मॉडर्न फिजिक्स: JEE मेन & एडवांस के लिए क्रैश कोर्स
टीचर ने 11:45 AM से 4:45 PM तक के सेशन की घोषणा की। यह मॉडर्न फिजिक्स का क्रैश कोर्स है, जिसमें टाइम लिमिट के कारण क्रिस्प और टू द पॉइंट पढ़ाने पर जोर दिया जाएगा। अधिक विस्तृत जानकारी के लिए आप Comprehensive Modern Physics Lecture: Photoelectric Effect to Nuclear Physics का संदर्भ ले सकते हैं।
टॉपिक वेटेज और अपेक्षाएँ
- JEE Main: कम से कम 2 प्रश्न (गारंटी), 3 प्रश्नों की उम्मीद। कुल 12 नंबर के प्रश्न आसानी से लाए जा सकते हैं।
- JEE Advanced: कम से कम 2 प्रश्न (गारंटी)।
- महत्व: मॉडर्न फिजिक्स सबसे आसान टॉपिक है और एक दिन में 12 नंबर लाए जा सकते हैं।
कवर किए जाने वाले टॉपिक्स (पिछले 15 वर्षों के PYQs पर आधारित)
- फोटोइलेक्ट्रिक इफेक्ट (1 प्रश्न की गारंटी)
- एक्स-रे (ड्यूल नेचर कॉन्सेप्ट, आंशिक रूप से)
- डी ब्रोगली का कॉन्सेप्ट (डी ब्रॉय वेवलेंथ)
- बोहर थ्योरी
- नाभिक का आकार (A की पावर 1/3 वाला कॉन्सेप्ट)
- मास डिफेक्ट और बाइंडिंग एनर्जी (सबसे ज्यादा प्रश्न)
- फिशन एंड फ्यूजन (अंत में)
फोटोइलेक्ट्रिक इफेक्ट की पूरी व्याख्या
परिभाषा
जब किसी धातु की प्लेट पर रेडिएशन (फोटॉन) गिरता है, तो इलेक्ट्रॉन बाहर निकल आते हैं। यह रेडिएशन के पार्टिकल नेचर का प्रमाण है।
प्रायोगिक सेटअप
- एक्वाक्यूट ट्यूब: जिसमें दो प्लेट्स होती हैं।
- कैथोड (C): जिस प्लेट पर रेडिएशन गिरता है।
- एनोड (A): दूसरी प्लेट जो करंट कलेक्ट करती है।
- विंडो (W): जिससे मोनोक्रोमेटिक रेडिएशन (एकल λ और ν) ट्यूब में प्रवेश करता है।
- बैटरी (V): एनोड-कैथोड के बीच वोल्टेज प्रदान करती है।
- रेजिस्टेंस (R) और अमीटर: करंट को मापने के लिए।
करंट का प्रवाह
जब रेडिएशन कैथोड से इलेक्ट्रॉन निकालता है, तो ये इलेक्ट्रॉन एनोड की ओर बढ़ते हैं, जिससे सर्किट में फोटो करंट प्रवाहित होता है।
तीन मुख्य वेरिएबल्स का प्रभाव
1. इंटेंसिटी (I) का प्रभाव (Effect of Intensity)
- परिभाषा: प्रति यूनिट एरिया प्रति यूनिट समय में आने वाली ऊर्जा।
- प्रभाव:
- इंटेंसिटी बढ़ाने पर फोटो करंट (i) बढ़ता है।
- इंटेंसिटी घटाने पर फोटो करंट (i) घटता है।
- यह प्रभाव केवल फोटो इलेक्ट्रॉनों की संख्या को प्रभावित करता है, उनकी ऊर्जा को नहीं।
2. वोल्टेज (V) का प्रभाव (Effect of Voltage)
- रिवर्स बायस: कैथोड को पॉजिटिव और एनोड को नेगेटिव करने पर इलेक्ट्रॉन रुक जाते हैं।
- स्टॉपिंग पोटेंशियल (V₀): वह न्यूनतम रिवर्स वोल्टेज जिस पर फोटो करंट शून्य हो जाता है। यह इलेक्ट्रॉनों की अधिकतम गतिज ऊर्जा को मापता है।
- प्रभाव:
- V बढ़ाने पर फोटो करंट बढ़ सकता है (एक सीमा तक)।
- रिवर्स बायस में, V₀ इलेक्ट्रॉनों की ऊर्जा के बारे में बताता है।
3. फ्रीक्वेंसी (ν) का प्रभाव (Effect of Frequency)
- थ्रेशोल्ड फ्रीक्वेंसी (ν₀): वह न्यूनतम फ्रीक्वेंसी जिस पर फोटोइलेक्ट्रिक इफेक्ट होता है। इससे कम फ्रीक्वेंसी पर कोई इलेक्ट्रॉन नहीं निकलता, चाहे इंटेंसिटी कितनी भी ज्यादा क्यों न हो।
- प्रभाव:
- फ्रीक्वेंसी बढ़ाने पर इलेक्ट्रॉनों की अधिकतम गतिज ऊर्जा (K.E.) बढ़ती है।
- ν > ν₀ होने पर ही इलेक्ट्रॉन निकलते हैं।
- ν पर निर्भर करता है कि स्टॉपिंग पोटेंशियल (V₀) का मान कितना होगा।
यदि आप रे ऑप्टिक्स के कॉन्सेप्ट को भी समझना चाहते हैं, तो रे ऑप्टिक्स: दर्पण एवं अपवर्तन का संपूर्ण निर्देशन एवं डेरिवेशन ट्रिक्स पढ़ें।
गुड मॉर्निंग। गुड मॉर्निंग। गुड मॉर्निंग। हेलो हेलो हेलो हेलो
गुड मॉर्निंग हम हम गुड मॉर्निंग गुड मॉर्निंग मॉर्निंग बेटा।
गुड मॉर्निंग। हम हम हम [हंसी] ओके ड्यूरेशन ड्यूरेशन ड्यूरेशन
गुड मॉर्निंग गुड मॉर्निंग ये कौन सी रे ऑप्टिक्स लग गई हम
ओके दूसरी लगानी पड़ेगी। हेलो बच्चों हेलो हेलो हेलो हेलो क्या
हालचाल भाई कैसे हो हां, यह मॉडर्न फिजिक्स ही है। ठीक है? मॉडर्न फिजिक्स। गुड मॉर्निंग। गुड मॉर्निंग। गुड
मॉर्निंग। गुड मॉर्निंग। मॉडर्न फिजिक्स। मॉडर्न फिजिक्स वो पीपीटी गलती आ जाती है कभी-कभी। कोई नहीं। ठीक है ना? मॉडर्न
फिजिक्स। ओके। आ जाओ भाई। आ जाओ आ जाओ। गुड मॉर्निंग। गुड मॉर्निंग। नमस्ते। नमस्ते।
नमस्ते। देखो भाई आज क्या स्पेशल है? आज हमारे पास टाइम लिमिट है। है ना? टाइम लिमिट है।
राइट? और टाइम लिमिट का मतलब ये है कि बहुत ही क्रिस्प और टू द पॉइंट पढ़ाना पड़ेगा।
एकदम क्रिस्प और टू द पॉइंट पढ़ाना पड़ेगा। ठीक है? हां। और भाई आप इस सेशन को यहां पे
पाई ऐप पे भी देख सकते हो। PW का जो पाई वाला ऐप है आप उस पे भी देख सकते हो इसको। ठीक
है? उस पे आप जाओगे तो यह कॉलम बना मिलेगा। क्लिक करो। वहां पे भी देख सकते हो। एकदम डिस्ट्रैक्शन फ्री और कोई ऐड वेड
भी नहीं आएंगे आपके। और पोल-वोल भी अच्छे से होगा। सारे काम बढ़िया होंगे। तो वहां पे भी आप इसको देख सकते हो। ठीक है? पाई
पे भी। राइट? लाइव पीवाईक्यू सेशन, शॉर्ट नोट्स, एआई वगैरह, टेस्ट सीरीज, डीपीपी, क्लास नोट्स
सब अवेलेबल है वहां पर। तो वो भी एक अच्छा ऑप्शन है। अब हम क्या करने वाले हैं यहां पे? ठीक है? तो
ये जो भाई हमने स्टार्ट करना है, पहले तो मैं इस टॉपिक का आपको वेटेज बता देता हूं। ठीक है? और
ड्यूरेशन सबसे बड़ी चीज ड्यूरेशन की ही है। ड्यूरेशन मैं आपको बिल्कुल क्लियर कर देता
हूं। एकदम एकदम क्लियर रहेगी ड्यूरेशन। ठीक है
भाई। ड्यूरेशन रहने वाली है हमारी ज्यादा ज्यादा 445 तक। अपने पास इतना ही टाइम है। 445 तक।
तक समझ रहे हो आप? तो यानी के 5 1/2 या 6 घंटे में हमें यह पूरा करना है। ठीक है ना? यही ड्यूरेशन है
445 तक। एक और दूसरी चीज। ठीक है? अगर मैं इसकी बात करूं मॉडर्न फिजिक्स की।
तो मॉडर्न फिजिक्स में कम से कम तीन क्वेश्चन जेईई मेंस में आने की उम्मीदें
हैं अगर हमारी किस्मत बहुत अच्छी हुई तो वरना दो क्वेश्चन की तो समझ लो मैं गारंटी ले रहा हूं अपने नाम से।
दो क्वेश्चन के लिए तो मैंने अपना नाम लिख दिया। दो सवाल तो मॉडर्न फिजिक्स में पक्का आएंगे। यह मेरी गारंटी है। और तीन
आने की उम्मीदें हैं। ठीक है ना? तीन क्वेश्चन आने की उम्मीदें जेईई मेंस में और इसके दो क्वेश्चन आएंगे
एडवांस में। एडवांस में भी दो क्वेश्चन आने हैं। इन दो की तो मैं गारंटी ले रहा हूं। दो क्वेश्चन
एडवांस में आएंगे और दो क्वेश्चन आपके जेईई मेंस में आएंगे। जेई मेंस में तीन भी आ सकते हैं। उम्मीद लगती है मुझे कि तीन
भी आ जाएंगे। ठीक है? हां। तो भाई इसी उम्मीद के साथ हम पढ़ते हैं। तो जेईई मेंस के प्लस के 12
नंबर की मुझे उम्मीद है और आप देखना तीन आएंगे। तीन आएंगे। लेकिन मैं क्या हूं ऐसे कूद-कूद के क्लेम करने वाले लोगों में से
नहीं हूं। तो मैं बुरे समय को भी साथ में सोच के चलता हूं कि कभी-कभी क्या है हमारे साथ हादसे हो जाते हैं तो उस केस में दो
सवाल तो जरूर आएंगे। ठीक? वरना हम इसको तीन क्वेश्चन के लिए प्रिपेयर करते हैं चैप्टर को। और सबसे बड़ी बात यह बहुत इजी
है। सबसे इजी मार्क्स यही हैं। सबसे इजी मार्क्स यही वाले हैं। मॉडर्न फिजिक्स के 12 नंबर ले पाना सबसे आसान है। 1 दिन में
1 दिन में आप 12 नंबर ला सकते हो 1 दिन में। ठीक? तो अभी जब हम स्टार्ट करेंगे ठीक? जो जो टॉपिक मैं आपको बताऊंगा बस वो
वो टॉपिक आपको करने हैं। उससे ज्यादा नहीं करने हैं। ठीक है? और भाई पाई ऐप पे जितने जा सकते हो चले जाओ वो
ज्यादा बेटर है वहां पे। ठीक है? यहां से मुझे YouTube से ज्यादा मुझे बेटर लगता है। राइट? चलो अब सुनना ध्यान से टॉपिक्स।
टॉपिक्स जो हम कवर करने वाले हैं। ठीक है ना? तो मैं आपको ये बता दूं कि ये टॉपिक्स जो मैं अभी लिखने वाला हूं जो हम यहां कवर
करेंगे ये किस बेसिस पे हैं। तो मैं ये कह रहा हूं कि लास्ट 15 इयर्स ठीक है ना?
ठीक है ना? लास्ट 15 इयर्स के जो पीवाईक्यूस हैं। लास्ट 15 इयर्स के जो पीवाईक्यूस हैं, अगर मैं उनके बेसिस पे
देखूं कि भाई लास्ट 15 सालों में क्या-क्या किस-किस चैप्टर से आया है। तो कुछ एक दो चैप्टर तो वो हैं जो डिलीट हो
गए हैं। मतलब जैसे रेडियोएक्टिविटी हट गया है। ठीक है ना? एक्सरे हट गया है। उनके सवाल मैंने इसमें आते ही थे। डेफिनेट
एक्सरे पे तो डेफिनेटली आता था। और रेडियो एक्टिविटी तो कभी मिस ही नहीं होता था भाई। है ना? तो वो सवाल तो आते ही थे।
उनको तो मैंने कंसीडर ही क्या करना जो आना ही नहीं है। ठीक है? तो हम सबसे पहले जो यहां पे कवर करेंगे वो करेंगे फोटोइिक
इफेक्ट। फोटो इलेक्ट्रिक
इफेक्ट। ठीक है ना? यह इसमें से एक सवाल की गारंटी है। ठीक है
ना? इसके बाद जो हम करेंगे थोड़ा सा एक्सरे करेंगे। एक्सरेज ठीक है ना? लिटिल लिटिल ठीक है
ना? जितना भी रिक्वायर्ड है एक्चुअल में इसमें से जितना रिक्चुअली एक्सरेज़ क्या है? एक्सरेज़ एक्चुअल में ड्यूल नेचर वाला
कांसेप्ट है। ठीक है ना? तो इसका जितना भी कांसेप्ट रिक्वायर्ड है वो हम करेंगे। जिस पे मुझे उम्मीद लगती है कि इस पे आ जाएगा।
जैसे आपको याद है ना पोटेंशियोमीटर के बारे में बात करते थे कि भाई पोटेंशियोमीटर नहीं है और सवाल धरा हुआ
मिल गया था हमें वहां पे सवाल रखा हुआ मिल गया था हमें वहां पे है ना तो इसी तरीके से जैसे एक्सरे हटा दिया है और सवाल रखा
हुआ मिल सकता है वहां पे राइट बेटा ठीक है इसके बाद अपन देखेंगे डी ब्रोगली मतलब का कांसेप्ट डी ब्रोगली
का कांसेप्ट वही देखेंगे थ्योरी या वेवलेंथ तो क्या ही बोलूं उसको। ठीक है ना? तो डी ब्रोगली को डी ब्रॉय
प्रोनाउंस करते हैं। पर इंडियन लोग हैं जो लिखेंगे वही बोलेंगे। तो डी ब्रोगली भी बोल सकते हो। डी ब्रॉय भी बोल सकते हो।
आपकी मर्जी है। इसमें कोई दिक्कत वाली बात नहीं है। अब बोहर थ्योरी
यह करेंगे हम। फिर इसके बाद न्यूक्लियस जो है ना उस पर बेस्ड दुनिया भर की चीजें हैं। पर इसमें एक ही चीज है
जो लास्ट 10 या 15 सालों में रिपीट हो रही है। वो है साइज ऑफ न्यूक्लियस। वो a की पावर 1/3 वाला कांसेप्ट। उस पे खूब सारे
सवाल भी हैं और ये भी ये करेंगे हम। ठीक? इसके बाद हमें करना क्या है? इसके बाद आता है जो सवाल सबसे ज्यादा आता है मास
डिफेक्ट और बाइंडिंग एनर्जी पे आता है। इसके बाद अपन करेंगे मास डिफेक्ट। यह और सबसे लास्ट में
पिशन एंड प्यूज़न दैट्स इट। खत्म बस लास्ट 15 सालों में जो कुछ भी आ रहा है
इन्हीं में से आ रहा है। ठीक है? और और जो पहले ही अनाउंस कर रहा हूं यह यह जो तीन टॉपिक हैं ये वाले एक दो तीन फोटोइिक
इफेक्ट एक्सरे का कांसेप्ट और डी ब्रोगली इनमें से एक क्वेश्चन की गारंटी है। और इनमें से भी एक क्वेश्चन की गारंटी है।
गारंटी जिसको बोल रहा हूं ना मैं कि मेरी गारंटी आएगा ही आएगा। इसमें से एक सवाल आएगा। इसमें से एक सवाल आएगा। हो सकता है
इसमें से प्लस एक और हो जाए। तीन सवाल हो जाए और ज्यादा ही किस्मत अच्छी रही तो भाई कुछ भी हो सकता है। ऑप्टिक्स में से छह-छह
सवाल आए हुए हैं एक बार में तो वो भी बहुत बढ़िया है। अब ठीक है इनमें हम क्या करेंगे? फिर मैं आपको ब्रेक बता देता हूं।
कब मिलेगा? पूरा अनाउंस कर देता हूं। ब्रेक मिलेगा आपको एग्जैक्ट 2:00 बजे।
ठीक है ना? ब्रेक किस टाइम मिलेगा? 2:00 बजे राइट शुरू करें अब चलें चलो भाई पूरी कहानी समझा दी जिसको जैसे बैठना है
पानीानी लेके बैठ जाओ चाय पानी नाश्ता तो आप लोगों ने कर ही लिया होगा ठीक है 2:00 बजे ब्रेक मिलेगा और 4:30 और 5 के बीच में
सेशन खत्म हो जाएगा 4:30 और 5 उससे ज्यादा ले नहीं सकते क्योंकि शाम को आपका फिर से नया मंजिल है तो भाई टाइम की लिमिट है
हमारे पास ठीक है ना तो टाइम की हमारे पास लिमिट है आज।
इससे ज्यादा टाइम हो नहीं सकता। आपको पता भी है। ठीक है? तो चलिए बेटा बिना किसी डिले के स्टार्ट करते हैं फोटोइिक इफेक्ट।
ठीक है ना? राइट? ये रहा अपना फोटोइिक इफेक्ट। तो भाई रेडी हो जाओ
चलने के लिए। ठीक है ना? फोटोइिक इफेक्ट। चलिए बिना किसी डिले के 1 घंटे में मेरा टारगेट है इसको 1 घंटा 15 मिनट के
अंदर-अंदर पूरा करूंगा मैं जिसमें मुझे कभी-कभी एक प्लस हाफ डेढ़ लेक्चर लग जाता है। यानी कि लगभग दो से 3 घंटे लग जाते
हैं इसको टॉपिक को करने में। इसको मैं टू द पॉइंट बात करूंगा और सीधे-सीधे पॉइंट पे आएंगे। तो देखो भाई, फोटोइिक
इफेक्ट क्या होता है? भाई, फोटोइिक इफ़ेक्ट क्या होता है? कि अगर कोई हमारे पास ऐसे मेटल प्लेट है। ठीक है ना? सुनना ध्यान
से। ऐसे कोई मेटल प्लेट है। ठीक? इस पे हम यहां से ऐसे रेडिएशन डालते हैं।
ठीक है ना? तो जैसे ही इस पे रेडिएशन डलता है, इससे एकदम इलेक्ट्रॉन निकल के भागता है। ठीक है ना? तो किसी प्लेट पे एक
रेडिएशन गिरने से इलेक्ट्रॉन का निकलना इज़ फोटोइिक इफ़ेक्ट। ठीक? तो लिखना आपकी मर्जी है। लिखो या मत लिखो। ठीक है? वो आपकी
मर्जी है। सर 5 आवर्स में मॉडर्न इंपॉसिबल है। अच्छा बेटा
3 घंटे में वहां बैठ के 3 घंटे में पूरी फिजिक्स करनी होती है। और आप बोल रहे 5 घंटे में एक टॉपिक नहीं हो पाएगा। हैं?
देखो अभी पॉसिबल होगा। अभी अभी पॉसिबल होगा। और एक-एक चीज बताऊंगा। एक-एक चीज। ठीक है? चलो। तो भाई, मेटल प्लेट पर कोई
रेडिएशन गिरता है। ठीक है ना? रेडिएशन गिरता है तो इलेक्ट्रॉन निकलता है। ठीक? इस इफेक्ट को फोटोइिक इफेक्ट बोलते हैं।
यानी कि फोटन गिरने से फोटो इलेक्ट्रिक इलेक्ट्रॉन का निकलना इज़ फोटो इलेक्ट्रिक इफेक्ट। ठीक? और ये क्या होता है? ये एक
प्रूफ है। क्या है? ये प्रूफ ऑफ पार्टिकल नेचर। प्रूफ ऑफ पार्टिकल
नेचर ऑफ रेडिएशन। ठीक है ना? रेडिएशन में पार्टिकल नेचर
होती है। ये उस चीज का प्रूफ है। ठीक? और उस पार्टिकल को जिसकी बात हम कर रहे हैं। ठीक? जब रेडिएशन को हम पार्टिकल बोलते हैं
तो उस पार्टिकल को क्या बोला गया है बाद में? फोटन बोला गया है और वो फोटन बाद में आएगा। मैं इसको लास्ट में एक्सप्लेन
करूंगा। इसका दूसरा नाम क्वांटा भी है। ठीक है ना? इस तरीके से भी इसको बोला जाता है कि भाई रेडिएशन को अगर हम पार्टिकल मान
रहे हैं तो उस पार्टिकल का नाम क्या है? क्या उस पार्टिकल का नाम रेडिएशन ही है? नहीं। उस पार्टिकल का नाम है फोटन। तो वो
फोटन गिरता है और यहां पे टकराता है किसी चीज से और एक इलेक्ट्रॉन को बाहर भगा देता है विद सम काइनेटिक एनर्जी। ठीक? ये तो
फोटोइिक इफेक्ट था। ठीक? अब आते हैं इसके आगे वाले सेटअप पे इन चीजों पे। और बेटा देखो जैसे कुछ लोग कह रहे हैं कि इतनी देर
में ये पॉसिबल नहीं है। ये नहीं है, वो नहीं है। सर बहुत कम टाइम है। इतने में कि कैसे हो? तो भाई ये लोग चाहते हैं कि मैं
घास काट दूं। ये मेरे सर पर प्रेशर बना रहे हैं कि जल्दी जल्दी जल्दी जल्दी जल्दी जल्दी करो। भाई अगर जल्दी-जल्दी करूंगा
ठीक है तो आपको समझ नहीं आएगा कुछ भी। तो भाई मैं अपने आराम से जितने जिस तरीके से मैं पढ़ा रहा हूं वैसे आराम से पढ़ते रहो।
मैं चीजों को जिस चीज को आराम से पढ़ाना है उसको आराम से पढ़ाऊंगा। जिसको जल्दी पढ़ाना है उसको मैं जल्दी पढ़ाऊंगा। ठीक?
और बहुत सालों से मैं पढ़ा रहा हूं। कोई दिक्कत नहीं आएगी आपको। जिस चीज को बोलूंगा यह इंपॉर्टेंट है उसमें से आएगा।
जिसको बोलूंगा यह नहीं है आप देख लेना नहीं आएगा। ठीक? और एक्सेप्शनंस आर ऑलवेज देयर। ठीक है? तो भाई आराम से बैठ के
पढ़ते रहो। ठीक है? अच्छा स्पीड अप स्पीड अप ऑप्टिकल ऑप्टिकल सेमीकंडक्टर सेमीकंडक्टर आ गए स्पैमर। नाश्ता-आशस्ता
करके आ गए तुम लोग। चलो बहुत बढ़िया। अब दिहाड़ी कमाओ अपनी। उल्टे-सीधे मैसेज करो। स्पैम करो यहां पे जो चल रहा है। ठीक? वो
तो ये लोग पढ़ते रहेंगे जो बैठ के पढ़ने आए हैं। आप लोग अपना कमाते रहो। कोई बात नहीं भाई आपके भी बच्चे हैं। ठीक है ना?
वरना अगर मैं यहां पे कुछ स्पैमर के अगेंस्ट कर दूंगा तो आपके पेट पे लात लग जाएगी। पेट पे लात। इमेजिन कर पा रहे हो?
पेट पे लात कैसे लगती है? हां वो। हां। मजदूर है भाई। मजदूरी कर लेने दो इनको। कोई बात नहीं। ठीक। चलिए देखो भाई
फोटोइिक इफेक्ट का सेटअप कैसा होता है बहुत ज्यादा ध्यान से सुनते जाना है। ठीक है? एक इस तरीके की ट्यूब टाइप होती है।
ऐसे होता है क्योंकि इस सेटअप की मुझे बार-बार जरूरत पड़ेगी। ठीक है? तो इस सेटअप की मुझे बार-बार जरूरत पड़ेगी।
इसलिए मैंने यहां पे इसको पूरा बनाना है। फिर इसको एक बार कॉपी कर क्योंकि समझाऊंगा ना फैक्ट्स मैं। बार-बार बार-बार फैक्ट
समझाऊंगा आपको। तो फैक्ट समझाने में मुझे इस चीज की जरूरत पड़ती ही रहेगी। ठीक है? तो भाई ये वाली चीज हम यहां पे
ऐसे ले लेते हैं और ये अपना ये हो गया। तो भाई होता क्या है? एक इस तरीके की ट्यूब होती है जो इधर से
ऐसे क्लोज रहती है और इधर से भी ऐसे क्लोज रहती है। अब इसमें क्या होता है यहां पे? जो यह वाली ट्यूब होती है, इसमें ऊपर एक
विंडो बनी होती है। है ना? एक विंडो बनी होती है जिसको हम अभी बनाएंगे। ठीक है? बहुत ध्यान से देखते रहना। तो इसमें क्या
होता है कि इस तरफ एक प्लेट होती है यूं। ठीक है ना? ऐसी और बिल्कुल सेम टू सेम प्लेट इधर की साइड भी होती है। ठीक? इस
प्लेट पे अब इस प्लेट पे क्या होता है? रेडिएशन आता है। रेडिएशन आके इस प्लेट पे गिरता है। ठीक है ना? तो बिल्कुल इसी
तरीके की यहां पे एक हम विंडो बनाते हैं। यूं ऐसे एक विंडो होती है यहां पे भाई यूं।
ठीक है? ये हो गई विंडो। और इस जगह पर यह वाली जो प्लेट है यह नीचे एक बैटरी से जुड़ी होती
है। जिसका नेगेटिव टर्मिनल इधर होता है। पॉजिटिव इधर होता है। और यहां पे इस जगह पे एक ऐसे ही करंट को भी कंट्रोल कर जितनी
चाहते हैं हम करंट आए। वो हमारे अमीटर वगैरह की लिमिटेशन होती है। और यहां पे एक अमीटर होता है और यहां पे ये इस तरीके का
सेटअप होता है। ठीक है? अब भाई यहां पे क्या होता है? ये जो विंडो है इधर ठीक है ना ये जो विंडो है इधर यहां पे इस विंडो
से आता है रेडिएशन इस विंडो से क्या आता है इस विंडो से आता है रेडिएशन ऐसे
और यहां इस पे गिर जाता है ठीक है ना इस प्लेट पे रेडिएशन गिरता है
इस जगह पे यहां पे और यहां से निकल निकल के इलेक्ट्रॉन्स इलेक्ट्रॉन्स इस तरफ से निकल-निकल के इस
तरफ भागते हैं। ऐसे इलेक्ट्रॉन्स भागते हैं ऐसे। इस वाली प्लेट को कैथोड बोलते हैं। इस वाली प्लेट
को एनोड बोलते हैं। ठीक है? राइट? अब यहां पे सुनते जाना। इसकी वोल्टेज होती है V। ये होता है रेजिस्टेंस। और यहां पे करंट
की डायरेक्शन भी मैं अब एक्सप्लेन करूंगा। ठीक है? तो यहां पे क्या होता है कि भाई ये इलेक्ट्रॉन्स निकलते हैं इस तरीके से
ये और ये इस तरफ को भागते हैं। ये होता है रेडिएशन। तो इस विंडो से W यानी कि विंडो बोल सकते
हो आप इसको। इस विंडो को W भी बोलते हैं। तो विंडो से रेडिएशन आता है और ये रेडिएशन एकदम स्पेशल होता है जिसके बारे में अभी
मैं एक्सप्लेन करने वाला हूं कि क्या-क्या चीजें इसमें होती हैं। अब कुछ लोगों को लग रहा होगा कि सर इसको आप फटाफट बनाइए। बेटा
यही मुझे फटाफट बनाना है। चिंता ना करो। लेकिन इसी को मैं अब ठीक हर पेज पे पेस्ट करता रहूंगा। मुझे दोबारा दोबारा ये नहीं
बनाना पड़ेगा। राइट? चलो तो आइए भाई फोटोइिक इफेक्ट की बातें करते हैं। ठीक है? चलो ये जो प्लेट है, ठीक है ना?
कैथोड। इस पे रेडिएशन गिरता है और वो रेडिएशन गिर के यहां से इलेक्ट्रॉन निकलते हैं। लेकिन इस रेडिएशन की खास बात है कि
ये वाला रेडिएशन मोनोक्रोमेटिक होता है। मोनोक्रोमेटिक मतलब सिंगल वेवलेंथ। सिंगल लैम्ब्डा और फ्रीक्वेंसी। क्यों?
क्योंकि रेडिएशन होता है इलेक्ट्रोमैग्नेटिक वेव। तो उसकी स्पीड जो है एयर में बिल्कुल फिक्स होती है और उसकी
फ्रीक्वेंसी * लैम्ब्डा यहां पे फ्रीक्वेंसी को μ लिखते हैं और लैम्ब्डा को लैम्ब्डा ही लिखते हैं। तो c जो है वो
कांस्टेंट है। ये वाली चीज क्या है? कांस्टेंट है। अगर c कांस्टेंट है तो इसकी और इसकी मल्टीप्लाई भी कांस्टेंट होगी। तो
लैम्ब्डा अगर बहुत ज्यादा होगा तो फ्रीक्वेंसी कम होगी। तो चाहे आप इसको सिंगल लैम्ब्डा बोल दो या फिर सिंगल
फ्रीक्वेंसी बोल दो एक ही बात है मोनोक्रोमेटिक यानी कि सिंगल लैम्ब्डा और सिंगल फ्रीक्वेंसी वाला रेडिएशन है ये। आप
अगर इसकी फ्रीक्वेंसी बदलोगे या इसकी वेवलेंथ बदलोगे तो इसको डिफरेंट रेडिएशन माना जाएगा कि दूसरे टाइप का रेडिएशन डाला
है हमने। ठीक है? दूसरे टाइप का रेडिएशन डाला है। ठीक? तो भाई यहां पे अब इसकी इंटेंसिटी को हम I बोलते हैं। I क्या है?
इंटेंसिटी होती है। इंटेंसिटी। I जो है यहां पे इंटेंसिटी होती है एनर्जी पर यूनिट एरिया
और पर यूनिट टाइम। ये होती है इंटेंसिटी। ठीक? अब यहां पे क्या होता है भाई? अगर इस चीज की मैं बात करूं तो ये तो कैथोड है
आपका। तो इस पॉइंट को आप कैथोड ले लो। ये एनोड है आपका तो इस पॉइंट को आप एनोड ले लो। अब यहां से एक वायर यूं जा रही है।
यूं जा रही है। यूं जा रही है यहां पे। और यहां पे एक ऐसे बैटरी लगी हुई है। बिल्कुल सही बात है। और यहां पे एक रेजिस्टेंस भी
है भाई। ये वाला रेजिस्टेंस भी है। और यहां पे एक अमीटर लगा हुआ है आपका। और ये ये सेटअप है आपका। तो यह तो आपका ब्रोकन
सर्किट है। तो यह जो सेटअप है आपका यह टूटा हुआ सर्किट है। ओपन सर्किट है। टूटा हुआ सर्किट। अब क्या होता है? जब इस प्लेट
पे रेडिएशन गिरता है यहां से तो यहां से इलेक्ट्रॉन चल के इस तरफ जाते हैं। तो इलेक्ट्रॉन इस तरफ जाते हैं। चार्ज का
फ्लो होता है। तो समझ लो जब भी चार्ज का फ्लो होगा। जब चार्ज का फ्लो होगा तब-तब ये सर्किट जुड़ेगा। क्या ये बात समझ में आ
रही है? और अगर इलेक्ट्रॉन अगर इलेक्ट्रॉन नेगेटिव चार्ज है वो इस तरफ फ्लो हो रहे हैं तो भाई करंट इस तरफ मानी जाएगी। अब ये
कैपिटल आई को मैंने यहां पे इंटेंसिटी बोल दिया। तो स्मॉल आई मुझे करंट के लिए रिज़र्व करना पड़ेगा। तो यहां पे भाई अगर
इलेक्ट्रॉन इस तरफ चल रहे हैं तो समझ लीजिए करंट आपकी इस तरफ चलेगी। तो यहां पे इस सेटअप में करंट ऐसे आएगी। तो यहां पर
करंट ऐसे आएगी यूं। समझ में आ रहा है? तो यहां पे करंट इस तरफ से आएगी। तो ये करंट को मैं एकदम स्पेशल
डायरेक्शन दे रहा हूं। ये ऐसे आएगी करंट इस तरफ। और यहां से करंट यूं जाएगी। ऐसे इस अमीटर को हिलाते हुए। भाई अमीटर में भी
तो रीडिंग आएगी ना करंट की। और ये यूं जाएगी करंट यहां पे। तो जब भी यहां से इलेक्ट्रॉन ऐसे चलेंगे करंट ऐसे चलेगी। ये
राइट? अब भाई यह एक वोल्टेज भी है। ये क्या है? ये एक वोल्टेज है। इसका ध्यान देना है। यहां से आने वाली इंटेंसिटी है
इसका ध्यान देना है। और रेडिएशन की जो मोनोक्रोमेटिक है ये। तो सिंगल वेवलेंथ और सिंगल
फ्रीक्वेंसी। ठीक? इस फ्रीक्वेंसी पे भी हमको ध्यान देना है। राइट? अब फोटोइिक इफ़ेक्ट क्या
होता है? फोटोइिक इफ़ेक्ट एक्चुअल में यही तो होता है कि एक प्लेट पे रेडिएशन गिरता है। ये अब भाई ये रेडिएशन स्ट्रांग होने
पे क्या होता है? वीक होने पे क्या होता है? ठीक? इलेक्ट्रॉन को कब ज्यादा वेलोसिटी मिलती है? कब कम वेलोसिटी मिलती
है? इन सारी बातों को हम एनालाइज कर सकते हैं केवल तीन फैक्ट्स से। कौन-कौन से? सबसे पहला तो अगर हम यहां की इंटेंसिटी को
कम ज्यादा करके देखें। ठीक है ना? तो यहां पे हम पहला काम इसको भाई हमें समझना ही तो है ये। तो इंटेंसिटी को कैसे वेरीरी कर
करते हैं? इंटेंसिटी को कम ज्यादा करके क्या मिलता है हमें? दूसरा हम ये वाली जो वोल्टेज है।
ठीक है ना? इस वोल्टेज को कम ज्यादा करके क्या मिलता है? कैसे पता चलता है कि करंट का क्या इफेक्ट होता है? अब ये जो करंट है
इस करंट का नाम होता है फोटो करंट। इसको क्या बोलते हैं? फोटो करंट बोलते हैं। और ये जो इलेक्ट्रॉन्स हैं ये जो
इलेक्ट्रॉन्स हैं ये वाले ये इन इलेक्ट्रॉन्स को हम फोटो इलेक्ट्रॉन्स बोलते हैं। यही वो फोटो इलेक्ट्रॉन्स हैं
जो फोटोन के गिरने से निकलते हैं। तो भाई वोल्टेज कम ज्यादा करने से इन दोनों पे क्या फर्क पड़ता है? और तीसरा जो फैक्टर
है वो है फ्रीक्वेंसी। फ्रीक्वेंसी फ्रीक्वेंसी मतलब इसकी फ्रीक्वेंसी को जो रेडिएशन का टाइप है
इसको कम ज्यादा करने से क्या फर्क पड़ता है ये हम देखेंगे और सारी चीजें एनालाइज करते चलेंगे। ठीक है? चलो भाई तो अब अगला
वाला जो टॉपिक आ रहा है हमारा वो यही वाला है। इसी सेटअप की हमें जरूरत पड़ेगी। ठीक? तो इसमें से मैं बाकी सारी चीजें तो
मिटाऊंगा और कुछ चीजें आपको यहां पे छोड़ दूंगा एक्सप्लेन करने के लिए। ठीक है? तो ये सब चीजें हम हटा देते हैं। ये तो मैंने
आपको बता ही दिया है सब। ठीक है? तो अब हम करेंगे इंटेंसिटी का वेरिएशन। ठीक है? इंटेंसिटी का वेरिएशन। तो भाई
सबसे पहला काम है अब इंटेंसिटी को एनालाइज करना। ठीक है? और
थोड़ा सा भाई पेशेंस भी रखना है क्योंकि जो नंबर हैं उनकी श्योरिटी करनी है हमें कि वो हमारे ना कटे। कटने नहीं चाहिए
नंबर। ठीक है ना? तो भाई एकदम टू द पॉइंट बात करने से बेटर है थोड़ा सा आगे पीछे की बातें भी हम सोच लें।
ठीक है? तो भाई यहां पे मैं एक बड़ा सा हेडिंग डाल देता हूं। एक इफेक्ट ऑफ इंटेंसिटी।
इफेक्ट ऑफ इंटेंसिटी। ठीक है? इफेक्ट ऑफ इंटेंसिटी। अब भाई यहां
पे हमें क्या करना है? इंटेंसिटी का इफेक्ट क्या होता है? यानी कि जो यहां से रेडिएशन आ रहा है, उसकी इंटेंसिटी को अगर
हम कम ज्यादा करते हैं, तो क्या फर्क पड़ता है? ठीक? सुनते जाना ध्यान से। अब ये जो इंटेंसिटी है,
इंटेंसिटी का मतलब होता है एनर्जी पर यूनिट टाइम पर यूनिट एरिया।
ओके। तो भाई इसमें क्या किया मैंने? सुनते जाना ध्यान से। ठीक है? यहां पर जो इंटेंस भाई यही पॉइंट है जो
आपके कंफ्यूजन को बचाएगा। यहां से जो इंटेंसिटी यहां पे गिरती है उसका मतलब एनर्जी मान लो हमने एनर्जी बढ़ा दी। तो
एनर्जी को बढ़ाने के हमारे पास कई तरीके हैं। कई तरीके हैं। ठीक है ना? यह जो रेडिएशन आ रहा है जो ये रेडिएशन इधर से
गिरता है ना यह वाला रेडिएशन इसको अब आप समझना क्या है ये भाई रेडिएशन क्या है रेडिएशन नंबर ऑफ वेव्स है जो इस वाली
प्लेट पे गिरेंगे आके ये रेडिएशन है ठीक तो मैं यहां पे एक बहुत बड़ा कंफ्यूजन खत्म करना चाहता हूं अगर आप इस पूरी इस
पूरी एनर्जी को यहां पे कितनी एनर्जी गिर रही है ठीक है ना इसको किस इस तरीके से सोच सकते हो कि जो एनर्जी यहां पे गिर रही
है वो एनर्जी है नंबर ऑफ वेव्स मल्टीप्लाई बाय एनर्जी ऑफ अ सिंगल वेव।
ठीक है ना? सुनना ध्यान से। मान लो 1 सेकंड में 1 सेकंड में जितनी वेव्स गिरती हैं वो नंबर ऑफ वेव्स और एक वेव की
एनर्जी। यही तो टोटल एनर्जी है जो 1 सेकंड में इसमें गिर रही है। तो हमें क्या करना है
कि जब हम इंटेंसिटी को वेरीरी करेंगे तब हम करेंगे कीपिंग फ्रीक्वेंसी
कांस्टेंट। ठीक है ना? तो फ्रीक्वेंसी को कांस्टेंट रखना है।
यानी कि सिंपल सी चीज है। सिंगल फ्रीक्वेंसी रखनी है। एक फ्रीक्वेंसी। तो ये जो भी रेडिएशन है ये एक ही फ्रीक्वेंसी
का है। यानी के इसमें जो भी वेव आप पिक कर रहे हो उस वेव की एनर्जी उतनी है। और अगर आपको अब इंटेंसिटी बढ़ानी है तो आपको नंबर
ऑफ वेव्स बढ़ाने पड़ेंगे। उसका यह वाला पार्ट फिक्स रखना है। यानी कि जो रेडिएशन है उसकी क्वालिटी वही की वही रखनी है। बस
उसके नंबर बढ़ाने हैं। तो मैं साफ-साफ लिख रहा हूं देसी भाषा में इंक्रीजिंग नंबर ऑफ वेव्स।
ये समझ लो। वेव्स और फोटॉन्स। ठीक? आप वेव थ्योरी मानते हो, वेव्स बोल दो, पार्टिकल थ्योरी मानते हो, पार्टिकल
बोल दो। ये तो बाद में करेंगे। तो इंक्रीजिंग नंबर ऑफ वेव्स और फोटन आपको केवल नंबर बढ़ाने हैं। ओके? राइट? तो भाई
इसकी इंटेंसिटी अगर हम बढ़ाते हैं तो एक्सपेरिमेंटली देखा गया है अमीटर में इसकी रीडिंग बढ़ जाती है। अगर इंटेंसिटी
बढ़ाते हैं तो इसकी रीडिंग बढ़ जाती है। और हमें जो मिलता है एक ग्राफ मिलता है किस में? इंटेंसिटी में और
ऑटो करंट में। तो जो हम ग्राफ बनाते हैं यहां पे इस तरफ तो हम फोटो करंट प्लॉट करते हैं और इस तरफ हम इंटेंसिटी प्लॉट
करते हैं। तो हमने देखा कि भाई जब इंटेंसिटी इतनी थी तो फोटो करंट इतनी थी। अब इंटेंसिटी को हमने डबल कर दिया। तो भाई
फोटो करंट भी डबल हो गई। इंटेंसिटी को हमने ट्रिपल कर दिया। तो फोटो करंट भी ट्रिपल हो गई। तो यहां पे देखा कि ये सारे
पॉइंट आपको बिल्कुल एक स्ट्रेट लाइन में मिल रहे हैं। तो मुझे ये पता चल गया कि भाई ये जो ग्राफ है ये एक
स्ट्रेट लाइन ग्राफ है। ठीक? ये कैसा ग्राफ आया? स्ट्रेट लाइन ग्राफ आया। अब इस बात को थोड़ा सा समझना
आप कि भाई ये स्ट्रेट लाइन ग्राफ आपको क्या बताता है। ठीक है? ये स्ट्रेट लाइन ग्राफ आपको क्या बताता है? ये ये बताता है
कि इंटेंसिटी इज डायरेक्टली प्रपोशनल टू करंट यानी के इंटेंसिटी इज डायरेक्टली प्रपोर्शनल टू नंबर ऑफ इलेक्ट्रॉन्स
प्रोड्यूस्ड प्रोड्यूस्ड। ठीक? अब अगर ये वाली प्लेट आप लोगे ऐसी
प्लेट लेके अगर आप सोचोगे और ये रेडिएशन यहां पे यूं गिरता है और आपने इसके नंबर बढ़ा दिए तो समझ लो हीटिंग साइड सीधे-सीधे
बोलेंगे हीटिंग साइड्स। ठीक है ना? नंबर ऑफ़ हीटिंग साइड्स इंक्रीज किए हैं आपने। देखो भाई, सारा रेडिएशन एक
जैसा ही है। एक जैसा ही है। आपने इंटेंसिटी डबल की है। तो भाई, उनके नंबर डबल करने पड़ेंगे आपको। तो जितना मान लो ये
प्लेट है पहले इस पे 100 जगह पे अटैक होता था। 100 जगह पे पार्टिकल गिरते थे 1 सेकंड में। तो अब 1 सेकंड में 200 जगह पे
पार्टिकल गिरेंगे। 200 जगह पे पार्टिकल गिरेंगे क्योंकि आपने इंटेंसिटी को डबल किया है। तो नंबर डबल
किए हैं। रेडिएशन सारा एक जैसा ही है। वही का वही रेडिएशन है। बस डबल कर दिया। तो पहले 100 जगह पे हिट होता था। अब 200 जगह
पे हिट होगा। आप चार गुना करोगे तो 400 जगह पे हिट होगा। तो नंबर ऑफ हीटिंग साइड्स इनक्रीज की है आपने। ठीक? और
बिल्कुल सेम रेश्यो में। इन द सेम रेश्यो करंट भी इनक्रीज हुई है। देखो स्ट्रेट लाइन आया है। इन द सेम रेशो इन द सेम
रेश्यो आपकी करंट भी इनक्रीज हुई है। इससे क्या पता चलता है कि सक्सेस रेश्यो इज़ कांस्टेंट।
सक्सेस रेश्यो। सक्सेस रेशो इज कांस्टेंट। इससे बहुत सारी बातें पता चल रही है हमें कि भाई सक्सेस
रेशो कांस्टेंट है। मतलब अगर भाई 500 इलेक्ट्रॉन गिरते हैं सॉरी 500 वेव्स गिरती है तब जाके एक इलेक्ट्रॉन निकले
निकल रहा है। तो भाई 1000 गिरेंगे तो दो निकलेंगे। 10000 गिरेंगे तो 20 निकलेंगे। यह रेशियो फिक्स है। और यह अपने
आप में बहुत बड़ी बात है। ठीक है ना? अपने आप में बहुत बड़ी बात है। ठीक है? तो ये हीटिंग रेशो और जो सक्सेस रेश्यो इस प्लेट
का जिसको हम एनालाइज कर रहे हैं, ये फिक्स होता है फॉर अ रेडिएशन ऑफ़ कॉन्सेंट फ्रीक्वेंसी।
ठीक है ना? फॉर द रेडिएशन ऑफ़ सिंगल फ्रीक्वेंसी। एक टाइप के रेडिएशन के ये डायरेक्टली प्रोपोर्शनल होता है। एक बात
पूरी हुई। एक बात पूरी हुई। यहां से हमने ज्ञान प्राप्त किया कुछ। अगले पॉइंट पर चलते हैं। नेक्स्ट पॉइंट क्या है? नेक्स्ट
पॉइंट इज इफेक्ट ऑफ वोल्टेज। इफेक्ट ऑफ वोल्टेज। तो, इसी को कॉपी करके यहां पे यहीं से लेते हैं हम इफेक्ट ऑफ
वोल्टेज भी। ठीक है ना? क्योंकि यह डायग्राम की मुझे फिर जरूरत पड़ेगी समझाने के लिए। तो, बाकी की चीजों को हम यहां पे
हटा देते हैं। है ना? यह सब बातें तो निपट गई।
ठीक? इसमें अब हम क्या करेंगे? इफेक्ट ऑफ वोल्टेज।
राइट? वोल्टेज की बात करें। कौन सी वोल्टेज? ये वाली वोल्टेज। इस वाली वोल्टेज की बात करेंगे और यही यहां का
सबसे ज़्यादा कॉन्सेप्चुअल पॉइंट है। ठीक है बेटा? चलो। यह सुबह-सुबह कुछ लोगों को क्या हो रखा है भाई? अच्छा सुबह-सुबह 9:00
बजे से ही तो 9 10:00 बजे से मजदूरी चालू होती है। इसलिए रात के उसमें थोड़ा कम रहता है। ठीक? सुनते जाओ बस। भाई अपना
टारगेट है। अपना क्वेश्चन पूरा होना चाहिए। चलो। तो भाई इसमें क्या हुआ बेटा? इस वाले में क्या हुआ? इसको देखते जाओ।
बेटा मैं गारंटी दे रहा हूं आपकी। अगर आपने इस 5 1/2 घंटे के सेशन को बिल्कुल सीरियसली देख लिया तो तीन सवाल आप लेके
जाओगे यहां से 12 नंबर का पढ़ के जाओगे। आप देख लेना जिस दिन पेपर में बैठोगे ना आपको वही मिलेगा जो मैं बता रहा हूं। उसी
में से आएगा। यह नहीं कह रहा कि यह बताया था सर ने यही आएगा। भाई जो टॉपिक पढ़ाऊंगा ना आएगा उसी में से ही। और वो हर बात हर
फैक्ट यहां पर आपको सुनने को मिल जाएगी जो वहां पर पूछी जाएगी। आप पेपर हो जाएगा ना उस दिन सेशन को चला के देख लेना और आपको
पता चल जाएगा कि ये बात बोली हुई है। ठीक? आज से नहीं बहुत पहले से ये बात है। मॉडर्न फिजिक्स इतना आसान है प्रिडिक्ट
करना। उससे आसान कुछ है नहीं। सारे जितने भी टॉपिक हैं सबसे आसान मॉडर्न फिजिक्स ही है। ठीक? इसलिए उसको प्रिडिक्ट करना आसान
है। अब सोचो मॉडर्न फिजिक्स का क्वेश्चन भी अगर किसी बच्चे से नहीं हो रहा है इसका मतलब उसने मॉडर्न फिजिक्स की क्लास ही
नहीं की। वो बैठा ही नहीं है। उसने सुना ही नहीं है। प्रैक्टिस कर लेता तो पक्का होता लेकिन बैठ भी जाता ना तो तीन में से
दो सवाल उसके पक्का हो जाते। तो बेटा आप बस बैठ के सुनते रहो। इट्स अ रिक्वेस्ट। इट्स अ रिक्वेस्ट। कुल 20 दिन बच रहे हैं।
20 दिन भी नहीं बचे समझ लो। ठीक है? जस्ट 20 डेज। बस 20 दिन बच रहे हैं। लिख देता हूं मैं आपके।
20 डेज हैं बस। ठीक? इसलिए सीरियस हो जाओ और देख लो। चलिए भाई यहां पे आते हैं हम। तो भाई अब क्या होता है कि ये जो रेडिएशन
यहां पे गिर रहा है जिसकी बात हम कर रहे हैं कि यहां से रेडिएशन आता है। ठीक? वो रेडिएशन आता है। यहां पे कुछ हरकतें होती
है इस जगह। ठीक है ना? इस जगह पे कुछ हरकतें होती हैं और यहां से इलेक्ट्रॉन निकल के एनोड की तरफ चल देता है। अब ये
क्या कर रखा है? हमने इसको पॉजिटिव से जोड़ रखा है। तो भाई एनोड तो आपका पॉजिटिव हो रखा है। ओके? जब पॉजिटिव प्लेट से
जुड़ा हुआ है। कैथोड आपका नेगेटिव हो रखा है क्योंकि ये तो नेगेटिव प्लेट से जुड़ा हुआ है। अब सोचो एक प्लेट ऐसी है जो यहां
पे नेगेटिव है। और एक प्लेट ऐसी है जो यहां पे पॉजिटिव है। ठीक है ना? ये तो आपकी पॉजिटिव प्लेट हुई
और यह आपकी नेगेटिव प्लेट हुई। अगर नेगेटिव प्लेट पे कोई नेगेटिव आ जाएगा तो यह तो उसको भगाएगी कि भाग यहां से।
निकल भाई इलेक्ट्रॉन है नेगेटिव है इस पे अगर वो डेवलप हो गया तो यह तो भगाएगी तो
बोलेगी बस आ गया ना फ्री हो गया ना तो निकल यहां से भाग यहां से तो ये उसको भगाएगी ओके बहुत अच्छी बात है अब ये
पॉजिटिव होगा ये वाली प्लेट उसको अट्रैक्ट करेगी क्योंकि इस पे तो पॉजिटिव चार्ज आ गया यहां पे और ये तो नेगेटिव है रास्ते
में इलेक्ट्रॉन है तो ये प्लेट उसको बुलाएगी के इधर आओ अगर यह मना भी कर रहा होगा ना थोड़ी बहुत तब भी पकड़ के इसको
खींच लेगी कि आजा इधर। तो यहां से यहां से अभी क्या हो रहा है कि ये वाली प्लेट से इस वाली प्लेट पे बड़े अच्छे से
इलेक्ट्रॉन जा रहे हैं। ठीक है ना? अब हमने क्या किया? इसका जो पॉजिटिव कैरेक्टर है, ये तो वोल्टेज थी। इसका पॉजिटिव
कैरेक्टर यानी कि इसकी वोल्टेज को थोड़ा कम करके देखा। फिर हमने इसकी वोल्टेज को बढ़ा के देखा। फिर ज़ीरो करके देखा। और फिर
वोल्टेज को पलट भी दिया। फिर पलट के देखा। तो हमने क्या किया? हमने इस वोल्टेज को पूरा एनालाइज करके देखा। ठीक? और इसके ऊपर
बहुत सारे बहुत सारे पॉइंट्स हमें मिले। और सबसे बड़ी बात जो ग्राफ मिला है उसी पे उसी पे बेस्ड है। बहुत सारे पॉइंट्स और
बहुत सारे क्वेश्चन। उसी पे बेस्ड है। ज्यादा दिमाग लगाना ही नहीं है। ठीक है? तो भाई ये एक ग्राफ है। इस जगह पे हम जो
प्लॉट कर रहे हैं वो फोटो करंट प्लॉट कर रहे हैं। और इस एक्सिस पे जो प्लॉट कर रहे हैं वो वोल्टेज प्लॉट कर रहे हैं। और ये
वोल्टेज कौन सी है? ये वाली वोल्टेज है वोल्टेज ऑफ़ एनोड माइनस वोल्टेज ऑफ़ कैथोड। ये वाली वोल्टेज ये है कि जितनी भी
वोल्टेज एनोड की है और जितनी वोल्टेज कैथोड की उसको माइनस करके। ठीक है? ओके। अब भाई बात को बहुत ध्यान से सुनना है।
हमारी बात को बहुत ध्यान से सुनना है। ठीक है? अब सुनना ध्यान से ग्राफ कैसा आता है?
