द्रव यांत्रिकी के गुण: पूरा चैप्टर वन शॉट समझें (बर्नौली सिद्धांत, श्यानता, पृष्ठ तनाव)
द्रव (Fluid) क्या है?
- परिभाषा: कोई भी पदार्थ जो बह सकता है और जिसका कोई निश्चित आकार नहीं होता, उसे द्रव कहते हैं।
- उदाहरण: द्रव (लिक्विड) और गैसें (गैसेस) दोनों द्रव हैं।
- मुख्य गुण:
- इनका अपना कोई आकार नहीं होता; ये जिस बर्तन में रखे जाते हैं उसी का आकार ले लेते हैं।
- तनाव (स्ट्रेस) लगाने पर ये आसानी से विकृत (डिफॉर्म) हो जाते हैं।
अध्याय के तीन मुख्य भाग
- हाइड्रोस्टैटिक्स (Hydrostatics): स्थिर द्रव का अध्ययन।
- हाइड्रोडायनैमिक्स (Hydrodynamics): बहते हुए द्रव का अध्ययन।
- पृष्ठ तनाव और श्यानता (Surface Tension and Viscosity): द्रव के पृष्ठीय गुण।
हाइड्रोस्टैटिक्स (स्थिर द्रव)
1. दाब (Pressure)
- परिभाषा: प्रति एकांक क्षेत्रफल पर लगने वाला अभिलंब बल।
दाब (P) = फोर्स (F) / क्षेत्रफल (A)
- मात्रक (यूनिट): पास्कल (Pa या N/m²)
- अन्य मात्रक:
- 1 एटीएम (वायुमंडलीय दाब): 1.013 × 10⁵ Pa (याद रखना जरूरी)
- टॉर (Torr): 1 Torr = 1 mm Hg ≈ 133 Pa
- बार (Bar): 1 Bar = 10⁵ Pa
2. घनत्व (Density) और आपेक्षिक घनत्व (Relative Density)
- घनत्व (ρ):
द्रव्यमान / आयतन(एक अदिश राशि) - पानी का घनत्व: 10³ kg/m³ या 1 g/cm³ (4°C पर अधिकतम)
- पारे (मरकरी) का घनत्व: 13,600 kg/m³
- आपेक्षिक घनत्व / विशिष्ट गुरुत्व (Specific Gravity):
आपेक्षिक घनत्व = पदार्थ का घनत्व / 4°C पर पानी का घनत्व
3. दाब में गहराई के साथ परिवर्तन (Variation of Pressure with Depth)
- यदि तरल की सतह से h गहराई पर दाब P है, तो सतह के दाब (P₀) के सापेक्ष:
P = P₀ + ρgh- जहां ρ = तरल का घनत्व, g = गुरुत्वीय त्वरण
- महत्वपूर्ण: दाब केवल तरल स्तंभ की ऊंचाई पर निर्भर करता है, बर्तन के आकार पर नहीं। इसे हाइड्रोस्टैटिक पैराडॉक्स कहते हैं।
4. दाब के प्रकार (Types of Pressure)
- वायुमंडलीय दाब (Atmospheric Pressure - Pₐ): वायुमंडल द्वारा लगाया गया दाब।
- गेज दाब (Gauge Pressure):
गेज दाब = निरपेक्ष दाब - वायुमंडलीय दाब - निरपेक्ष दाब (Absolute Pressure):
निरपेक्ष दाब = वायुमंडलीय दाब + गेज दाब
5. बैरोमीटर (Barometer) और मैनोमीटर (Manometer)
- बैरोमीटर: वायुमंडलीय दाब मापने का उपकरण।
- टॉरिसेली का प्रयोग: इसमें पारे का उपयोग किया जाता है। पारे के स्तंभ की सामान्य ऊंचाई 76 cm होती है।
- पारा क्यों? (a) उच्च घनत्व, जिससे स्तंभ की ऊंचाई कम (76 cm) रहती है। पानी से यह 10 m ऊंचा होता। (b) चमकीला, जिससे पढ़ना आसान है। (c) कांच को गीला नहीं करता, जिससे सटीक माप मिलती है।
- मैनोमीटर: गैस का दाब मापने का उपकरण।
- सिद्धांत: U-नली में दोनों सिरों पर दाब के अंतर (ρgh) से गैस का दाब ज्ञात किया जाता है।
P_gas = Pₐ + ρgh
6. पास्कल का नियम (Pascal's Law) और हाइड्रोलिक मशीनें
- पास्कल का नियम: "किसी बंद द्रव में एक स्थान पर लगाया गया दाब द्रव के प्रत्येक भाग में समान रूप से संचारित होता है।"
- हाइड्रोलिक लिफ्ट/ब्रेक:
- यह पास्कल के नियम पर कार्य करती हैं।
- सिद्धांत:
F₁/A₁ = F₂/A₂अर्थातF₂ = F₁(A₂/A₁) - इसका अर्थ है कि एक छोटे क्षेत्र पर लगाया गया छोटा बल, बड़े क्षेत्र पर एक बहुत बड़ा बल उत्पन्न कर सकता है।
हाइड्रोलिक मशीन पर आधारित प्रश्न (उदाहरण)
प्रश्न: एक सिरिंज का छोटा पिस्टन (एरिया A₁) पर 10 N का बल लगता है और बड़े पिस्टन (एरिया A₂ = 9A₁) पर कितना बल लगेगा?
- हल:
- पास्कल के नियम से:
F₂ = F₁(A₂/A₁) F₂ = 10N × (9A₁/A₁) = 90 N
- पास्कल के नियम से:
हाइड्रोडायनैमिक्स (बहता द्रव)
- सुवीही प्रवाह (Streamline Flow): जब द्रव की प्रत्येक परत एक निश्चित पथ पर बिना आपस में मिले बहती है।
- असुवीही प्रवाह (Turbulent Flow): जब द्रव की परतें आपस में मिल जाती हैं।
- श्यानता (Viscosity): द्रव में आंतरिक घर्षण का गुण, जो उसकी परतों के बीच आपेक्षिक गति का विरोध करता है। इस विषय पर अधिक जानकारी के लिए Mechanical Properties of Fluids: A Comprehensive Guide to Bernoulli's Theorem and Applications देखें।
- बर्नौली का सिद्धांत (Bernoulli's Theorem): किसी असम्पीड्य, अश्यान द्रव के सुवीही प्रवाह में, दाब ऊर्जा, गतिज ऊर्जा और स्थितिज ऊर्जा का योग नियत रहता है।
P + (1/2)ρv² + ρgh = नियतांक
पृष्ठ तनाव (Surface Tension)
- परिभाषा: द्रव की सतह के एकांक क्षेत्रफल को बढ़ाने के लिए आवश्यक कार्य के बराबर पृष्ठीय ऊर्जा।
- कारण: यह द्रव के अणुओं के बीच के आसंजक बलों के कारण होता है, जो सतह को एक खिंची हुई झिल्ली की तरह बना देता है।
- सामान्य उदाहरण: पानी पर बूंदों का गोलाकार होना, कीड़ों का पानी पर चलना।
श्यानता (Viscosity)
- परिभाषा: द्रव का वह गुण जो उसकी विभिन्न परतों के बीच आपेक्षिक गति का विरोध करता है।
- श्यानता का गुणांक (Coefficient of Viscosity - η):
η = श्यान-बल × परतों के बीच की दूरी / (क्षेत्रफल × वेग-प्रवणता)- मात्रक: पॉइज़ (CGS) या N·s/m² (SI)
- स्टोक्स का नियम (Stokes' Law): किसी श्यान द्रव में गोलाकार वस्तु के गिरने पर उस पर लगने वाला श्यान-बल:
F = 6πηrv(जहां r = त्रिज्या, v = वेग)
- सीमांत वेग (Terminal Velocity): जब गुरुत्वाकर्षण बल और श्यान बल एक संतुलन पर आ जाते हैं, तब वस्तु एक स्थिर वेग से गिरती है, जिसे सीमांत वेग कहते हैं।
v_t = [2r²(ρ_s - ρ_f)g] / 9η
व्याख्या: यह संपूर्ण अध्याय द्रवों के स्थैतिक एवं गतिक गुणों को कवर करता है, जो व्यावहारिक अनुप्रयोगों और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत आवश्यक है। यदि आप इस विषय को गहराई से समझना चाहते हैं, तो हमारा केंद्र द्रव्यमान एवं संघट्ट: शून्य से एकल व्याख्यान भी देख सकते हैं।
हाय। मैकेनिकल प्रॉपर्टीज़ ऑफ़ फ्लूइड में प्रॉब्लम आ रही है ना? ऐसा लग रहा है ना कि इस चैप्टर के अंदर कितनी सारी
डेरिवेशंस हैं। कितने सारे क्वेश्चंस हैं? ये बर्नोलिस थ्योरम तो समझ नहीं आती। स्टोक्स लॉ को तो छोड़ो। इतनी सारी चीजें
हैं विस्कोसिटी क्या होता है? सरफेस टेंशन क्या होता है? ये सब कैसे हम कवर कर पाएंगे? एग्जाम के अंदर कैसे अच्छे
मार्क्स आ पाएंगे? अरे रुक जाओ यार। व्हाई टू फियर व्हेन पीके भैया इज़ हियर? क्योंकि आज तुम्हारे जो बड़े भैया है ना इस चैप्टर
की सारी प्रॉब्लम का सॉल्यूशन लेकर आ गए हैं। एक ऐसा वन शॉट जिसके अंदर आपको सारी थ्योरी, सारी डेरिवेशंस और सारे क्वेश्चंस
जो कि आपके पेपर के अंदर आ सकते हैं वो हम सब कुछ डिस्कस करेंगे। मैं यहां पर खड़ा हो के डंके की चोट पे बोल सकता हूं कि ये
लेक्चर YouTube का वन ऑफ द बेस्ट लेक्चर होने वाला है। क्योंकि मैंने जितने भी लेक्चर देखे YouTube में कुछ लेक्चर्स में
सिर्फ थ्योरी कराई गई थी। कुछ में क्वेश्चन कराए गए थे। लेकिन मैं तुम्हारे लिए पूरी की पूरी चीजें डिटेल में आज यहां
पर खड़ा हो के कराने वाला हूं। ठीक है? तो आपका जोश मीटर जो है एनर्जी मीटर जो है वो एकदम हाई होना चाहिए। क्योंकि ये जो
चैप्टर जो तुम्हें आज तक समझ नहीं आया वो आज तुम्हें समझ आएगा। ये जितने भी टॉपिक्स हैं ना प्रेशर, पास्कल लॉ, हाइड्रोलिक
मशीन, स्ट्रीमलाइन फ्लोस जिन सुनसुन के आपको घबराहट हो रही है, डर लग रहा है। ये सब कुछ हम डिटेल में पढ़ने वाले हैं। मुझे
पता है यार क्लास 10th की जितनी किताब की मोटाई होती है ना उतना तो क्लास 11th का एक चैप्टर होता है। है ना? चाहे वो रोटेशन
हो, चाहे वो फ्लूइड मैकेनिक्स हो। मुझे पता है क्लास 10थ की साइंस काफी इजी थी। बट यहां पर फिजिक्स थोड़ी सी डिफिकल्ट हो
गई है। बट सही तरीके से अगर तुमने चीजों को समझा ना तो तुम्हें इंटरेस्ट आने लगेगा। जैसे कि आज तुम्हें लेक्चर में
आएगा इंटरेस्ट। चलिए स्टार्ट करते हैं। सबसे पहले व्हाट इज फ्लूइड? अब बहुत सारे बच्चों को तो यही नहीं पता फ्लूइड क्या
होता है। उनको लगता है पानी जो है भैया वही फ्लूइड है। अरे नहीं फ्लूइड का मतलब है जो कि फ्लो कर पाए। बह जाए। कौन बह
सकता है बेटा? पानी भी बह सकता है, वाटर भी बह सकता है, लिक्विड भी बह सकता है और गैसेस भी फ्लो कर सकती हैं। यानी फ्लूइड
सिर्फ लिक्विड नहीं होते। लिक्विड एंड गैसेस आर नोन एज फ्लूइड। तो याद रखना फ्लूइड इज़ अ सब्सटेंस दैट कैन फ्लो एंड डज़
नॉट हैव अ फिक्स्ड शेप। जिसकी खुद की शेप नहीं होती। है ना? खुद की शेप नहीं होती। जहां पर रखोगे उसकी शेप ले लेगा। जैसे कि
क्लास का वो टॉपर है ना? जिनको हम टीचर का चमचा बोलते हैं। वो भी टीचर के हिसाब से अपने रंग रूप बदल लेता है। वैसे भी फ्लूइड
भी क्या करता है? अपने रंग रूप बदल लेता है। जिस कंटेनर में डालोगे उस कंटेनर की शेप भैया ये ले लेता है। उसके अलावा
इंपॉर्टेंट चीज यहां पर क्या है? कि इसके अंदर ना ईजीली डिफॉर्मेशन आ जाती है। अब डिफॉर्मेशन आपको पता होगा पिछला चैप्टर
मैकेनिकल प्रॉपर्टीज ऑफ़ सॉलिड के अंदर मैंने आपको बताया था कि शेप एंड साइज में चेंज आ जाने को हम डिफॉर्मेशन बोलते हैं।
तो इसके अंदर बहुत ईजीली डिफॉर्मेशन आ जाती है। अगर हम इस पे एक छोटी सी स्ट्रेस भी अप्लाई करेंगे। फोर्स भी अप्लाई करेंगे
तो उससे भी इसके अंदर क्या आएगा? डिफॉर्मेशन आ जाएगा। बहुत बढ़िया। अब देखो इस चैप्टर के तीन पोर्शन हैं। है ना? पहला
है हाइड्रोस्टेटिक। फिर आएगा हाइड्रोडायनेमिक्स और लास्ट पोर्शन है सरफेस टेंशन एंड विस्कोसिटी। अब
ये हाइड्रोस्टेटिक स्टैटिक यानी रुका हुआ। इसके अंदर ना हम पढ़ेंगे कि अगर पानी रुका हुआ है, फ्लूइड रुका हुआ है तो क्या-क्या
चीजें हम इसके ऊपर स्टडी कर पाएंगे। यानी हाइड्रोस्टेटिक क्या है? ब्रांच ऑफ दी फिजिक्स दैट डील्स विद दी स्टडी ऑफ़ दी
फ्लूइड एट रेस्ट। जब पानी रुका हुआ है। शुरू में हम ये पढ़ेंगे। उसके बाद जब इसके सारे टॉपिक्स खत्म हो जाएंगे, फिर हम
आएंगे हाइड्रोडायनेमिक्स पे। ये फिजिक्स की वो ब्रांच होती है जो स्टडी करती है जब पानी मूव कर रहा होता है, बह रहा होता है
और लास्ट आता है सरफेस टेंशन विस्कोसिटी। इसको अपन लास्ट में डिस्कस करेंगे। ठीक है? तो इस चैप्टर को इस फ्लो में मैं आपको
पढ़ाने वाला हूं। सबसे पहले हम स्टार्ट करेंगे हाइड्रोस्टेटिक। यानी आपको इमेजिन करके चलना होगा कि पानी भैया रुके हुए
हैं। बट उससे पहले कुछ चीजें आपको समझनी पड़ेंगी कि देखो वैसे तो तुम्हें सॉलिड और फ्लूइड के बीच में डिफरेंसेस ऑलरेडी पता
हैं। लेकिन दो-तीन डिफरेंसेस जो कि तुम्हें याद रखने पड़ेंगे। ध्यान से समझना। सबसे पहली चीज सॉलिड जो होता है उसकी
फिक्स्ड शेप होती है लेकिन फ्लूइड की कोई शेप नहीं होती। इनकी वॉल्यूम क्या होती है? फिक्स्ड होती है। लेकिन फ्लूइड के
अंदर जो लिक्विड होते हैं ना उनकी तो वॉल्यूम फिक्स रहती है बट जो गैस होती हैं उनकी वॉल्यूम कभी भी फिक्स नहीं रहती। ठीक
है जी? अब याद रखना कंप्रेसिबिलिटी यानी जो सॉलिड्स होते हैं वो कंप्रेस नहीं करते। और इस चैप्टर के अंदर हम ये अस्यूम
करके चलेंगे कि ये जो लिक्विड्स होते हैं ना लिक्विड्स ये भी कंप्रेस नहीं होते। यानी लिक्विड को दबाया नहीं जा सकता।
लेकिन जो गैसेस होती हैं उनको तो दबाया जा सकता है। यानी वो इजीली कंप्रेसिबल हैं। ये भी हमें याद रखना पड़ेगा। अगली चीज कैन
रेजिस्ट शियर स्ट्रेस। यानी अगर हम थोड़ी सी भी स्ट्रेस लगाएंगे तो उसको वो रेजिस्ट कर जाएगा। लेकिन जो फ्लूइड होते हैं उनपे
अगर आप थोड़ी सी भी स्ट्रेस लगाओगे तो वो डिफॉर्म हो जाएगा। ये कुछ छोटे-छोटे डिफरेंसेस छोटे-छोटे पॉइंट बस आपको पता
होने चाहिए। चलिए फटाफट से अब हम स्टार्ट करते हैं। तो ये चैप्टर स्टार्ट होता है प्रेशर से। अब प्रेशर मुझे बताने की जरूरत
नहीं है। अरे पढ़ाई वाला प्रेशर नहीं भैया। मुझे पता है उससे तुम परेशान हो। प्रेशर क्या होता था? प्रेशर होता था
परपेंडिकुलर फोर्स पर यूनिट एरिया। याद आया? परपेंडिकुलर फोर्स को क्या बोलते थे? छोटी क्लासेस में बोलता आया था थ्रस्ट।
थ्रस्ट। बहुत बढ़िया। याद आ गया। है ना? तो क्या होता था? प्रेशर इज़ डिफाइंड एज दी नॉर्मल फोर्स एक्टिंग पर यूनिट। एरिया।
फार्मूला होता था फोर्स बाय एरिया। ठीक है भैया। पुरानी यादें ताजा हो गई। अच्छा प्रेशर का यूनिट क्या होता था भैया? यूनिट
होता था पास्कल। जी हां। बहुत बढ़िया। तो हमको ये सारी चीजें याद होंगी। पास्कल इसका यूनिट होता था। ठीक है? इसके
डायमेंशन फार्मूला क्या होता था वो भी आपको पता होगा। अब यहां पर एक नई चीज आपको समझनी पड़ेगी कि प्रेशर का यूनिट अभी तक
हमने पास्कल पढ़ा। यहां पर हम एक नए यूनिट को पढ़ेंगे जिसको हम बोलते हैं एटीएम। अरे वो वाला एटीएम नहीं पैसा पैसा। नहीं नहीं
नहीं एटीएम यानी एटमॉस्फेयर। क्या? एटमॉस्फेयर। तो यहां पर एक कॉमन यूनिट हम पढ़ेंगे जिसको हम बोलते हैं एटमॉस्फेयर
यानी एटीएम। जिसकी वैल्यू होती है 1 एटीएम = 1.013 * 10 रे टू पावर 5 पास्कल। ये याद होना चाहिए। ये वैल्यू बहुत कम आएगी। भैया
अब ये क्या है एटीएम? ये तो बताओ। हैं हमने तो एक ही एटीएम सुना है। यार देख 1 एटीएम का मतलब है कि ये जो एनवायरमेंट है
ना एनवायरमेंट के अंदर गैसेस हैं। ये गैसेस भी तो तुम पे प्रेशर लगाएंगी। तो ये गैसेस कितना प्रेशर मतलब ये जो एटमॉस्फेयर
है ये हम पे कितना प्रेशर लगाता है? उसको हम बोलते हैं 1 एटीएम। जिसकी वैल्यू होती है 1.013 * 10 रे टू पावर 5 पास्कल।
एटमॉस्फेरिक प्रेशर। एटमॉस्फियर हम पे कितना प्रेशर लगाता है। ठीक है जी भैया ये चीज तो हमको क्लियर हो गई। उसके अलावा एक
दो चीज और है। जैसे कि एवरेज प्रेशर क्या होता है? कुछ नहीं एवरेज प्रेशर। टोटल फोर्स डिवाइड बाय टोटल एरिया। बहुत बेसिक
है। अब इसी के ऊपर ना एनसीईआरटी के अंदर एक क्वेश्चन दे रखा है एवरेज प्रेशर के ऊपर। तो मैंने सोचा कि आपको वो क्वेश्चन
मैं करा देता हूं। अब ना इस चैप्टर में ना बहुत सारे सवाल एनसीईआरटी के सेम टू सेम आपके पेपर के अंदर आते हैं। तो इस वजह से
मैं एनसीईआरटी के ज्यादा क्वेश्चंस आपको यहां पर प्रैक्टिस कराऊंगा। ठीक है? आ जाइए। तो क्या बोला है? टू थाई बोनस ये जो
आपकी थाई की बोनस होती है ना ईच हैविंग क्रॉस सेक्शनल एरिया 10 सेंटीमी² दोनों का यानी एक का जो क्रॉस सेक्शनल
एरिया है जो एरिया है वो कितना है 10 सेंटीमीटर² सबसे पहले तो बेटा इसको मीटर के अंदर क्या
कर लेना कन्वर्ट कर लेना उसके लिए आप क्या करोगे उसके लिए आप करोगे 10 रे टू पावर -4 से मल्टीप्लाई ठीक है जी आ गया तो ये
हमारा क्या आ गया ये हमारा आ गया मीटर स्क्वायर के अंदर एक बोन बोन का एरिया। ठीक है जी। सपोर्ट दी अपर पार्ट ऑफ द
ह्यूमन बॉडी ऑफ़ मास 40 kg। यानी ये जो बोन है ना ये अपर बॉडी को सपोर्ट कर रही हैं। ठीक है? एस्टीिमेट दी एवरेज प्रेशर। अब
एवरेज प्रेशर क्या होता है? टोटल फोर्स बाय टोटल एरिया। अब मुझे बताओ टोटल फोर्स कितनी लगेगी? देखो मास हमें गिवन है। है
ना? फोर्स क्या होती है? वेट। वेट वेट। यानी जो टोटल फोर्स होगी वो होगी m * g जो कि हो जाएगा 400 न्यूटन। ठीक है? अच्छा
टोटल एरिया कितना होगा? बताओ टोटल एरिया कितना होगा? एक बोन का एरिया हमें गिवन है ये। है ना? 10 * 10 रे टू पावर 4 या फिर
हम इसको डायरेक्टली लिख भी सकते हैं कि 10 रेज़ टू पावर 3 - 3 ऐसे भी लिख सकते हैं। है ना? पर यहां पर दो बोन हैं। तो टोटल
एरिया कितना हो जाएगा? बस इसको आपको टू से यहां पर मल्टीप्लाई कर देना है। तो ये आ गया आपका क्या? टोटल एरिया 2 * 10 रे टू
पावर -3 मीटर के यही आया सबका यही आया बहुत बढ़िया अब क्या करना है आपको बस इन दोनों को डिवाइड कर देना है प्रेशर हमें
निकालना है तो प्रेशर होता है टोटल फोर्स बाय टोटल एरिया तो ये आ जाएगा 400 डिवाइड बाय 2 * 10 रे टू पावर -3 तो फाइनली जो
आपका आंसर आएगा इसको ऊपर ले जाके वो आएगा 2 * 10 रे टू पावर 5 पास्कल ये आपका आंसर आ जाएगा क्या सबका यही आंसर आंसर है। एक
बार चेक कर लेना। ठीक है? पास्कल बोल सकते हो या फिर न्यूटन पर मीटर स्क्वायर बोल सकते हो। बट पास्कल में प्रेशर का यूनिट
हमें लिखना होता है। ठीक है जी? हमको ये समझ आ गया। बहुत बेसिक क्वेश्चन था यार भैया ये तो है ना? छोटी क्लासेस वाला सवाल
आ गया। बस कैलकुलेशन थोड़ी टफ थी। एक और क्वेश्चन देखते हैं। अ 50 kg गर्ल वियरिंग हाई हील्स। हाई हील ते नच्चे तू बड़ी
जच्चे। एक गाना हुआ करता था। है ना? हां। तो 50 kg की एक लड़की है। ठीक है? उसने हाई हील पहनी है। बैलेंस होना सिंगल हील।
एक हील पे बैलेंस कर रखा है भाई। बहुत बढ़िया। टैलेंट टैलेंट। हील इज अ सर्कुलर विद अ डायमीटर ऑफ़ 1 सें.मी. हील का
डायमीटर हमें गिवन है 1 सें.मी. सबसे पहले भैया इसको क्या करो? मीटर के अंदर कन्वर्ट कर लिया करो फटाफट से बिना सोचे समझे। तो
ये आ जाएगा 1 * 10 रे टू पावर -2 क्या? मीटर। ठीक है? ये डायमीटर है। रेडियस कितना होगा? इसका आधा कर लोगे तो वो आ
जाएगा 0.5 * 10 रे टू पावर -2 मीटर। ये रेडियस आ गया। ठीक है जी। व्हाट इज दी प्रेशर एग्जर्टेड बाय दी हील ऑन दी
हॉरिजॉन्टल सरफेस? देखो भैया बहुत सिंपल है। प्रेशर का फार्मूला होता है टोटल फोर्स बाय टोटल एरिया। अब फोर्स कितनी
लगेगी? जितना उसका वेट होगा। उसका वेट कितना है? मास है 50 किलो। तो वेट कितना हो जाएगा? m * g जो कि हो जाएगा कितना?
500 न्यूटन। एरिया कितना हो जाएगा? रेडियस हमारे पास है। कैसे निकालोगे एरिया? अरे सर्कल का एरिया πr² है ना? तो πr² से इसको
आप निकाल लेना। 22 / 7 * r क्या है? 0.5 * 10 रे टू पावर -2 है ना? इसका हमें क्या करना है? इसका हमें स्क्वायर कर देना है।
है ना? इसको आप सॉल्व करना। और फिर क्या निकालोगे? प्रेशर निकालोगे जो कि होगा फोर्स बाय एरिया। अब फटाफट से इसको
कैलकुलेटर में आप अभी के लिए सॉल्व कर लो क्योंकि इतना टाइम हमारे पास है नहीं। जब आप सॉल्व करोगे तो ये अराउंड अराउंड आ
जाएगा 6.24 * 10 रेज़ टू पावर 6 पास्कल। क्या यही आ रहा है सबका? एक बार फटाफट से चेक कर लेना। बहुत बढ़िया। है ना? तो ऐसे
लॉजिकल क्वेश्चन सिंपल क्वेश्चन आ जाते हैं बहुत बार इस चैप्टर से। चलिए अब हम आते हैं मेन टॉपिक की तरफ। देखो ये जो
फ्लूइड होते हैं ये प्रेशर किस डायरेक्शन में एग्जर्ट करते हैं? तो याद रखना एक फ्लूइड को अगर हम कंटेनर में डाल देंगे तो
वो हर डायरेक्शन में प्रेशर को फेंकेगा। यानी अगर उसको हम ऐसे स्टोर कर लेंगे ना तो यहां भी फोर्स लगाएगा। यहां भी लगाएगा,
यहां भी लगाएगा, यहां भी लगाएगा, इधर-उधर, इधर-उधर हर जगह फोर्स लगाएगा। यानी फ्लूइड प्रेशर लगाता है हर डायरेक्शन में। ये चीज
आपको पता होनी चाहिए। इस चीज को अभी हम और डिटेल में पढ़ेंगे। उससे पहले भी एक दो चीजें आपको यहां पर जाननी पड़ेंगी जो कि है
डेंसिटी क्या होती है? है ना? आई होप पता होगा। मास बाय वॉल्यूम, है ना? मास पर यूनिट वॉल्यूम, किसका फार्मूला होता है?
डेंसिटी का फार्मूला होता है बहुत बढ़िया। ठीक है? डेंसिटी एक प्रकार की स्केलर क्वांटिटी है। ये भी आपको पता होना चाहिए।
उसके अलावा वाटर की जो डेंसिटी है, वाटर की डेंसिटी एट 4° सेल्सियस एट 4° सेल्सियस कितनी होती
है? उसकी वैल्यू आपको याद रखनी पड़ेगी। वो वैल्यू होती है कितनी? 10 रे टू पावर 3 kg पर मीटर
और इसी को मैं लिख सकता हूं 1 ग्राम पर सें.मी. है ना? दो अलग-अलग यूनिट है। ये है kg पर
मीटर है ना? केजी मीटर दिख रहा होगा और ये क्या आ जाएगा? ग्राम पर सेंटी सेंटीमीटर तो यहां पर 1000 है। यहां पर वन है। ये
वैल्यू आपको याद रखनी पड़ेगी। आई होप अभी तक पता भी होगा वाटर की क्या डेंसिटी होती है। बहुत बढ़िया। इतना हमको समझ में आ
गया। डेंसिटी क्या होती है? वो तो हमें भैया बचपन से ही पता था। लेकिन जो बचपन से आपको नहीं पता वो मैं अब आपको बता देता
हूं। जो कि क्या है? रिलेटिव डेंसिटी या फिर स्पेसिफिक ग्रेविटी। मुझे पता है। अभी ये चैप्टर ना शुरू में बड़ा बोरिंग लगता
है। ऐसा लगता है यार भैया क्या बोले जा रहे हो? कभी कहते हो ये, कभी कहते हो वो, इधर-उधर। अरे काम की बात करो। देखो ये जो
छोटी-छोटी टर्म्स है ना ये आपको शुरू में जाननी पड़ेगी। जब तक आप ये नहीं जानोगे ना तो आगे हम क्वेश्चन पे जब आएंगे तो आपसे
सॉल्व नहीं हो पाएंगे। अगर मैं बोलूं स्पेसिफिक ग्रेविटी क्या होता है? तुम्हें पता ही नहीं। तो स्पेसिफिक ग्रेविटी कुछ
नहीं होता। रिलेटिव डेंसिटी होता है। अब तुम बोलोगे भैया रिलेटिव डेंसिटी क्या होता है? रेश्यो। देखना बेटा। द रेश्यो ऑफ
दी डेंसिटी ऑफ़ अ सब्सटेंस टू दी डेंसिटी ऑफ़ दी वाटर एट 4° सेल्सियस। यानी एक रेश्यो है। है ना? एक सब्सटेंस
है। उसकी जो भी डेंसिटी है अगर मैं उसको डिवाइड कर दूंगा वाटर की डेंसिटी के साथ। और वाटर की डेंसिटी हमें पता है 1000।
उससे अगर मैं डिवाइड कर दूंगा तो जो ये जो आएगा ना रेश्यो इसी रेश्यो को मैं बोलता हूं स्पेसिफिक ग्रेविटी या फिर रिलेटिव
डेंसिटी। तो याद रखना रिलेटिव डेंसिटी क्या होती है? डेंसिटी ऑफ़ सब्सटेंस डिवाइड बाय डेंसिटी ऑफ़ वाटर एट 4° सेल्सियस। अब
तुम बोलोगे भैया 4° सेल्सियस ही क्यों? क्योंकि पता है तुम्हें वाटर की जो डेंसिटी होती है ना वो मैक्सिमम डेंसिटी
4° पे होती है। हां। तुमने एक चीज नोट करी है कि जब पानी का टेंपरेचर तुम कम करते हो तो वो बर्फ बन जाती है। तो बर्फ तो सॉलिड
है और सॉलिड की डेंसिटी तो ज्यादा होती है। लेकिन ये गलत है। क्योंकि यार तुमने नोट करा हो बर्फ पानी पे तैर जाती है।
इसका ये मतलब है कि जो बर्फ है जो सॉलिड है बट उसकी डेंसिटी पानी से कम है। पानी की डेंसिटी ज्यादा है। तो पानी की जो
मैक्सिमम डेंसिटी होती है ना बेटा वो इसी टेंपरेचर पे होती है। इसी वजह से हम बार-बार लिखते हैं डेंसिटी ऑफ़ वाटर एट 4°
सेल्सियस। ठीक है जी समझ आ गया। डेंसिटी ऑफ़ वाटर के साथ-साथ एक कंपाउंड और है जिसकी डेंसिटी आपको याद करनी पड़ेगी।
बार-बार पूछा जाता है। वो है डेंसिटी ऑफ़ मरकरी। किसकी बेटा? मरकरी। मरकरी की डेंसिटी होती है इतनी 13,600
केजी। ये बहुत बढ़िया। है ना? 13600। ये हमें याद रखना पड़ेगा। मरकरी का और वाटर
का। बस इतना आपने याद कर लिया तो काम हमारा यहां पे बन जाएगा। ठीक है? अब जैसे कि मैंने आपको अब टर्म्स बताई तो क्वेश्चन
भी देख लेते हैं क्वेश्चन कैसा पूछा जाता है। लिक्विड ऑफ अ मास 250 ग्र एंड वॉल्यूम 200 सें.मी. फाइंड दी डेंसिटी एंड दी
रिलेटिव डेंसिटी। अब देखो डेंसिटी के लिए क्या करोगे? मास बाय वॉल्यूम कर दोगे। तो डेंसिटी का ये यूनिट होता है। यूनिट नहीं
मतलब ये सिंबल होता है। अब क्या करोगे? ग्राम है और यहां पर सेंटीमीटर है। तो क्या करेंगे हम? डिवाइड कर देंगे। मास मास
बाय वॉल्यूम। यही होता है फार्मूला। तो क्या आ जाएगा? आंसर आ जाएगा आपका। एक बार बताना जरा इसको सॉल्व करके। इसको अगर आप
सॉल्व करोगे अह तो ये कितना आ रहा है? ये आ रहा है 1 25
ग्राम पर सेंटीमीटर । क्या यही आ रहा है सबका? 1.25 ग्राम पर सेंटीमीटर । अब रिलेटिव डेंसिटी कैसे निकालते हैं? ये
डेंसिटी डिवाइड बाय पानी की डेंसिटी। लेकिन अगर हमने यहां पर ग्राम पर सेंटीमीटर रखा है तो आपको पानी की डेंसिटी
को भी ग्राम पर सेंटीमीटर में लेना पड़ेगा। तो जो रिलेटिव डेंसिटी आएगी वो आएगी 1.25 डिवाइड बाय वन। क्यों? क्योंकि
वाटर की डेंसिटी ग्राम पर सेंटीमीटर में वन होती है। तो इसका आंसर यही आ जाएगा 1.25।
ये क्या है? ये है रिलेटिव डेंसिटी। आई होप ये क्लियर हो गया होगा। चलो अब बढ़ते हैं अगले सवाल की तरफ। बट सवाल से पहले एक
टॉपिक हम पढ़ लेते हैं। फिर इसके सवाल देखेंगे। क्या है टॉपिक? टॉपिक है वेरिएशन ऑफ प्रेशर विद डेप्थ। क्या तुमने छोटी
क्लासेस के अंदर पढ़ा था? पढ़ा तो था बट भैया याद रहिए। एक तो ना क्लास 11th के अंदर हालत कैसी हो जाती है ना कि अगर कोई
तुमसे पूछे कि तुम टॉपर हो या फिर तुम एवरेज हो? तो तुम जवाब देते हो बीएएमपी। बीएएमपी क्या? बड़ी मुश्किल से पास होने
वाले स्टूडेंट। है ना? ये हालत हो जाती है। नवीं में जो पढ़ा था वो तुमको याद नहीं है। बट अगर धुली धुली यादों में याद हो तो
तुम्हें पता होगा अगर हम डेप्थ बढ़ाते जाते हैं पानी की गहराई में जाते हैं तो प्रेशर बढ़ता जाता है। बढ़ता है या नहीं बढ़ता? तो
इसी चीज को अब हम प्रूव करने वाले हैं। एक छोटी सी हल्की फुल्की सी नन्नू पन्नू सी एक क्या है? डेरिवेशन है। आ जाओ स्टार्ट
करते हैं। तो क्या है इसके अंदर? एक कंटेनर के अंदर हमने पानी लिया। और ये जो अंदर तुम्हें सिलेंडर दिख रहा है ना ये भी
पानी का ही सिलेंडर है। अब भैया ये पानी का सिलेंडर क्यों ले रहे हैं हम अंदर? क्योंकि एनसीईआरटी के अंदर ऐसा गिवन है।
ठीक है? तो ये पानी का ही हमने क्या ले लिया? एक सिलेंडर ले लिया। पानी का है। इतना समझ लो। ठीक है? अब इस सिलेंडर का ये
जो एरिया है ये क्या है बेटा? ये एरिया तो है a है ना? इसकी जो हाइट है वो है h। वो क्या है बेटा? h। ठीक है? अब ये सिलेंडर
ना इस जगह पर रुका हुआ है। ये पानी से ही बना है। किससे बना है बेटा? पानी से। और ये पानी यानी ये जो भी लिक्विड है, इसकी
हम डेंसिटी ले लेते हैं रो। ये डेंसिटी का सिंबल होता है। ठीक है जी? बहुत बढ़िया। अब ये एक जगह पे रुका हुआ है। अगर ये रुका
हुआ है यानी इस पे जो भी फोर्सेस लग रही होंगी वो बैलेंस्ड होंगी। पहले तो हम फोर्सेस देखते हैं। सबसे पहले क्या होगा?
