हेलोएल्केन और हेलोएरीन: वन शॉट क्लासिफिकेशन, नामकरण, बॉन्ड गुण
हेलोएल्केन और हेलोएरीन: बेसिक समझ और वर्गीकरण
यह चैप्टर ऑर्गेनिक केमिस्ट्री की बेसिक समझ | कार्बन, कोवेलेंट बॉन्ड, हाइड्रोकार्बन का बेस है और बोर्ड्स में 6 अंकों का प्रश्न पूछा जाता है। इसे सिर्फ वेटेज के लिए नहीं, बल्कि इसलिए पढ़ें क्योंकि इसका उपयोग अल्कोहल, एल्डिहाइड, अमीनस जैसे हर चैप्टर में होता है।
हेलोएल्केन (Alkyl Halides) क्या है?
एल्केन (CₙH₂ₙ₊₂) से एक या अधिक हाइड्रोजन हटाकर उसकी जगह हैलोजन (F, Cl, Br, I) लगाने पर हेलोएल्केन बनता है।
- उदाहरण: मिथेन (CH₄) → मिथाइल क्लोराइड (CH₃-Cl)
हेलोएरीन (Aryl Halides) क्या है?
एरोमेटिक रिंग (जैसे बेंजीन) से एक हाइड्रोजन हटाकर हैलोजन लगाने पर हेलोएरीन बनता है।
- उदाहरण: बेंजीन (C₆H₆) → क्लोरोबेंजीन (C₆H₅-Cl)
तीन प्रकार से वर्गीकरण
1. हैलोजन परमाणुओं की संख्या के आधार पर
- मोनोहेलोजिनेटेड: एक हैलोजन। जैसे CH₃-I (मिथाइल आयोडाइड), C₂H₅-Br (एथिल ब्रोमाइड)
- डाइहेलोजिनेटेड: दो हैलोजन। यह दो प्रकार का होता है:
- जेमिनल (geminal): एक ही कार्बन पर दो हैलोजन। (जेम = एक ही कार्बन)
- विसिनल (vicinal): बगल के दो कार्बन पर हैलोजन।
- पॉलीहेलोजिनेटेड: दो से अधिक हैलोजन। जैसे CHCl₃ (क्लोरोफॉर्म)
2. अल्काइल हैलाइड की डिग्री के आधार पर
- 1° (प्राइमरी): हैलोजन जिस कार्बन से जुड़ा है, वह केवल एक और कार्बन से जुड़ा है।
- 2° (सेकेंडरी): वह कार्बन दो अन्य कार्बन से जुड़ा है।
- 3° (टर्शियरी): वह कार्बन तीन अन्य कार्बन से जुड़ा है।
3. कार्बन के हाइब्रिडाइजेशन (sp² और sp³) के आधार पर
- sp² हाइब्रिडाइज्ड कार्बन (डबल बॉन्ड वाला):
- विनाइलिक (Vinylic): हैलोजन उसी कार्बन से जुड़ा है जो डबल बॉन्ड बना रहा है (C=C) |
- एराइलिक (Arylic): हैलोजन सीधे एरोमेटिक रिंग से जुड़ा है।
- sp³ हाइब्रिडाइज्ड कार्बन (सिग्मा बॉन्ड वाला):
- एलाइलिक (Allylic): हैलोजन उस कार्बन से जुड़ा है जो C=C वाले कार्बन के बगल (adjacent) में है।
- बेंज़ाइलिक (Benzylic): हैलोजन उस कार्बन से जुड़ा है जो बेंजीन रिंग के बगल में है।
IUPAC और कॉमन नेम (नामकरण)
IUPAC नामकरण के स्टेप्स
- मेन चेन चुनें: सबसे लंबी कार्बन चेन चुनें जिसमें हैलोजन हो।
- नंबरिंग: फंक्शनल ग्रुप (हेलोजन) और डबल/ट्रिपल बॉन्ड को सबसे छोटा नंबर देते हुए नंबर करें।
- नाम लिखें: SR का BF (Substituent - Root word - Bond - Functional group) के क्रम में लिखें।
- उदाहरण: 4-ब्रोमो-2-मिथाइलब्यूटीन
कॉमन नेम (ट्राइविअल सिस्टम) के लिए ट्रिक्स (3 से अधिक कार्बन के लिए)
- n- : सीधी चेन (Normal chain)। जैसे n-प्रोपाइल ब्रोमाइड।
- आइसो (Iso): कार्बन से दो समान ग्रुप जुड़े हों (हार्ट जैसा स्ट्रक्चर)। जैसे Isopropyl क्लोराइड।
- ध्यान दें: Iso और Sec में अंतर है। Iso में हैलोजन वाला कार्बन दो समान ग्रुप्स (जैसे CH₃) से जुड़ा होता है, जबकि Sec में वह दो अलग-अलग ग्रुप से जुड़ा होता है।
- टर्ट (tert): कार्बन तीन ग्रुप से जुड़े (हाफ फ्लावर जैसा स्ट्रक्चर)। जैसे tert-ब्यूटाइल ब्रोमाइड।
- नियो (Neo): पाँच या अधिक कार्बन में, एक कार्बन चार अन्य कार्बन से जुड़ा हो (फुल फ्लावर जैसा स्ट्रक्चर)। जैसे Neo-पेंटाइल ब्रोमाइड।
- सेक (sec): 2° कार्बन पर हैलोजन। जैसे sec-ब्यूटाइल ब्रोमाइड।
C-X बॉन्ड की प्रकृति (Nature of Carbon-Halogen Bond)
यह एक पोलर कोवेलेंट बॉन्ड है। चूंकि हैलोजन की इलेक्ट्रोनेगेटिविटी कार्बन से अधिक होती है, इसलिए इलेक्ट्रॉन हैलोजन की ओर खिंच जाते हैं, जिससे बॉन्ड में आंशिक चार्ज (δ+ और δ-) उत्पन्न होता है।
| गुण | F से I की ओर प्रवृत्ति | | :--- | :--- | | बॉन्ड लेंथ (Bond Length) | बढ़ती है (F < Cl < Br < I) | | बॉन्ड एनर्जी (Bond Enthalpy) | घटती है (F > Cl > Br > I), F-X बॉन्ड तोड़ना सबसे कठिन है | | पोलरिटी (Dipole Moment) | अपवाद (Exception): Cl का डाइपोल मोमेंट F से अधिक होता है क्योंकि F की लंबाई बहुत कम है, जिससे q × d का मान कम हो जाता है। सामान्यतः यह ऊपर से नीचे घटती है। |
इस चैप्टर की गहरी समझ के लिए ऑर्गेनिक केमिस्ट्री: कार्बन के वर्सटाइल नेचर और हाइड्रोकार्बन की पूरी जानकारी पढ़ें। साथ ही, रिएक्शन मैकेनिज्म को समझने के लिए बेसिक इलेक्ट्रॉनिक्स: PN जंक्शन डायोड की पूरी जानकारी में दिए गए इलेक्ट्रॉनिक कॉन्सेप्ट्स उपयोगी हो सकते हैं।
यह चैप्टर बोर्ड्स में टोटल पूछा जाता है भाई सिक्स मार्क्स का। क्या बात कर रहे हैं?
और बहुत सारे स्टूडेंट्स यह कहते हैं यार छह नंबर का ही तो है। मतलब इतने ज्यादा तो वेटेज है ही नहीं इसका। मेरा मुंह वाली चल
गई। तो यार ये बात याद रखना ये चैप्टर सिर्फ वेटेज के लिए नहीं पढ़ना है बल्कि इसलिए
भी पढ़ना है क्योंकि अगर आपने ऑर्गेनिक केमिस्ट्री का ये चैप्टर पढ़ लिया तो आपको हर चैप्टर में इससे रिलेटेड कुछ ना कुछ
मिलने वाला है। तो ये ऑर्गेनिक केमिस्ट्री का वो बेस है जो हर जगह हर चैप्टर में यूज़ होने वाला है। चाहे आप अल्कोहल फिनोल
ईथर ले लो एल्डिहाइड कीटोन कार्बोक्सिलिक एसिड उठा लो, अमीनस उठा लो। तो ये चैप्टर बहुत ज्यादा इंपॉर्टेंट होता है क्योंकि
इससे रिलेटेड हर चैप्टर में हमें बहुत सारी रिएक्शंस देखने को मिलती हैं। हेलो एवरीबॉडी एंड वेलकम टू नेक्स्ट टॉपर्स।
माय नेम इज तापुर उमर योर मिस एक्सेप्शन योर केमिस्ट्री एजुकेटर एंड मैं आ चुकी हूं एक नए चैप्टर के वन शॉट के साथ व्हिच
इज़ हेलो एल्केेंस एंड हेलो एअरेंस। सो चलो गाइस स्टार्ट करते हैं अपने प्यारे से चैप्टर को। सबसे पहले इस चैप्टर के नाम का
मतलब समझते हैं। हेलो एल्केेंस। हेलो हाय हाय एवरीवन। तो हेलो का मतलब यहां पे हेलो वाला हेलो नहीं है। हैलो और हैलो क्या
होता है? हैलो मींस हैलोजंस। हैलोजंस। हैलोजंस जैसे कि हमारे एक्स से जिसको हम डिनोट करते हैं फ्लोरीन,
क्लोरीन, ब्रोमीन, आयोडीन है ना? ये हमारे हैलोजंस हैं। एंड एल्केनेंस तो हम सभी जानते ही हैं। CNH2N
+2 वाले ग्रुप्स। सिंगल बॉन्ड वाले हाइड्रोकार्बंस बेसिकली है ना? तो हैलोल्केेंस का मतलब क्या है? अगर मैं
किसी एल्केन को उठा लूं। सपोज़, यह एक एल्केन है। बेसिक से अगर मैं बताऊं, तो यह एक एल्केन है। है ना? एक कार्बन वाला
एल्केन है, मतलब मिथेन यहां पे लिखा हुआ है। अगर मैं इस एल्केन में से इस मिथेन में से बेसिकली एक हाइड्रोजन हटा दूं और
इसकी जगह यानी कि माइनस कर दूं H और प्लस कर दूं कोई भी हैलोजन। इट कुड बी अगेन क्लोरीन, ब्रोमीन, आयोडीन। एक्चुअली
फ्लोरीन मतलब आप सोच सकते हो कि हैलोजन तो है बट फ्लोरीन इतनी इतना आसान नहीं है किसी भी रिएक्शन में ऐड करना। ठीक है? तो
फ्लोरीन इज़ नॉट दैट इज़ी। फ्लोरीन की केवल दो रिएक्शन होती है पूरे चैप्टर में। एक होता है हैलोल्केन में और एक होती है हैलो
एरीन में। तो फ्लोरीन की दो ही रिएक्शन आपको पढ़नी है। तो फ्लोरीन भाई साहब इतनी आसानी से नहीं लग सकता अंदर। ठीक है? तो
मैं कोई भी हैलोजन लगा सकती हूं। तो ये कैसा दिखने लगेगा? CH और एक H हटा के हमने लगा दिया कोई अपना
हैलोजन भाई साहब। तो ये क्या बन गया? ये बन गया हमारा हैलो एल्केन। ये बन गया हमारा
हैलो एल्केन। ठीक है? और इसी के बारे में हमें पढ़ना होगा। ठीक है? अब आप दो कार्बन वाला एल्केन ले सकते थे। तीन कार्बन एंड
सो ऑन सो ऑन कर सकते थे। बस ये याद रखना कि अगर मैंने रिप्लेस कर दिया एक या एक से ज्यादा हाई हाइड्रोजन को किससे? एक एल्केन
में से एक या एक से ज्यादा हाइड्रोजन हटा दिए और उतने ही उतने ही इक्वल नंबर ऑफ़ हैलोजन एटम्स मैंने जोड़ दिए। तो हम हेलो
एल्केन बना सकते हैं जिसको हम अल्काइल हैलाइड्स के भी नाम से जानते हैं। अल्काइल हैलाइड्स आर द कॉमन नेम ऑफ़ हैोएकेन्स
बेसिकली। ठीक है? तो ये तो था भाई हमारा हैोएकेन। साथ में स्क्रीनशॉट लेते हुए चलना। ठीक है? चलो, आगे बढ़ते हैं। हेलो
एआरन्स को समझते हैं। अब नाम तो समझ गए? हेलो मतलब मैम हैलोजन होगा यहां भी। और एररीन मतलब एरोमेटिक रिंग बेंजीन जैसा?
यस। तो हैलो एरीन का मतलब क्या है? अगर मैंने उसी क्वेश्चन में एल्केन की जगह एरीन ले लिया होता। क्या ले लिया होता?
एरीन। जैसे कि बेंजीन। अब हमें बहुत अच्छे से पता है बेंजीन से हर कॉर्नर पे क्या लगे हैं? कार्बन लगे हुए हैं यहां पे। है
ना? जैसे मान लो मैंने ये सर्कल से कार्बन दिखा दिए। और हमें पता है बेंजीन होता है C6H6 यानी कि हर कार्बन से हाइड्रोजन
जुड़ा होगा। है ना? हां जी मैम। अब अगर इसी रिएक्शन में मैं क्या करूं? सिमिलरली जो पहले किया था हाइड्रोजन को हटा के
हैलोजन को ऐड कर दूं। है ना? तो हाइड्रोजन को हटाना पड़ेगा और उसकी जगह पे हमारा हैलोजन आ जाएगा। तो ये कैसा दिखेगा मैम?
बेंजीन लगा होगा। एंड उससे अब लग जाएंगे हर जगह पे हाइड्रोजन जैसे लगे होते हैं। है ना? हाइड्रोजन हाइड्रोजन हाइड्रोजन हर
जगह और एक हाइड्रोजन हट के हैलोजन लग जाएगा। एंड ये वाला जो ग्रुप है हमारा ये कहलाएगा हैलो अरीन। ठीक है? इसका कॉमन नेम
क्या होगा? अराइल हेलाइड्स। ठीक है? तो अगर मैंने हाइड्रोजन एटम जो अटैच्ड है बेंजीन से एरोमेटिक रिंग या हाइड्रोकार्बन
ऑफ़ कोर्स जो एरोमेटिक है उसे रिप्लेस कर दूं हैलोजन एटम से तो वो बना देता है हमारा हैलो एअरन। ठीक है? हैलो एरीन। क्या
बना देगा? हैलो एरीन। हेलो एरीन एक सेकंड रुको। हेलो एरीन कहां रहा है? ये रहा भाई। स्पेस करना भूल गए हम स्लाइड में। कोई बात
नहीं। कोई बात नहीं। हेलो एरीन्स अभी भी गलत है। अभी भी गलत है। रुक जाओ। हैलो एरीन्स ये रहा। ठीक है? अभी सही है। स्पेस
कर देना तुम यहां पे। ठीक है? अराइल हैलाइड्स और एसिड। ठीक है? तो ये हमारा हैलो एरीन या अराइल हैलाइड हो गया। तो यार
ये तो बहुत बेसिक सी बात थी कि हमने अभी केवल मीनिंग समझा। हैलो एल्केन होता क्या है? हेलो एरीन होता क्या है? अब हमें इसकी
बहुत सारी रिएक्शंस देखनी है। फिजिकल प्रॉपर्टी, केमिकल प्रॉपर्टी, प्रिपरेशंस इनकी कैसे होती है? है ना? तो ये सारी
बातें हम इस चैप्टर के अंदर करते हैं। हमें हैलोएल्केन, हेलोरीन बहुत अच्छे से भाई समझ में आ चुका है। अब अगर मैं बात
करूं अगर मैं बात करूं इनके क्लासिफिकेशन का तो इनका तीन तरीके से क्लासिफिकेशन हो सकता है। ठीक है? अगर मैं इसका
क्लासिफिकेशन करूं तो तीन तरीके से क्लासिफिकेशन हो सकता है। पहला क्लासिफिकेशन होता है ऑन द बेसिस ऑफ़ नंबर
ऑफ़ हैलोजन एटम्स। कितने हैलोजन एटम्स लगे हुए हैं किसी से? जैसे कि मैम, जैसे कि आपके हैलोजन एटम एक लगे हो सकते हैं, दो
लगे हो सकते हैं, तीन लगे हो सकते हैं, है ना? अगर एक हैलोजन लगा है तो मोनोहैलोजनेटेड,
मोनोहैलोजनेटेड ग्रुप हो जाएगा। है ना? अगर दो लगे हैं तो डाईहैलोजनेटेड डाईहैलोनेटेड
ग्रुप हो जाएगा। है ना? अगर तीन लगे हैं, तो ट्राईहैलोजनेटेड है ना? और ट्राईहैलोजनेटेड में ही आप
पॉलीहैलोजनेटेड लोगे। ट्रायलोजनेटेड और अह फिर टेट्राहैलोजेनेटेड एंड सो ऑन सो ऑन जो कि अपने पॉली ग्रुप्स में आएंगे।
पॉलीहैलोजनेटेड ग्रुप्स में आएंगे। ठीक है? तो अगर मैं हैलोएल्केनेंस का क्लासिफिकेशन करूं ऑन द बेसिस ऑफ़ नंबर ऑफ़
हैलोजन एटम तो हो सकता है मैम कि किसी कार्बन से एक हैलोजन लगा हो तो वो क्या है? वो मोनोहैलोजनेटेड का एग्जांपल है। है
ना? जैसे कि मिथाइल हैलाइड। इथाइल हैलाइड। है ना? मान लो मैंने CH3 लिया एंड इससे मैंने एक कोई भी आयोडाइड लगा दिया। चलो।
ठीक है? तो ये क्या हो गया? मिथाइल आयोडाइड। अब इस एक ग्रुप से एक हैलोजन लगा है तो ये मोनोहैलोजिनेटेड के क्लासिफिकेशन
में आएगा। मैं इसकी जगह C2H5 Br लिख दूं। ये भी मोनोहैलोजिनेटेड के कैटेगरी में आएगा। ठीक है? क्योंकि हमारे
पास जो अल्काइल हैड है उससे केवल एक हैलोजन इस टाइम पे लगा हुआ है। ठीक है मैम समझ गए? अच्छा डाईहैलोजेनेटेड को ध्यान से
सुनना। डाईहैलोजनेटेड जो होता है वो फर्दर दो टाइप्स का होता है। एक होता है जेमिनल और एक होता है विसिनल।
जेमिनल और विसिनल दो टाइप के डाईहैलाइड पॉसिबल होते हैं। चलो हम इसको बना के देखते हैं। जेमिनल का मतलब समझना। पहले
दोनों को देख लो। देखो अगर ऐसे कार्बन कार्बन लगे हुए हैं। ठीक है? ऐसे। ठीक है? इससे हैलोजन, इससे हैलोजन। और यहां पे
इससे हैलोजन और इससे हैलोजन। अब इसमें एक जेमिनल है, एक विसनल है। ठीक है? अगर मैंने बोला जेमिनल, तो जेमिनल का मतलब
क्या होता है? जेमिनल का मतलब होता है जेम ऑफ़ अ पर्सन। मैं ऐसे याद करती हूं। जेम ऑफ़ अ पर्सन। एक कार्बन जेम ऑफ अ पर्सन है।
उससे ही दो हैलोजन लग गए। तो ही इज़ जेम ऑफ अ पर्सन। ठीक है? तो जेमिनल ये वाला ग्रुप हुआ। ये हमारा जेमिनल ग्रुप है। बेसिकली
ये वाला जो हमारा है इस कार्बन से दो कार्बन एक साथ लगे हैं। तो ये जेम ऑफ़ अ पर्सन है। यानी कि ये जेमिनल ग्रुप है।
अगर बगल-बगल कार्बन में यानी कि इसको मैं बोलती हूं पड़ोसी कार्बन में अगर पड़ोसी-पड़ोसी कार्बन में अल्टरनेट पोजीशन
एक साथ जस्ट बगल वाले पोजीशन में अगर हैलोजन लग गया। ठीक है? दोनों एडजेसेंट कार्बन इसका नाम रखा जाता है। एडजेसेंट
कार्बन्स पे अगर हैलोजन है तो हम उसको विसिनल का नाम दे देते हैं। किसका नाम दे देते हैं? विसिनल का उसको हम नाम देंगे।
तो ये हमारा विसिनल ग्रुप है। विसिनल डाईहैलोजनेटेड इसका नाम रखा जाएगा। तो एक क्या हुआ हमारा? एक हो गया हमारा जेम ऑफ़ अ
पर्सन। डाईहैलोजनेटेड मतलब देखो अगर या तो एक ही कार्बन पे दो हैलोजन लग गए तो भी डाईहैलोजनेटेड। अगर बगल-बगल कार्बन पे दो
हैलोजन है तो भी मैम ईहैलोजनेटेड। तो इनको भी क्लासिफाई किया गया दो कैटेगरी में। एक होते हैं जेमिनल और एक होते हैं विसनल।
जेमिनल का मतलब है कार्बन इज़ जैम ऑफ़ अ पर्सन। उसी कार्बन से दो हैलोजन लग गए। जेम ऑफ़ अ पर्सन। ऐसे इसको याद रखना। ठीक
है? और विसनल का मतलब क्या है? एडजेसेंट कार्बन। बगल-बगल वाले कार्बन पे हैलोजंस लग गए। ठीक है? तो ये जेमिनल और विसनल की
कैटेगरी हो गई। फिर पॉलीहैलोजनेटेड आप समझ ही गए। एक से ज्यादा हैलोजन लगा होना। जैसे कि क्लोरोफॉर्मिक एग्जांपल है। CHCl3
क्लोरोफॉर्मिक एग्जांपल हो सकता है। है ना? CHCl3 में क्या है? दो से ज्यादा हैलोजन ग्रुप्स लगे हैं। तो ये आ जाते हैं
आपके पॉलीहैलोजिनेटेड की कैटेगरी में। अच्छा आप इसका क्लासिफिकेशन एक और तरीके से कर सकते हो जो कि होता है ऑन द बेसिस
ऑफ़ डिग्री ऑफ़ अल्काइल हैलाइड। मतलब कि हैलोजन जिस कार्बन से लगा है वो कितने कार्बन से लगा है? फॉर एग्जांपल मैंने
बोला ये एक हैलोजन है। ये कार्बन से लगा है। और ये कार्बन फर्दर एक कार्बन से लगा है। तो ये कौन सा है? ये 1 डिग्री वाला
अपना ग्रुप है। 1 डिग्री। इस अल्काइल हैलाइड को हम बोलेंगे 1 डिग्री वाला अल्काइल हेलाइड है। तो एक हो सकते हैं
हमारे पास 1 डिग्री वाले। 1 डिग्री प्राइमरी जिसको आप बोल सकते हो। प्राइमरी अल्काइल हैलाइड।
एक हो सकते हैं हमारे पास सेकेंडरी अल्काइल हैलाइड। एंड हमारे पास हो सकते हैं टर्शरी अल्काइल
हैलाइड। है ना? ऑफ़ कोर्स एज़ द नेम सजेस्ट 1° 2° अल्काइल हैलाइड एंड 3° अल्काइल हैलाइड। ठीक है? 1° मतलब हैलोजन जिस
कार्बन से लगा है, हैलोजन जिस कार्बन से लगा है, वो फर्दर एक कार्बन से लगा है। दिस इज़ 1° 1° अल्काइल हैलाइड। अगर हैलोजन
जिस कार्बन से लगा है, वो खुद दो कार्बन से लगा है, दिस इज़ 2° अल्काइल हैलाइड। दिस इज़ 2° अल्काइल हैलाइड। हैलोजन जिस कार्बन
से वो फर्दर दो कार्बन से लगा हुआ है। हैलोजन जिस कार्बन से लगा है हमारा अगर वो खुद फर्दर तीन कार्बन से लगा हुआ है। मैं
इसको चलो अच्छा ठीक है बना देती हूं। एक दो और नीचे भी एक बना है। ठीक है? आई होप सो आपको ये थोड़ा-थोड़ा दिख रहा होगा। ठीक
है? तो इसको यहां पे भी ड्रॉ कर सकते हैं। हैलोजन जिस कार्बन से लगा है वो खुद तीन कार्बन से लग गया। तो ये वाला हमारा
कहलाएगा 3°। तो डिग्री के बेसिस पे भी हम इसको क्लासिफाई कर सकते हैं। भाई हमारा हैलोजन जिस कार्बन से जुड़ा हुआ है। देखो
वो कार्बन कितने कार्बन से लगा है? एक कार्बन से लगे हो भाई तुम 1 डिग्री हो। प्राइमरी अल्काइल हैलाइड हो। दो कार्बन से
लगे हो सेकेंडरी और तीन से लगे हो तो टर्शियरी। तो ये दो टाइप के हमारे कैटेगरी हो गई। आई होप सो आपको ये वाली बात समझ
में आ गई होगी। ठीक है? नेक्स्ट क्या है हमारे पास? हाइब्रिडाइजेशन ऑफ़ कार्बन। अच्छा अच्छा। अब ये तो थोड़ा सा 11th का
कॉन्सेप्ट आया। अगर मैं कार्बन की हाइब्रिडाइजेशन देखूं तो कार्बन दो टाइप की
हाइब्रिडाइजेशन यहां पे दिखाएगा। या तो कार्बन sp2 वाली हाइब्रिडाइजेशन दिखाएगा और या तो कार्बन sp3 वाली हाइब्रिडाइजेशन
दिखाएगा। ठीक है? या तो sp2 और या तो sp3 इनके भी फर्दर दो-दो क्लासिफिकेशन होते हैं। या तो कार्बन क्या दिखाएगा मैम? या
तो कार्बन sp3 दिखाएगा या तो sp2 दिखाएगा। ठीक है? अगर sp2 दिखा रहा है तो इसके फर्दर दो क्लासिफिकेशन है। कौन से?