यह वाला ग्राफ आया भाई। ठीक है ना? किस-किस में प्लॉट किया यह ग्राफ? भाई ये ग्राफ जो हमने प्लॉट किया है, ये हमने
वोल्टेज और करंट में प्लॉट किया है। अच्छा। तो यहां पे वोल्टेज ज़ीरो है। यहां पे वोल्टेज कितनी है? ज़ीरो है और इस तरफ
माइनस की वोल्टेज है और इस तरफ प्लस की वोल्टेज है और यहां पे ज़ीरो है और ये करंट है। ठीक? तो इस वोल्टेज को वेरी करके हमें
ये करंट मिलती है। ये करंट मतलब यहां पे इतनी करंट, यहां पे इतनी, यहां पे इतनी, ऐसे ही तो ऐसे ही तो ग्राफ ड्रॉ किया होगा
यह वाला। यह वाला ग्राफ ऐसे ही तो ड्रॉ किया होगा। तो इस बात को अब समझना है आपको कि देखो भाई यहां पे चाहे ये कैसा भी है
अरेंजमेंट बट इस तरीके से ये एनालाइज किया जा सकता है यहां पे।
ठीक है ना? इसके बाद ठीक है। और यहां पर हमको मिला बहुत सारा डाटा इस तरीके का जिसके बारे में हम
बार-बार बात कर सकते हैं। ठीक है? ग्राफ दिख रहा है। अब इस ग्राफ की ही
बातें करते रहेंगे। अब हम इस ग्राफ की ही बातें करते रहेंगे। राइट? अब इस ग्राफ पे रिलेटेड बहुत सारी
बातें हैं। जो मैं यहां एक-एक करके आपको बताता रहूंगा। ठीक है?
ओके तो ये रहा ग्राफ अगर मैं अब ये बातें करूं कि भाई ये ग्राफ बताता क्या है आपको क्या बता रहा है ये ग्राफ तो ये ग्राफ
आपको ये बता रहा है कि जीरो जीरो वोल्टेज है। कितनी? जीरो वोल्टेज है। जीरो वोल्टेज का मतलब बैटरी हटा दी। बैटरी को बट यहां
से यहां जॉइ कर दिया। ऐसे जॉइ कर दिया। बैटरी हटा दी। तब भी भाई साहब कुछ करंट है। यहां तो इस पे करंट है ना ये तो। ये
तो करंट चल रही है ना इस पे। तब भी कुछ करंट है। और अगर वोल्टेज आप बढ़ाओगे तो करंट बढ़ जाएगी। वोल्टेज को थोड़ा और बढ़ाओगे
तो करंट और बढ़ जाएगी। वोल्टेज को और बढ़ाओगे तो थोड़ी सी और बढ़ जाएगी। लेकिन अब इससे आगे कितनी भी बढ़ा लो आप वोल्ट करंट
नहीं बढ़ेगी। करंट इसके बाद कांस्टेंट हो गई। यानी कि करंट की एक मैक्सिमम वैल्यू हमें मिल गई। इसको क्या बोलेंगे? इसको
बोलेंगे सैचुरेशन। सैचुरेशन करंट। इसको क्या बोलेंगे? सैचुरेशन करंट। अब
सैचुरेशन करंट आ गई। इसका मतलब इससे ज्यादा करंट बढ़ ही नहीं रही है। इस वोल्टेज को आप कितना भी ज्यादा कर लो।
यानी कि बैटरी के बाद बैटरी और ऐड कर दी और बैटरी ऐड कर दी और बैटरी ऐड कर दी और सैचुरेशन करंट यहां पे बढ़ ही नहीं रही
है। वो उतनी की उतनी है। उसमें कोई इजाफा नहीं है। अब क्या बैटरी को कम करते चले गए। बैटरी को कम करते चले गए। अब यहां तक
तो ठीक है। यहां के बाद करंट कम होती चली गई। अब बैटरी को कम करते-करते हटा ही दिया। फिर भी करंट है। अब बैटरी को यहां
पे यहां पे भाई उल्टा करके जोड़ दिया। समझ रहे हो क्या कांड कर रहे हैं हम? उल्टा करके जोड़ दिया। जब हमने बैटरी को
उल्टा करके जोड़ा तो जो चीज पॉजिटिव थी भाई वो नेगेटिव हो गई। और जो नेगेटिव थी वो क्या हुआ? वो पॉजिटिव हो गई। तो करंट
और कम हो गई। ये देखो करंट कम हो गई। अब इसके कम होने का कारण क्या है? भाई कम तो होगी ही होगी। पहले जो प्लेट उसको धकेल
रही थी कि भाग यहां से। अब वो कह रही है वापस आजा। आजा आजा तू तो वापस आजा। क्योंकि वो पॉजिटिव हो चुकी है। अगर वो
पॉजिटिव हो चुकी है तो निकलते हुए इलेक्ट्रॉन को भगाएगी नहीं उसको जाने से रोकेगी। और ये प्लेट जो कभी पॉजिटिव हुआ
करती थी ये नेगेटिव हो गई है। अब इसकी तरफ कोई इलेक्ट्रॉन अगर आ भी रहा होगा तो ये उसको भगाएगी कि जा यहां से मत आ इधर। इधर
मत आ। तू तो जा यहां से। ठीक? तो ये उसको इसलिए करंट कम हो गई। अब इसको और पॉजिटिव कर दिया। इसको और नेगेटिव कर दिया तो करंट
और कम हो गई। एक टाइम ऐसा आया आपने इसको इतना नेगेटिव और इतना पॉजिटिव कर दिया कि इन दोनों के बीच का डिफरेंस V नॉट हो गया।
ठीक? तो इस जगह पे जैसे ही पोटेंशियल V नोट हुआ पूरी दुनिया को पता है कि ये पोटेंशियल नेगेटिव होगा। नेगेटिव नेगेटिव
होगा। नेगेटिव V नोट हुआ करंट हो गई ज़ीरो। यहां आते ही करंट ज़ीरो हो गई। इसलिए इस वोल्टेज को हम स्टॉपिंग
स्टॉपिंग पोटेंशियल भी बोलते हैं या फिर कट ऑफ पोटेंशियल कट ऑफ वोल्टेज जो आपको ठीक लगे। ठीक?
स्टॉपिंग पोटेंशियल या कट ऑफ वोल्टेज बोलते हैं इस लास्ट वाले को भी। तो ये जो ग्राफ आया इससे हमें बहुत सारी चीजें
सोचने को मिली। जैसे भाई ये वाला पॉइंट। ये वाला पॉइंट क्या कहता है आपको? ये वाला पॉइंट आपको कहता है कि अगर भाई इस चीज को
देखा जाए देखो ये वाला जो पॉइंट है इसको आप रीड करके देखो तो आपको मिलेगा कि एट जीरो एनोड पोटेंशियल
अ करंट एग्ज़िस्ट इट मींस दैट इलेक्ट्रॉन्स आर एमिटेड विद सम इनिशियल काइनेटिक एनर्जी फ्रॉम कैथोड।
ये ट्रू है या फॉल्स है? बताओ मुझे। क्या ये स्टेटमेंट ट्रू है? बताओ। ट्रू है या फॉल्स है? क्या लिखा हुआ है ये?
क्या लिखा हुआ है ये? सारी बातें बताऊंगा। व्हाई डज़ करंट स्टॉप्स?
ट्रू है। राइट। हम देखो अब आए ना पढ़ने वाले यह नाम ही अलग
हैं। जो पढ़ने वाले बच्चे हैं ना चुप बैठे रहते हैं। जब उनसे पूछा जाता है ना तब जवाब देते हैं। देखो आए नाम आ रहा है ना
ट्रू लिखा हुआ। ठीक? तो ये स्टेटमेंट एकदम ट्रू है। तो ये स्टेटमेंट आपको क्या बताता है? यह स्टेटमेंट बताता है कि एट जीरो
एनोड पोटेंशियल यानी कि हमने एनोड का पोटेंशियल जीरो कर दिया। अस करंट एग्जिस्ट तब भी एक करंट
एग्जिस्ट करती है। करती है ना ये करंट एग्जिस्ट। इट मींस दैट इलेक्ट्रॉन्स आर एमिटेड विद सम पोटें इनिशियल काइनेटिक
एनर्जी। यानी के जो उस प्लेट पे से इलेक्ट्रॉन निकल रहे हैं यहां से यहां से जो इलेक्ट्रॉन निकल रहे हैं इनके पास एक
इनिशियल क्या होती है एक इनिशियल काइनेटिक एनर्जी होती है। ये यहां से पता चलता है। यानी के
ज़ीरो पोटेंशियल पे भी करंट है। यानी के इन इलेक्ट्रॉन को यहां से यहां पहुंचने के लिए इस बैटरी की जरुरत नहीं है। इसके
अट्रैक्शन की जरुरत नहीं है। इसके रिपल्शन की जरूरत नहीं है। वो अपने आप यहां पहुंच जाते हैं। इसका मतलब जब प्लेट से जब प्लेट
से इलेक्ट्रॉन निकलता है भाई ये वाली प्लेट होती है ना ये वाली प्लेट ये फोटोग्राफिक प्लेट ये होती है। जब यहां से
इलेक्ट्रॉन निकलता है तो उसके पास एक काइनेटिक एनर्जी होती है। ये वाली बात हो गई। एक बात समझ आ गई कि भाई, उसके पास
पहले से काइनेटिक एनर्जी होती है। इन प्लेटों के अट्रैक्शन और रिपल्शन की जरूरत उसको अभी नहीं है। कुछ तो हैं ऐसे
इलेक्ट्रॉन हैं। अब इसके बाद नई बात निकल के आती है। नई बात क्या निकल के आती है? कि भाई दूसरा पॉइंट।
ठीक? दूसरा पॉइंट क्या कहता है? इसको भी बताना है कि ये ट्रू है या फॉल्स है। ठीक? दूसरा पॉइंट आपको क्या कहता है कि एज एनोड
पोटेंशियल इंक्रीजसेस यानी कि पोटेंशियल उधर की साइड वाला इनक्रीज होता है ये वाला ना ये
एज एनोड पोटेंशियल इंक्रीजसेस करंट इनक्रीजसेस करंट इनक्रीज होती है करंट इनक्रीज बिल्कुल दिस इंप्ल्लाई दैट
डिफरेंट इलेक्ट्रॉन्स आर एमिटेड विद डिफरेंट काइनेटिक एनर्जी यानी कि इस वाली प्लेट से जो इलेक्ट्रॉन निकल-निकल के भाग
रहे हैं। ठीक? इनकी सबकी एनर्जी सेम नहीं है। ये अलग-अलग एनर्जी के हैं। ये भी बताता है ये पॉइंट। भाई यही तो बता रहा
है। क्योंकि भाई आप देखो अगर यहां पे हम पोटेंशियल बढ़ाते हैं तो करंट बढ़ जाती है। थोड़ा बढ़ाया करंट और बढ़ गई। इसका
मतलब ये है कि कुछ इलेक्ट्रॉन जो यहां पहुंच रहे हैं वो तो करंट बना ही रहे हैं लेकिन कुछ जो यहां पहुंच नहीं रहे थे इसका
पोटेंशियल और पॉजिटिव करने से उन पे अट्रैक्शन ज्यादा लगा जो यहां इधर-उधर गिर रहे थे वो भी वहां पहुंचने लग गए हैं। वो
भी अब वहां पहुंचने लग गए हैं। इसका मतलब कुछ की एनर्जी इतनी कम थी कि वो बेचारे यहां तक पहुंच ही नहीं पा रहे थे। इससे
पहले ही रुक जाते थे रास्ते में। तो उसने क्या अट्रैक्शन बढ़ा दिया तो वो भी वहां पहुंचने लग गए। तो ये स्टेटमेंट भी आपका
ट्रू है। ठीक? तो यहां से ये पता चला कि डिफरेंट एनर्जी के साथ होते हैं जो इलेक्ट्रॉन निकलते हैं। चलिए नेक्स्ट
पॉइंट की बात करते हैं। ये वाला। ठीक? ये कह रहा है ये वाला पॉइंट कह रहा है कि आफ्टर अ सर्टेन एनोड पोटेंशियल देखो।
आफ्टर अ सर्टेन एनोड पोटेंशियल करंट एक्वायर्स अ कॉन्स्टेंट वैल्यू कॉल्ड सैचुरेशन करंट। इसको क्या बोलते हैं?
कॉल्ड सैचुरेशन करंट। एक सर्टेन एनोड पोटेंशियल के बाद सैचुरेशन करंट आ जाती है। बिल्कुल। दिस इज़ बिकॉज़ द
नंबर ऑफ इलेक्ट्रॉन्स एमिटेड। नंबर ऑफ इलेक्ट्रॉन्स एमिटेड पर सेकंड फ्रॉम कैथोड आर फिक्स्ड।
यह भाई बहुत बड़ी बात है। बहुत बड़ी बात है। यह क्या बताता है हमें? ठीक है? ये भी ट्रू है। ये भी ट्रू है। ये
क्या बताता है? ये बताता है कि ये जो प्लेट है, ठीक है ना? यहां तो मैं हॉरिजॉन्टल बना रहा हूं। एक्चुअल में ये
आपकी कैथोड प्लेट है। ये आपकी कौन सी प्लेट है? कैथोड प्लेट यही तो है। इस पे रेडिएशन गिरता है ऐसे। ओके? और यहां से
इलेक्ट्रॉन निकलते हैं। तो वो ये कह रहा है कि भाई आफ्टर सर्टेन एनोड पोटेंशियल जब आप एनोड के पोटेंशियल को बढ़ा देते हो
यानी कि पॉजिटिव कर देते हो तो जो करंट है जो करंट है वो एक सैचुरेशन वैल्यू पे चली जाती है। ऐसे ही उसके बाद करंट बढ़ती नहीं
है। भाई क्यों नहीं बढ़ रही है? जब हमने इसको अट्रैक्शन बढ़ा दिया। इसका पॉजिटिव और पॉजिटिव कर दिया। इसके नेगेटिव को और
नेगेटिव कर दिया। तो करंट बढ़ क्यों नहीं रही है? इसका मतलब ये हुआ कि अब और इलेक्ट्रॉन नहीं है। जितने इलेक्ट्रॉन
पहुंचने थे वो सारे पहुंच गए। अब चाहे आप कितना कितना भी पोटेंशियल बढ़ा दो जब इधर और ज्यादा इलेक्ट्रॉन पैदा ही नहीं हो रहे
हैं तो वहां पहुंचेगा कौन? इसका मतलब यहां पर जितने इलेक्ट्रॉन्स पैदा हो रहे हैं, जनरेट हो रहे हैं यानी
कि प्रोड्यूस हो रहे हैं या आप कह सकते हो रेडिएशन गिरने से फ्री हो रहे हैं। वो फिक्स्ड हैं।
वो फिक्स्ड हैं। अब करंट कम क्यों थी? क्योंकि वो भाई वहां पहुंच नहीं पा रहे थे। पर हैं फिक्स्ड। फिक्स हो के मतलब
फ्री हो के प्रोड्यूस हो के यहीं पड़े हुए थे। इधर गिर जाते थे। कुछ भी हो जाता था पर वहां नहीं पहुंच पा रहे थे। जैसे ही
आपने इसको पॉजिटिव कर दिया वो पहुंचने शुरू हो गए। अब एक दो वो जो और भी कमजोर थे। थोड़ा और पॉजिटिव कर दिया वो भी
पहुंच। अब जो सबसे कमजोर है वो भी वहां पहुंच रहा है। ठीक? अब कोई बचा ही नहीं है। तो आप कितना भी ज्यादा कितना भी
ज्यादा कर लो वो पहुंचेंगे ही नहीं वहां पे। जितने हैं सारे पहुंच गए। अब कौन बचा है? इसका मतलब जो इलेक्ट्रॉन वहां डेवलप
हो रहे हैं वो फिक्स्ड हैं। इसका मतलब तो ये हुआ भाई कि इस वोल्टेज के डिफरेंस का ये जो वोल्टेज का डिफरेंस है डेल्टाV इसका
और इस पे कितने इलेक्ट्रॉन प्रोड्यूस होते हैं कोई लेना देना नहीं है। यानी कि ये वाली वोल्टेज तो इलेक्ट्रॉनों को पैदा
करने में, जनरेट करने में यानी कि ये वाली वोल्टेज तो फोटोइिक इफेक्ट में कोई कंट्रीब्यूशन ही नहीं देती है। इस पे तो
फोटोइिक इफेक्ट डिपेंड ही नहीं करता। इस वोल्टेज पे तो फोटोइिक इफेक्ट डिपेंड ही नहीं करता। क्योंकि यह कितनी भी बढ़ा लो
आप वो पैदा होने पे कोई फर्क नहीं। वो जितने प्रोड्यूस हो रहे हैं उतने ही हो रहे हैं। इसको कितना भी कम कर लो तब भी
उतने ही प्रोड्यूस होंगे। तो भाई इससे इंडिपेंडेंट हो गया। इससे इंडिपेंडेंट हो गया फोटोइिक इफेक्ट।
राइट? नेक्स्ट पॉइंट देखो। ठीक? नेक्स्ट पॉइंट देखो। नेक्स्ट पॉइंट क्या कहता है आपको? नेक्स्ट पॉइंट यह कहता
है कि देखो इफ लाइट ऑफ सेम फ्रीक्वेंसी इज यूज्ड या एक
और पॉइंट है। इससे पहले वो बताना चाहिए मुझे। यह वाला पॉइंट।
ठीक है ना? यह वाला पॉइंट इससे पहले बताऊंगा मैं। यह वाला पॉइंट क्या कहता है
भाई? ये वाला पॉइंट ये कहता है कि एट अ सर्टेन नेगेटिव पोटेंशियल किसकी बात कर रहा है? सर्टेन नेगेटिव पोटेंशियल की बात
कर रहा है। द फोटो इलेक्ट्रिक करंट बिकम्स ज़ीरो। फोटोइिक करंट्स बिकम ज़ीरो। हो रही है ना
ज़ीरो? देखो एट अ सर्टेन नेगेटिव पोटेंशियल ये करंट ज़ीरो हो रही है यहां पे। देखो ये करंट क्या हो रही है? ज़ीरो हो रही है।
सर्टेन नेगेटिव पोटेंशियल पे ये ज़ीरो हो रही है। ओके? ठीक है ना? सर्टेन नेगेटिव पोटेंशियल करंट बिकम्स ज़ीरो। ओके? दिस इज़
कॉल्ड स्टॉपिंग पोटेंशियल और कट ऑफ पोटेंशियल। दिस स्टॉपिंग पोटेंशियल इज़ अ मेजर ऑफ़ मैक्सिमम काइनेटिक एनर्जी। ये
वर्ड जो है ना बहुत इंपॉर्टेंट है मैक्सिमम काइनेटिक एनर्जी ऑफ द एमिटेड इलेक्ट्रॉन्स कि भाई ये जो स्टॉपिंग
पोटेंशियल है कौन सा ये v नॉट कौन सा माइनस का v नॉट ठीक तो इसके मैग्नीट्यूड की बात करेंगे हम यहां पे ठीक भाई सबको
पता है कि ये पोटेंशियल नेगेटिव है हां नेगेटिव है ये पोटेंशियल पर इसको फिर भी v नॉट बोला जाएगा इसका मैग्नीट्यूड बोलेंगे
बस हम क्या बोलेंगे इसका मैग भाई बैटरी तो मान लो 10 वोल्ट की है अगर आप ऐसे ऐसे लगा रहे हो तो पॉजिटिव है। उसको ऐसे लगा दो तो
वही नेगेटिव माइनस का 10 वोल्ट हो जाता है। भाई बैटरी तो 10 वोल्ट की है। आपकी मर्जी आप इसको ऐसे लगाओ या ऐसे लगाओ। अगर
आप यहां पॉजिटिव यहां नेगेटिव लगा रहे हो तो मान लो पॉजिटिव 10 लिख रहे हो। इसको ऐसे लगा दोगे तो नेगेटिव 10 लिखोगे। भाई
बैटरी पे क्या फर्क पड़ रहा है? बैटरी तो 10 वोल्ट की बोली जाएगी। तो पोटेंशियल भले ही नेगेटिव है पर पोटेंशियल तो उतना ही
बोला जाएगा ना। स्केलर क्वांटिटी है वो। उसकी सेहत पे फर्क नहीं पड़ता। आप किधर क्या कर रहे हो? ठीक? तो वो पोटेंशियल का
मैग्नीट्यूड ही बोला जाएगा। तो वो ये कह रहा है कि एट अ सर्टेन नेगेटिव पोटेंशियल द फोटो करंट बिकम्स ज़ीरो। इस ज़ीरो
पोटेंशियल पे फोटो करंट ज़ीरो हो गई। यानी कि यानी कि यहां से यहां जो ये कैथोड था ना और जो ये एनोड था जो यहां से
इलेक्ट्रॉन निकल के भाग के वहां पहुंच रहा था। ठीक? उसको रोकना शुरू कर दिया हमने भाई।
इसको नेगेटिव पोटेंशियल दे दिया। इसको पॉजिटिव दे दिया। कैथोड को कभी पॉजिटिव मिलता नहीं है। आज इसको पॉजिटिव दे रहे
हैं हम। और एनोड बेचारा हमेशा पॉजिटिव रहता है। इसको अब नेगेटिव दे रहे हैं। टाइम देख लो। समय है। एनालाइज कर रहे हैं।
हर एक का समय बदलता है। कोई कहीं होता है कहीं पहुंच जाता है। ठीक है? और कोई कहीं होता है कहीं पहुंच जाता है। आज इनका समय
ठीक नहीं चल रहा है। तो इसका नेगेटिव और इसको पॉजिटिव देते हैं। तो यहां से एक इलेक्ट्रॉन निकला।
ठीक है ना? पूरी एनर्जी के साथ गया। जैसे-जैसे वो ऐसे जा रहा है ना यूं यूं जा रहा है। अब आप देखो इसका पॉजिटिव
पोटेंशियल है। इसका नेगेटिव पोटेंशियल है। तो इलेक्ट्रिक फील्ड तो भाई इधर होगा। बिल्कुल सर। और अगर इलेक्ट्रिक फील्ड इधर
होगा तो जो ये इलेक्ट्रॉन भागा जा रहा है ना ये ये जो इलेक्ट्रॉन है इस पे भाई फोर्स इस तरफ होगा। बिल्कुल सर भाई
इलेक्ट्रॉन पे तो फोर्स उल्टा लगता है ना फोर्स इस तरफ होगा। तो भाई इलेक्ट्रॉन इधर जाते-जाते स्लो हो जाएगा। इधर जाते-जाते
स्लो होता रहेगा। अगर स्लो होते ये इलेक्ट्रॉन यहां पे रुक गया। इसकी वेलोसिटी कितनी हो गई? ज़ीरो। तो रुक के
यहां गिर नहीं जाएगा। ये वाली प्लेट इसको वापस खींच लेगी कि तू तो अब वापस आजा। रुक गया ना तू? आजा वापस तो इसको वापस खींच
लेगी। तो ये वहां नहीं पहुंचा। लेकिन अभी भी जो बहुत स्ट्रांग था जो इससे ज्यादा वेलोसिटी से चल रहा था। तो वो ऐसे
चलते-चलते स्लो हो रहा है। ऐसे चलते-चलते स्लो हो रहा है। यानी कि उसकी काइनेटिक एनर्जी डिक्रीज हो रही है। लेकिन यहां से
वो थोड़ी ज्यादा वेलोसिटी के साथ निकला था। तो वो पहुंच गया। अगर वह पहुंच गया तो उसने थोड़ी सी करंट बना दी। थोड़ी सी करंट
बना दी। अब इनको फिर पता चला कि अच्छा इलेक्ट्रॉन पहुंच रहे हैं। करंट आ रही है। इसको और नेगेटिव बना दिया और इसको और
पॉजिटिव बना दिया। तो जो सबसे स्ट्रांग इलेक्ट्रॉन था वो यहां से कूद के निकला कि मैं देखता हूं कौन रोकता है मुझे वहां
पहुंचने से। एक तो ये जो पॉजिटिव है लगातार इसको खींचे जा रहा है और ये जो नेगेटिव है लगातार इसको रिपेल किए जा रहा
है। तो अब ये सबसे स्ट्रांगेस्ट है। स्ट्रांगेस्ट इलेक्ट्रॉन है। तो ये ऐसे चलते जा रहा है। चलते जा रहा है। चलते जा
रहा है। स्लो होता जा रहा है। ये भी बस यहां पहुंचने ही वाला था। पहुंचने से जस्ट पहले इसकी वेलोसिटी हो गई ज़ीरो। पहुंचने
से जस्ट पहले इसकी वेलोसिटी कितनी हो गई? ज़ीरो। और ये भी भाई वापस आ गया। लो भाई अब करंट ज़ीरो हो गई। अब करंट नहीं जा रही। अब
तो एक भी नहीं पहुंच रहा वहां पे। जो सबसे स्ट्रांग था वह भी नहीं पहुंच रहा। ठीक? वो भी बिल्कुल वहां पहुंच के बिल्कुल
एंड पे पहुंच के वापस आ गया। क्लियर? और जो इससे सबसे स्ट्रांगेस्ट तो वही होगा ना जो एंड पे पहुंच के वापस आएगा। जो इससे
वीक है वो तो पहले ही वापस चले गए। और वीक वाले और पहले ही वापस चले गए। तो सबसे स्ट्रांगेस्ट इलेक्ट्रॉन वही होगा जो
बिल्कुल वहां पहुंचने से पहले रुका है। अब इस फिलॉसफी को समझो क्या है ये? तो भाई जो सबसे स्ट्रांगेस्ट इलेक्ट्रॉन है जो वहां
तक पहुंच पाया उसकी काइनेटिक एनर्जी क्या है? मैक्सिमम है। बिल्कुल। अब जैसे-जैसे यह इधर चलता है तो नेगेटिव चार्ज
इलेक्ट्रिक फील्ड के अपोजिट फोर्स फील करता है और यह फोर्स के अपोजिट चल रहा है। और जब भी पार्टिकल फोर्स के अपोजिट चलता
है उसकी पोटेंशियल एनर्जी इनक्रीज होती है। तो भाई, ऐसे चलते-चलते काइनेटिक एनर्जी डिक्रीज हो रही है। ठीक है ना?
काइनेटिक एनर्जी डिक्रीज हो रही है ऐसे चलने से और पोटेंशियल एनर्जी इनक्रीज हो रही है। तो यहां पे उसकी काइनेटिक एनर्जी
इतनी थी। और वो वहां पहुंच के कितनी हो गई है? जीरो। तो सारी की सारी काइनेटिक एनर्जी किस में बदल चुकी है? पोटेंशियल
एनर्जी में। और पोटेंशियल एनर्जी क्या होती है? पोटेंशियल एनर्जी होती है भाई q * डेल्टाV ये होती है पोटेंशियल एनर्जी। q
कितना है? e है। और यहां से यहां तक का पोटेंशियल का डिफरेंस कितना है? v नॉट है। ये लो हो गया। काइनेटिक एनर्जी मैक्सिमम
इक्वल टू पोटेंशियल एनर्जी। यानी के यानी के काइनेटिक एनर्जी की जो मैक्सिमम वैल्यू है दैट इज इक्वल टू E * v नॉट। तो यही तो
बात बताई जा रही थी। यही तो बात बताई जा रही थी। मेजर ऑफ़ मैक्सिमम काइनेटिक एनर्जी ऑफ़ द एमिटेड इलेक्ट्रॉन। तो अगर इस
स्टॉपिंग पोटेंशियल में आप E की मल्टीप्लाई कर देते हो तो जो मैक्सिमम काइनेटिक एनर्जी है किसी इलेक्ट्रॉन की वो
निकल आती है। चलिए सर बात समझ में आ गई। ठीक है? बात समझ में आ गई? ठीक है? अब यहां पे आते
हैं। ठीक? ये जैसे-जैसे आप पोटेंशियल को बढ़ाते जाओगे। देखो पॉजिटिव करते जा रहे हो। यानी कि एनोड का पोटेंशियल बढ़ाते जा
रहे हो। तो इलेक्ट्रॉन को और खींचना शुरू कर देता है तो वो इलेक्ट्रॉन को और एक्सीलरेटिंग कर देता है। तो एक्सीलरेटेड
पोटेंशियल है ये जो एक्सीलरेट करता है और अगर आप पोटेंशियल को नेगेटिव करते जा रहे हो तो ये आपका डीएक्सलरेटिंग
पोटेंशियल है इधर वाला। तो इधर वाला पोटेंशियल डी एक्सीलरेट करने वाला है। इधर वाला एक्सीलरेट करने वाला है। इस
पोटेंशियल पे आके रुक जाते हैं। ठीक है ना? करंट जीरो हो जाती है। अब भाई किसी ने पूछा कि सर ठीक है। आप बता रहे हो कि यहां
से आने वाला जो सबसे स्ट्रांगेस्ट इलेक्ट्रॉन है यहां जा के वापस चला जाता है। ठीक? लेकिन आपने पहले ही बोला है कि
जब हम वोल्टेज को देखते हैं तो इसकी इंटेंसिटी और इसकी फ्रीक्वेंसी को कांस्टेंट रखते
हैं। बिल्कुल कि सर अगर सर अगर हम इंटेंसिटी को कांस्टेंट ना रखें
या कांस्टेंट ही रखें पर दूसरा एक्सपेरिमेंट करें सेम रेडिएशन का अगर मैं इंटेंसिटी थोड़ी कम लेके
इंटेंसिटी को थोड़ा कम लूं तो कैसा ग्राफ आएगा? ठीक है? इंटेंसिटी को थोड़ा कम लूं अगर तो ग्राफ कैसा आएगा? ठीक है? सुनना
बात को ध्यान से। तो अगर इंटेंसिटी को थोड़ा कम लेते हैं हम यानी कि कौन सी इंटेंसिटी फ्रीक्वेंसी वही रखनी है।
फ्रीक्वेंसी को नहीं छेड़ना। बस अगर पहले 200 वेव्स गिरा रहे थे तो अब मान लो 150 गिरा रहे हो तो ग्राफ कैसा आएगा? अब ग्राफ
कैसा आएगा? तो भाई ग्राफ कैसा आएगा? अब ग्राफ वापस यहीं से शुरू होगा और बस थोड़ा नीचे आ जाएगा। लो इंटेंसिटी का ग्राफ और
कोई फर्क नहीं पड़ेगा। अब यह यह नई बात पता चली हमें कि भाई यह क्या हो गया? तो भाई इससे हमें यह पता चला कि अगर
इंटेंसिटी आपने कम कर दी। क्या कर दी? कम कर दी इंटेंसिटी। इंटेंसिटी कम डिक्रीज कर दी तो सैचुरेशन करंट थोड़ी कम हो जाएगी।
यानी के लेकिन स्टॉपिंग पोटेंशियल सेम रहेगा। स्टॉपिंग पोटेंशियल सेम रहेगा। ये स्टॉपिंग पोटेंशियल सेम रहेगा तो I कम
तो इससे V नॉट सेम रहता है। अच्छा भाई इससे क्या पता चलता है? अगर स्टॉपिंग पोटेंशियल सेम रहता है। ग्राफ तो ऐसा हो
गया स्टॉपिंग पोटेंशियल सेम रहता है तो क्या पता चलता है? भाई इससे ये पता चलता है कि स्टॉपिंग पोटेंशियल इंटेंसिटी से
इंडिपेंडेंट है। यानी के जो यहां से इलेक्ट्रॉन निकल रहे हैं उनकी काइनेटिक एनर्जी इंटेंसिटी से इंडिपेंडेंट है।
इंटेंसिटी का कुछ फर्क नहीं पड़ता। मतलब क्या हुआ इस बात का? इस बात का जो मतलब हुआ, ठीक है ना? वह मैं अभी बता रहा हूं
आपको बस। वही बताना था मुझे। ये वाला ये ठीक है ये वाला पॉइंट देखो इफ लाइट ऑफ सेम फ्रीक्वेंसी इज यूज्ड एट हायर
इंटेंसिटी मतलब मैंने लो करके बता दी ये कह रहा है कि अगर बढ़ा दी जाए अगर बढ़ा दी जाए द वैल्यू ऑफ़ सैचुरेशन करंट इज़ फाउंड
टू बी ग्रेटर डेफिनेटली देखो भाई इंटेंसिटी कम लोगे तो सैचुरेशन करंट कम हो जाएगी इंटेंसिटी ज्यादा लोगे तो सैचुरेशन
करंट ज्यादा हो जाएगी। ये बात तो ठीक है। ठीक? बट द स्टॉपिंग पोटेंशियल रिमेंस द सेम। स्टॉपिंग पोटेंशियल सेम रहता है।
ओके? अब सो द स्टॉपिंग पोटेंशियल इज़ इंडिपेंडेंट ऑफ इंटेंसिटी ऑफ़ इंसिडेंट लाइट ऑफ सेम फ्रीक्वेंसी। भाई ये जो वर्ड
लिखा गया है ना, ठीक है ना? ऑफ़ सेम फ्रीक्वेंसी। ये बहुत इंपॉर्टेंट है। यही आगे चल के आपको एक एडवांस का सवाल
करवाएगा। इस बात को ध्यान से सुनना है आपको के स्टॉपिंग पोटेंशियल जो है इज़ इंडिपेंडेंट
ऑफ इंटेंसिटी। अगर आप यहीं पे यहीं पे रोक दोगे ना सेंटेंस को कि स्टॉपिंग पोटेंशियल इज़ इंडिपेंडेंट ऑफ इंटेंसिटी। तो गलत हो
जाएगा। ठीक है ना? यह गलत भी हो सकता है, सही भी हो सकता है। इसका कुछ भरोसा नहीं है। यह पूरा है ही नहीं सेंटेंस। लेकिन
अगर आप इसको पूरा लिखते हो यहां तक ये तो ये ट्रू हो जाएगा। अब ये ट्रू हो जाएगा। क्योंकि भाई
इंटेंसिटी ऑफ़ इंसिडेंट लाइट ऑफ सेम फ्रीक्वेंसी। अगर ये सेम फ्रीक्वेंसी हटा दो ना आप तो ये स्टेटमेंट फॉल्स है। ट्रू
भी हो सकता है, फॉल्स भी हो सकता है। पूरा ही नहीं है ये। क्यों? क्योंकि ये बोल रहा है कि स्टॉपिंग पोटेंशियल इंटेंसिटी से
इंडिपेंडेंट है। लेकिन किस इंटेंसिटी से? ऑफ सेम फ्रीक्वेंसी। लेकिन अगर आप इंटेंसिटी वेरीरी कराते हो और फ्रीक्वेंसी
बढ़ा देते हो तो भाई स्टॉपिंग पोटेंशियल भी बढ़ जाएगा। तो इसलिए ये वाली चीज इसमें ऐड करनी मस्ट है। ऑफ सेम फ्रीक्वेंसी। ये
वाला वर्ड इसमें ऐड करना मस्ट है। राइट? क्या ये बात समझ में आ रही है? बिल्कुल क्लियर समझा रहा हूं आपको। एकदम साफ-साफ।
ओके। चलो भाई। तो ये वाली बातें जो थी जो हमने अभी की है यहां पे और ये आपको जो मैंने समझाई है चीजें। ठीक है ना? ये भाई
पूरी हो गई। फोटोइिक इफेक्ट की बातें पूरी हो गई। बहुत बढ़िया बात। अब क्या होता है? अब बात आती है कि भाई जब ये फोटोइिक
इफेक्ट की बातें चल रही थी। लोगों को समझाया गया। पेपर पब्लिश हुए खूब सारे जो ये किसने की? ये प्लैंक साहब ने की।
प्लैंक एंड हर्ज प्लैंक और हर्ज साहब ने ये एक्सपेरिमेंट किए और ये सारी बातें उन्होंने की। तो भाई
उनसे सवाल उठने लग गए। क्या लोगों को दिक्कतें होने लग गई इसमें कि ये एक्सपेरिमेंट सर आप कर तो रहे हो। ठीक है
ना? इसमें बहुत सारी दिक्कतें हैं। कौन सी? कौन सी दिक्कतें हैं? तो भाई वो दिक्कतें जो हैं जो प्रॉब्लम्स हैं इसमें
वो मैं अभी आपको एक्सप्लेन करूंगा ताकि वो प्रॉब्लम आपको पूरी समझ में आए। ठीक है ना? इसलिए उससे पहले एक पॉइंट और जरूरी है
कि पहले फ्रीक्वेंसी को समझ लिया जाए। ठीक है ना? हम थोड़ी देर में होशियार बनेंगे। चौधरी बनेंगे हम। सॉरी ज्यादा इंटेलिजेंट
बन के दिखाएंगे। लेकिन उससे पहले एक टर्म समझ में आनी चाहिए हमें। इफेक्ट ऑफ इफेक्ट ऑफ फ्रीक्वेंसी
के फ्रीक्वेंसी का क्या इफेक्ट पड़ता है? तो भाई यहां पे अगर मैं ये वाला डायग्राम लूं तो यहां पे ये जो विंडो से रेडिएशन आ
रहा है ना ये वाला रेडिएशन अभी तक तो क्या था बिल्कुल बंदिश लगी हुई थी कि फ्रीक्वेंसी नहीं हिलानी है आपको। आप
इंटेंसिटी कम ज्यादा कर लो कर लो। कोई दिक्कत नहीं है। दो-दो ग्राफ मिल गए आपको। इंटेंसिटी कम की तो ऐसा इंटेंसिटी बढ़ाओगे
तो इससे ऊपर जाएगा ग्राफ कोई दिक्कत नहीं है बना लो लेकिन फ्रीक्वेंसी नहीं हिलानी अब बोल रहे हैं कि अगर फ्रीक्वेंसी हिलाई
तो क्या होगा अगर फ्रीक्वेंसी को कम ज्यादा किया तो क्या होगा तो भाई यहां पे जब हमने इसकी फ्रीक्वेंसी को कम ज्यादा
करने की ट्राई की ठीक है ना फ्रीक्वेंसी मतलब न्यू को कम ज्यादा करने की ट्राई की तो स्टॉपिंग
पोटेंशियल ही बदल गया अच्छा जी कैसा अब देखो अब तब तक स्टॉपिंग पोटेंशियल कांस्टेंट चल रहा था। कोई दिक्कत नहीं थी।
लेकिन अब अगर स्टॉपिंग पोटेंशियल ही बदल गया। ठीक है? तो भाई उसका ग्राफ कैसा बना वो देखना आप। तो भाई
इस एक्सिस पे हम स्टॉपिंग पोटेंशियल प्लॉट कर रहे हैं। और ये ज़ीरो ज़ीरो है। अब कुछ लोग कहेंगे सर स्टॉपिंग पोटेंशियल
तो नेगेटिव होता है। उसे तो नीचे की तरफ प्लॉट करो। भाई ये मैग्नीट्यूड है। समझो बात को। वो मैग्नीट्यूड है। कंफ्यूज होने
की जरूरत ही नहीं है। अच्छा। अब इस एक्सिस पे इस एक्सिस पे हम फ्रीक्वेंसी प्लॉट कर रहे हैं।
ठीक है ना? कुछ लोग कहेंगे सर यहां तो हमने लैम्ब्डा देखा है। भाई लैम्ब्डा भी देखा होगा। कौन सा बड़ी बात है? इस तरफ इस
तरफ फ्रीक्वेंसी इनक्रीज हो रही है। अगर आप इसमें लैम्ब्डा को प्लॉट करोगे तो इस तरफ लैम्ब्डा डिक्रीज होगा। क्यों?
क्योंकि C तो कांस्टेंट है और लैम्ब्डा * फ्रीक्वेंसी अगर इस तरफ चलने से फ्रीक्वेंसी इंक्रीज हो रही है तो इस तरफ
चलने से लैम्ब्डा डिक्रीज होगा। तो आपने लैम्ब्डा में भी देखा होगा। मैं मना नहीं कर रहा हूं। तो लैम्ब्डा के साथ भी ये
ग्राफ बनता है। ठीक? तो इसमें देखा गया कि भाई फोटोइिक इफेक्ट जब हुआ तो फ्रीक्वेंसी हमने काफी ज्यादा ली ऐसे और काफी सारा
आपका स्टॉपिंग पोटेंशियल आया। फिर भाई फ्रीक्वेंसी को कम किया गया। तो स्टॉपिंग पोटेंशियल भी कम हो गया। ठीक है ना?
फ्रीक्वेंसी को फिर और कम किया गया। स्टॉपिंग पोटेंशियल और कम हो गया। फिर फ्रीक्वेंसी को और कम किया गया। ठीक?
स्टॉपिंग पोटेंशियल जीरो हो गया। उसके बाद फ्रीक्वेंसी को और कम किया। भाई स्टॉपिंग पोटेंशियल की जरूरत ही नहीं
पड़ी। वो ज़ीरो ही हो गया पहले ही। ठीक? तो यहां पे हमने देखा कि भाई ये जो ग्राफ है हमारा ये वाला जो ग्राफ है हमारा ये थोड़ा
अजीब आया है। ये यहां से शुरू हो के ऐसे आ रहा है। यूं आ रहा है यह ग्राफ। ठीक? तो बाद में सोचा गया कि यार इस ग्राफ
का ऐसा क्या मतलब हुआ है? ये तो यहीं पे एंड हो गया। ये तो यहां पे एंड हो गया। इससे आगे ग्राफ ही नहीं है। अब यहां पे
देखा जाए तो अगर हमने इस फ्रीक्वेंसी की बात की है थोड़ी सी ज्यादा फ्रीक्वेंसी की तो यहां पे स्टॉपिंग पोटेंशियल ये आया है।
फिर फ्रीक्वेंसी को हमने और बढ़ाया तो उसी रेश्यो में स्टॉपिंग पोटेंशियल भी बढ़ गया। फिर फ्रीक्वेंसी को हमने और बढ़ाया
तो स्टॉपिंग पोटेंशियल और बढ़ गया। लेकिन जब स्टॉपिंग उसको फ्रीक्वेंसी को कम कर रहे हैं तो एक फ्रीक्वेंसी ऐसी है उससे कम
आप कितनी भी फ्रीक्वेंसी कर लो यहीं पे स्टॉपिंग पोटेंशियल ज़ीरो हो गया। स्टॉपिंग पोटेंशियल यहीं पे ज़ीरो हो गया और उसके
बाद ज़ीरो ही है। जीरो स्टॉपिंग पोटेंशियल का मतलब क्या हुआ? जीरो स्टॉपिंग पोटेंशियल का मतलब ये हुआ
कि कुछ स्टॉप ही नहीं करना। भाई जब कुछ चल ही नहीं रहा है तो किसे स्टॉप करोगे? नो नीड ऑफ़ स्टॉपिंग पोटेंशियल। स्टॉप करने को
कुछ है ही नहीं। यानी के इस ग्राफ से पता चला कि अगर इससे कम आपने फ्रीक्वेंसी ली तो कुछ स्टॉप करने के लिए होगा ही नहीं।
इसका मतलब इस प्लेट पे से इस प्लेट पे से यहां पे अगर यहां से आने वाले रेडिएशन का जो फ्रीक्वेंसी है, अगर वह आपने इस
फ्रीक्वेंसी से कम ली तो कुछ नहीं होगा। रेडिएशन खत्म कुछ नहीं होगा। कोई फोटोइिक इफेक्ट ही नहीं होगा यहां पर।
अब यह आते ही सबके पैरों के नीचे जमीन खिसक गई कि भाई यह क्या हो गया? ये तो गड़बड़ हो गई। क्यों? क्योंकि भाई अगर
कहीं पे एनर्जी आ रही है, आ रही है। यहां से इलेक्ट्रॉन को निकलना था। यहां से इलेक्ट्रॉन को निकलना था। हम एक्सपेक्ट
करते हैं यहां से निकलेगा। ठीक? अब घंटे हो गए। दो-ती घंटे हो गए बैठे हुए। पूरा दिन हो गया। एक इलेक्ट्रॉन नहीं निकल रहा।
एक इलेक्ट्रॉन नहीं निकल के दे रहा। पूरा दिन हो गया, घंटे हो गए। मतलब डज़ बीत गए रेडिएशन को गिरते-गिरते एक इलेक्ट्रॉन
नहीं निकला। क्यों? क्यों नहीं हुआ ऐसा? इसका मतलब तो ये है भाई कि यहां से जो इलेक्ट्रॉन निकलता है उसको निकलने के लिए
एक मिनिमम एनर्जी चाहिए होती है। उससे कम एनर्जी दोगे तो निकलेगा ही नहीं। अब इस पर तो दिक्कत हो गई। कुछ लोगों को ऐतराज
होगा। क्यों? क्यों? क्योंकि भाई हो सकता है इलेक्ट्रॉन ऐसा कटोरा लेके बैठा हो तो
जैसे-जैसे रेडिएशन आ रहा है उसके पास एनर्जी इकट्ठा होती जाएगी। एक टाइम बाद ये कटोरा उसका भर जाएगा। ठीक? ये कटोरा उसका
भर जाएगा और उसको तो निकल लेना चाहिए। भाई रेडिएशन आ रहा है उधर से ऐसे आए जा रहा है। आए जा रहा है। यहां इलेक्ट्रॉन है।
हमें पता है इलेक्ट्रॉन इतनी एनर्जी के बाद ही निकलेगा। तो ठीक है भाई इकट्ठा कर लेना एनर्जी को। आजा आजा ऐसे करके इकट्ठा
हो जा। एक टाइम पे उसकी एनर्जी हो जाएगी। ठीक? तो उसको निकल लेना चाहिए। पर वो निकल नहीं रहा है। क्यों? क्यों हो रहा है ऐसे?
