काफी टाइम
पहले पर्ले जीी का पैकेट ना पा का आता था इन्होंने ना प ले जीी की कंपनी ने एक बार कोशिश करी थी कि पारलेजी का दाम हम बढ़ाने
की कोशिश करते हैं इन्होंने पता क्या किया ₹ वाला पैकेट ये छ में आई थिंक बेचने लग ग थे या छ या ₹
में जब इन्होंने ऐसा किया ना पारलेजी की डिमांड बहुत हैवी लेवल के ऊपर नीचे आ गई थी आर यू गेटिंग माय पॉइंट लोगों ने
पारलेजी खरीदना बंद कर दिया था उसकी जगह लोग और बिस्कुट खरीदने लग गए थे और कुछ खरीदने लग गए थे ये भी एक एग्जांपल ही तो
हुआ कि कैसे आपका प्राइस बढ़ा तो आपकी डिमांड कम होगी आर यू गेटिंग माय पॉइंट इसके और भी रीजन
है मैं वो भी एक्सप्लेन करूंगा पर एक चीज आपको प्रैक्टिकली इंप्लीमेंट होती हुई देखने को मिल रही है या नहीं मिल रही और
एग्जांपल में आपको चलो प्रैक्टिकल एग्जांपल में आपको और देता हूं फॉर
एग्जांपल लेट्स से आप किसी भी ऐसे ओटीडी प्लेटफॉर्म का देख
लो कई बार पता क्या होता है मान लो जस्ट एग्जांपल मान लो कोई ना आपको कोई चीज 00 में दे रहा है उसका आम प्राइस है 00 किसी
भी कारण की वजह से वो वस्तु का दाम लेट्स से कोई ऑफर चल रहा है कई बार आपको ऑफर्स वगैरह आते हैं ना आप लोगों ने भी नोटिस
किया होगा कुछ ऑफर आ गया मान लो और उस ऑफर में आपको बोला गया कि अब 00 नहीं प्राइस आपको पे करना अब आपको 50 पे करना है सिर्फ
कई बार होते हैं ऑफर इवन एजुकेशन इंस्टीट्यूट्स में भी ऐसा अक्सर देखने को मिलता है कुछ एक ऑफर्स होते हैं तो उस
ऑफर्स के टाइम के ऊपर आप लोगों ने देखा होगा कि लोग ज्यादा डिमांड करने की कोशिश करते हैं आपसे भी मैं अगर आपको ऑप्शन दूं
कि लेट्स से कोई वस्तु आप आप सप्शन है मान लो 000 का अभी है कल को अगर मैं
करूंगा ठीक है तो यही है आपका जो बुक के अंदर लॉ ऑफ डिमांड दिया गया है जैसे मान लो स्मार्टफोन का अगर दाम कम होता है तो
कंज्यूमर ज्यादा स्मार्टफोन खरीदने की कोशिश करेंगे और अगर स्मार्टफोन का दाम बढ़ गया तो डिमांड कहीं ना कहीं कम हो
जाएगी दिस इज व्हाट इज द मीनिंग ऑफ लॉ ऑफ डिमांड तो एक तरह से उल्टा रिलेशनशिप देखने को मिलता है जिसको हम बोलते हैं
क्या इवर्स रिलेशनशिप इवर्स का मतलब एक चीज बड़ी दूसरी चीज कम हुई दूसरी चीज बड़ी और पहली चीज कम हुई दैट इज इवर्स
रिलेशनशिप ठीक है तो ये तो हो गया हमारा सर लॉ ऑफ डिमांड चलो ठीक है यहां तक क्लियर राइट अब यहां पर एक टर्म हमें
देखने को मिल रही है जिसका नाम है इलास्टिसिटी अब आप पूछेंगे सर इलास्टिसिटी क्या होता है मैं आपको एक्सप्लेन करता हूं
जैसे ना मेरे हाथ में य आपको एक बैलून देखने को मिल रहा होगा मान लो मैं इसम थोड़ा जोर लगाऊ ये देखो ये देखो ये देखो
ये जोर लगाने की वजह से कितना ज्यादा मूव कर गया नोटिस कर रहे हो है इतना सा पर जैसे मैंने इस जोर लगाया ये देखो कितना
ज्यादा मूव कर रहा है क्या मैं ये कह सकता हूं कि काफी ज्यादा इलास्टिक है क्यों इलास्टिक क्यों कह रहा हूं क्योंकि अगर
मैं इसके ऊपर फोर्स लगा रहा हूं ना इस फोर्स के लगाने की वजह से इसमें बदलाव आ रहा है जब भी कोई आप इनपुट चेंज कर रहे हो
उस इनपुट से आउटपुट में बदलाव आ रहा है इनपुट क्या था यहां प मेरा फोर्स और आउटपुट क्या है इसकी शेप के अंदर बदलाव
ऐसी चीज को बोलते हैं हम इलास्टिक समझ गए ठीक है अब मेरे सामने एक चाबी है ये देखो ये चाबी है अब मैं चाबी को जोर लगाए जाऊं
लगाए जाऊ लगाए जाऊं जितना मर्जी जोर लगा ल क्या आपको लगता है कि चाबी ऐसे खींच जाएगी नहीं खींचे गी चाबी इतनी है तो इतनी ही
रहेगी ये वाली चाबी है मेरे हाथ में तो चाबी क्या हुई यह हुई इन इलास्टिक समझ गयो हो अगर मैं किसी चीज पर कुछ फोर्स लगा रहा
हूं उसकी शेप में बहुत बदलाव आया उसको मैंने बोला इलास्टिक एंड अगर बदलाव नहीं आया उसको मैंने बोला इलास्टिक चलो ठीक है
पर यहां पर क्यों बता रहे हो सर क्योंकि हमें डिमांड की इलास्टिसिटी भी समझनी है क्या मतलब इस चीज का सर डिमांड की
इलास्टिसिटी समझनी है अब एक चीज समझो यार मैंने आपको बोल तो दिया कि प्राइस के चेंज करने की वजह से उसकी डिमांड च हो सकती है
पर जरूरी तो नहीं कि हर चीज में ऐसा ही हो क्या ऐसा जरूरी है नहीं हो सकता है कुछ केसेस में ऐसा हमें देखने को मिले कि आप
किसी चीज का प्राइस बदलो अगर मान लो प्राइस बदले उससे डिमांड कितनी ज्यादा बदलेगी
ये चीज बताएगी इलास्टिसिटी जैसे अगर मैं बात करूं पारलेजी वाला एग्जांपल मैंने क्या दिखाया था कि प्राइस में थोड़ा सा
बदलाव किया उसकी क्वांटिटी डिमांडेड के अंदर बहुत ज्यादा बदलाव आ गया सही बात है तो वो क्या हुआ एक इलास्टिक प्रोडक्ट हुआ
ऑन द अदर हैंड मान लो कोई ऐसा प्रोडक्ट हो जिसमें मान लो मैं प्राइस में जितना मर्जी चेंज करता रहूं उसकी डिमांड को कोई फर्क
ही ना पड़े उसको हम बोलेंगे क्या इन इलास्टिक क्या यह बात आप लोग समझ पाए हो राइट तोय इलास्टिसिटी और इन इलास्टिसिटी
का मतलब आपको यहां पर पता होना चाहिए मैं थोड़ा सा आपको और एक्सप्लेन कर देता हूं इस चीज को इलास्टिसिटी और इन इलास्टिसिटी
को ठीक है एक बार इसको थोड़ा और हम यहां पर डिस्कस कर लेते
हैं ठीक है जैसे यह वाला जो एग्जांपल था पारलेजी वाला इस पर आ जाते हैं एक बार यस यह पारलेजी वाला एग्जांपल देखा
बिल्कुल देखा अब एक चीज इमेजिन करो मान लो जस्ट टेक एन एग्जांपल लेट्स से मैंने एक वस्तु का दाम इसका पाच से छ कर दिया तो आप
जानते होंगे किसी चीज का दाम पा से र हुआ तो हमने कितना इंक्रीज किया होगा इसको मतलब प्राइस कितना बदला आप बोलोगे 20 प्र
पाच से छ जाने में कितना परसेंट इंक्रीज हुआ 20 पर ठीक है अगर 20 पर इंक्रीज करने की वजह से इसकी डिमांड लेट्स से 20 पर कम
हो गई ऊपर क्या लिख रहा हूं डिमांड के अंदर चेंज नीचे क्या आ रहा है नीचे आ रहा है प्राइस के अंदर
चेंज अगर तो इसकी वैल्यू जैसे इस केसे मान लो 20 पर आपने प्राइस बढ़ा दिया और उसमें डिमांड में बदलाव आया 20 पर तो आपका
इलास्टिसिटी आई वन ठीक है पर पर अगर मान लो 20 पर बदलाव करने की वजह से इस केस में इसकी डिमांड 40 पर कम हो जाती तो हम इसको
बोलते इलास्टिसिटी टू तो हो पता क्या रहा है पर्ले जी का ना जितनी ज्यादा ये नंबर आएगा क्या था नंबर
कैसे निकल रहा है नंबर निकल रहा है कि कितना बदलाव आया डिमांड के अंदर डिवाइड अपॉन कितना प्राइस में चेंज किया यानी कि
प्राइस चेंज करने की वजह से डिमांड में कितना बदलाव आया ये होता है इलास्टिसिटी वो भी तो हमने यही देखा था कितना फोर्स
लगाने की वजह से कितना बदलाव आया था तो यहां पर भी फोर्स क्या है आपका प्राइस चेंज और आपका डिमांड चेंज मब डिमांड चेंज
आउटपुट है अगर तो ये नंबर बहुत ज्यादा आता है मान लो एक दोती च पा ऐसे नंबर आता है इसका मतलब प्रोडक्ट अपने आप में बहुत
ज्यादा इलास्टिक है ऑन द अदर हैंड अगर मान लो प्राइस चेंज करने की वजह से उस चीज में बहुत ज्यादा बदलाव ना आए या बहुत ही कम
बदलाव आए उस चीज को हम बोल देते हैं इन इलास्टिक समझ गए इस बात को ठीक है और मैं आपको कुछ और एग्जांपल्स दे
दूंगा डोंट वरी अबाउट इट ठीक है तो जैसा ये वाली चीज थी डिमांड वाली चीज थी ठीक है ना तो इसी चीज को हम यहां पे डिमांड कर्व
तो मैंने आपको समझा ही दिया कि कैसे डिमांड कर्व इस तरह से हमारे पास थी जहां पर हमारे पास क्या था एक इवर्स रिलेशनशिप
हमें यहां पे देखने को मिलता है ये चीज तो हमने समझ ली इसी तरह से ना दूसरी चीज हमारे पास क्या है दूसरी चीज हमारे सामने
यहां पे ये है सप्लाई साइड जैसे डिमांड साइड समझी उस तरह से एक चीज होती है सप्लाई साइड अब सप्लाई साइड क्या होती है
याद करो वही एग्जांपल मैंने क्या बोला था मैंने बोला था कि कि एक है आपका प्रोड्यूसर या आप इसको सप्लायर कह लो एंड
दूसरा आपके सामने आता है आपके सामने आ गया जैसे फॉर एग्जांपल आपका
कंज्यूमर एक सेकंड रुक जाओ पहले मैं आपको ना उसका भी एक्सप्लेन कर दूं जैसे हमने पारलेजी एग्जांपल पढ़ा था ना पारलेजी को
मैंने क्या बोला था कंपैरेटिव इलास्टिक ज्यादा है ये ज्यादा इलास्टिक है क्योंकि आपके थोड़े प्राइस चेंज करने व से डिमांड
बहुत ज्यादा बदल रही है पर मान लो जस्ट टेक एन एग्जांपल अगर लेट्स से आपको कोई वस्तु खरीदनी है कुछ भी मान लो आपको नमक
खरीदना है एंड दुनिया में बस एक ही कंपनी है नमक बेचने वाली तो उस केस में क्या होगा उस केस में वह कंपनी एक ही है जो बेच
रही है नमक तो वोह जो कहेगा आपको करना ही पड़ेगा आर यू गेटिंग माय पॉइंट लेट्स से जस्ट टेक एन एग्जांपल मैंने क्या बोला कि
आपको नमक खरीदना है और दुनिया में एक ही कंपनी है नमक खरीद बेचने वाली अब वो कंपनी जो बोलेगी आपको उसी दाम के ऊपर नमक खरीदना
पड़ेगा तो कल को नमक का दाम बढ़ गया अगर उस केस के अंदर तो आप रिलाइज कर रहे हो उसकी डिमांड के ऊपर कोई फर्क नहीं पड़ेगा
आपको खरीदना है नमक आपकी जरूरत है आपको खरीदना ही पड़ेगा एक कंपनी होगी तो आपको उसी से खरीदना पड़ेगा यू डोंट हैव ऑप्शन
कल को महंगा भी बेचेगा तब भी आपको खरीदना ही पड़ेगा इस चीज को बोल देते हैं इन इलास्टिक क्योंकि बदलाव कुछ आ ही नहीं रहा
समझ गए इलास्टिक मतलब प्राइस चेंज करने के ऊपर डिमांड में बहुत ज्यादा चेंज आना इन इलास्टिक मतलब प्राइस चेंज करने के ऊपर
डिमांड में कोई बदलाव ना आना दैट इज परफेक्टली इन इलास्टिक ठीक है ये डिमांड की बात हो गई अब बात कर लेते हैं सप्लाई
सप्लाई वाले केस में मैंने आपको क्या बताया जैसे फॉर एग्जांपल कंज्यूमर वाला एंगल तो हमने देखा जहां पर हमने समझा कि
कैसे डिमांड के अंदर बदलाव आता है कैसे कंज्यूमर डिमांड करता है अब ऐसे ही हमें जब भी हमें बात होनी है सप्लाई साइड की तो
हमारा जो प्रोड्यूसर है या सप्लायर है हमें उसकी बात करनी है ठीक है ठीक है ठीक है लॉ ऑफ डिमांड तो हमने समझ लिया लॉ ऑफ
सप्लाई क्या कहता है एग्जांपल से समझते है फॉर एग्जांपल मान लो जैसे मेरे पास क्या है मान लो मेरे पास ये बोतल है पानी की अब
पानी की बोटल है ठीक है अगर लेट्स से एग्जांपल अगर मान लो इस बोतल का दाम आज के समय ₹10 है कितना है ₹1 तो मैं कुछ मैं
मान लो अगर सप्लायर हूं तो मैं कुछ यूनिट सप्लाई कर रहा हूं इस बॉटल के एग्जांपल लेट्स से मान लो
ये बॉटल का दाम था ₹10 मैं अभी 10 यूनिट इसके बना रहा था बहुत बढ़िया कल को किसी भी कारण की वजह से
इसका दाम बढ़ जाता है मान लो इसका दाम हो गया मार्केट में ₹ तो क्या होगा सर तो क्या करेगा मुझे
बताओ सप्लायर क्या करेगा उस केस के अंदर मेरी कोशिश यह रहेगी भाई मार्केट में ना खूब दाम मिल रहा है अपनी बॉटल का खूब
महंगे में बिक रही है तो मेरी कोशिश यह रहेगी कि मैं इस समय ज्यादा से ज्यादा बॉटल्स प्रोड्यूस करूं क्यों ऐसा क्यों
करूंगा क्योंकि मुझे आप नोटिस कर रहे हो मुझे एक बॉटल प खूब अच्छी खासी कमाई हो रही है है खूब अच्छा पैसा मिल रहा है एक
बोटल के लिए तो मेरी कोशिश ये रहेगी जब तक इतना महंगा प्राइस मेे मिल रहा है ना मेरी बोटल के लिए मैं ज्यादा से ज्यादा
प्रोडक्शन करूं तो हो सकता है कि मैं अब 20 यूनिट बनाने लग जाऊंगा क्यों क् मुझे दिख रहा है कि मेरी बॉटल महंगे में बिक
रही है मार्केट के अंदर तो मेरी कोशिश ये रहेगी कि यहां पर मैं ज्यादा से ज्यादा सप्लाई करूं तो एक्चुअल में पता क्या होता
है लॉ ऑफ सप्लाई पता है क्या कहता है कि जैसे ही किसी वस्तु का दाम इंक्रीज होता है वैसे-वैसे क्या करेगा एक सप्लायर की
कोशिश ये रहेगी कि वो ज्यादा से ज्यादा वस्तुओं को सप्लाई करें आर यू गेटिंग माय पॉइंट दिस इज लॉ ऑफ सप्लाई अब यहां पर इस
पिक्चर पर समझना जैसे लॉ ऑफ डिमांड का देखा था वो कर्व कुछ ऐसे बनी थी पर लॉ ऑफ सप्लाई की जो कर्व होती है वो एक तरह से
चेंज हो जाती है मान लो आप वा एक्सिस प यहां पे प्राइस लिख रहे हो एंड एक्स एक्सिस प यहां पर आपने लिखा है क्वांटिटी
कितनी सप्लाई हुई तो अगर मान लो आपकी वस्तु का दाम था एक रप आप कौन हो सप्लायर आपकी वस्तु का दाम एक रप था उस समय आप
बहुत ही या तो कुछ सप्लाई नहीं रहे पर जैसे-जैसे मान लो इसकी दाम बढ़ता गया मान लो जैसे ₹ हो गया इसका दाम तब आप यहां पर
कुछ 1213 यूनिट सप्लाई कर रहे हो अगर कल को दाम इसका लेट्स से ₹ यहां पर हो जाता है तो आपकी कोशिश होगी कि आप ज्यादा से
ज्यादा यूनिट सप्लाई करोगे ताकि आपका कहीं ना कहीं प्रॉफिट इंक्रीज हो तो होता क्या है सप्लाई कर्व के अंदर एन इंक्रीज इन द
प्राइस रिजल्ट्स इन द इंक्रीज इन क्वांटिटी सप्लाई जैसे-जैसे आपका दाम बढ़ रहा है प्राइस बढ़ रहा है मार्केट के अंदर
उसके साथ ही आपकी कोशिश ये रहेगी कि जो आप क्वांटिटी सप्लाई कर रहे हो ना वो भी कहीं ना कहीं बढ़ जाए तो प्राइस और क्वांटिटी
सप्लाइड को ही हम यहां पर सप्लाई कर्व बोलते हैं क्लियर हुई ये बात समझ आया इस कांसेप्ट को तो डिमांड में क्या हो रहा था
डिमांड और प्राइस का इवर्स रिलेशनशिप था क्या बोला मैंने डिमांड एंड प्राइस का इन्वर्स रिलेशनशिप था यानी कि एक उल्टा
रिलेशनशिप था डिमांड बढ़ती थी सॉरी प्राइस बढ़ता था तो डिमांड कम होती थी प्राइस कम होता था तो डिमांड बढ़ती थी ये था इवर्स
रिलेशनशिप सप्लाई में क्या है डायरेक्ट रिलेशनशिप अगर दाम बढ़ रहा है तो सप्लायर की कोशिश होगी ज्यादा से ज्यादा प्रोड्यूस
करके उसको सप्लाई करें ये है डायरेक्ट रिलेशनशिप इंक्रीज इन प्राइसेस रिजल्ट इन इंक्रीज इन क्वांटिटी
सप्लाइड दिस इज सप्लाई कफ ठीक है ये बात भी क्लियर हुई अब लॉ ऑफ सप्लाई इसी को बोला जाता है ठीक है कि बाकी सब चीजें अगर
इक्वल रहे क्वांटिटी सप्लाइड जो होगी उस वस्तु की वो भी इंक्रीज हो जाएगी अगर उसका दाम इंक्रीज हो गया मान लो जैसे कॉफी बीन
है कॉफी बींस का अगर मार्केट प्राइस बढ़ता है तो फार्मर्स खुश होंगे फार्मर्स इंसेंटिवाइज होंगे कि वो ज्यादा से ज्यादा
कॉफी बींस इंक्रीज करें उनके ग्रोथ वो ज्यादा करें और वो चीज ज्यादा होगी अकॉर्डिंग वो सप्लाई बढ़ा देंगे अगर मान
लो कॉफी के अंदर मान लो प्रॉफिटेबिलिटी कम है तो उस समय क्या होगा उस समय एक किसान की कोशिश यही रहेगी कि वो कम प्रोड्यूस
करे क्योंकि उसको दिख रहा है कि यार प्रोड्यूस करने से कोई फायदा तो हो नहीं रहा तो इस तरह से प्राइस और सप्लाई के बीच
में क्या होता है आपका एक डायरेक्ट रिलेशनशिप प्राइस और डिमांड डिमांड में इवर्स प्राइस और सप्लाई में डायरेक्ट यह
चीज आपको पता होनी चाहिए ठीक है सर यह बात भी समझ आई अब पता कैसे लगता है क्या-क्या चीजें सप्लाई को डिटरमिनेट करती है जैसे
फॉर एग्जांपल कितना प्रॉफिट हो रहा है सरकार को कितना टैक्स जाना है बनाने में क्या-क्या कॉस्ट ज ार है यानी कि
प्रोडक्शन कॉस्ट हो गया कमोडिटी का प्राइस हो गया इसके हिसाब से सप्लाई ऊपर नीचे होती रहती है बिल्कुल ठीक बात है और जब
मैं टर्म यूज कर रहा हूं इलास्टिसिटी की इलास्टिसिटी का मतलब आप जानते ही हो कि क्या
बदलाव हुआ दैट इज द मीनिंग ऑफ इलास्टिसिटी तो अगर मान लीजिए प्राइस के बदलने की वजह से
क्वांटिटी में कितना बदलाव आया इस चीज को बोलते हैं इलास्टिसिटी ऑफ सप्लाई एग्जांपल से मैं आपको समझाता हूं जैसे यहां पर कुछ
पिक्चर्स आप देख पा रहे होंगे अब ध्यान से समझना यही सेम चीज आपको डिमांड में भी देखने को मिलेगी यही सेम
सेम चीज आपको सप्लाई में भी समझनी है लेट्स से यहां पर सप्लाई की बात कर रहे हैं अब यहां पर आपने लिख दिया इस साइड प
प्राइस इस साइड प क्वांटिटी लिख दिया ठीक है जो पहला कर्व है ना आपको वो पता क्या दिखा रहा है यहां पर नोटिस करना आप ना यह
प्राइस देखो यह प्राइस है यह प्राइस इंक्रीज ही होता जा रहा है प्राइस क्या है इंक्रीज ही होता जा रहा है इन प्राइस
इनक्रीस होने की वजह से क्वांटिटी सप्लाइड के अंदर कुछ अंतर नहीं आ रहा अगर कोई सिचुएशन ऐसी हो उसको बोलेंगे हम क्या
परफेक्टली इन इलास्टिक क्यों क्योंकि क्या था आपका इलास्टिसिटी वो यही तो था कि कितना स सप्लाई में चेंज आया एज कंपेयर टू
कितना प्राइस में चेंज आया अगर आपका प्राइस चेंज करे जा रहे हो करे जा रहे हो करे जा रहे हो पर सप्लाई में कोई बदलाव आ
ही नहीं रहा सप्लाई में कोई चेंज आया ही नहीं तो आपकी इलास्टिसिटी कितनी हुई जीरो ऐसी चीज को हम बोलते हैं परफेक्ट इन
इलास्टिक यानी कि यहां पे इलास्टिसिटी आपकी जीरो हो जाती है ऑन द अदर हैंड लेट्स से आपके ना क्या हो रहा है यहां पर प्राइस
आपका उतना ही है या आपकी जो सप्लाई है वो कहीं ना कहीं बढ़ती जा रही है राइट इस केस में क्या हो जाता है आपकी इलास्टिसिटी
इनफिट हो जाती है यह चीज को बोलते प्लास्टिक परफेक्टली इलास्टिक ऑन द अदर हैंड हमारे पास कुछ और सिनेरियो हो सकते
हैं जैसे मैंने सिंपली आपको क्या बोला डेल ए बा डेल प यही तो था इलास्टिसिटी आपकी सप्लाई कर्व की अगर मान लो इसकी वैल्यू वन
आ जाए कि अगर 20 पर आपने प्राइस को बढ़ाया एंड उसमें सप्लाई भी 20 पर बढ़ गई तो उसको बोलेंगे यूनिट इलास्टिसिटी यानी कि
इलास्टिसिटी का मतलब वन हो जाएगा जब लाटी की वैल्यू वन आई उसको बोलते हैं यूनिटरी इलास्टिसिटी अगर यह नंबर रो और वन के बीच
में आए कि लेट्स से आपने प्राइस तो 10 पर बढ़ाया पर आपकी सप्लाई सिर्फ और सिर्फ 5 पर इंक्रीज हुई तो इस केस में इलास्टिसिटी
कितनी आएगी 5 तो भाई इलास्टिक तो है ये चेंजेज तो आ रहे हैं सप्लाई के अंदर पर कहीं ना कहीं कम इलास्टिक है इसको बोल
देंगे लेस इलास्टिसिटी ऑन द अदर हैंड अगर मान लो आपने प्राइस 10 पर बदले पर आपकी सप्लाई के अंदर बदलाव आ गया 20 पर तो इस
केस को हम क्या बोलेंगे मोर इलास्टिक अगर इलास्टिसिटी आपकी ग्रेटर दन वन हो जाए तो इस तरह से आपके अलग-अलग कर्व्स बनते हैं
यही सेम चीज आप सप्लाई के लिए निकाल सकते हो यही सेम चीज आप डिमांड के लिए निकाल सकते हो अगर तो बिल्कुल बदलाव नहीं आ रहा
क्वांटिटी के अंदर जैसे डिमांड वाले केस में तो हम उसको परफेक्टली इलास्टिक बोल देंगे अगर बहुत भारी चेंजेज आ रहा है
डिमांड के अंदर प्राइस चेंज करने की वजह से उसको हम बहुत हैवी लेवल पे इलास्टिक बोल देंगे आर यू गेटिंग द प तो ये कुछ
पॉइंट्स थे इलास्टिसिटी के बारे में जो आपको यहां पर क्लियर होने चाहिए ठीक है थोड़ा सा अगर आप चाहते हो तो
मैं आपको इन टर्म्स को एक बार दिखा भी देता हूं इलास्टिसिटी का मतलब तो मैंने आपको एक्सप्लेन कर ही दिया कि कैसे
क्वांटिटी डिमांडेड या सप्लाइड मतलब अगर डिमांड वाला एक अलग केस है उस केस में भी हम देख सकते हैं कि प्राइस से डिमांड के
ऊपर क्या बदलाव आया और ऑन द अदर हम प्राइस का सप्लाई के ऊपर भी देख सकते हैं अगर तो ऐसा होता है कि प्राइस चेंज का बहुत ही कम
इंपैक्ट होता है क्वांटिटी डिमांडेड के ऊपर उसको हम बोलेंगे हाईली इन इलास्टिक इलास्टिक मतलब बदलाव आया ही नहीं और अगर
बहुत ज्यादा चेंज आता है तो हम उसको बोल देंगे इलास्टिक आपको एग्जांपल और समझा देता हूं
मान लो मैं एक कंपनी रन करता हूं अब इसको समझना कैसे प्रैक्टिकली हम देख सकते हैं मान लो मैं एक कंपनी चलाता हूं ठीक
है अगर मुझे पता है कि लेट्स से जैसे मान लो हमारा कोई कोर्स है एग्जांपल से समझते हैं मान लो लो
कि कोर्स हम चला रहे हैं ठीक है और वो मान लो कोर्स है कोई ₹1 का ठीक है अगर आप मुझे ये चीज पता है कि यार मैं अगर दाम बढ़ा भी
दूंगा ना तब भी आप लोग मेरा ही कोर्स खरीदोगे मैंने क्या बोला मैंने कहा अगर मुझे पता है कि अगर मैं दाम बढ़ा भी दूं
तब भी आप मेरा ही कोर्स खरीदोगे तो ऐसी चीज को मैं क्या बोलूंगा ऐसी चीज को बोलूंगा क्या दिस इज इन इलास्टिक क्योंकि
डिमांड के अंदर कोई फर्क नहीं आ रहा पहले भी इतना ही था पहले भी 100 लोग खरीद रहे थे चाहे वो कोर्स 00 का ही था अगर मैं कल
को उसके दाम 000 भी कर दूंगा तब भी अगर 100 लोग ही खरीद रहे हैं तो भाई डिमांड के अंदर चेंज नहीं ना आया इसको बोलेंगे इन
इलास्टिक तो मुझे एस अ कंपनी या एस ए इंडिविजुअल मुझे अपना कोर्स कितने का बेचना है उसको जानने के लिए मुझे मदद
करेगा यह इलास्टिसिटी का कांसेप्ट अगर तो मुझे चीज पता है कि यार मैं ही एक यहां का बादशाह हूं मैं जितने में कोर्स बेचना
चाहता हूं उतने का बेच दूंगा तो मैं मह का कोर्स भी बेच सकता हूं पता है क्यों क्योंकि मेरी डिमांड इन इलास्टिक है
प्राइस बढ़ने की वजह से डिमांड के ऊपर फर्क नहीं आ रहा पर अगर मान लो मुझे ऐसा लगता है कि नहीं यार अगर प्राइस बढ़ा
दूंगा तो लोग कहीं और चले जाएंगे लोग मुझे छोड़ के चले जाएंगे तो उस केस को हम बोलेंगे इलास्टिक डिमांड कि थोड़ा सा
प्राइस चेंज आया उससे क्वांटिटी डिमांडेड कम हो गई आर यू गेटिंग माय पॉइंट कोई कंपनी भी ऐसे सोच सकती है मान लो
mcdonald's है मैकडी ने अपना कोई बर्गर लच करना है अब उसको पता है यार जैसे ही बर्गर महंगा करते हैं ना मान लो कोई बर्गर ₹ का
है बर्गर 3030 का आता है मान लो मैडी में अगर मैकडी वालों को ये पता है यार हमारे जो लोग है ना वो इलास्टिक वाले हैं मतलब
अगर हमने ये 30 वाला बर्गर 40 में बेचना शुरू कर दिया ना लोग तो भाग जाएंगे हमें छोड़ के तो हां ये चीज मैडी को मदद करती
है प्राइस सेट करने के ऊपर अगर उसको पता है कि हां लोग ऐसे हैं जो कहीं ना कहीं प्राइस बदलने की वजह से हमें छोड़ के चले
जाएंगे तो मैकडी को वो प्राइस ₹ ही रखना पड़ेगा इस चीज को बोलते हैं इलास्टिक डिमांड पर अगर मान लीजिए मैगडी को यह पता
है कि यार मेरा बर्गर बहुत बढ़िया है मैं महंगा भी बर्गर बेचूंगा ना तब भी लोग मेरे से बर्गर खरीदेंगे उस चीज को हम क्या
बोलेंगे इन इलास्टिक डिमांड फर्क आया ही नहीं डिमांड के अंदर प्राइस बढ़ाने की वजह से तो कल को अगर मैगडी को यह पता है कि
उसकी डिमांड क्या है इन इलास्टिक डिमांड है तो मैगडी अब 30 का बर्गर नहीं वो 50 का भेजेगा क्यों क्योंकि उसको पता है कि
प्राइस बढ़ने की वजह से डिमांड में कोई फर्क नहीं आता आने वाला आर यू गेटिंग द पॉइंट क्या आपको रियल लाइफ के साथ लिंक हो
रहा है सिंपल बस इस चीज को याद रख लेना है अगर प्राइस बदलने की वजह से अगर डिमांड में बहुत फर्क आए अगर प्राइस बढ़ाने की
वजह से अगर डिमांड कम हो जाए तो इलास्टिक अगर ऑन द अदर हैंड प्राइस बढ़ाने की वजह से डिमांड में कोई चेंज ना आए उतना ही रहे
तो आपका इन इलास्टिक इस तरह से चीजें आपको पता होनी चाहिए अगर ये एग्जांपल्स आपको पता लग गए हैं तो आई होप आपको इलास्टिक और
इन इलास्टिक का मतलब समझ आ गया होगा यही चीज मांड की साइड देख सकते हैं यही चीज हम सप्लाई साइड में देख सकते
हैं ठीक है हां जी तो जैसे मैंने कहा था कि कैसे इसको कैलकुलेट करेंगे हम चेक करेंगे कि क्वांटिटी में क्या बदलाव आया
डिवाइड बाय प्राइस में क्या बदलाव आएगा उसके हिसाब से हम ये चीज कर सकते हैं एंड उसी हिसाब से हमारे पास अलग-अलग तरह की
चीजें आ जाती है एक होती है परफेक्टली इलास्टिक परफेक्टली इलास्टिक मतलब कि आपने थोड़ा सा प्राइस में बदलाव आया उसके हिसाब
से आपका क्वांटिटी में बहुत मैसिव लेवल के ऊपर चेंज आ गया मान लो आप पहले कोई चीज ₹1 की बेचते थे अब वो ₹10 की बेचने लग गई
प्राइस में थोड़ा सा चेंज आया पर लोगों ने बिल्कुल आपका प्रोडक्ट खरीदना ही बंद कर दिया दैट इज परफेक्टली इलास्टिक डिमांड
में बहुत मैसिव लेवल के ऊपर चेंज आना परफेक्टली इन इलास्टिक जो मैकडी वाला एग्जांपल था कि पहले 30 का बर्गर था फिर
60 का कर दिया पर डिमांड में कोई बदलाव नहीं आया समझ गए कि रिगार्डलेस ऑफ प्राइस चेंज क्वांटिटीज डिमांड में जब कोई बदलाव
आता ही नहीं वो चाबी वाला एग्जांपल याद करो वो चाबी वाला एग्जांपल क्या है डिमांड में कोई चेंज आया ही नहीं जितना मर्जी
फर्स लगा लो वो परफेक्टली अन इलास्टिक रिलेटिव का मतलब क्या होता है रिलेटिवली इलास्टिक कि इलास्टिक है पर परफेक्टली
नहीं है आप प्राइस में चेंज करो उससे डिमांड में बदलाव आएगा बहुत बड़ा बदलाव आएगा पर
इफिनाकोनाजोले सिटी व इसको बोलते हैं यूनिटरी यूनिटरी का मतलब होता है वन सो इसको बोलते हैं
यूनिटरी इलास्टिक डिमांड एंड रिलेटिवली इन इलास्टिक यहां पर बात ये है कि डिमांड में यार चेंज तो आएगा पर बहुत ज्यादा चेंज
नहीं आएगा अगर मान लो आप प्राइस 10 पर बढ़ा दे रहे हो ना और मान लो चेंज आया डिमांड के अंदर सिर्फ 2 पर तो चेंज तो हुआ
पर बहुत ज्यादा चेंज नहीं हुआ डिमांड के अंदर इसको बोलते हैं रिलेटिवली इन इलास्टिक तो परफेक्टली इधर मतलब ऐसा समझो
मैं आपको एक बता देता हूं ऐसा समझो ऐसा कुछ है यहां पर इस एंगल पे इस इस वाले एंड प परफेक्टली इलास्टिक बहुत ज्यादा चेंज
आता है डिमांड के अंदर थोड़ा प्राइस चेंज करने की वजह से यहां पर आ जाएगा रिलेटिवली इलास्टिक कि हां प्राइस चेंज किया तो
डिमांड में अच्छा खासा चेंज आया यहां पर आ जाएगा यूनिटरी इलास्टिक 10 पर प्राइस चेंज किया तो डिमांड 10 पर कम हुई यूनिटरी
इलास्टिक यहां पर आ जाएगा आपका रिलेटिवली इन इलास्टिक प्राइस 10 पर चेंज किया पर उसकी वज से डिमांड जो कम हुई वो आपकी 5 पर
कम हुई तो कम तो हुई डिमांड बहुत ज्यादा कम नहीं हुई और यहां पर आ जाएगा परफेक्टली इन
इलास्टिक प्राइस को जितना मर्जी आपने चेंज किया हो डिमांड में बिल्कुल भी बदलाव ना आए रिलेटिवली परफेक्टली इन इलास्टिक आर यू
गेटिंग द पॉइंट ये चीज जो हमने डिमांड के लिए डिस्कस की ऐसी ही सेम चीज आपकी सप्लाई के लिए हो सकती है उसमें भी यही पांचों
कैटेगरी बन जाएंगी क्या ये कर लोगे सेम चीज है यार परफेक्टली का मतलब आपको समझा दिया यूनिटरी का मतलब समझा दिया रिलेटिवली
का मतलब समझा दिया मतलब समझ एपल समझ आ गए होंगे तो बड़े आराम से य चीज हो भी जाएंगी राइट ठीक है आगे आते
हैं पारलेजी वाला भी पढ़ लिया था अब बात अगर इलास्टिसिटी की हो ही रही है एक टर्म हमें और जाननी है जिसका नाम है
इनकम इलास्टिसिटी क्या बोला मैंने मैंने बोला इनकम इलास्टिसिटी आप पूछेंगे सर यह क्या
टर्म है इनकम इलास्टिसिटी इलास्टिसिटी हमने कर लिया कैसे किस चीज का बदलाव आएगा दैट इज इलास्टिसिटी अब साथ में मैंने वर्ड
यूज़ कर दिया इनकम इनकम का मतलब क्या होता है इनकम का मतलब होता है सर कमाई इनकम मैं कितना पैसा अर्न कर रहा हूं तो ऐसा भी तो
हो सकता है ना यार समझो इस बात को पहले मैं आपको एग्जांपल से समझाता हूं जस्ट इ टेक एन एग्जांपल लेट्स से जस्ट टेक एन
एग्जांपल लेट्स से पहले मैं इधर ही लिख लो यार पहले लेट्स से मैं ₹1000000 कमाता था ये क्या थी सर मेरी इनकम मेरी इनकम कितनी
थी 00 ठीक है अब मैंने अपने करियर में मेहनत करी बहुत मेहनत करी अपनी कंपनी के अंदर और
लेट्स से मेरी इनकम अब हो गई है 00 बात सही है सही बात है पहले मैं कमाता था 00 अब मैं कमा रहा हूं 20000 क्या चेंज
आया यहां पर आप बोलोगे सर यहां आपकी इनकम चेंज हुई पहले मैं थोड़ा कम पैसे कमाता था अब थोड़े ठीक ठाक पैसे कमाने लग हूं अब
मेरे पैसे ज्यादा कमा आने की वजह से मेरी इनकम बढ़ने की वजह से क्या मेरी डिमांड बदलेगी या नहीं बदलेगी हां बिल्कुल बदल
सकती है क्यों नहीं बदल सकती आप भी पहले आप एक चीज समझो ना यार जब आप पहले कम पैसे कमाते थे आप हर जगह पहले बस में जाते थे
आजकल आप लोग ओला में जाने लग गए हो डिमांड में बदलाव तो आया ना या नहीं आया पहले आप कोई भी ऐसी चीज मान लो आप पहले लैपटॉप
खरीदते थे तो पहले सोचते सस्ता वाला लैपटॉप ले ले अब आपकी इनकम बढ़ गई है बोलोगे नहीं सर हमें तो बढ़िया लैपटॉप
चाहिए पहले आप कोई भी फोन ले लेते थे अब बोलोगे नहीं सर हमें आई ही चाहिए तो आर यू गेटिंग वन पॉइंट यहां पर क्या चेंज हो रहा
है इनकम क्या इनकम बढ़ने की वजह से भी डिमांड चेंज हो सकती है हां बिल्कुल हो सकती है तो क्या इस चीज को मैं इनकम
इलास्टिसिटी बोल सकता हूं या नहीं बोल सकता इलास्टिसिटी का मतलब ही चेंज था बदलाव का बिल्कुल तो मेरी इनकम बदलने की
वजह से मेरी डिमांड के अंदर क्या बदलाव आया या मेरी सप्लाई सप्लाई वाला डिस्कस कर
लेंगे सेम ही पॉइंट है एक चीज समझ जाओगे दूसरी रिलेटेड है मान लो अगर मैं सिंपली बोल रहा हू इनकम चेंज होने की वजह से मेरी
डिमांड के अंदर क्या बदलाव आया इसको बोलते हैं इनकम इलास्टिसिटी समझ गए ठीक है अब एक काम करते
हैं कुछ एक एग्जांपल देखते हैं पहले मैं आप लोगों को ना नॉर्मल गुडस समझा देता हूं कि नॉर्मल गुड्स क्या होते
हैं ठीक है नॉर्मल गुड मैं आपको समझा देता हूं जैसे टेक एन एग्जांपल मान लो आपके जैसे कप की बात
है या फिर आपकी फूड की बात है या फिर इलेक्ट्रिसिटी वगैरह की बात है ठीक है ठीक
है अब इन केसेस में पता क्या होता है क्लोथिंग फूड इलेक्ट्रिसिटी यह सब चीजों को हम नर्मल गुडस में इंक्लूड कर लेते
क्या मतलब अब इन केसेस में होता पता क्या है यहां पर आपकी जो इनकम बढ़ती है जब आपकी
कमाई बढ़ी जब आपकी इनकम बढ़ी ना तो उस इनकम के बढ़ने की वजह से आप ज्यादा कपड़े खरीदने लग गए आप थोड़ा ज्यादा ढंग का खाना
खाने लग गए आप थोड़ा इलेक्ट्रिसिटी को ज्यादा यूज करने लग गए इन चीजों को बोला जाता है आपकी नॉर्मल
गुड्स समझे इस बात को आपको मैं एग्जांपल देता हूं इलास्टिसिटी का मतलब पता था इनकम में क्या बदलाव आया मान लो आपकी इनकम पहले
10000 थी राइट और अब आपकी इनकम हो गई है मान लो 20000
तो क्या मैं ये कह सकता हूं कि आपकी इनकम में 100% चेंज आया 100% आपकी इनकम बढ़ गई बिल्कुल बिल्कुल बढ़ गई प्राइस में चेंज
कितना आया मतलब सॉरी इनकम में कितना चेंज आया 100% का अब हो सकता है कि पहले लेट्स से आप लोग जो क्लोथ खरीदते थे वो 1000 के
कपड़े खरीदते थे अब आपने पता क्या कर दिया अब आप लोग 1500 के कपड़े खरीदने लग गए क्यों अरे आपकी कमाई बढ़ गई है ना यार
इसलिए आपने कपड़े ज्यादा खरीदने शुरू कर दिए तोक मैं ऐसा कह सकता हूं कि हज की जगह अब आप 1500 के कपड़े खरीद रहे हो हर महीने
तो क्या ऐसा कहा जा सकता है कि यहां पर इंक्रीज कितना हुआ 50 पर का इंक्रीस हुआ बिल्कुल हुआ तो आप एक चीज नोटिस कर पा रहे
हो यहां पर जो मैं निकालू ये वैल्यू ये क्या आएगी ये आएगी इनकम इलास्टिसिटी ऑफ डिमांड और यह आपकी आ जाएगी फ तो कहने का
अर्थ पता क्या है कुछ ऐसी गुड्स होती है जिनको हम बोलते हैं नॉर्मल गुड्स जैसे-जैसे आपकी इनकम
इंक्रीज होती है वैसे-वैसे आप उनको ज्यादा कंज्यूम कर ना स्टार्ट करते हो ऐसा भी नहीं कि बहुत ज्यादा यूज करने कंज्यूम
करना स्टार्ट कर दिया पर हां आपकी जो इनकम इलास्टिसिटी है ना वो जीरो से एक के बीच में आ जाती
है आपकी कमाई बढ़ने से आपने किसी चीज को ज्यादा कंज्यूम करना स्टार्ट कर दिया दैट इज नोन एज नॉर्मल गुड ऐसा भी नहीं कि बहुत
ज्यादा यूज करने लग गए बट हां पहले के मुकाबले में आपने थोड़ा सा उसमें इंक्रीज कर दिया है राइट ये चीजों को बोलते हैं हम
