वेक्टर स्पेस की परिभाषा, गुण और उदाहरण | लीनियर अलजेब्रा
वेक्टर स्पेस: एक विस्तृत परिचय
इस लेख में हम वेक्टर स्पेस की अवधारणा को विस्तार से समझेंगे। यह लीनियर अलजेब्रा की एक मूलभूत संरचना है जो गणित, भौतिकी, और इंजीनियरिंग के कई क्षेत्रों में उपयोग होती है।
आधारभूत अवधारणाएँ (पूर्वापेक्षाएँ)
वेक्टर स्पेस को समझने के लिए निम्नलिखित अवधारणाओं की जानकारी होना आवश्यक है:
- ग्रुप (Group): एक सेट और एक बाइनरी ऑपरेशन (योग) जो चार गुणों को संतुष्ट करता है:
- क्लोज़र (Closure)
- साहचर्य (Associativity)
- तत्समक/आइडेंटिटी (Identity)
- व्युत्क्रम/इन्वर्स (Inverse)
- एबेलियन ग्रुप (Abelian Group): एक ग्रुप जो क्रमविनिमेय (Commutative) गुण भी रखता है।
- सेमीग्रुप (Semigroup): एक सेट और एक बाइनरी ऑपरेशन जो केवल क्लोज़र और साहचर्य गुणों को संतुष्ट करता है।
- रिंग (Ring): एक सेट जिसमें दो बाइनरी ऑपरेशन (योग और गुणा) होते हैं। योग के लिए यह एक एबेलियन ग्रुप होता है और गुणा के लिए एक सेमीग्रुप, साथ ही वितरण नियम (Distributive Law) का पालन करता है।
- फील्ड (Field): एक सेट जिसमें दो बाइनरी ऑपरेशन होते हैं। योग के लिए यह एक एबेलियन ग्रुप और गुणा के लिए भी एक एबेलियन ग्रुप होता है (शून्येतर तत्वों के लिए)। उदाहरण: Q, R, C.
वेक्टर स्पेस की परिभाषा
मान लीजिए F एक फील्ड है और V एक अरिक्त (non-empty) सेट है। V के तत्वों को वेक्टर (Vectors) और F के तत्वों को स्केलर (Scalars) कहा जाता है।
V को F पर एक वेक्टर स्पेस (Vector Space) कहा जाता है यदि दो बाइनरी संक्रियाएँ (operations) परिभाषित हों:
- आंतरिक संक्रिया (Internal Composition): V × V → V (जिसे हम योग + द्वारा दर्शाते हैं)
- बाह्य संक्रिया (External Composition): F × V → V (जिसे हम स्केलर गुणा · द्वारा दर्शाते हैं)
और ये संक्रियाएँ निम्नलिखित गुणों (axioms) को संतुष्ट करती हैं:
V, योग (+) के सापेक्ष एक एबेलियन ग्रुप है
- क्लोज़र (Closure): सभी u, v ∈ V के लिए, u + v ∈ V
- साहचर्य (Associativity): सभी u, v, w ∈ V के लिए, (u + v) + w = u + (v + w)
- तत्समक (Identity): एक ऐसा अद्वितीय तत्व 0 ∈ V (शून्य वेक्टर) है कि सभी v ∈ V के लिए, v + 0 = 0 + v = v
- व्युत्क्रम (Inverse): प्रत्येक v ∈ V के लिए, एक ऐसा तत्व -v ∈ V है कि v + (-v) = (-v) + v = 0
- क्रमविनिमेय (Commutativity): सभी u, v ∈ V के लिए, u + v = v + u
स्केलर गुणा (·) के लिए गुण
- क्लोज़र: सभी α ∈ F और v ∈ V के लिए, α · v ∈ V
- वितरण नियम (Distributive Laws):
- सभी α ∈ F और u, v ∈ V के लिए, α · (u + v) = α · u + α · v
- सभी α, β ∈ F और v ∈ V के लिए, (α + β) · v = α · v + β · v
- साहचर्य (Associativity of Scalar Multiplication): सभी α, β ∈ F और v ∈ V के लिए, (αβ) · v = α · (β · v)
- एकांक गुण (Unitary Property): फील्ड F के गुणात्मक तत्समक (multiplicative identity), 1 ∈ F के लिए, 1 · v = v, सभी v ∈ V के लिए
आंतरिक बाइनरी संक्रिया (Internal Binary Composition)
यह वह संक्रिया है जो एक सेट के दो तत्वों पर लागू होती है और परिणाम उसी सेट का एक तत्व होता है। इस अवधारणा को बेहतर ढंग से समझने के लिए आप लीनियर प्रोग्रामिंग: ग्राफिकल विधि और सॉफ़्टवेयर समाधान लेख का अध्ययन कर सकते हैं, जिसमें गणितीय संक्रियाओं का व्यावहारिक उपयोग बताया गया है।
उदाहरण:
- Z (पूर्णांक) पर योग (+) एक आंतरिक संक्रिया है क्योंकि दो पूर्णांकों का योग एक पूर्णांक होता है।
- वेक्टर स्पेस में, वेक्टरों का योग (+) एक आंतरिक संक्रिया है।
बाह्य बाइनरी संक्रिया (External Binary Composition)
यह वह संक्रिया है जिसमें एक तत्व फील्ड (स्केलर) से और दूसरा तत्व वेक्टर सेट (V) से लिया जाता है, और परिणाम V का ही एक तत्व होता है।
महत्वपूर्ण बिंदु: बाह्य संक्रिया को संतुष्ट करने के लिए, वह सेट जहाँ से परिणाम आता है (V), वह सेट जहाँ से स्केलर आता है (F) से "बड़ा" होना चाहिए या कम से कम उसका एक सुपरसेट होना चाहिए।
उदाहरण:
- Q (V = Q, F = Q): V Q से स्केलर (जैसे 2/3) लेने पर 2/3 · 1/3 = 2/9, जो कि Q में ही है। यह संक्रिया संतुष्ट होती है।
- R (V = R, F = Q): एक वेक्टर (जैसे √2) और एक स्केलर (जैसे 2/3) का गुणनफल (2√2/3) एक वास्तविक संख्या (R) है, इसलिए यह संतुष्ट होता है।
- C (V = C, F = Q): एक वेक्टर (जैसे i) और एक स्केलर (जैसे 2/3) का गुणनफल (2i/3) एक सम्मिश्र संख्या (C) है, इसलिए यह संतुष्ट होता है।
- Q (V = Q, F = C): एक वेक्टर (जैसे 1/2) और एक स्केलर (जैसे i) का गुणनफल (i/2) एक सम्मिश्र संख्या (C) है, जो कि Q में नहीं है। इसलिए यह संतुष्ट नहीं होता।
नियम: बाह्य संक्रिया तभी संतुष्ट होगी जब वेक्टर सेट (V) फील्ड (F) से बड़ा या उसके बराबर हो (F ⊆ V).