विनाइलिक एक होता है इसका विनाइलिक क्लासिफिकेशन। दूसरा होता है इसका अराइल क्लासिफिकेशन।
या जिसको आप अराइलिक भी बोलते हो। sp3 की अगर मैं बात करूं तो एक होता है इसमें एलाइलिक
एलाइलिक और एक होता है आपके पास बेंज़ाइलिक। बेंज़ाइलिक ये इनके फर्दर क्लासिफिकेशन
देखने को मिलते हैं। अब मेरी बात को बहुत ध्यान से सुनना। जो आपके क्वेश्चन पूछे जाते हैं ना इस क्लासिफिकेशन से वो सबसे
ज्यादा पूछे जाते हैं या तो डाईहैलोजनेटेड से यानी कि जेमिनल विसिनल से या तो फिर आपके इनमें से कार्बन sp2 और sp3 वाले से।
ठीक है? अच्छा कार्बन sp2 sp3 का क्या आप मतलब समझे? आई होप सो आप समझे होगे। कार्बन sp2 का मतलब क्या है? कार्बन की
हाइब्रिडाइजेशन sp2 है उस कंडीशन में। है ना? sp2 कार्बन sp2 हाइब्रिडाइज्ड कब होता है? किसी को पता है? जब कार्बन डबल बॉन्ड
बनाता है। देखो हाइब्रिडाइजेशन आप निकालते कैसे हो? हाइब्रिडाइजेशन निकालते हो। नंबर ऑफ सिग्मा बॉन्ड से है। अगर मैं बहुत
बेसिक लेवल पे भी बात करूं तो मैम सिग्मा बॉन्ड काउंट कर लेते हैं। 1 2 3 4 तो इसकी हाइब्रिडाइजेशन कितनी है? अगर इसने तीन
सिग्मा बॉन्ड बनाए तो sp2 हाइब्रिडाइज्ड होता है। अगर कार्बन ने चारों सिग्मा बॉन्ड बना लिए। सिग्मा बॉन्ड मतलब सिंगल
बॉन्ड। चारों सिग्मा बॉन्ड बना लिए तो उसकी हाइब्रिडाइजेशन उस कंडीशन में sp3 निकल के आती है। है ना? sp हाइब्रिडाइजेशन
भी देखने को मिल सकती है। ट्रिपल बॉन्ड बनाया होगा ना? sp2 sp3। अगर इसने सारे ट्रिपल बॉन्ड बना लिए तो दो सिग्मा बॉन्ड
तो उस टाइम पे sp हाइब्रिडाइजेशन होगी। है ना? बट हमारे को हमारे अभी इसमें जो हमको पढ़ना है वो sp2 और sp3 के बारे में जानना
है। ठीक है मैम समझ गए? तो या तो भाई sp2 दिखने वाला है या तो मैम हमें sp3 दिखने वाला है। अब सुनना मेरी बात ध्यान से।
यहां मैम ने ये चीज आपको क्यों समझाई? ताकि आप उस क्लासिफिकेशन को समझ पाओ। sp2 की दो कैटेगरी हैं। आप इतना देख के समझो
कि यहां पे ये दोनों कैटेगरी उस कार्बन की बात कर रही होंगी जो डबल बॉन्ड बना रहा होगा। दिमाग में इसको बैठाओ। मेन यहां पे
आपको समझना है। जब मैंने बोला कार्बन sp2 है तो या तो विनाइलिक होगा और या तो एराइलिक होगा। तो मुझे दिमाग में क्या
रखना है? दोनों ही केस में कार्बन पक्का भाई डबल बॉन्ड बनाया होगा। दोनों ही केस में कार्बन डबल बॉन्ड बनाया होगा। तो
विनाइलिक का मतलब समझो। कार्बन के साथ हैलोजन लगा है। और जिस कार्बन से हैलोजन लगा है उस कार्बन ने दूसरे कार्बन से डबल
बॉन्ड बना लिया। ठीक है? ये हो गया विनाइलिक। सुनो मेरी बात ध्यान से। वापस से वापस से। हैलोजन
जिस कार्बन से लगा है, उस कार्बन ने ही डबल बॉन्ड बना रखा है। दैट इज़ विनाइलिक ग्रुप। और इसका ऑोजिट होता है एलाइलिक।
एलाइलिक का मतलब क्या होता है? हैलोजन जिस कार्बन से लगा है वो किसी कार्बन से लगा है जो डबल बॉन्ड बना रहा है। वो किसी
कार्बन से फर्दर लगा है जो डबल बॉन्ड बना रहा है। वापस से बोलूं एक बार। चलो एक बार और सुनना। एलाइलिक क्या कहता है? हैलोजन
एक कार्बन से लगा है। और वो कार्बन जो है वो किसी कार्बन से लगा है जो डबल बॉन्ड लगा रहा है। मतलब आप ये याद रखना जब हम
sp3 की बात कर रहे हैं तो हैलोजन जिस कार्बन से लगा है वो sp3 हाइब्रिडाइज्ड होगा। मतलब आप थोड़ा सा इसको डेप्थ में
समझो इस बात को। रटना नहीं इसको समझो ताकि आप क्वेश्चन कर पाओ इससे रिलेटेड। ठीक है? और इसका क्वेश्चन बहुत बार बोर्ड्स में
पूछा जा चुका है। सुनना ध्यान से। हैलोजन जिस कार्बन से लगा है उसके बगल वाला कार्बन डबल बॉन्ड बना रहा है। ठीक? मतलब
अपना कार्बन बेचारा सीधा-साधा इंसान है। वो डबल बॉन्ड नहीं बना रहा है। अपना कार्बन सीधा-साधा इंसान है भाई। वो sp3
हाइब्रिडाइज्ड है। शुद्ध शाकाहारी इंसान है। ठीक है? लेकिन विनाइलिक कहता है कि अ हैलोजन जिस कार्बन से लगा है वो कहां लगा
है? अच्छा खुद ही डबल बॉन्ड बना रहा है तो विनाइलिक कैटेगरी हो गई। हैलोजन जिस कार्बन से लगा है अगर उस कार्बन ने डबल
बॉन्ड बना लिया विनाइलिक। हैलोजन जिस कार्बन से लगा है उसकी कोई गलती नहीं है। पर उसके बगल वाले कार्बन ने डबल बॉन्ड
बनाया हुआ है एलाइलिक। तो विनाइलिक एलाइलिक विनाइलिक एलाइलिक दिमाग में बैठेगा। आई होप सो बैठेगा। अब देखो इसी
तरीके से ये है। अराइलिक और बेंज़ाइलिक का मतलब समझो। अराइलिक पहले तो नाम से ही समझ जाओ। अराइलिक मतलब अराइल रिंग की बात हो
रही है। मतलब बेंजीन जैसा कोई ग्रुप है। है ना? और क्योंकि ये sp2 हाइब्रिडाइज्ड है मतलब इसके कार्बन ने डबल बॉन्ड बनाया
होगा। तो सुनो ध्यान से। इस पे भी बोर्ड्स ने बहुत बार घुमाया है क्वेश्चन। सुनो। अगर हमारी क्या हो गया भाई? हां चलो। तो
अगर हमारी जो बेंजीन की रिंग है अराइलिक मतलब बेंजीन की रिंग आएगी। देखो और बेंजाइल मतलब भी बेंजीन की रिंग आएगी।
दोनों में ही बेंजीन की रिंग आएगी। ठीक है? डिफरेंस समझिएगा। अराइल कहता है मैं हैलोजन जिस कार्बन से लगा है वो कार्बन
कहता है मैं खुद ही डबल बॉन्ड बनाऊंगा। तो यहां पे डायरेक्टली एक हैलोजन लगा है। मतलब कि जैसे हम अराइल हेलाइड पढ़ रहे हैं
ये वही है। और बेंज़ाइलिक कहता है कि हैलोजन जिस कार्बन से लगा है वो कार्बन बेंजीन से लगा है। तो ये अपना बेंज़ाइलिक
की कैटेगरी बनती है। तो क्या आपको अराइलिक और बेंज़ाइलिक भी समझ में आए? देखो क्लास में ही आप ट्राई करा करो भाई कि हमें
क्लास में हर चीज़ समझ में भी आ जाए। क्लास में ही हर चीज हमें याद भी हो जाए और क्लास में ही सब हो जाए। ठीक है? मतलब इसी
वन शॉट में हमें सब कुछ आ जाए। तो ये हमारा क्लासिफिकेशन हो गया। एक बार वापस से बोलूं मैं। कार्बन तीन तरीके से
क्लासिफाई हो सकता है। पहला पहला ऑन द बेसिस ऑफ़ नंबर ऑफ़ हैलोजन एटम उससे किस कितने लगे हैं? तो मोनोहैलोजनेटेड,
डाईहैलोजनेटेड और ट्राईहैलोजनेटेड या पॉलीहैलोजनेटेड। मोनो मतलब कार्बन के पास एक ही हैलोजन है। ठीक है? कोई कार्बन की
चेन है, एक ही हैलोजन है। डाई मतलब कार्बन के पास दो हैलोजन है। अब या तो एक ही कार्बन के पास दो हैलोजन होंगे। तो हम
बोलेंगे विस सॉरी जेम ऑफ अ पर्सन जेमिनल जेमिनल डाईहैलाइड और अगर एडजेसेंट कार्बन पे अड़ोस पड़ोस के कार्बन पे हैलोजंस लगे
हुए हैं दो तो वो बोलेंगे विसिनल डाईहैलाइड है ठीक है बाकी उससे ज्यादा होगा तो पॉलीहैलोजनेटेड में आएगा डिग्री
के बेसिस पे कर सकते हैं जिस कार्बन से लगा है वो कितने कार्बन से लगा है कितने आदमी थे एक आदमी था एक हैलोजन जिस कार्बन
से है वो एक कार्बन से मोनोहैलोजन सॉरी अ प्राइमरी हैलोजनेटेड ठीक है प्राइमरी अल्काइल हैलाइड 1° अ हैलोजन जिस कार्बन से
लगा है वो कार्बन खुद दो कार्बन से लगा है। हैलोजन जिस कार्बन से लगा है वो फर्दर दो कार्बन से लगा है। सेकेंडरी सेकेंडरी
अल्काइल हैलाइड या 2° अल्काइल हैलाइड। हैलोजन जिस कार्बन से लगा है वो खुद ही तीन कार्बन से लगा है। टर्शरी अल्काइल
हैलाइड। फिर हाइब्रिडाइजेशन के बेसिस पे दो क्लासिफिकेशन होते हैं। या तो sp2 हाइब्रिडाइज्ड और या तो sp3
हाइब्रिडाइज्ड। sp2 में आते हैं हमारे पास विनाइलिक और एराइलिक। दोनों ही कहते हैं कि भाई हैलोजन जिस कार्बन से है उस कार्बन
ने खुद ही डबल बॉन्ड बनाया है। हैलोजन जिस कार्बन से उसने खुद ही डबल बॉन्ड बनाया है। हैलोजन जिस कार्बन से है उसने खुद ही
डबल बॉन्ड बनाया है। ठीक है? और सेकंड आता है sp3 हाइब्रिडाइज्ड। मतलब हैलोजन जिस कार्बन से है उसकी कोई गलती नहीं है। उसने
बॉन्ड नहीं बनाया। उसके बगल वाले कार्बन ने डबल बॉन्ड बनाया है। तो इसमें आता है हमारे पास एलाइलिक और बेंज़ाइलिक। हैलोजन
जिस कार्बन से लगा है वो तो sp3 है। वो किसी से नहीं लगा डबल बॉन्ड से। पर उसके बगल वाला कार्बन डबल बॉन्ड से लगा है।
हैलोजन जिस कार्बन से लगा है वो sp3 है। पर उसके बगल वाला जो कार्बन है उसने डबल बॉन्ड बनाया है। तो ये हो गया हमारा
क्लासिफिकेशन। चलो भाई स्क्रीनशॉट स्क्रीनशॉट टाइम। ऑलराइट। आगे बढ़ते हैं। नेक्स्ट स्लाइड क्या कहती है हमारी?
नोमेनक्लेचर में आ जाओ। नोमेनक्लेचर के जो बेसिक रूल्स आप नाइंथ नाइंथ नहीं 10थ 11 12th में पढ़ के आए हो। पर 12th में तो आप
आ ही गए हो बेसिकली। 10थ और 11th में आपने जो पढ़ा है नोमेनक्लेचर एज़ इट इज़ रहने वाला है। उसमें कोई बड़ी बात नहीं है। बस थोड़ी
बहुत चीजें आप जैसे बॉन्ड लाइन स्ट्रक्चर्स एक दो और कर लेना। ठीक है? और कॉमन नेम्स थोड़े से और पढ़ लेना। तो बस यही
है। तो चलो उसको समझते हैं जल्दी से। चलो तो अगर मैं नोमेनक्लेचर की बात करूं तो देखो नोमेनक्लेचर पहले हम बेसिक समझते हैं
क्या होता है। मैम नंबर वन स्टेप वाइज़ अगर हम चलेंगे स्टेप वाइज़ चलेंगे। तो स्टेप नंबर वन होता है हमारे पास एक मेन चेन को
सेलेक्ट करना। है ना? किसी भी क्वेश्चन में एक मेन चेन सेलेक्ट करिए जिसको आप मेन चेन की जगह पेरेंट चेन भी बोल सकते हो।
ठीक है? जैसे ऐसे कार्बन कार्बन एक ऐसे लगे हैं तो ये एक मेन चेन हो गई। है ना? कार्बन कार्बन कार्बन कार्बन कार्बन यहां
पे लगा है। है ना? तो ये भी मेन चेन आएगी। है ना? ये कार्बन लगे हैं। ये हमारे सपोज़ कार्बन लगे हैं। तो ये भी हमारी एक मेन
चेन आएगी। है ना? तो इस तरीके से हमें पहले मेन चेन ढूंढनी है। स्टेप नंबर टू हमारे पास क्या होता है? स्टेप नंबर टू
होता है हमारे पास नंबरिंग करना। है ना? ये तो नॉर्मल नम नॉमन बहुत ही ज्यादा कॉमन नोमेनक्लेचर है।
ठीक है? नॉमिन नोमेनक्लेचर नहीं है। नंबरिंग करिए। है ना? नंबरिंग में प्रायोरिटी होती है। फंक्शनल ग्रुप सबसे
आगे होते हैं। फिर उसके बाद हमारे पास बॉन्ड्स आते हैं। एंड थर्ड नंबर पे हमारे पास सब्स्टट्यूट्स आते हैं। मतलब फंक्शनल
ग्रुप दिख जाए तो उसके पास से नंबरिंग शुरू कर दो। फिर बॉन्ड्स के पास से करो। और बॉन्ड भी नहीं है तो सब्सीट्यूट के पास
से कर दो। और स्टेप थ्री बेटा सबसे मेन स्टेप होता है जिसमें आप पूरी नोमेनक्लेचर करते हो। दैट इज़ एसआर का बीएफ। एसआर का
बीएफ मतलब सबसे पहले आप नाम लिखते हो एक सब्स्टट्यूट का। ठीक है? सब्सीट्यूट का नाम। फिर रूट वर्ड फिर बॉन्ड और फिर
फंक्शनल ग्रुप। ठीक है? ये मेरी बनाई हुई ट्रिक है। भाई आपको कोई अपने तरीके से पता है या आपको नॉर्मली भी पता है। रूट वर्ड
को वर्ड रूट भी बोलते हैं। अच्छा आपको नॉर्मल भी नॉर्मल भी आता है करना तो आप उस हिसाब से कर लेना। ठीक है? चलो
सब्स्टट्यूट। तो नोमेनक्लेचर एज सच कोई बहुत इंपॉर्टेंट टॉपिक नहीं है हैलोल्केन हैलोरीन में या क्लास 12th में क्योंकि हम
इसको बहुत अच्छे से समझ के आए हैं क्लास 11th में एंड क्लास 10th में भी है ना तो नोमेनक्लेचर एज़ इट इज़ वैसा ही रहने वाला
है। चलो भाई अच्छा अ क्योंकि स्पेसिफिकली हम इस चैप्टर में हैलोल्केन की बात करते हैं तो ऑफ कोर्स हैलोजन और आपके एल्केन
वाले ग्रुप सबसे ज्यादा आपको मिलने वाले हैं। है ना? यहां पे आपको फंक्शनल ग्रुप ज्यादा देखने को नहीं मिलेगा। मेन आपके
हैलोजन रहेंगे और आपके पूरा मेन चेन जैसे रहती है। ठीक है? तो ये आपके नोमेनक्लेचर हो जाएगा। ठीक है? अच्छा ये चीज बेटा याद
रखना इस चैप्टर में जब आप नोमेनक्लेचर करते हो ना तो ट्राइविअल सिस्टम बड़ा फेमस होता है। नोमेनक्लेचर दो टाइप से हो पाता
है। या तो आप ट्राइविअल सिस्टम लगाते हो या तो आईयूपीएसी। ट्राइविल सिस्टम होता है ओल्ड फॉर्म ऑफ नेमिंग जिसमें कॉमन नेम्स
आते हैं जो कि याद करने पड़ते हैं हमें। है ना? और आईयूपीएसी इंटरनेशनल यूनियन ऑफ़ प्योर एंड अप्लाइड केमिस्ट्री। ये एक रूल
के बेसिस पे चलता है जिसे हम इस तरीके से स्टेप वाइज़ लगा रहे होते हैं। है ना? तो ये हमारे दो तरीके के सिस्टम होते हैं।
रिमेंबर दैट नोमेनक्लेचर इन हैलोएल्केनेंस एंड हैलोएंस स्पेशली इन हैलो एरीन्स सबसे ज़्यादा आपसे अगर कुछ पूछा जाता है तो वो
होते हैं नोमेनक्लेचर ट्राइविअल सिस्टम के यानी कि कॉमन नेम्स के मतलब आपसे क्वेश्चन ये नहीं बोलेगा वन कॉमा सो ऐसे क्या बोलते
हैं वन मिथाइल टू ब्रोमो बेंजीन की नेम का रिएक्शन करवाइए ये वो नहीं वो बोलेगा अ वन ब्रोमोलीन का रिएक्शन कराओ ठीक है अ फिनोल
का रिएक्शन कराओ है ना अ सेलिसिलिक एसिड बनाओ सेलिसिल्डिहाइड बनाओ तो यहां पे नोमेनक्लेचर जो सबसे इंपॉर्टेंट होते हैं।
इस पूरे ऑर्गेनिक केमिस्ट्री में जो आप 12th में पढ़ने वाले हो उसमें ट्राइविल सिस्टम ज्यादा इंपॉर्टेंट होता है। यानी
कि आपको अगर कॉमन नेम्स नहीं याद है तो याद करने ही पड़ेंगे एनी हाउ क्योंकि कॉमन नेम्स ही क्वेश्चंस पूछे जाते हैं। कॉमन
नेम्स ही आपको रिएक्शन में भी बोले जाते हैं बनाने को। ठीक है? तो वो ज्यादाेंट होता है। खैर अभी हम इस पे आते हैं। तो
यहां पे आईयूपीएसी सिस्टम भी हम यहां पे पढ़ेंगे। ट्राइविल सिस्टम कॉमन नेम्स इंक्लूड करता है। ऑफ कोर्स जो कि आपको
लर्न करने पड़ते हैं। है ना? जैसे अभी हमने एक एक क्वेश्चन दिया CH3 Br सपोज मैंने लिखा CH3Br अब ये है क्या? ये है
आपका ब्रोमोमीथेन है ना? पर इसका कॉमन नेम क्या है? मिथाइल ब्रोमाइड। तो ये मिथाइल ब्रोमाइड के नाम से भी बहुत फेमस होगा।
मिथाइल ब्रोमाइड है ना? मिथाइल ब्रोमाइड। है ना? अल्काइल हेलाइड। मिथाइल इज़ अल्काइल ग्रुप एंड
हैलाइड ग्रुप इज़ ब्रोमाइड। तो इस तरीके से इसका कॉमन नेम होता है अल्काइल हैलाइड के बेसिस पे। ठीक है? तो ब्रोमो को आप
ब्रोमीन को ब्रोमाइड बोलते हो। फ्लोराइड फिर क्लोरीन, क्लोरीन को क्लोराइड। तो इस तरीके से आप इसकी नेमिंग करते हो। ठीक है?
चलो भाई, हम एक दो क्वेश्चन कर ही लेते हैं खैर। चलो। तो नोमेनक्लेचर अगर मैं अल्काइल हैलाइड की बात करूं तो जैसे मैंने
आपको बोला कि आपको कैसे चलना है? आपको कुछ स्टेप्स याद रखने हैं। है ना? हमें कुछ स्टेप्स याद रखने हैं। सबसे पहले हमें
क्या करना है? सबसे पहले मैम हमारा काम हो जाता है। हमारा काम हो जाता है सबसे पहले मेन चेन फाइंड करना। है ना? सेकंड नंबर पे
मैम हमारा स्टेप होता है नंबरिंग करना। थर्ड नंबर पे हमारा स्टेप होता है सब्स्टट्यूट लिखना फिर रूट वर्ड फिर बॉन्ड
और फिर फंक्शनल ग्रुप। इसको कई स्कूल्स में या कई बुक्स में ऐसे लिखा जाता है प्राइमरी सब्स्टट्यूट। प्राइमरी फंक्शनल
ग्रुप, सेकेंडरी सब्स्टट्यूट, सेकेंडरी फंक्शनल ग्रुप। तो प्राइमरी, सेकेंडरी ना याद करवाते हुए मैं बोलती हूं बस ये ट्रिक
याद रखो। सबसे पहले सब्स्टिट्यूट का नाम लिखो। फिर रूट वर्ड फिर बॉन्ड और फिर एंड में फंक्शनल ग्रुप। ठीक है? अच्छा इसके
अलावा कुछ और भी रूल्स होते हैं। जैसे कि जैसे कि मोर देन वन अगर आपके पास हैलोजन लगा है। हैलोजन हैलोजन लगे हैं मोर देन वन
मोर दन वन। है ना? तो आप क्या करते हो? आप प्रीफिक्स यूज़ करते हो। अगर सेम सब्सीट्यूट लगे हैं तो आप बोलते हो डाई
ट्राई टेट्रा है ना? इस तरीके से। ठीक है? सेम मोर देन वन सेम हैलोजन लग जाए। ठीक है? जैसे कि दो बार ब्रोमीन लगाए तो डाई
ब्रोमो तीन बार लगाए ट्राई ब्रोमो इस तरीके से है ना और क्या होता है और बाकी बेसिक रूल होता है कि सबको आप स्मॉल
लेटर्स में लिखते हो उसके बाद एक रूल बहुत बेसिक सा होता है कि आप कोई भी नंबर लिखते हो तो उसके बगल में एक डैश लगाना पड़ता है
नंबर और अल्फाबेट के बीच में हमेशा एक डैश लगता है है ना तो वो हो गया आपका एक रूल फिर उसके बाद अगर एक से ज्यादा
सब्स्टिट्यूट अलग-अलग लगे मतलब डिफरेंट-डिफरेंट सब्स्टिट्यूट लग गए तब क्या करते हो तो उस टाइम पे अल्फाबेटिकली
आप चलते हो और उनकी नेमिंग करते हो ठीक है चलो हम खैर कुछ क्वेश्चन से ही समझते हैं इसको और क्वेश्चंस के पहले आप अह
नोमेनक्लेचर पहले अच्छा ऐसा करते हैं भाई। पहले हम नोमेनक्लेचर यह वाला करते हैं। ठीक है? ठीक है? तो पहले हम यह वाला
नोमेनक्लेचर करते हैं। तो इसका नाम लिखना है हमें। तो यहां पे हमारे पास कार्बन लगे होंगे। ये बॉन्ड लाइन स्ट्रक्चर है। और
बॉन्ड लाइन स्ट्रक्चर जहां पे खत्म होता है समझ जाओ वहीं पे कार्बन लगा होता है। है ना? देखो यहां पे कार्बन है। तो मैं
क्या करती हूं? सबसे इजी तरीका बोलती हूं कि जब भी आपको बॉन्ड लाइन स्ट्रक्चर दिखे आप उसको नॉर्मल स्ट्रक्चर में बदल लो।
कैसे बदलो? नॉर्मल स्ट्रक्चर में नॉर्मल में बदल लो। तो मुझे दिख रहा है सबसे पहले एक CH3 लगा है। उससे एक बॉन्ड है जिससे एक
कार्बन लगा है। उस कार्बन से एक हाइड्रोजन लगा है। और उस कार्बन का डबल बॉन्ड दूसरे कार्बन के साथ लगा है। और उस कार्बन से
फिर हाइड्रोजन लगा है। ठीक है? अब इस कार्बन से वापस एक कार्बन लगा है और इस कार्बन से ब्रोमीन लगा है। है ना? साथ ही
साथ एक हाइड्रोजन लगा है और साथ ही साथ एक CH3 ग्रुप लगा है। ठीक है? तो ये हमारा पूरी तरीके से टूट गया। है ना? अब हमें
इसका नोमेनक्लेचर करना है बेसिकली। चलो करते हैं। सबसे पहले स्टेप वन मेन चेन। ये रही भाई हमारी मेन चेन। मेन चेन। ठीक है?
ये हो गई हमारी मेन चेन। दो कार्बन लगे थे। फिर एक कार्बन लगा था। उससे फिर एक कार्बन लगा था। सही? चलो। अब नंबरिंग करो।
नंबरिंग कहां से करोगे? बॉन्ड की तरफ से जहां से बॉन्ड पास पड़े। वन टू थ्री। अगर मैं यहां से नंबरिंग कर रही हूं, तो थर्ड
पोजीशन पे बॉन्ड आ रहा है। एंड वन, टू, यहां से नंबरिंग कर रही हूं, तो सेकंड पोजीशन पे आ रहा है। तो भाई, बॉन्ड को हम
छोटा नंबर देंगे। ठीक है? अब क्या करना है? एसआर का बीएफ लगा दो। ठीक है? SR का BF। ठीक है? तो सबसे पहले आप सब्स्टट्यूट
का नाम लिखो। ये रहा यहां पे पहला सब्स्टट्यूट। फोर्थ कार्बन पे लगा है ब्रोमीन। तो नाम क्या होगा? फोर ब्रोमो।
ठीक है? सब्स्टिट्यूट लिख दिया। हां जी मैम। रूट वर्ड बताइए। टोटल पांच कार्बन है। पेंट।
बॉन्ड बताइए। सभी में सिंगल बॉन्ड है। सेकंड और थर्ड पे डबल बॉन्ड है। छोटा वाला पोजीशन देंगे। सेकंड पे लगा है इन।
ठीक है? और फंक्शनल ग्रुप नहीं है तो नहीं लिखना है। sr का बीएफ। तो ये हमारी सिंपल ट्रिक से हमने इसका नाम लिख दिया। चलो भाई
सेकंड क्वेश्चन में आते हैं। पहले मैम एक कार्बन लगा है। लिखते जाते हैं साथ ही साथ भाई। एक कार्बन लगा है। उससे एक कार्बन
लगा है डबल बॉन्ड से और डबल बॉन्ड वाले कार्बन से फिर ऊपर एक कार्बन लगा है। ठीक है? और पहले कार्बन से दो हाइड्रोजन लगे
हैं। ठीक है? अब ये आगे बढ़ा, मैम, एक और कार्बन आ गया इसमें। उससे एक ब्रोमीन लगा
है। और उससे फिर एक CH3 लगा है और ऊपर एक हाइड्रोजन लगा है। ठीक है? एक बार यार वैलेंसी सबकी चेक कर लेना। ठीक है? सब में
चार-चार बॉन्ड होने चाहिए। एक बार रिचेक करना इसको। ठीक है? चलो। ये भी हो गया मैम। अब नेमिंग करते हैं चलो। तो एट दी
एंड मुझे इसका नाम लिखना था। है ना? तो इसको आप तोड़ सकते हो। तो भाई ये रही हमारी मेन चेन अगेन ये रही मेन चेन। है ना? यस
मैम। नंबरिंग कहां से होगी? बॉन्ड के पास से। तो वन टू थ्री फोर। ठीक है? ये नंबरिंग हो गई। अच्छा। नेम कैसे लिखेंगे?
SR का BF। ठीक है? चलो सब्स्टिट्यूट क्या लगा है? मैम थर्ड पोजीशन पे ब्रोमीन लगा है। थ्री ब्रोमो
रूट वर्ड क्या होगा? टोटल चार कार्बन है। ब्यूट बॉन्ड सभी में सिंगल बॉन्ड है पर फर्स्ट
और सेकंड पे डबल बॉन्ड है। तो छोटा वाला नंबर लिखते हैं। तो वन पे इन चाहे वन पे इन लिखो चाहे वन को एक्सक्लूड करके
डायरेक्टली इन लगा दो। है ना? फर्स्ट पोजीशन हम हटा सकते हैं। तो इसका नाम हो गया थ्री ब्रोमो ब्यूटीन। ठीक है? इसका
नाम हो गया थ्री ब्रोमो वन 2 3 थ्री ब्रोमो ब्यूट ईन। ये इसका नाम। हां अच्छा एक सेकंड एक सेकंड एक सेकंड रुको रुको
रुको रुको मिथाइल नहीं लगा था मिथाइल नहीं लगा था बी पहले आएगा एम बाद में आएगा तो वन सॉरी थ्री ब्रोमो 2 मिथाइल रुको रुको
रुको थ्री ब्रोमो टू मिथाइल सॉरी सॉरी टू मिथाइल ब्यूटीन
है ना ये हो गया इसका नाम एक दो तीन चार पांच कार्बन थे है ना दो 3 4 हां पांचवा कार्बन तो ये हो गई मेन चेन 1 2 3 4 वन पे
थ्री पे ब्रोमो टू पे मिथाइल ब्यूटीन सही अभी सही है। ठीक है? थ्री ब्रोमो टू मिथाइल ब्यूटीन। एक बार इसको भी रिचेक कर
लेते हैं। 1 2 3 4 फाइव कार्बन। 1 2 3 4 फाइव कार्बन। ठीक है? तो और कहीं मिथाइल लगा है। मिथाइल लगा है। मिथाइल देखो एक तो
ये लगा है। एक लास्ट वाले से लगा है। तो तो मेन चेन में आ गया और एक यहां पे लगा था सेकंड से। वन टू। अच्छा ये तो वन से
स्टार्ट हो गया। ठीक है। ठीक है। दोनों सही है। ठीक है। ये वाला भाई आपका होमवर्क है। ये आपको बताना है कमेंट में। ये आपको
बताना है कमेंट में। ठीक है? तो आपसे मेजरली इस टाइप के क्वेश्चन पूछे जाते हैं बॉन्ड लाइन वाले। जनरली आपसे ऐसे लिख के
नहीं देता वो क्वेश्चन। वो एग्जाम में क्वेश्चन आपको बॉन्ड लाइन स्ट्रक्चर्स बना के दे देते हैं। तो आपको समझ में आना
चाहिए बॉन्ड लाइन के क्वेश्चंस आप कैसे करते हो। ठीक है? चलो अब हम वापस से आते हैं। अब आते हैं हम जरा नोमनक्लेचर ऑफ
अल्काइल हैलाइड जो कि हम करेंगे कॉमन नेम के हिसाब से। कॉमन नेम बहुत कंफ्यूजिंग होता है। याद ही नहीं होता। तो हम क्या
करेंगे? हम कॉमन नेम की कुछ ट्रिक याद करेंगे। कॉमन नेम्स कैसे याद करें भाई? कॉमन नेम्स।
तो हम कॉमन नेम्स कैसे लर्न कर सकते हैं? तो कॉमन नेम्स की हम कुछ ट्रिक से याद करेंगे। सबसे पहले एक होता है आपके पास
देखो कॉमन नेम स्टार्ट होते हैं तीन कार्बन से। कॉमन नेम की जो ट्रिक मैं बताने जा रही हूं वो तीन कार्बन से शुरू
होती है। अगर तीन कार्बन की एक स्ट्रेट चेन है या चार कार्बन, पांच कार्बन कितने भी कार्बन है और एक स्ट्रेट चेन लगी हुई
है। ठीक है? तो इसको आप बोलते हो ये एक नॉर्मल चेन है तो इसको आप एन ग्रुप से लिखोगे। एन प्रोपेन है ना? इसका नाम होगा
एन प्रोपेन। या मान लो यहां पे हैलोजन लगा है तो इसका नाम हो जाएगा n प्रोपाइल अगर मैं इसका नोमेनक्लेचर करूंगी तो नाम पता
है क्या लिखूंगी n प्रो पाइल ब्रोमाइड है ना तो इस तरीके से या आप
इसको लिख लो n प्रोपेन वाला ग्रुप है ना अभी ये हटा दो एन प्रोपेन वाला ग्रुप है ये एन प्रोपेन
एन क्यों क्योंकि एक नॉर्मल चेन है तीन कार्बन की तो n में प्रोपेन लग गया अच्छा अब दूसरा क्वेश्चन देखिएगा अगर कभी ऐसा
क्वेश्चन दिख जाए देखो जनरली जनरली मैं अगेन एक बात बोल दूं आप चाहो तो नॉर्मल याद कर लो आइसो क्या होता है क्योंकि कॉमन
नेम्स इज़ ऑल अबाउट लर्निंग ओनली कॉमन नेम्स को हम समझ नहीं सकते उसका कोई सरपर नहीं होता कॉमन नेम कॉमन नेम कुछ भी देख
के नाम रख दिए जाते हैं उसे बोलते हैं कॉमन नेम है ना कोई सरपर नहीं है ठीक है अ बारिश हो रही थी बारिश वाले दिन बच्चा
पैदा हो गया नाम रख दिया वर्षा देयर इज़ नो सरप ऑफ़ दिस नेम है ना कोई साइकोलॉजी कुछ नहीं बैठाई बस ये नॉर्मल नाम रख दिया तो
किसी के देखने के बेसिस पे ऐसे छोटू नाम है क्योंकि वो वो छोटा है है ना मोटू नाम है क्योंकि वो मोटा है तो ऐसे जो कॉमन
नेम्स जो किसी के रूल्स पे नहीं चल रहे हैं। वैसे ही ट्राइविअल सिस्टम में रखे जाते थे नाम। मतलब बहुत ओल्ड फॉर्म ऑफ
नेमिंग में किसी कंपाउंड के रूल्स के बेसिस पे नाम नहीं रखते थे। कुछ भी सोच के समझ के या वो कैसे दिख रहे हैं जैसे अ एक
कार्बन वाला एल्डिहाइड को हम बोलते हैं फॉर्मल्डिहाइड। रीज़न पता है क्या है? क्योंकि उससे फॉर्मिक एसिड बनता है। तो
फॉर्मिक एसिड बन रहा है तो उसका नाम रख दिया फॉर्मल्डिहाइड। क्योंकि उसके ऑक्सीडेशन से फॉर्मिक एसिड बन रहा है। तो
इस तरीके से नाम रखे जाते थे। तो ये हमें याद करने होते हैं। ठीक है? अच्छा। कुछ कॉमन नेम हमें बार-बार देखने को मिलते
हैं। जैसे कि आइसो ग्रुप लगा हुआ दिखता है, नियो लगा हुआ दिखता है, टर्ट लगा हुआ दिखता है, एन लगा हुआ दिखता है। उसकी मैं
आपको ट्रिक समझाने जा रही हूं। आप चाहो तो वो भी रट लो, लर्न कर लो। लेकिन इसको ट्रिक से याद रखो ताकि क्वेश्चन कितना भी
घुमा दे आप कर पाओ। ठीक है? चलो। तो अगर मुझे कभी-कभी कोई ऐसा ग्रुप दिख जाए। कार्बन कार्बन लगे हुए हैं। ठीक है? कैसे
भी कार्बन लगे हुए हैं। ठीक? और इससे दो कार्बन एक जैसे लगे हैं। इसको आप बोलते हो आइसो। जब भी आपको ऐसा हाफ हार्ट या आपको
सिंपल बोल लो हार्ट दिख जाए तो इसका वर्ड होता है आइसो आइसो जैसे ये आइसोब्यूटेन का एग्जांपल है देखो चार कार्बन हैं है ना
आइसोब्यूटेन अच्छा आइसो ग्रुप ऐसे भी लगा होता है कई बार ये भी आइसो है ये भी आइसो ग्रुप है क्यों मैम क्यों मैम क्योंकि ये
भी एक हार्ट बना रहा है ठीक है तो आइसो का सिंपल सा मतलब पता है क्या होता है जिस कार्बन से दो एकदम सेम ग्रुप्स लगे हो
एकदम सेम ग्रुप्स लगे हो उसको आप बोलते हो आइसो ग्रुप एकदम सेम ग्रुप लगे हो उसको हम बोलते हैं आइसो ग्रुप। ठीक है? आइसो
ग्रुप। फिर एक आता है टर्ट ग्रुप। टर्ट क्या होता है? ये कार्बन लगे हुए हैं। ठीक है? यहां से हैलोजन कुछ लग जाएगा। ठीक है?