नॉर्मल गुड्स कि आपकी इनकम इलास्टिसिटी है पर वो जीरो से वन के बीच में ऐसा नहीं होगा कि आपकी इनकम 10000 से
20000 बढ़ जाएगी और आपने कपड़े हज की जगह 3000 खरीदने लग जाओ नहीं नॉर्मल गुड्स में जनरली ऐसा देखा जाता है इतना फर्क नहीं
आता आप ज्यादा खरीदना शुरू करते हो पर बहुत ज्यादा खरीदना नहीं लग जाते ऐसा नहीं है कि हजार को हजार के कपड़े री तीन गुना
खरीदने लग ग नहीं राइट तो नर्मल गुड्स के अंदर हमारी जो इनकम इलास्टिसिटी है जनरली जीरो से वन के बीच में रहती है ठीक है ठीक
है ठीक है इसी तरह से एक चीज होती है आपकी इनफीरियर गुड्स अब आप पूछेंगे सर ये क्या चीज है सिंपल से एग्जांपल से देता हूं फॉर
एग्जांपल टेक एन एग्जांपल जैसे मान लो आप हो दिल्ली में रहने वाले और आप चंडीगढ़ अक्सर जाते रहते हो कहां जाते रहते हो
चंडीगढ़ ठीक है अब दिल्ली से चंडीगढ़ आप लोग जाते थे पहले मैं मान लेता हूं पहले आपकी कमाई थी महीने की आप इनकम करते थे 00
पहले महीने का कितना कमाते 10000 तब आप लोग जाते थे बस के अंदर और वापस बस में आते
थे सही बात है पर अब आपकी कमाई बढ़ गई है अब लेट्स से आपकी कमाई होगी 0000 अब आप ज्यादा कमाने
लग गए हो अब आप बोलोगे नहीं यार मुझे नहीं जाना बस के अंदर मैं बस के धक्के क्यों खाऊं अब आप यह बस को खत्म कर दोगे अब बस
की जगह आप अपनी खुद की टैक्सी या कार में जाने लग जाओगे एंड उसी तरह से आप वापस भी आओगे बात सही है
बात सही है ठीक है अब समझना अब देखना किसको है बस को बस को
देखो आपकी जब कमाई कम थी तो आप बस को ज्यादा इस्तेमाल कर रहे थे सही बात आज जब आपकी कमाई बढ़ गई है आपने बस का इस्तेमाल
कम कर दिया है क्या बोला मैंने मैंने बोला जब आपकी कमाई आपकी कमाई कम थी तो बस का इस्तेमाल था ज्यादा आज कमाई बढ़ ग गई है
बस्त का इस्तेमाल आपने कम कर दिया तो बस्ट पता क्या हुई यहां पे इनफीरियर गुड हुई क्यों जैसे-जैसे आपकी कमाई बढ़ती रहती है
ना आप इस चीज का इस्तेमाल कम करना लग जाते हो क्योंकि आपको यह चीज पसंद नहीं है इसी को बोलते हैं इनफीरियर गुड जैसे-जैसे आपकी
कमाई बढ़ने लग जाएगी आप उस चीज का इस्तेमाल कम करने लग जाते हो उसकी डिमांड कम हो जाती है आर यू गेटिंग दिस पॉइंट इसी
चीज को बोलते हैं कि इनकम इलास्टिसिटी ऑफ डिमांड यहां पर आपकी नेगेटिव हो जाती है क्यों जैसे-जैसे आपकी कमाई बढ़ रही है आप
उसको कम इस्तेमाल करना शुरू करते हो ये पॉइंट बोला जाता है आपके इनफीरियर गुड्स के अंदर कई बार ऐसा बोला जाता है कि जैसे
मान लो आपकी कमाई बढ़ रही है पहले आप जवार बाजरा के ऊपर डिपेंडेंट थे अब आप उसके अल्टरनेटिव्स के ऊपर आ जाते हो तो जवार
बाजरा खाना छोड़ दिया ना उसी का कुछ और खाने लग गए तो मतलब जैसे आपकी कमाई बढ़ रही है आपको ये चीजें पसंद नहीं थी पर
मजबूरी में कर रहे थे यहां पर भी यही है आपको जाना तो टैक्सी से मजा आता था पर आपके पास पैसे नहीं थे उने आप बस के
माध्यम से जा रहे थे अब जैसे आपके पैसे बढ़ जाएंगे आपको यह चीज पसंद नहीं थी तो आपके लिए क्या थी इनफीरियर गुड आपने उसका
इस्तेमाल कम करने लग ग इसको बलाता है इनफीरियर गुड ध्यान में ये रखना है कि जैसे जैसे कमाई बढ़ती है जैसे आपकी इनकम
बढ़ती है आपका इनफीरियर गुड का इस्तेमाल कम हो जाता है पिछले केस में क्या बोला था नॉर्मल गुड के केस में आपको व इस्तेमाल आप
उसको थोड़ा बढ़ा देते हो ज्यादा नहीं बढ़ाते थोड़ा सा बढ़ा देते हो ठीक है यह भी बात समझ आई इस उसके अलावा अगर मैं बात
करूं ना आपके एक होते हैं लग्जरी गुड्स लग्जरी गुड्स में पता है क्या होता है लग्जरी
गुड्स में यह बात देखी गई है कि जब हम बात करते हैं आपके जब हम बात करते हैं लग्जरी गुड के केस में जैसे मान लो आपकी गाड़ियां
है राइट आपकी हाई एंड गाड़िया जैसे आपका बीएड हो गया या आपके एक्सपेंसिव वॉचेस हो गया जो महंगी घड़िया होती है राइट कुछ इस
तरह के जो आपके लगजरी चीजें होती है इन केसेस में पता है क्या होता है इन या फिर आपके जैसे i वगैरह हो
गया जो आप दिखावे के लिए थोड़ा यूज करते हो इस केस में पता क्या होता है जब आपकी कमाई अच्छी खासी बढ़ती है ना तो इन चीजों
की डिमांड बहुत ज्यादा बढ़ती है एक्चुअल में होता क्या है ना जैसे मान लो जस्ट टेक एन एग्जांपल अगर आपकी पहले कमाई थी लेट्स
से 10000 या 1 लाख मान लेते हैं एंड अब आपकी कमाई हो चुकी है 2 लाख तो ऐसा देखा जाता है कि जब भी आपकी सैलरी इस तरह से
इंक्रीज होती है आपकी इनकम इस तरह से इंक्रीज होती है जिसको हम बोलते हैं डिस्क्रीशनरी स्पेंडिंग वो दरअसल में जो
स्पेंडिंग ज्यादा होने लग जाती है ना वो आपकी लग्जरी आइटम्स के ऊपर ज्यादा होने लग जाती है आप बोलोगे अब इन चीजों प खर्चा
करते हैं अभी तक तो नहीं कर रहे थे अब इन चीजों प खर्चा करना शुरू करते हैं आप ये चीज रिलाइज कर लेना ऐसी वस्तुओं को बोला
जाता है लग्जरी गुड्स कि जैसे जैसे आपकी इनकम बढ़ती है आप इन चीजों के ऊपर खूब खर्चा करना शुरू कर देते हो अब एक चीज
सोचो ना यार आपकी कमाई मान लो 1 लाख से 2 लाख होगी हां ठीक है आप थोड़ा बहुत खाना पना बढ़ा दोगे अपना मतलब जैसे अगर मान लो
000 खाने पर स्पेंड करते थे अब 6000 कर दोगे बाकी पैसे का क्या करोगे बाकी पैसा आप इन चीजों को खरीदने लग जाओगे जो कुछ
आपके पास नहीं थी अभी तक कुछ जो आपको बढ़िया लगती जो स्टेटस सिंबल दिखाती है उस चीजों की तरफ आप खर्चा करना शुरू कर दोगे
इनको बोला जाता है लगजरी गुड्स लग्जरी गुड्स के केस में ना आपकी जो इनकम इलास्टिसिटी ऑफ डिमांड है वो वन से ज्यादा
होती है नॉर्मली समझ गए तो ये पॉइंट्स थे आपको लग्जरी गुड्स नॉर्मल गुड्स और आपको
इनफीरियर गुड्स इनका मतलब पता होना चाहिए लग्जरी ऐसी चीजें जो आपको कहीं ना कहीं स्टेटस सिंबल के साथ जो लिंक्ड होती है
नॉर्मल गुड्स जो आप नेसेसिटीज की हम बात कर सकते हैं इनफीरियर गुड ऐसी चीजें थी जो आपको पसंद नहीं है जैसे आपकी इनकम बढ़ेगी
आप उसका इस्तेमाल कम कर दोगे ये फर्क होता है तीनों गुड्स के अंदर तो ये जो बात यहां पे करी जा रही थी ना इनकम इलास्टिसिटी ऑफ
डिमांड की इनकम इलास्टिसिटी यही चीज दिखाती है कि मान लो अगर आपकी कमाई में चेंज आया उसके हिसाब से आपकी क्वांटिटी
डिमांडेड में क्या चेंज आया अगर सप्लाई साइड का दिखाना चाह रहे हो तो सप्लाई द सेम चीज बस ये देखते हैं कि इनकम के साथ
इन चीजों का क्या बदलाव है क्लियर हुई ये बात ठीक है देखो अगर ना किसी बच्चे को कोई किसी भी कांसेप्ट में डाउट है आप ना इसको
पीछे ना मतलब जो स्ट्रीम चल रहा है उसको पीछे भी करके देख सकते हो राइट क्योंकि youtube1 कर लो ठीक है पॉज कर लो 1.5x पे
देख लो किसी को लग रहा है मैं स्लो पढ़ा रहा हूं तो स्पीड बढ़ा सकता है किसी को लग रहा है तेज पढ़ा रहा हूं तो स्पीड कम करी
जा सकती है और जहां पर कोई कांसेप्ट नहीं समझ आया उसको पा मिनट पीछे ले जाओ 5 मिनट में आपको वो कांसेप्ट दोबारा से एक्सप्लेन
हो जाएगा आर यू गेटिंग माय पॉइंट तो इस तरह से ये चीज कर लिया करो ठीक है रदर देन सेइंग की कमेंट में सर दोबारा एक्सप्लेन
कर दो समझ रहे हो क्योंकि वो चीज नहीं पॉसिबल हो पाती वो लाइव में पॉसिबल है बट यहां पर वो पॉसिबल नहीं है तो जस्ट आपके
पास ऑप्शन है तो आप उसका इस्तेमाल कर लो ये चीज तो बात हुई इनकम इलास्टिसिटी की इसी तरह से एक और टर्म है जिसका नाम क्या
है क्रॉस इलास्टिसिटी अब ये क्या मतलब है मतलब बहुत ही सिंपल सा है अब क्रॉस का मतलब क्या होता है क्रॉस का मतलब होता है
एक चीज का दूसरे के ऊपर फर्क को समझना मैं आपको एग्जांपल देता हूं जैसे एक एग्जांपल समझना मान लो ये दो
बॉटल्स है मेरे पास बिसलेरी और एक फिना है ठीक है या मान लो ये कोका कोला है और ये पेप्सी है अब मुझे एक बात बताओ ये रही
कोकाकोला ये रहा पेप्सी मान लो कोका-कोला का दाम बढ़ गया क्या बोला कोकाकोला का दाम बढ़ गया अब मुझे आप लोग सोच के बताओ कोका
कोला का अगर दाम बढ़ गया तो लोग क्या करेंगे आप बोलोगे सर लोग कोका कोला कम खरीदेंगे कोकाकोला की डिमांड कम हो जाएगी
ना अरे दाम बढ़ गया कोका कोला महंगी हो चुकी है कोका कोला तो लोग कोका कोला कम खरीदेंगे पर pepsi-cola
नहीं खरीद रहे तो लोग क्या खरीदेंगे लोग pepsi-cola की वजह से दूसरे प्रोडक्ट की डिमांड में
क्या बदलाव आया दैट इज क्रॉस इलास्टिसिटी कोका कोला का दाम बढ़ा तो कोकाकोला की डिमांड कम होगी बट pepsi-cola
इस का बढ़ना दूसरी वस्तु के क्वांटिटी डिमांड के ऊपर क्या इंपैक्ट डालता है क्रॉस ला एक का दूसरे पे इंपैक्ट समझ गए
तो ये टर्मिनोलॉजी है आपको इन सबका मीनिंग पता होना चाहिए तो क्रॉस इलास्टिसिटी मैंने आपको अच्छे से एक्सप्लेन कर दिया
हाउ द चेंस इन प्राइस ऑफ वन गुड कैन अफेक्ट द क्वांटिटी डिमांडेड ऑफ अनदर गुड दो प्रोडक्ट्स की य बात होती है ठीक है यह
सारे एग्जांपल देख लिए लग्जरी गुड देख लिया नॉर्मल गुड देख लिया इनफीरियर गुड देख लिया राइट इनकी यहां पे आप लोगों के
डेफिनेशन भी है जैसे मैं बात कर रहा था इनफीरियर गुड्स की ये एक ऐसी इकोनॉमिक टर्म है जो ऐसी वस्तु को दिखाती है कि
जिसकी डिमांड कम हो जाती है जब लोगों की इनकम ब मैंने बताया आपको पब्लिक ट्रांसपोर्टेशन
वाला एग्जांपल जब भी आप कहीं ना कहीं आपकी कमाई बढ़ जाएगी आपकी इनकम बढ़ जाएगी आप पब्लिक ट्रांसपोर्ट कम यूज करते हो और भी
एग्जांपल है आप चीप सीरियल्स खाना कम मतलब आपकी इनकम बढ़ेगी तो चीप सीरियल्स आप कम खाओगे ठीक है ना कुछ और चीज भी आप कम खाना
स्टार्ट कर सकते हो राइट उनको किसी और से सब्सीट्यूट कर दोगे जवाहर बाजरा की जगह आप अंडे हो गया मिल्क हो गया यह सब खाना
स्टार्ट कर दोगे इनको बोलते हैं इनफीरियर गुड्स राइट इसके अलावा एक टर्म और होता है जिसको
हम बोलते हैं गफन गुड्स अब आप पूछेंगे सर ये क्या होता है गफन गुड्स की जब हम बात करें देखो गिफ एन गुड्स ना गिफ एन गुड्स
भी एक अपने आप में बहुत इंपोर्टेंट कांसेप्ट हमें पता होना चाहिए एक्चुअल में क्या होता है गिफ एन गुड एक ऐसा एग्जांपल
होता है जो कहीं ना कहीं हमारे डिमांड वाले लॉ को वायलेट करता है क्या बोला मैंने मैंने बोला ये डिमांड वाले लॉ को
वायलेट करता है अब आप पूछेंगे सर डिमांड वाले लॉ को कैसे वायलेट कर रहा है मैं आपको एक्सप्लेन करता
हूं समझना इस मुद्दे को एग्जांपल समझना जस्ट टेक एन एग्जांपल मान लो जस्ट टेक एन एग्जांपल मान
लो आपके पास ₹1 हैं ठीक है आपके पास ₹1 थे अब ₹1 ना आपने अपना खाने का गुजारा करना है और लेट्स से
आपके पास दो ही ऑप्शन है एक है प्रोडक्ट ए और दूसरा है प्रोडक्ट b क्या कहा मैंने मैंने कहा आपके पास सिर्फ दो ही ऑप्शंस थे
और आपको ₹1 के अंदर अपना गुजारा करना है ठीक है अब 00 के अंदर आपको गुजारा करना है लेट्स से यहां पर बात हो रही है आपके
बाजरा की बात हो रही है एंड यहां पर आप कोई और सबूट लेट से आपका वीट की बात हो रही
है ठीक है और आपको ना अपना गुजारा करने के लिए लेटस से
आपको 10 किलो चाहिए होता है अब वो 10 किलो में आप चाहे बाजरा ले लो वीट ले लो इट इज ओके आप अगर बाजरा नहीं खाओगे आप वीट खा
लोगे वीट नहीं खाओगे तो बाजरा खा लोगे मैं ये नहीं कह रहा कि अ मतलब कि यू नो मैं ये नहीं कह रहा कि अ कंप्लीट एक दूसरे को
सब्सीट्यूट कर देते हैं बट आपकी कोशिश रहती है कि आप थोड़ा वीट ज्यादा खाओ ठीक है अगर मान लो आपको ₹1 के अंदर अपना
गुजारा करना है एंड आपके पास 10 किलो आपको चाहिए बाजरा वीट मिला के और आपको मैं प्राइस बता देता हूं लेट्स से बाजरा के
प्राइस है ₹ पर किलो एंड ऑन द अदर हैंड अगर मैं बात करूं वीट की तो मान लो वीट की प्राइस है ₹ पर किलो अब आपकी कोशिश क्या
रहती है कोशिश रहती है कि ज्यादा से ज्यादा वीट खाई जाए राइट और बाजरा थोड़ा कम खाया जाए तो इस केस में पता है क्या
होगा इस केस में आप नोटिस करोगे यहां पर आप पता क्या कर पाओगे आप ऐसा कर सकते हो कि मान लो आपने
अ ठीक है आपने पता है क्या किया आपने ₹1 किया मैक्सिमम ₹1 था आपके पास मैक्सिमम ₹1 है और आपने क्या कोशिश करी आपने सोचा यार
3 किलो मैं ये खा लेता हूं और 7 किलो यहां से खा लूंगा तब आपका जो प्राइस आया वह 95 में आपका काम बन गया बन गया बिल्कुल बन
गया क्योंकि यहां पर 0 का आपने वीट ले लिया और आपने 3 का यहां पर बाजरा खा लिया तो आपके पास 10 किलो भी कंप्लीट हो गया
एंड 100 से कम में भी हो गया आप 00 मैक्सिमम खर्च कर सकते हो और आपकी कोशिश य होना चाहिए कि वीट ज्यादा से जदा खाए तो
ऐसा कुछ आपके पास कॉमिनेशन था पर इसके बाद मान लो क्या होता है लेट्स से जस्ट टेक एन एग्जांपल मान लो अचानक से पता क्या हुआ
बाजरा के दाम बढ़ गए किके दाम बरे सिर्फ और सिर्फ बाजरा के वीट के प्राइस अभी भी 20 ही है अब मुझे बताओ अगर सेम कंडीशन है
कि आपके पास ₹ ही रुपए हैं एंड आपको 10 किलो यहां पर खाना ही खाना है तो आप कैसे इसको कर पाओगे अब आप बोलोगे सर मैं ऐसा कर
सकता हूं कि लेट्स से एक किलो ये खाऊं और 8 किलो मैं ये खाऊ तब भी नहीं इनफैक्ट बात बनेगी सॉरी ठीक है
ना हां तब भी नहीं बात बनेगी तब भी वो जो वैल्यू आएगी उससे हो जाएगी अब इस केस में पता क्या करना पड़ेगा आप आपको 10 के 10
किलो बाजरा ही खाना पड़ेगा और वीट आपको त्याग नहीं पड़ेगी यहां पे क्या हुआ यहां पे आपने बाजरा ज्यादा खाने लग गए क्यों
क्योंकि यहां पे आपको ₹1 मीट करना था अगर आप अभी भी वीट इतनी खा रहे होते 3 किलो ही तब आप बाजरा यूज ही नहीं कर पाते अब आपके
पास उतना पैसा ही नहीं था आपने एक चीज नोटिस करी हुआ पता क्या यहां पर बाजरा का दाम था पहले ₹ अब उसका दाम हो गया है ₹10
अब मैंने आपको एक चीज बताई थी कि जब भी किसी चीज का दाम बढ़े क्या हो जब भी किसी चीज का प्राइस बढ़े तो होना क्या चाहिए सर
प्राइस बढ़ने की वजह से जब प्राइस बढ़ता है तो डिमांड नीचे आती है बोला था या नहीं बोला था बिल्कुल बोला था तो जब प्राइस
बढ़ना चाहिए था तो इसकी डिमांड कम होनी चाहिए पर हम यहां पे देख रहे हैं भाई पहले इसकी डिमांड थी 7 किलो की अब इसकी डिमांड
हो गई है 10 किलो की अरे बाप रे तो क्या मैं ये कह सकता हूं ये लॉ ऑफ डिमांड के तो अगेंस्ट चला गया लॉ ऑफ
डिमांड तो यही कह रहा था ना कि प्राइस बढ़ेगा तो डिमांड कम होगी पर यहां तो प्राइस बढ़ने के साथ-साथ डिमांड बढ़ रही
है है कि नहीं ऐसी चीजों को हम बोलते हैं गिफ इन गुड्स यह वाले जो गिफिन गुड्स होते हैं ना दे गो अगेंस्ट द प्रिंसिपल ऑफ लॉ
ऑफ डिमांड आर यू गेटिंग माय पॉइंट यहां पर क्या हो रहा है दाम बढ़ रहा है यस पर डिमांड भी साथ-साथ बढ़ेगी इसको बोलते हैं
गिफ इन गुड्स इंपॉर्टेंट बात आपको ध्यान में रखनी है कि गिफ इन गुड्स की जब हम बात करते हैं ना गिफ इन गुड्स अक्सर लो
क्वालिटी गुड्स ही होती हैं क्या मैंने यहां पे लिखा डिमांड फॉर गिफ इन गुड्स राइजेज व्हेन प्राइस राइजेज अगर गिफिन
गुड्स का दाम बढ़ रहा है तो उनकी डिमांड बढ़ रही है अगर प्राइस कम हो रहा है तो उनकी डिमांड नीचे आ रही है जैसे फॉर
एग्जांपल कई बार जैसे ब्रेड राइस वीट हो गया राइट अगर मतलब पता क्या है यह इन्होंने जो एग्जांपल दिए है ना इन्होंने
ऐसा मान लिया कि जैसे फॉर एग्जांपल लेट्स से अगर मैं यहां पर इसको वीट लिख दूं और यहां पर लेट्स से कोई और न्यूट्रिशस चीज़
लिख दूं मान लो एग्स हो गया या मीट वगैरह हो गया कुछ ऐसे बढ़िया वाली जो ब बढ़िया वाली नहीं अ जो मतलब थोड़ी सी एक्सपेंसिव
वाली चीज होती है वीड के मुकाबले भी या और कोई ऐसी कोई वस्तु हो गया कुछ ऑर्गेनिक चीज आ गई उस तरह की चीजें की बात कर रहा
हूं राइट कुछ ऑर्गेनिक वाली चीज आ गई इस तरह से आप कह सकते हो तो लोग ना इस चीज को इस्तेमाल कम करना मतलब बढ़ाना शुरू कर
देंगे अगर इसके दाम बढ़ रहे हैं ऐसी चीज को बोलते हैं हम क्या गिफ इन गुड्स इसको नाम दिया जाता है ठीक है तो उनके कुछ
सब्सीट्यूट्स होते हैं डेफिनेटली एट द सेम सिमिलर प्राइस लेवल हमें यहां पे देख देखने को मिल जाते हैं या थोड़े से हमसे
ज्यादा प्राइस पे देखने को मिल जाते हैं ठीक है तो यहां पर आपको ध्यान में रखना है गिफ इन गुड क्या होती है लो इनकम नॉन
लग्जरी प्रोडक्ट होता है ठीक है ना वो देखा ना जो पहला वाला प्रोडक्ट था वो नॉन लग्जरी प्रोडक्ट था राइट जो कहीं ना कहीं
आपकी डिमांड थ्योरी को डिफाई करता है डिफाई मतलब उसके अगेंस्ट जाता है डिमांड ऑफ लॉ ऑफ डिमांड क्या कहता है प्राइस
बढ़ेगा तो डिमांड कम होगी पर यहां पर क्या हुआ प्राइस बढ़ने के साथ-साथ डिमांड बढ़ रही थी तो इट डिफाई डिफाई मतलब उसके जाना
नॉन लगजरी प्रोडक्ट है एंड बाकी चीज भी हमने समझ ली दिस इज गफन गुड्स ठीक है इसके अलावा दोस्तों हमारे पास ना एक
यहां पर एक और तरह की गुड्स होती है जिनको हम नाम जानते हैं जिनका जिनका नाम होता है क्या वेबल गुड्स अब आप पूछेंगे सर वेबल
गुड्स क्या होती है देखो गिफिन गुड्स तो समझ आ गया जो वेबन गुड्स क्या होती है वेलेन गुड्स भी
ना ये भी एक ऐसी गुड्स होती है जो कि आपके लॉ ऑफ डिमांड के अगेंस्ट जाती है क्या करती है लॉ ऑफ डिमांड के अगेंस्ट
जाती है अब आप पूछेंगे ऐसा कैसे अभी तो गफन गुड्स का तो समझ आ गया वो लॉ ऑफ डिमांड के अगेंस्ट जा रही थी हमने समझा पर
हाउ डू वेबल गुड्स गो लॉ ऑफ डिमांड देखो गिफ एन गुड्स ना लो क्वालिटी वाली चीजें थी है ना नन लग्जरी वाली चीजें थी वेबल
गुड्स के अंदर थोड़ी लग्जरी वाली चीजें आती है आप पूछेंगे वो कैसे देखो यार मैं समझाता हूं आप लोगों ने
जैसे आ देखा होगा आ ठीक है यूज है उसका पर काफी सारे लोग ना दिखाने के लिए बस यूज करते हैं कि यार यह देखो मेरे पास आई है
यह डेढ़ लाख का है मेरे पास यह वाला आई का मैंने लेटेस्ट वर्जन ले लिया यह सवा लाख का है वो सिर्फ और सिर्फ क्या होती है
दिखावे के लिए होती है कई लोग किसी जगह प जाते घूमने जाते हैं या एक मान लो कोई गाड़ी खरीदते हैं अब वो गाड़ी पता क्यों
खरीदते हैं इसलिए नहीं कि उनको यूटिलिटी होती है उसकी बल्कि इसके लिए कि उनको दुनिया को व चीज दिखानी होती है कि यार यह
देखो मेरे पास 35 लाख की गाड़ी है मेरे पास 50 लाख वाली गाड़ी है समझ पाए हो वो एक तरह का क्या होता है स्टेटस सिंबल वाली
चीज होती है कि उनको दिखाने में मजा आता है कि यार मतलब ये देखो मेरे पास 4050 लाख की गाड़ी
है अब ऐसी गुड्स के अंदर होता पता क्या है ऐसी गुड्स के अंदर जैसे-जैसे उनका प्राइस बढ़ता है ना वैसे-वैसे उनकी डिमांड बढ़ती
है देखो नॉर्मली तो मैंने कहा था कि यार प्राइस बढ़ने की वजह से किसी चीज की डिमांड कम होगी पर वेबल गुड्स में ऐसा
नहीं होता वेबल गुड्स में आप दिखावा कर रहे हो कि यार मेरे पास तो 50 लाख की गाड़ी है कल को वही गाड़ी 55 लाख की हो
जाएगी ना आपकी डिमांड बढ़ेगी उसके ऊपर आपके पास लुई विटन का जो बैग्स वगैरह आते हैं राइट या इस तरह से बहुत एक्सपेंसिव
बैग्स आते हैं वो स्टेटस सिंबल के लिए होते हैं जैसे-जैसे उनका दाम बढ़ता है ना वैसे-वैसे क्या होता है वैसे-वैसे उनकी
डिमांड इंक्रीज होती है आर यू गेटिंग दिस पॉइंट तो फर्क पता क्या है वेबल गुड्स भी और आपके गिफिन गुड्स भी दोनों के दोनों लॉ
ऑफ डिमांड के अगेंस्ट जाते हैं उसको फॉलो नहीं करते लॉ ऑफ डिमांड बहुत सिंपल चीज बोलता है कि प्राइस बढ़ेगा डिमांड कम होगी
पर गिफ इन गुड्स भी और आपका वेबलिन गुड ये दोनों अगेंस्ट जाते हैं इस लॉ ऑफ डिमांड के फर्क इतना है वेबल गुड में हम बात करते
हैं स्टेटस सिंबल वाली चीजों की लग्जरी चीजों की बात करते हैं पर गिफ एन गुड्स के अंदर हम बात करते हैं नॉन लग्जरी चीजों की
या सस्ती चीजों की यहां पर बात करते हैं वेबल के अंदर बहुत महंगी चीजों की हम बात कर रहे होते हैं आर यू गेटिंग दिस
पॉइंट ध्यान यह रखना है वेबल और गिफिन का अंतर आपको पता होना चाहिए ठीक है आई थिंक यहां तक सारी चीज तो क्लियर है आगे आ जाते
हैं अब यहां पर आप लोगों के लिए मैंने यहां पे वेबन इफेक्ट को समझाया भी है जैसे मान लो एग्जांपल यहां पे ना इन्होने
रोलेक्स का दिया है लेक्स की घड़ी का एग्जांपल दिया हुआ है या फिर रोयल राइस जो कार होती है ठीक है ना इसमें क्या होता है
इसमें जितना दाम बढ़ जाता है उसके हिसाब से लोग इसको ज्यादा खरीदने की कोशिश करते हैं इसकी डिमांड बढ़ जाती है यही बोलते
हैं वेबल इफेक्ट होना उल्टा चाहिए कि महंगा हो रहा है तो डिमांड कम होनी चाहिए बट यहां नहीं यहां उल्टा होता है दिस इज
नोन एज वेबल गट्स या वेबल इफेक्ट ठीक है एक और यहां पे आपको टर्म देखने को मिलेगी जिसका नाम है क्या स्पेक्युलेटिव इफेक्ट
क्या बोला मैंने स्पेकल इफेक्ट क्या मतलब का डू यू नो व्हाट दे मीन बाय स्पेकल
स्पेक्युलेटिंग वाली है मान लो जैसे आप लोग मुझे बोलो आपने कोई वो नहीं कर रखा आईएमडी वगैरह की बात नहीं
कर रहा मेटलजंक्शन [संगीत] ऐसे ही चाय पी रहे थे आपने बोला यार कल ना
बारिश होने वाली है स्पेक्युलेटिव है मान लो घड़ी है ये अब मुझे ऐसा लग रहा है कि यार घड़ी के ना दाम
बढ़ने वाले हैं घड़ी के दाम फ्यूचर में बढ़ने वाले हैं ऐसा मुझे लग रहा है मेरा
उस केस में मैं पता क्या करूंगा जब मुझे ऐसा लग रहा है यार घड़ी के दाम बढ़ने वाले हैं मैं इस घड़ी को दाम को आगे बढ़ने के
लिए वेट नहीं करूंगा मैं इस घड़ी को आज ही खरीद लूंगा पता है क्यों क्योंकि मुझे ऐसा लग रहा है यार आगे जाके और बढ़ जाएंगे आगे
जाके घड़ी और महंगी हो जाएगी तो क्यों ना मैं इसको आज ही खरीद ल ठीक है एक तो चीज यह होती है यहां पर पता क्या हुआ इस घड़ी
की डिमांड आज बढ़ गई पता है क्यों क्योंकि हमें स्पेकल थी कि फ्यूचर में इसके दाम बढ़ जाएंगे तो इस घड़ी की आज डिमांड बढ़ना
इसने लेटिव इफक्ट उल्टा भी हो सकता है मुझे ऐसा लग सकता है यार यह घड़ी की ना दाम फ्यूचर में कम होने वाले हैं मुझे पता
नहीं है सच में होने वाले नहीं होने वाले पर मुझे आइडिया है थोड़ा सा स्पेकल है मेरी उस केस में पता क्या करूंगा मैं
इंतजार करता रहूंगा यार सस्ती हो जाए घड़ी सस्ती हो जाए घड़ी सस्ती हो जाए घड़ी फिर खरीदेंगे इस घड़ी को वो भी एक तरह की
स्पेकल है इसी को बोलते स्पेक इफेक्ट यहां पर क्या होता है फ्यूचर इवेंट्स की एक्सपेक्टेशन के हिसाब से
चीजों के अंदर वेरिएशन आते हैं अगर प्राइस किसी क्वालिटी का मान लो बढ़ता जा रहा है बढ़ता जा रहा है और हमें लगता है कि अभी
और बढ़ेगा फ्यूचर के अंदर उस केस में हम उसको आज ही खरीद लगते हैं कई बार जैसे होता है ना स्टॉक मार्केट के अंदर मान लो
स्टॉक मार्केट ऊपर जा रही है ऊपर जा रही है समझना इस मुद्दे को मैं मान लो जैसे मैं स्टॉक मार्केट की बात कर रहा हूं मान
लो स्टॉक मार्केट ना ऐसे ऊपर जा रही है ठीक है अब टेक्निकली जब स्टॉक मार्केट ऊपर जा रही है तोब आप लोग ये सोचोगे या
स्टॉक मार्केट नीचे आए तब खरीदेंगे पर नहीं आपको लगता है यार ये स्टॉक मार्केट ऊपर जा रही है ना तो हो सकता है और ऊपर
जाए और ऊपर जाए और ऊपर जाए है ना तब आप यहां पर इसका खरीद लोगे होना क्या चाहिए था लॉ ऑफ डिमांड क्या कहता है कि यार जब
कोई प्राइस ऊपर जाता है किसी चीज का तो डिमांड कम होती है पर यहां उल्टा हो रहा है लोगों को डर है लोगों को
स्पेक्युलेटिंग ऑफ लॉ या लॉ ऑफ डिमांड के अगेंस्ट नहीं गया बिल्कुल गया जैसे जैसे दाम बढ़ रहे थे आपने उसको और खरीदा और
डिमांड करी पता है क्यों क्योंकि आपने स्पेक है कि अभी तो ये और ऊपर जाएगा इसी को बोलते स्पेकल इफेक्ट समझ गए इस मुद्दे
को ठीक है बाकी देखो कुछ और टाइप्स ऑफ गुड्स भी होती है जिनको हम बोलते हैं सब्सीट्यूट गुड्स क्या होता है सब्सीट्यूट
गुड्स अब आप पूछेंगे सर सब्सीट्यूट क्या होता है कभी नाम सुना है सब्सीट्यूट वर्ड का हां बिल्कुल सुने क्रिकेट कभी देखते
होंगे आप लोग कई बार ऐसा होता है कि मान लो कोई बंदा हो गया मान लो हार्दिक पांड्या इंजर्ड हो गया तो हम बोलते ठीक है
या हार्दिक पांड्या इंजर्ड है हार्दिक पांड्या की जगह के ऊपर हम अक्षर पटेल को खिला देते हैं एक का सब्सीट्यूट ले आते
हैं यही होता है कि एक की जगह हमने दूसरे को खिला लिया उसका सब्सीट्यूट यह बनके आ गया यही तो वर्ड है सब्सीट्यूट बिल्कुल
ठीक बात है अब होता पता क्या है होता बहुत ही सिंपल चीज है वापस इ बटल को लेकर आते हैं यह है मान लो कोका कोला यह था मेरा
पेप्सी यह था कोका कोला यह था पेप्सी अब मैं आपके घर आया मैं आपके घर आया आपने मेरे से पूछा
सर क्या पियोगे कोका कोला पियोगे या पेप्सी पियोगे आप लोगों ने मुझे रिस्पेक्ट के तौर के ऊपर दो चीज पूछी अब वर्ड देखो
क्या आया कोका कोला या पेप्सी यह चीज पता क्या है सब्सीट्यूट गुड्स है अगर मैंने भाई कोका कोला पी लिया
तो मैं पेप्सी नहीं पिऊंगा और अगर मैंने पेप्सी पी ली तो भाई मैं कोका कोला नहीं पिऊंगा यू हैव टू चूज वन अमंग द टू दोनों
में से किसी एक को पीना पड़ेगा है कि नहीं ऐसी चीजों को बोलते हैं हम सब्सीट्यूट गुड्स आर यू गेटिंग इट और एग्जांपल दे दो
सर जैसे आपका चाय और कॉफी भाई या तो आप लोग चाय पियोगे या आप लोग कॉफी पियोगे दोनों थोड़ी
ही पियोगे कुछ लोग पीने वाले पी भी लेंगे उनका उनका नहीं बट नॉर्मली हम बात करें आप अगर एक समय के ऊपर चाय पी रहे हो तो आप
कॉफी नहीं पियोगे और अगर कॉफी पी रहे हो तो भाई चाय नहीं पियोगे ऐसी चीजों को बोलते हम सब्सीट्यूट गुड्स वेयर
इन वन गुड रिप्लेस द अदर दैट इज सब्सीट्यूट गुड ठीक है ठीक है अब यह बात तो हमें समझ आई कि इसका एग्जांपल हमें
क्लियर हो गया या फिर जैसे मैंने बोला कोका कोला और पेप्सी यह भी हमारा एक सब्सीट्यूट गुड हो
गया अब हमें पता समझना पता क्या है मीनिंग तो क्लियर है हम सब्सीट्यूट गुट का हमें यह जानना है कि एक चीज के प्राइस में चेंज
आने की वजह से दूसरे के ऊपर क्या इफेक्ट आता है हालांकि मैंने जब आपको क्रॉस इलास्टिसिटी समझाया था तब मैं आपको ये चीज
बता भी चुका हूं बट फिर भी एक बार दोबारा से अंडरस्टैंड करते हैं टेक एन एग्जांपल मान लो जस्ट टेक एन एग्जांपल आपके पास दो
ऑप्शन थे मतलब या तो आप चाय पीते या आप कॉफी पीते ठीक है जस्ट टेक एन एग्जांपल मान लो चाय के जो प्राइस थे ना क्या मैंने
बोला चाय के प्राइस बढ़ गए चाय महंगी हो चुकी है मुझे एक बात बताओ अगर चाय महंगी हो चुकी है तो लोग पता है क्या करेंगे लोग
बोलेंगे या चाय महंगी हो गई है एक काम करते हैं चाय पीना बंद कर देते हैं कॉफी पीना शुरू कर देते हैं क्यों क्योंकि चाय
महंगी है चाहे महंगी है तो क्या हुआ चाय महंगी है चाय का प्राइस बढ़ गया तो चाय की डिमांड कम आ जाएगी या नहीं आ जाएगी लॉ ऑफ
डिमांड पढ़ के आए तो है हम लोग चाय का प्राइस बढ़ जाएंगे तो चाय की डिमांड कम होगी और चाय की डिमांड को कौन सब्सीट्यूट
करेगा वो करेगा कॉफी तो होता पता क्या है जब एक प्रोडक्ट का दाम बढ़ जाता है तो उसकी डिमांड कम हो जाती है एंड उसकी
डिमांड किसकी बढ़ जाती है उसके सब्सीट्यूट वाले की डिमांड बढ़ जाती है चाय का प्राइस बढ़ गया चाय की डिमांड कम होगी चाय की
डिमांड कम होगी तो कहीं ना कहीं कॉफी की डिमांड बढ़ गई सेम चीज कोका कोला और pepsi-cola
वालों ने डिसाइड किया कि प्राइस 50 हो गया अब यार कोका-कोला महंगा हो जाएगा हालांकि कोका कोला और pepsi-cola
समझ आता है पर मान लेते हैं कि सेम ही टेस्ट है मान लेते हैं थोड़े टाइम के लिए कि 30 वाली चीज कोका कोला ने ₹ की कर दी
अब लोग सोचेंगे यार कोकाकोला इतना महंगा हो गया है हम नहीं पिएंगे अब कोकाकोला एक काम करते हैं पेप्सी पी लेते हैं तो होता
क्या है ना जब एक वस्तु की दाम बढ़ते हैं तो इसकी डिमांड कम हुई बट इसके जो सब्सीट्यूट थी उसकी डिमांड कहीं ना कहीं
बढ़ गई ये होते हैं आपके सब्सीट्यूट गुड्स क्या ये कांसेप्ट क्लियर हुआ सब्सीट्यूट गुड का ठीक
है अब एक कांसेप्ट और है जिसको हम बोलते हैं कंप्लीमेंट्री गुड्स सब्सीट्यूट गुड्स हमने साइड में रख दिए अब
बात करेंगे कॉम्प्लीयंट मेंट्री वर्ड कब सुना है आपने जब हम बात करें ना
कॉम्प्लीयंट किया कई बार आप लोग भी तैयार होते होंगे तो कई बार क किसी ने आपको बोला होगा यार
इस टीशर्ट के साथ ना यह वाले जूते बड़े कॉम्प्लीयंट बढ ललग रही है एक दूसरे को कंप्लीमेंट
करती है यानी कि वो चीजें जब वो साथ-साथ में आती है तो बहुत अच्छी लगती है सर एग्जांपल दे दीजिए हां बिल्कुल जैसे आप
देखो चाय और पकड़ा चाय पकौड़ा क्या है ये आपके कॉम्प्लीयंट
जैसे छोले भटूरे है कि नहीं ठीक है ना मुंह में पानी नहीं आना चाहिए लेकिन इससे छोले भटूरे हो गया ये साथ में दोनों बहुत
बढ़िया लगते हैं म दार लगते हैं खाने में और भी बहुत सारे एग्जांपल हो सकते हैं जो आपको और सोचना हो सोच लेना ठीक है अब ये
इनमें देखो सब फर्क समझना पिछले वाले में ना मैंने वर्ड यूज किया था और या ये या वो या ये या वो यहां पर वर्ड पता है क्या यूज
कर रहा हूं प्लस यूज कर रहा हूं या एंड यूज कर रहा हूं चाहे एंड पकोड़ा छोले एंड भटूरे क्योंकि ये साथ-साथ में बहुत बढ़िया
लगते हैं पिछले वाले में थे दोनों में से एक अब एक चीज सोचना जस्ट एग्जांपल मान लो चाय है जैसे अब चाय मान लो महंगी हो गई
[संगीत] अब चाय महंगी हो जाएगी तो लोग चाय कम पिएंगे और लोग चाय कम
पी रहे हैं तो कहीं ना कहीं भाई पकड़े भी कम खाएंगे फर्क समझ रहे हो यह कॉम्प्लीयंट
में यहां पर हो रहा है कि एक का दाम बढ़ गया ना तो उसकी डिमांड कम होगी अरे इसकी डिमांड कम हुई तो भाई इसकी भी डिमांड कम
हो जाएगी यहां पर भी देख लो मान लो छोले महंगे हो गए या मान लो भटूरे महंगे हो गए एग्जांपल मान लो या जो भी आपको देखना है
मान लो छोले महंगे हो गए अब छोले महंगे हो जाएंगे तो लोग कहेंगे यार छोले तो बहुत महंगे हैं तो छोले कम खाना स्टार्ट कर
देते हैं लॉ ऑफ डिमांड छोले कम खाना स्टार्ट करेंगे तो भाई भटूरे भी कम ही खाएंगे फिर क्योंकि महंगे हो गए ना छोले
इसलिए इस तरह से इनको बोलते हैं कॉम्प्लीयंट ठीक है मान लो छोले के प्राइस कम हो गए छोले सस्ते हो गए छोले सस्ते हो
गए तो छोले की डिमांड बढ़ जाएगी एंड कहीं ना कहीं लोग फिर चोलो के साथ भटूरे भी खूब खाएंगे भर भर के खाएंगे पेट भर के आर यू
गेटिंग द पॉइंट तो कॉम्प्लीयंट यहां पे लिखे हुए हैं ब्रेड जैम हो गया या चाय और चीनी हो गया ये इंटरडिपेंडेंट है
साथ में बहुत बढ़िया लगते हैं कंपैटिबल बहुत ज्यादा है गेटिंग इट ये होते हैं आपके कॉम्प्लीयंट
देखो इसके अलावा तो मतलब मेजर तो यही थी बट इसके अलावा कुछ एक चीजें जैसे फॉर एग्जांपल एक होती है इकोनॉमिक गुड
इकोनॉमिक गुड एक ऐसी वस्तु या ऐसी ऐ सर्विस को बोला जाता है जिसका कुछ ना कुछ सोसाइटी को बेनिफिट या यूटिलिटी होती है
