SSB जीडी में क्लाइमेट चेंज और प्रदूषण पॉल्यूशन टॉपिक्स की पूरी तैयारी, environment and pollution GD topics
SSB जीडी और साक्षात्कार की तैयारी: पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन पर एक गहन विश्लेषण
इस वीडियो में SSB, AFSB और नेवी चयन बोर्ड जैसे परीक्षाओं में पूछे जाने वाले पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन और प्रदूषण (पॉल्यूशन) जैसे ओवरलैपिंग विषयों को एक प्रभावी और याद रखने में आसान संरचना के साथ पढ़ाया गया है। यह केवल सिद्धांत नहीं, बल्कि आपकी बात को मजबूत बनाने वाले उदाहरण, डेटा और ठोस रणनीति प्रदान करता है। इस तरह की तैयारी के लिए आप Mastering Group Discussions: Tips for Success in GD & Debates पर भी एक नज़र डाल सकते हैं।
किसी भी विषय को पेश करने की 4-स्टेप रणनीति
वीडियो एक शक्तिशाली और सार्वभौमिक तरीका (लेक्चरेट और GD दोनों के लिए) सिखाता है जिसका उपयोग किसी भी विषय पर प्रभावी ढंग से बात करने के लिए किया जा सकता है।
1. परिचय (Introduction)
- विषय की एक सरल और बुनियादी परिभाषा देकर शुरुआत करें।
- उदाहरण: "जलवायु परिवर्तन (climate change) का मतलब है लंबे समय में पृथ्वी के तापमान और मौसम के पैटर्न में होने वाला बदलाव।"
2. उदाहरण, कारण और प्रभाव (डेटा के साथ)
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जलवायु परिवर्तन (Climate Change)
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कारण (Causes):
- जीवाश्म ईंधन (coal, petrol, diesel) का जलना - इससे सबसे ज्यादा CO2 निकलती है।
- वनों की कटाई (Deforestation) - पेड़ CO2 सोखते हैं, इन्हें काटने से ग्रीनहाउस गैसें बढ़ती हैं। उदाहरण: अरावली पहाड़ियों में वनों की कटाई, हैदराबाद में शहरी परियोजनाओं के लिए पेड़ काटना।
- वाहन और उद्योगों से निकलने वाला धुआं।
- शहरीकरण (Urbanization) - गर्मी के द्वीप (heat islands) का निर्माण।
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प्रभाव (Effects) - अस्तित्व के लिए खतरा:
- हिमालयी ग्लेशियरों का पिघलना: ISRO की रिपोर्ट के अनुसार पिछले 50 सालों में लगातार हो रहा है।
- समुद्र का बढ़ता स्तर: IPCC की रिपोर्ट के अनुसार पिछले 100 सालों में लगभग 20 सेंटीमीटर बढ़ चुका है। इसी वजह से इंडोनेशिया को अपनी राजधानी जकार्ता से शिफ्ट करनी पड़ रही है।
- चरम मौसम: दिल्ली में मई 2024 में 49.9°C तापमान दर्ज किया गया (IMD रिपोर्ट)।
- बाढ़ और सूखा: पंजाब, हिमाचल, असम में लगातार बाढ़; महाराष्ट्र और राजस्थान में सूखा।
- स्वास्थ्य समस्याएं: श्वसन रोग, लंग कैंसर, हीट स्ट्रोक।
- किसानों की आत्महत्या: जलवायु परिवर्तन के कारण फसल खराब होने से पिछले दो दशकों में लगभग 4 लाख किसानों ने आत्महत्या की।
- आर्थिक प्रभाव:
- वायु प्रदूषण से संबंधित बीमारियों पर भारत को सालाना 2.6 लाख करोड़ रुपये का नुकसान (वर्ल्ड बैंक का अनुमान)।
- जलवायु परिवर्तन के कारण जीडीपी का 2.6% सालाना नुकसान (एशियन डेवलपमेंट बैंक की रिपोर्ट)।
- दिल्ली में प्रदूषण के कारण पर्यटन में 20-25% की गिरावट।
- शहरी सफाई और कचरा प्रबंधन पर दिल्ली सरकार द्वारा 2000 करोड़ रुपये खर्च।
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प्रदूषण (Pollution)
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परिभाषा: “प्रदूषण पर्यावरण में उन हानिकारक पदार्थों की उपस्थिति है जो मनुष्यों, जानवरों और पौधों को नुकसान पहुंचाते हैं।”
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प्रकार: वायु, जल, मृदा और ध्वनि प्रदूषण।
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कारण (Causes):
- पराली जलाना (Stubble Burning): पंजाब और हरियाणा में बड़ी समस्या, जिससे PM 2.5 निकलता है।
- औद्योगिक कचरा: कागज, रासायनिक और वस्त्र उद्योग जहरीला कचरा नदियों में बहाते हैं।
- सीवेज और घरेलू कचरा: यमुना नदी का 70-80% प्रदूषण सिर्फ दिल्ली के सीवेज और औद्योगिक कचरे से होता है। केवल 30-40% सीवेज का ही उचित उपचार होता है।
- प्लास्टिक: हर साल 11 मिलियन टन प्लास्टिक समुद्र में जाता है (UNEP रिपोर्ट)।
- ध्वनि प्रदूषण के कारण: निर्माण कार्य (100 डेसिबल तक), लाउडस्पीकर, और यातायात।
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प्रभाव (Effects):
- स्वास्थ्य पर प्रभाव: PM 2.5 फेफड़ों को नुकसान पहुँचाता है और कैंसर का कारण बनता है। WHO के अनुसार दुनिया भर में 7 मिलियन मौतें (जिसमें से 1.7 मिलियन भारत में) वायु प्रदूषण के कारण होती हैं।
- जल जनित रोग: प्रदूषित पानी से हैजा, टाइफाइड और डायरिया फैलता है (सालाना 5 लाख डायरिया से मौतें)।
- मृदा प्रदूषण: उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक प्रयोग से कैंसर और तंत्रिका संबंधी समस्याएं होती हैं।
- ध्वनि प्रदूषण: सुनने की क्षमता में कमी, तनाव और हृदय रोग।
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3. समाधान (Solutions) - सरकारी योजनाएं और व्यक्तिगत प्रयास
- ग्रीन इंडिया मिशन: वन क्षेत्र को बढ़ाने के लिए सरकारी कार्यक्रम।
- ईशा फाउंडेशन की पहल:
- कावेरी कॉलिंग मिशन – कावेरी नदी को पुनर्जीवित करने के लिए 2.42 बिलियन पेड़ लगाने का लक्ष्य।
- सेव सॉयल मूवमेंट – मृदा संरक्षण के लिए विश्व का सबसे बड़ा अभियान।
- स्वच्छ ऊर्जा में बदलाव:
- इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) का उपयोग बढ़ाना।
- कोयले की जगह सौर, पवन और नाभिकीय ऊर्जा को अपनाना। उदाहरण: भारत में पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने से 700 करोड़ लीटर कच्चे तेल के आयात में कमी।
- हरित बुनियादी ढाँचा (Green Infrastructure):
- प्लास्टिक का उपयोग करके सड़कें बनाना – 700-800 किमी सड़कों के लिए 33 टन प्लास्टिक का उपयोग किया जा चुका है।
- BS-6 उत्सर्जन मानक: वाहनों से निकलने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए।
- नदी सफाई: नमामि गंगे परियोजना (अब तक 42,000 करोड़ खर्च) और अन्य नदियों की सफाई के प्रयास।
4. निजी राय और निष्कर्ष (Personal Opinion & Conclusion)
- निजी राय (Last 30-45 Seconds):
- यदि समय बचे, तो विषय पर अपना अनुभव या स्थानीय उदाहरण साझा करें।
- उदाहरण: "मैं पंजाब में रहता हूं, पिछले 2-3 सालों में मैंने अचानक बाढ़ देखी है जो पहले नहीं आती थी। इससे लाखों लोग प्रभावित होते हैं।"
- निष्कर्ष (Conclusion): सभी बिंदुओं को संक्षेप में दोहराते हुए कहें कि जलवायु परिवर्तन और प्रदूषण दुनिया के लिए सबसे बड़ा खतरा है; इसे रोकने के लिए मजबूत पर्यावरणीय कार्रवाई और टिकाऊ विकास आवश्यक है।
ग्रुप डिस्कशन (GD) टिप्स और नई जानकारी
- मुख्य टिप: GD में किसी निष्कर्ष पर आना जरूरी नहीं है, बल्कि एक प्रभावी सदस्य के रूप में अपने मजबूत तर्क और डेटा के साथ भाग लेना महत्वपूर्ण है। एक बार कोई विषय (लीड) चुन लें, तो उसी पर अडिग रहें।
- नए GD विषय और अंतर्दृष्टि:
- विषय: विश्व, विशेषकर भारत, अनेक अस्तित्वगत और सुरक्षा चुनौतियों का सामना कर रहा है। इनमें से कौन सा तीन (जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण, आदि) सबसे खतरनाक है?
- इस GD के लिए ऊपर दिए गए प्रभावों (जैसे लाखों मौतें, कैंसर, किसान आत्महत्या) को प्रभावी ढंग से रखा जा सकता है।
- विषय: बढ़ती मुद्रास्फीति और मंदी का खतरा। वैश्विक आर्थिक मंदी को बढ़ावा देने वाला सबसे विनाशकारी कारक क्या है?
- यहां एक नई लीड सामने आती है: जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय तनाव (Climate Change & Environmental Stress)।
- तर्क: इसी प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन के कारण देशों को स्वास्थ्य सेवा, बुनियादी ढाँचे की मरम्मत और आपदा प्रबंधन पर अरबों खर्च करने पड़ रहे हैं, जिसका पैसा अन्य विकास कार्यों से हट रहा है, जिससे अर्थव्यवस्था सुस्त हो रही है।
- विषय: विश्व, विशेषकर भारत, अनेक अस्तित्वगत और सुरक्षा चुनौतियों का सामना कर रहा है। इनमें से कौन सा तीन (जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण, आदि) सबसे खतरनाक है?
अतिरिक्त महत्वपूर्ण जानकारी
- नाभिकीय ऊर्जा (Nuclear Energy):
- परिभाषा: परमाणु के नाभिक से निकलने वाली ऊर्जा।
- लाभ:
- बहुत कम कार्बन उत्सर्जन: इसे स्वच्छ ईंधन भी कहा जाता है।
- उच्च दक्षता: एक यूरेनियम छर्रे (लगभग 2.5 सेमी) से उतनी ऊर्जा निकलती है जितनी 120 गैलन तेल या 1 टन कोयले से।
- विदेशी ईंधन पर निर्भरता कम करना: भारत 80% कच्चा तेल आयात करता है, नाभिकीय ऊर्जा का उपयोग इस निर्भरता को कम कर सकता है।
- विश्वसनीय बिजली: ये रिएक्टर 24/7 काम करते हैं।
- कम जगह: सौर और पवन ऊर्जा की तुलना में बहुत कम भूमि की आवश्यकता होती है। इसके अलावा, अगर आप डेटा और तकनीकी नवाचारों पर अपडेट रहना चाहते हैं, तो Data Center Cooling Tech, India's R&D, and Current Affairs for UPSC पर पढ़ सकते हैं।
वी आर कवरिंग दैट आल्सो राइट देन ग्लोबल सी लेवल रोज़ बाय अबाउट 20 सेंटीमीटर इन लास्ट 100 ईयर आईपीसीसी की रिपोर्ट है जो
इंटर गवर्नमेंटल पैनल ऑफ ऑन क्लाइमेट चेंज है उन्होंने ये रिपोर्ट डाली है कि 20 सेंटीमीटर [संगीत]
से जो है हमारा ओशन का लेवल बढ़ चुका है इन कंफ्रंटेड विद मल्टीपल एग्ज़िस्टेंशियल एंड सिक्योरिटी चैलेंजेस ठीक है [संगीत] तो
एग्ज़िस्टेंशियल मतलब यहां पर हुआ जो थ्रेट टू सर्वाइवल है टू मेक इट इजी सिमिलरली पोलशन को हम डिवाइड करेंगे तो फर्स्ट वन
क्या हो जाएगा हमारा इंट्रो राइट सिंपल डेफिनेशन तो पॉल्यूशन इज दी प्रेजेंस ऑफ़ हार्मफुल सब्सटेंस सेस इन द एनवायरमेंट
पीएम ई ड्राइव स्कीम राइट सो अंडर दिस वेरियस इलेक्ट्रिक बसेस हैव बीन फ्लैग्ड ऑफ बाय दी स्टेट गवर्नमेंट्स मोस्ट
इन्फ्लुएंशियल फैक्टर शेपिंग दी अडॉप्शन ऑफ इलेक्ट्रिक व्हीकल ईवीस बोथ पॉजिटिवली एंड नेगेटिवली ठीक है ये एफएसबी गुहाटी
में आया था टॉपिक इंडिया इंपोर्ट अबाउट 45 टू 50% ऑफ एलजी हम जीडी में यूज़ करेंगे अराउंड 20% ऑफ ग्लोबल ऑयल ट्रेड पाससेस
थ्रू दिस रूट 60% ऑफ इट्स ऑयल थ्रू दिस रूट देन हम बता सकते हैं पेपगाडा सोलर प्लांट देन हम बता सकते हैं कि कैसे सोलर
प्लांट जो है वो बिल्कुल भी कार्बन इमिशन नहीं करता है। फिर हम पीएम रूफ टॉप स्कीम देन पीएम सोलर पार्क स्कीम इंडियन
गवर्नमेंट ने तो पहले ही टारगेट [संगीत] सेट कर रखा है कि हम अपना 50% बात करें कि विटामिन डी से हमें मिलता है। पूरा
एग्रीकल्चर सेक्टर हमारा जो है सनलाइट पर डिपेंड करता है। ठीक है? तो मसून रेनी सीज़ंस अकर फ्रॉम जून टू सप्टेंबर एंड
ब्रिंग्स हैवी [संगीत] रेनफॉल टू मोस्ट पार्ट ऑफ इंडिया। पढ़ने वाले हैं कि कैसे जो एआई बेस्ड सेंसर हैं वो हेल्प कर रहे
हैं इरीगेशन मैनेजमेंट में। तो वहां से आप पॉइंट उठा के यहां पे डाल सकते हैं। ड्रोन टेक्नोलॉजी भी आ चुकी है। ठीक है? सोइल
मैनेजमेंट के लिए और वायर्स जा रही हैं जो कि डायरेक्टली आपकी सॉइल के न्यूट्रिएंट्स और पीएच लेवल को आपके मोबाइल फोन पर जो है
मैसेजेस देती है रोड और इंडस्ट्रीज। ठीक है? ये समझ में आ गया हमें? देखिए ये एग्जांपल देखिए। ये लॉस ऑफ़ हैबिटेट कॉज
करता है। ठीक है? तो ये एक सस्टेनेबल डेवलपमेंट है। बट वाइल्ड लाइफफ़ प्रोटेक्शन एक्ट 1972। ये आप यूज़ कर सकते हैं। दैट
इंडियन कॉन्स्टिट्यूशन के पास क्या है? वाइल्ड लाइफफ़ प्रोटेक्शन [संगीत] एक्ट। वी आर गोइंग टू कवर ऑल दी टॉपिक्स व्हिच आर
रिलेटेड टू ऑनलाइन एआई साइबर व्हिच केम इन आवर [संगीत] एसएसबी एंड वी आर आल्सो गोइंग टू कवर सम ग्रुप डिस्कशन टॉपिक्स ओके नाउ
लेट्स स्टार्ट विद ई-कॉमर्स [संगीत] राइट चाहे वो ट्रेन बस फ्लाइट की हो तो आईआरसीटीced बस मेक माय ट्रेन डिजिटल
वर्जन है बुक्स का जो कि आप रीड कर सकते हैं किस पर स्मार्टफोन पर टैबलेट्स पर कंप्यूटर पर आप अपने स्मार्टफोन [संगीत]
डिवाइसेस के अंदर जो है बुक यू कैन कैरी उनसे रिलेटेड जो ग्रुप डिस्कशन के टॉपिक्स हैं हम उनको डिस्कस करेंगे टॉपिक देखते
हैं हम जो ओटी से रिलेटेड आया हुआ है। है कन्वीनियंस एंड ऑन डिमांड एक्सेस। तो ठीक है? तो सोशल में हमारे पास क्या है?
Facebook, Instagram, YouTube, आज तक NDTV, ऑल इंडिया रेडियो है ना? इंक्रीस फॉरेन टूरिस्ट और 9.2 मिलियन टूरिस्ट हमने
अट्रैक्ट करें। मिनिस्ट्री ऑफ़ टूरिज्म की रिपोर्ट है। तो टेंपल्स का नाम देख सकते हैं। तो वो सारे किसमें आ जाएंगे?
रिलीजियस के अंदर आ जाएंगे। इंपैक्ट ऑफ मूवीज और फिल्म, माय फेवरेट मूवी, सेंसरशिप इन मूवीज़ और व्हिच इंडस्ट्री
होल्ड्स द ग्रेटेस्ट पोटेंशियल टू अपलिफ्ट द लाइव्स ऑफ पीपल इन इंडिया। [संगीत] तो देखिए यहां पर लीड में देखिए क्या आ रहा
है फिल्म एंड एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री्स जो हैं यूज करेंगे अपने जीडी के अंदर कि कैसे बिलियंस [संगीत] ऑफ डॉलर इन्वेस्टमेंट आ
रही है तो तो क्यों नहीं हमारी इंडिया की जीडीपी ग्रोथ बढ़ेगी अगर सर्विस सेक्टर में हम कवर करने वाले हैं सोशल टॉपिक्स को
[संगीत] ठीक है चाहे वो जेन जी हो यूथ हो सबसे पहले हम स्टार्ट करते हैं जेन जी से जनरेशन जेड राइट सो इन डे [संगीत] सेवन वी
आर गोइंग टू कवर दी टॉपिक्स दैट आर रिलेटेड टू हेल्थ एंड फिटनेस ठीक है ठीक है तो ये एक ऐसा टॉपिक है जो हर एक बोर्ड
में देखने को मिला यहां पर स्कॉलरशिप मिलती है अराउंड 5 लाख तो आप देखेंगे [संगीत] कि विंटर गेम्स गेम्स के अंदर
हमने आज तक विंटर ओलंपिक्स में हमने आज तक एक भी मेडल नहीं जीता है। डाल सकते हैं। ठीक है? चलिए नेक्स्ट टॉपिक की तरफ चलते
हैं जो कि है इंडियन [संगीत] प्रीमियर लीग ऑन एज योगा कैपिटल ऑफ द वर्ल्ड। सिमिलरली वैक्सीन कैपिटल ऑफ द वर्ल्ड कौन है?
इंडिया है। इंडियन हेल्थ केयर सिस्टम क्या है? नेटवर्क है पब्लिक और प्राइवेट मेडिकल इंस्टीट्यूशन का हेल्थ केयर वर्कर्स का।
जो है नेशनल हेल्थ मिशन लाया गया था। देन जन औषधि [संगीत] स्कीम की अगर बात करें तो प्रोवाइड्स अफोर्डेबल जेरिक मेडिसिंस थ्रू
जन औषधि केंद्र वन नेशन वन इलेक्शन का टॉपिक देखने को मिलता है। देन हमारे पास आता है रिजर्वेशन सिस्टम इन इंडिया।
[संगीत] में हम पढ़ेंगे रेलवे प्राइवेटाइजेशन एंड फ्री बीस कल्चर और फ्री बीस पे भी जो है
जीडी का टॉपिक आता है। चलिए [संगीत] बात करते हैं इलेक्ट्रोल रिफॉर्म्स के बारे में। राइट? इन इंडिया मींस प्रोवाइडिंग अ
फिक्स्ड परसेंटेज [संगीत] ऑफ सीड्स। उस टाइम की गवर्नमेंट जहां पर प्राइम मिनिस्टर कौन थे? पी वी नरसिम्हा राव एंड
फाइनेंस मिनिस्टर थे डॉ. मनमोहन सिंह और ऑपरेशन वाइल ओनरशिप रिमेन विद गवर्नमेंट। कौन से हैं? न्यू दिल्ली रेलवे स्टेशन,
मुंबई, सीएसएमटी, अहमदाबाद स्टेशन और करते हैं और उससे जो है वो पैसा कमाते हैं। बट जो वो पैसा है उसका 45% तो सिर्फ फ्री बबी
में ही जा रहा है। G20, [संगीत] G7, क्वाड वीटो पावर वाला पॉइंट देंगे। ग्रुपिज्म एंड जियोपॉलिटिकल अलायंस। कंट्री सपोर्ट
देयर अलाइज़ इंस्टेड ऑफ़ न्यूट्रल डिसीजन। यूरोप का अगर आप ट्रेड देखेंगे ना तो इट इज़ अराउंड 135 बिलियन।
कि इंडियास रिलेशन विद इट्स नेबरिंग कंट्री। जहां पर होता है कि इंडिया अपने [संगीत] नेबरिंग कंट्रीज के साथ कैसे
रिलेशन अगर इंडिया को ग्रो करना है इवाकुएट किया [संगीत] लोगों को रिलीफ मटेरियल को सेंड किया गया इकोनमिक ग्रोथ
सोशियो कल्चर और रीजनल पीस के लिए बना था तो यहां पर एक जीडी का टॉपिक आएगा जहां पर बोला जाएगा आशियान सार्क जी20 बनाया गया
आशियान ठीक है चलिए अब रेिलिएट क्रॉप्स बनाई गई थी वर्ल्ड बैंक भी जो है लोन प्रोवाइड करता है कंट्रीज को सिमिलरली
इंटरनेशनल मॉनिटरी फंड भी जो है लोन प्रोवाइड करता है यूएसए बेल्जियम पोलैंड, नॉर्वे। तो देखिए इंडियन ओसियन और पेसिफिक
ओशियन की सेफ्टी सिक्योरिटी मेजर इन्वेस्टमेंट जो है पाकिस्तान को मिली अंडर दिस सीपैक प्रोजेक्ट। [संगीत]
राइट? सो इन डे 11 वी आर गोइंग टू स्टडी द टॉपिक्स रिलेशंस विद कंट्रीज। राइट? जैसे कि इंडिया, रशिया डिफेंस कॉपोरेशन में
क्या है? सिर्फ एग्जांपल याद रखने हैं। ठीक है? कोई भी पॉइंट याद नहीं रखना। सिर्फ एग्जांपल देखिए हम जो है T90 बीम
टैंक को यूज़ करते हैं। AK203 राइफल को यूज़ करते हैं। S400 को यूज़ करते हैं। ब्रमोस को यूज़ करते हैं। देन L70 एयर डिफेंस गंस
जो है वो भी इंडिया यूएसए का। तो वहां पर भी यही सेम कोऑपरेशन आने वाले हैं। तो इससे क्या होता है? देखो आपको बहुत ईजीली
आप लेक्चररी डिलीवर कर सकते हैं। इसमें याद रखो HQ9, [संगीत] HQ7 ये क्या है? लॉन्ग रेंज और शॉर्ट रेंज एयर डिफेंस
सिस्टम है। सबमरीन भी जो है बांग्लादेश ने दी है कि आप इंडियन ओशन में अपनी प्रेजेंस को बनाइए। राइट? देन टाइप 56 कॉर्बेट्स भी
है यहां पर जो बांग्लादेश को दिया है। तो बांग्लादेश को भी जो टैंक सबमरीन जेट्स मिसाइल कॉर्बेट्स देना हो तो इजराइल,
ईरान, यूएस कॉन्फ्लिक्ट हो, चाहे वो रशिया वर्सेस यूक्रेन हो और यहां पर हम पांच से ज्यादा ग्रुप डिस्कशन के टॉपिक्स को देखने
वाले हैं। रीजन क्या है? तो यहां पर हमने डिस्कस करा था। [संगीत]
सो डे वन एंड द चैप्टर इज़ एनवायरमेंट। सो ऑल दी लेक्चर टॉपिक्स दैट आर रिलेटेड टू दी एनवायरमेंट एंड केम इन आवर एसएसबी,
एएफएसबी, पीएसबी और नेवल सिलेक्शन बोर्ड वी आर गोइंग टू कवर इन दिस वीडियो। आल्सो दी ग्रुप डिस्कशन टॉपिक्स रिलेटेड टू दी
एनवायरमेंट वी आर कवरिंग दैट आल्सो राइट? सो फर्स्ट वी विल स्टार्ट विद क्लाइमेट चेंज एंड पोलुशन बिकॉज़ बोथ दीज़ टॉपिक्स
इंटररिलेटेड टू ईच अदर एंड ओवरलैप राइट? सो व्हेनएवर यू आर गिविंग अ लेक्चरेट टॉपिक इफ यू डिवाइड योर टॉपिक इंटू दीज़
पार्ट्स इट विल सिंपलीफाई योर लेक्चरेट। राइट? फर्स्ट यू हैव टू गिव दी इंट्रोडक्शन बेसिक डेफिनेशन ऑफ दैट टॉपिक
देन एग्जांपल्स कॉजेस इफेक्ट्स इफेक्ट्स लाइक इन पर्टिकुलरली क्लाइमेट चेंज व्हाट आर दी इफेक्ट्स ऑन ह्यूमन बीइंग्स व्हाट
आर दी इफेक्ट्स ऑन नेचर आर अर्थ एटमॉस्फेयर तो क्लाइमेट चेंज के अंदर वो सारी चीजें आ जाएंगी देन सॉल्यूशन हाउ वी
कैन मिटिगेट दी क्लाइमेट चेंज व्हाट आर दी स्टेप्स वी कैन टेक पॉलिसीज एंड लॉ दैट विल मिटिगेट क्लाइमेट चेंज हम सॉल्यूशन
में बात करेंगे एंड एट दी एंड जो लास्ट के हमारे 30 सेकंड्स हैं वी विल डिस्कस दी कंक्लूजन। सो इफ वी फॉलो दिस मेथड वी कैन
गिव लेक्चर रेट ऑन एनी टॉपिक वेरी ईज़ली। ठीक है? सपोज़ आप लेक्चर दे रहे हैं और आपने ये सारी चीजें कवर कर दी हैं। स्टिल
दी 30 टू 45 सेकंड्स आर लेफ्ट। इन दैट केस व्हाट वी कैन डू? वी कैन यूज़ आवर पर्सनल ओपिनियन। अब पर्सनल ओपिनियन क्या होता है?
ठीक है? तो कोई भी जो टॉपिक है लेक्चरेट का उसके ऊपर आपकी क्या समझ है और जो आपने ऑब्ज़र्व करा है खुद हम उसके ऊपर बात
करेंगे। सपोज मैं अगर एग्जांपल दूं लाइक क्लाइमेट चेंज की बात हो रही है। एज़ आई लिव नियर पंजाब एंड हरियाणा। आई हैव
ऑब्ज़र्व देयर इज़ अ फ्रीक्वेंट फ्लड इन दी लास्ट टू टू थ्री इयर्स। अर्लियर सच फ्लड्स वर नॉट दैट कॉमन बट नाउ दे आर
हैप्पेनिंग रेगुलरली। एंड दीज़ फ्लड्स आर अफेक्टिंग मिलियंस ऑफ पीपल। एंड देयर इज़ अ क्लियर एग्जांपल हाउ क्लाइमेट चेंज इज़
हैप्पेनिंग। सो देखिए मैंने ये चीज़ ऑब्ज़र्व करी थी। इसलिए मैं ये पॉइंट बोल पाया। सपोज़ आप एमपी में रहते हैं। सपोज यू
लिव इन गुजरात, केरला, असम तो आपने भी फ्लड्स देखी होंगी। एंड व्हाट यू हैव ऑब्जर्व्ड अबाउट दैट फ्लड्स यू कैन टेल
अबाउट दैट। देन सपोज़ हम एक्यूआई का एग्जांपल ले लेते हैं। राइट? द एक्यूआई ऑफ़ हरियाणा इटसेल्फ इज़ एवरेज इज़ अराउंड 150
टू 200। राइट? जो बहुत ज्यादा है। ठीक है? जो एक्यूआई है वो डायरेक्टली रिलेटेड है क्लाइमेट चेंज से। ठीक है? हम आगे उस पर
भी बात करेंगे। तो जो भी आपकी ऑब्जरवेशन है उस पर्टिकुलर टॉपिक से रिलेटेड हम वहां पर पर्सनल ओपिनियन में डाल सकते हैं। अगर
हम और एग्जांपल्स लें। सपोज अगर हमारे पास टॉपिक आ जाता है स्टार्टअप। तो स्टार्टअप के ऊपर क्या हो सकता है पर्सनल ओपिनियन?
कि आप जैसे मैं अगर यहां का एग्जांपल दूं तो जितनी भी हमारी पंजाब और हरियाणा की यूनिवर्सिटीज हैं चाहे वो पंजाब
यूनिवर्सिटी हो, चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी हो तो इन सब यूनिवर्सिटीज में क्या हो रहा है? देयर इज़ अ ट्रेंड कि स्टूडेंट्स हैं
दे आर फॉलोइंग दी स्टार्टअप एंड एंटरप्रेन्योरशिप पैशन रेदर देन फॉलोइंग दी ऑर्डिनरी जॉब्स व्हिच क्लियरली शोज़ दैट
हाउ दी स्टार्टअप इंडिया इज़ अफेक्टिंग एंड शेपिंग दी फ्यूचर। ठीक है? तो ये चीज़ जो थी वो मैंने ऑब्ज़र्व करी। सिमिलरली आप
एमपी या फिर बिहार में रहते हैं। आप पर्टिकुलरली किसी एनआईटी से पढ़े हैं। किसी भी पर्टिकुलर कॉलेज जो आपने अपने
कॉलेज में ट्रेंड देखा था स्टार्टअप से रिलेटेड सपोज आपने एक स्टार्टअप देखा था जो कि रिसाइकल के ऊपर रिसाइक्लिंग के ऊपर
काम करता था। तो आप उसका एग्जांपल भी वहां पर दे सकते हैं कि कैसे वो जंक मटेरियल को कन्वर्ट करके एक रिसाइकल प्रोडक्ट में
डालते थे। बिकॉज़ आपने ये एक्सपीरियंस को ऑब्जर्व करा है। ठीक है? तो जितनी भी पर्सनल चीजें आपने आपने उस पर्टिकुलर
टॉपिक से रिलेटेड देखी है, आप उसके ऊपर डाल सकते हैं। तो जो भी आपको लगता है दैट विल कम इंटू दी पर्सनल ओपिनियन। मेरे पास
30 टू 45 सेकंड्स हैं। हमारे सारे पॉइंट्स खत्म हो चुके हैं। तब आपको जो है पर्सनल ओपिनियन पे स्टिक करना है। राइट? अब टॉपिक
ई-बुक आ जाए। ठीक है? तो ई-बुक के ऊपर भी आप बता सकते हैं कि आपने जो भी ई बुक्स पढ़ी हुई हैं वो आप अपना पर्सनल
एक्सपीरियंस डाल सकते हैं। तो चलिए स्टार्ट करते हैं क्लाइमेट चेंज से। ठीक है? तो क्लाइमेट चेंज इज दी लॉन्ग टर्म
चेंज इन अर्थ टेंपरेचर एंड वेदर पैटर्न। बस ये दो चीजें याद रखनी है। क्या है? एक है अर्थ टेंपरेचर, वेदर पैटर्न। अर्थ
टेंपरेचर और वेदर पैटर्न का लॉन्ग पीरियड ऑफ टाइम में चेंज होना ही क्लाइमेट चेंज कहता है। तो अगर कोई भी आपसे पूछे तो
सिंपल है। अर्थ टेंपरेचर और वेदर पैटर्न का लॉन्ग पीरियड ऑफ टाइम में चेंज होना ही क्लाइमेट चेंज है। दैट्स ऑल। क्या
एग्जांपल्स हैं इसके? देखिए हिमालयन ग्लेशियर्स आर मेल्टिंग इन लास्ट 50 ईयर कंटीन्यूअसली बाय इंडियन स्पेस रिसर्च
ऑर्गेनाइजेशन। ठीक है? तो ये रिपोर्ट उन्होंने पब्लिश करी है। देन ग्लोबल सी लेवल रोज़ बाय अबाउट 20 सें.मी. इन लास्ट
100 ईयर। आईपीसीसी की रिपोर्ट है जो इंटर गवर्नमेंटल पैनल ऑफ ऑन क्लाइमेट चेंज है। उन्होंने ये रिपोर्ट डाली है कि 20
सेंटीमीटर से जो है हमारा ओशन का लेवल बढ़ चुका है इन लास्ट 100 इयर्स के अंदर। ठीक है? सो दिल्ली ने रिकॉर्ड करा है 49.9°
सेल्सियस इन मे 2024 वन ऑफ द हाईएस्ट टेंपरेचर एवर अकॉर्डिंग टू दी आईएमडी इंडियन मेटोलॉजिकल डिपार्टमेंट। ठीक है?
2026 में देखते हैं हम लोग कितना यार मे बी 50 पार कर जाए। ठीक है? तो आईएमडी रिपोर्टेड दैट इंडियास एवरेज टेंपरेचर
इंक्रीज्ड बाय 0.62 और 0.62 बहुत ज्यादा होता है। अगर पॉइंट वन भी बढ़ रहा है तो उससे काफी सारी जो स्पीशीज़ हैं उनमें
इफ़ेक्ट पड़ता है। ठीक है? तो ये एक अच्छा एग्जांपल हमारे पास आ जाता है। देन हमने देखा जैसे कि सीवियर फ्लड्स हुई हैं। चाहे
वो पंजाब में, हरियाणा, हिमाचल, आसाम। तो आप जहां से भी हैं आपने जो भी एक्सपीरियंस करा है इन फ्लड के बारे में आप बता सकते
हैं। ठीक है? इंपैक्टिंग मिलियंस ऑफ मिलियंस ऑफ पीपल कैजुअलिटीज हुई है जो। ठीक है? आईएमडी की रिपोर्ट। अब हम बात
करते हैं हीट वेव्स, फ्लड ड्रॉट अकरिंग वर्ल्ड वाइड एंड इंडिया ड्यू टू क्लाइमेट चेंज। आईपीसीसी एंड आईmडी क्लाइमेट
रिपोर्ट यह बताती है। तो इन सारे एग्जांपल से हमें क्या पता लगता है कि क्लाइमेट चेंज बहुत ही रैपिडली फैल रहा है। तो
एग्जांपल्स जो हैं जो हम जीडी में भी यूज़ कर सकते हैं वो कौन-कौन से थे कि हिमालयन ग्लेशियर आर कॉन्स्टेंटली मेल्टिंग दिस
रिपोर्ट इज़ गिवन बाय आईएसओ। देन ग्लोबल सी लेवल रोज़ एंड दिल्ली हैज़ रिकॉर्डेड वन ऑफ़ द हाईएस्ट टेंपरेचर 49.9° सेल्सियस एंड
0.62 टेंपरेचर हैज़ रोज़ इन लास्ट 100 इयर्स। देन आप बता सकते हैं फ्रीक्वेंट फ्लड्स इन आसाम, बिहार, हिमाचल, हरियाणा
में जो फ्लड्स होती हैं, चाहे वो गुजरात हो। ठीक है? देन हीट वेव्स हो रही है बहुत ऑफन। इतने सारे एग्जांपल्स आपको याद रखने
हैं। तो चलिए अब डिस्कस करते हैं कॉज। क्या ऐसे कारण हैं? क्या रीज़ंस हैं जिसकी वजह से जो क्लाइमेट चेंज है वो इतनी
रैपिडली ग्रो कर रहा है। सबसे पहले आता है बर्निंग ऑफ फॉसिल फ्यूल्स। ठीक है? तो बर्निंग ऑफ फॉसिल फ्यूल्स में क्या है?
फैक्ट्रीज, पावर प्लांट, कार्स एंड जनरेटर, बर्न कोल, पेट्रोल, डीजल, रिलीजिंग लार्ज अमाउंट ऑफ कार्बन
डाइऑक्साइड CO2। फॉर एग्जांपल इंडियास थर्मल पावर प्लांट एंड ग्रोइंग नंबर ऑफ व्हीकल इंक्रीस कार्बन इमिशन
सिग्निफिकेंट। तो अब हम सबको पता है कि कार्स की जो डिमांड है और कार्स की जो सेल है वो कांस्टेंटली इनक्रीस हो रही है। ठीक
है? यहां तक कि रिपोर्ट पब्लिश हुई कि चंडीगढ़ में जितने लोग नहीं है उससे ज्यादा पब्लिश्ड व्हीकल हैं। तो इससे क्या
पता लगता है हमें कि जो और जैसे ही हमारी पॉपुलेशन बढ़ रही है एनर्जी डिमांड भी बहुत हाई होने वाली है। तो हम पक्का फॉसिल
फ्यूल्स तो जलाएंगे। चाहे वो पावर प्लांट के अंदर हो, वो कार्स में हो, चाहे वो फैक्ट्रीज के अंदर हो। यहां तक कि अभी
स्टेट ऑफ़ हर्मल्स में जो एनर्जी क्राइसिस आया उसकी वजह से क्या हो गया? हमारी 180 सेरेमिक्स जो टाइल फैक्ट्रीज थी वो सारी
क्लोज्ड हुई। मतलब सब कुछ ही जो है हमारा किससे चल रहा है? फॉसिल फ्यूल से चल रहा है। तो पहला रीज़न क्या हुआ? फॉसिल फ्यूल
क्योंकि वो लार्ज अमाउंट ऑफ़ CO2 जो है अ इमिट करता है। ठीक है? रिलीज़ करता है। देन सेकंड क्या आ जाता है हमारे पास?
डिफॉरेस्टेशन। तो डिफॉरेस्टेशन में देखेंगे अगर हम तो कटिंग फॉरेस्ट रिड्यूसेस CO2 ऑब्जर्शन इंक्रीजिंग ग्रीन
हाउस गैसेस इन द एटमॉस्फेयर फॉर एग्जांपल डिफॉरेस्टेशन इन अरावली हिल्स। ठीक है? ये एग्जांपल हम अपने जीडी के अंदर यूज़ कर
सकते हैं। देन ट्री कटिंग इन हैदराबाद फॉर अर्बन प्रोजेक्ट्स। आपने देखा होगा वो केस जहां पर हैदराबाद यूनिवर्सिटी के अंदर जो
हमारा फॉरेस्ट एरिया था उसको कट किया जा रहा था टू मेक दिस यू नो प्रोजेक्ट्स जो हमारे अर्बन प्रोजेक्ट्स थे तो वहां पर
बहुत ज्यादा प्रोटेस्ट हुआ था तो वो एग्जांपल भी हम यूज़ कर सकते हैं थर्ड क्या है हमारे पास व्हीकल इमिशन अभी हमने बात
करी थी व्हीकल इमिशन पे ठीक देखिए व्हीकल रनिंग ऑन पेट्रोल डीजल रिलीज CO2 है ना तो यहां पर आप ये रिपोर्ट देख सकते हैं फॉर
एग्जांपल चंडीगढ़ हैज़ मोर रजिस्टर्ड व्हीकल्स देन इट्स पॉपुलेशन एंड इंडिया इज वन ऑफ दी लार्जेस्ट ऑटोमोबल मार्केट तो
यहां से ये पॉइंट भी हमें हमें क्लियर हो जाता है कि क्यों व्हीकल इमिशन इंडिया के अंदर इतना ज्यादा हो रहा है। ठीक है? देन
हमारे पास क्या जाता है? इंडस्ट्रियल इमिशन भी देख सकते हैं हम। इंडस्ट्रीज रिलीज़ ग्रीन हाउस गैसेस एंड पॉलटेंट्स
थ्रू फ्यूल बर्निंग एंड वेस्ट डिस्चार्ज। फॉर एग्जांपल शुगर मिल्स, पेपर मील, केमिकल इंडस्ट्रीज, CO2, पॉल्यूट रिवर एंड
एयर। देखिए जितनी भी फैक्ट्रीज़ हैं जो वेस्ट मटेरियल होता है डायरेक्टली ये डंप करती है हमारी रिवर्स के अंदर। ठीक है? या
फिर हमारे एनवायरमेंट में जिसकी वजह से जो है हमारा वेस्ट बहुत ज्यादा इंक्रीस होता है और और CO2 लेवल भी इनक्रीस होता है।
ठीक है? तो यह हमारे कुछ रीज़ंस थे। ठीक है? तो नेक्स्ट हम देख सकते हैं अर्बनाइजेशन। ठीक है? तो जैसे हमने बात
करी थी आवर पॉपुलेशन इज कास्टेंटली इंक्रीजिंग। आप देख सकते हैं अर्बनाइजेशन के लिए हमें उसके लिए स्काई स्कीपर की
जरूरत पड़ेगी और ज्यादा एंड ज्यादा से ज्यादा हमें कंस्ट्रक्शन करनी पड़ेगी। तो उसकी वजह से क्या होएगा? देखिए ग्रोथ एंड
पॉपुलेशन ग्रोथ इंक्रीस इमिशन एंड क्रिएट अर्बन हीट आइलैंड्स। ठीक है? तो ये कुछ रीज़ंस थे जिनकी वजह से क्लाइमेट चेंज बहुत
रैपिडली फैल रहा है। नाउ हम बात करते हैं सम इफेक्ट्स की। तो हीट वेव्स हमने बात करी। हीट वेव्स आर बिकमिंग मोर फ्रीक्वेंट
इंटेंस ग्लोबली कॉजिंग थाउजेंड्स ऑफ़ डेथ ईच ईयर। इंडिया के अंदर तो हो ही रही है। नॉर्थ इंडिया के अंदर चाहे दिल्ली में हो।
बट साथ-साथ अगर हम देखेंगे तो यूके के अंदर ठीक है? यूनाइटेड किंगडम में बहुत सारे केसेस आए जहां पर हीट स्पेशली इन
यूरोप में काफी ज्यादा डेथ्स भी देखने को मिली है। अकॉर्डिंग टू WHO ठीक। नाउ हम बात करते हैं इंक्रीजिंग फ्लड्स,
फ्रीक्वेंट फ्लड्स इन पंजाब, असम, हिमाचल अफेक्टिंग लैक्स ऑफ़ पीपल। हम बात कर चुके हैं राइजिंग सी लेवल। वार्मिंग ओशन कॉज
कोस्टल फ्लडिंग एंड लैंड लॉस इंडोनेशिया शिफ्टिंग कैपिटल ड्यू टू सी लेवल राइस थ्रेट। अभी हमने यहां पर देखा था कि जो
हमारा सी लेवल है वो 20 सें.मी. से रेज हो गया है। ठीक है? देखिए यहां पे 20 सें.मी. से रेज़ हो चुका है इन लास्ट 100 इयर्स की
एवरीज़। तो यही रीज़न है कि जो उनकी कैपिटल थी इंडोनेशिया जकार्ता वहां से वो कैपिटल चेंज करके अपनी क्या कर रहे हैं? नूस
संतारा कर रहे हैं। उसका रीज़न यही है कि जो उनके आइलैंड नेशन है वो कांस्टेंटली डूबते जा रहे हैं। और इंडोनेशिया तो वैसे
ही जो नेशन है काफी सारे आइलैंड से बना हुआ है। ठीक? देन नेक्स्ट को हम देखेंगे हेल्थ प्रॉब्लम्स इनक्रीस इन रेस्पिरेटरी
डिसीज हीट स्ट्रोक्स। अभी हमने यहां बात करी हीट वेव्स की वजह से जो हीट स्ट्रोक्स आ रहे हैं इनफेक्शन, लंग प्रॉब्लम्स ड्यू
टू क्लाइमेट चेंज। अगर आप सिंपल ये लिख देंगे ना कि लंग कैंसर इन दिल्ली आपको इतने केसेस मिलेंगे। राइट? तो
[नाक से की जाने वाली आवाज़] यस इट इज़ एक्चुअली हैपनिंग। देन पुअर एयर क्वालिटी बताने की जरूरत नहीं है। ठीक है? हर एक
सिटी आप देख सकते हैं वहां पर क्या चल रहा है? एवरेज टेंपरेचर और एवरेज एयूआई। ठीक है? तो एक्यूआई अबव 400 इन दिल्ली। ठीक
है? तो ये तो है ही देन ड्रॉट एंड वाटर शॉर्टेज फ्रीक्वेंट ड्रॉट इन महाराष्ट्र एंड राजस्थान कॉजिंग वाटर स्केरसिटी एंड
फार्मर सुसाइड केसेस। ठीक है? अगर हम देखेंगे तो अराउंड 4000 डेथ ठीक है? 2023 में हमें सिर्फ महाराष्ट्र में देखने को
मिली है। कर्नाटक के अंदर अराउंड 2500 डेथ्स है। तो देखिए एग्जैक्ट नंबर याद नहीं करना होता है क्योंकि जीडी में आपको
कभी एग्जैक्ट नंबर याद नहीं आने वाला है। ठीक है? तो आप अप्रोक्स में बोल सकते हैं अराउंड 4000 डेथ इन महाराष्ट्र। अराउंड
2500 डेथ इन कर्नाटका। एंड इन लास्ट टू डिकेड्स अगर हम देखें तो 4 लाख फार्मर्स की जो एग्रीकल्चर लेबर्स हैं दे डाइड बाय
सुसाइड। ठीक है? बिकॉज़ ऑफ़ दी देखिए इसका रीज़न क्या है? रीज़न अगर हम देखें तो जो इन्होंने डेप्ट लिया होता है, डेप्ट से
क्या करते हैं? फार्मिंग फार्मिंग एक्टिविटीज़ करते हैं। बट जब क्रॉप्स डैमेज होती है। अब क्रॉप डैमेज क्यों होती है?
या तो देखिए जब क्लाइमेट चेंज इतनी हीट वेव्स पड़ेगी तो इतनी हमारी जो क्रॉप्स हैं वो नहीं झेल सकती इतनी हीट को। देन
फ्रीक्वेंट फ्लड्स जो हमारे साइक्लोनस आते हैं उससे और इराटिक रेनफॉल होती है या फिर रेनफॉल जो सीजन रेनफॉल का नहीं है उसमें
भी हमें रेनफॉल देखने को मिल रही है। तो यही कुछ रीज़ंस हैं जिनकी वजह से इनकी जो हमारी क्रॉप्स है वो डैमेज होती है और इट
लेड टू सुसाइड। पंजाब के अंदर भी हम देख सकते हैं 16,600 फार्मर्स सुसाइड इन द स्टेट फ्रॉम 2000। तो यह कुछ डाटा है आप
यूज कर सकते हैं अपने जीडी में कि लाइक 4000 डेथ इन महाराष्ट्र एंड 4 लाख डेथ इन लास्ट टू डिकेड्स इंडिया हैज़ सीन एंड
अराउंड 16000 डेथ इन पंजाब ड्यू टू दी क्लाइमेट चेंज इफेक्ट तो हमने ये बात कर ली इफेक्ट्स क्या-क्या थे अब हम बात करते
हैं इकोनमिक इफेक्ट्स के देखिए जो ये इकोनमिक इफेक्ट्स है ना ये जो स्लाइड है ये मैंने पॉल्यूशन से उठाई है जब हम पोलशन
करेंगे तो यही स्लाइड दोबारा रिबिल्ट होएगी तो वही है ये दोनों ओवरलैप करते हैं इसलिए ये स्लाइड यहां पर तो हेल्थ केयर
कॉस्ट इंडिया लूजेस 2.6 लाख करोड़ ईयर ड्यू टू एयर पॉल्यूशन रिलेटेड डिजीज वर्ल्ड ल्ट बैंक का एस्टीमेट है ये। ठीक
है? तो ये हम अपने जीडी में यूज़ कर सकते हैं। अभी हम आगे देखेंगे कैसे 2.6 लाख करोड़ जो है हमारे वेस्ट होते हैं। इंडिया
में लूज़ 2.6% ऑफ इट्स जीडीपी एनुअली बाय50 ड्यू टू क्लाइमेट चेंज। ये किसकी है? एशियन डेवलपमेंट बैंक की रिपोर्ट है।
हमारे पास आता है दिल्ली स्मोग एपिसोड रिड्यूसेस टूरिस्ट। देखिए जब दिल्ली में स्मोग अराउंड 500 एकक्यूआई जाती है, 400
एक्यूआई जाती है। तो उससे क्या होता है? जो हमारे टूरिज्म होते हैं बिकॉज़ इंटरनेशनल फ्लाइट डायरेक्टली कहां? दिल्ली
में ही लैंड करेगी। ठीक है? दिल्ली एयरपोर्ट है। तो वहां पर जब इतना एक्यूआई है तो जो हमारे टूरिस्ट होंगे वो क्यों
आना पसंद करेंगे? ठीक है? और दिल्ली के साथ अगर आप देखेंगे आगरा भी पास में है। आगरा में वैसे ही बहुत ज्यादा टूरिज्म है।
तो ये एक रीज़न है जिसकी वजह से 20 टू 25% जो है हमारा टूरिस्ट जो है रिड्यूस हो रहा है बिकॉज़ ऑफ़ पॉल्यूशन देन अर्बन क्लीनिंग
एंड वेस्ट मैनेजमेंट। देखिए दिल्ली गवर्नमेंट 2000 करोड़ 2000 करोड़ स्पेंड करती है मनसिपल सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के
अंदर। तो तो इससे हम क्या देख सकते हैं कि बिकॉज़ ऑफ़ आवर ग्रोइंग पापुलेशन वेस्ट मैनेजमेंट बहुत ज्यादा और उसे काउंटर करने
के लिए हमें थाउजेंड्स ऑफ करोड़ वी हैव टू स्पेंड इन अर्बन क्लीनिंग एंड वेस्ट मैनेजमेंट। ठीक है? तो जैसे हमने बात करी
थी कि 2.6 लाख करोड़ ईयरली ड्यू टू एयर पॉल्यूशन और हमारा जो क्लाइमेट चेंज है उससे कैसे अफेक्ट हो रहा है लेट्स सी दैट
तो देखिए जैसे एग्रीकल्चर लॉस इर्रेगुलर रेनफॉल ब्रॉट फ्लड्स लो यील्ड लैक्स ऑफ करोड़ होगा ठीक है इंफ्रास्ट्रक्चर रोड
ब्रिजेस रेलवे डैमेज होता है जब फ्लड आती हैं ठीक है उनको रिपेयर करने के लिए रिबिल्डिंग की कॉस्ट होती है हेल्थ कॉस्ट
हीट वेव्स होंगी पोलशन होंगी डिसीज होंगे जैसे केसेस बढ़ रहे हैं तो पक्का क्योंकि हमारी पॉपुलेशन बाय 20050 कितनी ओनली 160
करोड़ तो उस हिसाब से अगर हम देखें तो हमें हेल्थ केयर इंफ्रास्ट्रक्चर भी वैसा ही चाहिए। ठीक है? तो प्रोडक्टिविटी लॉस
अगर हम बात करें एक्सट्रीम हीट रिड्यूसेस वर्किंग आवर्स। बिल्कुल लेबर कैसे काम करेगा? जब इतनी हीट जब 50° सेल्सियस
टेंपरेचर जाएगा तो तो इन सबको अगर हम कलेक्टिवली देखें ठीक है? एनर्जी वाटर स्ट्रेस डिजास्टर मैनेजमेंट तो ये हमारा
2.6 लाख करोड़ का इंपैक्ट देखने को मिलेगा हमें। ठीक है? तो ये हमारे कुछ इकोनमिक इफेक्ट्स थे जो हमने बात करी। तो चलिए अब
हम बात करते हैं सॉल्यूशन के ऊपर। ठीक है? तो सॉल्यूशन में सिंपल-सिंपल पॉइंट्स हैं। ये हमने जीडी के अंदर भी यूज कर सकते हैं।
जैसे कि ग्रीन इंडिया मिशन एंड नेशनल अफॉरेस्टेशन प्रोग्राम गवर्नमेंट प्रोग्राम टू अफॉरेस्ट डिग्रेडेड फॉरेस्ट
लैंड। देन हमारे पास क्या आ जाता है? ईशा फाउंडेशन इनिशिएटिव कावेरी कॉलिंग। राइट? तो ये फाउंडेशन जो है हमें पता है सद्गुरु
द्वारा चलाई जाती है। ठीक है? तो ईशा फाउंडेशन ने इनिशिएटिव लिया है कि दे आर गोइंग टू प्लांट अराउंड 2.4 बिलियन ट्रीज़
टू रिवाइव कावेरी रिवर्स। और रिसेंटली रिपोर्ट आई है कि जिसमें बताया गया है कावेरी रिवर बाय 20050 इज़ गोइंग टू अ
वैनिश। राइट? जैसे कि हमारी लूनी और सरस्वती रिवर पूरी खत्म हो चुकी है। वैसे ही कावेरी रिवर हो जाएगी। इसलिए कावेरी
कॉलिंग प्रोजेक्ट हमें चाहिए और कावेरी प्रोग्राम भी जो है गवर्नमेंट स्टार्ट कर रही है। देन हमारे पास आ जाती है ग्रो
ट्रीज एनजीओ। राइट? सो व्हनेवर वी आर सिंग इन जीडी हमें एनजीओस के एग्जांपल पता होने चाहिए। हर टॉपिक से रिलेटेड जो एनजीओ काम
कर रही है। बिकॉज़ एनजीओ बहुत इंपॉर्टेंट रोल प्ले करती है। राइट? तो यहां पर ये नाम बहुत सिंपल है। ग्रो ट्री एनजीओ। ठीक
है? नेशनल अफॉरेस्टेशन प्रोग्राम बहुत सिंपल है। याद रहेगा। ईशा फाउंडेशन का नाम याद रहेगा। ठीक है? तो ग्रीन इंडिया मिशन।
तो ये चार तो जरूर याद रखने हैं। सॉलिड एंड वेस्ट टू वेल्थ मिशन आ रहा है। कन्वर्ट वेस्ट इंटू यूज़फुल प्रोडक्ट
रिसाइक्लिंग ट्रीटमेंट। राइट? अब इलेक्ट्रिक व्हीकल्स का यूज़ करो ज्यादा से ज्यादा। बिकॉज़ फॉसिल फील्ड नहीं यूज़ होगा
उसमें। तो देखिए Tata, Ola, AT Ka, Hyundai कितनी सारी जो हमारी कार्स हैं, स्कूटी है वो इलेक्ट्रिक बेस आ रही है। तो
ये हम यहां पर बोल सकते हैं इलेक्ट्रिक व्हीकल्स का यूज़ करना। करते हैं ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर की। राइट? जिसमें हम
सस्टेनेबल डेवलपमेंट करें। ठीक? स्मार्ट सिटी प्लानिंग, यूज़, पब्लिक ट्रांसपोर्ट, रिड्यूस ट्रैफिक एंड कंट्रोल पोलशन। ठीक
है? तो ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर में मैं बात करता हूं कैसे? देखिए प्लास्टिक यूज्ड इन नेशनल हाईवे तो यह आप अपनी टैट की स्टोरीज
में भी लिख सकते हैं। जैसे हमारे पास आईडियाज नहीं आते ना तो यह बहुत अच्छा आईडियाज है कि कैसे गवर्नमेंट ने
प्लास्टिक को यूज करते हुए रोड्स बनाई है। देखिए 33ाउ टन्स ऑफ प्लास्टिक हैज़ बीन यूज्ड टू बिल्ड 700 टू 800 कि.मी. ऑफ़ रोड
इंक्लूडिंग जो हमारे इंडिया का सबसे बड़ा हाईवे है। जो हमारा प्लास्टिक होता है, उसको आपने क्रश करके बिटुमिन के साथ मिक्स
कर दिया है। और इस तरीके से आप प्लास्टिक रोड्स बना सकते हैं। ठीक है? तो ये हमारा किसके अंदर आ जाएगा? ये हमारा आ जाएगा
ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर के अंदर। आप ऐसे वेस्ट मैनेजमेंट करते हुए कंस्ट्रक्शन कर सकते हैं। लेकिन अगर हम देखें तो इंडिया
एम्स टू अचीव 500 गीगाइट्स ऑफ रिन्यूएबल एनर्जी कैपेसिटी बाय 2000 रिन्यूएबल एनर्जी इंक्लूड सोलर विंड, हाइड्रो,
बायोमास और ग्रीन एनर्जी। ठीक है? कुछ रिपोर्ट्स ये भी बताती है कि इंडिया कोशिश कर रहा है कि बाय 20130 वी विल शिफ्ट
अराउंड 50% ऑफ इलेक्ट्रिसिटी बाय रिन्यूल सोर्स ऑफ़ एनर्जी। ठीक है? तो ये पॉइंट जो है अब जीडी के अंदर यूज़ कर सकते हैं। नाउ
क्लीन एनर्जी राइट? शिफ्ट इंडस्ट्री फ्रॉम कोल टू सोलर विंड एंड नेचुरल गैस। तो रिसेंटली जो हमने एनर्जी क्राइसिस देखा है
स्टेट ऑफ हरमोस और ईरान, यूएसए और इजराइल वॉर की वजह से तो प्राइम मिनिस्टर हैज़ आल्सो इशूड अ स्टेटमेंट जहां पर उन्होंने
बताया कि हमने 700 करोड़ लीटर्स ऑफ जो फ्यूल है क्रूड ऑयल है हमने कम इंपोर्ट करा और 1.5 लाख करोड़ जो हमने सेव करे अपने
बिकॉज़ हमने उसमें एथेनॉल फ्यूल को ब्लेंड करा है। तो दैट इज़ अ वेरी ग्रेट एग्जांपल हाउ वी यूज़्ड दी क्लीन एनर्जी। तो बात
करते हैं अब कंक्लूजन की। की तो कंक्लूजन में वही बात है क्लाइमेट चेंज इज़ द बिगेस्ट थ्रेट इन द वर्ल्ड टुडे। इट
अफेक्ट्स अर्थ एंड ऑल लिविंग बीइंग्स। कोई इशू नहीं आना चाहिए इसमें। ठीक है? द ह्यूमैनिटी, एनवायरमेंट और कॉजिंग
डिजास्टर वेरीेंट टू टॉक अबाउट। बट हमें अपने एनवायरमेंट का ध्यान भी रखना है। उसमें कोरल री्स हो, चाहे वो ओशन हो
फिशरीज हो। ठीक है? जो हमारी मरीन लाइफ्स हैं हमें उसको भी देखते हुए चलना है। ठीक है? देन वी मस्ट टेक स्ट्रांग एनवायरमेंटल
एक्शन टू सेव अर्थ एंड सस्टेनेबल डेवलपमेंट इज़ नेसेसरी फॉर फ्यूचर। ये था हमारा क्लाइमेट चेंज। अब हम अपने नेक्स्ट
टॉपिक की तरफ चलते हैं जो कि है पॉल्यूशन। ठीक है? सो पॉल्यूशन को भी हम जैसे हमने क्लाइमेट चेंज को डिवाइड करा छोटे पार्ट्स
में। ठीक है? टू मेक इट इजी। सिमिलरली पोल्यूशन को हम डिवाइड करेंगे। तो फर्स्ट वन क्या हो जाएगा हमारा? इंट्रो। राइट?
सिंपल डेफिनेशन। देन टाइप्स। क्योंकि पॉल्यूशन में हमें टाइप्स देखने को मिलती है। चाहे वो वाटर पॉल्यूशन, एयर पॉल्यूशन,
नॉइज़ पॉल्यूशन, सइल पॉल्यूशन। ठीक है? अब कॉज क्या-क्या हैं पॉल्यूशन के? फिर हम उसको डिस्कस करेंगे। एंड देन हमारे पास आ
जाते हैं इफेक्ट्स। ठीक है? कि क्या इफेक्ट्स हैं ह्यूमन पर, प्लांट्स पर, एनिमल पर, पॉल्यूशन के। एंड व्हाट आर दी
सॉल्यूशन टू कब द पोल्यूशन? एंड एट द लास्ट 30 सेकंड हम कंक्लूजन की बात करेंगे। इंट्रोडक्शन और डेफिनेशन।
पॉल्यूशन इज दी प्रेजेंस ऑफ हार्मफुल सब्सटेंसेस इन दी एनवायरमेंट। तो बस इस पर एम्फेसिस करना है। जो भी हार्मफुल
सब्सटेंसेस हमारे एनवायरमेंट के अंदर प्रेजेंट है जो कि अफेक्ट कर रहे हैं। किसको? हार्म कर रहे हैं ह्यूमन बीइंग्स
को, एनिमल्स को, प्लांट्स को। तो पॉल्यूशन इज दी प्रेजेंस ऑफ हार्मफुल सब्सटेंसेस इन दी एनवायरमेंट दैट हार्म्स ह्यूमन एनिमल
एंड प्लांट्स। ठीक है? तो हार्मफुल सब्सटेंसेस एनवायरमेंट के अंदर जो कि हार्म कर रहे हैं ह्यूमन एनिमल प्लांट्स।
आई थिंक ये डेफिनेशन याद हो चुकी होगी अब तक। नाउ जो ये पीएम 2.5 और पीएम 10 है पार्टिकुलेट मैटर। ये बार-बार आएगा। तो
इसे एक बार हम देख लेते हैं। तो क्या होता है जब भी कोई भी एयर पॉल्यूशन होता है तो एयर पोल्यूशन के अंदर जब कार्बन इमिशन
होता है या फिर हम कोई भी चीज़ बर्न करते हैं तो उसमें से क्या है? पीएम 2.5 रिलीज़ होता है। अ पार्टिकुलेंट मैटर 2.5 ये हम
नेकेड आई से नहीं दे सकते। माइक्रोस्कोपिक होते हैं। काफी छोटे होते हैं। ठीक है? तो सिमिलरली पीएम 10 ये जो कंस्ट्रक्शन
एक्टिविटीज होती है वहां पर जितना भी हमारा जो पोलटेंट्स उड़ते हैं ना पीएम 10 होता है उसके अंदर। और ये डायरेक्टली क्या
करता है? हमें इन्हेल करता है क्योंकि बहुत छोटा मैटर होता है ये। और लंग्स में जाके हमारे लंग्स को डैमेज करता है। इसलिए
ये इन चीजों का नाम बार-बार आएगा पीएम 2.5 और पीएम 10। ठीक है? तो ये हमें ध्यान रखना है। अह टाइप्स देख ली हमने एयर वाटर
सॉइल नॉइज़। ठीक है? तो अब हम बात करते हैं कॉज की। तो एयर पॉल्यूशन। ठीक? एयर से स्टार्ट करते हैं। फ़र्स्ट आता है हमारे
पास स्टबल बर्निंग। राइट? तो स्टबल बर्निंग क्या होता है? दी बर्निंग ऑफ़ दी रेज़ड्यू ऑफ़ दी क्रॉप्स। जितनी भी हमारी
क्रॉप्स होती हैं जितने एग्रीकल्चर स्टेट हो गए चाहे वो हरियाणा, पंजाब, बिहार, उत्तर प्रदेश हो गए तो वहां पर जितना भी
एग्रीकल्चर लैंड है, वहां पर जो क्रॉप्स को ग्रो किया जाता है। देन उसका जो रेजिड्यू जो बचा हुआ हिस्सा होता है उसे
बर्न कर दिया जाता है। जो बर्न करने के बाद वो स्मोक जो है वो ऊपर जाकर एक क्लाउड फॉर्म कर लेता है। जिसकी वजह से जो एयर
क्वालिटी बहुत ज्यादा खराब हो जाती है। ठीक है? तो यह हो गया स्टबल बर्निंग। अब फिर पीएम इसमें से भी जो है पीएम 2.5
रिलीज होता है। ठीक है? पीएम 10 हमने देखा पार्टिकुलरेंट मैटर जो कंस्ट्रक्शन एक्टिविटी वहां से होता है। अब ये जो
सल्फर डाइऑक्साइड, ओजोन और कार्बन डाइऑक्साइड है ये हमारा कहां से होता है? व्हीकल का जितना भी इमिशन होता है या
बर्निंग ऑफ फॉसिल फ्यूल्स होता है। ठीक है? फैक्ट्री के अंदर जो थर्मल पावर प्लांट हो एयर पोल्यूशन के अंदर कौन-कौन
से हार्मफुल मटेरियल्स हैं? पीएम 2.5, पीएम 1010, सल्फर डाइऑक्साइड, ओजोन, कार्बन डाइऑक्साइड। ठीक है? तो पीएम 2.5
पीएम 10 ओजोन सल्फर डाइऑक्साइड कार्बन डाइऑक्साइड आई थिंक ये भी याद हो गया होगा। नाउ वाटर की बात करें तो केमिकल एंड
डिटर्जेंट वेस्ट सीवेज वेस्ट एंड इंडस्ट्रियल वेस्ट। क्योंकि ये जो सीवेज वेस्ट और इंडस्ट्रियल वेस्ट है ये मेजर
रीजन है हमारी जितनी भी रिवर्स हैं उनको पॉल्यूट करने का। राइट? इवन दी जो हमारी रिवर गंगा है और जो रिवर हमारी यमुना है
वो भी मेजरली पॉल्यूट जो है वो सीवेज वेस्ट और इंडस्ट्रियल वेस्ट की वजह से ही है। जो हमारा पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड है
वो बहुत बार इस चीज को मेंशन कर चुका है। अब सॉइल की बात करें तो इंडस्ट्रियल फर्टिलाइजर एंड वेस्ट देखो इंडस्ट्री जो
होती है जो उनका वेस्ट मटेरियल होता है वो डंप कर देती है सॉइल के अंदर ठीक है किसी खाली लैंड पे देन जो हम बार-बार
फर्टिलाइजर यूज़ करते हैं ठीक है यूरिया यूज़ करते हैं उससे क्या होता है सॉइल की फर्टिलिटी रिड्यूस होती है उसे हम क्या
बोलते हैं तो सॉइल पॉल्यूशन हो गया वो माइनिंग एक्टिविटी जो हम कॉन्स्टेंटली करते रहते हैं उससे भी सइल बहुत ज्यादा
डैमेज होती है इलेक्ट्रॉनिक वेस्ट देखिए सोनिक वेस्ट की ठीक है सो एव्री ईयर अराउंड 10 टू 15 करोड़ ऑफ़ इलेक्ट्रॉनिक
आइटम्स बीइंग सोल्ड इन इंडिया ओनली ठीक है तो अब जब आप यूज़ कर रहे हो 10 से 15 करोड़ इलेक्ट्रॉनिक आइटम्स तो एक दिन तो वो खराब
होंगे तो वो कहां वो भी डंप कर दिए जाते हैं सइल में देन प्लास्टिक तो हम जानते ही हैं तो इस तरीके से सॉइल जो है हमारी
डिग्रेड हो रही है कांस्टेंटली तो अब हम बात करते हैं नॉइज़ पोलशन की ठीक है तो कंस्ट्रक्शन एक्टिविटी हो जाती है तो
कंस्ट्रक्शन से तो हमने ये भी देखा था पीएम 10 पार्टिकुलेट मैटर 10 रिलीज़ होता है और कंस्ट्रक्शन इटसेल्फ मेजर कॉज़ है जो
नॉइज़ पोलशन का क्योंकि यहां पर जो फ्रीक्वेंसी 100 डेसीबल तक जाती है तो सबसे ज्यादा अगर कोई नॉइज़ पोलशन करता है
वो कंस्ट्रक्शन एक्टिविटी है। दूसरे नंबर पे क्या है? स्पीकर्स और साइरेंस जो है हम अब देखते हैं कस हमारी सिटीज में ठीक है
स्ट्रीट्स पे तो वो जो है वो दूसरा रीज़न हो गया तीसरा हम जितना भी ट्रैफिक है चाहे वो रेलवेेज के थ्रू हो चाहे वो एयरप्लेंस
का हो चाहे वो व्हीकल का हो ठीक है तो ये सारा नॉइज़ पोलशन के अंदर आ गया तो हमने मेजरली देख लिया कि एयर पोलशन स्टबल
बर्निंग से कॉज होता है कार्बन इमिशन जो कि व्हीकल से किया जाता है चाहे वो फैक्ट्रीज के द्वारा किया जाता है बर्निंग
ऑफ फॉसिल फ्यूल्स सारी इंडस्ट्री जो है वो इसी पे चल रही है तो एयर पोल्यूशन और एयर पोल्यूशन के अंदर अंदर हमने पढ़ा पीएम 2.5
पीएम 10 ओजोन सल्फर डाइऑक्साइड कार्बन डाइऑक्स वाटर हमने देखा सीवेज वेस्ट, इंडस्ट्रियल वेस्ट और सीवेज और
इंडस्ट्रियल वेस्ट ही मेजर कॉज है हमारी जितनी भी इंडिया ऑल ओवर द वर्ल्ड रिवर्स है पोल्यूटेड करने का। देन सइल को हमने
बहुत अच्छे तरीके से देखा। इंडस्ट्रियल और फर्टिलाइजर कैसे करता है? नाउ इसमें हमने देख लिया कंस्ट्रक्शन एक्टिविटी स्पीकर
आयरन एंड ट्रैफिक। ठीक है? आई होप दिस इज़ क्लियर नाउ। नाउ हेल्थ इफेक्ट्स। ठीक है? देखिए एयर पॉलटेंट्स लाइक पीएम 2.5 राइट?
ये क्या करता है? एंटर इंटू लंग्स एंड डैमेज लंग टिश्यू। WHO की स्टडी ने यह शो करा है। CHO स्टडी स्टेट्स एयर पॉल्यूशन
इज अ मेजर कॉज ऑफ लंग कैंसर एंड रेस्पिरेटरी डिजीज। और हम क्लाइमेट चेंज पे भी बात करके आए थे कि अगर दिल्ली में
आप देखेंगे तो मेजरली लंग कैंसर के केसेस काफी देखने को मिल रहे हैं। ठीक है? प्रीमेच्योर डेथ्स। तो एयर पोल्यूशन कॉज
मिलियंस ऑफ अर्ली डेथ। तो ये पॉइंट हमें याद रखना है। बिकॉज़ हमें जीडी में यूज़ करना है क्योंकि जीडी में हमारा टॉपिक
आएगा जहां पर हमें बात करनी है कि कैसे जो है हमारा पॉल्यूशन और क्लाइमेट चेंज है वो हमारी एग्ज़िस्टेंस को थ्रेट करता है। ठीक
है? तो यहां पे यह पॉइंट आ जाएगा एयर पोलशन कॉज़ मिलियंस ऑफ़ अर्ली डेथ। WHO एस्टेटेड अबाउट 7 मिलियन डेथ ग्लोबली यानी
कि 70 लाख पीपल ग्लोबली डाई ड्यू टू एयर पोल्यूशन और इंडिया के अंदर 1.7 मिलियन यानी कि अराउंड 17 लाख पीपल जस्ट डाई
बिकॉज़ ऑफ़ दी एयर पोल्यूशन। ठीक है? एंड क्लाइमेट चेंज। तो यहां पर जो है एक रिपोर्ट थी लेंस रिपोर्ट। उसने ये चीज
पब्लिश करी थी। ठीक है? तो अगर हम बोले WHO ने बोला है 7 मिलियन डेथ हो रही है ग्लोबली जिसमें से 1.7 मिलियन डेथ सिर्फ
इंडिया के अंदर होती हैं। और पीएम 2.5 ही मेजर रीज़न है हमारा लंग डैमेज करने का और लंग कैंसर का। ठीक है? और उसके बाद हम आ
जाते हैं फ्यूचर जनरेशन डे। ठीक है? जैसे हम बात करें चिल्ड्रन एक्सपोज्ड टू पोल्यूटेड एयर मे डेवलप लाइफ लॉन्ग हेल्थ
प्रॉब्लम्स। मेनी इंडियन सिटीज हैव ए्यूआई अबव 100 और हम पढ़कर आए थे कि एक्यूआई जो है वो स्पेशली इन दिल्ली इज़ अबव 400 जिसकी
वजह से टूरिस्ट इनफ्लो जो है 20 टू 25% रिड्यूस हो रहा है। ठीक है? हमने पढ़ा था वहां पर। देन डिसीज राइट? सो डिसीज में
देखिए पॉल्यूटेड वाटर स्प्रेड डेंजरस डिसीज लाइक कोलेरा, टाइफाइड एंड डायरिया। ठीक है? अब ये जो रिपोर्ट्स हैं जितनी भी
हमने पब्लिश करी है वो किसकी है? इंटर गवर्नमेंटल पैनल फॉर क्लाइमेट चेंज कंफर्म्स दैट एयर पोल्यूशन कंट्रीब्यूट्स
टू क्लाइमेट चेंज। ठीक है? तो हमने वहां पर भी पढ़ा था इंटर गवर्नमेंटल पैनल की रिपोर्ट की वहां पर भी क्लाइमेट चेंज और
पोलशन दोनों लिंक है। तो यहां पर भी वो चीज सर्टिफाई होगी। ठीक है? चलिए हेल्थ इफेक्ट्स WHO स्टेट्स दैट लॉन्ग टर्म नॉइज़
पोलशन कैन कॉज हियरिंग इंपेयरमेंट, स्ट्रेस, स्लीप डिस्टरबेंस, कार्डियोवस्कुलर डिसीज़। ठीक है? तो कितनी
सारी चीजें हैं। देखिए, लंग कैंसर हो रहा है हमें। ठीक है? वहीं पर अगर हम नॉइज़ पोलशन की बात करें वहां से हमें हेयरिंग
इंपेयरमेंट स्ट्रेस हो रहा है। स्लीप डिस्टरबेंस कार्डियोवस्कुलर डिसीजसेस ठीक है? हार्ट डिसीजसेस बेसिकली देन
कंटैमिनेशन ऑफ़ फूड क्रॉप्स। सॉइल की अगर बात करें तो सॉइल पॉल्यूशन अफेक्ट्स वेजिटेबल, पल्ससेस, वीट, अदर क्रॉप्स,
टॉक्सिक केमिकल्स, एंटर्स फूड एंड हार्म ह्यूमन हेल्थ। ठीक है? तो ये भी चीज़ हमारे पास क्लियर हो जाती है कि जो हम यूरिया और
फर्टिलाइजर और जितना भी हम इलेक्ट्रॉनिक वेस्ट, प्लास्टिक ये सब डालते हैं, उससे क्या होने वाला जो हमारी सॉइल है वो
डिग्रेड होने वाली है और अगर हम सॉइल डिग्रेडेड हो जाएगी तो हमारा जो फ़ूड है उसमें भी टॉक्सिक केमिकल्स एंटर करेंगे।
ठीक है? देन हेल्थ इफेक्ट फ्रॉम पेस्टिसाइड्स एंड फर्टिलाइज़र्स। ठीक है? तो स्टडीज बाय WHO शोज़ एक्सेसिव यूज़ ऑफ़
पेस्टिसाइड एंड फर्टिलाइज़र कैन कॉज कैंसर, न्यूरोलॉजिकल प्रॉब्लम्स एंड अदर डिसीज़। अगर हम समराइज करें इन सबको तो हमने देखा
पीएम 2.5 कॉज कैंसर एक्यूआई मे कॉज लाइफ लॉन्ग हेल्थ प्रॉब्लम्स पॉल्यूटेड वाटर स्प्रेड डेंजरस डिजीज कोरा टाइफाइड
डायरिया डब्ल्यूए स्टेट्स नॉइस पोलशन कॉज स्ट्रेस स्लीप डिस्टरबेंस कार्डियोवस्कुलर डिजीजसेस हार्ट डिसीजसेस हियरिंग
इंपेयरमेंट देन कंटैमिनेशन फूड कैन कॉज दी कैंसर न्यूरोलॉजिकल प्रॉब्लम्स एंड अदर डिसीज इकोनॉमिक इफेक्ट्स हम सेम यही चीजें
डिस्कस करके आए थे क्लाइमेट चेंज के अंदर हेल्थ केयर कॉस्ट जहां पर 2.6 लाख करोड़ जो है इंडिया लॉस कर सकता है ड्यू टू अह
हमारा एयर पॉल्यूशन। ठीक है? देन क्लाइमेट अह रिलेटेड इकोनमिक लॉस 2.6% ऑफ़ जीडीपी एनुअली एनुअली बाय 2015 ड्यू टू क्लाइमेट
चेंज। ठीक है? ये किसकी? एशियन डेवलपमेंट बैंक की रिपोर्ट थी। टूरिज्म ये बात अभी हमने डिस्कस करी 2225 वाली। और हमने बजट
की बात भी करी थी कि दिल्ली का वेस्ट मैनेजमेंट 2000 करोड़ जो हमारे अदर स्टेट है वो भी 1000 करोड़ प्लस जाते हैं। ठीक
है? नाउ इंडस्ट्रीज लाइक पेपर मिल केमिकल इंडस्ट्रीज एंड टेक्सटाइल इंडस्ट्री डिस्चार्ज अनट्रीटी टॉक्सिक वेस्ट इनू द
रिवर। ठीक है? तो यह जो टॉक्सिक वेस्ट रिवर है ये आ कहां से रहा है? हमने बात करी थी इंडस्ट्रीज ही है जो मेजर कॉज करती
हैं। और कौन-कौन सी इंडस्ट्रीज है पेपर मील्स, केमिकल इंडस्ट्री, टेक्सटाइल इंडस्ट्री। तो जहां पे हमारे क्लोथ्स
वगैरह बनते हैं, कपड़े बनते हैं वो भी टेक्सटाइल इंडस्ट्री। सो वो भी एक मेजर कंट्रीब्यूटर है टॉक्सिक वेस्ट का हमारी
रिवर्स के अंदर। ठीक है? तो अपने जीडी में आप यूज़ कर सकते हैं। पेपर मील इंडस्ट्री, केमिकल इंडस्ट्रीज, टेक्सटाइल इंडस्ट्रीज
आर दी मेजर कंट्रीब्यूटर ऑफ द टॉक्सिक वेस्ट इन द रिवर एंड एंड दी वाटर पोल्यूशन। ठीक है? यूनाइटेड नेशन
एनवायरमेंट प्रोग्राम यूएईपी रिपोर्ट्स दैट 11 मिलियन टन्स ऑफ़ प्लास्टिक एंटर ओशन एव्री ईयर सीवियरली हार्मिंग मरीन लाइफ
एंड इकोसिस्टम। ठीक है? तो वाटर पोलशन का बहुत अच्छा एग्जांपल है कि 11 मिलियन टन्स ऑफ़ प्लास्टिक जो है वो एंटर करता है ओशियन
के अंदर। ठीक है? देन स्टडी वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन WHO सेस कंटैमिनेटेड वाटर कॉज ओवर 5 लाख डायरियल डेथ ईयरली वर्ल्ड
वाइड। तो यहां पर हमने क्या देखा था कि 7 मिलियन डेथ होती है एयर पोल्यूशन की वजह से क्लाइमेट चेंज की वजह से जिसमें से 1.7
मिलियन तो इंडिया के अंदर डेथ थी और यहां पर हम क्या देख रहे हैं कि डायरियल इंफेक्शन की वजह से 5 लाख डेथ हो रही है
ऑल ओवर दी वर्ल्ड। राइट? तो यहां से हमें दो डाटा और मिल चुके हैं। और 11 टन प्लास्टिक तो वैसे भी एंटर कर रहा है
ओशियन के अंदर। ठीक है? तो यहां से काफी अच्छे पॉइंट्स हमें मिल जाते हैं जो हम अपनी जीडी के अंदर यूज़ कर सकते हैं। ठीक
है? देखिए यमुना रिवर इन दिल्ली इज हैवली पोल्यूटेड बाय सीवेज एंड इंडस्ट्रियल वेस्ट। नियरली 70 टू 80% ऑफ़ पोल्यूशन इन
यमुना कम्स फ्रॉम सीवेज रेन इन दिल्ली। ठीक है? तो 70 टू 80% तो सिर्फ दिल्ली के सीवेज और इंडस्ट्रियल वेस्ट से जो यमुना
के अंदर आ रहा है। ठीक है? देन सीपीसीबी। ये क्या है हमारा? ये है सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड। ठीक है? है सेंट्रल
पोल्यूशन कंट्रोल बोर्ड रिपोर्ट ओनली अबाउट 30 टू 40% सीवेज इज़ प्रॉपर्ली ट्रीटेड रेस्ट गोज़ डायरेक्टली इंटू द रिवर
दिया जाता है। ठीक है? उन्हें साफ किया जाता है। बट वो 30 टू 40% ही हो रहा है। बाकी का बाकी सारे प्लांट्स जो हैं वो
इनफेक्टिव हैं। वो अपनी कैपेसिटी पर काम नहीं कर पा रहे हैं। ठीक है? तो सेंट्रल पोलशन कंट्रोल बोर्ड रिपोर्ट्स दैट
इंडस्ट्रियल वेस्ट इज़ अ मेजर सोर्स ऑफ़ वाटर पोल्यूशन इन इंडिया। हम इसमें बात कर चुके हैं। यमुना का एग्जांपल आपको याद
रखना है। एंड गंगा आल्सो गंगा इज़ हैवली पोलटेड ड्यू टू द इंडस्ट्रियल वेस्ट एज़ आइडेंटिफाइड बाय सीपीसीबी। ठीक है?
सेंट्रल पोलशन कंट्रोल बोर्ड। सो नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा रिपोर्ट। ये किसकी रिपोर्ट है? नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा
रिपोर्ट। ठीक है? तो जब हमने इतना सब कुछ देख लिया कि 5 लाख डाइडियल डेथ 1.7 मिलियन इंडिया के अंदर 7 मिलियन डेथ ऑल ओवर दी
वर्ल्ड लंग कैंसर हो रहा है। ठीक है? उसके बाद कार्डियोवस्कुलर डिजीज स्ट्रेस और हमारी रिवर्स यमुना जो है वो 70 टू 80%
देन गंगा रिवर हमारी डैमेज हो चुकी है। 11 टन प्लास्टिक हमने ओशन के अंदर डाल दिया है। देन टॉक्सिन वेस्ट केमिकल यूरिया ये
सब हम देख के आए। तो सॉल्यूशन क्या है इसका? क्या? तो देखिए पहला सॉल्यूशन क्या हो सकता है कि जो हमने क्लाइमेट चेंज में
डिस्कस करा था कि जिसमें हम क्या कर सकते हैं? इलेक्ट्रिक व्हीकल पर अगर हम शिफ्ट करते हैं तो हमारा जितना भी पॉल्यूशन होता
है, कार्बन इमिशन होता है जिससे पीएम 2.5 निकलता है वो बच सकता है। राइट? और हम क्या कर सकते हैं? क्लीन एनर्जी यूज़ कर
सकते हैं। न्यूक्लियर एनर्जी, सोलर एनर्जी आप यूज़ करिए। ठीक है? रेदर देन यूजिंग दी कोल। तो वहां से भी हमारा जो पोलशन है वो
कम होगा। दूसरा हम क्या कर सकते हैं? ट्रीटमेंट प्लांट्स वगैरह लगा सकते हैं। जितने भी पॉइंट हमने क्लाइमेट चेंज के
अंदर यूज़ करे थे वो आप यहां पर सेम लिख सकते हैं। ठीक है? देखिए यहां पे लिखा हुआ है सेम सॉल्यूशन एज क्लाइमेट चेंज। तो जो
आपने बात करी थी देखिए इसमें ट्रीज़ का रोल भी आ जाता है नेशनल अफोरेस्टेशन प्रोग्राम की। देन हमने कावेरी कॉलिंग राइट? हमने एक
इनिशिएटिव देखा था जो सद्गुरु की फाउंडेशन ने स्टार्ट करा था। तो उसमें ट्री को हम ग्रो करने वाले थे। राइट? तो इसलिए सिमिलर
चीजें जो हमने वहां डिस्कस करी वो आप यहां पर भी बोल सकते हैं। तो एक क्लाइमेट चेंज पड़ने की वजह से हमारा पोल्यूशन चैप्टर भी
क्लियर हो जाता है। ठीक है? अब देखिए यहां पर हम देखें ग्लोबल अवेयरनेस एंड सेव सॉइल कैंपेन ईशा फाउंडेशन ने एक तो कावेरी
कॉलिंग चलाया था। बट इन्होंने ये क्या है? ग्लोबल अवेयरनेस एंड सेव सॉइल कैंपेन। देखिए ये कैंपेन मैंने क्यों लिखा यहां
पर? बिकॉज़ ये कैंपेन वर्ल्ड का सबसे बड़ा कैंपेन था। इसके अंदर 81 नेशन इनवॉल्व थे। और हमारे इंडिया के 10 स्टेट्स थे। और ये
यूनाइटेड नेशन की बॉडीज भी इसमें इनवॉल्व थी। ठीक है? तो ये बहुत बड़ा प्रोग्राम था जिसके अंदर हम जो सेव सइल सॉइल के जो
न्यूट्रिएंट्स और सॉइल जो डिग्रेड हो रही है उसके बारे में अवेयरनेस से लेके ट्री प्लांटेशन से लेके बहुत सारी चीजें इसके
अंदर थी। ठीक है? तो ये आपको याद रखना है। ईशा फाउंडेशन सेव सइल मूवमेंट और ईशा फाउंडेशन का कावेरी कॉलिंग मिशन अंडर
व्हिच दे आर गोइंग टू प्लांट 2.42 बिलियन ट्रीज़ जो हम अभी पढ़ के आए थे। देन गवर्नमेंट इंट्रोड्यूस्ड BS6 इमिशन
स्टैंडर्ड। देखो BS6 इमिशन स्टैंडर्ड क्या है? कुछ नहीं है। बस सिंपल याद रखो कि जो हमारे जितने भी व्हीकल्स हैं तो उसके अंदर
से जो पार्टिकुलेंट मैटर पीएम 2.5 और अदर मैटर्स थे जैसे कि हमने पढ़ा था कार्बन डाइऑक्साइड था, सल्फर डाइऑक्साइड था, ओजोन
था। इन सब चीजों को कम करने के लिए फिल्टर्स को ऐड करना है। ठीक है? सल्फर की मात्रा को कम करना है पेट्रोल और डीजल
डीजल में स्पेशली डीजल के अंदर। तो समराइज करें कि जितने भी हमारे नई व्हीकल्स आएंगे उनके अंदर ऐसे फिल्टर्स होने चाहिए जो कि
पहले ही हमारा जो स्मोक है उसको फिल्टर करके एनवायरमेंट में इमिट हो और दूसरी चीजें जो है एथेनॉल वगैरह भी आप देख रहे
हैं एथेनॉल का यूज़ भी हो रहा है। ठीक है? तो वो सारा BS6 इमिशन के अंदर आ जाता है। नाउ रिवर क्लीनिंग प्रोग्राम नमामिंगे।
आपको पता है नमामिंगे में सो फार वी हैव स्पेंड अराउंड 42ाउज करोड़। बट अगर हम स्टिल अभी गंगा की हालत देखें तो देयर इज़
नो इंप्रूवमेंट एट ऑल। ठीक है? अगर आप देखें तो पहले से ज्यादा फर्स्ट सिचुएशन जो है वो गंगा रिवर की हो चुकी है। अब
इटसेल्फ इट इज़ अ वेरी कंसर्निंग फॉर ऑल ऑफ़ अस डिस्पाइट स्पेंडिंग 42,000 करोड़ और अगर अभी भी हमारी यमुना रिवर्स पूरी डेड है।
तो हम देख सकते हैं जो हमारी मरीन लाइफ है वो बुरी तरीके से जो है अफेक्टेड है। तो अगर अब कंक्लूजन की बात करें तो हमारा
कंक्लूजन बिल्कुल सेम रहेगा जो हमने पढ़ा था क्लाइमेट चेंज के अंदर। ठीक है? देयर विल बी नो चेंज एज़ इट इज़ जो हमने क्लाइमेट
चेंज में बोला था कंक्लूजन वो हम यहां पे भी यूज़ कर सकते हैं। ठीक है? हम चलते हैं ग्रुप डिस्कशन के टॉपिक की तरफ जो कि हमें
एसएसबी आर्मी बोर्ड में देखने को मिला था। ठीक है? तो अब यहां पर जो है पर्टिकुलरली नाम नहीं लिखा हुआ बिकॉज़ ये टॉपिक्स जो है
वो डिफरेंट-डिफरेंट आर्मी बोर्ड में रिपीट होते रहते हैं। ठीक है? ये देखा गया है टॉपिक बहुत बार रिपीट होते हुए इसलिए यहां
पे डायरेक्ट आर्मी बोर्ड लिखा हुआ है। तो अब यहां पर लिखा हुआ है कि द वर्ल्ड टुडे पर्टिकुलरली इंडिया इज़ कंफ्रेंटेड विद
मल्टीपल एग्ज़िस्टेंशियल एंड सिक्योरिटी चैलेंजज़। ठीक है? तो एकिस्टेंशियल मतलब यहां पर हुआ जो थ्रेट टू सर्वाइवल है
ह्यूमन बीइंग्स के थ्रेट टू सर्विटी चैलेंज करेगा किसकी? ह्यूमन बीइंग्स की। ठीक है? तो क्लाइमेट चेंज एंड पोल्यूशन।
तो आपको क्या है? किसी एक लीड को चुनना है इन तीनों में से और अराउंड फाइव टू सिक्स और पॉइंट्स इफेक्टिवली ग्रुप के अंदर देने
हैं। राइट? तो जब भी हम ग्रुप डिस्कशन करते हैं, वहां पर किसी कॉमन कंक्लूजन पे नहीं आना होता है। ठीक है? आपको ग्रुप में
इफेक्टिवली पॉइंट्स देने हैं। आप यू शुड बी अ इफेक्टिव मेंबर इन दी ग्रुप। रेदर देन कमिंग इंटू द कंक्लूजन वी हैव टू बी अ
इफेक्टिव मेंबर। तो आपको किसी भी एक लीड को चुनके उस पर पॉइंट्स बोलने होते हैं। यस यू कैन टॉक ऑन दी अदर लीड्स बट कोशिश
करिए कि आप अपनी लीड से ही स्टिक रहें। ठीक है? आपको अपनी लीड्स को कांस्टेंटली चेंज नहीं करना है। तो ये चीज़ हमें याद
रदनी है। अब क्लाइमेट चेंज और पोलशन की बात होती है। तो कैसे ये थ्रेट टू सर्वाइवल है। ठीक है? हमने काफी सारे
पॉइंट्स देखे थे। जैसे कि हमने देखा था लंग डैमेज लंग कैंसर पीएम 2.5 वाली रिपोर्ट 7 मिलियन डेथ ग्लोबली डब्ल्यूho
देन 1.7 मिलियन हमने देखी थी लसेंट की रिपोर्ट। देन हमारी फ्यूचर जनरेशन को बहुत ज्यादा रिस्क है। ये भी हमने पढ़ा डायरिया
और डायरिया और कोलेरा की वजह से तो हमने डेथ भी देखी थी। WHO ने 5 लाख डेथ बताई थी एव्री ईयर। ठीक है? तो उसके बाद हमने देखा
कि कैसे जो हियरिंग इंपेयरमेंट, स्ट्रेस स्लीप डिस्टरबेंस, कार्डियोवस्कुलर डिसीज ठीक है? देन सॉइल पॉलटेंट, हार्म, हेल्थ,
न्यूरोलॉजिकल प्रॉब्लम्स। देन कैसे इकोनॉमिक इफेक्ट है? तो हमने देखा जैसे कि 2.6 लाख करोड़ हो या फिर वो 2.6% ऑफ
जीडीपी हो या फिर थाउजेंड्स ऑफ करोड़ ऑफ़ स्टेट बजट हो तो हम ये सारा हेल्थ केयर में यूज़ करते हैं। कोई एक कंट्री ग्रो
नहीं कर सकती और ग्रो नहीं करेगी कंट्री। तो डेफिनेटली ह्यूमन की जो लाइफ है उस पे भी इफेक्ट होगा। राइट? इसलिए हम ये सारी
चीजों को बता सकते हैं। देन हमने बताया 11 टन्स ऑफ प्लास्टिक जो है वो किस में? ओशंस के अंदर जा रहा। हमारी फ्लड्स हुई थी।
राइट? फ्लड्स हमने देखी। चाहे वो हिमाचल हो, असम हो, पंजाब हो, हरियाणा हो, साउथ इंडिया हो। से काफी लोगों की डेथ हुई।
फार्मर सुसाइड केसेस जो 3.9 लैक्स थे अराउंड इन लास्ट टू डिकेड्स। जब आप यह सारे पॉइंट्स बताओगे क्लाइमेट चेंज और
पोलशन पे आई डोंट थिंक सो कि कोई ऐसे पॉइंट्स इफेक्टिवली दे पाएगा। ठीक है? पूरे ग्रुप में। तो मैंने बहुत बार ये
चीजों को रिपीट करा है। बट उसका रीज़न यही है कि जो हम पॉइंट्स बार-बार बोल रहे हैं वो हमारे दिमाग में फिट हो जाए। ठीक है?
कि वहां पर जीडी में हम ये पॉइंट्स इफेक्टिवली पुट कर पाए। तो यहां पर एक और जीडी का टॉपिक है जहां पर हमें जो थर्ड
लीड है वहां पर देखने को मिल रहा है क्लाइमेट चेंज एंड एनवायरमेंटल स्ट्रेस। ठीक है? तो ये जो टॉपिक है राइजिंग
इनफ्लेशन एंड दी लूमिंग थ्रेट ऑफ रिसेशन। व्हाट इज दी मोस्ट डेसेसिव फैक्टर ड्राइविंग दी ग्लोबल इकोनॉमिक स्लोडाउन?
तो रिसेंटली हमने देखा है कि जो इजराइल, ईरान एंड यूएस वॉर चली और स्टेट ऑफ़ हरमोस ब्लॉक हुआ ओवर दी वर्ल्ड जो है हमें क्या
देखने को मिला है? इकोनमिक स्लोडाउन देखने को मिला। राइट? तो उसमें अगर हम लीड्स को देखें ट्रेड एंड पॉलिसी डिसररप्शन या
जिओपॉलिटिकल टेंशंस। तो जब हम ये वॉर डिस्कस करेंगे वहां पर हम इन दोनों पॉइंट्स को कवर कर लेंगे। राइट? बट अभी
हमने जैसे क्लाइमेट चेंज और एनवायरमेंटल स्ट्रेस के बारे में पढ़ा है। तो हम अगर कोई थर्ड लीड को चूज़ भी कर रहा है तो वो
कैसे इस जीडी के अंदर पॉइंट्स को फिट कर सकता है। ठीक है? तो इकोनॉमिक स्लोडाउन की अगर हम बात करें ग्लोबल इकोनमिक स्लोडाउन
कैसे क्लाइमेट चेंज से हो रहा है? देखिए जैसे हमने बात करी थी हेल्थ केयर कॉस्ट की कि इंडिया जो लूज़ करता है 2.6 लाख करोड़
ईयर ड्यू टू ईयरली राइट ड्यू टू एयर पोल्यूशन। सिमिलरली अगर आप चाइना का एग्जांपल भी लेंगे शंघाई इज़ आल्सो वन ऑफ द
मोस्ट पोल्यूटेड इन द वर्ल्ड। सिमिलरली बांग्लादेश, पाकिस्तान और नेपाल यह कंट्रीज भी बहुत
ज्यादा सीवियरली इफेक्टेड हैं और साउथ अफ्रीकन कंट्रीज भी। तो वो भी अपनी जीडीपी का बहुत सारा परसेंटेज क्लाइमेट चेंज से
डील करने में लगा रही है। जिससे इकोनमिक स्लोडाउन अफेक्ट होगा। टूरिज्म हमने देखा इंडिया के अंदर कैसे इफेक्ट हो रहा है। आप
इंडिया का एग्जांपल दे दीजिए। ठीक? वहां से कैसे हमारी टूरिज्म इंडस्ट्री अफेक्ट हो रही है। सिमिलरली चाइना में भी और साउथ
अफ्रीका में और बांग्लादेश एंड नेपाल और श्रीलंका ये कंट्रीज भी सिमिलर सिचुएशन फेस कर रही है। आप उन कंट्री का एग्जांपल
लेकर भी इकोनॉमिक स्लोडाउन को जस्टिफाई कर सकते हैं। सिबन क्लीनिंग एंड वेस्ट मैनेजमेंट कॉस्ट। यहां पर 2000 करोड़ हमने
स्पेंड करा। नमामिंगे का एग्जांपल दे सकते थे जो हमने बात करी थी पहले कि 42,000 करोड़ हमने स्पेंड कर दिया अभी तक। ठीक
है? चाहे वो 2015 से लेके यहां तक। तो अगर वो 42,000 अगर हमारी रिवर्स क्लीन होती जैसे यूरोप की है, चाहे वो अमेरिका की हैं
तो क्या वो 42,000 करोड़ हम अपनी एजुकेशन में लगा सकते थे। अपनी ट्रेड पॉलिसी में लगा सकते थे जिससे हमारा इकोनमिक स्लोडाउन
जो हो रहा है अब वो हमें नहीं देखने को मिलता। फिर अगर हम बात करते हैं कि हमने देखा कितनी डे्स हुई यूके के अंदर हीट वेव
की वजह से। ठीक है? सो वहां पर आपको अब सेपरेटली बजट बनाना पड़ रहा है हेल्थ केयर सिस्टम के लिए। तो वो पैसा जो कि हम
इकॉनमी को ग्रो करने में लगाते थे वो हेल्थ केयर सिस्टम में जा रहा है। अब इंडिया की पॉपुलेशन जैसे ग्रो कर रही है
क्लाइमेट चेंज जिस हिसाब से बढ़ रहा है तो हमें भी एडिशनल हॉस्पिटल्स चाहिए। हेल्थ केयर सिस्टम चाहिए। हमारा रिसोर्सेज है वो
कहीं और डाइवर्ट हो रहा है। ठीक है? तो ये एक पॉइंट बन सकता है। फिर एग्जांपल आप बता सकते हैं कि जो यंग वर्कर्स हैं अगर हीट
वेव इतनी ज्यादा पड़ेगी तो उनका जो वर्किंग आवर्स हैं ये पॉइंट भी हमने डिस्कस करा था पहले तो वो भी रिड्यूस होगा
और अगर आप पूरे वर्ल्ड में अगर ऐसी चीजें होंगी तो डेफिनेटली इकोनॉमिक स्लो डाउन ट्रिगर होगा। और एग्जांपल क्या हो सकते
हैं? जैसे कि अब फ्यूचर जनरेशन रिस्क है। ठीक है? चिल्ड्रन एक्सपोज टू पोल्यूटेड एयर में डेवलप लाइफ लॉन्ग डिसीजसेस। तो आज
की जनरेशन ही अगर ऐसे लाइफ लॉन्ग हेल्थ डिसीज से प्रॉब्लम होगी तो वो कैसे इकॉनमी को ग्रो करेगी? तो ये कुछ पॉइंट्स हैं जो
आप बता सकते हैं क्लाइमेट चेंज एंड एनवायरमेंटल स्ट्रेस के अंदर। ठीक है? और बाकी मेजरली तो हम जानते हैं कि
जियोपॉलिटिकल टेंशन और ट्रेड पॉलिसी डिरप्शन की वजह से हो रहा है। ठीक है? तो बट अगर कोई क्लाइमेट चेंज और एनवायरमेंटल
स्ट्रेस को लेना चाहता है तो वो यहां पे पॉइंट्स कुछ रख सकता था। ठीक है? ओके नाउ लेट्स मूव ऑन टू दी न्यूक्लियर
एनर्जी। राइट? सो न्यूक्लियर एनर्जी की अगर हम बात करें तो इंडिया प्रोड्यूसेस अबाउट 3% ऑफ इट्स इलेक्ट्रिसिटी फ्रॉम
न्यूक्लियर पावर। ठीक है? इट इज द गवर्नमेंट एंड इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी डाटा। राइट?
सो न्यूक्लियर एनर्जी इज दी एनर्जी रिलीज्ड फ्रॉम दी न्यूक्लियस ऑफ़ एन एटम। देखिए न्यूक्लियर के साथ क्या वर्ड जुड़ा
हुआ है? एनर्जी। और ये एनर्जी जो है रिलीज़ हो रही है न्यूक्लियस ऑफ़ एन एटम से। राइट? इतना समझ में आ गया? मेनली थ्रू दी
प्रोसेस कॉल्ड न्यूक्लियर फज़। और जब ये न्यूक्लियर फज़ प्रोसेस होता है तो हीट जनरेट होती है। राइट? और ये हीट जो है
इलेक्ट्रिसिटी जनरेट करती है। तो हमने समझा कि न्यूक्लियर एनर्जी के साथ वर्ड एनर्जी जुड़ा हुआ है। और ये एनर्जी रिलीज
होती है न्यूक्लियस ऑफ़ एन एटम से मेनली थ्रू दी प्रोसेस ऑफ़ न्यूक्लियर फज़। राइट? एंड इट प्रोड्यूसेस अ लार्ज अमाउंट ऑफ़ हीट
व्हिच इज़ यूज्ड टू जनरेट इलेक्ट्रिसिटी। देखिए आइए समझते हैं। यूरेनियम एटम्स आर स्प्लिट इन अ न्यूक्लियर रिएक्टर। ठीक है?
तो यूरेनियम्स के जो एटम्स है वो स्प्लिट होती है और हमने देखा है कि जब वो स्प्लिट होते हैं तो वो रिलीज करते हैं हीट को और
ये हीट क्या करती है वाटर को बॉईल करती है उससे जो स्टीम निकलती है उस वो स्टीम जो है वो टरबाइन ब्लेड्स को मूव करती है राइट
बहुत फास्ट फील्ड में और जिससे क्या होता है कि जो हमारे जो पावर प्लांट्स होते हैं वो चार्ज होते हैं। ठीक है? तो चलिए अब हम
बात करते हैं एडवांटेजेस ऑफ न्यूक्लियर एनर्जी की। राइट? लो कार्बन इमिशन। न्यूक्लियर एनर्जी को क्लीन फ्यूल भी बोला
जाता है। अगर आप कंपेयर करेंगे किसी भी फ्यूल से तो न्यूक्लियर एनर्जी में सबसे कम लोएस्ट कार्बन डाइऑक्साइड इमिशन होता
है। राइट? देन हाई एफिशिएंसी स्मॉल अमाउंट ऑफ यूरेनियम प्रोड्यूसेस मैसिव एनर्जी। वन यूरेनियम पैेट इज इक्वल टू टन्स ऑफ कोल
एनर्जी। ठीक है? आइए समझते हैं इसको। देखिए, न्यूक्लियर फ्यूल इज़ एक्सट्रीमली एनर्जी डेंस। ठीक है? एक यूरेनियम का जो
पैेट होता है व्हिच इज़ अराउंड 2.54 सें.मी. या फिर हम बोल सकते हैं 1 इंचेस। राइट? वो यूरेनियम का पैेट अगर आप देखेंगे
120 गैलंस ऑफ़ ऑयल वन टन ऑफ कोल एंड 17,000 ऑफ़ क्यूबिक ऑफ़ नेचुरल गैस के बराबर है। ठीक है? तो व्हेन आई हर्ड दिस फर्स्ट टाइम
आई वाज़ आल्सो शॉक्ड कि हाउ पावरफुल अ यूरेनियम पैेट इज़। राइट? सो, दिस इज़ समथिंग व्हिच इज़ वेरी इंटरेस्टिंग। राइट?
तो यहां से हमें समझ में आ गया कि हाई एफिशिएंसी क्यों है। राइट? देन रिड्यूस ऑफ फॉसिल फ्यूल डिपेंडेंस। हम देख सकते हैं
इंडिया इंपोर्ट अराउंड 80% ऑफ इट्स क्रूड ऑयल फ्रॉम आउटसाइड। राइट? सो उस केस में अगर हम अपने जो फ्यूल है उसको हम
डवर्सिफाई करेंगे। हम जैसे कि कोल का यूज़ करते हैं मेनली टू जनरेट इलेक्ट्रिसिटी। अगर हम उसको डवर्सिफाई करके न्यूक्लियर
एनर्जी पे शिफ्ट करें तो हमें ज्यादा बेनिफिट होगा क्योंकि ये क्लीन फ्यूल है। बहुत ही कम कार्बन डाइऑक्साइड ये इमिट
करता है जिससे हमें क्लाइमेट चेंज को मिटिगेट करने में हेल्प मिलेगी। ठीक है? देन रिलायबल पावर वर्क 247 जो न्यूक्लियर
रिएक्टर्स होते हैं बहुत ज्यादा रिलायबल होते हैं। 247 वर्क करते हैं। तभी हमने देखा है न्यूक्लियर सबमरींस भी होते हैं।
राइट? सिमिलरली लेस लैंड रिक्वायर्ड कंपेयर टू सोलर एंड विंड फार्म्स। तो आप एग्जांपल देख सकते हैं भद्र सोलर
प्लांट का जहां पर हमने कितना किलोमी का एरिया जो एक्वायर करा है जस्ट फॉर प्लांटिंग दी सोलर्स। तो बट यहां पर जो है
लेस लैंड रिक्वायरमेंट है। ठीक है? चलिए अब हम बात करते हैं डिसएडवांटेजेस की। ठीक है? तो हाई इंस्टॉलेशन कॉस्ट ऑफ
न्यूक्लियर प्लांट। ठीक है? 6 से 9 बिलियन डॉलर्स तो 50000 करोड़ के आसपास अगर आप यूएसए के देखें तो जो न्यूक्लियर पावर
प्लांट है वो इतने ही है। ठीक है? अगर इंडिया की बात करें जैसे कि हम बात करें अगर कुडानु कुलान की ठीक है? तो वो जो
न्यूक्लियर पावर प्लांट है इंडिया का लार्जेस्ट न्यूक्लियर प्लांट है वो भी अराउंड 20,000 करोड़ का बना हुआ है। तो
बहुत हाई इंस्टॉलेशन कॉस्ट है। सो न्यूक्लियर एनर्जी डिपेंड्स ऑन यूरेनियम व्हिच इज़ अ नॉन रिन्यूएबल एंड लिमिटेड
रिसोर्स ऑन अर्थ। दैट इज़ क्लियर। यहां पर कोई डाउट नहीं है। देन रिस्क ऑफ एक्सीडेंट देख सकते हैं। चर्नोबल 1986 यूक्रेन में
हुआ। सीवियर रेडिएशन डिजास्टर हुआ। देन देन हमने देखा था फकोशीमा। ठीक है? 2011 में जापान में जो फेलियर हुआ सुनामी के
बाद तो देयर इज़ ऑलवेज कॉन्सेंट फियर ऑफ न्यूक्लियर एक्सीडेंट्स। अब वॉर में भी आप देख सकते हैं जैसे कि रशिया वर्सेस
यूक्रेन था तो वहां पर ऑलमोस्ट थ्रेट था कि अगर वो उनकी न्यूक्लियर सप्लाई को हिट करते हैं तो पावर सप्लाई जो है पूरे यूरोप
के अंदर अफेक्ट होगी। एंड यूरोप के अंदर रेडिएशन लीक होने का भी यहां पर थ्रेट था हमारे पास। रेडियोएक्टिव वेस्ट डिस्पोज़ल
इज़ डिफ़िकल्ट एंड लॉन्ग टर्म। राइट? फिर हम एग्ज़ांपल देख सकते हैं सिक्योरिटी रिस्क का। ठीक है? हाउ न्यूक्लियर मटेरियल एंड
यूरेनियम, प्लेनियम कैन बी पोटेंशियली बी मिसयूज्ड फॉर न्यूक्लियर वेपन। एग्जांपल हम देख सकते हैं ईरान का जहां पर ईरान
हमने देखा साइंटिस्ट जो इनकी टनल्स जो थी नतंस में, फरदो में वहां पर जो है वो 60% ऑलरेडी एनरच कर चुके थे। और उससे ज्यादा
अगर वो 90% तक चले जाते तो वो न्यूक्लियर वेपन बना सकते थे। दिस इज़ आल्सो अ ग्रेट थ्रेट। हमने रशिया वर्सेस यूक्रेन की तो
बात करी है। देन अगर हम बात करते हैं न्यूक्लियर एनर्जी इंडिया के अंदर। ठीक है? तो जो हमारा कुडानकुलन न्यूक्लियर
पावर प्लांट है तमिलनाडु के अंदर ये एग्जांपल क्योंकि हमें पता होने चाहिए कि कौन-कौन से हैं इंडिया के अंदर। तो ये
लार्जेस्ट न्यूक्लियर एनर्जी प्लांट है। देन हमारे पास तारापुर राइट एटॉमिक पावर स्टेशन है जो महाराष्ट्र के अंदर है। एंड
देन हमारे पास है काकरा परत जो गुजरात के अंदर है और राजस्थान एटॉमिक पावर स्टेशन। ये कुछ एग्जांपल्स आप देख सकते हैं। ठीक
है? देन ग्लोबल न्यूक्लियर लीडर तो चाइना रैपिडली एक्सपेंडिंग न्यूक्लियर कैपेसिटी एंड यूएसए लार्जेस्ट न्यूक्लियर पावर
प्रोड्यूसर है। ठीक है? फ्रांस अराउंड 60 टू 70% ऑफ इलेक्ट्रिसिटी फ्रॉम न्यूक्लियर। तो आप देख सकते हैं हम जहां
पर 3% पर हैं। वेयर एज़ फ्रांस 60 टू 70% है। ये बड़ी इंटरेस्टिंग चीज़ है। अगर आप देखें तो इंडिया के पास भी पोटेंशियल है
कि वी कैन एटलीस्ट 10% या फिर 20% हम अपनी न्यूक्लियर एनर्जी से जनरेट करें कि सो दैट हम जो अपनी क्रूड ऑयल का डिपेंडेंस है
उसको कम कर सकें। नाउ अब हम बात करते हैं चैलेंजेस की। देखिए क्वेश्चन कास्टेंटली आता है कि न्यूक्लियर एनर्जी इंडिया में
सिर्फ 3% ही क्यों है? व्हाई? सो उसका रीज़न ये है मल्टीपल परमिशंस एंड क्लीयरेंसेस आर रिक्वायर्ड। जब भी आप एक
नया न्यूक्लियर पावर प्लांट लगाते हैं तो आपको अप्रूवल लेना पड़ता है इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी से एटॉमिक एनर्जी रेगुलेटरी
बोर्ड अपनी एनवायरनमेंट मिनिस्ट्री से। देन उसके बाद सर्वे होता है, राइट? कि जो हम लैंड ले रहे हैं, व्हाट आर दी
पॉसिबिलिटीज़? अगर कोई एक्सीडेंट होता है तो वो सारी कॉम्प्लिकेशंस को स्टडी किया जाता है जिसमें बहुत सारा टाइम जाता है।
हम बात करते हैं इंटरनेशनल ऑब्लिगेशन का। ठीक है? तो इंडिया शेयर लिस्ट ऑफ न्यूक्लियर फैसिलिटी विद पाकिस्तान अंडर
एग्रीमेंट। देखिए पाकिस्तान अपनी सारी न्यूक्लियर फैसिलिटी बताता है इंडिया को और सिमिलरली इंडिया बताता है पाकिस्तान
को। उसका रीज़न ये है कि अगर कल को वॉर होती है तो ये जो टारगेट्स हैं आप इस पे हिट नहीं कर सकते। ठीक है? ये अगेंस्ट
होगा इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी के नॉर्म्स के दोनों कंट्रीज एक्सचेंज करती है देयर न्यूक्लियर फैसिलिटी। ठीक है? तो
अब आगे क्या आता है? हाई कॉस्ट एंड लॉन्ग टाइम वेरी एक्सपेंसिव। देखिए जो हमारा हमने पढ़ा था कुडानकुलम है न्यूक्लियर
पावर प्लांट है। उसने खुद जो है 10 टू 15 इयर्स लिए बिल्ड होने में। 20,000 प्लस करोड़। इसमें हमें रशिया की हेल्प मिली
थी। तो जब हम इंडिया और रशिया का रिलेशन पढ़ेंगे तो आप बता सकते हैं कि रशिया हैज़ हेल्प्ड इंडिया इन ह इट्स न्यूक्लियर
एनर्जी दे दे हेल्प्ड अस इन सेटिंग अप दी द कुडान कूलम न्यूक्लियर पावर प्लांट व्हिच इज़ वन ऑफ़ द लार्जेस्ट। ठीक है? तो
रशिया के जो रिएक्टर्स हैं ना वो यहां पर हमने यूज़ करे हुए हैं। ठीक है? तो देन सेफ्टी और पब्लिक फेयर अप। ठीक है? फेयर
ऑफ रेडिएशन एक्सीडेंट बहुत सारे प्रोटेस्ट भी हुए थे जब हमने [संगीत] डिफरेंट न्यूक्लियर पावर प्लांट बन रहे थे जो
आसपास के गांव थे बहुत सारा प्रोटेस्ट वहां पर देखने को मिला था। ठीक है? ठीक है? तो देन हमारे पास आता है स्ट्रांग
सिक्योरिटी रिक्वायरमेंट। ठीक है? 24/7 आर्म सिक्योरिटी चाहिए सीआईएसएफ सेंट्रल इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी फोर्सेस डिप्लॉय
रहती है वहां पर। ठीक है? तो उसमें भी हमारा जो बजट है एलोकेट होता है सिक्योरिटी के लिए। ठीक है? तो आप
न्यूक्लियर पावर प्लांट बना रहे हैं इलेक्ट्रिसिटी जनरेट करने के लिए। बट इतनी सिक्योरिटी लगानी पड़ती है तो उसका बजट
सेपरेट अलग से लगाना पड़ रहा है। देन टेक्निकल एंड फ्यूल डिपेंडेंसी हमने बात करा था कि इंडिया 3% क्यों क्यों जनरेट कर
रहा है इलेक्ट्रिसिटी बिकॉज़ इंपोर्ट करना पड़ता है यूरेनियम है ना तो ये भी और यूएसए लार्जेस्ट है और हम देख सकते हैं कैसे
ट्रेड की पॉलिसीज चल रही हैं जिस हिसाब से ठीक है तो फ्यूल सप्लाई इशू कैन अफेक्ट दी पावर स्टेशन तो ये था पावर जनरेशन था अभी
तक का न्यूक्लियर एनर्जी के बारे में ठीक देन एक क्वेश्चन आ जाता है कि रेडियोएक्टिव वेस्ट क्या ये रिसाइकल करती
है इंडिया तो देखिए यस इंडिया फॉलोस अ क्लोज्ड फ्यूल साइकिल पॉलिसी ठीक है इस पॉलिसी के अंदर क्या होता है कि जो हमारा
न्यूक्लियर फ्यूल होता है उसको रिप्रोडस किया जाता है वो वो ऐसा नहीं है कि डंप कर दोगे आप ऐसी सइल पे या फिर किसी भी लैंड
पे इज़ एक्सट्रैक्टेड एंड रयूज्ड इन रिएक्टर। ठीक है? नाउ कंक्लूजन कंक्लूजन में आप बता सकते हैं। देखिए न्यूक्लियर
एनर्जी बहुत पावरफुल है। हमने देखा था एक पैेट कितने टन्स ऑफ कोल के बराबर होता है। कितने क्यूबिक 17,000 क्यूबिक ऑफ हमारे
नेचुरल गैस के बराबर होता है। देन गैलन्स ऑफ़ क्रूड ऑयल के बराबर होता है। तो बहुत एफिशिएंट है। बोलो आप कि न्यूक्लियर
एनर्जी इज़ वेरी पावरफुल। एफिशिएंट है। वो एग्जांपल दीजिए। ठीक है? देन लो कार्बन एनर्जी है। बिकॉज़ बहुत कम ही जो है हमारा
कार्बन डाइऑक्साइड इमिट करता है। तो हमारे क्लाइमेट गोल्स, एनर्जी सिक्योरिटी, नेट इमिशन टारगेट और जो हमने नेट जीरो टारगेट
रखा है 2070 उसको ये मीट करता है। हाउ एवर सेफ्टी कंसर्न है। हमने देखा रेडियो एक्टिव वेस्ट होता है। बहुत ज्यादा कॉस्ट
है। 20,000 और कहीं-क कंट्रीज में आपने देखा 50,000 करोड़ लगे हैं। राइट? देन स्ट्रिक्ट रेगुलेशन है। आपको शेयर करना
पड़ता है। वॉर का खतरा है। हमने देखा चाहे रशिया, यूक्रेन हो। ठीक है? इजराइल, ईरान, यूएस वॉर हो। सो न्यूक्लियर एनर्जी
डिपेंड्स ऑन बैलेंसिंग एफिशिएंसी एंड सेफ्टी एंड सस्टेनेबिलिटी। तो ये बहुत अच्छा एक हमने देखा कंक्लूजन। तो चलिए
जीडी देखते हैं जो इस पर आ चुका है। एफएसबी के अंदर भी देखने को मिला है। सिमिलरली हमने एनएसबी के अंदर भी देखा है
रिपीट होते। सो इन दी पर्स्यूट ऑफ़ सस्टेनेबल फ्यूचर व्हिच सोर्स ऑफ एनर्जी इज दी मोस्ट एफिशिएंट रिलायबल एंड ग्लोबली
बेनिफिशियल। तो सबसे पहले आता है न्यूक्लियर एनर्जी, सोलर एनर्जी और विंड एंड टाइडल एनर्जी। ठीक है? तो न्यूक्लियर
एनर्जी के बारे में आप बताइए कि क्यों सबसे एफिशिएंट है। आप बताओ कि सबसे पहले क्लीन फ्यूल है। कोई भी कार्बन डाइऑक्साइड
इसमें इमिट नहीं होता है। दूसरा जो है ये हाइली एफिशिएंट है। वो सारे एग्जांपल देने हैं आपको कि एक पैेट जो है वो कितने टन्स
ऑफ कोल्स के बराबर है। बैरल्स ऑफ क्रूड ऑयल के बराबर है वो एंड टन्स ऑफ कोल्स के बराबर है। एंड 17,000 क्यूबिक ऑफ नेचुरल
गैस के बराबर है। तो हाइली इफेक्टिव है। राइट? देन इट रिक्वायर्स अ वेरी लेस लैंड। राइट? आप एक बार न्यूक्लियर रिएक्टर लगा
देते हैं तो जितना हमें सोलर में चाहिए एंड सोलर डिपेंड्स ऑन व्हाट? सन के ऊपर। राइट? रात में तो आप सोलर एनर्जी नहीं
जनरेट कर सकते। सिमिलरली आप विंड और टाइडल प्रोजेक्ट की अगर बात करेंगे तो वहां पे भी आपको विंड चाहिए। अगर हम बात करें
हाइड्रो पावर की भी आल्सो तो हाइड्रो पावर में क्या चाहिए? आपको वाटर की रिक्वायर्ड डैम्स बनाने पड़ते हैं। डैम इटसेल्फ वेरी
डेंजरस है ना? तो उस केस में न्यूक्लियर एनर्जी बेस्ट निकल के आता है। राइट? सो यहां पर हम ये पॉइंट्स कुछ न्यूक्लियर के
बता सकते हैं जो कि हमारे फेवर में जाएंगे। राइट? और इंडिया तो वैसे भी 3% जनरेट कर रहा है। इसलिए इंडिया के लिए तो
बहुत जरूरी है। फिर आप बताइए कि रशिया से हम कितना इंपोर्ट कर रहे हैं कोल। तो हमें डिपेंडेंसी को रिड्यूस करने के लिए और
डायवर्सिफाई करने के लिए हमारी एनर्जी को फिर आप ईरान, इजराइल, यूएस का बताइए कि कैसे हमारी एलएनजी, एलपीजी क्राइसिस
इंडिया के अंदर आया, पेट्रोलियम क्राइसिस आया। ठीक है? तो उस क्राइसिस को शिफ्ट करने के लिए हमें जरूरी है कि न्यूक्लियर
एनर्जी पे हम शिफ्ट हुए। फिर न्यूक्लियर क्यों जरूरी है सर? न्यूक्लियर सबमरीन। तो न्यूक्लियर सबमरीन जो होती है वो बहुत
ज्यादा शांत होती है। ठीक है? वो अब देखिए डीजल इलेक्ट्रिक सबमरीन जो होती है उन्हें बार-बार क्या होता है कि सरफेस पे आना
पड़ता है। तो इसलिए उनकी स्टेल्थ फीचर जो है उससे कॉम्प्रोमाइज होता है। बट न्यूक्लियर एनर्जी सबमरेन क्योंकि
रिएक्टर्स लगे हुए हैं और रिएक्टर इतनी हाई एनर्जी जनरेट करते हैं 24 /7 तो ऐसी कोई नीड नहीं है आपके पास। तो इसलिए
इंडिया को न्यूक्लियर एनर्जी चाहिए। सोलर एनर्जी पे बात कर लेते हैं। ठीक है? तो सोलर एनर्जी देखिए। सोलर पावर इज द
इलेक्ट्रिसिटी जनरेटेड फ्रॉम सनलाइट यूजिंग सोलर पैनल। सिंपल। पर क्या हुआ? इलेक्ट्रिसिटी जनरेट करना सनलाइट के
द्वारा सोलर पैनल को यूज़ करते हुए इस इज़ दी सोलर एनर्जी। वहां पर हमने क्या देखा था कि जो न्यूक्लियर एनर्जी है वो एनर्जी
है वो रिलीज़ होती है एक न्यूक्लियस ऑफ़ एन एटम से जो यूरेनियम का एटम है उससे न्यूक्लियस ऑफ़ एन एटम से रिलीज़ होती है एक
एनर्जी। और ये एनर्जी जो है वो न्यूक्लियर फज़ के प्रोसेस के द्वारा रिएक्ट होती थी। जब ये न्यूक्लियर फज़ प्रोसेस होता था।
उससे हमें हीट जो है जनरेट होती थी। और इस हीट से जो है हम वाटर को बॉईल करते थे। बॉईल से क्या स्टीम निकलती थी? स्टीम
टरबाइन ब्लेड को घुमाती थी। सो टरबाइन ब्लेड्स मूव करते टरबाइन ब्लेड्स मूव करते हैं तो क्या होता है? जनरेटर हमारा चार्ज
होता है जो कि इलेक्ट्रिसिटी प्रोड्यूस करता है। चलिए अब इसके एग्जांपल देख लेते हैं। बदला सोलर पावर प्लांट। बदला जो सोलर
पार्क है राजस्थान के अंदर है। इसकी कैपेसिटी देख लीजिए आप और इट इज दी वर्ल्ड लार्जेस्ट सोलर पावर प्लांट। ये बहुत
इंटरेस्टिंग फैक्ट है। ये आप अपनी जीडी के अंदर यूज़ कर सकते हैं कि देखिए इंडिया जो है उसके पास वर्ल्ड का लार्जेस्ट सोलर
पावर प्लांट है। तो जो हमने जीडी करा अब उसके अंदर न्यूक्लियर एनर्जी के हमने काफी सारे पॉइंट्स देखे। तो एक कैंडिडेट
न्यूक्लियर एनर्जी के बहुत सारे पॉइंट बोल रहा होगा। तो सिमिलरली जिसने सोलर लिए तो वो बता सकता है। देखिए बदला सोलर पावर
पार्क जो इंडिया के अंदर है वो राजस्थान के अंदर है वो 250 मेगावाट्स ऑफ़ कैपेसिटी का है जो इलेक्ट्रिसिटी जनरेट करता है। ये
वर्ल्ड का लार्जेस्ट सोलर पावर प्लांट है। देन वो देन वो किसका एग्जांपल दे सकता है? पेवगाड़ा सोलर पावर प्लांट का दे सकता है।
जहां पर कैपेसिटी कितनी है? 2000 मेगावाट की है। इट इज़ आल्सो वन ऑफ़ द लार्जेस्ट। और हमने तो इंटरनेशनल सोलर अलायंस भी बनाया
हुआ है। जिसका हेड क्वार्टर इटसेल्फ इन गुरुग्राम। फ्रांस के साथ हमने देखा है फ्रांस वाज़ वन ऑफ़ द फाउंडिंग मेंबर। तो अब
इसमें 120 प्लस कंट्रीज हैं। इंडिया तो नेतृत्व कर रहा है सोलर पावर क्या? सोलर क्या है न्यू रिन्यूएबल सोर्स ऑफ़ एनर्जी
है। न्यूक्लियर। अब देखिए जिसने न्यूक्लियर एनर्जी पॉइंट लिया था आप उसको काउंटर कर सकते हैं कि न्यूक्लियर एनर्जी
नॉन रिन्यूएबल सोर्स है। अब वहां पर वो आप बता सकते हैं उसको काउंटर करते हुए। देखिए न्यूक्लियर के साथ एक्सीडेंट्स भी है
इनवॉल्व। चाहे वो हम देख सकते हैं चर्नोबेल का इंसिडेंट है ना? चर्नोबेल या फुक्सिमा जो जापान के अंदर हुआ सुनामी की
वजह से। बट यहां पर कोई ऐसा इंसिडेंट होने की संभावना नहीं है। राइट? वॉर में भी इसको अब इतना इफ़ेक्ट नहीं होगा जितना अब
न्यूक्लियर पावर से रिएक्ट होने के चांसेस है। ठीक है? देन देखिए रिन्यूएबल एंड अनलिमिटेड सोर्स है। बिल्कुल बिलियंस ऑफ
इयर्स के लिए आप देख सकते हैं। सन लास्ट है। बिल्कुल ये तो पॉइंट बहुत ही सिंपल है। देन एनवायरमेंटल फ्रेंडली है। देखिए
सोलर पावर प्लांट डू नॉट रिलीज़ CO2 बिल्कुल भी नहीं 0% है। बिल्कुल हार्मफुल गैसेस भी नहीं होती ड्यूरिंग
इलेक्ट्रिसिटी जनरेशन अनलाइक कोल पावर प्लांट्स। बिल्कुल सही बात है। देन रिड्यूसेस इलेक्ट्रिसिटी कॉस्ट आफ्टर
इंस्टॉलेशन सनलाइट इज़ फ्री। सो इलेक्ट्रिसिटी कॉस्ट इन द लॉन्ग टर्म विल बी लेस। देन हेल्प्स टू फाइट क्लाइमेट
चेंज। जैसे कि नेट ज़ीरो हमने टारगेट रखा है बाय 2070 तो उस टारगेट को ये फुलफिल करता है। लो मेंटेनेंस एंड लॉन्ग लाइफ और
सबसे बड़ी चीज ये हमारी इकॉनमी में हेल्प कर रहा है। कैसे? देखिए तो सबसे बड़ा पॉइंट क्या जाता है यहां पर? क्रिएट जॉब्स। ठीक
है? ये इकोनमी में हमारी हेल्प करता है। कैसे? तो देखिए जब भी कोई भी सोलर पार्क बनता है या फिर कोई सोलर पैनल इंस्टॉल
होता है तो उसके लिए हमें एक टेक्ननीशियन की जरूरत होती है। ठीक है? देन वेरियस कंपनीज़ आर देयर। स्पेशली आप adानी देख
लीजिए, Tata देख लीजिए। ये सारी सोलर के फील्ड में काम कर रही हैं। तो सो इन कंपनीज़ ने जो है लैक्स ऑफ पीपल को एंप्लॉय
कर रखा है इन दी सोलर एनर्जी सेक्टर। तो ये पॉइंट आ जाता है। सिमिलरली सोलर पैनल्स जो है अब वो विलेजेस के अंदर भी इंस्टॉल
हो रहे हैं। तो वहां पर भी जो टेक्नशियन हो गया, इंजीनियर्स हो गया और लोकल वर्कर हो गया, मेंटेनेंस तो वहां पर जो है लोगों
की जरूरत है। तो जॉब्स तो क्रिएट कर रहा है सोलर पैनल। ठीक है? देन हमारे पास आ जाता है कि कुछ डिसएडवांटेजेस हम देख लेते
हैं। ठीक है? तो रिक्वायर्ड टेक्निकल असिस्टेंस एंड रिक्वायर्ड लार्ज लैंड एरिया। अब यह जो लार्ज लैंड
[गला साफ़ करने की आवाज़] एरिया है यह न्यूक्लियर एनर्जी का क्या था? पॉजिटिव पॉइंट था। वहां पर शॉर्ट वहां पर क्या था?
आपको कम एरिया चाहिए था। लेस एरिया रिक्वायर्ड वेयर एज यहां पर क्या है? लार्ज लैंड रिक्वायर्ड है। तो ये समझ में
आ रहा है आपको? कैसे कंपेयर करना है? देन रिक्वायर्ड टेक्निकल असिस्टेंस। तो मैंने बताया था कैसे आपको क्या है मेंटेनेंस के
लिए यहां पर इंजीनियर्स, टेक्नशियन की जरूरत पड़ती है। राइट? देन सेकंड पॉइंट क्या आ जाता है? डिस्पोजल एंड रिसाइक्लिंग
प्रॉब्लम। सोलर पैनल्स आर डिफिकल्ट टू रिसाइकल एंड कैन कॉज सॉइल पोल्यूशन। देखिए सोलर पैनल जो बनते हैं उसके अंदर सिलिकॉन
का यूज़ होता है। देन इसमें हम देख सकते हैं वायर्स यूज़ होती हैं। काफी सारी एलुमिनियम का यूज़ होता है और काफी सारी
शीट्स होती हैं इसमें। ठीक है? तो इनको जो है वो रिसाइकल करना बड़ा मुश्किल होता है। अगर ये यूज़ हो चुकी है सिलिकॉन खासतौर से।
तो जब हम इसे डायरेक्टली अगर सोइल में डंप करते हैं तो यह जो है सोइल पोल्यूशन बहुत ही और अगर आप सोचिए वर्ल्ड का लार्जेस्ट
बदतला सोलर पावर प्लांट जो हमने बनाया है कितने एकड़ और किलोमीटर्स में फैला हुआ है। तो जब हम इसे इतने सारे सोलर पैनल्स
को क्योंकि इनकी भी लाइफ शेलफ होती है 15 इयर्स 20 इयर्स तो उस केस में जब आप इसको डंप कहां करेंगे? क्योंकि अभी ऐसी कोई
अच्छी हमारे पास रिसाइक्लिंग की फैसिलिटी नहीं है। ठीक है? देन डिपेंड्स ऑन सनलाइट वेदर डिपेंडेंट सोलर पावर कैन नॉट जनरेट
इलेक्ट्रिसिटी एट नाइट। बिल्कुल बट न्यूक्लियर एनर्जी तो 24/7 काम करती थी। पर अब उसका एडवांटेजेस हो गया। देन हाई
इनिशियल कॉस्ट एंड इंस्टॉलेशन कॉस्ट द कॉस्ट ऑफ सोलर पैनल इन्वर्टर इंस्टॉलेशन इज हाई एट द बिगिनिंग ये हमने बात करी थी
दैट्स व्हाई जो गवर्नमेंट है काफी सारी स्कीम्स के साथ आई है टू काउंटर दिस प्रॉब्लम एंड प्रॉब्लम क्या है देखिए
इंडिया इंपोर्ट 80 टू 85% सोलर मॉड्यूल फ्रॉम चाइना भाई साहब आप चाइना पे डिपेंडेड है सोलर पैनल्स के लिए भी तो ये
भी बहुत एक इंपॉर्टेंट पॉइंट यहां पे आ सकता है जो अपनी जीडी में यूज़ कर सकते हैं कि सोलर पैनल तो हम स्टिल 80 टू 85% कहां
से इंपोर्ट कर रहे हैं चाइना से ठीक है अब डिस्पाइट ऑल दिस डिसएडवांटेजेस अगर आप देखेंगे ना तो जो हमारा सोलर पैनल है ना
इसमें बेस्ट थिंग यही है कि कोई भी तरीके की गैसेस जैसे कि सल्फर डाइऑक्साइड, कार्बन डाइऑक्साइड देन पीएम 2.5 पीपीएम
अदर टाइप ऑफ़ पार्टिकल एंड मैटर स्मोक ये सारी चीजें रिलीज नहीं होती। वेयर एस सब और जितने भी हमारे एनर्जी सोर्सेस हैं ना
उनमें मेजरली होती। देखिए अगर आप हाइड्रो पावर का भी एग्जांपल लें जो वाटर यूज़ होता है इलेक्ट्रिसिटी जनरेट के अंदर। फिर आप
वापस उसको वो ड्रिंकेबल वाटर नहीं रहा। ठीक है? तो वहां पर हम देखें तो सोलर पैनल उससे काफी बेटर है। राइट?
तो देखिए जब आप सोलर एनर्जी क्योंकि यह टॉपिक बहुत बार रिपीट हुआ है स्पेशली इन लेक्चरेट तो यह हर बोर्ड में आपको देखने
को मिलेगा आर्मी एफएसबी बहुत फेवरेट टॉपिक है। तो जब सोलर एनर्जी पे आप लेक्चर देंगे तो आप थोड़ा सा देखिए आप बता सकते हैं
थोड़ा कि सोलर एनर्जी को इंस्टॉल कैसे करते हैं। राइट? और सिमिलरली टैट की जब हम स्टोरीज लिखते हैं तो काफी सारी पिक्चर्स
ऐसी आती है जहां पर हम सोलर एनर्जी से रिलेटेड बना सकते हैं स्टोरी। ठीक है? तो अगर हमें पता ही नहीं कि सोलर पैनल्स लगते
कैसे हैं तो हम स्टोरी कैसे बनाएंगे। इसलिए यहां पे हमें सीखना जरूरी है कि हम ये जो चीजें हैं हम अपने लेक्चरेट प्लस हम
अपने टैट में भी यूज़ कर सकते हैं। ठीक है? तो माउंटिंग स्ट्रक्चर देखिए एक माउंटिंग स्ट्रक्चर चाहिए होता है। जैसे एलुमिनियम
फ्रेम होता है ना वो चाहिए होता है हमें। ठीक है? होल्ड पैनल फर्मली एंड करेक्ट एंगल फॉर मैक्सिमम सनलाइट। मतलब कितने
एंगल पे हमने एक माउंटिंग पैनल्स को लगा दिया। तो सबसे पहली चीज़ क्या चाहिए? एक माउंटिंग स्ट्रक्चर चाहिए हमें। ठीक है?
माउंटिंग स्ट्रक्चर चाहिए जो एलुमिनियम का बना होता है। ठीक है? फिर हमें क्या चाहिए? सोलर पैनल चाहिए। बिल्कुल हमने
बताया ही था कि सोलर पैनल क्या कहते हैं? कन्वर्ट सनलाइट इंटू डायरेक्ट करंट इलेक्ट्रिसिटी। ठीक है? फिर हमें एक
इन्वर्टर की जरूरत है जो कन्वर्ट करता है डायरेक्ट करंट को। किसमें? एसी के अंदर जो कि कन्वर्ट करता है डायरेक्ट करंट को। किस
में? अल्टरनेटिंग करंट। ठीक है? तो अल्टरनेटिंग करंट कौन सा होता है? जो हम अपने हाउसहोल्ड में यूज़ करते हैं। ठीक? सो
इनवरर्टर बहुत जरूरी है कन्वर्ट करने के लिए डायरेक्ट करंट को एसी करंट के अंदर। ठीक है? मतलब एसी वही अल्टरनेटिंग करंट।
तो ये चीज़ हमें समझ में आ गई कि हमें एक माउंटिंग स्ट्रक्चर चाहिए। हमें सोलर पैनल की रिक्वायर्ड है। हमें इन्वर्टर की चाहिए
जो ए डीसी को एसी में कन्वर्ट करेगा। एंड देन हमें ग्रिड सिस्टम चाहिए। ठीक है? और वायरिंग चाहिए, बैटरी चाहिए। ठीक है?
ग्रिड सप्लाई और रिसीव्स एक्स्ट्रा पावर। देखिए क्या होता है कि कभी-कभी हमारे सोलर पैनल जो होते हैं ना लोग जब एक्स
एक्स्ट्रा इलेक्ट्रिसिटी बच जाती है तो वो बाहर प्रोड्यूस भी करते हैं। राइट? एक्स्ट्रा इलेक्ट्रिसिटी जनरेट हो सकती है
तो हम उसको सेल भी कर सकते हैं। ठीक? सो, सम कंट्रीज इवन सेल दी इलेक्ट्रिसिटी टू अदर कंट्रीज आल्सो। तो ये चीजें हमें
देखनी है। ठीक है? तो वायरिंग वायरिंग सिस्टम हमें चाहिए और बैटरी स्टोर बैटरी चाहिए जो कि जो एक्स्ट्रा इलेक्ट्रिसिटी
है वो उसको स्टोर कर सके बैटरी। ठीक है? तो हमने देखा माउंटिंग स्ट्रक्चर, सोलर पैनल, इनवरर्टर दे दो एक जो डीसी से एसी
में करेगा। फिर ग्रिड सिस्टम, वायरिंग्स तो चाहिए और एक बैटरी दे दो बैकअप के लिए। अगर बाय चांस जो हमारी एक्स्ट्रा
इलेक्ट्रिसिटी जनरेट हुई है वो बैटरी के अंदर स्टोर हो जाएगी। जब रात में कभी हमें लाइट की जरूरत पड़ी तो हम बैटरी का यूज़
करके उसे कर सकते हैं। ठीक है? नाउ स्कीम्स देख लेते हैं। जैसे हमने बात करी थी यहां पर कि हाई इनिशियल कॉस्ट है।
इंस्टॉलेशन कॉस्ट बहुत ज्यादा है। ठीक है? कॉस्ट ऑफ सोलर पैनल इनवरर्टर। तो इस चीज को कर्व करने के लिए गवर्नमेंट आई काफी
सारी स्कीम के साथ और स्कीम्स को तो आप ग्रुप डिस्कशन के अंदर बहुत तरीके से यूज कर सकते हैं। आप अपने टैट की स्टोरीज के
अंदर लिख सकते हैं जिससे पता लगता है कि आपको नॉलेज है। ठीक है? तो पीएम कुसुम स्कीम राइट? इसके अंदर क्या है? गवर्नमेंट
विल पे 60% ऑफ द कॉस्ट ऑफ सोलर पंप प्लांट। सो फार्मर पे मच लेस एंड अर्न बाय सेलिंग एक्स्ट्रा पावर। ठीक है? देखिए
हमने बोला था वहां पे हाई इनिशियल कॉस्ट है बट आप इसको काउंटर कर सकते हैं अपनी जीडी के अंदर कि देखिए हाई इनिशियल कॉस्ट
तो है बट पीएम कुसुम स्कीम के द्वारा जो है 60% तो सब्सिडी अपनी गवर्नमेंट दे रही है देन रूफ ऑफ सोलर प्रोग्राम यहां पर भी
क्या है 40% सब्सिडी मिल रही है फॉर स्मॉल सिस्टम 3 किलोवाट के होते हैं जो एंड रेस्ट ऑफ दी अमाउंट आप पे कर रही है 40%
गवर्नमेंट पे करेगी देन सोलर पार्क स्कीम लार्ज सोलर पार्क लाइक बदला राजस्थान के अंदर है जो गवर्नमेंट डेवलप्स लार्ज सोलर
पार्क विद रेडी लैंड एंड इंफ्रास्ट्रक्चर सो कंपनीज़ कैन ईज़ली सेट अप प्लांट्स एंड जनरेट इलेक्ट्रिसिटी जैसे कि Tata और
adानी हो तो गवर्नमेंट लैंड प्रोवाइड करेगी सब्सिड सब्सिडाइज रेट पर और आप वहां पर अपने जो बड़े सोलर पावर प्लांट्स लगा
सकते हैं। ठीक है? तो ये कुछ थी जो अच्छे और पॉजिटिव थिंग्स हैं व्हिच डेड बाय गवर्नमेंट। देन सोलर एनर्जी का अगर
कंक्लूजन की बात करें तो देखिए इंडिया टारगेट इंडियास टारगेट टू अचीव 50% ऑफ़ इलेक्ट्रिसिटी कैपेसिटी फ्रॉम रिन्यूएबल
नॉन फॉसिल सोर्स बाय 20130। हमने ये पॉइंट को बहुत बार रिपीट करा और ये पॉइंट बहुत अच्छी तरीके से याद कर लीजिए। ठीक है? ये
पॉइंट बहुत रिपीट होगा और ये पॉइंट बहुत इफेक्टिव पॉइंट है कि बाय 20130 हमने सेट कर रखा है टारगेट में कि भाई साहब हम अपनी
50% इलेक्ट्रिसिटी नॉन रिन्यूएबल जिसमें क्या-क्या आ सकता है? विंड हो सकता है, टाइडल हो सकता है, हाइड्रो पावर हो सकता
है और हमारा सोलर एनर्जी हो गया। तो ये सारी चीजें हम नॉन रिन्यूएबल से करेंगे। व्हिच इज़ गुड। और अब तो बहुतेंट है। हमने
देख लिया ईरान क्राइसिस के बाद कि कैसे इंडिया बहुत वनरेबल है अपनी एनर्जी को लेके। ठीक है? तो इसलिए और दूसरा हम अपना
इंपोर्ट भी इतना ज्यादा कर रहे हैं 80% क्रूड ऑयल। तो हमने ये चीज याद रखनी है और ये जीडी आने के बहुत ज्यादा चांसेस हैं इन
फ्यूचर। ठीक है? सेटेलाइट यूज सोलर एनर्जी। देखिए सारी पॉइंट पे हमने बात कर ली। बट एक बहुत इंटरेस्टिंग पॉइंट है।
जितनी भी हमारी सेटेलाइट्स हैं ना आई सेट हो गई एमई सेट ये सारी सेटेलाइट्स जो हैं वो क्या यूज़ कर रही हैं? सोलर पैनल्स यूज़
कर रही हैं। ठीक है? ये एनर्जी जनरेट कहां से करती होंगी? इलेक्ट्रिसिटी कहां से मिलती होगी इनको फॉर फंक्शनिंग। तो वो
सारी क्या है? देखिए आप ये जो सोलर पैनल्स लगे होते हैं ये जनरेट करवाती हैं। ठीक है? तो ये चीज़ बहुत कम लोगों को पता है।
हम सारे पॉइंट्स बता देंगे। बट आपको पता है कि सेटेलाइट्स भी यूज़ कर रही हैं सोलर पैनल। तो दैट इज़ समथिंग व्हिच इज़ वैरी
इफ़ेक्टिव। नाउ कंक्लूजन यही है कि देखिए सोलर एनर्जी रिड्यूसेस कोल्ड डिपेंडेंस व्हिच इज़ इंडियस प्राइमरी इलेक्ट्रिसिटी
सोर्स टुडे एंड मेनली इंपोर्ट कोलइल फ्रॉम इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया। एंड क्रूड ऑयल की अगर हम बात करें तो वो हम कहां से कर
रहे हैं? चलिए अब हम बात करते हैं इलेक्ट्रिक व्हीकल्स का। राइट? ये लेक्चर टॉपिक भी
ऑलमोस्ट हर बोर्ड में रिपीट हो चुका है। और आगे भी फ्यूचर में ये होता रहेगा। एंड इस पे भी जो है जीडी टॉपिक बहुत बार रिपीट
हो चुका है। ठीक है? तो एन इलेक्ट्रिक व्हीकल इज अ व्हीकल दैट रंस फुल्ली और पार्शियली ऑन इलेक्ट्रिसिटी इंस्टेड ऑफ
पेट्रोल और डीजल। अब हमने बात कर ली कि इलेक्ट्रिसिटी पे रन करता है। और ये इलेक्ट्रिसिटी जो है वो कहां से मिलती है?
हमें रिचारजेबल बैटरी से मिलती है। आपको पता है इन जितनी भी गाड़ियां होती हैं इनमें बैटरी होती है। राइट? जिनको हमें
रिचार्ज करना पड़ता है जब उनकी पर्टिकुलर लिमिट खत्म हो जाती है। ठीक है? तो अब ये जो आपने लिखा है चार्जिंग स्टेशन और होम
चार्जर तो ये भी बहुत सिंपल पॉइंट है। ठीक है? तो आप ये देख सकते हैं। ईवी सेल्स एग्जांपल इन इंडिया। Tata Nexon EV वन ऑफ
द हाईएस्ट सेलिंग इलेक्ट्रिक कार्स इन इंडिया। भाई ये पॉइंट्स हमें जीडी में यूज़ करने हैं। इंडियास ईवी कार सेल्स क्रॉस्ड
विद Tata Motors होल्डिंग 70% ऑफ़ मार्केट शेयर किसके पास है? Tata Motors के पास है। सो 1.76 लाख यूनिट हमने इंडिया में
सेल करी है। और ग्लोबली अगर मैं बात करूं तो 20 मिलियन सेल्स हो गई है। ऑलमोस्ट 2 करोड़ व्हीकल इलेक्ट्रिक व्हीकल हैव बीन
सोल्ड। सो अब यहां पर एक चीज़ आती है कि इंडिया के अंदर कितने सेल हुए हैं? 1.76 लाख हुए हैं। ठीक है? इंडिया के अंदर जो
है Tata Motors सबसे प्रॉमिनेंट है। 70% शेयर उन्हीं का है। दूसरी चीज अगर हम देखें स्टिल 90% मार्केट अभी भी डीजल
व्हीकल का ही है। 90 टू 92% वेयर एज 8 टू 10% ही इलेक्ट्रिक व्हीकल अभी तक कैप्चर कर पाई है। ठीक है? तो ये पॉइंट आप देख
सकते हैं कि इलेक्ट्रिक व्हीकल है तो अच्छा बट अभी तक ये मार्केट कैप्चर नहीं कर पाए। अब हम बात करते हैं इलेक्ट्रिक
व्हीकल क्यों जरूरी है? हमने इतनी सारी चीजें क्लाइमेट के बारे में बात करी। राइट अब तक। तो इलेक्ट्रिक व्हीकल में भी
सिमिलर दो कार्बन इमिशन है। तो ईवीज़ प्रोड्यूस ज़ीरो टेल पाइप इमिशन। कौन से इमिशन पीम 2.5 हम पढ़ के आए हैं। बहुत बार
रिपीट कर चुके हैं। CO2 हो गया, सल्फर डाइऑक्साइड हो गया, कार्बन मोनोऑक्साइड, कार्बन डाइऑक्साइड ओजोन। तो ये सारी चीजें
हमने देखी। ठीक है? तो ये देख चुके हैं। देन लेस नॉइज़ पोल्यूशन ईवीज़ आर वेरी क्वाइट बिकॉज़ दे डू नॉट हैव एनी कन्वेंशन
कन्वेंशनल इंटरनल कंबशन इंजन। तो हम पढ़कर आए थे कहां पर? पोल्यूशन के अंदर कि नॉइज़ पोलशन में। थर्ड पॉइंट में हमने पढ़ा था कि
जो हमारा व्हीकल होता है वो कितना ज्यादा जो है नॉइज़ पोलशन प्रोड्यूस करता है। बट यहां पर ईवी की वजह से नॉइज़ पोलशन पूरा
खत्म। राइट? एयर पोल्यूशन पूरी तरीके से खत्म। तो इसलिए ये वन ऑफ़ दी बेस्ट है इन कंपैरिजन टू दी फॉसिल फील्ड। ठीक है?
इंप्रूव अर्बन एयर क्वालिटी एंड पब्लिक हेल्थ। बिल्कुल सही बात है। दिल्ली का एग्जांपल ले सकते हैं। ठीक है? देन व्हाट
आर दी कॉज एंड रीज़न? व्हाई ईवीज़ आर रिक्वायर्ड? तो वही जो हम पढ़ के आए थे किसमें? क्लाइमेट चेंज में कि क्यों
क्लाइमेट चेंज हो रहा है? बर्निंग ऑफ़ फॉसिल फ्यूल, डिफॉरेस्टेशन, इंडस्ट्रियल एमिशन हो रहा है, व्हीकल इमिशन हो रहा है,
अर्बनाइजेशन हो रहा है। उसके बाद सारे पॉइंट्स आपको बता देने हैं। देन आपको रिपीट करने हैं सारे पॉइंट्स। अगर आप
लेक्चर दे रहे हैं कि देखिए WHO बता चुका है कि ग्लोबली 7 मिलियन डेथ हो गई है। इंडिया के अंदर 1.7 मिलियन डेथ हुई है। ये
मेंशन किया गया है लैंडसेस रिपोर्ट के द्वारा। तो इन सब चीजों से देखें हम तो जो हमारी एयर क्वालिटी की वजह से लाइफ अफेक्ट
हो रही है और जो फ्यूचर जनरेशन है वो रिस्क है इसलिए हमें ईवी की जरूरत है। ठीक है? तो ये सारे हम चीजें पढ़ के आ चुके
हैं। हमें रिपीट करने की जरूरत नहीं है। नाउ इकोनमिक एडवांटेजेस क्या है? ईवी रनिंग कॉस्ट इज रफ्ली वन टू ₹2 पर कि.मी.
व्हाइल पेट्रोल कॉस्ट 7 टू 10 ये वन ऑफ दी बेस्ट पॉइंट है जो हम अपने जीडी में पुट अक्रॉस कर सकते हैं। ठीक है? ईवी रनिंग
कॉस्ट इज रफली वन टू ₹2 पर कि.मी. व्हाइल द पेट्रोल कॉस्ट 7 टू ₹10 पर कि.मी. सो इकोनमिक एडवांटेज कितना ज्यादा मिल रहा है
हमें यहां पे। देन लोअर मेंटेनेंस कॉस्ट फ्यूर मूविंग पार्ट्स कंपेयर टू दी इंटरनल कंबैशन इंजन व्हीकल। देखिए जो इंजन होते
थे हमारे अभी। राइट? तो उनके अंदर काफी सारे पार्ट्स होते थे। राइट? बट यहां पर जो हमारी बैटरी होती है राइट जो मेन जो
पावर जनरेट कर रही है तो वेयर एस बैटरी और अगर आप इंजन को तो इंजन बहुत कॉम्प्लेक्स है तो मेंटेनेंस की बहुत कम रिक्वायरमेंट
है। दूसरा लोअर रनिंग कॉस्ट हम देख चुके हैं। देन इंडिया इंपोर्ट ओवर 85% ऑफ क्रूड ऑयल नीड्स फ्रॉम अदर कंट्रीज। ठीक है?
अराउंड 130 बिलियन डॉलर्स का हम क्रूड ऑयल कहां मेनली रशिया से इन सब जगह से इंपोर्ट करते हैं। और इसी क्रूड ऑयल से क्या बनता
है? पेट्रोल बनता है, डीजल बनता है। तो हमारी जो डिपेंडेंसी है ऑन अदर नेशंस वो भी कम होगी। राइट?
अगर हम सारे अपने क्रूड ऑयल का देखें तो देखिए रशिया जो है रशिया के साथ हमारा जितना ट्रेड होता है उसमें 80% हमारा क्या
है? क्रूड ऑयल का होता है। अगर हम ओवरऑल देखें तो लार्जेस्ट सप्लायर है 35% के आसपास जो है रशिया है और मिडिल ईस्ट की
अगर कलेक्टिवली सारी कंट्रीज को देखें तो 50 टू 55% हम वहां से ला रहे हैं। ठीक है? नाउ मेड इन इंडिया ठीक है? इंडीजीनस है।
तो सबसे बड़ा एडवांटेज क्या है? मेड इन इंडिया है भाई जितने भी Ola, इलेक्ट्रिक, एथर, Tata, Mahindra, इलेक्ट्रिक, Tata
Power, हैम ये सारी मेड इन इंडिया आ रही है। वेयर एज़ अगर आप Suzuki भी देखें तो है तो मेड इन इंडिया बट है फॉरेन कंपनीज़।
वेयर एस ये सारी इंडियन कंपनीज़ हैं। इंडियन ओरिजिनेटेड हैं। इंडीजीनियस कंपनीज़ हैं। तो जितनी इलेक्ट्रिक सेक्टर्स में अब
कंपनियां आ रही हैं वो सारी इंडियन ओरिजिनेटेड है। ठीक है? तो Ola इलेक्ट्रिक देख सकते हैं। बिलियन डॉलर ईवी स्टार्टअप
है। बिल्डिंग लार्ज ईवी फैक्ट्रीज़ एंड क्रिएटिंग थाउजेंड्स ऑफ़ जॉब्स। आप ये एग्जांपल जीडी में डालिए। बिल्कुल। देन
एथर का आप एग्जांपल दे सकते हैं कि स्ट्रांग ईवी इनोवेशन करा है इन्होंने। और ये जितनी भी कंपनीज़ हैं सारी क्या है?
यूनिकॉर्न है। ठीक है? बिलियन डॉलर्स कंपनीज़ है। देन Tata Motors तो हम जान सकते हैं 70% तो शेयर इन्हीं के पास है।
Mahindra इलेक्ट्रिक आपने देखा है वो B6E जो इनकी कार आई है। राइट? देन Tata पावर्स में आप एग्जांपल दे सकते हैं जो एग्जाम
एक्सपेंडिंग ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और आप एग्जांपल्स दीजिए। ठीक है? अगर आपको कोई भी याद आता है जैसे Tata आपको PH याद
आ रहा है, Nexon याद आ रहा है तो जितने भी इलेक्ट्रिक गाड़ियां आ रही है आप उसका एग्जांपल्स दे सकते हैं। ठीक है? ईवी
सेक्टर बिलियन डॉलर्स कंपनीज़ प्लस जॉब क्रिएशन, इनोवेशन, इकोनमिक ग्रोथ ये सारे जीडी के पॉइंट्स हैं। ठीक है? और सिमिलरली
इलेक्ट्रate में तो हमें यूज़ करना ही है। देन हम बात करते हैं कन्वीनियंस एडवांटेजेस ऑफ़ इलेक्ट्रिक व्हीकल। देखिए
सबसे पहली बात कन्वीनियंस क्योंकि ये एक जीडी की लीड बनेगी आगे जाके। ये टॉपिक आ चुका है जिसमें कन्वीनियंस थी वो लीड कि
क्यों हम इलेक्ट्रिक व्हीकल को प्रेफर कर रहे हैं। तो कन्वीनियंस मतलब क्या होता है कि आप सिंपल लैंग्वेज में बोलते हैं
फीचर्स या फिर क्या आपको वो एडवांटेज दे रही है। पर्टिकुलर व्हीकल आपको क्या कंफर्ट कन्वीनियंस एडवांटेजेस दे रही है।
ठीक है? तो उस पे बात करते हैं। साइलेंट ऑपरेशन अभी हम बात करके आए हैं। ईजी टू ड्राइव है। भाई यहां कोई क्लच नहीं है।
कोई गियर सिस्टम ही नहीं है। तो क्या है? बहुत इजी है ड्राइव करना। ठीक है? सबसे बड़ी प्रॉब्लम तो क्लच में आती थी। देन
एडस फीचर आ जाता है। ठीक है? एडस फीचर आ जाता है। जितने भी हमारी गाड़ियां हैं जो इलेक्ट्रिक व्हीकल हैं देखिए उसमें हाई आप
देखिए डिस्प्ले सिस्टम है। एडस फीचर मिलेगा। ए बेस सेंसर है। कैमरास हैं पांचप छह। ठीक है? एयर बैग्स फुल्ली लोडेड विद
फीचर्स हैं। राइट? देन यहां पर बूट स्पेस भी बहुत ज्यादा है। क्यों बूट स्पेस है? क्योंकि इंजन की जगह खाली हो चुकी है।
बैटरी जो आप देखेंगे सबसे निचले पार्ट में है। राइट? तो इसलिए यहां पर बूट स्पेस भी एक्स्ट्रा मिल रहा है आपको। देन ये जो
ईवीस हैं बहुत ज्यादा फ्यूचरिस्टिक डिज़ाइन है। ठीक है? लोअर वाइब्रेशन स्मूदर राइड कंपेयर टू फ्यूल व्हीकल्स। मोबाइल ऐप
कनेक्टिविटी है, चार्जिंग, कंट्रोल लॉक, अनलॉक, ट्रैक व्हीकल्स, होम चार्जिंग कन्वीनियंस है। पेट्रोल पंप तो घर पे नहीं
खोल सकते ना। बट होम चार्जिंग कन्वीनियंस मिल रही है यहां पे। मोर बूट स्पेस और स्टोरेज भी हम बात कर चुके हैं। अब हम बात
करते हैं चैलेंजेस की। राइट? तो इंफ्रास्ट्रक्चर चैलेंज लिमिटेड चार्जिंग स्टेशन स्पेशली इन रूरल एरियाज। राइट? एंड
हाईवे एरियाज। अगर आप रूरल एरिया किसी भी चले जाएं। ठीक है? तो राजस्थान के या फिर कहीं पे भी रूरल एरिया में जा रहे हैं और
आप बहुत मिड वे अगर बाय चांस आपकी बैटरी फिनिश हो जाती इन दैट केस आप ये नहीं है कि किसी से पेट्रोल डीजल ले रहे हैं
क्योंकि क्या होता था बाइक्स वगैरह से पेट्रोल डीजल निकाल सकते हो राइट थ्रू पाइप बट यहां क्या करोगे तो यहां पे ये
ऐसा कोई भी आपको एडवांटेज नहीं मिल सकता ठीक है देन हाई इन्वेस्टमेंट रिक्वायर्ड फॉर नेशन वाइड चार्जिंग नेटवर्क बिल्कुल
बिकॉज़ इनिशियल कॉस्ट जो होएगी वो बहुत हाई होने वाली है। ठीक है? अगर आप चार्जिंग स्टेशंस जगह-जगह लगाएंगे तो ये समथिंग
देखिए बट इसका सशन ये है जितने भी हमारे पेट्रोल पंप्स हैं उसके साथ-साथ अगर आप ईवी लगा देते हैं इससे क्या होगा? जो आपकी
इनिशियल कॉस्ट थी वो काफी ज्यादा कम होएगी और सिमिलरली हम देख सकते हैं Jio के और adानी के काफी सारे जो है चार्जिंग
स्टेशंस अब इंडिया में स्टार्ट हो चुके हैं लगने। ठीक है? हाई इनिशियल कॉस्ट ईवीज़ आर मोर एक्सपेंसिव देन पेट्रोल डीजल कार।
ये तो सबको पता है। ठीक है? 15 टू 19 लाख जो कि आपको कार्स जो है वो 8 से 13 लाख में इमिट साइज एसयूवी मिल जाती है। वही
काफी ज्यादा कॉस्ट करती है। ठीक है? बैटरी कॉस्ट 30 टू 40% ऑफ ईवी प्राइस। ठीक है? तो जब बैटरी ड्रेन हो जाती है लैक्स ऑफ
किलोमीटर के बाद तो आपको बैटरी चेंज कराना है जो 30 टू 40% ईवी प्राइस है तो आपको रिसेल भी नहीं कर सकते उसको। ठीक है? तो
देखिएगा कुछ और चैलेंजेस है रॉ मटेरियल डिपेंडेंसी है। हमने देखा कि जो हमारा तो रॉ मटेरियल डिपेंडेंसी ईवी बैटरीज
रिक्वायर लिथियम कोबाइल निकल और ये जो है मेनी कंट्रीज डिपेंड ऑन इंपोर्ट। एस्पेशली चाइना हम बहुत ज्यादा डिपेंडेंट है चाइना
के ऊपर। ठीक है? और चाइना बीइंग एनिमी तो वो चीज हमारे लिए एक ग्रेटर थ्रेट है। बैटरी एंड रेंज लिमिटेशन पे हम बात कर
चुके हैं इलेक्ट्रिसिटी डिमांड। ठीक है? इलेक्ट्रिसिटी जैसे हमने बात करी कि जो हमारा इलेक्ट्रिक व्हीकल का शेयर है वो 8
टू 10% है। वेयर एस पेट्रोल एंड डीजल का शेयर जो है वो 90% है। सो टू इंक्रीस दी इलेक्ट्रिक व्हीकल शेयर इन दी मार्केट
इंडियन गवर्नमेंट केम विद फेम इंडिया स्कीम। जिसका मतलब है फास्ट अडॉप्शन एंड मैन्युफैक्चरिंग ऑफ़ इलेक्ट्रिक व्हीकल।
ठीक है? तो अंडर दिस गवर्नमेंट विल प्रोवाइड दी सब्सिडीज फॉर ईवी बायरर्स एंड सपोर्ट फॉर चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर।
राइट? सो गवर्नमेंट विल डेवलप मोर एंड मोर चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर एंड सब्सिडी टू दी कॉमन बायर। सो देन दिस फेम इंडिया
स्कीम इज मॉडिफाइड इंटू पीएम ई ड्राइव स्कीम राइट? सो अंडर दिस वेरियस इलेक्ट्रिक बसेस हैव बीन फ्लैग्ड ऑफ बाय
दी स्टेट गवर्नमेंट्स। ठीक है? एंड टू व्हीलर्स चार्जिंग स्टेशंस। आल्सो सब्सिडीज जो है वो स्टिल कंटिन्यू है।
बहुत सारे व्हीकल्स पे। अगर आप अभी भी जाएंगे तो TVS के स्कूटर्स हैं। देन चेतक इन पर अभी भी सब्सिडीज जो है वो गवर्नमेंट
दे रही है। ठीक है? तो अगर हम फ्लैग ऑफ बसेस की बात करें तो आप देख सकते हैं कि 300 न्यू इलेक्ट्रिक बसेस फ्लैग्ड ऑफ बाय
दिल्ली सीएम है ना देन हम यहां पर देख सकते हैं पीएम मोदी फ्लैग्स ऑफ 50 इलेक्ट्रिक बसेस और लास्ट में आप देख सकते
हैं पीएम ई बस सेवा राइट तो ई ड्राइव स्कीम है वैसे ही ई बस सेवा भी है जिसके अंदर हमने काफी सारी जो है इलेक्ट्रिक
बसेस को फ्लैग्स ऑफ करा है ठीक है देन सेमीकंडक्टर मिशन ठीक है तो कैबिनेट ने अप्रूव करा है सेमीकंडक्टर
मैन्युफैक्चरिंग यूनिट इन ओसा पंजाब आंध्र प्रदेश ठीक है और बिकॉज़ ये जो सेमीकंडक्टर क्टर और इलेक्ट्रॉनिक कॉम्पोनेंट चिप्स
हैं। ये इलेक्ट्रिक व्हीकल के अंदर यूज़ होती है। राइट? यह एक तरीके का ब्रेन है इलेक्ट्रिक व्हीकल का। तो इसको
मैन्युफैक्चरिंग करने के लिए जो है हमने सेमीकंडक्टर मिशन को ल्च करा है। आई होप दिस इज़ अंडरस्टुड। नाउ हम जीडी टॉपिक की
तरफ चलते हैं। व्हाट इज दी मोस्ट इन्फ्लुएंशियल फैक्टर शेपिंग दी अडॉप्शन ऑफ़ इलेक्ट्रिक व्हीकल ईवीज़ बोथ पॉजिटिवली
एंड नेगेटिविटी। ठीक है? ये एफएसबी गुहाटी में आया था टॉपिक। नाउ कॉस्ट एंड इकोनॉमिक वायबिलिटी, यूजर कन्वीनियंस एंड यूज़बिलिटी
एंड चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और एक्सेसिबिलिटी। तो इन तीनों में से सबसे पहले हम कॉस्ट एंड इकोनमिक वायबिलिटी की
बात करते हैं। तो जैसे कि हमने बात करी थी इकोनॉमिक एडवांटेज में कि ईवी की जो रनिंग कॉस्ट है वो बहुत कम है वन टू 2 पर किमी
वेयर एज वेयर एज पेट्रोल कार्स कॉस्ट इज़ 7 टू ₹10 पर किमी ठीक है देन लोअर मेंटेनेंस कॉस्ट फ्यूवर मूविंग पार्ट देखिए क्योंकि
यहां पर इंजन नहीं है, क्लच नहीं है, गिय्स नहीं है। तो देयर फॉर यहां पर जो मेंटेनेंस है वो बहुत ही इजी है। आप अगर
बैटरी भी चेंज कर देते हैं अराउंड आफ्टर 2 लाख कि.मी. तो स्टिल आपकी कार जो है वो न्यू हो जाती है। ठीक है? देन लोअर रनिंग
कॉस्ट पे हम बात कर चुके हैं। ठीक है? इफ वी कंपेयर टू पेट्रोल एंड डीजल और आप ये भी बता सकते हैं कि हम जो हाई इंपोर्ट
करते हैं अराउंड 85% ऑफ क्रूड ऑयल देख अराउंड 130 बिलियन। ठीक है? वो भी हमारा रिड्यूस होगा। तो वो भी हमारा इकोनमिक
वायबिलिटी के अंदर आ जाएगा। ठीक है? देन हम बात करते हैं Ola EIC A3 Tata Motors, Mahindra एंड Tata Power। सो इतनी सारी
कंपनीज़ जो है ऑलरेडी इंडियन मार्केट के अंदर आ चुकी है। तो अब जो है कंपटीशन इनक्रीस हो चुका है और उसका बेनिफिट जो है
वो कस्टमर को मिलेगा। बिकॉज़ अब यह जो है प्राइस सेंसिटिव मार्केट बन चुकी है। जब न्यू इलेक्ट्रिक व्हीकल्स आ रहे थे तो वह
1.5 लाख, 2 लाख तक आ रहे थे। ठीक है? अब आपको 60,000, 80,000, 90,000 में भी देखने को मिल रहा है। ठीक है? सिमिलरली कार्स भी
अगर हम देखें तो काफी ज्यादा चीपर हो गया एज़ कंपैरिजन टू अर्लियर। राइट? तो ये एक बेनिफिट हो गया मेड इन इंडिया का और मेड
इन इंडिया और इंडीजीनियस की वजह से क्या है? लोगों को जॉब भी मिली है एंप्लॉयमेंट। तो इकोनॉमिक वायबिलिटी एक कॉमन बयर को तो
मिल रही है। साथ-साथ जो एक इकोसिस्टम बन रहा है जिसमें सारे इकोनॉमिकली बेनिफिट हो रहे हैं। ठीक है? और ईवी फ्यूचर है। ठीक
है? क्लाइमेट चेंज एंड ऑल दैट। तो हम इतना खर्चा कर रहे हैं क्लाइमेट चेंज के ऊपर हमने बात करी थी मिशनंस थे चाहे वो नमामी
गंगे 42000 करोड़ देन स्टेट बजट ही दो2000 करोड़ है तो वो सारी चीजें भी अब खत्म होंगी बिकॉज़ इलेक्ट्रिक व्हीकल आ रहा है
कम व्हीकलर पोलशन होगा पीएम 2.5 रिलीज़ होगा हेल्थ केयर सेक्टर में इंप्रूवमेंट होगी तो ओवरऑल इकोनमिक एडवांटेजेस काफी
सारे बढ़ेंगे। नाउ अब हम बात करते हैं इकोनमिक वायबिलिटी के सब नेगेटिव एडवांटेजेस की। ठीक है? तो अगर आप देखें
ईवीज़ की कॉस्ट जो है जैसे Tata Nexon EV जो है वो सबसे ज्यादा बिकने वाली EV है इंडिया के अंदर। कॉस्ट अराउंड 15 टू ₹19
लाख। ठीक है? तो ये जो एक चीज है अगर हम जितनी भी ईवी देखेंगे चाहे वो मिड साइज एसयूवीस हैं वो सारी अबव ₹15 लाख हैं। ठीक
है? तो ये अभी भी स्टिल एक यू नो चैलेंज है फॉर एसयूवी मार्केट कि अगर हम इसे चीपर बनाए थोड़ा। ठीक है? और भी काफी सारी हैं
जो यू नो हैचबैक्स हैं। इट स्टिल कॉस्ट मोर देन ₹1 लाख। सो ये एक नेगेटिवली एक इकोनमिक वायबिलिटी है। देन
इंफ्रास्ट्रक्चर का चैलेंज तो है ही कि हमें जो है जगह-जगह पर ईवी स्टेशंस बनाने हैं जो कि अभी नहीं बने हैं। ठीक है? तो
ये है और दूसरी बैटरी की कॉस्ट काफी ज्यादा है। अगर बैटरी आपकी खराब हुई तो यू हैव 40% जो है पूरी कार की कॉस्ट सिर्फ एक
बैटरी करेगी। तो हमने पॉजिटिवली काफी सारे पॉइंट्स को डिस्कस कर ला और नेगेटिव वे में भी हमने कुछ पॉइंट्स को देखा। तो ये
हमारा इकोनमिक वायबिलिटी से रिलेटेड था। नाउ अगर हम अपनी सेकंड लीड देखें यूजर कन्वीनियंस एंड यूज़बिलिटी। तो यहां पर
काफी पॉइंट्स हम बोल सकते हैं। फॉर एग्जांपल देखिए साइलेंट ऑपरेशन। नो इंजन नॉइज़ वेरी स्मूथ ड्राइविंग। ठीक है? कोई
क्लच नहीं है। कोई गियर नहीं है। कोई इंजन नहीं है। देयर फॉर बहुत साइलेंट ऑपरेशन है। नॉइज़ पोलशन कर्व होगा। ठीक है? इजी टू
ड्राइव। जैसे हमने बात करी अभी क्लच और गियर नहीं है। एडस फीचर राइट एडवांस ड्राइवर असिस्टेंस फॉर सेफ्टी फीचर्स।
जैसे आपने देखा होगा Tesla की कार्स में ऑटोमेटिक ड्राइवर कंट्रोल सिस्टम वैसे ही यहां पर भी आपको एडस फीचर्स मिलता है। देन
एi बेस्ड सेंसर एंड कैमरास बेटर पार्किंग एंड एंटी कोजन सिस्टम। बेटर पार्किंग एंड कोलीजन डिटेक्शन सिस्टम मिलता है। यहां पर
लार्ज डिस्प्ले मिलेंगी। ठीक है? स्मार्ट डैशबोर्ड, इंफोटेनमेंट सिस्टम्स, लोअर वाइब्रेशन है। मोबाइल ऐप कनेक्टिविटी
मिलती है। होम चार्जिंग एंड कन्वीनियंस हैव टू गो टू पर्टिकुलर पेट्रोल पंप फॉर चार्जिंग। वन बाय वन ले तो काफी सारी
कन्वीनियंस के फीचर जो है हमें इलेक्ट्रिक व्हीकल के अंदर देखने को मिल जाते हैं। ठीक है? एंड आल्सो आपने देखा मेड इन
इंडिया कितनी सारी हमारी कंपनीज़ हैं। तो वो जो है वो इंडियन कस्टमर के अकॉर्डिंग ही जो है चेंज करेगी फ्यूचर के अंदर भी।
तो ये भी एक अच्छा जो फीचर है हमारा जो हमें मेड इन इंडिया मिलेगा। देन चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर एंड एक्सेसिबिलिटी पे अगर
बात करें तो हमने बात करी कि स्टिल हम कॉम्प्रोमाइज कर रहे हैं इंफ्रास्ट्रक्चर से रिलेटेड उसके लिए हमने पीएमई ड्राइव
स्कीम पीएमई बस सर्विस पीएम फेम स्कीम हमने जो स्टार्ट करी थी जिसके अंदर हम जो अडॉप्शन ऑफ मैन्युफैक्चरिंग और देन हम
चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को डेवलप करेंगे तो हम उस पर बात कर सकते हैं। तो स्टिल एक्सेसिबिलिटी और इंफ्रास्ट्रक्चर एक
चैलेंज है बट मेजरली हमें जो है पीएम ई ड्राइव और पीएम बट गवर्नमेंट इज कॉन्सेंटली ट्राइंग और यहां पर हम
प्राइवेट पार्टनर्स को भी ऐड कर रहे हैं। चाहे वो adानी हो चाहे वो Jio हो राइट Reliance हो। तो ये कंपनीज़ भी धीरे-धीरे
जो है ईवी को EV के इंफ्रास्ट्रक्चर को लाइक चार्जिंग स्टेशंस को डेवलप कर रही है। तो मोस्ट जो इसमें बेस्ट रहेगा वो आप
यूजर एंड कन्वीनियंस एंड यूज़बिलिटी को ले तो उसमें काफी सारे पॉइंट्स हमारे निकल के आते हैं। ठीक है? तो चलिए नेक्स्ट टॉपिक
पे चलते हैं व्हिच इज़ एनर्जी क्राइसिस। ठीक है? तो एनर्जी क्राइसिस क्या होता है? अब ये टॉपिक बहुतेंट हो जाता है बिकॉज़
आपने देखा है कि एनर्जी क्राइसिस इंडिया में बहुत सीवियरली हो रही है इस वक्त। ठीक है? तो एनर्जी क्राइसिस मींस अ सिचुएशन
वेयर एनर्जी डिमांड इज हायर देन दी एनर्जी सप्लाई। ठीक है? लीडिंग टू शॉर्टेज, हाई प्राइसेस एंड इकोनमिक प्रॉब्लम। अब ये चीज
जो है हम देख सकते हैं क्योंकि हमारी जो एनर्जी की डिमांड है वो बढ़ रही है। बट सप्लाई नहीं है। जैसे ही स्टेट ऑफ
हार्मोस्ट स्टॉक हुआ तो इंडिया ने काफी सारी शॉर्टेज देखी एलएजी में, एलपीजी में, चाहे वो हमारा क्रूड ऑयल हो। तो तो यह
सारी चीजों में हमने बहुत सारी प्रॉब्लम्स को फेस करा है। अब यहां पर हम एग्जांपल्स देख सकते हैं कुछ एनर्जी क्राइसिस की।
जैसे कि हमने यूरोप एनर्जी क्राइसिस देखा 2022 रशिया यूक्रेन वॉर जहां पर जो है यूरोप के अंदर गैस सप्लाई डिसररप्ट हुई
बिकॉज़ आपने देखा होगा कि जो रशिया था वो यूरोप का एक बहुत बड़ा एक्सपोर्टर था क्रूड ऑयल का एंड ऑल दीज़ एलएनजी एलपीजी बट
बिकॉज़ ऑफ़ दिस वॉर यूरोप हैज़ टू कट डाउन ऑल दी इंपोर्ट फ्रॉम दी रशिया। सो वहां पर एक एनर्जी क्राइसिस देखने को मिला। देन
इंडिया कोल शॉर्टेज इन 202 मेनी पावर्स प्लांट्स हैड बीन ओनली टू टू थ्री डज़ ऑफ़ कोल स्टॉक। तो वहां पर हमने कुछ पॉलिसीज़
लेके आए हैं जिससे हमने इस प्रॉब्लम को सॉल्व करा। देन आपने देखा होगा ग्लोबल एनर्जी क्राइसिस ईरान, इजराइल, यूएस वॉर
2026 एलपीजी, एलएनजी क्राइसिस इन इंडिया। ठीक है? ये इसमें मुझे बताने की जरूरत नहीं है। हमने देख लिया एलपीजी क्राइसिस
की वजह से। तो हमने देखा कि कैसे इंडिया के अंदर जो है एलपीजी क्राइसिस हुई जहां पर काफी सारे सिलडर्स जो है वो ब्लैक में
लाइक लाइक ₹2000 अप टू ₹7,000 भी सेल हुए हैं। ठीक है? और कमर्शियल सिलडर्स तो पूरी तरीके से जो है बंद कर दिए थे। जिसकी वजह
से रेस्टोरेंट भी काफी सारे शट डाउन हुए। ठीक है? तो हम बात करते हैं व्हाई एनर्जी क्राइसिस हैपेंस? देखिए इंडिया
इलेक्ट्रिसिटी डिमांड राइजिंग एव्री ईयर जैसे हमने बात करी थी बाय 20150 विद द फर्टिलिटी रेट ऑफ़ 1.9 गोइंग टू हिट अराउंड
160 टू 170 करोड़ पॉपुलेशन होने वाली है। तो इलेक्ट्रिसिटी की डिमांड बहुत ज्यादा हाई होने वाली है। और अभी हम इलेक्ट्रिक
व्हीकल के बारे में पढ़ के आ रहे हैं कि कैसे इलेक्ट्रिक व्हीकल का जो आगे सेक्टर है वो बहुत इंक्रीस होने वाला है। तो उस
हिसाब से हमें इलेक्ट्रिसिटी की डिमांड बहुत ज्यादा होने वाली है। ठीक है? और इंडस्ट्रीज इंक्रीस एनर्जी कंसमशन। ठीक
है? आप देख रहे हैं जैसे-जैसे इंडिया ग्रोथ हो रही है। ठीक है? स्टार्टअप इंडिया, स्किल इंडिया, ठीक है?