वेक्टर स्पेस के महत्वपूर्ण उदाहरण
उदाहरण 1: n-टपल (n-Tuples)
सेट: Fₙ = {(u₁, u₂, ..., uₙ) | uᵢ ∈ F} (जहाँ F कोई फील्ड है, जैसे R) योग: (u₁, u₂, ..., uₙ) + (v₁, v₂, ..., vₙ) = (u₁+v₁, u₂+v₂, ..., uₙ+vₙ) स्केलर गुणा: α · (u₁, u₂, ..., uₙ) = (αu₁, αu₂, ..., αuₙ)
यह एक वेक्टर स्पेस है। इसे Fₙ (F पर) दर्शाया जाता है। उदाहरण: R₂, R₃, आदि।
उदाहरण 2: मैट्रिसेस (Matrices)
सेट: Mₘₓₙ = सभी m × n आव्यूहों (matrices) का समुच्चय, जिनके अवयव (entries) फील्ड F से हैं। योग: दो आव्यूहों का योग (Matrix Addition) स्केलर गुणा: एक स्केलर द्वारा आव्यूह का गुणा (Scalar Multiplication)
यह F पर एक वेक्टर स्पेस है।
महत्वपूर्ण: यह तभी वेक्टर स्पेस बनेगा जब आव्यूहों के अवयव, फील्ड F के ही हों या उससे बड़े हों। इसी प्रकार, वोल्टेज, करंट और रेजिस्टेंस: सरल भाषा में समझें लेख में भौतिक राशियों के बीच समान बीजगणितीय संबंधों का वर्णन है, जो वेक्टर स्पेस के अनुप्रयोग को दर्शाता है।
उदाहरण 3: बहुपद (Polynomials)
सेट: रैखिक बहुपदों का समुच्चय, जैसे Pₙ(x) = {a₀ + a₁x + a₂x² + ... + aₙxⁿ | aᵢ ∈ F} योग: बहुपदों का सामान्य योग स्केलर गुणा: एक स्केलर द्वारा बहुपद का गुणा
यह F पर एक वेक्टर स्पेस है।
महत्वपूर्ण:
- बहुपदों का समुच्चय जहाँ घात (degree) 'n' या 'n' से कम है, वह वेक्टर स्पेस बनाता है।
- जहाँ घात 'n' ही है (exact degree n), वह वेक्टर स्पेस नहीं बनाता क्योंकि योग के बाद घात कम हो सकती है (e.g., xⁿ + (-xⁿ) = 0)।
- जैसा कि मैट्रिसेस में, बहुपदों के गुणांक (coefficients) फील्ड के तत्व होने चाहिए या फील्ड से बड़े सेट के तत्व होने चाहिए।
निष्कर्ष
वेक्टर स्पेस एक महत्वपूर्ण संरचना है जो रैखिक समीकरणों, मैट्रिसेस, और बहुपदों जैसी अवधारणाओं को एक सामान्य ढाँचा प्रदान करता है। वेक्टर स्पेस की पूर्ण परिभाषा और उसके गुणों को समझना लीनियर अलजेब्रा में आगे बढ़ने के लिए आवश्यक है। अगर आप इन अवधारणाओं को और अधिक विस्तार से समझना चाहते हैं, तो रे ऑप्टिक्स: दर्पण एवं अपवर्तन का संपूर्ण निर्देशन एवं डेरिवेशन ट्रिक्स लेख देखें, जहाँ गणितीय सिद्धांतों का भौतिकी में अनुप्रयोग समझाया गया है।
आने वाले वीडियो में हम वेक्टर स्पेस के प्रमेयों (theorems) और उप-समष्टि (subspaces) के बारे में पढ़ेंगे।
हेलो स्टूडेंट्स मेरा नाम डॉक्टर गजेंद्र पुरोहित है आज मैं आपके सामने वेक्टर स्पेस के बारे में बात करूंगा और इसकी जो
इंपॉर्टेंट प्रॉपर्टीज हैं वह हम डिस्कस करेंगे कि कोई भी अगर हमारे पास सेट है और वह अगर फील्ड पर डिफाइन हो रहा है तो क्या
ऐसी कंडीशन होगी जिस परे वह वेक्टर स्पेस बनेगा यह हम डिस्कस करेंगे पर इससे पहले जो इंटरनल कंपोजीशन है और एक्सटर्नल
कंपोजीशन है उसको हम यहां पर पढ़ने की कोशिश करेंगे प्लस थोड़ा सा पुराना रिवाइज करना पड़ेगा क्योंकि जब भी हम वेक्टर
स्पेस की बात करते हैं तो यहां पर आपको ग्रुप के बारे में आईडिया होना चाहिए खास करके जो एलियन ग्रुप होता है सेमी ग्रुप
होता है यह क्या चीज होती है यह आपको पता होना चाहिए प्लस यहां पर फील्ड का कांसेप्ट भी आपको पता होना चाहिए राइट
उसके बाद ही आपको वेक्टर स्पेस का कांसेप्ट यहां पे समझ में आएगा तो सु पहले बात करते हैं थोड़ा सा जो बेसिक है उसको
ऊपर लेके तो सुन वेक्टर स्पेस वी नो दैट द ग्रुप हैव वन सेट एंड वन बाइनरी कंपोजीशन स् अगर हमारे पास कोई भी ग्रुप होता है
उसके पास जो ऑपरेशन होता है वो हमारे पास क्या होता है स्टूडेंट एक होता है जैसे मैं बात कर रहा हं स्टूडेंट z+ ये हमारे
पास क्या होता है एक एलियन ग्रुप होता है है ना हम जानते हैं ये चार प्रॉपर्टी को सेटिस्फाई करता है दैट इज क्लोजर
एसोसिएटिव एंड आइडेंटिटी एंड इवर्स अगर बाय चांस ये कम्युनिटी प्रॉपर्टी भी सेटिस्फाई कर दे तो ये हमारे पास एक
प्रकार का अविलियन ग्रुप हो जाता है है ना और अगर ये किसी एक एलिमेंट से जनरेट होता है तो उसको हम यहां पे क्या कहते हैं मतलब
एक या दो एलिमेंट से या किसी भी एलिमेंट से जनरेट हो जाए पूरा का पूरा ग्रुप तो उसको हम यहां पे साइक्लिक ग्रुप कहते हैं
क्लियर है ये हम जानते हैं अब इसके बाद का जो कांसेप्ट आता है वो रिंग का कांसेप्ट आता है कि मान लीजिए हमारे पास z प्लस और
मल्टीप्लिकेशन है ना या इसको डॉट लगा दीजिए है ना हम जानते हैं कि z प्लस में ये अविलियन ग्रुप होना चाहिए और z डॉट के
अंदर ये सेमी ग्रुप होना चाहिए है ना ये हमारे पास क्या होना चाहिए एक अी इलियन ग्रुप होना चाहिए है ना ठीक है अबी लियन
ग्रुप होना चाहिए एंड देन ये हमारे पास क्या होना चाहिए मल्टीप्लिकेशन में सेमी ग्रुप होना चाहिए अगर ऐसा होता है और यहां
पर डिस्ट्रीब्यूशन डिस्ट्रीब्यूटर ल होता है राइट है ना लेफ्ट और राइट डिस्ट्रीब्यूटर लो होता है अगर ये कंडीशन
सेटिस्फाई हो जाती है तो वो हमारे पास रिंग कहलाता है अगर बात करी जाए कि एडिशन में और मल्टीप्लिकेशन के अंदर जो हमारे
पास मतलब दो बाइनरी ऑपरेशन के साथ जो स्ट्रक्चर बनता है जिसमें प्लस के साथ अविलियन ग्रुप और डॉट के साथ सेमी ग्रुप
तो यह जो स्ट्रक्चर होता है यह हमारे पास रिंग कहलाता है अब अगर बाय चांस ये एडिशन में भी एलियन ग्रुप बन जाए मल्टीप्लिकेशन
में भी एलियन ग्रुप बन जाए तो उस वाले केस में ये फीड हो जाता है पर हम जा ते हैं कि z मल्टीप्लिकेशन जो होता है वो हमारे पास
अी लियन ग्रुप नहीं बनाता मतलब ग्रुप नहीं बनाता है क्योंकि इसके अंदर मल्टीप्लिकेटिव इवर्स एजिस्ट नहीं करता है