एक प्रेशर लग रहा होगा यहां से। हां या ना? एक प्रेशर लग रहा होगा यहां से। यस और नो बोलो। एक प्रेशर लग रहा होगा नीचे से
ऊपर। P2 और क्योंकि इसका कुछ मास भी होगा। तो इसका जो वेट होगा वो नीचे की तरफ फोर्स लगाएगा जो कि होगी कितनी? जो कि होगी mg
जो कि होगी mg। है ना? अगर यह एक जगह पे स्टेबल है, तो क्या मैं लिख सकता हूं बेटा? ध्यान से देखना। तो क्या मैं लिख
सकता हूं P1 देख ले ध्यान से? अरे भैया, क्या कर रहे हो? ध्यान से देख लो कि यहां पर जो प्रेशर लग रहा है, देखना, यहां पर
जो प्रेशर लग रहा है, P1, है ना? या फिर मैं लिख सकता हूं P1 की जगह मैं फोर्स मान लेता हूं यार। P1 को छोड़ो। यहां पर एक
फोर्स लग रही होगी, है ना? यहां पर एक फोर्स लग रही होगी F1। यहां पर एक फोर्स लग रही होगी F2। है ना जी? तो क्या मैं
लिख सकता हूं? क्या मैं लिख सकता हूं? देखना बेटा, मैं क्या लिखने जा रहा हूं? ध्यान से देखना। f1 नीचे की डायरेक्शन में
+ mg हां या ना? नीचे की डायरेक्शन में। इसकी वैल्यू बराबर होगी f2 जो कि ऊपर की डायरेक्शन में। अब समझ आ गया। ठीक है?
अच्छा। फोर्स और प्रेशर का रिश्ता क्या कहलाता है? सोचो। प्रेशर क्या होता था? फोर्स बाय एरिया। तो फोर्स क्या होगा?
प्रेशर * एरिया। तो क्या मैं लिख सकता हूं F1 की जगह? P1 * A जो कि सिलेंडर का एरिया है। ठीक है
जी? समझ आ गया। + MG = P2 * A क्योंकि यहां पर भी एरिया तो A ही है। सिलेंडर है तो एरिया तो A ही है।
अच्छा अब ये mg तुम्हें दिख रहा होगा। अब मुझे एक बात बताओ। ये मास है। है ना? क्या मैं लिख सकता हूं? क्या मैं लिख सकता हूं?
ध्यान से देखना बेटा। क्या मैं लिख सकता हूं? 1 मिनट। पहले इसको मैं वापस से बता देता हूं। ये क्या था? P1 है ना? अब क्या
मैं लिख सकता हूं? डेंसिटी इक्वल्स टू मास बाय वॉल्यूम। तो मास क्या होगा? मास होगा डेंसिटी * वॉल्यूम। हां भैया बिल्कुल लिख
सकते हो। बिल्कुल लिख सकते हो। अच्छा पर मुझे एक बात बताओ वॉल्यूम क्या होती है? सिलेंडर की वॉल्यूम क्या होगी? अरे
वॉल्यूम क्या होगी? एरिया * लेंथ। एरिया इंटू लेंथ। तो क्या मैं इस वॉल्यूम की जगह यहां पर a * l लिख सकता हूं? तो फाइनली जो
मेरा मास का फार्मूला आया वो आया रो a lस और नो। अब इस चीज को यहां पर मैं पुट कर दूंगा। देखना बेटा ध्यान से। अब मैं यहां
लिखने जा रहा हूं। p1 a + मास क्या है? रो a lg = p2a बहुत बढ़िया। अब देखो हर जगह a ए
है। एरिया हर जगह है। तो एरिया को काट दो। फटाफट से काट दो। है ना? अब इस p1 को यहां ले जाओ। तो मैं अब लिख देता हूं P2 - P1 =
रो LG अब ये L क्या था? हाइट ऑफ कंटेनर। हाइट ऑफ कंटेनर। अरे हां या ना बोल दे भाई। हाइट
ऑफ कंटेनर। तो मैं लिख सकता हूं P2 - P1 = रो H g और यही मैं चीज यहां पर प्रूव करना चाहता था। यानी P2 है इस जगह पे प्रेशर।
P1 है इस जगह पर प्रेशर। तो अगर मैंने P2 और P1 को माइनस करा तो फार्मूला आ गया डेंसिटी * हाइट * G यानी आप जितना नीचे
जाते जाओगे प्रेशर बढ़ता जाएगा बढ़ता जाएगा। जितनी हाइट बढ़ती जाएगी देखो जितनी हाइट बढ़ती जाएगी प्रेशर डिफरेंस उतना ही बढ़ता
जाएगा। यानी ऊपर के कंपैरिजन से नीचे प्रेशर ज्यादा होगा और उसका फार्मूला होता है रोHG वेरीेंट या फिर रो GH भी बोलते
हैं रोh जी भी बोलते हैं। एक ही बात है। वेरीेंट फार्मूला। क्या बात समझ में आई? ये एक सिंपल सी डेरिवेशन थी जिससे कि हमने
ये प्रूव करा क्या कि वेरिएशन ऑफ प्रेशर विद डेप्थ। ठीक है? अब डेरिवेशन से ज्यादा यहां पर क्वेश्चन बहुत पूछे जाते हैं।
क्वेश्चन मैं दिखाऊं? आ जाओ स्टार्ट करते हैं। एनसीईआरटी का ही क्वेश्चन है। व्हाट इज दी प्रेशर ऑन अ स्विमर? 10 मीटर बिलो
दी सरफेस ऑफ दी लेक। देखो भैया ये तो रही लेक और इसके 10 मीटर नीचे। 10 मीटर नीचे ये भैया स्विमर भाई। ये हमारे स्विमर भैया
स्विम कर रहे हैं। कितना प्रेशर है बताओ जरा। अच्छा मुझे ये बताओ इस पॉइंट पे यानी जहां से लेक स्टार्ट हो रही है क्या इस
जगह पे कोई प्रेशर होगा? हां होगा। कौन सा? एटमॉस्फेरिक प्रेशर। होगा या नहीं होगा? अरे बोल दो यार। अरे एटमॉस्फेयर
प्रेशर लगाता है ना? तो इस जगह पे जो P1 होगा वो होगा एटमॉस्फेरिक प्रेशर। जिसकी वैल्यू होती है 1.01
* 10 रेज़ टू पावर 5। ठीक है? इस पॉइंट पे जहां पर ये तैर रहा है, इस पॉइंट पे हमें प्रेशर की वैल्यू निकालनी है। और अभी
मैंने आपको फार्मूला बताया P2 - P1 = रो GH हां या ना? बहुत बढ़िया। है ना? तो अब तुम्हें P2 निकालना है। P1 की वैल्यू तो
हमारे पास है ही। और और डेंसिटी पानी की हमें पता ही है कितनी होती है जो कि होती है 1000। G की वैल्यू 10 और हाइट कितनी दे
रखी है? डेप्थ कितनी दे रखी है? वो है हमारी 10। तो इसको आप सॉल्व करोगे तो ये कितना आ जाएगा? ये आ जाएगा 10 रे टू पावर
5 यही आ रहा है ना बेटा? अब इसको यहां पर ले जाओ तो P2 की वैल्यू आ जाएगी 2.01 * 10 रे टू पावर 5 पास्कल। ये आ गया
प्रेशर। इस स्विमर को इतना प्रेशर फील होगा। क्या ये चीज क्लियर है? जल्दी से बता दो। बहुत बढ़िया। क्या बात है? तो ऐसे
क्वेश्चन बहुत आते हैं। देखो एक और क्वेश्चन हम देखते हैं। ये तो कॉम्पिटिटिव एग्जाम जैसे नीट वगैरह में भी पूछा गया
है। ये बड़ा लल्लू सा सवाल है। अ बकर इज़ फिल्ड विद टू इमसिबल लिक्विड्स। दो लिक्विड हैं जिनकी डेंसिटीज अलग-अलग हैं।
डायग्राम में हम देखते हैं कि पहले ऊपर वाले पोर्शन में h डेप्थ में h डेप्थ में एक लिक्विड है जिसकी डेंसिटी रो है और
दूसरी एच डेप्थ में एक ऐसा लिक्विड जिसकी डेंसिटी कितनी है? टू टाइम्स। ठीक है जी। क्या पूछा गया है? फाइंड दी प्रेशर एट दी
बेस ऑफ़ द बकर। यानी इस जगह पे नीचे नीचे नीचे कितना प्रेशर महसूस होगा? तो मुझे एक बात बताओ इस पे प्रेशर कौन-कौन लगाएगा?
सबसे पहले तो ऊपर से लगेगा एटमॉस्फेरिक प्रेशर। देखना यहां से लगेगा। यहां से लगेगा एटमॉस्फेरिक प्रेशर। है ना? हां या
ना? ठीक है जी। फिर ये जो लिक्विड है ये H डेप्थ तक है। तो ये एक प्रेशर लगाएगा जो कि होगा रो GH। फिर ये भी h डेप्थ तक है
तो ये लगाएगा 2 रोgh है ना तो यानी तीन प्रेशर लगेंगे इस पे 2 रोgh रोgh और p नो यानी एटमॉस्फेरिक
प्रेशर तो टोटल आ जाएगा एटमॉस्फेरिक प्रेशर + 3 रोgh ये आपका आंसर यहां पर आना चाहिए। बहुत
बढ़िया। आई होप ये समझ आया होगा। ऐसे क्वेश्चन कॉम्पिटिटिव एग्जाम्स में पूछे जाते हैं। ठीक है जी। अब बढ़ते हैं हम एक
अगले टॉपिक की तरफ। टॉपिक नहीं है। इसी का पार्ट है कि देखो कंटेनर चाहे जैसा भी हो प्रेशर डिपेंड्स ओनली ऑन हाइट। एक
एग्जांपल से समझाता हूं। तुम्हें ऐसे समझ नहीं आएगा। मान लो कंटेनर ऐसा है। इसकी वॉल्यूम कम है। इसकी वॉल्यूम ज्यादा है।
इसकी वॉल्यूम भी अलग है। वॉल्यूम से फर्क ही नहीं पड़ता। इन तीनों की हाइट अगर बराबर है तो इन तीनों पे जो प्रेशर लगेगा
वो बराबर होगा। है ना? वो बराबर होगा। बहुत सारे लोग एक्सपेरिमेंट में दिखाते भी हैं कि एक पाइप ले लो मोटा, एक पाइप ले लो
पतला। दोनों को जोड़ दो। दोनों में लिक्विड बराबर आ जाएगा। दोनों में लिक्विड बराबर आ जाएगा हाइट में। क्यों? क्योंकि
दोनों पे प्रेशर सेम पड़ रहा है। है ना? तो आप देख सकते हो चाहे कितने ही अलग-अलग लिक्विड ले लो। अगर उनकी हाइट सेम है तो
उन पे प्रेशर क्या होगा? सेम पड़ेगा। तो डिपेंड इट ओनली डिपेंड्स अपॉन हाइट। शेप ऑफ दी कंटेनर पे कुछ भी डिपेंड नहीं करता।
एरिया पे कुछ भी डिपेंड नहीं करता। सिर्फ डिपेंड करता है हाइट पे कि किस हाइट पे लिक्विड है। उसी पे प्रेशर डिपेंड करता
है। और इसी चीज को हम बोलते हैं हाइड्रोस्टेटिक पैराडॉक्स। क्या बोलते हैं बेटा? हाइड्रोस्टेटिक पैराडॉक्स। डेफिनेशन
देख लो। स्कूल एग्जाम में पूछी गई है। हाइड्रोस्टेटिक पैराडॉक्स स्टेट्स दैट दी प्रेशर एग्जर्टेड बाय अ लिक्विड डिपेंड्स
ओनली ऑन दी हाइट ऑफ द लिक्विड कॉलम एंड नॉट ऑन दी शेप और वॉल्यूम ऑफ दी कंटेनर। सिर्फ हाइट पे डिपेंड करता है। शेप
वॉल्यूम से हमको कछु लेना देना नहीं है। इसी को हम बोलते हैं क्या? हाइड्रोस्टेटिक पैराडॉक्स। चलिए जी बहुत बढ़िया। ये हमको
समझ आ गया। ठीक है जी। अब हमें कुछ टाइप्स के प्रेशर के बारे में समझना पड़ेगा। अब देखो प्रेशर ना तीन प्रकार के होते हैं।
एक प्रकार का प्रेशर तुम्हें पता है जो कि है एटमॉस्फेरिक प्रेशर। है ना? एटमॉस्फेरिक प्रेशर क्या है? वो प्रेशर जो
कि एटमॉस्फेयर हम पे लगाता है। उसकी वैल्यू मैं आपको ऑलरेडी बता चुका हूं। ये वैल्यू आपको याद भी रखनी है। अगला प्रेशर
होता है गॉज प्रेशर। अब ये गॉज प्रेशर क्या है? देखो किसी भी चीज पे जितना भी टोटल प्रेशर लग रहा है उसमें से अगर आप
सबट्रैक्ट कर देते हो एटमॉस्फेरिक प्रेशर को तो हम उसको बोल देते हैं गॉज प्रेशर। यानी गॉज प्रेशर। कुछ नहीं है। टोटल
प्रेशर माइनस एटमॉस्फेरिक प्रेशर। ठीक है? तो इसका फार्मूला होता है एब्सोल्यूट प्रेशर माइनस
ये जो एटीएम वाला प्रेशर है यानी जो एटमॉस्फेरिक प्रेशर है, इसको बस हमें क्या करना है? माइनस कर लेना है। बहुत बढ़िया
जी। ये भी हमको समझ आ गया क्योंकि इसमें एनसीआरटी पे क्वेश्चन है इसलिए मैं आपको बता रहा हूं। बस इतना समझना है। डिटेल में
नहीं जाना। अगला होता है एब्सोल्यूट प्रेशर। एब्सोल्यूट प्रेशर होता है टोटल प्रेशर। यानी एटमॉस्फेरिक प्रेशर भी होना
चाहिए। गॉज प्रेशर भी होना चाहिए। दोनों को जोड़ दोगे तो टोटल प्रेशर निकल के आता है जिसको हम बोलते हैं एब्सोल्यूट प्रेशर।
ठीक है जी? अब ये मैंने आपको इसलिए पढ़ाया क्योंकि एनसीआरटी के अंदर इसका एक क्वेश्चन है। देख लेते हैं। एट द डेप्थ ऑफ़
1000 मीटर इन एन ओशन व्हाट इज दी एब्सोल्यूट प्रेशर? अगर मैं 1000 मीटर के अंदर चला जाऊं तो एब्सोल्यूट प्रेशर क्या
होगा? एब्सोल्यूट प्रेशर है टोटल प्रेशर। यानी एक तो देखो मैं एक डायग्राम की मदद से आपको समझाता हूं। मान लो ये सरफेस है
और मैं 1000 मीटर नीचे चला गया। कितने मीटर? मैं 1000 मीटर नीचे चला गया हूं। ठीक है? तो एब्सोल्यूट प्रेशर होता है
टोटल प्रेशर। एक प्रेशर तो यहां पे लगेगा जो कि होगा एटमॉस्फेरिक प्रेशर। है ना? और डेप्थ की वजह से जो प्रेशर आएगा वो होगा
रोgh। तो एब्सोल्यूट प्रेशर क्या होगा? इन दोनों को हमें ऐड करना पड़ेगा। ठीक है? तो अगर
मैं एब्सोल्यूट प्रेशर निकालूंगा तो वो हो जाएगा एटमॉस्फेरिक प्रेशर जो कि है 1.01 * 10 रे टू पावर 5 प्लस ये तो एटमॉस्फेरिक
प्रेशर है। प्लस रोgh क्या? रो जो कि है 1000। डेंसिटी 1000 होती है। सबको पता ही है। g की वैल्यू 10 ले लेंगे हम यहां पर।
और डेप्थ हमें गिवन है वो भी कितनी गिवन है हमें? वो भी हमें 1000 गिवन है ऑलरेडी। ठीक है? तो ये कितना आ जाएगा? इनको आप ऐड
कर सकते हो। ये कितना आ गया? थ्री। 1 मिनट देखते हैं कितना आ गया? 367 तो ये आ जाएगा 1 * 10 रेज़ टू पावर 7 और ये आ गया 1.01 *
10 रेज़ टू पावर 5 + 1 * 10 रेज़ टू पावर 7। ये आपका आंसर आ जाएगा। इसको आप और डिटेल में सॉल्व कर सकते हो। ठीक है जी? बहुत
बढ़िया। यह एब्सोल्यूट आया है। अब अगला क्वेश्चन देखो। क्या है? गॉज प्रेशर क्या आएगा? गॉज। गॉज प्रेशर कुछ नहीं है। बस इस
चीज को इसमें से हटा दो। इस चीज को हटा दो। तो ये जो बचा हुआ आया था ना हमारा अरे भैया यही तो था गॉज। अरे यही तो था गॉज।
आया कुछ समझ में? भेजे के अंदर गया या नहीं गया? गया। बहुत बढ़िया यार। क्या बात है। यही था गॉज। ठीक है जी। आई होप ये चीज
भी आपको समझ आ गई होगी। चलिए है ना? तो ये था गॉज प्रेशर। अगले क्वेश्चन की तरफ बढ़ते हैं। फाइंड दी फोर्स एक्टिंग ऑन अ विंडो
ऑफ एरिया 20 सें.मी. * 20 सें.मी. ऑफ अ सबमरीन एट दिस डेप्थ द इंटीरियर ऑफ व्हिच इज़ मेंटेंड एट दी सी लेवल एटमॉस्फेरिक
प्रेशर। ओके? ये बड़ा अच्छा सवाल है। देखो क्या बोला है? एक सबमरीन है। वो सबमरीन इस डेप्थ पे है। यानी यहां पर एक सबमरीन तैर
रही है। उसकी विंडो पे कितना प्रेशर होगा? बट यहां पर एक गेम है विंडो पे प्रेशर तो भैया इतना ही होगा। ओवरऑल जो हमने निकाला।
अरे इतना ही तो प्रेशर होगा। लेकिन यहां पर एक लाइन लिखी है जो कि तुम्हें कंफ्यूज करने के लिए इनफ है कि क्या लाइन लिखी गई
है? इंटीरियर ऑफ व्हिच इज मेंटेंड एट दी सी लेवल एटमॉस्फेरिक प्रेशर। यानी जो अंदर है ना कांच का ये मान लो कांच का बाहर ये
कांच का अंदर जो कांच का अंदर है ना उसमें जो प्रेशर मेंटेन किया गया है वो पता है कितना है? वो एटमॉस्फेरिक प्रेशर के बराबर
है। तो नेट प्रेशर कितना लगेगा? बताओ नेट प्रेशर कितना लगेगा? अरे भैया टोटल प्रेशर माइनस एटमॉस्फेरिक प्रेशर। टोटल प्रेशर
बाहर से लग रहा है। अंदर से अंदर से एटमॉस्फेरिक प्रेशर लग रहा है। यानी जो नेट प्रेशर लग रहा है वो इसी के बराबर
होगा। ये जो गॉज प्रेशर हम निकाल रहे हैं ना ये जो हमने इससे पहले निकाला इसी के बराबर होगा। यही तो होगा। हां ठीक है। ये
तो प्रेशर निकाल दिया। बट क्वेश्चन में हमें फोर्स पूछा गया है। तो फोर्स कैसे निकालते हैं बेटा? फोर्स क्या होता है?
बताओ जल्दी से। फोर्स होता है अरे बता दो भाई। क्या? इतनी छोटी-छोटी चीजों में भी कंफ्यूज होगे क्या? हां। प्रेशर हमें पता
है। एरिया कहां पता है? अरे एरिया देखो ये पता। बस मीटर के अंदर कन्वर्ट कर लेना। और फटाफट से इसका आंसर बता दो। इस एरिया को
पहले इन दोनों टर्म्स को मीटर के अंदर कन्वर्ट कर लेना। 0.2 * 0.2 तो जो एरिया आएगा वो आएगा 0 04 मीटर² तो ये एरिया
आएगा। बस इस एरिया को आपको प्रेशर से मल्टीप्लाई करना है और फटाफट से इसका आंसर बताना है। तो इसका आंसर क्या आएगा? इसको
आप जब मल्टीप्लाई करोगे 0.04 से तो आंसर आएगा अराउंड फोर। आंसर आएगा अराउंड 4 * 10 रे टू पावर 5। ये क्या है बेटा? ये फोर्स
आपकी आ गई। राइट? तो ऐसे क्वेश्चन भी पेपर के अंदर पूछ लिए जाते हैं। एक और क्वेश्चन मैं आपसे पूछता हूं। द डेंसिटी ऑफ़ दी
एटमॉस्फेयर एट दी सी लेवल इज़ दिस। यानी क्या गिवन है कि जो एटमॉस्फयर की डेंसिटी है एटमॉस्फेयर यानी जो गैसेस है ना उनकी
जो डेंसिटी है वो सी लेवल पे हमें गिवन है। अस्यूम दैट इट डज़ नॉट चेंज विद एटीट्यूड। यानी जब मैं ऊपर जाता जाता हूं
हवा के अंदर तो हवा की डेंसिटी नहीं बदल रही। ऐसा मैं अस्यूम कर लेता हूं। देन हाउ हाई वुड दी एटमॉस्फेयर एक्सटेंड? यानी
कितनी ऊपर तक एटमॉस्फेयर जा सकता है। एटमॉस्फेयर उतनी ऊपर तक जा सकता है जहां तक एटमॉस्फेरिक प्रेशर फील हो सकता है। अब
मैं आपको समझाता हूं। देखो एमॉस्फेयर के अंदर क्या लगता है? एटमॉस्फेरिक प्रेशर। अरे लगता है नहीं लगता है? ठीक है? तो
जहां तक एटमॉस्फेरिक प्रेशर लगेगा वहां तक एटमॉस्फेयर पहुंच सकता है। तो यानी इस क्वेश्चन में आपको कुछ नहीं करना था। आपको
क्या करना था? एटमॉस्फेरिक प्रेशर जिसकी वैल्यू तुम्हें पता है 1.013 * 10 रेज़ टू पावर 5 उसकी वैल्यू को बराबर करना था।
किसके? अरे देखो, हम ऊपर जाते जाएंगे, ऊपर जाते जाएंगे, ऊपर जाते जाएंगे। हाइट बढ़ाते जा रहे हैं। तो, इसको आपको बराबर करना था
रोg के। और हमें h निकालना था। हाइट निकालनी थी कि एटमॉस्फेयर कितना ऊंचा है। अरे
एटमॉस्फेयर उतना ऊंचा होगा जहां तक हमें एटमॉस्फेरिक प्रेशर फील होगा। तो एटमॉस्फेरिक प्रेशर की वैल्यू आपको बराबर
पुट करनी थी किसके? रोgh के। h हमें निकालना था। रो हमें यहां पर गिवन है 1 1.29। ये हमें गिवन है। तो बस आपको इसको
क्या करना था? सॉल्व कर लेना। थोड़ी बहुत कैलकुलेशन इस चैप्टर के अंदर बेटा आ ही जाती है। उसका कोई और सॉल्यूशन नहीं है
हमारे पास। अब इससे आपको ये h की वैल्यू निकाल लेनी है। फटाफट से सॉल्व करो और h की वैल्यू निकाल के एक बार बता दो कि क्या
आ रहा है आंसर। अगर आपने सॉल्व करा होगा तो अराउंड अराउंड h की वैल्यू 79 89 कुछ इस प्रकार से आ रही होगी मीटर्स के अंदर।
राइट? ऐसे आप कर सकते हो। चलिए जी बहुत बढ़िया। अब बढ़ जाते हैं हम एक अगले टॉपिक की तरफ जो कि है मरकरी बैरोमीटर। मैं फिर
बोल रहा हूं इस चैप्टर की जो स्टार्टिंग है ना वो थोड़ी सी बोरिंग लग सकती है। इस चैप्टर की स्टार्टिंग में तुम बोर महसूस
कर सकते हो। कैलकुलेशन में तुम्हारा दिमाग जा सकता है। लेकिन तुम्हें हार नहीं माननी क्योंकि मैं यहां पर बोल रहा हूं कि अगर
तुमने थोड़ी देर और लग के करा तुम्हारा इंटरेस्ट आने लगेगा। मरकरी बैरोमीटर पे बढ़ते हैं। भैया ये बैरोमीटर क्या है?
पहले तो ये बताओ यार देख बैरोमीटर पता है क्या है? ये एक ऐसा डिवाइस है ना जो कि ये प्रूव करके देता है कि अभी तक जो हम ये जो
एटमॉस्फेरिक प्रेशर की ये जो हम वैल्यू निकाल रहे हैं ना ये हमने निकाली कैसे है? तो उसी एटमॉस्फेरिक प्रेशर की वैल्यू को
अब हम निकालने वाले हैं जिसको हम अभी तक यूज़ कर रहे थे। तो इट इज़ अ इंस्ट्रूमेंट यूज्ड टू मेजर एटमॉस्फेरिक प्रेशर।
एटमॉस्फेरिक प्रेशर को मेजर करने के काम आता है। ठीक है? कुछ नहीं होता। एक टेस्ट ट्यूब की तरह होती है। ऐसी ये देख रहे हो
उल्टी टेस्ट ट्यूब जो आपको दिख रही है। ठीक है? अब इसके अंदर हम मरकरी को भरते हैं। अब क्या होता है? देखना बेटा यहां पर
एक ट्यूब है। मतलब यहां पर एक पूरा का पूरा आप ऐसे मान सकते हो एक बकर है। ठीक है? अब इस बकर के अंदर हमने क्या करा?
मरकरी को ऐसा मान लो यहां पर एक लिक्विड को भर दिया। लिक्विड को हमने क्या करा? यहां पर भर दिया। अब क्या होगा बेटा? अब
क्या होगा? ये आप देख पा रहे हो। ये जो पूरी की पूरी ट्यूब थी इसके अंदर मरकरी था। अब इस ट्यूब को हमने क्या करा? ऐसे
उल्टा करके उल्टा करके इसके अंदर ऐसे रख दिया। है ना? उल्टा करके इसके अंदर ऐसे रख दिया। ठीक है? थोड़ी देर तो मरकरी नीचे
गया। नीचे गया नीचे गया। बट सारा मरकरी नीचे नहीं गया। थोड़ा सा मरकरी रह गया। कितना? थोड़ा सा मरकरी रह गया। और उसकी
मरकरी की जब हमने हाइट कैलकुलेट करी ना यहां से और यहां तक तो वो आई 76 सें.मी. अब यहां पर सोचने वाली बात ये है। सोचने
वाली बात ये है बेटा देखना यहां पर मान लेते हैं तीन पॉइंट। एक पॉइंट A एक पॉइंट B, एक पॉइंट C। तीनों पॉइंट की हाइट बराबर
है। तीनों पॉइंट की हाइट बराबर है। तो जब हाइट बराबर होती है, प्रेशर, सेम होता है। यस और नो। होता है, यार भैया, ये तो आप 10
बार बता चुके हो। पर एक चीज तुमने नोट करी कि भैया यहां पर तो सेम है। यहां पर तो सेम है। बट यहां पर तो ऐसे मरकरी भर गया
इसके ऊपर। अब वो मरकरी पता है क्यों भरा? क्योंकि इस पॉइंट पे एटमॉस्फेरिक प्रेशर नहीं लग पा रहा। तो प्रेशर सेम करने की
वजह से मरकरी ऐसे ऊपर की तरफ यहां पर स्टोर हो गया। ये मरकरी क्या कर रहा है? ये मरकरी इस पॉइंट को उतना प्रेशर दे रहा
है जितना प्रेशर बाकी पॉइंट्स को मिल रहा है। और बाकी पॉइंट्स को कितना प्रेशर मिल रहा है? वो मिल रहा है एटमॉस्फेरिक प्रेशर
जो कि होता है 1.013 * 10 रे टू पावर 5 है ना? तो उतना प्रेशर इन पॉइंट्स को मिल रहा है उतना ही प्रेशर मरकरी के इस पॉइंट को
भी मिल रहा है। क्यों मिल रहा है? क्योंकि ये जो ऊपर ये जो लिक्विड भर चुका है ये इसको प्रेशर दे रहा है। आई बात समझ में?
तो इस एक्सपेरिमेंट से हम क्या करते हैं? इस एक्सपेरिमेंट से हमने हाइट कैलकुलेट करते हैं इस बैरोमीटर की जो कि आती है 76
सें.मी. फिर हम क्या करते हैं? हमें पता है हमें एटमॉस्फेरिक प्रेशर निकालना है यहां पर। तो उसकी वैल्यू बराबर होगी
किसके? रोgh के। किसके बेटा? रो GH के जितनी हाइट तक ये भर चुका है। है ना? तो हमने हाइट निकाल ली है। तो बस अब हम इनमें
पुट करते हैं सारी वैल्यूज़ को। आपको मैंने अभी बताया था। ये होती है मरकरी की डेंसिटी। g की वैल्यू 9.8 लोगे और हाइट
आपको पता है। हाइट आप ये लोगे। इसको मीटर्स के अंदर क्या कर लेना? कन्वर्ट कर लेना। तो ये 0.76 आ जाएगा। इसको जब आप
पूरी डिटेल में सॉल्व करोगे तो जो आंसर अभी हमने निकाला उसी प्रकार से आंसर आपका आ जाएगा। क्या बात समझ में आई? जल्दी
बताओ। इसी प्रकार से हम क्या कर रहे होते हैं? प्रूव कर रहे होते हैं कि एटमॉस्फेरिक प्रेशर की जो हम वैल्यू
निकालते हैं बेटा वो एकदम सही वैल्यू है। आई होप ये चीज आपको अब यहां पर समझ आ गई होगी। तो यानी बैरोमीटर का काम क्या है?
एटमॉस्फेरिक प्रेशर की वैल्यू को निकालना बस। है ना? ये जितनी हाइट पे होता है उससे हम कैलकुलेट कर लेते हैं। चलिए जी आगे
बढ़ते हैं। अब क्वेश्चन क्या आता है? क्वेश्चन ये आता है कि सिर्फ मरकरी को ही क्यों यूज़ किया जा रहा है? व्हाई ओनली
मरकरी? पानी को क्यों नहीं कर रहे? है ना? एक्सपेरिमेंट में गद्दारी कर दी क्या पानी के साथ? नहीं यार देखो मरकरी बहुत जरूरी
इंसान है। क्यों? इंसान नहीं है। केमिकल है। क्यों है जरूरी? देखो मरकरी हैज़ वेरी हाई डेंसिटी। पहली चीज तो मरकरी की
डेंसिटी बहुत हाई होती है। जिसकी वजह से उसके जो कॉलम में जो लिक्विड भरता है ना वो सिर्फ 76 सें.मी. तक भरता है। अगर हम
यहां पर पानी ले लेंगे तो पानी की डेंसिटी कम होती है। पता है पानी में लिक्विड कितना भरेगा? पानी में 10 मीटर भर जाएगा।
10 मीटर समझते हो? तो [हंसी] इतनी बड़ी क्या टेस्ट ट्यूब लेके आएंगे क्या हम तुम्हारे लिए? तो इस वजह से मरकरी को
प्रेफर किया जाता है। मरकरी डज़ नॉट वेट ग्लास यानी एक्यूरेट रीडिंग आती है मरकरी से और मरकरी शाइनी भी होता है। तो ईजीली
आप देख सकते हो कि मरकरी कहां तक रीडिंग आपको मतलब क्लियरली दिखाई दे जाती है। ठीक है? मरकरी शाइनी एंड विज़िबल। तो इजी टू
रीड यानी लेवल्स को हम रीड कर सकते हैं। चलिए बहुत समझ समझ आ गया होगा कि बैरोमीटर के अंदर मरकरी को हम क्यों यूज़ करते हैं?