क्या इलेक्ट्रॉन कटोरा लेके नहीं बैठा? क्या है ऐसा? तो वो बहुत बड़ी बातें हो गई। दूसरी चीज यहां से एक चीज और हुई। एक
चीज और हुई कि चलो भाई हमें यह पता चल गया कि अगर इस थ्रेशहोल्ड फ्रिक इसका नाम हो इसको फिर चलो। कुछ लोग बोल रहे हैं
थ्रेशहोल्ड फ्रीक्वेंसी। इसको बोल देते हैं थ्रेशहोल्ड फ्रीक्वेंसी। ठीक है? तो, यह एक ऐसी
फ्रीक्वेंसी है। इससे कम किया, तो फोटोइिक इफ़ेक्ट नहीं होगा। अब मान लो हम तो चाहते हैं कि फोटोइिक इफ़ेक्ट हो। तो, भाई, इससे
फ्रीक्वेंसी ज्यादा ले ली। ज्यादा फ्रीक्वेंसी ले ली। चलो, अगर आपने ज्यादा फ्रीक्वेंसी ले ली, तो ये रेडिएशन यहां
गिरा और इसने इलेक्ट्रॉन को खटाक से निकाल दिया। ठीक? अब क्या होता है? कुछ लोग इतने तगड़े एनालाइजर होते हैं। उन्होंने कहा कि
यार ये रेडिएशन जो गिरता है बिल्कुल टाइम का डिले ही नहीं है। तुरंत तुरंत तुरंत एकदम यानी कि t < 10 टू दी पावर -8
सेकंड। तुरंत का मतलब साइंस में क्या होता है? अगर साइंस में आप तुरंत बोल रहे हो तो उसका मतलब होता है कि आपने जो टाइम लिया
है वह 10 टू दी पावर -8 सेकंड से कम है। यानी कि यह जो रेडिएशन निकल के भागता है, जो इलेक्ट्रॉन निकल के भागता है, वह तुरंत
भागता है। कोई टाइम का डिले ही नहीं होता। नो टाइम डिले। क्यों भाई? ऐसा क्यों है? इलेक्ट्रॉन एकदम
से क्यों भागता है? कौन सा कौन सा चक्कर हो गया कि वो डिले नहीं करता? तो ये सारे क्वेश्चन आए। ठीक है ना? ये सारी बातें
हुई कि भाई ये बताओ ये क्या है? ये क्यों हुआ? यह क्यों हुआ? तो ये बड़ी सारी दिक्कतें आई। ठीक? तो इन सबको जो साफ किया
वो किया फिर आइंस्टीन साहब ने। ठीक है? देखो बेटा 15 मिनट का टाइम और है। कितना टाइम लूंगा मैं? 15 मिनट। और उसके बाद
क्वेश्चन ही क्वेश्चन क्वेश्चन ही क्वेश्चन होंगे। ठीक है? क्वेश्चन ही क्वेश्चन होंगे। और इतने सवाल
होंगे कि आपका एक सवाल पक्का हो जाएगा। बस 15 मिनट मुझे और एक्सप्लेन करनी है चीजें। उसके बाद क्वेश्चन ही क्वेश्चन होंगे
क्योंकि भाई फिर मैं क्वेश्चन एकदम धड़ाधड़ कराऊंगा। कोई एक भी बात ऐसी नहीं होगी जो आपको पता ना हो। ठीक? तो भाई ये
सारी समस्याएं हो गई। कौन-कौन सी कि वो यही क्यों चाहिए? एक तो ये कि भाई ऐसा क्यों है? ऊपर से टाइम डिले क्यों नहीं हो
रहा? एकदम तुरंत क्यों हो रहा है? ये सारी बातें गड़बड़ हो गई। ठीक? तो इनकी इन बातों के जवाब प्लैंक साहब और हज साहब
नहीं दे पाए। ठीक है ना? तो क्या होता है? ये वाली बातें ले हम किसके पास गए? आइंस्टीन साहब के पास गए।
ठीक? आइंस्टीन। ये लो ये स्पेलिंग ही ऐसी है कि अभी मैंने कल परसों ही पढ़ाया है ये। तब भी मुझे शक हो रहा है।
आइंस्टींस एक्सप्लेनेशन। स्पेलिंग सही है क्या? ई आई एन एस टी ई आई एन। आइंस्टीन एक्सप्लेनेशन याद कैसे मतलब
इतने कॉम्प्लिकेटेड नाम क्यों रखते हैं लोग सीधे-सीधे रख लूं जॉन जॉनी राम रामू
अनिल कितने सीधे-सीधे नाम है रमेश आइंस्टीन
जितना इसके नाम की स्पेलिंग याद रखने में एफर्ट लगानी इतना चार फार्मूले याद हो जाए हमें
पप्पू पप्पू रख सकते हो आप आइंस्टीन आइंस्टीन
जैसे किसी के भाई चैलेंज है स्पेलिंग याद रख के दिखाओ और जो मतलब हिंदी भाषी हैं मेरे जैसे हिंदी मीडियम वाले उनके लिए तो
चैलेंज है ये स्पेलिंग्स याद रखना देखो आइंस्टीन एक्सप्लेनेशन तो आइंस्टीन साहब ने क्या किया इन समस्याओं का समाधान किया
और हमें बताया ठीक। अब सारी जिंदगी किसने? प्लैंक साहब ने और हर्ट साहब ने अपनी पूरी लाइफ लगा
दी। किस पे? इस फोटोइिक इफेक्ट पे। फोटोइिक इफेक्ट पे उन्होंने पूरी जिंदगी लगा दी। लेकिन आइंस्टीन साहब ने उसके बारे
में कुछ बातें बताई और इनको उस बात पे नोबेल प्राइज मिल गया। समझ रहे हो आप? और इन्होंने जिंदगी भर जो काम किया उस पे
इनको नोबेल प्राइज नहीं मिला। पर इन बेचारों की थ्योरी दोनों की इसके ऊपर थोड़ा सा ज्ञान देने से इनको नोबेल प्राइज
मिल गया। कैसे? इन्होंने क्या बताया? इन्होंने ये बताया कि देखो भाई जो ये रेडिएशन होता है ये जो रेडिएशन आता है
सबसे पहली चीज तो ये जो रेडिएशन है ये पार्टिकल नेचर का होता है। ठीक है? तो सबसे पहली बात तो इन्होंने यही
इंप्रेस करने वाली कर दी कि यह रेडिएशन जिसको आप तब से वेव समझ रहे हो, इसकी फ्रीक्वेंसी की बात कर रहे हो, इसके
लैम्ब्डा की बात कर रहे हो, कोई बात नहीं आप लोग भी सही हो। लेकिन रेडिएशन में पार्टिकल नेचर भी होती है। इसलिए ये एक
ड्यूल नेचर वाला फैक्टर है। ये ड्यूल नेचर वाली बात हो रही है। तो पहली बात तो यही। अब जब उन्होंने
पूरी कहानी बदल दी। भाई ये प्लैंक और हर्ट्स तो मतलब वेव समझ के काम करते रहे, करते रहे, लगे रहे, लगे रहे। ठीक है ना?
इनको आईडिया आते होंगे बीच में। लेकिन उन्होंने एकदम कहानी बदल दी कि भाई ये तो ये है। ठीक है ना? ठीक। मान लो कहीं आप
जाते हो और आपसे पूछा जाए कि सर ये समझ नहीं आ रहा। ये समझ नहीं आ रहा। ये ये वाला टॉपिक समझ नहीं आ रहा सर। और कोई
आपको बोल दे अरे ये तो सिलेबस में ही नहीं है। इसको तो पढ़ना ही नहीं है। तो आपकी तो दुनिया बदल जाती है कि यार मैंने तो इतना
समय खराब कर दिया। इन्होंने तो बोल दिया ये तो ये है। यानी इसके बजाय ये सिलेबस में है। ये पढ़ो और जो हम पढ़ रहे थे ठीक है
ना? कि ये सिलेबस में है। ठीक? और हम उसको सोच रहे हैं ये सिलेबस में है नहीं। तो हमारी तो दुनिया पलट जाती है ना ऐसे ही कि
लो भाई ये तो गड़बड़ हो गई। ये सब आना ही नहीं है। जिसकी टेंशन ले रखी है चारप दिन से रो रहे हैं हम। और जिसको ऐसे फेंक के
बैठे हैं उस पे सवाल आते हैं। तो इन्होंने वही कह दिया कि तुम जो रेडिएशन की बात कर रहे हो वो तो ड्यूल नेचर वो तो पार्टिकल
है। अच्छा भाई अब तो चुप बैठ के इसकी बात सुननी पड़ेगी। ठीक? तो इन्होंने कहा कि ये जो रेडिएशन आता है ये जितनी भी एनर्जी
लेके आता है उसमें से कुछ एनर्जी कुछ एनर्जी ये मेटल खाता है। कुछ एनर्जी ये मेटल खाता है। और जो एनर्जी खाता है वो
बेचारा ये ऐसे ही नहीं खा रहा है। इसकी मजबूरी है। उसको क्या बोलते हैं? वर्क फंक्शन बोलते
हैं। ठीक? वो एनर्जी खाता है और इसको फाई से डिनोट करते हैं कि वो एनर्जी ये खाता है और वो एनर्जी क्या होती है? इसको मेटल
से फ्री करने के लिए होती है। टू मेक इलेक्ट्रॉन फ्री फ्रॉम मेटल।
मेटल से फ्री करने के लिए एनर्जी। ठीक है ना? तो यह रिक्वायर्ड एनर्जी होती है जो मेटल से फ्री करने के लिए चाहिए
होती है कि वो एनर्जी ये खाता है और जहां बाकी बची हुई एनर्जी वो इसको काइनेटिक एनर्जी की फॉर्म में मिल जाती है। तो
इन्होंने बोला कि ये एनर्जी आएगी और इस एनर्जी में से वर्क फंक्शन वाली एनर्जी ये मेटल खाएगा और जो बाकी बची हुई एनर्जी है
वो काइनेटिक एनर्जी की फॉर्म में मिल जाएगी। ठीक? ये इक्वेशन देने से उनको नोबेल
प्राइज मिल गया। समझ रहे हो आप? नोबेल प्राइज। ये इक्वेशन ये हिसाब किताब बताने से समझ रहे हो? ठीक।
अब इस बात को फिर से सुनना। अब ये प्लैंक और हर्ट्स साहब जो कह रहे हैं कह रहे भाई हमारी मेहनत बेकार गई क्या? हम जो इतने
दिनों से कर रहे हैं वो बेकार है क्या? उसने कहा नहीं तुम्हारी मेहनत बेकार नहीं है। ठीक है ना? ऐसा नहीं है। तुम्हारी
मेहनत है। बहुत कुछ है और सब कुछ तुम्हारी मेहनत है। प्राइस अवार्ड तो मुझे मिल गया। कोई बात नहीं। मेहनत तुम्हारी है। उसको
मना नहीं करेंगे कि तुम ये जो एनर्जी बता रहे हो कि रेडिएशन जो आ रहा है इसकी एनर्जी को आप e * न्यू लिख सॉरी
h न्यू लिख दो। ये वाली एनर्जी है। इसको आप h न्यू लिख दो। ओके? इसमें से h न्यू नॉट कहां जाएगी? खर्च हो जाएगी। यह आपका
वर्क फंक्शन है और बाकी बची हुई एनर्जी क्या है? काइनेटिक एनर्जी है। तो जो इलेक्ट्रॉन काइनेटिक एनर्जी लेके निकलेगा
उसके पास कितनी काइनेटिक एनर्जी होगी? जितनी काइनेटिक जितनी एनर्जी फोटॉन ले के आया माइनस जितना उसने मेटल ने खा लिया। तो
ये उसकी काइनेटिक एनर्जी होगी। ये वाली चीज वर्क फंक्शन है। दिस इज वर्क फंक्शन जिसको पाई से डिनोट करते हैं। और ये जो
न्यू नोट है ये वही वाला न्यू नोट है जो यहां पे आपको पता चल रहा था कि अगर वर्क फंक्शन से कम एनर्जी हुई तो कुछ होगा ही
नहीं। इलेक्ट्रॉन फ्री नहीं होगा तो फोटोइिक इफेक्ट ही नहीं होगा। तो ये उन्होंने बता दिया यहां पे। ठीक है? चलो
यह वाली बात तो हो गई। अब उन्होंने क्या बोला? उन्होंने और बहुत सारी बातें बताई यहां पे कि ऐसा नहीं है। टाइम डिले की
प्रॉब्लम भी हम सॉल्व करते हैं। उन्होंने बोला कि ये जो मेटल है इसमें जो सीज़ियम है अगर आप इसकी जगह सीज़ियम लो। ठीक है ना? इस
मेटल को सीज़ियम ले लो तो वो मिनिमम वर्क फंक्शन लेता है। मिनिमम वर्क फंक्शन होता है। यानी कि सबसे कम खर्चे में वो
इलेक्ट्रॉन दे देगा आपको। ठीक? दूसरी बात उन्होंने बोली के यह जो फोटोइिक इफ़ेक्ट है, जो फोटोइलेक्टिक इफ़ेक्ट है, वह रिजल्ट
है किसका? रिजल्ट ऑफ वन टू वन वन टू वन सॉरी रिजल्ट ऑफ
वन टू वन परफेक्टली इनलास्टिक
कोलीजन यह वाली बात उन्होंने बोली आइंस्टीन साहब ने इसी से पता चला कि ये जो है ये
पार्टिकल नेचर से ही एक्सप्लेन किया जा सकता है। समझना बात को उन्होंने कहा है कि जो फोटोइिक इफेक्ट होता है वो रिजल्ट होता
है किसका? वन टू वन परफेक्टली इन इलास्टिक कोलीजन। अब इनलास्टिक कोलीजन ये कहां से आ गया भाई? कोलीजन क्या होती है? कोलीजन तो
दो पार्टिकल में होती है। ये पार्टिकल अगर आके इस पे टक्कर मारे तो उसको कोलीजन बोलते हैं। और साथ में बोल रहे हैं कि भाई
ये तो वन टू वन है। यानी कि एक पार्टिकल पे एक ही पार्टिकल टक्कर मारेगा। दूसरा इनवॉल्व नहीं होगा। दूसरा परफेक्टली
इनइलास्टिक है। परफेक्टली इनइलास्टिक का मतलब ये होगा कि दोनों के दोनों जब टक्कर मारेंगे तो फाइनली दोनों जुड़ के एक हो
जाएंगे। परफेक्टली इनइइइलास्टिक मतलब टक्कर मारने पे जुड़ जाना। यानी कि टक्कर तो दो मारेंगे। टक्कर के बाद एक पार्टिकल
रह जाएगा। बस उसी बात का रिजल्ट है ये। ठीक? तो वो जो पार्टिकल है जो आके टक्कर मारेगा वो है फोटन।
वो क्या है? फोटन। और यह वाला कौन सा है? यह है इलेक्ट्रॉन। तो एक पार्टिकल फोटन होगा, एक इलेक्ट्रॉन होगा। और इस कोलीजन
में जो फोटन है वो कंप्लीटली अब्जॉर्ब हो जाएगा। ठीक है ना? तो इन दिस कोलीजन फोटन
इज़ कंप्लीटली कंप्लीटली एब्जॉर्ब्ड। यह लो हो गई ना इनइलास्टिक कोलीजन कि फोटन
जो है वह कंप्लीटली अब्सॉर्ब हो जाएगा। इसका मतलब यह है कि इलेक्ट्रॉन चाहे तो चाहे या ना चाहे इस इलेक्ट्रॉन को इसकी
पूरी की पूरी एनर्जी लेनी पड़ेगी। इस इलेक्ट्रॉन को इसकी पूरी एनर्जी लेनी पड़ेगी। वन टू वन इनलास्टिक कोलीजन है।
ठीक? तो ये पूरी की पूरी एनर्जी लेगा इस फोटन की। इसलिए यह जब इलेक्ट्रॉन यहां पे फ्री होगा तो कुछ एनर्जी से तो फ्री हो
जाएगा और बाकी एनर्जी लेके निकल लेगा और वो किस फॉर्म में मिलेगी इसको? काइनेटिक एनर्जी की फॉर्म में मिलेगी ये वाली। तो
इसको पूरी एनर्जी लेनी पड़ेगी मजबूरी है इसकी। ये वाली बात भी बोली उन्होंने। भाई
पार्टिकल नेचर है तो पार्टिकल वाली तरीके भी तो होंगे। कोलीजन वाला चैप्टर हमने सेंटर ऑफ़ मास में पढ़ा है ना। तो वहां पे
कोलीजन होगी परफेक्टली इनइलास्टिक। चलो भाई बहुत बढ़िया बात। आइंस्टीन साहब ने काफी कुछ क्लियर किया। ठीक है ना? अब ये
ये बोल रहे हैं कि जितनी ज्यादा ठीक है ना? फोटोन आएंगे उतनी ज्यादा करंट होगी। ठीक है ना? तो यहां पे बोला
इन्होंने नंबर ऑफ इंसिडेंट फोटों्स। इज डायरेक्टली प्रपोर्शनल टू फोटो करंट।
जितने ज्यादा फोटन आएंगे उतनी ज्यादा फोटो करंट निकलेगी। ये बात तो हमें पहले भी पता थी। इसमें कोई बड़ी बात नहीं है। अब मैं
यहां पे एक स्टेटमेंट लिखूंगा। ठीक है? एक स्टेटमेंट लिखूंगा और आपको बताना है कि वो ट्रू है या फॉल्स है। इतनी
सारी बातों के बाद हमने अभी-अभी देखा कि भाई जो स्टॉपिंग पोटेंशियल है वो इंटें इंटेंसिटी
से इंडिपेंडेंट है। ठीक है? अब ये इतनी सारी बातों के बाद एक स्टेटमेंट मैं लिखूंगा। ठीक? उसको देखना आप वो सही है या
गलत है। ठीक है? वो स्टेटमेंट क्या है? मैं लिख रहा हूं। ध्यान से सुनना। वो स्टेटमेंट ये है कि फॉर अ गिवन इंटेंसिटी
फॉर अ गिवन इंटेंसिटी ग्रेटर द फ्रीक्वेंसी। ग्रेटर द फ्रीक्वेंसी
ग्रेटर द फ्रीक्वेंसी लेसर लेसर विल बी द करंट ठीक है इन फोटो इलेक्ट्रिक इफेक्ट ठीक ये
वाली बात को पूछा गया है कि ये ट्रू है या फॉल्स है ठीक है तो ट्रू ट्रू वाले लोग पॉजिटिवली आंसर दें और ये मैं आपको वोट
टाइप बता रहा हूं। 30 सेकंड का टाइम है। ये लीजिए। जिनको लग रहा है ये स्टेटमेंट ट्रू है तो वो ट्रू लगाएं
कि फॉर अ गिवन इंटेंसिटी फॉर अ गिवन इंटेंसिटी ग्रेटर द फ्रीक्वेंसी लेसर विल बी द करंट।
करंट कम होगी अगर इंटेंसिटी बढ़ाओगे। देखो क्या बोल रहे हैं कि इंटेंसिटी मतलब इंटेंसिटी यह है सॉरी ग्रेटर द
फ्रीक्वेंसी बढ़ाओगे तो करंट कम हो जाएगी। फॉल्स फॉल्स फॉल्स फॉल्स फॉल्स अच्छा हां वही है ना फ्रीक्वेंसी बढ़ाने से करंट कम
होने की बात बोल रहे हैं तो और पूछा जा रहा है कि ट्रू है या फॉल्स है तो ज्यादा दिमाग लगाना नहीं है। आप बस सीधे-सीधे
बताओ क्या है? फॉल्स। देखो अब आया ना आंसर फॉल्स फॉल्स फॉल्स फॉल्स हम हम
वाह वाह क्या बात है फॉल्स की लाइन लगा दी ट्रू अरे अब ट्रू भी
लिखेंगे एक दो कोई बात नहीं भाई कभी-कभी आसान सवाल आ जाते हैं ठीक है चलो इसका रिजल्ट देखते हैं तो अरे रिजल्ट तो अजीब
है 56% इसको ट्रू बोल रहे हैं। भाई यहां तो सब फॉल्स लिख रहे हैं। तो ये ट्रू बोलने वाले कौन हैं?
एक आध ट्रू दिख रहा है मुझे। दोबारा करना पड़ेगा क्या इसको? चलो। मैं बता रहा हूं। ये स्टेटमेंट ट्रू
है। ये ट्रू स्टेटमेंट है। क्या है? ट्रू है। यह क्यों ट्रू है? उस बात को आप समझना।
मैंने कहा ना यह स्टेटमेंट एडवांस में आया हुआ है। ये स्टेटमेंट जो है एडवांस में आया हुआ
है। इसके बाद मैं सवाल कराने शुरू करूंगा। ठीक? तो इस ये स्टेटमेंट ट्रू है। कैसे ट्रू है? वो सुन लो। इन्होंने कहा है फॉर
अ गिवन इंटेंसिटी। तो भाई इंटेंसिटी क्या होती है? एनर्जी। तो एनर्जी किस चीज से मिलती है? नंबर ऑफ़ फोटन। ठीक है ना? और एक
फोटन की एनर्जी। ओके? यही तो इंटेंसिटी होती है पर यूनिट एरिया पर यूनिट टाइम। तो नंबर ऑफ फोटन और एक फोटन की एनर्जी होती
है h न्यू। यही तो बताया प्लैंक और हर्ट्स साहब ने। ठीक है? तो यहां पे इसकी जगह मैं h न्यू लिख देता हूं। इंटेंसिटी। तो
इंटेंसिटी इज डायरेक्टली प्रपोर्शनल टू नंबर ऑफ फोटॉन्स * फ्रीक्वेंसी। ओके?
अब वो कह रहा है कि यहां पर यह जो प्लेट है इस पर भाई इलेक्ट्रॉन निकल रहे थे। इलेक्ट्रॉन निकल रहे थे। बहुत बढ़िया।
इसका मतलब ये जो फ्रीक्वेंसी यहां पे डल रही है ये ऑलरेडी न्यू नोट से ज्यादा है। ये पहले ही न्यू नोट से ज्यादा है। तभी तो
इलेक्ट्रॉन निकल रहे हैं। वरना इलेक्ट्रॉन निकलते ही नहीं। ठीक है? तो यह कह रहा है ग्रेटर द फ्रीक्वेंसी कि अब इस
फ्रीक्वेंसी को हम बढ़ा देते हैं। अब इस फ्रीक्वेंसी को हम बढ़ा देते हैं। अब भाई सोचो ध्यान से। अगर फ्रीक्वेंसी आप
बढ़ाओगे और इंटेंसिटी क्या है? गिवन। यानी कि ये इंटेंसिटी कम ज्यादा नहीं होनी चाहिए। तो
अगर आप फ्रीक्वेंसी बढ़ाओगे और इंटेंसिटी आपको यही रखनी है। फ्रीक्वेंसी बढ़ाओगे, इंटेंसिटी यही रखनी है तो नंबर कम करने
पड़ेंगे ना। अगर एक फोटन की एनर्जी डबल करोगे और इंटेंसिटी वही रखनी है तो नंबर आधे करने पड़ेंगे ना। 100 से 50 करने
पड़ेंगे आपको। बात समझ में आती है? यानी के अगर आप फ्रीक्वेंसी को बढ़ाओगे तो नंबर कम करने पड़ेंगे। यानी के हिटिंग
रेशियो। हीटिंग रेशियो कम करना पड़ेगा आपको। साइट कम हिट होंगी। क्या यह बात समझ में आई? अब
साइट अगर कम हिट होंगी तो कम करंट निकलेगी। भाई ये फ्रीक्वेंसी तो पहले भी करंट निकाल रही थी। ये तो इलेक्ट्रॉन पहले
भी निकाल रही थी। इसका मतलब हर रेडिएशन हर रेडिएशन फोटोइिक इफेक्ट करने के काबिल था। तो अगर 100 जगह हिट करते थे। ठीक है? तो
अब 50 जगह हिट करेंगे। तो आधी हो जाएगी करंट अगर आपने फ्रीक्वेंसी को डबल कर दिया तो तो नंबर ऑफ
हिटिंग साइड्स कम हो जाएंगी और नंबर ऑफ हिटिंग साइड कम हो गई तो करंट कम हो जाएगी। तो ये वाला स्टेटमेंट हमारा ट्रू
था। ठीक है? ये वाला स्टेटमेंट हमारा ट्रू था। ठीक है? क्या ये बात समझ में आई?
ठीक है। ओके। एक सेकंड बस। ओके
ठीक है चलो हेलो हेलो ओके तो ये बात हो गई तो यह बातें वो है जो हमें समझ आ गई। ठीक है भाई। अब चलो सर देखो बहुत टाइम हो गया।
अब आप सवाल कराओ। तो भाई अब आप आ जाओ मैदान में और अब करते हैं सवाल। बहुत सारे सवाल हैं। ठीक। एक-एक एक-एक करके निपटाते
जाएंगे। ठीक पहले मैं देख लूं कौन-कौन से क्वेश्चन मुझे बहुत बढ़िया तरीके से करवाने हैं आप
लोग। चलो ये देखते हैं सवाल। ठीक है? चलो देखो क्या सवाल है ये। बहुत ध्यान से देखना। यह बोल
रहा है कि द रेश्यो ऑफ द पावर ऑफ लाइट सोर्स s1 टू दैट द लाइट सोर्स s2 इज टू। s1 और s2
की पावर का रेश्यो टू है। s1 इज एमिटिंग 2 * 10 टू दी पावर 15 फोटॉन्स पर सेकंड एट 600
नैनोमीटर। ठीक है? यानी कि जो पावर है जो पहले सोर्स की पावर है। ठीक है ना? दैट इज n1 *
ठीक है ना? कितना? N1 ये रहा। इतने फोटन निकाल रहा है। कितनी एनर्जी वाले? इतनी एनर्जी वाले। तो ये आपका HC हो गया। HC/
भाई देखो अगर फ्रीक्वेंसी करेंगे तो फ्रीक्वेंसी क्या होती है? वेलोसिटी / वेवलेंथ। वेलोसिटी तो C होती है। C /
लैम्ब्डा। तो HC / लैम्ब्डा। लैम्ब्डा कितना है? 600। ठीक? तो ये वाली एक इक्वेशन हो गई। पहले की पावर इतनी हो गई।
अब वो कह रहा है इफ द वेवलेंथ ऑफ द सोर्स s2 इज 300 नैन मीटर। अब वो कह रहा है कि दूसरा जो सोर्स है उसकी जो वेवलेंथ है ठीक
वो कितनी है? 300 नैन मीटर है। ठीक है? तो क्या चाहता है वो? कि नंबर ऑफ़ फोटॉन्स पर सेकंड एमिटेड बाय S2 बताइए
कितने होंगे? ठीक? तो भाई हम क्या लिखते हैं? पावर। पावर क्या होता है? पावर होता है एनर्जी पर यूनिट टाइम पर यूनिट एरिया।
तो एनर्जी पर यूनिट टाइम ठीक है ना? ये पावर होती है। सॉरी पावर क्या होती है? एनर्जी पर यूनिट टाइम। ये पावर होती है।
वो इंटेंसिटी होती है। अगर एरिया से डिवाइड कर दो इंटेंसिटी हो जाती है। ठीक है? तो पावर एनर्जी पर यूनिट टाइम। अब
एनर्जी क्या है? एनर्जी तो जो 1 सेकंड में आने वाला पूरा रेडिएशन है उसकी एनर्जी है। अब वो तो नंबर कितने नंबर आ रहे हैं और
कितना एक फोटन की एनर्जी है। तो नंबर और एक फोटन की एनर्जी ये पावर हो गई एक सेकंड की। अब ये नंबर और एक फोटन की एनर्जी ये
पावर हो गई। अब आप खुद देखो। वो कह रहा है कि रेश्यो ऑफ़ पावर ऑफ़ लाइट सोर्स S12 दैट द लाइट ऑफ़ S2 तो P1 / P2 = 2 बता रहे हैं
इज़ टू तो ये वाली वैल्यू को कितनी कर लो? 2 / 1 कर लो। ठीक? तो बताइए क्या-क्या होगा इसमें? n1 n2 का रेश्यो। क्या आप
निकाल लोगे? ठीक? एक झटके में पता चल जाएगा। ठीक है? क्योंकि n1 n2 की वैल्यू भी
निकालेंगे हम। तो इस दो जीरो से ये दो जीरो कट गई। HC से HC कट गया। तो N1 / N2 तो यहां आ गया। ठीक है ना? और यहां पे
थ्री आ गया। यहां पे सिक्स आ गया। और यहां पे टू आ गया। यहां पे वन आ गया। ठीक है ना? n2 की वैल्यू कितनी आ गई? n2 की
वैल्यू 3 टाइम्स ऑफ़ n1 और डिवाइडेड / 6 * 2 इससे कट के टू आ गया। तो दिस इज़ n1 / 4 ठीक है ना? n1 / 4 आ गया। और ये कितना है?
2 * 10 टू दी पावर 15 है। दिस डिवाइडेड बाय 4 तो ये 5 * 10 टू दी पावर 14 आ गया। तो यहां पे आएगा फाइव। और ये 2025 का सवाल
है। क्या ये बात समझ में आ रही है आपको? जितना मैंने पढ़ाया है आपको वह इस क्वेश्चन से बहुत ऊपर का है। तो जिस लेवल
पर हमने पढ़ा है ना अभी उससे भी थोड़े हल्के सवाल आ रहे हैं भाई यहां पे। उससे भी थोड़े हल्के सवाल आ रहे हैं। ठीक है?
अगला सवाल देख लो। ये देखो पांच आंसर है। ठीक? ये क्या बोल रहा है? द रेडिएशन प्रेशर एग्जर्टेड बाय 450 वाट लाइट सोर्स
ऑन अ परफेक्टली रिफ्लेक्टिंग सरफेस एट 2 मीटर अवे फ्रॉम इट इज़। ठीक? अब ये क्वेश्चन क्यों लिया है मैंने? क्योंकि ये
जो रेडिएशन प्रेशर वाली टर्म है इसको मैं अलग से समझाऊंगा तो टाइम लगेगा। क्यों ना मैं इस सवाल में ही समझा दूं। बिल्कुल सही
बात है। चलो सर इसी में समझाओ और फिर आंसर भी निकालो। ठीक? देखो रेडिएशन प्रेशर क्या होता है? रेडिएशन प्रेशर क्या होता है? कि
जैसे ये कोई एरिया है A इस पे एक लाइट आती है। ठीक है ना? लाइट बीम आया। यहां पे रेडिएशन आया। यह क्या आया? रेडिएशन आया।
तो भाई जो रेडिएशन होता है ठीक है ना? उसकी एनर्जी है E. उसकी एनर्जी कितनी है? E. E एनर्जी का रेडिएशन आया। ठीक? तो
आइंस्टीन साहब ने ये बोला है कि जो फोटों्स होते हैं, ठीक है ना? उनमें एनर्जी होती है और मोमेंटम भी होता है।
क्या होता है? एनर्जी और मोमेंटम दोनों होते हैं। जो फोटन होते हैं, जो पार्टिकल आते हैं। ठीक है ना? जिसको रेडिएशन बोलते
हैं। फोटन से उनके एनर्जी और मोमेंटम दोनों होते हैं। अगर उनमें एनर्जी e है तो उनका जो मोमेंटम है वो e / c होता है। ओके
सर बहुत बढ़िया। तो भाई e एनर्जी का रेडिएशन आ रहा है और स्पीड तो c रहेगी। तो यहां पे जो मोमेंटम मोमेंटम बनेगा ठीक है
ना? मोमेंटम बनेगा वो कितना बनेगा? e / c ठीक? तो आपने देखा भी होगा मैकेनिक्स में कि अगर m मास का पार्टिकल v वेलोसिटी से
आता है तो टकराता है तो इसका मोमेंटम mv होता है। अगर टकरा के यहीं चिपक जाता है तो वेलोसिटी ज़ीरो होती है। ठीक है ना? तो
इस टाइम 0 - mv तो चेंज इन मोमेंटम केवल mv होता है। लेकिन अगर वो यहां से रिफ्लेक्ट हो के वापस आता है तो चेंज इन
मोमेंटम 2mv होता है। क्यों? mv जाने का और mv आने का। चेंज इन मोमेंटम 2mv होता है। तो यहां पे ये जो रेडिएशन आता है। ठीक
है बेटा? अगर ये वाला रेडिएशन एब्जॉर्ब हो जाता है। यहीं पे खत्म हो जाता है। ठीक? तो वो एक केस होता है। एक केस होता है कि
आया और रिफ्लेक्ट हो के चला गया। ठीक? तो इस केस में इस केस में जो मोमेंटम हुआ चेंज इन मोमेंटम वो केवल e / c हुआ। लेकिन
इस केस में जो चेंज इन मोमेंटम हुआ वो होगा आपका 2e / c क्या मेरी बात समझ में आई? ओके। और अब यह कितनी देर का मोमेंटम
है? डेल्टा t का। तो इसको कर दो डेल्टा t. ठीक है ना भाई? यह कितनी देर का मोमेंटम है? डेल्टा t का। तो ये डेल्टा T टाइम में
मोमेंटम में चेंज हो गया भाई। डेल्टा T से इधर-इधर दोनों तरफ डिवाइड कर दिया। ओके। सर ये तो फोर्स बन गया। हमें तो पता है ये
फोर्स है। बिल्कुल। तो ये भाई आपका फोर्स बन गया। ठीक? तो मैंने मना नहीं किया। फोर्स = डेल्टा P / डेल्टा T अब सर प्रेशर
तो हमें पता है। प्रेशर होता है फोर्स / एरिया। तो ये वाला जो एरिया है ये जो एरिया है जिस पे ये रेडिएशन गिर रहा है ये
कितना प्रेशर फील करेगा? तो भाई प्रेशर है PR प्रेशर फील करेगा फोर्स / एरिया। अब फोर्स तो ये लिखा रखा है। तो E / C डेल्टा
T * A इतना प्रेशर होगा। ठीक है ना? ये क्या होगा? प्रेशर होगा। इतना प्रेशर होगा। अब यहां पे ध्यान से देखो। e / a
डेल्टा t ये क्या हुआ? एनर्जी पर यूनिट टाइम पर यूनिट एरिया सर ये तो इंटेंसिटी हो गई। इंटेंसिटी डिवाइडेड बाय C तो यहां
पे भाई प्रेशर का जो फार्मूला बन गया इस जगह पे। इस जगह पे जो प्रेशर का फार्मूला बन गया वो केवल ये तो I हो गया। और ये हो
गया C. I / C प्रेशर का फार्मूला हो गया। तो यहां पे प्रेशर का फार्मूला कितना हो जाएगा? डबल हो जाएगा। ये 2i / c हो जाएगा।
दिस इज नोन एज रेडिएशन प्रेशर। रेडिएशन प्रेशर इसको रेडिएशन प्रेशर बोलते हैं। जब भी कहीं रेडिएशन गिरता है। क्या
ये बात समझ में आई? तो ये हुई इंटेंसिटी। इंटेंसिटी / C। तो I / C प्रेशर हुआ। यहां पे भी ये I / C प्रेशर हुआ। ठीक?
सर सब कुछ समझ आ रहा है। बहुत बढ़िया सर। चलो बेटा थैंक यू सो मच। बहुत बढ़िया। भाई कोई कह रहा था ईजी चैप्टर है। [हंसी]
ईजी तो भाई ये टर्म तो हमें समझनी पड़ेगी ना अब। ठीक? हां। क्योंकि मुझे ना दिखता रहता है कि भाई कुछ लोग तो हैं। कुछ लोगों
को एक्चुअल में चीजें समझ आ रही होंगी कि हां भाई ये बात सही है। अब बात करते हैं। ठीक? अब क्वेश्चन को पढ़ते हैं। क्वेश्चन
का अब आपको एक-एक वर्ड समझ में आ जाएगा। ये बोल रहा है द रेडिएशन प्रेशर एग्जर्टेड बाय 450 W लाइट सोर्स ऑन अ परफेक्टली
रिफ्लेक्टिंग परफेक्टली रिफ्लेक्टिंग सरफेस प्लेस्ड एट 2 मीटर अवे फ्रॉम इट। 2 मीटर दूर है यहां
से। ठीक है? 2 मीटर अवे फ्रॉम इट इज कितना है? रेडिएशन प्रेशर कितना है? कैसे करोगे? यह
तो भाई पावर होगी। यह तो एनर्जी पर यूनिट टाइम हो गया। अगर इसको एरिया से डिवाइड कर देंगे तो ये इंटेंसिटी आ जाएगी। ये क्या आ
जाएगी? इंटेंसिटी। और अगर इसको c से डिवाइड कर दोगे तो ये आ जाएगा। और परफेक्टली रिफ्लेक्टिंग है तो ये टू आ
जाएगा। तो ये 2i / c ये आपका रेडिएशन प्रेशर हो जाएगा। ये वाली चीज आपका रेडिएशन प्रेशर हो जाएगा। अब आप खुद सोचो
बहुत ध्यान से सोचना है। ठीक है ना? ये लाइट सोर्स की बात कर रहा है। ठीक है? तो आप यहां पे खुद ही देख लो। ये टू होगा और
e / t की वैल्यू आपको यहां पे दे रखी है। तो आपका जो आंसर होगा वो होगा 2 टाइम्स ऑफ़ E / T. ठीक है ना? E / T क्या है? ये रहा।
ये आ गया आपका 450। ठीक है ना? E / T / AC C की वैल्यू कितनी हुई? 3 * 10 टू दी पावर 8 हो गई। ठीक है ना? टू तो ये हो गया। e /
t की वैल्यू 450 हो गई और c ये हो गया। और यहां पे लेना है एरिया। अब वो कह रहा है कि 2 मीटर दूर है इससे। अब सोर्स से ये
लाइट निकल रही है ये। अब 2 मीटर दूर एरिया अगर ये होगा तो जो एरिया होगा इसका वो 4pr²
होगा। ठीक है ना? कितना होगा? 4pr² 2 मीटर की डिस्टेंस पे। ठीक? A की वैल्यू डालो। आंसर निकाल लो। ठीक है? कर लोगे? कर लोगे
सवाल को? ठीक? चलो इसका आंसर बता देता हूं मैं। आंसर आएगा इसका सी। ये वाला इसका आंसर है। ठीक है? दैट्स इट।
चलो भाई, अगला वाला सवाल करते हैं। ये वाला। यह बिल्कुल वही है। वही वाला सवाल है।
क्या बोल रहा है? कि ऑब्जेक्ट प्लेस इन अ मीडियम ऑफ़ रिफ्रैक्टिव इंडेक्स थ्री। अगर रिफैक्टिव इंडेक्स थ्री है। ठीक है ना? तो
वेलोसिटी की वैल्यू हो जाएगी c / 3 यानी कि 1 * 10 पावर 8। ये वेलोसिटी की वैल्यू हो जाएगी। ठीक है? अब ये बोल रहा है
ऑब्जेक्ट इज़ प्लेस्ड इन अ मीडियम ऑफ रिफैक्टिव इंडेक्स थ्री एन इलेक्ट्रोमैग्नेटिक वेव ऑफ इंटेंसिटी दिस
फॉल्स नॉर्मली ऑन द ऑब्जेक्ट इतनी इंटेंसिटी है कितनी 6 * 10 टू दी पावर 8 वॉट पर मीटर स्क्वायर इतनी है फॉल्स
नॉर्मली ऑन द ऑब्जेक्ट इट इज़ एब्जॉर्ब तो रेडिएशन प्रेशर क्या होता है? एब्जॉर्ब हो जाती है कंप्लीटली यानी कि रिफ्लेक्ट नहीं
होती। तो I / C ठीक है? I / C तो इसमें आंसर क्या आएगा भाई? C की C की जगह क्या लिया जाएगा? I / V लिया जाएगा कि
ये तो ये आ गया। तो 6 / 1 तो छह वाला आंसर सही होगा। छह वाला कौन सा है? ये वाला आंसर सही होगा। 6 / 1 सी सही हो गया। क्या
ये वाली बात डायरेक्ट हिट हो रही है यहां पे? रेडिएशन प्रेशर वाली। हिट हो रही है डायरेक्ट। बिल्कुल सही भाई। 6 / 1 वाला
आंसर सही हो जाएगा। तो I तो सिक्स दे ही रखा है। वेलोसिटी यहां पे वन ली जाएगी क्योंकि रिफैक्टिव इंडेक्स ये है।
रिफैक्टिव इंडेक्स क्या होता है? रिफैक्टिव इंडेक्स होता है c / v इन द मीडियम। ठीक? तो वेलोसिटी इन द मीडियम
कितनी हो जाएगी? C / μ। ठीक? और रेडिएशन प्रेशर क्या होता है? ठीक? रेडिएशन प्रेशर क्या होता है? I / C
या 2 / C? C क्या होता है? c होती है रेडिएशन की स्पीड। जो भी रेडिएशन की स्पीड है वो आपको ध्यान रखनी है। ठीक है? ओके।
अब भाई कुछ और भी कर सकते हैं। यहां पे खूब सारी चीजें हैं। ये क्या कह रहा है? सोर्स ऑफ लाइट एमिट विद पावर दिस द रेशियो
ऑफ़ नंबर ऑफ़ फोटों्स विज़िबल लाइट एमिटेड बाय ईच सोर्स हैविंग वेवलेंथ 300 नैनोमीटर, 500 नैनोमीटर रिस्पेक्टिवली।
अच्छा। क्या बोल रहा है यह? यह बोल रहा है द टू सोर्सेस ऑफ़ लाइट एमिट पावर ऑफ़ दिस। ओके। द
रेशियो ऑफ नंबर ऑफ फोटों्स ऑफ विजिबल लाइट एमिटेड बाय ईच सोर्स हैविंग वेवलेंथ 300 नैन मीटर और 500 नैन
मीटर। भाई इससे आसान कुछ हो ही नहीं सकता। जो 300 वाला है ठीक है ना? 300 वाला जो है उसकी एनर्जी एक फोटन की कितनी होगी? HC/λ
कितनी होगी? HC/λ और HC/λ को अगर मैं कैलकुलेट करूं तो भाई यहां पर बात को समझना है। है ना? बात को
बहुत बढ़िया तरीके से समझना है। यहीं पर मैं एक बात और बता देता हूं कि h क्या होता है? 6.63 * 10 टू दी पावर -34 * 3 *
10 टू दी पावर 8 और डिवाइडेड बाय लैम्ब्डा। लैम्ब्डा को अगर आप एंगस्ट्रो में लोगे ठीक है ना? और ये जो एनर्जी है
इसको आपको इलेक्ट्रॉन वोल्ट में लेना है। ठीक है ना? इसको किस में लेना है? इलेक्ट्रॉन वोल्ट में लेना है। तो मेरी
बात को बहुत ध्यान से समझना। अगर HC है ठीक है? 12400
ये आया डिवाइडेड बाय लैम्ब्डा। अगर आप इसको एंगस्ट्रो में ले लेते हो तो आपके पास एनर्जी जो है सीधे-सीधे एनर्जी निकल
आती है इलेक्ट्रॉन वोल्ट में। बस ये वाली बात आप याद रखना। ये फार्मूला भी है और इससे ये सवाल भी होते हैं बहुत सारे। बट
इसमें इसमें ये और आसानी से हो जाएगा। बट ये मुझे बात याद आई ये आपको याद रखनी है कि अगर hc/ लैम्ब्डा = eना है आपको। ठीक?
तो लैम्ब्डा एंगस्ट्रो में दिया है। ठीक है ना? तो लैम्ब्डा की वैल्यू आप एंगस्ट्रो में डाल दो बस। जैसे 12400
एंगस्ट्रो जैसे 6000 एंगस्ट्रो है। जैसे ये वाली चीज है ये। यह 300 नैन मीटर है। तो 300 नैन मीटर का मतलब होता है 3000
एंगस्ट्रो। तो अगर आप 1240 को 3000 से डिवाइड करोगे 3000 से डिवाइड करना है तो जो भी आंसर आएगा ना एक तो ये एक ये जो भी
आंसर आएगा ये वाली जो एनर्जी आएगी ये आपकी इलेक्ट्रॉन वोल्ट में आ जाएगी। इलेक्ट्रॉन वोल्ट में आ जाएगी। यह वाली एनर्जी और यह
आपको हमेशा याद रखना है। ठीक? अब ये सवाल करना बहुत आसान है। इस सवाल में कोई दिक्कत नहीं है। ठीक? इसमें तो कुछ भी
नहीं करना। ये कह रहा है कि टू सोर्स लाइट एमिटिंग पावर ऑफ दिस। तो n1 कितना होगा? n1 होगा 200 जूल पर सेकंड। इतनी पावर वो
दे रहा है। ठीक है ना? अब एक एक की एनर्जी कितनी हो जाएगी? h * c और डिवाइडेड बाय लैम्ब्डा लैम्ब्डा की मल्टीप्लाई कर दो
ऊपर 300 नैन मीटर। ये पहला वाला है। अब वो दूसरे वाले सोर्स की बात कर रहा है। वो भी 200 जूल का ही है। तो 200 जूल पर सेकंड का
तो वो सोर्स है। डिवाइडेड बाय HC और डिवाइडेड बाय लैम्ब्डा * 500। तो वो कह रहा है इन दोनों का रेश्यो बता दो। ठीक है
ना? N1 और N2 का रेश्यो बता दो। तो आप देखो 200 से 200 कट गया। HC से HC कट गया। दो ज़ीरो से दो ज़ीरो कट गई। P / 5 आ गया।
ठीक है? क्या आंसर होगा? क्या आंसर होगा यहां पे? ये इसका क्या आंसर बनेगा? अगले वाले पेज पर होगा ना? आंसर तो डी डी आंसर
बनेगा। और हमारा 3/5 वैसे ही आ रहा था। ठीक? तो ये क्वेश्चन तो बस इतना करने से हो रहा है। लेकिन ये वाली बात भी है जो
आपको हमेशा याद रखनी है। ठीक? कुछ सवाल और देखो। कब का है यह? 2024 का सवाल है यह। ठीक?
यह क्या है? ये वाला बिल्कुल वही है कि मोनोक्रोमेटिक फ्रीक्वेंसी ऑफ़ दिस इज़ प्रोड्यूस्ड बाय अ
लेजर। द पावर एमिटेड बाय दिस हाउ मेनी फोटों्स? भाई 2024 में ये सवाल पूछा गया। जरा इमेजिन करो आप। जरा इमेजिन करो कि इस
सवाल को कौन नहीं कर पाएगा? कौन नहीं कर पाएगा? ये देख लो। ये कह रहा है कि मोनोक्रोमेटिक लाइट है। ठीक है ना? सबसे
सिंपल एक सिंगल फ्रीक्वेंसी की लाइट होती है जिसकी फ्रीक्वेंसी इतनी है। यानी कि न्यू की वैल्यू दे रखी है इसने। इज
प्रोड्यूस्ड बाय लेजर। द पावर एमिटेड इज़ दिस। तो जो पावर है पर सेकंड इतनी दे रखी है। हाउ मेनी फोटों्स पर सेकंड ऑन एन
एवरेज आर एमिटेड फ्रॉम द सोर्स? सोर्स से कितने फोटों्स निकल रहे हैं? तो क्या पावर इक्वल टू 1 सेकंड की बात करते हैं तो 1
सेकंड में जो पावर होती है वही एनर्जी होती है। तो n * h न्यू क्या ये नहीं होना चाहिए? बिल्कुल। तो क्या यहां से n की
वैल्यू सीधे-सीधे नहीं निकलेगी? पावर ओवर h न्यू पावर कितनी है? 2 * 10 टू दी पावर -3 डिवाइडेड बाय h कितना है? 6.63
* 10 पावर -34 * μ कितना है? 6 * 10 ^ कितना? 14 यह अब क्या यह वाली चीज़ हम कैलकुलेट नहीं कर सकते? आप यह सोचो कौन
नहीं कर पाएगा इसको? कौन है? कौन नहीं कर पाएगा? किसको प्लस के चार नंबर इस सवाल से नहीं
मिल पाएंगे? बता दो मुझे। जिसको ये फार्मूला ही नहीं पता होगा उसको नहीं मिल पाएंगे।
और यह फार्मूला किसको नहीं पता होगा? जो मॉडर्न फिजिक्स पढ़ के नहीं जा रहा है। जो मॉडर्न फिजिक्स पढ़ के नहीं जा रहा है
उसको नहीं मिल पाएंगे। क्या बात समझ में आ रही है? ठीक। और दूसरी चीज यहां पे जो कैलकुलेशन है अगर आप उसकी
बात करो कि भाई कैलकुलेशन कहां गया? कौन सा सवाल था ये? ये वाला। अगला था ना ये वाला। हां। अगर मैं यहां कैलकुलेशन की बात
करूं तो वो भी चुटकी में देखने से हो रही है। देखने से कैलकुलेशन हो रही है। यहां पे कैसे? कि देखो भाई इस टू से ये कट के
थ्री आएगा। थ्री से हम जब 6.6 को कम करते हैं तो 3 * 20 आ जाता है। अगर नीचे 20 आ रहा है और ऊपर वन है तो फाइव वाला नंबर
सही होता है और फाइव वाला नंबर बस एक ही तो है यहां पे। तो ना तो कैलकुलेशन कुछ है इस सवाल में ना कांसेप्ट कुछ है। भाई ये
चार नंबर फ्री के हैं। ये चार नंबर फ्री के हैं। इसीलिए बोल रहा हूं बहुत इजी क्वेश्चन आएंगे। बस आप करके चले जाना
इसको। ठीक है ना? जो भी आएगा फाइव वाला नंबर एक बार आंसर देख लेते हैं। कुछ लोग बी लिख रहे हैं। बी डी बी डी।
सी आंसर है यार इसमें। लो ये है। क्या ये बात समझ में आ रही है? बात समझ में आती है? चलो अब कुछ ऐसे सवाल भी होंगे जो भाई
थोड़े मतलब ठीक-ठीक भी हो जाएंगे। ये तो बहुत ही सिंपल कलर वाले सवाल है। ओके
ये देखो ये क्या बोल रहा है? द वर्क फंक्शन ऑफ सीज़ियम एंड लिथियम मेटल आर दिस एंड दिस। ओके? रेस्पेक्टिवली। इफ वी
इंसिडेंट अ लाइट ऑफ वेवलेंथ दिस ऑन दीज़ टू मेटल सरफेससेस देन फोटोइिक इफेक्ट इज़ पॉसिबल इन द केस ऑफ ठीक यहां पे वो
कांसेप्ट काम आ जाएगा जो अभी मैंने आपको बताया है। मैंने क्या बताया आपको के देखो भाई इसकी एनर्जी वर्क फंक्शन इलेक्ट्रॉन
वोल्ट में दिया हुआ किसका सीज़ियम का। और ये भी इलेक्ट्रॉन वोल्ट में दिया गया किसका? लिथियम का। तो आपको जो लाइट है
उसकी वेवलेंथ इसमें दी गई नैनोमीटर में। तो पहले तो इसको एक काम करो एंगस्ट्रो में चेंज करो। तो 5500 एंगस्ट्रो नैनोमीटर
क्या होता है? 10 टू दी पावर -9 और एंगस्ट्रो क्या होता है? 10 टू दी पावर -10 तो एक जीरो एक्स्ट्रा लगा दो।
नैनोमीटर एंगस्ट्रो में आ जाता है। ये हो गया। अब मुझे निकालना है एक फोटन की एनर्जी। तो एनर्जी ऑफ़ फोटन कितनी होती है?