कोई भी वस्तु जहां पर हमें कहीं ना कहीं अ कुछ सोसाइटी को बेनिफिट मिले उसको इकोनॉमिक गुड बोल जाते हैं और जैसा मैंने
स्टार्टिंग में बोला ही था दुनिया में रिसोर्सेस की हमेशा कमी रहती है तो यहां पर हमें देखने को मिलता है कि इकोनॉमिक
गुड्स के साथ एक स्कार्सिटी लिंक्ड होती है एंड कहीं ना कहीं इसके साथ एक ऑर्च निटी कॉस्ट भी एसोसिएटेड होती है यानी कि
अगर आप एक चीज कर रहे हो तो उसके करेस्पॉन्डिंग्ली नहीं कर रहे क्लियर बेसिक आइडिया
था ठीक है ठीक है यहां तक कोई दिक्कत किसी को नहीं अब आपको ना कुछ एक टर्मिनोलॉजी और समझनी है अब हमने ना पब्लिक और प्राइवेट
गुड समझना है पर उसको समझने के लिए हमारे पास कुछ टर्म्स का एक आईडिया होना चाहिए
समझना क्या आप वर्ड समझते हो एक्सक्लूड करना आपने वर्ड सुना इंक्लूड इंक्लूड मतलब उसको ड ऑन करना अपने साथ मिलाना
एक्सक्लूड मतलब होता है उसको हटाना बाहर हटाना साइड कर देना एक वर्ड आपके सामने यूज कर रहा हूं एक्सक्लूड
बल और एक मैं आपके सामने वर्ड यूज कर रहा हूं नॉन एक्सक्लूड यह दो टर्म्स आपके सामने आपको
देखने को मिल रहे हो ठीक है ठीक है ठीक है एक्सक्लूड मतलब किसी चीज को हटाना
पॉसिबल है किसी बंदे को हटाना पॉसिबल है नॉन एक्सक्लूड बल का मतलब हटाना पॉसिबल नहीं है आप पूछेंगे सर क्या बोल रहे हो
हटाना हटाना क्या मतलब है इस चीज का एग्जांपल से समझते हैं मान
लो एक मूवी आई मान लो लेट्स से एनिमल मूवी आई ठीक है अब होता पता क्या है क्या एनिमल मूवी सब लोग देखने जा सकते हैं आप बोलोगे
नहीं सर आप बोलोगे सर एनिमल मूवी की टिकट ही 00 है तो होता पता क्या है ये जो एर मूवी टिकट है यहां पर ना आप किसी को हटा
सकते हो समझना पहले समझ लो अच्छे से समझ आएगा चिंता मत करो एग्जांपल मैं इसीलिए देता हूं ताकि समझने में कभी कोई दिक्कत
ना आए मूवी टिकट में ना आपने किसी को एक्सक्लूड कर दिया कैसे कर दिया एक्सक्लूड जिसके पास 00 है वो आके मूवी देख सकता है
जो नहीं है वो नहीं देखेगा उसको नहीं देखने दिया जाएगा तो यानी कि इसको मिटाना पॉसिबल है किसी को बाहर करना यहां पर
पॉसिबल है ठीक है आपका जैसे मोबाइल फोन हो गया अब मोबाइल फोन मान लो 50000 का आता है जो बंदा कहीं ना कहीं वो अफोर्ड कर सकता
है वो खरीद सकता है इसको जिसके पास नहीं है उसको हटा दिया जाएगा उसको एक्सक्लूड कर दिया जाएगा भाई तुझे नहीं ये चीज मिलेगी
बात समझे हो कि इसके अंदर ना इन दोनों एग्जांपल्स के अंदर किसी को हटाना और किसी को रखना यहां पर पॉसिबल है गाड़ी आपका हो
गया ऑटोमोबिल हो गया यहां पर भी सेम चीज है किसी को रखना किसी को हटाना अपने आप में पॉसिबल है ऐसी चीजों को हम बोलते हैं
एक्सक्लूडिंग अपन द फैक्ट पेमेंट वगैरह है यहां प इवॉल्व सही बात है आप पूछेंगे सर नॉन एक्सक्लूज होती है नॉन एक्सक्लब का
मतलब उसमें किसी को हटाना पॉसिबल ही नहीं है आप पूछेंगे ऐसी कौन सी चीज है अरे भाई जैसे आपकी हवा एयर अब मैं यह थोड़ी कह
सकता हूं यार यहां पर हवा है यहां पर हमारे यहां सब जगह हवा है अब ऐसा थोड़ी हो सकता है भाई यह हवा सिर्फ
ऋषभ को मिले और अंकित को ना मिले ऐसा थोड़ी हो सकता है आप बोलोगे या इस बंदे को हवा नहीं मिलनी चाहिए क्या इसको एक्सक्लूड
करना पॉसिबल है नहीं आपका जैसे कंट्री का आपका नेशनल डिफेंस है आपकी आर्मी है और आपके जो भी फोर्सेस है क्या आप ऐसा कह
सकते हो कि भाई एक काम करते हैं य नेशनल डिफेंस है ना यह हमारे बॉर्डर के ऊपर हमारी फोर्सेस खड़ी हुई है इन बॉर्डर की
फोर्सेस को सिर्फ और सिर्फ इस बंदे की प्रोटेक्शन करनी है इस बंदे की नहीं करनी अरे ऐसा नहीं होता देश की आर्मी है वो
सबके लिए है चाहे किसीने पैसा दिया है किसी ने पैसा नहीं दिया फर्क नहीं पड़ता किसी को हटाना पॉसिबल ही नहीं है इनमें से
कि नेशनल डिफेंस सिर्फ कुछ लोगों के लिए काम करे बाकी लोगों के काम ना करे ऐसा थोड़ी होता है इसी तरह से आपके कुछ पब्लिक
बीच होते हैं ठीक है या फिर कुछ पब्लिक पार्क होते हैं अब बीच है मैं प्राइवेट बीच की बात
नहीं कर रहा कि कोई प्राइवेट बीच हो दैट इज अ सेपरेट थिंग पब्लिक बीच वो तो सबके लिए खुला है किसी को भी जाना है वो जा
सकता है मैं ये नहीं कह रहा कि वहां पे पर्ची वाला सिस्टम कई जगह पे होता है पची वाला सिस्टम दैट इज अ सेपरेट थिंग पर मान
लेते हैं कि पब्लिक बीच है वहां कोई भी जा सकता है क्या वहां पर एक्सक्लूड करना पॉसिबल है कि अरे ये पब्लिक बीच का जो
पानी है ये बस मुझे मिले इनको ना मिले ऐसा तो नहीं हो सकता ना ही पब्लिक पार्क पब्लिक पार्क में कोई भी जा सकता है मैं
फिर से बता रहा हूं मैं उन पार्क की बात नहीं कर रहा जहां पर पर्ची कटती है या फिर ₹10 की टिकट होती है उनकी बात नहीं कर रहा
जो पब्लिक पा जो सबके लिए खुले हुए हैं समझ रहे हो जैसे कई बार अब दिल्ली में तो कम है चंडीगढ़ का एग्जांपल देता चंडीगढ़
में हर सेक्टर में आपको एक पार्क देखने को मिलता है ठीक है जैसे 15 सेक्टर का एक बहुत बड़ा पार्क है वहा पर कोई बंदा कोई
मर्जी बंदा चला जाए एक्सक्लूड करना थोड़ी पॉसिबल है कि भाई आप नहीं आ सकते नहीं वहां पर सबको आ सकते हैं तो इस चीज को
बोलते हैं फर्क समझे एक्सक्लूड के मतलब किसी को हटाया जा सकता है नॉन एक्सक्लूडेड मतलब किसी को हटाया नहीं जा सकता ठीक है
ये पहला टर्म है एक्सक्लूडेड ठीक है एक दूसरा वर्ड यहां पर सर आपने और यूज कर दिया क्या है दूसरा वर्ड दूसरा
वर्ड हमारे सामने है राइवल अब आप पूछेंगे सर यह क्या एग्जांपल हुआ राइवल का यह क्या एग्जांपल हुआ राइवल
का देखो राइवल एक वर्ड होता है और एक वर्ड होता है आपका नॉन राइवल एक वर्ड है आपका राइवल एक वर्ड है
नॉन राइवल राइवल का मतलब पता क्या है राइवल समझते हो जैसे वर्सेस बोलता है ए वर्सेस बी ये
एक राइवल है अगर मैंने कोई चीज कंज्यूम कर ली या मुझे कोई चीज मिल गई तो वो चीज आपको नहीं मिल सकती क्या बोला मैंने मैंने बोला
अगर कोई चीज मुझे मिल गई तो वो चीज आपको नहीं मिल सकती दैट इज राइवल एंड अगर कोई चीज मुझे मिल गई और वो आपको भी मिल सकती
है दैट इज नॉन राइवल आप बोलोगे सर फिर समझ नहीं आया फिर से एग्जांपल दो तब समझेंगे आपको एपल तो मान लो जैसे फॉर एग्जांपल कुछ
भी खाना खा रहा हूं जैसे मान लो पिज्जा है अब पिज्जा अगर मुझे मिल गया ना तो सेम पिज आपको नहीं मिल सकता है कि नहीं आपके
ऑटोमोबिल हो गया यह शर्ट मैंने पहन ली तो भाई सेम टाइम के ऊपर आप ये शर्ट नहीं पहन सकते यह है राइवल कि एक बंदे के पास कोई
चीज आ गई तो वो दूसरे बंदे के पास नहीं आ सकती कोई भी एग्जांपल आप ऑटोमोबिल का आप देख लो आप कहीं ना कहीं इलेक्ट्रॉनिक्स का
देख लो ये सब राइवल है एक बंदे के पास वो चीज आ गई तो दूसरे बंदे के पास वो चीज नहीं हो सकती सर नॉन राइवल क्या चीज होती
है आपको एग्जांपल देता हूं जैसे फॉर एग्जांपल आपकी सड़क अरे सड़क है ना सड़क सड़क प जाते हो
आप लोग क्या ऐसा है क्या कि सड़क प मैं चलने लग गया तो भाई आप नहीं सड़क प जा पाओगे नहीं सड़क प मैं भी चलू कोई दिक्कत
नहीं आप भी चलते रहो कोई मना थोड़ी किया आपको इसे चलने से ठीक है उसी तरह से आपकी
ना स्ट्रीट लाइट लगी होती है अब ऐसा थोड़ी है भाई कि वो स्ट्रीट लाइट के नीचे मैं चला गया या मैं जाकर बैठ गया
तो आपकी लिए लाइट कम हो जाएगी नहीं होगी ना क्या फर्क पड़ता है उससे और एग्जांपल देता हूं जैसे मान लो
आपके आपके जैसे ये वाईफाई वगैरह होते हैं हालांकि थोड़ी स्पीड वगैरह का फर्क आ सकता है पर देखो आप एक्चुअली नोटिस करो वाईफाई
अगर मैं चला रहा हूं तो आप भी चलाते रहो मुझे कोई दिक्कत थोड़ी है उससे मुझे थोड़ी पता लग रहा है अब कई बार मेरा वाईफाई चलता
रहता है यहां पे मेरे वाईफाई पता नहीं कितने लोग चलाते रहते हैं मुझे पता थोड़ी लगता है मेरे ऊपर थोड़ी इंपैक्ट आ रहा है
उस चीज का राइट आपके रेडियो स्टेश वगैरह होते हैं अब रेडियो अगर मैं सुन रहा हूं भाई रेडियो अगर मैं सुन रहा हूं तो आप भी
सुनो कोई दिक्कत थोड़ी है कोई दिक्कत थोड़ी है उसमें तो ये चीजें होती है राइवल और ये चीज हो है नॉन राइवल राइवल का मतलब
है कि अगर कोई चीज को मैंने कंज्यूम कर लिया तो वो चीज आप नहीं कंज्यूम कर सकते हैं अगर मेरा कोई मैंने कोई अपनी व्हीकल
खरीद ली है तो वो सेम व्हीकल आपकी नहीं हो सकती पर यहां पर क्या हो रहा है नॉन राइवल के अंदर क्या हो रहा है नॉन राइवल के अंदर
मेरे कंजमपट्टी दोनों वर्ड्स आपको पता होने चाहिए कि
एक्सक्लूडेड नॉन एक्सक्लूडेड क्या होता है और राइवल नॉन राइवल क्या होता है एक्सक्लूडेड का मतलब बस यही है कि उसको
हटाया जा सकता है नॉन एक्सक्लूडेड का मतलब उसको नहीं हटाया जा सकता राइवल का मतलब होता
है कि मेरे कंज्यूम करने की वजह से सामने वाले के ऊपर कुछ इंपैक्ट आ रहा है नॉन राइबल का मतलब होता है मेरे कंज्यूम करने
की वजह से सामने वाले कोई इंपैक्ट नहीं आ रहा क्लियर य बात किसी को कोई भी डाउट है तो
बताओ बताओगे कैसे तो रक्ड लेक्चर है कैसे बताओगे है ना अब इसकी मैं आपको एक छोटी सी डेफिनेशन भी लिखवा देता हूं ताकि आपको बाद
में कभी दिक्कत ना आए राइट वसे तो आपकी बुक्स में मेंशन करी हुई है इसकी डेफिनेशन भी है ना आपकी बुक्स
में आपकी डेफिनेशन मेंशन करी हुई है बट मैं फिर भी आपको थोड़ा सा बता देता हूं ठीक है एनी
गुड एनी गुड ट कैन बी पोस्ड बाय सिंगल
यूजर इसको हम क्या बोल देंगे इसको हम बोल राइवल ऑन द अदर हैंड अगर मान लीजिए एनी गुड ट कैन बी कंज्यूम और पस बाय मल्टीपल
यूजर्स इसको हम बोल देंगे आपका नॉन राइ ऑन द अदर हैंड जब मैं बात करता एक्सक्लब इट मींस की इट इ
इजी टू एक्सक्लूड पीपल राइट ऑन द कंटरी जब मैं बात करता नन एक्सक्लब की इट इज रियली
डिफिकल्ट टू एक्सक्लूड और रिमूव पीपल फ्रॉम कंजमेट क्या होता है नॉन राइवल गुड क्या
होता है एक्सक्लूडेड क्या होता है और नॉन एक्सक्लूडेड होता है तो अब आपको पब्लिक और प्राइवेट गुड्स समझने में कोई भी दिक्कत
नहीं आएगी एक्चुअल में होता क्या है ना ये आपके सामने मैंने एक टेबल बनाया हुआ है अब
समझना समझना इस चीज को अगर लेट्स से कोई गुड है आपकी राइवल गुड भी है और आपकी एक्सक्लूडेड गुड भी है अब ये मत पूछना कि
राइवल क्या है एक्सक्लूडेड क्या है इतने एग्जांपल दिए हैं आप लोगों को है ना एक्सक्लूड मतलब उसको एक्सक्लूड करना
पॉसिबल है राइवल का मतलब मेरे कंसंट की वजह से दूसरे के ऊपर कंजमेट आ रहा है अगर ये दोनों चीजें कहीं पे आ रही हैं ऐसी चीज
को बोलते हैं हम प्राइवेट गुड्स सर एग्जांपल एग्जांपल मेरी गाड़ी अब मेरी गाड़ी है मेरी गाड़ी आपकी गाड़ी नहीं हो
सकती तो राइवल गुड एक्सक्लूडेड किया जा सकता है इससे बिल्कुल एक कॉस्ट अटेड है उसके साथ टीवी हो गया आपके जो भी इस तरह
से कंज्यूमर गुड्स होते हैं यह सारे आपके प्राइवेट गुड्स में आते हैं ठीक है उसी तरह से आपको ध्यान में रखना है पब्लिक
गुड्स के बारे में पब्लिक गुड्स क्या है ऐसी चीज जो नॉन एक्सक्लूडेड है और नॉन राइवल है नॉन राइवल मतलब जैसे आप नेशनल
डिफेंस की बात कर रहे हो अब नेशनल डिफेंस में दोनों चीजें है नेशनल डिफेंस में से हम यह थोड़ी कह सकते हैं कि भाई नेशनल
डिफेंस सिर्फ मेरे लिए करो इसके लिए मत करो तो एक्सक्लूडेड बल और ऐसा भी नहीं है कि
नेशनल डिफेंस मेरे लिए कर रहा है उससे आपको नेशनल डिफेंस ना मिले तो भाई वो राइवल भी नहीं है आपकी हवा भी सेम चीज है
हवा जो होती है वो एक्सक्लूडेड आ भी नहीं रहा तो ऐसी चीजों को बोलते हैं हम पब्लिक गुड्स आपका पब्लिक
पार्क जो आपके मोहल्ले में आपका पार्क बना हुआ होगा सबके लिए ओपन है नॉन एक्सक्लूडेड और मैं भी वहां प जाके बैठूं आराम से आप
भी आके बैठो कोई दिक्कत थोड़ी है नॉन राइवल तो ये सारे एग्जांपल होंगे आपके पब्लिक गुड्स के समझ गए इस बात को तो क्या
प्राइवेट और पब्लिक गुड्स के रिगार्डिंग कंप्लीट क्लेरिटी है प्राइवेट गुड्स आर दोज गुड्स व्हिच आर राइवल एज वेल एज
एक्सक्लूडेड इन नेचर दोनों कंडीशन होंगी राइवल भी एक्सक्लूडेड भी उसको हम बोलेंगे प्राइवेट गुड्स पब्लिक गुड किसको बोलेंगे
नॉन राइवल नॉन एक्सक्लूड बल दैट इज पब्लिक गुड्स क्या यह दोनों बातें क्लियर है सबसे इंपोर्टेंट चीज यही दोनों है प्राइवेट और
पब्लिक गुड ही पर इसके अलावा भी कुछ चीजें होती है इंपोर्टेंट देखो मोस्टली दोनों यही है बट मैं बाकी चीजें भी आपको
एक्सप्लेन कर देता हूं जैसे एक चीज होती है कॉमन गुड्स कॉमन गुड्स जैसे आपका कोयला हो गया पेट्रोल वम हो गया इनको हम बोलते
हैं कॉमन गुड्स कॉमन गुड्स के क्या क्राइटेरिया है ये नॉन एक्सक्लूडेड है जैसे आपका कोयला आपका पेट्रोलियम अब कोयला
पेट्रोलियम नॉन एक्सक्लूडेड नहीं किया जा सकता कि आप नहीं कर सकते ये नहीं कर सकते नहीं नॉन
एक्सक्लूड है पर ये राइवल जरूर है एक बंदे ने कर लिया इसका तो कहीं ना कहीं वो सेम कोयला किसी और के लिए अवेलेबल नहीं है
गेटिंग इट उसी तरह से यहां प हमारे पास क्लब गुड्स भी होती है जैसे वाईफाई हो या टोल रोड हो गया अब टोल रोड है देखो टोल
टोल लग गया इस सड़क के ऊपर समझो इस बात को सड़क के ऊपर टोल लग चुका है अब सड़क के ऊपर टोल लग गया ना तो मैंने एक्सक्लूड कर
दिया जो लोग टोल पे कर सकते हैं बस वही उस सड़क पे आएंगे तो एक्सक्लूडेड पर मेरे सड़क प जलने से आपको कोई दिक्कत
थोड़ी है तो इट्स नॉन राइवल वाईफाई वाईफाई क्या था वाईफाई के लिए पैसे पे करने पड़ेंगे जो नहीं पे कर सकता उसको
एक्सक्लूड कर दिया जाएगा तो भाई एक्सक्लूडेड बल आई होप कल को कोई भी क्वेश्चन आए कि क्या
एक्सक्लूडेड बल है कौन राइवल है कौन नॉन राइवल है अब इसमें आप कभी भी दिक्कत नहीं आएगी ध्यान ये रखना है जब हम बात करते हैं
प्राइवेट गुड्स की प्राइवेट गुड्स आर बोथ मतलब टू कैरेक्टरिस्टिक राइवल एज वेल एज एक्सक्लूडेड पब्लिक गुड्स क्या है पब्लिक
गुड्स आर नॉन राइवल रिस एज वेल एज आपका नॉन एक्सक्लूड बल ये चीजें अगर आपको पता होंगी तो आप बड़े आराम से यह क्वेश्चन कर
ले जाओगे ठीक है यहां तक किसी को कोई दिक्कत ठीक है ठीक है ठीक है अब इसी के
साथ ना एक जुड़ी हुई और प्रॉब्लम हमें डिस्कस करनी है जिसका नाम है फ्री राइडर प्रॉब्लम क्या है फ्री राइडर
प्रॉब्लम क्या मीनिंग है इस चीज का मैं आपको एग्जांपल देता हूं मान लो ना आपकी क्लासरूम है और आपके क्लास में 10 बच्चे
हैं ठीक है अब आपका टीचर मैंने क्या किया मैंने दो ग्रुप फम कर दिए पांच लोगों का यह ग्रुप पांच लोगों का दूसरा ग्रुप और
मैंने आपको कुछ काम दिया मैंने आपको काम यह दिया कि आपको एक प्रोजेक्ट करना है आपको एक प्रोजेक्ट परफॉर्म करना है ठीक है
और जो ग्रुप जो ग्रुप प्रोजेक्ट में अच्छा परफॉर्म करेगा उसको मैं 10 आउट ऑफ 10 दे दूंगा और जो ग्रुप थोड़ा खराब परफॉर्म
करेगा या अच्छा परफॉर्म नहीं करेगा उसको 10 में से आ नंबर दूंगा ठीक है अब नोटिस करना यहां पर मैंने बात पता क्या
करी मैंने बात करी पूरे के पूरे ग्रुप की मैंने कहा जो ग्रुप अच्छा करेगा उसको 10 में से 10 मिल जाएंगे और जो ग्रुप खराब
करेगा उसको आठ मिलेंगे क्या ऐसा पॉसिबल है और ऐसा पॉसिबल क्या ऐसा सच में होता है कि अगर ये पांच लोगों का मैंने ग्रुप बनाया
ना तो हो सकता है इस ग्रुप में से चार लोग तो भाई काम करने वाले होंगे पर एक इंसान ऐसा बंदा होगा जो काम ही नहीं करना चाहता
होगा अब इसको ना पता क्या है इसको एक चीज पता है क्या पता है इसको पता है यार यहां बात ना पूरे ग्रुप की हो रही है मैं काम
नहीं भी करूंगा ना कोई दिक्कत वाली बात नहीं ये बाकी चार लोग काम कर लेंगे बाकी चार लोग मेहनती हैं मैं काम नहीं भी
करूंगा तब भी बात चल जाएगी अब यह जो बंदा है ना इसको बोलते हैं फ्री
राइडर फ्री राइडर को ना आप अपनी जिंदगी के ऐसे इंसान को याद करो जो भाई काम कुछ नहीं करता पर क्रेडिट पूरा खा जाता है यही होता
है फ्री राइडर काम कुछ नहीं करेगा काम सारे के सारे चार लोग करेंगे फिर जब नंबर मिलेंगे तो इस पांचवे को भी सबको 10 के 10
नंबर मिल जाएंगे पूरे ग्रुप को पूरे पूरे में से पूरे नंबर मिल जाएंगे यह बोलते हैं फ्री राइडर ऐसे बंदे को बोला जाता है फ्री
राइडर काम कुछ किया नहीं बाकियों को भरोसे बस काम पर मतलब साथ में जुड़ा हुआ है एंड उसका बेनिफिट भी उसको मिल रहा है अब जब
मैं बात करता हूं ना आपकी फ्री राइडर की तो ये जो फ्री राइडर प्रॉब्लम है ना यह हमें पब गुड्स के केस में देखने को मिलती
है आप पूछेंगे सर वो कैसे अब मैं आपको एग्जांपल देता हूं जैसे मान लो आपके सोसाइटी में एक पार्क है ठीक
है और यह पब्लिक पार्क है पब्लिक पार्क मतलब नॉन एक्सक्लूडेड नॉन राइबल भी है पब्लिक पार्क हुआ पब्लिक गुड हुआ बिल्कुल
सही बात है अब यार देखो कुछ लोग तो होंगे जो कुछ पार्क के लिए कुछ डोनेशन दे रहे होंगे ताकि पार्क अच्छी स्थिति में रहे
कुछ कोई इंसान हो सकता है टैक्स वगैरह पे कर रहा होगा ताकि पार्क अच्छा रहे है ना बहुत सारे लोग ऐसे होंगे पर कुछ लोग ऐसे
होंगे जो कुछ नहीं कर रहे होंगे है ना कुछ लोग ऐसे होंगे जो कुछ भी नहीं पे कर रहे होंगे अब वो लोग क्या बन
जाते हैं ना कई बार फ्री राइडर बन जाते हैं कि वो काम कुछ नहीं करेंगे इस पर्टिकुलर पार्क को या किसी पब्लिक गुड को
सही रखने के लिए पर उनको पता है यार ये पब्लिक गुड सबके लिए है तो इस केस में क्या हो जाता है फ्री राइडर
प्रॉब्लम देखने को मिल जाती है कि मेहनत कोई करता ही नहीं उस चीज के लिए और जो फल है उस चीज का व सबको मिलना
मिलेगा तो हो क्या रहा है हो सकता है टैक्स इस पब्लिक पार्क को मेंटेन करने के लिए चार लोग दे रहे हैं पर उसका फायदा
सबको मिल रहा है तो क्या आपने नोटिस कर रहे य पांचवा बंदा क्या है यह भी पब्लिक पार्क की फैसिलिटी का इस्तेमाल कर रहा है
पर कुछ पेमेंट वगैरह नहीं कर रहा कुछ कंट्रीब्यूट नहीं कर रहा उस चीज के लिए तो क्या यह भी आपका राइडर नहीं हुआ बिल्कुल
हुआ जब भी आपकी पब्लिक गुड्स के एग्जांपल आएंगे उसके साथ जो दिक्कत आएगी वो फ्री राइडर प्रॉब्लम की हमेशा हमेशा आएगी ही
आएगी दिस इज द एग्जांपल ऑफ फ्री राइडर प्रॉब्लम ध्यान रखना कहां पर होता है ये ये आपके पब्लिक गुड्स वाले केस में हमें
ये फ्री राइडर प्रॉब्लम देखने को मिल जाती है राइट आई होप यहां तक तो किसी को कोई भी दिक्कत नहीं होगी ठीक
है हां आगे हमें जो एक दो चीज डिस्कस करनी है ना वो मैं आपके साथ सा डिस्कस कर लेता हूं जैसे एक जो टॉपिक हमें डिस्कस करना है
वो है हमारा थ्योरी ऑफ फर्म के बारे में एक्चुअल में क्या होता है ना हमारे पास अलग-अलग तरह के सिस्टम्स हो सकते हैं मैं
आपको एक्सप्लेन करता हूं समझना पहले एक काम करते हैं पहले हम ना स्टार्ट करते हैं किससे पहले हम
स्टार्ट करते हैं मोनोपोली से देखो जब भी आप ये वर्ड सुनोगे मोनो मोनो का अर्थ होता है वन या
सिंगल राइट सिंगल वो वाला नहीं रिलेशनशिप सिंगल की बात नहीं कर रहा वन ठीक है ना तो मोनोपोली का जब वर्ड आएगा आपको हमेशा
ध्यान रखना है यहां पर एक्चुअल में एक ही सेलर होता है कितने सेलर होते हैं सिर्फ और सिर्फ आपका एक सेलर होना इज नोन एज
मोनोपोली ठीक है अब एग्जांपल से समझते हैं जैसे देखो आजकल ना वैसे पूरी तरह से 100% मोनोपोली एग्जामिन समझना थोड़ा
मुश्किल होता है क्योंकि एक्चुअल में 100% मोनोपोली बहुत कम एरियाज में बट आपको कुछ एक आइडिया देता हूं जैसे मान लो रेलवेज की
बात करें अब देखो रेलवेज का प्राइवेटाइजेशन हो रहा है बट कहीं ना कहीं जो रेलवेज के
ऑपरेशंस है वो आपका इंडियन रेलवेज ही रन करता है आपका जो साथ साथ जो कैटरिंग और बाकी चीजें है वो आईआर सीटीसी देखता है तो
क्या हम यहां पर यह कह सकते हैं कि यहां पर सिर्फ एक ही सेलर है मोर और लेस हां बिल्कुल तो जब भी ऐसी सिचुएशन होती है ना
उसको हम बोलते हैं मोनोपोली इसी तरह से और एग्जांपल देता ह जैसे हम बात करते हैं ना कोल इंडिया लिमिटेड की अब तो देखो सरकार
ने ओपन अप कर दिया इस सेक्टर को पर पहले एक ही कंपनी थी जो इस सेक्टर में काम करती थी कोल इंडिया लिमिटेड दैट इज इट तो यह भी
एक मोनोपोली हुई और क्या एग्जांपल हो सकते हैं यहां पे और एग्जांपल्स की दोस्तों मैं बात करूं
जैसे फॉर एग्जांपल जैसे आपका मान लो यह रही हमारी सरकार एंड सरकार ने एक किसी कंपनी को पेटेंट दे दिया कि भाई जैसे ये
ही मान लो सिपला कंपनी और इसने कोई दिवाई बनाई और इसने पेटेंट जब उसको मिल गया ना तो बस सिपला कंपनी ही उस प्रोडक्ट को बना
सकती है दुनिया में और कोई कंपनी उस प्रोडक्ट को नहीं बना सकती क्या आप एक चीज नोटिस कर रहे हो कोई भी एग्जांपल आपने
यहां पे देखा जितने भी एग्जांपल आपने देखे यहां पर सप्लायर कितना था सिर्फ और सिर्फ एक सिर्फ एक ही सप्लायर था आर यू गेटिंग
इट जब भी इस तरह सिर्फ एक ही सेलर होता है उसको बोलते हैं हम सिंगल सेलर या उसको बोल देते हैं
मोनोपोली ठीक है अब मुझे आप एक चीज बताओ अगर मान लो सिपला की बात करें जो भी कंपनी को यहां पर पेटेंट मिला है क्या आप एक चीज
नोटिस कर रहे हो यह कल को सिपला चाहे तो यह जो दिवाई है यह जितने मर्जी पैसों की बेचे इसका मन कर रहा है यह दवाई बेचने का
तो 10000 की बेच सकती चाहे तो 1000 की बेचे चाहे बेचे तो दो लाख की बेचे पता है क्यों क्योंकि अगर सिपला से आप ये दिवाई
नहीं खरीदोगे ना आप किसी और से खरीद ही नहीं सकते क्योंकि एक ही सेलर है देर इज ओनली वन सेलर तो क्या मैं यहां पर ये कह
सकता हूं कि यहां पर जो प्राइस सेटर है वो कौन होता है प्राइस सेटर आपकी वो फर्म होती है जो उसको प्रोड्यूस कर रही है यानी
कि प्राइस कितना होना चाहिए ये फर्म सेट कर रही है और मैं और आपके जैसे जो कस्टमर होते हैं कस्टमर क्या होंगे प्राइस टेकर
जिस दाम प वो बोलेगा ना भाई हमें खरीदना पड़ेगा आर यू गेटिंग द कि प्राइस टेकर कौन हुआ मैं हुआ मुझे खरीदना पड़ेगा यार
क्योंकि अगर मैं मान लो रेलवेज के माध्यम से नहीं जाना चाह रहा मेरे पास ऑप्शन ही कुछ नहीं है हां वो चीजें हैं कि आप कार
से चले जाओ या आप फ्लाइट से चले जाओ पर रेलवेज में तो और कोई ऑप्शन नहीं ना है वहीं से जाना पड़ेगा अगर आपको कोयला अब तो
चलो ऑप्शन आ गए पर पहले क्या होता था कोयला यही कर रहा है तो यही कर रहा है यही आपका प्राइस सेट करेगा और कोई सेट करने का
है ही नहीं कई जगह के ऊपर ऐसा होता है कि जो आपके दारू बेचने वाली कंपनीज होती है वो स्टेट रन कंपनी होती है सरकार के अलावा
और कोई दारू बेच नहीं सकता कुछ एक जगह के ऊपर ऐसा है तो वहां पर क्या हुआ सरकार जितने पैसे में चाहेगी उतने में दारू
बेचेगी इन ऑल दीस थिंग्स व्हाट आर द पॉइंट्स दैट यू आर गेटिंग व्हेन देयर इज अ सिंगल सेलर द एंटायस विल बी डिटरमिन बाय
दैट सिंगल सेलन ओनली वही डिसाइड करेगा कितने में वो वस्तु बिकेगी हम लोग बस प्राइस टेकर हैं वो जो कह देगा भाई 2 लाख
तो 2 लाख 10000 तो 10000 क्योंकि एक ही सेलर है वहां से नहीं खरीदोगे आपके पास कोई ऑप्शन ही नहीं है तो यहां पर ना एक
चीज तो आपको पता होनी चाहिए कि प्राइस सेट कौन करता है वो आपकी फर्म सेट करती है एंड हम लोग क्या होते हैं प्राइस टेकर होते
हैं हमें उसमें खरीदना ही पड़ेगा यहां पर आपको एक बात और ध्यान में रखनी है कि जो एंट्री बैरियर्स होते हैं ना वो बहुत
ज्यादा हाई होते हैं क्या मतलब एंट्री बैरियर्स का एंट्री बैरियर्स का मतलब उस सेक्टर में एंट्री
करना एक नया सप्लायर का आना बहुत मुश्किल होता है या तो सरकार नहीं आने देगी सरकार बोलेगी नहीं यार हमें नहीं चाहिए और कोई
कंपनी एक ही कंपनी चाहिए बस बहुत है तो उसको बोलते हैं एंट्री बैरियर बहुत मुश्किल है उस उस उस सेक्टर में एंट्री
करना एज अ सप्लायर बहुत मुश्किल होता है दैट इज एंट्री बैरियर्स आर वेरी हाई गेटिंग द पॉइंट तो थोड़ा सा एक बार
मोनोपोली को पढ़ लेते हैं मोनोपोली क्या कहता है मोनोपोली अकर्स व्हेन अ सिंगल प्रोड्यूसर डोमिनेट्स द
एंटायस ऑफ एन डिफाइन मोनोपोली लेस स्ट्रिक्टली कंसीडरिंग फर्म्स विद द स्पेसिफिक मार्केट शेयर ठीक है मोनोपोली
मे अराइज ड्यू टू स्टेच राइट कुछ लीगल कारणों की वजह से हो सकता है या सरकार कहेगा कि यार हमें नहीं चाहिए जैसे एटॉमिक
एनर्जी है अब एटॉमिक एनर्जी के रिगार्डिंग सरकार ही काम कर सकती है और कोई काम कर ही नहीं सकता और क्योंकि एक ही कंपनी है तो
वही कंपनी कहीं ना कहीं अपने मर्जी से प्राइस को सेट करेगी और जब अपनी मर्जी से सेट करेगी तो एक तरह से ना इट कैन हैव
सुपर नॉर्मल प्रॉफिट्स एक ही कंपनी है ना अब वो जो कहेगी हमें उतना प्राइस देना ही पड़ेगा सिपला अगर मैंने जैसे एग्जांपल
दिया मान लो सिपला के पास पेटेंट है किसी कैंसर वाली दवाई का अब सिपला बोलेगा भाई 5 लाख की दवाई है तो मुझे देना ही पड़ेगा 5
लाख या तो दवाई ना खरीदो और कोई ऑप्शन ही नहीं है गेटिंग द पॉइंट तो जब भी मोनोपोली पावर को रिड्यूस करना होता है कंट्रोल
करना होता है वहां सरकार का रेगुलेशन जरूरी होता है तो यह बात थी मोनोपोली के बारे में जो हमें पता होनी चाहिए एग्जांपल
हमने देखे अब मोनो का वर्ड था सिंगल मोनो का वर्ड क्या था सिंगल उसको बोल दिया हमने मोनोपोली उसी तरह से हमारे पास एक टर्म
आता है ओलिगोपॉली बाकी सब चीज सेम है ओलिगो का मतलब होता है फ्यू ओलिगो का मतलब हो गया फ्यू यहां पर क्या है यहां पर आपके
पास फ्यू सेलर्स है बहुत कम सेलर्स है सर एग्जांपल दे सकते हैं हां जी बिल्कुल एग्जांपल्स क्यों नहीं देंगे बिल्कुल
देंगे जैसे फॉर एग्जांपल आप टेलीकॉम सेक्टर की बात कर लो भाई या तो एप्रोक्सीमेटली मे मुझे नंबर तो नहीं पता
बट ज्यादातर मार्केट कहीं ना क इन्हीं के द्वारा कैप्चरड है इसको बोलते ओलिगोपॉली और एग्जांपल चाहिए जैसे आपका एयरलाइंस हो
गया एयरलाइंस में आप जाओ इंडिगो से जाओ इंडिगो पसंद नहीं है कोई दिक्कत नहीं आप एयर इंडिया में चले जाओ विस्तारा में चले
जाओ राइट एक दो कंपनी और भी है गो एयर हो गया या जो भी है मतलब ऐसे एक दो कंपनी और है उनसे चले जाओ पाछ से ज्यादा ऑप्शन नहीं
है इसको बोलते हैं ओलिगोपॉली जहां पर देर आर ओनली फ्यू सेलर्स अब अगर मान लो जस्ट टेक
एन एग्जांपल मान लो अगर दो ही सेलर्स है तो उसको हम बोल देंगे डुओ पॉली डुओ पॉली मतलब दो डुओ का मतलब हो जाता है दो जैसे
आपके जो एयरक्राफ्ट्स बनाए जाते हैं वहां पर आपके दो ही सेलर्स है मेजर्ली आपका एयर बस और
बोइंग राइट ऐसी चीज को हम बोल देते हैं क्या डुओ पॉली या डुओ पॉली मतलब दो सेलर्स ओलिगोपॉली मतलब फ्यू सेलर्स इसका थोड़ा सा
पढ़ लेते हैं ओलिगोपॉली का अर्थ ये होता है कि जब भी एक मार्केट को कुछ एक इनफ्लुएंशल प्रोड्यूसर्स कहीं ना कहीं
डोमिनेट करते हैं डुओ पॉली मतलब दो जब सेलर्स होते हैं राइट इसमें आप नोटिस करो सारे लोगों को ना कंपीटर एक्शंस का पता
होता है इंडिगो को पता है यार एयर इंडिया कितने में कहीं ना कहीं अपनी फ्लाइट को भेज रहा है एयर बस को पता होता है बोइंग
कितना चार्ज कर रहा है राइट ये सब चीजें पता होती हैं एंड कहीं ना कहीं कैसे स्ट्रेटजी को चेंज करना है ये भी हमें पता
होता है इसके साथ ही साथ यहां पर ओलिगोपोलिस्टिक मार्केटस में ना एक तो कॉम्प्लेक्शन
डिफरेंशिएबल सारी कंपनीज आ जाती ऐसा थोड़ी है कि मेरा मन किया चलो आज एयरलाइंस खोल लेते हैं
बहुत मुश्किल है एयरलाइंस खोलना ऐसे थोड़ी है मेरा मन किया कि चलो आज से एयर बस और बोइंग की तरह मैं भी एक कंपनी खोल लेता
हूं एंट्री बैरियर्स यहां पर भी है मोनोपोली से थोड़े से कम है पर एंट्री बैरियर्स यहां पर भी एजिस्ट करते हैं यह
चीज को को बोलते हम ओलिगोपॉली चलो ठीक है इसी तरह से एक वर्ड आ जाता है य आएंगे मोनोपोलिस्टिक कंपटीशन के ऊपर पर पहले एक
बार समझ लो एक चीज होती है आपकी परफेक्ट कंपटीशन क्या वर्ड मैंने यूज किया मैंने वर्ड यूज किया परफेक्ट कंपटीशन इसका मतलब
क्या है बहुत ही परफेक्ट कंपटीशन है क्या मतलब सर एग्जांपल समझते
हैं कोई मान लो जैसे ना आपको कोई वस्तु बनानी है सिंपल सा एग्जांपल समझते
हैं चावल है ऑर्गेनिक ऑर्गेनिक को साइड में रखो अभी के लिए अब चावल है ठीक है चावल मोर और लेस सिमिलर ही आपको देखने को
मिलते हैं या वीट आपको मोर लेस सिमिलर देखने को मिलती है या सब्जियां आपको मोर लेस सिमिलर
देखने को मिल जाती है यहां पर क्या हो रहा है सेम ही तो प्रोडक्ट है हां मैं मानता हूं कि ऑर्गेनिक आ गया इसमें इसमें वो
नहीं है इसमें फर्टिलाइजर नहीं डाले ये नहीं करा वो नहीं करा चीजें आ गई है अब मतलब आई गेट इट हां चावल में भी बासमती
ऑप्शन है ये नॉन बासमती ऐसे कुछ चीजें होती हैं बट अगर आप ये जो एग्रीकल्चर मार्केट को अगर हम बात करें क्या लगभग
सिमिलर प्रोडक्ट ही सब लोग नहीं इस्तेमाल कर रहे बिल्कुल कर रहे हैं ऐसी चीज को बोलते हैं हम परफेक्ट कंपटीशन पूरा
कंपटीशन चल रहा है सब लोग एक ही तरह की वस्तु बेच रहे हैं एक ही तरह की ये भी वही बेच रहा है उस उसी तरह से थोड़ा बहुत 10
15 पर का ऊपर नीचे हो सकता है ये भी सेम चीज बेच रहा है ये भी सेम चीज बेच रहा है आप लोग कभी मंडी में गए हो मंडी में गए हो
कभी सब्जी खरीदने आपको कोई बंदा बोलता है यार प्याज सर 50 किलो है आप बोलोगे चलो कोई बात नहीं अगले वाले के पास जाते हो
अगले वाला कहता है 45 किलो पे ले ले आप ले लेते हो क्यों क्योंकि लगभग उसका प्याज और इसका प्याज और इसका प्याज भी सेम ही तो है
हां थोड़ा बहुत फर्क आ सकता है पर ज्यादातर चीजें सिमिलर ही तो है ऐसी चीज को बोलते हैं हम परफेक्ट
कंपटीशन एक मार्केट है जहां परफेक्ट कंपटीशन है सिमिलर प्रोडक्ट है सब जगह कोई फर्क ही नहीं है प्रोडक्ट के अंदर और
एग्जांपल देता हूं मैं जैसे आप आप एक इस चीज को समझना जैसे यार कोई भी चीज है मान लो जैसे
जैसे आप लोग नट बोल्ट समझते हो किसी जगह पे जैसे इसको भी बोर्ड को लगाया गया होगा तो नट बोल्ट लगाए गए होंगे अब नट बोल्ट
सेम ही तो है आर यू गेटिंग माय पॉइंट स्क्रूज वगैरह जो आप लगाते हो वो कोई भी लगाए कई कसी उसम कंपनी थोड़ी देखते हो यार
ये कौन सी कंपनी के स्क्रू आ रहे हैं कुछ लोग देखने लग गए होंगे आजकल बट ज्यादातर आप नोटिस कर रहे हो वो सेम सिमिलर ही
मार्केट तो है यहां पे ऐसी चीज को बोलते हैं परफेक्ट कंपटीशन हर किसी को कंप्लीट जानकारी होती है कि
मार्केट में प्राइस क्या है यहां पर ना जो आपका प्रोड्यूसर होता है या जो सेलर होता है रेश से वह आपका प्राइस टेकर बन जाता है
आप पूछेंगे प्राइस टेकर का मतलब क्या मैंने आपको बोला ना जैसे आपका एग्रीकल्चर मंडी थी मंडी थी वहां पर एक बंदा मान लो प
50 का बेच रहा है और दूसरा बंदा 45 का बेच रहा है तो सब लोग 45 वाले वाले से प्याज खरीद लेंगे 50 वाले से कोई नहीं खरीद देगा