ये चीज़ क्लियर हो गई। मजा आ गया? समझ आ गया? जल्दी से बताओ। एक थोड़ी सी और कॉम्प्लिकेटेड चीज़ की तरफ बढूंगा। थोड़ा
मुझे पता है परेशान हो रहे हो बट थोड़ी देर और रुक जाओ। वो चीज क्या है? वो है टॉर। अभी वो टॉरा नहीं है जो कि हरियाणा वालों
का चलता है। टॉरा चल रहा है हमारा। तो टॉरा चल रहा है बेटा ये वो वाला टॉरा नहीं है। समझाता हूं। ये टॉर यूनिट है। प्रेशर
की यूनिट है टॉर। देखो क्या होता है ना कि मरकरी के केस में बैरोमीटर के केस में हम प्रेशर को पता है कैसे नापते हैं? हम
बोलते हैं 1 एमएम प्रेशर है। 2 एमएम प्रेशर है। 3 एमएम प्रेशर है। इसका मतलब क्या होता है? कि जब बैरोमीटर के अंदर
रीडिंग 1 एमएम आई तो उस प्रेशर को मैं बोलता हूं 1 एमएम या फिर उसको मैं बोलता हूं वन टॉर प्रेशर। यानी प्रेशर
इक्विवेलेंट टू दी 1 एमएम ऑफ मरकरी इज कॉल्ड टॉर। यानी वन टॉर्क की वैल्यू क्या होती है? जब बैरोमीटर के अंदर जो रीडिंग
आए वो 1 एमएम की आए। तब मैं उसको बोल दूंगा कि वहां पर जो प्रेशर लग रहा है वो प्रेशर कितना लग रहा है? वो प्रेशर लग रहा
है वन टॉर्क के बराबर। और एक टॉर्क की बेटा वैल्यू होती है 133 पास्कल। आपको याद करने की जरूरत नहीं है। बस इतना समझ लो
टॉर्क क्या होता है? उसके अलावा एक और यूनिट होता है जिसको हम बोलते हैं बार। है ना? ये क्या होती है? मेटोलॉजी के अंदर
काम आ रहा होता है। बार यूनिट होता है। बट ये आपको समझने की कोई जरूरत नहीं है। तो इसको आप काट सकते हो। ये आपके कोई यूज़फुल
नहीं है। बस अगर आपको याद करना है तो आप ऐसे याद कर लो। वन बार इक्वल्स 10 रेज़ टू पावर 5 पास्कल। बहुत बढ़िया। बैरोमीटर
क्लियर। मरकरी भैया क्लियर। 1 एमएम एक टॉर्क के बराबर होता है। क्लियर? मरकरी भैया से हमने क्या करा? उनसे हमने
एटमॉस्फेरिक प्रेशर का पता लगाया। एक्सपेरिमेंट तुम्हें समझ आया। चलिए जी बहुत बढ़िया। आगे बढ़ा जाए। अब आती है
YouTube। अरे वो YouTube नहीं जिससे तुम लेक्चर देख रहे हो। भैया एक अलग YouTube है। देखो यू शेप की एक ट्यूब। अब इस
YouTube की पता है क्या खासियत है? कैसे पकड़ोगे? इसको अगर ऊपर करो चाहे इसको नीचे करो। यह जो लिक्विड है ना इनकी हाइट
हमेशा बराबर रहती है। मान लो मैं इसको ऐसे ऊपर ले जाऊं। इसको मैं ऐसे ऊपर ले जाऊं तब भी इन लिक्विड की हाइट हमेशा बराबर रहेगी।
क्यों? क्योंकि दोनों पे सेम प्रेशर लग रहा होता है जो कि होता है एटमॉस्फेरिक प्रेशर। देखो सेम एटमॉस्फेरिक प्रेशर लग
रहा है। तो सेम एटमॉस्फेरिक प्रेशर लग रहा है। तो हाइट दोनों को मेंटेन रखनी पड़ती है। है ना? इसी को हम बोलते हैं यू ट्यूब।
अब ये मैंने आपको क्यों बताया? क्योंकि एक एक्सपेरिमेंट है आपकी एनसीआरटी के अंदर जिसको हम बोलते हैं ओपन ट्यूब मैनोमीटर।
अब भैया ये क्या है? पहले बैरोमीटर अब मैनोमीटर। मैंने कहा रुक जा यार। मैनोमीटर से हम क्या करते हैं? किसी भी गैस के
प्रेशर को नापते हैं। अरे इतनी सारी गैस है। प्रेशर को नापेंगे ना भैया जरूरत पड़ जाती है यार। तो कैसे नापेंगे? मैनोमीटर
से। तो पहले देखो मैनोमीटर क्या है? इट इज दी डिवाइस यूज्ड टू मेजर प्रेशर ऑफ दी गैस। यानी कोई भी गैस है उसके प्रेशर को
हम इससे नापते हैं। कैसे नापते हैं? आ जाओ एक्सपेरिमेंट में। देखो क्या है? पहले हमने एक वही YouTube ली थी। YouTube समझते
हो ना? हां। लिक्विड एकदम बराबर पे था। फिर मैंने क्या करा? एक तरफ से एक प्रेशर पंप लगाया और इसके अंदर गैस डाली और यहां
से गैस रिलीज़ होने लगी। अब जब गैस आई, तो गैस ने प्रेशर लगाया। प्रेशर लगाया, तो यहां पर यह जो लिक्विड था जो कि इस इधर था
बी पॉइंट पे था, वह लिक्विड ऊपर जाने लगा, ऊपर जाने लगा, ऊपर जाने लगा, ऊपर जाने लगा। और वो एच हाइट तक ऊपर पहुंच गया। एच
हाइट तक ऊपर पहुंच गया। अब भैया, इस एक्सपेरिमेंट से हम इस गैस के प्रेशर को कैसे काउंट करेंगे? कर सकते हो। पता है
कैसे? इस गैस की वजह से क्या हुआ? यह ऊपर गया। यानी इस गैस का जो प्रेशर होगा वो बराबर होगा रोgh
के। या सिर्फ इतना ही नहीं। अगर तुम ध्यान से देखोगे तो ये भी तो लग रहा है। ये भी तो लग रहा है। तो यानी इसके प्रेशर ने ये
एटमॉस्फेरिक प्रेशर को भी तोड़ा है। यानी अगर मुझे गैस का प्रेशर निकालना है तो मैं क्या करूंगा? रोgh प्लस एटमॉस्फेरिक
प्रेशर। इस चीज से मैं किसी भी गैस का प्रेशर निकाल सकता हूं। तो इसको हम क्या बोलते हैं? इसको हम बोलते हैं मैनोमीटर।
याद रखना मैनोमीटर हम क्यों यूज़ करते हैं? किसी भी गैस के प्रेशर को कैलकुलेट करने के लिए। फार्मूला क्या होता है? रोgh प्लस
एटमॉस्फेरिक प्रेशर। ठीक है? छोटी-छोटी एक्टिविटीज थी। आजकल तो स्कूल के अंदर कम पूछी जाती है। तो तुम्हें ज्यादा लोड नहीं
लेना है। हम फटाफट से बढ़ते हैं सवाल की तरफ। चलो करो क्वेश्चन को सॉल्व। यार देखो थोड़ा सा फोकस से पढ़ लो। एग्जाम तुम्हारे
बहुत पास आ गए हैं। अब यह गद्दारी नहीं चलेगी कि तुम थोड़ा-थोड़ा पढ़ रहे हो। कभी समझ नहीं आ रहा तो हार मान रहे हो। यार
हार मानने के लिए थोड़ी ना पैदा हुए हो तुम। इतनी छोटी-छोटी कैलकुलेशंस में हार मान जाते हो। अगर कुछ समझ नहीं आता तो हार
मान जाते हो। तुम हार मानने के लिए पैदा हुए हो क्या यार? तुम जीवन में कुछ बड़ा करने के लिए पैदा हुए हो। इतनी छोटी-छोटी
बातों पे हार मानोगे कैसे चलेगा? आ जाओ फटाफट से क्वेश्चन सॉल्व करो। इन अ टॉर्सली बैरोमीटर वो जो बैरोमीटर का मैंने
एक्सपेरिमेंट बताया उसको हम टॉर्सली बैरोमीटर बोलते हैं। कंफ्यूज नहीं होना है। ठीक है? है यूज़्ड मरकरी। उन्होंने
क्या करा? मरकरी का यूज़ करा। जबकि एक पास्कल जी थे। है ना? पास्कल साइंटिस्ट। तुमने नाम सुना ही होगा। तो पास्कल ने
क्या करा? उसी एक्सपेरिमेंट को डुप्लीकेट करा। लेकिन उन्होंने मरकरी नहीं लिया। उन्होंने फ्रेंच वाइन ले ली। अब वाइन के
शौकीन थे भैया पास्कल भैया तो उन्होंने ले ली। है ना? तो क्या हुआ? जिसकी डेंसिटी हमें गिवन है। फ्रेंच वाइन की डेंसिटी 984
होती है। डिटरमाइन दी हाइट ऑफ दी वाइन कॉलम फॉर नॉर्मल एटमॉस्फेरिक प्रेशर। अब अगर मैं वाइन लूंगा तो कितनी हाइट तक वो
ऊपर उठेगी? तो तुम्हें याद होगा उसमें हम क्या फार्मूला यूज़ करते थे? एटमॉस्फेरिक प्रेशर = रोgh
और एटमॉस्फेरिक प्रेशर हमें मालूम है। है ना? और डेंसिटी भी हमें मालूम है जो कि है 9 84 और एक्सीलरेशन ड्यू टू ग्रेविटी यानी
g हम 10 ले लेते हैं। तो आपको बस हाइट निकालनी है। आप फटाफट से इसको सॉल्व करो और h की वैल्यू जरा मुझे निकाल के बता दो
कि हाइट क्या आ रही है इस केस के अंदर। तो आपने अगर ये सॉल्व करा होगा तो अराउंड अराउंड 10.2
मीटर्स आपका आंसर आ रहा होगा। ठीक है? तो ऐसे भी क्वेश्चन आ जाते हैं और प्रकार के क्वेश्चन देखते हैं। एनसीईआरटी का एक और
क्वेश्चन जो कि YouTube का क्वेश्चन है। अरे YouTube हां ये वाली ट्यूब। अब इस ट्यूब के अंदर क्या करा गया है ना? दो
अलग-अलग कंपाउंड्स को भरा गया है। देखो अंदर तो यहां पर मरकरी है। अरे भैया अंदर मरकरी है। ये पूरी मरकरी है। लेकिन यहां
पर एक अलग सब्सटेंस है। यहां पर एक अलग सब्सटेंस है और यहां पर पानी को डाला गया है। लेकिन यहां पर गौर फरमाने वाली बात ये
है कि अगर आप ध्यान से देखोगे। देखो मरकरी का लेवल इन दोनों पॉइंट पे बराबर है। आप देख पा रहे होंगे दोनों पॉइंट पे बराबर
है। लेकिन यहां पर ये जो लिक्विड है ये तो ज्यादा है और यहां पर ये जो लिक्विड है ये तो कम है। है ना? ये तो कम है। बट यहां पर
ये मरकरी दोनों में बराबर है। इसका मतलब है कि इन दोनों पॉइंट में पॉइंट A और पॉइंट B इन दोनों पे जो प्रेशर पड़ रहा है
वो बराबर पड़ रहा है। यस और नो बोलो। यस और नो बोलो। बहुत बढ़िया। अब देखते हैं पहले कि इस A पॉइंट पे प्रेशर कहां-कहां से आ
रहा है? एक तो होगा एटमॉस्फेरिक प्रेशर क्योंकि ओपन ट्यूब है। है ना? एटमॉस्फेरिक प्रेशर। उसके बाद क्या है बेटा? उसके बाद
ये पानी जो कि 10 सें.मी. की डेप्थ पे है। ये भी तो लगा रहा होगा प्रेशर। है ना? इस सेंटीमीटर को मीटर में कन्वर्ट कर लेना।
तो ये आ जाएगा 0.1 मीटर। ठीक है? तो ये भी तो प्रेशर लगा रहा होगा। इसका ये मतलब है कि अगर मैं प्रेशर ही नहीं निकालूं तो
पहले मैं लिखूंगा एटमॉस्फेरिक प्रेशर प्लस रो g * h. H कितना है? 0.1 और इसकी वैल्यू
बराबर होगी किसके? इस पॉइंट के प्रेशर के। तो यहां पर भी एटमॉस्फेरिक प्रेशर तो लग ही रहा है। प्लस ये जो लिक्विड है ये एक
प्रेशर लगा रहा होगा। और ये कितना लगाएगा? रोgh। इसकी डेंसिटी अलग है जो कि क्वेश्चन में हमें गिवन है। है ना? तो रोgh और यहां
पर अगर आप ध्यान से देखोगे हाइट भी अलग है। देखो हाइट भी क्या है? हमें हाइट भी अलग दी गई है। ठीक है जी? तो मैं क्या लिख
दूंगा यहां पर? Patm वो तो सेम ही रहेगा। प्लस ये जो भी लिक्विड है इसकी डेंसिटी * g * हाइट। हाइट कितनी है? मीटर में
कन्वर्ट कर लेना। 0.125 मीटर। यही आ रहा है ना मीटर में कन्वर्ट करने के बाद? बहुत बढ़िया। तो अब आपको कुछ
नहीं करना है। ये एटीएम से एटीएम वाला तो कट जाएगा। अब आपको यहां पर डेंसिटीज़ गिवन होनी चाहिए। किसकी डेंसिटी हमें गिवन है?
अ व्हाट इज दी स्पेसिफिक ग्रेविटी? पूछा है। यानी हमें डेंसिटीज़ गिवन ही नहीं है। और हमसे पूछा है व्हाट इज़ दी स्पेसिफिक
ग्रेविटी ऑफ दी स्पिरिट? स्पिरिट यानी ये जो सब्सटेंस है, इसका स्पेसिफिक ग्रेविटी क्या होगा? और अगर तुम्हें याद हो
फार्मूला, स्पेसिफिक ग्रेविटी का फार्मूला क्या होता था? डेंसिटी डिवाइड बाय डेंसिटी ऑफ़ वाटर। यही
तो होता था, है ना? तो मुझे क्या करना है? बेसिकली इस चीज़ को मुझे यहां पर ले आना है। हां या ना? बोल दे भाई। ये देख इस
लिक्विड की डेंसिटी इसको मुझे यहां पर ले जाना है। है ना? और बाकी सारी चीजों को मुझे यहां पे ले जाना है। तो पहले तो ये g
से g काट दो। है ना? इसको यहां ले जाओ। तो ये आएगा 0.1 / 0.125 इक्वल्स टू लिक्विड की डेंसिटी डिवाइड बाय
वाटर की डेंसिटी। अरे यही तो है क्या? अरे यही तो है स्पेसिफिक ग्रेविटी रेश्यो। तो यही हमें इसके अंदर निकालना था। यही
रेश्यो हमें इस क्वेश्चन के अंदर निकालना था। आई होप ये चीज़ आपको समझ आ गई हो। ये डेंसिटी हमें गिवन नहीं थी बट हमें
डायरेक्टली रेश्यो ही पूछा गया था। तो ऐसे सवाल भी आप देख सकते हो। पेपर के अंदर पूछ लिए जाते हैं। चलिए जी आगे बढ़ते हैं अगले
नियम की तरफ। अभी तक हमने चीजें पढ़ी। अब हम अगले नियम की तरफ बढ़ रहे हैं जो कि है पास्कल्स लॉ। अब ये पास्कल भैया ने क्या
बोला? समझना बेटा। पास्कल भैया ने ये बोला कि यार आप ये अस्यूम करो कि जो वाटर है वो इनकंप्रेसिबल है। यानी वो कंप्रेस नहीं हो
सकता। और अगर मैं कहीं पे भी पानी पे प्रेशर लगाऊंगा ना तो वो ना हर जगह पे प्रेशर को डिस्ट्रीब्यूट करेगा। फॉर
एग्जांपल फॉर एग्जांपल यहां पर मैं कुछ आपको ड्रॉ कर देता हूं। यहां पर मैं कुछ आपको ऐसे ड्रॉ कर देता
हूं। ठीक है? मान लो मान लो इसके अंदर पानी है। इसके अंदर पानी है। ठीक है? अब मैंने यहां से फोर्स लगाई। यहां से मैंने
क्या लगाई? फोर्स लगाई। ठीक है? अब लिक्विड के पार्टिकल में फोर्स लगेगी। अब वो अपनी फोर्स को डिस्ट्रीब्यूट करते
जाएंगे। डिस्ट्रीब्यूट करते जाएंगे। आगे भेजते जाएंगे। आगे भेजते जाएंगे। आगे भेजते जाएंगे। और उतनी ही प्रेशर इस पॉइंट
पे निकलेगा। यानी जितना प्रेशर भैया यहां लगा, अरे जितना प्रेशर यहां लगा उतना ही प्रेशर यहां लगा। दोनों पे प्रेशर सेम
होगा। और यही बोलता है पास्कल लॉ। अब एक बार स्टेटमेंट पढ़ लो फटाफट से। पास्कल लॉ स्टेट्स दैट इन अ फ्लूइड एट रेस्ट। प्रेशर
इज़ सेम एट ऑल पॉइंट एट दी सेम हाइट एंड दी प्रेशर अप्लाइड टू एन इंक्लोज़्ड फ्लूइड इज़ ट्रांसमिटेड इक्वली इन दी ऑल डायरेक्शन।
यानी हर एक डायरेक्शन में प्रेशर ट्रांसफर होगा। और क्योंकि इनकी दोनों की क्या है? हाइट सेम है। तो जितना प्रेशर यहां होगा
उतना ही प्रेशर यहां होगा। यही बोलते हैं हमारे पास्कल भैया। अब पास्कल भैया की मदद से एक छोटी सी नन्ही मुन्नी सी हम क्या
करेंगे? डेरिवेशन कर लेंगे। है ना? ठीक है जी। बहुत बढ़िया। तो ये एक ट्यूब है। है ना? यहां पर एरिया
हम ले लेते हैं A1। यहां का एरिया हम ले लेते हैं A2। ठीक है जी। यहां पर जो फोर्स हमने लगाई वो F1 और यहां पे जो फोर्स लगी
वो F2। मुझे पता है जितना प्रेशर यहां उतना ही यहां। तो क्या मैं लिख सकता हूं? प्रेशर जो होगा वो एकदम सेम होगा। P1 की
वैल्यू P2 के बराबर होगी। बहुत बढ़िया। अच्छा प्रेशर क्या होता था? फोर्स बाय एरिया। तो P1 क्या होगा? F1 / A1 और P2
क्या होगा? F2 / A2 बेटा, बहुत इंपॉर्टेंट है। फोकस लगा ले। एक थपड़ा पड़ेगा कैमरे में घुस के। प्लीज भैया फोकस लगा लो।
इंपॉर्टेंट चीज पढ़ा रहा हूं। पेपर में सवाल आएगा देख ले। ठीक है? अब क्या करना है आपको? क्रॉस मल्टीप्लाई करा तो f1a2 =
f2a1 ये जो इक्वेशन है ये आपके लिए बहुत इंपॉर्टेंट रहने वाली है। ये बहुत
इंपॉर्टेंट इक्वेशन है। इस इक्वेशन से ना अगर तुम ध्यान से देखोगे एक चीज तुम्हें समझ आएगी। क्या समझ आएगी? देखना बेटा। अगर
मैं यहां पे फोर्स कम लगाऊं। अगर मैं यहां पर फोर्स कम भी लगाऊं। समझना। अगर मैं यहां फोर्स क्या करूं? मैं यहां फोर्स कम
लगाता हूं। ठीक है? और मुझे दूसरी डायरेक्शन में फोर्स ज्यादा चाहिए तो क्या ये पॉसिबल है? बिल्कुल है पॉसिबल। कैसे?
अगर मान लो ये फोर्स कम है लेकिन दूसरा एरिया ज्यादा है। यानी ये एरिया ज्यादा है। अब यहां पर एरिया कम है और फोर्स
ऑटोमेटिकली ज्यादा हो जाएगी। इसका ये मतलब है कि अगर आपको दूसरी तरफ पे फोर्स ज्यादा चाहिए तो उसका एरिया ज्यादा कर दो। और
पहले जहां पर आपको फोर्स कम लगानी है वहां का एरिया कम कर दो। मुझे पता है तुम्हें समझ नहीं आया। मुझे पता है। अब इसका एक
प्रैक्टिकल एग्जांपल देखते हैं जो कि पेपर के अंदर पूछे जाते हैं। उस वो है हाइड्रोलिक मशीनंस। हाइड्रोलिक लिफ्ट।
हाइड्रोलिक लिफ्ट कैसे काम करती है? डायग्राम की मदद से देखते हैं। जहां पे प्रेशर लगता है ना उस जगह का जो एरिया
होता है बेटा वो बहुत छोटा होता है। लेकिन जहां पर आपकी गाड़ी खड़ी होती है या फिर जहां लिफ्ट होती है उसका एरिया बहुत बड़ा
होता है। जिस वजह से क्या होता है? मैंने यहां पर फोर्स तो कम लगाई थी। फोर्स तो मैंने यहां छोटी लगाई थी। बट यहां पर जो
फोर्स लगी बेटा वो बहुत ज्यादा लगी। क्यों लगी? ऑब्वियस सी बात है ना? जहां पर एरिया बड़ा वहां फोर्स भी ज्यादा। तो यही इसके
क्या है? एप्लीकेशनेशंस हैं। पास्कल लॉ के यही एप्लीकेशन है। पूछा जाता है। हाइड्रोलिक मशीन वर्क ऑन दी पास्कल लॉ।
व्हिच स्टेट्स दैट व्हेन अ एक्सटर्नल प्रेशर इज़ अप्लाइड टू अ फ्लूइड कंटेनिंग इन अ वेसल इट ट्रांसमिट इक्वली इन ऑल
डायरेक्शन। हर डायरेक्शन में वो इक्वली ट्रांसमिट करता है। ठीक है? और फाइनली ये स्टेटमेंट हमारे पास आ जाती है। क्या आ
जाती है? f2 यानी जो दूसरी वाली फोर्स है वो किसके बराबर होगी? f1 * a2 / a1 यानी अगर दूसरा वाला एरिया बड़ा है तो यहां पर
फोर्स भी ज्यादा लगेगी। एक और एप्लीकेशन बताऊं। आपके घरों में गाड़ियां होंगी। तुमने कभी देखा गाड़ी भैया 200ों की
रफ्तार से भाग रही है। हल्का सा ब्रेक लगाते हो और इतनी बड़ी गाड़ी रुक जाती है। कैसे? वहां पे भी हाइड्रोलिक ब्रेक्स यूज़
करे जाते हैं। वो ब्रेक्स क्या करते हैं बेटा? जब हम पुश करते हैं तो हम फोर्स कम लगाते हैं और वहां पर जो पिस्टन होता है
जो एरिया होता है वो बहुत कम होता है। है ना? हमने फोर्स भी कम लगाई। A1 जो है वो भी कम है। लेकिन जो टायर के अंदर जो
ब्रेकिंग सिस्टम होता है उसका एरिया तो बड़ा है। वहां पे तो एरिया बड़ा है। है ना? तो अब क्या होगा? जहां एरिया बड़ा होगी
वहां पर ऑटोमेटिकली फोर्स ज्यादा होगी अकॉर्डिंग टू दी पास्कल लॉ। है ना? तो वहां पर फोर्स ज्यादा होती है और हमारे
चारों टायर रुक जाते हैं। ठीक है? तो ये क्वेश्चन भी पूछा जाता है। हाइड्रोलिक ब्रेक्स किस प्रिंसिपल पे काम करते हैं?
तो पास्कल लॉ पे काम करते हैं। ये एक बार पीडीएफ में आप डिटेल में एक बार पढ़ लेना। अगर थ्योरिटिकल क्वेश्चन आ जाए तो आपको ये
सारी चीजें पता होनी चाहिए। चलिए जी बहुत बढ़िया। आगे बढ़ते हैं। अब इसी चीज से रिलेटेड एक क्वेश्चन देखते हैं एनसीईआरटी
का। टू सिरिंजेस ऑफ डिफरेंट क्रॉस सेक्शनल विदाउट नीडल्स फिल्ड विद वाटर आर कनेक्टेड विद अ टाइटली फिटेड रबड़। क्या बोला है?
दो सिरिंजेस यानी दो इंजेक्शन है। दोनों को हमने क्या करा है? आपस में कनेक्टेड कर दिया है। डायमीटर ऑफ दी स्मॉलर पिस्टन एंड
लार्जर पिस्टन इज़ 1 सें.मी. एंड 3 सें.मी.। ठीक है? इसको पहले मीटर में कन्वर्ट कर लेना। 0.01 मीटर और एक है 0.03
मीटर। ये बेटा डायमीटर्स हैं। दोनों के हमें डायमीटर्स गिवन है। ठीक है? फाइंड दी फोर्स एक्सर्टेड ऑन अ लार्जर पिस्टन व्हेन
द फोर्स 10 न्यूटन इज अपाइड टू दी स्मॉलर पिस्टन। अगर मैं छोटे इंजेक्शन में 10 न्यूटन की फोर्स लगा रहा हूं। अब आपको
फार्मूला याद होना चाहिए। f1 * a2 = f2 * a1 याद होना चाहिए। है ना? हमें क्या निकालना है? हमें f2 निकालना है। हमें पता
है छोटे वाले से जो हमने फोर्स लगाई है वो कितनी है? 10 न्यूटन की है। ठीक है? बड़े वाले का एरिया कैसे निकालोगे? डायमीटर
गिवन है। ये क्या गिवन है बेटा? ये डायमीटर गिवन है। तो इससे रेडियस आप निकाल सकते हो। 0.015
मीटर। ये इसका रेडियस आ जाएगा। तो अब आपको कुछ भी नहीं करना है। π * r r की वैल्यू 0.015 इसका स्क्वायर है ना? ये किसके
बराबर होगा? f2 जो कि हमें निकालना है। और छोटे वाले इंजेक्शन का एरिया वो हम कैसे निकाल सकते हैं? इसका भी हमें क्या गिवन
है? रेडियस ये डायमीटर है। इससे हम रेडियस निकाल सकते हैं बेटा। है ना? तो ये कितना आ जाएगा? ये आ जाएगा 0.005 ये इसका रेडियस
आ गया। तो ये आ जाएगा π * 0.005 का होल स्क्वायर। तो यहां पर पाई से ये पाई कट जाएगा और f2 की वैल्यू अब आप सॉल्व
करके निकाल सकते हो। जल्दी से बता दो f2 की वैल्यू क्या आ रही है? f2 की वैल्यू अगर आपने सॉल्व करी तो इस f2 की वैल्यू ये
जो f2 है इसकी वैल्यू आएगी अराउंड 90 न्यूटन है ना? हां मुझे पता है आधे बच्चों से सॉल्व ही नहीं हो पाया होगा। बेटा हालत
तुम्हारी ऐसी हो चुकी है ना। इतनी तो टाइटेनिक भी नहीं डूबी थी जितना तुम अपने करियर को डूबा लोगे। पढ़ लो यार। है ना?
ये तो बहुत ईजी कैलकुलेशन है। आगे आते हैं। इफ दी स्मॉलर पिस्टन इज़ पुश् थ्रू 6 सें.मी. हाउ मच डस दी लार्ज पिस्टन मूव
आउट? यानी अगर स्मॉलर पिस्टन अब यहां दूसरा पार्ट है क्वेश्चन का। अगर मैंने छोटे वाले पिस्टन को 6 सें.मी. अंदर डाल
दिया है। तो दूसरा वाला पिस्टन कितना बाहर निकलेगा? ये कैसे पता चलेगा? देखो यार पानी की वॉल्यूम तो सेम है। जितना वॉल्यूम
तुम यहां से डालोगे उतना वॉल्यूम सामने वाले में आएगा। वॉल्यूम सेम रहेगा। तो क्या मैं बोल सकता हूं कि वॉल्यूम विल
ऑलवेज रिमेन सेम। है ना? पानी का वॉल्यूम सेम रहेगा। अब जब मैंने पहले पिस्टन को प्रेस करा तो मैंने देखो कितनी लेंथ तक
उसे प्रेस करा। 6 सें.मी. करा या नहीं करा? ठीक है? और ये कौन सा है? ये स्मॉलर पिस्टन है। ये स्मॉलर पिस्टन है। तो कितना
वॉल्यूम मैंने बाहर निकाला? वॉल्यूम कैसे निकालते हैं? एरिया इंटू लेंथ। ये आपको पता होगा। ठीक है? एरिया आपको पता है।
एरिया अभी हमने निकाल ही दिया था। एरिया हमने निकाला था कितना था? स्मॉलर वाले का π * r²। ठीक है? तो वॉल्यूम मैं यहां लिख
सकता हूं π * 0.005 का स्क्वायर ये क्या है? ये एरिया है। इंटू लेंथ इंटू लेंथ और लेंथ कितनी है?
मीटर के अंदर कन्वर्ट कर लेना। 0.06 0.06 ये क्या आ गई? ये आ गई लेंथ। ये वॉल्यूम
है। और इतनी वॉल्यूम आगे ट्रांसफर होगी। है ना? तो बड़े वाले सिरिंज में भी तो इतनी वॉल्यूम ही ट्रांसफर होगी। तो उसके लिए
आपको लेंथ निकालनी है। एरिया आपको पता है उसका भी। वो कितना था? π * रेडियस कितना था इसका? 0.015
0.015 का होल स्क्वायर। ठीक है जी? अब इसको आपको सॉल्व करना है और इससे आपको ये बताना है
कि ये जो l है ये l कितना आएगा? अब फटाफट से इसको सॉल्व करके l की वैल्यू बता सकते हो। कितनी आ रही है? अराउंड अराउंड ये
आएगी 0.67 वो भी सें.मी. के अंदर। क्या यही आ रही है क्या? एक बार चेक कर लेना। यही आपका आंसर
आ रहा होगा। आई होप ये चीज़ क्लियर है। डन। आगे बढ़े। चेक कर लेना एक बार आंसर। छोटी-मोटी कैलकुलेशन में मिस्टेक हो तो
खुद से सॉल्व कर लिया करो। चलो आगे बढ़ते हैं। एक और क्वेश्चन देखते हैं। और ये जो क्वेश्चन है ये बड़ा इंटरेस्टिंग क्वेश्चन
है। ध्यान से देखना। अ कार लिफ्ट कंप्रेस्ड एयर एग्जर्टेड अ फोर्स F1 ऑन दी स्मॉल पिस्टन। क्या बोला है? एक गाड़ी की
लिफ्ट है। है ना? उसमें वही होता है हाइड्रोलिक लिफ्ट। समझ गए ना? तो जो छोटी फोर्स लगाई गई है वो कितनी लगाई गई है? F1
लगाई गई है ऑन अ स्मॉल पिस्टन हैविंग अ रेडियस 5 सें.मी. दिस प्रेशर इज़ ट्रांसमिटेड टू दी सेकंड पिस्टन। दूसरा जो
पिस्टन है बड़ा वाला जो है जिसका रेडियस है 15 सें.मी. इफ दी मास ऑफ़ दी कार टू बी लिफ्टेड इज़ 31350
kg कैलकुलेट F1। अब इसके अंदर हमें क्या निकालना है? f1 निकालना है। वेट f2 तो है ही नहीं। अरे f2 है। कार के वेट को हमें
ऊपर ले जाना है। है ना? यानी हमें उतनी फोर्स लगानी पड़ेगी जितनी कार के वजन के बराबर होगी। तो f2 है जो कि होगी mg हां
या ना? देखते चलो। 1350 * 10 ले लेते हैं बेटा ईजी कैलकुलेशन के लिए। 13500 0 ये आ जाएगा क्या? ये आ गई
f2। है ना? और आपको पता है पास्कल भैया के नियम के हिसाब से क्या? F1 a2 = f2 a1 यही तो है पास्कल भैया का नियम। F1 निकालना है
तो F1 क्या होगा? F1 होगा F2 * A1 / A2 है ना जी? अब देखो F2 की वैल्यू हमें पता है। अब एरिया तुम निकाल सकते हो दोनों का। है
ना? A1 यानी हमें देखो रेडियस दोनों का दे रखा है। एक का है 5 सें.मी. और एक का कितना है? एक का है 15 सें.मी. तो दोनों
का जरा एरिया निकाल लो। है ना? πr² πr² पुट करो और फटाफट से जरा आंसर बताओ कि क्या आ रही है फोर्स? यानी कितनी फोर्स
हमें अप्लाई करनी चाहिए? जल्दी से बताएंगे। सॉल्व करो। जब तुम सॉल्व करोगे तो F1 की वैल्यू आएगी 1500 न्यूटन। कि यही
आ रही है? 1500 न्यूटन शुड बी योर आंसर। राइट? ठीक है? तो आप देख सकते हो कि हमने कम फोर्स लगाई। सिर्फ 1500 न्यूटन की
फोर्स से हमने कितनी बड़ी फोर्स जो कि आप देख सकते हो 13,500 न्यूटन की फोर्स हमने जनरेट कर ली। तो यही तो पास्कल लॉ का
खासियत है। ठीक है जी? अगले टॉपिक की तरफ एक छोटा सा टॉपिक बाइंड फोर्स। अब यह टॉपिक वो है जो कि आप ऑलरेडी छोटी क्लासेस
के अंदर पढ़ चुके हो। बाय फ़ोर्स क्या है? बायोसी। याद आया? जब भी किसी भी ऑब्जेक्ट को लिक्विड के अंदर डाला जाता है, तो उस
पे एक अपवर्ड फोर्स लगती है। उसको हम बोलते हैं बाय फ़। बहुत सिंपल है। राइट? बायोसी इज़ दी अपवर्ड फोर्स एग्जर्टेड बाय
अ फ्लूइड ऑन एन ऑब्जेक्ट व्हेन इट इज़ पार्शियली और कंप्लीटली इमर्स्ड इन अ फ्लूइड। यानी जब फ्लूइड में डालेंगे तो
उसप जो फोर्स लगेगी अपवर्ड डायरेक्शन में, उसी को हम क्या बोलते हैं? बायोेंट फोर्स बोल रहे होते हैं। ये चीज आपको ऑलरेडी
शायद पता होगी। लेकिन क्या आपको आर्कमिडीज प्रिंसिपल पता है? ये भी नाइंथ में था। फिर बता देता हूं। आर्कमिडीस प्रिंसिपल की
पहले स्टेटमेंट देखो। बायोेंट फोर्स एग्जर्टेड बाय अ फ्लूइड ऑन अ पार्शियली फुल्ली इमर्स्ड बॉडी इज़ इक्वल टू दी वेट
ऑफ दी फ्लूइड दैट इज़ डिस्प्लेस्ड। अब देखो आर्किमडीज बाबा ने क्या बताया कि जो बाइंड फोर्स है ना इसकी वैल्यू कैसे कैलकुलेट
करेंगे? तो उन्होंने क्या देखा? उन्होंने क्या देखा? अब मान लो ये बकर है। ये बकर पूरा भरा हुआ है पानी से एकदम लबालाब। अब
मैंने ना एक डब्बा लिया। उस डब्बे को मैंने इसके अंदर डाला। अब जब मैं इसके अंदर डालूंगा तो पानी पूरा भरा हुआ था। तो
पानी नीचे गिरेगा। है ना? तो पानी नीचे गिरने लगा। नीचे गिरने लगा। अब उस सारे पानी को हमने इकट्ठा करा और उस पानी का
मैंने क्या करा? वेट करा। उस पानी का वजन किया। यानी mg करा। mg वेट समझते हो ना? mg हां। तो जितना इसका वेट आया है ना
न्यूटन के अंदर उतनी ही बायड फोर्स इस डब्बे पे ये पानी लगाएगा। उतनी ही बाय फोर्स इस डब्बे पे पानी लगाएगा। बात समझ
में आई? यानी मैं क्या बोल सकता हूं? बाय फोर्स इज इक्वल टू दी वेट ऑफ दी फ्लूइड दैट इज डिस्प्लेस्ड। यानी जितने फ्लूइड को
डिस्प्लेस करा, उतना क्या रहेगा? उतना ही बाइंड फ़ रहेगा। अब इसी चीज़ को एक फ़ूले की मदद से मैं आपको समझाता हूं। मुझे एक बात
बताओ। कितना लिक्विड डिस्प्लेस होगा बताओ? अगर मैं किसी भी डब्बे को पूरा अंदर डाल दूंगा तो जितनी इसकी वॉल्यूम होगी, जितनी
इसकी पूरी वॉल्यूम होगी उतना ही तो पानी बाहर गिर जाएगा। अरे हां या ना यार। जितनी स्पेस ये लेगा उतना पानी नीचे गिर जाएगा।
है ना? है [हंसी] ना? तो अगर मुझे कितना लिक्विड नीचे गिरा वो निकालना है तो मुझे निकालने की जरूरत नहीं है। जितनी इस डब्बे
की वॉल्यूम होगी उतना ही क्या होगा? लिक्विड डिस्प्लेस हो जाएगा। ठीक है जी? अब अगर मुझे लिक्विड का मास निकालना है तो
मुझे लिक्विड की पहले डेंसिटी गिवन होनी चाहिए। उसको मैं रो ले लेता हूं। तो मास का फार्मूला आ जाएगा। क्या आ जाएगा? मास आ
जाएगा डेंसिटी * वॉल्यूम। ठीक है? और और वेट क्या होगा? वेट आ जाएगा डेंसिटी वॉल्यूम इंटू ग्रेविटी। यानी बायोड फोर्स
का फार्मूला होता है डेंसिटी ऑफ़ दी लिक्विड इंटू वॉल्यूम ऑफ दी सब्सटेंस। जिस सब्सटेंस को आपने अंदर डाला क्योंकि उतना
ही तो पानी नीचे गिरेगा। इंटू G ये बड़ा इंपॉर्टेंट फार्मूला है। अभी इसका एक क्वेश्चन दिखाऊंगा। डेंसिटी * वॉल्यूम *
g। आई होप ये आपको क्लियर हुआ होगा। लॉ ऑफ़ लोटेशन पे अभी हम वापस आते हैं। उससे पहले मैं आपको एक क्वेश्चन बता देता हूं। पहले
अभी हम एक क्वेश्चन देखते हैं। आ जाओ। अ रॉक वेज़ 100 न्यूटन इन एयर। यानी एक पत्थर है। उसका वजन कितना है? 100 न्यूटन है हवा
के अंदर। लेकिन जैसे ही मैंने उसको पानी के अंदर डाला तो उसका वजन कम हो गया भैया जादू हो गया 70 न्यूटन हो गया 30 न्यूटन
कहां गया बताओ अरे बायो एंड फोर्स ने कम कर दिया किसने कम कर दिया उस पत्थर पे बायोड फोर्स भी तो लग रही होगी तो पहले
100 था अब 70 है यानी जो बची हुई फोर्स है वो क्या है वो है बायोट फोर्स बहुत बढ़िया तो सबसे पहले तो बायोडंट फोर्स आपने बता
दी 30 न्यूटन अब आपको बताना है रॉक का वॉल्यूम क्या होगा तो तुम्हें अभी मैंने एक फार्मूला बताया बायोट फोर्स इज़ इक्व टू
डेंसिटी ऑफ़ वाटर इंटू वॉल्यूम ऑफ़ दी सब्सटेंस जिसको हम अंदर डाल रहे हैं। इंटू G यही बताया मैंने आपको। है ना? बाय फ़ की
वैल्यू मुझे पता है जो कि है 30 न्यूटन। डेंसिटी ऑफ़ वाटर कितना होता है? 1000 होता है। वॉल्यूम मुझे निकालना है और g की
वैल्यू यहां पर आप 10 ले सकते हो। तो वॉल्यूम कितनी आ जाएगी बेटा? एक 10 से एक 10 काट दो। तो ये आ जाएगी 3 * 10 टू पावर
-3 मीटर । ये आ गई उस पत्थर की वॉल्यूम। तो ऐसे हमने इन क्वेश्चंस को भी सॉल्व करना सीख लिया है। आई होप ये चीज भी आपको
क्लियर हो गई होगी। अब एक टॉपिक हमारा बच गया जो कि क्या था? लॉ ऑफ फ्लोटेशन। ये लॉ क्या बोलता है? देखो ये बड़ा सिंपल सा लॉ
है। ये लॉ क्या बोलता है? कि कौन सी चीज कब तैरेगी? वो आपको पता होना चाहिए। जिसकी डेंसिटी बेटा ज्यादा होगी ना जिसकी
डेंसिटी ज्यादा होगी वो ज्यादा शक्तिशाली होगा तो वो ऊपर फेंकेगा सबको जैसे कि बर्फ की डेंसिटी कम है तो वो ऊपर रहता है पानी
की डेंसिटी ज्यादा है तो वो नीचे रहता है जो ज्यादा शक्तिशाली होगा वो क्या करेगा अरे भैया ऊपर जाओ अरे भैया ऊपर जाओ तो
जिसकी डेंसिटी ज्यादा जिसकी डेंसिटी ज्यादा वो क्या करेगा वो नीचे रहेगा और वो ऊपर फेंकता रहेगा है ना तो अगर कोई भी
सब्सटेंस की डेंसिटी पानी से कम है तो वो फ्लोट करेगा या या फिर आप इसको ऐसे भी बोल सकते हो अगर कोई भी सब्सटेंस कब फ्लोट
करेगा जब वो जो लिक्विड को डिस्प्लेस करेगा ना लिक्विड को डिस्प्लेस करेगा उसका जो वेट
है ध्यान से देखना बेटा फ्लूइड डिस्प्लेस का जो वेट है वो ज्यादा होगा एज कंपेयर टू वेट ऑफ दी सब्सटेंस समझ नहीं आया मैं
बताता हूं फिर से सुनो मान लो एक पत्थर है इसी इसी का एग्जांपल लेते हैं अब इस पे फोर्स कौन लगा रहा इसी का वेट फ़ लगा रहा
है। और इस पे बाइंड फ़ लग रही है। और बाइंड फ़ किसके बराबर होती है? वेट ऑफ दी फ्लूइड डिस्प्लेस्ड। यानी अगर वेट ऑफ दी फ्लूइड
डिस्प्लेस ज्यादा है इसके खुद के वजन से तो तो ये ऊपर जाएगा। अगर बराबर है तो फ्लोट करेगा। और और अगर इसका वेट ज्यादा
है, इसका खुद का वेट ज्यादा है तो क्या होगा? ये नीचे की तरफ डूब जाएगा। यही होता है लॉ ऑफ़ फ्लोटेशन। बस आपको इतना ही समझना
था। न्यूमेरिकल क्वेश्चंस यहां पे कभी कबभार पूछ लिए जाते हैं। अब बढ़ते हैं हमारे अगले टॉपिक की तरफ जो कि है टाइप्स
ऑफ फ्लोस। तो देखो अभी तक जो हमने पढ़ा ना वो ये था कि जो फ्लूइड थे ना हमारे वो रेस्ट पे थे। है ना? यानी हमने स्टैटिक
पढ़ा था। अभी तक हमारे ये जो फ्लूइड थे ये मूव नहीं कर रहे थे। लेकिन अब हम ये पढ़ेंगे कि आखिर ये जो फ्लूइड हैं ये मूव
करते हैं तो ये कितने प्रकार में मूव करते हैं। यानी टाइप्स ऑफ फ्लो। अगर ये फ्लो करेगा तो कैसे-कैसे फ्लो करेगा? तो
बेसिकली ना देखो तीन टाइप के फ्लो होते हैं। सबसे इंपॉर्टेंट है स्ट्रीमलाइन फ्लो जिसके ऊपर ये पूरा का पूरा चैप्टर है।
स्ट्रीमलाइन फ्लो। स्ट्रीमलाइन फ्लो का क्या मतलब होता है? आपने कभी देखा है? नल वो आपके घरों में नल लग रहा होगा। नल को
ऑन करते हो तो सारे पानी के पार्टिकल्स कैसे लाइन में एक सीधी लाइन में नीचे नीचे नीचे गिरते जाते हैं। नोट करा है। है ना?