HC/ लैम्ब्डा। और हमें पता है कि अगर मैं HC की जगह 1 2 400 लिख दूंगा। ठीक है ना? इसको आप कुछ लोग 1 2 3 4 5 भी याद रखते
हैं। 1 2 3 4 5 भी पर कोई बात नहीं 1 2 400 ज्यादा एक्यूरेट होता है। तो अगर ये रख दोगे HC की वैल्यू और इसके नीचे आप
इसको इससे डिवाइड कर दोगे तो भाई जो भी आंसर आएगा वो इलेक्ट्रॉन वोल्ट में आएगा। तो जो ये इलेक्ट्रॉन वोल्ट में आएगा उसको
इससे आप इजीली कंपेयर कर सकते हो। ठीक है ना? तो अगर मैं यहां पे इसको इलेक्ट्रॉन वोल्ट में निकालूं।
ठीक है? तो कैलकुलेटर से अगर मैं करूं तो दो जीरो से पहले तो दो जीरो यहीं निपटा दो। तो ये
आ रहा है आपका 124 / 55 तो ये आपका आ रहा है 2.25 यानी कि 2.25
इलेक्ट्रॉन वोल्ट। यह एनर्जी ऑफ अ सिंगल फोटन है। एनर्जी ऑफ द सिंगल फोटन है यह। ठीक है ना भाई? अगर यह आपकी एनर्जी ऑफ़
सिंगल फोटन है इस वक्त ये तो भाई ये तो मुझे पता चल रहा है कि इससे तो ज्यादा है। लेकिन इससे कम है।
तो जो लिथियम वाली प्लेट है। ठीक है ना? और जो सीज़ियम वाली प्लेट है, यह तो सीज़ियम वाली प्लेट है। यह लिथियम वाली प्लेट है।
यह वाला रेडिएशन यह वाला रेडिएशन भाई दोनों पे गिर रहा है। ठीक? तो यहां से तो इलेक्ट्रॉन निकाल देगा। यहां से नहीं
निकाल पाएगा। क्योंकि ये इसके वर्क फंक्शन से जो इसका वर्क फंक्शन है 2.5 इलेक्ट्रॉन वोल्ट ये कम है। और ये कितने का? 2.25
इलेक्ट्रॉन वोल्ट का है। क्या ये बात समझ में आ रही है? इज इट ओके? तो केवल सीज़ियम से निकलेगा। ठीक है? लिथियम से नहीं निकल
पाएगा। तो सीज़ियम ओनली ये ए ऑप्शन डी ऑप्शन करेक्ट हो गया। एक बार को आंसर देख लेते हैं। क्या है इसमें?
कौन से नंबर का सवाल था? ये अगले वाले पेज पे भाई। डी ऑप्शन आंसर है इसका। भाई साहब
2025 का सवाल है। देखते हैं इसमें क्या इन्होंने कारस्थानी की हुई है। ये बोल रहा है इन अ फोटोइिक इफेक्ट ईएम वेव्स इज़
इंसिडेंट ऑन मेटल सरफेस एंड इलेक्ट्रॉन इजेक्टेड फ्रॉम द सरफेस। द वर्क फंक्शन ऑफ़ द मेटल इज़ 2.14 इलेक्ट्रॉन वोल्ट एंड
स्टॉपिंग पोटेंशियल इज़ 2 वोल्ट। ठीक है ना? व्हाट इज द वेवलेंथ ऑफ द इलेक्ट्रोमैग्नेटिक वेव? भाई, बहुत बहुत
बेहतरीन सवाल है और बहुत आसान सवाल है। इसने क्या बोला है? इसने बोला है कि यहां पे
यहां पे ये रेडिएशन गिरता है। अच्छा इसकी एनर्जी नहीं पता कितनी है। ओके। लेकिन हमें पता है कि इसका वर्क फंक्शन है 2.14
इलेक्ट्रॉन वोल्ट। ये इसका वर्क फंक्शन है। और यहां से जो इलेक्ट्रॉन निकल के भागता है उसकी काइनेटिक एनर्जी जो है ठीक
है ना? स्टॉपिंग पोटेंशियल इज़ 2 वोल्ट। भाई उसका स्टॉपिंग पोटेंशियल कितना दे रखा है उसने? 2 वोल्ट दे रखा है। और याद करिए
मैंने आपको बताया था कि काइनेटिक एनर्जी क्या होती है? E * V नॉट। ठीक? तो यहां E लगा दो और यहां E लगा दो। यानी के 2
इलेक्ट्रॉन वोल्ट उसकी काइनेटिक एनर्जी हो गई। ठीक? तो जो स्टॉपिंग पोटेंशियल होता है ठीक है ना? जैसे वो 2 वोल्ट है। अगर
इसमें आप E की मल्टीप्लाई कर दो। एक्चुअल में ये तो Q हो गया ना? Q की मल्टीप्लाई कर दो। तो समझ लो आप E की मल्टीप्लाई कर
रहे हो। तो q * v नॉट उसकी पोटेंशियल एनर्जी आती है जो कि काइनेटिक एनर्जी के ही बराबर होती है। तो उतने इलेक्ट्रॉन
वोल्ट जैसे 2 वोल्ट स्टॉपिंग पोटेंशियल है तो 2 इलेक्ट्रॉन वोल्ट काइनेटिक एनर्जी होगी। तो इसकी काइनेटिक एनर्जी 2
इलेक्ट्रॉन वोल्ट हुई। इसका मतलब आइंस्टीन साहब के हिसाब से ये जो एनर्जी है ये वर्क फंक्शन प्लस इसमें गई। तो ये 4.14
इलेक्ट्रॉन वोल्ट इसकी टोटल एनर्जी है जो रेडिएशन आ रहा है। लेकिन भाई साहब एनर्जी तो पूछ ही नहीं रहे हैं। वो तो पूछ रहे
हैं कि भाई वेवलेंथ बताओ। तो वेवलेंथ अगर हम बताएंगे तो वो वाला फार्मूला यूज़ करेंगे। कौन से वाला? 1 2 4 0
/ लैम्ब्डा इन एंगेस्ट्रोम इज़ इक्वल टु एनर्जी इन इलेक्ट्रॉन वोल्ट 4.14 तो आप खुद सोचो अगर लैम्ब्डा मैं
एंगस्ट्रो में निकालूंगा तो 12400 को 4.14 से डिवाइड करूंगा। ठीक है? और इससे डिवाइड करके ये सीधे-सीधे ठीक है? 4
* 3 = 12 और 14 * 3 = 42 लगभग ये थ्री आ रहा है। ठीक है ना? कितना आ रहा है? थ्री और फोर से डिवाइड करूंगा तो 12400 तो 3000
आएगा। 3000 एंगस्ट्रो के आसपास आंसर आएगा। तो 300 नैन मीटर हो गया। ये आपका आंसर हो गया डी। डी आंसर हो गया आपका।
ठीक है ना? यह वाले का आंसर क्या है? डी। यह देखो। आंसर कितना है? डी। डी ही आंसर है इसका। और यह हो भी गया आपका सवाल। ठीक
है? क्या भाई कुछ समझ में आ रहा है? इज इट ओके? कुछ समझ में आ रहा है यहां पे? ओके।
एक आध सवाल और निपटा देते हैं ये वाला। देखो ये 2024 में आया हुआ सवाल है। ठीक है? ये क्या कह रहा है? द वर्क फंक्शन ऑफ
अ सब्सटेंस इज़ दिस लॉन्गेस्ट वेवलेंथ ऑफ़ द लाइट दैट कैन कॉज़ द एमिशन ऑफ़ फोटो इलेक्ट्रॉन फ्रॉम दिस सब्सटेंस। भाई, ये
जो 2024 में सवाल आया था। यह एक तो फ्री होता है। एक तो होता है फ्री।
और एक होता है एहसान। एहसान। एहसान हो गया। ये तो।
एहसान। ये ठीक है ना? एहसान करना। एक तो होता है फ्री देना कि लो भाई फ्री ले जाओ तुम लोग।
एक होता है एहसान करना। तो यह सवाल देना एहसान करने के बराबर है कि बच्चों पे एहसान कर दिया कि लो फ्री मत ले जाओ। तुम
तो और भी ले जाओ। ये लो आगे तक का एहसान ले जाओ तुम लोग। ठीक? तो इस सवाल की वजह से तो एनtए वालों को ठीक है ना? बहुत बार
थैंक यू बोलना चाहिए कि थैंक यू भाई साहब। क्या सवाल दिया है तुम लोगों ने? ये बोल रहा है वर्क फंक्शन 3 इलेक्ट्रॉन वोल्ट
है। ठीक है ना? तो ये बोल रहा है कि लॉन्गेस्ट वेवलेंथ क्या होगी? भाई वर्क फंक्शन किसी प्लेट का कुछ है।
ठीक है ना? ये इतना वर्क फंक्शन है। 3.0 अगर आप इससे 3.0 से जरा सी ज्यादा जरा सी 0.0001
इतने इलेक्ट्रॉन वोल्ट का ही रेडिएशन डाल दोगे तो यहां से तो निकल जाएगा इलेक्ट्रॉन। इससे 3.0 से थोड़ा सा ज्यादा
डाल दो। ये निकल जाएगा इलेक्ट्रॉन। क्या बात समझ में आ रही है? क्या बात समझ में आ रही है? और लेकिन इसकी काइनेटिक एनर्जी
बहुत कम होगी। मिनिमम काइनेटिक एनर्जी क्योंकि 3.0001 में से थ्री तो वर्क फंक्शन में चला
जाएगा। बहुत कम एनर्जी काइनेटिक एनर्जी की फॉर्म में होगी। ठीक है ना? काइनेटिक एनर्जी की फॉर्म में बट निकल जाएगा। आपका
काम हो जाएगा। इसका मतलब इतनी वोल्टेज इससे जरा सी ज्यादा इससे ज्यादा जरा सी ज्यादा एनर्जी का आप फोटन डाल दोगे तो
आपका काम हो जाएगा। तो वेवलेंथ कितनी होगी? वेवलेंथ कितनी होगी? HC/ लैम्ब्डा = ये वाली एनर्जी। तो वही वाला फंडा यूज़
करो। 12400 और डिवाइडेड बाय लैम्ब्डा इन एंगस्ट्रोम = एनर्जी इन इलेक्ट्रॉन वोल्ट। और ये 3.0 रख
दो। ठीक है ना? तो अभी-अभी तो क्या है? लैम्ब्डा = 4.14 आया था ना ये याद करो 4.14 नहीं आएगा तीन से डिवाइड करके तो 414
वाला आंसर आपका सही होगा ये लो ठीक है ना 4.14 इतना 10 टू दी पावर -7 मान लो इतना आएगा दैट्स इट
लैम्ब्डा की वैल्यू इतनी आएगी ये इलेक्ट्रॉन वोल्ट है ना तो ये आपका भाई इसको ना मैं थोड़ा सा हल्के में ही लेता
हूं कुछ लोग यहां पे ना बावले हो जाएंगे। इसको देख के सीधे-सीधे लिख देता हूं। लो भाई लैम्ब्डा = 4140 ये कुछ आएगा। ठीक है
ना? लेकिन ये एंगस्ट्रो में आएगा। ठीक? क्योंकि लैम्ब्डा जो आएगा वो एंगस्ट्रो में आता है इससे करके। तो यहां
पे ये वाला आंसर हो जाएगा। लाइफ आसान है। आसान है लाइफ। यह वाला देख लो भाई। देखो भाई, कभी-कभी
अच्छा सवाल भी आ जाता है। कभी-कभी अच्छा सवाल भी आ जाता है। ठीक? इसने क्या कहा? नीचे दो स्टेटमेंट है। पहला स्टेटमेंट,
दूसरा स्टेटमेंट पढ़ लेते हैं। पढ़ लेते हैं। क्या है? ये बोल रहा है फिगर शोज़ द वेरिएशन ऑफ स्टॉपिंग पोटेंशियल विद
फ्रीक्वेंसी न्यू फॉर द टू फोटोसेंसिटिव मटेरियल्स m1 एंड m2 द स्लोप गिव्स वैल्यू ऑफ़ h / e स्लोप गिव्स वैल्यू ऑफ़ h / e
वेयर h इज़ प्लैंक्स कांस्टेंट एंड e इज़ द चार्ज ऑफ़ इलेक्ट्रॉन। बहुत बढ़िया। बहुत बढ़िया। पहले वाले को हमने पढ़ लिया।
देखेंगे अभी सही है या गलत है। दूसरे में बोला है m2 विल एमिट फोटो इलेक्ट्रॉन ऑफ ग्रेटर काइनेटिक एनर्जी। m2 विल एमिट फोटो
इलेक्ट्रॉन ऑफ ग्रेटर काइनेटिक एनर्जी। ठीक है ना? इंसिडेंट रेडिएशन हैविंग सेम फ्रीक्वेंसी। फॉर द इंसिडेंट रेडिएशन
हैविंग सेम फ्रीक्वेंसी। ठीक है? चलो बात करते हैं। ठीक? जो भी है। पहले इसकी बातें कर लेते हैं। क्या है? यह
कह रहा है कि दिस फिगर शोज़ अब यह क्या कह रहा है? लाइट ऑफ द अबव स्टेटमेंट चूज़ द मोस्ट एप्रोप्रियट आंसर। आंसर्स देख लेते
हैं पहले उसके बाद बात करेंगे। स्टेटमेंट वन इज़ करेक्ट। पहले बोल रहा है स्टेटमेंट वन करेक्ट है और दूसरा इनकरेक्ट
है। ओके? स्टेटमेंट वन इज़ इनकरेक्ट और टू इज़ करेक्ट। ओके? स्टेटमेंट वन एंड स्टेटमेंट टू दोनों ही इनकरेक्ट हैं।
और इसमें स्टेटमेंट और ये दोनों करेक्ट। अच्छा बस करेक्ट और इनकरेक्ट बातें बतानी है। ठीक है? क्या बात समझ में आ रही है?
और सवाल पे चलते हैं वापस पे चल देते हैं। ठीक है? ठीक है? सवाल पे चल देते हैं। ये क्या कह
रहा है? फिगर शोज़ वेरिएशन ऑफ़ दिस। भाई वो जो ग्राफ हमने देखा था यहां पे ये वाला ग्राफ देखा था। बिल्कुल। ये क्या था?
स्टॉपिंग पोटेंशियल था। बहुत बढ़िया। ये क्या था? आपकी फ्रीक्वेंसी थी। तो ये तो y एक्सिस पे प्लॉट कर रहे थे हम। और ये आप x
एक्सिस पे प्लॉट कर रहे थे। और ये ग्राफ यहीं पे खत्म हो रहा था और ये जा रहा था समथिंग कुछ नेगेटिव। तो इस लाइन की
इक्वेशन अगर आपसे पूछी जाए तो y = mx + c होनी चाहिए। ठीक है ना? तो हमें पता है कि y क्या है? y ये वाली ये तो काइनेटिक
एनर्जी है। ठीक है ना? तो काइनेटिक एनर्जी यहां पे ये हो गई। काइनेटिक एनर्जी इक्वल टू ये mx क्या हो गया? m तो इसका स्लोप हो
गया। ठीक है ना? तो काइनेटिक एनर्जी होती है h * μ0 और प्लस सॉरी माइनस माइनस वर्क फंक्शन। यही तो होती है। काइनेटिक एनर्जी
= h न्यू बाय ये। अब काइनेटिक एनर्जी जो है क्यों ना मैं उस काइनेटिक एनर्जी को यहां पे e * स्टॉपिंग पोटेंशियल लिख दूं
और ये h * μ0 हो गया और ये फाई हो गया। अगर मैं इस पूरी इक्वेशन को e से डिवाइड कर दूं तो यहां केवल ये हो जाएगा और ये h
/ e हो जाएगा और ये μ हो जाएगा। ये μ नॉट नहीं मुझे केवल न्यू लेना चाहिए। ये केवल न्यू है। ठीक है ना? और माइनस π / e हो
जाएगा। अब आप देखो ये वाली चीज क्या है? ये वाली चीज स्लोप का रोल प्ले कर रही है। ये चीज क्या है? स्लोप का रोल प्ले कर रही
है। तो ये यही तो कहता है कि फिगर शोर वेरिएशन ऑफ स्टॉपिंग पोटेंशियल विद फ्रीक्वेंसी न्यू फॉर द टू फोटोसेंसिटिव
मटेरियल m1 एंड m2 द स्लोप गिव्स वैल्यू ऑफ़ h / e वेयर h इज़ प्लैंक्स कॉन्स्टेंट एंड e इज़ चार्ज ऑफ़ इलेक्ट्रॉन। तो ये बात
तो बिल्कुल सही है भाई। स्टेटमेंट वन तो हमें करेक्ट मिल गया। और एक चीज़ और देखो आप। ये जो h/e है ये स्लोप है। स्लोप क्या
है? h/e ये तो यूनिवर्सल कांस्टेंट है। ये तो बदलेगा ही नहीं। H प्लैंक कांस्टेंट है। E चार्ज है। वो तो जिंदगी में कभी
नहीं बदलेंगे। तो ये तो कांस्टेंट है। कभी चेंज नहीं होगा। चलो भाई ये वाली बात तो करेक्ट हो गई। अब ये बोल रहा है m2 विल
एमिट जिसकी फ्रीक्वेंसी ज्यादा है। यानी कि वर्क फंक्शन ज्यादा है। ये खाएगा। ज्यादा एनर्जी खाता है ये। तो काइनेटिक
एनर्जी कम देगा ये। ठीक है ना? फोटो ग्रेटर काइनेटिक एनर्जी भाई काइनेटिक एनर्जी कम देगा यार। फोटो ऑफ़ ग्रेटर
काइनेटिक एनर्जी फॉर द इंसिडेंट रेडियंट सेम फ्रीक्वेंसी। ये हो गया गलत। ठीक? क्योंकि जिसकी न्यू ज्यादा है यानी कि
उसका वर्क फंक्शन ज्यादा है। वो ज्यादा खाएगा तो काइनेटिक एनर्जी कम बचेगी। ज्यादा नहीं बचेगी। तो यहां पे स्टेटमेंट
वन ठीक है। टू गलत है। तो ए ऑप्शन इज द करेक्ट आंसर। एक बार आंसर देख लेते हैं क्या है? ये लो भाई, ए ऑप्शन आपका आंसर
है। ए ऑप्शन आंसर है। वन इज ट्रू, टू इज़ फॉल्स। राइट। एकदम बढ़िया बात। वन इज ट्रू, टू इज़ रॉन्ग। ये
हो गया। ठीक है? क्या यहां तक की बात समझ में आई? तो भाई, इन सवालों का जो ये सवाल मैं लेके आया हूं, इनका कोई अंत नहीं है।
तो यह सवाल मैं आपको दे दूंगा किस में? यह सवाल आपको दे दिए जाएंगे। किस में? आपके
हम ओके। तो इतना हमारा काम काफी हो गया इस पे। ठीक है ना? फोटोइिक इफेक्ट पे खूब
सारे सवाल हो गए। अब कुछ और आगे बढ़ना चाहिए। आगे हमको अब बढ़ना चाहिए। तो भाई अगला वाला टॉपिक कौन सा है हमारा?
थोड़ा सा एक्सरे पे हम बात करेंगे और फिर उसके बाद डी ब्रोगली वेवलेंथ पे बात करेंगे। ठीक है? तो भाई देखो मेरा यहां पे
मतलब क्या है? आप इसको अदरवाइज मत लेना। कुछ लोग सोचेंगे कि सर एक्सरे तो है ही नहीं। आप क्यों पढ़ा रहे हो? वाई।
ठीक। ठीक है ना? एक्सरेज क्यों पढ़ा रहे हो? तो भाई, मैं पहले ही बता रहा हूं आपको
क्योंकि मुझे क्या रहता है? डर। तो मैं इसको मिनिमम बातें बताऊंगा। ठीक है ना? मिनिमम रिक्वायर्ड।
ठीक? उतनी बातें यहां होनी चाहिए। क्योंकि भाई एक्सरे में कुछ बातें ऐसी हैं जो फोटोइिक इफेक्ट को पूरा कर देती हैं। ठीक
है ना? तो मैं एक्सरे एक्सप्लेन करूंगा। मिनिमम रिक्वायर्ड। मुझे पता है कि ये टॉपिक जेईई मेनस से डिलीटेड है। हटाया जा
चुका है। बट मैं इसमें जितनी भी रिक्वायर्ड बातें होंगी बस वो बताऊंगा ज्यादा नहीं। ठीक है ना बेटा? इज इट ओके?
फाइन। चलो बात करते हैं इससे आगे वाली एक्सरेज़। तो एक्सरे क्या है? यह उल्टा है।
उल्टा है यह। यानी कि यह एक्सरे जो है उल्टा ऑफ। फोटो इलेक्ट्रिक इफेक्ट। ठीक है ना? तो
बिल्कुल इस तरीके से देखो भाई टू द पॉइंट पढ़ाना है मुझे। तो मैं इस तरीके से पढ़ाऊंगा कि एकदम कैजुअल टाइप ताकि फटाफट
फटाफट फंडे क्लियर हो जाए आपके। ठीक है? ओके। तो उल्टा ऑफ फोटोइिक इफेक्ट। अरे इसका
मतलब क्या हुआ? उल्टा ऑफ़ फोटोइिक इफ़ेक्ट। यानी कि अगर भाई ये फोटोइिक इफ़ेक्ट है। ठीक है ना? यहां पे यूं तो आप क्या करते
हो यहां पे ऐसे यूं फोटोइिक इफेक्ट में क्या होता है? फोटोइिक इफेक्ट में यूं रेडिएशन आता है। ये क्या आता है? रेडिएशन
आता है। ओके? आया रेडिएशन? बिल्कुल। और यहां से जो इलेक्ट्रॉन है जो इलेक्ट्रॉन है वो निकल के भाग गया।
ठीक है ना? रेडिएशन आया और इलेक्ट्रॉन निकल के भाग गया। इसको क्या बोलते हैं? इसको बोलते हैं फोटोइिक इफेक्ट। बहुत
बढ़िया। और ये रेडिएशन क्या है? एक न्यू नोट से ऊपर का इसका ये होना चाहिए फ्रीक्वेंसी। ठीक है भाई। फोटोइिक इफेक्ट
अभी-अभी तो पढ़ा है सर। सब याद है। कोई दिक्कत नहीं है। आगे बढ़ जाते हैं। अब लेकिन यही वाले रेडिएशन।
ठीक है ना? क्योंकि यही वाली इवेंट अगर इस प्लेट के साथ हो रही है। यहां पे यही वाली इवेंट जो है अगर मैं इस
प्लेट के साथ कर रहा हूं यहां पे। अलग ही टशन दिखा रहा है। हां ये लो। तो भाई अगर यही वाली इवेंट यहां पे हो रही
है तो ये जो इलेक्ट्रॉन निकल रहा है अगर इसको वापस इस पे मार दें। यह लो वापस इस प्लेट पर मार दें तो भाई यह जो रेडिएशन है
ना यह इस तरफ निकल जाएगा। ये ठीक है? तो ये उल्टा है। ये क्या है?
उल्टा है। ठीक? तो यहां पे जब हम रेडिएशन डालते थे तो इलेक्ट्रॉन निकलता था। अब अगर इलेक्ट्रॉन डालेंगे तो रेडिएशन निकलेगा।
और इस रेडिएशन को ही हम एक्स रेज बोलते हैं। ठीक है ना? इस रेडिएशन को ही हम एक्स रेज़ बोलते हैं। ठीक? तो ऐसा है तो वैसा भी
है। उल्टा भी ट्रू है। यही एक्सरे का फंडा है। ओके? अब एक्सरे कैसी होती है? जब फास्ट मूविंग इसी पेज पे ही मैं काफी सारी
चीजें बताऊंगा आपको। तो जब फास्ट मूविंग फास्ट मूविंग इलेक्ट्रॉन किसी बढ़िया यानी के हाई
मेल्टिंग पॉइंट वाली प्लेट से टकराते हैं तो ऐसे एक्स रेज़ निकलती हैं। और जो वन एंगस्ट्रो से लेके 100 एंगस्ट्रो के बीच
की वेवलेंथ रखते हैं उनको हम एक्स रेज़ बोलते हैं। बाकी रेडिएशन तो बहुत टाइप का निकलेगा। लेकिन वो रेडिएशन जिसका रेंज वन
एंगस्ट्रो से 100 एंगस्ट्रो तक होगी उसको हम क्या बोलेंगे? एक्सरे बोलेंगे। अब ये हाई मेल्टिंग पॉइंट होना चाहिए क्योंकि ये
फास्ट मूविंग इलेक्ट्रॉन है। इनके पास काइनेटिक एनर्जी बहुत ज्यादा होती है। और जब ये इस प्लेट से टकराएंगे तो अपनी
काइनेटिक एनर्जी इस प्लेट को देंगे। उस काइनेटिक एनर्जी से उस काइनेटिक एनर्जी से ऐसे यूं बन के यूं
बन के पैकेट बनेगा और पैकेट बनके एनर्जी का यूं निकल के भाग जाएगा। ठीक? अब यहां से काइनेटिक एनर्जी आ रही है। काइनेटिक
एनर्जी आ रही है। यहां पे अंदर क्या घटित हो रहा है? आज तक किसी को नहीं पता। किसी को नहीं पता यहां क्या हो रहा है। यहां से
एनर्जी का पैकेट बनेगा। एनर्जी का पैकेट बनेगा जिसको हम फोटन बोलेंगे या आप चाहो तो उसको
इलेक्ट्रोमैग्नेटिक वेव बोल दो जो आपकी मर्जी है। इस काइनेटिक एनर्जी से एनर्जी का पैकेट बनेगा और वो निकल के चलेगा। उसको
हम रेडिएशन बोलेंगे। वो एक्सरे होगा। और पता है आपको? आइंस्टीन साहब ने अपनी पूरी जिंदगी इसी में लगा दी कि भाई काइनेटिक
एनर्जी का पैकेट कैसे बन पाता है? ये नहीं पता आज तक किसी को। ठीक? ये नहीं पता। ठीक? तो ये एक्सरे बहुत बड़ी मिस्ट्री है।
बट हमें तो अपने फायदा लेने से मतलब है। एक्सरे से हमारे इतने काम होते हैं वो पता चल जाए। तो यहां से जो ये एक्सरे निकलती
है ये हाई एनर्जी वाली रेडिएशन होती है। जिसका आप देखो कितना कम है। ये शॉर्ट वेवलेंथ है। क्या है ये? शॉर्ट वेवलेंथ
है। शॉर्ट लैम्ब्डा है और लैम्ब्डा अगर शॉर्ट होता है तो भाई एनर्जी बहुत हाई होती है। तो हाई एनर्जेटिक
इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन इज नोन एज एक्स रेज़। ठीक है? अब इसका जो सेटअप होता है, ठीक है ना? इसका जो सेटअप होता है भाई
वो इस तरीके का होता है। ठीक है? तो मैं इसमें बहुत ज्यादा समय नहीं लूंगा बेटा आपका। क्यों? क्योंकि मुझे बस मिनिमम
रिक्वायर्ड चीजें पूरी करनी है। ठीक है ना? तो इधर होती है प्लेट और यहां पे होती है एक इलेक्ट्रॉन गन और इस इलेक्ट्रॉन गन
में होता है एक फिलामेंट। फिलामेंट के बीच के जो ये जो पॉइंट्स हैं इनके बीच का पोटेंशियल होता है V1। ठीक है ना? और यहां
पे ये जो फिलामेंट का कवर है ये और ये जो प्लेट है ये। इन दोनों के बीच की वोल्टेज होती है V2। ठीक है भाई? इन दोनों के बीच
की वोल्टेज होती है V2। अब ये जो प्लेट है, ठीक है ना? इस प्लेट के पास ठीक है ना इस टाइप की एक ओपनिंग होती है
यहां पे यूं यूं यहां पे एक ओपनिंग होती है इस तरीके की ठीक है ना बात को समझते जाना है तो इसमें क्या होता है कि यहां पे
हम इस जगह पे वोल्टेज लगाते हैं ऐसे ये तो यहां पे इलेक्ट्रॉन जनरेट होते हैं और वो फास्ट मूविंग इलेक्ट्रॉन्स यहां से निकल
के यूं जा के यहां टकराते हैं। फास्ट मूविंग इलेक्ट्रॉन जाकर इस प्लेट पे टकराते हैं। यह इलेक्ट्रॉन गन है। यहां
टकराते हैं। अब यह क्या होता है? टंगस्टन। टंगस्टन बोल दो या हाई एटॉमिक नंबर वाला मटेरियल बोल दो। इससे टकराते हैं और यहां
से इस तरीके से रेडिएशन निकलता है। अब ये जो रेडिएशन है ये हम किसी प्लेट पे नीचे यहां पे ऐसे रिसीव कर लेते हैं। और यही
आपका एक्सरे होता है। क्या होता है? यही आपकी एक्स रेज़ होती है। ठीक है? ध्यान से सुनना। तो ये जो प्लेट
है, ये बहुत हाई मेल्टिंग पॉइंट की प्लेट होती है जिसको हम टारगेट बोलते हैं। T मतलब टारगेट। भाई, बहुत जल्दी-जल्दी
एक्सप्लेन करूंगा। सारी चीजें पता चल जाएंगी आपको। ठीक है? तो यहां पे इस टारगेट को कूल करने के लिए इस तरीके से
यहां से कोल्ड वाटर का फ्लो भी होता है। ठीक है ना? कोल्ड वाटर का फ्लो भी होता है। क्यों? क्योंकि 90%
ऑफ काइनेटिक एनर्जी किस में कन्वर्ट होती है? हीट में कन्वर्ट होती है। और बहुत थोड़ी सी एनर्जी एक्स रे में कन्वर्ट होती
है। राइट? ठीक है सर। बहुत बढ़िया। अब जरा थोड़ा सा ध्यान इस पे दो। v1 पे। अगर मैं v1 को बढ़ा दूंगा। ठीक है ना? सपोज़ करो
मैंने इस V1 को बढ़ा दिया। तो यहां से ज्यादा इलेक्ट्रॉन निकलेंगे। बहुत अच्छी बात है। ज्यादा इलेक्ट्रॉन निकलेंगे तो
ज्यादा हीटिंग होगी। ज्यादा हीटिंग होगी तो ज्यादा एक्सरे निकलेंगी। ठीक? तो इस वोल्टेज को बढ़ाने से इनकी
क्वांटिटी बढ़ाई जा सकती है। तो अगर आपको एक्स रेज की क्वांटिटी क्वांटिटी इनक्रीज करनी है तो इस वोल्टेज
को बढ़ा दो। तो ये वाली वोल्टेज आपको क्वांटिटी का कंट्रोल देती है। तो दिस इज क्वांटिटी कंट्रोल वोल्टेज। बहुत बढ़िया
सर। समझ आ गया। कोई बात नहीं। भाई जितने ज्यादा इलेक्ट्रॉन निकलेंगे भाई इसकी वोल्टेज बढ़ाओगे तो इतने ज्यादा
इलेक्ट्रॉन निकलेंगे। जितने ज्यादा इलेक्ट्रॉन निकलेंगे उतनी ज्यादा एक्सरेज निकलेंगी। तो ये वाली चीज आपकी क्वांटिटी
को कंट्रोल करती है। बहुत अच्छी बात सर। बहुत अच्छी। अब आगे बढ़ते हैं। अब जरा इस वोल्टेज पे ध्यान दो। ठीक है ना?
ये इस वोल्टेज पे ध्यान दो। ठीक? अब ये वोल्टेज क्या है? इसको पॉजिटिव बनाती है और इस फिलामेंट को नेगेटिव बनाती है।
नेगेटिव से पॉजिटिव ये वाली वोल्टेज ये वाली वोल्टेज इलेक्ट्रॉन को एक्सीलरेशन देगी।
ये वाली वोल्टेज क्या करेगी? इन इलेक्ट्रॉन्स को एक्सीलरेशन देगी। अब ये ऑलरेडी काफी तेज़ चल रहे थे। अब ये
एक्सीलरेशन देके और फास्ट कर देगी इनको। फास्ट करने का मतलब एक इलेक्ट्रॉन की काइनेटिक एनर्जी को बढ़ा देगी। ठीक? अब
नंबर नहीं बढ़ाएंगे। नंबर तो इसके हाथ में है। नंबर तो कम है। नंबर तो कम ही है। जितने हैं उतने लेकिन जो इलेक्ट्रॉन है
बहुत ज्यादा एनर्जी से टकरा रहा है यहां पे। तो जो यहां पे ये रेडिएशन निकलेगा ये और स्ट्रांग हो जाएगा। क्या हो जाएगा? और
स्ट्रांग हो जाएगा। यानी कि क्वालिटी और स्ट्रांग हो जाएगी। तो ये और स्ट्रांग स्ट्रांग एक्सरेज़ निकलेंगी। यानी कि
ज्यादा एनर्जेटिक एक्सरेज निकलेंगी। यानी कि यह क्वालिटी यह वाली चीज क्या करेगी? एक्सरेज की क्वालिटी
क्वालिटी को बढ़ा देगी। यानी कि ये वोल्टेज आपकी क्वालिटी कंट्रोल करती है। क्या करती है? क्वालिटी कंट्रोल करती है।
तो ये वोल्टेज क्वालिटी को कंट्रोल करने वाली है। ये वोल्टेज क्वांटिटी को कंट्रोल करने वाली होती है। ठीक? तो अगर स्ट्रांग
एक्स रेज़ होंगी। ठीक है ना? तो इसकी मोर पेनिट्रेटिंग मोर पेनिट्रेटिंग पावर होगी।
ज्यादा पेनिट्रेटिंग पावर हो जाएगी अगर स्ट्रांग होगी और वीक होगी तो कम पेनिट्रेटिंग पावर होगी। तो भाई आप ये
देखो अगर आपको ऐसी एक्सरे लेनी है जो ज्यादा पेनिट्रेट करती है जो ज्यादा पेनिट्रेट करती है तो आपको ये वाली
वोल्टेज बढ़ानी पड़ेगी और कम पेनिट्रेट करती है तो ये वाली वोल्टेज कम करनी पड़ेगी। अब आपको अगर बहुत ज्यादा एक्सरे
चाहिए तो आपको ये वाली वोल्टेज बढ़ानी पड़ेगी। आपको कम एक्सरेज चाहिए तो ये वाली वोल्टेज कम करनी पड़ेगी। ये वाली बात आपको
समझ आ गई? बहुत बढ़िया। तो भाई देखो बेटा मेरा टारगेट है आपको वो वो पॉइंट बता देना जिस पे सवाल आ जाए। ठीक? अब यहां पे भाई
लोग बाग मानते तो है ही नहीं। जो यहां पे ये एक्सरेज आई हैं ये वाली। इन एक्सरेज़ को अब एनालाइज किया गया। क्या किया गया?
एनालाइज किया गया इन एक्सरेज़ को। और ये एक्सरेज हमें दो प्रकार की मिली। ये जो एक्सरेज यहां आ के गिर रही है ना इन
एक्सरेज को एनालाइज किया गया और हमें दो टाइप की एक्सरेज मिली। एक तो नॉर्मल बिल्कुल नॉर्मल जिनको कंटीन्यूअस
कंटीन्यूअस एक्सरेज़ बोलते हैं। बहुत बढ़िया। और एक हमें स्पेशल टाइप की मिली जिनको हम कैरेक्टरिस्टिक
कैरेक्टरिस्टिक एक्सरेज़ बोलते हैं। बहुत अच्छे। एक तो कंटीन्यूअस एक्सरेज, एक कैरेक्टरिस्टिक एक्सरे। अब कैरेक्टरिस्टिक
एक्सरेज कैसी हैं? कंटीन्यूअस एक्सरेज कैसी हैं? वो वाली चीज देख लो। भाई जब ये एक्सरेज हमें मिली तो हमने क्या ट्राई
किया? हमने इनका एक ग्राफ बनाने की कोशिश की। ठीक है ना? हमने इनका एक ग्राफ बनाने की कोशिश की। इस ग्राफ में हमने इस
डायरेक्शन पे इनकी वेवलेंथ प्लॉट की और यहां पे इनकी इंटेंसिटी प्लॉट की। एक तो हमें क्या मिला? हमें एक ग्राफ ऐसा मिला।
यूं हमें एक ऐसा ग्राफ मिला। ओके? यानी के जो हमें ग्राफ मिला उसमें कुछ एक्सरेज़ तो ऐसी
थी जो यहां पर कहीं-कहीं पे इस तरीके के पंप्स आ रहे थे। यूं करके कहीं-कहीं पे ऐसे-ऐसे कांटे टाइप आ रहे थे। यूं ऐसे यूं
आ रहे थे कांटे टाइप। ऐसा ग्राफ मिल रहा हमें। अच्छा, ठीक है सर। इस ग्राफ का क्या मतलब हुआ? ठीक है ना? इस ग्राफ का मतलब ये
हुआ भाई कि कहीं-कहीं पे जो एक्सरेज हैं, ठीक है ना? जो एक्सरेज़ हैं उनकी जो उनकी जो इंटेंसिटी है वो एक कास्टेंट रेट
से बढ़ रही है, कम हो रही है। लेकिन किसी-किसी जगह पे एकदम से हाई हो जाती है। ठीक है ना? एकदम से हाई हो जाती है
किसी-किसी जगह पे। ठीक है ना? किसी-किसी जगह पे एकदम से हाई हो जाती है। ठीक है? अब ये वो स्पेशल
लैम्ब्डा है। ठीक है ना भाई? ये लैम्ब्डा होगा। ये लैम्ब्डा 2 होगा। ये लैम्ब्डा 3 होगा। ये लैम्ब्डा 4 होगा। ऐसे स्पेशल
लैम्ब्डा है ये। इन लैम्डा पे इंटेंसिटी एकदम से हाई हो जाती है और बाकी जगह पे कंटीन्यूअस चलती हैं। तो इन वेवलेंथ इन
वेवलेंथ की भाई जो एक्स रेज ऐसे गिर रही थी नीचे इस वाले एरिया पे जो एक्सरेज ऐसे गिर रही थी ये वाली जो एक्स रेज़ हैं हमारी
इन एक्स रेज़ में से कुछ एक्सरेज़ जिनकी वेवलेंथ ये है उनकी इंटेंसिटी एकदम से ज्यादा होती है। ठीक है? बाकी की तो एक
एवरेज रेट में बढ़ती है और फिर कम हो जाती है। इस टाइप की। अब इस बात को समझना आप। ठीक है? इस बात को समझना आप ये क्या है?
तो भाई, यह वाली जो एक्सरेज हैं, इनको हम कैरेक्टरिस्टिक एक्सरेज बोलते हैं। कैरेक्टरिस्टिक एक्सरेज़।
ठीक? और ये वाली जो इंटेंसिटी है, इनको आप कंटीन्यूअस कंटीन्यूअस एक्सरेज़ बोलते हैं। ठीक? तो,
जो ये कैरेक्टरिस्टिक एक्सरेज़ हैं, इनका बनने का तरीका अलग होता है और कंटीन्यूअस एक्सरेज का बनने का तरीका अलग होता है।
ठीक है भाई? कैसे? एक्स रेज बनती कैसे? जैसे यह न्यूक्लियस है। यह क्या है? न्यूक्लियस है। इसके चारों तरफ इस तरीके
से। ठीक है ना? इस तरीके से ऑर्बिट्स होती हैं जिनमें इलेक्ट्रॉन घूमते रहते हैं। जिनमें इलेक्ट्रॉन्स ऐसे घूमते रहते हैं।
ये ऐसे इलेक्ट्रॉन घूम रहे हैं ऐसे। ठीक? तो उधर से जब फास्ट मूविंग इलेक्ट्रॉन आएगा। मान लो ये फास्ट मूविंग इलेक्ट्रॉन
आया। ठीक? भाई ये एक एटम है। ये इसका न्यूक्लियस है। ये क्या है? न्यूक्लियस है। इधर से फास्ट मूविंग इलेक्ट्रॉन आया।
तो देखा गया कि ये जो फास्ट मूविंग इलेक्ट्रॉन है इसकी वेलोसिटी v1 है और जैसे ये न्यूक्लियस से पास से गुजरता है
और जब एटम से बाहर निकलता है तो इसकी वेलोसिटी v2 हो जाती है और ये स्लो पड़ जाता है और इसकी काइनेटिक एनर्जी यहां
ज्यादा है। यहां कम है। तो जो काइनेटिक एनर्जी का गैप है उतनी एनर्जी का ये फोटन निकाल देता है। इसी को एक्सरे बोलते हैं।
तो ये वाली जो एक्सरे है ये आपकी कंटीन्यूअस एक्सरे हो जाती है। ठीक? लेकिन कोई कोई इलेक्ट्रॉन जब यहां से ऐसे भाग के
आता है तो कोई तो बिल्कुल सीधा निकल जाता है। कोई दिक्कत नहीं है। लेकिन किसी किसी के रास्ते में कोई आ जाता है। जैसे ये आ
गया। इस इस वाले इलेक्ट्रॉन के रास्ते में ये आ गया। तो ये क्या करता है? इसमें टक्कर मारता है। टक्कर मार के इसको भगा
देता है। तो यहां वैकेंसी क्रिएट हो जाती है। अब यहां पे जो वैकेंसी क्रिएट होती है इसको ये ऊपर वाला आके भरने की कोशिश करता
है। फिर ये भरने की कोशिश करता है। फिर ये भरने की कोशिश करता है। तो यहां से क्या होता है? ट्रांजिशन होता है। अब इस
ट्रांजिशन देखो हायर एनर्जी से लोअर एनर्जी में जा रहा है। ठीक है? तो यहां से जो इसकी और इस ऑर्बिट के एनर्जी का गैप है
उसके बराबर का फोटन निकल के चला जाता है। तो ये आपकी वो वाली एक्सरेज हो गई जो कैरेक्टरिस्टिक एक्सरेज है ये वाली। ठीक
है ना? तो ये वाली एक्सरेज़ वो होती हैं जो ट्रांजिशन से बनती हैं। ठीक? और ये वाली एक्सरेज़ वो होती हैं जो बस स्लो डाउन होने
से बनती है कि इलेक्ट्रॉन स्लो डाउन हो गया उसी से बन गई। लेकिन जो ट्रांजिशन वाली एनर्जी से बनती है वो कैरेक्टरिस्टिक
एक्स रेज होती हैं। तो ये तो सीधे-सीधे स्लो डाउन होने से बनती हैं। और ये किससे बनती है? ये ट्रांजिशन से बनती हैं। ठीक
है भाई? दो पॉइंट हो गए। याद रखना हमेशा। अब जो एक्स रेज़ हैं इनमें ये वाला पॉइंट तो था ही। राइट? अब क्या होगा? इसमें एक
मोजले साहब हैं। उन्होंने इन पे बहुत रिसर्च की। किन पे? कैरेक्टरिस्टिक एक्सरेज़ पे। तो कैरेक्टरिस्टिक एक्सरेज पर
मोजले साहब ने मोजलेस लॉ इन्होंने इस पे बहुत रिसर्च की कैरेक्टरिस्टिक एक्सरेज़ पे और इन्होंने
पाया कि भाई जो कैरेक्टरिस्टिक एक्सरेज़ हैं ठीक है जो कैरेक्टरिस्टिक एक्सरेज़ हैं अगर
उनके मास नंबर एटॉमिक नंबर ठीक और वो जो निकल रही हैं उनकी जो फ्रीक्वेंसी होती है उसके अंडर अंडर रूट में ग्राफ प्लॉट किया
जाए तो भाई वो स्ट्रेट लाइन ग्राफ आता है। ठीक है? यानी के अंडर रूट ऑफ़ फ्रीक्वेंसी इज़ डायरेक्टली प्रोपोर्शनल टू Z। ठीक? ये
उन्होंने बात बोली मोजले साहब ने। ठीक है ना? कि दैट इज डायरेक्टली प्रपोर्शनल टू अंडर रूट ऑफ़ Z। चलो बहुत अच्छी बात है।
उन्होंने बात बोली हमने सुन ली। बातें हो गई। लेकिन जो मोजले साहब थे उन्होंने जो बात बताई हमें
ठीक है कि भाई ये जो फ्रीक्वेंसी होती है जो एक्स रेज़ निकलते हैं इनकी फ्रीक्वेंसी का अंडर रूट उसके डायरेक्टली प्रोपोर्शनल
और उस टाइम में ग्राफ बनाना बहुत बड़ी बात हुआ करती थी तो उन्होंने बहुत एक्सपेरिमेंट किए अलग-अलग मटेरियल अलग-अलग
मटेरियल की प्लेट ले ले के भाई प्लेट ही तो बदली है उन्होंने Z मतलब अलग मटेरियल अलग मटेरियल की प्लेट लेके के उनके
एक्सरेज़ को उन्होंने एनालाइज किया। तब यह निकाला और उन्होंने बोला कि ये जो पॉइंट्स है ना ये थोड़े से ऊपर नीचे एग्जिस्ट करते
हैं। ले इसका मतलब Z में से अगर थोड़ा सा कुछ माइनस कर दें ना हम Z में से अगर कोई चीज हम माइनस कर दें तो भाई वो चीज माइनस
करते ही ये बिल्कुल सेट बैठ जाता है। ठीक है ना? यह वाली चीज बिल्कुल सेट आ जाती है। तो उस कांस्टेंट को बोलते हैं हम B.
