इलास्टिसिटी और प्लास्टिसिटी (Elasticity and Plasticity)
- डिफॉर्मेशन: किसी बाहरी बल (External Force) के लगने पर किसी वस्तु की आकृति और आकार में होने वाला परिवर्तन।
- इलास्टिसिटी (Elasticity): वह गुण जिसके कारण कोई वस्तु बल हटाने पर अपनी मूल आकृति और आकार में वापस आ जाती है।
- प्लास्टिसिटी (Plasticity): वह गुण जिसके कारण कोई वस्तु बल हटाने के बाद भी अपने विकृत रूप (Permanent Deformation) को बनाए रखती है।
- महत्वपूर्ण: फिजिक्स की दृष्टि से स्टील (Steel) रबड़ की तुलना में अधिक इलास्टिक है क्योंकि इसका सख्तपन (Stiffness) अधिक होता है। इलास्टिसिटी सीधे तौर पर सख्तपन के समानुपाती होती है। अधिक विस्तृत समझ के लिए आप फाइनल एग्जाम तैयारी: फिजिक्स क्लास 11th की पूरी मैराथॉन देख सकते हैं।
स्ट्रेस (Stress) के प्रकार
स्ट्रेस को रिस्टोरिंग फोर्स (Restoring Force) प्रति इकाई क्षेत्रफल (Force / Area) के रूप में परिभाषित किया जाता है। इसका SI मात्रक N/m² या Pa (Pascal) है। यह एक अदिश राशि (Scalar Quantity) है। स्ट्रेस तीन प्रकार की होती है:
- अनुदैर्ध्य प्रतिबल (Longitudinal Stress):
- कार्य: इसमें बल (Force) अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल (Cross-sectional Area) के लंबवत (Perpendicular) लगता है।
- प्रभाव: वस्तु की लंबाई (Length) में परिवर्तन होता है।
- तनन प्रतिबल (Tensile Stress): जब लंबाई बढ़ाई जाती है।
- संपीड़न प्रतिबल (Compressive Stress): जब लंबाई घटाई जाती है।
- अपरूपण प्रतिबल (Shearing Stress):
- कार्य: बल सतह के स्पर्शरेखीय (Tangential/Parallel) लगता है।
- प्रभाव: वस्तु की आकृति (Shape) बदल जाती है, लेकिन आयतन (Volume) में कोई परिवर्तन नहीं होता।
- उदाहरण: जेली के ऊपरी सिरे पर बल लगाने पर उसका आकार बिगड़ना।
- आयतन प्रतिबल (Bulk Stress) / जलदाब प्रतिबल (Hydraulic Stress):
- कार्य: वस्तु के प्रत्येक पृष्ठ पर बल लंबवत लगता है।
- प्रभाव: वस्तु का आकार (Shape) समान रहता है लेकिन आयतन (Volume) में परिवर्तन होता है।
- यह हाइड्रोलिक प्रेशर (Hydraulic Pressure) के बराबर होता है।
स्ट्रेन (Strain) के प्रकार
स्ट्रेन मूल आयाम में परिवर्तन और मूल आयाम का अनुपात (Change in Dimension / Original Dimension) है। इसका कोई मात्रक (Unit) नहीं होता (यह Unitless है)।
- अनुदैर्ध्य विकृति (Longitudinal Strain): लंबाई में परिवर्तन / मूल लंबाई = ΔL / L
- अपरूपण विकृति (Shearing Strain): कोणीय विस्थापन (Angular Displacement) जो लंबाई लंबवत किसी बिंदु के क्षैतिज विस्थापन Δx और उसकी ऊँचाई L के अनुपात के बराबर होता है। Δx / L = tan θ, छोटे कोणों के लिए θ के बराबर।
- आयतन विकृति (Volumetric Strain): आयतन में परिवर्तन / मूल आयतन = ΔV / V
हुक का नियम (Hooke's Law) और प्रत्यास्थता गुणांक (Modulus of Elasticity)
- हुक का नियम: प्रत्यास्थ सीमा (Elastic Limit) के अंदर, प्रतिबल (Stress) विकृति (Strain) के समानुपाती होता है।
- Stress ∝ Strain => Stress = K · Strain
- प्रत्यास्थता गुणांक (Modulus of Elasticity): प्रतिबल और विकृति का अनुपात।
- K = Stress / Strain
- यह केवल पदार्थ (Material) पर निर्भर करता है, वस्तु के आकार या साइज पर नहीं।
- प्रत्यास्थ सीमा (Elastic Limit): वह अधिकतम प्रतिबल जिसे पार करने के बाद वस्तु अपनी मूल आकृति में वापस नहीं आती।
प्रत्यास्थता गुणांक के तीन प्रकार
1. यंग का गुणांक (Young's Modulus) [Y]
- परिभाषा: अनुदैर्ध्य प्रतिबल (Longitudinal Stress) और अनुदैर्ध्य विकृति (Longitudinal Strain) का अनुपात।
- सूत्र: Y = (F / A) / (ΔL / L) = F · L / (A · ΔL)
- महत्व: यह पदार्थ की कठोरता (Stiffness) को दर्शाता है। उच्च Y का अर्थ है अधिक सख्त पदार्थ। रे ऑप्टिक्स जैसे अन्य अध्यायों की तैयारी के लिए आप रे ऑप्टिक्स: दर्पण एवं अपवर्तन का संपूर्ण निर्देशन एवं डेरिवेशन ट्रिक्स का संदर्भ ले सकते हैं।
2. अपरूपण गुणांक (Shear Modulus) या दृढ़ता गुणांक [G या η]
- परिभाषा: अपरूपण प्रतिबल (Shearing Stress) और अपरूपण विकृति (Shearing Strain) का अनुपात।
- सूत्र: η = अपरूपण प्रतिबल / अपरूपण विकृति
- नोट करें: यह केवल ठोसों (Solids) के लिए मान्य होता है, क्योंकि द्रवों में अपरूपण बल लगाने पर वह प्रवाहित हो जाता है। अधिकांश पदार्थों के लिए यह यंग मॉड्यूलस से कम होता है (लगभग Y/3)।
3. आयतन गुणांक (Bulk Modulus) [K]
- परिभाषा: आयतन प्रतिबल (Bulk Stress) और आयतन विकृति (Volumetric Strain) का अनुपात।
- सूत्र: K = (F / A) / (ΔV / V) = -ΔP / (ΔV / V)
(यहाँ ऋण चिह्न यह दर्शाता है कि दबाव (Pressure) बढ़ने पर आयतन (Volume) घटता है।) - संपीड्यता (Compressibility): आयतन गुणांक का व्युत्क्रम (Reciprocal) है। संपीड्यता = 1 / K
- गैसों की संपीड्यता सबसे अधिक होती है, इसके बाद द्रवों और फिर ठोसों की।
उदाहरण और समाधान (Examples & Solutions)
- मूल उदाहरण: यदि कोई तार लंबाई 2 m है और उसे 0.4 mm तक खींचा जाए तो विकृति = 0.4 × 10⁻³ m / 2 m = 2 × 10⁻⁴
- परीक्षा उपयोगी: एक संरचनात्मक स्टील की छड़ की त्रिज्या 10 mm और लंबाई 1 m है। 100 kN का बल लगाने पर प्रतिबल, विकृति और दीर्घीकरण (Elongation) ज्ञात कीजिए। (Y = 2 × 10¹¹ Pa)
- प्रतिबल (Stress): F / A = (100 × 10³) / (π × (0.01)²) ≈ 3.18 × 10⁸ Pa
- विकृति (Strain): प्रतिबल / Y = (3.18 × 10⁸) / (2 × 10¹¹) ≈ 1.59 × 10⁻³
- दीर्घीकरण (Elongation): विकृति × मूल लंबाई = 1.59 × 10⁻³ × 1 m = 1.59 mm
अपनी तैयारी को और बेहतर बनाने के लिए आप टाइटंस फास्ट ट्रैक 11वीं ओरिएंटेशन: शेड्यूल, नोट्स और क्लासेस का लाभ उठा सकते हैं।
एग्जाम्स आर नियर बट व्हाई टू फियर व्हेन पीके भैया इज हियर। सो हाय एवरीवन मैं हूं आप सभी का अपना प्रशांत भैया और लेकर आ
गया हूं अगले चैप्टर की वन शॉर्ट वीडियो। अभी तक फिजिक्स की क्लास 11th की एक जो किताब थी ना जो कि वन ऑफ़ द टफेस्ट किताब
थी वो हमने पूरा निचोड़ के पढ़ लिया है। अगर आपको कोई भी चैप्टर देखना है यूनिट एंड डायमेंशन से लेकर ग्रेविटेशन तक हर एक
चैप्टर का डिटेल वन शॉट वन ऑफ द बेस्ट ऑन YouTube। ये मैं तुम्हें दावे से बोल सकता हूं। तुम जाकर देख लेना अगर विश्वास नहीं
हो रहा तो और ये जो है अब नई बुक हम स्टार्ट करने वाले हैं जिसका कि पहला चैप्टर आपको पता ही है जो कि सबसे इजी
चैप्टर है। मैं अगर बोलूं कि सबसे छोटा और सबसे इजी चैप्टर कौन सा है ना क्लास 11th का तो उसमें से वन ऑफ द बिगेस्ट नेम होगा
इसका मैकेनिकल प्रॉपर्टीज ऑफ़ सॉलिड। तो इसको हम डिटेल में पढ़ेंगे। क्वेश्चंस भी बताऊंगा। वो इंपॉर्टेंट सारे के सारे सवाल
थ्योरी सब कुछ करा दूंगा जो कि तुम्हारे पेपर के अंदर आ सकता है। ठीक है? भरोसा रखना। तुम्हारा टीचर ना यहां पर एकदम जोश
से तुम्हें पढ़ा रहा है। एनर्जी से तुम्हें पढ़ा रहा है। तो मैं चाहता हूं मेरे हर एक स्टूडेंट के अंदर वो जोश रहे,
वो एनर्जी रहे। है ना? कभी भी अगर डर लगे ना लाइफ के अंदर तो अपना गोल याद रखना कि तुमने पढ़ाई इसलिए स्टार्ट करी थी क्योंकि
तुम्हें जीवन में कुछ बड़ा करना था। जब तुम छोटे थे तो क्या सपने सोचते थे ना कि लाइफ में ये करेंगे, वो करेंगे। तुम्हारे
अंदर का वो जो छोटा बच्चा है ना वो तुम्हें देखकर प्राउड फील करना चाहिए। इसलिए तुम मेहनत कर रहे हो। आ जाओ चलो
स्टार्ट करते हैं। ठीक है? तो ये जो चैप्टर है काफी छोटा चैप्टर है। है ना? ये चैप्टर स्टार्ट कहां से होता है? सबसे
पहले होता है सॉलिड क्या होता है? अब देखो सॉलिड मुझे बताने की जरूरत नहीं है। सॉलिड है ना? सबको पता है भैया व्हाट इज सॉलिड?
ठीक है? अब एक टॉपिक आता है यहां पर जिसको हम बोलते हैं डिफॉर्मेशन। भैया ये डिफॉर्मेशन क्या है? अरे अंग्रेजी का शब्द
है। सबसे अच्छी बात बताऊं क्या? इस चैप्टर में ना डेरिवेशन नहीं है। भैया मजाक तो नहीं कर रहे। सही बताओ। हैं? सही में
डेरिवेशन। अरे नहीं है डेरिवेशन। भैया मजे ही मजे हैं। लो एंजॉय करो। बस दो ही डेरिवेशन है। सॉरी। ठीक है? तो डिफेशन
क्या है? देखो डिफेशन आप किसी भी चीज पे अगर फोर्स लगाओगे तो वो अपनी शेप और साइज को बदल लेगा। जैसे कि अगर मेरे हाथ में
पेन है। अगर मैं उसमें जोर से फोर्स लगाऊं तो एक समय ऐसा आएगा जब अपनी ये शेप और साइज बदल लेगा। बदल लेगा या नहीं बदलेगा?
हां बदली तो वो भी थी। कोई बात नहीं बेटा। इसको हम देखते हैं अभी। तो क्या है डिफॉर्मेशन? व्हेन एन एक्सटर्नल फोर्स इज़
अप्लाइड ऑन अ बॉडी इट चेंजज़ इट्स शेप एंड साइज और बोथ। जब ये चेंजज़ आते हैं उसको हम बोलते हैं डिफॉर्मेशन। क्या बोलते हैं
बेटा? डिफेशन। ठीक है? दिस चेंज प्रोड्यूस्ड इन दी कॉन्फ़िगरेशन ऑफ दी बॉडी ऑफ एन एक्सटर्नल फोर्स इज कॉल्ड डिफेशन।
ठीक है जी? हमको ये समझ आ गया भैया डिफॉर्मेशन क्या होता है? लेकिन अब एक शब्द मैं तुम्हें बताना चाहता हूं। और वो
जो तुम बचपन से उस शब्द को गलत मान के बैठे थे। आज तुम्हारा बहुत बड़ा भ्रम तोडूंगा मैं। इलास्टिक। इस शब्द का क्या
मतलब होता है? तुम बोलोगे भैया वो बचपन में ना हम वो इलास्टिक वाला वो पहनते थे। नाड़ा होता था इलास्टिक वाला, पजामा होता
था इलास्टिक वाला। तो भैया इलास्टिक यानी जो ज्यादा स्ट्रेच हो पाए। अरे यही तो है इलास्टिक का मतलब है ना? जो ज्यादा
स्ट्रेच हो पाए। रबड़ इज़ इलास्टिक। बट अगर आज मैं बोलूं कि फिजिक्स के हिसाब से इलास्टिक की डेफिनेशन ये नहीं होती। तो
इलास्टिक का मतलब क्या है? देखते हैं। आ जाओ। इलास्टिक का मतलब है इफ अ बॉडी रिगेंस इट्स ओरिजिनल शेप एंड साइज़ आफ्टर
रिमूवल ऑफ़ दी फोर्स। यानी इमेजिन करो मैंने इस पे फ़ लगाई। इसके शेप और साइज में थोड़ा सा चेंज आ गया। लेकिन जैसे ही मैंने
फोर्स को छोड़ा तो ये अपनी शेप पे वापस आ गया। अपनी शेप पे वापस आ गया। उस प्रॉपर्टी को मैं बोलता हूं क्या?
इलास्टिक। और उस वर्च्यू को मैं बोलता हूं इलास्टिसिटी। क्या बोलता हूं? इलास्टिसिटी। अभी लिखवा दूंगा सब समझा
दूंगा। टेंशन मत लो। पहले तुम ये समझो इलास्टिक क्या है? अगर किसी के ऊपर फोर्स लगाओ उसके शेप एंड साइज में बदलाव आ जाए
और वो वापस जब फोर्स हटाई तो उसी शेप में आ जाए। उसको हम बोलते हैं इलास्टिक। जबकि एक और चीज होती है प्लास्टिक। प्लास्टिक
का सबसे अच्छा एग्जांपल है क्ले। क्ले तो देखी होगी क्ले। तो मान लो तुम क्ले लो और उस क्ले में ना अपनी ऐसे उंगली दबा दो। है
ना? फोर्स लगाई। डिफेशन भी आ गया। अब उंगली को हटाओ। जैसे ही तुम उंगली को हटाओगे तो क्या क्ले वापस से ऊपर आ जाएगी?
नहीं। नहीं। क्ले वैसे की वैसे रह जाएगी। यानी जब हम फोर्स लगाते हैं और उन बॉडीज जिसके अंदर क्या होता है? परमानेंट
डिफॉर्मेशन आ जाता है। परमानेंट चेंज इन शेप या साइज आ जाता है। तब हम उन बॉडीज को बोलते हैं प्लास्टिक। क्या बोलते हैं
बेटा? प्लास्टिक। बहुत बढ़िया। इफ अ बॉडी डज़ नॉट रिगेंस इट्स ओरिजिनल शेप एंड साइज इवन आफ्टर रिमूवल ऑफ द डिफॉर्मिंग फोर्स द
डिफेशन इज़ सेट टू बी प्लास्टिक। ठीक है? ये प्लास्टिक हो गया। ये इलास्टिक हो गया। चलो अब हम डिटेल में पढ़ते हैं जो कि इस
चैप्टर का सबसे इंपॉर्टेंट टॉपिक है कि ये जो इलास्टिसिटी होती है ये क्या होती है? ठीक है? बट उससे पहले ये जो डिफॉर्मेशन
होते हैं जैसे मैंने आपको दो प्रकार के बताए एक होता है इलास्टिक डिफेशन टेंपरेरी डिफेमेशन जिसके अंदर क्या होगा फोर्स
लगाओगे और जैसे ही फोर्स हटाओगे वापस हां ठीक है बट ये है प्लास्टिक डिफॉर्मेशन यानी परमानेंट चेंज यहां पर क्या होगा
परमानेंट चेंज होगा बहुत बढ़िया ये तो तुम्हें समझ आ गया अब देखो डेफिनेशन क्या होती है इलास्टिसिटी की वेरी इंपॉर्टेंट
ये एक ना बोनस चैप्टर है तुम्हारी के लिए मतलब तुम सबके लिए अगले डेढ़ घंटे बोनस हैं पता है क्यों क्योंकि 1 1/2 घंटे के
अंदर जितने भी सवाल तुम्हारे स्कूल लेवल में पूछे जा सकते हैं वो सारे सवाल तुम इसके अंदर सॉल्व कर लोगे। ठीक है? और यहां
पर डेफिनेशंस वगैरह भी पूछी जाती है। तो थ्योरिटिकली भी इंपॉर्टेंट चैप्टर है। देखो इलास्टिसिटी क्या है? द प्रॉपर्टी ऑफ़
दी बॉडी बाय वर्च्यू ऑफ़ व्हिच इट टेंड्स टू रिगेन इट्स ओरिजिनल शेप एंड साइज व्हेन अप्लाइड फोर्स इज़ रिमूव्ड। यानी एक ऐसी
प्रॉपर्टी बॉडी की जिसकी मदद से जब तुमने फोर्स लगाई और जब फोर्स हटाई तो वो अपनी वापस से उसी शेप में आ गया। उस प्रॉपर्टी
को हम बोलते हैं क्या? इलास्टिसिटी। अब मेरे मन में एक सवाल आया वि बॉडी इज मोर इलास्टिक?
स्टील या फिर रबड़ बैंड? क्या लगता है? भैया रबड़ बैंड ज्यादा इलास्टिक है। बचपन से सुनते आ रहे हैं। रबड़ बैंड को खींचते
हैं तो वापस से सेम शेप में आ जाता है। मैंने कहा बात तो तेरी सही है। पर फिजिक्स के हिसाब से गलत है। इलास्टिसिटी
इज़ डायरेक्टली प्रोपोर्शनल टू सख्त। जैसे हम बोलते हैं ना सख्त लौंडा है ना तो तुम इलास्टिसिटी को ऐसे समझो इसका मतलब होता
है बेटा सख्त है ना एकदम सख्त जो कहीं पिघलता नहीं है है ना ऐसे लड़के एकिस्ट नहीं करते वो अलग बात है बट सख्त समझो अब
समझो मैं आपको एक एग्जांपल देता हूं मान लो एक चेयर है ना दो चेयर है एक स्टील की चेयर है एक रबड़ की चेयर है ठीक है तो एक
दिन एक इंसान बैठा 100 किलो का तो स्टील की चेयर तो वैसी ही है ना बट रबड़ की जो चेयर होगी वो हल्की सी बेंड हो जाएगी हो
जाएगी ना हो जाएगी बट जब वो इंसान उठ जाएगा जाएगा तो वापस से सीधी हो जाएगी। ठीक है? मान लिया। बट अगर वही 100 किलो का
इंसान 3 दिन, 4 दिन, 7 दिन उसी चेयर पे बैठेगा तो स्टील की चेयर तो ऐसी रहेगी। उसमें कोई डिफेशन नहीं आएगा। लेकिन रबड़
वाली जो चेयर थी जो कि पहले सीधी थी अब वो बेंड रह जाएगी। यानी उसमें परमानेंट डिफेशन आ गया। तो कौन ज्यादा इलास्टिक कौन
कम इलास्टिक? अरे बोल स्टील ज्यादा इलास्टिक, रबड़ कम इलास्टिक। तो आपको याद कैसे रखना है? इलास्टिसिटी इज़ डायरेक्टली
प्रोपोर्शनल टू सख्त। कौन ज्यादा सख्त है? जो जितना ज्यादा सख्त होगा वो ज्यादा इलास्टिक होगा। ऐसे समझो तुम। जैसे स्टील
जो है ज्यादा ताकतवर है, सख्त है। और अगर मैं बात करूं रबड़ की तो वो कम इलास्टिक है क्यों? क्योंकि वो ज्यादा सख्त नहीं
होता। चलिए बहुत बढ़िया। आई होप आपको ये समझ आ गया होगा। ठीक है? चलिए आगे बढ़ा जाए। है ना? तो ऐसे छोटे-मोटे टॉपिक्स
हैं। एक प्लास्टिसिटी। प्लास्टिसिटी की डेफिनेशन भी समझ लो। ये क्या है? द प्रॉपर्टी ऑफ द बॉडी व्हिच अलाउस इट टू
रिटेन इट्स डिफॉर्म शेप परमानेंटली। यानी जो भी डिफेशन आया है बॉडी के अंदर वो परमानेंट रह जाए। उस प्रॉपर्टी को हम
बोलते हैं प्लास्टिसिटी। क्या बोलते हैं बेटा? प्लास्टिसिटी। एग्जांपल क्या है? वो घरों के अंदर पुट्टी-वुट्टी होती है ना?