इमेजिन करो तुम स्कूल की असेंबली में खड़े हो और तुम एकदम स्ट्रेट लाइन में खड़े हो। तो हम क्या बोल सकते हैं? स्ट्रीम लाइन।
है ना? तो ये वो फ्लो है जहां पर पानी का हर एक पार्टिकल सेम वेलोसिटी में एक डायरेक्शन में मूव करता है। क्या बात समझ
में आई? याद रखना। स्ट्रीमलाइन फ्लो इज द टाइप ऑफ मोशन इन व्हिच एव्री फ्लूइड पार्टिकल फॉलोस दी सेम पाथ। यानी एक पाथ
को फॉलो करेगा और वेलोसिटीज़ भी सेम रहेंगी। एग्जांपल दे देता हूं। जैसे कि मान लो एक पाइप है। उसमें से पानी के बहुत
सारे पार्टिकल फ्लो हो रहे हैं। अब मैं एक पॉइंट को डिसाइड करता हूं। मान लो एक पॉइंट है P. यह पॉइंट है P. ठीक है? इस
पॉइंट से जो भी पानी का पार्टिकल जाएगा ना उसकी वेलोसिटी हमेशा सेम रहेगी। क्या मैं बोल रहा हूं कि इस पॉइंट से जब भी कोई भी
पानी का पार्टिकल जाएगा तो उसकी वेलोसिटी सेम रहेगी और यही प्रॉपर्टी होती है किसकी? स्ट्रीम लाइन फ्लो की। आई होप ये
आपको समझ आ गया होगा कि स्ट्रीम लाइन फ्लो क्या होता है? अब इसको और डिटेल में इसके बारे में बात करेंगे। अभी हम बढ़ते हैं
सेकंड टाइप के फ्लो की तरफ जो कि है लेमिनार फ्लो। लेमिनार फ्लो क्या होता है? अह यह ना बड़े जैसे आप मान लो ओशन रिवर्स
वहां पर यह फ्लो आपको देखने को मिलता है। अगर आपने रिवर को देखा हो ना तो रिवर पे पानी कैसे मूव करता है? पानी की एक परत
जाती है। एक दूसरी परत जाती है। एक तीसरी परत जाती है। यानी लेयर्स में पानी मूव करता है। यस और नो। नोट करा है? हां। तो
उसी फ्लो को हम बोलते हैं लेमिनार फ्लो। ठीक है? द फ्लो इन व्हिच लिक्विड मूव्स इन दी स्मूथ लेयर ईच लेयर स्लाइडिंग जेंटली
ओवर दी अदर विदाउट मिक्सिंग। यानी अब ये दोनों लेयर मिक्स नहीं हो रही है। ये एक लेयर दूसरी लेयर पे जा रही है और वो
सीधे-सीधे-सीधे सेम डायरेक्शन में मूव करती जा रही है। तब हम उसको बोलते हैं लेमिनार फ्लो। जबकि एक तीसरे टाइप का फ्लो
जो कि सबसे खतरनाक फ्लो है जिसका नाम है टर्बुलेंट फ्लो। ये क्या है? एक एग्जांपल से समझाता हूं। देखो कभी ये देखा है डैम?
डैम देखा है? डैम में जब पानी को हाई स्पीड से छोड़ा जाता है तो कैसे? एक पानी दूसरे पे आता है, दूसरा तीसरे पे आता है,
तीसरा चौथे पे आता है। ऐसे देखा है? इसको हम बोलते हैं टर्बुलेंट फ्लो। यानी एक ऐसा फ्लो जिसके अंदर पानी के पार्टिकल्स की
अलग-अलग वेलोसिटी हैं। वह ओवरलैप भी कर रहे हैं। यानी एक दूसरे को क्रॉस कर रहा है। दूसरा तीसरे को क्रॉस कर रहा है। तो
उस फ्लो को हम क्या बोलते हैं बेटा? टर्बुलेंट फ्लो बोल रहे होते हैं। व्हेन दी फ्लूइड स्पीड बिकम्स ग्रेटर देन दी
सर्टेन लिमिट। और उस लिमिट को हम क्रिटिकल स्पीड भी बोलते हैं। यानी जब ये जो पानी की रफ्तार है ना ये क्रिटिकल स्पीड से
ज्यादा हो जाती है। तब क्या होता है? तब वो टर्बुलेंट फ्लो में चला जाता है। इसका एक एग्जांपल मैं बताता हूं। अगर तुम होली
में तुमने देखा हो कि कुछ लोग होते हैं जो कि छत पे खड़े हो के पानी की बाल्टियां फेंकते हैं। है ना? तो अगर कोई छत से पानी
की बाल्टी से पानी फेंकेगा ना तो पानी कभी भी ऐसे सीधा नहीं आएगा। वो पानी ऐसे-ऐसे बिखरता बिखरता बिखरता आएगा। क्यों?
क्योंकि हमने उसको इतनी वेलोसिटी दे दी जिसकी वजह से वो कैसे फ्लो कर रहा है? वो टर्बुलेंट फ्लो कर रहा है। यानी वो हर
डायरेक्शन में फ्लो कर रहा है। क्या बात समझ में आई? द मोशन ऑफ द पार्टिकल बिकम इर्रेगुलर एंड रैंडम और उसको हम बोलते हैं
टर्बुलेंट फ्लो। ठीक है? तीन फ्लो समझ आ गए? सबसे पहला क्या था? स्ट्रीमलाइन। और वही हमारे लिए इंपॉर्टेंट है। और उसी के
हम क्या करेंगे? कुछ प्रॉपर्टीज के बारे में जानना चाहेंगे। प्रॉपर्टीज ऑफ स्ट्रीम लाइन फ्लो। देखते हैं। एक-एक करके तीन-चार
प्रॉपर्टी है। ध्यान से समझ लो क्योंकि स्कूल लेवल में यही सवाल आ जाते हैं। पहली प्रॉपर्टी क्या है? इन अ स्टडी फ्लो न्यू
टू स्ट्रीम लाइंस क्रॉस ईच अदर। यानी कोई भी दो स्ट्रीम लाइन कभी भी आपस में क्रॉस नहीं करती। अच्छा क्लास 10थ के अंदर वो
तुमने मैग्नेटिक इफेक्ट ऑफ इलेक्ट्रिक करंट पढ़ा था वो चैप्टर। उसके अंदर अगर तुम्हें याद हो वो जो दो इलेक्ट्रिक फील्ड
ऑफ लाइंस होती थी वो कभी इंटरसेक्ट नहीं करती थी। याद आ गया? हां। सिमिलरली यहां पर भी क्या होता है ना कि कभी भी एक फ्लो
के अंदर एक्सट्रीम लाइन फ्लो के अंदर ये जो दो लाइंस हैं वो आपस में क्रॉस नहीं करती। यानी अगर आपका नल लगा हुआ है तो नल
में से पानी की लाइंस इस प्रकार से आएंगी। कभी भी वो ऐसे मिक्स नहीं होंगी। कभी वो ऐसे मिक्स नहीं होंगी। अब इसका रीज़न क्या
है? वही रीज़न जो कि हम मैग्नेटिक इफेक्ट ऑफ करंट में बोलते थे कि अगर अगर किसी भी स्ट्रीम लाइन पे मैं टेंजेंट ड्रॉ कर लूं
तो वो डायरेक्शन के बारे में बताता है और एक पॉइंट पे दो डायरेक्शन पॉसिबल नहीं है। अरे वो मैग्नेटिक इफेक्ट ऑफ इलेक्ट्रिक
करंट क्लास 10थ याद आया कुछ? वही यहां पर रीज़न है। ठीक है? तो याद रखना सिंस फ्लूइड पार्टिकल ऐट अ पॉइंट ऑफ इंटरसेक्शन वुड
हैव टू डायरेक्शन ऑफ दी फ्लो। दिस विल डिस्ट्रॉय दी स्टेडी नेचर ऑफ दी फ्लूइड फ्लो। यानी यह पॉसिबल नहीं है। क्योंकि
अगर यह इंटरसेक्ट कर गई, यह स्ट्रीम लाइंस इंटरसेक्ट कर गई, तो एक पॉइंट पे दो डायरेक्शन हो जाएंगे जो कि पॉसिबल नहीं
होता। ठीक है जी? अगला द टेंजेंट एट एनी पॉइंट ऑन दी स्ट्रीम लाइन गिव दी डायरेक्शन। यानी ये जो स्ट्रीम लाइन है इस
पे अगर आप टेंजेंट ड्रॉ करोगे तो वो डायरेक्शन को देगा। जैसे सर्कल के लिए हम डायरेक्शन निकालते हैं। सिमिलर वही है।
अगला ग्रेटर दी नंबर ऑफ स्ट्रीम लाइन पासिंग नॉर्मली थ्रू दी रीजन लार्जर दी फ्लूइड वेलोसिटी। समझाता हूं। एक छोटे से
एरिया में अगर ज्यादा स्ट्रीम लाइन होंगी तो वहां पर पानी की रफ्तार ज्यादा होगी। फॉर एग्जांपल यहां पर देखो कितनी सारी
स्ट्रीम लाइंस आपको दिख रही हैं। तो यहां पर पानी की रफ्तार ज्यादा होगी। अगर मैं एक पाइप और बना दूं जिसके अंदर मैं सिर्फ
दो स्ट्रीम लाइंस बनाऊं तो यहां पर पानी की रफ्तार यानी पानी की वेलोसिटी कम होगी। बहुत सिंपल चीजें, बेसिक चीजें हैं। लास्ट
पॉइंट, फ्लूइड वेलोसिटी रिमेंस कांस्टेंट एट एनी पॉइंट ऑफ दी स्ट्रीमलाइन। जो कि मैं आपको बता भी चुका हूं। स्ट्रीम लाइन
की सबसे खासियत क्या है कि किसी भी पॉइंट को पकड़ लो। उस पॉइंट पे सारे पार्टिकल्स की ये जो वेलोसिटी होती है ना ये सेम
रहेगी। बदलेगी नहीं। अभी वो पी पार्टिकल वाला समझाया ना? हां। तो ये चार कुछ प्रॉपर्टीज हैं जो कि आपको याद रखनी है
स्ट्रीमलाइन फ्लो के बारे में। ठीक है जी। हमको ये तो समझ आ गया कि स्ट्रीमलाइन फ्लो क्या होता है। अब यहां पर ना आपको आइडियल
फ्लूइड के बारे में समझना पड़ेगा कि अभी जो मैं आपको कुछ डेरिवेशंस कराऊंगा मैं ये अस्यूम करके चलूंगा कि जो फ्लूइड है ना वो
आइडियल है। जैसे कि आपके क्लास के टीचर ये अस्यूम करते हैं कि तुम एक आइडियल स्टूडेंट हो। लेकिन उनको नहीं पता कि तुम
बिल्कुल भी आइडियल स्टूडेंट नहीं हो। तुम तो एक रात पहले YouTube से पढ़ के आते हो और पेपर में पास हो जाते हो। है ना? तो
आइडियल फ्लूइड क्या है? देखते हैं। सबसे पहले वो फ्लूइड जो कि स्टेडी फ्लो करे। स्टेडी यानी वही स्ट्रीम लाइन। स्ट्रीम
लाइन फ्लो होना चाहिए। उसका सीधा फ्लो होना चाहिए। आपस में ओवरलैप वगैरह नहीं होना चाहिए। अगला इनकंप्रेसबल। थोड़ी देर
पहले भी बताया कि इनकंप्रेसबल होता है एक आइडियल लिक्विड। यानी उसको कंप्रेस नहीं किया जा सकता। अगला नॉन विस्कस। अब ये
विस्कस क्या होता है? इसके बारे में बाद में हम डिस्कस करेंगे। अभी के लिए आप ऐसा समझ लो कि दो फ्लूइड के बीच में फ्रिक्शन
नहीं होता। यानी हम अस्यूम करके चलेंगे। एक लाइन जा रही है, दूसरी लाइन जा रही है। है ना? इन दोनों के बीच में फ्रिक्शन नहीं
है। ठीक है? ठीक है? इस प्रॉपर्टी के बारे में हम आगे डिटेल में बात करेंगे। अगला इररोटेशनल फ्लो यानी यहां पर पानी में कोई
भी रोटेशन नहीं होता। इसका एक एग्जांपल है। तुमने अगर वो नदी वदी में देखा हो ना तो ऐसे भवर बन जाते हैं। है ना? भंवर बन
जाते हैं। तो हमें अस्यूम करके चल रहे हैं कि ऐसा कुछ भी नहीं होगा एक आइडियल फ्लूइड के अंदर। तो आइडियल फ्लूइड की चार
प्रॉपर्टीज हैं। और इन्हीं चार प्रॉपर्टीज को ध्यान में रख के हमें आगे की कुछ डेरिवेशंस करनी हैं। जैसे कि सबसे पहला
आता है इक्वेशन ऑफ़ कंटिन्यूटी। यहां दो इंपॉर्टेंट चीजें हैं बेटा। एक है इक्वेशन ऑफ कंटिन्यूटी और एक है बर्नोलिस थ्योरम।
बर्नोलिस थ्योरम बच्चों को इतना डराती है, इतनी डराती है। है ना कि बच्चे कहते हैं भैया यार ये तो हो ही नहीं पाती। आज मैं
करा दूंगा, क्वेश्चन भी करा दूंगा, डेरिवेशन भी करा दूंगा। तू चिल कर आजा। पहले इक्वेशन ऑफ़ कंटिन्यूटी देख। ये बहुत
बेसिक है। तुम स्टेटमेंट पढ़ोगे तो तुम्हें समझ आ जाएगा। देखो, द इक्वेशन ऑफ़ कंटिन्यूटी स्टेट्स दैट इफ देयर इज़ नो
सोर्स और सिंक इन अ ट्यूब देन वॉल्यूम ऑफ़ द लिक्विड एंटरिंग द ट्यूब पर यूनिट टाइम इज़ इक्वल टू दी वॉल्यूम ऑफ़ फ्लूइड लीविंग
पर यूनिट टाइम। यानी इमेजिन करो एक पाइप है। और उस पाइप में कोई नल वगैरह कुछ नहीं लगाया हुआ है। एक सिंपल सा पाइप है। मैं
यहां पर पाइप बना लेता हूं। ये ये पाइप। ठीक है? ये पाइप है। ठीक है? यहां से पानी जा रहा है। यहां से पानी बाहर जा रहा है।
तो अगर हमने कोई भी सोर्स नहीं लगाया यानी नल नहीं लगाया है तो जितना पानी यहां से जाएगा उतना ही बाहर आएगा। अरे ऐसा तो नहीं
है बीच में पानी की चोरी हो गई। हैं? ऐसा तो पॉसिबल नहीं है। हैं भाई बिहार से थोड़ी ना है पानी जो बीच में ही चोरी हो
जाए। मजाक कर रहा हूं। है ना? [हंसी] तो तो ऐसा थोड़ी रहा है कि चोरी हो जाएगा। कहां कहां से चोरी हो जाएगा भैया? तो वो
तो पॉसिबल ही नहीं है। तो यही बोलता है कौन? यही बोलता है इक्वेशन ऑफ़ कंटिन्यूटी। अब इक्वेशन ऑफ कंटिन्यूटी की एक डेरिवेशन
है सिंपल सी जो कि आपको पता होनी चाहिए। वो मैं आपको बता देता हूं। ये हम पाइप बनाएंगे वापस से वही एक पाइप बनाते हैं। आ
जाओ बेटा। ये पाइप है। यहां पर जो एरिया था वो हम लेंगे a1। यहां पर जो एरिया है वो हम लेंगे क्या बेटा? a2। ठीक है जी?
यहां से पानी जा रहा है जिसकी डेंसिटी हम रो मान लेते हैं। अब ध्यान से देखना बेटा। अकॉर्डिंग टू दी कंजर्वेशन ऑफ़ मास। है ना?
जो मास होता है मम मास। मास जो है वो कंजर्वड रहता है। जितना पानी यहां से आएगा उतना ही पानी यहां से जाएगा। भैया ये तो
बहुत सिंपल सी बात है। हमको पता है। मैंने कहा बहुत बढ़िया। इमेजिन कर यहां से मास गया पानी का m1 तो निकलेगा भी कितना? भैया
निकलेगा भी m2 या m1 बराबर ही होगा। तो क्या मैं बोल सकता हूं m1 विल बी इक्वल्स m2? बहुत बढ़िया। अच्छा मास का फार्मूला
क्या होता है? भैया डेंसिटी * वॉल्यूम। बहुत बढ़िया। तो लिख लेते हैं। डेंसिटी तो पानी की सेम ही रहेगी। है ना जी? बहुत
बढ़िया जी। ये भी समझ आ गया। डेंसिटी से डेंसिटी कट करा तो यानी हमें ये भी पता चल गया कि जो वॉल्यूम है पानी की जितनी जाएगी
उतनी बाहर आएगी। यहां तक भी समझ आ गया। और आगे बढ़ते हैं। अब देख अपन क्या करेंगे ना? वॉल्यूम को अपन कैसे लिख सकते हैं?
वॉल्यूम क्या होती है? इमेजिन करते हैं एक छोटे से टाइम पीरियड के लिए। एक छोटे से टाइम पीरियड के लिए जिसको हम मान लेते हैं
डेल्टा t। क्या मान लेते हैं बेटा? एक छोटे से टाइम पीरियड के लिए डेल्टा t। उस टाइम में उस टाइम में ये जो पानी था ना ये
आगे L मूव कर गया। कितना मूव कर गया बेटा? l मूव कर गया। थोड़ा सा आगे मूव कर गया। ऐसा आप अस्यूम कर लो यार। कोई दिक्कत तो
नहीं है? कोई परेशानी तो नहीं है। ठीक है? हम बस अस्यूम कर रहे हैं। डेल्टा टाइम के लिए छोटे से टाइम के लिए वो L मूव कर गया।
अब मुझे बताओ वॉल्यूम का फार्मूला क्या होता है? सबसे पहले तो। भैया वॉल्यूम का फार्मूला होता है एरिया * लेंथ। बहुत
बढ़िया। तो यहां पर लिख देता हूं A1 L1 और बाहर निकलते हुए A2 L2 ठीक है? यहां पर जो मूव करा वो छोटा सा L1 ले लिया और यहां पे
जो मूव करा वो छोटा सा हमने L2 ले लिया। ठीक है भैया ये भी समझ में आ गया। अच्छा अब मुझे एक चीज़ बताओ वेलोसिटी और लेंथ और
टाइम का कोई रिश्ता होता है क्या? क्या तुम्हें याद है? क्या तुम्हें याद है? अगर मुझे वेलोसिटी बतानी है तो मैं लिख दूंगा
डिस्टेंस यानी लेंथ / टाइम। अरे लेंथ / टाइम। और क्या मैं लेंथ को लिख सकता हूं वेलोसिटी इंटू टाइम। लिख सकता हूं या नहीं
लिख सकता? बिल्कुल लिख सकता हूं। बिल्कुल लिख सकता हूं। यानी अगर मैं अस्यूम करता हूं कि पानी इस जगह पर v1 वेलोसिटी से गया
और इस जगह पर v2 वेलोसिटी से गया तो क्या मैं यहां पर लिख सकता हूं? बेटा ध्यान से देख लो। इस लेंथ की जगह मैं क्या लिखने जा
रहा हूं? मैं लिखने जा रहा हूं वेलोसिटी v1 * डेल्टा t डेल्टा t टाइम के लिए गया। ठीक है जी? और मैं यहां पर क्या लिखने जा
रहा हूं? a2 * वेलोसिटी v2 (delta). अब डे (डेल्ट) t से डेल्टा कट जाएगा। और फाइनली जो इक्वेशन आएगी बेटा, वह आएगी a1b1 =
a2v2. और यही है सबसे इंपॉर्टेंट इक्वेशन जिसको हम इक्वेशन ऑफ़ कंटिन्यूटी बोलते हैं। क्या बात समझ में आई? यानी एरिया ऑफ़
फर्स्ट मल्टीप्लाई बाय वेलोसिटी ऑफ़ फर्स्ट इक्वल्स टू दी एरिया ऑफ़ सेकंड मल्टीप्लाई बाय वेलोसिटी ऑफ़ सेकंड। ये इंपॉर्टेंट है।
अच्छा, ये क्या बताता है? ये ना बड़ा एक रियल लाइफ का एग्जांपल है। तुमने कभी वो तुम्हारे घर में गार्डन वार्डन कुछ गया
है। तुमने पाइप वाइप लिया है पानी का पाइप। तो जब हमें दूर तक पानी देना होता था ना तो बड़ा मस्त गेम खेला करता था बचपन
में मैं। उसमें ऐसे मैं ऐसे थंब लगाता था और पानी का छिड़काव दूर तक जाता था। नोट करा है ऐसा क्यों? क्योंकि जब मैंने एरिया
कम करा तो वेलोसिटी ज्यादा हो गई। ध्यान से देख। ध्यान से देख। अगर मैं एरिया कम कर दूंगा तो वेलोसिटी ऑटोमेटिकली ज्यादा
हो जाएगी। क्योंकि इसकी वैल्यू कांस्टेंट रहेगी। इसकी वैल्यू कांस्टेंट रहेगी। a1 v1 = a2 v2 तो अगर मैं एरिया कम करूंगा
वेलोसिटी ज्यादा हो जाएगी। हां जी समझ आ गया। अब रियल लाइफ एग्जांपल से समझ आ गया जो पाइप में पानीानी देते थे वो हम
इक्वेशन ऑफ कंटिन्यूटी की मदद से देते थे और ये बहुत ज्यादा इंपॉर्टेंट है। इसके क्वेश्चन बार-बार हर बार पूछे गए हैं।
आईआईटी जेईई, नीट आपके स्कूल लेवल हर जगह आ जाते हैं। देख लेते हैं। एन आइडियल फ्लूइड फ्लोस लेमिनार फ्लो थ्रू अ पाइप ऑफ
नॉन यूनिफॉर्म डायमीटर। एक पाइप है जिसका जो डायमीटर है वो नॉन यूनिफॉर्म है। एक जगह छोटा होगा, एक जगह बड़ा होगा। मैंने
कहा बहुत बढ़िया। ठीक है? अब क्या बोला है? क्या बोला है? ऐसे मान लो एक बड़ा डायमीटर है, एक छोटा डायमीटर है। तो हमें
बड़ा डायमीटर दे रखा है 6.4 है ना? तो रेडियस कितना हो जाएगा? रेडियस हो जाएगा 3.2 सें.मी. और छोटा डायमीटर दे रखा है
4.8 तो रेडियस हो जाएगा 2.4 सें.मी. बहुत बढ़िया। अब क्या बोला है? द रेश्यो ऑफ़ दी मिनिमम एंड मैक्सिमम वेलोसिटीज़ ऑफ़ दी
फ्लूइड इन दिस पाइप। मुझे पहले ये बताओ कि मिनिमम वेलोसिटी कहां होगी? बताओ। मिनिमम और मैक्सिमम वेलोसिटी कहां होगी? देखो
जहां पर छेद छोटा वहां वेलोसिटी ज्यादा। वो पाइप वाला एग्जांपल याद रखना। यानी ज्यादा वेलोसिटी भैया यहां पर होगी और कम
वेलोसिटी यहां पर होगी। बहुत बढ़िया। तो अब आपको क्या बताना है? आपको कुछ नहीं बताना। ये इक्वेशन लगानी है। आपको
वेलोसिटीज का रेश्यो बताना है। तो मिनिमम किसकी होगी बेटा? मिनिमम उसकी होगी जिसका अरे बोलो। एरिया अरे एरिया ज्यादा होगा।
तो मुझे यहां पर बताना है v2 / v1 जिसकी वैल्यू बराबर होगी a1 / a2 के। बस अब दोनों का एरिया निकाल लो। a1 क्या है? ये
a2 क्या है? ये अब आपको बस वैल्यूस को पुट कर लेना है। तो मैं निकाल देता हूं। a1 लिख देता हूं। π * r r क्या है? 2.4²
/ π * r 3.2 का होल स्क्वायर। तो इनको आप सॉल्व कर लो और फटाफट से बता दो कि आपका आंसर क्या आ रहा है। बहुत बढ़िया। सॉल्व
करा होगा। तो आंसर कितना आ रहा है? इसको सॉल्व करने पे आंसर आ जाएगा 9/16। बहुत बढ़िया। तो आंसर आ गया ए। बहुत सही। चलिए
अगले सवाल की तरफ बढ़ते हैं। वाटर फ्लोस थ्रू अ पाइप ऑफ इंटरनल डायमीटर दिस एट दी स्पीड ऑफ़ दिस व्हाट शुड बी द डायमीटर ऑफ़
दी नोजल इफ दी वाटर टू बी इमर्ज एट दी स्पीड ऑफ़ फोर। अरे यार ये तो सिंपल हो गया। A1 V1 बस आपको वही फार्मूला लगाना
है। है ना? हमें क्या-क्या गिवन है बेटा? ये देखो। हमें जहां से पानी जा रहा है उसका डायमीटर गिवन है। यानी बेसिकली एरिया
गिवन है। और देखो वेलोसिटी हमें गिवन है। इसकी वैल्यू हमें 1 मीटर पर सेकंड गिवन है। अब जहां से पानी बाहर जा रहा है वहां
की वेलोसिटी भी हमें गिवन है जो कि है 4 मीटर पर सेकंड। तो आपको ये एरिया निकालना है। ये एरिया निकालना है। तो अब आप इसको
सॉल्व करो। वीडियो को पॉज करो और कमेंट में बताओ कि क्या आया? ये होता है इक्वेशन ऑफ़ कंटिन्यूटी। चलिए आगे बढ़ते हैं। अब हम
कुछ टर्म्स के बारे में जानेंगे। क्योंकि अब हम इस चैप्टर के सबसे इंपॉर्टेंट टॉपिक बर्नौली भैया जी के पास आगे बढ़ रहे हैं।
तो बर्नौली भैया के पास जाने से पहले थोड़ी बहुत चीजें हमें पता होनी चाहिए। क्या पता होना चाहिए? सबसे पहले काइनेटिक
एनर्जी पर यूनिट वॉल्यूम। भैया काइनेटिक एनर्जी क्या होती है? 1/2 mv² पर यूनिट वॉल्यूम यानी वॉल्यूम से डिवाइड कर लो। तो
ऑब्वियस सी बात है अगर आप 1/2 mv² को वॉल्यूम से ये वॉल्यूम है बेटा। वॉल्यूम से डिवाइड करोगे तो मास / वॉल्यूम क्या
होता है? मम्मा मास। मास बाय वॉल्यूम होता है डेंसिटी। तो यानी काइनेटिक एनर्जी पर यूनिट वॉल्यूम का फार्मूला क्या? यही
होगा। 1/2 * डेंसिटी * वेलोसिटी का स्क्वायर। बहुत बढ़िया। ये चीजें काम आएंगी इसलिए बता रहा हूं। ये होता है
काइनेटिक एनर्जी पर यूनिट वॉल्यूम। अब मैं बताता हूं आपको पोटेंशियल एनर्जी पर यूनिट वॉल्यूम क्या होगा? पोटेंशियल एनर्जी
डिवाइड बाय वॉल्यूम। तो मास / वॉल्यूम फिर डेंसिटी हो गया। तो ये आ गया रोgh। बहुत बढ़िया। देखा फार्मूला लग रहा है।
अभी तो देखा था थोड़ी देर पहले। हां। अगली चीज़ प्रेशर एनर्जी पर यूनिट वॉल्यूम। अच्छा प्रेशर एनर्जी क्या होती है? ये
आपने केमिस्ट्री में थर्मोडायनेमिक्स में पढ़ लिया होगा और नहीं पढ़ा है तो फिजिक्स में हम कुछ ही चैप्टर बाद हम इसको पढ़ ही
लेंगे। तो प्रेशर एनर्जी होती है एक्चुअली में प्रेशर * वॉल्यूम। यही होता है प्रेशर एनर्जी का फार्मूला। और प्रेशर एनर्जी पर
यूनिट वॉल्यूम क्या होगा? PV PV / V क्योंकि वॉल्यूम से डिवाइड कर दोगे तो आंसर आ जाएगा प्रेशर। तो प्रेशर, एनर्जी
पर यूनिट वॉल्यूम कुछ नहीं है। सिर्फ और सिर्फ प्रेशर है। क्या है? प्रेशर। ठीक है? ये तीनों चीजें पता चल गई? पता चल गई।
तो आ जाइए आगे बढ़ते हैं। बर्नौली भैया जी से मिलते हैं। बर्नोली प्रिंसिपल क्या बोलता है? पहले स्टेटमेंट पढ़ेंगे।
स्टेटमेंट ये बोलता है बर्नोली इक्वेशन स्टेट दैट इफ वी मूव अलोंग अ स्ट्रीम लाइन। यानी हम स्ट्रीम लाइन से आगे बढ़ते
जाएंगे। द सम ऑफ दी प्रेशर द सम ऑफ दी प्रेशर द काइनेटिक एनर्जी पर यूनिट वॉल्यूम एंड द पोटेंशियल एनर्जी पर यूनिट
वॉल्यूम रिमेंस कास्टेंट फॉर एन इनकंप्रेसिबल फ्लूइड। क्या बोल रहा है? मान लो एक पाइप है। उस पाइप में अगर हम
आगे बढ़ते जाएंगे ना तो प्रेशर प्लस काइनेटिक एनर्जी पर यूनिट वॉल्यूम प्लस पोटेंशियल एनर्जी पर यूनिट वॉल्यूम उसकी
जो ओवरऑल वैल्यू है वो कांस्टेंट रहेगी। चाहे मैं यहां पे चेक करूं, चाहे मैं यहां पे चेक करूं, चाहे मैं बिटवीन में चेक
करूं। पूरे पाइप में हर जगह इन तीनों चीजों का सम जो होगा वो कांस्टेंट रहेगा। यानी बर्नोली क्या बोलता है? प्रेशर + 1/2
रोv² + रोgh ये जो होगा ये हमेशा कांस्टेंट रहेगा। ये
एक सत्य है। मुझे पता है अभी तुम्हें कुछ समझ नहीं आया। रुको जरा सबर करो। अभी मैं तुम्हें फील लाऊंगा। जब तक मैं एप्लीकेशन
पे बढूंगा ना फिर तुम्हें पता चलेगा। आई ला भैया। अच्छा ये समझा रहे थे क्या? थोड़ी देर रुकना पड़ेगा। सबर करना पड़ेगा।
ठीक है जी। इतनी चीज हमें क्लियर हो गई। अब देखना बेटा इसकी डेरिवेशन। बट डेरिवेशन से पहले कुछ लॉजिकल चीजें मैं आपको समझाना
चाहता हूं। वरना मजा नहीं आएगा तुमको। मुझे एक बात बताओ अगर मैं मान लेता हूं ये तीनों चीजें कांस्टेंट हैं। एक बार को
मैंने मान लिया। ठीक है? मुझे बताओ इनमें से क्या बदल सकता है? अरे भैया ऑब्वियस सी बात है। डेंसिटी कभी बदलेगी नहीं। अरे हां
या ना? डेंसिटी कभी लिक्विड की डेंसिटी सेम रहती है। ठीक है? है ना? H कभी बदलेगा नहीं। बहुत बढ़िया। तो भैया बदलेगा क्या?
वेलोसिटी बदल सकती है या तो या तो प्रेशर बदल सकता है। अरे हां या ना बोल। बाकी सारी चीजें तो कांस्टेंट है। अगर बाय चांस
कुछ बदलेगा तो क्या बदल सकता है? या तो वेलोसिटी और या तो एक्सटर्नल प्रेशर। अब इमेजिन कर इस पूरे की वैल्यू कांस्टेंट
है। सोचना बेटा सोचने पे मजबूर करना है अपन को। अगर मैं वेलोसिटी को बढ़ा दूं बाय एनी चांस। मेरा मन किया मैंने वेलोस पानी
की पानी के अंदर फवारे में मैंने वेलोसिटी बढ़ा दी। तब क्या बढ़ेगा या क्या घटेगा? अब इसकी वैल्यू तो कांस्टेंट है। अगर
वेलोसिटी बढ़ गई ना भैया तो इस प्रेशर को कम होना पड़ेगा। इस प्रेशर को कम होना पड़ेगा। और यही बोलता है बर्नोली थ्योरम
कि अगर आप पानी की रफ्तार यानी फ्लूइड की पानी नहीं फ्लूइड है। पानी तो एक लिक्विड हो गया। फ्लूइड यानी गैसेस और लिक्विड सब
कुछ। तो अगर आप किसी भी फ्लूइड की वेलोसिटी बढ़ाते हो। अगर आप वेलोसिटी बढ़ाते हो तो प्रेशर घटता है और अगर
वेलोसिटी घटाते हो प्रेशर बढ़ता है। भैया अभी भी समझ नहीं आया तो रुको भाई इसका एक लाइव प्रैक्टिकल एग्जांपल मैं आपको करा के
दिखा देता हूं। देखो भाई मैं आपके लिए एक पेपर लाया हूं। है ना? अब ये पेपर है। अब तुम बस इस पेपर को देखना। पेपर नीचे झुका
हुआ है। अब अगर मैं ऊपर फूंक मारूंगा तो भैया पेपर को तो नीचे जाना चाहिए क्योंकि मैं ऊपर देखो ना वेलोसिटी मेरी ऊपर लग रही
है। पर देखना एक जादू होगा। देखो क्या हुआ? मैं ऊपर फूंक लगा रहा हूं बट पेपर ऊपर आ रहा है। अरे भैया पेपर को तो
नीचे जाना चाहिए। अरे यही तो गेम है। देख मैंने क्या करा? जब मैंने यहां पे फ्लूइड्स यानी एयर को वेलोसिटी दी तो यहां
पर वेलोसिटी तेज हो गई। अब जब ऊपर वेलोसिटी तेज हो गई तो वेलोसिटी तेज होते ही प्रेशर कम हो जाता है। यानी ऊपर प्रेशर
कम हो गया। और नीचे तो प्रेशर ज्यादा है ना? और प्रेशर कहां से कहां लगता है? नीचे से ऊपर। यानी कम से अरे देखना भाई यहां पे
क्या था ज्यादा और ऊपर था कम तो ज्यादा से कम की तरफ प्रेशर लग गया है ना भाई तो यही तो है गेम समझ आया यानी बर्नोली ये बोलता
है कि जहां पर वेलोसिटी ज्यादा वहां पर प्रेशर भैया कम हो गए जैसा अभी मैंने आपको दिखाया और प्रेशर कहां से कहां मूव करता
है हाई से लो की तरफ चलिए हमको ये समझ आया इसके कुछ एग्जांपल्स हैं जो कि आपको फील देंगे आपको मजा आएगा पहले वो एग्जांपल्स
हम देखते हैं सबसे पहले डायनेमिक लिफ्ट देखना देखना बेटा अगर आपने कभी देखा हो बॉल को वो देखा है तुमने जो क्रिकेटर्स
होते हैं ना जो फास्ट बॉलर्स होते हैं वो बॉल को स्विंग करते हैं। देखा है वो स्विंग कैसे होती है? वो ना बॉल को ऐसे
रगड़ते रहते हैं बार-बार बार-बार और एक तरफ से बॉल को रफ कर देते हैं। एक तरफ से चमका देते हैं। ऐसा वो क्यों करते हैं?