तो यहां पे हाफ फ्लावर बनेगा। जब भी आपको हाफ फ्लावर बनता हुआ दिखे। हाफ फ्लावर बनता हुआ दिखे तो आप उसको बोल देना वो है
वहां पे टर्ट ग्रुप। हार्ट बनता हुआ दिखे तो हम बोल रहे हैं आइसो ग्रुप। हाफ फ्लावर बनता हुआ दिखे हम बोलेंगे टर्ट ग्रुप। फुल
फ्लावर कहीं आपको बनता हुआ दिख जाए। कहीं आपको ऐसा दिख जाए कार्बन कार्बन ऐसे लग गए और एक फुल फ्लावर बना लिया इन्होंने। तो
जब भी आपको फुल फ्लावर जैसा स्ट्रक्चर देखने को मिले उसको हम बोलते हैं नियो ग्रुप। नियो ग्रुप। ठीक है? ये पांच
कार्बन में मिनिमम पॉसिबल है। है ना? ये कम से कम चार कार्बन होने चाहिए। है ना? तो इस तरीके से देखो इनको आप ऐसे भी समझ
सकते हो। एक होता है सेक ग्रुप। तो कार्बन अगर यहां पे है और इससे लग गया। ठीक है? अब ये वाला जो कार्बन है ये 2° कार्बन है।
क्या है ये? 2° तो इसको आप बोलते हो 2° कार्बन को सेक ग्रुप। सेकेंडरी और आइसोम में बड़ी कंफ्यूजन आती है तो अभी हम उसको
समझेंगे। ठीक है? तो ये आपके पहले तो नोमेनक्लेचर हो गए। ये आपके ट्राइविअल सिस्टम के बेसिस पे हैं। अगर हमें दिल
बनता हुआ दिख जाए। एक कार्बन से दो सिमिलर ग्रुप लगे हैं। सिमिलर ग्रुप लगे हैं। सिमिलर ग्रुप लगे हैं तो हम उसको क्या बोल
देंगे? उसको हम बोल देंगे आइसो ग्रुप। ठीक है? अगर हमारे पास एक स्ट्रेट चेन है। n वाला ग्रुप हो गया वो। ठीक है? चार कार्बन
लगे हैं और ऐसे लगे हैं मैम कि वो हाफ फ्लावर बना रहे हैं तो हम उसको बोल देंगे टर्ट मैम पांच कार्बन लगे हैं और फुल
फ्लावर बना रहे हैं ना इसी के आगे हैलोजन लग जाएगा फुल फ्लावर बना रहे हैं नियो ग्रुप ठीक है नियो ग्रुप और 2° वाला
कार्बन है तो सेक ग्रुप ठीक है चलो तो यहां पे भी कुछ ऐसे ही नाम लिखने हैं जैसे इसका नाम क्या है इसका नाम है क्लोरोथेन
और अगर मैं आईयूपीएसी करूंगी तो मिथेन मिथाइल क्लोराइड तो ये क्या है क्लोरोमीथेन
क्लोरो मिथेन है ना ये क्या है अपना ब्रोमो इथेन ब्रोमो इथेन है ना या फिर इथाइल ब्रोमाइड है ना जो भी बोल लो इथाइल
ब्रोमाइड ये दोनों ही इसके दोनों ही इसके कॉमन नेम है ना और यहां पे कॉमन नेम क्या है अ क्लोरोथेन तो इसका आईयूपीएसी हो गया
मिथाइल क्लोराइड लिख दो है ना मिथाइल क्लोराइड ठीक है मैम समझ गए समझ ही गया समझ ही गया
चलो आगे समझते हैं ये क्या है अब आप कर लोगे खुद से इसका नाम प्रोपाइल आयोडाइड प्रोपाइल आयोडाइड या एन एन प्रोपाइल
आयोडाइड एन प्रोपाइल आयो डाइड है ना चलो ये क्या है देखो ये क्या है ये कार्बन है जिससे मैम CH3 और
CH3 लगा है और सेकंड पोजीशन पे लगा है क्लोरीन चलो इसका नाम सोचो क्या होगा इसका नाम क्या होगा इसका नाम हो जाएगा
आइसोप्रोपाइल क्लोराइड आइसोप्रोपाइल क्लोराइड मैम व्हाई आइसोप्रोपाइल क्लोराइड आइसो प्रोपाइल
क्लोराइड लेकिन मैम क्यों हुआ आइसोप्रोपाइल क्लोराइड समझे कार्बन से जिससे हैलोजन लगा है वो फर्दर दो सिमिलर
कार्बन से लगा है। आइसो ग्रुप मैम हार्ट तो बना ही नहीं। तभी मैम ये बात समझा रही थी कि या तो आपको स्ट्रक्चर में ऐसे लिख
देते या तो यहां पे CH3 लिख देते है ना। तो हर बार हार्ट वाला नहीं देखना है। हमें आइसो वाले ग्रुप में क्या देखना है कि दो
सेम ग्रुप लगे होंगे। जिस कार्बन से हैलोजन है वो फर्दर दो सिमिलर ग्रुप से लगा है। और यही इसको सेकेंडरी से अलग
बनाता है। अभी सेकेंडरी के हिसाब से समझना। ठीक है? फिलहाल इस पे और यह क्या है? सेम अह एक नॉर्मल सी चेन है मैम। n
ब्यूटाइल ब्रोमाइड। ठीक है? अच्छा, अब इसे ध्यान से देखो। इसे
ध्यान से देखो। इसी से आप समझोगे डिफरेंस बिटवीन आइसो एंड सेक। सेक मतलब होता है 2° वाले कार्बन से लगा हो। देखो ये वन ये
कार्बन जिस हैलोजन जिस कार्बन से है। हैलोजन जिस कार्बन से है वो फर्दर दो कार्बन से लगा है। यानी कि ये 2° है। और
वो जिन दो कार्बन से लगा है वो देखो एकदम सेम नहीं है। यहां पे CH3 है और यहां पे CH2 है। है ना? तो जब मैंने इसको यहां पे
समझाया तो आप इसको क्या बोलोगे कि यहां पे इस क्वेश्चन के हिसाब से अगर हम देखें तो यहां पे लगा है CH2 ग्रुप। यहां पे लगा है
CH3 ग्रुप। यहां पे लगा है CH3 ग्रुप। और यहां पे कार्बन लगाओ या कोई अभी क्योंकि हम है हेलो एल्केन पढ़ रहे हैं तो हैलोजन
लगा लो। ठीक है? चलो। अब इस कार्बन को हम बोलेंगे 2°। हम इसको आइसो बोल ही नहीं सकते। क्यों नहीं बोल सकते? मैम आइसो।
क्योंकि यहां पे दो सिमिलर कार्बन नहीं है। जिस कार्बन से लगा है अगर वो दो सेम कार्बन से लग गया। आइसो ग्रुप। लेकिन
हैलोजन जिस कार्बन से लगा है वो दो डिफरेंट कार्बन से लगा है और वो सेकंड डिग्री वाला कार्बन है सेक ग्रुप। याद
रखना ये चीज। ठीक है? तो इसका नाम होगा सेक सेक ब्यूटाइल ब्रोमाइड।
दिस इज़ सेक ब्यूटाइल ब्रोमाइड। देखो इसका नाम क्या होगा? इसका नाम हो जाएगा सेक ब्यूटाइल ब्रोमाइड। सेक ब्यूटाइल
ब्रोमाइड। ठीक है? चलो। अब यार ये तो बड़ा आसान हो गया। है ना? ये देखो मैम कार्बन किसी हैलोजन से लगा है और वो मैम हाफ
फ्लावर बना रहा है। टर्ट ब्यूटाइल ब्रोमाइड है ना? टर्ट ब्यूटाइल ब्रोमाइड वाला ग्रुप
हो गया। ठीक है? अब इसको आप सोचो क्या होगा? ये ब्रोमीन है। ये कार्बन से लगे हैं। है ना? और ये कार्बन फर्दर दो कार्बन
से लगे हैं। एक यहां पे एक यहां पे। अब सोचो ये आइसो है। क्या है ये? कौन सा ग्रुप है? ये आपको भाई कमेंट में बताना
है। लेकिन एक चीज़ मैं आपको हिंट देती हूं। पहले मैं आपको एक हिंट दे के जाऊंगी। सुनो ध्यान से। ब्रोमीन जो है ब्रोमीन जो है वो
इस कार्बन से नहीं लगा है। मतलब अगर आप सेक समझ रहे हो तो भी थोड़ा ध्यान से देख लो। सेक कैसा दिख रहा है? सेक कैसा दिख
रहा है ना? कहां गया सेक? ये देखो सेक कैसा दिख रहा है। है ना? हैलोजन कहां लगा है? ये देखो। फिर उसके हिसाब से सोचना कि
वो कौन सा ग्रुप में आ रहा है। तो ये आपको भाई कमेंट में बताना है अगेन। नेक्स्ट क्या है देखो मैम? हैलोजन किसी कार्बन से
लगा है। एंड ये अपना फुल फ्लावर जैसा दिख रहा है। तो ये नियो बन गया। नियो पेंटाइल ब्रोमाइड। नियो पेंटाइल ब्रोमाइड। ठीक है?
तो ये होते हैं आपके कुछ कॉमन नेमिंग्स नेमिंग्स जो आप समझ सकते हो। ठीक है? जिसको आप ट्रिक्स के बेसिस पे समझ सकते
हो। है ना? बिकॉज़ दे आर नॉट लाइक फॉर्मल्डिहाइड, फॉर्मिक एसिड ये वैसे नहीं है। ये कुछ ये भी कुछ ना कुछ थोड़ा बहुत
रूल्स लगा इसमें। है ना? तो इस बेसिस पे आप इसको समझ सकते हो। आई होप सो आपको ये समझ में आया होगा। ये बहुत भाई इसमें बहुत
लोग कंफ्यूज रहते हैं। तो इसको बहुत अच्छे से आपने समझ लिया होगा। अब हम आगे बढ़ते हैं। अब अगर हम आगे बढ़े तो नोमेनक्लेचर
होने के बाद ये कार्बन हैलोजन के बारे में हम पढ़ने जा रहे हैं। कार्बन हैलोजन का बॉन्ड कैसा होता होगा? सोचो। कार्बन की जब
मैं बात करती हूं और हैलोजन की जब मैं बात करती हूं तो हमने पीरियडिक टेबल में बचपन की क्लासेस में थोड़ा बहुत जाना है।
कार्बन जो होता है वो थोड़ा-थोड़ा नॉन पोलर होता है। है ना? कहीं ना कहीं नॉन पोलर कह सकते हैं हम उसको। लेकिन जो
हैलोजन होता है वो पोलर होता है। इसका क्या मतलब है मैम? पोलर का मतलब होता है पोलरिटी। पोलरिटी का मतलब होता है
चार्जेस। है ना? जो हैलोजन है। देखो कार्बन हैलोजन में बॉन्ड बन कैसे रहा है आपके हिसाब से? अगर मैं कार्बन हैलोजन का
बॉन्ड पूछूं। कैसा बन रहा है? मैम एक कोवेलेंट बॉन्ड है कार्बन और हैलोजन के बीच में। है ना? लेकिन यार ये भी तो हमको
पता है कि ये जो हैलोजन होता है ये अपना पोलर ग्रुप होता है। इसमें पोलरिटी होती है। चार्जेस होते हैं इसमें। ठीक है? और
जो हैलोजन है जो कार्बन है सॉरी वो अपना नॉन पोलर जैसा होता है। है ना? ये अपना थोड़ा सा नॉन पोलर होता है। मतलब इसमें
पोलरिटी नहीं होती है। चार्जेस नहीं होते। ठीक है? अब सुनो ये जो पोलर है ये इसलिए पोलर है क्योंकि इसकी इलेक्ट्रोनेगेटिविटी
ज्यादा होती है। और ये जो नॉन पोलर है ये इसलिए नॉन पोलर है क्योंकि इसकी इलेक्ट्रोनेगेटिविटी का डिफरेंस कम होता
है। इसका मतलब समझना जो हमारा हैलोजन है वो पोलर क्यों है? क्योंकि इलेक्ट्रोनेगेटिविटी ज्यादा है।
मतलब मैम मतलब हैलोजन के पास टेंडेंसी है टू अट्रैक्ट इलेक्ट्रॉन्स टू इटसेल्फ। सुनना सुनना सुनना। मेरी बात को सुनो। ये
क्या है? ये हैलोजन है। मैं एक कार्बन हूं। ठीक है? हम दोनों साथ में लगे हुए हैं। या ऐसा करो ये हैलोजन है। मैं कार्बन
हूं। ठीक है? यही तो पहले बोला था। ऐसा करो। ये कार्बन है। मैं हैलोजन हूं। अभी सही बोला है। ठीक है? अब ये कार्बन भाई
साहब है। मैं इसके साथ लगी हुई हूं। ठीक है? तो मैंने क्या बोला? मैंने कहा हम तुम तो मेरे साथ कोवेलेंट बॉन्ड बना रहे हो।
कोवेलेंट बॉन्ड का मतलब जो कि शेयरिंग ऑफ इलेक्ट्रॉन्स की वजह से हो रहा होता है। ठीक है? तो कोई छीनापटी नहीं हो रही है।
दोनों साथ में एक-एक इलेक्ट्रॉन को शेयर कर रहे थे। पर जो हैलोजन भाई साहब है वो थोड़ा सा चालाक है। वो इसके इलेक्ट्रॉन
लेके भागना चाहता है। ठीक है? या ऐसा बोल लो उसकी इलेक्ट्रोनेगेटिविटी ज्यादा है। उसके पास टेंडेंसी है टू अट्रैक्ट
इलेक्ट्रॉन्स टू इटसेल्फ। तो मैं क्या करूंगी? मैं इस मैं इसके साथ बॉन्ड बना के रखी हुई हूं। ठीक है? तो मैं इससे
इलेक्ट्रॉन खींचूंगी इसके। तो मैं इसके इलेक्ट्रॉन ऐसे खींच रही हूं। खींच रही हूं खींच रही हूं। तो थोड़ी देर बाद यहां
ऐसे दिखने लगेंगे ऐसे। इसके इलेक्ट्रॉन थोड़े-थोड़े मेरी तरफ शिफ्ट होंगे। अगेन इलेक्ट्रॉन मैं ले नहीं रही हूं उसके
इलेक्ट्रॉन्स। समझो मैं उसके इलेक्ट्रॉन्स को ले नहीं रही हूं। मैं उसके इलेक्ट्रॉन्स को खींच रही हूं। देयर इज़ अ
डिफरेंस। ये इलेक्ट्रॉन्स ले लेता तो ये एक एनायन बन जाता और इस पे नेगेटिव चार्ज आ जाता और उस पे पॉजिटिव चार्ज आना पड़
जाता। है ना? बट ये इलेक्ट्रॉन्स ले नहीं रहा है। यहां कोई इलेक्ट्रॉन एफ़िनिटी नहीं हो रही है। यहां इलेक्ट्रोनेगेटिविटी हो
रही है। व्हाट इज़ इलेक्ट्रोनेगेटिविटी? टेंडेंसी ऑफ़ एन एटम टू अट्रैक्ट इलेक्ट्रॉन्स टू इटसेल्फ। मैं सिर्फ इससे
इलेक्ट्रॉन खींच लूंगी तेज़ से। खींच रही हूं इलेक्ट्रॉन। अच्छा। तो ये कुछ थोड़ी देर बाद अगर मैं इस बॉन्ड को देखूंगी तो
ये मुझे ऐसा दिखेगा। कार्बन इलेक्ट्रॉन कार्बन के। यहां पे इलेक्ट्रॉन हैलोजन के और हैलोजन। तो कुछ समझ में आया? इसके
इलेक्ट्रॉन शिफ्ट हो गए इस तरफ। है ना? कार्बन के जो इलेक्ट्रॉन्स थे थोड़े-थोड़े हैलोजन की तरफ शिफ्ट हुए। अगर हैलोजन
इलेक्ट्रॉन को ले रहा होता तो मैं उसको नेगेटिव चार्ज देती और कार्बन को पॉजिटिव। लेकिन ये ले नहीं रहा। खींच रहा है
इलेक्ट्रॉन, तो मैं इस पे डेल्टा नेगेटिव और इस पे डेल्टा पॉजिटिव दूंगी। डेल्टा का मतलब होता है पार्शियल।
पार्शियल। ठीक है? पार्शियल। तो हैलोजन पे पार्शियली जो है इलेक्ट्रॉन लेने वाला चार्ज आ रहा है। यानी कि पार्शियल नेगेटिव
आ रहा है। डेल्टा मतलब पार्शियल आधा-आधा है ना? पूरा नहीं नेगेटिव आया। इलेक्ट्रॉन ले लेता तो पूरा नेगेटिव देते। पर उसने
पूरे इलेक्ट्रॉन्स थोड़ी लिए। उसने तो खींचे हैं अपनी तरफ। है ना? भाई ने सिर्फ इलेक्ट्रॉन्स अपनी तरफ खींचे हैं। लिए
नहीं है। तो मैंने उसको बोला पार्शियल नेगेटिव है तुम पे चार्ज। और कार्बन पे पार्शियल पॉजिटिव आना पड़ गया। ठीक है? अब
ये जो बॉन्ड बना है ये पोलर बॉन्ड है। है ना? अभी आप इतना लिखा था आपने इलेक्ट्रोनेगेटिविटी
ज्यादा थी। इलेक्ट्रोनेगेटिविटी कम थी। ठीक है? अब ये जो बॉन्ड बना इनका ये एक पोलर बॉन्ड होता है। ये एक पोलर
बॉन्ड होता है। पोलर मतलब पोलरिटी। पोलैरिटी मतलब चार्जेस। है ना? ध्यान से देखो। देखने में लग रहा है इन्होंने
शेयरिंग करी हुई है। पर भाई उतनी अच्छी शेयरिंग इनकी है नहीं। हम घर के इंसान नहीं है तो हमें घर की बातें ज्यादा नहीं
पता है। लेकिन घर में माहौल ठीक नहीं है इनके। ये इलेक्ट्रॉन खींच रहा है अपनी तरफ। ये एक नॉर्मल बॉन्ड नहीं है। ये पोलर
कोवेलेंट बॉन्ड है। यानी कि इनके बीच में पोलरिटी है। चार्जेस हैं इनके बीच में। ठीक है? तो ये पोलर कोवेलेंट बॉन्ड होता
है। चलो तो हैलोजन एटम कैरीज़ अ स्मॉल नेगेटिव चार्ज। ठीक है? कार्बन एटम जो है वो कैरी कर रहा है थोड़ा सा पॉजिटिव चार्ज।
तो ये जो CHX बॉन्ड है ये एक पोलर कोवेलेंट बॉन्ड है। CX बॉन्ड जो है उसकी लेंथ इंक्रीस करती है। एंड CHX बॉन्ड
एनर्जी डिक्रीसेस फ्रॉम फ्लोरीन टू आयोडीन। वी मूव फ्रॉम फ्लोरीन टू आयोडीन। जैसे-जैसे चलते हैं। कुछ समझ नहीं है।
पहले मेरी बात सुनो ध्यान से। बस मैम की बात सुनो। मैम समझाती हैं। तो जब हम फ्लोरीन का कार्बन के साथ बॉन्ड बनाते हैं
तो क्या होता है? अगर मैं इसी में कार्बन और फ्लोरीन का बॉन्ड बना लूं। यानी कि मैंने जो हैलोजन लिया है मैंने मान लिया
वो फ्लोरीन है लेट्स से। ठीक है? तो कार्बन और फ्लोरीन दोनों छोटे-छोटे से एटम होते हैं। है ना? तो इनके बीच का बॉन्ड
है। है ना? फिर उसके बाद उसके बाद हम बोल सकते हैं कार्बन का बॉन्ड क्लोरीन के साथ। अब जैसे-जैसे हम फ्लोरीन, क्लोरीन,
ब्रोमीन, आयोडीन नीचे आते हैं, तो एटम का साइज कम होता है। है ना? कार्बन तो सेम ही रहेगा सेम एटम। है ना? कार्बन तो कार्बन
ही है। फिर क्लोरीन, फिर क्लोरीन, ब्रोमीन और आयोडीन। इस तरीके से है ना? ये तो नीचे आते-आते क्या हुई? इनकी
बॉन्ड लेंथ बढ़ेगी। बॉन्ड की लेंथ बढ़ेगी। नीचे आते-आते हैलोजन एटम का साइज़ बढ़ा। यानी कि इनकी बॉन्ड की जो लेंथ थी वो बढ़
जाएगी। अच्छा एक बात बताओ। मैं बोलूं जाओ ये मार्कर को तोड़ के लेके आओ। तो आप तोड़ दोगे इसको। है ना? मैं बोला सुनो सुनो
सुनो। मुझे लाओ। इसको मैंने एकदम छोटा सा हिस्सा किया। पहले बोला जाओ आप तोड़ के लाओ। तो आपको ज्यादा डिफिकल्टी होगी उसको
ब्रेक करने में। शुगरकेन गन्ने गन्ने को उठाओगे ऐसे तोड़ लोगे। है ना? तोड़ लेते हैं। उस गन्ने का एकदम छोटा सा हिस्सा
लेके जाओ। अब तोड़ने की कोशिश करो हाथ से तो उसमें ज्यादा मेहनत लगेगी। तो जितनी ज्यादा किसी की बॉन्ड लेंथ उतनी कम उसकी
बॉन्ड की स्ट्रेंथ। मतलब अगर मैं बोलूं इसका बॉन्ड तोड़ के दिखाओ और इसका बॉन्ड तोड़ के दिखाओ। आप सबसे ज्यादा किसके
बॉन्ड तोड़ने में मेहनत लगाओगे? आप फ्लोरीन ये फ्लोरीन था। ये क्लोरीन, ब्रोमीन, आयोडीन। ठीक है? आपको फ्लोरीन के
बॉन्ड तोड़ने में सबसे ज्यादा टाइम लगेगा या सबसे ज्यादा मेहनत लगेगी। सबसे ज्यादा डिफिकल्ट तरीके से टूटेगा।
अच्छा मैम ये गन्ने का रीज़न तो हम लिख के नहीं आ जाएंगे ना। तो हम रीज़न क्या लिखेंगे? रीज़न क्या है इसका? कि यहां पे
न्यूक्लियस जो है डिस्टेंस जो है न्यूक्लियस से वो काफी कम है। है ना? तो न्यूक्लियस न्यूक्लियस में बहुत स्ट्रंग
फोर्स बना हुआ है। बहुत ही ज्यादा स्ट्रांग बॉन्ड बन गया इनके बीच का। और किसी में न्यूक्लियस दूर है। उसके बॉन्ड
को तोड़ना थोड़ा सा आसान हो जाएगा। ठीक है? तो बॉन्ड की लेंथ जब इनक्रीस करती है तो जो बॉन्ड की स्ट्रेंथ है वो कम हो जाती
है। दे आर इन्वर्सली प्रोपोर्शनल। किसी भी ग्रुप में बॉन्ड की लेंथ जब बढ़ती है तो उसको तोड़ना थोड़ा आसान है। यानी कि उसकी
स्ट्रेंथ कमजोर है। और बॉन्ड की लेंथ जितनी छोटी उसको तोड़ना उतना मुश्किल है। और इसीलिए आपको याद होगा मैंने अभी भी एक
बात बोली थी कि फ्लोरीन की बहुत कम रिएक्शंस आप पढ़ने वाले हो। क्यों? क्योंकि जब आप रिएक्शन पढ़ते हो तो आप
क्या बोलते हो? आप बोलते हो कि कार्बन हैलोजन का बॉन्ड तोड़ना है। अच्छा कार्बन हैलोजन का बॉन्ड तोड़ना थोड़ा आसान है।
क्यों? उनके घर में ऑलरेडी दिक्कतें चल रही है। घर तोड़ना आसान है भाई इसका। ठीक है? क्यों? क्योंकि उनके ऑलरेडी प्रॉब्लम
चल रही है। पोलर ग्रुप है। एक के पास इलेक्ट्रॉन खींचने की टेंडेंसी है और दूसरे से इलेक्ट्रॉन बेचारे से खींच रहे
हैं। तो हम उसका बॉन्ड आसानी से तोड़ सकते हैं। ये सच है। लेकिन फ्लोरीन के केस में इतनी आसानी से नहीं हो पाएगा ये काम।
फ्लोरीन को तोड़ने में तो इतना इतनी ज्यादा हाई जूल की एनर्जी निकलती है ना या सॉरी इतनी ज्यादा हमें एनर्जी देनी भी
पड़ती है जितना कार्बन कार्बन को भी देने के लिए नहीं पड़ती। सोचो कार्बन-कार्बन दोनों अ इलेक्ट्रोनेगेटिविटी दोनों की सेम
है। देयर इज़ नो इलेक्ट्रोनेगेटिविटी डिफरेंस। लेकिन कार्बन-कार्बन के बॉन्ड तोड़ने से भी ज्यादा एनर्जी कई बार देनी
पड़ती है कार्बन फ्लोरीन का बॉन्ड तोड़ने में। क्यों? क्योंकि फ्लोरीन इज़ अ वेरी स्मॉल एटम। बहुत छोटा सा एटम है। तो उसके
बॉन्ड को तोड़ना हमारे लिए बहुत डिफिकल्ट है। वो बहुत तेजी से पकड़ा होता है कार्बन को। ठीक है? तो ये एक बात हो गई इसके इससे
रिलेटेड। ठीक है? तो इनके बॉन्ड लेंथ बढ़ेगी नीचे आते टाइम। और बॉन्ड लेंथ बढ़ेगी यानी कि बॉन्ड एंथैल्पी कम होगी।
एनर्जी है ना? स्टेबिलिटी कम होगी। भाई आयोडीन सबसे कम स्टेबल है। आसानी से टूट जाएगा और रिएक्टिविटी उनकी उतनी ज्यादा
बढ़ जाएगी। है ना? मतलब आयोडीन सबसे अच्छे से रिएक्शन कर सकता है। भाई देखो आयोडीन को तोड़ना सबसे आसान है। सबसे आसान। किसी
के भी साथ भी रिएक्शन कराओगे मस्त एकदम टूट जाएगा बॉन्ड फटाफट। लेकिन वो सबसे कम रिएक्टिव है। वो बॉन्ड तोड़ता ही नहीं है
कार्बन के साथ। ठीक? तो वो किसी और से क्या रिएक्ट करेगा? तो ये इनकी पूरी कहानी हो गई। ठीक है भाई? अच्छा। अब आपको यहां
पे एक चार्ट बना हुआ दिख रहा है जो कि बॉन्ड लेंथ, बॉन्ड एंथैल्पी और पोलरिटी बता रहा है। ठीक है? यानी कि डपोल मोमेंट
भी आपको देखना है। ठीक है? अब सुनना मेरी बात ध्यान से। इसके बॉन्ड लेंथ है 139। ठीक है? और इसकी बॉन्ड एंथैल्पी है ना?