तो कहीं ना कहीं दैट पर्सन हैज बिकम व्ट ही जज बिकम प्राइस टेकर जो मार्केट में प्राइस चल रहा है उसको वही दाम प बेचना
पड़ेगा अगर महंगे में बेचेगा और सेम प्रोडक्ट है यार सिमिलर प्रोडक्ट है तो बेच नहीं सकता महंगे में गेटिंग द पॉइंट
तो ये चीज को बोलते हैं परफेक्ट कंपटीशन थोड़ा सा एग्जांपल देखते हैं इन अ परफेक्टली कंपट मार्केट यह जो पॉइंट्स
अंडरलाइन कर रहा हूं थोड़ा सा इन पर ध्यान देना फर्म्स प्रोड्यूस आइडेंट गुड्स सेम प्रोडक्ट्स बनाए जा रहे हैं
जैसे स्क्रूज सेम बन रहे थे बोल्ट है सेम है मंडी में आपके आलू आए आलू सेम है कोई यहां पर बैरियर एंट्री एग्जिट का
नहीं है याद करो मोनोपोली और डपोली या ओलिगोपॉली में हमने देखा था एंट्री बैरियर्स है आपको कुछ एक क्राइटेरिया फॉलो
करने पड़ेंगे तभी आप उस मार्केट में एंट्री कर सकते हो बहुत मुश्किल है एंट्री यहां पर ऐसा नहीं है आपको मंडी में
पार्टिसिपेट करना है ठीक है आप भी आ जाओ आप भी अपनी मंडी में लगा लो अपनी दुकान आपको नट बोल्ट बेचने कोई मना थोड़ी कर रहा
है बेचो सेम प्रोडक्ट है कोई एंट्री की कोई दिक्कत नहीं कोई एग्जिट की कोई दिक्कत नहीं आपको अपनी फर्म लगानी है आपको अपना
अपना रेडी लगानी है आप लगाओ बाहर जाना है बाहर जाओ नहीं लगानी है तब भी एग्जिट भी आराम से हो सकता है पूरी की पूरी नॉलेज
होती है सेलर्स को भी या प्रोड्यूसर्स को भी और जो खरीद रहे हैं उनको भी जानकारी होती है प्लस एट द सेम टाइम इक्विलियम की
तरफ चीजें आ जाती है सबको पता लग जाता है यार प्याज मार्केट में ₹ किलो चल रहे हैं आलू ₹ किलो चल रहे हैं टमाटर आपके 2020
किलो चल रहे हैं एक इक्विलियम आ जाता है बहुत रेयर होते हैं मतलब एग्जैक्ट क्योंकि यहां पे ना वर्ड यूज कर दिया गया आइडेंट
कल आइडेंट कल होना बहुत मुश्किल होता है कि सेम ही प्रोडक्ट है बट सिमिलर प्रोडक्ट ज हो सकते हैं आपके इवन आपके एग्रीकल्चर
मार्केट्स हो गया ऑनलाइन कॉमर्स सेक्टर हो गया या फाइनेंशियल मार्केट्स हो गया यहां पर भी कोई भी कोई चीज कर सकता है तो ये
सारे एग्जांपल्स आपके परफेक्ट कंपटीशन के आ जाते हैं समझ गए इस बात को ठीक है तो हमने क्या-क्या पढ़ लिया हमने मोनोपोली
पढ़ लिया सर हमने ओलिगोपॉली पढ़ लिया और हमने पढ़ लिया था परफेक्ट कंपटीशन अब एक टर्म और आ गया यहां पे ये टर्म क्या है ये
टर्म है आपका मोनोपोलिस्टिक कंपटीशन क्या है ये मोनोपोलिस्टिक कंपटीशन अब यहां प बच्चे बड़े कंफ्यूज होते हैं वो कहते हैं
सर एक वर्ड आपने यूज कर लिया मोनोपोली एक वर्ड आपने यूज कर दिया कंपटीशन ऐसा कैसे हो सकता है मोनोपोली में आप बात कर रहे थे
सिंगल सेलर की कि एक ही सेलर है और परफेक्ट कंपटीशन में बात कर रहे थे सेलर ही बहुत सारे हैं तो दोनों शब्दों को हम
जोड़े कैसे मोनोपोली भी और कंपटीशन भी मैं आपको एग्जांपल देता हूं मैं अपना खुद का एग्जांपल देता हूं देखो मैं ना दिल्ली
में रहता हूं ठीक है कई सालों से दिल्ली में रह रहा हूं और दिल्ली में ना हजारों रेस्टोरेंट है हजारों मजाक की बात नहीं
है लाखों भी हो सकते हैं पता नहीं बहुत ज्यादा रेस्टोरेंट है दिल्ली में पर मेरा ना कुछ 10 ऐसे रेस्टोरेंट है जो मुझे बहुत
पसंद है पता है क्यों या तो उनका खाना बहुत बढ़िया है या उनकी सर्विस बहुत अच्छी है या कोई और कारण भी हो सकते हैं गेटिंग
माय पॉइंट मा पॉइंट है तो सेम ही चीज भाई वो भी दाल
मखनी दे रहे हैं वो भी पनीर बटर मसाला दे रहे हैं वो भी आपका लच्छा पराठा ही दे रहे हैं पर कहीं ना कहीं कुछ ना कुछ उनके
टेस्ट के अंदर उनकी सर्विस के अंदर उनके प्रोडक्ट के अंदर कुछ ना कुछ अलग चीज है जो उनको बाकियों से अलग बनाती है है तो
कंपटीशन ही है तो पनीर बटर मसाला ही पर कहीं ना कहीं उन्होंने अपनी एक मोनोपोली बना ली क्यों बना ली क्योंकि उनका
प्रोडक्ट अलग था पढ़ने को लिए तो टीच भी बहुत सारे हैं youtube2 टीचर मिल जाएंगे क्लासेस के अंदर आपको हजारों टीचर मिल
जाएंगे पर आप मेरे से क्यों पढ़ रहे हो क्योंकि शायद आपको मेरा प्रोडक्ट अलग लग रहा है मेरी ऑफिस अलग लग रही है आपको मेरे
से पढ़ने में ज्यादा मजा आ रहा है है तो कंपटीशन ही ना एक तरह से बिल्कुल है पर वो मोनोपोली पता क्यों है क्योंकि प्रोडक्ट
अलग था प्रोडक्ट को या प्रोडक्ट अलग नहीं था प्रोडक्ट को पेश करने का तरीका अलग था मैं इतने सारे एग्जांपल्स दे दे के आपको
पढ़ा रहा हूं ये मेरी अलग डिफरेंशिएबल कि इन अ मोनोपोलिस्टिक कंपटीशन देयर आर दिस नंबर ऑफ़ सेलर दिस नंबर ऑफ दिस पढ़ने
को तो आप उससे भी पढ़ सकते हो वो भी आपको मोनोपोलिस्टिक कंपटीशन ही बढ़ाएगा पर मेरी डिफरेंशिएबल सारे एग्जांपल्स के साथ लिंक
करके बहुत सारे रियल लाइफ चीजों के साथ रिलेट करके पढ़ा रहा हूं तो आपको समझने में अच्छा नहीं हो रही है तो कंपटीशन तो
है बहुत सारे सेलर्स हैं बिल्कुल खरीदने वाले भी बहुत सारे हैं बिल्कुल कोई एंट्री एग्जिट बैरियर नहीं है कोई भी आए कोई भी
पढ़ाए कोई दिक्कत वाली बात नहीं पर कहीं ना कहीं साथ में मोनोक्लिन चीज आ गई क्यों आ गई क्योंकि प्रोडक्ट डिफरेंशिएबल
एट टेक सेक्टर में बहुत सारी कंपनीज है वई इज पीडब्ल्यू स्पेशल कारण है ना उसका कोई प्रोडक्ट डिफरेंशिएबल भी अफोर्डेबल भी
गेटिंग द पॉइंट ये होता है मोनोपोलिस्टिक कंपटीशन कि कंपटीशन के फीचर्स भी है पर कहीं ना कहीं साथ में आपने मोनोपोली को भी
उसमें ऐड ऑन कर दिया कुछ एग्जांपल सर एग्जांपल बता तो दिया कितने एग्जांपल दूं मोनोपोलिस्टिक कंपटीशन क्या होता है बहुत
सारे प्रोड्यूसर्स होते हैं पर कहीं ना कहीं ना वो प्रोडक्ट डिफरेंशिएबल करने के
एग्जांपल मैंने आपको समझा ही दिए प्रोडक्ट सिमिलर ही होते हैं यार प्रोडक्ट सिमिलर ही होते हैं पर कहीं ना कहीं कुछ ना
डिफरेंसेस लाए जाते हैं उनकी मतलब पेश करने के तरीके के अंदर जिस वजह से कहीं ना कहीं शॉर्ट टर्म मोनोपोलिस्टिक बिहेवियर
आपको देखने को मिल जाता है कि हां कंपनीज तो बहुत सारी हैं पर लोग एक कंपनी को थोड़ा ज्यादा पसंद कर रहे हैं या एक
एंटिटी को ज्यादा पसंद कर रहे हैं कहीं ना कहीं यहां पर एं बैरियर्स टटू एंट्री और एग्जिट होते हैं पर ओलिगोपोलिस्टिक
मार्केट से कम होते हैं समझ गए इस बात को तो ये चार चीजों का आपको पता होना चाहिए मैं थोड़ा सा आप लोगों को क्विकली रिवाइज
कराता इसको थ्योरी ऑफ फर्म बोलते हैं तो आपको ना इस तरह से आप इन चीजों को नोटिस कर सकते हो जसे फॉर
एग्जांपल एक तरफ मैंने लिख दिया मोनोपोली मोनोपोली में क्या हो रहा था मोनोपोली में आपका सिर्फ एक ही सेलर था और
यही सारा प्राइस डिक्टेट कर रहा था यही प्राइस सेट कर रहा था कि क्या मार्केट में प्राइस क्या होना चाहिए और यहां पर हमने
नोटिस भी किया कि बैरियर्स वगैरह खूब थे भाई बैरियर एंट्री के खूब थे आसानी से एंट्री करना है ही नहीं मतलब बहुत मुश्किल
से एंट्री होती है ये हो गया हमारा मोनोपोली थोड़ा सा इधर आ जाते हैं फिर आ गया हमारा ओलिगोपॉली
यहां पर क्या हो गया हमारे फ्यू सेलर्स है क्या हुआ यहां पे आपके सेलर्स यहां पर थोड़े से हैं बहुत एक नहीं है पर चार पांच
या तीन चार ऐसे हैं इसको बोल दिया ओलिगोपॉली यहां पर बैरियर्स बहुत ज्यादा थे यहां पर थोड़े से कम बैरियर्स हो गए
इसके बाद हमारे पास आ जाता है यहां पर मोनोपोलिस्टिक कंपटीशन ठीक है यहां पर आ जाता है आपका
मोनोपोलिस्टिक कंपटीशन कंपटीशन था पर कहीं ना कहीं यहां पे प्रोडक्ट
डिफरेंशिएबल भी देखने को मिल जाती है एंड यहां पर हमारा आ गया परफेक्ट कंपटीशन यहां पर तो बिल्कुल अपोजिट आ ये मोनोपोली के
यहां पर तो सेलर्स प्राइस टेकर की तरह काम करते हैं एंड कस्टमर्स ही कहीं ना कहीं प्राइस सेट करते हैं मार्केट एक तरह से
प्राइस सेट करती है यहां पर खूब सेलर्स होते हैं खूब बायर्स होते हैं सबके पास सारी जानकारी होती है बैरियर्स टूू एंट्री
एग्जिट बहुत ही कम होते हैं तो यह वाला कांसेप्ट था आपका थ्योरी ऑफ फर्म का जहां पर आपको सारी चीजें अच्छे से पता होनी
चाहिए कि आखिर मोनोपोली क्या है ओलिगोपॉली क्या है मोनोपोलिस्टिक कंपटीशन क्या है एंड कहीं ना कहीं आपका जो परफेक्ट कंपटीशन
होता है वो हमें कहां देखने को मिलता है नेक्स्ट जो हम टॉपिक यहां पे डिस्कस करेंगे दैट इज विद रिगार्ड्स टू मार्केट
इक्विलियम एंड कंपटीशन अब यह वाला जो चीज है ना यह दरअसल में आपकी बुक के अंदर बहुत सारी ऐसी चीजें मेंशन है जो थोड़ी
मिसलेनियस है या कुछ टर्मिनोलॉजी का हमें आईडिया होना चाहिए अब दोस्तों जब मैं बात कर रहा हूं यहां पे वर्ड इक्विलियम की तो
इक्विलियम का अर्थ होता है कि कैसे किन्हीं चीजों के अंदर हमें एक बैलेंस देखने को मिलता है और हम डिस्कशन कर किसकी
रहे थे हम डिस्कशन कर रहे थे आपके डिमांड एंड सप्लाई की राइट तो होता क्या है ना डिमांड और सप्लाई के बीच में एक तरह से जब
हम कहते हैं कि हम हमारी जो डिमांड है व सप्लाई के बराबर हो जाती है जिसके माध्यम से हमें प्राइस डिटरमिन होता हुआ देखने को
मिल जाता है दैट इज नोन एस कि मार्केट में एक इक्विलियम है यहां पर एक एग्जांपल भी आपको देखने को मिल जाएगा जैसे कि आप यहां
पर इसको पढ़िए कहते हैं कि अगर मान लीजिए एक बेकरी है एंड मार्केट इक्विलियम कैसे आएगा जब
कहीं ना कहीं आप नोटिस करोगे जब हमारे पास सही दाम के ऊपर उस चीज को बेचा जाएगा आप इस चीज को इमेजिन करना मान लेते हैं जैसे
आप आपका ना कोई भी चीज है एक एग्जांपल से आपको मैं समझाने की कोशिश करता हूं लेट्स से जैसे फॉर एग्जांपल मेरे पास य मोबाइल
पड़ा हुआ है ठीक है मेरे सामने मोबाइल है मान लेता हूं कि मार्केट में ना इसका दाम आज के समय 10000 चल रहा है कितना दाम चल
रहा है मोबाइल का 00 ठीक है अब क्या यह 00 सही दाम है या खराब प्राइस है मतलब कम है या ज्यादा है लेटस से जस्ट टेक एन
एग्जांपल मान लेते हैं कि कल को क्या हो जाता है कल को ये कंपनी डिसाइड करती है कि नहीं यार अचानक से 10000 वाला जो दाम था
ना इन्होंने 20000 कर दिया अब मुझे एक चीज बताओ जब इस चीज का प्राइस बढ़ गया होगा 10000 का वाली वैल्यू
10000 वाला प्रोडक्ट 20000 का हो गया अब इस केस में पता क्या हुआ होगा इस केस में लोगों ने कम खरीदना स्टार्ट कर दिया
होगा यही हुआ होगा बिल्कुल ठीक बात है क्योंकि फोन महंगा हो गया है लोग सोचेंगे इतना क्यों महंगा कर दिया इन्होंने फोन हम
नहीं खरीदे ऐसा फोन हम कोई और खरीद लेंगे जो 0000 के अंदर ही बढ़िया फीचर्स दे रहा हो राइट तो होगा पता क्या यहां पर ना एक
तरह से डिस इक्वि ब्रियन हो जाएगा क्यों क्योंकि मान लो कंपनी ने अगर 100 प्रोडक्ट प्रोड्यूस कर रही थी यहां पर भी मान लो
कंपनी 100 प्रोडक्ट बना रही थी 100 मोबाइल फोन बना रही थी अभी भी कंपनी 100 मोबाइल फोन ही बना रही है अब कंपनी के मोबाइल्स
नहीं बिकेंगे या कम बिकेंगे है कि नहीं बिल्कुल ठीक बात है अब जब कंपनी के मोबाइल फोन कम बिकेंगे तो कंपनी के पास बहुत सारा
स्टॉक हो जाएगा उनके फोन पड़े हुए हैं फैक्ट्री के अंदर कोई खरीद ही नहीं रहा तो ऐसे केस में कंपनी को क्या करना पड़ेगा
कंपनी को अपना दाम कम करना ही पड़ेगा तो वापस से ना इसको अपना प्राइस जो है वो 20000 से नीचे करना पड़ेगा हो सकता है
12000 करे 13000 करे या 10000 करे या और नीचे कर दे पर आर यू गेटिंग द पॉइंट होता पता क्या है कि जब भी मान लो प्राइस जरूरत
से ज्यादा होता है किसी वस्तु का तो उस केस में क्या हो जाता है आपकी सप्लाई ज्यादा होती है और डिमांड कम होती है जैसा
कि हमने देखा इस मोबाइल फोन के केस में डिमांड उतनी नहीं बची क्योंकि महंगा है ना प्रोडक्ट फीचर कुछ है नहीं मोबाइल के अंदर
पर महंगा प्रोडक्ट बेच रहे हैं तो सप्लाई तो खूब है मोबाइल फोनों की पर डिमांड कम है ऐसे केस में अपना जो इन्वेंटरी है जो
इतने सारे मोबाइल फोन फैक्ट्री में बन के पड़े हुए हैं उनको बेचने के लिए फिर क्या करना पड़ेगा कहीं ना कहीं उनको क्या करना
पड़ेगा अपने प्राइसेस कम करने पड़ेंगे और जैसे ही मोबाइल का दाम नीचे आएगा उसकी डिमांड बढ़ जाएगी डिमांड बढ़ जाएगी सप्लाई
के और डिमांड के बीच में जो एक तरह से इन बैलेंस था ना अब वो बराबर हो जाएगा इसी को बोलते हैं दरअसल में चीजों का बराबर होना
इज नोन एस इक्विलियम आर यू गेटिंग द पॉइंट इक्विलियम का अर्थ बस इतना ही है कि एक तरह के चीजों के अंदर
बैलेंस है अगर डिमांड कम होती है प्राइस बढ़ने की वजह से तो कंपनी को अकॉर्डिंग प्राइस कम करना ही पड़ेगा ताकि वो डिमांड
को मतलब डिमांड उतनी ज्यादा इंक्रीज हो पाए ये एक तरीका है देखने का दूसरा तरीका पता क्या हो सकता है दूसरा तरीका यह हो
सकता है कि कई बार ना किसी चीज की डिमांड बहुत ज्यादा होती है और सप्लाई उसकी उतनी नहीं
होती सर एग्जांपल बता दीजिए जैसे मान लो कई बार पता क्या होता है जैसे मान लो टमाटर है टमाटर जब भी आप देखते हो जैसे
टमाटर के कई बार दाम बहुत ज्यादा बढ़ जाते हैं 100 किलो टमाटर बिक रहा है क्या लगता है क्यों ये टमाटर 00 किलो बिक रहा होगा
कहीं ना कहीं यही है कि टमाटर खरीदने वाले ज्यादा लोग है टमाटर की डिमांड ज्यादा है पर टमाटर उतने नहीं है मार्केट के अंदर
दैट इज द रीजन बिल्कुल ठीक बात है अब ऐसे केस में दो चीजें हो सकती है या तो भाई आप टमाटर की सप्लाई बढ़ा दो मतलब इतने सारे
टमाटर मार्केट में ले आओ किसी तरह से ताकि डिमांड और सप्लाई मैच कर जाए फिर जो महंगा टमाटर मिल रहा था 00 किलो का अब वो कहीं
ना कहीं शायद इक्विलियम प आके 50 किलो का मिलने लग जाएगा दैट इज वन वे या फिर आपको कहीं ना कहीं जो बढ़ती हुई डिमांड है आपको
उसको मैनेज करना पड़ गा तो कहने का पॉइंट पता क्या है यह जो हम बात कर रहे थे मार्केट इक्विलियम की यहां पर क्या होता
है कि डिमांड और सप्लाई में हमें एक जो मिसमैच था पहले अब वो मैच देखने को मिल जाता है दैट इज नोन एज इक्विलियम जैसे अगर
मान लीजिए आपने कोई ऐसा प्राइस सेट किया जो इक्विलियम से ज्यादा है आपने एक वस्तु का दाम इक्विलियम से ज्यादा सेट कर दिया
यानी कि महंगा मोबाइल फोन जैसे एग्जांपल था उस केस में मोबाइल फोन का आपके पास क्या हो जाएगा सरप्लस इकट्ठा हो जाएगा
आपकी क्वांटिटी सप्लाइड ज्यादा है क्वांटिटी डिमांडेड कम है इस केस में क्या होगा आपको अपनी इन्वेंटरी क्लियर करने के
लिए मोबाइल फोन बेचने के लिए कंपनी को क्या करना पड़ेगा दाम कम करना ही पड़ेगा फिर इक्विलियम आ जाएगा ऑन द अदर हैंड अगर
मान लो आपने बहुत कम प्राइस सेट कर दिया किसी चीज का उससे डिमांड कई बार ज्यादा हो जाती है उस केस में कई बार आपको प्राइस
इंक्रीज करने पड़ सकते हैं कहने का अर्थ पता क्या है कि ये जो बात होती है ना मार्केट इक्विलियम की ये बात इसी चीज की
करता है कि कैसे मार्केट में इक्विलियम आ सकता है है जब भी कभी प्राइस की वजह से मिसमैच आता है तो अकॉर्डिंग वो चीजें
एडजस्ट होके आपको एक इक्विलियम वाली सिचुएशन देखने को मिल जाती है तो दैट इज वन इंपॉर्टेंट कांसेप्ट रिगार्डिंग
मार्केट इक्विलियम जो आपको पता होना चाहिए राइट ठीक है आगे आते हैं आपके ना चैप्टर के एंड में बहुत सारी टर्मिनोलॉजी मेंशन
है आप लोगों ने पढ़ा होगा मतलब अगर पढ़ा नहीं है तो आपकी देखना मैं हर एक टर्मिनोलॉजी को आपको अच्छे से एक्सप्लेन
कर देता हूं ये इन वर्ड्स का मीनिंग पता होना बहुत-बहुत ज्यादा इंपॉर्टेंट समझते हैं पहला टर्म हमारे सामने मार्जिनल
यूटिलिटी है थोड़ा सा मैं आपको एक्सप्लेन करूंगा देखो जब मैं वर्ड यूज कर रहा हूं यूटिलिटी यूटिलिटी एक इंग्लिश का ही वर्ड
है यूटिलिटी क्या है एक इंग्लिश का ही शब्द है होता क्या है यूटिलिटी किसी चीज की कितना बेनिफिट है आपके लिए दैट इज
यूटिलिटी या अगर मैं सिंपल भाषा में बोलूं तो किसी चीज से आपको कितनी ज्यादा खुशी मिलती है कितना ज्यादा फायदा मिलता है उसी
को हम बोलते हैं यूटिलिटी ठीक बात बहुत बढ़िया फॉर एग्जांपल मैंने आपको लेक्चर के स्टार्टिंग में बोला था कि आप मेरा लेक्चर
पता क्यों देख रहे हो आप मेरा लेक्चर इसलिए देख रहे हो क्योंकि इस लेक्चर को देखने से आपको ज्यादा यूटिलिटी मिल रही है
एज कंपेयर टू एनी अदर थिंग अब यह जो टर्म है ना यूटिलिटी इसको क्वांटिफाई करना थोड़ा मुश्किल रहता है फॉर एग्जांपल आप
ऐसा नहीं कह सकते कि आपने मेरा लेक्चर देखा और आपको 5 किलो खुशी मिली थोड़ा सा मुश्किल होता है इसको क्वांटिफाई करना बट
फिर भी लेट्स से हमने इसको क्वांटिफाई कर दिया तब हम कहीं ना कहीं कंपैरिजन कर पाएंगे कि सर का लेक्चर देखने से 5 किलो
खुशी मिल रही थी गर्लफ्रेंड के साथ घूमने से 4 किलो खुशी मिल रही थी अब मुझे क्या करूं जहां ज्यादा खुशी मिल रही है ज्यादा
खुशी कहां है 5 किलो खुशी इधर है तो इधर वाला काम करोगे आप इसी को बोलते हैं हम यूटिलिटी कि कितना बेनिफिट आपको यहां पे
किसी वर्क से या किसी चीज से आपको मिलता है द एक्सपेक्टेड बेनिफिट्स आउट ऑफ समथिंग अ दैट यू गेट इज नोन एज यूटिलिटी ठीक है
सर यूटिलिटी तो समझ आ गया ये डेफिनेशन यहां पे लिखी भी हुई है यूटिलिटी इज नथिंग बट सेटिस्फैक्ट्रिली
पूछे बस इतनी डेफिनेशन है सेटिस्फैक्ट्रिली ये डेफिनेशन थी यूटिलिटी की अब आप पूछेंगे
सर इसके आगे तो एक और वर्ड लगा हुआ है मार्जिनल इसका अर्थ क्या होता है देखो मार्जिनल शब्द भी कहां का वर्ड है अरे यह
भी इंग्लिश का ही वर्ड है राइट मार्जिनल वर्ड जहां पर भी आप देखोगे आपको इसका मतलब सिर्फ इतना समझना है कि इट स्टैंड्स फॉर द
वर्ड अ किस वर्ड के लिए एडिशनल क्या मतलब इस चीज का एग्जांपल से
समझते हैं लेट्स से आपको प्यास लगी हुई है बहुत ज्यादा क्या लगी हुई है प्यास लगी हुई है ठीक है अब
प्यास बुझाने के लिए आपने सोचा यार एक काम करते हैं छच पी लेते हैं लस्सी पी लेते हैं जो भी आप कहना चाहो आपने पहला गिलास
पिया लस्सी का और मैं मानता हूं कि आपको कुछ खुशी मिली ठीक है दिस इ क्वांटिटी एंड यहां पर मैं लिख रहा
यूटिलिटी कितना उसको दे खाने से या पीने से आपको सेटिस्फेक्शन मिली पहला गिलास पिया आपने लस्सी का आपकी प्यास बहुत
ज्यादा लगी हुई थी तो लेट्स से आपको पाच यूनिट खुशी मिली तो यह क्या है दिस इज यूटिलिटी यूटिलिटी ऑफ कंजूमिंग द फर्स्ट
ग्लास ऑफ लस्सी क्लियर ठीक है अब मान लेते हैं कि दूसरा गिलास पिया आपने लस्सी का अब यार दूसरा गिलास पीने से भी थोड़ी
खुशी तो मिलेगी ना बिल्कुल मिलेगी पर शायद उतनी खुशी नहीं मि कि जितना पहला गिलास पीने से मिली पता है क्यों क्योंकि पहला
गिलास जब पी रहे थे बड़ी प्यास लगी थी और जैसे पहला गिलास पिया आप कहोगे यार आत्मा तृप्त हो गई आज तो मजा ही आ गया दूसरा
गिलास पीने से भी खुशी मिलेगी बट लेट्स से शायद वो चार यूनिट होगी अब देखो दो गिलास पी लिए आपने लस्सी के अब पेट भर गया है अब
इसके बाद तीसरा गिलास अगर आप पीने जाओगे ना तब उस केस में आपको शायद उतनी खुशी ना मिले हो सकता है आपको कम खुशी मिले आपको
दो ही यूनिट खुशी मिले अब तीन गिलास पीने के बाद पेट पूरा फुल हो चुका है पूरा भर चुका है आपका अब चौथा यूनिट जब चौथा ग्लास
पीने लगोगे तब तो आपको उल्टी जैसा फील हो लग जाएगा भाई इतना दस्सी थोड़ी पी सकता हूं तो हो सकता है उस केस में आपको खुशी
ना भी मिले बल्कि उल्टा दुख हो तो नेगेटिव यूटिलिटी हो सकती है उस केस के अंदर आर यू गेटिंग माय पॉइंट तो यूटिलिटी का मतलब
बहुत ही सिंपल था सेटिस्फेक्शन ठीक है अब हो सकता है कि अगर मुझे टोटल यूटिलिटी निकालनी हो तो मैं सबको ऐड कर दूं पर अगर
मैं वर्ड यूज करूंगा मार्जिनल यूटिलिटी इसका मतलब यह होगा कि जब मैं लेट्स से जैसे मान लो आपने दो ग्लास पी रखे थे अब
वो कह रहा है कि जब मैं एक और ग्लास यानी कि एक एडिशनल यूनिट मैं और कंज्यूम करूंगा उससे मुझे और कितनी ज्यादा खुशी मिलेगी इस
चीज को बोलते हैं मार्जिनल यूटिलिटी जब भी वर्ड आए मार्जिनल इसका मतलब कुछ नहीं है एक एडिशनल यूनिट दैट इज इट अगर मान लो आप
चार लोग मिलकर कुछ काम कर रहे थे ठीक है और मैंने बोला कि आप अपने एक पांचवें दोस्त को भी बुला लो उस पांचवें बंदे का
आना इज नथिंग बट द वर्ड मार्जिनल और क्योंकि वर्ड साथ में यूटिलिटी तो इसका मतलब है सेटिस्फेक्शन कि एक एडिशनल यूनिट
आने की वजह से आपको कितनी एडिशनल सेटिस्फैक्ट्रिली मिली दूसरा वाला गिलास पीने के टाइम आपको
जब जब आपके एक हो गया था एक के बाद जब आप एक की तरफ गए तब आपको यहां पे चार यूनिट खुशी मिली तो ये सेकंड ग्लास पीने की
मार्जिनल यूटिलिटी कितनी है आपकी प् 4 आर यू गेटिंग माय पॉइंट तो यूटिलिटी का सिंपल सा कि आपको कितनी सेटिस्फेक्शन मिल रही है
एंड जब मैं वर्ड यूज़ कर दूंगा मार्जिनल यूटिलिटी मार्जिनल का मतलब हो जाएगा एक एडिशनल
यूनिट तो एक एडिशनल यूनिट कंज्यूम करने से आपको कितनी और एडिशनल सेटिस्फैक्ट्रिली दैट इज़ मार्जिनल यूटिलिटी ये वर्ड देखो
मार्जिनल वर्ड बार-बार आएगा तो मैंने आपको एक बार मीनिंग बता दिया है यह स्टैंड करता है एडिशनल जब आप एक यूनिट कंज्यूम करते हो
उससे ये वर्ड बार-बार आएगा इसका ध्यान रखिएगा ठीक है आगे एक टर्मिनोलॉजी आपकी बुक में मेंशन है दैट इ अपॉर्चुनिटी कॉस्ट
यह तो मैंने आपको समझा ही दिया अपॉर्चुनिटी कॉस्ट इज नथिंग बट द कॉस्ट ऑफ नेक्स्ट बेस्ट अल्टरनेटिव
फॉरगॉन जब आप मेरा लेक्चर देखते हो तो उस समय कुछ और चीज नहीं करते क्योंकि आपके पास टाइम लिमिटेड है राइट तो आपने अगर वो
चीज ना करके उसका नेक्स्ट बेस्ट अल्टरनेटिव जो था अगर वो होता उसकी कॉस्ट को बोला जाता है अपॉर्चुनिटी कॉस्ट जैसे
फॉर एग्जांपल आपने मेरा लेक्चर नहीं देखा तो इस वजह से आप और चीजें नहीं कर पाए उनमें से जो बेस्ट चीज आप नहीं कर पाए जो
बेसिकली सेकंड बेस्ट चीज होगी आफ्टर दिस वर्क इज नोन एज अपॉर्चुनिटी कॉस्ट ये तो एक्सप्लेन कर ही चुके हम पहले भी डिस्कशन
मार्केट इक्विलियम मैंने अभी आपको एक्सप्लेन कर दिया कि मार्केट इक्विलियम में क्या होता है सप्लाई और डिमांड कैसे
एक दूसरे को बैलेंस करते हैं अब देखो यहां पर एक टर्म है जिसका नाम है एक्सटर्नलिटी अब ये बड़ा ही इंटरेस्टिंग कांसेप्ट है
एंड इसको आपको अच्छे से समझना चाहिए क्योंकि ये टर्म आपकी सिर्फ इकॉनमी के अंदर ही नहीं आपके एनवायरमेंट के अंदर भी
आपको पता होनी चाहिए वहां पर भी ऐसा क्वेश्चन आएगा पहले एक बार इसका मीनिंग समझ लो
एक्सटर्नलिटी का मीनिंग क्या है कॉस्ट और बेनिफिट दैट अफेक्ट अ पार्टी हु डिड नॉट चूज टू इनकर दैट कॉस्ट और बेनिफिट आप
बोलोगे सर कुछ भी समझ नहीं आया कि क्या लिखा हुआ है कोई दिक्कत वाली बात नहीं मैं आपको एक्सप्लेन करता
हूं देखो लेट्स से मान लीजिए मैं बात करता हूं एजुकेशन
की ठीक है अब समझो आप लोग जैसे पढ़ाई कर रहे हो मेरे से आप लोग पढ़ रहे हो ठीक है अब आप
लोग पढ़ाई क्यों कर रहे हो पहले मुझे बताओ शायद आपका पर्पस बस ये है यार मैं पढ़ाई कर रहा हूं ताकि मैं पढ़ लिख जाऊं एंड
अच्छी नौकरी मिल जाए आपका पर्पस शायद इतना ही है शायद है ना आप यही चाहते हो यार मुझे अच्छी नौकरी मिल जाए मेरा घरबार
अच्छे से चले दैट इज माय पर्पस ऑफ गेटिंग एजुकेशन तो आप एजुकेशन क्यों ले रहे हो क्योंकि आपको बेनिफिट हो पर आप एक चीज
नोटिस कर रहे हो आपके अच्छी शिक्षा लेने का फायदा बहुत सारे लोगों को हो रहा है आप सोच नहीं
रहे कि बाकी लोगों को भी बेनिफिट हो पर हो रहा है कैसे अरे अगर आप पढ़ लिख जाओगे तो हमारा समाज एक अच्छा समाज बनेगा वहां पर
क्राइम वगैरह हो सकता है कम हो हमारे देश की प्रकृति होगी हमारा देश दुनिया भर में हमारे देश का अच्छा नाम होगा बात तो सही
है पर क्या आप लोगों ने जब यह एजुकेशन ली आपके दिमाग में यह सब चीज चल रही थी क्या कि मुझे यार मैं पढ़ लिख जाऊंगा तो अच्छा
समाज बनेगा नहीं ना होता क्या है आप एक काम कर रहे हो उसका बेनिफिट या उसकी कॉस्ट बाकी और एक्सटर्नल चीजों के ऊपर हमें
देखने को मिल जाती है जिन्होंने वो चीज इनकर भी नहीं करी ये एक एग्जांपल था मान लेता हूं मैं और एग्जांपल देता हूं जैसे
मान लो पार्क वगैरह होते हैं जैसे फॉर एग्जांपल मान लो आपकी सोसाइटी है आपकी सोसाइटी में एक पार्क बन गया अब सोसाइटी
में पार्क बनाने का परपस हो सकता है कुछ एक सर्टेन चीज की वजह से पार्क बनाया जा रहा हो लेट्स से किसी ने बोला कि यार
पार्क बनाएंगे तो उस पार्क के अंदर बच्चे खेल सकते हैं इस परपस से पार्क बनाया गया पर पर्पस क्या था पर्पस था कि पार्क बनाया
जा रहा है बच्चों के खेलने के लिए पर साथ ही साथ नोटिस करोगे पार्क होने की वजह से वहां पर लोगों का स्वास्थ्य अच्छा हो गया
उनकी हेल्थ अच्छी होगी तो उनको अब हेल्थ के ऊपर उतना खर्चा नहीं करना पड़ रहा और यह भी चीज हो सकती है कि जिस सोसाइटी में
पार्क बना हो वहां पर प्रॉपर्टी के रेट इंक्रीज हो गए सर ये सोचा ही नहीं था हमने पार्क बनाते हुए कि पार्क बनाने से
प्रॉपर्टी रेट बढ़ जाएंगे आर यू गेटिंग माय पॉइंट तो ये जब ग्रीन स्पेसेस होती है इनका यह फायदा होता है और एग्जांपल देता
हूं क्या आप लोगों ने कभी वैक्सीन लगवाई है लगवाई होगी कोविड-19 पेंडम के ऊपर तो सबने लगवाई थी है ना चाहे जो भी थी आपकी
कोरोनल नहीं कोरोनल की बात नहीं कर रहा आपके जो ठीक है जो आपकी वैक्सीन आई थी राइट चलो जो भी वैक्सीन आपने लगवाई थी ठीक
है और आपने टीका लगवाया उस समय कोविड-19 के अंदर ठीक है अब आपने टीका क्यों लगवाया था मुझे एक बात बताओ आपने टीका बस इस परपस
से लगवाया था कि यार मैं बच जाऊं है ना कि भाई मुझे कोरोना ना हो जाए मैं उस कोविड-19 पेंडम से बचना चाहता हूं इसलिए
मैं टीका लगवा रहा हूं ठीक क्या अच्छी बात है पर आप एक चीज जानते हो आपके टीका लगवाने की वजह से बाकी और दुनिया को भी
फायदा हुआ कैसे जैसे मान लो यहां पर कोई टीका ऐसा बंदा था जिसने टीका नहीं लगवाया था अब इस बंदे को कोविड होगा कैसे अरे
इसके आसपास के लोगों से ही तो होगा कोविड इसको बिल्कुल पर अगर मान लो इन लोगों ने टीका लगवा लिया या आपने टीका लगवा लिया तो
कहीं ना कहीं वहां पर क्या हो गया हर्ड इम्युनिटी आ चुकी है अब ये लोग इसको कॉज कर ही नहीं पाएंगे क्योंकि इन लोगों ने
टीका लगवा दिया है तो आपने टीका अपने बेनिफिट के लिए लगवाया था भाई मुझे करोना ना हो जाए पर आपके टीका लगवाने की वजह से
और लोगों को बेनिफिट हुआ आपने यह सोच के थोड़ी किया था कि यार इन लोगों को बेनिफिट हो क्लियर आर यू गेटिंग माय पॉइंट तो हो
पता क्या रहा है समझना अब डेफिनेशन में वापस आना यहां पर अभी कॉस्ट वाला चीज बताऊंगा अब देखो ये क्या कह रहा है
बेनिफिट्स कॉस्ट वाली बात अभी अभी समझा दूंगा कॉस्ट क्यों लिखा है बेनिफिट्स दैट अफेक्ट अ पार्टी हु डिड नॉट चूज टू इनकर द
बेनिफिट उस इंसान को फायदा हुआ जिसने चूज ही नहीं किया था उस बेनिफिट को इनकर करना यहां पर बेनिफिट किसको हुआ यहां पर
बेनिफिट हुआ था इस इंसान को क्यों क्योंकि आपके वैक्सीन लगाने की वजह से एक पॉपुलेशन के अंदर हर्ड इम्युनिटी आ गई एंड कहीं ना
कहीं बाकी लोगों का बेनिफिट हो गया पार बनने की वजह से उन लोगों को बेनिफिट हो गया जिन्होंने कुछ वो बेनिफिट अनकर करने
का सोचा ही नहीं था एंड सेम चीज एजुकेशन के केस में है गेटिंग द पॉइंट है कि नहीं बात सही कह रहा हूं ऐसी चीजों को बोलते
हैं एक्सटर्नलिटी अब यहां पर पता क्या हो रहा है ये जितने भी एग्जांपल दिए चाहे एग्जांपल यह वैक्सीन वाला था एजुकेशन वाला
था मैंने पार्क वाला एग्जांपल दिया यह सारे के सारे एग्जांपल्स क्या है सर यह पॉजिटिव एग्जांपल्स है क्यों क्योंकि इससे
पता क्या हो रहा है इससे कुछ ना कुछ कुछ बेनिफिट मिल रहा है हमारी सोसाइटी को या बाकी और स्टेकहोल्डर्स
को तो जब भी ऐसे कुछ फायदा होता है जब भी एक्सटर्नल चीजों को कुछ ना कुछ फायदा होता है उसको हम बोलते हैं पॉजिटिव
एक्सटर्नलिटी तो ये जो मैं डेफिनेशन कह रहा था ना कि बेनिफिट्स दैट अफेक्ट अ पार्टी हु डिड नॉट चूज टू इनकर दोज
बेनिफिट्स ऐसी चीज को बोलते हैं हम पॉजिटिव एक्सटर्नलिटी अब आप पूछेंगे सर पॉजिटिव तो समझ आ गया कि किसी ने कुछ काम
किया उसका फायदा औरों को हो रहा है दिस इज समथिंग कॉल्ड एज पॉजिटिव एक्सटर्नलिटी अब पॉजिटिव है कुछ तो क्या नेगेटिव भी कोई
चीज होगी हां जी बिल्कुल होगी नेगेटिव एक्सटर्नलिटी क्या होती है सर नेगेटिव भी आपको बताता हूं नेगेटिव वे आपको बताता हूं
समझना मान लो आप एक फैक्ट्री चला रहे हो आप एक फैक्ट्री चला रहे हो ठीक है अब यार यह फैक्ट्री आप चला रहे हो इस
फैक्ट्री में मान लो आप कहीं ना कहीं कुछ बर्न कर रहे होंगे लेट्स से कोयला वगैरह बर्न कर रहे होंगे उस कोयला ब करने की वजह
से क्या हो रहा है एयर पोल्यूशन हो रहा है हम बिल्कुल हो रहा है बिल्कुल हो रहा है हो रहा है बिल्कुल हो रहा है अब ये जो
एयर पोल्यूशन है भाई किस लोगों किसको इफेक्ट कर रहा है अरे आपकी फैक्ट्री के आसपास जो भी लोग रह रहे होंगे उनको इफेक्ट
कर रहे हैं उनकी सेहत खराब हो रही है बिल्कुल हो रही है तो क्या जो कॉस्ट थी वो आप नोटिस कर रहे हो एक चीज यहां पर काम
कौन कर रहा है यहां पर काम ही फैक्ट्री वाला बंदा कर रहा है पर उसका नेगेटिव इंपैक्ट कहीं ना कहीं वहां के लोगों के
लिए ऊपर पड़ रहा है तो एक्चुअल में क्या हुआ ना कुछ लोगों को कुछ ऐसी कॉस्ट बियर करनी पड़ी जिन लोगों ने भाई चूज ही नहीं
किया था उसको बियर करना वहां वहां के आसपास के लोग हैं उस जगह के ऊपर उन लोगों की सेहत खराब हो रही
है पता है क्यों हमारी वजह से नहीं वो फैक्ट्री वाला कहीं ना कहीं कुछ कोयला चला रहा है इस वजह से ये क्या है दिस इज
नेगेटिव एक्सटर्नलिटी आर यू गेटिंग माय पॉइंट ऐसी चीज को बोलते हैं नेगेटिव एक्सटर्नलिटी जब कहीं ना कहीं नेगेटिव
इंपैक्ट आता है पॉजिटिव वाले में हमें बेनिफिट्स होते हैं नेगेटिव एक्सटर्नलिटी में क्या होता है नेगेटिव एक्सटर्न में
हमें कॉस्ट बियर करनी पड़ती है आर यू गेटिंग दिस पॉइंट एयर पोल्यूशन हो गया इवन ऐसे फैक्ट्री में से मान लो
इसने पानी में कुछ डंप कर दिया अपना जो भी वेस्ट वगैरह था पानी में कुछ डंप कर दिया तो उसको हम बोल देंगे वाटर पोल्यूशन कर
दिया वाटर पोल्यूशन का नेगेटिव इंपैक्ट किसके ऊपर आएगा या तो नदियों के ऊपर आएगा या फिर कहीं ना कहीं वहां पे लोकल लोग हैं
उनके ऊपर आएगा राइट इसी तरह से मान लो किसी जगह पे ऊपर ना आपने बहुत सारे अपने प्राइवेट
व्हीकल्स की वजह से किसी जगह के ऊपर ट्रैफिक हो गया अब आपने तो यार व्हीकल लिया था कि गाड़ी मस्त में घुमाऊंगा पर आप
कहीं ना कहीं ट्रैफिक का हिस्सा बन गए आपके ट्रैफिक के हिस्से बनने की वजह से पता है क्या हो रहा है लोगों को बहुत सारे
