दीर्घकालीन उत्पादन फलन (Long Run Production Function)
दीर्घकाल में, उत्पादन के सभी साधन परिवर्तनशील होते हैं। कोई स्थिर साधन नहीं होता। फर्म अपनी मशीनरी, भूमि, भवन और श्रम सभी को बदल सकती है। पैमाने का प्रतिफल (Returns to Scale) यह स्पष्ट करता है कि जब सभी साधनों को समान अनुपात में बढ़ाया जाता है तो उत्पादन में क्या परिवर्तन होता है।
सम-उत्पाद वक्र (Isoquant Curve)
यह एक वक्र है जो दो साधनों (सामान्यतः श्रम और पूंजी) के उन सभी संभावित संयोजनों को दर्शाता है जो उत्पादन का एक निश्चित स्तर प्रदान करते हैं। यह उपभोक्ता सिद्धांत के तटस्थता वक्र (Indifference Curve) के समान है, लेकिन यह उत्पादन सिद्धांत से संबंधित है।
मान्यताएं
- सरलता के लिए केवल दो साधन (श्रम और पूंजी) का उपयोग माना गया है।
- साधनों को छोटी-छोटी इकाइयों में विभाजित किया जा सकता है।
- उत्पादन तकनीक स्थिर रहती है।
- दो साधनों के बीच तकनीकी प्रतिस्थापन संभव है।
- साधनों का उपयोग अधिकतम दक्षता के साथ किया जाता है।
गुण (Properties of Isoquant)
- ऋणात्मक ढलान (Downward Sloping): यह बाएँ से दाएँ नीचे की ओर झुका होता है। इसका कारण यह है कि यदि हम एक साधन (जैसे श्रम) की मात्रा बढ़ाते हैं, तो उत्पादन स्तर को समान रखने के लिए दूसरे साधन (पूंजी) की मात्रा घटानी होगी।
- मूल बिंदु की ओर उत्तल (Convex to Origin): इसका कारण सीमांत तकनीकी प्रतिस्थापन दर (MRTS) का ह्रासमान होना है। जैसे-जैसे हम पूंजी के स्थान पर अधिक श्रम का उपयोग करते हैं, शेष पूंजी को प्रतिस्थापित करना कठिन होता जाता है, जिसके लिए अधिक से अधिक श्रम की आवश्यकता होती है।
- MRTS = Δपूंजी / Δश्रम = श्रम की सीमांत उत्पादकता / पूंजी की सीमांत उत्पादकता
- यदि MRTS स्थिर हो, तो सम-उत्पाद वक्र एक सीधी रेखा होगी।
- यदि MRTS बढ़ रहा हो, तो वक्र मूल बिंदु की ओर अवतल (Concave) होगा।
- एक-दूसरे को नहीं काटते (Non-Intersecting): प्रत्येक सम-उत्पाद वक्र उत्पादन के एक विशिष्ट स्तर को प्रदर्शित करता है, इसलिए वे एक-दूसरे को काट नहीं सकते।
- उच्च स्तर का प्रतिनिधित्व (Higher Output): मूल बिंदु से जितना दूर का सम-उत्पाद वक्र होगा, वह उत्पादन का उतना ही उच्च स्तर प्रदर्शित करेगा।
- अक्षों को स्पर्श नहीं करते (No Touch to Axes): यह माना जाता है कि उत्पादन के लिए श्रम और पूंजी दोनों का उपयोग आवश्यक है।
पैमाने का प्रतिफल (Law of Returns to Scale)
यह एक दीर्घकालीन अवधारणा है जो सभी साधनों में एक साथ होने वाले परिवर्तन के प्रति उत्पादन की प्रतिक्रिया का अध्ययन करती है।
मान्यताएं
- उत्पादन के सभी साधन परिवर्तनशील हैं।
- प्रौद्योगिकी में कोई परिवर्तन नहीं होता।
- बाजार में पूर्ण प्रतियोगिता (Perfect Competition) है।
- उत्पादन को भौतिक इकाइयों में मापा जाता है।
तीन अवस्थाएं
-
1. वर्धमान प्रतिफल (Increasing Returns to Scale):
- यदि सभी साधनों में 1% की वृद्धि करने पर उत्पादन में 1% से अधिक की वृद्धि होती है।
- उदाहरण: साधनों को दोगुना करने पर उत्पादन तीन गुना हो जाना।
- रेखाचित्र: सम-उत्पाद वक्रों के बीच की दूरी घटती जाती है।
-
2. स्थिर प्रतिफल (Constant Returns to Scale):
- यदि सभी साधनों में 1% की वृद्धि करने पर उत्पादन में ठीक 1% की वृद्धि होती है।
- उदाहरण: साधनों को दोगुना करने पर उत्पादन भी दोगुना हो जाना।
- इसे समरूप उत्पादन फलन (Homogeneous Production Function) भी कहते हैं।
- रेखाचित्र: सम-उत्पाद वक्रों के बीच की दूरी समान रहती है।
-
3. ह्रासमान प्रतिफल (Diminishing Returns to Scale):
- यदि सभी साधनों में 1% की वृद्धि करने पर उत्पादन में 1% से कम की वृद्धि होती है।
- उदाहरण: साधनों को दोगुना करने पर उत्पादन केवल 1.5 गुना हो जाना।
- रेखाचित्र: सम-उत्पाद वक्रों के बीच की दूरी बढ़ती जाती है।
उत्पादक संतुलन (Producer's Equilibrium)
यह वह स्थिति है जहां एक उत्पादक न्यूनतम लागत पर अधिकतम उत्पादन प्राप्त करता है। इसे साधनों का इष्टतम संयोजन (Optimum Combination of Factors) भी कहा जाता है।
सम-लागत रेखा (Iso-cost Line)
यह एक रेखा है जो दो साधनों (श्रम और पूंजी) के उन सभी संयोजनों को दर्शाती है जिन्हें एक फर्म अपने निश्चित बजट में खरीद सकती है। यह उपभोक्ता सिद्धांत की बजट रेखा के समान है।