ठीक है ना? तो दैट इज Z - B. ठीक? तो सुनना बात को। तो, यह डायरेक्टली प्रोपोर्शनल टू Z - B होता। अब यह B जो
है, वह डिपेंड करता है आपके मटेरियल पे और ट्रांजिशन पे। ठीक है? तो, अगर K टाइप का होगा तो B की वैल्यू वन होगी। K, L, M, N
तो उसमें B की वैल्यू डिफरेंट होगी। इसमें B की वैल्यू कुछ और होगी। इस तरीके से। तो K सीरीज का जो रेडिएशन होता है यानी कि जो
कैरेक्टरिस्टिक एक्सरेज निकलती है अगर वो K सीरीज का रेडिएशन है तो B की वैल्यू वन ली जाएगी और यहां पे अंडर रूट ऑफ़
फ्रीक्वेंसी इक्वल टू सम कांस्टेंट A * Z - B के बराबर हम उसको कर सकते हैं। ये मोज़लेस साहब का लॉ था। रटना है बस।
क्योंकि उन्होंने भी ये लॉ एक्सपेरिमेंटली फाइंड आउट किया था। इसका कोई प्रूफ नहीं है। ठीक है? अब क्या होगा इस पे अगर सवाल
आ गया अगर इस पे सवाल आ गया मान लो मान लो सवाल आ गया कैसा उन्होंने ही बता दिया मोज ले
लो मान लो क्वेश्चन में उन्होंने ही बता दिया अब तो सिलेबस के अंदर हो गया क्योंकि वो जो बता देंगे पैराग्राफ में या किसी
बात में उसके बाद तो हमें करना पड़ेगा तो इसके ऊपर सवाल आ गया तो हमें करना पड़ेगा ठीक हमें इतना पता है कि फ्रीक्वेंसी इज़
डायरेक्टली प्रोपोर्शनल टु 1 / लैम्ब्डा यह भी पता तो यहां पे आपको पता है फ्रीक्वेंसी इज़
डायरेक्टली प्रोपोर्शनल टू z - b² अगर आप इसका अंडर रूट हटाएंगे तो इधर स्क्वायर लग जाएगा और ये तो एक कांस्टेंट है। ये क्या
है? कांस्टेंट है। तो इस पे बेस्ड μ इज़ डायरेक्टली प्रोपोर्शनल टू z - b² इस पे बेस्ड सवाल आ जाते हैं। एक सवाल करेंगे और
आगे बढ़ जाएंगे। ठीक है? चलो एक सवाल निपटाते हैं इस पे और आगे बढ़ते हैं भाई। यह ले लो।
ठीक है? देखो, यह सवाल कैसा आएगा। सवाल में उन्होंने बोला कि K अल्फा रेडिएशन K सीरीज
का रेडिएशन ऑफ़ मोलबिडम Z = 42 हैज़ अ वेवलेंथ ऑफ़ दिस। यानी कि यानी कि फ्रीक्वेंसी इज़ डायरेक्टली प्रोपोर्शनल टू
Z - B होल स्क्वायर। अब फ्रीक्वेंसी इज़ डायरेक्टली प्रोपोर्शनल टू 1 / लैम्ब्डा। तो यहां पे आप लिख सकते हो 1 / इज
डायरेक्टली प्रोपोर्शनल टू z - b² ये आपकी इक्वेशन हो गई। अब इसके बारे में उसने क्या बोला है कि अगर प्लेट मोलबिडनम की ली
जाए जिसका z 42 है तो वेवलेंथ इतनी निकलती है। यानी के 1 /71 एंगस्ट्रो
इज़ डायरेक्टली प्रपोर्शनल टू कितना? 42 - b की वैल्यू कितनी दे रखी है? वन। और इसका स्क्वायर ये ये हो गया। अब वो कह रहा है
कि अगर मोलबिडनम की जगह कॉपर यूज किया जाए तो कितना होगा? तो हमें नहीं पता कितना होगा। वही तो निकालना है। दैट शुड बी
डायरेक्टली प्रपोर्शनल टू कॉपर का कितना है? 29 - 1 का स्क्वायर। अब इन दोनों चीजों को अगर हम डिवाइड करेंगे तो ये तो
लैम्ब्डा /71 हो जाएगा। ओके? अब यहां पे ये कट के इक्वल टू आ जाएगा और ऊपर क्या आ जाएगा? ऊपर आ जाएगा 41 का स्क्वायर और
नीचे आ जाएगा 20 8 का स्क्वायर। ये आ गया। तो यहां से लैम्ब्डा की वैल्यू निकल आएगी 1.51 एंगस्ट्रो के आसपास की वैल्यू निकल
आएगी। ठीक है? एप्रोक्सीमेटली। तो इस टाइप का भाई सवाल एक्सरे पे बनता है। और इस लेवल तक का एक्सरे अगर आया है
तो आपको आना चाहिए। राइट? अब बढ़ते हैं इससे भी आगे। कहां पे? डी ब्रोगली वेवलेंथ पे
डी ब्रोगली वेवलेंथ इस पे आते हैं। ठीक है क्या मेरी बात समझ में आ रही है? सर, हाउ डू आई क्रैक जेई इन लास्ट 22 डज़?
बहुत बढ़िया सवाल है बेटा। गजब फोड़ दिया आपने तो इतना तगड़ा सवाल पूछा आपने। ठीक है ना? डी ब्रोगली वेवलेंथ तो इसको डी
ब्रॉय भी बोल सकते हैं। डी ब्रॉय भी बोल सकते हैं। ठीक है भाई? अब ये डी ब्रोगली साहब क्या थे? यह बिल्कुल
इन्होंने ऐसा किया कि भाई एकदम उल्टा काम कर डाला इन्होंने। इन्होंने कहा कि ड्यूल नेचर है। ओके? ठीक
है ना? तो ड्यूल नेचर में क्या होता है कि भाई वेव नेचर भी होती है, पार्टिकल नेचर भी होती है।
कि जब हम मास को वेव और वेव को मास मान रहे हैं भाई। भाई जिसमें पार्टिकल नेचर है वो मैटर हो गया। ठीक है ना? जिसमें वेव
नेचर है वो वेव हो गया। कि जब मैटर वेव के बराबर है तो वेव मैटर के बराबर है। उल्टा भी है। ठीक है ना? इसका मतलब ये है कि अगर
ठीक? क्योंकि भाई कहानियां ज्यादा नहीं सुना सकते। बहुत कम टाइम है। उतने टाइम में मुझे पूरा करना है ये सब कुछ। तो और
सारी की सारी बातें बतानी है। जितनी भी है सारी बातें बतानी है मुझे। ठीक है? हां। अंडरस्टुड सर ओके
20 दिन में 22 दिन में जेई कैसे निकालें निकालें कहीं घुसा हुआ है क्या जेई जो निकालोगे
अच्छा पास करें ठीक है समझ आ गया हम हम ओके अब आ जाओ।
ठीक है? डीब्रॉय वेवलेंथ। तो भाई इन्होंने कहा है कि देखो जब मास वेव और वेव मास के बराबर है तो इसका मतलब ये है कि अगर भाई
कोई m मास का पार्टिकल m मास का पार्टिकल इस तरफ चल रहा है कितनी वेलोसिटी से? v से।
तो ये तो मैटर है ना? तो यह मैटर जो है वह वेव के इक्विवेलेंट होना चाहिए।
मैटर जो है वह वेव के बराबर होना चाहिए। जब किसी चीज में ड्यूल नेचर है लाइट है कभी वो पार्टिकल की तरीके से काम करती है।
कभी वो वेव की तरीके से काम करती है और वो दोनों एक ही चीज के कैरेक्टर हैं। तो दोनों में कोई इक्विवेलेंस होना चाहिए। तो
उन्होंने यही बताया कि अगर कोई m मास का पार्टिकल v वेलोसिटी से चल रहा है तो भाई उसका मोमेंटम कितना होता है? P = MV यह
होता है मोमेंटम। तो भाई वो एक वेव के इक्विवेलेंट होगा। अच्छा जी। किस वेव के? किस वेव के इक्विवेलेंट होगा? उस वेव के
इक्विवेलेंट होगा जिसकी वेवलेंथ H/ P के बराबर होगी। ये डी ब्रोगली साहब ने बताया है। और ये सब कुछ थ्योरिटिकल है।
प्रैक्टिकली कुछ भी ठीक नहीं है। मतलब ठीक नहीं है। अब चैलेंज तो कर नहीं सकते। अब H वही है प्लैंक कांस्टेंट 6.63 * 10 टू दी
पावर -34 इन SI यूनिट जो भी होता है S तो ये H तो ये होगा P क्या है? P है आपका मोमेंटम
मोमेंटम वो भी इन SI यूनिट। ठीक? और जो वेवलेंथ है वो आपकी मीटर में आएगी। तो वेवलेंथ जो है वो आपकी किस में
आएगी? मीटर में आएगी। क्योंकि सब कुछ एसआई यूनिट में ही चल रहा है। तो ये डी ब्रोगली साहब ने बताया और यकीन मानो इसके अलावा
कुछ जानने की जरूरत है ही नहीं। कुछ जानने की जरूरत नहीं है। डी ब्रोगली की रिसर्च करने की कोई जरूरत नहीं है भाई। ठीक? आपको
क्या करना है? जितने भी सवाल इंडस्ट्री में डी ब्रोगली वेवलेंथ पे हैं। ठीक? या तो P देके लैम्ब्डा पूछा है या फिर
लैम्ब्डा देके P पूछा है। बस H ना कभी पूछा गया ना बताया गया क्योंकि ये तो कांस्टेंट है। ठीक? तो आपका फाइनल टारगेट
रहता है कुछ भी करके। फाइनल टारगेट जो रहता है आपका वो होता है टू फाइंड P.
इसी तरीके से आप मोमेंटम पता कर लो लैम्ब्डा पता चल जाएगा। और कुछ भी करने की जरूरत नहीं है इसमें। इससे ज्यादा कुछ
जानने की जरूरत नहीं है। अब कुछ लोग बोलेंगे सर देखो किसी टीचर को ऐसी बातें ना करना शोभा नहीं देता। अच्छी नहीं लगती
जब वो कहता है कि इससे ज्यादा पढ़ने की जरूरत नहीं है। लेकिन बेटा हमें जेई की प्रिपरेशन करनी है। हमसे सवाल होना चाहिए।
एथिक्स वेथिक्स गई तेल लेने। हमसे सवाल होना चाहिए। हमें नंबर मिलने चाहिए और ज्यादा से ज्यादा सवाल होने चाहिए ताकि
सवाल आपका मिनिमम टाइम में निपटे। किस में? मिनिमम टाइम में निपटे। बस ऐसा करना है। ठीक? भाई पढ़ाई लिखाई बाद में कर
लेंगे। हमारा सवाल सही होना चाहिए। तो अभी वही टारगेट है। ठीक? वरना इसकी रिसर्च में मैं एक दिन दो दिन तक पढ़ाता रहूंगा आपको।
बहुत सारी ऊपर नीचे की बातें भी बता दूंगा जो आपके ना किसी काम की ना कहीं पे वो यूज़ होंगी। ठीक? तो चलो भाई शुरू करते
हैं। अब आप ये बताओ मुझे मोमेंटम मोमेंटम की बात करते हैं। तो कभी-कभी क्या होता है कि जब हम पढ़ाई लिखाई करते हैं तो
इलेक्ट्रॉन की बात होगी। ठीक? कि भाई एक इलेक्ट्रॉन है ये जा रहा है इधर v वेलोसिटी से। कितने से जा रहा है? v
वेलोसिटी से इलेक्ट्रॉन जा रहा है। तो बताइए इसके इक्विवेलेंट वेवलेंथ कितनी होगी? इसके इक्विवेलेंट वेवलेंथ कितनी
होगी? ये पूछा जाएगा। अब भाई इलेक्ट्रॉन का मोमेंटम चाहिए हमें। किसका? मोमेंटम चाहिए इलेक्ट्रॉन का। तभी तो लैम्ब्डा
निकलेगा। तो मोमेंटम इलेक्ट्रॉन का कैसे पता चलेगा? मोमेंटम पता चलेगा उसका मास इंटू उसकी वेलोसिटी।
इसी से तो मोमेंटम पता चलेगा। अब हमें इतना पता है कि काइनेटिक एनर्जी अगर k है। ठीक है ना? तो वो p² / 2m के बराबर होती
है। कैसे? मोमेंटम का स्क्वायर / 2m भाई m²v² / 2m कर दोगे तो 1/2 mv² आ जाएगा ना ये ये
1/2 mv² आ जाएगा तो काइनेटिक एनर्जी जो है p² / 2m के बराबर होती है। अच्छा जी। अब हमें इलेक्ट्रोस्टेटिक से एक चीज और पता
है। क्या पता है कि अगर ये वाला पॉइंट a है। ठीक है ना? और ये वाला पॉइंट B है। और यहां से लेके यहां तक का पोटेंशियल का
डिफरेंस डेल्टा V है। और एक इलेक्ट्रॉन को एक इलेक्ट्रॉन को हम यहां से यहां तक ले जाते हैं। ठीक है? तो भाई या तो उसकी
काइनेटिक एनर्जी बढ़ेगी अगर इस तरफ फोर्स लगेगा। नहीं तो उसकी काइनेटिक एनर्जी घटेगी अगर उल्टा फोर्स लगेगा। तो या तो
काइनेटिक होगी तो पोटेंशियल में बदल जाएगी। पोटेंशियल होगी तो काइनेटिक में बदल जाएगी। तो दो पॉइंट जिनके बीच का
पोटेंशियल का डिफरेंस डेल्टाV है। ठीक है ना? तो उसमें एनर्जी एनर्जी कितनी आ जाती है? q * डेल्टाV तो
इस इलेक्ट्रॉन के पास जो एनर्जी आ जाएगी वो आ जाएगी e * v। E * डेल्टाV लिखना चाहिए मुझे। E * डेल्टाV इतनी एनर्जी इस
इलेक्ट्रॉन को या तो मिल जाएगी या खत्म हो जाएगी। ठीक? तो हम तो वेलोसिटी चाहते हैं। इसमें वेलोसिटी आए। तो ज़ीरो वेलोसिटी पे
यहां रखा और इस पोटेंशियल से जैसे ही पास हुआ इसकी वेलोसिटी v हो गई। तो काइनेटिक एनर्जी अगर K है तो वो E * V के बराबर
होगी। ठीक? अब सुनना ध्यान से। अब इतनी काइनेटिक एनर्जी उसमें आ गई। आ गई। तो इस काइनेटिक एनर्जी की जगह आप E डेल्टाV रख
दो। तो P² / 2m आपके E डेल्टाV के बराबर हो गया। तो P किसके बराबर हो गया? यहां से इस जगह से p किसके बराबर आ गया? p² / 2m
डेल्टाV के बराबर आ गया। तो 2 e डेल्टाV और इसका अंडर रूट ये आपके इलेक्ट्रॉन का मोमेंटम आ गया। अच्छा जी। तो अगर
इलेक्ट्रॉन का मोमेंटम ये है। इलेक्ट्रॉन का मोमेंटम ये है तो उसका लैम्ब्डा क्या होगा? उसका लैम्ब्डा होगा h / वो वाला p
तो p कितना हो जाएगा? 2 टाइम्स ऑफ इलेक्ट्रॉन का चार्ज e मास इलेक्ट्रॉन का me और कितना जितना वो
वोल्टेज क्रॉस किया है डेल्टाV भाई ये उसके लैम्ब्डा का फार्मूला हो जाएगा। ठीक? ये उसके लैम्ब्डा का फार्मूला हो
जाएगा। अब ये फार्मूला मैंने निकाल के क्यों दिखाया है? क्योंकि मुझे आगे वाले फ़ूले डायरेक्ट लिखने हैं। ठीक है ना? आगे
वाले फ़ूले मुझे डायरेक्ट लिखने हैं। तो ये उसका लैम्ब्डा आ गया। ओके। अब इसमें देखो H कांस्टेंट है, me कांस्टेंट है, e
कांस्टेंट है और 2 भी कांस्टेंट है। भाई सारी चीजें कांस्टेंट है। एक्सेप्ट दिस डेल्टाV तो ये वाला फार्मूला अगर लिखा
जाएगा तो लैम्ब्डा ऑफ़ इलेक्ट्रॉन इज़ इक्वल टू आ जाएगा सम कांस्टेंट। यहां पे कुछ कांस्टेंट आएगा और नीचे अंडर
रूट में डेल्टाV आ जाएगा बस। क्योंकि भाई देखो ये भी कांस्टेंट है। ये भी कांस्टेंट है। ये भी कांस्टेंट है। ये भी कांस्टेंट
है। और इसका अंडर रूट लेके h के नीचे सब कांस्टेंट है। अंडर रूट में केवल डेल्टाV बचेगा। तो ये यहां पे जो कांस्टेंट आएगा
ना c नॉट वो मुझे पता करना। तो इसकी कैलकुलेशन करके पता चल जाएगा। तो ये वाले सारे फ़ूले मैंने आपको डायरेक्ट देने हैं।
ठीक? कैसे? देख लो। अब डीब्रोगली वेवलेंथ वाले फ़ूले। ये मैं आपको डायरेक्ट पकड़ाऊंगा। अब और इनको आपको याद रखना है।
कहीं ना कहीं तो लगे हुए हैं। ये ले लो ये रहा। ठीक है? तो भाई डी ब्रोगली वेवलेंथ पे ये
वाली बात थी। उसका लैम्ब्डा h / p के बराबर होता है। ठीक है? और अगर हम बात करते हैं किसी
ये लो बिल्कुल भी ज्यादा समय मैं आपका वेस्ट कराऊंगा ही नहीं। ठीक है? ये लो देखो ये इलेक्ट्रॉन के लिए है फार्मूला।
ठीक है ना? h / 2 * मास ऑफ़ द इलेक्ट्रॉन * चार्ज ऑफ़ इलेक्ट्रॉन * डेल्टाV भाई इसी से तो आया है इलेक्ट्रॉन के लिए। लैम्ब्डा =
h / 2 टाइम्स ऑफ़ मास ऑफ़ इलेक्ट्रॉन * चार्ज ऑफ़ इलेक्ट्रॉन * डेल्टाV यही समथिंग डिवाइडेड
बाय अंडर v नॉट यहीं से तो आया है। ठीक? अब जिन पार्टिकल्स की काइनेटिक एनर्जी E होती है। जिन पार्टिकल्स की काइनेटिक
एनर्जी E होती है। भाई जरूरी थोड़ी है उन पे चार्ज हो। किसी पे चार्ज होता है। अगर किसी पार्टिकल पे चार्ज है तो उसकी
काइनेटिक एनर्जी को हम q * डेल्टाV लिख देते हैं। लेकिन अगर किसी पे चार्ज नहीं है तो उसकी काइनेटिक एनर्जी को तो हमें KE
लिखना पड़ेगा या फिर e लिखना पड़ेगा। तो तब लैम्ब्डा की वैल्यू आपकी h / 2m हो जाती है। पर ये कैसे? क्योंकि
काइनेटिक एनर्जी अगर e है तो e को आप 1/2mv² लिखोगे। m से ऊपर और m से नीचे मल्टीप्लाई कर दो तो 2m
इस 2m को इधर ले आओ तो ये m² v² हो जाएगा। तो ये p हो जाएगा इसका अंडर रूट तो h / p इस तरीके से हमने ये वाली एनर्जी लिखी। अब
क्या होता है कि जैसे भाई हम कैलकुलेट करते हैं जब हम कैलकुलेट करेंगे तो अगर हमारे पास इलेक्ट्रॉन है या न्यूट्रॉन है
या कुछ भी है। ठीक है ना? तो देखो न्यूट्रॉन के लिए ठीक है ना? न्यूट्रॉन पे चार्ज कितना होता है? न्यूट्रॉन पे चार्ज
कितना होता है भाई? जीरो होता है। इसका मतलब उसमें हम काइनेटिक एनर्जी = q * डेल्टाV ये वाली चीज तो काम नहीं करेगी।
उसकी तो काइनेटिक एनर्जी देनी पड़ेगी। न्यूट्रॉन की काइनेटिक एनर्जी तो देनी पड़ेगी। तो अगर उसकी काइनेटिक एनर्जी e
है। ठीक है? तो उसका जो लैम्ब्डा होगा वो होगा 0. 286 / अंडर रूट ऑफ़ उसकी काइनेटिक एनर्जी
इन एंगस्ट्रो। ये एंगस्ट्रो में लैम्ब्डा आ जाएगा डायरेक्ट। और इसको रट्टा मार लेना है
आपको। क्या करना है भाई? रट्टा मार लेना है। इसी तरीके से गैस के मॉलिक्यूल्स हैं। इन गैस के मॉलिक्यूल्स पे भी तो चार्ज
जीरो होता है। इसलिए इनकी भी जो काइनेटिक एनर्जी है वो एज अ फंक्शन ऑफ टेंपरेचर होती है। क्या होती है? एज अ फंक्शन ऑफ़
टेंपरेचर होती है। ठीक? और तो उसकी एनर्जी की बात करें तो 3/ 2KT ऐसे करके होती है ना? 3/ 2kt होती है। राइट?
तो अगर मैं इसको 1/2 mv² करूंगा। इसी को मैं 1/2mv² करूंगा। तो यहां पे ऊपर नीचे m की
मल्टीप्लाई कर दो। इस वाले टू से टू कट गया। तो 3mt आ जाएगा mv की वैल्यू। तो यहां पे इसका जो लैम्ब्डा बनता है वो बन
जाता है आपका h / 3mkt. ये गैस के मॉलिक्यूल्स के लिए वेवलेंथ का
फार्मूला है। ठीक है ना? रट लेना। गारंटी दे रहा हूं। सवाल आएगा इन पे चाहे कुछ भी मान लो आप सवाल इन पे आके रहेगा किसी ना
किसी पे राइट हां चलो ठीक है अब बात करते हैं हम किसकी इलेक्ट्रॉन की ये वाली बात भी बताऊंगा मैं अभी पहले इलेक्ट्रॉन का
देख लेते हैं अल्फा पार्टिकल इज़ और ये और ये
और यह और यह काफी कुछ है यार पढ़ाने को बहुत सारा है।
बताओ भाई इतना सारा है। काफी कुछ है पढ़ाने को। बाप रे। ठीक है? तो गैस पार्टिकल्स की यह होगी।
ठीक तो लैम्ब्डा अगर इलेक्ट्रॉन का निकालें तो 1.227 /
डेल्टाV नैनोमीटर। ठीक है ना? नैनोमीटर ये इलेक्ट्रॉन का होगा। किसका होगा?
इलेक्ट्रॉन के लिए हो गया। तो ये भी आपको याद रखनी है 1.227 नैनोमीटर मतलब 10 टू दी पावर -9 अगर इसको -10 करोगे तो एक डॉट इधर
भगा दो तो 12.27 हो जाएगा। ठीक है ना? एंगस्ट्रो में करोगे तो 12.27 / अंडर रूट ऑफ उसका पोटेंशियल का डिफरेंस।
ये आपका एंगस्ट्रो में हो जाएगा लैम्ब्डा। तो इलेक्ट्रॉन के लिए ये याद रखना है। ठीक? अब यकीन करो यहां तक जितनी बातें
हमने की हैं डी ब्रोगली वेवलेंथ पर इन पर सवाल आना है। ठीक? अब जो पढ़ाई जितनी हमको नॉर्मल लगती
है ना एवरेज लगती है वो उतनी ही ज्यादा इफेक्टिव होती है। एक छोटी सी बात और सुन लो डी ब्रोगली वेवलेंथ के ही बारे में।
ठीक है ना? डी ब्रोगली साहब ने ये बोला है कि बोहर मॉडल में जो एंगुलर मोमेंटम है किसी ऑर्बिट का। ठीक है ना? भाई उन्होंने
MV को क्या लिखा है? P = H / यही तो लिखा है उन्होंने। H / ये लिखा है MV को। ठीक है? और बोहर साहब ने क्या बोला है? mv
r = n * h / 2π ये उन्होंने बोला है। तो n की वैल्यू को अगर आप 1 2 3 लिखोगे तो ये आएगा। ठीक? तो
फॉर एग्जांपल मैं n की वैल्यू थ्री ले रहा हूं। यानी कि थर्ड ऑर्बिट की बात कर रहा हूं। तो थर्ड ऑर्बिट के लिए जो लैम्ब्डा
है कुछ है? तो mv की वैल्यू को हम h / r लिख देते हैं। ये जो mv की वैल्यू है इसको हम h / लैम्ब्डा लिख देते हैं थर्ड के
लिए। ये r हो गया। ये n हो गया आपका। n * h / 2π h से h कट गया। तो 2πr = n लैम्ब्डा आ गया।
भाई mvr = nh/2π बोहर साहब ने बोला है। अब उन्होंने बोला है कि mv जो है वो h/λ के बराबर है। तो मैं इसको h / लैम्ब्डा अगर
कर देता हूं। ठीक है ना? तो दिस * r = n ये वाला n है और ये h है। इस वाले h से ये वाला h कट जाएगा। तो ये nh / 2π हो जाएगा
भाई। h से h कट गया। तो 2pr = nλ nλ यह वाली बात यह बताती है कि जो न्यूक्लियस
के चारों तरफ इलेक्ट्रॉन चक्कर काटता है उसकी रेडियस कितनी हो गई? r तो उसकी ये जो बाउंड्री की लेंथ है ये 2πr होगी। अब अगर
ये थर्ड ऑर्बिट है। अब अगर ये थर्ड ऑर्बिट है तो ये जो 2πr है ये 3 टाइम्स ऑफ़ लैम्ब्डा के बराबर होगी।
3 टाइम्स ऑफ़ लैम्ब्डा के बराबर। अब लैम्ब्डा क्या है भाई? जो यह इलेक्ट्रॉन भाग रहा है ना यह जो इलेक्ट्रॉन भाग रहा
है यह भागते हुए इलेक्ट्रॉन एक वेव के बराबर है जिसकी वेवलेंथ लैम्ब्डा होगी। अब इसकी अगर एक वेवलेंथ ले हम तो कुछ लेंथ
होगी तो उसमें आपकी तीन वेवलेंथ आएंगी इसमें तो अगर एक वेवलेंथ ये हो गई एक वेवलेंथ ये हो गई तो एक वेवलेंथ आपकी ये
हो जाएगी। तो इसकी तीन वेवलेंथ के बराबर होगा ये। ठीक? बस ये वाली बात आपको याद रखनी है। अगेन इस पे रट्टा मारना है। ये
समझ में आना चाहिए कि उन्होंने क्या चीज बता दी थी। भाई ये पूछेगा ना कि भाई इलेक्ट्रॉन अगर दौड़ रहा है तो कहां
वेवलेंथ दिखा रहा है वो? किस जगह है उसकी वेवलेंथ? तो भाई इलेक्ट्रॉन तो यहां एटम के चक्कर काटते हुए ही मिलता है। तो उसकी
वेवलेंथ कहां है? किस जगह है? बताओ कहां ऐसे ऐसे है वेवलेंथ? तो ये हाइपोथेसिस है कि जो इलेक्ट्रॉन चलता है वो अपनी ऑर्बिट
में जो चक्कर काटता है अगर वो nथ नंबर की ऑर्बिट है तो उस ऑर्बिट के एक चक्कर में वो n वेव्स चलता है। n वेवलेंथ पूरी करता
है। ठीक? तो ये वाली बात भी आपको याद रखनी है। और अब चलते हैं डीब्रोगली वेवलेंथ पे। ठीक है भाई? डीब्रोगली वेवलेंथ पे चलते
हैं। और याद रखो डी ब्रोगली वेवलेंथ पे जितने भी फॉर्मूले हैं आपके जितने भी फॉर्मूले हैं ना डीबोगली वेवलेंथ के।
ठीक है? कहां पे है भाई? डीब्रोगली वेवलेंथ ऊपर चला गया या नीचे चला गया। इसके क्वेश्चन करते हैं अभी। है ना?
डीबोगली वेवलेंथ के सवाल करते हैं। डीब्रोगली वेवलेंथ तो यह आ गया। इसके सवाल इससे आगे ही होंगे।
है क्या कहीं पे सवाल ये लो भरे पड़े हैं डीब्रोगली ली वेवलेंथ के
सवाल भरे पड़े हैं। 2024 में आया हुआ सवाल है ये। ठीक है? देखो क्या बोल रहा है ये? यह बोल रहा है डी ब्रोगली वेवलेंथ ऑफ अ
प्रोटॉन एंड अ पार्टिकल एंड एन
अल्फा पार्टिकल आर अल्फा। प्रोटॉन एंड एन अल्फा पार्टिकल आर अल्फा एंड 2 लैम्ब्डा। यार ये गड़बड़ हो गई।
इसकी कुछ लिखावट में दिक्कत है रेस्पेक्टिवली द रेशियो ऑफ वेलोसिटीज ऑफ प्रोटॉन एंड
अल्फा पार्टिकल प्रोटॉन एंड अल्फा पार्टिकल ये आर अल्फा एंड 2 लैम्ब्डा
ठीक भाई ये वेलोसिटी ये कुछ इसमें दिक्कत है वरना अपना सवाल गलत इसको देख लेते हैं अभी है ना जो भी हो अगला वाला सवाल कर
लेते हैं अगले वाले सवाल में कोई दिक्कत नहीं है चलो चलो ये क्या कह रहा है द डी ब्रोगली ली
वेवलेंथ ऑफ़ एन इलेक्ट्रॉन इज़ सेम एज दैट ऑफ़ अ फोटन। जो इलेक्ट्रॉन की डीब्रोगली वेवलेंथ है, वो एक फोटन की डीब्रोगली
वेवलेंथ के बराबर है। ठीक है? ठीक है? फोटन के बाद इफ वेलोसिटी ऑफ़ इलेक्ट्रॉन इज़ 25% ऑफ़ द वेलोसिटी ऑफ़ लाइट यानी कि
वेलोसिटी ऑफ़ इलेक्ट्रॉन इज़ = t / 4 25% है तो c / 4 है। ठीक है? देन द रेश्यो ऑफ़ काइनेटिक एनर्जी ऑफ़ इलेक्ट्रॉन एंड
काइनेटिक एनर्जी ऑफ़ फोटन विल बी। तो भाई देखो P इक्वल टू क्या होता है? H / लैम्ब्डा ये होता है H / लैम्ब्डा। अब जो
फोटन होता है, फोटन की जो एनर्जी होती है, फोटन की जो एनर्जी होती है, वो होती है E और फोटन का मोमेंटम होता है E / C. तो
फोटन का जो लैम्ब्डा है, फोटन का जो लैम्ब्डा होगा, वो होगा H / P यानी कि E / C ये उसका लैम्ब्डा होगा फोटन का। ठीक है
ना? तो साफ-साफ दिख रहा है H लै्ब्ब्डा = HC/ E ये उसका लैम्ब्डा होगा फोटन का और होना भी चाहिए। e = hc / लैम्ब्डा होता
है। ठीक? तो ये कह रहा है डीब्रोगली वेवलेंथ इलेक्ट्रॉन की और फोटन की सेम है। इफ वेलोसिटी ऑफ़ इलेक्ट्रॉन इज़ 25% ऑफ़
वेलोसिटी ऑफ़ लाइट देन रेश्यो ऑफ़ काइनेटिक एनर्जी ऑफ़ इलेक्ट्रॉन। तो ये कह रहा है कि इलेक्ट्रॉन की वेलोसिटी इतनी है। लाइट से
आधी है। तो काइनेटिक एनर्जी बताइए। अब दोनों की लैम्ब्डा तो सेम है। ठीक? इलेक्ट्रॉन का लैम्ब्डा अगर हम लें तो
इलेक्ट्रॉन का लैम्ब्डा होगा दिस * h / इलेक्ट्रॉन की काइनेटिक एनर्जी कितनी होगी?
तो 2m * k ऐसे लिखा जाएगा। लैम्ब्डा = h / 2mk अब उसका लैम्ब्डा और इसका लैम्ब्डा बराबर कर देंगे = hc / कितना? hc / e यह आ
जाएगा। ठीक है ना? तो काइनेटिक एनर्जी का रेशियो निकल आएगा e की टर्म में। क्या आंसर आएगा?
क्या आंसर बैठेगा बेटा बताओ एक सेकंड मेरे को तो लगता है पानी पीना पड़ेगा क्या आंसर बैठेगा बेटा फर्स्ट बताओ फटाफट
फटाफट बताओ क्या आंसर बैठेगा बस यह करवा लो तुम लोगों से
नहीं बोलूंगा सर ब्रेक ब्रेक
बी बी ऑप्शन दैट्स इट ये लो बी ऑप्शन आपका आंसर होगा।
तो कुछ लोग यहां पे थोड़ा सा मतलब ब्रेक ब्रेक ब्रेक होना भी चाहिए। चलो एक काम करते हैं। डी ब्रोगली वेवलेंथ के जो सवाल
हैं वह ब्रेक के बाद करेंगे। ठीक है? तो अभी थोड़ा सा ब्रेक ले लेते हैं। चलो भाई ब्रेक बोल रहे हो तो ब्रेक ही
सही। ब्रेक यहां पे केवल 15 मिनट का मिलेगा। ज्यादा से ज्यादा 5
मिनट और 15 मिनट के बाद आप जरूर चेक करोगे कि मैं आ गया हूं कि नहीं आ गया हूं। क्योंकि अपने पास काम करने को बहुत कुछ
है। ठीक है? और 15 मिनट का आपके पास यह ब्रेक है। ठीक? अभी क्या टाइम हो रहा है? एग्जैक्ट 2:00 बज रहे हैं। ठीक है? कुछ
लोग थोड़े से मतलब लंच वंच नहीं किया होगा। चलो कोई नहीं। 2:00 बज रहे हैं क्योंकि हमें टाइम पे बिल्कुल पाबंद रहना
है। और 2:15 और 220 के बीच में यानी कि 2:20 लिमिट है। 2:20 से पहले पहले आपको आ जाना है। ठीक है
ना? तो 220 से लेके 445 तक अपनी क्लास चलेगी। 220 से लेके 445 तक लगभग अपनी क्लास चलेगी और हम इसको निपटाएंगे। ठीक है
बेटा? तो ले लेते हैं ब्रेक जब आप कह रहे हो। कोई बात नहीं। ये एक ही तो ब्रेक है। इसके बाद कोई ब्रेक नहीं होगा। ठीक है ना?
इसके बाद कोई ब्रेक नहीं होगा। ठीक है? चलो। ओके। अब इस पहले बता दूं ब्रेक के बाद होना
क्या-क्या है? ब्रेक के बाद बोर्स मॉडल होना है। ठीक है ना?
न्यूक्लियस होना है। बाइंडिंग एनर्जी ठीक है ना? एंड मास डिफेक्ट होना है।
और आपका फिशन एंड फ्यूज़ होना है। फिशन एंड फ्यूज़ और भी और भी एक दो चीजें
पता चलेगी। तो ये होना है ये ब्रेक के बाद। ठीक है ना? और डी ब्रोगली वाली जो प्रॉब्लम्स हैं वो भी होनी है। ठीक है?
चलिए ओके। बाय-ब टेक केयर। 1520 मिनट के बाद फिर से मिलते हैं। तो अभी क्या हो रहा है? 25 तो 2:23
तक 23 तक विल मीट। ओके चलो। हेलो बच्चों, क्या हालचाल भाई? हो गया ब्रेक ओवर। थोड़ा सा एकद मिनट ज्यादा लग
जाती है क्योंकि पीपीटी पूरी चेंज हुई है अभी वापस से। ठीक है।
हम चलो फिर शुरुआत करते हैं। तो कहां तक पहुंच गए थे हम?
डी ब्रोगली वेवलेंथ चल रही थी अपनी। ठीक? तो जैसे ये वाला सवाल देखो। आप खुद देखो किस टाइप के सवाल यहां पे रखे हुए
हैं। दिख रहे हैं। किस टाइप के सवाल यहां पे रखे हुए हैं। देख सकते हो आप अपनी आंखों से।
एक ये वाला सवाल देखो। देखो J में मीनंस 2023 में आया। बोल रहा है कि डीब्रोगली वेवलेंथ ऑफ़ इलेक्ट्रॉन हैविंग काइनेटिक
एनर्जी E इज़ लैम्ब्डा। द काइनेटिक एनर्जी ऑफ़ द इलेक्ट्रॉन बिकम E / 4 देन इट्स डी ब्रोगली वेवलेंथ भाई साहब लैम्ब्डा = H /
2m ये एक फार्मूला है। ठीक है ना? अब इलेक्ट्रॉन को अगर वोल्टेज में डालते हैं
तो हम K को जो है रिप्लेस कर देते हैं E * V से। E * V यानी कि Q * डेल्टाV से रिप्लेस कर देते हैं हम K को। बट इसमें ये
बोल रहा है कि ये जो काइनेटिक एनर्जी है ये E है। ठीक है ना? अगर E की जगह आप E / 4 यूज़
करोगे। ठीक? तो भाई लैम्ब्डा कितना हो जाएगा? तो लैम्ब्डा ड = h / 2m और ये k / 4 करेंगे तो फोर जो है अंडर
रूट से निकल के ऊपर चला जाएगा तो टू की मल्टीप्लाई कर रहे यहां से हटा दो तो ये वाली बात सीधे-सीधे 2 टाइम्स ऑफ लैम्ब्डा
हो जाएगी और सी ऑप्शन यहां पे करेक्ट आ जाएगा। बात समझ रहे हो भाई? ये सवाल तो फ्री का है। ये तो थ्री फोर्थ क्लास के
बच्चों का है। ठीक है ना? ये कौन सी क्लास के बच्चों का है? फोर्थ क्लास के बच्चों का सवाल है ये।
बताओ अब क्या करें? ठीक है? अगला सवाल देख लेते हैं। आंसर तो देख लें इसका। पता चला सबसे आसान सवाल में
ही हमारी बैंड बजी पड़ी है। ये देख लो। ये वाला सवाल देखो। क्या बोल रहा है ये?
अब अल्फा पार्टिकल एंड कार्बन 12 एटम हैज़ सम काइनेटिक एनर्जी। सेम काइनेटिक एनर्जी। आप लोगों को आवाज आ रही है ठीक से?
क्या आप लोगों को आवाज आ रही है ठीक से मैं भी देख लूं क्योंकि दिन में
पढ़ने वालों की संख्या कम रहती है। क्लासें चलती रहती है ना भाई। चलो आ जाओ हम
बट कोई बात नहीं इट्स ओके देखते हैं क्या होता है। तो भाई इसमें क्या करना पड़ेगा? ये बोल
रहा है अल्फा पार्टिकल हैज़ अ कार्बन 12 एटम एंड सेम काइनेटिक एनर्जी। अब जो अल्फा पार्टिकल है ठीक? तो हमें तो जानते हैं ना
कि लैम्ब्डा इज़ इक्वल टू कम h / 2m * k ठीक है? तो अगर ये अल्फा पार्टिकल की बात हो रही है तो लैम्ब्डा ऑफ़ अल्फा
होगा। m ऑफ़ अल्फा होगा। फिर लैम्ब्डा ऑफ़ कार्बन क्या होगा? h / 2 टाइम्स ऑफ़ मास ऑफ़ कार्बन * k दोनों को
डिवाइड कर दो। तो लैम्ब्डा ऑफ़ अल्फा / लैम्ब्डा ऑफ़ कार्बन इज़ इक्वल टू रेश्यो ऑफ़ देयर डी ब्र वेवलेंथ। तो देखो ये नीचे है।
तो अंडर रूट में आएगा मास ऑफ़ द कार्बन डिवाइडेड बाय मास ऑफ़ द अल्फा पार्टिकल। और यह तो आपका 12 / 4 आएगा। कितना आएगा यह?
यह तो आपका 12/4 आएगा। बिल्कुल सही बात है। तो 3 आ जाएगा ये। ठीक है? तो रेश्यो ऑफ़ डीबोगली वेवलेंथ ऑफ़
लैम्ब्डा ऑफ़ अल्फा / लैम्ब्डा 3 / 1 आ जाएगा। तो हमारा ये वाला आंसर बी जो है वो सही आना चाहिए। तो क्या आंसर है अपना? बी।
बी ऑप्शन अपना आंसर है और यही आंसर भी है। नेक्स्ट सवाल देखते हैं। ठीक है? ये जो ये जो क्वेश्चन है ये देखने
में इतना डरावना लग रहा है कि जैसे पता नहीं ये क्या सवाल होगा। जबकि बहुत आसान सवाल है। क्या बोल रहा है? इलेक्ट्रॉन ऑफ़
मास m विद एन इनिशियल वेलोसिटी दिस। भाई इनिशियल वेलोसिटी इतनी है उसकी। ठीक? तो इनिशियल वेवलेंथ कितनी होगी? ्ब्डॉ = h /
मास ऑफ़ इलेक्ट्रॉन * v नॉट ये इनिशियल म्ब्डा0 होगा उसका इज़ मूविंग विद इन अ इलेक्ट्रिक फील्ड E अब देखो इलेक्ट्रिक
फील्ड वो तो इस तरफ जा रहा है इलेक्ट्रॉन तो इलेक्ट्रिक फील्ड इस तरफ है। इलेक्ट्रिक फील्ड इस तरफ है तो भाई फोर्स
तो इस पे इसी तरफ लगेगा। यानी के इलेक्ट्रॉन जो है वो फास्ट होना शुरू हो जाएगा। इलेक्ट्रॉन जो है वो फास्ट होना
शुरू हो जाएगा क्योंकि इलेक्ट्रिक फील्ड उल्टा लग रहा है। इलेक्ट्रॉन पर फोर्स उस तरफ लगेगा तो इलेक्ट्रॉन जो है वो फास्ट
होना शुरू हो जाएगा। अच्छा जी ठीक है। तो t = 0 पे डीबोगली वेवलेंथ ये वाली ये तो हमने वैसे भी लिख दी। पता नहीं क्यों दी
है इसने दोबारा से फालतू में। ये तो हमने लिख दी थी पहले ही। देन इट्स डीब्रोगली वेवलेंथ आफ्टर टाइम t तो भाई t टाइम के
बाद इसकी डीब्रोगली वेवलेंथ क्या होगी? तो इसकी वेलोसिटी क्या हो जाएगी? v नॉट + at a कितना हो जाएगा? e * e
/ me * t ये v हो जाएगा इसका। ठीक? तो नया वाला लैम्ब्डा कितना हो जाएगा इसका? h / मास ऑफ़ द इलेक्ट्रॉन और नए वाली वेलोसिटी
v तो ये वाली वेलोसिटी क्या हो जाएगी? v नॉट + e / m * t ये हो जाएगी। दोनों को डिवाइड कर
दो। ठीक है? डिवाइड करने से h से h कट गया। me से कट गया। तो यहां पे लैम्ब्डा / लैम्ब्डा' इक्वल टू आ गया। यह ऊपर चला
जाएगा। वो ऑलरेडी नीचे है। ठीक है ना? तो ये आपका लैम्ब्डा / लैम्ब्डा'' = v नॉट + e / m * t / v नॉट तो ये आपका आ जाएगा 1 +
e / mv नॉट * t ये आ जाएगा। लेकिन हमें तो ये चाहिए ना। हमें तो ये चाहिए। तो इसको तो उधर ले जाओ। इसको इसके नीचे ले जाओ। तो
म्ब्डा0 के नीचे क्या? वो तो म्ब्डा0 / दिस ये डी ऑप्शन आपका करेक्ट आ जाएगा। ठीक है?
आएगी आवाज चिंता ना करो आएगी आवाज बस 10 सेकंड ज्यादा आ रही है आवाज
चलो नो वॉइस मुझे तो आ रही है आवाज मेरी आपको नहीं आ रही
कोई बात नहीं तो इसमें आप ये देखो जैसे जैसे हमने पिछले वाले में ये कर लिया कि भाई ये वाला सवाल इस तरीके से कहां गया?
ये हो गया। इससे पिछले वाले सवाल में हमने ये निकाल लिया था कि भाई वो मास के मास के रेश्यो में होगा। यहां से पता चल रहा है
ना कि लैम्ब्डा इज डायरेक्टली प्रोपोर्शनल टू 1 / मास। अगर ये सब होता है तो ये तो ये वाले
जो रिलेशन है ना ये ये वाले रिलेशन आप इनको याद रख लो। ठीक? नो डाउट याद रखना इतना आसान काम तो होता नहीं है कि भाई याद
रखना बिल्कुल ही आसान काम है। ठीक थोड़ा सा तो भारी होता है बट करना पड़ता है। ये क्या कह रहा है? व्हाट शुड बी द ऑर्डर?
2021 में पूछा गया सवाल है। ठीक है? तो कह रहा है भाई ने बोला है कि व्हाट शुड बी द ऑर्डर
ऑफ डी ब्रोगली वेवलेंथ ऑफ इलेक्ट्रॉन लैम्ब्डा ऑफ़ इलेक्ट्रॉन लैम्ब्डा ऑफ़ अल्फा पार्टिकल
एंड लैम्ब्डा ऑफ़ प्रोटॉन। तो भाई आप ये देख लो मास ऑफ इलेक्ट्रॉन मास ऑफ अल्फा पार्टिकल और मास ऑफ प्रोटॉन इनमें से देख
लो कौन ज्यादा कौन कम और लैम्ब्डा इज़ डायरेक्टली प्रोपोर्शनल टू 1 / अंडर रूट ऑफ़ मास तो जिसका मास सबसे कम होगा उसका
लैम्ब्डा सबसे ज्यादा होगा। सबसे हल्का तो इलेक्ट्रॉन ही होता है। तो लैम्ब्डा जो e है वो सबसे ज्यादा होगा। फिर इसमें
प्रोटॉन का मास जो होता है वो कम होता है अल्फा से। तो उसके बाद प्रोटॉन आएगा। उसके बाद आपका हीलियम आएगा। और ये आपका डी वाला
ऑप्शन करेक्ट हो जाएगा। मैं ये मानता हूं कि इस टाइप के सवाल जो है ना वो फ्री के हैं। कैसे हैं वो? फ्री के हैं। इसमें कुछ
भी नहीं बचता ऐसे सवालों में। ठीक? अब मैं इसके एक दो अच्छे वाले सवाल और कराऊंगा। ठीक है ना? फिर हम आगे मूव कर जाएंगे
बोर्स मॉडल पे। ठीक? डीब्रॉय वेवलेंथ के। अब ये सवाल देख लो। यह थोड़ा अच्छा सवाल है। ऐसा सवाल मतलब जेईई मेंस में अगर आ
जाए, तो यह डिसाइडिंग फैक्टर हो जाते हैं। ठीक है ना? यह डिसाइडिंग फैक्टर हो जाते हैं। देखो इसमें क्या बोला है इसने? यह
बोला जरा इसका आंसर देना आप लोग मुझे। ठीक? खैर, वैसे तो बहुत सारे लोग इसको ऐसे ही तुरंत सर्च करके दे देंगे मुझे आंसर।
देखो चलो देखते हैं कितने लोग इतना फास्ट सर्च करते हैं। कुछ लोग बहुत फास्ट में तो सर्च करते हैं।
ओके देखते हैं रिजल्ट क्या है। अच्छा आंसर भी लगाना पड़ेगा क्या इसमें? शायद डी ऑप्शन आंसर होगा इसमें।
डी ऑप्शन आंसर है क्या? डी कितने लोगों का है? डी तो 12% का सबसे ज्यादा बी है। तो ये तो 12% लोगों का है और सबसे ज्यादा यह
है 36%। चलो देखते हैं क्या आंसर आता है। है ना? देखते हैं क्या आंसर आता है। यह 12% ने दिया वह सबसे ज्यादा 36% ने दिया।
और बाकी 50-50 बांट लो। इस सवाल को देखो। ये क्या बोल रहा है? देखो भाई इस टाइप का सवाल आ जाता है तो हमें थोड़ा सा दिमाग
लगाना पड़ जाता है। ये क्या कह रहा है? न्यूक्लियस a न्यूक्लियस a विद फाइनाइट डीब्रोगली वेवलेंथ लैम्ब्डा ए अंडरगस
स्पॉनटेनियस फिशन इंटू टू न्यूक्लियााई b एंड c ऑफ इक्वल मास। बात को समझना है। यह एक पार्टिकल है और यह दो भागों में टूट
जाता है। दो भागों में यह टूट जाता है। ठीक है? तो पहले इसका मास कितना था? m और इसकी वेलोसिटी थी v। v नॉट मान लो। मास m
था और वेलोसिटी थी v नॉट। ठीक है? तो वेवलेंथ आ रही थी लैम्ब्डा। लैम्ब्डा डेफिनेटली h / m * v नॉट होगी। ये हम
जानते हैं। ओके? तो इसकी वेवलेंथ लैम्ब्डा A आ रही थी। अब एकदम से ये ब्रेक होता है। तो ये कह रहे हैं कि B फ्लाई इन द सेम
डायरेक्शन एज दैट ऑफ़ A। तो अगर A पहले से इस तरफ चल रहा था तो ये इसका B पार्ट है। तो B पार्ट इधर ही कंटिन्यू रहता है। यानी
कि जो B पार्ट है वो इतना पार्ट B है और वह इस तरफ ही कंटिन्यू रहता है। ऐज़ दैट ऑफ़ A व्हाइल C फ्लाईज़ इन ऑपोजिट डायरेक्शन।
विद द वेलोसिटी इक्वल टू हाफ ऑफ़ दैट ऑफ़ B. तो B की वेलोसिटी अगर मैं V ले लेता हूं तो ये जो इधर वाला पार्ट है ये जो इधर
वाला पार्ट है ये ये वाला पार्ट जिसको C बोल रहे हैं। C उल्टा चलता है। लेकिन कितनी वेलोसिटी से? V / 2 से चलता है
उल्टा। ठीक है ना? बहुत केयरफुली करना पड़ेगा इसको। ठीक? एक बार फिर देखते हैं क्या है यह?