डिलेज फेस करने पड़ते हैं बहुत लंबा लंबे टाइम के ऊपर डिले फेस करना पड़ा एट द सेम टाइम नॉइस पोल्यूशन भी हुआ नॉयज पोल्यूशन
के साथ-साथ जो भी ड्राइवर्स वगैरह होते हैं जब वो इतना लंबा-लंबा टाइम ट्रैफिक में फंसे रहते हैं तो उनकी मेंटल हेल्थ के
ऊपर भी या स्ट्रेस उनका बढ़ जाता है तो ये सब क्या है ये सब है कहीं ना कहीं नेगेटिव एक्सटर्नलिटी आर यू गेटिंग
माय पॉइंट तो सिंपली आपको डेफिनेशन पता होनी चाहिए कि किस तरह से ये चीज वर्क कर रही है कॉस्ट कॉस्ट वाली वर्ड आपका
नेगेटिव एक्सटर्नलिटी के साथ आ जाएगी बेनिफिट आपकी पॉजिटिव एक्सटर्नलिटी के साथ दैट इफेक्ट अ पार्टी हु डिड नॉट चूज टू
इनकर दोस कॉस्ट और बेनिफिट्स कई बार जैसे मान लो आप रिसोर्स का यूज करते हो अब रिसोर्सेस
का यूज करना कोई गलत बात नहीं है पर रिसोर्सेस का मिस यूज करना गलत बात है अगर आपने कुछ रिसोर्सेस एक्सप्लोइट कर लिए
एक्सप्लोइट इन द सेंस कि मान लो कुछ रिसोर्सेस थे आपने बहुत ज्यादा जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल करने की कोशिश करी उसका
नेगेटिव इफेक्ट किसके ऊपर आएगा आपके आने वाली जनरेशन के ऊपर उनको उस चीज का फायदा नहीं मिल पाएगा तो वो भी क्या है वो भी एक
नेगेटिव एक्सटर्नलिटी है आप काम क्यों कर रहे हो क्योंकि कहीं ना कहीं आपको रिसोर्सेस एक्सट्रैक्ट करने हैं पर आप
आपके रिसोर्सेस एक्सट्रैक्ट करने का नेगेटिव इंपैक्ट किसी और के ऊपर पड़ रहा है आपकी फ्यूचर जनरेशन के ऊपर पड़ रहा है
ऐसी चीजों को बोलेंगे हम नेगेटिव एक्टरनेलिटीज यह वर्ड आप लोगों को एनवायरमेंट के फैकल्टी भी आपको पढ़ाएंगे
क्योंकि वहां पर बहुत इंपोर्टेंट चीज हो जाती है तो पॉजिटिव एक्सटर्नलिटी और नेगेटिव एक्सटर्नलिटी का मतलब बिल्कुल
आपको पता होना चाहिए क्लियर बहुत बढ़िया कुछ और टर्मिनोलॉजी भी आपके बुक में मेंशन है
जैसे सब्सीट्यूशन इफेक्ट व्हाट इ सब्सीट्यूशन इफेक्ट सब्सीट्यूशन वर्ड मैंने आपको सिखाया जब मैंने आपको
सब्सीट्यूट गुड्स बताया था कि एक को दूसरी गुड सब्सीट्यूट कर देती है पेप्सी को कोका कोला ने सब्सीट्यूट कर दिया चाय को कॉफी
ने सब्सीट्यूट कर दिया तो सब्सीट्यूशन इफेक्ट का मतलब क्या हो गया यह बेसिकली उसी चीज को बताता है कि
किस तरह से मान लीजिए कंजमपट्टी चूट अवे कर देता है किसी हायर प्राइस गुड से लोअर प्राइस चीज के पर जैसे कि जैसे
कोका कोला का दाम बढ़ गया था तो लोगों ने कोका-कोला खरीदना बंद कर दिया pepsi-cola का होना कहीं नाना कहीं दूसरे सब्सीट्यूट
के ऊपर इंपैक्ट डालता है दैट इज सब्सीट्यूशन इफेक्ट बाकी इनकम इफेक्ट वहां पे मेंशन है आपकी बुक के अंदर यह मैंने
आपको पढ़ा दिया कि कैसे-कैसे एक इंसान की जब इनकम बदलती है उसके हिसाब से कैसे कैसे बदलाव आता है दैट इज इनकम
फेक्ट राइट अगला टर्म है हमारे पास मार्जिनल कॉस्ट अब कॉस्ट तो आपको पता ही है कितना आप किसी चीज के ऊपर खर्चा करते
हो राइट और जब मैंने वर्ड यूज कर दिया मार्जिनल तो मार्जिनल का मतलब हो जाता है क्या एडिशनल यूनिट वन एडिशनल यूनिट तो
यानी कि जिस सिंपली मैं आपको एग्जांपल बता रहा हूं कि मान लो जैसे ना जैसे ये बुक पड़ी हुई है मेरे सामने जैसे ये बुक पढ़ी
हुई है मैंने इसकी 100 बुक्स की मैंने इसके 100 बुक्स ऐसे प्रिंट करवाई मैंने जब ऐसी 100 बुक्स प्रिंट करवाई तो मेरा खर्चा
आया 000 अब वो मेरे से पूछ रहा है कि मान लो एक बुक और प्रोड्यूस करनी है यह 100 तो
ऑलरेडी हम प्रोड्यूस कर चुके हैं बस एक बुक और प्रोड्यूस करनी है उस बुक को प्रोड्यूस करने के अंदर कितना खर्चा
आएगा अब समझना आप लोग कह सकते हो कि यार 100 बुक के लिए सिर्फ 5000 आया तो अगली बुक के लिए 5000 ब 100 हो सकता
है तो कुछ बच्चे बोलेंगे सर अगली प्रोड्यूस करने में 50 खर्चा आएगा पर ये सही नहीं है आप एक चीज नोटिस कर रहे हो
पता क्या हुआ जब आपने 100 बुक्स को प्रोड्यूस किया होगा इनको प्रिंट किया होगा तब आपने बहुत
सारे खर्चे एडिशनल कर लिए होंगे जैसे आपने एक हो सकता है प्रिंटिंग मशीन खरीदी हो आपने इंक खरीदी हो बहुत सी चीज आपने खरीदी
हो सकती है एक बंदा हायर किया होगा जो कहीं ना कहीं प्रिंटिंग को देखेगा तो होता पता क्या है यहां पर हम उसकी बात ही नहीं
कर रहे हम बस बात बात ये कर रहे हैं कि जो भी ऑलरेडी प्रोडक्शन हो चुका है दैट इज़ ओके अब आप मुझे बताओ कि एक यूनिट और अगर
मुझे प्रोड्यूस करना हो उसके लिए मुझे कितनी कॉस्ट इनकर करनी पड़ रही है दिस इज ओनली टॉकिंग अबाउट वन एडिशनल यूनिट अब अगर
एक नया हमें एक और यूनिट प्रोड्यूस करना है उसके ऊपर कितना खर्चा आएगा तो हो सकता है उस केस में वो नंबर 50 ना आए क्योंकि
इसमें हो सकता है कुछ फिक्स्ड कॉस्ट भी ऑलरेडी इंक्लूडेड हो जैसे मैंने आपको एग्जांपल भी दिए कि प्रिंटिंग मशीन का
खर्चा एक बंदे को हायर करने का खर्चा वो इसमें तो आएगा पर इसमें नहीं आएगा क्योंकि यहां पर क्या पूछ रहा है सिर्फ एक यूनिट
और प्रोड्यूस करने की कितनी कॉस्ट आती है समझ रहे हो इस तरह से मार्जिनल कॉस्ट होता है अब आप पूछ रहे होंगे यार मार्जिनल
कॉस्ट से सर फायदा क्या है मतलब क्यों हम इसको पढ़ रहे हैं क्या इसका कुछ रियल लाइफ एप्लीकेशन है या नहीं है बिल्कुल है
बिल्कुल है क्यों नहीं है मुझे देखो एक चीज समझो जैसे मान लो मैं इसी बुक की एग्जांपल देता हूं लेट्स से मुझे डिसाइड
करना है यार ये बुक मैं मार्केट में कितने की बेचू मुझे क्या डिसाइड करना है मुझे डिसाइड करना है ये मार्केट में बुक में
कितने की बेचू तो मुझे ये जानना पड़ेगा ना यार कि बाकी सब चीजें हटाओ वो बंदे की सैलरी और बाकी सब चीजें ठीक है वो फिक्स
चीजें हैं मुझे ये पता लगना चाहिए कि अगर मुझे एक बुक प्रोड्यूस करनी है उसमें कितना खर्चा लग रहा है लेट्स से मैं कह
रहा हूं कि इस बुक को इस बुक को इस बुक को प्रिंट करने में मुझे 100 लग रहा है जस्ट एग्जांपल कि ₹1 लग रहा है अब मुझे इतना तो
पता है कि मुझे जो मार्केट में बेचनी है ना बुक ये 100 से तो ऊपर ही बेचनी है सैलरी वगैरह ठीक है वो भी मैं फैक्टर्स को
इनकॉरपोरेट करूंगा पर इस अकेली बुक को प्रिंट करने का मेरा खर्चा है ₹ मार्जिनल कॉस्ट एक एडिशनल यूनिट अगली
बुक में प्रिंट करना चाहूंगा तो ₹ लगेगा अगली बुक प्रोड्यूस करना चाहूंगा तो ₹ और लगेगा तो मैं अपने स्ट्रेटेजी को अपने
बिजनेस स्ट्रेटेजी को उस हिसाब से इन अपना बनाने की कोशिश करूंगा जैसा कि मैं बोल रहा था हम माइक्रो इकोनॉमिक्स पढ़ रहे हैं
इस वाले टॉपिक के अंदर और माइक्रो क्या होता है एक इंडिविजुअल एक फर्म की बात करते हैं तो फर्म्स के लिए बहुत ज्यादा
इंपोर्टेंट हो जाता है मार्जिनल कॉस्ट को जानना ठीक है यह बात भी सर क्लियर हुई इसके अलावा देखो ना एक कुछ टर्मिनल है
आपके गुड्स के रिगार्डिंग वस्तुओं के रिगार्डिंग एक टर्मिनोलॉजी है बहुत बच्चों को कंफ्यूजन आती है मैं आप लोगों को आज ये
टर्म सारी सिखा दूंगा ताकि आपको आज के बाद कभी कोई दिक्कत ना आए अब समझना इस मुद्दे को कि आखिर मैं
कहना क्या चाहता हूं एक टर्म यहां पे यूज हुई है जिसका नाम क्या है फाइनल गुड फाइनल का मतलब होता है बस खत्म यही होता है
फाइनल मतलब खत्म तो फाइनल गुड बोल रहा है कि एक ऐसा प्रोडक्ट जिसने सारा का सारा प्रोडक्शन कंप्लीट हो चुका है एंड
ट्रांसफॉर्मेशन भी खत्म हो चुका है अब इस उसके बाद कोई प्रोसेस नहीं होना एग्जांपल एग्जांपल जैसे मान लो ये घड़ी है अब मेरे
हाथ में घड़ी है ना अब मैंने खरीद ली इसके बाद मैं इस घड़ी का कुछ नहीं करूंगा जो इसमें प्रोडक्शन होना था जो
ट्रांसफॉर्मेशन होना था सब हो चुका है तो ये क्या हुआ एक फाइनल गुड ठीक है सर अगर एक कोई चीज फाइनल गुड होती है तो क्या कुछ
हमारे पास इंटरमीडिएट गुड भी होती है या हां बिल्कुल अगर मेरे पास कोई चीज फाइनल गुड है अगर तो
कुछ इंटरमीडिएट भी होगी फाइनल मतलब होता है आखरी चीज आखिरी चीज को बोलते हैं फाइनल गुड कुछ बीच में भी तो आया होगा बीच में
जो चीज आती है उसको बोलते हैं हम इंटरमीडिएट गुड्स अब आप मुझे बताओ इस घड़ी के रिगार्डिंग इंटरमीडिएट क्या हुआ होगा
हो सकता है एक जो अकेला स्ट्रैप इसका इंटरमीडिएट गुड होगा इसके अंदर जो डायल्स वगैरह है वो इसका इंटरमीडिएट हो सकता है
और भी इस तरह की चीजें इंटरमीडिएट होंगी पर वो फाइनल नहीं है क्योंकि फाइनल इज व्हाट जहां पे चीजें ट्रांसफॉर्म होनी बंद
हो गई है उसके बाद कोई ट्रांसफॉर्मेशन नहीं होगा अब आप लोग ना एक काम करो मुझे एक चीज सोच के बताओ कि जैसे अगर मैं बात
करूं दूध की दूध समझते हो मिल्क क्या मिल्क आपके हिसाब से एक फाइनल गुड है या एक इंटरमीडिएट गुड है याद रखो
फाइनल मतलब फाइनल का मतलब है कि कोई आगे और ट्रांसफॉर्मेशन नहीं होना इसका बात खत्म हो चुकी है इसका प्रोडक्शन प्रोसेस
खत्म हो चुका है इंटरमीडिएट का मतलब है कि हां इसमें कुछ चेंजेज होने हैं इसमें कुछ और एडिशंस होने हैं एंड अकॉर्डिंग फिर बाद
में जाके फाइनल गुड बनेगा अब आप मुझे बताओ कि दूध क्या है व्हाट अकॉर्डिंग टू य इज मिल्क मैं सबसे एक्सपेक्ट करूंगा कि आप 30
सेकंड सोचो एंड फिर मुझे बताओ कि आपके हिसाब से इसका आंसर क्या होना चाहिए आप बोलोगे
सर पता नहीं पता है क्यों समझना इस मुद्दे को एक देखो जैसे मैं हूं अब यार मैं भी अपने घर में दूध इस्तेमाल करता हूं राइट
दूध पीने के लिए किसी और परपस के लिए मैं दूध का इस्तेमाल करता हूं ठीक है अब जब मैंने मार्केट से दूध खरीदा मान लो ₹ आधा
किलो का मैंने दूध खरीद दिया अब मैंने तो यार खरीद लिया उस केस में तो मेरे पास कोई और एडिशन नहीं हुआ ट्रांस प्रोडक्शन नहीं
हुआ मैं तो डायरेक्टली उसको कंज्यूम कर ले रहा हूं दूध खरीद के ठीक है तो उस केस में तो क्या होगा उस केस में तो वो चीज मेरी
फाइनल गुड बन जाएगी क्योंकि उसके बाद कुछ नहीं हुआ ठीक है बट ऑन द अदर हैंड मान लो एक हलवाई है हलवाई समझते हो ठीक है हलवाई
है मान लो एक अब हलवाई क्या करेगा हलवाई उस दूध से बर्फी बना सकता है लड्डू बना सकता है जहां भी दूध का इस्तेमाल हो होता
है जो जो मिठाई के अंदर उसके अंदर वो दूध का इस्तेमाल कर सकता है हां सर यह बात भी ठीक है अगर आप हलवाई वाला एग्जांपल समझोगे
तो आप एक चीज रिलाइज कर रहे हो हलवाई के लिए दूध क्या हुआ बताओ हलवाई के लिए दूध हुआ इंटरमीडिएट गुड क्यों क्योंकि फाइनल
गुड क्या है अरे फाइनल वस्तु तो आपकी बर्फी है ना जब बर्फी बन गई है ना तो बर्फी बनने के बाद मैं डायरेक्टली उससे ले
लूंगा उसके बाद बर्फी बनने के बाद उसमें कोई फिर प्रोडक्शन प्रोसेस नहीं हो रहा सारे प्रोसेस कंप्लीट हो चुके हैं
ट्रांसफॉर्मेशन सारी कंप्लीट हो चुकी है तो बर्फी इस केस में क्या बनेगी आपकी फाइनल गुड पर दूध क्या हुआ इंटरमीडिएट गुड
तो क्या कहूं सर क्या दूध फाइनल गुड है या इंटरमीडिएट अब समझना पॉइंट पता है क्या होता है पॉइंट ये रहता है कि अगर हम सेम
गुड की बात करें एक सेम वस्तु फाइनल गुड भी हो सकती है सेम वस्तु आपकी इंटरमीडिएट गुड भी हो सकती है फर्क पता कहां पर आता
है फर्क इस चीज पर आता है कि कैसे आप उसको यूज करते हो बेस्ड ऑन यूसेज यूसेज के हिसाब से कोई वस्तु फाइनल
या इंटरमीडिएट कहलाई जाती है जैसे अगर मिल्क मैं डायरेक्टली कंज्यूम कर रहा हूं डायरेक्टली कंज्यूम
बा कस्टमर तो उस केस में दूध बन जाएगा आपका फाइनल गुड वेर ऑन द अदर हैंड अगर मान लो
जैसे मैं आपको कह रहा था कि स्वीट शॉप वाला जो हलवाई होता है अगर वह उसको मिल्क को यूज करता
है उस केस में आपका दूध क्या बन जाएगा उस केस में आपका दूध बन जाएगा इंटरमीडिएट गुड और आपकी मिठाई होगी वो फाइनल गुड बन जाएगी
तो किसी भी केस में हम ये नहीं कह सकते कि हां ये वस्तु पक्का ही इंटरमीडिएट गुड है या पक्का ही फाइनल गुड है ये डिपेंड करता
है कि हम उसको कैसे यूज करते हैं घड़ी आपकी फाइनल गुड थी घड़ी का स्ट्रैप और बाकी चीजें आपकी इंटरमीडिएट गुड्स थी
क्योंकि वो बीच में यूज हुई होंगी पर फाइनल गुड ये निकल के आई दूध आपका कुछ भी हो सकता है इंटरमीडिएट भी हो सकता है
फाइनल गुड भी हो सकता है डिपेंडिंग ऑन द फैक्ट आप उसको यूज कैसे कर रहे हो आर यू गेटिंग द पॉइंट तो यह बात आप ध्यान में
रखना कि कैसे-कैसे आप किसी चीज को क्लासिफाई करते हो
राइट ठीक है तो ये फर्क क्या है अ प्रोडक्ट दैट हैज कंप्लीटेड प्रोडक्शन एंड ट्रांसफॉर्मेशन प्रोसेस इज नोन एज फाइनल
गुड वेयर एज एनी प्रोडक्ट व्हिच हैज सम स्टेजेस लेफ्ट एंड कैन बी यूज्ड टू मेक फाइनल गुड इज नोन एज इंटरमीडिएट
इंटरमीडिएट मतलब बीच में जो प्रोसेस हो रहा है बी बीच वाली जो चीजें बनती है उसको हम इंटरमीडिएट गुड बोलते हैं तो ये फर्क
आपको समझ आना चाहिए ठीक है सर इंटरमीडिएट और फाइनल गुड में फर्क समझ आ गया अब इसके अलावा कुछ और टर्मिनोलॉजी आपको पता होनी
चाहिए जैसे एक आपकी टर्मिनोलॉजी है क्या कंजमपट्टी हो
गया आपकी अप्लायंस वगैरह हो गया आपके मोबाइल फोनस हो गया लैपटॉप्स हो गया यह सब चीजें क्या जाती है इनको बोला जाता है
कंज्यूमर गुड्स या कंजमेट ह्यूमन नीड्स को यहां पर ये कैटर करती है ठीक है अब कपड़ा बन गया या
क्लोथिंग बन गई तो बन गई आप उसको यूज कर लोगे दैट इज इट तो ये क्या हुआ कंज्यूमर को डायरेक्टली सामने वाला कंज्यूमर इसको
कंज्यूम कर लेता है अगर ये कंजमेट भी कुछ चीज होगी आंसर इज यस इसके अगेंस्ट जो चीज आती है वो बोली जाती है
आपकी कैपिटल गुड्स अब कैपिटल गुड की एक बार फुल फॉर्म पढ़ लो एसेट यूज्ड इन प्रोडक्शन दैट डू नॉट अंडरगो अ
ट्रांसफॉर्मेशन इन द प्रोसेस आर टर्म एज कैपिटल गुड्स फॉर एग्जांपल जैसे मशीनरी जैसे प्लांट
था मशीन वगैरह आप लोग देखते हो मशीन वगैरह क्या है है तो वह भी एक वस्तु ही पर वह क्या एक कंज्यूमर डायरेक्टली उसको यूज कर
रहे है नहीं यह वह चीज होती है जो बाकियों को मदद करती है बनाने के अंदर फॉर एग्जांपल यह घड़ी थी ना घड़ी अब घड़ी
मैंने खरीदी कंज्यूमर ने खरीदी डायरेक्टली तो यह हुई कंज्यूमर गुड ठीक है ओके पर य घड़ी बनी कैसे होगी इस घड़ी को बनाने के
लिए कुछ मशीनस का इस्तेमाल हुआ होगा वो चीजों को हम बोलते हैं कैपिटल गुड्स ध्यान से समझो एसेट्स आपकी जो मशीन
है एक एसेट है एसेट कोई आपने एक ऐसी मशीन इस्तेमाल करी प्रोडक्शन के अंदर जिसके अंदर कोई बदलाव नहीं आया अब समझो जब यह
घड़ी बनी होगी तो घड़ी के अंदर पहले तो ना कुछ इंटरमीडिएट गुड्स रही होंगी जैसे इसका स्ट्रैप अलग से रहा होगा इसके जो डायल्स
होते हैं वो अलग रहे होंगे यह सब थे इंटरमीडिएट गुड्स ठीक है इन इंटरमीडिएट गुड्स के साथ कैपिटल गुड्स साथ में आई
कैपिटल गुड्स जो मशीनरी थी मशीनस वगैरह के ने इस घड़ी के ऊपर काम किया एंड इन दी एंड फाइनल गुड यह निकल के आई यह थी मेरी
कंज्यूमर गुड क्यों कंज्यूमर गुड क्यों क्योंकि मैंने डायरेक्टली इसको इस्तेमाल कर लिया मैंने डायरेक्टली इसको कंज्यूम कर
लिया तो यह फाइनल जो आउटपुट निकल के आया ना जो कंज्यूमर डायरेक्टली यूज़ कर सकता है उसको हम बोलेंगे कंज्यूमर गुड बीच में
आपकी जो मशीनरी प्लांट वगैरह थी जिसने मदद करा इसको बनाने के अंदर दैट इज योर कैपिटल गुड एंड कहीं ना कहीं जहां से मतलब बीच
में जो प्रोसेसेस हुए रॉ मटेरियल इंटरमीडिएट गुड्स आई उनको जब हमने यूटिलाइज किया उसी को हम यहां पे इन दी
एंड ट्रांसफॉर्म करते हुए हम यहां पर क्या लेकर आए हैं हमारा इन द एंड कंज्यूमर गुड तो होता क्या है ना आपके जो कैपिटल गुड्स
होते हैं ये ट्रांसफॉर्म नहीं होते प्रोडक्शन गुड्स के अंदर प्रोडक्शन प्रोसेस के अंदर क्यों अरे मशीनरी थी वो
पहले भी मशीनरी थी अभी भी मशीनरी ही रही तो कैपिटल गुड्स में कोई ट्रांसफॉर्मेशन नहीं आता कौन से गुड्स के ऊपर कैपिटल
गुड्स के ऊपर पर जो मेरे इस पर्टिकुलर घड़ी का स्ट्रैप था इसके डाइल वगैरह थे वो यहां पर थे इंटरमीडिएट गुड्स की तरह काम
कर रहे थे अब जब इनका ट्रांसफॉर्मेशन हुआ तो इन दी एंड निकल के आई वॉच तो इन चीजों का तो ट्रांसफॉर्मेशन हो रहा है इनका
रूपरेखा बदल रही है पर यहां पर कैपिटल गुड्स की रूपरेखा नहीं बदल रही तो कैपिटल गुड्स क्या होते हैं दैट डू नॉट अंडरगो अ
ट्रांसफॉर्मेशन इन द प्रोडक्शन प्रोसेस आर नोन एज कैपिटल गुड्स कंज्यूमर गुड्स क्या होते हैं जो कंज्यूमर डायरेक्टली यूज कर
ले और आपके इंटरमीडिएट गुड और फाइनल गुड का तो अंतर मैंने आपको समझा ही दिया एक बार आपको बस क्विकली मैं रिवाइज करवा देता
हूं तो गुड्स क्या हो सकती है आपके रॉ मटेरियल हो सकते हैं वस्तुओं के अंदर आपका रॉ मटेरियल जहां से चीज की शुरुआत हो रही
है राइट आप लोग कच्चा जो कच्चा माल होता है उसको हम रॉ मटेरियल बोल देते हैं फिर मैंने आपको इंटरमीडिएट गुड्स समझा दिया
एंड कहीं ना कहीं फिर इन दी एंड जो चीजें बनती है वो आपकी फाइनल गुड्स हो जाती है डिपेंड क्या करता है यूज के बेसिस के ऊपर
हम कैटेगरी करते हैं कोई वस्तु इंटरमीडिएट गुड है या फाइनल गुड है इसके अलावा फाइनल गुड्स दो तरह की हो सकती
हैं राइट फाइनल गुड्स आपकी दो तरह की हो सकती हैं या तो आपकी कंजमपट्टी जैसे ये घड़ी क्या थी ये घड़ी हमारी
कंज्यूमर गुड थी पर आपकी जो मशीन वगैरह थी वो आपकी कैपिटल गुड थी है दोनों ही फाइनल गुड्स क्योंकि इसके बाद कोई
ट्रांसफॉर्मेशन नहीं होना ये घड़ी बन गई बन गी इसके बाद तो कुछ चेंज नहीं ना आना बिल्कुल और सेम चीज आपकी कैपिटल गुड्स में
भी है मशीन बन गई बन गई इसके बाद तो कोई प्रोसेस में चेंज नहीं आना बस फर्क क्या होता है ना प्रोडक्शन प्रोसेस के अंदर
इनमें कोई बदलाव नहीं आता दे डू नॉट ट्रांसफॉर्म एक बार मशीन बन चुकी है वो बाकियों को मदद करती है चीजों को बनाने के
अंदर ये आपकी कंज्यूमर गुड होती है जो कंज्यूमर डायरेक्टली कंज्यूम करता है राइट एंड जो आपकी कंज्यूमर गुड्स होती
हैं या कंजमपट्टी हैं इनको भी हम दो तरह से कैटेगरी कर सकते हैं एक होंगे आपके ड्यूरेबल चिंता मत करो सबकी डेफिनेशन आगे
लिखी हुई है मैं आपको एक्सप्लेन कर रहा हूं और एक होता है नॉन ड्यूरेबल क्या मतलब ड्यूरेबल कभी आपने ये सुना वर्ड
कभी ड्यूरेबल आप लोग ना कई बार ऐसे कुछ खरीदने जाते हो तो सामने वाला बंदा बोलता है यार यह वाली वस्तु खरीद लो यह बड़ी
ड्यूरेबल है पता क्या होता है जैसे कई बार आपने एसी खरीदा होगा वाशिंग मशीन खरीदी होगी टीवी खरीदा होगा खरीदा है ना तो वहां
पर सामने वाले बंदे ने बोला होगा सर ये एसी खरीद लीजिए यह 5 साल तो पक्का ही पक्का चलेगा बढ़िया चलेगा 10 साल चलेगा 5
साल चलेगा 6 साल चलेगा ऐसे आपको बोलता है वो बोलता है ये ड्यूरेबल है डबल मतलब ये लंबे समय तक चलने वाली चीज है तो जब भी
कोई ऐसी वस्तु होती है जो लंबे समय तक चले उसको हम बोल देते हैं ड्यूरेबल गुड्स अगर कोई ऐसी वस्तु है जो लंबे समय तक ना चले
उनको बोल देंगे नॉन ड्यूरेबल फॉर एग्जांपल मान लो जैसे आपका दूध है यार आप मिल्क का एक पैकेट लेकर आए ठीक है ना आपने अमूल दूध
का एक पैकेट ले आया आप अपने घर के ऊपर तो कितने दिन चलेगा चार दिन पांच दिन उससे ज्यादा तो नहीं चलेगा ना उसके बाद तो खराब
हो जाएगा बिल्कुल दिस इज नॉन ड्यूरेबल ये क्या है आपका एसी चल रहा है कब से लगा हुआ है क सा से चल रहा है फ्रिज आपके घर का
आपके घर का टीवी वो होते है ड्यूरेबल गुड्स जो चीज ज्यादा टाइम ना चले नॉन ड्यूरेबल जो चीज ज्यादा टाइम चले ड्यूरेबल
इनकी डेफिनेशन देखनी है देख लो राइट एक बार पढ़ना है पढ़ लो क्या कह रहा है रॉ मटेरियल क्या होते हैं एक बार क्विकली बस
रिवाइज कर लेते हैं रॉ मटेरियल क्या होते हैं गुड्स दैट आर प्राइमरी यूज्ड एस इनपुट्स इनको इनपुट की तरह इस्तेमाल करा
जाता है इन द प्रोडक्शन ऑफ अदर गुड्स फिर हमने इंटरमीडियरी गुड्स हमने यहां पर देखी जो हमने देखा कि जहां पर हमें प्रोसेसिंग
जहां पर अंडरगो होती राइट इन द प्रोडक्शन ऑफ फाइनल गुड्स फिर हमने फिनिश गुड या फाइनल गुड्स देखा जिनके अंदर अब आगे और
प्रोसेसिंग नहीं होती घड़ी क्या थी मेरी फाइनल गुड थी बाकी मैंने आपको एक्सप्लेन कर ही
दिया और क्या हमने देखा कैपिटल और कंज्यूमर गुड्स के बीच का अंतर कैपिटल गुड्स के अंदर एग्जांपल्स क्या है आपके
टूल्स हो गया आपके मशीनरी हो गया व्हीकल्स बिल्डिंग्स प्लांट यह सब क्या है यह और चीजें बनाने के अंदर मदद कर रहे हैं यह
खुद ट्रांसफॉर्म नहीं हो रहे दे आर यूज इन द प्रोसेस ऑफ प्रोडक्शन कंजमपट्टी कपड़ा हो गया राइट या फिर रीक्रिएशन हो
गया यह डायरेक्टली आपका कंज्यूमर यहां पर परचेस होता हुआ हम देखने को मिल जाएगा इन्हीं को हम कंज्यूमर गुड्स या कजम गुड्स
कह सकते हैं देखो अगर एग्जांपल क्लियर होंगे ना बड़े आराम से डेफिनेशन आपको क्लियर होती
रहेंगी आगे आते हैं बाकी कुछ लोगों का डाउट आता है कि सर क्या कैपिटल गुड्स आपके इंटरमीडिएट गुड्स
होते हैं नहीं समझो इस बात को मैंने आपको पहले ही बताया वैसे कि फाइनल गुड्स के अंदर आपको
कंजमपट्टी है तो कैपिटल गुड्स आपके इंटरमीडिएट गुड्स तो हो ही नहीं सकते दे आर फाइनल गुड्स
इंटरमीडिएट गुड्स क्या होते थे जिनमें हमें एक बदलाव देखने को मिलता था जैसे मैंने बताया ना इस घड़ी का स्ट्रैप ये
क्या था इंटरमीडिएट गुड था पर जब हम बात करते हैं मशीनस की टूल्स की इक्विपमेंट की बिल्डिंग की व्हीकल्स की इन सब चीजों के
अंदर तो ट्रांसफॉर्मेशन नहीं हो रहा ना तो कैपिटल गुड्स आर नॉट इंटर टरी गुड्स बहुत-बहुत इंपोर्टेंट पॉइंट यह तो बन गए
हैं कैपिटल गुड्स भी यह बाकियों को मदद कर रहे हैं राइट दे देम सेल्फ डोंट गेट ट्रांसफॉर्म ये खुद बदलाव नहीं आता मशीन
है तो है इसमें थोड़ी बदलाव आ रहा है प्रोडक्शन के अंदर तो इसलिए कैपिटल गुड्स को कभी इंटरमीडिएट गुड्स मत बोल देना ये
फाइनल गुड ही होती है राइट यहां तक तो सारी चीजें हमें क्लियर हो गी जो आपकी बुक्स में
टर्मिनोलॉजी गिवन थी वोह सारी की सारी टर्मिनोलॉजी हमने यहां पर डिस्कस कर ली है बट कुछ एक और पॉइंट्स हैं जो आपकी बुक में
मेंशन है उसके लिए थोड़ा सा हम बैकग्राउंड समझना पड़ेगा जैसे आगे ना आपकी बुक के अंदर एसेट लायबिलिटी के बारे में थोड़ी
बहुत चर्चा करी हुई है या इनडायरेक्टली किस जगह पर वर्ड यूज है हमें इनका मीनिंग क्लियर होना चाहिए ताकि हम और कांसेप्ट को
समझ पाए समझते हैं एसेट लायबिलिटी प आते हैं एक्चुअल में होता क्या है ना दो टर्म्स है हमारे सामने एक है आपका
एसेट और एक है आपका वर्ड लायबिलिटी क्या अंतर है सर दोनों के अंदर यह घड़ी है मेरे हाथ में
ये घड़ी किसकी है यह घड़ी मेरी है ठीक है यह बुक है मेरे पास बुक किसकी है यह बुक मेरी है मेरा मोबाइल फोन यहां पर पड़ा हुआ
है मैंने आपको दिखाया था यह मोबाइल फोन किसका है मेरा है जो भी चीज मेरी होती है जिसके ऊपर मेरी ओनरशिप होती है वह मेरे
लिए एसेट है जैसे सर मेरी गाड़ी मेरा बंगला मेरा बैंक बैलेंस ठीक है मेरे स्टॉक्स जिनम मैंने इन्वेस्ट कर खा है
मेरा पैसा इन्वेस्ट कर रखा है यह सब मेरे एसेट्स हुए ठीक है इनसे मुझे फ्यूचर में कहीं ना कहीं
हो सकता है मुझे पैसे कमाए जा सकते हैं फॉर एग्जांपल मुझे पैसे चाहिए होंगे मैं स्टॉक्स को बेच के पैसे कमा लूंगा गाड़ी
बेच के पैसे कमा सकता हूं अपना बंगला बेच के पैसे कमा सकता हूं और पैसा तो मेरे पास पड़ा ही हुआ है राइट यह सब चीजों को बोला
जाता है एसेट इनसे मेरे कमाई के साधन हो सकते हैं आगे ऑन द अदर हैंड कुछ एक चीजें होती है जो मेरी होती है लायबिलिटी
लायबिलिटी का मतलब कुछ नहीं है लायबिलिटी का मतलब है कि व मेरी है ही नहीं वो मेरे पास हो सकती है पर मैंने किसी उ उधार पे
ली हुई है फॉर एग्जांपल मैंने किसी से पैसा मान लो उधार पर ले लिया क्या ले लिया पैसा उधार पर ले लिया अब पैसा किसका है वो
वो पैसा उस बंदे का है मैंने बस उधार प लिया था मेरे ऊपर एक ऑब्लिगेशन बनती है मेरे ऊपर एक लायबिलिटी बनती है कि उस पैसे
को मुझे रिटर्न करना है अगर मान लो मैंने 6 महीने पहले किसी से लोन लिया था ना तो मेरा पैसा नहीं है उसने मुझे पैसा उधार पर
दिया था मेरी जिम्मेदारी बनती है कि उसको मैं पैसा रिटर्न करूं इस चीज को बोलते हैं लायबिलिटी एसेट इज समथिंग ओन ओन मतलब
समझते हो जो मेरा है ओनरशिप है मेरी इसके ऊपर लायबिलिटी व्ट वी ओ ओ मतलब किसी को हमें वापस करना है वो चीज तो ये फर्क समझ
आना चाहिए एसेट और लायबिलिटी के बीच में जैसे यहां प एग्जांपल भी है आपका अपार्टमेंट कार यह सब चीजें राइट पर कहीं
ना कहीं मान लो घर है आपका पर उसके ऊपर आप कहीं ना कहीं पैसा दे रहे हो उधार पर दे रहे हो वह सब चीज हो गया
राइट इनको अगर आप ऐसे कैटेगरी करना चाहते हो तो ऐसे भी कटेरा किया जा सकता है एसेट्स आर आइटम्स ऑफ वैल्यू राइट ओनरशिप
होती है यहां पर ये कहीं ना कहीं पैसा कमा के देता है हमें एंड लंबे टाइम तक हमें बेनिफिट दे सकता है मान लो मेरा कोई
बिजनेस है एंड मैंने कोई मेरा ऑफिस है मेरा प्लांट है मेरी मशीनरी पड़ी हुई है यह मेरे लिए एसेट हुए ये मेरे हैं एक तो
पहली बात और फ्यूचर में मेरे लिए पैसे कमा के देंगे ऑन द अदर हैंड जब मैं बात करता हूं लायबिलिटी की ये कर्जा है भाई कर्जा
ये डेट है जो बिजनेस किसी और को ओ करता है उसको रिपे करना पड़ेगा प्लस एट द सेम टाइम अब यहां पर ना एक चीज आपको पता होनी चाहिए
कि लायबिलिटी को भी यूज किया जा सकता है एसेट परचेस करने के लिए फॉर एग्जांपल मैंने एक गाड़ी खरीदनी थी और मैंने मान लो
गाड़ी खरीद भी ली अब गाड़ी मेरी है बिल्कुल ठीक बात है मैंने खरीदी ना गाड़ी तो गाड़ी मेरी हुई बिल्कुल तो मेरे लिए तो
एसेट हुआ पर गाड़ी मैंने कैसे खरीदी मैंने गाड़ी खरीदी कर्जा लेकर कर्जा क्या है लायबिलिटी तो एक्चुअल में क्या होता है
लायबिलिटीज को आप यूज करते हो मतलब यूज किया जा सकता है टू परचेस एसेट्स ये कहना चाह रहा है बाकी कर्जे के माध्यम से आपने
अपना बिजनेस रन करना हो बिजनेस ऑपरेशंस को चलाना हो वो भी करा जा सकता है एंड कहीं ना कहीं एक खर्चा होता है बिजनेस के लिए
क्योंकि पैसा रिटर्न करना होता है विद इंटरेस्ट एंड ल दोस थिंग्स इसलिए एसेट और लायबिलिटी का अंतर आई होप समझ आ गया होगा
आने वाले चैप्टर्स के अंदर य बहुत बार यूज होगा एसेट लायबिलिटी तो एक अंडरस्टैंडिंग आपकी यहां पे डेवलप हो जानी
चाहिए ठीक है अब आपके बुक के अंदर कुछ टर्म्स और यूज्ड है जैसे एक टर्म यूज हुई है क्या फिक्स्ड एसेट्स
अब फिक्स्ड एसेट तो आपके यहां पर टर्मिनोलॉजी यूज्ड है पर आपके यहां पर जो टर्म नॉन फिक्स्ड एसेट या करंट एसेट जिसको
बोलते हैं ना वो वर्ड यूज नहीं है पर फिर भी मैं आपको यहां पर बताने की कोशिश करूंगा ठीक
है एक टर्म क्या होता है हमारा फिक्स्ड एसेट्स अब एसेट का मतलब तो आपको पता लग गया जो
कंपनी का है जो मेरा है दैट इज माय एसेट वर्ड आगे यूज हो गया फिक्स्ड एसेट जब भी वर्ड यूज होगा ना फिक्स्ड एसेट ये मतलब है
कि उस एसेट को कहीं ना कहीं एक अकाउंटिंग ईयर से ज्यादा लंबे टाइम तक आप यूज कर पाओगे कहने का अर्थ क्या है जैसे मान लो
एक कंपनी का प्लांट है उसका कुछ और इक्विपमेंट है या रदर आई शुड से मशीनरी है राइट या बिल्डिंग वगैरह
है ये सब चीजें क्या है पहली बात तो चेक करो क्या ये एक कंपनी का एसेट है बिल्कुल कंपनी मालिक है इन सब चीजों की बिल्कुल तो
एसेट तो है इसमें तो कोई डाउट की बात नहीं बट एट द सेम टाइम एसेट होने के साथ-साथ य क्या हुआ फिक्स्ड एसेट्स क्योंकि इसके जो
बेनिफिट होंगे ना वो एक साल से ज्यादा तक हमें बेनिफिट्स इसके आ सकते हैं ऐसी चीजों को बोलते हैं हम फिक्स्ड एसेट्स या इनको
हम नॉन करंट एसेट भी बोलते हैं राइट इसी का अपोजिट क्या होएगा इसका अपोजिट होता है हमारा करंट एसेट करंट एसेट
में भी वर्ड तो एसेट ही है तो एसेट तो है मेरे ओनरशिप तो है पर इसको कहीं ना कहीं लेस देन वन ईयर तक हम बेनिफिट्स हमें इसके
मिलेंगे एग्जांपल सर देखो कई बार मेरे पास जैसे कैश पड़ा हुआ है तो कैश मेरे पास अभी पड़ा हुआ है मोस्ट प्रोबेबली वो एक साल के
अंदर खत्म हो जाएगा जो कैश पड़ा हुआ है राइट एट द सेम टाइम कंपनी के पास कई बार जैसे कुछ इन्वेंटरी पड़ी होती
है उनको भी करंट एसेट बोल देते हैं एग्जांपल से बताता हूं जैसे मान लो लो मैं घड़ियां बना रहा हूं मैंने कंपनी खोली
घड़ियां बनाने की ठीक है अब मैंने कुछ घड़ियां बना के रखी होंगी मेरी घड़ियां है वो मेरी घड़ियां मैंने बनाई है तो मेरी
घड़ियां है मेरी घड़ियां मतलब मेरे एसेट हुए बिल्कुल ठीक बात है अब मैं इतना बड़ा थोड़ी है अपने घड़ियां अपने यहां फैक्ट्री
में बना के रख लूंगा कई सालों तक बिकती रहे नहीं मैं एक्सपेक्ट करूंगा यार मैं घड़ियां बना रहा हूं अगले दो-तीन महीनों
के अंदर मेरी घड़ियां बिक जाएंगी तो मेरी घड़ियां थी तो एसेट तो है और क्योंकि मैं एक्सपेक्ट कर रहा हूं कि एक साल के
अंदर-अंदर वो बिक जाएंगी तो इसके लिए वो चीजें कहलाएंगे करंट एसेट समझ गए ऐसा एसेट जो कहीं ना कहीं आप एक्सपेक्ट कर रहे हो
कि विद इन वन ईयर वो आपके उसके बेनिफिट आपको उसके मिल जाएंगे वेयर एज ये सब जो चीजें थी आपके प्लांट मशीनरी बिल्डिंग ये
सब भी आपके एसेट है क्योंकि मेरे ही है मैं ही हूं इनका बालिक तो एसेट तो हुए पर ये फिक्स्ड एसेट हुए इनका बिल्डिंग आपने
खरीद ली इसके बेनिफिट आपको कई सालों तक मिलेंगे आपने एक मशीन लगाई उसके बेनिफिट आपको कई सालों तक मिलेंगे इस तरह से इनको
बोला जाता है या तो फिक्स्ड एसेट कह लो या फिर आप इनको टर्म दे सकते हो नॉन करंट एसेट परफेक्ट वेरी
गुड आगे आ जाओ आगे एक वर्ड यूज होता है डेप्रिसिएशन आप लोगों ने एप्रिसिएशन वर्ड भी सुना होगा
हम यहां पर डेप दोनों समझ लेंगे जस्ट टेक एन एग्जांपल मान
लो जैसे मैं एग्जांपल आपको कार का दूंगा पर नॉर्मली हम ये बात करते हैं मशीनरी के लिए
समझ र इस बंदे को लेट्स से आपने आज एक कार खरीदी ठीक है आपने कार मान लो खरीद ली 20 लाख
की ठीक है अब एक साल आपने इस गाड़ी को इस्तेमाल किया बिल्कुल किया कोई दिक्कत वाली बात थोड़ी है एक साल के बाद आप सोचते
हो यार एक काम करते हैं गाड़ी बेचने की कोशिश करते हैं मुझे बताओ एक साल बाद आपकी गाड़ी कितने में बिकेगी अब एग्जैक्ट तो
कोई नहीं कह सकता पर हो सकता है आप कहोगे सर मेरी गाड़ी के लोग कह रहे हैं कि 15 लाख का हम खरीद
लेंगे अब मुझे एक चीज बताओ आपने गाड़ी खरीदी थी 20 लाख की एक साल आपने चलाई आज एक साल बाद उसकी कीमत 15 लाख क्या कैसे
होगी ये 5 लाख कहां चला गया 20 लाख वाली चीज की कीमत आज 15 लाख कैसे होगी 5 लाख कहां गया ये जो 5 लाख है ना दिस इज नथिंग
बट डेप्रिसिएशन क्यों अरे आपने गाड़ी चलाई तो गाड़ी पुरानी होगी एक तो पहली बात गाड़ी के टायर