तो आपके मन में सवाल उठेगा कि सर एक काम करते हैं यहां पे जो z है इसको हम क्यू कर देते हैं क्या कर देते हैं क्यू क्य एडिशन
और क्यू मल्टीप्लिकेशन हम जानते हैं कि एडिशन में ये हमारे पास अविलियन ग्रुप हो जाता है और मल्टीप्लिकेशन में हर नॉन जीरो
एलिमेंट का इवर्स एजिस्ट करता है तो इस हम जानते हैं कि ये भी हमारे पास क्या हो जाएगा एक प्रकार का एलियन ग्रुप हो जाता
है और अगर ऐसा है तो सुन ये जो पूरा स्ट्रक्चर होता होता है ये हमारे पास यहां पे क्या कहलाता है स्टूडेंट फील्ड कहलाता
है यह हम जानते हैं और यह हम पढ़ते भी हैं अब स्टें यहां पे दो चीजें हम पढ़ेंगे एक पढ़ेंगे यहां पे वेक्टर और एक पढ़ेंगे हम
यहां पे स्केलर न एक हमारे पास सेट v है जो कि नॉन एमटी सेट है इसके जो एलिमेंट्स हैं उसको हम वेक्टर्स के नाम से बात
करेंगे हां ये जो v के एलिमेंट है ये हमारे पास क्या होंगे स्टडेंट वेक्टर होंगे और जो हमारे पास फील्ड होता है
जिसके ऊपर हम इस v सेट को डिफाइन करेंगे है ना क्योंकि जो वेक्टर स्पेस होता है वो v और ए होता है मतलब फील्ड प डिफाइन होता
है तो जो फील्ड होता है उसके एलिमेंट को हम यहां पे क्या बोलते हैं स्टूडेंट स्केलर्स बोलते हैं अल्फा बीटा गामा इस
टाइप से हम इसको डिनोट करते हैं अब इसन यहां पे आता है एक कांसेप्ट दैट इज नोन एज अ बाइनरी कंपोजीशन तो सुन मैं आपके सामने
बताना चाहता हूं कि नॉर्मली हमारे पास जो वेक्टर स्पेस होता है वो हमेशा इस प्रकार से होता है दैट इज v ओ f जहां पर इसके जो
एलिमेंट होते हैं वो हमारे पास क्या होते हैं स् स्केलर होते हैं और इसके जो एलिमेंट होते हैं वो हमारे पास क्या होता
है स्टेंट वेक्टर्स होते हैं है ना ये ध्यान देने कि आवश्यकता है अब हम बात करेंगे सुन यहां पे इंटरनल कंपोजीशन या
इंटरनल बाइनरी कंपोजीशन इंटरनल बाइनरी कंपोजीशन की बात करी जाए तो वो हमेशा हम v सेट के बारे में बात करेंगे है ना हम इसके
बारे में बात करेंगे कि अगर इस v के मतलब क्योंकि हम जानते हैं कि जो v है है ना जो कि फील्ड पे डिफाइन हो रहा है तो हमेशा v
प्स जो है वो क्या होना चाहिए एक एलियन ग्रुप होना चाहिए क्या होना चाहिए भैया एलियन ग्रुप होना चाहिए है ना जब हम
पढ़ेंगे अभी परिभाषा पढ़ेंगे तो ये जो v प्लस है ये क्या होना चाहिए एक अविलियन ग्रुप होना चाहिए और ये फील्ड जो हम जानते
हैं क्या होता है अब जो जो v प्लस है ये अविलियन ग्रुप होना चाहिए तो इस बिलियन ग्रुप की चार प्रॉपर्टी होती है एक होता
है क्लोजर एसोसिएटिव आइडेंटिटी इवर्स है ना और लास्ट में आता है कमरेट प्रॉपर्टी तो अविलियन ग्रुप की जो पहली प्रॉपर्टी
होती है वो क्लोजर प्रॉपर्टी होती है अगर कोई भी दो एलिमेंट यहां पे लूं और इस पे ऑपरेशन लगाऊं तो वापस इसी में आना चाहिए
है ना यही हमारे पास इंटरनल बाइनरी कंपोजीशन कहलाता है कि किसी भी सेट के दो एलिमेंट को आप लो और जो भी ऑपरेशन दे रखा
है खैर यहां पर हमने एडिशन दे रखा मे भी मल्टीप्लिकेशन भी हो सकता है पर जब भी हम वेक्टर स्पे की बात करेंगे उस वाले केस
में हमारे पास जो v होता है वो प्लस में ही अविलियन ग्रुप बनाता है पर अगर हम इंटरनल कंपोजीशन को समझे अगर इसको साइड
में रख लें तो भया इंटरनल कंपोजिशन का मतलब ये होता है कि जो भी हमारे पास ऑपरेशन दे रखा है तो आपको सेट से दो
एलिमेंट लगा लेने हैं और ऑपरेशन लगाना है अगर ऑपरेशन लगाते ही वापस वो उसी में आ जाता है मतलब क्लोजर प्रॉपर्टी सेटिस्फाई
कर देता है तो वो हमारे पास क्या होता है इंटरनल बाइनरी कंपोजीशन कहलाता है नॉर्मली हम यहां पे वेक्टर्स पे लगाते हैं और यह
हमेशा जो रहेगा वो प्लस पे ही रहेगा है ना तो सन दो अगर हम यहां पे एलिमेंट लें तो उस पे अगर हम ऑपरेशन लगाए तो वापस वो
वेक्टर ही आना चाहिए अगर ऐसा है तो वो हमारे पास क्या होगा स्टूडेंट इंटरनल बाइनरी कंपोजीशन होता है स्टें अगर मैं
यहां तो मैंने खैर v के बारे में बात करी नॉर्मली अगर हम यहां पे v जो है वो z हो r हो q हो सो वैसे z हो नहीं सकता क्योंकि v
जो है वो हमेशा हमारे पास क्या होना चाहिए स्टूडेंट जब हम वेक्टर स्पेस की बात करेंगे तो फील्ड से बड़ा होना चाहिए है ना
तो फील्ड से बड़ा ओबवियसली फील्ड ही होता है राइट तो स् z हमारे पास फील्ड नहीं होता तो इसकी बात तो नहीं कर सकते पर मैं
खाली समझाने के लिए बता रहा हूं कि z के अगर दो एलिमेंट ले उसको ऐड करें तो भी z में ही आता है मल्टीप्लाई करें तो भी z
में ही आता है तो ये हमारे पास इंटरनल बाइनरी कंपोजीशन को सेटिस्फाई करता है इसी प्रकार से r q और c में भी ऐसा होता है अब
बात करते हैं सुन एक्सटर्नल बाइनरी कंपोजीशन सुन एक्सटर्नल बाइनरी कंपोजीशन क्या होता है कि जब भी हम वेक्टर स्पेस की
बात करते हैं तो मैंने आपके सामने बोला है ये हमेशा v ओ f होता है यहां पे यह होता है कि जब भी हम कोई एक एलिमेंट यहां से ले
अल्फा और यहां से मैंने एक एलिमेंट या v अगर मैं इन दोनों को मल्टीप्लाई करता हूं तो भैया ये v में आना चाहिए मतलब बाहर
वाले में आना चाहिए अगर ऐसा है तो ये एक्सटर्नल बाइनरी कंपोजिशन की प्रॉपर्टी को सेटिस्फाई करता है मतलब यहां पे ऐसा
लिखते हैं v क्रॉस f जो है वो क्या आना चाहिए v आना चाहिए या हम ऐसा बोले कि अगर स्केलर को मैं वेक्टर से मल्टीप्लाई करूं
तो वेक्टर क्वांटिटी आनी चाहिए है ना ओबवियसली वेक्टर क्वांटिटी आगी तभी तो v में जाएगा वो क्लियर है तो यार ये आपको
ध्यान देने की आवश्यकता है जैसे मैं आपके सामने बताना चाह रहा हूं मैंने आपके सामने फील्ड है और जो इससे बाहर वाला होता है ये