देखिए पुट्टी। हां। तो पुट्टी क्या है? अरे उसमें प्रेस करोगे तो वैसा ही रह जाता है। है ना? सिमिलरली मड, क्ले ये सब क्या
है? इसके एग्जांपल आ जाते हैं। चलिए बहुत बढ़िया। अब आता है अगला टॉपिक। इलास्टिक तुम्हें समझ आ गया। है ना? कौन ज्यादा
इलास्टिक है? स्टील या फिर रबड़ में से बोलो स्टील। क्लियर है? क्लियर है। क्लियर है। ठीक है जी। समझ आ गया। अगला टॉपिक है
स्ट्रेस। भैया यार पेपरों की स्ट्रेस, लाइफ में उसका ना रिप्लाई आने की स्ट्रेस, मम्मी पापा की स्ट्रेस। इतनी सारी स्ट्रेस
हैं। ये कौन सी? अरे भैया वो सब स्ट्रेस अलग है। वो जीवन का सत्य है। वो चलता रहेगा। ये स्ट्रेस अलग है। ये स्ट्रेस का
मतलब क्या होता है? डेफिनेशन देखो। सबसे पहले क्या है? स्ट्रेस इज दी रिस्टोरिंग फोर्स डेवलप्ड पर यूनिट एरिया ऑफ क्रॉस
सेक्शन ऑफ दी बॉडी। समझाता हूं। एक बॉक्स है या फिर ये पेन है। ये पेन है। ठीक है? इस पेन को मैं खींच रहा हूं। इस पेन को
मैं खींच रहा हूं। ठीक है हां एकदम खींच रहा हूं। जब मैं इसको खींच रहा हूं ना तुमने अगर एक चीज नोट करी हो यार। जब मैं
फोर्स हटा दूंगा तो ये पेन ऐसा का ऐसा रह जाएगा। हां या ना? हां या ना? तो ये पेन ऐसा का ऐसा कैसे रह पाया? क्योंकि इसके
अंदर एक फोर्स होगी जिसको हम बोलते हैं रिस्टोरिंग फोर्स जो कि इसके शेप एंड साइज को वापस से है ना वापस से खींच रही होगी।
हां या ना? अरे एक रबड़ को मैं खींचता हूं और जब छोड़ता हूं तो रबड़ वापस से उसमें आ जाता है। उसी शेप में आ जाता है। क्यों?
क्योंकि उसमें एक रिस्टोरिंग फोर्स है। तो स्ट्रेस यही होता है। रिस्टोरिंग फोर्स पर यूनिट एरिया। बस भैया ये फार्मूला तो कहीं
देखा सा लग रहा है यार। मैंने कहा बिल्कुल देखा। पता कहां? भैया प्रेशर प्रेशर प्रेशर। हां जी बहुत बढ़िया। प्रेशर हां
तो स्ट्रेस प्रेशर एक ही है। फिजिक्स के हिसाब से अलग है। बट फॉर्मूले के हिसाब से एक ही है। है ना? ये भी क्या होता है?
फोर्स बाय एरिया। चलिए बहुत बढ़िया। तो स्ट्रेस को हम कैसे डिनोट करते हैं? इस सिंबल से डिनोट करते हैं। ये नल वाला जो
सिंबल होता है। ठीक है? फार्मूला होता है फोर्स बाय एरिया। याद रखना ये फार्मूला बहुतेंट है। बार-बार यूज़ होने वाला है।
ठीक है? अब तुम मुझे ये बताओ कि इसका यूनिट क्या होगा? वही यूनिट जो कि प्रेशर का होता है। आपको पता है न्यूटन पर मीटर²।
बहुत सही। ठीक है? डायमेंशन फार्मूला तुम्हें पता होना चाहिए और तुम्हें ये भी पता होना चाहिए कि स्ट्रेस जो होता है वो
एक प्रकार का स्केलर क्वांटिटी है। यानी डायरेक्शन से कोई लेना देना नहीं है। चलिए बहुत बढ़िया। अब आगे बढ़ते हैं। ये जो
स्ट्रेस है ना ये भी तीन प्रकार की है। भैया हमारे भी जीवन में बहुत प्रकार की स्ट्रेस है। तुम्हारे जीवन से हट के यहां
पर भी स्ट्रेस तीन प्रकार की है। एक है लोंगिट्यूडनल, एक है शियर स्ट्रेस और एक होती है क्या? हाइड्रोलिक या फिर बल्क
स्ट्रेस। समझाता हूं एक-एक करके। सबसे इंपॉर्टेंट कौन सी है? ये वाली। यह सबसे इंपॉर्टेंट है। लोंगिट्यूडनल स्ट्रेस।
देखो जब भी हम किसी रोड को लें रोड को लें या तो हम उसकी लेंथ इंक्रीस करेंगे या तो हम उसकी लेंथ डिक्रीज करेंगे। अरे दो ही
काम कर सकते हैं ना यार। या तो लेंथ बढ़ा दूंगा या तो लेंथ कम कर दूंगा। तो वो जो रिस्टोरिंग फोर्स लगती है ना उस
रिस्टोरिंग फ़ को हम क्या बोलते हैं? लोंगिट्यूडनल स्ट्रेस। है ना? जब भी आप किसी चीज को खींच रहे हो और रिस्टोरिंग फ़
पीछे की तरफ उसको खींचने की कोशिश कर रही है। रिस्टोरिंग फ़ उल्टी तो लगेगी। है ना? या फिर आप किसी चीज को कंप्रेस कर रहे हो
और रीस्टोनिंग फोर्स बाहर की तरफ फोर्स लगा रही है। तो उन दोनों ही फोर्सर्सेस को पर यूनिट एरिया पे हम क्या बोलते हैं?
लोंगिट्यूडनल स्ट्रेस। पहली ये चीज क्लियर हुई क्या? चलो देख लेते हैं एक बार आ जाओ। लोंगिट्यूडनल स्ट्रेस क्या है?
परपेंडिकुलर टू दी क्रॉस सेक्शनल एरिया। सबसे पहली चीज तो। है ना? कैसी होगी? परपेंडिकुलर होगी क्रॉस सेक्शनल एरिया से।
जैसे ये रोड है। यह रोड है। तो ये एरिया है। ठीक है? तो ये फोर्स हमेशा इसके परपेंडिकुलर लगेगी। है ना? बहुत बढ़िया।
इससे होता क्या है? इट चेंजज़ दी लेंथ ऑफ द बॉडी। बहुत बढ़िया। ये दो प्रकार की होती है। एक होती है टेंसाइल स्ट्रेस और एक
होती है कंप्रेसिव स्ट्रेस। टेंसाइल यानी जब आप किसी की लेंथ बढ़ाते हो। है ना? जब आप लेंथ किसी रोड की बढ़ाते हो तब हम बोलते
हैं टेंसाइल स्ट्रेस। फोर्स स्ट्रेचेस दी बॉडी इंक्रीजिंग दी लेंथ। जब लेंथ इंक्रीज होती है। और कंप्रेशन से तुम्हें समझ ये आ
रहा होगा कि जब लेंथ डिक्रीज होती है। बहुत बढ़िया। तो उसको हम बोलते हैं कंप्रेसिव स्ट्रेस। ठीक है जी। हमको ये
समझ आ गया। लोंगिट्यूडनल स्ट्रेस तो भैया क्लियर है। आगे बढ़ो यार। मैंने कहा ठीक है। अगला है शयरिंग स्ट्रेस। ये बच्चों को
समझ नहीं आती। भैया भैया स्टयरिंग शेयरिंग क्या होता है? सुन सुन सुन ध्यान से सुन। एक एग्जांपल लें जेली का। जेली देखी है
जेली? अरे वो जेली नहीं होती जैसे ऐसे जेली मूव करती रहती है। देख मैं यहां पर एक जेली बनाऊं। देख आजा। मान ले जेली है।
ये बेस है और ये जेली है। टेढ़ी-मेढ़ी हमारी प्यारी जेली। ठीक है? अब जेली ना ऐसे जमीन से चिपकी हुई है। ठीक है? और मैं क्या
करूंगा? मैं ऊपर से फोर्स लगाऊंगा। ऊपर से यानी मैं टेंजेंशियल फोर्स लगाऊंगा। हर एक सर्कल को एक लाइन छू के जाती है टेंजेंट
पता होगा। तो मैं ऐसे एक टेंजेंशियल फोर्स लगाऊंगा ऊपर। ऊपर लगाऊंगा मैं। तो क्या होगा? अरे जेली का नीचे वाला पार्ट तो
चिपका हुआ है। बट ऊपर वाला पार्ट हल्का सा मूव कर जाएगा। अरे यस और नो बोल दे यार। अरे यस और नो बोल दे। और ये जेली मेरी कुछ
इस प्रकार से हो जाएगी। यानी देखो बेस तो सेम ही है। बट ये मेरी जेली हल्की सी टेढ़ी हो गई। अरे हो गई नहीं हो गई। अरे हुई या
नहीं हुई? तो इसी ही स्ट्रेस को हम बोलते हैं क्या? शयरिंग स्ट्रेस। यानी मान लो एक क्यूब है और उस क्यूब में आप टेंजेंशियल
फोर्स लगाओ। तो बेस तो वही है लेकिन वो हल्का सा जैसे ये मान लो अब वो हल्का सा से टेढ़ा हो गया। हल्का सा क्या है? वो
टेढ़ा हो गया। बेस वही है बस वो टेढ़ा हो गया। इसको हम क्या बोलते हैं? बहुत बढ़िया। शयरिंग स्ट्रेस। चलो। तो अब देख लेते हैं।
डायरेक्शन ऑफ दी फोर्स क्या है? पैरेलल टू दी सरफेस। है ना? सरफेस के पैरेलल होती है या फिर टेंजेंशियल भी हम बोल सकते हैं।
अगली चीज़ क्या है? इससे होता क्या है? चेंज इज़ दी शेप ऑफ दी बॉडी। वॉल्यूम में कोई चेंज नहीं होता। याद रखना शयरिंग
स्ट्रेस से वॉल्यूम नहीं बदलती। बस थोड़ा सा टेढ़ा हो गया ना? तो शेप बदल गई। वॉल्यूम नहीं बदली। बहुत सही। अगला लेयर
ऑफ दी बॉडी स्लाइड्स ओवर ईच अदर। यानी ये जो ऊपर वाली लेयर थी वो स्लाइड कर गई और साइड में पहुंच गई। ठीक है? है ना? इसका
एग्जांपल तुम्हें मैंने बता ही दिया। अब बढ़ते हैं तीसरे टाइप के स्ट्रेस की तरफ जिसको हम क्या बोलते हैं बेटा? जिसको हम
बोलते हैं हाइड्रोलिक या फिर बल्क स्ट्रेस। ये सबसे सिंपल है। जब भी किसी भी ऑब्जेक्ट पे हर एक डायरेक्शन से फोर्स
लगती है जिसकी वजह से उसकी वॉल्यूम बदल जाती है। क्या बदल जाती है? वॉल्यूम बदल जाती है। फॉर एग्जांपल एक बॉल है उसको अगर
तुम ओशन की गहराइयों में डाल दोगे तो पानी हर डायरेक्शन से फोर्स लगाएगा। इधर से भी, इधर से भी, इधर से भी। तो उसी प्रकार की
स्ट्रेस को हम क्या बोलते हैं बेटा? हाइड्रोलिक या फिर बल्क स्ट्रेस। ठीक है? हाइड्रोलिक या फिर बल्क स्ट्रेस। है ना?
ऐसा याद रखना। बल्क। बहुत बढ़िया। तो इसमें क्या होता है? फोर्स इज़ परपेंडिकुलर टू दी सरफेस। और हर एक डायरेक्शन में होती है।
है ना? एक बॉल है। अगर वो पानी में है तो हर डायरेक्शन में फोर्स लगेगी। हर डायरेक्शन में। ठीक है? इससे होता क्या
है? शेप तो सेम रहती है बट वॉल्यूम बदल जाती है। क्या बदल जाती है बेटा? वॉल्यूम बदल जाती है। बहुत बढ़िया। और अगली चीज़
मैग्नीट्यूड ऑफ दी स्ट्रेस इक्व टू हाइड्रोलिक प्रेशर अप्लाइड। देखो, अब तुम पूछोगे भैया, फॉर्मूले क्या हैं सबके?
सबके फॉर्मूले सेम हैं। सबका फार्मूला यही है। फोर्स बाय एरिया। और फोर्स बाय एरिया क्या होता है? प्रेशर होता है। राइट?
और ये जो हाइड्रोलिक स्ट्रेस है, इसमें प्रेशर ही तो लग रहा है। है ना? प्रेशर ही तो लग रहा है। यानी हाइड्रोलिक स्ट्रेस इज़
इक्वल्स टू दी हाइड्रोलिक प्रेशर। प्रेशर ही एक तरीके से पानी का प्रेशर है। ठीक है जी? बहुत बढ़िया। है ना? इसके एग्जांपल मैं
आपको बता चुका हूं। यानी हमने तीन प्रकार की स्ट्रेस पढ़ी है। मेरे साथ रिवाइज़ कर लो। पहला क्या था? जिसके अंदर लेंथ बढ़ती
है या तो डिक्रीज होती है। फार्मूला फोर्स बाय एरिया ये है। दूसरा शियर स्ट्रेस। जेली वाला एग्जांपल याद रखना। और तीसरा
क्या था? बल्क बोल सकते हो या तो तुम अलग-अलग नाम पुकार सकते हो। है ना? बट मैं तुम्हें बोलूंगा बल्क से तुम याद रखना
क्योंकि यही पूछा जाता है। आगे आप पढ़ोगे भी तो बल्क याद रखना। ठीक है? बल्क स्ट्रेस। बहुत बढ़िया। यहां तक क्लियर हो
गया। अब क्वेश्चन देखते हैं। लेट अ वायर बी सस्पेंडेड फ्रॉम अ सीलिंग ऑफ अ रिजिड बॉडी एंड स्ट्रेच बाय अ वेट w अटैच्ड ऑन
इट्स फ्री एंड द लोंगिट्यूडनल स्ट्रेस एट एनी पॉइंट ऑफ द क्रॉस सेक्शनल एरिया ए। एक वायर है। उससे मैंने एक वेट w वेट को रोक
रखा है। अब क्या होगा? ये वायर क्या करेगा? और एक खींचेगा। खींचेगा तो एक स्ट्रेस प्रोड्यूस होगी। और हमसे यही पूछा
गया है कि कितनी स्ट्रेस प्रोड्यूस हो रही है? कितनी लोंगिट्यूडनल स्ट्रेस प्रोड्यूस हो रही है? तो स्ट्रेस का फार्मूला होता
है फोर्स बाय एरिया। यहां पर फोर्स कितनी लग रही है बेटा? ये W फोर्स लग रही है। अरे जितना वेट होगा। वेट मास नहीं बोला
यहां। वेट बोला है। है ना? बच्चे पता है क्या लिख के आते हैं इसका आंसर? w * g भैया वेट निकाल लिया मूर्ख बालक अरे मूर्ख
बालक ये w वेट ही है ठीक है तो इसका आंसर क्या आएगा फोर्स क्या है w और एरिया हमें गिवन
है ठीक है तो जो स्ट्रेस होगी वो कितनी होगी वो होगी w / a बहुत सही बहुत सही आगे बढ़ते हैं अब इसके बाद आ जाता है स्ट्रेन
स्ट्रेस क्लियर है अब स्ट्रेन क्या होता है भैया देखो स्ट्रेन की एक सिंपल सी डेफिनेशन है क्या द रेश्यो ऑफ दी चेंज इन
डायमेंशन टू दी ओरिजिनल डायमेंशन ऑफ़ दी बॉडी इज कॉल्ड स्ट्रेन। फॉर एग्जांपल ये मेरी एक रोड थी। इसको मैंने खींचा तो
लेंथ में चेंज आ गया। अरे लेंथ में चेंज आ गया। हां। तो इसको मैं बोल सकता हूं चेंज इन लेंथ डिवाइड बाय ओरिजिनल लेंथ। यानी
अगर मैं फार्मूला लिखूं चेंज इन लेंथ को मैं डेल्टा l लिखूंगा। और ये क्या आ जाएगा? ओरिजिनल लेंथ। तो इसको मैं क्या
बोल सकता हूं? स्ट्रेन बोल सकता हूं स्ट्रेन। ठीक है जी? बहुत बढ़िया। तो याद रखना स्ट्रेन क्या है? चेंज इन डायमेंशन
डिवाइड बाय ओरिजिनल डायमेंशन। बहुत सही। मुझे बताओ इसका यूनिट क्या होगा भैया? यूनिट। अरे ये तो यूनिटलेस होगा ना यार।
ऑब्वियस सी बात है। ये क्या है? डायमेंशन। ये भी डायमेंशन। मीटर बाय मीटर दोनों जगह कट जाएगा। तुम्हारा भी तो कटा था। तो मीटर
बाय मीटर क्या हो जाएगा? कट जाएगा। तो डायमेंशन लेस क्वांटिटी होती है। ये बात हमें याद रखना है। ठीक है जी? बहुत बढ़िया।
अब ये भी तीन प्रकार की है। और ये बड़ा इंपॉर्टेंट पार्ट है। तीन पार्ट्स हैं जो कि है लोंगिट्यूडनल, शियरिंग एंड
वॉल्यूममेट्रिक स्ट्रेन। अब ये जो स्ट्रेन वाला टॉपिक है ना ये तीनों स्ट्रेन बहुत इंपॉर्टेंट है। तो थोड़ा सा फोकस कर लो।
है ना? ये रील व्हील चलाना थोड़ी कम कर दो। वैसे पता है दो प्रकार के स्टूडेंट होते हैं। एक वो स्टूडेंट होते हैं जो कि
थोड़ा बहुत पढ़ाई करते हैं। उसके बाद रील चलाते हैं। फिर आते हैं तुम्हारे जैसे स्टूडेंट जो कि पहले 1 घंटा रील चलाते
हैं। फिर 10 मिनट पढ़ाई करते हैं। फिर रील चलाते हैं। फिर 10 मिनट पढ़ाई करते हैं। है ना? तो एक बार इस पे फोकस कर लें। तीन
प्रकार की है। पहली लोंगिट्यूडनल स्ट्रेन। ये क्या है बेटा? लोंगिट्यूडनल स्ट्रेस तुम्हें याद होगा। लेंथ बढ़ा रहे थे। बहुत
बढ़िया। तो, ये क्या होगा? ये होगा चेंज इन लेंथ डिवाइड बाय ओरिजिनल लेंथ। बहुत सही। ठीक है? तो एक-एक करके देखते जाते हैं।
लोंगिट्यूडनल स्ट्रेन क्या होगा? चेंज इन लेंथ डिवाइड बाय ओरिजिनल लेंथ। याद रखना ये कब फॉलो किया जाता है? जब जो स्ट्रेस
लग रही है, जो फोर्स लग रही है, वो कैसी है? लोंगिट्यूडनल है। तो उस केस में जो स्ट्रेन डेवलप होता है, उसको हम बोलते हैं
क्या? लोंगिट्यूडनल स्ट्रेन। डेल्टा l / l बहुत बढ़िया भैया। ये तो बड़ा ईजी था। उसके अलावा अगला आ जाता है शयरिंग स्ट्रेन। ये
थोड़ा इंपॉर्टेंट है। ध्यान से समझना। बच्चों को समझ नहीं आता। देखो मैं एक एग्जांपल ले लेता हूं। मैं एक एग्जांपल ले
लेता हूं। मान लो ये मेरा एक बक्सा था। पहले मेरा बक्सा ये जो मैंने आपको डॉटेड लाइन बना रखी है ना पहले मेरा बक्सा यहां
पर था। बट मैंने क्या करा? ऐसे ऊपर से फोर्स लगाई। ऊपर से फोर्स लगाई तो क्या होगा? ये जो बक्सा था ये हल्का सा टिल्ट
कर गया। देखो नीचे से सेम है। नीचे से सेम है। बट ऊपर से देखो पहले यहां पर था। अब यहां पर पहुंच चुका है। है ना? थोड़ा सा इस
तरफ में बेंड हो गया है। ठीक है? तो अब आप ध्यान से देखना। अब आप ध्यान से देखना अगर एक्चुअली में एक्चुअली में मुझे
निकालना है कि कितना ये शिफ्ट हुआ। कितना ये शिफ्ट हुआ तो मुझे ये एंगल निकालना पड़ेगा। है ना? जिसको मैं ऐसे रिप्रेजेंट
कर सकता हूं। ठीक है? पाई ये एंगल फाई है। इसको मैं रिप्रेजेंट कर सकता हूं क्योंकि ये एंगल शिफ्ट हुआ होगा ना। है ना? ठीक
है? अब इस एंगल की वैल्यू अगर मुझे निकालनी है तो मुझे क्या-क्या चाहिए होगा? खुद सोचो। मान लो ये यहां से यहां जो
डिस्प्लेस हुआ है इसको मैं ले लेता हूं डेल्टा x क्या ले लेता हूं बेटा डेल्टा x और ये जो क्यूब था ये क्यूब था एक प्रकार
का इसकी जो एक साइड है उस साइड को मैं l मान लेता हूं l मान लूं या नहीं मान लूं बिल्कुल मान लूं भैया अरे सिंपल सी चीजें
फोकस कर ले समझ आ जाएगा वरना ऊपर से निकल जाएगा मैं क्या बोला ये साइड में थोड़ा शिफ्ट हुआ तो कितना एंगल वो शिफ्ट हुआ वो
मुझे निकालना है सिंपल सी बात है यार है ना अब ये जो एंगल है ये फाई है अगर मुझे tan tan लिखना है। tan अब तुम इस ट्रायंगल
को देखो बेटा जो मैं ट्रायंगल तुम्हें बता रहा हूं। ये वाला जो ट्रायंगल है ये वाला इस ट्रायंगल को जरा ध्यान से देखो। ये मान
लो 90° है। ठीक है? तो कैसे बनेगा? ये होगा परपेंडिकुलर और ये होगा बेस। ठीक है? तो क्या मैं लिख सकता हूं? tan
= परपेंडिकुलर में क्या है? डेल्टा x जितना ये शिफ्ट हुआ है। और ये क्या था? लेंथ ऑफ द क्यूब जो कि थी l तो क्या मैं
लिख सकता हूं? क्या मैं लिख सकता हूं? डेल्टा क्या मैं लिख सकता हूं? डेल्टा x / l इज
दी ट्रेन। क्या मैं लिख सकता हूं? बहुत बढ़िया। देखो तो शेयरिंग स्ट्रेन क्या
होती है? प्रोड्यूस्ड व्हेन अ बॉडी इज़ सब्जेक्टेड टू अ स्टयरिंग स्ट्रेस। जब शेयरिंग स्ट्रेस लगती है तो वो जो स्ट्रेन
प्रोड्यूस होती है उसको हम बोलते हैं शेयरिंग स्ट्रेन। ठीक है? इसका फार्मूला क्या होता है? डेल्टा x / l या फिर हम tan
थीटा भी लिख सकते हैं। या तो डायरेक्टली हम थीटा भी लिख सकते हैं। ठीक है? मैंने यहां पर माना था। इन्होंने यहां पर थीटा
लिखा है। कोई डिफरेंस नहीं है। एक ही बात है। ठीक है? तो अब भैया ये tan थीटा को थीटा क्यों लिख रहे हैं? क्योंकि
मैथमेटिकल टर्म्स में जब एंगल बहुत छोटा होता है तो आप उनको बराबर मान सकते हो। वो शायद आपको पता होगा। अगर आप मैथ्स के
स्टूडेंट हो नहीं पता तो मान लो। बता दिया मैंने। ठीक है? चलो बहुत सही। तो ये फार्मूला याद रहेगा। डेल्टा x क्या है?