मैन्युफैक्चरिंग इंडिया ये सारे प्रोग्राम्स आ रहे हैं। तो हमारी जो इंडस्ट्रीज है, ठीक है? पीएलआई स्कीम इसकी
वजह से ग्रोथ हो रही है। तो उन्हें मोर एनर्जी कंसमशन करनी है। इसलिए राइजिंग एनर्जी डिमांड हो रही है। अर्बनाइजेशन आप
देख सकते हैं जैसे-जैसे पॉपुलेशन हो रही है तो अर्बनाइजेशन बढ़ रहा है। और हमने वैसे भी क्लाइमेट चेंज में पढ़ा था कि और
अर्बनाइजेशन हो रहा है। स्काइसकीपर बना रहे हैं हम लोग। कंस्ट्रक्शन कर रहे हैं। पीएम 10 का बहुत ज्यादा रिलीज़ हो रहा है।
ठीक है? पॉपुलेशन ग्रोथ हमने अभी बात करी है। तो इसलिए हमारे पास ये जो है व एनर्जी क्राइसिस हैपेंस। और एक सो इसके अंदर एक
पॉइंट बहुत इंपॉर्टेंट ऐड होगा जो होगा वॉर एंड जियोपॉलिटिकल। ठीक है? तो बिकॉज़ ऑफ़ वॉर एंड जिओपॉलिटिकल क्राइसिस हमने
देखा कैसे एनर्जी क्राइसिस होता है पूरे वर्ल्ड के अंदर। नाउ इंपोर्ट डिपेंडेंस इंडिया इंपोर्ट अराउंड 85% ऑफ़ इट्स क्रूड
ऑयल। ठीक है? मेजर सप्लाई कौन है? रशिया। देन आफ्टर रशिया यूक्रेन वॉर इंडिया इंक्रीज़्ड ऑयल इंपोर्ट फ्रॉम रशिया हो
जाएगा। ठीक है? और एलपीजी की बात करें तो इंडिया इंपोर्ट अराउंड 60% ऑफ़ एलपीजी डिमांड फ्रॉम सऊदी अरेबिया, क़तर। हमने ये
चीजें खुद ऑब्जर्व करी है। द नेचुरल गैस एंड एलएनजी इंडिया इंपोर्ट अबाउट 45 टू 50% ऑफ एलएनजी। मेजर सप्लायर कौन है? कतर
है। ठीक है? तो जैसे ही स्टेट ऑफ़ हरमोस्ट स्ट्रोक हुआ तो कतर से जितने भी हमारे एलपीजी के टैंकर्स थे वो वहीं पे स्टक हो
गए। जिसकी वजह से जो है हमने ये गैस की क्राइसिस को देखने को मिला। ठीक है? देन हम बात करते हैं सेक्टर यूजिंग क्रूड ऑयल
इन इंडिया। देखिए सबको पता है कि क्रूड ऑयल किसमें यूज़ होता है? पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स में होता है। बट अपार्ट फ्रॉम
पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स। ठीक है? एिएशन फुल यहां पर याद रखना। इंडस्ट्री पेट्रोकेमिकल केमिकल्स। ठीक है? तो पेट्रोकेमिकल्स में
क्या जाता है? प्लास्टिक मटेरियल जितना भी प्लास्टिक से कोई भी मटेरियल बनता है आप देखते हैं चाहे वो कंटेनर्स होते हैं टॉयज़
होते हैं ठीक है तो ऑल दी सो ऑल दिस प्लास्टिक मटेरियल ठीक है इसमें भी क्रूड ऑयल यूज़ होता है देन कलर्स हो पेंट हो गया
ठीक है पेंट के अंदर भी पेट्रोलियम मिला होता है देन अगर हम देखें वायर्स होती है इसकी जो ऊपर वाली लेयर होती है राइट
इंसुलेशन लेयर देन अगर हम बात करें एग्रीकल्चर की तो वहां पर ट्रैक्टर इरीगेशन पंप्स ठीक है हाउसहोल्ड में
एलपीजी कुकिंग गैस तो क्रूड ऑयल हमें सिर्फ लगता था पेट्रोल और डीजल एिएशन फ्यूल बट पेट्रोकेमिकल में आपको याद रखना
है प्लास्टिक हो चाहे चाहे वो पेंट हो, चाहे वो टॉयज हो, चाहे वो टायर्स हो, इंसुलेशन वायर्स हो, ठीक है? कप मग्स जो
डेली हाउसहोल्ड आइटम मेड अप ऑफ़ प्लास्टिक वो भी सब उसमें भी क्रूड ऑयल का यूज़ होता है। तो जितनी भी पेट्रोकेमिकल इंडस्ट्री
है वो इस बार सीवियरली हिट हुई है। हमें बिलियन डॉलर्स ऑफ का लॉस हुआ है जस्ट बिकॉज़ ऑफ़ दिस क्राइसिस। ठीक है? देन पावर
जनरेशन, डीजल जनरेटर, एग्रीकल्चर में जो ट्रैक्टर, इरीगेशन पंप्स। तो सारी मोस्ट ऑफ़ द इंडस्ट्रीज आर लिंक्ड विद दिस क्रूड
ऑयल। नाउ हम बात करते हैं एनर्जी क्राइसिस लिंक टू फ़ूड सिक्योरिटी एज़ वेल। अभी हमने बात करी है पेट्रोकेमिकल्स और यू नो
पेट्रोकेमिकल्स जनरेटर्स अदर थिंग्स बट फ़ूड सिक्योरिटी इज़ आल्सो लिंक्ड विद एनर्जी क्राइसिस। देखिए कैसे इंडिया हैवली
इंपोर्ट एलएनजी। ठीक है? लिक्विफाइड नेचुरल गैस फ्रॉम क़तर फॉर एनर्जी एंड फर्टिलाइजर प्रोडक्शन। ठीक है? तो
फर्टिलाइजर प्रोडक्शन के लिए हमें एलएजी लिक्विफाइड नेचुरल गैस की जरूरत पड़ती है। नेचुरल गैस किस लिए यूज़ होती है? टू
प्रोड्यूस हाइड्रोजन। और हाइड्रोजन किस लिए यूज़ होता है? अमोनिया बनाने के लिए। और अमोनिया जो है वो फर्टिलाइज़र्स में
यूज़ होता है। ठीक है? फर्टिलाइज़र प्लांट्स में। और अमोनिया ही है जो यूरिया का एक की मटेरियल है। यूरिया हम जानते ही
हैं यूरिया तो जो एग्रीकल्चर जिन्होंने एग्रीकल्चर में काम करा होगा दे नो दैट यूरियाेंस। ठीक है? तो जैसे ही स्टेट ऑफ़
हर्मोस ब्लॉक होता है एलएनजी सप्लाई जो है पूरी तरीके से डिरप्ट होती है और जिसकी वजह से जो फर्टिलाइजर शॉर्टेज होती है और
यूरिया के प्राइस जो है शूट अप करते हैं। सो एग्रीकल्चर और फूड सिक्योरिटी तो अफेक्ट होती है इंडिया में। नाउ अब हम बात
करते हैं स्टेट ऑफ़ हरमोस एंड एनर्जी सिक्योरिटी। द स्टेट ऑफ़ हरमोस इज़ नैरो सी रूट बिटवीन ईरान एंड ओमान। इंपॉर्टेंट
फैक्ट्स ये हम जीडी में यूज़ करेंगे। अराउंड 20% ऑफ ग्लोबल ऑयल ट्रेड पाससेस थ्रू दिस रूट। इंडिया इंपोर्ट नियरली 60%
ऑफ इट्स ऑयल थ्रू दिस रूट थ्रू दिस रूट। मतलब स्टेट ऑफ़ हरमोस्ट से इंडिया का 60% ऑफ इट्स ऑयल आ रहा है। ठीक है? तो ये चीज़
हमें ध्यान रखनी है। अराउंड 90% ऑफ़ एलपीजी व्हिच वी इंपोर्ट इज़ आल्सो केम फ्रॉम दिस रूट। ठीक है? तो इंपैक्ट इंडिया पे क्या
है? एक्सपेंसिव क्रूड ऑय हो रहा है। पेट्रोल डीज़ल के प्राइस हाई करेंगे। इनफ्लेशन होगा। ओवरऑल क्या होगा? इनफ्लेशन
इनक्रीस होगा। ठीक है? प्राइस एलपीजी सिलेंडर कॉस्ट हाउसहोल्ड एलपीजी प्राइस इनक्रीस ठीक है देन एक्सपेंसिव पेट्रोल
डीजल फ्यूल प्राइस इनक्रीस अफेक्ट कॉमन पीपल ये बात भी हम डिस्कस कर चुके हैं इलेक्ट्रिसिटी शॉर्टेज कोल शॉर्टेज कॉसेस
पावर कट्स ये फ्रीक्वेंट पावर कट्स देखने को मिल रहे हैं हमें इंडिया के अंदर आल्सो अगर क्यूबा में देखेंगे तो वहां तो
कंप्लीटली कंप्लीटली ब्लैक आउट हो चुका है ठीक है तो बात करते हैं इंडस्ट्रियल स्लो डाउन ठीक है इसके हम एग्जांपल्स देखेंगे
अभी कि कैसे इंडस्ट्रीज जो है वो अफेक्ट हुई है तो और देख लेते हैं कॉम्प्लिकेशंस इकोनमिक स्लो डाउन हो गया अनइंप्लॉयमेंट
बढ़ रही है इसके भी एग्जांपल हम देखते हैं ट्रेड एफिशिएट इनक्रीस करेंसी प्रेशर और पॉलिटिकल इनस्टेबिलिटी बिल्कुल करेंसी अगर
डॉलर से कंपेयर करेंगे तो हमारी 100 को हिट करने वाली है। तो यस करेंसी प्रेशर हो रहा है। चलिए देखते हैं एग्जांपल्स। अगर
आप यहां पे देखेंगे मोरबी प्रोड्यूस अबाउट 80% ऑफ इंडियास सेरामिक्स मेनली टाइल्स एंड सेनेरी वेयर। तो जितनी भी हमारी टाइल
फैक्ट्रीज थी देखिए अगर टाइल इंडस्ट्री की हम और सेरेमिक इंडस्ट्री की बात करें तो एस्टीमेटेड 50 बिलियन है। और यह जो है शट
डाउन हो चुकी है पूरी कंप्लीटली। ठीक है? अराउंड 180 फैक्ट्रीज़ पूरी तरीके से शट डाउन हो चुकी है गुजरात के अंदर। बिकॉज़
वहां पर क्या है? एलएनजी नहीं है, लिक्विफाइड नेचुरल गैस नहीं है जो कि हमें चाहिए होती थी। देन अराउंड 4 लाख वर्कर्स
ठीक है? वापस जा चुके हैं। वेस्ट बंगाल चले गए, कुछ बिहार चले गए जो कि वर्कर्स थे। उससे क्या हो रहा है? देखिए इकोनमिक
लॉस हो रहा है। जॉब्स का लॉस हो रहा है। नाउ यहां पर देखिए यूरिया आउटपुट फॉल्स टू 18 लाख टन्स एमिट वेस्ट एशिया क्राइसिस।
यूरिया की जो क्राइसिस है वो यहां पे देखने को मिल रही है। देन एलपीजी गैस सिलेंडर प्राइस ह इन इंडिया। तो ये भी हम
देख सकते हैं। ठीक है? नाउ बात करते हैं हाउ इंडिया कैन काउंटर एनर्जी क्राइसिस तो डवर्सिफाइंग ऑयल सप्लाई रिड्यूस डिपेंडेंस
ऑन वन रीजन जैसे हमारा भी कतर और मिडिल ईस्ट पे बहुत ज्यादा डिपेंडेंट था लाइक 90% ऑफ़ एलपीजी वहीं से कतर से ही आ रही थी
तो अब हम क्या कर सकते हैं रशिया यूएसए ब्राजील गोयाना अफ्रीका यहां पर हम जो है डवर्सिफाई कर सकते हैं और आपको पता है
हमने डायवर्सिफाई कर भी दिया है हमने आफ्टर लाइक ऑलमोस्ट सेवन इयर्स के बाद जो है ईरान से फर्स्ट टाइम हमने जो है ऑयल
मंगाया इन दी सेवन इयर्स बिकॉज़ सेंशंस थे ईरान के ऊपर यूएस के द्वारा तो फिर हम ऑयल नहीं इंपोर्ट कर सकते थे। बट एमिट दिस वॉर
वी स्टार्टेड गेटिंग ऑयल फ्रॉम दी ईरान। तो व्हिच इज़ अ वेरी पॉजिटिव न्यूज़। ठीक है? देन अगर हम यहां पर देखें तो एक
इंडिया ने क्या करा है? इंडिया कट्स इट्स एक्सरसाइज ड्यूटी ऑन पेट्रोल एंड डीजल। देखिए देखिए ₹13 पर लीटर जो है वो इंडियन
गवर्नमेंट चार्ज करती थी एज अ एक्सरसाइज ड्यूटी ऑन पेट्रोल एंड डीजल। अब इन्होंने क्या करा? ₹10 से इसको रिड्यूस कर दिया और
ओनली ₹3 नाउ गवर्नमेंट इज़ चार्जिंग। जो पेट्रोल और डीजल के प्राइसेस हक होने वाले थे उससे उसमें जो है हमें बेनिफिट मिला
है। देन अगर हम देखें स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व्स जो इंडिया के हैं कुछ कहते हैं 60 डेज का है। कहीं ना कहीं 30
डेज का लिखा हुआ है। तो अगर हमें ऐसी क्राइसिस देखने को मिलती है तो हम अपने स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व को भी यूज़
कर सकते हैं। और हमें इन्हें बढ़ाने की जरूरत भी है। देन इलेक्ट्रिक व्हीकल्स है रिड्यूस पेट्रोल एंड डीजल। देखिए जिसके
पास इलेक्ट्रिक व्हीकल है उसे कोई भी प्रॉब्लम नहीं आएगी। पेट्रोल और डीजल के प्राइसेस। बायोफ्यूल्स एथेनॉल ब्लेंडिंग
इन पेट्रोल। ठीक? एग्जांपल इंडिया टारगेट 25% एथनॉल ब्लेंडिंग 2025। देखिए ये टारगेट हमने अचीव कर इंडिया ने 20% एथेनॉल
ब्रांड कर दिया है फ्यूल के अंदर। तो इसकी वजह से देखिए क्या हुआ है। एथेनॉल ब्रांडिंग इन पेट्रोल। देखिए मोदी सेड दैट
द कंट्री वुड हैव हैड टू इंपोर्ट एडिशनल 4.5 करोड़ बैरल ऑफ क्रूड एनुअली इक्वेंट टू 700 करोड़ लीटर्स इफ नॉट फॉर एथेनॉल
ब्लेंडिंग इफ नॉट फॉर एथेनॉल ब्लेंडिंग इन पेट्रोल। सो हमने जो एथेनॉल ब्लेंडिंग पेट्रोल के अंदर करी इसकी वजह से हमने 700
करोड़ ऑफ़ लीटर क्रूड ऑयल को जो हम इंपोर्ट करने वाले थे हम उससे बच गए और इसने जो है हमारे थाउजेंड्स ऑफ करोड़ सेव करे हैं। ठीक
है? सो ये पॉइंट बहुत इफेक्टिव है। सो हम ये पॉइंट जो है जीडी में यूज़ कर सकते हैं। बिकॉज़ ऑफ़ एथेनॉल ब्लेंडिंग इन पेट्रोल वी
आर एबल टू सेव अराउंड 4.5 करोड़ बैरल ऑफ़ क्रूड एनुअली आल्सो इक्वल टू 700 करोड़ ऑफ़ लीटर। नाउ यहां पर एक औरेंट पॉइंट आ जाता
है जो है सोलर एनर्जी। जैसे हमने पढ़ा कि इंडिया टारगेट टू अचीव 50% ऑफ इलेक्ट्रिसिटी कैपेसिटी फ्रॉम रिन्यूएबल
नॉन फॉसिल सोर्सेस बाय 20130। ठीक है? तो यहां पे हम सिमिलर ये एग्जांपल भी बता सकते हैं कि अगर हम जो अल्टरनेट सोर्स ऑफ़
एनर्जी है चाहे वो सोलर एनर्जी हो, न्यूक्लियर एनर्जी हो, चाहे वो विंड और टाइडल प्रोग्राम हो उससे जो है हम
डवर्सिफाई कर सकते हैं अपना एनर्जी का सेक्टर। ठीक है? देन सोलर एनर्जी रिड्यूस कोल्ड डिपेंडेंस व्हिच इंडियास प्राइमरी
इलेक्ट्रिसिटी सोर्स टुडे। ठीक है? तो वही बात है। ये हम पढ़ के आए हैं। तो अब हम बात करते हैं जीडी की। ठीक है? तो ग्लोबली द
वर्ल्ड इज सफरिंग फ्रॉम क्लाइमेट चेंज स्पेशली इंडिया। व्हाट स्टेप्स व्हाट स्टेप्स कैन इंडिया टेक टू काउंटर
क्लाइमेट चेंज? तो यहां पर तीन लीड्स दे रखी हैं। तो बीच वाली लीड देखिए सेकंड पॉइंट की ट्रांजिशन टू रिन्यूएबल एंड
अल्टरनेट एनर्जी। तो अब ये टॉपिक हमने जो करा है तो आप इसमें पॉइंट बता सकते हैं सोलर के बारे में क्या कि कैसे हमने सोलर
चाहे वो भदला सोलर पावर प्लांट हो। देन हम बता सकते हैं पेवगाड़ा सोलर प्लांट। देन हम बता सकते हैं कि कैसे सोलर प्लांट जो
है वो बिल्कुल भी कार्बन इमिशन नहीं करता है। फिर हम पीएम रूफ टॉप स्कीम देन पीएम सोलर पार्क स्कीम और कैसे जो है सोलर
पैनल्स एडिशनल जो इलेक्ट्रिसिटी होती है उसको हम एक्सपोर्ट कर सकते हैं। तो ये सारी चीजें हम रिन्यूल सोर्स ऑफ़ एनर्जी
में सोलर की सारी चीजें बताएंगे। हम विंड और टाइडल के बारे में भी बात कर सकते हैं। और अल्टरनेट एनर्जी के अंदर हम बात
करेंगे। किसकी? न्यूक्लियर एनर्जी की। हमने बात करी थी कि न्यूक्लियर एनर्जी क्या है? एक क्लीन फ्यूल है। बिल्कुल भी
कार्बन इमिशन नहीं है। एक पैेट ही जो है वो व्हिच इज़ अराउंड 2.54 सें.मी. वो कितने के बराबर था? टन्स ऑफ़ कोल्स के बराबर था।
टर्न चीज भी पढ़ी थी। तो वहां पे हम वो सारे जितने भी न्यूक्लियर एनर्जी के हमने पॉइंट पढ़े वहां पे हम इसके बारे में। देन
हम अल्टरनेट एनर्जी में इलेक्ट्रिक व्हीकल की भी बात करेंगे। राइट? अदर देन यूजिंग फॉसिल फ्यूल्स। हम इलेक्ट्रिक एनर्जी की
बात करेंगे। ठीक है? तो नाउ जो हमारी सेकंड वाली लीड है। अब आपके पास काफी सारे पॉइंट हैं इसके लिए। ठीक है? देन हम बात
करें पॉलिसी एंड गवर्नेंस रिफॉर्म। पॉलिसी और गवर्न गवर्नेंस रिफॉर्म के अंदर जो है हमने क्या है पीएम ई ड्राइव स्कीम राइट
जिसमें हमने इलेक्ट्र इलेक्ट्रिक बसेस को चलाया देन फेम स्कीम हमने चलाई उसके बाद पीएम रूफ टॉप स्कीम सोलर की जितनी भी
सब्सिडीज के बारे में हमने बात करी थी फिर सोलर पार्क के बारे में जो हमने बात करी थी गवर्नमेंट देन इलेक्ट्रिक व्हीकल पे
कैसे गवर्नमेंट सब्सिडीज दे रही है ठीक है तो वो जितनी भी देन नेट जीरो इमिशन 2070 टारगेट ऑफ इंडिया फिर बायोफील्ड प्रोग्राम
ऑफ इंडिया फिर हमने बात करी थी एथेनॉल ब्लेंडिंग की बात करी थी कि नाउ इंडिया जो है वो अपनी पॉलिसी को चेंज कर रहा है और
हमने ईरान से इंपोर्ट ऑयल और डवर्सिफाई करा है अपना जो एनर्जी का सेक्टर है। ठीक ये सारे पॉइंट्स जितने भी हमने गवर्नमेंट
से रिलेटेड बताए थे वो सारे आप इसमें पॉइंट में डाल सकते हैं पॉलिसी और गवर्नेंस रिफॉर्म में। देन सस्टेनेबल
अर्बनाइजेशन और इंफ्रास्ट्रक्चर में आप बता सकते हैं कि कैसे हमने जो है प्लास्टिक को यूज़ करा था। 33,000 ऑफ़ टन्स
ऑफ़ प्लास्टिक वी हैव यूज़्ड टू बिल्ड अराउंड 700 टू 800 कि.मी. ऑफ़ रोड। वो पॉइंट यहां पर बहुत अच्छा बैठेगा। ठीक है?
देन सस्टेनेबल अर्बनाइजेशन में भी आप इलेक्ट्रिक व्हीकल्स की बात कर सकते हैं कि जो हमारे पब्लिक ट्रांसपोर्ट हैं हम जो
अपना व्हीकल की जगह पब्लिक ट्रांसपोर्ट को यूज़ करें और इलेक्ट्रिक व्हीकल को यूज़ करें। इंफ्रास्ट्रक्चर में आप ईवी की बात
कर सकते हैं। तो अगर हम देखें जितने भी हमने टॉपिक अब तक पढ़े हैं वो सारे इन तीनों लीड्स में बहुत आसानी से फिट हो
सकते हैं। ठीक है? और क्लाइमेट चेंज की भी आप बात करें कि कैसे क्लाइमेट चेंज अफेक्ट कर रहा है। देन नमामी गंगे प्रोग्राम एंड
वेरियस प्रोग्राम व्हिच आर रन बाय दी इंडियन गवर्नमेंट। नाउ नेक्स्ट टॉपिक की तरफ बढ़ते हैं जो कि है व्हाई इज रिन्यूएबल
एनर्जी गेनिंग इंक्रीजिंगेंस ग्लोबली एंड इंडिया। ठीक है? रिन्यूएबल एनर्जी ट्रांजिशन टू सस्टेनेबल एनर्जी
सोर्सेस, इकोनमिक ओपोरर्चुनिटीज़ इन रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर एंड मिटिगेशन ऑफ़ क्लाइमेट चेंज एंड एनवायरमेंटल इफ़ेक्ट। जो
बस ऐसा ही कुछ सेम जीडी आता है तो सिंपल आप थर्ड लीड को चुनिए। बिकॉज़ यहां पर आपके पास काफी सारे पॉइंट हो जाएंगे कि कैसे
रिन्यूएबल एनर्जी जो है वो मिटिगेशन करेगी क्लाइमेट चेंज और एनवायरमेंटल को। जहां पर आप बता सकते हैं कि सोलर पैनल जो होते हैं
वो बिल्कुल भी कार्बन इमिशन नहीं करते। ठीक है? देन आप बता सकते हैं विंड और टाइडल एनर्जी भी बिल्कुल भी जो है कार्बन
इमिशन नहीं करती। फिर आप बताइए पीएम 2.5 के बारे में कि कैसे वो इफेक्ट करता है ह्यूमन हेल्थ को ठीक लंग्स में जाके। बट
अगर हम इलेक्ट्रिक व्हीकल को यूज़ करते हैं तो वहां पे भी हमें जो है जो हमें एडवांटेजेस मिल जाते हैं। अगर हम बात करें
रिन्यूएबल सोर्स ऑफ़ एनर्जी में तो आप बताइए कि कौन-कौन सी स्कीम्स हैं। अभी सारी स्कीम्स हम डिस्कस करके आए हैं। फिर
उसके बाद आप बताइए कि कैसे जो जॉब भी क्रिएट होएंगी साथ। नाउेंट पॉइंट क्या है? आप बताइए कि बाय 2013 इंडियन गवर्नमेंट ने
तो पहले ही टारगेट सेट कर रखा है कि हम अपना 50% ऑफ़ जो इलेक्ट्रिसिटी का जनरेशन है वो हम किससे करेंगे? रिन्यूल सोर्स ऑफ़
एनर्जी से करेंगे। तो वहां पर भी ये पॉइंट फिट हो जाता है। ठीक है? तो जितने भी ये सारे पॉइंट्स हैं जो हमने सोलर के अंदर
पढ़े थे वो सारे पॉइंट किसमें आ जाएंगे? मिटिगेशन ऑफ़ क्लाइमेट चेंज। अपार्ट फ्रॉम दिस वी कैन आल्सो इंक्लूड दी विंड और
टाइडल। ठीक है? टाइडल एनर्जी। विंड और टाइडल एनर्जी को भी आप इसमें इंक्लूड कर सकते हैं। तो देखिए अब सेकंड लीड जो
इकोनमिक अपोरर्चुनिटीज़ एंड रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर। तो हमने बात करी थी कैसे जो है टेक्नशियंस हो गए। फिर हमारे
इंजीनियर्स हो गए जो कि रिक्वायर्ड हैं इस सोलर पैनल्स को इंस्टॉल करने में। देन भदला सोलर पावर प्लांट जो हमने लगाया है
वो हमारा इतना लार्जेस्ट है। तो उसके लिए कितना मैन पावर रिक्वायर्ड होगा? उसकी मेंटेनेंस के लिए भी तो मैन पावर
रिक्वायर्ड होगा। देन पेगाडा का एग्जांपल दे सकते हैं आप। वहां पे भी सिमिलर हमने 2000 बिकॉज़ गीगावाट का है। तो वहां पे भी
कितने सारी जो है मैन पावर रिक्वायर्ड होगी। तो वहां पर इकोनॉमिक अपॉर्चुनिटीज़ बता सकते हैं। देन आप बता सकते हैं कि
सेटेलाइट्स के अंदर भी सोलर यूज़ होता है। तो वहां पर भी जो है हमारी इकोनमिक अपोरर्चुनिटीज़ हो जाती है। देन अगर आपके
पास एक्स्ट्रा बचता है तो आप एक्सपोर्ट भी कर सकते हैं। सेल भी कर सकते हैं गवर्नमेंट को इलेक्ट्रिसिटी जहां से
इकोनमिक जहां से इकोनमिक एक्टिविटी इन्वॉल्व हो जाती है। ठीक है? तो काफी सारे पॉइंट हम डिस्कस कर चुके हैं। अगर आप
रिवाइज़ करेंगे तो आपके पास और पॉइंट्स मिल जाएंगे। ठीक है? देन ट्रांज देन ट्रांजिशन टू सस्टेनेबल एनर्जी सोर्सेस। तो यहां पर
भी वही सारी चीजें आ जाती हैं जो हमने अभी डिस्कस करा है। ठीक है? न्यूक्लियर इलेक्ट्रिक एंड सोलर। सो यहां से यह पॉइंट
भी हमारा क्लियर हो जाता है। तो बीच में हमने एक जीडी का टॉपिक छोड़ दिया था। ठीक है? पॉल्यूशन के बाद। तो वो टॉपिक भी अब
हम डिस्कस कर लेते हैं। तो यह वाला टॉपिक जो है अब रह गया था। बट अब हम अच्छी तरीके से इसे सॉल्व कर सकते हैं। क्योंकि हमने
इलेक्ट्रिक व्हीकल भी पढ़ लिया है। व्हाट आर दी मोस्ट इफेक्टिव मेजर टू इंप्रूव दी एयर क्वालिटी इन इंडियन सिटीज। सो, लीड
नंबर वन क्या है? रिडक्शन ऑफ व्हीकलर, इमिशन एंड प्रमोशन ऑफ पब्लिक ट्रांसपोर्ट। ठीक है? रेगुलेशन ऑफ इंडस्ट्रियल पोलशन
एंड स्ट्रक्टर इमिशन स्टैंडर्ड एंड अडप्शन ऑफ क्लीन एनर्जी सोर्सेस एंड स्ट्रेंथनिंग दी पोलशन मॉनिटरिंग सिस्टम। देखिए जो थर्ड
लीड है हमारी एडॉप्शन ऑफ क्लीन एनर्जी उसमें आप सोलर की बात करें जितने भी अभी तक हम सोलर चाहे वो स्कीम्स के बारे में
बात करी हो चाहे वो कोई भी हमने प्लांट लगाए वो सब कुछ आपको बताना है कि कैसे कार्बन फ्री होती हैं ये सारी चीजें ठीक
है देन आप न्यूक्लियर एनर्जी की बात करें क्योंकि वो भी एक क्लीन एनर्जी सोर्स है। ठीक है? तो न्यूक्लियर एनर्जी में हमने
जितनी भी बात करी थी कैसे वो एडवांटेजेस हैं और कैसे हम सिर्फ अभी 3% यूज़ कर रहे हैं हम आगे जाके कैसे उसको इंक्रीस कर
सकते हैं और फिर क्लाइमेट चेंज के लिए कैसे हेल्प करेंगी ये एनर्जीज़। फिर आप इलेक्ट्रिक व्हीकल की भी बात कर सकते हैं
क्लीन एनर्जी में। सेकंड लीड क्या है? रेगुलेशन ऑफ इंडस्ट्रियल पोलशन एंड स्ट्रिक्टर इमिशन स्टैंडर्ड। तो हमने बात
करी थी कि कैसे जो है हमने BS6 इमिशन का कांसेप्ट लेकर आए थे और इंडस्ट्रियल पोलशन में आप बता सकते हैं मेजर कंट्रीब्यूटर
क्या है और जो सेंट्रल पोलशन जो सेंट्रल पोल्यूशन कंट्रोल बोर्ड है उन्होंने डाटा दिया था। ठीक है? सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट
हमको बनाने हैं। ये सारी चीजें। नाउ रिडक्शन ऑफ व्हीकलर इमिशन एंड प्रमोशन ऑफ़ पब्लिक ट्रांसपोर्ट। तो इसमें भी आप पूरा
इलेक्ट्रिक व्हीकल से रिलेटेड जितने भी पॉइंट्स हैं आप सब डाल सकते हैं। ठीक है? तो व्हीकलर इमेशन अगर हम इलेक्ट्रिक
व्हीकल यूज़ करते हैं तो अपने आप ये प्रॉब्लम सॉल्व हो जाएगी और प्रमोशन ऑफ पब्लिक ट्रांसपोर्ट उसमें बताइए आप पीएम ई
ड्राइव स्कीम के बारे में ठीक है जो इलेक्ट्रिक बसेस चलाई गई हैं फेम स्कीम के बारे में बताइए पीएमई सेवा स्कीम के बारे
में बताइए तो जितनी भी हमारी स्कीम्स थी राइट रिलेटेड टू दिस सबसेेंट पॉइंट आ जाता है इसमें पीएमई बस सर्विस के बारे में
बताइए ठीक है तो ये सारी पॉइंट्स जो हैं और जो सब्सिडीज दी जा रही है तो आई होप हमने काफी बार रिपीट कर ली है चीजें तो
[संगीत] अब आप इस पर पॉइंट बहुत अच्छी तरीके से चलिए अब हम अपने नेक्स्ट टॉपिक की तरफ बढ़ते हैं जो कि है नेचुरल
रिसोर्सेज। तो ये ऑफिन [संगीत] हमें लेक्चर के अंदर देखने को मिलता है। सो अब यहां पर बस एक कंफ्यूजन ये आती है कि
नेचुरल रिसोर्सेज में हम क्या-क्या इंक्लूड करें? ठीक है? तो देखिए पहले तो नेचुरल रिसोर्सेज होता क्या है? मटेरियल
एंड सब्सटांस दैट कम्स फ्रॉम नेचर एंड आर यूज्ड बाय ह्यूमंस इज़ कॉल्ड नेचुरल रिसोर्सेज। ठीक है? तो ये टॉपिक बहुत इजी
है। समझना है कि इस टॉपिक में बताना क्या है? तो नेचुरल रिसोर्सेज कौन-कौन से होते हैं? वाटर सनलाइट सॉइल फॉरेस्ट। ठीक है?
तो वाटर आप बता सकते हैं कि हमारी ह्यूमन बॉडी 70% ऑफ़ वाटर बनी है। ठीक है? वाटर के बिना जो है ह्यूमैनिटी इज़ नॉट एबल टू
एक्सिस्ट। देन आप सनलाइट के बारे में बात करें कि विटामिन डी इससे हमें मिलता है। पूरा एग्रीकल्चर सेक्टर हमारा जो है
सनलाइट पर डिपेंड करता है। और अगर सनलाइट नहीं होगी तो सिमिलरली हमारा जो अर्थ यहां पर एग्ज़िस्ट नहीं कर। सो सॉइल में आप बता
सकते हैं बिकॉज़ सॉइल इज़ कंप्लीटली रिलेटेड टू फ़ूड सिक्योरिटी। ठीक है? अगर सइल नहीं होगी तो फ़ूड की क्राइसिस हो जाएगी। ठीक
है? देन फॉरेस्ट बता सकते हैं। फॉरेस्ट जितने भी है हमारे फॉरेस्ट रिसोर्सेज़ हैं। वुड मिलती है। वुड से क्या-क्या बनता है।
ठीक? तो वो सारी चीजें यहां पर आ जाएगा। वेदर इट्स अ पेपर एंड चेयर टेबल ऑल दैट कम्स फ्रॉम फॉरेस्ट यानी कि मैट स्टिक्स
हो गई हमारी तो जितनी भी चीजें हैं ठीक है मेडिसिंस हमारी फॉरेस्ट से ही बनती हैं ये चीजें भी जो है आप बता सकते हैं ठीक देन
अगर हम ये सारे तो रिसोर्सेज हुए हैं। ठीक है अगर पहले हम डेफिनेशन दे देंगे फिर हम बता देंगे कौन-कौन से रिसोर्सेज हैं। फिर
थोड़ा बहुत उनके बारे में बताया। फिर आप वाटर को रेन वाटर हार्वेस्टिंग से जोड़ सकते हैं। सनलाइट को सोलर पावर प्लांट के
बारे में बता सकते हैं। सॉइल से आप सोइल मैनेजमेंट के बारे में बता सकते हैं जो अभी हम पढ़ेंगे। फिर फॉरेस्ट के बारे में
जब आप बता रहे हो तो आप बता सकते हैं कि फॉरेस्ट हमें क्या मिलता है। फिर डिफॉरेस्टेशन हो रहा है। फिर आप
अफोरेस्टेशन की बात कर सकते हैं। तो ये टॉपिक बहुत ब्रॉड है। तो आप इस पे काफी सारी चीजों के ऊपर बोल सकते हैं। ठीक है?
स्केरसिटी के ऊपर बात कर सकते हैं हम लोग। ठीक है? सॉइल के ऊपर हम सॉइल पोल्यूशन के बारे में बात कर सकते हैं कि कैसे हमारे
नेचुरल रिसोर्सेज जो हैं उनको थ्रेट है। तो हमने जो स्टार्टिंग में सीखा था कि हम पहले इंट्रो देंगे। फिर एडवांटेजेस
बताएंगे, फिर डिसएडवांटेजेस बताएंगे, टाइप्स बताएंगे। तो आई होप अब मुझे इससे ज्यादा नेचुरल रिसोर्सेज के बारे में
बताने की जरूरत नहीं है। आपको आईडिया लग चुका होगा। अगर आपको टॉपिक मिलता है तो आप इसके बारे में बता दें। देन हम बात करते
हैं अब रेन वाटर हार्वेस्टिंग की। तो रेन [संगीत] वाटर हार्वेस्टिंग तो हमेशा रिपीट होता है। रेन वाटर हार्वेस्टिंग में बस
पहले ये याद रखो कि जो मसून सीजन होता है वो हमारा कहां से कहां तक होता है? जून से सितेंंबर तक। ठीक है? तो मसून रेनी सीज़ंस
अकर फ्रॉम जून टू सप्टेंबर। एंड ब्रिंग्स हैवी रेनफॉल टू मोस्ट पार्ट ऑफ इंडिया। रेन वाटर हार्वेस्टिंग इज़ द प्रोसेस ऑफ़
कलेक्टिंग एंड स्टोरिंग रेन वाटर। क्या है? कलेक्टिंग एंड स्टोरिंग रेन वाटर। फॉर फ्यूचर यूज़ एंड इंस्टेड ऑफ़ लेटिंग इट गो
वेस्ट। ठीक है? तो रेन वाटर हार्वेस्टिंग इज़ द प्रोसेस ऑफ़ कलेक्टिंग एंड स्टोरिंग रेन वाटर फॉर फ्यूचर यूज़ एंड इंस्टेड ऑफ़
लेटिंग इट गो वेस्ट। तो अब हम बात करते हैं इसमें कौन-कौन सी टाइप्स और एग्जांपल्स हैं। जैसे हम पहले बात करते थे
ना इंट्रोडक्शन देना है, डेफिनेशन देना है फिर टाइप्स और एग्जांपल की। ठीक है? तो रूफ टॉप रेन वाटर हार्वेस्टिंग कलेक्ट रेन
वाटर फ्रॉम रूफ्स एंड स्टोर इट इन टैंक्स। रूफ के अंदर क्या देखिए तो रूफ के ऊपर क्या होता है? पानी इकट्ठा होता है और
उसके थ्रू रूफ के साथ क्या होते हैं? छोटे-छोटे पाइप्स जा रहे होते हैं। तो उन पाइप से पानी नीचे की तरफ फ्लो करता है और
टैंक्स में चला जाता है। ये रूफ टॉप हुआ। देन हमारे पास होता है रिचार्ज पोंड्स। तो हमारे पास काफी सारे पोंड्स हैं। स्पेशली
आपने देखा होगा कि राजस्थान में देन आपने बोर, चेन्नई, साउथ इंडिया में काफी जगह बिहार में भी इवन पोंड्स देखे होंगे। तो
वो क्या करते हैं? कलेक्ट करते हैं इन अ स्मॉल पिट एंड अलाउड टू स्लोली एंटर इंटू द अंडरग्राउंड वाटर जो कि हमारा जो
ग्राउंड वाटर लेवल होता है उससे रिचार्ज होता है। ठीक है? दे तो देन रिचार्ज वेल। वेल क्या है? कुआं। ठीक है? तो कुएं का जो
रेन वाटर है डायरेक्टेड इंटू अ वेल टू इंक्रीस द ग्राउंड वाटर लेवल। देन हमारे पास आता है वाटर स्टोरेज टैंक। रेन वाटर
इज़ स्टर्ड इन अ टैंक फॉर फ्यूचर यूज़। तो ये हमारे कुछ टाइप थे। रूफ टॉप याद रखना, पोंड याद रखना, वेल याद रख लेना और
स्टोरेज टैंक। ठीक है? ये चार चीजें एग्जांपल्स में हमारे आ जाएगी। नाउ अब हम बात करते हैं कुछ एडवांटेजेस की। तो जैसे
कि जो रेन वाटर हार्वेस्टिंग है वो हेल्प करता है ड्रॉट लाइक सिचुएशन में, इरीगेशन एंड फार्मिंग में। आल्सो इंक्रीसेस द
ग्राउंड वाटर लेवल। देन प्रिवेंट वाटर स्केसिटी। आप देख सकते हैं कि इंडिया की पॉपुलेशन जिस हिसाब से है अराउंड 18% ऑफ़
वर्ल्ड पॉपुलेशन है हमारे पास। बट अगर हम पीने की पानी की बात करें तो वो कितना है? बट अगर हम पीने की पानी की बात करें तो
ओनली 4% ऑफ़ वर्ल्ड फ्रेश वाटर वी हैव व्हिच इज़ वेरी कंसर्निंग। तो इसलिए प्रिवेंट वाटर स्केरसिटी। ठीक है? रिड्यूस
फ्लडिंग एंड सॉइल इरोजन। सो जो हमारी वाटर लॉजिंग की प्रॉब्लम है वो वहीं से सॉल्व हो जाएगी। ठीक है? देन सॉइल इरोजन होता
है। अगर वाटर लॉजिंग हो रही है तो सोइल इरोजन होगा। ठीक है? देन प्रोवाइड वाटर एंड डोमेस्टिक फॉर फार्मिंग यूज़। इसमें तो
हमें पता है कि हम कैसे इरीगेशन के लिए अगर हमने रेन वाटर हार्वेस्टिंग कर रखी है तो इसे यूज़ कर सकते हैं। पोंड इसका बहुत
अच्छा एग्जांपल है। पोंड यूज़ होते हैं एग्रीकल्चर के अंदर। देन सेव वाटर एंड प्रोटेक्ट दी एनवायर। अब आगे आगे बात करते
हैं हम लोग। अब हमने जैसे बात करी हेल्प्स ड्रॉट प्रोन एरियाज़ लाइक महाराष्ट्र एंड राजस्थान। और क्या आपको याद आ रहा है कि
महाराष्ट्र के अंदर ही अराउंड 4500 डेथ हुई थी। राइट? देन कर्नाटका के अंदर अराउंड 2500 डेथ देखने को मिली थी। ठीक
है? देन हमने एक पंजाब की रिपोर्ट पढ़ी थी जिसमें हमने देखा था 16,000 फार्मर हैव डाइड। ठीक है? तो ड्रॉट और क्लाइमेट चेंज
की वजह से। इसलिए बहुत इंपॉर्टेंट है ये। यहां पर हम बता सकते हैं क्यों रेन वाटर हार्वेस्टिंग इंपॉर्टेंट है। ठीक है? सो
यू मस्ट हैव सीन इन न्यूज़ फ्रॉम द लास्ट टू इयर्स कि जो साउथ इंडिया है वहां पर वाटर क्राइसिस चल रहा है। वेदर इट इज़
बेंगलुरु, चेन्नई राइट केरला। देन हमने बात करी थी ईसा फाउंडेशन जो सद्गुरु का प्रोग्राम था जिसमें कावेरी कॉलिंग करके
एक प्रोजेक्ट चलाया गया था अराउंड दिस 2.42 बिलियन ट्रीज हम ग्रो करने वाले थे तो ये सारी चीजें क्यों कर रहे थे बिकॉज़
देखिए जो कावेरी है वो साउथ इंडिया को पानी देती है राइट फ्रेश वाटर प्रोवाइड करती है तो बाय 2050 वो वनिश हो जाएगी
खत्म हो जाएगी पूरी ठीक है जैसे कि हमारी बाकी रिवर्स थी इसलिए ये इंपॉर्टेंट है हमारे लिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग करता रेन
वाटर इज़ क्लीन एंड प्योर कंपेयर टू पोलटेड सिटी वाटर लाइक दिल्ली बिल्कुल बहुत अच्छा एग्जांपल है अ स्टडी बाय आईआईटी दिल्ली
शोड रेन वाटर हार्वेस्टिंग कैन रिड्यूस वाटर शॉर्टेज इन अर्बन एरियाज। स्पेशली इन दिल्ली। राइट? तो ये चीजें जो है हमारे
लिए काफी हेल्पफुल हैं। अब बात करते हैं टैट की। देखिए टैट में काफी सारी पिक्चर्स आती हैं जिसमें हम रेन वाटर हार्वेस्टिंग
को दिखा सकते हैं। ठीक है? तो रेन वाटर हार्वेस्टिंग वैसे भी बहुत लो कॉस्ट है। देखिए कैसे कर सकते हैं हम। फर्स्ट डिग द
लैंड टू क्रिएट अ पोंड और अ स्टोरेज एरिया। तो फर्स्ट आप क्या करिए? आप सर्वे करिए कि कहां पर जो है नेचुरली वाटर जो है
इकट्ठा होता है। ठीक है? वाटर जो है एक्यूमुलेट होता है। ठीक है? वहां पर जाकर आपको क्या करना है? डिक करना है उस लैंड
को। ठीक है? आफ्टर दैट आपको क्या करना है? कवर द बेस विद क्ले और सीमेंट टू प्रिवेंट द वाटर लीकेज। आपने एक छोटा पोंड टाइप बना
दिया तो आप उसको क्या कर सकते हैं? क्ले और सीमेंट से कवर कर सकते हैं। उसके बाद आप क्या करेंगे? इंस्टॉल इनलेट एंड आउटलेट
पाइप। इनलेट पाइप जहां से वाटर आ रहा है। देन आप क्या कर सकते हैं? इनलेट और आउटलेट पाइप को इंस्टॉल कर देंगे। ठीक है? जहां
से आप वाटर को रिसीव कर सकते हैं। ठीक है? देन फिल्टर सिस्टम वहां पर लगा सकते हैं कि जो रिमूव करेगा डर्ट एंड इंप्योरिटीज़
उसको कवर भी कर सकते हैं आप। ठीक है? और इससे जो है रेन वाटर हार्वेस्टिंग पोंड हमारा रेडी हो जाता है। तो ये कुछ एकशंस
हैं जो अपनी टैड स्टोरी में देख सकते हैं। आल्सो इट्स वेरी लो कॉस्ट चीप है। ठीक है? और रूफ टॉप का हमने अभी डिस्कस करा था कि
कैसे हम रूफ टॉप पे ये चीज कर सकते हैं। वहां पे भी हमें इनलेट और आउटलेट पाइप लगा सकते हैं हम लोग जो डायरेक्टली स्टोरेज
टैंक में जाता है। टैंक में भी आप फिल्टर लगा सकते हैं। एंड देन यू कैन यूज़ दैट। अब बात करते हैं हम कंक्लूजन की। बिफोर दैट
हमें बात करनी है जल जीवन मिशन और जलशक्ति अभियान की। वन मिशन की बात करें तो ये इंडियन गवर्नमेंट का एक प्रोग्राम था
जिसके अंदर क्या है कि और स्टिल इट इज़ रनिंग कि जो हम टैप वाटर कनेक्शन है प्रोवाइड करेंगे रूरल एरियाज के अंदर
विलेजेस के अंदर। ठीक है? और कोई भी ऐसा जो है हमारा स्टेट और विलेज नहीं रहेगा जहां पर हमें टैप वाटर कनेक्शन नहीं है।
ठीक है? तो अंडर दिस जलवन मिशन हमने ये चीजें कह दी। अब जल जलशक्ति अभियान क्या है? हम ज्यादा से ज्यादा रेन हार्वेस्टिंग
प्रोजेक्ट्स बनाएंगे, पोंड्स बनाएंगे, टैंक्स बनाएंगे जहां पर हम रेन वाटर को हार्वेस्ट कर सकें। तो ये दोनों
इंटररिलेटेड है। देखिए जलशक्ति अभियान से क्या कर रहे हैं? वाटर को एक्यूमुलेट कर रहे हैं और जल जीवन मिशन से क्या आप उसको
टैप वाटर कनेक्शन प्रोवाइड कर रहे हैं। ठीक है? तो दोनों इंटरडिपेंडेंट टू ईच अदर है। तो ये कुछ गवर्नमेंट की पॉलिसीज हैं।
कंक्लूजन देख लेते हैं। रेन वाटर हार्वेस्टिंग इजेंट फॉर सिक्योरिंग आवर फ्यूचर वाटर नीड्स। इट इज़ सिंपल लो कॉस्ट
एंड सस्टेनेबल सॉल्यूशन टू दी ग्रोइंग वाटर क्लासेस। बिल्कुल सही बात है। इट हेल्प टू कंजर्व वाटर एंड प्रमोट
रिस्पांसिबल यूज़ ऑफ़ नेचुरल रिसोर्सेज। देयर फॉर रेन वाटर हार्वेस्टिंग इज़ नॉट जस्ट एन ऑप्शन बट अ नेसेसिटी फॉर
सस्टेनेबल डेवलपमेंट एंड फ्यूचर जनरेशन। ठीक है? तो चलिए अब हम बात करते हैं सॉइल मैनेजमेंट पे। ठीक है? तो ये सॉइल
मैनेजमेंट भी काफी बार लेक्चर में देखने को मिला है। तो ये टॉपिक में बस हम एक ही स्लाइड ये पढ़ेंगे क्योंकि बेसिकली हमें जो
कंफ्यूजन आती है वो इसी में आती है कि सॉइल मैनेजमेंट में हमें क्या-क्या चीजें कवर करनी है। ठीक है? तो अगर हमें वो समझ
में आ जाएगा तो आई होप आप इज़ली सॉइल मैनेजमेंट पर बोल सकते हैं। ठीक है? तो देखिए सॉइल मैनेजमेंट होता क्या है? सॉइल
मैनेजमेंट मींस दी प्रॉपर यूज़ इंप्रूवमेंट एंड कंजर्वेशन ऑफ़ सॉइल टू मेंटेन फर्टिलिटी, प्रोडक्टिविटी, स्ट्रक्चर एंड
सस्टेनेबल एग्रीकल्चर। देखिए सॉइल मैनेजमेंट में कुछ नहीं है। हमें क्या करना है? सोइल को कंजर्व करना है। उसकी
फर्टिलिटी को मेंटेन करना है। उसकी प्रोडक्टिविटी को एनहांस करना है। जिससे हम सस्टेनेबल एग्रीकल्चर प्रैक्टिससेस कर
सकें। ठीक है? अच्छा क्या आपको सोइल देख के एक इनिशिएटिव याद आ रहा है? ईशा फाउंडेशन का सेव सइल मूवमेंट जो हमने पढ़ा
था। इसके अंदर 81 नेशंस थे और ह्यूमन बॉडीज भी इन्वॉल्व थी। ठीक है? तो यहां पर ये आप एग्जांपल डाल सकते हैं क्योंकि वो
भी यही था कि फर्टिलिटी, प्रोडक्टिविटी और कंजर्वेशन ऑफ़ सइल। तो ये एक एग्जांपल आप वहां पर बता सकते हैं। ठीक है? तो चलिए
देखते हैं। मेंटेन सॉइल फर्टिलिटी, प्रिवेंट सोइल इरोजन, प्रिवेंट सॉइल स्ट्रक्चर, देन मॉइस्चर रिटेंशन, इंक्रीस
क्रॉप प्रोडक्टिविटी, प्रमोट सस्टेनेबल फार्मिंग। ठीक है? कैसे कर सकते हैं अब हम? बात तो हमने कर ली कि सॉइल की
फर्टिलिटी बचानी है, कंजर्व करना है, सॉइल को, प्रोडक्टिविटी मेंटेन करनी है। बट कैसे करें? ठीक है? सॉइल टेस्टिंग
टेस्टिंग सॉइल टू नो द न्यूट्रिएंट लेवल, पीएच एंड आल्सो फार्मर कैन अप्लाई करेक्ट फर्टिलाइजर फ्रॉम दैट। देखिए क्या होता है
कि आप जब टाइम टू टाइम टेस्ट करते रहेंगे तो उससे आपको अंदाजा लगता रहेगा कि हमारी सोइल की कंडीशन क्या चल रही है। ठीक है?
तो आप हिसाब से जो है हम डिफरेंट टाइप ऑफ फर्टिलाइजर ऑर्गेनिक मैन्योर क्या हमें यूज़ करना है। ठीक है? इरीगेशन मैनेजमेंट
प्रोवाइडिंग वाटर इन दी राइट अमाउंट एंड एट दी राइट टाइम टू अवॉयड वाटर लॉजिंग। तो आगे जाके हम पढ़ने वाले हैं कि कैसे जो
एआई बेस्ड सेंसर हैं वो हेल्प कर रहे हैं इरीगेशन मैनेजमेंट में। तो वहां से आप पॉइंट उठा के यहां पे डाल सकते हैं। बट
लेटर हम उसको पढ़ेंगे। ठीक है? तो ड्रोन टेक्नोलॉजी भी आ चुकी है। ठीक है? सॉइल मैनेजमेंट के लिए और काफी सारे एग्री
बेस्ड स्टार्टअप है जहां पर आप क्या कर सकते हैं? अंदर क्या है कि आपको एक पोल अटैच करना है एक सॉइल के अंदर। राइट? उस
पोल के अंदर काफी सारी वायर्स जा रही हैं जो कि डायरेक्टली आपके सॉइल के न्यूट्रिएंट्स और पीएच लेवल को आपके
मोबाइल फोन पर जो है मैसेजेस दे देगी। राइट? तो वो भी हम आगे पढ़ेंगे। देन हमारे पास आता है यूज़ ऑफ़ ऑर्गेनिक मैन्योर। ठीक
है? अपाइंग कंपोज्ड फार्म यारार्ड मैन्योर एंड ग्रीन मैन्योर टू इंप्रूव सॉइल फर्टिलिटी। देन हमारे पास आता है मलचिंग।
कवरिंग सइल विद स्ट्रो लीव्स और यू नो प्लास्टिक टू रिड्यूस दी मॉइस्चर लॉस एंड कंट्रोल वीड्स। तो ये कुछ वेज़ हैं जिससे
हम सॉइल मैनेजमेंट को इंप्रूव कर सकते हैं। राइट? इसमें फिर आप बात कर सकते हैं कैसे जो है सॉइल पोल्यूशन के बारे में जो
हमने पोलशन चैप्टर में पढ़ा था वो सारी अब चीजें बता सकते हैं और वहां पर जो भी हमने चीजें कवर करी थी वो यहां पे ऐड कर सकते
हैं। और आगे तो हम पढ़ेंगे इसके बारे में। तो यू डोंट नीड टू बी वरी अबाउट दैट। नाउ अब हम बात करते [संगीत] हैं
डिफॉरेस्टेशन की। ठीक है? तो डिफॉरेस्टेशन क्या डिफॉरेस्टेशन इज द लार्ज स्केल कटिंग डाउन ऑफ फॉरेस्ट परमानेंटली [संगीत]
टू यूज़ द लैंड फॉर एग्रीकल्चर सिटीज रोड और इंडस्ट्रीज। ठीक है? ये समझ में आ गया हमें? देखिए ये एग्जांपल देखिए। राइट?
लखनऊ सिटी का एग्जांपल है कि किस तरीके से जो है हमने डेवलपमेंट के लिए और सिटीज और रोड कंस्ट्रक्शन के लिए हमने जो है काफी
सारे ट्रीज़ को कट करा है। ठीक है? नाउ हम बात करते हैं कुछ एग्जांपल्स की। ग्लोबल फॉरेस्ट वॉच। ठीक है? यह एक ऑर्गेनाइजेशन
है। वर्ल्ड लॉसेस अबाउट 10 मिलियन हेक्टेयर्स ऑफ़ फॉरेस्ट एव्री ईयर। तो, यह आप जीडी में यूज़ कर सकते हैं। ये आप पॉइंट
अपने लेक्चरट में यूज़ कर सकते हैं कि वर्ल्ड यूज़ करता है एव्री ईयर अराउंड 10 मिलियन हेक्टेयर्स ऑफ़ फॉरेस्ट। ठीक है?
अरुणाचल प्रदेश एंड नॉर्थ ईस्ट ट्रीज़ कट फॉर रोड्स एंड इंफ्रास्ट्रक्चर। जैसे-जैसे हम लुक ईस्ट पॉलिसी को अपना रहे हैं कि
हमें अपने नॉर्थ ईस्ट को डेवलप करना है तो वहां पर भी बहुत तेजी से जो है हमारे ट्रीज़ को कट किया जा रहा है। नाउ इसरो
यूजज़ कार्टो सेट एंड रिसोर्स सेट सेटेलाइट अह टू मॉनिटर फॉरेस्ट कवर एंड देयर रिपोर्ट्स शो डेंस फॉरेस्ट इन इंडिया आर
डिक्लाइनिंग ड्यू टू माइनिंग एंड अर्बनाइजेशन। तो अब दो चीजें हैं इसमें। फर्स्ट ऑफ़ ऑल इसरो क्या है? कार्टो सेट
एंड रिसोर्स सेट सैटेलाइट्स को यूज़ करता है फॉरेस्ट को मॉनिटर करने के लिए। और वो सजेस्ट कर रहा है इसरो की रिपोर्ट बता रही
है कि कैसे माइनिंग और अर्बनाइजेशन की वजह से जो है हमारा फॉरेस्ट लैंड जो है वो डिक्रीज हो रहा है। तो ये एक बहुत अच्छा
पॉइंट है जो कि जीडी और लेक्चरेट के लिए। नाउ नाउ वेस्टर्न घाट फॉरेस्ट लॉस ड्यू टू अर्बन एक्सपेंशन एंड एग्रीकल्चर एंड
डिफॉरेस्टेशन इज़ आल्सो अदर रीज़न ऑफ़ क्लाइमेट चेंज एंड पोलशन। ठीक है? हमने वहां बात करी थी। तो देखिए ये सब पॉइंट्स
इंटररिलेटेड टू ईच अदर। नाउ लेट्स डिस्कस दी कॉज़। व्हाट आर दी कॉज़ व्हिच आर कॉजिंग दी डिफॉरेस्टेशन। अर्बनाइज़ेशन हमने जैसे
बात करी कि हमारी पपुलेशन इज़ गोइंग टू बी अराउंड 160 टू 170 करोड़। प्रोजेक्टेड है 170 करोड़ के आसपास ही बाय 20050। अह सो वी
नीड मोर अर्बनाइज़ेशन स्कायस्केपर रोड्स, हेल्थ केयर इंफ्रास्ट्रक्चर। सो बिकॉज़ ऑफ़ दिस वी नीड टू कट द ट्रीज़। ठीक है? तो ये
एक अर्बनाइजेशन इसका मेजर रीज़न है। ऑलदो हमें सस्टेनेबल डेवलपमेंट करना चाहिए बट अर्बनाइजेशन इट्स अ बिग कंसर्न। देन
फॉरेस्ट फायर बिल्कुल हमने देखा कि कैसे फॉरेस्ट फायर जो है डैमेज करती हैं। स्पेशली इन हमने देखा उत्तराखंड हिमाचल के
अंदर काफी सारी फॉरेस्ट फायर जो हैं इन 2026 टू एंड 2025। देन रोड कंस्ट्रक्शन। ठीक है? काफी सारी रोड कंस्ट्रक्शन एंड
हाईवेज़ जो हैं वो कहां से गुजर रहे हैं? हमारे अह नेशनल पार्क से जा रहे हैं। वाइल्ड लाइफफ़ सेंचुरीज़ से जा रहे हैं। ठीक
है? जिसके लिए ट्रीज़ को कट किया गया है। ऑलदो गवर्नमेंट एंड हाईवे अथॉरिटी ने प्रॉमिस करा है कि हम सिमिलर काइंड ऑफ़
ट्रीज़ जो है किसी और एरिया पे प्लांट कर देते हैं। तो ये एक सस्टेनेबल डेवलपमेंट है। बट आई थिंक ये लॉस ऑफ़ हैबिटेट कॉज़
करता है। ठीक है? देन एग्रीकल्चर एक्सपेंशन देन पॉपुलेशन ग्रोथ पे हम बात कर चुके हैं। एंड इंडस्ट्रियल ग्रोथ जैसे
ही जैसे इंडिया डेवलप हो रहा है, डेवलपिंग कंट्री है, मैन्युफैक्चरिंग मिशनंस आ रहे हैं। स्टार्टअप इंडिया ये सारी चीजें आ
रही हैं। तो इससे इंडस्ट्रियल ग्रोथ भी हो रहा है। ठीक है? ठीक है? पीएलआई स्कीम तो इसलिए जो है हम एंड व्हेन वी आर डूइंग
ग्रोथ तो डेफिनेटली यहां पे हमें लैंड की जरूरत होगी। जैसे आपने सोलर प्लांट भी लगाया है। ठीक है? बदला सोलर पावर प्लांट
कितने थाउजेंड्स ऑफ हेक्टेयर्स एंड किलोमीटर्स में फैला हुआ है। तो अब हम बात करते हैं इफेक्ट्स क्या है? इंक्रीस इन
CO2 लेवल। क्योंकि ट्रीज जो है ऑब्जर्व करते हैं CO2 को। हमने पढ़ा था ये पॉल्यूशन चैप्टर में। तो इसलिए इनक्रीस ऑफ़ CO2
लेवल। ठीक है? ठीक है? तो फ्लड रिस्क इनक्रीस। ठीक है? तो फ्लड्स हमने देखी काफी सारी आई हमारी हमने बात करी थी
क्लाइमेट चेंज चैप्टर। ठीक है? और इस वीडियो से आपको आईडिया लग जाएगा कैसे जो हैज़ इंपॉर्टेंट है टू कर्व दी फ्लड। ठीक
है? नाउ हम बात करते हैं ग्लोबल वार्मिंग। राइट? ग्लोबल वार्मिंग इज़ आल्सो अ वेरी
मेजर रीज़न फॉर दिस। अब एक चीज और है कि जो हमारी क्लाइमेट चेंज है और पॉल्यूशन है, ये दोनों ग्लोबल वार्मिंग से रिलेटेड है
यार। नाउ ग्लोबल वार्मिंग। ठीक है? तो क्लाइमेट चेंज चैप्टर ही पूरा कंप्लीट ग्लोबल वार्मिंग से रिलेटेड है। वहां पे
भी जो आपका वेदर पैटर्न चेंज हो रहा है तो आप अगर क्लाइमेट चेंज को कंप्लीट करते हो तो वेदर ग्लोबल वार्मिंग भी आपका कंप्लीट
हो जाएगा। देन जो है सोइल इरोजन की काफी सारी पॉसिबिलिटी इनक्रीस होती है। देन हैबिटेट
लॉस ऑफ़ एनिमल काफी सारे केसेस हैं जहां पर स्पेशली इन उत्तराखंड हमें देखने को मिले, एमपी में देखने को मिले, राजस्थान में
देखने को मिले, जहां पर जो है वाइल्ड एनिमल्स जो है बिकॉज़ फॉरेस्ट कॉन्सेंटली हम कट कर रहे हैं। तो वो जो ह्यूमन के साथ
उनका इंटरवेंशन बढ़ रहा है। ठीक है? स्पेशली नियर दी नेशनल पार्कक्स एंड वाइल्ड लाइफफ़ सेंचुरीज़। देन सॉल्यूशन क्या
है? देखिए अफॉरेस्टेशन है हमारा इंडिया का तो वैसे भी नेशनल अफोरेस्टेशन प्रोग्राम है। देन वेरियस एनजीओ की बात हमने करी थी।
चाहे वो ग्रीन इंडिया मिशन हो। फॉरेस्ट सैटेलाइट हमने बात करी थी। कार्टो से कार्टो सेट रिसोर्स सेट सेटेलाइट स्ट्रीट
लॉज़ बनाने की जरूरत है। अभी हम वाइट के बारे में पढ़ेंगे तो वहां पर हम लॉज़ के बारे में भी डिस्कस करेंगे। ठीक है? देन
क्रिएट मोर एंड मोर नेशनल पार्क बनाइए। बिकॉज़ नेशनल पार्क आप जैसे ही बना देते हैं तो उसके साथ काफी सारे लॉज़ जुड़ जाते
हैं। ठीक है? वो काफी सारे रूल्स आ जाते हैं। तो उस एरिया को आप नहीं टच कर सकते हो। तो इसलिए हमें ज्यादा से ज्यादा नेशनल
पार्क बनाने की जरूरत है। ऑलदो हम बना रहे हैं। देखिए एक टाइम पर हमारी वाइल्ड लाइफफ़ सेंचुरीज़ या फिर टाइगर रिजर्व जो 50 थे और
अब जो है वो अराउंड 100 आने वाले हैं। ठीक है? तो दिस इज़ वेरी ग्रेट थिंग। देन रिफॉरेस्टेशन
की जरूरत है। ठीक है? अवेयरनेस ऑफ़ लेस वुड देन है। नाउ लेट्स डिस्कस अफॉरेस्टेशन और रिफॉरेस्टेशन में डिफरेंस क्या है? ठीक
है? सो अफोरेस्टेशन क्या होता देखिए अफॉरेस्टेशन इज़ द प्रोसेस ऑफ़ प्लांटिंग ट्रीज़ ऑन लैंड वेयर देयर वर नो फॉरेस्ट
बिफोर। मतलब ऐसी जगह पर फॉरेस्ट ग्रो करने जहां पर पहले नहीं थे। वेयर ऐज़ रिफॉरेस्टेशन क्या होता है? रिफॉरेस्टेशन
इज़ द प्रोसेस ऑफ़ रिप्लेसिंग ट्रीज़ इन एन एरिया वेयर फॉरेस्ट वर प्रीवियसली कट डाउन और डिस्ट्रॉयड। जैसे कि फॉर एग्जांपल
हमारी जो फॉरेस्ट फायर लगती है। ठीक है? वहां पर हम रिफॉरेस्टेशन करेंगे। क्योंकि वहां पर पहले ट्रीज़ थे। और अब फॉरेस्टेशन
का अगर हम एग्जांपल ले खाली एरिया है राइट? जैसे राजस्थान का हम एरिया ले रहे हैं तो वहां पर नेशनल एफरेस्टेशन
प्रोग्राम है तो वो सेलेक्ट करता है ऐसे-ऐसे सर्वे करके लैंड पर जहां पर हम फॉरेस्ट को ग्रो कर सकते हैं। ठीक है? तो
इसलिए रिफॉरेस्टेशन और अफोरेस्टेशन में ये मेजर डिफरेंस है आप देख सकते हैं। नाउ व्हाई वी नीड दिस यू नो रिफॉरेस्टेशन
एंड अफोरेस्टेशन। सो हमने बात करी थी क्यों? सारे क्लाइमेट चेंज के पॉइंट आप बता सकते हो। और चलिए ये हमने कुछ पॉइंट्स
देखे। तो वही सारी चीजें कंक्लूजन में हम बता सकते हैं। डिफरेस्टेशन इज द ग्रेटेस्ट थ्रेट्स इंक्रीजिंग CO2 लेवल, ग्लोबल
वार्मिंग, क्लाइमेट चेंज। ये ऑल हम डिस्कस कर चुके हैं। नाउ अब हम बात करते हैं वाइल्ड लाइफफ़ कंजर्वेशन के ऊपर। ठीक है?
तो [संगीत] सबसे पहले इंट्रोडक्शन अगर हम दें तो प्रोटेक्शन एंड मैनेजमेंट ऑफ वाइल्ड एनिमल्स, प्लांट्स एंड देयर नेचुरल
हैबिटेट इज कॉल्ड वाइल्ड लाइफफ़ कंजर्वेशन। तो [संगीत] क्या डेफिनेशन है? प्रोटेक्ट करना है किसको? वाइल्ड एनिमल को करना है,
प्लांट्स को करना है, ट्रीज को करना है और उनके नेचुरल हैबिटेट को करना है। बहुत ही सिंपल डेफिनेशन है ना? सो, वाइल्ड लाइफफ़
कंजर्वेशन क्या हुआ? प्रोटेक्शन और मैनेजमेंट किसकी? वाइल्ड लाइफफ़ वाइल्ड एनिमल्स प्लांट्स एंड नेचुरल हैबिटेट। ठीक
है? इतनी सी डेफिनेशन थी। देन वाइल्ड लाइफफ़ प्रोटेक्शन एक्ट 1972। ये आप यूज़ कर सकते हैं। दैट इंडियन कॉन्स्टिट्यूशन के
पास क्या है? वाइल्ड लाइफफ़ प्रोटेक्शन एक्ट है। ठीक है? जिसमें वो लीगल प्रोटेक्शन देता है स्पीशीज़ को। ठीक है?
नाउ इसके अंदर क्या है कि ये प्रोहिबिट करता है कि आप किसी भी जो वाइल्ड लाइफफ़ को हंट नहीं कर सकते। किसी ट्री या फॉरेस्ट
को कट नहीं कर सकते। अंडर दी वाइल्ड लाइफफ़ प्रोटेक्शन एक्ट 1972 अकॉर्डिंग टू दी वर्ल्ड वाइल्ड लाइफफ़ फंड लिविंग प्लेनेट
रिपोर्ट 2022 ग्लोबल वाइल्ड लाइफफ़ पापुलेशन हैव डिक्लाइंड बाय 69% सिंस 1970 यानी कि लास्ट 50 ईयर में 69% डिक्लाइन
हुआ है वाइल्ड लाइफफ़ के अंदर। तोडब्ल्यूएफ की रिपोर्ट है। सो हम यह जीडी में पॉइंट रख सकते हैं दैट अकॉर्डिंग टू
डब्ल्यूडब्ल्यूएफ अह इन द लास्ट 50 इयर्स देयर इज़ अ डिक्लाइन अह देयर हैज़ बीन अ डिक्लाइन ऑफ़ 69% ऑफ़ वाइल्ड लाइफफ़ पापुलेशन
व्हिच इज़ अ ग्रोइंग कंसर्न फॉर अस। देन आईयूसीएन इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ़ नेचर। ठीक? सो आईयूएसएन क्या करता है?
एव्री ईयर रेड लिस्ट को पब्लिश करता है। तो उसने रिपोर्ट करा है अराउंड 44,000 स्पीशीज़ आर थ्रेटन विद एक्सटन वर्ल्ड
वाइड। ठीक है? तो अगर हम एग्जांपल देखें एंडेंजर्ड स्पीशीज का इन इंडिया वो है बंगाल टाइगर एशियाटिक लाइन एंड ग्रेट
इंडियन बासर। तो ये एग्जांपल आप अपने जीडी में यूज़ कर सकते हैं। कौन-कौन से? हमने बताया कि वर्ल्ड वाइल्ड लाइफफ़ फंड ने जो
है 69% ऑफ़ वाइल्ड लाइफफ़ डिक्लाइन दिखाया इन लास्ट 50 इयर्स। आईएसए जो है वो रेड लिस्ट रिपोर्ट करा है। उसने 44,000
स्पीशीज़ जो है वो थ्रेटन है विद एक्सटन ऑफ़ वर्ल्ड वाइड। एग्जांपल हम बता सकते हैं इन इंडिया एशिया डिक लाइन देन बंगाल टाइगर
एंड ग्रेट इंडियन मास्टर। तो यहां पर देखिए एक इंटरेस्टिंग पॉइंट है। इंडिया होस्ट नियरली 8% ऑफ दी वर्ल्ड
बायोडायवर्सिटी एंड ओनली 2.4% ऑफ लैंड। तो इंडिया के पास टोटल कितना है? 2.4% ऑफ लैंड है पूरे वर्ल्ड का। बट स्टिल हमारे
पास 8% ऑफ वर्ल्ड बायोडायवर्सिटी है जो कि एक अच्छी न्यूज़ है। बट फिर भी हमें जो है बंगाल टाइगर एशियाटिक लाइन एंड ग्रेट
इंडियन ऐसी काफी सारी जो एंडेंजर्ड स्पीशीज़ हैं उन्हें बचाने की जरूरत है। और ज्यादा से ज्यादा नेशनल
पार्क और क्या बायोडायवर्सिटी पार्क एंड वाइल्ड लाइफफ़ सेंचुरीज़ बनाने की जरूरत है। ठीक है? चलिए आगे बढ़ते हैं।ेंस ऑफ वाइल्ड
लाइफ क्या है? देखिए मेंटेन इकोलॉजिकल बैलेंस फूड चेन एंड इकोसिस्टम स्टेबिलिटी। ठीक है? तो फूड चेन हम सबको पता है कि किस
तरीके से काम करती है। इसलिए वाइल्ड लाइफफ़ इंपॉर्टेंट है। फॉर एग्जांपल आप ले सकते हैं उत्तराखंड का। ठीक है? जिम कॉर्बेट
नेशनल पार्क देन हिमाचल हो गया। ठीक है? वैली ऑफ़ फ्लावर्स। तो ये सारी जो चीजें हैं, ठीक है? ये क्या है? टूरिज्म को काफी
ज्यादा इफ़ेक्ट करती हैं। ठीक है? देन आप उत्तर प्रदेश एमपी के अंदर देख सकते हैं। काफी सारे टाइगर रिजर्व्स हैं। चाहे वो
बांधवगढ़ हो। उत्तर प्रदेश में देख सकते हैं। ठीक है? दुधवा नेशनल पार्क। तो ऑल ओवर वर्ल्ड आप काफी सारे नेशनल पार्क और
वाइल्ड लाइफ सेंचुरीज और टाइगर रिजर्व के एग्जांपल्स डाल सकते हैं जब आप लेक्चर को दे रहे हैं। ईजीली आपका टाइम जो है वो और
ये आपकी नॉलेज भी शो करता है कि यू नो अबाउट दिस। ठीक है? तो टूरिज्म बहुत ज्यादा जो है इससे प्रभावित होता है
वाइल्ड लाइफ कंजर्वेशन से। ठीक है? देन सपोर्ट एग्रीकल्चर थ्रू पोलॉलिनेशन एंड पेस्ट कंट्रोल। ठीक है? रेगुलेट्स
क्लाइमेट एंड मेंटेन बायोडायवर्सिटी। आगे बढ़ते हैं। नाउ मेजर चैलेंजेस क्या है? पोचिंग एंड इललीगल वाइल्ड लाइफफ़ ट्रेड।
ठीक है? है राइनो का एंड टाइगर पोचिंग अच्छा तो चलिए बात करते हैं अब हम चैलेंजेस की राइट सो पोचिंग एंड इललीगल
वाइल्ड लाइफफ़ ट्रेड राइनो का टाइगरर्स का ठीक है केसेस रिपोर्टेड इन इंडिया रिपोर्टेड बाय एनटीसीए एंड ट्रैफिक सी जो
हमारे वन हॉर्न राइनो थे स्पेशली इन काजीरंगा नेशनल पार्क काफी सारे जो है पोचिंग के केसेस देखने को मिले वहां पर
ठीक है बिकॉज़ जो इनके हॉर्न है और सिमिलरली एलीफेंट के जो टस्क्स हैं तो ये सारी चीजें जो है सेल होती हैं पता है
स्किन तो टाइगरर्स की एंड ऑल दैट तो ये सारी सारी चीज़ की वजह से जो है पोचिंग और हंटिंग काफी ज्यादा हो रही थी। बट ऑलदो
वाइल्ड लाइफफ़ कंजर्वेशन और हमारे जो फॉरेस्ट ऑफिसर्स हैं लॉज़ है हमने उसे अच्छी तरीके से प्रिवेंट करा है। बट ये एक
मेजर चैलेंज है जो हमें आगे बिकॉज़ पॉपुलेशन इज़ गोइंग टू इंक्रीस। नाउ हम बात करें डिफॉरेस्टेशन की वो एक बहुत बड़ा
थ्रेट है वाइल्ड लाइफ कंजर्वेशन के लिए। क्योंकि अगर डिफॉरेस्टेशन ज्यादा से ज्यादा होगा तो वाइल्ड लाइफ का जो
एनकाउंटर है ह्यूमन के साथ वो दिन-ब दिन बढ़ता जाएगा। ठीक है? और ये भी एक चैलेंज है वाइल्ड लाइफ एनकाउंटर विद ह्यूमन
बीइंग्स। हम चलते हैं डे टू की तरफ। ठीक है? [संगीत] तो डे टू हमारा एंटरटेनमेंट। तो जितने भी टॉपिक्स हमारे एंटरटेनमेंट से
रिलेटेड हैं जो कि हमारे एसएसबी में आते हैं प्लस उनसे रिलेटेड जो ग्रुप डिस्कशन के टॉपिक्स हैं, हम उनको डिस्कस करेंगे।
जितने भी टॉपिक हम यहां पर कवर कर रहे हैं, सारे रिलेवेंट हैं और ये सारे रिपीट हो चुके हैं बार-बार। ठीक है? इन वेरियस
[संगीत] एसएसबीस। ओके? सो, एक बार टॉपिक देख लेते हैं। ओटीटी प्लेटफार्म है। यहां पर एक जीडी भी आता है ओटीटी प्लेटफार्म से
रिलेटेड। ठीक है? ये दो-तीन बार देखा गया है। देन हम सोशल मीडिया है। ठीक है? सोशल मीडिया से रिलेटेड एनडीए के अंदर। राइट?
जितनी भी हमारी 10 + 2 एंट्रीज हैं, उनमें सोशल मीडिया का टॉपिक देखने को मिलता है। मीडिया का लेक्चरेट भी आता है। ठीक है? और
आजकल YouTube का लेक्चर भी देखने को मिल रहा है कि टॉपिक क्या है? YouTube है। YouTube पर आपको बोलना है। ठीक है? 3
मिनट्स। देन इंपैक्ट ऑफ सोशल मीडिया। और एक टॉपिक और आ जाता है कभी-कभी फॉल्स इंपैक्ट ऑफ सोशल मीडिया। तो हम ये तीनों
टॉपिक्स जो हैं कवर करने वाले हैं। फिर आता है टॉपिक थर्ड प्रेस एंड मीडिया। कभी-कभी लेक्चर में टॉपिक आता है
इलेक्ट्रॉनिक मीडिया। तो वो भी प्रेस मीडिया ही है। कंफ्यूज नहीं होना प्रेस, मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में। ठीक
है? देन हमारे पास बॉलीवुड आ जाता है टॉपिक और हमने इंपैक्ट ऑफ मूवीज़। ठीक है? ये लेक्चर में टॉपिक आया हुआ है सेंसरशिप
इन मूवीज़ एंड माय फेवरेट मूवी। तो ये टॉपिक्स भी हम देखेंगे और इनसे रिलेटेड जीडी को सॉल्व करेंगे। ठीक है? ठीक है?
स्टार्ट करते हैं ओटीटी प्लेटफार्म से। तो जैसे हम पहले अपने टॉपिक को डिवाइड करते थे छोटे पार्ट्स में। सिमिलरली हम यहां पर
भी करेंगे। चाहे वो सोशल मीडिया हो उसमें भी हम यही चीज़ फॉलो करेंगे। ठीक है? इंट्रोडक्शन, एग्जांपल, एडवांटेजेस, डिस
डिसएडवांटेजेस, इंपैक्ट ऑन सोसाइटी एंड कंक्लूजन। चलिए स्टार्ट करते हैं। तो ओटीटी राइट? एन ओटीटी प्लेटफार्म इज अ
सर्विस दैट प्रोवाइड्स मूवीज, शोज़ एंड वीडियोस। ठीक है? तो एक ऐसा प्लेटफार्म है जो प्रोवाइड करता है कौन सी सर्विस? मूवी
शो एंड वीडियोस। या फिर हम इसे बोल सकते हैं कि एक ऐसा स्ट्रीमिंग प्लेटफार्म है जो कि प्रोवाइड करता है मूवीज़, शोज़ एंड
वीडियोस। अब यहां पर इंफेसिस है। देखिए, डायरेक्टली थ्रू इंटरनेट विदाउट यूजिंग केबल और सेटेलाइट। ठीक है? इंटरनेट के
थ्रू ये हमें क्या प्रोवाइड करता है? मूवीज़, शोज़ एंड वीडियो। तो बहुत सिंपल डेफिनेशन है। आई होप ये याद रहेगी। क्या
है कि oटीt प्लेटफार्म एक ऐसा वीडियो प्लेटफार्म है या फिर एक वीडियो स्ट्रीमिंग प्लेटफार्म है जहां पर हम
मूवीस शोज़ और वीडियोस को देखते हैं इंटरनेट की सहायता से। नाउ व्हाई इट इज कॉल्ड ओवर दी टॉप? OटीT को हम ओवर दी टॉप
क्यों बोलते हैं? तो बेसिक रीज़न यही है बिकॉज़ कंटेंट इज डिलीवर्ड ओवर दी इंटरनेट। इसलिए हम इसको ओटीटी बोल देते हैं। ऑफ़
यूज़िंग ट्रेडिशनल केबल, सेटेलाइट और DH टीवी। तो आपको पता लग गया डेफिनेशन और OटीT क्यों बोलते हैं इसको? चलिए अब कुछ
एग्जांपल्स को हम देख लेते हैं। ठीक है? ग्लोबल के हम कुछ एग्जांपल्स देख लेते हैं। Netflix, प्राइम वीडियो, डिज़्नी। और
कौन-कौन से हो सकते हैं? Apple टीवी। चलिए अब हम देखते हैं कुछ इंडियन oटीt प्लेटफॉर्म्स Zee5, Sony Liv एंड Jio
Hotstar एग्जांपल्स भी आपको याद रखने हैं व्हनेवर यू आर गिविंग दी लेक्चर। अब हम बात करते हैं एडवांटेजेस की। ठीक है?
ग्लोबल कंटेंट एक्सेस वॉच मूवीज़ एंड शोज़ फ्रॉम अराउंड दी वर्ल्ड एंड डिफरेंट लैंग्वेजज़ विद सबटाइटल। इस पॉइंट के अंदर
हमें काफी सारी चीजें देखने को मिल रही हैं। ठीक है? अगर हम ध्यान से इसको पढ़ें ना तो आप सबसे पहले ग्लोबल कंटेंट एक्सेस
कर सकते हैं। वर्ल्ड की किसी भी कोने की मूवीज़ जो हैं जो ओटीटी पर डली हुई हैं। आप देख सकते हैं। नंबर वन। तो जितने भी
स्ट्रीमिंग प्लेटफार्म है उनमें लैंग्वेज का ऑप्शन होता है। हिंदी, इंग्लिश, रीजनल लैंग्वेज भी ऐड होती जा रही है। तो ये चीज
हो गया। एक क्लिक के ऊपर आप थाउजेंड्स ऑफ मूवीज, शोज़, डॉक्यूमेंट्री को देख सकते हैं। तो कितनी? ठीक है? तो ये एक बहुत बड़ा
एडवांटेज है। ठीक है? वैरायटी ऑफ़ कंटेंट मेनी जोर्स हैं लाइक कॉमेडी, थ्रिलर, ड्रामा, हॉरर, डॉक्यूमेंट्रीज़ इन वन
प्लेस। ठीक है? देन मोर जॉब, अपोरर्चुनिटीज़ ओटीटी प्लेटफार्म लाइक Amazon, प्राइम, Netflix क्रिएट जॉब।
किनको मिल रही है? एक्टर्स, राइटर्स, एडिटर, टेक्नशियंस एंड वेरियस एक्टर्स, एक्ट्रेसेस एंड डायरेक्टर देमसेल्फ
एडमिटेड दैट बिकॉज़ ऑफ़ दी ओटीटी प्लेटफार्म। नाउ दे आर गेटिंग मोर वर्क। ठीक है? आपने खुद ऑब्जर्व करा होगा कि
वेरियस जो टैलेंटेड स्टार्स थे, ठीक है? ओटीटी आने की वजह से उनको काफी सारी जो ओपोरर्चुनिटीज़ मिलना स्टार्ट हो गई है।
ठीक है? इवन द फेमस यूर्स आर नाउ शिफ्टिंग टू दी oटीt। है ना? चलिए अब हम नेक्स्ट पॉइंट पर बात करते हैं। कॉस्ट इफेक्टिव
एंटरटेनमेंट। ठीक है? oटीt प्लेटफार्म लाइक Netflix, Amazon Prime प्रोवाइड अफोर्डेबल मंथली सब्सक्रिप्शन कंपेयर टू
सिनेमा एंड केबल टीवी। अब यहां पर बात करते हैं हम लाइव स्पोर्ट्स एट लो कॉस्ट। ठीक है? जैसे हम आईपीएल की बात कर सकते
हैं। इवन जो T20 वर्ल्ड कप था वो आप फ्री में देख सकते थे। वेयर एस आपको चैनल्स को सब्सक्राइब करना पड़ता अगर आप केबल या फिर
डिश टीवी यूज़ कर रहे होते। ठीक है? तो ये कुछ पॉइंट्स थे। इनको ध्यान रखना है क्योंकि यह अभी हमारे जीडी के अंदर और
लेक्चर में तो काम आएंगे। चलिए अब आईपीएल का अगर एग्जांपल लें हम तो जब आप Jio Hotstar पर IPL देखते हैं तो कितने
मल्टीपल कैमरा एंगल्स को आप खुद देख सकते हैं। ठीक है? जो पहले टीवी पे पॉसिबल नहीं था। सेकंड वहां पर आप कमेंट्रीज देख सकते
हैं कितनी रीजनल लैंग्वेज के अंदर। ठीक है? चाहे वो हरियाणा, पंजाबी, गुजराती है ना? तो वो एक बहुत अच्छा एडवांटेज यहां पर
मिल जाता है। ठीक है? तो जितने भी हमने पॉइंट्स पढ़े आप यहां पर देख सकते हैं। ठीक है? जैसे कि Netflix है ₹199 मंथ। बेसिक
प्लान है इनका। देन Amazon का ₹299 मंथ है। ये बेसिक प्लान है। ठीक है? Dनी Hotstar ₹75 मंथ। ठीक है? ये चीप है इन
कंपैरिजन टू केबल और अगर हम DSH टीवी की बात करें Sony Liv एंड देन Jio सिनेमा तो ये चीजें हम देख सकते हैं। ये प्राइस की
बात हो गई। फिर यहां तो आप यहां पर देखिए अगर आप एक बार सब्सक्रिप्शन ले लेते हैं। ठीक है? अपनी आईडी से तो आप कहां-कहां
एक्सेस कर सकते हैं। वो आप मोबाइल फोन हो, लैपटॉप हो, टैब्स हो या फिर आपका टेलीविज़ हो तो तो एक आईडी से आप मल्टीपल जगह पर
लॉग इन कर सकते हैं और डिपेंडिंग ऑन दी प्लान। तो ये भी एक इसका एडवांटेजेस है। ठीक है? देन यहां पर एक वन फैमिली
सब्सक्रिप्शन आता है जहां पर आप एक सब्सक्रिप्शन लेकर पूरी फैमिली में जितने भी मोबाइल फोंस हैं टेलीविज़ है वहां पर
शेयर कर सकते हैं। तो ये भी एक बहुत अच्छा एडवांटेजेस है। वेयर एज अगर आप केबल और डिश टीवी की बात करें तो ये चीज पॉसिबल
नहीं थी कभी भी। ठीक है? देन सपोर्ट्स 4K कंटेंट। तो यहां पर 4K कंटेंट है। सो ये क्या है? यहां पर सपोर्ट 4K कॉन्टेंट। ठीक
है? डिपेंडिंग ऑन दी इंटरनेट स्पीड आप अपने आप ही जो है एडजस्ट कर सकते हैं क्वालिटी को। देन यहां पर 1.2x का फीचर भी
आ चुका है। तो आप अगर कोई भी कंटेंट जल्दी देखना चाहते हैं तो आप वो भी विद प्लेबैक स्पीड आप उसको जल्दी देख सकते हैं। ठीक
है? तो यहां पर आप देख सकते हैं कुछ मूवीज हैं जो कि वॉर से रिलेटेड हैं, आर्मी से रिलेटेड है। ठीक है? तो एक टॉपिक आया था
बट वो सोशल मीडिया से रिलेटेड था कि कैसे यूथ को हेल्प करता है सोशल मीडिया डिफेंस जॉइन करने के लिए। ठीक है? तो हम ओटीटी के
एग्जांपल भी देख लेते हैं। ठीक है? ओटीटी में अगर आप देखें तो कितनी सारी मूवीज़ हैं डूइंग प्राइवेट नाइट 197 ऑल क्वाइट ऑन
वेस्टर्न फ्रंट शेरशाह। और भी बहुत सारी मूवीज़ हैं। ठीक है? तो ये सारी मूवीज़ क्या करती हैं? यूथ को मोटिवेट करती हैं। ठीक
है? रियलिटी बताती हैं डिफेंस फोर्सेस की और क्योंकि जो एक बच्चा है उसे नहीं पता कि फोर्सर्सेस में क्या होता है। ठीक है?
तो इन मूवीस के थ्रू उसको आईडिया लगता है। तो ये भी एक अच्छा एडवांटेजेस है। तो अपने लेक्चरेट में आप ये यूज़ कर सकते हैं कि
आपको अगर डिफेंस फोर्सेस ज्वाइन करनी है तो आपने मूवीज तो जरूर देखी होंगी ना। तो आप ये बता सकते हैं अपने लेक्चरेट में
एग्जांपल्स के साथ कि आपने ये मूवीज देखी हैं Netflix, पे, Amazon Prime पर, डिफेंस से रिलेटेड जिसने आपको मोटिवेट करा है।
आपके पास कभी भी पॉइंट्स की कमी नहीं होगी। ठीक है? तो चलिए अब बात करते हैं डिसएडवांटेजेस की। ठीक है? मल्टीपल
सब्सक्रिप्शन नीडेड। तो देखिए अगर कोई मूवी है जो Netflix पे आई है ठीक है Amazon Prime पर नहीं आ सकती। ठीक है?
सिमिलरली आप देख सकते हैं Z5 का कंटेंट आपको VOT पर नहीं देखने को मिलेगा। तो सब कंटेंट अलग-अलग है। तो इसलिए आपको डिफरेंट
सब्सक्रिप्शन लेने पड़ेंगे जो कि बहुत ज्यादा कॉस्टली हो जाएगा। ठीक है? जैसे कि क्रिकेट के लिए आपको Jio Hotstar चाहिए और
डॉक्यूमेंट्रीज़ मूवीज़ के लिए Netflix चाहिए। Amazon के लिए आपको कुछ। सो दिस वन कैन बी अ डिसएडवांटेज। ठीक है? नाउ
इंटरनेट डिपेंडेंसी कोई भी हमारा ओटीटी प्लेटफार्म विदाउट इंटरनेट नहीं चल सकता। तो अगर आप रूरल एरियाज में हैं तो वहां पर
ये पॉसिबल नहीं है या फिर आप ट्रेवल कर रहे हैं तो वहां पर फ्लक्चुएट होता है इंटरनेट। दिस इज़ समथिंग व्हिच वी हैव टू
टेक केयर। देन हाई डाटा कंसमशन। ठीक है? OTT प्लेटफार्म कंज्यूम अ लॉट ऑफ़ मोबाइल डाटा स्पेशली इन एचडी क्वालिटी। एग्जांपल
वाचिंग एचडी वीडियोस ऑन YouTube और प्राइम कैन कॉज़ कैन यूज़ वन टू 3GB ऑफ़ इंटरनेट पर आवर ग्रीन एडिक्शन। ठीक है? पीपल स्पेंड
टू मच टाइम वाचिंग शोज़। बंज वाचिंग का कॉ कांसेप्ट आपको पता होगा। ठीक है? व्हिच अफेक्ट्स हेल्थ, स्लीप प्रोडक्टिविटी। नाउ
इनएप्रोप्रियेट कंटेंट। ठीक है? तो सम ओटीटी कंटेंट इंक्लूड्स वायलेंस, अब्यूसिव लैंग्वेज और एडल्ट सीनंस व्हिच इज नॉट
सूटेबल फॉर चिल्ड्रन। ठीक है? एग्जांपल सम वेब सीरीज ऑन और Netflix कंटेन एडल्ट कंटेंट। ठीक है? तो इस चीज को सॉल्व करने
के लिए ओटीटी प्लेटफार्म में क्या है? एक चिल्ड्रन का आपने देखा होगा ऑप्शन होता होगा। जो चाइल्ड हैं उनके लिए अलग से
कंटेंट को बना चीज जो है वहां पर एडवांटेज के तौर पे आप बोल सकते हैं। बट डिसएडवांटेजेस में हम ये चीजें यूज़ कर
सकते। नाउ इंपैक्ट ऑन सोसाइटी। ठीक है? तो आप देखिए प्रमोशन ऑफ़ रीजनल एंड कल्चरल लैंग्वेज। ठीक है? ओटीटी प्लेटफार्म
प्रमोट इंडियन रीजनल लैंग्वेज लाइक पंजाबी, तमिल, तेलुगु एंड शो इंडियन स्टोरीज ग्लोबली। आपने कंतारा के बारे में
सुना होगा। ट्रिपल आर ठीक है? तुमबाद के बारे में सुना होगा। चाहे वो मंजुमल बॉयज ये जितनी भी मूवीज़ हैं ये सारी साउथ
इंडिया की मूवीज़ थी। बट ये नॉर्थ इंडिया में काफी ज्यादा पॉपुलर हुई है। और देन हम बात करें कल्चरल इन्फ्लुएंस एंड वैल्यू
शिफ्ट। तो आपने देखा होगा कि के ड्रामा इंडिया के अंदर काफी ज्यादा पॉपुलर हुआ। और आपको पता है कि इंडिया का यूथ जो है अब
जापान, साउथ कोरिया बहुत ज्यादा माइग्रेट कर रहा है। तो उस हिसाब से अगर हम देख सकते हैं कि के ड्रामा और केपॉप कल्चर का
बहुत ज्यादा इफ़ेक्ट जो है यहां पर। तो कल्चरल इन्फ्लुएंस बहुत ज्यादा होता है oटीt प्लेटफार्म से क्योंकि आप ऑल ओवर
ग्लोबल वर्ल्ड का कंटेंट देख रहे हैं। नाउ इंस्पायर यूथ थ्रू डॉक्यूमेंट्रीज मूवीस नाउ बाय नाउ द शॉपिंग कॉनस्परेसी ये
Netflix की सीरीज है। देन मिनिमम लिस्ट लेस इज़ नाउ आई थिंक ये Amazon तो ये दो डॉक्यूमेंट्रीज काफी ज्यादा पॉपुलर हुई थी
जजीस में नाम भी देख सकते हैं। ठीक है? तो चलिए जीडी टॉपिक देखते हैं हम जो ओटीटी से रिलेटेड आया हुआ है। व्हाई आर व्यूअर्स इन
इंडिया एंड ग्लोबली इंक्रीजिंगली शिफ्टिंग फ्रॉम ट्रेडिशनल टेलीविज़ टू ओटीटी प्लेटफार्म। तो लीड्स क्या है? कन्वीनियंस
एंड ऑन डिमांड एक्सेस? तो हमने पहले भी बात करी थी देखिए जो कन्वीनियंस होता है उसका मतलब होता है फीचर्स कंफर्ट
एडवांटेजेस ठीक है देन सेकंड लीड क्या है कॉस्ट एंड इकोनमिक वैल्यू एंड थर्ड लीड क्या है टेक्नोलॉजिकल एडवांसमेंट एंड
इंटरनेट पेनिट्रेशन ठीक है तो हम सबसे पहले कन्वीनियंस एंड ऑन डिमांड एक्सेस की अगर हम बात करें तो हमने यहां पर देखा था
कि ग्लोबल कंटेंट एक्सेस है वन क्लिक के ऊपर तो आप ये जीडी में पॉइंट रख सकते हैं आप वैरायटी ऑफ़ कंटेंट वाला पॉइंट रख सकते
हैं देन अब बात कर सकते हैं हम लोग लाइव स्पोर्ट्स ठीक है लो कॉस्ट किसमें चला जाएगा इकोनमिक पे बट आप ये बता सकते हैं
कि स्पोर्ट्स को आप मल्टीपल कैमरा में एंगल में देख सकते हैं। ये बता सकते हैं कि को आप मल्टीपल कैमरा एंगल्स में देख
सकते हैं। ठीक? जो कि एक बहुत बड़ा एडवांटेज है और फीचर यानी कि कन्वीनियंस में चला जाएगा वो। देन आप क्या बता सकते
हैं कि एक आईडी से फ्रॉम वन आईडी यू कैन लॉग इन टू मल्टीपल डिवाइसेस वेदर इट्स अ लैपटॉप, टीवी, मोबाइल फोन और टैबलेट। ठीक?
सो इफ यू बोट वन फैमिली सब्सक्रिप्शन यू कैन लॉग इन टू डिफरेंट डिवाइसेस। ठीक है? डिफरेंट फैमिली मेंबर्स कैन लॉग इन टू
डिफरेंट डिवाइसेस। देन यू कैन गिव दी एग्जांपल ऑफ 4K कंटेंट 1.2x देन यू कैन गिव दी एग्जांपल ऑफ डिफरेंट टाइप्स ऑफ
लैंग्वेजिस। सो हमने जितनी भी चीजें अभी फीचर्स की बात करी थी वो सारी किसमें? कन्वीनियंस में चला जाएगा। ठीक है? अब
सेकंड लीड क्या थी? कॉस्ट इफेक्टिव से रिलेटेड। तो कॉस्ट इफेक्टिव में यू कैन गिव द एग्जांपल ऑफ़ Netflix बेसिक
प्रोग्राम ₹19, Jio सिनेमा जस्ट कॉस्ट 83 है ना? देन वी हैव दी d्नी Hotstar ₹75 मंथ। देन आप क्या बता सकते हैं? इसमें भी
ये एग्जांपल चला जाएगा। फ्रॉम बाइंग वन फैमिली सब्सक्रिप्शन यू कैन लॉग इन इंटू मल्टीपल डिवाइसेस। तो ये भी एक कॉस्ट
इफेक्टिव हुआ है। ठीक? तो यहां पर क्या है? मंथली प्रोग्राम भी है, इयरली प्रोग्राम भी है। ये भी एक कॉस्ट इफेक्टिव
हो जाएगा। ठीक है? देन यू कैन कंपेयर दिस विद यू कैन कंपेयर दिस विद दी केबल एंड डिश टीवी। यहां पर आपको डिश टीवी के लिए
क्या सेटअप बॉक्स की जरूरत है। एंड देन यू नीड अ डिश आल्सो। सो इनिशियल कॉस्ट इज़ वेरी हाई। बट यहां पर ऐसी कोई भी चीज़ नहीं
है। भाई यू जस्ट नीड एन इंटरनेट। ठीक? कन्वीनियंस में तो आप ये भी ऐड कर सकते थे रीजनल लैंग्वेज और कल्चरल लैंग्वेज। और ये
सारे एग्जांपल्स यहां पर चले जाते हैं। डॉक्यूमेंट्रीज वाला। ठीक है? मूवीज़ वाला। यहां पर ये सारे एग्जांपल्स चले जाते हैं।
दैट वेदर इट्स अ डॉक्यूमेंट्री और मूवीज़। सो टेक्नोलॉजिकल एडवांसमेंट के अंदर भी वही सारे पॉइंट्स ओवरलैप करेंगे कि जैसे
आप वीडियो 4K में देख सकते हैं। अपने अकॉर्डिंग रेोल्यूशन को एडजस्ट कर सकते हैं। आप 1.2X में वीडियो देख सकते हैं।
ठीक है? एंड आप मल्टीपल डिवाइसेस में लॉग इन कर सकते हैं। देन यहां पे dolb डिजिटल का सपोर्ट मिल जाता है आपको। ठीक है? और
काफी सारी चीजें हैं फीचर्स जो टेक्नोलॉजिकल से रिलेटेड हैं। आप इसमें ऐड कर सकते हैं जो हमने पहले भी बात करें
हैं। ठीक है? तो आई थिंक मेन जो है कन्वीनियंस में इसमें काफी सारे पॉइंट्स हैं। देन कॉस्ट इफेक्टिव पे पॉइंट्स मिल
जाएंगे। देन टेक्नोलॉजिकल एडवांसमेंट पे। तो इट्स डिपेंड्स ऑन यू व्हिच लीड यू वांट टू स्पीक। ठीक है? अब हम बात करते हैं
नेक्स्ट टॉपिक पे जो है सोशल मीडिया। तो इसको भी हमने डिवाइड करा है इंट्रो एग्जांपल्स, एडवांटेजेस, डिसएडवांटेजेस,
सोसाइटी इंपैक्ट एंड कंक्लूजन। सोशल मीडिया इज अ डिजिटल प्लेटफार्म फॉर कम्युनिकेशन, इंटरेक्शन, शेयरिंग एंड
एक्सचेंज कंटेंट ऑनलाइन। और वहीं पर अगर हम oटीt की बात करें तो ओटीटी की डेफिनेशन में था oटीt इज़ अ प्लेटफार्म। और oटीt इज़
अ वीडियो स्ट्रीमिंग प्लेटफार्म दैट प्रोवाइड्स सर्विस रिलेटेड टू मूवीज़, वेब सीरीज, शोज़ है ना? विद दी हेल्प ऑफ
इंटरनेट। ये थी oटीt की। और यहां पर क्या है? सोशल मीडिया इज़ अ डिजिटल प्लेटफार्म फॉर कम्युनिकेशन। इंटरेक्शन, शेयरिंग एंड
एक्सचेंजिंग कंटेंट ऑनलाइन। तो दोनों की डेफिनेशन सिंपल है। ठीक है? दो-तीन बार हम पढ़ेंगे तो हमें याद हो जाएगी। इंटरेक्शन,
शेयरिंग एंड एक्सचेंज कंटेंट ऑनलाइन। नाउ इंडिया हैज़ 80 करोड़ इंटरनेट यूजर कवरिंग मोर देन हाफ ऑफ दी पापुलेशन। तो ये पॉइंट
बार-बार रिपीट होगा और आप ये जीडी में यूज़ कर सकते हैं। ठीक है? ये पॉइंट बहुत सारे जीडी के टॉपिक्स में फिट हो सकता है कि
इंडिया हैज़ अराउंड 80 करोड़ ऑफ इंटरनेट यूज़र्स। नाउ टोटल सोशल मीडिया यूज़र्स इन इंडिया आर 50 करोड़ व्हिच इज़ 1/3 ऑफ इट्स
पॉपुलेशन। ठीक है? तो यहां पे आप देख सकते हैं डाटा रिपोर्टल डिजिटल इंडिया की रिपोर्ट है कि 50 करोड़ यूज़र्स जो है वो
सोशल मीडिया को यूज़ कर सकते हैं जो बहुत बड़ा नंबर है। ठीक है? तो Instagram इज़ द मोस्ट पॉपुलर अमंग द यूथ एंड जजी। रंजी और
यू जो है सबसे ज्यादा क्या चलाते हैं? Instagram वेयर एस जो मिलेनियल है वाली जनरेशन है 25 से 35 जिनकी ऐज होगी वो
ज्यादातर क्या है? Facebook देखने को मिलता है। ठीक है? चलिए अब बात करते हैं सोशल मीडिया के एग्जांपल्स को। तो हमने
इसको कैटेगराइज़ कर दिया है प्रोफेशनल, सोशल और मैसेजिंग। अगर प्रोफेशनल की ही बात करें हम तो आप प्रोफेशनल के ऊपर ही एक
पूरा लेक्चर दे सकते हैं कि इसमें इतना सारा कंटेंट है। Lindin। सो वेरियस रिपोर्ट्स हैव मेंशंड दैट अराउंड 20 टू
30% पीपल गॉट देयर फर्स्ट जॉब थ्रू दी Lindin एंड आल्सो वेरियस पीपल गॉट देयर फर्स्ट इंटरव्यू थ्रू दी मीडियम ऑफ़ Lind
Lindin जो है वो बहुत ज्यादा धीरे-धीरे पॉपुलर करता जा रहा है। और जितने भी प्रोफेशनल्स हैं वो आपको पता है उनके पास
Lindin अकाउंट जरूर होगा। ठीक है? देन ZM कॉल्स की बात करें तो कोविड-19 के टाइम पे हमने देखा कैसे ZM कॉल के थ्रू जो है वर्क
फ्रॉम होम हमारी पूरी आईटी इंडस्ट्री चली। सर्विस इंडस्ट्री चली। देन मेल तो 90 टू 95% पीपल जो इंटरनेट के ऊपर हैं उनके पास
मेल ईमेल आईडी है। ठीक है? बिकॉज़ ईमेल आईडी के बिना आप क्या है? YouTube नहीं चला सकते। ठीक है? Google नहीं चला सकते।
ऑलदो यू कैन यूज़ बट इफ यू वांट टू यूज़ मोर फीचर तो ईमेल आईडी होनी चाहिए। हमारे पास कहता है एक्स। तो जितने भी वॉर रिलेटेड
जिओपॉलिटिकल न्यूज़ हो गया। इवन इंडियन रेलवे जो है हमारी और बहुत सारी जो हमारी गवर्नमेंट एजेंसीज़ वो क्या यूज़ करती है?
एक्स प्लेटफार्म को यूज़ करती है जो पहले Twitter था। स्कीम्स हो या गवर्नमेंट की पॉलिसी है वो भी एक्स के थ्रू जो है
प्रोपगेट होती है। देन हम बात करते हैं सोशल की। ठीक है? तो सोशल में हमारे पास क्या है? Facebook, Instagram, YouTube,
Snapchaat और डिस्कर्ड। ठीक? तो आप जितने मर्जी एग्जांपल्स में ऐड कर सकते हैं। ठीक है? तो अगर हम सोशल की बात करें तो इस पे
भी एटलीस्ट एक पूरा लेक्चर चल सकता है। चाहे Facebook पे और YouTube पे, Snapchaat पे। तो आप अपने अकॉर्डिंग जो है
पॉइंट्स को बना सकते हैं रिलेटेड टू Facebook, Instagram कैसे आप अपने दोस्तों से कनेक्टेड हैं। मैसेजिंग की बात करें तो
WhatsApp और Telegram ये जो बहुत फेमस है। ठीक? तो अगर हम पर्टिकुलरली Telegram की बात करें तो एजुकेशनल कंटेंट जितना भी है।
ठीक है? पीडीएफ वगैरह कहां पे? Telegram पर ही मिलती है आपको। तो वहां से आप पॉइंट्स बना सकते हैं। एंड और रही बात अगर
WhatsApp की तो आई थिंक जितने भी लोग वीडियो देख रहे हैं सबके मोबाइल फोन में WhatsApp जरूर होगा। ठीक है? देखिए तो
YouTube एक सेपरेट टॉपिक आता है लेक्चर रेट का। ठीक है? तो उसमें कभी-कभी कंफ्यूजन होती है कि क्या-क्या पॉइंट्स
बोले हम? ठीक है? तो देखिए YouTube के फीचर्स बताइए। अब सबसे पहले प्लेबैक स्पीड का कंट्रोल है। 2x में देखिए, 3x में
देखिए। हाई क्वालिटी वीडियो स्ट्रीमिंग है 4K, 8K। यहां पे पॉज और रिज्यूम का फीचर है। बात करते हैं फिफ्थ पॉइंट की जो है
डवर्स कंटेंट। ठीक है? ये बहुतेंट पॉइंट है। हम इस पे काफी सारे पॉइंट्स बना सकते हैं। देखिए एजुकेशन। तो जब आप स्कूल में
थे, कॉलेज में थे, फिर आपने किसी एग्जाम की प्रिपरेशन करी हो तो आपने एजुकेशन चैनल जरूर फॉलो करेंगे। तो आप वहां पे वहां पर
आप ये चीज मेंशन कर सकते हैं। एंटरटेनमेंट चाहे वो सॉन्ग्स हो, मूवीज हो, शोज़ हो। ठीक है? देन न्यूज़ सारे न्यूज़ चैनल जितने
भी हैं आप देख रहे हैं आप सब शिफ्ट हो चुके हैं YouTube के ऊपर। ठीक है? देन अगर आपको कोई हॉबी सीखनी है, सपोज यू वांट टू
लर्न अ गिटार और पियानो। राइट? तो आप किस पे सीख सकते हैं? YouTube से आराम से सीख सकते हैं, सिंगिंग सीख सकते हैं। ठीक है?
और भी काफी सारी इवन जिमिंग। इवन आप अगर जिम करना चाहते हैं, जिम्स की टिप देख सकते हैं। आप डाइट के बारे में देख सकते
हैं। इवन ऑल तो अगर हम हेल्थ केयर सेक्टर की बात करें तो कितने सारे डॉक्टर, डाइटिशियन, फिजियोथरेपिस्ट वो सारे टिप्स
दे रहे हैं अपनी। ठीक है? मेडिसिंस के बारे में बता रहे हैं। ठीक? हेल्थ केयर तो पूरा एक अलग टॉपिक हो जाएगा। तो कितनी
सारी चीजें हैं कि अगर आप एक-एक सेक्टर को लेके चलें तो बहुत पॉइंट्स बना सकते हैं आप। ठीक? मोनेटाइजेशन की बात कर सकते हैं।
दैट यू कैन अर्न मनी थ्रू YouTube आल्सो। ठीक है? देन ऑफलाइन डाउनलोड ऑप्शन। इफ यू डोंट हैव इंटरनेट, आप क्या कर सकते हैं?
जब आपके पास इंटरनेट है, आप डाउनलोड कर सकते हैं वीडियोस को। एंड लेटर ऑन व्हेन देयर इज़ नो इंटरनेट आप देख सकते हैं। ठीक
है? देन एथ क्या है? लाइव स्ट्रीमिंग फीचर है। काफी सारे एजुकेशनेशनल चैलेंज जो है वो लाइव स्ट्रीमिंग ही करते हैं। देन
गेमिंग गेमिंग चैनल्स आप देख सकते हैं। ठीक है? तो ये सारी चीजें हैं जो हम अपने YouTube के लेक्चरेट में डाल सकते हैं।
देन क्रॉस डिवाइस एक्सेस मोबाइल टीवी लैपटॉप एक बार ईमेल आईडी आपकी बन चुकी है YouTube के ऊपर। तो आप वेरियस डिवाइस में
एक्सेस कर सकते हैं। तो ये सारे पॉइंट्स जो है आपको YouTube में बताने हैं। फिर आपका कोई फेवरेट क्रिएटर भी है तो आप उसके
ऊपर भी बात कर सकते हैं। ठीक है? कैसे उन्होंने इंपैक्ट डाला है आपकी लाइफ के ऊपर। तो आप उसके ऊपर बात करिए। ठीक है? तो
YouTube पे काफी सारे पॉइंट्स हैं। ठीक है? चलिए अब आगे चलते हैं। सोर्स ऑफ़ एंटरटेनमेंट है प्रोवाइड जॉब एंड इनकम।
वेरियस एजेंसीज जो हैं उनका फेवरेट प्रोफेशन बनता जा रहा है। ठीक है? डिजिटल मीडिया। तो अब हम बात करते हैं इंप्रूव
कम्युनिकेशन एंड कनेक्टिविटी। प्यूर रिसर्च सेंटर फाउंड दैट 80% ऑफ यूज़र्स स्टिल कनेक्टेड टू फ्रेंड्स एंड फैमिली
थ्रू सोशल मीडिया। ठीक है? बिज़नेस प्रमोट्स प्रोडक्ट एंड रीच कस्टमर्स। किसके थ्रू? आपने देखा होगा ब्रांड
प्रमोशनंस होते हैं। ठीक है? YouTube के ऊपर और वेरियस प्लेटफार्म Instagram है ना? Facebook देन स्प्रेड अवेयरनेस
क्विकली वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन WHO यूज़्ड सोशल मीडिया सक्सेसफुली टू स्प्रेड कोविड-19 ठीक है आपने देखा होगा काफी सारी
एनजीओ जो है वो रिवर से रिलेटेड हमारे एनवायरमेंट से रिलेटेड सिविक सेंस ये सारे जो हमारे इशूज़ हैं वो भी रेज़ करता है सोशल
मीडिया देन प्रोवाइड एजुकेशनल ओपोरर्चुनिटीज़ अ यूनेस्को रिपोर्ट स्टेट्स दैट सोशल मीडिया इंप्रूव्स कोलैबोरेटिव
लर्निंग एंड एक्सेस टू एजुकेशनल कंटेंट यहां पर एक टॉपिक आता है कि हाउ सोशल मीडिया हेल्प यूथ टू जॉइन आर्म्ड फोर्सेस
ठीक है तो थ्रू पडकास्ट जैसे कि दिशा तो दिशा क्या क्या है? इंडियन एयरफोर्स का एक सेल है जो कि इंफॉर्मेशनेशन देता है
रिलेटेड टू इंडियन एयरफोर्स लाइक लाइफ इन इंडियन एयरफोर्स अबाउट रिक्रूटमेंट रिजल्ट। तो और अब ये एजेंसी जो है
ब्रॉडकास्ट भी करती है। ठीक? बताती है कि इंडियन एयरफोर्स की लाइफ कैसी है। देन मक्स वॉरियर आपने देखा होगा वेट्स का चैनल
है। ठीक है? तो वहां पर भी वेट्स आते हैं। डिफरेंट रेजीमेंट्स के बारे में बताते हैं और स्पेशल फोर्स एंड ऑल दैट। तो अब आता है
रिक्रूटमेंट अवेयरनेस। ऑफिशियल पेजेस ऑफ इंडियन आर्मी, इंडियन नेवी एंड इंडियन एयरफोर्स। ने भी आर्म्ड फोर्सेस हैं वो
सोशल मीडिया यूज़ करते हैं बताने के लिए रिक्रूटमेंट के लिए। देन कोचिंग स्टडी। आपने देखा YouTube चैनल्स पे काफी सारे जो
है आर्म्ड फोर्सर्सेस पे जॉइन करने के लिए एनडीए की कोचिंग, सीडीएस की कोचिंग, एफकट की कोचिंग स्टोरीज एंड डॉक्यूमेंट्रीज़ तो
वीर बाय डिस्कवरीज पे आपने जरूर डॉक्यूमेंट्रीज देखी होंगी। ठीक है? रिलेटेड टू सबमरीन देन रिलेटेड टू
एयरफोर्स, आर्मी कल्चरल आइडेंटिटी तो देखिए रिलीजियस और कल्चरल आइडेंटिटी से मीन है इसका। अगर हम बात करें रिलीजियस और
कल्चरल आइडेंटिटी वाले पॉइंट पर तो यहां पर आप देखेंगे कि हमारे इंडिया के अंदर काफी सारी रेजीमेंट्स होती है ऑन दी बेसिस
ऑफ देयर ऑन दी बेसिस ऑफ देयर कल्चरल आइडेंटिटी। चाहे वो बात करें राजपूत रेजीमेंट की देन कुमाऊ रेजीमेंट एंड जाट
रेजीमेंट तो पंजाब रेजीमेंट इस तरीके से ठीक है तो वो कल्चरल आइडेंटिटी जो है वो मोटिवेट करती है यूथ को जॉइ जॉइनिंग के
लिए देन अगर हम रिलीजियस बात करें तो हमने काफी सारे जो है वॉर्स देखी चाहे वो महाभारत हो रामायण हो देन हम अगर हम
मॉडर्न की बात करें लाइक इन 70ज और 80 100 में तो कैसे जो है छत्रपति शिवाजी हमने वॉर्स देखी हैं तो वो सारी वॉर्स कैसे
हेल्प करती हैं यूथ को तो वो लीड नंबर वन में आ जाएगा ठीक है और तो पीियर इन्फ्लुएंस में क्या आएगा जो पूरी सोसाइटी
है चाहे वो फ्रेंड्स नेबर्स हो कैसे आपको इन्फ्लुएंस करते हैं सपोज कोई फॉर एग्जांपल सपोज इफ समवन इज़ बोर्न एंड बॉट
अप इन कंटोनोमेंट तो उसको वैसा ही एनवायरमेंट मिला है पीियर इन्फ्लुएंस तो वो वैसे पॉइंट्स रखेगा कि वो कैसे मोटिवेट
हुआ उन सारी चीजों से ठीक है और देयर आर वेरियस विलेजेस इन हरियाणा जहां पर आप देखेंगे हर एक परिवार और हर एक घर से जो
है वो आर्म्ड फोर्सेस में ठीक है तो वो सब किसमें आ जाएगा पीियर इन्फ्लुएंस में आ जाएगा। तो अभी हमने सोशल मीडिया के बारे
में पढ़ा था। इसलिए हमने मीडिया इन्फ़्लुएंस पे ज़्यादा बात करी। चलिए अब हम डिसएडवांटेजेस की बात करें। तो एडिक्शन
एंड टाइम वेस्ट। ठीक है? अबाउट 46 करोड़ सोशल मीडिया यूज़र इन इंडिया स्पेंड टू टू थ्री डेली ऑन रील्स एंड शॉट्स एंड ठीक है?
ये किसकी रिपोर्ट है? डिजिटल इंडिया। साइबर बुलिंग एंड ऑनलाइन हरासमेंट। ठीक है? पीपल फेस अब्यूज, थ्रेट एंड बुलिंग
ऑनलाइन यूनिसेफ की रिपोर्ट है। देन आप देख सकते हैं कि देन आप देख सकते हैं डिक्शनरी पब्लिश कर रही है अपना वर्ड ऑफ द ईयर
ब्रेन रोट। तो यार सोशल मीडिया अब हम बात करते हैं स्प्रेड फेक न्यूज़ एंड मिसइफेशन। कोविड-19 का एग्जांपल है। कम्युनल फेक
न्यूज़ है इंडिया के अंदर। डी फेक मिसयूज़ हो रहा है एआई का। है ना? तो एआई में हम पढ़ेंगे काफी सारी तो उससे हमें हमें और
आईडिया लग जाएगा। देन रिड्यूस प्रोडक्टिविटी एंड स्टडी परफॉर्मेंस WHO ने बताया कैसे स्टूडेंट लूज़ फोकस। ठीक है?
एक्सेसिव शॉर्ट वीडियो यूज़ अटेंशन स्पैन। तो ये कुछ डिसएडवांटेजेस थे। ठीक? नाउ सोशल मीडिया के पॉजिटिव इंपैक्ट के बारे
में बात करते हैं। गिव वॉइस टू कॉमन पीपल। एनीवन कैन शेयर ओपिनियन एंड इन्फ्लुएंस सोसाइटी नॉट ओनली मीडिया। पहले क्या होता
था? सिर्फ मीडिया के पास ये पावर थी। बट नाउ सोशल मीडिया की वजह से काफी सारे जो हमारी सोसाइटी के इशूज़ हैं वो रेज हुए
हैं। देन इफेक्टिव एंड सेव्स टाइम कॉर्पोरेट स्कूल ZM ठीक है? Google मीट आपने देखा वर्क फ्रॉम होम। अगर हम
कोविड-19 की बात करें तो स्कूल स्टूडेंट्स ने अपनी क्लासेस को कैसे ज़ूम कॉल के थ्रू और Google मीट के थ्रू ही अटेंड करा है।
देन गिव प्लेटफार्म टू शोकेस टैलेंट। ठीक है? सिंगिंग, आर्ट, स्पोर्ट्स देन हेल्प्स स्मॉल बिज़नेसेस ग्रो थ्रू ऑनलाइन
मार्केटिंग। ठीक है? एग्जांपल बोट, Mmart और आपने देखा होगा काफी सारे क्लोथिंग ब्रांड्स जो हैं वो ऑनलाइन ही सेल करते
हैं। ग्रुप डिस्कशन का टॉपिक देखते हैं। विद दी इंक्रीजिंग इंक्लिनेशन ऑफ़ टीनएजर टुवर्ड इंसाइड और इंडोर एक्टिविटीज़। व्हाट
इज़ द मोस्ट सिग्निफिकेंट इंपैक्ट? तो अब इंसाइड और इंडोर एक्टिविटीज़ से क्या मतलब है? नाउ इंसाइड एक्टिविटीज़ से क्या मतलब
है? यहां पर सोशल मीडिया है। ठीक है? तो जो आप हम फोन चलाते हैं, रील्स देखते हैं, सोशल मीडिया बिंज वॉचिंग करते हैं तो उन
सब वो सारी चीजें किस में जाएगी? इनसाइड एक्टिविटीज में जाएगी। तो लीड्स अगर हम देखें तो क्या है? हेल्थ क्रिएटिविटी एंड
सोशल लाइफ। तो चलिए देखते हैं हम हेल्थ क्रिएटिविटी और सोशल लाइफ से कुछ पॉइंट्स। ठीक है? तो हम कुछ हेल्थ के पॉइंट्स देखते
हैं। स्लीप डिसऑर्डर इंसोमनिया। ठीक है? ब्लू लाइट, लेटा नाइट, स्क्रॉलिंग, डिलेड, मेलोटोनिन जो हमारे ब्रेन में होता है।
एंड ब्रेन स्टेज अलर्ट, डिप्रेशन, ए्जायटी डिसऑर्डर देख सकते हैं आप। देन अटेंशन, डेफिशिएट एंड फिजिकल हेल्थ इंपैक्ट। तो ये
सारे हमारे हेल्थ इफेक्ट्स हो गए। अब क्रिएटिविटी पे बात करते हैं। देखिए रिड्यूस क्रिएटिव थिंकिंग, हैप्पी सोशल
मीडिया यूज़, लेस आईडिया जनरेशन, ओरिजिनलिटी। ठीक है? देन लोअर अटेंशन स्पैन, एटीएचडी, देन क्रिएटिविटी सप्रेशन,
हाई कंटेंट कंज्यूम, हाई कंटेंट कंजमशन, लेस टाइम फॉर एक्टिव क्रिएशन, लिमिटेशन ओवर ओरिजिनलिटी। क्या? जो एक्सपोज़र ऑफ़
वायरल ट्रेंड्स चलते हैं। कॉपिंग बिहेवियर इंक्रीज़। आपने देखा होगा रील्स फॉलो होती हैं। ठीक है? आपने आपने देखा होगा रील्स
के और श्स के ट्रेंड जो हैं वो फॉलो होते हैं। देन कॉग्निटिव ओवरलोड एक्सेसिव इन देन एक्सेस इनेशन ब्रेन ओवरलोड रिड्यूस
क्रिएटिव प्रॉब्लम। तो ये सारे क्रिएटिव के पॉइंट हो गए। नाउ थर्ड लीड देखें तो सोशल लाइफ रिड्यूस रियल वर्ल्ड इंटरेक्शन।
चाहे वो वर्क फ्रॉम होम हो चाहे स्कूल्स और कॉलेजेस का ऑनलाइन क्लासेस को अटेंड करना हो। ज़ूम कॉल मीटिंग। तो जो रियल
इंटरेक्शन होता है वो बहुत ज्यादा कम हो चुका है। नाउ जो हमारा इंटरेक्शन है वो टोटली किस पे सोशल मीडिया पे शिफ्ट हो
चुका है। इसलिए जो रियल वर्ल्ड इंटरेक्शन है वो काफी ज्यादा कम हो गया। तो वो सारे पॉइंट्स आप बता सकते हैं। ठीक है? ठीक है?
नाउ अब हम अपने नेक्स्ट टॉपिक की तरफ बढ़ते हैं। इंडियन मीडिया या फिर प्रेस। और यहां पे एक टॉपिक सेपरेट आ जाता है कभी-कभी रोल
ऑफ मीडिया इन टूरिज्म। तो यहां पर एक टॉपिक और होता है चाइल्ड लेबर। ठीक है? तो चाइल्ड लेबर की लीड्स में हमेशा क्या
देखने को मिलता है? मीडिया। सिमिलरली टूरिज्म की लीड में मीडिया दिखता है। मीडिया कैसे इन्फ्लुएंस करता है टूरिज्म
को और मीडिया कैसे हेल्प करता है चाइल्ड लेबर को रिड्यूस करने में। ठीक है? तो ये सारे पॉइंट्स हम डिस्कस करते हैं। मीडिया
और प्रेस इज़ अ प्लेटफार्म यूज्ड टू शेयर इंफॉर्मेशनेशन न्यूज़ एंड आइडियाज़ विद दी पब्लिक। वेयर एज़ OटीT में क्या था? OTT एक
ऐसा प्लेटफार्म था जो सर्विस प्रोवाइड करता था मूवीज़, शोज़ विद दी हेल्प ऑफ इंटरनेट। फिर हमने पढ़ा सोशल मीडिया। सोशल
मीडिया एक ऐसा प्लेटफार्म था जहां पर हम क्या कर सकते थे? एक्सचेंज व्यूज कर सकते थे, शेयर कर सकते थे चीजें। अब यहां पर
क्या है? देखो, शेयर इनेशन, न्यूज़। ठीक है? एंड आइडियाज़ विद दी पब्लिक। और भी काफी चीजें ऐड कर सकते हैं हम। लाइक
गवर्नमेंट की पॉलिसीज़ है ना। नाउ बात करते हैं आर्टिकल 19 सबक्लॉज़ ए फ्रीडम ऑफ़ स्पीच एंड एक्सप्रेशन के बारे में बात करते हैं।
बेसिकली आप बात कर सकते हैं आर्टिकल 19 जो है हमारा फ्रीडम ऑफ स्पीच एंड एक्सप्रेशन की बात करता है। इट इंक्लूड्स न्यूज़पेपर,
टेलीविज़, रेडियो, इंटरनेट एंड सोशल मीडिया। तो, यह एक बहुत ब्रॉड हो चुका है अब। ठीक है? मीडिया इज़ कॉल्ड दी फोर्थ
पिलर ऑफ़ डेमोक्रेसी। मीडिया इज़ कॉल्ड दी फोर्थ पिलर ऑफ़ डेमोक्रेसी। बिकॉज़ इट मॉनिटर्स गवर्नमेंट एंड इनफॉर्म सिटीज़ंस।
ठीक है? तो, यहां तक क्लियर है? देन मीडिया के टाइप्स देख लेते हैं। प्रिंट मीडिया, न्यूज़पेपर एंड मैगजींस, द हिंदू
टाइम्स ऑफ इंडिया, दैनिक जागरण इंडिया टुडे। ठीक है? देन टेलीविज़ एंड रेडियो दूरदर्शन आज तक NDTV, ऑल इंडिया रेडियो है
ना? तो, और भी काफी सारे एग्जांपल आप ऐड कर सकते हैं। नाउ, इंडिया हैज़ ओवर 14,4,000 रजिस्टर्ड न्यूज़पेपर। ठीक है?
एंड वन ऑफ़ द लार्जेस्ट न्यूज़पेपर मार्केट इन द वर्ल्ड। तो, यह सारे पॉइंट्स अगर आप अपने लेक्चर में डालें, इट विल बी मोर
इफेक्टिव। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया प्रोवाइड्स फास्ट एंड वाइड कवरेज न्यूज़ एंड इवेंट्स। अब हम बात करते हैं डिजिटल मीडिया। फ्यूचर
ऑफ मीडिया। अभी हम पढ़ के आ रहे हैं कि सारे न्यूज़ चैनल किस पे शिफ्ट हो चुके हैं। YouTube, Instagram, Facebook,
Twitter है ना? तो ये सारी चीजें भी हैं। देन इंडिया हैज़ ओवर 80 करोड़ ऑफ़ इंटरनेट यूजर मेकिंग डिजिटल मीडिया हाईली
इन्फ्लुएंशियल। ये भी हम पढ़ चुके हैं। नाउ अब बात करते हैं रोल और फंक्शन। प्रोवाइड इनेशन अबाउट नेशनल और इंटरनेशनल इवेंट्स।
एजुकेट पीपल ऑन सोशल पॉलिटिकल इकोनमिक इशज़। यह बहुत सिंपल है। नेशनल, इंटरनेशनल न्यूज़ देना। सोशल पॉलिटिकल एंड इकोनमिक
इशज़ के बारे में बताना है। देन एक्ट एज अ वॉच डॉग ऑफ़ गवर्नमेंट एंड एक्सपोज़ करप्शन। क्रिएट्स अवेयरनेस अबाउट हेल्थ एजुकेशन,
सोशल इशज़, स्ट्रेंथन डेमोक्रेसी, डेमोक्रेसी, वोटिंग स्कीम्स के बारे में बताना है। गवर्नमेंट स्कीन अवेयरनेस।
एग्जांपल इंडिया एक्सपोज़ मेजर स्कैम लाइक 2G स्पेक्ट्रम स्कैम, है ना? कॉमनव्थ गेम स्कैम। नाउ हम बात करते हैं अब इंडियन
मीडिया कैसे हेल्प करता है हमारी डेमोक्रेसी को स्ट्रेंथन करने में और गवर्नमेंट स्कीम को प्रोपगेट करने में।
ठीक है? तो पीएम रूफ टॉप सोलर स्कीम हम पढ़ के आए थे। हमने स्वच्छ भारत मिशन देखा, पीएम उज्जवला योजना के बारे में
देखा। तो, यह जितनी भी स्कीम्स थी, यह सारी प्रोपोगेट करी गई इंडियन मीडिया के द्वारा ऑन न्यूज़ चैनल, ऑन न्यूज़पेपर, ऑन
रेडियो प्लेट। अकॉर्डिंग टू दी इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया, मीडिया अवेयरनेस कैंपेन सिग्निफिकेंटली इंक्रीज्ड वोटर टर्न आउट
इन रीसेंट इलेक्शन। तो इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया खुद यह बात मान चुका है कि मीडिया के जो कैंपेन होते हैं, वो वोटर टर्न आउट
को चेंज कर देते हैं। ठीक है? तो यह भी बहुत इफेक्टिव पॉइंट है। ड्यूरिंग कोविड-19 मीडिया हेल्प्ड स्प्रेड अवेयरनेस
अबाउट वैक्सीनेशन व्हिच हेल्प्ड इंडिया टू अचीव ओवर 200 करोड़ वैक्सीन डोज़। यह बहुत इफेक्टिव पॉइंट है। ये हम अपने जीडी में
यूज़ कर सकते हो ऑफ़ हेल्थ एंड फैमिली वेलफेयर का ये डाटा था। नाउ हम बात करें कैसे टूरिज्म को इफेक्ट करता है मीडिया।
तो गवर्नमेंट कैंपेन लाइक इनक्रेडिबल इंडिया। ठीक है? इनक्रेडिबल इंडिया प्रमोटेड थ्रू टीवी न्यूज़पेपर डिजिटल
मीडिया हेल्प इंक्रीस फॉरेन टूरिस्ट और 9.2 मिलियन टूरिस्ट हमने अट्रैक्ट करे मिनिस्ट्री ऑफ़ टूरिज्म की रिपोर्ट है। तो
इनक्रेडिबल इंडिया आपको याद रहेगा। देन न्यूज़ मीडिया प्रमोट्स कल्चरल फेस्टिवल सच ऐ कुंभ मेला। ठीक है? 24 करोड़ पिग्रेम
टूरिस्ट अट्रैक्ट करे। देन गोवा कार्निवल्स जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल्स अट्रैक्ट बोथ डोमेस्टिक एंड इंटरनेशनल
टूरिस्ट। नाउ सोशल मीडिया प्लेटफार्म लाइक YouTube एंड Instagram प्ले अ मेजर रोल इन टूरिज्म ग्रोथ। ट्रैवल वीडियोस, रील्स,
शोकेसिंग डेस्टिनेशन लाइक लद्दाख, कश्मीर, मेघालय, अट्रैक्ट मिलियंस ऑफ व्यूअर। है ना? ये आपने खुद नोटिस करा होगा कितनी
सारी रील्स जो है टूरिज्म से रिलेटेड हमारे इंस्टा पे और Facebook पे और YouTube पे आती है। ठीक है? नाउ आगे देखते
हैं। मिनिस्ट्री ऑफ़ टूरिज्म रिपोर्ट्स अ मेजरिटी ऑफ़ ट्रेवलर नाउ यूज़ ऑनलाइन मीडिया टू डिस्कवर डेस्टिनेशन एंड प्लान देयर
ट्रिप्स। देखो अपना देश कैंपेन। ठीक है? यह भी क्या प्रोपगेट करा गया टीवी और YouTube के द्वारा। ठीक है? मीडिया के
द्वारा। पहले हमने इनक्रेडिबल इंडिया पढ़ा। अब हमने क्या पढ़ा? देखो अपना देश। तो डिस्कवरी चैनल्स लाइक मैन वर्सेस वाइल्ड
एपिसोड विद नरेंद्र मोदी प्रमोटेड जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क। ठीक है? तो ये भी मीडिया द्वारा दिखाया गया था। देन प्रमोशन
ऑफ़ अयोध्या राम मंदिर होगा। काफी सारे न्यूज़ चैनल जो है इसके ऊपर लाइव टेलीकास्ट चला था। देन न्यूज़ एंड मीडिया कवरेज
स्टैचू ऑफ यूनिटी के बारे में। ठीक है? 50 लैक्स एनुअल विजिटर्स हैं यहां पर। तो ये सारे पॉइंट्स आपको देखने हैं। चलिए रिवाइज़
कर लें। देखो अपना देश कैंपेन मीडिया ने प्रोपोगेट करा। देन इनक्रेडिबल इंडिया। मीडिया ने प्रोपोगेट करा देन कुंभ मेला हो
देन गोवा कार्निवल जयपुर जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल ठीक है देन हमने देखा है कि काफी सारी डेस्टिनेशंस हैं जैसे लद्दाख कश्मीर
मेघालय वो भी मीडिया के द्वारा प्रोपोगेट किया जा सकता है देन आप एग्जांपल देख सकते हैं अयोध्या राम मंदिर का और स्टच ऑफ
यूनिटी का टीडी का टॉपिक देखते हैं व्हाट इज़ दी मोस्ट सिग्निफिकेंट फैक्टर ड्राइविंग द रैपिड ग्रोथ ऑफ टूरिज्म इन
इंडिया ठीक है रिलीजियस एंड कल्चरल डायवर्सिटी सोशल प्रेस मीडिया इन्फ्लुएंस एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट एंड
गवर्नमेंट इनिशिएटिव तो देखिए सोशल प्रेसिशल मीडिया प्रेस मीडिया इन्फ्लुएंस हमने काफी सारे सारे पॉइंट्स को डिस्कस
करा। तो वो सारे पॉइंट्स जो हैं जो अभी हम डिस्कस करके आए हैं वो सेकंड लीड में आ जाएंगे। देन लिखा है रिलीजियस एंड कल्चरल
डायवर्सिटी। तो देखिए जब हम टूरिज्म का टॉपिक पढ़ेंगे। ठीक है? तो वहां पर हम ये वाले पॉइंट्स कैसे हमारा रिलीजियस एंड
कल्चरल डायवर्सिटी जो है वो इंपैक्ट करता है टूरिज्म को। ठीक है? फॉर एग्जांपल मैं आपको दिखा देता हूं। हम देखें तो यहां पर
हमारे पास ताजमल है जो कि आगरा में है। फिर वाराणसी। ठीक है? हिंदू टेंपल। देन हम गोल्डन टेंपल की बात कर सकते हैं। सिख
वैष्णो वैष्णो देवी का एग्जांपल देख सकते हैं। देन आप साउथ इंडिया के काफी सारे टेंपल्स का नाम देख सकते हैं। तो वो सारे
किस में आ जाएंगे? रिलीजियस के अंदर आ जाएंगे। बट ये हम कहां डिस्कस करेंगे? हम टूरिज्म जब चैप्टर पढ़ेंगे तो हम वहां पर
इन चीजों को डिस्कस करेंगे। ठीक है? कि कैसे रिलीजन डायवर्सिटी इंपैक्ट करती है टूरिज्म को। ठीक है? मीडिया का क्या रोल
है चाइल्ड लेबर में? ठीक? हम बात करते हैं चाइल्ड लेबर की कि मीडिया का रोल क्या है टू मिटगेट दी चाइल्ड लेबर प्रॉब्लम। ठीक
है? तो टीवी न्यूज़ चैनल्स लाइक एनडीt आज तक एंड इंडियन एक्सप्रेस हैव एक्सपोज्ड फैक्ट्रीज, होटल्स एंड वर्कशॉप एंप्लॉइंग
चिल्ड्रन लीडिंग टू लीडिंग टू पुलिस रेड्स एंड चाइल्ड रेस्क्यू ऑपरेशन। ठीक है? तो स्टिंग ऑपरेशंस जो हैं काफी सारे करे गए
हैं। ठीक? सो वेरियस स्टिंग ऑपरेशन हैव बीन डन बाय दी मीडिया टू एक्सपोज दी चाइल्ड लेबर। देन न्यूज़ कवरेज एंड सोशल
मीडिया कैंपेन हेल्प्ड टू प्रमोट गवर्नमेंट हेल्पलाइन नंबर 1098 1098 आई रिपीट 1098। तो जब भी चाइल्ड लेबर का
टॉपिक आएगा तो चाइल्ड लाइन हेल्पलाइन नंबर जरूर ठीक है तो चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर जरूर याद रहना चाहिए 1098 अलोंग सिटीजन टू
रिपोर्ट चाइल्ड लेबर केसेस क्विकली दैट इंक्रीज्ड रिपोर्ट दैट इंक्रीज्ड रिपोर्टिंग एंड रेस्क्यू ऑफ चिल्ड्रन नाउ
मीडिया सपोर्ट एनजीओस लाइक बचपन बचाओ आंदोलन आई रिपीट बचपन बचाओ आंदोलन बाय हाईलाइटिंग देयर रेस्क्यू मिशन एंड
स्प्रेडिंग अवेयरनेस तो देखिए जो मीडिया है वह काफी सारी एनजीओस के बारे में बताता है। ठीक है? जैसे कि बचपन बचाओ आंदोलन। तो
तो अब तक हमने क्या सीखा है कि NDTV आज तक इंडियन एक्सप्रेस इन न्यूज़ चैनल ने एक्सपोज करा है चाइल्ड लेबर के केसेस को।
ठीक है? देन हमने देखा कि इन्होंने काफी सारे स्टिंग ऑपरेशंस भी किए। देन हमने देखा कि 1098 चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर भी जो
है वो मीडिया द्वारा प्रोपोगेट किया जाता है। ठीक है? जिससे जो है काफी सारे बच्चे रेस्क्यू हुए हैं। देन हमने देखा कि
मीडिया जो है वो काफी सारे एनजीओ के बारे में बता दिया। लाइक बचपन बचाओ आंदोलन। देखिए नेशनल कमीशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ
चाइल्ड राइट। ठीक है? एनसीपीसीआर मीडिया रिपोर्ट्स केसेस ऑफ चाइल्ड लेबर अब्यूज एक्सप्लॉयटेशन वि एनसीपीसीआर
इन्वेस्टिगेट तो हमने अभी देखा कि स्टिंग ऑपरेशंस होते हैं। ठीक? बट उनको इन्वेस्टिगेट कौन करता है? नेशनल कमीशन
फॉर प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स। तो हम बोल सकते हैं कि मीडिया हेल्प करती है हमारे नेशनल कमीशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ
चाइल्ड राइट्स को। और उसके बाद क्या आता है? मीडिया सपोर्ट कैंपेन लाइक पेंसिल पोर्टल। ठीक है? प्लेटफार्म फॉर इफेक्टिव
एनफोर्समेंट फॉर नो चाइल्ड लेबर। ठीक है? तो यह एक प्लेटफार्म है। द पेंसिल पोर्टल इज़ एन ऑनलाइन गवर्नमेंट प्लेटफार्म ल्च
बाय द मिनिस्ट्री ऑफ़ लेबर एंड एंप्लॉयमेंट इंडिया टू रिपोर्ट, ट्रैक, एलिमिनेट चाइल्ड लेबर केसेस एंड इंश्योर प्रॉपर
रिहबिलेशन ऑफ रेस्क्यूड चिल्ड्रन। तो यह भी जो है वो मीडिया द्वारा प्रोपोगेट किया जाता है। तो आई होप जब चाइल्ड लेबर की बात
होगी तो आप बता सकते हैं कि नेशनल कमीशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ़ चाइल्ड राइट्स। सो जब भी अब चाइल्ड लेबर की बात होगी तो आप बता
सकते हैं कि मीडिया कैसे हेल्प करती है नेशनल कमीशन ऑफ़ प्रोटेक्शन ऑफ़ चाइल्ड राइट्स को। ठीक है? उनको डिफरेंट केसेस के
बारे में बताती है जो वो बाद में इन्वेस्टिगेट करते हैं। फिर मीडिया ने पेंसिल पोर्टल के बारे में देन 1098
चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर के बारे में भी मीडिया ने बात करी है। ठीक? चलिए नेक्स्ट टॉपिक की तरफ बढ़ते हैं जो कि है इंपैक्ट
ऑफ मूवीज और फिल्म माय फेवरेट मूवी सेंसरशिप इन मूवीज और बॉलीवुड। तो ये चार टॉपिक जो है लेक्चर के देखने को मिलते
हैं। और यहां से हमें क्या है? एक जीडी का टॉपिक भी देखने को मिलता है। ठीक है? तो बॉलीवुड से स्टार्ट करते हैं। ठीक है? सो
बॉलीवुड इज़ मेड फ्रॉम टू वर्ड्स। ठीक है? बॉम्बे, नाउ, मुंबई एंड हॉलीवुड। तो जो बॉम्बे से बॉली बना और वुड जो है हॉलीवुड
से दिया। ठीक है? तो इट रेफर्स टू दी हिंदी लैंग्वेज फिल्म इंडस्ट्री बेस्ड इन मुंबई। तो बॉलीवुड सिंपल क्या है? दो वर्ड
से बना है जिसका मतलब बॉम्बे है और हॉलीवुड से हमने वुड लिया है। ठीक है? और ये क्या बताती है? हिंदी लैंग्वेज फिल्म
इंडस्ट्री के बारे में बताती है जो कि मुंबई और महाराष्ट्र में बेस्ड है। ठीक है? मेजर फिल्म शूटिंग आल्सो टेक प्लेस इन
हैदराबाद स्पेशली रामोजी फिल्म सिटी। तो आपको फिल्म सिटी। ठीक है? इसके बारे में भी अब एक तो आप एक एग्जांपल याद रख सकते
हैं रामोजी फिल्म सिटी का कि यहां पर मोस्टली मूवीस जो है शूट होती हैं और अदर दैन दैट हमें पता है कश्मीर राजस्थान एंड
फॉरेन कंट्रीज टू नाउ इंडिया प्रोड्यूसेस अराउंड 1500 टू 2000 फिल्म एव्री ईयर ऑल लैंग्वेज कंबाइंड मेकिंग इट वन ऑफ़ द
लार्जेस्ट फिल्म इंडस्ट्रीज इन द वर्ल्ड। तो ये पॉइंट बहुत इफेक्टिव है। ठीक? तो हमारे इंडिया के अंदर एव्री ईयर कितनी
मूवीज़ बनती है? 1500 टू 2000। ये बहुत इंटरेस्टिंग फैक्ट है। तो आप देख सकते हैं कितने एक्टर्स हैं, हमारे टेक्नशियंस,
डायरेक्टर हैं उनको जॉब मिलती होगी। ठीक है? सो द इंडियन मीडिया एंड एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री प्रोवाइड एंप्लॉयमेंट टू मोर
देन 20 लाख। ठीक है? पीपल डायरेक्टली और इनडायरेक्ट। जॉब्स इंक्लूड एक्टर्स, डायरेक्टर, असिस्टेंट डायरेक्टर्स, एडिटर,
राइटर्स, कोरियोग्राफर, म्यूजिक डायरेक्टर्स, टेक्नशियन, वीएफएक्स, आर्टिस्ट एंड मार्केटिंग प्रोफेशनल। तो
हमें सिर्फ क्या दिखते हैं? एक्टर्स दिखते हैं। बट उनके पीछे जो टीम होती है वो कितनी बड़ी होती है। इसलिए ये पॉइंट बहुत
इफेक्टिव है। अब ये पॉइंट बहुत ज्यादा इफेक्टिव है कि कैसे इकोनॉमिकली बॉलीवुड एक बैकबोन है। ठीक है? नाउ द सेक्टर
कंट्रीब्यूट्स अराउंड 2 लाख करोड़ एनुअली टू इंडियन इकॉनमी। आपने देखा होगा कि बॉयकॉट बॉलीवुड एक ट्रेंड चला था। तो अब
काफी सारे डायरेक्टर, असिस्टेंट डायरेक्टर, एडिटर, राइटर्स, कोरियोग्राफ़र्स, म्यूजिक डायरेक्टर सामने
आए और उन्होंने बोला कि अगर यह बॉयकॉट ट्रेंड चलेगा तो हमारी जॉब को थ्रेट है और इकॉनमी के लिए भी सही नहीं है। तो 2 लाख
करोड़ प्लस एनुअली इंडियन इकॉनमी के अंदर जो कंट्रीब्यूट करता है बॉलीवुड। ठीक है? अब बॉलीवुड एज अ सॉफ्ट पावर हैज़ इंडियास
सॉफ्ट पावर बाय स्प्रेडिंग इंडियन कल्चर, म्यूजिक, फैशन एंड ट्रेडिशन वर्ल्ड वाइड। मूवीस लाइक दंगल, थ्री इडियट्स एंड ट्रिपल
आर गेन इंटरनेशनल पॉपुलैरिटी एंड इंप्रूव इंडियास ग्लोबल कल्चरल इमेज। नाउ अब धुरंधर का एग्जांपल आप अपने आप फिट करें।
ठीक है? आप अपनी नॉलेज से जो आपको सही लगता है कि क्या सॉफ्ट पावर है या नहीं है। इंडियन फिल्म्स आर वाइडली वॉच्ड इन द
मिडिल ईस्ट, चाइना, रशिया, सेंट्रल एशियन एंड अफ्रीका। आपको रेदर देन यूरोप और अमेरिका चाइना में बहुत ज्यादा हिट थी।
सिमिलरली थ्री इडियट्स भी हम देखें तो इंडिया से ठीक है? सिमिलरली अगर हम देखें थ्री इडियट्स भी चाइना के अंदर बहुत
ज्यादा पॉपुलर हुई है। और ट्रिपल आर में आपने देखा है कि इसमें एकेडमी अवार्ड्स भी मिले हैं। ठीक है? नाउ चैलेंजज़ क्या है?
देखिए बॉलीवुड फेसेस इशूज़ लाइक नेपोटिज़्म, पॉलिटिकल इन्फ्लुएंस, हाई प्रोडक्शन कॉस्ट, बॉक्स ऑफिस प्रेशर एंड कंपटीशन
फ्रॉम ओटीटी प्लेटफॉर्म्स। ठीक है? नाउ और भी काफी सारे चैलेंजेस हैं आपने देखा होगा। चाहे वो ड्रग, कोकेन ये सारे इशूज़
हमें सुनने को मिलते हैं बॉलीवुड में। ठीक है? नाउ जीडी में टॉपिक आया था क्या? सोशल मीडिया कैसे हेल्प करता है? जॉइनिंग
डिफेंस फोर्सेस। ठीक है? नाउ इंपैक्ट ऑफ मूवीज। ठीक है? इंपैक्ट ऑफ मूवीज की बात कर रहे हैं। कैसे इंपैक्ट कर रहा है यूथ
को जॉइ करने के लिए डिफेंस के लिए? लक्ष्य मूवी। ठीक है? एग्जांपल देखिए। लक्ष्य मूवी डायरेक्टेड बाय फरान अख्तर ड्यूरिंग
द विजिट टू इंडियन मिलिट्री एकेडमी आईएमए कैडिडेट टोल्ड हिम वेरियस कैडिट्स [संगीत] टोल्ड हिम द फिल्म इंस्पायर्ड देम टू जॉइन
द आर्म्ड फोर्स एंड रिमेंस पॉपुलर अमंग यंग व्यूअर ऑन Netflix ठीक है देहरादून आप चले जाइए कोचिंग हब्स वहां पर आपको दिख
जाएगा लक्ष्य का क्रेज़ ठीक है देन बॉर्डर 1997 बेस्ड ऑन द बैटल ऑफ लोंगेवाला द फिल्म इग्नाइटेड पेट्रियोटिज्म एंड
इंस्पायर्ड मेनी यूथ टू जॉइन आर्म्ड फोर्सेस [संगीत] ठीक है देन एलओसी कारगिल मूवी द मूवी हाईलाइटेड द रियल सैक्रिफाइस
ऑफ़ कारगिल वॉर कारगिल वॉर हीरोज़ एंड मोटिवेटेड यू टुवर्ड्स दी मिलिट्री सर्विस [संगीत] शेरशाह मूवी। ठीक है? तो ये सारी
चीजें अब ये एग्जांपल्स आपको ऐड करने हैं अपने लेक्चर में और जीडी बहुत इफेक्टिव है ये पॉइंट्स। ठीक है? ओके नाउ लेट्स मूव ऑन
टू दी डे थ्री। राइट? सो इन डे थ्री वी आर गोइंग टू कवर ऑल दी टॉपिक्स व्हिच आर रिलेटेड टू ऑनलाइन एआई साइबर व्हिच केम इन
आवर एसएसबीआई एंड वी आर आल्सो गोइंग टू कवर सम ग्रुप डिस्कशन टॉपिक्स रिलेटेड टू दी ऑनलाइन एआई एंड साइबर। राइट? ओके नाउ
लेट्स स्टार्ट विद ई-कॉमर्स। राइट? ओके। सो ई-कॉमर्स इज दी बाइंग एंड सेलिंग ऑफ गुड्स एंड सर्विसेस थ्रू दी इंटरनेट। और
अगर मैं बात करूं सोशल मीडिया की क्या डेफिनेशन थी? सोशल मीडिया इज अ प्लेटफार्म फॉर कम्युनिकेशन, इंटरेक्शन, शेयरिंग एंड
एक्सचेंजिंग कंटेंट। ठीक है? और हमने मीडिया और प्रेस की क्या डेफिनेशन देखी थी? मीडिया और प्रेस इज़ अ प्लेटफार्म
यूज्ड टू शेयर इंफॉर्मेशनेशन, न्यूज़ एंड आइडियाज विद दी पब्लिक। देन अगर हम बात करें ओटीटी की। राइट? तो ओटीटी की
डेफिनेशन क्या थी? ओटीटी प्लेटफार्म प्रोवाइड्स मूवीज़, शोज़, वीडियोस डायरेक्टली थ्रू दी इंटरनेट। ओके? यहां पर
देखिए इंडिया इज द सेकंड लार्जेस्ट ई-कॉमर्स मार्केट इन टर्म्स ऑफ यूजर ग्रोथ। राइट? सो इंडिया हैज़ ओवर 27 करोड़
ऑनलाइन शॉपर्स। ठीक है? ठीक है? सो अगर इंडिया की डिजिटल इकॉनमी की बात करें तो इट कंट्रीब्यूट्स अराउंड 22 लाख करोड़।
राइट? व्हिच इज़ 11% ऑफ़ द जीडीपी। सो डिजिटल इकॉनमी के अंदर ही क्या आता है? हमारा ई-कॉमर्स आता है। तो नाउ लेट्स मूव
ऑन टू द एग्जांपल्स। ठीक है? तो अगर हम एग्जांपल्स में देखें तो हमें क्या याद रहता है? जनरली ई-कॉमर्स से Amazon होगा।
राइट देन Flipkart हो सकता है बट ई-कॉमर्स इज़ वेरी वास्ट प्लेटफार्म। ठीक है? तो यहां से देखते हैं ऑनलाइन टिकट बुकिंग
चाहे वो ट्रेन बस फ्लाइट की हो तो आईआरसीटीc रेड बस मेक माय ट्रिप होटल बुकिंग के लिए भी। तो ये सारी भी हमारी
ई-कॉमर्स वेबसाइट्स हैं। देन फास्ट फूड ऑर्डरिंग ठीक है? SWGI Zomato देन ऑनलाइन ग्रोसरी सेव्स टाइम व्हिच इज़ Blink Zptotो
देन बिग बास्केट Flipkart मिनट्स। ठीक है? देन ऑनलाइन रिचार्ज सेव टाइम रिचार्ज मोबाइल एंड डीटीएच यूजिंग Google Pay,
Airtel, Paytm ठीक है? विदाउट विजिटिंग शॉप्स। देन वी हैव मेडिसिन आल्सो। तो मेडिसिन इन मिनट्स में क्या है? नेट
मैड्स, फार्मेसी। तो ये सारे एग्जांपल्स अगर आप अपने लेक्चर या फिर जीडी के अंदर यूज़ करते हैं, इट विल क्रिएट अ इंपैक्ट।
ठीक है? तो इसमें न्यू क्या था? हमारे पास रेड बस था, आईआरसीटीसी मेक माय ट्रिप है ना? ये सारी चीजें भी किसमें? ई-कॉमर्स
में आती है। ठीक है? नाउ लेट्स मूव टू दी एडवांटेज। पहला एडवांटेज क्या आ जाता है? कन्वीनियंस 24 /7। अब 24 /7 से मुझे
न्यूक्लियर एनर्जी याद आ रहा है। ठीक है? सोलर एनर्जी तो सिर्फ आप दिन में जनरेट कर सकते हैं। वेयर ऐज़ न्यूक्लियर एनर्जी इज़
24 /7। ठीक है? तो पीपल कैन शॉप एनी टाइम फ्रॉम होम विदाउट विजिटिंग स्टोर। देन हमारे पास क्या आ जाता है? वाइड वैरायटी
ऑफ़ प्रोडक्ट। प्रोडक्ट रिलेटेड टू हेल्थ केयर, मेकअप, अपेरल, क्लोथ, हाउसहोल्ड आइटम। तो आपको पता है। देन इजी प्राइस
कंपैरिजन कस्टमर कैन कंपेयर प्राइसेस एंड गेट बेटर डील्स। ठीक है? एक Amazon पे एक पर्टिकुलर प्रोडक्ट कितने का है? देन आप
MNTRa पे जाते हो। देन आप किस पे जाते हो Flipkart पे। तो बेस्ट प्राइस जहां पर भी मिलता है। यू कैन बाय दैट। देन रूरल ग्रोथ
इंपैक्ट मोर देन 6 करोड़ रूरल यूजर शॉप ऑनलाइन हेल्पिंग रूरल इकोनमी हेल्पिंग रूरल इकोनॉमिक डेवलपमेंट ठीक है तो अगर हम
यहां पर Meesho का एग्जांपल लें ठीक है तो Meesho बिकम वेरी पॉपुलर इन दी रूरल एरियाज तो यहां पर जो ई-कॉमर्स है वो
दोनों कैटेगरी को कैटर कर रहा है वेदर इट्स ठीक है वेदर वेदर इट्स अर्बन एरिया और रूरल एरिया ठीक है देन एंप्लॉयमेंट
जनरेशन ई-कॉमर्स सपोर्ट ओवर ई-कॉमर्स सपोर्ट्स ओवर 1.5 करोड़ जॉब्स इन डिलीवरी लॉजिस्टिक्स आईटी एंड वेयर हाउसिंग अगर हम
Amazon की ही बात करें तो इट क्रिएट्स अराउंड 13 लैक्स जॉब इन इंडिया। ठीक है? तो 1.5 करोड़ ऑल ओवर इंडिया एंड अलोन
Amazon इज़ क्रिएटिंग अराउंड 13 लैक्स जॉब। सेव्स टाइम्स एंड ट्रेवल कॉस्ट। ऑनलाइन शॉपिंग, रिड्यूसेस, ट्रेवल एंड वेटिंग
टाइम। ठीक? सो सपोज़ इफ यू आर अ प्रीमियम और अ प्लस मेंबर ऑफ़ Amazon, दे विल डिलीवर यू प्रोडक्ट इन जस्ट वन डे। ठीक है? सो इट
सेव्स योर टाइम एंड ट्रेवल कॉस्ट टू देन डिसएडवांटेज इज़ लैक ऑफ फिजिकल इंस्पेक्शन। अबाउट 20 टू 30% ऑफ़ ऑनलाइन प्रोडक्ट्स आर
रिटर्नड। ठीक है? अह वेरियस टाइम्स MNTR सीईओ एंड वेरियस अदर कंपनीज़ सीईओस हैज़ मेंशंड दैट दे सफर्ड अ ह्यूज लॉस बिकॉज़ ऑफ़
दी प्रोडक्ट रिटर्न। ठीक है? देन इंपैक्ट ऑन स्मॉल रिटेलर्स। ठीक है? नियरली 30% ऑफ़ स्मॉल रिटेलर रिपोर्टेड कस्टमर लॉस ड्यू
टू ई-कॉमर्स। ठीक है? देन दिस डाटा वाज़ गिवन बाय दी रिटेलर एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया। देन डिलीवरी डिलेज़ अराउंड 42% ऑफ़ इंडियन
कस्टमर एक्सपीरियंस डिलेड डिलीवरी। ठीक है? इट शोज़ दैट इट विल कम ऑन संडे बट्स द प्रोडक्ट शोज़ दैट इट विल डिलीवर ऑन अ
पर्टिकुलर डे बट इट स्ट्रेच टू वन और टू मोर सम। सो व्हिच लीड्स टू समटाइम डिसटिस्फेक्शन ऑफ़ कस्टमर। ठीक है? द नो
पर्सनल इंटरेक्शन अबाउट 64% ऑफ़ कस्टमर प्रेफर फिजिकल स्टोर फॉर बेटर ट्रस्ट एंड इंटरेक्शन। ठीक है? स्टिल इन इंडिया इफ यू
आर गोइंग टू बाय अ लैपटॉप और अ मोबाइल फोन स्टिल पीपल ट्राई टू प्रेफर ऑफलाइन मार्केट। देन रिस्क ऑफ़ ऑनलाइन स्कैम्स एंड
फ्रॉड, इंडिया रिकॉर्डेड अबाउट 22 लाख ऑफ़ साइबर क्राइम कंप्लेंट्स इन 2024 एंड यू नो इन [नाक से की जाने वाली आवाज़]
2025 आल्सो वी रजिस्टर्ड अराउंड 22 टू 24 लैक्स। तो इफ यू सी 24 और 25 दोनों में हमने 22 से 24 लाख के आस तो इन दोनों
इयर्स में ही रिकॉर्डेड अराउंड 24 लैक्स ऑफ कंप्लेंट्स। ठीक है? सो दिस डाटा वाज़ गिवन बाय दी एनसीआर नेशनल क्राइम रिपोर्ट
ब्यूरो। ठीक है? सो यू ऑल हैव मस्ट हर्ड अबाउट दी ओलेक्स स्कैम्स। राइट? पीपल पोज़ेस एंड आर्म्ड फोर्सेस पर्सनल एंड देन
ट्राई टू स्टील योर मनी। ठीक है? तो फ्यूचर ऑफ ई-कॉमर्स क्या है? ई-कॉमर्स विल बिकम दी प्राइमरी मोड ऑफ़ बाइंग एंड सेलिंग
ग्लोबली। राइट? टेक्नोलॉजीस लाइक एआई ड्रोनस एंड क्विक डिलीवरी विल मेक शॉपिंग फास्टर एंड स्मार्टर। फिजिकल शॉप्स विल
रिड्यूस एंड डिजिटल मार्केट प्लेस विल डोमिनेट। अगर हम इसका एग्जांपल ले तो आप ब्लिंकट का एग्जांपल ले सकते हैं। देन
ज़प्टो Flipkart मिनट्स ग्रोसरीज को डिलीवर कर रही है इन फ्यू मिनट्स। ठीक है? देन फूड डिलीवरी एप्स हैं। तो जो हमारे फिजिकल
शॉप्स हैं तो हमारे जो फिजिकल शॉप्स हैं वो ड्रास्टिकली रिड्यूस होंगे फ्यूचर के अंदर। सो इट इज़ अ आल्सो अ ग्रेट थ्रेट।
बिकॉज़ यहां पर क्या है? जो हर एक फिजिकल शॉप का ओनर है। सो ही इज़ गेटिंग अ प्रॉफिट। राइट? बट व्हेन इट कम्स टू बिग
ई-कॉमर्स वेबसाइट्स। सो मेजरली प्रॉफिट किन के पास जा रहा है? एक सिंगल पर्सन जो कि ओनर है। राइट? सो इट कुड बी अ बिग
डिसएडवांटेज इन फ्यूचर। नाउ अगर हम बात करें कंक्लूजन की तो ई-कॉमर्स हैज़ ट्रांसफॉर्म ट्रेडिशनल ट्रेड इंटू फास्ट
डिजिटल ट्रेड। ठीक है? एंड लाइक तो डिस्पाइट चैलेंजज़ लाइक फ्रॉड एंड जॉब लॉस इन स्मॉल शॉप इट्स इट्स बेनिफिट्स आउट वे
डिसएडवांटेजेस। सो व्हेनवर यू आर गिविंग दी लेक्चर यू एक्सेप्ट यस, देयर आर फ्लॉज़। बट इफ वी कंटीन्यूअसली इम्प्रूव वी कैन
आउट वे द डिसएडवांटेजिस। ठीक है? सो इट इज़ अ पावरफुल ड्राइवर ऑफ इकोनमिक ग्रोथ, एंप्लॉयमेंट एंड डिजिटल डेवलपमेंट इन एंड
डिजिटल डेवलपमेंट एंड इट्स फ्यूचर इज़ हाइली प्रॉमिसिंग। ठीक है? तो अगर इकोनमिक ग्रोथ की बात करें तो हमने देखा कि डिजिटल
इकोनमी जो है हमारी 22 लाख करोड़ जो है हमारी जीडीपी के अंदर कंट्रीब्यूट करती है। एंड इट प्रोड्यूसेस अराउंड 1.5 करोड़
ऑफ़ जॉब्स इन डिफरेंट सेक्टर्स। ठीक है? तो चलिए बात करते हैं अब ई बुक्स की। राइट? तो ई बुक्स। इलेक्ट्रॉनिक बुक्स आर डिजिटल
वर्जन ऑफ़ बुक्स दैट कैन बी रीड ऑन इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस सच ऐज़ स्मार्टफोनस, टैबलेट्स, कंप्यूटर और ई रीडर। तो ये एक
डिजिटल वर्जन है बुक्स का जो कि आप रीड कर सकते हैं किस पर? स्मार्टफोन पर, टैबलेट्स पर, कंप्यूटर पर। और ई रीडर अदर डिवाइसेस।
ठीक है? ओवर 1 बिलियन पीपल वर्ल्ड वाइड यूज़ ई-बुक। देन ई-बुक यूजेज इनक्रीज्ड बाय 30 टू 40% ड्यूरिंग कोविड-19। राइट? अगर
हम कोविड-19 की बात करें तो हमने सोशल मीडिया के टॉपिक में देखा था कि कैसे हमने ZM कॉल्स और मीट की हेल्प से जो स्कूल की
क्लासेस हो या फिर ऑफिस या फिर ऑफिस के जितने भी ऑपरेशंस हैं वो हमने इन एप्स की हेल्प से करे थे। ठीक है? देन Amazon KD
इज़ वन ऑफ़ द मोस्ट यूज़्ड ई-बुक प्लेटफार्म ग्लोब। देन इंडिया हैज़ अराउंड 80 करोड़ इंटरनेट यूज़र्स। हमने बात करी थी इस पर
एंड कवरिंग हाफ ऑफ दी पपुलेशन। सो ई ईबुक्स का जो है ह्यूज पोटेंशियल है इंडिया के अंदर। देन हम बात कर सकते हैं
कि बसाइड्स 80 करोड़ हमारे पास 50 करोड़ क्या सोशल मीडिया यूज़र्स थे हमने देखा था। राइट? चलिए तो ई बुक्स की एग्जांपल्स देख
सकते हैं हम। फेमस ई बुक्स कौन-कौन सी है? रिच डैड, पुअर डैड, एटॉमिक हैबिट, सेल्केमिस्ट, हैरीपॉटर एंड एनसीआरटी की
सारी बुक्स जो है आपको ई-बुक्स पर मिल जाएंगी। ठीक है? देन एग्जांपल्स की अगर हम बात करें तो ई-बुक रीडर कौन-कौन से हैं?
राइट? फोन, कंडल, टैब्स, लैपटॉप, कंप्यूटर। राइट? स्मार्ट डिवाइसेस हैं, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेस हैं। आप उस पर
ई-बुक्स को रीड कर सकते हैं। ठीक है? अगर हम बात करें वेबसाइट्स की जहां से आप ई-बुक को डाउनलोड कर सकते हैं। फर्स्ट कौन
सी है? नेशनल डिजिटल लाइब्रेरी ऑफ़ इंडिया। ठीक है? यहां से काफी सारी बुक्स आप फ्रीली डाउनलोड कर सकते हैं। एनसीआरटी
सीबीएसई राइट देन Amazon Kindle राइट देन Google बुक्स देन इंटरनेट आर्काइव राइट तो जितनी भी ग्लोबली हिस्ट्री से रिलेटेड
चीजें हैं वो आपको आर्काइव में देखने को मिल जाएगी। ठीक है? देन हम एडवांटेजेस की बात करते हैं तो ईजीली एक्सेस एनी टाइम
एंड एनीवेयर। राइट? पोर्टेबल थाउजेंड्स ऑफ़ बुक्स इन वन डिवाइस। सी अगर आप सी इफ यू आर ट्रैवलिंग, यू आर इन बस, ट्रेन,
एनीवेयर। राइट? सो, यू कैन ईज़ली एक्सेस थाउजेंड्स ऑफ़ बुक्स इन योर मोबाइल फोन। राइट? वेयर एज अगर हम बात करें फिजिकली इट
इज नॉट पॉसिबल कि आप थाउजेंड्स ऑफ बुक कैरी कर सकते हैं। बट आप अपने स्मार्टफोन डिवाइसेस के अंदर जो है बुक यू कैन कैरी
देन सर्च फीचर मेक स्टडी फास्ट इफ यू हैव थाउजेंड्स ऑफ़ बुक सो विद द हेल्प ऑफ़ सर्च फीचर यू कैन फाइंड एनी पर्टिकुलर बुक एनी
पर्टिकुलर चैप्टर टू राइट देन कॉस्ट इफेक्टिव कंपेयर टू प्रिंटेड बुक्स राइट ठीक है तो आप Amazon पे जाइए और पर्टिकुलर
बुक को सेलेक्ट करिए ठीक है तो वहां पर दो प्राइसेस आएंगे एक आएगा Amazon कंडल और एक आएगा फिजिकल का तो Amazon कैंडल विल बी
हाफ राइट ठीक है तो अगर Amazon कैंडल का प्राइस देखेंगे आप तो ऑलमोस्ट हाफ होगा राइट हाफ से भी कम ठीक है तो सेव पेपर एंड
प्रोटेक्ट्स एनवायरमेंट राइट देन इन देन देन पॉइंट आता है इंस्टेंट डाउनलोड विदाउट विजिटिंग लाइब्रेरी। तो पहले क्या होता
था? हम लाइब्रेरी जाते थे। वहां से बुक इशू करवाते थे। बट नाउ वी कैन इंस्टेंट डाउनलोड इन जस्ट फ्यू सेकंड्स। ठीक है?
स्टूडेंट कैन डाउनलोड एनसीईआरटी बुक्स फ्री फ्रॉम इंटरनेट। राइट? देन डिसएडवांटेजेस की बात करें तो आई ट्रेन
ड्यू टू लॉन्ग स्क्रीन टाइम। ठीक है? देन रिक्वायर्स इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस एंड इंटरनेट। सो इफ यू आर ट्रैवलिंग इन बस,
ट्रेन, सो अह इट रिक्वायर्स इंटरनेट अह फॉर डाउनलोडिंग दी पीडीएफ राइट और एक्सेसिंग। नॉट इजीली एक्सेसिबल इन रूरल
एरियाज इन योर मोबाइल फोन्स और लैपटॉप राइट? सो डेफिनेटली देयर विल बी अ डिस्ट्रैक्शन राइट बिकॉज़ देयर आर अदर एप्स
टू बैटरी डिपेंडेंसी लिमिट यूज़। सो इफ यू ई बुक रीडर इज़ नॉट चार्ज यू कैन नॉट एक्सेस एनी बुक राइट कैन नॉट रीड एग्जांपल
कैन नॉट रीड ई-बुक इफ फ़ बैटरी इज़ दैट राइट? देन अगर हम बात करें इंपैक्ट की तो प्रमोटेड डिजिटल लर्निंग एंड ऑनलाइन
एजुकेशन। ठीक है? सो वी आर आल्सो रनिंग डिजिटल इंडिया प्रोग्राम। ठीक है? तो इट इज़ेंट टू सो इट इज़ेंट टू प्रोपोगेट ई
बुक्स। ठीक है? पीड एजुकेशन मोर एक्सेसिबल एंड अफोर्डेबल। जैसे हमने बात करी कि थाउजेंड्स ऑफ़ बुक आप अपने एक डिवाइस छोटे
से डिवाइस में रख सकते हैं व्हिच यू कैन कैरी एनीवेयर। इसलिए एक्सेसिबल है। अफोर्डेबल क्यों है? बिकॉज़ ई-बुक रीडर जो
है मोस्टली आपको फ्री भी। देन ई बुक्स हैव ट्रांसफॉर्म रीडिंग बाय मेकिंग नॉलेज ईजीली एक्सेसिबल एनी टाइम एनीवेयर। हमने
बात करी दे आर दे आर पोर्टेबल, अफोर्डेबल एंड सपोर्ट डिजिटल एजुकेशन एंड मॉडर्न लर्निंग। दे हेल्प प्रोटेक्ट एनवायरमेंट।
देन डिस्पाइट सम लिमिटेशन ई बुक्स आर एसेंशियल पार्ट ऑफ दी फ्यूचर एजुकेशन एंड डिजिटल सोसाइटी। ठीक है? सो आई होप दिस इज़
क्लियर नाउ। आई होप दिस इज़ क्लियर। ठीक है? इसमें कुछ डाटा था। वो एक बार फिर से रिवीज़ कर लेते हैं। ठीक है? तो यहां पर बस
कुछ डाटा था इसमें जैसे ओवर 1 बिलियन पीपल यूज़ दी ई-बुक वर्ल्ड वाइड। देन इंडिया हैज़ अराउंड 80 करोड़ ऑफ़ इंटरनेट यूज़र्स। सो इट
हैज़ अ ग्रेट पोटेंशियल। सो ये कुछ चीजें थी जो आपको देखनी थी। ओके नाउ लेट्स स्टार्ट विद आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस
टॉपिक। राइट? सो इन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस फर्स्ट वी विल डिस्कस दी डेफिनेशन ऑफ एआई देन सम एग्जांपल्स
यूजेजेस इन डिफरेंट सेक्टर वेदर हेल्थ केयर डिफेंस इंडस्ट्री एजुकेशन इंडस्ट्री सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री राइट देन एडवांटेजेस
डिसएडवांटेजेस देन साइबर क्राइम थ्रेट दैट आर रिलेटेड टू आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस देन व्हाट आर दी लॉज़ व्हिच इंडियन गवर्नमेंट
मेड एंड वर्ल्ड वाइड एंड व्हाई एआई बिकम सो पॉपुलर सो अर्ली राइट सो फर्स्ट डेफिनेशन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस
[गला साफ़ करने की आवाज़] इज़ अ टेक्नोलॉजी दैट अनेबल्स मशीनंस एंड कंप्यूटर टू थिंक, लर्न एंड
मेक डिसीजन लाइक ह्यूमन। तो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एक ऐसी टेक्नोलॉजी है जो अनेबल करती है मशीनंस को, कंप्यूटर को। ठीक है?
टेक डिसीजंस लाइक ह्यूमन। देन एग्जांपल्स देखते हैं हम। तो एi चैट बॉट के एग्जांपल सबको पता होगा। लाइक लाइक चैट जीपीटी, डीप
सी, जेमिनाई, ग्रॉक, मेटा आई। राइट? बट व्हेन इट कम्स टू अदर एग्जांपल्स लाइक एi वॉइस असिस्टेंट। ये भी एक तरीके का क्या
है? आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस है। राइट? जैसे कि Google Assistant सोरी राइट जो हम यूज़ करते हैं Apple वॉइस
असिस्टेंट में देन कॉटना जो Microsoft के लिए है एंड देन Alexa सो फेस अनलॉक फीचर जो हमारे स्मार्टफोनोंस में होता है राइट
वो भी क्या है एक तरीके का आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस होता है तो हम एआई क्या समझते थे सिर्फ चैट बॉट्स को बट अ फेस
रिकॉग्निशन इज़ आल्सो कंसीडर्ड टू बी अ एई देन सीसीटीवी फेशियल रिकॉग्निशन इज़ आल्सो अंडर दी एआई कैटेगरी देन वी हैव वीडियो
जनरेशन ठीक है तो हम वीडियो जो जनरेट करते हैं ग्राफिक्स जनरेट करते हैं ठीक है स्मॉल देन स्मॉल 3D एनिमेटेड वीडियोस भी
जो हम जनरेट करते हैं लाइक विद द हेल्प ऑफ़ सोरा दैट इज़ आल्सो अ एiन इमेज जनरेशन में जो फेमस है वो कौन सा है? नैनो बनाना है।
ठीक है? देन म्यूजिक जनरेशन क्या है? सुनो एआई। ठीक है? और मेडिकल की फील्ड में एक क्योर एi जो है वो बहुत पॉपुलर हो। तो ये
कुछ एग्जांपल्स थे जो हमें अपने जीडी प्लस लेक्चरर जब भी हम डिलीवर कर रहे हैं तो हम जरूर यूज़ करेंगे। राइट? तो ये हम सिर्फ एक
बार गो थ्रू कर लेते हैं कि एi काम कैसे करता है। ठीक है? तो डाटा कलेक्शन राइट? तो पहले क्या होता है? एi के पास बहुत
सारा रॉ डाटा आता है। तो ट्रेनिंग में वो क्या करता है उसे डिफरेंशिएट करता है। फॉर बात करें सपोज़ बहुत सारी डॉग्स और कैट्स
की इमेजज़ हैं। ठीक है? वो क्या हुआ? बहुत सारा डाटा र डाटा आया। तो ट्रेनिंग के अंदर क्या आएगा? वो उसको कैटेगराइज़ करेगा
कि कौन सी डॉग की इमेजज़ है और कौन सी कैट की है। कौन सा प्रोसेस आता है? टेस्टिंग का। ठीक है? तो जब भी आप प्र्ट देते हैं
किसी भी एआई को तो वो क्या करता है? डिफरेंट-डिफरेंट इमेजेस को लेके आपको पिच करता है। देन डिफरेंट-डिफरेंट इमेजज़ क्या
करता है? वो जनरेट करता है और बेस्ड ऑन योर एक्सपीरियंस। ठीक है? वो नेक्स्ट इमेजज़ जनरेट करता है। तो ये क्या? तो ये
किस चीज़ का यूज़ करता है? न्यूरल नेटवर्क का यूज़ करता है। तो आप बोल सकते हैं कि ए जो है वो डाटा कलेक्शन और न्यूरल नेटवर्क
पे काम करता है। डाटा कलेक्शन पे हमने बात करी कि जो भी रॉ डाटा है ठीक है? वो सारा एi के पास आता है और न्यूरल नेटवर्क का
यूज़ करते हुए वो हमें बेस्ट रिजल्ट्स को देता है। ठीक है? डिसीजन मेकिंग। सो अब हम बात करते हैं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की
यूजेजेस लाइक अकाउंट्स एंड फाइनेंस। तो हम Zerodha AI टूल के बारे में बात करें तो ये क्या करता है? एनालाइज़ करता है स्टॉक
मार्केट के जो ट्रेंड्स हैं लाइक किस कंपनी ने कौन से ईयर में कितना प्रॉफिट दिया, क्वार्टर में कितना प्रॉफिट दिया।
सो नाउ आप डायरेक्टली जो एआई की हेल्प से डिसीजन बेटर ले सकते हैं कि इन वि कंपनी यू शुड इन्वेस्ट देन सो वेरियस बैंक एआई
सिस्टम ठीक है तो बैंक्स भी जितने हमारे चाहे वेदर इट्स एचडीएफसी एसबीआई सेंट्रल बैंक दे ऑल आर इंटीग्रेटिंग दी
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस फॉर डिटेक्टिंग दी फ्रॉड्स ठीक है देन अगर हम बात करें कि ट्रैफिक एंड ट्रांसपोर्ट में तो Google
मैप्स के अंदर भी जो है एआई का फीचर है जो प्रिडिक्ट करता है ट्रैफिक्स एंड सजेस्ट दी बेस्ट रूट है ना आर्टिफिशियल
इंटेलिजेंस क्या होता है सिर्फ चैट जीबीटी ग्रो एआई राइट डीप सीक बट आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एक बहुत वाइड टर्म है। ठीक है?
तो उसके अंदर अब Google मैप्स भी आ जाता है। देन Tesla ऑटो पापाट्स। सो जितने भी आपने ऑटोमेटिक ड्राइविंग असिस्टेंट सिस्टम
देखे होंगे, एडस सिस्टम देखे होंगे। ठीक है? तो ये सारे अभी क्या होते हैं? एक तरीके के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस होती है।
ठीक है? अब एग्रीकल्चर सेक्टर के अंदर हम बात करें तो फसल। ठीक है? ये एक बेंगलुरु का स्टार्टअप है। एआई बेस्ड स्मार्ट
इरीगेशन सिस्टम यूजिंग सेंसर। तो ये एक ऐसा एi बेस्ड सिस्टम है। इसके अंदर सेंसर लगे हैं। तो जहां पर भी वाटर की नीड है
सिर्फ ये वहां पे स्प्रिंकल करेगा। राइट? सो तो इससे क्या हो जाएगा? हमारे पास जो वाटर स्केसिटी की प्रॉब्लम है वो इससे
सॉल्व हो सकती है। बिकॉज़ जहां पर एरिया ठीक है? जहां पर क्रॉप को सबसे ज्यादा वाटर की नीड है ये वहीं पे स्प्रिंकल करता
है। और एग्जांपल्स की बात करें एग्रीकल्चर सेक्टर में तो एआई ड्रोनस आ चुके हैं। ठीक है? जो कि फर्टिलाइजर को उसके बाद क्या
करते हैं? लार्ज लार्ज एरिया को मैपिंग करते हैं। स्कैन करते हैं। देन देयर आर अदर सिस्टम आल्सो जो कि सइल के
न्यूट्रिएंट्स के बारे में इंफॉर्मेशनेशन देते हैं जो एआई है। ठीक? देन अगर एजुकेशन सेक्टर में बात करें तो चैट जीपीटी ऑडियो।
तो अगर हम एजुकेशन सेक्टर की बात करें तो चैट जीपीटी राइट हेल्प्स स्टूडेंट इन होमवर्क एक्सप्लेनेशन एंड लर्निंग कॉलेज
और स्कूल गोइंग स्टूडेंट यूज़ दी चैट जीपीटी फॉर देयर होमवर्क एंड अदर थिंग्स। ठीक है? नाउ ड्यूलिंगो की अगर हम बात करें
तो तो ड्यूलिंगो ए की बात करें तो इसमें काफी सारी रीजनल लैंग्वेज भी हैं। तो आप डिफरेंट टाइप्स ऑफ़ वर्ल्ड लैंग्वेज लर्न
कर सकते हैं। वेदर इट्स स्पेनिश, फ्रेंच और इंग्लिश। ठीक है? सो, सो दैट इज़ ग्रेट। नाउ बात करें अगर मिलिट्री और डिफेंस
सेक्टर की। ठीक है? तो हमें पता है मिलिट्री और डिफेंस सेक्टर में हमारे जो ड्रोंस हैं उनमें एआई यूज हो रहा है। बट
अपार्ट फ्रॉम दिस देयर इज अ चैट बॉट जो आप अपने जीडी में यूज कर सकते हैं इस पॉइंट को। एआई संबंध चैट बॉट। ठीक है? तो ये
इंडियन आर्म्ड फोर्सेस ने ही बनाया है। और किन के लिए? जो हमारे वेटर्न्स हैं और वीर नारीज हैं उनको ये प्रोवाइड करता है इनेशन
रिलेटेड टू पेंशन, वेलफेयर स्कीम्स एंड अदर सपोर्ट सर्विसेस। अगर मैं बात करूं कि सर्वििलेंस सिस्टम्स की। ठीक है? ये हमारी
बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्सेस यूज कर रही हैं और ये हमारी बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्सेस यूज़ करती हैं। आईटीबीपी यूज़ करती हैं। तो
ये भी क्या है? एक एआई इनेबल्ड सर्लेंस सिस्टम है। ठीक है? जो आपको समरी दे देता है दैट व्हाट हैपेंड होल डे और कोई
इनफिल्ट्रेशन हो कुछ भी हो तो ये ऑटोमेटिकली जो है आपको सिग्नल सेंड कर देता है। तो ये कुछ सिस्टम है जो यूज़ होते
और अगर ड्रोंस की बात करें तो बहुत वाइडली इंडियन आर्म्ड फोर्स जो है ड्रोंस को यूज़ कर रही हैं। तो ये कुछ एग्जांपल्स आप अपनी
स्क्रीन पर देख सकते हैं। ठीक है? चलिए अब एडवांटेजेस की बात करते हैं। तो ग्लोबली एआई इज एक्सपेक्टेड टू क्रिएट 10
करोड़ न्यू जॉब्स। आगे बात करेंगे कौन-कौन सी जॉब्स जो है आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस फ्यूचर के अंदर क्रिएट करने वाला है।
बूस्टिंग इन्वेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर बेसिकली हम एफडीआई की बात करें अगर फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट
चलिए देखें लार्ज इन्वेस्टमेंट एआई इंफ्रास्ट्रक्चर रेज़ इकोनमिक ग्रोथ जो भी हमारा इन्वेस्टमेंट होती है और एआई का
इंफ्रास्ट्रक्चर बनेगा उससे इकोनमिक ग्रोथ तो होगी। फॉर एग्जांपल अगर हम देखें adan ग्रुप प्लांस अ 100 बिलियन इन्वेस्टमेंट
इन एआई रेडी डाटा सेंटर्स बाय 2035 देन अगर हम बात करें Reliance Industries की तो ये वन ऑफ़ द लार्जेस्ट एi डाटा सेंटर
बना रहे हैं जामनगर अबाउट 3 गीगावाट ऑफ़ कैपेसिटी देन इफ वी टॉक अबाउट दी कंपनीज़ लाइक Amazon, Google, Microsoft दे ऑल आर
इन्वेस्टिंग बिलियंस ऑफ़ डॉलर इन इंडिया इन क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डाटा सेंटर्स में। ठीक है? तो वो भी क्या है जो हमारी
इकॉनमी को बूस्ट करेगा और जॉब क्रिएशन करेगा। सो इन इंडिया एआई एंड डिजिटल टेक्नोलॉजीस आर प्रोजेक्टेड टू क्रिएट
अराउंड 20 टू 30 लैक्स न्यू जॉब्स बाय 2030 इन एरियाज ऑफ डाटा साइंस एआई डेवलपमेंट एंड साइबर सिक्योरिटी। ठीक है?
तो ग्लोबली अगर हम वर्ल्ड में देखें तो 10 करोड़ जॉब्स होगी जिसमें 20 टू 30 लैक्स जो है सिर्फ इंडिया के अंदर जॉब्स जनरेट
होंगी। ठीक है? तो आई होप दिस इज़ क्लियर। पर हम समराइज़ करें। हमने देखा कि adानी इज़ गोइंग टू इन्वेस्ट 100 बिलियन
इन्वेस्टमेंट इन डेटा सेंटर्स। देन हमने देखा कि वर्ल्ड लार्जेस्ट एआई डाटा सेंटर्स जो है वो Reliance Industries बना
रही है। देन हमने देखा Amazon, Google, Microsoft ऑल आर इन्वेस्टिंग इन क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर इन इंडिया और इंडिया के
अंदर ही जो है 20 टू 30 लैक्स न्यू जॉब्स बनने वाली है। वेयर एज वेयर एज़ अगर हम ग्लोबली देखें तो अराउंड 10 करोड़ जॉब्स जो
है एई से क्रिएट होगी। अपार्ट फ्रॉम दिस हम कह सकते हैं इससे हमारी इकॉनमी बूस्ट होगी। हमें फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट
मिल रहा है। मतलब बाहर की कंपनीज़ इंडिया में इन्वेस्ट कर रही है लाइक Google, Amazon, मेटा, Microsoft। सो अब आगे बात
करते हैं जॉब्स की। की तो हमने जॉब देखा डेटा साइंटिस्ट, एआई इंजीनियर्स, टेक प्रोफेशंस, टेक प्रोफेशनल्स, एलएलएम
इंजीनियर्स। ठीक है? तो ये सारी जॉब्स जो हैं वो क्रिएट होंगी। तो आप इनको यूज़ कर सकते हैं अपने लेक्चरेट और जीडी के
पॉइंट्स में। हम बात करते हैं सर्वम एआई की। ठीक है? तो ये एक एआई है जो इंडिया में ही बना है। बोर का स्टार्टअप था। और
ये एक यूनिकॉर्न है। राइट? बिलियन ऑफ डॉलर्स की इसकी वैल्यू्यूएशन हो चुकी है। और इसकी खासियत क्या है कि ये जो है हमारे
इंडियन रीजनल लैंग्वेज है। मोर देन 22 लैंग्वेज में जो है ये आपको रिस्पांस दे सकता है। देन अगर हम बात करें जो जितने भी
इंडिया के अंदर स्मार्टफोनस और या फिर बेसिक फोंस भी यूज़ होते हैं तो ये उसके अंदर भी आराम से ईजीली वर्क कर सकता है।
तो दैट इज़ समथिंग यू हैव टू रिमेंबर सर्वम एi के बारे में। देन हमने देखा कि 2026 इन दिस ईयर हमने देखा कि एआई समिट भी जो है
वो इंडिया के अंदर हुए थे। जिसमें अराउंड 500 प्लस ग्लोबल एआई लीडर्स आए जिसमें फॉर एग्जांपल जैसे सैम ऑल्टमैन आए थे जो चैट
जीपीटी के फाउंडर हैं। देन सुंदर पिचाई हु वर्क्स इन Google लैंड एंड अदर लीडर आल्सो और इसी एआई समिट के अंदर हमने जो है वो
गलगोटिया यूनिवर्सिटी वाली कंट्रोवर्सी भी देखी थी। ठीक है? तो अब बात करते हैं हम लोग डिसएडवांटेजेस की। ठीक है? तो जॉब लॉस
एंड डिस्प्लेसमेंट ग्लोबली अराउंड 8 टू 9 करोड़ जॉब्स आर एक्सपेक्टेड टू बी डिस्प्लेस्ड ड्यू टू आर्टिफिशियल
इंटेलिजेंस एंड ऑटोमेशन। और इंडिया के अंदर अराउंड वन टू 2 करोड़ जॉब्स जो है वो लॉस होंगी। सो सेक्टर्स लाइक बीपीओ,
रिटेल, डाटा एंट्री, सॉफ्टवेयर जो है अराउंड वन टू 2 करोड़ जॉब्स जो है लॉस हो सकती है। दो अगर हम देखें अराउंड 10 करोड़
जॉब्स जो क्रिएट हो रही है बट साइमलटेनियसली 8 टू 9 करोड़ जॉब लॉस भी हो रही है। इंडिया के अंदर वन टू 2 करोड़ जॉब
जो है लॉस हो रहा है। और क्रिएट कितनी हो रही थी? अराउंड अराउंड 20 टू 30 लैक्स। तो अगर हम रेशियो देखें तो काफी ज्यादा जो है
हमें जॉब लॉस देखने को मिलेगा। ठीक है? तो एi बेस स्कैम्स और डीप फिक के बारे में बात करते हैं तो एi पावर फ्रॉड्स, डीप फिक
स्कैम्स आर इंक्रीजिंग रैपिडली इन इंडिया। इंडिया हैज़ रिकॉर्डेड 22 लाख साइबर फ्रॉड्स कंप्लेंट इन 2024 और और आपको एक
चीज और याद रखनी है 2025 में भी हमारे पास अराउंड 22 टू 24 लैक्स कंप्लेंट्स रजिस्टर्ड हुई है। तो आप बोल सकते हैं इन
लास्ट टू इयर्स और लास्ट थ्री इयर्स जो है हमने अराउंड 225 लैक्स ऑफ एव्री ईयर हमने जो साइबर फ्रॉड रिलेटेड कंप्लेंट्स को
रजिस्टर करा है। ठीक है? सो ये डाटा जो है वो एनसीआरबी का है। नेशनल क्राइम रिपोर्ट ब्यूरो। तो आप ये भी रेफरेंस दे सकते हैं।
सो एआई स्कैम कॉज बिलियंस ऑफ डॉलर्स लॉसेस एव्री ईयर। ठीक है? तो ये चीज हमें देखना है। देन अगर हम बात करें कंटेंट जनरेशन की
एआई टूल्स कैन राइट आर्टिकल डिजाइन ग्राफिक्स एंड जनरेट कोड अफेक्टिंग राइटर डिजाइनर एंड जूनियर प्रोग्रामर। ठीक है?
सपोज कोई इंजीनियर है या फिर डिजाइनर है जिसने अराउंड 10 टू 12 इयर्स दिए थे इस फील्ड के अंदर टू गेन एक्सपर्टीज। बट नाउ
बिकॉज़ ऑफ़ एआई वो सारी एक्सपर्टीज जो है वो कुछ सेकंड्स में ही जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जनरेट कर सकता है। तो ये जो है
कि इससे जितने भी कंटेंट जनरेशन की फील्ड थी उसमें काफी ज्यादा इफेक्ट देखने को मिला है। और हमें अपार्ट फ्रॉम कंटेंट
जनरेशन सॉफ्टवेयर में भी काफी देखने को मिला है। राइट? कोडिंग में एंड ऐप डेवलपमेंट एक्सट्रा में। तो ऑटोमेशन ऑफ
रिपीटिटी वर्क एआई रिप्लेसेस रूटीन टास्क लाइक डेटा एंट्री, बिलिंग रिपोर्ट, चेकिंग एंड कस्टमर सपोर्ट, रिड्यूसिंग द नीड फॉर
ह्यूमन वर्कर्स। जो ये टास्क थे वो हमारी टेक और फाइनेंस इंडस्ट्री करती थी जिससे वो काफी ज्यादा इफ़ेक्ट होगी। देन बीपीपीओ
एंड कॉल सेंटर्स एआई चैट बोट्स एंड वॉइस बोट्स रिप्लेस मेनी बेसिक कस्टमर सर्विस एंड रोल्स। तो आप ये यूज़ कर सकते हैं कि
जो हमारे बीपीओ और कॉल सेंटर्स थे इंडिया के अंदर जो कि फॉरेन कंपनीज़ के लिए भी काम करते थे। ठीक है? बट अब क्या आ गए हैं?