बॉन्ड को तोड़ने के लिए जो एनर्जी दी होगी वो 5 452 kज पर मोल है। ठीक है? यहां पे क्लोरीन की बॉन्ड लेंथ है 178 और इसको
दिया 351 की एनर्जी। ठीक है? चलो ये हमारे पास एक ऑर्डर गिवेन है। ठीक है? अब ये है क्या? जैसे ही बॉन्ड लेंथ देखी उसके बेसिस
पे कितनी एनर्जी देनी पड़ रही है? देखो जैसे-जैसे बॉन्ड की लेंथ कम हो रही है हमें कम एनर्जी देनी पड़ रही है। हमें कम
एनर्जी देनी पड़ रही है। है ना? यस मैम। लेकिन आप जरा यहां पे ध्यान दो। ये क्या है? ये दिया हुआ है इसका बॉन्ड ऑर्डर।
क्या है ये? डपोल मोमेंट। सॉरी बॉन्ड ऑर्डर नहीं डाइपोल मोमेंट। डपोल मोमेंट का मतलब क्या होता है? ये हमने फिजिक्स में
पढ़ा होगा। है ना? डीवाई इसकी यूनिट होती है। और डपोल मोमेंट होता क्या है? जो भी चार्जेस हैं इंटू जो भी डिस्टेंस है उनके
बीच की। q * डिस्टेंस है ना? ये होता है डपोल मोमेंट। अब डपोल मोमेंट देखो कैसे होना चाहिए। अगर मैम हम ऊपर से नीचे देखें
तो अ फ्लोरीन में सबसे कम डिस्टेंस है। फिर क्लोरीन फिर ब्रोमीन फिर आयोडीन ऐसे ही है। है ना? तो डपोल मोमेंट जो गिवन है
वो कैसे है? 1.847 1.860 1.830
1.63 एक सेकंड मैम। क्या कर रहे हो आप? ये क्या पढ़ रहे हो आप? अगर मैं दिमाग लगाऊं तो डपोल मोमेंट ऊपर से नीचे आते टाइम कम
होना चाहिए। है ना? कम होना चाहिए। बिल्कुल सही बात है भाई। क्योंकि ऊपर से नीचे आते टाइम बॉन्ड एंथैल्पी भी तो कम हो
रही है। है ना? तो मैम कम होना चाहिए। पर यहां पे आप एक एक्सेप्शन देखते हो वो है फ्लोरीन और क्लोरीन का। ठीक? ऊपर से नीचे
आते टाइम जो क्लोरीन है उसका डपोल मोमेंट इज़ मोर दैन दैट ऑफ़ फ्लोरीन वाला। ऐसा क्यों हुआ होगा? सोचो। सोचो कार्बन के साथ
क्लोरीन लगा है। कार्बन के साथ क्लोरीन लगा है। अब हमें पता है क्लोरीन का बॉन्ड तोड़ना आसान है। फ्लोरीन का तोड़ना बड़ा
मुश्किल है। है ना? ये तो हमें समझ में आ गया क्योंकि फ्लोरीन एक बहुत छोटा एटम है। तो डपोल मोमेंट क्या होता है? चार्ज *
डिस्टेंस। तो चार्ज * डिस्टेंस। चार्ज * डिस्टेंस कर रहे क्लोरीन की डिस्टेंस ज्यादा है। फ्लोरीन की डिस्टेंस कम है।
ठीक? तो नीचे आते-आते अगर मैं बात करूं डपोल मोमेंट की तो जनरली डपोल मोमेंट जो है वो जनरली डिक्रीज करता है। तो इस केस
में उल्टा हुआ क्यों मैम? तो इसका रीज़न है फ्लोरीन एटम का बहुत छोटा होना। फ्लोरीन एटम इतना छोटा एटम है। इतना छोटा एटम है
कि उसकी डिस्टेंस बहुत ही कम हो जाती है। उसकी जो डिस्टेंस है वो बहुत कम हो जाती है। हमने एक्सपेक्ट किया था फ्लोरीन का
डपोल मोमेंट क्लोरीन से ज्यादा होना चाहिए। भाई ऊपर से नीचे आने आते टाइम कम होना चाहिए। यानी कि फ्लोरीन का ज्यादा
फिर क्लोरीन का फिर ब्रोमीन फिर आयोडीन। बाकी तो अपने ऑर्डर में है लेकिन फ्लोरीन क्लोरीन में रिवर्स हुआ। रियल में डपोल
मोमेंट क्लोरीन का ज्यादा है। एज़ कंपेयर टू फ्लोरीन। पर ऐसा क्यों? क्योंकि डपोल मोमेंट क्या होता है? चार्जेस इंटू
डिस्टेंस जो मैम ने आपको बताया। जो भी चार्ज है इंटू जो भी डिस्टेंस है उसके बीच का। है ना? तो कार्बन फ्लोरीन की
अगर मैं बात करूं तो कार्बन फ्लोरीन में चार्ज तो बहुत हाई है। छोटा सा एटम है। बहुत हाई चार्ज है फ्लोरीन में। लेकिन उस
वो इतना छोटा इतना स्मॉल एटम है कि उसके बीच की डिस्टेंस कुछ ज्यादा ही कम है एज़ वी एक्सपेक्टेड जो हमने सोचा था जो हमने
इमेजिन किया था उससे भी कम डिस्टेंस होती है फ्लोरीन की। एंड दैट इज़ द रीज़न ये इसकी वैल्यू इतनी स्मॉल आ जाती है फ्लोरीन के
केस में कि इसका जो पूरा प्रोडक्ट निकल के आता है वो क्लोरीन से थोड़ा सा कम होता है। थोड़ा सा पॉइंट में ही डिफरेंस है बट फिर
भी एक्सेप्शन है तो हमें जानना पड़ेगा। और पॉइंट में भी डिफरेंस होना बड़ी बात होती है क्योंकि एटम बहुत छोटे-छोटे होते हैं।
है ना? बहुत छोटे स्पीशीज़ में हम बात कर रहे हैं। तो पॉइंट में अगर डिफरेंस आ रहा है वो भी बहुत ह्यूज माना जाता है। ठीक
है? तो डिस्टेंस बिटवीन चार्जेस इज़ वेरी लेस एंड दिस इज़ द होल रीज़न। तो आई होप सो आपको नेचर ऑफ़ कार्बन, हैलोजन बॉन्ड समझ
में आया होगा। चलो भाई फाइनली आगे बढ़ते हैं। प्रिपरेशन ऑफ़ हैलोएल्केन। अब मेथड्स ऑफ प्रिपरेशन में पहला मेथड है हमारे पास
फ्रॉम अल्कोहॉल्स। अब ये आप कहां पढ़ोगे? आप अल्कोहल, फिनोल, ईथर में ये सारी रिएक्शन दोबारा देखने वाले हो। एंड आपकी
एनसीईआरटी में वो लिख देते हैं एक रिएक्शन के बाद प्रीवियसली डिस्कस इन चैप्टर ये सिक्स हैलोएल्केन एंड हैलोरीन। तो आपको
भाई ये पता होने चाहिए। ठीक है? क्योंकि ये आगे आपसे पूछे जाने वाले हैं। चलो समझते हैं। सबसे पहले हमारे पास रिएक्शन
है अल्कोहल से। अब अगर मुझे हैलोल्केन बनाना है। अल्काइल हैलाइड बनाना है तो मैं हेल्प ले सकती हूं अल्कोहल की। और इसके
बेसिस पे हमारे पास होती हैं यहां पे छह रिएक्शंस जो कि बहुत ज्यादा इंपॉर्टेंट होती हैं और बड़ी प्यारी रिएक्शंस होती
हैं। अब ये जो रिएक्शन है ये आपको मेमोराइज भी होनी चाहिए। देखो केमिस्ट्री का एक बहुत प्यारा सा रूल होता है जो आपको
हर इंसान नहीं बताता। मैं आपको एक चीज़ बता दूं केमिस्ट्री का एक बहुत अच्छा सा रूल होता है। ना ही तो केमिस्ट्री पूरी याद
करने वाली होती है कभी भी। अगर आपको कोई बोल रहा है याद करना है, याद करना है, सब याद करना है। दिस इज़ नॉट पॉसिबल। पर
रियलिटी ये भी है कि केमिस्ट्री को पूरा समझने के अलावा क्या कुछ भी याद नहीं करना होता है? तो मेरा रूल यही कहता है हमेशा
समझो हर चीज हर चीज समझ में आनी चाहिए लेकिन कुछ चीजें याद रखनी है हमें ताकि जब हम एग्जाम में बैठे तो हमारा ज्यादा टाइम
वेस्ट ना हो है ना अब बेसिक से एक नंबर का क्वेश्चन आने वाला है इससे सपोज है ना और वो एक क्वेश्चन आपका पूरा एक घंटा ले मैं
कह रही हूं एक घंटा टॉप 5 मिनट ले जाए तो आपने क्या उस क्वेश्चन को कर लिया मान लो सही भी कर लिया पर आपका वो इतना टाइम ले
गई जो आपको एक बड़े क्वेश्चन में देना था टाइम आर यू गेटिंग माय पॉइंट ठीक है तो हमें टाइम के अकॉर्डिंग भी बहुत ज्यादा
काम करना होता है तो आप ना हर चीज समझो लेकिन कुछ चीजें मेमोराइज करने की कोशिश करो। जैसे ये अल्कोहल वाली जो छह रिएक्शंस
होती हैं ना ये आपके दिमाग में ऐसी होनी चाहिए कि जैसे ही इससे क्वेश्चन आया आपने आंसर दे दिया। ये ऐसे क्वेश्चंस आते हैं।
ठीक है? तो ये क्वेश्चंस आपको ऐसे पूछे जाते हैं तो आपको ऐसे ही पढ़ने हैं इसको। ठीक है? चलो समझते हैं। सबसे पहली रिएक्शन
है हम अल्कोहल से भाई हैलोएकेन बना सकते हैं। पांच छह तरीके होते हैं। पहला तरीका होता है हमारे पास कि हम यूज़ कर लें
ल्यूकास रिएजेंट। अ वेरी इंपॉर्टेंट रिएक्शन। एक बहुत ही ज्यादा इंपॉर्टेंट रिएक्शन है आपकी ल्यूकास रिएजेंट वाली
रिएक्शन। ठीक है? तो ल्यूकास रिएजेंट क्या कहता है मैम? और ये मतलब क्या है? और ये ल्यूकास रिएजेंट होता क्या है? तो आप एक
अल्कोहल को उठाओ और उसकी रिएक्शन करा दो अ हाइड्रोक्लोरिक एसिड से HCL से इन द प्रेज़ेंस ऑफ़ जिंक क्लोराइड एनहाइड्रस जिंक
क्लोराइड ZnCl2 एनहाइड्रस फॉर्म में लेना है। ठीक है? एनहाइड्रस एनहाइड्रस ZnCl2 ठीक है? तो ये जो इसको
लिख लेना यार मैं इसको पूरा बता यहां पे लिख देते हैं। चलो एनहाइड्रस। ठीक है? तो ये जो पूरा ग्रुप है ना इसे आप
बोलते हो ल्यूकास रिएजेंट। और इसका एक टेस्ट बड़ा इंपॉर्टेंट है, बड़ा फेमस है। अभी आगे समझेंगे ल्यूकास रिएजेंट। ठीक है?
ल्यूकास रिएजेंट। ठीक है? तो ल्यूकास रिएजेंट क्या कहता है? तो अगर आपने किसी अल्कोहल को उठाया और आपने उसकी रिएक्शन
करा दी HCL इन द प्रेज़ेंस ऑफ़ एनहाइड्रस ZnCl2 तो ये आपको बना के देता है हेलो एल्केन। क्या बना के देता है? हैलोएल्केन।
साथ ही साथ वाटर बाहर निकलता है। रिएक्शन कैसे होगी मैम? सारी ही रिएक्शन में पॉजिटिव नेगेटिव का ही खेल है केवल। ठीक
है? अगर मैं इसकी बात करूं तो OH नेगेटिव R पॉजिटिव है ना इसकी बात करूं Cl नेगेटिव H पॉजिटिव है ना तो OH जाएगा H के साथ तो
बनेगा H2O R जाएगा हमारा Cl के साथ तो बनेगा RCL है ना RCL तो अगर आपको कभी भी कोई अल्काइल क्लोराइड बनाने को दे दे ठीक
और अल्कोहल की हेल्प से बोले तो आप क्या करोगे उसमें HCL इन द प्रेज़ेंस ऑफ़ एनहाइड्रस ZnCl2 ऐड कर दोगे। ठीक है? ये
आपका फॉलो करता है SN1 मैकेनिज्म। अगर आपको SN1, SN2 नहीं आता है तो अभी हम समझने वाले हैं आगे। ठीक है? तो ये हमारा
SN वन मैकेनिज़्म फॉलो करता है। एक नंबर में आपसे क्वेश्चन पूछा जा सकता है मैकेनिज़्म से ऊपर। ठीक है? चलो। अच्छा
सेकंड रिएक्शन होती है हमारे पास कि हम ले लें सोडियम ब्रोमाइड। अगर मैं अल्कोहल में सोडियम ब्रोमाइड और थोड़ा सा सल्फ्यूरिक
एसिड डाल दूंगी तो यहां पे भी मुझे अ अपना हैलो एल्केन मिल सकता है। तो ये अल्काइल ब्रोमाइड बनाने की रिएक्शन हो गई। अल्कोहल
से मुझे अल्काइल ब्रोमाइड बनाना है। तो मैं सोडियम ब्रोमाइड डाल दूंगी इन द प्रेज़ेंस ऑफ़ सल्फ्यूरिक एसिड। फिर वही
पॉज़िटिव नेगेटिव का खेल है ना? जो R है वो जाएगा Br के साथ तो R Br हैलो एल्केन बन जाएगा हमारा है ना जैसे इसका नाम क्या है
मान लो एक कार्बन वाला है तो ब्रोमोमीथेन है ना ब्रोमोथेन कुछ भी इस तरीके से आप बना सकते हो साथ ही साथ सोडियम के साथ
HSO4 जाता है तो NaHSO4 बनता है और साथ ही साथ वाटर बाहर निकलता है तो H2O तो ये हो गई ब्रोमीन वाली रिएक्शन। अच्छा थर्ड
रिएक्शन को मैं बोलती हूं थ्री वाली रिएक्शन। इसका मैंने नाम ही रखा हुआ है थ्री वाली रिएक्शन। इसका नाम है थ्री वाली
रिएक्शन। थ्री वाली रिएक्शन। इस रिएक्शन का नाम है थ्री वाली रिएक्शन। देखो ये थर्ड पोजीशन पे है
पहली चीज। ठीक? अब यहां पे होता क्या है? पहले समझो। हमारा ऐ क्या है? हमें अल्कोहल लेना है मैम। उससे हैलो एल्केन बनाना है।
ROH ले लिया और RCL, RBr RI ऐसा कोई ग्रुप बनाना है। फ्लोरीन वाला मत सोचना। फ्लोरीन एक ही रिएक्शन पढ़नी है यहां पे। केवल। ठीक
है? चलो। तो RX बनाना है। ठीक है मैम। तो मान लो आपको क्लोरो या ब्रोमो कुछ बनाना है तो थ्री वाली रिएक्शन यूज़ करो। यानी कि
थ्री टाइम RCl उठाओ, ROH सॉरी अल्कोहल उठाओ। थ्री टाइम ROH उठाओ और इसे रिएक्ट करो आप किस से? H3PO सॉरी सॉरी सॉरी सॉरी।
इसको आप रिएक्ट करो H3PO3 तो आपका प्रोडक्ट निकलेगा यहां पे। है ना? आप इसको रिएक्ट करा दो PX3 से। नहीं समझ में आया?
चलो समझाती हूं। थ्री वाली रिएक्शन क्या है? थ्री वाली रिएक्शन है। मान लो मैंने ले लिया ROH
ROH मैंने रिएक्ट करा है PH3 से। से अब मुझे पता है ये थ्री वाली रिएक्शन है। थ्री
टाइम्स ये यूज़ होगा। ठीक? अब हमें पता है भाई क्लोरीन नेगेटिव होता है। अच्छा X क्या हो सकता है? X आपका यहां पे क्लोरीन
भी हो सकता है, ब्रोमीन भी हो सकता है। ठीक है? बस यही दो हो सकते हैं। ठीक है? तो ये नेगेटिव है। तो R तो हमारा भाई X के
साथ लगने वाला है। तो हमारे पास थ्री टाइम्स ऑफ़ RX बन के आएगा। जो हमारा ऐ था अल्कोहल से हैोएल्केन बन गया। साथ ही साथ
यहां पे क्या निकलेगा? H3 PO3 फास्फोरस एसिड। ठीक है? H3PO3 ठीक है? तो ये हो गई आपकी रिएक्शन। ये हो
गई आपकी भाई रिएक्शन। ROH को मैंने PX3 से रिएक्ट कराया। RX और H3PO3 निकला। ठीक? क्लोरीन और ब्रोमीन हो सकता है। SN2
मैकेनिज़्म फॉलो करेगा। तो ये भी हमें याद रखना है। ठीक है? SN2 अच्छा SN1 SN2 याद नहीं करना है। रटना नहीं है। SN1 SN2 मैम
आपको आगे समझा देंगे। टेंशन मत लो उसकी। ठीक है? तो क्या थ्री वाली रिएक्शन समझ में आई? ROH ऐम क्या है? अल्कोहल से
अल्काइल हैलाइड बनाना है। बना दिया। किसकी प्रेजेंस में? PX3 की प्रेजेंस में। ठीक है? और थ्री वाली रिएक्शन है। बैलेंसिंग
में भी थ्री लगेगा। और H3PO3 33 निकलेगा हर जगह। ठीक है? चलो मां। नेक्स्ट आती है हमारे पास इसी की जगह अगर आप PCL3 की जगह
PCL5 लेना चाहते हो। है ना? अगर आप पेंटाक्लोराइड लेना चाहते हो तो आप क्या करोगे? तो सेम कहानी आप ROH को उठाओ। आप
PCL5 को उठाओ। तो RCL बन जाएगा सबसे पहले तो। साथ ही साथ यहां पे बनता है POCl3 और HCL। ये POCl3 बनता है यहां पे। क्या
बनता है? POCl3। फास्फोरस ऑक्सी क्लोराइड। POCL3 बनता है। ठीक है? POCL3
बनता है। यू हैव टू रिमेंबर दिस कंपाउंड नेम। ठीक है? तो क्या होता है? अगर मैंने PCL5 ले लिया तो वही सेम अपना RCL बन
जाएगा और POCL3 बनेगा अलोंग विद HCl। ठीक है? SN1 मैकेनिज़्म। अच्छा ये तो बड़ी बेसिक सी रिएक्शन होती है। अगर आपने रेड हॉट
आयरन से पास करा दिया अल्कोहल को। रेड हॉट आयरन से पास करा दिया। ठीक है? इन द प्रेज़ेंस ऑफ़ रेड हॉट आयरन मतलब रेड हॉट
सॉरी फास्फोरस। रेड हॉट फास्फोरस। ठीक है? फास्फोरस से पास करा दिया इन द प्रेजेंस ऑफ़ कोई हैलोजन लेना है हमें। ठीक है? अब
हैलोजन यहां पे क्या हो सकता है? वेरीेंट ब्रोमीन हो सकता है, आयोडीन हो सकता है। तो आपको डायरेक्ट मिल जाता है अपना ROH
वाला ग्रुप। RX वाला ग्रुप सॉरी ROH से RX वाला ग्रुप। ठीक है? तो अगर मैंने ROH उठा लिया और मुझे उससे RX बनाना है तो मैं
डायरेक्टली रेड फास्फोरस से पास करा सकती हूं। रिमेंबर ये रिएक्शन एज़ सच इतनीेंट नहीं है। और ये देखने में जितनी आसान लग
रही है, एक ही स्टेप बड़ी छोटी सी रिएक्शन है। ये इतना आसान नहीं होता इसको प्रोडक्ट को फॉर्म करना। लास्ट रिएक्शन इज़ वेरीेंट।
एंड अगेन लास्ट रिएक्शन एक बड़ी प्यारी सी रिएक्शन है। अच्छा एक बात बताओ आपके घर में कोई पार्टी है या आप किसी पार्टी में
जा रहे हो और पार्टी में वो लोग आ गए जो आप नहीं चाहते थे आए समझ रहे हो मेहमान आ गए जबरदस्ती के मतलब आपने सोचा था यार बजट
तो कम होगा पर आप जबरदस्ती एक ऐसा दोस्त आ गया आपकी पार्टी में आप नहीं चाहते थे वो दोस्त आए पर वो आ गया बिन बुलाए मेहमान की
तरह पर वो आते ही बोलता है चलो भाई यार ठीक है ज्यादा मजा तो आ नहीं रही और मुझे तो जाना है वैसे भी और वो चला जाए तो आपको
कैसा लगेगा मतलब आप चाहते नहीं थे वो आए पर वो आया पर आके वो खुद ही चला गया आपको कुछ करना नहीं पड़ा तो वो कैसा लगेगा
अच्छा ही लगेगा ना तो वो सबसे अच्छा अच्छा मोमेंट कहलाएगा आपके लिए उस पर्टिकुलर दिन का है ना कि यार फालतू आ गया था क्या ही
करना था इसका कोई काम भी नहीं था मैंने बुलाया भी नहीं था ऐसे ही है ना है ना हम तो चाहते थे हमारा मेन दोस्त आ जाए उसके
साथ वो अपना दोस्त ले आया तो यही तो अच्छा लगेगा हमें कि वो चला गया खुद से सिमिलरली यहां पे होता है थाइनिल क्लोराइड की
रिएक्शन के साथ अगर मैंने ROH यानी कि अल्कोहल उठाया और उसको रिएक्ट कराया थाइलल क्लोराइड से थाइनिल क्लोराइड इज़ SOCl2 ठीक
तो SOCl2 से रिएक्ट कराने पे मुझे चाहिए RCL है ना जो कि हमारा मेन प्रोडक्ट है पर हर रिएक्शन में जैसा हम देख रहे बाय
प्रोडक्ट्स भी बनते जा रहे हैं। है ना? तो यहां पे भी बनेंगे। यहां पे भी दो बाय प्रोडक्ट बनेंगे। एक हमारे पास होगा HCl।
HCL बन जाएगा और दूसरा हमारे पास होगा सल्फर डाइऑक्साइड यानी कि SO2। पर ये दोनों प्रोडक्ट्स जो बने हैं ये स्केपेबल
गैसेस हैं। ये भी एक गैस है और ये भी एक गैस है। ये बाहर तो आते हैं पर ये खुद ही स्केपेबल हो जाते हैं। यानी कि खुद ही उड़
जाते हैं और हमें हमारा मेन प्रोडक्ट मिल जाता है व्हिच इज़ RCL। तो दिस इज़ वन ऑफ़ द वेरीेंट रिएक्शन। एंड अगर आपसे कोई पूछे
सब में से सबसे बेस्ट मेथड कौन सा है? अह हैलोएल्केन बनाने का अल्कोहल से। तो आप बोलोगे थाइनिल क्लोराइड वाली रिएक्शन भाई
सबसे बेस्ट है। क्यों? क्योंकि यहां पे जो बाय प्रोडक्ट्स होते हैं दे आर एस्केपेबल गैसेस। इसको कई बुक्स में नाम भी इसका
लिखा रहता है। ये कहलाती है डार्जेंस रिएक्शन। ठीक है? तो अगर मैं आपसे पूछूं अल्कोहल से हैलोल्केन बनाना है यार सबसे
अच्छा तरीका क्या होगा? तो आप बोलोगे थाइनल क्लोराइड ले के आ जाओ। अगर आपने अल्कोहल में मैम SOCl2 डाल दिया तो ये
SOCl2 डालते ही ये RCL बनाएगा, SO2 बनाएगा और HCL गैस बनाएगा। और ये SO2 HCl दोनों आपस में मैम अपने आप ही एस्केप हो जाएंगे
दोनों। ठीक है? आपको कुछ नहीं करना है। आपको मेन प्रोडक्ट मिल जाएगा। तो ये आपका बेस्ट मेथड होता है टू प्रिपेयर हैलो
एल्केन। और ये होता है SN1 मैकेनिज्म से। ठीक है? तो ये हमारी अल्कोहल से हम प्रिपेयर कर सकते हैं क्या? अपना हेलो
एल्केन। ठीक है? अच्छा। तो ये हो गया। तो बेस्ट मेथड भी भाई हमको यहां पे मिल गया। अच्छा। अगर मैं ऑर्डर ऑफ रिएक्टिविटी की
बात करूं अल्कोहल की तो 3° 2° 1° इस तरीके से इनका ऑर्डर ऑफ रिएक्टिविटी होती है। ठीक है? 3° आपको सबसे ज्यादा रिएक्शन करके
दिखाएगा। फिर 2° फिर 1° फर्स्ट रिएक्शन की बात हो रही है ल्यूकास रिएजेंट वाली। ठीक है? अच्छा तो यहां पे इन द प्रेज़ेंस ऑफ़ HX
आप कराते हो ZnCl2 की प्रेजेंस में। ठीक है? टर्शरी अल्कोहल जो रिएक्शन देते हैं वो बहुत इजीली होती है और हम उसको सिंपली
मतलब अगर हमने 3° वाले अल्कोहल को हैलोजन आयोडाइड के साथ रिएक्ट करा दिया और शेक भी कर दिया ना तो भी उसकी रिएक्शन हो जाती
है। हमें ज्यादा हीट करने की जरूरत नहीं पड़ती। क्योंकि हाइड्रोजन आयोडाइड जो होता है वो क्या है वो एक ऐसा ग्रुप है जिसमें
आयोडीन का बड़ा शेप है। आयोडीन तो बड़ा होता है ना एज़ कम साइज़ एज़ कंपेयर टू अदर हैलोजंस। तो भाई वो बहुत आसानी से टूटेगा।
रिएक्टिविटी ज्यादा होती है आयोडीन की। और अल्कोहल में 3° की सबसे ज्यादा रिएक्टिविटी होती है। तो जब आपस में
रिएक्ट करेंगे तो बड़ी प्यारी रिएक्शन होगी। फटाफट से थाइनिल क्लोराइड इज़ प्रेफर्ड बिकॉज़ द अदर टू प्रोडक्ट्स आर
स्केपेबल गैसेस। अगर मुझे कंपैरिजन करने का मौका मिले सारी रिएक्शंस में से तो हम भाई चूज़ करने वाले हैं थाइयनल क्लोराइड।
अपने आप भाई साहब बाहर निकल जाती है वो। अब मैम बार-बार बोल रही हैं ये ल्यूकास रिएजेंट जो है ये एक टेस्ट में काम आता
है। तो ये टेस्ट क्या है? चलो सुनना मेरी बात को। ल्यूकास रिएजेंट हमें काम आ सकता है जब हमें पता करनी होती है किसी की
डिग्री। मेरे पास तीन अल्कोहल है। ठीक है? मैंने बोला ये अल्कोहल नंबर वन है। मेरे पास और बॉटल्स नहीं है। तो इसी को मान लो
अल्कोहल नंबर टू। फिर तीसरी टाइम पे हम इसको मानेंगे अल्कोहल नंबर थ्री। ठीक है? अब मेरे पास तीन अल्कोहल है। मैंने बोला
यार कौन सा 1° है, कौन सा 2° है, कौन सा 3° मुझे पता ही नहीं है। तीन बॉटल्स रखी है मेरे सामने और तीनों में अल्कोहल है।
किसी में 1°, किसी में 2° और किसी में 3°। अब मुझे पता करना है किसमें कौन सी डिग्री है। तो मैं बोलूंगी ओ भाई इधर आओ, इधर आओ,
इधर आओ, तुम जो मेरा वीडियो देख रहे हो। ठीक है? जाओ जा के ल्यूकास रिएजेंट लेके आओ। ल्यूकास रिएजेंट मतलब तुम क्या लाओगे?
आप लेके आओगे HCL इन द प्रेज़ेंस ऑफ़ ZnCl2 एनहाइड्रेस ZnCl2। ठीक है? अब मैं क्या करूंगी? मैंने एक अल्कोहल उठाया। ठीक है?
एक बॉटल उठाया। मैंने उसमें क्या किया? ल्यूकास रिएजेंट को डाला और मैंने उसको ऐसे शेक किया। ठीक? अब अगर इसमें
तुरंत-तुरंत टर्बिडिटी आ गई, टर्बिडिटी मतलब धुंधलापन, क्लाउडीनेस। ठीक है? तुरंत-तुरंत धुंधलापन आ गया। ऐसा हो गया।
ये तुरंत-तुरंत हो गया। इंस्टेंट टर्बिडिटी आ गई। मैंने बोला ये भाई ले जाओ 3° अल्कोहल है। ये तो 3° वाला अल्कोहल है।
ठीक? फिर मैंने कहा एक काम करते हैं। ये दूसरी बोतल उठाते हैं। ठीक? ये दूसरी बोतल है। अब इसमें 2° है 1° है। मुझे देखना है।
तो मैंने वही ल्यूकास रीएजेंट लिया। इसमें डाला। अब मैंने इसको शेक किया। मैंने देखा है टर्बिडिटी तो आ ही नहीं रही है। फिर 5
मिनट हो गए 6 मिनट 7 मिनट 5 से 10 मिनट के बीच में मुझे टर्बिडिटी देखने को मिली। ठीक? तो 5 से 10 मिनट अगर इसने ले लिया तो
ये हमारा 2° वाला अल्कोहल है। अब मैंने बोला चलो तीसरी बोतल उठाओ। ये रही मेरी तीसरी बतल। आई नो तीनों एक ही बार एक ही
बोतल है। बट हम इमेजिन कर सकते हैं। है ना? जैसे हम इमेजिन कर रहे हैं तुम अच्छे नंबर लेके आने वाले हो। नहीं नहीं ये तो
पॉसिबिलिटी होने वाली है। मजाक था। चलो। तो हमने क्या किया? हमने इसमें ल्यूकास रिएजेंट डाला। अब ल्यूकास रिएजेंट डाला।
शेक किया। शेक किया। शेक किया। 1 घंटा हो गया मैम टर्बिडिटी तो आ ही नहीं रही है। तो ये हमारा 1° है जिसमें टर्बिडिटी नहीं
आती है। पर ध्यान से सुनना। कई बुक्स में लिखा रहता है आ भी जाती है थोड़ी देर बाद। तो ऐसा क्यों? ऐसा क्यों करते हैं वो लोग?