तो यह कह रहा है इक्वल मास दोनों B फ्लाई इन द सेम डायरेक्शन एज दैट ऑफ A तो A तो भाई इस तरफ चल रहा था। ठीक है ना? तो A जो
है वो टूट के B और C में टूट गया। तो B जो है वो तो आगे ही चलता रहा V वेलोसिटी से। C जो है वो B की जितनी वेलोसिटी है उसकी
आधी वेलोसिटी से पीछे चल रहा है। ठीक है? दैट हाफ ऑफ़ दैट ऑफ़ B द डीब्रोगली वेवलेंथ ऑफ़ म्ब्डा B एंड म्ब्डा C ऑफ़ B एंड C. B
और C की डीबोगली वेवलेंथ बताइए क्या होगी? ठीक है? तो चलिए बेटा इस सवाल को सॉल्व करेंगे अब। पहले तो मोमेंटम बैलेंस कर लो।
तो M * V नॉट इस तरफ है टोटल मोमेंटम। तो ये कितना ले रहा है? ये तो m / 2 मास हो गया और v मोमेंटम इसी तरफ ले रहा है। अब
इसका मास m / 2 है लेकिन वेलोसिटी v / 2 है। मोमेंटम इस तरफ है। तो ये विद माइनस साइन आएगा m/2 * v/2 तो देखो ये mv/2 -
mv/4 तो ये हो गया आपका mv / 4 इतना बच गया = mv नॉट तो m से कट गया m तो यहां से v की वैल्यू v नॉट * 4 आ गई
भाई देखो यह mv / 2 है। यह -mv / 4 है। तो ये mv/4 बचेगा। तो m से m कट गया। v की वैल्यू v नॉट। यानी कि ये वाला जो
पार्टिकल है ये 4 टाइम्स ऑफ़ v नॉट से भाग रहा है उस तरफ। और ये आपका 2 टाइम्स ऑफ़ V नॉट से भाग रहा है इस तरफ। तो अब मैं
लैम्ब्डा ऑफ़ B निकालूंगा। ठीक है ना? तो लैम्ब्डा B होगा H / M / 2 * 4V नॉट
यानी कि h / 2mv नॉट ठीक है तो भाई इस बात को समझो आप इस बात को समझो h / mv नॉट की वैल्यू तो म्ब्डा a
है तो ये वाली वैल्यू तो म्ब्डा a / 2 हो गई तो म्ब्डा b की वैल्यू ्ब्डा a / 2 है और वो λb पहले लिखना है λc बाद में लिखना
है और एक ही ऑप्शन है ऐसा जिसमें पहले म्ब्डा a / 2 लिखा है तो इसमें पहले 2λ a लिखा है इसमें म्ब्डा a लिखा है इसमें में
म्ब्डा a लिखा है। इसमें म्ब्डा a / 2 पहले प्लेस पे लिखा है। तो यही आंसर है। दूसरे को भी कैलकुलेट करने की जरूरत है
नहीं। लेकिन फिर भी अगर आप करना चाहो ठीक है ना? तो अब मुझे म्ब्डा ऑफ़ c निकालना है। तो वो होगा h / इसका mv तो m / 2 *
2v0 2 से टू कट गया। तो ये h/ mv नॉट आ गया जो कि बिल्कुल लैम्ब्डा के ही बराबर है। तो लैम्ब्डा = लैम्ब्डा तो आपका यही
ऑप्शन सही बैठता है डी और डी को केवल 12% लोगों ने सही किया है। तो मैंने कहा ना आपको ये टाइप के सवाल डिसाइडिंग फैक्टर हो
जाते हैं। ठीक है ना? ये टाइप के सवाल डिसाइडिंग फैक्टर हो जाते हैं। तो जितने लोगों का यह सही है वो अपने आप को प्लस के
चार दे दें। जिनका गलत है वो -1 दे दें। ठीक है ना? और जिन्होंने ट्राई नहीं किया बकवास कर रहे हैं वो निकल के चले जाए यहां
से। ठीक है? क्योंकि सवाल बहुत गहराइयों पे हो रहे हैं और वह आपको करने ही पड़ेंगे।
ठीक है ना? अब आता है बोर्स एटॉमिक मॉडल। ठीक है ना? अब आता है बोर्स एटॉमिक मॉडल। ठीक है भाई? चलो। तो बोर्स एटॉमिक मॉडल
में हम क्या कर सकते हैं? हमें क्या करना होता है? बातें करने को तो हम कितनी भी बातें कर सकते हैं बोर्स एटॉमिक मॉडल पे
जितनी चाहे उतनी बातें कर सकते हैं और बहुत सारे क्वेश्चन भी हैं। ठीक? लेकिन हमें यहां पे बहुत क्रिस्प तरीके से
निपटाना है। ठीक है ना? ताकि हमारा सही टाइम पे सब कुछ कवर हो जाए। ठीक है ना? और एक-एक चीज ज्यादा से ज्यादा सवाल हो जाए।
तो चलिए बेटा हम अब बोर्स मॉडल की बातें करते हैं। ठीक है?
लेकिन बोर्स मॉडल से रिलेटेड कुछ चीजें ऐसी हैं जो मुझे आपको एक-एक करके बतानी पड़ेंगी जो मैं ऊपर यहां पे ताकि टाइम बच
जाए थोड़ी-थोड़ी सी ऐसे लिख के लेके आया हूं। ठीक है?
ओके मैं काफी कुछ अच्छे से लिख के लाया हूं तो आपके लिए बड़ी आसानी हो जाएगी और अपना काम भी फटाफट फटाफट हो जाएगा। चलो यह
तो बहुत अच्छा किया। मैंने मैंने अच्छा किया। ठीक। तो
तो हम करने वाले हैं बोर्स मॉडल। लेकिन बोर्स मॉडल से पहले थोड़ा सा हम रदरफोर्ड मॉडल पे भी प्रकाश डालेंगे।
ठीक है ना? रदरफोर्ड मॉडल पे भी प्रकाश डालेंगे। कैसे? देखो थोड़ी सी बातें हैं जो रदरफोर्ड मॉडल की भी बहुत इंपॉर्टेंट
है। वो मैं निकाल के लाया हूं और इनको समझाने की भी कोशिश करूंगा मैं। है ना? इनको पूरा समझाने की ट्राई करूंगा। राइट?
देखो भाई रदरफोर्ड साहब ने क्या किया था? गोल्ड फॉइल पर अल्फा पार्टिकल की बम्बार्डमेंट किया था। उससे कुछ कंक्लूजन
निकले थे उनके वो यहां पे उन्होंने बताए। ठीक है ना? उन्होंने ये बताया जो फॉइल पे उन्होंने बंबार्डमेंट किया था अल्फा
पार्टिकल का तो कुछ तो चले गए थे। कुछ किसी एंगल पे डिफ्लेक्ट हो गए थे और बहुत कम वापस आ गए थे। तो उन्होंने निकाला था
कि मोस्ट हम कि मोस्ट ऑफ द स्पेस इन एटम इज अनऑक्युपाइड। एटम के अंदर का बहुत सारा
स्पेस खाली होता है। ठीक है? क्योंकि बहुत सारे पार्टिकल सीधे चले गए थे बिना डेविएट हुए। देयर मस्ट बी एन एक्सट्रीमली स्मॉल
रीजन ऑफ कंसंट्रेटेड पॉजिटिव चार्ज एट द सेंटर ऑफ़ द एटम। तो न्यूक्लियस क्या होता है?
एटम के सेंटर पे होता है जिसमें सारा पॉजिटिव चार्ज होता है और बहुत कम साइज होता है उसका। ठीक है ना? 1/ 20,000 टाइप
होता है। 1 / 20,000 टाइप इतना कम रहता है। अगर एटम का साइज 20,000 उसका एक होता है। ठीक है? द न्यूक्लियस ऑफ एटम इज सो
मैसिव दैट इट रिमेंस एट रेस्ट ड्यूरिंग द इंपैक्ट। जब ये अल्फा पार्टिकल उसमें गोल्ड फॉइल में ऐसे हिट करते हैं तो जो
गोल्ड फॉइल के एटम का न्यूक्लियस है वो स्टेशनरी रहता है ऑलमोस्ट अल्फा पार्टिकल की टक्कर से उसका कुछ नहीं बिगड़ता यानी
कि अल्फा पार्टिकल और उसके न्यूक्लियस के मास में काफी बड़ा रेश्यो रहता है। ठीक है? इलेक्ट्रॉन रिवॉल्व्स अराउंड द
न्यूक्लियस इन द ऑर्बिट। न्यूक्लियस के चारों तरफ इलेक्ट्रॉन्स रिवॉल्व करते हैं इन द ऑर्बिट। ये बात भी आपको रदरफोर्ड
साहब ने बता दी थी। ओके? अल्फा पार्टिकल मूव्स अंडर द एक्शन ऑफ कलाम्स फोर्स ऑफ द रिपल्शन एंड इट्स पाथ इज़ हाइपरिक। जो
अल्फा पार्टिकल हैं वो आपके कूलम फोर्स से डेविएट हो जाते हैं और उनका पाथ जो है वो हाइपरिक हो जाता है। ये वाली बातें
उन्होंने बोली हमको बताई। ठीक है? तो इनको थोड़ा सा और लाइट डालने के लिए मैं एक चीज बताऊंगा आपको कि भाई जैसे रदरफोर्ड साहब
ने ऐसे हिट किया था। ये यहां पे गोल्ड फॉइल गोल्ड का न्यूक्लियस रखा था ये वाला और उन्होंने अल्फा पार्टिकल को ऐसे हिट
किया था। तो जो अल्फा पार्टिकल की चलने वाली लाइन थी जो उसकी ये वाली लाइन थी ना जिसमें उन्होंने थ्रो किया था ये इस लाइन
के और इस लाइन के बीच का जो गैप है उसको हम इंपैक्ट पैरामीटर बोलते हैं। क्या बोलते हैं? इंपैक्ट पैरामीटर।
तो इंपैक्ट पैरामीटर किस में होता है? मीटर में होता है। तो ये वाली डिस्टेंस ही इंपैक्ट पैरामीटर है। अब ये अल्फा
पार्टिकल जब हम थ्रो करते हैं तो जब ये अल्फा पार्टिकल इसकी तरफ जाते हैं तो ये इससे पहले ही इस तरीके से यूं मुड़ जाते
हैं। तो जो और नजदीक जाते हैं और कम इंपैक्ट पैरामीटर वाले होते हैं वो थोड़ा ज्यादा मुड़ते हैं। जो और कम इंपैक्ट
पैरामीटर वाले होते हैं वो और ज्यादा मुड़ते हैं। और जो बिल्कुल इनके इसके पास होते हैं वो तो काफी ज्यादा मुड़ जाते हैं।
और जो बिल्कुल इसी लाइन पे होते हैं वो पूरे 180 पे वापस आ जाते हैं। ठीक? तो जिसका इंपैक्ट पैरामीटर जितना कम होगा वो
उतना ज्यादा मुड़ेगा। और इन सबका एंगल इस वाली लाइन से नापा जाता है कि ये कितने एंगल पे मुड़ रहे हैं। ठीक है? तो ये वाले
एंगल को हम क्या बोलते हैं? थीटा। क्या मेरी बात समझ में आई? ओके। अब ये तो एक गोल्ड फॉइल है। गोल्ड न्यूक्लियस है। इस
पे हम बबार्डमेंट ऐसे कर रहे हैं और जो एक्सिस है उससे हम किसी डिस्टेंस पे कर रहे हैं। तो ये जो इंपैक्ट पैरामीटर अगर
ये एक्सिस है और हम यहां से थ्रो कर रहे हैं तो इस एक्सिस के तो चारों तरफ R होगा। ये तो जो इंपैक्ट पैरामीटर है वो एक सर्कल
के लिए होता है। इसको एक्सिस को सेंटर मान के अगर हम सर्कल ऐसे डालेंगे तो इस सर्कल के हर पॉइंट के लिए इंपैक्ट पैरामीटर सेम
होगा। तो जितनी डिस्टेंस पे इधर से थ्रो किया अगर आप उतनी डिस्टेंस पे इधर से थ्रो करोगे तो इधर भी वो इधर अगर वो थीटा पे
गया है तो इधर भी वो कितने पे जाएगा? थीटा पे ही जाएगा। तो जो पार्टिकल हैं ठीक जो थीटा एंगल पे जाने वाले पार्टिकल हैं वो
इस सर्कल पे पास हो के जाते हैं। यूं जो थीटा पे जाने वाले पार्टिकल हैं। तो रदरफोर्ड साहब ने एक लॉ निकाला है के वो
नंबर ऑफ पार्टिकल जो थीटा एंगल पे जाते हैं। दे आर डायरेक्टली प्रपोर्शनल टू 1 / sin की पावर
4 θ / 2 इसके डायरेक्टली प्रपोर्शनल होते हैं। तो ये वाला जो लॉ था ये रदरफोर्ड साहब ने
दिया। ठीक है ना? इसके ऊपर कभी-कभी कभी-कभी इसके ऊपर सवाल भी आ जाता है। ठीक है ना? वो सवाल मैं आपको
यहां पे करवा भी सकता हूं। ठीक है? तो ये sin की पावर 4 और थीटा के बारे यानी के वो नंबर ऑफ पार्टिकल जो कितने एंगल पे मुड़
रहे हैं? थीटा पे मुड़ रहे हैं। कितने पे मुड़ रहे हैं? थीटा पे। तो वो नंबर ऑफ़ पार्टिकल जो थीटा एंगल पे मुड़ रहे हैं इज़
डायरेक्टली प्रोपोर्शनल टू 1 / sin की पावर 4 थीटा / 2 तो ये वाली लाइन केवल कंपैरिजन के काम आती है। और अगर कोई कहने
लगे कि सर थीटा ठीक है ना? थीटा और नंबर ऑफ़ पार्टिकल में कैसा ग्राफ आता है? तो भाई वो ये वाला
ग्राफ आता है। और ये वाला ग्राफ एंड हो जाता है कितने पे? 180° पे। क्योंकि 180° से ज्यादा डेविएशन तो ले ही नहीं सकते ना।
तो कोई कितने एंगल पे मुड़ता है? ठीक है ना? वो ये ग्राफ में आपको पता चल जाता है। तो नंबर ऑफ़ पार्टिकल जो थीटा पे मुड़ रहे
हैं वो और ये भाई यही आ जाएगा एग्जाम में। जेईई मेंस में यही रखा हुआ आ जाएगा कि बताओ नंबर ऑफ़ पार्टिकल और जो डेविएशन का
एंगल है उसमें क्या रिलेशन है? तो ऐसा ग्राफ आ जाएगा। अब ये वाला जो फार्मूला है ये वाला ये इसके बेसिस पे सवाल आ जाते
हैं। कैसे सवाल? इतना सिंपल सवाल आएगा। वो ये पूछेगा कि भाई 10° पे मुड़ने वाले पार्टिकल।
ठीक है ना? कितने हैं? 1 * 10 टू दी पावर 6 है। 1 * 10 पावर 6 है पर मिनट। ठीक? तो बताइए थीटा इक्वल टू कितने पे
मुड़ने वाले? 90 पर मुड़ने वाले बताइए कितने हैं? 90 पर मुड़ने वाले कितने होंगे? तो यह काम
तो किया जा सकता है ना? है ना भाई? ये काम तो किया जा सकता है। मान लो रदरफोर्ड मॉडल में ये कह रहे हैं कि भाई 10° पे मुड़ने
वाले पार्टिकल इतने हैं 1 मिनट में। तो बताइए 90 पे मुड़ने वाले कितने होंगे? तो इसमें वैल्यू रखी जा सकती है ना? ये देखो
n थीटा। ठीक है ना? तो n एट 10° यहां रख दो डिवाइडेड बाय n एट 90° यहां रख दो और इन दोनों को डिवाइड कर दो ऊपर sin आ जाएगा
sin की पावर 4 90 / 2 और नीचे sin की पावर 4 tan / 2 नीचे आ जाएगा क्योंकि ये तो इन्वर्सली प्रपोर्शनल है ना तो एक बार tan
वाले और 90 वालों को ऐसे कर दो। ठीक? अब इसकी वैल्यू तो आपको पता है कितनी? 1 * 10 टू दी पावर 6 है। ठीक है ना? कितनी है
इसकी वैल्यू? 1 * 10 टू दी पावर 6 है। इसकी वैल्यू हमको निकालनी है। तो ये वाली वैल्यू बराबर हो जाएगी। sin की पावर 4 90
का बाय 2 45 तो 1 / 2 की पावर 4 तो ये 1/2 1/4 तो ये हो गया। अब ये sin की पावर 4 5° आएगा। अब भाई sin 5° की वैल्यू आपको गिवन
होगी। sin 5° की वैल्यू आपको गिवन होगी। यह और यह वैल्यू गिवन होगी। यहां रखोगे n निकल
के आ जाएगा। तो इस पर्टिकुलर केस में n की वैल्यू एप्रोक्सीमेटली 250 या 231 आती है। तो यहां पे n की
वैल्यू एप्रोक्समेटली 231 आ जाएगी। तो भाई ये टाइप का सवाल भी आ सकता है। और यह किस पे है? ये
रदरफोर्ड मॉडल पे है। तो भाई अगर ये आ गया ठीक है ना? तो मुझे याद कर लेना कि सर ने बताया था। राइट? अब एक बात और है।
डिस्टेंस ऑफ क्लोजेस्ट अप्रोच। ये वाला पॉइंट भी है एक। ठीक है ना? तो कहीं पे एक पॉइंट और आता
है। डिस्टेंस ऑफ क्लोजेस्ट अप्रोच। यह ठीक यह वाला सवाल भी मैंने अच्छी-अच्छी जगहों पर देखा है।
ठीक है? डिस्टेंस ऑफ क्लोजेस्ट अप्रोच इसका मतलब समझ रहे हो? ठीक? क्या होता है कि जैसे ये गोल्ड फॉइल
है। ठीक है ना? तो इसमें कितना पॉजिटिव चार्ज होगा? पॉजिटिव का Z टाइम्स ऑफ़ E जितना भी Z गोइल उसका होता है गोल्ड का।
तो इस पे एक अल्फा पार्टिकल आ रहा है। ठीक है ना? तो अल्फा पार्टिकल का चार्ज कितना होता है? 2e तो उसको अगर आप e एनर्जी से
थ्रो कर रहे हो। कितने से एनर्जी से थ्रो कर रहे हो? E से थ्रो कर रहे हो। ठीक? तो अभी इसके और इसके बीच का डिस्टेंस बहुत
ज्यादा है। ठीक है? और यहां पे काइनेटिक एनर्जी कितनी है उसकी? E है। जो भी है। तो उस एनर्जी से आप इसको थ्रो कर रहे हो। तो
क्या होगा? ये जैसे-जैसे उसके पास जाएगा ना यूं तो स्लो होता जाएगा। एक जगह से ये वापस मुड़ेगा यूं। तो यहां पे इसकी
वेलोसिटी कितनी होगी? ज़ीरो। तो इसका सेंटर ये दिस इज़ द डिस्टेंस ऑफ़ क्लोजेस्ट अप्रोच ये। तो भाई ये समझ लो इसकी काइनेटिक
एनर्जी कम होते-होते यहां ज़ीरो हो जाएगी। तो पूरी की पूरी काइनेटिक एनर्जी पोटेंशियल एनर्जी में बदल जाएगी। तो इसकी
और इसकी पोटेंशियल एनर्जी क्या हो जाएगी? KQ1Q2 तो 2E * ZE KQ1Q2 / R ये R ही क्लोजेस्ट
एप्रोच है। यही उसकी काइनेटिक एनर्जी के बराबर होगी। यही उसकी काइनेटिक एनर्जी के बराबर होगी।
तो हमें तो केवल r निकालना है। तो K * 2 टाइम्स ऑफ़ ZE² / ये वाला K नीचे ले आओ और R इधर ले जाओ।
ठीक है ना भाई? यही आपकी क्लोजेस्ट एप्रोच। अब ये काइनेटिक एनर्जी है। कहीं इस वाले K से इस वाले K को काट दो। तो मैं
इसको KE एक साथ लिख देता हूं। ठीक है ना? kee एक साथ लिख देता हूं इसको। तो इसको मैं पहले वैल्यू डाल देता हूं। तो इसको 4π
0 लिख दो। और ये आपका 2ZE² हो गया। और ये यहां पे आपकी काइनेटिक एनर्जी हो गई।
दिस इज़ द डिस्टेंस ऑफ़ क्लोजेस्ट एप्रोच। ज्यादा से ज्यादा गोल्ड फॉइल के मतलब गोल्ड के न्यूक्लियस के इतना नजदीक पहुंच
पाएगा। ये इससे ज्यादा नजदीक नहीं पहुंच पाएगा। ठीक है? तो ये आपका
R हो गया। राइट? चलो भाई। अब आ जाते हैं बोर्स मॉडल पे। ठीक है? बोर्स मॉडल में मुझे कुछ भी बहुत ज्यादा आपको एक्सप्लेन
नहीं करना। ठीक है ना? सीधे-सीधे कुछ-कुछ चीजें बतानी हैं।
और वह सब चीजें जो जो काम करती हैं वह सारी चीजें मुझे लिख के तो मैं ले ही आया हूं। ठीक है? और वो चीजें मैं यहां पे
एक-एक करके एक्सप्लेन कर दूंगा। और बोर्स मॉडल पे फिर सीधे क्वेश्चंस पे पहुंचेंगे। ठीक है? कहां पहुंचेंगे? सीधे क्वेश्चंस
पे पहुंचेंगे। ठीक? तो देखो भाई, बोर्स मॉडल के कुछ स्पेशल पॉइंट्स हैं। बोहर साहब ने क्या बताया है? बोर साहब ने बताया
है कि जो न्यूक्लियस होता है, ठीक है ना? हाइड्रोजन एटम के लिए उन्होंने रिसर्च की थी। तो जो न्यूक्लियस होता है, इलेक्ट्रॉन
उसके चारों तरफ घूमते हैं सर्कुलर ऑर्बिट में। अब सर्कुलर ऑर्बिट में घूमने के लिए उनको जो फोर्स चाहिए होता है, भाई, किसी
भी चीज को अगर सर्कुलर पाथ में घूमना है, तो घूमने के लिए उन्हें सेंट्रिपेटल फ़ चाहिए होता है। बस मेन-मेन पॉइंट करेंगे।
फिर क्वेश्चन पे आते हैं भाई। बहुत काम रह गया हमारा। ठीक? तो जैसे ही वो सर्कल में घूमते हैं तो घूमने के लिए उनको
सेंट्रिपेटल फोर्स चाहिए होता है। सेंट्रिपेटल फोर्स का एक ही फार्मूला है mv²/ r r क्या होता है? वो रेडियस जिसमें
वो घूम रहे हैं। ठीक है ना? तो वो मिलता है उसको सेंटर जो इसका न्यूक्लियस है इलेक्ट्रॉन को अट्रैक्ट जो करता है
इलेक्ट्रोस्टेटिक फोर्स। और वो क्या होता है? वो होता है 1 / 4π0 k q1q2 / r² तो ये तो इलेक्ट्रॉन होता है
और z क्या होता है? न्यूक्लियस जिसके चारों तरफ वो घूम रहा है उसका चार्ज होता है। तो q1 q2 / r का स्क्वायर तो ये यहां
पे r का स्क्वायर हो जाता है। तो ये एक इक्वेशन आती है यहां से। तो ये वाली चीज यहां से हमारे पास निकल के आ जाती है। तो
ये सेंट्रिपेटल फोर्स इलेक्ट्रोस्टेटिक फोर्स से मिलता है। और उन्होंने ये भी बताया है कि जो ये इलेक्ट्रॉन किसी
न्यूक्लियस के चारों तरफ घूम रहा है ऐसे तो ये सर्टेन एनर्जी लेवल्स हैं। ये क्या है? ये एनर्जी लेवल्स हैं। और ये सर्टेन
है। फिक्स्ड हैं। ऐसा नहीं कि कुछ भी होगा। तो इलेक्ट्रॉन जो घूम रहा है वो सर्टेन एनर्जी लेवल में ही घूम सकता है।
किसी अपनी मर्जी से किसी भी रेडियस में नहीं घूम सकता। कुछ एनर्जी के लेवल्स हैं। ठीक? सबसे पहला वाली ऑर्बिट होती है n =
1, फिर n = 2, n = 3, n = 4, n = 5। ऐसे करके सर्टेन एनर्जी लेवल्स हैं। बस इन्हीं में ही घूम सकता है। वो हर एक में नहीं
घूम सकता। अब किसी ऑर्बिट में अगर वो घूम रहा है, तो उसको फोर्स चाहिए। फोर्स कहां से मिलता है?
इलेक्ट्रोस्टेटिक अट्रैक्शन से मिलता है। चलिए भाई बहुत बढ़िया बात है। तो यहां पर एक बात का अगर आप ध्यान रखो तो ये वाली
चीज आपको बताती है कि ये और आप देखो mv² / r में v को आप ठीक है ना? ये जो r है नीचे ठीक है ना? v की ठीक है? z² r² की इधर
मल्टीप्लाई कर दो तो mv mvr * v बन जाता है ये। इसकी भी जरूरत पड़ जाती है कहीं-कहीं पे। इसलिए मैंने लिख के रख
दिया। अब दूसरी चीज उन्होंने बोला है कि इलेक्ट्रॉन कैन रिवॉल्व ओनली इन दोज़ ऑर्बिट्स वेयर एंगुलर मोमेंटम इज़ अ
इंटीग्रल मल्टीपल ऑफ़ h / 2π तो ऐसे ही किसी आर्बिट्रेरी उसमें नहीं घूम सकता। केवल उनमें घूमेगा जहां पे उसका एंगुलर
मोमेंटम इंटीजर मल्टीपल हो। किसका? h / 2π का। तो यह रूल भी उन्हीं का ही बताया हुआ है कि
इसमें वह घूमेगा। अदरवाइज़ कोई आर्बिट्रेरी रेडियस को वो पिक नहीं कर सकता। एंगुलर मोमेंटम है ये। एंगुलर मोमेंटम h / 2π के
इंटीग्रल मल्टीपल में होना चाहिए। चलो बहुत अच्छी बात है। अब और क्या बात बताई उन्होंने? और बात उन्होंने यह बताई कि भाई
यह जो ऑर्बिट है कि इन एनी ऑफ़ द ऑर्बिट इलेक्ट्रॉन डज़ नॉट
रेडिएट एनर्जी। ऑलदो इट इज़ एक्सीलरेटेड। वो कह रहा है कि अगर इन ऑर्बिट में वो घूम
रहा है तो वो एनर्जी रेडिएट नहीं करता। जबकि वो एक्सलरेटेड है। जबकि लॉ ये कहता है कि अगर कोई पार्टिकल एक्सीलरेटेड है तो
वो एनर्जी का लॉस करेगा। लेकिन ये नहीं करता तो ये भी उनका एक रूल हो गया। क्यों? अब कुछ बोलेंगे सर वो तो कांस्टेंट स्पीड
से घूमता है। एक्सीलरेटेड कहां है? भाई अगर वो एक्सीलरेटेड है मतलब उसका सेंटर की तरफ तो एक्सीलरेशन है ना। तो एक्सीलरेशन
इज नॉट इक्वल टू 0 है भाई। एक्सीलरेशन जो है वह ज़ीरो नहीं है। एक्सलरेशन यहां पर जीरो नहीं है। सेंट्रिपेटल सेंट्रिपेटल
एक्सीलरेशन तो है ना r ओमेगा² या फिर v² / r तो एक्सलरेटेड है पर तब भी वो कुछ एनर्जी रेडिएट नहीं करता। ओके?
इलेक्ट्रॉन्स इन आउटर ऑर्बिट हैव ग्रेटर एनर्जी। अब जो ये तो न्यूक्लियस हो गया और ये बाहर वाली ऑर्बिट हो गई। तो ऑर्बिट
जितनी बाहर वाली होती जाएगी उतनी एनर्जी ग्रेटर होती जाएगी। ग्रेटर एनर्जी होती जाएगी बाहर की तरफ।
यानी कि n = 1, n = 2, n = 3, n = 4 इसकी एनर्जी ज्यादा होगी। इसकी कम होगी, इसकी और कम होगी, इसकी और कम होगी। ठीक? और ये
टोटल एनर्जी की बात हो रही है। अभी ये जो टोटल एनर्जी है ना इस पे भी हम बात करेंगे। तो ये बातें थी बोर्स मॉडल की। अब
क्या होता है? अब बोहर साहब ने यह बताया है हमें कि भाई क्लोजेस्ट अप्रोच तो हो गया और ये क्या
है? वेवलेंथ ऑफ़ फोटन और ये क्या है? सीरीज पावर थ्री। हम ये एनर्जीज़ हो गई और यहां के बाद सवाल
आ जाता। चलो एक दो बातें और हैं। और साहब की बातें करेंगे उसी पे बेसिस और फिर हम आगे बढ़ेंगे। ठीक? चलो, अब कुछ बातें हैं
जो मुझे बतानी है। ठीक है? ध्यान से सुनना। उन्होंने कहा है कि थोड़ी सी कैलकुलेशन करोगे आप तो आपको कुछ फार्मूले
मिलने शुरू हो जाएंगे। ठीक है ना? कैसे? उन्होंने कहा कि जो इन फार्मूलों को नहीं
रटेगा उसको पाप लगेगा। रटने बहुत जरूरी हैं। वो कह रहा है कि किसी भी एटम में जो हाइड्रोजन और हाइड्रोजन लाइक एटम है। ठीक
है ना? हाइड्रोजन एंड हाइड्रोजन लाइक एटम्स जो हैं जो उनके आसपास के एटम है जिनमें एक इलेक्ट्रॉन अवेलेबल हो जाता
है आपको उनमें वो कह रहा है कि वेलोसिटी ऑफ़ इलेक्ट्रॉन इन nथ ऑर्बिट इज़ दिस। ठीक? लिखा हुआ है आपके सामने। वेलोसिटी इन nथ
ऑर्बिट इज़ z / n * e² / 2 h
ये तो इसकी वैल्यू अगर आप कैलकुलेट करोगे तो दिस इज़ 2.2 * 10 टू दी पावर 6 मीटर पर सेकंड एंड मल्टीप्लाई बाय z / n ये जो
नंबर है ना z / n चाहे आपको कुछ याद हो ना हो पर ये जरूर याद होना होना चाहिए। एक तो किसी भी ऑर्बिट में पार्टिकल की या
इलेक्ट्रॉन की वेलोसिटी यह होती है। दूसरी बात उन्होंने क्या बोली कि किसी भी ऑर्बिट की जो रेडियस है रेडियस ऑफ़ nथ ऑर्बिट इज़
n² / z *0 h² / πm² जो कि आ जाएगी 0.53
* n² /z इतने एंगेस्ट्रोम आप चाहे अपना नाम भूल जाओ पर इसको मत भूलना आप। ठीक है ना? चाहे अपने किसी का अपने किसी
बहुत इंपॉर्टेंट जो इंसान है आजकल मम्मी पापा भाई बहन तो इंपॉर्टेंट रहे नहीं है लाइफ में। तो जो भी इंपॉर्टेंट इंसान है
उसका नाम भूल जाना। पर ये मत भूल जाना आप। ये दोनों चीजें याद रखनी है। बहुत ज्यादा जरूरी है। ठीक? अभी सवाल आएंगे। इसके लिए
बोल रहा हूं मैं। ऐसे मेरे को पागल कुत्ते ने नहीं काटा कि इसको याद रखना। हैं। मेरे को कोई मेरे को कोई ऐसे दवाई थोड़ी खा रखी
है मैंने कि हर चीज को बोलूंगा। भाई इन पर सवाल आएंगे। सवाल आएंगे। ठीक है? उनमें यूज़ होगा ये। फिर हम इनको याद करेंगे कि
ये क्या था और ये क्या था। ठीक? डिस्टेंस ऑफ क्लोजेस्ट अप्रोच हो गया। अब ये वाली बात सुन लो।
ठीक? ये वाली बात क्या कहती है? ये वाली बात ये कहती है कि भाई जब इलेक्ट्रॉन एक ऑर्बिट से दूसरी ऑर्बिट में ट्रांजिशन
लेता है। ठीक है? जब एक इलेक्ट्रॉन एक ऑर्बिट से दूसरी ऑर्बिट में ट्रांजिशन लेता है तो या तो वो फोटन को एब्जॉर्ब
करता है या वो फोटोन निकाल देता है। ठीक? सिंपल सी बात है। मान लो ये तो न्यूक्लियस है। अब एक ऑर्बिट यह है और एक ऑर्बिट यह
है। यह इनर ऑर्बिट है। यह आउटर ऑर्बिट है। यानी कि यह
न्यूक्लियस के पास वाली ऑर्बिट है और यह बाहर वाली ऑर्बिट है। ठीक है? सुनते जाना ध्यान से। इस ऑर्बिट में जिंदा रहने के
लिए ₹1000 चाहिए और इस ऑर्बिट में जिंदा रहने के लिए ₹200 चाहिए।
ठीक? तो अगर इलेक्ट्रॉन को इस ऑर्बिट से इस ऑर्बिट में ट्रांजिशन लेना है तो ₹800 उधार लेने पड़ेंगे क्योंकि यहां जीने के
लिए ज्यादा पैसा चाहिए। अभी बताया ना आउटर ऑर्बिट में आउटर ऑर्बिट में ज्यादा एनर्जी होती है। तो वहां रहने के लिए ज्यादा
एनर्जी चाहिए। ₹1000 लगेंगे वहां 1 दिन के। यहां 200 तो ₹800 उधार लेगा कहीं से तब उसमें जाएगा। तो जब ट्रांजिशन बाहर की
तरफ होता है तो रेडिएशन एब्जॉर्ब करना पड़ता है। ठीक है ना? अब अब मान लो कोई क्या करता है? बाहर वाली ऑर्बिट से अंदर
वाली ऑर्बिट में आता है। तो कम खर्चे वाली जगह आ जाता है तो जेब में कुछ पैसे बच जाते हैं। उनको आप उड़ा सकते हो। क्योंकि
अब तो आपका खर्चा कम है। तो जब बाहर से अंदर वाली तरफ आते हैं तो आप उड़ा सकते हो। तो यहां से एक फोटन निकल जाता है।
यानी कि अगर आप बाहर से अंदर की तरफ आ रहे हो तो फोटन निकलते हैं। एनर्जी निकलती है और जब अंदर से बाहर की तरफ जाते हो तो
आपको कुछ उधार लेना पड़ता है। एनर्जी खानी पड़ती है। सिंपल सी चीज है। इनको बोलते हैं ट्रांजिशन। ये क्या होता है? और
ट्रांजिशन होता है। और ये बिल्कुल फेयर है। फेयर है ये। चाहे आप अंदर से बाहर जाओ या बाहर से अंदर जाओ जो भी उनकी ऑर्बिट की
एनर्जी का डिफरेंस है उस डिफरेंस के बराबर या तो लेना पड़ेगा या देना पड़ेगा तब जाके आप ट्रांजिशन ले सकते हो। बहुत सिंपल सी
चीज है। अब ये चीज वही बताती है। ठीक है ना? ये चीज़ ये बताती है कि किसी भी ऑर्बिट में एनर्जी
एनथ ऑर्बिट की एनर्जी कितनी होती है? माइनस की 13.6 * z² / n² किसी भी ऑर्बिट की एनर्जी ये
होती है nथ की तो इतने इलेक्ट्रॉन वोल्ट सॉरी इतने इलेक्ट्रॉन वोल्ट एनर्जी होती है ये। अब ये नेगेटिव में है। अब z² z तो
एटॉमिक नंबर है। n क्या है? वो ऑर्बिट का नंबर है। n = 1 2 3 4 5 बड़ी ऑर्बिट तो नंबर बढ़ता जाएगा। तो ये है तो आप खुद सोचो
Z तो कॉन्स्टेंट हो गया एटम के लिए। n अगर कम है यानी कि अंदर की तरफ है तो ये वैल्यू छोटी होगी। ये वाली वैल्यू बड़ी
होगी। तो नेगेटिव में बड़ी वैल्यू मतलब कम एनर्जी। तो जितना उसके पास होते हैं हम जितना न्यूक्लियस के पास होते हैं उतनी
नेगेटिव में ज्यादा मतलब कम एनर्जी होती है हमारे पास। ठीक? जितना n की वैल्यू ज्यादा कर दोगे। n की वैल्यू ज्यादा कर
दोगे। ये क्वांटिटी छोटी हो जाएगी। लेकिन सामने माइनस लगा हुआ है। तो जैसे-जैसे हम दूर जाते हैं तो हमारे पास एनर्जी थोड़ी
ज्यादा होती रहती है। ठीक? तो ये एनर्जी बताती है। अब एक ऑर्बिट से दूसरी ऑर्बिट में आप ट्रांजिशन ले रहे हो। तो एक में
EN1 होगा तो एक में EN2 होगा। दोनों का डिफरेंस जो है वही एनर्जी चाहिए। तो यहां ये दोनों का डिफरेंस ही है। तो दोनों का
डिफरेंस = 13.6Z² * 1 / N1² - 1 / N2 का स्क्वायर। ठीक है ना? ये होता है। अगर आप इसको सॉल्व करते
हो और इस डेल्टा को HC/ लैम्ब्डा रखते हो और 1 / लैम्ब्डा को डेल्टा / HC रखते हो तो यहां पे 1 / लैम्ब्डा की वैल्यू आ जाती
है। देखो डेल्टा है ये। इसको HC से डिवाइड कर दो। इधर भी HC से डिवाइड कर दो। इधर भी HC से डिवाइड कर दो। तो आपके पास 1 /
लैम्ब्डा ठीक है ना कितना 1 / लैम्ब्डा = रिडबर्ग कांस्टेंट rh * z का स्क्वायर यहां आ जाएगा और 1 / n1 का स्क्वायर - 1 /
n2 का स्क्वायर यहां आ जाएगा और रिडबर्ग कांस्टेंट की वैल्यू होती है 10 9 8 7 10 9 8 7 यहां सेवन के बजाय आठ
याद कर लो 10 9 8 7 8 9 10 और एक के बाद ज़ीरो लगा दो। ठीक है ना? 7 8 9 10 ठीक है ना? तो इंटू 10 टू दी पावर 7 और एक के बाद
ये ज़ीरो लगा दो। 7 8 9 10 एक के बाद ये डेसिमल लगा दो यहां पे। ज़ीरो सॉरी डेसिमल लगा दो। तो रिडबर्ग कांस्टेंट की वैल्यू
आपको याद हो जाएगी यहां पे। राइट? और रिडबर्ग कांस्टेंट होता है पर मीटर में। तो इस वाली इक्वेशन से आप लैम्ब्डा की
वैल्यू निकाल सकते हो कि ये जो फोटन जा रहा है ये कितनी वेवलेंथ का फोटन है। लैम्ब्डा निकाल सकते हो आप। ठीक? अब ये
वाली जो बातें मैं कर रहा हूं ना बेटा ये बोरिंग लग रही होंगी। ऐसा लग रहा होगा सर इनको लिख के दिखाते तो ज्यादा। बेटा लिख
के भी तो यही है ना। बोर्स मॉडल यही है। अब इस पे जब सवाल करेंगे फिर चेक हो जाएगा। ठीक है ना? अब स्पेक्ट्रल लाइन की
बात होती है हाइड्रोजन की। तो अगर हाइड्रोजन एटम है तो Z की वैल्यू वन हो जाएगी। तो रिडबर्ग कांस्टेंट * 1 / N1² -
1 / N2² इसी से सारी चीजें आपको मिलती चली जाती हैं। ठीक? चलो इससे थोड़ा सा एक लेवल और आगे चलते हैं हम। ठीक? अब होता क्या है
भाई? यहां पे जब एक एटम में ठीक है ना? मान लीजिए भाई ये एटम है यहां पे।
यह ऐसे एटम है। ठीक है ना? यह न्यूक्लियस है। यहां से यहां, यहां से यहां यह ट्रांजिशन चलते
रहते हैं। ठीक है ना? यहां से यहां, यहां से यहां ये ट्रांजिशन चलते रहते हैं। तो जब भी ट्रांजिशन ऐसा होता है कि
इलेक्ट्रॉन की लैंडिंग, ठीक है ना? इलेक्ट्रॉन की लैंडिंग चाहे कहीं से भी हो n = 1 पे होती है। तो n = 1
पे जितनी भी लैंडिंग होती है तो उन सबसे क्योंकि अंदर की तरफ आ रहा है उन सब से फोटन निकलेंगे। अगर सेकंड से इस पे गिर
रहा है इसमें से भी फोटन निकलेंगे। तो वो सारे रेडिएशंस निकलेंगे। ठीक? तो n = 1 पे जितनी भी लैंडिंग होगी उन सारी लैंडिंग्स
की जो वेवलेंथ है उनको बोलेंगे कि ये सब लाइमन सीरीज में है। किस में है? लाइमन सीरीज में है। ठीक? तो अगर जस्ट नेक्स्ट
वाले से यहां गिरता है। नेक्स्ट वाले से यहां गिरता है तो कितनी वेवलेंथ आएगी? 1 / लैम्ब्डा = r * 1 / 1² - 1 / 2² 3r / 4
आएगी। रिडबर्ग कांस्टेंट यह 1 / की वैल्यू आएगी। तो रिडबर्ग कांस्टेंट की वैल्यू अगर आप यहां डाल दो तो यह लैम्डा इतना आ जाएगा
1216 एंगस्ट्रो। ठीक है? लाइमन सीरीज में। अब अगर बहुत दूर से वन पे आएगा यानी कि इनफाइनाइट से वन पे
आएगा तो भी लाइमन सीरीज़ में ही आएगा। तो अगर तब लैम्ब्डा कितना होगा? 1 / लैम्ब्डा आ 1 / 1 का स्क्वायर - 1 / इसका स्क्वायर
तो ये आ गया आपका 912 एंगस्ट्रो। अब आप खुद देखो जब वो बिल्कुल पास वाले से इसमें जाएगा तो बहुत कम एनर्जी का गैप होगा।
सबसे कमजोर सबसे कमजोर फोटन निकलेगा। और जब सबसे कमजोर फोटन निकलेगा तो उसका लैम्ब्डा
मैक्सिमम होगा। तो ये मैक्सिमम लैम्ब्डा है। लाइमन सीरीज का मैक्सिमम लैम्ब्डा है ये। और जब बिल्कुल बहुत दूर से आएगा तो
दोनों ऑर्बिट का जो एनर्जी का गैप होगा वो सबसे ज्यादा होगा। तो सबसे ज्यादा एनर्जी का फोटन निकलेगा तो मिनिमम शॉर्टेस्ट
वेवलेंथ निकलेगी। तो ये आपकी मिनिमम वेवलेंथ होगी। ठीक? तो ये आपके लाइमन की मैक्सिमम और मिनिमम हो गई। यकीन मानो यही
पूछ लिया जाता है कभी-कभी। राइट? अब आप ये देखो बामर सीरीज। बामर सीरीज क्या होता है? कि जितनी भी लैंडिंग जितनी भी लैंडिंग
n = 2 पे होगी कहीं से भी हो रही है किसी भी जगह से हो रही है वो सारी बामर सीरीज में आएंगी और इस तरीके से इसकी ये
मैक्सिमम वेवलेंथ हो जाएगी जो बिल्कुल बराबर वाली से आएगी और ये इनफाइनाइट वाली से हो जाएगी ये आपकी मिनिमम वेवलेंथ हो
जाएगी ठीक लाइमन बामर ठीक यह क्या हुआ पाश्चन ठीक है ना? पाश्चन ब्रैकेट पफंड और फिर और
भी बहुत सारी। ठीक है ना? मैंने कैसे याद किया था? एल एल बीपी
बी पी लाइमन बामर पाश्चन ब्रैकेट प्रफंड ऐसे करके एलबीपी बीपी बीपी मतलब भारत पेट्रोलियम भारत
पेट्रोलियम एल लाइमन बामर तो याद ही रहता है। तो इनके जो
यह सीरीज है ना इससे याद रहता है। लाइमन बामर पाश्चन ओ सॉरी हां पाश्चन और ब्रैकेट और फिर पंट सीरीज उसमें भी पी आता है आगे।
ठीक? इसी तरीके से पाश्चन सीरीज कौन सी होगी? जब लैंडिंग सीधे थ्री पे होगी। थ्री पे होगी या थ्री से जाएगी? क्या ये
बात समझ में आ रही है? राइट? तो n = 3 से लैंडिंग होगी? तो ये पाश्चियन सीरीज होगी ब्रैकेट n = 4 के लिए
फंड सीरीज होगी n = 5 के लिए तो इनकी मैक्सिमम और मिनिमम आपको याद रखनी है कुछ की मैंने लिख दी है कुछ आपको याद रखनी है
ये बोर्स मॉडल की वो चीजें हैं जिनको बस रटना है और आपका काम हो जाएगा इन्हीं से ही ठीक
है भाई अब अगर हम हाइड्रोजन एटम की बात करें तो कुछ चीज याद रखने वाली है। n = 1 में एनर्जी
माइनस की 13.6 होती है। n = 2 में - की 3.4 होती है। n = 3 में माइनस की 1.51 होती है और n = 4 में
0.85 होती है और 0.54 होती है n = 5 में। इससे आगे की एनर्जी
आपको याद करने की या रखने की जरूरत भी नहीं है। जो कुछ भी एनर्जी होगी इन्हीं में ही हो जाएगी। और ये इलेक्ट्रॉन वोल्ट
में चल रहा है सब। सब किस में चल रहा है? इलेक्ट्रॉन वोल्ट में चल रहा है। ये एनर्जी याद रखनी है। ओके जी। सर अब क्या?
अब अब है सवाल। कौन से सवाल? अभी देखना आप लोग कैसे-कैसे सवाल आने वाले हैं यहां पे।
ठीक है ये लो हम ये लो भाई देखो सवालों पे आ गए हम बॉस मॉडल के ठीक है और कितना टाइम हो गया 320
हो गए 320 420
और 4:45 1/2 घंटा बच रहा है बस 1ढ़ घंटे में हमें दुनिया पलट डालनी है समझ रहे हो भाई साहब ओके यह बोल रहा है n इलेक्ट्रॉन
इन द हाइड्रोजन एटम इनिशियली इन द फोर्थ एक्साइटेड स्टेट फोर्थ एक्साइटेड स्टेट यानी कि n = 5 क्यों? क्योंकि n = 1 को तो
हम ग्राउंड स्टेट बोलते हैं। क्या होती है ये? ग्राउंड स्टेट होती है। और n = 2 को हम फर्स्ट एक्साइटेड स्टेट बोलते हैं।
फर्स्ट एक्साइटेड स्टेट। तो फ़ोर्थ एक्साइटेड स्टेट मतलब n = 5. तो यह बोल रहा है एक इलेक्ट्रॉन हाइड्रोजन एटम में
इनिशियली n = 5 में है। मेक्स अ ट्रांजिशन टू एनथ एनर्जी स्टेट बाय एमिटिंग अ फोटन ऑफ़ एनर्जी 2.86 इलेक्ट्रॉन वोल्ट। ओके? तो
इंटीजर वैल्यू ऑफ़ n विल बी n की इंटीजर वैल्यू बताइए। ठीक है? तो चेंज इन एनर्जी कितना होता है? 13.6
और यह तो है तो 1 / n² - 1 / 5² यह आपका कितना आना चाहिए? 2.86 आना चाहिए। अब या तो इसको सॉल्व कर लो और
n निकाल लो या फिर आपको जो वो दे रखा है 13.6 3.4
1.51.85 और 54 इनमें से थोड़ी सी कॉमन सेंस लगा के देख लो। कौन सी जगह का जो डिफरेंस है वह
2.86 है। तो मेरे को साफ-साफ दिख रहा है कि इसका और इसका डिफरेंस 2.86 निकलेगा। 340 में से 54 माइनस करो तो 286 आएगा।
ठीक? तो ये कौन सा है? ये तो n = 2 है और ये n = 5 है। दैट्स इट। देखो और n = 5 में सेट बैठ भी रहा है। तो ये सवाल फ्री का
है। फ्री के नंबर है ये। जिनको ये ये चीज याद है ना जिसको ये वाली
चीज याद है वो तो इसको देखते ही कर देगा। भाई इस सवाल को करने वाले बच्चे में क्या टैलेंट चाहिए? बताओ आप मुझे क्या छांट
लेंगे एनडीए वाले? क्या फ़्टर लगा लेंगे? क्या चेक कर लेंगे कि कैसा बच्चा है? हैं? जो इनके डिफरेंस से आंसर निकाल रहे हैं
उसमें क्या निकाल लेंगे यार? एक तो भाई थोड़ा सा पेपर का लेवल अच्छा होना चाहिए। मैं यही उम्मीद करूंगा। ठीक है?