एआई चैट बॉट्स आ गए हैं। वॉइस बोट आ गए जो कि ह्यूमनली ऑल पॉसिबल असिस्टेंस जो है वो प्रोवाइड कर सकते हैं कस्टमर को। सो दैट
इज़ अ ग्रेट थ्रेट। देन हम बात करते हैं अदर डिसएडवांटेजेस की। रिड्यूस क्रिटिकल थिंकिंग हैवी डिपेंडेंस ऑन आर्टिफिशियल
इंटेलिजेंस और राइटिंग, कोडिंग एंड डिसीजन मेकिंग ह्यूमन एनालिटिकल एंड प्रॉब्लम सॉल्विंग स्किल। तो आज का एग्जांपल देखिए
तो क्या है? मोस्ट ऑफ़ द पीपल व्हाइल राइटिंग अ ईमेल आल्सो यूज़ दी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस। सो इससे क्या होगा? जो हमारी
ह्यूमन की क्रिटिकल और एनालिटिक थिंकिंग है उस पर बहुत ज्यादा इफ़ेक्ट पड़ेगा। देन एआई किल्स क्रिएटिविटी। तो फोटोग्राफी,
वीडियो जनरेशन, एडिटिंग एंड देन आपने देखा गिबली स्टाइल आर्ट, ड्राइंग्स जो जनरेट हो रही थी एआई से जितने भी आर्ट हैं वो सारी
क्या है? एआई की हेल्प से जनरेट हो रही है। इससे होगा क्या? जितने भी हमारे आर्टिस्ट हैं जिनकी क्रिएटिव थिंकिंग है
उस पर काफी ज्यादा इफ़ेक्ट देखने को मिलेगा हमें। ठीक है? देन बात करते हैं अगर हम मैन्युफैक्चरिंग एंड रोबोटिक सेक्टर की तो
एआई पावर्ड रोबोट्स कैन वर्क फास्ट एंड कंटीन्यूअसली इन फैक्ट्रीज रिड्यूसिंग डिमांड फॉर मैनुअल लेबर। तो चाइना इसका
एग्जांपल है दे हैव डेवलप्ड अ वेरी ग्रेट रोबोटिक फ़ोर्स। इन फ्यूचर डेफिनेटली इंडिया एंड अदर कंट्रीज विल आल्सो यूज़ द
एआई पावर्ड रोबोट्स फॉर फास्ट वर्क। इंडिया एआई इंपैक्ट समिट। राइट? तो हमने डिस्कस करा था कैसे समिट के अंदर जो है
ग्लोबल एआई लीडर्स मोर देन 500। तो हमने बात करी थी कैसे इसमें 500 प्लस ग्लोबल एआई लीडर आए थे इंक्लूडिंग सैम ऑल्टमैन
सुंदर पिचाई एक्सट्रा। सो इससे हम देख सकते हैं कि इंडिया इज़ आल्सो कंटीन्यूअसली प्रोग्रेसिंग टुवर्ड्स दी आर्टिफिशियल
इंटेलिजेंस। ठीक है? नाउ लेट्स टॉक अबाउट दी साइबर क्राइम थ्रेट्स व्हिच आर रिलेटेड टू आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस। ठीक है? तो
हमें ये एग्जांपल्स को याद रखना है बिकॉज़ हम अपने जीडी और अपने लेक्चर के अंदर इन्हें यूज़ करेंगे। व्हिच विल मेक आवर
पॉइंट्स इफेक्टिव। सबसे पहले क्या आता है? अरूप दी फेक फ्रॉड। तो इन 2024 अ फाइनेंस एंप्लॉय ऑफ द ब्रिटिश इंजीनियरिंग कंपनी
अरूफ वाज़ ट्रिक्ड थ्रू अ एआई जनरेटेड वीडियो कॉल इंपर्सनेटिंग। ठीक है? वीडियो कॉल इंपर्सनेटिंग सीनियर एग्जीक्यूटिव द
कंपनी लॉस्ट अबाउट $25 करोड़ इन फ्रॉडलैंड ट्रांजैक्शन। तो यहां पर हुआ क्या था? एक डीप फिक वीडियो बनाई गई जिसमें एक सीईओ जो
है अपने एंप्लॉय फाइनेंस एंप्लॉय से कह रहा है कि यू नीड टू ट्रांसफर दिस अमाउंट ऑफ़ मनी टू अ पर्टिकुलर बैंक अकाउंट इट्स
एजेंसी। एंड आप जानते हैं इट इज़ वेरी डिफिकल्ट टू डिस्टिंग बिटवीन अ रियल और डीप फेक वीडियो। पर हुआ क्या कि जो वो
एंप्लई था उसने ये अमाउंट जो है वो ट्रांसफर कर दिया फ्रॉडलैंड अकाउंट के अंदर देन Samsung इंटरनल डाटा लीक ठीक ठीक
है तो Samsung एंप्लाइजज़ अपलोडेड कॉन्फिडेंशियल सेमीकंडक्टर सोर्स कोड एंड इंटरनल मीटिंग डॉक्यूमेंट्स इनू चैट
जीपीटी ऑफ प्रोपराइटरी चीप डिज़ डाटा तो हमने बात करी थी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस क्या करता है डाटा कलेक्शन पे काम करता है
और जैसे आप उसको प्र्ट देते हो वो वैसे ही रिजल्ट जनरेट करता है तो इससे हुआ क्या जो सेमीकंडक्टर का सोर्स कोड और इंटरनल
मीटिंग के डॉक्यूमेंट्स थे वो चैट जीपीटी वो चैट जीपीटी के सर्वर पर अपलोड हो गए और जब किसी और दूसरे पर्सन ने उसे सर्च करा
चैट जीपीटी तो वो सारे रिजल्ट्स जो हैं उसे दिखाई दिए लाइक सेमीकंडक्टर का सोर्स कोड एंड इंटरनल मीटिंग डॉक्यूमेंट्स। तो
इससे जो है क्या है? Samsung को काफी लॉस फेस करना पड़ा। ठीक है? देन डीप सीक एआई डाटा लीक डीप सीक चैट बोर्ड डाटाबेस
एक्सपोज्ड ओवर 1 मिलियन चैट रिकॉर्ड्स एंड एपीआई कीज़ ड्यू टू वीक सिक्योरिटी सेटिंग्स। तो जो हम तो जितनी भी हमारी
चैट्स होती हैं भी जो पर्सनल चैट्स वगैरह भी होती है वो भी सारी जो है डीप सिक्स से लीक होगी। देन एआई बेस्ड स्कैम्स एंड डीप
फेक्स एआई पावर्ड फ्रॉड्स एंड डी फेक स्कैम्स आर इंक्रीजिंग रैपिडली। इंडिया हैज़ रिकॉर्डेड मोर देन 24 लैक्स ऑफ साइबर
फ्रॉड कंप्लेंट इन रिसेंट ईयर। तो याद रखना अराउंड 22 टू 24 लैक्स कंप्लेंट्स हमने 2024 सिमिलरली इन 2025 हमने फेस करी
हैं। ठीक? तो कौन-कौन से हैं? एआई वॉइस क्लोनिंग डीप फिक्स स्कैम्स। ठीक है? ओटीबी फ्रॉड्स होते हैं। तो ग्लोबली एआई
स्कैम कॉज़ बिलियंस ऑफ़ डॉलर लॉसेस इन एव्री ईयर। तो आपको ये पॉइंट्स याद रखने हैं कि हाउ एआई इज़ आल्सो यू नो थ्रेट टू
ह्यूमैनिटी एज़ वेल ऐज़ आवर इकोनमी। तो इकोनमी पे काफी ज्यादा इफ़ेक्ट जो है एआई का पड़ेगा। चलिए अब लॉज़ की बात करते हैं।
डिजिटल पर्सनल डाटा प्रोटेक्शन एक्ट 2023। ठीक है? तो प्रोटेक्ट पर्सनल डाटा ऑफ़ सिटीजन कंपनीज़ यूजिंग एआई मस्ट टेक कंसेंट
बिफोर कलेक्टिंग डाटा एंड इंश्योर प्रॉपर सिक्योरिटी। ठीक है? तो जब भी आप कभी भी कोई चैटबॉट को इंस्टॉल करेंगे अपने
स्मार्टफोन के अंदर तो होगा कि ऐप जो है फर्स्ट क्या होता है? परमिशन मांगता है। ठीक? देन अगर हम बात करते हैं भारतीय
न्याय संहिता 2023। यहां पर क्या है? पनिशमेंट फॉर चीटिंग फ्रॉड इंपोर्सनेट एंड साइबर क्राइम अगर आप एआई का यूज़ करते हुए
चीट करते हैं फ्रॉड करते हैं इंपोर्सनेट करते हैं किसी और को वीडियो के द्वारा टू इंपर्सनेट सम अदर पर्सन यूजिंग द डीप फेक
वीडियो तो वहां पर भी जो है आपको पनिशमेंट देखने को मिलती है किसमें भारतीय न्याय संहिता के अंदर हम बात करें ये रूल्स नहीं
थे ठीक है कि अगर आप डीप फेक वीडियो बना के किसी को ट्रीट कर रहे हो ये सब तो ये सारी चीजें ऐड हुई लॉ के अंदर देन
मिनिस्ट्री ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड आईटी डायरेक्टेड प्लेटफार्म लाइक सोशल मीडिया कंपनीज़ टू स्ट्रिक्टली रिमूव एआई जनरेटेड
डीप फेक कंटेंट ्स एंड वांट ऑफ लीगल एक्शन फॉर नॉन कंप्लाइट। तो बात करते हैं हम व्हाई एआई बिकम सो पॉपुलर सोर्ली। ठीक है?
तो फास्ट प्रोसेसिंग एआई कंप्लीट टास्क इन सेकंड्स सच एज एनालाइजिंग थाउजेंड्स ऑफ रिकॉर्ड्स और जनरेटिंग रिपोर्ट्स
इंस्टेंटली। एंड देन ऑटोमेशन। तो एआई जो है ऑटोमेट करता है टास्क लाइक डाटा एंट्री, सॉफ्टवेयर टेस्टिंग, बैंकिंग,
टास्क लाइक केवाईसी, ट्रांजैक्शन, चेकक्स एंड ऑफिस वर्क, पे रोल। तो कितने सारे टास्क हैं देखिए हमारे पास। ठीक? देन 24/7
अवेलेबिलिटी। एआई चैटबॉट प्रोवाइड कस्टमर सपोर्ट एनी टाइम विदाउट ब्रेक्स हाई एक्यूरेसी एआई रिड्यूसेस एरर फॉर एग्जांपल
कोडिंग मेडिकल डायग्नोसिस एंड फ्रॉड डिटेक्शन इन बैन देन इंक्रीस प्रोडक्टिविटी एआई हेल्प्स
राइट ईमेल्स क्रिएट प्रेजेंटेशन डिज़ ग्राफिक्स मैनेज लार डाटा क्विकली तो अगर हम इसको समराइज़ करें तो हमारा जो एआई है
वो सॉफ्टवेयर टेस्टिंग बैंकिंग सिस्टम में यूज़ हो रहा है और हमारी डेली लाइफ के अंदर जहां पर हम चाहे वो प्रेजेंटेशन बनाना हो
पीपीटी जनरेट करना हो ईमेल लिखनी हो राइट और कस्टमर सपोर्ट के अंदर भी जो है हमें एआई देखने को मिल रहा है और ये क्या है
कुछ सेकंड्स में ही हमें रिजल्ट दे देता है। तो इसलिए जो है कुछ रीज़ंस थे जो एआई जो है काफी ज्यादा पॉपुलर हो गया। और जीडी
की तरफ बढ़ते हैं। व्हिच एरिया विल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इंपैक्ट मोस्ट इन इंडिया एंड ग्लोबली इकोनमिक ग्रोथ एंड
ट्रांसफॉर्मेशन। तो इकोनमिक ग्रोथ में हमने देखा था कैसे? तो इकोनमिक ग्रोथ एंड ट्रांसफॉर्मेशन हमने काफी सारे एग्जांपल
देखे जहां पे हमने देखा adानी Industries इस गोइंग टू इन्वेस्ट अराउंड 100 बिलियंस ऑफ़ डॉलर्स इन इंडिया। देन Reliance
Industries सेटिंग अप वन ऑफ़ द लार्जेस्ट डाटा सेंटर इन इंडिया अह जामगर। देन हमने देखा फॉरेन कंपनीज़ लाइक Google, Ma, Apple
एंड Microsoft आर इन्वेस्टिंग इन क्लाउड कंप्यूटिंग एंड क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर इन इंडिया। राइट? सो ये कुछ एग्जांपल्स हैं।
तो एंड अपार्ट फ्रॉम दैट अगर ट्रांसफॉर्मेशन की बात करें तो हमने देखा कि कैसे एआई जो है वो बैंकिंग इंडस्ट्री
में काम करता है। ठीक है? SBI एंड HDFC आर यूजिंग टू डिटेक्ट दी एआई फ्रॉड्स। देन हमने देखा था डिफेंस इंडस्ट्री में जहां
पर जो है एआई चैटबॉट बनाए गए फॉर वेटर्न्स। और हमने देखा कि कैसे सर्विलेंस कैमरास एंड सीसीटीवी कैमरास देन ड्रोंस
हमने देखे। तो ये सारे क्या है? ट्रांसफॉर्मेशन में है और इकोनमिक ग्रोथ तो होगी। ठीक है? तो ये सब किस में आ
जाएगा? ट्रांसफॉर्मेशन में। तो देन अगर हेल्थ केयर सेक्टर की बात करें तो ये कुछ एग्जांपल्स हैं। आप देख सकते हैं। हेल्थ
केयर सेक्टर की बात करें तो ये कुछ एग्जांपल्स हैं कि कहां-कहां पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जो है यूज़ हो रहा
है। सो दीज़ वर सम इंटरेस्टिंग पॉइंट्स जो आप अपने अगर जीडी के अंदर यूज़ करते हैं इकोनमिक ग्रोथ एंड ट्रांसफॉर्मेशन से
रिलेटेड तो डेफिनेटली इट विल गिव यू एडवांटेज। अगर बात करते हैं एंप्लॉयमेंट एंड जॉब डायनामिक्स की तो यू कैन गिव
एग्जांपल दैट हाउ ग्लोबली एआई इज़ गोइंग टू प्रोड्यूस अराउंड 10 करोड़ जॉब्स रिलेटेड टू डेटा साइंटिस्ट एआई इंजीनियर टेक
प्रोफेशनल एलएलएम इंजीनियर्स राइट देन आप बात कर सकते थे कि इन इंडिया स्पेशली अराउंड 20 टू 30 लैक्स जॉब्स आर गोइंग टू
क्रिएट देन यहां पर बात करिए व्हिच एरिया विल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इंपैक्ट द मोस्ट पॉजिटिव पॉइंट्स थे जो आपने
एंप्लॉयमेंट से रिलेटेड बताए राइट देन आप बता सकते हैं कि कैसे अराउंड 9 करोड़ जॉब का डिस्प्लेसमेंट होगा इंडिया के अंदर
अकेले ही अराउंड वन टू टू करोड़ जॉब्स जो है लॉस हो सकती है। देन अदर दैन दैट आप बता सकते हैं कि कैसे जो है यह
क्रिएटिविटी को इंपैक्ट करता है। राइट? तो जितने भी हमारे आर्टिस्ट हैं उनको भी बहुत ज्यादा इससे क्या है और जितने भी हमारे
आर्टिस्ट थे जो क्रिएटिविटी से रिलेटेड काम करते थे उनको भी काफी ज्यादा इंपैक्ट देखने को मिलेगा। उन तो उनकी भी जॉब्स में
काफी ज्यादा इंपैक्ट देखने को मिलेगा। देन हमने देखा था वीडियो जनरेशन और वीडियो कंटेंट की फील्ड हो चाहे वो ग्राफिक
डिजाइनिंग, वीडियो जनरेशन, फोटोग्राफी। तो ये सारी फील्ड के जो जॉब्स हैं, एंप्लॉयमेंट है उससे भी काफी ज्यादा
इंपैक्ट देखने को मिलेगा। राइट? देन आप कुछ एग्जांपल्स को यूज़ कर सकते थे। लाइक फसल एआई और सर्वम एआई का। तो ये क्या है?
इंडियन बेस्ड एi स्टार्टअप है। ठीक है? और ये कुछ एग्जांपल्स और हैं जो आप अपने जीडी के अंदर यूज़ कर सकते हैं कि ये जब एआई
इंडिया के अंदर बनेंगे तो जॉब्स भी तो क्रिएट करेंगे ना। राइट? देन हमारे पास आता है कन्वीनियंस, प्रोडक्टिविटी एंड
एफिशिएंसी। तो देखिए कन्वीनियंस क्या होता है? एडवांटेजेस, फीचर्स। ठीक है? जो हमें मिलते हैं एआई से। तो इस पे काफी सारे
पॉइंट्स हैं आप बात कर सकते हैं। सच एज एनालाइजिंग थाउजेंड्स ऑफ रिकॉर्ड्स और जनरेटिंग रिपोर्ट्स इंस्टेंटली। ठीक है?
देन ऑटोमेशन की हमने बात करी थी। चाहे वो केवाईसी करना हो, ऑफिस के जो डेली टास्क होते हैं, सॉफ्टवेयर टेस्टिंग हो, कोडिंग
करना हो, देन कस्टमर सपोर्ट एनी टाइम एंड हाई एक्यूरेसी। राइट? कन्वीनियंस में आप क्या-क्या बता सकते हैं? राइट? राइटिंग
ईमेल्स, क्रिएट प्रेजेंटेशन, डिज़ ग्राफिक्स, मेजेस लार्ज डाटा क्विकली। इससे क्या होगा? प्रोडक्टिविटी बहुत
ज्यादा एनहांस होगी क्योंकि ऑटोमेशन के टास्क क्या है? बहुत ज्यादा घंटे लेते थे। बट अब क्या है? वो सेकंड्स में हो सकते
हैं। और इससे ओवरऑल एफिशिएंसी कंपनी की डेफिनेटली इंप्रूव होगी। तो ये कुछ पॉइंट्स थे जो आप डिस्कस कर सकते हैं अपने
[संगीत] जीडी के अंदर। देन अगर हम बात करते हैं 5G इंटरनेट की। ठीक है? तो हम यहां पर क्या है? 5G इंटरनेट पर बात
करेंगे और एंड में जो 6G पर हमारा काम चल रहा है। ठीक है? तो फर्स्ट हम क्या करेंगे? 5G इंटरनेट पर बात करेंगे और एट
दी एंड हम 6G [संगीत] के ऊपर भी बात करने वाले हैं। ठीक है? तो तो 5G क्या है? डायरेक्ट लेक्चर के अंदर टॉपिक आता है और
इससे रिलेटेड जीडी भी आया हुआ है। तो हम वो भी डिस्कस करेंगे। तो 5G 5G जी फॉर जनरेशन। फिफ्थ जनरेशन इज़ द लेटेस्ट मोबाइल
नेटवर्क टेक्नोलॉजी दैट प्रोवाइड्स वेरी हाई स्पीड इंटरनेट अल्ट्रा लो लेटेंसी एंड दी एबिलिटी टू कनेक्ट मिलियंस ऑफ़ डिवाइसेस
समलटेनियसली। अगर हम प्लान की बात करें तो 299 टू 349 5G प्लान आपको इंडिया में मिल जाता है। कंपनीज़ पे बात कर लेते हैं।
Reliance Jio ठीक है? तो यस वाइडली अवेलेबल 5G अक्रॉस इंडिया विथ स्ट्रांग कवरेज देन Airtel और Vodafone और Idea
राइट V आ जाता है। हैज़ लॉन्च 5G इन सम रीजन एंड कंटीन्यूअसली एक्सपेंडिंग। BSNL की बात करें जो कि एक इंडिया का पीएसयू
है। तो यहां पर अभी भी 4G टेक्नोलॉजी का यूज़ हो रहा है। 5G इंटीग्रेट नहीं हुआ है। ठीक है? तो पहले हम क्या करते हैं? जीडी
के टॉपिक को देख लेते हैं। क्या होगा हमें? बेटर अंडरस्टैंडिंग होगी पूरे टॉपिक को समझने में। ठीक है? तो जीडी
क्या आया था? वि सेक्टर विल बेनिफिट द मोस्ट फ्रॉम द एडवांसमेंट ऑफ 5G टेक्नोलॉजी।
फर्स्ट सेक्टर कौन सा है? डिफेंस सेक्टर। देन हमारा एजुकेशन सेक्टर और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री। ठीक है? तो एक-एक करके हम
तीनों लीड पर बात करते हैं। ठीक है? ठीक है? तो एंटरटेनमेंट सेक्टर से स्टार्ट करते हैं। तो सबसे पहले क्या होता है? बफर
फ्री मूवीज़ एंड शोज़। 5G अलाउ स्मूथ स्ट्रीमिंग ऑन प्लेटफार्म लाइक Netflix, YouTube विदाउट बफरिंग। डाउनलोड स्पीड कैन
रीच वन टू 10 GB. सो इवन लार्ज HD मूवीस डाउनलोड इन फ्यू सेकंड्स। ठीक है? देन हम बात करें बेटर वीआर एंड एआर एक्सपीरियंस।
5G इंप्रूव्स वर्चुअल रियलिटी, ऑगमेंटेड रियलिटी, गेमिंग फील्ड में और कंटेंट फील्ड में जो है जो वीआर और एआर कंटेंट
है। बिकॉज़ इट रिक्वायर अ लॉट ऑफ़ इंटरनेट एंड स्पीड। तो बिकॉज़ ऑफ़ दिस 5G क्या करता है? अनेबल करता है यार। देन आपने ऑब्ज़र्व
करा होगा कि आप IPL को भी जो है अराउंड 180 टू 360 व्यू में भी आप देख सकते हैं। ठीक है? क्यों? बिकॉज़ ऑफ़ दी 5G इंटरनेट
टेक्नोलॉजी। नाउ इंप्रूव्ड क्लाउड गेमिंग। राइट? क्लाउड गेमिंग मींस क्या होता है? गेम्स रन ऑन रिमोट सर्वर इंस्टेड ऑफ योर
डिवाइस प्लेटफार्म लाइक PlayStation नाउ हैज़ अ हाई ग्राफिक्स गेम्स लाइक PUBG बैटल फ्रंट, कॉल ऑफ DUT, वॉर ज़ोन और कौन-कौन सी
है? वेलरेंट हो गई। ठीक है? ये सारी क्या है गेम्स? हाई स्पीड इंटरनेट चाहिए होता है इनके लिए। और ये जो है लो लेटेंसी
डिमांड करती है जो कि फोर जो कि 5G टेक्नोलॉजी में आपको देखने को मिलती है। देन स्मूदर ऑनलाइन गेमिंग। ठीक है? लो
लेटेंसी मींस ऑलमोस्ट ज़ीरो लाख व्हिच इज़ेंट फॉर मल्टीप्लेयर एंड कॉम्पिटिटिव गेम्स लाइक GTF 5 ऑनलाइन। देन लाइव
स्पोर्ट्स स्ट्रीमिंग इन अल्ट्रा एसडी यूज़र्स कैन स्ट्रीम लाइव क्रिकेट और फुटबॉल मैचेस इन 4K एंड नाउ इन इवन 8K
रेल्वेशन विदाउट इंटररपशन इट इज़ पॉसिबल बिकॉज़ ऑफ़ 5G टेक्नोलॉजी। अगर हम इसको समराइज़ करें तो बफर फ्री मूवीस एंड शोज़ आप
इज़ली देख सकते हैं इन 4K एंड HD क्वालिटी टीटी प्लेटफॉर्म्स। देन हमने देखा कैसे हम एआर और VR एक्सपीरियंस बेटर ले सकते हैं
बिकॉज़ ऑफ़ 5G टेक्नोलॉजी। देन इंप्रूव्ड क्लाउड गेमिंग और ऑनलाइन गेमिंग जो होती है वो काफी स्मूथली और लो लेटेंसी के साथ
हम देख सकते हैं विद 5G टेक्नोलॉजी। देन लाइव स्ट्रीमिंग एंड स्पोर्ट्स आप IPL के एग्जांपल्स दे सकते हैं। फुटबॉल के
एग्जांपल सो यू कैन वॉच डिफरेंट टाइप्स ऑफ़ स्पॉट्स ईज़ली इन 4K एंड 8K विदाउट एनी इंटरप्शन। चलिए अब बात करते हैं हम
डिफरेंट सेक्टर की। राइट? तो रियल टाइम ड्रोन कंट्रोल। सो मिलिट्री ड्रोंस कैन बी कंट्रोलोल्ड इंस्टेंटली विद वेरी लो डिले।
राइट? एग्जांपल सर्विलेंस ड्रोंस यूज़्ड फॉर बॉर्डर मॉनिटरिंग। हमने देखा था अभी एग्जांपल्स। राइट? तो जो एi बेस्ड ये
ड्रोंस हमने देखे हैं ये भी जो है वो 5G टेक्नोलॉजी का यूज़ करते हैं। ठीक है? देन हम देख सकते हैं यहां पर डिफेंस सेक्टर
में एक रियल टाइम ड्रोन कंट्रोल जगगा। राइट? जगगा 5G अनेबल सर्िलेंस यूएवीस हैं जो हमारी आर्म्ड फोर्सेस द्वारा यूज़ किए
जाते हैं। देन सिक्योर डाटा एंड ट्रांसफर। 5G प्रोवाइड्स इंक्रिप्टेड एंड हाई स्पीड कम्युनिकेशन फॉर मिलिट्री ऑपरेशंस टू देन
मिलिट्री देन फास्ट मिलिट्री कम्युनिकेशन सिक्योर कम्युनिकेशन सिस्टम अलाउज़ इंस्टेंट ट्रांसफ़ेशन ऑफ बैटल फील्ड डाटा।
देन स्मार्ट सर्लेंस सिस्टम राइट बीएसएफ लार्ज सीसीटीवी एआई सर्लेंस रोल आउट ये सारे किस पर 5G टेक्नोलॉजी पर ही काम करते
हैं। देन देन ऑटोनॉमस डिफेंस व्हीकल वेरियस एजेंसीज इन आर्म्ड फोर्स यूज़ दिस व्हीकल राइट दे ऑल आल्सो वर्क अंडर दी 5G
कनेक्टिविटी। तो हमने देखा कि कैसे रियल टाइम ड्रोन कंट्रोल सिस्टम हो चाहे वो यूएवीस हो? उनके लिए हमें क्या है? 5G
टेक्नोलॉजी का यूज़ होता है। देन अगर आपको कम्युनिकेशन सिक्योर करना है, डाटा चाहिए आपको बैटल फील्ड का या फिर स्मार्ट
सर्विलेंस सिस्टम या सीसीटीवी कैमराज़ हो, देन ऑटोनॉमस डिफेंस व्हीकल हो तो इन सब जगह पर जो है हमें 5G की इन सब जगह पर जो
है हमें 5G इंटरनेट की जरूरत पड़ती है। अपार्ट फ्रॉम दिस आपने देखा होगा जो हमारे आर्म्ड फोर्स के पर्सनल है जो पोस्टेड हैं
ले लद्दाख और वेरी रिमोट एरियाज ऑफ नॉर्थ ईस्ट। ठीक है? तो वो ईजीली क्या कर सकते हैं? अपनी कम्युनिकेट कर सकते हैं
फ्रेंड्स से और फैमिली से विद दी हेल्प ऑफ दी 5G इंटरनेट टेक्नोलॉजी। राइट? तो ये कुछ पॉइंट्स हैं जो आप अपने जीडी के अंदर
यूज़ कर सकते हैं। देन अगर हम बात करें एजुकेशन सेक्टर की। ठीक है? फास्टर डाउनलोड ऑफ स्टडी मटेरियल। स्टूडेंट कैन
डाउनलोड लार्ज पीडीएफ बुक्स रिकॉर्डेड लेक्चर एंड असाइनमेंट इंस्टेंटली। राइट? देन रूरल एजुकेशन इंप्रूवमेंट हाई स्पीड
इंटरनेट इन रूरल एरियाज इंप्रूव्स एक्सेस टू डिजिटल एजुकेशन। और हमारे इंडिया का डिजिटल प्रोग्राम भी चल रहा है। डिजिटल
इंडिया राइट? तो उसमें क्या है? ये हेल्प करेंगे। देन हाई क्वालिटी वीडियो मीटिंग्स ऑनलाइन क्लासेस लाइक ज़ूम, Google मीट बिकम
क्लियरर एंड मोर स्टेबल। तो हमने देखा था कैसे कोविड 19 में वेरियस स्टूडेंट हैव अटेंडेड देयर क्लासेस ठीक है ऑनलाइन स्कूल
की चाहे वो कॉलेजेस की ठीक है और एग्जाम भी हमने जो है ZM और Google मीट की हेल्प से दिए देन स्मूथ लाइव ऑनलाइन क्लासेस ठीक
है प्लेटफॉर्म्स लाइक फिजिक्स वाला YouTube चैनल्स Unacademy एंड वेरियस अदर प्लेटफार्म ठीक है जितने भी हमारे ऑनलाइन
एजुकेशन जितने भी हमारे ऑनलाइन एजुकेशन एप्स और चैनल्स हैं तो वहां पर आप ईजीली क्या है कंटेंट को देख सकते हैं 2x 3x में
HD में 4K में और डाउनलोड कर सकते हैं व्हाई बिकॉज़ ऑफ़ दी 5G इंटरनेट टेक्नोलॉजी एंड देन वर्चुअल लैब्स एंड सिमुलेशन 5G
सपोर्ट्स रियल टाइम साइंस एक्सपेरिमेंट एंड 3D सिमुलेशन फॉर सब्जेक्ट्स लाइक फिजिक्स एंड बायोलॉजी ब्लेंडर सॉफ्टवेयर
जो कि बहुत ज्यादा इंटरनेट रिक्वायर करते हैं वो आप इज़ली रन कर सकते हैं विद दी 5G इंटरनेट टेक्नोलॉजी
ठीक है तो अगर समराइज़ करें तो हमने देखा कि कैसे आप स्टडी मटेरियल पीडीएफ को बुक्स को डाउनलोड कर सकते हैं इंस्टेंटली इन
जस्ट फ्यू सेकंड्स रूरल एरिया की अगर हम बात करें तो वहां पर 5G इंटरनेट जाने की वजह से जो है हमारा डिजिटल लिटरेसी
इंप्रूव हुआ है डिजिटल एजुकेशन इंप्रूव हुआ है। ठीक है? देन अगर हाई क्वालिटी वीडियो मीटिंग्स हमने देखा ज़ूम कॉल,
Google मीट पे इज़ली अटेंड कर सकते हैं कॉलेज और स्कूल गोइंग स्टूडेंट। देन हमने देखा स्मूथ लाइव ऑनलाइन क्लासेस एंड
वर्चुअल लैब्स एंड सिमुलेशन। तो ये कुछ एग्जांपल्स थे जो एजुकेशन सेक्टर के थे। अपार्ट फ्रॉम एजुकेशन, डिफेंस एंड द
एंटरटेनमेंट सेक्टर। कुछ और एडवांटेजेस हम देख लेते हैं। तो स्पीड अप टू 10GB तो स्पीड अप टू 10GB। ठीक है? तो 10GB पर
सेकंड यहां पर स्पीड देखने को मिलती है। व्हिच इज़ 100 टाइम फास्टर देन 4G टेक्नोलॉजी। देन अल्ट्रा लो लेटेंसी पर
हमने बात करी थी जो कि गेमिंग में हेल्प करती है। स्मूथ 4K एंड 8K वीडियो स्ट्रीमिंग बेटर सपोर्ट फॉर ऑटोमेशन एंड
रोबोटिक्स देन इंप्रूव्ड टेलीमेडिसिन एंड रिमोट ऑपरेशंस। सो इंस्टेड ऑफ गोइंग फिजिकली आप क्या कर सकते हैं? यूजिंग दी
हाई स्पीड इंटरनेट आप यूजिंग दी ज़ूम कॉल और Google mट जो है उनसे कंसल्ट कर सकते हैं। देन आप ऑनलाइन मेडिसिंस को भी मंगा
सकते हैं। उसके लिए भी इंटरनेट का रिक्वायरमेंट होता है। राइट? तो वहां पर भी जो है इसकी हेल्प मिलेगी। देन फास्ट
डाउनलोड्स एंड अपलोड्स आप देख सकते हैं। तो हमने डाउनलोड्स पर तो काफी बात करी है। अपलोड पर भी बात कर सकते हैं। ठीक है?
अपलोड है। राइट? अपलोडिंग स्पीड भी यहां पर काफी ज्यादा है। तो अगर आप कोई डॉक्यूमेंट्स को अपलोड करना चाहते हैं और
आपने देखा होगा काफी सारी कंपनीज़ जो है अपने डाटा को कहां है ऑनलाइन अपलोड करती है। ठीक है? और हम डेली लाइफ में भी काफी
सारी चीजें जो है अपनी इमेजेस हो गए, वीडियोस हो गए वो अपलोड करते हैं। तो उस हिसाब से हमें एक अच्छे इंटरनेट की
रिक्वायरमेंट होती है। चैलेंजेस पर भी बात कर लेते हैं। हाई इंफ्रास्ट्रक्चर कॉस्ट इंस्टॉलिंग थाउजेंड्स ऑफ स्मॉल टावर। ठीक
है? तो यहां पर कॉस्ट बहुत ज्यादा है। एंड हाई इंफ्रास्ट्रक्चर कॉस्ट इंस्टॉलिंग थाउजेंड्स ऑफ स्मॉल टावर्स। इफ यू आर
इंस्टॉलिंग थाउजेंड्स ऑफ स्मॉल टावर्स, इट विल कॉस्ट यू बिलियंस ऑफ डॉलर। ठीक है? तो यही एग्जांपल था कि जो BSNL था वो अभी 4G
टेक्नोलॉजी है। 5G इंटीग्रेट नहीं कर पाया। देन एक्सपेंसिव स्पेक्ट्रम लाइसेंसिंग फॉर टेलीकॉम कंपनीज़। सो तो
जितने भी हमारी प्राइवेट कंपनीज़ हैं इनको क्या होता है? एक लाइसेंस लेना पड़ता है। दैट वी कैन यूज़ अ पर्टिकुलर फ्रीक्वेंसी।
सो रीज़न क्या है? यहां पर जितने भी हमारे टावर्स लगते हैं, राइट? इनके ऊपर क्या होता है? स्मॉल एक छोटा ट्रांसमीटर होता
है। ट्रांसमीटर और रिसीवर। बेसिकली एक रडार होता है जो फ्रीक्वेंसी को क्या करता है? इमिट करता है। तो अगर आप इंडिया के
अंदर ऐसी फ्रीक्वेंसीज़ को इमिट करना चाहते हैं, तो आपको क्या है? एक लाइसेंस लेना पड़ेगा। देन हाई कॉस्ट ऑफ़ 5G स्मार्टफोनस।
हमने बात करा 5G इंटरनेट की राइट? बट 5G इंटरनेट जो है वो हर एक स्मार्टफोन के अंदर नहीं चल सकता। ठीक है? ऐसा
स्मार्टफोन बाय करना पड़ेगा जिसमें 5G सपोर्ट हो। ठीक है? तो मिनिमम अगर आप कोई भी फोन देखेंगे जो 5G इनेबल्ड होगा वो
कॉस्ट करेगा आपको 7000 से अबव। ठीक है? 7000 से नीचे कोई भी 5G फोन नहीं आता है। देन लिमिटेड कवरेज इन रूरल एरियाज। ठीक
है? देन हमारे पास आता है सिक्योरिटी एंड साइबर थ्रेट्स। तो हमने देखा था कैसे? इन लास्ट टू इयर्स इंडिया हैज़ रिकॉर्डेड
अराउंड 24 लैक्स ऑफ़ साइबर थ्रेट केसेस। ठीक है? तो जैसे इंटरनेट का यूसेज बढ़ेगा, स्पीड बढ़ेगी तो डेफिनेटली थ्रेट्स भी जो
है उसके साथ आएंगे। डेफिनेटली जो है उससे साइबर थ्रेट भी जो है इनक्रीस होंगे। हाई देन हाई एनर्जी कंजमशन। ठीक है? तो जितने
भी हमारे टावर्स जो हैं फंक्शन करते हैं उसके लिए हमें क्या होता है? इलेक्ट्रिसिटी की नीड होती है। तो यहां पर
काफी ज्यादा इलेक्ट्रिसिटी की नीड देखने [संगीत] को मिलती है। ओके? तो ये कुछ पॉइंट्स थे जो कि हमने 5G से रिलेटेड
देखे। नाउ अब हम बात करते हैं 6G [संगीत] पे। तो सो फार 6G के ऊपर लेक्चर रेट तो नहीं देखने को मिला है बट फिर भी बिकॉज़ इन
फ्यूचर डेफिनेटली 6G के ऊपर भी जो है लेक्चर और जीडी का टॉपिक आ सकता है। तो बस हम ये एक स्लाइड देख लेते हैं राइट? जिससे
हमें बेसिक अंडरस्टैंडिंग हो जाएगी अबाउट 6G। तो देखिए Samsung एक्टिवली काम कर रहा है 6G टेक्नोलॉजी पर। देन हम यहां पर अगर
अपनी इंडीजीनस Reliance Jio की बात करें तो ये भी जो है एक्टिवली 6G पर काम कर रही है। ठीक है? तो ये एक अच्छा पॉइंट मिल
सकता है कि जो हम अपने जीडी में यूज़ कर सकते हैं कि हमारी जो इंडीजीनस कंपनीज़ भी हैं वो भी जो है एआई और जो है टेलीकॉम
इंफ्रास्ट्रक्चर को डेवलप करने में हेल्प कर रही है। देन 6G राइट सिक्स्थ जनरेशन इज़ द नेक्स्ट जनरेशन ऑफ़ वायरलेस कम्युनिकेशन
टेक्नोलॉजी दैट विल कम आफ्टर 5G एंड इट इज़ एक्सपेक्टेड टू प्रोवाइड एक्सट्रीमली हाई स्पीड अप टू 100 टाइम फास्टर देन 5G। तो
यहां पर क्या था? 10GB था। तो उससे 100 टाइम्स फास्टर जो होगी यहां पर देखने को मिलेगा 6G इंटरनेट। तो यहां पर क्या है?
नियरली जीरो लेटेंसी देखने को मिलेगी। सो यहां पर आप देख सकते हैं कि गवर्नमेंट ऑफ इंडिया आल्सो ल्च भारत 6G विज़ टू डेवलप
इंडजीनस 6G टेक्नोलॉजी देन 6G इज़ एक्सपेक्टेड अराउंड 2030 ठीक है देन यहां पर क्या है होलोग्राफिक कम्युनिकेशन जो
हमने मूवीज़ में देखा होगा राइट ऐसी चीजें तो वो भी अब अनेबल होगा अभी क्या है एआर और वीआर एक्सपीरियंस तो 5G इनेबल करता है
बट बट यहां पर जो होलोग्राफिक कम्युनिकेशन है वो भी पॉसिबल नहीं होगा ठीक है तो [नाक से की जाने वाली आवाज़] जो 6G
टेक्नोलॉजी आएगी उससे ये चीज़ भी पॉसिबल होगी देन अपार्ट फ्रॉम Reliance Jio जो हमारा Airtel है राइट B Airtel वो भी
हैवली इन्वेस्ट कर रहा है हमारी 6G टेक्नोलॉजी में देन मच हायर स्पीड तो अगर 6G की हम बात करें तो वहां पर स्पीड हमें
1TB भी देखने को मिल जाती है। इन फ्यूचर में मे बी जो हमारी 6G की स्पीड है वो हमें 1TB तक भी देखने को मिल सकती है। ठीक
ये कुछ पॉइंट्स थे 6G से रिलेटेड। तो आपने देखा होगा कैसे हमारे इंडिया का मिशन है भारत 6G विज़न कंपनीज़ हैं जो Reliance हो
चाहे वो Airtel देन हमारी जो इंडिजीनेंस कंपनीज़ हैं वेदर इट्स Reliance और B Airtel कि फॉरेन कंपनीज़ लाइक Samsung और
Hui भी जो है कंटीन्यूअसली 6G पे काम कर रही है। और 6G कब तक आ जाएगा बाय 2030। एक स्पेशल फीचर था कि होलोग्राफिक
कम्युनिकेशन भी मे बी पॉसिबल [संगीत] हो। तो ये कुछ पॉइंट्स थे 6G से रिलेटेड। ठीक है? यहां पर हमारे पास एक टॉपिक आता है
फ्यूचर ऑफ़ स्मार्टफोन। ठीक है? तो [संगीत] ये हमें दो बोर्ड में देखने को मिला है टॉपिक। तो यहां पर हम फ्यूचर ऑफ
स्मार्टफोन लेक्चर टॉपिक में क्या-क्या चीजें ऐड कर सकते हैं। ठीक है? फ्लिप फोन आपने देखा है फ्यूचर के अंदर अब जो फोंस
आने वाले हैं वो बहुत ज्यादा कॉम्पैक्ट होने वाले हैं। तो उसमें एक फ्लिप फोन आ जाता है। फोल्डिंग फोन आपने देखा होगा
Samsung की फोल्डिंग फोन सीरीज और अगर हम बात करें वेरियस अदर कंपनीज़ ने जो है फ्लिप और फोल्डिंग फस को निकाला है। चाहे
वो चाहे वो Huawei कंपनी हो और अब जो Apple भी है वो हैवली इन्वेस्ट कर रहा है फ्लिप और फोल्डिंग फोन की रिसर्च में। तो
डेफिनेटली इन फ्यूचर जो है हमें फ्लिप और फोंस जो है काफी ज्यादा देखने को मिलेंगे। देन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आपने देखा
होगा कैसे Galaxy AI राइट देन अगर Google के फोंस की बात करें तो वहां पर जेमिनाई इंटीग्रेट होकर आ रहा है एंड देन Apple
इंटेलिजेंस इन Apple फ़ोंस हम बात करें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की तो वो हर एक फोन में अभी हमें देखने को मिल रहा है ठीक
है देन फ्यूचर में क्या होने वाला है फ्लिप फोन फोल्डिंग फस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्या हमने अभी देखा 6G बाय
2030 आ जाएगा जो हमारे फ्यूचर फोनस होंगे उसमें क्या होगा 6G की स्पीड होगी और अगर 6G की स्पीड होगी तो जितने भी हमने
एडवांटेजेस डिस्कस और अगर 6G की स्पीड होगी तो हम बता सकते हैं वहां पर क्या है होलोग्राफिक कम्युनिकेशन भी पॉसिबल होगा
और स्पीड जो है 1 टेराबाइट तक भी क्या पता रीच करे। अगर हम बात करें यहां पर एक इंटरेस्टिंग फीचर है नो सिम कार्ड। यहां
पर कोई सिम कार्ड नहीं होगा। यहां पर क्या होगा? एक ई सिम कार्ड होगा जो आपके फोन के अंदर ही इंटीग्रेट होगा। राइट? तो इससे
होगा क्या कि अब आपको फिजिकली तो इससे होगा क्या? आपको फिजिकली जाकर सिम बाय करने की जरूरत नहीं है। फोन के अंदर ही तो
फोन के अंदर ही क्या है? तो सिम इंटीग्रेट होगा। देन एi बेस्ड कैमरास देखने को मिलेंगे। ठीक है? और अभी भी आपने देखा
होगा इन वेरियस फ़ों्स चाहे वो Samsung हो, Apple हो। तो आपने अभी भी देखा होगा वेरियस फ़स लाइक Samsung हो और Vivo वहां
पर क्या ऑलरेडी एi बेस्ड कैमरा देखने को मिलते हैं जो हमारी पिक्चर को एनहांस कर देते हैं काफी ज्यादा। तो फ्यूचर ऑफ़
स्मार्टफोन की बात करें तो तो डेफिनेशन की बात करें अगर स्मार्टफोन क्या होता है? एक मोबाइल डिवाइस होता है जो अलाउ करता है
लोगों को कॉल करने के लिए, मैसेजेस सेंड करने के लिए विथ द हेल्प ऑफ इंटरनेट और जो एप्स हैं ठीक है? एंड रन एप्स एंड टेक
फोटो एंड परफॉर्म मेनी कंप्यूटर लाइक फंक्शनल फंक्शनंस इन वन हैंडेड डिवाइस। ठीक है? तो इन 2025 अगर हम बात करें Apple
एट द ग्लोबल स्मार्टफोन मार्केट अराउंड 20% शेयर जो है वो Apple का ही हमें देखने को मिलता है और फॉललोड बाय Samsung वि इज
19% एंड देन Xiaomi तो ग्लोबल स्मार्टफोन यूजर कितने हैं हमारे पास 500 करोड़ देन इंडिया के अंदर स्मार्टफोन यूज़र्स कितने
हैं वही सेम आपने याद रखा था कि 80 करोड़ इंटरनेट यूजर हैं। तो आप ये ऐसे ही ठीक है तो आप सिमिलरली याद रख सकते हैं कि
स्मार्टफोन यूजर भी कितने हैं? 80 करोड़ हैं। तो आप इज़ली डाटा याद रहेगा कि 80 करोड़ इंटरनेट यूजर हैं और 80 करोड़ ही
हमारे पास स्मार्टफोन यूज़र्स हैं। ठीक है? देन अपार्ट फ्रॉम दिस हम देख सकते हैं यहां पर कंपनीज़ लाइक Qualcom, Apple,
Google, MediaTek आर इन्वेस्टिंग इन एफिशिएंट AI चिपसेट ऑन डिवाइस इंटेलिजेंस। तो यहां पर क्या है? AI चिपसेट भी हमें
फ्यूचर स्मार्टफोन को देखने को मिलेगा। देन हमने देखा नो सिम ट्रे क्योंकि यहां पर क्या है कि यहां पर क्या है? ई सिम
कार्ड आने वाला है जो फुल्ली डिजिटल नेटवर्क होगा। तो इसलिए यहां पर सिम ट्रे नहीं देखने को मिलेगी। देन कैमरा
टेक्नोलॉजी भी हमने बात करी है। Sony इज़ डेवलपिंग एडवांस स्मार्टफोन, कैमरा सेंसर 100 मेगापिक्सल प्लस क्लास। Samsung
यूजिंग AI कॉमटीशनल फोटोग्राफी। ठीक है? देन प्रोसेसर और GPU जो है वो बहुत ज्यादा क्या होने वाले हैं? पावरफुल होने वाले
हैं। ठीक है? देन यहां पे बात करें Qualcomm Snapdragon एंड MediaTek बिल्डिंग हाई परफॉर्मेंस टिप्स विद
डेडिकेटेड AI कोर आपने Apple में देखा होगा A सीरीज आई फिर M सीरीज आई देन अब M5 आ चुका है तो ये क्या है जो फ्यूचर
स्मार्टफोन होने वाले हैं उसमें काफी ज्यादा पावरफुल प्रोसेसर और GPU देखने को मिलेगा देन हमने बात करी थी E सिम के बारे
में तो ये कुछ चीजें और ये टेक्नोलॉजीज़ है जो कि फ्यूचर ऑफ़ स्मार्टफोन में आपको देखने को मिलेगी। ठीक है? देन चैलेंजेस की
अगर हम बात करते हैं हाई कॉस्ट ऑफ़ फ्लैशिप एंड एडवांस स्मार्टफोन तो जितने भी फ्लिप फोन फोल्डिंग फ़ 6D अनेबल फ़स आने वाले हैं
और फ्लैकशिप्स फ़ होते हैं। ठीक है? तो ये नियरली आपको 40,000 से अबव ही देखने को मिलता है। ठीक है? यपिडली चेंजिंग मार्केट
एंड इंटेंस कॉमटीशन बिकॉज़ ऑफ़ ऑफ़ एआई एंड फ्लिप फोल्डिंग ऐसी टेक्नोलॉजीस की वजह से जो है काफी ज्यादा इंटेंस कॉम्पटीशन
मार्केट को मार्केट में देखने को मिलेगा। ठीक है? स्मार्टफोन एडिक्शन एंड मेंटल हेल्थ कंसर्न्स। जैसे-जैसे स्मार्टफोन
एडवांस होता जा रहा है। बिकॉज़ अब क्या है? अटेंशन इकॉनमी चल रही है। राइट? तो हमने देखा है कि कैसे कोई फोन और ऐप जो है आपका
ज्यादा से ज्यादा अटेंशन ले सके। तो फ्यूचर में जो है ये एडिक्शन और मेंटल हेल्थ कंसर्न हमें देखने को मिल सकता है।
देन डाटा प्राइवेसी एंड सिक्योरिटी रिस्क शॉर्ट प्रोडक्ट लाइफ साइकिल एंड फ्रीक्वेंट अपडेट्स। कुछ बैटरी लाइफ जो है
वो रिड्यूस होती है। तो यू हैव आल्सो सीन बिकॉज़ स्मार्टफोनस जो है वो कांस्टेंटली इवॉल्व हो रहे हैं। तो फ्यूचर के अंदर
क्या होगा कि जो स्मार्टफोनोंस हैं पीपल मोर ऑफन जो है उसे अपडेट करेंगे जिसकी वजह से क्या होगा कि आपका जो ई वेस्ट भी होगा
वो काफी ज्यादा इनक्रीस होने के चांसेस हैं। तो ये कुछ पॉइंट्स थे चैलेंजेस थे रिलेटेड टू स्मार्टफोन। ठीक है? तो
कंक्लूजन में आपको बात करनी है कि कैसे स्मार्टफोनस जो है वो फ्यूचर के अंदर काफी ज्यादा टेक्नोलॉजी के साथ आएंगे। चाहे वो
एi हो, कैमरास हो, चिपसेट हो, जीपीयू हो। तो देन अपार्ट फ्रॉम दिस यहां पर कुछ डिसएडवांटेजेस भी हैं। चाहे वो एडिक्शन
हो, एक्सेसिव यूजेज हो एंड ठीक है? तो ओवरऑल अगर हम बात करें द फ्यूचर ऑफ़ स्मार्टफोन इज़ प्रॉमिसिंग बट रिस्पांसिबल
यूज़ इज़ द की टू बट रिस्पांसिबल यूज़ इज़ द की टू मैनेज इट पॉजिटिव फोर्स इन आवर। तो ये आप कंक्लूजन में बता सकते हैं। एक जीडी
टॉपिक देख लेते हैं जो हमें इंडिया एंट्रीज में देखने को मिला था। व्हाट इज दी मोस्ट ब्यूटीफुल डेवलपमेंट ऑफ़
ह्यूमैनिटी? तो लीड्स क्या थी? स्मार्टफोन एंड इलेक्ट्रॉनिक्स? तो स्मार्टफोन एंड इलेक्ट्रॉनिक्स? अभी हमने स्मार्टफोन से
रिलेटेड काफी सारे पॉइंट्स देखे। ठीक है? तो वो आप ऐड कर सकते हैं। तो यहां पर एक लीड दे रखी है सोशल रिलेशन। तो अगर हम बात
करें आजकल के जो सोशल रिलेशन है वो सारे किस पे? पे सोशल मीडिया पे ही हो रहा है। ठीक है? सोशल रिलेशन जो हम बना भी रहे हैं
किस पे बना रहे हैं? सोशल मीडिया पे। और अगर सोशल मीडिया पे बन रहे हैं तो सोशल मीडिया किस पे चलता है? स्मार्टफोन पे
इलेक्ट्रॉनिक्स पे ही चल रहा है। तो एक तरीके से क्या है? ओवरलैप हो रहा है यहां पर। ठीक है? तो सोशल रिलेशन भी क्या है?
स्मार्टफोन से रिलेटेड ही है। तो स्मार्टफोन एक बहुत वाइड। तो स्मार्टफोन क्या है? यहां पर बहुत वाइड लीड हो गई। तो
तो इससे क्या क्या है? आप सोशल रिलेशन को जोड़ के भी स्मार्टफोन के ऊपर बोल सकते हैं कि कम्युनिकेशन भी तो हम स्मार्टफोन
से ही कर रहे हैं। ठीक है? तो इसलिए स्मार्टफोन बहुत ज्यादा वाइड हो जाएगा। सो अपार्ट फ्रॉम दी कम्युनिकेशन और सोशल
मीडिया आप बता सकते हैं कि कैसे कैमरास जो है काफी ज्यादा एडवांस आ रहे हैं जिससे आप अपनी मेमोरीज को सेफ रख सकते हैं। देन
वेरियस बिज़नेस नाउ अजज़ रन ऑन स्मार्टफोन एंड इंटरनेट एंड इलेक्ट्रॉनिक्स। तो काफी सारे पॉइंट्स पर हमने जो बात करी है। देन
अगर हम बात करें 5G 6G टेक्नोलॉजीस एi बेस्ड देन हमने बात करी 5G टेक्नोलॉजी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तो वो सारी क्या
है? स्मार्टफोनस और इलेक्ट्रॉनिक्स [संगीत] पे देखने को मिलेंगी। तो ये कुछ पॉइंट्स है जो आप रख सकते हैं। चलिए बात
करते हैं अब साइबर क्राइम की। राइट? [संगीत] तो साइबर क्राइम रेफर्स टू इललीगल एक्टिविटीज कैरिड आउट यूजिंग कंप्यूटर,
मोबाइल फस, इंटरनेट और डिजिटल नेटवर्क वेयर टेक्नोलॉजी इज इदर दी टूल और दी टारगेट ऑफ दी क्राइम। तो हमें यह चीज़
देखनी है। कंप्यूटर, मोबाइल फोन और इंटरनेट का यूज़ करते हुए इललीगल एक्टिविटीज करना ही साइबर क्राइम है।
राइट? देन विद द रैपिड ग्रोथ ऑफ डिजिटल पेमेंट सोशल मीडिया एंड ऑनलाइन सर्विज साइबर क्राइम हैज़ बिकम अ मेजर ग्लोबल
थ्रेड अफेक्टिंग इंडिविजुअल बिनेसेस एंड गवर्नमेंट। तो अगर हम बात करें हमने देखा 80 करोड़ इंटरनेट यूजर हैं। 80 करोड़ जो है
हमारे पास क्या है? स्मार्टफोन यूज़र्स हैं। देन देन 50 करोड़ क्या है? सोशल मीडिया यूज़र्स हैं। तो डेफिनेटली जो है
हमारे साइबर क्राइम्स इसलिए जो है इंक्रीस होते जा रहे हैं। तो अगर हम ग्लोबली बात करें तो लॉस ओवर 8 ट्रिलियन इन 2023 हमें
देखने को मिला। 8 ट्रिलियन। तो तो ये एक रिपोर्ट थी जो पब्लिश हुई थी गिग्स फॉर गीग की तो उसमें ये चीज मेंशन थी। देन
फ्रॉम 202 2024 तो आप सीधा ये चीजें याद रखिए कि इन लास्ट टू इयर्स जो है हमने अराउंड 24 लैक्स ईच ईयर लास्ट दो सालों के
अंदर हमने देखा कि मोर देन 24 लैक्स ईच ईयर हमने जो है साइबर क्राइम से रिलेटेड प्रॉब्लम्स को देखा है। वहीं पर अगर हम
बात करें इन 202 इट वाज़ ओनली 4.5 लाख। तो आपने देखा ऑलमोस्ट 5 एक्स ग्रोथ हो चुकी है साइबर थ्रेट्स की। तो देन हम बात करें
रिटायर्ड आर्मी ऑफिसर्स एंड सीनियर सिटीजंस हैव लॉस्ट 1 करोड़ और मोर इन फेक इन्वेस्टमेंट डिजिटल अरेस्ट स्कैम्स वेयर
फ्रॉडस्टर पोज्ड एज पुलिस और गवर्नमेंट ऑफिशियल्स। ठीक है? देन अगर कुछ एग्जांपल्स हम इंडिया के अंदर देखें तो
गुजरात रिपोर्टेड साइबर क्राइम लॉस ऑफ 1000 करोड़ इन 2025 रिपोर्टेड बाय स्टेट पुलिस डाटा। एंड देन अगर हम बात करें अदर
स्टेट्स की। ठीक है? तो हर एक स्टेट ने मोर देन 100 करोड़ जो है साइबर सिक्योरिटी और साइबर क्राइम में लॉस करें। के कुछ
डाटा है जो आप अपने जीडी के अंदर यूज़ कर सकते हैं। देन हम बात करते हैं साइबर क्राइम। राइट? तो टाइप्स ऑफ़ साइबर क्राइम
की बात करें तो साइबर बुलिंग एंड स्टॉकिंग। ठीक है? तो साइबर क्राइम हमें क्या लगता था? ओटीबी फ्रॉड्स, एआई बेस्ड
वॉइस कैम्स। बट जो साइबर बुलिंग और स्टॉकिंग होती है वो भी एक तरीके का क्या है? साइबर क्राइम्स है। तो हरेसिंग अदर
ओवर सोशल मीडिया और एप्स। जैसे-जैसे सोशल मीडिया का यूजेज बढ़ रहा है। अराउंड 50 करोड़ सोशल मीडिया यूज़र्स हैं इंटरनेट। ठीक
है? देन आपने देखा होगा Instagram, एक्स पे और YouTube पे ट्रोलिंग और साइबर बुलिंग इज़ कॉन्स्टेंटली इंक्रीजिंग टू।
देन मैलवेयर एंड रैंसमवेयर अटैक्स। ठीक है? तो मलेशियस सॉफ्टवेयर लॉकिंग डाटा एंड अह फॉर रैंसम। तो बेसिक डिफरेंस क्या है?
मैलवेयर और रेंसमवेयर में सपोज आपने कोई मलेशिया सॉफ्टवेयर डाउनलोड कर लिया या फाइल डाउनलोड कर ली है। ठीक है? या किसी
की पेनड्राइव आपने यूज़ करी उसके अंदर कोई रेंसमवेयर अटैक था। ठीक है? इससे होगा क्या? जो आपका स्मार्टफोन है या फिर
लैपटॉप है वो लॉक हो जाएगा। वो तभी ओपन होगा जब आप उसको एक रेंसम देंगे। लाइक पर्टिकुलर अमाउंट आप देंगे। सपोज 50,000
और 1 लाख। ठीक है? जब आप उस लिंक पर पेमेंट कर देंगे तभी आपका जो लैपटॉप है वो इंस्टॉल होगा। होगा। अदरवाइज़ वो सारा डाटा
जो है वो डिलीट हो जाएगा। जहां पर इंपॉर्टेंट फाइल्स और डाटा होते हैं वहां पर। तो काफी सारे बिज़नेसेस में क्या है?
बहुत सारीेंट फाइल्स और डाटा होती है। तो वहां पर ये रैंसमवेयर अटैक्स देखने को मिलते हैं। देन मेलवेयर अटैक तो मलवेयर
अटैक के अंदर क्या होता है? ये आपका डाटा को स्टील करता है। डाटा के अंदर क्या-क्या हो सकता है? आपके पासवर्ड्स हो सकते हैं।
आईडी हो सकती है। जिससे क्या है? वो फर्दर उसको मिसयूज़ कर सकता है। तो मेलवेयर और इनसे में ये बेसिक अटैक्स था। देन हैकिंग
एंड अनअथराइज़्ड एक्सेस ब्रेकिंग इंटू कंप्यूटर सिस्टम विदाउट परमिशन। ऑनलाइन एंड फाइनेंसियल फ्रॉड यूपीआई स्कैम। तो
काफी ज्यादा प्रॉमिनेंट है। आपने देखा होगा। देन फिशिंग एंड स्मिंग। ठीक है? तो फिशिंग के अंदर क्या होता है कि फेक ईमेल
स्कैम्स आते हैं। अगर आप उन पर क्लिक कर देते हैं अनलोन लिंक पर तो आपका जितना भी डाटा होता है वो सारा उनके पास चला जाता
है। ठीक है? और स्मिंग में क्या होता है कि फेक एसएमएस। ठीक है? तो ईमेल से रिलेटेड हो जाएगा और स्मिसिंग में क्या
होता है कि स्मिंग के अंदर क्या होता है? आपके पास फेक ओटीपी या फिर एसएमएस आता है। अगर आप उस पे क्लिक करते हैं तो जो आपका
लॉगिन डिटेल्स और बैंक डिटेल्स हैं वो ऑटोमेटिकली जो है उनके पास चली जाती है। तो ये कुछ साइबर क्राइम्स हैं जो आप अपने
लेक्चरेट और जीडी के टॉपिक्स में यूज़ कर सकते हैं। लाइक साइबर बुलिंग स्टॉकिंग, मैलवेयर रनवेयर अटैक, हैकिंग, फाइनेंसियल
फ्रॉड, यूपीआई स्कैम, ओटीपी बेस्ड कैम, फिशिंग स्पीशी ये सारे साइबर क्राइम हो गए। लेट्स डिस्कस व्हाई साइबर क्राइम इज़
राइजिंग। तो लो डिजिटल लिटरेसी एंड लैक ऑफ अवेयरनेस, स्मार्ट सोशल इंजीनियरिंग टैक्टिक यूज़्ड बाय क्रिमिनल। अगर हम
इंडिया में बात करें देखिए 50% ऑफ ग्रेजुएट्स कैन नॉट राइट अ प्रॉपर ईमेल एंड फर्दर अगर हम बात करें इंडिया के अंदर
अराउंड 30 टू 40% पीपल आर स्टिल आर नॉट डिजिटली लिटरेट सी अगर किसी के पास स्मार्टफोन या लैपटॉप कंप्यूटर होने से वो
डिजिटल लिटरेट नहीं हो सकता। ठीक है? तो डिजिटल लिटरेसी इज़ अ डिफरेंट कांसेप्ट। इसलिए जो है हमारे इंडिया के अंदर थोड़ी लो
डिजिटल लिटरेसी है। इसलिए ये साइबर क्राइम जो है कॉन्स्टेंटली राइज़ कर रहे हैं। देन मैसिव इंक्रीज़ इन इंटरनेट एंड यूज़ ऑफ़
डिजिटल पे। अगर आपने देखा होगा यूपीआई टैब से चाहे वो Google Pay, Paytm, PhonePe तो ये सारे काफी ज्यादा प्रॉमिनेंट है इंडिया
के अंदर एज़ कंपैरिजन टू सम अदर एशियन कंट्रीज। यहां पे इसलिए एक ये भी रीज़न है कि साइबर क्राइम कॉन्स्टेंटली राइज़ कर रहा
है। देन हाउ सोशल मीडिया इज़ लिंक्ड विद साइबर क्राइम। साइबर बुलिंग और हरेसमेंट में हमने बात करी फेक प्रोफाइल्स एंड
आइडेंटिटी थ्रेट। जहां पर फ्रॉस्टर क्या करता है? क्रिएट करता है फेक Instagram और Facebook अकाउंट यूजिंग समवनस फोटोस नेम
टू चीट अदर और डैमेज रेपुटेशन। देन ऑनलाइन फाइनेंसियल फ्रॉड्स, इन्वेस्टमेंट स्कैम, क्रिप्टो स्कैम्स राइट एंड अपार्ट फ्रॉम
दिस सोशल मीडिया एड्स एंड इन्फ्लुएंसरर आल्सो ट्राई टू ट्रैप यूज़र्स। चलिए अब बात करते हैं इफेक्ट्स ऑफ़ साइबर क्राइम ऑन
इकोनमी एंड सोसाइट इकोनॉमिक लॉस एंड थ्रेट टू डिजिटल इंडिया। तो, हमने बात करी थी कैसे गुजरात ने लॉस्ट करे अराउंड
थाउजेंड्स ऑफ़ करोड़ इन साइबर क्राइम। वेयर ऐज़ मुंबई ने अराउंड 150 करोड़। और वेरियस अदर इंडियन स्टेट्स ने जो है वो थाउजेंड्स
ऑफ़ करोड़ लॉस करे ड्यू टू इकोनॉमिक ड्यू टू साइबर क्राइम। और अगर हम वर्ल्ड वाइड बात करें तो इन 2023 वेरियस रिपोर्ट्स
पब्लिश्ड कि ग्लोबली अराउंड ट्रिलियंस ऑफ़ डॉलर्स की जो है डॉलर्स जो है हमने साइबर क्राइम में लॉस्ट करे हैं ग्लोबली। जिन
रिपोर्ट्स ने दिखाया कि कैसे ग्लोबली ऑल ओवर दी वर्ल्ड वी लॉस्ट अराउंड ट्रिलियंस ऑफ़ डॉलर्स। देन साइबर फ्रॉड लॉसेस
थाउजेंड्स ऑफ़ करोड़। हमने इस पे बात करी। देन मेंटल हेल्थ एंड सोशल इंपैक्ट। देन अगर हम बात करें सोसाइटी की राइट इफेक्ट्स
ऑफ साइबर क्राइम ऑन सोसाइटी क्या है मेंटल हेल्थ एंड सोशल इंपैक्ट विक्टिम्स ऑफ ऑनलाइन फ्रॉड साइबर बुलिंग ब्लैकमेलिंग
फाइनेंसियल स्कैम्स ऑर्थन फेस डिप्रेशन स्ट्रेस एंड सोशल इमिनेशन एंड वेरियस केसेस आर रजिस्टर्ड जहां पर जो विक्टिम है
ही और शी हैज़ डन दिस सुसाइड आल्सो देन बर्डन ऑन लो इनफोर्समेंट गवर्नमेंट मस्ट इन्वेस्ट मोर इन साइबर पुलिस यूनिट साइबर
सिक्योरिटी सिस्टम एंड अवेयरनेस प्रोग्राम तो हमारी जो पुलिस भी है राइट तो उस पर क्या होगा बर्डन इनक्रीस होगा बिकॉज़ वो
मेनली जो है डील करते से वो जितनी भी हमारी सोसाइटी की प्रॉब्लम प्रॉब्लम्स होते थे। मेनली वो डील करते थे। बट बिकॉज़
ऑफ़ साइबर क्राइम ऑफ़ लास्ट फाइव टू 10 इयर्स में जो साइबर क्राइम्स के केसेस इनक्रीस हुए हैं उससे जो है बर्डन जो है
लॉ इनफोर्समेंट में काफी ज्यादा बढ़ेगा। देन हम बात करते हैं नेक्स्ट टॉपिक की जो कि साइबर क्राइम से ही रिलेटेड है और
डायरेक्टली हमारे लेक्चरेट के टॉपिक में और जीडी में आ जाता है। साइबर सिक्योरिटी। तो अभी जितने भी हमने साइबर क्राइम्स की
बात करी उसको काउंटर करने के लिए। ठीक है? उसे खत्म करने के लिए क्या है? साइबर सिक्योरिटी आती है। क्या? तो साइबर
सिक्योरिटी रेफर्स टू दी प्रोटेक्शन ऑफ कंप्यूटरटर्स, मोबाइल फोंस, नेटवर्क्स एंड डिजिटल डाटा फॉर फ्रॉम साइबर अटैक्स,
हैकिंग फ्रॉड एंड अनअथराइज़्ड एक्सेस। एग्जांपल ऑफ़ साइबर सिक्योरिटी क्या है? एंटीवायरस एंड एंटी मैलवेयर सॉफ्टवेयर। सो
हमने बात करी थी मेलवेयर और रैंसमवेयर की। अगर आपके पास एंटीवायरस और एंटीलवेयर सिस्टम है तो जितने भी हमारी ऐसी फाइल्स
हैं जो रैंसमवेयर और ये मेलवेयर कंटेन करती है वो पहले ही उसे क्या कर देगा? डिलीट कर देगा। फायर वाल्स टू ब्लॉक अन
ऑथराइज़्ड एक्सेस देन टू फैक्टर ऑथेंटिफिकेशन। तो पहले क्या होता था? अगर किसी के पास आपकी लॉगिन आईडी और पासवर्ड
है तो वो क्या है आपके अकाउंट को एक्सेस कर सकता था। बट नाउ क्या है? टू फैक्टर ऑथेंटिफिकेशन आ गया कि आपको ओटीपी की
जरूरत नहीं है। और ओटीपी क्या है? एक पर्सनल मोबाइल फोन पे आता है। तो इसकी वजह से क्या है? काफी सारे स्कैम्स में हमें
रिडक्शन देखने को मिला है। देन इंक्रिप्शन इन बैंकिंग एंड यूपीआई एप्स देन बायोमेट्रिक लाइक फिंगरप्रिंट्स एंड फेस
आईडी इज़ रिक्वायर्ड टू एक्सेस दी डिजिटल सर्विज। तो चलिए बात करते हैं गवर्नमेंट के कुछ इनिशिएटिव लाइक इंफॉर्मेशनेशन
टेक्नोलॉजी एक्ट 200। तो यहां पर क्या था? प्रोवाइड्स लीगल पनिशमेंट फॉर साइबर ऑफेंसेस। तो यह जो है हमारा फर्स्ट एक्ट
था जो इंडिया के अंदर बना था जो कि पनिशमेंट देता था लीगली साइबर ऑफेंसेस को। देन इंडियन साइबर क्राइम डिपार्टमेंट
कोऑर्डिनेशन सेंटर आई4 वर्क्स अंडर दी मिनिस्ट्री ऑफ होम अफेयर्स। देन नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल अलाउस
ऑनलाइन कंप्लेंट रजिस्ट्रेशन। तो आप यह पोर्टल का नाम याद रख सकते हैं व्हिच यू कैन यूज़ इन योर लेक्चर इट। देन साइबर
क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930। आई रिपीट 1930। क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 हेल्प्स ब्लॉक फाइनेंसियल फ्रॉड इमीडिएट। तो इस
हेल्पलाइन नंबर की मैंने एक शॉट डाला था पीपीडीटी का। उसमें भी मैंने एक स्टोरी बनाई थी रिलेटेड टू साइबर क्राइम। तो
उसमें मैंने ये नंबर 1930 का मेंशन करा था। देन हमारे पास क्या था? कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम। इंडिया मॉनिटर्स
एंड रिस्पांस टू साइबर थ्रेट। इंडिया के पास क्या है? एक इमरजेंसी रिस्पांस टीम भी है। अपार्ट फ्रॉम दी इंडियन साइबर क्राइम
डिपार्टमेंट। तो हमने कुछ लॉज़ की बात करी थी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस वाली स्लाइड में जहां पर हमने बात करी थी कि डिजिटल
पर्सनल डाटा प्रोटेक्शन एक्ट भी इंडिया में बनाया गया है टू प्रोटेक्ट पर्सनल डाटा ऑफ सिटीजन देन भारतीय न्याय संहिता
2023 प्रोवाइड पनिशमेंट फॉर चीटिंग फ्रॉड इंपोर्सनेशन एंड साइबर क्राइम इंक्लूडिंग एआई जनरेटेड स्कैम्स। ठीक है? तो
मिनिस्ट्री ऑफ़ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड आईटी डायरेक्टेड प्लेटफॉर्म्स लाइक सोशल मीडिया कंपनीज़ टू स्ट्रिक्टली रिमूव एआई जनरेटेड
डीफिक। तो तो ये क्या है? कुछ लेटेस्ट एक्ट और हमारे लॉज़ हैं जो कि बनाए गए हैं इंडियन गवर्नमेंट द्वारा टू काउंटर साइबर
क्राइम। चलिए अब बात करते हैं व्हाट वर्ल्ड इज डूइंग राइट तो नेटो एंड इंटरपोल कोपरेट
ग्लोबली टू फाइट साइबर क्राइम हमने बात करी थी कैसे ग्लोबली अराउंड ट्रिलियंस ऑफ डॉलर्स हमने लॉस करे हैं इन साइबर क्राइम
देन हमने फ्रॉड्स की बात करी थी चाहे देन हमने बात करी थी अरुप डिजिटल यूके बेस्ड कंपनी जिन्होंने अराउंड 25 करोड़ ऑफ डॉलर
लॉस करे थे इन साइबर क्राइम तो वैसे केसेस काफी सारे हैं। ठीक है? तो इनको काउंटर करने के लिए क्या है? जो कंट्रीज लाइक
यूएसए, यूके एंड इजराइल हैव नेशनल साइबर सिक्योरिटी एजेंसीज आई। आई रिपीट कंट्रीज लाइक यूएसए, यूके एंड इजराइल हैव नेशनल
साइबर सिक्योरिटी एजेंसीज एंड इंटरपोल एंड नाटो इज आल्सो कॉन्सेंटली वर्किंग टू फाइट साइबर क्राइम ग्लोबली। ये कुछ पॉइंट्स हैं
जो आप याद रख सकते हैं कि व्हाट वर्ल्ड इज़ डूइंग। देन साइबर सिक्योरिटी इज़ एसेंशियल फॉर इकोनॉमिक स्टेबिलिटी, नेशनल
सिक्योरिटी, पब्लिक ट्रस्ट, स्ट्रांग लॉज़ एंड अवेयरनेस टेक्नोलॉजी एंड रिस्पांसिबल डिजिटल बिहेवियर एंड नेसेसरी टू प्रोटेक्ट
इंडियास डिजिटल फ्यूचर। जैसे हमारा डिजिटल इंडिया प्रोग्राम है और जिस तरीके से हमारी डिजिटल इकॉनमी बढ़ रही है तो हमें सो
इट इज़ वेरीेंट टू हैव दी साइबर सिक्योरिटी विद अस। ठीक है? सो चलिए जीडी का टॉपिक देखते हैं। व्हाट आर दी की हिंडरेंसेस टू
दी इफेक्टिव इंप्लीमेंटेशन ऑफ़ द डिजिटल इंडिया प्रोग्राम। ठीक है? तो सबसे पहले क्या जाता है हमारे पास? लिमिटेड
फाइनेंसियल एंड डिजिटल लिटरेसी देन कनेक्टिविटी एंड नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर गैप्स एंड साइबर सिक्योरिटी रिस्क एंड
डाटा प्राइवेसी कंसर्न। देखिए तो साइबर सिक्योरिटी रिस्क एंड डाटा प्राइवेसी कंसर्न जो कि थर्ड लीड है। तो इसमें क्या
है? हमें सारे एग्जांपल्स देने हैं। ठीक है? कि कैसे गुजरात ने थाउजेंड्स ऑफ करोड़ लॉस करे। मुंबई ने कैसे 150 करोड़ प्लस
लॉस करे। देन हमारे आर्मी ऑफिसर्स हैं, जवान हैं, गवर्नमेंट पर्सनल्स हैं जो कि रिटायर्ड हो चुके हैं। कैसे उनके ऊपर काफी
सारे ओटीपी बेस्ड एआई बेस्ड वॉइस कैंप्स हो रहे हैं इंडिया के अंदर। फिर आपको बात करनी है कैसे इंडिया ने फ्रॉम लास्ट टू
इयर्स अराउंड 24 लाख प्लस कंप्लेंट्स को रजिस्टर करा है एनसीआरबी डाटा के अकॉर्डिंग। ये सारे एग्जांपल जो किसमें
आएंगे? साइबर सिक्योरिटी रिस्क एंड डाटा प्राइवेसी कंसर्न के अंदर आएंगे कि ये हमारी प्रॉब्लम्स हैं जो कि डिजिटल इंडिया
प्रोग्राम को हिंडर कर रही हैं। देन क्या है? लिमिटेड फाइनेंसियल एंड डिजिटल लिटरेसी। तो हमने बात करी थी कि कैसे
इंडिया के अंदर जो है अराउंड 80 करोड़ इंटरनेट यूजर स्मार्टफोन यूज़र्स हैं। 50 करोड़ सोशल मीडिया यूज़र्स हैं। बट अगर हम
बात करें फाइनेंसियल और डिजिटल लिटरेसी की तो वो बहुत ज्यादा बोर है। ओनली 30% पीपल हु आर यूजिंग दी स्मार्टफोन एंड इंटरनेट
यूजर हैव दी डिजिटल लिटरेसी। रेस्ट ऑफ़ 70% पीपल डज़ नॉट हैव दी डिजिटल लिटरेसी। और हमने बात करा था कि मोबाइल फोन होना ही
डिजिटल लिटरेसी नहीं होता है। देन हमने बात करी थी कैसे 50% ऑफ ग्रेजुएट कैन नॉट राइट अ ईमेल। ठीक है? ये nesकम की रिपोर्ट
थी। तो यह भी आप यूज़ कर सकते हैं इनलिमिटेड फाइनेंसियल एंड डिजिटल लिटरेसी के अंदर। देन कनेक्टिविटी एंड नेटवर्क
इंफ्रास्ट्रक्चर गैप्स की अगर हम बात करें तो आप बता सकते हैं कि कैसे जो हमारी करंट पुलिस है उसके ऊपर बर्डन जो काफी ज्यादा
बढ़ने वाला है। देन आप बता सकते हैं कि इंडिया ने यस इंडिया हैज़ डन टू इंप्रूव दी कनेक्टिविटी। चाहे वो भारतीय न्याय संहिता
लॉ चाहे वो आईटी एक्ट हो। वो भारतीय न्याय संहिता 2023 हो चाहे वो चाहे वो पर्सनल प्रोटेक्शन एक्ट हो पोर्टल हो चाहे वो
हेल्पलाइन नंबर हो तो कनेक्टिविटी और नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर में इंडिया काम कर रहा है बट अ लॉट नीड्स टू बी डन ठीक है
तो ये कुछ पॉइंट्स [संगीत] थे जो आप यूज़ कर सकते हैं अपने जीडी में ओके नाउ लेट्स मूव ऑन टू दी लास्ट टॉपिक ठीक है अपने डे
थ्री का लास्ट टॉपिक पे मूव करते हैं जो है इंफॉर्मेशनेशन टेक्नोलॉजी आईटी आईटी इंडस्ट्री राइट लाइक Google मेटा
Microsoft Wipro Amazon Apple एसेंचर HCL Infosys TCS IBM और ये सारे एग्जांपल आने चाहिए ठीक है ये सारे एग्जांपल आपको यूज़
करने हैं ठीक है? दिस विल मेक दी पॉइंट इफेक्टिव। चलिए बात करते हैं। आईटी इनेशन टेक्नोलॉजी रेफर्स टू दी यूज़ ऑफ़ कंप्यूटर,
सॉफ्टवेयर, इंटरनेट एंड कम्युनिकेशन सिस्टम टू क्रिएट टू क्रिएट। क्रिएट क्या? सॉफ्टवेयर्स बनाना, एप्स बनाना। प्रोसेस
क्या करना है? रॉ डाटा। ठीक है? रॉ डाटा को। और किस में? यूज़फुल इनेशन में। तो रॉ डाटा को यूज़फुल इनेशन में प्रोसेस करना।
देन ऑफ़ इंडिया विद ऑफिस कैंपसेस ऑफ़ Google, Microsoft, Oracle एंड Amazon। ठीक है? Microsoft इंडिया पार्टनर्ड विद
दी गवर्नमेंट टू ट्रेन वुमेन इन एआई स्किल्स थ्रू स्ट्रक्चरर्ड 240 आवर्स करिकुलम अलाइन विद इंडस्ट्री स्टैंडर्ड्स
कवरिंग एआई एंड रिलेटेड टेक्नोलॉजीज़। तो Microsoft इंडिया यहां पर क्या कर रहा है? पर्टिकुलरली वमेन को ट्रेन कर रहा है विद
दी एआई करिकुलम। तो यहां पर वुमेन एंपावरमेंट भी हो रहा है। नाउ Google's वुमेन विल इनिशिएटिव एंड अ प्लेटफार्म
एक्सपेंड डिजिटल लिटरेसी एंड सपोर्ट वुमेनस पार्टिसिपेशन इन टेक्नोलॉजी सेक्टर।
देन हम बात करें Googleस बैग स्किलिंग प्रोग्राम फॉर वुमेन Google सपोर्ट वमेन इंजीनियर वी प्रोग्राम ऑफर्ड बाय टैलेंट
स्पिरिट व्हिच सेलेक्ट्स एंड ट्रेन वमेन इंजीनियरिंग स्टूडेंट टू बिकम वर्ल्ड क्लास सॉफ्टवेयर इंजीनियर विद फुल
स्कॉलरशिप एंड करियर सपोर्ट तो Google का वी प्रोग्राम और Google का वुमेन विल इनिशिएटिव याद रहेगा और Microsoft भी क्या
कर रहा है गवर्नमेंट के साथ एक 240 आवर्स का उन्होंने करिकुलम बनाया है एआई रिलेटेड टेक्नोलॉजीज़ के लिए तो हमने देखा Google
का वी प्रोग्राम और Google का वमेन विल इनिशिएटिव ये सारी चीजें क्या है? वुमेन के लिए हो रही है। तो यहां से हम देख सकते
हैं आईटी सेक्टर जो है काफी वुमेन एंपावरमेंट की तरफ जो है बढ़ रहा है। देन हाई सैलरी पैकेजेस आईटी सेक्टर ऑफर्स सम
ऑफ़ दी हाईएस्ट सैलरी पैकेजेस इन दी सर्विस सेक्टर। ठीक है? आईआईटी ग्रेजुएट्स इन कंप्यूटर साइंस हैव रिसीव्ड पैकेजेस वर्थ
₹1 करोड़ और मोर फ्रॉम कंपनीज़ लाइक Google Microsoft इंटरनेशनल टेक फॉर्म्स। तो हम कह सकते हैं कि कॉलेजेस के बाद अगर हमें
हाईएस्ट पैकेज भी मिल रहे हैं वो किसमें मिल रहे हैं? आईटी इंडस्ट्री के अंदर। तो अगर हम यहां पर देखें तो हमने क्या-क्या
बात करी है? तो आईटी के अंदर सबसे पहले क्या आ जाता स्किल्स आ जाती है। हमने बात करा चाहे वो वेबसाइट डेवलपमेंट हो, ऐप
डेवलपमेंट हो, क्लाउड कंप्यूटिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस। राइट? तो ये सब चीजें किसके अंदर आ जाती हैं?
इंफॉर्मेशनेशन टेक्नोलॉजी। और हमने अभी देखा कि कैसे Microsoft इंडिया हो, चाहे वो Google वमेन विल इनिशिएटिव हो, Google
V प्रोग्राम हो। वहां से भी क्या स्किल डेवलपमेंट को बढ़ावा मिल रहा है। देन हम बात करें सैलरी की तो हमने देखा कि
हाईएस्ट पैकेजेस जो हैं वो आईटी इंडस्ट्री में ही हमें देखने को मिल रहे हैं। देन अगर हम इंफ्रा की बात करें तो
इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट की बात करें या फिर एफडीआई फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट की बात करें तो हमने एग्जांपल्स देखे जैसे
कि Apple जो है वो थाउजेंड्स ऑफ करोड़ की इन्वेस्टमेंट इंडिया में कर रहा है। देन सिमिलरली हमने देखा था कि Amazon इंडिया
जो है वो अराउंड 35 बिलियन एंड Google इज़ एंड Google इज़ गोइंग टू इनवेस्ट अराउंड 15 बिलियन। देन हमने बात करी थी adानी हो
चाहे वो Reliance Industries हो एंड वेरियस अदर टेक कंपनीज़ आर कंटीन्यूअसली इन्वेस्टिंग इन इंडिया। सो
इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट तो हो ही रहा है साथ में। फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट भी जो है इंडिया अट्रैक्ट कर रहा है। देन
आता है इनोवेशन। तो हमने इनोवेशन के अंदर काफी सारे एग्जांपल्स देखे हैं आईटी के अंदर। चाहे वो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का
आना हो, चाहे वो यूपीआई का आना हो, चाहे वो ई-कॉमर्स वेबसाइट का आना हो, डिजिटलाइजेशन हो, वो सारा किसके अंदर?
आईटी के अंदर हमने देखा। तो, इन हम कह सकते हैं यस आईटी इंडस्ट्री इज़ वेरी इनोवेटिव। देन ऑनलाइन वर्क फ्रॉम होम। तो,
यह फीचर जो है आपको किसमें देखने को मिल रहा है? इंफॉर्मेशनेशन टेक्नोलॉजी सेक्टर के अंदर। अगर आप दूसरे सेक्टर्स देखें
वेदर इट्स अ मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर या फिर एग्रीकल्चर सेक्टर तो वहां पर ऑनलाइन वर्क फ्रॉम होम ऐसी कोई चीज नहीं है। बट
आईटी के अंदर ये जो है फ्लेक्सिबिलिटी हमें देखने को मिलती है। तो हमने चाहे वो स्किल की बात हो सैलरी इंफ्रा इनोवेशन
ऑनलाइन वर्क फ्रॉम होमफ या फिर फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट हो इकोनमिक हेल्प हो चाहे वो जॉब्स क्रिएशन हो वो सारा कहां
आईटी के अंदर देखने को मिलता है। तो अब बात करें इनोवेशन की कुछ एग्जांपल तो आप देख सकते हैं Zomato, food, Flipkart,
ई-कॉमर्स, PhoneP, Fintech, Ola, Unacademy देन इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट में अगर हम देखें तो कंपनीज़ जब भी आती हैं
तो वह क्या करती है? अपने ऑफिसेस को देखिए जब भी कोई भी आईटी कंपनी कहीं पर भी सेटअप होती है तो वहां पर क्या होता है उनका
ऑफिस बनता है। लैंड वैल्यू इंक्रीज होती है। रोड का डेवलपमेंट होता है। मेट्रो कनेक्टिविटी होता है। रियल स्टेट की
वैल्यू जो है वो काफी ज्यादा बढ़ जाती है। और साथ में काफी सारी इनडायरेक्ट जॉब जो है क्रिएट होती है। चाहे वो सिक्योरिटी
गार्ड की हो, ड्राइवर्स की हो, फूड सर्विस, हाउसकीपिंग, फैसिलिटी मैनेजमेंट होता है। तो इससे क्या हो रहा है? एक पूरा
इकोसिस्टम चैन डेवलप हो रही है जिसमें क्या है? सबको इकोनॉमिकली बेनिफिट हो रहा है। देन वर्क फ्रॉम होम की हमने बात करी।
नाउ अब हम कुछ चैलेंजेस की बात कर लेते हैं जो कि ब्रेन ड्रेन। राइट? सो मेनी इंडियन आईटी प्रोफेशंस माइग्रेट अब्रॉड
फॉर हायर पे एंड अपोरर्चुनिटीज़। जैसे एग्जांपल सुंदर पिच Google सीईओ सत्य नडेला Microsoft CEO अरविंद अधिक अरविंद
कृष्णा आईबीएम सीईओ Xbox CEO AO CEO जितनी भी बड़ी ग्लोबल जॉइंट टेक कंपनीज़ हैं उनके सीईओस जो हैं वो इंडियन हैं। सपोज़ अगर यही
इंडियंस जो हैं वो इंडिया में रहकर ही कोई टेक कंपनी बनाते हैं या उनके सीईओ थे तो वो कंपनीज़ भी आज काफी ज्यादा ग्रो करती
है। ट्रेन रेन की प्रॉब्लम क्या है कि आप इंडिया के रिसोर्सेज को यूज़ करते हैं। वेदर जो हमारे इंडिया के प्रेस्टीज
इंस्टीट्यूशन होते हैं वो आईआईटी आईएम्स की सीट्स हो। बट व्हेन इट कम्स टू वर्क पीपल आर गोइंग अब्रॉड एंड गिविंग देयर
सर्विज टू दी अब्रॉड नेशन। तो वो वहां की इकॉनमी में हेल्प करता है। सो दैट्स व्हाई ब्रेन ड्रेन जो है आईटी के अंदर हमें काफी
देखने को मिलता है जो कि एक प्रॉब्लम है। देन जॉब इनसिक्योरिटी एंड लेज़ ऑन ड्यूरिंग कोविड 19 पेंडेमिक द आईटी सेक्टर फेस द
लार्ज ले ऑफ्स हायरिंग फ्रीज़ एंड सैलरी कट स्पेशली इन ग्लोबल टेक फर्म्स एंड कंसल्टिंग रोल्स। देन थ्रेट फ्रॉम ऑटोमेशन
एंड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस। हमने बात करी थी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टॉपिक में कि कैसे अराउंड 8 टू 9 करोड़ जॉब्स जो है
ग्लोबली डिस्प्लेस होंगी और स्पेशली इंडिया के अंदर अराउंड वन टू 2 करोड़ जॉब्स डिस्प्लेस होंगी इन वेरियस सेक्टर लाइक
बीपीओ डाटा एंट्री एंड कॉल सेंटर तो वर्क प्रेशर एंड स्ट्रेस हाई वर्क लोड डेडलाइंस एंड लॉन्ग आवर्स आर कॉमन इन आईटी रोल्स
इंपैक्टिंग वर्क लाइफ बैलेंस एंड तो आपने देखा होगा कि आईटी इंडस्ट्री में वर्क लोड काफी ज्यादा है और काफी सारी कंपनीज़ में
आपने देखा होगा इफ यू आर डूइंग वर्क फ्रॉम होम तो आपको 8 आवर्स की जगह जो है 12 आवर का भी काम करना पड़ता है तो इससे पता लगता
है कि यस अगर आपको फ्लेक्सिबल टाइमिंग भी दी जाती है तो साथ में आपसे काम भी उतना ही करा जाता है। देन साइबर सिक्योरिटी
रिस्क, साइबर अटैक्स, डाटा ब्रीचेस, हैकिंग, इंसिडेंट्स, इंक्रीस, क्रिएटिंग न्यू चैलेंजेस फॉर आईटी टीम्स। ये सारी
चीजें जो है किसमें पढ़ के आए थे? साइबर क्राइम में हमने पढ़ा था कि 24 लाख प्लस साइबर क्राइम में पढ़ के आए थे कि कैसे
इंडिया जो है वो बिलियंस डॉलर्स लॉस कर चुका है। वर्ल्ड जो है ट्रिलियन डॉलर लॉस कर चुका है। अराउंड 24 लैक्स जो है एव्री
ईयर साइबर कंप्लेंट्स आ रही हैं। और हमने देखा था इनसे बचने के लिए क्या था। हमारे पास मैलवेयर, एंटी रैंसमवेयर सिस्टम और
फायर वाल टेक्नोलॉजी, साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स। तो ये सारी चीजें हमने वहां पर देखी थी। तो चलिए जीडी टॉपिक देख लेते
हैं। व्हिच सेक्टर हैज़ द ग्रेटेस्ट पोटेंशियल टू ड्राइव इंडियास जीडीपी ग्रोथ। तो लीड्स क्या है? सर्विस सेक्टर
हमने बात करी थी कि सर्विस सेक्टर के अंदर जो मेजर कंट्रीब्यूशन है वो आईटी इंडस्ट्री है। आईटी इंडस्ट्री बहुत बड़ी
है। उसके अंदर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आती है। अंदर ही ऐप डेवलपमेंट, वेबसाइट डेवलपमेंट, बैक एंड फ्रंट एंड, क्लाउड
कंप्यूटिंग, गेम डेवलपमेंट, एवरीथिंग कम्स अंडर दी आईटी इंडस्ट्री। और वो अराउंड 8 टू 9% हमारी जीडीपी के अंदर कंट्रीब्यूट
करता है। तो हम बोल सकते हैं यस सर्विस सेक्टर। और सर्विस सेक्टर के अंदर एंड हमने सर्विस सेक्टर के अंदर देखा कि स्किल
डेवलपमेंट भी होती है। जॉब क्रिएशन होती है। वुमेन एंपावरमेंट होता है। देन बेस्ट सैलरी पैकेजेस मिलते हैं। इंफ्रास्ट्रक्चर
डेवलपमेंट में हमने देन हमने इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट में बात करी कि जब कंपनीज़ आती है तो ऑफिस बनाती है। लैंड
वैल्यू इनक्रीस होती है। रोड्स मेट्रो रियलस्टेट ग्रो होता है। ठीक है? और इनडायरेक्ट जॉब्स भी काफी सारी होती हैं।
देन हमने बात करी इनोवेशन के बारे में। इनोवेशन में हमने बात करी चाहे वो Zomato, Flipkart, PhonePe, Unacademy, रेजर पे,
फ्रेश वर्क। देन हमने बात करी थी एफडीआई की। राइट? तो एफडीआई में हमने ये सारे पॉइंट्स देखे थे। तो अब ये सारे पॉइंट्स
जो है यूज़ करेंगे अपने जीडी के अंदर कि कैसे बिलियंस ऑफ डॉलर इन्वेस्टमेंट आ रही है तो तो क्यों नहीं हमारी इंडिया की
जीडीपी ग्रोथ बढ़ेगी अगर सर्विस सेक्टर भी बढ़ेगा और स्टिल अगर हम देखें तो 55% जो है हमारा सर्विस सेक्टर ही कंट्रीब्यूट करता
है। देन जब मैन्युफैक्चरिंग की बात आएगी तो हम मैन्युफैक्चरिंग के पॉइंट्स भी देखेंगे। तो जब हम कोई भी टॉपिक
मैन्युफैक्चरिंग से रिलेटेड करेंगे तो हम वहां पर मैन्युफैक्चरिंग और एग्रीकल्चर के पॉइंट्स भी देख। तो दिस वाज़ अबाउट दी
सर्विस सेक्टर। तो यहां से जो है हमारा डे थ्री कंप्लीट होता है। हमने सारे पॉइंट्स को देख लिया है। मोर देन सिक्स जीडी हमने
एंड मोर देन सिक्स जीडी टॉपिक्स जो कि हमारे एसएसबी में आए थे हमने वो भी यहां पर करे हैं। करते हैं डे फोर की तरफ। ठीक
है? तो डे फोर में हम कवर करने वाले हैं सोशल टॉपिक्स को। ठीक है? चाहे वो जेंजी हो, यूथ हो, लिविंग रिलेशनशिप ऑफ़ वुमेन
एंपावरमेंट हो और टूरिज्म हो। तो ये कुछ सोशल टॉपिक्स हैं और इसमें हम क्या है? अराउंड मोर देन 5 जीडी वी आर गोइंग टू
डिस्कस जो कि हमारे एसएसबी एफएसबी पीएसबी के अंदर आए हुए हैं। तो सबसे पहले हम स्टार्ट करते हैं जेजी से जनरेशन जेड। तो
देखिए जजी जो भी लोग 1997 से लेके 2012 के बीच में पैदा हुए हैं वो जेजी कहलाएंगे। सो इन 2026 देयर आर अप्रोक्सिममेटली ऐज जो
होंगी उनकी 14 टू 29 यानी कि जो भी इस वीडियो को देख रहे हैं मोस्टली सारे क्या होंगे? जजी ही होंगे। ठीक? जजी ही होंगे।
चलिए बात करते हैं जेंजीज़ की क्वालिटी मोर ओपन माइंडेड लेस रिजिड अबाउट कास्ट जेंडर रोल्स एंड ट्रेडिशनल बैरियर कंपेयर टू
ओल्डर जनरेशन। तो आपने ये खुद ऑब्ज़र्व करा होगा कि जेंजीस जो है वो कास्टिज्म और जेंडर रोल्स पर ज्यादा ध्यान नहीं दे रहे
हैं। देन हम बात करें सोशली अवेयर हैं। स्पीक ओपनली अबाउट मेंटल हेल्थ, क्लाइमेट चेंज, इक्वलिटी, सोशल जस्टिस। तो अगर आप
ओल्ड एज देखेंगे वहां पर अगर मेंटल हेल्थ की बात की जाती है तो उसको क्या है? टैबू कंसीडर किया जाता है। ठीक है? बट अगर आप
जजीज में देखेंगे तो वो दे ओपनली टॉक अबाउट दी मेंटल हेल्थ। और हम बात करें क्लाइमेट चेंज की। ठीक है? तो क्लाइमेट
चेंज आप देखेंगे चाहे वो लीडरशिप हो, चाहे वो न्यूज़ हो। आपको काफी कम इस पर डिस्कशन देखने को मिलेगा। वेयर एज अगर आप जजीस में
देखेंगे चाहे वो सोशल मीडिया के थ्रू हो, चाहे वो Instagram के थ्रू हो तो काफी सारी क्लाइमेट चेंज से रिलेटेड जो है हमें
चीजें देखने को मिलती हैं। ठीक है? देन काफी सारी एनजीओस का जो क्लाइमेट चेंज से रिलेटेड है उसके पार्ट भी आपको जो है
जेंजीस देखने को मिलेंगे। देन टेक एंड एi फ्रेंडली है। कंफर्टेबल यूजिंग एi प्लेटफार्म, ऑनलाइन लर्निंग, डिजिटल
पेमेंट्स एंड रिमोट वर्क। तो आप इन सब चीजों से रिलेट करेंगे। राइट? चाहे वो यूपीआई का यूज़ करना हो, चाहे वो एआई का
यूज़ करना हो, चाहे जेंजीस बहुत आ गए। देन डिजिटल नेटिव्स ग्र्यू अप विद स्मार्टफोनस, इंटरनेट, सोशल मीडिया एंड
नाउ एआई टूल्स। तो मोस्टली जो जेंजीस हैं वो स्मार्टफोन के साथ ही बड़े हुए हैं। तो इसलिए जो है ये डिजिटल नेटिव कहलाते हैं।
चलिए अब बात करते हैं आगे बात करने से पहले क्या हम जीडी का टॉपिक देख लेते हैं जो हमारे एसएसबी में आया था। ठीक है?
देखिए, व्हाट इज दी मोस्ट प्रेसिंग चैलेंज फेस्ड बाय जजी टुडे? लिमिटेड ओपोरर्चुनिटीज हैं, डिसीजन मेकिंग के
डायलेमाज़ हैं, प्रॉब्लम्स हैं, अर्निंग एंड फाइनेंसियल स्टेबिलिटी। तो सो अकॉर्डिंग टू यू मोस्ट प्रेसिंग। ठीक है?
सबसे बड़ा चैलेंज क्या फेस कर रहे हैं आज जजी? ये हमारा जो है टॉपिक था। तो उसमें क्या है? लीड है लिमिटेड अपोरर्चुनिटीज़,
डिसीजन मेकिंग डायलेमाज़ एंड अर्निंग एंड फाइनेंसियल स्टेबिलिटी। तो चलिए स्टार्ट करते हैं हम डिसीजन मेकिंग चैलेंज से। ठीक
है? जेंजी डिसीजन मेकिंग इज़ ऑफन इन्फ्लुएंस्ड बाय ट्रेंड्स, इन्फ्लुएंसर्स एंड वायरल कंटेंट। दे मे चूज़ करियर, फैशन
और इन्वेस्टमेंट बेस्ड ऑन व्हाट पॉपुलर रादर देन लॉन्ग टर्म प्लानिंग। देन क्या आता है? फियर ऑफ मिसिंग आउट
फोमो। सीइंग अदर सक्सेस ऑनलाइन क्रिएट्स प्रेशर टू फॉलो द सेम पाथ। इवन इफ इट इज़ नॉट सूटेबल फॉर देम। शॉर्ट अटेंशन स्पैन,
कॉन्स्टेंट स्क्रोलिंग [गला साफ़ करने की आवाज़] एंड फास्ट कंटेंट रिड्यूस पेशेंस। सो दे मे अवॉयड
डीप रिसर्च बिफोर मेकिंगेंट डिसीजंस। तो हमने बात करी थी सोशल मीडिया के अंदर कि कैसे शॉर्ट अटेंशन स्पैन हो रहा है। सोशल
मीडिया के टॉपिक में हमने देखा था कि कैसे जेंजीस जो है अफेक्ट हो रहे हैं शॉर्ट अटेंशन स्पैन से। चाहे वो रिड्यूस
क्रिटिकल थिंकिंग हो, लोअर अटेंशन स्पैन हो, क्रिएटिविटी, सप्रेशन, इमिटेशन एंड ओरिजिनलिटी एंड कॉग्निटिव ओवरलोड। तो इन
सब चीजों पे हमने बात करी थी सोशल मीडिया के अंदर। हैवी सोशल मीडिया यूज़ लेस आईडिया जनरेशन होते हैं। आप लोअर अटेंशन स्पैन
होता है, फ्रीक्वेंट प्लेटफार्म स्विचिंग हो गया। छड़ी करने बैठते हो तो Instagram, Snapchaat ये सारी चीजें जो है एक
कॉन्स्टेंट डिस्ट्रैक्शन रहता है। ठीक है? चलिए आगे क्या है? पीियर प्रेशर एंड कंपैरिजन। कांस्टेंट कंपैरिजन ऑन सोशल
मीडिया कैन इन्फ्लुएंस लाइफस्टाइल, चॉइससेस, स्पेंडिंग हैबिट्स एंड करियर डिसीजंस। देन करियर कन्फ्यूजन टू मेनी
करियर ऑप्शन, कंटेंट क्रिएशन, स्टार्टअप, गवर्नमेंट जॉब, फ्रीलांसिंग, एआई जॉब्स, क्रिएट कन्फ्यूजन एंड डिले, क्लियर डिसीजन
मेकिंग। तो, ये सारी चीजें जो है व्हाइल ग्रोइंग अप यू हैव फेस्ड इन योर लाइफ। देखा होगा Instagram पर क्या होता है?
रील्स के ट्रेंड चलते हैं। ठीक एक पर्टिकुलर सॉन्ग काफी पॉपुलर होता है। सारे लोग जो है उस पे रील्स बनाना शुरू कर
देते हैं। श्स बनाना शुरू कर देते हैं। ये सारी चीजें क्या है? सोशल मीडिया का इन्फ्लुएंस है। फियर ऑफ मिसिंग आउट है कि
बिकॉज़ सब ये चीजें कर रहे हैं। तो हमें भी वो चीज़ करनी है। इससे होगा क्या? शॉर्ट अटेंशन स्पैन होगा और पीियर प्रेशर और
कंपैरिजन यही तो चीजें हैं। ठीक है? चलिए अब हम बात करते हैं अर्न मनी। राइट? सो चैलेंजेस क्या हैं? रिलेटेड टू अर्निंग
मनी। सो चैलेंजेस फेस्ड बाय जेंजी इन रिलेटेड टू अर्निंग मनी। ओवर डिपेंडेंस ऑन डिजिटल करियर। मेनी जजी प्रेफर सोशल
मीडिया। कंटेंट क्रिएशन, गेमिंग और फ्रीलांसिंग। दीज़ करियर कैन गिव अ क्विक फेम बट इनकम इज ऑफन अनस्टेबल एंड
अनसर्टेन। एआई ऑटोमेशन का रिस्क है। आपने देखा होगा कि एआई आ चुका है। बट अभी तक कंपनीज़ और एजुकेशन भी हमारी फाइंड आउट
नहीं कर पा रही। फाइंड आउट नहीं कर पा रही कि एआई को हम किस तरीके से जो है इंटीग्रेट करें। क्योंकि अगर आप कोई भी
स्किल सीखने जाते हैं तो देयर इज़ आल्सो अ कॉन्स्टेंट थ्रेट कि ये स्किल जो है एआई रिप्लेस कर देगा। तो ये चीजें जो है
जेंजीस काफी ज्यादा फेस कर रहे हैं। राइट? कि अगर वो कोडिंग सीखना चाहते हैं तो अगर वो कोडिंग सीखना चाहते हैं तो फ्यूचर के
अंदर जो है एआई कोडिंग करेगा। अगर वो एडिटिंग सीखना चाहते हैं तो एडिटिंग, बेसिक डिज़ाइन, कंटेंट राइटिंग ये सारी
चीजें भी जो है एआई अपने आप ये सारी चीजें भी क्या है जो एआई फ्यूचर में करेगा। तो देयर इज़ आल्सो अ कॉन्सेंट बैटल जो चल रही
है रिलेटेड टू एआई। देन शॉर्ट अटेंशन एंड क्विक मनी माइंडसेट। सम जेस एक्सपेक्ट फास्ट सक्सेस थ्रू क्रिप्टो ट्रेडिंग और
वायरल कंटेंट व्हिच कैन लीड टू फाइनेंसियल लॉसेस। तो क्रिप्टो और ट्रेडिंग की एड्स आपने जरूर देखी होगी इंस्टा पे चाहे वो
YouTube पे ही होगा कि वेरियस ट्रेडर जो है वो फ्लेक्स करते हैं अपनी लाइफ को। राइट? हाउ मच दे आर अर्निंग। और एजेंसीज़
जो है ऑफन केम इनू देयर ट्रैप्स एंड दे मे लूज़ मनी। देन स्किल गैप प्रॉब्लम फोकसिंग ओनली ऑन डिजिटल ट्रेंड विदाउट स्ट्रांग
कोर स्किल लाइक टेक्निकल प्रोफेशनल और वोकेशनल स्किल कैन लिमिट स्टेबल करियर ग्रोथ। बट आपने मोस्टली देखा होगा ऑफिस
वर्क में जो जेंजीस हैं वो चैटबिलिटी की हेल्प लेते हैं। चाहे वो राइटिंग अ ईमेल हो, चाहे वो कोडिंग करना हो। सो यहां पर
स्किल गैप की प्रॉब्लम हमें देखने को मिल जाती है। चलिए हम बात करते हैं ओपोरर्चुनिटी रिलेटेड चैलेंजेस। स्किल
मिसमैच मेनी जजीस यूथ लर्न ट्रडी स्किल्स फ्रॉम द इंटरनेट बट कंपनीज़ डिमांड प्रैक्टिकल एक्सपीरियंस एंड डीप
एक्सपर्टीज क्रिएटिंग अ गैप। सपोज आपने देखा होगा काफी सारे लोग जो है Cवा यूज़ कर लेते हैं। ठीक है? बट व्हेन इट कम्स टू
AOब के जितने सॉफ्टवेयर हो चाहे वो figma हो यूजर इंटरफ़ेस डिजाइन करना हो तो उसमें उनको प्रॉब्लम देखने को मिलती है। बिकॉज़
यहां पर जो है आपको प्रैक्टिकल एक्सपीरियंस और डीप एक्सपर्टीज़ रिक्वायर्ड होती हैं। अनस्टेबल डिजिटल करियर
ओपोरर्चुनिटीज़ इन कंटेंट क्रिएशन, गेमिंग और इन्फ्लुएंसिंग मार्केटिंग आर अट्रैक्टिव बट इनकम स्टेबल। अनस्टेबल
डिजिटल करियर। तो हमने यह पहले भी बात करी है। ठीक है? क्योंकि मोस्टली जो लीड्स होती है ना वो एक दूसरे को ओवरलैप करती
है। तो इसलिए जो है हमारे पॉइंट्स भी जो है ओवरलैप देखने को मिल रहे हैं। देन अर्बन रूरल ओपोरर्चुनिटी गैप डिजिटल
ओपोरर्चुनिटीज़ एग्जिट डिजिटल ओपोरर्चुनिटीज़ एक्सिस्ट बट मेनी रूरल यूथ लैक स्ट्रांग इंटरनेट एक्सेस इन इंग्लिश
स्किल और एक्सपोज़र टू मच कंपटीशन। ऑलदो देयर आर मेनी ओपोरर्चुनिटीज़ स्टार्टअप फ्रीलांसिंग एआई जॉब्स मिलियंस आर कमटिंग
फॉर दी सेम डिजिटल प्लेटफार्म एंड गवर्नमेंट जॉब्स। ठीक तो ये चीज भी क्लियर है। अगर आप देखेंगे कंपटीशन आज उठाकर राइट
तो यह देखिए आप यह सारे तो आप यह देख सकते हैं यह डाटा जो है कंपटीशन का जिससे पता लगता है कि यस जेस आर फेसिंग टू मच
कॉमटीशन बात करें चाहे वो बात करें नीट की चाहे वो आईआईटी की चाहे वेरियस अदर कॉम्पटी कॉम्पिटिटिव एग्जाम्स तो वहां पर
बहुत ज्यादा कंपटीशन देखने को मिलता है तो यहां पर देखें हाई जॉब स्विचिंग फ्लेक्सिबिलिटी डिमांड 72% वुड लीव जॉब
विदाउट फ्लेक्सिबिलिटी 34% जेंसीज़ इन इंडिया फील्ड डिसइंगेज्ड एट वर्क दे वांट रिमोट वर्किंग फ्लेक्सिबल टाइमिंग
मीनिंगफुल वर्क तो ये सारी चीजें आपने भी नोटिस करी होगी। चाहे वो वर्क फ्रॉम होम हो, चाहे वो मीनिंगफुल वर्क हो। राइट?
जहां पर आपको पर्पस नहीं दिखता तो मोस्टली यू टेंड टू स्विच जॉब वर्क लाइफ बैलेंस प्रायोरिटी। ओनली 6% एम फॉर लीडरशिप रोल
एज मेन गोल 77 प्रायोरिटाइज वर्क लाइफ बैलेंस। तो ये सारी जो रिपोर्ट्स हैं वो किसकी है? डेलॉयड कंपनी के। ठीक है? तो
यहां पर कंफ्यूज मत होइए। लीडरशिप किसकी बात हो रही है? कंपनीज़ की बात हो रही है। आर्म्ड फोर्स की बात नहीं हो रही। चलिए हम
नेक्स्ट जीडी टॉपिक देखते हैं जो जेंजी से रिलेटेड आया हुआ है। व्हाट हैज़ द ग्रेटेस्ट इन्फ्लुएंस ऑन जेंजी व्हेन
चूजिंग देयर करियर पाथ? डिजिटल एक्सपोज़र एंड सोशल मीडिया इन्फ्लुएंस। अभी हमने इस पर काफी सारे पॉइंट्स पर बात करी है। देन
ग्लोबल अपोरर्चुनिटीज़ एंड इंटरनेशनल मोबिलिटी में देखा होगा कि इंडिया के अंदर काफी ज्यादा माइग्रेशन हो रहा है अभी।
राइट? पीपल आर गोइंग टू कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, जापान, राइट? जर्मनी फॉर देयर एजुकेशन एंड ओपोरर्चुनिटीज़। तो वो
सारी चीज़ इसमें आएगी। एंड देन पैशन, ड्रिवन करियर चॉइससेस। चलिए पहले बात करते हैं हम पैशन, ड्रिवन करियर चॉइससेस की। तो
काफी सारे स्टूडेंट इवन बिग कॉलेजेस क्या कर रहे हैं? स्किप कर देते हैं प्लेसमेंट एंड दे स्टार्ट देयर ओन स्टार्टअप। तो
क्या होगा? स्टार्टअप रिलेटेड टू फिटनेस देन रेस्टोरेंट्स, रिसाइक्लिंग बिनेसेस, ई-कॉमर्स वेबसाइट, ड्रॉपशिपिंग राइट? तो
ये सारे बिनेस और स्टार्टअप जो हैं जेंजीस करना प्रेफर कर रहे हैं। देन क्रिएटर एंड सोशल मीडिया करियर। ठीक है? तो इसमें
क्या-क्या चीजें आ जाती हैं? वीडियो एडिटर, इन्फ्लुएंसरर, कम्युनिटी मैनेजर, एसइओ, स्क्रिप्ट राइडर ये सारी चीजें क्या
है? क्रिएटर में देखने को मिल जाती हैं। क्रिएटिव डिजाइन एंड रोल्स में क्या-क्या आ जाती हैं? ग्राफिक डिजाइनिंग हो गया,
फैशन डिज़ाइनर, फोटोग्राफर, गेम डिज़र, मोशन डिज़र, क्रिएटिव डिज़ रोल। तो अगर हम पैशन और सोशल मीडिया की बात करें तो ये सारे
करियर जो हैं काफी ज्यादा प्रॉमिनेंट है जो पॉइंट्स आप डाल सकते हैं। देन अगर हम बात करें ग्लोबल अपोरर्चुनिटीज़ एंड
इंटरनेशनल मोबिलिटी की बात तो आप देख सकते हैं जो जेंजीस हैं। राइट? वो प्रेफर कर रहे हैं कहां पर? कनाडा जाना है। तो अगर
आप देखेंगे कनाडा क्यों पीआर फ्रेंडली है। ठीक है? स्ट्रांग इंडियन डायस्पोरा हाई डिमांड इन आईटी हेल्थ केयर ट्रेड्स। तो सो
अराउंड 4 लाख स्टूडेंट तो 2023 में गए थे। राइट? और अभी भी जो माइग्रेशन टुवर्ड्स कनाडा है स्टिल गोइंग ऑन। थिंक ट्रेंड है
आप देख सकते हैं। देन अगर हम बात करें ऑस्ट्रेलिया की तो क्या है? ऑस्ट्रेलिया एक डेवलप्ड नेशन है। पॉपुलेशन कम है। वेदर
जो है अगर वेदर पैटर्न भी देखें जैसे कनाडा में आपको एक्सट्रीम कोल्ड देखने को मिलते हैं। बट वेट वेट वेट वेट वेट वेट
वेट वेट वेट वेर एस वेदर जो पैटर्न आपको ऑस्ट्रेलिया में है वो सिमिलर लाइक इंडिया दिखेगा। तो अराउंड 2.75 इंडियंस जो है वो
ऑस्ट्रेलिया गए। देन यूएसए राइट टेक सिलिकॉन वैली हाई पेइंग आईटी जॉब्स टॉप यूनिवर्सिटीज एंड इनोवेशन। तो यूएसए। देन
हम बात करें जर्मनी की तो जर्मनी में क्या है? देखिए नो ट्यूशन फीस। तो जर्मनी क्या स्टूडेंट फ्रेंडली है इन टर्म्स ऑफ़ अह हम
बात करें एजुकेशन फीस की, एजुकेशन लोन की। फिर इधर हम बात करते हैं जापान की। तो जापान क्या ग्रोइंग टेक एंड रोबोटिक
सेक्टर है के पॉप ए पॉप कल्चर अट्रैक्शन जो है इंडियंस को जापान की तरफ लेके जा रही है। ये सारे पॉइंट्स जो है आप यूज़ कर
सकते हैं माइग्रेटिंग और बेटर अपोरर्चुनिटीज़ के अंदर जहां पर आप एग्जांपल देंगे कनाडा, ऑस्ट्रेलिया,
यूएसए, जर्मनी, जापान का। राइट? चलिए और डिजिटल एक्सपोज़र एंड सोशल मीडिया पे भी हमने बात करी है। [संगीत] चलिए अब बात
करते हैं हम यूथ की। राइट? तो यूथ यंग पपुलेशन शेपिंग फ्यूचर इकॉनमी देन इन इंडिया [संगीत] यूथ एज इज अराउंड 15 टू 29
यानी कि अगर मैं बात करूं जजीज की तो वो यूथ सारे उसी में फॉल कर रहे हैं। देन दे फॉर्म अराउंड 27% ऑफ इंडियास करंट पपुलेशन
तो यूथ जो है अराउंड 27% ऑफ इंडियास करंट पापुलेशन। चलिए पहले जीडी का टॉपिक देख लेते हैं हम।
चलिए जीडी का टॉपिक देखते हैं। हु हैज द ग्रेटेस्ट इन्फ्लुएंस ऑन द डिसीजन मेकिंग एंड करियर चॉइससेस ऑफ इंडियास यूथ? जब भी
कोई इंडिया का यूथ डिसीजन लेता है तो मोस्ट इन्फ्लुएंस वो किससे होता है? अपने फ्रेंड्स से, पेरेंट्स या फैमिली मेंबर से
या टीचर, मेंटर्स एंड गुरु से? ठीक है? तो ये तीन लीड्स हैं। चलिए, एक-एक करके हम इन लीड्स को पढ़ते हैं।
ठीक है? सबसे पहले हमारे पास आता है फ्रेंड्स पियर ग्रुप। चलिए हम सबसे पहले पढ़ते हैं फ्रेंड्स। तो एडलेसेंट मोर
लाइकली टू स्मोक ड्रिंक इफ फ्रेंड्स डू। एग्जांपल स्कूल ग्रुप्स इनफ्लुएंसिंग फर्स्ट अल्कोहल एंड स्मोकिंग यूज़। तो
कॉलेजेस और स्कूल में आपने देखा होगा। ठीक है? डब्ल्यूho की स्टडीज क्या बताती है? जो आप फर्स्ट एंड स्मोक या ड्रिंक करते
हैं ना वो अपने फ्रेंड्स के साथ ही करते हैं। तो ये चीज आपने अपनी सोसाइटी के अंदर ऑब्जर्व करी होगी। तो ये बात बिल्कुल ट्रू
है। राइट? देन सोशल मीडिया इन्फ्लुएंस पीयू रिसर्च सेंटर टीम्स फील प्रेशर टू फॉलो ट्रेंड ड्यू टू फ्रेंड्स ऑनलाइन बात
करें एग्जांपल्स की Instagram ट्रेंड्स रील्स कल्चर तो हमने बात करी थी कैसे अगर एक पर्टिकुलर ट्रेंड फॉलो हो रहा है सोशल
मीडिया के ऊपर तो क्या है आप भी उसे देख के फॉलो करते हैं तो ये क्या है तो ये क्लियरली दिखाता है कि आप अपने फ्रेंड्स
से और पीियर से इन्फ्लुएंस होते हो। ठीक है? देन नेक्स्ट अगर हम देखें करियर चॉइससेस कि सर्वे शोज़ स्टूडेंट चूज़ करियर
बेस्ड ऑन पीियर चॉइससेस इंजीनियरिंग ट्रेंड ड्यू टू फ्रेंड सर्कल। आपने देखा होगा आफ्टर 12थ क्लास आप देखते हैं कि
आपके मोस्टली फ्रेंड्स जो है एक इंजीनियरिंग पर्स्यू कर रहे हैं एक पर्टिकुलर ब्रांच में सीएस में राइट
कंप्यूटर इंजीनियरिंग में तो सारे वहीं पर कुछ फ्रेंड्स जो है वो नीट की प्रिपरेशन कर रहे हैं तो नीट तो इसी तरीके से जो है
हमारी करियर चॉइस जो है अपने फ्रेंड्स से काफी ज्यादा इफेक्ट होती है। आपने देखा होगा काफी सारे आपके फ्रेंड्स जो है वो
क्या है अब्रॉड नेशंस जा रहे हैं फॉर हायर स्टडीज। तो क्या है आप उससे काफी ज्यादा इन्फ्लुएंस होते हैं। देन मेंटल हेल्थ
इंपैक्ट लसेंड कमीशन की रिपोर्ट कहती है पीियर एक्सेप्टेंस और रिजेक्शन अफेक्ट्स एंजायटी डिप्रेशन। ठीक है? एग्जांपल
बुलिंग स्ट्रेस, लो कॉन्फिडेंस। तो ये सारी चीजें भी आप देख सकते हैं। ठीक है? देन लाइफस्टाइल हैबिट्स, फ्रेंड्स
इन्फ्लुएंस, फैशन, फिटनेस, गेमिंग हैबिट्स, जिम कल्चर, स्प्रेडिंग थ्रू पीियर ग्रुप्स। आपने देखा होगा PUBG जो है
आपने देखा होगा कि चाहे वो हेल्थ एंड फिटनेस में जिम जाना हो तो फ्रेंड्स एक साथ ही जिम जाते हैं। देन आपने PUBG का
एग्जांपल आप ले सकते हैं गेमिंग में। ठीक है? तो ये क्या है? फ्रेंड्स ही फ्रेंड्स के साथ ही खेलते हैं। राइट? कॉल ऑफ
ड्यूटी। तो ये सारी गेमिंग का ट्रेंड भी क्यों स्टार्ट हुआ? गेमिंग का भी जो इन्फ्लुएंस है वो किससे? पीियर इन्फ्लुएंस
से ही होता है। चलिए अब हम बात करते हैं पेरेंट्स और फैमिली इन्फ्लुएंस। ठीक है? तो करियर डिसीजन मेनी इंडियन स्टूडेंट
फॉलो पैरेंटल एक्सपेक्टेशंस। प्रेशर फॉर यूपीएससी इंजीनियरिंग मेडिसिंस। तो क्या होता है? जब भी बच्चा छोटा होता है, ठीक
है? उसके दिमाग में पहले से डाल दिया जाता है कि तो यू हैव टू बिकम अ डॉक्टर, यू हैव टू बिकम अ सिविल सर्वेंट, यू हैव टू गो इन
आर्म्ड फोर्स। ठीक है? तो करियर डिसीजन जो है वो पेरेंट्स से इन्फ्लुएंस होते हैं। देन वैल्यूज़ एंड एथिक्स, अर्ली
अपब्रिंगिंग शेप्स, डिसिप्लिन, होनेस्टी, रिस्पेक्ट फॉर एल्डर्स, कल्चरल वैल्यूज़, फेस्टिवल्स को सेलिब्रेट करना, रिलीजियस
वैल्यू। तो ये सारी कहां से आती है हमें? पेरेंट्स की तरफ से आती है। देन एजुकेशन इन्वेस्टमेंट, पैरेंटल इन्वॉल्वमेंट,
इंप्रूव्स लर्निंग लेवल्स, एक्सप्रेशन। ठीक है? एग्जांपल क्या है? ट्यूशन सपोर्ट, स्कूल सिलेक्शंस। तो देखिए जब आप छोटे
होते हैं तो स्कूल किसके द्वारा सेलेक्ट किया जाता है? फैमिली मेंबर्स के द्वारा। आपकी फीस किसके द्वारा पे करी जाती है?
फैमिली मेंबर्स के द्वारा। ठीक है? तो एजुकेशन इन्वेस्टमेंट में जो है पूरा रोल किसका होता है? फैमिली मेंबर्स का तो होता
है। मेंटल हेल्थ सपोर्ट, सपोर्टिव पैरेंट रिड्यूसेस स्ट्रेस, ओपन कम्युनिकेशन, लोअर्स एंजाइटटी। तो हमने क्या डिसीजन
देखे? चाहे वो करियर का डिसीजन हो। जो वैल्यू एथिक्स, वैल्यू, एथिक्स, कल्चर, रिलीजन वो हमें कहां से मिल रहा है? अपने
फैमिली मेंबर से मिल रहा है। ठीक है? तो हमारा जो फर्स्ट स्कूल होता है वो भी किसके द्वारा चुना जाता है? हमारे
पेरेंट्स के द्वारा। देन मेंटल हेल्थ सपोर्ट अगर अगर ओपन कम्युनिकेशन है। ठीक है? देन हम देखते हैं जिनाइल लायबिलिटी।
देखिए जवेनाइल लायबिलिटी अंडर इंडियन लॉ अगर कोई माइनर कमिट करता है रोड एक्सीडेंट द गार्डियन ओनर यूजुअली फादर हेल्ड
रिस्पांसिबल। तो ये लॉ अगर बनाया है देखिए ये लॉ क्या दर्शाता है कि जब तक अ माइनर यानी कि 18 इयर्स से बिलो है तो वो किसकी
रिस्पांसिबिलिटी है? पेरेंट्स की है। राइट? अगर वो कोई भी रोड एक्सीडेंट कमिट करता है तो उसमें किसके पेरेंट को हेल्ड
किया जाएगा। तो इससे हमें पता लगता है कि यस पेरेंट्स जो है वो इन्फ्लुएंस करते हैं यूथ ऐज में भी चिल्ड्रन इससे क्या पता
लगता है कि यस गवर्नमेंट भी लायबल मानती है पेरेंट्स को ही अगर बच्चा जो है कोई कमिट एक्सीडेंट कर रहा है फ्रेंड्स को
नहीं मान रहे वो ठीक है वो फ्रेंड्स को नहीं मानेंगे किसको मानेंगे पेरेंट्स को तो इससे पता लगता है कि यस पेरेंट्स जो है
वो इन्फ्लुएंस करते हैं डिसीजन में और पेरेंट्स जो हैं वो स्टिल इंपैक्ट डालते हैं यूथ को ठीक है तो ये कुछ पॉइंट्स हैं
जो हमें डिस्कस करना है बिकॉज़ कुछ हमें देखने को मिले हैं जहां पर एक्सीडेंट से रिलेटेड टॉपिक्स आए हैं और जहां पर लीड्स
में जो है पेरेंट्स का रोल भी आया है तो आप यहां पे बता सकते हैं। देखिए तो यहां पर अगर हम बात करें द्वारका फैटल क्रैश की
तो यहां पर क्या था कि एक एसयूवी गाड़ी में 17 ईयर ओल्ड जिसको ड्राइव कर रहा था वो काफी ज्यादा स्पीड में था। अबव 100 जो
है एक बॉय जो टू व्हीलर पर बाइक से जा रहा था। दैट एसयूवी हिट दैट बइकर एंड दी बाइकर डाइड एट एंड द बाइकर डाइड एट दी स्पॉट।
यहां पर एक मेन पॉइंट देखिए कि 17 ईयर ओल्ड के पास एसयूवी आई कैसे? वो उसके पेरेंट्स की थी। राइट? यहां पर क्या है?
पेरेंट्स का रोल आया कि पेरेंट्स ने कैसे अलाउ कर दिया उस बच्चे को कार ले जाने के लिए। तो यहां पर क्या है? पेरेंट्स का रोल
आया। देन टीन किल्ड थ्री इंजर्ड एज लग्जरी कार क्रैशेस ऑन नोएडा। तो देखिए लग्जरी कार एक टीन के पास कैसे आई? ठीक है? वो
किससे पैरेंट से आई। देन स्पीड थ्रिल्स बट किल्स टीन ड्राइविंग 118 कि.मी. पर आर फार्म हाउस वॉल गुजरात टू डेड। ठीक है? तो
यहां पर भी अगर आप देखेंगे तो टीन जो है एक हाई स्पीड कार चला रहा था। ठीक है? तो मोस्टली आपने काफी सारे केसेस देखे होंगे
जहां पर जो है टीन लग्जरी कार चलाते हुए जो है जो है कॉन्सेंटली इनवॉल्व। तो इन सारी चीजों में यही पता लगता है कि जो कार
है या फिर अदर व्हीकल है, लग्जरी व्हीकल्स हैं ये पेरेंट्स ही प्रोवाइड कर सकते हैं। तो यहां पर जो है पेरेंट्स जो है वो उस
चीजों के लिए लायबल हैं। चलिए हम बात करते हैं अब टीचर एंड एजुकेशन सिस्टम की। तो लर्निंग आउटकम्स टीचर क्वालिटी डायरेक्टली
इंपैक्ट परफॉर्मेंस। देखिए अगर अच्छा टीचर होगा तो आपके कॉनंसेप्ट्स भी अच्छी तरीके से क्लियर होंगे। टीचर जो है डायरेक्टली
इंपैक्ट करते हैं एजुकेशन सिस्टम को। देन स्किल डेवलपमेंट यूनेस्को की रिपोर्ट कहती है कि टीचर क्रूशियल फॉर 21 सेंचुरी
स्किल्स क्रिटिकल थिंकिंग और कम्युनिकेशन के लिए। ठीक? देन करियर गाइडेंस टीचर गाइड सब्जेक्ट्स एंड करियर चॉइससेस सजेस्टिंग
स्ट्रीम्स एंड एग्जाम्स हमारे पास क्या कहता है मोटिवेशन एंड कॉन्फिडेंस एनकरेजिंग टीचर बूस्ट सेल्फ एस्टीम
एप्रिशिएट एप्रिसिएशन इंप्रूव्स पार्टिसिपेशन राइट डिजिटल एंड मॉडल लर्निंग अ टीचर्स इंट्रोड्यूस न्यू टूल्स
स्मार्ट क्लासेस कोडिंग ऑनलाइन प्लेटफार्म प्रोजेक्ट लर्निंग राइट देन डिसिप्लिन बिहेवियर स्कूल्स शेप्स बिहेवियर्स
पैटर्न्स तो ये सारे कुछ लाइक टाइम मैनेजमेंट एंड टीम वर्क ठीक है तो ये कुछ पॉइंट्स थे जो कि टीचर से रिलेटेड थे तो
आई होप तो ये जीडी का टॉपिक आपको क्लियर होगा चलिए अब हम चलते हैं वुमेन एंपावरमेंट की तरफ। ठीक है? तो यहां पर जो
है हमें जीडी और लेक्चरेट दोनों में ये टॉपिक देखने को मिलता है। ठीक है? गिविंग वुमेन इक्वल राइट्स, ओपोरर्चुनिटीज़,
एजुकेशन, इकोनॉमिक इंडिपेंडेंस एंड डिसीजन मेकिंग पावर इन सोसाइटी। ठीक है? तो उनको इक्वल राइट्स देना, ओपोरर्चुनिटीज़ देना,
जॉब के लिए, एजुकेशन के लिए, इकोनमिक इंडिपेंडेंस मतलब क्या हो गया? कि वो अर्न कर सकती हैं एंड डिसीजन मेकिंग। ठीक है?
तो इट इंश्योर दैट वुमेन कैन पार्टिसिपेट इक्वली इन इकोनमिक, सोशल एंड पॉलिटिकल लाइफ। ठीक है? चलिए बात करते हैं
एजुकेटिंग वुमेन इंप्रूव क्या करता है? फैमिली हेल्थ। जैसे कि हमने देखा है वुमेन रीइ्वेस्ट अबाउट 90% ऑफ देयर इनकम बैक टू
देयर फैमिली वेलफेयर। तो इससे क्या पता लगता है हमें कि फैमिली हेल्थ अगर हम एजुकेट करते हैं किसी वुमेन को तो
डेफिनेटली फैमिली हेल्थ इंप्रूव होती है। चाइल्ड एजुकेशन अगर एक वुमेन एजुकेटेड है तो डेफिनेटली वो अपने बच्चों को भी एजुकेट
करेगी। फॉर चाइल्ड एजुकेशन एजुकेटिंग वुमेन इज़ेंट देन इकोनमिक प्रोडक्टिविटी। राइट? सो इफ वुमेन इज़ एजुकेटेड शी कैन
आल्सो वर्क। तो इससे क्या होगा कि जो ओवरऑल फैमिली की इकोनमिक प्रोडक्टिविटी है वो इंप्रूव होगी। चलिए बात करते हैं।
व्हाई वुमेन एमावरमेंट इज़ नीडेड। ठीक है? तो सबसे पहले क्या है? लो फीमेल वर्क फ़ोर्स पार्टिसिपेशन इंडिया फीमेल लेबर
फ़ोर्स पार्टिसिपेशन इज़ अराउंड 30% तो वो तो उससे क्या निकल के आता है कि अराउंड मींस कि व्हिच मींस कि आउट ऑफ थ्री इंडियन
वुमेन ओनली वन इज़ पार्टिसिपेटिंग इन लेबर फोर्स अकॉर्डिंग टू वर्ल्ड बैंक। उससे होगा क्या? अगर हम यही फीमेल का रेशियो जो
है इनक्रीस करते हैं अप टू टू और थ्री तो इंडिया 700 बिलियंस तो इंडिया जो है अपनी जीडीपी के अंदर अराउंड 700 बिलियंस ऐड कर
सकता है। यहां पर क्या होगा? इंडिया की इकॉनमी अपने आप बेटर हो जाएगी। ठीक है? तो इसलिए वुमेन का पार्टिसिपेशन इन इकॉनमी इज़
वेरीेंट। अकॉर्डिंग टू द वर्ल्ड बैंक डाटा इंडियास फीमेल वर्क फ़र्स्ट पार्टिसिपेशन इज़ सिग्निफिकेंटली लोअर देन दी मेनी
डेवलप्ड कंट्रीज। ठीक है? देन एजुकेशन गैप अकॉर्डिंग टू यूनेस्को रिपोर्ट्स ऑल द फीमेल लिटरेसी इन इंडिया हैज़ इंप्रूव्ड
अराउंड 70% स्टिल लोअर देन मेल लिटरेसी। मेल की लिटरेसी कितनी है? अराउंड 85% बट वुमेन की अगर हम देखें तो 70% की है ओनली।
देन हम बात करें सोशल इक्वलिटी की। वुमेन स्टिल फेसेस चैलेंजज़ सच ऐज़ जेंडर डिस्क्रिमिनेशन, लोअर वेजेस, लिमिटेड
लिमिटेड लीडरशिप रिजर्वेशन। हां। तो यहां पर एक इंपॉर्टेंट रिपोर्ट पब्लिश होती है। वहां पर एक इंपॉर्टेंट रिपोर्ट पब्लिश
होती है ऑन दी प्रोग्राम व्हिच वाज़ रन बाय दी आर गवर्नमेंट। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ। तो यहां पर क्या है कि जो हरियाणा है राइट?
तो वहां पर जो हमारा जेंडर रेश्यो था वो क्या था? जो हमारा जेंडर रेश्यो था मेल एंड फीमेल का राइट? तो वहां पर 2011 में
834 था। बट अगर हम रीसेंट इयर्स में अभी देखें तो वो कितना हो गया? 900 हो गया। तो यस इंप्रूवमेंट हुई है। बट अगर हम कुछ
डिस्ट्रिक्ट्स में देखें स्पेशली लाइक रोहतक के कुछ विलेजेस में वहां पर रेश्यो जो है वो 800 से बिलो अभी भी है। राइट? उस
बात को देखें तो ऑलमोस्ट 15 इयर्स हो गए हैं। बट अगर हम जेंडर रेश्यो देखें कुछ पर्टिकुलर विलेजेस का तो वहां पर जो है
834 से नीचे जाके 800 हो चुका है। देन इससे हुआ क्या कि यहां पर इन्वेस्टिगेशन के लिए ऑर्डर दे दिया गया। ठीक है? तो
वहां पर पाया गया कि स्टिल फीमेल फर्टिसाइड्स जो है विलेजेस के अंदर काफी ज्यादा हो रहा था और उसमें कुछ डॉक्टर्स
भी इन्वॉल्व थे। हॉस्पिटल्स भी इन्वॉल्व थे। तो इससे हमें पता लगता है कि या स्टिल फीमेल फर्टिसाइड्स जो है वो हो रहा है।
ठीक है? तो आप एग्जांपल दे सकते हैं कि सो यू कैन गिव दी एग्जांपल इन योर जीडी। स्टिल इन हरियाणा सम ऑफ़ द विलेजेस इन
रोहतक स्पेशली दी जेंडर रेशो इज़ वर जेंडर रेशो ऑफ़ मेल एंड फीमेल वाज़ अराउंड 800 गर्ल्स पर थाउजेंड बॉयज़ अंडर दी बेटी बचाओ
बेटी पढ़ाओ रिपोर्ट एंड देन इन्वेस्टिगेशन ऑर्डर हैज़ बीन गिवेन एंड इट वाज़ फाउंड दैट स्टिल दी फीमेल फर्टिसाइड इज़ प्रिवेलेंट
इन दी विलेजेस। तो अवेयरनेस कैंपेन अगेंस्ट फीमेल फर्टिसाइड इज़ रिक्वायर्ड। तो चलिए हम बात करते हैं गवर्नमेंट
स्कीम्स की फॉर वुमेन एमावरमेंट इन इंडिया। तो पहली क्या है? स्टैंड अप इंडिया स्कीम। तो यहां पर क्या है कि अगर
कोई वुमेन अपना बिज़नेस स्टार्ट कर रही है व्हिच विल कॉस्ट अराउंड 10 लाख टू 1 करोड़। तो सो इफ सपोज इफ यू आर लेंडिंग ₹1 करोड़
तो अराउंड ₹75 लाख गवर्नमेंट विल गिव यू एज अ लोन। तो जो भी आप बिजनेस कर रहे हैं उसका 75% कॉस्ट जो है वो गवर्नमेंट आपको
एज अ लोन देगी। देन क्या है हमारे पास? प्रधानमंत्री उज्जवला योजना प्रोवाइड्स फ्री एलपीजी कनेक्शंस। तो देखिए तो इसमें
क्या होगा कि आपको एलपीजी कनेक्शन जो एक बार लेने की जरूरत है। उसके बाद रिफिल आप ₹200 टू ₹300 में रिफिल हो जाता है। ठीक
है? ₹200 टू ₹300 में हो जाएगा। वेयर ए अगर आप ऐसे देखे तो सिलेंडर विल कॉस्ट अराउंड ₹900 से अबव ही। राइट? ठीक है? एंड
देन हमने पढ़ा है बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ इंप्रूव्स गर्ल चाइल्ड सर्वाइवल एंड एजुकेशन देन सुकन्या समृद्धि योजना क्या
है देखिए सेविंग स्कीम फॉर गर्ल्स चिल्ड्रन सेविंग स्कीम फॉर गर्ल्स चाइल्ड एजुकेशन एंड मैरिज आउटकम मिलियंस ऑफ
अकाउंट्स ओपन फॉर गर्ल्स प्रमोटिंग फाइनेंसियल सिक्योरिटी चाहे वो एबीआई हो पीएनबी हो तो इसके अंदर क्या है कि तो इस
स्कीम के अंदर क्या है जितनी भी गर्ल्स जो 10 इयर्स बिलो हैं राइट तो उनके लिए क्या है एक सेविंग अकाउंट्स जो है ओपन किया गया
है डिफरेंट बैंक अकाउंट्स में ठीक है देन ये कुछ और मिशनंस हैं जो कि हम बात करेंगे किसमें स्किल इंडिया प्रोग्राम के अंदर हम
बात करेंगे ठीक है ये सारे क्या है इसमें वुमेन इनको हेल्प मिल रही है इन सारे प्रोग्राम से। चाहे वो स्टेप प्रोग्राम
हो, चाहे वो एंप्लॉयमेंट लिंक इंसेंटिव स्कीम हो, प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना हो, स्किल डेवलपमेंट सेंटर्स हो,
इंडस्ट्री यूनिवर्सिटी पार्टनरशिप प्रधानमंत्री कौशल के अंदर। ठीक है? तो ये सारी चीजें हम बात करने वाले हैं। तो जब
हम वमेन एनवायरमेंट की स्कीम्स की बात कर रहे हैं तो हम अभी क्या पढ़ के आए थे कि Google का वुमेन विल इनिशिएटिव प्रोग्राम
था। Google का वी प्रोग्राम था। देन Microsoft इंडियन नेम पार्टनरशिप विद गवर्नमेंट टू ट्रेन अ वमेन। राइट? सो टू
ट्रेन वमेन इन एआई करिकुलम। तो इन सारी चीजों से हमें क्या पता लगता है कि आईटी सेक्टर के अंदर भी वुमेन एंपावरमेंट है।
तो तो ये वाले जितने भी पॉइंट्स हमने पढ़े हैं ये जरूर आप वुमेन एंपावरमेंट के अंदर डालिए। ठीक है? तो हमें क्या है? लिमिटेड
पढ़ना है और वही लिमिटेड रिसोर्स को डिफरेंट एरियाज में यूज़ करना है। कुछ एग्जांपल्स देखते हैं जो हमें अपने जीडी
के अंदर यूज़ करने हैं। ठीक है? वुमेन एमावरमेंट इन डिफरेंट सेक्टर। करते हैं डिफेंस सेक्टर की। तो वुमेन ऑफिसर्स इन
इंडियन आर्मी, नेवी एंड एयरफोर्स देन परमानेंट कमीशन फॉर वुमेन ऑफिसर्स, वुमेन अलाउड इन नेशनल डिफेंस एकेडमी। ठीक है?
स्क्वाडन लीडर अवनीश चतुर्वेदी बिकम दी वन ऑफ़ द फर्स्ट वुमेन फाइटर पायलट। देन सब लेफ्टिनेंट शिवांगी फर्स्ट वीमेन नेवेल अह
पायल देन कैप्टन तानिया शेरगिल फर्स्ट वीमेन ऑफिसर टू लीड ऑल मेल कंटिंजेंट एट दी राजपथ देन लेफ्टिनेंट कमांडर दिलना
लेफ्टिनेंट कमांडर रूपा दे हैव डन दी सेलिंग एक्सपेडिशन राइट नोन एज निका सागर परिक्रमा देन हम बात करें कैप्टन शिवा
चौहान की पोस्टेड एट हाईएस्ट बैटल फील्ड सियाचन तो ये एग्जांपल जरूर आप याद रखें देन हम बात करें मेजर दीक्षा की राइट तो
शी वाज़ दी फर्स्ट वूमेन टू अर्न बलिदान बैच ऑफ दी पैरा स्पेशल फ़ एंड यह पहले अपने दो अटेम्प्ट्स में टू गेट दी बलिदान बैच
वाज़ अनसक्सेसफुल बट शी वाज़ बट इन दी थर्ड अटेम्प्ट शी मेड इट एंड शी गॉट दी बलिदान बैच देन स्पोर्ट्समैन ठीक है प्रीति रजक
शी इज़ दी फर्स्ट फीमेल सूबेदार देन शिवांगी सिंह राइट इंडियास फर्स्ट फीमेल फाइटर पायलट अह टू फ्लाई रफाल जेट देन
एमएनएस की अगर हम बात करें तो मिलिट्री नर्सिंग सर्विसेस तो यहां पर भी आप देख सकते हैं तो ये कुछ पॉइंट्स थे वुमेन
एंपावरमेंट के और वुमेन शॉर्ट सर्विस ऑफिसर इन डिफेंस फोर्स नाउ टू गेट पेंशन पहले क्या था? शॉर्ट सर्विस कमीशन को
पेंशन अलाउड नहीं थी। बट रिसेंटली अभी सुप्रीम कोर्ट का एक जजमेंट आया है जहां पर वुमेन सर्विस कमीशन जहां पर वुमेन
शॉर्ट सर्विस कमीशन को पेंशन देने की बात की जा रही है। तो ये कुछ पॉइंट्स हैं जो डिफेंस से रिलेटेड हैं। एंड ये जितने भी
पॉइंट है ये काफी ज्यादा इफेक्टिव हैं। एंड ये सारे पॉइंट्स काफी ज्यादा इंपॉर्टेंट है जो आपको जो कि आपको याद
रखने हैं। ठीक? देन अगर हम स्पोर्ट्स की बात करें राइट तो आपको एग्जांपल्स याद रखने हैं। मैरीकॉम, पीवी सिंधु, साक्षी
मलिक, मीराबाई चानू, मनुबाकर ये सारे एग्जांपल्स आपको याद रहने चाहिए। देन हम बात करें अगर पॉलिटिक्स की तो लोकसभा एंड
स्टेट असेंबलीज 33% रिजर्वेशन प्रोपोज्ड अंडर दी नारी शक्ति वंदन एक्ट आई रिपीट अंडर दी नारी शक्ति वंदन एक्ट राइट और
पंचायत एंड लोकल बॉडीज के अंदर भी 33% रिजर्वेशन फॉर वुमेन ठीक है प्रेसिडेंट इज़ अ वुमेन देन फाइनेंस मिनिस्टर इज़ अ वुमेन
दिल्ली सीएम हो चाहे वो वेस्ट बंगाल सीएम ठीक है चाहे वो वेस्ट बंगाल सीएम रह चुकी हो चाहे वुमेन चाइल्ड डेवलपमेंट हो तो ये
सारी जो है हमारी वुमनस हैं और काफी सारी वुमनस हैं जो पॉलिटिक्स और लीडर शिप रोल में आपको देखने को मिलेंगे। ठीक है? चलिए
अब हम बात करें तो पार्लियामेंट सीट्स में इंक्रीस टू 86 व्हिच इज़ वन इन वुमेन रिजर्वेशन। तो इससे होगा क्या? देखिए
ग्रेटर वुमेन रिप्रेजेंटेशन इन पार्लियामेंट मतलब क्या होगा कि स्ट्रंगर सेफ्टी एंड एंपावरमेंट आउटकम्स फॉर वुमेन।
तो उससे होगा क्या कि वुमेन के इशज़ को डिस्कस किया जाएगा। वुमेन की सेफ्टी के बारे में जो है ज्यादा से ज्यादा बात होगी
और उसके ऊपर लॉ लाए जाएंगे। ठीक है? तो इसलिए क्या है कि अगर ज्यादा वुमेन का पार्टिसिपेशन होगा तो इससे होगा क्या?
ओवरऑल स्ट्रंगर सेफ्टी एंड एंपावरमेंट होगी वुमेन। तो वमेन एंपावरमेंट इन एजुकेशन सेक्टर बोले तो मेनी आईआईएम्स एम
40 टू 50% ऑफ़ वुमेन इंटेक थ्रू एडमिशन पॉलिसीज और बहुत सारे आईएम है जहां पर क्या है 50% वुमेन है 50% मेल है जहां पर
50% क्या है फीमेल 50% मेल है एंड सम आईएम्स में क्या है 50 से अबव भी आपको फीमेल देखने को मिल रही है ठीक है देन
आईआईटीस ठीक है 20% सीट्स जो रिजर्व है फीमेल के लिए देन अगर हम बात करें सम स्टेट प्रोवाइड फीमेल कोटा इन मेडिकल
कॉलेजेस लाइक इन तेलंगाना बिहार में भी अबाउट 33% रिजर्वेशन वुमेन इन गवर्नमेंट जॉब्स एंड एजुकेशन तो ये कुछ एग्जांपल है
जो कि आपको याद रखने एजुकेशन से रिलेटेड जीडी का टॉपिक देखें तो हाउ कैन वुमेन सेफ्टी एनश्यर्ड इन सोसाइटी? तो फर्स्ट
लीड क्या है? वुमेन एंपावरमेंट एंड सेल्फ रिलायंस। तो इसमें आपको कौन से एग्जांपल देने हैं? आपको सारे डिफेंस के एग्जांपल
जो हमने अभी बात करें हैं। थी चाहे वो फर्स्ट फाइटर पायलट इन नेवी हो, एयरफोर्स हो, चाहे फर्स्ट राफाल पायलट हो, चाहे वो
फर्स्ट सूबेदार इंडियन चाहे वो फर्स्ट बलिदान बैच वुमेन अर्न कर रही है। बिकॉज़ इससे होगा क्या? देखिए इससे होगा क्या कि
एक एग्जांपल सेट होता है सोसाइटी के अंदर कि वुमेन आर स्ट्रंगर। तो इससे क्या होगा? वुमेन सेफ्टी अपने आप इंश्योर होगी। और
एनडीए के अंदर हमने वैसे भी वुमेस को अलाउ करा है। परमानेंट कमीशन भी हम वुमेन को अलाउ कर रहे हैं। पेंशन भी कर रहे हैं।
राइट? देन आपको किसके? स्पोर्ट्स के एग्जांपल देने हैं। एग्जांपल देने हैं। चाहे वो मनु बाकर, मीराबाई चानू, मैरीकॉम।
ठीक है? तो ये सारे क्या है? वुमेन एंपावरमेंट और वुमेन सेफ्टी के लिए इंपॉर्टेंट है। देन आप एजुकेशन का
एग्जांपल दे सकते हैं। बिकॉज़ एजुकेटेड वुमेन क्या है? मोर स्ट्रंगर होगी। राइट? और सेफ फील करेगी इन शॉर्ट। ठीक है? और
इससे क्या होगा? ऑलरेडी सेफ्टी हमारी जो है वुमेन के प्रति वो इससे होगा क्या कि सेफ्टी जो है वुमेन की बढ़ेगी। ठीक है? देन
हम बात करते हैं करें ट्रांसफ़ेशन इन सोसाइटी के माइंडसेट पे। ठीक है? तो इसमें भी वो पॉइंट सारे हम लोग फिट कर सकते हैं।
तो अगर सपोज कोई सेकंड वाली लीड भी लेता है तो वो सारे डिफेंस के एग्जांपल हो, चाहे वो हमारे एजुकेशन से रिलेटेड हो,
चाहे वो हमारे पॉलिटिक्स से रिलेटेड हो। ठीक है? तो वहां पर देखिए अगर वुमेन अच्छा स्पोर्ट्स में कर रही है तो उससे क्या
होगा? सोसाइटी का माइंडसेट चेंज होगा जो हमने हरियाणा के अंदर देखा रोहतक विलेजेस में। इससे क्या होगा? जब हरियाणा की वुमस
मेडल लेके आएगी चाहे वो ओलंपिक में हो। ठीक है? हमने देखा भी मनु बाकर का एग्जांपल। तो इससे होगा क्या कि जो हमारा
सोसाइटी के अंदर माइंडसेन था जैसे कि हमने वो रोहतक विलेज वाला केस देखा तो वो सारी चीजें भी हमारी जो है इससे खत्म हो जाएगी।
ठीक है? देन स्ट्रांग लीगल फ्रेमवर्क एंड इफेक्टिव एनफोर्समेंट। तो यहां पर देखिए अगर हम बात करें तो काफी सारी स्कीम्स
चलाई गई गवर्नमेंट द्वारा। और अगर लीगल्स की बात हम करें तो यहां पर क्या है? एक पॉश एक्ट है जो कि प्रिवेंट करता है वुमेन
वर्क प्लेस पे जो है सेक्सुअल है हरेसमेंट होती है। अगर हम बात करें पॉक्सो एक्ट की तो क्या है? माइनर गर्ल्स के लिए बनाया
गया है। देन मैटरनिटी बेनिफिट का आपको पता होगा राइट कि 26 वीक्स की जो है लीव मिलती है फॉर मैटरनिटी वीक। अगर आप इफ यू आर
वर्किंग इन ऑर्गेनाइज्ड सेक्टर वेदर इन गवर्नमेंट और प्राइवेट। देन आपने देखा होगा पिंक पुलिस पेट्रोल वाला सिस्टम जहां
पर 112 इमरजेंसी नंबर है। राइट देन हम फास्ट ट्रैक कोर्ट्स की बात कर सकते हैं। जहां पर जितने भी पॉक्सो से रिलेटेड केसेस
होते हैं वो किसमें जाते हैं? फास्ट ट्रैक कोर्ट्स के अंदर जाते हैं। देन हम बात करें अगर निर्भया फंड सेफ्टी तो इसमें हुआ
क्या था कि दिल्ली के अंदर सीसीटीवी कैमरास लगाए गए और पैनिकिक बटन इंस्टॉल किए गए। इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट हुआ
रिलेटेड वुमेन। सो ये कुछ पॉइंट्स हैं जो आप यूज़ कर सकते हैं। वुमेन डोमेस्टिक वायलेंस एक्ट की बात कर सकते हैं। वो 2005
वाला। अगर हम पोश एक्ट की बात करें तो पोश एक्ट 2013 में बना है। राइट? तो ये कुछ एक्ट्स हैं अ जिनके बारे में आप बात कर
सकते हैं। पिंक पुलिस पेट्रोल चाहे मैटरनिटी बेनिफिट्स हो वन स्टॉप सेंटर की बात हम करेंगे आगे। तो ये सारी चीजें जो
है वो किसमें आ जाएंगी? स्ट्रांग लीगल फ्रेमवर्क के अंदर आ जाएगी। चलिए अब हम नेक्स्ट जीडी टॉपिक की बात करते हैं।
व्हिच एरिया शुड बी प्रायोरिटाइज्ड टू अचीव इफेक्टिव वुमेन एंपावरमेंट? सेफ्टी एंड सिक्योरिटी मेजर, वर्क लाइफ बैलेंस
एंड इकोनमिक पार्टिसिपेशन एंड सोसाइट एंड सोसाइटी एटीट्यूड्स एंड माइंडसेट ट्रांसफॉर्मेशन। तो सिमिलरली सोसाइटल
एटीट्यूड्स एंड माइंडसेट ट्रांसफॉर्मेशन में आप क्या है? डिफेंस की बात कर सकते हैं। ठीक है? उससे क्या होगा? वुमेन
एमावरमेंट होगा। सोसाइटी का एटीट्यूड चेंज होगा। माइंडसेट चेंज होगा। देन आप बात कर सकते हैं पॉलिटिक्स की नारी शक्ति वंदन
बिल और पॉलिटिक्स में जितने भी हैं चाहे वो हमारे प्रेसिडेंट हो, चाहे वो सीएम हो, चाहे वो हमारे यूनियनर्स हो वुमेन। ठीक
है? देन आप एजुकेशन सेक्टर वाले एग्जांपल्स दे सकते हैं। देन अगर हम बात करें इकोनॉमिक पार्टिसिपेशन की तो हमने
रिपोर्ट देखी थी आउट ऑफ एव्री थ्री वुमेन ओनली वन इज़ वर्क ओनली वन इज़ वर्किंग इन दी लेबर फ़। सो इफ वी एबल टू शिफ्ट टू टू टू
थ्री वी कैन ऐड अराउंड 700 बिलियन डॉलर्स इन आवर इकॉनमी। तो वहां पर आप इकोनमिक पार्टिसिपेशन की बात कर सकते हैं। देन अगर
इकोनमिक पार्टिसिपेशन की बात हो रही है तो आप बता सकते हैं अगर एक वुमेन एजुकेटेड है तो उससे क्या होगा? उसका जो चाइल्ड है वो
एजुकेटेड होगा। उसकी फैमिली की ओवरऑल इकोनमिक प्रोडक्टिविटी बढ़ेगी। ठीक है? अगर वुमेन भी अर्न कर रही है। देन हम बात
करें तो वी का प्रोग्राम हो चाहे वुमेन विल इनिशिएटिव हो Google का। चाहे वो माइक्रोसॉफ्ट के बारे में हमने बात करी
थी। राइट? अ तो ये सारे एग्जांपल भी आप इकोनमिक पार्टिसिपेशन में बता सकते हैं। देन एमएनएस मिलिट्री नर्सिंग सर्विस हो
गया। देन सेफ्टी सिक्योरिटी मेजर्स में हमने जो अभी बात करी चाहे वो पोश एक्ट हो चाहे वो पोक्सो एक्ट हो मैटरनिटी बेनिफिट
हो 26 वीक्स की लीव के लिए। राइट? देन पिंक पुलिस का एग्जांपल हमने दिया। 112 इमरजेंसी नंबर की बात करी। हमने फास्ट
ट्रैक कोर्ट्स के बारे में बात करा। वन स्टॉप सेंटर्स के बारे में बात करा। जहां पर वुमेन को जो है लीगल प्लस शेल्टर्स
प्रोवाइड किए जाते हैं। देन निर्भया फंड के बारे में हमने बात करा। तो वो सारे एग्जांपल किसमें आ [संगीत] जाएंगे? हमारे
सेफ्टी एंड सिक्योरिटी मेजर्स के अंदर आ जाएंगे। ठीक है? चलिए अब हम बात करते हैं अपने नेक्स्ट टॉपिक की तरफ जो कि है
इंडियन टूरिज्म। ठीक है? इट इज आल्सो वन ऑफ़ द फेवरेट टॉपिक ऑफ द एसएसबी। ठीक? टूरिज्म से रिलेटेड कहीं ना कहीं जरूर
हमें टॉपिक देखने को मिलता है। तो सबसे पहले फॉरेन टूरिस्ट अराइवल इंडिया के अंदर कितने अबाउट 1 करोड़ इन 2025। और आपको पता
है अराउंड 2024 में 2 करोड़ टूरिस्ट आए थे इंडिया के अंदर। बट जब से ये एयर क्वालिटी इंडिया की खराब हुई है उससे उससे जो है
हमारे टूरिस्ट ड्रास्टिकली जो है काफी कम हो। तो यार एयर क्वालिटी एंड क्लाइमेट चेंज इटसेल्फ अ वैरी बिग प्रॉब्लम व्हिच
इंडिया इज़ फेसिंग राइट नाउ देन डोमेस्टिक टूरिस्ट विजिट अबाउट 1.7 बिलियन विजिट एनुअली। ठीक है? तो ये इसमें कंफ्यूज नहीं
होना कि पपुलेशन तो अराउंड 1.4 बिलियन है। तो ये क्या है? एक टूरिस्ट ये क्या है? इंट्रा है। इट मींस कि आप एक स्टेट से
दूसरे स्टेट अगर टूरिज्म के लिए जा रहे हैं। ठीक है? विजिट्स के बारे में बेसिकली। इसलिए 1.7 बिलियन। देन डेफिनेशन
ऑफ़ टूरिज्म क्या होता है? ठीक है? टूरिज्म मींस पीपल ट्रैवलिंग टू डिफरेंट प्लेसेस फॉर लीजर। मतलब फन फन के लिए। चाहे वो
रिलीजन रिलीजन के लिए, चाहे वो बिजनेस के लिए, एडवेंचर के लिए। ठीक है? स्टेइंग टेंपरेरी आउटसाइड देयर यूजुअल प्लेस ऑफ
रेजिडेंस। तो देखिए अगर आप फन के लिए घूमने जा रहे हैं चाहे वो रिलीजन हो, चाहे वो बिज़नेस बिज़नेस पर्पस से जा रहे हो,
एडवेंचर एक्टिविटी के लिए जा रहे हो। और एक और चीज़ ऐड कर देते हैं। अब मेडिकल टूरिज्म भी तो आ गया है। तो मेडिकल के लिए
आप जा रहे हो तो वो सारा किसके अंदर आ जाता है? और देन अगर आप कहीं टेंपरेरी आउटसाइड रह रहे हो। टेंपरेरी आउटसाइड रह
रहे हो वहां पर जाके तो वो क्या कहलाए? टूरिज्म कहलाए। तो हम बोल सकते हैं रिलीजन के लिए, बिज़नेस के लिए, एडवेंचर के लिए
किसी और प्लेस पे जाना या फिर मेडिकल टूरिज्म के लिए किसी और प्लेस पर जाना और टेंपरेरी वहां पर रहना इस कॉल्ड एज
टूरिज्म। ठीक है? चलिए देखते हैं ताजमहल आगरा 6 टू 7 मिलियन यानी कि 60 टू 70 करोड़ विजिटर है हर साल वाराणसी 70 टू 80
मिलियन पिग्रिमेज ठीक देन अगर हम गोवा बीचेस की बात करें तो 80 लाख टूरिस्ट इयरली गोल्डन टेंपल में 1 लाख विजिटर डेली
आई रिपीट 1 लाख विजिटर डेली अटेंड इन गोल्डन टेंपल अमृतसर देन वैष्णो देवी के अंदर भी है 8 टू 9 मिलियन बेलगिरमेज इयरली
आते हैं। ठीक है? तो ये सारे जो रिपोर्ट्स हैं वो किसकी है? मिनिस्ट्री ऑफ़ टूरिज्म की रिपोर्ट्स हैं। तो ये सारे आप क्या है
आपको अपने लेक्चरेट और जीडी के टॉपिक में यूज़ करना है कि इंडिया के अंदर इतनी डायवर्सिटी है चाहे वो गोल्डन टेंपल हो,
गोल्डन टेंपल हो, सिक्स का चाहे वो हिंदू टेंपल वाराणसी का हो, अयोध्या का हो, वैष्णो देवी हो। ठीक है? ताजमल हो। तो
यहां पर जो है डायवर्सिटी कल्चर काफी देखने को मिलता है इंडिया में। ठीक है? चलिए बात करें स्टैचू ऑफ यूनिटी इन गुजरात
कॉस्ट अबाउट 3000 करोड़। नाउ अट्रैक्ट 5 मिलियन विजिटर एनुअली। राइट? तो ये एक अच्छा पॉइंट है। टूरिज्म इकॉनमी। देखिए
प्रोवाइड डायरेक्ट एंड इनडायरेक्ट एंप्लॉयमेंट टू 40 टू 45 मिलियन। यानी कि बात करते हैं चार से 5 करोड़ लोग जो है वो
टूरिज्म की वजह से उनको जॉब मिलती है और टूरिज्म कंट्रीब्यूट करता है अराउंड 5 टू 6% ऑफ इंडियास जीडीपी और हमने बात करी थी
आईटी सेक्टर की अगर हम बात करें तो वो कितना करता था 7 टू 8% और अगर हम बात करें कि इसकी सर्विस सेक्टर पूरा कंट्रीब्यूट
करें तो वो 55% हमारी जीडीपी के अंदर कंट्रीब्यूट करता था। राइट? और अगर मैं फिल्म इंडस्ट्री की बात करूं तो कितना
करता था वो? 2 लाख करोड़ करता था। अगर मैं ई-कॉमर्स की बात करूं तो वहां पर कितना था? 10 टू 11 लाख करोड़ था। तो ये कुछ
पॉइंट्स हैं जो आपको याद रखने हैं। चलिए अब बात करते हैं हम टाइप्स ऑफ टूरिज्म, रिलीजियस टूरिज्म, वाराणसी, केदारनाथ,
तिरुपति। राइट? अभी हमने देखा अयोध्या, गोल्डन टेंपल। ठीक है? चलिए अब बात करते हैं हिस्टोरिकल टूरिज्म। ताजमहल, हम्पी,
रेडफोर्ट। फिर आता है हमारे पास क्या? एडवेंचर टूरिज्म। ऋषिकेश, लद्दाख, हिमाचल, नॉर्थ ईस्ट, साउथ ईस्ट है ना? देन हमारे
पास आता है बीच टूरिज्म। गोवा, अंडमान, लक्षद्वीप है ना? देन हमारे पास आता है इको टूरिज्म। काजीरंगा, सुंदरबवं, जिम
कॉर्बेट नेशनल पार्क, राजाजी नेशनल पार्क। ठीक है? एमपी के अंदर काफी सारे नेशनल पार्क है। तो सारे किसमें इको टूरिज्म के
अंदर आ जाएंगे। देन मेडिकल टूरिज्म केरला, चेन्नई, दिल्ली हॉस्पिटल्स ये एग्जांपल्स हैं। देखिए पहले हम क्या सोचते थे टूरिज्म
रिलेटेड ओनली कि हमारा एडवेंचर एक्टिविटी होती हो जहां पर या फिर गोवा बीचेस। बट देखिए टूरिज्म एक बहुत वाइड चीज है। तो
मुझे लगता है शायद आपका व्यू जो है चेंज हुआ होगा। अब जरूर अब मेडिकल टूरिज्म की, इको टूरिज्म की भी बात जरूर करेंगे। ठीक
है? चलिए, हम बात करते हैं एडवांटेजेस ऑफ़ टूरिज्म की। ठीक है? तो सबसे बड़ा एडवांटेज क्या है? जॉब क्रिएशन। और जॉब से
क्या होगा? कि हमारी इकॉनमी। जॉब से क्या होगा? हमारी इकॉनमी ग्रो करेगी। राइट? हमारी जीडीपी बढ़ेगी। तो अगर हम बात करें
ऋषिकेश की। ठीक है? एडवेंचर टूरिज्म रिवर राफ्टिंग गाइड्स, बंजी जंपिंग इंस्ट्रक्टर, ट्रैकिंग गाइड्स, कैंप
मैनेजर, इक्विपमेंट, रेंटल शॉप्स। तो यहां से क्या हुआ? इतनी सारी जॉब्स क्रिएट हो रही है। अगर गोवा बीच की बात करें तो वाटर
स्पोर्ट्स होता है। वहां पर इंस्ट्रक्टर्स होते हैं, लाइव गार्ड्स होते हैं, होटल स्टाफ होता है, बीट शैक ओनर, बीट शैक ओन,
स्कूटर रेंटल सर्विज। तो इससे क्या है? जॉब्स क्रिएट हो रही है। तो ठीक है। ये सारे पॉइंट्स आपको यूज़ करने हैं जीडीपी और
लेक्चर में। केरला मेडिकल टूरिज्म डॉक्टर्स, नर्सेज, आयुर्वेदिक थेरेपिस्ट, होटल वेलनेस स्टाफ, ट्रांसपोर्ट सर्विस
बात करें वाराणसी रिलजन टूरिज्म। ठीक है? फ्लावर सेलर, प्रसाद सेलर, बोटमैन इन गंगा, प्रीस्ट, गाइड्स, लोकल फूड वेंडर।
तो ये सारे कुछ पॉइंट्स हैं जो आपको याद रखने हैं कि हमारी ये सारी जॉब्स जो है वो क्रिएट होती हैं। चलिए, अब हम बात करते
हैं इकोनमिक बेनिफिट की। फॉरेन एक्सचेंज टूरिज्म अर्न अबाउट 30 बिलियन फॉरेन एक्सचेंज एनुअली फॉर फॉर इंडिया। ठीक है?
मिनिस्ट्री ऑफ़ टूरिज्म की रिपोर्ट। प्रमोशन ऑफ लोकल हैंडीक्राफ्ट एंड कल्चर। ब्लू पोटरी ऑफ जयपुर हैंडीक्राफ्ट
इंडस्ट्री सपोर्टेड बाय टूरिस्ट डिमांड। तो यह ब्लू पोटरी जस्ट एक एग्जांपल है। अगर आप लद्दाख में रहते होंगे या फिर आप
तो अगर आप ठीक है? तो अगर आप कश्मीर और लद्दाख में रहते होंगे तो आपने देखा होगा काफी सारी चीजों को जीआई टैग मिला हुआ है।
ठीक है? चाहे वो वहां की टी हो चाहे सैफरन हो। राइट? चाहे ड्राई फ्रूट्स हो। तो वैसे ही सिमिलर आप नॉर्थ ईस्ट में रहते होंगे
तो वहां की चीजों को हैंडीक्राफ्ट को जो है जीआई टैग मिला है और लोग जो है फॉरेन टूरिस्ट जैसे खरीदते हैं इंडियन टूरिस्ट
खरीदते हैं तो वो सारी चीजें आपको अपने जीडी में और अपने लेक्चरेट में यूज़ करना है। इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट अयोध्या
राम टेंपल टूरिस्ट न्यू इंटरनेशनल एयरपोर्ट बना है। रेलवे स्टेशन रीडवलपमेंट ठीक रोड्स होटल रिवर फ्रंट डेवलपमेंट ऑफ
सरायटी एक रिलीजियस टूरिज्म डेवलपमेंट होने की डेवलपमेंट होने की वजह से क्या हुआ? वहां पर एयरपोर्ट आ गया। रेलवे
स्टेशन आ गया। ठीक है? रोड्स बड़ी बन गई। तो इससे हमें क्या पता लगता है कि टूरिज्म से जो है डेवलपमेंट लिंक है। तो हम बोल
सकते हैं कि अगर टूरिज्म हो रहा है तो पैरेलली क्या है? डेवलपमेंट भी साथ-साथ चलेगी। ठीक है? देन रीजनल डेवलपमेंट इन
रूरल एरियाज रन ऑफ कच रन उत्सव क्रिएटेड जॉब्स इन होम स्टेज हैंडीक्राफ्ट, कैमल राइड्स फॉर लोकल विलेजर्स सिटी वैली की
अगर हम बात करें तो ट्रैकिंग गाइड्स लोकल वही बात हुई। देन अंडमान निकोबार एक्सपेंशन ऑफ़ वीर सावरकर एयरपोर्ट न्यू
रिसोर्ट्स बने। ठीक है? बेटर फेरी सर्विज स्टार्ट हुई। कोस्टल टूरिज्म इंफ्रास्ट्रक्चर। तो हमने देखा तो ये सारे
क्या थे? इकोनमिक बेनिफिट्स चाहे वो फॉरेन मनी आनी हो, इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट होना हो, चाहे वो प्रमोशन ऑफ लोकल हेरिटेज
हो, जॉब्स क्रिएट होना हो, रीजनल डेवलपमेंट होना हो किसी छोटे एरिया के अंदर। तो ये सारे इकोनमिक बेनिफिट थे।
चलिए हम बात करें गवर्नमेंट स्कीम की। राइट? जो हमें अपने जीडी के अंदर स्कीम्स की जो आप अपने टैट स्टोरी के अंदर भी यूज़
कर सकते हैं। स्वदेश दर्शन स्कीम। ठीक है? गवर्नमेंट स्कीम ल्च इन 2014 टू डेवलप थीम डेवलप थीम बेस्ड टूरिज्म सर्किट्स लाइक
बुद्धिस्ट, कोस्टल, डेजर्ट, हिमालयन, फोकस इंफ्रास्ट्रक्चर कनेक्टिविटी, टूरिस्ट फैसिलिटी। देखिए इसमें क्या स्वदेश दर्शन
स्कीम के अंदर क्या था? जो हमारे कोस्टल प्लेेंस हैं और हिमालयज हैं, डेजर्ट हैं, बुद्धिस्ट सर्किट्स हैं। उन सबको कनेक्ट
करना है हमें। किसके? थ्रू मीडियम ऑफ रोड। राइट? देन हमें वहां पर क्या है? इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट करना है। राइट?
वहां हम स्टेज बनाने हैं। वहां पर हमें होटल्स बनाने हैं। ठीक है? वहां पर क्या है? पर क्या है? ट्रांसपोर्ट अच्छा करना
है। तो ये सारी किसके अंदर था? स्वदेश दर्शन स्कीम के अंदर था। चलिए अगर हम बात करें प्रसाद स्कीम की टू डेवलप पिग्रिमेज
एंड हेरिटेज। वाराणसी, केदारनाथ, अयोध्या, अमृतसर, कामाख्या टेंपल, सोमनाथ। तो आपने देखा होगा अयोध्या जो है वो रीडवलप हुआ
है। राइट? वाराणसी का ठीक है? चाहे वो वाराणसी का टेंपल हो, कामाख्या टेंपल हो तो ये सारे क्या है? रीडवप रीडवप हुए हैं।
राइट? तो यहां पर जो है स्वदेश दर्शन का पार्ट टू यानी कि 2.0 प्रोजेक्ट भी स्टार्ट हो चुका है। अबाउट 36 टूरिज्म
डेवलपमेंट प्रोजेक्ट वर्थ 648 करोड़ अक्रॉस इंडिया फोकसिंग ऑन स्पिरिचुअल टूरिज्म, इको टूरिज्म, कल्चरल एंड हेरिटेज
साइट। ठीक है? स्वदेश दर्शन स्कीम और प्रशांत स्कीम को जरूर याद रख। यहां पर क्या था कि जो हमारी हेरिटेज साइट्स हैं
वहां पर क्या है? जो भी हमारा टूरिज्म से रिलेटेड डेवलपमेंट है वो इन दो स्कीम्स के अंदर होगा। चलिए हम बात करते हैं फ्यूचर
ऑफ़ टूरिज्म प्रोजेक्ट को। तो चलिए हम बात करते हैं फ्यूचर टूरिज्म प्रोजेक्ट्स की। तो बुद्धिस्ट टूरिज्म सर्किट। ठीक है?
डेवलपमेंट ऑफ़ बोधगया, सारनाथ, कुशीनगर, लुंबिनी कनेक्टिविटी, बेटर रोड्स होंगी, टूरिस्ट फैसिलिटीज़ फॉर इंटरनेशनल
बुद्धिस्ट पिगमेज। चलिए बात करते हैं नॉर्थ ईस्ट इको टूरिज्म प्रोजेक्ट्स डेवलपमेंट, काजीरंगा, टूरिज्म
इंफ्रास्ट्रक्चर, मेघालय, लिविंग रोड ब्रिज, टूरिज्म, अरुणाचल इको, टूरिज्म विलेजेस, लक्षद्वीप टूरिज डेवलपमेंट,
गवर्नमेंट प्लानिंग, न्यू रिसोर्ट, वाटर स्पोर्ट्स। अच्छा ये सब क्यों कर रहे हैं हम? लक्षद्व को क्यों डेवलप कर रहे हैं?
क्योंकि हमारा जो मेनली काफी सारे इंडियंस लोग क्या है मालदीव्स को प्रेफर करते हैं। तो इसलिए हम क्या है लक्षद्वीप और अंडमान
को तो हम क्या कर रहे हैं? लक्षद्वीप और अंडमान को कांस्टेंटली डेवलप कर रहे हैं। वहां पर क्रूज टूरिज्म ला रहे हैं।
रिसोर्ट्स ला रहे हैं। स्कूबा ड्राइविंग, बीस्ट टूरिज्म इंफ्रास्ट्रक्चर जो कि इंपॉर्टेंट भी है। तो ये कुछ प्रोजेक्ट्स
हैं। बुद्धिस्ट टूरिज्म सर्किट का एग्जांपल जरूर याद रखना। ठीक है? नॉर्थ ईस्ट का और लक्षद्वीप और अंडमान को आप जॉइ
करके बता सकते हैं कैसे मालदीव्स को काउंटर करने के लिए हम ये कर रहे हैं। ठीक है? तो चलिए हम बात करें इंफ्रास्ट्रक्चर
से रिलेटेड। तो बुद्धिस्ट सर्किट डेवलपमेंट पे अभी हमने बात करी। 4000 करोड़ होने वाला है। सारनाथ, कुशीनगर,
कपिल वस्तु इन तीनों को क्या है? इन तीनों को क्या है? हम जॉइन करेंगे थ्रू रोड्स और रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर। देन केदारनाथ की
अगर हम बात करें तो केदारनाथ में क्या है? जब से फ्लड आई थी राइट उसके बाद दोबारा से रीडवलपमेंट स्टार्ट हुआ। वहां पेस्ट्रेंट
पाथवे बनाए गए। फ्लड फ्लड रेिलिएट इंफ्रास्ट्रक्चर बनाया गया। ड्रेनेज सिस्टम को इंप्रूव किया गया और मॉडर्न
फैसिलिटीज लाई गई। ठीक है? देन चारधाम यात्रा जो है बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री, यमनोत्री इन तीनों को भी जो है
फास्ट, सेफर और मोर कन्वीनिएंट यात्रा बनाने की कोशिश चल रही है। ठीक है? चाहे वो रोड्स हो ऑल वेदर कनेक्टिविटी। चलिए अब
बात करें रामायण सर्किट की तो हमने देखा अयोध्या रामेश्वरम नासिक इन तीनों चीजों को भी डेवलप करने तो ये साइट्स को भी है
जो है हम कर रहे हैं अंडर दी स्वदेश दर्शन स्कीम कुछ और टूरिज्म इंफ्रास्ट्रक्चर की अगर हम बात करें तो उड़ान स्कीम लाई गई है
अब यहां पर क्या है जो छोटे हमारे रीजंस हैं जहां पर अच्छा टूरिज्म होता है चाहे वो शिमला का एग्जांपल ले लो आप या नॉर्थ
ईस्ट का तो उनको क्या है हम बाय एयर कनेक्ट कर रहे हैं राइट उड़ान स्कीम बाय एयर तो ये पॉइंट बहुतेंट है उड़ान स्कीम
का यूज़ बहुत जगह पर होगा काफी सारे जीडी जो है एिएशन से रिलेटेड आ जाते हैं तो वहां पर जो है आपको उड़ान स्कीम के बारे
में याद रखना है जो छोटे रीजंस हैं वहां पर भी हम क्या है एयरपोर्ट की फैसिलिटीज़ को ला रहे हैं। देन इको टूरिज्म की हमने
बात करी थी। चाहे वो काजीरंगा हो चाहे जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क हो। नए नेशनल पार्क्स और वाइल्ड लाइफफ़ सेंचुरीज़ जो है वो हर ईयर
जो है हर ईयर जो है उनका नंबर बढ़ रहा है। कोस्टल और पीस टूरिज्म ब्लू फ्लैग बीचेस ये याद रखना। ब्लू फ्लैग बीचेस क्रूज़
टूरिज्म। ब्लू फ्लैग बीचेस क्रूज़ टूरिज्म डेवलपमेंट इन गोवा, गुजरात, केरला। एडवेंचर एंड यूथ टूरिज्म इंफ्रा इन
हिमालयज। बात करें एग्जांपल्स की तो शिमला हो गया। तो यह कुछ एग्जांपल्स थे। ठीक है? आप जरूर
देखना। उड़ान स्कीम में, शिमला का देख लेना। कुशीनगर देन इको टूरिज्म में। देन हमारे पास आता है क्रूज टूरिज्म। और
इंडिया का एक मिशन भी है। क्रूज इंडिया मिशन। आई रिपीट क्रूज़ इंडिया मिशन। तो यहां पर क्या होने वाला है? हम जो हमारी
रिवर्स हैं चाहे वो गंगा हो, ब्रह्मपुत्र हो, तो हम उनको क्या है? क्रूज से कनेक्ट करेंगे। तो क्रूज़ शिप से क्या आप जितने भी
हमारे स्टेट से या फिर सिटीज से गंगा जो है फ्लो करती है वहां पर आप क्रूज़ के साथ जो है ट्रैवल कर सकते हैं। जो कल्चर और
हेरिटेज के टूरिज्म को एक्सप्लोर कर सकते हैं। तो क्रूज़ इंडिया मिशन राइट? चलिए अब हम बात करते हैं चैलेंजेस ऑफ़ टूरिज्म, ओवर
क्राउडिंग, एनवायरमेंटल डैमेज और पुअर इंफ्रास्ट्रक्चर। ठीक है? ओवर क्राउडिंग में आपको पता है कि हैवी टूरिस्ट प्रेशर
एट शिमला। ठीक है? तो ओवर क्राउडिंग की प्रॉब्लम्स हमें काफी सारी देखने को मिली। स्पेशली न्यू ईयर के टाइम पर बहुत ज्यादा
जाम लग चुका था और अराउंड टू थ्री डेज तक जो है वो ओवर क्राउड रहा। डेज तक जो है ट्रैफिक जाम ही था। देन एनवायरमेंटल डैमेज
प्लास्टिक पोलशन इकोसिस्टम डैमेज हिमालय ट्रैकिंग रोड्स। तो जितने भी लोग पहाड़ों में रहते होंगे वो एनवायरमेंटल डैमेज से
बहुत अच्छी तरीके से रिलेट करेंगे। इन पुअर इंफ्रास्ट्रक्चर इन रिमोट एरियाज एग्जांपल रोड एंड ट्रांसपोर्ट इशज़ इन
लद्दाख एंड नॉर्थ ईस्ट इंडिया। तो स्टिल आपने देखा होगा कि लद्दाख में जो है स्टिल अ लॉट नीड्स टू बी डन एंड सिमिलरली इन
नॉर्थ ईस्ट टू। चलिए हम मेडिकल टूरिज्म देख लेते हैं। ये कुछ पॉइंट्स हैं। तो ये पॉइंट जो हैं हम हेल्थ केयर सेक्टर जब हम
पढ़ेंगे तो उसमें हम ये डिस्कस करेंगे। तो बस ये स्लाइड मैंने यहां पर लगा दी है कि अगर आप देखना चाहते हैं एक बार देख सकते
हैं कि हमारे इंडिया के अंदर जो है जो हमारी नेबरिंग कंट्रीज हैं चाहे वो बांग्लादेश, अफगानिस्तान, नेपाल, मिडिल
ईस्ट, अफ्रीकन कंट्रीज वो इंडिया के अंदर आती है। ठीक है? हॉस्पिटल के अंदर क्योंकि अगर आप इंडिया के अंदर देखेंगे तो कौन-कौन
से अपोलो हॉस्पिटल, फोर्टिस, मेदांता, एम्स तो ये सारे जितने भी हॉस्पिटल चाहे वो ठीक है? ठीक है? चाहे वो टाटा मेमोरियल
हॉस्पिटल हो जो कैंसर से रिलेटेड है, रोबोटिक सर्जरी के लिए पॉपुलर है। तो ये सारी पॉइंट्स को याद नहीं रखना। बस एक बार
आप पढ़ भी लोगे तो ये आपके दिमाग में बैठ जाएंगे। ठीक है? तो इसलिए बस इनको रीड कर लो एंड यू विल गेट द बेनिफिट। व्हाट इज़ द
मोस्ट सिग्निफिकेंट फैक्टर ड्राइविंग दी रैपिड ग्रोथ ऑफ टूरिज्म इन इंडिया? रिलीजियस एंड कल्चरल डायवर्सिटी। ठीक है?
तो रिलीजियस एंड कल्चरल डायवर्सिटी में हमने क्या देखा? हमने देखा था वाराणसी का टेंपल। फिर हमने
गोल्डन टेंपल की बात करी, वैष्णो देवी टेंपल की बात करी, ताजमहल की बात करी, हमने ताजमहल की बात करी, हमने अयोध्या की
बात करी। राइट? अयोध्या रीडवलपमेंट। तो ये क्या है? देन हमने बात करी थी बुद्धिस्ट टूरिज्म सर्किट की। तो यहां से क्या पता
लगता है कि कितनी रिलीजियस डायवर्सिटी है इंडिया के अंदर। ठीक है? तो ये क्या है? रिलीजियस डायवर्सिटी और कल्चर के अंदर आ
गया। और भी काफी सारे एग्जांपल है। जैसे केदारनाथ रीडेवलपमेंट हो, चाहे वो चारधाम हो, चाहे वो रामायण सर्किट हो। तो ये सारे
एग्जांपल्स भी हमारे किसके अंदर आ जाएंगे? रिलीजियस एंड कल्चरल डायवर्सिटी के अंदर। ठीक है? तो अब हम बात करें सोशल मीडिया
इन्फ्लुएंस की। अगर अगर हम बात करें सोशल मीडिया इन्फ्लुएंस की तो याद करिए हमने डे टू के अंदर सोशल मीडिया पढ़ा था और सोशल
मीडिया के अंदर हमने क्या पढ़ा था? सोशल मीडिया कैसे अफेक्ट करता है टूरिज्म का? चलो एक बार रिवीजन करते हैं। ठीक है?