घिस गए हैं बाकी और चीजें हो गई हैं तो ये 5 लाख क्या है दिस माइनस जो 5 लाख इसकी वैल्यू हुई ना ये - 5 लाख कुछ नहीं
बल्कि इसको हम डेप्रिसिएशन ही बोलते हैं इसी तरह से मान लो एक कोई कंपनी है एक फर्म हमने खोली उस कंपनी के अंदर हमने कोई
बहुत बढ़िया सी मशीन लगा दी बहुत तगड़ी मशीन लगाई ठीक है वो मशीन की कीमत मान लो 20 लाख थी अब एक साल आपने उस मशीन को
इस्तेमाल किया एक साल इस्तेमाल एक व्हाट एवर टाइम 1 साल 6 महीने 2 साल 5 साल व्हाट एवर
दो साल बाद उस मशीन की कीमत क्या कम नहीं हो जाएगी बिल्कुल हो जाएगी मान लो 20 लाख की पहले कीमत थी अब उस मशीन की कीमत सिर्फ
और सिर्फ 10 लाख रहे गई तो यह 10 लाख कहां गया कीमत आपने खरीदी वो मशीन 20 लाख की थी आज दो साल बाद उसकी कीमत है 10 लाख तोय 10
लाख और कुछ नहीं 10 लाख डेप्रिसिएशन ही है क्या बोलेंगे इसको इसको बोलेंगे हम यर एंड टियर
लॉसेस वो मशीन भी तो भाई चल चल के चल चल के चल चल के पुरानी नहीं होगी बिल्कुल हो गई है तो यही बोलते हैं डेप्रिसिएशन को
डिक्लाइन इन वैल्यू ऑफ फिक्स्ड एसेट ओवर टाइम ड्यू टू यूज और ऑप्सं या तो टेक्नोलॉजी का उतना ही रेलीवेंट नहीं रहा
ऑब्सोलेटे टेक्नोलॉजी हो चुकी है या फिर आपने इतना ज्यादा इस्तेमाल कर दिया है कि उसकी वैल्यू में कमी आ गई इसको बोला जाता
है डेप्रिसिएशन अब अगर एक कोई चीज डेप्रिसिएशन होती है तो कोई चीज एप्रिसिएशन भी होगी सर हां बिल्कुल
डेप्रिसिएशन समझ आ गया ना वैल्यू कम हो जाना किसी चीज की का वर्ड ही आपका यही होता है किसी चीज की वैल्यू कम हो जाना
इसी तरह से एक आता है आपका एप्रिसिएशन यह क्या मतलब होगा किसी चीज की वैल्यू बढ़ जाना ट इ न
एप्रिसिएशन क्या मतलब इस चीज का जैसे आपने कई बार अपनी जमीन खरीदी होगी खरीदी है जमीन कभी आपने नहीं खरीदी आपकी फैमिली में
किसी ने जमीन खरीदी होगी लेटस से आपकी फैमिली ने जमीन खी लाख रप की आज उसकी कीमत हो जाती है 50 लाख किसी
भी कारण की वजह से आपकी बिल्डिंग का या आपकी जो जमीन था उसका दाम बढ़ गया तो 10 लाख वाली जमीन आपकी 50 लाख की होगी तो
कहीं ना कहीं मैं ये नहीं कह सकता कि वो चीज एप्रिशिया बिल्कुल तो डेप्रिसिएशन मतलब किसी चीज की वैल्यू में डिक्लाइन आना
एप्रिसिएशन मतलब उसकी वैल्यू में बढ़ावा आना इज नोन एज एप्रिसिएशन ये डेप्रिसिएशन वर्ड ध्यान में रखना आने वाले चैप्टर्स
में ये दोबारा यूज होगा क्लियर ठीक है आगे आते हैं आगे देखो लॉ ऑफ सप्लाई और लॉ ऑफ डिमांड आपकी बुक में दिया गया है ये तो
हमने ऑलरेडी डिस्कस कर चुके हैं कि कैसे-कैसे आपका लॉ ऑफ सप्लाई वर्क करता है कैसे लॉ ऑफ डिमांड वर्क करता है और मैंने
आपको एक्सप्लेन भी किया था कि जैसे-जैसे आपका आप किसी वस्तु का अगर दाम बढ़ता है ना अगर दाम बढ़ता है तो उस हिसाब से डि
डिमांड और सप्लाई में क्या चेंजेज आते हैं हमने ये चीज देख रखी है अगर फॉर एग्जांपल अगर किसी चीज का प्राइस बढ़ेगा तो कहीं ना
कहीं उसकी डिमांड कम हो जाती है ऑन द अदर हैंड अगर मान लो अगर प्राइस जो होता है वो कहीं ना कहीं बढ़ता है उस केस में सप्लायर
कोशिश करता है उसको ज्यादा से ज्यादा सप्लाई करने की ताकि उसको ज्यादा से ज्यादा बेनिफिट हो पाए तो इस तरह से लॉ ऑफ
सप्लाई एंड लॉ ऑफ डिमांड काम करते हैं ये हम ऑलरेडी डिस्कस कर चुके हैं राइट ये लॉ ऑफ डेशन यूटिलिटी भी हमने
डिस्कस किया यूटिलिटी का मतलब था सेटिस्फेक्शन डिमिशन का मतलब कम होना हां जी एक यहां पर आपकी बुक में एक
और टर्मिनोलॉजी यूज हुई है दैट इज लॉ ऑफ डिमिनिशिंग रिटर्न्स अब इसका क्या अर्थ होता है लॉ ऑफ डिमिनिशिंग रिटर्न्स का
एग्जांपल से समझते हैं एग्जांपल से समझते हैं
देखो मान लेते हैं है ना कि आप लोगों ने नाना सोचा यार एक बिजनेस करते हैं और आपने डिसाइड किया हम एक ना रेस्टोरेंट खोलेंगे
ठीक है आपने बोला कि एक रेस्टोरेंट खोलेंगे रेस्टोरेंट में ना कुछ चीजें फिक्स है
मतलब आपने बोला ये मेरा जमीन इतनी है ठीक है लैंड फिक्स हो गया हमारा इतनी ही जमीन है हमारे पास सारा कुछ लगा दिया जो भी हो
गया रेस्टोरेंट बन गया अब जितना पैसा लगाना था सब लग चुका है अब नया पैसा नहीं लगेगा ठीक है अब चेंज पता कहां पर आ सकता
है बदलाव आ सकता है सिर्फ और सिर्फ वेटर्स के ऊपर कितने वेटर काम करेंगे इस रेस्टोरेंट के अंदर ठीक है समझना इस
मुद्दे को पहले मान लो जब आपने पहला वेटर रखा ना तो आपने नोटिस किया कि आपका बिजनेस की कमाई हुई
50 ठीक है एग्जांपल समझा रहा हूं ये क्या था जब आपने पहला वेटर रखा तो आपके बिजनेस की कमाई आई 50 आपने सोचा यार एक और वेटर
रख लेते हैं अब जब एक और वेटर आएगा तो जो कस्टमर्स होंगे वो भी थोड़े खुश होंगे यार वेटर्स हैं हमारी बात सुन रहे हैं तो कहीं
ना कहीं वो थोड़े और ज्यादा लोग आएंगे हो सकता है यहां पर आपके वेटर्स दूसरे के आने की वजह से अब आपकी कंपनी का प्रॉफिट आ गया
0 पहले एक वेटर था तो कंपनी कमा रही थी 50 दो वेटर हो चुके हैं मतलब दूसरा वेटर आपने ऐड कर दिया एक और वेटर ऐड कर दिया तो आपकी
कमाई होगी 0 ठीक है मान लो तीसरा वेटर आता है अब नोटिस करना मान लो मैं आपको कहता हूं अब प्रॉफिट या अब अब आपकी कंपनी की
कमाई आई 0 पता क्यों कारण इसका यह है कि जब आप नया वेटर ऐड कर रहे हो हो सकता है कि आपका
वेटर आने से आपका रेवेन्यू तो बढ़े बट उस लेवल से नहीं बढ़े क्यों अरे भाई इतनी जगह इतनी ही है इतनी
जगह में कितने ही लोग बैठ के खाना खा सकते हैं उसके ऊपर भी तो क्वेश्चन मार्क है ऐसा थोड़ी होगा कि बस आप वेटर को बढ़ाए जाओ
बढ़ाए जाओ रेवेन्यू बढ़ता ही रहेगा और ऐसा भी हो सकता है कि मान लो आपने एक और वेटर ऐड कर दिया अब चार वेटर की जरूरत
ही नहीं थी अब चार वेटर हो सकता है आपस में झगड़ रहे हो एक दूसरे के साथ लड़ रहे हो या फिर एक दूसरे के काम के अंदर दखल
अंदाजी दे रहे हो कई बार ऐसा भी होता है तो हो सकता है आपका रेवेन्यू कम आ जाए हो सकता है वो रेवेन्यू 70 हो जाए ऐसा समझना
आप अकेले पढ़ाई कर रहे हो तो मस्त पढ़ाई हो रही है दूसरा बंदा आपने ऐड ऑन किया तो थोड़ी सी बढ़िया पढ़ाई हुई तीसरा ऐड किया
तो थोड़ी सी बढ़िया हुई पर बहुत ज्यादा मजा नहीं आया चौथा ऐड करने से उल्ट उसने आपका काम बिगाड़ ही दिया वो बातों बातों
में ज्यादा लगा रहा है तो आप एक बार नोटिस कर रहे हो यहां पर क्या हो रहा है जैसे जैसे आप इनपुट के अंदर बदलाव कर रहे हो ना
उसके हिसाब से आपका रिटर्न चेंज हो रहा है आर यू गेटिंग द पॉइंट जब आपके पास जीरो वेटर था तो आपकी कमाई थी जीरो समझना जब
आपके पास जीरो वेटर था तो आपकी कमाई थी जीरो जब आपने इसके अंदर एक ऐड कर दिया आपकी कमाई 50 यूनिट यूनिट बढ़ गई एक और ऐड
कर दिया आपकी कमाई ऐड हुई ₹ एक और वेटर ऐड किया यहां पर आपकी कमाई बढ़ गई ₹10 से ये जीरो वाला तो छोड़ ही दो जीरो वाला तो
इतना रेलीवेंट नहीं रहेगा पर बाकी एग्जांपल देखो ये जब आपने एक और ऐड किया तब आपकी कमाई नेगेटिव में चली आने लग गई
क्या आप लोग एक चीज यहां पे रिलाइज कर रहे हो पहला जब वेटर ऐड किया था या दूसरा वेटर जब ऐड किया था तो कमाई अच्छी खासी हो रही
थी उससे बढ़ने से प्रॉफिट ज्यादा था आपका रेवेन्यू ज्यादा आ रहा था था दूसरा वेटर ऐड करने से बढ़ी है कमाई नो डाउट पर 20 के
मुकाबले कम हुई है एंड चौथा वेट ऐड करने के बाद तो वो उसने उल्टा काम बिगाड़ा ही है तो रिटर्न का मतलब समझते हो कितनी कमाई
कितना आपको रिटर्न हो रहा है और जब मैंने वर्ड यूज कर दिया साथ में डिमिनिशिंग डिमिनिशिंग का मतलब होता है कम
होना ऐसा नहीं हो सकता कि आपके रिटर्न्स हमेशा बढ़ते ही रहे एक टाइम के बाद वो डिमिनिशिंग भी होंगे आप अगर ग्राफ देखना
चाहते हो तो डिमिनिशिंग रिटर्न का ग्राफ कुछ ऐसे होता है ये एवरेज आउटपुट की बात हो रही है कि स्टार्टिंग में सिंपली आप
ऐसा समझो कि एक कंपनी है कंपनी अपने एंप्लॉयज को बढ़ाए जा रही है बढ़ाई जा रही है बढ़ाई जा रही है तो यहां पर तो बढ़ा
कंपनी के एंप्लॉयज को बढ़ाने से आपका आउटपुट बढ़ रहा है काफी तेजी से आगे बढ़ रहा है पर एक समय ऐसा आएगा जब आप नए
एंप्लॉयज को हायर तो कर रहे हो पर उनके हायर होने से कंपनी के रेवेन्यू में कोई बदलाव खास आ नहीं रहा इसको बोलते हैं
डिमिनिशिंग रिटर्न ये वाला जो फेस था ना इसको हम बोलेंगे डिमिनिशिंग रिटर्न कि एक यहां पर ऐड होने से आपका प्रॉफिट ₹ बढ़ा
था अब यहां पर यह वाले बंदे से सिर्फ ₹ ही बढ़ रहा है तो डिमिनिशिंग रिटर्न्स हो रही है और यहां पर तो भाई रिटर्न्स नेगेटिव
में चली गई तो ये चीज भी ना आपके माइक्रो इकोनॉमिक्स से बहुत इंपोर्टेंट चीज ये कांसेप्ट बन जाता है क्योंकि एज अ मैनेजर
एज अ कंपनी हेड मुझे पता होना चाहिए भाई मुझे कितने लोग काम प रखने हैं ऐसा नहीं है कि बस पागलों की तरह चलो सब लोगों को
मैं हायर कर लू मुझे लगेगा कि मेरा प्रॉफिट बढ़ता जाएगा नहीं यू नीड टू फाइंड द स्वीट स्पॉट कि कहां पर मुझे कितने
लोगों को हायर करने पे कितना सही मुझे बेनिफिट हो रहा है उतने लोगों को मैं रखना पसंद करूंगा जहां पर मुझे लगेगा कि यार
नया बंदा ऐड करने की वजह से उतना आउटपुट नहीं आ रहा तो मैं कहूंगा यार यहां पे रिटर्न्स
डिमिनिशिंग होने लग जाएंगे तो मुझे ये पता करने में बहुत ज्यादा मदद करता है अगर मार्जिनल मैं इसका देखना चाहूं ना मार्जिन
मतलब था सिंगल प्रोडक्ट के मतलब सिंगल यूनिट ऐड करने पे तो यहां पर जैसे जैसे मैं एक ऐड कर रहा था एक नया वेटर ऐड कर
रहा था यहां पर तो काफी तेजी से बढ़ रहा है प्रॉफिट पर एक टाइम के बाद वो प्रॉफिट उतना नहीं रहेगा प्रॉफिट कम होने लग जाएगा
एंड एक टाइम ऐसा भी आएगा जब नया बंदा ऐड करने से वस्तुओं या रदर शट से मेरा प्रॉफिट नेगेटिव में जाने लग जाएगा
प्रॉफिट कम होने लग जाएगा इस चीज को बोलते हैं लॉ ऑफ डिमिनिशिंग रिटर्न्स रिटर्न्स का मतलब पता था डिमिनिशिंग का मतलब होता
है कम होना आई होप ये कांसेप्ट आपको समझ में आ गया होगा काफी बच्चों को यह ना बुक में दिया हुआ था पर शायद समझ नहीं आया
होगा तो काफी डिटेल में मैंने आपको यह एक्सप्लेन कर दिया है
यस अब आते हैं कुछ एडिशनल टॉपिक्स के ऊपर आपके बुक की स्टार्टिंग के अंदर ही मेंशन है टाइप्स ऑफ इकॉनमी के बारे में माइक्रो
मैक्रो हमने थोड़ा डिस्कशन भी किया था बट एट द सेम टाइम यहां पर हमारे क्लासिकल इकोनॉमिस क्या बोल के गए हैं किनेशियन
इकॉनम क्या बोल के गई हैं उसको समझने से पहले हमें कुछ चीजों का समझना इंपोर्टेंट हो जाता है एक मैं ब्लैंक पेज पहले ले लू
एक सेकंड एक काम करते हैं पहले ब्लैंक पेज मैं एक ले लेता
हूं कोई दिक्कत नहीं है इसी को हम कॉपी कर लेते हैं ठीक है घबराना मत ये सारी जो स्लाइड्स
है ना ये आपको मिल जाएंगी डोंट वरी और कोई भी स्लाइड मैं इरेज नहीं करूंगा ये मैंने कॉपी ही किया है स्लाइड को ये सारी स्लाइड
आपको एज इट इज मिल जाएंगी ताकि आपको रिवीजन करने में कोई दिक्कत ना हो यस अब देखो जब भी हम बात करते हैं ना किसी
अर्थव्यवस्था की जब भी हम बात करते हैं इकॉनमी की तो इकॉनमी के ना तीन फंडामेंटल सवाल होते हैं क्या मतलब तीन फंडामेंटल
सवाल क्या है तीन फंडामेंटल सवाल ये है पहला सवाल तो यह है कि हमें प्रोडक्शन करनी है बिल्कुल ठीक बात है पर प्रोडक्शन
करें किस चीज की मतलब पहला सवाल होता है व्हाट टू प्रोड्यूस मैं समझाऊं तीनों का मीनिंग
एकएक करके डोंट वरी अबाउट इट दूसरा होता है हाउ टू प्रोड्यूस एंड तीसरा हमारे सामने सवाल आता
है फॉर होम टू प्रोड्यूस आप पूछेंगे सर क्या अंतर है मतलब क्या
मीनिंग है इन तीनों क्वेश्चंस का किसी भी अर्थव्यवस्था के अंदर तीन सवाल बहुत इंपोर्टेंट है पहला है व्हाट टू प्रोड्यूस
क्या प्रोड्यूस करना है याद करो लेक्चर की स्टार्टिंग के अंदर मैंने आपको एक वर्ड समझाया था स्कार्सिटी क्या बोला था
स्कार्सिटी ऑफ रिसोर्सेस रिसोर्सेस की कमी होती है दुनिया भर के अंदर कोई भी रिसोर्स मतलब अनलिमिटेड तरह से हमारे पास अवेलेबल
नहीं होता है राइट रिसोर्सेस की कमी होती है तो हमें कहीं ना कहीं उस रिसोर्सेस को अच्छे ढंग से यूटिलाइज करना होता
है ठीक है अब मुझे यह तय करना बहुत ज्यादा जरूरी हो जाता है कि भाई मैं घड़ी बनाऊ या मैं एक बुक बनाऊ समझ रहे हो समझो मैंने
क्या बोला मैंने कहा रिसोर्सेस लिमिटेड होते हैं दे आर नॉट अनलिमिटेड तो मुझे डिसाइड करना पड़ेगा कि यार जो रिसोर्सेस
मेरे पास है उसको रिसोर्स को यूज करके मैं किताब बनाऊ या फिर एक घड़ी बनाऊ तो व्ट टू प्रोड्यूस यह फैसला बहुत इंपोर्टेंट हो
जाता है क्या प्रोड्यूस करना क्या है क्या गाड़ियां बनानी है या फिर लैपटॉप बनाने है या ये बनाना है हां आप ये कह सकते हो कि
हां ऐसा करते हैं कि कुछ यूनिट लैपटॉप के बना लेते हैं कुछ यूनिट गाड़ियों के बना सकते हैं दैट इज पॉसिबल नो डाउट अबाउट इट
पर क्योंकि मैंने कहा ना रिसोर्सेस लिमिटेड होते हैं हमें क्या प्रोड्यूस करना है इसके ऊपर एक लिमिट लगानी पड़ती है
तो दैट इज वन क्वेश्चन कि व्हाट टू प्रोड्यूस क्या प्रोड्यूस करना क्या है दूसरा सवाल आता है हाउ टू प्रोड्यूस कैसे
प्रोड्यूस करना है अगर मान लो जैसे मैं ये कह रहा हूं कि मुझे एक बुक पब्लिश करनी है तो क्या मैं हाथ से उसको करवा रहा हूं या
फिर मैं मशीन का इस्तेमाल कर रहा हूं या लेबर का इस्तेमाल कर रहा हूं जिसको आप लोग जानते हो ना लेबर इंटेंसिव या कैपिटल
इंटेंसिव अगर आप कहीं ना क जैसे टेक्सटाइल होते है जैसे शर्ट बनानी है तो आप कैसे इसको शर्ट को बना रहे हो क्या प्रोसेस
क्या है उस चीज का लेबर इंटेंसिव है या फिर आप मशीनों के माध्यम से बना रहे हो जिसको हम कैपिटल इंटेंसिव बोलते हैं तो
हाउ टू प्रोड्यूस दूसरा सवाल आ जाता है इसी तरह से जो तीसरा सवाल है वो आता है फॉर होम टू प्रोड्यूस अरे किसके लिए बनानी
है एक गा मान लो आपने सोच लिया कि यार मैं गाड़ियां बनाना चाहता हूं और मैंने यह भी सोच लिया कि मैं मशीनों के माध्यम से उस
गाड़ी को बनाऊंगा पर किसके लिए बना रहा हूं क्या एक ननो की तरह बनाना चाहता हूं कि एक लखटकिया कार हो जो कि हर बंदा
इस्तेमाल कर पाए उसको या फिर थोड़ा मीडियम रेंज वालों के लिए बनाना चाहता हूं या फिर रोल्स रय या फिर
व्यवस्था के ठीक है राइट तो व्हाट आर द थ्री फंडामेंटल क्वेश्चंस ऑफ इकॉनमी दे आर व्हाट टू
प्रोड्यूस एंड इन व्हाट क्वांटिटीज कि कैसे आप रिसोर्सेस को एलोकेट करते हो क्योंकि जैसा मैंने आपको बताया रिसोर्सेस
अनलिमिटेड तो होते नहीं है हाउ टू प्रोड्यूस क्या उसकी टेक्नीक क्या होनी चाहिए लेबर इंटेंसिव होना चाहिए कैपिटल
इंटेंसिव होना चाहिए फॉर होम टू प्रोड्यूस कि क्या उनके जो ओनर्स वगैरह होते हैं ठीक है ना कैसे उनको डिस्ट्रीब्यूटर है वो सब
चीजें ठीक है अब ये तीन सवाल थे मेरे सामने बहुत इंपॉर्टेंट सवाल है क्या प्रोड्यूस करना है कैसे प्रोड्यूस करना है
किसके लिए प्रोड्यूस करना है अब ये तीन सवालों का जवाब देगा कौन अरे किसी को तो जवाब देने पड़ेंगे ना इन सवालों के
बिल्कुल देने पड़ेंगे कौन देगा इसके सवालों के जवाब अब मेजर ली ना दो प्लेयर्स इसके जवाब दे सकते हैं एक तो देखो यार हो
सकती है हमारी सरकार सरकार तय करे कि क्या बनना है कैसे बनना है एंड किसके लिए बनना है चलो ठीक है एक हो हो सकता है सरकार ऐसा
तय करे दूसरा हो सकता है भाई मैं तय करूं मैं कौन हूं मैं हूं प्राइवेट प्लेयर मैं हूं प्राइवेट इंडिविजुअल प्राइवेट कंपनी
हूं मैं मैं तय करूं कि क्या बनना है क्या नहीं बनना कैसे प्रोड्यूस करना है एंड किसके लिए प्रोड्यूस करना है आर यू गेटिंग
द पॉइंट तो एक साइड के ऊपर हो सकता है कि सरकार इन चीजों का फैसला करे एक ऐसी कंडीशन भी हो सकती है कि प्राइवेट
इंडिविजुअल या प्राइवेट कंपनीज इन चीजों का फैसला करें डिपेंडिंग अपॉन द फैक्ट कि किसके पास इन रिसोर्सेस का डिस्ट्रीब्यूशन
है किसके पास कंट्रोल है हमें देखने को मिलता है हमारे यहां पर तीन तरह की अर्थव्यवस्था क्या नाम है इनका इनका नाम
बहुत ही सिंपल सा है अगर तो मान लीजिए यह सारे जो मैं बात कर रहा था हो सकता है आप लोगों को दिख ना रहा हो यहां पर मैं आपको
एक्सप्लेन कर देता हूं यह पहली अर्थव्यवस्था का नाम क्या है कैपिट इस्ट इकॉनमी अगर यह तीनों फंडामेंटल क्वेश्चन
ऑफ इकॉनमी अगर यह प्राइवेट प्लेयर्स बता रहे हैं उसको हम बोलेंगे कैपिट इकॉनमी अगर य
सवालों का जवाब आपकी सरकार दे रही है तो उसको हम बोलेंगे सोशलिस्ट इकॉनमी अगर भाई दोनों मिलकर कुछ ना कुछ फैसले ले
रहे हैं उसको हम बोलते हैं मिक्स्ड इकॉनमी एग्जांपल समझे एग्जांपल समझ लेते हैं थोड़ा और क्लेरिटी
मिलेगी एक सेकंड यस ये जो आपका कैपिटिस इकॉनमी होती है ना इसको आप लोग मार्केट इकॉनमी बोलते
हो और जो आपका सोशलिस्ट वगैरह हो गया उसको हम
सेंट्रली प्लान कह सकते हो जैसे यार देखो जैसे कुछ एक देश ऐसे रहे हैं क्यूबा हो गया और भी अब तो ऐसे प्रॉपर एग्जांपल
ढूंढना थोड़ा मुश्किल है इन चीजों का पर वहां पर ना हर चीज के ऊपर सरकार का कंट्रोल था सरकार ही बताती थी कि भाई
प्राइवेट प्लेयर को क्या होना चाहिए को प्राइवेट कंपनी होनी चाहिए नहीं होनी चाहिए या सरकार ही सारे फैसले ले ले क्या
सरकार ही डिसाइड करेगी राइट अगर वो सब चीजें फॉर व्हाट टू प्रोड्यूस हाउ टू प्रोड्यूस फॉर हूम टू प्रोड्यूस अगर वो
सारे पैसे सरकार ही ले रही है हां सरकार बोले कि नहीं यार आप गरीबों के लिए काम करोगे आप यह चीज इतने महंगे से नहीं कर
सकते यह चीज आपको इसी मात्रा में प्रोड्यूस करनी है तब हम उसको बोलते हैं कि कहीं ना कहीं वहां पर हमें सोशलिस्ट
इकॉनमी के फीचर ज्यादा देखने को मिलते हैं ऑन द अदर हैंड मार्केट इकॉनमी के अंदर सारी चीजें प्राइवेट प्लेयर के पास
कंट्रोल है अगर मान लो मैं हूं एक कंपनी मैंने एक कंपनी खोली और मैं बता रहा हूं कि यार मैं तो ना मैं तो शर्ट्स बना
बनाऊंगा और शर्ट्स भी बनाऊंगा अमीरों के लिए सब चीजें मेरे हाथ में ही है तो उसको मैं बोल दूंगा प्राइवेट इकॉनमी या फिर
आपको कैपिटिस इकॉनमी जैसे अगर मैं बात करूं यूएसए की वहां पर आपकी प्राइवेट कंपनीज बहुत ज्यादा पावरफुल होती हैं
क्यों क्योंकि वहां पर हमें एक काफी हद तक आपको कैपिट इकॉनमी के फीचर्स देखने को मिल जाते हैं प्राइवेट कंपनियां ही हर चीज को
डिसाइड कर रही होती है गेटिंग द पॉइंट थोड़ा सा पहले इसके बारे में पढ़ लेते हैं इन तीनों का मीनिंग थोड़ा सा हम जानने की
कोशिश करते हैं फिर एक सवाल मैं आपसे एक्सपेक्ट करूंगा कि आप लोग मुझे ये बताओ कि भारत क्या है इज इंडिया कैपिट इज
इंडिया मिक्स्ड इकॉनमी और इज इंडिया सोशलिस्ट इकॉनमी ठीक है पहले एक काम करते हैं थोड़ा सा इसको जान लेते हैं इनका मतलब
जैसे देखो कैपिटिस इकॉनमी में क्या होता है आपकी सरकार की दखल अंदाजी बहुत कम होती है ठीक है सरकार दखल अंदाजी नहीं देगी तो
कैसे तय होगा हर चीज को कहीं ना कहीं डिसाइड होगा मार्केट के बेसिस के ऊपर और यहां पर आ जाता है रोल किसका सप्लाई और
डिमांड क्या मतलब इस चीज का देखो इसका मतलब ये है कि सरकार साइड हो चुकी है हर चीज प्राइवेट
प्लेयर डिसाइड कर रहा है कैसे ऑन द बेसस ऑफ सप्लाई एंड डिमांड मान लो मार्केट में डिमांड है घड़ियों की लोग चाहते हैं
घड़ियां खरीदें बढ़िया-बढ़िया घड़ियां खरीदें तो आपकी जो प्राइवेट कंपनीज होंगी वो क्या करेंगी घड़ियां प्रोड्यूस करने लग
जाएंगी क्यों क्योंकि उनको दिख रहा है डिमांड है उस चीज की जिस चीज की डिमांड होगी लोग वो सप्लाई करना शुरू कर देंगे
घड़ियों की डिमांड आएगी तो प्राइवेट कंपनी घड़ियां प्रोड्यूस करने लग जाएगी क्यों क्योंकि जो फैसले है व्ट टू प्रोड्यूस कौन
ले रहा है प्राइवेट कंपनी किसके लिए ले रहा है अगर डिमांड आएगी भाई की हजारों वाली घड़ियां चाहिए लाखों वाली घड़िया
चाहिए तो उनकी डिमांड को फुलफिल करने के लिए प्राइवेट सेक्टर आ जाएगा तो होता क्या है ना डिमांड एंड सप्लाई यहां पर रोल प्ले
करते हैं कैपिट इकॉनमी के अंदर आपकी मार्केट डिटरमिन करती है क्या चीज कैसे होनी चाहिए ज्यादातर जो चीज है वो आपके
प्राइवेट इंडिविजुअल या प्राइवेट बिजनेस फन उनके लिए उनको ओन करते हैं यह होता है आपका कैपिट
अर्थव्यवस्था ठीक है अब यहां पर आप लोगों को ना एडम स्मिथ जी के बारे में जानना चाहिए एडम स्मिथ को फादर ऑफ इकोनॉमिक्स भी
कह सकते हो मॉडर्न इकोनॉमिक्स अगर नहीं भी बोलना फादर ऑफ इकोनॉमिक्स आप इनको बोल सकते हो तो फादर ऑफ इकोनॉमिक्स इनको यहां
पे माना जाता है ठीक है इन्होंने एक बुक थी 1776 के अंदर इनकी एक बुक आती है द वेल्थ ऑफ नेशंस उसमें यहां पर ये बात करते
हैं किस चीज की ल साजे फेयर की ल साजे फेयर का मतलब कुछ नहीं जो मैंने आपको बोला इसका मतलब है कि जो स्टेट है उसका
हस्तक्षेप मिनिमम से मिनिमम होना चाहिए प्राइवेट सेक्टर का रोल ज्यादा होगा एंड अकॉर्डिंग ली चीजें अपने आप बढ़िया हो
जाएंगी क्योंकि आप नोटिस करो ना मैं क्या काम करना चाहता हूं मैं काम करना चाहूंगा वो जिससे मेरा सबसे ज्यादा फायदा हो तो
मैं कहीं ना कहीं वो चीज सप्लाई करने लग जाऊंगा जिसमें डिमांड होगी तो मेरा फायदा सब लोग ऐसे ही अगर आप सोचेंगे ना हर कोई
बंदा अपने-अपने फायदे के लिए सोचेगा तो उस केस में क्या होगा पूरी देश का विकास हो जाएगा तो इनका पॉइंट वही था इन्होंने फ्री
इकॉनमी को यहां पे प्रमोट किया अपनी बात करी इन्होंने रसाज फेयर की बात करी इन्होंने मार्केट इकॉनमी की इन्हीं को
करके कैटम का इन्वेंटर माना जाता है एंड क्योंकि हर इंसान किस चीज के लिए काम करता है कहीं ना कहीं प्रॉफिट मोटिव के लिए तो
ये इनका पॉइंट था कैपिट इकॉनमी का एंड इसी वजह से इन्होंने यहां पर एक बात बोली थी ठीक लसा फेर मैंने आपको समझा दिया कि कैसे
यहां पर कोई गवर्नमेंट इंटरवेंशन नहीं होता इन्होंने देखो यह सब चीजें बात करी डेफिनेटली मैंने
आपको डिस्कस कर दिया इन्होंने बात करी थी इनविजिबल हैंड के बारे में क्या मतलब एक्चुअल में ना मैंने आपको
एक कांसेप्ट समझा दिया याद करो जब मैंने आपको डिस इक्विलियम और इक्विलियम कांसेप्ट समझाया था तब मैंने आप लोगों के साथ ये
चर्चा करी थी कि होता क्या है ना कई बार मार्केट में एक डिस इक्विलियम आ जाता है ठीक है कि मान लो या तो प्राइस बहुत
ज्यादा हैं राइट उस केस में क्या हो जाता है डिमांड हमें देखने को मिलता है कि डिमांड उन चीजों की कम हो जाती है राइट
एंड सप्लाई ज्यादा थी ऐसे केस में इन्होंने बोला एडम स्मिथ जी ने कि एक ना इनविजिबल हैंड होता है इनविजिबल हैंड होने
की वजह से पता क्या होता है चीजें अपने आप इक्विलियम पे आ जाएंगी कैसे अगर मान लो कोई वस्तु महंगी है और उसकी डिमांड ही
नहीं है तो अकॉर्डिंग अपने आप उसकी सप्लाई बढ़ उसकी सप्लाई जो ज्यादा हो रखी है उसको मैनेज करने के लिए डिमांड के साथ
इक्विलियम में आने के लिए प्राइस कम करने पड़ेंगे और जैसे ही प्राइस सही हो जाएंगे तो एक तरह से मैच हो जाएगा राइट मान लो
किसी चीज की डिमांड ज्यादा है तो उस केस में क्या होने लग जाएगा जो कंपनीज है वो उस चीज को ज्यादा सप्लाई करने लग जाएंगी
तो अपने आप एक इनविजिबल हैंड आएगा इन चीजों को सबको सही डायरेक्शन में लेके जाने के लिए सब चीजें इक्वि में लाने के
लिए तो ये इनका पॉइंट था इनविजिबल हैंड का और साथ साथ इन्होंने ये बोला कि अगर मान लो कोई इंसान अपने खुद के इंटरेस्ट को
परसू करता है वो कहीं ना कहीं पूरी सोसाइटी के इंटरेस्ट को परसू कर देता है यह बात इनकी बुक में मेंशन है तो यह बात
होती है कैपिट इकॉनमी की जहां पर हमने समझा कि किस तरह से हमें यह सब चीजें देखने को मिल जाती है ठीक है अब एक्चुअल
में ना हमें थोड़ा सा और चीजें भी समझनी होंगी क्या सर हमें यह भी समझना होगा यार कि कि क्या कैपिट इकॉनमी एक अच्छी चीज
इकॉनमी है या नहीं है ये पॉइंट्स हमें जानने बहुत ज्यादा इंपोर्टेंट हो जाते हैं आऊंगा उस सवाल के ऊपर भी कि इंडियन
अर्थव्यवस्था क्या है पर पहले एक काम करो थोड़ा सा इन सबको समझ लो जैसे अगर मैं बात करूं कैपिटल इकॉनमी तो डेफिनेटली कैपिट
इकॉनमी के कुछ फायदे हैं और ये मैं नहीं कह रहा ये आपका जो स्नैपशॉट है ना आपके सामने ये इकोनॉमिक सर्वे ने बताया है ये
मेरे नहीं लिखा मैंने पॉइंट्स नहीं लिखे ये आपके इकोनॉमिक सर्वे ने लिखा हुआ है एक्चुअल में आपकी बुक के अंदर जो ना लिखा
हुआ है सारे क्लासिकल इन एंड ऑल दोस थिंग्स उसको समझने के लिए इन चीजों को समझना इंपोर्टेंट है अब क्या है यहां पर
ये कह रहा है कि बिल्कुल कैपिट इकॉनमी के बहुत जदा फायदे हो सकते
हैं कैसे एक्चुअली दोनों का ना कंपैरिजन हम थोड़ा सा साथ साथ समझने की कोशिश करते हैं अब मैंने आपको एक चीज बताई कैपिट
इकॉनमी के अंदर प्राइवेट सेक्टर का रोल ज्यादा रहता है आपके सोशलिस्ट इकॉनमी के अंदर सरकार का रोल ज्यादा रहता है बिल्कुल
ठीक बात है अब आप लोग ना या एक काम करता हूं पहले मैं आपको समझा ही देता हूं उससे आपको
थोड़ा सा एक और आईडिया लगेगा एक सेकंड बस एक सेकंड देना एक मैं स्लाइड ओपन कर लू इधर समझ लेते हैं यह आएंगे इस टॉपिक के
ऊपर आप पहले एक चीज समझो आप यहां पर ना एक मैं आपके सामने एक टाइमलाइन बना रहा हूं इसको अंडरस्टैंड
करना राइट मान लेते हैं यहां पर है 1947 जब हमारा देश आजाद हुआ एंड यहां पर
मैंने आज का समय बना दिया 2024 ठीक है एंड बीच में मैंने एक यहां पर और टाइम यहां पर यूज करूंगा 1991 का
हालांकि यह सब चीजें हम ना हमारा जो प्लानिंग वाला टॉपिक आएगा वहां पर हम डिस्कस करेंगे प्लान वगैरह के अंदर बट एक
बेसिक आईडिया जरूरी है यहां पर आप एक चीज समझो 1991 के अंदर ना एक बड़ा ही बड़ा चेंज आया जिसका नाम क्या था
एलपीजी रिफॉर्म्स क्या रिफॉर्म्स आए आपके एल जीी रिफॉर्म आ एलपीजी किस चीज के लिए स्टैंड करते हैं
आपके लिबरलाइजेशन प्राइवेटाइजेशन एंड ग्लोबलाइजेशन
आप ना एक टाइम इमेजिन करो 1991 से पहले का टाइम 1991 से पहले का आप टाइम इमेजिन करो यह जो मैं आपको बात कर रहा हूं ना इस टाइम
की इस समय आप लोग जानते होंगे कि यार सरकार का रोल बहुत ज्यादा था बिल्कुल था इनफैक्ट यहां पर आपके जो
पीएसयू थे पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग्स उनका रोल बहुत ज्यादा था बिल्कुल था और यहां पर प्राइवेट प्लेयर उतने हुआ भी नहीं
करते थे एक तो प्राइवेट प्लेयर्स थे ही नहीं अगर थे तो बहुत कम थे एंड उनका रोल भी बहुत कम था स्टेट के पास ज्यादातर
कंट्रोल था हर चीज का इंडस्ट्रीज स्टेट रन कर रही है घड़ियां स्टेट बना रही है बहुत सारे इस तरह के कंज्यूमर गुड्स को भी
स्टेट ही बना रही थी प्राइवेट सेक्टर का रोल बहुत कम था इनफैक्ट प्राइवेट सेक्टर में अगर किसी को कंपनी खोलनी थी तो सरकार
से परमिशन लेनी पड़ती थी कंपनी को बड़ा करना था सरकार से बहुत सारे परमिशन चाहिए होती थी बहुत सारे आपको लाइसेंसेस चाहिए
होते थे फिर एट द सेम टाइम कंपनी बंद करना अपने आप में बहुत बड़ा चैलेंज था तो हर चीज के लिए सरकार से आपको लाइसेंस लेना
पड़ता था तो सरकार ही हर चीज कंट्रोल करती थी तो यहां पर नोटिस कर रहे हो क्या बनाना है सरकार बता रही है किस मात्रा में बनाना
है सरकार बता रही है कैसे बनाना है वहां पर भी सरकार का काफी कंट्रोल था ठीक है अब जब हमने 1991 के अंदर एलपीजी रिफॉर्म्स
लेकर आए उस समय पहले तो हमने एक चीज करी लिबरलाइजेशन यहां पर जो लाइसेंसेस वगैरह इतने सारे चाहिए होते थे ना उसकी वजह से
बड़ा करप्शन हो गया था तो वो हमने करप्शन को हटाने के लिए ये चीज करी लिबरलाइजेशन लाइसेंस राज को खत्म कर
इसके अलावा हमने प्राइवेटाइजेशन की तरफ हम बढ़े एक तो बहुत सारी चीजों को प्राइवेटाइज किया गया प्लस प्राइवेट
सेक्टर की एंट्री भी थोड़ी आसान करी गई उसके अलावा ग्लोबलाइजेशन हम बाकी दुनिया के साथ जुड़ने लग गए हमने ट्रेड वगैरह
इंपोर्ट एक्सपोर्ट आयात निर्यात करना एक तरह से इंक्रीज किया यह फर्क आया 1991 के बाद ठीक है अब आज के समय आप एक चीज इमेजिन
कर रहे हो आज के समय आपको बहुत सारे प्राइवेट चीजें देखने को मिलती है फॉर एग्जांपल फिजिक्स वाला फिजिक्स वाला या
पीडब्ल्यू क्या है प्राइवेट एजुकेशन है ना मतलब प्राइवेटाइजेशन की बात हो गई यहां पे भी प्राइवेट सेक्टर कैसे इंपोर्टेंट रोल
प्ले कर रहा है ठीक है मेरे हाथ में घड़ी है ये सरकार ने नहीं बनाई प्राइवेट सेक्टर ने बनाई
है आपके सामने बहुत सारे ऑप्शंस देखने को मिलते हैं मोबाइल फोनस के रिगार्डिंग टेलीकम्स के रिगार्डिंग
आप लोग आजकल समझ पा रहे हो कि पिछले कुछ सालों के अंदर ना हमारे यहां प पता है क्या हुआ है हमारे यहां पर प्राइवेट
सेक्टर का रोल बढ़ गया है क्योंकि ये जो सारे मैं आपको एग्जांपल दे रहा हूं ये सारे क्या है ये कहीं ना कहीं प्राइवेट
सेक्टर के साथ डील करते हैं बिल्कुल ठीक बात है अब अगर मैं आपसे यह सवाल पूछूं कि भारत
क्या है इज इंडिया अ सोशलिस्ट इकॉनमी इज इंडिया अ कैपिटिस इकॉनमी या फिर इंडिया एक मिक्स्ड इकॉनमी है आपका जवाब बहुत ही
सिंपल होना चाहिए आपका जवाब यह होगा कि इंडिया ना हमेशा मिक्सड इकॉनमी था क्या है इंडिया हमेशा से मिक्स्ड इकॉनमी ही रहा है
अब होता पता क्या है आप ऐसा समझो कि लेट्स से जस्ट टेक एन एग्जांपल इधर मैं आपको लिखता हूं सोशलिस्ट इकॉनमी एंड इधर मैं
आपको लिखता हूं कैपिट इकॉनमी एंड यह आ गया एग्जैक्ट मिडल यहां पर एजेक्ट मिक्स्ड इकॉनमी है अब जब मैं बात करता हूं 1947 की
तो आप ऐसा कह सकते हो कि 1947 में ना इंडिया के ही यहां पर था कहां पर 1947 में भी इंडिया था तो एक मिक्स्ड इकॉनमी ही
इंडिया में उस समय आपको प्राइवेट सेक्टर पब्लिक सेक्टर दोनों देखने को मिलता था बट थोड़ा सा हमारा जो टिल्ट था ना वो
सोशलिज्म की तरफ ज्यादा था क्योंकि सरकार का रोल ज्यादा था थे तब भी हम मिक्स्ड इकॉनमी ही क्यों क्योंकि 1947 में भया
पब्लिक सेक्टर भी था सरकार भी थी और प्राइवेट सेक्टर का भी रोल था दोनों का रोल था पर सर सकार का रोल ज्यादा था इसलिए
हम कहते हैं कि 1947 में थे तो हम मिक्स्ड इकॉनमी ही बट वी व टिटेड टुवर्ड सोशलिज्म आज के समय जब मैं बात करता हूं 2024
में 2024 में भी हम क्या है हम आज भी सर मिक्सड इकॉनमी ही है पर हमारे यहां पर प्राइवेट सेक्टर का रोल बढ़ता जा रहा है
तो हम थोड़ा सा टिटेड है टुवर्ड्स कैपिट यह बात आपको बिल्कुल नहीं भूलनी पहले भी मिक्स्ड इकॉनमी थे अब भी मिक्स्ड इकॉनमी
ही है बस फरक इतना आया है पहले सरकार का रोल ज्यादा था अब सरकार का रोल कम है आर यू गेटिंग द पॉइंट अब प्राइवेट सेक्टर का
रोल बढ़ता जा रहा है तो यह बात थी कि कैसे इंडिया क्या है मैं आई होप मैंने आपको यह चीज समझा दी अब वापस आते हैं उसी मुद्दे