कभी सोचा है? अरे एक तरफ से रफ कर रहे हैं। एक तरफ से चमका रहे हैं। ऐसा क्यों कर रहे हैं? क्योंकि बॉल उससे स्विंग होती
है। आओ बेटा तुम्हें क्रिकेट का आज तुम सबको क्रिकेट का कांसेप्ट समझाता हूं। ये है बॉल। मान लो इस बॉल को मैंने एक तरफ से
रफ कर दिया। एक तरफ से रफ कर दिया। एक तरफ से ये बॉल कैसी है? शाइनीशाइनी है। एकदम मस्त है। तो अब होगा क्या? कि जब मेरा जब
मैं बॉल को तेज स्पीड से फेंकूंगा तो क्या होगा? एयर एयर पास होगी। तो अब जब एयर बेटा पास होगी ना तो एयर क्या होगी? यहां
से जब एयर पास होगी तो वो कम वेलोसिटी से पास होगी। क्योंकि यहां पर देखो खुद-खुदरे सब्सटेंस हैं। है ना? रफ हो गया है। तो
यहां पर वेलोसिटी कम होगी। है ना? वेलोसिटी यहां पर कम होगी। बल्कि यहां से जो एयर पास होगी उसकी वेलोसिटी तो बहुत
तेज होगी। अब इससे होगा क्या? जहां वेलोसिटी कम अकॉर्डिंग टू दी बर्नोली भैया जी जहां वेलोसिटी कम वहां पर प्रेशर
ज्यादा और जहां वेलोसिटी ज्यादा वहां प्रेशर कम। अब देखो प्रेशर का डिफरेंस आ गया। प्रेशर के डिफरेंस की वजह से ये जो
बॉल जा रही थी वो ऐसे घूमने लगेगी और मूव करने लगेगी। मूव कर जाएगी ये बॉल। और ऐसे इस वजह से स्विंग होती है बॉल। हवा में
आपने देखा होगा बॉल टेढ़ी हो जाती है। क्यों होती है? भैया यहां भी फिजिक्स है। इसी वजह से एक तरफ से रफ रखते हैं। एक तरफ
से शाइन कराते हैं। क्यों? क्योंकि रफ वाला क्या करता है? वेलोसिटी को कम करता है। दूसरा वाला बहुत बढ़िया। ये चीज आई
होप आपको क्लियर हो गई होगी। है ना? मैं आपको दिखा भी देता हूं। इसको हम क्या बोलते हैं? इसको हम बोलते हैं मैग्नस
इफेक्ट। क्या बोलते हैं बेटा? मैग्नस इफेक्ट। तो याद रखना। हाई वेलोसिटी यानी लो प्रेशर। लो वेलोसिटी यानी हाई प्रेशर।
इस वजह से बॉल हमारी स्विंग हो पाती है। पहला तो ये है। दूसरा एरोप्लेन। एरोप्लेन कैसे उड़ते हैं हवा में? भैया बर्नोली की
वजह से। हां जी भैया। बर्नोली की वजह से अगर आपने देखा हो एरोप्लेनस के पास ना कुछ फ्लैप होते हैं। जब वो उड़ रहे होते हैं
ना तो उन फ्लैप को वो खोल लेते हैं। जिस वजह से वो टेक ऑफ कर पाता है। नोट कराएगा अभी। तो देखो वो फ्लैप ना कुछ इस प्रकार
से होता है। ये आप शेप को देख पा रहे होंगे। क्या इस शेप आपको ध्यान से दिख रही है? अब इस शेप से क्या होता है? मान लो
एरोप्लेन आगे जा रहा है। उसने अपने फ्लैप को ऐसे ओपन कर लिया। तो अब क्या होगा? यहां से हवा जाएगी ना। देखो, यहां से हवा
जाएगी ना, तो वह तेज रफ्तार में जाएगी। ऊपर से तेज स्पीड से जाएगी और नीचे तो नॉर्मल ही जा रही है। ऊपर से तेज़ जा रही
है, नीचे से नॉर्मल जा रही है। अब ऊपर से क्या होगा बेटा? देखना ऊपर से तेज स्पीड में जा रही है। वेलोसिटी ज्यादा यानी
प्रेशर कम। और यहां पर क्या होगा? वेलोसिटी कम, तो प्रेशर ज्यादा। अब मुझे बताओ प्रेशर कहां से कहां लगता है? हाई से
लो में। हाई से लो में। यानी फोर्स कहां लगेगी? डिंग डिंग डिंग डिंग डिंग और अपना प्लेन डिंग डिंग डिंग डिंग डिंग करके उड़
जाएगा। जाएगा टाटा बाय-ब गुड बाय हो जाएगा। क्या बात समझ में आई? यानी एरोप्लेनस में भी साइंस यूज़ हो रही है।
क्या बात है? ठीक है? तो याद रखना एज अ विंग मूव्स अगेंस्ट दी विंड स्ट्रीमलाइन क्राउड अबव दी विंग मोर देन बिलो एयर फ्लो
स्पीड इज़ हायर ऑन द टॉप। यानी जो ऊपर वाला जो सरफेस होता है ये डायग्राम बना के आना रहेगा पेपर के अंदर। ऊपर वाले पे क्या
होती है? स्पीड ज्यादा होती है। प्रेशर कम होता है। नीचे स्पीड कम होती है। प्रेशर ज्यादा हाई टू लो। हाई टू लो अपलिफ्ट मिल
गया। और आपका प्लेन टाटा बाय-ब गुड बाय करके हवा में चल दिया। इसका एक और एग्जांपल है जो कि है स्प्रेयर। आपके घर
में कुछ भी वो स्प्रे वाला होता है ना उसको एक एग्जांपल से देखते हैं। कुछ इस प्रकार से होती है आपके घर में स्प्रे। तो
अगर आपने देखा हो आपने ऐसे प्रेस करते हो प्रेस करते हो तो उससे क्या होता है? जैसे ही मान लो मैंने यहां प्रेस करा। मैंने
ऐसा बटन दबाया प्रेस किया तो होगा क्या ना बेटा? यहां से एयर पास होगी। जैसे ही एयर पास होगी तो क्या होगा? वेलोसिटी बढ़ेगी।
वेलोसिटी बढ़ेगी तो प्रेशर घटेगा। अब भैया नीचे तो प्रेशर ज्यादा था। इस कंटेनर के अंदर जिसके अंदर तुम्हारा डीओ डीओ स्टोर
है। यहां पे प्रेशर ज्यादा था। यहां प्रेशर कम हो गया। तो हाई से लो पे आएगा। हाई से लो पे आएगा। आपका डीओ और वो डीओ
बाहर आ जाएगा। क्या बात समझ में आई? यानी जितनी भी स्प्रेज़ होती हैं, डड्रेंट्स होते हैं, सब कुछ बर्नौली प्रिंसिपल पे ही
काम करते हैं। तो बर्नोली भैया क्या बोलते हैं? जहां पर वेलोसिटी ज्यादा, वहां प्रेशर कम। और जहां वेलोसिटी कम, वहां
प्रेशर ज्यादा। बस आपको इतना ध्यान रखना है। चलो अब आते हैं इसकी डेरिवेशन की तरफ क्योंकि इसकी जो डेरिवेशन है ना बेटा वो
बहुत इंटरेस्टिंग है। थोड़ी टफ है बट मजा आएगा। मतलब मजा आपको तो क्या ही आएगा। तुम तो परेशान ही होगे बट करनी जरूरी है। तो
क्या कर सकते हैं? ठीक है जी? मान लेते हैं मान लेते हैं। एक पाइप है अपने पास। ठीक है? एक पाइप अपन मान लेते हैं अपने
पास। ठीक है? अब क्या होगा? अब क्या होगा? इस पाइप में इस पाइप में अब क्या अस्यूम करो यहां पर जो एरिया है वो a1 है। यहां
पर जो एरिया है वो क्या है बेटा? वो एरिया है A2. ठीक है? अब हमें ये अस्यूम करना होगा कि यहां पर जो पानी की वेलोसिटी है
पहले इस पॉइंट पे वो तो है v1। यहां पर मैं अस्यूम करता हूं पानी की वेलोसिटी v1 और यहां पर पानी की वेलोसिटी आ गई v2। ठीक
है? पहले ये h हाइट पे था। h1 हाइट पे था और अब ये क्या है? अब ये h2 हाइट के ऊपर है। ठीक है? ये डायग्राम आपको पहले तो याद
रखना है। अब सबसे पहले तुम क्या करो? चीजें लिख दो। जैसे कि चेंज इन काइनेटिक एनर्जी। तो यहां से यहां जाने में चेंज इन
काइनेटिक एनर्जी कितना हुआ? तो वो होगा 1/2 m
v2 स्क्वायर - v1² क्या यही होगा चेंज इन काइनेटिक एनर्जी? जल्दी से बता दो। क्या यही है चेंज इन काइनेटिक एनर्जी? बहुत
बढ़िया। अब अगर मुझे चेंज इन पोटेंशियल एनर्जी निकालनी है तो वो कितना होगा? चेंज इन पोटेंशियल एनर्जी होता है बेटा mgh।
है ना? तो यहां पर है mgh2 और यहां पर mgh1 तो उनका चेंज हम निकाल लेंगे mgh - h1। बहुत बढ़िया। तो हमने क्या करा?
हमने चेंज इन पोटेंशियल एनर्जी भी निकाल लिया। अच्छा अब मैं क्या करता हूं? मैं वर्क डन का चेंज निकालता हूं। मैं क्या
करता हूं? चेंज इन वर्क डन निकालता हूं। यहां पर आपको फिजिक्स का एक नियम याद रखना होगा कि वर्क डन इज नेगेटिव ऑफ एनर्जी। है
ना? पढ़ा था वर्क पर एनर्जी के अंदर। तो तो एक्चुअली में एक्चुअली में वर्क डन ये नहीं होगा। ये नहीं होगा। वर्क डन इस पे
आपको एक नेगेटिव साइन और लगाना पड़ेगा। यानी बेसिकली चेंज इन वर्क डन होगा W1 - W2। है ना? अब ये भैया वर्क डन एक्चुअली
में है क्या? अरे वर्क डन कुछ नहीं है। अरे कुछ भी नहीं है। ये वही है वो प्रेशर एनर्जी जो कि हम पढ़ रहे थे अभी तक। है
ना? कि प्रेशर से कितनी एनर्जी लग रही है? अरे भाई पी वी पी वी बहुत बढ़िया। तो ये वही है। बाकी कुछ भी नहीं है। तो इसमें
ज्यादा हमें क्या कंफ्यूज वगैरह नहीं होना है। ठीक है? तो अब यहां पर मैं ले लेता हूं। ये W1 यानी पहले कितना वर्क डन था?
तो इसको मैं लिख लेता हूं। P1 V1 ठीक है? यहां पर मैंने क्या लिखा बेटा? P1 V1 - P2V2 तो ये क्या आ गया? ये आ गया चेंज इन
चेंज इन वर्क डन। ठीक है जी? तीन चीजें हमें क्लियर हो गई। आई होप यहां तक किसी को कोई दिक्कत नहीं आई होगी। अब देखो मैं
यहां पर एक छोटा सा नियम लगाऊंगा साइंस का। वो नियम क्या बोलता है? द लॉ ऑफ़ कंजर्वेशन ऑफ एनर्जी। लॉ ऑफ कंजर्वेशन ऑफ
एनर्जी ये बोलता है कि एनर्जी इज़ कंजर्व्ड। यानी काइनेटिक एनर्जी प्लस पोटेंशियल एनर्जी इज़
इक्वल्स टू दी चेंज ऑफ वर्क डन। यानी यह जो है यह टोटल टोटल चेंज इन काइनेटिक एनर्जी प्लस चेंज इन पोटेंशियल एनर्जी के
बराबर होगा। टोटल वर्क डन। अभी मैंने बता दिया कि वर्क डन क्या आया है? P1V1 - P2V2 और यहां पर आपको पता ही है क्या आया है।
ठीक है जी? बहुत बढ़िया। अब मेरे को बस ये सारी वैल्यूज़ को यहां पर क्या करना है बेटा? पुट करते चलना है। बाकी मुझे यहां
पर कुछ भी नहीं करना है। ठीक है जी? आ जाओ अब फटाफट से। चेंज इन काइनेटिक एनर्जी कितना है? है चेंज इन काइनेटिक एनर्जी आप
देख सकते हो। अह चेंज इन काइनेटिक एनर्जी मैं लिख सकता हूं यहां पर 1/2 m 1/2 m v2 v2²
- 1/2 m v1² ठीक है? पोटेंशियल एनर्जी भी आगे जोड़ दो अब। पोटेंशियल एनर्जी क्या है? पोटेंशियल एनर्जी है mgh
- mg1। ठीक है जी? ये बात समझ में आ गया? बहुत बढ़िया। अब यहां पर चीज ध्यान से देखना।
यार ये v क्या था? ये वेलोसिटीस थोड़ी ना थी। ये क्या थी? ये क्या थी? ये तो वॉल्यूम है और पानी की वॉल्यूम तो सेम ही
रहती है। तो क्या मैं लिख सकता हूं यहां पर कि जो भैया v1 है और जो v2 है वो तो बराबर है। तो इसको मैं v भी लिख सकता हूं।
यस और नो। ठीक है जी। बहुत बढ़िया। अब मैं क्या करूंगा? मैं जो नेगेटिव वाली टर्म्स हैं इनको यहां ले जाऊंगा और इस वाली को
यहां ले जाऊंगा। देखना मैं क्या बोल रहा हूं। P1V V1 को V लिख रहा हूं मैं वॉल्यूम में। और यह नेगेटिव वाली को यहां ले
आऊंगा। + 1/2m V1² + MGH1.
इसकी वैल्यू किसके बराबर होगी? यहां पर मैंने इसको भेज दिया। तो, यह हो गया P2V + 1/2 M V2² + क्या बच गया अपना? MGH2।
बहुत सही। अब मैं क्या करूंगा? पूरी इक्वेशन को ये जो वॉल्यूम है ना बड़ा वाला v इससे मैं
डिवाइड कर लूंगा। बेटा कंफ्यूज मत हो। ये वेलोसिटी है। ये वॉल्यूम है। तो मैं दोनों तरफ मैं क्या करूंगा? अब मैं बड़े वाले v
से डिवाइड कर लूंगा। और जब मैं डिवाइड करूंगा आपको दिखेगा ये आएगा p1 प्लस ये क्या आ गया? काइनेटिक एनर्जी पर यूनिट
वॉल्यूम। तो इसको मैं लिख सकता हूं 1/2 लिख सकता हूं ना? बहुत बढ़िया। ये क्या आ गया? पोटेंशियल एनर्जी पर यूनिट वॉल्यूम।
बहुत बढ़िया। और यहां पर भी सेम आ जाएगा। तो यहां पर भी आप लिख सकते हो। ठीक है? देखते चलना बस। इंपॉर्टेंट ये कि तुम
देखते चलो। चलो बहुत सही। तो फाइनली फाइनली ये हमारी डेरिवेशन आ गई जो कि मैंने आपको शुरू में बताया था कि यही हमें
डिराइव करना था बर्नोलिस थ्योरम के अंदर जिसके अंदर P1 + काइनेटिक एनर्जी पर यूनिट वॉल्यूम प्लस पोटेंशियल एनर्जी पर यूनिट
वॉल्यूम इक्वल्स टू दी सेकंड प्रेशर प्लस काइनेटिक एनर्जी पर यूनिट वॉल्यूम। पोटेंशियल एनर्जी पर यूनिट वॉल्यूम के
बराबर होता है। मुझे पता है थोड़ा सा कॉम्प्लिकेटेड था। एक बार समराइज़ कर देता हूं। इसके अंदर हमने कुछ भी नहीं करा है।
हमने एक पाइप लिया है। सारी चीजों को डिफाइन करा। सबसे पहले मैंने चेंज इन काइनेटिक एनर्जी निकाला। चेंज इन
पोटेंशियल एनर्जी निकाला। चेंज इन वर्क डन निकाला। अब चेंज इन वर्क डन क्या आया? W1 - W2। अब ये W क्या होता है? अरे प्रेशर
एनर्जी। थर्मोडायनेमिक्स। हां। प्रेशर एनर्जी क्या होती है? प्रेशर एनर्जी होती है प्रेशर इंटू वॉल्यूम। और दोनों की
वॉल्यूम तो सेम ही है। तो V1 V2 बराबर है। ठीक है? फिर मैंने लॉ ऑफ़ कंजर्वेशन ऑफ एनर्जी लगाया जो कि ये बोलता है कि द चेंज
इन वर्क डन इज़ इक्वल्स टू दी क्या? टोटल चेंज इन काइनेटिक एनर्जी प्लस टोटल चेंज इन पोटेंशियल एनर्जी। ये अकॉर्डिंग टू दी
कंजर्वेशन ऑफ़ एनर्जी है। ठीक है जी? तो अब इससे मैंने फाइनली ये इक्वेशन डिराइव कर दी जो कि मुझे डिराइव करनी थी। आई होप ये
चीज़ आपको क्लियर हो गई होगी। चलिए जी आगे बढ़ते हैं। एक सवाल की तरफ बढ़ते हैं जो कि आप मुझे बताओगे। अब यह जो क्वेश्चन है नीट
के अंदर आया गया है। बट फिर भी देखो कितना ईजी क्वेश्चन है। एन आइडियल फ्लूइड इज़ फ्लोइंग इन अ नॉन यूनिफॉर्म क्रॉस सेक्शनल
ट्यूब। आप यह x से y में जा रहा है। और हमें क्या बताना है कि इस पॉइंट पे जो काइनेटिक एनर्जी है वो कितनी है? वो k1
है। और इस पॉइंट पे काइनेटिक एनर्जी जो है वो k2 है। तो आपको ये बताना है काइनेटिक एनर्जी k1 और k2 का रिश्ता क्या होगा? अब
तुम कंफ्यूज हो गए। बट यहां पर ना सोचने की बात थी। कैसे सोचना था? देखो, यहां पर छेद छोटा है, एरिया कम है। और जहां पर
भैया एरिया कम होता है, वहां वेलोसिटी ज़्यादा होती है। तो ऑब्वियस सी बात है इस जगह पर इस जगह पर काइनेटिक एनर्जी ज्यादा
होगी। यानी जो K1 होगा वो K2 के कंपैरिजन में ज्यादा होगा। तो ये सबसे इज़ी क्वेश्चन था नीट का। चलो अब आगे बढ़ते हैं अगले
टॉपिक की तरफ जो कि है द स्पीड ऑफ़ इफ्लिक्स। अभी जो इफ्लिक्स होता है इसकी स्पीड हमें कैलकुलेट करनी है। अरे कंफ्यूज
मत हो। कोई फ्लिक्स कुछ नई चीज नहीं है। बड़ी बेसिक सी चीज है। एक कंटेनर हमें लेना है। एक कंटेनर हमें लेना है। ये देख
लो एक कंटेनर। और इस कंटेनर के अगर मैं नीचे कहीं पर छेद कर दूं जिसका एरिया मैं ले लेता हूं a2। ठीक है? ऊपर वाला ये जो
कंटेनर का छेद है इसका एरिया मैं ले लेता हूं a1। तो आपको ये बताना है कि जो पानी इसमें से निकलेगा। अरे ऑब्वियस सी बात है
छेद करोगे तो पानी निकलेगा। तो भैया ये पानी की वेलोसिटी कितनी होगी? है ना? है ना? इमेजिन आपको ये कर लेना है कि यहां से
लेकर ऊपर तक की जो हाइट है वो h है। तो इसका एक इक्वेशन होती है, एक फार्मूला होता है। इसी को हम क्या बोलते हैं? इसी
को इसी को हम बोल रहे होते हैं द स्पीड ऑफ इफ्लिक्स। इसका फार्मूला होता है 2g। क्या होता है? 2gh। और इसी का एक छोटा
सा प्रूफ है जो कि हम बर्नोली थ्योरम की मदद से करने वाले हैं। आ जाओ। है ना? करें फटाफट से। बहुत बहुत ईजी है। ज्यादा
मुश्किल नहीं है। ज्यादा कंफ्यूज नहीं होगे। ठीक है? बर्नोली थ्योरम ये बोलती है कि भैया जो पानी है ना उसकी तीन चीजों का
अगर आप सम करोगे तो वो कांस्टेंट आएगी हर बार। यही बोलती है बर्नोली थ्योरम। तो आ जाओ भैया दोनों जगह बर्नोली थ्योरम लगाते
हैं। ठीक है? लिखना स्टार्ट करते हैं। अच्छा मुझे एक बात बताओ एक्सटर्नल प्रेशर क्या दोनों पे सेम लगेगा? एक पॉइंट मैं
यहां मान लेता हूं। एक पॉइंट मैं यहां मान लेता हूं। क्या दोनों पे एक्सटर्नल प्रेशर जो P हम लेते हैं बर्नोली थ्योरम में वो
बराबर होगा या नहीं होगा? अरे बराबर होगा। एटमॉस्फेरिक प्रेशर। तो मैं सबसे पहले तो लिख देता हूं P1 और P2 सेम होंगे। हां या
ना? बहुत बढ़िया। अब इमेजिन कर लेते हैं यहां से जो वेलोसिटी निकल रही है वो V2 है। और यहां पर जो वेलोसिटी है पानी की वो
कितनी है? वो है V1। ठीक है? अब बर्नोली थ्योरम का उपयोग करते हैं। P1 + 1/2 रो V1 स्क्वायर प्लस हाफ हाफ नहीं सॉरी रो GH।
क्यों? क्योंकि ये देखो h हाइट पे है। ये वाले पॉइंट की बात कर रहा हूं। ये कितनी हाइट पे है बेटा? ये h हाइट पे है। बहुत
बढ़िया। इसकी वैल्यू बराबर होगी P2 + 1/2 रो V2² प्लस ये तो बॉटम पे है। हाइट पे ही नहीं
है। h ज़ीरो है। तो यानी ये जो रोgh है यहां पर कितना हो जाएगा? शून्य हो जाएगा। ज़ीरो हो जाएगा। अब आपको पता है P1 और P2
क्या है बेटा? दोनों आपस में बराबर है। तो इन दोनों को फटाफट से काट दो। ठीक है जी? बहुत बढ़िया। अब आपको ज्यादा कुछ नहीं करना
है। अब क्या करोगे आप? इसको यहां ले आओ। तो ये जो रोgh आएगा इसकी वैल्यू बराबर आ जाएगी कितनी? 1/2 रो v2² - v1² कोई
दिक्कत, कोई परेशानी, कोई दुविधा? अब क्या करोगे? रो से रो कर दोगे। टू को यहां भेज दोगे। तो ये आ जाएगा 2gh = v² v2² - v1²।
अब क्या करें? हमें निकालना क्या है? हमें v2 निकालना है। अब यहां पर इक्वेशन ऑफ़ कंटिन्यूटी। इक्वेशन ऑफ़ कंटिन्यूटी क्या
बोलती है? a1v1 = a2v2 यही तो बोलती है। हां मुझे निकालना क्या है भैया? मुझे निकालना है यहां से v2
मुझे v2 निकालना है। तो मुझे ये जो v1 है ना v1 हटाना पड़ेगा। v1 की वैल्यू ढूंढनी पड़ेगी। है ना? V1 को रिप्लेस करना
पड़ेगा। यही तो मेरा काम है। ठीक है जी? तो मैं क्या करता हूं? मैं यार एक बार देखता हूं कि v1 की वैल्यू क्या आई? तो
देखना बेटा जब मैंने v1 को रिप्लेस करा तो v1 की वैल्यू कितनी आई? वो आई a2 / a1 a2 / a1 * v2 यस और नो। a2 / a2 / a1 / b2 अब
तुम अगर ध्यान से देखो यार ये छोटा सा छेद है। एरिया बहुत छोटा है और a1 एरिया बहुत बड़ा है। a1 एरिया बहुत बड़ा है। तो क्या
मैं यहां पे लिख सकता हूं कि यार देखो जो a1 है ना भैया वो बहुत ज्यादा बड़ा है एज़ कंपेयर टू a2। और तुम अगर यहां ध्यान से
देख पा रहे हो। यहां पे गौर फरमाओ भैया। यहां ध्यान से देखो। अगर इसकी वैल्यू बहुत ज्यादा होती है, डिनोमिनेटर की वैल्यू
ज्यादा होती है, तो इस पूरी वैल्यू ये जो पूरी वैल्यू होती है, ये अराउंड ज़ीरो बन जाती है। है ना? इसकी वैल्यू अप्रोक्स
क्या हो जाती है? ज़ीरो हो जाती है। हम ऐसा एस्टीमेट ले रहे हैं। ठीक है? तो यहां पर मैं v1² की वैल्यू क्या पुट कर सकता हूं
बेटा? ज़ीरो के बराबर पुट कर सकता हूं। तो v2² की वैल्यू आ गई अब मेरी। v2² की वैल्यू आ गई मेरी 2gh
और और v2 की वैल्यू आ गई 2gh जो कि मुझे निकालना था। यानी जब भी मैं किसी भी कंटेनर में छेद करूंगा और
मुझे उसकी क्या निकालनी होगी? पानी की वेलोसिटी निकालनी होगी। एक डायरेक्टली फार्मूला है 2gh। बहुत क्वेश्चन आते हैं।
याद रखना 2gh। हमने बर्नोलीस की इक्वेशन लगाई और उसकी मदद से हमने इसको सॉल्व करा। कोई भी क्वेश्चन आ जाएगा एक कंटेनर में ये
बोल देगा कि जो छेद किया है पर हाइट हमेशा बॉटम से काउंट होगी। ठीक है? तो मान लो मान लो मान लो ऐसा ऐसा बोल दे मैं बताता
हूं आपको मैं क्या समझाना चाह रहा हूं। इंपॉर्टेंट है। ध्यान से देख लो। मान लो ये बोला है कि ये जो पूरा कंटेनर है ये 10
मीटर का है। और जो छेद हुआ है छेद हुआ है वो कितने पे हुआ है? वो नीचे से 4 मीटर पे हुआ है। नीचे से 4 मीटर पे हुआ है। तो आप
फार्मूला तो लगा दोगे इस पे 2gh बट h क्या लोगे? बताओ h क्या लोगे? H आप काउंट यहां से नहीं करोगे। h आप काउंट
करोगे बेटा यहां से। ये बात याद रखना। क्योंकि जितनी डेप्थ में जाते हैं वेलोसिटी बढ़ती जाती है पानी की। है ना?
तो हमें यहां से काउंट करना है। यानी हम 6 मीटर इस क्वेश्चन के अंदर हम क्या करेंगे? 6 मीटर लेंगे। आंसर आएगा 2 * 10 * 6 जो कि
आ जाएगा अंडर रूट 120 मीटर पर सेकंड। तो ऐसे वेलोसिटी आप किसी भी कंटेनर के किसी भी पॉइंट पे निकाल सकते हो। क्वेश्चंस कई
बार-बार पूछे गए हैं। ये फार्मूला हमें क्या रखना है? याद रखना है। चलिए जी आगे बढ़ा जाए। अब एक क्वेश्चन देख लेते हैं जिस
क्वेश्चन की मदद से आप सॉल्व कर पाओगे। थोड़ा बहुत ज्ञान ले पाओगे। फिर हम अगले टॉपिक की तरफ बढ़ते हैं जो कि है
विस्कोसिटी। क्वेश्चन देखते हैं। इन अ टेस्ट एक्सपेरिमेंट ऑन अ मॉडल एरोप्लेन इन अ विंड टनल द फ्लो स्पीड ऑन दी अपर एंड
लोअर सरफेससेस ऑफ द विंग आर 70 मीटर पर सेकंड एंड 63 मीटर पर सेकंड रेस्पेक्टिवली। व्हाट इज द लिफ्ट ऑफ द
विंग इफ दी एरिया इज़ दिस? टेक दी डेंसिटी ऑफ़ द एयर टू बी दिस? बड़ा खतरनाक क्वेश्चन एनसीईआरटी का। क्या बोला है? एक प्लेन है।
याद है प्लेन पे ऊपर तो स्पीड तेज होती है। याद आ गया? नीचे कम होती है। हमसे क्या बोला है? आपको ये बताना है कि प्लेन
पे लिफ्ट कितनी लग रही है? लिफ्ट यानी आपको फोर्स बतानी है। कुछ नहीं बताना आपको। आपको फोर्स बतानी है कि कितनी फोर्स
लग रही है। है ना? बस आपको ये बताना है। बाकी आपको कुछ भी नहीं बताना। तो यहां पर हम बर्नोली थ्योरम का यूज़ कर सकते हैं। है
ना? बर्नोली थ्योरम। देखो दोनों सेम हाइट पे हैं। दोनों सेम हाइट पे हैं। तो रोgh तो कैंसिल हो जाएगा। है ना? तो मैं लिख
सकता हूं 1/2 रो1² = p2 + 1/2 रो2² हां या ना? अब देखो p1 - p2 यानी यानी
हमें क्या करना है? हमें यही निकालना है। हमें P1 - P2 ही तो निकालना है भैया। और हम क्या निकालेंगे? हमें यही तो निकालना
है। चेंज इन प्रेशर। प्रेशर में कितना चेंज आया? यही तो हमें निकालना है। तो इसकी वैल्यू किसके बराबर हो जाएगी? 1/2 रो
v2² - v1² तो अब आपको क्या करना है? इसको मैथमेटिकली सॉल्व कर लेना है और चेंज इन प्रेशर निकाल के आंसर बता देना है। जब आप
इसको सॉल्व करोगे तो ये जो चेंज इन प्रेशर आएगा ये 65 के अराउंड अराउंड आएगा। बट क्या ये आपका आंसर है? नहीं। आंसर में
हमसे क्वेश्चन में हमसे फोर्स पूछी गई है। फोर्स क्या होती है? अरे भैया प्रेशर इंटू एरिया। ये तो चेंज इन प्रेशर है। अब इस
प्रेशर को हमें क्या करना होगा? इसके एरिया से मल्टीप्लाई करना होगा। एरिया हमें इस क्वेश्चन के अंदर गिवन है कि
एरिया कितना है? 2.5 मीटर पर मीटर²। तो ये हमें सॉल्व करना है और इससे हमारी ओवरऑल फोर्स जो कि इस पे अप्लाई हो रही होगी
प्लेन के ऊपर वो हमें पता चल जाएगी। तो ये एनसीईआरटी का क्वेश्चन है। थोड़ा सा कैलकुलेटिव है बट ऐसे सवाल आ जाते हैं।
चलिए आगे बढ़ते हैं अगले टॉपिक की तरफ जो कि है विस्कोसिटी। अब ये जो विस्कोसिटी है ना ये सबसे इजी टॉपिक है। विस्कोसिटी का
एक एग्जांपल है शहद। अरे शहद यानी मैं क्योंकि मेरा निक नेम भी हनी है। हां मजाक से हटके शहद गाढ़ा होता है अगर आपने ध्यान
से देखा हो तो। शहद के अंदर अगर आप उंगली डालोगे तो आपकी उंगली इजीली उसके अंदर घूम नहीं पाएगी। वहीं पर ही अगर मैं आपको
बोलूं पानी। पानी के अंदर आप अपनी उंगली डालो तो पानी तो बहुत पतला है। तो विस्कोसिटी वही चीज है जो कि ये बताता है
कि कौन सा लिक्विड मोटा है, गाढ़ा है और कौन सा लिक्विड पतला है। अगर साइंटिफिकली मैं इसकी डेफिनेशन बताऊं तो डेफिनेशन देख
लेते हैं। विस्कोसिटी क्या है? इट इज दी इंटरनल फ्रिक्शन प्रेजेंट बिटवीन दी लेयर्स ऑफ अ फ्लूइड व्हेन दे मूव रिलेटिव
टू ईच अदर। मैंने आपको अभी थोड़ी देर पहले बताया था कि जो फ्लूइड होते हैं ना वो लेयर्स में फ्लो करते हैं। ठीक है? तो ये
विस्कोसिटी उन दोनों लेयर्स के बीच की फ्रिक्शन है। तो जिसकी जितनी ज्यादा विस्कोसिटी होगी वो उतना ज्यादा गाढ़ा
होगा। यानी वो फ्लो नहीं कर पाएगा। अगर तुमने देखा हो जो शहद होता है वो ईजीली फ्लो नहीं कर पाता। लेकिन वहीं पे मैं बात
करूं वॉटर की तो वॉटर बहुत ईज़ीली फ्लो करता है। एक और एग्जांपल बता देता हूं। मरकरी। मरकरी जो होता है वो भी बहुत गाढ़ा
होता है। वो भी फ्लो नहीं कर पाता लेकिन वॉटर बहुत ईजीली फ्लो करता है। यानी विस्कोसिटी क्या है? ये एक ऐसी प्रॉपर्टी
है जो कि आपको ये बताता है कि लेयर्स के बीच का फ्रिक्शन क्या है? बहुत बढ़िया। आई होप ये चीज़ आपको क्लियर हो गई होगी। यहां
पर डायग्राम देख के भी समझ आ रहा होगा कि देखो एक लिक्विड जो है वो कितनी मुश्किल से फ्लोट कर रहा है। यानी कितनी मुश्किल
से नीचे आ रहा है। जबकि ये लिक्विड कितनी ईजीली नीचे आ रहा है। तो ज्यादा विस्कोसिटी किसकी होगी? इसकी होगी ज्यादा
विस्कोसिटी। आई बात समझ में? बहुत बढ़िया जी। हमको ये समझ आ गया। अब हम पढ़ते हैं कोफिशिएंट ऑफ विस्कोसिटी। अब ये कोफिशिएंट
ऑफ विस्कोसिटी का पहले तो सिंबल याद रखना बेटा। ये होता है सिंबल। ठीक है? नीटा भी बोलते हैं। इस प्रकार से इसका सिंबल होता
है। अब ये बेसिकली है क्या? इसकी एक सिंपल डेफिनेशन है। बट उससे पहले ये समझो कि ये डिपेंड किस पे करता है? ये डिपेंड करता है
नेचर ऑफ दी मटेरियल पे। यानी ये जो फ्लूइड्स हैं ना ये फ्लूइड्स किस मटेरियल के बने हैं? इनका नेचर क्या है? उस पे
डिपेंड करता है कोफिशिएंट ऑफ विस्कोसिटी। जैसे कि पानी जो है उसकी कोफिशिएंट ऑफ़ विस्कोसिटी कम होगा। क्योंकि वो ईजीली
फ्लो हो जाता है। जबकि मरकरी उसका ज्यादा होगा। हां या ना? है ना? तो पहली चीज तो ये डिपेंड करता है किस पे? नेचर पे। और
दूसरी एक और चीज है जिस पे डिपेंड करता है जो कि है टेंपरेचर पे। अब टेंपरेचर पे ना बड़े इंटरेस्टिंग तरीके से डिपेंड करता है।
ध्यान से समझना। अगर मैं कोई भी लिक्विड लूं और उसको गर्म करूं। मैं क्या बोल रहा हूं? मैं लिक्विड लूं और उसको गर्म करूं
तो पता है क्या होगा? ये जो कोफिशिएंट ऑफ विस्कोसिटी है ना ये डिक्रीज होने लगेगा। विस्कोसिटी ऑफ़ द लिक्विड डिक्रीज विद
टेंपरेचर लिक्विड के केस में। वहीं पर ही अगर मैं बात करूं गैसेस की तो पता है क्या होगा? उल्टा होगा। क्या होगा? उल्टा होगा।
गैसेस को अगर टेंपरेचर दोगे ना तो उसकी विस्कोसिटी बढ़ जाएगी। यानी यानी वो इजीली फ्लो नहीं कर पाएगी। क्या बात समझ में आई?