[नाक से की जाने वाली आवाज़] ठीक है? तो मिनिस्ट्री ऑफ़ टूरिज्म रिपोर्ट्स अ मेजोरिटी ऑफ़ ट्रेवलर नाउ यूज़ ऑनलाइन
मीडिया टू डिस्कवर डेस्टिनेशन एंड प्लान देयर ट्रिप। देखो अपना देश कैंपेन। तो ये कहां प्रोपगेट हुआ था? टीवी पर हुआ,
YouTube पे हुआ, सोशल मीडिया पे हुआ। आपने एड्स देखी होगी ना? तो आपने काफी सारे कैंपेन देखे होंगे, एडवर्टाइजमेंट देखी
होगी, पधारो नहीं मारे देश। ठीक है? गुजरात, राजस्थान बिताई है कुछ दिन तो गुजरात में। देन आपने
काफी सारी एड्स देखी होंगी रिलेटेड टू लद्दाख, नॉर्थ ईस्ट इंडिया। है ना? तो वो सारी किसमें? देखो अपना देश कैंपेन के
अंदर था। देन डिस्कवरी चैनल के देन अगर हम मीडिया की बात करें तो हमने देखा था कैसे डिस्कवरी चैनल पर जो है मैन वर्सेस वेल्ड
एपिसोड आया जिसने जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क के बारे में ग्लोबली जिससे क्या हुआ? जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क जो है ग्लोबली
प्रोपगेट हुआ। देन अयोध्या राम मंदिर का टेंपल का जो देन प्रमोशन ऑफ़ अयोध्या राम मंदिर टेंपल जो लाइव टेलीकास्ट हुआ था इन
2024 राइट सारे न्यूज़ चैनल्स पर देन न्यूज़ एंड मीडिया कवरेज इन स्टचू ऑफ यूनिटी है ना तो ये सारी कुछ चीजें थी
इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट गवर्नमेंट इनिशिएटिव उसमें इस इंफ्रा में सारे पॉइंट्स आ जाएंगे जो हमने अभी डिस्कस करें
ठीक है ये वाले पॉइंट तो ये इंफ्रास्ट्रक्चर और इसमें आ जाएंगे और इंफ्रास्ट्रक्चर से रिलेटेड जो चैलेंजेस
हैं वो भी यहां पर आप देख सकते हैं तो आई थिंक दैट्स ऑल अबाउट दैट वाज़ ऑल अबाउट दी डे फोर। ठीक है? आई होप एवरीथिंग इज
क्लियर। चलिए अब चलते हैं डे फाइव। ओके। ओके नाउ लेट्स मूव ऑन टू द डे फाइव। [संगीत] राइट? सो इन डे फाइव वी आर गोइंग
टू कवर ऑल द टॉपिक्स दैट आर रिलेटेड टू नेशनल चैलेंजेस। नेशनल प्रॉब्लम व्हिच इंडिया इज़ फेसिंग। राइट? सो फर्स्ट वन इज़
चाइल्ड लेबर, करप्शन, नक्सलिज्म, पपुलेशन, ब्रेन रेन। [संगीत] राइट? एंड वी आर आल्सो गोइंग टू कवर मोर देन फाइव जीडी टॉपिक्स
व्हिच आर रिलेटेड टू दी नेशनल चैलेंजेस। [संगीत] ठीक है? तो चलिए स्टार्ट करते हैं हम लोग चाइल्ड लेबर से। राइट? सो चाइल्ड
लेबर एक ऐसा टॉपिक है जो कि काफी बार रिपीट हुआ है [संगीत] लेक्चर के अंदर और जीडी के अंदर इन डिफरेंट एसएसबी। सो देखिए
चाइल्ड लेबर मतलब होता है जितने भी बच्चे जो 14 साल से छोटे हैं और वो किसी भी काम में इंगेज हैं जो कि हार्म कर रहा है उनकी
फिजिकल, मेंटल और एजुकेशनल डेवलपमेंट को एंड फोर्स कर रहा है उन्हें टू मिस स्कूल। तो वो क्या हुआ? चाइल्ड लेबर कहलाया। और
जितने भी बच्चे हमारे 18 साल से छोटे हैं जो कि हज़ार्डियस वर्क में इन्वॉल्वड हैं। जैसे कि फायरवक्स की फैक्ट्री हो या फिर
जहां पर टाइल्स वगैरह बनती हैं। ठीक है? बिकॉज़ टेंपरेचर बहुत ज्यादा हाई होता है। तो ऐसी जगह पर जहां पर अनफेवरेबल
एनवायरमेंट है राइट फैक्ट्रीज वहां पर अगर 18 साल से छोटे बच्चे काम करते पाए जाते हैं या और स्कूल नहीं जा रहे हैं तो हम
उन्हें क्या कहेंगे? चाइल्ड लेबर कहेंगे। तो बेसिक चाइल्ड लेबर मींस बिलो 14 इयर्स और बिलो ऑफ़ 18 इयर्स इन हज़ार्डियस वर्क
बीइंग इंगेज्ड इन वर्क दैट हार्म देयर फिजिकल मेंटल और एजुकेशनेशनल डेवलपमेंट एंड फोर्सेस देम टू मिस स्कूल। सो
अकॉर्डिंग टू इंटरनेशनल लेबर ऑर्गेनाइजेशन एंड यूनिसेफ की रिपोर्ट्स अराउंड 160 मिलियन व्हिच इज़ अराउंड 16 करोड़ 16 मिलियन
व्हिच इज़ अराउंड 16 करोड़ आर इंगेज्ड इन चाइल्ड लेबर नियरली वन इन 10 चिल्ड्रन ग्लोबली इनवॉल्वड इन सम ऑफ़ लेबर
एक्टिविटी। तो हम बोल सकते हैं कि पूरे वर्ल्ड वाइड अगर हम देखें अकॉर्डिंग टू आईएलओ एंड यूनिसेफ अराउंड 16 करोड़ और 160
मिलियन चिल्ड्रेंस जो है इनवॉल्वड हैं चाइल्ड लेबर एक्टिविटी के अंदर जो कि बनाता है नियरली 10 में से एक बच्चा
चाइल्ड लेबर एक्टिविटी में इनवॉल्वड है। तो अगर हम इंडिया के अंदर देखें तो 5% ऑफ दी पॉपुलेशन लिव्स इन एक्सट्रीम पावर्टी
अर्निंग लेस देन अबाउट $3 अ डे। तो हम कह सकते हैं अराउंड 7 टू 8 करोड़ पॉपुलेशन ऑफ इंडिया स्टिल अर्न
लेस देन $300 पर डे। अह दिस रिपोर्ट इज़ पब्लिश्ड ब प्रेस ब्यूरो। मतलब यह गवर्नमेंट का ही डाटा है। ठीक है? तो, आगे
बढ़ने से पहले क्या है? हम एक बार जीडी का टॉपिक देख लेते हैं जिससे हम अच्छी तरीके से रिलेट कर पाए। ठीक? देखिए, जीडी का
टॉपिक है व्हाट इज़ दी प्राइमरी कॉज़ ऑफ़ चाइल्ड लेबर इन इंडिया एंड ग्लोबली। लैक ऑफ एक्सेस एजुकेशन एंड अवेयरनेस। सेकंड
देखिए क्या है? पावर्टी एंड सोशियोइकोनॉमिक बैकवर्डनेस एंड थर्ड वीक गवर्नमेंट पॉलिसीज एंड पुअर
इंप्लीमेंटेशन। तो पहला क्या हुआ है? एजुकेशन। दूसरा पावर्टी, तीसरा गवर्नमेंट की पॉलिसीज। ठीक है? तो चलिए हम एक-एक
करके पॉइंट्स को देखते हैं। तो जैसे हमने देखा था कि अराउंड 5% ऑफ़ पॉपुलेशन इन इंडिया अर्न लेस देन ₹300 अ डे। ठीक है?
या फिर $3। ठीक है? पावर्टी एंड फाइनेंसियल कंडीशन बहुत ज्यादा पुअर हैं जो कि पुश करती हैं बच्चों को इंस्टेड ऑफ़
गोइंग स्कूल टू दी वर्क। देन अकॉर्डिंग टू गवर्नमेंट पावर्टी एस्टीमेट मिलियंस ऑफ इंडियन फैमिली स्टिल लिव विद लो मंथली इन
लो मंथली इनकम स्पेशली इन रूरल एरियाज ऑफ़ बिहार, झारखंड, यूपी, उड़ीसा, छत्तीसगढ़। ठीक है? तो ये स्टेट्स के एग्जांपल आपको
याद रखने हैं जो कि आप अपने जीडी में यूज़ कर सकते हैं कि अगर हम पावर्टी की बात करें स्टेट्स के रूरल एरिया स्पेशली
बिहार, झारखंड, यूपी एंड छत्तीसगढ़, उड़ीसा तो यहां पर जो है जो रूरल एरियाज हैं वहां पर काफी ज्यादा पावर्टी देखने को
मिलती है। जिसकी वजह से बच्चे जो है चाइल्ड लेबर में इनवॉल्वड हैं। ठीक है? तो ये स्टेट्स के नाम याद रहेंगे। तो दूसरा
रीज़न क्या कहता है? सोशो बैकवेटनेस। जैसे कि सिंगल पैरेंट डिसेबिलिटी और फैमिली बर्डन। सपोज अगर किसी बच्चे के जो
पेरेंट्स हैं जिसमें से एक फादर नहीं है। राइट? तो सारा जो बर्डन है वो उस बच्चे पर आ जाएगा उसकी फैमिली का। अह तो सारा बर्डन
जो है उस बच्चे पर आ जाता है फैमिली का। ठीक है? और सपोज़ अगर दोनों पेरेंट्स में से एक डिसेबल है लाइक फादर डिसेबल है
राइट? तो उस कंडीशन में जो तो वो जो बच्चे हैं वह लेबर वर्क करने की तरफ चले जाते हैं। देन फैमिली बर्डन फैमिली बर्डन मतलब
किसी तरीके का अगर डेप्ट है काफी ज्यादा लोन है तो उस केस के अंदर भी हमने देखा है कि काफी बच्चे जो है अपनी फैमिली को
सपोर्ट करने के लिए चाइल्ड लेबर जैसी एक्टिविटी में इन्वॉल्वड हो जाते हैं। चलिए अब बात करते हैं हम अराउंड 19 टू 20
करोड़ पीपल इन इंडिया आर एस्टेटेड टू बी अंडर नरिश्ड। कि एक सोशो बैकवर्डनेस का पॉइंट है कि हमारे इंडिया के अंदर ही
अराउंड 20 करोड़ पीपल जो है अंडर नरिश्ड हैं। राइट? व्हेन दे कैन नॉट रिपे दीज़ लोंस ड्यू टू लो क्रॉप इनकम और क्रॉप
फेलियर दे पुश देयर चिल्ड्रन इनू वर्क इन ब्रिकली। जहां पर क्या है? इन ब्रिक लिंस। तो ये कौन सी जगह है? जहां पर क्या है?
भट्टा होता है। जहां पर क्या बनती है? ईंटें बनती है। ठीक है? ब्रिक्स बनती है हमारी। देन रोड साइड स्टॉल्स। तो आपने
देखे होंगे काफी सारे बच्चे जो है स्टॉल्स लगाकर रोड पर होते हैं। ठीक है? वो डिफरेंट-डिफरेंट चीजें बेच रहे हैं। तो वो
भी क्या है? एक तरीके का चाइल्ड लेबर है। एंड देन एग्रीकल्चर फील्ड्स में आपने देखा होगा। एंड स्मॉल फैक्ट्रीज़ टू अर्न
एक्स्ट्रा मनी टू सपोर्ट देयर फैमिलीज़। देन हमने कुछ एग्जांपल्स देखे थे क्लाइमेट चेंज के अंदर कि अराउंड 3.9 लाख डेथ्स
हमने देखी थी फार्मर्स की। तो उसका रीज़न क्या था कि उनकी जो क्रॉप्स और फसलें थी वो खराब हो गई थी क्लाइमेट चेंज एंड अदर
रीज़ंस की वजह से और उन्होंने काफी ज्यादा लोन ले रखा था। इससे कंफर्म कर सकते हैं कि यस एग्रीकल्चर फील्ड्स और जितने भी
हमारे तो हम इससे कंफर्म कर सकते हैं कि जो क्रॉप फेलियर होना या फिर एग्रीकल्चर फील्ड्स में काफी ज्यादा लोन और डेप्ट की
वजह से भी जो है इन बच्चों को आगे आना पड़ता है। देन अराउंड 80 करोड़ पीपल इन इंडिया रिसीव फ्री और सब्सिडाइज फूड
ग्रेंस अंडर दी नेशनल फूड सिक्योरिटी एक्ट। तो ये भी एक सोशो बैकवर्डनेस का पॉइंट है। आप अपने जीडी में यूज़ करिए कि
देखिए अराउंड 80 करोड़ पीपल इन इंडिया स्टिल आर डिपेंडेंट ऑन दी गवर्नमेंट फॉर फ़ूड ग्रेंस। ठीक है? अंडर दी नेशनल फ़ूड
सिक्योरिटी एक्ट। सो दैट क्लियरली शोज़ यस इंडिया हैज़ अ लॉट ऑफ़ पावर्टी एंड बैकवर्डनेस एंड दैट इट इज़ द मोस्ट कॉमन
रीज़न दैट द चिल्ड्रन हैज़ टू कम फॉरवर्ड एंड सपोर्ट देयर फैमिलीज़। तो देन दैट पॉवर्टी एंड लीडिंग टू चाइल्ड लेबर मेनी
फार्मिंग फैमिलीज़ स्टेट्स। सो देन मेनी फार्मिंग फैमिलीज़ इन स्टेट लाइक बिहार, उत्तर प्रदेश एंड झारखंड टेक लोन फ्रॉम
मनी लेंडर्स बैंक्स फॉर सीड्स, फर्टिलाइजर एंड लिविंग एक्सपेंसेस। और जब वो नहीं पे कर पाते, राइट? तो उन्हें क्या है? बच्चों
को आगे करना पड़ता है चाय लेबर के लिए। तो, यह कुछ पॉइंट्स थे जो कि सोशियो इककोनमी और पावर्टी को दिखाते हैं कि व्हिच शोज़
दैट इंडिया के अंदर अराउंड 5% ऑफ़ पॉपुलेशन अर्न ओनली लेस देन ₹300। इट्स अ साइन ऑफ़ पावर्टी छत्तीसगढ़ एंड अदर स्टेट इन रूरल
एरिया स्पेशली अ लॉट ऑफ़ पॉवर्टी इज़ देयर। एंड इफ देयर इज़ अ सिंगल पैरेंट डिसेबिलिटी और फैमिली बर्डन सिंगल पैरेंट दैट आर दी
आल्सो रीज़न ऑफ़ अह चाइल्ड। चलिए अब हम बात करते हैं एजुकेशन सेक्टर की। राइट? जो हमारी सेकंड लीड थी। सो अकॉर्डिंग टू
यूनिसेफ एंड एजुकेशन रिपोर्ट्स अराउंड 3.2 करोड़ चिल्ड्रन एज सिक्स टू 17 इन इंडिया आर आउट ऑफ स्कूल। मतलब इंडिया के अंदर 3
करोड़ बच्चे जो हैं वो आज भी स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। मिड डे मील स्कीम कवर्स अबाउट 12 करोड़ चिल्ड्रन इन गवर्नमेंट एंड
एडियट स्कूल अक्रॉस इंडिया। तो बेसिकली क्या है? पीएम पोषण स्कीम चलाई गई थी जो हम मिड डे मील स्कूल के नाम से जानते हैं।
तो इसके अंदर हमने देखा है अराउंड 12 करोड़ बच्चे जो हैं तो हमने इसमें देखा है कि अराउंड 12 करोड़ बच्चे इसमें इंगेज
हैं। देन पुअर कंडीशन ऑफ़ गवर्नमेंट स्कूल मेनी गवर्नमेंट स्कूल सफर फ्रॉम पुअर इंफ्रास्ट्रक्चर टीचर एब्सेंटिज्म लैक ऑफ
क्लासरूम एंड टॉयलेट्स एंड इर्रेगुलर लो क्वालिटी ऑफ़ मिड डे मील्स। ठीक है? मिड डे मील्स केसेस ऑफ़ फ़ूड क्वालिटी, इशू स्कैम्स
इन मिड डे मील स्कीम्स हैव रिसीव्ड हैव रिड्यूस्ड पेरेंट्स ट्रस्ट। सो मेनी पुअर फैमिलीज़ हेज़िटेट टू सेंड देयर चिल्ड्रन टू
स्कूल एंड इंस्टेड ऑफ़ पुश देम टू वर्क। देखिए अगर आप आज भी YouTube पर जस्ट सर्च करते हैं मिड डे मील स्कैम तो आपको
थाउजेंड्स ऑफ वीडियोस दिख जाएंगी। ठीक है? स्पेशली यूपी के अंदर आपको दिखेगा काफी सारे पुअर इंफ्रास्ट्रक्चर की गवर्नमेंट
स्कूल की हालत काफी ज्यादा खस्ता है। टीचर वहां पर है नहीं। टॉयलेट्स नहीं है वो काफी ज्यादा एडल्टरेशन दिखेगा फूड के अंदर
जो मिड डे मील में मिल रहा है उसकी क्वालिटी काफी ज्यादा खराब है। बच्चे काफी ज्यादा बीमार पड़ जाते हैं। तो यह कुछ
कारण है जिसकी वजह से पेरेंट्स का जो ट्रस्ट है वो काफी ज्यादा मिड डे मील स्कूल की तरफ कम हुआ है। और इंडिया के
अंदर अराउंड 3 करोड़ बच्चे जो हैं स्कूल नहीं जा रहे हैं। देन हाउ वी कैन स्टॉप दी चाइल्ड लेबर इन इंडिया। सो मेनी एनजीओस
एक्टिवली रेस्क्यू एंड रिहबिलेट चाइल्ड लेबर। जैसे कि बचपन बचाओ आंदोलन। आई रिपीट बचपन बचाओ आंदोलन। रेस्क्यू चिल्ड्रन
फ्रॉम फैक्ट्रीज ब्रिकलिंस एंड ट्रैफिकिंग फाउंडेड बाय नोबेल लॉरेट कैलाश सत्यार्थी। ठीक है? तो ये एक जिनको नोबेल प्राइज मिल
चुका है कैलाश सत्यार्थी। तो उन्होंने जो है बचपन बचाओ आंदोलन जो है वो एक बचपन बचाओ आंदोलन जो है एक एनजीओ स्टार्ट करी
है। तो ये क्या करती है? बच्चों को फाइंड करती है और उनको क्या है? एजुकेशन सेक्टर में फिर इंडल्ज करती है। एजुकेशन सेक्टर
में वापस डालती है। ठीक है? देन क्राई चाइल्ड राइट्स एंड यू फोकसेस ऑन एजुकेशन एक्सेस एंड प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट।
देन क्राइड चाइल्ड राइट एंड यू चाइल्ड राइट एंड यू ठीक है देन सेव द चिल्ड्रन इंडिया देखिए कितना सिंपल नाम है सेव द
चिल्ड्रन इंडिया वर्क्स ऑन चाइल्ड प्रोटेक्शन एजुकेशन एंड प्रिवेंटिंग चाइल्ड एक्सप्लइटेशन ठीक तो यहां पर कुछ
एग्जांपल्स थे जो आपको याद रखने हैं एजुकेशन सेक्टर में चाहे वो बचपन बचा हुआ आंदोलन हो चाहे वो क्राई हो सेव द
चिल्ड्रन हो राइट तो ये कुछ एनजीओ जो हैं तो ये कुछ एनजीओस हैं जो बच्चों को रेस्क्यू करते हैं फ्रॉम दी लेबर
एक्टिविटीज और उनको जो है एजुकेशन के सेक्टर में वापस डालती है। तो ये एनजीओ के नाम आपको याद रखने हैं। बचपन बचाओ आंदोलन,
क्राई चाइल्ड राइट एंड यू एंड सेव द चिल्ड्रन ऑफ इंडिया। सेव एंड सेव द चिल्ड्रन इन इंडिया। ठीक है? तो कुछ
गवर्नमेंट के इनिशिएटिव्स भी देख लेते हैं। जैसे हमने पढ़ा मिड डे मील स्कूल के बारे में। देन चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर। तो
ये हमें याद रखना है। ये हम अपनी टैट की स्टोरीज में यूज़ कर सकते हैं। देन हम इसे जो है अपने लेक्चरेट और जीडी में भी यूज़
कर सकते हैं। ठीक है? तो चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर क्या है? 1098 क्या है? 1098 वेरी सिंपल। देखिए तो नेशनल 24/7 हेल्पलाइन टू
रिपोर्ट चाइल्ड लेबर और चाइल्ड अब्यूज। ठीक है? और आपको पता है यही हेल्पलाइन नंबर जो है वो वुमेन के लिए भी यूज़ होता
है। अगर वुमेन से रिलेटेड कोई भी क्राइम होता है या डोमेस्टिक वायलेंस या फिर कोई भी चीजें अगर वुमेन से रिलेटेड 1098 जो है
वो यूज़ होता है। ये जो नंबर है वो किसका है? मिनिस्ट्री ऑफ़ वुमेन चाइल्ड डेवलपमेंट का नंबर है। ठीक? तो ये नंबर किसने जनरेट
करा है? मिनिस्ट्री ऑफ़ वुमेन चाइल्ड डेवलपमेंट। तो आप इसको कैसे याद रख सकते हैं? देखिए चाइल्ड। ठीक है? चिल्ड्रन के
लिए बना है। तो 1098 बहुत सिंपल रखा है। वेयर एज अगर आप बात करें साइबर सिक्योरिटी हेल्पलाइन नंबर की तो वो क्या था? 1930 तो
आप इसको ऐसे याद रख लीजिए। 1930 तो 1930 में साइबर केसेस तो होते नहीं थे। ठीक है? तो वैसे याद रख लीजिए कि 1930 रख दिया।
ठीक है? 1930 आगे बढ़ते हैं हम लोग। देन आगे बढ़ते हैं। द नेशनल चाइल्ड लेबर प्रोजेक्ट। आई रिपीट नेशनल चाइल्ड लेबर
प्रोजेक्ट। तो बहुत सिंपल नाम है। इज अ गवर्नमेंट ऑफ इंडिया स्कीम अंडर द मिनिस्ट्री ऑफ़ लेबर एंप्लॉयमेंट टू
एलिमिनेट चाइल्ड लेबर। ठीक? तो इन्होंने क्या करा है? उत्तर प्रदेश की कारपेट इंडस्ट्री जो मिजापुर के अंदर है वहां से
बच्चों को रेस्क्यू करा। फायरवक्स इंडस्ट्री ऑफ़ तमिलनाडु वहां से रेस्क्यू करा। राजस्थान की स्टोन क्वरी से रेस्क्यू
करा है। देन बिहार और झारखंड के अंदर जो जहां पर ब्रिक्स बनती हैं भत्ते ठीक है वहां से रेस्क्यू करा एग्रीकल्चर सेक्टर
से एंड दिल्ली महाराष्ट्र में जो स्माल फैक्ट्रीज होती है और डोमेस्टिक वर्क होती है चाहे वो टी स्टॉल्स होते हैं और
डिफरेंट टाइप के हर्ट्स होते हैं वहां से भी बच्चों को जो है रेस्क्यू किया गया है तो आप तो आप अपने जीडी के अंदर यूज़ करिए
कि नेशनल चाइल्ड लेबर प्रोजेक्ट ने जो है वो कारपेट इंडस्ट्री हो चाहे वो फायर फायर वर्क इंडस्ट्री हो चाहे वो स्टोन क्वरीज
हो ब्रिकलंस हो एग्रीकल्चर सेक्टर हो स्मॉल फैक्ट्रीज हो डोमेस्टिक वर्क हो वहां से बच्चों को जो है रेस्क्यू करके
एजुकेशन सेक्टर में डाला है अंडर दी नेशनल चाइल्ड प्रोजेक्ट अंडर दी नेशनल चाइल्ड लेबर लेबर प्रोजेक्ट तो हमने हेल्पलाइन
नंबर देखी 108 हमने मिड डे मील स्कीम देखी हमने नेशनल चाइल्ड लेबर प्रोजेक्ट और कुछ एग्जांपल्स देखे वेरियस स्टेट्स के तो
हमने जो जीडी का टॉपिक देखा था उसमें हमने देखा कि पॉवर्टी और सोशियो इकोनॉमिक के पॉइंट्स देन हमने एजुकेशन के पॉइंट्स देखे
जिसमें हमने देखा 3 करोड़ बच्चे जो हैं अभी भी स्कूल नहीं जा रहे हैं फिर वेरियस एनजीओ चाहे वो बचपन बचाओ आंदोलन हो चाहे
वो क्राई हो चाहे सेव चिल्ड्रन इंडिया हो फिर हेल्पलाइन नंबर हो चाहे वो नेशनल चाइल्ड लेबर प्रोजेक्ट हो मिड डे मिल
स्कीम हो तो ये हमने सारा एजुकेशन में देखा और पावर्टी में हमने देखा था कुछ एग्जांपल बिहार उत्तर प्रदेश झारखंड
उड़ीसा के रूरल एरियाज में काफी ज्यादा पॉवर्टी है। देन हमने डिसेबिलिटी के बारे में बात करी। सिंगल पैरेंट्स की बात करी।
उसके बाद हमने देखा इंडिया के अंदर अराउंड 5% जो पॉपुलेशन है वो अभी भी जो है लेस देन ₹300 अर्न कर रही है। राइट? और फिर
हमने देखा कि कैसे जो फार्मर्स हैं वो अपना लोन नहीं पे कर पा रहे हैं जैसे उनको बच्चों को आगे करना पड़ता है। तो ये हमने
कुछ एग्जांपल सोश बैकवर्डनेस पॉवर्टी और एजुकेशन से रिलेटेड देखा। ये थी समरी। ठीक है? चलिए अब हम बात करते हैं मीडिया रोल
की। तो हम इसे क्यों पढ़ रहे हैं? ठीक है? तो देखिए एक जीडी टॉपिक था। पहले हम जीडी टॉपिक को देखते हैं। व्हिच इज दी मोस्ट
इफेक्टिव मींस टू इरेडिकेट चाइल्ड लेबर इन इंडिया? मीडिया इंटरवेंशन, एनजीओ एफर्ट्स और एजुकेशन। तो देखिए हम कैसे जो है
चाइल्ड लेबर को इरेडिकेट कर सकते हैं इंडिया के अंदर? तो रोल ऑफ मीडिया बोला है अवेयरनेस कैंपेन, एनजीओ इनिशिएटिव एंड
ग्रास रू ग्रास रूट एकशंस एंड एक्सेस टू एजुकेशन एंड स्किल डेवलपमेंट। हमने एनजीओ इनिशिएटिव्स की बात करी और ग्रास रूट
एकशंस की बात करी थी। देन थर्ड लीड क्या है? एक्सेस टू एजुकेशन एंड स्किल डेवलपमेंट। तो देखिए जब भी हम स्किल
इंडिया पढ़ेंगे राइट? तो वहां भी हम स्किल डेवलपमेंट की बात करेंगे कि कैसे हमने डिफरेंट टाइप्स ऑफ स्किल के प्रोग्राम्स
चलाएं बच्चों को स्किल देने के लिए। तो हमने एक्सेस टू एजुकेशन की बात करी चाहे वो पीएम पोषण स्कीम हो और एनजीओस का रोल
हो चाहे वो नेशनल चाइल्ड लेबर प्रोजेक्ट हो। चलिए अब हम बात करते हैं मीडिया का रोल क्या है? राइट? सो देखिए नेशनल कमीशन
फॉर प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट। ठीक है? एनसीपीसीआर। तो मीडिया रिपोर्ट केसेस ऑफ़ चाइल्ड लेबर अब्यूज एंड एक्सप्लॉयटेशन
व्हिच एनसीपीसीआर इन्वेस्टिगेट। तो देखिए यह एक कमीशन है जो कि चाइल्ड लेबर के केसेस को इन्वेस्टिगेट करता है। बट जो
केसेस आ रहे हैं उसे हाईलाइट कौन कर रहा है? मीडिया ही कर रहा है। राइट? तो मीडिया रिपोर्ट्स केसेस ऑफ़ चाइल्ड लेबर। मीडिया
का रोल क्या है? मीडिया जो है बड़े केसेस जितने भी चाइल्ड लेबर के हैं वो सारे मीडिया रिपोर्ट कर रहा है। और नेशनल कमीशन
ऑफ़ प्रोटेक्शन चाइल्ड राइट जो है उस पर इन्वेस्टिगेट कर रहा है। बोल सकते हैं कि मीडिया जो है अपना फोर्थ पिलर की तरह काम
कर रहा है। ठीक है? वो इशूज़ को वो इशूज़ को क्या है? बाहर लेके आ रहा है। देन अगर हम बात करें 10 98 हेल्पलाइन नंबर ऑफ़
चिल्ड्रन तो वो भी जो है मीडिया टाइम टू टाइम जो है प्रोपगेट करता है। अवेयरनेस फैलाता है उसकी। ठीक है? देन मीडिया
सपोर्टेड कैंपेन लाइक पेंसिल पोर्टल। आई रिपीट पेंसिल पोर्टल। ठीक है? तो ये क्या है? प्लेटफार्म फॉर इफेक्टिव इनफोर्समेंट
ऑफ नो चाइल्ड लेबर। द पेंसिल पोर्टल इज़ ऑनलाइन गवर्नमेंट प्लेटफार्म लॉन्च बाय मिनिस्ट्री ऑफ़ लेबर एंड एंप्लॉयमेंट
इंडिया टू रिपोर्ट, ट्रैक एंड एलिमिनेट चाइल्ड लेबर केसेस एंड इंश्योर प्रॉपर रिहबिलेशन एंड रेस्क्यूड ऑफ चिल्ड्रन।
देखिए ये जो पेंसिल पोर्टल है इस पे आप भी जाकर कंप्लेंट कर सकते हैं। जो हमारा पेंसिल पोर्टल है यहां पे आप भी जाकर
कंप्लेंट कर सकते हैं। तो मीडिया जो है ऐसे कैंपेन को कंटीन्यूअसली जो है प्रोपगेट करता है। अवेयर करता है लोगों को
अबाउट दिस पोर्टल। अगर हम बात करें टीवी न्यूज़ चैनल्स लाइक एनडीt आज तक इंडियन एक्सप्रेस हैव एक्सपोज्ड फैक्ट्रीज होटल्स
एंड वर्कशॉप एंप्लॉयंग चिल्ड्रन लीडिंग टू पुलिस रेड्स एंड चाइल्ड रेस्क्यू ऑपरेशन। तो जितने भी हमारे न्यूज़ चैनल्स हैं चाहे
एनडीटीवी आज तक इंडियन एक्सप्रेस हो चाहे इंडिया टीवी हो। तो इन्होंने काफी सारे सारे पास्ट में जो है स्टिंग ऑपरेशंस करे
हैं। बिकॉज़ ऑफ़ दिस स्टिंग ऑपरेशंस जो है जो हमारी पुलिस है और इससे जो हमारी एजेंसीज हैं और जो पुलिस है और कमीशन है
जिससे उनकी नजर वहां पर गई और उन्होंने ये प्रॉब्लम्स को जो है सॉल्व किया। ठीक है? देन अगर हम बात करें न्यूज़ कवरेज एंड सोशल
मीडिया कैंपेन हेल्प टू प्रमोट चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर जिस पे हमने बात कर ली है टू रिपोर्ट लेबर केसेस क्विकली एंड
इंक्रीज रिपोर्ट रिपोर्टिंग रेस्क्यू ऑफ़ चिल्ड्रन। ठीक है? देन मीडिया सपोर्ट एनजीओस लाइक बचपन बचाओ आंदोलन बाय
हाईलाइटिंग देयर रेस्क्यू मिशनंस एंड स्प्रेडिंग अवेयरनेस। ठीक? तो जितनी भी हमारी एनजीओस अच्छा काम कर रही है मीडिया
उसको भी दिखाता है। तो अगर हम समराइज करें ठीक है हम समराइज करें चाहे वो नेशनल कमीशन ऑफ प्रोटेक्शन चाइल्ड राइट हो करें
कि मीडिया काफी सारे केसेस को हाईलाइट करता है जो कि इन्वेस्टिगेट किए जाते हैं बाद में नेशनल कमीशन ऑफ़ प्रोटेक्शन चाइल्ड
राइट्स के द्वारा देन मीडिया जो है कॉन्सेंटली पेंसिल पोर्टल के बारे में अवेयरनेस फैलाता है। मीडिया जो है
कॉन्स्टेंटली अबाउट चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर के बारे में करता है। मीडिया जो है कॉन्स्टेंटली स्टिंग ऑपरेशंस करता है।
चाहे वो आज तक इंडियन एक्सप्रेस इंडिया टीवी। ठीक है? तो ये एग्जांपल था। मीडिया ही है जो एनजीओ के अच्छे कामों को दिखाता
है। इससे क्या होता है? ज्यादा से ज्यादा लोग एनजीओ से जुड़ते हैं। ठीक है? और जो यह चाइल्ड लेबर है इसके खिलाफ जो है अपनी
आवाज को उठाते हैं। तो ये कुछ पॉइंट्स थे जो आपको याद रखने हैं। ठीक है? हमने दोनों जीडी को देखा है और आप ये [संगीत] सारे
पॉइंट्स जो है यूज़ कर सकते हैं जीडी। चलिए अब हम बात करते हैं अपने सेकंड टॉपिक की तरफ जो है करप्शन। तो करप्शन क्या होता
है? देखिए मिसयूज ऑफ़ पब्लिक पावर, पोजीशन, [संगीत] अथॉरिटी फॉर पर्सनल गेन। तो कभी भी अगर अपनी पावर, पोजीशन और अथॉरिटी का
मिसयूज करके अब देखिए कभी भी अगर आप अपनी पावर का पोजीशन का और अथॉरिटी का मिसयूज करते हैं फॉर पर्सनल गेन के लिए तो वो
क्या कहलाएगा? करप्शन कहलाएगा। तो ये एक बहुत ही सिंपल डेफिनेशन है। आई होप ये याद रहेगी कि अपनी पावर का मिसयूज करना और
अथॉरिटी का मिसयूज करना पर्सनल गेन के लिए ही क्या जो है करप्शन कहलाता है। ठीक है? और करप्शन क्या है? एक बहुत ही वाइड टर्म
है। ठीक है? तो करप्शन के अंदर देखिए क्या-क्या आता है? ब्राइबरी। ब्राइब लेना सबको पता है कि करप्शन होता है। बट
एंबेसलमेंट गवन कर लेना, जगह गवन कर लेना या फिर फंड गवन कर लेना। ठीक है? तो एंबेसलमेंट भी एक तरीके का करप्शन है।
फेवरेटिज्म, फ्रॉड एंड अब्यूज, फेवरेटिज्म, फ्रॉड एंड अब्यूज। तो सपोज अगर कोई किसी प्राइवेट या गवर्नमेंट
ऑर्गेनाइजेशन के अंदर फेवरेटिज्म की वजह से जो है किसी को प्रमोशन देता है राइट और रेदर देन डिर्विंग तो वो भी एक तरीके का
करप्शन कहलाएगा राइट देन अब्यूज करना किसी को वर्क प्लेस के अंदर प्राइवेट हो गवर्न वो भी क्या है एक तरीके का जो है करप्शन
कहलाएगा आई होप अब आपको ब्राइबरी के अलावा जो है बेज़लमेंट फेवरेटिज्म फ्रॉड और अब्यूज भी जो है करप्शन की कैटेगरी में
आता है। अगर हम बात करें करप्शन परसेप्शन इंडेक्स की तो इंडिया का रैंक जो है उसमें 91 आता है आउट ऑफ 180 कंट्रीज विद स्कोर
ऑफ़ 39 आउट ऑफ 100 तो आप याद रखेंगे 91 आया है इंडिया का रैंक हाफ है ठीक है वन आप ऐसे याद रख सकते हैं कि 180 कंट्रीज में
हाफ आया है इंडिया का रैंक तो ये जो है हमारे लिए कंसर्निंग बात है तो क्या है करप्शन परसेप्शन इंडेक्स के अंदर इंडिया
का रैंक 91 आया ठीक देन अगर हम बात करें करप्शन की कुछ एग्जांपल्स की सेवरल ब्रिजेस कोलैप्ड्स इन बिहार इन 2023 टू
2024 राइट इसमें काफी सारी डेथ्स भी हुई है ब्रिजेस कोलैप्स होने की वजह से पुअर क्वालिटी ऑफ़ इंफ्रास्ट्रक्चर। तो आपने
देखा होगा कि जो हमारी रोड्स की कंडीशंस है, वहां पर पोर्टफ हॉल्स देखने को मिलते हैं। ठीक है? काफी सारे रोड एक्सीडेंट्स
हो रहे हैं। और आप ये पॉइंट रख सकते हैं पूरे वर्ल्ड के अंदर जो है इंडिया में सबसे ज्यादा एक्सीडेंट्स हो रहे हैं।
अराउंड 4 लाख ठीक है? अराउंड 4 लाख प्लस एक्सीडेंट्स जो है हर साल हमें देखने को मिलते हैं। जिसमें अराउंड 1 टू 10000 लोग
अपनी जान गवा दे रहे हैं। तो आप यहां देख सकते हैं करप्शन ऑफ रोड, ब्रिजेस, पब्लिक प्रोजेक्ट, कॉन्ट्रैक्ट लीड्स टू लो
क्वालिटी, कंस्ट्रक्शन, डिले एंड एक्स्ट्रा पब्लिक स्पेंडिंग। ठीक? देन हमारे पास आता है इनकम इनकलिटी एंड
पॉवर्टिटी। देखिए ऑक्सफम इनकलिटी की स्टडीज क्या शो करती है कि जो भारत है उसके अंदर आपको सबसे ज्यादा इनकम
डिस्पेरिटी देखने को मिलेगी। तो इनका इनकम डिस्पेरिटी मतलब क्या है? रिच और पुअर के बीच में जो है बहुत ज्यादा फासला है। ये
जो है हमारी इकॉनमी के लिए जो है काफी ज्यादा जो है कंसर्निंग बात है। देन हम बात करें रिड्यूस्ड फॉरेन इन्वेस्टमेंट।
देखिए करप्शन। रेड टैपिज्म क्या होता है? रेड टैपिज्म मींस होता है जब तो रेड टैपिज्म क्या होता है? कि जो ऑफिशियल्स
गवर्नमेंट होते हैं राइट? वहां पर जो फाइलें हैं वो दबी रहती हैं। ठीक है? उन पर कोई एक्शन नहीं लिया जाता है। ठीक है?
डिले किया जाता है। साइन नहीं किया जाता। तो वो सब किस में आ जाएगा? रेड टैपिज्म के अंदर आ जाएगा। तो बेसिकली अगर आप अपना
बिज़नेस स्टार्ट करें, आपको लाइसेंस चाहिए, टेंडर चाहिए, ठीक? परमिशन चाहिए। बट वहां पर बहुत ज्यादा रैट टैपिज़्म है। ठीक? डिले
पे डिले है, ये फाइल चाहिए, वो साइन चाहिए। ठीक है? तो इसकी वजह से जो है ग्लोबल कंपनीज़ हैव शिफ्टेड
मैन्युफैक्चरिंग टू कंट्रीज लाइक वियतनाम। देन हमारे पास इंक्रीज़्ड कॉस्ट ऑफ़ डूइंग बिज़नेस। ब्राइव्स एंड अनफिशियल पेमेंट,
इंक्रीज़ बिज़नेस कॉस्ट। मेनी स्मॉल बिज़नेसेस ओनर कंप्लेन ऑन सोशल मीडिया अबाउट स्पीड मनी। तो ये टर्म याद रख लीजिए
स्पीड मनी। तो आपने काफी सारी वीडियोस देखी होंगी सोशल मीडिया पर जहां पर लोग बनाते हैं कि हम अपना बिज़नेस स्टार्ट कर
रहे हैं। हमने अपना कोई रेस्टोरेंट खोला है और हमें क्या तो हमें क्या है? फायर सेफ्टी से सर्टिफिकेट चाहिए। बट क्या होता
है वहां पर आपको स्पीड मनी देनी पड़ रही है। ठीक? लाइसेंस के लिए। तो ये सारी चीजों की वजह से जो है कॉस्ट ऑफ डूइंग
बिजनेस है और जो फ्रस्ट्रेशन अमंग स्मॉल बिजनेस ओनर वो काफी ज्यादा बढ़ती है। तो हमने देखा कि करप्शन के कारण जो है हमें
वो पुअर क्वालिटी ऑफ इंफ्रास्ट्रक्चर मिलता है। रोड्स मिलती है, ब्रिजेस मिलती है जिसकी वजह से ट्रैफिक होता है, काफी
ज्यादा एक्सीडेंट्स होते हैं, डेथ्स होते हैं। देन हमने पढ़ा इनकम इनकलिटी बहुत ज्यादा हो रही है। रिच काफी ज्यादा रिच हो
रहा है। पुअर काफी ज्यादा पुअर होता जा रहा है। रिड्यूस फॉरेन इन्वेस्टमेंट। फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट इज़ वेरीेंट
फॉर आवर इंडियन ग्रोथ इकॉनमी की। जो कंट्रीज हैं वो बिकॉज़ ऑफ़ करप्शन एंड रेट टिपिज्म जो है कंट्रीज दूसरी जो है
कंट्रीज की तरफ चली जाती हैं। देन इंक्रीज्ड कॉस्ट ऑफ डूइंग बिज़नेस हमने बात करी कैसे आपको स्पीड मनी देनी पड़ रही है।
राइट स्पीड मनी और जरूर आप ऑक्सफम इनकिटी स्टडीज के बारे में बताएं कि इनकम डेस्पेरिटी इंडिया के अंदर काफी ज्यादा है
ड्यू टू करप्शन। और और इंडिया का तो वैसे भी करप्शन परसेप्शन इंडेक्स में अराउंड 91 है। ठीक है? अराउंड 90 है। ठीक है? अब हम
बात करते हैं टाइप्स ऑफ़ करप्शन। ब्राइबरी, इंपेज़लमेंट, एक्सटॉर्शन, बैंकिंग फ्रॉड। ठीक है? फेवरेटिज़्म। तो देखिए तो बिहार
हैज़ रिपीटेडली रिपोर्टेड हाई ब्राइबरी कंप्लेंट्स इन पब्लिक सर्विस अकॉर्डिंग टू इंडिया करप्शन स्टडीज। ठीक? तो अकॉर्डिंग
टू इंडिया करप्शन स्टडीज एंड स्टेट विजिलेंस डाटा शो करता है कि बिहार के अंदर जो है पब्लिक सर्विज हैं जितनी भी
ठीक है? गवर्नमेंट सर्विज है वहां पर बहुत ज्यादा ब्राइबरी के केसेस देखे गए हैं। तो ये किसका स्टेट विजिलेंस डाटा है। ठीक है?
तो आप बता सकते हैं ये विद रेफरेंस। देन इंबेज़लमेंट गुरुग्राम वेरियस मुनिसिपल ऑफिशियल वाज़ अरेस्टेड फॉर मिस
एप्रोप्रिएशन ऑफ पब्लिक डेवलपमेंट फंड्स वर्थ सेवरल करोड़ एज़ रिपोर्टेड बाय मेजर नेशनल न्यूज़पेपर। ठीक है? तो वेरियस
न्यूज़पेपर ने यह चीजों को उजागर करा है कि जो गुड़गांव है उनमें काफी सारे मनसिपल ऑफिशियल्स जो है वो करोड़ ऑफ उन्होंने जो
है करोड़ ऑफ मिसप्रोप्रिएशन करा है अपने पब्लिक फंड का। राइट? तो यहां पर देन देन हमारे पास आता है एक्सटॉर्शन पुलिस एंड
लोकल ऑफिशियल इन सब रीजन हैव फेस्ड केसेस ऑफ़ इललीगल मनी कलेक्शन फ्रॉम स्मॉल बिज़नेस फ्रॉम स्मॉल बिज़नेसेस रिपोर्टेड बाय स्टेट
विजिलेंस डिपार्टमेंट। तो आप बता सकते हैं कि स्टेट विजिलेंस तो आप बता सकते हैं कि स्टेट विजिलेंस डिपार्टमेंट का जो डाटा है
वो शो करता है कि बिहार के अंदर ब्राइबरी बहुत ज्यादा है। इंबेज़लमेंट के काफी सारे केसेस गुड़गांव के अंदर देखने को मिले
हैं। जहां पर ऑफिशियल ने जो है डेवलपमेंट का फंड ही गवर्न कर लिया है। देन एक्सटॉर्शन के केसेस जो है काफी ज्यादा
बढ़ते जा रहे हैं। रिपोर्टेड बाय स्टेट विजिलेंस डिपार्टमेंट। जहां पर जो है पुलिस खुद ही इनवॉल्व है। ठीक है? देन
बैंकिंग फ्रॉड अकॉर्डिंग टू आरबीआई एनुअल रिपोर्ट बैंकिंग फ्रॉड केसेस इन्वॉल्विंग थाउजेंड्स ऑफ करोड़ आर रिपोर्टेड एव्री
ईयर इंक्लूडिंग लोन फ्रॉड एंड मिसयूज़ ऑफ़ फंड्स। तो आप एग्जांपल उसमें दे सकते हैं। चाहे वो PNB का स्कैम हो अराउंड 13,000 ऑफ
नीरव मोदी देन विजय माल्या का आप स्कैम की बात कर सकते हैं। Yes Bank क्राइसिस की बात कर सकते हैं। सहारा स्कैम की बात कर
सकते हैं। ठीक है? 2G स्पेक्ट्रम तो ये कुछ स्कैम्स हैं जो कि आप अपने जीडी के अंदर यूज़ कर सकते हैं। बैंकिंग फ्रॉड से
रिलेटेड। ठीक है? तो आगे बढ़ने से पहले हम लोग एक बार जीडी का टॉपिक देख लेते हैं। देन वी कैन रिलेट इट बेटर। व्हाट आर दी
मोस्ट इफेक्टिव वेज़ टू कर्व करप्शन इन मॉडर्न वर्ल्ड? स्ट्र्रांग इनफोर्समेंट एंड लीगल अकाउंटेबिलिटी? तो इसके अंदर
जितनी भी हमारी इनफोर्समेंट एजेंसीज हैं और लीगल अकाउंटेबिलिटी के अंदर लॉज़ हैं, एक्ट हैं, कमीशन जो बनाया गया है कर्व
करने के लिए करप्शन को हमें वो पॉइंट्स को इस लीड के अंदर डालना। देन टेक्नोलॉजी ड्रिवन ट्रांसपेरेंसी, डिजिटल गवर्नेंस
एंड डिजिटल इंडिया। तो डिजिटल गवर्नेंस और डिजिटल इंडिया ने जो भी स्टेप्स लिए हैं या फिर जो टेक्नोलॉजीस हैं चाहे वो
सीसीटीवी कैमरास हो, फिंगरप्रिंट सेंसर्स हो, राइट? और यूपीआई हो, डिजिटल रिकॉर्ड्स हो तो वो सारी चीजें जो हमें डिस्कस करनी
है इस लीड के अंदर। देन एजुकेशन एंड एथिकल अवेयरनेस। देन एजुकेशन एंड एथिकल अवेयरनेस। तो ठीक है हम एक-एक करके जो है
इन तीनों लीड्स के जो हैं कुछ पॉइंट्स को देखते हैं जो हम अपने लेक्चरेट और जीडी के अंदर यूज़ करेंगे।
तो फर्स्ट क्या आता है हमारे पास? ई गवर्नेंस एंड गवर्नमेंट एप्स। तो हमने जैसे बात करी थी डिजिटल गवर्नेंस की और
डिजिटल इंडिया की, टेक्नोलॉजी ड्रिवन की। तो यहां पर हम कुछ एग्जांपल्स देख सकते हैं। प्रोग्राम लाइक ई ऑफिस। सो यह ई ऑफिस
है। प्रोग्राम लाइक ई ऑफिस उमंग एप एंड ऑनलाइन सर्विज पोर्टल रिड्यूस फिजिकल कांटेक्ट विद ऑफिसिसेस विद ऑफिशियल्स
लिमिट मिडिल मैन जो बीच में हमेशा क्या होता था? बीच का व्यक्ति होता था। जिसे क्या था? कमीशन चाहिए होती थी। अब वो क्या
है? पूरी तरीके से खत्म हो चुका है। एंड ब्रिंग ट्रांसपेरेंसी इन सर्विस लाइक लाइसेंस सर्टिफिकेट एंड बिल पेमेंट्स।
चलिए एग्जांपल्स देखते हैं। ठीक है? तो ये डिजिटल इंडिया की स्लाइड है। तो वहां से जो डिजिटल इंडिया की स्लाइड है मैंने यहां
पर लगा दी है। हम डिजिटल इंडिया में सारे पॉइंट्स पढ़ेंगे। बट एक बार रिवाइज कर लेते हैं। एम पासपोर्ट सेवा यूज़्ड फॉर पासपोर्ट
एप्लीकेशन स्टेटस टैकिंग एंड अपॉइंटमेंट बुकिंग। तो अब आप अपना पासपोर्ट जो है वो ईजीली ऑनलाइन बनवा सकते हैं। ठीक है? देन
हमारे पास आता है भीम एप राइट? यूज़्ड फॉर यूपीआई बेस्ड इंस्टेंट बैंक टू बैंक पेमेंट्स। तो अब सारी ट्रांजैक्शन का जो
है रिकॉर्ड्स रहता है। देन हमारे पास ईसा साइन आ गया। ठीक है? डिजिटल सिग्नेचर, पेपरलेस एग्रीमेंट्स। देन ई ऑफिस देखिए ई
ऑफिस की बात हो रही है यूज्ड इन गवर्नमेंट डिपार्टमेंट टू रिड्यूस पेपर वर्क एंड इनेबल फाइल मूवमेंट ऑनलाइन तो आप अपनी
फाइल्स को ट्रैक कर सकते हैं देन हमारे पास डीlॉockकर तो है ही यूज्ड टू स्टोर ड्राइविंग लाइसेंस आधार कार्ड मार्कशीट
व्हीकल आरसी डिजिटल तो ये सारी चीजों को बनवाने के लिए पहले क्या है एक कमीशन देनी पड़ती थी किसी मिडिलमैन को बट अब ईजीली
ऑनलाइन ही जो है इन सब चीजों को बनवा सकते हैं डाउनलोड कर सकते हैं देन अगर हम बात करें उमंग ऐप की तो आप यह देखिए गवर्नमेंट
सर्विज लाइक पैन आधार गैस बुकिंग पेंशन तो आप ऑनलाइन ही ये सारी चीजें से कर सकते हैं जिससे जो है करप्शन बहुत ही
ड्रास्टिकली रिड्यूस होगा। देन हमारे पास आता है सर्विलेंस एंड डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम। तो लीड में था
ना हां तो लीड में आपने देखा होगा टेक्नोलॉजी ड्रिवन से रिलेटेड पॉइंट था। तो वो यहां वहां पर जो है आप ये पॉइंट्स
फिट कर सकते हैं कि लाइक सीसीटीवी कैमरास इन ऑफिस बायोमेट्रिक फिंगरप्रिंट्स अटेंडेंस सिस्टम एंड ऑनलाइन कंप्लेन
पोर्टल हेल्प मॉनिटर एंप्लाइजज़ प्रिवेंट फेक अटेंडेंस एंड क्रिएट डिजिटल प्रूफ अगेंस्ट करप्शन। तो यहां पर क्या है?
सीसीटीवी कैमरा और बायोमेट्रिक फिंगर अटेंडेंस सिस्टम। तो बायोमेट्रिक फिंगरप्रिंट अटेंडेंस सिस्टम लगा हुआ है
जिससे आप पता कर सकते हैं कि कितने एंप्लाइजज़ कब काम करने आ रहे हैं और ऑफिस में प्रेजेंट है कि एंड डिजिटल पेमेंट एंड
यूपीआई ट्रांजैक्शन की बात हमने करी है। इससे आप जो है इनकम टैक्स का ट्रैक कर सकते हैं। तो टैक्स भी जो है इससे ईजीली
गवर्नमेंट जो है कलेक्ट कर सकती है। देन मोबाइल फोंस एंड सोशल मीडिया। मोबाइल फोंस एंड सोशल मीडिया। तो आपने देखा होगा कैसे
सोशल मीडिया के ऊपर जो है काफी सारी वीडियोस अपलोड होती हैं। आपने देखा होगा एक्स प्लेटफार्म पे है। काफी सारी रेलवे
से रिलेटेड जो प्रॉब्लम है लोग वहां पर पब्लिश कर देते हैं और इमीडिएटली जो है एक्शन लिया जाता है और रेलवे का जो एक
हेल्पलाइन नंबर भी है 139 आई रिपीट 139 जहां पर आप रिपोर्ट कर सकते हैं फूड सीट सेफ्टी इशू एंड ऑफिशियल रिसोंड क्विकली।
ठीक है? तो सोशल मीडिया और मोबाइल फोन का यूज़ करते हैं। ये भी क्या है? टेक्नोलॉजी ड्रिवेंस पॉइंट आ जाते हैं जो कि करप्ट
करते हैं हमारे करप्शन को। चलिए हम बात करते हैं एजुकेशन एंड अवेयरनेस की जो हमारी थर्ड लीड है। देन विजिलेंस अवेयरनेस
वीक हर साल मनाया जाता है। कंडक्ट एव्री ईयर इन स्कूल्स, कॉलेजेस एंड गवर्नमेंट ऑफिसिसेस टू प्रमोट इंटीग्रिटी एंड फाइट
करप्शन। ठीक है? देन स्टेट एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रेनिंग इंस्टट्यूट। तो जितने भी हमारे पीसीएस ऑफिसर्स होते हैं
वो हमारे स्टेट्स के गवर्नमेंट ऑफिसर्स होते हैं उनकी ट्रेनिंग करवाई जाती है। ठीक है? विजिलेंस से रिलेटेड, इंटीग्रिटी
से रिलेटेड प्लेस दिलाई जाती है कि हम करप्शन नहीं करेंगे। ठीक है? देन लवासना के अंदर जितने भी हमारे गवर्नमेंट
ऑफिशियल्स जो कि यूपीएससी के थ्रू चुन के आते हैं वो भी जो है लवासना के अंदर प्रॉपर एथिक्स इंटीग्रिटी और पब्लिक
सर्विस वैल्यू ट्रेनिंग करते हैं। देन हम बात करें अगर स्कूल करिकुलम की तो सीबीएसई और स्टेट बोर्ड्स के जितने भी हमारे
स्कूल्स हैं केंद्र विद्यालयज हो गए या फिर अदर स्कूल हैं वहां पर जो है मोरल साइंस सिविक स्टडीज और वैल्यू एजुकेशन और
टीच होनेस्टी रिस्पांसिबिलिटी फ्रॉम यंग एज। देन हमारी जो आईपीएस की एकेडमीज़ भी हैं वहां पर भी जो है एथिकल एंड पुलिस
विजिलेंस प्रोसीजर और पढ़ाया जाता है। देन अगर हम बैंकिंग की बात करें तो वहां पर भी जो है एथिक्स प्रोग्राम टाइम टू टाइम चलाए
जाते हैं। चाहे वो SBI हो, HDFC हो, सेंट्रल बैंक। तो ये कुछ पॉइंट्स हैं जो आपको याद रखने हैं। बोल सकते हैं कि फ्रॉम
स्कूल्स टू कॉलेजेस देन हमारी गवर्नमेंट ऑफिसेस हो, चाहे वो ट्रेनिंग इंस्टट्यूट हो, चाहे वो बैंकिंग इंडस्ट्री हो, चाहे
वो पुलिस हो। हर जगह पर जो है विजिलेंस अवेयरनेस वीक मनाया जाता है। प्रॉपर ट्रेनिंग करवाई जाती है एथिक्स की,
इंटीग्रिटी की टू फाइट करप्शन। को ये सारे पॉइंट्स जो है याद रखने हैं। आईपीएस एकडमी, लबासना, स्कूल्स, एडमिनिस्ट्रेटिव
ट्रेनिंग इंस्टट्यूट, विजिलेंस एंड एसबीआई, एसडीएफसी, सेंट्रल बैंक का एथिक्स प्रोग्राम। ठीक है? चलिए अब हम बात करते
हैं एनफोर्समेंट एंड लीगल। ठीक है? तो जो हमारा फर्स्ट लीड थी तो देखिए, राइट टू इंफॉर्मेशनेशन एक्ट 2005 आरटीआई। ठीक है?
आरटीआई अलॉज़ सिटीजन टू सी गवर्नमेंट इनेशन रिमूव्स सीक्रेसी एंड इंप्रूव्स ट्रांस्परेसी इन पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन।
तो यहां पर राइट टू इंफॉर्मेशन एक्ट है। देन सबसे इंपॉर्टेंट पॉइंट अब तक की पूरी करप्शन का प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट
अमेंडेड इन 2018 जहां पर जो ब्राइब दे रहा है प्लस जो ब्राइब एक्सेप्ट कर रहा है। यहां पर जो है दोनों के लिए जो है पनिश तो
द एक्ट वाज़ अमेंडेड इन 2018 टू मेक बोथ गिविंग एंड टेकिंग ब्राइब्स पनिशेबल ऑफेंस एंड टू क्रिमिनलाइज मिसयूज़ ऑफ़ ऑफिशियल
पोजीशन बाय द पब्लिक सर्वेंट। ठीक है? तो ये पॉइंट जरूर याद रखना है कि हमारी गवर्नमेंट के बता सकते हैं कि हमारे लॉ के
अंदर भी जो है प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट बनाया गया है। जहां पर जो है करप्शन लेना और देना दोनों ही जो है एक पनिशेबल ऑफेंस
है। देन सेंट्रल विजिलेंस कमीशन। ठीक है? तो ये क्या है? कमीशन है। कंडक्ट्स प्रिलिमिनरी इंक्वायरी इनू कंप्लेंट्स
रेफर्ड बाय दी लोकपाल एंड रेकमेंड स्ट्रंगर विजिलेंस एंड डिसिप्लिनरी एक्शन अगेंस्ट दी करप्ट ऑफिशियल। आपको याद रखना
है सेंट्रल विजिलेंस कमीशन। और यही सेंट्रल सेंट्रल विजिलेंस कमीशन। और आपने देखा है सेंट्रल विजिलेंस अवेयरनेस वीक भी
बनाया जाता है डिफरेंट इंस्टीट्यूशन में चाहे वो स्कूल कॉलेजेस और गवर्नमेंट ऑफिसिसेस हो। देन हम बात करते हैं
इनफोर्समेंट की। राइट? तो चलिए देखते हैं हमारे पास इनफोर्समेंट एजेंसीज कौन सी है। तो ईडी राइट इन्वेस्टिगेट मनी लॉन्ड्रिंग
एंड इललीगल फॉरेन ट्रांजैक्शन अंडर पीएमएलए। एंड ईडी ने जो है अराउंड लाख करोड़ ऑफ एसेट्स को जो है सीज़ करा है इन
रिसेंट ईयर। तो हम देख सकते हैं कि ईडी जो है कॉन्स्टेंटली काम कर रही है करप्शन को और मनी लॉन्ड्रिंग को खत्म करने में। ठीक
है? देन हमारे पास आता है कैग काउंटर ऑडिटर जनरल। ये जितने भी हमारी गवर्नमेंट के फंड्स होते हैं, पब्लिक प्रोजेक्ट्स
होते हैं, वो यह जो है इन्वेस्टिगेट करता है। तो यहां पर कुछ एग्जांपल्स हैं जो कि आपको देखने हैं। चाहिए। देखिए, स्वच्छ
भारत का जो फंड था हरियाणा के अंदर, वो फुल्ली यूज्ड नहीं किया गया है। यूज़ नहीं किया। देन फाउंड प्रॉब्लम्स इन पंजाब
इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट देन फाउंड एक्स्ट्रा स्पेंडिंग एंड डिले इन सम नेशनल हाईवे प्रोजेक्ट एंड डिफेंस इक्विपमेंट
परचेज। ठीक है? तो यहां पर जो है हमारे पास बजट है। बट फिर भी जो है डिफेंस इक्विपमेंट नहीं खरीदे गए। डिले देखने को
मिले एनएचएआई के प्रोजेक्ट्स में। तो आप एग्जांपल दे सकते हैं कि स्वच्छ भारत का जो फंड है वो यूज़ नहीं किया गया हरियाणा
के अंदर। देन हमें देखने को मिला कि काफी सारे प्रोजेक्ट्स जो हैं डिले हैं। प्लस जो डिफेंस का बजट है वो भी प्रॉपर्ली हमने
यूज़ नहीं किया। राइट? वो अभी भी बचा हुआ था। ये कुछ प्रॉब्लम्स थी जो कंप्यूटर ऑडिटर जनरल ने जो है सामने रखी गवर्नमेंट
के। देन सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन ये सबको पता है। तो इन्होंने काफी सारे फेमस केसेस को जो है सॉल्व करा है। चाहे
वो 2G स्पेक्ट्रम केसेस हो, चाहे वो नीरव मोदी का स्कैम हो। चाहे वो सहारा स्कैम हो। तो ये सारे जो स्कैम्स हैं वो सीबीआई
कास्टेंटली जो है इन्वेस्टिगेट करती है। ठीक है? तो ये कुछ इनफोर्समेंट वाले पॉइंट आपको याद रखने हैं ईडी का, कंप्यूटर ऑडिटर
जनरल का, सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन का, देन आपको राइट टू इनफेशन एक्ट, प्रिवेंशन ऑफ़ करप्शन एक्ट। आई रिपीट
प्रिवेंशन ऑफ़ करप्शन एक्ट का भी ध्यान रखना है। देन सेंट्रल विजिलेंस कमीशन। और ये कुछ पॉइंट्स थे जो कि एजुकेशन वाले
पॉइंट के अंदर आ जाएंगे। चलिए कुछ रीज़ंस देख लेते हैं जो आप अपने लेक्चरेट में यूज़ कर सकते हैं कि करप्शन के रीज़न क्या है?
लो गवर्नमेंट सैलरीज़ इन सम सेक्टर। फॉर एग्जांपल होमगार्ड। देखिए होमगार्ड की सैलरी कितनी है? 15,000 टू 18,000 पर मंथ
है। ठीक है? जो कि काफी लेस है। होमगार्ड इन सेवरल स्टेट अर्न अराउंड 15 टू 18,000 पर मंथ। तो यही रीज़न था कि जो है एट्थ पे
कमीशन को लाया गया है। ठीक है? तो एथ पे कमीशन में जो है जो गवर्नमेंट सैलरीज हैं वो क्या होंगी? हाई कोर्ट लैक ऑफ
स्ट्रिक्ट इनफोर्समेंट लॉज़ डिस्पाइट द प्रिवेंशन ऑफ़ करप्शन एक्ट कन्विक्शन रेट्स इन करप्शन केसेस रिमेन रिलेटिवली लो ड्यू
टू लॉन्ग लीगल प्रोसेससेस एंड डिले इन कॉम्प्लेक्स ब्यूरोक्रेटिक प्रोसीजर्स लेंथी पेपर वर्क अप्रूवल ऑफन क्रिएट
ओपोरर्चुनिटीज़ फॉर मिडिल मैन एंड ब्राइव डिमांड्स इन लैंड रजिस्ट्रेशन एंड लाइसेंसिंग। तभी हमने बात करी थी कैसे
डिजिटल इंडिया आया इन सब चीजों को कर्व करने के लिए। देन ग्रीड एंड अनएथिकल माइंडसेट देन ग्रीड एंड अनएथिकल माइंडसेट।
दैट इज द रीज़न जो हमने एथिक्स प्रोग्राम की बात करी थी। चाहे वो बैंकिंग इंडस्ट्री में हो या फिर डिफरेंट गवर्नमेंट ऑफिसिसेस
के अंदर, स्कूल के अंदर, कॉलेजेस के अंदर। तो यही रीज़न था कि अगर अनएथिकल माइंडसेट है तो इसे खत्म करने के लिए जो है हमें ये
सारे प्रोग्राम को चलाया गया। तो चलिए अब हम अपने नेक्स्ट टॉपिक की तरफ चलते हैं जो कि है रेड कॉरिडोर या फिर नक्सलिज्म। ठीक
है? तो अब जो है नक्सलिज्म पूरी तरीके से इंडिया के अंदर खत्म हो चुका है। ये हमारे होम मिनिस्टर द्वारा स्टेटमेंट दी गई है
इन पार्लियामेंट दैट उन्होंने टारगेट सेट रखा था कि 2026 तक अप्रैल तक जो है नक्सलिज्म को पूरी तरीके से खत्म करते
हैं। पहले हम समझते हैं रेड कॉरिडोर है क्या? ठीक है? देखिए रेड कॉरिडोर एक बेल्ट है [संगीत] नक्सल अफेक्टेड एरियाज के। तो
रेड कॉरिडोर क्या है? एक नक्सल अफेक्टेड बेल्ट है कुछ डिस्ट्रिक्ट्स की जो कि फॉल करते हैं छत्तीसगढ़, झारखंड, उड़ीसा,
बिहार, महाराष्ट्र, तेलंगाना एंड आंध्र प्रदेश के अंदर। अब आपको याद रहेगा रेड कॉरिडोर क्या एक बेल्ट है जो कि कुछ
डिस्ट्रिक्ट में फैली हुई है जहां पर नक्सलिज्म। तो नक्सलिज्म क्या होता है? पहले हम यह समझते हैं। नक्सलिज्म इज़ अ
लेफ्ट विंग एक्सट्रीमिस्ट मूवमेंट इंस्पायर्ड बाय मॉइस्ट आईडियोलॉजी। तो नक्सलिज्म के अंदर क्या है? एक मॉइस्ट
आईडियोलॉजी है। और ये आईडियोलॉजी क्या कहती है? जो भी गवर्नमेंट अभी रूल कर रही है, राइट? जो इेड गवर्नमेंट है, ये उस रूल
को क्या है? खत्म करना चाहते हैं। जो इलेक्टेड गवर्नमेंट है, उसे क्या है? बाहर फेंकना चाहते हैं और खुद रूल करना चाहते
हैं। तो कैसे? आर्म्ड रेवोल्यूशन के थ्रू। तो चलिए अब हम बात करते हैं ये जो नक्सलिज्म टर्म है, ये कैसे बनी? राइट? तो
एक नक्सलबाड़ी विलेज था जो कि वेस्ट बंगाल में था। नक्सलबाड़ी विलेज जो था वो वेस्ट बंगाल में था। इतना समझ में आ गया? वहां
पर जो है पुअर फार्मर्स थे वो क्या करते थे? डेप्ट लेते थे लैंड लॉर्ड से और बड़े लेंडर से। तो ये जो लेंडर तो जो ये लैंड
लॉर्ड्स हुआ करते थे ये इनको बहुत ज्यादा क्या एक्सप्लइट करते थे। काफी ज्यादा जो है टैक्स लिया करते थे। तो काफी ज्यादा जो
है इनसे टैक्स लिया करते थे। और जब वो अपना लोन नहीं रिपे कर पाते थे। उनके लैंड को जो है वो सीज कर लेते थे। तो इससे क्या
होने लगा कि जो लोकल लोग थे नक्सलबाड़ी विलेज के अंदर उनके अंदर जो है काफी ज्यादा फ्रस्ट्रेशन और गुस्सा जो है
स्टार्ट हो गया। वहां पर क्या है एक रिवोल्ट कर दिया और आर्म्ड ठीक है गन उठा ली वहां पर। तो नक्सलिज्म डिराइव्ड फ्रॉम
नक्सलबाड़ी विलेज लीडर कौन थे? चारू मजूमदार। एंड हम बात करें अगर 1970 एंड 80 की तो ये जो नक्सलिज्म था यह स्प्रेड होने
लगा। तो स्टार्ट कहां से हुआ था? वेस्ट बंगाल से। और यह धीरे-धीरे झारखंड में फिर बिहार फिर धीरे-धीरे आंध्र प्रदेश,
तेलंगाना और महाराष्ट्र। तो ऐसे करते यह पूरी तरीके से फैल गया। चलिए हम कुछ बात करते हैं रीज़ंस की कि क्यों नक्सलिज्म जो
है वो इतने सारे स्टेट्स में जो है फैल गया। तो पहला क्या है? माइनिंग डिस्प्लेसमेंट। माइनिंग प्रोजेक्ट्स इन
छत्तीसगढ़ एंड झारखंड डिस्प्लेस ट्राइबल कम्युनिटीज़ फ्रॉम देयर लैंड। तो आपने देखा होगा काफी सारी माइनिंग ओर्स जो हैं वो
छत्तीसगढ़ और झारखंड के अंदर है। चाहे वो आयरन ओर हो, चाहे वो एलुमिनियम ओर हो। तो आपको कहां देखने को मिलती है? इन दो
स्टेट्स के अंदर। जब भी माइनिंग होती है तो जो लोकल रीजन के लोग होते हैं उन्हें क्या है डिस्प्लेस कर दिया जाता है। ठीक
है? डिस्प्लेस कर दिया जाता है। उनका लैंड ले लिया जाता है। तो जिसकी वजह से क्या है? उनके अंदर फ्रस्ट्रेशन और एंगर आता
है। ठीक है? देन लो वेजेस इन फॉरेस्ट वर्क। ट्राइबल पीपल डिपेंड ऑन माइनर फॉरेस्ट प्रोड्यूस लाइक तेंदू लीव्स एंड
बमबू व्हिच पे वेरी लो इनकम। 2000 टू 2000 जो है वो मंथली कमा रहे हैं। जो कि काफी ज्यादा कम है जो फ्रस्ट्रेशन और पावर्टी
कॉज करती है। देन लॉस ऑफ़ लाइवलीहुड व्हेन फॉरेस्ट आर टेकन फॉर माइनिंग इंडस्ट्री ट्राइबल पीपल लॉस फार्मिंग एंड फॉरेस्ट
बेस्ड इनकम। जितने भी लोग हैं वो फॉरेस्ट से ही सारे रिसोर्सेज ले रहे हैं। लोग हैं वो फॉरेस्ट से ही सारे रिसोर्सेज ले रहे
हैं। अपना खाना उनको वहीं से मिल रहा है। देन अगर वो आग भी जला रहे हैं तो वहीं की लकड़ी यूज़ कर रहे हैं। वहीं पर वो
एग्रीकल्चर एक्टिविटीज भी कर रहे हैं। तो एक तरीके से वो फॉरेस्ट पे कंप्लीटली उनका लाइवलीहुड उसी पर डिपेंड करता है। और जब
माइनिंग होती है तो फॉरेस्ट को क्या काटा जाता है। डेफिनेटली वहां पर जो है फ्रस्ट्रेशन और एंगर आएगा। और साथ में
क्या है? पावर्टी भी काफी ज्यादा है। तो ये कुछ रीज़ंस हैं। अब इन सारे रीज़ंस का जो है फायदा कौन उठाता है? मॉइस्ट उठाते हैं।
मॉइस्ट ग्रुप। मोइस्ट ग्रुप समटाइम्स प्रोवाइड स्मॉल पेमेंट फूड और सपोर्ट अट्रैक्टिंग अनइंप्लॉयड यूथ। तो यहां पर
क्या है रिक्रूटमेंट करी जाती है। इंसेंटिव्स दिए जाते हैं मोइस्ट द्वारा जो अनइंप्लॉयमेंट यूथ है जिनके अंदर काफी
ज्यादा गुस्सा है अथॉरिटी के खिलाफ तो उनको क्या है गंस वगैरह भी दी जाती है। तो ऐसे जो है नक्सलिज्म जो है वो पनपता रहा।
ठीक है? चलिए अब हम बात करते हैं हाउ नक्सल्स अर्न मनी। राइट? तो इललीगल माइनिंग टैक्स इललीगल टैक्स फ्रॉम आयरन ओर
एंड कोल्ड ट्रांसपोर्टर एग्जांपल झारखंड माइनिंग बेल्ट। तो जो ट्रक पास होता है वहां से कि आयरन ओर लेके जा रहा है ये
एलुमिनियम। तो वो जो ट्रक है ₹500 टू पर ट्रक जो है इनको देना पड़ता है नक्सल्स को देन किडनैपिंग फॉर रैंसम तो जो भी
कॉन्ट्रक्टर बिजनेसमैन वहां पर काम कर रहे हैं इन ओर्स के अंदर और या फिर डिफरेंट प्रोजेक्ट्स के अंदर उनको जो है किडनैप कर
लिया जाता है उनकी फैमिली मेंबर्स को वहां पर जो है इनसे रैंसम मांगी जाती है। देन एस्टीिमेटेड रेवेन्यू तो सिक्योरिटी
एजेंसी ने एस्टिमेट करा है कि 100्स ऑफ करोड़ जो है एनुअली वो एक्सटॉर्शन और इल लीगल एक्टिविटी से जो है ये अर्न करते
हैं। देन लूटिंग बैंक्स एंड वेपंस। ठीक है? अटैक्स ऑन बैंक पुलिस आर्मरीज टू सीज़ गैस एंड राइफल इन झारखंड एंड उड़ीसा। एक
और रीज़न है यहां पर वो है हमारा फॉरेन फंडिंग का। तो आपने देखा होगा कि जो हमारे एनिमिनेशन है ठीक है? वो क्या है
कास्टेंटली डिस्टेबलाइज करना चाहते हैं इंडिया को। तो वहां से भी जो है फंडिंग आती है। चाहे वो पाकिस्तान हो, चाइना हो,
म्यांमार हो। यहां से भी जो है नक्सलिज्म को बढ़ावा मिलता है। तो चलिए अब हम बात करते हैं एजुकेशन की। ठीक है? बट बिफोर
दैट हम एक बार जीडी का टॉपिक देख लेते हैं। व्हाट इज़ दी प्राइमरी कॉज़ बिहाइंड द
पर्सिस्टेंस ऑफ़ नक्सलिज्म इन इंडिया। पहला क्या है? पॉवर्टी एंड इकोनमिक डेप्रिवेशन। सेकंड है लैक ऑफ एजुकेशन एंड अवेयरनेस।
एंड थर्ड इज़ इन इफेक्टिव गवर्नमेंट पॉलिसीज एंड इंप्लीमेंटेशन। ठीक है? मल्टी एंड इकोनॉमिक डेप्रिवेशंस की हमने काफी
सारी बात करी। जैसे कि हमने देखा था माइनिंग डिस्प्लेसमेंट। वहां पर क्या हो रहा था? जो ट्राइबल कम्युनिटीज़ हैं उनसे
उनके लैंड ले लिए जा रहे थे। लो वेजेस एंड फॉरेस्ट वर्क। देखिए वो 1000 से ₹2000 ही कमा पा रहे हैं। ठीक है? वो किस पर
डिपेंडेड है? बमबू पे और तैडू लीव्स के ऊपर। देन लॉस ऑफ़ लाइवलीहुड। जब फॉरेस्ट काटे जाते हैं, माइनिंग होती है, तो उससे
क्या होता जो फार्मिंग एक्टिविटी वो करते थे फॉरेस्ट एरियाज में एग्रीकल्चर एक्टिविटी करते थे या फिर उनका जो
लाइवलीहुड उनको वहां से खाना मिलता था वो सारा भी उनसे ले लिया जाता है जिसके कारण जो है उनके अंदर जो है एंगर आता है तो ये
ये क्या है ये वाले पॉइंट्स जो है पॉवर्टी में चले गए देन इसी का फायदा जो है वो मोइस्ट उठाते हैं गवर्नमेंट पॉलिसीज की
बात करें तो हम ये कुछ एग्जांपल्स दे सकते हैं जैसे कि इललीगल माइनिंग टैक्स हो चाहे वो किडनैपिंग रेंसम का हो एस्टेटेड
रेवेन्यू हो कि थाउजेंड्स ऑफ देखें एस्टीिमेटेड रेवेन्यू की वो 100्स ऑफ करोड़ कैसे कमा पाए थे। ठीक है? बट कोशिश
करिए कि आप गवर्नमेंट को जो है कम से कम क्रिटिसाइज़ करें। बिकॉज़ गवर्नमेंट ने अब नक्सलिज्म पूरी तरीके से खत्म कर दिया है।
हमारी सिक्योरिटी एजेंसी चाहे वो सीआरपीएफ हो उन्होंने काफी ज्यादा बलिदान दिया है। ठीक है? इस चीजों को खत्म करने के लिए।
इसलिए इस पर काफी ज्यादा कम पॉइंट मिलेंगे। चलिए अब हम बात करते हैं एजुकेशन की क्योंकि एक हमारी लीड थी एजुकेशन। तो
आप सबसे पहले बेसिक चीज ये समझिए कि ये जितने भी लोग हैं इतनी ज्यादा पावर्टी है। तो सो बिकॉज़ ऑफ़ सच हाई पावर्टी ये जितने
भी बच्चे हैं जो छोटे हैं वो क्या एजुकेशन नहीं ले पाते। यूथ जो है एजुकेशन से डेप्रिवेट रहता है। तो इसके कारण जो वो
ईली जो है वो मॉइस्ट लुक के साथ जो है जुड़ जाता है। तो बट अगर एजुकेशन होगी तो यहां पर वो बेटर डिसीजन ले सकता है जो कि
नहीं थी। इसलिए जो है इकलव्य मॉडल रेजिडेंशियल स्कूल को जो है अपनाया गया है। आई रिपीट इकलव्या मॉडल रेजिडेंशियल
स्कूल गवर्नमेंट ओपन रेजिडेंशियल स्कूल फॉर ट्राइबल स्टूडेंट्स इन नक्सल अफेक्टेड एरियाज एग्जांपल स्कूल्स इन झारखंड एंड
छत्तीसगढ़ डिस्ट्रिक्ट। ठीक है? अह छत्तीसगढ़ ट्राइबल डिस्ट्रिक्ट रिजल्ट ट्राइबल चिल्ड्रन गेट फ्री एजुकेशन,
हॉस्टल, स्किल ट्रेनिंग, रिड्यूसिंग रिक्रूटमेंट बाय नक्सल ग्रुप। ठीक है? तो यहां पर इकलव्य मॉडल स्कूल को अपनाया गया।
देन सीआरपीएफ सिविक एक्शन प्रोग्राम। तो यहां पर जो सिक्योरिटी फोर्सेस हैं हमारी जैसे कि सीआरपीएफ वो मेडिकल कैंप्स को
कंडक्ट किया करती थी। जहां पर वो फ्री मेडिकल ट्रीटमेंट दिया करते थे यहां पर जो हमारे ट्राइबल पीपल हैं। इससे हुआ क्या
है? एक ट्रस्ट जो है सिक्योरिटी फोर्सेस की तरफ जो है बनना शुरू। देन स्कूल सप्लाई एंड स्पोर्ट्स इक्विपमेंट इन विलेजेस। फॉर
एग्जांपल सीआरपीएफ ऑर्गेनाइज्ड मेडिकल कैंप्स एंड डिस्ट्रीब्यूशन ऑफ़ बाइस इन बस्तर विलेजेस। बिल्ड ट्रस्ट बिटवीन
सिक्योरिटी फोर्सेस एंड लोकल कम्युनिटीज़। सीआरपीएफ ने काफी सारे अवेयरनेस कैंप्स भी जो हैं यहां पर विलेजेस के अंदर कंडक्ट
करवाए हैं। जहां पर वो बच्चों को एजुकेशन देते थे। कैसे उनके लिए जो नक्सलिज्म है वो एक डेंजर है। ठीक है? देन हम बात करते
हैं ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट की। तो फोर्स सीआरपीएफ कोबरा कमांडोज़ डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड डीआरजी ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट
चलाया गया। जहां पर जितने भी ये डिस्ट्रिक्ट थे उनकी पुलिस रिजर्व गार्ड और हमारे सीआरपीएफ और कोबरा कमांडोज़ ने
मिलकर जो है ये ऑपरेशंस चलाए। है जहां पर इन्होंने एलिमिनेट करे मोर देन 31 मॉइस्ट को जो इनका टॉप लीडर था बसवा राजू ठीक है
जिस पर 2 करोड़ की बंटी थी उसको भी इन्होंने एलिमिनेट करा अराउंड 450 आईडीस को भी जो है रिकवर किया तो ये एक वन ऑफ दी
मेजर ऑपरेशन था जहां पर हमने जो है जो बड़े मॉइस्ट लीडर्स थे उनको एलिमिनेट किया तो जैसे ही अब नक्सलिज्म खत्म हो चुका है
ठीक है तो वहां पर डेवलपमेंट मेजर देख लेते हैं हम लोग इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट हुई स्टार्ट वहां पर गवर्नमेंट
बिल्डिंग्स बनी रोड्स बनी टेलीकॉम टावर आ गए एग्जांपल रोड कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट इन छत्तीसगढ़ एंड उड़ीसा फॉरेस्ट एरिया
छत्तीसगढ़ और उड़ीसा के अंदर जो है रोड कंस्ट्रक्शन बहुत ज्यादा तेजी से चल रहा है। देन इससे हुआ क्या है? बेटर
कनेक्टिविटी एंड ईज़ियर एडमिनिस्ट्रेशन। और आपको पता है यह मॉइस्ट जो थे वो ये चीजें नहीं चाहते थे। वो क्या करते थे? आईडीज
लगा देते थे रोड के ऊपर और उसको पूरा ब्लो कर देते थे। तो बट जो हमारे मॉइस्ट हुआ करते थे वो क्या करते थे? रोड डेवलपमेंट
नहीं चाहते थे। बिकॉज़ अगर रोड डेवलपमेंट होगी तो एजुकेशन होगा। और जो ये बच्चे जो हैं जॉइ कर लेते हैं नक्सलिज्म को। ठीक
है? वो ड्राइव जो है काफी ज्यादा कम हो जाएगी। तो इसलिए वो रोड्स नहीं चाहते थे, डेवलपमेंट नहीं चाहते थे। बट अब जब ये
चीजें खत्म हो चुकी हैं तो ये चीजें अब ये सारी नक्सलिज्म जो खत्म हो चुका है इसलिए हमारा जो डेवलपमेंट है फिर से स्टार्ट हो
गया है। देन वाटर सैनिटेशन स्कीम्स लाइक जलजीवन मिशन, अह स्वच्छ भारत मिशन, इंप्रूविंग ड्रिंकिंग वाटर एंड सैनिटेशन
इन रूरल एरियाज़ बेटर लिविंग कंडीशन इन ट्राइबल विलेजेस। एंप्लॉयमेंट जनरेशन। ठीक है? प्रोग्राम लाइक मनरेगा, स्किल
डेवलपमेंट स्कीम प्रोवाइड्स जॉब्स। एग्जांपल रूरल यूथ गेट एंप्लॉयमेंट इन लोकल डेवलपमेंट वर्क्स रिजल्ट रिड्यूस
अनइंप्लॉयमेंट एंड वनरेबिलिटी टू नक्सल रिक्रूटमेंट। देन कुछ इन्वेस्टमेंट प्रोजेक्ट्स हम देख लेते हैं। देखिए adानी
एंटरप्राइज जो है वो छत्तीसगढ़ के अंदर जो है कोल माइनिंग एंड पावर प्रोजेक्ट्स क्रिएट कर रहा है। जिससे जो है लोकल जॉब
और इंफ्रास्ट्रक्चर जो है डेवलप होगा। देन टाटा स्टील अह देन हम एनटीपीसी देख सकते हैं छत्तीसगढ़ के अंदर थर्मल पावर
प्लांट्स जनरेटिंग इलेक्ट्रिसिटी एंड लोकल एंप्लॉयमेंट। सो ये कुछ पॉइंट्स है दैट आफ्टर दी नक्सलिज्म गॉट इरेडिकेट दीज़ आर
सम प्रोजेक्ट्स व्हिच आर रन बाय द इंडियन गवर्नमेंट। देन आउटकम क्या हुआ है? देखिए मार्केट रीओपनिंग, वीकली ट्राइबल
मार्केट्स और हर्ट्स लगना दोबारा से स्टार्ट हो गई हैं। इन बस्तर रीजन बूस्टिंग लोकल ट्रेड आयुष्मान भारत की जो
हेल्थ स्कीम्स है वो भी जो है दंतेवाड़ा और सुखमा डिस्ट्रिक्ट में देखने को मिल रही है। देन गवर्नमेंट प्रेजेंस वहां पर
पहले क्या है? डीएम ऑफिस नहीं हुआ करते थे। तहसीलदार ऑफिस है वो सब नहीं हुआ करते थे बिकॉज़ वो क्या है उनको मार दिया करते
थे राइट या फिर किडनैप कर लेते थे। इससे जो है काफी ज्यादा फियर होता था जो हमारी एडमिनिस्ट्रेटिव अथॉरिटी है बट अब जो है
वापस से ऑफिसिसेस स्टार्ट हो चुके हैं। देन एंप्लॉयमेंट मनरेगा वर्क प्रोजेक्ट्स इन गचिरोली डिस्ट्रिक्ट एंड दंतेवाड़ा
प्रोवाइडिंग रूरल जॉब्स। यही गचिरोली जो डिस्ट्रिक्ट है महाराष्ट्र का यहां पर जो है दोबारा से बस सर्विस स्टार्ट करी गई
टिकेड्स बाद। ठीक है? कई सालों बाद जो है यहां पर बस सर्विस स्टार्ट हुई है। देखिए यहां पर बस सर्विस भी नहीं थी बिकॉज़ ऑफ़
नक्सल फियर। देन बैंकिंग सर्विज स्टेट बैंक ऑफ इंडिया यहां पर आ चुका है और HDFC और वेरियस अदर बैंक्स जो है यहां पर बस्तर
रीजन में हमें देखने को मिल रहे हैं। तो हमने देखा चाहे वो दंतेवाड़ा हो, बस्तर हो, सुमा हो। हमने देखा कैसे दंतेवाड़ा और
सुमा डिस्ट्रिक्ट में जो है आयुष्मान भारत हेल्थ सेंटर खुले। हमने देखा बस्तर रीजन में जो है हर्ट्स दोबारा से ओपन हुए। हमने
देखा कि बस्तर रीजन में जो है एसबीआई और अदर बैंकिंग सर्विज जो स्टार्ट हुई और वेरियस अदर रीजन जैसे वो महाराष्ट्र का
गिरोली डिस्ट्रिक्ट हो चाहे वह दंतेवाड़ा हो वहां पर जो है एंप्लॉयमेंट और मनरेगा स्कीम जो है दोबारा से स्टार्ट हुई है।
तो जीडी में आप पॉवर्टी और इकोनमिक डेप्रिवेशन में बता सकते हैं यह वाली स्लाइड। ठीक है? और लैक ऑफ एजुकेशन एंड
अवेयरनेस में आप बता सकते हैं क्लेव मॉडर्न स्कूल के बारे में और सीआरपीएफ के जो कैंप लगते थे एजुकेशन वाले। एंड
पॉवर्टी और इकोनमिक डेप्रिवेशन के अंदर आप ये कुछ पॉइंट्स भी बता सकते हैं कि इंडिया के अंदर अराउंड 3 करोड़ प्लस बच्चे जो हैं
वो स्कूल नहीं जा रहे थे। लैक ऑफ एजुकेशन एंड अवेयरनेस में बता सकते हैं कि कैसे वहां पर जो इकलव्य मॉडल
रेजिडेंशियल स्कूल लाया गया सीआरपीएफ के कैंप्स लगते थे बिकॉज़ वहां पर एजुकेशन नहीं थी और आप चाइल्ड लेबर के पॉइंट्स भी
डाल सकते हैं कि इंडिया के अंदर ही देखिए अराउंड 3.2 करोड़ चिल्ड्रंस जो है वो स्कूल नहीं जा रहे हैं और हमने देखा था मेजरली
जो देन हमने देखा था पुअर कंडीशन ऑफ़ गवर्नमेंट स्कूल और ये स्कूल कहां थे हमने देखा था छत्तीसगढ़ झारखंड बिहार उत्तर
प्रदेश है ना तो छत्तीसगढ़ झारखंड उड़ीसा इन सारे स्टेट में तो वैसे भी हमें क्या है नक्सलिज्म देखने को मिलता था तो ये
पॉइंट्स भी कुछ ओवरलैप आप कर सकते हैं। ठीक है? देन इन इफेक्टिव गवर्नमेंट पॉलिसीज पे हमने बात करी थी। कैसे वहां पर
किडनैपिंग, रैंसम और जो मॉइस्ट की ड्राइव्स चलती थी। ठीक है? और पॉवर्टी और इकोनॉमिक डेबिवेशन मैंने बताया था कि कैसे
वहां पर जो है माइनिंग एक्टिविटी की वजह से उनका घर छीन लिया जाता था। 1000 या ₹2000 ही वो ओनली अर्न कर पाते थे। तो ये
कुछ पॉइंट्स हैं। अगर आप पूरा पढ़ेंगे तो आप ईजीली फिट कर सकते हैं। तो चलिए अब हम बात करते हैं अपने नेक्स्ट टॉपिक की तरफ
जो है करंट पॉपुलेशन। [संगीत] तो देखिए पॉपुलेशन एक ऐसा टॉपिक है जो कि काफी सारी लीड्स में देखने को मिलता है आपके जीडी के
टॉपिक में। अगर क्लाइमेट चेंज का टॉपिक आ रहा है तो वहां पे आ जाता है पोर्शन एक लीड में कि कैसे इंपैक्ट करता है क्लाइमेट
चेंज को। तो सपोज अगर टॉपिक आता है गवर्नमेंट पॉलिसीज का तो वहां पर लीड में आ जाता है। वहां पर लीड में क्या होता है?
पॉपुलेशन होता है कि इतनी बड़ी पॉपुलेशन पे आप कैसे गवर्नमेंट पॉलिसीज को इंप्लीमेंट करेंगे। देन हमारा टॉपिक आ
जाता है ट्रैफिक कंजेशन से और या फिर एक्सीडेंट से रिलेटेड। तो वहां पर भी पॉपुलेशन देखने को मिलता है। देन
अनइंप्लॉयमेंट की जब भी बात होती है वहां पर भी पॉपुलेशन की बात आती है। इसलिए पॉपुलेशन से रिलेटेड हमें जरूर कुछ
पॉइंट्स जो है पता होने चाहिए जो कि हम इफेक्टिवली पुट कर सकते हैं अपने जीडी और लेक्चर के अंदर। तो इंडिया की पॉपुलेशन
कितनी है? अराउंड 146 करोड़ है। ठीक है? जो हाईएस्ट है पूरे वर्ल्ड के अंदर फर्टिलिटी रेट की बात कर लेते हैं। देखिए
फर्टिलिटी रेट में क्या होता है? अगर फर्टिलिटी रेट 2.1 है राइट? तो आपकी जो पपुलेशन है वो क्या है? स्टेबल रहेगी। तो
फर्टिलिटी रेट 2.1 का मतलब क्या हुआ है? कि एक जो महिला है वो दो बच्चों को जन्म दे रही है। तो चलिए अब हम बात करते हैं
फर्टिलिटी रेट की। ठीक है? तो अगर फर्टिलिटी रेट 2.1 है व्हिच मींस एक महिला जो है दो बच्चों को जन्म दे रही है। तो
पॉपुलेशन क्या है? हमारी स्टेबल रहेगी। तो जितनी पॉपुलेशन आज है वो आगे भी उतनी ही देखने को मिलेगी। ठीक है? 2.1 अगर 2.1 से
फर्टिलिटी रेट कम जाता है जैसे कि 1.9 तो पॉपुलेशन जो है आपकी लॉन्ग टर्म में डिक्लाइन होना स्टार्ट हो जाएगी। पॉपुलेशन
गिरना शुरू हो जाएगी। फॉर एग्जांपल चाइना अगर आप चाइना का फर्टिलिटी रेट देखें तो इंडिया का अभी जो फर्टिलिटी रेट है अब वो
1.9 आ चुका है। तो फ्यूचर के अंदर वो 1.8 और 1.7 तक भी जाएगा। तो यानी कि इंडिया की मैक्स जो पॉपुलेशन है वो जो इंडिया की
मैक्स पॉपुलेशन है वो मे बी अराउंड 2060 और 2070 तक जाएगी और उसके बाद जो है डिक्लाइन होना स्टार्ट हो जाएगी। तो ये
एकदम से नहीं होता। आज इंडिया का 1.9 है बट इसे काफी ज्यादा टाइम लगेगा डिक्लाइन होने में। और अगर 2.1 से फर्टिलिटी रेट
ज्यादा है तो पॉपुलेशन जो है वह ग्रो करती है। तो इंडिया का जो फर्टिलिटी रेट था आप देख सकते हैं यह डिफरेंट इयर्स में जिसकी
वजह से इंडिया की जो पॉपुलेशन काफी ज्यादा बढ़ी है। ठीक है? सो प्रोजेक्टेड पॉपुलेशन 250 में कितनी है? अराउंड 166 से लेके 176
करोड़ है। अकॉर्डिंग टू यूएन प्रोजेक्शन। चलिए हम बात करते हैं हाउ पॉपुलेशन अफेक्ट क्लाइमेट चेंज। रैपिड अर्बनाइजेशन एंड
एनर्जी यूज़ इन इंडिया सिटीज इनक्रीस हीट रेनफॉल रिस्क। ठीक है? देन अगर हम बात करें यहां पर देखिए हायर एनर्जी डिमांड।
तो जैसे-जैसे देखिए पॉपुलेशन बढ़ेगी ज्यादा लोग होंगे तो इलेक्ट्रिसिटी की डिमांड, ट्रांसपोर्ट की डिमांड और
इंडस्ट्रीज के अंदर जो हमें फॉसिल फील्ड की जरूरत होती है वो सारी एनर्जी की डिमांड जो है काफी ज्यादा बढ़ेगी। हमने
देखा है कैसे अभी जो है एनर्जी क्राइसिस चल रहा है वो चाहे वो एलपीजी हो, एलएनजी हो चाहे वो पेट्रोल डीजल हो। तो ये सारी
जो एनर्जी डिमांड्स हैं हमारी कॉन्स्टेंटली इंक्रीस हो रही है। देन वाटर स्ट्रेस। ठीक है? तो इंडिया के पास कितना
है? ओनली 4% ऑफ़ फ्रेश वाटर है हमारे पास। कितना ओनली 4% ऑफ़ फ्रेश वाटर है। आपने देखा है कावेरी क्राइसिस बाय 20 तो वो
कावेरी जो है पूरी तरीके से विलुप्त हो जाएगी। तो इसलिए जो है वाटर क्राइसिस भी इंडिया को फेस कर रहा है। आपने देखा होगा
एग्जांपल बेंगलुरु का वहां पर वाटर क्राइसिस देखने को मिला। चेन्नई में देखने को मिला। ठीक है? और दिल्ली के अंदर आपको
देखने को मिलता है। देन डिफॉरेस्टेशन एंड लैंड प्रेशर। मोर पॉपुलेशन नीड्स लैंड फॉर हाउसिंग एग्रीकल्चर एंड इंफ्रास्ट्रक्चर।
तो जैसे-जैसे पापुलेशन बढ़ रही है, इंफ्रास्ट्रक्चर भी तो चाहिए। ठीक है? अभी क्या है? 464% किलोमीटर पर स्क्वायर पे रह
रहे हैं। ठीक है? तो धीरे-धीरे क्या है? ये 500 तक चला जाएगा। तो क्या है? इंफ्रास्ट्रक्चर की डिमांड तो चाहिए। तो
आप देख सकते हैं वर्ल्ड बैंक खुद वर्न कर चुका है कि राइजिंग पापुलेशन जो है अर्बनाइजेशन और वाटर और क्लाइमेट प्रेशर
के लिए जो है मेन रीज़न है। चलिए अब हम बात करते हैं इंपैक्ट ऑन अनइंप्लॉयमेंट। ठीक है? तो जैसे ही पॉपुलेशन बढ़ेगी
अनइंप्लॉयमेंट तो होगा मोर जॉब सीकर लार्ज यूथ पॉपुलेशन क्रिएट जॉब कॉम्पटीशन फॉर लिमिटेड जॉब्स। ठीक है? आप यहां पर देख
सकते हैं चाहे नीट हो। कितने हैं? 24 लाख एपेंट्स जेई 11 लाख एप्लीेंट्स यूपीएससी सिविल सर्विज 10 लाख एस्पिरेंट फॉर जस्ट
1000 पोस्ट। देन अगर आप एमबीबीएस प्राइवेट कॉलेज से करने जाते हैं तो 1 करोड़ है। क्योंकि गवर्नमेंट में इतना ज्यादा
कंपटीशन है। है गवर्नमेंट कॉलेजेस के लिए और प्राइवेट कॉलेजेस जो है वो डिमांड फुलफिल नहीं कर पा रहे हैं व्हेन इट कम्स
टू फीस देन एसएससी सीजीएल की बात करें तो 30 लाख यहां पर जो एस्पिरेंट्स हैं। देन आपने देखा होगा चाहे वो रेलवे हो रेलवे
ग्रुप डी हो वहां पर आपको 2 करोड़ एस्पिरेंट भी देखने को मिलते हैं। ठीक है एग्जाम में तो देख सकते हैं इंडिया के
अंदर जो है तो ये कुछ रेश्यो है जो आप अपने जीडी के अंदर यूज़ कर सकते हैं। आप बता सकते हैं नीट जे यूपीएससी एसएससी
सीजीएल एंड रेलवे जो ग्रुप डी एग्जाम है वहां पे दो-दो करोड़ एप्लीेंट्स तक आ रहे हैं। ठीक है? तो इससे क्लियरली शो होता है
कि अनइंप्लॉयमेंट जो है क्योंकि लिमिटेड रिसोर्स है। लिमिटेड जॉब्स हैं और ज्यादा तो है नहीं। तो इसलिए कॉम्पटीशन तो
बढ़ेगा। ठीक है? तो इसलिए जो है ये इंपैक्ट करता है हमारी अनइंप्लॉयमेंट पे। तो चलिए अब हम बात करते हैं इंडिया में
नीड 2.4 ट्रिलियन इन्वेस्टमेंट इन अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर बाय 2050। तो फर्स्ट क्या है? हेल्थ केयर बर्डन। तो
आपने देखा होगा चाहे वो एम्स हॉस्पिटल हो। ठीक है? एम्स दिल्ली हो या फिर वो पीजीआई हो या फिर वेरियस जो अदर गवर्नमेंट
इंस्टीट्यूशन है जो अच्छे इंस्टीट्यूशन है वहां पर जो है चार-चार पांच-प दिन की जो है लाइन लगती है। राइट फॉर अपॉइंटमेंट
ओनली। तो आप देख सकते हैं जो हमारे हॉस्पिटल्स हैं उनकी हालत जो है काफी ज्यादा जो है उन पर बर्डन आ चुका है।
अर्बन कंजेशन, सिटी स्पेस, ट्रैफिक, पोल्यूशन एंड हाउसिंग शॉर्टेजेस। तो ये इससे आप रिलेट करेंगे हमारी जितनी भी
इंडिया के स्टेट्स हैं जो एवरेज एयआई चल रहा है वो 150 से अबव ही चल रहा है। देन हमने देखा था कि कैसे ट्रैफिक और
एक्सीडेंट्स 4 लाख प्लस एक्सीडेंट्स जो हर साल हो रहे हैं जिसमें अराउंड 1,80,000 लोग जो है अपनी जान गवा दे रहे हैं। तो ये
रिपोर्ट भी हमने देखी थी। देन आप एग्जांपल्स दे सकते हैं मुंबई का बेंगलुरु का जहां पर लिविंग इंडेक्स के हिसाब से जो
है काफी ज्यादा कॉस्टली है। स्पेशली जो हमारे रियल स्टेट है। देन आप गुड़गांव का एग्जांपल दे सकते हैं। चंडीगढ़, पुणे। ठीक
है? तो ये सिटीज में जो है जो रियल स्टेट है उनके प्राइसेस जो है बहुत ज्यादा हाई कर गए हैं। देन एजुकेशन प्रेशर गवर्नमेंट
मस्ट बिल्ड मोर स्कूल्स, टीचर्स एंड यूनिवर्सिटीज का एग्जांपल है। तो 2 करोड़ बच्चे तो फर्स्ट क्लास के अंदर गए हैं इस
साल। ठीक है? इसलिए जो है हमें गवर्नमेंट स्कूल्स जो हैं और टीचर्स यूनिवर्सिटीज की जरूरत है। हमें ज्यादा और हमें ज्यादा से
ज्यादा क्या है? हॉस्पिटल्स की जरूरत है। आईटीस, आईएम, रिसर्च एंड डेवलपमेंट, फंडिंग। राइट? तो, ये सारी चीजों की हमें
जरूरत है। चलिए, अब हम बात करते हैं एडवांटेजेस ऑफ़ पॉपुलेशन। हमने डिसएडवांटेजेस तो देखिए। देखिए, इंडिया
हैज़ वन ऑफ दी यंगेस्ट अ पपुलेशन इन दी वर्ल्ड। अराउंड 65% ऑफ़ इंडियास पॉपुलेशन इज़ बिलो 35 इयर्स। और अगर हम अपनी मीडियन
ऐज भी देखेंगे जो कि अराउंड अभी राइट नाउ 29 के आसपास है। तो हमारी क्या है? यंग पापुलेशन है। तो यंग पापुलेशन जो होती है
वो वर्किंग पापुलेशन होती है। तो वो जीडीपी में और इकॉनमी में बहुत ज्यादा कंट्रीब्यूट करती है। ठीक है? तो ये
एग्जांपल आप बता सकते हैं। आप चाइना का एग्जांपल दे सकते हैं कि कैसे वहां पर जो है जो फर्टिलिटी रेट है वन से नीचे जा रहा
है। तो उन्होंने अगेन पॉपुलेशन इनक्रीस करने की कोशिश कर रहे हैं। देन सिमिलरली जापान और साउथ कोरिया में आप देख सकते हैं
कि कैसे जो है उनकी इकॉनमी फॉल कर रही है बिकॉज़ ऑफ़ दी लेस बिकॉज़ ऑफ़ द डिक्लाइनिंग पॉपुलेशन। सिमिलरली रशिया में आप देख सकते
हैं। तो इसलिए पॉपुलेशन होना बहुतेंट है स्पेशली यंग पॉपुलेशन। देन इंडिया हैज़ 1.4 बिलियन कंज्यूमर वन ऑफ़ द लार्जेस्ट
मार्केट। तो कोई भी प्रोडक्ट अगर आप बनाते हैं तो आप ईज़ली जो है यहां पर तो आपके पास ईज़ली जो है अराउंड 1.4 बिलियन कंज्यूमर्स
हैं। देन हम बात करें एंटरप्रेन्योरशिप एंड स्टार्टअप की तो इंडिया हैज़ दी थर्ड लार्जेस्ट स्टार्टअप इकोसिस्टम। ठीक है?
एंड 100 प्लस यूनिकॉर्न यहां पर हो चुके हैं और फ्यूचर में भी बहुत सारे आने वाले हैं। तो अ लार्ज पॉपुलेशन इज़ आल्सो अ
लार्ज इनोवेशन इकोसिस्टम। चलिए अब हम बात करते हैं टॉपिक ब्रेन रेन के ऊपर। राइट? सो ब्रेन रेन जो टॉपिक है
वह लेक्चरट में आता है। साथ में ही जीडी के अंदर जब हम एंप्लॉयमेंट की बात करते हैं या फिर स्किल की बात करते हैं,
एजुकेशन की बात करते हैं या डायरेक्टली ब्रेन ड्रेन की तो तो वहां पर जो है बहुत सारे पॉइंट हमें इस टॉपिक से देखने को
मिलते हैं। देखिए, ब्रेन ड्रेन क्या है? ब्रेन ड्रेन इज़ दी माइग्रेशन ऑफ़ हाइली एजुकेटेड और स्किल्ड पीपल। राइट? फ्रॉम वन
कंट्री टू अनदर कंट्री इन सर्च ऑफ क्या? एजुकेशन, जॉब्स, सैलरीज़ एंड लिविंग कंडीशन। तो जो एक कंट्री के हाइली
एजुकेटेड और स्किल्ड लोग हैं, जब वह किसी दूसरी कंट्री में जाते हैं एजुकेशन के लिए, जॉब के लिए, सैलरी के लिए, लिविंग
कंडीशन के लिए, है ना? बेटर अपोरर्चुनिटीज के लिए, तो वो ब्रेन ड्रेन कहलाता है। राइट? इसलिए यहां पर जो ब्रेन लिखा है वो
यहां पर हाईली एजुकेट और स्किल्ड लोगों से रिलेट कर रहा है। राइट? सो एव्री ईयर रफली 6 टू 9 लाख ऑफ इंडियन स्टूडेंट गो अब्रॉड
फॉर हायर एजुकेशन एंड करेंटली अबाउट 18 लैक्स इंडियंस आर स्टडिंग ओवरसीज मेकिंग इंडियास वन ऑफ द लार्जेस्ट सोर्स ऑफ़
इंटरनेशनल स्टूडेंट राइट वन ऑफ दी लार्जेस्ट सोर्स ऑफ़ इंटरनेशनल स्टूडेंट। तो देखिए हम आगे भी इसके ऊपर पढ़ेंगे कि
चाइना के अंदर अराउंड 20,000 स्टूडेंट जो हैं वो एमबीबीएस कर रहे हैं। राइट? देन सिमिलरली यूक्रेन, कजाकिस्तान, रशिया आर
वेरी फेमस डेस्टिनेशन जो हमारे मेडिकल हेल्थ केयर कोर्सेज होते हैं वहां पर ये बहुत ज्यादा प्रॉमिनेंट है। बिकॉज़ इंडिया
के अंदर वो कोर्सेस बहुत ज्यादा हेफ्टी हैं। राइट? और अपार्ट फ्रॉम दिस अगर आप जर्मनी का एग्जांपल लेंगे तो वहां पर क्या
है? ट्यूशन फी बहुत ज्यादा कम है। तो वहां पर लोग जाते हैं। देन कनाडा, यूएसए, ऑस्ट्रेलिया, यूरोप के नेशंस। तो वेरियस
स्टूडेंट्स जो हैं वो मास्टर करने जाते हैं। आफ्टर 12th भी जा रहे हैं, एमबीबीएस करने जा रहे हैं। बिजनेस रिलेटेड
कोर्सर्सेस करने जा रहे हैं। तो यहां पर ये चीजें जो है फिट हो जाती हैं। देन हेनले प्राइवेट वेल्थ माइग्रेशन रिपोर्ट।
राइट? हेनले प्राइवेट वेल्थ माइग्रेशन रिपोर्ट बताती है दैट अराउंड 6500 हाई नेटवर्थ इंडिविजुअल लेफ्ट इंडिया इन वन
ईयर। तो यह लोग यहां पर इंडिया से क्यों चले गए? फॉर बेटर लिविंग कंडीशन। कैसी लिविंग कंडीशन इंडिया के अंदर हमने देखा
है AQI 500 प्लस है। है ना? मोस्टली सिटीज के अंदर जो है एवरेज ही 250 से प्लस जा रहा है। इसलिए हमने एक और रिपोर्ट देखी
जिसमें टॉप 100 जो हॉटेस्ट सिटीज हैं वो भी कहां है? इंडिया के अंदर है। तो जब यहां पर पॉपुलेशन ज्यादा है। ट्रैफिक
कंडीशन बहुत ज्यादा पुअर है। एक्सीडेंट सबसे ज्यादा हो रहे हैं। और फेवरेबल कंडीशंस नहीं है। और फेवरेबल क्लाइमेटिक
कंडीशंस नहीं है। इसलिए जो 6500 हाई नेटवर्थ पीपल हैं टू इंप्रूव देयर लिविंग कंडीशन दे वेंट टू सम अदर कंट्रीज। तो
चलिए आगे देखते हैं ब्रेन ड्रेन के एग्जांपल्स। राइट? तो हमने ये पहले भी बात करी थी। कनाडा देखिए पीआर फ्रेंडली है।
परमानेंट रेजिडेंसी मिल सकती है। स्ट्रांग इंडियन डायस्पोरा है। हाई डिमांड ऑफ़ आईटी हेल्थ केयर ट्रेड्स अराउंड 4.27 लाख जो है
2023 में स्टूडेंट गए थे। और स्टिल ये नंबर जो है अभी इतना ही चल रहा है। अराउंड 4 लैक्स के अराउंड ही 2024 25 26 में
थोड़ा ऊपर नीचे फ्लक्चुएट करता है। बट नंबर यहीं पर रहता है। देन ऑस्ट्रेलिया में भी सिमिलर है। स्टडी है, पीआर है और
टॉप यूनिवर्सिटीज हैं। सिमिलर अगर आप देखेंगे तो इंडिया की तरह ही क्लाइमेट देखने को मिलता है। ऑस्ट्रेलिया के अंदर
भी। ठीक है? हॉट ह्यूमन क्लाइमेट है। तो दैट इज़ आल्सो अ रीज़न। देन यूएसए के अंदर हमने रिपोर्ट्स देखी थी जहां पर फोर टू
फाइव इंडियन ओरिजिन आईटी प्रोफेशनल्स आर वर्किंग देयर। और हम उनकी इकॉनमी में कितने बिलियन डॉलर्स ऐड करते हैं इस चीज
से। देन हाई पेइंग आईटी जॉब्स आप जानते हैं सिलिकॉन वैली ठीक है आईटी का हब देन टॉप यूनिवर्सिटीज इनोवेशन तो तो जितनी भी
हमारी बड़ी यूनिवर्सिटीज हैं कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी स्टैनफोर्ड यहां पर जरूर देखने को मिलती है देन जर्मनी में लो
ट्यूशन फीस है ठीक है तो जर्मनी जो है एक स्टूडेंट फ्रेंडली कंट्री मानी जाती है बिकॉज़ ऑफ़ लो ट्यूशन फीस एंड लो
यूनिवर्सिटीज फीस ठीक है देन हम देखें जापान तो जापान में टेक हो चाहे वो केपॉप कल्चर हो रिसेंटली हमने काफी सारे
मेमोरेंडम भी साइन करे हैं जापान के साथ जहां पर जो है इंडियन वर्कर्स जो हैं वहां पर जाकर काम करेंगे। बिकॉज़ ऑफ़ देयर
पॉपुलेशन इज़ कॉन्स्टेंटली डिक्रीजिंग। रीज़ंस ऑफ़ ब्रेन रेन। राइट? सो, फर्स्ट वन क्या है हमारे पास? बेटर एजुकेशन अब्रॉड।
अकॉर्डिंग टू क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2025 ओनली टू इंडियन यूनिवर्सिटीज आर इन दी ग्लोबल टॉप 200 टॉप यूनिवर्सिटीज
लाइक एमआईटी स्टैनफोर्ड ऑक्सफोर्ड अट्रैक्ट इंडियन स्टूडेंट। तो देखिए पूरे वर्ल्ड के 200 ग्लोबल टॉप यूनिवर्सिटीज
में सिर्फ इंडिया की दो ही यूनिवर्सिटी हैं। तो यह इटसेल्फ यह दिखाता है कि जो है बेटर एजुकेशन है अब्रॉड के अंदर और हमारी
यूनिवर्सिटी आईआईटी बॉम्बे और समटाइ्स आईएम्स होती हैं। तो और इंडिया के अंदर इन यूनिवर्सिटी में जाना वैसे ही बहुत ज्यादा
कॉम्पिटिटिव है। तो इसलिए यही रीज़न है कि लोग जो है वो प्रेफर करते हैं बाहर फॉरेन यूनिवर्सिटीज़। तो देखिए एग्जांपल हमने
पहले भी डिस्कस करे थे चाहे वो नील मोहन हो सीओ YouTube अरविंद कृष्णा सीओ ऑफ़ आईबीएम शांतनु नारायण हो सीओ ऑफ़ एडoब
सुंदर पिचाई सत्य नडाला तो ये सारे एग्जांपल्स जो है हम पहले भी डिस्कस करके आए थे तो जब भी आप ब्रेन ड्रेन के ऊपर बोल
रहे होंगे या फिर जीडी के अंदर कुछ ऐसा पॉइंट आता है तो आप ये सारे एग्जांपल्स दे सकते हैं क्योंकि ये एक बहुत ग्रेट
एग्जांपल है ब्रेन ड्रेन के अगर ये इंडिया में रहकर ही कोई कंपनी बनाते तो डेफिनेटली जॉब्स भी क्रिएट होती इंडियन यूथ के लिए
और इंडिया में क्या होता है इनोवेशन होता राइट है बट दीज़ सीईओस प्रेफर टू वर्क इन दी फॉरेन कंपनीज़ तो ये एक ब्रिलिन का काफी
अच्छा एग्जांपल है। देन लिमिटेड रिसर्च एंड इंफ्रास्ट्रक्चर इन इंडिया देखिए अकॉर्डिंग टू द यूनेस्को साइंस रिपोर्ट
इंडिया स्पेंड्स अबाउट 0.7% ऑफ़ जीडीपी ऑन रिसर्च एंड डेवलपमेंट। वेयर एज़ अगर आप देखें यूएस एंड चाइना स्पेंड ओवर 2 टू 3%
ऑफ़ इट्स जीडीपी। और हम अपने एजुकेशन सेक्टर पे भी अराउंड 5 टू 6% और और अगर हम देखें अपने एजुकेशन सेक्टर पे हम 4 टू 6%
ही स्पेंड करते हैं। वेयर एस जो अदर कंट्रीज हैं वो अप टू 7% स्पेंड करती हैं। तो इट्स अ ग्रेट एग्जांपल कि कैसे लिमिटेड
रिसर्च इंफ्रास्ट्रक्चर जो है इंडिया के अंदर तो आप जरूर याद रखें यूनेस्को साइंस रिपोर्ट बताती है ओनली 0.7% वेयर एस
क्यूएस वर्ल्ड रैंकिंग यूनिवर्सिटी बताती है कि सिर्फ दो ही यूनिवर्सिटीज हैं इंडिया की जो टॉप के टॉप 200 में है। देन
हम बात करें ग्लोबल एक्सपोज़र एंड नॉलेज अकॉर्डिंग टू क्यूएस ग्लोबल रैंकिंग यहां पर क्या था?
क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग। अब यहां पर क्यूएस ग्लोबल रैंकिंग ने एक और रिपोर्ट निकाली कि जो इंटरनेशनल हायरिंग
होती हैं उनमें क्या ट्रेंड देखा गया है कि यूनिवर्सिटीज एंड कंपनीज़ वैल्यू इंटरनेशनल एक्सपोज़र एंड ग्लोबल
एक्सपीरियंस। तो जिन कैंडिडेट्स के पास जो है इंटरनेशनल एक्सपोज़र होता है जिन्होंने यूएस के अंदर काम करा है चाहे वो यूरोप के
अंदर काम करा है तो उन्हें प्रेफर किया जाता है। देन अनइंप्लॉयमेंट डाटा देन टोटल अनइंप्लॉयड पीपल अकॉर्डिंग टू द सीएमआई
लेबर मार्केट डाटा जो कि 23 टू 24 में रिलीज़ किया गया। अबाउट 3.5 करोड़ पीपल इन इंडिया आर अनइंप्लॉयड। राइट? तो, यह भी एक
वन ऑफ़ दी रीज़न है कि पीपल जो प्रेफर करते हैं बाहर। तो, आपने देखा होगा काफी सारे लोग हरियाणा, पंजाब और गुजरात से स्पेशली
माइग्रेट होकर कहां पर जाते हैं? कनाडा प्रेफर करते हैं। तो, और आप सब ने डंकी रूट के बारे में सुना होगा कि काफी सारे
लोग जो हैं डंकी लगाकर जो अपनी लाइफ को थ्रेट करके वो दूसरी कंट्रीज में जाते हैं। देन हमारे पास आता है बेटर जॉब
अपॉर्चुनिटीज़ एंड सैलरीज़। राइट? सो जो फॉरेन कंट्रीज हैं वो बेटर जॉब अपोरर्चुनिटीज और सैलरी प्रोवाइड करती
हैं। इसलिए ये एक रीज़न है ब्रेन ड्रेन का। तो देखिए एम्स डॉक्टर्स अबाउट 54% ऑफ़ ग्रेजुएट वर्किंग इन अब्रॉड। ठीक है? और
यह काफी बार पार्लियामेंट में भी डिस्कस किया गया है। देन मेनी इंडियन ग्रेजुएट्स मूव टू कंट्रीज लाइक यूएसए, कनाडा, यूके
हम इसके ऊपर बात कर चुके हैं फॉर सैलरी एंड रिसर्च फंडिंग। आईटी ग्रेजुएट्स अराउंड 30 टू 35% ऑफ़ माइग्रेड अब्रॉड
एवरेज पैकेज ऑफ इंजीनियर इज़ 8 टू 10 लाख इन इंडिया वेयर एज़ सिलिकॉन वैली में अगर आप देखें तो 19 लाख अबव ही पैकेज है।
रिपोर्ट जो है नेशनल ब्यूरो ऑफ़ इकोनॉमिक रिसर्च और साथ-साथ ही जो हमारे द वायर का आर्टिकल हो चाहे वो आरटीआई हो और बहुत
सारी एजेंसीज ने जो है इसके ऊपर एनालिसिस करा था। तो हमारे पास डाटा आता है अराउंड 30 टू 35% माइग्रेट अब्रॉड फॉर अह जो है
पैकेजेस के लिए सैलरीज़ के लिए। देन फॉर्मर आईएसआरओ चेयरमैन एस सोमनाथ आल्सो सेड मेनी आईटी स्टूडेंट्स वॉक्ड आउट ऑफ रिक्रूटमेंट
आफ्टर सीइंग दी गवर्नमेंट सैलरी लेवल्स। तो इन्होंने एक इंटरव्यू और पॉडकास्ट में बताया था कि किस तरीके से जो है जब वो
सैलरी के बारे में सुनते हैं तो वो वहीं से वॉकआउ कर देते हैं। ठीक है? देन अकॉर्डिंग टू रिपोर्ट्स लेस देन 1% ऑफ़
आईआईटी ग्रेजुएट्स जॉइन आईएसआरओ बिकॉज़ प्राइवेट टेक कंपनीज़ ऑफर मच हायर सैलरीज़। तो देखिए यही रीज़न है कि जो हमारा रिसर्च
एंड डेवलपमेंट है वो काफी ज्यादा पुअर रह चुका है इंडिया के अंदर। और हमारा जो डिफेंस सेक्टर इसकी वजह से सफर कर रहा है।
हम बेसिक राइफल भी जो हम यूज़ करते हैं वह हमें रशिया से इंपोर्ट करनी पड़ रही है। इंडिया के अंदर मैन्युफैक्चर हो रही है
वह। तो क्यों टेक्नोलॉजी नहीं है। बिकॉज़ हमारे जो सबसे बेस्ट माइंड्स थे जो रिसर्च एंड डेवलपमेंट वाले थे वो सारे कहां जा
रहे हैं? वो फॉरेन कंट्रीज में जा रहे हैं। और हमारी जो एजेंसी है उनको जॉइन नहीं कर रहे हैं। तो ये एक ब्रेन ड्रेन का
एग्जांपल हो जाता है। देन इंडिया रिसीविंग दी हाईएस्ट रेमिटेंस इन 2025 रेमिटेंस इन इंडिया इंक्रीज्ड अराउंड 135 बिलियन। तो
हमने पहले भी बात करी थी। तो ये पॉइंट आप जरूर याद रखें। तो ये एक बेनिफिट भी है रेमिटेंस जो हम फॉरेन एक्सचेंज हमारे पास
आ रहा है ना तो ये एक बेनिफिट हुआ ब्रेन ड्रेन का तो इसलिए देन टफ कंपटीशन इन इंडिया देखिए नीट के अंदर कितने हैं 24
लाख एपेंट्स हैं जेईई के अंदर 11 लाख एप्लीेंट्स यूपीएससी सिविल सर्विज 10 लाख एस्पिरेंट्स कमपीट फॉर ओनली 10 पोस्ट ठीक
है 0.1% सिलेक्शन रेश्यो है देन एमबीबीएस प्राइवेट कॉलेज अगर आप देखें तो 1 करोड़ से अबव जाती है कॉस्ट इसलिए जो है पीपल
प्रेफर करते हैं इसलिए जो है स्टूडेंट प्रेफर करते हैं फॉरेन यूनिवर्सिटीज में जाना देन एसएससी सीजीएल 30 लाख और अगर आप
देखेंगे तो रेलवे चाहे वो रेलवे ग्रुप डीज़ हो वहां पर जो है मोर देन 2 करोड़ फॉर्म भी फिल किए गए हैं। तो देखिए काफी ज्यादा
कंपटीशन है। अनइंप्लॉयमेंट रेट बहुत ज्यादा है। लिमिटेड पोस्ट हैं। तो यह एक रीज़न है जो टफ कंपटीशन बनाता है। इसलिए जो
पीपल हैं वो प्रेफर करते हैं फॉरेन कंट्रीज एंड कंपनीज़। तो चलिए बात करते हैं हाउ ब्रेन रेन कैन बी रिड्यूस्ड इंप्रूव
हायर एजुकेशन। देखिए नेशनल एजुकेशन पॉलिसी लाई गई इसके लिए जो मोर एम्फेसिस करती है। किस पर? रिसर्च एंड डेवलपमेंट पर। और मोर
प्रैक्टिकल नॉलेज पर ज़्यादा एंफेसिस करती है। स्किल पर एम्फेसिस करती है रेदर दैन थ्योरिटिकल। देन इंक्रीज रिसर्च फंड।
इंडिया नीड्स टू इंक्रीस आरएनडी स्पेंडिंग व्हिच करेंटली इज़ अराउंड 0.7% एंड जीडीपी टू इंक्रीज साइंटिस्ट टू स्टे। और और आप
अपने आप सोचिए कि क्या कर सकते हैं हम? और इसका क्या रीज़न हो सकता है? देखिए सबसे पहले आपको क्या करना पड़ेगा? सैलेजेस को
इंक्रीस करना पड़ेगा जो हमारे साइंटिस्ट के हैं। वेदर डीआरडीओ के साइंटिस्ट हो, चाहे वो हमारे आईएसआरओ के साइंटिस्ट हो और जो
आईआईटी ग्रेजुएट हैं, हमें इनको इंटर्नशिप देनी होएगी इन सारे जगह पर और अच्छे पैकेजेस के साथ। तब जाके एक अच्छा
इकोसिस्टम तैयार होगा फॉर रिसर्च पर्पस। देन स्टूडेंट एक्सचेंज प्रोग्राम कर सकते हैं। हमने देखा काफी सारे स्टूडेंट क्या
करते हैं? फॉरेन यूनिवर्सिटी में जाते हैं फॉर बेटर पैकेजेस एक्सपोज़र के लिए और हमने क्यूएस ग्लोबल इंटरनेशनल हायरिंग की
रिपोर्ट देखी थी। तो उस रिपोर्ट में यही पब्लिश हुआ कि जो इंटरनेशनल कंपनीज़ हैं वो क्या करती हैं? जिनके पास फॉरेन एक्सपोज़र
होता है उनको सेलेक्ट करती हैं। तो अगर हम स्टूडेंट एक्सचेंज प्रोग्राम रखेंगे जैसे फॉर एग्जांपल आईआईटी बॉम्बे हैव एक्सचेंज
प्रोग्राम विद यूनिवर्सिटी सच ऐज़ यूनिवर्सिटी ऑफ़ कैलिफोर्निया। राइट? तो आप एक सेमेस्टर जो है वो कहां पर? इंडिया में
पढ़ रहे हैं। और दूसरा सेमेस्टर कैलिफोर्निया। और सिमिलरली कैलिफोर्निया के स्टूडेंट यहां पर आ रहे हैं। तो यहां
पर क्या है? एक अच्छा एक्सचेंज हो रहा है। तो एक्सपोज़र बढ़ रहा है। तो इससे क्या होगा? तो इससे होगा क्या? अल्टीमेटली जो
एंप्लॉयमेंट रेश्यो है वो और बढ़ेगा बिकॉज़ ऑफ़ ग्लोबल एक्सपोज़र। तो यहां पर और भी काफी सारे एग्जांपल है। जैसे कि अगर हम
देखें तो आईएम अहमदाबाद वो कोलंबिया बिजनेस स्कूल जो है यूएसए उसके उनके साथ उनका क्या है? स्टूडेंट एक्सचेंज
प्रोग्राम है। अह देन अगर हम देखें तो आईआईटी दिल्ली का यूनिवर्सिटी ऑफ़ टैक्सेस के साथ। तो और भी काफी सारी प्राइवेट
यूनिवर्सिटी हैं जो टाई अप करती हैं फॉरेन यूनिवर्सिटी के साथ। बेटर जॉब अपोरर्चुनिटीज हम क्रिएट करें, स्टार्टअप
लेके आए, सेमीकंडक्टर मिशन लाए, एआई टेक्नोलॉजीज़ लाएं। तो इससे होगा क्या? हमारे इंडिया का यूथ जो है वो इंडिया के
अंदर ही रिटेन रहेगा। देन ड्यूल डिग्रीज़ प्रोग्राम। ठीक है? सम यूनिवर्सिटी ऑफ ड्यूल डिग्रीज़ जिसमें आप एक डिग्री जो है
इंडिया के अंदर करते हैं। नेक्स्ट आप जो है फॉरेन के अंदर करते हैं। ठीक है? तो ये भी एक अच्छा प्रोग्राम है। सो अगर हम यहां
पर देखें इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ साइंस कोलैबोरेट्स विद कैंब्रिज यूनिवर्सिटी एंड ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी ऑन रिस साइंटिफिक
रिसर्च प्रोजेक्ट्स। देन आईआईटीस कोलैबोरेट विद एमआईटी स्टैनफोर्ड फॉर रिसर्च एंड एआई इंजीनियरिंग रिसर्च। सो इफ
यू ऑब्ज़र्व इट यू विल फाइंड दैट ओनली अ फ्यू यूनिवर्सिटीज़ इन इंडिया आर कोलैबोरेटिंग विद दी फॉरेन यूनिवर्सिटीज़?
वेयर ऐज़ अगर हम स्टेट की गवर्नमेंट यूनिवर्सिटीज़ को देखें तो वहां पर ऐसा कोलैबोरेशन नहीं है। राइट? चलिए जीडी का
टॉपिक देखते हैं। व्हाई आर इंडियंस इंक्रीजिंगली चूजिंग टू पर्स्यू एजुकेशन एंड करियर अपोरर्चुनिटीज अब्रॉड। राइट? तो
सिमिलर टॉपिक एक और था इससे रिलेटेड। वहां पर यूनिवर्सिटीज था कि इंडियन यूनिवर्सिटी क्यों फेल हो रही है? ठीक है? और स्टूडेंट
क्यों ब्रेन ड्रेन कर रहे हैं? तो यूनिवर्सिटी से जोड़ के भी एक टॉपिक था और एफएसबी वाराणसी में देखने को मिला था। देन
यहां पर लीड्स क्या है? इंटेंस कंपटीशन इन इंडियास एजुकेशन सिस्टम, ग्रेटर ओपोरर्चुनिटीज़ एंड करियर प्रोस्पेक्ट
अब्रॉड एंड डिज़ायर फॉर ग्लोबल एक्सपोज़र एंड इंटरनेशनल एक्सपीरियंसेस। ठीक है? के इंटेंस कंपटीशन इन इंडियन एंड एजुकेशन
सिस्टम में हमने देखे थे काफी सारे एग्जांपल वेदर नीट का आईआईटी का यूपीएससी सिविल सर्विज सीजीएल देन रेलवे ग्रुप डी 2
करोड़ पीपल तो इतना सारा जब कंपटीशन होगा फॉर लिमिटेड पोस्ट तो डेफिनेटली ब्रेन रेन होगा हमने देखा हरियाणा और पंजाब का जो
यूथ है वो क्यों बाहर जा रहा है बिकॉज़ यहां पर उसे अपॉर्चुनिटी नहीं मिल पा रही है। देन सेकंड आप कंपटीशन में क्या बोल
सकते हैं? रिजर्वेशन सिस्टम है इंडिया के अंदर। ठीक है? तो जो हमारी ओपन सीट्स होती हैं वो काफी कम बचती हैं। जब आप उसको
डिवाइड कर देते हैं तब आप उसको कैटेगराइज करते हैं डिफरेंट-डिफरेंट सेक्टर्स के अंदर इकोनॉमिकल वीकर सेक्शन एंड देन
कास्ट। तो इसलिए बिकॉज़ ऑफ़ दिस जो ओपन सीट्स होती हैं वो काफी ज्यादा कम बचती हैं। उसकी वजह से जो है यहां पर कंपटीशन
इंक्रीस होता है। देन देन आपने देखा होगा डिले। तो अगर आप देखेंगे जो हमारे स्टेट्स के एग्जाम होते हैं या फिर एसएससी के
एग्जाम भी तो पूरा प्रोसेस ही अराउंड वन टू टू इयर्स ले लेता है। ठीक? तो आपने खुद ऑब्ज़र्व करा होगा। आप एग्जाम देते हैं।
सपोज आप एसएससी का एग्जाम देने जाते हैं। रिजल्ट जो है वो डिक्लेअ होगा आपका फोर टू फाइव मंथ्स। तो इतना डिले क्यों? वेयर एज
अगर आप फॉरेन में कोई भी एग्जाम देते हैं तो आपको साथ-साथ ही रिजल्ट मिल जाता है। राइट? ऑनलाइन होते हैं मोस्टली एग्जाम।
ठीक है? देन आप बता सकते हैं एक्सट्रीम कट ऑफ के बारे में। वेदर इट इज़ 99। ओके? नाउ लेट्स मूव ऑन टू द डे सिक्स। राइट? सो डे
सिक्स के अंदर हम पढ़ने वाले हैं मिशन और स्कीम के बारे में। राइट? जैसे कि स्किल इंडिया, डिजिटल इंडिया, मेड इन इंडिया,
स्टार्टअप इंडिया एंड नीति आयोग एंड वी आर आल्सो गोइंग टू कवर सेवन जीडी टॉपिक। तो चलिए स्टार्ट करते हैं हम लोग। फर्स्ट
क्या है हमारे पास? स्किल इंडिया। ठीक है? तो स्किल इंडिया। तो अगर हम क्यूएस वर्ल्ड फ्यूचर स्किल इंडेक्स देखेंगे। तो इंडिया
का रैंक क्या है? 25th है। वहीं पर अगर हम बोलें क्यूएस यूनिवर्सिटी रैंकिंग की बात करें तो वहां पर क्या था कि आउट ऑफ 200
यूनिवर्सिटीज इंडिया की सिर्फ दो ही यूनिवर्सिटीज थी। है ना? जिसमें आईआईटी बॉम्बे और आईएम थे। तो वहां पे हमने ये
चीज पढ़ी थी। सिमिलरली हमने एक और देखी थी क्यूएस वर्ल्ड इंटरनेशनल हायरिंग ट्रेंड्स के बारे में। तो उस रिपोर्ट्स में क्या
बताया गया था कि जो फॉरेन कंपनीज़ हैं वो ग्लोबल एक्सपोज़र को ज्यादा अहमियत देती हैं। इसलिए जो है ब्रेन ड्रेन हो रहा है।
और यहां पर क्या है? क्यूएस वर्ल्ड फ्यूचर है। ये याद रहेंगी। तीन जो रिपोर्ट्स हमने क्यूएस की देखी। राइट? तो चलिए बात करते
हैं स्किल इंडिया की। तो 65 करोड़ पीपल बिलो 35 इयर्स के हैं इंडिया के अंदर। हमारी मीडियन ऐज भी क्या है? 29 है। राइट?
तो यानी कि बहुत यंग पपुलेशन है यहां पर। देखिए तो लॉन्च्ड इन 2015 स्किल इंडिया एम्स टू ट्रेन यूथ इन इंडस्ट्री रिलेवेंट
स्किल्स टू इंप्रूव एंप्लॉयबिलिटी एंड मेक इंडिया सेल्फ रिलायंट आत्मनिर्भर भारत। तो यहां से हम क्या इनफर कर सकते हैं कि
स्किल इंडिया जो है वो यूथ को ट्रेन कर रहा है। उनको स्किल कर रहा है और उनको इंडस्ट्री के लिए रेडी कर रहा है कि हम
अपना जो गोल है सेल्फ रिलायंट और आत्मनिर्भर भारत का वो अचीव कर सकें। तो देखिए इसके अंदर जो फेमस स्कीम आती है वो
है प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना। देखिए स्किल इंडिया एक प्रोग्राम है। उसके अंदर काफी सारी और छोटी-छोटी स्कीम्स आती हैं।
जैसे कि प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना। तो ये क्या है? एक फ्लैशिप स्कीम अंडर दी स्किल इंडिया दैट प्रोवाइड्स फ्री शॉर्ट
टर्म स्किल ट्रेनिंग एंड सर्टिफिकेशन टू यूथ एंड मेक देम जॉब रेडी। मेक देम इंडस्ट्री रेडी। देखिए अंडर स्किल इंडिया
इनिशिएटिव 1 करोड़ यूथ हैव रिसीव्ड स्किल ट्रेनिंग। तो ये जरूर आप अपने जीडी में लेक्चर में यूज करिए कि अंडर दी स्किल
इंडिया इनिशिएटिव ओवर 1 करोड़ यूथ हैव रिसीव्ड स्किल ट्रेनिंग थ्रू दी प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना एंड केंद्र
तो ये सारी स्कीम्स जो है वो प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के अंदर जो है सिखाई जाती है आईटीआईटीएस डाटा एंट्री ऑपरेटर
फील्ड टेक्ननीशियन हेल्थ केयर में जाएं तो वहां पर नर्स जनरल ड्यूटी असिस्टेंट टेक्ननीशियन रेडियोलॉजिस्ट ठीक है देन
ऑटोमेटिव सर्विस टेक्ननीशियन टू व्हीलर मैकेनिक्स कंस्ट्रक्शन इलेक्ट्रिशियन प्लंबर मेसन और रिटेल के अंदर सेल्स
एसोसिएट स्टोर असिस्टेंट। तो जो भी स्किल में आपका इंटरेस्ट है किसी भी स्किल में जिसमें आपका इंटरेस्ट है आप वो स्किल जो
है सीख सकते हैं। ठीक है? वेदर इट इज़ रिलेटेड टू हैंडीक्राफ्ट, एग्रीकल्चर और भी सारी फील्ड्स हैं। तो अब बात करते हैं
व्हाई इंडिया इज़ नीडेड स्किल इंडिया। हमने जैसे बात करी है अभी कि हमें आत्मनिर्भर भारत बनना है। बट अपार्ट फ्रॉम दिस देखिए
स्किल इंडिया हेल्प्स टू रिड्यूस पावर्टी, अनइंप्लॉयमेंट एंड द गैप बिटवीन एजुकेशन एंड इंडस्ट्री नीड्स। देखिए अभी हम क्या
है? न्यू एजुकेशन पॉलिसी लेके आए वो क्यों लेके आए थे हम न्यू एजुकेशन पॉलिसी? क्योंकि यहां पर जो हमारी स्किल्स और
एजुकेशन में बहुत ज्यादा गैप था। हमारी जो नॉलेज है वो इंडस्ट्री से मैच नहीं करती थी। राइट? हम मोर एम्फेसिस ऑन दी
थ्योरेटिकल एस्पेक्ट प्रैक्टिकल नॉलेज नहीं थी। तो इसलिए जो है सिमिलरली हम क्या है स्किल इंडिया भी लेके आए हैं। देन
नेक्स्ट अगर हम देखें इंडिया हैज़ अराउंड 65 करोड़ पीपल बिलो 30 इयर्स हम ये बात कर चुके हैं। मीडियन एज भी 29 है। बाय 2030
अराउंड 18 करोड़ मोर पीपल विल जॉइन दी वर्किंग एज पॉपुलेशन इंक्रीजिंग जॉब प्रेशर। तो 18 करोड़ बहुत ही बड़ा नंबर
है। तो काफी सारी कंट्री की पॉपुलेशन होती है। तो इतनी अगर पापुलेशन बाय 20-30 वर्किंग एज में जाने वाली है तो तो इसलिए
उन्हें स्किल सिखाना बहुत जरूरी है। सो दैट दे बिकम अ इंडस्ट्री रेडी। ठीक है? तो स्किल इंडिया जो है वो एक बहुत वाइड
प्रोग्राम है। यह एक अंब्रेला है। राइट? इस अंब्रेला के अंदर काफी सारी स्कीम्स आ जाती हैं। जैसे कि प्रधानमंत्री कौशल
विकास योजना हो, चाहे वो स्टेप प्रोग्राम हो जिसके बारे में अभी हम पढ़ेंगे। आईटीआई के बारे में आपने सुना हो। एंप्लॉयमेंट
लिंक इंसेंटिव स्कीम और भी बताता हूं मैं। मैन्युफैक्चरिंग स्कीम भी इसके अंदर आ जाएगी। न्यू एजुकेशन पॉलिसी को भी आप इससे
जोड़ सकते हैं। देखिए स्किल इंडिया एक अंब्रेला प्रोग्राम है। अंदर जो है काफी सारी सब छोटी स्कीम्स आ जाती है। ठीक है?
फॉर एग्जांपल चलिए स्टार्ट करते हैं स्टेप प्रोग्राम से। सपोर्ट टू ट्रेनिंग एंड एंप्लॉयमेंट प्रोग्राम फॉर वुमेन। तो जब
भी वुमेन एंपावरमेंट की बात होगी तो जरूर आप स्टेप प्रोग्राम के बारे में बताइए कि प्रोवाइड स्किल ट्रेनिंग टू वुमेन सेक्टर
लाइक हैंडीक्राफ्ट, टेलरिंग, एग्रीकल्चर एंड सर्विस टू इंप्रूव एंप्लॉयबिलिटी एंड एंटरप्रेन्योरशिप अपोरर्चुनिटीज़। सिमिलरली
अगर हम बात करें आईटी इंडस्ट्री में जब हम पढ़ रहे थे हमने वहां पर क्या पढ़ा था? Google वमेन विल इनिशिएटिव प्रोग्राम। देन
हमने Google का वी इंजीनियर प्रोग्राम पढ़ा था। फिर वहां पर माइक्रोसॉफ्ट ने गवर्नमेंट के साथ पार्टनरशिप भी करी थी
वमेन को ट्रेन करने के लिए। 140R करिकुलम ये सब चीजें हम पढ़कर आए हैं अभी। राइट? देन हमने वुमेन एंपावरमेंट के काफी सारे
एग्जांपल्स भी देखे। तो वो रिवाइज़ कर लेना और उसके साथ-साथ ये स्टेप प्रोग्राम भी जोड़ लेना उसके अंदर। ठीक है? देन
एंप्लॉयमेंट लिंक इंसेंटिव स्कीम। ठीक है? ईएलआई द गवर्नमेंट हैज़ अनाउंस्ड एन एंप्लॉयमेंट लिंक इंसेंटिव स्कीम विद
अराउंड 1 लाख करोड़ टू प्रमोट प्राइवेट इन्वेस्टमेंट रिसर्च एंड जॉब क्रिएशन एमिंग टू जनरेट 3.5 करोड़ जॉब्स। राइट? तो
इसके अंदर क्या होगा कि जो एंप्लयर है जो जॉब दे रहा है किसी एंप्लई को उसको भी बेनिफिट होगा। और जो एंप्लॉय फर्स्ट टाइम
कोई स्किल सीख कर किसी फैक्ट्री के अंदर जा रहा है या फिर कहीं पर भी एंप्लॉय होता है तो वहां पर उसे जो है इंसेंटिव मिलेगा
अराउंड 15000 अब जो उसको इंसेंटिव मिलेगा वो कुछ पीरियड में मिलेगा राइट लाइक 6 महीने बाद उसको 5000 मिल गए इस तरीके से
तो ये तो सिमिलरली एंप्लयर को क्या करती है ये टैक्स बेनिफिट दे देती है और एंप्लई को क्या है डायरेक्टली पैसे मिल जाते हैं
तो ये क्या है दोनों को जो है बेनिफिट करती है देन हमारे पास क्या है वोकेशनल ट्रेनिंग आईटीआई तो सिर्फ ये ध्यान रखिए
कि यूनियन बजट जो कि 2026 में आया उसमें 6ाउज करोड़ टू मॉडर्नाइज हमारी आई आईटीआई को राइट तो जो 10थ के बाद स्टूडेंट आईटीआई
करते हैं राइट अब वो जितने भी इंस्टट्यूट हैं उनके अंदर नई स्किल्स आएंगी नई टीचर्स आएंगे इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट होगी देन
प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के बारे में हमने बात करा तो इसके अंदर क्या होता है देखिए छोटे-छोटे सेंटर्स खोले गए हैं
टाई अप किसके साथ किसी कॉलेज के साथ टाई अप करके इंस्टीट्यूशन के साथ टाई अप करके तो वहां पर क्या है कोर्सेस दैट आर 150 टू
300 आवर्स लॉन्ग्स एंड फ्री फॉर बेनिफिशरीज ठीक है फ्री है तो ये पॉइंट जरूर याद रखें ठीक है देन स्किल डेवलपमेंट
सेंटर एंड ट्रेनिंग नेटवर्क जैसे हमने बात करी थी अभी देन इंडस्ट्री एंड यूनिवर्सिटी पार्टनरशिप। ठीक है? यूनिवर्सिटीज़ लाइक
इग्नू आर पार्टनरिंग विद द गवर्नमेंट टू सेट अप स्किल सेंटर्स इन देयर रीजनल कैंपसेस ऑफरिंग वोकेशनल ट्रेनिंग एंड
प्लेसमेंट सपोर्ट थ्रू दी स्किल इंडिया नेटवर्क। और सिमिलरली आप ऐड कर सकते हैं। अभी हम पढ़ के आए थे ब्रेन ड्रेन को कैसे
रोकना है कि हम जो है स्टूडेंट एक्सचेंज प्रोग्राम चला सकते हैं डिफरेंट यूनिवर्सिटीज़ के साथ फॉरेन की। तो वहां पर
भी हमारी जो स्किल है और करंट जो ट्रेंड चल रहा है हम उसे सीख सकते हैं। देन आप एआई समिट के बारे में भी बता सकते हैं।
इंडिया के अंदर हुई तो वो भी तो स्किल का ही पार्ट हुआ ना। तो डिफरेंट-डिफरेंट चीजों को आप जोड़िए तो आप बहुत ईजीली काफी
सारे पॉइंट बना लेंगे। देन प्रधानमंत्री कौशल विकास केंद्र जो हमने बात करी थी। दीज़ आर स्पेशल ट्रेनिंग हब्स एस्टैब्लिश
नेशन वाइड टू असोर द ट्रेनिंग स्लॉट्स अंडर प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना। ठीक है? चलिए अब हम बात करते हैं चैलेंजेस की।
हमने बात तो करी कि स्किल इंडिया से बहुत बेनिफिट है। पर चैलेंजज़ क्या है? इंप्लीमेंटेशन गैप मेनी ट्रेनिंग सेंटर्स
लैक प्रॉपर इंफ्रास्ट्रक्चर इक्विपमेंट्स नहीं है एंड क्वालिफाइड ट्रेनर्स मेकिंग स्किल आउटकम इनकंसिस्टेंट अक्रॉस स्टेट्स
देन एक्सेस बैरियर्स इन रूरल एरियाज अह यूथ इन रूरल रीजंस फेस पुअर कनेक्टिविटी टू स्किल सेंटर्स लैक ऑफ अवेयरनेस एंड
फाइनेंसियल बैरियर फाइनेंसियल बैरियर टू अटेंड कोर्सेस राइट देन क्वालिटी ऑफ़ ट्रेनिंग सम कोर्सेज लैक रिकॉग्नाइज़्ड
सर्टिफिकेशन तो अगर आप जॉब लेने जा रहे हैं तो वह क्या है आपसे आपसे डिप्लोमा मांगेंगे। आपकी डिग्री क्या है? आपके साथ
सर्टिफिकेशन कोर्स किया है। बट यहां पर जो सर्टिफिकेशन कोर्स मिल रहा है, सर्टिफिकेशन मिल रहा है, एंप्लॉयर्स को
क्रेडिबिलिटी नहीं दे रहा है। तो रिड्यूसिंग जॉब अपोरर्चुनिटीज़ आफ्टर ट्रेनिंग। तो कहीं पर ऐसी चीजें भी देखने
को मिल रही हैं। तो इसलिए ये क्या है? चैलेंज के अंदर आ जाता है। देन एडवांटेजेस की बात कर लेते हैं। अब हम स्ट्रेंथनिंग
आत्मनिर्भर भारत। देन रिड्यूस पावर्टी हमने बात करी। देन हमने एक रिपोर्ट पढ़ी थी ग्लोबल वैकेंसी की। वहां पर था ना आउट ऑफ
थ्री वुमेन और फोर। ओनली वन इज़ एंप्लॉयड इन दी लेबर फ़। इसकी वजह से क्या है? जो हमारी जीडीपी है उसके अंदर जो 700 से 800
बिलियन डॉलर का कंट्रीब्यूशन हो सकता है। अगर हम यह नंबर जो वन है उसे थ्री या फोर पर ले जाते तो इसलिए जो है स्किल बहुत
जरूरी है वुमेन के अंदर। ठीक है? एंड कंट्रीब्यूट्स टू दी जीडीपी ग्रोथ। अगर स्किल होगी, जॉब होगी तो जीडीपी
अल्टीमेटली बढ़ेगी। राइट? देन कन्वर्ट्स इंडियास लार्ज यूथ पापुलेशन इंटू प्रोडक्टिव। जल्दी से रिवाइज़ कर लेते हैं।
ठीक है? तो आत्मनिर्भर भारत बनेगा हमारा स्किल इंडिया से। पावर्टी रिड्यूस होगी। ठीक है? लोगों को ज्यादा से ज्यादा क्या
है? स्किल मिलेगी, जॉब्स मिलेगी, वुमेन का पार्टिसिपेशन ज्यादा होगा और अल्टीमेटली जीडीपी ग्रोथ होगी। की जीडीपी ग्रोथ होगी
तो इकॉनमी अच्छी होएगी। राइट? चलिए जीडी का टॉपिक देखते हैं। व्हाट स्ट्रेटेजिक प्रायोरिटी शुड इंडिया अडॉप्ट टू बिकम अ
डेवलप्ड नेशन? स्किल डेवलपमेंट करें, एग्रीकल्चर मॉडर्नाइजेशन करें या स्ट्रेंथिंग मिलिट्री डिफेंस? जो भी स्किल
डेवलपमेंट लीड के ऊपर बोलना चाहते हैं उनके पास पॉइंट्स हैं। देखिए आप क्या बता सकते हैं? आप बोलिए सीधा कि देखिए हमारी
जो पॉपुलेशन है मेजरली मीडियन एज कितनी है? 29 है। एंड बाय 2030 18 करोड़ पीपल तो कहां हमारी वर्किंग एज पॉपुलेशन के अंदर
आने वाले हैं। सिमिलरली इंडिया के अंदर तो 65 करोड़ ऐसे लोग हैं जो कि 35 से नीचे के हैं। तो इसलिए स्किल डेवलपमेंट बहुत
इंपॉर्टेंट है इंडिया को डेवलप्ड नेशन बनाने के लिए। देन आप बताइए कि कैसे स्किल डेवलपमेंट की वजह से जो है हमारी इकोनमी
को बेनिफिट होगा। अनइंप्लॉयमेंट दूर होगी। पावर्टी दूर होगी जो अभी हम पढ़कर आए हैं। राइट? और वुमेन का पार्टिसिपेशन जो कि
सिर्फ अभी आउट ऑफ फोर वुमेन कितना है? वन या फिर आउट ऑफ थ्री वुमेन वन है लेबर फ़ के अंदर तो वो भी अगर हम इंक्रीस कर दें टू
टू थ्री तो हम 7 टू 800 बिलियन डॉलर्स जो है अपनी जीडीपी के अंदर कंट्रीब्यूट कर सकते हैं। ठीक है? देन आप बताइए
मैन्युफैक्चरिंग मिशन के बारे में। राइट? तो देखिए इंडिया के मैन्युफैक्चरिंग मिशन में क्या है कि जो हमारा मैन्युफैक्चरिंग
सेक्टर है हम उसको 16% कंट्रीब्यूशन से 25% पर लेके जाना चाहते हैं। तभी हमारा जो भारत है वो डेवलप्ड होगा। क्योंकि चाइना
के अंदर भी अगर आप देखेंगे तो 26% जो है वहां का कंट्रीब्यूट करता है मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर और
मैन्युफैक्चरिंग तो तब अच्छी हम कर पाएंगे जब हमारे पास स्किल्ड लेबर होंगे। इसलिए स्किल डेवलपमेंट तो देखिए यहां पे भी
हेल्प कर रहा है डेवलप्ड बनाने के लिए और अगर आप बात करेंगे यहां पर मिलिट्री और डिफेंस की तो अगर हमारे पास स्किल्ड लोग
होंगे तो हम जो मिलिट्री और डिफेंस का हार्डवेयर खुद बना सकते हैं। अगर हमारे पास स्किल्ड लोग होंगे जैसे कि हमने अभी
पीछे पढ़ा है ना हम एआई चैप्टर में पढ़ के आए थे फसल एआई के बारे में पढ़ा था। हमने ड्रोंस के बारे में पढ़ा था। तो अगर
स्किल्ड लोग होंगे तो वो एग्रीकल्चर मॉडर्नाइजेशन भी करेंगे। इसलिए स्किल डेवलपमेंट को आप तीनों से जोड़कर बोल सकते
हैं। राइट? आप ईजीली स्टैंड आउट कर सकते हैं। चलिए अब हम बात करते हैं डिजिटल इंडिया के ऊपर। राइट? तो डिजिटल इंडिया
लॉन्चड इन 2015 एक फ्लैशिप प्रोग्राम है। सिमिलरली जो हम अभी पढ़ के आए हैं स्किल इंडिया वो भी 2015 में ल्च हुआ। तो याद
रहेगा दोनों का राइट? अब देखिए एम क्या था? ट्रांसफॉर्म इंडिया इंटू अ डिजिटली एंपावर्ड सोसाइटी नॉलेज इकॉनमी। राइट? देन
फोकस डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर डिजिटल सर्विज के ऊपर, डिजिटल एंपावरमेंट के ऊपर। डिजिटल इंडिया इज़ अंब्रेला प्रोग्राम
कवरिंग मल्टीपल डिजिटल इनिशिएटिव। सिमिलरली जैसे कि स्किल इंडिया प्रोग्राम था। एक अंब्रेला प्रोग्राम था। उसके अंदर
क्या आ रहा था? मॉडर्नाइजेशन ऑफ़ आईटीआई आ रहा था। प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना। उसी के अंदर एंप्लॉयमेंट लिंक इंसेंटिव
स्कीम था। मैन्युफैक्चरिंग स्कीम था। तो काफी सारी स्कीम थी। सिमिलरली यहां पर क्या है? नेशनल ब्रॉडबैंड मिशन इसके अंदर
आ रहा है। यूपीआई आ रहा है। पब्लिक इंटरनेट एक्सेस कॉमन डिजिटल सर्विज और पेपरलेस गवर्नेंस लाइक डीजीकर ईसाइन ई
ऑफिस ई साइन। तो ये जो पब्लिक इंटरनेट एक्सेस है तो आप आप जब भी रेलवे स्टेशन जाते होंगे तो वहां पर आपको वाई-फाई दिखता
होगा और भी काफी सारी जगह बस स्टैंड और चाहे वो मेट्रो स्टेशन हो या फिर बस स्टैंड हो तो ये जो पब्लिक इंटरनेट एक्सेस
है वो यहीं से कांसेप्ट आ रहा है राइट देन नेशनल ब्रॉडबैंड मिशन आया तो जिसमें BSNL को ब्रॉडबैंड मिला और काफी सारी प्राइवेट
कंपनीज़ ने जो है ब्रॉडबैंड का एक्सपेंशन करा यूपीआई के बारे में हर कोई जानता है तो इसमें मुझे बताने की जरूरत नहीं है और
Digilocker e ऑफिस चलिए आगे बढ़ते हैं देखिए तो Digilocker सबको पता होगा यूज्ड टू स्टोर ड्राइविंग लाइसेंस आधार मार्कशीट
व्हीकल डिजिटल ये ओवर 25 करोड़ रजिस्टर्ड यूजर हैं यहां पर। ठीक है? तो बाकी के देख लेते हैं क्योंकि यह तो याद रहेगा सबको बट
ये कुछ पॉइंट्स हैं जो हमें देखते हैं। जैसे कि एम पासपोर्ट सेवा यूज्ड फॉर पासपोर्ट एप्लीकेशन स्टेटस ट्रैकिंग
अपॉइंटमेंट बुकिंग। पहले क्या होता था? देखो आपको फिजिकली जाना पड़ता था। क्या है? अपना स्लॉट बुक करने के लिए। देन आपको
पेपर्स देने पड़ते थे। फिर आप ट्रैक करते थे। फिर तो सब कुछ फिजिकली होता था। अब ऑनलाइन ही सब कुछ हो सकता है। केवाईसी से
लेके आप अपना रिसीव भी जो है पासवर्ड ऑनलाइन कर सकते हैं। विद दी हेल्प ऑफ़ एम पासपोर्ट सेवा। आई रिपीट एम पासपोर्ट
सेवा। देन हमारे पास क्या आता है? Diksha ऐप यूज्ड फॉर डिजिटल टेक्स्ट बुक क्यूआर बेस्ड लर्निंग एंड टीचर रिसोर्सेज। ठीक
है? देन हमारे पास आता है भीम एप जो कि हमारा यूपीआई है। यूज़्ड फॉर यूपीआई बेस्ड इंस्टेंट बैंक टू बैंक पेमेंट। तो जरूर
इसका एग्जांपल देना है हमें। ठीक है? देन उमंग एप यूज्ड फॉर गवर्नमेंट सर्विज लाइक पैन कार्ड, आधार कार्ड, गैस बुकिंग,
पेंशन। ठीक है? तो हमने देखा होगा कि हमारे पेरेंट्स के जमाने में क्या होता था? पैन कार्ड बनाना है तो तहसीलदार के
ऑफिस में जाओ। अगर आपको गैस बुक करनी है, फिजिकली जाना पड़ता था। बट आप ऑनलाइन कर सकते हैं विद हेल्प ऑफ द टोल फ्री नंबर।
देन पेंशन के लिए भी सिमिलरली बैंक में आ जाती है। तो उमंग ऐप बहुतेंट है। देन ईसाइन यूज़्ड फॉर डिजिटल सिग्नेचर पेपरलेस
एग्रीमेंट्स। ठीक है? तो जब भी आपको सिग्नेचर करने होते थे पहले फिजिकली जाकर वहां पर उस पेपर पे साइन करने पड़ते थे।
बट अब जो है ईसाइन पहले ही वेरीफाई कर देता है। तो यूज़्ड फॉर डिजिटल सिग्नेचर। इससे क्या है? पेपरलेस एग्रीमेंट होते
हैं। देन आरोग्य सेतु। राइट? तो कोविड-19 में आपने देखा होगा कि अगर आप एग्जाम देने जा रहे हैं कोई भी। ठीक है? तो मुझे तो
अच्छे से याद है कि वहां पर क्या होता था? आरोग्य सेतु ऐप जरूर आपके मोबाइल फोन में होना चाहिए था पहले। ठीक है? हेल्थ हेल्थ
स्टेटस एंड कांटेक्ट ट्रेिंग ओवर 10 करोड़ डाउनलोड्स थे यहां पर। देन ई ऑफिस यूज्ड इन गवर्नमेंट डिपार्टमेंट टू रिड्यूस पेपर
वर्क एंड अनेबल फाइल मूवमेंट ऑनलाइन। ठीक है? तो यहां पर आप देख सकते हैं जो रेड टैपिज्म हम पढ़कर आए थे करप्शन में वो
यहां से ई ऑफिस से दूर हो जाएगा। ठीक है? हमारे पास क्या आता है? पीएमजी दिशा पोर्टल यूज्ड फॉर डिजिटल लिटरेसी ट्रेनिंग
इन रूरल एरियाज और पीएमजी दिशा ने टारगेट रखा है कि अराउंड 6 करोड़ हाउसहोल्ड में जो है हम डिजिटल लिटरेसी इंटरनेट को और ये
सारे एप्स को है ना वहां पर अवेयरनेस फैलाएंगे। चलिए आगे चलते हैं हम एडवांटेजेस की। तो देखिए सबसे पहला क्या
है? इकोनॉमिक इफेक्ट। डिजिटल इकोनमी कंट्रीब्यूट अप्रोक्स 30 लाख करोड़ अराउंड 11 टू 12% ऑफ जीडीपी। राइट? और हमने देखा
था [नाक से की जाने वाली आवाज़] कि जो ई-कॉमर्स की जितनी भी इंडस्ट्री है वो कितना करती थी? 22 लाख करोड़। तो 30 लाख
करोड़ हमारी डिजिटल इकॉनमी कर रही है। तो देखिए यूपीआई ईयरली ट्रांजैक्शन वैल्यू क्रॉस्ड अप्रोक्स 200 लाख करोड़ प्लस ये
नंबर जरूर याद रखिए 200 लाख प्लस करोड़ की यूपीआई की ट्रांजैक्शन हम कर चुके हैं। देन डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर अप्रोक्स
₹3 लाख करोड़ बाय स्टॉपिंग लीकेजेस। तो अगर हम कोविड-19 की बात करें तो गवर्नमेंट ने क्या है? आई थिंक 1 टू ₹2000
डायरेक्टली जो है वो लोगों के का जो लोगों के बैंक अकाउंट में ट्रांसफर करें। अगर यही हम 2000 एरा में होते या फिर 1990 में
होते तो वहां पर क्या होता कि हम पहले किसी मिडिलमैन को देते किसी गवर्नमेंट ऑफिशियल को देते फिर वो आगे जो है
ट्रांसफर करता उससे क्या होता है लीकेज करप्शन है ना मिडिलमैन जैसे ही ऐड हो गया बट यहां पर जैसे ही बट यहां पर क्या है
डायरेक्टली आपके खाते में पैसे जा रहे हैं तो कितनी सारी स्कीम है चाहे वो लाडली बहना स्कीम हो है ना तो तो कितनी सारी
स्कीम है जो फ्री बी स्कीम होती है जैसे लाडली बहना स्कीम होगी तो डायरेक्टली आपके बैंक अकाउंट में ही पैसे आते हैं। राइट?
चलिए आगे देखते हैं। कन्वीनियंस एंड कैशलेस सिस्टम इंटरनेट यूजर इंक्रीज्ड फ्रॉम अप्रोक्स 25 करोड़ 2014 में थे और
2015 में हम डिजिटल इंडिया लेके आए और हमने पढ़ा था कि 80 करोड़ इंटरनेट यूजर हो चुके हैं और हमने देखा था 27 करोड़ पीपल
जो है वो ई-कॉमर्स यूज़ कर रहे थे। तो ये नंबर जो है यहीं पे है 80 करोड़ से 95 करोड़ के बीच में ही है। देन नो नीड टू
कैरी कैश राइट यूपीआई और यूपीआई क्यूआर भीम वाइडली यूज़्ड। ठीक है? देन पासपोर्ट पैन आधार सर्विज अब सब कुछ ऑनलाइन हो चुका
है। फॉर्म फिलिंग क्या है? ऑनलाइन हो चुकी है। ठीक है? देन देखिए रिड्यूस्ड करप्शन एंड बेटर रिकॉर्ड्स। तो अभी हम करप्शन के
बारे में पढ़ के आ रहे हैं। देन रिड्यूस्ड करप्शन एंड बेटर रिकॉर्ड्स। तो देखिए अभी हम करप्शन चैप्टर को पढ़ के आए। तो वहां
पर अगर आपको करप्शन मिलता है तो जरूर बताइए कि डिजिटल इंडिया कैसे हेल्प कर रहा है टू कर दी करप्ट बाय डायरेक्ट बैंक
ट्रांसफर अप्रोक्स 30 लाख करोड़ डायरेक्टली टू दी बैंक अकाउंट्स। वहां पे आप बताइए जो स्कीम्स थी चाहे वो नेशनल फ़ूड
सिक्योरिटी एक्ट हो, लाडली बहना स्कीम हो। ठीक है? कोविड-19 के टाइम पर जो गवर्नमेंट ने पैसे ट्रांसफर करे या फिर पेंशंस होती
हैं ओल्ड एज पेंशन विडो पेंशन वो सब क्या है? डायरेक्ट बैंक ट्रांसफर ही तो है। राइट? देन सेव्ड अप्रोक्स 3 लाख करोड़ बाय
रिमूविंग फेक बेनिफिशरीज। राइट? देन इनकम टैक्स जीएसटी सब्सिडी ट्रैकिंग नाउ डिजिटल बेटर ट्रांसपेरेंसी। ठीक है? तो जो इनकम
टैक्स रिटर्न्स हैं वो ऑनलाइन फिल होती है। आप यूपीआई से जो पेमेंट करते हैं उनका सारा डाटा होता है। तो अब ये सब क्या है?
ट्रांसपेरेंसी आ चुकी है। तो जरूर करप्शन को डिजिटल इंडिया से जोड़कर आप अच्छे पॉइंट्स बना सकते हैं। चलिए और देखते हैं।
पेपरलेस गवर्नेंस एंड ट्रांसपेरेंसी ई ऑफिस डीजी लॉकर रिड्यूस दी फिजिकल पेपर वर्क डिजिटल डॉक्यूमेंट्स हो चुके हैं।
दैट्स क्लियर। देन वुमेन एंपावरमेंट एंड जीडीपी कंट्रीब्यूशन अह पीएमजी दिशा की बात आ गई। व प्रधानमंत्री ग्रामीण डिजिटल
सक्षत्र अभियान अराउंड 6 करोड़ रूरल हाउसहोल्ड्स आर टारगेटेड फॉर डिजिटल लिटरेसी वेयर लार्ज नंबर ऑफ़ बेनिफिशरीज़
वुमेन है। तो हम कहां पर जोड़ देंगे? वुमेन एंपावरमेंट में जोड़ देंगे पीएम दिशा को। जैसे हमने क्या जोड़ा था? प्रधानमंत्री
कौशल विकास योजना जोड़ा था। प्लस हमने स्टेप प्रोग्राम भी जोड़ा था। राइट? देन जॉब क्रिएशन आईटी और डिजिटल सेक्टर 50 लाख
जॉब्स को क्रिएट करता है। आईटी और डिजिटल सेक्टर राइट देन डिजिटल प्लेटफार्म स्टार्टअप वन टेक गिग इकॉनमी क्रिएटेड
अप्रोक्स 20 लाख न्यू जॉब्स इन रिसेंट ईयर तो ये किस लिए पॉसिबल हुआ? क्योंकि डिजिटल इंडिया राइट देन इंडियास टेक स्टार्टअप
इकोसिस्टम सपोर्ट 1 लाख स्टार्टअप जनरेटिंग लार्ज एंप्लॉयमेंट। राइट? तो जो टेक स्टार्टअप है, डिजिटल स्टार्टअप्स
हैं, वो क्या है? 1 लाख स्टार्टअप हो चुके हैं। तो, यह कुछ हमारे इंपैक्टफुल पॉइंट्स थे, एडवांटेजेस थे। हमारी इकॉनमी में जो
डिजिटल इंडिया हेल्प कर रहा है, तो उसे जोड़ सकते हैं। देन अगर हम देखें तो क्या चैलेंजेस हैं? चलिए उस पर बात करते हैं।
फर्स्ट है डिजिटली पुअर। ओनली 35 टू 40% हाउसहोल्ड हैव दी बेसिक डिजिटल लिटरेसी। आई रिपीट आप जीडी में बोलिए कि अराउंड 35
टू 40% ऑफ द इंडियास पॉपुलेशन हैव द डिजिटल लिटरेसी। एंड दैट इज द रीजन कि जो साइबर सिक्योरिटी रिस्क था हम बहुत बार
पढ़ के आए हैं कि इंडिया ने जो है 24 लाख साइबर कंप्लेंट्स रजिस्टर करी 2025 एस्टीेटेड है 2026 में भी इससे ज्यादा
बढ़ेंगी 2024 में भी 22 टू 24 लाख क्यों क्योंकि डिजिटल लिटरेसी ही 35 टू और एक और चीज मोबाइल फोन और इंटरनेट लैपटॉप होना
डिजिटल लिटरेसी नहीं होती राइट देन हमने [नाक से की जाने वाली आवाज़] पढ़ा है डाटा रिपोर्टेड बाय नेशनल साइबर क्राइम
रिपोर्टिंग पोर्टल तो हमने बहुत सारे एग्जांपल्स देखे थे किसमें साइबर सिक्योरिटी के अंदर अंदर कि जो गुजरात है
ठीक है जो हम गुजरात है उसने थाउजेंड्स ऑफ करोड़ 150 करोड़ लॉस इन मुंबई फिर हमने काफी सारे स्कैम्स देखे थे अरूप स्कैम
देखा था ग्लोबली तो ठीक है हमने देन हमने काफी सारे स्कैम देखे थे वो अूप स्कैम Samsung का लीग तो ये सारे जो साइबर
सिक्योर ठीक है देन हमने ये भी देखा था जो ओल्ड एज लोग हैं स्पेशली रिटायर्ड लोग हैं चाहे वो बैंक ऑफिसर्स हैं देन हमारे
आर्म्ड फोर्सेस के पर्सनल हैं या फिर किसी और गवर्नमेंट सर्विस कितने साइ कितने सारे लोगों ने जो है वो साइबर अटैक लैक्स के जो
है वो विक्टिम हुए और उन्होंने जो है लैक्स ऑफ करोड़ जो है लॉस करे। राइट? चलिए आगे देखते हैं। नेक्स्ट जनरेशन डिजिटल
इंफ्रास्ट्रक्चर गवर्नमेंट एआई पुश इंडियास एआई समिट 2026 न्यू दिल्ली फोकस्ड रिस्पांसिबल एंड इंक्लूसिव एआई इंडिया इज़
प्रमोटिंग इंडिया एआई मिशन टू बिल्ड इंडीजीनस। तो यहां पर एआई समिट इंडिया के अंदर हुई थी। 2026 जिसके अंदर सुंदर बिचाई
सैमल्ट वन प्लस 500 और जो है 500 प्लस ग्लोबल लीडर्स आए थे रिलेटेड टू एi। देन एक्सपेंशन ऑफ 5G हम पढ़कर आए थे कि जो 5G
टेक्नोलॉजी और 6G टेक्नोलॉजी पे काम चल रहा है। हमने देखा था कि Jio कंटीन्यूअसली उसके ऊपर काम कर रहा है। Hui काम कर रहा
है। राइट? तो हमारी इंडियन कंपनीज़ भी इस पे काम कर रही है। देन एआई इंटीग्रेशन इन्वेस्टमेंट। इंडिया इज़ रैपिडली फोकसिंग
ऑन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एज़ इट्स द नेक्स्ट ड्राइवर। इस पर आपको पता है। देन adानी ग्रुप इज़ गोइंग टू इनवेस्ट 100
बिलियन बाय 2035। हमने पढ़ा था कि जो अह Reliance है राइट? वो जो वर्ल्ड का सबसे लार्जेस्ट डाटा सेंटर जो है वो कहां पे
जामगर के अंदर ओपन करने वाला है। फिर हमने पढ़ा था काफी सारी कंपनीज़ जैसे कि Amazon है बाय 2035 दे आर देन हमने पढ़ा था Amazon
Google Ma दे आर आल्सो गोइंग टू इन्वेस्ट थाउजेंड्स ऑफ़ करोड़ इन इंडिया रिलेटेड टू AI देन इंडिया का सेमीकंडक्टर मिशन 2.0
विद 1.25 लाख करोड़ बजट टू स्ट्रेंथन द डोमेस्टिक चिप्स एंड इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चर। तो हमने इसमें लेटेस्ट
चीजें क्या पढ़ी कि डिजिटल इंडिया के अंदर अब इंडिया एआई मिशन जुड़ चुका है। सेकंड जो है इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन जुड़ चुका
है। 5G नेशन वाइड और 6G टेक्नोलॉजी पे जो रिसर्च जुड़ चुकी है इसके साथ। हमने कुछ एग्जांपल्स देखे कि adानी इन्वेस्ट करेंगे
100 बिलियन। Reliance जो है वर्ल्ड लार्जेस्ट डाटा सेंटर बनाएगी और वेरियस कंपनी Google Microsoft Apple मेटा जो है
कंटीन्यूअसली इन्वेस्ट कर रही है इंडिया के अंदर। तो डिजिटल इंडिया का रिजल्ट क्या हुआ? बिकॉज़ इस प्रोग्राम को जो है मोर देन
वन डिकेड होने वाला है। राइट? सो डिजिटल इंडिया हैज़ ट्रांसफॉर्म्ड गवर्नेंस कनेक्टेड 80 करोड़ पीपल टू दी इंटरनेट एंड
कंट्रीब्यूटेड नियरली 30 लाख करोड़ टू दी इकोनमी थ्रू यूपीआई डिजिटल सर्विसेस एंड फाइनेंसियल इंक्लूज़ कंक्लूजन आप पढ़ सकते
हैं टू मेक इट मोर सक्सेसफुल इंडिया मस्ट स्ट्रेंथन डिजिटल स्किल्स और स्किल इंडिया होना चाहिए इंटीग्रेटेड एआई
रिस्पांसिबिलिटी एंड फर्मली अह काउंटराइजिंग साइबर स्कैम्स। तो इस पे भी हमने बात करी एंड डाटा थ्रेट्स विद
स्ट्रांग सिक्योरिटी और साइबर सिक्योरिटी एंड इंक्लूजन डिजिटल इंडिया विल रिमेन दी बैकबोन ऑफ इंडियास फ्यूचर ग्रोथ एंड
ग्लोबल डिजिटल लीडरेशन। चलिए जीडी का टॉपिक देखते हैं। व्हिच इनिशिएटिव होल्ड्स द ग्रेटेस्ट पोटेंशियल टू इंप्रूव इंडियास
ओवरऑल डेवलपमेंट डिजिटल इंडिया, वुमेन एंपावरमेंट और स्टार्टअप इंडिया। राइट? तो वुमेन एंपावरमेंट हम पढ़कर आए थे पीछे। तो
वुमेन एंपावरमेंट के ऊपर जिसको भी बोलना है वो सारे एग्जांपल्स आप ऐड कर सकते हैं। ठीक है? जो हमने डिफेंस सेक्टर में पढ़े
थे और फिर हमने ठीक है? तो जो जो हमने डिफेंस सेक्टर में पढ़ थे फिर इकॉनमी के लिए हमने पढ़ा था कि ग्लोबल मैकेंसी
रिपोर्ट कहती है कि आउट ऑफ थ्री वुमेन जो है वन ही पार्टिसिपेट करती है लेबर फोर्स के अंदर और ओवरऑल देखें तो आउट ऑफ वन 4 तो
वो वाला रेश्यो बताइए उससे क्या है हम 7 टू$800 बिलियन डॉलर्स ऐड कर सकते हैं इसलिए वमेन एंपायरवरमेंट बहुत जरूरी है
देन इंडिया जो है वो कंटीन्यूअसली स्टेप प्रोग्राम चला रहा है चाहे वो ठीक है तो इंडिया जो है कंटीन्यूअसली स्टेप
प्रोग्राम चला रहा है Google का वमेन विल इनिशिएटिव बता सकते हैं वी प्रोग्राम बता सकते हैं और जितने भी ठीक है उसके बाद आप
बता सकते हैं वेरियस एग्जांपल जो वुमेन डिफेंस चाहे वो फर्स्ट फाइटर पायलट हो या स्पेशल फोर्सर्सेस में जाना वुमेन का और
वुमेन जो है एक एग्जांपल सेट कर रही है। फिर पॉलिटिशियंस का एग्जांपल दीजिए। चाहे वो हमारे प्रेसिडेंट हो, चाहे वो दिल्ली
सीएम हो और चाहे वो हमारे वुमेन चाइल्ड डेवलपमेंट मिनिस्टर्स हो। तो वहां पे भी आप ये सारी चीजें जोड़ के बता सकते हैं।
हमने डिजिटल इंडिया पे बहुत सारे पॉइंट को डिस्कस करा है। चाहे वो 30 लाख प्लस करोड़ जो है वो इकॉनमी के अंदर जा रहा है।
इंडिया से एआई मिशन, स्टार्टअप मिशन एवरीथिंग जो है डिजिटल इंडिया के अंदर आ जाएगा। देन स्टार्टअप इंडिया जो है वो हम
आगे बढ़ेंगे तो वहां से भी आपको बहुत सारे पॉइंट मिल जाएंगे। नाउ आई होप आप ईजीली आप डिजिटल इंडिया और डिजिटल इंडिया को स्किल
इंडिया से जोड़कर काफी सारे पॉइंट बोल सकते हैं। वमेन एनवायरमेंट स्टार्टअप में। ठीक है? चलिए अब नेक्स्ट टॉपिक पे चलते
हैं। व्हाट आर दी की हिंडरेंसेस टू इफेक्टिव इंप्लीमेंटेशन ऑफ द डिजिटल इंडिया प्रोग्राम। तो लिमिटेड फाइनेंसियल
एंड डिजिटल लिटरेसी। अच्छा ये हम साइबर सिक्योरिटी में ये टॉपिक कंप्लीट करके आए हैं। बट मैंने फिर भी यहां पर रिवीजन के
लिए लगा दिया है क्योंकि आप डिजिटल इंडिया पढ़ चुके हैं। तो आई होप आप बता सकते हैं साइबर सिक्योरिटी रिस्क और डाटा प्राइवेसी
कंसर्न है और लिमिटेड फाइनेंसियल डिजिटल लिटरेसी है। इसकी वजह से काफी सारे पर्सनल जो रिटायर्ड हो चुके हैं वो जो है साइबर
वो जो है साइबर अटैक्स के जो हैं विक्टिम हुए। ठीक है? चलिए अब हम चलते हैं मेक इन इंडिया या फिर सेल्फ रिलायंस या
आत्मनिर्भर भारत की तरफ। तो ये टॉपिक भी इंपॉर्टेंट है मुझे बताने की जरूरत नहीं है। ठीक है? देन मेक इन इंडिया इज अ
गवर्नमेंट ऑफ इंडिया इनिशिएटिव लॉन्च इन 2014 तो 2015 के अंदर क्या स्टार्ट होता है हमारा फ्लैकशिप प्रोग्राम स्किल इंडिया
सिमिलरली डिजिटल इंडिया भी स्टार्ट होता है और 2014 के अंदर जो है मेड इन इंडिया स्टार्ट होता है या फिर मेक इन इंडिया मेक
इन इंडिया इज़ अ गवर्नमेंट ऑफ इंडिया इनिशिएटिव ल्च इन 2014 टू प्रमोट मैन्युफैक्चरिंग इन इंडिया अट्रैक्ट फॉरेन
इन्वेस्टमेंट एंड मेक इंडियास ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब इसलिए जो है इंडिया का मैन्युफैक्चरिंग मिशन भी आया है इन 2026
के अंडर व्हिच जो मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर 16% अभी जीडीपी के अंदर कंट्रीब्यूट करता है हम उसको पुश पुश करके 25 तक ले जाना
चाहते हैं टू बिकम द सेल्फ रिलायंट और डेवलप्ड इन 2047। चलिए व्हाई मेक इन इंडिया इज़ नीडेड? इंडिया हैज़ बीन हैवली
डिपेंडेंट ऑन इंपोर्ट स्पेशली फ्रॉम चाइना। इंडिया एंड चाइना ट्रेड क्रॉस्ड 100 बिलियंस विद अ लार्ज ट्रेड डेफिशिएंट
इन चाइना फेवर। देखिए तो हमारा जो ट्रेड है उसमें अगर आप देखेंगे तो अराउंड तो जो हमारा ट्रेड है चाइना के साथ इन 2026 के
अगर डाटा के हिसाब से जाएं तो हम अराउंड 160 बिलियन डॉलर है। राइट? तो उसमें जो है चाइना जो है हमें ज्यादा एक्सपोर्ट करता
है। वी हैव ट्रेड डेफिशिएट ऑफ अराउंड $10 बिलियन। सोचिए 100 बिलियन से ज्यादा हम ट्रेड डेफिशिएट में चल रहे हैं। मतलब वो
हमें ज्यादा एक्सपोर्ट कर रहे हैं बाकी कंट्रीज को एक्सपोर्ट करने के लिए। हम खुद इंपोर्ट डिपेंडेंट हैं। तो इसलिए इसे
काउंटर करने के लिए जो देन वही बात आ जाती है कि 16 टू 17% अभी कंट्रीब्यूट करता है मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर और हम उसको 25% तक
ले जाना चाहते हैं। तो अब हम आगे बढ़ते हैं। देखिए मेक इन इंडिया जो है वो जॉब्स क्रिएट करेगा और हमारे एक्सपोर्ट्स को
बढ़ाएगा। नेशनल मैन्युफैक्चरिंग मिशन आ चुका है। नेशनल मैन्युफैक्चरिंग मिशन से इन द गवर्नमेंट ऑफ इंडिया इनिशिएटिव टू
बूस्ट द मैन्युफैक्चरिंग इंक्रीस एक्सपोर्ट्स एंड क्रिएट जॉब्स एंड मेक इंडिया ग्लोबल प्रोडक्शन हब। ठीक है? तो
जो हमारा ये मेक इन इंडिया मिशन है। तो यहां पर क्या कवर है? देखिए इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रिक
व्हीकल्स, डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग, एमएसएमई मॉडर्नाइज़ेशन, रिन्यूएबल एनर्जी और रिन्यूएबल एनर्जी पर हमने बहुत बात करी
है। राइट? आपको पता होगा चाहे वो सोलर हो, न्यूक्लियर हो। ठीक है? देन देखें टारगेट इंक्रीज मैन्युफैक्चरिंग शेयर फ्रॉम 17 और
16 टू 25% ऑफ़ द जीडी। वही चीज़ आ जाती है। चलिए, अब एग्जांपल्स देखते हैं। देखिए, सो, डिफेंस एक्सपोर्ट्स फ्रॉम इंडियन
कंपनीज़ क्रॉस्ड 20,000 प्लस करोड़। ठीक है? तो, ये पॉइंट जरूर याद रखना। जीडी में जरूर यूज़ करना इस पॉइंट को। देन हाल तेजस
जो फाइटर जेट है हमने ऑर्डर करे हैं। राइट? वो 48,000 करोड़ के आसपास की डील है। मेक इन इंडिया है। ठीक है? तो वो डील
जो है 48,000 करोड़ की है। देन अब तक की सबसे बड़ी डील जो मेक इन इंडिया के अंदर आई वो कौन सी थी? एलयूए हेलीकॉप्टर लाइट
यूटिलिटी हेलीकॉप्टर्स या फिर एएलएच प्रचंड जो कि 50000 करोड़ की डील थी। तो यह जरूर बताना। ठीक है? ठीक है? तो यह एक
बहुत इफेक्टिव पॉइंट निकल कर आता है। देन AK203 राइफल जो अमेठी में आपने देखा होगा इसकी फैक्ट्री है और वहां पर जो है
प्रोडक्शन चल रहा है। यह रशियन ऑलदो दीज़ राइफल्स आर रशियन बट जो कॉमोनेंट की मैन्युफैक्चरिंग है राइट डिफरेंट-डिफरेंट
वो कहां पर हो रही है? वो इंडिया के अंदर ही हो रही है। देन हमारे पास एग्जांपल आता है Tata Airbus C295। तो C295 जो है
एयरक्राफ्ट हमने स्पेन से लिया है। और यह यहां पर जॉइंट मैन्युफैक्चरिंग है किसकी? Tata के साथ। देन अगर हम बात करें डिफेंस
सेक्टर के अपार्ट कौन सी है? फार्मासटिकल सेक्टर। सो इंडिया इज़ द फार्मेसी कैपिटल ऑफ द वर्ल्ड। ठीक है? कंपनीज़ लाइक कौन-कौन
सी कंपनीज़ हैं यहां पर? अगर हम देखें Sharma, डॉ. रेडी, लैबोरेटरी, SPL, देन सीरम इंस्टट्यूट ऑफ़ इंडिया आधार पूनावाला
के बारे में आपने जरूर सुना होगा। तो, देखिए, इंडिया इज़ वन ऑफ़ द वर्ल्ड लार्जेस्ट मेडिसिन प्रोड्यूसर सपाइंग ओवर
20% ऑफ़ ग्लोबल जेनेरिक ड्रग वॉल्यूम। अबाउट 60% ऑफ़ ग्लोबल वैक्सीन। ठीक है? तो, यह पॉइंट बहुत इफ़ेक्टिव है। 60 60% ऑफ़
ग्लोबल वैक्सीनंस जो पूरे वर्ल्ड में है, वो कहां से आ रही है? इंडिया से आ रही है। तो, सोचिए हम तो वैक्सीन कैपिटल हैं। ठीक
है? देन 20% ग्लोबल जेरिक ड्रग भी कहां इंडिया से आ रहे हैं। ठीक है? देन सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया आधार पूना वाला
प्रोड्यूस्ड दी कोवि शील्ड वैक्सीन ड्यूरिंग कोविड-19 सप्लाई वैक्सीन इन इंडिया एंड एक्सपोर्टिंग टू मेनी कंट्रीज।
इसमें जो हमारी नेबरिंग कंट्री थी हमने उनको भी दिया है। तो जब हम पढ़ेंगे इंडिया और हमारी नेबरिंग कंट्री का रिलेशन तो
वहां पर आप पॉइंट बोल सकते हैं कि देखिए इंडिया की कंपनी लाइक सीरम इंस्टट्यूट ऑफ़ इंडिया बाय द आधार पूनावाला हैज़ प्रोड्यूस
द कोवि शील्ड वैक्सीन ड्यूरिंग द कोविड-19 एंड सप्लाइड टू दी नेबरिंग कंट्रीज। ठीक है? देन डॉक्टर रेडी लैबोरेटरीज मेक
फार्मासटिकल इंग्रेडिएंट्स एंड फिनिश टैबलेट्स एंड सोल्ड इन 50 प्लस कंट्रीज। तो हम बता सकते हैं हाउ इंडिया इज़
हेल्पिंग दी अदर कंट्रीज एंड ग्लोबली कैसे हेल्प करता है इंडिया बाय सप्लाइंग मेडिसिंस 50 प्लस कंट्रीज को। देन सन
फार्मा लार्ज मैन्युफैक्चरिंग जनरिक मेडिसिन एंड सप्लाई एक्सपोर्ट अफोर्डेबल मेडिसिन ग्लोबली। राइट? देन हम बात करते
हैं इलेक्ट्रॉनिक्स एंड मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के अंदर। तो देखिए यहां पर जो है प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव स्कीम को लाया
गया है। 99% ऑफ़ फ़ सोल्ड इन इंडिया आर नाउ मेड इन इंडिया। तो ये भी बहुत अच्छा पॉइंट है। ये हम जीडी में यूज़ कर सकते हैं और
लेक्चर में। राइट? देन इंडिया इज़ द वर्ल्ड सेकंड लार्जेस्ट मोबाइल मैन्युफैक्चरर। इंडिया प्रोड्यूसेस मोर मोबाइल देन
ऑलमोस्ट एनी अदर कंट्री सेकंड ओनली टू चाइना। राइट? तो चाइना को काउंटर करना है हमें। इंडिया एक्सपोर्टेड ₹1,20,000 करोड़
वर्थ मोबाइल फ़स मेड इन इंडिया लेटेस्ट फाइनेंसियल ईयर में एस्टीमेट है। देन Apple iPhon आर असेंबल्ड इन इंडिया बाय
Foxक इन तमिलनाडु राइट एंड कर्नाटका प्रोड्यूस अराउंड 20% ऑफ़ ग्लोबल iPhone। तो जरूर आप बोलिए कि अराउंड 20% ऑफ़ ग्लोबल
iPhonस आर आल्सो बीन मैन्युफैक्चर इन इंडिया बाय दी Foxक। आल्सो Foxक हैज़ रिसेंटली मेड अ स्टेटमेंट दैट दे आर गोइंग
टू इन्वेस्ट मोर बिलियंस ऑफ़ एंड दे आर गोइंग टू इन्वेस्ट बिलियंस ऑफ़ डॉलर्स इन इंडिया। ठीक है? तो ये जो 20% है इससे भी
ज्यादा वो इनक्रीस करेंगे शेयर। ठीक है? और आपको पता है डॉन्ड ट्रंप ने जो है काफी बार जो है Foxक को थ्रेट करा है कि वापस
आप आकर अमेरिका में ही बिज़नेस करिए इंडिया के अंदर नहीं। ठीक है? देन ग्लोबल ब्रांड्स लाइक Del HP, Lenovo, असेंबल
लैपटॉप्स इन इंडिया। तो बहुत अच्छे पॉइंट्स हैं यार इलेक्ट्रॉनिक्स के। चाहे वो iPhone हो, आपके लैपटॉप्स हो, देन
मोबाइल फोंस हो। तो वो सब कहां है? इंडिया के अंदर ही बन रहा है। और 99% जो फोन अब इंडिया के अंदर सोल्ड हो रहे हैं। वो मेड
इन इंडिया है। मतलब मैन्युफैक्चर जो है वो इंडिया के अंदर ही होते हैं। राइट? वो आरएडी मे बी चाइना की हो सकती है वो
अमेरिका की हो सकती है Samsung एंड हम बात करते हैं सेमीकंडक्टर की राइट तो धोलेरा गुजरात अब ये नाम याद रखना है ठीक है हमें
याद रहता है कि सेमीकंडक्टर मिशन है इंडिया का बट हमें यह याद नहीं रहता कि कहां पर जो है मैन्युफैक्चरिंग हो रही है
प्लांट है कहां पर तो धोलेरा गुजरात के अंदर जो है वो यहां पर सेमीकंडक्टर प्लांट है और धोलेरा से मुझे बदला सोलर पावर
प्लांट आ रहा है जो कि राजस्थान में था राइट देन असम टाटा इलेक्ट्रॉनिक सेमीकंडक्टर असेंबली है तो असम याद रखो और
धोलेरा गुजरात याद रखो यहां पर जो है सेमीकंडक्टर प्लांट और अगर असम के अंदर है तो हम बोल सकते हैं यहां से नॉर्थ ईस्ट
में डेवलपमेंट होगा। राइट? नॉर्थ ईस्ट में जॉब मिलेगी। तो यहां से हम लुक ईस्ट पॉलिसी को भी यहां पर जो है अपना रहे हैं।
ठीक है? आगे बढ़ते हैं। इंडिया हैज़ लॉन्च सेमीकंडक्टर मिशन विद 76000 करोड़। राइट? सपोर्ट बिल्ट चिप्स, फैब्स एंड डिज़
फैसिलिटीज़। सेमीकंडक्टर आर यूज़्ड इन स्मार्टफोनस, लैपटॉप्स, कार्स, इलेक्ट्रिक व्हीकल, डिफेंस सिस्टम, एआई डिवाइस, डाटा
सेंटर्स। तो जो सेमीकंडक्टर्स हैं वो बैकबोन है इंडिया की। राइट? तो जैसे ही हमारा गलवान क्लैश हुआ था क्या है जो
सेमीकंडक्टर की शॉर्टेज देखने को मिली थी तब तो इसलिए जो है इस फील्ड में हमें जो है आत्मनिर्भर होना बहुत इंपॉर्टेंट है।
देन इंडिया एम टू रिड्यूस चिप इंपोर्ट एंड बिकम ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग। अब ये हमने टारगेट रखा है अंडर दी सेमीकंडक्टर मिशन।
देन टॉय मैन्युफैक्चरिंग बताइए। तो इंडिया रिड्यूस टॉय इंपोर्ट फ्रॉम चाइना एंड प्रमोटेड लोकल टॉय फर्म्स लाइक फंग स्कूल
इंडिया देन टॉय क्राफ्ट हैमलेज़ इंडिया। तो ये टॉय के एग्जांपल भी आप देख सकते हैं। आपने देखा होगा जो किर टॉय होते हैं और
पहले क्रैक्स आता था। राइट? तो उसके अंदर जो टॉयज़ होते थे छोटे-छोटे उस पे क्या लिखा होता था? मेड इन चाइना हर जगह पर मेड
इन चाइना। बट अगर अब आप देखेंगे तो टॉयज के ऊपर मेड इन इंडिया लिखा आता है। तो यस टॉयज़ सेक्टर में हमने जो है मेक इन इंडिया
टॉयज़ सेक्टर में जो है हमें बेनिफिट हुआ है। चलिए आगे बढ़ते हैं इलेक्ट्रिक व्हीकल के बारे में। ठीक है? तो अब यहां पर आप
अपना माइंड यूज़ करो। अपनी ऑब्जरवेशन यूज़ करो। क्या आपने EV गाड़ियां देखी हैं? तो क्या आप उसके एग्जांपल बता सकते हैं? Tata
EV, Mahindra, EV, ER, Ola है ना? तो जितनी भी EV गाड़ियां देखी हैं ना, जब भी आपके पास कोई ऐसा टॉपिक आता है तो आप उसके
एग्जांपल्स दीजिए। ठीक है? कार्स के एग्जांपल दे सकते हैं। बाइक्स के, स्कूटी के एग्जांपल दे दो। तो उससे आपकी नॉलेज शो
होती है। देन हमारे पास क्या था? प्रोडक्शन लिंक इंसेंटिव स्कीम थी। तो ये जो कंपनीज़ मैन्युफैक्चरर होती हैं, उनको
गवर्नमेंट ने इंसेंटिव्स दिए थे वर्थ ₹1,30,000 प्लस करो। ठीक है? देन एंप्लॉयमेंट लिंक इंसेंटिव के बारे में
हमने पढ़ा था। अबाउट 1 लाख करोड़ टू प्रमोट द प्राइवेट इन्वेस्टमेंट एंड क्रिएट अराउंड 3.5 करोड़ जॉब्स। चलिए न्यू बैटरी
सेमीकंडक्टर प्लांट्स आर बीइंग सेट अप टू सपोर्ट ईवी ग्रोथ। ठीक है? ओवर 1 मिलियंस ईवी सोल्ड एनुअली। क्या याद रहेगा कि 10
लाख व्हीकल सोल्ड हो रहे हैं इंडिया के अंदर और तमिलनाडु को कहा जाता है ईवी कैपिटल ऑफ इंडिया और इंडिया तो फार्मा
कैपिटल भी है और इंडिया जो है वो वैक्सीन कैपिटल भी है। अराउंड 60% ऑफ ग्लोबल वैक्सीन भी इंडिया जो है वो पूरे वर्ल्ड
में ग्लोबली सप्लाई करता है। चलिए अब बात करते हैं एडवांटेजेस की। मेक इन इंडिया के क्या एडवांटेज होंगे? क्रिएट लार्ज स्केल
जॉब फॉर यूथ, बूस्ट टेक्नोलॉजी, रिसर्च एंड इनोवेशन। और स्किल इंडिया भी यही कर रहा था। डिजिटल इंडिया भी। तो तीनों
प्रोग्राम एक तरीके से जुड़े हुए हैं। राइट? देन सपोर्ट इकोनॉमिक ग्रोथ रेज जीडीपी शेयर ऑफ मैन्युफैक्चरिंग। बिल्कुल
हमने देखा था मैन्युफैक्चरिंग मिशन में क्या था? 16% से लेके कहां तक? 25% तक जाना है। तो डेफिनेटली ये बात सच है। देन
रिड्यूस डिपेंडेंस ऑन इंपोर्ट स्पेशली चाइना। क्यों? क्योंकि हमारा जो इंपोर्ट ही है वो 100 बिलियन प्लस है। राइट?