जितना डिस्प्लेसमेंट हुआ है। l क्या है? लेंथ ऑफ द क्यू। बहुत सही। चलिए आगे बढ़ते हैं। फिर आता है वॉल्यूममेट्रिक स्ट्रेन।
तुम्हें वो स्ट्रेस याद है? कौन सी? बल्क बल्क। हां। जिसमें वॉल्यूम कम या तो वॉल्यूम ज्यादा होती है। ठीक है? तो उस
स्ट्रेस की वजह से जो स्ट्रेन आता है उसको हम क्या बोलते हैं? उसको हम बोलते हैं वॉल्यूममेट्रिक स्ट्रेन। क्या बोलते हैं
बेटा? वॉल्यूममेट्रिक स्ट्रेन। ठीक है? इसका फार्मूला क्या होगा? चेंज इन वॉल्यूम डिवाइड बाय ओरिजिनल वॉल्यूम। बस बहुत
बेसिक है। बहुत बेसिक है। वॉल्यूमेट्रिक स्ट्रेन = डेल्टाV / v। बहुत बढ़िया। तो तीन प्रकार की स्ट्रेन भी आपको समझ आ गई।
कौन-कौन सी बेटा? बोलो मेरे साथ लोंगिट्यूडनल। अरे आई या नहीं आई समझ में? में बहुत बढ़िया। इसका क्या नाम है?
वॉल्यूममेट्रिक। और वो क्या है? शयरिंग। है ना? शयर स्ट्रेन। शेयरिंग स्ट्रेन। ठीक है जी। बहुत बढ़िया। ये समझ आ गया। तीन
प्रकार की स्ट्रेस और स्ट्रेन हमारी यहां पर खत्म होती हैं। ठीक है? कुछ न्यूमेरिकल देखते हैं। छोटे-मोटे से नन्नू-मुन्ने से
न्यूमेरिकल्स आ जाओ। व्हाट टाइप ऑफ स्ट्रेन इज़ प्रोड्यूस्ड व्हेन अ सॉलिड स्फीयर इज़ इमर्स्ड इन अ फ्लूइड। जल्दी से
आंसर दे दो। अगर किसी को पानी में डालेंगे, फोर्स हर डायरेक्शन से लगेगा, तो उसको हम बोलते हैं क्या? वॉल्यूममेट्रिक।
क्या बोलेंगे बेटा? वॉल्यूममेट्रिक स्ट्रेन। बहुत सही। अ स्टील वायर ऑफ़ द लेंथ 2 मीटर इज़ स्ट्रेच्ड बाइ 0.4 mm
व्हेन अ लोड इज़ अप्लाइड कैलकुलेट दी स्ट्रेन। देखो स्ट्रेन निकालना है। स्ट्रेन का फार्मूला क्या होता है? डेल्टा
LL / L. ठीक है? तो चेंज कितना गिवन है? चेंज हमें गिवन है 0.4 एमm। अब इस 0.4 एमएम को अगर हमें कन्वर्ट करना है किसके
अंदर? मीटर के अंदर तो हमें क्या करना रहेगा? इसको 10 रेज़ टू पावर -3 से मल्टीप्लाई करना रहेगा। ठीक है? ठीक है?
तो मैं लिख देता हूं 0.4 * 10 रे टू पावर -3 मीटर डिवाइड बाय ओरिजिनल लेंथ क्या थी? 2 मीटर। ओरिजिनल लेंथ क्या थी? 2 मीटर। तो
इसको और थोड़ा बहुत सॉल्व करा तो आंसर आ जाएगा 2 * 10 रे टू पावर -4। याद रखना स्ट्रेन का कोई यूनिट नहीं होता। है ना?
स्ट्रेन का कोई यूनिट नहीं होता। स्ट्रेस का होता है, स्ट्रेन का नहीं होता। चलिए आगे बढ़ा जाए। इफ अ लोंगिट्यूडनल स्ट्रेन
ऑफ अ बॉडी इज़ दिस। हमें लोंगिट्यूडनल स्ट्रेन दी गई है। एंड दी ओरिजिनल लेंथ भी हमें गिवन है। कैलकुलेट दी चेंज इन लेंथ।
यानी डेल्टा l / l की वैल्यू हमें गिवन है 0.0125। आपको डेल्टा l निकालना है और l की वैल्यू
आपको गिवन है 8 सें.मी. तो आपको कुछ नहीं करना। इसको ना आपको बस एट से मल्टीप्लाई करना है। तो आपका आंसर सेंटीमीटर्स में आ
जाएगा। ठीक है? सेंटीमीटर्स में आपका आंसर आ जाएगा। बहुत बढ़िया। है ना? बस मल्टीप्लाई कर लेना, सॉल्व कर लेना। बहुत
बेसिक है। चलो आगे बढ़ते हैं। अब आ रहा है हुक लॉ। हुक क्या? अरे वो मछली पकड़ने वाला हुक ना ही बेटा। वो हुक नहीं। ये है
अलग हुक लॉ। हुक बाबा आए और उन्होंने बोला एक बात बता। तू 11वीं में है? मैंने कहा हां 11वीं में हूं। तूने वो स्ट्रेस ऑफ
स्ट्रेन पढ़ लिया? मैंने कहा हां भैया पढ़ तो लिया। अच्छा। तो एक काम कर एक काम कर। एक लॉ बताता हूं
मैं तुने। मैंने कहा बताओ। जो स्ट्रेस है ना स्ट्रेस। मैंने कहा हां हां स्ट्रेस स्ट्रेस और जो स्ट्रेन है ना स्ट्रेन
मैंने कहा हां स्ट्रेन स्ट्रेन वो दोनों ना डायरेक्टली प्रोपोर्शनल है। मैंने कहा हैं? कहा हां मैंने कहा समझाओ यार तू एक
बात बता एक पेन है उस पे जितनी तू स्ट्रेस देगा उतना ज़्यादा स्ट्रेन आएगा या नहीं आएगा? मैंने कहा बात तो सही है। जितना
खींचूंगा जितनी फोर्स लगाऊंगा उतना ज्यादा खींचेगा। बात तो सही है। तो कहा बस यही तो लॉ है। मैंने कहा है? ये लॉ है। ये तो मैं
ही बता देता। भाई इसमें क्या लॉ दे दिया? बट मजाक से हटके। हुक बाबा ने यही बताया कि स्ट्रेस जो है वो डायरेक्टली
प्रोपोर्शनल है स्ट्रेन के। उन्होंने यही बताया बस। इतना बताया और निकल लिए। [हंसी] ठीक है? तो स्ट्रेस अब यहां पर देखो
डायरेक्टली प्रोपोर्शनल को हटाने के लिए हम एक कांस्टेंट लेते हैं। जैसे हम चलाते आ रहे हैं सालों साल से। है ना? तो हम
फाइनली लिखते हैं स्ट्रेस। स्ट्रेस और कांस्टेंट हम लेते हैं K, है ना? इंटू स्ट्रेन। ठीक है? तो डायरेक्टली
प्रोपोर्शनल का साइन हटाने के लिए कांस्टेंट लेते हैं K। और भैया ये K क्या है? इसको हम बोलते हैं मॉड्यूलस ऑफ़
इलास्टिसिटी। क्या बोलते हैं बेटा? मॉड्यूलस ऑफ़ इलास्टिसिटी। अब ये क्या होता है? इसकी डेफिनेशन मैं आपको बता देता हूं।
आ जाओ। व्हाट इज मॉड्यूलस ऑफ इलास्टिसिटी? देखो बेटा पहले डेफिनेशन देखें। क्या कहते हो? पहले डेफिनेशन देखें। भैया डेफिनेशन
तो बहुत सिंपल है। क्या होगा ये? द रेश्यो ऑफ़ दी स्ट्रेस एंड स्ट्रेन। अरे देख एक बात बता मुझे। अभी मैंने क्या फार्मूला
बताया? स्ट्रेस = k * स्ट्रेन। ठीक है? तो स्ट्रेन को इस डायरेक्शन में ले जाऊं। तो K की वैल्यू क्या हो जाएगी? स्ट्रेस बाय
स्ट्रेन। तो क्या मैं डायरेक्टली नहीं लिख सकता कि मॉड्यूलस ऑफ इलास्टिसिटी क्या होगा? द रेश्यो ऑफ दी स्ट्रेस टू
कोस्पोंडिंग स्ट्रेन। है ना? बहुत बढ़िया। बट एग्जैक्ट डेफिनेशन ये नहीं होती। एग्जैक्ट डेफिनेशन ये नहीं होती। एक टर्म
होता है जो कि तुम्हें लिख के आना पड़ेगा हर पेपर के अंदर। द रेश्यो ऑफ़ दी स्ट्रेस टू स्ट्रेन ऑफ़ अ मटेरियल
विद इन इट्स इलास्टिक लिमिट। ये जो लाइन है ना विद इन विद इन यहां से आप देखोगे विद इन द इलास्टिक लिमिट ये बहुत
इंपॉर्टेंट है। भैया कुछ समझ नहीं आया इलास्टिक लिमिट क्या है? समझा रहा हूं। देख यार सबकी अपनी-अपनी लिमिट है। सबकी
अपनी-अपनी लिमिट है। वो अलग बात है कि प्यार में लोग अपनी सारी हदों को पार कर देते हैं। लिमिट्स को पार कर देते हैं। है
ना? वो तुम इग्नोर किए जा रहे हैं और तुम फिर भी लगे पड़े हो। मैसेज पे मैसेज मैसेज पे मैसेज तो आपने वो लिमिट्स पार कर दी।
है ना? एक समय आता है जब तुम्हें लगता है कि यार एकदम गलत चल रहा है लाइफ के अंदर। ये सब छोड़ना पड़ेगा। आता है ना? तो
लिमिट्स होती हैं। सिमिलरली हर मटेरियल की एक लिमिट होती है। मान लो ये पेन है। ये पेन है प्लास्टिक का या फिर ये मान लेते
हैं स्टील का है। अब मैं इसको खींचूंगा। खींचूंगा, खींचूंगा, खींचूंगा। एक समय आएगा जब वो खींचने लगेगा, खींचने लगेगा,
खींचने लगेगा। लेकिन लेकिन एक टाइम ऐसा आएगा इलास्टिक की डेफिनेशन याद करो कि जब फोर्स
हटाएं तो ये वापस से अपनी पोजीशन को रिगेन कर ले। लेकिन मैं इतनी फोर्स लगा दूंगा एक टाइम ऐसा आएगा कि वो खींचेगा तो बट जब मैं
उसकी फोर्स छोडूंगा तो वो एग्जैक्ट खुद को रिगेन नहीं कर पाएगा। जैसे मैंने खींचा वो बड़ा बड़ा बड़ा बड़ा बड़ा अब मैंने फोर्स
हटाई तो आना तो उसको यहां था लेकिन वो आया यहां पर यानी परमानेंट डिफेशन आ गया। बात को समझे? तो इलास्टिक लिमिट क्या है?
इलास्टिक लिमिट वो मैक्सिमम फोर्स है जब तक कोई भी मटेरियल अपनी इलास्टिक प्रॉपर्टीज दिखाता है। अगर उससे ऊपर गए तो
मीडियम बोलता है भैया मेरे को माफ करो जी मेरे बस की नहीं है। अब तुम मुझ पे फोर्स लगाओगे तो मैं वापस से अपनी शेप को रिगेन
नहीं कर पाऊंगा। ठीक है? बहुत बढ़िया। इट इज़ दी मैक्सिमम स्ट्रेस अप टू व्हिच अ मटेरियल रिटर्न्स टू इट्स ओरिजिनल शेप एंड
साइज कंप्लीटली व्हेन फोर्स अप्लाइड इज़ रिमूव्ड। आ गई बात समझ में? वापस मैक्सिमम है वो लिमिट है उसकी। उतनी फोर्स लगाओगे,
उतनी स्ट्रेस लगाओगे तो मैं वापस आ जाऊंगा। इससे ऊपर गए तो भैया मेरे बस की नहीं है। बात खत्म। ठीक है जी। हमको ये
समझ आ गया। है ना? ये है इलास्टिक लिमिट। यानी यानी मॉड्यूलस ऑफ़ इलास्टिसिटी क्या है? द रेश्यो ऑफ़ दी स्ट्रेस टू स्ट्रेन
विद इन इलास्टिक लिमिट। विद इन इलास्टिक। अगर ये इलास्टिक लिमिट क्रॉस कर गई तो भैया फिर ये वैलिड नहीं होता। फिर ये
वैलिड नहीं होता। ठीक है जी। हमको ये समझ में आ गया। ठीक है भैया। हमको ये फार्मूला भी समझ में आ गया। स्ट्रेस यानी डिवाइड
बाय स्ट्रेन। लेकिन भैया एक्चुअली में क्या है? थोड़ा फील कराओ यार। मैंने कहा ले यार तुझे थोड़ा फील कराते हैं। देख ये जो
मॉड्यूलस ऑफ इलास्टिसिटी है ना ये मीडियम पे डिपेंड करता है। मैं एक एग्जांपल देता हूं। तुमने क्लास 10थ के अंदर वो
रेजिस्टिविटी पढ़ा होगा। रेजिस्टिविटी किस-किस को याद है? तुम्हें याद होगा रेजिस्टिविटी मीडियम पे डिपेंड करता था।
कॉपर का अलग है ना? है ना? हां। ये भी वही है। ये भी वही है। ये जो K है ना यानी ये जो मॉड्यूलस ऑफ़ इलास्टिसिटी है ना इट ओनली
डिपेंड्स अपॉन मीडियम। यानी हर एक मीडियम का अलग होता है। कॉपर का अलग होता है, आयरन का अलग होता है, स्टील का अलग होता
है। बाकी किसी पर डिपेंड ही नहीं करता। सिर्फ मीडियम पर डिपेंड करता है। और ये जो मॉड्यूलस ऑफ इलास्टिसिटी होता है ना इसको
भी तुम सख्तनेस से काउंट कर सकते हो। सख्त कौन कितना सख्त। जैसे जो तुम्हें याद होगा जो स्टील था वो बहुत सख्त था। उसका क्या
मतलब था कि वो ज्यादा इलास्टिक है। और उसका एक्चुअली में मतलब क्या है? कि उसका ये जो मॉड्यूलस ऑफ इलास्टिसिटी है ना ये
ज्यादा है। यानी मॉड्यूलस ऑफ इलास्टिसिटी किसका ज्यादा होगा? जो ज्यादा सख्त होगा। अब तुमको समझ आई। अब भी नहीं आई समझ में?
अब तुझे फॉर्मूले से समझा देता हूं। मॉड्यूलस ऑफ़ इलास्टिसिटी का फार्मूला है स्ट्रेस बाय स्ट्रेन। अब तुम खुद सोचो।
खुद सोचो इसकी वैल्यू कब ज्यादा होगी? इसकी वैल्यू कब ज्यादा होगी? जब स्ट्रेन कम होगी और स्ट्रेस ज्यादा होगी। है ना?
है ना? यानी तुम फोर्स लगाए जा रहे हो, लगाए जा रहे हो और स्ट्रेन बहुत कम आया। स्ट्रेन बहुत कम आया। यानी सख्त है ना
भाई? अरे सख्त है ना? अगर सोचो तुमने स्ट्रेस थोड़ी सी लगाई और स्ट्रेन बहुत ज्यादा आ गया तो क्या इसकी वैल्यू कम नहीं
हो जाएगी? बहुत बढ़िया। तो इसलिए बस तुम इतना याद रख लो जो जितना सख्त वो उसकी जो मॉड्यूलस ऑफ इलास्टिसिटी है वो उतनी
ज्यादा। और जो जितना कमजोर उसकी मॉड्यूलस ऑफ इलास्टिसिटी उतनी कम। अब तुमको चमक गया। अब पक्का से चमक गया। ठीक है जी?
बहुत बढ़िया। तो ये भी तीन प्रकार की हैं भैया। खत्म ही नहीं हो रहे। टाइप ही टाइप टाइप ही टाइप। कितने टाइप? इसके भी तीन
टाइप हैं। पहला होता है यंग्स मॉड्यूलस। क्या? यंग्स मॉड्यूलस। एंड दिस इज़ वन ऑफ़ दी मोस्टेंट यंग मॉड्यूलस। इसको हम y से
रिप्रेजेंट करते हैं बेटा। किससे? y और ये क्या है? रेश्यो ऑफ़ स्ट्रेस बाय स्ट्रेन। बट किसका रेश्यो? लोंगिट्यूडनल स्ट्रेस
डिवाइड बाय लोंगिट्यूडनल स्ट्रेन। ठीक है? लोंगिट्यूडनल स्ट्रेस डिवाइड बाय लोंगिट्यूडनल स्ट्रेन। तो इसका फार्मूला
क्या आ जाएगा? तुम खुद बताओ। लोंगिट्यूडनल स्ट्रेस क्या होती है? फोर्स बाय एरिया। और लोंगिट्यूडनल स्ट्रेन क्या होती थी?
डेल्टा / l तो थोड़ा बहुत सॉल्व करोगे तो आंसर क्या आ जाएगा बेटा बताओ? F * l क्या यही आएगा? डिवाइड बाय A * डेल्टा LL क्या
यही आ रहा है सबका? बहुत बढ़िया। तो फाइनली फाइनली यंग मॉड्यूलस का फार्मूला। यंग मॉड्यूलस यंग है ये भी अपनी तरह तुम्हारी
और मेरी तरह। ठीक है? यंग मॉड्यूलस का फार्मूला क्या आया? f * l / a * डेल्टाl फार्मूला याद मत करो। तुम बस इतना याद कर
लो। इट इज द रेशियो ऑफ लोंगिट्यूडनल स्ट्रेस डिवाइड बाय लोंगिट्यूडनल स्ट्रेन। ठीक है जी। हमको समझ में आ गया। बहुत
बढ़िया। ठीक है? अब मुझे बताओ यंग मॉड्यूलस किसका ज्यादा होगा जो ज्यादा सख्त होगा। अरे हां या ना यार। अरे हां या
ना यार। बहुत बढ़िया। ठीक है? तो इसको हम क्या बोलते हैं? सख्तनेस। जैसे कि जैसे कि अगर मैं आपको कुछ मीडियम की बात बताऊं।
जैसे कॉपर जो है उसका यंग मॉड्यूलस है 110। जबकि अगर मैं बात करूं ग्लास की तो उसका यंग मॉड्यूलस होता है 65। क्यों?
क्योंकि जो ग्लास होता है वो यार कम कमजोर है ना बेचारा है ना? हां बहुत बढ़िया। अगर मैं बात करूं स्टील की तो स्टील सबसे
ज्यादा मजबूत होता है जिसका होता है 200 यंग मॉड्यूलस। और अगर मैं बात करूं वुड की तो वुड होता है सिर्फ 13। तो ऐसे मैं आपको
बस ये दिखाना चाहता था कि यंग मॉड्यूलस यानी सख्त। कौन कितना सख्त और कौन सबसे ज्यादा सख्त जिसका यंग मॉड्यूलस सबसे
ज्यादा। चलिए जी बहुत बढ़िया। ठीक है? यहां पर लिखा भी हुआ है हाई वाई मींस मटेरियल इज़ वेरी स्टिफ यानी सख्त। लो व
यानी मटेरियल इज़ ईजीली स्ट्रेचेबल। डिपेंड्स ऑन मटेरियल नॉट ऑन साइज एंड शेप। याद रखना यंग मॉड्यूलस सिर्फ और सिर्फ
यानी कोई भी मॉड्यूलस ऑफ़ इलास्टिसिटी सिर्फ और सिर्फ मटेरियल पे डिपेंड करता है। साइज शेप वगैरह किसी पे डिपेंड नहीं
करता। अगला वैलिड ओनली विद इन इलास्टिक लिमिट। ये मैं आपको बता चुका हूं। एक मैक्सिमम फोर्स है। अगर उससे आगे जाओगे तो
एक कोई भी रूल वैलिड ही नहीं होगा। ठीक है? चलिए बहुत बढ़िया। कुछ क्वेश्चन बताओगे फटाफट से। ये तो बहुत सिंपल था।
इसमें आपको क्या करना था? बस ये बताना था कि इंक्रीजिंग कोफिशिएंट ऑफ इलास्टिसिटी यानी यंग मॉड्यूलस किसका ज्यादा किसका कम?