क्या बात समझ में आ रही है? तो n = 2 यहां पे आंसर है। ठीक है? तो इसमें कोई इतना
खुश होने वाली बात भी नहीं है कि ये सवाल कर दिया तो हम एकदम कूदेंगे। ये तो n = 2 हमें साफ-साफ दिख रहा है। तो मैं यही दुआ
करूंगा कि आप पे फिर से ऐसा ही सवाल आए। ठीक है ना? एक और देख लो फिर से। ठीक? ये कह रहा है कि हाइड्रोजन लाइक आयन है।
अच्छा जी। द एनर्जी डिफरेंस बिटवीन द सेकंड एक्साइटेशन एनर्जी स्टेट एंड ग्राउंड। अब ये क्या बोल रहा है? सेकंड
एक्साइटेशन एनर्जी स्टेट। तो n = 3 नहीं हो गया ये। सेकंड एक्साइटेशन एनर्जी स्टेट n = 3 हो
गया। और यह कौन सा हो गया? n = 1 हो गया। द एटॉमिक नंबर ऑफ द आयन इज कह रहा है दोनों का डिफरेंस कितना है? 108.8 है। तो
भाई, क्या होता है? 13.6 * z² / n² = एनर्जी ऑफ़ दैट स्टेट। ठीक? तो सीधे-सीधे सोचो। 13.6
* z² / 1 / 1² / 1 / 3 का स्क्वायर क्योंकि n = 3 और वन का डिफरेंस है और वो आना चाहिए कितना? 108.8
ये आना चाहिए। तो मुझे साफ-साफ दिख रहा है कि यहां पे 13.6 * z का स्क्वायर अगर हम करेंगे तो 1 - 1 / 9 तो ये 8 / 9 हो जाएगा
और ये 108 हो जाएगा। 108 /8 तो यहां पे थोड़ा सा आईडिया भी अगर हम लगा लें ना तो इसमें देखो नाइन की मल्टीप्लाई करेंगे तो
ये थोड़ा छोटा हो जाएगा। 108 से छोटा हो जाएगा। फिर इसको हम ये जो 13.6 है इसको एट से मल्टीप्लाई करेंगे। ठीक? या फिर एक काम
कर लो यहां पे z² की वैल्यू देखो भाई ये जो एट है अगर इसको एट से मल्टीप्लाई करेंगे ना हम ये तो ये वाली वैल्यू
एप्रोक्सीमेटली इसके बराबर हो जाएगी। और z² की वैल्यू यहां पे नाइन आ जाएगी। तो z की वैल्यू थ्री आ गई।
z की वैल्यू कितनी आ गई? थ्री। क्या ये वाली बात समझ में आ रही है? तो यहां पे कौन सा ऑप्शन करेक्ट हो जाएगा? थर्ड वाला।
ठीक? अभी और भी है सवाल इसी टाइप के। भरे पड़े हैं। और ये कब का है? यह भी 2025 का है। उड़ी बाबा।
ठीक है? देखो क्या आएगा इसमें आंसर? क्या आएगा इसमें आंसर? भाई इस टाइप के सवाल अगर आए तो हमारा तो बेड़ा पार हो जाएगा।
ठीक? ये कह रहा है कंसीडरिंग द बोर मॉडल ऑफ हाइड्रोजन लाइक एटम्स द रेश्यो ऑफ द रेडियस फिफ्थ ऑर्बिट ऑफ इलेक्ट्रॉन ऑफ
लिथियम एंड हीलियम। ओके भाई इसका तो Z3 होता है। इसका Z2 होता है शायद। ठीक है ना? यही तो है। तो रेश्यो
पूछ रहा है किसका? रेडियस का। तो भाई रेडियस क्या होती है? रेडियस ऑफ़ एनथ ऑर्बिट इज़ 0.53
* n² /z एंगस्ट्रोम। मैंने कहा ना आप किसी का नाम भूल जाना। पर ये फॉर्मूले मत भूलना आप। ठीक? अब वो क्या कह रहा है कि फिफ्थ
ऑर्बिट है दोनों की। तो n दोनों में सेम है। तो यहां पे रेडियस इज डायरेक्टली प्रोपोर्शनल टू 1 / z तो r ऑफ़ लिथियम / r
ऑफ़ हीलियम = 3 / 2 / 3 आंसर है। ये भी फ्री के नंबर हैं। मैंने क्या कहा
था? इतने आसान क्वेश्चन आएंगे कि पूछो मत। बहुत आसान आएंगे। ठीक? 2 / 3 आएगा आंसर इसमें। देखो
डी ऑप्शन करेक्ट है। ठीक? चलो अगले वाला सवाल देख लेते हैं। क्या पता वह भारी हो। हो सकता है वह भारी हो जाए। यह बोल रहा है
फॉर अ हाइड्रोजन एटम द रेशियो ऑफ़ द लार्जेस्ट वेवलेंथ ऑफ़ लाइमन सीरीज टू दैट ऑफ़ द बामर सीरीज। अरे बाबा
रेश्यो पूछ रहा है। रेश्यो क्या? लार्जेस्ट वेवलेंथ ऑफ लाइमन। लाइमन मतलब n = 1 और लार्जेस्ट का मतलब
लार्जेस्ट वेवलेंथ यानी कि लोएस्ट एनर्जी यानी कि टू से वन। भाई लार्जेस्ट वेवलेंथ का मतलब क्या होगा?
लोएस्ट एनर्जी। लोएस्ट एनर्जी लार्ज अगर वेवलेंथ बहुत ज्यादा होती है तो एनर्जी बहुत कम होती है। यानी कि बिल्कुल बराबर
वाले में से ही कूदा है। तो टू से वन पे कूदा है। ठीक है? तो क्या चाहता है ये? वेवलेंथ चाहता है ये। है ना?
ठीक है? तो 1 /λ = सम कांस्टेंट * 1 / 1² - 1 / 2 का स्क्वायर। चलो ये हो गया। ये किसकी है? लाइमन की है। टू दैट ऑफ़ बामर।
अब बामर का मतलब क्या हुआ? वो भी बिल्कुल बराबर वाले में से ही कूदा है। 1 / लैम्ब्डा बामर = r * 1 / 2² - 1 / 3² तो
ये कितना है? r * 1 - 1 / 4 तो यह तो 3 / 4 हो गया और यह कितना हो गया? 1 / 4 - 1 / 9 तो 36 तो ये हो गया। 9 - 4 5 ये हो गया
और r ये हो गया। और लाइमन को बामर से डिवाइड करना है। इनको लाइमन को बामर से डिवाइड करना है। तो लैम्ब्डा ऑफ़ द बाइमर
डिवाइडेड बाय लाइमन इतना हो गया। और ये कितना हो गया? 36/5 * बाय
36/5 * बाय इतना 3 / 4 तो तीन से सॉरी चार से कट के 9 27/5 हो गया। यानी कि इसका उल्टा
27/5 तो लैम्ब्डा बामर बाय यह हो गया। तो इसका उल्टा चाहिए हमें 5/ 27 भाई बी ऑप्शन करेक्ट होगा। इसका उल्टा चाहिए ना तो बी
ऑप्शन करेक्ट होगा। यह वाला हो गया। अब आप खुद ही सोच लो इसका आंसर क्या आया? कितना आया आंसर? बी आया इसका। ये लो बी आंसर आ
गया इसका। ठीक? अगर कुछ और अच्छा सा कुछ करके देखें हम। तो और भी बहुत सारे सवाल हैं मेरे पास। बट एक
बार ये भी देख लेते हैं। 2024 में आया हुआ सवाल है। ये क्या बोल रहा है? अकॉर्डिंग टू बोर्स थ्योरी द मोमेंटम। मोमेंट ऑफ़
मोमेंटम मोमेंटम तो mv और उसका मूवमेंट यानी कि r इक्वल टू ऑफ़ एन इलेक्ट्रॉन रिवॉल्विंग इन
द फोर्थ ऑर्बिट ऑफ़ द हाइड्रोजन एटम = 4 * h / 2π तो कितना हो गया? 2H/π ओ भगवान 2H/π भाई
क्या सवाल पूछा है एनटीए वाले भाई क्या सवाल पूछ रहे हैं। वाह वाह सॉरी
सॉरी सॉरी एनटीए वालों बहुत गजब सवाल बहुत गजब सवाल पूछा एनटीए वालों ने। वाह वाह भाई देखो एनटीए वालों को कुछ नहीं कहना
चाहिए। वह सुप्रीम पावर हैं। वही हैं जो सबसे अच्छा पेपर बनाते हैं।
ठीक है? हां। पिछले साल उन्होंने नीट में ठीक है? जो लोगों को तारे दिखाए हैं। ठीक है? वो कुछ भी किसी को भी दिखा सकते हैं।
ठीक है? चलो। तो बहुत बढ़िया सवाल था। गजब एकदम हमें पसंद आ गया।
क्या हम इस टाइप का सवाल भी कर सकते हैं? ठीक है? ठीक। बताइए भाई क्या इसका आंसर निकलेगा?
क्या होगा? मैं और सवाल देखता हूं। इतना कुछ एक दो सवाल और मिले तो। सवाल दिख रहा है। सवाल दिख रहा है। चलो
इसमें बोल रहा है अ लाइट ऑफ एनर्जी 12.75 इलेक्ट्रॉन वोल्ट इज इंसिडेंट ऑन अ हाइड्रोजन एटम। ओके? इन इट्स ग्राउंड
स्टेट। अच्छा मतलब ये इसको अब्जॉर्ब करेगा। ओके? द एटम अब्सॉर्ब द रेडिएशन एंड रीचेस टू वन
ऑफ इट्स एक्साइटेड स्टेट। द एंगुलर मोमेंटम ऑफ दैट ऑफ द एटम इन द एक्साइटेड स्टेट इज़ अब भाई ये देखो माइनस का 13.6
3.4 1.51.85 और 54
ठीक है ना? ये 12 75 किसका डिफरेंस है? ठीक? वो तो बोल रहा है कि ग्राउंड स्टेट में है। तो इससे इसका डिफरेंस नजर आ रहा
है मुझे। तो क्योंकि 136 में से 85 माइनस करेंगे ओके। ओके। 1360 में से 85 माइनस करेंगे तो
1275 बैठेगा। तो यही बैठ रहा है। 12.75 यही बैठ रहा है। तो दिस इज़ n = 1 एंड दिस इज़ n = 4 तो ये फोर्थ एक्साइटेड स्टेट में
पहुंचा रहा है इसको। तो वो कह रहा है कि उस एक्साइटेड स्टेट में आप मोमेंटम बता दो क्या होगा? वो भी एंगुलर। तो nh / 2π ये
होगा। n कितना है? 4 h ठीक है / 2 ठीक है और पाई ठीक है। ठीक है? तो ये बोल रहा है इतने EVज़। तो वैल्यू ऑफ़ x बताइए कितना
होगा? ठीक है? तो यहां पे हमें क्या करना पड़ेगा? उसकी एप्रोक्समेट वैल्यू निकालनी पड़ेगी। तो ये तो टू टाइम्स हो गया। ये
6.63 * 10 टू दी पावर - 34 हो गया। और डिवाइडेड बाय पाई की वैल्यू कितनी हो गई? 3.14
हो गई ये। ठीक है? तो ये क्या चाहता है कि हम इसको इलेक्ट्रॉन वोल्ट पर सेकंड में बताएं। EV पर सेकंड में। तो क्या इसको 1.6
से डिवाइड करना पड़ेगा? क्या इससे डिवाइड करना पड़ेगा? इलेक्ट्रॉन वोल्ट सेकंड में। चलो कैलकुलेटर की सहायता
लेते हैं और कैलकुलेट करके देखते हैं आंसर आता है कि नहीं आता है। एक आप कोई नहीं मैं तो पढ़ ही रहा हूं। है
ना? मुझे तो पढ़ना ही है भाई। चलो करते हैं। 2 * 6.63
ओके डिवाइडेड बाय 3.14 ठीक है ना? एंड अगेन डिवाइडेड बाय
ये या इसमें मल्टीप्लाई करनी पड़ेगी nh / 2π अच्छा पाई तो है ना नीचे यार ये पाई तो
ऑलरेडी है नीचे पाई को तो हमें छोड़ना है मैंने पाई से से भी डिवाइड कर दिया। बताओ कितना एडवांस हो रहा हूं मैं?
आ गया। ठीक है ना? इस पाई को ऐसे ही छोड़ना है। तो ये पाई तो नीचे रह गया और ऊपर आ गया 10
टू दी पावर -19 तो 15 और अगर 100 की मल्टीप्लाई करें 8.28 में तो 828 आ गया यह और 10 पावर -17 भी बन
गया। यह आ गया 828 8.28 आया मेरा ठीक है 8.28 10 पावर -15 तो -17 करके ये आ गया देखते हैं क्या आंसर
आ रहा है ये लो भाई 828 आंसर है ठीक है बात समझ में आई सर h दिया है कहां दिया है h 1 सेकंड मुझे देखने दो ओहो अरे यार हम
फालतू में मेहनत कर रहे हैं h तो दिया है पर वो तो हमने निकाल भी लिया वो तो हमने वैसे भी कर लिया नहीं दिया हो तो मेरा
इससे भी आंसर आ गया 828 आ रहा है देखो 2 * 6.63 बाय ये करेंगे तो आएगा माइनस का 19 उसमें से -15 आएगा 8.28 ये आ जाएगा दो
डेसिमल इधर किसका वो 17 बन गया हो गया आंसर कोई जरूरत नहीं है इसकी हमें सब पता है सब आता है ठीक अब थोड़ा ना बेटा आगे
चलेंगे अब थोड़ा जल्दी चलेंगे क्योंकि 3:30 हो गए हैं और हमारे पास एक सवा घंटा है और हमें बाइंडिंग एनर्जी भी करनी है।
ठीक है? रेडियस ऑफ़ सेकंड ऑर्बिट ऑफ़ दिस इज़ R1 एंड दैट ऑफ़ फोर्थ ऑर्बिट ऑफ़ दिस इज़ R2. नाउ R2 / R1 इज़ दिस। वैल्यू ऑफ़ X तो कर ही
लेंगे। क्योंकि भाई रेडियस इज़ डायरेक्टली प्रोपोर्शनल टू N² / Z. ठीक है ना? तो हीलियम का Z हमें पता है और BE का Z हमें
पता है। राइट? और n n की वैल्यू कितनी दे रखी है इसने? सेकंड ऑर्बिट ऑफ दिस। तो n की वैल्यू यहां टू दे रखी है। और फोर्थ
ऑर्बिट यहां पे n की वैल्यू फोर दे रखी है। तो बस दिस डिवाइडेड बाय दिस n² / z का स्क्वायर कर देंगे। आंसर निकल आएगा। ये
आपका होमवर्क हो गया। अगला वाला सवाल करते हैं। ठीक है? ये वाला सवाल देख लो। अब ये वाले सवाल में वो क्या कह रहा है? ये 2023
में आया हुआ सवाल है। क्या कह रहा है ये? यह कह रहा है द एनर्जी लेवल्स ऑफ एन हाइड्रोजन एटम इज शोन बिलो द ट्रांजिशन
कोस्पोंडिंग टू एमिशन ऑफ शॉर्टेस्ट वेवलेंथ शॉर्टेस्ट वेवलेंथ किसकी बात कर रहा है ये हाइड्रोजन की कर
रहा है शॉर्टेस्ट वेवलेंथ यानी के मैक्सिमम एनर्जी तो n = 1 पे 13.6 3.4 1.5185
देखो किस किसका गैप सबसे ज्यादा है? गैप कौन से में सबसे ज्यादा है? शॉर्टेस्ट वेवलेंथ मतलब मैक्सिमम एनर्जी।
मैक्सिमम एनर्जी का गैप किस में है? ये 13.6 और इसमें होगा। डी में होगा ये। है ना? क्या आंसर होगा इसका?
सबसे ज्यादा गैप किस में है? कोस्पोंडिंग टू एमिशन ऑफ शॉर्टेस्ट वेवलेंथ यानी कि मैक्सिमम
एनर्जी का गैप। टॉर्ट वेवलेंथ तो तभी होती है जब एनर्जी का गैप मैक्सिमम होता है।
यार ये तो डी में सबसे ज्यादा है। डी में सबसे ज्यादा है ना? आंसर क्या दे रखा है? यह वाला आंसर है हमारा। डी जो है
ना हमारा डी आंसर है। अब डी किस में दे रखा है? सी डी। अरे यार ये बी ऑप्शन करेक्ट होगा। ये वाला करेक्ट है ना हमारा।
आंसर देखें क्या है? बी ऑप्शन आंसर है तो सही तो है। बी में ही तो डी दे रखा है। बी ठीक है। अच्छा सवाल है। बी में डी है
तो हमारा डी आएगा जो कि बी ऑप्शन में लिखा हुआ है। तो बी ऑप्शन इज द करेक्ट ऑप्शन। बी ऑप्शन इज द करेक्ट ऑप्शन।
ओके। अब भाई थोड़ी सी बातें करेंगे हम न्यूक्लियस की।
ठीक है? थोड़ी सी बातें करेंगे हम न्यूक्लियस की। देखो हम अपनी क्लास को चलाएंगे
4:45 तक। कब तक चलाएंगे हम अपनी क्लास को? 4:45 तक चलेगी अपनी क्लास। क्योंकि भाई आपका फिर
दूसरा मंजिल भी है। उससे पहले थोड़ा सा आपको हाथ मुंह धोने का टाइम मिलना चाहिए। खाने का टाइम मिलना चाहिए। तो थोड़ा सा
टाइम आपको उससे पहले मिलना चाहिए। तो अपन 445 तक करेंगे और अभी 340 हो रहे हैं। इस वक्त कितने हो रहे हैं? 340 हो रहे हैं।
तो हमारे पास लगभग 1 घंटा 5 मिनट हैं। ठीक है? 1 घंटा 5 मिनट हैं। तो हम पूरी एक-एक पॉइंट हम जितने जो भी रिक्वायर्ड है
वो हम इसमें पूरा करने वाले हैं। ठीक है? तो आप ये मत समझना कि मैं इसको थोड़ा जल्दी निपटाऊंगा बिल्कुल भी नहीं और वो वो
चीजें ही बताऊंगा मैं जो रिक्वायर्ड है। ठीक? देखो भाई न्यूक्लियस सबसे ज्यादा इनफैक्ट एक ही टाइप का सवाल है
कि वॉल्यूम और जिसको साइज भी बोलते हैं। साइज ऑफ न्यूक्लियस।
ठीक है ना? साइज ऑफ न्यूक्लियस इज डायरेक्टली प्रोपोर्शनल टू इट्स मास नंबर जो भी उसका a होता है डायरेक्टली
प्रोपोर्शनल टू ये होता है। अब भाई ये अगर आप स्फेरिकल मान लो 4 / 3 πr इज़ डायरेक्टली प्रोपोर्शनल टू a हो जाता है।
तो यहां से r इज़ डायरेक्टली प्रोपोर्शनल टू a हो जाता है या फिर r इज़ डायरेक्टली प्रोपोर्शनल टू
a की पावर 1 / 3 हो जाता है। ठीक है ना? तो a की पावर 1 /3 मतलब मास नंबर की पावर 1 / 3 तो इस चीज को ऐसे भी लिख सकते हैं
कि रेडियस ऑफ़ द न्यूक्लियस इक्वल टू सम r0 * a की पावर 1 / 3 तो भाई ये वाली चीज यहां पे लिखी जाती है और r नोट जो है वो
एक कांस्टेंट है। ठीक है ना? R0 क्या है? एक कांस्टेंट है जिसकी वैल्यू कुछ फर्मीटर में दी जाती है। किस में दी जाती है?
फर्मीटर में दी जाती है जो कि कहीं पर अगर जरूरत पड़ती है इसको तभी यूज़ करना है। दिस इज 1.2 * 10 टू दी पावर -15 इन एसआई यूनिट
जिसको फर्मीटर भी बोलते हैं। एफएम भी बोलते हैं उसको। ये तो R नॉट की वैल्यू होती है 1.2 * 10 टू दी पावर -15। तो भाई
नेक्स्ट क्लास एट सिक्स। हां हां मुझे पता है नेक्स्ट क्लास सिक्स पे है। तो लेकिन बेटा थोड़ा सा गैप भी चाहिए। तो यह
इंस्ट्रक्शन है कि कम से कम 1 घंटे से ज़्यादा का गैप होना चाहिए। तो 5 से पहले पहले अपन को क्लास एंड करनी पड़ेगी।
ठीक? तो भाई यहां पे जो रेडियस है दैट इज़ इक्वल टू R0 * a रे टू दी पावर 3/2। अब ये जो साइज ऑफ़ न्यूक्लियस है उस पे बेस्ड ही
बहुत सारे सवाल बनते हैं। ठीक? इतनी बात के ऊपर सवाल फेंक दिए जाते हैं। जैसे ये देखो ये रहा ये क्या कह रहा है? द मास
नंबर ऑफ न्यूक्लियस हैविंग रेडियस इक्वल टू हाफ ऑफ द रेडियस ऑफ न्यूक्लियस विद मास नंबर 192 इज़
2024 का सवाल है। ठीक? तो यह कह रहा है कि एक ऐसा न्यूक्लियस है जिसका मास नंबर
192 है। तो r0 * 192 की पावर 1 / 3 इक्वल टू और उसकी रेडियस है r ये। ठीक है? तो विद मास
नंबर दिस। तो यह कह रहा है कि द मास नंबर ऑफ न्यूक्लियस हैविंग रेडियस इक्वल टू हाफ ऑफ द रेडियस। अब वो क्या कह रहा है कि
जिसकी रेडियस इससे आधी है उसका a क्या होगा? a बताना है उसका कितना होगा? तो भाई आप ये
देखो दोनों को डिवाइड कर दो। r नॉट से r नॉट कैंसिल और इधर तो टू आ गया और ये 192 / a की पावर 1 / 3 आ गई। तो इसको तीन मतलब
इसको क्यूब कर दो तो इधर तो एट आ गया और ये 192 / a आ गया। तो यहां से मुझे पता चलता है a = 192 / 8 तो दिस इज़ 2 * 4 24 आ
गया ये। ये देखो धड़ाधड़ कर डाला सब लोगों ने। तो एक छोटा सा फार्मूला और बहुत सारे सवाल छोटा सा फार्मूला बहुत सारे सवाल ए
ऑप्शन अपना करेक्ट हो गया। ठीक है? अब ये वाला देख लो। ये इतना भारी सवाल है कि बस कोई कोई ही कर पाएगा। केवल
टीचर लोग ही इसको कर पाते हैं। ठीक है ना? केवल टीचर लोग ही इसको कर पाते हैं और किसी से यह हो नहीं पाता। ये सवाल है ना?
बहुत सारे सवाल बस और किसी से हो नहीं पाता यह। तो यह बोल रहा है न्यूक्लियस हैज़ मास नंबर A1 एंड वॉल्यूम V1
अनदर न्यूक्लियस हैज़ मास नंबर A2 वॉल्यूम V2 ठीक है ना? इफ रिलेटिव रिलेशन बिटवीन मास नंबर इज़ A2 = 4a A1 देन V =
ठीक है? तो भाई ये कह रहा है कि वॉल्यूम इज डायरेक्टली प्रोपोर्शनल टू A तो V1
/ V2 = A1 / A2 ये होगा हां सर। तो वो कह रहा है कि आप तो V2 / V1 बताओ।
A a1 [हंसी] V1 / V2 बताना है इसमें। नहीं v1 /v2 हम बता सकते हैं। और a1 /a2 कितना है भाई? a1
/a2 है आपका 1/4 देखो यहां से a1 इधर रख लो। a2 को इधर ले जाओ तो वन के नीचे फोर आ जाएगा। 1/4 तो अगर हमें v1 / v2 1/4 दिया
है तो v2 / v1 कितना हो जाएगा भाई? बताओ सब के सब आप सर्च कर सकते हो स्यूशन। देखो भारी
सवाल है तो बहुत मुश्किल हो जाता है कभी-कभी। तो आप इंटरनेट की मदद ले सकते हो।
ठीक? इतना भारी सवाल पता है इसको पूरा यूं पलटना पड़ेगा। तब
जाके आंसर आएगा। समझ रहे हो? पूरा यूं पलटना पड़ेगा। तब जाके आंसर आएगा। 4 / 1
ठीक है? फोर दे रखा है आंसर। देखो इन्होंने भी 4 बाय वन नहीं लिखा क्योंकि इतना भारी काम
है ना इसको 4 / 1 लिखना मतलब समझ लो बहुत भारी काम है। ठीक इतने भारी-भारी सवाल मॉडर्न फिजिक्स
में आते हैं। एक भाई वही तो था कि साइज जो साइज है साइज इज डायरेक्टली प्रोपोर्शनल टू A यानी
कि वॉल्यूम इज डायरेक्टली प्रोपोर्शनल टू A वही तो था बस उसी पे बेस्ड सवाल है ये ठीक है
देख लो आप बस ये देखो ये वाला सवाल 2024 में आया हुआ क्या बोल रहा है द रेडियस ऑफ न्यूक्लियस
ऑफ़ मास दिस इज़ 4.8 फॉर मी तो 4.8 fm = सम r0 * 64 की पावर 1 / 3 ओके ठीक है
ये तो हम जानते ही हैं ना r = r0 * a की पावर 1 / 3 अब ये बोल रहा है कि मास नंबर ऑफ़ अनदर न्यूक्लियस हैविंग रेडियस 4 पर मी
तो वो कह रहा है कि जिसकी रेडियस 4fm है ठीक है ना उसका मास नंबर क्या होगा ये आप सोच भी नहीं सकते कि कैसे होगा सवाल।
ठीक? इसको केवल वही कर सकते हैं ठीक है ना? जो कभी टीचर्स के टीचर रहे होंगे। बहुत
मुश्किल सवाल है। fm से fm कट गया। r नोट से r नॉट कट गया। तो ये आपका 1.2 आ गया और ये 64 / a का आ गया। तो इसका अगर क्यूब कर
देंगे तो ये a आ जाएगा। तो a की वैल्यू आ जाएगी 64 / 1.2 * 1.2 * 1.2 ठीक है? तो वो बोल रहा है कि 1000 / x लाना है आपको।
ठीक? तो इसमें क्या करो? इसमें 1000 की मल्टीप्लाई कर दो। 1000 से डिवाइड कर दो। 64 की मल्टीप्लाई कर दो। 64 से डिवाइड कर
दो। कुछ तो किया ही नहीं हमने। कुछ भी नहीं किया हमने। ठीक है? 1000 64 की क्यों की हमने? इसकी
तो जरूरत ही नहीं थी 64 की। तो नीचे तो इसने x दिया हुआ है। तो 1000 की मल्टीप्लाई कर दो। 1000 का डिवीज़ कर दो।
तो ये वाली वैल्यू आपकी x हो जाएगी। कितने आएगा? 37 समथिंग आएगा ये। ठीक है? देख लो कितना आएगा। 27 आ रहा है। अच्छा
चलो 27 आ जाएगा जो भी आ रहा है। क्या यह बात समझ में आ रही है? क्योंकि इस सवाल का आंसर भी मुझे
एप्रोक्समेटली याद था। 37 27 ऐसा ये आंसर आ जाएगा। क्या मेरी बात समझ में आ रही है? दैट्स इट। तो बेटा जो ये सवाल है ना
न्यूक्लियस पे मैं कितने भी कराऊंगा ना तो आपका समय ही बर्बाद होगा और कुछ नहीं होगा। ठीक? अब
रेडियो एक्टिविटी पर भी मैं कुछ सवाल ले आया था। लेकिन हम उससे भी पहले थोड़ा सा मास डिफेक्ट और बाइंडिंग एनर्जी पे
चलेंगे। क्योंकि ये अपना लास्ट टॉपिक है। अगर ये अपना हो गया तो फिर कई सारे सवाल कर देंगे और रेडियोएक्टिविटी भी कर लेंगे
हम। ठीक है? रेडियोएक्टिविटी भी कर लेंगे। ठीक? तो मैं यहां पे एक बहुत ही छोटा सा ब्रेक ले रहा हूं पानी का।
ठीक है ना? जस्ट फॉर 5 मिनट्स और कोई टीवी सीवी कुछ बंद नहीं हो रहा। बस 5 मिनट का ब्रेक है।
हेलो हेलो हेलो हेलो हेलो ओके एक बार भाई मैं जरा मैच कर लूं कि मैंने क्या-क्या करा
ओके वेव थ्योरी आइंस्टीन एक्सप्लेनेशन हो गई एक्स रेज वाला पार्ट हो गया फोटन फ्लक्स
फोटन फ्लक्स वाला सवाल एक करवाएंगे एक्स रेज़ प्रॉपर्टीज ऑफ एक्स रेज़ ओके
नंबर ऑफ स्पेक्ट्रल लाइंस ओके कुछ पॉइंट ऐसे हैं ना बेटा जो छूट जाते हैं इतनी जल्दी-जल्दी में ना मैं एक
बार उनको देख रहा हूं। ये मेरे नोट्स हैं। एक्चुअल में देखो ना मेरे नोट्स हैं। ये प्रॉपर बने हुए हैं। ये बहुत पुराने लिखे
हुए नोट्स हैं। तो मैं एक बार मैच कर लूं क्योंकि मैंने कवर तो ऑलमोस्ट सारी चीजें कर दी हैं जिन पे सवाल आते हैं। बट
कुछ-कुछ पॉइंट्स ऐसे हैं जो एकदम स्पेशल हैं जो मैं कराऊंगा और आपको पता होने चाहिए।
रेडियो एक्टिविटी तो करानी नहीं है। रेडियो एक्टिविटी तो है ही नहीं। ओके।
चल शुरू करें। चलो भाई लेट्स स्टार्ट। वापस से शुरू कर देते हैं अपना काम। ओके।
तो मैंने यह ब्रेक इसलिए लिया था ताकि मैं यह चेक कर लूं के अपन सही जा भी रहे हैं या नहीं। ठीक है। ओके भाई आ जाओ वापस। कुछ
लोग तो लगता है ब्रेक सुन के मोहल्ले निकल लिए कि मोहल्ले में एक चक्कर ही लगा है। हां। एक राउंड लगा लेते हैं इतनी देर में
मोहल्ले में। ठीक। वापस आ जाओ भाई। चालू होने वाला है। एम ठीक है। खूब सारे सवाल होने हैं ना?
चलो देखो बाइंडिंग एनर्जी और मास डिफेक्ट क्या होता है? बहुत छोटी सी बात बताता हूं मैं
आपको। जैसे ऑक्सीजन ले लो। ठीक है ना? ऑक्सीजन के न्यूक्लियस में आठ तो प्रोटॉन होते हैं और आठ न्यूट्रॉन होते हैं।
बिल्कुल। आठ प्रोटॉन होते हैं, आठ न्यूट्रॉन होते हैं। बिल्कुल सही बात है। तो भाई अगर इनको
इनके अलग-अलग मास लें तो टोटल मास कितना बैठेगा? मास ऑफ प्रोटॉन एक प्रोटॉन का मास और आठ है मल्टीप्लाई बाय 8 प्लस
आठ न्यूट्रॉन है। एक न्यूट्रॉन का मास और मल्टीप्लाई बाय 8 ठीक है ना? यह टोटल न्यूट्रॉन का मास हो गया। अब यह टोटल मास
बैठेगा इनका हिसाब किताब लगाएंगे तो लेकिन जब यह आठ प्रोटॉन और आठ न्यूट्रॉन मिलके ऑक्सीजन का न्यूक्लियस बनाते हैं।
ठीक है ना? ऑक्सीजन का न्यूक्लियस बनाते हैं। आठ प्रोटॉन और आठ न्यूट्रॉन मिलके। न्यूक्लियस बनाते
हैं। यानी कि यह जॉइ होके न्यूक्लियस बनाते हैं। तो इसका जो मास होता है, मास ऑफ दिस न्यूक्लियस ऑफ ऑक्सीजन इज़ लेस देन
दिस। जो इनका अलग-अलग मास पे हिसाब जो लगाया हमने वो उससे कम होता है। मतलब क्या है कि ये अलग-अलग अगर रहें और यहां जॉइंट
फैमिली में रहें। जॉइंट फैमिली में इनका मास कम निकलता है सबका और इनके अलग-अलग मास कैलकुलेट किए जाए तो वो ज्यादा निकलते
हैं। इसका मतलब ये हुआ कि जब कभी ये ऑक्सीजन का न्यूक्लियस बना होगा ऐसे तब यहां से कुछ मास
उड़ गया होगा। खत्म लॉस हो गया होगा। ठीक है? मान लो ये 80 किलो निकलता है तो यहां पे 79 निकलेगा। 1 किलो खत्म हो गया
भाई। इन सबके मास मान लो 80 किलो हैं। मिला के 16 पार्टिकल के मास 80 किलो हैं। तो यहां पे 79 निकलेगा। 1 किलो मास कब हो
गया? अब भाई वो क्या है? वो क्या है? वो डेल्टा मास ही एक्चुअल में इनके जॉइनिंग की इनके जॉइ होने की कीमत है।
वो मास खर्च होने के बाद ये जॉइ हुए हैं। तो दैट मास इज नोन एज बाइंडिंग एनर्जी। बाइंडिंग एनर्जी ऑफ दिस
न्यूक्लियस। इस न्यूक्लियस की बाइंडिंग एनर्जी है ये। यानी के अगर इसको इसको किसी तरीके से वो मास जो इनको जॉइ करते टाइम उड़
गया है वो मास इनको वापस मिल जाए तो ये वापस अलग-अलग हो जाएंगे। तो ये वापस अलग-अलग हो जाएंगे। अगर वो मास इनको मिल
जाए तो। इसका मतलब वही बाइंडिंग एनर्जी है। वही खर्चा है। उसी वही खर्चा हुआ है इनका जॉइन होने में। वो खर्चा इनको वापस
मिल जाए तो अलग-अलग हो जाएंगे। अब कुछ लोग सोचेंगे सर ये क्या बोल रहे हो आप? कभी एनर्जी बोल रहे हो, कभी मास बोल रहे हो,
कभी एनर्जी, कभी मास कुछ तो समझ आ नहीं रहा है। ठीक है? तो भाई जो मैं एनर्जी बोल रहा हूं वो भी ठीक है। और जो मैं मास बोल
रहा हूं वो भी ठीक है। वो भी बात सही है। दोनों में कोई अंतर नहीं है। क्यों? क्योंकि किसी ने हमें बताया है कि एनर्जी
ही मास है और मास ही एनर्जी है। तो कितने मास से कितनी एनर्जी मिलती है? ठीक है ना? तो ये आइंस्टीन साहब ने हमें बताया कि e =
डेल्टाm * c² अगर m मास को जला दिया जाए, खत्म कर दिया जाए या उसको एनर्जी में बदला जाए तो वो
मास कितनी एनर्जी के बराबर आता है? दैट मास * c का स्क्वायर कर दो उतनी एनर्जी के बराबर आता है। e = mc² तो दिस इज मास
एनर्जी इक्विवेलेंस। ये आपका मास एनर्जी इक्विवेलेंस है। ठीक? तो भाई इसका मतलब ये है कि इसके मास में
और इसके मास में जो अंतर है। ठीक है ना? यानी कि 8 टाइम्स ऑफ MP + 8 टाइम्स ऑफ MN इस मास में से अगर पूरे ऑक्सीजन के
न्यूक्लियस का मास माइनस किया जाए तो ये आपका इतने मास का अंतर आता है। इस वाली चीज को हम ये जो चीज है इसको इसको हम मास
डिफेक्ट बोलते हैं। क्या बोलते हैं? मास डिफेक्ट बोलते हैं। और ये मास डिफेक्ट कहीं मास नहीं होता। यह मास एनर्जी में
कन्वर्ट हो के यहां से चला जाता है और इनको जॉइ कर जाता है। तो यह वाला मास कितनी एनर्जी के बराबर हुआ? ये वाला मास
हुआ डेल्टाm * c² इतनी एनर्जी के बराबर हुआ। तो ये वाली जो एनर्जी है, इसी को इस न्यूक्लियस की बाइंडिंग एनर्जी बोलते हैं।
ठीक? तो ये तो कांसेप्ट है। ये तो हो गया आपका कांसेप्ट। कि भाई बाइंडिंग एनर्जी का कांसेप्ट क्या है? अगर हमारे पास तीन-4
घंटे होते तो मैं इसकी पूरी डेप्थ में जाके आपको दो-तीन प्रैक्टिकल मतलब एग्जिस्टिंग
न्यूक्लियस उन सबके नाम लेके उनके एग्जांपल दे के बताता आपको कि भाई ऐसे ऐसे ऐसे होता है। ठीक? बट ये कांसेप्ट है। अब
इसको आपको याद रखना है। यानी कि एक चीज बनाने में अगर मास का डिफेक्ट आ गया, मास की कमी आ गई तो समझ लो वो मास या तो
एनर्जी की फॉर्म में निकल गया है या उतना मास एनर्जी बनके मिल गया है। या तो निकल गया है या मिल गया है। तो मास का डिफेक्ट
इज़ डिफरेंस इन रिएक्टेंट और प्रोडक्ट। यानी कि इवेंट से पहले और इवेंट से बाद वाले जो मासेस हैं उनका डिफरेंस कर दो तो
यह पता चल जाएगा कि कितना मास एनर्जी में कन्वर्ट हुआ है। राइट? अब क्या होता है यहां पे? कुछ चीजें ऐसी होती हैं जिनके
मासेस हमें याद रखने होते हैं। जैसे मास ऑफ प्रोटॉन, मास ऑफ न्यूट्रॉन। तो यह 1.6
जो इनके इसमें है 1.6 7 ये तो समझ लो जैसे मैंने याद रखा था
वैसे ही आपको बता देता हूं। 1.67 1.67 तो दोनों में है * 10 टू दी पावर -27 * 10 टू दी पावर -27 kg ये भी है। लेकिन प्रोटॉन
का मास थोड़ा सा कम होता है। न्यूट्रॉन का ज्यादा होता है। तो इसमें 25 लिख देते हैं। इसमें 50 लिख देते हैं। ये
एप्रोक्सीमेट मास होता है। ठीक? और जो मास ऑफ इलेक्ट्रॉन होता है दैट इज मास ऑफ न्यूट्रॉन या प्रोटॉन डिवाइडेड बाय 18860
या 18840 टाइम्स होता है। 1840 या 1860 कुछ ऐसे होता है वो आपको देखना है। ठीक है ना? तो प्रोटॉन के मास को अगर आप 1840 से
या 60 से डिवाइड कर दो तो मास ऑफ़ इलेक्ट्रॉन आ जाता है। ये तो आ गई ये। ठीक? अब ये तो इतना हो गया। अब बेटा बहुत
ध्यान से सुनना है। जैसे कार्बन 12 है। ठीक है ना? जैसे कार्बन 12 है। उसके न्यूक्लियस में छह प्रोटॉन छह न्यूट्रॉन
है। ठीक है ना? तो कार्बन के न्यूक्लियस को जो इसका मास है। ठीक है ना? इसके मास को अगर 12 से डिवाइड करते हैं तो कुछ नंबर
निकल के आता है। भाई इसके छह प्रोटॉन छह न्यूट्रॉन इसके मास को 12 से डिवाइड कर तो कुछ नंबर निकल
के आता है। उसको बोलते हैं एक एटॉमिक मास यूनिट। तो 1 amu इक्वल टू कितना है? एकदम एग्जैक्ट नंबर
बताऊंगा क्योंकि ये नंबर तो हमारा हमें याद रखना पड़ेगा। तो दैट इज 1 660 5402
* 10 टू दी पावर -27 kg तो इसको 1 यूनिट बोलते हैं। दिस इज़ 1 यूनिट। ये हो गया आपका 1 यूनिट। ठीक है?
ये आपका 1 यूनिट हो गया। अब आप खुद सोचो हर चीज के मास को आप यूनिट की टर्म में बोल सकते हो। तो आप जैसे मास ऑफ़ प्रोटॉन
हो गया। आप मास ऑफ प्रोटॉन को किससे डिवाइड कर दो? इससे 1 amu से डिवाइड कर दो तो समथिंग इन यूनिट आ जाएगा। तो वो यूनिट
में आ जाएगा। जैसे 1.0086 एंड सो ऑन ऐसे-ऐसे करके नंबर आता जाएगा। तो ये जो नंबर है ये एटॉमिक मास यूनिट की
टर्म में है। ठीक? अब रूल क्या कहता है कि अगर आप एक एएमय को जलाओगे
तो इससे कुछ एनर्जी मिलेगी। ठीक है ना? तो इससे जो एनर्जी मिलेगी वो मिलेगी 931.5
मिलियन इलेक्ट्रॉन वोल्ट। तो इससे एनर्जी इतनी मिलेगी। 1 amu को अगर आप डेल्टाm मान के उसके
बराबर एनर्जी निकालोगे। ठीक है ना? दिस इज़ 1 amu तो इतनी एनर्जी आपको मिलेगी मिलियन
इलेक्ट्रॉन वोल्ट इतनी एनर्जी आपको मिलेगी। तो ये आपको याद रखना है। अब कुछ लोग कह देते हैं कि 1 AMU = 931 मिलियन
इलेक्ट्रॉन वोल्ट एनर्जी। भाई इस ऐसे लिखना गलत है। क्यों? क्योंकि ये तो मास है।
और ये क्या है? ये एनर्जी है। ठीक है ना? यह एनर्जी है। तो बेटर यह है कि 1 amu = 931
मिलियन इलेक्ट्रॉन वोल्ट पर सी² ऐसे तो लिख सकते हैं। ऐसे नहीं लिख सकते। तो अगर ऐसे लिखेंगे तो ठीक है। फाइव को कभी-कभी
हम इग्नोर कर देते हैं। तो ऐसे भी लिख सकते हैं। तो ये 1 amu के बराबर एनर्जी हो गई। अब ऐसा करने से क्या होगा? ऐसा करने
से हमारे जो सवाल हैं, जो क्वेश्चंस हैं वो बहुत आसानी से सॉल्व हो जाएंगे। बहुत आसानी से सॉल्व हो जाएंगे। तो अब हम बहुत
सारे सवाल सॉल्व करेंगे इसी पे बेस्ड बहुत सारे। ठीक है? चलो देखते हैं। तो ये मैंने आपको
बाइंडिंग एनर्जी के थोड़े से फंडे बताए हैं कि भाई इसको इस ऐसे मानते हैं। इसको ऐसे मानते हैं, इसको ऐसे मानते हैं।
कैलकुलेशन पे डिपेंड करता है कि आप कितनी अच्छी कैलकुलेशन कर लेते हो। ठीक? अब बीच-बीच में क्वेश्चन के जरिए ही मैं आपको
और आगे की बातें बताते हुए चलूंगा। ठीक है ना? ठीक। या चलो इसी के साथ-साथ एक दो चीजें और बता देता हूं मैं आपको। ये तो
हो गया ना अपना न्यूक्लियर फिशन और फ्यूज़ भी यहीं निपटाते हैं। ठीक है ना? न्यूक्लियर फिशन और फ्यूज़ भी हम यहीं
निपटाते हैं। बात को समझना। है ना? न्यूक्लियर फिशन। ठीक देखो भाई फिशन का मतलब होता है टूटना।
ठीक है ना? तो आप कह सकते हो कि ब्रेकिंग ऑफ अ हैवी न्यूक्लियस इंटू टू और मोर फ्रेगमेंट्स ऑफ कंपेरेबल मास इज़ नोन एज
न्यूक्लियर फज़ विद रिलीज ऑफ़ एनर्जी। यानी कि ब्रेकिंग ऑफ अ हैवी न्यूक्लियस इनू टू और मोर फ्रेगमेंट्स ऑफ कंपेरेबल
मास विद रिलीज ऑफ एनर्जी इज नोन एज न्यूक्लियर फिशन। यानी कि जब बड़ा हैवी न्यूक्लियस टूटता है दो या दो से ज्यादा
पार्टिकल्स में और वो दोनों के दोनों दो या दो से ज्यादा जो पार्ट्स हैं वो बहुत छोटे-छोटे नहीं है। ऑलमोस्ट बराबर-बराबर
के हैं। ठीक है ना? बिल्कुल हल्के-हल्के नहीं है। ठीक है ना? ऑलमोस्ट बराबर-बराबर के हैं। तो भाई वो जो हैं
हम ठीक? तो उसके साथ-साथ एनर्जी भी निकलती है। इस रिएक्शन को न्यूक्लियर फिशन बोलते हैं। ठीक है? तो यहां पे मैं एक
न्यूक्लियर फिशन की वो रिएक्शन लिख रहा हूं जो सबसे ज्यादा पॉपुलर है। ठीक है ना? दैट रिएक्शन इज़ यूरेनियम 235 वाली
रिएक्शन। ठीक है? तो यूरेनियम 235 और ये कितना है? 92 है। ठीक है? तो अगर यूरेनियम का
न्यूक्लियस कहीं पे है रखा हुआ है उस पे अगर आप एक न्यूट्रॉन थ्रो कर दो तो वो दो भागों में टूट जाता है। एक तो क्रिप्टन
में टूटता है और दूसरा किस में टूटता है? बेरिलियम में टूटता है। PA और क्रिप्टॉन में टूटता है। और साथ में साथ में तीन
न्यूट्रॉन और रिलीज करता है। कितने? तीन एक टूटेगा तीन रिलीज करेगा। ठीक? तो क्रिप्टॉन का क्या होता है? क्रिप्टॉन
होता है 36 और 92। बेरिलियम कितना होता है? 56 और 141 ये ये होता है। ठीक? इसके साथ-साथ
एनर्जी जो निकलती है वो निकलती है 200 मिलियन इलेक्ट्रॉन वोल्ट। बड़ी बात है। इतनी एनर्जी निकलती है। अब
मेरी बात को सुनना आप ध्यान से। कभी-कभी यह एनर्जी ना गिवन हो जाती है। कभी-कभी ये गिवन होती है और कभी-कभी ये
कैलकुलेट करनी पड़ती है। कैलकुलेट करके हां हिरशिमा एंड नागासाकी फेडरेशन। यस यस यस। लेकिन ये बेटा कहानियां तब होती है जब
घंटों का टाइम होता है। हमारे पास घंटों का टाइम नहीं है। हमारे पास मिनटों का टाइम है। तो आधा घंटा टाइप हमारे पास है।
राइट? ठीक? तो भाई ये गिवन होता है और कभी-कभी ये हमें कैलकुलेट भी करना पड़ जाता है।
तो कभी-कभी ये हमें कैलकुलेट भी करना पड़ जाता है। ठीक? अब क्या होगा? इसका कुछ मास दिया रहेगा। इसका कुछ मास दिया रहेगा।
इसका कुछ मास दिया रहेगा। इसका कुछ मास दिया रहेगा। आपको क्या करना है? इन सबका मास लेना है। इन सबका मास लेना है। दोनों
का माइनस कर देना है। डेल्टा निकलेगा। बिल्कुल। डेल्टा में c² करेंगे। जो यहां पे डेल्टा होगा अगर उसमें आप c² करोगे तो
वो इसकी q वैल्यू हो जाएगी। Q वैल्यू भी उसी को बोलते हैं। यानी कि जो रिएक्टेंट और प्रोडक्ट के बीच के जो मास
के डिफेक्ट की वजह से एनर्जी का चेंज आता है, दैट इज Q वैल्यू। ठीक है? तो यहां पे जो भी डेल्टा है, हम उसमें C का स्क्वायर
करेंगे, तो आपका एनर्जी आ जाएगी। लेकिन यहां पे अगर इन सबकी वैल्यूज़ AMU में दी हुई है, तो AMU का डिफरेंस करो और 931 से
मल्टीप्लाई कर दो आंसर आ जाएगा। ठीक? एक तो ये दिस दिस इज़ नोन एज न्यूक्लियर फिशन यानी कि टूट जाना। एक देखो ये कंपेरेबल
मास है। बिल्कुल जीरो ज़ीरो नहीं है ना। बहुत छोटे-छोटे नहीं है ना ये ऑलमोस्ट बराबर-बराबर के ही हैं। हल्के-हल्के नहीं
है। बड़े-बड़े पीसेस में टूटना इज़ न्यूक्लियर फिशन। अब यहां पे ये जो रिएक्शन होती है जिसमें तीन न्यूट्रॉन
निकलते हैं। तो आप देखो ये न्यूक्लियस था। ठीक है ना? इससे एक ब्रेकिंग हुई। उससे तीन
न्यूट्रॉन रिलीज हुए। वो क्या करेंगे? वो फिर तीन को। ठीक है ना? तीन को फिर तोड़ेंगे। फिर वो
तीन को तोड़ेंगे। और वो तीन फिर तीन को तोड़ेंगे। तो आप देखो कितनी चेन रिएक्शन हो जाएगी
ये। और ये फिर तीन-तीन को तोड़ेंगे। ये फिर तीन-तीन को तोड़ेंगे। भाई साहब चेन रिएक्शन
हो जाएगी। ये क्या हो जाएगी? चेन रिएक्शन। तो इस चेन रिएक्शन को रोकने के लिए भी हमें बहुत सारे ठीक है ना? स्टेप्स लेने
होते हैं। इसलिए ये वाली रिएक्शंस जो है ना एक रिएक्टर में होती हैं। क्या होती है? रिएक्टर में होती हैं। अब
जेई में कभी रिएक्टर के ऊपर ज्यादा सवाल पूछे नहीं जाते। नाम अगर एक आध बार ले भी लिया है तो क्वेश्चन आपका सिंपल ही होगा।
ठीक है ना? तो रिएक्टर के ऊपर बहुत ज्यादा सवाल यहां पे पूछे नहीं जाते। तो रिएक्टर को अभी जेईई के लिए तो नहीं पढ़ना है बट
बोर्ड बोर्ड में आता होगा तो आपको पढ़ना चाहिए। ठीक है? अब क्या होता है? इस चेन रिएक्शन को रोकने वाली भी बहुत चीजें होती
हैं। उनके बारे में भी आप डिटेल में एनसीईआरटी में पढ़ सकते हो। तो मैं ये कहूंगा कि रिएक्टर अगर आपको पढ़ना है तो
प्लीज एनसीईआरटी से पढ़ लीजिएगा। कोई इसमें बुरा नहीं मानूंगा मैं। ठीक है? आप क्यों बुरा मानोगे? हां। न्यूक्लियर
फ्यूजन न्यूक्लियर फ्यूजन देख लो क्या है? फ्यूजन का मतलब है
फ्यूज होना। फ्यूज होना मतलब जुड़ जाना। ठीक है ना? तो ये प्रोसेस क्या है? ये प्रोसेस द प्रोसेस इन व्हिच टू और मोर
लाइट न्यूक्लियाई इन व्हिच टू और मोर लाइट न्यूक्लियाई कंबाइंड इंटू अ सिंगल न्यूक्लियस विद रिलीज ऑफ एनर्जी। ठीक है?