इंडिया का जो इंपोर्ट सरप्लस है राइट? सरप्लस वो $100 बिलियन से ज्यादा है। देन इंक्रीस एक्सपोर्ट रेवेन्यू एंड स्ट्रेंथन
रूपी। बिल्कुल जितना ज्यादा आप एक्सपोर्ट करेंगे उतनी ज्यादा रुपी की वैल्यू बढ़ेगी अगर आप रूपी में ट्रेड करेंगे। और हमने तो
यह देख चुका है कि 20,000 प्लस करोड़ जो है वह डिफेंस सेक्टर ने सेल करे हैं। एक्सपोर्ट करे हैं वेपन। तो यह एक
एग्जांपल अच्छा है। चलिए अब हम बात करते हैं चैलेंजेस की। स्किल गैप अभी हम पढ़कर आ रहे थे। हमने पढ़ा था ना प्रधानमंत्री
कौशल विकास योजना के अंदर जो केंद्र हैं उनकी सर्टिफिकेशन की मान्यता नहीं देते एंप्लॉयर और 40 टू 45% ग्रेजुएट ही है
सिर्फ इंडिया के अंदर जो कि एंप्लॉयबल हैं। जिससे पता लगता है कि इंडस्ट्री रेडी तो हम है ही नहीं। इसी के लिए जो है हम
काफी सारी स्कीम्स लेके आए थे। देन इंपोर्ट डिपेंडेंस इंडिया स्टिल डिपेंड्स ऑन चाइना फॉर की कंपोनेंट्स लाइक
इलेक्ट्रॉनिक्स, एपीआई और सेमीकंडक्टर के लिए। और आपको पता है% वो ड्रग और मेडिसिंस हम सप्लाई करते हैं
जेरिक और 60% वैक्सीन। बट जो इसका रॉ मटेरियल आ रहा है ना वह भी हम चाइना से ही ले रहे हैं। तो अगर कल को चाइना के साथ
हमारी वॉर होती है और चाइना ट्रेड बंद करता है तो हमारी यह जो सेक्टर चाहे वह इलेक्ट्रॉनिक सेक्टर हमने पढ़ा था ना वहां
पर क्लाइमेट के अंदर एनवायरनमेंट के अंदर कि हमने पढ़ा था कि वहां पर जो 70 टू 80% हमारे जो ईवी कॉम्पोनेंट्स हैं सोलर
कॉम्पोनेंट है वो भी हम चाइना से ही लेके आ रहे हैं। तो इसलिए चाइना पे बहुत ज्यादा हैवली डिपेंडेड हैं हम लोग। देन ग्लोबल
कंपटीशन है कंट्रीज लाइक वियतनाम, बांग्लादेश चीपर लेबर है। फास्ट एक्सपोर्ट सिस्टम है वहां पर। फॉर एग्जांपल आप
टेक्सटाइल का ले सकते। तो आपने देखा होगा वेस्ट बंगाल के अंदर अभी इलेक्शन हुए थे तो प्राइम मिनिस्टर वहां पर गए थे और
उन्होंने जो है अराउंड 1600 करोड़ का जो है एक टेक्सटाइल पार्क जो है अह जो है एक टेक्सटाइल पार्क को ओपन किया गया है टू
काउंटर किया बांग्लादेश और वियतनाम को ठीक है देन इंफ्रास्ट्रक्चर इशूज़ पुअर लॉजिस्टिक हाई ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट एंड
पोर्ट डिले इनक्रीस मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट लैक ऑफ इनोवेशन रेट टपिज्म एंड करप्शन ऑफ इनोवेशन में आप बोल सकते हम लोग तो सिर्फ
0.9% ही खर्च करते हैं अपनी जीडीपी का किस पे रिसर्च पे है ना रिसर्च और इनोवेशन पे इसलिए हम जो है इनोवेशन में पीछे हैं अगर
बात करें तो जो हमारे मिनिस्टर थे पीयूष गोयल जो स्टार्टअप इंडिया का हमारा एक्सपो हुआ था उसमें उन्होंने कहा था कि इंडिया
जो स्टार्टअप बना रहा है वह कौन से हैं फ़ूड डिलीवरी है एप्स बना रहे हैं हम लोग जो है आइसक्रीम बना रहे हैं बट वेयर एस
अगर हम चाइना को देखें वो क्या है आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस हो चाहे वो रोबोटिक्स हो और गलगोटिया यूनिवर्सिटी में
भी आपने देखा होगा काफी कंट्रोवर्सी हुई तो हम इनोवेशन लैक करते हैं जो कि हमें जरूरत है देन रेड टैपिज्म हमने पढ़ा था
करप्शन के अंदर और इसको काउंटर करने के लिए हम डिजिटल इंडिया लेके आए थे देन करप्शन पे हमने बहुत बात करी है चलिए जीडी
का टॉपिक देखते हैं व्हिच सेक्टर हैज़ द ग्रेटेस्ट पोटेंशियल टू ड्राइव इंडियास जीडीपी ग्रोथ। सर्विस सेक्टर,
मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर, एग्रीकल्चर सेक्टर। तो आप बोल सकते हैं मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर यहां पर। ठीक है?
क्यों? क्योंकि देखिए चाइना का एग्जांपल अगर हम देखें तो चाइना का जो कंट्रीब्यूशन है मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में वो कितना
है? 26% है। इसलिए जो चाइना है डेवलप्ड है। और इंडिया का कितना है? 16% है। तो इसलिए हम मैन्युफैक्चरिंग मिशन लेकर आए थे
कि हम यहां पर जा सकें। और जैसे ही हम यहां पर जाएंगे तो हमें क्या है? इंडिया की जीडीपी की ग्रोथ देखनी पड़ेगी। प्लस हम
डेवलप नेशन भी बनेंगे। इसलिए मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर इंपॉर्टेंट है। देन जो मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर है वो क्या
करेगा? जॉब बहुत ज्यादा क्रिएट करेगा। हमने बात करी थी कि 18 करोड़ प्लस लोग जो है वो वर्किंग एज पॉपुलेशन के अंदर जाने
वाले हैं बाय 2030 और हमारी जो पॉपुलेशन है अराउंड 65 करोड़ पीपल्स आर बिलो 35 और जो मीडियन एज है वो कितनी है? 29 है। तो
इसलिए हमें जो है मैन्युफैक्चरिंग मिशन लाना पड़ेगा कि हम ज्यादा से ज्यादा मैन्युफैक्चरिंग करें। ज्यादा से ज्यादा
जॉब क्रिएट करें। स्किल दें। राइट? तो इसलिए हम यहां पर काफी सारे पॉइंट्स जो है जोड़कर जो है हम रिलेट करके मैन्युफैक्चर
सेक्टर में काफी सारे पॉइंट बोल सकते हैं। चलिए नेक्स्ट टॉपिक देखते हैं। वि इंडस्ट्री होल्ड्स द ग्रेटेस्ट पोटेंशियल
टू अपलिफ्ट लाइव्स ऑफ पीपल इन इंडिया? फार्मासटिकल इंडस्ट्री है, फिल्म इंडस्ट्री है या डिफेंस इंडस्ट्री है। ठीक
है? तो फार्मासटिकल इंडस्ट्री की हमने बात करी थी कि कोविड-19 में देखिए हमारी जान किसने बचाई? कोविड वैक्सीनंस ने बचाई। और
देखिए कि अगर फार्मासटिकल सेक्टर को बोलें तो हम बता सकते हैं कि देखिए इंडिया के अंदर जो है मेडिसिन बहुत ज्यादा चीप है।
अगर आप फॉरेन कंट्री यूएसए, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया जाएंगे तो वहां पर आपको अपॉइंटमेंट लेना पड़ता है। 6- सात दिन बाद
आपको बेसिक मेडिसिंस मिलती है लाइक पैरासिटामॉल और ये। तो वहां पर क्या है ऐसे जो फार्मेसी शॉप्स हैं हमारी हर
स्ट्रीट पे मिल जाती हैं। वो वहां पर ऐसा नहीं है। राइट? वहां पर बहुत ज्यादा स्ट्रिक्ट हैं इन सब चीजों को लेकर। बट
इंडिया के अंदर क्या बहुत चीपली आप जाकर जो है कोई भी मेडिसिन खरीद सकते हैं। अभी हमारी कंट्री डेवलप्ड नहीं हुई है। इसलिए
जो फार्मासटिकल सेक्टर है उसने जो है इंडिया को बचा रखा है बैकबोन की तरह। तो हेल्थ में जो है फार्मासटिकल सेक्टर हेल्प
कर रहा है। फिर बताइए कि देखिए 60% जो वैक्सीनेशन है वो इंडिया से ही बन के जा रही है। 20% जेनेरिक मेडिसिन अफोर्डेबल
मेडिसिन भी इंडिया से बन के आ रही है। और कोविड-19 में जान किसने बचाई? हमारी फार्मासटिकल इंडस्ट्री ने ही बचाई है। ठीक
है? तो इसलिए फार्मासटिकल इंडस्ट्री भी जो है लोगों की लाइफ को जो है अपलिफ्ट करता है। राइट? देन फिल्म और एंटरटेनमेंट
इंडस्ट्री। तो याद करो हमने जो एंटरटेनमेंट सेक्टर पढ़ा था उसमें हमने कितने पॉइंट्स में डिस्कस करा था ना कि
चाहे वह टूरिज्म हो लोगों का डिफेंस सेक्टर में जाना वो सब कुछ कैसे फिल्म और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री जो है इफेक्ट कर
रहा था वो सारी चीजें वहां पर हमने बात करी है देन यहां पर क्या आता है डिफेंस इंडस्ट्री तो आप बता सकते हैं कि इंडिया
जो है वो 2.5 फ्रंट वॉर है ना हो सकती है तो इसलिए डिफेंस इंडस्ट्री जो है हमारी बहुत जरूरी है और डिफेंस इंडस्ट्री 20000
प्लस करोड़ का एक्सपोर्ट कर चुकी है जॉब्स को क्रिएट कर रही है ज्यादा से ज्यादा और आपने देखा चाहे चाहे वो 50000 करोड़ का
ऑर्डर देना हो हमारा प्रचंड हेलीकॉप्टर का चाहे वो हमारा हाल तेजस का ऑर्डर देना हो C295 का देना हो या फिर हमारी AK203 हो और
अभी तो मिसाइल्स की तो बात हमने करी नहीं चाहे वो ब्रह्मोस अग्नि और कितनी मिसाइल एयर डिफेंस सिस्टम आकाश मिसाइल डिफेंस
सिस्टम वी शॉट डिफेंस सिस्टम देन हम लेजर सिस्टम के बारे में बात करें रडार सिस्टम अश्विनी और रोहिणी इंदिरा एंड स्वाति तो
ये सारी चीजें हैं जो डिफेंस इंडस्ट्री में तो बहुत पॉइंट्स हैं बोलने को और इस सबसे क्या होगा कि जो हमारी इस सब से क्या
होगा? सिक्योरिटी है इंडिया की वो ज्यादा से ज्यादा बढ़ेगी और अपलिफ्ट होगी लाइफ। तो तीनों पॉइंट्स पे आप बोल सकते हैं। आई
होप चलिए अब हम आगे चलते हैं स्टार्टअप इंडिया के ऊपर। राइट? तो देखिए स्टार्टअप क्या होता है? स्टार्टअप एक ऐसी कंपनी है
जो कि लेस देन 10 ईयर ओल्ड है और एज अ एनुअल टर्नओवर बिलो 100 करोड़। तो यह भी जो है डेफिनेशन चेंज हो चुकी है। तो यह भी
आप देख सकते हैं। इंडिया इज़ द थर्ड लार्जेस्ट स्टार्टअप इकोसिस्टम इन द वर्ल्ड आफ्टर यूएसए एंड चाइना। स्टार्टअप
हैव क्रिएटेड 12 लाख डायरेक्ट जॉब्स इन इंडिया। तो फेमस स्टार्टअप की बात करते हैं ब्लिंकट अब क्या है ये यूनिकॉर्न sविg
Zomato Flipkart oo sky रूट sky रूट एरोस्पेस ठीक है तो अगर डिलीवरी की बात हो या ई-कॉमर्स की बात हो चाहे वो हमारा होटल
टूरिज्म इंडस्ट्री की बात हो या फिर स्पेस की हम हर जगह पर जो है स्टार्टअप्स को लेकर आ रहे हैं। ठीक है बात करते हैं
Zomato की राइट फाउंडर दीपेंद्र गोयल सेक्टर फूड एंड डिलीवरी जॉब्स 3 लाख प्लस जॉब्स 3 लाख प्लस प्लस डिलीवरी पार्टनर्स
भी है। Ola फाउंडर भवेश अग्रवाल सेक्टर राइड हीलिंग प्लेटफॉर्म्स जॉब्स देखिए 10 लाख प्लस ड्राइवर्स पार्टनर्स सेल्फ
एंप्लॉयमेंट देन सेल्फ एंप्लॉयमेंट अगर आप स्टार्टअप करना चाहते हैं तो आप सेल्फ को एंप्लॉय करते हैं। साथ में जॉब भी क्रिएट
करते हैं। तो जॉब सीकिंग और जॉब सीकर से जो है आप क्या बन जाते हैं? जॉब प्रोवाइडर बन जाते हैं बिकॉज़ ऑफ़ स्टार्टअप। चलिए अब
बात करते हैं व्हाई स्टार्टअप इज़ेंट इकोनमी के अंदर। राइट? एंप्लॉयमेंट जनरेशन करता है स्टार्टअप। अभी हम पढ़कर आए थे
इसके बारे में। देन स्टार्टअप इकोस सिस्टम कंट्रीब्यूट बिलियंस ऑफ़ डॉलर्स टू इंडियास जीडीपी थ्रू इनोवेशन एक्सपोर्ट्स एंड
टेक्नोलॉजी ये सर्विस और आप इसको मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर से जोड़ सकते हैं और जितने भी पॉइंट हमने मैन्युफैक्चरिंग
सेक्टर स्किल इंडिया डिजिटल इंडिया में देखे तो उससे जोड़कर आप बता सकते हैं। हमने पढ़ा था जितने भी हमारे स्टार्टअप आ
रहे हैं वो मोस्टली डिजिटल इंडिया से लिंक हैं। इंटरनेट के थ्रू रन करते हैं। राइट डिजिटल सर्विज देते हैं। देन डिजिटल
इकॉनमी फinटेक्स स्टार्टअप्स लाइक Paytm, फोन पे इंक्रीसेस डिजिटल ट्रांजैक्शन एंड रेवेन्यू। देन मैन्युफैक्चरिंग हार्डवेयर
स्टार्टअप्स लाइक एथर एनर्जी, इलेक्ट्रिक स्कूटर्स और बोट इलेक्ट्रॉनिक्स, इंक्रीस इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन। ठीक है? चलिए अब
हम चलते हैं इनोवेशन मोस्ट इंटरेस्टिंग और इंपॉर्टेंट पार्ट जो आपको सबसे अलग करेगा। राइट? ये कुछ ऐसे एग्जांपल्स हैं। पिक्सल
बिल्स हाइपर स्पेक्ट्रिकल सेटेलाइट्स टू मॉनिटर क्लाइमेट एग्रीकल्चर एंड पोल्यूशन। तो पिक्सल का नाम याद रहेगा। तो कैसे
स्टार्टअप हमारी हेल्प कर रहे हैं क्लाइमेट चेंज को डील करने के लिए। तो पिक्सल का जरूर नाम याद रखिए। देन स्काई
रूट एरोस्पेस प्राइवेट स्पेस स्टार्टअप डेवलपिंग विक्रम रॉकेट फॉर लो कॉस्ट सेटेलाइट लॉन्चेस। और अभी इन्होंने जो है
अराउंड जो है फंडिंग भी ली है। राइट? देन Zo डेवलप्ड अ ग्लोबल सॉफ्टवेयर प्रोडक्ट्स फ्रॉम इंडिया। तो जो हम पहले क्या था
Microsoft के एक्सेल को यूज़ करते थे। पावर पॉइंट वर्ड को यूज़ करते थे। बट अब जो है हम Zo को यूज़ कर रहे हैं। अपने जितने भी
गवर्नमेंट ऑफिसिसेस हैं वो सारे शिफ्ट हो रहे हैं Zo के ऊपर। राइट? और Zoho जो है काफी सारे सिस्टम बनाता है। लाइब्रेरी
मैनेजमेंट सिस्टम एंड अदर थिंग। देन एथर एनर्जी मैन्युफैक्चरिंग स्मार्ट इलेक्ट्रिक स्कूटर प्रमोटिंग क्लीन
मोबिलिटी। राइट? तो ये स्कूटर्स तो आपने खुद देखे होंगे राइट रोड्स पर। तो आप इसके एग्जांपल दे सकते हैं। देन आईडिया फोर्स
टेक्नोलॉजी बिल सर्लेंस ड्रोन यूज्ड बाय इंडियन आर्मी एंड सिक्योरिटी एजेंसीज। ठीक है? चलिए अब हम बात करते हैं स्टार्टअप
सॉल्विंग सोशल प्रॉब्लम्स फूल डॉट को। यह भी बहुत अच्छा एग्जांपल है। देखिए कन्वर्ट टेंपल फ्लावर वेस्ट इंटू इंसेंस प्रोडक्ट
लाइक रिड्यूसिंग दी रिवर पोल्यूशन। मैंने एक रिपोर्ट में देखा था कि अयोध्या के जितने भी वेस्ट जो फ्लावर्स हैं जो कि
ऑफर्स होते हैं फॉर वरशिप वो सारे जब यूज़ हो जाते हैं। राइट? उनको क्या है? यह फूल डॉट को जो इकट्ठा करके जो है इससे क्या
बनाता है? है परफ्यूम इंसेंस प्रोडक्ट ये सब बना रहा है। तो यह क्या है? वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम है। ठीक है? तो यह क्या
है? एक सस्टेनेबल डेवलपमेंट वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम बोल सकते हैं हम लोग। देन दी राइट कनेक्ट्स दी फार्मर
डायरेक्टली टू बयरर्स एंड एग्रीकल्चर इनपुट्स इंक्रीजिंग फार्मर इनकम। ठीक है? तो फूल डॉट को याद रखना है। देहात याद
रखना है। देन Meesho Meesho के बारे में पता होगा आप सबको। सोशल कमर्स प्लेटफार्म एक्टिंग एज अ मिडिल मैन बिटवीन द
मैन्युफैक्चर एंड स्मॉल रिटेल। देखिए Meesho में क्या ऐसा डिफरेंट है? जो जितने भी स्मॉल रिटेलर्स हैं ना सपोज आप अपने
किसी भी स्टेट में या सिटी में देखेंगे छोटे-छोटे रिटेलर्स होते हैं मार्केट में जाएंगे वो डायरेक्टली सेल कर सकते हैं
Meesho पे। ठीक है? इससे हुआ क्या कि रूरल एरिया में भी जो है ई-कॉमर्स का ट्रेंड बहुत ज्यादा स्टार्ट हो गया और अफोर्डेबल
रेट पर जो है हमें प्रोडक्ट्स मिलना स्टार्ट हो गए। देन यहां पर क्या है? निरमाई यूजज़ एआई थर्मल टेक्नोलॉजी फॉर
अर्ली ब्रेस्ट कैंसर डिटेक्शन। तो ये भी जरूर आप याद रखें NMI के बारे में। ठीक है? चलिए आगे बढ़ते हैं। स्टार्टअप वर्किंग
इन कोर्ट लीगल सेक्टर। तो यहां पर प्रीसॉल्व 360 है प्रोवाइड ऑनलाइन डिस्प्यूट रिजल्वेशन प्लेटफार्म टू सेटल
डिस्प्यूट्स प्राइवेटली विदाउट लॉन्ग कोर्ट प्रोसीजर्स। तो यहां पर ये क्या करते हैं? दोनों पार्टीज को बुलाते हैं।
और यहां पर जो प्रीसॉल्व 360 के अंदर जो लोग होते हैं जो सॉल्व करते हैं वो भी एक्स जजेस होते हैं या फिर जो खुद सुप्रीम
कोर्ट के लॉयर रह चुके होते हैं तो वो दोनों पार्टीज को बुलाकर एक बीच का रास्ता निकालते हैं। सॉल्व करते हैं उनके
डिस्प्यूट्स को। राइट? तो इस आई थिंक दे हैव सॉल्वड वेरियस केसेस और शायद एक और स्टार्टअप था। अराउंड 40 लाख केसेस जो हैं
इन्होंने सॉल्व करें। सोचिए अगर ऐसे मोर स्टार्टअप आ जाए इंडिया के अंदर तो जो हमारे इतने सारे केसेस पेंडिंग है राइट 15
टू 16 इयर्स लग जाते हैं किसी एक कोर्ट केस के रिजल्ट को आने में तो यहां पर ऐसे स्टार्टअप बहुत ज्यादा हेल्प करेंगे देन
स्टार्टअप वर्किंग इन क्लाइमेट चेंज ब्लू स्काई एनालिटिक्स यूज सेटेलाइट डाटा एंड एआई टू मॉनिटर द पोलशन एंड क्लाइमेट रिस्क
क्या नाम है ब्लू स्काई एनालिटिक्स और पिक्सल का नाम जरूर याद रखना ठीक है पिक्सल हाइपर स्पेक्टिकल सेटेलाइट है जो
मॉनिटर करती है क्लाइमेट एग्रीकल्चर और पोलशन को तो स्काई रूट एरोस्पेस तो स्काई रूट याद रहेगा किसमें स्पेस के सेक्टर में
ज़हो वही आएगा किसमें? सॉफ्टवेयर के सेक्टर में, एथर इलेक्ट्रिक व्हीकल के सेक्टर में, Idea फोर्स टेक्नोलॉजी किस में आ
जाएगा? देन देखिए डिफेंस सेक्टर में बहुत सारे एग्जांपल हैं। ठीक है? तो डिफेंस सेक्टर में काफी सारे एग्जांपल आ जाएंगे।
ड्रोंस के बारे में पढ़ना, एआई के बारे में। तो बहुत सारी छोटी चीजें जो है अब इंडियन आर्मी ऑर्डर कर रही है। वो सारे
कहां स्टार्टअप से ही आ रहा है। ठीक है? चलिए आगे देखते हैं। गवर्नमेंट इनिशिएटिव स्टार्टअप इंडिया स्कीम। देखिए स्टार्टअप
इंडिया स्कीम 2016 लॉन्च बाय प्राइम मिनिस्टर नरेंद्र मोदी। की बेनिफिट क्या था? ठीक है? टैक्स एक्सेंपशन फॉर 3 इयर्स।
देखिए स्टार्टअप इंडिया में था क्या? यही था कि टैक्स एक्सेंपशन मिल जाता है आपको। देन फंडिंग प्रोवाइड करी थी। यहां पे
स्टार्टअप सीड प्रोग्राम था। जैसे कि स्टार्टअप इंडिया सीड फंड स्कीम 945 करोड़ फंड। ठीक है? मनी हैज़ बीन डिस्ट्रीब्यूटेड
थ्रू दी इनक्यूबेटर्स इन आईआईटी आईएम यूनिवर्सिटीज़ एंड रिसर्च इंस्टट्यूट टू सपोर्ट अर्ली स्टेज स्टार्टअप्स। तो ये
अवेयरनेस फैला दी काफी ज्यादा। कॉलेजेस के साथ टाई अप करा। तो इसलिए जो है स्टार्टअप इंडिया जो है सक्सेसफुल रहा। चलिए हम बात
करते हैं शार्क टैंक की। ठीक है? तो ये एग्जांपल भी आप यूज़ कर सकते हैं क्योंकि शार्क टैंक जो है स्टार्टअप से लिंक है।
राइट? एक तरीके से वो प्रमोट कर रहा है स्टार्टअप को। तो यहां पर क्या है? फंडिंग मिलती है। राइट? मेंटरशिप विज़िबिलिटी
प्रोडक्ट और ब्रांड अवेयरनेस होती है जब आपको शार्क टैंक का प्लेटफार्म मिलता है और उससे मार्केट जो है आपके प्रोडक्ट की
बढ़ती है। तो यह शार्क टैंक का एग्जांपल जरूर याद रखना। तो चलिए अब चैलेंजेस को देख लेते हैं। हाई फेलियर रेट। तो जितने
भी स्टार्टअप ओपन हो रहे हैं अराउंड 90% तो फेल ही हो जा रहे हैं फर्स्ट फाइव इयर्स के। यह आईबीएम की स्टडी बताती है।
यानी कि अगर 100 स्टार्टअप बन रहे हैं एक साल के अंदर तो 90 तो फेल हो ही जाएंगे। ठीक है? देन मार्केट कंपटीशन स्मॉल
स्टार्टअप स्ट्रगल अगेंस्ट बिग कंपनीज़ एग्जांपल Snapdal लॉस्ट मार्केट शेयर ड्यू टू Amazon एंड Flipkart। आज आप ग्रोसरी के
मार्केट में जाना चाहते हो तो कितनी सारी कंपनीज़ हैं। ठीक है? चाहे वह Tata हो, Fortun हो। तो क्या एक छोटा रिटेलर उस
लेवल पर जा सकता है? नहीं। तो उसे आउट ऑफ द बॉक्स सोचना पड़ेगा। तो इसलिए जो स्मॉल स्टार्टअप जो हैं वो स्ट्रगल करते हैं
कॉन्सेंटली टू फाइट द बिग कंपनीज़। राइट? देन फंडिंग प्रॉब्लम है। मेनी स्टार्टअप शट ड्यू टू लैक ऑफ कैपिटल। तो ये चीज़ भी
हैं। देन काफी सारे स्टार्टअप हैं ऐसे जो कि राइज़ करें और बहुत जल्दी फॉल भी हुए। राइट? अह जैसे कि आप एग्जांपल दे सकते हैं
BJUS का। अनअकडमी को भी रिसेंटली अपग्रेड ने खरीद लिया है। तो काफी सारे ऐसे स्टार्टअप थे जो जिन्होंने जो स्टेक
होल्डर थे उन्होंने बेच दिया अपने स्टार्टअप को किसी और कंपनी को या फिर वह पूरी तरीके से खत्म हो गए हैं। चलिए व्हाट
इज़ दी मोस्ट क्रिटिकल फैक्टर इनफ्लुएंसिंग दी सक्सेस एंड ग्रोथ ऑफ़ एंटरप्रेन्योरशिप। ठीक है? तो एक्सेस टू फंडिंग एंड
इन्वेस्टमेंट इनोवेशन आइडियाज़ एंड टेक्नोलॉजी और गवर्नमेंट पॉलिसीज़ एंड रेगुलेटरी सपोर्ट। तो देखिए गवर्नमेंट
पॉलिसी बता सकते हैं। स्टार्टअप इंडिया के अंदर थाउज़ ऑफ़ करोड़ जो है गवर्नमेंट ने सीड प्रोग्राम के अंदर बांटे हैं।
इनक्यूबेडर्स के अंदर बांटे हैं। इनोवेशन के अंदर मैंने बहुत सारे पॉइंट बताए। चाहे वो फूल डॉट को हो बताया था ना फूल से कैसे
इंसेंस बना रहे हैं परफ्यूम बना रहे हैं देन हमने निर्मय के बारे में पढ़ा था जो अर्ली ब्रेस्ट कैंसर अवेयरनेस था फिर हमने
पढ़ा था जोहो स्काई रूट एरोस्पेस प्रीसॉल्व 360 जो कोर्ट के केसेस को सॉल्व कर रहे थे प्राइवेटली और भी बहुत एग्जांपल
देन आपने कोई भी स्टार्टअप अगर सुना है जो आपको याद है वह भी आप जरूर बताइए eथ Ola zomatobling Flipkart तो यह सब कुछ में
इनोवेशन आइडियाज और टेक्नोलॉजी में आ जाएगा डिफेंस सेक्टर भी जोड़ सकते हैं। देन एक्सेस टू फंडिंग एंड इन्वेस्टमेंट।
तो, यह भी आप बता सकते हैं कि 90% जो स्टार्टअप है, वह फेल हो जाते हैं हमारे। फंडिंग नहीं मिलती। कुछ पॉइंट्स हैं जो आप
यूज़ कर सकते हैं। चलिए, आगे देखते हैं। व्हिच इनिशिएटिव होल्ड्स द ग्रेटेस्ट पोटेंशियल टू इंप्रूव इंडियास ओवरऑल
डेवलपमेंट? तो डिजिटल इंडिया वुमेन एंपावरमेंट हम पढ़कर आए थे। तो, अब आप जो है स्टार्टअप इंडिया के ऊपर भी आई होप बोल
सकते हैं। चलिए, आगे चलते हैं। सो, व्हाट इज़ ड्राइविंग दी शिफ्ट इन इंडियास वर्क फ़ोर्स फ्रॉम ट्रेडिशनल एंप्लॉयमेंट टू
अनकन्वेंशनल करियर पाथ, एंटरप्रेन्योरशिप एंड स्टार्टअप कल्चर? तो ये वही बोलना चाह रहा है कि पहले जो हमारे वर्क फोर्स थे वो
टोडिशनल एंप्लॉयमेंट करती थी। गवर्नमेंट जॉब में जाती थी, सर्विस सेक्टर में जाती थी। बट तो अब ऐसा क्या शिफ्ट आ गया है? तो
एंटरप्रेन्योरशिप स्टार्टअप कल्चर तो बताइए आप कि एंटरप्रेन्योरशिप और स्टार्टअप कल्चर जो है आपने खुद ऑब्जर्व
करा होगा अपने कॉलेजेस में। ठीक है? अपने आसपास तो ये हम यहां पर बता सकते हैं। देन स्पोर्ट्स और आर्ट कल्चर। तो आर्ट कल्चर
एंड क्रिएटिव इंडस्ट्री। तो क्रिएटिव इंडस्ट्री के अंदर ना सोशल मीडिया आ जाएगा। राइट? तो काफी सारे पॉइंट्स जो हैं
एंटरप्रेन्योरशिप और स्टार्टअप कल्चर में आपको मिल जाएंगे। अपने नेक्स्ट टॉपिक की तरफ चलते हैं जो है नीति आयोग। नेशनल
इंस्टट्यूट फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया। नेशनल इंस्टट्यूट फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया। डेफिनेशन क्या है? देखिए नीति
आयोग इज दी पॉलिसी थिंक टैंक ऑफ द गवर्नमेंट। तो ये क्या है? एक थिंक टैंक है गवर्नमेंट का। इस्टैब्लिश्ड कब हुआ?
2015 में। इसने रिप्लेस करा था प्लानिंग कमीशन को। पहले प्लानिंग कमीशन जो है प्लान बनाती थी। इसने क्या है? रिप्लेस
करा है प्लानिंग कमीशन को। टू प्रमोट कोऑपरेटिव फेडरलिज्म इनोवेशन एंड स्ट्रेटेजिक पॉलिसी मेकिंग। तो अगर हम एक
वर्ड में कहें तो यह गवर्नमेंट का थिंक टैंक है। राइट? तो प्रोवाइड रिसर्च एंड पॉलिसी रेकमेंडेशन एग्जांपल पॉलिसी पेपर
ऑन इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, वाटर मैनेजमेंट, डिजिटल इकॉनमी। तो जितने भी स्टार्टअप इंडिया, स्किल इंडिया, मैन्युफैक्चरिंग
इंडिया, एआई समिट तो पहले जो है इस पे जो ये थिंक टैंक है ये इसके ऊपर सोचता है। फिर पॉलिसी बनती है। फिर स्कीम्स बनती है।
ठीक है? तो जरूर ये नीति आयोग को आप जोड़ सकते हैं। स्टार्टअप इंडिया, स्किल इंडिया, डिजिटल इंडिया से। चेयर पर्सन कौन
है? हमारे प्राइम मिनिस्टर हैं इसके। ठीक है? चलिए आगे बढ़ते हैं। व्हाई नीति आयोग वास फॉर्म्ड? रिप्लेस सेंट्रलाइज्ड
प्लानिंग कमीशन मॉडल अर्लियर फाइव ईयर प्लान कंट्रोलोल्ड स्टेट फंड अर्लियर क्या था फाइव ईयर प्लान था तो आपने पढ़ा होगा
ठीक है एफकेआर सीडीएस एनडीए में सबने पढ़ा होगा फाइव ईयर प्लान के बारे में देन प्रमोट कोऑपरेटिव एग्जांपल सेंटर स्टेट
पॉलिसी डिस्कशन ऑन एग्रीकल्चर रिफॉर्म्स एंड डिजिटल इकॉनमी यहां पर क्या है कि सेंटर पर जो पॉलिसीज बनती हैं प्लस स्टेट
के लिए बनती है तो दोनों पर जो है यहां पर डिस्कशन होता है और क्या होता है कि दोनों की डेवलपमेंट की बात की जाती है। देन
एनकरेज इनोवेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप क्रिएशन ऑफ़ अटल इनोवेशन मिशन। ठीक है? अटल टिंकरिंग लैब भी जो है यहां पर ओपन हो गया
है। इस लैब्स के अंदर क्या है? डिफरेंट टाइप्स ऑफ रोबोटिक्स, आईटी, चिप्स और इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स के बारे में। तो
ये सारी चीजें बच्चों को प्रोवाइड की जाएगी। वो इस पे एक्सपेरिमेंट करेंगे, मैन्युफैक्चर करेंगे और इससे क्या होगा?
जो इनोवेशन है वो बढ़ेगा। ठीक है? चलिए आगे बढ़ते हैं। अटल इनोवेशन मिशन इसके अंदर आया। इंडियास इनोवेशन इंडेक्स। ठीक
है? तो ये जो है नीति आयोग वो अटल इनोवेशन मिशन लेके आया। और ये जो है इंडियास इनोवेशन इंडेक्स भी रिलीज़ करता है। कौन?
नीति आयोग। नीति आयोग ने ही ये जो है नेशनल इलेक्ट्रिक मोबिलिटी इनिशिएटिव लेकर आया। एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट प्रोग्राम
चलाया गया। जहां पर जो है ये जो हमारे डिस्ट्रिक्ट्स होते हैं उनको ये बांटते हैं कैटेगरीज के अंदर कि कौन सा किस ठीक
है? तो किस स्टेट को जो है फॉर एग्जांपल यहां पर आपने सुना होगा बीमारू स्टेट का कांसेप्ट। तो कौन सा स्टेट और सिटी जो है
वो अच्छा नहीं कर रही होती है। तो उसके लिए क्या होता है? अदर स्कीम्स को जो है लाया जाता है। फॉर एग्जांपल जल जीवन मिशन,
जलशक्ति अभियान। तो ये सारी चीजें लाई जाती है एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट प्रोग्राम के अंदर और जिसकी परफॉर्मेंस अच्छी होती
है और रेटिंग दी जाती है तो ये सब किसके इसके अंदर आ जाएगा। नीति आयोग जो है हेल्थ इंडेक्स को रिलीज़ करता है। कंपोजिट वाटर
मैनेजमेंट इंडेक्स को रिलीज़ करता है। तो आप बता सकते हैं। देखिए नीति आयोग जो है वो इनोवेशन के ऊपर सोच रहा है। इनोवेशन
इंडेक्स निकाल रहा है। एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट प्रोग्राम निकाल रहा है जिससे अवेयरनेस मिल रही है। कौन सा डिस्ट्रिक्ट
जो है कितना ग्रोथ कर रहा है। कहां पर जो है वहां पर डेवलप और कौन सी जगह पर जो है डेवलपमेंट की जरूरत है। देन इलेक्ट्रिक
व्हीकल को भी प्रमोट कर रहा है और हेल्थ इंडेक्स और कंपोजिट वाटर मैनेजमेंट इंडेक्स। तो है ही। चलिए आगे चलते हैं।
मेजर इनिशिएटिव अटल इनोवेशन मिशन के बारे में। तो प्रमोट इनोवेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप अटल टिंकरिंग लैब इन
स्कूल्स वेयर स्टूडेंट्स लर्न रोबोटिक्स एआईएन कोडिंग अटल इनक्यूबेशन सेंटर सपोर्टिंग स्टार्टअप इन यूनिवर्सिटीज़ एंड
रिसर्च इंस्टट्यूट्स थाउजेंड्स ऑफ़ स्कूल्स नाउ हैव दी इनोवेशन लैब्स फॉर स्टूडेंट्स। ठीक है? चलिए आगे देखते हैं अटल टिंकिंग
लैब के बारे में। तो देखिए प्रैक्टिकल लर्निंग होगी। रोबोटिक्स, इलेक्ट्रॉनिक कॉमोनेंट, सर्किट्स, ड्रोन, आईओटी सेंसर,
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस देन इंडस्ट्री आईएसओ लिंक पार्टनरशिप विद इसरो। राइट? स्टूडेंट्स गेट रियल एक्सपोज़र्स जो कॉलेज
के स्टूडेंट हैं, स्कूल के स्टूडेंट्स हैं। देन माइंडसेट बिल्डिंग हो जाता है। एंटरप्रेन्योरशिप, क्रिएटिव थिंकिंग,
स्कूल लेवल इंप्लीमेंटेड फ्रॉम क्लास सिक्स टू 12थ। देन क्या है? फ्यूचर रेडी है। राइट? तो फ्यूचर में प्रिपेयर करेगा
स्टूडेंट को टू फॉर टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन। तो देख सकते हैं ड्रोन, बेसिक इलेक्ट्रॉनिक्स, आई ओटी, आई ओटी, 3D
प्रिंटिंग रोबोटिक्स। ठीक है? चलिए आगे चलते हैं। एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट प्रोग्राम के बारे में देख लेते हैं।
डेवलप्स इंडियास मोस्ट बैकवर्ड डिस्ट्रिक्ट्स। जो भी हमारे बैकवर्ड डिस्ट्रिक्ट है जिसको डेवलपमेंट की जरूरत
है। जैसे कि फॉर एग्जांपल दंतेवाड़ा छत्तीसगढ़ इंप्रूव स्कूल्स अटेंडेंस एकलव्य मॉडल स्कूल आया था ना अभी सब पढ़
के आए हैं हम दंतेवाड़ा सुखमा के बारे में गच्छ चिरौली डिस्ट्रिक्ट के बारे में बस सर्विस शुरू हुई तो वो सब रिलेट करो यहां
पर ये सारे पॉइंट आ जाएंगे ठीक है कुपवाड़ा जम्मू कश्मीर इंप्रूवमेंट हेल्थ केयर सर्विसेस मेवात हरियाणा इंप्रूवमेंट
इन मैटरनल हेल्थ इंडिकेटर अच्छा हरियाणा का नाम आया और हमने एक और रिपोर्ट बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के अंदर क्या पढ़ा था कि
जो रेश्यो था वो 834 से 900 आ चुका था बट हमने देखा था कुछ विलेज ऑफ रोहतक थे जहां पर रेश्यो सिर्फ सिर्फ 800 से नीचे था और
कुछ विलेजेस के अंदर 300 के आसपास था। तो इसलिए अब यहां पर क्या है? देखिए एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट प्रोग्राम लाया
गया जिसमें मैटरनल हेल्थ इंडिकेटर लाए गए। देन फोकस सेक्टर्स लाइक हेल्थ, एजुकेशन, एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर। देन नेशनल
इलेक्ट्रिक मोबिलिटी मिशन के बारे में आप पढ़ सकते हैं। यहां पे फेम स्कीम आई थी फास्टर अडॉप्शन एंड मैन्युफैक्चरिंग ऑफ़
इलेक्ट्रिक व्हीकल। आई रिपीट फास्टर अडॉप्शन एंड मैन्युफैक्चरिंग ऑफ इलेक्ट्रिक व्हीकल। तो, यह हम पढ़ के आए
थे इलेक्ट्रिक व्हीकल के अंदर। ठीक है? तो, वही सारे पॉइंट्स हैं। पढ़ो, इसे रिवाइज करो, दो-तीन बार बोलो। तो आई होप
आपको ये चीजें समझ में आएंगी। देन नेशनल न्यूट्रिशन स्ट्रेटजी फोकस ऑन रिड्यूसिंग माल न्यूट्रिशन एंड चाइल्ड स्टंटिंग। ठीक
है? तो चाइल्ड स्टंटिंग में इंडिया जो है वो साउथ अफ्रीका से ठीक है? और आपको पता है चाइल्ड स्टंटिंग में रिसेंटली अभी डाटा
आया है 2026 मई का कि इंडिया जो है वो साउथ अफ्रीका से भी वर्स्ट परफॉर्म कर रहा है चाइल्ड स्टंटिंग के अंदर। हमारे जो
चिल्ड्रंस हैं करोड़ ऑफ़ चिल्ड्रंस आर माल न्यूट्रिशन आर सफरिंग फ्रॉम माल न्यूट्रिशन। ठीक है? पॉलिसी सपोर्ट पोषण
अभियान आपने पढ़ा था ना पीएम पोषण स्कीम मिड डे मील स्कूल देन कंपोजिट वाटर मैनेजमेंट इंडेक्स इंप्रूव वाटर मैनेजमेंट
इन स्टेट्स गुजरात आंध्र प्रदेश रैंक हाई इन वाटर कंजर्वेशन पॉलिसी रेकमेंडेशन इन रेन वाटर हार्वेस्टिंग इरीगेशन रिफॉर्म्स
देन हमारे पास आता है हेल्थ इंडेक्स रिपोर्ट इंप्रूव हेल्थ केयर परफॉर्मेंस ऑफ स्टेट्स केरला रैंक अमंग दी टॉप
परफॉर्मिंग स्टेट्स इन हेल्थ केयर राइट और उत्तर प्रदेश एंड बिहार इंप्रूविंग वैक्सीनेशन एंड मैटरनल हेल्थ सर्विस देन
इंडिया इंडिया इनोवेशन इंडेक्स कर्नाटका रैंक एस द टॉप इनोवेशन स्टेट ड्यू टू स्ट्रांग स्टार्टअप इकोसिस्टम लिंक करो
स्टार्टअप इंडिया से कौन सा स्टेट है कर्नाटका है दिल्ली एंड महाराष्ट्र हाई रैंकिंग रिसर्च एंड टेक्नोलॉजी इनोवेशन
कुछ रिपोर्ट्स हैं जो आप यूज़ कर सकते हैं कि कर्नाटका स्टार्टअप में टॉप है दिल्ली और महाराष्ट्र जो इनोवेशन में टॉप है और
अगर हम हेल्थ केयर की बात करें तो केरला टॉप करता है। प्लस अह जो हमारा इंप्रूविंग वैक्सीनेशन और मैटरर्नल हेल्थ सर्विज जो
है वह कहां उत्तर प्रदेश और बिहार में हो रही है। चैलेंजज़ फॉर नीति आयोग क्या है? डाटा रिलायबिलिटी है। राइट? तो देखिए
कर्नाटका वाटर कंजर्वेशन एक प्रोग्राम चलाया गया। तो वहां पर क्या होता है कि आपको छोटे-छोटे पोंड्स बनाने हैं, टैप
वाटर देने हैं। तो वहां पर आपको फोटो अपलोड करनी है। राइट? बट यहां पर देखा गया कि एडिटेड और एआई इमेजज़ को अपलोड कर दिया।
एडिटेड और एआई इमेजज़ को अपलोड कर दिया गया और और अवार्ड ले लिया गया। ठीक है? तो अब अगर आगे देखें हम नो इनफोर्समेंट है। अह
सो नीति आयोग जो है वो रेकमेंड कर सकती है लैंड लेबर रिफॉर्म्स को। बट व्हेन इट कम्स टू इनफोर्समेंट इनके पास ये पावर नहीं है।
फॉर एग्जांपल देखिए पंजाब और वेस्ट बंगाल ने कहा कि हम नहीं फॉलो करेंगे जो लैंड और लेबर पॉलिसी है। तो इससे हमें पता लगता है
कि ये सिर्फ पॉलिसी बना सकते हैं बट इंप्लीमेंटेशन की पावर इनके पास नहीं है। देन हेल्थ इनकलिटी तो आप देखेंगे केरला
टॉप पर उत्तर प्रदेश लो पर तो दोनों बीच में बैलेंस करना थोड़ा डिफिकल्ट है। देन ह्यूज पॉपुलेशन चैलेंज हमने बात करी थी
पॉपुलेशन के अंदर कि इंप्लीमेंटेशन ऑफ़ पॉलिसी इज़ वेरी डिफिकल्ट व्हेन पॉपुलेशन इज़ सच हाई एंड देन जॉब एंड स्किल गैप। तो
आप जॉब तो जनरेट कर रहे हैं बट यहां पर प्रॉब्लम आती है फिर स्किल की तो आप स्किल सेंटर करते हैं। इतने में जॉब बदलती है।
तो देयर इज़ ऑलवेज कांस्टेंट मिसमैच बिटवीन द जॉब एंड द स्किल। सो दैट इज़ ऑल अबाउट दी नीति आयोग। ओके नाउ [संगीत] लेट्स स्टार्ट
विद डे सेवन। राइट? सो इन डे सेवन वी आर गोइंग टू कवर दी टॉपिक्स दैट आर रिलेटेड टू हेल्थ [संगीत] एंड फिटनेस। ठीक है? सो
फर्स्ट वी विल कवर दी स्पोर्ट्स पॉलिसी और स्पोर्ट्स इन इंडिया। देन सेकंड वी आर गोइंग टू कवर दी आईपीएल इंडियन प्रीमियर
लीग। एंड द थर्ड [संगीत] वन इज द योगा एंड फोर्थ वन इज द हेल्थ केयर सिस्टम ऑफ इंडिया एंड वी आर आल्सो गोइंग टू कवर दी
टू जीडी टॉपिक्स व्हिच केम इन आवर वेरियस बोर्ड्स। [संगीत] सो फर्स्ट हमारे पास आता है इंडियास स्पोर्ट्स पॉलिसी या फिर हम कह
सकते हैं स्पोर्ट्स इन इंडिया। [संगीत] तो ये दो लेक्चरेट के टॉपिक देखने को मिले थे। फर्स्ट वन था स्पोर्ट्स इन इंडिया एंड
सेकंड वन था इंडिया स्पोर्ट्स पॉलिसी। तो दोनों में से कोई भी आ सकता है। बट मोर ओवर द कंटेंट विल रिमेन दी सेम। यह दोनों
टॉपिक जो हैं एक दूसरे से रिलेटेड हैं। स्पोर्ट्स [संगीत] प्ले एन इंपॉर्टेंट रोल इन फिजिकल फिटनेस, डिसिप्लिन एंड
इंटरनेशनल रेपटीशन ऑफ़ अ [संगीत] कंट्री। ठीक है? तो बेसिकली ये कहना चाहता है देखिए स्पोर्ट्स सबसे पहले तो हमें
फिजिकली फिट रखता है। मेंटली साउंड रखता है। साथ ही [संगीत] साथ जो इंटरनेशनल रेपटीशन ऑफ़ अ कंट्री है वो भी जो है
प्रमोट करता है। फॉर एग्जांपल अगर आप देखेंगे तो चाइना। चाइना का अगर नाम आता है तो क्या आता है हमारे दिमाग में कि
स्पोर्ट्स में अच्छे होंगे। ऑस्ट्रेलिया स्पोर्ट्स में अच्छा होगा। ठीक है? यूएसए से। तो हम इससे कह सकते हैं कि स्पोर्ट्स
जो है एज अ सॉफ्ट पावर का काम भी करता है। नाउ इंडिया डज नॉट हैव ऑफिशियली राइट इंडिया डज नॉट ऑफिशियली हैव अ नेशनल
स्पोर्ट्स। ऑलदो फील्ड हॉकी इज अ ट्रेडिशनली कंसीडर्ड टू बी द नेशनल गेम। तो अगर हम प्रेस इनेशन ब्यूरो के
अकॉर्डिंग चलेंगे तो हमारे पास कोई भी अपना नेशनल स्पोर्ट्स नहीं है। राइट? बट हम कई टेक्स्ट बुक्स में देखते हैं फील्ड
हॉकी दिखाता है तो वही चीज़ यहां पर बताई हुई है। देन पपुलेशन हमारे इंडिया की है 140 करोड़। बट अगर आप देखेंगे एट 2024 अह
समर ओलंपिक्स आवर पोज़शन वाज़ 71 वेरियस कंट्रीज़ लाइक पाकिस्तान, ईरान भी हमसे आगे था। राइट? देन अगर हम एशियन गेम्स की बात
करें अगेन हमारी पॉपुलेशन 140 करोड़ बट हमारी पोजीशन जो थी फोर्थ थी ओवरऑल। साउथ कोरिया एंड जापान जो है वो भी हमसे आगे
थे। तो इससे हमें क्या पता लगता है कि इंडिया जो है वो स्पोर्ट्स में काफी पीछे है। राइट? तो देखिए उसका रीज़न क्या है?
अगर हम क्रिकेट को देखेंगे इंडिया के अंदर तो इंडिया की वन ऑफ दी स्ट्रांगेस्ट टीम है पूरे वर्ल्ड के अंदर। तो ICC ओडीआई
रैंकिंग में देखेंगे तो टॉप थ्री के अंदर आती है हमेशा। ठीक है? एंड गवर्निंग बॉडी कौन सी है हमारी? BCCI है जो वन ऑफ़ द
रिचेस्ट बोर्ड है। एंड अगर हम सारे बोर्ड्स में देखें और अगर हम BCCI का रेवेन्यू देखेंगे तो इट इज़ अराउंड ₹9700
करोड़। और अगर हम इंडिया का टोटल बजट देखें स्पोर्ट्स का बजट वो है 4400 करोड़। तो यहां से क्या इनफर कर रहे हैं हम? कि
हमारा जो फोकस है वो मेनली किस पर है? क्रिकेट पर है। हमारी जो पॉपुलेशन भी है वो ज्यादा क्रिकेट देखना पसंद करती है। और
हम नेगलेक्ट कर रहे हैं बाकी स्पोर्ट्स को। ठीक है? तो ये एक अच्छा पॉइंट हमारे पास निकल कर आता है कि क्यों इंडिया की
पोजीशन जो है वो वर्स्ट है इन ओलंपिक्स और एशियन गेम्स। देन अगर हम फुटबॉल की बात करें तो फुटबॉल में हमारी जो रैंकिंग है
वो 100 टू 105 के अराउंड है और कैप्टन हमारे सुनील छत्री। सुनील छत्री वंस पब्लिकली रिक्वेस्टेड इंडियन फैंस टू कम
टू स्टेडियम टू सपोर्ट द नेशनल टीम शोविंग लो पब्लिक इंगेजमेंट। तो अगर हम आईपीएल मैचेस को ही देखें तो वहां पर क्या होता
है? स्टेडियम पैक्ड होते हैं। बट व्हेन इट कम्स टू फुटबॉल बहुत ही कम लोग हैं। तो अगर हम फुटबॉल की बात करें तो फुटबॉल अगर
पॉपुलर कहां पर है? नॉर्थ ईस्ट एरिया में है और कुछ साउथ के स्टेट्स में है। इनमें जो है फुटबॉल को भी पूरे इंडिया के अंदर
पॉपुलर करना है। ठीक है? चलिए आगे चलते हैं। यंग एथलीट्स की बात कर लेते हैं। अविनाश साबले एथलेटिक्स एशियन गोल्ड
इंडियन आर्मी से। ठीक है? तो ये सूबेदार हैं इंडियन आर्मी के अंदर और इन्होंने जो है स्टेपल चेस और 5000 मीटर्स के अंदर भी
मेडल लिए हैं। देन मनु भाकर जो हरियाणा से है वो किससे? शूटिंग से रिलेटेड है। उन्होंने टू ओलंपिक मेडल्स जीते थे इन
2024 ओलंप। देन ओजस, अंतिम बंगाल, निखत जरीन एंड आर वैशाली इन चेस क्रिकेट। तो ये कुछ नाम आपको याद रखने हैं। बिकॉज़ जब आप
लेक्चर देंगे तो आपको इन प्लेयर्स क्योंकि ये यंग एथलीट्स हैं। ये फ्यूचर है इंडिया का। राइट? इनसे इंस्पायर होते हैं लोग। तो
आपको एग्जांपल्स जरूर याद रखने हैं। एनी फोर और फाइव यू कैन लर्न लाइक अविनाश साबले, मनु भाकर और जयस देवतला, अंतिम
बंगाल, आर वैशाली। राइट? चलिए। सो, आगे बढ़ने से पहले हम क्या है? एक बार जीडी का टॉपिक देख लेते हैं। फिर हम जो है
बेटर अंडरस्टैंडिंग कर पाएंगे आगे के टॉपिक। सो, व्हाट इज दी प्राइमरी रीज़न बिहाइंड इंडियास रिलेटिवली पुअर
परफॉर्मेंस इन ओलंपिक्स? गवर्नमेंट की पॉलिसीज एंड इंस्टीट्यूशनल सपोर्ट, माइंडसेट एंड स्पोर्टिंग कल्चर ऑफ सोसाइटी
और स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर एंड ट्रेनिंग फैसिलिटीज़ नहीं थी इंडिया के अंदर। इसलिए जो है हमारा पुअर परफॉर्मेंस
था ओलंपिक्स में। तो इन तीनों लीड्स में से आपको किसी एक लीड को सेलेक्ट करना है। एंड देन यू हैव टू गिव दी पॉइंट ऑन दैट
पर्टिकुलर लीड। तो ये जो टॉपिक है हमें ऑलमोस्ट सारे बोर्ड्स में देखने को मिला है। तो ये जो टॉपिक है हम लोग कैसे कलेक्ट
करते हैं? जो भी एसएसबी देने जाता है वो नोट डाउन करके लेके आता है कि मेरे पर्टिकुलर एसएसबी आर्मी एनएसबी में यह
टॉपिक आया था। ठीक है? तो ये एक ऐसा टॉपिक है जो हर एक बोर्ड में देखने को मिला था। ठीक है? तो चलिए हम नेक्स्ट टॉपिक को भी
एक बार देख लेते हैं। एंड रिसेंटली वी हैव सीन दैट इंडिया इज़ परफॉर्मिंग वेल इन स्पोर्ट्स व्हाट इन योर रीज़न कुड बी द
फैक्टर। ठीक है? तो ये हमें एएफएसबी गुवाहाटी में देखने को मिला था। अब लीड्स जो है हमें इसकी नहीं मिली है। ठीक है? बट
लीड्स भी मोर ओवर सेम ही है। चाहे वो गवर्नमेंट के एफर्ट्स हो, यूथ हो, माइंडसेट चेंज होना होगा, तो ऐसी ही लीड्स
हमें देखने को मिलेंगी। राइट? तो देखिए हमने जो सेकंड जीडी टॉपिक करा था उसके अंदर हमने देखा था कि क्यों इंडिया की जो
स्पोर्ट्स की परफॉर्मेंस है वो धीरे-धीरे इंप्रूव हो रही है। राइट? तो उसके रीज़ंस क्या है? चलिए डिस्कस करते हैं। गवर्नमेंट
स्पोर्ट्स पॉलिसी। तो देखिए गवर्नमेंट जो है वो खेलो इंडिया प्रोग्राम लेके आई है। और इस खेलो इंडिया प्रोग्राम के अंदर तीन
मेजर प्रोग्राम्स हैं। खेलो इंडिया यूथ गेम्स, यूनिवर्सिटी गेम्स एंड खेलो इंडिया स्कूल गेम्स। ठीक है? तो इसके अंदर क्या
है? 3000 प्लस एथलीट्स सिलेक्टेड फॉर लॉन्ग टर्म डेवलपमेंट सिलेक्टेड एथलीट्स रिसीव 5 लाख पर ईयर स्कॉलरशिप फॉर एट
इयर्स। फॉर एग्जांपल अंशु मलिक वर्ल्ड चैंपियनशिप मेडलिस्ट हैं। इनको भी जो है ये स्कॉलरशिप मिली है। तो देखिए यहां पर
क्या है कि ये जो 3000 एथलीट्स हैं ये पार्टिसिपेट करती हैं डिफरेंट-डिफरेंट खेलो इंडिया गेम्स में। कोई यूथ में करता
है, यूनिवर्सिटी में करता है और स्कूल में। तो जो वहां पर स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया है और वेरियस ऑर्गेनाइजेशन है वो
बेस्ट टैलेंट को सेलेक्ट करती है और उनको जो है यहां पर स्कॉलरशिप प्रोवाइड की जाती है। अब इससे क्या होगा अगर 5 लाख पर ईयर
उन्हें मिलेंगे तो वो एज अ फाइनेंशियली बेसिक इंडिपेंडेंट हो सकते हैं जिससे वो अपने स्पोर्ट्स पर आगे ध्यान दे सकते हैं।
तो ये आपको जीडी में पॉइंट याद रखना है और साथ में लेक्चरेट में भी यूज़ करना है। देखिए खेलो इंडिया सबको पता है। बट उसका
बेनिफिट क्या होने वाला है कि यहां पर स्कॉलरशिप मिलती है अराउंड 5 लाख। चलिए आगे देखते हैं। तो देखिए इंडिया की
परफॉर्मेंस हमने एक जीडी देखा था 37th उसमें क्या था पुअर है। तो आप देखेंगे कि विंटर गेम्स के अंदर हमने आज तक विंटर
ओलंपिक्स में हमने आज तक एक भी मेडल नहीं जीता है। राइट? तो उसका रीज़न क्या है? अगर आप देखेंगे तो हमारे पास कोई विंटर
स्पोर्ट्स की फैसिलिटीज ही नहीं थी। जैसे कि यहां पर लिखा है दैट विंटर स्पोर्ट्स आर स्टिल अंडर डेवलप्ड इन दी कंट्री। और
इसे प्रमोट करने के लिए हम लाइक खेलो इंडिया विंटर गेम्स। और खेलो इंडिया विंटर गेम्स जो है वो मेनली कंडक्ट किए जाते हैं
गुलम्ग में, लेह में एंड व्हिच हैव सूटेबल स्नो एंड माउंटेन कंडीशंस। ठीक है? तो अब इस विंटर गेम्स की वजह से क्या है? हमारा
आइस हॉकी, अल्पाइन किंग, स्नो बोर्डिंग, आइस स्केटिंग, नोडक्स किंग एंड माउंटेनरिंग। तो ये जितने भी गेम्स थे, हम
इसमें पार्टिसिपेट ही नहीं करते थे। एटलीस्ट अब हम जो है पार्टिसिपेशन तो अपना स्टार्ट करेंगे। तो, आप यह पॉइंट जरूर
अपने जीडी और लेक्चर में दीजिए कि इंडिया हैज़ नेवर वॉन अ सिंगल मेडल इन द विंटर ओलंपिक्स। बट बिकॉज़ ऑफ़ दिस खेलो इंडिया
विंटर गेम्स व्हिच आर मेनली कंडक्टेड इन गुलम्ग, ले ऑर इन दी माउंटेनिस रीजन दी आइस हॉकी, अल्पाइन, स्नो बोर्डिंग, आइस
गेटिंग दीज़ स्पोर्ट्स आर गोइंग टू बी पॉपुलराइज़्ड एज़ वेल एज़ वी विल सून वॉन दी मेडल इन दी फ्यूचर बिकॉज़ ऑफ़ दिस खेलो
इंडिया विंटर गेम्स। ठीक? आगे देखते हैं हमारी स्कीम क्या है? टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम। टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम
टॉप्स। ठीक है? द टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम सपोर्ट्स एथलीट प्रिपेयरिंग फॉर ओलंपिक्स। तो जितने भी एथलीट्स जिनमें
पोटेंशियल है ओलंपिक्स में मेडल लाने के लिए ये स्कीम उनके लिए है। राइट? यहां पर मंथली स्टाइपमेंट दिया जाता है। फॉरेन
ट्रेनिंग कैंप्स और स्पोर्ट्स साइंस, बायोमेकेनिक्स, कोचेस, डाइड से लेके हर चीज का जो है सपोर्ट प्रोवाइड किया जाता
है। तो अगर आप देखेंगे नीरज चोपड़ा, पीवी सिंधु, मीराबाई चू ये सारे जो है वो टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम का जो है
बेनिफिट ले पाए। तो हमने खेलो इंडिया गेम्स के बारे में देखा जहां पर जो हमारे ग्रासल लूट लेवल पर एथलीट्स उनको सपोर्ट
दिया गया। अराउंड 5 टू 6 लाख की स्कॉलरशिप प्रोवाइड करके। सिमिलरली जो ओलंपिक जो इससे बड़े लेवल के एथलीट्स हैं उनको जो है
हम टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम दे रहे हैं। चलिए और गवर्नमेंट स्कीम्स के बारे में हम देखते हैं जो कि आप बहुत जगह पर
यूज़ कर सकते हैं। आप टीएटी में भी इसे यूज़ कर सकते हैं। देखिए स्पेशल एरिया गेम्स स्कीम ये जो है वो स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ
इंडिया जो है ल्च करता है अंडर द मिनिस्ट्री ऑफ़ यूथ अफेयर्स एंड स्पोर्ट्स। यहां पर जो है टारगेट टैलेंटेड स्पोर्ट्स
पर्सन फ्रॉम हिली और ट्राइबल कोस्टल रिमोट एरियाज। क्योंकि कोस्टल और रिमोट एरियाज में टैलेंट है। राइट? बट यहां पर जो है
प्लेटफार्म नहीं है। इसलिए जो है स्पेशल एरिया गेम स्कीम को लाया गया। ठीक है? लोकल टैलेंट [नाक से की जाने वाली आवाज़]
को बढ़ावा देने के लिए। चलिए देन फिट इंडिया मूवमेंट सबको पता होगा। राइट? ये 2019 में ल्च की गई। और यहां पर जो है
एनकरेज किया गया फिटनेस और हेल्थी लाइफस्टाइल को, फिजिकल फिटनेस को। यहां पर मैराथनस दौड़ना, स्कूल और कॉलेजेस के अंदर
जो है एक्सरसाइज कैंपेन। राइट? तो ये सारी चीजें फिट इंडिया मूवमेंट के अंदर आ जाता है। देन स्पोर्ट्स फॉर वुमेन प्रोग्राम।
तो जब भी आप वुमेन एंपावरमेंट की बात करेंगे तो वहां पर आप ये ऐड कर सकते हैं। स्पोर्ट्स फॉर वुमेन प्रोग्राम ये भी
हमारा स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया द्वारा चलाया गया और यहां पर एम्स टू एनकरेज गर्ल्स एंड वुमेन टू पार्टिसिपेट इन
स्पोर्ट्स कंपटीशन। राइट? प्रोवाइड कोचिंग, ट्रेनिंग इंफ्रास्ट्रक्चर अपोरर्चुनिटीज़ टू वमेन एथलीट्स। राइट?
जेंडर इक्वलिटी यहां से फोस्टर होती है। देन नेक्स्ट क्या है? नेशनल टैलेंट स्पोर्ट्स कॉन्टेस्ट स्कीम। ये भी हमारी
स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया द्वारा ल्च की गई। और यहां पर भी जो है जगह-जगह पर कॉलेजेस में कैंप्स लगाए जाते हैं। जहां
पर आप अपना टैलेंट को शोकेस कर सकते हैं। और अगर आप बेटर परफॉर्म करते हैं तो स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया आपको सपोर्ट
करता है। ठीक है? देन ऑल दीज़ इनिशिएटिव्स आर अंडर दी मिनिस्ट्री ऑफ़ यूथ अफेयर्स एंड स्पोर्ट्स। ठीक है? तो चलिए अब अगर रिवाइज
करें तो हमने टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम को देखा। हमने देखा अ देन हमने देखा खेलो इंडिया गेम स्कीम को स्पेशल एरिया गेम
स्कीम को फिट इंडिया मूवमेंट को स्पोर्ट्स फॉर वुमेन प्रोग्राम को नेशनल टैलेंट स्पोर्ट्स कॉन्टेस्ट को राइट सो फार चलिए
आगे देखते हैं इंडियन आर्मी स्पोर्ट्स इंस्टट्यूट भी है यहां पर तो जो हमारे इंडियन आर्मी के एथलीट्स हैं उनको ट्रेन
करने के लिए जो है इंडियन आर्मी स्पोर्ट्स इंस्टट्यूट बनाया गया है राइट फॉर एग्जांपल आप देखेंगे द आर्मी स्पोर्ट्स
इंस्टट्यूट इन पुणे ट्रेंस एलट एथलीट्स नीरज चोपड़ा जो कि जॉइ करा था जिन्होंने उन्होंने एज अ सूबेदार नाउ उनको जो है
एंटाइटल किया गया है लेफ्टिनेंट कर्नल रैंक से। देन इंडियन आर्मी के सूबेदार अविनाश साबले राइट वुमेन में अगर हम
एग्जांपल देखें तो प्रीति राजक राइट जितने भी हमारे इंडियन आर्मी के एथलीट्स हैं उनको कौन ट्रेन करता है? इंडियन आर्मी
स्पोर्ट्स इंस्टट्यूट। आपने जरूर देखा होगा नेशनल गेम्स को। तो वहां पर आप देखेंगे महाराष्ट्र। फिर क्या होता है?
सर्विसेस मतलब वहां पर जो इंडियन आर्मी के जो हमारे एथलीट्स हैं वो हमेशा फर्स्ट या सेकंड पे ही रहते हैं। ठीक है? तो ये जो
इंस्टट्यूट है वो नहीं ट्रेन करता है। देन अगर आप देखेंगे पब्लिक सेक्टर कंपनीज़ ऑर्गेनाइजेशन लाइक ओएजीसी ऑयल नेचुरल गैस
कॉरपोरेशन इंडियन ऑयल हो गया या फिर सर्विस स्पोर्ट्स कंट्रोल बोर्ड तो यहां पर जो है कोटा रखा जाता है अलग से
स्पोर्ट्स एथलीट्स के लिए। ठीक है? और आपने देखा होगा इंडियन रेलवे में भी वैकेंसीज आती है। सिमिलरली इंडियन
एयरफोर्स के अंदर इंडियन आर्मी के अंदर भी वैकेंसीज आती है। इफ यू हैव रिप्रेजेंटेड इन द नेशनल और आपने कोई मेडल वगैरह लिया
है तो आप डायरेक्टली जा सकते हैं रिक्रूटमेंट के लिए फिजिकल होता है एंड ऑल दैट। और आप जो है जॉइ कर सकते हैं हमारी
आर्म्ड फोर्सेस को भी। ठीक है? चलिए फिर बात करते हैं हम कैश रिवॉर्ड्स फॉर एथलीट्स। कैश रिवॉर्ड्स फॉर एथलीट्स। अगर
हम हरियाणा का एग्जांपल लें तो यहां पर अगर आप ओलंपिक गोल्ड मेडल लाते हैं तो सीधा आपको कितने ₹ करोड़ मिलेंगे। देन
सिल्वर पे 4 करोड़ एंड ब्रोंज़ पे 2.5 करोड़। सो दिस पॉलिसी हेल्प टू प्रोड्यूस मेनी एथलीट्स सच एज नीरज चोपड़ा और साक्षी मिले
की। तो ये जो है बेनिफिशरीज़ हैं इस पॉलिसी के। तो ये जो पॉलिसी है, यह क्या करती है? मोटिवेट करती है यूथ को कि अगर आप ओलंपिक
में मेडल लेके आते हैं तो यस यू कैन गेट सच प्राइस। चलिए नेक्स्ट देखते हैं। चलिए अब हम बात करते हैं जो इंडिया की पुअर
परफॉर्मेंस है उसमें एक लीड थी माइंडसेट ऑफ पीपल। तो वहां पर अब उस पर बात करते हैं कुछ नेगेटिव पॉइंट्स पे क्यों इंडिया
का स्पोर्ट्स नहीं ग्रो कर पा रहा है। एक तो हमने देखा कि विंटर जो स्पोर्ट्स है वो अंडर डेवलप्ड था हमारे स्कूल और कॉलेजेस
में। चलिए नेक्स्ट देखते हैं। काफी सारी रिपोर्ट्स पढ़ी थी पपुलेशन चैप्टर के अंदर जहां पर हमने बताया था कि अनइंप्लॉयमेंट
और कंपटीशन बहुत ज्यादा है। तो ये जो डाटा है हमने किसमें पढ़ा था? पॉपुलेशन चैप्टर में पढ़ा था कि अगर आप देखेंगे तो सीजीएल
के अंदर कितने हैं? 30 लाख एस्पिरेंट्स हैं। देन अगर नीट के अंदर देखेंगे तो 24 लाख एपेंट्स हैं। जेई के अंदर 11 लाख
एप्लीेंट्स हैं। और ग्रुप डी के 1.8 करोड़ फॉर्म अगर आप माइंडसेट देखेंगे तो इतने सारे लोग जो है वो कुछ पोस्ट और कुछ
पोजीशंस के लिए जो है फाइट कर रहे हैं। बट हमें क्या पता लगता है कि एक इंडिया के अंदर टैबू है जहां पर पढ़ाई को ही जो है
अच्छा माना जाता है। ठीक है? स्पोर्ट्स कल्चर को जो है इतना बढ़ावा नहीं देते। क्योंकि आप यह नंबर्स को अगर देखते हैं तो
इससे हमें पता लग जाता है इफ यू कंपेयर टू दी चाइना और अदर कंट्रीज। देन एकेडमिक प्रेशर बहुत ज्यादा है स्कूल्स के अंदर।
मेनी स्कूल फोकसेस मोर ऑन बोर्ड एग्जाम रेदर दैन स्पोर्ट्स डेवलपमेंट। ठीक है? और आपने देखा होगा स्कूल्स के अंदर क्या होता
है? बोर्ड एग्जाम की वजह से जो है हमारे एनुअल फंक्शनंस वगैरह होते हैं वो कैंसिल कर दिए जाते हैं। स्पोर्ट्स मीट कैंसिल कर
दी जाती है। तो एकेडमिक प्रेशर बहुत ज्यादा है। क्योंकि टीचर्स पे भी क्या फोकस है हमें? ज्यादा से ज्यादा रिजल्ट
देना है। पढ़ाई का है। बट स्पोर्ट्स की जब बात आती है तो ऐसा कुछ नहीं है। देन 2019 नेशनल एजुकेशन पॉलिसी ड्राफ्ट डाटा बताता
है कि बहुत सारे गवर्नमेंट स्कूल में तो प्लेग्राउंड और स्पोर्ट्स इक्विपमेंट्स ही नहीं है। अगर आप फुटबॉल खेलना चाहते हैं
तो आपको फुटबॉल का एक बहुत बड़ा ग्राउंड चाहिए। बट आधे से ज्यादा स्कूल्स में नहीं है ना फुटबॉल का है, बास्केटबॉल का है। तो
इसलिए जो है हमारे गेम्स जो है पीछे रह जाते हैं। राइट? देन प्रकाश पादुकोण रनाउंड बैडमिंटन प्लेयर है। ही इज़ दी फादर
ऑफ दीपिका पादुकोण। राइट? ही ही स्टेटेड दैट मेनी स्टूडेंट एंड इवन फॉर्मर नेशनल प्लेयर कम टू हिम सीकिंग जॉब्स शोइंग दैट
करियर ओपोरर्चुनिटीज़ इन स्पोर्ट्स आर स्टिल वेरी लिमिटेड। तो काफी सारे स्पोर्ट्स एथलीट जो कि नेशनल खेल चुके
हैं, स्टेट में गोल्ड मेडल ला चुके हैं वो जाकर जब जॉब मांगते हैं उनके पास जॉब नहीं है। तो ये दिखाता है कि हमारे इंडिया के
अंदर जो है स्पोर्ट्स की पॉलिसी क्या है? राइट? वो क्या है? अनइंप्लॉयड हैं। देन रिपोर्ट्स फ्रॉम मिनिस्ट्री ऑफ़ एजुकेशन
हाईलाइटेड दैट मेनी गवर्नमेंट स्कूल्स डू नॉट हैव फुल टाइम फिजिकल एजुकेशन। टीचर ही नहीं है। कॉन्ट्रैक्ट बेस पर रखा जाता है
टीचर्स को। ठीक है? तो चलिए आगे चलते हैं। लैक ऑफ स्पोर्ट्स टेक्नोलॉजी एंड स्पोर्ट्स साइंस ओलंपिक गोल्ड मेडलिस्ट
अभिनव बिंद्रा सेट अप हाई परफॉर्मेंस ट्रेनिंग सेंटर बिकॉज़ सच स्पोर्ट्स साइंस फैसिलिटीज़ वर मिसिंग अर्लियर इन इंडिया।
तो इनकी डॉक्यूमेंट्री बनी थी जहां पर इन्होंने दिखाया था कि कैसे ये जर्मनी गए वहां पर इन्होंने जो है बायोमेकेनिक्स और
अदर स्पोर्ट्स साइंस फैसिलिटी को अवेल करा बिकॉज़ वो इंडिया के अंदर नहीं थी। देन इन्होंने वहां से लेसन सीख कर जो है ये
इंडिया में स्टार्ट करी। सिमिलरली आप देखेंगे जर्मनी में नीरज चोपड़ा भी गए। फिनलैंड गए। पीवी सिंधु जो है डेनमार्क
इंग्लैंड में जाकर जो है ट्रेनिंग लेती हैं। देन मीराबाई चानू यूएसए एंड बजरंग पुनिया रशिया यूएसए। तो ये एग्जांपल आप
जरूर याद रखें कि जो हमारे एथलीट्स हैं चाहे वो नीरज चोपड़ा, अभिनव बिंद्रा, पीवी सिंधु, मीराबाई चानू, बजरंग पुनिया ये
सारे फॉरेन नेशन में जाके ट्रेनिंग ले रहे हैं। बिकॉज़ इंडिया फेल टू गिव सच टाइप ऑफ़ ट्रेनिंग। तो जितनी भी बड़ी फेडरेशन अब
इंडिया के अंदर है उनके चीफ अगर आप देखेंगे तो वो स्पोर्ट्स से रिलेटेड है ही नहीं। फॉर एग्जांपल अगर आप देखें एमएचर
कबड्डी फेडरेशन ऑफ इंडिया विभोर विनीत जैन वाज़ ही कबड्डी प्लेयर? नो। तो यहां पर यह कबड्डी प्लेयर नहीं है। यह क्या है? एक
एडमिनिस्ट्रेटर और प्रमोटर हैं। सिमिलरली अगर आप देखेंगे वॉलीबॉल फेडरेशन ऑफ इंडिया का भी वीरेंद्र कनवर है। राइट? ठीक है? ये
क्या है? एक पॉलिटिशियन और एडमिनिस्ट्रेटर हैं। देन अगर हम देखें शूटिंग का भी तो करंट प्रेसिडेंट को भी अगर आप देखेंगे तो
पॉलिटिशियन एंड फॉर्मर मेंबर ऑफ़ पार्लियामेंट है। नॉट एन एक्स नॉट एन एक्स शूटिंग प्लेयर। सिमिलरली रेसलिंग में आप
देखेंगे संजय सिंह और आपने बृजभूषण शर्मा सिंह वाला केस सुना होगा। राइट? तो इससे हमें क्या पता लगता है कि अगर एक एथलीट जो
कि एक्स प्लेयर है वो उस लेवल पर खेल चुका है तो वैसे ही पॉलिसी बनाएगा। उसने वो चीजें देखी होंगी। तो इससे हमें क्या इनफर
होता है कि जो बड़ी फेडरेशंस हैं जहां पर हमारे प्लेयर्स होने चाहिए थे जो कि बहुत एक्सपीरियंस्ड है जिन्हें इनस एंड आउट
पूरा पता है किसी गेम का कि क्या डिफिकल्टी हमारे प्लेयर फेस कर रहे हैं। हमें कौन सा इक्विपमेंट चाहिए, कहां हमें
ट्रेनिंग चाहिए। बट उसकी जगह पर हम पॉलिटिशियन और एडमिनिस्ट्रेटर को रख लेते हैं। तो ये एक लूप होल है जो इंडिया के
अंदर ही चलता है। राइट? चलिए आगे देखते हैं कुछ रिपोर्ट्स को। ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम हॉकी प्लेयर्स कंप्लेंट अबाउट
पुअर टर्फ मेंटेनेंस इनएडीिक्वेट फैसिलिटीज हैं। ध्यानचंद स्टेडियम के अंदर जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम अगर हम देखें तो
2010 में बनता है। बट यहां पर लेटर हाईलाइटेड दी मेंटेनेंस इशू ग्रीन पार्क स्टेडियम ऑफ़ कानपुर क्रिटिसाइज़ फॉर
मल्टीपल टाइम्स ऑफ़ पुअर ड्रेनेज और पिच कंडीशन की वजह से। देन एथलीट्स हिमादा दास मेंशन इन ह इंटरव्यू दैट शी ट्रेंड
इनिशियली विदाउट प्रॉपर ट्रैक इन आसाम रनिंग ऑन मड ट्रैक्स। तो ये दिखाता है कि जो हमारे स्टेडियम्स हैं उनकी हालत क्या
है? और आप खुद ऑब्जर्व करिए आपकी विसिनिटी के अंदर कितने ऐसे स्टेडियम्स हैं जिनके अंदर वाटर लॉजिंग नहीं होती। वाटर लॉजिंग
की प्रॉब्लम वहां है या नहीं है। वहां क्या लॉन्ग जंप और हाई जंप के लिए ट्रैक बने हुए हैं। क्या वहां प्रॉपर 400 मीटर
100 मीटर्स के ट्रैक बने हैं? तो आपको आंसर अपने आप मिल जाएगा जो आप यूज़ कर सकते हैं अपने जीडी और लेक्चर के अंदर। राइट?
चलिए आगे देखते हैं। चाइना की अगर हम बात करें तो इनके पास क्या है? टैलेंट पूल सिलेक्शन है। यहां पर क्या किया जाता है?
देखिए आइडेंटिफिकेशन प्रोग्राम इन स्कूल। टीचर मेजर हाइट, फ्लेक्सिबिलिटी, एंडोरेंस एंड बॉडी स्ट्रक्चर ऑफ़ अ स्टूडेंट। बेस्ड
ऑन दीज़ फिजिकल ट्रेड्स चिल्ड्रन आर सिलेक्टेड फॉर स्पोर्ट्स लाइक जिम्नास्टिक्स, ड्राइविंग, स्विमिंग देन
सेंट फॉर स्पेशलाइड स्पोर्ट्स ट्रेनिंग सेंटर्स। तो यहां से क्या होता है? स्कूल पे ही आपकी वेट, हाइट और एक पूरा बीएमआई
देखकर और आपका बॉडी पोश्चर स्ट्रक्चर देखकर बॉडी स्ट्रक्चर देखकर आपका इंटरेस्ट देख के जो है आपको एक किसी पर्टिकुलर
स्पोर्ट्स में असाइन कर देते हैं। एंड देन उस पे कंटीन्यूअसली आपको ट्रेन किया जाता है। देन स्टेट स्पोर्ट्स स्कूल सिस्टम। तो
देखिए यहां पर पर्टिकुलरली स्पोर्ट्स स्कूल बनाए गए हैं। राइट? चाइना हैज़ थाउजेंड्स ऑफ़ गवर्नमेंट रन स्पोर्ट्स
स्कूल अक्रॉस दी कंट्री। चिल्ड्रन एज्ड सिक्स टू एट ईयर हु शो एथलेटिक पोटेंशियल आर सिलेक्टेड एंड सेंट टू दीज़ स्कूल्स फॉर
प्रोफेशनल ट्रेनिंग। क्या ये इंडिया के अंदर है? ऐसी कोई भी चीज अभी इंडिया के अंदर नहीं है जहां पे स्टेट्स स्पोर्ट्स
स्कूल हो और जहां पर सिक्स टू एट बिकॉज़ हमारे इंडिया के अंदर तो यहां पर एजुकेशन पे एफेसिस होगा ज्यादा राइट देन चाइनीस
एथलीट यूज़ बायोमेकेनिक एनालिसिस मोशन ट्रैकिंग एआई बेस्ड परफरेंस मॉनिटरिंग सिस्टम दिस टेक्नोलॉजी हेल्प टू इंप्रूव द
टेक्निक्स एंड प्रिवेंट फ्यूचर इंजरीज़ चलिए जीडी का टॉपिक हमने देखा व्हाट इज़ द प्राइमरी रीज़न बिहाइंड दी इंडियास
रिलेटिवली पुअर परफॉर्मेंस तो गवर्नमेंट पॉलिसीज़ हैं इंस्टीटशंस तो आप यहां पर चाइना से कंपेयर करके बता सकते हैं कि
वहां पर थाउजेंड्स ऑफ़ स्पोर्ट्स इंस्टट्यूट हैं स्पोर्ट्स स्कूल हैं जहां पर सिक्स टू एट इयर्स के बच्चे जो हैं
उन्हें पहले ही सेलेक्ट किया जाता है देन वहां वहां पर जो है एक टैलेंट पूल स्कीम है जहां पर बच्चों को सेलेक्ट किया जाता
है अकॉर्डिंग टू देयर वेट हाइट बट ये स्कीम इंडिया के अंदर नहीं है। देन आप एग्जांपल दे सकते हैं जितनी भी गवर्नमेंट
की फेडरेशंस हैं हमारी स्पोर्ट्स की फेडरेशन है उनके चीफ कौन है? एक्स प्लेयर्स नहीं है। राइट? वो
एडमिनिस्ट्रेटर और पॉलिटिशियन हैं। तो ये भी एक गवर्नमेंट पॉलिसी और इंस्टीट्यूशनल सपोर्ट का फेलियर है। देन माइंडसेट एंड
स्पोर्टिंग कल्चर और सोसाइटी की बात करें तो आप यहां पर एग्जांपल दीजिए कि सर जेई के अंदर 11 लाख, नीट के अंदर 24 लाख,
एसएससी सीजीएल के अंदर 30 लाख, रेलवे के अंदर 1 करोड़। तो ये क्या दिखाता है कि लार्ज नंबर ऑफ यूथ जो हैं वो सिर्फ
गवर्नमेंट जॉब और स्टडी करना चाहते हैं। उनका स्पोर्ट्स के अंदर रुझान नहीं है। अगर हम बात करें स्पोर्ट्स
इंफ्रास्ट्रक्चर एंड ट्रेनिंग फैसिलिटीज की तो वहां पर जितने भी हमने स्टेडियम्स देखे थे ये वाले स्टेडियम सारे तो इनका
एक-एक करके आप एग्जांपल दे सकते हैं। सिमिलरली आप इंफ्रास्ट्रक्चर में भी वो पॉइंट जोड़ सकते हैं जो हमारी फेडरेशन के
चीफ हैं वो कौन है? वो नॉन एक्स प्लेयर हैं। ठीक है? देन हम बात करें ट्रेनिंग फैसिलिटीज की तो आप हीमा दास का एग्जांपल
दीजिए। देन आप सारे एग्जांपल दीजिए जो वेदर अभिनव बिंद्रा, नीरज चोपड़ा, द्वितीय चंद और जितने भी ये सारे प्लेयर्स हैं ये
कहां गए? फॉरेन कंट्रीज गए। फिनलैंड, जर्मनी, यूएसए, रशिया, बजरंग पुनिया। राइट? सो ये सारे जो है बिकॉज़
इंफ्रास्ट्रक्चर इंडिया के अंदर नहीं था। बायोमेकेनिक्स, एनालिसिस, डाटा एनालिटिक्स एंड स्पोर्ट्स परफॉर्मेंस ये सारी चीजें
यहां इंडिया में नहीं थी। ठीक है? और इसलिए जो है अभिनव बिंद्रा ने जो है यहां पर एकेडमी खोली। तो इस समय क्या पता लगता
है कि स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर और ट्रेनिंग फैसिलिटी यहां पर पुअर है। और अभी मैं डोपिंग की बात तो कर ही नहीं रहा
हूं। बिकॉज़ डोपिंग के अंदर अगर आप देखेंगे तो इंडिया का परफॉर्मेंस ये देख लीजिए आप डोपिंग में परफॉर्मेंस। ठीक है? तो डोपिंग
की हमने बात नहीं करी है तो वो भी आप ऐड कर सकते हैं। देन आप बताइए इंफ्रास्ट्रक्चर में कि जो हमारे आसपास के
स्टेडियम है तो यहां पर आप अपना पर्सनल ओपिनियन दे सकते हैं कि फॉर एग्जांपल आई लिव इन दिस प्लेस एंड देयर इज़ अ स्टेडियम
कॉल्ड शास्त्री स्टेडियम और खरका स्टेडियम एंड आई हैव सीन देयर इज़ अ वाटर लॉजिंग प्रॉब्लम। देयर इज़ नो बास्केटबॉल ग्राउंड,
देयर इज़ नो नॉर्थ 100 मीटर और 400 मीटर प्रॉपर ट्रैक दिस पॉइंट। देन आप बता सकते हैं कुछ माइंडसेट के अंदर आप पॉइंट रख
सकते हैं कि जो हमारा स्पोर्ट्स है अगर आप देखिए फुटबॉल पर कितना कम एम्फेसिस है। हमारा कैप्टन सुनील छत्री खुद कह रहा है
कि यार हमारा मैच देख लो। राइट? और अगर आप क्रिकेट की बात करेंगे तो 9000 प्लस करोड़ जो है वहां पर रेवेन्यू जा रहा है। बट अगर
स्पोर्ट्स के बजट की बात करें तो कितना है? ओनली अराउंड 4000 करोड़। तो ये यहां पर क्या दिखाता है? इसे क्या दिखाता है?
हमारा जो रुजाना है वो सिर्फ कुछ स्पोर्ट्स तक ही है। देन आप बता सकते हैं इंफ्रास्ट्रक्चर के अंदर कि काफी सारे
स्कूल्स थे जहां पर विंटर की विंटर स्पोर्ट्स की फैसिलिटी नहीं थी। तो ये सारे पॉइंट्स आ जाएंगे। देन हम रिसेंटली
वी हैव सीन दैट इंडिया परफॉर्मिंग वेल इन स्पोर्ट्स। तो जितनी भी हमने स्कीम पढ़ी चाहे वो ओलंपिक पोडियम स्कीम हो, फिट
इंडिया मूवमेंट हो, स्पेशल एरिया गेम्स हो, स्पोर्ट्स फॉर वमेन प्रोग्राम हो, देन इंडियन आर्मी स्पोर्ट्स इंस्टट्यूट हो,
खेलो इंडिया गेम्स हो। तो ये सारी पॉलिसीज यहां पर आप बता सकते हैं। देन आप बता सकते हैं कि गवर्नमेंट जो है काफी सारे नए
स्टेडियम बना रही है। तो आप ये वाले स्टेडियम्स के एग्जांपल दे सकते हैं। और जो हमने अच्छे पॉइंट्स डिस्कस करे थे वो
सारे आप यहां पर डाल सकते हैं। ठीक है? चलिए नेक्स्ट टॉपिक की तरफ चलते हैं जो कि है इंडियन प्रीमियर लीग। तो देखिए इंडियन
प्रीमियर लीग में सिर्फ हम दो स्लाइड पढ़ेंगे जो कि रिलेटेड टू हिस्ट्री है और कुछ फैक्ट्स। आई होप मोस्टली लोग अगर
आईपीएल आता है तो उसके ऊपर बहुत ईजीली बोल लेंगे। बट थोड़ी सी हिस्ट्री में प्रॉब्लम आती है तो वो देख लेते हैं। देखिए ये 208
में स्टार्ट हुआ था। फाउंडेड बाय ललित मोदी अंडर दी bcci और फॉर्मेट फ्रेंचाइजी टी20 क्रिकेटशिप था। और यहां पर पहले
कितनी टीम थी? एट टीम्स थी। राइट? पहले कितनी? एट टीम्स थी। तो स्टार्ट 208 में हुआ और एट टीम्स थी। ऐसे याद रहेगा? और
किसने स्टार्ट करा? ललित मोदी। राइट? तो अगर हम देखेंगे तो अब करेंटली कितनी है? 10 टीम्स हो चुकी हैं। दो कौन सी नई टीम आ
गई है? लखनऊ सुपर जाइंट्स और गुजरात टाइटंस। और यहां पर जो डेक्कन चार्जेस थी ये रिप्लेस हो चुकी है। राइट? वहां पर
क्या आ गई थी? एसआरएच आ गई थी। सनराइज़र्स हैदराबाद। तो एक बार टीम देख लेते हैं। पहले दिल्ली डेड डेवल्स थी। अब क्या हो
गई? वो दिल्ली कैपिटल्स। K्स 11 पंजाब थी अब वो पंजाब किंग्स हो चुका है। राजस्थान रॉयल्स मुंबई इंडियंस, चेन्नई सुपर
किंग्स, कोलकाता नाइटराइडर्स एंड रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर। देन अगर हम देखें तो यहां परl के एडवांटेजेस क्या हैं? देखिए
टैलेंट प्लेटफार्म तो ये जितने भी हमारे चाहे यशस्वी जैसवाल हो श्रेयस अयर हो ये कहां से आए थे आईपीएल से उठकर आए राइट देन
हम बात करें इंटरनेशनल एक्सपोज़र प्ले विद फॉरेन क्रिकेटर्स अब देखते हैं कि वो किस तरीके से स्पोर्ट्स खेलते हैं उनकी बॉलिंग
पैटर्न फील्डिंग पैटर्न बैटिंग पैटर्न तो इससे हमें क्या है इंटरनेशनल एक्सपोज़र मिलता है देन इकोनमिक ग्रोथ जनरेट्स ह्यूज
रेवेन्यू फॉर इंडिया ये देख लीजिए आप तो ये देखिए आप कितना रेवेन्यू जो है आईपीएल हमें कमा कर दे रहा है देन एंप्लॉयमेंट
जनरेशन जॉब्स इन स्पोर्ट्स मीडिया टूरिज्म तो देखिए जब आईपीएल चलता है तो उसके पीछे बहुत सारे सारे लोगों को जॉब मिलती है।
चाहे वो होटल इंडस्ट्री हो, हमारी टूरिज्म इंडस्ट्री हो। उसके बाद जो स्पोर्ट्स हमारे फिजियोथरेपिस्ट होते हैं। देन अगर
आप स्टेडियम के अंदर ही देखेंगे वहां पर कैमरामैनस होते हैं, ब्रॉडकास्टर्स होते हैं जो लाइट इलेक्ट्रिशियंस होते हैं,
लाइटनिंग संभालते हैं, स्पॉटबॉय होते हैं। तो यहां से क्या क्या है? एंप्लॉयमेंट जनरेशन होता है। देन इंफ्रास्ट्रक्चर
डेवलपमेंट, बेटर स्टेडियम फैसिलिटीज़ फॉर एग्जांपल अगर आप देखेंगे मोटेरा स्टेडियम जो नरेंद्र मोदी स्टेडियम से जाना जाता है
तो वो भी जो है वर्ल्ड का लार्जेस्ट स्टेडियम है। तो वहां पर जो हैl के फाइनल्स होते हैं। देन एंटरटेनमेंट फॉर
फैंस फास्ट एंड एक्साइटिंग टी20 मैचेस होते हैं। देन बूस्ट टू डोमेस्टिक क्रिकेट इंप्रूव ओवरऑल क्रिकेट क्वालिटी। तो देखिए
हम टी20 वर्ल्ड कप जीते। एशिया कब जीते? क्यों जीते? क्योंकि हमारी जो है आईपीएल से टी20 टीम जो है स्ट्रांग हुई और वहां
से हमने प्लेयर उठा के जो है अपनी नेशनल टीम में डाला। देन हमारे पास आता है ग्लोबल पॉपुलैरिटी राइट प्रमोट्स इंडियन
क्रिकेट वर्ल्ड वाइड। तो आप देख सकते हैं ओलंपिक के अंदर भी जो है क्रिकेट आने वाला है। तो इससे हमें पता लगता है कि यस
पॉपुलर तो हो रहा है स्पोर्ट। तो फाइनेंसियल सिक्योरिटी फॉर प्लेयर्स हाई सैलरीज एंड कॉन्ट्रैक्ट। तो आपको पता है
कि जब ऑक्शन होता है तो कितने करोड़ में जो है वेरियस प्लेयर्स सोल्ड आउट होते हैं और कितने सारे प्लेयर्स हैं जिनको जो है
फाइनेंसियल बेनिफिट मिला है आईपीएलl की वजह से। राइट? चाहे वो एडवर्टाइजमेंट हो या फिर डायरेक्ट बेनिफिट हो। तो ये सारी
चीजें हम बता सकते हैं। चलिए अब हम चैलेंजेस के बारे में बात कर लेते हैं। डिक्लाइनिंग ओडीआई इंटरेस्ट। फैंस प्रेफर
टी20 लीग्स ओडीआई सीरीज व्यूअरशिप फॉलिंग तो ये बात से एग्री करते हैं आप देन पैक्ड क्रिकेट कैलेंडर बटरल सीरीज देन ICC इवेंट
वेरी लिटिल विंडो फॉर आईपीएल तो पूरे साल जो है क्रिकेटर्स बिजी रहते हैं देन ओलंपिक्स इंक्लूजन प्रेशर सी अगर क्रिकेट
भी ओलंपिक्स के अंदर आ जाएगा देन हमारे पास वर्ल्ड कप आ जाता है उसके बाद आईपीएल भी है देन बटरल सीरीज़ हैं एशियन गेम्स है
तो कैसे जो है हम इस चीज को डील करेंगे तो ये एक तो इसलिए ओलंपिक्स जो है मे बी थ्रेट करे आईपीएलl की पॉपुलैरिटी को चलिए
आगे देखते हैं राइजिंग ग्लोबल टी20 लीग्स। तो अगर अब आप देखेंगे तो हर जगह पर चाहे वो पाकिस्तान हो, बांग्लादेश हो, बिग बैश
लीग थी, साउथ अफ्रीका की लीग तो बहुत सारी कंट्रीज जो है अब ऐसी टी20 लीग्स ला रहे हैं। राइट? तो यहां पर जो प्लेयर्स हैं वो
डिवाइड हो जाते हैं। फॉर एग्जांपल डेविड वार्नर क्या है? वो पीसएल में खेल रहे हैं इस बार। तो ये चीजें जो है यहां पर डिवीज़
ऑफ़ प्लेयर देखिएगा। प्लेयर वर्क लोड एंड इंजरी। तो देख सकते हैं सम प्लेयर स्किप्स IPL टू स्टू फिट एंड इंटरनेशनल
टूर्नामेंट। तो चलिए अब हम बात करते हैं अपने नेक्स्ट टॉपिक की तरफ जो है योगा। तो देखिए ऋषिकेश उत्तराखंड इज नोन एज योगा
कैपिटल ऑफ द वर्ल्ड। यानी कि हम बोल सकते हैं कि योगा कैपिटल ऑफ दी वर्ल्ड कौन है? ऋषिकेश है। सिमिलरली वैक्सीन कैपिटल ऑफ द
वर्ल्ड कौन है? इंडिया है। देन फार्मेसी कैपिटल ऑफ द वर्ल्ड कौन है? इंडिया है। तो ये चीजें हैं। देन सिटीज लाइक वाराणसी,
मैसूर, हरिद्वार प्रमोट योगा टूरिज्म। इट इज़ ओरिजिनेटेड इन इंडिया ओवर 5000 इयर्स एगो एंड इट इज़ मेंशंड इन एंशिएंट टेक्स्ट
लाइक वेदाज़ एंड पतंजलि योगसूत्र। तो योगा के बारे में हमें कहां से पता लगता है? वेदास से। और पतंजलि योगा सूत्र से देन
योगा इज एन एंशिएंट इंडियन प्रैक्टिस दैट कंबाइन फिजिकल पोश्चर जो कि आसंस हैं ब्रीथिंग टेक्निक्स के बारे में है।
प्राणायाम एंड मेडिटेशन टू इंप्रूव फिजिकल मेंटल स्पिरिचुअल वेल बीइंग। चलिए इंटरनेशनल योगा डे कब सेलिब्रेट किया जाता
है? 21 जून को सेलिब्रेट किया जाता है। डिक्लेयर्ड बाय यूनाइटेड नेशन इन 2014 आफ्टर द इंडियास प्रपोजल प्रैक्टिस
ग्लोबली इन मोर देन 180 कंट्रीज। राइट? तो योगा जो है वो पॉपुलर हो चुका है वर्ल्ड वाइड। चलिए आगे देखें टाइप्स ऑफ योगा
प्रैक्टिस। तो अगर आपने कभी भी योगा किया है और आपको किसी पर्टिकुलर आसन का नाम याद है सो डू मेंशन दिस इन योर लेक्चरेट राइट
चलिए वज्रासन इंप्रूव डाइजेशन हेल्थ इन कॉन्स्टिपेशन एंड स्ट्रेंथन लेग्स देन ताड़ासन माउंटेन पोज़ इंप्रूव पोश्चर एंड
बैलेंस तो देखिए ताड़ासन में क्या है माउंटेन पोज़ बनाना है इससे क्या होगा आपका पोश्चर और बैलेंस इंप्रूव होगा देन
पद्मासन लोटस पोज़ लाइक आप यहां से देख सकते हैं लोटस पोज़ ठीक है देन यूज़्ड फॉर मेडिटेशन इंप्रूव कंसंट्रेशन फिर सूर्य
नमस्कार राइट यहां पर 12 पोज़ होते हैं आप देख सकते हैं ये पोज़ज़ हैं और यह क्या करते हैं? फुल बॉडी वर्कआउट इससे हो जाता है
इंप्रूव फ्लेक्सिबिलिटी एंड ब्लड सर्कुलेशन। देन हमारे पास आता है भोजासन। कोबरा पोज़। तो यहां पर आपको दिख रहा होगा
राइट कोबरा पोज़। देन स्ट्रेंथनिंग स्पाइन रिड्यूसेस बैक पेन। तो ये कुछ आसंस थे। अगर आपको कोई और आसन याद है तो आप मेंशन
कर सकते हैं। ठीक है? चलिए अनुलोम-विलोम सबको पता होगा। राइट? इंप्रूव लंग कैपेसिटी एंड रिड्यूसेस स्ट्रेस। कपालभाति
हेल्प्स इन डाइजेशन वेट। देन अगर आप देखेंगे तो आप मेडिटेशन का एग्जांपल दे सकते हैं। और ताड़ासन करते थे हम लोग स्कूल
में। तो अगर हम मेडिटेशन को देखें तो इंप्रूव मेंटल हेल्थ, रिड्यूस, स्ट्रेस एंड एंजाइटी, एनहांस कंसंट्रेशन एंड
प्रमोट इमोशनल स्टेबिलिटी। चलिए व्हाई योगा इज़ नीडेड एक्सेसिव फोन यूज़ अफेक्ट फोकस एंड मेमोरी। मेडिटेशन एनहांसेस
कंसंट्रेशन एंड मेंटल क्लेरिटी। तो आपने देखा कि डिक्शनरी का वर्ड ऑफ द ईयर क्या था? ब्रेन रोट था। हमारे प्राइम मिनिस्टर
ने ब्रेन रोट के ऊपर बात करी। और अगर आप देखेंगे तो अराउंड 75 करोड़ टू 80 करोड़ क्या है? हमारे इंटरनेट यूज़र्स हैं।
सिमिलरली हमारे पास मोबाइल फोन यूज़र्स हैं। डिजिटल इकॉनमी आ चुकी है। शॉट्स और रील्स का ट्रेंड चल रहा है। तो ऐसे केसेस
में कंसंट्रेशन और मेंटल क्लेरिटी को बढ़ाने के लिए जो है तो योगा काेंस जो है बहुत ज्यादा है। 40% ऑफ पीपल वर्किंग
लॉन्ग आवर्स एट डेस्क आईटी सर्विज सेक्टर्स में आपने देखा होगा। तो यहां पर योगा जो है हेल्प करता है रिड्यूस पोश्चर
प्रॉब्लम को और फिजिकल स्ट्रेन के लिए। तो आपको पता है सबसे ज्यादा लोग जो है सर्विस सेक्टर के अंदर ही इंगेज हैं इंडिया के
अंदर। राइट? और आईटी इंडस्ट्री के अंदर 4 टू 5 मिलियन। तो उस केस में जो है योगा उनके लिए बेस्ट है। देन अगर हम देखें
मेंटल हेल्थ इशू लाइक स्ट्रेस, डिप्रेशन, एंजाइटटी आर राइजिंग अमंग यूथ एंड एडल्ट्स। योगा एंड मेडिटेशन इंप्रूव
इमोशनल बैलेंस एंड काम दी माइंड। राइट? देन स्लीप प्रॉब्लम आर इंक्रीजिंग अमंग दी यंग पीपल। योगा एंड ब्रीथिंग एक्सरसाइज
इंप्रूव स्लीप क्वालिटी एज वेल। चलिए गवर्नमेंट के इनिशिएटिव्स को देख लेते हैं। नेशनल आयुष मिशन सपोर्ट योगा
ट्रेनिंग सेंटर्स मिनिस्ट्री ऑफ़ आयुष प्रमोट योगा वर्ल्ड वाइड। तो नेशनल आयुष मिशन देन योगा इंटीग्रेटेड केंद्रीय
विद्यालय के अंदर और जितने भी सीबीएसई स्कूल हैं चाहे वह आर्मी स्कूल्स हो नवोदय हो तो इन सारे स्कूल्स में भी जो है योगा
का इंटीग्रेशन हो चुका है। तो मैं भी केंद्रीय विद्यालय से पढ़ा हूं और मैंने खुद ऑब्जर्व करा है कि योगा जो है हमारे
स्कूल्स में कराया जाता था। देन फिट इंडिया मूवमेंट राइट लॉन्च टू एनकरेज डेली फिजिकल एक्टिविटी एंड अ हेल्थी लाइफस्टाइल
प्रमोट फिटनेस इन स्कूल वर्क प्लेस एंड कम्युनिटीज़ अक्रॉस इंडिया। इस पर हमने बात करी थी। राइट? चलिए आगे देखते हैं।
बेनिफिट्स ऑफ योगा इंप्रूव फ्लेक्सिबिलिटी, मसल स्ट्रेंथ, डाइजेशन इशू, हेल्थ इन डाइजेशन, रिड्यूसेस
कॉन्स्टिपेशन, कंट्रोल डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, इंप्रूव स्लीप, मेंटल हेल्थ, देन इंप्रूव लंग फंक्शन एंड इम्युनिटी। तो
जितनी भी प्रॉब्लम्स हैं उसमें जो है योगा जरूर बेनिफिट करेगा आपको उसको रिड्यूस करने के लिए। चलिए आगे देखते हैं। योगा
ग्लोबल कंट्रीब्यूशन क्या है? इंडिया हैज़ एक्सपोर्टेड योगा टीचर्स एंड ट्रेनिंग ग्लोबली। योगा टूरिज्म कंट्रीब्यूट्स टू
इंडियास इकॉनमी। बहुत सारे लोग ऋषिकेश आते हैं, वाराणसी आते हैं योगा करने के लिए। राइट? आपने देखा होगा वॉग्स बनाते हैं। सो
ड्यूरिंग कोविड-19 योगा वास प्रमोटेड वर्ल्ड वाइड फॉर इम्युनिटी एंड मेंटल हेल्थ मिलियंस पार्टिसिपेटेड एनुअली इन
मास योगा सेशन अक्रॉस कंट्री। देन अगर आप कंक्लूजन देखेंगे योगा इज़ इंडियास एंशिएंट गिफ्ट टू दी वर्ल्ड प्रमोटिंग फिजिकल
फिटनेस मेंटल पीस एंड ग्लोबल हार्मोनी। राइट? तो अगर आप देखेंगे बहुत सारी बुक्स लिखी गई लाइक थिंक लाइक अ मक बाय जे
शेट्टी। मक हु सोल्ड ह फरारी। तो ये सारी बुक्स को जब आप पढ़ेंगे तो ये सारी बुक्स जो है वो बेस्ट सेलर बनी पूरे ग्लोबली
वर्ल्ड के अंदर और इन बुक्स के अंदर क्या था? मेडिटेशन था। योगा के सूत्र थे। तो इससे हमें पता लगता है कि जो योगा है वो
वर्ल्ड वाइड जो है प्रोपगेट हुआ है। चलिए अब हम बात करते हैं इंडियन हेल्थ केयर सिस्टम के। तो देखिए इंडिया इज कॉल्ड एज
फार्मेसी कैपिटल ऑफ द वर्ल्ड। तो इंडियन हेल्थ केयर सिस्टम की अगर हम बात करें तो ये एक नेटवर्क है पब्लिक और प्राइवेट
मेडिकल इंस्टीट्यूशन का। तो पब्लिक के अंदर क्या-क्या आ जाता है? एम्स हॉस्पिटल, पीजीआई या फिर हम बोले जितने भी सिविल
हॉस्पिटल्स हैं स्टेट्स के वो सारे पब्लिक हो गए। प्राइवेट मेडिकल हॉस्पिटल की अगर हम बात करें तो टाटा इंस्टट्यूट हो जाएगा।
वेदर इट इज़ हीलिंग टच, मैक्स हॉस्पिटल, फोर्टिस हॉस्पिटल। तो वो सारे क्या है? प्राइवेट हो गए। तो आपको समझ में आ गया
इंडियन हेल्थ केयर सिस्टम क्या है? नेटवर्क है पब्लिक और प्राइवेट मेडिकल इंस्टीट्यूशन का हेल्थ केयर वर्कर्स का।
हेल्थ केयर वर्कर्स में क्या जाता है? नर्सेज, डॉक्टर्स, टेक्नशियंस, लैब टेक्नशियंस। देन पॉलिसीज इंफ्रास्ट्रक्चर
दैट प्रोवाइड प्रिवेंटिव क्यूरेटिव रिहबिलेटिव हेल्थ सर्विज टू दी पॉपुलेशन ऑफ इंडिया। तो इंडियन हेल्थ केयर सिस्टम
एक नेटवर्क है पब्लिक प्राइवेट मेडिकल इंस्टीट्यूशन का या फिर हॉस्पिटल्स का जहां पर हेल्थ केयर वर्कर्स हैं, पॉलिसीज
बनाई जाती है, इंफ्रास्ट्रक्चर बनाया जाता है टू प्रोवाइड प्रिवेंटिव क्यूरेटिव रिहबिलेटिव हेल्थ सर्विसेस। या फिर आप बोल
सकते हैं कि सिंपली यहां पर जो है ट्रीटमेंट दिया जाता है। राइट पेशेंट्स को। देन स्ट्रक्चर ऑफ इंडियन हेल्थ केयर
सिस्टम देखिए। तो देखिए जो हमारा हेल्थ केयर सिस्टम है वो तीन पार्ट में डिवाइड है। प्राइमरी, सेकेंडरी और टर्शरी। तो
प्राइमरी हेल्थ केयर सिस्टम के अंदर क्या आता है? देखिए फर्स्ट लेवल ऑफ कांटेक्ट फॉर पीपल। तो कोई भी छोटी सी छोटी बीमारी
जब आपको होती है चाहे बुखार हो, खांसी जुकाम तो आप कहां जाते हैं? प्राइमरी हेल्थ केयर सेंटर्स जाते हैं। तो यहां पर
क्या है? हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर जो कि आयुष्मन भारत नाम से जाने जाते हैं वो भी यहां पर गवर्नमेंट द्वारा खुले गए हैं। ये
क्या है? पीएचसी है। तो यहां पर क्या होता है? देखिए बेसिक ट्रीटमेंट होता है। वैक्सीनेशन होती है। मैटरनल केयर और जो
छोटे-मोटे डिसीज हैं उनसे प्रिवेंशन। एग्जांपल अगर आप देखेंगे तो रूरल एरियाज में जितने पीएचसी सेंटर्स होते हैं चाहे
वो उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, विलेजेस में तो उन्हें जो है हम प्राइमरी हेल्थ केयर कहते हैं। कह सकते हैं
प्राइमरी हेल्थ केयर जो है वो फर्स्ट लेवल ऑफ कांटेक्ट फॉर पीपल है। केयर देखते हैं। प्रोवाइड स्पेशलाइज्ड मेडिकल सर्विज। यहां
पर क्या था? फर्स्ट लेवल कांटेक्ट फॉर पीपल। और यहां पर क्या है? प्रोवाइड स्पेशलाइज्ड मेडिकल सर्विज। चलिए एग्जांपल
देखते हैं। कम्युनिटी हेल्थ सेंटर्स और डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल। तो डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल में जो भी सिविल हॉस्पिटल होते
हैं। आप जिस भी सिटी में रहते हैं उसके आसपास जो सिविल हॉस्पिटल होगा ना तो वो किसके अंदर आएगा? सेकेंडरी हेल्थ केयर
सिस्टम में आएगा। तो यहां पर आप देखें तो सर्जरी हो सकती है। स्पेशलिस्ट कंसल्टेशन मिल सकता है। यहां पर आपको एमडी डॉक्टर्स
मिल जाएंगे। फॉर एग्जांपल अगर आप देखेंगे तो सरजंग हॉस्पिटल दिल्ली डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल, श्रीनगर, डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल,
लुधियाना और किसी भी डिस्ट्रिक्ट में रहते हैं जो वहां का डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल होगा वो क्या है? सेकेंडरी हॉस्पिटल। वो क्या
है? सेकेंडरी हेल्थ केयर के अंदर आएगा। चलिए अब हम बात करते हैं टर्शरी हेल्थ केयर के एग्जांपल्स की। यहां पर क्या है?
हाइली स्पेशलाइज्ड हॉस्पिटल। यहां पर जो है रिसर्च चलती है। राइट? यहां पर दी बेस्ट माइंड और बेस्ट डॉक्टर्स होते हैं।
फॉर एग्जांपल एम्स दिल्ली जितने भी एम्स इंडिया के अंदर हैं वो सारे किसमें आएंगे? टर्शरी हेल्थ केयर एग्जांपल में आ जाएंगे।
ठीक है? द पीजीआई आ जाएगा। पीजीआईआर चंडीगढ़। राइट? देन टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल कैंसर ट्रीटमेंट एंड देन
क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज। तो ये कुछ एग्जांपल्स हैं जो टर्शरी हेल्थ केयर में आ जाएंगे। तो अभी सो फार हमने डेफिनेशन
देखी। फिर हमने तीन टियर सिस्टम देखा जिसमें प्राइमरी, सेकेंडरी और हमारा टर्शरी हेल्थ केयर सिस्टम था। प्राइमरी
पीएचसी था। सेकेंडरी के अंदर हमारे डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल आ रहे थे। और टर्शरी के अंदर एम्स, पीजीआई एंड टाटा मेमोरियल
सच जो बड़े हॉस्पिटल्स हैं वो आ रहे और ये प्रोवाइड करते हैं हाईली स्पेशलाइज्ड हॉस्पिटल्स। ठीक है? देन हम कुछ
एग्जांपल्स देखते हैं प्राइवेट सुपर स्पेशलिटी का। फॉर एग्जांपल अपोलो हॉस्पिटल, फोर्टिस हॉस्पिटल, मेदांता,
मैक्स सुपर हॉस्पिटल। तो ये सारे जो हॉस्पिटल्स हैं इंडिया के अंदर इनकी वजह से जो है हमारा फॉरेन जो टूरिज्म है,
मेडिकल टूरिज्म है वो यहां पर अट्रैक्ट होता है। राइट? क्योंकि यहां पर स्पेशलाइज्ड डॉक्टर हैं। ऑर्गन
ट्रांसप्लांट होता है, कैंसर ट्रीटमेंट होता है, न्यूरोसर्जरी होता है, कार्डियक सर्जरी होती है। सिमिलरली अगर आप ये
सर्विज को अेल करने किसी गवर्नमेंट हॉस्पिटल में जाएंगे तो ये पॉसिबल नहीं है, राइट? आपको फोर टू फाइव मंथ्स जो है
वेट करना पड़ेगा। राइट? फॉर ऑर्गन ट्रांसप्लांट और ये सारी चीजें। तो इसलिए यहां पर जो है प्राइवेट इंस्टीट्यूशन आए
हैं। बट यहां पर प्रॉब्लम क्या है? ये प्राइवेट इंस्टीट्यूशन बहुत ज्यादा कॉस्टली होते हैं। इससे क्या होता है? जो
फॉरेन मेडिकल टूरिज्म है वो अट्रैक्ट होता है। फॉर एग्जांपल ऑस्ट्रेलिया, यूएसए काफी सारे लोग जो हैं इन हॉस्पिटल्स के अंदर
आते हैं फॉर सच सर्विज। ठीक है? चलिए आगे देखते हैं हम अब गवर्नमेंट के हेल्थ केयर स्कीम्स के बारे में देखते हैं। यह बहुत
इंपॉर्टेंट है क्योंकि यह हम अपने टीएटी के अंदर यूज़ कर सकते हैं। यह हम अपने जीडी के अंदर यूज़ कर सकते हैं। और सिमिलरली ये
हमारे लेक्चर में तो यूज़ होंगी। इसलिए इसे ध्यान से याद रखिए। ठीक है? फर्स्ट क्या है? आयुष्मान भारत। राइट? प्रोवाइड फ्री
हेल्थ इंश्योरेंस कवरेज अप टू 5 लाख पर ईयर फॉर पुअर फैमिलीज़ एंड हॉस्पिटलाइजेशन फॉर हॉस्पिटलाइजेशन एंड मेजर ट्रीटमेंट।
ठीक? तो यहां पर जो है आयुष्मान भारत में क्या है? एक इंश्योरेंस प्रोवाइड किया जाता है फैमिलीज़ को जहां पर 5 लाख जहां पर
जो है 5 लाख तक का मुफ्त इलाज किया जाता है। देन हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर्स हमने इस पर बात करी थी। अपग्रेड्स प्राइमरी हेल्थ
सेंटर्स जो है हमारे पीएचसी हैं उन्हें जो है बेटर किया जाएगा। स्क्रीनिंग फॉर डिसीजसेस लाइक डायबिटीज एंड कैंसर्स। वहां
पर लैब्स खुली हैं जहां पर स्क्रीनिंग की जाती है डिसीज। जो न्यू लैब्स खोली गई हैं जहां पर अपना ब्लड चेकअप करवा सकते हैं।
क्या डिसीज हैं वो सारे हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर आयुष्मान भारत। देन नेशनल डिजिटल हेल्थ मिशन क्रिएट्स डिजिटल हेल्थ
इकोसिस्टम विद इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड्स एंड डिजिटल तो देखिए इसमें क्या है नेशनल डिजिटल हेल्थ मिशन जो है आपने
देखा आयुष्मान भारत है वहां पर क्या है 5 लाख का इंश्योरेंस मिल रहा है बट उन लोगों को इंश्योरेंस मिलेगा जिनके पास क्या है
आभा आईडी होएगी राइट तो ये आभा जो आईडी है आईडी कार्ड्स हैं यूनिक आईडी है वो कौन बनाता है नेशनल डिजिटल हेल्थ मिशन राइट वो
इसके अंडर बनती है तो आभा आईडी क्या है वो नेशनल डिजिटल हेल्थ मिशन के अंदर है राइट देन नेशनल हेल्थ मिशन तो यहां पर क्या है
स्ट्रेंथन रूरल एंड अर्बन हेल्थ केयर इंफ्रास्ट्रक्चर इंक्लूडिंग पीएसी, सीएचसी एंड मैटरनल हेल्थ सर्विज। तो देखिए यह
स्टार्ट किया गया था अराउंड 2005 के अंदर। तो इसका जो एम था वो मैटरनल हेल्थ को इंप्रूव करना था। क्योंकि आपको पता है
मैटरनल जो मोटलिटी रेट है पहले जो था ये काफी ज्यादा हाई था। ऑलदो अब ये कम हो चुका है बट हमें इसे और रिड्यूस करना है।
राइट? आगे इसमें चाइल्ड मोटिटी रेट भी आ जाता है जो कि इस टाइम पे 37.4 है आउट ऑफ 1000। तो यानी कि 1000 बच्चे अगर बोर्न
होते हैं तो उसमें एवरेजली 37 बच्चों की जो है डेथ हो जाती है। तो इसलिए जो है नेशनल हेल्थ मिशन लाया गया था। देन जन
औषधि स्कीम की अगर बात करें तो प्रोवाइड्स अफोर्डेबल जेरिक मेडिसिंस थ्रू प्रधानमंत्री जो प्रधानमंत्री जन औषधि
केंद्र अक्रॉस इंडिया। तो यहां पर क्या है गवर्नमेंट डायरेक्टली जो कंपनीज़ हैं उनसे जो है मेडिसिंस को परचेस करती है और चीपली
रेट पे जो है प्रोवाइड करती है। तो यहां पर 50 से 90% चीपर मेडिसिन मिलेगी। अगर आप केमिस्ट की जगह जन औषधि केंद्र पर जाते
हैं तो आपको जो है 50 से 90% चीपर मेडिसिन मिलेगी। राइट? तो आगे देखते हैं। व्हाट इंडियन हेल्थ केयर कंट्रीब्यूट्स टू दी
वर्ल्ड? तो पोलियो वैक्सीन एक्सपोर्टेड ग्लोबली फॉर डब्ल्यूho इम्यूनाइजेशन प्रोग्राम्स ड्यूरिंग कोविड 19 पेंडेमिक
इंडिया एक्सपोर्टेड हाइड्रोक्लोरिक्वीन टेबलेट्स पैरासिटामॉल टू मेनी कंट्रीज इंक्लूडिंग यूएसए ब्राजील इजराइल देन अगर
हम सीरम इंस्टट्यूट ऑफ इंडिया की बात करें तो इन्होंने जो है कोवि शील्ड बनाई और यह जो ऑक्सफोर्ड की एस्ट्रोजेनिका थी ये वो
मेडिसिन थी जो कि मैन्युफैक्चर हुई इंडिया में कोवि शील्ड के नाम से और हमने सप्लाई करी मोर देन 100 कंट्री इसलिए इंडिया को
जो है क्या कहते हैं हम वैक्सीन कैपिटल क्योंकि 60% ऑफ़ ग्लोबल वैक्सीन तो इंडिया ही मैन्युफैक्चर कर रहा है और सपोर्ट और
एक्सपोर्ट कर रहा है। देन वैक्सीन मैत्री इनिशिएटिव था जिसमें हमने जो है अपने नेबरिंग कंट्रीज को हमने जो है वैक्सीन
सप्लाई करी। तो ये पॉइंट बहुत इंपॉर्टेंट है क्योंकि आपको पता है एक लेक्चरेट आता है इंडियास रिलेशन विद नेबरिंग कंट्री।
देन टॉपिक आ जाता है हाउ इंडिया हेल्प्स इट्स नेबरिंग कंट्री और जीडी के अंदर भी कुछ टॉपिक आ सकता है। अगर इंडिया के
नेबर्स जो है वहां पर डिस्ट्रेस हो रहा है वो वो डिस्टेबलाइज हो रहे हैं। तो इंडिया कैसे इंप्रूव कर सकता है उनके साथ रिलेशन?
तो आप बोल सकते हैं कि देखिए वैक्सीन मैथ्री इनिशिएटिव हमने 2011 में चलाया था। जहां पर हमने क्या है कोविड वैक्सीन को
सप्लाई करा है। सिमिलरली जो है हम आगे भी उनकी हेल्प कर सकते हैं ऐसे कुछ इनिशिएटिव्स के साथ। देन ड्रग्स एंड
एचआईवी मेडिसिंस सप्लाई टू अफ्रीका एंड डेवलपिंग कंट्रीज 60% ऑफ ग्लोबल चाइल्डहुड वैक्सीनंस भी है। चाहे वो रूबेला हो,
हेपेटाइटिस हो वो सारी भी जो है इंडिया के अंदर ही प्रोड्यूस की होती है। तो हमने देखा यहां पर कितने अच्छे पॉइंट्स थे।
चाहे वो कोविड-19 में पूरे वर्ल्ड की हेल्प करना हो, चाहे वो सीरम इंस्टट्यूट का कोवि शील्ड को मैन्युफैक्चर करना हो,
100 प्लस कंट्रीज में सप्लाई करना हो, 100 प्लस कंट्री में, चाहे वो हमारा नेबरिंग कंट्रीज की हेल्प करनी हो, चाहे वो पोलियो
से फाइट करना हो या फिर ड्रग्स, एचआईवी एड्स की मेडिसिन बनानी हो, तो वहां पर जो है इंडिया कंट्रीब्यूट कर रहा है पूरे
वर्ल्ड के अंदर। तो, यहां से हमें क्या पता लगता है कि इंडिया की जो अहमियत है वो पूरे वर्ल्ड में है। राइट? चलिए, आगे
देखते हैं। मेडिकल टूरिज्म की हमने बात करी थी। इंडिया अट्रैक्ट्स पेशेंट्स फ्रॉम मेनी कंट्रीज ड्यू टू हाई क्वालिटी ऑफ़
ट्रीटमेंट एंड लोअर कॉस्ट। रोबोटिक सर्जरीज है, एडवांस्ड कैंसर ट्रीटमेंट है, टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल, मेदता, मैक्स
हमने ये सारे पढ़े थे। राइट? अपोलो हॉस्पिटल, फर्टिस हॉस्पिटल, मेदता। तो यहां पर जो है बाइपरस सर्जरी और कार्डियक
ट्रीटमेंट जो है यहां पर होता है। अब देखिए यहां पर फॉरेन टूरिस्ट इसलिए आते हैं क्योंकि अगर आप यूएसए और ऑस्ट्रेलिया
में ये करवाने जाएंगे तो आपको 1000 से मिलियन डॉलर की सर्जरी पड़ती है। वेयर एस इंडिया में आप चीपली ये सर्जरी को करवा
सकते हैं। देन ऑर्गन ट्रांसप्लांट सर्जरी परफॉर्म्ड एट एम्स अपोलो हॉस्पिटल एंड ग्लोबल हॉस्पिटल्स। तो अब जो है आपने
[नाक से की जाने वाली आवाज़] देखा होगा ऑर्गन ट्रांसप्लांट की सर्जरी जो पहले टैबू माना जाता था। अब यह बहुत ज्यादा
प्रॉमिनेंट हो चुका है। देन कंट्री सेंडिंग पेशेंट्स देन कंट्री सेंडिंग पेशेंट टू इंडिया। बांग्लादेश,
अफगानिस्तान, नेपाल, मिडिल ईस्ट, अफ्रीकन कंट्रीज। ये सारी कंट्रीज जो है वो कहां? इंडिया के अंदर आ रही हैं। तो इसमें जो है
हमारी नेबरिंग कंट्रीज भी हैं। तो इससे हमें पता लगता है हम यहां पर नेबरिंग कंट्रीज की हेल्प कर रहे हैं। राइट? देन
थाउजेंड्स ऑफ़ फॉरेन पेशेंट विजिट दिल्ली, चेन्नई, मुंबई एंड हैदराबाद हॉस्पिटल ए्री ईयर फॉर दी एडवांस ट्रीटमेंट। तो चलिए कुछ
रेशियोज़ देख लेते हैं। हॉस्पिटल बेड रेशियो अगर हम देखें इंडिया का 1.5 बेड है 1000 लोगों पर। और WHO रेकमेंड करता है
एटलीस्ट थ्री बेड होने चाहिए 1000 पे। तो हाफ है। यानी कि ये पॉइंट आप रख सकते हैं कि इंडिया का जो हेल्थ केयर सिस्टम है वो
सफर कर रहा है। तो आपको पता है हमारी जो पॉपुलेशन है अकॉर्डिंग टू यूएन प्रोजेक्शन वो अराउंड 166 करोड़ होने वाली है बाय
2050। तो वहां पर अगर हम देखें तो हमें ये सीवियरली इनक्रीस करने की जरूरत है। राइट? चलिए आगे देखें। इंडिया स्पेंड्स ओनली टू
टू 2.5% ऑफ़ जीडीपी ऑन हेल्थ केयर लोअर देन मेनी डेवलप्ड कंट्रीज। तो यहां पर जो है हमें बहुत जरूरी है और हमने तो देखा था
रिसर्च एंड डेवलपमेंट में हम 0.6 से लेके 0.7% ही स्पेंड करते हैं। राइट? और एजुकेशन में हम कितना करते हैं? 4 टू 5%
स्पेंड करते हैं। तो अगर आप ग्लोबल एवरेज देखेंगे अराउंड 6 टू 10% ऑफ जीडीपी वेरियस कंट्रीज जो स्पेंड करती है अपने हेल्थ
केयर सिस्टम पे। अगर हम इंडिया की बात करें तो ओनली टू टू 2.5% सस्पाइट सच अ ह्यूज पॉपुलेशन हम सिर्फ कितना टू टू 2.5
तो व्हिच इज़ कंसर्निंग। देन गवर्नमेंट हॉस्पिटल लाइक एम्स दिल्ली एंड सफरजंग हॉस्पिटल ऑफ इन फेस ओवर क्राउडिंग ड्यू टू
लिमिटेड रिसोर्सेज। तो यहां पर जो है फोर फोर फाइव मंथ्स की जो है अपॉइंटमेंट लगते हैं। तो आप देख सकते हैं कितनी लंबी लाइंस
वगैरह यहां पर लगती हैं। देन इंडिया वन नर्स पर 670 पीपल है। WHO रेकमेंड करता है वन नर्स पर 300 पीपल। तो यहां पर भी आप
देखेंगे डबल रेश्यो है नर्सेज का भी। तो अगर हम देखें बेड्स का भी और नर्सेज का भी रेश्यो जो है वो डबल है जो कि हमें
इंप्रूव करने की जरूरत है। देन फैमिली स्पेंडिंग लार्ज अमाउंट ऑन प्राइवेट हॉस्पिटल ट्रीटमेंट फॉर सर्जरीज एंड कैंसर
केयर। देखा होगा कि अब जो है जो प्राइवेट हॉस्पिटल्स हैं राइट उनके जो कॉस्ट है वो काफी ज्यादा एक्सपेंसिव होते जा रहे हैं।
अगर किसी के पास इंश्योरेंस नहीं है तो इट विल बी वेरी डिफिकल्ट टू गेट इंटू दी प्राइवेट हॉस्पिटल। देन अगर आप यहां पर
देखें रूरल एरियाज लैकिंग पीएचसी डायग्नोस्टिक लैब्स एंड आईसीयू फैसिलिटीज। ठीक है? ओके नाउ लेट्स मूव ऑन टू द डे एट।
राइट? सो इन डे एट वी आर गोइंग टू स्टडी द टॉपिक्स दैट आर रिलेटेड टू डिफेंस एंड स्पेस। सो फर्स्ट टॉपिक इज गोइंग टू बी
ड्रोन और यूएवी अनमैंड एरियल व्हीकल देन आईएसआरओ राइट इसरो इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन देन इंडियास मिसाइल
प्रोग्राम और इंडियास रॉकेट फोर्स देन वी आर गोइंग टू स्टडी न्यूक्लियर प्रोलीिफरेशन एंड एट लास्ट वी आर गोइंग टू
स्टडी आर्म्ड फोर्स प्रेशल वी आर आल्सो गोइंग टू कवर टू जीडी टॉपिक्स दैट केम रिलेटेड टू दिस टॉपिक्स राइट सो देखिए अगर
हम ड्रोंस की हिस्ट्री की बात करें तो ड्रोनस हैव बीन यूज्ड फ्रॉम दी वर्ल्ड वॉर एरा से राइट तो वर्ल्ड वॉर वन में जो है
फ्लाइंग बॉम्ब्स होते थे और बेसिक पायलटलेस एयरक्राफ्ट होते थे। देन वर्ल्ड वॉर टू में जो है ड्रोंस को यूज़ किया जाता
था एज अ टारगेट प्रैक्टिस। जो हमारी एडी गंस होती थी एयर डिफेंस गंस होती थी पहले। राइट? तो वो टारगेट प्रैक्टिस के लिए जो
है ड्रोंस को यूज़ करती थी। देन अगर हम वियतनाम वॉर की बात करें तो वहां पर सर्लेंस के लिए इंटेलिजेंस गैदरिंग के लिए
विदाउट रिस्किंग ह्यूमन लाइफ जो है यूएसए ने यूज़ करें। देन अगर हम 200 एरा की बात करें तो ड्रोंस बहुत ज्यादा प्रॉमिनेंट हो
चुके थे। राइट? चाहे वो एमक्यू वन हो यूएसए का एमक्यू टू हो। तो ड्रोंस मिलिट्री के अंदर जो है 2000 एरा से जो है
स्टार्ट हो चुके थे आना। तो चलिए अब हम बात करते हैं एक डेफिनेशन बेसिक ड्रोन होता क्या है? ए ड्रोन इज आल्सो कॉल्ड एज
अ यूएवी अनमैंड एरियल व्हीकल इज़ एन एयरक्राफ्ट दैट फ्लाइस विदाउट अ ह्यूमन पायलट ऑन बोर्ड। राइट? इट इज़ कंट्रोलोल्ड
रिमोटली बाय पायलट और ऑटोनॉमसली यूजिंग जीपीएस सेंसर्स एंड एआई सिस्टम। राइट? तो ड्रोन क्या है? एक ऐसा एयरक्राफ्ट है जो
फ्लाई करता है विदाउट ह्यूमन पायलट के। राइट? और ये कंट्रोल किया जाता है जीपीएस सेंसर और एआई सिस्टम द्वारा। राइट? तो
चलिए ड्रोंस के पार्ट देखते हैं हम। राइट? तो ड्रोन के अंदर क्या होता है? बैटरी एंड नेविगेशन सिस्टम। तो आपने देखा होगा अब जो
ड्रोंस हैं वो प्रोमिनेंट है बहुत। राइट? पार्टीज में भी यूज होते हैं फॉर वीडियो रिकॉर्डिंग। तो वहां पर भी क्या होता है
कि ड्रोनस को चार्ज किया जाता है। राइट? जब भी आपने देखा होगा डीजीआई डीजीआई के ड्रोनस हैं जो फैंटम राइट? तो वहां पर
क्या है? बैटरी को चार्ज करना पड़ता है। तो बैटरी होती है ड्रोन के अंदर एक नेविगेशन सिस्टम होता है। राइट? जीपीएस ही
यूज़ करता है बेसिकली ड्रोन। देन हमारे पास होते हैं कैमरास एंड सेंसर। तो वीडियो रिकॉर्ड कैसे होएगी? कैमरा से होएगी।
राइट? देन अगर हम मिलिट्री ड्रोंस की बात करें तो वहां पर बहुत सारे सेंसर्स होते हैं। वेदर इट्स थर्मल इमेजिंग सेंसर,
फ्रंट एंड फोर्स सिस्टम, प्रॉक्सिमिटी सेंसर। बहुत सारे सेंसर जो है मिलिट्री ड्रोनस में देखने को मिलेंगे। देन आता है
हमारे पास प्रोपेलर एंड मोटर्स। तो ड्रोंस के अंदर आपने देखे होंगे छोटे-छोटे प्रोपेलर्स होते हैं जो मूव करते हैं
जिसकी वजह से लिफ्ट जनरेट होती है। राइट? देन रिमोट कंट्रोल और ऑटोनॉमस फ्लाइट सॉफ्टवेयर। राइट? ड्रोंस जो है रिमोट से
कंट्रोल किए जाते हैं। इसलिए रिमोट कंट्रोल और एक सॉफ्टवेयर की जरूरत तो है जिससे हम कम्युनिकेशन मेंटेन करेंगे ड्रोन
के साथ। यह कुछ इंपॉर्टेंट पार्ट्स हैं ड्रोन के अंदर। राइट? तो चलिए अब हम बात करते हैं कुछ फेमस ड्रोन की। MQ9 ड्रोन।
तो ये अभी तक का मोस्ट एक्सपेंसिव ड्रोन है यूज्ड फॉर सर्विलेंस एंड टारगेट स्ट्र्राइक्स। राइट? और यही ड्रोन जो है
वो यूएसए ने बहुत ज्यादा यूज करा। किसमें? ईरान और इजराइल के कॉन्फ्लिक्ट में। देन बरेक्टर टीबी टू यूज्ड इन कॉन्फ्लिक्ट
लाइक दी रशिया वर्सेस यूक्रेन वॉर। तो आपने देखा रशिया वर्सेस यूक्रेन वॉर में मेजरली क्या है? ड्रोनस ही यूज़ हुए हैं।
ऑटोनॉमस व्हीकल ही यूज़ हुए हैं। और अगर आप देखेंगे रशिया की जो सबसे ज्यादा कैजुअलिटी भी हुई है वो ड्रोन अटैक और
अनमैंड एररियल व्हीकल अटैक की वजह से ही हुई है। तो इसलिए अब हम कह सकते हैं कि पूरी वॉरफेयर जो है चेंज हो चुकी है और अब
ड्रोन जो है वो की पार्ट बन चुका है एक वॉरफेयर का। तो ये जो बरेक्टर ड्रोन है ये कहां है? टर्की के ड्रोंस हैं और यह
यूक्रेन द्वारा यूज़ किए गए थे। देन हमारे पास आता है लॉ एंटरिंग ड्रोंस। राइट? कामेकाज़ ड्रोंस कैन स्टे इन द एयर एंड
स्ट्राइक टारगेट व्हेन डिटेक्टेड। तो देखिए ये जो कामीकाज़ ड्रोंस होते हैं इनकी खासियत क्या है? ये बहुत ज्यादा चीप होते
हैं। ये बहुत ज्यादा डिस्टेंस जो है ट्रेवल कर सकते हैं। देन इनके पास क्या होता है? डेडली वॉर हेड होता है। तो ये
कामेकाज़ मतलब क्या होता है? सुसाइड ड्रोंस हैं। ये क्या है? लॉटरिंग करते हैं स्काई के अंदर। व्हेन दे डिटेक्ट द टारगेट। तब
यह जाकर जो है उस पे अटैक कर देते हैं। और यह जो कामेकाज़ ड्रोनस है यही ड्रोन जो है ईरान द्वारा यूज़ किए गए टू हिट दी प्रिंस
ऑफ़ सुल्तान बेस ऑफ़ सऊदी अरेबिया एंड देन अलदाफरा बेस ऑफ यूएई और भी जितने बेससेस हैं जितने भी मिडिल ईस्ट में जो टारगेट
हुए हैं वो कामेकाज़ ड्रोन की हेल्प से हुए। राइट? चलिए अब हम बात करते हैं टाइप्स ऑफ ड्रोंस की। तो सबसे पहले क्या
आता है? मल्टी मोटर ड्रोंस। मोस्ट कॉमन है ये यूज्ड फॉर फोटोग्राफी एंड सर्लेंस। ठीक है? तो मल्टीमोटर क्यों कहते हैं? आप देख
सकते हैं यहां पर जो है काफी सारी मोटर्स लगी हुई है। राइट? तो इसलिए हम इसे मल्टी मोटर कहते हैं। देन हमारे पास आता है
फिक्स्ड विंग ड्रोंस। लॉन्ग फ्लाइट टाइम यूज्ड फॉर मैपिंग एंड मिलिट्री ऑपरेशन। तो देखिए जो ये विंग्स वाले ड्रोन होते हैं
इनकी स्पेशलिटी क्या है? कि ये लॉन्ग डिस्टेंस कैरी कर सकते हैं। लॉन्ग फ्लाइट टाइम होता है इनका। राइट? जैसे कि ये भी
क्या है? एक फिक्स्ड विंग ड्रोन है। राइट? देन हमारे पास आता है सिंगल मोटर ड्रोनस। हेलीकॉप्टर लाइक ड्रोन यूज्ड फॉर हैवी
पेलोड्स। तो ये तीन टाइप हो गए मल्टीमोटर विंग वाले ड्रोंस एंड सिंगल रोटर ड्रोन। याद रहेगा? चलिए आगे चलते हैं। देन इंडियन
ड्रोन डेवलपमेंट इंडिया इज़ डेवलपिंग इंडीजीनस ड्रोन टेक्नोलॉजी थ्रू डिफेंस रिसर्च डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन यानी कि
डीआरडीओ। तो इंडिया काम कर रहा है रुस्तम। रुस्तम टू पे। लॉन्ग एंडोरेंस सर्लेंस यूएवी अनमैन एरियल व्हीकल है। तपस ड्रोन
पर हम लोग काम कर रहे हैं। एंड दिस तपस विल बी यूज़्ड फॉर इंटेलिजेंस एंड रिक्नेसेंस के लिए। देन इंडिया इज़ आल्सो
एनकरेजिंग ड्रोन स्टार्टअप अंडर दी ड्रोन शक्ति स्कीम। तो ड्रोन शक्ति स्कीम के अंदर क्या है? हम स्टार्टअप इंडिया के
अंदर जो है ड्रोन मैन्युफैक्चरिंग को जो है ज्यादा से ज्यादा बढ़ावा दे रहे हैं। उसको हमने पीएलआई स्कीम के अंदर जो है
इंटीग्रेट कर दिया है। तो इससे क्या होगा कि इंडिया के अंदर जो है ड्रोन का स्टार्टअप और ड्रोन का जो क्रेज है वो
बढ़ेगा। राइट? चलिए अब हम बात करते हैं इंडियन ड्रोन डेवलपमेंट्स की। तो इंडिया इज कॉन्सेंटली वर्किंग ऑन वेरियस ड्रोन।
हमने देखा तपस हो, रुस्तम हो बट अपार्ट फ्रॉम दिस हम डेवलप कर रहे हैं फोर स्क्वाड्रंट्स ऑफ घातक स्टेल्थ बमबर
ड्रोन। राइट? तो ये जो घातक ड्रोन है इसके अंदर जो इंजन यूज़ होगा वो कौन सा इंजन यूज़ होगा? कावेरी इंजन। और ये वही कावेरी इंजन
है जो हम तेजस के लिए डेवलप कर रहे थे। बट हम उतना थ्रस्ट जनरेट नहीं कर पाए थे। बट नाउ अब हमने इसको थोड़ा मॉडिफाई करके जो है
हम उसको घातक यूसीएवी में यूज़ करेंगे। देन हमारे पास आता है HS HL कैट्स वॉरियर लॉयल विंगमैन कांसेप्ट। ठीक है? तो ये जो है हम
अराउंड 100 यूनिट्स एक्वायर करेंगे। अभी इस पर काम चल रहा है। और ये जो है तेजस के साथ राइट? Tejas एयरक्राफ्ट के साथ एज अ
विंगमैन काम करेंगे। तेजस एयरक्राफ्ट जो है इन्हें कंट्रोल करेगा और इसके अंदर कोई पायलट नहीं होगा। राइट? तो ये एज अ
विंगमैन काम करेगा। चलिए आगे चलते हैं। देन एडवांटेजेस देखते हैं हम ड्रोंस के। तो लो कॉस्ट वॉरफेयर। ड्रोंस आर मच चीपर
देन फाइटर जेट्स। शहीद 136 ड्रोन यूज्ड इन ईरान। रशिया यूक्रेन वॉर। राइट? एग्जांपल क्या है? शहीद ड्रोन। शहीद मींस क्या? वही
कामेकाजे ड्रोनस हैं। ये राइट? तो ये जो है रशिया ने यूज़ करे थे अगेंस्ट यूक्रेन। और ये जो शहीद ड्रोन है ये ईरान ने बनाए
थे। और यही ड्रोन जो है ईरान ने यूज करे अगेंस्ट किसके? यूएसए के। और किसके? इजराइल के। अब देखिए ये ड्रोन जो है बहुत
ही सस्ता ड्रोन है। राइट? अराउंड 20 टू $25,000 में ये ड्रोन बन जाता है। वेयर एज जो हमारी मिसाइल है एयर डिफेंस सिस्टम की
कुछ मिसाइल्स तो $1 मिलियन की हैं। तो क्या आप इतनी कॉस्टली मिसाइल अगर एक कामेकाजे ड्रोन को मारने के लिए यूज़ कर
रहे हैं तो यह इकोनॉमिकली क्या सस्टेनेबल है? नहीं है। इसलिए जो है यह लो कॉस्ट वॉरफेयर है। और सबसे बड़ा एडवांटेज क्या
है? इसे एयर डिफेंस सिस्टम हिट नहीं कर सकता क्योंकि ये साइज में बहुत ज्यादा छोटे होते हैं। दूसरी चीज ये स्वम ड्रोन
यानी कि एक नहीं ये ऐसे 10 ड्रोन एक साथ जाते हैं। तो अगर कोई एयर डिफेंस सिस्टम है फोर टू फाइव मिसाइल्स हैं तो वो ज्यादा
से ज्यादा क्या है? चार या पांच कमे खासे ड्रोन को हिट कर सकता है। बट रेस्ट जो पांच से छह ड्रोन है वो जाके उस एयर
डिफेंस सिस्टम का रडार उड़ा देंगे। राइट? और अगर रडार ही काम नहीं करेगा तो हमारा एयर डिफेंस सिस्टम भी नहीं काम करेगा। ली
जो वॉरफेयर में है अगर आप देखेंगे कामेकास ड्रोन 50-60 का कामकाज ड्रोन एकदम से लॉन्च कर दिए जाते हैं जिससे जो है हमारा
जो एयर डिफेंस सिस्टम है वो क्या हो जाएगा ओवरवेल में हो जाएगा उसे पता नहीं लगेगा कौन सा टारगेट हिट करना है और अगर वो कर
भी देगा तो रेस्ट ऑफ द टारगेट पे जाके का कामकाज ड्रोन हिट कर देगा नो रिस्क टू पायलट अनमैन सिस्टम रिड्यूसेस ह्यूमन
कैजबिलिटी एग्जांपल एमq9 ड्रोनस ये यूएसए ने यूज़ करे और ये क्रैश भी हुए हैं। राइट ये जो है ईरान ने एयर डिफेंस सिस्टम से
हिट भी करे हैं। देन प्रसीजन अटैक्स ड्रोन कैन स्ट्राइक टारगेट्स एक्यूरेटली यूजिंग सेंसर एंड जीपीएस आपने देखा होगा ईरान ने
जो है काफी सारे टारगेट प्रिसाइजली हिट करे थे। चलिए कुछ और एडवांटेजेस की बात करते हैं। मल्टीसेक्टर यूज़ यूज्ड इन
एग्रीकल्चर डिलीवरी डिजास्टर रिलीफ एंड सर्लेंस एंड स्वर्म टेक्नोलॉजी मल्टीपल ड्रोनस कैन अटैक और मॉनिटर टुगेदर इंडियन
आर्मी स्वम ड्रोन सिस्टम। तो ये देखिए एक ड्रोन होगा उसके साथ पांच से 10 ड्रोन सिस्टम काम करेंगे। इसे हम स्वम ड्रोन
टेक्नोलॉजी बोलते हैं। और इंडियन आर्मी ने जो है इसे इंटीग्रेट कर लिया है अपने आर्सनल के अंदर। चलिए अब हम बात करते हैं
यूज़ ऑफ़ ड्रोंस इन डिफरेंट सेक्टर। फर्स्ट वन इज़ मेडिकल एंड हेल्थ केयर। यूज़्ड टू डिलीवर वैक्सीनंस, ब्लड सैंपल्स,
मेडिसिंस, रिमोट एरियाज। राइट? तो इंडिया के अंदर भी जो है ये ड्रोनस यूज़ करते हैं फॉर मेडिकल एंड हेल्थ केयर पर्पस।
तेलंगाना में अगर आप देखेंगे तो वहां पर एक इनिशिएटिव चला था। राइट? मेडिकल फ्रॉम स्काई। यहां पर जो है ड्रोंस यूज़ किए गए
मेडिसिन को सप्लाई करने के लिए, ब्लड सैंपल के लिए और भी बहुत वेरियस पर्पस के लिए। सिमिलरली मेघालय और आंध्र प्रदेश में
भी और फ्लड के टाइम पर भी जो है हमने ड्रोंस को यूज़ करा मेडिसिन सप्लाई करने के लिए, वैक्सीन सप्लाई करने के लिए। अगर हम
डिफेंस की बात करें तो हमारे पास जो है हिरोन यूएवी है, रुस्तम टू यूएवी है और ये जो हिरोन यूएवी है ये हमने यूज़ करा था किस
में? ऑपरेशन सिंदूर में। राइट? और हमने यूज़ करा हरूफ यूएवी जो इजराइल का था। तो ये जो यूएवी था इसने जो एयर डिफेंस सिस्टम
और जो पाकिस्तान के एयर बेससेस में जाके भी अटैक करा था ड्यूरिंग ऑपरेशन सिंदूर। राइट? तो चलिए अब हम आगे चलते हैं। राइट?
एग्रीकल्चर सेक्टर में देखें तो यूज्ड फॉर क्रॉप मॉनिटरिंग, पेस्टिसाइड, स्प्रिंग, फर्टिलाइजर डिस्ट्रीब्यूशन, गरुड़ा एयर
स्पेस एग्रीकल्चर ड्रोंस यूज्ड इन मेनी इंडियन फर्म्स। कौन सा नाम है? गरुड़ा एयर स्पेस एग्रीकल्चर। राइट? देन अगर हम बात
करें नमो ड्रोन दीदी स्कीम आई थी वुमेनस के लिए। जहां पर जो है हम वुमेन को मॉडर्न फार्मिंग की टेक्निक सिखा रहे थे। उसमें
ड्रोन सिखाना भी था फॉर स्प्रेइंग, फर्टिलाइजर जिससे जो लेबर का यूज़ होता है एक्स्ट्रा फॉर स्प्रेइंग, फर्टिलाइजर और
भी मॉनिटरिंग करने के लिए तो वो ड्रोन ही करेगा। तो ये बता सकते हैं हम। देन डिजास्टर मैनेजमेंट यूज़्ड इन फ्लड
रेस्क्यू सर्च ऑपरेशन डैमेज असेसमेंट Idea Ford Q41 ड्रोन जो है वो यूज़्ड है सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशंस के लिए और डिजास्टर
मॉनिटरिंग सिस्टम यहां पे हमने गरुडा एयर स्पेस के बारे में पढ़ा जो एग्रीकल्चर के ड्रोन बना रहा है। देन हमने Idea फर्ज के
बारे में पढ़ा जो डिजास्टर मैनेजमेंट के ड्रोन बना रहा है। देन ई-कॉमर्स एंड डिलीवरी की अगर हम बात करें तो स्काई एयर
डिलीवरी ड्रोनस यूज्ड इन पायलट प्रोजेक्ट्स फॉर पार्सल मेडिसिंस डिलीवरी तो यूएसए Amazon Walmart ये तो यूज़ करते
ही हैं और इंडिया के अंदर भी जो है एक्सपेरिमेंट चल रहा था। राइट? देन लॉ एंड इनफोर्समेंट यूज्ड फॉर पुलिस यूज्ड बाय
पुलिस फॉर क्राउड मॉनिटरिंग एंड ट्रैफिक सर्िलेंस। तो अगर आप किसी क्राउडेड एरिया में गए होंगे सपोज कोई मेला हो या कोई
फंक्शन हो रहा होगा राइट कोई रैली हो रही होगी तो वहां ड्यूरिंग कुंभ मेला एंड लार्ज पब्लिक इवेंट्स तो लार्ज पब्लिक
इवेंट्स में और क्या आ सकता है कोई भी रैली होती है जब पॉलिटिशियंस की राइट जहां पर बहुत लोग भी आपने देखा होगा पुलिस जो
है वो ड्रोन यूज़ करती है फॉर सर्लेंस देन अगर हम बात करें लॉजिस्टिक्स की राइट तो यूज़्ड फॉर पैकेज डिलीवरी एक्सपेरिमेंट
एग्जांपल कंपनीज़ लाइक स्विगी एंड डिंजो टेस्टिंग ड्रोन डिलीवरी चलिए अब हम बात करते हैं ईरान एंड यूएसए ड्रोन वॉरफेयर की
तो रशिया एंड यूक्रेन वॉर इज़ कॉल्ड एस दी फर्स्ट लार्ज स्केल ड्रोन वॉरफेयर राइट शहीद ड्रोन के बारे में हमने पढ़ा का
कामकाजे अटैक यूक्रेनियन इंफ्रास्ट्रक्चर और इन रिस्पांस जो यूक्रेन है उसने यूज़ करा बायरेक्टर ड्रोन जो टर्किश ड्रोन था
यूक्रेन यूज्ड इट फॉर डिस्ट्रइंग रशियन टैंक्स आर्टिलरी एंड सप्लाई कॉन्वेज देन अगर हम इंडिया की बात करें क्या इंडिया
कोई का कामकाजे ड्रोन बना रहा है यस तो देखेंगे अगर रिटायर्ड इंडियन एयरफोर्स इंजीनियर फाउंडेड न्यू स्पेस रिसर्च
टेक्नोलॉजीस इन बेंगलुरु नाम क्या है न्यू स्पेस रिसर्च टेक्नोलॉजीस इन बेंगलुरु इस कंपनी ने जो है वो शेष शेषनाग ड्रोन बनाया
है। राइट? शेषनाग 150 कामेकाजी ड्रोन जिसकी रेंज जो है 1000 कि.मी. है और ये एक चीप है। तो मे बी आई थिंक इन फ्यूचर
इंडियन एयरफोर्स जो है इसे एक्वायर करे। इसका नाम जरूर याद रखिए शेषनाग 150 क्योंकि इसकी जो रेंज है वो बहुत ज्यादा
है। चलिए बात करते हैं हम जीडी टॉपिक की। सो व्हाट इज गोइंग टू बी प्री प्री प्री प्री प्री प्री प्री प्री प्री प्रॉमिनेंट
इन फ्यूचर वॉरफेयर एंड इमर्जिंग मिलिट्री टेक्नोलॉजीस? ड्रोंस अनमैंड एरियल व्हीकल, साइबर अटैक्स एआई, रोबोटेटिक वारफेयर एंड
ऑटोनॉमस कॉम्बैट। तो ड्रोंस एंड अनमैंड एरियल व्हीकल्स के एग्जांपल आप दे सकते हैं। फॉर एग्जांपल आप बताइए कि रशिया
वर्सेस यूक्रेन वॉर जो कि रिसेंटली हुई और अभी भी चल रही है उसे कहा जाता है फर्स्ट लार्ज स्केल ड्रोन वॉर। देन आप एग्जांपल
दीजिए कि ईरान और यूएसए के ड्रोन वॉरफेयर के अंदर अगर हम बात करें तो एमq9 ड्रोन हो चाहे वो कामेकाजे ड्रोन हो, शहीद 136
ड्रोन हो। तो ये जो ड्रोंस हैं ये दोनों यूज किए इन दोनों कंट्रीज ने। राइट? पर आप देखेंगे फर्स्ट टाइम ऐसा हुआ कि ग्राउंड
ऑन बूट्स नहीं हुआ। राइट? यानी कि सोल्जर्स जो है नहीं आए डायरेक्टली अटैक करने के लिए। ड्रोंस और मिसाइल्स का यूज़
हुआ। तो इसलिए जो फ्यूचर वॉरफेयर है वो ड्रोन होने वाला है। देन आप एग्जांपल दीजिए कि इंडिया जो है वो हेरोन यूएवी को
यूज़ करता है। तपस पर हम काम कर रहे हैं। देन आप बता सकते हैं हरूफ ड्रोन, सर्चर ड्रोन और वेरियस स्मॉल ऑटोनॉमस व्हीकल यूज़
हुए ड्यूरिंग ऑपरेशन सिंदूर। देन आप बता सकते हैं कि इंडिया जो है वो फोर स्क्वाड्स ऑक स्टेल्थ बम्बर बना रहा है।
यह जो है मे बी अराउंड 2030 या फिर 2035 तक इसको इंटीग्रेट करें। देन हम हाल कैट्स वॉरियर विंगमैन बना रहे हैं अपने हाल तेजस
के साथ। तो इससे हमें पता लगता है कि फ्यूचर के अंदर जो है ड्रोन वॉरफेयर और विंगमैन और अनमैंड एरियल व्हीकल ही फ्यूचर
है। तो ये कुछ पॉइंट्स थे जो कि ड्रोन एंड अनमैंड एररियल व्हीकल से रिलेटेड थे। लेट्स मूव ऑन टू द नेक्स्ट टॉपिक जो कि है
आईएसआरओ इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन। हेड क्वार्टर है बेंगलुरु में एंड इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन
इज इंडियास नेशनल स्पेस एजेंसी। नेशनल स्पेस एजेंसी है ये हमारी दैट डेवलप्स सेटेलाइट्स, रॉकेट्स एंड स्पेस
टेक्नोलॉजी। तो आईएसआरओ हमारी स्पेस एजेंसी है जो कि डेवलप करती है सेटेलाइट्स, रॉकेट्स और स्पेस टेक्नोलॉजी
को। क्यों? फॉर कम्युनिकेशन, वेदर फॉरकास्टिंग, डिफेंस के लिए, नेविगेशन के लिए और साइंटिफिक एक्सप्लोरेशन के लिए। तो
समझ में आ गई डेफिनेशन? नेशनल स्पेस एजेंसी सेटेलाइट रॉकेट स्पेस टेक्नोलॉजी बनाती है फॉर कम्युनिकेशन वेदर
फॉरकास्टिंग डिफेंस नेविगेशन साइंटिफिक एक्सप्लोरेशन चलिए हिस्ट्री देखते हैं हम आईएसआरओ की तो 1962 में इसको कहा जाता था
इनकोस्पा राइट फॉर्म्ड बाय विक्रम साराभाई ठीक है तो हम बोल सकते हैं आईएसआरओ वाज़ फाउंडेड बाय विक्रम साराभाई आर रिनाउंड
साइंटिस्ट इन 1969 जो है इसे इसरो एस्टैब्लिश कर दिया गया और 1975 में हमने अपनी फर्स्ट सेटेलाइट ल्च करी जो कि थी
आर्यभट्टा राइट तो आर्यभट्टा जो सेटेलाइट है ये हमने रशिया की हेल्प से ल्च करी। तो हम कह सकते हैं कि इंडिया को जो स्पेस
प्रोग्राम था उसमें रशिया ने हेल्प करी। तो जब भी आप लेक्चरेट देंगे इंडिया रशिया रिलेशनशिप या फिर कोई जीडी हो रहा होगा तो
वहां बता सकते हैं कि हम कह सकते हैं कि रशिया हैज़ हेल्प्ड इंडिया इन अर्ली स्पेस प्रोग्राम्स लाइक फॉर एग्जांपल वी डेवलप्ड
द आर्यभट्ट सैटेलाइट विथ द असिस्टेंस ऑफ़ रशिया। देन अराउंड 1980 हमने जो है एसएलवी 3 ल्च करा। रोहिणी सेटेलाइट ल्च करी। 208
में चंद्रयान वन ल्च करा जिसने बताया कि वाटर है मोन पर। एंड 2014 में आपने देखा होगा हमने मार्स ऑर्बिटर मिशन भेजा था जो
कि सक्सेसफुल था अपने फर्स्ट अटेम्प्ट में ही और ये बहुत चीप था फॉर कंपैरिजन टू द अदर कंट्रीज और 2023 में हमने जो है
चंदनयान 3 ल्च करा तो ये कुछ माइलस्टोन थे आईएसआरओ के हिस्ट्री में राइट चलिए अब हम बात करते हैं आईएसआरओ के मिशनंस के बारे
में डिफरेंट कैटेगरीज के और सेटेलाइट्स के बारे में तो देखिए सबसे पहले क्लाइमेट चेंज और एनवायरमेंट की अगर हम बात करें तो
हमारे पास है कार्टो सेट सेटेलाइट्स राइट हाई रेोल्यूशन अर्थ इमेजिंग फॉर मैपिंग एंड एनवायरमेंटल मॉनिटरिंग तो याद रहेगा
कि कार्टो साट हम यूज़ करते हैं फॉर क्लाइमेट चेंज एंड एनवायरमेंट। तो यू कैन से दैट कार्टो सेट सेटेलाइट्स आर यूज़्ड
फॉर एनवायरमेंटल मॉनिटरिंग एंड इट इज़ यूज़्ड फॉर क्लाइमेट चेंज एंड एनवायरमेंट प्रोटेक्शन। कार्टो सेट याद रहेगा। देन
हमारे पास आता है ओशन सेट। ओशन सेट टू ओशन सेट थ्री। ये जो सेटेलाइट्स हैं, ये यूज़ होती हैं मॉनिटर ओशियन टेंपरेचर ज़ों्स,
फिशरीज़। एग्जांपल हेल्प्स फिशरमैन टू लोकेट पोटेंशियल फिशिंग ज़ों्स। और ओशियन टेंपरेचर से जो है हम बहुत सारी चीजों को
पता लगा सकते हैं। हम क्लाइमेट चेंज हमारा वेदर कैसा होगा। राइट? और कुछ फिनोमिना है जैसे कि अलमिनो के बारे में आपने सुना
होगा। राइट? तो यह जो है वह कौन बताता है? ओशनियन सेट सेटेलाइट। तो कार्टो सेट एनवायरमेंट और क्लाइमेट चेंज से रिलेटेड।
ओशन सेट ओशन से रिलेटेड। देन हमारे पास आता है फॉर वेदर फॉरकास्टिंग के लिए कौन सी सेटेलाइट है? इनसेट। राइट? इनसेट सीरीज
सेटेलाइट प्रोवाइड मेटोलॉजिकल डाटा रेनफॉल, स्टॉर्म ट्रैकिंग। एग्जांपल हेल्प्स टू आईएमडी प्रिडिक्ट साइक्लोन,
मॉनसून पैटर्न। तो आपने देखा होगा कि हमारे मोबाइल फोंस में नोटिस आ जाता है साइक्लोन का, मॉनसून पैटर्न्स का,
स्टॉर्म्स का। तो वो हमारा इंडियन मेटोलॉजिकल डिपार्टमेंट प्रेडिक्ट कैसे करता है? इनसेट सीरीज के सेटेलाइट से पता
करते हैं। राइट? देन कुछ डिफेंस और सिक्योरिटी रिलेटेड सेटेलाइट्स की बात करें तो हमारे पास है आरआई सेट रिसेट या
फिर आरआई सेट सेटेलाइट्स। राइट? रेडार इमेजिंग सेटेलाइट्स यूज्ड फॉर बॉर्डर सर्विलेंस एंड मॉनिटरिंग इनफिल्ट्रेशन।
राइट? तो आरआई सेट्स याद रहेगा। राइट? यूज्ड फॉर मॉनिटरिंग बॉर्डर एंड डिजास्टर एरियाज इवन थ्रू क्लाउड्स। देन हमारे पास
आता है एमईसेट। राइट? इलेक्ट्रॉनिक इंटेलिजेंस सैटेलाइट फॉर डिफेंस सर्लेंस। हमने पढ़ा आरआई सेट एमई सेट। देन हमारे
पास आता है जीसेट। रुकमणी कम्युनिकेशन सैटेलाइट फॉर इंडियन नेवी। आई रिपीट जीसेट रुकमणी। कम्युनिकेशन सेटेलाइट फॉर इंडियन
नेवी। तो डिफेंस सेक्टर में याद रहेगा चाहे वो आरआई सेट हो, एमई सेट हो, जीसेट हो। मैं दोबारा से रिपीट करता हूं। आरआई
सेट, एमई सेट, जीसेट। बस ये याद रखो और आप अपने आप ऐड कर सकते हो कि ये हम कम्युनिकेशन के लिए, इंटेलिजेंस गैदरिंग
के लिए, डिफेंस सर्लेंस के लिए, बॉर्डर मॉनिटरिंग के लिए। तो ये सब चीजें आप अपने आप ऐड कर सकते हैं। और ये सारी सेटेलाइट्स
यूज़ होती हैं। देन अगर हम बात करें इकोनमिक कंट्रीब्यूशन की, तो आईएस रोड जनरेट्स रेवेन्यू बाय लॉन्चिंग फॉरेन
सैटेलाइट एज़ वेल। राइट? इंडिया ऑफर्स लो कॉस्ट, लॉन्च सर्विस अट्रैक्टिंग ग्लोबल क्लाइंट्स। पीएसएलवी हैज़ ल्च 400 प्लस
फॉरेन सेटेलाइट फॉर ओवर 30 कंट्रीज। तो ये पॉइंट जरूर बोलिए कि आईएसआरओ तो इकोनमिक कंट्रीब्यूशन भी कर रहा है और हमने 400
फॉरेन सेटेलाइट्स अब तक सो फार 30 कंट्रीज की ल्च कर दी है। और इससे क्या होता है? इंडिया की सॉफ्ट पावर भी बढ़ती है। राइट?
सॉफ्ट पावर और रेपुटेशन बहुत ज्यादाेंट है डिप्लोमेसी के लिए। राइट? देन मिशन शक्ति ये बहुतेंट पॉइंट है। राइट? इसको स्टार
मार्क कर लो। इंडिया हैज़ सक्सेसफुली टेस्टेड एंटी सेटेलाइट मिसाइल डिस्ट्रइंग सेटेलाइट इन अ लो ऑर्बिट इन अ लो अर्थ
ऑर्बिट इंडिया बिकम फोर्थ कंट्री विद एसेट इट मींस क्या हो गया एंटी सेटेलाइट कैपेबिलिटी ठीक है तो मिशन शक्ति का नाम
जरूर याद रखना है तो इसमें क्या होता है कि मिसाइल डायरेक्टली जाकर जो है किसी कंट्री की सेटेलाइट को डिस्ट्रॉय कर सकती
है वो कम्युनिकेशन सेटेलाइट हो सकती है नेविगेशन सेटेलाइट होती है अगर आपने किसी की कम्युनिकेशन और नेविगेशन सेटेलाइट ही
उड़ा दी तो उनका एयरक्राफ्ट एयर डिफेंस सिस्टम सिस्टम और जितने कम्युनिकेशन सिस्टम है वो काम ही नहीं करेंगे। राइट?
तो ये जो है एक इसलिए की पॉइंट है कि अगर आपको सब कुछ ग्राउंडेड कर देना ये कैपेबिलिटी होनी चाहिए एंटी सैटेलाइट
मिशनंस की। राइट? तो चलिए अब हम बात करते हैं एजुकेशन एंड कम्युनिकेशन के लिए हमारे पास है एडूसेट से सैटेलाइट। तो देखिए नाम
भी बहुत सिंपल है। ओशन सेट फॉर ओशनंस के लिए। देन एडू सेट एजुकेशन के लिए यूज़ करते हैं सेटेलाइट डेडिकेटेड टू डिस्टेंस
एजुकेशन। कनेक्टेड थाउजेंड्स ऑफ रूरल क्लासरूम्स। देन अगर हम बात करते हैं कंट्रीब्यूशन ऑफ़ साइंस की। ठीक है? तो ये
देखिए ये कुछ पॉइंट्स हैं जो आपको याद रखने हैं। इनको जरूर पढ़िए कि कैसे हमें सल्फर मिला और हमने एक्सप्लोर करा स्पेस
को और उससे हमें जो है नई चीजों के बारे में पता लगा। जो है हमें नई डायमेंशंस पता लगे अर्थ के। राइट? तो इसलिए जो है साइंस
में भी आईएसओ कंट्रीब्यूशन करता है। देन रॉकेट्स डेवलप्ड बाय आईएसआरओ। तो आपने देखा होगा जब भी रॉकेट लॉन्च होते हैं
वहां पर पीएसएलवी होता है। कभी जीएसएलवी होता है। तो ये क्या है? राइट? चलिए वो देखते हैं। पोलर सेटेलाइट लॉन्च व्हीकल
यूज्ड फॉर अर्थ ऑब्जरवेशन सेटेलाइट एंड इंटरनेशनल लॉन्चेस। यही पीएसएलवी है जिसने ल्च करी है 104 सेटेलाइट इन वन मिशन इन
2017 ठीक है तो देखिए जो पीएसएलवी है ये अराउंड 500 टू 900 अबव अर्थ जाकर ल्च करता है सेटेलाइट मतलब 500 टू 900 हम अर्थ
ऑर्बिट की बात करें ठीक है अबव अर्थ तो ये जो रॉकेट है ये ल्च करता है सेटेलाइट्स रिलेटेड टू फार्मिंग वेदर मैप्स फोटो इमेज
लेना फॉरेस्ट की राइट तो ये सारी सेटेलाइट्स जो है वो अराउंड 500 टू 900 अर्थ अबव जो है ल्च होती हैं वो पीएसएलवी
ल्च करता है चलिए अब हम बात करते हैं जीएसएल एलवी की पीएसएलवी क्या था? पोलर सेटेलाइट लॉन्च व्हीकल और और ये क्या है?