संतुलन की शर्तें
- पहली शर्त: सम-उत्पाद वक्र का ढलान (MRTS) सम-लागत रेखा के ढलान के बराबर होना चाहिए।
- MRTS(श्रम, पूंजी) = श्रम की कीमत / पूंजी की कीमत
- दूसरी शर्त: स्पर्श बिंदु पर सम-उत्पाद वक्र मूल बिंदु की ओर उत्तल (Convex) होना चाहिए।
अधिक पढ़ें: उत्पादन योजना और सुविधा निर्णय | PPC, क्षमता और लेआउट रणनीतियाँ
कॉब-डगलस उत्पादन फलन (Cobb-Douglas Production Function)
इसे चार्ल्स डब्ल्यू. कॉब और पॉल एच. डगलस ने विकसित किया था। यह एक रैखिक समरूप उत्पादन फलन है जो स्थिर पैमाने के प्रतिफल को दर्शाता है, लेकिन साधनों को एक निश्चित सीमा तक एक-दूसरे के लिए प्रतिस्थापित किया जा सकता है।
मुख्य बिंदु
- केवल दो साधन लेबर (L) और कैपिटल (K) पर विचार किया जाता है।
- श्रम उत्पादन में 3/4 और पूंजी 1/4 का योगदान देता है।
- साधनों के बीच प्रतिस्थापन की लोच (Elasticity of Substitution) 1 के बराबर होती है।
मानक सूत्र
q = A · L^α · K^β
जहां,
- q = कुल उत्पादन
- L = श्रम की मात्रा
- K = पूंजी की मात्रा
- A = एक स्थिरांक जो प्रौद्योगिकी और दक्षता को दर्शाता है
- α और β = धनात्मक स्थिरांक (0 और 1 के बीच), जो उत्पादन की लोच को दर्शाते हैं
- α = श्रम में परिवर्तन के प्रति उत्पादन की प्रतिक्रिया
- β = पूंजी में परिवर्तन के प्रति उत्पादन की प्रतिक्रिया
साधनों की प्रमुखता का मापन
- साधनों की प्रमुखता (Factor Intensity) को β / α के अनुपात से मापा जाता है।
- यदि β / α > 1, तो पूंजी अधिक प्रमुख है (पूंजी-गहन उत्पादन)।
- यदि β / α < 1, तो श्रम अधिक प्रमुख है (श्रम-गहन उत्पादन)।
- यदि β / α = 1, तो दोनों समान रूप से प्रमुख हैं।
पैमाने के प्रतिफल का निर्धारण
- पैमाने के प्रतिफल का निर्धारण α + β के योग से होता है।
- यदि α + β = 1, तो स्थिर प्रतिफल (Constant Returns to Scale)
- यदि α + β > 1, तो वर्धमान प्रतिफल (Increasing Returns to Scale)
- यदि α + β < 1, तो ह्रासमान प्रतिफल (Diminishing Returns to Scale)
हेलो एंड वेलकम यू ऑल डियर स्टूडेंट्स। हम इकोनॉमिक्स का एक चैप्टर पढ़ रहे हैं। फैक्टर्स ऑफ प्रोडक्शन एंड लॉज़ ऑफ
प्रोडक्शन। ऑलरेडी हमने लास्ट लेक्चर में डिस्कस किया था शॉर्ट रन प्रोडक्शन फंक्शन। आज हम पढ़ने वाले हैं लॉन्ग रन
प्रोडक्शन फंक्शन। अगर आप कंप्लीट सिलेबस देखना चाहते हो इकोनॉमिक्स, स्टैटिस्टिक्स एंड मैथमेटिक्स पर डिस्क्रिप्शन के अंदर
आपको लिंक्स मिलेगी। वहां पे आपको कंप्लीट सिलेबस बिल्कुल फ्री ऑफ कॉस्ट मिल जाएगा। अगर आपको पीडीएफ के रिलेटेड कोई भी
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के रिलेटेड कोई भी इंफॉर्मेशन चाहिए tlegram पर जाओ। वहां पर सर्च करो मलिक ट्यूटोरियल ऑफिशियल। उस ग्रुप को ज्वाइन
करो। वहां पे आपको लेटेस्ट अपडेट्स एंड इंफॉर्मेशन मिल जाएगी। सो आज हम पढ़ते हैं रिटर्न टू स्केल। एक
रिक्वेस्ट है। प्लीज अगर आपको यह लेक्चर पसंद आए तो इस वीडियो को आपने लाइक, शेयर एंड कमेंट करके जरूर मुझे बताना है कि
आपको यह लेक्चर कैसा लगा। अगर यह सब चीजें आप करोगे ट्रस्ट मी गाइस आपका कोई भी नुकसान नहीं होगा। मुझे और ज्यादा
मोटिवेशन मिलती है और ज्यादा अच्छा आपके लिए मैं स्टडी मटेरियल लाऊंगा। नाउ रिटर्न टू स्केल क्या है? इन लॉन्ग रन। अब यहां
पर हम बात कर रहे हैं लॉन्ग रन की। लॉन्ग रन में कोई भी फिक्स फैक्टर नहीं होता है। आपके पास जो मशीनरी है आप उसको भी चेंज
करते हो। लैंड नई खरीदते हो, नई बिल्डिंग खरीदते हो, नए लेबर्स हायर करते हो। यानी यहां पे इस वक्त सारे के सारे फैक्टर्स
क्या है? वेरिएबल्स हैं। द लॉ ऑफ़ रिटर्न टू स्केल एक्सप्लेन द रिलेशनशिप बिटवीन आउटपुट एंड स्केल ऑफ़ इनपुट। जो लॉ ऑफ़
रिटर्न टू स्केल है, यह एक्सप्लेन करता है कैसा रिलेशन रहता है आउटपुट में। और जब हम स्केल ऑफ़ इनपुट को चेंज करते हैं। जैसे
पहले आपकी स्केल यानी आपकी जो कैपेसिटी थी, आपने एक मशीन रखी थी, उसके साथ आपने 20 लेबर्स रखे। आप 1000 बैग बना रहे थे।
फिर आपने नई मशीन, फिर और लेबर, फिर और बिल्डिंग यह सब चीजें आपने इनक्रीस की। तो आउटपुट के ऊपर क्या फर्क पड़ता है? जो लॉ
ऑफ़ रिटर्न टू स्केल है, यह एक्सप्लेन करता है। यहां पे इस वक्त सारे क्या है? सेम प्रोपोर्शन में इनक्रीस होते हैं। मैंने