हमेशा इससे बड़ा होता है राइट तो ओबवियसली बाहर वाला भी हमारे पास क्या होना चाहिए फील्ड होना चाहिए अब फील्ड कौन-कौन से
होते हैं आपको पहले पता होना चाहिए तो फील्ड हमारे पास कौन-कौन से होते हैं ये आपको बता दूं देखो मैं अभी परिभाषा
बताऊंगा तो और चीज समझ में आएगी अभी तो खाली मैं आपको थोड़ा सा आईडिया दे रहा हूं सुन q प्लस मल्टीप्लिकेशन हमारे पास फील्ड
होता है या डोट ले लो बेस्ट है है नान उसके बाद r प्लस डॉट हमारे पास फीड होता है देन c प्लस डॉट हमारे पास यहां पे क्या
होता है स्टूडेंट फीड होता है क्लियर है ये सब के सब हमारे पास यहां पे क्या होता है स्टूडेंट फीड होते है क्लियर है अब मैं
आपके सामने बताना चाहता हूं कि अगर मैं आपके सामने q ओवर q ले लू है ना मान लीजिए ये भी हमारे पास फील्ड फील्ड को भी मैंने
q ले लिया और जो वेक्टर है v है उसको भी मैंने यहां पे फील्ड ले लिया अगर मैं एक एलिमेंट यहां से लेता हूं मान लीजिए मैंने
यहां से अ 2/3 एक एलिमेंट ले लिया और यहां से मैंने 1/3 एक एलिमेंट यहां से ले लिया अगर मैं इसका ऑपरेशन लगाऊं तो क्या आना
चाहिए भैया क्य में आना चाहिए हां जी आ रहा है ठीक है तो यहां पे स्केलर मल्टीप्लिकेशन जो मतलब एक्सल कंपोजीशन जो
है वो या एक्सल मल्टीप्लिकेशन की प्रॉपर्टी यहां पे क्या हो रही है स्टूडेंट सेटिस्फाई हो रही है अब मैं अगर
आपके सामने ये ले लूं कि भैया मैंने ले लिया q ओ r r है ना मान लीजिए ये ले लिया r में मैंने एक काम करा एक एलिमेंट मैंने
√2 ले लिया हम जानते हैं ये रियल नंबर है और यहां से मैंने 2/3 ले लिया है ना q से मैं जानता हूं इसका जो प्रोडक्ट है वो
क्या आना चाहिए भाई इस बाहर वाले में आना चाहिए याद है ना है ना भाई v में आना चाहिए बट बेटा हम देख रहे हैं ये तो v में
आता ही नहीं है राइट इसका मतलब ये जो है ये एक्सटर्नल बाइनरी कंपोजीशन की प्रॉपर्टी को सेटिस्फाई नहीं कर रहा है
भैया ये नहीं कर रहा है ध्यान दीजिएगा क्लियर है आपके मन में सॉल्व होगा सर q ओवर c करेगा क्या तो c में अगर मैं आयो ले
लूं यहां से मैं 2/3 ले लूं अगर मैं मल्टीप्लाई करूं तो 2 आयो बा 3 भैया हम जानते हैं यार ये क्य में नहीं जाता है है
ना क्योंकि तो हमारे पास इमेज नहीं जा रहा इसका मतलब यह भी इस एक्सटर्नल बाइनरी कंपोजीशन की प्रॉपर्टी को सेटिस्फाई नहीं
कर रहा है क्लियर है भैया अंदर का एलिमेंट और बाहर के एक-एक एलिमेंट को जब प्रोडक्ट करें तो बाहर के अंदर जाना चाहिए मतलब
बाहर के एलिमेंट में जाना चाहिए बाहर के सेट में जाना चाहिए अगर ऐसा होता है तो एक्सन बाइनरी कंपोजीशन होता है तो यार
आपको यहां पे एक सीखने को मिलता है कि यार गुरुजी अंदर वाला बड़ा ले रहे हो बाहर वाला छोटा ले रहे हो तो सर छोटे में से अ
कोई बाह बड़े में से एलिमेंट लिया एक छोटे में से लिया तो छोटे में कैसे जाएगा व तो बड़े में जाएगा तो पॉसिबल है नहीं इसका
मतलब यह हुआ कि जब भी v और f हम वेक्टर स्पेस डिफाइन करेंगे तो उसमें एक्सटर्नल बाइनरी कंपोजीशन की प्रॉपर्टी बहुत बड़ा
रोल प्ले करती है और वह सेटिस्फाई होनी चाहिए तो उसके लिए हमेशा बाहर वाला जो सेट है वह अंदर वाले से क्या होना चाहिए बड़ा
होना चाहिए मतलब यह हुआ कि अगर हम यहां पे बात करेंगे तो हम ऐसा कर सकते हैं कि q और q चलो ठीक है हो रहा है अगर हम यहां पे
करना चाह रहे हैं तो यह r ओ q होना चाहिए और c ओ q होना चाहिए अगर हम कोई भी यहां पे एलिमेंट ले रेशनल नंबर यहां से
कॉम्प्लेक्शन नंबर ले दोनों का प्रोडक्ट करेंगे तो ओबवियसली वो स में जाएगा यहां से अगर ले यहां से ले तो बेटा इसका
प्रोडक्ट हमेशा r होगा है ना इसी प्रकार से अगर मैं बात करूं यहां पे तो r ओ r हो जाएगा r ओ c हो जाएगा इसी प्रकार से c ओवर
सी होगा सुनिए सब के सब हमारे पास एक्सटर्नल बाइनरी कंपोजीशन की प्रॉपर्टी को क्या करेंगे सेटिस्फाई करते हैं ये
टाइप अगर अंदर बड़ा आ जाए बाहर छोटा आ जाए देखो इसको याद रखने का तरीका ये है कि हमेशा जो
गेट होता है ना या जहां पर भी मेन गेट होता है वहां पर या बाहर की तरफ हमेशा मजबूत आदमी को खड़ा किया जाता है या थोड़े
से ताकतवर आदमी को खड़ा किया जाता है ताकि अंदर वाले कमजोर आदमी की वो क्या कर सके प्रोटेक्शन कर कर सके तो यह तरीका है कि
बाहर वाला जो होना चाहिए वो क्या होना चाहिए थोड़ा सा भारी होना चाहिए अंदर वाले से है ना अगर ऐसा होगा तो वो हमारे पास
क्या बन जाएगा स्टूडेंट एक्सन बाइनरी कंपोजिशन प्रॉपर्टी को सेटिस्फाई कर जाएगा अब आपके मन में सवाल उठेगा कि गुरुजी यार
फिर तो सर ऐसा भी तो कर सकते हैं कि सर q ओवर जड है ना सर ये भी तो वेक्टर स्पेस हो सकता है है ना तो यहां पे सबसे बड़ी
दिक्कत है कि स्टूडेंट जो अंदर वाला है वो फीड होना चाहिए तो अंदर वाला z जो होता है ये फीड नहीं होता है ना क्योंकि
मल्टीप्लिकेटिव मल्टीप्लिकेशन में इसके पास इवर्स एजिस्ट नहीं करता है तो स्टें ये कभी भी हमारे पास अ वेक्टर स्पेस बनेगा
ही नहीं है ना क्योंकि वेक्टर स्पेस बनने के लिए अंदर जो होना चाहिए वो क्या होना चाहिए स्टूडेंट फीड होना चाहिए नॉर्मली
जितने भी वेक्टर स्पेस के कंसेप्ट होते हैं जब अगर आप कॉम्पिटेटिव एग्जाम्स की तैयारी करते हैं खास करके सीएसआईआर नेट और
आईडी जम वहां पे इसका नॉलेज होना अति आवश्यक हैन बात करते हैं अब हम आते हैं वेक्टर स्पेस की परिभाषा के अंदर कि यार
एक्चुअली वेक्टर स्पेस होता क्या है तो अगर हमारे पास कोई भी फेल्ड दे रखा है जो कि लाइक फील्ड हमेशा एडिशन और
मल्टीप्लिकेशन में बनता है बी ए फील्ड अ नॉन एमटी सेट v इज कॉल्ड अ वेक्टर स्पेस ओवर द फील्ड एफ है ना इसमें ये जो v होता