जिओ सिंक्रोनाइज सेटेलाइट लॉन्च व्हीकल। ये हैवी सेटेलाइट्स को ल्च करता है। और आपको पता है जीएसएलवी 36000 कि.मी. अबव
अर्थ तक जा सकता है। राइट? और वहां पर जाके ये ल्च करता है सेटेलाइट्स लाइक जो मोबाइल कम्युनिकेशन के लिए यूज़ होती हैं।
इंटरनेट सिग्नल के लिए टेलीविज़ वो सारी जो सेटेलाइट्स होती हैं कम्युनिकेशन वाली पता है जीएसएलवी। पीएसएलवी क्या है? छोटी
सेटेलाइट्स को ल्च कर रहा था। बट जीएसएलवी 36,000 कि.मी. अबव वेयर एस पीएसएलवी की मैक्सिमम देखेंगे आप 900 कि.मी. तक। तो
इससे आप देख सकते हैं कि जो जीएसएलवी है ये कुछ हैवी सेटेलाइट्स को लॉन्च करने के लिए यूज होता है। देन एलवीएम3 इंडियास
हैविएस्ट रॉकेट यूज्ड फॉर चंद्रयान टू चंद्रयान 3 एंड गगनयान मिशन तो अब मून की दूरी तो और भी ज्यादा है। राइट? तो उन सब
चीजों के लिए जो है हम एलवीएम3 का यूज़ करते। तो अगर हम बोल तो पीएसएलवी क्या है? इसमें सबसे छोटा भाई है इनका। राइट? फिर
जीएसएलवी एंड देन आता है एलवीएम3। राइट? तो यही जो एलवीएम3 हम यूज़ करने वाले हैं गगनयान मिशन के अंदर। राइट? तो यही
एलवीएम3 है जो हम गगनयान मिशन में यूज़ करने वाले हैं। तो देखिए गगनयान मिशन के अंदर जो है हमारे एस्ट्रोनॉट्स जाएंगे
स्पेस के अंदर। राइट? और ये जो है अराउंड 400 कि.मी. अबव होगा अर्थ के। राइट? और आपको पता है जो ये कैप्सूल होगा जिसके
अंदर जो हमारे एस्ट्रोनॉट्स होंगे इसकी स्पीड जो है अराउंड 28,000 कि.मी. पर आर होएगी। ये और ये जो है 90 मिनट्स में पूरे
अर्थ का चक्कर लगा सकता है। राइट? तो इससे जो है हमारा अर्थ ऑब्जरवेशन, कॉन्टिनेंट्स को देखना, डिफरेंट कंट्रीज को ये सारा
ऑब्जर्व किया जाएगा हमारे एस्ट्रोनॉट द्वारा। राइट? तो ये जो है एक बहुत ही इंटरेस्टिंग मिशन होने वाला है। राइट? तो
ये जो है इस साल लॉन्च होना था। बट जैसे कि यहां पर ह्यूमन इनवॉल्वड हैं। हमारे एस्ट्रोनॉट्स इनवॉल्वड हैं। इसलिए जो है
काफी सारे सेफ्टी चेकक्स को देखा जा रहा है अभी भी। राइट? एक्सपेरिमेंट्स चल रहे हैं कि हम इसे जो है 100% पूरा सिक्योर
बना सके। राइट? देन प्लंड इंडियन स्पेस स्टेशन। तो इंडिया का भी स्पेस स्टेशन बन जाएगा अराउंड 2035। तो ये है चाइना के पास
अपना है यूएसए के पास है तो इंडिया के पास भी बन जाएगा अपना बाय 2035 देन इंडिया स्पेस स्टेशन अगर हम बात करें भारतीय
अंतरिक्ष स्टेशन के नाम से जाना जाएगा देन हम जो है शुक्रायन मिशन पे काम कर रहे हैं जहां पे वीनस को हम स्टडी करेंगे देन हम
चंद्रयान फोर के बारे में भी बात जहां पर हम जो है सैंपल्स लेकर आएंगे अर्थ पर ठीक है मून के तो चलिए अब हम बात करते हैं
अपने नेक्स्ट टॉपिक की तरफ जो है इंडियास मिसाइल प्रोग्राम और इंडियास रॉकेट फोर्स तो ये टॉपिक भी लेक्चर एट में आता है
इंडियास मॉडर्न मिसाइल डेवलपमेंट स्टार्टेड विद इंटीग्रेटेड गाइडेड मिसाइल डेवलप मेंट प्रोग्राम आईजीएमडीपी
इंटीग्रेटेड गाइडेड मिसाइल डेवलपमेंट प्रोग्राम तो ये जो है स्टार्ट होता है 1983 में इनिशिएट किया जाता है डीआरडीओ
द्वारा और की लीडर अगर हम देखेंगे तो इसमें थे डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम एंड दैट्स व्हाई वी कॉल्ड हिम मिसाइल मैन
क्योंकि इंटीग्रेटेड गाइडेड मिसाइल डेवलपमेंट प्रोग्राम जो है इन्हीं के द्वारा स्टार्ट किया गया है और और आज जो
इंडिया की सिक्योरिटी है वो इंटीग्रेटेड गाइडेड मिसाइल डेवलपमेंट प्रोग्राम की वजह से है क्योंकि कल को अगर कोई भी कंट्री
इंडिया पे अटैक करना चाहेगी तो उन्हें पता है कि उनके पास 5000 6000 7000 12000 किलोमीटर तक की रेंज की मिसाइल्स हैं।
डिफरेंट रेंजेस की विद डिफरेंट वॉर हेड न्यूक्लियर कैपेबल। तो वो पॉसिबल हो पाया किसकी वजह से? एपीजे अब्दुल कलाम सर की
वजह से। ठीक है? चलिए पर्पस टू डेवलप इंडीजीनस स्ट्रेटेजिक टेिकल मिसाइल फॉर नेशन सिक्योरिटी। पर अगर आप सोचेंगे तो ये
आईडिया आया क्यों हमें? देखिए इंडिया स्टार्टेड दिस प्रोग्राम बिकॉज़ सेवरल सिक्योरिटी चैलेंजेस। चाइना डेवलप्ड
न्यूक्लियर मिसाइल इन 1960 में ही बना चुका था। पाकिस्तान अपना प्रोग्राम स्टार्ट कर चुका था इनिशियल 1980 में ही।
अगर आप देखेंगे तो टेक्नोलॉजी हमें वेस्टर्न कंट्रीज से मिल नहीं रही थी। सो इसलिए जो है हमें सेल्फ रिलायंट होना था
और हम 1971 वॉर जो है देख कर आए थे। तो हमें पता था कि ऐसी वॉर जो है फ्यूचर के अंदर होगी। इसलिए था ये इंपॉर्टेंट कि
इंडीजीनस मिसाइल कैपेबिलिटी हो। चलिए अब हम बात करते हैं इंटीग्रेटेड गाइडेड मिसाइल डेवलप प्रोग्राम के अंदर जो
मिसाइल्स थी। तो देखिए ये जो मिसाइल्स हैं पृथ्वी, आकाश, नाग, त्रिशूल, अग्नि। तो यह जो आईडिया था वो एक पेपर पर था पहले और आज
ये मिसाइल्स सारी डेवलप हो चुकी हैं और इनके एडवांस्ड मिसाइल आ चुकी हैं। तो देखिए हमने 1980 में जो है एक विज़न देखा
था और आज वो कंप्लीट हुआ विज़न। ठीक है? इसलिए जो है हमें फ्यूचरिस्टिक होना पड़ता है। राइट? चलिए बात करते हैं सरफेस टू
सरफेस शॉर्ट रेंज बैलस्टिक मिसाइल है पृथ्वी। देन आकाश मिसाइल आपने देखा होगा एयर डिफेंस सिस्टम के लिए यूज़ होती है। और
नाग जो है एंटी टैंक मिसाइल है ये। ठीक है? नाग के बारे में आपने सुना होगा। और त्रिशूल जो है वो शॉर्ट रेंज लो लेवल
सरफेस टू एयर मिसाइल है और अग्नि के बारे में आपको पता ही है ये इंटरकॉन्टिनेंटल बैलस्टिक मिसाइल है और अभी हमने जो है नया
ट्रायल भी करा है। हमने रिसेंटली जो है अग्नि सिक्स या फिर कुछ न्यूज़ चैनल इसे अग्नि5 का ही एक मॉडर्न वर्जन बता रहे हैं
जिसके हम जिसके अंदर हमने जो है एमआईआरवी टेक्नोलॉजी को डेमोंस्ट्रेट करा है। राइट? लाइक एमआरआईवी टेक्नोलॉजी क्या होती है कि
वन मिसाइल कैरी मेनी वॉर हेड राइट? अह मल्टीपल इंडिपेंडेंट अह रीएंट्री व्हीकल्स। तो ये टेक्नोलॉजी जो है अभी
हमने टेस्ट करी है। ठीक है? तो देखिए हमने काफी सारी मिसाइल पढ़ी तो कंफ्यूजन आ जाता है। राइट? तो देखिए सरफेस टू सरफेस यानी
कि हम बोल सकते हैं कि एक सरफेस से यहां से जाकर दूसरे सरफेस पे हिट करने को हम बोलते हैं सरफेस टू सरफेस। तो ये कौन सी
मिसाइल है? अग्नि मिसाइल है और पृथ्वी मिसाइल है। ठीक है? अग्नि मिसाइल और पृथ्वी। तो पृथ्वी मिसाइल को आप कैसे याद
रख सकते हैं? पृथ्वी से ही निकलती है और पृथ्वी पर ही गिरती है। तो ठीक है? याद रहेगा? देन सरफेस टू एयर मिसाइल कौन सी
है? आकाश और त्रिशूल। तो सरफेस टू एयर मतलब क्या ये देखो मेरा एयर डिफेंस सिस्टम है और यहां से कोई एयरक्राफ्ट जा रहा है।
तो ये सरफेस से निकल के एयर पे इसको हिट करा। तो ये कौन सी है? आकाश मिसाइल और त्रिशूल त्रिशूल मिसाइल है। तो त्रिशूल को
आप याद रख सकते हैं कि इस तरीके से तो आप त्रिशूल को याद कर सकते हैं कि ऐसे त्रिशूल मारा है। राइट? देन हमारे पास आती
है एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल जो है नाग। तो अब आपको याद रहेगा सरफेस टू सरफेस सरफेस टू एयर और एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल नाग।
चलिए देख लेते हैं अग्नि सीरीज अग्नि 1900 कि.मी. अग्नि 2 2003 3000 4005 5000 टू 5500 तो याद रहेगी रेंज टू से 2000 थ्री
से 3000 आई होप ऐसे याद रहेगा आपको। तो चलिए अब हम बात कर लेते हैं पृथ्वी की तो पृथ्वी क्या है? सरफेस टू सरफेस मिसाइल
है। ये न्यूक्लियर कैपेबल मिसाइल है। ये जरूर याद रखना कि ये न्यूक्लियर कैपेबल मिसाइल है। ये डेवलपी करी थी डीआरडीओ और
बीडीएल ने और ये इसके वर्जनंस हैं। देन अगर हम बात करें आकाश मिसाइल डिफेंस सिस्टम की तो ये ऑपरेशन सिंदूर के अंदर
वाइडली यूज़ हुआ। ये हमारी इंडियन एयरफोर्स यूज़ करती है बहुत ज्यादा वाइडली। ठीक है? और जो इसकी रेंज है वो अराउंड 25 टू 45
कि.मी. है। ये जो है मीडियम शॉर्ट रेंज एयर डिफेंस सिस्टम में यूज़ होती है। देन हमारे पास आती है त्रिशूल मिसाइल। ये जो
है शॉर्ट रेंज एयर मिसाइल डिफेंस सिस्टम के लिए यूज़ होती है। रेंज इज़ अराउंड 900 कि.मी. और तीनों फोर्सर्सेस द्वारा यूज़ की
जाती है। देन हम नाग एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल हम बात कर चुके हैं। 4 टू 7 कि.मी. की रेंज है। और यही नाग जो है इसका
एडवांस्ड वर्जन हेलीना जो है हम ध्रुव हेलीकॉप्टर्स के अंदर भी यूज़ करते हैं। देन हचीडी टॉपिक देख लेते हैं। हाउ इंडिया
कैन बिकम अ सुपर पावर बाय 2047 स्ट्रेंथनिंग डिफेंस सेक्टर। देन हमारे पास क्या आता है? स्ट्रेंथनिंग डिफेंस
सेक्टर? तो अभी हम दो टॉपिक पढ़ के आए। ड्रोन हमने पढ़ा और इंटीग्रेटेड मिसाइल डिफेंस सिस्टम हमने पढ़ा। अभी हम दो
टॉपिक्स पढ़ के आ रहे हैं। एक हमने पढ़ा ड्रोन। राइट? हमने पढ़ा ड्रोन और एक हमने पढ़ा और दूसरा टॉपिक हमने पढ़ा
इंटीग्रेटेड मिसाइल डेवलपमेंट प्रोग्राम। तो ड्रोनस आपने देख लिया कि फ्यूचर वॉरफेयर है। हम हम जो है तपस ड्रोन बना
रहे हैं। दुस्तम ड्रोन। हाल कैट्स विंगमैन बना रहे हैं। हम डीआरडीओ का घातक यूसीएवी बना रहे हैं। तो ये एग्जांपल याद रहेंगे।
हमने अभी रिसेंटली एमक्यू ड्रोंस भी लिए थे अराउंड 31 बिलियंस ऑफ डॉलर्स के यूएसए से। तो ये सब क्या बताता है कि डिफेंस
सेक्टर को स्ट्रेंथन हमें करना पड़ेगा। राइट? अगर हम बात करें मिसाइल्स की तो हम कंटीन्यूअसली मिसाइल्स बना रहे हैं। तो हम
ये सब क्यों कर रहे हैं? क्योंकि हमें जो है सुपर पावर बनना है और सुपर पावर वही कंट्री बन सकती है जिसका मिसाइल डिफेंस
सिस्टम जो है बहुत ज्यादा स्ट्रांग होगा। राइट? आप एग्जांपल देख सकते हैं यूएसए या फिर चाइना या रशिया का। इन तीनों कंट्रीज
की जो फोर्सेस हैं, तीनों कंट्री की फोर्सेस हैं वो क्या है? टॉप नच है। अगर हम चाइना की बात करें तो इनके पास पूरे
वर्ल्ड की लार्जेस्ट नेवी है। और कहा जाता है ना कि चाइना जो है अब जो है सुपर पावर होने वाला है। वो क्यों? क्यों? क्योंकि
उनके पास जितने जेट्स हैं और नेवी है वो धीरे-धीरे यूएस को सरपास करने जा रहे हैं। ठीक है? तो इसलिए जो है अगर हमें सुपर
पावर बनना है हमें स्ट्रेंथिंग डिफेंस करना पड़ेगा। उसमें आप सारी मिसाइल्स का एग्जांपल दे सकते हैं। ड्रोंस के एग्जांपल
दे सकते हैं। एंड आप इजीली जो है बहुत सारे पॉइंट इस पर रख सकते हैं। तो चलिए हम बात करते हैं मिलिट्री ऑपरेशंस की जहां पर
जो है हमने जो ये मिसाइल्स जो है जो डेवलप करी है वो यूज़ करी थी। ऑपरेशन विजय के अंदर हमने पृथ्वी मिसाइल को यूज़ करा। देन
हमने ऑपरेशन सिंदूर के अंदर आकाश मिसाइल डिफेंस सिस्टम को यूज़ करा फॉर प्रोटेक्टिंग स्ट्रेटेजिक इंस्टॉलेशन एंड
बेसिस। देन ऑपरेशन प्रक्रम के अंदर हमने अग्नि मिसाइल को जो है मोबिलाइज्ड और डिप्लॉय कर दिया था। ऑलदो यहां पर वॉर
नहीं हुई थी बट हम रेडी थे। राइट? देन आर्मर्ड वॉरफेयर प्रपेयर्डनेस के लिए हमने एंटीक गाइडेड मिसाइल को भी इंटीग्रेट करा
है। चलिए अब हम बात करते हैं अपने नेक्स्ट टॉपिक की तरफ जो है न्यूक्लियर प्रॉलीिफेरेशन। तो देखिए न्यूक्लियर
प्रॉलीिफरेशन होता क्या है? देखिए न्यूक्लियर प्रॉलीिफरेशन मींस स्प्रेड ऑफ न्यूक्लियर वेपन एंड न्यूक्लियर मटेरियल।
मतलब ज्यादा से ज्यादा कंट्री जब न्यूक्लियर वेपन को एक्वायर कर लेती हैं या फिर न्यूक्लियर मटेरियल को एक्वायर कर
लेती है, न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी को एक्वायर कर लेती है उसे हम न्यूक्लियर प्रोलीिफेरेशन बोलते हैं। यानी कि स्प्रेड
ऑफ न्यूक्लियर वेपन हम बोल सकते हैं बेसिक भाषा में कि ये न्यूक्लियर प्रोलीिफेरेशन आता है। ये रिसेंटली हमने देखा ईरान जो है
वो न्यूक्लियर एनरच कर रहा था। न्यूक्लियर वेपन बनाने वाला था। 60% वो एरर कर चुका था और 90% जो है एक वो न्यूक्लियर बम
बनाने के लिए सूटेबल है। देन इजराइल की अगर हम बात करें तो काफी सारी रिपोर्ट्स ने बताया कि इजराइल के पास भी न्यूक्लियर
वेपंस हैं। तो इसलिए ये न्यूक्लियर पोलीिफरेशन अब इंपॉर्टेंट टॉपिक आ जाता है। और अब जो ये कॉन्फ्लिक्ट हुआ है हर
कंट्री चाहेगी कि अब मिडिल ईस्ट में जो है यूएई सऊदी अरेबिया भी चाहेगी हमारे पास भी न्यूक्लियर वेपन हो एज अ डेटरेंस। देन इट
इज़ द इंक्रीस ऑफ़ नंबर ऑफ़ कंट्रीज पोज़ेसिंग न्यूक्लियर वेपन फॉर टेक्नोलॉजी टू बिल्ड देम। एग्जांपल व्हेन द कंट्रीज लाइक
इंडिया, पाकिस्तान, नॉर्थ कोरिया डेवलप न्यूक्लियर वेपन आफ्टर द ओरिजिनल न्यूक्लियर पावर इट वाज़ कंसीडर्ड एट
न्यूक्लियर प्रोलीिफरेशन। तो पहले जो है वो किसके पास था? रशिया के पास था, यूएसए के पास था, देन चाइना एंड फ्रांस इन सब
कंट्रीज के पास। बट जैसे ही इंडिया ने बनाया, पाकिस्तान ने बनाया, नॉर्थ कोरिया ने बनाया। क्योंकि ये कंट्रीज डेवलपिंग
कंट्रीज थी। तब ये टर्म आई न्यूक्लियर प्रोलीिफेरेशन। तो देखिए इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी जो है वो जो है मॉनिटर करती
है न्यूक्लियर प्रोग्राम को और एनश्योर करती है पीसफुल यूज़ ऑफ न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी। कौन सी एजेंसी? इंटरनेशनल
एटॉमिक एनर्जी एजेंसी। चलिए अब देखते हैं न्यूक्लियर वेपंस फर्स्ट यूज़्ड ड्यूरिंग द वर्ल्ड वॉर टू 1945 में यूज़ हुआ था।
यूनाइटेड स्टेट्स ड्रॉप एटॉमिक बम्स ऑन हिरोशिमा, नागासाकी जापान। ये आप सबको पता है। देन आफ्टर दी सेवरल कंट्रीज बिगेन
डेवलपिंग न्यूक्लियर वेपन लीडिंग टू दी इशू ऑफ़ न्यूक्लियर प्रोलीफरेशन। देखिए अभी राइट नाउ किन-किन कंट्रीज के पास
न्यूक्लियर वेपन है? यूनाइटेड स्टेट्स, चाइना, यूनाइटेड किंगडम, पाकिस्तान, रशिया, फ्रांस, इंडिया, नॉर्थ कोरिया और
इजराइल सस्पेक्टेड। राइट? चलिए अब देखते हैं टाइप्स ऑफ न्यूक्लियर प्रोलीिफरेशन। एक होता है हॉरिजॉन्टल प्रोलीिफरेशन और एक
होता है वर्टिकल प्रोलीिफेरे। सेंट्रल प्रोलीिफिरेशन होता है व्हेन मोर कंट्रीज एक्वायर्ड न्यूक्लियर वेपन। फॉर एग्जांपल
देखिए फ्रांस ने बनाया, चाइना ने बनाया। फिर इंडिया ने कहा कि हमें खतरा है चाइना से इसलिए हम ऐसा डेटरेंस बना रहे हैं। देन
पाकिस्तान ने बोला कि हमें खतरा है इंडिया से इसलिए पाकिस्तान ने डेवलप कर लिया। और कल को अगर ईरान भी डेवलप कर लेता है कि
हमें इजराइल से खतरा है। तो इस तरीके से जो ये चेन चलती है एक कंट्री से दूसरी कंट्री, तीसरी कंट्री। ये जो चेन बनती है
एक कंट्री से दूसरी कंट्री तो इसे हम कहते हैं हॉरिजॉन्टल प्रोलीफरेशन। और वर्टिकल प्रोलीिफरेशन क्या होता है कि जो कंट्री
जैसे कि यूएसए है व्हेन एकिस्टिंग न्यूक्लियर पावर इंक्रीस देयर न्यूक्लियर स्टॉक व्हाइल इंप्रूव देयर वेपन तो
एकिस्टिंग कंट्री जिसके पास पहले से ही न्यूक्लियर वेपन है जब वो अपने न्यूक्लियर वेपन सपोज 1000 है अब उसको 2000 कर रही है
3000 कर रही है जैसे रशिया है सबसे ज्यादा न्यूक्लियर वेपन अराउंड 5000 के आसपास तो इससे क्या पता लगता है कि जब कंट्री
इंक्रीस करती है अपने न्यूक्लियर आर्सनल को उसको हम वर्टिकल प्रोलीफरेशन बोल देते हैं। तो आई होप हॉरिजॉन्टल और वर्टिकल समझ
में आ गया होगा और प्रोलीिफेरेशन मतलब क्या होता है? ज्यादा से ज्यादा कंट्री जब न्यूक्लियर मटेरियल को न्यूक्लियर
टेक्नोलॉजी को न्यूक्लियर वेपन को एक्वायर कर लेती है उसे प्रोलीिफरेशन कहते हैं। चलिए अब देखते हैं व्हाई कंट्रीज डेवलप
न्यूक्लियर वेपन तो सिक्योरिटी एंड डेटरेंस के लिए कंट्रीज डेवलप न्यूक्लियर वेपन फॉर नेशनल सिक्योरिटी इंडिया डेवलप
न्यूक्लियर वेपन पार्टली ड्यू टू चाइना। ठीक है? देन प्रेस्टीज एंड ग्लोबल पावर पोज़ेसिंग न्यूक्लियर वेपन ऑफन इंक्रीज़
स्ट्रेटेजिक इन्फ्लुएंस एंड स्टेटस। तो आप एग्जांपल दे सकते हैं किसका? नॉर्थ कोरिया का कि नॉर्थ कोरिया जो है कंटीन्यूअसली
धमकी देता रहता है किसको? यूएसए को और अदर नेशंस को, साउथ कोरिया को। तो क्यों न्यूक्लियर पावर के दम पे देन
टेक्नोलॉजिकल कैपेबिलिटी कंट्रीज विद एडवांस टेक्नोलॉजी समटाइम्स पर्स्यू न्यूक्लियर प्रोग्राम फॉर स्ट्रेटेजिक
एडवांटेज। जब आपके पास पैसा है, आपके पास टेक्नोलॉजी है अगर बहुत ज्यादा डेवलप्ड है और उसके पास टेक्नोलॉजी भी है तो ऐसी
कंट्रीज जरूर जाती है न्यूक्लियर वेपन और न्यूक्लियर प्रोग्राम की तरफ। चलिए अब हम बात करते हैं ग्लोबल एफर्ट्स टू स्टॉप
न्यूक्लियर प्रोलीिफरेशन। न्यूक्लियर नॉन प्रोलीिफरेशन ट्रीटी की। तो यहां तो देखिए जो न्यूक्लियर प्रोलीिफरेशन हो रहा है इसे
खत्म करने के लिए न्यूक्लियर नॉन प्रोलीिफेरेशन ट्रीटी बनाई गई। यह जो साइन है 1968 के अंदर भी और इसका ऑब्जेक्टिव था
प्रिवेंट स्प्रेड ऑफ न्यूक्लियर वेपन एंड प्रमोट पीसफुल यूज़ ऑफ न्यूक्लियर एनर्जी एंड एनकरेजिंग न्यूक्लियर
डिसऑर्नामेंटमेंट। तो पीसफुल न्यूक्लियर एनर्जी मतलब क्या है? कि आप न्यूक्लियर यूज़ कर सकते हैं अपने न्यूक्लियर प्लांट्स
के अंदर फॉर जनरेटिंग इलेक्ट्रिसिटी। बट आप वेपन बनाने के लिए यूज़ नहीं कर सकते। हाउ एवर कंट्रीज लाइक इंडिया, पाकिस्तान
एंड इजराइल आर नॉट अ मेंबर। तो इंडिया, पाकिस्तान, इजराइल और बहुत सारी कंट्रीज ने जो है इसे साइन नहीं करा था न्यूक्लियर
नॉन प्रोलीिफेरेशन ट्रीटी को। तो याद रखना है नॉन प्रोलीिफेरेशन ट्रीटी साइन हुई 1968 के अंदर। और इसके अंदर क्या था? देन
कौन सी कंट्री ने इसे साइन नहीं करा? टुडे अबाउट 190 कंट्रीज जो है इसके मेंबर हैं एंड मेकिंग वन ऑफ़ द मोस्ट वाइडली
एक्सेप्टेड इंटरनेशनल सिक्योरिटी ट्रीटी है। पीसफुल यूज़ ऑफ़ न्यूक्लियर एनर्जी कंट्रीज आर फॉललोड टू यूज़ न्यूक्लियर
टेक्नोलॉजी फॉर पीसफुल फॉर इलेक्ट्रिसिटी जनरेशन के लिए, मेडिकल रिसर्च के लिए और साइंटिफिक डेवलपमेंट के लिए। और जिन
कंट्रीज ने नहीं करा, तो यह भी आप देख सकते हैं। चलिए, अब हम बात करते हैं इंडियास न्यूक्लियर पॉलिसी के बारे में।
तो इंडिया की जो न्यूक्लियर पॉलिसी है वो है नो फर्स्ट यूज़ पॉलिसी। तो नो फर्स्ट यूज़ पॉलिसी मतलब यह हुआ कि अगर कोई कंट्री
हम पर पहले अटैक करती है देन एज अ रिटेलिएशन हम न्यूक्लियर वेपन का यूज करेंगे और जो न्यूक्लियर वेपन का हम यूज़
करेंगे वो मच हायर स्केल पर करेंगे हम लोग इंडिया जो है ट्राइड न्यूक्लियर पावर है तो ट्राइड मतलब क्या होता है जो कि तीनों
लैंड वाटर एयर से लॉन्च कर सकता है न्यूक्लियर वेपन को तो लैंड बेस्ड मिसाइल कौन सी है अग्नि-5 है हमारे पास देन हमारे
पास अग्नि4 और पृथ्वी मिसाइल है ये क्या है लैंड बेस्ड मिसाइल्स है देन एयर बेस्ड डिलीवरी के लिए कौन सा है इंडियन एयर
एयरफोर्स के जेट हैं जो मिराज Jaguar सु 300 एम के आई तो ये जो है न्यूक्लियर वेपन और न्यूक्लियर वॉर हेड को कैरी कर सकते
हैं। तो देखिए हमारे पास मिसाइल होती है एक मिसाइल के अंदर जो वॉर हेड होता है उसमें आप न्यूक्लियर वेपन को डाल सकते हैं
और मिसाइल के साथ अटैच करके वो लॉन्च कर सकते हैं। देन अकॉर्डिंग टू ग्लोबल डिफेंस एस्टीमेट सच एस सिरी ये रिपोर्ट जरूर याद
रखना सिपरी की रिपोर्ट ने कहा है कि इंडिया के पास अराउंड 160 टू 170 न्यूक्लियर वॉर हेड हैं सिप्री की रिपोर्ट
में। देन K15 सागरिका देन K-15 सागरिका सी बेस्ड न्यूक्लियर मिसाइल है और ये आईएएस अरिहंत न्यूक्लियर सबमरीन और आप याद रखना
कि हमारी जो आईएएस अरिहंत सबमरीन है ये न्यूक्लियर कैपेबल सबमरीन है। ठीक है? देखिए चलिए चैलेंजेस देखें। अगर ज्यादा से
ज्यादा कंट्री न्यूक्लियर वेपन को एक्वायर करेंगी तो यहां पर एक न्यूक्लियर वॉरफेयर भी देखने को मिल सकती है। आर्म रेस एक
कंट्री दूसरी कंट्री को देख के जो है वो न्यूक्लियर आर्सनल बढ़ाएगी। हमने देखा था वर्टिकल हमने देखा था वर्टिकल
प्रोलीिफेरेशन में जैसे कि यूएसए और यूएसएसआर कंटीन्यूअसली बढ़ाते-बढ़ाते देखिए कहां तक 5000 तक आ चुके हैं। देन
यहां पर आ जाता है न्यूक्लियर टेररिज्म डेंजर ऑफ न्यूक्लियर प्रोलीिफेरेशन। सो इफ न्यूक्लियर मटेरियल्स फॉल्स इंटू दी
हैंड्स ऑफ टेररिस्ट ग्रुप इट कुड कॉज मैसिव डिस्ट्रक्शन। फॉर एग्जांपल अगर ईरान बना लेता है और वो प्रॉक्सी को दे देता है
तो प्रॉक्सी कैन हिट इजराइल राइट? और मिडिल ईस्ट में भी। इसलिए यहां पर जो है इसलिए जो यहां पर हमेशा थ्रेट रहेगा। तो
यह था हमारा चैप्टर न्यूक्लियर पोलीिफेरेशन। तो आप इसके ऊपर यह भी पढ़ सकते हैं कि इंडियास न्यूक्लियर पॉलिसी
जिसमें आप बता सकते हैं कि इंडिया एक न्यूक्लियर ट्राइड है। न्यूक्लियर की इंडिया जो है वो नो फर्स्ट यूज़ पॉलिसी
यूज़ करता है। एज अ डेटरेंस ही सिर्फ यूज़ कर सकता है। फिर कौन-कौन से वेपन फॉर एग्जांपल जैसे कि हम जो है सबमरींस यूज
करते हैं। देन हमारे पास मिसाइल्स हैं, एयरक्राफ्ट हैं। तो वो सारी चीजें आप नो फर्स्ट यूज़ पॉलिसी और न्यूक्लियर पॉलिसी
ऑफ इंडिया में भी बता सकते हैं क्योंकि ये टॉपिक भी देखने को मिला है। सो दिस वाज़ ऑल अबाउट दी न्यूक्लियर पोलीफिलेशन। तो चलिए
अब हम चलते हैं अपने नेक्स्ट टॉपिक की तरफ जो है आर्म्ड फोर्सेस स्पेशल पावर एक्ट। तो देखिए द आर्म्ड फोर्सेस स्पेशल पावर
एक्ट एएफएसपीए इज अ लॉ दैट गिव्स स्पेशल पावर्स टू दी आर्म्ड फोर्सेस टू मेंटेन पब्लिक ऑर्डर इन डिस्टर्बड एरियाज। अब इसे
पढ़ के दो क्वेश्चन हमारे माइंड में आते हैं। पहली बात कि आर्म्ड फोर्सेस को आप स्पेशल पावर्स दे रहे हैं। तो यह कौन सी
स्पेशल पावर है? और यह स्पेशल पावर्स आप दे रहे हैं डिस्टर्बड एरियाज में। तो ये डिस्टर्बड एरियाज कौन से हैं? यह दो चीजें
समझ में आती है। और यह स्पेशल पावर्स इन्हें दे कौन रहा है? क्योंकि ये अगर स्पेशल पावर्स हैं तो हमारी आर्मी तो इसे
कभी भी यूज़ कर सकती है। तो इसलिए इसे देगा कौन? तो ये जो कुछ क्वेश्चंस हैं हमें इसके आंसर मिलेंगे। इट वाज़ फर्स्ट
इंट्रोड्यूस्ड इन 1958 टू डील विद इंसर्जेंसी इन नॉर्थ ईस्ट इंडिया एंड लेटर एक्सटेंडेड टू जम्मू कश्मीर इन 1990।
क्योंकि आपको पता है 1990 में पीक पे था इंसर्जेंसी जम्मू कश्मीर के अंदर। ठीक है? और हमने देखा होगा मास एक्सोडस ऑफ पीपल
फ्रॉम कश्मीर जो आपने सुना होगा ना कश्मीरी पंडित के बारे में। तो 1990 जो एरा था वो पीक था इंसर्जेंसी का। तो पहली
बार कब इंट्रोड्यूस हुआ? ईयर 1958 था। ठीक है? द ऑब्जेक्टिव ऑफ़ आर्म्ड स्पेशल फोर्सेस पावर एक्ट इज़ टू हेल्प सिक्योरिटी
फोर्सेस टू कॉम्बैट टेररिज्म, इंसर्जेंसी एंड मिलिटेंट एक्टिविटीज़। तो ये जो पावर्स हैं, यह दी किस लिए थी? कॉम्बट टेररिज्म,
इंसर्जेंसी और मिलिटेंट एक्टिविटीज को खत्म करने के लिए और उनसे डील करने के लिए। इतना समझ में आ गया? चलिए अब हम
देखते हैं कि डिस्टर्बड एरिया कौन सा होता है और कौन यह पावर दे रहा है आर्मी को। राइट? तो देखिए आर्म्ड फोर्स स्पेशल तो
एएफएसपीए कैन बी अपाइड ओनली ओनली इन एरियाज डिक्लेयर्ड एज डिस्टर्बड एरियाज बाय दी गवर्नमेंट। तो गवर्नमेंट जिस एरिया
को डिस्टर्ब घोषित कर देती है वहां पर जो है यह पावर्स जो है आर्मी को मिलती हैं। चलिए अथॉरिटीज हु कैन डिक्लेअ डिस्टर्बड
एरिया। तो ये पावर सेंट्रल गवर्नमेंट के पास है मिनिस्ट्री ऑफ़ होम अफेयर्स के पास जो वो डिक्लेअ कर सकती है ये पर्टिकुलर
एरिया जो डिस्टर्बड है। देन इसे स्टेट गवर्नमेंट बता सकती है कंसर्न स्टेट फॉर एग्जांपल आप मणिपुर का देखें चाहे वो असम
हो नागालैंड हो तो ये स्टेट्स तो है और यहां पर लगा है एएफएसपीए। तो इसलिए जो है स्टेट गवर्नमेंट इसे लगा सकती है। देन
एडमिनिस्ट्रेटर लेफ्टिनेंट गवर्नर क्योंकि अगर आप देखेंगे यूटी का जो हेड है जो इसे गवर्न कर रहा है वो कौन है? लेफ्टिनेंट
गवर्नर है। तो चलिए अब हम देखते हैं इंटरेस्टिंग चीज कि कौन सी पावर मिल रही है यहां पर। यूज़ ऑफ़ फोर्स सिक्योरिटी
फोर्सेस इवन लीथल फोर्सेस कैन बी यूज्ड टू मेंटेन द पब्लिक ऑर्डर। तो वहां पर आप स्पेशल फोर्सेस को डिप्लॉय कर सकते हैं।
यहां पर जो है आप स्पेशल फोर्सेस को डिप्लॉय कर सकते हैं। आप आर्मड व्हीकल को डिप्लॉय कर सकते हैं। तो ये सारी चीजें आप
यूज कर सकते हैं। देन अरेस्ट विदाउट वारंट। ये बहुत की पॉइंट है यहां पर। आर्म्ड फोर्सेस कैन अरेस्ट अ पर्सन विदाउट
अ वारंट इफ सस्पेक्टेड इन्वॉल्वमेंट इन अनलॉफुल एक्टिविटीज। यहां पर क्या है? किसी भी पर्सन को अरेस्ट कर सकते हैं। अगर
आपको इस पे शक है तो आप डायरेक्ट ले जा सकते हैं। तो व्हिच इज़ अ वेरी बिग थिंग। राइट? तो इसलिए जो हमारे फंडामेंटल राइट्स
हैं तो डायरेक्टली चैलेंज कर रहा है उसको। तो देन तो देखिए देन सर्च विदाउट वारंट सिक्योरिटी फोर्सेस कैन एंटर एंड सर्च
प्रिमिसेस विदाउट अ वारंट अगर फोर्सेस को लगता है कुछ भी कि यहां पर जो सस्पेक्टेड है अगर सिक्योरिटी फोर्सेस को लगता है
यहां पर कोई टेररिस्ट वगैरह तो सो विदाउट सर्च वारंट जो है वहां पर सिक्योरिटी फोर्सेस जा सकती है। एंड लीगल इम्यूनिटी।
देखिए सिक्योरिटी पर्सनल जो भी ये एक्शन ले रहा है अरेस्ट विदाउट वारंट, सर्च विदाउट वारंट और फोर्सेस यूज़ कर रहा है
टेररिस्ट को किल कर रहा है। तो यहां पर विदाउट अप्रूवल फ्रॉम सेंट्रल गवर्नमेंट आप उसको प्रोसीक्यूट नहीं कर सकते। तो आप
उसके खिलाफ जो है कोई कार्यवाही नहीं कर सकते पुलिस से जाकर कि यहां पर हमें विदाउट वारंस अरेस्ट किया गया है। हमें
प्रताड़ित किया गया है। क्योंकि यहां पर जो है लीगल इम्यूनिटी दी जाती है फोर्सेस को। तो यह देख सकते हैं आप फुल फ्रीडम है
यहां पर हमारी सिक्योरिटी फोर्सेस को जब ये एक्ट लगता है ऑफ एएफएसपीए इट हेल्प टू कंट्रोल इंसर्जेंसी इन नॉर्थ ईस्ट इंडिया
इट प्लेड अ मेजर रोल टू काउंटर द टेररिज्म इन ऑपरेशन ऑफ जम्मू कश्मीर पर क्रिटिसिज्म क्या आता है देखिए ह्यूमन राइट कंसर्न सम
ग्रुप्स आर आर्ग्यू दैट एक्ट कैन लीड टू ह्यूमन राइट वायलेशन भी कोई भी ऑपरेशन होता है तो वहां पर कोलटरल डैमेज होता है
किसी सिविलियन की कैजुअलिटी हो जाती है तो उस केस में जो है यहां पर एंगर रहता है नेटिव्स के अंदर कि आर्म्ड फोर्सेस जो है
हमारे लोगों के साथ ऐसा कर रही है। देन प्रोटेस्ट लेड बाय एक्टिविस्ट इरोम शर्मिला हु वेंट ऑन लॉन्ग हंगर स्ट्राइंग
डिमांडिंग टू रिपील ए एफएसपीए। तो यहां पर आप एग्जांपल देख सकते हैं कि कैसे प्रोटेस्ट किया जा रहा है मणिपुर के लोगों
द्वारा कि यह जो एक्ट है ये जो पावर्स हैं ये रिमूव किए जाए आर्मी से। तो देखिए अगर हम कुछ रीसेंट इयर्स में देखें तो ये एक्ट
रिमूव किया गया है नॉर्थ ईस्ट इंडिया के कुछ पार्ट्स में। फॉर एग्जांपल त्रिपुरा 2015 में इसे पूरी तरीके से रिमूव कर
दिया। मेघालय कुछ पार्ट्स में है और कुछ पार्ट्स में इसे रिमूव कर दिया गया। देन एएफएसपी है विथड्रॉन फ्रॉम मेनी
डिस्ट्रिक्ट लाइक आसाम, नागालैंड एंड मणिपुर। पर अब हम देखें ये पूरी तरीके से रिमूव नहीं हुआ है। ये स्टिल इंप्लीमेंट
है इन सम सेंसिटिव एरियाज ऑफ मणिपुर जहां पर इंसजेंसी एथेनिक वायलेंस हो रही है। बहुत आपने देखा होगा कुक की मैथाई
कम्युनिटी की वायलेंस कब से ये चलता आ रहा है। राइट? देन नागालैंड में भी है ये। क्योंकि नागालैंड का बॉर्डर म्यांमार के
साथ है तो वहां वहां से इंसर्जेंसी बहुत ज्यादा होती है। देन जम्मू कश्मीर में आपको पता ही है इनफिल्ट्रेशन होती है।
अरुणाचल प्रदेश में नागा मिलिटेंट इनफिल्ट्रेशन अक्रॉस बॉर्डर्स एंड आसाम ओनली थ्री डिस्ट्रिक्ट। ठीक है? क्योंकि
वहां पर उल्फा है। आपने उल्फा के बारे में सुना होगा। इंसर्जेंसी राइट ओके नाउ लेट्स मूव ऑन टू दी डे नाइन। राइट? सो इन डे
नाइन वी आर गोइंग टू कवर सम अदर टॉपिक्स। राइट? जैसे कि इलेक्ट्रॉल रिफॉर्म्स हैं। वन नेशन वन इलेक्शन है और वन नेशन वन
इलेक्शन का जीडी टॉपिक भी आता है। जब भी इलेक्शन का सीजन चल रहा होता है। राइट? और उसके आसपास कोई एसएसबी होता है तो वहां पर
वन नेशन वन इलेक्शन का टॉपिक देखने को मिलता है। देन हमारे पास आता है रिजर्वेशन सिस्टम इन इंडिया। देन एलपीजी [संगीत]
रिफॉर्म्स। एलपीजी रिफॉर्म्स क्या होता है? लिबरलाइजेशन, प्राइवेटाइजेशन एंड ग्लोबलाइजेशन। देन हम पढ़ेंगे रेलवे
प्राइवेटाइजेशन एंड फ्री बीस कल्चर। और फ्री बीस पे भी जो है जीडी का टॉपिक आता है। तो हम ये [संगीत] जो टॉपिक्स हैं वो
कवर करने वाले हैं डे नाइन के अंदर। चलिए हम बात करते हैं इलेक्ट्रोल रिफॉर्म्स के बारे में। राइट? सो देखिए इंडिया इज
कंसीडर्ड टू बी द लार्जेस्ट डेमोक्रेसी इन द वर्ल्ड। राइट? तो इलेक्ट्रॉल रिफॉर्म्स क्या है? देखिए, चेंजेस मेड इन द इलेक्शन
सिस्टम टू मेक इलेक्शन फ्री, फेयर, ट्रांसपेरेंट एंड एफिशिएंट। तो चेंजेस करना इलेक्शन सिस्टम के अंदर कि इलेक्शन
जो है हमारा वो फ्री हो, फेयर हो, ट्रांसपेरेंट हो एंड एफिशिएंट हो। राइट? दीज़ रिफॉर्म्स इंप्रूव दी वोटिंग प्रोसेस
एंड स्ट्रेंथन डेमोक्रेसी इन इंडिया। राइट? तो चलिए देखते हैं कौन-कौन से ऐसे चेंजेस हुए जिसने जो इलेक्शन सिस्टम है वो
फ्री फेयर ट्रांसपेरेंट एंड एफिशिएंट बनाया। सबसे पहले हम देखते हैं ईवीएम। ईवीएम का फुल फॉर्म क्या है? इलेक्ट्रॉनिक
वोटिंग मशीन। राइट? सो इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन रिप्लेस्ड बैलेट पेपर्स एंड वर यूज्ड नेशन वाइड इन द 2004 जनरल
इलेक्शन। दे मेड वोटिंग फास्टर एंड रिड्यूस्ड एरर। तो देखिए पहले [नाक से की जाने वाली आवाज़] हम क्या यूज़
करते थे? बैलेट पेपर्स को। और बैलेट पेपर्स में क्या डिसएडवांटेजेस था कि बैलेट पेपर क्या है आपको मैनुअली काउंट
करने पड़ते थे। राइट? तो बहुत ज्यादा टाइम लगता था काउंटिंग के अंदर। तो हमें क्या है? एफिशिएंट सिस्टम बनाना है। राइट? तो
इसलिए काउंटिंग को रिड्यूस करने के लिए हम जो है ईवीएम्स को लेके आए। सेकंड बैलेट पेपर्स में क्या होता था? बूथ कैप्चरिंग
होती थी। तो बूथ कैप्चरिंग के अंदर क्या हो रहा था कि कुछ सेट ऑफ लोग आते हैं। वो बैलेट पेपर को प्रिंट करवा लेते हैं।
राइट? किसी एक पर्टिकुलर कैंडिडेट के लिए। और फॉर फॉर एग्जांपल 100 से 200 करा के और वो हमने सबमिट कर दिए। तो इससे क्या होता
था जो इलेक्शन का रिजल्ट है उसमें क्या है वो फेयर नहीं था। तो ये भी एक रीज़न था ईवीएम का लाना। देन यहां पर एक
डिसएडवांटेजेस क्या था कि बैलेट पेपर जो है वो चोरी भी हो सकता था। राइट? इससे क्या होता था? आप एक्यूरेट डाटा नहीं बता
सकते थे। राइट? है जो इलेक्शन थे वो ट्रांसपेरेंट नहीं थे। तो इसलिए जो है हम ईवीएम हमने इंट्रोड्यूस करा। राइट? ये
क्या डिजिटल सिस्टम है। इसमें वोटिंग बहुत जल्दी हो जाती है। बट यहां पर मैनुअली वाला कोई सिस्टम नहीं है। तो इसलिए यह
बेस्ट है। देन आया नोटा। नोटा का फुल फॉर्म क्या है? नन ऑफ दी अबव। तो जो नोटा बटन होता है वो एकदम एंड में होता है। और
जितनी भी पार्टीज हैं राइट वो सारे नोटा के अबव होती है। सपोज आपको किसी भी कैंडिडेट को वोट नहीं देना है तो आप नोटा
का बटन भी दबा सकते हैं। दिस ऑप्शन अलाउज़ वोटर टू रिजेक्ट ऑल द कैंडिडेट्स इफ दे डू नॉट फाइंड एनी सूटेबल कैंडिडेट। तो नोटा
भी क्या है? देखिए एक मैसेज देता है डेमोक्रेसी के अंदर। देन हमारे पास आता है वीवीपैट वोटर वेरिफेबल पेपर ऑडिट ट्रायल।
यह भी 2013 के अंदर इंप्लीमेंट हुआ। दिस सिस्टम अलाउस वोटर टू सी पेपर स्लिप कंफर्मिंग देयर वोट व्हिच इंक्रीस
ट्रांसपेरेंसी एंड ट्रस्ट। चलिए अब हम बात करते हैं कुछ और रिफॉर्म्स के बारे में। इलेक्ट्रॉल बॉन्ड्स। राइट? तो इलेक्ट्रॉल
बॉन्ड्स आर बैंकिंग इंस्ट्रूमेंट यूज्ड टू डोनेट मनी टू पॉलिटिकल पार्टी थ्रू फॉर्मल चैनल्स। इलेक्ट्रॉल बॉन्ड्स को समझते हैं
हम कि इलेक्ट्रल बॉन्ड्स क्या होता है? तो देखिए अगर कोई भी कंपनी है, कोई एंटिटी है या कोई पर्सन है जो कि फंड देना चाहता है,
डोनेट करना चाहता है किसी पॉलिटिकल पार्टी को तो वो क्या करेगा? किसी भी बैंक के पास जाएगा। फॉर एग्जांपल स्टेट बैंक के पास
जाएगा। राइट? और स्टेट बैंक क्या है? उसको इलेक्ट्रॉल बॉन्ड्स इशू करके दे देगा। उस पर्टिकुलर मनी जो वो डोनेट करना चाहता है।
देन वो जो इलेक्ट्रॉल बॉन्ड है वो क्या है? उस पर्टिकुलर पार्टी के बैंक अकाउंट में चला जाएगा। राइट? और वो उसको रिडीम कर
सकते हैं। अब इससे क्या हुआ? ट्रांसपेरेंसी इनक्रीस हुई। बैंक्स को पता है किस पर्सन ने इलेक्ट्रॉल बॉन्ड्स खरीदे
हैं और किस पार्टी को डोनेट करें हैं। तो डोनेशन का हमारे पास पूरा अमाउंट है। और अगर इलेक्ट्रॉल बॉन्ड्स ना होते राइट तो
क्या है आप किसी को भी जितना मर्जी बैग भर के पैसा दे दो। राइट? तो उसका उसका डाटा कहां है? उसकी ट्रांसपेरेंसी कहां है? तो
उसका डिजिटल रिकॉर्ड कहां है? तो इसलिए जो है इलेक्ट्रॉल बॉन्ड को लाया गया। बट यहां पर प्रॉब्लम क्या है? कि जो आइडेंटिटी ऑफ़
डोनर है वो हिडन रहेगी पब्लिक से। राइट? तो अगर आप किसी को फंड डोनेट करते हैं इलेक्ट्रॉल बॉन्ड्स के थ्रू तो वो रिलीज
नहीं होगा पब्लिक में कि किस कंपनी ने या किस पार्टी ने या किस पर्सन ने जो है किसको फंड जो फंड डोनेट करें। तो ये चीज
यहां पर देखिए तो सुप्रीम कोर्ट ने 2024 में एक जजमेंट दी जहां पर उन्होंने कहा कि ये जो एनोनिमस पॉलिटिकल फंडिंग है वलेट
करती है वोटर के राइट टू इंफॉर्मेशन को। तो देखिए वोटर्स को नहीं पता कि कौन सी कंपनी और पर्सन कितना पैसा जो है एक
पॉलिटिकल पार्टी को दे रहा है। ऑलदो यहां पर क्या होता है कि रिलीज़ किया जाता है कि किस पार्टी को कितना पैसा रिसीव हुआ
है। बट किस पर्सन या कंपनी एंटीटी ने डोनेट करा है वो नहीं बताया जाता है। चलिए अब हम देखते हैं आधार वोटर आईडी लिंकिंग।
दिस रिफॉर्म हेल्प टू रिमूव डुप्लीकेट वोटर्स एंड फेक एंट्रीज इन दी वोटर लिस्ट। ठीक है? तो अब जो है आप वोट करने जाएंगे
तो आपको आधार जो है वेरीफाई कराना पड़ता है। यह जो है 202 में इंप्लीमेंट किया गया। देन कैंडिडेट इंफॉर्मेशनेशन
डिस्क्लोज़र ये बहुत इंटरेस्टिंग चीज है। देखिए my neta डॉट info एक वेबसाइट है। यहां पर जो है कैंडिडेट को इस वेबसाइट के
ऊपर सारा डाटा उसको प्रोवाइड करना पड़ेगा कि उस पर कितने क्रिमिनल केसेस हैं, उसके कितने एसेट्स हैं, लायबिलिटी है, उसकी
एजुकेशन डिटेल्स हैं। तो आप जान सकते हैं तो आप जान सकते हैं जो आपके स्टेट में एमपी एमएलए हैं उन पर कोई कोर्ट केस है या
नहीं है या फिर उनकी एसेट कितनी है, लायबिलिटीज़ कितनी है? फॉर एग्जांपल अगर हम देखें देखिए ये वेबसाइट है राइट my na
info तो अगर आप इस पे जाते हैं तो आप देख सकते हैं ये देखिए कितने सारे एमपीज हैं और कितने केसेस हैं इन पे ये भी आप देख
सकते हैं फॉर एग्जांपल विद विद क्रिमिनल केसेस अगर हम देखें तो आउट ऑफ 243 251 पर जो है क्रिमिनल केसेस हैं। और विद सीरियस
क्रिमिनल केसेस देखें तो 31% ऐसे एमपी है जिन पर सीरियस क्रिमिनल केसेस हैं। और अगर हम करोड़पति एमपीज की बात करें तो 93%
93% जो एमपीज हैं वह करोड़पति हैं। और वुमेन कितनी है? सिर्फ 14% है। यानी कि 74 एमपी। तो ये देखिए काफी इंटरेस्टिंग चीज
है कि हमें कैंडिडेट्स के बारे में पता लग जाता है। चलिए हम बात करते हैं स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन लिस्ट की। ठीक है? तो
हमने वेस्ट बंगाल में देखा कि वहां पर जो है जो इलेक्शन कमीशन था उसने क्या करा? वोटर वेरिफिकेशन ड्राइव चलाई इलेक्शन
कमीशन ने जहां पर उन्होंने रिमूव करे डुप्लीकेट शिफ्टेड और डिसीज्ड और इनवैलिड वोटर्स को। ठीक है? वेरिफिकेशन हुई कैसे?
हाउस टू हाउस चेकक्स, मिसमैचिंग बर्थ सर्टिफिकेट और वोटर आईडी है। अगर एड्रेस एंड आइडेंटिटी वेरिफिकेशन मैच नहीं कर रहा
है कंपेयरिंग विद ओल्डर वोटर लिस्ट। देन अगर इस वेरिफिकेशन से कोई मिसमैच निकलता है बर्थ डिटेल के अंदर। एड्रेस में
डिफरेंस निकलता है या इनकरेक्ट डॉक्यूमेंट्स हैं वोटर लिस्ट में उसका नाम जो है रिमूव कर दिया जाता है। और इसकी वजह
से जो है 84 टू 90 लैक्स वोटर नेम्स वर रिमूव्ड और रिवाइज्ड। तो ये चीज आप नोट डाउन कर सकते हैं कि 84 से 19 लाख लोग जो
हैं वो वेस्ट बंगाल के इलेक्शन में वोट नहीं कर पाए इस बार। ठीक है? नाउ अपोजिशन पार्टीज ने जो है इस पर काफी ज्यादा
एलगेशन लगाए। राइट? तो यहां पर जो इलेक्शन कमीशन का गोल था वो क्रिएट था क्लीन एक्यूरेट एंड अपडेटेड वोटर लिस्ट। चलिए अब
हम बात करते हैं एडवांटेजेस की। राइट? तो हमने ईवीएम के बारे में पढ़ा। राइट? इलेक्ट्रॉनिक वोटर मशीन। तो यहां पर देखिए
फास्ट वोट काउंटिंग होती है और बहुत ही कम इनवैलिड वोट्स निकलते हैं और यह एक डिजिटल मशीन है। देन हमने देखा था वीवीपैट वोटर
कैन वेरीफाई दी वोट बिल्ड ट्रस्ट इन इलेक्शन। चलिए देन देखते हैं नोटा राइट गिव्स वोटर द राइट टू रिजेक्ट द कैंडिडेट
एनकरेज बेटर कैंडिडेट सिलेक्शन। देन हमारे पास आता है इलेक्ट्रोल बॉन्ड्स। फॉर्मल मेथड ऑफ़ पॉलिटिकल फंडिंग रिड्यूसेस कैश
डोनेशन। तो जो कैश इनफ्लो होता था बहुत ज्यादा इलेक्शन के टाइम पे वो इसकी वजह से जो है पूरी तरीके से रिड्यूस हुआ। देन
इलेक्ट्रॉल बॉन्ड्स आर बैंकिंग इंस्ट्रूमेंट यूज्ड टू डोनेट मनी टू पॉलिटिकल पार्टीज थ्रू बैंक्स। ठीक है? तो
आप ये ये डेफिनेशन देख सकते हैं। देन कैंडिडेट डिक्लेअर तो अगर आप इलेक्शन में पार्टिसिपेट कर रहे हैं तो आपको एसेट
कितनी है लायबिलिटी कितनी है? कितने कोर्ट केसेस हैं सब कुछ जो है पहले ही बताना पड़ता है। राइट? और ये आपने डॉट इनफो भी
देख सकते हैं। देन कैंडिडेट डिस्क्लोज़र इंप्रूव ट्रांसपेरेंसी एंड हेल्प्स वोटर टू चूज़ वॉइसली। राइट? चलिए अब हम बात करते
हैं ओवरऑल एडवांटेज। इससे होगा क्या? इलेक्शन बिकम मोर ट्रांसपेरेंट होंगे, फास्टर होंगे, एफिशिएंट बनेंगे। फेक
वोटिंग के केसेस जो है वह ज्यादा से ज्यादा रिड्यूस होंगे। वोटर बिकम मोर अवेयर एंड इनफॉर्म्ड अबाउट दी कैंडिडेट
केसेस, एसेट और वो एक बेटर डिसीजन ले सकता है कि उसे किसको वोट और किस पार्टी को वोट करना है। राइट? तो चलिए अब कुछ चैलेंजेस
को भी देख लेते हैं। राइट? तो मनी पावर इन इलेक्शन। तो जैसे हमने देखा इलेक्ट्रॉल बोनस के बारे में। राइट? तो यहां पर क्या
हो सकता है? किसी एक पर्टिकुलर पार्टी को बहुत ज्यादा पैसे मिले और एक किसी पर्टिकुलर पार्टी को बहुत कम पैसे मिले।
तो उससे क्या होगा कि जो इलेक्शन के रिजल्ट हैं उसमें भी चेंजज़ आ सकते हैं। राइट? क्योंकि यहां पर एडवर्टाइजमेंट होती
है, रैलीज़ निकलती हैं तो बहुत ज्यादा जो है कॉस्ट होती है। तो यहां पर जो मनी जो है मनी पावर ठीक है? वो इन्फ्लुएंस करती
है इलेक्शन को। देन क्रिमिनलाइजेशन ऑफ़ पॉलिटिक्स। तो ये जो टॉपिक है राइट? इस पे आज से एक दो साल पहले भी जीडी आते थे।
राइट? क्रिमिनलाइजेशन ऑफ़ पॉलिटिक्स क्यों हो रहा है? क्या रीज़ंस हैं? मनी रीजन है, पावर रीजन है या फिर इन्फ्लुएंस या वांट
ऑफ रूल है। ठीक है? तो ये लीड्स भी आती हैं। तो ये आपको ध्यान रखना है क्रिमिनलाइजेशन ऑफ पॉलिटिक्स के बारे में।
बट बेसिकली आप देखिए इसमें क्या है? आप एग्जांपल्स को याद रखिए। तो आपका जो जीडी है वो मोर इफेक्टिव होगा। जैसे आप देखेंगे
मुख्तार अंसारी फॉर्मर एमएलए फ्रॉम उत्तर प्रदेश कन्विक्टेड इन सेवरल क्रिमिनल केसेस। ठीक है? देन अतीक अहमद फॉर्मर एमपी
फ्रॉम उत्तर प्रदेश इनवॉल्वड इन मल्टीपल क्रिमिनल केसेस इंक्लूडिंग मर्डर एंड किडनैपिंग। और आपको पता होगा राइट अतीक
अहमद केस। देन अनंत सिंह फॉर्मर एमएलए फ्रॉम बिहार कन्विक्टेड अंडर दी आर्म्स एक्ट। देन मोहम्मद शाहबुद्दीन फॉर्मर एमपी
फ्रॉम बिहार कन्वेक्टेड इन मर्डर केस देन अमृतपाल सिंह आप देख सकते हैं यहां पर जो अमृतपाल सिंह का केस था देन इन पर एनएसए
लगा है राइट देन मधुकोडा फॉर्मर चीफ मिनिस्टर ऑफ़ झारखंड कन्व्टेड इन करप्शन केसेस और ये देखिए ये एग्जांपल भी आप देख
सकते हैं वेस्ट बंगाल का राइट यहां तो कितने करोड़ का घोटाला हुआ है तो इससे हमें क्या पता लगता है लाइजेशन ऑफ़ पॉलिटिक्स ये
जितने भी एग्जांपल है आपको इससे समझ में आ रहा है कि ये लोग जो है पैसे के लिए भी आए पावर के लिए भी आए और इन्फ्लुएंस तो ये
लीड्स जो में ओवरलैप करती है। इसलिए अगर आप एग्जांपल देके अगर बताएंगे तो जो जीडी है वो बहुत इफेक्टिवली जाएगा। देन आप
एग्जांपल दे सकते हैं माय neta डॉट info का। तो आप उसमें बताइए कि जो 93% ऑफ एमपी है वो क्या है? करोड़पति हैं। राइट? देन
आप बता सकते हैं कि उनके ऊपर केसेस कितने हैं? तो हमने ये डाटा देखा। राइट? तो ये केसेस को आप बताइए इंडिविजुअली कि देखिए
इतने परसेंट जो हमारे एमपीस हैं उन पे जो है हार्ड क्रिमिनल केसेस चल रहे हैं। राइट? तो ये सारी चीजों से हमें क्या पता
लगता है कि यस क्रिमिनलाइजेशन ऑफ पॉलिटिक्स हो रहा है और उसका सॉल्यूशन भी आप डिस्कस कर सकते हैं कि ऐसी वेबसाइट्स
जो हैं अवेयर करती हैं लोगों को बेटर डिसीजन के लिए। ठीक है? तो इन सब चीजों पे अगर आप बात करेंगे तो आप इजीली बोल सकते
हैं इसके ऊपर। चलिए लैक ऑफ ट्रांसपेरेंसी इन पॉलिटिकल फंडिंग। पॉलिटिकल डोनेशंस आर नॉट ऑलवेज फुल्ली ट्रांसपेरेंट।
क्रिटिसिज्म ऑफ़ इलेक्ट्रॉल बॉन्ड सिस्टम आर्ग्यूज़ दैट डोनर्स कैन रिमेन एनोनिमस। तो वही बात होगी जो डोनर और कंपनी पैसे दे
रही है इलेक्शन में वो यहां पर रिवील नहीं होती है। ये जो प्रॉब्लम है यहां पर ट्रांसपेरेंसी की देन मनी पावर इन इलेक्शन
इलेक्शन रिक्वायर ह्यूज कैंपेन स्पेंडिंग देखिए ड्यूरिंग मनी ड्यूरिंग मेनी इलेक्शन कैंडिडेट स्पेंड करोड़ ऑफ रूपी ऑन
कैंपेनिंग रैलीज़ एंड एडवर्टाइजमेंट व्हिच क्रिएट इनकलिटी बिटवीन रिच और पुअर कैंडिडेट्स। तो वन नेशन वन इलेक्शन में
अगर हम देखें हम पढ़ेंगे कि अकॉर्डिंग टू सेंटर मीडिया स्टडीज ऑन ऑन इलेक्शन एक्सपेंडिचर रिपोर्ट 1 लाख करोड़ हैड बीन
स्पेंड ऑन 2024 लोकसभा इलेक्शन तो आप देख सकते हैं और इसने जो है 0.5% जीडीपी बूस्ट भी करी थी क्योंकि यहां पे एडवर्टाइजमेंट
होती है रैलीज आती है कैंपेन होता है इसलिए इससे हमें पता लगता है जो मनी है वह इलेक्शन को इन्फ्लुएंस करती है। चलिए अब
बात करते हैं फ्यूचर ऑफ़ इलेक्ट्रॉल बॉन्ड्स क्या हो सकते हैं? डिक्लेयर्ड डोनेशन। यहां पर पता लगेगा कि किस कंपनी
ने जो है कितना पैसा पर्टिकुलर पार्टी को दिया है और किस पर्सन ने दिया है। उसकी क्या इंटेंशन देन स्ट्रांगर मॉनिटरिंग
इलेक्शन कमीशन मे गेट मोर पावर टू चेक द डोनेशन देन मोर ट्रांसपेरेंसी सुप्रीम कोर्ट ऑर्डर डोनर डिटेल टू बी पब्लिश। सो
दैट वाज़ ऑल अबाउट द इलेक्ट्रॉल रिफॉर्म्स। हमने सारी चीजों को डिस्कस करा। हमने ईवीएम्स के बारे में डिस्कस करा। वीपैट के
बारे में डिस्कस करा। माय नेता डॉट इनफो कैंडिडेट डिस्क्लोज़र बैलेट पेपर्स को क्यों रिप्लेस किया गया? देन हमने बात करी
इलेक्ट्रॉल बॉन्ड्स के बारे में, चैलेंजेस के बारे में हमने बात करी और फ्यूचर ऑफ इलेक्ट्रॉल बॉन्ड्स क्या होगा? और हमने
क्रिमिनलाइजेशन ऑफ पॉलिटिक्स के ऊपर भी बात करी और जीडी का टॉपिक भी देखा। राइट? तो चलिए अब हम बात करते हैं वन नेशन वन
इलेक्शन पे। राइट? तो इसका जीडी टॉपिक भी आता है और लेक्चर एट में भी ये देखने को मिलता है। तो वन नेशन वन इलेक्शन को क्या?
पैरेलल इलेक्शन भी बोलते हैं और साइमलटेनियस इलेक्शन भी बोलते हैं। ठीक है? तो कंफ्यूज नहीं होना। अगर पैरेलल
इलेक्शन आता है लिखा या फिर या फिर साइमलटेनियस इलेक्शन लिखा आता है तो उसका मतलब वन नेशन वन इलेक्शन ही है। राइट? तो
देखिए कंडक्टिंग लोकसभा एंड ऑल दी स्टेट असेंबली इलेक्शन टुगेदर एट दी सेम टाइम इज नोन एज वन नेशन वन इलेक्शन। तो देखिए एक
ही समय पर जो है लोकसभा स्टेट असेंबली इलेक्शन, मुनिसिपालिटी, पंचायत इलेक्शन होना ही हम कह सकते हैं वन नेशन वन
इलेक्शन। तो देखिए अब क्या यह बिल पास हो चुका है? नहीं। ठीक है? नो इट वाज़ नॉट पास्ड। इट वाज़ ओनली इंट्रोड्यूस्ड एंड
ब्रीफली डिस्कस्ड। और अगर यह इंप्लीमेंट होगा वन नेशन वन इलेक्शन लाइकली टू रिक्वायर मल्टीपल एटलीस्ट फाइव टू सेवन
कॉन्स्टिट्यूशनल अमेंडमेंट करने पड़ेंगे हम लोगों को। ठीक है? चलिए आगे देखते हैं। व्हाई इट इज़ नीडेड? हमने बात करी लोकसभा
इलेक्शन है, स्टेट असेंबली इलेक्शन है, मुनिसिपल इलेक्शन, पंचायत इलेक्शन। तो इतने सारे इलेक्शन जब इंडिया के अंदर
होंगे तो उससे क्या होता है? देखिए रिपीटेड स्पेंडिंग बहुत ज्यादा पैसा खर्च होता है। रिपीटेड सिक्योरिटी डिप्लॉयमेंट।
तो जितनी भी हमारी सीएसएफ, सीआरपीएफ, आईटीबीपी, बीएसएफ है ना? तो ये सारी फोर्सेस क्या है? जगह-जगह पे डिप्लॉय होती
हैं। और कब डिप्लॉय होती हैं? एटलीस्ट टू मंथ्स बिफोर दी इलेक्शन देन फ्रीक्वेंट पॉलिसीज़ डिले। अभी हम पढ़ेंगे कैसे पॉलिसी
डिले। तो देखिए इंपैक्ट जो है बस इसके तीन इंपैक्ट आप पढ़िए और ज्यादा नहीं पढ़ना। इकोनमिक इंपैक्ट, गवर्नेंस एंड एफिशिएंसी
एंड सोशल पॉलिटिकल इंपैक्ट। का टॉपिक आया हुआ था। राइट? विद दी इंप्लीमेंटेशन ऑफ वन नेशन वन इलेक्शन व्हिच एरियाज़ अकॉर्डिंग
टू यू विल बी मोस्ट इंपैक्टेड। तो तो देखिए ये जो जीडी का टॉपिक है ये बहुत सारे बोर्ड्स में रिपीट हुआ है। एयरफोर्स,
आर्मी। ठीक है? तो इसलिए ये पढ़ना बहुत इंपॉर्टेंट है। ऑलदो अगर हम देखेंगे अभी इलेक्शन का सीजन चल रहा था। और जब भी कभी
इलेक्शन का सीजन आता है ना, तो यह टॉपिक जो है बहुत ज्यादा फेवरेट बन जाता है। इकोनॉमिक इंपैक्ट, गवर्नेंस एंड
एडमिनिस्ट्रेशन, एफिशिएंसी इंपैक्ट और या फिर सोशल एंड पॉलिटिकल इंपैक्ट। तो चलिए एक-एक करके हम पढ़ते हैं इकोनमिक इंपैक्ट
से स्टार्ट करते हैं। तो देखिए इकोनॉमिक इंपैक्ट इलेक्शन एक्सपेंडिचर 2014 का जो लोकसभा इलेक्शन होता है तो सेंटर ऑफ
मीडिया स्टडी सीएमएस इलेक्शन एक्सपेंडिचर रिपोर्ट बताती है कि 1 लाख करोड़ की स्पेंडिंग थी उस टाइम पर। ये कॉस्ट जो 1
लाख है वो कैसे हुई? देखिए ईवीएम वीवीपैट हमने पढ़ा था ना वहां पर देन ट्रांसपोर्ट पुलिंग बूथ सेटअप व्हीकल स्टोरेज कैंपेन
में अगर देखेंगे रैलीज एडवरटाइजमेंट डिजिटल कैंपेन तो ये सब मिलाकर जो है कितना हो जाता है हमारा 1 लाख करोड़ हो
जाता है अगर कंप्लीट हम देखें तो जरूर याद रखना और इंडिया के अंदर अगर आप देखेंगे तो अराउंड मिलियंस ऑफ पोलिंग बोथ सेटअप होते
हैं। व्हाट रिपीटेड स्पेंडिंग मींस देखिए 10.5 लाख पुूलिंग स्टेशंस हैं। देन अगर हम देखेंगे देन स्टेट इक्शंस आएंगे। फिर वहां
पे भी आप सेपरेट पोलिंग बूथ्स लगाएंगे और उसके नेक्स्ट मंथ बाद आपको पता लगता है कि चलिए मुनिसिपालिटी और पंचायत राज के
इलेक्शन आ चुके हैं तो वहां पर आप अलग से पोलिंग बूथ लगाएंगे। तो यही अगर सारा टाइम चलता रहेगा तो हमारी कॉस्ट तो इनक्रीस
होती रहेगी। आगे देखते हैं जीडीपी इंपैक्ट। देखिए इलेक्शन स्पेंडिंग इन इंक्रीज शॉर्ट टर्म एक्टिविटी तो होती है।
प्रिंटिंग, ट्रांसपोर्ट, मीडिया एड्स, बूस्टेड डिमांड 0.5% ऑफ़ जीडीपी बूस्टेड हो जाती है इलेक्शन पीरियड के अंदर। ये भी
सीएमएस की रिपोर्ट बताती है। नेक्स्ट देखते हैं हम इन्वेस्टमेंट डिले। देख तो हमें यहां पर एम्फेसिस देना है मॉडल कोड
ऑफ़ कंडक्ट एमसीसी। तो जब भी इलेक्शन होते हैं तो हमारा इलेक्शन कमीशन जो है वो मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट लगा देता है। राइट? तो
इसमें क्या होता है कि जितने भी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट हैं वो पॉज कर दिए जाते हैं। कोई भी गवर्नमेंट स्कीम जो
है अनाउंस नहीं की जा सकती। क्यों? क्योंकि अगर कोई रूलिंग गवर्नमेंट है वो स्कीम्स नई-नई निकाले और इंफ्रास्ट्रक्चर
डेवलपमेंट प्रोजेक्ट जो है बहुत सारे उस टाइम पर स्टार्ट कर दे। तो इससे क्या हो सकता है कि जो वोटिंग है उस पे क्या हो
सकता है? इन्फ्लुएंस हो सकता है। इसलिए मॉडल कोड ऑफ़ कंडक्ट जब लागू हो जाता है तो आप कोई स्कीम जो है लागू नहीं कर सकते और
इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट भी पॉज़ हो जाते हैं। तो आप देखिए अगर बार-बार ये चीजें चलेंगी स्टेट इलेक्शन में देन पंचायत
इलेक्शन में फिर लोकसभा के इलेक्शन में तो क्या होगा? इससे इन्वेस्टमेंट डिले होगी। इंफ्रास्ट्रक्चर के जो प्रोजेक्ट्स हैं
उसमें डिले देखने को मिलेगी। तो ये पीआईबी का डाटा था। देन हम देखते हैं पब्लिक मनी डायवर्ज़ फंड्स यूज़्ड फॉर इलेक्शन इंस्टेड
ऑफ़ हेल्थ, एजुकेशन, इंफ्रास्ट्रक्चर। तो जो पैसा हमें किसमें यूज़ करना है? ₹1 लाख करोड़ हमारा स्पेंड। तो वो पैसा जो है हम
किसमें यूज़ कर सकते हेल्थ, एजुकेशन, इंफ्रास्ट्रक्चर देन हम देखते हैं और ये सारे इशू जो हैं वो पार्लियामेंट में
डिस्कस हुए हैं पॉलिसी डिबेट्स में। इसलिए यह पॉइंट यहां पर रखा हुआ है कि पब्लिक मनी का डायवर्जन भी होता है। देन
सिक्योरिटी फ़ ऑप्टिमाइजेशन मोस्टेंट पॉइंट देखिए पैरामिलिट्री फोर्स लाइक सीआरपीएफ, बीएसएफ, आईटीबीपी। बीएसएफ का काम क्या है?
पाकिस्तान बॉर्डर बांग्लादेश बॉर्डर पे डिप्लॉय होना। आईटीबीपी का काम क्या है? जो हमारे इंडो तिब्बतन बॉर्डर है वहां पर
डिप्लॉय होना। और आप उनको कहां पर डिप्लॉय कर रहे हैं? इलेक्शन ड्यूटी के लिए अराउंड वन टू टू मंथ्स। वैसे ही अगर आप देखेंगे
सिक्योरिटी फोर्सेस जो हैं हमारी उनकी शॉर्टेजेस हैं और आप उनको इलेक्शन के लिए जो है पहले से ही वहां पर डिप्लॉय कर देते
हैं। देन समलटेनियस इलेक्शन वुड रिड्यूस रिपीटेड डिप्लॉयमेंट लॉजिस्टिक्स अनेबल बेटर यूज़ ऑफ़ क्रिटिकल सिक्योरिटी ड्यूटीज़
एंड सेव एक्सपेंडिचर फॉर दी मिनिस्ट्री ऑफ़ होम अफेयर्स। इससे जो होम अफेयर्स का ही पैसा बचेगा। तो देखिए ये जो है सिक्योरिटी
फ़ ऑप्टिमाइजेशन बहुतेंट पॉइंट था। चलिए अब हम नेक्स्ट देखते हैं। गवर्नेंस कैसे अच्छी होएगी? तो देखिए मॉडल कोड ऑफ़
कंडक्ट। ठीक है? तो बार-बार जब इलेक्शंस होते हैं हमारे डिफरेंट असेंबली के तो इससे क्या होता डिले होता है लाइक स्टेट
के जो डिले रोड्स होती हैं इरीगेशन वेलफेयर अप्रूवल तो ये सारी चीजें भी खत्म हो गई। देन हमारे पास आता है
एडमिनिस्ट्रेटिव डायवर्जन लैक्स ऑफ गवर्नमेंट स्टाफ डिप्लॉयड टीचर्स क्लर्क लोकल ऑफिसर। तो आपको पता होगा पूलिंग बूथ
पे जो है कौन होते हैं? हमारे टीचर्स क्लर्क और लोकल ऑफिसर्स डिप्लॉय होते हैं। जब आपने देखा होगा कि हमारी समर्स की
हॉलिडेज़ होती हैं। बट टीचर्स का जो है स्कूल तब भी लगता है। तो उस टाइम पर जो है टीचर्स को यूज़ कर लिया जाता है फॉर
इलेक्शन ड्यूटी और अदर चीजों के लिए। और आपने देखा होगा कोरोना के टाइम पर कितने सारे टीचर्स ने जो है अपनी लाइफ
सैक्रिफाइस करी क्योंकि उस टाइम पर इलेक्शन कराया गया। बहुत सारे टीचर्स ने जो है अपनी लाइफ को सैक्रिफाइस किया
ड्यूरिंग दिस। एंड स्कूल यूज्ड एज पुलिंग बूथ। तो जब हर साल इक्शंस होंगे तो जो स्कूल्स हैं उनको आप पुलिंग बूथ सेटअप कर
रहे हैं। तो इससे क्या होएगा? वेस्टेज ऑफ़ रिसोर्सेज हो रहा है। देन इलेक्शन कमीशन पर बर्डन बढ़ता है। राइट? इलेक्शन कमीशन ऑफ़
इंडिया मैनेजेस 90 करोड़ वोटर। तो ये डाटा जरूर याद रखिए। ठीक है? तो एक हमें याद रखना है 10 लाख पुलिंग स्टेशंस जो हैं
आपको याद रखनी है। 10 लाख पुलिंग स्टेशंस बनाए गए थे ड्यूरिंग लोकसभा इलेक्शन। और दूसरा 90 करोड़ वोटर हैं इंडिया के अंदर।
इतना बड़ा डाटा इलेक्शन कमीशन को हैंडल करना इटसेल्फ अ रिपीटेड साइकिल एंड मैसिव लॉजिस्टिकल स्ट्रेन है। ठीक है? आप स्पेशल
इंटेंसिव रिवीजन लिस्ट के बारे में भी देख सकते हैं कि इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया के ऊपर जो है अराउंड 80 टू 90 लैक्स वोटर जो
थे वहां पर है ना उनका वेरी वेरिफिकेशन करना। तो इसकी वजह से जो है उन पर बर्डन जो है बहुत ज्यादा बढ़ता जा रहा है। देन
कंटीन्यूअस गवर्नेंस फोकस। फॉर एग्जांपल अगर आप देखेंगे सेंट्रल गवर्नमेंट है। राइट? तो सेंट्रल गवर्नमेंट चाहती है कि
हर स्टेट में हमारी गवर्नमेंट हो। तो इसके लिए क्या होता है? हर साल जो है नए स्टेट गवर्नमेंट के इलेक्शन होने स्टार्ट हो
जाते हैं। फॉर एग्जांपल अभी वेस्ट बंगाल के इलेक्शन हुए तो क्या हो गया? सेंटर का ध्यान वेस्ट बंगाल की तरफ गया। फिर अब जो
है पंजाब का इलेक्शन होगा तो पंजाब की तरफ ध्यान जाएगा। तो गवर्नमेंट जो कि जिसका काम है गवर्नेंस पे फोकस करना। वो किस पर
फोकस कर रही है? स्टेट इलेक्शन पर। और एक ही बार अगर होंगे इलेक्शन जो हमारे नेक्स्ट टू थ्री टू फोर इयर्स हैं वहां पर
जो है फोकस सिर्फ और सिर्फ गवर्नेंस पे ही होगा। तो क्लियर फोर टू फाइव ईयर विंडोज़ फॉर गवर्नेंस। एग्जांपल लॉन्ग टर्म
इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट, हाईवेज़, डिफेंस प्रोजेक्ट गेट अनइंटरप्टेड फोकस। तो फोकस हमारा गवर्नेंस पे जाएगा। देन हम
देखते हैं सोशल और पॉलिटिकल इंपैक्ट। तो देखिए रिड्यूस डिसररप्शन इन डेली लाइफ। जब भी रैली होती है तो उससे क्या होता है?
रोड्स ब्लॉक होते हैं। ट्रैफिक का इशूज़ आता है मल्टीपल टाइम्स इन अ ईयर। और आपने देखा होगा कि कोई भी मिनिस्टर अगर आ रहा
है रैली करने के लिए तो पहले से ही जो है बहुत सारे जो है इंतजाम करने पड़ते हैं। ट्रैफिक पुलिस पर भी बर्डन इनक्रीस होता
है। और आपने देखा होगा सर ट्रैफिक जैम्स और सिक्योरिटी का डिप्लॉयमेंट होता है। पुलिस फोर्सेस सारी की सारी वहां पर
डिप्लॉय जाती है और पुलिस फ़ का काम क्या है? वहां पर केसेस सॉल्व करना। तो ये भी है। तो देखिए जब भी वन नेशन वन इलेक्शन
होगा तो उससे लेस फ्रीक्वेंट ट्रैफिक जैम्स होंगे और स्मूदर डेली रूटीन होगा। स्कूल्स एंड पब्लिक सर्विस रन
कंटीन्यूअसली स्कूल यूज्ड एज अ पुलिंग बोथ अगेन एंड अगेन विद वन नेशन वन इलेक्शन यूज़्ड वंस इन फाइव ईयर। ठीक है? तो
वेस्टेज ऑफ़ रिसोर्सेज नहीं होगा। नो रिपीटेड क्लास डिसररप्शन फॉर स्टूडेंट्स। रिलीफ फॉर माइग्रेंट वर्कर। ये बहुत
इंटरेस्टिंग पॉइंट है। तो आपने देखा होगा जब इलेक्शंस होते हैं। फॉर एग्जांपल लोकसभा का इलेक्शन है। तो कोई भी जो
माइग्रेंट वर्कर है डिफरेंट स्टेट से आया हुआ है। राइट? वो किसी और स्टेट में काम कर रहा है तो वापस उसको उसी स्टेट में
जाना पड़ता है इलेक्शन देने के लिए। फॉर एग्जांपल जैसे कि वेस्ट बंगाल में इलेक्शन हुए। ठीक है? तो वेस्ट बंगाल के काफी सारे
लोग कहां हैं? गुजरात में और महाराष्ट्र में काम कर रहे थे। तो ये सारे लोग जो हैं वापस आए किसका? स्टेट असेंबली इलेक्शन के
लिए। अब सपोज़ जिस गांव में ये रहते हैं वहां पर पंचायत के इलेक्शन होंगे। तो ये वापस वहां पर आएंगे। देन मुनिसिपालिटी के
होते तो ये वापस एंड देन लोकसभा के इलेक्शन होते तो फिर। तो इससे हो क्या रहा है बार-बार? जो माइग्रेंट वर्कर हैं उनका
जो माइग्रेशन है वो इससे कम से कम होगा। राइट? सेव्स ट्रैवल कॉस्ट एंड अवॉयड लॉस ऑफ वेजेस। ठीक है?
तो पोलराइज़ेशन के एग्ज़ांपल हम देख सकते हैं। जैसे कि करंट फ्रीक्वेंट इलेक्शन होते हैं। तो यहां पर कॉन्स्टेंट पॉलिटिकल
डिबेट्स होती हैं ऑन दी बेसिस ऑफ़ कास्ट, रिलीजन, डिवीज़ है ना? तो ये क्या है? है पोलराइज़ हो गया कि अगर आप किसी पार्टी को
सपोर्ट करते हैं तो आप उसी ही पार्टी की आइडियोलॉजी को फॉलो करते हैं और सपोज़ कोई दूसरी पार्टी है उसकी डिफरेंट आइडियोलॉजी
है तो आइडियोलॉजी की वजह से जो है ग्रुप डिवीज़ हो जाता है तो उसे हम पोलराइजेशन बोल देते हैं। तो बार-बार जब हर साल
इलेक्शन होंगे स्टेट म्युनिसिपालिटी और सेंटर के तो इससे क्या होगा कि जो पॉलिटिकल डिबेट्स हैं कास्ट और रिलीजन है
उन्हीं पर ज्यादातर हमारा जो है फोकस रहेगा। तो इसलिए क्या है? लिमिटेड इलेक्शन पीरियड अगर हो सोसाइटी फेस लेस कंटीन्यूअस
पॉलिटिकल टेंशन। देन हायर वोटर कन्वीनियंसेस। जब आपको पता है कि इलेक्शन 5 साल में एक ही बार होने हैं तो आप जरूर
वोट देंगे। जब आपको पता है हर साल ही इलेक्शन होते हैं तो यू विल नॉट टेक दैट सीरियसली। मल्टीपल इलेक्शन कंफ्यूजन और
फटीग होता है। बट वन नेशन वन इलेक्शन से होगा क्या कि ईज़र पार्टिसिपेशन एंड बेटर प्लानिंग टू वोट होगा। चलिए एक एग्जांपल
और हम देखते हैं जो हम ऑब्जर्व कर सकते हैं मीडिया का। राइट? तो देखिए मीडिया का काम क्या है? जो भी हमारे इंडिया के अंदर
और हमारे इंटरनल स्टेट्स के अंदर इशूज़ हैं उसको हाईलाइट करना है। उसके सॉल्यूशन पर बात करना है और गवर्नमेंट का ध्यान जो है
वहां पर खींचना है। बट जब इलेक्शन होता है तो मीडिया का सारा फोकस किस पर होता है? इलेक्शन पर होता है। तो आपने देखा होगा
पॉलिटिकल डिबेट्स होती हैं। एग्जिट पोल्स लाए जाते हैं। उन पे डिस्कशन चलता है। तो ये सारा जो टाइम वेस्ट हो रहा है। मीडिया
जो अपने रियल इशूज़ से है वो क्या है? डायवर्ट होती है कि मीडिया का डायवर्जन भी नहीं होगा। राइट? तो आई होप अब आपको सारे
पॉइंट्स जो हैं क्लियर हो चुके होंगे। वेदर इट्स इकोनॉमिक इफ़ेक्ट, गवर्नेंस कैसे इंप्रूव होगा? सोशल तो आप इसको दो-तीन बार
पढ़ेंगे तो ये पॉइंट्स आपको बहुत अच्छे तरीके से याद रहेंगे। और ये जितने भी पॉइंट्स हैं बहुत ब्रीफ, छोटे और टू दी
पॉइंट हैं। राइट? तो चलिए अब हम चलते हैं रिजर्वेशन सिस्टम टॉपिक के ऊपर। राइट? तो पहले हम देखते हैं रिजर्वेशन मतलब क्या
है? तो रिजर्वेशन इन इंडिया मींस प्रोवाइडिंग अ फिक्स्ड परसेंटेज ऑफ सीड्स। ठीक है? फिक्स्ड परसेंटेज ऑफ सीड्स
प्रोवाइड करना। किस सेक्टर में? एजुकेशन, गवर्नमेंट जॉब्स एंड पॉलिटिकल इंस्टीट्यूशन टू सोशली एंड इकोनॉमिकली
डिसएडवांटेजेस ग्रुप टू इंश्योर इक्वलिटी एंड रिप्रेजेंटेशन। तो हमने बेसिकली यहां पर ये पढ़ा है कि फिक्स्ड परसेंटेज ऑफ़ सीड
देना एजुकेशन, गवर्नमेंट जॉब्स और पॉलिटिकल इंस्टीट्यूशन में किन लोगों को? डिसएडवांटेजेस ग्रुप्स को और जो सोशली और
इकोनॉमिकली वीक हैं। किस लिए? टू एनश्योर क्वालिटी रिप्रेजेंटेशन। टू इंश्योर इक्वलिटी एंड रिप्रेजेंटेशन। ठीक है? तो
ये था रिजर्वेशन मतलब। चलिए हम बात कर लेते हैं रिजर्वेशन कब स्टार्ट हुआ? तो देखिए जो 1950 ईयर था हमारा जो
कॉन्स्टिट्यूशन है दैट केम इनू फोर्स तो कॉन्स्टिट्यूशन के अंदर जो है शेड्यूल कास्ट और शेड्यूल ट्राइब को जो है
रिजर्वेशन दिया गया था। देन अगर हम और हिस्ट्री उठाकर देखें 1932 का तो आपने पूना पैक्ट के बारे में पढ़ा होगा जहां पर
बी आर अंबेडकर और महात्मा गांधी ने जो है रिजर्वेशन की बात करी किसको? डिप्रेस्ड क्लासेस को। तो इससे हमें पता लगता है कि
यस हिस्ट्री से जो है रिजर्वेशन चलता आ रहा है। हमें ये ध्यान रखना है कि 1950 में जो है एससी और एसटी के बारे में बताया
गया और 1990 तक जो है मंडल कमीशन में 27% रिजर्वेशन दिया गया ओबीसी क्लास को अदर बैकवर्ड क्लासेस को। देन इकोनॉमिकल वीकर
सेक्शन की अगर हम बात करें तो 10% रिजर्वेशन दिया गया 2019 के अंदर थ्रू दी 113 कॉन्स्टिट्यूशनल अमेंडमेंट। बिफोर
मूविंग फॉरवर्ड हम कुछ चीजें पढ़ लेते हैं रिजर्वेशन के बारे में कि हमें बेटर अंडरस्टैंडिंग हो इसके बारे में। ठीक है?
तो यहां पर अगर हम देखें डी वाई चंद्रचू जो कि हमारे कौन सीजीआई चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया ही स्टेटेड दैट कास्ट बेस्ड
डिस्क्रिमिनेशन स्टिल एकिस्ट इन इंडिया एंड इक्वल ओपोरर्चुनिटी कैन नॉट बी अचीव्ड अनलेस हिस्टोरिकली मार्जिनलाइज्ड
कम्युनिटी रिसीव कॉन्स्टिट्यूशनल सपोर्ट थ्रू रिजर्वेशन एंड सोशल जस्टिस मेजर्स तो अगर हमारे सीजीआई ये स्टेटमेंट दे रहे हैं
तो इससे हमें क्या पता लगता है कि यस इंडिया को रिजर्वेशन सिस्टम की जरूरत है। और अगर आप देखेंगे सुप्रीम कोर्ट की
वेरियस जजमेंट्स कहा गया कि रिजर्वेशन इज़ नॉट मेयरली अबाउट जॉब्स और सीड्स बट अबाउट इंश्योरिंग रिप्रेजेंटेशन डिग्निटी एंड
पार्टिसिपेशन फॉर कम्युनिटीज़ दैट फेस्ड सेंचुरीज ऑफ सोशल एक्सक्लूस। और सीजीआई ने मेंशन करा कि उनके पास काफी सारे केसेस आए
इन सुप्रीम कोर्ट जहां पर जो प्रीमियर इंस्टीट्यूट थे वहां पर बच्चों का वहां पर जो है काफी सारे बच्चों की डेथ हुई ड्यू
टू सुसाइड केसेस क्योंकि वहां पर जो है कास्टिज्म और जो रिजर्वेशन को लेके उनसे उनको बुली किया गया। देन अगर हम थोड़ा
ब्रॉड पर्सपेक्टिव ले चल और वर्ल्ड को भी देखें तो देखिए ब्राजील में जो है रिजर्वेशन कोटा है टू एफ्रो ब्राज़लियन
स्टूडेंट फ्रॉम पब्लिक स्कूल एंड यूनिवर्सिटीज और यूनाइटेड स्टेट्स के अंदर भी रिजर्वेशन कोटा था अफ्रीकन अमेरिकनंस
के लिए और हिस्टोरिकल डिस्क्रिमिनेटेड ग्रुप्स के लिए इन एजुकेशन जॉब्स साउथ अफ्रीका के अंदर हम देखें तो ब्लैक
इकोनॉमिक एंपावरमेंट के लिए टू प्रमोट इक्वलिटी ब्लैक सिटीजंस जॉब्स बिज़नेस और ओनरशिप में देन अगर हम ऑस्ट्रेलिया का भी
एग्जांपल ले तो यहां पर जो अब्रोजनल्स थे राइट जो यहां पर नेटिव्स थे ऑस्ट्रेलिया के जो कि फॉरेस्ट में रहा करते थे उनको भी
देखिए गवर्नमेंट सेक्टर में यहां पर कोटा दिया गया है। तो ये कुछ एग्जांपल है जिससे हमें पता लगता है कि सिर्फ इंडिया के अंदर
ही नहीं बट अगर आप इंडिया के अंदर कास्ट देखेंगे तो इन किसी भी कंट्री के अंदर जितना वाइड आपको कास्टिज्म इंडिया के अंदर
देखने को मिलेगा वो इन कंट्रीज में नहीं है। देन अगर हम यहां पर एक इंटरेस्टिंग एग्जांपल देखते हैं। बांग्लादेश प्रोटेस्ट
रिमूव्ड शेख हसीना। आपने देखा प्राइम मिनिस्टर जो है वहां पर चेंज हो गया। ठीक है? लोग जो है सड़कों पर आए। प्रोटेस्ट
हुआ मैसिव मैसिव स्टूडेंट लेड प्रोटेस्ट अगेंस्ट कोटा सिस्टम इन गवर्नमेंट जॉब लेड रिमूवल ऑफ शेख हसीना तो देखिए कोटा सिस्टम
और रिजर्वेशन अगेंस्ट भी जा सकता है गवर्नमेंट के जैसे आप यहां पर देखिए कि फ्रीडम फाइटर को 30% दे दिया गया वुमेन को
दिया डिस्ट्रिक्ट थाना एथनिक माइनॉरिटी डिसेबल कोटा और सिर्फ और सिर्फ लास्ट में 5 टू 10% ही सीट बचती है जनरल या फिर ओपन
कैंडिडेट्स के लिए से जो है स्टूडेंट जो बहुत ज्यादा फ्रस्ट्रेटेड थे और यहां पर जो है प्रोटेस्ट होता है अप्रूवल ऑफ
प्राइम मिनिस्टर शेख हसीना होता है। ठीक है? जिससे हमें पता लगता है कि अगर हद से ज्यादा रिजर्वेशन भी दे दिया जाए तो ऐसी
सिचुएशन भी आ सकती है। तो आपको जो है दोनों पर्सपेक्टिव को लेकर चलना है। राइट? चलिए अब कुछ केसेस देख लेते हैं हम।
राजस्थान पेरेंट्स डाई बाय सुसाइड आफ्टर डॉटर मैरिज अगेंस्ट देयर विशेस। यहां पर इंटरकास्ट मैरिज होने की वजह से जो है
पेरेंट्स ने ही अपनी जात तो आप देख सकते हैं किस लेवल का कास्टिज्म यहां पर चल रहा है कि पेरेंट्स प्रेफर टू डाई देन मैरिंग
इन एनी अदर कास्ट देन कर्नाटका कपल स्टोंड टू डेथ फोर इयर्स आफ्टर इंटरकास्ट मैरिज। देन यहां पर देखिए ऑनर किलिंग राइट 25 ईयर
ओल्ड मैन शॉट डेड बाय वाइफ्स ब्रदर ओवर इंटरकास्ट मैरिज इन राजस्थान झुंझुनू डिस्ट्रिक्ट और अगर ओनर किलिंग के आप
केसेस देखेंगे ना एनसीआरबी के डाटा के अकॉर्डिंग तो आप शॉक्ड हो जाएंगे कि इंडिया के अंदर जो है ऑनर किलिंग कितनी
ज्यादा प्रिवेलेंट है। स्पेशली अगर आप हरियाणा का डाटा देखेंगे तो यू विल गेट एन आईडिया। देन यहां पर अगर आप देखेंगे वुमेन
मैरिज लवर्स बॉडी आफ्टर दी फैमिली किल्स हिम ओवर कास्ट। देखिए तो इससे हमें यह पता लगता है कि कास्टिज्म इंडिया के अंदर है।
ठीक है? और इसलिए इसे काउंटर करने के लिए जो है रिजर्वेशन सिस्टम को लाया गया जो यह डिस्क्रिमिनेशन फेस करती है और उनका
अपलिफमेंट के लिए जो है रिजर्वेशन सिस्टम लाया गया। देन अगर हम रिजर्वेशन डिवीजन की बात करें तो शेड्यूल कास्ट 15% शेड्यूल
ट्राइब 7.5% ओबीसी अदर बैकवर्ड क्लास 27% एंड ईडब्ल्यूएस 10%। ठीक है? चलिए अब हम पढ़ते हैं ईडब्ल्यूएस के बारे में थोड़ा
डेप्थ में। ठीक है? देखिए 10% रिजर्वेशन मिला 2019 के अंदर थ्रू 113 कॉन्स्टिट्यूशनल अमेंडमेंट। ये हमने देख
लिया था। अब यहां पर फैमिली इनकम शुड बिलो 8 लाख पर ईयर अप्लाई टू जनरल कैटेगरी इकोनॉमिकली पुअर पीपल। ठीक है? तो ये जो
है यहां पर 8 लाख पर ईयर से जो है इनकम अगर आपकी लेस है तो यू विल फॉल इनू दी इकोनॉमिकल वीकर सेक्शन।
देन देन अगर हम देखें तो ये जो ईडब्ल्यूएस रिजर्वेशन है ये कहां-कहां है? देखिए एजुकेशन सेक्टर में है। सीट्स इन सेंट्रल
यूनिवर्सिटीज आईआईटीस, एनआईटीस, मेडिकल कॉलेजेस तो जितनी भी हमारी गवर्नमेंट यूनिवर्सिटीज हैं वहां पर जो है
ईडब्ल्यूएस कोटा देखने को मिलेगा। देन हम देखें तो गवर्नमेंट जॉब्स की भी तो वहां पर भी जो है 10% रिजर्वेशन है सेंट्रल
गवर्नमेंट रिक्रूटमेंट में। ठीक है? देन गवर्नमेंट स्कीम्स की अगर हम बात करें तो बेनिफिट इन हाउसिंग स्कीम, स्कॉलरशिप एंड
वेलफेयर प्रोग्राम ईडब्ल्यूएस को दिया जाता है। ठीक है? चलिए हम बात करते हैं व्हाई रिजर्वेशन इज़ नीडेड टू इंप्रूव द
रिप्रेजेंटेशन इन गवर्नमेंट जॉब्स। एग्जांपल रिजर्वेशन अलाउज़ एससी, एसटी एंड ओबीसी कैंडिडेट टू जॉइन सर्विज लाइक
रेलवे, पुलिस, टीचिंग एंड एडमिनिस्ट्रेशन व्हिच अर्लियर हैड वेरी लो रिप्रेजेंटेशन फ्रॉम दीज़ ग्रुप। अगर आप बात करेंगे जो
हमारी एक क्लास सर्विज होती थी तो उसमें एससी, एसटी और ओबीसी का जो रिप्रेजेंटेशन था वो बहुत ज्यादा कम था। बट बिकॉज़ ऑफ़ दिस
रिजर्वेशन सिस्टम क्योंकि सीट फिक्स्ड है 27% 7.5 15 तो तो इसकी वजह से जो है आपको हर एक कम्युनिटी का प्रॉपर रिप्रेजेंटेशन
देखने को मिलेगा। इन मेनी विलेजेस दलित कम्युनिटी स्टिल फसेस डिस्क्रिमिनेशन इन हाउसिंग एजुकेशन, सोशल स्पसेस। रिजर्वेशन
हेल्प्स देम एंटर गवर्नमेंट सर्विज एंड हायर एजुकेशन। राइट? तो इस हिस्टोरिकल सोशल डिस्क्रिमिनेशन को कम करने के लिए
क्या है? आपको लोगों को पहले अपलिफ्ट करना पड़ेगा। उनको एजुकेट करना पड़ेगा। उनको जॉब देनी पड़ेगी। इसलिए जो है रिजर्वेशन
सिस्टम लाया गया। ठीक है? खुद ऑब्जर्व करिए कि क्या आपने कभी कास्टिज्म फेस करा है या फिर आपने कभी कास्टिज्म को ऑब्जर्व
करा है अपने आसपास स्कूल, कॉलेजेस में या फिर विलेज के अंदर तो आपको उससे आईडिया लगेगा टू सपोर्ट इकोनॉमिकली पुअर
फैमिलीज़। अ जनरल कैटेगरी स्टूडेंट फ्रॉम अ लो इनकम फैमिली कैन गेट एडमिशन इन आईआईटी और गवर्नमेंट जॉब्स थ्रू दी
ईडब्ल्यूएस कोटा। राइट? देन टू अपलिफ्ट रिमोट एंड मजनलाइज़्ड कम्युनिटीज़। मेनी स्टूडेंट फ्रॉम नॉर्थ ईस्ट ट्राइबल
कम्युनिटीज़ आर एबल टू स्टडी इन सेंट्रल यूनिवर्सिटी थ्रू रिजर्वेशन पॉलिसीज। राइट? तो यहां पर हम देख सकते हैं कि कोई
भी कम्युनिटी हो वो प्रेसिडेंट भी बन सकता है। राइट? देन हम बात करते हैं रिजर्वेशन इन पंचायत। रिजर्वेशन इन पंचायत राज
इंस्टीट्यूशन वाज़ इंट्रोड्यूस्ड थ्रू 73 कॉन्स्टिट्यूशनल अमेंडमेंट एक्ट 1992। तो यहां पर जो पंचायत के इलेक्शंस होते हैं
तो वहां पर भी जो है रिजर्वेशन दिया जाता है। ठीक है? देखिए एससी सीट्स रिजर्व्ड इन प्रोपोर्शन टू देयर पॉपुलेशन। तो पॉपुलेशन
के अकॉर्डिंग जो है एससी की सीट्स जो है रिजर्व रहती है इन पंचायत राज्य इक्शंस देन शेड्यूल ट्राइब्स सीट रिजर्व इन
प्रोपोर्शन टू देयर पॉपुलेशन मिनिमम 33% रिजर्वेशन ऑफ टोटल सीट्स इन पंचायत इंक्लूडिंग एससी एसटी एंड वुमेन तो तो वन
थर्ड जो है हमें रिजर्वेशन देना ही पड़ेगा इंक्लूडिंग एससी एसटी वुमेन ठीक है मेनी स्टेट्स लाइक बिहार राजस्थान मध्य प्रदेश
इंक्रीज्ड इट टू 50% रिजर्वेशन फॉर वमेन तो यहां पर याद रखने वाली बात क्या है कि 73 कॉन्स्टिट्यूशन अमेंडमेंट 1992 से जो
है हमने पंचायत के अंदर भी जो है रिजर्वेशन लागू लागू कर दिया जहां पे एससी, एसटी और वुमेनस को जो है रिजर्वेशन
दिया गया मिनिमम 33% का और कुछ स्टेट्स में जो है 50% तक। तो चलिए हमने देखा है वुमेन रिजर्वेशन बिल आने वाला था सेंसेस
के बाद बट हुआ क्या? ये बिल पास ही नहीं हुआ। राइट? टू थर्ड मेजॉरिटी ये बिल जो हिट नहीं कर पाया और इसकी वजह से जो है ये
बिल यहां पर पास नहीं हुआ। ठीक है? तो इस पर हम बात कर सकते हैं कि जो वुमेन एंपावरमेंट की हम एक तरफ बात करते हैं। बट
व्हेन इट कम्स टू वुमेन रिजर्वेशन यहां पर जो है बिल नहीं पास कर पाए। तो इस पे भी एक अच्छी डिबेट हो सकती है। चलिए वेलफेयर
स्कीम एंड डेवलपमेंट प्रोग्राम रिजर्वेशन प्रायोरिटी बेनिफिशरीज पीएम आवास योजना हाउसिंग स्कीम प्रायोरिटी गिवन टू एससी
शेड्यूल कास्ट शेड्यूल ट्राइब एंड बिलो पावर्टी लाइन बीपीएल फैमिलीज़ फॉर बिल्डिंग हाउस इन रूरल एंड अर्बन एरियाज। यहां पर
गवर्नमेंट सपोर्ट करती है। गवर्नमेंट जो है घर बनाकर देती है। राइट? तो यहां पर जो बेनिफिशरीज़ है उसमें बहुत सारे लोग क्या
थे? बीपीएल जो बीपीएल कार्ड होल्डर थे बिलो पावर्टी लाइन और एससी एंड एसटी कम्युनिटी। देन प्रधानमंत्री उज्जवला
योजना इसके भी जो बेनिफिशरीज आप देखेंगे तो बहुत सारे लोग जो बिलो पावर्टी लाइन थे और पुअर थे वो इसका बेनिफिट उठा पाए। देन
नेशनल शेड्यूल्ड कास्ट फाइनेंस एंड डेवलपमेंट प्रोग्राम प्रोवाइड लोंस स्किल ट्रेनिंग एंड फाइनेंसियल सपोर्ट फॉर
शेड्यूल्ड कास्ट एंटरप्रेन्योर। राइट? देन ट्राइबल वेलफेयर स्कीम स्पेशल डेवलपमेंट प्रोग्राम फॉर एसटी कम्युनिटीज़ सच एज
इकलव्य मॉडल रेजिडेंशियल स्कूल एंड ट्राइबल डेवलपमेंट फंड्स। और हम एकलव्या मॉडल रेजिडेंशियल स्कूल के बारे में पढ़कर
आए थे नक्सलिज्म के अंदर कि वहां पर जो है गवर्नमेंट और सीआरपीएफ की हेल्प से हमने ये स्कूल्स को चलाया। जहां पर एक तरीके का
ये बोर्डिंग स्कूल है जहां पर बच्चों को सारी फैसिलिटीज मिलती है। राइट? और इससे क्या होता है? एजुकेशन डेवलपमेंट होगा
वहां पर। तो चलिए अब हम स्टार्ट करते हैं एलपीजी रिफॉर्म्स। राइट? लिबरलाइजेशन, प्राइवेटाइजेशन एंड ग्लोबलाइजेशन
रिफॉर्म्स इन इंडिया। 1991 में जो है इकोनॉमिक रिफॉर्म्स लाए गए थे। राइट? सो इंडिया अडॉप्टेड दी एलपीजी रिफॉर्म्स इन
1991 ड्यूरिंग अ सीवियर इकोनॉमिक क्राइसिस। तो देखिए 1991 के अंदर जो है इंडिया इज फेसिंग अ इकोनमिक क्राइसिस।
जहां पर इंडिया के पास जो फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व था वो फॉल इन टू अबाउट 1 बिलियन तक। यानी कि हमारे पास सिर्फ 1 बिलियन का
ही यानी कि हमारे पास सिर्फ 1 बिलियन डॉलर्स का ही फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व बचा था। यह फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व होता है।
राइट? यह यूज़ होता है। जब भी आप कोई भी चीज़ इंपोर्ट करते हैं किसी और कंट्री से, तो आपको क्या है? डॉलर में पेमेंट करनी
पड़ती है। राइट? तो ये जो डॉलर था हमारे पास कितना सिर्फ $1 बिलियन डॉलर का ही बचा था। अगर हमारे पास इतना कम फॉरेन एक्सचेंज
रिजर्व होगा हम जो एनर्जी इंपोर्ट करते थे ऑयल पेट्रोलियम कोल एलपीजी एलएजी वो हम कैसे इंपोर्ट करते तो हमारी जितनी भी
इंडस्ट्रीज थी वो क्या हो जाती है शट डाउन हो जाती तो इसलिए जो इंडिया है वो सीवियर इकोनमिक क्राइसिस फेस कर रहा था 1991 में
तो अब इस क्राइसिस से बाहर निकलने के लिए जो है उस टाइम की गवर्नमेंट जहां पर प्राइम मिनिस्टर कौन थे पी वी नरसिम्हा
राव एंड फाइनेंस मिनिस्टर थे डॉ मनमोहन सिंह इंट्रोड्यूस दी एलपीजी रिफॉर्म तो देखिए इस एलपीजी रिफॉर्म का मेन एम था ओपन
इंडियन इकॉनमी इंक्रीज कंपटीशन एंड अट्रैक्ट फॉरेन इन्वेस्टमेंट एंड इंप्रूव एफिशिएंसी। जैसे ही हमारी इकॉनमी जो है
ओपन होगी तो जो फॉरेन की कंपनीज़ है वो इंडिया के अंदर आएंगी बाहर से। राइट? और इससे क्या होगा? कंपटीशन इनक्रीस होगा। और
जब फॉरेन की कंपनीज़ इंडिया के अंदर आएंगी तो वो क्या है? फॉरेन इन्वेस्टमेंट करेगी। यहां पर प्लांट सेटअप करेगी। तो यहां पर
हमें जो फॉरेन का इन्वेस्टमेंट आ रहा है यानी कि हमारे पास डॉलर आ रहा है इंडिया के अंदर। तो इससे क्या है? हमारे फॉरेन
एक्सचेंज रिजर्व है जो बढ़ेंगे और ओवरऑल एफिशिएंसी जो है वो इंप्रूव होगी। तो चलिए अब हम देखते हैं इसके अंदर जो लिबरलाइज़ेशन
था वह क्या था। राइट? तो देखिए लिबरलाइज़ेशन मींस रिमूविंग गवर्नमेंट रिस्ट्रिक्शन एंड रेगुलेशन फ़ द इकॉनमी टू
अलव फ्री बिज़नेस ऑपरेशंस। एग्जांपल देखिए रिडक्शन ऑफ इंडस्ट्रियल लाइसेंसिनिंग फ्यूअर गवर्नमेंट कंट्रोल्स ऑन कंपनीज़। तो
देखिए पहले क्या था? जो हमारी गवर्नमेंट है वो लाइसेंस राज चलाती थी। गवर्नमेंट कंपनीज़ को लाइसेंस देती थी। गवर्नमेंट ही
कंपनीज़ को बताती थी कि आप क्या प्रोड्यूस करेंगे, आप कितना आउटपुट प्रोड्यूस करेंगे, कहां करेंगे। राइट? तो बहुत
ज्यादा जो है कंट्रोल था गवर्नमेंट का। तो इसलिए जो ये इंडस्ट्रियल लाइसेंसिंग और ये जो लाइसेंस राज चल रहा है कि गवर्नमेंट
लाइसेंस देगी कि क्या करना है वो सारी चीजें जो है यहां पर ख वो सारी चीजें यहां पर क्या है खत्म करी गई और यहां पर जो
गवर्नमेंट का कंट्रोल था वो बहुत ही कम कर दिया गया क्योंकि यहां पर गवर्नमेंट क्या है बताती थी आपको कितना आउटपुट प्रोड्यूस
करना है और क्या करना है तो अब ये सारी चीजें जो है यहां पर खत्म होगी तो अगर आपको डेफिनेशन देनी है लिबरलाइजेशन की तो
अब आप बेसिक बता दीजिए कि रिडक्शन ऑफ इंडस्ट्रियल लाइसेंसिनिंग एंड फीवर गवर्नमेंट कंट्रोल ऑन कंपनीज़ इज़ कॉल्ड
लिबरलाइजेशन। तो प्राइवेटाइजेशन देख लेते हैं। प्राइवेटाइजेशन मींस रिड्यूसिंग गवर्नमेंट ओनरशिप इन इंडस्ट्रीज एंड
अलाउंग प्राइवेट कंपनीज़ टू रन बिज़नेस। तो देखिए बहुत सिंपल डेफिनेशन है कि अलव करना प्राइवेट कंपनीज़ को कि आप अपने बिजनेस को
रन कर सकते हैं इंडिया के अंदर और जो हमारी गवर्नमेंट कंपनीज़ है उससे ओनरशिप को कम करना। अभी हम बहुत सारे एग्जांपल आगे
पढ़ने वाले हैं कि कैसे प्राइवेटाइजेशन हुआ। देखिए, सेलिंग शेयर्स ऑफ पब्लिक सेक्टर कंपनीज़ टू प्राइवेट इन्वेस्टर्स।
हम इसके भी एग्जांपल्स देखेंगे। चलिए ग्लोबलाइजेशन को देख लेते हैं। ग्लोबलाइजेशन मींस इंटीग्रेटिंग दी इंडियन
इकॉनमी विद दी ग्लोबल इकॉनमी थ्रू ट्रेड इन्वेस्टमेंट एंड टेक्नोलॉजी एक्सचेंज अलाउंग फॉरेन कंपनीज़ टू इन्वेस्ट एंड
ऑपरेट इन इंडिया। तो देखिए ग्लोबलाइजेशन का बेसिक सा मतलब यही है कि ज्यादा से ज्यादा कंट्री के साथ हम ट्रेड करें,
इन्वेस्टमेंट करें और टेक्नोलॉजी का एक्सचेंज करें। इसे ग्लोबलाइजेशन कहते हैं बस। और ग्लोबलाइजेशन के अंदर क्या है? जो
कंट्री के नेटिव्स हैं, वो दूसरी कंट्रीज में जाते हैं, वहां बिज़नेस करते हैं और वहां के लोग इधर आते हैं। तो ये भी
ग्लोबलाइजेशन का ही पार्ट है। राइट? तो चलिए अब डेप्थ में पढ़ते हैं। देखिए लिबरलाइजेशन इन इंडिया व्हाट हैपेंड अंडर
दी लिबरलाइजेशन? तो इंडस्ट्रियल [नाक से की जाने वाली आवाज़] लाइसेंसिंग जो था इंडस्ट्रियल राज था वो पूरी तरीके
से अबॉलिश कर दिया गया। अर्लियर कंपनीज़ नीडेड गवर्नमेंट परमिशन टू स्टार्ट इंडस्ट्रीज बट आफ्टर 1991 मोर सेक्टर वर
ओपन। अब आपको गवर्नमेंट की परमिशन इस तरीके से नहीं चाहिए थी। देन रिडक्शन इन इंपोर्ट ड्यूटीज़ टेरिफ्स वर रिड्यूस टू
प्रमोट इंटरनेशनल। तो देखिए पहले जो हमारी गवर्नमेंट थी राइट वो हमारी इंडियन कंपनीज़ को बचाने के लिए क्या करती थी? बहुत
ज्यादा टेरिफ लगाती थी। किस पर लगाती थी टेरिफ जो फॉरेन कंपनीज़ हैं उन पे बहुत ज्यादा टेरिफ लगाती थी। इससे क्या होता
था? वो कंपनीज़ इंडिया के अंदर नहीं आती थी। और जो मोनोपोली थी वो हमारी इंडियन कंपनीज़ की थी। बट इससे हो क्या रहा था कि
जो इंडियन कंपनीज़ है वो बहुत ज्यादा लॉस देख रही थी और आउटपुट था नहीं। तो इसलिए जो यहां पर टेरिफ था ये पूरी तरीके से कम
किया गया और जो ट्रेड है प्रमोट इंटरनेशनल ट्रेड बढ़ाया गया। देन ऑटोमोबाइल सेक्टर बो कंपनीज़ लाइक Maruti Suzuki। तो आपने
देखा है कि जो 1990 में क्या आई थी यहां पर? Maruti 800 कार आई थी। आज देखेंगे तो Maruti Suzuki का प्लांट जो है इंडिया के
अंदर बहुत बड़ा प्लांट लगा रखा है मैन्युफैक्चरिंग का। यहां से गाड़ी मेड इन इंडिया जो मैन्युफैक्चर होकर बहुत सारी
जगह पर जाती है जापान में, ताइवान में और भी अदर कंट्रीज में। सिमिलरली Hyundai ने भी यहां पर अपना प्लांट लगा रखा है। और
यहां पर अगर आप देखेंगे तो थाउजेंड्स एंड लैक्स ऑफ कार्स इंडिया के अंदर बनती हैं। ठीक है? देन अगर हम बात करें एक्सपेंडेड
ड्यू टू रिलैक्स रेगुलेशन। तो ये कंपनीज़ इंडिया के अंदर इसलिए आई क्योंकि यहां पर टेररिफ जो है बहुत कम कर दिया गया था।
चलिए फाइनेंसियल सेक्टर रिफॉर्म्स देखते हैं हम। बैंकिंग सेक्टर मॉडर्नाइजेशन, HDFC, Yes Bank, ICIC, Axis, Indus Land
फॉर्मेशन। तो ये सारे बैंक भी जो है 1990 के बाद बनाए गए। राइट? तो जब भी आप कभी फाइनेंसियल कोई टॉपिक दे रहे हैं या फिर
बैंकिंग से रिलेटेड तो आप बता सकते हैं कि आफ्टर दी 1990 इन सारे बैंक्स का जो है फॉर्मेशन हुआ। अगर आप आज इनका रेवेन्यू
देखेंगे तो यह 70 टू 80,000 करोड़ का रेवेन्यू कमाते हैं। आप देखेंगे ये सक्सेसफुल रहा पूरी तरीके से फाइनेंसियल
सेक्टर रिफॉर्म। देन टैक्स रिफॉर्म सिंपलीफिकेशन ऑफ़ टैक्स सिस्टम। देन कंपटीशन इंक्रीज़्ड। मोर फॉरेन कंपनीज़
एंटर्ड मार्केट। तो आपने देखा होगा हिंदुस्तान लवर राइट तो काफी सारे प्रोडक्ट्स जो हैं हिंदुस्तान लवर बनाता
है। nstle आपने सुना होगा मैगी जो आती है वो nstle की कॉफी हो गई देन चॉकलेट्स pepsico walmart microsoft Google तो ये
सारी कंपनीज़ जो है इंडिया के अंदर आई अंडर दिस लिबरलाइजेशन ठीक है तो चलिए अब हम आगे देखते हैं प्राइवेटाइजेशन के बारे में
राइट तो सेक्टर्स वेयर प्राइवेटाइजेशन अकरर्ड सिविल एिएशन में तो सिविल एिएशन में देखिए इंडिगो आया स्पाइसेट आया और
पहले क्या था एयर इंडिया था तो इससे क्या हुआ इंडिगो और spice जेट की एंट्री हुई हमारी एिएशन मार्केट और आप देख सकते हैं
आज इंडिगो जो है हमारी इंडिया की सबसे प्रॉमिनेंट और सबसे ज्यादा सिविल एिएशन का शेयर जो है वो इंडिगो का ही है। देन
टेलीकम्युनिकेशन देन एंट्री ऑफ़ प्राइवेट प्लेयर लाइक Airtel आया, Vodafone, Reliance Jio आया। राइट? तो इससे क्या है?
कंपटीशन इंक्रीस हुआ। हमें अच्छी सर्विज मिली। देन Tata एडवांस सिस्टम, Mahindra डिफेंस सिस्टम, लार्सन एंड Turbo डिफेंस
एंड adानी डिफेंस। तो ये सारी कंपनीज़ भी जो है 1990 के बाद हमारे इंडिया के अंदर फॉर्मेशन हुआ। देन बैंकिंग एंड फाइनेंस पे
हमने बात करी और एनर्जी सेक्टर के अंदर भी जो है प्राइवेट कंपनीज़ लाइक Reliance एनर्जी और adानी पावर आया। तो हमने काफी
सारे एग्जांपल देखे। जैसे ही 1990 के बाद एलपीजी रिफॉर्म आया और प्राइवेटाइजेशन हुआ तो प्राइवेट कंपनीज़ की एंट्री हुई। तो
चलिए अब देखते हैं जो गवर्नमेंट कंपनी थी जो लॉस में चल रही थी वो भी हमने क्या करी? सेल कर दिए स्टेक्स किसको? प्राइवेट
कंपनीज़ को। फॉर एग्जांपल अगर आप देखेंगे Belco फॉर एग्जांपल आप देखेंगे Belco Bharat एलुमिनियम कंपनी सोल्ड टू Vedanता
ग्रुप इन 20001 देन आप Air इंडिया का एग्जांपल देंगे तो Air India जो है राइट वोट इन 2022 बहुत लेटर हमने जो है किसको
Tata को ही सेल कर दिया था। देन अगर हम BSNL का एग्जांपल ले विदेश संचार निगम लिमिटेड तो ये भी जो है Tata को हमने 2002
में सेल कर दी जो कि बाद में रिब्रांडेड हो के Tata कम्युनिकेशन सिस्टम बना। देन हिंदुस्तान जिंक देखे तो वो सोल्ड कर दिया
गया Vedता को। जरूर आप इन गवर्नमेंट कंपनीज़ का एग्जांपल दे सकते हैं कि ये सारी कंपनीज़ लॉस में थी और हमने प्राइवेट
कंपनीज़ को बेच दी और बाद में वो प्रॉफिट में आई। देन आउटकम ऑफ़ प्राइवेटाइजेशन हुआ क्या? इंप्रूव्ड एफिशिएंसी एंड
प्रोडक्टिविटी, बेटर सर्विज हुई एंड रिड्यूस्ड बर्डन और गवर्नमेंट फाइनेंससेस। कि अगर आपको हर दिन करोड़ ऑफ रुपीज़ लॉस हो
रहा है तो जो हमारा बजट है वह सिर्फ लॉस को कंपनसेशन में चला जाएगा। इसलिए जो है बर्डन जो था गवर्नमेंट में वह पूरी तरीके
से खत्म। टेलीकॉम सेक्टर प्राइसेस ड्रॉप ड्रास्टिकली आफ्टर दी प्राइवेट एंट्री। आपने देखा होगा जैसे ही प्राइवेट कंपनीज़
आई तो वहां पर टेलीकॉम सेक्टर के जो प्राइसेस थे वो डिक्रीज हुए। देन इसमें आप एग्जांपल देख सकते हैं एचएमटी। तो पहले
क्या होता था? एचएमटी वॉचेस बनाती थी। इंडिया के अंदर काफी सारी अच्छी एचएमटी की वॉचेस आती थी। बट ये कंपनी लॉस में थी
इसलिए इसको क्या है? बंद कर दिया। तो देखिए गवर्नमेंट ने यहां पर एक थ्री टियर पॉलिसी यूज करी। जो भी कंपनीज़ बहुत ज्यादा
सीवियर लॉस में है। फॉर एग्जांपल एचएमटी वॉचेस उनको बंद कर दिया गया। जो कि कुछ लॉस में है उन्हें क्या है? प्राइवेट
पार्टनर्स को सेल कर दिया गया। फॉर एग्जांपल BCO, BSNL, Air इंडिया, Hindstan Zinc राइट और जो कंपनीज़ जो है जिनको
गवर्नमेंट थोड़ा कंपनसेशन देके थोड़ा पैकेजेस देके इंप्रूव कर सकती है वो आज भी गवर्नमेंट के पास ही है। फॉर एग्जांपल आप
BSNL का ले सकते हैं राइवल का। देन आप ओएनgसी लें या फिर और भी जितनी पब्लिक सेक्टर अंडरटेिंग है महारत्न कंपनीज़ ऑफ
इंडियन है वो सारी गवर्नमेंट ने अपने पास ही रखी और उनको जो है और फंडिंग दी और वो आज जो है प्रॉफिट में तो ये तीन टियर
सिस्टम जो है गवर्नमेंट ने अपनाया देन आउटकम ऑफ़ प्राइवेटाइजेशन बता दिया था मैंने आगे चलते हैं हैपन अंडर दी
ग्लोबलाइजेशन एफडीआई इंडिया के अंदर आई फॉरेन कंपनीज़ ने जो है एंटर करा इंडिया के अंदर टेक्नोलॉजी ट्रांसफर हुआ यहां पर
एक्सपोर्ट ओरिएंटेड इंडस्ट्रीज ग्री हुई फॉर एग्जांपल Cocola इंडिया के अंदर आया Pepsi Samsung LG, Toyota, Hyundai,
Amazon, Google, Microsoft तो ये सारी कंपनीज़ इंडिया के अंदर आई। इन्होंने फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट को कंपनीज़ है फॉरेन
डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट इंडिया के अंदर लाई और साथ में जो है इन्होंने काफी सारी जॉब्स भी क्रिएट करी। तो देखिए
ग्लोबलाइजेशन की वजह से जो है दो चीजें हुई। एक हुआ ब्रेन रेन एंड दूसरा रेमिटेंसेस का। तो आपको पता है इंडिया जो
है पूरे वर्ल्ड के अंदर सबसे ज्यादा रेमिटेंस जो है रिसीव करता है। फॉर एग्जांपल आप देखेंगे 2026 की अभी रिपोर्ट
आई है। राइट? तो हमने 137 बिलियन डॉलर्स जो है इस बार जो है हमने रिसीव करा है और 19 मिलियन स्ट्रांग डायस्पोरा यानी कि 1.9
करोड़ पीपल जो है बाहर हैं इंडिया के। तो हमने ब्रेन ड्रेन चैप्टर में पढ़ा था कि जब लोग बेटर अपोरर्चुनिटीज़ के लिए,
टेक्नोलॉजी के लिए, जॉब्स के लिए फॉरेन कंट्रीज में जाते हैं, तो हम इसे ब्रेन ड्रेन कहते थे। तो देखिए तो ग्लोबलाइजेशन
में क्या था कि जो फॉरेन कंपनीज़ हैं वो इंडिया के अंदर आ सकती हैं। और अगर फॉरेन की कंपनीज़ इंडिया में आएंगी तो जो लोग हैं
वो भी फॉरेन जाएंगे उन कंपनीज़ में काम करने के लिए। तो इसलिए जो है यहां पर ग्लोबलाइज़ेशन की वजह से ब्रेन ड्रेन हुआ
और मेनी स्किल्ड इंडियन माइग्रेटेड अब्रॉड आफ्टर द ग्लोबलाइज़ेशन। इंडियन प्रोफेशनल वर्किंग इन यूएसए, यूके, कनाडा गल्फ
कंट्रीज। और आपको पता है गल्फ कंट्रीज में राइट नाउ 8 मिलियन लोग जो है काम कर रहे हैं। राइट? तो अगर आपने देखा होगा जो अभी
हमारी एनर्जी क्राइसिस चल रही है और यह वॉर थी इजराइल, ईरान और यूएसए वाली तो इसकी वजह से जो 8 मिलियन लोग जो है उनकी
जॉब को खतरा है। ठीक है? इंडिया इज़ नाउ अमंग द टॉप फिफ्थ लार्जेस्ट इकॉनमी। बट अगर आप राइट नाउ देखेंगे तो इंडिया जो है
सिक्स्थ लार्जेस्ट इकॉनमी हो गया। बिकॉज़ ऑफ़ दिस इकोनमिक क्राइसिस जो अभी चल रहा है और जो वॉारर्स चल रही है उसकी वजह से वेरी
सून इंडिया जो है फोर्थ लार्जेस्ट दोबारा बन जाएगा। देन हायर इकोनमिक ग्रोथ हुआ है। इंडियास जीडीपी ग्रोथ इंक्रीज़
सिग्निफिकेंटली आफ्टर 1991। आप ये देख सकते हैं ग्राफ है ना इससे हमें पता लगता है कि कैसे जो है ग्रोथ हुई है। देन
इंडियास करंट जीडीपी इज़ अबाउट 4.1 टू 4.2 ट्रिलियन नॉमिनल जीडीपी है ये। एंड देन इंडियास जीडीपी ग्रोथ राइट नाउ अगर आप
देखेंगे 2025 टू 26 कितनी है? 7.4% है। तो ये जरूर याद रखना है कि इंडिया की जो जीडीपी ग्रोथ है वो 7.4% है। राइट? देन
एडवांटेजेस ऑफ़ एलपीजी रिफॉर्म्स की अगर हम बात करें राइज़ ऑफ़ आईटी सेक्टर हमारा बहुत अच्छी तरीके से ग्रो हुआ। चाहे वो TCS,
विp्रो, Infosys ये सारी कंपनीज़ जो है इंक्रीस हुई। देन फॉरेन कंपनीज़ भी इंडिया के अंदर आई। 10 से ज्यादा जॉब जो है जनरेट
हुई। एफडीआई मिला। देन मोर एंप्लॉयमेंट अपोरर्चुनिटीज एंड टेक्नोलॉजिकल एडवांसमेंट। वही बात हुई हमें टेक्नोलॉजी
ट्रांसफर हुआ। देन अगर हम चैलेंजेस की बात करें तो देखिए जो स्मॉल इंडस्ट्रीज थी राइट उन्होंने बहुत ज्यादा कंपटीशन को फेस
करा। जब जब बड़ी कंपनीज़ लाइक nसle देन unilver और अगर हम ऑटोमोबाइल सेक्टर की बात करें तो Honda, Hyundai, Suzuki तो ये
सारी जब कंपनीज़ इंडिया के अंदर आएंगी तो क्या होगा? जो हमारी नेटिव कंपनीज़ हैं जो ग्रो हो रही थी, बहुत छोटी थी उन्होंने जो
है टफ कंपटीशन को फेस करा और काफी सारी कंपनीज़ जो है बंद भी हुई। देन जॉब्स इनसिक्योरिटी हुई, कॉन्ट्रैक्ट बेस्ड
जॉब्स इनक्रीज हुई। तो देखिए जो ये एलपीजी रिफॉर्म्स आया राइट उसके उसके साथ क्या हुआ कि हमारी जो कॉन्ट्रैक्ट बेस्ड जॉब्स
पहले क्या होता था सारी गवर्नमेंट जॉब्स हुआ करती थी बट एलपीजी के आने की वजह से जो है जो जॉब्स जो है कॉन्ट्रैक्ट बेस पे
होना स्टार्ट हो गई देन टेक्नोलॉजिकल एडवांसमेंट के लिए जो है हम डिपेंड थे ग्लोबल मार्केट पे भी आज भी देखेंगे तो
असेंबल्ड इन इंडिया सारी चीजें इंडिया के अंदर असेंबल होती है बट व्हेन इट कम्स टू टेक्नोलॉजी हमारे पास टेक्नोलॉजी नहीं है
और हम 0.7% के आसपास जो है हम रिसर्च एंड डेवलपमेंट पे खर्च करते हैं तो इसलिए हम जो है ग्लोबल मार्केट पे डिपेंड थे
ग्लोबलाइजेशन यानी इनकम इनकलिटी हुई इसकी वजह से जो बिज़नेसमैन थे वो बहुत ज्यादा रिच हुए और जो हमारे पुअर लोग थे तो उनके
बीच में जो इनकम डिस्पैरिटी थी वो बहुत ज्यादा है और पूरे वर्ल्ड में अगर आप देखेंगे तो इनकम डिस्पेरिटी इंडिया के
अंदर बहुत ज्यादा है। तो चलिए अब हम अपने नेक्स्ट टॉपिक की तरफ चलते हैं जो है इंडियन रेलवे एंड प्राइवेटाइजेशन। ठीक है?
तो देखिए प्राइवेटाइजेशन मींस क्या होता है? अलाउंग प्राइवेट कंपनीज़ टू पार्टिसिपेट इन रेलवे सर्विज
इंफ्रास्ट्रक्चर और ऑपरेशन व्हाइल ओनरशिप रिमेन विद गवर्नमेंट। तो देखिए ओनरशिप जो है रेलवे की वो गवर्नमेंट के पास ही
रहेगी। बट जो सर्विज हैं और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट है और ऑपरेशंस हैं वहां पर जो है आप प्राइवेट की हेल्प
ले सकते हैं। इंडियन रेलवे राइट नाउ 100% ओनड बाय गवर्नमेंट ऑफ इंडिया। ये चीज जरूर याद रखिए। प्राइवेट सेक्टर की अगर हम बात
करें तो पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल्स को यहां पे अपनाया गया है। तो देखिए प्राइवेट कंपनीज़ रन सर्विज लाइक
लाइक कैटरिंग टिकट स्टेशन रिीडेवलपमेंट, वेगन मैन्युफैक्चरिंग एक्सट्रा। ठीक है? तो प्राइवेट कंपनीज़ का काम यहां पर क्या
है? चाहे वो सर्विज हो। तो हमने आईआरसीटीc का एग्जांपल दिया है वो ट्रिपल पी मॉडल पर ही चलती है पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप
पर। राइट? और अगर हम स्टेशन रीडेवलपमेंट की बात करें और या फिर वेगन मैन्युफैक्चरिंग की तो बहुत सारी जो है
हमारी प्राइवेट कंपनीज़ हैं जो ये काम करती हैं। हम आगे इसके एग्जांपल्स देखेंगे। राइट? तो देखिए 1999 के अंदर जो है
आईआरसीटीसी इंडियन रेलवे केटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन को बनाया गया। और यह जो है टिकट को और कैटरिंग को हैंडल करता है।
तो आपको पता है आईआरसीटीसी जो है वो मिनिस्ट्री ऑफ रेलवे के अंडर आती है और यहां पर जो शेयर है ठीक है? कि गवर्नमेंट
का जो शेयर है वो कितना है? 62% के आसपास गवर्नमेंट का शेयर है। और रेस्ट जो है क्योंकि यह स्टॉक मार्केट में लिस्ट है तो
आप खुद इसके शेयर्स खरीद सकते हैं। तो गवर्नमेंट जो है वो पैसा किससे? प्राइवेट पार्टनर से उठाती है। तो हम बोल सकते हैं
40% प्राइवेट और 60% जो है गवर्नमेंट के हाथ में है iआरसीटीc। और आपको पता है iआरसीटीc का प्रॉफिट अराउंड 1300 करोड़ है
एव्री ईयर। तो यानी कि ये जो iआरसीटीc है ये प्रॉफिट में है। राइट? तो इससे आप देख सकते हैं जब पीपीपी मॉडल को यूज करते हैं
आप तो वहां पर प्रॉफिट भी जनरेट होता है। देन 2006 में देखेंगे तो प्राइवेट कंटेनर्स ऑपरेटर्स अलाउड इन फ्रेट सेक्टर।
तो ये जो वैगन मैन्युफैक्चरिंग होती है ये कौन प्राइवेट कंपनीज़ करती है? अभी हम देखेंगे इसके बारे में दैट 2014 ऑनवर्ड्स
जो है पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल इंट्रोड्यूस किया गया स्टेशन रीडवलपमेंट में और बहुत सारे स्टेशंस जो हैं हमने अभी
भी राइट नाउ जो डेवलपमेंट हो रहा है अमृत भारत स्कीम के अंदर वो सारे पीपीवी मॉडल पर हैं। देन 2019 के अंदर बात करें तो हम
प्राइवेट पार्टनरशिप अनाउंस्ड इन पैसेंजर तो तेजस एक्सप्रेस जो है हमारी एक प्राइवेट ट्रेन है। तो ये एग्जांपल आप याद
रख सकते हैं तेजस एक्सप्रेस का। तो चलिए आगे देखते हैं हम। देन मैगन मैन्युफैक्चरिंग की हमने बात करी कि यहां
पर प्राइवेट पार्टिसिपेशन है। आईआरसीटीसी में है। स्टेशन री डेवलपमेंट में है। जो डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर बनाए गए हैं।
ईस्टर्न कॉरिडोर, वेस्टर्न कॉरिडोर, नॉर्थ साउथ कॉरिडोर। तो ये यहां पर भी जो है हमें प्राइवेट पार्टनर्स का जो है
इन्वॉल्वमेंट देखने को मिलेगा। तो अगर हम देखें यहां पर टिकट और टूरिस्ट में तो ऑनलाइन टिकट बुकिंग, टूरिज्म पैकेजेस और
कैटरिंग ये सारे कौन? iआरसीटीc करता है और iआरसीटीc अब देखेंगे तो 62% जो है वो पब्लिक कंपनी है। और अगर आप iआरसीटीc
देखेंगे तो गवर्नमेंट के पास 62% शेयर है और रेस्ट जो है वह पब्लिक कंपनी लिस्टेड इन स्टॉक मार्केट। तो अगर आप प्रॉफिट
देखेंगे तो यह 2024 का प्रॉफिट है। बट अगर आप राइट नाउ आप देखेंगे 2025 टू 26 तो दे हैव मेड 1300 करोड़। तो आप देख सकते हैं
जो ग्राफ है iआरसीटीc का वो ऊपर की तरफ ही जा रहा है। यानी कि हम जो है पीपीपी मॉडल से जो है बहुत ज्यादा बेनिफिट ले रहे हैं।
तो चलिए हमने रीडेवलपमेंट की बात करी थी तो एग्जांपल्स देख लेते हैं। तो रानी कमलावती रेलवे स्टेशन भोपाल जो है डेवलप्ड
अंडर दिस ट्रिपल बी मॉडल एयरपोर्ट लाइक फैसिलिटीज हैं। यहां पर शॉपिंग कॉम्प्लेक्स है और मॉडर्न वेटिंग हॉल। देन
हम बात करें तो प्लान कौन से हैं? न्यू दिल्ली रेलवे स्टेशन, मुंबई सीएसएमटी, अहमदाबाद स्टेशन और गांधीनगर कैपिटल रेलवे
स्टेशन इंक्लूड्स होटल अबव रेलवे स्टेशन डेवलप्ड विद प्राइवेट पार्टनरशिप। वेगन मैन्युफैक्चरिंग की बात करें तो आप
एग्जांपल दे सकते हैं टेक्सको रेल इंजीनियरिंग का चाहे वो जुपिटर Wagगंस का दे सकते हैं। देन अगर हम फ्रेड सेक्टर की
बात करें तो देखिए प्राइवेट ऑपरेटर्स अलाउड टू रन कंटेनर ट्रेंस। देखिए अराउंड 15 टू 20% ऑफ कंटेनर फ्रेड मूवमेंट हैंडल
बाय प्राइवेट ऑपरेटर्स। यहां पर जो adan लॉजिस्टic है, गेटवे रेल फ्रेट है, Hind टर्मिनल्स है, तो यह प्राइवेट कंपनीज़ हैं।
फॉर एग्ज़ांपल अगर आप देखें कोई शिप आता है फॉरेन कंपनी से गुजरात के अंदर मुद्रा पोर्ट पे, तो वहां से जो है तो वहां से जो
है एक फ्रेट कॉरिडोर चलता है नॉर्थ की तरफ। तो, इससे क्या होएगा जो पोर्ट पर जितना भी हमारा गुड्स आया है वो सारा लोड
होता है किस में? कंटेनर्स के अंदर और वाया ट्रेन जो है राजस्थान, देन हरियाणा, पंजाब की तरफ जाता है। इस एग्जांपल से हम
समझ सकते हैं कि कैसे जो है फ्रेट सेक्टर में जो है प्राइवेटाइजेशन है। और आपको पता है सबसे इंटरेस्टिंग फैक्ट क्या है? इस
फ्रेट की वजह से ही जो है इंडियन रेलवे की 65 टू 70% इनकम जनरेट होती है। तो देखिए हमारे पास फेमस क्या है? वेस्टर्न
डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर है और ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर है। और इन फ्रेट कॉरिडोर की बनने की वजह से जो है हमारी
स्पीड भी इनक्रीस हुई। 25 कि.मी. पर आर से जो है 70 कि.मी. पर आर हो चुकी है। तो आपको पहले पता होगा कि जो हमारी रेलवे
लाइंस थी उस पर ही पैसेंजर ट्रेन चलती है और उसी पर फ्रेट ट्रेन भी चलती थी। तो इससे होता क्या था कि जो फ्रेट ट्रेंस हैं
उनको रोक दिया जाता था और लाइन जो है किसको दी जाती थी और प्रायोरिटी किसको दी जाती जो पैसेंजर ट्रेन होती है। बट अब
क्या है? डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर बना दिए गए हैं। मतलब यहां पर सिर्फ मालगाड़ी ही चलेगी। तो इसकी वजह से जो स्पीड है वो 70
कि.मी. पर आर तक चली गई है। तो इसमें वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर, ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर, नॉर्थ
साउथ डेडिकेटेड कॉरिडोर हैं हमारे पास। तो ये सारे फ्रेट कॉरिडोर का एग्जांपल और सबसेेंट फैक्ट क्या था कि हमारा जो इंडियन
रेल 65 टू 70% जो इनकम है और प्रॉफिट जो जनरेट होता है वो फ्रेट से ही होता है। यानी कि मालगाड़ी के ऑपरेशन से होता है।
पैसेंजर से नहीं। राइट? देन एडवांटेजेस देख लेते हैं प्राइवेटाइजेशन के। तो इससे क्या होता है? बेटर एफिशिएंसी आती है।
राइट? आईआरसीटीc ऑनलाइन। अब क्या है? आप ईजीली जो है ऑनलाइन बुक कर सकते हैं टिकट्स को। और आपने देखा था आईआरसीटीc
रिफॉर्म्स आए थे। अभी इसके अंदर क्या है? आपको अपना आधार कार्ड जो है लिंक करवाना था किससे? आईआरसीटी से। सारे एग्जांपल आप
देख सकते हैं कि आईआरसीटीc ने जो है रिफॉर्म्स के अंदर आए हैं। ठीक है? देन हमारे पास क्या आता है? रिड्यूस्ड
गवर्नमेंट फाइनेंसियल बर्डन। तो यहां पर स्टेशन रिडवलपमेंट हो, चाहे वो वेगन मैन्युफैक्चरिंग हो, अब जो है गवर्नमेंट
ईजीली टेंडर देकर प्राइवेट कंपनीज़ को दे सकती है और वो बाकी के जो इंपॉर्टेंट ऑपरेशन है गवर्नमेंट उस पर फोकस कर सकती
है। देन देन इनोवेशन एंड टेक्नोलॉजी की अगर हम बात करें तो Tejas एक्सप्रेस यहां पर लाई गई। एयरलाइन स्टाइल कैटरिंग है,
ऑटोमेटिक डोर्स हैं, एंटरटेनमेंट स्क्रीनंस हैं। राइट? तो ये सारे कुछ एग्जांपल्स हैं। ठीक है? तो यहां पर एक
एडवांटेज देखते हैं। तो पहले क्या होता था? आपको रेलवे स्टेशन जाकर टिकट खरीदनी पड़ती या फिर जो रेलवे स्टेशन के आसपास जो
है काफी सारे आपने देखा होगा साइबर कैफे वगैरह होते थे। वहां पर जो मिडिल मैन होते थे वो आपको टिकट निकाल कर देते थे। तो
इसकी वजह से क्या होता था जो जेन्युइन पीपल हैं जेन्युइन यूज़र्स हैं उनको टिकट नहीं मिल पाती थी। अब जो है ऑनलाइन सारा
सिस्टम होने की वजह से जो है ये जो मिडिल मैन है ये पूरी तरीके से रिड्यूस्ड हो चुके हैं। और आधार कार्ड के इंटीग्रेशन की
वजह से भी जो है एक पर्सन जो है अपने आधार कार्ड पे एक पर्टिकुलर सीट्स ही जो है जनरेट कर सकता। यहां पर देखेंगे न्यू
पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम लाया गया। कैन हैंडल अबाउट 1.5 लाख टिकट्स हैं और पहले क्या होता था? सिर्फ 32,000 था। तो मतलब
अब जो है साइट हैक नहीं होएगी। ज्यादा से ज्यादा आप जो है ईज़ली ट्रेन बुक कर सकते हैं। देन सीट सिलेक्शन ऑप्शन भी यहां पर
दिया गया है। पैसेंजर कैन नाउ चूज़ प्रेफर सीट्स व्हाइल बुकिंग। तो पहले क्या होता था? सपोज किसी की ऐज अगर 60 65 इयर्स है,
70 इयर्स है तो उसको क्या है अपपर बर्थ मिल गया है। बट यहां पर क्या है? आप अपनी अकॉर्डिंग जो है सीट सिलेक्शन कर सकते
हैं। देन मल्टीअल इंटरफ़ेस है। वेबसाइट अवेलेबल इन मल्टीपल इंडिया लैंग्वेजज़ हैं। तो इंग्लिश, हिंदी और भी जितनी हमारी
रीजनल लैंग्वेज है वहां पर भी ये साइट को आप एक्सेस कर सकते हैं। देन इंटीग्रेटेड फैसिलिटीज़ फॉर दिव्यांग जन स्टूडेंट एंड
पेशेंट्स के लिए भी यहां पर जो है फैसिलिटीज़ दी गई हैं। कमेटी और रेकमेंडेशन के नाम याद रख सकते हैं। चाहे वो डिब्रॉय
कमेटी हो। तो यहां पर जो है बोला गया कि आप जो है प्राइवेट पार्टनर्स को लेके आइए और इससे क्या है कंपटीशन इंप्रूव होगा।
देन नीति आयोग ने भी बहुत बार बोला है कि हमें जो ज्यादा से ज्यादा प्रमोट पीपीई मॉडल करना है और एनकरेज करना है प्राइवेट
इन्वेस्टमेंट इन इंफ्रास्ट्रक्चर। तो देखिए थ्रेट क्या है अब प्राइवेटाइजेशन के? तो सबसे पहला क्या है? हायर टिकट
प्राइस है। तेजस एक्सप्रेस फेयर्स आर ऑफेन हायर देन रेगुलर ट्रेंस। तो अगर आप प्राइवेट पार्टनर को ऐड करते
[नाक से की जाने वाली आवाज़] हैं ट्रेन के अंदर। ट्रेन के ऑपरेशंस जो पैसेंजर ट्रेन चलती है तो आपको जो टिकट के फेयर्स अभी
मिल रहे हैं वो बहुत ज्यादा देखने को मिलेंगे। क्योंकि प्राइवेट कंपनी को प्रॉफिट बनाना है। यह बहुतेंट पॉइंट है।
देखिए रूरल रूट निगलेक्ट। तो जो प्राइवेट कंपनीज हैं वो वहां पर ही अपनी ट्रेन सर्विज देना चाहेगी जहां पर उन्हें
प्रॉफिट मिलेगा जैसे कि दिल्ली, मुंबई या दिल्ली, लखनऊ जो मेट्रोपॉलिन सिटीज हैं और जो हमारे छोटे गांव है, विलेजेस हैं उनको
कनेक्ट नहीं करेगी। जो हमारे छोटे गांव और विलेजेस हैं तो वहां पर कैसे डेवलपमेंट होगी? इसलिए जो हमारा इंडियन रेलवे है जब
गवर्नमेंट मॉडल पर काम करता है तो देखा है आपने किसान ट्रेन चलती है, कुछ पैसेंजर ट्रेन चलती हैं जो कि हर एक छोटे विलेज या
रेलवे स्टेशन पर रुकती है। तो इससे हम बता सकते हैं कि यहां पर रूरल रूट जो है नेगलेक्ट होगा। देन प्रॉफिट ओवर पब्लिक
सर्विज तो ये बता सकते हैं कि रेलवे जो है वो सोशल सर्विज देती है। राइट? स्टूडेंट कंसेशन सीनियर सिटीजन को डिस्काउंट मिलना
हो चाहे वो बट प्राइवेट कंपनीज़ ये सारी चीजों पर ध्यान नहीं देगी। जॉब सिक्योरिटी की बात करें तो इंडियन रेलवे एंप्लॉयज़ 1.2
मिलियन पीपल 10 लाख लोग यहां पर काम कर रहे हैं जो गवर्नमेंट जॉब में हैं। और जैसे ही प्राइवेटाइजेशन होगा तो वहां पर
कॉन्ट्रैक्ट बेस एंप्लॉयमेंट होगा और जो परमानेंट जॉब्स मिलती हैं वो नहीं मिलेंगी। राइट? अगर हम कंक्लूजन देखें तो
प्राइवेटाइजेशन इन इंडियन रेलवे इज़ पार्शियल राइट नाउ। नहीं है पूरी तरीके से। सिर्फ थोड़ा सा है। नॉट कंप्लीट बोथ
इज नीडेड एट डिफरेंट स्टेजेस। बहुत अच्छी बात है। नाउ प्राइवेट सेक्टर मेनली पार्टिसिपेट इन
टूरिज्म एंड टिकटिंग। तो हम यह पढ़कर आए हैं iआरसीटीसी का एग्जांपल हमने देखा था कि 1300 करोड़ का प्रॉफिट जो है वह हर साल
जनरेट करते हैं। देन स्टेशन रीडेडवलपमेंट में हमने देखा रानी कमलावती हो, गांधीनगर सेंट्रल हो, मुंबई, अहमदाबाद और भी न्यू
दिल्ली और ये सारी लिस्ट आप देख सकते हैं। अमृत भारत स्टेशंस जो है रीडेडप हो रहे हैं। ये लिस्ट है। देन फ्रेट लॉजिस्टिक्स
में हमने देखा कि जो फ्रेट है तो हमने फ्रेट लॉजिस्टिक्स में देखा कि जो इंडियन रेलवे की इनकम है अराउंड 65 टू 70% वो
फ्रेट से ही आती है। और Wagon मैन्युफैक्चरिंग में हमने एग्ज़ांपल देखे थे टेक्स मेको रेल इंजीनियरिंग का, जुपिटर
Wagen का यह मैन्युफैक्चर करते हैं और यह प्राइवेट कंपनीज़ हैं। वेयर ऐज़ गवर्नमेंट जो है कंटिन्यू करती है कंट्रोल कोर
ऑपरेशन सच ऐज़ रेलवे ट्रैक सिग्नलिंग, सेफ्टी ट्रेन ऑपरेशन। सो, दैट वाज़ ऑल अबाउट दी इंडियन रेलवे। राइट? तो प्लीज
इसे रिवाइज़ करना। और आई थिंक चलिए, फ्री बीस को पढ़ लेते हैं क्योंकि फ्री बीज़ का जो है जीडी का टॉपिक आता है और लेक्चर में
भी यह टॉपिक आ रखा है। तो, हम जीडी का टॉपिक देख लेते हैं पहले। तो इसकी लीड्स मेरे पास नहीं है। तो हम
जीडी का टॉपिक देख लेते हैं और उससे रिलेटेड हम पढ़ लेते हैं। तो हम ईजीली जो जीडी की डिफरेंट लीड्स भी होंगी हम उस पर
पार्टिसिपेट कर सकते हैं। सो हाउ द कल्चर ऑफ़ फ्रीबीज़ इज़ डैमेजिंग इंडियास इकॉनमी एनकरेजिंग डिपेंडेंसी एंड बिकमिंग मिनेस
टू नेशंस ग्रोथ। तो फ्रीबीज़ कैसे इंडिया की इकॉनमी को डैमेज कर रही है? तो यह टॉपिक था नोट करके लाया। उसको लीड्स यहां
पर याद नहीं रही थी। ठीक है? तो इसलिए जो सिर्फ हमारे पास टॉपिक है। बट इस टॉपिक से ही हम सब कुछ इनफ कर सकते हैं।
तो चलिए हम एग्जांपल पर ज्यादा फोकस करेंगे क्योंकि यही हम अपने जीडी और लेक्चर में यूज़ कर सकते हैं। फॉर एग्जांपल
पंजाब की अगर हम बात करेंगे तो 300 यूनिट्स पर मंथ इलेक्ट्रिसिटी फ्री है और यह कॉस्ट करता है ₹0000 करोड़ एव्री ईयर
पहले ऐसा नहीं था बट अब जैसे ही गवर्नमेंट आई ये जो दिल्ली का मॉडल था 300 यूनिट्स फ्री देने वाला वो यहां पर लागू किया।
गवर्नमेंट इज स्पेंडिंग टू मच पंजाब ऑलरेडी हैज़ हैवी डेप्ट अबाउट। देखिए अबाउट 45% ऑफ ईयरली इनकम जो है वो फ्री बीस पे
ही जा रहा है। गवर्नमेंट क्या काफी सारी फैक्ट्रीज रन करती है, ट्रांसपोर्टेशन रन करती है और उससे जो है वो पैसा कमाते हैं।
बट जो वो पैसा है उसका 45% तो सिर्फ फ्री बी में ही जा रहा है। ऑलमोस्ट हाफ ऑफ व्हाट पंजाब अर्न इज़ ऑलरेडी डेप्ट प्रेशर
देन वेस्ट बंगाल का अगर इलेक्शन दे लें तो स्कीम्स गिविंग कैश एंड बेनिफिट लाइक वाउचर्स एंड मनी सपोर्ट। स्टेट ऑलरेडी हैज़
अ डेप्ट। अराउंड 40% ऑफ़ इयरली इनकम। देन बिहार की अगर हम बात करें तो कैश स्कीम फॉर वुमेन 2000 टू 10,000 टाइप ऑफ़
बेनिफिट्स। बिहार अर्न लेस बट स्पेंड्स मोर। सो इट डिपेंड्स ऑन लोंस। तेलंगाना की अगर हम बात करें तेलंगाना कांग्रेस
गवर्नमेंट प्रोपोज्ड 8000 वाउचर्स फॉर वुमेन ड्यूरिंग इलेक्शंस सच स्कीम इंक्रीस फिस्कल प्रेशर वि स्टेट दैट ऑलरेडी ऑलरेडी
अराउंड 40% ऑफ इट्स इनकम 2026 का एस्टीमेट देन अगर हम बात करें बोरोइंग इंपैक्ट दिस गवर्नमेंट स्पेंड देखिए देखिए गवर्नमेंट
स्पेंड मोर ऑन फ्री बीस देन दे अर्न सो दे बोरो मनी बाय इशुइंग गवर्नमेंट बोंड्स एंड टेकिंग लोंस
देन अगर हम अनइंप्लॉयमेंट सपोर्ट स्कीम की बात करें तो यहां पर बेरोजगारी भत्ता तो बेरोजगारी भत्ता जो है स्टेट लाइक
राजस्थान, हरियाणा और यूपी में दिया जाता है फॉर एजुकेटेड अनइंप्लॉयड यूथ अराउंड 1000 टू 4000। तो यहां पर जो है इससे होता
क्या है देखिए तो इससे होता क्या है देखिए कि जो हमारा यूथ है वो इससे लेज़ बनेगा। तो यह भी इस पे भी बहुत सारी डिबेट और
आर्टिकल लिखे गए हैं कि कैसे फ्री बीस जो है वो लोगों को लेज़ बनाती है। राइट? तो वो भी आप पॉइंट रख सकते हैं। देन ओवर यूज़ ऑफ
रिसोर्सेज फ्री 300 यूनिट्स ऑफ इलेक्ट्रिसिटी इवन टू दोज़ हु डोंट नीड इट रिजल्ट हायर कंजमशन मोर पावर डिमांड एंड
स्ट्रेन ऑन रिसोर्सेज एंड हायर इलेक्ट्रिसिटी कॉस्ट फॉर दी स्टेट रिड्यूस्ड वर्क इंसेंटिव एग्जांपल
अनइंप्लॉयमेंट अलाउंस बेरोजगारी भत्ता जो है बेसिक एक्सपेंसेस आर कवर्ड विदाउट वर्किंग सम पीपल में डिले जॉब सर्च देखिए
अब जब आपको नीड है राइट जब आपके पास बिल्कुल पैसे नहीं है तो आप जॉब को जरूर सर्च करेंगे बट आपके पास अगर 4000 आ रहे
हैं तो आपका बेसिक खर्चा निकल रहा तो क्यों कोई इंसान जॉब को सर्च करेगा? देन डिपेंडेंसी कल्चर पीपल स्टार्ट रिलाइंग ऑन
गवर्नमेंट बेनिफिट इंस्टेड ऑफ़ बिल्डिंग स्किल्स और अर्निंग इंडिपेंडेंटली। देन मिस एलोकेशन ऑफ़ बेनिफिट्स फ्री बीज़ ऑफन गो
टू एवरीवन नॉट जस्ट दे नीड ही रिजल्ट वेस्टेज ऑफ़ पब्लिक मनी। फॉर एग्जांपल अगर यहां 300 यूनिट्स है। अगर हम उनको देते
हैं जिनके पास बीपीएल कार्ड है या फिर जो अफोर्ड नहीं कर सकते। बट ये यहां पर सबको मिल रहा है। तो इससे हो क्या रहा है?
वेस्टेज ऑफ़ पब्लिक मनी हो रहा है। तो दिस वाज़ ऑल अबाउट दी फ्रीबीस। ओके नाउ लेट्स स्टार्ट [संगीत] द डे 10
राइट सो हम डे 10 के अंदर पढ़ने वाले हैं ऑर्गेनाइजेशंस डिफरेंट एंड अलायंसेस राइट सो सबसे पहले
हम पढ़ेंगे यूनाइटेड नेशंस देन आईक आईक [संगीत] कॉरिडोर राइट देन हम पढ़ेंगे सार्क देन हम
पढ़ेंगे सार्क साउथ एशियन एसोसिएशन फॉर रीजनल कॉरपोरेशन एंड देन आशियान एसोसिएशन ऑफ़ साउथ ईस्ट एशियन नेशन G20 G7 क्वाड
राइट [संगीत] एंड देन नाटो एट द एंड वी विल स्टडी दी सीपक ठीक है और इसके साथ हम कुछ जीडी के टॉपिक्स को भी डिस्कस करेंगे।
तो [संगीत] चलिए स्टार्ट करते हैं यूनाइटेड नेशंस। राइट? सो यूनाइटेड नेशन इस्टैब्लिश्ड ऑन 24th अक्टूबर 1945 आफ्टर
दी वर्ल्ड वॉर टू। तो बस इस चीज पर एफेसिस करना है कि यह वर्ल्ड वॉर टू के बाद स्टार्ट हुआ था और इसका जो मेन पर्पस था,
इसे क्यों बनाया गया था? तो मेन पर्पस इसका था कि अब जो आगे कोई भी वर्ल्ड वॉर ना हो। राइट? क्योंकि वर्ल्ड वॉर में बहुत
ज्यादा मास डिस्ट्रक्शन हुआ। मिलियंस ऑफ लोग मारे गए। इकॉनमी बहुत ज्यादा सफर हुई और पॉवर्टी बहुत ज्यादा थी। तो ऐसी
सिचुएशन दोबारा ना आए तो हमने यूनाइटेड नेशंस को बनाया। और अगर आप देखेंगे तो टोटल अब सेवन डिकेड्स हो चुके हैं और हमें
कोई भी मेजर वर्ल्ड वॉर अभी तक देखने को नहीं मिली है। राइट? ऑलदो वॉर्स हर जगह चल रही है। बट जैसी वर्ल्ड वॉर वन और वर्ल्ड
वॉर टू थी वैसी हमें वॉर नहीं देखने को मिली है। तो देखिए यूनाइटेड नेशन इज़ एन एन इंटरनेशनल ऑर्गेनाइजेशन क्रिएटेड टू
मेंटेन ग्लोबल पीस सिक्योरिटी कोऑपरेशन एंड डेवलपमेंट अमंग कंट्रीज। और आप सिंपल लैंग्वेज में भी बोल सकते हैं कि यूनाइटेड
नेशन एक ऐसी इंटरनेशनल ऑर्गेनाइजेशन है जो क्रिएट करी गई थी आफ्टर वर्ल्ड वॉर टू टू मेंटेन दी पीस एंड सिक्योरिटी अवॉयड और
अवार्ड दी वर्ल्ड वॉर थ्री तो ये भी चल जाएगा हम इसके ऑर्ग्स को डिस्कस कर लेते हैं राइट तो कैसे याद रखें हम ऑर्गन्स तो
देखिए कभी भी कोई कंट्री बनती है ऐसे याद रख लो ठीक है एक निमोनिक की तरह कि कोई भी अगर कंट्री बनती है तो उसे सिक्योरिटी की
जरूरत होती है और उसको क्या है इकोनॉमिक इकॉनमी की भी जरूरत होती है पैसे की जरूरत होती है तो हमें क्या चाहिए देखो
सिक्योरिटी चाहिए और पैसा चाहिए और क्या चाहिए होता है एक जनरल असेंबली भी होनी चाहिए जहां यहां पर हम डिस्कस कर सके।
जैसे क्या होता है? हर देश की पार्लियामेंट होती है। तो ऐसा समझ लो कि ये जो यूनाइटेड नेशन है इसको एक जनरल
असेंबली चाहिए थी। इसको सिक्योरिटी चाहिए थी। इकॉनमी चाहिए थी। और अगर अब केसेस आए तो उसके लिए क्या है? कोर्ट भी तो होना
चाहिए ना। तो इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस भी है इसका। ठीक है? नाउ अब हमारे पास दो बचते हैं। एक बचता है यूएन सेक्रेटेट और
दूसरा है जस्टिसशिप काउंसिल। तो देखिए यूएन सेक्रेटेट का काम क्या है? इसको ऐसा समझ लो ये एग्जीक्यूटिव है। सो सपोज़ अगर
आप सिक्योरिटी बनाओगे। फिर आप क्या है? आप मनी रिलेटेड चीजें ले आए। आप कोर्ट को ले आए और जनरल असेंबली जहां पर डिस्कशन चल
रहा है। तो इन सबके काम करेगा कौन? तो सेक्रेटेट। राइट? सेक्रेटेट का काम क्या है? देखो इनका काम है ऑर्गेनाइज यूएन
मीटिंग्स, कॉन्फ्रेंस जो डेली टास्क होते हैं यूनाइटेड नेशन के अंदर वो यूएन सेक्रेटेट ही करता है। और इनका काम होता
है इंफॉर्मेशन को कलेक्ट करना ऑल ओवर वर्ल्ड क्या चल रहा है? राइट? उस पे डिस्कस करना। तो यूएन सेक्रेटेट का काम है
ये। और क्या करना है? ये डॉक्यूमेंट्स बनाते हैं, पेपर बनाते हैं। तो जितना भी एग्जीक्यूटिव काम है तो वो यूएन सेक्रेटेट
करते हैं। अब ये ट्रस्टीशिप काउंसिल क्या है? तो देखो यूनाइटेड नेशन का ट्रस्टीशिप काउंसिल क्या करता है? तो देखो जो नई
कंट्रीज होती हैं उनको सिखाना कि गवर्नमेंट कैसे चलानी है, उनकी हेल्प करनी स्कूल बनाने में, हॉस्पिटल्स बनाने में,
इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने में। तो ये सब कौन करता है? ट्रस्टीशिप काउंसिल करती है। फॉर एग्जांपल अगर आप लेंगे तो देखिए टोगो,
नाबीबिया, पलाऊ। तो ये सारे जो देश हैं, है ना? ये छोटे देश थे। तो इनके पास गवर्नमेंट नहीं थी। तो इनको ये सब सिखाने
का काम किसने करा? ट्रस्टशिप काउंसिल। तो आई होप अब आपको ऑर्गन्स अच्छी तरीके से याद होंगे होंगे कि हमें यूएन सिक्योरिटी
काउंसिल चाहिए। देन इकोनॉमिक एंड सोशल काउंसिल है यहां पर। इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस है। जनरल असेंबली डिस्कस करने के
लिए है। टेस्टरशिप काउंसिसिल और एडमिनिस्ट्रेटिव काम करने के लिए यूएन सेक्रेटेट का। चलो एक बार देख लेते हैं
इसको कि यूएन सिक्योरिटी काउंसिल जो है रिस्पांसिबल फॉर इंटरनेशनल पीस एंड सिक्योरिटी। ठीक है? और इसमें क्या है? 15
मेंबर्स हैं। अब यहां पे देखो पांच परमानेंट मेंबर हैं और 10 टेंपरेरी मेंबर हैं। तो ये जो 10 टेंपरेरी मेंबर है ना यह
हर 2 साल के लिए चेंज होते हैं। तो यह जनरल असेंबली डिसाइड करती है कि अब नेक्स्ट 2 साल के लिए कौन जो है 10
टेंपरेरी मेंबर रहेंगे। तो इंडिया भी इसका टेंपरेरी मेंबर था अराउंड 202 के आसपास। अब जो इसके पांच परमानेंट मेंबर हैं इनके
पास क्या होता है? वीटो पावर्स होती है। राइट? तो ये जो है पांच परमानेंट मेंबर इनके पास जो है सबसे ज्यादा पावर है। अब
इनको याद कैसे रखें? तो बस इसके लिए एक टेक्निक होती थी वही रशिया का फेस। राइट? तो रशिया तो है ही एफ फॉर फ्रांस। ए से
अमेरिका, सी से चाइना एंड ई से इंग्लैंड यानी कि यूके मान लो। अगर आप ये रशिया का फेस निमोनिक टेक्निक को देखो तो आप इज़ली
याद रख लोगे। आई होप अब आपको चीजें समझ में आ चुकी होंगी। तो चलिए अब नेक्स्ट पर चलते हैं। देखिए यूएन के पास क्या है?
अपनी एक पीस कीपिंग फोर्स है। यूएन डिप्लॉय पीस कीपिंग फोर्स फ्रॉम मेंबर कंट्रीज टू मेंटेन पीस। और इस जो पीस
कीपिंग फोर्स के अंदर जो है हमने यहां पर देखा था ना कि जो यू यूनाइटेड नेशन है यहां पर 193 मेंबर कंट्रीज हैं। यह 193
मेंबर कंट्रीज में से हर कोई जो है अपनी छोटी-छोटी फोर्सेस भेजता है यहां पर यूएन में सर्व करने के लिए। फॉर एग्जांपल आपने
देखा होगा इंडियन पीस कीपिंग फोर्स है ना? तो यहां पे जाते हैं हम लोग। तो देखिए साउथ सूडान में ये डिप्लॉय थी। यहां पर जो
है इन्होंने सिविलियंस को प्रोटेक्ट करा लेबनान में। देन कांगो में ये सारा काम जो है यूएन पीस कीपिंग फ़ का है। देन हमारे
पास आता है कि यूनिसेफ हेल्प्स चिल्ड्रन विद एजुकेशन एंड वैक्सीन न्यूट्रिशन। तो अगर आप यूनिसेफ की बात करेंगे तो देखिए
इन्होंने पोलियो कैंपेन चलाया था और आपने देखा 2014 में जो इंडिया ने इरेडिकेट कर दिया था पोलियो को। आप देखेंगे सीरिया के
अंदर जो क्राइसिस चला राइट वहां पर फूड, वाटर, मेडिसिन, रिफ्यूजीज़ की हेल्प करना, कैंप सेटअप करवाना ये सारा काम जो है
यूनिसेफ ने करा। देन WHO के बारे में आप सबको पता है वर्क्स ऑन ग्लोबल हेल्थ एंड डिसीज कंट्रोल। बट आपको पता है जो अब इन
2026 डॉन्ड ट्रंप और यूएसए ने जो है WHO से जो है पुल आउट कर लिया। देखिए यूएसए का कहना ये है ड्यूरिंग कोविड-19 राइट तो जो
WHO है उसने सही तरीके से जो है इसको मैनेज नहीं करा। उसने सही तरीके से जो है चाइना को ब्लेम नहीं करा कि चाइना ही है
जो रियल रीज़न है इसका। ठीक है? तो टू मच इन्फ्लुएंस्ड बाय दी चाइना देन फेल टू मैनेज दी कंट्रोल ऑफ़ कोविड-19। तो इसलिए
जो है WHO से यूएसए ने पुल आउट कर लिया। देन हमारे पास यूएनडीपी आ जाता है यूनाइटेड नेशन डेवलपमेंट प्रोग्राम
इकोनमिक डेवलपमेंट एंड पावर्टी के लिए हेल्प करता है। देन वर्ल्ड फ़ूड प्रोग्राम। ठीक है? तो यहां पर आप देखेंगे वर्ल्ड फूड
प्रोग्राम प्रोवाइड्स सपोर्ट ड्यूरिंग फेमाइन इन अफ्रीका एंड कॉन्फ्लिक्ट्स इन यमन एंड सूडान। तो ये एक अच्छा पॉइंट्स है
कि कैसे जो है यूएन की एजेंसीज और फंड्स जो है वेलफेयर के लिए काम करते हैं। ठीक है? तो ये जो है हमारा जीडी का टॉपिक है।
व्हाई इंटरनेशनल बॉडीज लाइक इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस एंड यूनाइटेड नेशन आर नॉट फुल्ली इफेक्टिव। ठीक है? इसके आगे एक चीज
और ऐड कर दो। व्हाई दे फेल्ड टू सॉल्व सॉल्व दी
मेजर कॉन्फ्लिक्ट्स एंड वॉर। ठीक है? यह टॉपिक क्योंकि आया है। ठीक है? ये वॉर और कॉन्फ्लिक्ट्स यूएन
क्यों फेल हुआ है? एज इट इज़ टॉपिक मिलेगा। ठीक है? और अब तो ये जो है वॉर का टाइम चल रहा है। तो बेसिकली यहां पर ये टॉपिक के
आने के बहुत अच्छे चांसेस हैं। मेंबरशिप डिप्लोमेसी प्रोसीजर। तो देखो प्रोसीजर को उठा के अगर देखते हैं हम। ठीक है? पॉइंट्स
देखेंगे अब एक साथ। तो प्रोसीजर देखो। यूनाइटेड नेशन ऑफन फेल्स टू स्टॉप वॉर। क्यों? क्योंकि वीटो पावर जो है देखो वीटो
पावर इन सिक्योरिटी काउंसिल। तो इंडिया की पॉपुलेशन कितनी है? 140 करोड़। वर्ल्ड की सबसे ज्यादा पॉपुलेशन और स्टिल इंडिया जो
है परमानेंट मेंबर नहीं है। अब यहां पर देखो रशिया जो है ब्लॉक्ड कर देता है रिजर्वेशन ऑन द रशिया यूक्रेन वॉर। अब
इसका कहने का मतलब क्या है? देखिए यूएसए, फ्रांस, यूके लेके आते हैं एक रेज़ोलशन रशिया के खिलाफ कि रशिया पे हमें सेंशन
लगाने हैं। क्योंकि रशिया जो है ट्रॉसिटीज कर रहा है। यूक्रेन के अंदर वॉर चल रही है। बट यहां पर क्या होता है? रशिया के
पास क्या है? वीटो पावर है। और वीटो पावर का कांसेप्ट क्या है? अगर एक एक भी इन पांचों मेंबर में से वीटो पावर को लगा
देगा ना, तो वो रेोल्यूशन पास नहीं होगा। तो इसलिए क्या है? अब यहां पर यह कॉन्फ्लिक्ट सॉल्व ही नहीं हो सकता। अगेन
देखिए इंडिया ने काफी बार जो कोशिश करी कि जो मसूद हज़र और लीडर ऑफ जैश मोहम्मद रिसोंसिबल फॉर टेरर अटैक्स इन पठानकोट
पुलवामा इसको जो है यूएन डेजिग्नेटेड टेररिस्ट बनाएं। ठीक है? इसको इंडिया के अंदर भेजें पर क्या होता है? चाइना ब्लॉक
कर देता है। चाइना ब्लॉक्ड सेंशन अगेंस्ट सम पाकिस्तान बेस्ड टेररिस्ट। अब ये बहुत इफेक्टिव पॉइंट है। देखो इसे हम कहां-कहां
यूज़ कर सकते हैं। जब भी कभी टॉपिक आएगा इंडिया और चाइना का तो वहां तो आप बता सकते हैं। देखिए चाइना ब्लॉक्ड सेंशन
अगेंस्ट सम पाकिस्तान बेस्ड टेररिस्ट। तो देखिए कैसे चाइना जो हेल्प कर रहा है पाकिस्तान को तो। ठीक है? तो आप इससे समझ
सकते हैं कि बिकॉज़ ऑफ़ जस्ट वीटो पावर जो है इंडिया जैसी कंट्री को सफर करना पड़ता है। तो पहला आप पॉइंट क्या देंगे? वीटो
पावर वाला पॉइंट देंगे। ग्रुपिज्म एंड जिओपॉलिटिकल अलायंस। कंट्री सपोर्ट देयर अलाइज़ इंस्टेड ऑफ़ न्यूट्रल डिसीजन।
बिल्कुल। देखिए चाइना का अलाय कौन है? पाकिस्तान है। इसलिए जो है चाइना पाकिस्तान को सपोर्ट करता है। सिमिलरली आप
देखेंगे अगर कोई भी रेजोलेशन अगर ईरान के खिलाफ आएगा तो रशिया उसको सपोर्ट करेगा। देन वेस्टर्न कंट्रीज सपोर्ट यूक्रेन
व्हाइल सम कंट्रीज सपोर्ट रशिया। बिल्कुल वेस्टर्न कंट्रीज यानी कि फ्रांस, यूके अमेरिका जो है किसको? यूक्रेन को सपोर्ट
करता है। तो देखो अब यूनाइटेड नेशन क्या है? यूनाइटेड है। पर ये जुड़े हुए हैं क्या? इनके बीच में भी ग्रुपिज्म और
जियोपॉलिटिकल अलायंस चल रहा है। देन हमारे पास आता है लैक ऑफ इंडिपेंडेंट मिलिट्री पावर। यूएन पीस कीपर्स डिपेंड ऑन ट्रूप्स
प्रोवाइडेड बाय मेंबर कंट्री। सो दे कैन नॉट एक्ट क्विकली विदाउट अप्रूवल। चलो इसको समझते हैं। देखिए सपोज़ अगर इंडिया
है। राइट? अब यूएन कहता है कि इंडिया की पीस कीपिंग फ़ यूक्रेन में भेजते हैं कि यूक्रेन की तरफ से लड़े और वॉर को स्टॉप
करें। तो पहले जो है यूएन को परमिशन लेनी पड़ेगी इंडियन गवर्नमेंट से। क्या हम आपकी फोर्स भेज सकते हैं? तो इसलिए ये जो यूएन
पीस कीपिंग फोर्स है ना इनके पास ये तब तक डिप्लॉय नहीं कर सकते जब तक कि मेंबर कंट्री ही अलाउ ना करे। इसलिए यहां पर जो
है डिप्लॉयमेंट नहीं हो सकता वॉर के अंदर। सेकंड क्या है? नेशनल इंटरेस्ट ओवर ग्लोबल इंटरेस्ट। देखिए मेजर पावर प्रायोरिटाइज
स्ट्रेटेजिक एंड इकोनमिक इंटरेस्ट। एग्जांपल इन इजराइल, गाज़ा कॉन्फ्लिक्ट डिफरेंट कंट्रीज सपोर्ट डिफरेंट साइड्स
मेकिंग कंसेंस डिफिकल्ट। और अगर आप अभी का एग्जांपल ले लेंगे ये इजराइल, यूएसए एंड ईरान वॉर के अंदर तो वहां पर आप देखेंगे
तो यहां पर जो मेंबर्स हैं वो डिवीजन है। फ्रांस ने देखिए कंडेम करा इस वॉर को। राइट? और यूएस के इस अटैक को भी कंडेम करा
था। देखेंगे यूएसए और फ्रांस दोनों क्या है? वीटो पावर नेशन है। बट एक दूसरे के खिलाफ जा रहे हैं। तो इसलिए यहां पर जो है
जो कंट्रीज अपने पर्सनल इंटरेस्ट को नेशनल इंटरेस्ट को देख रही है रेदर दैन ग्लोबल इंटरेस्ट। तो यूएसए जो है वो कंटीन्यूअसली
इजराइल को सपोर्ट कर रहा है। तो इससे हमें यही पता लगता है। चलिए आगे देखते हैं। ऑयल क्राइसिस एंड ग्लोबल इकोनमिक इशज़ ड्यूरिंग
ग्लोबल एनर्जी क्राइसिस जो अभी चल भी रहा है। राइट? द यूएन हैज़ लिमिटेड अथॉरिटी बिकॉज़ इकोनमिक डिसीजन डिपेंड ऑन
इंडिपेंडेंट कंट्रीज एंड ऑर्गेनाइजेशन। तो आप सीधा बोलिए। देखिए कोई भी एनर्जी रिलेटेड प्रॉब्लम आती है एलपीजी, एलएनजी,
कोल, पेट्रोलियम। तो ये डिसीजन जो है ओपेक ऑयल, पेट्रोलिंग, एक्सपोर्टिंग कंट्रीज द्वारा लिया जाएगा ना कि यूएन द्वारा लिया
जाएगा। तो इससे हमें क्या पता लगता है कि कंट्रीज के पास ही पावर आती है जब ऐसे इशूज़ आते हैं। यूएन के पास तो कोई पावर है
ही नहीं। सेंशन समटाइ्स इन इफेक्टिव कंट्रीज फाइंड अल्टरनेट ट्रेड रूट और अलायज़। देखिए सेंशन जो समटाइम है
इनफेक्टिव है। क्योंकि कंट्री जो है वो क्या करती हैं? अल्टरनेट ट्रेड रूट या फिर अपने दूसरे अलायस को ढूंढ लेती हैं। फॉर
एग्जांपल आप रशिया का लें। ठीक है? तो यूरोप जो है बहुत ज्यादा क्या है? ऑयल खरीदता था किससे? रशिया से। एनर्जी खरीदता
था। बट जैसे ही रशिया के ऊपर सेंशन लगे तो यूरोप ने पुल आउट कर दिया कि अब हम इनसे तेल नहीं खरीदेंगे। यूएसए से ले लेंगे। तो
इससे हुआ क्या? रशिया ने डिस्काउंटेड कर दिया उसको प्राइस को और किसको सेल करा? इंडिया को बहुत ज्यादा क्वांटिटी में सेल
करा, चाइना को सेल करा। तो इसलिए जो सेंशन लग रहे हैं वो तो इफेक्टिव हो चुके हैं। और अगर आप आज की वॉर देखेंगे तो आयरन
देखिए कितनी इंटरेस्टिंग है कि यूएसए खुद अलाउ कर रहा है रशिया को और पूरे वर्ल्ड को कह रहा है कि आप रशिया से तेल खरीदे कि
ऑयल के जो प्राइसेस हैं वो मेंटेन रहे। इससे हमें क्या पता लगता है? देखिए कि जो हमारे सेंशन है वो इनफेक्टिव हो जाते हैं।
ठीक है? देन ईरान ऑयल सेंशन में आप देख सकते हैं ईरान कंटिन्यू सेलिंग ऑयल टू चाइना थ्रू इनडायरेक्ट शिपिंग और मिडिलमैन
कंपनीज़ है ना? और ईरान पे सेंशन लगे हुए हैं। तो ईरान पे सेंशन होने के बावजूद भी जो है वो ईज़ली देखिए चाइना को सेल कर रहा
है। तो यह बहुत अच्छे एग्जांपल। देन हम देखते हैं रिसेंट डेवलपमेंट की बात। तो देखिए फाइनेंसियल क्राइसिस। तो मेनी
कंट्रीज हैव नॉट पेड मेंबरशिप ड्यूस बाय अर्ली 2026 अनपेड कंट्रीब्यूशन वर अबाउट 1.6 बिलियन क्रिएटिंग अ रिस्क ऑफ़
फाइनेंसियल इनस्टेबिलिटी। आपने देखा होगा यूनाइटेड नेशन के पास अपनी पीस कीपिंग फोर्स है। उनके पास जो है वो इकोनॉमिक
काउंसिल है जहां पर वो यूनिसेफ और ये सारी ऑर्गेनाइजेशन है। तो जब ये ऑर्गेनाइजेशन को हमें रन करना है यूएनएआरसी इनको फंड भी
तो देना पड़ेगा और फंड जो है वो हर कंट्री को थोड़ा बहुत कंट्रीब्यूट करना पड़ता है। बट बहुत सारी कंट्री ने तो फंड ही नहीं
दिया। अराउंड 1.6 बिलियन का जो है ड्यूस है। तो इससे हमें पता लगता है कि यहां पर तो फाइनेंसियल क्राइसिस भी चल रही है। देन
फंडिंग शॉर्टेज आप देख सकते हैं। फोर्स एजेंसीज लाइक यूएनएचसीआर टू कट स्टाफ एंड रिड्यूस रिफ्यूजी असिस्टेंस प्रोग्राम।
देन आप यहां पर देखिए डोनल्ड ट्रंप विड्र्यू द यूनाइटेड स्टेट्स फ्रॉम इंटरनेशनल बॉडीज और एग्रीमेंट कहां से?
यूएनएआरसी से। डॉनल्ड ट्रंप कहते हैं कि ये जो यूएनएआरसी है यह बायस्ड है। राइट? काफी सारे कंट्रीज लाइक चाइना है। तो अगर
आप देखेंगे चाइना जो है उन्होंने काफी सारे ह्यूमन राइट का वायलेशन करा है। राइट? वो वीगर मुस्लिम्स को मारना हो और
भी बहुत सारे केसेस हैं। बट चाइना स्टिल यहां पर मेंबर है। देन इनका कहना यह है कि इजराइल के प्रति जो है यूएनएआरसी बहुत
ज्यादा बायस्ड है। वो सपोर्ट करता है पेलेस्टाइन को और गाज़ा को। बट इजराइल के प्रति जो है वो इतना ज्यादा इन्फ्लुएंस
नहीं है। देन वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन की हमने बात करी थी कि वो कोविड-19 को ढंग से मैनेज नहीं कर पाए और चाइना की तरफ
इन्फ्लुएंस था। इसलिए जो है डोन्ड ट्रंप और यूनाइटेड स्टेट्स यहां से भी निकल चुका है यूएआरसी से भी और यूनेस्को भी इन्होंने
छोड़ दिया है। देखिए अगर आप यूएसए जो कि मेजर कंट्रीब्यूशन है यूनाइटेड नेशन का अगर वो ही ऐसी ऑर्गेनाइजेशन और काउंसिल को
छोड़ देगा तो कैसे यूनाइटेड नेशन आगे चलेगा। राइट? देन हम आगे देखते हैं प्रोसीजर। तो देखिए कंसेंट ऑफ पार्टीज बोथ
कॉन्फ्लिक्टिंग कंट्रीज मस्ट एग्री। अगर वो कोई मीडिएशन चाहते हैं या पीस कीपिंग फ़ चाहते हैं तो दोनों कंट्री को एग्री करना
पड़ेगा। साथ में जो जिस कंट्री की फोर्स जा रही हैं उन्हें भी एग्री करना पड़ेगा। तो प्रोसीजर बहुत ज्यादा डिफिकल्ट है।
यूएन सिक्योरिटी काउंसिल अप्रूवल स्पेशली नो वीटो फ्रॉम पी5 तो देखिए आपको कोई भी अगर अप्रूवल लेना है तो पहले आपको वीटो
कंट्री से पास करना पड़ेगा। बट वीटो कंट्री में क्या होता है वो ब्लॉक कर देते हैं। आपने देखा है रेोल्यूशन। देन
इंपार्शियल पर्पस मिशन मस्ट बी न्यूट्रल नॉट फेवर एनी साइड। और हमने देखा सारे केसेस यहां पर साइड बाय साइड ही चल रहे
हैं। देन ट्रूप कंट्रीब्यूशन मेंबर कंट्रीज वंटरी प्रोवाइड सोल्जर यूएन डज़ नॉट हैव इट्स ओन आर्मी। ठीक है? तो
यूनाइटेड नेशन की अपनी कोई आर्मी नहीं है। यह तो हमको पता ही है। अगर बजट की बात करें तो यूनाइटेड स्टेट ही लार्जेस्ट
फाइनेंसियल कंट्रीब्यूटर है। 27% पीस कीपिंग का बजट सिर्फ यानी कि अगर हम बात करें तो 1/3 जो बजट है वो कहां से आ रहा
है? पीस कीपिंग का यूएसए ही दे रहा है और 22% रेगुलर यूएन बजट। तो सिर्फ यूएसए ही कंट्रीब्यूट कर रहा है इसके अंदर। तो ये
सारे पॉइंट से हमको पता लगता है कि इसलिए जो है यूनाइटेड नेशन बहुत जल्दी फेल होने वाला है। और अगर आप देखेंगे तो यूनाइटेड
नेशन को बनाया गया था वर्ल्ड वॉर को रोकने के लिए। बट आजकल की अगर वॉर देखेंगे हाइब्रिड वॉरफेयर साइबर अटैक्स हो रहे
हैं, प्रॉक्सी वॉर हो रहे हैं, टेरर नेटवर्क तो हमने जो यूनाइटेड नेशन बनाया था वो इन सारी चीजों को देखकर नहीं बनाया
था। राइट? इलेक्ट्रॉनिक सेंशन, इंफॉर्मेशनेशन वॉरफेयर। इसलिए जो है ये फेल हो रहा है बार-बार यूनाइटेड नेशन टू
सॉल्व सच प्रॉब्लम्स। तो ये टॉपिक बहुत इंपॉर्टेंट है। सीधा आएगा आपके पास कि वॉर्स क्यों नहीं रोक पा रहा यूनाइटेड
नेशन या फिर बड़ी कंट्रीज या फिर जो इंटरनेशनल बॉडीज हैं वो क्यों इनफेक्टिव होती जा रही हैं? तो आप जो है प्रोसीजर पे
बोलिए मेंबरशिप पे तो ये दोनों ओवरलैप करेंगे और डिप्लोमेसी पे भी ये सारे पॉइंट्स अगर जोड़ के बोलेंगे तो आप बोल
सकते हैं। चलिए अब हम पढ़ते हैं इंडिया मिडिल ईस्ट यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर। तो यहां पर तीन चीजों को याद रखना है। इंडिया
है यहां पर मिडिल ईस्ट है और यूरोप है। इकोनॉमिक कॉरिडोर। तो देखिए ये जो कॉरिडोर है इसके बारे में हमने सबसे पहले बात कब
करी? अनाउंस्ड कब हुआ ये? सेप्टेंबर 23 में। राइट? तो यहां पर देखिए G20 समिट थी और इंडिया उसे होस्ट कर रहा था। तब
[नाक से की जाने वाली आवाज़] हमने जो है इसे अनाउंस करा। नाउ यहां पर क्वेश्चन आता है हम इस कॉरिडोर को क्यों बना रहे हैं?
और क्या यह बन चुका है? क्योंकि ये जो अनाउंस हुआ था वो 23 में हुआ था। देखिए ये अभी ऑपरेशनल नहीं हुआ है। राइट? इसका जो
पार्शियल कुछ पार्ट है वो बन चुका है बट फुल्ली ये ऑपरेशनल अभी नहीं हुआ है। नाउ अब हम बात करते हैं इसे क्यों बनाया गया
था। इट एम्स टू कनेक्ट इंडिया टू यूरोप। तो इसका मेन एम क्या है? इंडिया को यूरोप से कनेक्ट करना है थ्रू मिडिल ईस्ट यूजिंग
रेलवे पोर्ट शिपिंग रूट्स, एनर्जी पाइपलाइन, डिजिटल केबल्स टू रिड्यूस ट्रांसपोर्ट टाइम एंड टू स्ट्रेंथन
इकोनॉमिक इंटीग्रेशन। नाउ यहां पर क्वेश्चन आता है कि इंडिया तो डायरेक्टली सी रूट के थ्रू यूरोप जा सकता है। तो हमें
क्या नीड है रेलवे, पोर्ट, शिपिंग रूट, एनर्जी पाइप लाइन, डिजिटल केबल बिछाने की? इतना सब करने की क्या जरूरत है? चलिए
देखते हैं। तो देखिए इंडिया जो है वो गुजरात से या फिर मुंबई से। ठीक है? ये अपने पोर्ट का यूज़ करके जो है वो यूएई
सामान अपना भेजेगा। देन यूएई से आप देखेंगे तो ट्रेन के थ्रू इजराइल तक जाएगा सामान जॉर्डन तक। नाउ फिर यहां इजराइल के
पोर्ट से जो है सामान सीधा इटली, फ्रांस, जर्मनी जाएगा। ठीक है? तो यहां पर आप देखेंगे तो क्या इनवॉल्व हुआ? सी रूट
इनवॉल्व हुआ। देन रेलवे इनवॉल्व हुई। केबल्स तो यहां पर बिछाई जाएगी। पाइपलाइंस भी बिछाई जाएगी। तो अब आपको इतना समझ में
आ गया कि यहां पर शिपिंग रेल्वेज जो ये लैंड एरिया है उस पे तो शिप नहीं चलेगा ना। तो यहां पे रेलवेेज यानी कि अगर हम
बोलें कि यूएई को इजराइल से कनेक्ट करने के लिए रेलवे चल रही है। इंडिया को यूएई से कनेक्ट करने के लिए शिप चल रही है और
दोबारा इजराइल से जो है यूरोपियन कंट्रीज को जॉइ करने के लिए शिप और अंडर वाटर तो हम पाइपलाइंस बिछाएंगे ही साथ में केबल्स
भी। तो ये हमें रूट तो समझ में आ चुका है। राइट? तो हमने जो मैप देखा उससे हमें क्या पता लगता है कि इंडिया यहां पर इनवॉल्वड
है। सऊदी अरेबिया, यूएई, जॉर्डन, इजराइल एंड यूरोपियन नेशन। तो अब हम बात करते हैं हम इसे बना क्यों रहे हैं? राइट?
तो देखिए अल्टरनेटिव ट्रेड कॉरिडोर रिड्यूस डिपेंडेंस ऑन स्विस कैनाल रूट। तो यहां पर देखिए जो स्विस कैनाल है वो यहां
पर है। तो अगर हम डायरेक्ट इंडिया से सामान जो यूरोप भेजना चाहते हैं तो वो हमें स्विस कैनाल के रूट से यहां पर जाएगा
सामान। अब इसमें क्या है? 30 टू 40 डेज लग जाते हैं। बट अगर हम सामान यहां से भेजेंगे तो हमें जो है 40% टाइम रिडक्शन
होगा। मतलब हम 20 टू 25 या फिर 20 डेज के अंदर ही सामान जो है पहुंचा सकते हैं। और सेकंड चीज क्या है? इंडिया और यूरोप का
अगर आप ट्रेड देखेंगे ना तो इट इज़ अराउंड 135 बिलियन। इंडिया जो है ज्यादा एक्सपोर्ट करता है
यूरोप को। और इंडिया ने टारगेट सेट रखा है बाय 2030 हम ग्लोबली जितनी भी कंट्रीज को एक्सपोर्ट ज्यादा करते हैं पूरा मिलाकर हम
2 ट्रिलियन एक्सपोर्ट करेंगे। तो इंडिया जो है ज्यादा जो है क्या करना चाहता है? एक्सपोर्ट करना चाहता है। बट यहां पर टाइम
जो है ज्यादा लगता है। इसलिए इंडिया ने जो है यह कॉरिडोर बनाने की बात करी। सेकंड यहां पर क्या है कि अगर आप आप यहां पर
देखेंगे कि हम यहां से जाने की कोशिश करें यानी कि स्टेट ऑफ हार्मोस तो आपने देखा स्टेट ऑफ हार्मोस जो है ब्लॉक हो चुका है
और सारा वर्ल्ड जो है वो अब क्या है अल्टरनेट ट्रेड रूट बनाने की कोशिश कर रहा है। तो इसलिए ये जो हमने जो इंडिया मिडिल
ईस्ट को इकोनॉमिक ऑर्डर बना रहे हैं। तो यहां से हमें स्टेट ऑफ हरमोस्ट से जाने की जरूरत नहीं है। मतलब स्टेट ऑफ हरमोस से
फिर जॉर्डन के थ्रू जाकर फिर यहां से जर्मनी फ्रांस। सेकंड अगर यहां पर स्टेट ऑफ हार्मोस ब्लॉक हो सकता है तो कल को
स्विस कैनाल पर भी ऐसी चीजें हो सकती हैं। तो कल को क्या है हम देखें यहां पर ब्लॉकेड हो सकता है। कभी स्विस कैनाल में
ब्लॉकेड हो सकता है। तो इससे बेटर क्या है कि अगर हम लैंड के थ्रू ही डायरेक्ट चले जाएं तो ये जो वाटर में ब्लॉकेड लगा और
नेवीज का यूएस ने बाद में लगा दिया तो ये सारी चीजों से भी हम बच सकते हैं। देन थर्ड थिंग क्या है? देखिए चाइना जो है
बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव बना रहा है। कंटीन्यूअसली क्या कर रहा है? रोड्स डेवलपमेंट कर रहा है, पोर्ट डेवलपमेंट कर
रहा है। तो अगर इंडिया इस चीज में पीछे रह गया तो जो पूरे एशिया में और पूरे वर्ल्ड में जो है चाइना का ग्लोबल डोमिनेंस हो
जाएगा। सो टू काउंटर दी बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव ऑफ दी चाइना इंडिया कम अप विद इंडिया मिडिल ईस्ट यूरोप इकोनमिक कॉरिडोर।
अब क्वेश्चन ये आता है कि यहां से जो ये मिडिल ईस्ट कंट्री इनको यहां पर क्या फायदा है? तो देखिए जब ये कॉरिडोर बनेगा
तो जो मिडिल ईस्ट कंट्री है वो भी अपना सामान ईजीली जो है यहां पर पहुंचा सकती हैं। ठीक है? तो इससे इनको भी बेनिफिट
होगा और इंडिया को तो बेनिफिट होगा ही। चलिए और एडवांटेजेस देखते हैं। काउंटर बैलेंस चाइना बेल्टन रोड
इनिशिएटिव। देखिए चाइना का 1 ट्रिलियन का बेल्टन रोड इनिशिएटिव है। तो इसको ये काउंटर करेगा। रिड्यूस ट्रांसपोर्ट टाइप
हमने बात करी 30 टू 40 डेज लग जाते हैं। अगर अभी मुंबई से जाएं। ठीक है? तो करंट रूट अगर हम देखें अभी तो देखिए मुंबई से
अगर आप निकले तो यहां से जाएंगे फिर यूं एंड देन आप स्विस कैनाल स्विस कैनाल में भी बहुत टाइम लगता है क्योंकि वहां पर
ट्रैफिक बहुत ज्यादा होता है फिर देन आप डिफरेंट कंट्रीज जाएंगे तो 30 टू 40 डेज लग जाते हैं यहां पर इसलिए जो है आईएमएफ
जो है इसको रिड्यूस कर देगा 40% देन एनर्जी एंड डिजिटल कनेक्टिविटी देखिए इंक्लूड्स इलेक्ट्रिक केबल हाइड्रोजन
पाइपलाइन एंड डिजिटल फाइबर नेटवर्क तो यहां पर क्या है केबल्स को बिछाया जाएगा राइट यहां से केबल्स जाएंगी और यूरोप तो
अब आप ये सोच रहे हैं कि केबल्स क्यों बिछा रहे हैं। तो देखिए स्टिल जो अभी इंटरनेट पूरे वर्ल्ड में चलता है 95% ऑफ
इंटरनेट केबल के थ्रू आता है ऑप्टिकल केबल और लोगों को लगता है कि सेटेलाइट के थ्रू। ठीक है? तो ऐसा नहीं है। वो स्टार लिंक जो
है अभी बहुत कम शेयर है उनका। तो देखिए इसलिए हम जो है ये डिजिटल केबल्स ऑप्टिकल फाइबर बिछाना चाहते हैं कि जो हमारा
इंटरनेट है राइट? उसकी जो लेटेंसी है और कम हो और फास्ट हो। और सेकंड थिंग क्या है? सोचिए अगर किसी ने सेटेलाइट डिस्ट्रॉय
कर दी। हर कंट्री क्या है? मल्टीपल ऐसे रूट्स बना रही हैं। ऐसी ऐसी जो केबल्स हैं वो बिछा रही हैं कि अगर वॉर होती है या
फिर कोई कॉन्फ्लिक्ट होता है और कोई पर्टिकुलर उनका इंटरनेट सप्लाई कट कर देता है तो उनके पास क्या है? अल्टरनेट भी रूट
है। तो इसलिए मल्टीपल अल्टरनेट रूट भी होना चाहिए। अब पाइप लाइन की बात करते हैं। तो देखिए इंडिया का मिशन है ग्रीन
हाइड्रोजन। बाय 2030 हम बहुत सारा एक्सपोर्ट। अभी हम आगे पढ़ेंगे उसके बारे में। तो अगर हम पाइप लाइन बिछा देंगे तो
हम डायरेक्टली यूरोप को क्या है? हाइड्रोजन बेच सकते हैं। तो यूएई डायरेक्ट इंडिया को ऑयल सप्लाई कर सकता है। ठीक है?