तो ऑब्वियस सी बात है ये जो बी ऑप्शन है स्टील का सबसे ज्यादा फिर कॉपर फिर ग्लास फिर रबड़। कैसे याद नहीं करना है। कौन
ज्यादा सख्त वो सबसे ज्यादा होगा। ठीक है जी। बहुत बढ़िया। आगे बढ़ते हैं। अ कॉपर वायर एंड अ स्टील वायर ऑफ दी सेम डायमीटर
एंड द लेंथ आर कनेक्टेड एंड टू एंड एंड फोर्स इज अपाइड वि स्ट्रेचेस देयर कंबाइंड लेंथ बाय 1 सें.मी. द टू वायर्स विल हैव।
देखो क्या बोला है? दो वायर को भैया जोड़ दिया है। क्या बात है यार। दोनों वायर को जोड़ दिया है। एक किसका है बेटा? एक है
कॉपर का है ना? और एक है स्टील का। और हमने फोर्स लगाई। तो ये बोला है कि क्या इनका सेम होगा और क्या इनका अलग होगा।
यानी क्या उनकी स्ट्रेस और स्ट्रेन सेम रहेंगी? तो देखो ऑब्वियस सी बात है फोर्स तो ना दोनों पे बराबर ही लगेगी क्योंकि
फोर्स इस डायरेक्शन में लग रही है। तो भैया जितनी फोर्स इस पे लगेगी उतनी इस पे लगेगी। तो फोर्स तो बराबर होगी। यानी
स्ट्रेस विल बी सेम। बट क्या स्ट्रेन जो है क्या वो सेम होगा? आंसर है नहीं। पता है क्यों? क्योंकि इन दोनों का यंग
मॉड्यूलस अलग होता है बेटा। इसका भी अलग, इसका भी अलग। है ना? और तुम्हें अगर फार्मूला याद हो यंग मॉड्यूलस इक्व
स्ट्रेस बाय स्ट्रेन। ठीक है? अब एक मुझे बात बताओ स्ट्रेस तो दोनों की सेम है बट दोनों का यंग मॉड्यूलस अलग है। वो कैसे
पॉसिबल हो पाया? वो तब पॉसिबल हो पाएगा जब दोनों की स्ट्रेन भी अलग-अलग होंगी। यानी इसका सही आंसर क्या आएगा? आंसर आएगा द सेम
स्ट्रेस बट डिफरेंट स्ट्रेनस। बहुत बढ़िया। आई होप ये आपको समझ आ गया होगा। अगला क्वेश्चन देखते हैं। द यंग मॉड्यूलस
ऑफ़ दी वायर ऑफ़ लेंथ L एंड रेडियस r इज़ y. ठीक है जी? हमको क्या गिवन है? यंग मॉड्यूलस गिवन है हमें y किसका? एक वायर
है जिसकी लेंथ L है। तो मैं लिख देता हूं क्या लिखूं मैं? फोर्स फोर्स बाय एरिया है ना? ये होती है स्ट्रेस डिवाइड बाय डिवाइड
बाय डेल्टा LL / L तो ये क्या हो गया? यंग मॉड्यूलस। ठीक है? अब क्या बोला है? इफ दी लेंथ इज़ रिड्यूस टू L / 2 एंड रेडियस टू R
/ 4, व्हाट विल बी इट्स यंग मॉड्यूलस? अब लेंथ कम कर दी, रेडियस कम कर दिया। यंग मॉड्यूलस को क्या होगा? कुछ नहीं होगा।
यंग मॉड्यूलस सेम ही रहेगा। पता है क्यों? क्योंकि इट डिपेंड्स अपॉन मीडियम। हां, ठीक है? हां। बहुत अभी तो बताया था कहां
है ध्यान? भूल गए ना तुम फिर? भूल गए ना? याद रखना। याद रखना। इंपॉर्टेंट चीजें हैं। आ जाओ। द मैक्सिमम अलोंगेशन ऑफ द
स्टील वायर ऑफ 1 मीटर लेंथ इफ द इलास्टिक लिमिट ऑफ दी स्टील एंड इट्स यंग मॉड्यूलस आर रेस्पेक्टिवली दिस एंड दिस। ठीक है?
अच्छा इस क्वेश्चन से पहले मैं आपको ये पूछना चाहता हूं मैं तुम सब से कि यंग मॉड्यूलस का यूनिट क्या होगा? यार यंग
मॉड्यूलस स्ट्रेस बाय स्ट्रेन है। स्ट्रेन का तो कोई यूनिट होता ही नहीं। तो यंग मॉड्यूलस का यूनिट वही होगा जो कि स्ट्रेस
का है जो कि है न्यूटन पर मीटर²। ठीक है जी? तभी यहां पर लिखा हुआ है। तो हमें क्वेश्चन में क्या गिवन है कि एक स्टील
वायर है। ठीक है? उसका हमें मैक्सिमम अलोंगेशन निकालना है। उसकी लेंथ हमें 1 मीटर गिवन है। बहुत बढ़िया। और हमें यंग
मॉड्यूलस भी गिवन है। ठीक है? यंग मॉड्यूलस हमें गिवन है 2 * 10 रे टू पावर 11। ये हमें गिवन है। और और उसके साथ-साथ
हमें उसकी क्या? इलास्टिक लिमिट गिवन है। इलास्टिक लिमिट क्या होता है? मैक्सिमम स्ट्रेस। क्या? मैक्सिमम स्ट्रेस। यानी
हमें मैक्सिमम स्ट्रेस भी गिवन है। इलास्टिक लिमिट का मतलब है मैक्सिमम स्ट्रेस कितनी दे सकते हैं? तो मैक्सिमम
स्ट्रेस हमें गिवन है 8 * 10 रे टू पावर 8। ठीक है? निकालना क्या है? निकालना है हमें डेल्टा l कि कितना एलोंगेशन आएगा? तो
फार्मूला लगा दो। फार्मूला लगा दो। y = स्ट्रेस बाय स्ट्रेन। अरे हमें मैक्सिमम एलोंगेशन निकालना है। कितना एलोंगेट हो
सकता है? तो मैक्सिमम एलोंगेशन के लिए आपको यही तो सोचना पड़ेगा कि मैक्सिमम स्ट्रेस कितनी है? और मैक्सिमम स्ट्रेस
हमें गिवन है ऑलरेडी। तो बस लगा दो 8 * 10 रे टू पावर 8 / डेल्टा l / l की वैल्यू वन ही है। बहुत बढ़िया। तो आपको क्या निकालना
है? डेल्टा l तो डेल्टा l हो जाएगा 8 * 10 रे टू पावर 8 डिवाइड बाय यंग मॉड्यूलस की वैल्यू कितनी है? 2 * 2 * 10 रेज़ टू पावर
11। यही है ना? बस बहुत बढ़िया। तो फाइनली फाइनली ये आप सॉल्व करोगे तो आंसर आ जाएगा 4 * 10 रे टू पावर -3
ये मीटर्स में आपका आंसर आ गया। अब आप मैच कर सकते हो बेटा क्या आ रहा है इसमें आंसर? एक बार मैच करके चेक कर लो। ठीक है?
बहुत बढ़िया। सबका आंसर 4 एमएम आ गया होगा। है ना? ये क्या है? 4 एमm। ठीक है जी। बहुत सही। आगे बढ़ते हैं। अगला क्वेश्चन
देखते हैं। जेईई मेन का सवाल है। देखिएगा। अ वायर ऑफ द लेंथ l एंड रेडियस r इज क्लैंप्ड एट दी वन एंड इफ इट्स आउटर एंड
इज पुल्ड बाय फोर्स f एंड द लेंथ इंक्रीज्ड बाय डेल्टा इफ दी रेडियस ऑफ दी वायर एंड अप्लाइड फोर्स बोथ आर रिड्यूस्ड
टू हाफ यानी क्या बोला गया है बेटा क्या बोला गया है पहले जो फोर्स थी और अब जो फोर्स है जो नई फोर्स है वो पुरानी फोर्स
की आधी है। पहली चीज तो हमें ये गिवन है। उसके अलावा जो पहले रेडियस था देखो द रेडियस ऑफ दी वायर जो पहले r था अब वो r
पुराने आर के आधा हो गया है। क्या बोला है? कीपिंग दी ओरिजिनल लेंथ कांस्टेंट द इंक्रीस इन दी लेंथ विल बी यानी जो नया
लेंथ है वो पुरानी लेंथ के बराबर ही है। ठीक है? और क्योंकि मीडियम सेम ही है। देखो गिवन है ना कि मीडियम सेम ही है। तो
यानी यंग मॉड्यूलस तो सेम ही रहेगा। है ना? ठीक है जी। हमें क्या निकालना है कि पहले के कंपैरिजन में जो अब जो डेल्टा l
आएगा वो कितना गुना बढ़ेगा या कितना गुना कम होगा? आपको बस ये बताना है। अब ये क्वेश्चन कैसे सॉल्व होते हैं? सबसे पहले
आपको ओरिजिनल केस के लिए यंग मॉड्यूलस लिखना पड़ेगा। ठीक है? तो y इक्वल्स टू एक बार लिख लो। ओरिजिनल केस के लिए y इक्वल्स
टू क्या होता है? स्ट्रेस है ना? स्ट्रेस। स्ट्रेस क्या होता है? फोर्स बाय एरिया। ठीक है? फोर्स बाय एरिया। f डिवाइड बाय
एरिया क्या होता है बेटा? किसी भी रोड का अगर तुम्हें एरिया देखना है तो πr² होता है। ठीक है? πr²
* डेल्टा और ऊपर आ जाएगा l। ठीक है? ये पहले था यंग मॉड्यूलस है ना? अब अगर मैं इस नए केस के लिए यंग मॉड्यूलस लिखूं। नए
केस के लिए यंग मॉड्यूलस लिखूं तो उसकी वैल्यू कितनी आएगी? उसकी वैल्यू कितनी आएगी? सोचो। सोचो। क्या रहेगी उसकी
वैल्यू? तो वो आएगी वो आएगी फोर्स तो f / 2 कर दी है। लेंथ सेम रखी है। बट और क्या बदला है? देखो रेडियस बदला और रेडियस बदला
यानी एरिया भी तो बदलेगा। बिल्कुल बदलेगा यार। अगर रेडियस को मैंने आधा कर दिया तो एरिया कितना हो जाएगा? एरिया हो जाएगा a /
4 यानी पहले के कंपैरिजन में पहले के कंपैरिजन में 1/4 टाइम्स हो जाएगा। ठीक है जी? बहुत बढ़िया। और डेल्टा l मुझे नए केस
के लिए निकालना है। ठीक है? डेल्टा l मुझे नए केस के लिए निकालना है। अच्छा यंग मॉड्यूलस सेम रहेगा क्योंकि मटेरियल दोनों
सेम है। हां। तो इन दोनों इक्वेशंस को क्या मैं बराबर इक्वेट कर सकता हूं? बिल्कुल इक्वेट कर सकता हूं। ठीक है? इनको
बराबर इक्वेट कर दो। तो fl ये दोनों कट जाएगा। ठीक है? फाइनली फाइनली अगर मुझे डेल्टा l निकालना है तो इसकी वैल्यू कितनी
होगी? डेल्टा l' = टू इक्वल्स टू एक बार मैं थोड़ा बहुत सॉल्व कर लेता हूं। आप भी सॉल्व कर लो। इक्वल्स टू 2 * डेल्टा l ये
आएगा। यानी जो नया चेंज इन लेंथ आया वो ट्वाइस हो गया। वो ट्वाइस हो गया। अगर आपने इन दोनों को बराबर इक्वेट करा हो,
सॉल्व करा हो तो आपको पता चलेगा कि क्या आ जाएगा? ट्वाइस आ जाएगा। राइट? तो आंसर आएगा कितना? डी यानी टू टाइम्स। टू टाइम्स
हो गई चेंज इन द लेंथ। बहुत बढ़िया। तो ऐसे क्वेश्चन भी आते हैं। जेईई मेन में भी पूछा गया था। तुम्हारे स्कूल पेपर्स में
भी बिल्कुल पूछा जा सकता है। चलिए आगे बढ़ते हैं। नीट 2013 का सवाल। द फॉलोइंग फोर वायर्स आर मेड अप ऑफ दी सेम मटेरियल
व्हिच वन ऑफ़ देम विल हैव दी लार्जेस्ट एक्सटेंशन व्हेन सेम टेंशन इज़ अप्लाइड। हमें क्या पता है? टेंशन सेम है। हमें ये
गिवन है कि जो भैया टेंशन है ना वो हम सेम दे रहे हैं सब में। सेम दे रहे हैं। यानी हम फोर्स बराबर लगा रहे हैं। तो आपको ये
बताना है कि इनमें से कौन सा है? इनमें से कौन सा है जिनमें एक्सटेंशन सबसे ज्यादा होगा। है ना? एक्सटेंशन सबसे ज्यादा होगा
और सेम मटेरियल है तो y भी सेम है। y भी सेम है। ठीक है? अब ये वाला जो क्वेश्चन है इनमें सारे ऑप्शंस को आपको चेक करना
पड़ेगा। है ना? सारे ऑप्शंस को आपको चेक करना पड़ेगा और आप मुझे अभी पॉज करो और कमेंट में बताओ कि इसका सही आंसर क्या
रहने वाला है। अगर आपने सही से सॉल्व करा होगा तो आपका आंसर ए आ रहा होगा जो कि बहुत ऑब्वियस सा है। आपने कैसे सॉल्व करा
होगा बेटा? देखो आपको पता है यंग मॉड्यूलस = फोर्स फोर्स बाय एरिया * डेल्टा l ऊपर l ठीक है? अब मुझे क्या है? डेल्टा l का
रेश्यो निकालना है। डेल्टा l का रेशियो निकालना है। तो इसको मैं इधर ले जाता हूं। तो डेल्टा l क्या होता है? डेल्टा l होगा
फोर्स * l / बाय एरिया * यंग मॉड्यूलस। ठीक है? तो आपको पता है कि फोर्स क्या है? अरे बोलो भाई। फोर्स क्या है? सेम है। ठीक
है? ओरिजिनल लेंथ क्या है? सेम है। यंग मॉड्यूलस क्या है? सेम है। ठीक है? अच्छा लेंथ अलग है। सॉरी। लेंथ अलग है। लेंथ
अलग-अलग है। लेंथ हमें यहां पर गिवन है। है ना? लेकिन एरिया अलग है। क्यों? क्योंकि डायमीटर यस। डायमीटर बदला तो
एरिया बदला। तो आपको बस चेक कर करके देखने थे कि जो ये है किसका ज्यादा आएगा, किसका कम आएगा। तो आपको पता चल जाएगा डेल्टा
सबसे ज्यादा ए ऑप्शन में आ रहा होगा। चलिए भाई अगले सवाल की तरफ बढ़ते हैं जो कि एनसीआरटी का एक सवाल है। क्या है? अ
स्ट्रक्चरल स्टील रोड हैज़ अ रेडियस 10 एमm एंड लेंथ 1 मीटर। अ 100 किलटन फोर्स। किलटन है बेटा ये। स्ट्रेचेस इट अलोंग
इट्स लेंथ। लेंथ से उसको वो स्ट्रेच करता है। ठीक है? कैलकुलेट दी स्ट्रेस, अलोंगेशन, स्ट्रेन ऑन दी रोड और यंग
मॉड्यूलस हमें गिवन हुआ है। यानी प्योर कैलकुलेटिव क्वेश्चन है। ठीक है? एकदम कैलकुलेटिव क्वेश्चन है। बस एक काम रखना
कि सारे यूनिट्स को मीटर में कन्वर्ट कर लेना। जैसे कि ये रेडियस है ना? तो इस रेडियस को क्या करना? 10 रेज़ टू पावर -3
यानी 10 रेज़ टू पावर -2 मीटर। है ना? ऐसे हमें सबको मीटर्स के अंदर कन्वर्ट कर लेना है। ये रेडियस हो गया। लेंथ हमें मीटर में
गिवन है। फोर्स हमें गिवन है। तो फोर्स किलो न्यूटन का मतलब क्या होता है बेटा? 10 रे टू पावर 3 है ना? ये होता है किटन
का मतलब। बहुत बढ़िया। ठीक है? अब आपको कुछ नहीं करना है। सबसे पहले स्ट्रेस निकाल लो। तो स्ट्रेस क्या होगी? स्ट्रेस होगी
फोर्स बाय एरिया। फोर्स क्या है? ये डिवाइड बाय एरिया कितना है? एरिया होगा πr²। तो ये आप सॉल्व करना। पाई की वैल्यू
3.14 ले लेना बेटा। है ना? रेडियस कितना है? 10 रे टू पावर -2 तो इसका स्क्वायर करोगे तो ये आ जाएगा 10 रे टू पावर -4 ठीक
है? इससे आप स्ट्रेस निकाल लोगे। फिर स्ट्रेन कैसे निकालोगे? स्ट्रेन आपको निकालने के लिए क्या करना रहेगा? डेल्टा l
/ l डेल्टा l / l लेकिन दिक्कत ये है ना कि यहां पर भैया हमें चेंज इन लेंथ गिवन ही नहीं है। तो हम कैसे निकालें स्ट्रेन?
तो ना ये फार्मूला आपको यहां लगाना ही नहीं था। पता है कैसे करोगे? यंग मॉड्यूलस वाले फ़ूले से। क्योंकि यहां देखो यंग
मॉड्यूलस गिवन है। तो यंग मॉड्यूलस इक्वल्स टू स्ट्रेस बाय स्ट्रेन। ठीक है? अब हमें स्ट्रेन निकालना है तो इसको यहां
ले जाओ, इसको यहां ले जाओ। तो स्ट्रेन आ जाएगा स्ट्रेस
बाय यंग मॉड्यूलस। ठीक है? तो यंग मॉड्यूलस की वैल्यू आपको गिवन है। आपने ये स्ट्रेस की वैल्यू निकाल ली है। इसको पुट
करोगे तो उससे क्या आ जाएगा? उससे आपका स्ट्रेन भी निकल जाएगा। आई होप ये क्वेश्चन भी अब आप कर लोगे। अगर आप इसको
सॉल्व करोगे तो स्ट्रेन की वैल्यू अराउंड 1.59 * 10 रे टू पावर -3 आ रही होगी। एक बार चेक जरूर करना। ठीक है? ठीक है? तो
एनसीईआरटी का क्वेश्चन है। स्कूल एग्जाम्स के अंदर बहुत बार पूछा गया है। एक और एनसीईआरटी का क्वेश्चन हमें मिला है। द
स्टील वायर ऑफ द लेंथ 4.7 मीटर क्रॉस सेक्शनल एरिया 3.0 * 10 रे टू पावर दिस मीटर स्ट्रेचेस बाय दी सेम अमाउंट एज़ दी
कॉपर वायर ऑफ द लेंथ 3.5 मीटर एंड क्रॉस सेक्शनल एरिया 4.0 * दिस मीटर। व्हाट इज़ द रेश्यो ऑफ़ द यंग मॉड्यूलस ऑफ़ दी स्टील टू
दी कॉपर? इसमें रेश्यो निकालना है। यंग मॉड्यूलस ऑफ़ स्टील टू कॉपर। अब देखो इसको कैसे सॉल्व करेंगे। सबसे पहले मैं स्टील
के लिए यंग मॉड्यूलस निकालता हूं। हमें ये गिवन है कि स्टील वायर की जो लेंथ है वो हमें गिवन है। क्रॉस सेक्शनल एरिया हमें
गिवन है। और हमें ये भी गिवन है कि जब उसको स्ट्रेच करा तो वो डेल्टा l से स्ट्रेच हो गया होगा। और उतना ही अमाउंट
कॉपर ने भी करा है। ठीक है? तो मैं यहां पर लिख देता हूं यंग मॉड्यूलस का फार्मूला। फोर्स फोर्स बाय एरिया। एरिया
कितना है? 3 * 10 रे टू पावर -5। ठीक है? अ यहां पर आएगा क्या? यहां पर आएगा डेल्टा l और लेंथ कितनी गिवन है? लेंथ हमें गिवन
है 4.7। बहुत बढ़िया। अब अगर मैं ऐसे यंग मॉड्यूलस किसके लिए? कॉपर के लिए भी निकालूं तो
कॉपर के लिए मैं कैसे लिख पाऊंगा बेटा? कॉपर की लेंथ मुझे गिवन है ये रही 3.5। क्रॉस सेक्शनल एरिया गिवन है 4.0 * 10 रे
टू पावर -5। ठीक है? अंडर दी गिवन लोड यानी जो लोड है यानी जो फोर्स है वो सेम है। और ये भी गिवन है कि जो एलोंगेशन आया
जो बदलाव आया वो भी बराबर है। ठीक है? ठीक है? तो मैं यहां पर लिख देता हूं f इंटू इंटू कितना गिवन था लेंथ? 3.5 डिवाइड बाय
एरिया कितना था? 4.0 * 10 रे टू पावर -5 * डेल्टा l अब आपको कुछ नहीं करना है। इन दोनों को बस डिवाइड कर लेना है बेटा। है
ना? डिवाइड करोगे डेल्टा l से डेल्टा l कट जाएगा। फोर से फोर्स कट जाएगा। सारी न्यूमेरिकल वैल्यूज़ बच जाएंगी। उन
न्यूमेरिकल वैल्यूज़ को आपको क्या करना है? बस सॉल्व कर लेना है। ठीक है? तो आई होप ये अब आप कर पाओगे। है ना? फाइनली अगर आप
थोड़ा बहुत सॉल्व करोगे तो ये आएगा 4.7 * 4 अ डिवाइड बाय डिवाइड बाय 1 मिनट जरा डिवाइड बाय इसको जरा सॉल्व कर ही लो तुम 3
* 3.5 यही आ रहा है सबका यंग मॉड्यूलस ऑफ़ स्टील टू कॉपर और इसको सॉल्व करोगे तो अराउंड
अराउंड 1.79 कुछ आपका आंसर आ रहा होगा। अब बढ़ते हैं शियर मॉड्यूलस की तरफ। अभी तक हमने यंग मॉड्यूलस पढ़ा। अब भैया ये शियर
मॉड्यूलस क्या है? देखो ये ज्यादा कोई टफ चीज नहीं है। बड़ी ईजी सी चीज है। वो जो था ना अभी क्या? शयरिंग स्ट्रेस। शयरिंग
स्ट्रेन उनका रेश्यो है। उनका क्या है? उनका रेश्यो है। ठीक है? शयरिंग स्ट्रेस बाय शयरिंग स्ट्रेन इज़ इक्वल्स टू क्या?