आपको बोला है सेम प्रोपोर्शन का क्या मतलब है? जैसे शॉर्ट रन में हम क्या करते हैं? एक मशीनरी है। ठीक है? इसके साथ हमने पहले
पांच लेबर इस्तेमाल किए। फिर इसी मशीनरी के साथ हमने सोचा नहीं यार 10 लेबर हम इस्तेमाल करते हैं। यहां पर फिर हमने 15
इस्तेमाल किए। जब हम लॉन्ग रन में देखते हैं ना हम एक मशीनरी को देखते हैं कि यार इसकी फुल कैपेसिटी कितनी है। यहां पे हम
कितने लेबर इस्तेमाल कर सकते हैं। आपने मान के चला यहां पे 20 लेबर इस्तेमाल कर सकते हो। अब इसके अंदर कोई भी चेंज आप
नहीं करोगे। आप नई मशीन लाओगे उसके साथ भी 20 लेबर इस्तेमाल करोगे। नई मशीन लाओगे उसके साथ भी आप 20 लेबर इस्तेमाल करोगे।
यानी यहां पे सेम प्रोपोर्शन रहता है। हमने पढ़ा था कि जो लॉ ऑफ़ रिटर्न टू स्केल है यहां पे हम आइसोकंट्स के बारे में पढ़ते
हैं। तो थोड़ा सा एक छोटा सा कांसेप्ट है आइसोकॉन्ट्स। इसके बारे में हम थोड़ा सा सीखेंगे। आइसोकंट्स मींस आइसो एंड कॉट।
आइसोका मींस इक्वल एंड कंट मींस क्वांटिटी। आइसो इज द कर्व दैट रिप्रेजेंट ऑल पॉसिबल
कॉम्बिनेशन ऑफ टू इनपुट्स दैट प्रोड्यूस द एग्जैक्ट लेवल ऑफ़ आउटपुट। क्या आपको थोड़ा सा ऐसा लगे कि यार यह लैंग्वेज मैंने कहीं
सुनीसुनी है? जब हमने इंडफेंस कर्व पढ़ा था। वहां पे हमने पढ़ा था कि इंडफेंस कर्व इज़ अ कर्व। वी शोस कॉम्बिनेशन ऑफ टू गुड्स
जो कि एक कंज्यूमर को सेम लेवल ऑफ सेटिस्फेक्शन देते हैं। यानी यह होती थी इनडिफरेंस करो। इस पे ये एक कॉम्बिनेशन ऑफ
टू गुड्स है। यह सेम लेवल ऑफ़ सेटिस्फेक्शन कंज्यूमर को देते थे। इस तरह से दूसरा यह भी सेम लेवल ऑफ़ सेटिस्फेक्शन देते थे। यह
तीसरा यह सेम लेवल ऑफ़ सेटिस्फेक्शन। तो, यह जो आइसोकट है ना, यह भी इनडफरेंस कर्व है। लेकिन, कौन सी? प्रोडक्शन इन डिफरेंस
करो। यानी सेम कासेप्ट है। सिर्फ यहां पर है प्रोडक्शन इन डिफरेंस करो। यहां पर थोड़ा सा चेंज है। यहां पे हम लेते हैं टू
इनपुट्स। यूजुअली हम लेते हैं लेबर और कैपिटल को जो हमें देते हैं सेम लेवल ऑफ़ आउटपुट। यानी यह आपके पास ऐसी ही आइसो है।
यह करेगी शो एक कॉम्बिनेशन लेबर और कैपिटल का जो आपको आउटपुट देंगे। यह भी वही आउटपुट देंगे। दूसरा कॉम्बिनेशन। यह तीसरा
कॉम्बिनेशन। यह भी आपको सेम आउटपुट देंगे। यानी एव्री पॉइंट ऑन द कर्व यल्ड सेम प्रोडक्शन वॉल्यूम। ठीक है? अब देखो ये
आपके पास आइसोकाउंट है। आपने सोचा मैं तीन 30 मशीनरीज और दो लेबर्स इस्तेमाल करूंगा। तो यह है
दो लेबर्स और 30 कैपिटल्स। यह आपको 400 यूनिट्स बैग प्रोड्यूस करके दे रहे हैं। फिर आपने सोचा नहीं मैं चेंज करता हूं। तो
यहां पर आपने 20 मशीनरीज और चार लेबर इस्तेमाल किए। सॉरी 22 मशीनरीज और चार लेबर। तो ये भी आपको वही
दे रहे हैं। इस पॉइंट पे आपने 16 मशीनरीज एंड सिक्स लेबर इस्तेमाल किए। यह भी आपको 400 यूनिट्स बैग प्रोड्यूस
करके दे रहे हैं। इस पॉइंट पर भी इस पॉइंट पर भी सेम आपको मिल रहा है। यहां पे कुछ एजम्पशनंस है जिनमें पहली एजमशन है इट इज
अस्यूम्ड दैट ओनली टू फैक्टर्स आर यूज्ड फॉर द सेक ऑफ़ सिंपलीसिटी। अगर हम दो से ज्यादा लेंगे तो फिर हमारे लिए मुश्किल हो
जाएगा इसको ग्राफिकली रिप्रेजेंट करना। तो हम यहां पे लेते हैं सिर्फ टू फैक्टर्स। और जो टू फैक्टर्स है इनको हम डिवाइड कर
सकते हैं स्मॉलर पार्ट्स में। ठीक है? जैसे लेबर अगर आपको 10 चाहिए पहले आप दो खरीदोगे फिर आपने दो हायर किए फिर आपने दो
हायर किए। टेक्निक ऑफ प्रोडक्शन कास्टेंट है। द सब्स्टट्यूशन बिटवीन द टू फैक्टर्स इज टेक्निकली पॉसिबल। अब जो सब्सीट्यूशन
है यानी एक दूसरे की जगह हम इस्तेमाल कर सकते हैं। वो पॉसिबल होना चाहिए। जैसे यहां पे 30 मशीनरी है। आपने आठ कम कर दी
ना तो इन आठ कम मशीनरीज की वजह से आपने दो लेबर यहां पे बढ़ा दिए। यानी आठ मशीनरी की जगह आपने दो लेबर
इनक्रीस किया। इनका सब्स्टट्यूशन किया। इस तरह से यहां पर और आपने छह कम कर दिए। यहां पर दो और बढ़ा दिया। यानी एक दूसरे
की जगह पे हम सब्स्टट्यूट कर सकते हैं। अंडर द गिवन टेक्निक फैक्टर्स ऑफ़ प्रोडक्शन कैन बी यूज्ड विद मैक्सिमम
एफिशिएंसी। और जो भी हमने फैक्टर्स ऑफ प्रोडक्शन इस्तेमाल करने हैं उनको हमने मैक्सिमम एफिशिएंसी के साथ इस्तेमाल करना
है। तो ये हमारे पास हो गई आइसोकॉन्ट। अब हम थोड़ी सी इनकी प्रॉपर्टीज भी पढ़ेंगे कि