वो ऐसा इसलिए कहते हैं क्योंकि वो कहते हैं अगर इसको हीट कर दूं नॉर्मल टेंपरेचर में इसमें टर्बिडिटी नहीं आएगी। लेकिन अगर
मैं इसको हीट कर दूं बहुत देर तक। ठीक है? तो उसके बाद इसमें थोड़ी-थोड़ी धुंधलापन आना स्टार्ट हो सकता है। तो हम इस तरीके
से बता सकते हैं हमारा अल्कोहल जो है वो 1° है, 2° है या 3° है। अब मुझे 1 मिनट दे दो। मैं पानी पी ही लेती हूं।
हम तो हम इस तरीके से अल्कोहल की डिग्री निकाल सकते हैं। मैम वापस से अगर हमारा 3°
अल्कोहल हुआ तो वो ल्यूकास रिएजेंट के डालने पे तुरंत-तुरंत इंस्टेंटली टर्बिट हो जाएगा। ठीक? तो हम बोलेंगे 3° अल्कोहल
है। अगर हमारा जो अ पर्टिकुलर अल्कोहल है उसमें मैंने ल्यूकास रिएजेंट डाला पर 5 से 10 मिनट लग गए उसमें टर्बिडिटी आने में तो
हम बोलेंगे वो हमारा 2° है। और अगर टर्बिडिटी आई ही नहीं या हीट करने पे टर्बिडिटी आएगी तो हम उसको बोलेंगे वो है
हमारा 1°। ठीक है? तो ये टर्बिडिटी के बेसिस पे होगा। और ये टेस्ट आपसे पूछा जा सकता है। है ना? तो आपको क्या करेंगे?
आपको कोई अल्कोहल बना के दे देंगे। जैसे कि यह
ठीक है? ठीक है? और ये ठीक आपको इस तरीके से क्वेश्चन दे देंगे।
तो आप याद रखना सबसे ज्यादा टर्बिडिटी इसमें आएगी क्योंकि ये वाला कार्बन 3° है। 3° क्यों है मैम? OH जिस कार्बन से लगा है
वो तीन कार्बन से लगा है। ये वाला आपका 2° है। तो इसमें थोड़ी देर से टर्बिडिटी आएगी और लास्ट में आता है हमारे पास 1° जिसमें
टर्बिडिटी नहीं आती ऑलमोस्ट। ठीक है? तो ये टर्बिडिटी हो गई। टर्बिडिटी मतलब धुंधलानेस या धुंधलापन या फिर क्लाउडीनेस।
ठीक है? चलो अब हम आते हैं मेथड्स ऑफ प्रिपरेशन ऑफ़ हैलोएकेन में। अभी तक हमने पढ़ा कि हम हैलोएकेन को कैसे बना सकते हैं
अल्कोहल की हेल्प से। है ना? अब हम पढ़ने जा रहे हैं कि हम हैलोएकेन को कैसे बना सकते हैं एल्कीन की हेल्प से या किसी
हाइड्रोकार्बन की हेल्प से। है ना? हाइड्रोकार्बन की हेल्प से। तो इसमें एक बड़ी प्यारी सी रिएक्शन होती है कि यार
एल्केन ले लो और उससे हैलोएल्केन बना लो जो मैम आपने सबसे शुरुआत में बताई थी। सबसे आसान रिएक्शन मैम है। ये रहा अपना ये
रहा अपना मिथेन मैम। आपने बोला इससे एक हाइड्रोजन हटाओ। इसमें कोई हैलोजन जोड़ो। सपोज मैम हमें क्लोरीन जोड़ना है। मैंने
Cl2 लगाया मैम। हाइड्रोजन बाहर आ जाएगा। हाइड्रोजन हमारा मैम बाहर हो जाएगा। तो मैम सबसे आसान रिएक्शन है जो आपने
स्टार्टिंग बताई थी। ये लगे हैं मैम इससे हाइड्रोजन और मैम आके एक क्लोरीन लग जाएगा। और एक कार्ब एक हाइड्रोजन बचा है।
एक क्लोरीन बचा वो आपस में लग गए। मैम सबसे ईज़ी रिएक्शन। मस्त रिएक्शन है। बट ये देखने में जितनी मस्त होती है ना यह होती
नहीं उतनी मस्त। है ना? यह H म्यू की प्रेज़ेंस में होती है। यानी कि लाइट की प्रेज़ेंस में होती है रिएक्शन। ठीक है?
पहली चीज। अच्छा ये रिएक्शन इतनी मस्त क्यों नहीं होती है जो मैम आपने बोला? उसका रीज़न ये है ये हमें बहुत ज्यादा
प्रोडक्ट्स बना के देता है। मल्टीपल प्रोडक्ट्स। हमें लग रहा है ये रिएक्शन ऐसे हो रही है पर ये रिएक्शन ऐसे हो ही
नहीं रही है। ये अपने आप होती जाएगी। देखो ये Cl2 से रिएक्ट करेगा। ये बन जाएगा। ये वापस Cl2 से रिएक्ट करेगा। फिर रिएक्शन
करने लग जाएगा। फिर ये बनाएगा C यहां पे इसने बनाया था CH3Cl। फिर ये बनाएगा पता है क्या? CH2Cl2 फिर रिएक्शन करेगा। फिर
बनाएगा CHCl3। फिर रिएक्शन करेगा। फिर बनाएगा CCL4। और ये हमें मल्टीपल स्टेप्स में प्रोडक्ट्स मिलते चले जाएंगे। तो ये
रिएक्शन एज सच लैब वगैरह में बनाने के लिए सबसे खराब रिएक्शन होगी। क्यों? क्योंकि इसमें मल्टीपल प्रोडक्ट मिलते जाएंगे।
अच्छा कब तक प्रोडक्ट मिलेंगे मैम? और प्रोडक्ट बना दीजिए। नहीं नहीं। प्रोडक्ट तब तक मिलेंगे जब तक जो हमारे हैलोजन है
वो सारे हाइड्रोजन को रिप्लेस ना कर दे। देखो ध्यान से। पहले एक हाइड्रोजन बाहर निकला। एक क्लोरीन गया। फिर एक और
हाइड्रोजन बाहर गया और एक और क्लोरीन जुड़ गया। Cl2 फिर एक और हाइड्रोजन बाहर निकला और क्लोरोफॉर्म बनाया उसने। CHCl3 फिर एक
और हाइड्रोजन बाहर निकला और एक और क्लोरीन चला गया। चारों क्लोरीन आ गया अब अंदर। अब जा चार हाइड्रोजन थे और अब वहां पे चार
क्लोरीन बचे। मतलब जब तक सारे हाइड्रोजन रिप्लेस ना कर दे तब तक क्लोरीन अटैक करता रहता है। तब तक वो उस पे जाके लगना चाहता
है। तो ये रिएक्शन लैब के लिए अच्छी नहीं मानी जाती। ठीक है? हैलोएन फ्री रेडिकल मैकेनिज्म होता है इसका। इसका मैकेनिज्म
की अगर आप बात करोगे फ्री रेडिकल मैकेनिज्म होता है ना? Cl2 Cl2 क्लोरीन क्लोरीन इस तरीके से जुड़े होते हैं और ये
होमोलिटिक फज़ करते हैं। मतलब क्लोरीन एक रेडिकल बनेगा, क्लोरीन पे एक इलेक्ट्रॉन और दूसरे पे एक और इलेक्ट्रॉन। ठीक है? तो
ये फ्री रेडिकल मैकेनिज्म है और अटैक होता रहेगा बार-बार। फ्री रेडिकल क्लोरीनेशन ब्रोमिनेशन ऑफ़ एल्केनेंस गिव्स
कॉम्प्लेक्स मिक्सचर ऑफ़ आइसोमेरिक मोनो एंड पॉलीहैलोकेन। अच्छा आप एक बात सोचो बेटा। मैं इसको हटा दूं मीथेन को। मैं
इथेन यूज़ कर लूं। सोचो। अभी चलो मीथेन में भी चार हमें स्टेप मिले और चार प्रोडक्ट मिले। क्योंकि चार क्लोरीन लगने थे। अब
मैं इथेन जोड़ दूं। मैं बोलूं C2H6 से यही रिएक्शन कराओ। तो छह हाइड्रोजन लगे हैं। मतलब छह बार क्लोरीन अटैक करना चाहेगा। छह
प्रोडक्ट्स मिलेंगे हमें। समझ रहे हो आप? तो ऐसे तो मतलब और कॉम्प्लेक्स रिएक्शन होती चली जाएगी। मैम और ज्यादा हाइड्रोजन
लगाओगे तो और कॉम्प्लेक्स यस ये और कॉम्प्लेक्स होती चली जाएगी। ठीक है? व्हिच इज़ डिफिकल्ट टू सेपरेट एज प्योर
कंपाउंड्स। अब इसे प्योर कंपाउंड देखो अगर बहुत बड़े लेवल पे हम ये काम कर रहे हैं तो ठीक है। चलो थोड़ा बहुत मिल भी रहा है कुछ
एक्स्ट्रा। फिर उसको यूज़ कर लेंगे कहीं ये वो लेकिन लैब्स में तो हम इसे कभी भी यूज़ नहीं कर सकते। है ना? तो हम इसको लैब्स
में कभी इस रिएक्शन को यूज़ नहीं करते। ठीक? क्योंकि फ्री रेडिकल मैकेनिज़्म से ये अ अनकंट्रोलेबल रिएक्शन होती है। कंट्रोल
में नहीं होती हमारे। प्रोडक्ट्स बनते जाते हैं। ठीक है? तो यस। तो यहां पे और जो प्रोडक्ट बनते हैं उनको सेपरेट करना भी
ज्यादा आसान नहीं होता। कॉन्सिक्वेंटली द यील्ड ऑफ़ एनी सिंगल कंपाउंड इज़ लो। अब मुझे केवल ये चाहिए तो बड़ा कम मिलेगा
क्योंकि उसके अलावा आगे भी प्रोडक्ट बन रहे हैं। मुझे केवल ये चाहिए तो भी ये कम बनेगा क्योंकि बाकी के प्रोडक्ट्स भी बन
रहे होंगे। तो इसीलिए एक सिंगल कंपाउंड की यील्ड यहां से बहुत कम होती है। ठीक है? तो फ्री रेडिकल मैकेनिज्म होता है। अच्छा
ये सेम चीज आपके ब्रोमीन के साथ होती है। सेम चीज ब्रोमीन के साथ होती है। फ्लोरीन के साथ भी होगी मैम? नहीं। फ्लोरीन तो
जल्दी रिएक्शन ही नहीं दिखाएगा। है ना? मैम आयोडीन। आयोडीन एक्चुअली रिवर्सिबल रिएक्शन दिखाता है। तो अभी हम उस पे
आएंगे। पहले ये सुन लो। अगर मैंने Cl2 रिएक्ट कराया तो हां मैम बनता है प्रोडक्ट। बन सकता है। बट आगे और प्रोडक्ट
भी बनेंगे। ठीक? मैंने ब्रोमीन रिएक्ट कराया तो सेम। देखो। अच्छा आगे ये क्लोरीन फिर से रिएक्ट करेगा। फिर CH2Cl2 फिर
रिएक्ट करेगा। CHCl3 फिर रिएक्ट करेगा CCL4 तब तक होता जाएगा जब तक भाई पूरे हाइड्रोजन को रिप्लेस ना कर दे हैलोजन।
ठीक है? और सिमिलर थिंग हमारी ब्रोमीन में होती है। यानी कि ब्रोमिनेशन और क्लोरीनेशन सेम हो रहे हैं यहां पे। अच्छा
आयोडिनेशन एक्चुअली एकदम सेम नहीं होता। ऐसा क्यों? जब आप ये रिएक्शन कराते हो सपोज मैंने बोला CH4 की रिएक्शन I2 से
कराओ। ठीक? तो CH3I बन जाएगा। है ना? और HI बाहर निकलेगा। अब गलती यहीं पे दिक्कत यहीं पे है पूरी। ये जो hi बना है ये जो
hi बना है ये एक बड़ा स्ट्रांग रिड्यूसिंग एजेंट होता है। ये बड़ा स्ट्रांग रिड्यूसिंग एजेंट होता है। और ये फिर
रिड्यूस होने की कोशिश करने लग जाता है वापस से। फिर रिड्यूस होने की कोशिश करेगा। वापस से रिड्यूस बनने आयोडीन बनने
की कोशिश करेगा। HI वापस से I2 बनने की कोशिश करने लग जाता है। ठीक? तो ये रिएक्शन रिवर्सिबल होती है। क्या हम इसकी
रिवर्सिबिलिटी में हम रोक सकते हैं? हां? क्या हम वापस से प्रोडक्ट से रिएक्टेंट बनने से रोक सकते हैं? हां, थोड़ा बहुत
रिएक्शन थोड़ी बहुत चीजें ऐड करनी पड़ेंगी। जैसे कि अगर आप इसको HNO3 से रिएक्ट करो, तो ये एक डायरेक्शन में जा सकती है।
क्यों? क्योंकि HNO3 एक काफी स्ट्रांग ऑक्सीडाइजिंग एजेंट होता है। स्ट्रांग ऑक्सीडाइजिंग एजेंट होता है। तो Hi आयोडीन
के साथ रिएक्शन करने पे रिवर्सिबल होती है। क्योंकि HI हाइड्रोजन आयोडाइड एक रिड्यूसिंग एजेंट होता है। बड़ा स्ट्रंग तो
मुझे इसके साथ यूज़ करना पड़ेगा। एक काफी स्टंग ऑक्सीडाइजिंग एजेंट ताकि ये रिएक्शन रिवर्सिबल ना रहे। ठीक है? तो यहां पे ये
कहानी पूरी होगी। अच्छा फ्लोरिनेशन तो हमको पता है। नो रिएक्शन विल टेक प्लेस। बहुत एक्सप्लोसिव रिएक्शन हो जाती है। जो
हमारा फ्लोरीन है बहुत रिएक्टिव है। वो मतलब बहुत ही सॉरी रिएक्टिव कह रही हूं। बहुत ही ज्यादा स्मॉल एटम है। वो इतना
स्मॉल एटम है कि उसके साथ कोई भी रिएक्शन कराओगे इतने ज्यादा हाई अमाउंट में एनर्जी निकलेगी। इतने ज्यादा हाई अमाउंट में
एनर्जी देनी पड़ेगी। चाहे आप बॉन्ड तोड़ रहे हो या जोड़ रहे हो। है ना? किसी के साथ ऐड करा रहे हो तो बहुत ज्यादा एनर्जी
देनी पड़ेगी। किसी से बॉन्ड तोड़ रहे हो तो बहुत ज्यादा एनर्जी बाहर निकल रही है। तो मतलब कुछ भी हो सकता है उस केस में।
ठीक? तो फ्लोरीन वाला केस हम बहुत रेयर पढ़ते हैं। सिर्फ एक ही रिएक्शन है आपके हेलोोएल्कीन में स्वार्ड्स रिएक्शन। ठीक
है? मूविंग फॉरवर्ड नेक्स्ट है हमारे पास हाइड्रोकार्बंस में एल्कीन से रिएक्शन। तो हम एल्कीन से रिएक्शन करा सकते हैं भाई। C
डबल बॉन्ड C है। मैंने इसको बोला कि यार किसी HX से रिएक्ट करो ताकि ये X जो है ये कार्बन के साथ आ पाए। है ना? और इसका
बॉन्ड तोड़ दें। है ना? यार सिंपल सी बात है X को हमें अंदर लगाना है। तो हम ये रिएक्शन करा सकते हैं। ये होती है
मार्कोनिकॉफ्स रूल यहां पे फॉलो होगा। मार्क कोनिकॉफ्स रूल या एंटीमार्कोनिकॉफ्स रूल भी हो सकता है। ठीक है? तो हम क्या कर
सकते हैं? हम किसी हैलोजन को ले जा के कार्बन पे लगा सकते हैं जो कि डबल बॉन्ड बनाया हुआ है। लेकिन उस टाइम पे हमें
मार्कोनिकॉफ या एंटीमार्कोनिकॉफ रूल यूज़ करना पड़ता है। मैम इसका मतलब बता दो। चलो अगर मैंने किसी एल्केन को लिया। एंड मुझे
उसे कन्वर्ट करना है एक पर्टिकुलर हैलो एल्केन में। ठीक है? तो मैं क्या करूंगी? मैं बोलूंगी यार उस कार्बन के साथ हैलोजन
को जोड़ना है। ठीक है? तो मार्कोनिकॉफ रूल क्या कहता है? मार्कोनिक रूल बड़ी सिंपल सी बात कहता है। कार्बन जो डबल बॉन्ड बना रहा
है। ठीक है? जिस कार्बन से डबल बॉन्ड बना हुआ है। वो जो कार्बन है आप हैलोजन उस कार्बन में भेजो या ऐसे बोलो मार्कोनिकॉफ
रूल क्या कहता है? हाइड्रोजन और हैलोजन इन दोनों को आप तोड़ सकते हो ना। एक हाइड्रोजन है इसमें। एक हैलोजन है। है ना?
तो ये बोलता है हाइड्रोजन को वहां भेजो जहां हाइड्रोजन ज्यादा हैं। हाइड्रोजन को वहां भेजो। हाइड्रोजन को डबल बॉन्ड के उस
कार्बन से जोड़ो जहां पे ऑलरेडी हाइड्रोजन ज्यादा बैठे हुए हैं। ठीक? हाइड्रोजन जहां ज्यादा है वहां पे आप हाइड्रोजन भेज दोगे।
तो एडिशन ऑफ़ हाइड्रोजन हैलाइड एन एल्कीन इज़ कनवर्टेड टू करेस्पोंडिंग अल्काइल हैलाइड बाय रिएक्शन विद हाइड्रोजन
क्लोराइड, हाइड्रोजन ब्रोमाइड और हाइड्रोजन आयोडाइड। ठीक है? तो कैसे बनेगा? मार्कोनिकॉफ रूल से। वन
प्रीडोमिनेट्स एज़ पर मार्कोनिकॉफ्स रूल। है ना? मैम नहीं समझ में आया। मुझे पता है इसमें प्रोडक्ट देखो दो बन सकते हैं। तो
हम दोनों के हिसाब से समझेंगे फिलहाल। ठीक है? पहले इसको सुन लो। एडिशन ऑफ़ इन द लैबोरेटरी इन द लैबोरेटरी हैलोजन से भी आप
ऐड कर सकते हो। पहले आपको मैं मार्कोनिक ऑफ़ रूल ऐसे करती हूं। यहीं पे समझाती हूं। चलो पहले मार्कोनिक ऑफ रूल समझते हैं।
कार्बन कार्बन लगा हुआ है। ठीक है? इस तरीके से यहां पे H2 है। यहां पे H2 है। मैंने बोला इससे HCL रिएक्ट कराओ ताकि
क्लोरीन अंदर चला जाए। ठीक है? हमें ये रिएक्शन करानी है। अब ये रिएक्शन जो होगी इसमें क्या होगा मैम? एक जगह हाइड्रोजन
लगेगा। एक जगह क्लोरीन लगेगा। है ना? देखो ये होता है आपका सिग्मा बॉन्ड और एक होता है पाई बॉन्ड। तो पाई बॉन्ड जो होता है वो
वीक बॉन्ड होता है। है ना? वो टूट सकता है। है ना? और यहां पे ये कैसे टूट सकता है? पॉजिटिव और नेगेटिव में। अच्छा अब ये
बॉन्ड फ्यूजन होगा। एक तरीके से टूटेगा। सपोज़ कर लो इस बॉन्ड को मैंने यहां पे तोड़ा। तो इस कार्बन पे नेगेटिव चार्ज
आएगा। इस कार्बन पे पॉज़िटिव चार्ज आएगा। नेगेटिव के साथ पॉजिटिव जाके जुड़ेगा और पॉज़िटिव के साथ नेगेटिव जाके जुड़ेगा। है
ना? तो यहां पे क्या बनेगा? कार्बन कार्बन में अब सिंगल बॉन्ड बचा। ठीक? इससे हाइड्रोजन दो लगे थे। इससे हाइड्रोजन दो
लगे थे। अब क्या होगा मैम? एक जगह क्लोरीन आएगा, एक जगह हाइड्रोजन आएगा। तो अभी तो दोनों जगह एक बराबर हाइड्रोजन है तो कहीं
भी कुछ भी लगा दो, है ना? जैसे इसके बेसिस पे मैं बोलूं तो यहां पे हाइड्रोजन लगा दिया मैंने। और यहां पे क्लोरीन लगा दिया।
है ना? तो ये बन गया अपना CH3 C H2 CL CH3 है ना? या ऐसे लिख दो यार CH3 C H2Cl
ये बन गया प्रोडक्ट। है ना? ये बन गया हमारा प्रोडक्ट। लेकिन अगर अगर मैं इसको थोड़ा सा रिवर्स करूं मतलब मैं रिवर्स नहीं
इसको मैं थोड़ा सा चेंज करूं। मैं बोलूं ये ऐसे बना है। और यहां पे डबल बॉन्ड है। यानी कि यहां पे
लगे हैं H3। यहां पे लगा है एक हाइड्रोजन और यहां पे लगे हैं दो हाइड्रोजन। अब मैंने बोला HCL रिएक्ट करो जरा।
अब अकॉर्डिंग टू मार्कोनिकॉफ्स रूल मार्क कोनिकॉफ्स रूल। यहां पे लगेगा मार्कोनिकॉप्स रूल। है ना? अब मुझे पता है
ये डबल बॉन्ड टूटने वाला है। एक से हाइड्रोजन जुड़ने वाला है। एक से हैलोजन। पर किससे हाइड्रोजन और किससे हैलोजन
जुड़ेगा। यानी कि किससे हाइड्रोजन और किससे हैलोजन जुड़ेगा। यानी कि किस पे डबल बॉन्ड टूट रहा होगा? तो यहां पे आप याद
रखना कि यहां पे क्या होगा? अगर मैं डबल बॉन्ड को तोडूंगी तो मैं इसको ऐसे भी तोड़ सकती हूं। मैं यहां पे भी बॉन्ड तोड़ सकती
हूं। यानी कि इस कार्बन को नेगेटिव चार्ज दे दूं। मैं ऐसे भी कर सकती हूं कि मैं डबल बॉन्ड को यहां पे तोड़ दूं और मैं इसे
नेगेटिव चार्ज दे दूं। पर रिएक्ट सॉरी करे करेक्ट वाले इसमें क्या होगा रिएक्शन? मैम यहां पे बॉन्ड तोड़ोगे आप नेगेटिव। ये तो
मैम दिमाग से चला गया। बिल्कुल समझ नहीं आया। तो सुनना ये पॉजिटिव ये नेगेटिव। हाइड्रोजन उसको दो जहां पे हाइड्रोजन
ज्यादा है। ये देखो ये देखो मैम एक सेकंड। हाइड्रोजन तो सबसे ज्यादा यहां पे है। इसको दो ना। अरे यार
डबल बॉन्ड के उस कार्बन को हाइड्रोजन देने जा रहे हो। जहां पे सिंगल बॉन्ड है उसको तो भूल जाओ। उसको तो देखो ही मत। भूल भूल
जाओ उसको। ठीक है? तो मुझे क्या करना है? मुझे एक को हाइड्रोजन देखना है। एक को हैलोजन देना है। तो सिंपल ट्रिक मार्कोनिक
ऑफ रूल की क्या कहती है कि जहां पे हाइड्रोजन ज्यादा है। डबल बॉन्ड के उस कार्बन को हाइड्रोजन दो जहां पे हाइड्रोजन
ज्यादा है। डबल बॉन्ड के उस कार्बन को हाइड्रोजन दो जहां पे हाइड्रोजन ज्यादा है। तो मैं क्या बोलूंगी इसको?
इसको मैं थोड़ा सा साइड कर लूं। तो अगर मुझे इसको देखना है तो मैं क्या बोलूंगी? ठीक है? हां। चलो तो मैं क्या बोलूंगी?
मैं बोलूंगी मैम ये ऐसे लिख दो आप। CH3 C डबल बॉन्ड CH2 ऐसे था मैम। अब एक बॉन्ड आप इसका तोड़ो। सिंगल बॉन्ड लगाओ यहां पे।
है ना? इसको दे दो हाइड्रोजन। इसको दे दो हमारा हैलोजन। अच्छा मैम एक सेकंड क्या आप जो बोल रहे हो है ना? उसके अकॉर्डिंग मतलब
मैम हमने तो ऐसा भी सोच सकते थे ना मैम कि ये बन जाएगा मैम। इसकी जगह हम मैम ये भी तो बोल सकते थे और CH3
CH CH2 मैम इसको क्लोरीन और इसको हाइड्रोजन दे सकते थे। है ना? तो बेटा एक्चुअली में आपको पता है दोनों प्रोडक्ट
बनते हैं। बस ये याद रखना ये माइनर प्रोडक्ट होता है और ये वाला हमारा मेजर प्रोडक्ट होता है। ये मेजर प्रोडक्ट होता
है और वो माइनर प्रोडक्ट होता है। ठीक है? अच्छा मैम ये तो हमने याद कर लिया कि ठीक है डबल बॉन्ड के उस कार्बन को हाइड्रोजन
दो जहां हाइड्रोजन ज्यादा है। पर मैम कोई सर पैर है इस बात का। मतलब ऐसा क्यों बोला गया होगा? तो इसको भी आप समझ सकते हो। ये
इसलिए बोला जाता है बेटा क्योंकि क्योंकि यहां पे ऑर्डर फॉलो हो रहा होता है 3° 2° 1° मतलब मैम मैम ने ऐसा क्यों बोला इस
बॉन्ड को इस तरफ तोड़ो मैम इस तरफ भी तोड़ सकती थी ना बिल्कुल तोड़ सकते थे पर क्यों नहीं तोड़ा क्योंकि जब मैंने इस तरफ बॉन्ड
तोड़ा तो मुझे ये कार्बोटायन मिला जिस कार्बन पे पॉजिटिव चार्ज है थोड़ा सा मतलब डिटेल में जा रही हूं सुनना ध्यान से। तो
एक्चुअली मार्कोनिक रूल का मैकेनिज़्म क्या होता है? आपको कहता है कार्बोटायन का स्टेबिलिटी देखो। कार्बो कैटायन की
स्टेबिलिटी देखो। तो हमें पता है कार्बोटायन सबसे ज्यादा स्टेबल 3° वाला होता है। फिर 2° फिर 1° तो यहां पे मैंने
इसको कार्बोटायन बनाया। उसे कार्बोटायन नहीं बनाया। क्योंकि अगर उसे बनाती तो वो 1° वाला कार्बोटायन बनता। और 1° से ज्यादा
स्टेबल 2° मुझे दिख रहा था। तो इसीलिए ये कहानी हुई। तो मार्कोनिकॉफ रूल एक डेफिनेशन है। नेगेटिव पार्ट विल विल गो टू
गो टू डबल बॉन्ड दैट कार्बन एडेंडियम व्हिच हैज़ लेसर नंबर ऑफ़ हाइड्रोजन। ये तो मार्कोनिकॉफ रूल की डेफिनेशन है। या ये
याद कर लो यार हाइड्रोजन वहां जाएगा डबल बॉन्ड के उस कार्बन पे जहां पे हाइड्रोजन ज्यादा होगा। ठीक? और बगल वाले में हैलोजन
चला जाएगा। वो सही है। पर उसका मैकेनिज़्म क्या है? कार्बोटायन की स्टेबिलिटी। ठीक? तो वो मार्कोनिक ऑफ रूल कहलाता है। ठीक
है? चलो। तो इससे भी मैम हम हेलोएल्केन बना सकते हैं। जैसे ये क्या बन गया हमारा? टू क्लोरो प्रोपेन। इसका नाम हो गया टू
क्लोरो प्रोपेन। ठीक है? टू क्लोरोप्रोपेन बनेगा ना कि वन क्लोरो प्रोपेन बनेगा। तो ये ऑप्शन गलत है। ये ऑप्शन सही है अगर ऐसा
कभी क्वेश्चन आता है तो। चलो। अच्छा अच्छा सेम सेम। ऐसे ही एंटीमार्कोनिकॉफ रूल होता है। एंटीमार्कोनिक ऑफ रूल इसका जस्ट ऑोजिट
होता है। वो कहता है भाई हाइड्रोजन वहां भेजो जहां हाइड्रोजन कम है। पर मैम हमें पता कैसे चलेगा कब एंटीमार्कोनिकॉफ रूल लग
रहा है और कम मार्कोनिकॉफ। तो एंटीमार्कोनिक ऑफ जब लगता है ना बेटा तो आप किसी रीएजेंट की प्रेजेंस में करते हो।
जैसे एसीटोन वगैरह। तो वो किसी के परऑक्साइड इफ़ेक्ट आप उसको बोलते हो एंटीमारकोनिकॉफ को खैराश इफ़ेक्ट या
परऑक्साइड इफ़ेक्ट क्योंकि उसमें परऑक्साइड की प्रेज़ेंस में रिएक्शन हो रही होती है। वो रिएक्शन हमेशा किसी परऑक्साइड की
प्रेजेंस में होने होते हुए दिखेगी। पर मार्कोनिकॉफ रूल में कोई रिएजेंट नहीं यूज़ होता है। ठीक है? तो ये हो गया। आगे बढ़ते
हैं। हाइड्रोकार्बंस में हम डायरेक्टली हैलोजन भी ऐड कर सकते थे। एडिशन रिएक्शन से है ना? कि मैम बॉन्ड तोड़ो और
डायरेक्टली कोई हैलोजन को जोड़ दो। ठीक? तो कर सकते थे हम ऐसा भी। इन द लैबोरेटरी एडिशन ऑफ़ ब्रोमीन CCL4 टू एन एल्कीन इसको
हम रेड रेडिश ब्राउन हमें कलर ये डिस्चार्ज करता है ऑफ़ ब्रोमीन कॉन्सीटुएंट एंड इंपॉर्टेंट मेथड ऑफ़ द डिटेक्शन ऑफ़ डबल
बॉन्ड और ये एक टेस्ट बन जाता है। ब्रोमिनेशन एक टेस्ट बन जाता है। क्या होता है यहां पे? हम क्या करते हैं? हम
क्या करते थे? इधर जाते थे। नहीं नहीं एडिशन ऑफ़ हैलोजंस कराना है। तो इन द लैबोरेटरी हम एडिशन करा सकते हैं ब्रोमीन
की। ठीक है? ब्रोमीन इन द प्रेज़ेंस ऑफ़ कार्बन टेट्राक्लोराइड। ठीक है? तो मैंने कोई एल्कीन ले लिया।
यह मैंने एल्कीन ले लिया। H2 H2 ठीक है? मैंने बोला इसमें डायरेक्टली क्या करो? ब्रोमिनेशन करा दो। ब्रोमीन को ऐड करो इन
द प्रेज़ेंस ऑफ़ कार्बन टेट्रा क्लोराइड एज अ सॉल्वेंट। ठीक है? तो क्या होगा मैम? ये बॉन्ड टूटेगा और ब्रोमीन अंदर जाने की
कोशिश करेगा। है ना? ब्रोमीन अंदर जाने की कोशिश करेगा बॉन्ड टूटने के बाद। ठीक है? तो डायरेक्टली आप एडिशन रिएक्शन करा सकते
थे। तो यहां पे क्या होगा? यहां पे हमारे पास मिलेगा मैम? यहां पे हमारे पास मिलेगा अ ब्रोमीन अंदर चला जाएगा बेसिकली। है ना?