है ये हमारे पास वेक्टर स्पेस होता है और हमेशा ये फील्ड पे डिफाइन होता है है ना इफ फॉर द टू बाइनरी कंपोजीशन एक तो हमारे
पास एडिशन होता है मतलब दो एलिमेंट अगर मैं यहां पे लूं तो उसका जो एडिशन है वो वापस वेक्टर होना चाहिए एंड दूसरा हमारे
पास यहां पे मल्टीप्लिकेशन होता है कि अगर मैं एक एलिमेंट फील्ड से लूं और एक एलिमेंट वेक्टर से लूं मतलब एक्सनल बाइनरी
कंपोजीशन वो हमेशा क्या होना चाहिए वेक्टर होना चाहिए अगर ये कंडीशन यहां पे सेटिस्फाई होती है है ना तो हम यहां पे ये
पांच और इंपॉर्टेंट प्रॉपर्टीज हैं ये यहां पे हम देखेंगे एक तो जो v है जो कि फील्ड पे डिफाइन हो रहा है ये हमेशा प्लस
में एक अलिन ग्रुप होना चाहिए और जब अयन है तो ये प्रॉपर्टी बाय डिफॉल्ट सेटिस्फाई हो जाती है सोचने की आवश्यकता नहीं है
यहां पे हमारे पास डिस्ट्रीब्यूटर लॉ होता है कि अगर स्केलर को हम वेक्टर के साथ डिस्ट्रीब्यूटर है ना ये एडिशन दरखा तो ये
इसके साथ और इसके साथ चला जाएगा बहुत सिंपल सी बात है है ना अगर हम यहां पे स्केलर को अ वेक्टर के साथ डिस्ट्रीब्यूटर
तो ये वेक्टर इसके साथ अंदर की तरफ मल्टीप्लाई हो जाता है अगर अल्फा बीटा * u है तो स्टूडेंट ये इसको इस प्रकार से लिखा
जा सकता है सिंपल सी बात है इस एक और होता है दैट इज 1 . u = u जहां पर u हमारे पास v से जा रहा और वन हमारे पास f से जा रहा
और f जो होता है वो क्या होता है स्ट यूनिटी होती है दैट इज मल्टीप्लिकेटिव बा आइडेंटिटी और ओबवियसली भैया फील्ड बन रहा
है तो फील्ड के पास एडिटिव आइडेंटिटी भी होती है और मल्टीप्लिकेटिव आइडेंटिटी भी होती है तो जब भी अगर आपको किसी को वेक्टर
स्पेस प्रूव करना है तो नॉर्मली हम यहां पे एक तो ये चीज देखते हैं एक ये चीज देखते हैं और एक हमारे पास स्केलर अ लाइक
मल्टीप्लिकेशन वाली प्रॉपर्टी देखते हैं कि अगर हमारे पास यहां पे अल्फा ड u जो है वो हमारे श क्या होना चाहिए स्टूडेंट अ v
में होना चाहिए फॉर ऑल अल्फा बिलोंग टू f एंड v बिलोंग टू v है ना अगर ऐसा है तो ये हमारे पास कंडीशन सेटिस्फाई होनी चाहिए
अगर ये कंडीशन सेटिस्फाई होती है तो हम हमारे पास वेक्टर स्पेस बन जाता है क्लियर है अब मैं आपके सामने कुछ एग्जांपल लेके
समझाने की कोशिश करता हूं लेट v बी द वेक्टर स्पेस ओ f देन इट इज डिनोटेड बाय v और f है ना नॉर्मली वेक्टर स्पेस को v और
v और f से दिखाया जाता है इस मैं आपको बता दूं कि मैंने अभी आपके सामने एग्जांपल दिया था कि दैट इज q ओ q है ना उसके बाद
मैंने बताया था r ओ q देन मैंने आपको बोला था c ओ q फिर आपको मैंने बोला था कि स्टूडेंट r ओ r है ना फिर आपको बोला था
मैंने सुन यहां पे लाइक r ओ q हो गया ना फिर हमारे पास होता है सुन c ओवर r हो गया c ओ r हो जाएगा एंड c ओवर c होगा दीज ऑल
आर द वेक्टर स्पेस ये सब के सब वेक्टर स्पेस बनेंगे ये सभी के सभी प्रॉपर्टी को सेटिस्फाई करेंगे आपके मन में सवाल उठेगा
सर ये प्रूव करके बताओ सर ये होगा कि नहीं होगा तो बढ़िया देख लो यार मेरी बात सुनो हमारे पास क्या होना चाहिए सुन क प्लस
अविलियन ग्रुप होना चाहिए भैया होता ही है पहली प्रॉपर्टी सेकंड प्रॉपर्टी यहां पे क्या होती है स्टडेंट मैंने आपको बताया था
स् सेकंड प्रॉपर्टी हमारे पास ये होती है कि अगर हम यहां पे लाइक जैसे मैं आपके सामने बात कर रहा हूं q और q के बारे में
है ना तो पहली प्रॉपर्टी तो ये होनी चाहिए कि q प्लस हमारे पास क्या होना चाहिए अभी लेन ग्रुप होना चाहिए भा हो रहा है सेकंड
प्रॉपर्टी हमारे पास ये होती है कि अगर मैं q से एक एलिमेंट लूं और यहां से भी दो एलिमेंट लूं तो ये डिस्ट्रीब्यूटर जाना
चाहिए हां तो बराबर ही आएगा है ना भाई मल्टीप्लिकेशन मंदर पूछेगा तो दोनों बराबर ही आते हैं है ना सु ये वाली मतलब ये ये
बाय डिफॉल्ट हो जाती है इसमें कुछ लफड़ा नहीं पड़ता मैंने अब ये देखना चाहिए कि 1 ड u य होना चाहिए तो बेटा हम जानते हैं कि
इस q के अंदर हमारे पास ए मल्टीप्लिकेटिव आइडेंटिटी होती है हो जाएगा तो सुनिए हमारे पास वेक्टर स्पेस हो जाता है क्लियर
है यर अब हमारे पास यहां पे एक एग्जाम में कभी-कभी ऐसे पूछ लिया जाता है कि द सेट ऑफ फंक्शन ऑफ ल ऑर्डर एंड टपस ऑफ द फील्ड एफ
इज वेक्टर स्पेस ओवर द फील्ड ए नॉर्मली ये इस प्रकार से हम लिख सकते हैं दैट इज r ए ओ r है ना है ना जहां पर हमारे पास मैंने
वैसे यहां पर दे रखा है सु fn1 पल अ जो फील्ड है जिसके अंदर हमारे पास जो एलिमेंट है वो n टपल्स है राइट इस
प्रकार से हमारे पास दैट इज u1 u2 अगर हमारे पास मान लीजिए f2 होता तो टू डबल हो जाता जैसे कभी-कभी एग्जाम में आपसे बोला
जाए कि r2 ओ r तो उस वाले केस में हमारे पास जो एलिमेंट होंगे वो क्या होंगे स्टूडेंट इस प्रकार से होंगे ना दैट इज u1
एंड u2 टाइप के एलिमेंट होंगे ना मतलब इस r के अंदर है ना मतलब r2 के अंदर इस प्रकार के एलिमेंट होते हैं या v1 v2 जैसे
भी आप डिनोट करना चाहे उसको कर सकते हैं ना r3 है तो थ्री टपल्स हो जाएंगे है ना जैसे हम r3 ओवर आ रहे हैं तो x वा ज पढ़ते
हैं है ना अगर r4 ओवर आ रहे तो x वा ज w पढ़ेंगे क्लियर है है ना बस ये ध्यान देने का तो n है तो n एलिमेंट हमारे पास यहां
पे हो रहा है अब आपको ये देखना है कि स्टूडेंट ये जो फील्ड है फील्ड के एलिमेंट को हमने यहां पे u1 u2 से दिखाया और
वेक्टर के एलिमेंट को हमने v1 v2 vn-hax वेक्टर ये भी तो हम जानते हैं इसका एडिशन हमारे पास वेक्टर ही होगा अब अगर