जो आइसोकॉन्ट है इसकी क्या-क्या प्रॉपर्टीज है। पहली जैसे इनडिफरेंस कर्व में है वैसे यहां पे भी है स्लोप डाउनवर्ड
फ्रॉम लेफ्ट टू राइट। हमारे पास इनडफरेंस कर्व में ऐसी ही इनडिफरेंस कर्व है। आइसोस में भी ऐसा ही है। क्यों? बिकॉज़ व्हेन द
क्वांटिटी ऑफ़ फैक्टर से लेबर इज इनक्रीज्ड, द क्वांटिटी ऑफ़ कैपिटल मस्ट बी रिड्यूस्ड। अब देखो अगर आपको चाहिए सेम
लेवल ऑफ़ आउटपुट। आपको चाहिए 400 बैग। अगर आप कैपिटल को डिक्रीज करोगे, तो आपको लेबर इनक्रीस करना पड़ेगा। यानी आपने एक फैक्टर
ऑफ प्रोडक्शन को कम करना है, दूसरे को बढ़ाना है। ना तो आप दोनों कम कर सकते हो, ना तो आप दोनों डिक्रीज कर सकते हो। फिर
अगर आपने दोनों कम कर दिए तो फिर आपके पास प्रोडक्शन कम हो जाएगी। अगर आपने दोनों बढ़ा लिए फिर आपके पास प्रोडक्शन ज्यादा
होगी। सेम लेवल ऑफ़ अगर आपको आउटपुट निकालना है, फिर अगर आप एक को इनक्रीस करोगे दूसरा डिक्रीज। अगर दूसरा डिक्रीज
तो दूसरा वाला इनक्रीज हो जाएगा। ठीक हो गया? अब दूसरा कन्वेक्स टू द ओरिजिन। जो आइसोकॉन्ट है वो कन्वेक्स टू द ओरिजिन है।
इसका मतलब यह है कि जो मार्जिनल रेट ऑफ़ टेक्निकल सब्स्टट्यूशन है वो यहां पे क्या कर रहा है? डिमिनिश कर रहा है।
इसका क्या मतलब है? एज यू सब्सीट्यूट वन मोर लेबर फॉर कैपिटल। अब यहां पे क्या कर रहे हो? मशीनरीज को कम कर रहे हो। लेबर को
बढ़ा रहे हो। मशीनरीज को कम कर रहे हो, लेबर को बढ़ा रहे हो। जैसेजैसे आप लेबर को सब्सीट्यूट करोगे कैपिटल के लिए यही कर
रहे हो ना? मशीनरीज को कम उनकी जगह पे लेबर इस्तेमाल कर रहे हो। इट बिकम्स इंक्रीजिंगली डिफिकल्ट टू रिप्लेस द
रिमेनिंग कैपिटल। यह आपके लिए डिफिकल्ट होता जाएगा। यार मशीनरीज जो काम करेंगी वह तो लेबर नहीं कर रहे। यहां पर आप मशीनरीज
घटा रहे हो और लेबर बढ़ा रहे हो। मशीनरीज घटा रहे हो, लेबर बढ़ा रहे हो, तो यह आपके लिए डिफिकल्ट हो रहा है टू रिप्लेस मशीनरी
विद कैपिटल। यू नीड मोर एंड मोर लेबर टू रिप्लेस ईच सब्सकुएंट यूनिट ऑफ़ कैपिटल। तो, इस वजह से
जो मार्जिनल रेट ऑफ़ टेक्निकल सब्स्टट्यूशन है, यह डिक्रीज होता है। जैसे आप यहां पे देखो। अब यहां पे स्लोप ऑफ़ आइसोकाउंट क्या
है? यही है मार्जिनल रेट ऑफ़ टेक्निकल सब्स्टट्यूशन। जरा मुझे बताओ कैसे हम निकालते हैं स्लोप?
किसी भी लाइन का अगर आपको स्लोप निकालना है तो सिंपल आपने चेंज देखना है। तो यहां पे चेंज यानी चेंज इन कैपिटल अपॉन यहां पे
चेंज यानी चेंज इन लेबर। मैंने कोई फार्मूला यहां पे नहीं लिखा था। आपने खुद ही मुझे बता दिया भाई चेंज ही तो हम
निकालते हैं। ठीक है ना? किसी भी लाइन का स्लोप निकालना है तो चेंज। यहां पे कितना चेंज हो रहा है? 30 - 22 अपॉन यहां पर
कितना चेंज हो रहा है? 4 - 2 दैट इज थोड़ा सा इसको
तो ये आपके पास आएगा 8 / 2 दैट इज़ 4 ठीक है? यहां पे देखो कितना चेंज हो रहा है? 22 - 16 अप यहां पर कितना चेंज हो रहा है?
दो लेबर बढ़ रहे हैं। यानी 6 - 4 यहां पे आएगा 6 / 2 दैट इज थ्री। तो कंटीन्यूअसली जो आपका स्लोप है वो डिक्रीज हो रहा है।
यानी मार्जिनल रेट ऑफ़ टेक्निकल सब्स्टट्यूशन क्या कर रहा है? डिमिनिश कर रहा है।
अब देखो मार्जिनल रेट ऑफ टेक्निकल सब्सिट्यूशन ऑलरेडी हमने पढ़ा कि चेंज इन कैपिटल अपॉन चेंज इन लेबर। ये होता है
इक्वल मार्जिनल प्रोडक्ट ऑफ लेबर यानी जितनी एडिशनल प्रोडक्शन करता है लेबर डिवाइडेड बाय जितनी एडिशनल प्रोडक्शन करता
है कैपिटल। ठीक हो गया? अब यहां पर आमतौर पर जो मार्जिनल रेट ऑफ टेक्निकल सब्स्टट्यूशन है वो डिमिनिश कर
रहा है और हमारे पास इस तरह की आइसोकॉन्ट है। अगर आपके पास ये पूछा जाए बताओ भाई अगर ये कांस्टेंट होगा तो उस केस में
आइसोकॉन्ट की शेप कैसी होगी? तो फिर वो स्ट्रेट लाइन होगी। अगर ये इनक्रीस करेगा जो मार्जिनल रेट ऑफ़
टेक्निकल सब्स्टट्यूशन है ये इनक्रीस करेगा। फिर होगी ये कॉनकेव टू द ओरिजिन। हमारे पास पीछे क्या था? जो यह है यह है
कन्वेक्स टू द ओरिजिन। लेकिन जब इसका उलट करेगा यानी मार्जिनल रेट ऑफ़ टेक्निकल सब्स्टट्यूशन अब बढ़ रहा है इंक्रीजिंग फिर
होगी ये कॉनकेव टू देयर ओरिजिन। उसके बाद तीसरी प्रॉपर्टी नॉन इंटरसेक्शन ऑफ़ आइसोकॉट। अब यहां पर जो आइसोकॉट है ना
अगर हम फोर्थ प्रॉपर्टी को देखेंगे हायर आइसोकांट हायर लेवल ऑफ आउटपुट लोअर आइसोकाउंट लोअर लेवल ऑफ़ आउटपुट यानी हर एक