जैसे CH2 है ना सिंगल बॉन्ड CH 2 और ब्रोमीन लग गया इससे है ना इसमें हाइड्रोजन लग गया। ठीक है? तो यहां पे ये
क्या बोलता है? ये बोलता है कि अगर आपने ऐसा कुछ कराया मान लो आपने ये किया डबल बॉन्ड टूटेगा। सिंगल बॉन्ड लगेगा। H2
ऑलरेडी लगा है। H2 ऑलरेडी लगा है। यहां पे ब्रोमीन लग गया। है ना? ब्रोमीन लग गया। ये हो गई एडिशन रिएक्शन कि डायरेक्टली
जाके कोई ऐड हो गया। कुछ बाहर नहीं निकला। दैट इज़ एडिशन रिएक्शन है ना? ब्रोमीन गया। डायरेक्टली जाके ऐड हो गया। ठीक है? अ
कॉन्सीटुएंट द इंपॉर्टेंट मेथड फॉर डिटेक्शन ऑफ डबल बॉन्ड। अब ये हुआ क्या? इसमें ना आप ये पहचान सकते हो कि कोई एल
एक आपके पास हाइड्रोकार्बन है। आपसे बोले ये एल्केन है एल्कीन है या एल्काइन है? तो आप बोलोगे जरा ब्रोमिनेशन करा के देखो।
क्यों? क्योंकि अगर आप ब्रोमिनेशन कराओगे। ब्रोमिनेशन कराओगे। एडिशन ऑफ़ ब्रोमीन करोगे इन द प्रेज़ेंस ऑफ़ CCL4 तो जो यहां
पे क्या होगा? एडिशन ऑफ़ ब्रोमीन करने पे एल्कीन जो है वो डिस्चार्ज करता है रेडिश ब्राउन कलर ऑफ़ ब्रोमीन। ब्रोमीन का रेडिश
ब्राउन कलर हमें यहां पे देखने को मिलेगा। तो इससे आपको कंफर्म हो जाएगा यहां पे एक डबल बॉन्ड प्रेजेंट है। ठीक है? तो यहां
पे एक डबल बॉन्ड प्रेजेंट है। आप निकाल सकते हो। द एडिशन ऑफ़ रिजल्ट रिजल्ट इन द सिंथेसिस ऑफ़ विसिनल डाई ब्रोमो इज़ अ कलर
कलरलेस ग्रुप। तो सुनना मेरी बात ध्यान से। तो बेसिकली जो ब्रोमीन होता है वो रेडिश ब्राउन कलर का होता है। है ना? और
इससे बन गया विसिनल वाला ग्रुप। देखो एडजेसेंट कार्बन है विसिनल वाला ग्रुप। और विसिनल वाला ग्रुप जो है वो कलरलेस है। है
ना? तो इसने क्या किया? इसने डिस्चार्ज कर दिया ब्रोमीन का रेडिश ब्राउन कलर। हैं? हटा दिया रेडिश ब्राउन कलर। तो आप इस
तरीके से एक टेस्ट की तरह भी इसको यूज करते हो कई जगह पे अगर आपको डबल बॉन्ड फाइंड करना है तो। ठीक है मैम? आगे बढ़ते
हैं। नेक्स्ट है हमारे पास। अब कुछ इंपॉर्टेंट नेम रिएक्शंस आने वाली हैं। नेम रिएक्शन है। मेक श्योर रिएक्शन कॉपी
में लिख रहे हो आप इसको। ठीक है? चलो तो हमारे पास आती हैं कुछ नेम रिएक्शन। जैसे कि सबसे पहली रिएक्शन है हमारे पास
फिंकलल्स स्टीम रिएक्शन। अब जितनी भी आप रिएक्शन पढ़ने वाले हो ना वो आप हैलाइड एक्सचेंज के बेसिस पे पढ़ने वाले हो। मतलब
हैलोजन को आप अंदर भेजने वाले हो। ठीक? हैलाइड एक्सचेंज। आप किसी हैलोजन को लाने वाले हो। लाने वाले हो उसको एक्सचेंज
कराने वाले हो। ठीक? मतलब हैलोजन अंदर जाएगा, हैलोएकेन बन जाएगा। बस इतना सा काम है। ठीक है? पहली रिएक्शन है फिकलस्टीन
रिएक्शन। फिंगल स्टीन रिएक्शन के आगे लिखिए। इट इज़ एन एक्सक्लूसिव रिएक्शन फॉर द प्रिपरेशन ऑफ़ अल्काइल आयोडाइड। अब आप जो
नेम रिएक्शन पढ़ते हो ना वो किसी एक टाइप के हैलोएकेन के लिए बनी है। जैसे मैंने बोला फिंगलस्टीन। तो इसका मतलब है कि आप
अल्काइल आयोडाइड बना सकते हो। आप आयोडीन को अंदर लेके आने वाले हो। दिस इज़ बेसिकली फिंगलस्टीन रिएक्शन। ये किसकी प्रेज़ेंस
में होता है मैम? ये होता है सोडियम आयोडाइड की प्रेज़ेंस में। इन द प्रेज़ेंस ऑफ़ अगेन एसीटोन एज अ सॉल्वेंट। ठीक है? तो
ये रिएक्शन हो जाएगी। तो आपने क्या किया? आपने सिंपल कोई अल्काइल ब्रोमाइड उठाया। RBr वाला ग्रुप जहां-जहां R लगा है वो
अल्काइल ग्रुप है। CH3, C2H5 कुछ भी हो सकता है। ठीक है? तो RBr वाला आपने ग्रुप उठाया और रिएक्शन कराई सोडियम आयोडाइड से।
क्या उठाया? सोडियम आयोडाइड को उठा लिया। तो आयोडीन अंदर चला जाएगा और ब्रोमीन सोडियम के साथ बाहर निकल जाएगा। ठीक है?
तो अब आपने क्या किया? हैलोजन का एक्सचेंज करवाया। देखो इसका हैलोजन इसके सर। इसका हैलोजन इसके सर। इसकी टोपी उसके सर, उसकी
टोपी इसके सर। ये वाला काम है। तो एक का हैलोजन दूसरे के पास, दूसरे का हैलोजन पहले के पास। तो इस तरीके से ये एक्सचेंज
हो सकते हैं। प्रिपेयर कर सकते हैं यूजिंग दिस मेथड। हम इसमें अल्काइल आयोडाइड प्रिपेयर करेंगे। क्लोरो और ब्रोमो एल्केन
को हम हीट करके सोडियम आयोडाइड के साथ रिएक्शन करा सकते हैं। इन द प्रेज़ेंस ऑफ़ एसीटोन या मिथेनॉल रखना पड़ेगा। ठीक है? तो
अल्काइल आयोडाइड हमारे पास बन के आ जाएगा। सोडियम ब्रोमाइड अलग हो जाएगा। अच्छा इस रिएक्शन बेटा Na जो है वो इनसॉल्युबल है
इन मिथेनॉल या एसीटोन। मतलब अगर आप एसीटोन या मिथेनॉल की प्रेजेंस में नहीं करते हो तो रिएक्शन जल्दी नहीं होगी। ये रिएक्शन
अच्छी नहीं होगी। क्यों नहीं होगी मैम? क्योंकि जो सोडियम देखो अभी आपने पढ़ा था आयोडीन वाला जो ग्रुप होता है वो
रिवर्सिबल रिएक्शन दिखा देता है। है ना? पर यहां पे नहीं होगा ऐसा क्योंकि जो सोडियम ब्रोमाइड बन के आया है। है ना? वो
इनसॉल्युबल होता है। ये जो एसीटोन है इसमें तो उससे रिएक्ट ही नहीं करेगा तो पीछे रिएक्शन जाएगी ही नहीं। इट सेपरेट्स
आउट एंड रिएक्शन प्रोसीड्स इन द फॉरवर्ड रिएक्शन। फॉरवर्ड डायरेक्शन ओनली। ठीक? तो रिएक्शन केवल एक ही डायरेक्शन में चलती
रहेगी। तो फिंगल स्टीन रिएक्शन हो गई। अच्छा नाउ कम्स अ वेरीेंट रिएक्शन स्वार्ड्स रिएक्शन। अभी मैम ने बोला
बार-बार ये फ्लोरीन भाई साहब नहीं जाते रिएक्शन में। ये रिएक्शन नहीं करवाते। ये रिएक्शन नहीं करवाता है ना? क्यों नहीं
करवाता? क्योंकि वो बहुत ज्यादा एक्सप्लोसिव हो जाता है। है ना? लेकिन एक रिएक्शन है। ये एक इनडायरेक्ट मेथड है टू
प्रिपेयर अल्काइल फ्लोराइड। जिसे आप बोलते हो स्वार्ड्स रिएक्शन। स्वार्ड्स रिएक्शन इकलौती रिएक्शन जो पूरे पूरे आप
केमिस्ट्री में पढ़ने वाले हो हैलोजन के हैलोएकेन के साथ मतलब मतलब हैोएकेन मतलब फ्लोरो एल्केन बनाने की इकलौती रिएक्शन आप
पढ़ने वाले हो वो है स्वार्ड्स रिएक्शन तो अगर मुझे फ्लोरीन को अंदर भेजना है तो मैं डायरेक्टली तो नहीं भेज पाऊंगी पर मैं
इनडायरेक्टली भेज सकती हूं। ठीक है? तो मैं क्या करूंगी? मैं किसी भी अल्काइल ब्रोमाइड को उठा लूंगी। ठीक है? मैंने RBr
या RCL को उठा लिया। एंड रिएक्शन करा दी सिल्वर फ्लोराइड फ्लोराइड के साथ AgF के साथ। तो ये फ्लोरीन ब्रोमीन की जगह लेगा
और ब्रोमीन सिल्वर के साथ AgBr के बाहर वाइट प्रेसिपिटेट की तरह निकल जाएगा। ठीक है? सो अ बेटर मेथड फॉर द प्रिपरेशन ऑफ़
फ्लोरो कंपाउंड इज़ इनडायरेक्ट मेथड। डायरेक्टली तो हम ऐसा कर ही नहीं सकते थे। हम सपनों में भी नहीं सोच सकते कि हम किसी
R कुछ भी ROH या कुछ भी ले आके कुछ भी ले आके हमने सोच लिया F2 को ऐड करवा दो। तो ये हम सपनों में भी नहीं सोच सकते थे। या
हमने C डबल ब्ड C लिया हमने F2 ऐड करवा दिया। ये सब हम सोच भी नहीं सकते कभी भी क्योंकि ये पॉसिबल ही नहीं है। बहुत
ज्यादा किलोजूल ऑफ़ एनर्जी बाहर निकल आएगी। बहुत एक्सप्लोसिव रिएक्शन हो जाएगी। ठीक? तो ये हम नहीं सोच सकते। पर हम
इनडायरेक्टली करवा सकते हैं। ठीक है? इनडायरेक्ट मेथड। हम क्लोरो या ब्रोमो एल्केन को उठा लें और उसको हीट कर दें
किसी इनऑर्गेनिक फ्लोराइड के साथ। जैसे ये सिल्वर फ्लोराइड हो गया। है ना? मरक्यूरिक फ्लोराइड हो गया एंड सो ऑन। तो फिर वही
काम हैलाइड एक्सचेंज। इसकी टोपी इसके सर आ जाएगी और इसकी टोपी इसके सर। तो AgBr बाहर निकलेगा और RF बन जाएगा। और यही कहलाती है
हमारी स्वार्ड्स रिएक्शन। स्वार्ड्स रिएक्शन इज़ अ सिंगल मेथड फॉर एक्सक्लूसिवली प्रिपरेशन ऑफ़ अपना अल्काइल
फ्लोराइड्स। ठीक है? मूविंग फॉरवर्ड। अच्छा। तो फ्लोरिनेशन क्यों नहीं करवा सकते थे? क्यों इतनी बड़ी बात मानी जा रही
है? तो वही चीज़ यहां पे लिखी यार। फ्लोरिनेशन जो है फ्लोरिनेशन अगर मैं किसी हाइड्रोकार्बन का करा दूं। मैंने एक
एल्कीन लिया। मैंने F2 ऐड कर दिया। जैसे Cl2, Br2, I2 ऐड कर रहे थे। इतनी बड़ी बात थोड़ी है। पर यह बात यार यह मामला थोड़ा
सा बड़ा है। गड़बड़ मामला है। सुनो। तो विद प्योर फ्लोरीन अगर आप कराते हो F2 गैस इट इज़ एन एक्सप्लोसिव रिएक्शन। बहुत
ज्यादा एक्सप्लोसिव रिएक्शन हो जाएगी। अच्छा ये होता क्यों है? क्योंकि लो बॉन्ड डिसोसिएशन एनर्जी होती है इनकी। बॉन्ड को
तोड़ने की भाई इतनी एनर्जी हम नहीं दे सकते। ठीक? लो बॉन्ड डिसोसिएशन एनर्जी ऑफ़ F2 मॉलिक्यूल 150.6
kjूल/ मोल। इतनी एनर्जी कार्बन कार्बन के बॉन्ड तोड़ने पे भी नहीं निकलती है। एंड पार्टली ड्यू टू हाई एग्जोथर्मिक
टर्मिनेशन स्टेप। और रिएक्शन भी बहुत ज्यादा एग्जोथर्मिक हो जाती है। बहुत हाई अमाउंट ऑफ हीट बाहर निकलती है। तो इस वजह
से हम ये रिएक्शन कभी भी नहीं कराएंगे डायरेक्टली। ठीक है? द एनर्जी रिलीज़्ड इन दिस स्टेप तो एनर्जी देखो कितनी निकल रही
है? एनर्जी निकल रही है 447.7 किJ पर मोल। मतलब चार 450 किलJूल पर मोल के आसपास एनर्जी निकल रही है। व्हिच इज
वेरी हाई लार्जर दन रिक्वायर्ड टू ब्रेक कार्बन कार्बन बॉन्ड। सोचो कार्बन कार्बन जिनके बीच में पोलैरिटी भी नहीं है,
चार्जेस भी नहीं है उनको भी हम नहीं तोड़ पाते हैं इतने ज्यादा। इतने इतना ज्यादा एक्सप्लोसिव वो भी नहीं होता। एग्जोथर्मिक
भी है ना? ये भी रीज़न हो गया। हाउएवर डायरेक्ट फ्लोरिनेशन ऑफ़ हाइड्रोकार्बन मे बी डन बाय डाइल्यूटेड वगैरह। ठीक है? जो
आपको अभी-अभी बताया गया। तो, हम ऐसे कर सकते थे। अब हम आते हैं प्रिपरेशन ऑफ़ हेलो एरीन्स में। हम हेलो एरीन समझ गए। बेंजीन
की रिंग है। उसमें एक एरीन ग्रुप लगा है। अच्छा आपको पता है जो हैलो एरीन होता है जैसे आपने इतनी देर से रिएक्शनंस पढ़ी कई
सारी। है ना? तो आप न्यूक्लियोफिलिक रिएक्शन भी पढ़ रहे थे। आप बोल रहे थे SN1, SN2 एंड सो ऑन। पर जब आप हैलो एरीन
करते हो तो ये फ्रॉम हाइड्रोकार्बन आप इलेक्ट्रोफिलिक रिएक्शन ज्यादा दिखाओगे। ठीक है? अभी उसके बारे में समझेंगे हम। अब
जो आपने एराइल क्लोराइड और ब्रोमाइड होते हैं इनको आप इलेक्ट्रोफिलिक सब्स्टट्यूशन से प्रिपेयर कर सकते हो। है ना?
इलेक्ट्रोफिलिक इलेक्ट्रोफाइल की प्रेजेंस में व्हाट इज़ इलेक्ट्रोफाइल? मैम? इलेक्ट्रॉन्स का लवर जिस पे खुद पे
पॉजिटिव चार्ज हो और वो नेगेटिव के पास जा रहा है। जैसे इतनी देर से हम न्यूक्लियोफिलिक रिएक्शंस भी पढ़ रहे थे।
जिस पे खुद पे नेगेटिव था वो पॉजिटिव की तरफ अट्रैक्ट हो रहा था। है ना? SN1, SN2 वो सब। पर यहां पे इलेक्ट्रोफिलिक
रिएक्शंस होती हैं अरींस की विद क्लोरीन और ब्रोमीन रिस्पेक्टिवली। और किसकी प्रज़ेंस में होता है? लुईस एसिड की
प्रेज़ेंस में होता है जो कि एक कैटलिस्ट की तरह काम करता है। अभी हम इसमें आएंगे और हम इसको समझेंगे। ठीक है? अच्छा अब एक
बात ध्यान से सुनना। हमें पता है हमारे हेलो एरीन ऐसे दिखते हैं। ये होते हैं हेलो अर है ना तो अब हमें पता
है इसमें दो तीन प्रोडक्ट्स हैं। जैसे कि दो तीन चीजें होती हैं। जैसे कि ऑर्थो होता है।
है ना? ऑर्थो पोजीशन ये मेटा पोजीशन है ना? ये पैरा पोजीशन है ना? और इसको यहां पे लगा दो।
इसको यहां पे लगा दो। ठीक है? ये आपका मैंने लगाया था CH। क्या लगाया था? Cl है ना? अगर वहां पे मैं लगा देती जहां पहले
लगा था तो मुझे उसके बगल में ऑर्थो लिखना पड़ता। तो डायरेक्ट समझ लो भाई ये ऑर्थो होते हैं। ये दोनों मेटा और ये पैरा
पोजीशन होते हैं। है ना? ऑर्थो और पैरा आइसोमर्स जो होते हैं वो ईजीली सेपरेट किए जा सकते हैं। उनको अगर वो दो बन गए तो आप
इजीली हटा सकते हो। उनको सेपरेट कर सकते हो। क्यों? क्योंकि उनके बीच का मेल्टिंग पॉइंट का डिफरेंस ज्यादा होता है। सेपरेट
कर सकते हो ड्यू टू लार्ज डिफरेंस इन देयर मेल्टिंग पॉइंट। ठीक है? आयोडीन से रिएक्ट देखो क्लोरीन से रिएक्शन कराओगे क्लोरीन
अंदर चला जाएगा। है ना? पर रिएक्शन कैसे कराओगे? अभी मैं करके दिखाऊंगी रिएक्शन। ठीक है? डायरेक्ट क्लोरिनेशन ब्रोमिनेशन
कैसे होगा? अभी हम समझेंगे। फ्लोरिनेशन तो डायरेक्टली हो नहीं सकता अगेन। है ना? और आयोडीन वाली रिएक्शन रिवर्सिबल हो जाएगी।
ठीक है? समझ गए हम ये सारी बातें। आयोडीन रिवर्सिबल हो जाएगी। ठीक है? तो आयोडीन के लिए एक ऑक्सीडाइजिंग एजेंट चुनना पड़ेगा
हमें। ठीक है? ताकि वो ऑक्सीडाइज ना हो। ठीक है? मैम समझ गए? अब ये रिएक्शन कुछ ऐसे होती है। पर इस रिएक्शन को समझना
पड़ेगा। यहां पे हो रहा है इलेक्ट्रोफिलिक सब्सीट्यूशन। तो आपने क्या किया? आपने एक टॉलीन ग्रुप ले लिया। यानी कि एक बेंजीन
से ऑलरेडी CH3 लगा है। आपने उस ग्रुप को लिया। आप जनरली केवल बेंजीन ले सकते हो। बट वो रिएक्शन फिर बहुत ज्यादा
रिएक्टिविटी आपको देखनी पड़ जाती है वहां पे। ठीक है? बट हो सकती है। सुनो। तो आपने टॉलीन उठाया और टॉलीन को डायरेक्टली
क्लोरिनेशन करा दिया। मतलब कि X2 उसमें ऐड कर दिया। अब यह X क्या है? यह क्लोरीन हो सकता है, ब्रोमीन हो सकता है, आयोडीन भी
हो सकता है, लेकिन अगर आयोडीन होगा, तो आपको HNO3 भी ऐड करना पड़ेगा। अब ये रिएक्शन होती है इन द प्रेज़ेंस ऑफ़ आयरन।
या फिर आप बोल लो या फिर आप बोल लो AlCl3। तो मैंने एक टॉलीन लिया। ठीक? मुझे इसकी रिएक्शन करानी है किससे?
Cl2 से। मान लो यहां पे ब्रोमीन भी हो सकता है, आयोडीन भी हो सकता है। ठीक है? तो मैंने ये रिएक्शन कराई। ये होता है
बेटा इन द प्रेजेंस ऑफ Al Cl3 या FeCl3 की प्रेजेंस में। ठीक है? और इससे आपको क्या मिल जाएगा? आपको क्लोरो वाला ग्रुप मिल
जाता है। है ना? तो यहां पे आके क्लोरो लग जाएगा। ठीक है? तो ये बन गया क्लोरोटोलीन। ऑर्थो
क्लोरोटॉलीन इसका नाम होगा पूरा। है ना? तो आपने AlCl3 एनहाइड्रस AlCl3 लिया। ठीक? एनहाइड्रस AlCl3 अब ये एनहाइड्रस
AlCl3 ने किया क्या? यहां पे इसके पास एनहाइड्रस AlCl3 जो है बेटा सबसे पहले इस रिएक्शन में हुआ पता है
क्या होगा? क्लोरीन क्लोरीन का बॉन्ड टूटा होगा। सोचो ये एक इलेक्ट्रोफिलिक रिएक्शन है। इलेक्ट्रोफिलिक रिएक्शन है। मतलब किसी
इलेक्ट्रोफाइल ने अटैक किया होगा। एक सेकंड मैम। इलेक्ट्रोफ़ाइल मतलब जिसपे पॉजिटिव चार्ज हो। Cl2 में पॉजिटिव चार्ज
या क्लोरीन पे तो नेगेटिव होता है। कुछ समझ नहीं आया? तो सुनो। रियलिटी में ये एक लुईस एसिड है। ये एक लुईस एसिड है। लुईस
एसिड का मतलब होता है इलेक्ट्रॉन डेफिशिएंट ग्रुप है। इसके खुद के पास इलेक्ट्रॉन्स की कमी है भाई साहब। ओ भाई
साहब हमको देख के नहीं पता चला पर उसपे इलेक्ट्रॉन्स की कमी थी। ठीक है? तो इनिशियली इस रिएक्शन में हुआ क्या होगा?
अब आपको ऐसे ही अभी समझा दे रही हूं। ये ऐसी कोई भी रिएक्शन दिखेगी हमेशा समझ जाना इसके बारे में। ठीक है? यहां पे आप FeCl3
भी ले सकते थे। एक ही काम करता हूं। ये लुईस एसिड है। इसने जैसे ही देखा क्लोरीन क्लोरीन के बीच में डबल बॉन्ड है। अच्छा
इसके बॉन्ड को तोड़ना पड़ेगा। तो ये बॉन्ड कैसे तोड़ेगा? ये हेट्रोलिपिटिक फज़ करेगा। हेट्रोलिप्टिक फज़ मतलब एक पे पॉजिटिव और
एक पे नेगेटिव चार्ज देगा। ये तुरंत जैसे ही देखेगा ये पूरे ग्रुप को तो ये इसके नेगेटिव वाले ग्रुप को पकड़ के रिएक्ट
करेगा। और बोलेगा मैं बन जाऊंगा AlCl4- ये तुरंत ये कहानी करना शुरू कर देगा। क्योंकि ये एक लुईस एसिड है। इसके पास
इलेक्ट्रॉन्स की कमी है। इसने जैसे ही देखा यार क्लोरीन अगर मैं इसको ऐसे तोड़ दूं क्लोरीन को कि एक पे नेगेटिव और एक पे
पॉजिटिव आ जाए तो मैं नेगेटिव वाले को पकड़ के भाग सकता हूं। तो इसने ये किया। अब बेंजीन में क्या होता है? बेंजीन में आपको
पता है इलेक्ट्रॉन्स। बेंजीन इलेक्ट्रोफिलिक रिएक्शन क्यों सबसे अच्छे से दिखा रहा होता है? कभी सोचा है? ये
न्यूक्लियोफिलिक नहीं दिखाता इतनी ईजीली। क्यों? क्योंकि मैम यहां पे डीलोकलाइज़्ड इलेक्ट्रॉन लगे होते होंगे।
डीलोकलाइज़्ड इलेक्ट्रॉन, इलेक्ट्रॉन घूम रहे हैं। मस्त मज़े में है एकदम। तो ये अटैक करना चाहेगा। तो जो पॉजिटिव वाला
ग्रुप है उसने देखा अच्छा इलेक्ट्रॉन घूम रहे हैं तो इसने जा के इसको अटैक कर दिया। रेजोनेटिंग स्ट्रक्चर वगैरह बने होंगे बट
यहां पे पूरा आप कांसेप्ट समझो मैकेनिज्म समझो क्या हो रहा है? ये क्लोरीन अटैक कर रहा है और क्लोरीन पे पॉजिटिव चार्ज है और
इसीलिए मैं इसको बुला रही हूं इलेक्ट्रोफिलिक रिएक्शन। इलेक्ट्रोफ़ाइल के अटैक से ही हुआ। अच्छा एक सेकंड मैम। बहुत
कंफ्यूज कर लिया आपने। आप ये कहना चाहते हो AlCl4 नेगेटिव बना। ठीक है। मतलब बाहर AlCl4 नेगेटिव निकल गया। तो मैं बोलूंगी
नहीं यार AlCl3 जो है वो तो एक कैटालिस्ट है। मतलब वो तो जैसा गया वैसा बाहर निकलेगा। तो मैम इसका क्या हुआ होगा? तो
ये जैसे ही रिएक्शन हुई उसके बाद जिस कार्बन से ये क्लोरीन लगा है उससे एक हाइड्रोजन लगा होगा। हर एक से हाइड्रोजन
लगे हैं। तो बाहर हाइड्रोजन भी तो निकलेगा। यहां से हाइड्रोजन बाहर निकलेगा। और जैसे ही ये हाइड्रोजन बाहर निकलेगा H
पॉजिटिव के फॉर्म में। वो तो बड़ा रिएक्टिव होता है। उसके पास एक भी इलेक्ट्रॉन नहीं है। तो वो इसके साथ रिएक्ट करेगा H+ के
साथ। तो यहां पे बन जाएगा AlCl3 जैसा था वैसे ही बाहर निकलेगा और HCl बाहर निकल जाएगा। यानी कि यहां पे HCl भी बना होगा।
मतलब इन शॉर्ट अगर मैं बोलूं तो AlCl3 जैसे गया था वैसे ही निकला पर रिएक्शन के अंदर जा के उसने बहुत बड़ा काम कर दिया।
उसने क्या किया? उसी ने पहले ClCl का बॉन्ड तोड़ा। एक Cl को पहले पकड़ा अपनी तरफ। AlCl4 नेगेटिव बनाया। फिर थोड़ी देर वेट
किया। उसने देखा अच्छा हाइड्रोजन। अरे बाप रे हाइड्रोजन आ गया। अब क्लोरीन को भगाना पड़ेगा। तो वो क्लोरीन को फिर छोड़ देगा। तो
वो Cl नेगेटिव H के साथ जा के HCl बन जाएगा वापस से। ठीक है? तो, अगर हम केवल रिएक्शन देखते हैं, तो हमें ऐसे देखने को
मिलती है। देखो, रिएक्शन हमें ऐसे देखने को मिलती है, टोलीन था, टॉलीन वाला ग्रुप, है ना? तो, यह प्रोडक्ट बना, और यहां पे
HCl बाय-प्रोडक्ट भी बन सकता है। है ना? और जैसे आयरन यहां पे FeCl3 भी ले सकते है, Fe भी ले सकते हैं। FeCl, AlCl3 भी ले
सकते हैं एनहाइड्रस फॉर्म में। कुछ भी कर सकते थे। रिएक्शन बड़ी बड़ी सिंपल देखने में लगती है। पर, अंदर की कहानी ये हो रही
होती है, की वो इलेक्ट्रोफ़ाइल जनरेट करता है। कोई बोले, लुईस एसिड क्यों ले रहे हो यहां पे?" बोलना क्योंकि वो इलेक्ट्रॉन
डेफिशिएंट है। वो इससे इलेक्ट्रॉन खींचेगा। क्लोरीन को खींचेगा और एक पॉजिटिव क्लोरीन को बोलेगा जाओ अटैक करो।
तो वो इलेक्ट्रोफिलिक रिएक्शन हो गई। ठीक है? अच्छा साथ ही साथ क्योंकि ऑर्थो और पैरा दोनों प्रोडक्ट्स बनते हैं तो आप
दोनों लिख सकते हो। ठीक है? चलो भाई। तो ये यहां पे पूरे पूरे कांसेप्ट में यही लिखा हुआ था। तो इस तरीके से कहानी यहां
पे होती है। चलो आगे बढ़ते हैं। अगर ब्रोमीन लेना तो Albr3 ले लेना। ठीक है? अच्छा फ्रॉम अमीन भी आप रिएक्शन करा सकते
हो जिसको आप बोलते हो सैंडमियर रिएक्शन। सैंडमियर रिएक्शन आपको अभी आप अल्कोहल फिनोलथन पढ़ोगे, एल्डिहाइड, कीटोन में
पढ़ोगे, अमीनस में पढ़ोगे, हर बार पढ़ने वाले हो। ठीक है? यहां पे आप डाई एजोटाइजेशन भी कराने वाले हो। और ये एक बड़ी इंपॉर्टेंट
रिएक्शन है। सैंडमियर रिएक्शन समझो। सैंडमियर रिएक्शन को पहले समझो क्या होता है? अगर आपने कोई प्राइमरी एरोमेटिक अमीन
ले लिया। 1 डिग्री अमीन यानी कि RNH2 वाला ग्रुप ले लिया। प्राइमरी एरोमैटिक अमीन। ठीक? प्राइमरी एरोमेटिक सॉरी एनिलिन ले
लिया। प्राइमरी एरोमैटिक एरोमेटिक है ना? तो एरोमैटिक मतलब बेंजीन पे NH2 लगा दो। ये क्या बन गया? प्राइमरी एरोमेटिक रिंग
या आप जिसको बोल सकते हो एनिलिन। ठीक? तो आपने एक एनिलिन लिया और आपने इसको रिएक्ट कराया कोल्ड एक्वस HCl से। कोल्ड कोल्ड
एक्वस HCl से। इन द प्रेज़ेंस ऑफ़ प्रेज़ेंस ऑफ़ सोडियम नाइट्राइट। इन द प्रेज़ेंस ऑफ़ NaNO2। Nano2 ओवर HCL आपने रिएक्शन कराया
तो आपको डायजोनियम सॉल्ट मिल जाएगा। रिमेंबर डाईजोनियम साल्ट एक बड़ा ही इंपॉर्टेंट साल्ट है। बड़ा ही इंपॉर्टेंट
कंपाउंड है पूरे एरंस वाले ग्रुप का। जितने भी एरोमेटिक रिंग आप पढ़ते हो उसमें डाईजोनियम साल्ट जो है एक बड़ा इंपॉर्टेंट
रोल प्ले करता है। क्यों मैम? क्योंकि एक बार डाई डाईजोनियम साल्ट बनता है ना। तो वो कहता है क्या चाहिए तुमको? क्या चाहिए?