बाय चांस मैं स्केलर जो है वो अल्फा लेता हूं ना अल्फा टाइप का एलिमेंट ले रहा हूं है ना तो स्न यहां पे चूंकि हमारे पास ये
टपल नहीं है ना फील्ड टपल नहीं तो यहां से मैंने अल्फा ले लिया और मैं बताना चाहता हूं कि यहां पे अगर n टपल है ओबवियसली ये
हमारे पास वेक्टर है क्योंकि जो एलिमेंट है वो यहां से आ रहे है हमारे पास है ना और जो हमारे पास अंदर है जैसे अगर आप बात
करें सु f f ए और f तो ये तो हमारे पास सिंगल होगा और ये हमारे पास क्या होगा एंड टपल्स होंगे ना तो अगर मैं इसका स्केलर
मल्टीप्लिकेशन करूं तो बेटा वापस ये किस में आना चाहिए जाए है ना ठीक है तो ये हमारे पास स्केलर
मल्टीप्लिकेशन की प्रॉपर्टी भी सेटिस्फाई कर रहा है है ना तो दोनों प्रॉपर्टी सेटिस्फाई हो गई मतलब ये हमारे पास अ लाइक
स्टार्ट की दो प्रॉपर्टी को तो सेटिस्फाई कर देगा अब हम बात करेंगे स् यहां पे कि जो हमारे पास
fn1 वाला जो होता है ये हमेशा एक प्रकार का अलिन ग्रुप होता है ना नेक्स्ट प्रॉपर्टी हमारे पास क्या होता है
स्टूडेंट का अगर एलिमेंट लेके चले तो क्लोजर प्रॉपर्टी सेटिस्फाई होना चाहिए तभी
क्लोजर तो हमने देख लिया सेकंड हमारे पास एसोसिएटिव होना चाहिए तो भैया प्लस में हमेशा एसोसिएटिव होता ही है है ना ठीक है
अब दे तीसरी प्रॉपर्टी यहां पे होनी चाहिए कि भैया हमारे पास यहां पे आइडेंटिटी एलिमेंट होना चाहिए तो 00 हमारे पास क्या
हो जाएगा इसका आइडेंटिटी एलिमेंट हो जाएगा फिर हमारे पास इवर्स एजिस्ट करना चाहिए तो भैया मैं आपके सामने अगर v ले लू यहां पे
है ना v इ इक्वल टू मैंने ले लिया v1 v2 है ना v ए है तो इसका जो इवर्स होगा वो क्या हो जाएगा स्टें - v हो जाएगा है ना
माइनस का v1 माइनस का v2 है ना माइनस का v1 तभी तो इसको दोनों को ऐड करेंगे तो जीरो आ जाएगा तो ये हमारे पास एक प्रकार
का और अविलियन प्रॉपर्टी वैसे भी एडिशन में होती है य मतलब अगर मैं u + v करूं या v + य करो अल्टीमेटली दोनों बराबर आता है
तो ये हमारे पास अविलियन ग्रुप तो हो ही जाएगा अब नेक्स्ट हमारे पास होता है स्टूडेंट डिस्ट्रीब्यूटर लॉ है ना तो
डिस्ट्रीब्यूटर लो सेकंड प्रॉपर्टी हमारे पास यहां पे क्या होती है कि अगर हम अल्फा ले यहां पे है ना स्केलर ले और अंदर हमारे
पास यहां पे क्या ले स्टूडेंट मान लीजिए u + v ले तो हम जानते हैं कि अल्फा u प्स अल्फा v हो जाना चाहिए है ना ये हमारे पास
यहां पे होना चाहिए दूसरा हमारे पास पास ये होता है कि अगर अल्फा + बीटा और मैं यहां पे u ले लूं तो ये हमारे पास अल्फा u
+ बीटा v बीटा u होना चाहिए राइट तो ये प्रॉपर्टी हमारे पास सेटिस्फाई होनी चाहिए नेक्स्ट हमारे पास ये भी होता है अगर हम
बात करें स् अल्फा बीटा u ले तो स् ये हमारे पास अल्फा बीटा u तो मुझे लगता है कि इस जदा फर्क पड़ने वाला है नहीं ये भी
होता ही है एंड लास्ट हमारे पास एक और होना चाहिए कि भैया 1 . u जो है ये हमारे पास क्या आना चाहिए यू आना चाहिए मतलब जो
फीड हो रहा है जिसके ऊपर ये डिफाइन हो रहा है है ना उसके पास मल्टीप्लिकेटिव अ आइडेंट होनी चाहिए तो ओबवियसली होती है तो
ये सभी के सभी प्रॉपर्टी को यहां पे क्या कर देगा स्टूडेंट सेटिस्फाई कर देगा मतलब ये हमारे पास क्या हो जाएगा स्टूडेंट फीड
मतलब वेक्टर स्पेस हो जाएगा क्लियर है है ना वेरिफिकेशन मैंने बता रखा है स्टूडेंट अगर आप चाहे तो इसको ना जैसे f ए प्लस जो
है वो हमारे पास अविलियन ग्रुप होना जिसकी आइडेंटिटी एलिमेंट ये होती है इसके इवर्स ये होता है है ना फिर हमारे पास यहां पे
अल्फा जो सेकंड वाली प्रॉपर्टी डिस्ट्रीब्यूटर लॉ है ना वो हमारे पास यहां लग जाता है है ना फिर हमारे पास
नेक्स्ट थर्ड वाला जो है लो वो य लग जाता है है ना इस प्रकार से आप क्योंकि एग्जाम में आपको प्रूफ करना पड़ेगा लिख के बताना
पड़ेगा तो लिख के आप अल्फा बीटा u इस तरह से लिया तो अल्फा बीटा को मान लीजिए u हमने u1 u2 u ले लिया इसको आप अल्फा बीटा
को मल्टीप्लाई करके हम इसको इस प्रकार से लिख सकते हैं एक हमारे पास होता है कि आइडेंटिटी इसमें होना चाहिए तो . u लेंगे
है ना तो u हमारे पास इस प्रकार का है वन को मल्टीप्लाई करेंगे तो वापस हम जानते हैं कि 1 . u क्या होता है u1 ही होता है
राइट है ना तो अल्टीमेटली वापस u आ रहा मतलब 1 . u u आ रहा मतलब ये हमारे पास क्या हो जाएगा वेक्टर स्पेस हो जाएगा
क्लियर है आगे बढ़ते हैं स् नेक्स्ट हमारे पास द सेट ऑफ ऑल m क्रॉस n रियल मैट्रिसेज इज वेक्टर स्पेस ओवर द फील्ड आर ऑफ रियल
नंबर विद रिस्पेक्ट टू द एडिशन एंड मैट्रिक्स एंड स्केलर मल्टीप्लिकेशन ऑफ़ द मैट्रिस है ना एक तो हमारे पास एडिशन होना
चाहिए और एक हमारे पास स्केलर मल्टीप्लिकेशन होना चाहिए स् हमें यहां पे एक बात ध्यान देने की जरूरत है कि जो भी
हमारे पास वेक्टर स्पेस दे रखा है वो किस फील्ड पे डिफाइन हो रहा है यह बहुत इंपॉर्टेंट रोल प्ले करता है है ना तो अगर
हम बात करें यहां पे तो ये m है और ये हमारे पास m कॉस n है और यह हमारे पास डिफाइन कर रहे हम r पे तो सुनि जो m है है
ना जिसके जो इसके एलिमेंट आ रहे हैं मैट्रिस के वो भी क्या होना चाहिए इससे बड़े वाले फील्ड के आना चाहिए या तो r से
आना चाहिए या c से आना चाहिए तभी ये वेक्टर स्पेस बनेगा है ना अगर आपसे ये बोल दिया जाए कि मैट्रिक्स के जो एलिमेंट है
वो हमारे पास रेशनल नंबर है तो फिर भैया ये हमारे पासस वेक्टर स्पेस नहीं क्योंकि इसके अंदर स्केलर मल्टीप्लिकेशन की
प्रॉपर्टी सेटिस्फाई नहीं होगी ये ध्यान देने की आवश्यकता है क्लियर है तो सुनिए यहां पे अगर आपसे बोला जाए कि भैया ये