आइसोकॉन्ट पे अपना अपना प्रोडक्शन है यहां पे मान के चलो 300 है इस वाली आइसोकाउंट पे 400 है इस वाली पे है 500 इस वाली पे
600 अब मुझे बताओ ये दो अगर मिलेंगी तो इस पॉइंट पे फिर दोनों प्रोडक्शन इक्वल होनी चाहिए
यहां पर यह वाली आइसोक 300 बना रही है बैग्स। यह वाली बना रही है 100। तो यहां पर फिर बराबर कैसे हो गया? यहां पे या तो
300 होना चाहिए या तो 100 होना चाहिए। यानी आइसो्स आपस में कट नहीं करती हैं। और ना ही ये x एक्सिस को टच करती है ना y
एक्सिस को। क्योंकि हमने यह अस्यूम किया है कि हम दोनों को इस्तेमाल करेंगे साथ में। हम कुछ कैपिटल भी इस्तेमाल कर रहे
हैं। कुछ लेबर भी इस्तेमाल कर रहे हैं। अब इस पॉइंट पे हमारे पास लेबर जीरो है। तो लेबर इस्तेमाल तो हम कर रहे हैं ना। इस
पॉइंट पे कैपिटल जीरो है। लेकिन हमें लेबर भी इस्तेमाल करना है और कैपिटल भी इस्तेमाल करना है।
अब हम आते हैं लॉ ऑफ़ रिटर्न टू स्केल पे। लॉ ऑफ रिटर्न टू स्केल इज अ लॉन्ग रन प्रोडक्शन कासेप्ट। जो लॉ ऑफ रिटर्न टू
स्केल है यह लॉन्ग रन प्रोडक्शन कांसेप्ट है जो एक्सप्लेन करता है हाउ आउटपुट चेंजेस आउटपुट कैसे चेंज होता है व्हेन ऑल
फैक्टर्स ऑफ प्रोडक्शन आर इनक्रीज्ड साइमलटेनियसली। यानी जब हम स्केल ही इनक्रीस करेंगे यानी एक मशीनरी उसके साथ
कुछ लेबर। फिर दूसरी मशीनरी उसके साथ कुछ लेबर। जब हम स्केल ही इनक्रीस करेंगे तो हमारे पास जो आउटपुट है उसके ऊपर क्या
फर्क पड़ेगा वो कौन स्टडी करता है लॉ ऑफ़ रिटर्न टू स्केल एजम्पशनंस क्या है ऑल फैक्टर्स ऑफ़ प्रोडक्शन वेरिएबल है देयर इज
नो चेंज इन टेक्नोलॉजी हमारे पास परफेक्ट कंपटीशन है मार्केट के अंदर क्या है परफेक्ट कंपटीशन है परफेक्ट कंपटीशन मतलब
एक ऐसी मार्केट सिचुएशन जहां पे लार्ज नंबर ऑफ बाय र्स हो, खरीदने वाले बहुत हो, बेचने वाले बहुत हो और जो प्रोडक्ट वो बेच
रहे हैं ना वो होमोजनियस है। सेम है। जब हम वेरियस फॉर्म्स ऑफ मार्केट पढ़ेंगे तब हम इसको डिटेल में पढ़ेंगे। अभी सिर्फ इतना
ही कांसेप्ट याद रखो। फिर आउटपुट आर रिटर्न्स आर मेजर इन फिजिकल क्वांटिटीज। जो आउटपुट बन रहा है ना इसको हम किसी
फिजिकल क्वांटिटीज़ में मेजर करते हैं। अब हमारे पास जो लॉ ऑफ़ रिटर्न टू स्केल है इसके तीन फेसेस हैं। बहुत आसान है। फर्स्ट
फज़ इज़ इंक्रीजिंग रिटर्न टू स्केल। दूसरा हमारे पास है कास्टेंट रिटर्न टू स्केल। तीसरा हमारे पास है डिमिनिशिंग रिटर्न टू
स्केल। अब पहले में क्या होता है? इफ ऑल इनपुट्स आर इंक्रीज्ड बाय 1%। अगर आप अपने इनपुट्स को इनक्रीस करोगे 1% आउटपुट
इनक्रीस होता है लेकिन मोर देन 1% यानी इनपुट इनक्रीस आपने किया 1% और जो आउटपुट है वो निकला 5%
जितना आपने इनपुट इनक्रीस किया उससे कई गुना ज्यादा आउटपुट निकला मतलब इंक्रीजिंग रिटर्न उसके कास्टेंट मतलब इन दिस केस इफ
ऑल ऑल इनपुट्स आर इनक्रीज्ड बाय 1% द आउटपुट इनक्रीसेस एग्जजेक्टली बाय 1% आपने इनपुट इनक्रीस किया 1% आउटपुट भी बढ़ा
लेकिन कितना सिर्फ 1% आपने इनपुट इनक्रीस किया 2% आउटपुट भी बढ़ा 2% जितना इनपुट उतना आउटपुट इसको हम कहते हैं होमोजनियस
प्रोडक्शन फंक्शन भी कास्टेंट रिटर्न उस स्केल को हो या होमोजनियस प्रोडक्शन फंक्शन दोनों एक ही कह है डिमिनिशिंग
रिटर्न टू स्केल इफ ऑल द इनपुट्स आर इंक्रीज्ड बाय 1% आउटपुट इंक्रीसेस लेस देन 1% अब यहां पे क्या हो रहा है आपने
इनपुट बढ़ाया 1% आउटपुट भी बढ़ा यहां पे तीनों में बढ़ता है लेकिन कितना 0.2% या फॉर एग्जांपल आपने इनपुट बढ़ा दिया 10%
आउटपुट भी इनक्रीस हुआ लेकिन सिर्फ 5% जितना आपने इनपुट इनक्रीस किया उतना आउटपुट पुट इनक्रीस नहीं हुआ। थोड़ा अगर
हम ग्राफिकली भी समझेंगे जब तक ना मैं ग्राफ से समझाता हूं। मुझे मजा ही नहीं आता है। ये तो आपको अच्छे से समझ आ गया
ना? थोड़ा सा ग्राफिकली भी समझ लो। अब देख लो ये आपके पास है कैपिटल। और ये आपके पास है लेबर। यानी यह जो आपके
पास आइसोकाउंट है यहां पर तीन लेबर और तीन मशीनरीज आप इस्तेमाल कर रहे हो और 100 बैग्स आप आराम से बढ़ा सकते हो। फिर आपने
क्या किया? तीन से बढ़ा के पांच कर दिया। यानी दो मशीनरीज बढ़ा दी और यहां पे आपने दो लेबर बढ़ा दिए। दो आपने लेबर बढ़ा
दिया। ओवरऑल जो प्रोडक्शन है अब आपकी हो गई 200 बैग्स। यानी प्रोडक्शन में इनक्रीस कितना हुआ? 100 बैग्स का।