शियर मॉड्यूलस। इसका सिंबल याद रखना। ईटा। इसको हम ईटा बोलते हैं। क्या बोलते हैं? ईटा। क्या? ई टा। या फिर बहुत सारी जगहों
पे ऐसे जी से भी रिप्रेजेंट किया जाता है। ठीक है? ओजी। वैसे जी से भी करते हैं। बाकी बहुत जगहों पे ऐसे ईटा ये भी बनाया
जाता है। ठीक है? बाकी सारी चीजें सेम है। इसके भी क्वेश्चन की तरफ बढ़ते हैं। है ना? स्ट्रेस बाय शेयरिंग स्ट्रेन। ठीक है जी?
हमको ये समझ आ गया। इसका एक छोटी सी थ्योरी समझना बेटा। इसकी छोटी सी थ्योरी क्या है? कि किसी भी सॉलिड पे किसी भी
सॉलिड को अगर तुम देखोगे ना तो ये जो शेयरिंग मॉड्यूलस है ना उसका ये शयर मॉड्यूलस ये हमेशा कम होगा एज़ कंपेयर टू
यंग मॉड्यूलस। हमेशा कम होगा। थ्योरिटिकली अगर इसकी वैल्यू निकाली जाए तो ये जो g है इसकी वैल्यू अराउंड y / 3 होती है। यानी
1/3 टाइम्स होती है यंग मॉड्यूलस के। तो याद रखना फॉर मोस्ट मटेरियल शयर मॉड्यूलस इज़ लेस दैन यंग मॉड्यूलस। और एक चीज़ भी
याद रखना इट इज़ ओनली एप्लीकेबल फॉर सॉलिड। क्योंकि लिक्विड में अगर मैं ये लगाऊंगा टेंजेंशियल फोर्स लगाऊंगा तो लिक्विड तो
फ्लो कर जाएगा। तो लिक्विड के पास तो ये शियर मॉड्यूलस होता ही नहीं है। शयर मॉड्यूलस इज़ ओनली वैलिड फॉर सॉलिड। और वो
भी यंग मॉड्यूलस से इसकी वैल्यू हमेशा कम होती है। ठीक है? चलो इसका क्वेश्चन देखते हैं। बड़ा लल्लू सा सवाल है एनसीईआरटी का।
अ स्क्वायर लीड स्लैब ऑफ़ साइड 50 सें.मी. एंड थिकनेस हमें कितनी गई है? 10 सें.मी. इज़ सब्जेक्टेड टू अ शेयरिंग फोर्स ऑफ़ 9 *
10 रेज़ टू पावर 4 न्यूटन। द लोअर एज इज़ रिवर्टेड टू दी फ्लोर। अ हाउ मच विल दी अपर एज बी डिस्प्लेस्ड? क्या बोला गया है?
एक मैं नोटबुक लाता हूं। उसकी मदद से आपको समझाने की कोशिश करता हूं। जैसे नोटबुक है बेटा। ये नोटबुक तुम देख पा रहे हो। है
ना? ये एक प्रकार का सॉलिड है। ठीक है? अब ऐसे समझो कि इसका हमें स्क्वायर है। ये स्क्वायर है और उसकी जो एक साइड है वो
हमें कितनी गिवन है? 50 सें.मी. गिवन है। ठीक है? मीटर में कन्वर्ट कर लेते हैं तो वो आ जाएगा 0.5
मीटर। ठीक है? 0.5 मीटर। बहुत बढ़िया। और इसकी थिकनेस जो है वो कितनी है? 0.1 मीटर। थिकनेस क्या? ये जो मोटाई है ये जो मोटाई
है। ठीक है जी। अब हमें ये गिवन है कि हमें शेयरिंग फोर्स लगाई गई है जो कि नैरो फेस पर लगाई गई है। किस पर लगाई गई है
बेटा? नैरो फेस पर लगाई गई है। अब तुम बोलोगे भैया नैरो फेस क्या होता है? देख भाई नैरो फेस ऐसा एक एरिया होता है। ऐसा
एक एरिया होता है ये वाला साइड वाला जिसमें एक तो ये मोटाई आ गई। एक तो ये मोटाई आ गई और और एक ये स्क्वायर की लेंथ
आ गई। यानी अगर मुझे इस फेस का एरिया निकालना है तो वो क्या होगा? थिकनेस * लेंथ। हां या ना? थिकनेस * लेंथ। तो अगर
मुझे नैरो फेस का एरिया निकालना है तो वो कितना होगा? थिकनेस * लेंथ। ठीक है? ये होगा किसका? एरिया इसका इस वाली साइड का
नैरो साइड का। ठीक है जी? अब हमसे क्या पूछा गया है? द लोअर एज इज़ रेवेटेड टू दी फ्लोर। हाउ मच विल अप्पर एज बी
डिस्प्लेस्ड? यानी जब मूवमेंट आएगा ऊपर से वो जो डेल्टा x आता है ना डेल्टा x याद आ गया। तो वो डेल्टा x कितना होगा? हमसे यह
पूछा गया है। डेल्टा x कितना होगा? हमसे यह पूछा गया है। कैसे करेंगे? सोचो। अरे यार g की वैल्यू गिवन है। अगर तुम्हें याद
हो g क्या होता है? स्ट्रेस बाय स्ट्रेन। स्ट्रेस क्या होगा यहां पर? फोर्स फोर्स बाय एरिया। और एरिया हमने निकाल लिया है
जो कि आ गया 0.05 है ना? डिवाइड बाय शयरिंग स्ट्रेन क्या होता था? डेल्टा x / लेंथ। डेल्टा x तो
हमें निकालना है। और लेंथ क्या है? लेंथ हमें गिवन है जो कि है 0.5 मीटर। कितनी है बेटा? 0.5 मीटर। क्या हमें फोर्स भी गिवन
है? हां। फोर्स भी हमें गिवन है। अब सारी वैल्यूज़ को आपको बस पुट करना है। g की वैल्यू है 5.6 * 10 रे टू पावर 9 फोर्स की
वैल्यू कितनी है? फोर्स की वैल्यू है 9.0 * 10 रे टू पावर 4 ठीक है? डिवाइड बाय अ इसको ऊपर मल्टीप्लाई में ले जाता हूं मैं
तो ये आ जाएगा इंटू 0.5 / 0.05 * डेल्टा x ठीक है? बस आपको ये डेल्टा x
कैलकुलेट करना है। थोड़ा बहुत इसको जरा सॉल्व कर लेना। है ना? थोड़ा बहुत इसको फटाफट से क्या करो? सॉल्व कर दो। तो ये आ
जाएगा इंटू 10 डेल्टा x की वैल्यू करनी है। इसको इधर ले जाओ और फाइनली आंसर बताओ। अगर इसको सॉल्व करोगे तो आंसर आएगा 1.6 *
10 रे टू पावर -4 मीटर और वही है क्या? डेल्टा x जो कि हमें चाहिए था। अब पकड़ ले लिया। क्या बात है दोस्तों? ठीक है? चलिए
तो ये एक ही क्वेश्चन है। अ मैंने आपको बताया सबसेेंट यंग मॉड्यूलस फिर ये। ठीक है? अब आता है बल्क मॉड्यूलस। यह भी सेम
ही है। द रेशियो ऑफ दी हाइड्रोलिक स्ट्रेस बाय वॉल्यूममेट्रिक स्ट्रेन। है ना? बट एक चीज याद रखना इसको रिप्रेजेंट हम ऐसे के
से करते हैं। और बहुत सारी किताबों में ऐसे बी से भी लिखा जाता है। ये K को हम बोलते हैं कापा। क्या बोलते हैं? कापा और
B से भी लिखा जाता है। बल्क मॉड्यूलस। क्या बोलते हैं? बल्क मॉड्यूलस। इसका फार्मूला क्या होगा? देखो तुम्हें याद हो
वॉल्यूम कम हो रही थी वॉल्यूम। ठीक है? तो यानी इसको हम प्रेशर लिख सकते हैं डायरेक्टली। अरे जो स्ट्रेस होती थी उसको
हम प्रेशर भी तो बोलते थे। ठीक है? तो मैंने लिख दिया कि ये जो कापा है यानी बल्क मॉड्यूलस जो है इसकी वैल्यू होगी
प्रेशर डिवाइड बाय चेंज इन वॉल्यूम। क्या यही होगी? नहीं एक माइनस का साइन और लगेगा। एक माइनस का साइन और लगेगा। माइनस
का साइन क्यों लगता है? बिकॉज़ इट शोज़ क्या? व्हेन प्रेशर इंक्रीजसेस वॉल्यूम डिक्रीजसेस। क्योंकि प्रेशर जैसे बढ़ेगा तो
ये जो वॉल्यूम है ये कम होती जाएगी। इसलिए यहां पर एक माइनस साइन लगता है। ये क्या है? बल्क मॉड्यूलस। क्या है बेटा? बल्क
मॉड्यूलस। बहुत बढ़िया। है ना? तो याद रखना ये हो गया बल्क मॉड्यूलस। अब इसका एक अपोजिट होता है। इसका एक जुड़वा भाई
जोगिस्त एकदम अपोजिट है जिसको हम बोलते हैं कंप्रेसिबिलिटी। क्या बोलते हैं? कंप्रेसिबिलिटी। ये रेसिप्रोकल होता है।
इसका फार्मूला होता है वन बाय बल्क मॉड्यूलस। बस बस कंप्रेसिबिलिटी इज़ द अपोजिट ऑफ़ बल्क मॉड्यूलस। और इसका होता है
फार्मूला वन बाय बल्क मॉड्यूलस। यानी अगर तुमने बल्क मॉड्यूलस निकाल लिया तो उसको डिवाइड उसको रेसिप्रोकल कर दो। आंसर आ
जाएगा। ठीक है? अब तुम मुझे ये बताओ बल्क मॉड्यूलस किसका ज्यादा होगा? सॉलिड का ज्यादा होगा। होगा ऑब्वियस सी बात है
क्योंकि ज्यादा प्रेशर लगाओगे और कम वॉल्यूम में चेंज आएगा। तो हमेशा याद रखना बल्क मॉड्यूलस ऑफ़ सॉलिड, लिक्विड, गैस।
ज्यादा किसका? सॉलिड का। फिर लिक्विड, फिर गैस। दूसरी चीज़ कंप्रेसिबिलिटी किसकी ज्यादा होगी? ऑब्वियस सी बात है गैस की,
फिर लिक्विड की, फिर सॉलिड की। बहुत बढ़िया। तो ऐसे थ्योरिटिकल क्वेश्चन आ जाते हैं। चलो, एक लॉजिकल और एक न्यूमेरिकल
क्वेश्चन देखते हैं। अब इस क्वेश्चन के अंदर हमें क्या गिवन है? देखना जरा। एवरेज डेप्थ ऑफ द इंडियन ओशन इज़ 3000 मीटर। ठीक
है? गिवन है। कैलकुलेट दी फ्रैक्शनल कंप्रेशन। यानी हमें डेल्टाV / V निकालना है। ऑफ दी वाटर एट दी बॉटम ऑफ़ दी ओशन।
गिवन दी बल्क मॉड्यूलस ऑफ़ दी वाटर इज़ दिस। हमें बल्क मॉड्यूलस गिवन है। देखो आपको फार्मूला याद हो। बल्क मॉड्यूलस क्या होता
है? नेगेटिव प्रेशर / डेल्टाV / V. अब हमें यही निकालना है। इसको यहां ले जाओ। तो डेल्टाV / V क्या होगा? प्रेशर / बल्क
मॉड्यूल। अब बल्क मॉड्यूलस तो है पर प्रेशर कहां है? देखो ये अगला चैप्टर है वैसे बट अगर आपने नहीं पढ़ा है मैं आपको
बता देता हूं। देखो प्रेशर का एक फार्मूला होता है जो कि होता है रो g h ये तुम्हें याद रखना है क्या? रोgh। रो क्या है?
डेंसिटी। g क्या है? एक्सीलरेशन ड्यू टू ग्रेविटी। और h क्या है? कितनी गहराई में तुम ऑब्जेक्ट को लेके जा रहे हो। ठीक है?
अब डेंसिटी ऑफ़ वाटर क्या होती है? अगर तुम्हें डेंसिटी ऑफ़ वाटर याद हो तो वो होती है कितनी? 1000। कितनी होती है? 1000
kg के अंदर बता रहा हूं। 1000 kg पर मीटर ये होती है डेंसिटी। ठीक है? g की वैल्यू 10 ले लो। है ना? यह 10 गिवन है। और h
क्या है? डेप्थ कितनी है? डेप्थ हमें गिवन है जो कि है 3000. तो ऐसे आप प्रेशर भी निकाल सकते हो। तो डेल्टा v / v की वैल्यू
आ जाएगी कितनी? प्रेशर कितना है हमारा? 1000 * g * कितना था? डेप्थ 3000 डिवाइड बाय डिवाइड बाय बल्क मॉड्यूलस। बल्क
मॉड्यूलस कितना था? 2.2 2.2 * 10 रे टू पावर 9 बस ये आपका फाइनली आंसर आ गया। इसको सॉल्व कर लेना और मुझे फाइनल आंसर
बता देना। तुमने अगर सॉल्व करा होगा तो आंसर आ रहा होगा 1.36 * 10 रे टू पावर -2 राइट ये आपका आंसर आ रहा होगा। चलिए जी एक
क्वेश्चन मैं आपको होमवर्क पे देता हूं और फिर हम बढ़ते हैं स्ट्रेस ट्रेन ग्राफ के ऊपर। ये बहुत बेसिक क्वेश्चन है। इसके
अंदर देखो हमें प्रेशर गिवन है। प्रेशर गिवन है। है ना? उसके अलावा वॉल्यूम हमें गिवन है। ठीक है? वॉल्यूम हमें गिवन है।
यानी डेल्टा V हमें गिवन है। ओरिजिनल वॉल्यूम भी हमें गिवन है। बहुत बढ़िया। हमें पहले बल्क मॉड्यूलस निकालना है जो कि
क्या होता है? प्रेशर बाय डेल्टाV / V और कंप्रेसिबिलिटी निकालनी है। कैसे निकालोगे? बस इसको रेसिप्रोकल कर देना।
बल्क मॉड्यूलस को रेसिप्रोकल कर देना। ये आपका एक हो गया होमवर्क क्वेश्चन। अब बढ़ते हैं अगले टॉपिक की तरफ जो कि है क्या?
स्ट्रेस स्ट्रेन कर्व। इसको मैं डिटेल में समझाता हूं। बट उससे पहले एक लाइन याद रखना। एक बड़ी प्यारी शायरी है। है ना?
तुम्हें मोटिवेट करने के लिए बोल रहा हूं। वो जो तुम रात भर बैठ के ख्यालों में रोते रहते हो, यादों में रोते रहते हो। तो याद
रखना अब ना साइकिल ना बाइक अब तो डायरेक्ट कार आएगी। अब तो डायरेक्ट कार आएगी। और क्यों रोते हो तुम उनके पीछे? अरे क्यों
रोते हो हम उनके पीछे? अगर तुम्हारे जेब में हुई हरी घास तो बकरियां हजार आएंगी। ठीक है? तो चलो है ना इस मोटिवेशन के साथ
स्टार्ट करते हैं। द स्ट्रेस स्ट्रेन कर्व। अब देखो ये जो बड़ा सा ग्राफ है ना तुम्हें देख के डर तो लग रहा होगा। लग रहा
होगा ये कैसा कर्व है? यह बहुत इंपॉर्टेंट है। इससे कई सवाल तुम्हारे पेपर के अंदर आते हैं। लेकिन मैं तुमसे एक नॉर्मल सा
सवाल पूछता हूं। सबसे पहले एक चीज मुझे बताओ। अगर मैं ग्राफ बनाऊं उसका एक बनाऊं y एक्सिस, एक बनाऊं x एक्सिस। ठीक है? इधर
मैं ले लूं स्ट्रेस। है ना? और इधर मैं ले लूं स्ट्रेन। ठीक है? अब मुझे बताओ अगर अगर एक लाइन कुछ इस प्रकार से आए तो ये जो
स्लोप है वो क्या रिप्रेजेंट करेगा? व्हाट विल दिस स्लोप रिप्रेजेंट? बताओ। ऑब्वियस सी बात है ये स्लोप रिप्रेजेंट करेगा
किसको? मॉड्यूलस ऑफ इलास्टिसिटी को। कैसे पता चला? अगर तुम्हें याद हो मॉड्यूलस ऑफ इलास्टिसिटी का फार्मूला क्या होता था? वो
होता था क्या? अगर मैं यंग मॉड्यूलस की भी बात करूं तो वो क्या होता था? स्ट्रेस बाय स्ट्रेन। यस याद आ गया? यस। यानी ये जो
स्लोप है ना स्ट्रेस और किसकी? स्ट्रेन की वो किसको रिप्रेजेंट करती है? मॉड्यूलस ऑफ़ इलास्टिसिटी को। ये बहुत इंपॉर्टेंट है।
एक क्वेश्चन मैं तुमसे पूछूं। इमेजिन करो। मुझे दो ग्राफ दे रखे हैं। जैसे कि एक ग्राफ ये है। देखना एक ग्राफ वन है। एक
ग्राफ टू है। ये वही है स्ट्रेस और स्ट्रेन का ग्राफ। मुझे आपको ये बताना है कि इनमें से कौन सा मटेरियल मटेरियल वन या
मटेरियल टू? कौन सा मटेरियल ज्यादा यंग मॉड्यूलस होगा? यानी उसका मॉड्यूलस ऑफ इलास्टिसिटी किसकी ज्यादा होगी? आपको ये
बताना है। सोचो। ऑब्वियस सी बात है जो पहला वाला है ना इसकी इलास्टिसिटी ज्यादा होगी। क्यों? क्योंकि देखो इसकी स्लोप
ज्यादा है। इसकी स्लोप ज्यादा है। अगर आपको ये चीजें समझ नहीं आ रही ना यानी आपका जो बेसिक है ना वो थोड़ा वीक हो सकता
है। डरने की बात नहीं, घबराने की बात नहीं है। ये वैसे मैं प्रीवियस चैप्टर्स में कई बार बता चुका हूं। बट तुम्हें बस एंगल
देखना होता है। जिसका एंगल ज्यादा है ना उसकी स्लोप की वैल्यू ज्यादा होगी। और स्लोप किसको रिप्रेजेंट कर रहा है? हां,
मॉड्यूलस ऑफ़ इलास्टिसिटी को। तो कौन ज्यादा स्ट्रॉन्गर होगा? नंबर वन। और कम स्ट्रंगर कौन सा होगा? नंबर टू। बहुत
बढ़िया। अब ये जो ग्राफ है ना ये बड़ा कंफ्यूजिंग लग रहा होगा। लग रहा होगा भैया ये तो बड़ा अजीब है। मैं इस ग्राफ को ना
एक सिंपल सी कहानी से आपको समझा दूंगा। ऐसे समझो एक लड़का था। ठीक है? एक लड़का था। उसने दो लड़कियों से वादा करा था। वो
दो लड़कियों के लिए लॉयल था। ठीक है? दो लड़कियां थी। दो लड़कियों का नाम क्या था? एक का नाम था हुक्स लॉ। एक का नाम था
हुक्स लॉ। ठीक है? पहले तो वो लॉयल था हुक हुक्स लॉ के लिए। उसने कमिटमेंट दी थी और दूसरा था इलास्टिसिटी के लिए। इलास्टिसिटी
के लिए है ना? तो इसने दो लोगों को कमिटमेंट दी थी। है ना? अब देखो होता क्या है कि जैसे-जैसे प्रॉब्लम आती जाती है ना
तो ये जो कमिटमेंट है ये खत्म होने लगती है। ऐसा ही होता है रियल लाइफ के अंदर। सिमिलरली अब हम क्या देखते हैं? यहां पर
एक वायर है। देखो ये वायर है। अब ये स्ट्रेस और स्ट्रेन का ग्राफ है। अब इस वायर में मैं क्या करता हूं? स्ट्रेस देना
स्टार्ट करता हूं। जब मैं स्ट्रेस दूंगा तो थोड़ा-थोड़ा थोड़ा थोड़ा थोड़ा-थोड़ा स्ट्रेन भी आता रहेगा। स्ट्रेन भी आता
रहेगा। कहां तक आता रहेगा? इस पॉइंट A तक। कहां तक? इस पॉइंट A तक। इस समय तक ये जो वायर था, ये दोनों के लिए लॉयल था। किसके
लिए? हुक्स लॉ के लिए भी। हुक्स लॉ क्या बोलता है? स्ट्रेस इज़ डायरेक्टली प्रोपोर्शनल टू स्ट्रेन। और E यानी
इलास्टिक लिमिट के लिए भी। दोनों के लिए लॉयल था। लेकिन क्या हुआ? एक समय ऐसा आया जैसे ही ये A पॉइंट के आगे भी अगर हमने
इसको स्ट्रेस देते रहे हम इसको तो पता है क्या होगा? ये बोलेगा यार हुक्स लॉ। सॉरी। मैं तुमसे ये जो मैंने तुमसे वादा करा था
इस वादा को मैं छोड़ रहा हूं। ये वादा मैं नहीं निभा पाऊंगा। यानी इसने अपनी कमिटमेंट सबसे पहले किसके साथ तोड़ी? इसने
तोड़ी हुक्स लॉ के साथ। है ना? इसने बोला हुक्स लॉ अब मेरे पे ज्यादा स्ट्रेस आ गई है। अब मैं तुम्हारे साथ ये रिश्ता नहीं
रख सकता। तो मुझे तुम्हें छोड़ना पड़ेगा। तो इस पॉइंट ए पे वो हुक्स लॉ को छोड़ देता है। और हुक्स लॉ क्या बोलता था?
स्ट्रेस इज डायरेक्टली प्रपोर्शनल टू स्ट्रेन। इसलिए ये जो पॉइंट होता है इसको हम बोलते हैं प्रपोशनैलिटी लिमिट या फिर
प्रपोर्शनल लिमिट। क्यों बोलते हैं हम? क्योंकि इसके बाद ये जो ग्राफ है ना इसमें स्ट्रेस इज नॉट डायरेक्टली प्रपोर्शनल टू
स्ट्रेन। क्योंकि आप देख पा रहे होंगे जो ग्राफ है थोड़ा सा टिल्ट हो गया। मुड़ गया। दिख रहा है? दिख रहा है ये ग्राफ?