बहुत बढ़िया। व्हाइल इट इंक्रीजसेस इन द केस ऑफ गैसेस। जैसे कि यहां पर एक टेबल है आपकी एनसीईआरटी की। वो आप देख भी सकते हो।
वाटर का अगर आप टेंपरेचर बढ़ाओगे तो विस्कोसिटी कम होगी। वहीं पर अगर मैं एयर की बात करूं तो अगर मैं इसका टेंपरेचर
बढ़ा देता हूं तो विस्कोसिटी भी बढ़ जाती है। क्या बात याद रहेगी? एमसीक्यू क्वेश्चंस के अंदर पूछ लिया जाता है। ठीक
है जी। भैया बट ये कोफिशिएंट ऑफ़ विस्कोसिटी है क्या? इसका फार्मूला तो बताओ। तो आ जाओ भैया इसका फार्मूला पढ़ते
हैं। इट इज़ दी रेश्यो। किसका रेश्यो? ध्यान से देखना। इट इज़ डिफाइंड एज दी रेश्यो ऑफ दी शेयरिंग स्ट्रेस टू दी
स्ट्रेन रेट। बहुत इंपॉर्टेंट। शेयरिंग स्ट्रेस टू दी स्ट्रेन रेट। अब ये स्ट्रेन रेट क्या होता है भैया? हमें तो नॉर्मल
स्ट्रेन पता था। वो पिछले चैप्टर पढ़ा था हमने मैकेनिकल प्रॉपर्टीज़ ऑफ़ सॉलिड। ये स्ट्रेन रेट क्या है? स्ट्रेन रेट का
फार्मूला समझो सबसे पहले। वो होता है वेलोसिटी बाय l यानी लेंथ। यानी अगर कोई भी फ्लूइड फ्लो कर रहा है तो उसकी जितनी
भी वेलोसिटी होगी और जितनी भी उसकी लेंथ होगी। है ना? यानी उसकी जो थिकनेस होती है फ्लूइड की वो उन दोनों को अगर मैं डिवाइड
करूंगा तो मैं स्ट्रेन रेट निकाल सकता हूं। तो बेसिकली ये जो कोफिशिएंट हमें दिख रहा है ना विस्कोसिटी का ये क्या है?
शियरिंग स्ट्रेस। स्ट्रेस क्या होता है? ये फार्मूला तो तुम्हें पता होगा। फोर्स बाय एरिया। ऑब्वियस सी बात है। है ना? ये
है स्ट्रेस। और और स्ट्रेन रेट क्या मैंने बताया? वेलोसिटी बाय लेंथ। बहुत बढ़िया। वेलोसिटी बाय लेंथ। इसको सॉल्व करोगे तो
ये फाइनली आपका फार्मूला बन जाएगा fl / ab यानी f क्या है? फोर्स। l क्या है? लिक्विड की जो थिकनेस है। a क्या है? अरे
बोलो भाई। एरिया और v क्या है? वेलोसिटी ऑफ़ द लिक्विड। ये होता है फार्मूला ऑफ़ कोफिशिएंट ऑफ विस्कोसिटी। ये फार्मूला
आपको याद रहना चाहिए। ठीक है जी? अब इस फार्मूले को अगर तुम गौर से देखोगे, ध्यान से देखोगे, जितने ध्यान से तुम उनको देखा
करते हो, वैसे ही इसको हम फॉर्मूले को ध्यान से देखेंगे तो हमें पता चलेगा कि अगर मैं वेलोसिटी को बढ़ाऊंगा।
है ना? वेलोसिटी को बढ़ाऊंगा तो कोफिशिएंट ऑफ विस्कोसिटी कम होगा। यानी अगर कोई भी फ्लूइड तेज वेलोसिटी से फ्लो करेगा, इसका
ये मतलब है कि उसका कोफिशिएंट ऑफ विस्कोसिटी कम होगा। हां या ना? अरे पानी जल्दी फ्लो करता है उसका कोफिशिएंट ऑफ
विस्कोसिटी कम होता है। वहीं पर कोई और मटेरियल है जो कि धीरे-धीरे फ्लो करता है। यानी उसका कोफिशिएंट ऑफ विस्कोसिटी ज्यादा
होता है। ये बात अब हमने इस फॉर्मूले से भी प्रूव कर ली है। अब यहां पर आपको एक और चीज ध्यान में रखनी है कि ये जो कोफिशिएंट
ऑफ़ विस्कोसिटी होता है ना इसका यूनिट बड़ा इंपॉर्टेंट है क्योंकि बच्चों को इसका यूनिट याद नहीं रहता। तो इसका यूनिट होता
है पास्कल सेकंड। याद रखना क्या? पास्कल * सेकंड। ये होता है इसका यूनिट। बहुत बढ़िया। और डायमेंशन भी याद रखना। m l की
पावर -1 t की पावर -1 ये इसका क्या होता है? ये इसका डायमेंशन फार्मूला भी आप देख सकते हो। बहुत बढ़िया। तो यानी हमें
कोफिशिएंट ऑफ विस्कोसिटी समझ आ गया। अभी हम क्वेश्चंस की तरफ बढ़ेंगे। बट उससे पहले एक छोटा सा टॉपिक समझो कि विस्कस
फोर्स क्या होती है? देखो यार अगर मैं किसी भी बॉल को मैं इमेजिन कर रहा हूं। मैं इमेजिन कर रहा हूं। मेरे पास एक बहुत
बड़ा कंटेनर है। ठीक है? एक बहुत बड़ा कंटेनर है। उसमें पानी ही पानी भरा हुआ है। और उसके अंदर अगर मैं बॉल को नीचे की
डायरेक्शन में वेलोसिटी दूंगा तो मुझे एक बात बताओ बॉल पे कौन-कौन सी फोर्सेस लगेंगी? बताओ कौन-कौन सी फोर्सेस लगेंगी?
अरे यार भैया ऑब्वियस सी बात है ये जो बॉल है ना बॉल ये एक तो खुद के वेट की वजह से नीचे जाएगी। हां या ना? नीचे कौन सी फोर्स
लगा रही है? mg mg ऊपर की डायरेक्शन में भैया हमें पता है हम स्मार्ट हो चुके हैं। थोड़ी देर पहले आपने ही बताया बायोट फोर्स
लगती है। मैंने कहा बहुत बढ़िया। पर अभी हमने एक और फोर्स के बारे में पढ़ा जो कि है विस्कस फोर्स। है ना विस्कोसिटी? तो
देखो बेटा जब भी कोई चीज फ्लूइड के अंदर ट्रैवल कर रही होती है तो एक और फोर्स लगती है जिसको हम बोलते हैं विस्कस फोर्स।
और वो भी अपोजिट डायरेक्शन में लगती है। यानी इस डायरेक्शन में अब एक और फोर्स लगेगी जो कि होगी हमारी विस्कस फोर्स जो
कि अपोज करेगी इस बॉल के मोशन को। अभी तक 11वीं क्लास से पहले हमें सिर्फ और सिर्फ बाइंड फोर्स पता था। आज हमने एक नई फ़ जान
ली जो कि है विस्कस फ़। जब भी कोई भी बॉडी एक फ्लूइड में जाएगी तो एक और फोर्स लगेगी जो कि उसको अपोज़ करेगी जिसका नाम होता है
विस्कस फ़। बहुत बढ़िया। तो विस्कस फ़ क्या है? इंटरनल फ्रिक्शन की वजह से जनरेट हुई फोर्स। जो कि जब भी कोई बॉडी आएगी फ्लूइड
के अंदर तो उसको अपोज कर रही होगी। बहुत बढ़िया। अब यहां पर क्वेश्चन क्या पूछा जाता है वो भी देख लेते हैं। क्वेश्चन ये
पूछा जाता है इफ एन ऑब्जेक्ट इज़ फ्लोटिंग इन अ फ्लूइड व्हाट विल बी अ विस्कस फोर्स? यानी अगर कोई ऑब्जेक्ट फ्लोट कर रहा है
पानी पे तो उस पे विस्कस फोर्स कितनी होगी? आंसर है ज़ीरो। शून्य। क्योंकि विस्कस फोर्स तभी होगी जब कोई भी ऑब्जेक्ट
पानी में वेलोसिटी से जा रहा होगा। अब पानी के ऊपर फ्लोट कर रहा है। अरे भाई पानी के ऊपर फ्लोट कर रहा है तो तो विस्कस
फोर्स जीरो होगी। लेकिन अगर वो पानी के अंदर ट्रैवल कर रहा होता तो हां बिल्कुल तो फिर हमारी विस्कस फोर्स लग रही होती।
बट इसका आंसर क्या होगा? इसका आंसर होगा ज़ीरो। बहुत बढ़िया जी। ये हमें समझ आ गया। चलो एक क्वेश्चन देख लेते हैं। अभी तक
हमने जितना भी पढ़ा कोफिशिएंट ऑफ़ विस्कोसिटी वगैरह पे एक सवाल देख लेते हैं जो कि एनसीईआरटी का सवाल है। देखना। अ
मेटल ब्लॉक ऑफ़ एरिया। अब देखो सबसे पहले ये लिखो गिवन क्या है? हमें एरिया गिवन है। ठीक है जी? बहुत बढ़िया। इज कनेक्टेड
टू 0.010 kg मास। यानी एक मास भी हमें गिवन है जो कि है 0.01 kg। बहुत बढ़िया जी। बाय अ
स्ट्रिंग दैट पाससेस ओवर अ आइडियल पुली। पुली-वली सब छोड़ो भूल जाओ। यहां पर एक फिगर आनी थी जो कि यहां से हमने हटा दी
अभी के लिए। मिस प्रिंट हो गया। कोई दिक्कत नहीं है। अ लिक्विड विद अ फिल्म थिकनेस ऑफ़ 0.30 mm। अब क्या हो रहा है कि
एक लिक्विड बीच में रखा हुआ है। ठीक है? एक लिक्विड बीच में रखा है और उसकी थिकनेस गिवन है। मैंने क्या बोली थी? थिकनेस यानी
लेंथ ऑफ दी लिक्विड जो कि हमें ये गिवन है। तो यहां पर मैं लिख लेता हूं लेंथ को। अब इसको कन्वर्ट कर लेना बेटा मीटर के
अंदर जो कि होगा 10 रे टू पावर -3 मीटर। बहुत बढ़िया जी। इज प्लेस्ड बिटवीन दी ब्लॉक एंड दी टेबल। यानी ऐसे मानो, ऐसे
मानो कि एक ब्लॉक है और एक टेबल है। उसके बीच में एक फ्लूइड रखा गया है और उस फ्लूइड की थिकनेस हमें दे रखी है और ये
ब्लॉक जो है वो नीचे की डायरेक्शन में आ रहा है। ये ब्लॉक कहां आ रहा है? नीचे की डायरेक्शन में आ रहा है। और इसकी वेलोसिटी
भी दे रखी है कि ये जो ब्लॉक जिस वेलोसिटी से नीचे आ रहा है वो कितनी है? वो है v की वैल्यू है 0.085
मीटर पर सेकंड। फाइंड दी कॉफिशिएंट ऑफ़ विस्कोसिटी ऑफ़ दी फ्लूइड। अब हमें इसमें कॉफिशिएंट ऑफ विस्कोसिटी निकालना है। अब
इसी चीज को अभी हमने थोड़ी देर पहले पढ़ा कि कोफिशिएंट ऑफ विस्कोसिटी का क्या फार्मूला होता है? कोई बताएगा? क्या होता
था? स्ट्रेस स्ट्रेस बाय बाय स्ट्रेन रेट। ठीक है? तो आई होप
ये फार्मूला अब हमें एकदम बढ़िया तरीके से याद हो गया होगा। ठीक है? अब देखो फोर्स हमारे पास है क्या? फोर्स कौन लगा रहा है?
अरे ये बक्सा नीचे की डायरेक्शन में आ रहा है। तो ये फोर्स लगाएगा। कितनी फोर्स लगाएगा? जितना इसका मास यानी इसका वेट
होगा mg है ना तो जो फोर्स लगेगी वो होगी mg ठीक है जी लेंथ किसका लेंथ जो फ्लूइड है उसका लेंथ वो हमें गिवन है वो कितना है
0.3 * 10 रे टू पावर -3 ठीक है जी क्या हमें एरिया गिवन है बिल्कुल एरिया भी हमारे पास गिवन है क्या हमें वेलोसिटी
गिवन है बिल्कुल वेलोसिटी भी गिवन है तो क्या मैं कोफिशिएंट ऑफ विस्कोसिटी निकाल सकता हूं अरे भैया बिल्कुल निकाल सकता हूं
तो अब आपको कुछ भी नहीं करना है mg सारी वैल्यूज को पुट कर लो तो ये आ जाएगा 0.1 * लेंथ लेंथ कितनी है? 0.3 * 10 रे टू
पावर -3 डिवाइड बाय डिवाइड बाय एरिया कितना है? 0.1 इससे ये कट जाएगा और वेलोसिटी कितनी है? 0.085
ठीक है जी। अब इसको आप सॉल्व कर सकते हो। थोड़ा बहुत गणित का उपयोग करें। मैथ का उपयोग करें और बताएं कोफिशिएंट ऑफ
विस्कोसिटी यहां पर कितना आना चाहिए? अगर आपने इसको सॉल्व करा होगा तो अराउंड अराउंड 3.5 * 10 रे टू पावर -3 पास्कल
सेकंड आ रहा होगा। यूनिट याद रखना यूनिट होती है पास्कल सेकंड। किसकी? कोफिशिएंट ऑफ विस्कोसिटी की। बहुत बढ़िया। तो ऐसे
सवाल आ जाते हैं। ठीक है? अब बढ़ते हैं हम अगले नियम की तरफ। अगले लॉ की तरफ जिसका नाम है स्टोक्स लॉ। अब देखो स्टोक्स बाबा
आए। स्टोक्स बाबा ने ये बोला कि यार तुमने ये तो बता दिया कि विस्कस फोर्स होती है। बट विस्कस फोर्स की वैल्यू तो बताओ। तो
इन्होंने तुम्हारे फिजिक्स को सिलेबस को थोड़ा सा और खींचा और बढ़ाया और इन्होंने एक वैल्यू निकाल के दी जो कि है विस्कस फोर्स
की वैल्यू। हां वही फाॅर्स जो कि ऊपर की डायरेक्शन में लग रही है। उस फोर्स की वैल्यू जो कि एक बड़ा ही घटिया फार्मूला
है। घटिया नहीं बोलूंगा। तुम्हें याद करने में दिक्कत आएगी इसलिए घटिया बोल रहा हूं। वैसे तो बहुत इंटरेस्टिंग फार्मूला है।
मैं आपको बता देता हूं। 6 π θ rv 6π तो तुम्हें पता ही है। कांस्टेंट होता है। ठीक है जी? ये क्या है? कोफिशिएंट ऑफ़
विस्कोसिटी। दिख रहा है? कोफिशिएंट ऑफ विस्कोसिटी r क्या है? रेडियस। यानी हम ये इमेजिन करके चल रहे हैं कि एक स्फीयर है
जो कि पानी के अंदर ट्रैवल कर रहा है। उसका रेडियस है r और v क्या है? वेलोसिटी। जिस वेलोसिटी से वो स्फीयर नीचे की
डायरेक्शन में जा रहा है। तो ये फार्मूला भी आपको याद करना पड़ेगा। ये होता है विस्कस फोर्स का फार्मूला जो कि स्टोक्स
लॉ ने दिया था। स्टोक्स बाबा ने दिया था। ठीक है जी? ये फार्मूला हमें याद रहना चाहिए। 6pाई नीटा। बहुत बढ़िया। अब देखो
इसकीेंस बहुत जरूरी है। इसके एप्लीकेशनेशंस बहुत जरूरी है। पता है क्यों? क्योंकि स्टोक्स लॉ से ना हमारे ये
जो नेचर है ना इसके बहुत सारे राज के बारे में हमें पता चलता है। जैसे कि सबसेेंट चीज क्या है? इट एक्सप्लेंस व्हाई रेन
ड्रॉप फॉल्स विद अ स्मॉल स्पीड। देखो बारिश आ रही है। इतनी ऊंचाई से आ रही है। अगर बारिश वेलोसिटी से नीचे गिरेगी। बूंद
नीचे गिरेगी तो वो इतनी तेज गिरेगी ना कि वो तुम्हारी स्किन को चीर के अंदर चली जाएगी। बट बारिश की बूंदे तो बहुत धीरे
आती हैं। ऐसा क्यों? क्योंकि जब बारिश की बूंद नीचे आ रही होती है ना तो एनवायरमेंट में एटमॉस्फियर की जो विस्कस फोर्स है वो
उसको अपोज करती है। और विस्कस फोर्स उसकी वेलोसिटी को कम कर देती है। इसी वजह से बारिश की बूंदों में तुम नहा सकते हो,
एंजॉय कर सकते हो। वरना भैया खून खराबा हो जाता। है ना? अगर विस्कस फ़ नहीं होती तो तुम हो जाता तुम्हारा। समझ रहे हो बात को?
तो सबसेेंट क्या है? एक्सप्लेन व्हाई दी रेन ड्रॉप फॉल्स विद अ स्मॉल स्पीड। एंड आल्सो हेल्प अंडरस्टैंड क्लाउड फॉर्मेशन।
क्लाउड फॉर्मेशन को भी यही बता पाता है क्योंकि देखो जो क्लाउड होता है ना वो नीचे आ रहा होता है लेकिन विस्कस फोर्स
ऊपर लग रही होती है। इस वजह से क्लाउड पानी की फॉर्म में नीचे हमें आ रहा होता है। मतलब वाटर हमें उससे मिल रहा होता है।
ठीक है जी। उसके अलावा एक्सप्लेंस विस्कस ड्रैग ऑन दी स्मॉल स्फेरिकल बॉडी। कोई भी स्मॉल स्फेरिकल बॉडी आ रही है तो उस पे
कितनी फोर्स लगेगी अपोजिट डायरेक्शन में उसके बारे में बताता है स्टोक्स लॉ। अगली चीज हेल्प अंडरस्टैंड दी इफेक्ट ऑफ रेडियस
एंड विस्कोसिटी ऑन दी मोशन। बहुत इंपॉर्टेंट है। देखो अगर तुमने उस फॉर्मूले को ध्यान से देखा हो। इस
फॉर्मूले को ध्यान से देखो। क्या इससे हमें ये पता चल रहा है कि अगर किसी भी बॉडी का रेडियस बढ़ेगा तो विस्कस फोर्स
बढ़ेगी। और एक और चीज अगर वेलोसिटी बढ़ेगी तो भी विस्कस फोर्स बढ़ेगी। यानी अगर कोई चीज एनवायरमेंट में बहुत तेज रफ्तार से आ
रही है तो उस पे विस्कस फोर्स ज्यादा लगेगी। सिमिलरली अगर कोई बड़ी चीज आ रही है तो उस पे भी विस्कस फोर्स ज्यादा लगेगी।
और पता है इसी का एक एग्जांपल है। वो जो मीटरॉइड्स आते हैं ना स्पेस से हमारे अर्थ की तरफ और आतेआने से पहले ही वो गायब हो
जाते हैं। वो गायब क्यों हो जाते हैं? क्योंकि उनका एक तो रेडियस बहुत बड़ा है। वेलोसिटी बहुत ज्यादा है। तो उन पे जो
विस्कस फोर्स लग रही होती है एनवायरमेंट में आती है वो बहुत ज्यादा होती है। जिसकी वजह से वो गायब हो जाते हैं, जल जाते हैं,
बर्न कर जाते हैं। ठीक है जी? इस वजह से मटेरॉइड हमसे टकराते नहीं है। बहुत सही। उसके अलावा इट एक्सप्लेंस हाउ अ पर्सन विद
अ पैराशूट कम स्लोली। अगर पैराशूट में कभी तुम गए हो क्योंकि मैं गया हूं मुझे पता है। जब पैराशूट में क्या लगता है? इस नीचे
की डायरेक्शन से क्या लग रहा होता है? अरे बोलो भाई विस्कस फोर्स जिस वजह से आराम से हम लैंडिंग कर पाते हैं। चलिए जी बहुत
बढ़िया। अब इसका एक क्वेश्चन देखते हैं। नीट 2023 के अंदर पूछा गया था। द विस्कस ड्रैग एक्टिंग ऑन अ मेटल स्फीयर ऑफ
डायमीटर दिस। पहले ये लिखते जाओ। देखो गिवन क्या है? अगर हम ये लिख लेते हैं ना फिजिक्स के अंदर गिवन क्या है? तो आधी
प्रॉब्लम तो वहां समाप्त हो जाती है। तो पहले देखते हैं डायमीटर है यानी रेडियस लिख देते हैं 0.5 * 10 रेज़ टू पावर -3
मीटर। ठीक है? फॉलिंग थ्रू अ फ्लूइड ऑफ विस्कोसिटी। देखो विस्कोसिटी की वैल्यू हमें गिवन है। यानी ये है कोफिशिएंट ऑफ़
विस्कोसिटी। वेलोसिटी हमें गिवन है। वेलोसिटी है 2 मीटर पर सेकंड। बहुत बढ़िया। हमें क्या बताना है? हमें ये बताना है कि
विस्कस ड्रैग कितना लगेगा? यानी विस्कस फोर्स कितनी लगेगी? देखो विस्कस फोर्स का एक फार्मूला होता है। बस सारी वैल्यूज़ को
आपको पुट करना था। बाकी कुछ भी नहीं था। 6 * π की वैल्यू ले लो 3.14 इंटू अ वेलोसिटी कितनी है? वेलोसिटी टू है। रेडियस कितना
है? 0.5 * 10 रेज़ टू पावर -3 एंड कोफिशिएंट की वैल्यू क्या है? 0.8 बस इसको आपको सॉल्व करना है और आपको बताना है कि
करेक्ट आंसर हमारा इसके अंदर क्या आ रहा है। आप जब इसको सॉल्व करोगे तो अराउंड अराउंड 15 * 10 रेज़ टू पावर -3 इस प्रकार
से कुछ आना चाहिए और हमारा ए ऑप्शन इसमें मैच करना चाहिए। मुझे पता है कैलकुलेशन है बट इस चैप्टर में बेसिकली कैलकुलेशन थोड़ी
बहुत होती है। ठीक है? तुम्हारे पास कोई ऑप्शन नहीं है। करनी ही पड़ेगी भैया। है ना? यार तुम्हें तो अपने घर में खाने की
सब्जी में भी चॉइस नहीं मिलती और तुम चाह रहे हो कि तुम्हें ऑप्शंस में चॉइस मिल जाए। हैं? तुम्हें एग्जाम में चॉइस मिल
जाए। नहीं भैया नहीं मिलेगी। आ जाओ एक और क्वेश्चन देखते हैं। अ स्मॉल ग्लास स्फीयर ऑफ़ रेडियस 2 * 10 रे टू पावर -3m इज़
मूविंग थ्रू अ लिक्विड ऑफ़ विस्कोसिटी। वही सेम क्वेश्चन है। वही सेम फार्मूला है। खुद से इसको ट्राई करना है। रेडियस देखो।
सबसे पहले रेडियस मुझे गिवन है। ठीक है? उसके अलावा कोफिशिएंट ऑफ़ विस्कोसिटी मुझे गिवन है और मुझे विस्कस फोर्स निकालनी है
और वेलोसिटी मेरे पास ऑलरेडी है। तो आपको कुछ नहीं करना है। ये वाला फार्मूला लगाना है और सारी वैल्यूज़ को पुट करना है और
फोर्स निकाल लेनी है। अभी के अभी पॉज़ करो। कमेंट में बताओ क्या आता है आंसर? थोड़ी कैलकुलेशन की प्रैक्टिस भी कर लिया करो।
ठीक है जी। अब बढ़ते हैं अगले टॉपिक की तरफ जो कि है टर्मिनल वेलोसिटी। अब ये टर्मिनल वेलोसिटी क्या है? देखो यार होता क्या है?
होता क्या है? इमेजिन करो एक स्फीयर है जोकि नीचे आ रहा है। नीचे आ रहा है। नीचे आ रहा है। किस में? पानी के अंदर। इमेजिन
करते हैं। इमेजिन करते हैं। ठीक है? एक स्फीयर है जो कि पानी के अंदर कैसे आ रहा है? नीचे आ रहा है। अब क्या होगा ना?
उसमें फोर्सेस लग रही होंगी। एक फोर्स तो उसकी वेट की होगी जो कि नीचे की डायरेक्शन में होगी। और दो फोर्सज़ ऊपर की डायरेक्शन
में होंगी जो कि होगा बायंड फोर्स और एक होगा क्या? विस्कस फोर्स। ठीक है जी। एक बात मुझे बताओ। एक पॉइंट ऐसा आएगा जब ये
दोनों ऊपर नीचे की फोर्सेस बैलेंस हो जाए। यानी बराबर हो जाए। और तुम्हें पता है जब फोर्सेस बराबर हो जाती हैं, जब यानी
फोर्सेस जीरो हो जाती है, नेट फोर्स जीरो हो जाती है तो एक्सीलरेशन भी जीरो हो जाता है। और जब एक्सीलरेशन जीरो हो जाता है तो
वेलोसिटी कांस्टेंट हो जाती है। है ना? हां कि ना? हां कि ना? अरे बोल दे भाई चमक रहा है। हां। तो वेलोसिटी कांस्टेंट हो
जाती है। बिल्कुल। यानी एक कांस्टेंट वेलोसिटी पे जब भी कोई बॉडी फ्लूइड के अंदर मूव कर रही होगी तब हम उस वेलोसिटी
को क्या बोलेंगे? उस वेलोसिटी को हम बोलते हैं टर्मिनल वेलोसिटी। तो आप डेफिनेशन पढ़ सकते हो। इट इज़ दी कॉन्सेंट वेलोसिटी
अटेंड बाय अ बॉडी फॉलिंग थ्रू अ फ्लूइड व्हेन डाउनवर्ड फोर्स ऑफ़ ग्रेविटी बिकम्स एग्जैक्टली बैलेंस्ड बाय अपवर्ड विस्कस
फोर्स एंड बाय फोर्स। जब ओवरऑल फोर्स ज़ीरो हो जाती है तब जो कॉन्स्टेंट वेलोसिटी होती है उसको हम क्या बोलते हैं? टर्मिनल
वेलोसिटी। अब इसका भी एक छोटा सा नन्हा मुन्ना सा डेरिवेशन है जो कि बड़ा इजी है जो कि तुम ईजीली समझ जाओगे। हमें क्या है
ना हमें इस वेलोसिटी को निकालना है। ये जो टर्मिनल वेलोसिटी है इसका फार्मूला हमें डिराइव करना है। तो हम कैसे करेंगे वो
फार्मूला हम फटाफट से डिराइव करके देख लेते हैं। अब देखो यहां पर तीनों फोर्स लिखी हुई हैं। कौन-कौन सी फोर्स लग रही
है? बाइंड फोर्स, विस्कस फोर्स और एक तो तुम्हें पता ही है mg। अब देखना बेटा, हमें क्या करना है? हमें ये बोलना है कि
बायंड फोर्स प्लस विस्कस फोर्स = mg। यस ऑ नो। बिल्कुल। बहुत बढ़िया। तो फार्मूला लिख देता हूं सबसे पहले बाय फ़ का। बायंड फ़
अभी थोड़ी देर पहले मैंने तुम्हें बताया। बाय फोर्स का फार्मूला थोड़ी देर पहले मैंने आपको बताया क्या? मान लो मान लो जिस
लिक्विड में ये बॉल जा रही है उस लिक्विड की डेंसिटी तो रो है। ये किसकी है बेटा? लिक्विड की डेंसिटी। और ये जो सॉलिड है ना
इस सॉलिड की डेंसिटी मैं मान लेता हूं ये। ठीक है? इस सॉलिड की डेंसिटी ये है। अब कंफ्यूज मत होना। ये सॉलिड की डेंसिटी है।
ये किसकी है? रो किसकी है? लिक्विड की डेंसिटी। ठीक है? तो अगर मुझे बायोड फोर्स लिखनी है, तो बायोड फोर्स क्या होती है?
डेंसिटी इंटू वॉल्यूम। अभी बताया इंटू वॉल्यूम * g। बहुत बढ़िया। तो, मैं लिख देता हूं। डेंसिटी ऑफ़ लिक्विड * वॉल्यूम
ऑफ़ सॉलिड * G. विस्कस फोर्स का फार्मूला अभी मैंने आपको बताया जो कि क्या है? 6 पाई नीटा rv. ठीक है? अब इन दोनों का सम
किसके बराबर होगा बेटा? mg के। अब mg के m को मैं क्या लिख सकता हूं? मास ऑफ दी स्फीयर को मैं क्या लिख सकता हूं? डेंसिटी
* वॉल्यूम। हां कि ना? अरे डेंसिटी * वॉल्यूम। और इस सॉलिड की डेंसिटी मैंने ये मानी थी। ठीक है? तो डेंसिटी * वॉल्यूम *
g बहुत सही। ठीक है? अब इसको मैं क्या करूंगा? उस डायरेक्शन में ले जाऊंगा। तो यहां मैं लिख देता हूं 6πrv
= वहां से v और g क्या आएगा? कॉमन आ जाएगा। और यहां पर अगर आप देखोगे तो ये आ जाएगा
कितना? अह 1 मिनट। ये आ जाएगा बहुत बढ़िया। ठीक है जी। क्या है बात समझ में आई? अब कंफ्यूज मत होना। यह है, यह है
वॉल्यूम ऑफ़ स्फीयर। और यह है वेलोसिटी। यह क्या थी? यह इसके फ़ॉर्मूले की वेलोसिटी है। ठीक है? और यही वेलोसिटी हमें निकालनी
है। अरे, यही तो निकालनी है vt यानी टर्मिनल वेलोसिटी। हमको यही निकालना है। बाकी हमें कुछ भी नहीं करना भैया। बस ये
सिंपल सा हमें निकालना है। अब मुझे एक बात बताओ, ये जो स्फीयर है, हम इमेजिन कर रहे हैं ये स्फीयर है, स्फीयर के वॉल्यूम का
फार्मूला क्या होता है? वो होता है 4/3πr ठीक है तो मैं यहां पर लिख देता हूं 6π θ rvt इक्वल्स टू वॉल्यूम का मैं फार्मूला
लिख देता हूं 4 / 3πr r क्या है रेडियस ऑफ दी स्फीयर ठीक है इंटू g और ये आ गया - रो ठीक है जी बहुत
बढ़िया अब थोड़ा बहुत एडिशन सब्ट्रैक्शन करते हैं। पाई से पाई यहां पर काट देते हैं। एक r यहां पर है। ठीक है? तो एक r से
ये यहां पे कट के दो हो जाएगा। बहुत बढ़िया। ये हो जाएगा टू ये हो जाएगा थ्री। तो फाइनली vt जो है टर्मिनल वेलोसिटी उसका
फार्मूला क्या बन के आएगा बेटा? अगर आप ध्यान से देखोगे तो फार्मूला आ जाएगा 2 / 9 देखते चलना बेटा। 2 / 9
r² r² g एंड डिवाइड में मैं ले आता हूं। यहां से मैं डिवाइड में मैं ले आता हूं क्या? ये
बहुत बढ़िया। तो फाइनली जो मेरी टर्मिनल वेलोसिटी का फार्मूला आया वो कुछ इस प्रकार से आया। क्या ये चीज सबको क्लियर
है? अब देखो घबराओ मत। ये फार्मूला तुम्हें याद नहीं करना है वैसे तो क्योंकि इस फॉर्मूले पे डायरेक्टली क्वेश्चन नहीं
आते बट डिराइव करने के लिए यहां पर ये चीजें आ जाती हैं। बट आपको एक चीज याद रखना है कि ये जो टर्मिनल वेलोसिटी है, इट
इज़ डायरेक्टली प्रोपोर्शनल टू दी स्क्वायर ऑफ़ दी रेडियस। क्या बोल रहा हूं मैं? इट इज़ डायरेक्टली प्रोपोर्शनल टू दी स्क्वायर
ऑफ़ रेडियस एंड इट इज़ इन्वर्सली प्रोपोर्शनल टू दी कोफिशिएंट ऑफ़ विस्कोसिटी। बस आपको ये दो लाइनें याद
रखनी है। बाकी ये पूरा फार्मूला हमें याद रखने की जरूरत बिल्कुल भी नहीं है। और इसको मैंने क्यों याद कराया? क्योंकि यहां
पर क्वेश्चन पूछा गया है बार-बार। टू बॉल्स ऑफ इक्वल डेंसिटी एंड रेडियाई R ए आर बी आर मूविंग इन अ सेम मीडियम। ठीक है?
दो इक्वल डेंसिटी की बॉल हैं जिनका रेडियस RA RB है। वो मूव कर रही हैं। द रेश्यो ऑफ़ दी टर्मिनल वेलोसिटी। टर्मिनल वेलोसिटीज़
का हमें रेश्यो बताना है। और रेडियस गिवन है कि जो RB का रेडियस है वो टू टाइम्स है R A के। ठीक है? तो अगर मुझे टर्मिनल
वेलोसिटी ऑफ़ B बाय टर्मिनल वेलोसिटी ऑफ़ A निकालना हो तो मैं कैसे निकालूंगा? अभी मैंने बताया टर्मिनल वेलोसिटी इज़
डायरेक्टली प्रोपोर्शनल टू दी स्क्वायर ऑफ़ दी रेडियस। यानी मैं यहां पे लिख सकता हूं RB का स्क्वायर बाय RA का स्क्वायर। और
आपको पता है RB क्या है? टू टाइम्स है RA. तो रेश्यो आ जाएगा 4 / 1 यानी 4:1। तो आंसर आ जाएगा 4। बहुत बढ़िया। तो ऐसे
क्वेश्चन पूछे गए हैं। इसी वजह से मैं आपको ये बताना चाह रहा था। अब देखो ये एक क्वेश्चन है डायरेक्टली एनसीईआरटी का एक
सिंपल सा क्वेश्चन। इसके अंदर आपको ये फार्मूला पुट करना है डायरेक्टली। और ये फार्मूले की मदद से वैल्यू निकालनी है।
टर्मिनल वेलोसिटी निकालनी है। गिवन क्या-क्या है? अ स्मॉल मेटल बॉल ऑफ रेडियस। पहले हमें रेडियस गिवन है। ठीक
है? टर्मिनल वेलोसिटी इसके अंदर हमें ऑलरेडी गिवन है। ठीक है जी? डेंसिटी हमें गिवन है। निकालना क्या है? विस्कोसिटी
निकालना है। यानी हमें कोफिशिएंट ऑफ़ विस्कोसिटी थीटा निकालना है। तो इस क्वेश्चन के अंदर आपको सारी चीजें गिवन
है। बस आपको वैल्यूस को सबको पुट करना है। और ये जो कोफिशिएंट ऑफ़ विस्कोसिटी है ये आपको निकालना है। इसको भी आप ट्राई कर
सकते हो। चलिए जी आगे बढ़ते हैं अगले टॉपिक की तरफ जो कि है इंटरमॉलिक्यूलर बाइंडिंग एनर्जी। देखो भैया अभी तक जो हमने पढ़ा वो
अलग रख दो। ठीक है? अभी तक हमने क्या पढ़ा? अभी तक हमने पढ़ा कि भैया शुरू में लिक्विड जो था वो रेस्ट पे था। फिर लिक्विड मूव
करने लग गया। अब जो हम पढ़ने वाले हैं वो एकदम अलग है। अब हम सरफेस टेंशन वाले टॉपिक में जा रहे हैं और टेंशन नहीं देगा
तुम्हें। टेंशन मत लो। है ना? थोड़ी-थोड़ी टेंशन देगा ज्यादा नहीं देगा। तो देखो सबसे पहली चीज होती है क्या?
इंटरमॉलिक्यूलर बाइंडिंग एनर्जी। देखो जो भी मॉलिक्यूल होते हैं ना वो आपस में जुड़े होते हैं। ठीक है? तो इनको तोड़ने
के लिए इनको सेपरेट करने के लिए कितनी एनर्जी की आवश्यकता है? उसी को हम बोलते हैं इंटरमॉलिक्यूलर बाइंडिंग एनर्जी। जैसे
कि आपके और आपकी मित्र का कोई भी मित्र हो सकता है महिला मित्र हो चाहे मेल मित्र हो जो भी है उन मित्र का जो बॉन्ड है उसको
तोड़ने के लिए जीरो एनर्जी की रिक्वायरमेंट है [हंसी] वैसे ही बॉन्ड तो तुम्हारा है ही नहीं तो टूटेगा भी कैसे तो
सिमिलरली सिमिलरली यहां पर अलग केस है यहां पर क्या है कि कितनी एनर्जी चाहिए होती है उसी को हम बोलते हैं
इंटरमॉलिक्यूलर बाइंडिंग एनर्जी तो देखना इट इज़ द एनर्जी ऑफ़ लिक्विड रिक्वायर्ड टू कंप्लीटली सेपरेट मॉलिक्यूल फ्रॉम लिक्विड
बाय ओवरकमिंग एट अट्रैक्टिव फोर्सेस ऑफ ऑल सराउंडिंग। ठीक है? सारी फोर्सेस को हटाने के लिए। ठीक है जी। हमको ये समझ आ गया। अब
टॉपिक आता है हमारा कोहेसिव एंड एडेसिव फोर्स। समझना बेटा इंपॉर्टेंट है। कोहेसिव। कोहेसिव से क्या समझ आ रहा है?