अब यह जो 100 बैग्स हैं, यह बढ़ा सिर्फ दो मशीनरी और दो लेबर की वजह से। पहले आपको रिक्वायरमेंट थी तीन लेबर, तीन तीन लेबर्स
और तीन मशीनरीज की। लेकिन अब जो है सिर्फ आपने दो लेबर बढ़ा दिए। लेकिन उसकी वजह से आपका 100 यूनिट बैग्स बढ़ा। फिर अगर आप
आगे देखोगे फिर यहां से आपने सिर्फ एक मशीनरी बढ़ाई। यहां पर आपने सिर्फ एक लेबर बढ़ा दिया।
टोटल प्रोडक्शन हो गई 300। यानी यहां पर आपके पास फिर 100 बैग्स बढ़े। यानी एक मशीनरी एक लेबर के बढ़ाने की वजह से आपके
100 बैग्स की प्रोडक्शन बढ़ी। जहां पे पहले आपको तीन-तीन लगाने पड़ते थे। फिर आपको दो लेबर, दो मशीनरी लगानी पड़ती थी।
अब सिर्फ एक लेबर और एक मशीनरी की वजह से आपका काम हो रहा है। तो यह हो गया इनक्रीजिंग रिटर्न टू स्केल। ठीक है? यहां
पे जो पीछे वाला हिस्सा है OA यह बड़ा है आगे वाले हिस्से से और आगे वाले से बड़ा है। ये अब यहां पे आ जाओ।
यहां पे आपको दो मशीनरी और दो कैपिटल आपने बनाए 100। ठीक है? फिर आपने दो मशीनरीज बढ़ा दी और दो कैपिटल बढ़ा दिए। और जो आपका
आउटपुट है वह हो गया 200 बैग। यानी दो लेबर और दो कैपिटल के बढ़ाने की वजह से 100 यूनिट्स ज्यादा प्रोडक्शन होने लगे।
यानी पहले भी उतना था अभी भी उतना है। फिर यहां पे आपने बढ़ाया दो लेबर्स दो कैपिटल्स और बढ़ा लिए। दो लेबर्स और बढ़ा
लिए। तो यहां पे भी 100 बैग्स की एडिशनल प्रोडक्शन आपको होने लगी। यानी यहां पे तीनों हिस्से आपके बराबर है। जितना आप
इनपुट बढ़ा रहे हो, इतना आप आउटपुट आपका निकल रहा है। दिस इज कास्टेंट रिटर्न टू स्किप। अब यहां पे आ जाओ।
यहां पे आपने दो लेबर्स और दो मशीनरीज लगाई और 100 बैग बना दिए। फिर आपने सोचा मैं बढ़ाता हूं। आपने कितना बढ़ाया? पांच।
यानी प्लस कर दिया आपने तीन मशीनरी। यहां आपने कर दिया प्लस तीन लेबर्स। आपका जो आउटपुट है सिर्फ 100 बैग्स बढ़ा।
यानी तीन मशीनरीज आपने बढ़ाई, तीन लेबर बढ़ाई लेकिन अभी भी बना सिर्फ 100 जो कि आप ऑलरेडी दोद से भी बना रहे थे। यानी अब
आप तीन-तीन से ही उतना बना रहे हो। तो यह क्या हो गया? डिमिनिशिंग रिटर्न। अब यहां पर देखो आपने फोर मशीनरी इनक्रीस की। यहां
तक और यहां पर भी आपने फोर लेबर इनक्रीस कर दी।
लेकिन अगर आप देखोगे प्रोडक्शन आपके पास सिर्फ 100 बैग्स की बड़ी जो आप ऑलरेडी दोद मशीन से बना रहे थे अब आप वो चारचार से
बना रहे हो यानी यहां पे क्या है डिमिनिशिंग रिटर्न टू स्किल जितना आप इनपुट बढ़ा रहे हो आउटपुट उतना नहीं बढ़
रहा है तो दिस इज द लॉ ऑफ़ रिटर्न टू स्केल फिर हमारे पास है प्रोड्यूसर्स इक्विलिब्रियम प्रोड्यूसर्स इक्विलिब्रियम
किसको हम कहते हैं? प्रोड्यूसर इक्विलिब्रियम इज अ सिचुएशन वेयर प्रोड्यूसर मैक्सिमाइज ह आउटपुट।
प्रोड्यूसर इक्विलिब्रियम वो सिचुएशन है, वो स्टेज है जहां पे एक प्रोड्यूसर अपने आउटपुट को मैक्सिमाइज करें। इट इज आल्सो
नोन एस ऑप्टिमम कॉम्बिनेशन ऑफ फैक्टर्स ऑफ प्रोडक्शन। जो प्रोड्यूसर है वह कॉम्बिनेशन ऑफ फैक्टर्स ऑफ प्रोडक्शन
इस्तेमाल करेगा जहां पर उसको मैक्सिमम आउटपुट निकले और लीस्ट कॉस्ट बढ़े। यानी वो मशीनरी नंबर ऑफ मशीनरीज वो उतनी इस्तेमाल
करेगा। नंबर ऑफ लेबर इनके साथ उतने अटैच करेगा जहां पे उसको कम से कम कॉस्ट पड़े एंड मैक्सिमम से मैक्सिमम आउटपुट हो जाए।
तो इस सिटीज को हम कहते हैं प्रोड्यूसर्स इक्विलिब्रियम। इसके लिए एक छोटा सा यहां पर हम कांसेप्ट सीखेंगे। उसके बाद
प्रोड्यूसर इक्विलिब्रियम पढ़ेंगे। आइसो कॉस्ट लाइन। आइसो कॉस्ट लाइन क्या है? रिप्रेजेंट ऑल पॉसिबल कॉम्बिनेशन ऑफ टू
फैक्टर्स ऑफ़ प्रोडक्शन टू फैक्टर्स ऑफ़ प्रोडक्शन दैट अ फर्म कैन परचेस। सिंपल जिस तरह से बजट लाइन है जो आपके पास आइसो
कॉस्ट लाइन है यह शो करती है कॉम्बिनेशन ऑफ टू फैक्टर्स ऑफ प्रोडक्शन जिसको आप खरीद सकते हो यानी
यह आपके पास लाइन है यानी एक फर्म की सिर्फ इतनी बजट है। यहां से वह आगे जा ही नहीं सकती।
यहां पे उसने जीरो लेबर और चार मशीनरीज खरीदी। यहां पर चार लेबर और चार मशीनरी खरीदी। यहां पर छ लेबर और दो मशीनरी
खरीदी। ठीक है? जो आपके पास आइसो कॉस्ट लाइन है यह शो करती है फिक्स या टोटल बजट ऑफ एक फर्म। एक फर्म के अंदर कितने
फाइनशियल रिसोर्सेज है ना वो हमें कौन बताता है? आइसो कॉस्ट लाइन। आइसो कॉस्ट लाइन गिव्स इन ऑन फैक्टर प्राइस। यह हमें
फैक्टर की प्राइस बताती है। यानी आपको लेबर कितना का पड़ा? आपको कैपिटल कितना का पड़ा? एंड फाइनशियल रिसोर्सेज ऑफ द फर्म।