क्लोरीन चाहिए। क्लोर हैलो एरीन में क्लोरो एरीन चाहिए बना देंगे। ब्रोमो एरीन चाहिए बना देंगे। फलाना फलाना चाहिए बना
देंगे। बड़े आसानी से ये काम कर लेता है। तो हम क्या करते हैं? हम डायज़ोनियम साल्ट बनाते हैं। कैसे बनता है डाइजोनियम साल्ट
नाम? तो क्या बोला हमने कि आपको एनिलिन को लेना है, प्राइमरी अमीन को लेना है। ठीक? और इससे रिएक्ट करना है Nano2
ओवर HCl एंड आपको ये रिएक्शन बड़े ही कम टेंपरेचर से भेजनी होती है। 0 टू 5 डिग्री सेल्सियस है ना? 0 टू 5° सेल्सियस के
आसपास। सोचो। बड़ा ही कम टेंपरेचर। बहुत लो टेंपरेचर पे है ये रिएक्शन। है ना? जिसको आप बोल सकते हो 273 से है ना? ज़ीरो इज़
व्हाट? 273 और 273 + 5 278 तो 2 273 से 278 केल्विन तक का टेंपरेचर ले सकते हो। ठीक है? तो यहां से क्या होता है? यहां पे
बेंजीन पे बनता है डायजोनियम सॉल्ट। डायजोनियम सॉल्ट मतलब बेंजीन पे लग जाता है
N2 + Cl- और यही कहलाता है हमारा डाई अजोनियम सॉल्ट।
ठीक है? बाकी कुछ बाय प्रोडक्ट्स भी निकलते हैं यहां पे। ठीक है? यह रिएक्शन इज वन ऑफ द वेरीेंट रिएक्शन। मैकेनिज्म
वगैरह आप पढ़ोगे पूरा। मैकेनिज्म आप पढ़ोगे अमीनस वाले चैप्टर में। ठीक है? तो डाई एजोटाइजेशन आपने एनिलिन को उठाया और
एनिलिन को पास करा दिया Nano2 ओवर HCL इन द प्रेज़ेंस एट टेंपरेचर 0 टू 5° सेल्सियस। बहुत लो टेंपरेचर पे। एंड दिस इज़ फॉर्म इन
C2। C2 मतलब जैसे ही बनाते हैं फ्रेशली इसको यूज़ करते हैं। ठीक है? फ्रेशली प्रिपयर्ड हम इसको यूज़ करते हैं। ठीक है?
तो Nano2 ओवर HCL सोडियम नाइट्रेट नाइट्राइट ओवर HCL रिएक्शन कराई एट 0 टू 5° टेंपरेचर नहीं लिखोगे आपके मार्क्स कट
जाएंगे। ठीक है? तो बन जाता है डजोनियम साल्ट यानी कि बेंजीन पे लग जाता है N2 + Cl- अब ये बेंजीन एकदम भैया खुले में बैठा
है। क्या क्या रिएक्शन करनी है? मैं करूंगा। मैं हम करेंगे। हम फर्स्ट हम फर्स्ट। तो ये हम फर्स्ट करके रिएक्शन कर
देगा भाई। ठीक है? चलो। तो ये यहां पे लिखा है। द सॉल्यूशन इज़ फ्रेशली प्रिपयर्ड डजोनियम साल्ट विद क्यूपरस क्लोराइड और
क्यूपरस ब्रोमाइड रिजल्ट इन द रिप्लेसमेंट ऑफ़ डजोनियम ग्रुप। क्लोरीन और ब्रोमीन आके लग सकते हैं। रिप्लेसमेंट ऑफ़ डायजोनियम
ग्रुप बाय आयोडाइन डज़ नॉट रिक्वायर द प्रेज़ेंस ऑफ़ क्यूपरस हैलाइड एंड इज़ डन सिंपली बाय शेकिंग द डायज़ोनियम साल्ट विद
पोटैशियम आयोडाइड। तो मतलब आप डाइजोनियम साल्ट से क्लोरीन, ब्रोमीन कुछ भी बना सकते हो। फ्लोरीन नहीं अभी है ना? क्लोरीन
इतने आसानी से कहीं नहीं बनता। ठीक है? तो कुछ भी बना सकते हो। बाकी आयोडीन वही सेम कहानी है आयोडीन की तो भाई वो इतनी जल्दी।
अच्छा यहां पे आयोडीन जल्दी बन जाएगा वैसे। आयोडीन के साथ यहां पे क्या होगा? आयोडीन बहुत रिएक्टिव है। तो वो डायजोनियम
सॉल्ट के साथ और भी जल्दी रिएक्ट कर सकता है। तो भाई डायजोनियम रिएक्शन तो एक बड़ी फेवरेट सी रिएक्शन है जो कुछ भी बना देगी।
ठीक है? तो हमने क्या किया? एनिलिन को लिया। Nano2 और HCl लिया। तो इससे लग जाएगा N2+ एंड Cl- है ना? आप इसको Cu2H2
की प्रेज़ेंस में भी करा सकते थे। देखो अब देखो अब देखो कितना आसान हो गई कहानी। अब मुझे क्या करना है? अब मैंने बोला
सैंडमियर रिएक्शन। तो सैंडमियर रिएक्शन क्या थी? सुनना। सैंडमियर रिएक्शन का मतलब सुनना। हमने पहले डजोटाइजेशन समझ लिया। अब
सैंडमियर रिएक्शन तो बड़ी आसान हो गई। डजोटाइजेशन सब समझ गए? यस मैम। अब सैंडमियर सुनो। सैंडमियर रिएक्शन है क्या?
ये बोलता है हेलो एल्केन। हेलो एल्केन जैसे तुम इतनी देर से बना रहे थे ना फिंकलस्टीन और क्या बोलते हैं? स्वार्जन
जितनी भी तुमने रिएक्शन करी यार मेरे साथ भी करवाओ ना। बेंजीन में भी हैलोजन लगवाओ। एरोमेटिक अराइल हैलाइड बनाओ। तो वहां पे
एंट्री ले ली हमारे पास। वाइल्ड गार्ड एंट्री आ गई डायजोनियम साल्ट की। अब डायजोनियम साल्ट बन गया। अब तुम स्वार्ट्स
रिएक्शन बड़े आसानी से करा सकते हो। सॉरी, सैंडमियर रिएक्शन बड़े आसानी से करा सकते हो। सैंडमियर रिएक्शन क्या होता है? मैम
बेंजीन के रिंग पे क्लोरीन या ब्रोमीन लगा दो। सैंडमयर रिएक्शन बड़े आसानी से हो जाता है। लेकिन किसमें होता है? इन द प्रेज़ेंस
ऑफ़ Cu2X2। Cu2X2 की प्रेज़ेंस में होता है। ठीक? या आप Cux की प्रेज़ेंस में भी करा सकते हो उसको। ठीक है? तो आपने क्या किया?
आप हैलो एरीन से ये रिएक्शन नहीं करा पा रहे थे। आप अगर केवल बेंजीन उठा लेते या फिर आप केवल बोलते कि हम केवल बेंजीन
उठाएंगे और ये रिएक्शन कराएंगे। नहीं हो पा रही थी रिएक्शन। तो मैंने डायजोनियम साल्ट लिया है। ले आए। तो हमने डायजोनियम
साल्ट उठाया। ये हमने क्या किया? ये डजोटाइजेशन था। यहां पे सैंडवियर नहीं था। ये आपका डजोटाइजेशन रिएक्शन थी। ये जो
आपने यहां पे करी है ये सैंडवियर नहीं है। ये डजोटाइजेशन है। लिखा मैंने डाई एजोइजेशन
ये आपकी डाई एजोटाइजेशन रिएक्शन है। सैंडमियर रिएक्शन कहती है कि भाई हेलो अरीन बनाओ। हैलोअरीन बनाओ इन द प्रेज़ेंस
ऑफ़ Cu2X2। तो आपको क्या करना है? डजोनियम साल्ट बना लिया। अब आप बहुत सारी रिएक्शन करवा दोगे। ठीक है? जैसे पहली रिएक्शन है
सैंडमियर। डायजोनियम साल्ट बनाया। CO2H2 से पास करा दो। ठीक? क्या होगा? ये N2HX2 जो N2+ और Cl- था इसके साथ जाके हमारा एक
हैलोजन जुड़ता है। इस बार क्या जुड़ेगा? एक हैलोजन जुड़ेगा। क्या जुड़ेगा मैम? हैलोजन जुड़ेगा। और N2 जो है वो बाहर निकल
जाएगा। क्लोरीन और ब्रोमीन के साथ ये रिएक्शन हो सकती है। आगे बढ़ते हैं। अब आते हैं हम कुछ फिजिकल प्रॉपर्टीज में। ठीक?
तो अल्काइल लाइड की हमारे पास कुछ फिजिकल प्रॉपर्टीज होती हैं। जैसे कि पहली फिजिकल प्रॉपर्टी होती है फिजिकल स्टेट, कलर, अर।
अभी जैसे आपने ये साइड रिएक्शन पढ़ी ना, ऐसी और रिएक्शंस आएंगी उसके बारे में भी सुनना। ठीक है? पहले हम समझेंगे इनकी
फिजिकल प्रॉपर्टीज़। तो जो हमारे अ स्टार्टिंग के अल्काइल हैलाइड्स होते हैं, जो क्लोरोफ्लोरो मिथेनस होते हैं,
क्लोरोफ्लोरोइथेनस होते हैं वो एक्चुअली में स्टार्टिंग के जो आपके ये मिथेन इथेन है ना ये गैसियस स्टेट में पाए जाते हैं।
कैसे पाए जाते हैं? गैसियस स्टेट में पाए जाते हैं। रूम टेंपरेचर पे ये गैसियस स्टेट में पाए जाते हैं। पर इनसे ज्यादा
जो बड़े वाले हमारे जैसे-जैसे कार्बन बढ़ते जा रहे हैं ये सब जो हैल्केन आते हैं वो हमारे लिक्विड और सॉलिड स्टेट में पाए
जाते हैं। ठीक है? अल्काइल लाइड्स होते हैं जनरली उनके प्योर स्टेट में उनका कोई भी कलर नहीं होता। ठीक है? दे आर कलरलेस
इन देयर प्योर स्टेट। प्योर स्टेट में कोई भी कलर इनका नहीं होता। ठीक है? लेकिन अगर आप इसको एक्सपोज कर दो लाइट की प्रेजेंस
में। है ना? किसको? ब्रोमाइड वाले को स्पेशली। आयोडाइड भी थोड़ा बहुत ऐसा करता है पर मेजरली ब्रोमाइड करेगा। अल्काइल
ब्रोमाइड को आप लाइट की प्रज़ेंस में रखोगे तो वो ऑफ कोर्स क्या करेगा? रेडिश ब्राउन कलर दिखाएगा। है ना? तो वो थोड़ा सा लाइट
या कलर यू कैन से दिखा सकता है। ठीक है? बहुत सारे वोलेटाइल हैलोजन कंपाउंड्स होते हैं हमारे और उनकी स्वीट स्मेल होती है।
जो हमारे वोलेटाइल कंपाउंड्स होते हैं उनकी स्मेल स्वीट होती है। आगे बढ़ते हैं। अगर मैं इनके मेल्टिंग पॉइंट की बात करूं
तो जो हमारे मॉलिक्यूलर मासेस वाले होते हैं स्टार्टिंग के है ना? तो जो हमारे मॉलिक्यूलर मास जिनका कम है। अब देखो
मेल्टिंग पॉइंट अलग-अलग तरीके से आप डिफाइन कर सकते हो। पहली चीज जिसका मॉलिक्यूलर मास कम है उसका मेल्टिंग पॉइंट
कम होगा। है ना? और जिसका मॉलिक्यूलर मास बहुत ज्यादा है ना उसका मेल्टिंग पॉइंट भी ज्यादा। वो देर से मेल्ट होगा। तो
मॉलिक्यूलर मासेस ऑफ़ अल्काइल हैलाइड्स आर हायर देन दोज़ ऑफ़ पेरेंट एल्केन्स। पहले तो अगर नॉर्मल एल्केन से कंपेयर करेंगे हम।
तो एल्काइल हेलाइड जो है उनका मेल्टिंग पॉइंट ज़्यादा होता है एज़ कंपेयर टू नॉर्मल एल्केन। ठीक है? तो मेल्टिंग एंड बॉइलिंग
पॉइंट अगर हम हैलोल्केन की बात करेंगे तो काफी ज्यादा होता है एल्केन के कंपैरिज़न में। ठीक है? इन एडिशन अगर हायर
मॉलिक्यूलर मास है। भाई मैंने बोला एक किल किसी का मास बढ़ गया तो उसको मेल्ट होने में टाइम भी ज्यादा लगेगा। मास कम हो गया।
मेल्ट होने में टाइम कम लगेगा। ठीक है? तो हायर मॉलिक्यूलर मास। अनदर रीज़न इज़ CX बॉन्ड इज़ पोलर। अच्छा।
अगर मैं बोलूं कि एल्केन से ज्यादा क्यों है? तो एक तो मॉलिक्यूलर मास की बात हो गई। भाई मॉलिक्यूलर मास बढ़ता है अपने
हेलोकेन का। ठीक है? एज कंपेयर टू दैट ऑफ पेरेंट एल्केन। बाकी सेकंड होता है कि आपके जो हैोएकेस होते हैं उनमें पोलरिटी
होती है। चार्जेस होते हैं। स्टंग फोर्स ऑफ़ अट्रैक्शन होती है। स्ट्रंग इंटरमॉलिक्यूलर फोर्स ऑफ़ अट्रैक्शन होती
है। डपोल डपोल मूवमेंट ज्यादा होता है। वेंडर वाव फोर्स लग रही होती है। और इस वजह से इनका मेल्टिंग पॉइंट ज्यादा होता
है। ठीक है? अच्छा बॉइलिंग पॉइंट बड़ा इंपॉर्टेंट कॉन्सेप्ट होता है यहां पे। बॉइलिंग पॉइंट को आप अलग-अलग तरीके से
डिफाइन करोगे। ठीक है? पहले बॉइलिंग पॉइंट का मतलब समझो। एक ऐसा टेंपरेचर जिसमें मैम कोई चीज बॉईल होना स्टार्ट हो जाए। ठीक
है? तो हमारे हैलोएकेन जिनका मॉलिक्यूलर मास ज्यादा है उनको बॉईल होने में ज्यादा टाइम लगेगा तो उनका बॉइलिंग पॉइंट बढ़
जाएगा। सिंपल फंडा पहले तो जिसका भी मॉलिक्यूलर मास ज्यादा उसका बॉइलिंग पॉइंट ज्यादा। तो अगर सेम अल्काइल ग्रुप है
बॉइलिंग पॉइंट डिक्रीज करता है इस ऑर्डर में। देखो सबसे ज्यादा बॉइलिंग पॉइंट आयोडाइड का है। फिर ब्रोमाइड वाले का है।
फिर क्लोराइड वाले का है। अगर मैंने सेम अल्काइल ग्रुप ले लिया और मैंने हैलोजन अलग-अलग लगा दिए। तो देखो कौन सा हैलोजन
बड़ा होता है? आयोडीन। आयोडीन का एटम्स का साइज सबसे बड़ा होता है तो उसका मॉलिक्यूलर मास बड़ा होगा जिसकी वजह से उसका बॉइलिंग
पॉइंट ज्यादा हो जाएगा। ठीक? तो पहला तो केस ये हो गया। ठीक है? ड्यू टू दीज़ टू फैक्टर्स। अच्छा दूसरा क्या था? इट इज़
ड्यू टू इंक्रीस इन द एटॉमिक मास और साइज़ ऑफ़ हैलोजन जो मैंने आपको अभी-अभी एक्सप्लेन किया। ठीक है? बाकी वेंडर वाल
फोर्स वगैरह लग रही होती है जो बढ़ती है और इस वजह से ये पूरा निकल के आता है कि ठीक है मैम हम समझ गए। हम समझ गए ये बात। अगर
सेम अल्काइल लगा है और हैलोजन अलग-अलग लगे हैं तो जिस हैलोजन का मास ज्यादा वो हैलोजन का बॉइलिंग पॉइंट भी ज्यादा। ठीक
है? अच्छा सेकंड होता है अगर मैंने हैलोजन सेम कर दिया मान लो अब मैंने क्लोरीन लगा दिया केवल या चलो यहां पे एग्जांपल
ब्रोमीन का है मैंने ब्रोमीन लगा दिया चारों में तो ब्रोमीन के हिसाब से आ रहा होगा मैम तो इस केस में आप अल्काइल ग्रुप
देखो भाई जिसमें ज्यादा कार्बन उसका मास ज्यादा और उसका बॉइलिंग पॉइंट ज्यादा है ना तो CH3Br C2H5 Br C3H7 C4H9 तो कार्बन
बढ़ रहे हैं मतलब मॉलिक्यूलर मास बढ़ रहा है तो जैसे-जैसे नंबर ऑफ़ कार्बन बढ़ेंगे इस बार वैसे-वैसे उसका बॉइलिंग पॉइंट बढ़
जाएगा। तो एक तो ये कैटेगरी हो गई। अच्छा मैम एक कैटेगरी बड़ी अलग सी होती है आइसोमर्स की मान लो मैम सेक वाला ग्रुप रख
दिया हमने पेंट वाला रख दिया सॉरी न्यू वाला रख दिया टर्ट वाला इस तरीके से तो तो ब्रांचेस के बेसिस पे भी आप बॉइलिंग पॉइंट
निकाल सकते हो देखो जिसकी ब्रांचेस ज्यादा होती हैं जिसकी भी ब्रांचेस ज्यादा होती हैं उसका सरफेस एरिया कम होता
है और इस वजह से उसका बॉइलिंग पॉइंट भी कम होता है। इसको याद रखना। किसी की ब्रांचेस ज्यादा हैं। ज्यादा ब्रांचेस हैं। एक
कार्बन ऐसे वाला है। ठीक? ऐसे। तो इसका देखो इसकी ब्रांचेस कम है। है ना? इसका सरफेस एरिया ज्यादा है।
और इस वजह से इसका बॉइलिंग पॉइंट ज्यादा होगा। अगर मैं इसी को ऐसे ड्रॉ कर दूं। ठीक है? इस तरीके से कुछ ड्रॉ कर दूं। इस
तरीके से 1 2 3 4 5 6 1 2 3 कोई एक कार्बन हटा दो भाई। ऐसे कर लो। कंपेयर कर रहे हैं क्योंकि हम तो मान लो पांच-प कार्बन ही
रखें। पर इस बार इसका जो सरफेस एरिया है वो कम है और इस वजह से इसका बॉइलिंग पॉइंट भी कम होगा। ठीक है? तो जैसे-जैसे
ब्रांचेस बढ़ती हैं बॉइलिंग पॉइंट कम होता है। ठीक है? ये आइसोमर्स की बात हो गई। तो रीड कर लेते हैं। इन केस ऑफ़ आइसोमेरिक
अल्काइल लाइट ग्रेटर द ब्रांचिंग लोअर इज़ द बॉइलिंग पॉइंट। है ना? जितनी ज्यादा ब्रांचेस उतना कम बॉइलिंग पॉइंट। ये देखो।
जितनी ज्यादा ब्रांचेस उतना कम बॉइलिंग पॉइंट। क्योंकि सरफेस एरिया इज द रीज़न। आप यहां पे लिख दो ब्रांचेस के बेसिस पे ना
ब्रांचेस बड़ी हैं। ब्रांचेस बड़ी हैं और वहां पे ब्रांचेस कम थी। ठीक है? तो इसके बेसिस पे भी आप कर सकते हो। ड्यू टू दिस
जो मैग्नीट्यूड वेंडर वाल फोर्स ऑफ़ अट्रैक्शन है उनके बीच का वो भी कम हो जाता है। ठीक है? तो बॉइलिंग पॉइंट भी इस
वजह से कम हो जाता है। ठीक है? तो देखो n वाले का सबसे ज्यादा बॉइलिंग पॉइंट फिर आइसो वाला ग्रुप आएगा। भाई n तो मेन चेन
है ब्रांचेस है ही नहीं। तो सबसे ज्यादा बॉइलिंग पॉइंट है। है ना? और जैसे-जैसे ब्रांचेस बढ़ती गई, बॉइलिंग पॉइंट कम होता
चला जाएगा। ठीक है? तो ये हो गया हमारा बॉइलिंग पॉइंट वाला फिजिकल प्रॉपर्टी। मूविंग फॉरवर्ड नेक्स्ट है हमारे पास
सॉलुबिलिटी। अब हमारे जो अल्काइल हैलाइड होते हैं वो पोलर होते हैं। तो दे शुड बी वेरी सॉलुबल इन अ पोलर सॉल्वेंट। भाई लाइक
डिॉल्व्स लाइक पोलर वाला पोलर में सॉलुबल होता है। है ना? तो भाई इसको सॉलुबल होना चाहिए बड़े आसानी से पानी में। तो हां ठीक
है। बट अगर आपने हाइड्रोकार्बन की चेन बढ़ा दी तो उस टाइम पे ये बहुत अच्छे से पोलर बहुत अच्छे से ये सॉलुबल पानी में नहीं
होते हैं। क्या मतलब है मैम इसका? मान लो मैंने हैोएकेन उठाया। ठीक? एक क्लोरीन लगा है और मैंने लगा दिए आठ कार्बन एटम। अब
कार्बन कार्बन तो नॉन पोलर है। उसके बीच में कोई पोलरिटी थोड़ी है। उनके बीच में इलेक्ट्रोनेगेटिविटी का डिफरेंस ही नहीं
है। दोनों सेम ही एटम तो हैं। कार्बन कार्बन कार्बन कार्बन तो कार्बन नॉन पोलर हैं। है ना? और कार्बन के साथ जब हैलोजन
लग रहा है तो वो पोलर है। पर अगर हाइड्रोकार्बन का पोर्शन मैंने बढ़ा दिया। मतलब मैंने ज्यादा कार्बन लगा दिए तो उस
कंडीशन में वो नॉन पोलर डोमिनेट करने लग जाएगा पोलर कैरेक्टर को और फिर वो ज्यादा सॉलुबल नहीं हो पाएगा पानी में। ठीक है?
तो एक ये कंडीशन याद रखना। अल्काइल लाइट्स पोलर मॉलिक्यूल्स होते हैं। इवन देन दे आर ऑलमोस्ट इनसॉल्युबल। एज़ आई सेड जनरली
इनसॉल्युबल होते हैं पानी में। अच्छा इसका दो रीज़न होता है। पहली चीज़ ये हाइड्रोकार्बन हाइड्रोजन अ बॉन्ड नहीं
बनाते पानी के साथ। समझ रहे हो? जब ये अपने अ जो अपने जितने भी हैलोएकेन हैं वो पोलर हैं। मान लो मैंने केवल एक कार्बन दो
कार्बन वाला भी ले लिया तो वो भी पोलर है। पर फिर भी वो बहुत अच्छे से सॉलुबल नहीं होता। इट इज़ स्पेयरिंगली सॉलुबल इन वाटर।
बहुत अच्छे से सॉलुबल नहीं होता। क्यों? पोलर पोलर में सॉलीबल होना चाहिए ना। बट इतने अच्छे से इसलिए नहीं होता क्योंकि ये
जो ग्रुप है ये हाइड्रोजन बॉन्ड नहीं बनाता पानी के साथ जाके और इस वजह से ये ऐसा नहीं कर पाता। एनर्जी जो रिक्वायर
होती है इस अट्रैक्शन को बनाने के लिए वो भी इसमें काफी कम होती है। ठीक है? द ओरिजिनल हाइड्रोजन बॉन्ड इन वाटर आर
स्ट्रांग। पानी में ऑलरेडी जो हाइड्रोजन बॉन्ड है वो बड़े स्ट्रांग हैं। और वो बॉन्ड बना ही नहीं रहे हैं। है ना? वो
न्यू अट्रैक्शन करना चाह ही नहीं रहे हैं। क्यों? क्योंकि न्यू अट्रैक्शन बड़ा वीक सा अट्रैक्शन है। है ना? अल्काइल हैलाइड्स जो
हैं वो पानी के बॉन्ड के हाइड्रोजन के साथ तोड़ ही नहीं सकते। हाइड्रोजन बॉन्ड ऑलरेडी प्रेजेंट इन वाटर आल्सो। देयर फॉर
अल्काइल हैलाइड्स डू नॉट डिॉल्व इन वाटर। जनरली बड़े कम डिॉल्व होंगे। और जैसे-जैसे वो मैंने बात बताई कार्बन की चेन बढ़ती
जाएगी वैसे-वैसे तो ये एकदम बिल्कुल भी सॉल्युबल नहीं होंगे। ठीक है? अच्छा डेंसिटी की बात करें तो डेंसिटी क्या होता
है? मास / वॉल्यूम। है ना? मास / वॉल्यूम। तो जिसका मास ज्यादा ऑफ कोर्स जैसे आयोडीन का मास सबसे ज्यादा है। है ना? तो उसकी
डेंसिटी सबसे ज्यादा होगी। फिर उसके बाद क्या कहते हैं? रिवर्स ऑर्डर में चल लेना। ठीक है भाई? तो, जैसे फ्लोरीन, क्लोरीन,
ब्रोमीन, आयोडीन, तो आयोडीन की सबसे ज़्यादा है। है ना? फिर उसके बाद ब्रोमीन, फिर उसके बाद क्लोरीन, फिर उसके बाद
फ्लोरीन। तो, मास अपॉन वॉल्यूम के हिसाब से हम डेंसिटी भी निकाल सकते हैं। अगर मैं स्टेबिलिटी की बात करूं, तो सबसे ज्यादा
स्टेबल कौन है? फ्लोराइड वाला ग्रुप मैम। है ना? फ्लोराइड वाला सबसे स्टेबल है R, फिर RCl, फिर RBr, फिर R आयोडाइड, है ना?