वेक्टर स्पेस बनेगा कि नहीं बनेगा तो एक तो हमारे पास दो प्रॉपर्टी स्टार्ट में होती है कि अगर हम दो मैट्रेस लें है ना
क्योंकि हम हम ये जानते हैं कि दो मैट्रेस अगर हम लेंगे तो एक तो हमारे पास क्लोजर प्रॉपर्टी सेटिस्फाई होनी चाहिए a + b अगर
m से लेता हूं तो उसका सम भी हमारे पास इसमें ही आना चाहिए एंड एक स्केलर मल्टीप्लिकेशन होती है कि एक एलिमेंट
अल्फा यहां से ले लू मैं और दूसरा मैट्रिक्स यहां से लू और अल्फा को इसके मल्टीप्लाई करूं तो वापस ये किस में आना
चाहिए स्टूडेंट ये m में आना चाहिए अगर ऐसा होता है तो भैया ये हमारे पास यहां पे क्या हो जाएगा वेक्टर स्पेस की स्टार्ट की
दो कंडीशन को सटस क्योंकि जब भी हम वेक्टर स्पेस को डिफाइन करते हैं तो पहली दो कंडीशन ये होती है क्या होती है पहली
कंडीशन दो कंडीशन स् हम जानते हैं कि v क्रॉस v जो है वो हमारे पास क्या होना चाहिए v में जाना चाहिए और एक हमारे पास
यहां पे होता है स्टडेंट v क्रॉस f जो है वो हमारे पास क्या जाना चाहिए v में जाना चाहिए राइट है ना तो वही सम दो एलिमेंट
लेंगे तो खैर यहां पे जो ऑपरेशन लगता है वो हमारे पास एडिशन लगता है ना सुन ध्यान द यहां ऑपरेशन एडिशन लगता है और यहां पे
हमारे पास क्या लगता है सुन मल्टीप्लिकेशन लगता है ना इसको मल्टीप्लिकेशन ऑपरेशन हम बोलते हैं ना दो एलिमेंट लेंगे दोनों पे
एडिशन लगाएंगे तो वापस v होगा दो एक फील्ड का एलिमेंट लेंगे एक वेक्टर का एलिमेंट लेंगे है ना दोनों का प्रोडक्ट करेंगे तो
वो क्या आना चाहिए v में जाना चाहिए तो ये हमने यहां पे देख लिया है ना ये लग ही रहा है है ना ठीक है अब हम क्या करेंगे उसके
बाद नेक्स्ट हमारे पास होता है कि जो m है वो एडिशन में क्या होना चाहिए एक अविलियन ग्रुप बनाना चाहिए तो ओबवियसली हमारे पास
मैट्रिक्स का जो होता है वो एडिशन में अविलियन ग्रुप बनता है इसमें दिमाग लगाने की आवश्यकता नहीं है ना m प् जो होता है
वो बिलियन ग्रुप होता है रो इसकी आइडेंटिटी हो जाती है है ना और माइनस के जो एलिमेंट होते हैं - ए जो होता है वो
उसका इवर्स हो जाता है फिर हम जानते हैं स्टूडेंट कि मैट्रिक्स के अंदर स्केलर अगर मल्टीप्लिकेशन प्रॉपर्टी जो होती है वो
मैट्रिक्स हमेशा सेटिस्फाई करती है है ना अल्फा a प् अल्फा b हो जाएगा है ना अगर अल्फा + बीटा * a तो बेटा ये अंदर चला
जाएगा अल्फा बीटा a तो ये अल्फा बीटा a हो जाएगा और ड ए करें तो ये a आ जाएगा तो m जो होगा ये हमेशा क्या होगा वेक्टर स्पेस
हो जाएगा बस यह थोड़ा सा ध्यान देने की जरूरत है कि जो m के एलिमेंट है वो किस फील्ड से आ रहा है अगर आपके पास जो फील्ड
जिस परे डिफाइन हो रहा है वो अगर उससे बड़ा है तो फिर तो बन जाएगा उससे छोटा है तो फिर स्केलर मल्टीप्लिकेशन की जो या
एक्सटर्नल बाइनरी कंपोजिशन की प्रॉपर्टी है वो सेटिस्फाई नहीं होगी और वो इसकी वजह से दिक्कत कर जाएगा सो नेक्स्ट देखिए द
सेट p एक ऑफ ऑल पॉलीमर इन वन इंडिटरमिनेट x र अ फील्ड f इज अ वेक्टर स्पेस ओ f विद रेस्पेक्ट टू द एडिशन ऑफ पॉलिनॉमियल एंड
मल्टीप्लिकेशन ऑफ पॉलिनॉमियल बाय एलिमेंट ऑफ f मतलब स्केलर मल्टीप्लिकेशन राइट तो सुन अगर हमारे पास इस प्रकार की कोई भी
पॉलीमेल दे रखी है तो आपको यह पता लगाना है सुन यहां पे एक बात ध्यान देने की जरूरत है कि जो भी हमारे पास पॉलीमेल दे
रखी है उसकी कोई फाइट डिग्री नहीं मतलब कोई ऐसा नहीं कि भाई 2 डिग्री पॉलीमोल या 3 डिग्री पॉलीमेल है ना आपसे बोला जा रहा
है कि हमारे पास पॉलीमर का कलेक्शन दे रखा है जिसकी डिग्री मतलब कुछ भी हो सकती है राइट है ना मतलब वो कितने भी डिग्री की
पॉलिनॉमियल हमारे पास हो सकती है तो ये हमेशा एक वेक्टर स्पेस बनाएगा तो स् यहां पे सबसे पहले तो हम ये देखेंगे कि दो अगर
हम यहां पे पॉलीमेल ले तो उसका एडिशन भी क्या होना चाहिए पॉलीमेल होना चाहिए और एक हमारे पास यहां पे क्या होना चाहिए
स्टूडेंट स्केलर से अगर इस पॉलीमेल को मल्टीप्लाई करें तो वो वापस हमारे पास पॉलीमेल जैसा ही दिखना चाहिए क्योंकि जो
भी हमारे पास पॉलीमेल हो रही है वो हमेशा फील्ड पे डिफाइन होती है तो हमारे पास ये दो पॉलीमर ली तो हम जानते हैं इसका सम भी
हमारे पास इसी टाइप का आएगा राइट और अगर हम किसी स्केलर से मल्टीप्लाई करें तो ये भी हमारे पास
नॉर्मली इस प्रकार का जो वेक्टर स्पेस होता है उसको हम इस प्रकार से लिखते हैं दैट इज v ओवर f जहां पर v जो होता है वो
हमारे पास क्या होता है r एक होता है है ना एक आर ए एक भी होता है तो आर एक होता है वो एट मोस्ट n डिग्री पॉलीमेल होता है
है ना एग्जैक्ट n डिग्री पॉलीमेल कभी भी वेक्टर स्पेस नहीं बनाता है या तो हमारे पास डिग्री जो है उसकी n या n से कम होनी
चाहिए तभी वो हमारे पास वेक्टर स्पेस बनाएगा क्लियर है तो इस हमारे पास यहां पे हमने यहां p एक ले लिया r एक को य p एक ले
रगा तो रोने की जरूरत नहीं है गुरुजी ये क्या है है ना ये p एक लेले लो यहां पे है ना तो स् ये जो px2 अगर हम पॉलीमेल लेंगे
तो ओबवियसली पॉलीमेल का सम हमारे पास पॉलीमेल आएगा राइट एंड अगर अल्फा से मल्टीप्लाई करेंगे तो भी हमारे पास वो
पॉलीमेल आएगी बस ये ध्यान देने की जरूरत है कि ये जो पॉलीमेल है इसके कॉफिश एंट कहां से आ रहे है है ना स्टूड जब भी हम
बात करेंगे जैसे मैं आपके सामने बोलता हूं कि मान लीजिए वेक्टर स्पेस ओवर r दे रखा है तो भैया इस पॉलीमेल के जो कॉफिश है वो
या तो r से आने चाहिए या c से आने चाहिए इससे बड़े से आने चाहिए है ना अगर आपसे बोला जाए कि सर ये ओ q दे रखा है और v