आपस में कोई फोर्स लग रही होगी। एडेसिव दूर वालों से फोर्स लग रही होगी। ठीक है? अब सबसे पहले हमें ये समझना पड़ेगा कि मान
लो एक कंटेनर में मैंने लिक्विड ले लिया है। मान लो लिक्विड है। ये लिक्विड के पार्टिकल्स हैं। ये लिक्विड के पार्टिकल्स
हैं। तो सबसे पहले बेटा ये समझो ये इंपॉर्टेंट है। ध्यान से समझ लो क्योंकि मैंने इतनी सारी चीजें देखी हैं स्कूल्स
में बच्चों को बिल्कुल भी समझ नहीं आ रहा है ये टॉपिक। समझ लो। देखो ये जो लिक्विड के पार्टिकल्स होते हैं ना अगर मैं नीचे
जाऊंगा मैं मिड में जाऊंगा तो यहां पर जितने भी पार्टिकल्स होंगे ना वो बहुत ज्यादा स्टेबल होंगे। क्यों स्टेबल होंगे?
क्योंकि वो चारों तरफ से पार्टिकल से घिरे हुए हैं। ऐसे इमेजिन करो जब तुम असेंबली में खड़े होते हो सारी तरफ बच्चे हैं।
तुम्हारे जूनियर सीनियर सब हैं। तो वहां पर तुम मूव नहीं कर सकते। तुम बस खड़े रहते हो। है ना? एकदम खड़े रहते हो। तुम
स्टेबल रहते हो। क्यों? क्योंकि तुम्हारे पास काइनेटिक एनर्जी कम है। लेकिन उन लोगों का क्या जो कि एकदम सरफेस पे हैं।
क्योंकि भैया उनके लिए तो ये सामने वाली जगह खाली है। तो इनका मन तो अंदर से कूद रहा है कि क्यों ना मैं आगे चला जाऊं। अरे
क्यों ना मैं आगे दौड़ जाऊं। हैं? इनका मन तो कूद रहा है। ये चाह रहे हैं कि भैया जीवन जी लिया जाए, आगे चले जाया जाए। है
ना? पर स्टेबल तो सबको होना है भाई लाइफ के अंदर। तो इनको भी स्टेबल होना था। इनको भी स्टेबल होना था। उस स्टेबल के लिए
इन्होंने क्या करा वो मैं अभी आपको आगे बताऊंगा। वो मैं आपको आगे बताऊंगा। है ना? इन स्टेबल के लिए इस स्टेबल के लिए
इन्होंने ना आपस में हाथ जोड़ लिए। यानी इन्होंने क्या बोला कि चलो हमने मान लिया कि हमारे सामने वाला रास्ता खाली है।
हमारे पास काइनेटिक एनर्जी ज्यादा है। हम अनस्टेबल हैं। तो हम क्या करते हैं? हम आपस में हाथ जोड़ लेते हैं। यानी ये आपस
में एक अट्रैक्शन बना लेते हैं। एक दूसरे के बीच में ऐसे हाथ पकड़ लेते हैं। अट्रैक्ट कर लेते हैं। और पता है इसी को
क्या बोलते हैं? इसी को बोलते हैं सरफेस टेंशन। यानी सरफेस के जितने भी पार्टिकल्स होते हैं वो आपस में अट्रैक्ट कर लेते हैं
खुद को और एक टेंशन क्रिएट कर लेते हैं। एक लेयर क्रिएट कर लेते हैं। उसी को हम बोलते हैं सरफेस टेंशन। अब डेफिनेशन तुम
देखोगे तो तुम्हें डेफिनेशन क्लियर होगी। आ जाओ। देखो, सरफेस टेंशन इज दी प्रॉपर्टी ऑफ दी फ्री सरफेस। फ्री सरफेस का मतलब
क्या है बेटा? अपर लेयर वाला जो सरफेस होता है। ठीक है? ऑफ अ लिक्विड ड्यू टू व्हिच सरफेस बिहेव्स लाइक अ स्ट्रेच
इलास्टिक मेंब्रेन एंड देयर फॉर टेंड्स टू पोज़ेस मिनिमम सरफेस एरिया। देखो ये आपस में चिपकते जाते हैं। फोर्स लगाते जाते
हैं। तो ये ये अस्यूम करते हैं कि इनका जो सरफेस एरिया होना चाहिए ना वो सबसे कम होना चाहिए। तो जितना ज्यादा सरफेस टेंशन
उतना ये क्लोज आते जाएंगे। क्लोज आते जाएंगे और जितना कम सरफेस टेंशन उतना ये दूर दूर दूर दूर दूर-दूर जाते जाएंगे।
इसका एग्जांपल पानी मरकरी फिर से ले लो भाई। पानी को अगर तुमने देखा हो तो पानी जो होता है वो बूंदबूंद से ऐसे गिरता है।
बट जो अ मतलब पानी जो है वैसे बूब-बूूंद से गिरता है। है ना? अगर तुमने ध्यान से देखा हो पानी के अगर तुम मॉलिक्यूल को ऐसे
टच करोगे तो वो हिलने लगेंगे। वो हिलने लगेंगे। वो डिस्ट्रीब्यूट हो जाएंगे। यानी उनकी जो सरफेस टेंशन है ना वो उतनी अच्छी
नहीं है। वहीं पर अगर तुम मरकरी को देखोगे मरकरी को टच करोगे तो वो ईजीली मूव नहीं होगा। यानी जो मरकरी का सरफेस टेंशन है वो
ज्यादा है। यानी वो कम सरफेस एरिया में जो अपर लेयर है वो कम सरफेस एरिया में खुश है। वो खुश है भैया कम सरफेस एरिया में।
लेकिन पानी का सरफेस एरिया सरफेस एरिया सॉरी सरफेस एरिया नहीं सरफेस टेंशन। हां ठीक है जी। बहुत बढ़िया। ये हमें क्लियर
हो गया। अब सरफेस टेंशन तो हम समझ गए। लेकिन उससे पहले हमें एक दो चीजें और समझनी पड़ेगी इस टॉपिक को डिटेल में पढ़ने
के लिए जो कि है कोहेसिव फ़ और एडेसिव फ़ोर्स। देखो बेटा कोहेसिव फोर्स वो है जो कि लिक्विड लिक्विड पार्टिकल्स के बीच में
फोर्स होती है। है ना? जैसे कि अभी मैंने आपको बताया सरफेस टेंशन वो क्या है? लिक्विड लिक्विड पार्टिकल्स के बीच की
फोर्स है। बहुत बढ़िया। दीज़ आर दी फोर्सेस ऑफ़ अट्रैक्शन बिटवीन मॉलिक्यूल ऑफ दी सेम लिक्विड। एक लिक्विड के बीच के जो कोहेसिव
है ना? बीच की फोर्स है। ठीक है? एडेसिव फोर्स क्या होती है? ये दो अलग-अलग लोगों के बीच का एक अट्रैक्शन है। फॉर एग्जांपल
दीज़ आर दी फोर्सेस ऑफ अट्रैक्शन बिटवीन लिक्विड एंड मॉलिक्यूल ऑफ सॉलिड। भैया समझ नहीं आया? समझाता हूं। एक टेस्ट ट्यूब ले।
टेस्ट ट्यूब में पानी डाल। जब तू टेस्ट ट्यूब में पानी डालेगा ना। टेस्ट ट्यूब में बोल रहा हूं। बाल्टी में मत करना।
बाल्टी में तो तुम्हें ऐसी शेप देखने को मिलेगी। लेकिन जब टेस्ट ट्यूब में करोगे तो पानी कुछ इस प्रकार से हो जाएगा। ऐसा
क्यों हुआ? ऐसे इसलिए हुआ क्योंकि यहां पर ना कोहेसिव फोर्स के साथ-साथ एडेसिव फोर्स भी थी। एडेसिव फोर्स ने क्या करा? ये जो
पानी के मॉलिक्यूल्स थे ये इस सॉलिड यानी इस टेस्ट ट्यूब पे चिपक गए। इस टेस्ट ट्यूब पे चिपक गए। और उन्होंने एक शेप को
ले लिया और इस शेप को हम क्या बोलते हैं? मिनिस्कस। क्या बोलते हैं बेटा? मिनिस्कस। और स्पेसिफिकली जब ऐसी शेप हो अंदर की
डायरेक्शन में तो इसको हम बोलते हैं कॉनकेव मिनिस्कस। क्योंकि ये कॉनकेव मिरर, कॉनकेव लेंस जैसा तुम्हें दिखाई दे रहा
होगा। तो कॉनकेव मिनस्कस लेकिन कभी कबभार क्या होता है ये कंडीशन कब हुई बेटा पहले ये सोचो जब एडेसिव फोर्सर्सेस ताकतवर है
तभी तो इन्होंने अपने से चिपका लिया देखो चिपका लिया ना चिपका लिया ना हां तो अब एडेसिव ताकतवर है कोहेसिव वाले बिल्कुल
कमजोर लेकिन इसका उल्टा भी होगा कुछ-कुछ लिक्विड आएंगे जिसमें कि एडेसिव कमजोर होगा लेकिन कोहेसिव फोर्स ज्यादा होंगी तो
उसमें क्या होगा देखो बेटा ऐसी शेप बनेगी यानी कर्व बनेगा मिनिस्कस बनेगा बट उल्टा मिनिस्कस बनेगा और इसको हम बोलते हैं
कॉन्व कॉन्वेक्स मिनिस्कस क्या बोलते हैं? कॉन्वेक्स मिनस्कस। यानी यहां पर ये जो कोहेसिव फोर्स है ना कोहेसिव फोर्स क्या
हो रहा है यहां पर? ध्यान से समझना। इस शेप के अंदर अगर आप ध्यान से देखोगे इस शेप के अंदर कोहेसिव फ़ ज्यादा है। है ना?
और एडेसिव फ़ कम है। जबकि इसमें उल्टा सा। ठीक है जी? समझ आ गया। अब याद रखना ये जो डायग्राम बनेगा ये हमेशा पानी में बनेगा।
और ये जो दूसरा वाला डायग्राम है ये हमेशा मरकरी में बनेगा। किस में बनेगा? मरकरी में। ठीक है भैया? सरफेस टेंशन क्लियर।
सरफेस टेंशन क्या है? सरफेस के जितने मॉलिक्यूलर हैं वो बाइंड हो जाते हैं आपस में और सरफेस एरिया को कम कर देते हैं।
इसलिए हम उसको बोलते हैं सरफेस टेंशन। फोर्सर्सेस दो प्रकार की हो गई। कोहेसिव एडेसिव। समझ में आ गया? मिनिस कौन सा
वाला? कॉनकेव। और ये क्या है? कॉन्वेक्स मिनिस। चलिए जी बहुत बढ़िया। आगे बढ़ते हैं। इन चीजों को ध्यान से समझ लो क्योंकि
आगे बहुत कम आएंगी। ठीक है भैया। सरफेस टेंशन हम समझ तो गए बट फार्मूला तो बताओ। फार्मूला तो बहुत जरूरी है। मैंने कहा
डोंट वरी। बताता हूं। बेसिकली सरफेस टेंशन होता है फोर्स पर यूनिट लेंथ। कुछ नहीं होता भैया। सरफेस टेंशन को हम s से
रिप्रेजेंट करते हैं। और ये होता है फोर्स पर यूनिट लेंथ। बस इतना याद रखना क्या होता है? फोर्स पर यूनिट लेंथ। अब ये जो
सरफेस टेंशन है डिपेंड किस पे करता है? सबसे पहले तो नेचर ऑफ द लिक्विड। देखो पानी का सरफेस टेंशन कम है ना? ताकत कम है
भैया। है ना? जबकि मरकरी की ज्यादा। तो लिक्विड है। एक तो लिक्विड की प्रॉपर्टी पे डिपेंड कर रहा है। दूसरा टेंपरेचर पे
भी डिपेंड करता है। कैसे डिपेंड करता है? ध्यान से देखना। सरफेस टेंशन डिक्रीजसेस विद दी इंक्रीज इन टेंपरेचर। यानी क्या
होता है? ये जो सरफेस टेंशन होती है ना अगर आप टेंपरेचर बढ़ाते हो तो ये कम होती जाती है। इतना आपको याद रखना है। ठीक है
जी? बहुत सही। ये हमें क्लियर हो गया। फार्मूला हमें एकदम क्लियर हो गया। अब हम देखते हैं कि सरफेस टेंशन जो हम पढ़ रहे
हैं उसके एप्लीकेशन क्या है? क्योंकि यहां से भी स्कूल पेपर के अंदर सवाल पूछ लिया जाता है। देखो एप्लीकेशन क्या है? सबसे
पहला साबुन से नहाते हो? नहीं नहीं भैया बॉडी वाश से नहा। अरे बॉडी वाश भी तो साबुन ही है। हैं उसी से नहा रहे हो। ठीक
है। तो जब तुम साबुन लगाते हो तो साबुन कितना ईजीली तुम्हारी बॉडी में स्प्रेड हो जाता है। नोट करा है? नोट करा है? हां।
क्यों? क्योंकि जो साबुन होता है ना उसका ये जो सरफेस टेंशन है ना ये कम होता है। और मैंने अभी बताया जिसका सरफेस टेंशन कम
जो कमजोर है वो ईजीली फ्लो कर जाएगा। यानी फैल जाएगा। जबकि मरकरी का हाई होता है वो नहीं फैलता भैया। वो ईजीली नहीं फैलता।
हां। तो इसी वजह से साबुन का जो सरफेस टेंशन है वो कम बनाया जाता है ताकि वो इजीली आपकी बॉडी पे फैल जाए और आपको
ज्यादा इधर-उधर लगाना ना पड़े। एक और एग्जांपल डेटोल। कभी चोट-वोट लगी है डेटोल लगाए तो डेटोल को अगर आप एक जगह पे डालोगे
बूंद को तो वो बूंद फैल जाएगी। क्यों? क्योंकि उसका सरफेस टेंशन भी कम रहा जाता है ताकि वो हर जगह पे स्प्रेड हो पाए। ठीक
है? तो सबसे पहला क्या है? इसका एक एग्जांपल याद रखना। सोप सॉल्यूशन स्प्रेड ईजीली। क्यों? क्यों? क्योंकि उनका जो
सरफेस टेंशन होता है वो कम होता है। ऑयल जो होता है वो भी स्प्रेड कर जाता है क्योंकि उसका सरफेस टेंशन भी कम होता है।
एंटीसेप्टिक लाइक डेटोल हैव लो सरफेस टेंशन। सो दे स्प्रेड क्विकली वो स्प्रेड कर जाते हैं। उसके अलावा वेटिंग एंड नॉन
वेटिंग ऑफ सरफेससेस। यानी याद रखना कि जिनकी सरफेस टेंशन ज्यादा होती है जिन लिक्विड की वो फैलते नहीं है। तो वो
ज्यादा जगहों को वेट नहीं करते। जबकि पानी जो होता है फैल जाता है। हर जगह को गीला गीला कर देता है। ठीक है जी? बहुत बढ़िया।
अगला स्फेरिकल शेप ऑफ द ड्रॉप्स। अब ये जो शेप होती है ना अगर आपने देखा हो जो बूंद गिरती है उसकी जो शेप होती है वो स्फेरिकल
होती है। वो भी सरफेस टेंशन की वजह से होती है। और उसको हम आगे अभी प्रूव भी करने वाले हैं। उसकी आपको टेंशन नहीं लेनी
है। अभी के लिए इतने एप्लीकेशनेशंस हमारे लिए इनफ रहेंगे। चलिए आगे बढ़ते हैं। अब बात करते हैं सरफेस एनर्जी की। अरे भैया
सरफेस टेंशन तो पढ़ लिया। अब सरफेस एनर्जी क्या है? अरे सरफेस एनर्जी कुछ नहीं है। इट इज़ दी एक्स्ट्रा एनर्जी पोज़ेस्ड बाय दी
मॉलिक्यूल एट सरफेस ऑफ दी लिक्विड। यानी ये जो सरफेस वाले होते हैं ना जिन्होंने आपस में हाथ जोड़ लिया है। अरे इनके पास
एक्स्ट्रा एनर्जी भी तो होगी भैया। है ना? उस एक्स्ट्रा एनर्जी को हम बोलते हैं क्या? सरफेस एनर्जी। बहुत बढ़िया। इसका
फार्मूला क्या होता है? उस फॉर्मूले का एक छोटा सा डेरिवेशन है। वो हम फटाफट से देख लेते हैं। बड़ा लल्लू सा डेरिवेशन है। तुम
एक बार में समझ जाओगे। इमेजिन करते हैं। इमेजिन करते हैं आ जाओ। है ना? कि यहां पर मेरे पास एक पानी था। एक फिल्म थी। फिल्म
यानी हम कोई भी फ्लूइड को फिल्म बोल देते हैं। है ना? जिसको हम खींच सकते हैं। अब देखो मान लो मान लो इस फिल्म को मैंने इधर
इसमें फ़ लगाई। इस पानी में मैंने फ़ लगाई। पानी के सरफेस पे मैं क्या कर रहा हूं? फोर्स लगा रहा हूं। वैसे तुम सोचोगे
प्रैक्टिकली पॉसिबल नहीं है। बट साइंस में हम कर सकते हैं। पानी के साथ नहीं तो किसी और फ्लूइड के साथ कर सकते हैं। अगर मैं
ऊपर से ऐसे खींचूंगा तो हल्का सा स्ट्रेच कर जाएगा। क्या कर जाएगा? हल्का सा स्ट्रेच कर जाएगा। ठीक है भैया? कितना
स्ट्रेच कर गया? डेल्टा x। कितना स्ट्रेच कर गया? डेल्टा x स्ट्रेच कर गया। और ये जो पानी था इसकी जो लेंथ थी यानी जो इसकी
थिकनेस थी वो l थी वो हमें गिवन है। ठीक है? हमने क्या करा? हमने डेल्टा x उसको स्ट्रेच कर दिया। अब हमें ये निकालना है
कि सरफेस के ऊपर कितनी एनर्जी आई है? तो देखो बेटा एनर्जी क्या होता है? वर्क डन होता है। तो बेसिकली हमें वर्क डन निकालना
है। तो वर्क डन का फार्मूला बताओ क्या होता है? फोर्स * डिस्प्लेसमेंट। यानी फोर्स और डिस्प्लेसमेंट कितना हुआ? डेल्टा
x यही हुआ? बहुत बढ़िया। ठीक है? अच्छा अभी मैंने एक फार्मूला पढ़ा थोड़ी देर पहले ही बताओ कि ये फार्मूला पढ़ा मैंने सरफेस
टेंशन का। ठीक है? तो क्या इससे मैं लिख सकता हूं फोर्स इक्वल्स टू सरफेस टेंशन * लेंथ। यस और नो। और इसको क्या मैं यहां
पुट कर सकता हूं? बिल्कुल कर सकते हो। तो पुट कर दो s l डेल्टा x। अब अगर तुम ध्यान से देखोगे l * डेल्टा x क्या है? डायग्राम
पे आओ। ये है l और ये है डेल्टा x। l * डेल्टा x क्या है? यह एरिया है। द चेंज इन एरिया। जितना एरिया इनक्रीज हो गया ना वही
तो है l * डेल्टा x अरे लेंथ * ब्रेड्थ एरिया होता है। तो यानी ये क्या है? ये बेसिकली है चेंज इन एरिया। तो मैं लिख
सकता हूं s डेल्टा ए यानी सरफेस टेंशन * चेंज इन एरिया इज़ द फार्मूला। किसका? एनर्जी का। किसका? सरफेस एनर्जी का। तो
सरफेस एनर्जी का फार्मूला याद रखना। सरफेस टेंशन इंटू चेंज इन एरिया डायरेक्टली। और ये छोटी सी नन्ही-मुन्नी सी डेरिवेशन आपको
क्या करनी है? याद रखनी है। देखते हैं इस पे क्या क्वेश्चन पूछे गए हैं। नीट का सवाल है। द अमाउंट ऑफ एनर्जी रिक्वायर्ड
टू फॉर्म अ वाटर ड्रॉप ऑफ रेडियस 2 सें.मी. इज़ हमें एक वाटर ड्रॉप बनानी है। उसमें कितनी एनर्जी हमें चाहिए होगी?
सरफेस एनर्जी कितनी चाहिए होगी? तो सरफेस एनर्जी का मैंने अभी आपको फार्मूला बताया। s * डेल्टाa है ना? अगर मुझे बूंद को पूरी
तरीके से बनाना है, उस ड्रॉप को पूरी तरीके से बनाना है, तो मैं इमेजिन करूंगा कि पहले उसका एरिया जीरो था। अब मुझे
कितना एरिया बनाना होगा? तो जो ड्रॉप होती है वो स्फेरिकल होती है। तो उसका एरिया कितना होता है? 4pr²,
ठीक है जी? यानी देखो सरफेस टेंशन गिवन है। ये गिवन है वॉटर की सरफेस टेंशन 0.073 और एरिया मुझे निकालना है। पहले इसको
रेडियस को कन्वर्ट कर लेना। 0.0 पहले इसको 2 * 10^ ^ -2 ही डायरेक्टली लिख देते हैं ताकि कैलकुलेशन ईजी रहेगी। ठीक
है? तो अब हमें क्या करना है? हमें डायरेक्टली एरिया निकाल देना है। 4 * π * रेडियस क्या है? 2 * 10 रे टू पावर -2 का
होल स्क्वायर। बहुत बढ़िया। तो अब हमें इसे कैलकुलेट करना है और हमें ये बताना है कि एनर्जी जो आएगी सरफेस एनर्जी वो हमारी
कितनी आने वाली है? तो इसका जो आंसर आएगा अगर आपने सॉल्व करा होगा वो आ रहा होगा 3.66 * 10 रे टू पावर -4 जो कि है ऑप्शन
नंबर डी। ठीक है? तो ऐसे क्वेश्चन भी बेसिकली सवाल आ जाते हैं। ठीक है जी? अब बढ़ते हैं एक सबसे इंपॉर्टेंट डेरिवेशन की
तरफ। हां इस चैप्टर के अंदर बहुत सारे डेरिवेशंस हैं। अगर आप स्कूल लेवल के लिए इस वन शॉट को देख रहे हो तो मुझे पता है
कि आप परेशान हो गएगे अभी तक कि यार प्रशांत भैया क्या करा रहे हो? बिल्कुल ही क्या वन शॉट लेक्चर उठा लिया। दिमाग खराब
हो गया। बट ट्रस्ट मी पता है ये चैप्टर थोड़ा सा ऐसा ही है। ठीक है? और मैं मैं बहुत ऑनेस्टली तुम्हारे बड़े भैया होने के
नाते बोल रहा हूं। मुझे भी जब मैं तुम्हारी उम्र का था ना तो चैप्टर बहुत बेकार लगता था क्योंकि डेरिवेशन बहुत
ज्यादा है। बट कोई और ऑप्शन नहीं है। है ना? जितनी भी इंपॉर्टेंट डेरिवेशन जहां पर मैं इंपॉर्टेंट बोल रहा हूं वो आपको एक दो
बार प्रैक्टिस करके जानी पड़ेगी। जैसे बर्नौली वाली में मैंने बोला था कि इंपॉर्टेंट है। है ना? इसके अंदर मैं बोल
रहा हूं कि ये भी इंपॉर्टेंट है। ठीक है? इस चैप्टर में से ज्यादा डेरिवेशन ही आएंगी स्कूल लेवल के अंदर। और अगर तुम
कॉम्पिटिटिव एग्जाम की तैयारी कर रहे हो तो जो जितने भी फार्मूलाज़ हैं वो आपको पता होने ही चाहिए क्योंकि इससे क्वेश्चन आ ही
जाते हैं। चलिए देखते हैं। प्रेशर इंसाइड अ स्फेरिकल ड्रॉप। अब यहां पर मैं क्या बोलना चाह रहा हूं कि देखो बेटा एक
स्फेरिकल ड्रॉप है। क्या है? एक बूंद है बूंद। बूंद। अब उस बूंद में कुछ एक्सेस प्रेशर आ गया है। एक्स्ट्रा प्रेशर और
एक्स्ट्रा प्रेशर बहुत इंपॉर्टेंट है। एक्स्ट्रा प्रेशर अगर बूंद में नहीं होगा ना आपकी ड्रॉप में तो वो ड्रॉप ऐसे अंदर
की तरफ फट जाएगी। तो ड्रॉप में एक्स्ट्रा प्रेशर तो जरूरी है। वो प्रेशर कितना है वो मुझे कैलकुलेट करना है। ठीक है? एक
बूंद है, एक ड्रॉप है। अब मैंने क्या करा? मैंने क्या करा? जब उसमें मैंने एक्स्ट्रा प्रेशर डाला। मैंने क्या करा? उसमें
प्रेशर डाला। तो उस प्रेशर से पहले उसका जो रेडियस था वो r था। अब वो जो बूंद थी वो जो ड्रॉप थी वो हल्की सी और मोटी हो
गई। डेल्टा r ज्यादा नहीं हुई। छोटी सी डेल्टा r यानी मैंने उसमें प्रेशर दिया तो वो खींच गई। स्ट्रेच हो गई। डेल्टा r
स्ट्रेच हो गई। तो अब जो नया रेडियस हो गया वो हो गया r + डेल्टाr क्या बात क्लियर है एकदम r + डेल्टाr ठीक है जी अब
सबसे पहले तो तुम्हें ये देखना पड़ेगा कि मैंने उसको क्या दी मैंने उसको फोर्स दी प्रेशर दिया तो मैंने वर्क कितना करा
मैंने वर्क कितना करा तो वर्क का फार्मूला क्या होता है पहले तो आप ये बता दो वर्क डन का फार्मूला क्या होता है ये बता दो
बहुत सिंपल है कि वर्क डन का फार्मूला होता है फोर्स इंटू जितना चेंज आया चेंज कितना आया डेल्टा r आ गया कितना कितना आ
गया? डेल्टा r क्या आ गया? चेंज आ गया। बहुत बढ़िया। अच्छा फोर्स को मैं क्या लिख सकता हूं? प्रेशर की फॉर्म में। क्या मैं
फोर्स को प्रेशर * एरिया लिख सकता हूं? अरे प्रेशर इक्वल टू फोर्स बाय एरिया। तो फोर्स हो जाएगा प्रेशर इंटू एरिया। ठीक
है? तो क्या मैं लिख सकता हूं? वर्क डन इक्व प्रेशर * एरिया * डेल्टा R है ना? बहुत बढ़िया। अच्छा मुझे अब ये बताओ कि
पहले एरिया कितना था? मुझे ये बताओ पहले एरिया कितना था? जब मैंने प्रेशर देना स्टार्ट करा उस समय पर इनिशियल एरिया
कितना था? हमें ये देखना पड़ेगा। तो ये एक स्फीयर है। एरिया क्या होगा? 4pr² ठीक है जी। बहुत बढ़िया। तो मैं यहां लिख
देता हूं प्रेशर * 4πr² डेल्टा r बहुत सही। तो मैंने क्या करा? मैंने वर्क डन निकाल लिया। ठीक है जी।
बहुत सही। अच्छा मुझे एक बात बताओ वर्क डन क्या है? एनर्जी तो है। और अभी मैंने निकाला कि जब भी जो सरफेस पे जो एनर्जी
होती है उसको मैंने अभी फार्मूला निकाला। अरे, एक बात मुझे बता, वर्क डन एनर्जी है। और एनर्जी का फार्मूला अभी मैंने निकाला
थोड़ी देर पहले। तुझे याद आ रहा है? क्या था? क्या था? सरफेस टेंशन इंटू चेंज इन एरिया। हां भैया याद आ गया। अच्छा, एरिया
में चेंज कितना हुआ? पहले कितना था? पहले था एरिया 4πr², फिर रेडियस बढ़ गया। तो, मैं चेंज इन एरिया निकाल लेता हूं। तो,
यहां से वर्क डन आ जाएगा s * चेंज इन एरिया कितना हो जाएगा? 4 पाई 4pi अह पहले कितना था? 1 मिनट ज़रा इसको थोड़ा सॉल्व कर
लेते हैं। 1 मिनट रुकना। 4p r + डेल्टा r² - r² ठीक है? अब स्क्वायर वगैरह को ओपन करो
और एक बार सॉल्व करना स्टार्ट करो। s * 4pi इसको सॉल्व करोगे तो यह आ जाएगा r² से r² सब्ट्रैक्ट हो जाएगा। और ये आ जाएगा
डेल्टा R का स्क्वायर + 2R डेल्टा R ये आ गया। क्या यही आया सबका? बताओ यही आया। ठीक है जी। अब देखो अगर आप
प्रैक्टिकली सोचो फिजिक्स के पर्सपेक्टिव से सोचो तो आप ना किसी पानी के गुब्बारे को बढ़ा रहे हो। यानी उसकी रेडियस को बढ़ा
रहे हो। तो एक्चुअली में वो रेडियस थोड़ा सा ही बढ़ेगा। नेगिजिबल बढ़ेगा। बहुत कम बढ़ेगा। है ना? बहुत कम बढ़ेगा। और अब मैं
उस नेगलिजिबल का भी स्क्वायर कर रहा हूं। मैं जो चीज नेगलिजिबल थी ना उसका मैं स्क्वायर कर रहा हूं। तो अब जो उसकी
वैल्यू होगी ना बेटा अब उसकी जो वैल्यू होगी वो अराउंड ज़ीरो हो जाएगी। क्योंकि पहले वो बहुत छोटा था। अब वो और छोटा हो
गया। तो यहां पर मैं अस्यूम करता हूं कि जो डेल्टा r² है वो ज़ीरो हो जाएगा। तो इसकी वैल्यू मैं ज़ीरो अस्यूम करता हूं।
ठीक है? तो फाइनली वर्क डन का क्या फार्मूला आ गया? यहां से आ गया s * 8π 8π r डेल्टा r ठीक है? तो ये भी वर्क डन का
फार्मूला है। ये भी वर्क डन का फार्मूला है। और और ये भी वर्क डन का फार्मूला है। तो क्या मैं इन दोनों को आपस में इक्वेट
कर सकता हूं? तुम बोलोगे भैया अरे बिल्कुल कर सकते हो भैया जी क्या बात कर रहे हो? दोनों का आपस में जरा इक्वेट कर दो। यहां
पर मैं लिख देता हूं। जरा पेन बदल लेते हैं ताकि आपको समझ आए। ठीक है? p * 4p 4πr²
डेल्टाr. इसकी वैल्यू किसके बराबर हो गई? इसके बराबर हो गई। यह कितना है? S * 8pi R्ट R. बहुत बढ़िया। तो, डेल्टा R से
डेल्टा R यहां पर क्या हो गया? कट चुका है। ठीक है? हमें निकालना क्या है भैया? हमें प्रेशर ही तो निकालना है। ये प्रेशर
ही तो निकालना है कि कितना प्रेशर हमने दिया है जिससे कि वो इंक्रीज़ हो गया। एक्स्ट्रा प्रेशर निकालना है। तो प्रेशर
का फार्मूला सारी चीज़ों को वहां ले जाओ। तो पाई से यहां पर आप देखोगे पाई से पाई कटेगा। ये कितना हो जाएगा? ये टू हो
जाएगा। तो फाइनली जो फार्मूला आएगा वो आएगा 2s / r यानी जो प्रेशर है ना एक बूंद एक ड्रॉप एक ड्रॉप को बढ़ाने में जो
प्रेशर लगा उसका फार्मूला आया 2s / r s क्या है सरफेस टेंशन r क्या है रेडियस उस ड्रॉप का रेडियस ये फार्मूले पे बहुत सवाल
आपको देखने को मिलेंगे और ये जो डेरिवेशन है ये बड़ी इंपॉर्टेंट डेरिवेशन है। एक ड्रॉप को अगर मैंने बढ़ाया तो एक्स्ट्रा
प्रेशर उसके पास कितना आया? तो उस प्रेशर की वैल्यू होती है 2 * s / r 2 * s / r ठीक है? तो ये किसका केस था? ड्रॉप का। अब
ऐसा ही एक और क्वेश्चन आता है कि अगर मान लो यहां पर ड्रॉप ना हो या बबल हो। मान लो यहां ड्रॉप ना हो बबल हो। अब पता है बबल
ये जो तुम बबल-बल बनाते हो ना बबल और ड्रॉप में एक डिफरेंस होता है। देखो ड्रॉप के पास एक ही लेयर होती है। बट बबल जो
होती है ना बबल के पास दो लेयर्स होती हैं। एक आउटर लेयर, एक इनर लेयर। तो क्वेश्चन में सारी चीजें डेरिवेशन में
सारी चीजें हमें सेम ही करनी है। लेकिन जो हम एरिया अस्यूम करेंगे ना वो ट्वाइस करेंगे। किसके केस में बेटा? एक बबल के
केस में। एरिया डबल हो जाता है। तो अगर आप इसी डेरिवेशन पे वापस में आओ तो सारी चीजें आप सेम करोगे। बस याद रखना मैं
दूसरा पेन बदल देता हूं ताकि तुम्हें याद रहे कि अब मैं बबल के लिए कर रहा हूं कि ये जो एरिया है इसको बस तुम्हें क्या करना
है? इंटू टू कर देना है। किसको? इस एरिया को। जब तुम इंटू टू करोगे सारी चीजें इंटू टू हो जाएंगी। और जो आपका आंसर आएगा वो भी
डबल आएगा यानी वो आएगा 4s / r ये है प्रेशर फॉर बबल ये किसका था ड्रॉप का ये किसका था बबल का सेम डेरिवेशन है बिल्कुल
डिट्टो कोई भी पूछी जाए एग्जाम में बस बबल के अंदर एरिया को डबल कर देना यहां टू लगा देना बस तो सारी चीजें डबल डबल डबल हो
जाएंगी आंसर आ जाएगा 4s /r बहुत बढ़िया ये बहुत इंपॉर्टेंट है या तो तुम्हारे पेपर के अंदर बबल आ रहा है या तो तुम्हारे पेपर
के अंदर ड्रॉप आ रहा है ये बहुत स्कूल्स के अंदर मैंने कितनी इतनी बार पेपर्स के अंदर ये देख लिया है क्वेश्चन। चलिए जी
बहुत बढ़िया। तो आई होप आपको ये पता चल गया होगा प्रेशर इनसाइड अ सोप बबल कितना होता है? 4s / R। ठीक है जी? एकदम क्लियर। अब
देखो यहां पर एक चीज है कि हमें ना इतना प्रेशर देना ही पड़ेगा। अगर हमें किसी भी बबल को बनाना है, एक सोप के बबल को हमें
बनाना है ना, तो हमें उसको इतना एक्स्ट्रा प्रेशर देना पड़ेगा। है ना? अगर प्रेशर हम इतना नहीं देंगे तो वो क्या होगा? वो
बर्स्ट कर जाएगा। क्या कर जाएगा बेटा? वो बस्ट कर जाएगा। इसी वजह से दिस इज़ व्हाई यू मस्ट ब्लो हार्ड टू क्रिएट अ सोप बबल।
अगर हमें एक सोप बबल बनाया तो हमें फूंक मारनी पड़ेगी क्योंकि हमें इतना प्रेशर जनरेट करना पड़ेगा भैया तब जाकर तब जाकर वो
बबल फूल पाएगा। ठीक है जी? चलिए बहुत सही। अब इसके क्वेश्चन देखते हैं। एक सवाल आया था नीट 2022 के अंदर। सवाल क्या है? इफ अ
सोप बबल एक्सपेंड्स द प्रेशर इंसाइड द बबल। क्या होगा बताओ? बताओ। बबल था वो एक्सपैंड कर गया। अच्छा प्रेशर का
फार्मूला क्या था? 4s / r अगर कोई चीज़ एक्सपैंड कर रही है यानी उसका रेडियस बढ़ रहा है और अगर उसका रेडियस बढ़ रहा है तो
प्रेशर घट रहा है। बहुत सही। तो यानी इसका आंसर आएगा डिक्रीज। प्रेशर क्या होगा बेटा? प्रेशर होगा डिक्रीज। चलिए अगले
क्वेश्चन की तरफ बढ़ते हैं। एनसीईआरटी का कैलकुलेटिव। एक तो भैया एनसीईआरटी किसने किसने बनाई है? मैं खुद परेशान हूं। इतने
कैलकुलेटिव क्वेश्चन काहे देते हो भैया? एक सिंपल सवाल दे दिया करो। व्हाट इज दी प्रेशर इंसाइड दी ड्रॉप ऑफ मरकरी ऑफ
रेडियस 3 एमएम कन्वर्ट करते चलना एक तो ये कन्वर्ज़ से ही मैं परेशान हो चुका हूं। तुम भी परेशान हो चुके हो क्या? हैं सारे
क्वेश्चन में कन्वर्ज़ अरे भैया मीटर में दे दो ना। अरे मीटर में दे दो। हमें इतनी कैलकुलेशन काहे करवा रहे हो? ठीक है। ए
क्या है? द प्रेशर इनसाइड दी ड्रॉप ऑफ़ मरकरी ऑफ़ रेडियस दिस। सरफेस टेंशन हमें गिवन है। ठीक है जी। सरफेस टेंशन हमारे
पास है। एटमॉस्फेरिक प्रेशर भी हमें गिवन है। ऑल्सो गिव दी एक्सिस प्रेशर। देखो बेटा एक तो टोटल प्रेशर निकालना है और एक
एक्सेस प्रेशर निकालना है। डिफरेंस क्या है? जो अभी हमने फार्मूला डिराइव करा पहले यहां पर देखो क्या है? ड्रॉप है। ड्रॉप के
लिए जो प्रेशर का फार्मूला होता है वो होता है 2s / r ये फार्मूला किसका है? ये एक्स्ट्रा प्रेशर का है। किसका? एक्सेस
प्रेशर का फार्मूला है ये। पहली बात ये क्लियर रखो। अगर कोई भी ड्रॉप होगी उसके अंदर जो एक्सेस प्रेशर है, एक्स्ट्रा
प्रेशर है, उसका फार्मूला क्या है? उसका फार्मूला है 2s / r। तो भैया टोटल प्रेशर क्या होगा? देख एक बूंद है उसके ऊपर बाहर
से एटमॉस्फेरिक प्रेशर भी लग रहा होगा। यस और नो एटमॉस्फेरिक प्रेशर भी लग रहा होगा। है ना? तो अगर उस बूंद को बूंद बने रहना
है उसको राउंड स्फीयर बने रहना है तो उसके पास एक एक्सेस प्रेशर तो होना ही चाहिए। उसके साथ-साथ उसके पास एटमॉस्फेरिक प्रेशर
भी होना चाहिए। तो अगर क्वेश्चन में तुमसे पूछ रहा है एक्सिस प्रेशर तो तो तुम्हें बस यह बताना है और तुमसे अगर पूछ रहा है
टोटल इनसाइड प्रेशर के अंदर कितना प्रेशर है तो वो होगा 2s / r प्लस एटमॉस्फेरिक प्रेशर तो पहले आप एक्सिस प्रेशर निकाल लो
जो कि कितना है 2s / r तो अब आप सॉल्व कर सकते हो सरफेस टेंशन हमें गिवन होगी ऑलरेडी 4.65 * 10 रे टू पावर -1 बहुत
बढ़िया और रेडियस कितना है 3 * 10 रे टू पावर -3 तो ये आ गया आपका क्या? एक्सेस प्रेशर। और बस इसमें आपको ऐड कर देना है
जो कि एटमॉस्फेरिक प्रेशर है जिसकी वैल्यू हमें ये गिवन है। इसको आपको बस इसमें जोड़ देना है जिससे कि आप ओवरऑल इंसाइड प्रेशर
निकाल सकते हो। ठीक है जी? इतनी कैलकुलेशन कर लोगे? आई होप कर लोगे। हैं? कर लोगे ना? ठीक है? एक और क्वेश्चन सेम है
एनसीईआरटी का। व्हाट इज द एक्सेस प्रेशर इंसाइड? अब देखो डायरेक्टली एक्सेस प्रेशर पूछ लिया। एक्सेस प्रेशर का फार्मूला पता
है। पर यहां पर बोला है सोप बबल। बबल के लिए क्या होता है? एक्सिस प्रेशर का फार्मूला 4s / r कंफ्यूज मत होना बेटा।
बूंद एक ड्रॉप के लिए 2s / r और बबल कहीं पे दिख जाए तो 4s / r बिल्कुल भी कंफ्यूज नहीं होंगे। ठीक है? सरफेस टेंशन गिवन है,
रेडियस गिवन है। वैल्यू पुट करो फटाफट से आंसर निकाल लेना। चलिए जी। अब हम बढ़ते हैं अगले कांसेप्ट की तरफ जो कि है एंगल ऑफ
कांटेक्ट। बेटा बस दो ही टॉपिक बचे हैं। एक ये है। इसके बाद एक कैपिलरीज और हैं। बस फिर खत्म हो जाएगा। ठीक है? एंगल ऑफ
कांटेक्ट क्या होता है? देखो भैया अभी मैंने आपको थोड़ी देर पहले बताया था मिनिस्कस याद आया कॉनकेव मिनिस्कस
कॉन्वेक्स मिनिस्कस कॉनकेव मिन याद कैसे करो अरे गुफा गुफा गुफा गुफा बन रही है ना यहां पर देखो गुफा गुफा हां तो कॉनकेव
मिनिष्कस और ऊपर की डायरेक्शन में कॉन्वेक्स मिनस्कस ठीक है जी अब ये एंगल ऑफ कांटेक्ट क्या होता है बेसिकली बेसिकली
मैं आपको अगले पेज पे एक डायग्राम बनाता हूं उससे आपको समझ आएगा मान लो ये इस प्रकार से है ठीक है ये क्या है कॉनकेव
मिनिष्कस तो इट इज दी एंगल बिटवीन टेंजेंट टू दी सरफेस। यानी ये जो सरफेस है ना ये जो तुम्हें सरफेस दिख रहा है पहले तो इससे
एक टेंजेंट ड्रॉ कर लो। क्या कर लो बेटा? एक टेंजेंट डॉ कर लो। टेंजेंट ड्रॉ कर लो। इट इज़ द एंगल बिटवीन दी टेंजेंट टू दी
सरफेस एंड सॉलिड सरफेस। यानी ये तुम्हें सॉलिड सरफेस दिख ही रहा है। इस टेंजेंट और इस सॉलिड सरफेस का ये जो बीच का तुम्हें
ये जो एंगल दिख रहा है, इसी को हम बोलते हैं एंगल ऑफ कॉन्ट। है ना? बट अगर अगर ये इस प्रकार से अगर ये ऐसा है तो आप क्या
करोगे? आप टेंजेंट ड्रॉ करोगे कुछ इस प्रकार से। टेंजेंट ड्रॉ करोगे कुछ इस प्रकार से। ठीक है? अब इस केस में एंगल
क्या होगा बेटा? इसके और इसके बीच का एंगल। ठीक है? ये वाली लाइन और ये वाली लाइन के बीच का एंगल। तो ये क्या आ गया?