बिलो दीॉर्स ओशन के अंदर से तो देखिए ओशन के नीचे से जा रही हैं। तो यहां पर अगर कोई भी वॉर कुछ भी होता है तो डायरेक्ट
हमें तो ऑयल की सप्लाई और अब जो एनर्जी क्राइसिस हमने देखा तो इसलिए ये चीज बेस्ट है और आपको पता है इस पर स्टडी स्टार्ट हो
चुकी है। ओशन की एकदम डेप्थ से जो है हम पाइप लाइन निकालेंगे और इंडिया को कनेक्ट करेंगे। ठीक है? तो इंडिया की काफी सारी
कंपनीज़ जो है वो यूएई जा चुकी हैं और यूएई के इंजीनियर तो ये जो है अभी एकदम बिगिनिंग स्टेज में है। हमारे प्राइम
मिनिस्टर यूएई गए थे। आपको पता है रिसेंटली। तो ये सारी बातें जो चल रही हैं अल्टरनेट रूट की इंडिया को जो है सेल्फ
रिलायंट बनाने की इस वॉर की वजह से क्योंकि हम बहुत ज्यादा क्राइसिस अब फेस कर रहे हैं। तो हम ये देख चुके हैं
इलेक्ट्रिक केबल्स हाइड्रोजन पाइप लाइन डिजिटल फाइबर नेटवर्क ये सब बिछाने की बात चल रही है। देन मेजर कॉम्पोनेंट्स ऑफ़ आई
में क्या है? देखिए रेल इंफ्रास्ट्रक्चर हमने बात करी थी कि रेल जो है वो यूएई से पास करेगी सऊदी अरेबिया और जॉर्डन जो लैंड
एरिया है। देन डिजिटल केबल्स बिछाई जाएगी यहां पे हाई स्पीड डाटा कनेक्टिविटी बिटवीन इंडिया और यूरोप के बीच में।
लेटेंसी लो होगी। इंटरनेट की स्पीड बहुत ज्यादा हाई होएगी। एनर्जी पाइप लाइन हाइड्रोजन पाइपलाइन ट्रू ट्रांसपोर्ट
ग्रीन हाइड्रोजन टू यूरोप इंडिया का मिशन है। पोर्ट्स एंड शिपिंग हमने बात करी मुंबई देन गुजरात हाइफा पोर्ट आई थिंक
इजराइल इलेक्ट्रिसिटी केबल्स क्लीन एनर्जी ट्रांसमिशन अक्रॉस रीजन तो ये सारी चीजें थी। चलिए एडवांटेजेस देख लेते हैं इंडिया
को क्या मिलेगा? फास्टर ट्रेड होगा। तो इंडिया का जो ट्रेड है अराउंड 135 बिलियन है। 40% फास्टर हो जाएगा ये टाइम क्योंकि
आपने देखा था टाइम रिडक्शन होगा इसमें। बूस्ट इंडियन पोर्ट्स मुंबई मुंद्रा नवाशेरा पोर्ट जितने भी ये पोर्ट्स हैं
यहां पर क्या है? ट्रैफिक ज्यादा लगेगा। तो हमारे जो पोर्ट्स हैं वो ज्यादा से ज्यादा बेनिफिट लेंगे इससे। देन एनर्जी
सिक्योरिटी देखिए इंडिया इंपोर्ट 85% ऑफ़ इट्स क्रूड ऑयल एंड मिडिल ईस्ट सप्लाई 60% ऑफ इंडियन ऑयल टू इंपोर्ट। तो यहां पर
देखिए यूरोपियन यूनियन प्लांस टू इंपोर्ट 10 मिलियन टन्स ऑफ ग्रीन हाइड्रोजन बाय 2030। और हमने जो है मिशन स्टार्ट करा है
ग्रीन हाइड्रोजन का। ये देखिए इंडियास नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन टारगेट 5 मिलियन टन्स प्रोडक्शन पर ईयर बाय 2030।
इंडिया एम्स टू कैप्चर 10% ऑफ़ ग्लोबल ग्रीन हाइड्रोजन डिमांड। तो देखिए ये जो हाइड्रोजन है तो इसमें क्या होता है जो
हमारा वाटर होता है ठीक है H2O तो उसमें जो H हाइड्रोजन हम उसको अलग करते हैं। ठीक है? इसके लिए क्या है? हमें बहुत ज्यादा
इलेक्ट्रिसिटी की नीड होती है। तो अगर हम इलेक्ट्रिसिटी सोलर से जनरेट कर रहे हैं या फिर कोई भी रिन्यूल सोर्स है तो उसको
ग्रीन बोल देते हैं। ठीक है? और यही अगर हम इलेक्ट्रिसिटी किसी कोल से कर रहे हैं तो हम उसको ग्रे हाइड्रोजन बोल देते हैं।
तो ग्रीन हाइड्रोजन का मतलब आपको समझ में आ गया कि जो इलेक्ट्रिसिटी का यूज करते हुए जो हमने हाइड्रोजन प्रोड्यूस करा है
ना रिन्यूएबल एनर्जी का यूज़ करते हुए इलेक्ट्रिसिटी का यूज़ करते हुए जो हमने हाइड्रोजन प्रोड्यूस करा है उसको हम ग्रीन
हाइड्रोजन बोल देते हैं। तो इंडिया ने ये प्रोग्राम रखा है कि हम जो है ना 10% ग्लोबल। अब देखेंगे हाइड्रोजन की अगर हम
बात करें तो हाइड्रोजन बसेस स्टार्ट हो गई दिल्ली के अंदर। हमारे जो नितिन गडकरी हैं वो खुद हाइड्रोजन कार चलाते हैं और
हाइड्रोजन कार को बहुत ज्यादा प्रमोट करते हैं। बिलियंस ऑफ डॉलर हम खर्च कर चुके हैं ट्रेंस बनाने के लिए। राइट? हमारी कितनी
ट्रेनें जो है हाइड्रोजन ट्रेन एक तो स्टार्ट भी हो चुकी है। तो इसलिए जो हाइड्रोजन जो है बहुत बढ़ा चढ़ा के बात
करता हूं। और यूरोपियन यूनियन तो 10 मिलियन टन्स लेने ही वाला है। देन अगर हम आगे देखें तो इन्फ्लुएंस इन वेस्ट एशिया
देखिए यहां पर जो टाई है हमारे रिलेशन सऊदी अरेबिया, यूएई और इजराइल के साथ बहुत अच्छे हो जाएंगे क्योंकि ट्रेड बहुत जल्दी
हो रहा है। राइट? देन यहां पर हम देखेंगे तो आई टू यू भी है जहां पर इंडिया, इजराइल, यूएई। तो ये तीन मेंबर तो आई टू
यू2 का पार्ट ही हैं। तो यहां से भी जो है ये चीज़ मैच होती है। देन सप्लाई चेन डवर्सिफिकेशन इंडिया एम्स फॉर 2 ट्रिलियन
एक्सपोर्ट बाय 2030 हमने देखा कि ग्लोबली जो है हम 2 ट्रिलियन एक्सपोर्ट करना चाहते हैं। इंडियास मैन्युफैक्चरिंग एक्सपोर्ट्स
रीच यूरोप फास्टर। तो इससे क्या होगा कि हम यूरोप के साथ ज्यादा से ज्यादा जल्दी ट्रेड कर पाएंगे। तो ग्लोबल एडवांटेज देखो
इंडिया को तो एडवांटेज हो रहा है और ग्लोबली भी एडवांटेज मिलेगा। देखिए इससे होगा क्या? कॉरिडोर कनेक्ट करेगा एशिया,
मिडिल ईस्ट, यूरोप मार्केट को 3 बिलियन पीपल जो है इससे कनेक्ट होंगे। और अगर आप सोचिए कि अगर भूटान या फिर नेपाल फ्यूचर
में जाके या बांग्लादेश भी इस चीज को जॉइ करना चाहता है यूरोप में सामान पहुंचाना चाहता है तो वो इस रूट का हेल्प ले सकता
है। देन क्लीन एनर्जी ट्रांजिशन अब इससे हो क्या रहा है कि ये देखिए हाइड्रोजन प्रमोशन हो रहा है। टारगेट रखा हुआ है नेट
ज़ीरो का बाय 2070 तो वो टारगेट भी यहां पे मीट हो रहा है। इकोनमिक ग्रोथ होगी। यूरोपियन यूनियन देखिए यूरोपियन यूनियन की
इकॉनमी फ्लरिश करेगी। गल्फ कंट्रीज की करेगी। इंडिया की करेगी। तो सिमिलरली यहां पर जो है अच्छा ग्लोबल एडवांटेज। अब
चैलेंजेस की अगर बात करें तो रीजनल इनस्टेबिलिटी देखिए कॉन्फ्लिक्ट चल रहा है इज़राइल के अंदर गाज़ा के साथ। फिर आप यूएई
का एग्जांपल लीजिए कि ईरान जो है वो यूएई के साथ इनवॉल्व्ड है कॉन्फ्लिक्ट के अंदर। वहां पर ड्रोनस अटैक हो रहे हैं। सिमिलरली
सऊदी अरेबिया आप देख सकते हैं और सऊदी अरेबिया जो है वो पार्टनरशिप कर रहा है पाकिस्तान के साथ जहां पर पाकिस्तान जो है
उनको क्या है डिफेंस पे इन्होंने साइन करा है। तो अब ये सारे जो चैलेंजेस हैं देन जॉर्डन रिक्वायर बिलियंस ऑफ़ डॉलर्स
इन्वेस्टमेंट। तो इन्वेस्टमेंट तो इंडिया को ही करनी पड़ेगी। और इंडिया जो अभी शॉर्टेज ऑफ़ फंड चल रहा है ओवर 150 कंट्रीज
इनवॉल्वड। अब और वेयर एज हम चाइना की बात करें तो चाइना के पास इन्वेस्टमेंट बहुत ज्यादा है 1 ट्रिलियन की और ऑलरेडी 150
कंट्रीज आ चुकी है तो क्यों इंडिया का कोई रूट यूज़ करेगा जब वेल्थ एंड रोड इनिशिएटिव चाइना का है तो ये कुछ चैलेंजेस
है जिसके ऊपर हमें सोचने की जरूरत है तो जेडी का टॉपिक अब देख लेते हैं हम हाउ कैन इंडिया इंप्रूव इट्स इकॉनमी
ड्यूरिंग वॉर लाइक सिचुएशन इन द मिडिल ईस्ट तो यहां देखिए यूजिंग अल्टरनेट ट्रेड रूट्स एंड मार्केट तो आप यहां पर बताइए कि
हम जो है अल्टरनेट ट्रेड रूट बना रहे हैं आई मैक कॉरिडोर ठीक है तो जहां पर हम डायरेक्टली जो है थ्रू केबल्स के पाइपलाइन
के और शिपिंग से यूएई से कनेक्ट होंगे। राइट? और यूएई सऊदी अरेबिया तो हम वहां से और अगर हम पाइपलाइन की बात करें तो देखिए
वॉर अगर चल भी रही है लैंड पर तो हमें पाइपलाइन तो अंडर सी है। तो यहां पर जितने भी हमने पॉइंट डिस्कस करे आप आईx से
रिलेटेड आप रख सकते हैं। आप एग्जांपल दे सकते हैं रशिया का। तो हमने बहुत सारा तेल जो है रशिया से खरीदा है एट डिस्काउंटेड
प्राइस। क्योंकि हमने देखा कि वहां पर जो है ब्लॉकेट चल रहा है। और आपको पता है हमने एक कंटेनर जो है किससे? ईरान से भी
लिया है। हमने जो है ऑयल का कंटेनर जो है ईरान से भी मंगाया है। तो हम जो है अल्टरनेट ट्रेड रूट तो निकाल रहे हैं। हम
ऑस्ट्रेलिया के साथ भी पैक्ट साइन कर रहे हैं। एलएनजी ये सब तो ये सारी डिस्कशन आप आगे कर सकते हैं और हम आगे भी इसके बारे
में पढ़ेंगे बिकमिंग सेल्फ रिलायंट इन एनर्जी सेक्टर। अब ये जो लीड है ना आप जाइए डे वन के अंदर एनवायरमेंट चैप्टर में
जो हमने एनर्जी पढ़ा है ना उसमें हमने न्यूक्लियर एनर्जी की बात करी है। सोलर एनर्जी की बात करी है। रेन वाटर
हार्वेस्टिंग इलेक्ट्रिक व्हीकल तो वो सारे पॉइंट अगर आप देखेंगे और वैसे भी इंडिया का टारगेट है बाय 2030 बाय 2030
क्या है? इंडिया 50% ऑफ इलेक्ट्रिसिटी जनरेट करने वाला है रिन्यूएबल सोर्स ऑफ एनर्जी से। ठीक है? तो वो सारी चीजें
मैंने डिस्कस करी थी। तो बहुत पॉइंट्स मैंने डिस्कस करें। चलिए अब हम पढ़ते हैं सार्क को। राइट? साउथ एशियन एसोसिएशन फॉर
रीजनल कोपरेशन। और अगर सार्क के मेंबर को आप ऑब्जर्व करेंगे जैसे कि भूटान, बांग्लादेश, श्रीलंका, पाकिस्तान,
अफगानिस्तान, नेपाल तो ये सारे इंडिया की नेबरिंग कंट्रीज हैं। तो इससे हमें यह पता लगता है कि अगर हम सार्क को पढ़ रहे हैं
तो हम यह भी पढ़ रहे हैं कि इंडियास रिलेशन विद इट्स नेबरिंग कंट्री। और यह टॉपिक आता है। ठीक है? तो, यह टॉपिक किस
में आता है? लेक्चर में भी आता है और कुछ ऐसे जीडी होते हैं जहां पर होता है कि इंडिया अपने नेबरिंग कंट्रीज के साथ कैसे
रिलेशन अच्छी कर सकती है या फिर अगर इंडिया को ग्रो करना है तो उसमें क्या सबसे बड़ी प्रॉब्लम हो सकती है इंटरनल
सिक्योरिटी या फिर जो हमारी नेबरिंग कंट्री है अगर उनमें डिस्ट्रेस या कॉन्फ्लिक्ट चल रहा है होगा क्या इंडिया
की ग्रोथ भी हैंपर होगी तो ऐसी लीड्स भी आ जाती है तो उन सारे टॉपिक्स में उन सारे टॉपिक्स में जो पॉइंट्स हम यहां पर
पढ़ेंगे वो आप यूज कर सकते हैं तो एक ही टॉपिक से हम जो है तीन से चार चीजों को कवर कर रहे हैं। राइट? तो देखिए सार्क
राइट? सार्क इज़ अ रीजनल जियोपॉलिटिकल एंड इकोनॉमिक ऑर्गेनाइजेशन ऑफ़ साउथ एशियन कंट्रीज क्रिएटेड टू प्रमोट इकोनॉमिक
कोऑपरेशन, कल्चरल एक्सचेंज एंड डेवलपमेंट एंड रीजनल स्टेबिलिटी। रीजनल स्टेबिलिटी क्यों? क्योंकि ये सारे एक दूसरे के
नेबरिंग कंट्रीज हैं। तो इसलिए स्टेबिलिटी मेंटेन रहे यह सार्क बनाया गया। और क्या था? कल्चरल एक्सचेंज आपने देखा होगा कि
इंडिया का कल्चरल एक्सचेंज किसके साथ है? नेपाल के साथ है। बोलते हैं ना रोटी बेटी का रिश्ता। एंड देन हमने देखा है सिमिलरली
हमारा जो है भूटान के साथ भी है, बांग्लादेश के साथ भी है, श्रीलंका के साथ भी है। ठीक है? आप हिस्टोरिकल टाई अगर उठा
के देखें तो कल्चरल एक्सचेंज तो है हमारा। देन हम यहां पर इकोनमिक डेवलपमेंट भी करना चाहते हैं। तो देखिए टोटल कितनी है? एट
कंट्रीज हैं। और इसका निमोनिक क्या है? एमबीबीएस पेन से याद रख लो कि मालदीव्स, भूटान, बांग्लादेश, श्रीलंका, पाकिस्तान,
अफगानिस्तान, इंडिया, नेपाल। तो दिस ऑर्गेनाइजेशन इज़ फाउंडेड इन 1985 हेड क्वार्टर इज़ इन काठमांडू, नेपाल। ठीक है?
चलिए कोपरेशन देख लेते हैं। तो डिफरेंट-डिफरेंट कोपरेशन है। एजुकेशन कोपरेशन, टूरिज्म, एग्रीकल्चर, इकोनमिक
ट्रेड, एनर्जी एंड ट्रांसपोर्ट कोपरेशन एंड स्पेस डिजास्टर मैनेजमेंट। तो इन सारी कंट्रीज के बीच में जो है इन सारी चीजों
को लेके रिलेशंस हैं। राइट? कोऑपरेशंस हैं। चलिए टूरिज्म की सबसे पहले बात करें तो देखिए, इंडिया और नेपाल की टूरिज्म की
बात करें तो देखिए, 5 लाख इंडियन टूरिस्ट विजिट करते हैं नेपाल को एनुअली। नेपाली सिटीजन कैन ट्रेवल टू इंडिया विदाउट वीजा
और पासपोर्ट। यह बहुत इफेक्टिव पॉइंट है। और अगर आप देखेंगे नेपाल की जीडीपी 7 टू 8% किससे टूरिज्म से ही चल रही है। तो यह
बहुत इंपॉर्टेंट पॉइंट है कि 5 लाख इंडियन टूरिस्ट जो है वो नेपाल जाते हैं जिसकी वजह से इनकी इकॉनमी में बहुत हेल्प मिल
रही है इनको। देन इंडिया एंड श्रीलंका की बात करें तो 3 लाख इंडियन टूरिस्ट जाते हैं वहां पर और यहां पर भी इनकी 10%
जीडीपी जो है वो सिर्फ टूरिज्म से चलती। तो देखें अगर 3 लाख टूरिस्ट बहुत बड़ा नंबर है। देन बुद्धिज्म टूरिज्म सर्किट हम
बना रहे हैं। तो हमने टूरिज्म चैप्टर में पढ़ा था इसके बारे में। राइट? अह जहां पर हमने प्रसाद स्कीम, स्वदेश दर्शन स्कीम तो
इन सब पे बात करी थी। तो, यह बन रहा है। देखिए, लुंबिनी क्या है? नेपाल के अंदर है। बर्थ प्लेस ऑफ़ बुद्धा एंड बोधगया का
है। एनलाइटमेंट साइट है। तो, यहां पर नेपाल और इंडिया को कनेक्ट किया जा रहा है बुद्धिज्म टूरिज्म सर्किट के लिए। तो, हम
बोल सकते हैं जब इंडिया रिलेशन विद नेबरिंग कंट्री तो हम बता सकते हैं कि देखिए 5 लाख इंडियन टूरिस्ट विजिट करते
हैं नेपाल को हर साल। और हम बोल सकते हैं कि इंडिया के 3 लाख टूरिस्ट जो है वो श्रीलंका जाते हैं। हम साथ में जो है
बुद्धिज्म टूरिस्ट सर्किट भी डेवलप कर रहे हैं। और आप बता सकते हैं कि देखिए रिसेंटली क्या हुआ? बलन शाह वहां के
प्राइम मिनिस्टर बनते हैं और वो बोल देते हैं कि 30 दिन से ज्यादा कोई भी इंडियन व्हीकल जो है नेपाल के अंदर नहीं रह सकता
है। ठीक है? इंडियन व्हीकल इन फ्यूचर मे बी जीडी का टॉपिक आ सकता है कि इंडिया और नेपाल के रिलेशन जो है उसके ऊपर तो वहां
तो अगर आप देखेंगे जो हमारे फॉरेन सेक्रेटरी भी हैं बलन शाह जो कि वहां के प्राइम मिनिस्टर उन्होंने उनसे मिलने के
लिए मना कर दिया। राइट मीटिंग के लिए उन्होंने यह कहा कि प्लीज सेंड समवन हु इज़ इक्वल स्ट्रेचर जो मेरे इक्वल स्ट्रेचर का
हो यानी कि प्राइम मिनिस्टर को भेजिए या फिर कोई बड़ा मिनिस्टर। देन अगर हम मालदीव्स की बात करें तो 1.8 मिलियन
टूरिस्ट है यहां पर। ठीक है? मेनी टूरिस्ट कम फ्रॉम इंडिया एंड श्रीलंका। अब ये इंपॉर्टेंट पॉइंट है। देखिए सार्क के पास
क्या है? एक वीजा एक्सेंपशन स्कीम है। तो आप डायरेक्टली इंडियन लोग नेपाल जा सकते हैं। वीजा की जरूरत नहीं है। सिमिलरली
श्रीलंका और भूटान भी जा सकते हैं। तो यहां पर जो है वीजा एक्सेंपशन स्कीम है सार्क की। देन एग्रीकल्चर की बात करें तो
यहां पर एग्रीकल्चर सेंटर्स हैं जो कि रिसर्च करते हैं किस पे? क्लाइमेट रेिलिएंट क्रॉप्स के ऊपर और टेक्नोलॉजी,
क्रॉप प्रोडक्टिविटी, क्लाइमेट चेंज। क्योंकि अगर आप देखेंगे सार्क के अंदर बहुत ज्यादा हीट पड़ती है। राइट? क्लाइमेट
चेंज बहुत ज्यादा हो रहा है यहां पर। तो इसलिए यहां पर जो है क्लाइमेट और एग्रीकल्चर सेंटर भी है। देन हम देखेंगे
तो यहां पर फूड ग्रेंस प्रोवाइड करना ड्यूरिंग इमरजेंसी है ना? चलिए आगे देखते हैं इकोनॉमिक ट्रेड कॉपरेशन। तो ये
सबसेेंट पॉइंट है पूरे टॉपिक का। ठीक है? तो देखिए साउथ एशियन फ्री ट्रेड एग्रीमेंट साफ्ता। राइट? तो यहां पर जो है टेरिफ
रिड्यूस करेंगे ज़ीरो से 5% ऑन मेनी प्रोडक्ट। इंडिया ट्रेड 40 टू 45 बिलियन टोटल ट्रेड विद सार्क कंट्री। तो इंडिया
का जो ट्रेड है सार्क कंट्रीज के साथ कितना है? 40 टू 45 बिलियन है। हम क्या एक्सपोर्ट करते हैं? पेट्रोलियम प्रोडक्ट,
फार्मासटिकल, मशीनरी, ऑटोमोबाइल, एग्रीकल्चर प्रोडक्ट्स है ना? तो ये सारे हम सेंड करते हैं बांग्लादेश को, नेपाल
को, भूटान, श्रीलंका। देन इंडिया, बांग्लादेश ट्रेड की अगर हम बात करें तो ट्रेड वॉल्यूम अगर हम देखें तो 15 टू 18
बिलियन है। और आपको पता है श्रीलंका का लार्जेस्ट ट्रेडिंग पार्टनर कौन है? इंडिया ही है। देन टेक्सटाइल फ्रॉम
बांग्लादेश हम इंपोर्ट करते हैं। देन टी फ्रॉम श्रीलंका। तो देखिए बस यहां पर यह याद रखिए कि जितने भी सार्क के मेंबर हैं
हम उनसे टेरिफ नहीं लेते हैं। राइट? 0 टू 5% ही टेरिफ है। तो यहां पर जो इकोनमिक ट्रेड कोपरेशन है वह तो हो रहा है। और
आपको पता है सार्क बना भी इसलिए था। तो यानी कि ये चीज तो फुलफिल कर रहे हैं। बट अगर आप देखेंगे ट्रेड बहुत कम है। ओनली 40
टू 45 बिलियन है। राइट? तो यहां पर इसे हमें इंक्रीस करने की जरूरत है। ये एक चैलेंज है। चलिए एजुकेशन कॉपोरेशन की बात
करें तो यहां पर स्टूडेंट फ्रॉम ऑल सार्क कंट्रीज रिसीव स्कॉलरशिप। सार्क यूनिवर्सिटी भी है। यहां पर लोकेशन न्यू
दिल्ली है। क्लाइमेट रिसर्च पे हमने बात करी। जॉइंट स्टडीज ऑन हिमालयन ग्लेशियर एंड क्लाइमेट चेंज इंडिया नेपाल भूटान
कोपरेट ऑन ग्लेशियर रिसर्च। तो आप बता सकते हैं क्लाइमेट चेंज के ऊपर भी ये पॉइंट ऐड कर सकते हैं। तो अगर कोई
क्लाइमेट चेंज का टॉपिक आता है वैसे भी हमने बहुत पॉइंट पढ़ रखे हैं तो आप वहां पे भी ये ऐड कर सकते हैं कि ताकि भूटान के
अंदर जो है यहां पर जॉइंट स्टडीज होती हैं हिमालयन ग्लेशियर्स के ऊपर और क्लाइमेट तो एंड देन क्लाइमेट चेंज के ऊपर। ठीक है?
चलिए आगे चलते हैं। स्पेस एंड डिजास्टर मैनेजमेंट। तो ये भी एक बहुत अच्छा पॉइंट है। साउथ एशिया सेटेलाइट। तो यहां पर
जीसेट नाइन है। राइट? ये ल्च करी थी इंडिया ने। ये बताती है डिजास्टर मैनेजमेंट। एंड वेदर फॉरकास्टिंग,
टेलीमेडिसिन, टेली एजुकेशन और इन सब का फायदा आप देख सकते हैं। यह हमारी नेबरिंग कंट्रीज उठा रही है। एक्सेप्ट कौन?
पाकिस्तान। तो देखिए साउथ एशियन सेटेलाइट जीसेट 9 जब हम इसरो की बात करेंगे तो आप बता सकते हैं कि देखिए कैसे इसरो हमारी
नेबरिंग कंट्रीज को हेल्प कर रहा है बाय GST न सेटेलाइट। वहां पर हम डिजास्टर के बारे में बता रहे हैं। और ये सारे पॉइंट्स
हैं। नेपाल में अर्थक्वेक आया था। आपको पता है 2015 में। तो इंडियन एयरफोर्स गई थी वहां पर। इंडियन एयरफोर्स के Mi7
हेलीकॉप्टर्स ने काफी सारी सॉर्टेज करी वहां पर और एवकुएट किया लोगों को। रिलीफ मटेरियल को सेंड किया गया। देन सार्क
डिजिस्टर मैनेजमेंट सेंटर भी है यहां पर जो प्रोवाइड करता है टेक्निकल सपोर्ट एंड डिजास्टर प्रोपेडनेस एंड रिसोंस ऑफ़ हमने
श्रीलंका की हेल्प भी करी है और बांग्लादेश की भी ऐसे हेल्प करी है। देन अगर हम कोविड-19 की बात करें तो हमने
नेपाल को वैक्सीन दी है। बांग्लादेश को वैक्सीन दी है। और अगर आप राइट नाउ देखेंगे तो इकोनमिक क्राइसिस चल रहा है ऑल
ओवर दी वर्ल्ड। तो हमने जो है यूरिया भी दिया है नेपाल को और हमने डीजल भी जो है नेपाल को दिया है। तो इससे हमें पता लगता
है कि इंडिया जो है अपनी नेबरिंग कंट्रीज की हेल्प करता है। हर चाहे वो कोविड-19 हो चाहे डिजास्टर हो या फिर एनर्जी क्राइसिस
में उनकी हेल्प करना हो। राइट? तो ये सारी चीजें तो हैं। लास्ट में कंक्लूजन देख तो इंडिया पाकिस्तान पॉलिटिकल टेंशन अफेक्ट।
देखिए हमने हर चीज के बारे में बात करी। बट सार्क का मेंबर तो पाकिस्तान भी है और पाकिस्तान के साथ हमारे रिलेशन अच्छे नहीं
है और बांग्लादेश के साथ भी आप देख सकते हैं कि टर्मल चलता रहता है। देन इंट्रा रीजनल ट्रेड इन सार्क इज़ वेरी लो। ओनली 5%
ऑफ इट्स टोटल ट्रेड। सिर्फ 5% ऑफ इट्स टोटल ट्रेड जो है व्हाट इज़ वेरी लो। ओनली 5% ऑफ इट्स टोटल ट्रेड। ओनली 5% ऑफ इट्स
टोटल ट्रेड। व्हाइल इन अदर रीजनल ब्लॉक्स लाइक आशियान अगर आप बात करें यूरोपियन यूनियन। यहां पर जो ट्रेड है एक दूसरी
कंट्रीज के बीच मेंबर्स के बीच में वो कितना है? 25 टू 50% है और यहां पर सिर्फ 5% है। देखिए नेपाल, भूटान, श्रीलंका और
इंडिया बहुत कम ट्रेड हो रहा है। राइट? तो हमें इसे ट्रेड को बढ़ाने की जरूरत है। यही जो है फाइनल कंक्लूजन। चलिए अब हम
पढ़ते हैं आशियान को एसोसिएशन ऑफ साउथ ईस्ट एशियन नेशन। तो यहां पर पहले 10 मेंबर्स थे और अभी न्यू मेंबर जो है ऐड
हुआ है। राइट? कौन है? तिमोर लिस्टे। राइट? तो यहां पर टोटल 11 मेंबर्स हो चुके हैं। देन ये जो आशियान है ये एक रीजनल
ऑर्गेनाइजेशन है फॉर्म्ड इन 1967 बैंकॉक डिक्लेरेशन के अंदर टू प्रमोट इकोनॉमिक ग्रोथ सोशियो कल्चर डेवलपमेंट एंड रीजनल
पीस। और अगर हम सार्क की बात करें तो हम अभी पढ़कर आए थे वो भी इकोनॉमिक ग्रोथ सोशियो कल्चर और रीजनल पीस के लिए बना था।
तो यहां पर एक जीडी का टॉपिक आएगा जहां पर बोला जाएगा आसियान सार्क जी20। तो ये सारे जो ग्रुप हैं वो क्यों बनाए जाते हैं? लीड
होगी डिफेंस के लिए। राइट? डिफेंस और सिक्योरिटी के लिए या फिर इकोनॉमिक के लिए, सोशल कल्चर। तो ज्यादातर जो पॉइंट है
वो किस पर आएंगे? इकोनॉमिक, सोशियो कल्चर और रीजनल पीस पे। राइट? ठीक है? तो हम आगे पॉइंट्स देखते हैं जिससे हमें और क्लेरिटी
होगी। तो देखिए इसके जो मेंबर कंट्रीज हैं ये सारे लिखे हैं। अब ये याद कैसे होंगे? तो हम निमोनिक बना सकते हैं फॉर एग्जांपल
पीवीएसएम। तो पीवीएसएम आपको पता होगा। राइट? परम विशिष्ट सेवा मेडल तो यह हमारी आर्म्ड
फोर्सेस में दिया जाता है। तो देखिए फिलीपींस, वियतनाम, सिंगापुर और मलेशिया तो और एम से आप म्यांमार भी याद रख सकते
हैं। तो ऐसे पीवीएसएम से याद रख सकते हैं। और आगे आप इंड भी लिख सकते हैं। इंडिया तो पीवीएसएम इंडिया में दिया जाता है। तो इंड
से आपको इंडोनेशिया भी मिल गया। देखिए या फिर आप लिख सकते हैं कि पीवी सिंधु। राइट? कहां की है? इंडिया की वेंटू, थाईलैंड,
मलेशिया, ब्रूनोई, कंबोडिया इस तरीके से। तो देखिए फिलीपींस वियतनाम एस सिंस सिंध से सिंगापुर हो गया देन इंड यहां से बनता
है इंडोनेशिया यहां से भी इंडोनेशिया निकाल सकते हैं तो इस तरीके से कोई भी निमोनिक आप बना सकते हैं और याद रख सकते
हैं ठीक है टर्म्स को जो हेड क्वार्टर है देखिए वो कहां पर है जकार्ता इंडोनेशिया के अंदर है और आशियन मतलब पूरा एशिया नहीं
होता है सिर्फ और सिर्फ साउथ ईस्ट एशियन कंट्रीज ये वाली राइट तो ये साउथ ईस्ट एशिया हुआ तो वो कंट्रीज हैं ये चलिए आगे
देखते हैं अब हम अब क्वेश्चन आता है कि आशियन फॉर्म क्यों हुआ सार्क में हमने देखा था कि जितनी भी नेबरिंग कंट्री थी
इंडिया की वो सारे इकोनमी ग्रो करना चाहते थे। रीजनल पीस चाहते थे। स्टेबिलिटी चाहते थे। सोशियो कल्चर रिलेशन था। पर आशियान
क्यों बना? तो देखिए जो ये आशियान कंट्री थी यहां पर जो कॉलोनियल एक्सप्लॉयटेशन बहुत ज्यादा हुआ। यहां पर ब्रिटिश ने राज
करा और आपको पता है जब ब्रिटिश राज करते थे। बहुत ज्यादा एक्सप्लॉयटेशन करते थे। तो यहां पर देखो डच ने, फ्रेंच ने और
जापानीज़ ने भी रूल करा है। तो सिमिलरली ये सारी कंट्रीज भी बहुत रिच थी। बट इनको भी जो है एक्सप्लइट किया गया, लूटा गया बहुत
ज्यादा। देन सेकंड यहां पर क्या था? इंपैक्ट ऑफ वर्ल्ड वॉर टू। तो आपने देखा है वर्ल्ड वॉर टू में जो है साउथ ईस्ट
एशियन नेशन इनवॉल्व थे। देन इनफ्लुएंस ऑफ कोल्ड वॉर कॉन्फ्लिक्ट्स आपने देखा है वियतनाम वॉर हो यूएसए यूएसएस आर
इनफ्लुएंस। तो इन सब रीजन की वजह से जो एक्सप्लइटेशन हुआ है इन सारी कंट्रीज का वहां पर पावर्टी बहुत ज्यादा बढ़ चुकी है।
इकोनमी बहुत ज्यादा वीक थी। नेशन को बिल्ड करने में चैलेंजेस थे और पॉलिटिकल इनस्टेबिलिटी थी। तो इन सारी चीजों को डील
करने के लिए बनाया गया आशियान। ठीक है? चलिए अब ऑब्जेक्टिव्स को देख लेते हैं। वहां पर हमने कोपरेशन पढ़ा था सार्क के
अंदर। जहां पर हमने क्या देखा था? एजुकेशन कोपरेशन, स्पेस कोपरेशन और स्पेस कोपरेशन के अंदर हमने पढ़ा था जीसेट नाइन सैटेलाइट
के बारे में। फिर हमने क्या पढ़ा था? एजुकेशन। देन हमने पढ़ा था एग्रीकल्चर कोपरेशन क्लाइमेट चेंज रेिलिएंट क्रॉप्स
बनाई गई थी। और भी हमने सेक्टर्स पढ़े थे। तो सिमिलरली यहां पर भी जो ऑब्जेक्टिव है वो कौन सा? इकोनॉमिक है। तो वहां पर भी
इकोनॉमिक था। यहां पे भी है। तो यहां पर देखिए आशियन फ्री ट्रेड एग्रीमेंट साइन किया गया 1992 के अंदर। जहां पर जो है
टेरिफ को 0 टू 5% रिड्यूस किया गया। जिसकी वजह से जो ट्रेड बढ़ा और ट्रेड कितना हो गया देखिए 4 ट्रिलियन तक पहुंच चुका था तो
वहां पर भी जो है साफ्टा साइन किया गया था तो वहां पर भी जो है साफ्टा साइन किया गया था जिसके अंदर जो है फ्री ट्रेड एग्रीमेंट
था जहां पर 0 टू 5% ही टेरिफ चार्ज किया जा रहा था तो मतलब दोनों आशियान ने और सार्क ने दोनों ने जो है ये एग्रीमेंट
साइन करा फ्री ट्रेड एग्रीमेंट ठीक है और वहां पर तो वहां पर चैलेंज किया था कि ओनली 5% ट्रेड हो रहा था और हमने पढ़ा था
यहां पर कितना होता है 25 से 50 के बीच में तो ये हम रिलेट करके पढ़ रहे हैं ठीक है तो यहां पर इकोनॉमिक ग्रोथ क्यों हो
रही है क्वेश्चन आता है तो यहां यहां पर ग्रोथ इसलिए हो रही है क्योंकि 68 करोड़ पापुलेशन है। और आप देखेंगे तो यह जो
पॉपुलेशन है यहां पर क्या है? स्किल्ड लेबर्स हैं, चीप लेबर्स हैं। एंड लोअर कॉस्ट देन चाइना है। तो इसकी वजह से क्या
है? यह बहुत ज्यादा फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट अट्रैक्ट करते हैं। आपने देखा होगा वियतनाम में कितनी सारी चीजें
मैन्युफैक्चर होती हैं। nki pमा, एडडास और उसके बाद फोंस मैन्युफैक्चर होते हैं वहां पर। राइट? तो यही रीजन है कि ये बहुत
ज्यादा जो है एफडीआई को अट्रैक्ट करते हैं। देन इंफ्रास्ट्रक्चर देन हम देखें तो इंडोनेशिया जो है वो ईवी
बैटरीज प्रोड्यूस करता है। मलेशिया इंडिया भी जो है मलेशिया से पाम ऑयल बहुत ज्यादा खरीदता है। वियतनाम के अंदर रेयर अर्थ
पोटेंशियल भी है। तो ये कुछ रीज़ंस है। और जो यूएसए है राइट? और जो यूएसए है उसका और जो यूएसए है उसका स्ट्रांग टाइल्स है।
किसके साथ? साथ सिंगापुर के साथ फाइनेंस में टेक में और इंफ्रास्ट्रक्चर और आप देखेंगे तो चाइना का भी जो है बेल्ट एंड
रोड इनिशिएटिव भी है वह यहां पर भी है आशियन कंट्रीज में इसलिए जो है इनकी इकॉनमी अच्छा कर रही है चीप लेबर एफडीआई
अट्रैक्ट कर रहे हैं बहुत ज्यादा और ये सब चीजें तो हैं ही चलिए आगे देखें तो सोशियो कल्चर कोऑपरेशन के अंदर तो यहां पर क्या
है प्रमोट रीजनल टूरिज्म थाईलैंड मलेशिया सिंगापुर जॉइंट सर्किट राइट वीजा फैसिलेशन विद इन तो यहां पर क्या होता है कोई भी
आशियन मेंबर कंट्री का कोई सिटीजन है वो किसी और कंट्री में जाता है सपोज कोई मलेशिया का सिटीजन है वो शायद थाईलैंड के
अंदर जाता है तो वहां पर उसको वीजा कैरी करने की जरूरत जरूरत नहीं है। मतलब यह डिपेंड करता है शॉर्ट टर्म वीजा फ्री होता
है। मतलब यह डिपेंड करता है लाइक 14 टू 30 डज़ के बीच में आपको फ्री वीजा मिल जाएगा। तो, यह इसकी वजह से जो है टूरिज्म बहुत
ज्यादा बड़ा है और यह सर्किट तो डेवलप हो ही रहा है। देन यहां पर डिजास्टर मैनेजमेंट सेंटर है जो कि जकार्ता
इंडोनेशिया के अंदर है। राइट? कि हेड क्वार्टर भी जकार्ता इंडोनेशिया के अंदर क्या है? अगर सुनामी आती है, कोई
अर्थक्वेक आता है और कोई भी टाइफूंस वगैरह आते हैं तो यहां पर ये सारी कंट्री एक दूसरे की हेल्प करने में लग जाती है। इनकी
सारी नेवीज़ जो है जॉइंट ऑपरेशन ल्च करती है और जो है हेल्प करती है। फिलीपींस में टाइफूंस आए तो यहां पर इंप्लीमेंट किया
गया और इंडोनेशिया अर्थक्वेक में भी। देन हम पढ़ते हैं आशियन एजुकेशन एंड यूनिवर्सिटी। तो हमने सार्क में भी पढ़ा था
एजुकेशन के बारे में कि जो सार्क यूनिवर्सिटी है न्यू दिल्ली के अंदर कि वहां पर स्कॉलरशिप प्रोवाइड की जाती है
सार्क मेंबर के बच्चों को। ठीक है? स्टूडेंट एक्सचेंज प्रोग्राम की अगर हम बात करें तो यहां पर स्टूडेंट स्टडी इन
अनदर आशियन कंट्री। फॉर एग्जांपल आप देखेंगे वियतनाम का स्टूडेंट जो है एक सेमेस्टर जो है वो कहां पर पड़ता है?
थाईलैंड के अंदर पड़ता है। फिर एक वियतनाम के अंदर पड़ता है। तो यहां पर क्या है? कोलैबोरेट हो रहा है रिसर्च प्रोजेक्ट्स
में। फोकस क्या है? इंजीनियरिंग बिज़नेस एनवायरमेंट। तो आशियन एजुकेशन यूनिवर्सिटी है। और यहां पर क्या है? स्टूडेंट
एक्सचेंज प्रोग्राम भी है। जहां पर आप एक सेमेस्टर अपनी कंट्री और दूसरा दूसरी आशियन कंट्री में पढ़ सकते हैं। ठीक है?
तो देन यहां पर क्या आता है? मैरिटाइम सिक्योरिटी। मलका स्टेट पेट्रोल। तो आप देख रहे हैं चाइना का जो प्रेजेंस है मलका
स्टेट में वह ग्रो करता जा रहा है। तो इसलिए इसे काउंटर करने के लिए जो है यहां पर जो नेवीज़ हैं वो जॉइंट तो यहां पर जो
नेवीज़ हैं वो जॉइंट डील करती है। एक्सरसाइज करती है। फॉर फॉर एग्जांपल आप देख सकते हैं यहां पर जो है जॉइंट नेवल
एक्सरसाइज होती है। इंडिया के साथ भी यूएस जापान और यहां पर जो है जो यह हमारी जॉइंट नेवी है आशियन कंट्री की वो ट्रैक करती है
शिप्स को पाइरेसी को एयर सर्वििलेंस होता है ओवरमलका स्टेट और इनका एक इनिशिएटिव भी है आईज इन द स्काई इनिशिएटिव जहां पर यह
रियल टाइम डाटा शेयर करते हैं बिटवीन नेवीज़ तो सपोज़ करिए फिलीपींस की नेवी ने अगर कुछ देखा है तो वो इंडोनेशिया की नेवी
के साथ भी डाटा शेयर करेगी मलेशिया की नेवी के साथ तो यहां पर जो है एक कोलैबोरेशन रहता है देन सोशियो कल्चर की
बात करें तो जब कोविड-19 आया था तो एक दूसरे की यहां पर जो है कंट्रीज ने हेल्प करी देन इंडिया का रिलेशन अगर आसियान के
साथ देखें तो हमारा ट्रेड है इनके साथ कितना $10 टू$30 बिलियन डॉलर्स का और हमने जो है इनके साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट साइन
कर रखा है। यह एक बहुत इंपॉर्टेंट पॉइंट है। हमने देखा है कि 2 ट्रिलियन डॉलर हमने टारगेट सेट रखा है बाय 2030। तो ऐसे जो
फ्री ट्रेड एग्रीमेंट है हेल्प करेंगे इंडिया को। देन इंडिया विद इंडिविजुअल कंट्रीज की अगर हम बात करें तो सिंगापुर
के साथ जो है हमारा फाइनेंस और फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट। मलेशिया से हम पाम ऑइल खरीदते हैं। थाईलैंड के साथ हमने देखा
टूरिज्म। हमारा काफी ज्यादा टूरिज्म है। थाईलैंड। तो कनेक्टिविटी की बात करें तो इंडिया, म्यांमार, थाईलैंड एक हाईवे बन
रहा है। राइट? तो इसके बारे में भी आप बता सकते हैं। देन अगर हम चैलेंजेस की बात करें तो ह्यूज गैप बिटवीन रिच एंड पुअर।
फॉर एग्जांपल अगर सिंगापुर में देखें तो पर कैपिटा इनकम पता है वहां पर कितनी है? $900
वेयर एज अगर आप देखेंगे लाओस और कंबोडिया में सिर्फ $3000 हैं। तो इससे हमें क्या पता लगता है कि अराउंड 30 टाइम्स गैप है
तो बहुत ज्यादा गैप होने की वजह से जो है ये एक चैलेंज क्रिएट करता है बिकॉज़ ऑफ़ दिस ह्यूज गैप बिटवीन द रिच एंड पुअर मेंबर्स।
तो यहां पर ये तो यहां पर जो है ये एक रिफ्ट जो है क्रिएट करता है क्योंकि सिंगापुर में पोर्ट्स हैं। लॉजिस्टिक्स
अच्छा है। वेयर एज़ म्यांमार में देखेंगे तो नहीं है। तो कैसे आप ट्रेड बढ़ाएंगे? देन साउथ चाइना डिस्प्यूट हमने देखा है।
वियतनाम और फिलीपींस का भी टेरिटोरियल डिस्प्यूट है चाइना के साथ। चाइना जो है कंटीन्यूअसली आर्टिफिशियल आइलैंड बना रहा
है। फिशिंग कॉन्फ्लिक्ट्स अफेक्टिंग आशियन कंट्रीज लाइवलीहुड। तो ये कुछ चैलेंजेस हैं जो आशियन को ओवरकम करते हैं इन ऑर्डर
टू मेक दी ग्रोथ। देन पॉलिटिकल इंस्टेबिलिटी भी हो रही है। अगर पहले क्या था? वहां पर प्रॉपर गवर्नमेंट थी आंगसुकी।
बट वहां पर क्या हुआ? मिलिट्री कूप हुआ। मिलिट्री आ गई वहां पर। मिलिट्री का रूल चल रहा है। अब देन थाईलैंड के अंदर भी
फ्रीक्वेंट पॉलिटिकल इनस्टेबिलिटी चलती है। और चाइना तो अपना बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव तो इन्फ्लुएंस कर रहा है आशियान
के अंदर। तो अगर आशियान के अंदर चाइना का इन्फ्लुएंस होगा तो ये कंट्रीज तो चाइना के खिलाफ ही हैं। और आप कुछ पॉइंट्स ऐड कर
सकते थे किसके अंदर? इंडिया का रिलेशन विद आशियन कंट्री कि हमने ब्रह्मोस जो है फिलीपींस को सेल करी। तो आप बता सकते थे
कि हमने ब्रह्मोस जो है वो फिलीपींस को सेल करी और वो ऑपरेशनल भी होने वाली है। सेलिंग ब्रह्मोस मिसाइल हमने फिलीपींस को
दी। और आप देखेंगे तो इंडोनेशिया के साथ और मलेशिया के साथ भी हमारी बात चल रही है। सून दे आर आल्सो करते हैं G20 के बारे
में। राइट? सो देखिए G20 जो है वो ग्रुप ऑफ 20 है इसलिए इसे G20 कहा जाता है। अब इस ग्रुप ऑफ 20 में कौन सी कंट्रीज और
कॉन्टिनेंट आ जाते हैं? तो देखिए अफ्रीकन यूनियन यानी कि अफ्रीकन कॉन्टिनेंट्स के अंदर जो कंट्रीज आती हैं सिमिलरली
यूरोपियन यूनियन यानी कि यूरोपियन कंट्रीज जो हैं और 19 कंट्री। तो इसमें कंट्रीज के नाम याद रखने की जरूरत नहीं है। बस ये याद
रखिए यूरोपियन यूनियन, अफ्रीकन यूनियन और क्या इंडिया इसका पार्ट है? तो यस इंडिया इसका पार्ट है। और क्या जो मेजर सुपर पावर
हैं फॉर एग्जांपल रशिया हो या फिर चाइना या फिर यूएसए हो तो क्या ये इनका पार्ट है? तो बिल्कुल G20 का पार्ट है। ठीक है?
तो देखिए रिप्रेजेंट्स 85% ऑफ ग्लोबल जीडीपी। मतलब अगर हम इन G20 कंट्रीज को मिला दें तो 85% ऑफ ग्लोबल जीडीपी बनेगी
और 75% ऑफ ग्लोबल ट्रेड इन्हीं ग्रुप ऑफ 20 द्वारा किया जाता है। एंड 23 थर्ड ऑफ वर्ल्ड पॉपुलेशन तो यानी कि अगर हम
बोलेंगे मोस्ट पावरफुल ग्रुप कौन सा हुआ? G20 हुआ इन टर्म्स ऑफ इकॉनमी। राइट? इट इज़ आल्सो वन ऑफ़ द मोस्ट पावरफुल ग्लोबल
इकोनॉमिक प्लेटफार्म। अब क्वेश्चन आता है ये G20 क्यों फॉर्म हुआ? राइट? तो देखिए 1990 में एशियन फाइनेंशियल क्राइसिस आई।
ग्लोबल इनस्टेबिलिटी हुई। आपने देखा है कि इंडिया के अंदर बहुत ज्यादा इनस्टेबिलिटी थी। हमारे पास सिर्फ 1 बिलियन का फॉरेन
रिजर्व बचा था। और हमने देखा कि हम एलपीजी जो रिफॉर्म्स लेके आए थे लिबरलाइजेशन, प्राइवेटाइजेशन, ग्लोबलाइजेशन। अभी हम
पढ़कर आए हैं उसके बारे में। ठीक है? तो देखिए इसलिए इस फाइनेंशियल क्राइसिस से डील करने के लिए जो है नीड फॉर
कोऑर्डिनेशन बिटवीन दी मेजर इकॉनमीज़ और 1990 में जो है हम फॉर्मेशन करते हैं G20 का। तो यहां पर देखेंगे स्टार्टेड एज अ
मीटिंग ऑफ फाइनेंस मिनिस्टर एंड सेंट्रल बैंक गवर्नर्स। तो यहां पर जो है फाइनेंस मिनिस्टर आया करते थे सेंट्रल बैंक और
पॉलिसी बनाया करते थे कि कैसे हम जो है ये जो क्राइसिस हैं इससे डील करें। क्या पॉलिसीज बनाएं? तो ये इस तरीके से चलता था
ऑन एंड ऑफ। बट जब 208 आया तब जाके मेजर सेटबैक लगा। बिकॉज़ 208 में एक बहुत मेजर फाइनेंशियल क्राइसिस आया था। राइट? उसके
बाद से जो है ये सब समिट जो है वो हर साल होने लगी। एनुअल समिट स्टार्टेड राइट और यहां पर जो है बड़े लीडर्स आने लग गए। तो
देखिए इसके अंदर दो इंपॉर्टेंट चीजें हैं। एक है वर्ल्ड बैंक और दूसरा है इंटरनेशनल मॉनिटरी फंड। राइट? तो वर्ल्ड बैंक भी जो
है लोन प्रोवाइड करता है कंट्रीज को। सिमिलरली इंटरनेशनल मॉनिटरी फंड भी जो है लोन प्रोवाइड करता है।
तो देखिए यहां पर G20 काम कैसे करता है? शेरपा ट्रैक एंड फाइनेंस ट्रैक। तो फाइनेंस टैग तो हम अभी पढ़कर आए थे कि
फाइनेंस मिनिस्टर प्लस सेंट्रल बैंक के जो गवर्नर्स हैं उनकी यहां पर मीटिंग होती है। जहां पर यह बात करते हैं फाइनेंसियल
स्टेबिलिटी के बारे में, डेप्ट के बारे में, इनफ्लेशन के बारे में। राइट? तो देखिए जब भी हमें लोन लेना होता है। राइट?
तो हम क्या है? किससे लेते हैं? वर्ल्ड बैंक से लेते हैं। इंटरनेशनल मॉनिटरी फंड से लेते हैं। तो ये जो हमारे फाइनेंस
मिनिस्टर है वो वहां पर जाते हैं। वहां पर लोोंस के बारे में बात होती है। कितने परसेंट इंटरेस्ट है? कैसे डेप्ट है? डेप्ट
को कैसे कंट्रोल करना है? तो वो सारी चीजें हैं। और फर्स्ट क्या है? शेरपा ट्रैक है हैंडल्स डेवलपमेंट क्लाइमेट
हेल्थ एजुकेशन ईच कंट्री सेंड्स अ शेरपा पर्सनल रिप्रेजेंटेटिव तो हमारे इंडिया से कौन है अमिताभ कांत राइट जो नीति आयोग के
सीईओ थे तो वो यहां पर शेरपा रैक है देन यहां पर प्रेसिडेंसी सिस्टम कैसा है देखिए 2023 में इंडिया ने होस्ट करा था जी20
समिट फिर [संगीत] 2024 में ब्राजील तो यह साल जो है प्रेसिडेंसी चेंज होती है राइट यहां पर कोई परमानेंट हेड क्वार्टर नहीं
है राइट प्रेसिडेंसी कंट्री ऑर्गेनाइज्ड मीटिंग जैसे इंडिया ने ऑर्गेनाइज करी थी। तो चलिए अब बात करते हैं कुछ अचीवमेंट्स
के बारे में। तो देखिए हमने देखा 208 में एक बहुत ज्यादा ग्लोबल फाइनेंसियल क्राइसिस आया था। अब इसके बारे में पढ़ते
हैं कि फाइनेंसियल क्राइसिस क्या था? तो यहां पर जो मेजर बैंक्स थे वो सारे कोलैप्स हो चुके थे। ये क्राइसिस था। यह
कहां से स्टार्ट हुआ? 208 में यूएसए से स्टार्ट होता है। जहां पर हाउसिंग और बैंकिंग सेक्टर जो था वो कोलैप्स हो गया।
और आपको पता है अगर बैंक फेल हो जाते हैं तो अनइंप्लॉयमेंट बहुत ज्यादा बढ़ती है। कैसे? देखिए बैंक जो है लोन प्रोवाइड करता
है चीप रेट में बिनेसेस को। बिज़नेस जो है वह उस लोन से जो है वह आगे जाकर क्या करते हैं? आउटपुट प्रोड्यूस करते हैं। बट अगर
लोन ही नहीं मिलेगा या फिर लोन बहुत ज्यादा हाई रेट पर मिलेगा तो बिज़नेस ग्रोथ कर नहीं सकता और बिज़नेस ग्रोथ नहीं करेगा
तो क्या है? जॉब्स भी नहीं होएगी। तो इसलिए जब बैंक कोलैप्स हुए फॉर एग्जांपल आप देखेंगे लेमनस ब्रदर तो ये यहां पर
कोलैप्स हुआ। सिमिलरली और भी बहुत सारे बैंक कोलैप्स हुए। तो इसकी वजह से जो है यहां पर बहुत ज्यादा फाइनेंसियल क्राइसिस
आ चुका था। लोगों को लोन नहीं मिल रहा है। लोन मिल रहा है तो बहुत ज्यादा रेट पर मिल रहा है। और अगर लोन नहीं मिलेगा तो बिजनेस
कैसे ग्रो करेंगे? बिजनेस के पास अगर कैपिटल ही नहीं होगा तो वो इन्वेस्टमेंट कैसे करेगा? राइट? और जॉब्स ये यूएसए से
स्टार्ट हुआ था फिर यूरोप में और इंडिया तक जो है ये क्राइसिस आया क्योंकि इंडिया भी जो है यहां पर बहुत सारी कंट्रीज जो है
वो यूएसए से भी लोन लेती थी जो यूएसए बैक बैंक्स थे। बट यहां पर जैसे ही क्राइसिस आया तो उन कंट्रीज को भी सफर करना पड़ा।
तो इस प्रॉब्लम से निकलने के लिए क्या किया? G20 कंट्रीज ने मिलकर जो है इंजेक्ट करा 5 ट्रिलियन इनू ग्लोबल इकॉनमी। अब
इसका क्या मतलब है? तो देखिए इन सब ने पैसा इकट्ठा करा और बैंक्स को दिए जो बैंक्स पूरी तरीके से कोलैप्स हो चुके हैं
जिनके पास पैसा नहीं है अब देने को। और ये बैंक कोलैप्स कैसे हुए थे? देखिए जब आप लोन देते हैं एज अ बैंक और अब वो लोन जो
है आप रिकवर नहीं कर पा रहे। क्वेश्चन आएगा कि बैंक कोलैप्स कैसे हो जाते हैं? देखो देखिए बैंक का काम क्या है? वो आपको
लोन देता है और उस पे इंटरेस्ट चार्ज करता है। तो ऐसे वो प्रॉफिट बनाते हैं। तो अब यहां पर जो बैंक ने लोन दिए हुए थे वो
उनसे रिकवर ही नहीं हुए। राइट? थे जिन्होंने लोन लिया था वो उसे पे नहीं कर पाए। तो जब लोन नहीं पे कर पा रहे तो
टैक्स भी नहीं मिले। तो यानी कि बैंक्स को ना टैक्स मिला ना उनका पैसा मिला। तो वो कोलैप्स करते जा रहे थे। तो इसलिए जो
मिलकर जो है 5 ट्रिलियन पैसा जो है इंजेक्ट करा गया बैंक्स के अंदर। अब जैसे ही बैंक्स के पास 5 ट्रिलियन पैसा आया तो
बैंक्स ने क्या करा? जितने भी बिजनेसेस थे उनको इन्होंने चीप रेट पर दोबारा से लोन देना स्टार्ट कर दिया और जैसे ही बिजनेस
को लोन मिलना शुरू हुए उन्होंने फिर से अपना बिजनेस जो है स्टार्ट करा और जैसे ही बिज़नेस स्टार्ट हुआ आउटपुट बढ़ा फैक्ट्री
लगी तो जॉब्स जो है फिर से जो है डेवलप हुई और सिमिलरली लोगों ने जो है घर खरीदना शुरू कर दिया। जब पैसा आएगा तो आप घर भी
खरीदेंगे। तो इससे एक इकोसिस्टम डेवलप हुआ। तो आप जरूर बताइए कि G20 ने जो है कैसे फाइनेंसियल क्राइसिस को हैंडल करा
बाय इंजेक्टिंग 5 ट्रिलियन डॉलर्स बाय इंजेक्टिंग 5 ट्रिलियन राइट देन यहां पर जैसे-जैसे टाइम बीता और क्या आया 2020 से
202 अब यहां पर कोविड आ गया तो सिमिलरली कोविड के अंदर भी क्या हुआ हमने देखा पूरी तरीके से बिजनेस बंद हो चुके हैं हमने
देखा पूरी तरीके से बिजनेस बंद हो चुके थे और यहां पर अब जब बिजनेस नहीं होगा तो अब कैसे डेप्ट देंगे तो देखिए जैसे-जैसे समय
बीता हमने देखा कोविड-19 आया और कोविड 19 में पूरी तरीके ऐसे बिज़नेसेस जो बंद हो चुके हैं और बिज़नेस अगर बंद हो चुके हैं
तो वो प्रॉफिट कैसे कमाएंगे? प्रॉफिट नहीं कमाएंगे तो अपना लोन कैसे पे करेंगे? तो ये जो बड़े बैंक्स थे राइट यूएस के बैंक्स
यूरोप के बैंक तो इन्होंने क्या करा? डेप्ट को माफ़ कर दिया। राइट? कितने? 13 बिलियंस का जो पेमेंट है, डेप्ट था वो
इन्होंने जो है सस्पेंड कर दिया। और इससे जो 73 डेवलपिंग कंट्रीज थी उनको हेल्प मिली क्योंकि उन सब ने लोन ले रखा था। तो
सस्पेंडेड बिलियंस ऑफ़ डेप्ट पेमेंट। तो हमने देखा पहला चाहे वो ग्लोबल फाइनेंसियल क्राइसिस 208 को डील करना हो या 1990 1990
[नाक से की जाने वाली आवाज़] की हो या फिर कोविड हो तो यहां पर जो है हेल्प करी देन ग्लोबल इनफ्लेशन कोऑर्डिनेशन पॉलिसी
कोऑर्डिनेशन टू कंट्रोल द इनफ्लेशन अवॉयड ट्रेड रेस्ट्रिक्शन इंटरेस्ट लाइक इंटरेस्ट ह लेस मनी मार्केट डवर्सिफाई
एनर्जी एक्सपोर्ट चलिए देखते हैं और स्ट्रेंथनिंग आईएमएफ इंटरनेशनल मॉनिटरी फंड तो यहां देखिए आईएमएफ के जो फंड है वो
इनक्रीस कर दिए गए कहां तक 750 बिलियन तक ठीक है G20 ने जो है बैंक्स को स्ट्रांगर बनाया और बैंक्स दोबारा तरह से फेल ना हो।
हेल्प करा स्ट्रगलिंग कंट्रीज को टू अवॉइड कोलैप्स। कंट्रीज लाइक आइलैंड, ग्रीस, रिसीव्ड फाइनेंसियल सपोर्ट। अब देखिए
बैंकिंग रिफॉर्म्स में क्या हुआ कि प्रॉब्लम थी 208 में बैंक्स वर टेकिंग टू मच रिस्क। बैंक्स वर टेकिंग टू मच रिस्क।
तो देखिए बैंक क्या करता था? ऐसे बिनेसेस को लोन दे देता था या फिर कंट्री को जहां से रिकवरी बहुत मुश्किल है। तो ऐसी चीजों
को भी जो है यहां पर अब डील करने के लिए क्या किया गया कि बैंक मस्ट कीप एक्स्ट्रा सेफ्टी मनी और कैपिटल। बैंक मस्ट अवॉयड
रिस्की लोंस। देखिए लेमनस ब्रदर बिग बैंक्स लाइक लेमनस ब्रदर कोलैप्स हुए थे। बट अब नया रूल में क्या करा कि बैंक मस्ट
कीप मोर रिजर्व मनी। तो दोबारा से जो है यह बैंक ग्रो हुए। और इंडिया के अंदर अगर हम बात करें आरबीआई मेड स्ट्रिक्ट रूल्स।
और अगर आप इंडियन बैंक्स की भी कंडीशन देखेंगे तो वो काफी स्टेबल है। तो चलिए एरियाज देख लेते हैं। एरिया ऑफ़ कॉपरेशन,
ट्रेड एंड इकॉनमी, एग्रीकल्चर, हेड, एंटी टेररिज्म और एंटरप्रेन्योरशिप एंड इनोवेशन। ट्रेड की अगर हम बात करें तो
देखिए यहां पे एक एंटी प्रोटेक्शनिज्म का कांसेप्ट है। डोंट ब्लॉक द ट्रेड। जैसे इंडिया जो है 100% ट्रेड लगाता है चाइनीस
प्रोडक्ट पर। तो यहां पर चाइना ब्लॉक इंडियन मेडिसिन। तो यानी कि दोनों एक दूसरे के ट्रेड को ब्लॉक कर रहे हैं। बट
G20 कहता है कि ट्रेड को इस तरीके से ब्लॉक मत करिए। ट्रेड को स्टॉप मत करिए। डोंट ब्लॉक ईच अदर एंड कीप ट्रेड ओपन। देन
यहां पर वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन रिफॉर्म पुश। तो यहां देखिए जैसे-जैसे हमारी इकॉनमी ग्रो कर रही है। हमें ट्रेड
भी ज्यादा से ज्यादा बढ़ाना है। तो यहां पर G20 क्या है? मॉडर्नाइजेशन ट्रेड रूल लेके आए। इसने कहा कि मॉडर्नाइजेशन वे में हम
ट्रेड करते हैं। कैसे? देखिए ऑनलाइन शॉपिंग अक्रॉस कंट्रीज। तो यहां पर जब अगर आप कोई यूएसए से खरीदना चाहते हैं तो इनका
कहना है कि कम से कम टैक्स लगाइए। फास्ट कस्टम प्रोसेस पहले क्या होता था कि अगर कोई भी ट्रक सपोज अगर कनाडा से कोई ट्रक
यूएसए जा रहा है तो वहां पर परमिट के लिए क्या दो-ती दिन लग जाते बट अब इन मॉडर्नाइजेशन की वजह से क्या है कि ऑनलाइन
कर दिया गया है। ऑनलाइन डॉक्यूमेंटेशन सिस्टम हो गया जिसकी वजह से उनको वेट नहीं करना पड़ता है। नाउ साथ-साथ जैसे ही हमारी
इकॉनमी और ट्रेड बढ़ रहा है तो इन्होंने कहा कि ग्रीन प्रोडक्ट का ट्रेड करिए। अगर आप कोई इंडस्ट्री सेटअप करते हैं तो वहां
पर क्या है? ग्रीन फ्यूल का यूज़ करिए। देन ट्रेड डिस्प्यूट को फिक्स करना हो या फिर ग्रीन एनर्जी को यूज़ करना हो तो उन
सब चीजों पे भी है। पहले इनका फोकस जो था वो ग्रीन एनर्जी पर नहीं था। बट जैसे-जैसे क्लाइमेट चेंज हो रहा है तो इन्होंने इन
चीजों को भी ऐड कर दिया है। चलिए वही बात आ जाती है ऑनलाइन शॉपिंग अक्रॉस कंट्री इफ यू बाय डिजिटल लाइक Netflix और सॉफ्टवेयर
बाय करते हैं तो उस पर आप प्लीज टैक्स मत लगाइए। यही बता रहा है। और देन यहां पर इससे होगा क्या कि देखिए चीपर डिजिटल
सर्विज होगी। देन फास्टर कस्टम्स ट्रक को वेट करना पड़ता था दो से तीन दिन बॉर्डर के ऊपर बट ऑनलाइन डॉक्यूमेंटेशन को पुश
किया गया G20 द्वारा सिंगल विंडो क्लीयरेंस और इसकी वजह से जो ट्रेड कॉस्ट है वो रिड्यूस हुई 14% से। देन कोविड टाइम
सप्लाई चेन इन्होंने कहा कि अपना जो पोर्टफोलियो है डवर्सिफाई करिए। अगर आप रॉ मटेरियल किसी एक पर्टिकुलर कंट्री से
खरीदते हैं तो आप डिपेंडेंट मत होइए। राइट? कंट्री शुड नॉट डिपेंड ऑन ओनली वन कंट्री बिल्ड बैकअप सप्लायर। राइट? देन
ग्रीन प्रोडक्ट ट्रेड। देखिए पहले ओल्ड G20 क्या करता था? फोकस नहीं था उसका एनवायरमेंट पे। पर अब G20 का फोकस है।
एनकरेज ट्रेड इन सोलर पैनल्स, ईवी पार्ट्स। चीपर ग्रीन टेक और फास्टर क्लाइमेट एक्शन होगा। जैसे कि इंडिया जो
है इंपोर्ट करता है सोलर कहां से? चाइना से। तो इसलिए अगर यह सस्ता होगा तो इंडिया को भी फायदा होगा। देन एग्रीकल्चर की अगर
हम बात करें तो एग्रीकल्चर मार्केट इंफॉर्मेशनेशन सिस्टम बनाया गया। यहां पर आपको पता लगता है कि फूड सप्लाई किस
कंट्री के पास क्या है? अवॉयड प्राइस शॉक्स फूड सिक्योरिटी इनिशिएटिव लाया गया एड्रेस्ड ग्लोबल फूड क्राइसिस आफ्टर
यूक्रेन वॉर। राइट? देन मिलिट्स प्रमोशन इंडिया। तो हमने देखा था कि हमारा जो 2023 ईयर था, इसे क्या कहा? इंटरनेशनल ईयर ऑफ़
मिलिट्स। यहां पर अगर हम समरी देखें तो बस यही है कि यहां पर एक एग्रीकल्चर मार्केट इनेशन सिस्टम लाया गया। फूड सिक्योरिटी
इनिशिएटिव के ऊपर बात करी। अगर कोई कंट्री के अंदर फूड सिक्योरिटी या फूड क्राइसिस हो रहा है तो वहां पर सारी कंट्री मिलकर
हेल्प करती हैं। देन हमारे पास एंटी टेररिज्म से रिलेटेड भी आ सकता है। ये आप सारी चीजें पढ़ सकते हैं। एंड
एंटरप्रेन्योरशिप और इनोवेशन पर भी इनका जो है जोर है। चलिए अब बात करते हैं कि G20 की प्रेसिडेंसी हमने 2023 में ली थी।
क्या आपको याद आ रहा है? हमने आईएमए के अंदर क्या पढ़ा था कि हमने आईएमए कॉरिडोर जो अनाउंस करा था वो जी20 के मीटिंग के
दौरान ही करा था इन 2023। राइट? और यहां पर जो था हमारी थीम क्या वसुदेव कुटुंबकम देन यहां पर हमने वुमेन लेड डेवलपमेंट की
बात तो यहां पर हमने वुमेन लेड डेवलपमेंट की बात करी थी कि अगर किसी भी कंट्री को अपनी इकॉनमी डेवलप करनी है तो वुमेन का
डेवलपमेंट होना बहुत जरूरी है। वुमेन का पार्टिसिपेशन इन इकॉनमी बहुत जरूरी है और हमें तो पता ही है आउट ऑफ थ्री ओनली व्हेन
वुमेन इज़ पार्टिसिपेटिंग इन द लेबर फोर्स अकॉर्डिंग टू ग्लोबल मैकजी रिपोर्ट हमने पढ़ा था और देन इंडिया का फोकस जो है
क्लाइमेट एक्शन पर था। सोलर एनर्जी हो और आपने देखा है कि इंटरनेशनल सोलर अलायंस इंडिया ने बनाया है। हमारा जो है नेशनल
हाइड्रोजन प्रोग्राम है। हमारा जो है नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन प्रोग्राम भी है। हम न्यूक्लियर पे भी बहुत ज्यादा एम्फेसिस
दे रहे हैं। तो यस कश्मीर में आपने देखा होगा काफी सारी पिक्चर्स जहां पर डेलीगेट्स जो है वो कश्मीर घूम रहे थे। तो
इससे क्या हुआ? कश्मीर का भी डेवलपमेंट हुआ। तो देन हमने देखा ग्लोबल बायोफ्यूल अलायंस के बारे में लॉन्च बाय इंडिया
इंक्रीज्ड एथेनॉल बिल्डिंग। हमने 25% तो अचीव कर लिया है। हमारा टारगेट अब 80% है और टोटल हमारे 100% तक जाने का सोचा है।
तो इसमें जो है इंडिया और यूएसए और ब्राजील जो मेंबर है। तो आप बायोफ्यूल अलायंस के बारे में जरूर याद रखें। चलिए
अचीवमेंट्स देख लेते हैं। हमने देखा 208 का जो है क्राइसिस इन्होंने सॉल्व करा बाय इंजेक्टिंग 5 ट्रिलियन डॉलर्स है ना
बैंकिंग को दिया इन्होंने। देन कोविड-19 के टाइम पर भी यहां पर जो है 13 बिलियन के आसपास जो है लोन को माफ़ कर दिया गया।
जिससे जो डेवलपिंग कंट्रीज है उनको हेल्प मिली। और अब जो ओल्ड G20 क्लाइमेट पे फोकस नहीं करता था वो क्लाइमेट पे भी फोकस कर
रहा है। टेररिज्म पर भी हम बात कर रहे हैं। राइट? देन अगर हम बात करें चैलेंजेस की तो यहां पर कोई लीगल पावर नहीं है। अगर
कोई कंट्री G20 के नॉर्म्स या पॉलिसी को फॉलो नहीं करती तो आप उसके खिलाफ लीगल एक्शन नहीं ले सकते। डिसीज़ंस आर नॉट
बाइंडिंग। अगर आपको फॉलो करना है तो आप करिए। अदरवाइज़ देयर इज़ नो बाइंडिंग। लैक ऑफ इनफोर्समेंट कंट्रीज मे नॉट फॉलो
कमिटमेंट। जियोपॉलिटिकल टेंशन आप देख रहे हैं राइट नाउ जो चल रही है। देन अगर आप देखेंगे यूएसए, चाइना, रशिया सब G20 के
पार्ट है। बट इन कंट्रीज के अंदर आप देखेंगे तो यूएसए ने क्या रिस्ट्रिक्शन लगा रखा था चाइना के ऊपर। है ना? हमने
देखा है रशिया वर्सेस यूक्रेन के बाद। तो चलिए अब हम बात करते हैं फेलियर्स ऑफ G20 के बारे में। तो देखिए रशिया, यूएसए,
यूरोपियन यूनियन, इंडिया बहुत सारी मेजर पावर्स जो हैं वो क्या है? G20 के पार्ट हैं। बट स्टिल रशिया वर्सेस यूक्रेन हम
सॉल्व नहीं करा पाए। सिमिलरली अगर इजराइल, ईरान, यूएसए, मिडिल ईस्ट क्राइसिस देखें तो अब जो है इंडिया की जो इकॉनमी है वो
बहुत ज्यादा सफर कर रही है। पूरे वर्ल्ड में ग्लोबल क्राइसिस आ चुका है। डीडोलराइजेशन हो रहा है, रूपी गिर रहा है
और बहुत सारी कंट्रीज की इकॉनमी पूरी तरीके से सफर कर रही है। बट G20 यहां पर कुछ नहीं कर पाया। G20 सॉल्व नहीं कर पाए
एनर्जी क्राइसिस को। G20 जो है इस कॉन्फ्लिक्ट को नहीं रुकवा पाया। तो यहां पर हम टेररिज्म की अगर बात करें तो इंडिया
एंड पाकिस्तान इशू देखिए G20 प्रमोट्स जीरो टॉलरेंस टू टेररिज्म बट नो इनफोर्समेंट मैकेनिज्म टेरर इंसिडेंट अभी
भी हो रहे हैं। तो ये कुछ पॉइंट्स थे G20 से रिलेटेड तो ये कुछ पॉइंट्स थे G20 से रिलेटेड। मेजरली अगर हम देखें तो ये 1990
में बनता है जब पूरे वर्ल्ड के अंदर जो है इकोनमिक क्राइसिस चल रहा था। फिर देन यहां पर जो मेजर अचीवमेंट होती है वो कब होती
है? 2008 में जब फाइनेंसियल क्राइसिस आता है तो यहां पर 5 ट्रिलियन जो है इंजेक्ट किए जाते हैं। और हमने देखा कि कैसे जो
लेस ब्रदर और बहुत सारे बैंक जो कोलैप्स हो चुके थे, हाउसिंग कोलैप्स हो चुकी थी वो भी यहां से जो है रिड्यूस हुई। देन
हमने कोविड-19 की बात करी थी 2020 में कि कैसे G20 मेंबर्स ने जो है लोन के ऊपर एक्शन लिया। 13 बिलियन लोन जो है माफ़ किया
गया बहुत सारी डेवलपिंग कंट्रीज का। फिर हम अब जो है एनवायरमेंट पे भी फोकस कर रहे हैं। और हम जो है न्यू यहां पर जो है
ट्रेड रिफॉर्म्स लेके आए वो ऑनलाइन डॉक्यूमेंटेशन हो, डिजिटल सर्विज रिड्यूस करना हो, एक दूसरी कंट्रीज पे जो है टैक्स
और टेरिफ ना लगाना। तो ये सब जो है वो G20 के अंदर आ जाता है। चलिए अब हम पढ़ते हैं G7 को। G7 क्या है? ग्रुप ऑफ़ सेवन मेंबर्स
हैं। तो यहां पर यूएसए, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली है ना यूके। तो ये निमोनिक है। यू कैन सी दैट यू कैन फाइंड ग्रेट
आईटी जॉब्स। तो यू से यूएसए, सी से कनाडा लाइक दैट। 45% ऑफ़ ग्लोबल जीडीपी वहां पर 85% था। हाईली इंडस्ट्रियलाइज्ड
डेमोक्रेसी हैं। फिर यहां पर अगर हम बात करें तो ये 1970 में बनता है। देखिए ऑयल क्राइसिस आया था 1970 के अंदर जैसे अभी
है। सिमिलरली वहां पर भी आया था। देखिए ऑयल प्राइसेस इनक्रीस हो चुके थे। फोर टाइम्स G7 कंट्रीज ने कोऑर्डिनेट किया।
एनर्जी पॉलिसीज को बनाया। रिड्यूस डिपेंडेंसी ऑन ओपेक। आप देख रहे हैं आज यूएसए के पास क्या है? बहुत अच्छा रिजर्व
है ऑयल का। और अगर आप देखेंगे यूएसए खुद ऑयल प्रोड्यूस करता है। तो ये सब कब बना? ये सब इसी क्राइसिस के बाद ही बना है। और
यह G7 की कुछ पॉलिसीज के बाद ही बना है। मेन पर्पस क्या था? था इकोनमिक कोऑर्डिनेशन, क्राइसिस मैनेजमेंट,
पॉलिटिकल कोऑपरेशन। G7 जो है रिच और डेवलप्ड कंट्रीज है। वेयर ऐज़ G20 जो है डेवलप्ड और डेवलपिंग कंट्रीज है। सिमिलरली
यहां पर अगर देखेंगे तो इकोनमिक ट्रेड है। वही सारे पॉइंट्स हैं जो हम वहां पर पढ़ के आए थे। फ्री ट्रेड करो, टेरिफ को मत लगाओ।
एनर्जी और क्लाइमेट चेंज के ऊपर। अब यह भी बात कर रहे हैं। देन हेल्थ एंड पेंडेमिक के दौरान जो है इन्होंने साथ में मिलके
काम करा। सप्लाई चेन इंफ्रास्ट्रक्चर। तो यहां पर भी सिमिलर वही पॉइंट आएगा कि 5 ट्रिलियन हमने इंजेक्ट करे 208 के अंदर।
तो जितने पॉइंट हम 208 वाले पढ़ के आ रहे हैं वो सारे यहां पर फिट होंगे। क्यों? क्योंकि G7 मेंबर भी तो G20 का पार्ट है।
इसलिए जो है हमें इसे ज्यादा पढ़ने की जरूरत नहीं है। जो हमने G20 में बात करा था वही हम सिमिलरली पॉइंट्स यहां पर भी
डाल सकते हैं। WTO रिफॉर्म्स जो लेके आया था वो बात कर लो। क्लाइमेट चेंज वाली बात हो और 208 वाली बात 2020 कोविड-19 तो वो
सारी चीजें भी समझ में आ जाएगी। तो चलिए अब हम स्टार्ट करते हैं नैटो को। राइट? जिसे हम कहते हैं नॉर्थ अटलांटिक
ट्रीटी ऑर्गेनाइजेशन। नाउ यह क्वेश्चन आता है कि इसे नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गेनाइजेशन क्यों कहते हैं? तो देखिए ये
जो यहां पर है नॉर्थ अटलांटिक ओशन और जितनी भी नैटो मेंबर्स हैं आपको देखने को मिलेंगे वो सारे नॉर्थ अटलांटिक ओसियन की
नेबरिंग कंट्री ही मिलेंगी आपको चाहे वो यूनाइटेड स्टेट्स हो कनाडा हो यूनाइटेड किंगडम फ्रांस स्पेन पोर्तुगाल इटली
जर्मनी तो ये सारी कंट्री क्या है नॉर्थ अटलांटिक ऑर्गेनाइजेशन यानी कि नाटो का पार्ट है तो आपको अब समझ में आ रहा है कि
इसे नाटो क्यों कहा जाता है क्योंकि यह जो नॉर्थ अटलांटिक ओशन है जो उसके आसपास की जितनी कंट्रीज हैं। उनसे मिला समूह जो है
नाटो कहलाता है। नाउ अब हम बात करते हैं व्हेन इट वाज़ फॉर्म्ड एंड व्हाई इट वाज़ फॉर्म्ड। तो चलिए अब हम बात करते हैं इसके
फॉर्मेशन के बारे में। राइट? तो नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी जो है साइन होती है 4th अप्रैल 1949 में। और अगर इसकी मेंबर
कंट्री की बात करें तो अराउंड 32 कंट्रीज राइट नाउ जो है नॉर्थ अटलांटिक ऑर्गेनाइजेशन के पार्ट हैं। लेटेस्ट अगर
हम बात करें तो फिनलैंड और स्वीडन जो है नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी के पार्ट बने हैं। नाउ अगर हम बात करें कौन-कौन सी कंट्रीज
हैं? तो देखिए यूएसए, यूके, कनाडा और मोस्ट यूरोपियन कंट्रीज प्लस टर्की। तो आपको सारी याद नहीं रखनी। बस आप क्या
करिए? यूएसए, कनाडा और यूके एंड देन आप बोल सकते हैं मोस्ट यूरोपियन कंट्री। प्लस यहां पर टर्की क्यों लिखा हुआ है? क्योंकि
टर्की एक मुस्लिम कंट्री है जो कि इसका पार्ट है। नाउ अगर हम बात करते हैं व्हाई इट वाज़ फॉर्म्ड? सो नैटो वाज़ फॉर्म टू
प्रोटेक्ट वेस्टर्न कंट्रीज फ्रॉम सोवियत थ्रेट। तो यहां पर देखिए वर्ल्ड वॉर टू जो है वो 1945 के अंदर खत्म होती है। और अगर
आप देखेंगे तो यहां पर जर्मनी जो है बुरी तरीके से डिफीट होता है। बट अगर आप देखेंगे जर्मनी जो डिफीट हुआ उसके पीछे का
रीज़न क्या था? यूएसएसआर। राइट? अगर आप देखेंगे यूएसएसआर, यूएसए, चाइना और यूरोपियन कंट्री सारी मिलकर जो है जर्मनी
के खिलाफ लड़ रही थी। बट अगर आप देखेंगे तो मेजर कंट्रीब्यूशन किसका था? यूएसएसआर। यूएसएसआर जो है सोचिए अपने सोल्जर लेके वो
डायरेक्ट बर्लिन के अंदर तक चले गए वहां पर उन्होंने अपना झंडा गाड़ा है। तो यानी कि यूएसएसआर बहुत पावरफुल था। यूएसएसआर के
पास बहुत बड़ी आर्मी थी उस समय पर। राइट? और इन्होंने बहुत ज्यादा मिलियंस ऑफ कैजुअल्टी हुई थी यूएसएसआर की। बट यहां पर
प्रॉब्लम क्या थी? ये एक कम्युनिस्ट कंट्री है। राइट? यूएसएसआर क्या था? कम्युनिस्ट कंट्री थी। तो यहां पर जो है
जितने भी हमारे ये नेशंस थे यूरोपियन नेशंस थे और यूएसए, कनाडा ये सारे थे। तो इन्हें थ्रेट था। यहां पर भी जो है
कम्युनिज्म स्टार्ट हो जाएगा। तो इसलिए इसका जो एक्सपेंशन था राइट? नाटो वाज़ फॉर्म टू प्रोटेक्ट वेस्टर्न कंट्रीज
फ्रॉम सोवियत थ्रेट एक्सपेंशनिज्म ऑफ सोवियत को खत्म करने के लिए जो है यह नाटो को फॉर्म किया गया। एंड इसका जो सेकंड
मोटिव था वो इसलिए था कि सिमिलर वर्ल्ड वॉर थ्री जैसी सिचुएशन ना बने। तो चलिए हम आगे बढ़ते हैं। आर्टिकल फाइव के बारे में
पढ़ते हैं। तो बस यही इसका सबसे इंपॉर्टेंट पॉइंट आ जाता है यहां पर आर्टिकल फाइव। देखिए, अटैक ऑन वन इज़ कंसीडर्ड टू बी अटैक
ऑन ऑल। अटैक ऑन वन अटैक ऑन ऑल। अगर किसी भी नेटो मेंबर कंट्री पर अटैक होता है तो सारी कंट्रीज जो है वो एक साथ मिलकर उस
कंट्री के अगेंस्ट जो है फाइट करेगी। राइट? यही एक रीजन था कि आफ्टर वर्ल्ड वॉर टू हमें कोई भी ऐसी मेजर वर्ल्ड वॉर या
फिर यूरोप के अंदर वॉर देखने को नहीं मिली। बिकॉज़ यहां पर कास्टेंट थ्रेट था कि अगर हमने किसी एक भी यूरोपियन कंट्री को
अटैक करा तो हम पर भी जो है सारी कंट्रीज जवाब देगी। नाउ क्वेश्चन आता है क्या ये आर्टिकल फाइव कभी यूज़ हुआ है? यस। तो आपने
91 अटैक के बारे में सुना होगा कि जो वर्ल्ड ट्रेड टावर था उस पे इंटेंशनली जो टेररिस्ट अटैक था कि प्लेेंस को क्रैश
किया गया। देन जो है इंटेलिजेंस के थ्रू पता लगा कि जो टेररिस्ट हैं उनका जो ऑर्गेनाइजेशन है वो कहां है? अफगानिस्तान
सीरिया ऐसी जगहों पर है। तो जो है नाटो को जो है इनवोक किया गया। सारी कंट्रीज ने जो है अपनी फोर्सेस को भेजा। और आपने
अफगानिस्तान के अंदर देखा है कि जो कोल्ड वॉर चली है। राइट? तो ये एग्जांपल था नाटो फाइव इनवोक का। नाउ अगर हम कुछ और पॉइंट्स
देखें तो नैटो का बजट। ईच कंट्री शुड स्पेंड 2% ऑफ द जीडीपी ऑन डिफेंस। यानी कि हर कंट्री की जो जीडीपी है उसका 2% जो है
आपको नाटो के बजट में देना पड़ेगा। राइट? नाउ यहां पर जो है यूएसए कास्टेंटली यहां पर फोर्स कर रहा है बाकी कंट्रीज को कि आप
2% से जो आप 2% अपनी जीडीपी का खर्च करते हैं डिफेंस इसे इनक्रीस करिए। राइट? हमें और बजट की जरूरत है। द यूनाइटेड स्टेट्स
कंट्रीब्यूट अराउंड 65 टू 70% टोटल नेटो डिफेंस बजट का अगर आप देखेंगे तो 65 टू 70% तो सिर्फ यूएसए ही कंट्रीब्यूट कर रहा
है। नाउ इसकी एक्सरसाइज फेमस देखें तो डिफेंडर यूरोप एक्सरसाइज जहां पर अराउंड 10,000 ऑफ़ ट्रूप्स ने जो है पार्टिसिपेट
करा। देन ट्राइडेंट में देखें तो वन ऑफ़ द बिगेस्ट नैटो डील 50,000 ट्रूप पार्टिसिपेटेड इन दिस। नाउ वेपन सिस्टम की
अगर बात करें यहां पर तो थर्ड मिसाइल डिफेंस सिस्टम है जो कि यूज़ किया जाता है नाटो कंट्रीज द्वारा। देना F16 एंड F35 के
बारे में आपने सुना होगा। तो F16 जो है वो यूज़ करते हैं यूएसए, बेल्जियम, पोलैंड, नॉर्वे, टर्की भी
[नाक से की जाने वाली आवाज़] यहां तक कि जो है F16 यूज़ करता है। देन अगर F35 की बात करें तो जर्मनी यूज़ करता है। यूके,
इटली, पोलैंड। तो इससे हमें पता लगता है कि देखिए यूएसए के जेट्स जो हैं जो कि यूएसए की कंपनीज़ द्वारा बनाए गए हैं वह हर
एक नेटो कंट्री मोस्टली नाटो कंट्रीज द्वारा यूज़ किए जा रहे हैं। देन अगर हम रेडार्स की बात करें राइट एएसआर रडार देन
ए एनटीपीवाई2 और एफपीएस 132 तो ये अभी डिस्ट्रॉय हुए हैं। राइट ईरान ने इसे डिस्ट्रॉय करा है पिन पॉइंट एक्यूरेसी के
साथ। तो देन हम देखते हैं कुछ और पॉइंट्स। तो देखिए नाउ यहां पर क्वेश्चन आता है कि यूएसए क्यों फाइट कर रहा है? यूएसए के
बेसिस क्यों है यूएई के अंदर? सऊदी अरेबिया के अंदर डिस्पाइट सऊदी अरेबिया और यूएई तो इसके पार्ट ही नहीं है। तो देखिए
वो एक अलग रीज़न है। यूएसए जो है अपनी हेे हैेजिमनी क्रिएट करना चाहता है मिडिल ईस्ट के अंदर और इनका जो है पार्टनरशिप भी है
वेरियस कोऑपरेशन के अंदर। बट यूएई और साउथ कोरिया और ये अदर कंट्रीज जो है वो नाटो के पार्ट नहीं है। बिकॉज़ आपने देखा है
नॉर्थ अटलांटिक ओसियन के आसपास जो कंट्रीज है वही नाटो के पार्ट है। ठीक है? तो यहां पर कंफ्यूज नहीं होना क्या? यूएई और साउथ
कोरिया भी पार्ट है नाटो के? नहीं। राइट? देन हम बात करें तो मेंटेंड पीस इन यूरोप। देन अगर हम बात करें नाटो की अचीवमेंट्स
की तो बहुत ही इंटरेस्टिंग है। देखिए नाटो फॉर्म हुआ था कि कोई दोबारा से वर्ल्ड वॉर ना हो और देखिए इसने सक्सेसफुली डिफेंड
करा है 70 इयर्स तक। देन अगर हम देखें मोर देन 70 इयर्स होने वाले हैं और हमने कोई भी मेजर वॉर नहीं देखी वर्ल्ड वॉर की अगर
हम बात करें ऑलदो यूक्रेन और रशिया की वॉर चल रही है बट यूक्रेन जो है नाटो का पार्ट नहीं बना था। राइट? देन कोल्ड वॉर डेटरेंस
की बात करें नाटो सक्सेसफुली कंटेंड सोवियत एक्सपेंशन। तो हमने स्टार्टिंग में ही पढ़ा था कि सोवियत बहुत ज्यादा पावरफुल
था। कम्युनिस्ट कंट्री था। तो यहां पर फियर था कि कम्युनिज्म फैल ना जाए और सक्सेसफुली आप देखेंगे तो यूएसएसआर को
डिस्ट्रॉय कर दिया। तो आपने देखा कि यूएसएसआर जो है वह पूरी तरीके से टूट चुका था। ठीक है? बहुत सारी कंट्रीज उससे बनी
और फिर बाद में जो है रशिया जो है उसमें मेजर पावर निकल कर आया। तो इस समय पता लगता है कि यहां पर जो इनका एम था कि जो
यूएसएसआर का एक्सपेंशनिज्म है उसको रोकना है। तो वो इन्होंने फुलफिल करा। कोई वर्ल्ड वॉर नहीं हुई मेजर। तो वो भी
इन्होंने फुलफिल करा। और अब देखेंगे अगर यूक्रेन का तो यूक्रेन को ये कंटीन्यूअसली सपोर्ट कर रहे हैं। वेपन दे रहे हैं,
ट्रेनिंग दे रहे हैं, एड दे रहे हैं। राइट? चाहे वो F16 हो, पेट्रोइट मिसाइल डिफेंस सिस्टम हो, थर्ड मिसाइल डिफेंस
सिस्टम हो, इंटेलिजेंस शेयर करना हो। तो बहुत सारी चीजें जो हैं यूक्रेन को इनडायरेक्टली जो है यूएसए ने और नाटो
मेंबर्स ने सप्लाई करी है। तो इससे हमें पता लगता है कि नाटो इटसेल्फ अ वेरी पावरफुल ऑर्गेनाइजेशन। चलिए अब बात करते
हैं नाटो सपोर्ट टू यूक्रेन थोड़ा डेप्थ में। तो हम यहां पर देखेंगे। देखिए अह यहां पर पेट्रोल्ट मिसाइल डिफेंस सिस्टम
जो है यूक्रेन को दिया गया है। हिमरस मिसाइल डिफेंस सिस्टम दिया गया है। स्टिंगर मिसाइल दिए हैं। एंटी देन स्टिंगर
मिसाइल दी है। इनफ्रेडर मिसाइल देन जेवलीन एंटी टैंक मिसाइल दिए हैं। देन यूरोप ने F16 को दिया है। लेपर्ड टैंक्स दिए गए हैं
जर्मनी और पोलैंड द्वारा और टर्की ने जो है बरेक्टर ड्रोन और इस बरेक्टर ड्रोन ने जो है बहुत कैजुअलिटी करी रशिया के अंदर।
तो इससे हमें पता लगता है कि देखिए यूक्रेन को कंटीन्यूअसली सपोर्ट कर रहा है नाटो और यह वॉर इतनी लंबी नहीं चलती अगर
नाटो का सपोर्ट पीछे से ना होता। राइट? तो अगर हम बात करें ईरान इजराइल यूएसए कॉन्फ्लिक्ट की राइट 2026 में हुआ जो
व्हेन ईरान डिसररप्टेड ऑयल टैंकर इन द स्टेट ऑफ़ हरमोस ट्रंप आस्क्ड एलआई नेटो यूरोप अदर फॉर हेल्प तो देखिए जब यह स्टेट
ऑफ़ हरमोस में ब्लॉकेड हुआ राइट ईरान द्वारा तो यहां पर जो है यूएसए ने कहा कि आप अपनी नेवीज़ को सेंड करिए यूरोप बट
मोस्टली जो यूरोप कंट्रीज थी वो उन्होंने अपने शिप्स नहीं भेजे राइट वो यहां पर यूएसए की हेल्प नहीं करने आई तो इसकी वजह
से जो है ट्रंप ने स्टेटमेंट्स कुछ दी थी कि दे विल डू नथिंग फॉर वी डोंट नीड हेल्प फ्रॉम एनीवन। तो ऐसी जो स्टेटमेंट्स है
इसे क्या दिखाता है कि नाटो धीरे-धीरे कमजोर हो रहा है। ही वाज़ एंग्री बिकॉज़ नाटो कंट्रीज रिफ्यूज टू सेंडशिप्स। नो वन
हेल्प्ड प्रोटेक्ट ऑयल टैंकर्स इन स्टेट ऑफ़ हरमोस। तो यहां पर अगर एलाइज़ का रिएक्शन देखें हम लोग जो नाटो मेंबर्स हैं
उन्होंने क्या कहा? देखिए स्पेन कंडेम करता है यूएस की स्ट्राइक ऑन ईरान। ऑस्ट्रेलिया एंड फ्रांस रिफ्यूज टू सपोर्ट
व्हाइल जर्मनी एंड अदर यूरोपियन नेशन क्रिटिसाइज़ द एक्शन एंड शोइंग डिवीज़ विद इन द नैटो। तो यहां पर जो यूरोपियन
कंट्रीज हैं और नैटो मेंबर्स हैं उन्होंने कहा कि देखिए यह अटैक जो है वह यूएसए के ऊपर नहीं है। अगर यह अटैक यूएसए के ऊपर
होता तो मे बी यह कंट्रीज साथ में आती। ये यहां पर यूएसए खुद आया। आपने देखा यूएसए जो है इजराइल की हेल्प करने आया था और
इजराइल भी जो है नाटो का मेंबर नहीं है। तो इसलिए जो है ये कंट्रीज ने जो है कंडेम करा इस अटैक को। नाउ यहां पर देखिए
इंटरेस्टिंग चीज। मैक्रोन कहते हैं अब समय आ चुका है कि हम यूरोपियन डिफेंस कॉरपोरेशन बनाएं। वी हैव टू बी लेस
रिलायंस ऑन नाटो एंड द यूनाइटेड स्टेट्स। तो यहां पर हम देख सकते हैं पूरा जो वर्ल्ड ऑर्डर है वो चेंज हो रहा है और
फ्यूचर में हमें एक नया नाटो देखने को मिले जो है यूरोपियन डिफेंस कोऑपरेशन। नाउ यूरोप ने कहा है यूरोप शुड डिफेंड इटसेल्फ
नॉट डिपेंड फुल्ली ऑन नाटो एंड मैक्रोन। ओके नाउ लेट्स टॉक अबाउट दी क्वाड। राइट? सो क्वाड्रीलैटरल सिक्योरिटी डायलॉग। नाउ
क्वेश्चन कम्स कि इसे क्वाड्रीलैटरल सिक्योरिटी डायलॉग क्यों कहा जाता है? तो अगर आप इन चार कंट्रीज को कनेक्ट करते हैं
तो एक क्वाड्रीलटरल फॉर्म होता है। इसलिए इसे क्वाड्रीलटरल सिक्योरिटी डायलॉग कहा जाता है। नाउ आपको यहां पर एक टर्म याद
रखनी है जो है इंडो पेसिफिक। तो पूरा जो क्वाड है वो इंडोपेसिफिक पे ही डिपेंड करेगा। देखिए यहां पर हमें क्या है?
इंडियन ओसियन देखने को मिलता है और पेसिफिक ओसियन। तो देखिए इंडियन ओसियन और पेसिफिक ओशियन की सेफ्टी, सिक्योरिटी और
भी बहुत सारी चीजें हम आगे बढ़ने वाले हैं। वह सारा जो है वह क्वाड के अंदर आ जाएगा। देखिए सो क्वाड जो है क्वाड्रीलटरल
सिक्योरिटी डायलॉग इज़ अ ग्रुप ऑफ़ फोर कंट्रीज इंडिया, यूएसए, जापान एंड ऑस्ट्रेलिया। क्वाड फोकस ऑन द इंडोपेसिफिक
रीजन व्हिच मींस दी इंडियन ओसियन एंड पेसिफिक ओसियन टू इंश्योर अब टू इंश्योर क्या है? देखिए फ्री ओपन एंड सिक्योर सी
रूट्स ग्लोबल ट्रेड एंड रीजनल स्टेबिलिटी। तो यहां से जितना भी ट्रेड पास होता है, ठीक है? सिक्योर होना चाहिए, ओपन होना
चाहिए। और यहां पर जो है स्टेबिलिटी होनी चाहिए। मतलब और यहां पर क्या है? स्टेबिलिटी होनी चाहिए। चलिए अब हम बात
करते हैं ओरिजिन के बारे में। तो देखिए 2004 एक्चुअल बिगिनिंग यहां से स्टार्ट होती है। स्टार्टेड आफ्टर इंडियन ओशियन
सुनामी। राइट? तो 2004 में सुनामी आती है और ये चारों कंट्रीज मिलके जो है रिलीफ ऑपरेशंस को स्टार्ट करती है और सक्सेसफुली
काफी लोगों को यह एवाकुएट भी करते हैं। तो नाउ यहां पर जो आईडिया आता है कि अगर यह चार कंट्री मिलके कोऑर्डिनेटेड तरीके से
यह रिलीफ ऑपरेशंस को परफॉर्म करती है तो फ्यूचर में क्यों ना इन चारों कंट्रीज का एक ग्रुप बना लिया जाए जो कि इंडोपेसिफिक
से रिलेटेड जितनी भी हमारी चीजें जो हम बढ़कर आए हैं उससे डील करेगा। तो देखिए 2007 में जो है फॉर्मल आईडिया प्रपोज्ड
बाय जापान प्राइम मिनिस्टर शिंजिया राइट फर्स्ट क्वाड मीटिंग होती है 2017 में जो है मेजर डेवलपमेंट होती है ड्यू टू चाइनास
ग्रोइंग इन्फ्लुएंस साउथ चाइना सी के अंदर और बेल्ट थ्रोड इनिशिएटिव की वजह से क्वाड जो है 2017 के बाद से बहुत ज्यादा एक्टिव
हो जाता है। तो नाउ अब हम बात करते हैं यहां पर कौन-कौन से एरियाज हैं। राइट? तो सबसे पहले मैरिटाइम सिक्योरिटी। तो हमने
वहां पर बात करी थी सिक्योरिटी मतलब सिक्योर रूट होना चाहिए जो भी ट्रेड पास करता है। तो यहां पर क्या है? इंडोपेसिफिक
मेरिटाइम डोमेन अवेयरनेस। आई रिपीट इंडोपेसिफिक मैरिटाइम डोमेन अवेयरनेस। यह ल्च किया गया है 2022 में। अब यहां पर
क्या था? यह ट्रैक करता है इललीगल फिशिंग को। देन यह ट्रैक करता है इललीगल शिप्स को, डार्क वेसल्स को। देन यहां पर जो है
एक्सरसाइज भी की जाती है तीनों नेवीज़ द्वारा अगर आप देखेंगे तो यहां पर इंडियन नेवी है, यूनाइटेड स्टेट्स नेवी,
ऑस्ट्रेलियन नेवी, जापानीज़ नेवी। राइट? ये चारों नेवी मिलकर जो है मालाबार एक्सरसाइज करती है। नाउ अब हम कुछ और एरियाज के ऊपर
बात करते हैं। टेक्नोलॉजी एंड सप्लाई चेन सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन। तो देखिए वर्ल्ड जो है वो डिपेंडेंट है चाइना और ताइवान के
ऊपर फॉर सेमीकंडक्टर। और हमने देखा है सेमीकंडक्टर हर एक इलेक्ट्रॉनिक आइटम में यूज़ होता है। वेदर इट्स इलेक्ट्रिक कार्स,
लैपटॉप, कंप्यूटर और मोबाइल फोंस। इसलिए जो है सेमीकंडक्टर की जो है नीड है। तो इसे खत्म करने के लिए देखिए क्या है?
इंडिया इमर्जिंग प्रोडक्शन हब। तो आपने देखा है इंडिया के अंदर सेमीकॉन मिशन लाया गया। इसके अंदर हमने काफी सारे
सेमीकंडक्टर प्लांट जो है ओपन करे। वेदर इट्स इन राजस्थान, गुजरात, असम टाटा के हेल्प से। राइट? तो इससे क्या है कि यहां
पे इमर्जिंग प्रोडक्शन हब था। और अगर हम रॉ मटेरियल्स की बात करें तो ऑस्ट्रेलिया के पास लिथियम हम रॉ मटेरियल की बात करें
तो वो ऑस्ट्रेलिया के पास है। और टेक्नोलॉजी की बात करें तो वो यूएसए के पास है। तो ये चारों कंट्रीज ने मिलके जो
है सेमीकंडक्टर और सप्लाई चेन पर जो है यहां पर कोऑपरेशन दिखाया। नाउ हेल्थ एंड वैक्सीन इनिशिएटिव की अगर बात करें क्वाड
वैक्सीन पार्टनरशिप भी हुई। राइट? यूएसए ने फंडिंग करा। फॉर एग्जांपल देखिए यूएसए ने बनाई अष्ट्रसेनिका ऑक्सफोर्ड की
वैक्सीन जो कि इंडिया के अंदर कोवि शील्ड के नाम से जो है मैन्युफैक्चर हुई बाय सीरम इंस्टट्यूट। तो इससे हमें पता लगता
है कि यहां पर जो है पार्टनरशिप हुई और बाद में जो है इंडिया ने आपने देखा मैथ्री इनिशिएटिव के अंदर जो है अपनी नेबरिंग
कंट्रीज को साथ में जो है और भी कंट्रीज को जो है सप्लाई करी। फिर हमारे पास आता है डिजास्टर रिलीफ एंड कनेक्टिविटी। तो
आपने देखा है कि यह जो क्वाड का आईडिया है वह आया भी कहां से था? सुनामी से। चारों नेवीज़ ने मिलके जो है रिलीफ ऑपरेशन कंडक्ट
करे थे। तो देखिए डिजास्टर रिलीफ और कनेक्टिविटी में यहां पर क्या है? जॉइंट रिस्प तो देखिए यह कंट्रीज जो है जॉइंट
रिस्पांस देती हैं। रेस्क्यू रिलीफ मेडिकल एड बिल्ड्स अर्ली वार्निंग सिस्टम ट्रेनिंग फॉर कंट्रीज पेसिफिक आइलैंड केबल
कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट्स इंटरनेट एक्सेस के लिए। सपोर्ट अंडर सी इंटरनेट केबल स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर इंप्रूव
कम्युनिकेशन ड्यूरिंग डिजास्टर्स। तो तो ये चारों नेवीज़ जो है वह डाटा शेयर करती हैं हर एक नेवी के साथ और अगर कोई भी
डिजास्टर आता है तो चारों नेवी मिलकर जो है यहां पर रिलीफ और मेडिकल एड और रेस्क्यू ऑपरेशंस को चलाएंगी। साथ में आप
देखेंगे तो जब आप ओशन में होते हैं तो इंटरनेट की सप्लाई जो है वो इतनी ज्यादा नहीं होती। तो तो यहां पर उसे कैटर करने
के लिए केबल कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट्स हो। जहां यहां पर जो है क्लाइमेट और इंफ्रास्ट्रक्चर के ऊपर भी जो है
कोऑपरेशंस है। फॉर एग्जांपल क्लीन एनर्जी प्रमोट सोलर विंड एंड ग्रीन हाइड्रोजन टू रिड्यूस पॉल्यूशन। ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर
बिल्डिंग इको फ्रेंडली पोर्स। तो जितने भी पोर्ट्स हैं हम उसको इको फ्रेंडली बनाएंगे। क्लीन एनर्जी का ज्यादा से
ज्यादा यूज करेंगे। ये क्वार्ड ने जो है प्लेज लिया है। देन एजुकेशन एंड सॉफ्ट पावर की बात करें तो यहां पर क्वाड के एक
फेलोशिप प्रोग्राम है जहां पर $5 लाख जो है फंडिंग मिलती है फॉर साइंस टेक इंजीनियरिंग मैथमेटिक्स ग्रेजुएट्स
स्टूडेंट्स फ्रॉम इंडोपेसिफिक रीजंस के हैं जितने भी लोग हैं। देन अचीवमेंट ऑफ़ क्वाड की अगर बात करें तो स्ट्रांग
इंडोपेसिफिक कोऑर्डिनेशन हुआ। देन वैक्सीन डिप्लोमेसी हमने देखा वैक्सीन में जो है चारों नेशन एक दूसरे की हेल्प करी। देन
हमने देखा कि इंडोपेसिफिक मेरिटाइम डोमेन अवेयरनेस इंप्रूव्ड मेरिटाइम सर्विलेंस फॉर एग्जांपल अगर कोई भी शिप पेसिफिक
ओसियन में है और कुछ शिप्स इंडियन ओसियन में है तो इंडियन ओसियन की शिप जो है पेसिफिक ओसियन का डाटा शेयर कर सकती है और
सिमिलरली वाइसवरसा तो इससे क्या है जो डोमेन अवेयरनेस है सर्लेंस है मैरिटाइम का वो बहुत ज्यादा बढ़ता है रेगुलर मिलिट्री
कोपरेशन बिकॉज़ ऑफ़ मलाबार एक्सरसाइज बिकॉज़ ऑफ़ मलाबार एक्सरसाइज़ चारों मिनी नेवीज़ जो हैं वह साथ में जो है एक्सरसाइज़ करती हैं।
टैक्टिक्स लर्न करती हैं और यहां पर जो है इनके बीच में जो है कोऑपरेशन बढ़ता है। देन हम बात करते हैं फ्यूचर क्या होने वाला
है? देखिए साइबर सिक्योरिटी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर और मेरिटाइम डोमेन अवेयरनेस जो है और ज्यादा बढ़ेगी।
नाउ चैलेंजज़ की अगर हम बात करें देखिए, द क्वाड लीडर समिट वाज़ प्लंड इन 2025। 2025 में नहीं होती है बिकॉज़ ऑफ़ यूएस इंडिया
टेंशन। आपने देखा है डोन्ड ट्रंप ने जो है वो इंडिया के ऊपर काफी सारे टेरिफ लगा दिए थे। और काफी सारी एंटी इंडिया स्टेटमेंट्स
भी दी थी। तो इसलिए जो है यह शेड्यूल्ड हो गई 2026 और अभी भी अगर आप देखेंगे तो 2026
में सो फार नहीं हुई है यह मीटिंग। राइट? और अगर आप देखेंगे यूएस जो है कंटीन्यूअसली सपोर्ट करता है पाकिस्तान।
नाउ यूएसए जो है हेल्प कर रहा है पाकिस्तान को उसकी एजिंग एफ6 फील्ड को अपग्रेड करने के लिए। यहां पर 300 मिलियन
के आसपास जो है पैकेज दिया गया है। और हमने देखा था ड्यूरिंग दिस इजराइल ईरान कॉन्फ्लिक्ट मार्को रूबी और वाइस
प्रेसिडेंट ऑफ यूएस जो है पाकिस्तान गए थे फॉर मिडिएशन। सो इससे हमें पता लगता है कि डेफिनेटली यहां पर जो है जो यूएस का
पाकिस्तान की तरफ रुझान है वो बढ़ रहा है। देन ट्रंप टेरिफ पॉलिसीज एंड एंटी इंडिया रिमार्क रिस्क ऑफ वीकनिंग ट्रस्ट एंड
कोऑर्डिनेशन विद इन दी क्वाड। देन अगर हम देखें इंडिया और रशिया की क्लोजनेस तो देखिए सुथम के ब्रामोस है 57 पर जो है डील
के ऊपर बात चल रही है। AK203s400 और क्रूड ऑयल और फर्टिलाइजर जो है हम बहुत ज्यादा बल्क में खरीदते हैं। इसलिए यह चीज
जो है थ्रेट कर सकती है यूएसए को। राइट? एक तरफ हम यूएसए के साथ टाई बनाते हैं और और दूसरी तरीके से जो है हम रशिया को
इकॉनमिकली सपोर्ट कर रहे हैं। तो ये कुछ चैलेंजेस थे। तो आई होप नाटो के बारे में अगर आप ये कुछ पॉइंट्स रखेंगे तो ये कुछ
ब्रीफ और टू दी पॉइंट। तो चलिए अब हम पढ़ते हैं चाइना पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर सीपक। ठीक है? तो देखिए
चाइना पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर सीपक जो है एक इंफ्रास्ट्रक्चर और इकोनॉमिक प्रोजेक्ट है अंडर दी चाइना बेल्ट एंड रोड
इनिशिएटिव। ठीक है? तो हमने देखा कि ये एक इंफ्रास्ट्रक्चर और इकोनॉमिक प्रोजेक्ट है जो कि बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव ऑफ चाइना
है उसके अंदर ये आता है। अब ये जो है कनेक्ट करने वाला है काजगर एक सिंजियन प्रोविंस को जो कि चाइना के अंदर है टू
गवादर पोर्ट ऑफ़ बलूचिस्तान। यानी कि सिंजियान जो चाइना के अंदर है ऑल द वे टू द ग्वादर बलूचिस्तान को यह कनेक्ट करने
वाला है। ठीक है? तो ये इसकी डेफिनेशन थी। अब इसके अंदर अगर हम देखेंगे जो यहां से यहां तक की दूरी जो कि 3000 कि.मी. है वह
हाईवेज के थ्रू रेल्वेज के थ्रू पाइप लाइन एंड एनर्जी प्रोजेक्ट्स यहां पर लगाए जाएंगे। है ऑपरेशनलाइज़ करे जाएंगे। तो हम
देखें टोटल कॉस्ट जो है वो कितनी है? 60 बिलियन की आने वाली है। तो मेजर इन्वेस्टमेंट जो है पाकिस्तान को मिली
अंडर दिस सीपक प्रोजेक्ट। नाउ यहां पर बहुत सारे क्वेश्चन हमारे मन में आते हैं कि क्या ये प्रोजेक्ट बन चुका है? तो
देखिए ये प्रोजेक्ट जो है अभी पार्शियली ऑपरेशनल है। ये पूरी तरीके से ऑपरेशनल नहीं हुआ है। तो अगर हम देखेंगे जो ये
ग्वादर पोर्ट है यह ऑपरेशनलाइज है। राइट? तो यहां पर शिप्स जो है वो जाते हैं यहां से अरेबियन सी के थ्रू मिडिल ईस्ट के अंदर
एंड यूरोप के अंदर। तो यहां यस ग्वादर पोर्ट बन चुका है और यहां पर चाइनीस शिप्स की प्रेजेंस भी देखी गई है। वेयर एज अगर
हम देखेंगे कुछ पार्ट जो है अभी भी वेदर इट्स अ मॉडर्नाइजेशन एंड अपग्रेडेशन ऑफ रेल्वेज और पाइपलाइन बिछानी हो तो वो काम
जो है अभी भी होना है और बहुत सारी रिपोर्ट्स जो है सजेस्ट करती हैं कि बाय 2030 जो है जो इसका फज़ सेकंड है वह
कंप्लीट होगा। राइट? तो यह था कुछ बेसिक इंफॉर्मेशनेशन अबाउट सीपक। तो प्लीज इसे याद रखिए कि एक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट
है जो कि बेल्टन रोड इनिशिएटिव के अंदर आने वाला है जो शिंजियान को गवादर पोर्ट से कनेक्ट करने वाला है। नाउ अब क्वेश्चन
आता है कि क्यों चाइना इसे बना रहा है? राइट यहां पर। ठीक है? तो देखिए बेनिफिट्स टू चाइना क्या है? फर्स्ट ऑफ़ ऑल शॉर्टर
ट्रेड रूट ट्रेडिशनल रूट विदाउट सीपक। तो देखिए अगर आप शिंजियान से अरेबियन सी या फिर मिडिल ईस्ट जाना चाहते हैं तो आपको
12,000 से 16,000 कि.मी. डिस्टेंस पड़ेगा। फॉर एग्जांपल देखिए। तो देखिए अगर चाइना को अरेबियन सी के अंदर जाना है। ठीक है?
तो अरेबियन सी में चाइना को जाने के लिए देखिए ये रूट लेना पड़ेगा यहां से थ्रू स्टेट ऑफ मलक्का से फिर इंडियन ओशन होते
हुए यहां पर जो कि यहां पर 12,000 से कितना है? 16,000 कि.मी. यहां पर चाइना को ट्रैवल करना पड़ेगा। वेयर एज अगर हम सीपक
बनाते हैं शिंजियान से लेके ग्वादर तक तो यह डिस्टेंस सिर्फ 5000 से 6000 कि.मी. पड़ता है। तो इससे जो है चाइना को बहुत
ज्यादा बेनिफिट होने वाला है। फॉर एग्जांपल आप देख सकते हैं यह देखिए ग्वादर का रूट है। यह बहुत क्लोज है। वेयर एज़ अगर
यह यूरोप जाना चाहते हैं इदर यह वाला रूट लें या फिर यह तो इन्हें यह बहुत ज्यादा लंबा पड़ेगा। सिमिलरली अगर यह यहां पर
अपने डीजी बूटी बेस पर जाना चाहते हैं तो यहां पर भी इन्हें जो है पूरा घूम के जाना पड़ेगा जो कि 16,000 कि.मी. के आसपास
आएगा। वेयर ऐज़ अगर यह यहां से जाए, तो यह बहुत क्लोज पड़ेगा। तो, यह जो है चाइना का रीज़न है कि इसलिए वह इसे बना रहा है। तो,
तो यहां से जस्टिफाई होता है कि देखिए, चाइना का ही इसमें बेनिफिट है इसलिए चाइना इसे बना रहा है। तो, 6000 से 10,000
कि.मी. जो है चाइना के सेव हो जाते हैं। चाइना गेट्स डायरेक्ट एक्सेस टू दी अरेबियन सी। अभी हमने देखा है रिड्यूसिंग
डिस्टेंस फॉर ऑयल इंपोर्ट एंड फ्रॉम मिडिल ईस्ट हो जाएगा। तो, जैसे ही यह बन जाएगा पूरी तरीके से ऑपरेशनल। तो देखिए चाइना
ईजीली मिडिल ईस्ट से जो है ऑयल ले सकता है और डायरेक्ट जो है ग्वादर पोर्ट के थ्रू देन तो ये जो चाइना का वेस्टर्न वाला रीजन
है वो ईली ऑयल गैस नेचुरल गैस और यहां पर जो है डेवलपमेंट होगी राइट तो चलिए अब देखते हैं बेनिफिट्स टू चाइना डेवलपमेंट
ऑफ शिंजियान रीजन हमने अभी देखा बूस्ट इकोनमिक ग्रोथ चाइनास वेस्टर्न प्रोवेंस और इंडस्ट्रियल ज़ों्स बनाएंगे काशगढ़
शिंजियान में लॉजिस्टिक्स हब्स क्रॉस बॉर्डर ट्रेड होगा एनर्जी सिक्योरिटी ऑयल एंड गैस कैन रीच वेस्टर्न चाइना फास्टर
मिडिल ईस्ट ऑयल शिपमेंट थ्रू ग्वादर शशि पाइप लाइन के थ्रू। तो यहां पर जो है पाइप लाइन बिछाई जाएगी। राइट? यहां पर पाइप
लाइन लगाई जाएंगी और जिसके थ्रू जो है जो मिडिल ईस्ट है यहां से ऑयल आएगा शिपिंग के रूट और देन पाइप लाइन के थ्रू यहां पर
चाइना को सप्लाई होगा। चलिए देखते हैं पाकिस्तान को क्या बेनिफिट होने वाला है। तो देखिए मेजर इंफ्रास्ट्रक्चर बिल्ड अंडर
दी सीपक हाईवेज। तो यहां पर हाईवे बन रहे हैं। ठीक है? करम हाईवे बन रहा है और हज़ारा मोटरवे हाईवे बन रहा है। तो यहां पर
जो है लैक्स ऑफ़ जॉब जो है जनरेट होगी व्हाइल मेकिंग दिस हाईवेज़। देन रेलवे अपग्रेडेशन हो रहा है। रेलवे प्रोजेक्ट्स
कराची पेशावर रेलवे लाइन अपग्रेड हो रही है। पोर्ट तो हमने देख ही लिया है। गवादर पोर्ट बन चुका है और यहां से जो है काफी
सारा शिप और रेड जो है स्टार्ट हो चुका है। सीपक हैज़ हेल्प्ड रिड्यूस पाकिस्तान पावर
शॉर्टेज। तो सीपक के अंडर जो है यहां पर पोर्ट कासिम यहां पर कोल पावर प्लांट बनाया गया है। और यहां पर जो है सही वाला
कोल पावर प्लांट बनाया गया है। राइट? क्योंकि यहां पर जो है इलेक्ट्रिसिटी की डिमांड भी है। तो यहां से जो है पाकिस्तान
की जो पावर शॉर्टेजेस होती थी वह भी सॉल्व हो जाती है। क्योंकि यहां पर जो फंडिंग है वह कौन दे रहा है आपको? चाइना दे रहा है।
देन एंप्लॉयमेंट जनरेशन की अगर बात करें तो हमने देखा मोटरवे हाईवे और ग्वादर पोर्ट की वजह से जो है काफी सारी लैक्स ऑफ
जॉब्स जो है जनरेट हुई हैं। देन हम बात करते हैं रीजनल ट्रेड हब की। तो देखिए एक तरफ आपके पास चाइना आ जाता है
और एक तरफ मिडिल ईस्ट आ जाता है और बीच में जो यह रीजन है यहां पर जो है एक कनेक्टिविटी हब बन जाता है पाकिस्तान। तो
चाइना ट्रेड एक्सेस टू अरेबियन सी सेंट्रल एशिया ट्रेड रूट इसकी वजह से जो ये जो ये बीच में कनेक्टिविटी अब आ रहा है तो यहां
से जो बीच में कनेक्टिविटी है इसकी वजह से क्या है पाकिस्तान तो डेवलप होगा राइट पाकिस्तान क्या होएगा डेवलप होगा चलिए आगे
देखते हैं डिफेंस एंड स्ट्रेटेजिक थ्रेट टू इंडिया तो देखिए यहां पर सिर्फ और सिर्फ ट्रेड ही नहीं है और और कुछ
स्ट्रेटेजिक थिंकर तो बताते हैं ट्रेड तो सिर्फ एक बहाना है देखिए ईजीली जो है यहां पर अरेबियन सी का एक्सेस मिल जाता है
किसको चाइना को चाइनीस मिलिट्री प्रेजेंस ग्वादर पोर्ट कुड पोटेंशियली ली सपोर्ट चाइनीस नेवल शिप्स एग्जांपल चाइनीस नेवल
डॉकिंग सबमरीन एक्सेस मेरिट सर्ेलेंस स्टेशन युवान क्लास सबमरींस जो है देखी गई है चाइना की ग्वादर पोर्ट पर और बहुत सारी
अदर शिप्स जो है जो कि चाइनीस ओरिजिन है वो यहां पर गवादर में देखी गई है देन ड्यूल यूज़ इंफ्रास्ट्रक्चर रोड्स एंड टनल
बिल्ड फॉर ट्रेड एंड कैन आल्सो सपोर्ट मिलिट्री एंड लॉजिस्टिक्स कराम हाईवे एक्सपेंशन लॉजिस्टिक बेसिस एंड सप्लाई
ट्रांसपोर्ट रोड्स देखिए फ्यूचर के अंदर कोई भी अगर वॉर होती है पाकिस्तान के साथ इंडिया की तो यहां पर मिलिट्री सप्लाई जो
है ईजीली इज़ली पाकिस्तान को सप्लाई की जा सकती है थ्रू दिस सीपक और हम सीपक पर अटैक भी नहीं कर सकते क्योंकि अगर हम सीपक पर
अटैक करते हैं तो वो क्या है चाइना पर भी अटैक माना जाएगा देन चाइना पाकिस्तान मिलिट्री कॉपरेशन की अगर हम बात करें
डिफेंस पार्टनरशिप बिटवीन बोथ कंट्रीज है जॉइंट मिलिट्री एक्सरसाइज होती है वेपन ट्रांसफर सर्लेंस सिस्टम ये सब तो है ही
तो देखिए ये जो स्लाइड है यह कहां की है जब हम पढ़ेंगे चाइना पाकिस्तान इंडिया वाले रिलेशन में जब हम रिलेशन पढ़ेंगे
डिफरेंट कंट्री के बीच में तब हम इस स्लाइड को रिवाइज़ करेंगे बट एक बार देख लेते हैं एच न बट एक बार हम फिर भी पढ़
लेते हैं तो देखिए एचq9 लॉन्ग रेंज सरफेस टू एयर मिसाइल डिफेंस सिस्टम जो है चाइना ने पाकिस्तान को दिया। देन HQ7 शॉर्ट रेंज
मिसाइल डिफेंस सिस्टम दिया हुआ है। देन अगर J10C फाइटर जेट Z10 JF7 PL15 मिसाइल्स तो पीएल सीरीज की मिसाइल्स भी जो है ये
लॉन्ग रेंज मिसाइल्स है जो तो जो PL15 मिसाइल्स हैं जब ऑपरेशन सिंदूर चल रहा था तो पाकिस्तान ने ये फायर करी थी। राइट?
सिमिलरली J10C फाइटर जेट भी जो है पाकिस्तान द्वारा यूज़ किए गए और ये मिसाइल डिफेंस सिस्टम भी जो है यूज़ किए गए। ऑलदो
इंडिया ने जो है ये मिसाइल डिफेंस सिस्टम भी डिस्ट्रॉय करा था। तो इससे हमें क्या पता लगता है कि जो चाइना है वो
कंटीन्यूअसली मिलिट्री सप्लाई देकर पाकिस्तान को जो है वो को जो है वो सपोर्ट कर रहा है। चाइना हैज़ आल्सो लॉन्च दी
सेटेलाइट फॉर पाकिस्तान पीआरएसएस वन 2018 फ्रिज भी यहां पर जो है दी गई है और यहां पर जो है नेवी को भी अपग्रेड किया जा रहा
है बाय गिविंग द फ्रिज्स और जॉइंट एक्सरसाइज तो होती है वॉरियर एक्सरसाइज सी गार्डियंस एंड शाहीन एयर एक्सरसाइज। तो इन
सब से हमें क्या पता लगता है कि चाइना इज़ कंटीन्यूअसली हेल्पिंग पाकिस्तान। इससे हमें पता लगता है चाइना इज़ कंटीन्यूअसली
अपग्रेडिंग पाकिस्तान अगेंस्ट दी इंडिया। तो चलिए आगे देखते हैं। डेवलपमेंट इन डिस्प्यूटेड टेरिटरी। देखिए सीपक जो है
पास करता है गिलगिट बाल्तिस्तान से व्हिच इंडिया कंसीडर्ड पार्ट ऑफ जम्मू कश्मीर। टनल कंस्ट्रक्शन होती है यहां पर। तो इससे
हमें पता लगता है जो हमारी इंडिया की सोवरेनिटी है यह सीपक उस पे थ्रेट करता है। एंड थ्रेट टू इंडिया क्या है? यहां पर
देखिए कंपटीशन टू इंडियन पोर्ट्स। गवादर पोर्ट मे कमपीट विद इंडियन पोर्ट ट्रेड रूट्स। गवादर वर्सेस छाबार पोर्ट जो हमारा
छाबार पोर्ट ईरान के अंदर है वो इसे क्या है? है इससे कंपटीशन देता है। ग्वादर वर्सेस मुंबई भी ले सकते हैं। देन चाइनास
इकोनमिक इन्फ्लुएंस इन साउथ एशिया एक्सपेंडिंग चाइनास इन्वेस्टमेंट कुड रिड्यूस इंडियास इकोनमिक डोमिनेंस। तो
देखिए हम क्या है अभी रिसेंटली हमने देखा आईक कॉरिडोर के बारे में। राइट इंडिया मेरिटाइम इकोनमिक कॉरिडोर। तो उस आईmक
कॉरिडोर देखा था इंडिया मिडिल ईस्ट इकोनमिक कॉरिडोर। तो हमने उसमें देखा था कि कैसे इंडिया जो है पोर्ट्स के थ्रू
वाया शिपिंग के थ्रू पाइपलाइन के थ्रू। बट अगर ऐसे ही सिमिलर पोर्ट्स बनेंगे तो व्हाई विल अदर कंट्री विल यूज़ आर आई मैक?
तो इससे क्या होता है कि एक थ्रेड जो है वो कांस्टेंटली बनता रहता है। देन स्ट्रेंथिंग पाकिस्तान इकॉनमी हमने देख
लिया है कि अगर इंडस्ट्रियल ज़ोन, लॉजिस्टिक कॉरिडोर, एनर्जी प्लांट्स और हाईवेज ये सब बनेंगे तो पाकिस्तान की जो
इकॉनमी है वो ग्रो करेगी और बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव के अंदर देखेंगे श्रीलंका हम डोटा पोर्ट, नेपाल इंफ्रास्ट्रक्चर
इन्वेस्टमेंट तो जो है यह एक थ्रेट है इंडिया के लिए। तो चलिए अब जीडी का टॉपिक देखते हैं। हाउ चाइना इज़ हेल्पिंग
पाकिस्तान टू ग्रो इकोनॉमिकली डिफेंस और स्ट्रेटेजिक। तो अब इकोनॉमिकली के अंदर हमने बहुत सारे पॉइंट्स देख लिए हैं। तो
जरूर आप उसके बारे में बताइए। देन हम इकॉनमी में यह भी देख सकते हैं। देखिए जो 60 बिलियन की इन्वेस्टमेंट थी इस सीपैक के
अंदर और यह जो है 7 लाख जॉब जो है क्रिएट करेगा बाय 2030 देन अराउंड 2 टू 2.5% एनुअली जो है पाकिस्तान की जीडीपी ग्रोथ
होगी बिकॉज़ वहां पर ग्वादर पोर्ट है तो वहां पर ट्रेड भी होगा। तो इससे हमें पता लगता है कि कैसे चाइना जो हेल्प कर रहा है
पाकिस्तान को इकोनॉमिकली। डिफेंस सपोर्ट में हमने देखी थी वह दो स्लाइड्स। ठीक है? तो मैं दिखा देता हूं दोबारा से आपको। यह
वाली स्लाइड और जो हमने यह और जो हमने यह स्लाइड पढ़ी है, तो इसको आप पढ़ सकते हैं। देन स्ट्रेटेजिक सपोर्ट जब यह दो चीजें
होंगी तो स्ट्रेटेजिक सपोर्ट तो उसे मिलेगा। तो यह भी आप ओवरलैप करके इनके ऊपर बात कर सकते हैं। देन हम नेक्स्ट टॉपिक
देखें तो इंडिया एंड पाकिस्तान गेट इंगेज्ड इन वॉर हु कुड बेनिफिट दी मोस्ट चाइना यूनाइटेड स्टेट और बांग्लादेश। तो
आप बता सकते हैं चाइना। आप एग्जांपल इसमें इसमें आप एग्जांपल दे सकते हैं ऑपरेशन सिंदूर का। ठीक है? तो ऑपरेशन सिंदूर में
आप बता सकते हैं कि कैसे पीएल15 मिसाइल जो है फायर की गई चाइना की जो पाकिस्तान द्वारा। देन J10C एयरक्राफ्ट यूज़ किया
गया। देन JF7 यूज़ करा गया। देन आप बोलेंगे कि J35 जो एयरक्राफ्ट है एक इसका एक्सपोर्ट वर्जन भी जो है पाकिस्तान को
देने की बात चल रही है। तो इससे हमें पता लगता है कि जो चाइना है वो ईज़ली अपने वेपन को टेस्ट कर सकता है इंडिया के अगेंस्ट।
राइट? चाइना ने काफी सारे आर्टिकल पब्लिश करे कि उनका जो HQ7 है, HQ9 ने बहुत अच्छा परफॉर्म करा है ये डिफेंस ने। ये
इंफॉर्मेशन भी मोस्ट लाइकली फॉल्स सी होगी। बट इससे क्या है? देखिए चाइना को कंटीन्यूअसली पता लग रहा है कि उनके वेपन
कैसा परफॉर्म कर रहे हैं। तो देखिए चाइना को बेनिफिट है। देन अगर वॉर होती है तो जो पाकिस्तान है वो डायरेक्टली चाइना से वेपन
बाय करेगा। तो चाइना के लिए तो बेनिफिट ही है कि उनके वेपन सेल हो रहे हैं। देन अगर हम बात करें तो आप जानते हैं कि एशिया के
अंदर जो है वो चाइना और इंडिया ही ऐसी मेजर सुपर पावर है जो ग्रो कर रही हैं। तो अगर इंडिया तो अगर इंडिया पाकिस्तान के
साथ इंगेज होता है वॉर के अंदर। तो आपको पता है वॉर जो है इकॉनमी को क्या करती है? बहुत ज्यादा हिंडर करती है ग्रोथ में। तो
इससे क्या है? चाइना के लिए एक एडवांटेज है। इसलिए चाइना के लिए बहुत ज्यादा बेनिफिट होगा कि अगर उसका नेबर कंट्री जो
बहुत ज्यादा ग्रोथ कर रहा है वह किसी वॉर में इंगेज हो जाए तो वहां पे चाइना के लिए इससे बेस्ट क्या होगा? और चाइना को पता है
कि इंडिया भी जो है उसके लिए थ्रेट है क्योंकि चाइना जो है अरुणाचल को, अक्साई चीन को और भी बहुत सारा पार्ट जो आपने
देखा है कि चाइना काफी सारी एंटी इंडिया स्टेटमेंट्स देता है रिलेटेड टू अरुणाचल, अक्साई चीन, डोकलाम डे 11 वी आर गोइंग टू
स्टडी रिलेशंस विद कंट्रीज। इंडिया, रशिया, यूएसए, चाइना, इजराइल, पाकिस्तान, [संगीत] नेपाल एंड देन चाइना विद अदर
कंट्रीज। वी आर आल्सो गोइंग टू कवर सम जीडी टॉपिक्स। सो नाउ लेट्स स्टार्ट विद इंडिया रशिया रिलेशन। इंडिया गॉट द
इंडिपेंडेंस इन द ईयर ऑफ़ 1947 एंड द वर्ल्ड वाज़ डिवाइडेड इंटू टू पार्ट्स। पहला कौन सा था? यूएसए लेड कैपिटलिस्ट एंड
सेकंड वन वाज़ यूएसएसआर लेड सोशलिस्ट। तो देखिए, कैपिटलिस्ट कंट्री कौन सी होती है? जहां पर इकोनमी इकोनॉमिक एक्टिविटी पर
ज्यादा फोकस किया जाता है। प्राइवेटाइजेशन पर ज्यादा फोकस किया जाता है। राइट? टैक्स कलेक्शन पे फोकस होता है। वेयर एज अगर आप
सोशलिस्ट की बात करें तो यहां पर क्या होता है? वेलफेयर स्कीम्स चलाई जाती है। यहां पर जो मेजर फोकस होता है वो लोगों की
डेवलपमेंट के ऊपर होता है। पर टैक्स कम होते हैं और गवर्नमेंट के पास जो है कंट्रोल होता है कंपनीज़ का। ठीक है? तो
आपको बेसिक कैपिटलिस्ट और सोशलिस्ट का आईडिया हो गया। देन देखिए इंडिया ने अडॉप्ट करा नॉन एलाइन मूवमेंट। ना हम
जाएंगे यूएसए के साथ ना हम जाएंगे यूएसएसआर के साथ। उन्होंने कोई भी ब्लॉक को जॉइ नहीं करा। हाउएवर इंडिया ने मेंटेन
करे क्लोज स्ट्रेटेजिक रिलेशनशिप किसके साथ? यूएसएसआर के साथ। ठीक? यूएसआर को देखेंगे तो इसका एरिया जो है बहुत बड़ा
था। ठीक है? लेकिन क्या होता है 1991 में जो है यूएसएसआर पूरी तरीके से क्या होता है? डिवाइड हो जाता है। यहां पर नई-नई
कंट्रीज बन जाती है। बेलारूस, यूक्रेन, पोलैंड। अब यहां पर क्वेश्चन आता है कि ये जो है डिवाइड क्यों हो गया? ये डिवीज़ यहां
पर हुआ क्यों? तो देखिए जैसे हमने देखा कि यूएसएसआर क्या थी? एक सोशलिस्ट कंट्री थी। इनका फोकस होना चाहिए था वेलफेयर स्कीम्स
पे, पीपल के डेवलपमेंट पे। बट आपको पता है यूएसएसआर बहुत ज्यादा खर्च करता था वेपन के ऊपर। अगर आप यहां से 1960 से लेके अगर
1990 तक ही देखें तो इस पीरियड में जो है रशिया ने क्या-क्या डेवलप करा देखिए मिग 21 इसी पीरियड में बना मिग 29 मिग 23 मिग
27 तो आपको पता है कि जब कोई जेट का डेवलपमेंट होता है इंजन डेवलपमेंट होता है और साथ में इन्होंने आर्टिलरीज बनाई एयर
डिफेंस सिस्टम बनाए कंट्री को बहुत ज्यादा पैसा चाहिए तो कंट्री जो है वेपंस और डिफेंस पे ज्यादा खर्चा कर रही थी
एक्सपेंशनिज्म पे ज्यादा खर्चा कर रही थी रेदर देन पीपल डेवलपमेंट तो इसकी वजह से जो है यहां पर जो है क्या होता है रिफ्ट
स्टार्ट हो जाता है और यहां पर नई कंट्रीज बनती हैं चलिए आगे चलते हैं तो देखिए 1962 32 में क्या होता है? इंडो चाइना वॉर होते
ही हमने देखा था और यूएसएसआर जो है वो मेंटेन करता है बैलेंस दोनों कंट्रीज के बीच में। नीदर ही सपोर्टेड इंडिया और
चाइना बट लेटर जो है यूएसएसआर इंडियन मिलिट्री के सपोर्ट में आता है। देन 1965 के अंदर देखिए क्या होता है कि यूएसएसआर
मेडिएट कराता है ताशकंद एग्रीमेंट 1966। तो देखिए जैसे ही वॉर खत्म होती है तो यहां पर क्या है? नेक्स्ट ईयर ताशकंद
एग्रीमेंट होता है। राइट? जो उज़्बेकिस्तान में था। तो यहां पर जो है यूएसएसआर जो है वो मीडिएट कराता है बीच
में आके। देन 1971 बहुत इंपॉर्टेंट है ये ईयर। क्यों? देखिए यहां पर 1971 में जो है इंदिरा गांधी हमारी जो प्राइम मिनिस्टर थी
वो जाती हैं रशिया और साइन करती हैं ट्रीटी ऑफ पीस फ्रेंडशिप एंड कोऑपरेशन। तो इसके अंदर क्या था कि अगर सपोज करिए अब
इंडिया और पाकिस्तान की लड़ाई होती है और कोई दूसरी कंट्री फॉर एग्जांपल यूके या यूएसए आता है पाकिस्तान की हेल्प करने के
लिए। राइट? तो उस केस में जो है यूएसएसआर आएगा इंडिया की हेल्प करने के लिए। और होता क्या है? देखिए 1971 के अंदर क्या
होता है कि जो हमारी इंडोपाक वॉर होती है, बांग्लादेश लिबरेशन वॉर होती है 1971 जिसके अंदर बांग्लादेश फॉर्म होता है। तो
वहां पर क्या है? यूएसएसआर हमारी हेल्प करने के लिए आता है। क्यों? क्योंकि यहां पर जो है यूएसए राइट यूएसए क्या करता है?
अपनी सेवंथ फ्लट को भेज देता है। और यह जो सेवंथ फ्लट होती है इसके अंदर क्या होता है? एयरक्राफ्ट कैरियर्स होते हैं और साथ
में जो है यूके भी आ जाता है अपनी सबमरींस को कॉर्पोरेट डिस्ट्रयर लेकर इंडियन ओशन के अंदर। तो देखिए इसे काउंटर करने के लिए
जो है यूएसएसआर हमारी हेल्प करने के लिए आता है और वह भी अपना एयरक्राफ्ट कैरियर को भेजता है। तो इससे हमें पता लगता है जो
ट्रीटी ऑफ़ पीस एंड फ्रेंडशिप कॉपरेशन हमने साइन करी वो हमें बहुत ज्यादा बेनिफिट करी 1971 में और 1971 में जिस तरीके से
यूएसएसआर ने अपनी नेवी भेजी इंडिया की हेल्प के लिए तो ये एक मेजर डेवलपमेंट और एक मेजर रिलेशन को दिखाता है इंडिया और
यूएसएसआर के बीच में। तो चलिए अब हम बात करते हैं एरियाज ऑफ कोपरेशन। तो पहला क्या है हमारे पास? स्पेस कोऑपरेशन, डिफेंस
कोऑपरेशन, टूरिज्म कोपरेशन, एजुकेशन कोऑपरेशन और इकोनॉमिक कोऑपरेशन। ठीक है? तो जब हम इंडिया और यूएसए का रिलेशन
पढ़ेंगे तो वहां पर भी हम पढ़ेंगे कि इंडिया और यूएसए के बीच में डिफेंस कोपरेशन क्या है? टूरिज्म कोऑपरेशन क्या है? एजुकेशन
कोऑपरेशन क्या है? आईटी सेक्टर और इकोनमिक कोपरेशन। तो सिमिलरली जब हम कोई और टॉपिक इजराइल का पढ़ेंगे तो वहां पे। तो आप इन
चीजों को बस याद रख लीजिए कि कोई भी दो कंट्री के जब रिलेशन होते हैं तो हम उसको डिफरेंट पैरामीटर्स में देखते हैं।
डिफरेंट कोऑपरेशन में देखते हैं। ठीक है? तो फिर एक कोऑपरेशन को आप लीजिए और उसके ऊपर बोलिए। चलिए स्टार्ट करते हैं हम
डिफेंस कोपरेशन। ठीक? देखिए जैसे ही डिफेंस कोपरेशन का नाम आता है और रशिया का नाम आता है तो हमारे दिमाग में क्या आता
है? वेपंस। तो देखो आपको कुछ फालतू का याद नहीं रखना है। सिर्फ एग्जांपल याद रखना है। क्या आपको सु 30m क्या याद आ रहा है?
Mग29 याद आ रहा है। मिग 23 मिग 21 मिग 27 राइट देन T90 बीच में जो इंडिया का मेन बैटल टैंक है वो भी कहां से लिया हुआ है?
हमने रशिया से लिया हुआ है। AK203 राइफल। अब ये जो राइफल है ना AK203 ये हमारी मेन राइफल बनने वाली है। ये इंसार्स को
रिप्लेस कर रही है। और ये भी हमने कहां से ली है? रशिया से ली है। इसकी जो फैक्ट्री है वो कहां है? अमेठी के अंदर यूपी के
अंदर ये असेंबल हो रही हैं। ठीक है? देन S400 एयर डिफेंस सिस्टम आपको पता है। ऑपरेशन सिंदूर में भी यूज़ हुआ। ब्रह्मोस
मिसाइल देन L70 एयर डिफेंस गन ये भी हमने यूज़ करी थी ड्रोन को न्यूट्रलाइज़ करने के लिए ऑपरेशन सिंदूर में देन नेवी पे आ जाते
हैं। हमने आर्मी की बात कर ली एयरफोर्स की बात कर ली। नेवी में देखिए आईनएस विक्रमादित्य जो बना है वो रशिया की हेल्प
से बनाया हमने किलो क्लास सबमरींस जो है तलवार क्लास फ्रिजेड्स हैं। तो ये सब क्या है? हमने रशिया की हेल्प से बनाया और
दोनों कंट्री जो है साथ में मिलकर एक्सरसाइज भी परफॉर्म करती है। फॉर एग्जांपल इंदिरा एक्सरसाइज अभी इंदिरा
एक्सरसाइज। तो यह ग्रेट एग्जांपल आ जाता है कि कैसे जो है हमारा डिफेंस कॉपोरेशन बहुत ज्यादा स्ट्रांग है। और अगर आप
देखेंगे इंडिया के टॉप थ्री डिफेंस पार्टनर्स तो उसमें रशिया आपको जरूर मिलेगा हमेशा। अगर हम रिसेंट की डील की
बात करें तो देखिए यहां पे एक तुंगस्का एयर मिसाइल डिफेंस सिस्टम है जो कि इंडियन आर्मी हमारी यूज़ करती है। अब इसकी जो
मिसाइल्स हैं वो हमारी पुरानी हो चुकी थी। तो हमने नई मिसाइल्स को ऑर्डर करा है और ये कितनी है? 445 करोड़ का ऑर्डर दिया है
हमने। तो यहां से पता लगता है रिसेंटली इन देखिए 27 मार्च एंड 2026 में ही हमने जो है 445 करोड़ के फिर से वेपन जो है किससे
खरीदे हैं? रशिया से खरीदे और आपको पता है SU 57 S57 जो है रशिया ने ट्विन सीटर वर्जन बनाया है। ये किसके लिए बनाया है?
इंडिया के लिए बनाया है स्पेशली। तो इससे हमें पता लगता है कि अगर पाकिस्तान जो है J35 जो कि फिफ्थ जनरेशन एयरक्राफ्ट है
चाइना से एक्वायर करता है तो डेफिनेटली इंडिया भी जो है S57 के साथ जाएगा और ये अभी जो है एवोल्यूएशन चल रहा है। देखते
हैं फ्यूचर में क्या हम S57 खरीदते हैं या नहीं। तो चलिए एक इंपॉर्टेंट पॉइंट पर बात करते हैं अब। तो यहां पर डिफेंस
कॉर्पोरेशन में हमने रिसेंटली क्या है रे लॉस एग्रीमेंट साइन करा है। तो ये रेल लॉस एग्रीमेंट क्या है? यहां पर रेसिप्रोकल
एक्सचेंज ऑफ़ लॉजिस्टिक्स एग्रीमेंट है। तो इसके अंदर क्या होने वाला है? देखिए रशिया जो है 3000 सोल्जर्स जो है वो इंडिया के
लैंड के ऊपर डिप्लॉय कर सकता है। सिमिलरली इंडिया जो है इंडियन सोल्जर अराउंड 3000 जो हैं वो रशिया के लैंड पे डिप्लॉय हो
सकते हैं। ठीक है? यानी कि हम सोल्जर को एक्सचेंज कर सकते हैं। समझ में आ रहा है? ये जो यहां पर ई एक्सचेंज है। तो यहां पे
हम क्या है? सोल्जर का एक्सचेंज कर सकते। तो सेकंड क्या है? नेवी के जितने भी शिप्स हैं, वॉरशिप्स हैं, वो एक दूसरे के डॉक
फैसिलिटी को यूज़ कर सकते हैं। तो देखिए, रशिया के पास क्या है? आर्टिक के पास इनका नेवल बेस है। तो देखिए, इंडियन नेवी क्या
है? अब आर्टिक तक अपनी प्रेजेंस बना सकती है। राइट? आर्टिक आपको पता है इट्स नॉट पॉसिबल फॉर इंडियन नेवी कि वहां पर जाए।
बट यहां पर अगर हमारा रशिया के साथ ये एग्रीमेंट साइन हो रखा है। तो अब जो है इंडियन नेवी भी वहां पर अपनी प्रेजेंस को
बना सकती है। दूसरी चीज़ क्या है? हम एक दूसरे की डॉक फैसिलिटी फॉर रिपेयर और एयर बेसिस भी यूज़ कर सकते हैं हम रिपेयरमेंट
के लिए, लैंडिंग के लिए। ठीक है? तो यह एक इससे क्या होता है कि जो जॉइंट पार्टनरशिप है दोनों कंट्री की वो रिच होएगी क्योंकि
अगर आप सोल्जर्स एक दूसरी कंट्री में भेज सकते हैं तो यानी कि आपका ट्रस्ट जो है वो बहुत ज्यादा है। क्या हमने ऐसा कोई
एग्रीमेंट यूएसए के साथ भी साइन करा है? तो यस हमने लेमोहा साइन कर रखा है। ठीक है? तो ये भी याद रखना है लॉजिस्टिक
एक्सचेंज ये वाला भी जो है हमने यूएसए के साथ साइन कर रखा है। तो इसके अंदर क्या है? यूएसए के सोल्जर। तो इसके अंदर क्या
है कि जो यूएसए की नेवीज है वो इंडिया के अंदर आ सकती हैं रिपेयरमेंट फैसिलिटी के लिए, डॉग के लिए, रिपेयर के लिए। है ना?
और वेयर एज इंडियन नेवी भी जो है उनके जितने भी डॉग्स हैं वहां पर जा सकती है। फॉर एग्जांपल इंडियन ओशन में अगर आपने
इंडियागो गार्सिया देखा होगा तो वहां पर इंडियन नेवी जा सकती है फॉर रिपेयर एंड अदर वर्क। चलिए आगे देखते हैं। इकोनॉमिक
कोपरेशन के बारे में पढ़ते हैं। देखिए देखिए ट्रेड क्रॉस 60 बिलियन रीसेंट ईयर के अंदर। तो दोनों कंट्रीज का ट्रेड कितना
है? 60 बिलियन डॉलर्स का है। और यहां पर क्या है? देखिए चेन्नई व्डीवॉस्टक मेरिटाइम कॉरिडोर प्लान किया गया है।
चेन्नई व्डीवॉस्टक मैरिटाइम कॉरिडोर प्लान किया गया है कि हम जो है ट्रेड और ज्यादा बढ़ाएं अपना। ठीक है? और यहां पर जो है
100 बिलियन तक जाने का टारगेट रखा है बाय 2030। तो ये चीज भी आप याद रख सकते हैं। देन रशिया बिकम वन ऑफ द इंडियास टॉप क्रूड
ऑयल सप्लाई। तो अभी क्या चल रहा है? एनर्जी क्राइसिस चल रहा है और रशिया हमारी हेल्प कर रहा है क्योंकि डिस्काउंटेड
प्राइस पे जो हमें ऑयल और नेचुरल गैस मिल रहा है। और देखिए रशिया क्या है? एक अल्टरनेट रूट है। मिडिल ईस्ट पे हम
डिपेंडेंट थे। बट वहां पर वॉर हुई। हमारा सारा ऑयल नेचुरल गैस रुक गया। बट यहां पर जो रशिया है आप देखेंगे तो ये दूसरा रूट
है। राइट? रशिया की ज्योग्राफिकल लोकेशन बहुत ज्यादा अलग है। ठीक है? तो यहां पर जो है एक एडवांटेज आ जाता है कि अल्टरनेट
रूट मिल जाता है हमें। तो देखिए 84% ऑफ इंपोर्ट जो हम करते हैं क्रूड ऑयल, पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स एंड फर्टिलाइजर।
फर्टिलाइजर बहुतेंट है। तो ये सारा कहां से आता है? रशिया से आता है। तो इससे हमें पता लगता है कि नॉट ओनली डिफेंस। हम तो
यहां पर मेजरली किस पर डिपेंडेंट है? ऑयल, पेट्रोलियम, नेचुरल गैस और फर्टिलाइजर। चलिए आगे बढ़ते हैं। देन अगर हम एजुकेशन
कॉपोरेशन की बात करें तो यहां पर क्या है? मॉस्को स्टेट यूनिवर्सिटी है। कजान फेडरल यूनिवर्सिटी है। अट्रैक्ट करती है इंडियन
स्टूडेंट को। अराउंड 18 टू 25,000 इंडियन स्टूडेंट्स स्टडी इन रशिया। और मेनली क्या पढ़ रहे हैं वो? वो एमबीबीएस कोर्स कर रहे
हैं। ठीक है? रशिया इज़ अमंग द टॉप डेस्टिनेशन ऑफ़ इंडियन एमबीबीएस अब्रॉड स्टूडेंट। तो देखिए यूनिवर्सिटी का नाम
बहुत सिंपल है। मॉस्को स्टेट यूनिवर्सिटी। क्यों? क्योंकि आपको पता है रशिया की कैपिटल मॉस्को है। तो वहां से मॉस्को
स्टेट यूनिवर्सिटी और कजान फेडरल यूनिवर्सिटी। ठीक है? और 18 टू 15,000 स्टूडेंट जो है स्टडी कर रहे हैं। चलिए
टूरिज्म कोपरेशन की बात करें तो अराउंड 1.5 टू 2 लाख रशियंस जो हैं वो कहां आ रहे हैं? गोवा के अंदर आते हैं। राइट? तो गोवा
के अंदर वो यहां पर हॉलिडेज़ मनाने आते हैं। और डायरेक्ट उनकी चार्टर फ्लाइट जो है कहां पर लैंड करती है? गोवा के अंदर।
एंड रशिया इज़ वन ऑफ द लार्जेस्ट कंट्रीब्यूट्स टू गोवा टूरिज्म। ठीक है? तो ये बात भी आप याद रख सकते हैं। देन अगर
हम देखें इंडियन टूरिस्ट जो रशिया के अंदर जा रहे हैं अराउंड 70 टू 80,000 हर साल जो है इंडियन टूरिस्ट जो है रशिया के अंदर
जाते हैं और उनकी फेवरेट डेस्टिनेशन क्या है? मॉस्को सटरबर्ग है ना? देन यहां पर देखिए ई वीजा फैसिलिटीज़ भी लाई गई है
इंडियंस के लिए। ठीक है? ई वीजा अलाउज़ ऑनलाइन एप्लीकेशन विदाउट एंबेसी विजिट मेकिंग ट्रैवल फास्टर एंड ईज़ियर। तो आप
बोल सकते हैं देखिए टूरिज्म के अंदर रशिया जो है ई वीजा फैसिलिटी लाया है इंडिया के अंदर कि आप ऑनलाइन जो है फाइल कर सकते हैं
वीजा को वीजा ले सकते हैं रेदर दैन गोइंग डायरेक्टली टू दी एंबेसी। चलिए अब हम बात करते हैं न्यूक्लियर एनर्जी की। राइट? तो
देखिए यहां पर इंडिया का है कुडान कुलान न्यूक्लियर पावर प्लांट जो है तमिलनाडु के अंदर। और ये इंडिया का वन ऑफ द लार्जेस्ट
न्यूक्लियर पावर प्लांट है। तो ये भी जो हमने बनाया है वो किसकी असिस्टेंस से बना है? रशिया की असिस्टेंस से बनाया है। देन
अगर हम स्पेस कॉरपोरेशन की बात करें तो ये क्या है? आर्यभट्टा से सैटेलाइट है। ठीक है? तो ये जो आर्याभट्टा सेटेलाइट है
इंडिया की फर्स्ट सेटेलाइट थी जो इंडिया ने 1975 में ल्च करी थी। ये हम कहां पढ़कर आए थे? जब हमने स्पेस पढ़ा था इंडिया
स्पेस प्रोग्राम तो प्लीज रिवाइज करना। ठीक है? तो रशिया ने वहां पर हेल्प करी थी इसरो की अर्ली राइट अर्ली स्पेस
प्रोग्राम्स के अंदर जब हम डेवलप कर रहे थे। देन अगर हम गगनयार मिशन की बात करें जो हमारे एस्ट्रोनॉट स्पेस के अंदर जाने
वाले हैं एलवीएम 3 रॉकेट के अंदर। तो वो जो मिशन है उसमें भी जो ट्रेनिंग हुई है हमारे एस्ट्रोनॉट्स की वो कहां हुई थी?
इनिशियली रशिया के अंदर ही हुई है। राइट? तो रशिया जो है हमारी कंटीन्यूअसली हेल्प करता रहता है इन टर्म्स ऑफ स्पेस सेक्टर।
तो यहां पर ये एक इंपॉर्टेंट कांसेप्ट आता है जो हमें याद रखना है रूपी रूबल मैकेनिज्म। तो अगर कोई भी टॉपिक आता है कि
हम कैसे अपनी रूपी की वैल्यू को बढ़ा सकते हैं या फिर हम कैसे इनफ्लेशन कम कर सकते हैं। तो वहां पर आप रूपी और रूबल का
कांसेप्ट बताएंगे। तो देखिए यहां पर क्या होता है? ट्रेड बिटवीन इंडिया एंड रशिया इज़ डन इन रूपी एंड रूबल इंस्टेड ऑफ़
डॉलर्स। तो यहां से आप डॉलर को यूज़ नहीं कर रहे हैं। और अगर आप डॉलर को यूज़ नहीं करेंगे तो डॉलर की वैल्यू गिरेगी। तो यहां
पे डीडोलराइजेशन होगा। तो अगर कल को कोई टॉपिक आता है डीडोलराइजेशन तो वहां पे भी आप ये एग्जांपल दे सकते हैं। तो तो देखिए
जब भी आप किसी कंट्री से सामान खरीदते हैं और अगर उसको रुपी देते हैं तो रुपी की वैल्यू बढ़ेगी। अगर आप डॉलर को यूज़ करते
हैं तो डॉलर की वैल्यू बढ़ेगी। सिमिलरली रूपी की वैल्यू बढ़ेगी। तो यहां पर क्या होता है? जब भी इंडिया बाय करता है क्रूड
ऑयल फ्रॉम रशिया। आपने देखा है अराउंड 84% जो है हम वो पेट्रोलियम, ऑयल, फर्टिलाइजर ये सब इंपोर्ट करते हैं रशिया से। तो हम
किस में देते हैं पैसे? रूपी में देते हैं। अब क्वेश्चन आता है हमने तो रुपी में पेमेंट कर दी। बट वो उस रूपी का करेंगे
क्या? राइट? उनकी ये करेंसी तो उनके यहां चलती नहीं है। तो देखिए इसी रूपी को यूज़ करते हुए वो इंडिया से क्या खरीदते हैं?
फार्मासटिकल्स टी मशीनरीज़ को। तो यहां से जो है रूपी की वैल्यू बढ़ेगी। राइट? तो यहां से क्या है? देखिए हम ट्रेड जो है
डॉलर में नहीं कर रहे हैं और रूपी में कर रहे हैं। तो अब यहां पर एक प्रॉब्लम आ जाती है। वो प्रॉब्लम क्या है? देखिए
रशिया अर्न मोर रूपी। अब क्या है? हम ज्यादा सामान जो है रशिया से खरीदते हैं। सपोज़ हम रशिया से ₹100 का सामान खरीदते
हैं। तो उनके पास ₹100 क्या है? एक्यूमुलेट हो गया है। बट अब जब उन्हें खरीदना है सामान। बट वह कितने का खरीदते
हैं? 30 से ₹40 का सामान खरीद यह जो ₹70 उनके पास सरप्लस में आ गया है वो यहां पर जो है इनके लिए प्रॉब्लम करता है। तो
इसलिए यहां पे हम बोल सकते हैं रशिया अर्स मोर रूपी बट कैन नॉट फुल्ली यूज़ देम ट्रेड इमंबैलेंस होता है। इसका ओनली सॉल्यूशन
क्या है कि हम अपनी मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को स्ट्रांग करें। राइट? कि ज्यादा से ज्यादा कंट्री जो है हमसे इंपोर्ट
करें। तो यहां पर यही एक इसका सॉल्यूशन है। चलिए चैलेंजेस की बात भी कुछ कर लेते हैं। देखिए रशिया और चाइना की क्या है?
क्लोजनेस है। राइट? हमने देखा है रशिया और चाइना जो है एक दूसरे को वेपन सेल करते हैं। ऑयल एंड नेचुरल गैस के सेल करते हैं।
और आपको पता है 2026 रिसेंटली मई में जो है जो व्लादमीर पुतिन है वो रशिया गए हैं। तो उनके बीच में जो है टाइल्स बन रहे हैं
काफी सारे। तो यहां पर अगर रशिया की क्लोजनेस होगी चाइना से और आपको ये एक थ्रेट होगा। देन डिले इन डिफेंस सप्लाई।
देखिए जब भी हम रशिया से कोई भी वेपन खरीदते हैं तो वहां पे हमें डिले देखने को मिलता है। सेकंड क्या है कि यहां पर
स्पेयर पार्ट्स और मेंटेनेंस का इशू बहुत ज्यादा आता है। फॉर एग्जांपल अगर Mi-26 हेलीकॉप्टर की अगर बात करें या MIG-29K की
बात करें आप तो इंडियन नेवी के जो MI-29 के है यहां पर जो रशियन वेपंस होते हैं इनकी जो लाइफ होती है वो कम होती है इन
कंपैरिजन टू यूएस के वेपन से। ठीक है? बहुत सारी रिपोर्ट्स इस पर आ चुकी है कि Mi-26 हेलीकॉप्टर जो है वो हमारा उसको
हमें रिपेयर करना है। हम उसको यूज़ नहीं कर पा रहे हैं। ठीक? और सिमिलरली और भी वेपंस में जो है हमें प्रॉब्लम फेस करने को मिली
है। देन हमारे पास क्या आता है वेस्टर्न सेंशन ऑन रशिया अफेक्टिंग ट्रेड पेमेंट। तो आपको पता है कि बहुत सारे सेंशन लगे
हैं आफ्टर दी रशिया वर्सेस यूक्रेन वॉर। तो आपको काटसा एग्रीमेंट के बारे में पता होगा कि यूएसए क्या करता है? अगर कोई भी
रशिया से कोई बहुत बड़ा वेपन खरीदता है S400 या फिर बड़े फाइटर जेट्स तो वहां पर उन पर क्या है? काटसा लग जाता है। ऑलदो
अभी इंडिया पर नहीं लगा है। बट इन फ्यूचर अगर इंडिया जो है बाय करता है 257 तो हम क्या है? बिलियंस ऑफ डॉलर रशिया को देंगे।
रशिया की इकॉनमी बढ़ेगी और वो वेपन और वो पैसा वो फ्यूल कहां करेंगे? रशिया वर्सेस यूक्रेन वॉर में करेंगे। तो इसलिए हमारे
पास क्या है यहां पर थ्रेट आता है वेस्टर्न सेंशन का। ठीक है? देन इंडिया और रशिया ने एक टारगेट सेट रखा है कि हम 100
बिलियन डॉलर्स का जो है ट्रेड करना चाहते हैं। तो यह एक अच्छा पॉइंट है जो आप रख सकते हैं। तो दिस वाज़ ऑल अबाउट दी रशिया
एंड इंडिया रिलेशनशिप। हमने बहुत सारे कोऑपरेशन को पढ़ा है। तो प्लीज उन कोपरेशन को रिवाइज करिए। स्पेस कॉपरेशन, डिफेंस
कोऑपरेशन, एजुकेशन कोपरेशन, टूरिज्म कोऑपरेशन। ठीक है? चलिए अब हम पढ़ते हैं इंडिया यूएस रिलेशंस। तो हमने इंडिया
रशिया रिलेशन पढ़ लिया है। अभी तो अब हम इंडिया और यूएस रिलेशन देख लेते हैं। तो देखिए स्टार्टिंग हम वहीं से करते हैं कि
इंडिया को इंडिपेंडेंस मिलती है 1947 में। दो मेजर सुपर पावर थी। एक था यूएसए और दूसरा यूएसएसआर था। यूएसए कैपिटलिस्ट
कंट्री थी। जहां पर इकॉनमी पे ज्यादा फोकस था। प्राइवेटाइजेशन पे था। टैक्स कलेक्शन होता था। वेयर सोशलिस्ट कंट्री कौन सी थी?
जहां पर पब्लिक के वेलफेयर की बात होती थी। टैक्स नहीं लिया जाता था और गवर्नमेंट के पास प्राइवेट कंपनीज़ का कंट्रोल होता
था। इंडिया ने क्या चूज़ करा? ना इंडिया ने लिया यूएसए का साथ ना यूएसएसआर का। इंडिया ने बोला हम रहेंगे नॉन एलाइंड। हम किसी भी
ब्लॉक को जॉइ नहीं करेंगे। लेकिन अगर हम देखें डिपेंडेंसी की बात तो जैसे ही हमारा देश आजाद हुआ तो वहां पर क्या था? फेमाइन
था। भुखमरी थी। राइट? फिर आपने देखा फाइव इयर्स प्लान आया जहां पर हमारा एग्रीकल्चर सेक्टर डेवलप। इनिशियली इंडिया जो है फ़ूड
क्राइसिस से जो है सफर कर रहा था। तो यहां पर जो है यूएसए ने जो है हमें सप्लाई करा फ़ूड एड। तो देखिए यहां पर हम फ़ूड एड के
लिए फ़ूड के लिए किस पे डिपेंडेड थे? यूएसए के लिए। LL480 वीट कैटेगरी। ठीक है? तो यहां पर हम किसे इंपोर्ट करते थे? यूएसए
से इंपोर्ट करते थे। तो हम बोल सकते हैं फ़ूड एनर्जी के लिए हम किसके लिए? यूएसए पे डिपेंडेड थे। और यूएसआर पे हम डिफेंस
इक्विपमेंट्स के लिए थे। देन देखिए क्या होता है? 1962 के अंदर इंडो चाइना वॉर होती है। और यूएसए सपोर्ट करता है इंडिया
को विद आर्म्स एंड लॉजिस्टिक्स। बट यहां पर क्या था कि यूएसए के जो प्रेसिडेंट थे वो कौन थे? जॉन कैनडी थे। उनका होता है
अससिनेशन। और फिर आते हैं यहां पर निक्न। अब Nexन जैसे ही आते हैं ना 1963 के अंदर तो इंडिया और यूएस के रिलेशन जो है वो
खराब होना स्टार्ट हो जाते हैं। तो देखिए 1965 वॉर होती है और आपको पता है यूएसए सपोर्ट करता है पाकिस्तान को। यूएसए जो है
प्रोवाइड करता है उनको पैटन टैंक्स F86 सेबर जेट और यह वही F86 सेबर जेट है जो फ्लाइंग ऑफिसर निर्मलजीत से ने डिस्ट्रॉय
करा था। राइट? और इनके लिए उनको परमवीर चक्र भी मिला था। उन्होंने यह दो फाइटर जेट को गिराया था। किससे? जीनेट
एयरक्राफ्ट से। ठीक है? देन अगर आप देखेंगे F14 एयरक्राफ्ट जिसे स्टार फाइटर भी कहते हैं। तो यह मेजरली यूज हुए थे
पाकिस्तान द्वारा इन इंडोपाक वॉर जो यूएसए है इनको ये कंटीन्यूअसली सप्लाई कर रहा था। ठीक है? देन 1971 में इंडोपाक वॉर
होती है। तो हम इंडिया और रशिया रिलेशन में पढ़ के आए थे कि यूएसए ने सेंड करा था यूएसएस एंटरप्राइज। सेवंथ फ्लट भेज दी थी
अपनी बे ऑफ़ बंगाल के अंदर। किसको प्रोटेक्ट करने के लिए? पाकिस्तान को प्रोटेक्ट करने के लिए। बट वहां पर हमने
बताया था 1971 में हमने ट्रीटी ऑफ़ पीस एंड फ्रेंडशिप कॉपरेशन साइन करी जिसके अंदर जो है कोई भी एक्सटर्नल थ्रेट होता है इंडिया
को तो रशिया उसमें हेल्प करने आए। रशिया ने भी अपना एयरक्राफ्ट कैरियर भेजा था और यहां पर जो है यूएस को वापस जाना पड़ा था।
तो चलिए न्यूक्लियर इशू को देख लेते हैं। देखिए 1974 में इंडिया जो है अपना फर्स्ट न्यूक्लियर टेस्ट करता है और 1998 में
न्यूक्लियर टेस्ट करता है। तो आपने सुना होगा वो टेस्ट के बारे में स्माइलिंग बुद्धाशक्ति। तो यहां पर होता क्या है?
जैसे ही हम न्यूक्लियर टेस्ट करते हैं तो हम पर जो है टेक्नोलॉजी रिस्ट्रिक्शन लगा दिए जाते हैं। इकोनॉमिक सेंशंस लगा दिए
जाते हैं। हमें लोन नहीं मिलता है। हमें टेक्नोलॉजी देने से और जितनी भी कंट्रीज थी मना कर देती है। यूरेनियम के इंपोर्ट
पर बैन लगा दिया जाता है। ठीक है? तो यहां पर देखिए जो यूएसए था वो इंडिया के अगेंस्ट था। देखिए टर्निंग पॉइंट कब आता
है? 91 अटैक्स होते हैं। आपने 91 अटैक के बारे में सुना होगा। तो देखिए 91 अटैक्स होते हैं और तब जो है यूएसए को समझ में
आता है कि देखिए इंडिया भी जो है वो टेररिज्म को फेस कर रहा है बहुत हैवी और ये टेररिज्म कहां से आ रहा है? पाकिस्तान
से अफगानिस्तान से। राइट? तो इसलिए जो है दोनों कंट्रीज साथ में मिलती है और स्ट्रेटेजिक कोऑपरेशन बनाती है। डिफेंस
कोपरेशन बनाती है आफ्टर दी 91 अटैक। चलिए अब हम बात करते हैं डिफेंस कोऑपरेशन। तो जैसे ही डिफेंस का नाम आता है और इंडिया
यूएसए का नाम आता है तो मेरे दिमाग में चीनक हेलीकॉप्टर आता है। C17 ग्लोब मास्टर आता है। C130 जे हरकुलिस आता है। Apacचे
हेलीकॉप्टर्स P8 एयरक्राफ्ट जो कि हमारी इंडियन नेवी यूज़ करती है। M7 H होसर और अब बात करेंगे एसआईजी 716 गंस जो कि इंडियन
आर्मी अब यूज़ करती है फॉरवर्ड लोकेशनेशंस पर। देन अगर हम बात करें किसकी? तेजस एयरक्राफ्ट की। तो Tejas के अंदर इंजन कौन
सा यूज़ होता है? F4O4 इंजन। आपको पता है हम क्या है? फिफ्थ जनरेशन एयरक्राफ्ट बना रहे हैं। कौन सा? अमका बना रहे हैं। राइट?
आपने सुना होगा हमका के बारे में एएमसी फिफ्थ जनरेशन एयरक्राफ्ट। तो यहां पर भी जो है इंजन यूज़ होने वाला है वो इनिशियली
कौन सा होगा? F414 इंजन यूज़ होगा। तो इससे हमें पता लगता है कि हम इंजन जो कि क्रिटिकल टेक्नोलॉजी होती है वो भी यूएसए
पे डिपेंडेंट है। ठीक है? तो जरूर इन एग्जांपल्स को आप याद रखिए और आप बोल सकते हैं कि ऑलमोस्ट ज़ीरो से हम जो है 20
बिलियन पर आ चुके हैं डिफेंस कॉर्पोरेशन के अंदर। और भी चीजें हैं इसमें आप ऐड कर सकते हैं। अपाचे हेलीकॉप्टर भी आप ऐड कर
सकते हैं। ठीक है? चलिए अब हम बात करते हैं एजुकेशन एंड पीपल पे। ठीक है? तो इंडियन स्टूडेंट इन यूएसए कितने हैं?
अराउंड 2.6 लाख। तो 2.6 लाख इंडियन ओरिजिन स्टूडेंट कहां गए? यूएसए फॉर स्टडी पर्पस। ठीक है? तो ये ब्रेन रेड में भी आप ऐड कर
सकते हैं। देन रेमिटेंस टू इंडिया। इंडिया रिसीव करता है अराउंड 30 टू 35 बिलियन। कहां से? यूएसए से। और आपको पता है इंडिया
ही एक ऐसी कंट्री है जो सबसे ज्यादा रेमिटेंस पूरे वर्ल्ड में रिसीव करती है। अराउंड 137 बिलियन हमने इस साल जो है
रिसीव करा है। तो आप बता सकते हैं कि देखिए अराउंड 30 टू 35 बिलियन तो हम यूएसए से लेकर आ रहे हैं। इंडिया रिसीव हाईएस्ट
रेमिटेंस फ्रॉम द यूएसए। चलिए आगे बात करते हैं हम। देखिए Google, Microsoft, Apple, IBM, मेटा और भी बहुत सारी कंपनीज़
हैं ऐसी जहां पर इंडियंस काम कर रहे हैं। ठीक है? तो यहां पे अराउंड मिलियंस ऑफ लोगों को जॉब मिलती है बिकॉज़ ऑफ दी यूएसए
की कंपनीज़ के। तो आईटी एंड जॉब कनेक्शन तो आपको इसके बारे में जरूर पता होगा। देखिए जितनी भी कंपनीज़ हैं Google, Microsoft,
Apple, आईबीएम यहां पर क्या है? आईटी सर्विज जो है बहुत ज्यादा प्रॉमिनेंट है। तो इसलिए बहुत सारे इंडियंस जो है आईटी
सेक्टर में काम करते हैं और इन कंपनीज़ में काम करते हैं। तो अगर आप यहां पर देखेंगे टोटल इंडियंस इन यूएस सेक्टर इज़ 4 टू 5
मिलियन है इंडियन ओरिजिन। तो आप बता सकते हैं 40 टू 50 लैक्स ऑफ इंडियंस आर वर्किंग इन यूएसए इन टैक्स सेक्टर और आपको पता है
जो यह इंडियंस काम कर रहे हैं यह कंट्रीब्यूट करते हैं अराउंड 7 टू 8 बिलियन यूएस की इकॉनमी में। तो ऐसा नहीं
है कि सिर्फ इंडियंस को फायदा होता है। यूएसए को भी फायदा होता और जॉब्स जो है बहुत ज्यादा जनरेट होती है। आप देख सकते
हैं। चलिए आगे बढ़ते हैं ट्रेड रिलेशंस की। तो देखिए ट्रेड कितना है? 200 बिलियन टच कर गया है हमारा ट्रेड 200 बिलियन। और
यह स्टेटमेंट बहुत इंपॉर्टेंट है। यूएसए इज़ इंडियास लार्जेस्ट ट्रेडिंग पार्टनर। यूएसए इज़ इंडियास लार्जेस्ट ट्रेडिंग
पार्टनर। और सबसे बड़ा एडवांटेज क्या है? देखिए इंडिया एक्सपोर्ट मोर देन इंपोर्ट। यानी कि हम यहां पर ज्यादा एक्सपोर्ट कर
रहे हैं। हमें 30 टू 40 बिलियन का फायदा होता है सरप्लस यहां पर। राइट? जब हम यूएसए से ट्रेड करते हैं। देखिए हम क्या
भेजते हैं यूएसए को? आईटी सर्विज, फार्मासटिकल, टेक्सटाइल ज्वेलरी वेयर एज हम यूएसए से क्या खरीदते हैं? क्रूड ऑयल,
गैस, एयरक्राफ्ट, बोइंग, डिफेंस इक्विपमेंट्स। डिफेंस के बारे में हमने पढ़ा था। चलिए अब एयरक्राफ्ट बोइंग के
बारे में भी हम पढ़ लेते हैं। तो देखिए 2023 में इंडियन गवर्नमेंट ने एक मैसिव डील साइन करी जहां पर हमने 470 प्लेेंस का
ऑर्डर दिया। आउट ऑफ वि 220 प्लेेंस जो थे वो बोइंग के थे। राइट? तो ये भी क्या है? एक बिलियंस ऑफ डॉलर्स की डील थी। तो आप ये
बता सकते हैं। ठीक है? देन कंट्रीब्यूशन हमने पढ़ा कि 7 टू 8 बिलियन ईयर लीड टू यूएस इकॉनमी बाय इंडियन टेक एंड आईटी
इंडस्ट्री जो है यहां पर कंट्रीब्यूट करती है। चलिए आगे देखते हैं। क्रिटिकल टेक्नोलॉजीस फ्रॉम यूएसए। तो देखिए यूएसए
से हमें कुछ क्रिटिकल टेक्नोलॉजीस मिल जाती हैं। जैसे कि C130J, Apache, F4 इंजन, F414 ऑलदो अगर आप देखें तो यह जो
टेक्नोलॉजीस है ना यह यूएस में ही मैन्युफैक्चर होती है और फिर इंडिया के अंदर आती है। राइट? तो हमें क्या है?
मैन्युफैक्चरिंग प्रोडक्ट मिल रहा है। यहां पर पूरी क्रिटिकल टेक्नोलॉजी हमसे यूएसए शेयर नहीं करता। चलिए डिजिटल एंड
आईटी सेक्टर की बात करें तो क्लाउड, Google, Microsoft, AI, सेमीकंडक्टर कॉरपोरेशन। देखिए जितनी भी मेजर कंपनीज़
हैं लाइक Google, Microsoft, Apple, Ma, IBM तो ये सारी कंपनीज़ जब इंडिया के अंदर आई तो वहां से हमें पता लगा कि आईटी
सेक्टर कैसे काम करता है, ऑपरेशन कैसे करता है? वेबसाइट ऑल दो। ठीक है? देन आप आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का ले सकते हैं कि
एआई कहां से निकला। राइट? आई एम ऑल्ट यूएसए से निकला। तो ये सारी जो डिजिटल और आईटी सेक्टर की चीजें हैं वो हमें कहां?
यूएसए से आती हैं। इंडिया के अंदर। जो ट्रेंड यूएसए में फॉलो होता है वो कुछ सालों बाद कहां पर आता है? इंडिया के अंदर
आता है। देन एनर्जी की अगर हम बात करें तो हम एलएनजी यहां से इंपोर्ट करते हैं। सिविल न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी। सो देखिए
इंडियास मॉडर्नाइजेशन डिपेंड्स ऑन यूएस टेक। तो ये एक पॉइंट आप बोल सकते हैं। तो चलिए अब हम बात कर लेते हैं डिफेंस
एग्रीमेंट्स की। लेमोहा एग्रीमेंट लॉजिस्टिक सपोर्ट। तो जैसे हमने पढ़ा था किस में? इंडिया और रशिया के रिलेशनशिप
में। वहां पर कौन सा था? रेलॉस एग्रीमेंट था। राइट? यहां पर एक दूसरे की नेवीज जो हैं वो डॉक फैसिलिटी को यूज कर सकती हैं।
एयर बेसिस एयर फील्ड को यूज कर सकती हैं। फॉर रिपेयरमेंट ओवरहॉल एंड हमने फिर क्या पढ़ा था कि सोल्जर्स डिप्लॉय हो सकते हैं।
तो यहां पर भी सिमिलर ऐसा ही है। रिफ्यूलिंग रिपेयर सप्लाई एक दूसरे के बेसिस को हम यूज़ कर सकते हैं। ठीक है?
फॉर एग्जांपल आप देख सकते हैं यूएस का जो F35 एयरक्राफ्ट है वो केरला के अंदर लैंड करता है। यहां पर क्या एक एक्सरसाइज हो
रही थी और वहां पर कुछ एयरक्राफ्ट के अंदर मैल फंक्शन आता है और वह यहां पे केरला के अंदर आ जाता है। केरला की एयर फील्ड पे
लैंड करता है और फिर यहां पर वो जो है अराउंड मंथ जो है वो हैंगर में ही रहता है। तो ये क्यों था? क्योंकि हमने लेमो
एग्रीमेंट को साइन कर रखा था। राइट? देन यूएस नेवी के जो शिप्स हैं वो रेगुलरली रिफ्यूल करते हैं इंडियन पोर्ट्स पे
चेन्नई और मुंबई पे। और सिमिलरली इंडिया भी एक्सेस कर सकता है यूएस के बेसिस लाइक दिया गार्सिया जो कि कहां है? इंडियन ओशन
में है। तो यह जरूर आप अपने जीडी लेक्चरेट में कभी भी ऐसा कुछ पॉइंट आता है तो आप बोल सकते हैं लेमोहा एग्रीमेंट के बारे
में। देन हमने जो है कॉमकासा एग्रीमेंट भी साइन कर रखा है। राइट? सिक्योर कम्युनिकेशन। तो देखिए सिक्योर
एनक्रिप्टेड कम्युनिकेशन बिटवीन इंडिया और यूएस। राइट? तो देखिए हमने क्या है? एक पी8 आई एयरक्राफ्ट लिया था। अब यहां से
क्या है? हम शेयर कर सकते हैं रियल टाइम डाटा विद यूएस नेवी। देखिए जो भी P8 आई एयरक्राफ्ट को इंफॉर्मेशन मिलती है इंडियन
ओशन के बारे में के बारे में अरेबियन सी तो वो यहां पर यूएस नेवी के साथ शेयर कर सकता है। देन ड्यूरिंग मलाबार नेवल
एक्सरसाइज इंडिया एंड यूएसए कोऑर्डिनेट लाइव यूजिंग सिक्योर सिस्टम। देखिए सिक्योर कम्युनिकेशन बेटर कोऑर्डिनेशन। हम
क्वाड के अंदर क्या पढ़कर आए थे कि ये जो चारों नेवीज हैं तो देखिए ये चारों नेवीज जो हैं इललीगल फिशिंग इललीगल जो
ट्रैफिकिंग चलती है ड्रग्स वगैरह की तो उस पर भी ये क्या है चारों मिलकर काम करते हैं तो ये चारों मिलकर काम कब कर सकते हैं
जब यहां पर एक सिक्योर कम्युनिकेशन होगा तो आप बता सकते हैं अबाउट कॉमसा के बारे में और यहां से जो है नेवीज जो है क्या
करती हैं इंफॉर्मेशन को शेयर करती हैं एक दूसरे से इंक्रिप्टेड चलिए अब हम बात करते हैं बेका के बारे में तो बेका टोटली
इंटेलिजेंस से रिलेटेड है तो देखिए यूएसए शेयर सेटेलाइट इमेज जीपीएस डाटा एंड टेरेन मैप्स ठीक है तो बेका एग्रीमेंट के अंदर
क्या है यूएस के पास जो सेटेलाइट्स हैं वहां से हम जो है क्या ले सकते हैं? सेटेलाइट इमेजज़ ले सकते हैं। फॉर एग्जांपल
अगर आप देखेंगे तो ड्यूरिंग लद्दाख स्टैंड ऑफ विद चाइना 2020 एंड ड्रोन आर्टलरी कहां पर है? ठीक है? तो ये बैका एग्रीमेंट के
बारे में आप बात कर सकते हैं। चलिए अब हम बात करते हैं व्हाई इंडिया कैन नॉट फुल्ली ट्रस्ट ऑन यूएसए। देखिए सिक्योरिटी कंसर्न
एंड डीस्टेबलाइजेशन फॉर एग्जांपल आप देखें तो मैथ्यू वेंडाइक केस। तो यहां पर क्या होता है? देखिए मैथ्यू वेंडाइक जो कि यूएस
की स्पेशल फोर्सेस में काम करते थे। ये म्यांमार बॉर्डर से हमको मिलते हैं। ये क्या है? अलोंग विद सम यूक्रेनियन
सोल्जर्स कुछ ड्रोन टेक्नोलॉजी को लेकर कहां म्यांमार जा रहे थे? अगर ये टेक्नोलॉजी म्यांमार के इंसर्जेंट को मिल
जाती तो ड्रोन अटैक स्टार्ट कर देते इंडियन आर्मी के ऊपर। क्योंकि हमने पास्ट में देखा है कि काफी सारे अटैक्स जो है
वहां से हुए हैं। आपने सुना होगा कि वहां पे 21 पैरासफ जो है डिप्लॉय है। ठीक है? म्यांमार इंसर्जेंट से फाइट करने के लिए।
तो देखिए इसमें क्या पता लगता है कि यूएसए भी जो है अपनी प्रेजेंस बनाना चाहता है कि इंडियन बॉर्डर के आसपास। ठीक है? तो ये
वही चीज़ आ जाती है। देखिए रेस सच टेक कैन डिस्टेबलाइज़ इंडियास नेबरहुड। चलिए हम आगे बात करते हैं। बहुत इंपॉर्टेंट पॉइंट है
यह। देखिए यूएसए जो है $50 मिलियन डॉल का जो है पैकेज देता है F16 को जो है अपग्रेड करने का राइट किसके पाकिस्तान के दीज़
जेट्स कैन बी यूज़्ड अगेंस्ट इंडिया डिस्पाइट इंडियास ऑब्जेक्शन यूएसए वेंट अहेड यूएसए ने ये पैकेज दे दिया 450
मिलियन डॉलर्स का तो आपने देखा होगा कि मिडिएशन में जो है वो पाकिस्तान आता है बीच में तो अगर सीज़ फायर एग्रीमेंट होना
है तो वाया पाकिस्तान के थ्रू जो है ईरान के पास जाता है वो सीज़ फायर एग्रीमेंट होता है तो वहां पर क्या होता है कुछ
शर्तें होती हैं राइट तो मिडिएट कौन कर रहा है बीच में पाकिस्तान वो एग्रीमेंट जो है वो किसको दे रहा है? ईरान को दे रहा
है। और हमने देखा था कि यूएसए के जेडी वंस भी जो है पाकिस्तान गए थे। राइट? मीडिएशन के लिए। देखा था कि यूएसए के जो जेडी वंस
है वो भी कहां गए थे? पाकिस्तान गए थे। और आपने देखा होगा कि जो आसिफ मुनीर वहां के फील्ड मार्शल है और पाकिस्तान के जो पीएम
है वो भी कंटीन्यूअसली जो है अब यूएसए जाते हैं। तो यहां से हमें क्या पता लगता है प्रो पाकिस्तान टिल्ट हमें यहां देखने
को मिल रहा है। चलिए और देख लेते हैं क्या रीज़ंस हैं। अनप्रिडिक्टबल ट्रेड एंड टेरिफ पॉलिसीज। तो आपने देखा होगा कि इंडिया के
खिलाफ कितनी एंटी स्टेटमेंट्स दी हैं डॉनल्ड ट्रंप ने और कितनी बार जो है इंडिया के ऊपर जो है टेरिफ इंपोज कर दिया
गया है। है ना? तो यहां पर देखिए यूएस प्रेशर करते हैं किसको? Foxक को। अब ये foxक कंपनी जो है इंडिया के अंदर बिलियंस
ऑफ डॉलर इन्होंने इन्वेस्ट करे और Apple iphonस जो है मैन्युफैक्चरिंग करते हैं। देखिए डॉन्ड ट्रंप ने foxक को कहा कि आप
इंडिया को छोड़िए और मैन्युफैक्चरिंग करिए कहां पर? यूएसए के अंदर। अगर आप देखेंगे इंडिया जो है इंपोज करता था 50% इंपोर्ट
ड्यूटी ऑन बिग बाइक्स लाइक Harley डेविडसन। अब बिकॉज़ ऑफ ट्रंप प्रेशर हमें यह रिड्यूस करना पड़ा 25% तक। तो सपोज़ अगर
आप कोई भी बाइक ₹1 लाख की लेते हैं। राइट? तो यहां पर जो है यहां पर जो है आपको ₹50,000 एक्स्ट्रा देने पड़ते थे। किसको?