और एक फर्म के फाइनेंशियल रिसोर्सेज कितने हैं? उनके पास पैसे कितने हैं? जितने वो पैसे होंगे उसी हिसाब से वो मशीनरीज एंड
लेबर को खरीदेंगे। ठीक है ना? इसको हम आइसो इनकम लाइन आइसो एक्सपेंडिचर या टोटल आउटलेट करो भी कहते हैं। नाउ कंडीशंस फॉर
प्रोड्यूसर्स इक्विलिब्रियम क्या-क्या कंडीशंस है देखो हमारे पास है आइसोकॉन्ट करो। फिर हमारे पास है आइसो कॉस्ट लाइन।
अब जो आइसोकॉन्ट है ये हमें क्या बताती है? कॉम्बिनेशन ऑफ टू गुड्स जो क्या करते हैं? प्रोड्यूसेस दी सेम
लेवल ऑफ आउटपुट। ठीक है? जैसे यहां पे एक पॉइंट है A, यहां पे दूसरा पॉइंट है B, यहां पे तीसरा पॉइंट है C। तो, हर एक
कॉम्बिनेशन सेम लेवल ऑफ़ आउटपुट पे। और आइसोकास्ट ये शो करती है डिफरेंट कॉम्बिनेशन ऑफ़ टू फैक्टर्स ऑफ़ प्रोडक्शन
जो हम खरीद सकते हैं। ठीक है? अब यहां पर पहली कंडीशन ऑफ इक्विलिब्रियम है मार्जिनल रेट ऑफ टेक्निकल सब्स्टट्यूशन यानी जो
स्लोप है आइसोकॉन्ट का वो इक्वल होना चाहिए स्लोप ऑफ आइसोस्ट लाइन। ठीक है? दूसरी कंडीशन है एट द पॉइंट ऑफ टेंजेंसी
यानी जो आइसो कॉस्ट है एंड आइसोको है ये होनी चाहिए टेंजेंट और इस पॉइंट पे जो कर्व है वो होनी चाहिए कन्वेक्स टू दी
ओरिजिन तो ये आपके पास दो कंडीशन है। यानी यह जो पॉइंट E है, इस पॉइंट पे दोनों कर्व्स का जो स्लोप है
वह है इक्वल और इस पॉइंट पे टेंजेंट भी है एंड कन्वेक्स टू देयर ओरिजिन। तो ये है कंडीशन
फॉर प्रोड्यूसर इक्विम। सिर्फ दो आपको याद रखनी है तो आराम से आपको हो जाएगा। नेक्स्ट हमारे पास है कॉप डॉगस प्रोडक्शन
फंक्शन। यहां से भी क्वेश्चन आने के बहुत ज्यादा चांसेस है। यह जो प्रोडक्शन फंक्शन था इसको डेवलप किया है चार्ल्स डब्ल्यू
कॉब ने एंड पॉल एच डॉगस ने। इन्होंने जो प्रोडक्शन फंक्शन दिया वो दिया लीनियर होमोजनियस प्रोडक्शन फंक्शन। व्हिच
इम्लाइस दैट द फैक्टर्स ऑफ प्रोडक्शन कैन बी सब्सीट्यूटेड फॉर वन अनदर अप टू सर्टेन एक्सटेंट। पहला पॉइंट आपने यह याद रखना
है। कॉप डॉगस प्रोडक्शन फंक्शन क्या है? लीनियर होमोजेनस प्रोडक्शन फंक्शन। और इन्होंने कहा जो हमारे पास फैक्टर्स ऑफ
प्रोडक्शन है इनको हम एक दूसरे की जगह पे सब्सीट्यूट करते हैं। लेकिन किसी सर्टेन एक्सटेंट तक ही वहां से आगे इनको हम
सब्स्टट्यूट नहीं कर सकते। अब जो लीनियर होमोजेनियस प्रोडक्शन फंक्शन है, इसको हम कहते हैं प्रोडक्शन फंक्शन विद कास्टेंट
रिटर्न टू स्केल। यह भी इंपॉर्टेंट पॉइंट है। फिर कॉब डॉगस प्रोडक्शन फंक्शन कंसीडर्ड ओनली टू फैक्टर्स लेबर एंड
कैपिटल। इन्होंने सिर्फ दो फैक्टर्स कंसीडर किए। कौन? लेबर एंड कैपिटल। प्रोडक्शन टेक्स प्लेस ओनली व्हेन बोथ
फैक्टर्स आर एंप्ल्लाड। इन्होंने कहा प्रोडक्शन तब होगी जब हम इन दो फैक्टर्स को एंप्ल्लाई करेंगे। यह हमारे पास हो
गया। फिर फिर उन्होंने कहा जो लेबर है वह कंट्रीब्यूट करता है 34 ऑफ प्रोडक्शन यानी ज्यादा एंड कैपिटल कंट्रीब्यूट्स ओनली 1/4
ऑफ प्रोडक्शन। ये भी इंपॉर्टेंट कांसेप्ट है। कभी कबभार ये पूछा जाता है द इलास्टिसिटी ऑफ़ सब्स्टट्यूशन बिटवीन द
फैक्टर्स इज इक्वल टू वन। और जो उनके बीच में इलास्टिसिटी ऑफ़ सब्स्टट्यूशन है, वह क्या है? यूनिटरी है यानी इक्वल टू वन है।
फिर हमारे पास जो स्टैंडर्ड फार्मूला कॉब डॉगस ने दिया वो है q = a एल की पावर अलफा k की पावर बीटा। q आपके पास आउटपुट है। द
टोटल क्वांटिटी ऑफ़ गुड्स प्रोड्यूस। फिर एल आपके पास है लेबर। क्वांटिटी ऑफ़ लेबर। के आपके पास है कैपिटल। फिर जो ए है ए है
द कास्टेंट रिप्रेजेंटिंग टेक्नोलॉजी एंड एफिशिएंसी। ए क्या रिप्रेजेंट करता है? टेक्नोलॉजी एंड एफिशिएंसी। फिर आपके पास
जो अल्फा एंड बीटा है ये शो करते हैं आउटपुट इलास्टिसिटीज। क्या मतलब इसका? पॉजिटिव कांस्टेंट बिटवीन जीरो एंड वन दैट
डिटरमाइन द रिस्पांसिवस आउटपुट टू चेंज इन लेबर एंड कैपिटल। यानी अल्फा शो करता है आउटपुट कितना इनक्रीस होता है। आउटपुट
कितना चेंज होता है जब हम लेबर को चेंज करते हैं। और बीटा शो करता है कैपिटल सॉरी आउटपुट कितना चेंज होता है जब हम कैपिटल
को चेंज करते हैं। ठीक है? अल्फा से हमें पता चलता है लेबर इनक्रीस करने से आउटपुट में कितना इनक्रीस हुआ और बीटा हमें बताता