एंगल ऑफ़ कॉन्टेक्ट। यानी तुम देख सकते हो जब भी कॉनकेव मिनस्कस है तो ये जो एंगल होगा हमेशा कैसा होगा? ये एक्यूट होगा।
एक्यूट होगा। और यहां पर क्या होगा? ऑब्ट्यूस एंगल हमें दिखाई देने वाला है। ठीक है जी भैया? बहुत बढ़िया। तो डेफिनेशन
देख सकते हो। द एंगल ऑफ कांटेक्ट इज द एंगल बिटवीन दी टेंजेंट टू द लिक्विड सरफेस एट दी पॉइंट ऑफ कॉन्ट एंड दी सॉलिड
सरफेस इनाइड दी लिक्विड। इन दोनों के बीच का जो एंगल है वो क्या कहलाता है? वो कहलाता है एंगल ऑफ कॉन्टेक्ट। ठीक है? अब
एंगल ऑफ कांटेक्ट क्यों इंपॉर्टेंट है? क्योंकि बेटा जितना कम एंगल ऑफ कांटेक्ट होगा समझना। जितना कम एंगल ऑफ कांटेक्ट
होगा यानी एंगल जितना कम होगा उतना ईजीली लिक्विड फ्लो कर पाएगा। क्या बोला मैंने? जितना कम एंगल ऑफ कांटेक्ट होगा उतना
ईजीली लिक्विड फ्लो कर पाएगा। यानी ईजीली फ्लो कर जाएगा। अगर एंगल ऑफ कांटेक्ट क्या है? कम है। और अगर एंगल ज्यादा है तो
लिक्विड फ्लो नहीं कर पाएगा। अब इसी के एप्लीकेशनेशंस मैं आपको दिखा देता हूं फटाफट से। एप्लीकेशनेशंस क्या होते हैं?
जैसे सोप डिटर्जेंट, डाइस। अब इसमें क्या किया जाता है? इसमें जो एंगल ऑफ कॉन्टैक्ट है उसको रिड्यूस किया जाता है। जिससे क्या
होता है? वेटिंग इंक्रीस हो पाती है। वेटिंग यानी हर जगह फैल पाता है। कपड़ा गीला हो पाता है। ठीक है? तो इसलिए याद
रखना सोप डिटर्जेंट डाइस में क्या किया जाता है? एंगल ऑफ कांटेक्ट को रिड्यूस किया जाता है। जबकि कुछ मटेरियल होते हैं
जिनको हम वाटर प्रूफिंग एजेंट्स बोलते हैं जो कि पानी की ड्रॉप्स को रोकते हैं। तो वहां पर एंगल ऑफ कांटेक्ट को क्या किया
जाता है? इंक्रीस किया जाता है। क्यों? क्योंकि जब एंगल ऑफ कांटेक्ट ज्यादा होगा चीजें फैलेंगी नहीं। एक ही जगह पे ऐसे
रहेंगी। पानी इधर-उधर नहीं जाएगा। इधर ही रहेगा। ठीक है? तो इस वजह से वाटर प्रूफिंग के अंदर क्या किया जाता है? एंगल
ऑफ कांटेक्ट को बढ़ाया जाता है। चलिए जी हम ये समझ चुके हैं। एक दो इसके क्वेश्चन देखते हैं। थोड़े थ्योरिटिकल क्वेश्चन है।
एक्सप्लेन व्हाई आपको एक्सप्लेन करना है। द एंगल ऑफ़ कांटेक्ट ऑफ मरकरी विद ग्लास इज़ ऑब्ट्यूस व्हाइल दैट ऑफ़ वाटर विद ग्लास इज़
एक्यूट। देखो भैया, जो ग्लास होता है, वो वाटर के साथ ऐसा बनाता है। मरकरी ऐसा बनाता है। तो मरकरी में ऑब्ट्यूस इसमें
एक्यूट। बड़ा भेदभाव है। काहे? इसका आंसर तुम्हें पता है? बोलो। ये जो पानी है इसमें इसमें एडेसिव फोर्सर्सेस ज्यादा
हैं। कोहेसिव फोर्सर्सेस कमजोर हैं। यहां पर कोहेसिव फोर्सर्सेस ताकतवर हैं और एडेसिव फोर्सर्सेस कमजोर हैं। इस वजह से
तो बस यही इसका मेन रीज़न है। जिस वजह से यहां पर एंगल एक्यूट दिखता है। यहां पर ऑब्ट्यूस दिखता है। अगले पेज पे एक मिनट।
और भी क्वेश्चंस थे क्या? चलो एक और क्वेश्चन देखते हैं। वाटर ऑन अ क्लीन ग्लास सरफेस टेंड्स टू स्प्रेड आउट व्हाइल
मरकरी ऑन दी सेम सरफेस टेंड्स टू फॉर्म अ ड्रॉप। देखो जो मरकरी होती है ना अगर पानी कहीं पे गिराओगे तो फैल जाएगा बट मरकरी
वहीं रहेगी। इसका रीज़न क्या है? मरकरी का सरफेस टेंशन हाई होता है। इस वजह से वो फैलती नहीं है। अगला सरफेस टेंशन ऑफ अ
लिक्विड इज़ इंडिपेंडेंट ऑफ दी एरिया ऑफ़ दी सरफेस। देखो जो सरफेस टेंशन होता है ना वो एरिया पे डिपेंड ही नहीं करता। अगर आपने
देखा फार्मूला फार्मूला वो होता है फोर्स बाय L फोर्स / L यानी वो लेंथ पे डिपेंड कर रहा है लेकिन वो एरिया पे डिपेंड नहीं
कर रहा। तो यस इट इज़ इंडिपेंडेंट बिकॉज़ इट डज़ नॉट डिपेंड ऑन एरिया। ठीक है? अ वाटर विद डिटर्जेंट डिॉल्व इन इट शुड हैव स्मॉल
एंगल ऑफ़ कांटेक्ट। ऐसा क्यों है? कि डिटर्जेंट्स को जब पानी में मिलाया जाता है तो एंगल ऑफ़ कॉन्टैक्ट कम होना चाहिए।
तो इसका सिंपल सा रीज़न है एंगल ऑफ़ कांटेक्ट कम रहेगा तो वो क्या कर पाएगा? फैल पाएगा, वेट कर पाएगा हर एक जगह को।
चलिए बहुत सही। ये सारी चीजें हमें समझ आ गई हैं। अब हम बढ़ते हैं इस चैप्टर के आखिरी टॉपिक की तरफ जो कि है कैपिलरिटी।
अब भैया ये कैपिलरिटी क्या होता है? समझाता हूं। बट उससे पहले देखो तुम इस लेक्चर के यहां तक आ गए हो। बस लेक्चर 10
मिनट और है। लेकिन मैं एक चीज बोलना चाहता हूं। आई एम प्राउड ऑफ यू ऑल जो यहां तक पहुंचा है। क्यों? पता है क्यों? क्योंकि
ना होता क्या है ना कि इस लाइफ के अंदर हमें कोई ये बोलने वाला नहीं है कि आई एम प्राउड ऑफ यू या फिर तू अच्छा कर रहा है,
तू अच्छी कर रही है। मुझे भी अपनी लाइफ में कोई नहीं मिला था। लेकिन मैं तुम्हारे लिए लाइफ में वो इंसान बनना चाहता हूं जो
कि मैं तुमसे ये बोलूं कि आई एम प्राउड ऑफ यू। मुझे पता है तुम बहुत मेहनत कर रहे हो। तुम अपना बेस्ट लगा रहे हो। मुझे पता
है लाइफ के अंदर चैलेंजेस आ रहे हैं तुम्हारे। तुम्हें ऐसा लग रहा है कि गिव अप कर दूं बट तुम हार मत मानना। तुम जिस
भी पड़ाव के अंदर हो लाइफ के अंदर तुम इसको पार कर जाओगे और तुम बहुत बेहतरीन करोगे जिंदगी के अंदर। मुझे तुम पे 10001%
विश्वास है। ठीक है? तुम जितनी मेहनत कर रहे हो ना एक दिन वो रंग लाएगी। मुझे तुझ पे विश्वास है। तू डरे मत। चल आजा 10-15
मिनट और खत्म करते हैं चैप्टर को। कैपिलरिटी क्या होता है बेटा? अगर तुम्हें याद हो हमने अभी थोड़ी देर पहले वो मरकरी,
बैरोमीटर वो सब पढ़ा था। बैरोमीटर में क्या होता था? बैरोमीटर में अगर तुम्हें याद हो एक ट्यूब होती थी। है ना? यह क्या
ट्यूब बना दी भैया? है ना? एक ट्यूब होती थी जो कि बंद होती थी। तो उसमें क्या होता था ना? लिक्विड जो होता था वो ऊपर आ जाता
था। क्यों आता था? प्रेशर बैलेंस करने के लिए अभी पढ़ा था। लेकिन कैपिलरी क्या होती है? एक ट्यूब होती है और वो भी बहुत थिन
ट्यूब होती है। एकदम पतली। बहुत पतली। इससे भी पतली ट्यूब होती है जो कि दोनों एंड से ओपन होती है। यानी बैरोमीटर में तो
ट्यूब बंद थी। लेकिन अब क्या होगी ना अभी जो ट्यूब होगी वो ओपन होगी। लेकिन ये बहुत ज्यादा पतली होगी। एक्सट्रीमली थिन होगी।
तो जैसे ही आप इस कैपिल इसको हम कैपिलरी बोलते हैं। इसको जब आप पानी में डालोगे ना मान लो ये बकर है। इस बकर में आप जैसे ही
कैपिलरी को डालोगे ना तो पता है क्या होगा? इसमें पानी ऊपर उठने लगेगा। क्या करने लगेगा? पानी ऊपर उठने लगेगा। अब
तुम्हारे मन में सवाल आ रहा होगा कि भैया ये तो ओपन है। तो यहां से भी प्रेशर लगेगा। एटमॉस्फेरिक प्रेशर लग रहा है। तो
फिर तो पानी उठना ही नहीं चाहिए। पानी तो नीचे ही रहना चाहिए। पर पता है यहां पर क्या होता है? जो कैपिलरी होती है ये इतनी
छोटी होती है। इतनी छोटी होती है कि इसमें से प्रेशर लग ही नहीं पाता। वो जो एयर प्रेशर है ना वो लग ही नहीं पाता। इस वजह
से इस पॉइंट पे बराबर एयर प्रेशर लगाने के लिए यहां पे पानी ऊपर की डायरेक्शन में उठ जाता है। और इसी प्रोसेस को हम क्या बोलते
हैं? इसी प्रोसेस को हम बोलते हैं कैपिलरिटी। यानी इट इज़ द फिनोमिना इन व्हिच लिक्विड राइज़ेस और फॉल्स इन अ नैरो
ट्यूब व्हेन ट्यूब इज़ प्लेस्ड वर्टिकली इन अ लिक्विड। यानी इस ट्यूब को डाला जाता है तो वो ऊपर की तरफ मेनली राइज़ करती है। हां
कुछ-कुछ केसेस के अंदर भी जाती है बट वो केसेस आपको पढ़ने की जरूरत नहीं है। आपके सिलेबस में नहीं है। ठीक है? हमें बस इतना
पढ़ना है कि वो राइज़ करती है। अब इसका एवरीडे एग्जांपल बताऊं? आपने क्लास 10थ के अंदर ना एक चैप्टर में वो पढ़ा था जाइलम।
जाइलम याद है जो पानी को ट्रांसपोर्ट करता था। बायोलॉजी बायोलॉजी। हां। तो वो जो प्रोसेस होता है ना वो इसी एक्शन की वजह
से होता है। वो जो पानी ट्रांसपोर्ट होता है वो इसी एक्शन की वजह से होता है। यानी इज़ द राइज़ ऑफ़ सैप एंट्री थ्रू ज़ाइलम
ट्यूब्स। कैपिलरिटी की वजह से ही होता है। वहां पे छोटी-छोटी ट्यूब्स होती हैं जो कि पानी को ऊपर की तरफ खींच के ले जाती हैं।
चलिए बहुत सही। अगला ऑयल राइजिंग इन अ लैंप विक। अगर आपने देखा हो कभी आपने देखा है कि जब दिया जलाती है आपकी मम्मी तो
उसमें वो क्या डालती हैं वो दिए की वो बत्ती बनाती हैं और वो लगाती हैं। देखा है? तो उसमें ऑयल ऑटोमेटिकली ऊपर की तरफ
खींच जाता है। देखा है? कैसे खींच जाता है भैया? हैं? हमने तो वो लगाया और ऑइल ऊपर आ गया। कैपिलरी के प्रोसेस की वजह से। अगला
इंक राइजिंग इन दी ब्लोटिंग पेपर। आप कोई भी पेपर लेना वो जो टिश्यू पेपर होता है उसको पानी पर रखना। तो उसमें क्या होगा?
पानी उसमें फ्लो करने लगेगा। पानी उसमें फ्लो करने लगेगा। पानी उसमें ऊपर आने लगेगा। क्यों? ड्यू टू कैपिलरिटी। तो यानी
कैपिलरिटी में क्या हो रहा है बेटा? बेसिकली बेसिकली कैपिलरिटी के अंदर बहुत सिंपल प्रोसेस है कि ये ट्यूब इतनी पतली
है कि यहां पर प्रेशर डिफरेंस क्रिएट हो रहा है और पानी ऑटोमेटिकली ऊपर जा रहा है। अब कितना ऊपर जाएगा? कितनी हाइट पे जाएगा?
तो उसकी एक डेरिवेशन। भैया फिर नहीं। भैया हाथ जोड़ के मैं विनती करता हूं। भैया देखो यार एक डेरिवेशन बची है करा लेने दो।
आ जाओ फटाफट से स्टार्ट करते हैं। अब यहां पर हम क्या निकालने वाले हैं कि ये जो कैपिलरी है ना भैया इसकी हाइट भी तो
निकालें। ये जो हाइट जिसमें ये पानी आ गया है ये पानी किस हाइट पे आएगा वो भी तो निकालें। तो आ जाओ फटाफट से। देखो हमने
क्या इमेजिन करा है? नीचे कहीं पानी था। ये एक कैपिलरी ट्यूब है। इस कैपिलरी ट्यूब में h हाइट तक पानी जो है वो राइज़ हो गया
है। ठीक है? और पानी किस शेप में राइज़ होता है? वो आपको पता ही है। किसमें? कॉनकेव मिनिस्कस की शेप में ये पानी राइज़
हो चुका है। ठीक है जी। अब ये जो कैपिलरी ट्यूब थी इसका जो रेडियस था वो है r। ठीक है? वो क्या है? r और यहां पर में जो एंगल
ऑफ कॉन्ट है एंगल ऑफ कॉन्टैक्ट क्या होता है? आपको पता होगा एंगल ऑफ कॉन्टैक्ट इसके और इसके बीच का एंगल एक टेंजेंट ड्रॉ करा
वो कितना है? वो है थीटा। वो हम अस्यूम कर रहे हैं। ठीक है? अब यहां पर एक छोटी सी चीज और अस्यूम करनी होगी जिसकी मदद से ये
डेरिवेशन बहुत सिंपल हो जाएगी। हम क्या अस्यूम करेंगे कि ये जो आप देख पा रहे हो ना ये जो कॉनकेव है ये जो कॉनकेव मिनिसस
का आप पार्ट देख पा रहे हो ये पूरे सर्कल का पार्ट है। यानी एक सर्कल है उसका एक ये छोटा सा पार्ट है। ठीक है? और उस सर्कल का
आप इस जगह पे कहीं पे भी एक जगह पे सेंटर यहां पर अस्यूम कर सकते हो। ठीक है? और उसका हम रेडियस भी अस्यूम करेंगे बेटा।
इसका हम रेडियस भी अस्यूम करेंगे जो कि होगा बड़ा वाला r। ठीक है? जो कैपिलरी ट्यूब थी उसका रेडियस था छोटा वाला r और
यह जो हमने अस्यूम करा है रेडियस इस ये जो बड़ा वाला ये जो सर्कल हमने अस्यूम करा है जो कि इस छोटे से पोर्शन का पार्ट है उसका
हमने रेडियस अस्यूम करा है बड़ा वाला r ठीक है अगर आप ध्यान से देखो एक छोटी सी ज्योमेट्री हमें यहां पे लगानी पड़ेगी
देखना बेटा ये जो थीटा है ये जो थीटा है और यहां जो इन दोनों के बीच का एंगल होगा वो क्या होगा वो बराबर होगा ये ज्योमेट्री
की मदद से आपको करना पड़ेगा अब यहां पे प्रूफ वगैरह नहीं करके आना है कैसे होगा कैसे नहीं होगा वो छोड़ो वो छोड़ो। आपको बस
इतना रखना है कि इन दोनों के बीच में ये बड़े वाले R और ये छोटे वाले R के बीच में जो एंगल होगा वो थीटा होगा। अच्छा मुझे एक
बात बताओ cos थीटा क्या होता है? एक बार बताना जरा। cos थीटा क्या होता है भैया? बेस / हाइपोटेनस यानी r / r तो इस फ़ूले से
बड़े वाली r की वैल्यू क्या आ गई? r / cos थीटा। ठीक है? ये आपने भैया क्यों निकाली? ये आपको आगे समझ आएगा। लास्ट में समझ
आएगा। सबसे पहला एक सिंपल स्टेप हमने कर लिया। हमने क्या करा? हमने सबसे पहले तो एक कंस्ट्रक्शन कर लिया। हमने एक सर्कल
बना लिया। अस्यूम कर लिया। उसका रेडियस है बड़ा वाला r। ये एंगल एंगल ऑफ कॉन्टेक्ट है। तो ये भी थीटा होगा। ठीक है? तो हमने
क्या लिखा कि जो बड़े वाले R की वैल्यू है वो r / cos थीटा है। ठीक है? ये पहला स्टेप हो गया। अब अब आते हैं मेन चीज़ के
ऊपर। देखो यहां पर ना पानी h हाइट पे राइज़ हो गया है। प्रेशर लग रहा होगा। प्रेशर का फार्मूला क्या होता है?
रो G H यस और नो। यही होता है। अरे बोल दो यार। हां। है ना? प्रेशर लग रहा होगा। अच्छा एक इमेजिन करो। ये एक पूरी की पूरी
ड्रॉप बन गई है। अरे हां या ना बोले यार। ये पूरी एक ड्रॉप बन गई है। ये एक पूरी हमने अस्यूम कर लिया एक सर्कल है। एक
ड्रॉप है। अभी हमने एक और प्रेशर पढ़ा। अभी हमने एक और प्रेशर पढ़ा। सरफेस टेंशन की फॉर्म में जो हमने बोला ना एक्स्ट्रा
प्रेशर उसका क्या फार्मूला था? क्या उसका फार्मूला 2s / R था? जल्दी बताओ। क्या उसका फार्मूला 2s / R था? ठीक है? तो यानी
ये भी प्रेशर, ये भी प्रेशर। क्या इन दोनों को मैं बराबर रख सकता हूं? ठीक है? रख सकता हूं। तो रोgh = 2s / r मुझे
निकालना क्या है बेटा? मुझे निकालना है ये h तो सारी चीजों को मैं वहां ले जाऊंगा तो ये क्या आ जाएगा? 2s / रोgr
लेकिन यहां पर बड़ा वाला r है जो कि इस पूरे सर्कल का ये जो बूंद है इस ड्रॉप का रेडियस है। लेकिन ये तो हमने अस्यूम करा
है। तो अभी मैंने आपको एक वैल्यू बताई थी बड़े वाले r की जो कि है r / cos थीटा। तो मैं क्या करूंगा? इस r को रिप्लेस करूंगा।
यहां पर लिख दूंगा r / cos थीटा। तो ये आ जाएगा 2s cos थीटा / रो gr और यही फार्मूला होता है किसका हाइट का यानी
कितनी हाइट तक कैपिलरी राइज़ करेगी वो हम इस फॉर्मूले से निकाल सकते हैं 2s cos थीटा / रोgr अगर आपने ध्यान से देखा हो
जितना ज्यादा cos थीटा यानी जितना ज्यादा एंगल ऑफ कॉन्ट उतना ज्यादा क्या कर रही है अरे बोलो हां आई समझ में तो cos थीटा की
वैल्यू पे बहुत चीजें डिपेंड कर रही हैं बट वहीं पर अगर एंगल 90° हो गया तो क्या होगा? cos थीटा यानी cos 90 की वैल्यू
कितनी होती है? ज़ीरो होती है। तो जो हाइट की वैल्यू होगी वो भी ज़ीरो हो जाएगी। इसके बारे में अभी समझा रहा हूं। बस आप इतना
समझो। क्या ये डेरिवेशन समझ आई? इसके अंदर हमने क्या करा? कैपिलरी कितनी हाइट पे राइज़ होगी वो मुझे निकालना था। तो मैंने
एक छोटा सा कंस्ट्रक्शन करा। ये वैल्यू निकाली और फिर ये तो दो स्टेप थे। ये तो बड़े सिंपल स्टेप थे। ये तो बड़े सिंपल
स्टेप थे। ये पुट करा और आंसर मैंने निकाल लिया। आई होप ये आपको समझ आ गया होगा। बड़ा इंपॉर्टेंट पॉइंट था। अब यहां पर मैं आपको
क्या बताना चाहता हूं? अस्यूम करो, अस्यूम करो। लिक्विड जब मैंने कैलकुलेट करा तो हाइट आई 14 मीटर। ठीक है? बट जो मेरी
कैपिलरी थी वो थी 12 मीटर की। तो अब क्या होगा? पानी राइज़ करेगा, राइज़ करेगा, राइज़ करेगा और क्या नीचे बहने लगेगा? बताओ?
नहीं। पानी राइज़ करता है और इस जगह पर आकर रुक जाता है। अब तुम पूछोगे भैया ऐसे कैसे रुक? अरे रुक जाता है भाई। काहे रुक जाता
है? सोच। जैसे ही पानी यहां पर आएगा तो अब ये जो मिनिस्कस था ना ये सीधा हो जाएगा। हां या ना? ये सीधा हो जाएगा। स्ट्रेट हो
जाएगा। एंगल बता कितना हुआ? एंगल ऑफ कांटेक्ट 90
cos 90 की वैल्यू ज़ीरो। यानी इसके आगे हाइट नहीं बढ़ेगी। जैसे ही मिनस्कस का एंगल ये जो एंगल है
90° हुआ वैसे ही हाइट नहीं बढ़ेगी। और ये बहुत इंपॉर्टेंट है क्योंकि इस पे क्वेश्चन भी पूछा गया है जो मैं आपको
दिखाऊंगा अभी। वाटर राइजेस टू अ हाइट h इन कैपिलरी ट्यूब इफ द लेंथ ऑफ दी कैपिलरी ट्यूब अबोव दी सरफेस वाटर इज मेड लेस देन
h यानी जो कैपिलरी ट्यूब है भैया उसको कम कर दिया है उसकी हाइट को रिड्यूस कर दिया है तो क्या होगा तो इसका आंसर है वॉटर
राइजज़ अप टू दी टॉप ऑफ कैपिलरी ट्यूब एंड स्टेज़ देयर वहां रुक जाएगा ओवरफ्लो नहीं करेगा क्यों क्योंकि जैसे ही एंगल 90° हो
पानी समाप्त यानी हाइट वहीं पे रुक जाएगी बहुत बढ़िया इसका एक क्वेश्चन लास्ट क्वेश्चन हम करेंगे इस चैप्टर का जो कि है
व्हेन व्हेन अ कैपिलरी ट्यूब इज़ डिप्ड इन अ वाटर अ वाटर राइज़ेस टू अ हाइट H इफ दी सेम ट्यूब इज़ डिप्ड इन अ सोप सॉल्यूशन द
हाइट ऑफ अ राइज़ इज़ देखो बेटा अब क्या बोला है हमने इसको सोप सॉल्यूशन में डाल दिया तो हाइट कम होगी ज्यादा होगी आखिर होगी तो
क्या होगी बताओ क्या होगी देखो बेटा अभी अगर आपने हाइट का फार्मूला आपको याद हो पहले तो ये फार्मूला थोड़ा याद रखने पड़ेंगे
है ना तो आपको पता चलेगा जो हाइट है इट इज डायरेक्टली प्रपोर्शनल टू टू सरफेस टेंशन किसके डायरेक्टली प्रोपोर्शनल है? सरफेस
टेंशन के। हां या ना? किसकी सरफेस टेंशन ज्यादा होती है? सोप की या फिर पानी की? बताओ। अभी मैंने थोड़ी देर पहले बताया था
आपको कि जो सोप होती है उसकी सरफेस टेंशन कम होती है। अब क्योंकि सोप की सरफेस टेंशन कम है तो उसमें जो हाइट होगी
कैपिलरी राइस की वो भी कम हो जाएगी। यानी इसका आंसर आएगा डिक्रीज। चलिए बहुत बढ़िया। यहां पर एक क्वेश्चन आपके होमवर्क
का जो कि आप बताओगे। चार ऑप्शन हैं। पॉज करना, कमेंट करना। ये आपको एक बहुत सिंपल सा फार्मूला लगाना है। यहां पर मैंने लिख
भी दिया हाइट का जो अभी मैंने आपको निकाल के बताया ना 2s cos थीटा / rg यही आपको फार्मूला यहां पर लगाना है। और इस
फार्मूले की मदद से आपको सही आंसर बताना है। जल्दी से पॉज करिए कमेंट सेक्शन में खत्म करना इस लेक्चर को यहां पर। ये
लेक्चर होता है समाप्त। शुक्रिया। याद रखना यू ऑल आर वॉरियर्स। और तुम ना अपने पेरेंट्स को प्राउड फील कराने के लिए पढ़
रहे हो। खुद को प्रूव करने के लिए पढ़ रहे हो। पढ़ते रहो। मेहनत लगाते रहो। तुम्हारे प्रशांत भैया तुम्हारे हरदम साथ हैं। अभी
तक जितने वन शॉट हो पाए उतने बनाए। आगे और वन शॉट तुम्हारे लिए लाऊंगा। जितना बेस्ट तुम्हारे लिए लगा सकता हूं उतना बेस्ट मैं
तुम्हारे लिए लगाऊंगा। ऑन दिस नोट्स। शुक्रिया एवरीवन। मिलते हैं नेक्स्ट लेक्चर के अंदर। नोट्स डिस्क्रिप्शन में
मिल जाएंगे। टेक केयर। बाय बाय।
द्रव कोई भी पदार्थ है जो बह सकता है और जिसका कोई निश्चित आकार नहीं होता। इसमें द्रव (लिक्विड) और गैसें (गैसेस) दोनों शामिल हैं। इसके दो मुख्य गुण हैं: (1) इसका अपना कोई आकार नहीं होता, यह जिस बर्तन में रखा जाता है उसी का आकार ले लेता है, और (2) तनाव (स्ट्रेस) लगाने पर यह आसानी से विकृत (डिफॉर्म) हो जाता है।
हाइड्रोस्टैटिक पैराडॉक्स के अनुसार, किसी तरल में दाब केवल तरल स्तंभ की ऊंचाई पर निर्भर करता है, न कि बर्तन के आकार पर। दाब में गहराई के साथ परिवर्तन का सूत्र P = P₀ + ρgh है, जहां P₀ सतह का दाब, ρ तरल का घनत्व, g गुरुत्वीय त्वरण और h गहराई है। उदाहरण के लिए, पानी के टैंक में, चाहे आप कितने भी बड़े या छोटे बर्तन में पानी डालें, दाब सिर्फ पानी की ऊंचाई पर निर्भर करेगा।
पास्कल का नियम कहता है कि किसी बंद द्रव में एक स्थान पर लगाया गया दाब द्रव के प्रत्येक भाग में समान रूप से संचारित होता है। हाइड्रोलिक लिफ्ट या ब्रेक में, यह सिद्धांत F₁/A₁ = F₂/A₂ के रूप में उपयोग होता है, जिससे एक छोटे बल को बढ़ाकर बड़ा बल उत्पन्न किया जा सकता है। उदाहरण के लिए, यदि छोटे पिस्टन का क्षेत्रफल A₁ है और उस पर 10 N का बल लगता है, और बड़े पिस्टन का क्षेत्रफल A₂ = 9A₁ है, तो F₂ = 10N × 9 = 90 N बल उत्पन्न होगा।
बर्नौली का सिद्धांत कहता है कि किसी असम्पीड्य, अश्यान द्रव के सुवीही प्रवाह में, दाब ऊर्जा, गतिज ऊर्जा और स्थितिज ऊर्जा का योग नियत रहता है, जिसे P + (1/2)ρv² + ρgh = नियतांक के रूप में व्यक्त किया जाता है। इसका एक व्यावहारिक अनुप्रयोग हवाई जहाज के पंखों का डिज़ाइन है, जहां पंख के ऊपर और नीचे हवा के वेग में अंतर के कारण दाब का अंतर पैदा होता है, जिससे विमान उड़ता है।
पृष्ठ तनाव द्रव के अणुओं के बीच के आसंजक बलों (cohesive forces) के कारण होता है, जो सतह को एक खिंची हुई झिल्ली की तरह बना देता है। यह सतह के क्षेत्रफल को कम करने की प्रवृत्ति रखता है। इसके सामान्य उदाहरण हैं: पानी पर बूंदों का गोलाकार होना (क्योंकि गोले का पृष्ठीय क्षेत्रफल सबसे कम होता है), और पानी पर कीड़ों का चलना (जहां पृष्ठ तनाव उनके पैरों को डूबने से रोकता है)।
श्यानता द्रव का वह गुण है जो उसकी विभिन्न परतों के बीच आपेक्षिक गति का विरोध करता है, और इसे आंतरिक घर्षण के रूप में समझा जा सकता है। स्टोक्स का नियम F = 6πηrv के रूप में एक श्यान द्रव में गोलाकार वस्तु पर लगने वाले श्यान-बल को परिभाषित करता है, जहां r वस्तु की त्रिज्या और v उसका वेग है। इस नियम से ही सीमांत वेग (terminal velocity) v_t = [2r²(ρ_s - ρ_f)g] / 9η ज्ञात किया जाता है, जैसे पानी में गिरने वाली रेत के कण का स्थिर वेग।
बैरोमीटर का उपयोग वायुमंडलीय दाब मापने के लिए किया जाता है, जैसे टॉरिसेली के प्रयोग में पारे का स्तंभ 76 cm ऊंचा होता है। वहीं मैनोमीटर का उपयोग गैस का दाब मापने के लिए किया जाता है, जो U-नली के सिद्धांत पर काम करता है और P_gas = Pₐ + ρgh सूत्र से ज्ञात किया जाता है। मूल अंतर यह है कि बैरोमीटर बाहरी वायुमंडलीय दाब मापता है, जबकि मैनोमीटर किसी बंद गैस का दाब मापता है।
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