तो बहुत सारी एनर्जी रिलीज करने के साथ-साथ ये जब दो छोटे-छोटे न्यूक्लियस जुड़ जाते हैं और जुड़ के एक बड़ा
न्यूक्लियस बनाते हैं तो उस इवेंट को हम न्यूक्लियर फ्यूजन बोलते हैं। ठीक है? अब यहां पर बात को बहुत ध्यान से सुनना है।
तो 1H2 + 1H2 अगर ये दोनों जुड़ते हैं कहीं तो ये दोनों मिलके बनाते हैं 2H4 हीलियम का न्यूक्लियस बनाते हैं और साथ
में एनर्जी निकलती है 21.6 मिलियन इलेक्ट्रॉन वोल्ट। कोई-कोई ये कहता है कि यही रिएक्शन है जो सन पे चल रही है।
ठीक है ना? सन पे यही रिएक्शन चल रही है। ठीक? दो हाइड्रोजन जुड़ते हैं और हीलियम बनता है और बहुत थोड़ा सा मास एनर्जी में
कन्वर्ट हो जाता है। वही एनर्जी है जो पूरी दुनिया को मिल रही है। यही वो एनर्जी है जो पूरी दुनिया को मिल रही है। पूरे
यूनिवर्स को मिल रही है। तो ये सन से निकलने वाली एनर्जी का राज है। चलो अब सोच के देखो कितने छोटे-छोटे न्यूक्लियस हैं।
और इतनी एनर्जी दे रहे हैं। ठीक? अब यूरेनियम से हिसाब लगाओ ना तो यूरेनियम 235 ग्राम खर्च होगा और 200
मिलियन इलेक्ट्रॉन वोल्ट एनर्जी मिलेगी और ये 4 ग्राम खर्च होंगे और 21 मिलेगी। तो ये अगर 40 ग्राम खर्च होते हैं तो 216
मिलेगी और वो 235 खर्च होता है तब जाके 200 मिलेगी। तो ये कम खर्चे की चीज है। सोच के देखो ना। ये 4 ग्राम होगा तो 21
मिलियन इलेक्ट्रॉन वोल्ट मिल रही है और वो 235 ग्राम खर्च होगा। ठीक है? तब जाके 200 मिलेगी।
तो इसमें खर्चा बहुत कम है। लेकिन ये इतना ही मुश्किल काम भी है। तो दिस इज़ नेक्स्ट टू इंपॉसिबल। ये नेचुरली हो सकती हैं।
जबरदस्ती इसको कराना बहुत मुश्किल है। क्यों? क्योंकि ये कंबाइंड होना है। क्यों? क्योंकि न्यूक्लियर
फोर्सर्सेस जो हैं वो तब डेवलप होते हैं जब दो पार्टिकल के बीच की डिस्टेंस लेस देन 10 टू दी पावर -15 मीटर हो जाती है।
लेस देन 10 टू दी पावर -15 मीटर जब दो पार्टिकल के बीच की डिस्टेंस हो जाती है तब वो जुड़ते हैं। अब ये दोनों जुड़ जाते
हैं। जुड़ के हीलियम बनाते हैं। इसका मतलब इन दोनों पार्टिकल के बीच का जो सेपरेशन है ये वाला वो इससे कम करना पड़ता है और
इससे कम सेपरेशन करने के लिए भाई बहुत जोर लगाने होते हैं। बहुत अलग-अलग प्रोसेस फॉलो करने पड़ते हैं। ठीक है ना? राइट बात
समझ में आ रही है? तो भाई 30 मिनट्स का और बच रहा है अपना। इससे ज्यादा हम क्लास नहीं ले पाएंगे।
ठीक है? तो ये न्यूक्लियर फोर्सेस जो है इससे ज्यादा तो ये इट इज वेरी डिफिकल्ट टू अचीव ये वाली रिएक्शन को यहां जमीन पे
करना इज वेरी डिफिकल्ट। ठीक? तो आप वैसे भी सोच सकते हो कि हाइड्रोजन बम और ये सब इनके पीछे यही कांसेप्ट है और उससे बहुत
ज्यादा डिस्ट्रक्शन होगा। कितनी बार अर्थ पूरी नष्ट हो के खत्म हो जाएगी। पता नहीं क्या होगा। ठीक है? बट चलो ठीक है।
तो इससे इतनी एनर्जी मिलती है। ठीक। अब जो भी इसका मास का डिफेक्ट देखो इसका मास लेंगे, इसका मास लेंगे, इसका मास लेंगे।
दोनों के मास का डिफरेंस करेंगे, c² करेंगे, उतनी एनर्जी आएगी तो वो एनर्जी ये भी होगी। तो कभी-कभी ये गिवन होगी,
कभी-कभी आपको निकालनी पड़ेगी। ठीक? अब इसके सवालों पे आ जाते हैं। यही आपका न्यूक्लियर फिशन फ्यूजन का कांसेप्ट था।
सवाल जितने ज्यादा कर लेंगे हम, उतना ज्यादा फायदे में रहेंगे। ठीक है? ठीक है। चलो सवालों पर आ जाते हैं।
ओके। देखो भाई यहां से सवाल चालू होते हैं। सवालों में थोड़ा सा अगर दिमाग लगाओ ना तो बहुत पढ़ने से बच जाते हो आप।
ठीक? एक मॉडर्न फिजिक्स के बारे में एक बात है। कुछ लोगों को मॉडर्न फिजिक्स से बहुत डर लगता है। डर क्यों लगता है? उनको
लगता है कि यार ये एक ऐसी पढ़ाई है जो बहुत डेप्थ तक पढ़नी पड़ती है। तब जाके इसके सवाल होते होंगे। तो वो बेचारे
गलतफहमी की वजह से डरे रहते हैं। और इसको पढ़ते नहीं है। ठीक है? लेकिन किसी किसी को बहुत सारे लोगों को एकदम इसकी जड़ पकड़
में आ जाती है। कैसे कि मॉडर्न फिजिक्स में काम करने के लिए, क्वेश्चन करने के लिए बहुत ज्यादा पढ़ने की जरूरत है ही
नहीं। थोड़ा सा यूनिट पे ध्यान दे लो आप। ठीक है ना? और कम होशियार बनके स्टेप्स ले लो। जो सिखाए टीचर ने वो कर लो। आपका काम
हो जाएगा। वरना आप कहीं न्यूक्लियस और इन सब की पूरी नॉलेज लेने के चक्कर में सोचोगे कि जब कभी मॉडर्न फिजिक्स पढ़ेंगे
तब हमसे सवाल होंगे। ऐसा नहीं है। आपसे मॉडर्न फिजिक्स के सवाल किसी भी लेवल पे हो जाएंगे। ठीक? जैसे ये देखो इतना सब कुछ
पढ़ने की जरूरत नहीं है क्वेश्चन करने के लिए। ये क्या बोल रहा है? थ्री हीलियम न्यूक्लियाई है। कंबाइंड टू फॉर्म अ
कार्बन न्यूक्लियस। देन द एनर्जी रिलीज्ड इन दिस रिएक्शन इज़ दिस मच। गिवन दैट दिस एटॉमिक मास ऑफ़ हीलियम इज़ दिस। ठीक है? अब
ये सोचो ये कार्बन न्यूक्लियस है। ठीक है ना? तो कार्बन न्यूक्लियस को तो स्टैंडर्ड माना
गया है। बिल्कुल। राइट? और तीन हीलियम के न्यूक्लियस कंबाइंड होते हैं और एक का मास इतना है।
तो आप देखो 3 * कितना? 4.00 2603
इतना मास आपका m1 हो गया। अब ये मास खर्च होता है और बनता कितना है? कार्बन कार्बन 12 यानी कि 12 यूनिट बनता
है। 12 ठीक है ना? इतने U बनता है। इतना U था हां हमारे पास इतना U बन गया। वो तो स्टैंडर्ड
है ना भाई कार्बन तो कार्बन तो एग्जैक्टली 0 होगा। ठीक? तो आप देखो डेल्टा M कितना आया? कितना मास खर्च हो गया? इसमें 12 तो
इसका तीन गुना तो इसका तीन गुना कितना हो जाएगा? ठीक? या इसको ऐसे ही कर लेते हैं ना
सीधे-सीधे 2603 और मल्टीप्लाई बाय 3 इतना मास है जो
एनर्जी में कन्वर्ट होगा। तो दिस मास * 931 मिलियन इलेक्ट्रॉन वोल्ट। भाई इतनी एनर्जी बनेगी।
इतनी एनर्जी बनेगी मिलियन इलेक्ट्रॉन वोल्ट में। आप चाहो तो कैलकुलेट करके देख लो आंसर आ जाएगा। अब कुछ लोग सोचेंगे भाई
इस सवाल को करने के लिए तो बहुत ज्यादा नॉलेज चाहिए। ठीक? कुछ नहीं चाहिए। डेल्ट टाइम निकालो 931 की मल्टीप्लाई कर दो।
आंसर हो जाएगा। अब कोई कोई लोग इसके ये लो एकदम परफेक्ट आंसर आता है। 727
बिल्कुल एकदम परफेक्ट आंसर आता है। 727 ये आंसर आता है। एकदम 727 धराम से आया आंसर।
क्या ये बात समझ में आती है? मल्टीप्लाई करके देख लो आप। 931 3 के आसपास होगा। 26 * 3 = 727 आएगा। * 10 टू दी पावर -2
मिलियन इलेक्ट्रॉन वोल्ट। साफ-साफ दिख रहा है। इसी टाइप के सवाल होने हैं। बस सारे के
सारे। कुछ नहीं बचा किसी भी सवाल में। अब इससे पिछले वाला एक सवाल कर लो। यह वाला। यह देख लो।
ठीक? इस सवाल को देख के ऐसे लगता है पता नहीं क्या करना पड़ेगा। बोल रहा है द डिसइीग्रेशन ऑफ डिसइीग्रेशन एनर्जी क्यों
फॉर द न्यूक्लियर फिशन ऑफ यूरेनियम दिस दिस दिस इज़ इतने मिलियन इलेक्ट्रॉन वोल्ट। आप ये देखो ये वाली चीज का मास होगा कुछ।
और ये वाली चीज का मास सब कुछ अलग-अलग दिया हुआ है इस भाई ने। क्या बोला है? देखो यूरेनियम 235 का ये दिया हुआ है।
ओके? उसका 140G CE का वो दिया हुआ है। इसका ये दिया हुआ है। इसका n का ये दिया हुआ है। और ये 931 की वैल्यू भी दी हुई
है। आपको क्या करना है? इन सबके मास जोड़ने हैं। इसके मास को माइनस कर इसके मास में से माइनस करना है। दैट्स इट। तो
क्या करना है? ये वाली चीज तो आपको 235 0439 ये तो यहां रखना है। इसमें से माइनस करना
है इन सबको जोड़ के। ठीक है ना? इन सबको जोड़ोगे तो ये कितना होगा? 13954 और इसमें किसको जोड़ना है आपको? 93
93 90 63 और ये एक न्यूट्रॉन भी इधर ही है। तो 1
086 यह इसको जोड़ना है। इन सबको जोड़ के इसमें से माइनस करना है। ठीक है ना? यकीन मानिए
जैसे ही जो भी डेल्टा आएगा उसमें केवल 931 की मल्टीप्लाई करनी है और आंसर निकालना है।
हर सवाल में आपको यही करना है। कुछ भी एक्स्ट्रा नहीं है। ठीक? कर लोगे? क्या कर लोगे या इसको सॉल्व करके दिखाऊं मैं?
कर लोगे ना? बस इसको करना है आपको। थोड़ा सा दिमाग लगाना है कि किन-किन को जोड़ना है और किस में से माइनस करना है और
डेल्टा आते ही c का स्क्वायर कर दो आंसर आ जाएगा। ठीक? अब जो भी आंसर आएगा वो आपको ये देख लो।
ये वाला सवाल देखो। ये क्या बोल रहा है? द एक्सप्लोसिव इन हाइड्रोजन। कब का आया हुआ है? 2024 में आया हुआ सवाल है ये। बोल रहा
है द एक्सप्लोसिव इन अ हाइड्रोजन बम इज अ मिक्सचर ऑफ 1H2 1H3 3L6 इन सम कंडेंस्ड फॉर्म द चेन रिएक्शन इज़
गिवन बाय दिस। अब सवाल को पढ़ के ऐसा लगता है कि यार हमें 1H2 का नाम नंबर पता सब होना चाहिए। इसका नाम नंबर पता सब होना
चाहिए। इसके बारे में सब पता होना तब तो हमसे सवाल होगा। अरे भाई कुछ नॉलेज नहीं चाहिए इनके लिए। सीरियसली कुछ दिमाग नहीं
लगाना इसमें। ठीक? ये दिख रहा है? दिख रहा है ये? आपको बस चेंज इन मास निकालना है। देखो ये वाली चीज जुड़ के ये बनाती है।
यहां पे मास का कुछ डिफेक्ट हुआ होगा। फिर ये वाली चीज जुड़ के ये बनाती है। मास का कुछ डिफेक्ट। अगर इन दोनों को आप जोड़ लो
ना। इन दोनों को अगर आप जोड़ लो तो आपको नेट रिएक्शन मिल जाए। यानी कि अलग-अलग कैलकुलेशन भी मत करो। पहले ही निपटा लो।
देखो इससे ये वाली चीज कट गई। 0 n1 से ये वाली चीज कट गई। तो इस रिएक्शन से जो आपको फाइनल रिएक्शन मिली इससे यहां पे मतलब ये
हम करेंगे। ये तो अलग-अलग है। ये हम अपने लिए करेंगे। दिस प्लस दिस यानी के li + 1H2 इधर तो ये बच गया। इक्वल टू दिस प्लस
दिस। तो 2 टाइम्स ऑफ़ hi4 2H4 ये बच गया। तो ये थ्री और सिक्स होगा और ये 1H2 होगा। ठीक? बस ये चीज है। इससे
ये कट गया, इससे ये कट गया। आपको केवल इनके मास का डिफरेंस निकालना है। तो इसको और इसको जोड़ो और इसको इसमें से माइनस कर
दो। ठीक? अब ये और ये देखो कहां दे रखा है इसने। आपको पता है क्वेश्चन अपने आप में हिंट लिए हुए होता है। आप देखो इसमें कहीं
भी 0 n1 का मास नहीं दे रखा इसने। इस चीज का कहीं मास है नहीं। देखो कहीं भी इसका मास है नहीं इसमें। तो ये हमारे लिए हिंट
है कि भाई इसके मास की जरूरत नहीं पड़ेगी। यानी कि ये कटेगा। कहीं भी उसने 1H3 का मास नहीं दिया। देखो
इसमें 1H2 का दे रखा है। 2H4 का दे रखा है। लिथियम का दे रखा है। लेकिन इस 1H3 का मास नहीं दिया इसने कहीं भी। क्यों नहीं
दिया? क्योंकि ये हिंट दे रहा है कि भाई ऐसे कर लो। अब आप लोग सोचोगे यार इसका मास नहीं दिया तो मैं कैसे करूंगा? तो यार वो
फंडा तो मुझे आता ही नहीं है। ठीक? भाई दिमाग मत लगाओ ज्यादा। ठीक? दिमाग ज्यादा लगाओगे तो क्वेश्चन छूट जाएगा। ठीक? हल
देखो दिमाग होने के बाद उसको कंट्रोल में यूज करना भी इंटेलिजेंसी का ही पार्ट होता है। कुछ लोगों में दिमाग होता है और उसे
पूरा यूज़ करते हैं। जहां नहीं चाहिए वहां भी लगाते हैं। ठीक है ना? तो वो इंटेलिजेंट होने के बाद
भी मूर्ख होते हैं। ठीक है? वो उनका हाल खराब रहता है। उनको दिमाग लगाने की आदत पड़ी रहती है। ठीक? तो
यहां पर आप देखो सबको माइनस करो। आंसर निकालो। देखो ये थ्री और ये यानी कि 60 069
प्लस ये वाली चीज 1H2 कितना है? 2 01471
इन दोनों को जोड़ के इसमें से माइनस करना है। इसको और इसको जोड़ेंगे इसमें से माइनस करना है ये तो ये टू टाइम्स ऑफ दिस माइनस
करना है तो 2 * 400 388 ये माइनस करना है और जो भी आएगा डेल्टा m उसमें 931 की मल्टीप्लाई करनी
है। ठीक? तो मैं यहां बहुत हीरो बन रहा हूं। एक बार को मेरे को भी करना चाहिए ये है ना तो मैं इसको एक बार सॉल्व करके
देखता हूं तो 6016 9 ठीक प्लस
2.014 71 प्लस सॉरी इक्वल टू ये आ गया इसमें से
माइनस करना है ब्रैकेट स्टार्ट 2 * 4.00 388
ब्रैकेट बंद तो ये कितना आ गया? 0.0 2385
* अब इतना तो मास का डिफेक्ट आ गया। अब एक मास के डिफेक्ट से कितना है? 931.5 तो इसको 931.5 से आप मल्टीप्लाई कर दो। तो
यह जो भी आ रहा है इसको मल्टीप्लाई करो 931.5 से 22.22
आ रहा है ये आ रहा है 22 कितना 216 तो 22.22
के आसपास वाला आंसर सही है। डी ऑप्शन करेक्ट है। ठीक है? यह डी ऑप्शन करेक्ट है। चेक कर
लेते हैं। यह लीजिए डी ऑप्शन करेक्ट है। क्या मेरी बात समझ में आ रही है? ऐसे ऐसे इनफाइनाइट नंबर ऑफ क्वेश्चन हैं।
इनफाइनाइट नंबर ऑफ क्वेश्चन है। कितने भी कर लो। ठीक है ना? ये वाला सवाल देखो। बहुत ध्यान से देखते रहना इसको। ये क्या
बोल रहा है? न्यूक्लियस A इज़ हैविंग मास नंबर 220 एंड इट्स बाइंडिंग एनर्जी पर न्यूक्लियन।
ठीक? एक छोटी सी बात और बता दूं मैं आपको। बाइंडिंग एनर्जी पर न्यूक्लियन।
ठीक? इज डायरेक्टली प्रपोर्शनल टू स्टेबिलिटी। बाइंडिंग एनर्जी पर न्यूक्लियन इज़
डायरेक्टली प्रोपोर्शनल टू स्टेबिलिटी। सर इसका क्या मतलब हुआ? अब क्या बोलने लग गए आप क्वेश्चन के बीच में ही? देखो भाई,
जैसे कोई मॉलिक्यूल है। ठीक है ना? उसका न्यूक्लियस है। उसके न्यूक्लियस में 20 पार्टिकल हैं। और कुछ एनर्जी है। तो उस
एनर्जी को 20 से डिवाइड करोगे तो बाइंडिंग एनर्जी पर न्यूक्लियन आएगी। अगर वो ज्यादा है तो स्ट्रांगली बाउंड है।
क्या बात समझ में आई? टोटल बाइंडिंग एनर्जी नहीं। ठीक है ना? अगर कोई कहे कि
टोटल बाइंडिंग एनर्जी इज डायरेक्टली प्रोपोशनल टू स्टेबिलिटी। वो गलत हो जाएगा।
ये गलत हो जाएगा। ठीक है ना? मान लो 50 पार्टिकल हैं और बाइंडिंग एनर्जी 100 है। तो दो-दो
यूनिट आ रही हैं हर एक के पार्ट में। भाई 50 पार्टिकल है। बाइंडिंग एनर्जी 100 है। तो दो यूनिट हर पार्टिकल की बाइंडिंग
एनर्जी हो गई। अब एक दूसरी जगह 20 पार्टिकल हैं लेकिन बाइंडिंग एनर्जी 60 है। तो पर पार्टिकल थ्री आ रही है। लेकिन
100 बाइंडिंग एनर्जी ज्यादा है। 60 बाइंडिंग एनर्जी कम है। लेकिन स्टेबल वो 20 वाला ज्यादा है। स्टेबल जो है वो 20
वाला ज्यादा है। क्या बात समझ में आ रही है? तो बाइंडिंग एनर्जी पर न्यूक्लियन इज डायरेक्टली प्रपोशनल टू स्टेबिलिटी। जिसकी
बाइंडिंग एनर्जी पर न्यूक्लियों ज्यादा होगी वह ज्यादा स्टेबल होगा। टोटल बाइंडिंग एनर्जी वाला नहीं।
समझ में आया? टोटल बाइंडिंग एनर्जी वाला नहीं। ओके। चलो मेरी बात जिसको समझ में आनी होगी वो आएगी। ठीक है? आ ही रही होगी
कुछ को तो। ठीक? अब क्या होगा? ये क्वेश्चन में क्या बोल रहा है? ये बोल रहा है कि न्यूक्लियस A इज़ हैविंग मास नंबर
220। बहुत बढ़िया। एंड इट्स बाइंडिंग एनर्जी पर न्यूक्लियन इज 5.6 मिलियन इलेक्ट्रॉन वोल्ट है। एक पार्टिकल की इतनी
है और इतना मास नंबर है इसका। समझ रहे हो? तो जितना मास नंबर है उतने इसमें न्यूक्लियन होंगे। प्रोटॉन प्लस
न्यूट्रॉन। तो टोटल बाइंडिंग एनर्जी कितनी हुई भाई की? इसकी हुई 220 * बाय 5.6
मिलियन इलेक्ट्रॉन वोल्ट। ओके? टोटल बाइंडिंग एनर्जी इतनी होगी। ओके? इट स्प्लिट्स इनू टू फ्रेगमेंट्स B एंड C. तो
ये है A और ये टूट गया किस-किस में? B और C में। ये टूट गया। B और C में ये टूट गया। अब
220 है तो डेफिनेटली 105 एक में होंगे। तो 115 दूसरे में होंगे। ये इनमें टूट गया। ठीक है ना? द बाइंडिंग एनर्जी ऑफ़
न्यूक्लियों्स इन B एंड C आर 6.4 पर न्यूक्लियन। अब दोनों में 6.4 है तो अब कितनी हो गई मल्टीप्लाई बाय 6.4 टूट गया
या जॉइ हो गया जो भी हो गया तो ये नेट बाइंडिंग एनर्जी होगी अब ये नई बाइंडिंग एनर्जी है टोटल और ये पुरानी है ठीक है ना
तो एनर्जी कितनी रिलीज हुई भाई दोनों का डिफरेंस ही आंसर होगा ठीक है ना ये भी तो 220 है तो 220 * 6.4 - 220 * 5.4 तो कितना
बना? 220 * इतना आसान सवाल है क्या यह? 6.4 - 5.4 220
मिलियन इलेक्ट्रॉन वोल्ट। ये आंसर है क्या इसका? 220 आंसर है इसका। डी
हां ये तो गलत हो गया। 5.6 है। ये 5.4 नहीं है यार। वही तो मैं कहूं कि यार ये तो डायरेक्ट नहीं आएगा।
ठीक है ना? 5.6 है ये। 5.4 नहीं है ये। अच्छा तो 5.6 है ये और ये 5.6 हुआ है ना? अब आएगा ना सही 220 *8
इस पॉइंट से ये खत्म हो गया। 176 आएगी। यह आंसर है। देखो यह आ गया। डी है वो मतलब गलत हो गया था। मुझे यह
बताओ क्या यह सवाल आपसे नहीं होगा? अगर वहां आपसे यह सवाल पूछ लिया गया तो क्या ये सवाल आपसे वहां नहीं होगा? हो जाना
चाहिए ना यार। ठीक है। ओके। ठीक है। चलो आगे बढ़ जाते हैं। यहां पे
एक दो और अच्छे सवाल कर लेते हैं। देखो ये 2023 में आया हुआ सवाल है। बताना भाई कितना आएगा आंसर? बताओ बताओ जरा कितना
सवाल? क्या आएगा आंसर? हम देखो अ न्यूक्लियस विद मास नंबर दिस एंड बाइंडिंग एनर्जी पर न्यूक्लियन दिस
ब्रेक्स इंटू फ्रेगमेंट्स ईच विद मास नंबर 121 इफ ईच फ्रेगमेंट न्यूक्लियस हैज़ बाइंडिंग एनर्जी पर न्यूक्लियन 8.1 मिलियन
इलेक्ट्रॉन वोल्ट द टोटल गेन इन बाइंडिंग एनर्जी। अरे यार बिल्कुल सेम टू सेम सवाल हो गया वैसा का वैसा ही। ठीक है भाई 242
ये 242 का आधा कितना हो गया? 121 तो 121 + 121 इन सबको मल्टीप्लाई करो किससे? 8.1 से। और इनको माइनस कर दो वो पुराने वाला।
242 * 7.6 जो भी आएगा वह आंसर है। यह बहुत आसान सवाल आ रहे हैं यार बाइंडिंग एनर्जी पे और उस पे। एक बार ये और देख लेते हैं
कि क्या कुछ कुछ करने को मिल जाए किसी सवाल में। न्यूक्लियस A हैव Z = 17 एंड इक्वल नंबर ऑफ़ प्रोटॉन्स एंड न्यूट्रॉन एज
1.2 मिलियन इलेक्ट्रॉन वोल्ट बाइंडिंग एनर्जी पर न्यूक्लियन। अच्छा जी भाई, बहुत बढ़िया। ठीक है।
Z17 है। एंड इक्वल नंबर ऑफ प्रोटॉन एंड न्यूट्रॉन है इसमें। तो यानी के 34 पार्टिकल हैं
इसके अंदर और 1.2 मिलियन इलेक्ट्रॉन वोल्ट हर पार्टिकल की एनर्जी है। तो टोटल बाइंडिंग एनर्जी तो इतनी हो गई।
ओके? अब क्या बोल रहा है? अनदर न्यूक्लियस B ऑफ़ Z = 12 जिसका Z तो 12 है और टोटल 26 न्यूक्लियों्स हैं और 1.8 मिलियन
इलेक्ट्रॉन वोल्ट बाइंडिंग एनर्जी पर न्यूक्लियों है। मतलब ये भी दिया कुछ फायदा ही नहीं हुआ। दूसरे की बाइंडिंग
एनर्जी कितनी है? 26 है उसके न्यूक्लियों्स। और 1.8 मिलियन इलेक्ट्रॉन वोल्ट है यह। ठीक है ना? द डिफरेंस ऑफ
बाइंडिंग एनर्जी इन A एंड B भाई कुछ कुछ अच्छा ही सवाल पूछ लो यार अच्छा ही सवाल पूछ लो कुछ यहां बच्चों को बोर कर रहे हो
3.4 * 1.2 = दिस इसमें से माइनस करना है किसको 26 * 1.8 को तो यह आया आपका
ये क्या था? 34 और मल्टीप्लाई बाय 1.2 अच्छा इसमें से अब माइनस करना है 26 * 1.8 को तो
ये आया जितना भी आया माइनस करके सिक्स आया। दोनों की एनर्जी को माइनस करके सिक्स आया और आंसर देखो क्या आया। यह लो सिक्स।
तो मेरे भाई मैं बस इतना कहना चाहता हूं कि आप जो है ठीक है? आप जो है थोड़ा सा पेशेंस रख के
अगर बैठोगे कैलकुलेटर से पहले कर लिया। गुड। अगर आप
पेशेंस रख के मॉडर्न फिजिक्स का पेपर दोगे तो सारे सवाल हो जाएंगे आपके जितने भी हैं। जितना यहां बताया गया है ना बस उतना
करके कॉन्फिडेंस रखो कि जो होगा इन्हीं में से होगा। ठीक? सारे पीवाईक्यू कर डालो और ये कर लो। देखो अब ये सवाल और देखते
हैं। ये बोल रहा है बाइंडिंग एनर्जी ऑफ़ सर्टेन न्यूक्लियस इज़ दिस? तो जूल में दे रखी है। तो 18 * 10 टू दी पावर 8 जूल।
ओके? हाउ मच इज द डिफरेंस बिटवीन टोटल मास ऑफ़ ऑल न्यूक्लियों्स एंड न्यूक्लियर मास ऑफ़ द गिवन न्यूक्लियस? भाई सीधे-सीधे पूछ
लेता m * c² से कंपेयर करना है इसको। तो डेल्टा बताओ कितना होगा? तो दिस इज़ 18 * 10 ^ 8 18 * 10 पावर 8ेड / c² यानी कि 3 *
10 पावर 8 * 3 * 10 पावर 8 तो 10 टू दी पावर 8 से 10 टू दी पावर 8 खत्म 3 * 3 = 9 से ये दो आ गया तो दिस इज़
2 * 10 टू दी पावर कितना -8 ठीक है 2 * 10 पावर -8 माइक्रो ग्राम अब माइक्रो
ग्राम कितना होता है भाई? माइक्रो तो होता है 10 टू दी पावर -6 और ग्राम कितना हो? 10 टू दी पावर -3 इतने केजी हो गया। तो ये
10 टू दी पावर -9 kg हो गया। और ये तो हमारा केजी में आएगा ना। ये तो हमारा केजी में आएगा। तो मैं इसको लिख सकता हूं। 20 *
10 टू दी पावर -9 kg ठीक है ना? तो माइक्रो ग्राम कितना होता है? 10 टू दी पावर -9 kg इज़ माइक्रो ग्राम। तो दिस इज़
20 माइक्रो ग्राम। ये डेल्टा हो गया। दोनों के मासेस का डिफरेंस है। जेईई मेंस 2024 में आया हुआ सवाल है ये।
बी ऑप्शन करेक्ट हो गया। पता नहीं कैसे सवाल आ रहे हैं। मुझे लग रहा है मैं बहुत आसान सवाल उठा के ले आया हूं। इसका आंसर
देखें क्या? बी ऑप्शन आंसर है। बी कौन सा है? यही है। 20 माइक्रो ग्राम।
मैं कुछ आसान-आसान उठा लाया क्या सवाल? भारी आते थे यार सवाल। तो मुझे जो भारी-भारी लगे वो मैंने इसमें डाल
लिए। फटाफट फटाफट। ठीक है। यह क्या बोल रहा है?
देखना भाई, यह लास्ट ईयर का ही सवाल है। क्या आता है इसमें आंसर? देखना क्या आता है। एनर्जी रिलीज़ व्हेन टू
ड्यूटेरोन फ्यूज टू फॉर्म अ हीलियम। यानी के 1H2 + 1H2 गिव्स 2H4 + कुछ एनर्जी कुछ एनर्जी रिलीज होती है।
ठीक है ना? बाइंडिंग एनर्जी पर न्यूक्लियों इज़ दिस। अच्छा पर न्यूक्लियन इन दिस इज़ दिस एंड बाइंडिंग
एनर्जी ऑफ़ पर न्यूक्लियन इन दिस इज़ दिस। ओ गॉड। इसमें कितने न्यूक्लियों होंगे? दो। इसमें
कितने होंगे? दो। तो चार तो इसके हो गए और ये हुआ 1.1। ठीक है ना? तो ये तो बाइंडिंग एनर्जी ऑफ़
वन साइड हो गई। अब वो हीलियम है। हीलियम की बाइंडिंग एनर्जी कितनी है? हीलियम में कितने न्यूक्लियों्स होते हैं?
दो प्रोटॉन, दो न्यूट्रॉन। चार होंगे। तो 4 * कितने हो गए? 7.0
तो 28.0 मिलियन इलेक्ट्रॉन वोल्ट बाइंडिंग एनर्जी ऑफ़ टू हुई। और पहले वाले की कितनी हुई? 4.4 मिलियन इलेक्ट्रॉन वोल्ट। तो,
दोनों की एनर्जी का डिफरेंस कितना हुआ? बाइंडिंग एनर्जी ऑफ़ 2 - बाइंडिंग एनर्जी ऑफ़ 1 = 28 - 4.4 मतलब 23.6 मिलियन
इलेक्ट्रॉन वोल्ट एनर्जी इसमें रिलीज होती है या निकलती है? बस ये देख लो क्या?
तो बाइंडिंग एनर्जी पर न्यूक्लियन क्या बोल रहा है? एनर्जी रिलीज़ दोनों का डिफरेंस यह है। 23.6 क्या आएगा आंसर में?
क्या आएगा आंसर में? क्या है? सी ऑप्शन है क्या आंसर में? ये लो भाई सी ऑप्शन आपके आंसर में।
ठीक है? और बहुत सारी चीजें ऐसी हैं जो आपको अपने आप खुद से पढ़ लेनी है। ठीक है? अब मैं एक दो चीज ऐसी फटाफट फटाफट बता
देता हूं आपको जो आपको वैसे भी आनी ही चाहिए। ठीक है?
जैसे एक फार्मूला होता है। अगर मान लो यह न्यूक्लियस है। भाई देखो कुछ चीज मैंने नहीं बताई ना वह बता देता हूं मैं आपको
क्योंकि अपना जो जो टारगेट था वो तो हो गया पूरा। ठीक है? तो हमने जो जो यहां पे स्टार्टिंग
में प्लान किया था। ठीक है? क्या-क्या प्लान किया था टॉपिक्स का सुबह। सुबह 11:00 बजे हमने क्या-क्या प्लान किया था?
फोटोइिक इफेक्ट डन। एक्सरे रिक्वायर्ड कांसेप्ट डन डी ब्रोगली का कांसेप्ट डन बोर थ्योरी न्यूक्लियस की बातें हो गई मास
डिफेक्ट हो गया फ्यूज़ फ्यूज़ हो गया भाई देखो जो प्रॉपर ये था ना हमारा टारगेट था वो तो हमने पूरा कर लिया हालांकि थोड़ा
क्रिस्प और कंप्रेस्ड क्लास थी ये बट जितनी रिक्वायरमेंट थी वो सारी पूरी हुई यहां पे। ठीक है? अब क्या होगा? अब कुछ
बातें ऐसी हैं जो मैं यहां पे एक दो चीज ऐसी हैं जो मैं बताऊंगा। जैसे ये न्यूक्लियस है और इसके चारों तरफ ऐसे करके
कुछ होती है। तो अगर ट्रांजिशन किसी n2 से n1 पे होता है। ठीक है ना? मान लो n = 5 से n = 2 पे होता है ट्रांजिशन। तो भाई
कितने तरीके हैं? कितने तरीके हैं यहां से डायरेक्ट आने के? फिर यहां से यहां आने के। ठीक है ना? या यहां से यहां से
ट्रांजिशन यहां से डायरेक्ट आ सकते हैं हम। यहां पे हल्ट लेके यहां से आ सकते हैं। तो कितने तरीके हैं? नंबर ऑफ
स्पेक्ट्रल लाइन। ठीक है ना? नंबर ऑफ स्पेक्ट्रल लाइंस जो होती हैं उनका फार्मूला होता है
n2 + कुछ ऐसे ही होता है। n2 + n2 - n1 n2 - n1 लेते हैं। n2 - n1 + 1 * n2 - n1 और /
2 ये फ़ूला होता है शायद। यह मुझे एक बार को मैच करना पड़ेगा। ठीक। हो सकता है मेरे
दिमाग में कुछ मतलब क्योंकि भाई इतनी सारी चीजें हैं। कहीं गलत लिखाया गया ना तो मेरी हीरोगिरी के
चक्कर में आपका कांसेप्ट ध्वस्त हो जाएगा। नहीं ठीक है। सही है एकदम एकदम सही लिखा हुआ है। ठीक है? तो देखते हैं कितनी नंबर
ऑफ लाइंस आएंगी। पांच से दो पे। तो 5 - 2 + 1 * 5 - 2 / 2 तो 3 और 1 4 * 3 / 2 सिक्स लाइंस आएंगी।
छह लाइन आएंगी इसमें। ये सही है। है ना? ये सही है। तो एक ये वाला फार्मूला भी आपको पता होना चाहिए। और ये बहुत आसान हो
जाता कि n से अगर n = 1 पे आ जाए तो n * n - 1 / 2 बट ये वाला और ये वाला फार्मूला एक ही है। तो ये आपको याद रखना है कि एक
ऑर्बिट से दूसरी ऑर्बिट में अगर ट्रांजिशन लेते हैं तो कितनी नंबर ऑफ लाइंस बनती है वो यह फार्मूला है। राइट?
और ये तो मैंने बता ही दिया कि बाइंडिंग एनर्जी पर न्यूक्लियों तो आपको पता होनी
चाहिए। पर न्यूक्लियों ज्यादा होती है तभी चीज जो ज्यादा स्टेबल होती है। जैसे एक बार कभी सवाल पूछा भी गया था। एक बार सवाल
पूछा भी गया था वो बाइंडिंग एनर्जी पर न्यूक्लियों वाले उसमें क्या पूछा गया था कि एक ये 56 FE है और एक 209
ये है। ठीक है ना? इसकी जो टोटल एनर्जी है वो 4928
492.8 मिलियन इलेक्ट्रॉन वोल्ट निकलती है और इसकी निकलती है 1640 मिलियन इलेक्ट्रॉन
वोल्ट। ठीक है? 1640 मिलियन इलेक्ट्रॉन वोल्ट ये। तो वो पूछ
रहे हैं कि इनमें से ज्यादा स्टेबल कौन सा है? व्हिच वन इज मोर स्टेबल? इसकी बाइंडिंग एनर्जी इतनी है और इसकी बाइंडिंग
एनर्जी इतनी है। तो व्हिच वन इज़ मोर स्टेबल? कौन सा मोर स्टेबल है? ठीक? तो हमें
बाइंडिंग एनर्जी पर न्यूक्लियन चेक करनी पड़ेगी। बाइंडिंग एनर्जी पर न्यू। अब आप देखो
492.8 / 56 करो और 1640 / 209 करो। बाइंडिंग एनर्जी पर न्यूक्लियन
जिसकी भी ज्यादा आएगी ना वही ज्यादा स्टेबल है। ठीक है? तो अब आप यहां पर देखो 492.8ेड
बाय कितना 56 तो ये आपका एप्रोक्सीमेटली 8.8 आता है। ठीक? और अगर मैं इसको करूं तो 1640 और डिवाइडेड बाय 209
ये आपका 7.84 आता है। ठीक है ना? तो दिस वन इज मोर स्टेबल। देखो ये ज्यादा है और ये कम है तो
ये ज्यादा है तो दिस इज़ मोर स्टेबल। ये ज्यादा स्टेबल है। तो कभी-कभी ये स्टेबिलिटी भी पूछ ली जाती है। ठीक है ना?
सर अल्फा एंड बीटा डीके बेटा रेडियोएक्टिविटी ना हटा दिया गया है। ठीक है ना? उसमें अगर कुछ भी रिक्वायर्ड होगा
तो मैं बताऊंगा। ठीक है ना? किसी ना किसी मीन से मैं बताऊंगा। पर वो हटा दिया गया तो यहां पे कवर करने का कोई मीनिंग उसको
बनता नहीं है। ठीक? और वो फर्स्ट ऑर्डर रिएक्शन है। वो आपको केमिस्ट्री में पढ़ा दी जाती है। रेडियोएक्टिविटी पढ़ा दी जाती
है। ठीक है? तो भाई अपना सेशन ऑलमोस्ट यहीं पे ओवर होता है। एक सवाल और बचता है। वो मुझे और बताना है।
और अह यह वाला देख लो। डी ब्रोगली वेवलेंथ पे ये ठीक है ना
इनिशियल मोमेंटम वाला ठीक चलो इसका मुझे ना आप आंसर बताओ इसके लिए मैं आपको देता हूं 45 सेकंड्स बता दो मुझे इसका आंसर बता
दो क्या आएगा देखते हैं कितने लोग आंसर देते हैं भाई ठीक है देखते हैं कितने लोग इसका आंसर मुझे दे पाते हैं
दे रहे हो क्या आंसर? नहीं सर, हम नहीं देंगे। बताओ क्या कर लोगे? यह बात तो सही है भाई। पर तो मैं कुछ नहीं
पाऊंगा। क्या आंसर है? ओके। अरे
अरे अरे अरे कोई आंसर नहीं देना। हां आए आंसर आए आए आए। चलो गुड। देखो भाई सवाल कैसा है इसको समझना। फाइंड
द इनिशियल मोमेंटम ऑफ इलेक्ट्रॉन इफ द मोमेंटम ऑफ इलेक्ट्रॉन इज चेंज बाय PM अगर किसी का मोमेंटम p है और उसको हम PM
का चेंज कर देते हैं। उसमें PM का चेंज कर देते हैं। ठीक है ना? द डीब्रोगली वेवलेंथ एसोसिएटेड विद इट चेंज्ड बाय5%
तो जो डीब्रोगली वेवलेंथ है उसमें कितना चेंज आ जाता है 5 का यानी के डेल्टा लैम्ब्डा चेंज आ जाता है अगर लैम्ब्डा
इतना है परसेंट तो उसमें 5 का चेंज आ जाता है अगर वो 100 है तो तो दिस इज़ 1 / 200 ये है
तो वो वो बोलता है कि भाई इनिशियल मोमेंटम कितना है? P इनिशियल कितना है? इनिशियल मोमेंटम कितना है? ठीक क्वेश्चन को। इफ द
मोमेंटम ऑफ द इलेक्ट्रॉन इज चेंज्ड बाय PM तो जो इसका इनिशियल मोमेंटम है, ठीक है? उसमें हमने प्लस माइनस PM कर दिया है।
क्या कर दिया? प्लस माइनस PM कर दिया है तो डेफिनेटली P = H / लैम्ब्डा होता है। तो अगर P को बदलोगे तो लैम्ब्डा भी
बदलेगा। बिल्कुल बदलेगा सर। बदलना भी चाहिए। ठीक है? तो भाई अब ये बताना है कि अगर लैम्ब्डा इतना बदल गया है तो P कितना
बदला है? ना Pm बदला तो इनिशियल मोमेंटम बताइए कितना होगा? तो अपने आप में बड़ा अच्छा सवाल है ये। ठीक है ना? अगर मैं
यहां पे dp / देखो ये है ना ये dp / d लैम्ब्डा करूंगा। इसको लैम्ब्डा के रेस्पेक्ट में डिफरेंशिएट कर दो। तो h तो
कांस्टेंट है। ये hम्ब्डा की पावर -1 आएगी। ठीक है? तो म्ब्डा की पावर क्या आएगी? -1
तो -1 * लैम्ब्डा की पावर -2 हो जाएगा। ठीक? तो ये कह रहा है कि dp / dλ = - h / लैमλ का स्क्वायर।
ठीक है? ओके भाई। अब एक काम कर लो। dp को तो इधर ले आओ। = - का h / लैम्ब्डा एक इधर रख लो और इस d्डा को इधर ले जाओ और ये
वाला लैम्ब्डा एक इधर रख लो। एक तो इसके नीचे ले आए, एक इसके नीचे ले आए। ठीक है ना? तो अब आप देखो h/λ क्या है? एक्चुअल
में h/λ आपका इनिशियल मोमेंटम है। तो ये तो dp हो गया और डिवाइडेड बाय ये p हो गया = d लैλ / लैम्ब्डा ये हो गया। अब उसने ये
पूछा है आपसे। ठीक है ना? अब सोच के देखो ये क्या है? तो d लैλ / लैम्ब्डा तो आपका 1 / 200 है। तो
dp / p = 1 / 200 तो P इधर हो जाएगा। ये हो जाएगा। तो यहां से आपको पता चला कि ये जो P है ये P आपका 200 ऑफ़ DP के बराबर है।
और DP क्या है? मोमेंटम में चेंज है। तो दिस इज़ 200 ऑफ़ PM ये आपका आंसर होगा। तो इनिशियल मोमेंटम जो इनिशियल मोमेंटम है
वो जितना चेंज किया है ना इन्होंने PM का उसका 200 गुना है। ये आंसर है। अब इस टाइप के सवाल भी आपसे
होने चाहिए। आने चाहिए। है कि नहीं? डी ब्रोंगली वेवलेंथ पे इस टाइप के सवाल ऐसे होते हैं कि भाई यह लगता
तो है हो जाते हैं पर लास्ट तक होते नहीं है। पता नहीं क्या कभी-कभी इनमें दिक्कत भी आ जाती है हमको। ठीक है?
तो समय हो गया है। 455 हो गए हैं। आप चाहो तो एक सवाल और देख सकते हो। कौन से वाला? ये वाला भी देख सकते हो। ये भी बड़ा अलग
तरीके का सवाल है। ये पूछ रहा है कि एक अल्फा पार्टिकल है। मूव्स इन अ सर्कुलर ऑर्बिट पाथ ऑफ रेडियस। दिस इन प्रेजेंस ऑफ़
अ मैग्नेटिक फील्ड। इसमें मैग्नेटिक इफेक्ट ऑफ़ करंट वाला केस हो गया। जो r = mv/ qb से आता है। तो वो कहता है कि
डीबोगली वेवलेंथ बताइए। तो डी ब्रोगली वेवलेंथ इज़ h / p यानी के h / mv और ये पार्टिकल मैग्नेटिक फील्ड में ऐसे घूम रहा
है। तो यहां पे देखो इसका जो फार्मूला होता है वहां से डायरेक्ट mv आ जाता है। तो mv यहां से डायरेक्ट आ जाता है। ये qb
* r हो जाता है। अब आप खुद सोचो अल्फा पार्टिकल है। उसका q भी दे रखा है आपको। अल्फा पार्टिकल पे चार्ज कितना होता है?
2e * b भी दे रखा है और आपको r भी दे रखा है। तो यहां पे लैम्ब्डा की वैल्यू तुरंत आ जाएगी। h / 2br
जो भी आएगा वो आपका आंसर हो जाएगा। क्या मेरी बात समझ में आ रही है? इज इट ओके?
इज इट ओके? फाइन। ठीक? तो इस टाइप के सवाल भी भाई हम कर सकते हैं। ठीक? और भी खूब सारे सवाल हैं।
किए जा सकते हैं। ठीक है? तो चलिए भाई आज की सभा को हम यहीं पर समाप्त करते हैं।
आज की सभा को हम यहीं पर समाप्त करते हैं। तो ठीक है बेटा हमारे पास इतना ही टाइम था मॉडर्न फिजिक्स
का। ठीक है? तो वी विल मीट राइट। तो आपको होमवर्क भी मिलेगा। तो आप
मंजिल से रिलेटेड सारे अपडेट इसको स्कैन करके चेक कर सकते हो। और भाई मैं शायद अब आपको नए साल के बाद ही मिलूंगा। ठीक है?
तो आपको तो आपको बड़े वाला हैप्पी न्यू ईयर। ठीक है?
आई विल प्रे फॉर यू। इस साल में आपके सारे सपने सब चीजें पूरी हो जाए। ठीक है? चलो।
थैंक यू सो मच। बाय-बाय। टेक केयर। और होमवर्क आप जरूर कर लेना। ठीक है?
होमवर्क आपको जरूर करना है। राइट? चलो भाई बाय-ब टेक केयर। सी यू।
इस कोर्स में मुख्य रूप से फोटोइलेक्ट्रिक इफेक्ट, एक्स-रे, डी ब्रोगली का कॉन्सेप्ट, बोहर थ्योरी, नाभिक का आकार, मास डिफेक्ट और बाइंडिंग एनर्जी, तथा फिशन एंड फ्यूजन जैसे टॉपिक कवर किए जाएंगे। ये सभी पिछले 15 वर्षों के JEE Main और Advanced के PYQs पर आधारित हैं।
JEE Main में मॉडर्न फिजिक्स से कम से कम 2 प्रश्न (गारंटी) आते हैं, और 3 प्रश्नों की उम्मीद रहती है, जिससे 12 नंबर आसानी से लाए जा सकते हैं। JEE Advanced में भी कम से कम 2 प्रश्न आने की गारंटी है। यह सबसे आसान टॉपिक माना जाता है।
इंटेंसिटी बढ़ाने पर फोटो करंट बढ़ता है (संख्या प्रभावित होती है), लेकिन इलेक्ट्रॉनों की ऊर्जा पर कोई असर नहीं पड़ता। वोल्टेज बढ़ाने पर फोटो करंट एक सीमा तक बढ़ सकता है, और रिवर्स बायस में स्टॉपिंग पोटेंशियल (V₀) इलेक्ट्रॉनों की अधिकतम गतिज ऊर्जा मापता है। फ्रीक्वेंसी बढ़ाने पर इलेक्ट्रॉनों की गतिज ऊर्जा बढ़ती है, और थ्रेशोल्ड फ्रीक्वेंसी से कम पर कोई इलेक्ट्रॉन नहीं निकलता।
प्रायोगिक सेटअप में एक इवैक्यूएटेड ट्यूब होती है जिसमें कैथोड (C) और एनोड (A) प्लेट्स होती हैं। कैथोड पर रेडिएशन गिरता है और एनोड से इलेक्ट्रॉन कलेक्ट होते हैं। एक विंडो (W) से मोनोक्रोमेटिक रेडिएशन प्रवेश करता है, और बैटरी (V) वोल्टेज प्रदान करती है। करंट को अमीटर से मापा जाता है।
स्टॉपिंग पोटेंशियल वह न्यूनतम रिवर्स वोल्टेज है जिस पर फोटो करंट शून्य हो जाता है। यह इलेक्ट्रॉनों की अधिकतम गतिज ऊर्जा (K.E.) को मापने में मदद करता है, क्योंकि यह सीधे उस ऊर्जा के बराबर होता है।
थ्रेशोल्ड फ्रीक्वेंसी वह न्यूनतम फ्रीक्वेंसी है जिस पर फोटोइलेक्ट्रिक इफेक्ट होता है। इससे कम फ्रीक्वेंसी पर कोई इलेक्ट्रॉन नहीं निकलता, भले ही इंटेंसिटी कितनी भी अधिक क्यों न हो। यह प्रकाश के कणिका सिद्धांत का समर्थन करता है।
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