बहुत बढ़िया। है ना? क्यों हुआ ऐसा? क्योंकि भैया उसने बोला अब मैं नहीं कर पाऊंगा तेरे साथ। अब नहीं रह पाऊंगा तेरे
साथ। मैंने कहा ठीक है कोई बात नहीं। बट इट इज़ स्टिल लॉयल टू इलास्टिक लिमिट। ठीक है जी। अभी भी लॉयल है। अब आगे बढ़ते हैं।
अब क्या हुआ? एक पॉइंट आया B. अब इस B पॉइंट पे इतनी ज्यादा स्ट्रेस हो गई ना वायर के ऊपर कि वायर ने बोला यार अगर
तुमने अब मुझे और स्ट्रेस दी ना तो फिर भैया मैं ये इलास्टिक से भी लॉयल्टी तोड़ दूंगा। मैं इस इलास्टिसिटी से भी लॉयल्टी
तोड़ दूंगा। इस वजह से ये जो तुम लिमिट देख पा रहे हो जो पॉइंट B है इसको हम बोलते हैं इलास्टिक लिमिट। क्या बोलते हैं?
इलास्टिक लिमिट। या फिर इसका एक और नाम होता है जिसको हम बोलते हैं यील्ड पॉइंट। या यील्ड पॉइंट। तुमने सुना होगा ना आई
यील्ड यानी मैं हार गया। आई यील्ड मैं हार गया। तो इसने बोला भैया पहले तो मैंने हुक्स वालों को धोखा दिया था लेकिन अब मैं
इलास्टिक लिमिट को भी धोखा दे दूंगा और मैं हार गया। आई यील्ड यानी यील्ड पॉइंट। इसको बोलते हैं यील्ड पॉइंट। ठीक है? और
यहां पर ये जो तुम फोर्स देख पा रहे हो यानी ये जो स्ट्रेस देख पा रहे हो ये वो स्ट्रेस है जो कि मैं आपको ऑलरेडी थोड़ी
देर पहले बता भी चुका हूं। इसको हम बोलते हैं क्या? इलास्टिक लिमिट। है ना? इतनी स्ट्रेस जिसके बाद वायर बोलेगा कि अब मैं
इलास्टिक नहीं हूं। अब क्या होगा? अगर मैंने फिर भी इसको स्ट्रेस मैं देता रहा। मैंने कहा ले भाई और स्ट्रेस ले। तो अब
क्या होगा? अब ये जो है ये हल्का सा आगे बढ़ेगा और अगर मैंने थोड़ी सी भी स्ट्रेस दी ना तो अब इसके पास परमानेंट डिफॉर्मेशन
आ जाएगा। यानी मान लो मैं इसको पॉइंट C तक ले गया। है ना? इलास्टिक लिमिट तो खत्म हो गई। और पॉइंट C पे मैंने अपनी फोर्स हटा
दी। फोर्स हटा दी। तो पता है क्या होगा? इसकी ये जो स्ट्रेन है ना ये वापस से जीरो पे नहीं आएगी। इसकी स्ट्रेन कहीं यहां पर
आएगी। यानी इसमें एक परमानेंट डिफेशन हो जाएगी और उसको हम बोलते हैं परमानेंट सेट। क्या बोलते हैं? परमानेंट सेट। बहुत
इंपॉर्टेंट है ये ग्राफ। अभी सुनने में थोड़ा अटपटा लग रहा होगा बट ये बहुत इंपॉर्टेंट ग्राफ है। बहुत क्वेश्चन आते
हैं। दिखाऊंगा अभी। ठीक है? इसको हम बोलते हैं परमानेंट सेट। ये कब हुआ? जब हमने इलास्टिक लिमिट को तोड़ दिया। हम आगे बढ़
गए। है ना? और फिर मैंने फोर्स हटा दी। तो अब देखो ये जो स्ट्रेन है ये ज़ीरो नहीं हुई। ये स्ट्रेन थोड़ी सी हो गई। 1% हो
गई। इसको हम क्या बोलते हैं? इसको हम बोलते हैं परमानेंट सेट। ठीक है जी। अब क्या हुआ? अब इसने बोला कि भैया मैंने
दोनों से हार मान ली है। लेकिन मैंने कहा अब अभी तो गेम स्टार्ट हुआ है। मैं और स्ट्रेस दूंगा। अब मैं उसको और स्ट्रेस
देता जा रहा हूं। देता जा रहा हूं। देता जा रहा हूं। और अगर आप ग्राफ को आगे देखोगे ना तो देखो थोड़ी सी स्ट्रेस में
देखो थोड़ी सी स्ट्रेस में कितना ज्यादा स्ट्रेन हो गया। स्ट्रेन क्या है? ये वाला। तो देखो हल्की सी स्ट्रेस दी है
मैंने। यहां से लेकर यहां तक हल्की सी स्ट्रेस दी है। उसमें कितना स्ट्रेन हो गया। है ना? स्ट्रेन बढ़ता जा रहा है,
बढ़ता जा रहा है, बढ़ता जा रहा है। स्ट्रेस मैं बढ़ा रहा हूं। स्ट्रेन बढ़ता जा रहा है, बढ़ता जा रहा है, बढ़ता जा रहा
है, बढ़ता जा रहा है, बढ़ता जा रहा है। अब वो कहता है वायर मुझसे कि भैया अब अगर आपने हल्की सी भी स्ट्रेस दी ना तो मैं
टूट जाऊंगा, मैं बिखर जाऊंगा। और उस पॉइंट को हम बोलते हैं ये जो पॉइंट देख पा रहे हो इसको बोलते हैं अल्टीमेट स्ट्रेंथ।
अल्टीमेट स्ट्रेंथ। अगर इससे ज्यादा तुम स्ट्रेस दोगे तो भैया ये वायर टूट जाएगा। और तुम फिर भी नहीं रुके। तुमने और
स्ट्रेस दी। उसके बाद एक पॉइंट आता है जिसको हम बोलते हैं फ्रैक्चर पॉइंट जहां पर ये वायर टूट जाता है। अब एक दो चीजें
आपको यहां पर ध्यान रखनी होंगी कि देखो ये पॉइंट B क्या था? इलास्टिक लिमिट। इलास्टिक लिमिट से लेकर ये जो D वाली रेंज
है यहां तक का ये जो ज़ोन है इसको हम क्या बोलेंगे? इसको हम बोलेंगे प्लास्टिक ज़ोन। क्या बोलेंगे? प्लास्टिक ज़ोन। क्योंकि इस
समय पर वो जो हमारा इलास्टिक मटेरियल था ना, अब वो प्लास्टिक बन चुका है। क्यों? क्योंकि वो परमानेंट डिफेशन आ गया। बहुत
बढ़िया। और लास्ट में आ जाता है फ्रैक्चर ज़ोन। ठीक है? तो एक बार इसको पूरे के समराइज कर लेते हैं। फटाफट से आ जाओ। क्या
हुआ? मैंने थोड़ी सी फोर्स देना स्टार्ट करी। मैंने स्ट्रेस देना स्टार्ट करी। वो पहले दो लोगों के लिए लॉयल था। हुक्स के
लिए हुक्स के लिए और दूसरा किसके लिए? इलास्टिक लिमिट के लिए। धीरे-धीरे धीरे-धीरे सीधा ग्राफ जाता गया, जाता गया,
जाता गया। एक पॉइंट आएगा जिस पॉइंट पे वो बोलेगा नाउ आई एम नॉट लॉयल फॉर हुक्स लॉ। इसको हम बोलते हैं प्रोपोर्शनैलिटी लिमिट।
क्यों? क्योंकि वो जो प्रोपोर्शनल वाला साइन होता है वो हट जाता है। फिर ग्राफ ऐसे बेंड हो जाता है। कैसे? ऐसे बेंड हो
जाता है। फिर एक पॉइंट आता है जहां पर वो बोलता है आई यील्ड मैं हार गया। इसको हम क्या बोलते हैं? यील्ड स्ट्रेंथ भी बोलते
हैं या तो इलास्टिक लिमिट भी बोलते हैं। ठीक है? पर मैं रुका नहीं। मैं और देता गया और देता गया। फिर उसके बाद एक पॉइंट
आएगा जिसको हम बोलेंगे अल्टीमेट स्ट्रेंथ। अगर इससे ज्यादा दे दी भैया अब मैं टूट जाऊंगा और मैंने और दे दी तो भैया
फ्रैक्चर पॉइंट आ गया। है ना? इस पॉइंट को क्रॉस करते ही वायर का टूटना तय है। तुम अगर ध्यान से देखो यह पॉइंट क्रॉस हुआ और
अगर मैंने स्ट्रेस को कम भी कर दिया। देखो मैंने क्या करा? स्ट्रेस को कम भी कर दिया। स्ट्रेस को नीचे ले आया बट फिर भी
वायर टूटना तय है। ठीक है? तो ये होता है क्या? एक बहुत इंपॉर्टेंट ग्राफ, बहुत इंपॉर्टेंट कर्व। तो ये सारे के सारे
पॉइंट्स आपको याद रखने हैं। ओ से लेकर A का जो रीजन है उसको हम बोलते हैं इलास्टिक रीजन। क्या बोलते हैं बेटा? इलास्टिक
रीजन। यहां से लेकर यहां तक का जो रीजन है इसको हम बोलते हैं इलास्टिक रीजन। इस रीजन के अंदर हुक्स लॉ वैलिड होता है। ठीक है?
हुक्स लॉ वैलिड होता है। फिर क्या होता है? पॉइंट A को हम क्या बोलते हैं? प्रोपोर्शनैलिटी लिमिट। यहां तक
प्रोपोर्शनल है। इसके आगे प्रोपोर्शनल नहीं है। A से लेकर B तक का होता है इलास्टिक लिमिट। ये जो आप देख पा रहे हो
यहां से लेकर यहां तक का ये इलास्टिक लिमिट है। बट अगर B से ऊपर गए तो इलास्टिक लिमिट क्रॉस हो जाएगी। ठीक है? इलास्टिक
लिमिट क्या हो जाएगी? क्रॉस हो जाएगी। बहुत बढ़िया। और बी से लेकर डी तक का जो पूरा है उसको हम बोलते हैं प्लास्टिक ज़ोन।
मैंने आपको अभी बताया प्लास्टिक ज़ोन। इसके अंदर परमानेंट डिफॉर्मेशन हो जाता है। फिर आता है पॉइंट डी जिसको हम बोलते हैं
अल्टीमेट टेंसाइल स्ट्रेंथ। यानी ये उतनी स्ट्रेंथ है जितना कोई भी मटेरियल झेल पाएगा। इसके बाद मटेरियल कहता है भैया
हमारे बस की नहीं है। हमने हार मान ली है। आप जाओ अपने घर। हम जाएंगे अपने घर। ठीक है? और लास्ट आता है डी टू ई जिसको हम
बोलते हैं नेकिंग या फिर फ्रैक्चर रीजन। है ना? इसके अंदर क्या होता है? फ्रैक्चर हो जाता है। ये जो वायर तुम्हें दिख रहा
है, ये वायर टूट जाता है, बिखर जाता है। और यही है आपका पूरा का पूरा ग्राफ। याद रखना ये ग्राफ बहुतेंट है। इसकी एक दो बार
प्रैक्टिस कर लेना। सारे एरियाज तुम्हें पता होने चाहिए। बहुत बढ़िया जी। अब यहां पर कुछ क्वेश्चंस आएंगे। वो क्वेश्चंस
आपको दिखाऊंगा भी। बट थोड़े सवाल मुझे आपसे पूछने हैं। छोटी क्लासेस के अंदर ना हमने दो टाइप के मटेरियल पढ़े थे। वैसे
तुम्हें याद है कि जब तुम छोटी क्लास के अंदर थे, जब तुम लास्ट ईयर बोर्ड एग्जाम दे रहे थे, तो कैसे तुम्हारी डेटशीट आई
थी? दिल में ऐसे धकधक हो रही थी। तुम्हें लग रहा था यार 10थ कितनी मुश्किल है। और जब तुम 11th में आ गए हो तुम्हें लग रहा
है यार 10थ कितनी अच्छी थी। यह तो बहुत ही बेकार क्लास है। लग रहा है ना ऐसा है ना? पता है जब तुम बड़े हो जाओगे ना तो तुम
11th में पीछे मुड़ के देखोगे तुम यही सोचोगे यार 11th में हम कितना परेशान होते थे। बट वो तो बहुत ईजी था। लाइफ ऐसी है।
जैसे-जैसे आगे बढ़ते जाते हैं चीजें आसान लगने लगती हैं। ठीक है? तो देखो ये हमने छोटी क्लासेस में पढ़ा था डक्टाइल और
ब्रिटल। डक्टाइल क्या होता था कि जिनको लंबे वायर्स के अंदर कन्वर्ट किया जा सकता है। और ब्रिटल क्या होता था? जिसको जैसे
ही खींचोगे वो टूट जाएगा। यही होता था। जैसे ग्लास इसमें क्या आता था? वायर कॉपर वायर जिनको हम खींच सकते थे वो बहुत
ज्यादा डक्टाइल थे। बहुत बढ़िया। तो अगर मुझे डक्टाइल और ब्रिटल का ग्राफ बनाना हो तो उनमें पता है क्या डिफरेंस होगा? उनमें
डिफरेंस होगा प्लास्टिक ज़ोन का। अरे अभी मैंने तुम्हें ग्राफ दिखाया। ठीक है? अगर तुम ध्यान से देखो। यहां से लेकर यहां तक
का एरिया क्या है बेटा? ये पूरा प्लास्टिक ज़ोन है। एक चीज मुझे बताओ जितना तुम मटेरियल को खींच सकते हो वो एक प्रकार से
प्लास्टिक ज़ोन ही तो है। अरे मैं एक वायर को कितना खींच सकता हूं? कितना खींच सकता हूं? वो कौन बता रहा है? वो बता रहा है ये
प्लास्टिक ज़ोन कि मैं कितनी स्ट्रेन दे सकता हूं। है ना? है ना? तो जिसका प्लास्टिक ज़ोन ज्यादा होगा, क्या वो
डक्टाइल नहीं होगा? बिल्कुल होगा। बहुत बढ़िया। बहुत बढ़िया। है ना? तो आप देख सकते हो डक्टाइल ग्राफ की खासियत क्या होती है?
उसका ये जो प्लास्टिक ज़ोन होता है ये बहुत बड़ा होता है। जबकि ब्रिटल का क्या होता है? ब्रिटल का यहां तक आता है और फिर इसी
जगह पे फ्रैक्चर हो जाता है। टूट जाता है जैसे ग्लास। है ना? तो ये बहुत बड़ा डिफरेंस है। बहुत बड़ा डिफरेंस है।
क्वेश्चंस कभी कबभार ग्राफ की फॉर्म में आ जाते हैं। मैं आगे आपको दिखा भी दूंगा। ठीक है? फिर एक चीज और बची है छोटी सी
जिसको हम बोलते हैं इलास्टोमर्स। भैया इलास्टोमर्स क्या है? देखो इलास्टिक मटेरियल्स और इलास्टोमर्स। ये अलग है।
बचपन में वो जो हम पहना करते थे ना स्कूल जाके इलास्टिक वाली पेंट है ना वो इलास्टिक वाली पेंट एक्चुअली में
इलास्टोमर्स होते हैं। साइंस को उसको इलास्टोमर्स बोलते हैं। इलास्टोमर्स वो होते हैं जिनको जितना खींचो खींचो खींचो
खींचो वो खींचता ही जाए खींचता ही जाए। उसको हम बोलते हैं इलास्टोमर्स। जैसे कि रबड़ क्या है? रबड़। तो याद रखना
इलास्टोमर्स आर दी सब्सटेंस दैट कैन बी स्ट्रेच टू वेरी लार्ज स्ट्रेन एंड स्टिल रिटर्न टू देयर ओरिजिनल शेप वंस दी फोर्स
इज़ रिमूव्ड। है ना? इसका सबसे बड़ा एग्जांपल रबड़ है। उसके अलावा हमारा जो दिल होता है आयोटा। आयोटा जो होता है दिल के
अंदर वो भी इसका एक बहुत बड़ा एग्जांपल है। बहुत बढ़िया। ठीक है? तो अगर आप ध्यान से देखो अगर मैं स्ट्रेस और स्ट्रेन का आपको
कर्व बताऊं तो नॉर्मल फाइबर का तो ऐसा होता है। राइट? अगर कोई प्लास्टिक है तो पहले ऐसे होगा और फिर ऐसे होगा। बट
इलास्टोमर्स की सबसे खासियत है ना कि उसका ग्राफ एकदम डिफरेंट होता है। उसका ग्राफ कैसा होता है? ऐसा ये होता है उसका ग्राफ।
याद रखना ये इलास्टोमर्स हैं। जितना खींच सकते हो खींचा जाएगा, खींचा जाएगा, खींचा जाएगा, खींचा जाएगा। और जब छोड़ोगे वापस
भी आ जाएगा यार। है ना? यानी ये वो मटेरियल्स हैं जो कि ईजीली ईजीली क्या कर सकते हैं? स्ट्रेच हो सकते हैं और वापस भी
आ सकते हैं। इनको हम बोलते हैं इलास्टोमर्स। क्या बोलते हैं बेटा? इलास्टोमर्स बोलते हैं। तो इनका ग्राफ कुछ
इस प्रकार से होता है। है ना? स्ट्रेन बढ़ता ही जाता है, बढ़ता ही जाता है, बढ़ता जाता है। बहुत बढ़िया। चलिए, अब
देखते हैं कुछ थ्योरिटिकल क्वेश्चंस और फिर लॉजिकल क्वेश्चंस। जैसे कि व्हाट डू यू अंडरस्टैंड बाय टर्म इलास्टिक लिमिट?
इलास्टिक लिमिट मैं आपको ऑलरेडी बता चुका हूं। इसकी डेफिनेशन भी मैं तुम्हें बता चुका हूं। अगला, यील्ड स्ट्रेंथ क्या होती
है? अभी मैंने बताया। यील्ड स्ट्रेंथ। क्या है? बोलो। इलास्टिक लिमिट। इलास्टिक लिमिट ही यील्ड स्ट्रेंथ। आई यील्ड मैं
हार गया। इससे ऊपर अगर हम जाएंगे इस फोर्स से हम ज्यादा फोर्स लगाएंगे तो क्या होगा? मटेरियल इलास्टिसिटी को परफॉर्म नहीं कर
पाएगा। ठीक है? द स्ट्रेस कॉरेस्पोंडिंग टू दी इलास्टिक लिमिट? इलास्टिक लिमिट की जो स्ट्रेस है उसको हम क्या बोलते हैं?
यील्ड स्ट्रेंथ। व्हाट इज मेंट बाय अल्टीमेट टेंसाइल स्ट्रेंथ? ये एक मैक्सिमम स्ट्रेस है जिसके बाद मटेरियल
विल ब्रेक। मटेरियल टूट जाएगा। उसके भी टुकड़े हो जाएंगे। जैसे कि तुम्हारे दिल के टुकड़े हो गए थे। ठीक है? अगला
डिस्टिंग्विश बिटवीन इलास्टिक डिफेशन एंड प्लास्टिक डिफॉर्मेशन। वो आप कर सकते हो। बहुत सिंपल है। राइट टू फैक्टर्स ऑन व्हिच
इलास्टिसिटी ऑफ़ दी मटेरियल डिपेंड्स। कौन से दो फैक्टर्स हैं जिन पे इलास्टिसिटी डिपेंड करती है। देखो टाइप ऑफ मटेरियल
बहुत इंपॉर्टेंट है। ठीक है? नेचर क्या है मटेरियल का? वो भी बहुत इंपॉर्टेंट है। एंड उसके अलावा कौन से प्रकार की स्ट्रेस
उसको हम दे रहे हैं। है ना? ना स्ट्रेस भी तो तीन प्रकार की है। कौन सी हम स्ट्रेस दे रहे हैं वो भी बहुत इंपॉर्टेंट है।
चलिए व्हाट इज मेंट बाय इलास्टिक फटीग? ये बड़ाेंट क्वेश्चन है। ध्यान से देखना। स्कूल एग्जाम में बहुत बार पूछा गया है।
इलास्टिक फटीग क्या होता है? मटेरियल्स को जब हम हर रोज स्ट्रेच करते हैं बार-बार हर रोज तो वो थक जाता है। जैसे हम फटीग हो
जाते हैं ना हम थक जाते हैं वैसे ही मटेरियल की भी ना धीरे-धीरे टाइम के साथ वो जो इलास्टिसिटी है ना वो कम होती जाती
है। और एक समय ऐसा आता है जब आप हल्की सी फोर्स लगाओगे और अब वो वापस से अपनी शेप को रिगेन नहीं कर पाएगा। ठीक है? इलास्टिक
फटीक इज दी लॉस ऑफ इलास्टिक स्ट्रेंथ ऑफ अ मटेरियल व्हेन इट इज सब्जेक्टेड टू रिपीटेड और साइक्लिक लोडिंग एंड अनलोडिंग।
स्पेशली वो जो तुमने देखी है रस्सियां होती हैं जो कि केंस को ऊपर खींचती हैं या फिर लिफ्ट में लगी होती हैं तो उनकी ना
लिमिट होती है एक्चुअली। है ना? अगर आप उनको बार-बार बार-बार यूज़ करते रहोगे ना तो उनका इलास्टिक फटीग हो जाता है। इस वजह
से बोलते हैं कि सर्विस कराना बहुत जरूरी होता है स्पेशली लिफ्ट का। क्योंकि इलास्टिक फटीग हो गया ना तो एक दिन समझ
रहे हो बात को? हां, ठीक है। चलो, अब आते हैं कुछ क्वेश्चंस की तरफ। व्हिच ऑफ दी फॉलोइंग ऑप्शंस आर करेक्ट? आपको यहां पर
चार पॉइंट दिए गए हैं। बिना ऑप्शंस के बताना बेटा कौन-कौन से पॉइंट क्या-क्या हैं? सबसे पहले ये वो एरिया था जब मैं
अपने पहले प्यार को छोड़ता हूं जो कि था हुक्स लॉ। यानी ये था प्रोपोशनलि लिमिट। याद आ गया प्रोपोर्शनल लिमिट। ठीक है? फिर
ये होता था जब मैं अपने दूसरे प्यार को छोड़ता था। आई यील्ड मैं हार गया। फिर ये होता था जब मेरे पे मैक्सिमम टेंसाइल
स्ट्रेंथ लग जाती थी। भैया इससे ऊपर अब मैं नहीं रह सकता। और ये क्या होता था? ये फ्रैक्चर पॉइंट होता था। क्या होता था?