हमारे पास ये दे रखा है तो सर किस केस में वेक्टर स्पेस बनेगा तो यहां पे जो v है वो q मतलब उसके जो कॉफिश है है ना यह जो
हमारे पास ए है य वह या तो q से आना चाहिए या r से आना चाहिए या c से आना चाहिए मतलब इससे बड़े से आना चाहिए है ना तभी यह
वेक्टर स्पेस बनेगा बच्चे बहुत बड़ी गलती कर जाते हैं है ना कि मान लीजिए अगर आपसे कुछ ऐसा बोल दिया जाए कि भैया बताओ आपसे
बोला जाए कि अह अ v ओ r दे रखा है जहां पर v हमारे पास एक पॉलीमेल है जिसके कफिट रेशनल नंबर दे रखे हैं तो भैया फिर ये
वेक्टर स्पेस नहीं बनेगा क्योंकि स्केलर मल्टीप्लिकेशन में वो रेशनल से मल्टीप्लाई करेगा तो वो रियल नंबर बन जाएगा और जो कि
इस v में नहीं आएगा तो ये थोड़ा सा समझने वाली बात है अब स्टें ये तो हो गया अब उसके बाद ये जो पॉलीमेल वाला है है ना
देखो हमारे पास हमने एडिशन वाली प्रॉपर्टी देख ली एंड एक हमारे पास एक्सर्नल बाइनरी कंपोजीशन देख लिया अब हम यहां पे देखेंगे
कि जो हमारे पास px3 हो जाता है है ना क्योंकि यहां पे अगर बात करी जाए तो जीरो जो हमारे पास
पॉलिनॉमियल होगी वो इसकी आइडेंटिटी हो जाएगी और - px5 से मल्टीप्लाई कर दिया जाए तो वो उसका
लाइक इवर्स हो जाएगा है नाना और यह हमारे पास अ लाइक कमटी तो होती ही है तो v प्स जो मतलब
px1 हमारे पास आता है दैट इज डिस्ट्रीब्यूटर लो कि अगर हम यहां पे दो पॉलिनो मिल ले है ना और अल्फा से
मल्टीप्लाई करें तो ओबवियसली हम इसको कर सकते हैं यहां पे इस प्रकार से हो जाएगा देन हम अल्फा + बीटा * px1 + ब
px2 x की तरह से हम इसको लिख सकते हैं सो इन 1px px1 और वन हमेशा फील्ड में होता ही है जिसके ऊपर ये पॉलिनॉमियल डिफाइन हो रही
है एज अ वेक्टर स्पेस बना रही है तो स्टें ये सभी कंडीशन सेटिस्फाई करती है मतलब ये हमारे पास क्या हो जाएगा स्टूडेंट वेक्टर
स्पेस हो जाएगा तो मुझे लगता है कि चीजें आपको यहां पे समझ में आ गई होगी सो नेक्स्ट जो क्लास होने वाली है उसके अंदर
जो वेक्टर स्पेस की इंपॉर्टेंट रिजल्ट्स हैं थ्योरम्स हैं वो मैं आपको बताऊंगा छोटी-छोटी प्रॉपर्टीज बेस्ड एग्जाम में
प्रूफ पूछ लिए जाते हैं वो मैं आपको बताने वाला हूं प्लस यहां पे एक और इंपॉर्टेंट रिजल्ट है कि जो वेक्टर स्पेस होता है वो
हमेशा उसके सब फील्ड पे बनता है ये थ्योरम का प्रूफ भी एग्जाम में पूछा जाता है उसके बाद सब स्स क्या होता है सब स्पेस के एक
इंपॉर्टेंट रिजल्ट है टू स्टेप टेस्ट है जिसका प्रूफ एग्जाम में पूछा जाता है वो हम डिस्कस करेंगे तो स्टूडेंट यह लीनियर
अलजेब्रा का 2.0 सीरीज है हमने ऑलरेडी इसके ऊपर काफी अच्छा काम कर रखा है पर हम थोड़ा सा इंप्रोवाइज कंटेंट यहां पे आपको
देने की कोशिश कर रहे हैं तो यार आप बने रहिए हमारे साथ एंड कैसा लग रहा है आपको क्लास कमेंट करके जरूर बताइए अगर आप हमारे
साथ हायर मैथ पूछा जाता है तो हमारा आप कोर्स लेना चाहे तो मैथ्स के रप पे ले सकते हैं
आप सभी का बहुत-बहुत धन्यवाद थैंक यू बायबाय स्ट कैसे मैथ्स केरे पे सब्सक्रिप्शन इस का वीडियो आप यहां पे
जाके देख सकते हैं हमारी जो 1.0 सीरीज है लीनियर अलजेब्रा की उसकी प्लेलिस्ट यहां जाके मिल जाएगी धन्यवाद
वेक्टर स्पेस एक गणितीय संरचना है जिसमें एक अरिक्त सेट V (वेक्टर) और एक फील्ड F (स्केलर) होता है। इस पर दो संक्रियाएँ परिभाषित होती हैं: आंतरिक संक्रिया (वेक्टरों का योग) और बाह्य संक्रिया (स्केलर गुणा)। ये संक्रियाएँ कुछ निश्चित अभिगृहीतों (जैसे क्लोज़र, साहचर्य, क्रमविनिमेय, वितरण नियम आदि) को संतुष्ट करती हैं, जिससे V, F पर एक वेक्टर स्पेस बन जाता है।
आंतरिक बाइनरी संक्रिया वह संक्रिया है जो वेक्टर सेट V के दो तत्वों (वेक्टरों) पर लागू होती है और परिणाम V का ही एक तत्व होता है, जैसे वेक्टरों का योग। बाह्य बाइनरी संक्रिया में एक तत्व फील्ड F (स्केलर) से और दूसरा V (वेक्टर) से लिया जाता है, और परिणाम V का ही तत्व होता है, जैसे स्केलर गुणा।
नहीं, केवल वे सेट वेक्टर स्पेस बनाते हैं जो उपरोक्त सभी अभिगृहीतों को संतुष्ट करते हैं। उदाहरण के लिए, R पर n-टपल (जैसे R²), मैट्रिसेस का सेट (Mₘₓₙ), और निश्चित घात से कम या उसके बराबर के बहुपदों का सेट वेक्टर स्पेस बनाते हैं। लेकिन केवल 'n' घात वाले बहुपदों का सेट वेक्टर स्पेस नहीं बनाता, क्योंकि दो ऐसे बहुपदों का योग घात कम कर सकता है।
बाह्य संक्रिया (स्केलर गुणा) के संतुष्ट होने के लिए यह आवश्यक है कि वेक्टर सेट V, फील्ड F से 'बड़ा' या कम से कम उसका एक सुपरसेट हो (F ⊆ V)। उदाहरण के लिए, यदि V = R (वास्तविक संख्याएँ) और F = Q (परिमेय संख्याएँ) है, तो संक्रिया संतुष्ट होगी, लेकिन यदि V = Q और F = C (सम्मिश्र संख्याएँ) है, तो संक्रिया संतुष्ट नहीं होगी क्योंकि परिणाम Q में नहीं होगा।
वेक्टरों के योग के लिए वेक्टर स्पेस को एक एबेलियन ग्रुप बनना चाहिए। इसके लिए पाँच गुण आवश्यक हैं: क्लोज़र (दो वेक्टरों का योग V में हो), साहचर्य (समूहन बदलने पर परिणाम न बदले), तत्समक (शून्य वेक्टर का अस्तित्व), व्युत्क्रम (प्रत्येक वेक्टर के लिए ऋणात्मक वेक्टर का अस्तित्व), और क्रमविनिमेय (योग का क्रम बदलने पर परिणाम न बदले)।
सभी नहीं, केवल वे मैट्रिसेस और बहुपद वेक्टर स्पेस बनाते हैं जिनके अवयव/गुणांक फील्ड F के तत्व हों या F से बड़े सेट के तत्व हों। उदाहरण के लिए, Mₘₓₙ (सभी m×n मैट्रिसेस) और Pₙ(x) (घात n तक के सभी बहुपद) वेक्टर स्पेस बनाते हैं। लेकिन केवल 'n' घात वाले बहुपदों का सेट वेक्टर स्पेस नहीं बनाता क्योंकि योग के बाद घात कम हो सकती है।
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