गवर्नमेंट को। इंडियन गवर्नमेंट को एज अ टैक्स। तो बाइक जो है ₹1,50,000 की बिकती थी। अब इससे होता क्या था कि जो फॉरेन की
बाइक्स लाइक Harley डेविडसन है वो कम सेल होती थी। और जो हमारी इंडियन बाइक्स है वो ज्यादा सेल होती हैं। लाइक Royal Enfield
है ना? तो इससे क्या है? इंडियन कंपनीज़ बचती थी। बट अब यहां पर ड्यू टू ट्रंप प्रेशर जो है हमें इसे रिड्यूस करना पड़ा।
देन हम डिजिटल सर्विस टैक्स भी लगाते थे Google पर बट वो भी अब हमें रिड्यूस करना पड़ा बिकॉज़ ऑफ़ द ट्रंप टेरिफ पॉलिसीज़। देन
नेक्स्ट क्या है? देखिए इंडिया अलाउ यूएस एग्रीकल्चर प्रोडक्ट। यस बट लिमिटेड कंट्रोल। देखिए यहां पर क्या हो गया कि
कंटीन्यूअसली डॉनल्ड ट्रंप जो है इंडिया को फोर्स कर रहे हैं कि आप हमारे एग्रीकल्चरल प्रोडक्ट्स को लीजिए। बट यहां
पर प्रॉब्लम क्या है कि हमारा जो एग्रीकल्चर सेक्टर है। राइट? अगर हम ऐसा करेंगे तो हमारे एग्रीकल्चर सेक्टर के लिए
वो थ्रेट है। तो देखिए हम यहां पर आलमंड्स जो है इंडिया वन ऑफ़ द लार्जेस्ट बायर आलमंड्स कम एप्पल्स लटिल्स, पल्ससेस,
वालनट्स। यूएस एग्री एक्सपोर्ट्स टू इंडिया इज़ 1.5 टू 2 बिलियन। यस। बट क्या है कि हमें अगर यहां पर ट्रेड रिलेशन
कंटिन्यू करने हैं तो यूएस को भी कुछ बेनिफिट देना पड़ेगा। इसलिए हमें 1.5 टू 2 बिलियन डॉलर्स यहां पर खर्च करने पड़ते
हैं इन सारी चीजों पे। इंडिया अलाउ सेलेक्टिव एग्रीकल्चर इंपोर्ट नॉट फुल ओपन एक्सेस। तो देखिए यहां पर तो देखिए व्हाई
यूएसए वांट्स मोर एक्सेस। तो देखिए यूएसए को पता है कि इंडिया के पास पॉपुलेशन कितनी है? 1.4 बिलियन की पॉपुलेशन है।
इतनी बड़ी पॉपुलेशन है। तो यहां पर जो है यूएसए ईज़ली सेल कर सकता है अपने एग्रीकल्चर प्रोडक्ट्स को लाइक कॉर्न,
सोयाबीन, डेरी और यूएसए के पास यहां पर बहुत ज्यादा सरप्लस है। ठीक है? तो ये इसलिए यहां पर जो है इंडिया की एग्रीकल्चर
मार्केट को चाहते हैं। इंडिया मैसिव कंज्यूमर मार्केट फॉर द यूएस। दिस वाज़ ऑल अबाउट दी इंडिया। यूएसए प्लीज इसे रिवाइज
करना दो-तीन बार। एंड डेफिनेटली यू विल गेट द बेनिफिट। चलिए, अब हम बात करते हैं इंडिया और पाकिस्तान के रिलेशंस के बारे
में। 1947 के अंदर जो है पार्टीशन हो जाता है इंडिया और पाकिस्तान का। इंडिया चूज़ टू बी अ सेकुलर नेशन जहां पर सारे रिलीजन को
इक्वली ट्रीट किया जाएगा। वेयर एस पाकिस्तान चूज़ टू बी अ इस्लामिक स्टेट। यहां पर दो पाकिस्तान थे। एक हम कहते हैं
वेस्ट पाकिस्तान को और दूसरा था ईस्ट पाकिस्तान। और यह ईस्ट पाकिस्तान जो है 1971 में क्या बन जाता है? बांग्लादेश बन
जाता है। राइट? लीडर की अगर हम बात करें तो जवाहरलाल नेहरू जो थे इंडिया की की लीडर थे और
फर्स्ट प्राइम मिनिस्टर बने और वहां पर कौन थे? लियाकत अली खान जो थे वहां के फर्स्ट प्राइम मिनिस्टर बने। चलिए आगे
देखते हैं। मेजर वॉर्स तो हमें वॉर्स याद रहनी चाहिए। बिकॉज़ बेसिक एसएसबी के इंटरव्यू में भी कभी पूछ लिया जाता है कि
कौन-कौन सी वॉर जो है हमने पाकिस्तान के साथ लड़ी है। चार वॉर्स पाकिस्तान के साथ लड़ी है। और जो एक हमने किसके साथ लड़ी है?
चाइना के साथ 62 वाली। ठीक है? तो टोटल पांच वॉर्स। तो सबसे पहले हम देख लेते हैं 1947 टू 48 जिसे हम फर्स्ट कश्मीर वॉर भी
बोल देते हैं या इंडोपाक वॉर। इशू क्या था? कश्मीर। ठीक है? तो यहां पर जो है कश्मीर डिवाइड हो चुका था। जो पीओके आप आज
जानते होंगे तो वो पीओके जो है वो कब फॉर्म हुआ था? 1947 टू 48 के टाइम पर ही हुआ था। और इसे कश्मीर जो है डिवाइड हो
गया था। एलओसी फॉर्म्ड हुई। लाइन ऑफ कंट्रोल कब फॉर्म हुई? फर्स्ट कश्मीर वॉर के बाद ही हुई। 1965 वॉर की बात अगर हम
करें दोबारा से इसे सेकंड कश्मीर वॉर बोला जाता है। पाकिस्तान ने ल्च करा था ऑपरेशन चिब्राल्टर। ठीक है? टू कैप्चर बट यहां पर
इंडिया ने जो है सक्सेसफुली डिफेंड करा। देन हमारे पास आता है 1971 वॉर। और 1971 ही ईयर था जब हमने ट्रीटी ऑफ़ पीस एंड
फ्रेंडशिप कोऑपरेशन साइन करी थी। किसके साथ? रशिया के साथ। हम पढ़कर आए थे अभी रशिया के साथ रिलेशंस में। इंडिया ने क्या
है? बांग्लादेश को लिबरेट करा था 1971 वॉर के अंदर। और रिजल्ट क्या है? पाकिस्तान डिफिटेड बांग्लादेश इज़ क्रिएटिंग। देन
1999 कारगिल वॉर के बारे में आपको पता होगा। पाकिस्तान इंट्रूड करता है कारगिल के अंदर और बहुत सारी जो हिल्स थे टाइगर
हिल और बड़ी जो माउंटेंस [नाक से की जाने वाली आवाज़] थे उनको कैप्चर करता है। बट इंडिया ने पुश बट
इंडिया पुश देम बैक और यहां पर इंडिया ने सक्सेसफुली उन्हें डिफिट करा एंड डिफेंड करा इंडिया को। चलिए देन हम बात करते हैं
न्यूक्लियर की। तो देखिए बोथ कंट्रीज नाउ आर न्यूक्लियर कंट्री। राइट? हमने देखा है कि 1998 के अंदर इंडिया जो है पोखरान
टेस्ट करता है। राइट? जो इंडिया का जो है सेकंड न्यूक्लियर टेस्ट था और उसके रिस्पांस में जो है पाकिस्तान क्या करता
है? चागाई टेस्ट करता है। तो दोनों कंट्रीज जो हैं यहां पर अब क्या बन जाती है? न्यूक्लियर पावर बन जाती है। देन
ट्रेड अगर हम बात करें तो बहुत ही लिमिटेड है। 2 टू$3 बिलियन का ही ट्रेड होता था 2019 तक। पर जैसे ही 2019 के अंदर पुलवामा
अटैक होता है। तो हम जो ये 2 टू 3 बिलियन डॉलर्स का ट्रेड भी होता है। यह भी हम पूरी तरीके से बंद कर देते हैं। इंडिया जो
है टी कॉटन मशीनरी सप्लाई करता था पाकिस्तान को। वेयर एस पाकिस्तान जो है हमें रॉ मटेरियल्स, टेक्सटाइल ये सारी
चीजें पाकिस्तान देता था। ऑलदो इंडिया को एडवांटेज था इसमें क्योंकि इंडिया के पास सरप्लस था ट्रेड का। देन इनफॉर्मल ट्रेड
हैपेंस वाया दुबई रूट। तो देखिए इनफॉर्मल ट्रेड क्या होता है कि पाकिस्तान का कोई प्रोडक्ट है वो दुबई गया। दुबई में पैकेज
चेंज हुआ और पैकेज चेंज होकर इंडिया के अंदर आया। तो इसे हम बोलते हैं इनफॉर्मल ट्रेड। तो इनफॉर्मल ट्रेड होता है बट वो
भी बहुत ज्यादा कम है। दोनों कंट्रीज के रिलेशंस अच्छे होते। तो यहां पर पाकिस्तान की इकॉनमी को बहुत ज्यादा बेनिफिट होता
क्योंकि इंडिया की इकॉनमी तो पाकिस्तान से बेटर है। राइट? देन इंदस वाटर ट्रीटी राइट? तो 1960 के अंदर इसे साइन किया गया
था। और बीच में कौन था? वर्ल्ड बैंक था। वर्ल्ड बैंक ने यहां पर मिडिएट करा था ब्रोकर डिस्पाइट वॉर्स आपने देखा चाहे वो
65 की वॉर हो 71 1999 ये ट्रीटी कंटिन्यू थी। ऑलमोस्ट एट डिकेड्स तक ये ट्रीटी चलती रही। बट अब रीसेंट सिचुएशन देखेंगे तो
आफ्टर दी पालगाम अटैक। तो इंडिया ने सस्पेंड करा है इस ट्रीटी को। ऑलदो फुल्ली नहीं बट इंडिया ने बहुत सारे स्टेटमेंट्स
दिए कि अब हम इस ट्रीटी को फॉलो नहीं करेंगे। जब तक पाकिस्तान अपनी टेररिज्म को खत्म नहीं कर लेता। तो यहां पर हम जो है
किशनगंगा, रैटल डैम, रैटल डैम जैसे प्रोजेक्ट को स्टार्ट कर रहे हैं और बहुत सारे प्रोजेक्ट जो है प्रिलिमरी स्टेज में
कंप्लीट भी हो चुके हैं। तो इससे पता लगता है कि इंडिया जो है सीरियस है इन टर्म्स ऑफ सस्पेंडिंग दिस इन दिस वाटर ट्रीटी।
देन हम टॉपिक देख लेते हैं जीडी का टॉपिक। हाउ इंडिया कैन इंप्रूव रिलेशंस विद पाकिस्तान फॉर रीजनल पीस एंड इकोनमिक
ग्रोथ। इंडिया कैसे अपने रिलेशंस अच्छे कर सकता है पाकिस्तान के साथ। सो दैट दोनों कंट्रीज के बीच में जो है रीजनल पीस रहे
और इकोनमिक ग्रोथ रहे। ठीक है? चलिए देखते हैं अब हम सबसे पहला क्या है? रीओपन ट्रांसपोर्ट लिंक्स। देखिए समझौता
एक्सप्रेस चलती थी। दिल्ली से लाहौर बस सर्विस भी थी यहां पर दिल्ली से लाहौर की तरफ। देखिए जो पाकिस्तान के लोग थे वो
यहां पर इंडिया के अंदर आते थे। किस लिए आते थे? फॉर मेडिकल टूरिज्म के लिए। ठीक है? क्योंकि इंडिया के अंदर आप देखेंगे तो
मेडिकल टूरिज्म बेटर था पाकिस्तान से। तो वो यहां पर आकर जो है ऑर्गन ट्रांसप्लांटेशन, हार्ट सर्जरीज, आई
सर्जरी जो कि क्रिटिकल टेक्नोलॉजीस थी जो इंडिया के अंदर थी, डॉक्टर्स थे उनका वो बेनिफिट लेते थे। बट जैसे ही यह जो समझौता
एक्सप्रेस और बस सर्विस बंद हुई तो पीपल का मूवमेंट जो है वो खत्म हो गया। तो अगर हम इसे दोबारा स्टार्ट करें तो यहां पर जो
है रिलेशंस अच्छे देन रिस्टार्ट ट्रेड। तो देखिए ट्रेड जो है 2 टू 3 बिलियन डॉलर्स का था। हमने इस पर बात करी थी। तो अगर हम
दोबारा से ट्रेड स्टार्ट करते हैं तो दोनों कंट्रीज के अच्छे रिलेशन हो सकते हैं और पाकिस्तान भी अपनी इकॉनमी को ग्रो
कर सकता है। एक्सपेंड रिलीजियस डिप्लोमेसी। देखिए किरतारपुर कॉरिडोर। यहां पर जो किरतारपुर कॉरिडोर है यह कहां
पर था? पाकिस्तान के अंदर था। तो ये जो कॉरिडोर बनाया गया था कितारपुर एरिया था ये गुरु नानक देव जी जो हैं राइट जो हमारे
सिख के जो गुरु नानक देव जी हैं उनकी ये क्या थी जन्मभूमि थी तो काफी सारे सिख लोग जो हैं वो किरतारपुर कॉरिडोर जाया करते थे
इंडिया के काफी सारे लोग जो हैं वहां जाते थे जिससे उन्हें एक्सपीरियंस मिलता था पाकिस्तान कैसा है बट जब आर्टिकल 370 को
इंडिया ने रिमूव कर दिया एंड जो यह पुलवामा अटैक हुआ है इसकी वजह से यह जो कॉरिडोर था यह भी पूरी तरीके से अब बंद हो
चुका है। ठीक है? तो अगर हम इसे दोबारा से रीओपन करें तो इससे क्या होगा? फेथ बेस्ड एक्सेस इंप्रूव गुडविल। तो यहां पर दोबारा
से रिलेशंस जो है अच्छे हो सकते हैं। देन आप देख सकते हैं अगर हम बटरल सीरीज को स्टार्ट करें है ना पाकिस्तान इंडिया के
अंदर आए क्रिकेट खेलने के लिए तो व्यूअरशिप बढ़ेगी और यहां पर दोनों कंट्रीज को जो है इकोनमिकली फायदा होगा।
ऑलदो ये चीजें अब पॉसिबल नहीं है जिस तरीके के सिनेरियो अब चल रहे हैं। बट ऐसा बट हमें ये चीजें पढ़नी तो पड़ेगी। राइट?
देन हम क्या कर सकते हैं? मूवीज की बात कर सकते हैं। तोज़ म्यूजिक तो आपने देखा होगा कि जो पाकिस्तान के एक्टर्स एक्ट्रेसेस
हैं वो इंडिया के अंदर आते थे। राइट? तो मूवीज़ में पार्ट लेते थे। और सिमिलरली म्यूजिक में अगर हम देखें आपने देखा होगा
सिमिलरली म्यूजिक के अंदर काफी सारे सिंगर्स जो है वो इंडिया के अंदर आते थे और मूवीज़ के अंदर जो है अपने गानों को
देते थे। एंड अगर हम बात करें क्रिएटर्स की, कोक स्टूडियो तो ये सारी चीजें आपको पता होगा। ठीक है? कि बहुत दोनों कंट्रीज
के बीच में जो है कंटेंट का एक्सचेंज बहुत ज्यादा होता था। देन अगर हम बात करें टेरर ग्रुप्स की तो देखिए लश्कर ताइबा हिजबुल
मुजाहदीन द रेजिस्टेंस फ्रंट जैश-ए-मोहम्मद तो ये सारे जो टेरर ग्रुप्स हैं पाकिस्तान होल्ड करके रखता है राइट तो
ये जो सारे टेरर ग्रुप्स हैं ये कौन कंट्रोल करता है पाकिस्तान की आर्मी कंट्रोल करती है पाकिस्तान गवर्नमेंट तो
अगर ये इन टेररिज्म को खत्म करेंगे तो ही इंडिया और पाकिस्तान के रिलेशन जो हैं दोबारा से अच्छे हो सकते हैं और पाकिस्तान
अपनी इकॉनमी को ग्रो कर सकता है क्योंकि अब इतना सारा मनी लॉन्ड्रिंग जो है इन टेरर ग्रुप्स को देना पड़ता है। ठीक है?
और अब देखिए द रेजिस्टेंस फ्रंट ने क्या करा? आपने देखा है बलगा में अटैक करा। तो यही जो ग्रुप था जिसने बलगाम में अटैक करा
और इन रिस्पांस इंडिया ने जो है क्या करा? ऑपरेशन सिंदूर को लॉन्च करा। ऑपरेशन सिंदूर में आपने देखा होगा कि सिंदूर में
हमने काफी सारे बेसिस पर स्ट्राइक करी। इनकी एयर फील्ड्स को डिस्ट्रॉय करा। जेट्स को चाहे वो एसक सिस्टम हो। इनको बिलियंस
ऑफ डॉलर का नुकसान हुआ है। तो अगर यह ऐसे टेरर ग्रुप्स को ना होल्ड करते तो ऐसी बिलियंस डॉलर के जो नुकसान इनको होते हैं
इन स्ट्राइक्स में वो ना होते तो अपनी इकॉनमी को यह फ्लोरिश कर सकते थे। तो ये भी एक अच्छा एग्जांपल है कि कैसे टेरर
ग्रुप्स जो हैं वो इनको बैकफायर करते हैं पाकिस्तान की इकॉनमी को। देन हम बात कर सकते हैं चाइना जो है वो कंटीन्यूअसली
क्या कर रहा है? मॉडर्नाइज कर रहा है पाकिस्तान को मिलिट्रीली। एंड फॉर व्हाट पर्पस टू काउंटर दी इंडिया। देन यहां पर
एक टॉपिक आया था कि एशिया के अंदर जो है आप देखेंगे कंट्रीज हैं चाइना, पाकिस्तान, इंडिया। ये सारी कंट्रीज जो है वो अपने
मिसाइल आर्सनल को क्यों बढ़ा रही है? ठीक है? ये रियल टॉपिक है। मिसाइल आर्सनल को क्यों बढ़ा रही है? एयर डिफेंस को क्यों
स्ट्रांग कर रही है? ठीक है? तो उसमें लीड्स में था कि कंट्रीज के बीच में जो है वो कॉन्फ्लिक्ट्स बढ़ते जा रहे हैं,
टेंशनंस बढ़ते जा रहे हैं। ऐसे टॉपिक्स में आप एग्जांपल जरूर डाल सकते हैं। HQ9 HQ7 HQ9 क्या है? लॉन्ग रेंज सरफेस टू एयर
मिसाइल डिफेंस सिस्टम है। HQ7 जो है शॉर्ट रेंज मिसाइल एयर डिफेंस सिस्टम है। तो ये सारे जो मिसाइल डिफेंस सिस्टम है। क्यों?
टू काउंटर इंडिया। और कौन दे रहा है इसे? चाइना दे रहा है। तो इससे क्या होगा? देखिए मिसाइल का जो आर्सनल है, एयर डिफेंस
का आर्सनल है, बढ़ता जा रहा है दोनों कंट्रीज में। देन हम बात करते हैं PL15 मिसाइल्स की। तो यह पीएल 15 मिसाइल्स
मल्टीपल मिसाइल्स हैव बीन फायर्ड बाय दिस जेटन सी फाइटर जेट ड्यूरिंग द ऑपरेशन सिंदूर यह हमें मिसाइल्स मिली भी हैं राइट
इंटैक्ट तो ये हिट नहीं करी ये काफी सारी मिसाइल्स जो हैं इंडिया के अंदर मिली भी हैं रिमेन इंटैक्ट ड्यूरिंग द ऑपरेशन
सिंदूर देन चाहे वो JF7 एयरक्राफ्ट चाहे वो J10 अटैक हेलीकॉप्टर हो तो ये सारा जो है कंटीन्यूअसली कौन दे रहा है चाइना दे
रहा है पाकिस्तान को एडवांस कर रहा है चाहे वो PRS वन सैटेलाइट हो या फिर टाइप 54 फिजेट हो वो भी जो है चाइना पाकिस्तान
को दे रहा है। अगर कोई दूसरा टॉपिक भी आता है जीडी के अंदर कि कैसे चाइना जो है मॉडर्नाइज कर रहा है किसको? पाकिस्तान को।
कैसे चाइना काउंटर कर रहा है इंडिया को। तो उसमें आप ये सारे पॉइंट बोल सकते हैं कि कैसे जो है एनिमी कंट्री को स्ट्रांग
कर रहा है वह इंडिया के खिलाफ। देन एक्सरसाइज यहां पर दोनों कंट्रीज करती हैं वॉरियर एक्सरसाइज सी गार्डियन नेवी की एंड
शाहीन एयर एक्सरसाइज। चलिए अब हम जीडी के टॉपिक को डिस्कस कर लेते हैं। व्हाट कैन हेल्प पाकिस्तान ग्रो
इट्स इकॉनमी एंड ओवरऑल प्रोस्पेक्ट। फर्स्ट है स्टॉप टेररिज्म। सेकंड है रिमूव दी आर्मी फ्रॉम दी पॉलिटिक्स। एंड थर्ड
क्या है? बिल्ड गुड रिलेशन विद इंडिया। तो पाकिस्तान कैसे ग्रो कर सकता है अपनी इकॉनमी को और ओवरऑल प्रोस्पेक्ट में कैसे
जो है इंप्रूव कर सकता है बाय स्टॉपिंग द टेररिज्म। तो बात करते हैं टेररिज्म की। तो देखिए हमने देखा कि पाकिस्तान के अंदर
बहुत सारे टेरर ग्रुप्स हैं। चाहे वह लश्कर ताहिबा हिजबुल मुजाहिदन जश मोहम्मद रेजिस्टेंस फ्रंट। तो ये जितने भी टेरर
ग्रुप्स हैं पाकिस्तान गवर्नमेंट क्या करती है? इनको पैसे देती है मनी लॉन्ड्रिंग। और हमने अभी पढ़ा था कि जो
एफएटीएफ है राइट एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट में था पाकिस्तान टिल 2022। तो इसकी वजह से क्या है इनको लोन नहीं मिलते थे और जो
भी कंपनी अगर पाकिस्तान में इन्वेस्ट करना चाहती है उसको बहुत सारे पेपर वर्क करने पड़ते थे कि वो पैसा जाएगा कहां? कहीं वो
पैसा टेररिस्ट ऑर्गेनाइजेशन की तरफ तो नहीं जा रहा इनडायरेक्टली। तो इसकी वजह से क्या है? वहां पर जो फॉरेन इन्वेस्टमेंट
थी वो बहुत कम होती थी। तो डायरेक्टली इनकी इकॉनमी में जो है इफेक्ट पड़ता है बिकॉज़ ऑफ़ दिस टेरर ग्रुप्स। सेकंड अगर आप
देखेंगे तो मोस्टली जितने भी ये टेरर ग्रुप हैं चाहे वो एलईटी हो और हिजबुल मुजाहदीन जैम हो। तो ये इनके बहुत सारे
टेररिस्ट क्या है? यूएन डेज़िग्नेटेड टेररिस्ट हैं। यूएन की सिक्योरिटी एजेंसीज़ भी उनको ढूंढ रही है। और वो पाकिस्तान के
अंदर है। तो इससे क्या होगा? पाकिस्तान की इमेज भी खराब होगी कि एक टेररिस्ट कंट्री है। और अगर आप देखेंगे तो ऑपरेशन सिंदूर
का हमने एग्जांपल दिया था कि कैसे बिलियंस ऑफ डॉलर का नुकसान हुआ। एक रेजिस्टेंस उन्होंने अटैक करा और उसके रिस्पांस में
क्या हुआ? आपने देखा। तो इसकी वजह से पाकिस्तान की इकॉनमी सफर कर रही है। देन आप क्या बता सकते हैं? देखिए अबाउट 150
टेररिस्ट एंटटीज जो हैं वो कहां है? लिंक्ड विद पाकिस्तान है और ब्लैक लिस्ट है बाय यूएन। ठीक है? तो जब यूनाइटेड नेशन
खुद कह रहा है कि ये कंट्री जो है पाकिस्तान इतने सारे टेररिस्ट ग्रुप हैं तो एक टेररिस्ट कंट्री है जिसकी वजह से
इनकी इमेज खराब होती है। इकॉनमी सफर करती है। देन अगर आप बलूचिस्तान के एग्जांपल दे लें तो सो फॉर थाउजेंड्स ऑफ सोल्जर्स मारे
जा चुके हैं इनके पाकिस्तान के सोल्जर्स जो हैं चुके हैं इन बलूच इंसर्जेंसी। तो अगर आप देखेंगे बलूचिस्तान के अंदर भी जो
है इंसजेंसी चल रही है। वहां पर भी टेररिस्ट ग्रुप है जो कि पाकिस्तान आर्मी के खिलाफ लड़ रहे हैं। तो इससे हमें पता
लगता है। देन अगर आप देखेंगे तो ओसामा बिन लादेन का अगर एग्जांपल आप ले तो वो भी कहां मिला था? जो इनकी पाकिस्तान मिलिट्री
एकेडमी है वो वहां से कुछ मीटर्स दूर ही रहता था। तो इससे हमें क्या पता लगता है कि जो इनकी आर्मी है वो कंटीन्यूअसली क्या
करती है? सपोर्ट करती है टेररिज्म को। और इससे इनकी इमेज जो है वह खराब कर रही है और इनकी इकॉनमी भी सफर कर रही है। देन अगर
हम सेकंड एग्जांपल देखें रिमूव दी आर्मी फ्रॉम पॉलिटिक्स तो आपको पता है कि जो रियल पाकिस्तान चल रहा है वो किसकी वजह से
चल रहा है? आर्मी की वजह से चल रहा है। देन अगर हम सेकंड लीड को देखें रिमूव दी आर्मी फ्रॉम पॉलिटिक्स। तो हम जानते हैं
पाकिस्तान के अंदर जो आर्मी है वो डायरेक्टली पॉलिटिक्स को कंट्रोल करती है। आपको बहुत सारे एग्जांपल मिलेंगे। चाहे
अगर हम एग्जांपल लें 1999 का। राइट? कारगिल वॉर होती है। और अगर आप पाकिस्तान आर्मी चीफ को देखेंगे तो वह कौन थे? जनरल
परवेज मुशर्रफ। और वेरियस टाइम वहां के जो प्राइम मिनिस्टर हैं नवाज शरीफ उन्होंने बहुत सारे ओकेशंस पर ये चीज मेंशन करी है
कि इन्हें कारगिल वॉर के बारे में स्टार्टिंग में बताया ही नहीं गया था कि इनका क्या प्लान है। तो वहां पर जो है
रियल रूल कौन कर रहा है? यहां पर आर्मी कर रही है। और बहुत सारे एग्जांपल हैं ऐसे कि चाहे वो अय्यूब खान हो जो कि मिलिट्री
लीडर्स थे बहुत सारे वो रूल करते थे पाकिस्तान के अंदर। यहां पर मिलिट्री कूप भी बहुत बार हो चुका है। अराउंड आप
देखेंगे 1999 से 208 मिलिट्री कूप चलता रहा है। तो इससे हमें पता लगता है कि जो पॉलिटिक्स है पाकिस्तान की वो कौन रूल
करता है? पाकिस्तान की आर्मी रूल करती है। और अगर आप एग्जांपल और भी देखें तो चाहे वो ओसामा बिन लादेन का मिलना हो मिलिट्री
एकेडमी के इतने पास या फिर हम देखें तो काबुल में दह हैब सेंटर पर अटैक होता है जहां पर जहां पर 270 पीपल्स वर किल्ड। तो
इससे हमें पता लगता है कि जो पाकिस्तान आर्मी है वह सारे डिसीजंस लेती है। आईएसआई बिहाइंड दी पठानकोट एयरबेस अटैक। तो यहां
पर भी आप देखेंगे जितने भी अटैक्स होते हैं चाहे वो टेररिस्ट ग्रुप्स के अटैक्स होते हैं वो सारे उन्हें कौन ट्रेन करता
है। ठीक है? पाकिस्तान और बहुत सारे ऑकेशंस और फोटो दिख जाएंगी जहां पर एलएटी, हिजबुल मुजाहिदन, जैम, रेजिस्टेंस फ्रंट
के लीडर्स जो हैं वो पाकिस्तान आर्मी के लीडर्स के साथ दिख रहे हैं। देन हमारे पास क्या आता है? बिल्ड गुड रिलेशन विद
इंडिया। तो, हमने इस पर बहुत सारे पॉइंट पहले भी डिस्कस करे हैं कि इंडिया के साथ गुड रिलेशन कैसे बना सकते हैं फ्रॉम
किरतारपुर कॉरिडोर टू मेडिकल टूरिज्म का फायदा होगा। बिलियंस ऑफ डॉलर का ट्रेड दोबारा से स्टार्ट हो सकता है। और इंडस
वाटर ट्रीटी के बारे में तो आपने सुना ही है। राइट? तो इंडस वाटर ट्रीटी के अंदर जो हम रैटल
डैम और किशनगंगा डैम बना रहे हैं और ऐसे प्रोजेक्ट्स अगर हम जो है ऑपरेशनलाइज कर देंगे तो उससे जो पाकिस्तान को वाटर
बिल्कुल नहीं मिल चेनाब और झेलम का। तो इसलिए पाकिस्तान के लिए बहुत इंपॉर्टेंट है कि अपनी गुड रिलेशंस बनाए इंडिया के
साथ टेररिज्म को खत्म करके तभी वो अपनी पाकिस्तान जो है ग्रो कर सकता है ओवरऑल प्रोस्पेक्ट्स में।
नाउ चलिए अब हम बात करते हैं नेक्स्ट टॉपिक की तरफ जो है इंडिया हैज़ बीन फेसिंग प्रॉक्सी वॉरफेयर फॉर दी लास्ट फाइव
डिकेड्स। व्हाट इज दी मोस्ट सूटेबल वे टू स्टॉप इट? देखिए प्रॉक्सी का मतलब हो जाता है कि एक पर्टिकुलर कंट्री जब दूसरी
कंट्री के खिलाफ छोटे-छोटे ग्रुप्स को बनाती है चाहे कि टेरर ग्रुप्स हो। फॉर एग्जांपल अब इजराइल का लें अगर तो इजराइल
के खिलाफ जो है आपने देखा ईरान ने क्या बना रखा है? चाहे वो हमास हो, हिजबुल्ला हो या हूती रेबल्स हो। तो यह क्या है? एक
प्रॉक्सी है। यह छोटी-छोटी प्रॉक्सी बना रखी है इनडायरेक्टली फ़ाइट करने के लिए। ईरान खुद फाइट नहीं करेगा बट इनडायरेक्टली
इनके थ्रू। तो सिमिलरली जो यह पाकिस्तान है ये क्या करता है? जैम जैश-मोहम्मद हिजबुल मुजाहदीन रेजिस्टेंस फ्रंट इनके
हेल्प से जो है इंडिया पे अटैक करता है। खुद अटैक नहीं करेगा। तो वही कह रहा है कि इंडिया जो है बहुत टाइम से प्रॉक्सी को
फेस कर रहा है। ऑलमोस्ट फाइव डिकेड्स हो चुके हैं। अब इसे कैसे हम रोक सकते हैं? तो देखिए स्ट्रांग इंटेलिजेंस एंड सर्लेंस
सिस्टम को हम इंक्रीस कर रहे हैं। डिप्लोमेटिक टॉक्स एंड इंटरनेशनल प्रेशर से या फिर मिलिट्री ऑपरेशन एंड काउंटर
टेरर एक्शन से। तो ये जो पॉइंट है मिलिट्री ऑपरेशंस एंड काउंटर टेरर एक्शन तो इसकी एग्जांपल आप बता सकते हैं ऑपरेशन
सिंदूर के बारे में उसमें सब बता सकते हैं आप कि कैसे ऑपरेशन सिंदूर में हमने इनके काफी सारे बेसिस को डिस्ट्रॉय मुरीद के और
भागलपुर राइट और भी जितने भी टेरर कैंप्स थे हमने डिस्ट्रॉय करा देन आप बता सकते हैं ऑपरेशन बंदर या फिर ऑपरेशन बालाकोट
एयर स्ट्राइक के बारे में 2019 आप उ सर्जिकल स्ट्राइक्स के बारे में बता सकते हैं और ऑपरेशन महादेव के बारे में बता
सकते हैं जहां पर हमने जो यह पहलगाम में अटैक करा था जिन्होंने टेररिस्ट ने तो हमने उनको एलिमिनेट करा था तो ऐसे बहुत
सारे ऑपरेशंस हैं आप वो मेंशन कर सकते हैं इन दिस काउंटर टेरर एकशंस और मिलिट्री ऑपरेशंस के अंदर और आप बता सकते हैं कि
इसकी वजह से जो है हमें बहुत फायदा भी मिला है। फॉर एग्जांपल अगर आप कश्मीर का भी लें तो कश्मीर के अंदर क्या था जो
इंसजेंसी थी वो बहुत हाई थी 1990 में। राइट? ऐसे बहुत सारी जगह थी पीर पंजाल वाला एरिया हो गया या फिर किश्तवार। तो
वहां पर आर्मी का प्रेजेंस ही नहीं था। राइट? वहां बहुत डर था पहले। बट अगर आप देखेंगे आप प्रॉपर आर्मी वहां पर सेटअप
है। टूरिज्म चल रहा है। हम वहां पर डेवलपमेंट कर रहे हैं। तो यह क्यों हुआ? क्योंकि हमने वहां पर मिलिट्री ऑपरेशन
करे, काउंटर टेरर एक्शनंस करे। इसलिए तो यह पीस बन सका। नहीं तो आज पीस ना होता जितना आप ईजीली कश्मीर में आप देखें तो
रेलवे लाइन भी स्टार्ट हो चुकी है। बट क्या ये 1990 में जब इंसजेंसी एकदम पीक पे थी तब ये चीजें पॉसिबल नहीं थी। ठीक है?
देन हम बात करते हैं स्ट्रांग इंटेलिजेंस एंड सर्लेंस सिस्टम की। तो यहां पर आप बता सकते हैं कि कैसे हम लोग जो है फेंसिंग कर
रहे हैं और एआई को इंटीग्रेट कर रहे हैं एआई सर्लेंस सिस्टम को। चाहे वो हम आरआई सेट सेटेलाइट्स के बारे में आप बता सकते
हैं। हम पढ़कर आए थे स्पेस वाले प्रोग्राम के अंदर कि कैसे वो हेल्प कर रही है इंटेलिजेंस गैदरिंग में सर्विलेंस के
अंदर। देन आप बता सकते हैं कि इंडिया का भी एक सिस्टम है इंटेलिजेंस आर्मी इंटेलिजेंस यूनिट के बारे में आप बता सकते
हैं। ठीक है? आईएटी तो यहां पर ये यूनिट क्या करती है? स्पेशली इंटेलिजेंस गैदरिंग करती है। सर्विलेंस करती है। देन आप बता
सकते हैं कि यहां पर एक पाकिस्तान कर्नल भी होता है इंडियन आर्मी के अंदर। तो ये पाकिस्तान कर्नल क्या करता है? वो सारी
स्टडी करता है रिलेटेड टू पाकिस्तान। तो ये सारी चीजें आप बता सकते हैं कि इंटेलिजेंस और सर्विलेंस सिस्टम से जो है
हम अर्ली प्रिडिक्ट कर सकते हैं पाकिस्तान के एकशंस को और फिर उस पे हम काउंटर एक्शन बना सकते हैं। तो ये सारे पॉइंट्स इसमें आ
जाएंगे। देन डिप्लोमेटिक टॉक्स एंड इंटरनेशनल प्रेशर पर भी आप पॉइंट डाल सकते हैं। इंटरनेशनल प्रेशर पे आप डाल सकते
हैं। एफएटीएफ के बारे में हमने बात करी थी कि हम कैसे इनको ब्लैक लिस्ट करवा सकते हैं या फिर यूएन में जाके जिन जो और इनके
टेररिस्ट हैं। सारे कुछ पॉइंट्स होंगे। और डिप्लोमेटिक टॉक्स की अगर हम बात करें तो एक्स हमारे एक चीफ थे रॉ के। तो उन्होंने
भी मेंशन करा था कि वॉर इज़ नॉट अ सॉल्यूशन। डिप्लोमेटिक टॉक्स आर सॉल्यूशन। तो ये कुछ पॉइंट्स हैं जो आप अपनी तरफ से
ऐड कर सकते हैं और आपको डेफिनेटली बेनिफिट मिलेगा। ओके? नाउ लेट्स स्टडी दी इंडिया चाइना रिलेशंस। ठीक है? तो देखिए इंडिया
को इंडिपेंडेंस मिलती है 1947 के अंदर। वेयर एस चाइना जो है बनता है पीपल रिपब्लिक ऑफ चाइना इन द ईयर ऑफ़ 1949। देन
1954 के अंदर हम साइन करते हैं पंडशील एग्रीमेंट। तो इस एग्रीमेंट के अंदर दोनों कंट्रीज एक दूसरी कंट्री के इंटरनल
अफेयर्स के अंदर क्या है? इंटरफेयर नहीं करेगी। दोनों कंट्री एक दूसरे की सोवनिटी को रिस्पेक्ट करेंगी और ये जो एक दूसरे की
टेरिटरीज हैं राइट उन पर अटैक नहीं करेगी उन पे कब्जा नहीं करेगी तो तो ये सारी चीजें क्या थी इस एग्रीमेंट में थी पंचशील
एग्रीमेंट और यहीं पर हमने नारा दिया था हिंदी चीनी भाई का राइट बट हुआ क्या 1962 में आपने देखा होगा जो ये अक्साई चीन वाला
एरिया है चाइना कैप्चर कर लेता है और यहां पर हमारा ट्रस्ट जो है ब्रेकडाउन होता है चाइना के साथ ठीक है देन अगर हम देखें
एरियाज ऑफ कोपरेशन की राइट तो आपको पता है जब हमने इंडिया रशिया पढ़ा था। तो वहां पर बहुत सारे एरियाज़ ऑफ कोपरेशन देखे थे ना।
डिफेंस कॉपोरेशन, ट्रेड कॉपरेशन, एजुकेशन। तो सिमिलरली हम चाइना के साथ भी ये कॉपरेशंस को पढ़ेंगे। देखिए इन कोपरेशंस को
अगर हम सिर्फ दिमाग में रखेंगे तो हम ईजीली अपना लेक्चर भी दे सकते हैं और जीडी के भी बहुत सारे पॉइंट्स हम सिर्फ कोपरेशन
से ही बना सकते हैं। तो चलिए स्टार्ट करते हैं हम ट्रेड कॉपरेशन से। तो देखिए ट्रेड है 150 टू$55 बिलियन का ट्रेड है। अब तो
ये और इनक्रीस हो चुका है। तो देखिए हमारे पास टोटल ट्रेड कितना है? अराउंड 150 टू 155 बिलियन का ट्रेड है जिसमें इंडिया
देखिए इंपोर्ट कितना कर रहा है 155 टू 120 बिलियन और हम एक्सपोर्ट कितना करते हैं सिर्फ 30 टू$5 बिलियन और अगर आप डेफिशिट
देखेंगे तो यह यहां पर की पॉइंट निकल के आता है कि अराउंड 100 बिलियन डॉल का डेफिशिट है सोचिए यानी कि हम कितना ज्यादा
डिपेंडेंट है चाइना के ऊपर व्हेन इट कम्स टू दी ट्रेड इलेक्ट्रॉनिक्स एंड मशीनरी 35 टू 40% फार्मा एपीआई एंड बल्क ड्रग्स 65
टू 70% डिपेंडेंसी है। तो जो हमें रॉ मटेरियल्स मिलता है ठीक है एपीआई और ड्रग्स उससे हम क्या बनते हैं मेडिसिंस
बनाते हैं हम फार्मा कैपिटल कहलाते हैं ना इंडिया बट अगर ये ड्रग्स हमें देंगे ही नहीं एपीआई नहीं देंगे तो हम कैसे ये सब
मेडिसिंस बनाएंगे तो इसलिए आप बोल सकते हैं कि ड्रग्स और मेडिसिन के लिए हम किस पर डिपेंडेंट हैं चाइना के ऊपर देन
फर्टिलाइजर 15 टू 20% और सबसे इंपॉर्टेंट यहां पर देखिए सोलर पैनल्स एंड ईवी इक्विपमेंट 80% ऑफ डिपेंडेंसी और ये पॉइंट
तो हम पढ़कर आए थे कहां पर ठीक है सोलर जब हमने पढ़ा था तो हमने वहां पर ये डिस्कस करा था सो वी आर हाईली डिपेंडेंट व्हेन इट
कम कम्स टू दी रिन्यूएबल सोर्स ऑफ़ एनर्जी। देन यहां पर ईवी कॉम्पोनेंट्स भी आप देख सकते हैं। लिथियम बैटरी एंड अदर थिंग्स वो
भी हमारा 80% डिपेंडेंसी है चाइना के ऊपर। कल को अगर कोई इलेक्ट्रिक व्हीकल का टॉपिक भी आता है तो वहां पर ये पॉइंट रख सकते
हैं। देन सेमीकंडक्टर की अगर हम बात करें तो वहां पर 70 टू 80% रिलायंस है हमारा किसके ऊपर? चाइना के ऊपर। हाई डिपेंडेंस
प्लस ह्यूज डेफिशिएंट इज़ इक्वल टू चाइना होल्ड्स लिवरेज। तो कल को अगर वॉर होती है तो यहां पर चाइना क्या है? हमें ट्रेड से
अटैक करेगा। राइट? वो क्या करेगा? हमारी सेमीकंडक्टर की सप्लाई को बंद कर देगा। और सेमीकंडक्टर अगर नहीं होंगे तो मोबाइल फस
इलेक्ट्रॉनिक्स इलेक्ट्रिक व्हीकल्स हैं वो नहीं चलेंगे उसकी वजह से तो इसकी वजह से क्या है वहां पर हमें बहुत ज्यादा लॉस
देखने पूरा इंडिया जो है एक तरीके से बंद हो सकता है कि अगर हम ये सेमीकंडक्टर और सेमीकंडक्टर इलेक्ट्रॉनिक मशीनरीज को
सप्लाई ना करें देन हम बात करते हैं एजुकेशन स्टूडेंट्स की राइट तो अराउंड 12 थाउजेंड्स अराउंड
12000 इंडियन स्टूडेंट करेंटली लिंक टू चाइनीस यूनिवर्सिटी उसमें क्या-क्या है देखिए वहान यूनिवर्सिटी है और चाइना
मेडिकल यूनिवर्सिटी है ठीक है और अगर आप ये स्टूडेंट्स की बात करेंगे तो 80 टू 90% जो स्टूडेंट्स है वो एमबीबीएस करने गए हैं
वहां पर बिकॉज़ यह लो कॉस्ट है। राइट? 15 टू ₹25 लै में ही जो है आपकी एमबीबीएस हो जाती है। वेयर एज़ अगर प्राइवेट
यूनिवर्सिटीज इंडिया की बात करें तो अराउंड 80 लाख कॉस्ट करती है। देन टूरिज्म की अगर हम बात करें तो यहां पर टूरिज्म
बहुत कम है। बट व्हेन इट कम्स टू बिज़नेस टूरिज्म डोमिनेट करता है। तो देखिए टूरिज्म ट्रेड लिंक नॉट लीजर हैवी। ठीक
है? तो यहां पर क्या है? टूरिज्म जो होता है मेनली वो किससे होता है? ट्रेड से रिलेटेड होता है कि यहां पर जो बिजनेसमैन
है इंडिया के वो जाते हैं चाइना के अंदर। राइट? वहां से वो रॉ मटेरियल को खरीदते हैं या फिर मशीनरीज को खरीदते हैं या फिर
मेड इन चाइना का सामान खरीद के इंडिया में बेचते हैं। सो अराउंड कितने हैं हमारे पास? 2 लाख इंडियन विजिटर्स हैं जो चाइना
जाते हैं। चलिए अब हम बात करते हैं अदर इंगेजमेंट्स की मल्टीलटरल कोऑपरेशंस। तो बोथ आर एक्टिव मेंबर्स ऑफ़ ब्रिक्स
ब्राजील, रशिया, इंडिया, चाइना, साउथ अफ्रीका। और दोनों कंट्रीज क्या है? संघाई कोऑपरेशन ऑर्गेनाइजेशन के मेंबर है। G20
के मेंबर्स हैं। तो आप यह पॉइंट याद रख सकते हैं कि bricks एसइओ G20 के मेंबर्स हैं। तो एक टॉपिक और आता है जीडी में जीडी
में बोल दिया जाएगा कि ये जो ब्रिक्स है, आसियान है। राइट? और जितने भी कंट्रीज हैं, ये क्यों बनती हैं? क्या रीज़न है
इसका? ठीक है? तो, वहां पर आप बता सकते हैं कि ट्रेड इसका एक बहुत इंपॉर्टेंट रीज़न है। आप ले सकते हैं एग्जांपल चाहे वो
इंडिया, रशिया हो, हमने रूपी रूबल कांसेप्ट साइन करा था या फिर इंडिया चाइना का ट्रेड के बारे में आप बता सकते हैं
वहां पर। तो, ईजीली आप बहुत सारे पॉइंट दे देंगे व्हेन इट कम्स टू ट्रेड। देन ईवी सेक्टर हमने बात करी कि लिथियम बैटरीज हो
अराउंड 70 टू 80% ग्लोबल सप्लाई तो चाइना के पास है और ईवी आपको पता है फ्यूचर है तो यहां पर चाइना के पास एडवांटेज है। देन
सोलर एनर्जी की हमने बात करी कि कैसे जो है इंडिया इंपोर्ट करता है अराउंड 80 25% ऑफ़ सोलर मॉड्यूल्स फ्रॉम चाइना। चलिए अब
हम बात करते हैं चैलेंजेस और थ्रेट की जो कि सबसेेंट है। देखिए J20 स्टेल्थ फाइटर जेट्स जो हैं तिब्बत के अंदर डिप्लॉय करता
है कौन? चाइना। ठीक है? और यहां पर कंटीन्यूअसली वो रोड्स, एयर स्ट्रिप विलेजेस को बना रहा है अराउंड दी लाइन ऑफ
एक्चुअल कंट्रोल। तो कल को अगर वॉर होती है तो चाइना अपने आप को प्रिपेयर कर रहा है। राइट? देन मेगा डैम थ्रेड। चाइना इज़
बिल्डिंग मेडोंग यारलुंग सापो डैम बना रहा है ब्रह्मपुत्र रिवर पर। और आपको पता है यह डैम एशिया का लार्जेस्ट डैम है। वाटर
फ्लो कंट्रोल फ्लड मैनपुलेशन रिस्क इकोलॉजिकल इंपैक्ट इन नॉर्थ ईस्ट इंडिया। तो कल को अगर वॉर होती है तो चाइना क्या
कर सकता है? ब्रह्मपुत्र रिवर में फ्लड ला सकता है। जिसकी वजह से जो है नॉर्थ ईस्ट एरिया में जो इकोलॉजिकल इंपैक्ट बहुत
ज्यादा पड़ सकता है। देन अरुणाचल प्रदेश चाइना इसे कहता है यह साउथ तिब्बत है। बहुत सारी स्टेटमेंट चाइना टाइम टू टाइम
देता है कि अरुणाचल प्रदेश बिलोंग्स टू देम। देन एक्साई चीन की अगर हम बात करें लद्दाख अंडर दी चाइनीस कंट्रोल सिंस 1962
गलवान वैली क्लैश में भी हमने देखा टू 2020 पीपी 14 के अंदर। तो ये फर्स्ट डेडली क्लैश था डिकेड्स के अंदर। तो थोड़ा सा
हिस्ट्री में बता सकते हैं कि देखिए 1962 के बाद यहां पर कोई भी डेडली क्लैश नहीं हुआ था अंटिल द गलवान वैली क्लैश। देन अगर
हम डिप्लोमेटिक फ्रिक्शनंस की बात करें तो हमने इस पर डिस्कस करा था कि चाइना कैसे ब्लॉक कर देता है। अपनी वीटो पावर का यूज़
करके उसे यूएन डेजिग्नेटेड टेररिस्ट का दर्जा देने की कोशिश करते हैं। वहीं पर चाइना अपनी वीटो पावर का यूज़ कर लेता है।
ठीक है? देन यहां पर देखते हैं रिपीटेड स्टेटमेंट्स अरुणाचल प्रदेश बिलोंग्स टू चाइना। तो ये सारे थ्रेट्स हैं जो कि हमें
कंटीन्यूअसली ध्यान रखने पड़ेंगे। नाउ अब हम बात करते हैं कि कैसे हमें चाइना को काउंटर करना है। रिड्यूस रेट डिपेंडेंसी।
तो आपने देखा है कि 100्स ऑफ बिलियंस डॉलर्स जो चाइना है वह एडवांटेज लेता है सरप्लस का। तो इसलिए हमें मेक इन इंडिया
बनाना पड़ेगा। प्रोडक्शन लिंक इंसेंटिव स्कीम, सेमीकॉन मिशन, मैन्युफैक्चरिंग इंडिया, स्किल इंडिया, स्टार्टअप इंडिया
ये सारे प्रोग्राम्स हम डाल सकते हैं टू काउंटर दी चाइना। आल्सो हमें डायवर्सिफाई करने की जरूरत है अपने इंपोर्ट को। अगर हम
लार्ज इंपोर्ट करते हैं चाहे वो सेमीकंडक्टर्स हो, ईवी हो या फिर सोलर पैनल्स हो, एपीआई ड्रग्स हो तो हमें वो सब
कहां पर? ताइवान की तरफ, यूरोपियन यूनियन, वियतनाम की तरफ देखना चाहिए। रेदर देन ओनली इंपोर्ट फ्रॉम दी चाइना। स्ट्रांग बट
स्टेबल बॉर्डर पॉलिसी हमें लानी पड़ेगी। मिलिट्री रेडीनेस और कॉप्स कमांडर लेवल टॉक्स चलती रहनी चाहिए। अब यहां पर एक नया
एंगल आ जाता है कि चाइना जो है कंटीन्यूअसली पाकिस्तान की मिलिट्री को क्या कर रहा है? मॉडर्नाइज कर रहा है टू
काउंटर इंडिया। ये हम पढ़कर आए थे इंडिया और पाकिस्तान रिलेशन में। वहां हमने पढ़ा था कि कैसे चाइना ने जो है HQ9 HQ7 J10C0
सी फाइटर जी अटैक हेलीकॉप्टर JF7 PL5 मिसाइल देन पीआरएसएस वन सेटेलाइट टाइप 54 कॉर्पेट्स फ्रिजड दी है और जॉइंट
एक्सरसाइज तो ये टाइम टू टाइम करते ही रहते हैं और चाइना की तो स्ट्रिंग ऑफ पल्स पॉलिसी भी है पेसिफिक ओशन और इंडियन
ओसनियन में अपनी प्रेजेंस को बढ़ा रहे हैं। राइट? इसके लिए हमें काउंटर करने के लिए हम क्वाड को भी लेके आए थे। हमने पढ़ा था।
राइट? देन हमने पढ़ा था कि चाइना पाकिस्तान इकोनमिक कॉरिडोर जो है और यह जो चाइना पाकिस्तान इकोनमिक कॉरिडोर है वो
शिनजन प्रोविंस से जाता है और ग्वादर बलूचिस्तान के अंदर एंड होता है। इसकी लेंथ जो है अराउंड 3000 कि.मी. है और
इन्वेस्टमेंट कितनी है? 60 बिलियन की है और यह पार्शियनली ऑपरेशनल है। अराउंड 2029 के आसपास जो है ये कुछ हद तक आपको ऑपरेशनल
देखने को मिलेगा। देन यहां पर पाइपलाइंस हैं, रेलवेज हैं और पोर्ट्स बनाए गए हैं। यहां से आप देख सकते हैं कि चाइना कैसे
पाकिस्तान की हेल्प कर रहा है इकॉनमी को ग्रो करने में और मिलिट्री को मॉडर्नाइज करने में। तो ये पॉइंट्स यहां से आप दे
सकते हैं। देन हमने इस पर बात करी वीटो पावर के ऊपर कि चाइना जो है ब्लॉक कर देता है इंडिया का कोई भी रिजर्वेशन अगेंस्ट दी
पाकिस्तान बेस्ड टेररिस्ट। देन अगर हम बात करें हमने बात तो करी कि चाइना कैसे पाकिस्तान को मॉडर्नाइज कर रहा है। बट
यहां पर अब बांग्लादेश को भी यह मॉडर्नाइज कर इन्होंने जो है बांग्लादेश को क्या दिया है? मेन बैटल टैंक। राइट? देन अगर आप
यहां पर देखेंगे टाइप 35 मिं क्लास सबमरींस भी दी हैं। टाइप 56 कॉर्बोरेट्स भी दी हैं और F7 फाइटर जेट भी जो है यूज़
करता है बांग्लादेश ऑफ चाइना। अगर अदर देन दैट हम आगे भी इसके बारे में पढ़ने वाले हैं। जब हम चाइना का रिलेशन विद साउथ
अफ्रीका बांग्लादेश देखेंगे तो वहां पे हम पढ़ेंगे कि ZA, Huai और बहुत सारी कंपनीज़ हैं। 4G टेक्नोलॉजी भी जो है चाइना
बांग्लादेश और पाकिस्तान को दे रहा है। चलिए अब हम बात करते हैं दोनों जो है शघाई कोऑपरेशन ऑर्गेनाइजेशन के मेंबर। आप देख
सकते हैं चाइना और इंडिया। राइट? तो यहां पर आप देख सकते हैं कि इसमें क्या था? सिक्योरिटी कोऑपरेशन, मिलिट्री एक्सरसाइज
करना, इकोनमिक कनेक्टिविटी ओरिजिनल स्टेबिलिटी। तो अगर हमें इनके साथ इंप्रूव करने हैं, रिलेशन ऐसा कुछ टॉपिक हो तो
वहां पर आप एसइओ का मेंशन कर सकते हैं। ठीक है? ऑलदो यहां पर लिखा हुआ है कि काउंटर टेररिज्म बट चाइना जो है
कंटीन्यूअसली किसको? पाकिस्तान को सपोर्ट करता है। तो ये अपने आप में एक कॉन्फ्लिक्ट है। ठीक है? तो ये कुछ
पॉइंट्स थे। आप जरूर ऐड कर सकते हैं अपने जीडी और लाइक के अंदर एंड यू विल गेट दी बेनिफिट। नाउ लेट्स मूव विद दी इंडिया एंड
इजराइल रिलेशंस। ठीक है? तो देखिए इंडिया और इजराइल के रिलेशंस की अगर हम बात करें तो टॉप थ्री डिफेंस सप्लायर है इजराइल।
इंडिया का। अगर आप लिस्ट उठाकर देखेंगे तो जरूर आपको इसमें इजराइल दिखेगा। बोथ बिकम इंडिपेंडेंट अराउंड 1947 टू 1948। तो
इंडिया भी 1947 के अराउंड इंडिपेंडेंट हुआ। और हमने इस बारे में पढ़ा था कि उस टाइम पर दो मेजर ब्लॉक थे। एक था यूएसएसआर
और दूसरा यूएसए। राइट? और जो इजराइल था वो क्या था? प्रो यूएसए ब्लॉक था। वेयर एज इंडिया ने क्या था? नॉन एलाइंड। हाउएवर वी
वर डिपेंडेंट ऑन बोथ यूएसएसआई एंड यूएसए। हमने पढ़ा था इसके बारे में फॉर डिफेंस एंड फूड। सो 1950ज में इंडिया ने ऑफिशियली
रिकॉग्नाइज कर लिया इजराइल को एज अ कंट्री। ठीक है? बट 1992 तक हमने कोई भी डिप्लोमेटिक रिलेशंस जो है इस्टैब्लिश
नहीं करे थे इजराइल के साथ। हमारे इंडिया का कोई भी डिप्लोमेट जो है इजराइल के अंदर नहीं था। तो नाउ यहां पर एक की पॉइंट आ
जाता है कि प्राइम मिनिस्टर नरेंद्र मोदी वाज़ दी फर्स्ट एवर इंडियन प्राइम मिनिस्टर टू विजिट इज़राइल। इससे पहले कोई भी ऐसा
प्राइम मिनिस्टर नहीं था जो इज़राइल गया था। नाउ यहां पर आपके माइंड में क्वेश्चन आ रहा होगा कि 1947 से लेके 1942 तक हमने
इजराइल के साथ कोई भी डिप्लोमेटिक रिलेशंस नहीं रखे थे। हमारा कोई ट्रेड नहीं था। उसका क्या रीज़न हो सकता है? देखिए ऑयल
डिपेंडेंस इंडिया 60 टू 70% ऑयल कहां से मंगाता था? अरब नेशंस से, मिडिल ईस्ट से। राइट? और ये जो अरब नेशंस हैं, इनकी क्या
है? इजराइल के साथ एनिमिटी थी। आपने देखा होगा कि गल्फ वॉर चली थी 1970 के एरा में। इसलिए जो हम अपने रिलेशंस जो है अरब नेशंस
के साथ खराब नहीं करना चाहते थे। देन वेस्ट एशिया बैलेंस सपोर्ट फॉर पेस्टाइन देन डोमेस्टिक फैक्टर भी था कि हमारे पास
लार्ज मुस्लिम पापुलेशन थी और आपको पता है मुस्लिम पॉपुलेशन जुईश को नहीं पसंद करते थे। देन कोल्ड वॉर पॉलिटिक्स अरब नेशंस
क्लोजर टू यूएसएसआर और इंडिया भी यूएसएसआर के क्लोज था व्हेन इट कम्स टू डिफेंस। देन कारगिल वॉर होती है 1999 में और इजराइल
हमें सपोर्ट करता है कुछ की वेपंस को जो कि दूसरी कंट्रीज ने मना कर दिया था उस टाइम पर देने से। फॉर एग्जांपल यहां पर आप
देख सकते हैं आर्टिलरी एमिनेशन। तो हमारे पास जो आर्टिलरी का एमिनेशन का स्टॉक पाइल था वो धीरे-धीरे खत्म हो रहा था। तो उस
टाइम पर हमने इमरजेंसी सप्लाई कहां से एक्वायर करा? इजराइल से। लेजर गाइडेड बॉम्ब्स को हमने लिया था। और लेटर हमने
यही लेजर गाइडेड बॉम्ब्स जो है मिराजेस के अंदर इंटीग्रेट करके तो लिलिंग, टाइगर हिल्स और अदर पीक्स ऑफ जो हमारी कारगिल की
थी वहां पर हमने जो है बॉम्बिंग करी। देन सर्चर यूएवीस हो या फिर मोटार शेल्स हो जो नाइट विज़न डिवाइसेस हो ये सारे हमने कहां
से? इजराइल से लिए थे। ऑलदो हमने इसके लिए काफी हैवी प्राइस भी पे करा है। चलिए अब हम बात करते हैं डिफेंस स्ट्रेटेजिक
कॉपोरेशन की। तो फेल्कन एवक् तो आपने देखा होगा फेल्कन एवक्स जो है इंडियन एयरफोर्स यूज़ करती है जो कि IL76 पे माउंट होता है
राइट तो IL76 तो रशिया के है बट जो ये एक्स है बट ये जो एक्स है डोम शेप्ड ये हमने कहां से लिया है इजराइल से लिया है
एक ऐसा रडार है देन हम बात करते हैं हेरोन और सर्चर ड्रोंस की तो ये भी हमने कहां से लिया है सर्च ड्रोन ये हमने इजराइल से
लिया है देन बराक वन इन बराक एट नेवल एयर डिफेंस सिस्टम तो जो भी आपने देखा होगा एयरक्राफ्ट कैरियर चलता है डिस्ट्रयर
फ्रिज उसके साथ ठीक है तो वहां पर कौन सा एयर डिफेंस सिस्टम यूज़ होता है बराक एट और बराक वन देन स्पाइस 2000 बम प्रिसीजन
गाइडेड जो हमने बालाकोट एयर स्ट्राइक के अंदर भी यूज़ करे थे। राइट तो यह बराक हो गया और यह स्पाइस 2000 देन एंटी टैंक
गाइडेड मिसाइल्स हो या फिर हरप्लॉयटिंग इम्युनेशन ड्रोंस हो तो वो सारे भी हमने कहां से लिए हैं? इजराइल से लिए हैं। और
यहां पर एक बहुत इंपॉर्टेंट पॉइंट आ जाता है तेजस। तो तेजस जो एयरक्राफ्ट है वो क्या है? एक ऐसा रडार को यूज़ करता है। और
ये जो ऐसा रडार है, यह भी हमने कहां से लिया है? इजराइल से लिया हुआ है। राइट? एल्टा रडार। देन ब्लू फ्लैग एयर एक्सरसाइज
भी होती है यहां पर जो हम किसके साथ करते हैं? इजराइल के साथ करते हैं। देन इंडो इजराइल स्पेशल फोर्सेस एक्सरसाइज भी होती
है जहां पर एनएसडी हमारी पार्टिसिपेट करती है। और बहुत सारे आर्टिकल्स में न्यूज़ में और पडकास्ट में मेंशन किया गया है कि जो
हमारी इंटेलिजेंस यूनिट्स है वेदर इट्स रॉ वो किसके साथ ट्रेन होती है? मोसाद के साथ। तो ये कुछ कोपरेशंस थे जो आपको याद
रखने हैं रिलेटेड टू डिफेंस। देन ह्यूमनिटेरियन एंड क्राइसिस सपोर्ट की अगर हम बात करें तो गुजरात में अर्थक्वेक आया
था 20001 के अंदर। वहां पर इजराइयली सर्च एंड रेस्क्यू टीम गई थी। मेडिकल टीम्स गई थी ऑफ 150 पर्सनल स्टेड फॉर टू वीक्स
जिन्होंने रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया। 261 अटैक हो या फिर जितने भी बॉम्ब ब्लास्ट हुए वहां पर भी इजराइल ने हमें ऑफर करी थी
अराउंड 40 मेंबर्स ऑफ़ काउंटर टेरर टीम्स और इंटेलिजेंट शेयर इन्वेस्टिगेशन सपोर्ट। ऑलदो इंडिया ने इसे नहीं लिया और खुद जो
है इन्वेस्टिगेशन करी। देन एग्रीकल्चर और टेक्नोलॉजी कोपरेशन। तो बहुत सारे लोगों को डिफेंस के बारे में पता होगा। बट हमारा
मेजर जो कोपरेशन है वो एग्रीकल्चर के अंदर भी है। तो इंडिया के अंदर क्या है? वेरियस सेंटर्स ऑफ़ एक्सीलेंस खोले गए हैं। यह
किससे रिलेटेड है? एग्रीकल्चर से रिलेटेड है। एग्रीकल्चर एंड टेक्नोलॉजी। तो हरियाणा, गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र
एंड पंजाब। तो यहां पर जो टेक्निक्स होती हैं, जो मॉडर्न टेक्निक्स होती है फॉर एग्जांपल ड्रिप इरीगेशन, प्रिसीजन
फार्मिंग हो, पॉली हाउस और ग्रीन हाउस कल्टीिवेशन हो, हाई ईल्ड सीड्स एंड फर्टिगेशन सिस्टम हो। तो ये सारा हमने
कहां से लिया है? इजराइल से सीखा है। राइट? तो देन आप यहां पर भी देख सकते हैं ऑलिव इनिशिएटिव इन राजस्थान। तो देखिए ये
स्टार्ट होता है 2007 में। तो राजस्थान क्या था? बहुत सारा एरिया जो राजस्थान का था चाहे वो जैसलमेर का हो या फिर जो
आउटस्कर एरियाज था वो वहां पर क्या था? डेजर्ट था। तो वहां पर हमने इजरली टेक इनेबल्ड ऑलिव फार्मिंग इन डेजर्ट। ठीक है?
तो आज इंडिया जो है 100 टू 150 टन्स ऑफ ऑलिव ऑयल बना लेता है बिकॉज़ ऑफ़ दिस टेक्नोलॉजी व्हिच वी गॉट फ्रॉम द इजराइल।
नाउ अगर हम बात करें स्पेस कोपरेशन की तो आरई सेट सेटेलाइट के बारे में हमने पढ़ा था कि यह सेटेलाइट इंटेलिजेंस और सर्ेलेंस
के लिए यूज होती है। तो इसके अंदर जो सिंथेटिक अपर्चर रडार यूज़ होता है वो भी हमने कहां से लिया है? इजराइल से लिया है।
इसे लेंगे। देन इजराइल इज़ कंटीन्यूअसली वर्किंग ऑन इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन फॉर स्मॉल सैटेलाइट्स। देन कोलैबोरेशन इन नैनो
सैटेलाइट्स एंड रिमोट सेंसिंग। तो ये कुछ पॉइंट्स थे रिलेटेड टू स्पेस कॉपोरेशन। तो हमने यह पढ़ा भी था स्पेस प्रोग्राम के
अंदर रिलेटेड टू आर सेट। देन इकोनमिक कोपरेशन की अगर हम बात करें तो 2024 में अराउंड हमने 7 टू 8 बिलियन डॉल का जो है
ट्रेड करा है एक्सक्लूडिंग डिफेंस और डिफेंस को अगर हम मिला ले तो 10 बिलियन के आसपास है और राइट नाउ भी अगर हम देखें तो
वही 12 टू 15 बिलियन डॉलर्स का जो है ट्रेड होता है इंडिया देखिए क्या एक्सपोर्ट कर रहा है हम उन्हें बेच रहे
हैं डायमंड्स प्रिसियस स्टोंस मेजर शेयर जो है 40 टू 50% जो हम एक्सपोर्ट करते हैं उसमें यही सब आ जाता है केमिकल टेक्सटाइल
इंजीनियरिंग गुड्स और इजराइल हमें क्या देता है डिफेंस इक्विपमेंट इलेक्ट्रॉनिक्स फर्टिलाइजर की हमने बात करी चाहे वो
इरीगेशन टेक्नोलॉजी थ्रू सेंटर ऑफ एक्सीलेंस। तो ये सारी चीजें जो है हम इजराइल से लेते हैं। इंडिया को क्या है?
फेवर मिलता है क्योंकि इंडिया ज्यादा एक्सपोर्ट करता है। हम ज्यादा एक्सपोर्ट करते हैं किसको? इजराइल को। तो यहां पर
इंडिया को एडवांटेज है। चलिए हम बात करते हैं एजुकेशन एंड इनोवेशन की। तो देखिए यहां पर क्या है? आई 4F इंडिया इजराइल
इंडस्ट्रियल रिसर्च एंड डेवलपमेंट फंड। बजट इसका कितना है? 40 मिलियन डॉलर्स है। जॉइंट फंड है। एकेडमिक एक्सचेंज प्रोग्राम
कोलैबोरेशन इन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस साइबर सिक्योरिटी वाटर टैक। तो आप सीधा बता सकते हैं कि देखिए इजराइल और इंडिया
कंटीन्यूअसली रिसर्च एंड डेवलपमेंट कर रहे हैं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पे, साइबर सिक्योरिटी पे और वाटर टेक्नोलॉजी पे।
जैसे कि इरीगेशन पर हमने बात करी थी। इसमें हम जो है डायरेक्टली फंड देते हैं आईआईटीस को, इजराइयली यूनिवर्सिटीज को,
स्टूडेंट्स को, प्रोफेसर्स को कि वो इस पर रिसर्च करें और हमें एक बेटर प्रोडक्ट निकाल कर दे। कि वो इस पर रिसर्च एंड
डेवलपमेंट करें। चलिए अब हम चैलेंजेस की अगर बात करें तो देखिए इजराइल ईरान कॉन्फ्लिक्ट की वजह से जो है $100 प्लस जो
है क्या चला जाता है हमारा क्रूड ऑयल चला जाता है। ठीक है? जिसकी वजह से इंडिया को जो है वो थाउजेंड्स बिलियंस ऑफ डॉलर का
नुकसान होता है। नाउ अनदर कॉन्सिक्वेंस अगर आप देखेंगे हम फोर्थ लार्जेस्ट इकॉनमी हुआ करते थे। बट अब जो है हम पीछे आ चुके
हैं सिक्स लार्जेस्ट पर। क्यों? क्योंकि इनफ्लेशन बहुत ज्यादा बढ़ा। ठीक है? इनफ्लेशन आपने देखा रूपी की वैल्यू क्या
हुई? बहुत ज्यादा डाउन हुई। और यहां पर इंडिया को क्या देखने को मिला? एनर्जी क्राइसिस देखने को मिला। जॉब लॉस हुए। ठीक
है? तो बहुत ज्यादा नुकसान इंडिया को फेस हुआ एज अ कॉन्सिक्वेंसेस ऑफ दिस वॉर। और इस वॉर का मेजर पार्ट कौन था? इजराइल था।
राइट? इजराइल और यूएस ने ही तो ये वॉर स्टार्ट करी। तो इसलिए अगर हम बोल सकते हैं कि यहां पर जो है एक चैलेंज निकल कर
आता है। क्योंकि हम जो है इजराइल को सपोर्ट करते थे। देन बैलेंसिंग अरब नेशन। एक तरफ तो हम बहुत ज्यादा ऑयल एंड नेचुरल
गैस जो है किससे लेते हैं? अरब नेशन से लेते हैं। और आपको पता है अरब नेशन की एनिमिटी है किसके साथ? इजराइल के साथ और
दूसरी तरफ जो है हम ओपनली सपोर्ट करते हैं इजराइल को। तो इसलिए यहां पर जो है बैलेंस करना मुश्किल होगा। सेकंड थिंग क्या है?
देखिए हम रेमिटेंस रिसीव करते हैं। हमने बहुत बार पढ़ लिया कि इंडिया जो है अराउंड 137 बिलियन उसने रिसीव करा है। वर्ल्ड
लार्जेस्ट रेमिटेंस हम रिसीव करते हैं। बाहर से जो पैसा आता है और मेजरली आप देखेंगे तो यूएसए और कहां से आ रहा है?
मिडिल ईस्ट से आ रहा है। और आपको पता है अराउंड 8 मिलियन लोग जो हैं अभी इस टाइम पर काम कर रहे हैं कहां पर? मिडिल ईस्ट
में। तो अगर हम अपने रिलेशन इजराइल के साथ अच्छे करेंगे और इजराइल को सपोर्ट करेंगे तो इससे जो यह 8 मिलियन लोग यहां पर काम
कर रहे हैं उनकी जॉब पर थ्रेट है, रेमिटेंस पर थ्रेट है। तो हमें इसलिए बैलेंस करके रखना पड़ेगा दोनों चीजों को।
ये कुछ पॉइंट्स थे जो बहुत इफेक्टिव और ब्रीफ पॉइंट्स थे जो आप अपने जीडी लेक्चरट के अंदर यूज़ कर सकते हैं। और बहुत सारे
टॉपिक फ्यूचर में आएंगे जहां पर आप डायरेक्ट ये पॉइंट डाल सकते हैं। और बहुत सारे फ्यूचर में टॉपिक्स आएंगे देखना जहां
पर आप ईजीली इन कुछ पॉइंट्स को वहां पर यूज कर सकते हैं जो कि आपको बेनिफिट दे। तो चलिए अब हम पढ़ते हैं इंडिया एंड नेपाल
रिलेशंस के बारे में। राइट? सो देखिए 1950 के अंदर ट्रीटी ऑफ पीस एंड फ्रेंडशिप साइन की जाती है नेपाल के साथ। जहां पर ओपन
बॉर्डर इक्वल इकोनॉमिक राइट्स एंड स्ट्रेटेजिक कोऑपरेशन एग्रीमेंट किए जाते हैं। और आज भी आपने देखा होगा कि हमारा
नेपाल के साथ क्या है? ओपन बॉर्डर है। तो हमारी कोई भी वॉर नहीं हुई है नेपाल के साथ। तो ये ट्रीटी ऑफ पीस फ्रेंडशिप चल
रही है। आज भी ओपन बॉर्डर्स हैं। आपको पर्टिकुलर वीजा की जरूरत नहीं है नेपाल जाने के लिए। तो इससे हमें पता लगता है कि
जो ट्रीटी हमने साइन करी नेपाल के साथ 1950 में वो आज भी चल रही है। देन हमारे पास आता है डीप सिविलाइजेशन। चाहे वो
हिंदू हो या फिर बुद्धिस्ट दोनों को आपको सिविलाइजेशन लिंक्स मिलेंगे। कहां से? नेपाल और इंडिया के। देखिए जनकपुर अयोध्या
से कौन थी? गॉडेस सीता थी। राइट? और सिमिलरली अगर आप देखेंगे लुंबिनी। लुंबिनी क्या थी? बर्थ प्लेस ऑफ लॉर्ड। तो लुंबिनी
क्या थी? बर्थ प्लेस ऑफ गौतम बुद्धा। राइट? सो यहां पर हमें देखने को मिलता है कि जो टाइज हैं इंडिया और नेपाल के वो
बहुत पहले से चले आ रहे हैं। इसलिए इसे कहा जाता है रोटी बेटी का रिश्ता। देन ओपन बॉर्डर है अराउंड 1700 कि.मी. का है। फ्री
मूवमेंट ऑफ पीपल यहां पर होती है। अगर हम रीसेंट डेवलपमेंट की बात करें तो हमारा जो बॉर्डर है नेपाल इंडोनेपाल बॉर्डर वहां पर
कौन है? शस्त्र सीमा बल। तो वहां पर कौन है? शस्त्र सीमा बल जो है डिप्लॉय है। यह एक हमारी क्या है? पैरामिलिट्री फ़ है जो
कि गार्ड करती है नेपाल बॉर्डर को। यह आप ऐड कर सकते हैं। वेयर एज़ नेपाल की तरफ से जो है नेपाल आर्म्ड पुलिस फ़ जो है गार्ड
करती है नेपाल के बॉर्डर को। यह फोकस करती है एंटी स्मगलिंग पर और फास्टर कार्गो मूवमेंट पर। देन एनर्जी कॉपोरेशन की अगर
हम बात करें इन रिसेंट ईयर अराउंड 450 मेगावाट्स ऑफ़ इलेक्ट्रिसिटी टू इंडिया सप्लाई करता है नेपाल। यस नेपाल एक्सपोर्ट
करता है। बिकॉज़ नेपाल में आपने देखा होगा कि बहुत सारी रिवर्स हैं। गंदक, कोसी है ना? तो ये सारी रिवर्स जो हैं ओरिजनेट
कहां से होती नेपाल से होती है। तो इसलिए वहां पर हाइड्रो पावर प्लांट्स हैं और यह इलेक्ट्रिसिटी देता है इंडिया को। राइट?
देन कनेक्टिविटी पुश। तो जयनगर वर्दी बास रेल ऑपरेशनलाइज़ कर दी गई है। ठीक है? तो यहां से आप क्या है? इंडिया से हम नेपाल
जा सकते हैं विद दिस रेल लिंक। तो हमने अभी तक पढ़ा कि बॉर्डर जो है वो एसएसबी गार्ड कर रही है। तो यहां पर एनर्जी
कॉपरेशन भी है और कनेक्टिविटी रेलवे लाइंस तो है ही। देन अगर हम देखेंगे तो डिजिटल पेमेंट यूपीआई। अब अगर आप देखेंगे तो
यूपीआई सिस्टम जो है यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस यह नेपाल के अंदर भी है जो कि इंडिया ने बनाया था। एंड देन ग्रीन एनर्जी
और हाइड्रो पावर तो चल ही रहा है। देन क्लाइमेट फॉरेस्ट कॉपरेशन भी हमने यहां पर साइन करा है। चलिए अब हम कुछ मेजर पॉइंट्स
के बारे में डिस्कस कर लेते हैं जो हम अपने लेक्चरेट में यूज़ करेंगे। लाइक ऑपरेशन मत्री। ठीक है? तो ऑपरेशन मैत्री
के अंदर क्या होता है? आपने देखा होगा 2015 में क्या है? एक मेजर अर्थक्वेक आया था नेपाल के अंदर। ठीक है? तो वहां पर
हमारी जो है इंडियन आर्म्ड फोर्सेस थी, एनडीआरएफ की टीम्स थी, इंडियन एयरफोर्स थी वो डिप्लॉय होती है और अराउंड 43,000 प्लस
पीपल जो है हमने इवेकुएट करे थे वहां से। देन कोविड की सपोर्ट की अगर हम बात करें वैक्सीन मैथ्री में तो इंडिया सप्लाई
अराउंड 9.5 मिलियन डोज़ेज लाइक कोवि शील्ड। तो तो आप यहां से देख सकते हैं कि ड्यूरिंग दी कोविड-19 आल्सो हमने नेपाल की
हेल्प करी बाय सपाइंग दी वैक्सीन। अगर हम डेवलपमेंट असिस्टेंस की बात करें तो स्कूल्स, हॉस्पिटल्स अराउंड 450 स्मॉल
डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स जो है हमने स्टार्ट करे हैं। कहां पर? नेपाल के अंदर इंडिया हैज़ गिवन अराउंड 1.5 बिलियन सिंस 208 हमने
एड दी है किसको नेपाल के लिए नेपाल को दी है फॉर हॉस्पिटल्स एंड स्कूल्स और अदर छोटे प्रोजेक्ट्स के लिए यहां पर
पेट्रोलियम पाइपलाइन भी है और यहां पर एजुकेशन और ट्रेनिंग की अगर आप बात करेंगे तो इंडियन टेक्निकल इकोनमिक कॉपोरेशन
गवर्नमेंट ऑफ इंडिया स्कीम टू ट्रेन फॉरेन ऑफिशियल्स। ठीक है? तो यह एक गवर्नमेंट स्कीम है जहां पर हम एडमिनिस्ट्रेशन, आईटी
साइबर सिक्योरिटी, बैंकिंग, पब्लिक पॉलिसी यहां पर हम जो है नेपाली ऑफिशियल्स को ट्रेन करते हैं। फॉर एग्जा एग्जांपल अगर
आप देखें तो आईपीएस एकेडमी स्वप्ना तो अगर आप सरदार वल्लभ भाई पटेल आईपीएस एकेडमी भी देखेंगे तो वहां पर भी जो है नेपाल के
ऑफिसर्स आपको देखने को मिल जाएंगे। सिमिलरली हमारी जो इंडियन मिलिट्री एकेडमी है वहां पर भी एनडीए के अंदर भी आपको
नेपाली ऑफिसर्स देखने को मिल जाएंगे। ठीक है? और सो फार हमने थाउज्स ऑफ नेपाली ऑफिशियलल्स को ट्रेन कर दिया है एव्री ईयर
और स्कॉलरशिप भी दी है। एंड देन एमबीबीएस इंजीनियरिंग ह्यूमैनिटीज इंडियन कॉलेजेस में जो है पढ़ने के लिए बहुत सारे नेपाली
स्टूडेंट्स जो हैं वो इंडिया आते हैं। अगर आप देखेंगे ऑलमोस्ट 1/3 ऑफ नेपाल न्यू कैबिनेट जो बनी है इंक्लूडिंग प्राइम
मिनिस्टर बलन शाह स्टडीड इन इंडिया। राइट? तो बलन शाह ने जो अपनी बीटेक करी थी वो कहां से? इंडिया से करी थी। यहां तक कि
अगर आप इनकी जो हेल्थ मिनिस्टर हैं वुमेन राइट? और वो भी आप देखेंगे तो वो एम्स दिल्ली के अंदर हेडनर्स थी जो कि अब राइट
नाउ पूरे नेपाल की क्या है? हेल्थ मिनिस्टर है। तो इससे हमें पता लगता है कि एजुकेशन तो है ही यहां पर। देन अगर हम बात
करें डिफेंस की तो हमने देखा नेपाली सोल्जर्स सर्व करते थे गोरखा रेजीमेंट्स के अंदर। राइट? बट अब हुआ क्या है? जब से
अग्निपथ स्कीम आई है तब नेपाल ने ऑब्जेक्ट करा है इस स्कीम को और जो ये रिक्रूटमेंट नेपाली गोरखास की है वो टेंपरेरीली पॉज्ड
हो चुकी है। मतलब अब जो है गोर्खा के अंदर नेपाली सोल्जर्स नहीं आ रहे हैं। ठीक है? ऑफिसर्स तो हम आईएमए और आईएमए, एनडीए और
हमने बात करी जॉइंट एक्सरसाइज भी होती है हमारी नेपाल के साथ सूर्य किरण। ठीक है? इकोनॉमिक रिलेशंस की बात करें तो इंडिया
जो है नेपाल का वन ऑफ द लार्जेस्ट ट्रेडिंग पार्टनर है। राइट? चाइना नहीं है, इंडिया है और ट्रेड कितना है? टोटल
88.5 बिलियन डॉलर्स का ट्रेड हो रहा है। इंडिया एक्सपोर्ट करता है नेपाल को अराउंड 7 बिलियन जिसमें पेट्रोलियम व्हीकल्स,
मेडिसिंस, एफएमसीजी प्रोडक्ट्स हो जाते हैं। वेयर एज़ हम नेपाल से क्या इंपोर्ट करते हैं? इलेक्ट्रिसिटी, एग्रीकल्चर,
गुड्स। अगर कंक्लूजन देखें तो यहां पर इंडिया को एडवांटेज होता है। बिकॉज़ इंडिया जो है 7 बिलियन प्लस जो है यहां पर सरप्लस
का एडवांटेज लेता है। इसलिए हम बोल सकते हैं फॉर ट्रेड पर्पस नेपाल इज़ेंट फॉर अस। देन हम यहां पर अगर देखें तो रिवर एनर्जी
कॉपरेशन तो मेजर रिवर्स कोसी गंदक महाकाली ये सारी रिवर कहां से ओरिजनेट होती है? हमने देखा नेपाल से। राइट? तो एंड देन
फ्लोस इंटू इंडिया। तो फ्लड कंट्रोल इरीगेशन प्रोजेक्ट्स जो है यहां पर चलाए जा रहे हैं। हाइड्रो पावर की हमने बात करी
थी अराउंड 450 गीगाट्स। तो हम ले ही रहे हैं। सेकंड यह देखिए यह वाला भी देखिए अरुण 3 हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट यहां पर
900 मेगावाट्स ऑफ़ इलेक्ट्रिसिटी जो है हम नेपाल से ले रहे हैं। ठीक है? तो इससे हमें पता लगता है कि हम हाइड्रो पावर
इलेक्ट्रिसिटी डिमांड्स को फुलफिल कर रहे हैं विद द हेल्प ऑफ नेपाल। अब यहां रिसेंट एनर्जी क्राइसिस चली थी। आपने देखा ईरान,
इजराइल, यूएसए वॉर हुई। पूरे एशिया के अंदर एनर्जी क्राइसिस थी। वहां पर देखिए इंडिया ने क्या करा? नेपाल हैज़ आस्क्ड
इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन टू इंक्रीस मंथली सप्लाई ऑफ़ क्या? लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस है ना एलपीजी। तो यहां पर इंडिया ने
जो है 3000 टन्स ऑफ एलपीजी दी। ठीक है? नेपाल करेंटली इट्स अराउंड 48,000 टन्स ऑफ एलपीजी। तो इससे हमें क्या पता लगता है कि
कोविड-19 हो राइट? या फिर एनर्जी क्राइसिस हो या फिर हम बोल सकते हैं इन द टाइम ऑफ़ अर्थक्वेक और कोई भी डिजास्टर हो। इंडिया
हमेशा हेल्प करता है नेपाल की। राइट? तो देन हम देख सकते हैं इंडिया हेल्प्स नेबरिंग नेशंस इन क्राइसिस। नेपाल यहां पर
आपको दिख जाएगा। सिक्स टैंक्स आर कैरिंग थ्री 3,20,000 टन्स ऑफ फ्यूल। तो ये हमने एक्सपोर्ट करा है। तो इससे हमें पता लगता
है। देन हम बात करते हैं कुछ चैलेंजेस की। देखिए नेपाल का इंक्लिनेशन है वो कहां पर हो रहा है? चाइना की तरफ बढ़ता जा रहा है।
ठीक है? तो ये एक जो है हमारे लिए थ्रेट है। फॉर एग्जांपल अगर आप देखेंगे तो चाइना नेपाल रेलवे लाइन। ठीक है? तो स्टडी
ऑनगोइंग तिब्बत को काठमांडू से कनेक्ट करने की बात चल रही है। कोसी कॉरिडोर कनेक्ट नेपाल एंड चाइना तिब्बे। ट्रेड एंड
ट्रांसपोर्ट इससे बढ़ेगा। और अगर चाइना नेपाल के अंदर आता है। यानी कि नेपाल का बॉर्डर क्या है? डायरेक्टली लगता है
उत्तराखंड एंड हिमाचल के साथ तो डायरेक्टली चाइना क्या हमारे बॉर्डर्स की तरफ आ सकते हैं। तो डायरेक्टली चाइना को
क्या है इंडिया के बॉर्डर का एक्सेस मिल जाएगा। फिर इंफ्रास्ट्रक्चर की बात करें तो पोकारारा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के बारे
में आपने पढ़ा होगा। बिल्ड विद चाइनीस सपोर्ट राइट देन रोड एंड टनल्स प्रोजेक्ट्स इंप्रूव ट्रांसपोर्ट इन हिली
एरियाज। हाइड्रो पावर एनर्जी की बात करें तो तमाकोशी हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट है। चाइनीस कंपनी हेल्प इक्विपमेंट्स कांटेक्ट
वर्क यहां पर अदर हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट्स आल्सो सपोर्टेड। देन इंडस्ट्री ट्रेड की अगर हम बात करें चाइना
नेपाल इंडस्ट्रियल पार्क भी यहां पर बन रहा है। हेल्प्स इन मैन्युफैक्चरिंग एंड जॉब्स। एजुकेशन एंड साइंस में बात करें तो
मदन भंडारी यूनिवर्सिटी भी जो है चाइना के सपोर्ट से बनी है और यहां पर स्कॉलरशिप मिलती है नेपाली स्टूडेंट्स को। तो अगर आप
देखें कनेक्टिविटी हो या फिर इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट हो, एजुकेशन साइंस हो, हाइड्रो पावर एनर्जी हो और
ट्रेड बढ़ाना हो तो चाइना कंटीन्यूअसली अपनी प्रेजेंस बढ़ा रहा है नेपाल के अंदर जो कि फ्यूचर में हमारा थ्रेट हो सकता है।
नाउ आपने देखा होगा रिसेंटली बलन शाह जो है नए प्राइम मिनिस्टर बनते हैं नेपाल के। तो उन्होंने एक पिक्चर पोस्ट करी तो जहां
पर आप देख सकते हैं कि ग्रेटर नेपाल का मैप लगा हुआ है और उसमें वेरियस पार्ट्स जो है वो किसके? इंडिया के दिखाए हुए हैं।
बहुत ज्यादा आउटरच देखने को मिली इंडिया के अंदर। देन अगर आप देखेंगे तो उन्होंने पॉलिसी को एक्टिवेट करा। जहां पर अगर आप
मोर देन ₹100 से ज्यादा लेके आते हैं कोई भी सामान इंडिया से तो वहां पर आपको टैक्स देना पड़ता है अराउंड नेपाली रुपी। राइट?
देन अगर यह नेपाली रूपी की बात हो रही है। देन हम बात करें तो इन्होंने जो है व्हीकल पॉलिसी भी लिया है कि अगर मोर देन 30 डेज
कोई भी इंडियन व्हीकल जो है नेपाल के अंदर जाता है तो उसे जो है वहां पर फाइन देना पड़ेगा। तो इट मींस कि आप सिर्फ जो है 30
डेज तक ही एक व्हीकल को यूज कर सकते हैं नेपाल के अंदर। देन आपको जो है यहां पर फाइन देना पड़ जाएगा बहुत ज्यादा।
मिनिस्टर है वो मुझसे मिलने आए। तो इससे हमें पता लगता है ये जो छोटी-छोटी चीजें होती हैं इससे क्या है? रिलेशंस खराब होते
हैं। ठीक है? तो चलिए अब हम पढ़ते हैं चाइना रिलेशंस विद अदर कंट्रीज। जिसमें हमारे पास आता है
चाइना का रिलेशन विद श्रीलंका, साउथ ईस्ट एशिया, साउथ अफ्रीका एंड बांग्लादेश। तो हम इसे क्यों पढ़ रहे हैं? देखिए टॉपिक
आता है कि चाइना का डोमिनेशन कैसे बढ़ रहा है एशिया के अंदर ऑल ओवर दी वर्ल्ड चाइना कैसे सुपर पावर बनता जा रहा है। ठीक है तो
वहां पर ऐसे पॉइंट्स आपके पास होने चाहिए जहां पर आप बता सकते हैं कि श्रीलंका में प्रोजेक्ट साउथ एशिया में या फिर साउथ
अफ्रीका बांग्लादेश में दोनों तरफ से पता होना चाहिए वेदर साउथ ईस्ट एशिया हो हमारी नेबरिंग कंट्री जैसे कि श्रीलंका
बांग्लादेश नेपाल हो तो कैसे वो अपनी प्रेजेंस को बढ़ा रहा है। ठीक है? तो इसलिए हम इस टॉपिक को पढ़ रहे हैं। तो फॉर
द जीडी पॉइंट ऑफ व्यू यह टॉपिक बहुत इंपॉर्टेंट हो जाता है। चलिए स्टार्ट करते हैं हम श्रीलंका से। तो श्रीलंका के अंदर
है चाइना का हमंबनटोटा पोर्ट। राइट? इन्होंने यह लीज़ पर लिया है श्रीलंका से। चाइना फंडेड कंस्ट्रक्शन ऑफ़ हमनटोटा डीप
सी पोर्ट। पर्पस क्या था? स्ट्रेटेजिक पोर्ट अलोंग विद इन द इंडियन ओसियन शिपिंग रूट। तो देखिए इंडियन ओशन के अंदर क्या
था? इनका कोई प्रेजेंस नहीं था। बट बिकॉज़ ऑफ़ दिस हमनटोटा पोर्ट। अब इन्हें जो है पूरे इंडियन ओशन का एक्सेस मिल जाता है।
तो पहले क्या होता था कि चाइना यह वाला रूट यूज़ करता था। राइट? यहां से वह पूरा इंडियन ओसियन घूम कर जाता था स्विस कैनाल
व्हिच टेक्स अराउंड 20,000 कि.मी. राइट? मलका स्टेट, इंडियन ओसियन, स्विस कैनाल, यूरोप। बट अब जो है इनको हमंबनोटा पोर्ट
का जैसे ही एक्सेस मिल गया है, तो यह यह वाला रूट लेते हैं। राइट? एंड देन यहां से डायरेक्टली जो है इनको मिडिल ईस्ट का
एक्सेस मिल जाता है और साथ में ही स्विस कैनाल के थ्रू यह यूरोप से कनेक्ट कर देते हैं। इसकी वजह से जो है यह डिस्टेंस यह
अराउंड 11,000 कि.मी. डिस्टेंस को कट कर पाए और अपना टाइम को 40 डेज से 15 डेज पर ले आए। तो देखिए हमें पता है चाइना जो है
वो क्या करता है? सर्लेंस करता है। अब डायरेक्टली बिकॉज़ ऑफ़ दिस हमनटोटा पोर्ट इन्हें इंडियन ओशन का जो ये वाला रीजन है
यहां पर ईजीली सर्लेंस कर सकते हैं। ये लोग इंटेलिजेंस गैदर कर सकते हैं। जो कि फ्यूचर में अगर कोई भी कॉन्फ्लिक्ट होता
है या फिर वॉर होती है तो चाइना को यहां से बेनिफिट मिल जाएगा। ठीक है? इसलिए आप बता सकते हैं कि कैसे हमबोटा पोइन के लिए
बेनिफिट करता है। देन इन्होंने बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव ल्च करा था 2013 के अंदर। 150 प्लस कंट्रीज जो है इसको ज्वॉइ कर
चुके हैं। एस्टेटेड 1 ट्रिलियन ये है इन्वेस्ट कर चुके हैं। तो इससे क्या है? यह कनेक्ट कर रहे हैं चाइना को विद द
यूरोप, एशिया, मिडिल ईस्ट। है ना? तो इसलिए इससे क्या है कि इनकी इकॉनमी बहुत ज्यादा ग्रो करेगी। देन अगर हम बात करते
हैं साउथ ईस्ट एशिया तो हमने आसियान के अंदर पढ़ा था ना कि लाओस भी उसका मेंबर है। तो लाओस के अंदर जो है फर्स्ट हाई
स्पीड रेल लाइन बन रही है अराउंड 1000 कि.मी. की। राइट? यह कनेक्ट करेगी चाइना को विद आसियान मार्केट। चाइना म्यांमार
कॉरिडोर भी बन रहा है। तो हमने सीपक तो जरूर पढ़ा था। राइट? हमने पढ़ा था ना सीपैक चाइना पाकिस्तान इकोनमिक कॉरिडोर।
तो अब आप एक स्टेप और फर्दर बढ़िए आगे। चाइना म्यांमार इकोनमिक कॉरिडोर भी है। टू बे ऑफ़ बंगाल एनर्जी ट्रांसपोर्ट और
शॉर्टकट। तो यहां से बता सकते हैं कि देखिए लाओस में अगर यह इतनी 10,000 कि.मी. तो अगर यह थाउजेंड्स ऑफ किलोमीटर्स लंबी
रेल लाइन बनाएंगे आसियान के साथ अगर ये आशियन मार्केट के साथ कनेक्ट करेंगे इनका ट्रेड पता है कितना है? अराउंड 900 बिलियन
प्लस ट्रेड है इनका आशियन मार्केट के साथ एसोसिएशन ऑफ़ साउथ ईस्ट एशियन नेशन के साथ। और हमारा कितना है? अराउंड $10 बिलियन। तो
आप देख सकते हैं ये आने वाले फ्यूचर में 1 ट्रिलियन क्रॉस कर जाएंगे। वेयर एज इंडिया अभी सिर्फ यहीं पर है। तो इसलिए इंडिया के
पास बहुत पोटेंशियल था कि हम जो है साउथ ईस्ट एशिया में अपना सामान बेचें। बट चाइना के जो ये प्रोजेक्ट्स हैं ठीक है?
कंटीन्यूअसली जो ये बना रहा है इकोनमिक कॉरिडोर्स इससे जो है ये मार्केट को पूरा कैप्चर कर लेगा इंडिया से पहले ही। देन हम
बात करते हैं साउथ अफ्रीका की। तो देखिए एक्सपोर्ट फ्रॉम साउथ अफ्रीका टू चाइना। तो आपको पता होगा कि साउथ अफ्रीका के अंदर
जो है बहुत सारे मिनरल्स हैं। बट उनके पास क्या माइनिंग कैपेबिलिटी नहीं है। तो यहां पर चाइना आता है आयरन ओर, मैगनीज़,
प्लैटिनियम, कोल। ठीक है? तो चाइना यहां से एक्सट्रैक्ट करता है। साउथ अफ्रीका प्रोड्यूसेस अबाउट 70% ऑफ वर्ल्ड्स
प्लैटिनम। ठीक है? और यह प्लैटिनम बहुत इंपॉर्टेंट होता है इन इलेक्ट्रॉनिक और ऑटोमोबाइल सेक्टर के अंदर। देन रेलवे
अपग्रेड्स कर रहा है कोऑपरेशन इन इंप्रूविंग फ्रेट रेलवे सिस्टम टू ट्रांसपोर्ट मिनरल स्पोर्ट्स, बैटरी
मिनरल्स, साउथ अफ्रीका सप्लाई मिनरल यूज़्ड इन इलेक्ट्रिक व्हीकल बैटरीज। राइट? हमने पढ़ा था ना कैसे इलेक्ट्रिक व्हीकल को
कैप्चर कर चुका है। अराउंड 70 टू 80% ऑफ़ इलेक्ट्रिक व्हीकल और सोलर पैनल कहां से आ रहे थे? चाइना से आ रहे थे। और चाइना कहां
से ले रहा है? देखिए साउथ अफ्रीका से तो हमें डायरेक्ट यहां पर जो है अपनी प्रेजेंस बनानी चाहिए थी। पर चाइना ने
पहले ही अपनी प्रेजेंस बना रखी है। राइट? देन अगर यहां पर देखेंगे इंपोर्ट्स फ्रॉम चाइना टू साउथ अफ्रीका इलेक्ट्रॉनिक्स,
मशीनरी, टेलीकम्युनिकेशन, इक्विपमेंट। चाइना क्या है? साउथ अफ्रीका का लार्जेस्ट ट्रेडिंग पार्टनर है। 50 टू 55 बिलियन
डॉलर्स यहां पर जो है चाइना हर साल बेच दे रहा है साउथ अफ्रीका को। वेयर एज अगर आप इंडिया का ट्रेड देखेंगे तो अराउंड 19
बिलियन ही है जिसमें से हम 10 बिलियन के आसपास जो है एक्सपोर्ट करते हैं। तो इससे हमें क्या पता लग रहा है कि चाइना हमसे
बहुत अहेड है। देन अगर हम टेक्नोलॉजी एंड टेलीकॉम की बात करें तो मोर देन 200 चाइनीस कंपनीज़ ऑपरेट फ्रॉम देयर देखेंगे
तो यह bricks का पार्ट भी है। ब्राजील, रशिया, इंडिया, चाइना, साउथ अफ्रीका। तो चाइना एंड साउथ अफ्रीका की कोऑपरेशन तो
बढ़ती ही जा रही है। चाइनीज़ स्कॉलरशिप भी देते हैं ऑफ़ साउथ अफ्रीकन स्टूडेंट्स को। Hui, Z जैसी कंपनी 4G और 5G टेलीकॉम
इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलप कर रही है साउथ अफ्रीका के अंदर। स्मार्ट सिटी टेक्नोलॉजीज़। चाइनीस कंपनीज़ प्रोवाइड
सर्विलेंस सिस्टम एंड डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर टू दी साउथ अफ्रीकन कंपनीज़। देन हम
बांग्लादेश की अगर बात करें तो इकोनॉमिक स्टाइल्स राइट तो बांग्लादेश एक्सपोर्ट्स टू चाइना रेडीमेड गारमेंट्स लेदर
प्रोडक्ट्स सी फूड ये बांग्लादेश जो है एक्सपोर्ट करता है चाइना को। वेयर एज़ चाइना क्या एक्सपोर्ट करता है? मशीनरी
इलेक्ट्रॉनिक्स, इंडस्ट्रियल रॉ मटेरियल। ट्रेड दोनों का क्या है? देखिए 25 टू 30 बिलियन है और यह पॉइंट जो है बहुत
इंपॉर्टेंट है कि बांग्लादेश हमारा नेबरिंग कंट्री है बट चाइना जो है लार्जेस्ट ट्रेडिंग पार्टनर है बांग्लादेश
का बांग्लादेश की जो इकॉनमी है वो किस पे चलती है गारमेंट्स टेक्सटाइल इंडस्ट्री पे जो यह मशीनरीज है ना यह भी चाइना से आती
है उस टेक्सटाइल को मैन्युफैक्चरिंग करने के लिए देन चाइना फाइनेंस कर रहा है बहुत सारे इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट को अंडर
दी बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव पद्मा ब्रिज रेल लिंक ठीक है रेलवे प्रोजेक्ट है कॉस्ट करता है एट अराउंड 4 बिलियन बिल्ड वि दी
सपोर्ट ऑफ़ चाइना रेलवे ग्रुप लिमिटेड कनेक्ट साउथ वेस्टर्न बांग्लादेश विद धाका इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट आप देख
कर्नाफुली टनल बन रही है यहां पर देन आप देख सकते हैं कर्नाफुली रिवर पर एंड एनर्जी कॉपोरेशन में तो चाइना इज़ इनवॉल्वड
इन बिल्डिंग पावर प्लांट्स एंड इलेक्ट्रिसिटी इंफ्रास्ट्रक्चर ठीक है तो ये आप बता सकते हैं कुछ पायरार्मल पावर
प्लांट भी है यहां पर देन डिफेंस कॉपोरेशन हमने बात पहले भी करी थी कि मेन बैटल टैंक 2000 वी ये जो है चाइना ने सप्लाई करा है
किसको बांग्लादेश को देन टाइप 35G मिंग क्लास सबमरींस भी दी है जिससे यह इंडिया को काउंटर कर सकते हैं एंड कॉरबेट्स भी दे
रहा है। एंड F7 फाइटर जेट्स तो सप्लाई करे ही है बांग्लादेश को। देन टेक्नोलॉजी एंड टेलीकॉम यहां पर भी सिमिलर मोर देन अराउंड
200 चाइनीज़ कंपनीज़ जो है वह कहां पर ऑपरेट कर रही हैं। और सिमिलरली आप देखेंगे बांग्लादेश में भी 4G और 5G टेलीकॉम
टेक्नोलॉजी जो है चाइना ने दी है बांग्लादेश को। देन स्मार्ट सिटी टेक्नोलॉजी यहां पर भी इन्होंने
प्रोजेक्ट्स चलाए बांग्लादेश के अंदर। ये कुछ पॉइंट्स हैं जो आपको याद रखने हैं कि चाइना अपनी प्रेजेंस को कैसे बढ़ा रहा है।
बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव को कैसे एक्सपेंड कर रहा है इन साउथ अफ्रीका एंड इन बांग्लादेश।
ओके नाउ लेट्स मूव ऑन टू दी डे 12. सो डे 12 पर हम पढ़ने वाले हैं वॉर जो चल रही है अभी इजराइल, ईरान, यूएस कॉन्फ्लिक्ट हो,
चाहे वो रशिया वर्सेस यूक्रेन हो अराउंड फोर इयर्स होने को हैं और अभी भी यह एक कॉन्फ्लिक्ट जो चल रहा है और अब इसके
कॉन्सिक्वेंसेस क्या है पूरे वर्ल्ड पर। तो वो हम पढ़ने वाले हैं इंडिया के ऊपर। और यहां पर हम पांच से ज्यादा ग्रुप
डिस्कशन के टॉपिक्स को देखने वाले हैं। तो डे 12 के अंदर हमारा मोर फोकस किस पर रहेगा? ग्रुप डिस्कशन के टॉपिक्स पे
रहेगा। और इन ग्रुप डिस्कशन के टॉपिक्स ये सारे टॉपिक्स एक्चुअल हैं। तो इससे आईडिया लीजिए कि कैसे टॉपिक बनते हैं। राइट? तो
इससे आईडिया लग जाएगा हमें कि कोई भी करंट अफेयर अगर कोई भी वॉर कॉन्फ्लिक्ट चल रहा होता है तो किस तरीके से जो है सो टॉपिक
आते हैं। अब हम चलते हैं ईरान और इजराइल कॉन्फ्लिक्ट से। राइट? देखिए 1979 के अंदर इस्लामिक रेवोल्यूशन होता है। ईरान क्या
है? एक इस्लामिक रिपब्लिक कंट्री बन जाता है। आई रिपीट ईरान क्या है? एक इस्लामिक रिपब्लिक कंट्री बन जाता है 1979 के अंदर।
और न्यू लीडरशिप आती है किसकी? खमीनी की। राइट? आपने सुना होगा आयतुल्लाह खमीनी राइट तो जैसे ही ये लीडरशिप आती है ये
कहती है इजराइल को इललीगल स्टेट हम इजराइल को नहीं मानते इसकी एकिस्टेंस को हम नहीं सपोर्ट करते और ये पेलेस्टाइन को सपोर्ट
करते हैं दिस इज़ द रियल स्टार्टिंग पॉइंट ऑफ़ फस्टिटी तो देखिए 1979 में इस्लामिक रेवोल्यूशन होता है नई लीडरशिप आती है
खमीनी की और वो बोलती है इजराइल को इललीगल स्टेट सपोर्ट पेलेस्टाइन और कहती है कि इजराइल को हम इललीगल स्टेट मानते हैं। नाउ
अब क्वेश्चन आता है कि ये क्यों इसे इललीगल स्टेट मानते हैं? क्यों इनकी होस्टैलिटी है? तो देखिए आइडियोलॉजिकल
कॉन्फ्लिक्ट है। इजराइल क्या है? एक जइश स्टेट है। वेयर एज ईरान क्या है? एक इस्लामिक स्टेट। आपको पता है इस्लामिक
रिजीम जो है किसको जश को पसंद नहीं करती है। तो ये थी हिस्ट्री। तो आइडियोलॉजिकल कॉन्फ्लिक्ट भी है यहां पर। नाउ ईरान का
मेन गोल क्या है? देखिए अपोज इजराइल एक्सिस्टेंस एक्सपेंड इन्फ्लुएंस इन द मिडिल ईस्ट। और आपको पता है इजराइल जो है
मिडिल ईस्ट के अंदर बहुत ज्यादा स्टंग है। हमने गल्फ वॉर के अंदर देखा था कि इजराइल ने कैसे वेरियस गल्फ जीसीसी कंट्रीज को
हरा दिया था गल्फ वॉर के। तो चलिए अब हम डिस्कस करते हैं ट्रिगर पॉइंट क्या था जिसकी वजह से कॉन्फ्लिक्ट स्टार्ट हुआ।
ऑलदो हम देख सकते हैं हिस्ट्री तो यहीं से स्टार्ट हो रही है बट ये कॉन्फ्लिक्ट इतना बड़ा कैसे हो गया तो पॉइंट क्या है
यूरेनियम एनरचमेंट तो आप जानते हैं कि ईरान ने एनरच कर लिया था यूरेनियम 60% और जैसे ही वो 90% तक पहुंच जाता तो वो क्या
बना लेता न्यूक्लियर वेपन बना लेता राइट और अगर ये न्यूक्लियर [नाक से की जाने वाली आवाज़] वेपन बना
लेता तो आपको पता है जो इजराइल है ना इजराइल एक हरियाणा जितना हमारा इंडिया का हरियाणा स्टेट है ना उतना बड़ा है तो
ईजीली ये न्यूक कर सकते थे इजराइल को तो और देखिए जो इजराइल की इंटेलिजेंस यूनिट है उन्हें भी ये बात पता थी अगर इनके पास
न्यूक्लियर वेपन आया तो इनके के पास बहुत सारी प्रॉक्सीज़ हैं। हमने पढ़ा है ना हिजबुल्लाह, हमास, हूतीज़। तो अगर ये किसी
गलत हाथ में चली गई तो आप जान सकते हैं इजराइल के साथ क्या कॉन्सिक्वेंस होगा। देन अगर हम देखें तो 2020 के अंदर ईरानियन
जनरल थे कासिम सुलेमानी उन्हें किल्ड कर दिया गया। उन्हें अससेसिनेट कर दिया गया। देन 2023 में हमास अटैक हुआ। इजराइल। फिर
इजराइल ने आपको पता है गाज़ा वाला अटैक हुआ। देन 2024 में अगर हम देखें तो डायरेक्ट ईरान, इजराइल, मिसाइल ड्रोन
एक्सचेंज हुआ। और आपको पता है 2026 में मेजर चीज जो हुई जो इसने कॉन्फ्लिक्ट को और बढ़ा दिया वो था कौन? आयु अली खमीनी की
डेथ। राइट? आयु अली खमीनी की अससिनेशन कर दिया गया। आयु अली खमीनी। राइट? इनको एसेसनेट कर दिया। तो ये था जो मेजर की
पॉइंट था जिसकी वजह से वॉर जो है और कॉन्फ्लिक्ट जो है अभी तक चला। यही एक मेजर पॉइंट है जिसकी वजह से जो
कॉन्फ्लिक्ट है वो इतना लंबा चला है। ठीक है? देन अगर हम देखें तो यहां पर ईरान जो है उसके पास बहुत सारी प्रॉक्सीज़ हैं। तो
प्रॉक्सी के ऊपर हमने बात करी थी। अगर किसी कंट्री की एनिमिटी है दूसरी कंट्री के साथ तो वो डायरेक्टली इन्वॉल्व नहीं
होती। वो प्रॉक्सी यूज़ करती है। हिज़बुल्ला, हमाज़, हुतीज़ और सीरियन मिलिटेंट्स। ठीक है? तो इस तरीके से जो है
यहां पर आप देख सकते हैं लेबनान में, हिजबुल्ला है, हूस यमन में, हामास, गाजा में और ये सारे जो है इजराइल पर अटैक कर
रहे हैं। राइट? इजराइल सिटीज पर रॉकेट्स, शिप्स। देन आप देख सकते हैं हूती अटैक्स ऑन इजराइल ओपन न्यू फ्रंट। तो जैसे हमने
देखा हमास और हिजबुल्ला तो अटैक कर रहा था और जैसे ही कॉन्फ्लिक्ट स्टार्ट हुआ तो हूती ने भी एक नया फ्रंट खोल दिया। और
आपको पता है इन्होंने क्या है स्टेट ऑफ़ फर्मस को ब्लॉक कर रखा है। नाउ अगर हम बात करें वेपंस की तो आपको पता है बहुत ज्यादा
डिस्कशन हुआ है वेपन के ऊपर है ना जो यूज़ है शाही ड्रोन के बारे में आपने सुना होगा कि ये बहुत चीप ड्रोन था जिसने बहुत
ज्यादा स्ट्राइक्स करी हैं यू जीसीसी कंट्रीज के अंदर मिडिल ईस्ट के अंदर है ना दुबई के अंदर देन फतेह 11 वन मिसाइल
जुल्फकर मिसाइल खुर्रम शेर बलस्टिक मिसाइल रॉकेट बराजेस ये सारी कहां की है ईरान और ईरान की प्रॉक्सीस यूज़ करती हैं देन यूएसए
ने क्या यूज़ करा थर्ड मिसाइल डिफेंस सिस्टम और जो यहां पर इनका रडार था टीपीएसएस रडार ये भी डिस्ट्रॉय हुआ था
यहां पर इजराइल आयरन डोम डेविड स्लिंग तो ये सारे कुछ वेपन थे जो कि इस वॉर के अंदर यूज़ हुए हैं। नाउ व्हाई वॉर कंटिन्यूस? तो
हमने देखा प्रॉक्सी वॉरफेयर सिस्टम है। तो देखिए आप ईरान से नहीं लड़ रहे हैं। इनकी तीन-तीन प्रॉक्सीज़ हैं। हिजबुल्लाह, हूती,
गाजा में, हमास। तो इसलिए जो ये वॉर है इतनी लंबी खींच रही है। बिकॉज़ आपको प्रॉक्सी से भी अटैक करना है। देन देन
यहां पर आप देखेंगे तो हमने पढ़ा था स्टार्टिंग में ही कि आइडियोलॉजिकल कॉन्फ्लिक्ट है। एग्ज़िस्टेंस को ही नहीं
मानना चाहता। देन हम देखते हैं मेजर चीज़ क्या है? यहां पर यूएसए आ रखा है। आपको पता है यूएसए कंटीन्यूअसली सपोर्ट कर रहा
है इजराइल को। है ना? तो यहां पर सिर्फ अब दो कंट्रीज की फाइट नहीं हो रही है। यहां पर यूएसए भी आ चुका है। इसलिए वॉर जो है
इतनी लंबी चल रही है। देन ईरान एंड रीचिंग यूरेनियम 60% अकॉर्डिंग टू इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी रिपोर्ट कहता है
इजराइल फियर करता है कि न्यूक्लियर वेपनाइजेशन हो जाएगा। इजराइल विल नॉट स्टॉप अंटिल दे डिस्ट्रॉयड द रेयूनियम
सप्लाई। और यूरेनियम सप्लाई अभी तक डिस्ट्रॉय नहीं हुई है। इसलिए वॉर जो है इतनी लंबी खींची। देन अगर हम बात करें
स्टेट ऑफ़ हर्मोस की तो आपको पता ही है ब्लॉक हो चुका है। 20% ऑफ़ वर्ल्ड ऑयल पाससेस फ्रॉम हेयर कंट्रोलोल्ड बाय ईरान
रीजनली। देन फूड सप्लाई पे भी यहां पर बहुत ज्यादा थ्रेट है। गल्फ कंट्रीज इंपोर्ट 80 टू 90% ऑफ फूड। राइट? आपको पता
है गल्फ कंट्रीज के पास क्या है? फूड की स्केयरसिटी है। तो वो यहां पर क्या करता है? इंपोर्ट करता है। बट ऑल दी फूड
शिपमेंट जो है पास कहां से होता है? हार्मोस से होता है। तो यहां पर फूड सप्लाई का भी खतरा है। देन यूएई कतर
डिपेंड हैवली ऑन इंपोर्ट्स। तो आपको पता है यूएई कतर जो है वो राइस वीट बहुत ज्यादा इंपोर्ट करते हैं। बट अपस्टेट ऑफ़
हरमोस अगर ब्लॉक होगा तो इनको भी यहां पर थ्रेट है। नाउ अगर हम इंडिया की अगर बात करें अब राइट इंडिया पे क्या
कॉन्सिक्वेंसेस हो रहा है? तो आपको पता है 40 टू 45% एलएनजी सिर्फ कतर से आ रही थी वाया हरमोस रूट एंड एलपीजी के बारे में
आपने देखा कि इंडिया जो है 90% कहां से आती है? मिडिल ईस्ट से आती है। तो इंडिया के अंदर बहुत सारी एलपीजी क्राइसिस देखने
को मिली। तो हमने पढ़ा था ना एनर्जी क्राइसिस में जब हम लेक्चर का टॉपिक कवर कर रहे थे एनर्जी क्राइसिस तो वहां पे
हमने ये कवर करा था सारा। देन इंडियंस इन जीसीसी। तो हमने बात करी थी ना 11th डे के अंदर कि 9 मिलियन लोग जो हैं जीसीसी
कंट्रीज में रहते हैं, मिडिल ईस्ट में रहते हैं। तो उनकी जॉब को यहां पर थ्रेट है। रेमिटेंस इंडिया सबसे ज्यादा रिसीव
करता है। जीसीसी बहुत ज्यादा कंट्रीब्यूट करता है। तो इनकी जॉब को थ्रेट है। अगर हम इजराइल को सपोर्ट करेंगे। इजराइल और
इंडिया वाले रिलेशन में हमने ये सब पढ़ा है। ठीक है? देन यूएई की अगर हम बात करें तो 3.5 मिलियन इंडियंस वहां पर काम कर रहे
हैं। चलिए अब देखते हैं इंश्योरेंस कॉस्ट इनक्रीस हो चुकी है। अब इंश्योरेंस कॉस्ट इनक्रीज मतलब क्या है? जो शिप्स वहां पर
जाते हैं। राइट? तो वो इंश्योरेंस करवा के जाते थे। बट यहां पर अब कॉस्ट बहुत ज्यादा इनक्रीस होगी फोर टू सिक्स टाइम्स क्योंकि
यहां पर थ्रेट है कि कोई भी ऑयल टैंकर जो है निशाना बन सकता है रेबल का या फिर ईरान की मिसाइल्स का। तो यहां से इंश्योरेंस
कॉस्ट इनक्रीस हुई है। ऑयल प्राइसेस अगर आप देखेंगे 150 टू 200 बैरल जा चुका है और $1 भी अगर बैरल प्रति बैरल बढ़ता है तो 8
से $00 करोड़ का एनुअल इंपैक्ट पड़ता है। तो आप सोच सकते हैं इंडिया को कितना नुकसान हो रहा है। और यह पॉइंट बहुत
इंपॉर्टेंट है। अगर कोई रीसेंट अब एसएसबी देने जा रहा है तो इसे पढ़ के जाना। बिकॉज़ अब जो है बट अगर राइट नाउ अगर आप देखेंगे
तो इंडिया के अंदर इनफ्लेशन चल रहा है। इंडिया की जीडीपी फोर से सिक्स नंबर पर आ चुकी है। इंडिया की रूपी जो है बहुत बुरी
रूपी जो है बहुत बुरी तरीके से गिर रहा है। तो इसलिए ये पॉइंट बहुत इफेक्टिव हो जाते हैं। यहां पर ये पॉइंट हमें यूज़ करने
हैं। देन रेड सी रीटिंग देन रेड सी रीटिंग। तो आपने देखा होगा स्टेट ऑफ़ हरमोस को अब लोग यूज़ नहीं कर रहे हैं। रेदर दैन
अब वो कहां है? अफ्रीका से गो अराउंड करके जा रहे हैं। तो उसकी वजह से ज्यादा कॉस्ट लग रही है। फ्यूल ज्यादा लगेगा। पेट्रोल
प्राइसेस इनक्रीस हो चुके हैं। एयर एंड फ्यूल कॉस्ट राइजिस टिकट प्राइस इनक्रीस हो चुके हैं। पेट्रोकेमिकल कॉस्ट राइज पास
कहता है पेट्रोकेमिकल। तो हमने ये भी पढ़ा था। राइट? पेट्रोकेमिकल के बारे में एनर्जी क्राइसिस में। तो देखिए पेट्रोलियम
से क्या-क्या बनता है? प्लास्टिक फर्टिलाइजर और पेंट और भी बहुत सारी चीजें हैं। वायर्स तो सबकी कॉस्ट बढ़ेगी। तो
ओवरऑल इनफ्लेशन बढ़ेगी। राइट? देन एनवायरमेंटल इंपैक्ट तो हम भूल ही गए। राइट? ऑयल टैंकर्स फिल। तो आपने देखा है
कि ईरान ने बहुत सारे ऑयल टैंकर्स को यहां पर क्या करा है? डिस्ट्रॉय करा है। और वो सारा ऑयल जो है वो कहां गिर गया है? वो
सारा सी के अंदर मिल गया है। तो उससे क्या होएगा कि यहां पर जो हमारा वाटर पोल्यूशन है वो इनक्रीस होगा। एयर पोल्यूशन मिसाइल
स्ट्राइक जब इतनी सारी होती है। अर्बन डिस्ट्रक्शन हुआ है। आपने देखा ईरान की सिटीज का क्या हाल हुआ है। पावर प्लांट
इलेक्ट्रिसिटी और देन आप देखेंगे तो खर्ग आइलैंड ऑयल सप्लाई हैज़ बीन हिट। तो यहां पर कितने दिनों तक जो है ऑयल जलता ही रहा
है। तो कितना एयर पोलशन हुआ है कॉजिंग ब्लैक रेन। ब्लैक रेन। तो यहां पर ब्लैक रेन के केसेस भी देखने को मिले हैं। WHO
ने वर्न भी करा है और इसकी वजह से जो है लॉन्ग टर्म हेल्थ इफेक्ट्स देखने को मिलेंगे हमें ईरान के अंदर। व्हाई यूएसए
एंटर्ड इजराइल एंड ईरान कॉन्फ्लिक्ट? यह हमारे दिमाग में क्वेश्चन आता है। तो देखिए यूएस का सिक्योरिटी एग्रीमेंट है और
मिलिट्री प्रेजेंस है। ऑलदो आप याद रखना कि इजराइल नाटो का मेंबर नहीं है। ये चीज़ आपको ध्यान रखनी है। बट इनका क्या है?
यहां पर एग्रीमेंट था। आप देखेंगे इनका मिडिल ईस्ट में बहुत सारे बेस हैं यूएस चाहे वो कतर के अंदर अलदीद एयरबेस हो,
सऊदी अरब के अंदर प्रिंस सुल्तान एयरबेस हो जहां से ज्यादातर जो इन्होंने ऑपरेशन परफॉर्म करें हैं वो यहीं से करें हैं।
देन बहारिन के अंदर हो चाहे वो यूएई अलफरा बेस हो जहां पे F35 और सर्लेंस ऑपरेशन किए जाते हैं। तो देन हम देखें तो जॉइंट
मिलिट्री एक्सरसाइज जो है वो यूएसए जीसीसी कंट्री के साथ करता है। दुबई, सऊदी अरेबिया राइट देन आप यहां देख सकते हैं
यूएस सऊदी आर्म्स डील वर्थ 110 बिलियन यूएई F35 डील अप्रोक्स 23 बिलियन देन ऑयल सिक्योरिटी इफ इवन इफ यूएस इंपोर्ट लेस
ऑयल प्राइसेस अफेक्ट यूएस इकॉनमी हरमोस्ट डिसररप्शन जो प्राइसेस हैं ऑयल के इनक्रीस होंगे तो यूएस को भी इनफ्लेशन जो है झेलना
पड़ेगा राइट क्योंकि वर्ल्ड वाइड इनफ्लेशन होगा इंटेलिजेंस शेयरिंग नेटवर्क है तो इसलिए यही रीज़न है कि यूएस की प्रेजेंस है
जीसीसी कंट्री के साथ इनके वेरियस डिफेंस एग्रीमेंट है जीसीसी कंट्री के साथ नाउ यहां पर एक रीज़न और आ जाता है स्ट्रेटेजिक
अलायंस विद इजराइल। इज़राइल इज़ यूएसए क्लोजेस्ट अलाय है और मिलिट्रीली ए 3 बिलियन ईयर देता है इंटेलिजेंस एंड डिफेंस
सिस्टम। यूएसए डिप्लॉय थर्ड पेट्रोइट मिसाइल डिफेंस टू डिफेंड इजराइल। राइट? सो यहां पर यूएस को बहुत सारा लॉस देखने को
मिला है। अराउंड 3 बिलियन आप देख सकते हैं। इनका F35 डिस्ट्रॉय हुआ है। एफपीएस रडार, टीपीवाई रडार्स, एएस रडार जो बिलियन
डॉलर्स का है। देन आपने देखा होगा F1-15 जो है वो डिस्ट्रॉय हुआ था फ्रेंडली फायर के अंदर। एम क्यूइन ड्रोंस जो हैं कहते
हैं अब तक अराउंड 30 एमक्यू ड्रोंस जो है क्रैश हो चुके हैं। टीपीवाई रडार्स हो गए। तो थर्ड मिसाइल डिफेंस सिस्टम तो इसलिए
बहुत ज्यादा लॉस जो है यहां पर किसको देखने को मिला है? यूएस को देखने को मिला है। और यहां पर नो किंग प्रोटेस्ट भी हुए
थे डोनल्ड ट्रंप के खिलाफ। देन इजराइल ने रिपोर्ट करी है अराउंड 3000 कैजुअलिटीज़। तो यहां से हमें पता लगता है कि बहुत
ज्यादा लॉस जो है देखने को मिला है। चलिए अब हम एक बार बात कर लेते हैं जीडी के टॉपिक की। राइट? तो ये बहुतेंट टॉपिक है।
वी हैव सीन वेरियस वेस्ट एशियन कॉन्फ्लिक्ट इन रीसेंट ईयर व्हिच कंट्री इज बेनिफिटिंग दी मोस्ट फ्रॉम देम। तो
वेस्ट एशियन कॉन्फ्लिक्ट में क्या है? इजराइल, ईरान, यूएस और भी आ जाएगा। तो क्या है? रशिया, चाइना, यूएसए। अगर आप
यूएसए की बात करेंगे यहां पर किसकी? यूएसए की। तो आप बता सकते हैं कि देखिए यूएस का तो बहुत ज्यादा नुकसान हुआ है। यहां पर आप
देख सकते हैं 3 बिलियन प्लस हो चुका है। नो किंग प्रोटेस्ट वहां पर चले। यूएस के अंदर भी इनफ्लेशन हुआ है। तो यहां पर यूएस
को तो फायदा नहीं हुआ है। ऑलदो अगर हम यहां पर रशिया वर्सेस यूक्रेन की बात करें तो वहां पर यूएस को जो है बेनिफिट देखने
को मिला है। क्योंकि बिकॉज़ इनडायरेक्टली आप देखेंगे तो रशिया को बहुत ज्यादा नुकसान पहुंचाया यूएसए ने जो वो बट अगर आप
रशिया की बात करेंगे जो अभी ईरान और इजराइल की वॉर चल रही है। सबसे ज्यादा फायदा जो हुआ है वो पता है किसको हुआ है?
रशिया को हुआ है। चलिए देखते हैं क्यों। अ तो यहां पर देखते हैं। देखिए रशिया अर्न मोर फ्रॉम ऑयल एक्सपोर्ट ड्यू टू फियर ऑफ
वॉर इन मिडिल ईस्ट ऑयल प्राइसेस इंक्रीज्ड डेपिटली। देखिए कंट्रीज जो है वो कंटीन्यूअसली बाय कर रही है ऑयल किससे?
रशिया से। क्योंकि मिडिल ईस्ट में तो क्राइसिस चल रहा है। स्टेट ऑफ़ फर्मस ब्लॉक है। तो इंडिया और चाइना ने डिस्काउंटेड
प्राइस पे बहुत ज्यादा ऑयल को खरीदा है। देन अगर आप देखेंगे इंडिया इंक्रीस रशियन ऑयल परचेजेस। इंडिया इंपोर्ट लार्ज अमाउंट
ऑफ डिस्काउंटेड रशियन क्रूड ऑयल। मिडिल ईस्ट सप्लाई रिस्क में आप यहां और आपको पता होगा कि यूनाइटेड स्टेट ने
खुद स्टेटमेंट दी थी कि वी आर गिविंग वेवर टू इंडिया टू बाय ऑयल फ्रॉम द रशिया। तो देखिए एक तरफ पर यहां पर रशिया पे सेंशन
लगे थे। अब यूएसए खुद बोल रहा है कि आप बाय करिए ऑयल कि ग्लोबल ऑयल सप्लाई मेंटेन रहे। तो इससे हमें पता लगता है कि रशिया
का फायदा हो रहा है। देन आप यहां पर देखेंगे चाइना स्ट्रेंथन एनर्जी ट्रेड विद रशिया। चाइना इंक्रीज्ड लॉन्ग टर्म ऑयल
गैस कॉपोरेशन विद रशिया। चाइना वांट सिक्योर एनर्जी सप्लाई ड्यूरिंग द मिडिल ईस्ट। तो यहां से आप पढ़ सकते हैं आगे।
ठीक है? तो यह सारे पॉइंट्स यही दिखाते हैं कि अब तक रशिया से कोई भी ऑयल नहीं खरीद रहा था। बट मिडिल ईस्ट और स्टेट ऑफ
फर्मस के ब्लॉक होने की वजह से अब लोग अल्टरनेट रूट देख रहे हैं। तो अब लोग जो है रशिया की तरफ जा रहे हैं। वेरियस
एग्रीमेंट साइन कर रहे हैं और इनकी इकॉनमी ग्रो कर रही है। अब क्योंकि इन पे बहुत सारे सेंशन लगे थे। वर्ल्ड अटेंशन शिफ्टेड
फ्रॉम देन वर्ल्ड अटेंशन शिफ्टेड अवे फ्रॉम यूक्रेन। तो आपको पता है रशिया वर्सेस यूक्रेन वॉर चल रही थी। और अब जो
है अटेंशन यूक्रेन वॉर से हटकर किस पे आ चुकी है? ईरान, यूएस, इजराइल वॉर पे आ चुकी है। तो यहां पर अब जो है रशिया पे जो
है कम ध्यान है नाटो कंट्रीज का। देन आप देखें तो यूएस मिलिट्री रिसोर्सेज मे बी डायवर्टेड। तो आपने देखा होगा कि यूएस ने
जो है काफी सारी मिसाइल्स जो है कहते हैं ना टॉम हॉक मिसाइल का इनका जो स्टॉक पाइल था वो खत्म हो चुका है। पेट्रोइट मिसाइल
डिफेंस सिस्टम इन्होंने सारे वहां डिप्लॉय कर दिए थे इजराइल के अंदर मिडिल ईस्ट के अंदर। तो जो रिसोर्सेज यहां यूक्रेन में
यूज़ हो सकते थे वो अब कहां यूज़ हो रहे हैं? अपना मिडिल ईस्ट में यूज़ हो रहे हैं। तो इससे क्या है? है यहां पर रशिया के पास
बेनिफिट हो जाता है। रशिया जो है अब यूक्रेन पे और अटैक कर सकता है। जो देन रशियास ग्लोबल इन्फ्लुएंस इंक्रीज आपने
देखा होगा रशिया बहुत सारे वेपंस जो है किसको सप्लाई कर रहा है? ईरान को सप्लाई कर रहा है। ड्रोन सप्लाई कर रहा है। तो इस
समय पता लगता है और इंटेलिजेंस भी दे रहा है। तो इस समय पता लगता है कि यहां पर जो है रशिया को बहुत ज्यादा एडवांटेज मिला है
विद दिस वॉर। ठीक है? तो चलिए अब हम बात करते हैं हाउ कैन ईरान, इजराइल वॉर बी स्टॉप्ड एंड पीस रिस्टोर्ड। ठीक है? है तो
इंटरवेंशन एंड मीडिएशन ऑफ़ यूनाइटेड स्टेट्स से हम वॉर रोक सकते हैं। ईरान स्टॉपिंग प्रॉक्सी वॉरफेयर एंड
डिप्लोमेटिक टॉक्स एंड पीस नेगोशिएशन। तो प्रॉक्सी के बारे में हम पढ़ के आए थे। तो उसमें आप बता सकते हैं कि हिजबुल्ला है,
हबास, हूतीज़, सीरियन मिलिटेंट्स। तो ये सारे कंटीन्यूअसली किस पे अटैक करते हैं? इजराइल पे करते हैं। तो अगर यह प्रॉक्सी
वॉरफेयर स्टॉप होती है तो मे बी दी वॉर जो है ये भी खत्म हो जाए। वहां पर ये सारे पॉइंट्स आप बता सकते हैं। देन 2024 में जो
2023 में गाज़ा अटैक के बारे में आप एक्सप्लेन कर सकते हैं। अगर अब बात करें इंटरवेंशन ऑफ मीडिएशन बाय द यूनाइटेड
स्टेट्स तो आपने देखा होगा यूनाइटेड स्टेट्स ने कुछ जो है नेगोशिएशन की शर्तें रखी हैं। जैसे एंड ऑफ यूरेनियम एनरचमेंट,
नो न्यूक्लियर वेपन प्रोग्राम, लिमिट बैलस्टिक मिसाइल डेवलपमेंट, ग्रेटर न्यूक्लियर इंस्पेक्शन, सिक्योर शिपिंग
थ्रू स्टेट ऑफ़ हरमोस। तो आप ये सारे पॉइंट वहां पर बता सकते हैं जीडी के अंदर कि देखिए यूएसए जो है मीडिएट कर रहा है।
यूएसए ने ये डिमांड रखी है। ऑलदो ये डिमांड बहुत ज्यादा क्या हैफ्टी है। ईरान इसे नहीं मानेगा। ठीक है? तो ये चीज़ आप
बता सकते हैं। और यहां पर ईरान क्या डिमांड कर रहा है कि लिफ्ट इकोनॉमिक सेंशन जो कि यूएसए कर सकता है। अगर यूएसए हटा
देता है तो ये वॉर स्टॉप हो सकती है। रिलीजेस फ्रोजन ईरानियन एसेट। तो यहां पर जो यूएस के अंदर इनके एसेट्स थे, बैंक्स
के अंदर एसेट थे वर्ल्ड बैंक और अदर जगह पर तो वो फ्रीज़ कर दिए गए हैं। तो वो तो अगर ये सारी शर्तें हम मान लेते हैं। ऑलदो
अगर आप देखेंगे तो इन्होंने फिर भी शर्त रखी है कि हम न्यूक्लियर वेपन बनाएंगे जो यूएसए नहीं मानेगा। तो आई थिंक इन बिटवीन
अगर हम कोई वे निकालें। सो डेफिनेटली विद दी हेल्प ऑफ यू नो यूरोपियन कंट्रीज एंड यूनाइटेड स्टेट्स और अगर हम इनको कुछ
पैकेज दें तो हम इस वॉर को सॉल्व कर सकते हैं। डिप्लोमेटिक टॉक्स एंड पीस नेगोशिएशन में आप बता सकते हैं जो वेरियस मीटिंग्स
हुई हैं, पीस टॉक्स मीटिंग हुई है और ब्रिक्स के अंदर बात हुई है। बट ऑलदो कुछ इसका सॉलशन नहीं निकला तो वो भी आप डिस्कस
कर सकते हैं। ठीक है? तो चलिए नेक्स्ट टॉपिक पे चलते हैं हम लोग। हाउ कैन इंडिया इंप्रूव इट्स इकॉनमी ड्यूरिंग दी वॉर लाइक
सिचुएशन इन द मिडिल ईस्ट। तो देन बिकमिंग सेल्फ रिलायंट। तो सेल्फ रिलायंट एंड एनर्जी सेक्टर। तो प्लीज आप जाके एनर्जी
क्राइसिस पढ़ना। उसके अंदर मैंने सारी चीजें एक्सप्लेन कर रखी हैं। एंड कि कैसे हम जो है बायोफ्यूल अलायंस हो या फिर अगर
हम बात करें सोलर की ठीक है और 50% इलेक्ट्रिसिटी जो हम जनरेट करने वाले हैं बाय 2030 वो भी हम किससे रिन्यूएबल सोर्स
ऑफ़ एनर्जी से करने वाले हैं। देन आप बता सकते हैं एथेनॉल ब्लेंडिंग के बारे में। तो वहां पर एक रिपोर्ट भी बताई थी कि
कितना एथेनॉल ब्लेंडिंग की वजह से हमने ऑयल जो है कम इंपोर्ट करा है। तो वो बहुत सारे पॉइंट हमने डिस्कस करे हैं। ठीक है?
क्लाइमेट चैप्टर में। तो प्लीज वहां पे से आप इसको यूज़ कर सकते हैं। यूजिंग अल्टरनेट ट्रेड रूट्स के बारे में भी हम पहले बात
कर चुके हैं। तो प्लीज उसे रिवाइज़ कर लेना है। अब देखा होगा आपने इंडिया के जो क्रूड ऑयल है हम वेन्यूजुएला से हमने खरीदना
शुरू कर दिया। आई थिंक थर्ड लार्जेस्ट बन चुका है। रशिया से तो हम खरीद ही रहे हैं। हमने एक ब्लडी वॉश तक चेन्नई मेरीटाइम
कॉरिडोर भी पढ़ा था। हम ऑस्ट्रेलिया की तरफ भी जा रहे हैं। हम यूरोपियन यूनियन की तरफ जा रहे हैं। हम यूएस से ऑयल खरीद रहे
हैं। तो अल्टरनेट रूट तो इंडिया देख ही रहा है। ठीक है? तो देन नेक्स्ट टॉपिक अगर हम देखें नेक्स्ट टॉपिक आया हुआ है। तो आप
देख सकते हैं यहां पर वही चीज है जो मैंने बात करी थी राइजिंग इनफ्लेशन हो रहा है। उसके पीछे का रीज़न क्या है? तो यहां पर
हमने डिस्कस करा था। यहां पे हमने डिस्कस करा था देखिए इंश्योरेंस कॉस्ट इनक्रीस हुई। ऑयल के प्राइसेस इनक्रीस हुए थे 150
टू 200 बैरल जिसकी $1 इनक्रीस होने की वजह से इतना नुकसान इंडिया को हुआ है। रीूटिंग की वजह से हुआ है। पेट्रोल प्राइस इनक्रीस
हुए हैं। पेट्रो केमिकल इंडस्ट्री हो गया। फिर आप और बता सकते हैं। देन देन हमने अब तक जितनी रिपोर्ट्स भी
पढ़ी हैं वह सारी बता दो आप 2 लाख करोड़ हिट हाउ ईरान वॉर श्रिंकिंग इंडियास इकॉनमी एलपीजी क्राइसिस इंडिया ने फेस करी
यूरिया आउटपुट फॉल बाय 18 लाख टन्स ये हम पढ़ के आए थे एनर्जी क्राइसिस के अंदर मोरबिटा टाइल फैक्ट्री बंद हो चुकी थी
क्रूड ऑयल स्टॉक तो चलिए अब हम बात करते हैं रशिया वर्सेस यूक्रेन वॉर के बारे में तो अगर हिस्ट्री हम देखें तो यूएसएसआर
क्या था बहुत सारे देशों का एक संघ था यूनियन था राइट यहां पर बहुत सारे देश थे। सो 1922 से लेके 1991 तक जो है सोवियत
यूनियन या फिर यूएसएसआर था और 1991 के अंदर आपको पता है यूएसएसआर जो है वो कोलैप्स हो जाता है। राइट? वो छोटे भागों
में वो क्या होता है? छोटे-छोटे देशों में बंट जाता है और उसमें से ही एक निकलता है यूक्रेन। यूक्रेन बिकम इंडिपेंडेंट ऑन
24th अगस्त 1991। रशिया भी जो है एक सेपरेट कंट्री बन जाती है और यूक्रेन भी। तो अब [नाक से की जाने वाली आवाज़] देखिए
क्या होता है जब यह यूएसएसआर जो कि एक सुपर पावर थी राइट इसके पास बहुत सारे वेपंस थे न्यूक्लियर वेपन थे तो जब यह
डिवाइड हुआ तो यूक्रेन के हिस्से में क्या आया न्यूक्लियर वेपंस आए थर्ड लार्जेस्ट इन द वर्ल्ड आफ्टर द यूएसएसआर बट इन 1994
बुड्ढापेस्ट मेमोरेंडम यूक्रेन ने अपने सारे न्यूक्लियर वेपन दे दिए और इन रिटन रशिया यूएसए और यूके ने प्रॉमिस करा टू
रिस्पेक्ट यूक्रेन सोवरेनिटी तो देखिए सोवनिटी मतलब क्या हो गया कि किसी एक देश की जो टेरिटरी है, लैंड है, आप उसकी
रिस्पेक्ट करेंगे कि आप यूक्रेन को एक कंट्री मानेंगे। राइट? तो जो कंट्री को जिस तरीके से डील किया जाता है तो क्योंकि
ये नया देश था तो यहां पर इन्होंने क्या अपने न्यूक्लियर वेपन दे दिए और एक नई कंट्री बन गई। नाउ अगर हम डिस्कस करें तो
यहां तक तो सब सही था। तो रशिया और यूक्रेन एनिमी कैसे बन गए? तो 1991 तक देखिए 2000 रिलेशंस वर नॉर्मल।
मेजर टर्निंग पॉइंट आता कहां से है? नेटो एक्सपेंशन इशू। तो अगर आपसे कोई पूछता भी है कि यूक्रेन वर्सेस रशिया का मेजर रीज़न
क्या है? तो आप यही रीज़न होगा नाटो एक्सपेंशन इशू। तो देखिए यूक्रेन स्टार्टेड मूविंग क्लोज़र टू नाटो।
वेस्टर्न अलायंस रशिया सॉ दिस एज अ सिक्योरिटी थ्रेट। 208 में देखिए नाटो सेड यूक्रेन मे जॉइन इन फ्यूचर। तो रशिया को
यहां पर क्या थ्रेट था कि अगर यूक्रेन ने जॉइ कर लिया नाटो। तो जो रशिया का बॉर्डर है वहां पर क्या होगा? नाटो आ जाएगा। नाटो
की फोर्सेस डिप्लॉय होती है ना एक दूसरे देश में। तो देखिए नाटो की फोर्सेस डिप्लॉय होती है नाटो मेंबर कंट्रीज में
तो रशिया को यह था कि डायरेक्टली आप देखिए तो रशिया के बॉर्डर के पास क्या आ गया अब नाटो आ चुका है तो यही एक रीज़न था जिसकी
वजह से जो है रशिया को फियर था नाटो ऑलरेडी एक्सपेंडेड टू पोलैंड एंड बाल्टिक स्टेट्स तो यहां पर रशिया को थ्रेट था कि
इन फ्यूचर ये जो है रशिया के बॉर्डर तक आ जाएंगे। नाउ यहां पर कुछ और इशूज़ थे लाइक आइडेंटिटी एंड लैंग्वेज फैक्टर जो ईस्टर्न
यूक्रेन है ये वाला पार्ट यहां पर जो है मोर रशियन लैंग्वेज प्रो रशियन लैंग्वेज थी और यहां पर जो है यूरोपियन की तरफ इनका
ज्यादा रुझान था बट वॉर इज़ नॉट मेनली अबाउट द लैंग्वेज इट इज़ अबाउट द जिओपॉलिटिक्स एंड कंट्रोल वही बात है कि
जो हमने पहले फैक्टर डिस्कस करा है कि नाटो एक्सपेंशन ही यहां पर मेजर रीज़न था। तो देखिए यहां पर क्या होता है एक प्रो
रशियन प्रेसिडेंट थे 2014 तक विक्टर बट यहां पर क्या होता है यूक्रेन के अंदर प्रोटेस्ट होता है और उनको निकाल दिया
जाता है नाउ अब यहां पर रशिया को क्या फियर था कि विक्टर तो चले गए ठीक है विक्टर को निकाल दिया प्रेसिडेंट से नाउ
यहां पर रशिया ने इन रिस्पांस क्या करा क्राइमिया पे जो अटैक करा और यहां पर क्राइमिया को ले लिया ठीक है नाउ अगर आप
देखेंगे तो क्राइमिया पे अब रशिया का एक इंपॉर्टेंट नेवल बेस भी है तो ये क्राइमिया किसका पार्ट था यह यूक्रेन का
ही पार्ट था बट 2014 में जो है यहां पर रशिया ने इसे कब्जा कर लिया इस पर। तो यहां से हमें समझ में आता है कि इनकी जो
एनिमिटी है वो बहुत टाइम से चलती आ रही है। ठीक है? इन्होंने पहले भी क्राइमिया को कब्जा कर लिया था। नाउ कंट्रोल ऑफ
यूक्रेन स्ट्रेटेजिकेंस। यूक्रेन इज़ अ बफर ज़ोन बिटवीन रशिया एंड यूरोप। तो आप देखेंगे अगर यूक्रेन जो है वो यहां पर आता
है। रशिया यहां है और यूरोपियन यूनियन इधर है। तो ये एज अ बफर [नाक से की जाने वाली आवाज़] ज़ोन काम करता
है। तो अगर यूक्रेन पे इनका अच्छा कंट्रोल होगा तो डायरेक्टली ये जो ट्रेड कर सकते हैं किसके साथ? यूरोपियन यूनियन के साथ।
तो दैट्स व्हाई यूक्रेन इंपॉर्टेंट हो जाता था रशिया के लिए। और हम आगे पढ़ेंगे। एक जीडी का टॉपिक भी आता है कि जो यह
वॉर्स होती है, इसके पीछे का रीज़न क्या है? क्या यह कॉन्फ्लिक्ट होता है टेरिटरी को लेके? या फिर यहां पर जो है रिसोर्सेज
या फिर यहां पर रिसोर्सेज के लिए लड़ाई होती है? तो ये सारी चीजों में आप बता सकते हैं यहां पर एग्जांपल देके कि यहां
पर आप एग्जांपल दे सकते थे कि यूक्रेन जो है एक बफर ज़ोन की तरह काम करता है रशिया और यूरोप के बीच में। देन आप देख सकते हैं
अभी तक जो है सो फार यहां पर रशिया ने इतना जो है एरिया कब्जा कर लिया है किसका? यूक्रेन का। ठीक है? ऑलदो ये कीव तक नहीं
पहुंच पाए हैं। अभी तो कीव तो बहुत दूर है। सो ये एरिया आप देख सकते हैं। चाहे वो लोहान्स हो, डोनेट्स हो। तो ये सारी चीजें
आप देख सकते हैं। नाउ व्हाई वॉर स्टार्टेड करंट सिचुएशन क्या है? तो देखिए फुल स्केल इन्वज़ हो जाता है 2022 में रशिया अटैक कर
देता है नॉर्थ से, ईस्ट से, साउथ से, क्राइमिया साइड से। है ना? और वॉर जो है अभी तक चल रही है और यूक्रेन डिफेंडेड कीप
सक्सेसफुल। ऑलदो स्टार्टिंग में क्या नरेटिव बना था कि यूक्रेन तीन-चार दिन में ही हार। बट आप देख सकते हैं यूक्रेन ने जो
है कंटीन्यूअसली जो है डिफेंड करा है अपनी कंट्री को। और राइट नाउ अगर आप देखेंगे वॉर कैसी हो चुकी है? एकदम स्लो हो चुकी
है। ट्रेंच स्टाइल चल रही है। राइट? मतलब ट्रिस बने हुए हैं वहां पर वर्ल्ड वॉर में जैसे होता था तो वैसे ही लड़ाई चल रही है।
अब नाउ यहां पर कुछ और पॉइंट्स आ जाते हैं। तो हमने पहले एक जीडी का टॉपिक पढ़ा था। याद करो हमने एक जीडी का टॉपिक पढ़ा
था पहले। याद करो कि व्हाई यूएन फेल टू सॉल्व दी मेजर कॉन्फ्लिक्ट्स लाइक रशिया वर्सेस यूक्रेन वॉर। तो वही चीजें बता रखी
है। देखिए रशिया क्या एक परमानेंट मेंबर है। वीटो पावर है इसके पास। तो जैसे ही कोई भी रशिया के अगेंस्ट रिजर्वेशन लाया
जाता है तो वो अपनी वीटो पावर को यूज कर लेता है। तो आप बोल सकते हैं यूएन क्यों फेल हुआ? क्योंकि यहां पर वीटो पावर का
कांसेप्ट है और वीटो पावर सिर्फ पांच मेंबर के पास ही दे रखी है आपने। देन इकोनमिक इंटरेस्ट मेनी कंट्री डिपेंड्स ऑन
रशियन ऑयल, यूक्रेन ग्रेन। देन इकोनमिक इंटरेस्ट है। मेनी कंट्रीज डिपेंड ऑन रशियन ऑयल, यूक्रेन ग्रेंस। तो ये आप बता
सकते हैं रिसोर्सेज पे कि देन ये वाला पॉइंट आप ऐड कर सकते हैं किसमें? रिसोर्सेज के अंदर कि वॉर क्यों होती है?
रिसोर्सेज के पीछे होती है, लैंड के पीछे। तो वहां पर आप बता सकते हैं रशियन ऑयल और यूक्रेनियन ग्रेन। जियोपॉलिटिकल डिवीजन है
वेस्ट यूएसए यूरोप सपोर्ट करता है यूक्रेन को और रशिया आपको पता है ईरान और जो इनकी अदर कंट्रीज है वो उनको सपोर्ट करती है
ब्रिक्स लिमिटेशन ब्रिक्स इज नॉट अ मिलिट्री अलायंस मेंबर हैव डिफरेंट इंटरेस्ट तो देखिए ब्राजील रशिया इंडिया
चाइना साउथ अफ्रीका तो क्या यहां पर चाइना इंडिया मिलकर जो है क्या रशिया यूक्रेन वॉर नहीं रुकवा सकते थे तो यहां पे यही आ
जाता है कि देखिए एक मिलिट्री अलायंस नहीं है ठीक है यहां पर जो है इंटरेस्ट ट्रेड से रिलेटेड था दैट्स व्हाई ये वॉर सॉल्व
नहीं करवा पाया देन व्हाई वॉर स्टिल कंटिन्यूइंग इकोनमिक स्ट्रेंथ है देखिए रशिया फेस्ड हैवी सेंस बट स्टिल अर्निंग
वाया ऑयल एक्सपोर्ट टू इंडिया, चाइना। और अपने अभी हम पढ़कर आए थे कि रशिया को तो फायदा हुआ किससे? ईरान, इजराइल, यूएस वॉर
से। क्योंकि अब जो है उससे अब जैसे ही स्टेट ऑफ़ हरमोस्ट ब्लॉक होता है तो रशिया के पास और एडवांटेज हो जाता है ऑयल सेल
करने का टू मेंटेन द ग्लोबल ऑयल सप्लाई। और तो यहां पर तो वेवर भी मिला है रशिया को। देन नाउ ग्लोबल पावर पॉलिटिक्स। तो
सबसे इंपॉर्टेंट क्या है कि ये वॉर क्यों इतनी लंबी चल रही है? क्योंकि यूक्रेन के पीछे कौन खड़ा हुआ है? यूरोपियन यूनियन और
यूएसए। आपने देखा होगा कंटीन्यूअसली कि F16 हो, चाहे वो वेरियस स्टिंगर मिसाइल हो, टैंक्स हो, है ना? बहुत सारी चीजें जो
है सप्लाई करी है यूक्रेन को यूरोपियन यूनियन और नाटो ने। तो दैट्स व्हाई ये वॉर जो है इतनी लंबी चली है। अब नाउ पुतिन की
क्या डिमांड है इस वॉर को रोकने के लिए? नो नैटो मेंबरशिप। नाउ नेक्स्ट क्या है? टेरिटरी कंसेशन। तो जो एरिया अभी तक रशिया
ने ले लिया है। हमने देखा था ना वो एरिया डॉन बास का लोहांस था। वो सारा किसका पार्ट होगा? रशिया का ही पार्ट होगा। देन
सेंशन में रिलीफ दिया जाए तो वेस्टर्न सेंशन जो लगे हैं रशिया के ऊपर वो सारे रिड्यूस किए जाए। रिकॉग्निशन ऑफ़ रशियन
कंट्रोल ऑक्यूपाइड रीज़न मस्ट बी ऑफिशियली रिकॉग्नाइज़्ड एज़ रशियन। ठीक है? नाउ अगर यूक्रेन की साइड से आप देखेंगे तो
व्लादर जेलस्की है। यूक्रेन रिफ्यूज़ेस बिकॉज़ लूजिंग टेरिटरी लॉस ऑफ़ सोवरेनिटी। आपने देखा। देन लूजिंग टेरिटरी क्या होगा?
लॉस ऑफ़ सोवरेनिटी। तो आपने देखा था 1994 में इनसे प्रॉमिस किया गया था कि आपकी सोवनिटी को रिस्पेक्ट किया जाएगा। आपके
लैंड बॉर्डर्स को रिस्पेक्ट किया जाएगा। आप पे दूसरी कंट्री कोई अटैक नहीं करेगी। बट यहां पर जो है यहां पर लॉस ऑफ सेवनिटी
हो रहा है। नाटो बैन नो फ्यूचर सिक्योरिटी गारंटी। तो अगर यूक्रेन नाटो को जॉइ नहीं करेगा तो अगेन रशिया फिर अटैक कर सकता है
दोबारा से। तो इसलिए यहां पर कोई फ्यूचर सिक्योरिटी नहीं है। रशिया में यूज़ सीज़ फायर टू रीगप अटैक। तो देखिए अगर यहां पर
सीज़ फायर हो भी जाता है तो रशिया क्या करेगा? अपने आप को स्ट्रांग करेगा। जो इसके स्टॉक पाइल्स खत्म हो चुके हैं
वेपन्स के वो दोबारा से उसको इंक्रीस करेगा। दोबारा से और सोल्जर्स को रिक्रूट करेगा और फिर से अटैक करेगा। यूक्रेन का
यहां पर यह कंसर्न है। पास्ट एग्रीमेंट लाइक मिनिस्ट वर वायलेटेड रिपीटेटली। तो इसलिए यहां पर जो है वलादमीर जेलस्की का
कहना है कि हम यह सारी शर्तें नहीं मानेंगे। नाउ वेज़ टू स्टॉप फॉर क्या हो सकता है? इकोनमिक प्रेशर ऑन इंसेंटिव्स
दिए जाए। सेंशन हर्टिंग रशियास इकॉनमी ऑफर रिलीफ पीस साइन डाटा पॉइंट रशिया डिफेंस स्पेंडिंग शार्पली इंक्रीज्ड इकोनमिक
स्ट्रेन है देन इंटरनेशनल मेडिएशन यूएस यूरोपियन यूनियन और अदर कंट्री अगर वहां पर आए और यहां पर कोई टलेटरल नेगोशिएशन हो
तो कोई सॉल्यूशन निकल सकता है जीडी का टॉपिक वही है ग्लोबल टेंशंस आर राइजिंग अक्रॉस दी वर्ल्ड व्हाट कुड बी द मेन रीज़न
बिहाइंड इट टेरिटोरियल डिस्प्यूट्स बॉर्डर कॉन्फ्लिक्ट तो यहां पर आप बता सकते हैं बॉर्डर कॉन्फ्लिक्ट के अंदर कि क्राइमिया
इन्होंने ले लिया था 2014 के अंदर और यह जो है एक एज अ बफर ज़ोन काम करता है यूक्रेन अह उसके बाद आप बता सकते हैं कि
नाटो का एक्सपेंशन कैसे हो रहा है। तो वो सब है और कंपटीशन ओवर नेचुरल रिसोर्सेज में आप बता सकते हैं कि जो भी एरिया
इन्होंने कब्जा करा है रशिया ने वहां पर वो माइनिंग करेगा और वहां से जो माइनिंग से भी रिसोर्सेज निकलेगा वो उसको यूज़
करेगा। तो यहां पर आप बता सकते हैं इजराइल, ईरान और यूएस वाला कॉन्फ्लिक्ट आप देख सकते हैं कि जो ईरान है वो पेलेस्टाइन
को सपोर्ट करता है। गाज़ा को सपोर्ट करता है। वो चाहते हैं एरिया बट वेयर एज़ इजराइल जो है वो पेलेस्टाइन। तो इस समय क्या पता
लगता है कि टेरिटोरियल डिस्प्यूट्स हैं। फिर इंडिया और पाकिस्तान की आप बात कर सकते हैं टेरिटोरियल डिस्प्यूट्स के बारे
में पीओके को लेके। फिर आप यहां पर जो नेचुरल रिसोर्सेज लिखा है यहां पर वेनिजुला वाला डाल दीजिए सारा कुछ कि
वेनेजुएला में कौन गया था? यूएसए गया था। उन्होंने आपने देखा होगा कि क्योंकि वहां पर बहुत ज्यादा वर्ल्ड का लार्जेस्ट ऑइल
रिजर्व है। तभी तो यूएसए ने अटैक कर रहा था ना। वो कंट्रोल करना चाहते थे। तो नेचुरल रिसोर्सेज के ऊपर फाइट हो रही है।
देन आप ग्रीनलैंड का एग्जांपल दे सकते हैं कि यूएसए ने बोला था हम ग्रीनलैंड को ले लेंगे। देख सकते हैं आर्टिका की कि आर्टिक
कंटीन्यूअसली मेल्ट हो रहा है। एक नया ट्रेड रूट स्टार्ट होगा तो हर कंट्री वहां पर जो है अपना डोमिनेंस दिखाना चाहती है।
और जैसे ही वो मेल्ट होगा तो आपको पता है उसके नीचे बहुत सारे रिसोर्सेज भी दबे हुए हैं। तो उसको माइन करना चाहती है। तो ये
सब नेचुरल रिसोर्सेज के अंदर आ जाएगा। देन मिस ट्रस्ट और जिओपॉलिटिकल रेवलरी में आप नैटो वाला पॉइंट बता सकते हैं। वुड अपेस्ट
मेमोरेंडम के बारे में बता सकते हैं। तो बहुत सारी चीजें डिस्कस करने के लिए। राइट? ओवरलैप करती हैं। तो आप पॉइंट
ज्यादा से ज्यादा पॉइंट ईज़ली रख सकते। तो चलिए अब हम चलते हैं डे 13 एंड 14 लास्ट टॉपिक। राइट? तो यहां पर हम कुछ मिसलेनियस
टॉपिक जो हमारे रह गए थे और होम और होमवर्क राइट तो मैं कुछ टॉपिक्स दूंगा जो आपको पढ़ने हैं खुद सो लिव इन रिलेशनशिप
रह गया था न्यू एजुकेशन पॉलिसी जीडीपी और बहुत सारे जीडी के टॉपिक्स भी जो हैं हमें देखने हैं और कुछ टॉपिक्स होमवर्क के लिए
तो चलिए स्टार्ट करते हैं। अब यहां से हम फास्ट फेस में चलेंगे क्योंकि ऑलरेडी वीडियो बहुत ज्यादा लंबी हो चुकी है। तो
बस हम एक गो थ्रू करेंगे जल्दी से। तो देखिए लिविंग रिलेशनशिप मींस क्या होता है? दो पार्टनर लिविंग टुगेदर विदाउट
मैरिज। डेफिनेशन क्या है? दो पार्टनर साथ में रहते हैं विदाउट मैरिज इज कॉल्ड एज लिविंग रिलेशनशिप। सिंपल। अब नाउ यहां पर
टिस और ड्यू के कुछ रिसर्च पेपर है जो आप देख सकते हैं कि लिविंग रिलेशनशिप मोस्टली जो है मेट्रोपॉलिन सिटीज में देखने को
मिलते हैं। चाहे वो दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु हो, इंक्रीजिंग ट्रेंड इंक्रीजिंग ट्रेंड ड्यू टू अर्बनाइजेशन
एंड एजुकेशन। ठीक है? देन जनरल सुप्रीम कोर्ट का व्यू क्या है? देखिए, टू एडल्ट कैन लिव टुगेदर पार्ट ऑफ पर्सनल फ्रीडम।
आर्टिकल 21 कहता है। देन कुछ केसेस हैं जो आपको ध्यान रखने हैं। फॉर एग्जांपल आप यहां पर देख सकते हैं कि लिखा हुआ है टू
एडल्ट्स कैन लिव टुगेदर फ्रीली। ये इललीगल नहीं है। ठीक है? और यहां पर इंटरेस्टिंग थिंग क्या है? देखिए कपल लिविंग टुगेदर
फॉर मेनी इयर्स वुमेन कैन आस्क फॉर मेंटेनेंस। तो मैरिज के अंदर होता था ना जब डिवोर्स होता था तो वहां पर क्या है?
एलुमिनी या फिर आपको क्या है? मेंटेनेंस देनी पड़ती थी वुमेन को। बट अब ऐसा हो चुका है यहां पर आप देख सकते हैं इंदिरा
शर्मा का केस कि सुप्रीम कोर्ट ने खुद बोला है कि अगर कपल साथ में बहुत सालों से रह रहे हैं तो वहां पर भी जो पार्टनर है
उसको मेंटेनेंस देना पड़ेगा। देन नेक्स्ट क्या है हमारे पास? सुप्रीम कोर्ट सेड नॉट एव्री लिविंग रिलेशनशिप इज़ वैलिड। फॉर
एग्जांपल अगर फॉर एग्जांपल अगर टू टू थ्री मंथ्स आप रिलेशनशिप के अंदर हैं। तो यहां पर आपको नो लीगल राइट। मतलब यहां पर
मेंटेनेंस नहीं मिलेगा। ठीक है? तो ये कुछ केसेस हैं। इसे जरूर पढ़ना क्योंकि ये टॉपिक आता है। इससे जीडीपी आया हुआ है। वो
भी हम देख। तो देखिए सेंसेस 2027 में कहा है स्टेबल लिव इन कपल को भी काउंट किया जाएगा एज अ मैरिड। तो यहां पर क्या हो
गया? एक एक पोर्टल बन जाएगा। वहां पर आप रजिस्टर कर लो दोनों पार्टनर्स और एज अ मैरिड ही इनको कंसीडर किया जाएगा। ठीक है?
विदाउट मैरिज। तो नाउ यहां पर एक बार जीडी का टॉपिक देख लेते हैं। लिविंग रिलेशनशिप आर इंक्रीजिंग इन इंडिया एंड कोर्ट्स आर
आल्सो रिकॉग्नाइजिंग देम लीगली। व्हाई आर दे बिकमिंग मोर प्रिवेलेंट? मोर प्रिवेलेंट मतलब क्या है? प्रोपगेट क्यों
होते जा रहे हैं इतने ज्यादा? एंड व्हाट कुड बी द इंपैक्ट बाय दिस चेंज? चेंजिंग सोशल माइंडसेट, मॉडर्न लाइफस्टाइल,
इंपैक्ट ऑन ट्रेडिशनल फैमिली वैल्यूज़ और फ्लैक्सिबल देन मैरिज। तो ठीक है? चेंजिंग सोशल माइंडसेट के बारे में हम देखते हैं।
अब तो देखिए चेंजिंग माइंडसेट के यहां पर सारे पॉइंट्स लिखे हुए हैं। बहुत ही
कॉम्पैक्ट और अच्छे पॉइंट्स हैं। प्लीज इसे गो थ्रू करना। देन लीगल राइट्स भी आप देख सकते हैं यहां पर क्या-क्या मिलेंगे।
प्रैक्टिकल इशूज़ नाउ प्रैक्टिकल इशूज़ जो हैं वो यहां पर हैं। इंपैक्ट ऑन रिलीजन एंड कल्चर
ट्रेडिशनल। तो ये भी एक सेकंड लीड थी। तो उसके पॉइंट्स आप देख सकते हैं। अगेंस्ट हिंदू मैरिज कांसेप्ट है, ऑोजिशन फ्रॉम
ऑर्थोडक्स सोसाइटीज हैं, विलेजेस हैं। ठीक है? तो रिलीजियस लॉ डज़ नॉट रिकॉग्नाइज़ इट्स फुल्ली। तो ये सारी चीजें आप जरूर
देखना। जीडी का टॉपिक हम देख चुके हैं। चलिए अब यहां पर ना कुछ टॉपिक आते हैं माय बेस्ट फ्रेंड। जैसे कि क्या होगा? चार
टॉपिक होंगे। तो जैसे ही आप लेक्चरर को लेंगे सपोज़ वहां पर चार टॉपिक्स होते हैं। 1 2 3 4 राइट? तो फोर टॉपिक में क्या होता
है? एक बहुत ईजी सा टॉपिक होता है। तो वहां पर क्या देखने को मिलता है? माय बेस्ट फ्रेंड, माय फेवरेट टीचर, माय फादर,
माय रोल मॉडल, माय मदर, माय फेवरेट पॉलिटिशियन हीरो। तो ये जितने भी पर्सन वाले हैं ना माय बेस्ट फ्रेंड और ये सब।
तो इसमें क्या करना है? सिंपल लो इंट्रो और बेसिक डिटेल। फॉर एग्जांपल माय बेस्ट फ्रेंड नेम इज़ सो एंड सो एंड ही इज़ राइट
नाउ स्टडिंग दिस। और ही इज़ राइट नाउ सॉफ्टवेयर डेवलपर, ही इज़ राइट नाउ सर्विंग इन डिफेंस। यह एक बेसिक डिटेल बता दी। देन
व्हाट आर हिज़ क्वालिटीज़? राइट? तो, व्हाट आर हिज़ क्वालिटीज़? आप बता सकते हैं हिस अ टीम प्लेयर। ही इज़ अ फिजिकली फिट। ही इज़ अ
नेशनल प्लेयर जो भी है। देन इंपैक्ट ऑन योर लाइफ लाइक ही मोटिवेटेड यू टू जॉइन फोर्सेस, ही मोटिवेटेड यू टू जॉइन द जिम,
अ फिजिकल फिटनेस, ही हेल्प यू इन योर स्टडीज़, व्हाटएवर इट कुड बी इंपैक्ट ऑन योर लाइफ यू कैन मेंशन। सम ऑफ़ दी पर्सनल
इंसिडेंट व्हिच यू बोथ शेयर यू कैन देयर एंड देन अचीवमेंट्स, हिज अचीवमेंट एंड व्हाई यू एडमायर। तो अगर आप यह
बेसिक-बेसिक पॉइंट्स को ध्यान रखेंगे तो आप कोई भी टॉपिक को दे सकते हैं। फॉर एग्जांपल आप क्या बोल सकते हैं? माय
फेवरेट टीचर के ऊपर भी यही सेम चीजें लग जाएंगी। इंपैक्ट क्या डाला टीचर ने टीचर से? ठीक है? रोल मॉडल ने क्या इंपैक्ट
डाला आपकी लाइफ में? कुछ पर्सनल इंसिडेंट हो गए। सिमिलरली फादर मदर इन सारे केसेस में बस आप ये चीजों को याद रखिए। बेसिक
बताऊंगा। फिर क्वालिटी इज़ इंपैक्ट ऑन लाइफ, पर्सनल इंसिडेंट, अचीवमेंट्स और व्हाई एड एडमायर। क्स अगर आप बताना चाहते
हैं तो बता सकते हैं। देन मैं बता देता हूं आपको क्या आ सकता है। माय फेवरेट प्लेस भी आ सकता है। ठीक है? माय फेवरेट
प्लेस भी देख लेना क्योंकि यह भी दिख जाता है हमें फोर्थ नंबर पे और क्या आ सकता है? माय फेवरेट फूड आ सकता है। माय फेवरेट
मूवी आ सकता है। है ना? तो ये जो बेसिक चीजें हैं तो इस पर भी आप बोल सकते हैं। इसमें कोई इशू नहीं है। ठीक? देन न्यू
एजुकेशन पॉलिसी रह चुका था। तो पॉज करो और खुद पढ़ो। ठीक है? ये डेफिनेशन देख लेना। हु मेड दिस न्यू एजुकेशन पॉलिसी फॉर्मर
आईएसआरओ चीफ। कहां-कहां पर इंप्लीमेंट हो रहा है? सीबीएसई आईसीएससीई स्टेट बोर्ड। अभी पूरी तरीके से इंप्लीमेंटेशन नहीं हुआ
है। बट कुछ पार्ट हो चुका है। ये सब देख लेना। की फीचर यहां पर क्या 5 + 3 + 3 + 4 सिस्टम पहले 5 साल होंगे वो प्ले बेस्ड
बेसिक नर्सरी होगा एक्टिविटी लर्निंग ये चीजें जरूर पढ़ लेना ठीक है इसको आप किससे जोड़ सकते हैं तो इसको आप बहुत चीजों से
जोड़ सकते हैं फॉर एग्जांपल आप जानते हैं कि इंडिया के अंदर अनइंप्लॉयमेंट है तो न्यू एजुकेशन पॉलिसी क्या होएगा कि हमें
इंडस्ट्री रेडी बनाया जाएगा तो जॉब मिलेगी यहां पे है ना देन यहां पर आप देख सकते हैं मदर टंग मीडियम मल्टीडिसिप्लिनरी
एजुकेशन म्यूजिक भी है इकोनॉमिक्स है तो ओवरऑल डेवलपमेंट होगा यहां पर ये देखिए इंटर्नशिप कोडिंग कारपेंट्री तो स्किल पर
ज्यादा फोकस हो रहा है स्किल इंडिया में भी आप ये जोड़ सकते हैं। तो जब भी कभी बात आएगी कि जॉब्स कैसे मिलेंगी तो आप बोल
न्यू एजुकेशन पॉलिसी इंप्लीमेंटेशन, स्किल इंडिया, स्टार्टअप इंडिया, मैन्युफैक्चरिंग इंडिया, सेमीकॉन इंडिया
है ना? तो ये सारे पॉइंट्स जरूर रखना जीडी में। स्किल बेस्ड लर्निंग हम बात कर चुके हैं। देन अगर हम देखें तो डिजिटल एंड
ऑनलाइन लर्निंग हो रही है यहां पर। ठीक है? देन मल्टीपल एंट्री है। फर्स्ट ईयर सर्टिफिकेट, सेकंड ईयर डिप्लोमा, थ्री
ईयर। तो ये सब चीजें जरूर देखना। एडवांटेजेस। देन यहां पर कुछ प्रैक्टिकल एंड स्किल
बेस्ड लर्निंग। ये क्या लीड है जीडी में आ जाएगी कि जो हमारी न्यू एजुकेशन पॉलिसी है उससे प्रैक्टिकल एंड स्किल बेस्ड लर्निंग
होगी या फिर जॉब। तो इस तरीके से जो लीड्स हैं वो पढ़ सकते हैं आप। ठीक है? चैलेंजेस भी देख सकते हैं आप यहां पर
इंफ्रास्ट्रक्चर शॉर्टेज रूरल और जो हमारे गवर्नमेंट स्कूल है वहां पर प्रॉब्लम्स हैं। टीचर की ट्रेनिंग बिकॉज़ यहां पर
मल्टीपल लैंग्वेज हैं। तो वहां पर इशू आएगा इंप्लीमेंटेशन गैप इतनी बड़ी ह्यूज पॉपुलेशन है। तो उस पे कैसे आप इंप्लीमेंट
करेंगे? तो वो सारी चीजें हैं। देन जीडीपी देख लेना पॉज करके। बहुत ईजी वे में ये कुछ बने हुए हैं नोट्स। ठीक है? ठीक है?
जीडीपी की डेफिनेशन, जीडीपी कैसे कैलकुलेट करते हैं? इनकम मेथड, एक्सपेंडिचर मेथड एंड टाइप्स ऑफ जीडीपी, नॉमिनल जीडीपी,
रियल जीडीपी, जीडीपी पर कैपिटा जीडीपी पर कैपिटा यहां पे देख सकते हैं। चाइना की $4,000 है। वेयर एज इंडिया की अब ये कौन
सी है? पर कैपिटा है। ठीक है? पर कैपिटा में हम बहुत लो हैं। और इंडिया की $2,800 है। चाइना फाइव टाइम्स हायर है। तो ये ये
चीजें देख सकते हैं आप। देन जीडीपी हम कैसे बढ़ा सकते हैं? मेक इन इंडिया से बढ़ा सकते हैं। कुछ पॉइंट्स हैं। ये
पुराने हम बढ़कर आ चुके हैं। ठीक है? तो वही चीजें आप रिलेट कर सकते हैं यहां पर। लार्जेस्ट जीडीपी लिखी हुई है। अब वैसे भी
इंडिया जो है सिक्स्थ नंबर पे आ चुका है। जब से ये एनर्जी क्राइसिस चला वापस हम सिक्स्थ पे आ गए। देखते हैं फ्यूचर में हम
फोर्थ दोबारा होते हैं। फिर जीडीपी इंपैक्ट कैसे करती है कंट्री को? हाउ जीडीपी इंपैक्ट पीपल लाइफ वेज़ टू इंक्रीस
जीडीपी। ठीक है? तो ये कुछ पॉइंट्स थे। अब यहां से ना कुछ जीडी के टॉपिक्स हैं। मैं होमवर्क दे रहा हूं। आप जरूर इसको पढ़
लेना। ठीक है? फर्स्ट क्या है? न्यूक्लियर फैमिली और जॉइंट फैमिली के बारे में। तो देखिए न्यूक्लियर फैमिली क्या कांसेप्ट
होता है? जहां पर पेरेंट्स जहां पर पेरेंट्स हो यानी कि मदर फ़ादर और उनके जो बच्चे हैं और उनके जो बच्चे होते हैं। ठीक
है? चिल्ड्रन तो बस ये क्या होती है? न्यूक्लियर फैमिली होती है। न्यूक्लियर फैमिली मोस्टली क्या होते हैं? थ्री टू
फाइव मेंबर्स होते हैं न्यूक्लियर फैमिली में। और वेयर एज अगर आप देखेंगे जॉइंट फैमिली तो वहां पर क्या होता है? छह से
ज्यादा लोग होते हैं। जहां पर आपने देखा होगा ना जॉइंट फैमिली होती थी। जहां पर दादा-दादी अंकल ये सारे लोग होते थे और
फिर उनके बच्चे तो ये क्या होता है? जॉइंट फैमिली होती है। तो वही चीजें बोली हुई है कि आजकल न्यूक्लियर फैमिली कांसेप्ट क्यों
गेन कर रहा है? राइजिंग कंज्यूमरिज्म एंड इंडिविजुअल। तो कंज्यूमरिज्म क्या होता है? जो आजकल आप लोग Netflix चलाते हैं।
ठीक है? कंज्यूम करते हैं डाटा को। देन आपने देखा होगा Zomato, SWGI और उसके बाद Amazon Prime, IPL तो जो घर में बैठ के हम
ये जो सब्सक्रिप्शन और कंज्यूम करते हैं वो सारा कंज्यूमरिज्म में आ जाएगा अकेले बैठ के। है ना? हमारा क्योंकि फैमिली से
टेस्ट तो कट हो चुका है। फिर आप बता सकते हैं फाइनेंशियल स्ट्रेस और इकोनमिक प्रेशर में लोग कहां जा रहे हैं आजकल?
मेट्रोपॉलिन सिटीज में दिल्ली, बोर, नोएडा है ना गुड़गांव। तो यहां पर जॉब करने के लिए जाते हैं आईटी सेक्टर के अंदर तो वहां
पर क्या है फ्लैट लेके अलग से रह रहे हैं आप शादी करते हैं और फिर क्या है एक न्यूक्लियर फैमिली है तो देन डिक्लाइन इन
फैमिली वैल्यूस इमोशनल बॉन्डिंग तो जो विलेजेस में रहते होंगे आप तो ये सारे एग्जांपल आप बना सकते हैं ठीक है ये जरूर
पढ़ लेना अपने आप से पॉइंट बनाओ इसके चलिए नेक्स्ट टॉपिक देख लेते हैं व्हाई आर इंडियंस मैरिंग लेट नाउ अ डेज ठीक है तो
ये एसएससी टेक एंट्री ग्रेजुएट के लिए करियर ग्रोथ एंड जॉब प्रायोरिटीज सिमिलरली आप इसमें बता सकते हैं कि आपने देखा होगा
कि प्राइवेट जॉब्स करते हैं मोस्टली लोग बोर आईटी और वहां पर क्या है बहुत ज्यादा आप देखेंगे तो लिविंग कॉस्ट बहुत ज्यादा
है मुंबई जैसी जगहों पर। तो वहां पर क्या है? लिविंग कॉस्ट बहुत ज्यादा है। इसलिए वो जॉब को प्रायरिटाइज करते हैं। रेदर देन
मैरिज बिकॉज़ मैरिज के बाद उन पे क्या आएगी? रिस्पांसिबिलिटी आएगी। देन प्रेफरेंस ऑफ़ लिविंग रिलेशनशिप। अभी हम
लिव इन रिलेशनशिप पढ़ के आए थे। वहां पर डाटा लिखे हुए हैं कि कितने सारे लिविन रिलेशनशिप बढ़ रहे हैं इंडिया के अंदर। देन
फियर ऑफ़ डवोर्स एंड सोशल प्रेशर। अच्छा वुमेन एंट्री में ना एक टॉपिक आया था कि व्हाई डवोर्स केसेस आर राइज़िंग नाउ अ डेज़
ये वो। तो ये चीजें भी एक बार पढ़ लेना। ठीक है? वुमेन एंट्री में था। अह देन आता है व्हाट अ क्वालिटीज़ मेक पर्सन सक्सेसफुल
इन लाइफ। तो यह होमवर्क है। अब अपने आप अकॉर्डिंग दे सकते हैं एग्जांपल्स। देन व्हाई आर इंडियन मैरिंग लेट? ये वाला हम
कर चुके हैं टॉपिक। ये देख लेना यूनिवर्सल पे अ पाथ अ टू इकोनॉमिक सिक्योरिटी। तो यहां पर हुआ क्या था? यहां पर हुआ क्या कि
ये टॉपिक थोड़ा सा बड़ा था। यूनिवर्सल पे से रिलेटेड ही था और कुछ इकोनॉमिक सिक्योरिटी से था। पूरा टॉपिक नहीं है। बट हुआ यहां
पर कि इंटरेस्टिंग 5 मिनट जीडी चला। उसके बाद सब चुप हो गए। क्योंकि यूनिवर्सल पे का मतलब पता ही नहीं था। है ना? तो ये चीज़
जरूर देख लेना। यूनिवर्सल पे मतलब होता है जो हम इक्वल इनकम देते हैं ना फॉर एग्जांपल फॉरेन में क्या होता है कि अगर
कोई रेस्टोरेंट में कोई वेटर काम कर रहा है एक घंटे के लिए 2 घंटे के लिए तो वहां पर क्या है तो वहां पर क्या है $12 पर आर
$14 पर आर तो पर आवर के हिसाब से जो है पेमेंट मिलती है इक्वली तो पर आवर के हिसाब से पेमेंट मिलती है बट इंडिया में
अगर आप देखेंगे कोई एक घंटे के लिए काम करने आया तो क्या उसके पैसे देते हैं नहीं देते तो वो सारी चीजें भी यूनिवर्सल पे
में आ जाएगी ठीक है तो जरूर इसके बारे में टॉपिक पढ़ लेना तो इसलिए कभी-कभी ऐसा होता है कि हमें सिर्फ मतलब नहीं पता होता और
हम नहीं कर पाते कंट्रीब्यूट तो जरूर देख लेना यूनिवर्सल पे को देन जेंडर अंडर बेस्ड अपोरर्चुनिटीज़ फॉर वुमेन आर
इंक्रीजिंग। तो ये भी टॉपिक आया हुआ है। ठीक है? एफएसबी का ही टॉपिक है ये। और सेम डे का टॉपिक है ये। दूसरे ग्रुप को मिला
था। ठीक है? तो ये लीड्स देख लेना और ये होमवर्क है। पढ़ लेना इसके बारे में। ठीक है? आप देख सकते हैं। वैसे मैं थोड़ा सा
एक्सप्लेन कर देता हूं। देखो जेंडर बेस्ड अपोर्चुनिटीज़ फॉर वमेन आर इंक्रीजिंग मींस वुमेन गेटिंग मोर चांसेस एक्सेस टू एरियाज़
वेयर दे वर प्रीवियसली अंडर रिप्रेजेंटेड एजुकेशन सेक्टर में। ठीक है? मोर गर्ल्स। अब क्या है? स्कूल्स, कॉलेजेस,
यूनिवर्सिटीज जा रही हैं। और हमने तो पढ़ा भी था कि आईएम के अंदर क्या हो रहा है? मोर देन 50% वुमेन देखी गई थी वहां पर।
एंप्लॉयमेंट हो गई, लीडरशिप रूल और यहां पर आप आर्मी जोड़ सकते हैं। आर्मी के अंदर क्या हुआ है? नेशनल डिफेंस एकेडमी में
वुमेन परमानेंट हो चुकी है। उसके बाद हमारे चीफ ने खुद बोला है कि इन नेक्स्ट थ्री टू फोर डिकेड्स आपको चीफ दिख जाएंगी
वुमेन। बहुत सारी वुमेनस जो है वो लेफ्टिनेंट जनरल पर हैं। राइट नाउ कर्नल बन रही हैं और परमानेंट कमीशन भी दिया जा
रहा है सुप्रीम कोर्ट द्वारा। तो बहुत सारी चीजें डिस्कस करने के लिए। तो ये कुछ जीडी के टॉपिक्स थे। जरूर इसे पढ़ लेना।
ठीक है? नाउ अगर आपने पूरी वीडियो ये देखी है तो लास्ट में बस दो-तीन चीजें मैं बोलना चाहता हूं कि यहां पर 95% चांस है
कि इसमें से टॉपिक आपको मिल जाए। बट 5% कैसा हो सकता है कि कोई दूसरा टॉपिक मिल जाएगा। फॉर एग्जांपल आपको रिवर गंगा मिल
गया। ठीक है? रिवर गंगा तो मैंने इसमें नहीं कवर करा। बट हमने क्या पढ़ा था? वाटर पोल्यूशन पढ़ा था। तो क्या आप रिवर गंगा को
वाटर पोल्यूशन से जोड़ सकते हैं? ऐसे जोड़ सकते हैं कि वाटर पॉल्यूशन कैसे? और फिर मरीन लाइफ, फिशरीज़ लाइफ को हैंपर करता है।
ठीक है? तो आपको इंप्रोवाइज करना है। तो ये जो 5% ऐसा हो सकता है कि आपको कोई डिफरेंट टॉपिक मिलेगा और आपको क्या करना
है? इंप्रोवाइज करना है। फॉर एग्जांपल मैंने सस्टेनेबल डेवलपमेंट नहीं पढ़ाया। बट मैंने सस्टेनेबल डेवलपमेंट के
एग्जांपल्स काफी सारे दिए थे क्लाइमेट चेंज चैप्टर के अंदर। एनर्जी क्राइसिस हो रही है इसलिए हमें सस्टेनेबल डेवलपमेंट की
जरूरत है। क्लाइमेट चेंज हो रहा है इसलिए तो आपको रिलेट करना है। ठीक है? यहां पर ऐसा पैनिकिक नहीं कर जाना है कि ये टॉपिक
तो मैंने पढ़ा ही नहीं है। ठीक है? तो प्लीज इंप्रोवाइज करिए। जो भी नॉलेज आपने इन सारे टॉपिक्स के अंदर ली है, वो
पॉइंट्स आपको यूज करने हैं अपने लेक्चरर्स और जीडी के अंदर। ठीक है? तो सिमिलर हो सकता है कि जीडी का टॉपिक कोई डिफरेंट आ
गया। बट जो भी पॉइंट आपने पढ़े हैं उसको रिलेट करो आप यहां पर। ठीक है? और लास्ट में मैं यही बोलना चाहूंगा कि होता है तब
भी ठीक है। नहीं होता तो कोई बात नहीं है। इट इज़ लाइफ एवरीवन हैज़ टू डाई सम डे। डोंट टेक इट सीरियसली। ठीक है? बहुत ज्यादा
सीरियस नहीं लेना है कि यार नहीं हुआ मेरा एंड ऑल दैट थिंग। आई जस्ट वांट टू से यार इन योर हैंड्स इट इज़ टू डू हार्ड वर्क।
एंड रिजल्ट इज नॉट इन योर हैंड। और कभी ऐसा होता है कि आपने बहुत ज्यादा मेहनत करी होती है बट रिजल्ट हमारे फेवर में
नहीं आता है। एंड आई कैन आल्सो रिलेट। सो, तो मैं यही कहूंगा डोंट टेक इट सीरियसली। एवरीवन हैज़ टू डाई सम डे। इतना ज्यादा
हमें सीरियसली लेना है कि इट वास ओनली माय ड्रीम। है ना? बिकॉज़ यह चीजें होती हैं। तो प्लीज डोंट टेक इट सीरियसली।
[संगीत] [संगीत] [संगीत]
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SSB जीडी में किसी भी विषय को पेश करने के लिए 4-चरणीय रणनीति अपनाएं। पहले एक सरल परिचय दें, फिर डेटा के साथ कारण और प्रभाव बताएं, तीसरे चरण में सरकारी योजनाओं और व्यक्तिगत प्रयासों जैसे समाधान प्रस्तुत करें, और अंत में अपनी निजी राय और निष्कर्ष दें।
जलवायु परिवर्तन के प्रमुख कारणों में जीवाश्म ईंधन का जलना, वनों की कटाई और शहरीकरण शामिल हैं। इसके प्रभावों में हिमालयी ग्लेशियरों का पिघलना, समुद्र स्तर में वृद्धि, चरम मौसम की घटनाएं जैसे दिल्ली में 49.9°C तापमान, बाढ़, सूखा, स्वास्थ्य समस्याएं और किसानों की आत्महत्या शामिल हैं।
प्रदूषण के मुख्य प्रकार वायु, जल, मृदा और ध्वनि प्रदूषण हैं। इसके कारणों में पराली जलाना, औद्योगिक कचरा, सीवेज, प्लास्टिक और निर्माण कार्य शामिल हैं। प्रभावों में PM 2.5 से फेफड़ों का कैंसर, जल जनित रोगों से 5 लाख मौतें, मृदा प्रदूषण से कैंसर और ध्वनि प्रदूषण से सुनने की क्षमता में कमी शामिल हैं।
सरकारी योजनाओं में ग्रीन इंडिया मिशन, नमामि गंगे परियोजना, BS-6 उत्सर्जन मानक और इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देना शामिल है। व्यक्तिगत प्रयासों में सौर ऊर्जा अपनाना, प्लास्टिक का कम उपयोग, और ईशा फाउंडेशन के कावेरी कॉलिंग मिशन जैसे अभियानों में भाग लेना शामिल है।
निजी राय में अपने स्थानीय अनुभव या उदाहरण साझा करें, जैसे पंजाब में बाढ़ का बढ़ना। निष्कर्ष में सभी बिंदुओं को संक्षेप में दोहराएं और कहें कि जलवायु परिवर्तन और प्रदूषण दुनिया के लिए सबसे बड़ा खतरा है, जिसके लिए मजबूत पर्यावरणीय कार्रवाई और टिकाऊ विकास आवश्यक है।
GD में एक प्रभावी सदस्य बने रहने के लिए किसी एक विषय (लीड) को चुनकर उस पर अडिग रहें और मजबूत तर्क और डेटा के साथ भाग लें। निष्कर्ष पर पहुंचना जरूरी नहीं है, बल्कि अपने विचारों को स्पष्टता और प्रभाव से प्रस्तुत करना महत्वपूर्ण है।
नाभिकीय ऊर्जा के प्रमुख लाभों में बहुत कम कार्बन उत्सर्जन, उच्च दक्षता (एक यूरेनियम छर्रे से 120 गैलन तेल के बराबर ऊर्जा), विदेशी ईंधन पर निर्भरता कम करना और 24/7 विश्वसनीय बिजली उत्पादन शामिल है। यह स्वच्छ ऊर्जा स्रोत होने के कारण जलवायु परिवर्तन से लड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
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