के ऊपर कि कैसे हमें देखने को मिलता है कि कैपिट इकॉनमी के क्या फायदे होते हैं या क्या नुकसान होते हैं अब एक चीज आप नोटिस
करो 1991 का मैंने आपको एग्जांपल दिया कि कैसे हमारे यहां पर एलपीजी रिफॉर्म्स आए किस तरह से हमारे लिबरलाइजेशन
प्राइवेटाइजेशन ग्लोबलाइजेशन देखने को मिला क्या आपको लगता है कि उस चीज की जरूरत थी द आंसर इ यस बिल्कुल जरूरत थी आप
1991 से पहले आप एक चीज नोटिस करोगे आपके सामने बहुत सारे ऐसे इश्यूज थे पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग्स के रिगार्डिंग जो कि
देश में कहीं ना कहीं काफी दिक्कत दे रहे थे जैसे फॉर एग्जांपल अगर मैं आपसे बात करूं तो आप लोगों ने जाना होगा कि काफी
ज्यादा करप्शन के केसेस देखने को मिलते थे प्लस एट द सेम टाइम जो मैंने आपको एम एल दिया लाइसेंस राज का वो भी एक बहुत बड़ा
इशू था राइट तो यह सब इशू को कहीं ना कहीं खत्म करने के लिए हमने यहां पर क्या किया हमने यहां पर 1991 के अंदर एलपीजी
रिफॉर्म्स हम यहां पर लेकर आए राइट अब एक चीज इमेजिन करो अगर हम बात करते हैं ना रिसोर्सेस को एफिशिएंट यूज करना या इन
इनोवेशन को इनकरेज करना यह मार्केट्स बहुत अच्छे से कर सकती है फॉर एग्जांपल आप लोग जानते होंगे एयर इंडिया के बारे में एयर
इंडिया ना जब सरकार के कंट्रोल में थी बहुत मैसिव लेवल के ऊपर हर साल उसमें लॉस लॉस लॉस देखने को मिलता था जानते होंगे आप
लोग य ठीक है ऑन द अदर हैंड जब मैं बात करता हूं इंडिगो की इंडिगो में हमें ठीक ठाक प्रॉफिट देखने को मिल जाता है और भी
कुछ कंपनीज अच्छा कर रही है ठीक है होता क्या है ना दरअसल में प्राइवेट सेक्टर और सरकारी सेक्टर में थोड़ा सा कुछ इशू आते
हैं प्राइवेट सेक्टर में आपको एक चीज पता होती कि यार अगर मैं अच्छा काम करूंगा तो मैं शायद बहुत तेजी से अपनी लाइफ के अंदर
प्रोग्रेस कर पाऊंगा बहुत तेजी से मैं आगे बढ़ पाऊंगा मेरीटोक्रेसी को यहां पे प्रमोट किया जाता है हो सकता है कि आप 5
साल के अंदर अपने करियर में बहुत आगे बढ़ जाओगे मल्टीपल प्रमोशंस की वजह से क्यों क्योंकि आपने अच्छा काम किया इनोवेशन को
प्रमोट किया जाता है सरकारी सेक्टर के अंदर यह दिक्कत आती है जहां पर सरकार का रोल ज्यादा होता है ना वहां पर ये इशू आता
है कहीं ना कहीं वहां पर आपको फिक्स होता है कि 3 साल के बाद प्रमोशन होगी पा साल के के बाद तो कहीं ना कहीं कई बार ऐसा
देखा गया कि पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग के अंदर या पीएसयू वगैरह के अंदर वो इनोवेशन हमें नहीं देखने को मिल पाता प्लस यहां पर
रिसोर्सेस को एफिशिएंटली यूज किया जाता है क्यों क्योंकि प्राइवेट सेक्टर का काम ही क्या है काम ही उनका यह है प्रॉफिट कैसे
कमाया जाए कैसे प्रॉफिट बनाया जाए क्योंकि उसी के बेसिस प तो कंपनी सरवाइव करेगी ऑन द अदर हैंड जब मैं बात करता हूं आपके
गवर्नमेंट सेक्टर की वहां पर वो इतना बड़ा इशू नहीं होता तो यह फायदा है प्राइवेट सेक्टर का प्लस एट द सेम टाइम आजकल यार
आपके सामने इतने सारे ऑप्शंस हैं वो क्यों आ पाए हैं क्योंकि प्राइवेट सेक्टर का रोल बढ़ गया
है पहले क्या होता था ना पहले सरकार ही कुछ चीजें बनाया जाती थी कि स्कूटर है तो बस एक आधा ऑप्शन था अब इतने सारे ऑप्शंस
हैं आजकल तो गाड़ियों के पता नहीं कितने सारे ऑप्शंस आ चुके हैं कैसे आप आए हैं ये प्राइवेट सेक्टर के कंट्रीब्यूशन की वजह
से ही है इतने सारे चॉइसेज आ गए हैं आपको मेरे से नहीं पढ़ना कोई दिक्कत नहीं पीडब्ल्यू में और बहुत सारे इकॉनमी के
टीचर्स हैं आपको पीडब्ल्यू से नहीं पढ़ना आपके पास और बहुत सारे टीचर्स हैं तो व्हाट आई एम सेइंग इज ये जो कंज्यूमर के
पास इतने बेनिफिट्स आए हैं कैसे आप पाए हैं ये प्राइवेट सेक्टर के आने की वजह से ही आप आए इतना सारा जो कंपटीशन आया है
कंपटीशन की वजह से आपको फायदा हुआ है कंज्यूमर को फायदा हुआ है उसके पीछे आपका मार्केटस ही हैं राइट आपको मैकडी पसंद
नहीं है आप किसी और जगह खा लो वो पसंद नहीं आया तो इसी जगह खा लो पहले इतने ज्यादा ऑप्शंस नहीं होते थे आपको टीवी
नहीं पसंद आप स्ट प्स देख लो स् प् नहीं पसंद कुछ और देख लो देख लो प्राइम नहीं पसंद आपको कोई और देख
लो हॉस्टार देख लो गेटिंग द पॉइंट ये कैसे हो पाया है दिस इज ओनली पॉसिबल बिकॉज यहां पे हमें मार्केट्स के अंदर कैपिट सेक्टर
के अंदर हमें अलग-अलग चीजें देखने को मिलती है इनोवेशन को यहां पे प्रमोट किया जाता है आपके रिसोर्सेस को एफिशिएंटली यूज
किया जाता है उसके अलावा आप और चीज समझो ना जैसे प्राइवेट सेक्टर की बात करूं आप प्राइवेट सेक्टर बैंक्स देख लो जैसे
आईआईआई बैंक अगेंस्ट नहीं बोल रहा पर एसबीआई में आप नोटिस करना थोड़े से दिक्कत तो है शायद
उतनी सर्विस अच्छी नहीं मिलती या फिर प्रॉफिटेबिलिटी आपकी आईसीआईसी बैंक और मतलब कंज्यूमर को भी फायदा नया-नया
इनोवेशन भी आ रहा है इंडिया इनोवेशन इंडेक्स के अंदर जो है मतलब अच्छा कर रहा है दुनिया भर का जो इनोवेशन इंडेक्स आता
है उसमें इंडिया को बतरी हुई है नए-नए इतने सारे स्टार्टअप्स आ रहे हैं ये भी तो तभी आ रहे हैं कि प्राइवेट सेक्टर का रोल
बढ़ता जा रहा है ओवरऑल वेलफेयर बढ़ रही है वेल्थ क्रिएशन हो रही है ये सब बेनिफिट्स किस किस चीज के हैं ये सारे बेनिफिट इसी
चीज के हैं कि आपके कैपिट इकॉनमी ये सब चीजें कर पा रही है और चीजें डिमांड सप्लाई के बेसिस के ऊपर होंगी तो काम
बढ़िया है प्राइस भी ठीक-ठाक रहेंगे यह सब तो थे प्राइवेट इकॉनमी के या फिर प्राइवेट सेक्टर के ज्यादा कंट्रोल होने
के फायदे पर ऐसा नहीं है कि सिर्फ सब फायदे ही फायदे हैं जैसे कहते हैं ना कि एक सिक्के के दो पहल होते हैं यहां पर भी
सेम चीज है यहां पर कुछ नुकसान भी है फॉर एग्जांपल मैंने अभी आप लोगों को पब्लिक गुड्स पढ़ाया था थोड़ी टाइम पहले
जने नॉन राइवल नॉन एक्सक्लूड बल की बात करी थी अब मुझे एक चीज बताओ क्या आप लोग कभी हॉस्पिटल गए गए होंगे आप लोग हॉस्पिटल
गए होंगे ठी है किसी भी कारण की वजह से अब एक तो देखो यार हमारे यहां पे हॉस्पिटल है जैसे एम्स वगैरा हो गया पीजीआई हो गया इस
तरह के सरकारी अस्पताल हमें देखने को मिलते हैं बिल्कुल ठीक है और सरकारी अस्पताल में आप जानते हो कि आप जाते हो
हां ठीक है लंबी-लंबी लाइने जरूर होती है पर आपका इलाज ठीक-ठाक पैसे में हो जाता है या सस्ते में हो जाता है या कम पैसे में
हो जाता है बहुत ज्यादा पैसा नहीं चाहिए होता कंपेरिजन पर आप लोग कभी जो बड़े बड़े प्राइवेट अस्पताल है उनमें जाकर देखो एक
एक दिन का बिल 00 बन जाता है देखा होगा आप लोग ने गुड़गांव वगैरह में ना बहुत बड़े-बड़े हॉस्पिटल्स
है मुझे एक बात बताओ क्या भारत का आम इंसान जो आम आदमी है हमारे यहां पर क्या वह यह चीजें अफोर्ड कर पाएगा कभी नहीं कर
पाएगा नहीं कर पाएगा ना तो प्राइवेट सेक्टर का काम क्या था अच्छी सर्विस देना ठीक है दे रहे हैं अच्छी सर्विस पर कहीं
ना कहीं प्राइवेट सेक्टर का पर्पस क्या था प्रॉफिट मैक्सिम इजेशन एंड वो चीज हमें देखने को मिल रही है तो कहीं ना कहीं इस
तरह से आपकी अच्छी हेल्थ हो गया या एजुकेशन हो गया एजुकेशन में बहुत सारे स्कूलों में प्राइवेट स्कूलों में बहुत
महंगी हो चुकी है आज के समय के ऊपर तो यह सब चीजें प्रोवाइड करना इनके बस की बात नहीं है प्राइवेट सेक्टर की ये तो प्रॉफिट
के लिए काम करते हैं है कि नहीं प्लस एट द सेम टाइम कुछ सरकार को और बेनिफिट्स प्रोवाइड करने हो सकते हैं जैसे मान लो
किसानों के लिए यार किसानों की हालत इंडिया में खराब है तो किसानों के लिए हमारी सरकार काम करती है महिलाओं को आगे
बढ़ाने के लिए सरकार काम करती है प्राइवेट सेक्टर यह सब थोड़ी देखेगा कि भाई किसानों को आगे करें नहीं उनको तो अपना प्रॉफिट
देखना है तो मार्केट से यह चीज नहीं हो सकती प्लस यहां पर तो मोनोपोली हमें देखने को मिल जाती है कई बार अगर सरकार नहीं
होगी तो मोनोपली से क्या होगा एक सिंगल सेलर होगा वो सिंगल सेलर ही कहीं ना कहीं प्राइस डिक्टेट करेगा कि भाई इतने में
खरीदना है तो खरीदो वरना हट जाओ नहीं लो वरना मैं ही एक बंदा हूं लेना है तो लो वरना मत करो प्लस एट द सेम टाइम
एक्सटर्नलिटी वगैरह हमें इसमें देखने को मिल जाती है क्योंकि आप नोटिस करो प्राइवेट सेक्टर अगर आएगा तो बोलेगा यार
मुझे प्रॉफिट चाहिए उसके लिए एयर पोल्यूशन हो नॉइस पोल्यूशन और वाटर पोल्यूशन हो मुझे फर्क नहीं पड़ता तो एक्सटर्नलिटी भी
यहां पे आ जाती है प्लस एक सबसे बड़ी जो चीज हमें देखने को मिलती है ना प्राइवेट सेक्टर के अंदर
वो यह है कि इसमें ना इन इक्वालिटीज बहुत ज्यादा बढ़ जाती है 1991 के बाद देखो डेफिनेटली लोगों की
इनकम बड़ी है इसमें कोई डाउट की बात नहीं है पर एक क्रिटिसिजम भी यहां पे देखने को मिलता है वो यह है कि ऐसा कहा जाता है कि
1991 के बाद अमीर और अमीर हुआ है एंड आपका जो गरीब था वो गरीब हुआ है यानी कि अमीर और गरीब के बीच का जो अंतर है ना वो कहीं
ना कहीं बढ़ता जा रहा है तो ये सब इश्यूज होते हैं प्लस जब कहीं ना कहीं एक कंपनी का पर्पस ही यही है कि भाई कमाई करें कैसे
भी तो वो कैसे भी का मतलब ये हो जाता है कि कई बार वो एथिकल प्रैक्टिसेस को देखते ही नहीं है उनको बस ये होता है कि कमाई
बताओ कैसे हो सकती है हमारे एक्शन सही है या गलत है वो पता नहीं होता विजय माल्या को देख लो नीरम मोदी को
देख लो मेहुल चौक्स को देख लो कमाई करने के चक्कर में कि और प्रॉफिट आए और पैसा और पैसा और पैसा उस चक्कर में क्या किया
एथिक्स को किसी ने ध्यान में नहीं दिया आर यू गेटिंग माय पॉइंट तो यानी कि मेरे कहने का अर्थ सिंपल सा यह है कि अगर हम बात
करते ना कैपिट इकॉनमी की तो हां बिल्कुल कुछ फायदे हैं बट ऑन द अदर हैंड हमें यहां पर कुछ एक नुकसान भी या फिर देखने को
मिलते शूड से कुछ ऐसी चीजें हैं जो मार्केट्स नहीं कर सकती अब आप एक चीज नोटिस करो अब मैंने आपको कैपिट इकॉनमी को
समझा दिया कैपिट इकॉनमी के फायदे बताए कैपिट इकॉनमी के नुकसान बताए यही चीज को समझते हुए क्या आप लोग यह भी समझ जाओगे कि
आपके सोशलिस्ट इकॉनमी के क्या फायदे क्या नुकसान हो सकते हैं एक्चुअल में आप नोटिस करो जैसे मैंने आपको बताया ना यह कैपिट
इकॉनमी के फायदे थे कहीं ना कहीं यही सब चीजें सोशलिस्ट इकॉनमी नहीं कर पाएगी तो ये सोशलिस्ट इकॉनमी के नुकसान हो जाते हैं
ऑन द अदर हैंड जब मैं बात करता हूं यहां पर ये क्या थे कैपिट इकॉनमी के नुकसान यही आपके सोशलिस्ट इकॉनमी के बेनिफिट हो
जाएंगे कि हां हेल्थ हो गया एजुकेशन हो गया सरकार प्रोवाइड कर सकती है या बाकी और चीजें कर सकती है आर यू गेटिंग माय पॉइंट
तो एक चीज के माध्यम से आप दो कहीं ना कहीं टॉपिक्स कैसे पढ़ सकते हो आपको इसका आइडिया लगा
होगा और दोस्तों बात करें अगर सोशलिस्ट इकॉनमी की तो मैंने आपको बता ही दिया यहां पर कहीं ना कहीं इसको हम प्लान इकॉनमी या
कमांड इकॉनमी के नाम से जानते हैं ज्यादातर आपकी जो इंडस्ट्रीज होती हैं वो आपकी सरकार के द्वारा ओनरशिप होती है या
फिर उनके द्वारा कंट्रोल किया जाता है और यहां पर पर्पस क्या होता है आपके सोशल वेलफेयर का प्रॉफिट मोटिव यहां पर नहीं
रहता सोशल वेलफेयर यहां प मोटिव रहता है इसी को आप लोग नॉन मार्केट इकॉनमी सेंट्रलाइज इकॉनमी इन शब्दों से भी जान
सकते ठीक है ये चीजों का अर्थ आपको यहां पे क्लियर होना चाहिए अब यह जो आइडिया आया सोशलिस्ट
इकॉनमी का ये दरअसल में कार्ल मार्क्स के वर्क्स में से हमें देखने को मिलता है इनके द्वारा एक लिखा गया था कम्युनिस्ट
मैनिफेस्टो वहां से हमें इनके आईडियाज हमें पता लगते हैं और भी बहुत सारे इनकी बुक्स हमें
देखने को मिलती है प्लस एट द सेम टाइम जो अब तो रशिया है फि उससे पहले जो अवाल यूएसएसआर था वहां पर बोल्शेविक रेवोल्यूशन
हुआ उस समय भी ये आईडियाज आने लगी कि सरकार किस तरह से प्लानिंग के माध्यम से ये चीजें कर सकती है तो ऑल दिस बिकम अ
पार्ट ऑफ सोशलिस्ट इकॉनमी फिर एट द सेम टाइम सोशलिस्ट इकॉनमी के इश्यूज मैंने आपको समझा ही दिए कि कैसे हमें यहां पर
इनएफिशिएंसी देखने को मिलती जाती है मैंने आपको बैंकिंग सेक्टर का एग्जांपल दिया मैंने आपको एयरलाइन सेक्टर का एग्जांपल
दिया या इवन टेलीकॉम सेक्टर में आप देख सकते हो थोड़ा बीएसएनएल में ना थोड़ा इशू से गुजर रहा है तो वो एक चीज हो गया प्लस
एट द सेम टाइम यहां पर सरकार केवर इतनी ज्यादा पावरफुल हो जाती है कि पूरा का पूरा पावर ही सरकार के हाथ में आ जाता है
तो वह भी चीज भी गलत है कि सरकार इतनी ज्यादा पावरफुल हो चुकी है एट द सेम टाइम रेड टेपिस्म हो जाता है रेड टेपिस्म का
मतलब होता है लाल फीता शाही एक्चुअल में क्या होता है आप लोग जो फाइल्स वगैरह आप देखते हो ना उनके ऊपर आपने लाल फीता देखा
होगा होता क्या है ना कि सोशल इकॉनमी के अंदर हर चीज के लिए आपको लाइसेंस लेना पड़ रहा है या हर चीज के लिए आपको फाइल साइन
करवानी पड़ रही है लाइसेंसेस वगैरह की वजह से क्या हो जाता है कि वो फाइलें पड़ी रहती है पड़ी रहती है पड़ी रहती है उनके
ऊपर धूल जम जाती है और प्राइवेट सेक्टर कोई पूछता ही नहीं है तो काम कहीं ना कहीं बहुत धीरे धीरे होता है प्लस क्योंकि
सरकार ही हर चीज को कंट्रोल कर रही है तो यहां पर कस्टमर को कोई ध्यान ही नहीं देता आज आपके पास इतने ऑप्शंस क्यों है क्योंकि
आपके यहां पे डिफरेंट डिफरेंट प्राइवेट सेक्टर काम कर र है अगर प्राइवेट सेक्टर ना हो तो आपकी जो चॉइसेज है वो कहीं खत्म
हो जाएंगी इसके साथ ही साथ क्योंकि यहां पर कोई इंसेंटिव नहीं होता प्राइवेट सेक्टर में तो इंसेंटिव है
अच्छा काम करो प्रमोशन जल्दी खराब काम करोगे तो या तो प्रमोशन देरी से होगा या फिर आपको नौकरी से निकाला भी जा सकता है
यहां पर क्या होता है अगर आपके सामने कोई इंसेंटिव ही नहीं है आपको पता ही नहीं है कि यार अगर मैं मेहनत करूंगा भी तो
प्रमोशन तो मेरी 5 साल बाद ही होनी है तो उससे क्या होता है लोग मेहनत करना कई बार बंद कर देते हैं तो ऑल ऑफ दिस थिंग्स आर
व्हाट रिलेटेड टू सोशलिस्ट इकॉनमी के जो इशू होते हैं क्लियर अब इसी तरह से एक जो कॉमिनेशन इनका
आ जाता है उसको मिक्सड इकॉनमी बोल देते हैं जहां पर आपका प्राइवेट सेक्टर और पब्लिक सेक्टर दोनों मिलकर काम करते हैं
तो यहां पर इसकी कोशिश बेसिकली यही है कि दरअसल में दोनों के दोनों बेनिफिट्स को प्राइवेट सेक्टर के भी पब्लिक सेक्टर के
भी दोनों के बेनिफिट्स को हम यहां पर अडॉप्ट कर पाए अब एक्चुअल में पता क्या था अभी आपको क्लास क्लासिकल इकोनॉमिस्ट भी
पढ़ाऊंगा तो पता क्या था कि दरअसल में 1929 तक हमने जो एडम स्मिथ वाली बात जो करी ना जहां पर उन्होने साज फेयर की बात
करी उन्होंने बात करी कि किस तरह से मार्केट का रोल ज्यादा होना चाहिए कैपिट का बात करी उन्होंने यहां पे एडम स्मिथ ने
उस बात को काफी हद तक सही माना गया 1929 तक पर 1929 में ना हमें एक ग्रेड डिप्रेशन देखने को मिलता है क्या देखने को मिलता है
ग्रेड डिप्रेशन यहां पर मैंने आप लोगों के लिए पिक्चर भी लगाई हुई है ठीक है एक बेसिकली
1929 के अंदर ग्रेट डिप्रेशन आता है ग्रेट डिप्रेशन एक ऐसा इकोनॉमिक रिसेशन था पढ़ेंगे रिसेशन वगैरह चीजें जहां पर हमें
देखने को मिला कि 1929 से लेके 1941 के 1941 तक बहुत सारे इश्यूज आए एक एक दिन के अंदर स्टॉक मार्केट बहुत हैवी लेवल के ऊपर
गिर गया बहुत सारे लोगों की जो रोजगार थे वह खत्म हो गए एक तरह से अब यह वाला क्यों हुआ था इसको हम आगे डिस्कस करेंगे आने
वाले चैप्टर्स के अंदर पर आप एक चीज इमेजिन करो कि 1929 के अंदर ना जब यह चीज आती है जब लोगों के रोजगार खत्म हो जाते
हैं लोगों के पास खाने के लिए भी कुछ नहीं होता पूरी दुनिया में राही तही मच जाती है उस समय जो कैपिट इकॉनमी की बात होती थी जो
डिमांड एंड सप्लाई की बात होती थी जो बात होती थी इनविजिबल हैंड की जो बात होती थी ल साजे फेयर की उसके ऊपर कुछ क्वेश्चन
मार्क उठने लग जाते हैं कि अगर सब कुछ बढ़िया होता सब कुछ सही होता तो इस तरह के रिसेशन कैसे आते इस तरह के डिप्रेशन कैसे
आते अब ऐसे केस में ना एक बहुत इंपोर्टेंट इकोनॉमिस्ट होते हैं आपके जॉन मिनाड किंस राइट इनके द्वारा यहां पर ना बात करी जाती
है कि यार ऐसे केसेस के अंदर सरकार का इंटरवेंशन नेसेसरी होता है ताकि इकॉनमी को डिप्रेशन से हम यहां पे निकाल पाए तो
इन्होंने बहुत इंपॉर्टेंट बात करी जिसके बाद हमें नोटिस करने को मिलता है कि सरकार ने बहुत सारे स्टेप्स लिए सरकार ने अपना
खर्चा बढ़ाया जिसके माध्यम से धीरे-धीरे करके इसके डिप्रेशन से बाहर लाने की कोशिश करी गई ठीक है तो यह जॉन मिनाड कींस के
बारे में मैं आपको आगे भी डिस्कस करूंगा बट एक बेसिक आईडिया हमने यहां पर डिस्कस किया और जैसा मैं आपको कह रहा था मिक्स्ड
इकॉनमी के फायदे दोनों हमें देखने को मिल जाते हैं राइट फायदे दोनों के आ गए कैपिट इकॉनमी के भी सोशलिस्ट इकॉन के भी पर ऐसा
थोड़ी है कि सिर्फ फायदे ही आएंगे फायदों के साथ-साथ नुकसान भी तो साथ-साथ ही चलेगा अगर आप कह रहे हो कि आपने प्राइवेट सेक्टर
पब्लिक सेक्टर दोनों को मिक्स कर दिया हां ठीक है दोनों के फायदे आपको जरूर मिल गए पर दोनों के नुकसान भी तो साथ में ही मिले
है ना दिक्कत यहां पर ये आती है कई बार ना दोनों एंटिटीज के बीच में कोऑर्डिनेशन करना मुश्किल हो जाता है प्राइवेट सेक्टर
और पब्लिक सेक्टर बीच में कोऑर्डिनेशन करना कई बार मुश्किल हो जाता है प्लस इन क्वालिटी की प्रॉब्लम यहां भी आती है आपकी
जो लाल फीता शही वाली प्रॉब्लम है वो भी यहां पर आती है तो ये सब कुछ इश्यूज आते हैं जो कि आपके मिक्स्ड इकॉनमी के अंदर
हमें यहां पे देखने को मिल जाते हैं राइट अब देखो एक्चुअल में आप बात करो आजकल देखो बहुत डिफिकल्ट है किसी चीज को कैटेगरी इज
करना कि कौन मिक्स्ड है कौन अ सोशलिस्ट वाली साइड है कौन आपका कंपटीशन वाली साइड है या कौन मार्केट वाली साइड है बट थोड़ा
सा आप आईडिया ले सकते हो जैसे भारत तो कहीं ना कहीं बीच में है पर जब मैं बात करता हू यूएसए की तो यूएसए थोड़ा सा हमें
ज्यादा टिटेड हमें प्राइवेट सेक्टर की तरफ देखने को मिलता है नॉर्थ कोरिया में भी आपको मिक्स्ड इकॉनमी देखने को मिलेगी
हालांकि वो थोड़ा टिटेड ज्यादा है सोशलिज्म की तरफ चाइना के अंदर भी एग्जांपल्स है हमारे पास मिक्स्ड इकॉनमी
के ही हालांकि उसमें भी थोड़े कुछ फैक्टर्स मतलब अब तो चाइना में भी प्राइवेट सेक्टर खूब अच्छे सा देखने को
मिल जाएगा तो इट इज वेरी डिफिकल्ट टू क्लासिफाई एनी कंट्रीज एज कंपलीटली सोशलिस्ट और कंपलीटली कैपिट दे आर सम वेयर
इन द मिडल बस पॉइंट ये होता है किस जगह पे ज्यादा डिग्री ऑफ सोशलिज्म देखने को मिलता है किस जगह के ऊपर कम डिग्री ऑफ कैपिट
इज्म देखने को मिलता है इस तरह से वाइस वर्सा ये चीजें चलती रहती हैं राइट बाकी मैंने आपको बता ही दिया एक
ये भी इकोनॉमिक सर्वे के अंदर डिस्कशन हुआ था कि हमें ना प्रो क्रोनी नहीं होना हमें प्रो बिजनेस होना चाहिए कई बार ना सरकार
के ऊपर यह इल्जाम लगता है कि आप ना कुछ एक पूंजीपतियों या अरबपतियों के लिए ज्यादा काम करते हो तो यहां पर इकोनॉमिक सर्वे ने
एक बात बोली कि यार बिजनेसमैन के लिए काम करना कोई गलत बात नहीं है या बिजनेसमैन के साथ मिलकर काम करना कोई गलत बात नहीं है
उनके लिए काम करना गलत हो जाएगा यानी कि ऐसा नहीं होना चाहिए कि कोई कंपनी के बड़ा अरबपति कोई बड़ा पूंजीपति सरकार का खास
दोस्त हो एंड सरकार उसके लिए ही पॉलिसी बनाती रहे एक दो लोगों को ही बेनिफिट करता रहे वो चीज गलत है दैट इज नो प्रो क्रोनी
कि यहां पर किसी बड़े कैपिट ने सरकार को पैसा दिया राइट एंड सरकार उसके लिए ही पॉलिसी बना रही है यह
बात गलत है बट इतना जरूर होना चाहिए कि कंपनीज बढ़िया प्रॉस्पर करें देश के अंदर अच्छे से बिजनेसमैन देश में प्रॉस्पर करें
बिजनेसमैन देश में अच्छा करेंगे उससे कहीं ना कहीं बहुत अच्छे खासे रोजगार मिलेंगे अच्छे खासे रोजगार मिलेंगे तो रोजगार के
माध्यम से लोगों को अच्छी खासी अ उनकी लाइफ इंप्रूव होगी सिटीजन वेलफेयर बेनिफिट होगा तो ये पर्पस होना चाहिए हमारे यहां
पे सरकार के काम करने का ना कि ऐसा हो कि कुछ एक लोगों के लिए कुछ पूंजीपतियों के लिए काम कर रही है या उनसे पैसे लेकर उनके
लिए पॉलिसीज बना रही है वो गलत हो जाएगा स के लिए काम करना अच्छी बात है सिटीजंस के अगेंस्ट काम करना वो प्रो क्रोनी हो जाएगा
और ये चीज हमारे यहां पे गलत देखने को मिल सकती है तो पॉइंट यही है कहीं ना कहीं वेलफेयर स्टेट की तरफ हम मूव कर सकते हैं
एंड इवन कर भी रहे हैं सरकार यहां पर लोगों की जिंदगी को बेहतर करने के लिए जो दो कदम लेने चाहिए वो लेती है हमारे यहां
पे जो आपका पॉलिटी के अंदर आप पढ़ोगे डीपीएसपी डायरेक्टिव प्रिंसिपल ऑफ स्टेट पॉलिसी उसके अंदर लिखा भी हुआ है कि हमें
यहां पे वेलफेयर स्टेट को एस्टेब्लिश करने की कोशिश करनी चाहिए तो डेफिनेटली प्राइवेट सेक्टर हो कोई दिक्कत वाली बात
नहीं है बट बट एट द सेम टाइम सरकार स्टेप्स ले ताकि लोगों की जो जिंदगियां है उनकी जिंदगी जीने का जो तरीका है वो आसान
हो पाए उनकी जिंदगी थोड़ी बेहतर हो पाए एंड ईज ऑफ लिविंग हम कैसे लोगों के अंदर बेहतर कर सकते हैं यह फोकस होना
चाहिए दोस्तों डिस्कशन को आगे हम हम कंटिन्यू करते हैं राइट एक टॉपिक आपके बुक में और दिया हुआ है दैट इज मार्केट
इंटरवेंशन इन कैपिट सिस्टम्स एक्चुअल में यह बात यही कर रहा है कि किसकिस तरह से इंटरवेनर है सरकार के द्वारा कैपिट सिस्टम
के अंदर मैं आपको एग्जांपल के माध्यम से ये समझाने की कोशिश करता हूं कुछ एक जगह के ऊपर ना देखो कैपिट जम के हमने बेनिफिट
समझे कैपिट जम के हमने नुकसान समझे ये चीजें हमने समझी और मैंने आपको ये भी थोड़ा बताया कि कुछ-कुछ जगह के ऊपर ना
सरकार का रोल आ जाता है है ना और आना भी चाहिए जैसे फॉर एग्जांपल अगर पूरी तरह से हर चीज हमने प्राइवेट सेक्टर के हाथ में
छोड़ दी उससे दिक्कत आ जाती है तो यहां पर एक रेगुलेटर की तरह सरकार या रेगुलेटरी बॉडी सरकार की तरह से हो सकती हैं जो कि
यहां पर एक तरह से काम करने की कोशिश करें ताकि जो वेलफेयर स्टेट का कांसेप्ट है उसको हम एस्टेब्लिश कर पाए मैं ये नहीं कह
रहा कि सरकार हर चीज में अपना दखल अंदाजी दे वो चीज गलत है बट एट द सेम टाइम सरकार को कंज्यूमर्स को सेफगार्ड करने के लिए
कहीं ना कहीं बीच में इंटरवेनर है जैसे फॉर एग्जांपल एक चीज हो सकती है मैक्सिमम प्राइस इंटरवेंशन जहां पर कंज्यूमर्स को
हम सेफगार्ड करने की कोशिश करते हैं इसमें क्या होता है ना इसमें ये इंश्योर किया जाता है कि कंज्यूमर्स को हम कैसे
प्रोटेक्ट कर सकते हैं तो एक तरह से मैक्सिमम प्राइस को कैप करने वाली बात है उसी तरह से आप प्रोड्यूसर्स को भी कई बार
बचाने की कोशिश करते हो तो वहां पर भी कम से कम इतना दाम तो मिले ही मिले वो एक चीज हो जाती है जैसे फॉर एग्जांपल एमएसपी
मिनिमम स्पोर्ट प्राइस कि हमारे किसानों को इतना तो मिलेगा ही मिलेगा वहां पर प्रोड्यूसर्स को प्रोटेक्ट किया जा रहा है
कई बार आप देखते हो मैक्सिमम रिटेल प्राइस एमआरपी कि इससे ऊपर नहीं कोई चीज बेची जा सकती तो उससे कंज्यूमर्स को बचाने की
कोशिश है तो ऐसे इंटरवेंशंस किए जा सकते हैं सरकार के द्वारा कैपिटल सिस्टम के अंदर भी ताकि चीजों को प्रोटेक्ट किया जा
पाए राइट इसके साथ ही साथ आपकी बुक के अंदर थोड़ा सा डिस्कशन है क्लासिकल इकोनॉमिक्स के बारे में राइट एक्चुअल में
उससे पहले भी ना आपकी बुक के अंदर कुछ चीजें मेंशन है जैसे फॉर एग्जांपल कि ग्रीक के अंदर हमें कुछ एरिस्टोटल हो गया
और बाकी के द्वारा थोड़े-थोड़े इकॉनमी के बारे में आइडियाज दिए गए बट टू बी वेरी ऑनेस्ट दोज थिंग्स आर नॉट दैट इंपोर्टेंट
उनके बारे में हमें नहीं गो थ्रू करना हां इतना जरूर है कि आपको कींस इकॉनमी और आपका क्लासिकल इकोनॉमिस के बीच में अंतर पता
होना चाहिए एक्चुअल में मैंने वैसे आपको पढ़ा ही दिया जब हम बात कर रहे थे ना जॉन मिनार्ड कींस जी के बारे में मैंने जब
आपके साथ डिस्कशन किया था तो जॉन मिनार्ड कींस जी ने जैसे बात करी कि कैसे ग्रेड डिप्रेशन जब हमें देखने
को मिलता है उस समय इन्होंने बताया कि कैसे स्टेट का रोल इंपॉर्टेंट बन जाता है स्टेट को इंटरवेनर पड़ता है अगर
उस तरह के रिसेशन से बाहर होना पड़े राइट अब हुआ क्या है ना इन्होंने जब बात करी उससे पहले जितने भी इकोनॉमिस्ट आए वह काफी
हद तक उसी आइडियल जीी प बेस्ड थे जो एडम स्मिथ जी ने बात करी थी और इनका कांसेप्ट मैंने आपको बता ही दिया है दैट इज विद
रिगार्ड्स टू ले साज फेयर के रिगार्डिंग है राइट फ्री मार्केट के बारे में है इनविजिबल हैंड के बारे में
है बेसिकली कैपिट इकॉनमी की बात करते थे अब यह जो सारे कांसेप्ट थे ना जितने भी आपके जॉन मिनाड कीन से पहले आपके कनिस्ट
आए वो काफी हद तक इन्हीं आइडियाज के साथ अलाइन करते थे उन्हीं को हमने एक कैटेगरी का नाम दे दिया दैट इज क्लासिकल
इकोनॉमिक्स समझ गए इस बात को ठीक है अब कुछ एक पॉइंट्स है क्लासिकल इकोनॉमिक्स के बारे में जो हमें पता होने चाहिए जैसे एक
तो वही बात है कि हमारे पास जो भी आपके आइडियाज एडम स्मिथ क्या ना कि फ्री मार्केट
है सरकार का इंटरवेंशन नहीं होना चाहिए या बहुत ही लिमिटेड लेवल के ऊपर होना
चाहिए इसके साथ ही साथ प्रॉफिट मैक्सिमाइजेशन की तरफ सा साज फेर का जो कांसेप्ट
थाय क्लासिकल इकोनॉमिस्ट इन सब चीजों के अंदर बिलीव किया करते थे और मैंने आपको एग्जांपल दिए भी जैसे एडम स्मिथ तो थे ही
उसके अलावा जो आपके डेविड रिकार्डो थॉमस माल्थस इनके आइडियाज भी डेफिनेटली
इंपोर्टेंट बन जाते हैं इसी क्लासिकल इकॉनमी के अंदर अब देखिए इन लोगों के जो आइडियाज है ना ये
हम आगे भी डिस्कस करेंगे जैसे डेविड रिकार्डों का आईडिया हम पढ़ेंगे आने वाले चैप्टर्स के अंदर माल्थुस की जो
हाइपोथेसिस था कैसे फूड और पॉपुलेशन के बीच में क्या लिंकेज है इनको भी हम आने वाले चैप्टर्स में डिस्कस करेंगे ये भी
इंपॉर्टेंट है बट आई होप आपको ना क्लासिकल इकोनॉमिक्स का एक आईडिया लग गया होगा कि किस तरह से प्रॉफिट को मेन ड्राइवर माना
गया बात करी गई ल साजे फेयर की बात करे गई कैसे एक तरह से इक्विलियम आता है बिटवीन प्रोड्यूसर एंड बायर यह चीजें हमें यहां
पर पता होनी चाहिए राइट इसके अलावा क्लासिकल इकोनॉमिक्स के अलावा मैंने आपको किनेशियन
इकोनॉमिक्स के बारे में बताया जहां बात हुई जॉन विन आड किंस की यहां पर हमने कांसेप्ट जो डिस्कस किया कि कैसे हमें जब
भी रिसेशन में हम आते हैं उससे हम बाहर कैसे आ सकते हैं राइट इन्होंने ना इनफैक्ट एक मतलब कांसेप्ट भी हमें डिस्कस करने को
मिलता है कि जब भी ऐसे रिसेशन में कोई अर्थव्यवस्था आ गई तो रिसेशन से बाहर निकालने के लिए एक पुश देना पड़ता
है पुश यानी कि एक तरह का स्टिमसन लो 1929 की बात करें उस समय ग्रेट डिप्रेशन देखने को मिला लोगों की नौकरियां
जा रही थी प्लस एट द सेम टाइम स्टॉक मार्केट क्लैप्स था राइट दुनिया में काफी राही मची हुई थी ऐसे केस में ना सरकारों
को जरूरत यह पड़ी कि वो आगे आए आगे आके एक पुश द एक स्टिमसन को वापस से खड़ा किया जा पाए तो
सरकारों ने अपना खर्चा बढ़ा दिया उस समय के ऊपर सरकार ने बहुत सारी चीजें बनाई इवन अभी कोविड-19 पेंडम आया उस समय भी सिचुएशन
काफी खराब थी तो सरकारों ने बहुत सारी चीजें पुश करी पंप करी राइट ताकि अर्थव्यवस्था को वापस से खड़ा किया जा पाए
हमारे यहां पे बहुत सारे स्टेप्स लिए गए आत्मनिर्भर भारत हो गया एमएसएमई को हमने यहां पे सपोर्ट किया इंडस्ट्रीज को हमने
यहां पे सपोर्ट किया उसके पीछे पर्पस यही था कि जब भी ऐसी कोई सिचुएशन आती है तो कैसे उस अर्थव्यवस्था को वापस से ठीक करने
के लिए एक पुश दिया जा सकता है इस चीज को हम कई बार ना पंप प्राइम मिंग के नाम से भी जानते
हैं ये जो शब्द आया ना दरअसल में पंप प्राइम मिंग ये आपके हैंड पंप से आया है आप लोग हैंड पंप में कई बार पानी निकालने
की कोशिश करते हो पर कई बार उसमें हवा फंस जाती है उस केस में थोड़ा सा पानी आप ऊपर से डालने की कोशिश करते हो तब जाके वहां
से पानी निकलने की निकलता है उसी चीज को बोलते हैं पंप प्राइम मिंग तो अर्थव्यवस्था के अंदर भी यही चीज होती है
अगर अर्थव्यवस्था कहीं पे अटक गई है उसमें रिसेशन आ गया है और दिक्कतें हैं उससे बाहर निकालने के लिए एक जो तरीका अडॉप्ट
किया जाता है वो एक पुश दिया जाता है दैट इज मीनिंग ऑफ पंप प्राइम तो हमने जॉन मिनाड कींस डे के बारे में समझ लिया कि
कैसे उन्होंने किनेशियन इकोनॉमिक्स की बात करी कैसे उन्होंने बात की कि यार मार्केट ऐसा नहीं है कि हमेशा ही सही रहेगी यह अगर
सही रही होती अगर हमारे जो हमारे क्लासिकल इकोनॉमिस्ट है अगर उनकी बात सही रही होती फिर तो रिसेशन कभी आता ही नहीं डिमांड एंड
सप्लाई के बेसिस के ऊपर सारी चीजें हो चुकी होती राइट बट यहां पर हमें देखने को मिला कि प्रोड्यूस और बायर या जो हम बात
कर रहे थे सेल्फ करेक्टिंग मार्केट्स की उसको यहां पर उन्होंने चैलेंज किया प्लस एट द सेम बात करी कि इकोनॉमिक स्टेबिलिटी
के लिए सरकार के द्वारा इंटरवेंशन करना जरूरी बन जाता है तो यह बात थी किनेशियन इकोनॉमिक्स के बारे में इसके साथ ही साथ
देखो बहुत ज्यादा यूपीएससी पूछता नहीं है तो बहुत डिटेल में हमें जाना नहीं है इन चीजों के रिगार्डिंग एक जो बात हुई है ना
आपकी बुक के अंदर वो आपकी क्लासिकल थ्योरी और नियो क्लासिकल थ्योरी की भी बात हुई है हालांकि यूपीएससी ने इसके ऊपर कभी सवाल
नहीं पूछा बट एक बेसिक आईडिया हम जरूर देख लेंगे जैसे देखो क्लासिकल इकोनॉमिक्स की हम बात करते हैं क्लासिकल थ्योरी की बात
करते हैं यहां पर ना आप समझना इस मुद्दे को जैसे एक जो फंडामेंटल डिफरेंस हमें देखने को मिलता है लेट्स से जैसे मैं
मोबाइल की बात कर रहा हूं अब ये मोबाइल का दाम क्या है लेट्स से आप कहोगे 10000 अब 10000 आपने कैसे डिटरमाइंड किया एक कोई
मुझे कह सकता है कि यार सर इसमें ना मोबाइल के अंदर इस मोबाइल के अंदर चिप डली हुई है स्क्रीन है इसमें कैमरा है इसमें
इतने सारी चीजें ऐड ऑन हुई ई है उन सबको मैं ऐड करूंगा कॉस्ट इसकी निकालने की कोशिश करूंगा तो तो लेट्स से 9000 का बनता
है फिर थोड़ा सा उस बंदे ने खुद का प्रॉफिट देखा 9000 में अपना प्रॉफिट डाल के 10000 का बेच दिया यहां पर क्या हो रहा