फ्रैक्चर पॉइंट। तो आप मैच कर सकते हो इनमें से कौन सा लग रहा है? ए जो है वो प्रोपोर्शनल लिमिट है। यील्ड पॉइंट,
अल्टीमेट टेंसाइल स्ट्रेन फ्रैक्चर पॉइंट। सी आपका एकदम करेक्ट आंसर है। चलिए। द स्ट्रेस स्ट्रेन कर्व ऑफ़ ब्रास, स्टील एंड
रबर आर शोन इन द फिगर। और आपको क्या बताना है? ए, बी, सी कॉस्पोंड्स टू। ठीक है? इनमें से कौन सा ब्रास है? ठीक है? उसके
अलावा कौन सा स्टील है, कौन सा रबर है? बताओ। देखो यार, स्ट्रेस ट्रेन का कर्व है। तो मुझे ये बताओ सबसे ज्यादा मॉड्यूलस
ऑफ इलास्टिसिटी किसकी होती है? जो सबसे ज्यादा सख्त होता है। सबसे ज्यादा सख्त हमारा स्टील होता है। हमें पता है। तो
यानी ये होगा स्टील। तो ए तो होगा स्टील। अगला होगा ब्रास और लास्ट में आएगा रबड़। ठीक है? तो ए आएगा स्टील, फिर ब्रास फिर
रबड़। तो इसका आंसर आ जाएगा सी। बहुत बढ़िया। चलो अगले क्वेश्चंस की तरफ बढ़ते हैं। अगला सवाल क्या है? ये बहुत अच्छा
सवाल है। देखना क्या बोला है इसके अंदर? द स्ट्रेस ट्रेन ग्राफ ऑफ टू मटेरियल A एंड B आर शोन इन द फिगर। द ग्राफ आर ड्रॉन ऑन
दी सेम स्केल। व्हिच ऑफ दी मटेरियल हैज़ दी ग्रेटर यंग मॉड्यूलस? पहले ये बताओ किसका यंग मॉड्यूलस ज्यादा होगा? देखो यंग
मॉड्यूलस एक्चुअली में क्या है? बताओ। एक्चुअली में इट इज़ किसका इलास्टिक लिमिट ज्यादा? यंग मॉड्यूलस वही तो है यार।
इलास्टिक लिमिट किसकी ज्यादा? कौन ज्यादा इलास्टिक राइट? राइट? तो अगर इन दोनों ग्राफ को आप ध्यान से देखोगे, ध्यान से
देखोगे तो ये जो B वाला है, देखो इसकी इलास्टिक लिमिट कहां है? यहां पे। कैसे पता चलता है? तुम्हें याद होगा? एक ऐसा
पॉइंट होता है जहां पर कर्व ऐसे घूमता है। पहले तो कर्व एकदम सीधा सीधा सीधा सीधा सीधा। फिर इस पॉइंट पे इसको अपन बोलते हैं
वैसे प्रपोर्शनल लिमिट। फिर उसके बाद आती है इलास्टिक लिमिट। ठीक है? तो अराउंड अराउंड ये वाला पॉइंट होगा। जबकि यहां पर
देखो तो वो पॉइंट यहीं पर आ गया। इसी पॉइंट पे कर्व हो गया। राइट? राइट? तो आप ध्यान से देखो। तो ये जो B वाला है इसका
कर्व ऊंचा है। इसका कर्व ऊंचा है। है ना? है ना? ये वाला पॉइंट ऊंचा है। इसका नीचे है। तो क्या मैं बोल सकता हूं ये जो बी
वाला मटेरियल है इसका यंग मॉड्यूलस ज्यादा होगा। ये ज्यादा इलास्टिक होगा। बिल्कुल होगा यार भैया क्या बात कर रहे हो?
बिल्कुल होगा। देखो ना ऊंचा है। ऊंचा है। यानी उसको इतनी ज्यादा मुझे स्ट्रेस देनी पड़ी। जबकि उसको कम स्ट्रेस मुझे देनी पड़ी।
है ना? यंग मॉड्यूलर सख्त। कौन ज्यादा सख्त? जिसको ज्यादा स्ट्रेस देनी पड़े। ज्यादा स्ट्रेस देनी पड़ी। ठीक है जी? तो
इसका आंसर आएगा बी। अगला व्हिच ऑफ दी टू इज दी स्ट्रंगर मटेरियल? देखो स्ट्रंगर मटेरियल टेंसाइल स्ट्रेंथ बताता है। ठीक?
ऐसा कौन सा पॉइंट है जिसके बाद इसने ये बोला कि आई गिव अप मैं हार गया। अरे वही तो होता है ना। अरे वही तो होता है। जो
ज्यादा स्ट्रंगर होगा वो ईजीली टूटेगा नहीं। वो ब्रेक नहीं होगा। जबकि जो वीक होगा वो जल्दी फ्रैक्चर कर जाएगा। टूट
जाएगा। तो अगर आप ध्यान से देखो ध्यान से देखो तो ये देखो कितना लंबा टिक पाया। देखो कितना लंबा टिक पाया। और इसका ये जो
पॉइंट है ना ये काफी ऊपर है। जबकि इसका जो पॉइंट है ये नीचे है। ठीक है? और ये ज्यादा टिक भी नहीं पाया यार। ये तो देखो
ना जल्दी टूट गया। जल्दी फ्रैक्चर कर गया। जबकि ये बहुत समय बाद फ्रैक्चर करा। तो ज्यादा स्ट्रांग A है। जबकि पहले वाले
पॉइंट यानी यंग मॉड्यूलस इसका ज्यादा है। बहुत बढ़िया। तो ऐसे लॉजिकल क्वेश्चंस भी पूछे जाते हैं। चलिए अगले टॉपिक की तरफ
बढ़ते हैं जो कि है रिलेशनशिप विद स्प्रिंग। भैया यहां भी स्प्रिंग आ गई। अच्छा मैं बस एक क्वेश्चन पूछना चाहता
हूं। तुम्हें स्प्रिंग का फार्मूला याद है? x = kx अरे हां भाई - kx याद है? याद है या नहीं है? ठीक है याद होगा। अब एक
बात मुझे बताओ अभी यंग मॉड्यूलस मैं किसी वायर को स्ट्रेच करता हूं। तो यंग मॉड्यूलस का फार्मूला मैंने आपको अभी
बताया। फोर्स / एरिया डेल्टा l डेल्टा l / l क्या यही है? बहुत बढ़िया। यही है भैया ऑब्वियस सी बात है। अच्छा अगर इस फोर्स को
मैं यहां ले जाऊं और यंग मॉड्यूलस को मैं यहां पर ले आऊं तो क्या आएगा? फोर्स का फार्मूला क्या आ जाएगा? फ़ का फार्मूला हो
जाएगा y a डेल्टाl / l क्या यही आ जाएगा फ़ का फार्मूला। ठीक है? अब अगर आप ध्यान से देखोगे तो ये जो डेल्टा LL है ये क्या है?
चेंज इन लेंथ। अरे चेंज इन लेंथ ही तो है। बहुत बढ़िया। क्या मैं इसको x मान सकता हूं? अगर तुम्हें याद हो स्प्रिंग का ये
जो फार्मूला होता था - kx इसमें x क्या होता था? कितना स्प्रिंग स्ट्रेच हुई? यही होता था। तो क्या मैं इसको x मान सकता
हूं? ठीक है? अगर तुम ध्यान से देखो। फोर्स = y a / l * x क्या ये सारी चीजें कांस्टेंट है बेटा? यंग मॉड्यूलस किसी भी
मटेरियल का कांस्टेंट, एरिया कांस्टेंट, लेंथ कांस्टेंट। तो क्या मैं इसको k बोल सकता हूं? बिल्कुल बोल सकते हो। तो अगर
मैं स्प्रिंग से इसका रिलेशन बनाऊं, किसी भी वायर को स्ट्रेच करूं और उसका स्प्रिंग से रिलेशन बनाऊं तो तुम्हें याद रहना
चाहिए कि जो k की वैल्यू होती है वो क्या होगी? y a / l ठीक है? और जैसा मैंने आपको स्टार्टिंग में बताया था इसके अंदर मैं
आपको एक या दो डेरिवेशन कराऊंगा। पहली डेरिवेशन तो ये थी। बड़ी लल्लू सी पता भी नहीं चला डेरिवेशन हो गई। है ना? रिलेशन
विद स्प्रिंग हमने बता दी। k की वैल्यू क्या आई? ya a / l बड़ी ईजी बड़ी लल्लू पल्लू डेफिनेशन थी। आ गई समझ में? अब जो
दूसरी डेरिवेशन है दैट इज़ वेरी इंपॉर्टेंट। ध्यान से देखना। ये है इलास्टिक पोटेंशियल एनर्जी। देखो यार तुम
क्या ये सोच सकते हो कि क्या जब भी मैं किसी चीज़ को खींचूंगा, तो उसके अंदर कोई पोटेंशियल एनर्जी स्टोर होगी? बिल्कुल
होगी। पोटेंशियल एनर्जी की डेफिनेशन क्या होती थी? जब भी मैं किसी चीज़ की शेप या साइज़ बदललूंगा, तो पोटेंशियल एनर्जी तो
आएगी ही आएगी। वो तो जरूरी है। एकदम नेसेसरी है। अब इसमें भी तो मैं वायर को खींच रहा हूं। तो मैं अज्यूम करता हूं कि
एक वायर है। ठीक है? मैं क्या अस्यूम कर रहा हूं बेटा? डेरिवेशन ध्यान से देखना। एक वायर है जिसकी जो लेंथ है वो L है। यंग
मॉड्यूलस Y है। और जो एरिया है वो A है। इसको मैंने स्ट्रेच करा और जो इसमें एक्सपेंशन आया वो X आ गया। X मैंने उसको
एक्सपेंड कर दिया। खींच दिया। ठीक है जी समझ आ गया। अच्छा अब ना थोड़ा सा दिमाग लगाना थोड़ा सा दिमाग लगाना कि मैं क्या
लिखने जा रहा हूं। थोड़ा हमने पहले पढ़ा था वर्क पावर एनर्जी वाले चैप्टर में कि जो वर्क डन होता है वर्क डन होता है क्या
वही नेगेटिव ऑफ पोटेंशियल एनर्जी होता है? हां भैया बिल्कुल होता है। एकदम सही कह रहे हो भैया। ये तो आपने बात सही की हमने
पढ़ा है। अब एक बात बताओ इस चैप्टर में हम शुरू से ही रिस्टोरिंग फोर्स की बात कर रहे हैं। रिस्टोरिंग यानी कि जो कि अंदर
की तरफ खींचती है जो कि उल्टी फोर्स है। राइट? तो क्या मैं इस केस में लिख सकता हूं कि जो वर्क डन होगा वो पोटेंशियल
एनर्जी के बराबर होगा? तुम बोलोगे बिल्कुल लिख सकते हो क्योंकि रिस्टोरिंग फोर्स है। यस। अब मुझे बताओ अगर मुझे पोटेंशियल
एनर्जी निकालनी है तो बेसिकली मुझे वर्क डन निकालना है और वर्क डन होता है ff यानी फोर्स फोर्स डॉट्स। यही होता है ना? याद आ
गया? हां, यही होता है वर्क डन। अच्छा, अभी मैंने फोर्स निकाली थी। कैसे मैंने फोर्स निकाली थी? वापस से निकाल के बता
देता हूं। यंग मॉड्यूलस = fa डेल्टा l डेल्टा l या फिर मैं चेंज इन लेंथ यहां पर x ही लिख देता हूं डायरेक्टली। ठीक है?
डिवाइड बाय l अब यहां पर मुझे फोर्स निकालनी है। तो फोर्स क्या आ जाएगी? फोर्स आ जाएगा y ax / l ठीक है? अब इस फोर्स को
उठाओ और देखना फटाफट से यहां पर लगा दो। तो वर्क डन आ जाएगा कितना? ya / l x डॉट बहुत बढ़िया। x.dx भैया ये तो इंटीग्रेशन
सा लग रहा है यार। मैंने कहा बिल्कुल अब तुझे मतलब मैथमेटिक भी तेरी स्ट्रांग हो गई है। क्या बात है? तो इसका इंटीग्रेशन
आपको करना है। लिमिट क्या लगानी पड़ेगी? लिमिट लगाओगे 0 से लेकर डेल्टा l तक। कहां तक? डेल्टा l तक जो कि तुमने एक्सपेंड करा
है। ठीक है जी। बहुत बढ़िया। अब जब इनको x.dx का इंटीग्रेशन होता है बेटा x² / 2 इतना शायद इंटीग्रेशन तुम्हें अब तक आ गया
होगा। ठीक है? हर जगह भैया एक तो ये इंटीग्रेशन आ जाता है। ठीक है? तो ये कितना आ जाएगा? x² / 2 x² / 2 लिमिट लगा
लेना डेल्टा l से 0 तक की और सॉल्व करोगे और सॉल्व करोगे तो जो वर्क डन आएगा वो कितना आएगा ya a / l और ये आ जाएगा डेल्टा
का स्क्वायर / 2 बहुत बढ़िया ठीक है ये आ गया फाइनली हमारा क्या अरे बोलो वर्क हां यानी यही है हमारी पोटेंशियल एनर्जी यस तो
भैया क्या यहां पर डेरिवेशन खत्म नहीं अभी कहां खत्म हुई भाई ध्यान से देखना बेटा। अब मैं इसको अलग तरीके से लिखने जा रहा
हूं। कैसे लिखूंगा? कैसे लिखूंगा? देखना। अब मैं क्या करूंगा ना? मैं ऊपर नीचे ऊपर नीचे l से मल्टीप्लाई करूंगा और डिवाइड
करूंगा। कोई दिक्कत? कोई समस्या? नहीं भैया कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए। इस हाफ को बाहर ले आओ। इस हाफ को क्या करो बेटा?
बाहर ले आओ। ठीक है? तो अब मैं इसको क्या लिखने जा रहा हूं? ध्यान से देखना। मैं इसको लिख रहा हूं। हाफ हाफ y a y a देखते
चलना बेटा। बहुत इंपॉर्टेंट चीज चल रही है अभी के समय पे। y एल डेल्टा स्क्वायर डिवाइड बाय डिवाइड बाइ l² ठीक है? अब मुझे
एक बात बताओ जो स्ट्रेन मैंने तुम्हें बताया था स्ट्रेन क्या होती थी? डेल्टा l / l यही तो स्ट्रेन होती थी। तो क्या मैं
इसको लिख सकता हूं कि ये जो है ये कुछ नहीं है। ये है स्ट्रेन का स्क्वायर। लिख सकता हूं या नहीं लिख सकता? बिल्कुल लिख
सकते हो। तो लिख दो 1/2 y a l और यह है स्ट्रेन। किसका बेटा? स्ट्रेन का स्क्वायर। क्या बात समझ में आई? जल्दी बता
दो। बहुत बढ़िया। स्ट्रेन का स्क्वायर। अच्छा, यह a * l यानी एरिया इंटू लेंथ क्या होती है? वॉल्यूम होती है। अरे किसी
का भी अगर वॉल्यूम निकालना है क्या करोगे? एरिया इंटू L करोगे। ठीक है जी? बहुत बढ़िया। तो क्या मैं इसको लिख सकता हूं 1/2
y v और ये है स्ट्रेन का स्क्वायर। ठीक है? अच्छा यंग मॉड्यूलस क्या होता था? यंग मॉड्यूलस होता था भैया स्ट्रेस बाय
स्ट्रेन। तो यहां पर जब तुम यंग मॉड्यूलस की वैल्यू डालोगे क्या है? स्ट्रेस बाय स्ट्रेन। जब तुम ये वैल्यू डालोगे ना बेटा
तो पता है क्या होगा? तो फाइनली आ जाएगा क्योंकि एक स्ट्रेन से एक स्ट्रेन कट जाएगा। तो ये आ जाएगा 1/2 स्ट्रेस
* स्ट्रेन * वॉल्यूम। और यही है पोटेंशियल एनर्जी का सबसे इंपॉर्टेंट फार्मूला। क्या ये बात
समझ में आई? इसको हम बोलेंगे पोटेंशियल एनर्जी स्टर्ड इन एन ऑब्जेक्ट। यानी जब हमने शेप बदलने की कोशिश करी, जो
पोटेंशियल एनर्जी स्टोर हुई वो कितनी हुई? 1/2 * स्ट्रेस * स्ट्रेन * वॉल्यूम। और इसका एक और चीज होती है। इस वॉल्यूम को
यहां पर ले आओ। इस वॉल्यूम को यहां पर ले आओ। तो ये जो टर्म होती है ना पोटेंशियल एनर्जी पर यूनिट वॉल्यूम पोटेंशियल एनर्जी
पर यूनिट वॉल्यूम। ठीक है? इसका फार्मूला बन के आ जाता है 1/2 * स्ट्रेस * स्ट्रेन। याद रखना बेटा वेरी इंपॉर्टेंट
फार्मूला। पोटेंशियल एनर्जी पर यूनिट वॉल्यूम का। एक बार फटाफट से समराइज़ कर लेते हैं कि हमने क्या खतरनाक सी डेरिवेशन
करी। अरे बहुत ईजी डेरिवेशन थी। मैंने क्या करा? मैंने एक पाइप लिया उसको मैंने खींचा। मान लो मान लो वो x खींच गया। x
खींच गया। ठीक है? तो मुझे निकालनी थी पोटेंशियल एनर्जी। मुझे पता है पोटेंशियल एनर्जी वर्क डन के बराबर है। वर्क डन क्या
होता है? f.dx सबसे पहले मैंने जो फोर्स निकाली थी उस फोर्स को यहां पर रखा। बच क्या गया? x.dx. x.dx का इंटीग्रेशन करा
तो वो होता है x² / 2 ठीक है? लिमिट डाल दी ज़ीरो से डेल्टा LL जितना एक्सपेंड हुआ था। तो फाइनली फाइनली जो मेरा w यानी वर्क
डन आया वो वर्क डन कितना आ गया? थोड़ा बहुत मैंने सॉल्व करा तो वो आ गया ya a / l डेल्टा l² / 2 ठीक है? फिर मैंने क्या
करा? ऊपर नीचे l से मल्टीप्लाई डिवाइड कर दिया। क्यों कर दिया? क्योंकि मुझे स्ट्रेस और स्ट्रेन के अंदर चीजों को ले
जाना था। वो मेरी मर्जी थी। तो मैंने यहां से मल्टीप्लाई डिवाइड करा। तो अगर आपने इसको ध्यान से देखा हो तो ये क्या है? ये
है स्ट्रेन का स्क्वायर। तो मैंने डायरेक्ट लिख दिया स्ट्रेन का स्क्वायर। अब अगर एरिया * लेंथ ध्यान से देखोगे तो
ये वॉल्यूम होता है। तो यहां मैंने लिख दिया वॉल्यूम। और ये जो यंग मॉड्यूलस है y ये एक्चुअली में क्या होता है? स्ट्रेस
बाय स्ट्रेन। तो मैंने सारी वैल्यू्यूज को पुट करा। तो फाइनली पोटेंशियल एनर्जी का फार्मूला आया 1/2 * स्ट्रेस * स्ट्रेन *
वॉल्यूम एंड पोटेंशियल एनर्जी पर यूनिट वॉल्यूम का फार्मूला आया 1/2 * स्ट्रेस * स्ट्रेन। वेरी इंपॉर्टेंट फार्मूला। बहुत
बार काम आएगा। कई बार इसको यूज़ करने वाले हो। ठीक है? ये डेरिवेशन समझ में आई? बहुत इंपॉर्टेंट थी। याद रखना। ठीक है जी? चलिए
आगे बढ़ते हैं अब फटाफट से। क्वेश्चन देखते हैं अब इसके। स्टील वायर ऑफ द लेंथ 2 मीटर एंड क्रॉस सेक्शनल एरिया दिस इज़ स्ट्रेच
बाय अ फोर्स 200 न्यूटन। क्या करा? 200 न्यूटन का फोर्स ने इसको स्ट्रेच कर दिया। यंग मॉड्यूलस हमें गिवन है। हमें बताना
है। स्ट्रेन बताना है और इलास्टिक पोटेंशियल एनर्जी। देखो, इलास्टिक पोटेंशियल एनर्जी के लिए तुम्हें
क्या-क्या चाहिए होगा? पहले तो यह देखो। क्या फार्मूला होता था? 1/2 * स्ट्रेस
* स्ट्रेन * वॉल्यूम। ठीक है? तो पहले आप स्ट्रेस निकालोगे, स्ट्रेन निकालोगे, वॉल्यूम
निकाल सकते हो। क्यों? क्योंकि लेंथ हमारे पास गिवन है और क्रॉस सेक्शनल एरिया भी हमें गिवन है। तो वॉल्यूम क्या होती है? l
* a। ठीक है? तो स्ट्रेस निकालो, स्ट्रेन निकालो। स्ट्रेस कैसे निकालोगे? फोर्स गिवन है। तो एरिया देखो, मैं आपको सॉल्व
भी करके दिखा देता हूं। सबसे पहले मैं क्या करता हूं? स्ट्रेस निकालता हूं। तो वो होगी फोर्स बाय एरिया। तो वो कितना हो
जाएगा? एक बार चेक कर लेना बेटा। फोर्स है 200 न्यूटन और एरिया है 1 * 10 रे टू पावर -6 ओके तो ये कितना आ जाएगा? ये आ जाएगा 2
* 10 रे टू पावर 8 ये क्या आ गया? ये आ गया मेरा स्ट्रेस। अब जब मुझे स्ट्रेन निकालना होगा तो यंग मॉड्यूलस मेरे को
यहां पर गिवन है। तो मैं स्ट्रेन कैसे निकालूंगा बताओ? अरे यार तुम्हें अगर फार्मूला याद हो यंग मॉड्यूलस = स्ट्रेस
बाय स्ट्रेन। बहुत बढ़िया। है ना? अब देखो स्ट्रेस मैंने निकाल लिया है जो कि ये है। यंग मॉड्यूलस मुझे गिवन है। तो बस वैल्यूस
को पुट करो। तो जो स्ट्रेन आएगा बेटा इसको आप सॉल्व करोगे। इसकी वैल्यू यहां डालो और एक बार सॉल्व करो। तो ये आएगा ये आएगा अ 1
* 1 * 10 रे टू पावर -3 ये आएगा। ये क्या आ गया? स्ट्रेन। तो अब देखो मेरे पास स्ट्रेस भी है। मेरे पास स्ट्रेन भी है और
मेरे पास वॉल्यूम भी है। वॉल्यूम क्या है? वॉल्यूम आती है एरिया। एरिया जो कि है 10 रे टू पावर -5 * लेंथ। लेंथ कितनी है? 2
मीटर। तो ये हो जाएगा 2 * 10 टू पावर -5। ये वॉल्यूम है। ठीक है? तो स्ट्रेस भी है, स्ट्रेन भी है, वॉल्यूम भी है। तीनों को
मल्टीप्लाई करो और हाफ से मल्टीप्लाई कर दो। क्योंकि फार्मूला होता है 1/2 * स्ट्रेस * स्ट्रेन * वॉल्यूम और फटाफट से
मुझे एक बार आंसर बता दो। इसमें एक चीज़ करेक्ट कर लेना कि हमने जो वॉल्यूम निकाली है, ये 10 रेज़ टू पावर -6 था। ठीक है? अब
एक बार सॉल्व करना। तो आंसर जो आएगा वो आएगा 0.2 जूल क्योंकि ये पोटेंशियल एनर्जी है तो जूल में हमें कैलकुलेट करनी है। ठीक
है? ऐसे बहुत क्वेश्चन आते हैं। जैसे कि एक क्वेश्चन आपको मैं यहां पे भी दिखा देता हूं। ये क्वेश्चन आया हुआ है। जैसे
कि दी वायर हमें लेंथ दे रखी है। एरिया दे रखा है। यंग मॉड्यूलस गिवन है। कैलकुलेट दी स्प्रिंग कांस्टेंट। अब स्प्रिंग
कांस्टेंट कैसे निकालोगे? देखो मैंने थोड़ी देर पहले ना स्प्रिंग कांस्टेंट आपको डिराइव करके बताया था। मैं आपको वापस
से दिखा देता हूं। मैंने आपको हल्की सी देर पहले ये स्प्रिंग कांस्टेंट ya a / l ये प्रूव करके दिखाया था। तो यही फॉर्मूले
से आपको स्प्रिंग कांस्टेंट कैलकुलेट करना था। तो ऐसे क्वेश्चंस भी कभी कबभार आपके पेपर में आपको दिख सकते हैं। ठीक है?