है जब हम मशीनरी को इनक्रीस करेंगे तो आउटपुट कितना इनक्रीस हुआ जितनी बड़ी वैल्यू होगी उतना ही वो जो फैक्टर ऑफ
प्रोडक्शन है वो इंपॉर्टेंट है। अगर अल्फा की वैल्यू बड़ी होगी मतलब यहां पे लेबर का ज्यादा कंट्रीब्यूशन है। लेबर ज्यादा
इंपॉर्टेंट है। अगर बीटा की वैल्यू ज़्यादा होगी मतलब बीटा का ज़्यादा कंट्रीब्यूशन है यानी कैपिटल का ज़्यादा कंट्रीब्यूशन है।
यह ज़्यादा इंपॉर्टेंट है। फिर हमारे पास जो फैक्टर्स ऑफ़ प्रोडक्शन है N की इंटेंसी को मेजर करते हैं बीटा /
अल्फा से। मतलब कौन कितना इंपॉर्टेंट है। देखो यह है आपके पास अगर इसकी वैल्यू ज्यादा है मतलब कैपिटल ज्यादा इंपॉर्टेंट
है। अगर इसकी वैल्यू ज्यादा है मतलब लेबर ज्यादा इंपॉर्टेंट है। अब इसका देखो 10 / 2 दूसरा है 2 / 10
यहां पे क्या आएगा? 5 यानी ग्रेटर देन वन। यहां पे आएगा 0.2 यानी लेस देन वन। तो यहां से आपने एक चीज को ऑब्जर्व किया। ऊपर
से अगर वैल्यू बड़ी होगी नीचे वाले से तो वैल्यू हो जाती है ग्रेटर देन वन। अगर ऊपर वाले की वैल्यू कम है, नीचे की ज़्यादा है
तो फिर हो जाती है लेस देन वन। अब जब वैल्यू होगी ग्रेटर देन वन। इसका मतलब जो बीटा है यह ज्यादा है और यह कम है। मतलब
कैपिटल इज मोरेंट देन लेबर। ठीक है? यानी कैपिटल इंटेंसिव प्रोडक्शन है। ज्यादा हम मशीनरी इस्तेमाल कर रहे हैं लेबर कम। जब
ये लेस दैन होगा। यहां पे लेस दैन था। मतलब नीचे वाला बड़ा है ऊपर वाले से। मतलब लेबर इज मोरेंट देन कैपिटल। यहां यहां पर
लेबर इंटेंसिव टेक्निक जब दोनों बराबर है 10/10 तभी तो वन आएगा ना दोनों बराबर है मतलब बोथ आर इक्वलीेंट
ठीक है फिर अब जो रिटर्न टू स्केल है ये अब हमें पता चलता है अलफा + बीटा से अगर अलफा + बीटा = 1 तो कांस्टेंट रिटर्न टू
स्केल अगर अलफा + बीटा > 1 इंक्रीजिंग रिटर्न टू स्केल अगर अलफा + बीटा लेस देन वन तो डिमिनिशिंग
रिटर्न टू स्केल तो यह था आपके पास कॉब डॉगस प्रोडक्शन फंक्शन तो इसी कांसेप्ट के साथ आज का हमारा लेक्चर हो जाता है खत्म
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दीर्घकाल में उत्पादन के सभी साधन परिवर्तनशील होते हैं, जैसे मशीनरी, भूमि और श्रम। इसके विपरीत, अल्पकाल में कम से कम एक साधन स्थिर रहता है। दीर्घकालीन फलन पैमाने के प्रतिफल का विश्लेषण करता है, जबकि अल्पकालीन फलन परिवर्तनशील साधनों के अनुपात पर केंद्रित होता है।
सम-उत्पाद वक्र के प्रमुख गुण हैं: इसका ढलान ऋणात्मक होता है, यह मूल बिंदु की ओर उत्तल होता है (ह्रासमान MRTS के कारण), ये वक्र एक-दूसरे को नहीं काटते, उच्च स्तर का उत्पादन मूल बिंदु से दूर होता है, और ये अक्षों को स्पर्श नहीं करते। यह उपभोक्ता सिद्धांत के तटस्थता वक्र के समान है, लेकिन यह उत्पादन सिद्धांत से संबंधित है और दो साधनों के संयोजन को दर्शाता है।
पैमाने के प्रतिफल की तीन अवस्थाएं हैं: वर्धमान प्रतिफल (जहां उत्पादन आनुपातिक रूप से अधिक बढ़ता है), स्थिर प्रतिफल (जहां उत्पादन आनुपातिक रूप से बढ़ता है), और ह्रासमान प्रतिफल (जहां उत्पादन आनुपातिक रूप से कम बढ़ता है)। सम-उत्पाद वक्रों पर, वर्धमान प्रतिफल में वक्रों के बीच की दूरी घटती है, स्थिर प्रतिफल में समान रहती है, और ह्रासमान प्रतिफल में बढ़ती है।
उत्पादक संतुलन के लिए दो शर्तें हैं: पहली, सम-उत्पाद वक्र का ढलान (MRTS) सम-लागत रेखा के ढलान के बराबर होना चाहिए। दूसरी, स्पर्श बिंदु पर सम-उत्पाद वक्र मूल बिंदु की ओर उत्तल होना चाहिए। सम-लागत रेखा एक निश्चित बजट में दो साधनों के सभी संभावित संयोजनों को दर्शाती है, जिससे उत्पादक न्यूनतम लागत पर अधिकतम उत्पादन प्राप्त कर सकता है।
कॉब-डगलस उत्पादन फलन का मानक सूत्र q = A · L^α · K^β है, जहां q कुल उत्पादन, L श्रम, K पूंजी, और A प्रौद्योगिकी स्थिरांक है। α श्रम में परिवर्तन के प्रति उत्पादन की लोच दर्शाता है, जबकि β पूंजी में परिवर्तन के प्रति उत्पादन की लोच दर्शाता है। ये दोनों 0 और 1 के बीच धनात्मक स्थिरांक होते हैं।
α + β के योग से पैमाने के प्रतिफल का निर्धारण इस प्रकार किया जाता है: यदि α + β = 1, तो स्थिर प्रतिफल होता है; यदि α + β > 1, तो वर्धमान प्रतिफल होता है; और यदि α + β < 1, तो ह्रासमान प्रतिफल होता है। यह कॉब-डगलस फलन को पैमाने के प्रतिफल के विश्लेषण के लिए उपयोगी बनाता है।
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