था ना यहां पर फोकस था कहीं ना कहीं आपके प्रोडक्शन के ऊपर इनके फैक्टर्स के ऊपर जिसके माध्यम से गुड्स की आपकी सप्लाई
देखने को मिल जाती थी नियो क्लासिकल इकोनॉमिक्स थोड़ा सा ना इससे अलग तरह से सोचने की कोशिश करता है वो यहां पर ह्यूमन
बिहेवियर को ऐड करने की कोशिश करता है कि कैसे कहीं ना कहीं इंडिविजुअल चॉइस ली जाती है अब बहुत सारे प्रोडक्ट ऐसे होते
हैं जिनका कॉस्ट के साथ कोई लिंक नहीं होता क फ्स आपके ऐसे होंगे जो शायद कॉस्ट तो उनकी बहुत कम होगी पर कुछ ना कुछ उनके
साथ अटैच है एक कंज्यूमर बिहेवियर उनके साथ अटैच है जिसके वजह से उनका दाम बहुत ज्यादा देखने को मिल जाता है तो एक्चुअल
में आपके नियो क्लासिकल थ्योरी यही है कि इंडिविजुअल चॉइस के ऊपर फोकस करता है राइट कहीं ना कहीं सब्जेक्टिव प्रेफरेंसेस की
बात करता है एट द सेम टाइम इस चीज को न्यू क्लासिकल चीजों को एंड प्रोडक्ट ऑफ इंडिविजुअल उनका
एग्रीगेट ही यहां पे माना गया है तो यहां पर बात होती थी यहां पर बात होती थी सप्लाई ऑफ गुड्स एंड की यहां पर
इंडिविजुअल को बहुत कम अटेंशन थी बट यो क्लासिकल थ्योरी के अंदर हम इन चीजों को काफी ज्यादा इंपोर्टेंस देने लग गए बस
इतना एक बेसिक आईडिया काफी रहेगा यह टॉपिक आपके लिए बहुत ज्यादा इंपोर्टेंट नहीं है बट एक बेसिक आईडिया जरूर पता होना चाहिए
ठीक है सर अब आगे एक कांसेप्ट जो आपकी बुक में मेंशन है दैट इज विद रिगार्ड्स टू बिहेवियरल इकोनॉमिक्स अब ये बड़ा
इंटरेस्टिंग टॉपिक है देखो बिहेवियरल इकोनॉमिक्स सही बताऊं तो और इसका कारण पता क्या है क्योंकि ये रियल लाइफ में आपको ना
बहुत हैवी लेवल के ऊपर इंप्लीमेंट होता हुआ देखने को मिलता मिलता है इकोनॉमिक्स तो हम सब समझते हैं हम पढ़ भी रहे हैं
इकोनॉमिक्स को अगर उस इकोनॉमिक्स के अंदर आप साइकोलॉजी एक इंसान के दिमाग को आप ऐड ऑन कर दोगे ना तो आपका बनता है बिहेवियरल
इकोनॉमिक्स मतलब इकोनॉमिक्स तो हम पढ़ ही रहे हैं पर साथ ही साथ आपने ऐड कर दिया का कि इंसान का दिमाग कैसे काम करता है उसको
बोल देंगे बिहेवियरल इकोनॉमिक्स स समझ नहीं आया अभी भी एग्जांपल से समझते हैं समझना मान लो मैंने ना एक कंपनी चलाई
और ये एक्चुअली में प्रूवन चीज है मैं बताऊंगा मान लो मैं ना कॉफी बेचता हूं ठीक है अब मैंने पता क्या किया मैंने ना कॉफी
के तीन वेरिएंट्स यहां पे लाए एक कॉफी एक प्रकार की एक दूसरे प्रकार की और तीसरे प्रकार की मैंने पहली कॉफी का नाम दिया
बजट कॉफी मतलब थोड़ी सस्ती कॉफी है इसका दाम मान लो $80 है 1.8 है या जो भी आप ₹10 मान लो अगर आपको ऐसे नहीं समझ आ रहा मान
लो इसका दाम था ₹10 और मैंने इसकी क्वालिटी मेंशन करी कि 50 क्वालिटी है इसकी दूसरा मैंने कर दिया एक प्रीमियम
क्वालिटी की एक कॉफी लॉन्च करी इसका दाम मैंने रख दिया ₹ 60 और इसकी क्वालिटी मैंने रख दी 70 मतलब ये क्वालिटी थोड़ी
बढ़िया है इसकी और सुपर प्रीमियम में देखा गया इसकी क्वालिटी थी 340 मतलब दाम था इसका 340 और क्वालिटी है
75 ऐसा देखा गया कि जब इस तरह से ना आपने तीन प्रोडक्ट्स लॉन्च किए अब एज अ कस्टमर अगर मैं आप अगर एज अ कंपनी मैं आपको ये
सामने तीन ऑप्शन देता हूं कि भाई इन तीनों में से ना आप चूज करो आपको क्या कौन सी कॉफी पीनी है तो ऐसा देखा गया कि 90 पर
लोग ना दूसरी वाली कॉफी चूज करते हैं 10 पर लोग तीसरी वाली कॉफी चूज करते हैं अब आप पूछेंगे ऐसा क्यों देखो जब मैंने इसके
साथ वर्ड एसोसिएट कर दिया ना ये सस्ती कॉफी है तो लोगों का था यार अच्छा सस्ती कॉफी चलो इसको नहीं पीते
हैं बट फिर वो दूसरे और तीसरे को कंपैरिजन करने लग गए कि ये खरीदे या ये खरीदें अब इन्होंने नोटिस किया क्वालिटी 70 इसकी य
थी और इसकी सिर्फ 75 थोड़ा सा ही अंतर है पर इसमें प्राइस में बहुत ज्यादा अंतर बन गया तो यहां पर ना ज्यादातर लोग इसी को
चूज करेंगे तो होता क्या है ना अगर आपको ऐसा इंश्योर करना होता है कि यार इस वाली कॉफी की ना आप चाहते हो लोगों के अंदर
कंजमेट को और क्वालिटी को कैसे आप एडजस्ट कर सकते हो ये एक एग्जांपल हुआ बिहेवियरल इकोनॉमिक्स का आपने सामने वाले इंसान का
दिमाग कैसे सोचता है उसके हिसाब से आप अपने प्राइस चूज कर रहे हो गेटिंग द पॉइंट ये है बिहेवियरल इकोनॉमिक्स इंसान का
दिमाग कैसे सोचता है वो इकोनॉमिक्स के अंदर जब आप लाने की कोशिश करते हो ना तो वो बोला जाता है बिहेवियरल इकोनॉमिक्स मैं
आपको और एग्जांपल देता हूं आपको बहुत सारे एग्जांपल्स मैं आपको सिखाऊंगा यार आजकल ना देखो मैं भी टू बी वेरी ऑनेस्ट आप लोग जो
दिल्ली में नहीं हो उनको नहीं पता होगा शायद बट बाकी जगह प भी होगा जैसे जेप्टो हो गया या ब्लिंकड हो गया या या आपके इस
तरह से या आपके स्विग हो गया या इवन जमाटो और स्विगी हो गया इनके अंदर भी ना कई बार आप कुछ खरीद रहे होते हो या
am9 का आपका बिल हो चुका है इसमें फिर वो बोलेगा कि आपको डिलीवरी लग रही है 0 तो आपको 469 पे करने
हैं ऐसा आ गया आपके सामने एग्जांपल पर वो आपको एक चीज साथ में और बोलेगा कि अगर आप र की शॉपिंग और कर लोगे ना तो आपका
डिलीवरी चार्ज हम खत्म कर देंगे अब आप लोग ना कुछ और खरीदना नहीं चाहते हो आपको बस इतना ही खरीदना था जितना
आपने कर लिया पर वो आपको ना पुश दे रहा है यार डिलीवरी चार्ज खत्म करना है तो एक काम करते हैं कुछ और भी खरीद लेते हैं आपको
खरीदना है ही नहीं था कुछ और पर आपके दिमाग में एक चीज डाली जा रही है कि भाई कुछ और भी खरीद लो का कुछ और भी
दो डिलीवरी फ्री हो जाएगी ये क्या है व्हाट इज दिस दिस इज बिहेवियर ये आपकी ह्यूमन साइक को पढ़ने की
कोशिश है उसके हिसाब से आपको कुछ नई चीज परचेज करवाने की कोशिश है आर यू गेटिंग द पॉइंट ये होता है बिहेवियरल इकोनॉमिक्स कि
कैसे आप कहीं ना कहीं एक ह्यूमन साइकोलॉजी को समझते हो एंड उसको इकोनॉमिक्स के साथ लिंक करके उसको अप्लाई करते हो आर यू
गेटिंग द पॉइंट दिस इज़ नोन एज व्हाट बिहेवियरल इकोनॉमिक्स और भी मैं कुछ आपको एग्जांपल देता हूं ताकि आपको कोई दिक्कत
ना आए राइट बिहेवियरल इकोनॉमिक्स का ना कई बार जिक्र
ऐसे भी किया जाता है जैसे मान लो एक एग्जांपल से समझाता हूं आप लोग भी कई बार चीज करते होंगे लेट्स से एक कोई
पर्सन है मैंने इसका नाम दे दिया मोहित ठीक है अब मोहित ने पता क्या किया मोहित ने ना
रात भर पढ़ाई करी मतलब रात भर कह लो या बहुत पढ़ाई करी महीनों पढ़ाई करी इसने ठीक है पर इसने जब पेपर दिया पेपर देने के बाद
इसने अपने दोस्तों को बोला यार घर में शादी थी मेरी सेहत खराब हो गई थी मैं बीमार हो गया था इसलिए बहुत ज्यादा पढ़
नहीं पाया पढ़ाई इसने खूब करी है पर इसने अपने दोस्तों को यह वाली चीज बोली पता है क्यों यह इसलिए कि कल को ना मान लो यह फेल
हो जाता है या इसके नंबर कम आते हैं तो उस केस में कहीं ना कहीं एक ह्यूमन टेंडेंसी होती है कि हम अपनी सेल्फ एस्टीम को खतरे
में ना आने दें तो यह जो मोहित का बिहेवियर था जहां पे जाके इसने अपने दोस्तों को बोला यार मैं तो इन मजा से
पढ़ाई नहीं कर पाया वह क्या है वह भी उसके एक बिहेवियर इकोनॉमिक्स का ही पार्ट है क्योंकि एक ह्यूमन टेंडेंसी एक ह्यूमन
साइकोलॉजी कैसे सोचती है उसको हमने यहां पे लिंक किया है रियल लाइफ एप्लीकेशन के साथ ये एग्जांपल होते हैं बिहेवियरल
इकोनॉमिक्स क्योंकि इंसान कैसे किस जगह पे क्या बिहेव करता है कैसे कौन सा वह एक्शन लेता है ऑल दीज थिंग्स बिकम वेरी वेरी
इंपॉर्टेंट राइट इसके अलावा अगर मैं बात करूं और भी बहुत सारे ऐसे एग्जांपल्स हो सकते हैं बट
इतने ज्यादा एग्जांपल्स का क्या ही करोगे बेसिक आईडिया आपको चीज के लिए इंपोर्टेंट है बिहेवियरल इकोनॉमिक्स के अंदर ना एक
चीज आती है जिसको हम जानते हैं नज थ्योरी के लिए क्या वर्ड है यहां पर वर्ड है आपका नज थ्योरी नज थ्योरी का मतलब क्या होता है
नज का मतलब समझते हो नज मतलब होता है एक हल्का सा धक्का देना एक हल्का सा पुश देना फॉर एग्जांपल मैंने आपको कहा कि यार जैसे
आप थे मान लो मैं आपको बोल रहा हूं यार एक काम करो कि प पढ़ लिया करो मैं आपको सिंपली बस इतना बोल रहा हूं कि पढ़ लिया
करो पढ़ाई करोगे तो मॉक टेस्ट में नंबर अच्छे आएंगे मॉक टेस्ट में नंबर अच्छे आएंगे तो कहीं ना कहीं यूपीएससी का एग्जाम
क्लियर कर पाओगे मैंने आपको बस ऐसे बोल दिए ये बात अब आप में से कुछ लोग पढ़ेंगे कुछ लोग नहीं भी पढ़ेंगे पर मैंने एक चीज
बोली मैंने कहा यार एक काम करते हैं इस संडे मॉक टेस्ट करवाते हैं एक एंड जो भी बच्चा मॉक टेस्ट में टॉप थ्री रैंक में
आएगा उनको मैं क्या करूंगा उनको मैं कुछ गिफ्ट दे दूंगा एक पेन गिफ्ट कर दूंगा चॉकलेट गिफ्ट कर
दूंगा कुछ भी ऐसा मैंने बोला मैंने आपको कुछ गिफ्ट दे दूंगा अब यहां पर ना मैंने आपको कहा थोड़ी है कि आप करते रहो मेहनत
पक्का ही मेहनत करो मैंने एक हल्का सा पुश दिया यहां पे और यह पुश आपके दिमाग में आ गया आपके दिमाग ने इस पुश को कैप्चर किया
यह नज को कैप्चर किया जो मैंने आपको धक्का देने की कोशिश करी एंड आप उसके साथ यहां पे मेहनत करने भी लग गए तो होता क्या है
ना क बार ज हल्का सा एक धक्का दिया जाता है वो धक्का आपके दिमाग को हिट करता है एंड आपका दिमाग फिर उस तरह से काम करने लग
जाता है यह नच थ्योरी बोलती है एस पर बिहेवियरल इकोनॉमिक्स और एग्जांपल भी इसके हो सकते हैं आप लोगों ने कभी टिकट बुक
किया है टिकट बुक करते समय कई बार ना व आपको बोलता है कि आप अपने टिकट बुक कर रहे हो
जैसे फ्लाइट की आपने टिकट बुक करने चा रहे हो उस टिकट बुकिंग के साथ वो कई बार आपको ऑप्शन देता है क्या आप अपनी इंश्योरेंस भी
करवाना चाहते हो एंड उसके ऊपर क बार डायरेक्टली टिक होता है या फिर आप ऐसा करना चाहते हो कि
आप गरीब इंसान के लिए कुछ डोनेट करना चाहते हो उसके ऊपर भी एक टिक होता है ये टिक क्या है टिक क्यों लगाया गया है वो एक
नजिंग है आपके लिए कि आप ऑटोमेटिक उसके साथ-साथ आपको एक पुश देर रहा है कि यार हां यार अच्छा काम भी कर दो कुछ और आप कर
भी देते हो ये क्या है ये भी आपका बिहेवियरल इकोनॉमिक्स का ही एग्जांपल है इसके साथ ही साथ कई बार हमें और एग्जांपल
भी देखने को मिलते जैसे फॉर एग्जांपल अब बात हुई स्वच्छ भारत अभियान की दोस्तों स्वच्छ भारत अभियान में क्या
हुआ स्वच्छ भारत अभियान में ऐसा थो नहीं कहा गया कि भाई आपको स्वच्छ नहीं रखोगे तो ऐसी दिक्कतें आएंगी मतलब ऐसा तो नहीं किया
कि आपके ऊपर पेनल्टी लगा दी जाएगी नहीं सरकार ने कैसे इंश्योर किया सरकार ने कुछ सेलिब्रिटी से बुलवाया यार स्वच्छता एक
अच्छी चीज है प्लस 2 अक्टूबर को लच किया गया था गांधी जी के दिन गांधी जी के जन्म दिवस के दिन
तो गांधी जी स्वच्छता के बहुत बड़े रोल मॉडल की तरह रहे हैं तो लोगों के दिमाग में यह अपील किया प्लस आपके जो रोल मॉडल्स
होते हैं उन्होंने आपको अपील करी प्लस बहुत सारे कैंपस चलाए गए उन कैंपस की वजह से क्या हुआ क्या उन कैंपेन
की वजह से आपके दिमाग में एक साइकोलॉजिकली आपके दिमाग में पश आया कि यार नहीं हमें अपनी सोसाइटी को हमें अपने आसपास के
एरियाज को गंदा नहीं रखना हमें ये चीज करनी है हमें उसको बढ़िया बनाना है यह भी किस चीज का एग्जांपल है यह भी आपका एक नज
थ्योरी का एग्जांपल है टिंग की बिहेवियरल इंसान का कैसे होता है इसके अलावा आप लोग जैसे बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के बारे में
जानते होंगे राइट आप लोगों ने बेटी बचाओ बेटी बढ़ाओ का एग्जांपल देखा होगा अब देखो बेटी बचाओ बेटी बढ़ाओ को लंच कि गया था
पानीपत से कहीं ना कहीं हरियाणा से लॉन्च किया गया क्योंकि हरियाणा में सेक्स रेशो काफी खराब था तो वो एक तरह से लोगों के
दिमाग में हिट किया नहीं यार बेटियों को पढ़ाना और बेटियों को बचाना बहुत ज्यादा इंपोर्टेंट है उनको आगे बढ़ने के अवसर
देने पड़ेंगे बहुत बार एग्जांपल लिए गए साइना नेहवाल जी का ठीक है ना सानिया मिर्जा का आपके साक्षी मलिक का राइट विनेश
फोगाट का उन सबका एग्जांपल लिया गया यार देखो इन्होंने अपनी लाइफ में कितना बड़ा अचीव किया है और ये तो स्पोर्ट्स पर्सन की
बात करी इसके अलावा भी बहुत सारे एग्जांपल्स हमें देखने को मिलते हैं बिजनेस फील्ड के अंदर और अलग-अलग जगह के
ऊपर ये क्या थे ये भी एक साइकोलॉजिकल पुश था लोगों के दिमाग के अंदर एक आदा और एग्जांपल दे देता हूं जैसे यहां पर आप
नोटिस करोगे कई बार ना आप कुछ खरीदने जाते हो कहीं पर आपका ना एक दिमाग में जाता है चलो यार यही
ऑर्डर कर लेते हैं और एग्जांपल जैसे कई बार आप जमाटो स्विगी प आप देखते हो ना कि यार कोई रेस्टोरेंट खोला और रेस्टोरेंट
में देख रहे हैं कि 1015 ऑप्शन है दाल मखनी पनीर बटर मसाला ये सब ये सब ये और उसमें छोटा छोटा लिखा आ जाता है कई बार
बेस्ट यू नो दिस डिश इ बेस्ट इन हियर ऐसा कुछ मतलब यू नो मतलब बेस्ट बेस्ट डिश मतलब यू
नो कैन नॉट बी मिस्ड ऐसा कुछ डिश के ऊपर लिखा जाता है तो आपको लग यार ये डिश यहां की सबसे बढ़िया है इसी को ऑर्डर करते हैं
ये क्या है ये आपके दिमाग के साथ एक तरह से प्ले करने की कोशिश है आपको एक नच देने की कोशिश है कि यार यही वाली एक्टिविटी
करो यही चीज को आप क्लिक करो आर यू गेटिंग माय पॉइंट ये सब चीजें होते है नच थ्योरी के एग्जांपल कई बार आप जैसे रिव्यूज वगैरह
होते हैं उसके बेसिस के ऊपर कई बार रिव्यू सही है नहीं है पता नहीं पर आपके दिमाग के ऊपर हिट जरूर करते हैं ऑल दिस थिंग्स आर
व्ट आपके एग्जांपल्स है नच थ्योरी के और बिहेवियरल इकोनॉमिक्स क्लियर हुई ये बात तो ये चीजें आपको बिल्कुल पता होनी चाहिए
बाकी देखो एक दो आखिरी टॉपिक्स हैं इस पर्टिकुलर चैप्टर के ही ये टॉपिक आपका नेक्स्ट टॉपिक में भी नेक्स्ट चैप्टर में
भी बहुत इंपोर्टेंट रोल प्ले करेगा यहां बात किसकी हो रही है आपके फैक्टर्स ऑफ प्रोडक्शन
की समझो इस बात को जैसे मान लो अगर मैं बात करता हूं इस मोबाइल फोन की अब मोबाइल फोन को बनाने के लिए कुछ ना कुछ तो चाहिए
हुआ होगा बिल्कुल आप बोलोगे सर एक तो कुछ जमीन वगैरह चाहिए हुई होगी लैंड वगैरह जहां पर सारा प्रोडक्शन का प्रोसेस लगेगा
फिर कुछ लोग लगे होंगे इसके अंदर इसको बनाने के लिए प्लस एट द सेम टाइम कुछ पैसा लगा होगा राइट एंड एट द सेम टाइम एक इंसान
लगा होगा बेसिकली एक जो ये सब चीजों को मैनेज कर रहा होगा एक एंटरप्रेन्योर लगा होगा गेटिंग द पॉइंट दरअसल में इन्हीं
चीजों को बोला जाता है आपके फैक्टर्स ऑफ प्रोडक्शन समझ गए तो इस तरह से आपकी हाउसहोल्ड होती है आपकी फर्म्स होते हैं
फर्म्स किसी वस्तु को बनाती हैं बदले में हाउसहोल्ड उनसे वो खरीदते हैं राइट ये सारा प्रोसेस तो हम आगे डिस्कस करेंगे पर
आपको फैक्टर ऑफ प्रोडक्शन जरूर पता होना चाहिए एक्चुअल में क्या होता है टोटल हमें चार फैक्टर्स ऑफ प्रोडक्शन देखने को मिलते
हैं दैट इज लैंड लेबर कैपिटल और एंटरप्रेन्योर चारों के चारों फैक्टर्स ऑफ
प्रोडक्शन बहुत ज्यादा इंपोर्टेंट हो जाते हैं जब मैं बात करता हूं जैसे लैंड की ये आपके एग्जांपल्स आपको पिक्चर में देख ही
पा रहे होंगे कोई भी आपको फर्म एस्टेब्लिश करनी है कुछ भी आपको करना है तो वहां पर आपको लैंड की जरूरत पड़ेगी साथ ही साथ
लेबर की जरूरत पड़ेगी जो उसके रिगार्डिंग प्रोडक्शन करेगा अगर मोबाइल फोन बना था कुसी ना उसको लेबर को उसके साथ इवॉल्व
होगी कैपिटल के अंदर आपके इक्विपमेंट्स वगैरह भी आ गए ठीक है इनको भी हम और डिटेल में डिस्कस करेंगे अलग-अलग तरह के जैसे
कैपिटल के अंदर आ गया आपका फिजिकल कैपिटल हो गया आपका ह्यूमन कैपिटल जो इधर आ जाएगा आपके यहां पे आपका जैसे मनी कैपिटल हो गया
राइट वो चीजें भी आ जाएंगी और आपके अदर इक्विपमेंट जो कि इस प्रोसेस के अंदर हेल्प करेंगे वो आ जाएगा एंड लास्ट में
आपका एंटरप्रेन्योर आ जाएगा ठीक है ना ंट प्रनर आ जाएगा जिसका एक आईडिया होगा इस चीज के रिगार्डिंग एंड कहीं ना कहीं बाकी
फैक्टर ऑफ प्रोडक्शन को लेकर काम करवाना वो इसका पर्पस हो जाएगा कोई भी चीज होती है उसके लिए चार फैक्टर्स ऑफ प्रोडक्शन
हमारे लिए काम आते हैं इनको आगे हम और डिटेल में डिस्कस करेंगे कैसे कैसे इनकी और फदर डिवीजन होती है वो नेक्स्ट चैप्टर
में देखेंगे बट एक बेसिक आईडिया यहां पर लेना जरूरी था हां जी तो आपकी इस बुक के अंदर यह
स्टार्टिंग में एक डायग्राम बना हुआ है जहां पर हम बात करते हैं इकोनॉमिक्स की तो इकोनॉमिक्स डिवाइड हो जाता है आपका थोड़ा
सा एक्सप्लेन कर देता हूं इकोनॉमिक्स आपका डिवाइड किया जाता है है एक तरफ आपका आ गया माइक्रो इकोनॉमिक्स एक तरफ आ गया आपका
मैक्रो इकोनॉमिक्स माइक्रो इकोनॉमिक्स के अंदर हमने देखा प्रोडक्ट प्राइसिंग के बारे में कैसे कैसे आपका डिमांड की थ्योरी
वर्क करती है कैसे सप्लाई की थ्योरी वर्क करती है यह हमने देखा उसके साथ ही ना एक होती है हमारी फैक्टर प्राइसिंग फैक्टर
प्राइसिंग कुछ नहीं है फैक्टर वर्ड पढ़ा अभी फैक्टर्स ऑफ प्रोडक्शन उसी के साथ प्राइसिंग लिंक्ड है जैसे फॉर एग्जांपल
अगर मान लो लैंड है लैंड के कॉरस्पॉडिंग प्राइस क्या पे करोगे लैंड रेस्पॉन्डिंग हमें रेंट देखने
को मिल जाएगा राइट उसी तरह से अगर मैं बात करूं लेबर की तो लेबर को क्या देना पड़ता है सर
लेबर के पास जाती है वेजेस बिल्कुल ठीक बात है साथ ही साथ अगर मैं बात करूं दोस्तों कैपिटल की कैपिटल के
साथ हमारा जो जनरली चीज लिंक रहती है वो आपका इंटरेस्ट देखने को मिल जाएगा राइट कैपिटल के साथ हमें इंटरेस्ट देखने को मिल
जाता है इसको आगे मैं कैपिटल को और डिस्कस करूंगा चिंता मत करो इनको दो पार्ट में डिवाइड करेंगे हम नेक्स्ट टॉपिक के अंदर
पर अभी के लिए बस इतना समझो कि हमें इंटरेस्ट देखने को मिल जाएगा एंड एंटरप्रेन्योर के रिगार्डिंग हमें देखने
को मिलता है प्रॉफिट जो भी कमाई होती है जो भी प्रॉफिट होता है वो यहां पर एंटरप्रेन्योर को बिलोंग करता है ये
फैक्टर्स ऑफ प्रोडक्शन थे इन्हीं की जो फैक्टर प्राइसिंग हमें देखने को मिल जाती है दैट इज वेजेस हमने देखा लेबर के
कॉरस्पॉडिंग देखा प्रॉफिट देखा एंटरप्र के रिगार्डिंग एंड लैंड के रिगार्डिंग हमने रेंट देखा प्लस वेलफेयर इकोनॉमिक्स बात
करता है कैसे हम वेलफेयर को मैक्सिमाइज कर सकते हैं यह सब चीजें हमने डिस्कस करी उसके अलावा अगर मैं बात करूं मैक्रो
इकोनॉमिक्स की तो बिल्कुल ये सब चीजें हम आने वाले चैप्टर्स में डिस्कस करेंगे इनकम के बारे में एंप्लॉयमेंट के बारे में राइट
आपके इंफ्लेशन के बारे में ये सब चीजें डिस्कशन होंगी इन सब की थ्योरी हमें देखने को मिलती हैं थ्योरी ऑफ इकोनॉमिक ग्रोथ
हमें देखने को मिल जाती है एंड थ्योरी ऑफ डिस्ट्रीब्यूशन स ऑल दिस थिंग्स वी विल बी डिस्कसिंग इन द फर्द चैप्टर्स बट एक बेसिक
आईडिया हमें जरूर हो चुका है कि कैसे-कैसे इकोनॉमिक्स के अंदर हम क्या चीजें पढ़ेंगे अब जैसा मैंने आपको प्रॉमिस किया था
चैप्टर खत्म होने से पहले चैप्टर खत्म होने से पहले हम हर पर्टिकुलर टॉपिक के कुछ पी वाई क्यू जरूर
किया करेंगे स्टार्टिंग टॉपिक था थोड़े कम पी वाई क्यू है दो ही क्वेश्चंस आज हम डिस्कस करेंगे बट आने वाले चैप्टर से बहुत
ज्यादा हमें प्रैक्टिस करनी पड़ेगी ताकि हमें कोई दिक्कत ना आए मैंने जैसा आपको प्रॉमिस किया था स्टार्टिंग ऑफ द लेक्चर
के अंदर कि हम इन लेक्चर को खूब एक्सटेंसिवली डिस्कस करेंगे कोई जल्दबाजी में नहीं डिस्कस करेंगे ताकि आपकी पढ़ाई
बहुत अच्छे से हो पाए जैसे यूपीएससी ने 2018 के अंदर ही हमसे क्वेश्चन पूछा था क्या था सवाल सवाल यह था कि अगर मान लीजिए
किसी वस्तु को सरकार फ्री में प्रोवाइड कर रही है तो उस केस में क्या होगा मुझे एक चीज बताओ जैसे सरकार कोई भी चीज लेट्स से
फ्री में दे रही है मान लो फ्री राशन दे रही है ये कुछ भी फ्री में दे रही है उस केस में हुआ क्या क्या सरकार कैसे दे रही
है उस चीज को क्या मैं ऐसा कह सकता हूं कि सरकार ने अपनी जेब से दे दिया नहीं ऐसा तो नहीं कह सकते हां सरकार
ठीक है अपनी जेब से दे रही है पर सरकार की जेब में पैसा कहां से आ रहा है इन दी एंड तो हम यह कह सकते हैं ना कि
सरकार की जेब में जो पैसा आ रहा है वह कहीं ना कहीं एक टैक्स पेयर की वजह से आ रहा है सरकार पैसा कैसे कमा रही है आप लोग
मैं लोग पैसा देते हैं सरकार को कैसे जैसे फॉर एग्जांपल मैं कुछ पैसे कमाता हूं तो मैं सरकार को क्या देता हूं इनकम टैक्स
देता हूं या आप भी कमाते तो आप भी दे सकते हो अगर नहीं भी कमाते तब भी हम सरकार को टैक्स देते हैं कैसे अरे जीएसटी के रूप के
ऊपर आप कहीं खाना खाने जाते हो सरकार को जीएसटी देते हो आपने ये कोर्स खरीदा हो सकता है किसी जगह प तो उसके ऊपर जीएसटी
दिया होगा वो सब क्या है सरकार की कमाई ही तो है तो मेरी वजह से सरकार को पैसा मिल रहा है एंड सरकार अगर मान लो किसी चीज को
कोई चीज फ्री में दे रही है और बदले में कुछ नहीं मिल रहा तो उस केस में इन दी एंड जो कॉस्ट बेयर करनी पड़ी वो किसको बेयर
करनी पड़ी वो टैक्स पेयर को तो होता क्या है अगर मान लीजिए कोई ऐसी कमोडिटी है जो सरकार फ्री में दे रही है उस केस में क्या
होगा अपॉर्चुनिटी कॉस्ट ट्रांसफर हो जाएगी फ्रॉम द क मर्स ऑफ द प्रोडक्ट टू द टैक्स पेइंग पब्लिक जो लोग टैक्स पे करते हैं
उनके ऊपर अपॉर्चुनिटी कॉस्ट यहां पे शिफ्ट होती हुई देखने को मिल जाएगी तो इसका आंसर रहेगा करेक्ट दैट इज ऑप्शन नंबर सी विल बी
द राइट आंसर ठीक है दूसरा सवाल यहां पर 2021 में पूछा गया अभी कुछ दो से तीन साल ही हुए हैं यहां पर
पूछा गया कि मान लीजिए बाकी सब चीजें सेम है ऑल द अदर थिंग्स रिमेनिंग अनचेंज्ड मार्केट डिमांड फॉर अ गुड माइट इंक्रीज
पूछ रहा है कब किसी वस्तु की डिमांड बढ़ सकती है बहुत ही ध्यान से करना है बहुत बच्चे ना ऐसे क्वेश्चन छोड़ के आ जाते हैं
पर मैंने जितना कांसेप्चुअली आपको समझाया है ना आई एम एक्सपेक्टिंग आप कभी ये क्वेश्चन में गलती नहीं करोगे एक एक ऑप्शन
को ध्यान से पढ़ते हैं पहले आते हैं स्टेटमेंट वन के ऊपर यहां पर कह रहा है कि सब्सीट्यूट का प्राइस बढ़ जाए अब याद करो
सब्सीट्यूट क्या था मैंने आपको बताया जैसे फॉर एग्जांपल चाय और
कॉफी ये सब क्या थे ये सब्सीट्यूट थे है ना एक को दूसरे ने सब्सीट्यूट कर दिया एक प्लेयर की जगह दूसरा सब्सीट्यूट आ गया
तो चाय और कॉफी थे सब्सीट्यूट मान लो मैं चाय को देख रहा हूं इसकी डिमांड को मुझे देखना है क्योंकि वही पूछ र ना डिमांड फॉर
अ गुड माइट इंक्रीज वो कह रहा है कि अगर मान लो इसका सब्सीट्यूट चाय का सब्सीट्यूट क्या होगा कॉफी वो कह रहा है चाय आपके जो
सब्सीट्यूट है उसके प्राइस बढ़ गया मुझे बताओ अगर कॉफी का प्राइस बढ़ गया कॉफी का प्राइस बढ़ गया तो कॉफी की डिमांड नीचे आ
जाएगी कॉफी महंगी हो चुकी है तो कॉफी लोग कम पिएंगे और लोग अगर कॉफी कम पिएंगे तो भाई चाय ज्यादा पिएंगे बिल्कुल ठीक बात है
तो क्या ये स्टेटमेंट सही हुई यहां पे पूछ रहा था डिमांड बढ़नी चाहिए हां बिल्कुल चाय की डिमांड बढ़ रही है क्यों कॉफी का
दाम बढ़ा कॉफी के कॉफी का प्राइस बढ़ा तो कॉफी की डिमांड कम होगी कॉफी की डिमांड कम हुई चाय की डिमांड बढ़ गई तो भाई
स्टेटमेंट वन तो बिल्कुल करेक्ट है नो डाउट अबाउट इट दूसरा स्टेटमेंट पे आओ दूसरा कह रहा है प्राइस ऑफ इट्स
कॉम्प्लीयंट पकौड़ा टी एंड पकड़ा ये थे कम्प्लीनोस ठीक है तीसरा स्टेटमेंट है आपका अगर वह
वस्तु एक इनफीरियर गुड है और जो इनकम है कंज्यूमर की व बढ़ जाए अगर मान लो मैं ज्यादा पैसे कमाने लग गया उस केस में क्या
होगा लेट्स से पहले मैं कमाता था 00 अब मैं कमाने लग गया 00 याद करो व एग्जांपल जब मैंने कहा था कि
हमें जाना है दिल्ली से चंडीगढ़ और पहले हम पता कैसे जाते थे हम जाते थे पब्लिक ट्रांसपोर्ट से बस में जाते थे
पहले अब बस क्या थी एक इनफीरियर गुड थी क्योंकि मुझे पसंद क्या है मुझे गाड़ी में जाना पसंद है अपनी खुद की कार के अंदर तो
पब्लिक ट्रांसपोर्ट क्या हुआ एक इनफीरियर गुड हुआ अगर मान लो मेरी इनकम बढ़ जाए तो क्या मैं उस इनफीरियर गुड यानी कि मैं बस
के अंदर ज्यादा ट्रेवल करूंगा या ना करूंगा क्या बस की डिमांड बढ़ेगी या नहीं बढ़ेगी नहीं बस की डिमांड कम हो जाएगी ना
क्यों क्योंकि बस एक इनफीरियर गुड थी मेरी कमाई जब बढ़ती है तो इनफीरियर गुड को मैं कम कंज्यूम करूंगा उसके जो अल्टरनेटिव है
या उससे जो बढ़िया चीजें हैं उसको मैं कंज्यूम ज्यादा करूंगा तो सर थर्ड स्टेटमेंट भी गलत है हां जी बिल्कुल
इसके अलावा चौथा स्टेटमेंट देख लेते हैं चौथा स्टेटमेंट क्या कह रहा है अगर मान लीजिए किसी वस्तु का दाम घटता है अगर किसी
चीज का प्राइस बढ़ेगा सॉरी प्राइस कम होगा प्राइस कम होने से उसकी डिमांड बढ़ती ही बढ़ती है ये तो हमें पता ही है तो लॉ ऑफ
डिमांड ही है चौथा बिल्कुल करेक्ट है इसका आंसर बनेगा ऑप्शन नंबर ए वन एंड फोर ओनली देखो हमने तो लेक्चर बहुत अच्छे से डिटेल
में पढ़ा हर एक कांसेप्ट को बहुत अच्छे से समझा तो हमें चारों के चारों स्टेटमेंट्स का पता था मान लेते हैं कल को कोई ऐसा
क्वेश्चन आ जाए जहां पर आपको सब स्टेटमेंट्स का नहीं पता उस केस में ना आप ऑप्शंस एलिमिनेट करने की कोशिश कर सकते हो
जैसे अगर आपको पता लग गया यार सेकंड स्टेटमेंट गलत है तो काफी हद तक आपने b और डी एलिमिनेट कर दिया अब आपको इस डाउट ए और
c में होगा या लेट्स से अगर आपको पता लग गया कि तीसरी स्टेटमेंट गलत है अगर आपने वो चीज प्रूफ कर दी तो ऑटोमेटिक आपका आंसर
तो मिल ही गया ऑप्शन नंबर ए वन एंड फोर ओनली तो व्हाट आई एम सजेस्टिंग टू यू इज कि पहली बात तो लेक्चर अच्छे से देखो ताकि
कोई कांसेप्ट मिस ही ना हो चलो ठीक है यार कई बार यूपीएससी ने कुछ पूछ लिया जो हमें नहीं पता पर जितना पता है उससे भी कई बार
हम अपने आंसर तक पहुंच सकते हैं इसीलिए मैं कह रहा हूं कि अगर आप मेरे साथ इन इकोनॉमी के लेक्चर को शुरू से लेकर एंड तक
देखोगे आज का चैप्टर की बात नहीं कर रहा पूरी बुक सीरीज को अगर मेरे साथ आप देखोगे आप रिलाइज करोगे कि हम ना बस इकॉनमी पढ़
नहीं रहे इकॉनमी को रियल लाइफ में इंप्लीमेंट कर रहे हैं आर यू गेटिंग द पॉइंट स्टार्टिंग ऑफ द लेक्चर में बोला था
इकॉनमी कुछ नहीं है चॉइसेज की स्टडी है क्या करना है क्या नहीं करना किस चीज से ज्यादा खुशी मिलती है किस चीज से कम खुशी
मिलती है कोशिश मेरी यही रही है आज के लेक्चर से कि आज की आपकी जो यूटिलिटी थी ना वो यूटिलिटी अच्छी खासी रही होगी ठीक
है कि आपने इस लेक्चर को देखा एंड आपको काफी कुछ सीखने को मिला तो अगर आप इस लेक्चर के अंड तक पहुंचे हो तो प्लीज मुझे
एक बार बता देना कि क्या आप लोग इस जो लाइन जो स्टार्टिंग ऑफ द लेक्चर मैंने यूज करी थी इकॉनमी इज टेक्निकल बट नॉट टफ क्या
आप इससे सहमत हो या नहीं हो क् कांसेप्ट बहुत सारे थे मार्जिनल यूटिलिटी मार्जिनल रिटर्न्स बहुत सारे कांसेप्ट क्लासिकल
इकोनॉमिक्स ये वो बहुत सारी चीजें थी पड़ी आज हमने क्या वो चीजें समझ आई रीजन बता क्या था हमने बस सोच लिया था ये मुश्किल
है मुश्किल है मुश्किल है मुश्किल है मुश्किल लगना ही था पर जब हमने एक-एक चीज को ब्रेक डाउन करके पढ़ने की कोशिश करी हर
एक चीज को एग्जांपल से पढ़ने की कोशिश करी तो हमें शायद वो चीजें ज्यादा अच्छे से समझ आई होंगी बाकी आप लोग मुझे बताइएगा
ठीक है फिर इसी तरह से मैं आपको आने वाले लेक्चर के अंदर मिलता हूं ये था आज का सेशन हमारा पहला टॉपिक था काफी डिटेल में
डिस्कस किया आने वाले टॉपिक्स भी अच्छे से हम कांसेप्चुअल क्राइटेरिया साथ डिस्कस करते रहेंगे थैंक यू वेरी मच फॉर जॉइनिंग
ऑल दी वेरी बेस्ट कीप अ इसी तरह से आप भी हार्ड वर्क करते रहिए थैंक यू
UPSC परीक्षा में मैक्रो इकॉनमिक्स पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है क्योंकि यह देश की समग्र आर्थिक स्थिति जैसे GDP, महंगाई आदि को समझने में मदद करता है। हालांकि, माइक्रो इकॉनॉमिक्स भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह व्यक्तिगत उपभोक्ता और फर्म के निर्णयों को समझाता है, जो प्रीलिम्स और मेंस में पूछे जा सकते हैं। अभ्यर्थियों को दोनों विषयों का संतुलित अध्ययन करना चाहिए।
डिमांड लॉ के तहत नॉर्मल गुड्स जैसे सामान्य वस्तुएं हैं जिनकी मांग कीमत बढ़ने पर घटती है। इसके अलावा, इलास्टिसिटी के संदर्भ में इलास्टिक और इनइलास्टिक गुड्स के उदाहरण जैसे लक्ज़री वस्तुएं या आवश्यक सामान मददगार होते हैं। सप्लाई लॉ के लिए उत्पादकों की कीमत बढ़ने पर उत्पादन बढ़ाने की प्रवृत्ति का विश्लेषण करना चाहिए। इन उदाहरणों से सिद्धांत बेहतर तरीके से समझ आता है।
मोनोपोली में एक ही विक्रेता होता है जो बाजार पर नियंत्रण रखता है, जिससे कीमतें नियंत्रित की जाती हैं और प्रतिस्पर्धा कम होती है। परफेक्ट कंपटीशन में कई विक्रेता होते हैं, कीमतें बाज़ार द्वारा तय होती हैं और प्रतिस्पर्धा अधिक होती है। प्रत्येक संरचना की विशिष्ट विशेषताएं और प्रभाव होते हैं जिन्हें UPSC परीक्षा के लिए समझना जरूरी है।
भारत की मिक्स्ड इकॉनमी में पूंजीवादी और समाजवादी तत्व दोनों शामिल हैं, जिससे आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय का संतुलन बनता है। 1991 के LPG (लिबरलाइज़ेशन, प्राइवेटीकरण, ग्लोबलाइज़ेशन) सुधारों ने भारतीय अर्थव्यवस्था को खोलकर विकास की गति तेज की। UPSC में इन विषयों को जानना आवश्यक है क्योंकि ये आर्थिक नीतियों और विकास को समझने में मदद करते हैं।
क्लासिकल थ्योरी स्वतंत्र बाजार और न्यूनतम सरकारी हस्तक्षेप की वकालत करती है, जबकि किनेशियन थ्योरी में कहा जाता है कि सरकारी सक्रिय हस्तक्षेप आर्थिक स्थिरता के लिए आवश्यक है। जॉन मीनार्ड किन्स ने इस विचारधारा की नींव रखी, जो आर्थिक मंदी में सरकारी खर्च बढ़ाने पर जोर देती है। UPSC की तैयारी में इन थ्योरीज को समझना आर्थिक नीतियों के लिए अहम है।
बिहेवियरल इकॉनमिक्स मनोविज्ञान के आधार पर आर्थिक निर्णयों को समझाता है, जैसे नज थ्योरी और पर्सुएशन तकनीकें। यह पारंपरिक आर्थिक मॉडल से अलग होता है और मानव व्यवहार की जटिलताओं को उजागर करता है। UPSC परीक्षा में यह विषय उम्मीदवारों को व्यवहारिक आर्थिक परिप्रेक्ष्य देने में मदद करता है।
फैक्टर्स ऑफ प्रोडक्शन में भूमि, श्रम, पूंजी और उद्यमिता शामिल हैं। इनका मूल्य निर्धारण क्रमशः रेंट, वेज, इंटरेस्ट और प्रॉफिट के माध्यम से होता है। UPSC की इकॉनमी तैयारी में इनके सिद्धांत और उदाहरण समझना बेहद जरूरी है क्योंकि ये आर्थिक उत्पादन की आधारशिला हैं।
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