स्प्रिंग कांस्टेंट निकाल लोगे फॉर्मूले से। हाउ मच एनर्जी विल बी स्टर्ड व्हेन एक्सटेंशन इज़ 2mm? अब आपको बताना है कितनी
एनर्जी? यानी पोटेंशियल एनर्जी आपको निकालनी है और ये जो है ये डेल्टा हमें गिवन है। ठीक है? तो अब वापस से फार्मूला
लगाओ, वीडियो पॉज करो, इसको सॉल्व करो और कमेंट में आंसर बताना। चलिए, अब बढ़ते हैं इस चैप्टर के वन ऑफ दी सेकंड लास्ट टॉपिक
की तरफ जो कि है पोइजंस रेशियो। पोइजन भैया ये क्या है? पोइजन भैया का भी रेश्यो आ गया है क्या? ये क्या चीज है? तो देखो
पोइजन रेशियो कुछ नहीं होता। तुम इमेजिन करो जब भी तुम किसी चीज को खींचोगे ना तो लेंथ तो बढ़ती है बट साथ-साथ में जो
रेडियस होता है जो डायमीटर होता है वो भी तो कम होता है। होता ही नहीं होता है। किसी वायर को खींचोगे तो डायमीटर कम होगा।
यस। तो ये तो हमें पता है कि जब भी हम किसी चीज को खींचते हैं तो उसको हम क्या बोलते हैं? स्ट्रेन को हम क्या बोलते हैं?
लोंगिट्यूडनल स्ट्रेन। बट जब हम किसी चीज को खींचते हैं उसके डायमीटर में जो चेंज आता है उसको हम बोलते हैं लेटरल स्ट्रेन।
क्या बोलते हैं? लेटरल स्ट्रेन। द स्ट्रेन परपेंडिकुलर टू द अप्लाइड फोर्स इज कॉल्ड लेटरल स्ट्रेन। एग्जांपल वही है। जब मैंने
इसको खींचा तो डायमीटर कम हुआ तो वो क्या कहलाएगा? वो कहला रहा है एक प्रकार से लेटरल स्ट्रेन। कि चेंज आ गया ना भैया
डायमीटर में। तो ये पोइजन रेश्यो क्या बोलता है? पोइजन रेश्यो ये बोलता है द रेश्यो ऑफ़ दी लेटरल स्ट्रेन टू
लोंगिट्यूडनल स्ट्रेन व्हेन अ वायर इज़ स्ट्रेच। सिंपल सिंपल भैया लोंगिट्यूडनल स्ट्रेंज तो हमें पता था। लोंगिट्यूडनल
स्ट्रेंज तो डेल्टा l / l होता है। लेटरल क्या होगा? अरे लेटरल कुछ नहीं होगा। डेल्टा d यानी चेंज इन डायमीटर डिवाइड बाय
ओरिजिनल डायमीटर। बस इन दोनों का रेश्यो है। बस इन दोनों का रेश्यो है। बट एक चीज याद रखना इस फ़ूले में ये नेगेटिव साइन आता
है। वैसे तो इस पे क्वेश्चन आज तक नहीं पूछा गया। ना ही पूछा जाएगा। बहुत कम चांसेस हैं। बट फिर भी नेगेटिव आता है।
क्यों आता है? क्योंकि तुम खुद सोचो जैसे-जैसे लेंथ बढ़ेगी डायमीटर कम होगा, कम होगा, कम होगा, छोटा सा हो जाएगा। हां या
ना? हां या ना? बिल्कुल हो जाएगा यार। तो यानी लेंथ बढ़ेगी, डायमीटर कम हो गया। इस वजह से यहां पर डेल्टा d / d डेल्टा LL /
L बहुत सही। ठीक है? तो इसके क्वेश्चंस वैसे आते नहीं है। कुछ चीजें आप याद कर लेना। क्या याद करना है आपको? कि याद रखना
कि नॉर्मली जब हम इस वैल्यूज़ को कैलकुलेट करते हैं तो थ्योरिटिकली थ्योरिटिकली जो वैल्यूज़ आती हैं वो -1 से लेकर 0.5 तक आती
हैं। जब हम कैलकुलेट करते हैं पेन और पेपर से। लेकिन जब हम प्रैक्टिकली कैलकुलेट करते हैं तो एक्चुअल वैल्यू 0 से 0.5 के
बीच में आती है। जब हम न्यूमेरिकल सॉल्व करोगे आप इसके तो हमारी वैल्यू्यूज तो नेगेटिव में आएंगी बट प्रैक्टिकली नेगेटिव
वैल्यूज़ इसमें पॉसिबल नहीं होता। वो ज़ीरो से 0.5 ही पॉसिबल होता है। द हायर वैल्यू ऑफ पोइज़ंस रेश्यो मीन मटेरियल कॉन्ट्रैक्ट
मोर। अगर इसकी वैल्यू ज्यादा है इसका क्या मतलब है? कि जो मटेरियल है ना यार वो कॉन्ट्रैक्ट हो रहा है। है ना? ज्यादा
कॉन्ट्रैक्ट हो रहा है साइड से। मतलब मैं हल्का सा खींच रहा हूं पतला हो जा रहा है। हल्का सा खींच रहा हूं। पतला हो जा रहा
है। हां या ना? हां या ना? बहुत बढ़िया। अब ये चीज भैया आपने क्यों बताई? क्योंकि इस पे क्वेश्चन आया था। व्हिच ऑफ दी
फॉलोइंग मटेरियल हैज़ दी हाईएस्ट पोइजन रेश्यो? भैया ये तो बताया नहीं। हमें तो अभी तक इलास्टिसिटी बताई थी। यार पोइजन
यानी थोड़ा सा खींच रहा हूं और रेडियस कम हो जा रहा है। डायमीटर कम हो जा रहा है। खुद सोचो किसके साथ ये पॉसिबल है? रबड़ के
साथ। रबड़ को तुम थोड़ा सा खींचते हो ना तो रबड़ पतला हो जाता है। हां या ना? स्टील को खींचो नहीं होगा पतला। ग्लास को
खींचो नहीं होगा पतला। कॉर्क को खींचो नहीं रबर। बहुत बढ़िया। चलो। अ सिलेंडर रोड इज़ स्ट्रेच बाय अ लोड प्रोड्यूसिंग अ
लोंगिट्यूडनल स्ट्रेन। दिस इफ ये वाला जो सिंबल होता है ना बेटा ये सिंबल होता है पोइजन रेश्यो का। याद रखना है ना? हमें
बताना है लेटरल स्ट्रेन क्या होगी? तो आपको पता है ये रेश्यो होता है किसका? लेटरल स्ट्रेन बाय लोंगिट्यूडनल स्ट्रेन।
ठीक है? तो हमें क्या गिवन है? हमें लोंगिट्यूडनल स्ट्रेन गिवन है। तो लोंगिट्यूडनल स्ट्रेन लेटरल स्ट्रेन हमें
निकालनी है। लोंगिट्यूडनल हमें गिवन है। ठीक है? पोइजनंस रेश्यो हमें गिवन है जो कि है 0.25। बस वैल्यू को पुट करो और आंसर
निकालो। ये आ जाएगा 0.5 * 10 रे टू पावर -3। ठीक है? -3। अच्छा पोइजन रेश्यो का भी कोई यूनिट नहीं होता। क्योंकि रेश्यो है
ना? रेश्यो का कोई यूनिट नहीं होता। ठीक है जी? बहुत बढ़िया। फाइनली इस चैप्टर को एंड करने से पहले एक छोटा सा टॉपिक जो कि
स्कूल लेवल के पेपर्स में आता है। एप्लीकेशन ऑफ इलास्टिक बिहेवियर। हमने पूरा चैप्टर पढ़ा। अब ये बताओ कि इसका क्या
काम? मतलब कैसी मजाक की बात नहीं। लास्ट में पूछ रहे हैं क्या काम? पूरा चैप्टर पढ़ा दिया। अब पूछ रहे हो क्या काम? ये कोई
तरीका होता है भैया। देखो तीन काम होते हैं इसके मेनली। सबसे पहला काम तो वो जो रोप्स बनती है ना मैंने तुम्हें बताया
लिफ्ट वाली जो रोप्स होती हैं। यस। उनको देख के बनाया जाता है कि वो ऐसे मटेरियल की बनाए जाए जिनका यंग मॉड्यूलस ज्यादा
है। वो ज्यादा इलास्टिक हैं। उससे क्या होगा? उससे जब कोई भी चीज ऊपर नीचे जाएगी तो ताकतवर मजबूत तरीके से जाएगी। ऐसा नहीं
कि टूट जाए। है ना? तो सबसेेंट तो ये है स्टील रोप्स इन दी केंस एंड द लिफ्ट। तुमने देखा होगा घर भी जब बनते हैं ना
बड़ी-बड़ी इमारतें बनती है तो क्रेस आती है वो उठा के ऐसे रखती हैं। तो उनमें भी रोप लगी होती है स्टील की। तो सबसे पहला
एप्लीकेशन तो स्टील रोप एंड कन। दूसरा आई शेप्ड ग्रेडर्स। अभी ग्रेडर्स क्या होते हैं? तुमने अगर देखा हो ना वो तुमने अगर
शेप देखी हो जब भी ब्रिज होता है कोई ब्रिज उसके नीचे के जो पिलर्स होते हैं ना उन पिलर की शेप कुछ ऐसी होती है। नोट करी
है किसी ने? है ना? है ना? है ना? ऐसी होती है। तो ये भी जो पिलर्स ऐसे वाले बनाए जाते हैं ना दिस इज़ आल्सो बेस्ड ऑन
दी प्रॉपर्टी ऑफ़ इलास्टिक बिहेवियर। ये ऐसे क्यों बनाए जाते हैं? ये रेक्टेंगुलर नहीं बनते। क्यों? क्योंकि अगर
रेक्टेंगुलर बनाएंगे ना भैया तो ज्यादा पैसा लगेगा। पर जब ऐसा बनाया जाता है ना तो उतनी ही स्ट्रेंथ मिलती है जितनी
स्ट्रेंथ जितनी स्ट्रेंथ बोलो रेक्टेंगुलर से मिल सकती थी। यानी ये शेप और रेक्टेंगुलर शेप दोनों बराबर स्ट्रेंथ
देती हैं। बट फर्क ये है इसमें पैसा बच जाता है। इसलिए आई शेप्ड की बनाई जाती है। आपने देखा होगा। ठीक है? प्रोवाइड्स मोर
स्ट्रेंथ एंड रिजिडिटी यूजिंग लेस मटेरियल बिकॉज़ मटेरियल इज़ कंसंट्रेटेड अवे फ्रॉम द न्यूट्रल एक्सिस। यानी वो दूर रखा जाता है
मटेरियल को न्यूट्रल एक्सिस से। उतना मत डिटेल में जाओ। बस इतना समझो। आई शेप्ड होता है। ये भी किसका एग्जांपल है?
एप्लीकेशन का। एंड लास्ट बेंडिंग ऑफ बीम। यानी जो बीम होता है उसको बेंड। अगर तुम अपने पापा से पूछोगे कहीं गांव-गांव के
तुम्हारे घर बने होंगे तो उसमें बीम लगती है। दरवाजों के नीचे एक लोहे की पट्टी सी होती है। उसको हम बीम बोलते हैं। बीम लगाई
जाती है लोहे की। क्यों लगाई जाती है? ताकि वो प्रेशर जो भी ऊपर से प्रेशर आ रहा है ना उसको वो झेल ले। तो ये देखा जाता है
कि वो जो बीम लग रही है ना वो बीम की मोटाई कितनी है? वो बीम का यंग मॉड्यूलस कितना है? सब कुछ देखा जाता है। तभी तो वो
वेट को ले पाएगी वो बीम। ठीक है? तो बीम बेंड्स व्हेन दी लोड इज़ अपाइड टू रि टू रिड्यूस बेंडिंग यूज़ मटेरियल विद हाई यंग
मॉड्यूलस। हमेशा क्या करना है हमें? हाई यंग मॉड्यूलस का मटेरियल इसके अंदर हमें यूज़ करना होता है। उसके साथ-साथ इंक्रीज
डेप्थ। यानी आप बीम को जितना मोटा बनाओगे उसकी हाइट जितनी करोगे उतना ज्यादा वो स्ट्रांग बन जाएगा। ठीक है? तो तीन
एप्लीकेशन आई शेप्ड, बीम और रोप्स। याद रखना स्कूल के एग्जाम में पूछे जाते हैं। ठीक है जी। यहां पर इस चैप्टर को एंड करते
हैं। कुछ क्वेश्चन बता दो। व्हाई आर दी स्टील वायर प्रेफर्ड ओवर कॉपर वायर? क्यों किए जाते हैं? क्योंकि स्टील का यंगर यंग
मॉड्यूलस ज्यादा होता है। ठीक है? व्हाई आर गिडसर्स इन दी ब्रिज गिव एन आई शेप्ड इंस्टेड ऑफ रेक्टेंगुलर क्रॉस सेक्शन। मैं
बता चुका हूं। आई शेप से कॉस्ट बचती है और स्ट्रेंथ उतनी ही मिलती है जितनी कि रेक्टेंगुल से मिलती है। सेम स्ट्रेंथ बट
पैसा देखो पैसा बचाना बहुत जरूरी है। यहां पर आपके सारे के सारे चैप्टर्स मतलब ये जो पूरा का पूरा इतना बड़ा चैप्टर था इसके जो
छोटे-छोटे टॉपिक्स थे सब खत्म कर दिए हमने। ठीक है? आई होप कि तुम्हें समझ आया होगा, मजा आया होगा। ऐसे ही और वन शॉट मैं
तुम्हारे लिए लाता रहूंगा। प्रीवियस सारे वन शॉट आप देख सकते हो। आगे भी ट्राई कर रहा हूं तुम्हारे लिए वन ऑफ द बेस्ट वन
शॉट। है ना? यह लोग जो YouTube पे इतना अच्छा नहीं पढ़ाते। मैं चाहता हूं कि मैं तुम्हें इतना अच्छा पढ़ा
दूं ना कि तुम बोलो यार हां एग्जाम है। एग्जाम से पहले प्रशांत भैया की वीडियो देखी काम खत्म। क्वेश्चंस करा दूं। इतने
क्वेश्चंस करा दूं जो कि कोई करा ही नहीं सकता। तभी मजा आता है। है ना? तो आई होप तुम्हारी मदद हो पाई होगी। शुक्रिया
एवरीवन। जाओ मेहनत करो। पढ़ाई करो। मुझे पता है तुम्हें अपने माता-पिता का सपना पूरा करना है। उनके लिए जाओ पढ़ाई करो। और
याद रखना लाइफ में कभी रिग्रेट मत होने देना। क्योंकि लाइफ का सबसे बड़ा रिग्रेट तब तुम्हें महसूस होगा जब तुम्हें ऐसा
लगेगा कि आप एक अच्छे बेटा या फिर एक अच्छा बेटी नहीं बन पाए। तो यह वाला रिग्रेट कभी लाइफ में आने मत देना। अपना
बेस्ट लगाओ बस। शुक्रिया। मिलते हैं नेक्स्ट लेक्चर के अंदर।
फिजिक्स की दृष्टि से स्टील (Steel) रबर की तुलना में अधिक प्रत्यास्थ (इलास्टिक) है। ऐसा इसलिए है क्योंकि प्रत्यास्थता का सीधा संबंध किसी पदार्थ की कठोरता (Stiffness) से होता है। स्टील में कठोरता अधिक होने के कारण यह बल हटाने पर अपने मूल आकार में वापस आने में अधिक सक्षम होता है, जबकि रबर आसानी से विकृत हो जाता है।
प्रतिबल (Stress) प्रति इकाई क्षेत्रफल पर लगने वाला प्रत्यानयन बल (Restoring Force) है, जिसका SI मात्रक N/m² या पास्कल (Pa) है, और यह एक अदिश राशि है। विकृति (Strain) मूल आयाम में परिवर्तन और मूल आयाम का अनुपात होता है, जो इकाईहीन (Unitless) होता है। प्रतिबल तीन प्रकार का होता है: अनुदैर्ध्य (Longitudinal), अपरूपण (Shearing), और आयतन (Bulk); जबकि विकृति भी इन्हीं के अनुरूप तीन प्रकार की होती है।
हुक का नियम कहता है कि प्रत्यास्थ सीमा (Elastic Limit) के अंदर, प्रतिबल (Stress) विकृति (Strain) के समानुपाती होता है (Stress ∝ Strain)। प्रत्यास्थता गुणांक (Modulus of Elasticity) प्रतिबल और विकृति का अनुपात (K = Stress / Strain) है, जो केवल पदार्थ के प्रकार पर निर्भर करता है, न कि उसके आकार या साइज पर।
यंग का गुणांक (Y) अनुदैर्ध्य प्रतिबल और अनुदैर्ध्य विकृति का अनुपात है, जो पदार्थ की कठोरता (Stiffness) दर्शाता है। अपरूपण गुणांक (G या η) अपरूपण प्रतिबल और अपरूपण विकृति का अनुपात है, जो केवल ठोसों के लिए मान्य होता है। आयतन गुणांक (K) आयतन प्रतिबल और आयतन विकृति का अनुपात है, और इसका व्युत्क्रम संपीड्यता (Compressibility) कहलाता है, जो गैसों में सबसे अधिक होती है।
अपरूपण प्रतिबल तब लगता है जब बल सतह के स्पर्शरेखीय (Tangential) हो, जिससे वस्तु की आकृति बदल जाती है लेकिन आयतन समान रहता है। अपरूपण विकृति कोणीय विस्थापन (Δx/L) के रूप में परिभाषित किया जाता है। यह केवल ठोसों के लिए मान्य है क्योंकि द्रवों में अपरूपण बल लगाने पर वे प्रवाहित हो जाते हैं और स्थायी विकृति उत्पन्न नहीं करते।
प्रत्यास्थ सीमा (Elastic Limit) वह अधिकतम प्रतिबल है जिसे पार करने के बाद कोई वस्तु बल हटाने पर अपनी मूल आकृति में वापस नहीं आती। हुक का नियम केवल इसी सीमा के अंदर मान्य होता है, क्योंकि इसके बाहर प्रतिबल और विकृति के बीच समानुपातिक संबंध समाप्त हो जाता है और स्थायी विरूपण (Permanent Deformation) शुरू हो जाता है।
सबसे पहले, प्रतिबल (Stress) = F/A सूत्र से ज्ञात करें। फिर, विकृति (Strain) = प्रतिबल / Y (जहाँ Y यंग का गुणांक है) से निकालें। अंत में, दीर्घीकरण (Elongation) = विकृति × मूल लंबाई होगा। उदाहरण के लिए, यदि 10 mm त्रिज्या और 1 m लंबाई की छड़ पर 100 kN बल लगे और Y = 2×10¹¹ Pa हो, तो प्रतिबल ≈ 3.18×10⁸ Pa, विकृति ≈ 1.59×10⁻³, और दीर्घीकरण ≈ 1.59 mm होगा।
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