डिक्रीज़ज़ इन द ऑर्डर, डिक्रीजिंग ऑर्डर में लिखना है। तो, डिक्रीजिंग ऑर्डर में उल्टा करके लिख देना, है ना? डिक्रीजिंग
ऑर्डर। डिक्रीजिंग मतलब बड़े से छोटा। ठीक है? तो जिसकी सबसे ज्यादा स्टेबिलिटी है फिर वो। अच्छा इसमें कई जगह रिएक्टिविटी
भी पूछ सकता है आपसे। अगर आपसे रिएक्टिविटी पूछेगा तो याद रखना आयोडाइड की सबसे ज्यादा होती है फिर वो। ठीक? फिर
उसके बाद ब्रोमाइड वाली। फिर उसके बाद क्लोराइड और फिर उसके बाद फ्लोराइड। है ना? आयोडाइड सबसे अच्छे से रिएक्ट करता
है। फिर उसके बाद हम आगे बढ़ते हैं। तो ये हो गई भाई इसकी कुछ फिजिकल प्रॉपर्टीज़। आगे बढ़ते हैं टाइप्स ऑफ रिएक्शंस पे।
हैलोएल्केन हमारे तीन टाइप की रिएक्शन दिखाएगा। नंबर वन होता है न्यूक्लियोफिलिक सब्सीट्यूशन रिएक्शन। नंबर टू होता है
हमारे पास एलिमिनेशन रिएक्शन। एंड नंबर थ्री होता है हमारे पास रिएक्शन विद मेटल्स। और रिएक्शन विद मेटल्स में ही हम
ये सैंडमियर वगैरह वापस से पढ़ेंगे। ठीक है? तो हमारे पास है न्यूक्लियोफिलिक सब्सीट्यूशन रिएक्शन। पहले नाम से मतलब
समझो। देखो नाम में बहुत बड़ा काम है। न्यूक्लियोफिलिक मतलब न्यूक्लियोफाइल का आना। है ना? सब्सीट्यूशन मतलब आके किसी को
रिप्लेस कर देना। ठीक? है ना? और रिएक्शन तो यार तुम जानते ही हो। है ना? जब तुम चाह रहे हो कि तुम
ना जानो। है ना? है ना? बट तुम्हें जानना पड़ेगा कैसे भी करके। कैसे भी करके पढ़ना तो है ही है ना? कुछ भी करके पढ़ना तो है
ही मैम। हमें इसको नंबर जो लाने हैं। ठीक है? देखो यार ये वन शॉट है। आई नो दिस। आई नो दिस ये वन शॉट है। पर ये वन शॉट वन शॉट
की तरह नहीं है। बहुत डिटेल में जाके आपको समझनी पड़ेगी हर चीज। ठीक है? हम कोई भी टॉपिक को उड़ाएंगे नहीं इसमें। अगर आप ये
सोच के आए हो अरे यार आधे घंटे में समझ जाएंगे। तो यार उसके लिए तुम बोर्ड एक्सप्रेस देख लो वो है हमारा। है ना इसी
चैनल पे। लेकिन वन शॉट है। इसको आप पूरा समझो डिटेल में। तो सबसे पहले हमारे पास आता है न्यूक्लियोफिलिक सब्सीट्यूशन
रिएक्शन। जो कहता है एक न्यूक्लियोफाइल है। वो आएगा और सब्सीट्यूट कर देगा। किसी के साथ लग जाएगा। ये दो तरीके से पॉसिबल
है। या तो SN वन मैकेनिज्म से या तो SN2 मैकेनिज़्म से। वैसे तो 11th में पढ़ा है पर वही बात है। बचपन की प्यार की तरह तुम ये
जो बचपन की बातें भूलते जा रहे हो अपनी जिंदगी से वो बड़ा खराब हो रहा है। है ना? तो अ न्यूक्लियोफिलिक सब्सीट्यूशन रिएक्शन
एक न्यूक्लियोफाइल आएगा किसी को हटाएगा और जाके लग जाएगा। न्यूक्लियोफाइल के आने से किसी का सब्सीट्यूशन हो गया। ठीक है? यस
मैम। तो क्योंकि हैलोजन एटम जो है वो ज्यादा इलेक्ट्रोनेगेटिव है। हमें पता है यार उनका घर तो अच्छा था ही नहीं। पहले से
ही पता था मुझे तो। हमको तो ये बात पहले से पता था उनका घर वो बस दिखा रहे हैं। वो बड़े अच्छे इंसान हैं साथ में। बट वो साथ
में खुश नहीं है। समझ रहे हो? यही सब बातें तो तुम समझ रहे हो। बस बात तो वही गलत है। ठीक है? तो ये दे आर शोइंग दैट दे
आर फॉर्मिंग अ वेरी स्ट्रंग बॉन्ड। बट दे आर नॉट एक्चुअली में। है ना? एक्चुअली में इनके बॉन्ड को तोड़ना आसान है। क्यों?
क्योंकि ये पोलर बॉन्ड है। है ना? एक तो थोड़ा-थोड़ा नेगेटिव है और एक थोड़ा-थोड़ा पॉजिटिव है। है डेल्टा पॉजिटिव और नेगेटिव
है। पर अगर टूट जाएगा तो नेगेटिव और पॉजिटिव पूरी तरीके से आ जाएगा। और इसको तोड़ना आसान भी है। क्यों आसान है मैम?
ऑलरेडी अच्छे बॉन्ड बना ही नहीं रहे थे वो। ठीक है? तो क्योंकि हैलोजन एटम ज्यादा इलेक्ट्रोनेगेटिव है कार्बन से। तो जो
हैलोजन है उसमें थोड़ा-थोड़ा नेगेटिव आता है और उसमें कार्बन में थोड़ा-थोड़ा पॉजिटिव आता है। पढ़ लिया मैम हमने। अब
बेटा इस कंडीशन में फायदा उठाएगा तीसरा इंसान। अगेन इफ यू नो यू नो। है ना? तो भाई
न्यूक्लियोफाइल ने देख लिया। मौके पे चौका लगाने आया है। न्यूक्लियोफाइल में खुद पे नेगेटिव होता है। उसने कहा 1 सेकंड ए
सेकंड। क्या? मतलब कार्बन पे पॉजिटिव चार्ज आने वाला है। मैं जाऊंगा कार्बन के पास। तो वो अटैक कर देगा। और ये दो तरीके
से अटैक हो सकता है या तो फ्रंट साइड से या तो बैक साइड से। ठीक है? चलो बताती हूं मैं। तो ये कार्बन है। इस पे पॉजिटिव
चार्ज है। ये हैलोजन के साथ लगा हुआ है। ठीक है? अब कार्बन हैलोजन का बॉन्ड कुछ ठीक-ठाक नहीं है। बॉन्ड टूटने वाला है
ऑलमोस्ट। है ना? पार्शियल-पार्शियल चार्ज है। और जैसे ही न्यूक्लियस न्यूक्लियोफाइल ने ये बात देखी न्यूक्लियोफाइल मतलब जिस
पे नेगेटिव चार्ज है। ठीक है? वो खुद पॉजिटिव की तरफ अट्रैक्ट होता है। ठीक है? तो वो क्या देख रहा है कि यार इनका बॉन्ड
तो टूटने वाला है। तो क्यों ना मैं अटैक कर दूं मैं जाके इस पे लग जाऊं। ये अटैक दो साइड से हो सकता है अगेन या तो फ्रंट
साइड या तो रियर साइड। एंड इसी के बेसिस पे दो टाइप के मैकेनिज्म होंगे SN1 एंड SN2। ठीक है? तो जो हमारे न्यूक्लियोफाइल
होते हैं जैसे कि OH नेगेटिव, CN नेगेटिव, NO2 एटसेट्रा एटसेट्रा ये अटैक कर सकते हैं इलेक्ट्रॉन डेफिशिएंट कार्बन के पास।
यानी कि ऐसे कार्बन के पास जिस पे पॉजिटिव चार्ज लगा है और हैलाइड जो है उसको रिप्लेस कर देंगे। क्यों? क्योंकि
न्यूक्लियोफाइल हैलोजन हमेशा स्ट्रंग होते हैं एक्चुअली में। ठीक है? चाहे SN1 के हो चाहे SN2 के हो। नाउ द रिएक्शन ऐसी
रिएक्शन जिसमें एक स्ट्रांग न्यूक्लियोफाइल डिस्प्लेस कर देगा एक न्यूक्लियोफाइल को। वीकर न्यूक्लियोफाइल
को। मैम वीकर न्यूक्लियोफाइल कौन है? तो यार हैलोजन को वीकर न्यूक्लियोफाइल बोल रहे हैं। न्यूक्लियोफाइल क्यों बोल रहे
हैं? क्योंकि हैलोजन पे भी तो नेगेटिव ही चार्ज है। पर क्योंकि वो हमारे दूसरे न्यूक्लियोफाइल से स्ट्रंग है तो हम उसको
वीकर न्यूक्लियोफाइल के नाम से बोल सकते हैं। उन्हें हम बोलते हैं न्यूक्लियोफिलिक सब्स्टट्यूशन रिएक्शन। तो कभी
न्यूक्लियोफाइल के आने से हैलोजन को जाना पड़ जाए उस रिएक्शन को हम बोलते हैं न्यूक्लियोफाइल ने आके रिप्लेस कर दिया।
सब्स्टट्यूट कर दिया हैलोजन को। ठीक है मैम समझ गए? एटम और ग्रुप प्रेजेंट जो होंगे उसको हम लिविंग ग्रुप बोलेंगे। यानी
कि इस टाइम पे ये जो हमारा ये वाला हैलोजन है इसको हम बोलेंगे लिविंग ग्रुप। भाई साहब लीव होने वाले हैं। ठीक है भाई
साहब निकलने वाले हैं बाहर चले जाएंगे। ठीक है? यस मैम। वीकर द लिविंग ग्रुप न्यूक्लियोफाइल मोर फिसाइल इज द
न्यूक्लियोफिलिक सब्स्टट्यूशन रिएक्शन। अब देखो हम थोड़ा सा अब भाई वो अटैक करना चाह रहा है तो वो तो सामने वाले का बुरा ही
चाहेगा। वो बोलेगा सुनो मजा तो तब है जब ये न्यूक्लियोफाइल बहुत नहीं ये कोई हीरो नहीं है। ये हीरो नहीं है। ये रियल लाइफ
में हो रहा है। है ना? तो हीरो तो कहता है लड़ाई करने में उससे मजा आती है जो खुद स्ट्रांग हो। लेकिन ये ऐसा नहीं बोलेगा।
ये बोला भाई जितना वीक जितना वीक अपना वो लगा हुआ है ना हैलोजन उतना मस्त कहानी है उतनी बढ़िया उसको भगा के हम लगेंगे उसकी
जगह तो जितना वीक ये न्यूक्लियोफाइल ये सॉरी वीकर न्यूक्लियोफाइल या इसको हैलोजन बोल लो अभी ये लीविंग ग्रुप जितना वीक
होगा ना उतनी बढ़िया ये रिएक्शन हो सकती है क्योंकि उतनी जल्दी अटैक होगा उतनी जल्दी हैलोजन को धक्का मार के बाहर निकाला
जाएगा। ठीक है? चलो तो इसके बेसिस पे दो टाइप के मैकेनिज़्म आते हैं। SN1 एंड SN2। यूनमॉलिक्यूलर न्यूक्लियोफिलिक
सब्स्टट्यूशन रिएक्शन एंड बाय मॉलिक्यूलर न्यूक्लियोफिलिक सब्स्टट्यूशन रिएक्शन। यूनमॉलिक्यूलर और बायमॉलिक्यूलर दो टाइप
के हमारे पास न्यूक्लियोफिलिक सब्स्टट्यूशन रिएक्शन है। अब ये दो टाइप का मतलब क्या है? चलो स्टार्ट करते हैं हम
यूनमॉलिक्यूलर से। तो सबसे पहले हमारे पास आता है SN वन मैकेनिज़्म। नाम का मतलब समझे? यूनमॉलिक्यूलर वन का मतलब
यूनमॉलिक्यूलर। N मतलब न्यूक्लियोफिलिक। S मतलब सब्सीट्यूशन। यूनमॉलिक्यूलर न्यूक्लियोफिलिक सब्स्टट्यूशन। इसको आप
बोलते हो ये है हमारा SN1 मैकेनिज़्म। ठीक है? टेक SN1 रिएक्शन। ठीक है? अच्छा ये एक सब्स्टट्यूशन रिएक्शन है फॉर श्योर। कुछ
आके रिप्लेस कर रहा होगा है ना? तो ये एक फर्स्ट ऑर्डर सब्स्टट्यूशन रिएक्शन। अब आपने केमिकल काइनेटिक्स पढ़ा है। क्या पढ़ा
है मैम हमने? क्या क्या मैम? नहीं तुमने पढ़ा होगा। पढ़ाया है मैंने वन शॉट में। आपने पढ़ा है अ केमिकल काइनेटिक्स। तो
उसमें आपने ऑर्डर, मॉलिक्यूलैरिटी ये सब निकालना सीखा होगा। है ना? यस मैम। ओ वंडर वर्ल्ड मतलब याद है ना तुमको? याद
है ना तुमको? वरना फिर वो वाला लुक दूंगी मैं तुमको। समझ रहे हो? आई होप सो आपको याद होगा यार। ठीक है? तो ये एक फर्स्ट
ऑर्डर सब्स्टट्यूशन रिएक्शन है। ऐसा मैम क्यों बोल रही हैं? याद होगा या नहीं होगा? या अंडर वर्ल्ड ना
क्यों ऐसा बोल रही हैं मैम? क्योंकि आपको समझना पड़ेगा। यहां पे जो टर्म वन है वो आपको क्या बता रहा है? वो आपको ऑर्डर ऑफ
रिएक्शन बना बता रहा है कि उस रिएक्शन का ऑर्डर है वन। मॉलिक्यूलैरिटी नहीं बता रहा। मॉलिक्यूलरिटी थोड़ा याद आया? कितने
मॉलिक्यूल्स आपस में कोलाइड कर रहे हैं वो मॉलिक्यूलैरिटी होती है और ऑर्डर ऑफ़ रिएक्शन अलग होता है। दोनों अलग चीज़ हैं।
तो ये जो वन टर्म है यूनमॉलिक्यूलर तो लगता है मॉलिक्यूलैरिटी वन है। नहीं ये आपसे क्वेश्चन पूछा जा सकता है। तो याद
रखना ये मॉलिक्यूलैरिटी वन नहीं है। ये मतलब है कि वो ऑर्डर ऑफ़ रिएक्शन वन है उसका। डिस्क्राइब्स द ऑर्डर ऑफ़ रिएक्शन
एंड नॉट द मॉलिक्यूलरिटी। तो आपको मॉलिक्यूलैरिटी नहीं बता रहा। ठीक है? अच्छा अब SN1 के नाम पे मत जाना। SN1 दो
स्टेप का होता है। ठीक है? इसको यहां पे लिख दो। SN1 जो होता है जो SN1 होता है ये आपका दो स्टेप का होता है। पर SN2 जो होता
है वो सिंगल स्टेप का होता है। ठीक है? तो ये थोड़ा क्रिस क्रॉस है भाई। वन वाला जिसमें वन लिखा है वो दो स्टेप में हो रहा
है। जिसमें टू लिखा है वन स्टेप में हो रहा है। रिएक्शन यहां पे दो स्टेप में होती है एज़ आई सेड। ठीक है? अब अगर दो
स्टेप में रिएक्शन होती है तो हम रेट ऑफ रिएक्शन कैसे निकालते हैं? याद है ना? याद है? हम तुझे नहीं याद है। ठीक है? तो आई
होप सो तुझे याद होगा मेरे भाई मेरे दोस्त। ठीक है मेरी बहन? तो आई होप सो आपको याद होगा। फर्स्ट स्टेप इज़ स्लो एंड
रिवर्सिबल। तो यहां पे दो स्टेप होते हैं। तो दो स्टेप होते हैं। तो कोई एक से ही ऑर्डर ऑफ रिएक्शन निकलता है। तो किससे
निकलता है ऑर्डर ऑफ रिएक्शन? है ना? रेट डिटरमाइनिंग या फिर बोलो रेट डिटरमाइनिंग स्टेप कौन सा होता है? फर्स्ट स्टेप जो
स्लो स्टेप होता है। बेसिकली जो स्लो स्टेप होता है वो वहां पे रेट डिटरमाइन करता है। और यहां पे फर्स्ट स्टेप स्लो
होता है। तो वही उसका रेट डिटरमाइनिंग स्टेप हो जाएगा। ठीक है? यस मैम। फिर होता है यहां पे क्या होता है? आयोनाइज़ेशन
अल्काइल हैलाइड का होता है और कार्बोटायन प्रोड्यूस होता है। हम रिएक्शन से ही समझेंगे। एनर्जी जो रिक्वायर्ड होती है
आयनाइजेशन के लिए सॉल्वेशन ऑफ हैलाइड से अ आयनाइजेशन इज़ ऑब्टेड थ्रू सॉल्वेशन ऑफ़ हैलाइड आयन विद द प्रोटो पोलर प्रोटेक्ट
सॉल्वेंट। तुम्हारे दिमाग से अब जा रहा होगा। तुम सोच रहे होंगे ये क्या मैम बोल रही हैं? क्या मजाक कर रही हैं? समझ ही
नहीं आ रहा है। समझाऊंगी उसको। पहले SN1 को समझो। अब यहां पे होना क्या है? मैम यहां पे एक ग्रुप है न्यूक्लियोफाइल वो
अटैक करने आ रहा है। ठीक है? उसको जो कार्बन ऑलरेडी किसी हैलोजन से लगा हुआ है। ठीक है? तो यहां पे कार्बोटायन की
स्टेबिलिटी होती है SN1 में। और इसीलिए इसका ऑर्डर 3° 2° 1° होता है। ठीक है? चलो तो खैर
पूरी रिएक्शन दो स्टेप में होगी। पूरी रिएक्शन दो स्टेप में होगी। ठीक है? पहला स्टेप जो होता है वो स्लो स्टेप होता है
और वही उसका रेट डिटरमाइनिंग स्टेप होता है। ठीक है? तो फर्स्ट स्टेप में क्या होगा? ये रेट डिटरमाइनिंग स्टेप होगा।
क्योंकि यहां पे रेट डिटरमाइन किया जा रहा है। तो हम बोलते हैं यही इसका एक स्लो स्टेप है। ठीक है? अच्छा इससे ना आपको
बहुत सारे अलग-अलग टाइप के क्वेश्चन पूछे जा सकते हैं। तो सब कुछ समझना। मैकेनिज्म समझो पूरा। ठीक है? तो रेट जो है वो
डिपेंड करती है rx पे। ठीक? तो मान लो मैंने बोला एक हमारे पास ऐसे कार्बन है। उससे कार्बन लगे हैं। कार्बन, कार्बन,
कार्बन, हैलोजन। ठीक? अब एक न्यूक्लियोफाइल आएगा। मैं इसको ऐसा करती हूं। दूसरे पेज में बताती हूं। गिवन है तो
ठीक है। नहीं तो यहां पे भी समझ सकते हैं। चलो यहां पे समझते हैं। कार्बन से कार्बन लगे हैं। है ना?
और यहां पे हैलोजन लगा है। ठीक? अब मैम ने जानबूझ के यहां पे 3° वाला कार्बन लिया है। क्योंकि यही इसका रिएक्टिविटी ऑर्डर
होगा। ठीक है? तो यहां पे इस पे पार्शियल नेगेटिव है, पार्शियल पॉजिटिव है। ठीक? तो, ये बॉन्ड टूटना चाहेगा। ठीक है? ठीक
है? ये बॉन्ड पहले स्टेप में टूटेगा। पहले स्टेप में क्या होगा? कार्बोटायन बनेगा। स्टेप वन इज़ द फॉर्मेशन ऑफ़ कार्बोटायन।
पहला स्टेप दो स्टेप होंगे। पहला फॉर्मेशन ऑफ़ कार्बोटायन और लिविंग ग्रुप अलग हो जाएगा। ठीक है? तो पहले स्टेप में क्या
हुआ? हमारे पास आ गया कार्बोटायन। मैम 1° होता तो सेम ही रिएक्शन होती। पर 1 2 3° में से 3° सबसे अच्छी रिएक्शन मानी
जाएगी। ठीक है? क्योंकि कार्बोटायन 3° वाला सबसे स्टेबल होता है। ठीक है? लिख लो। कार्बो केटायन अभी लिखा भी था मैंने
शायद। 3° सबसे स्टेबल फिर 2° और फिर 1°। ठीक है? ठीक है? तो ये इसका स्टेबिलिटी ऑर्डर होता है। ठीक है मैम? लिविंग ग्रुप
निकल गया ये वो। अब सेकंड स्टेप में आना है। सेकंड स्टेप में न्यूक्लियोफाइल आएगा फॉर श्योर। है ना? तो ये कार्बन है हमारे
पास। सेकंड स्टेप यहां लिख दूं स्टेप टू। सेकंड स्टेप। सेकंड स्टेप सुनो। अब ये कार्बोटायन है।
ये कार्बन लगा है और यहां पे पॉजिटिव चार्ज। अब आएगा न्यूक्लियोफाइल अटैक करने। वो इस पे अटैक करना चाहेगा। OH नेगेटिव
जैसे हो सकता है ना? तो ये अटैक करना चाहेगा और ये इससे जुड़ना चाहेगा। है ना? ऐसे होना चाहता है ये। ये रिएक्शन
होने वाली है बेसिकली। ठीक है मैम? समझ गए हम? अब अब यहां पे कुछ चीजें आपको समझनी पड़ी। पहली चीज ये वाला स्टेप जो हुआ ये
स्लो स्टेप है और इसीलिए ये इसका आरडीएस स्टेप है। रेट डिटरमाइनिंग स्टेप। ठीक? अब इसको मैम यूनमॉलिक्यूलर क्यों बोला जा रहा
है? क्योंकि रेट डिटरमाइनिंग स्टेप को ही आप देखते हो जिससे आप उसका ऑर्डर ऑफ रिएक्शन निकाल सकते हो। ठीक है? तो यहां
पे जो ऑर्डर ऑफ़ रिएक्शन होगा यानी कि जो रिएक्शन का रेट आएगा बेसिकली ऑर्डर नहीं रेट। जो रेट ऑफ़ रिएक्शन आता है वो आता है
कैसे? रेट ऑफ़ रिएक्शन निकालने का फार्मूला याद है? K और इंटू जो भी आपके पास रिएक्टेंट गिवन हो। तो यहां पे आपको
क्या-क्या गिवन है? आपको पूरा RX गिवन है। आपको पूरा RX गिवन है। तो केवल एक ही एक ही चीज़ प्रेजेंट है इन द रिएक्टेंट साइड
फर्स्ट स्टेप में। रेट डिटरमाइनिंग स्टेप में केवल एक ही चीज़ प्रेजेंट है। तो इसीलिए मैंने इसको बोल दिया। ये है हमारा
SN1 रिएक्शन। ऑर्डर ऑफ़ रिएक्शन इसका वन है। रेट सॉरी रेट ऑफ़ रिएक्शन जो इसका निकल के आ रहा है। ठीक है? क्योंकि एक ही स्टेप
एक स्टेप में एक ही चीज़ प्रेजेंट है। ठीक है? मैम समझ गए? ये भी बात समझ गए? अच्छा, एक बड़ा प्यारा सा क्वेश्चन इससे पूछा जा
सकता है। क्या आप इसको समझो, खुद से पूछो मुझसे। मतलब मैं आपसे खुद से पूछ रही हूं। ठीक है? खुद से पूछ रही हूं मैं तुमसे।
मुझसे नहीं। ठीक है? क्या ये हैलोजन जो हमने बाहर निकाला है ये फिर से अटैक करना नहीं चाहेगा? बताओ नहीं चाहेगा ये। क्या
वो हैलोजन जो बाहर निकला है वो फिर से अटैक नहीं करना चाहेगा? भाई। कार्बन पे पॉजिटिव है। हैलोजन पे नेगेटिव है। हैलोजन
फिर से अटैक करेगा। उसकी मर्जी। पर हम ऐसा नहीं चाह चाहने देंगे उसको। ये चेहता है ऐसा करना। पर हम उसको नहीं चाहने देंगे।
ऐसा करना। ठीक है? तो हम यहां पे यूज़ करते हैं पोलर प्रोटिक सॉल्वेंट। पोलर प्रोटिक सॉल्वेंट। ये बड़े लोग कंफ्यूज होते हैं इस
नाम से। है ना? तो पोलर प्रोटिक सॉल्वेंट का मतलब समझिए। आप SN1 मैकेनिज़्म में यूज़ करते हो पोलर प्रोटिक सॉल्वेंट।
पोलर प्रोटिक सॉल्वेंट का काम क्या होता है? पोलर मतलब उसमें पोलरिटी है। जैसे कि पानी पानी एक बहुत अच्छा पोलर प्रोटिक
सॉल्वेंट है। ठीक है? तो पानी क्या करता है? इस X नेगेटिव को पकड़ के रखता है। एक्चुअली में यहां पे H2 बैठे होंगे।
[संगीत] ऐसे पानी के पार्टिकल्स ऐसे पकड़ के रखेंगे ऐसे घेर लेंगे उसको प्रोटिक उसको
उसको पकड़ के रखेंगे प्रोटिक का नाम है उसका ठीक है वो प्रोटिक है पोलर प्रोटिक सॉल्वेंट ताकि वो वापस से अटैक ना कर पाए
ठीक है और यहां पे जो न्यूक्लियोफाइल है ये जो ये वाला न्यूक्लियोफाइल है SN2 से वीक है
समझ रहे हो ना तो समझा नहीं तो समझा नहीं ज्यादा मैं वापस समझाती हूं इस बात को तो यहां पे जो आप क्या बोल रहे थे न्यू
न्यूक्लियोफाइल ले रहे हो। SN2 मैकेनिज़्म में भी आप न्यूक्लियोफाइल लोगे। ये वाला न्यूक्लियोफाइल SN2 से वीक है। क्यों?
क्योंकि ये वेट करता है पहले X नेगेटिव के निकलने से। जब तक X नेगेटिव बैठा है वो अटैक नहीं करेगा। वो बोलेगा नहीं यार मैं
नहीं कर सकता। है ना? तो वो अटैक नहीं करेगा स्टार्टिंग में। ठीक? पहले इसका बॉन्ड टूटेगा। आपने एक पोलर प्रोटिक
सॉल्वेंट डाला। इसका बॉन्ड टूटा है ना? इसका बॉन्ड टूटा और पोलर प्रोटिक सॉल्वेंट ने हैलोजन को पकड़ा। तब वो न्यूक्लियोफाइल
बोलेगा हां। अब मैं आ सकता हूं अटैक करने। तो ये कहानी हो रही है। ठीक है? सेकंड स्टेप फास्ट स्टेप होता है इसलिए उससे रेट
नहीं निकाल सकते आप। कार्बोटायन और न्यूक्लियोफाइल के बीच में होगा वो स्टेप। ठीक है? और यहां से आपको रेट ऑफ रिएक्शन
से कोई फर्क नहीं पड़ेगा क्योंकि फर्स्ट स्टेप में आप रेट ऑफ रिएक्शन निकाल ही नहीं पाते। ठीक है? तो मैंने ये फर्स्ट और
सेकंड स्टेप आपको लिख के दिखा दिया। चलो भाई आगे बढ़ते हैं। कार्बोटायन एक प्लेनर होता है। देयर फॉर जो अल्काइल हैलाइड है
वो ऑप्टिकली एक्टिव है। अब ऑप्टिकली एक्टिव का मतलब क्या है? ऑप्टिकली एक्टिव का मतलब होता है जो प्लेन पोलराइज़्ड लाइट
को रोटेट कर पाए। पढ़ा है ये प्लेन पोलराइज़्ड लाइट क्या होता है? एक सेकंड। अगर इमेज लगी है तो समझा देती हूं। वरना
लिख के समझा दूंगी। ठीक है? तो पहले प्लेन पोलराइज़्ड लाइट समझो। हां। ये देखो। तो बेसिकली क्या होता है? आप एक सोर्स ऑफ
लाइट लेते हो। ठीक है? एक जगह से लाइट निकल रही है। बीच में आप लगाते हो निकोल प्रिज्म। ठीक है? तो आप क्या करते हो?
पहले उसको प्लेन पोलराइज़्ड लाइट में बदलते हो। देखो लाइट हर डायरेक्शन में निकल रही होती है। और जब वो पोलरीमीटर से पास करोगे
आप। है ना? आपने एक पोलराइजर रख दिया यहां पे। पोलराइजर रख दिया। ठीक है? तो पहले लाइट हर डायरेक्शन में ऐसे भी जा रही है।
ऐसे भी जा रही है। हर तरफ तरफ से जा रही है। और जैसे ही आपने ये पोलरीमीटर रखा ये इसको एक साइड एक डायरेक्शन में बदल देता
है। ठीक है? तो मैं इसको ऐसे समझा सकती हूं आपको कि भई पहले ये सोर्स ऑफ लाइट है। सपोज यहां पे कहीं से लाइट निकल रही है।
लाइट हर डायरेक्शन में होती है। ठीक है? फिर आप निकोल प्रिज्म वगैरह रखोगे। पोलर पोल पोलारी मीटर वगैरह रखोगे। ठीक है? आप
ऐसे प्रिज़्म लगाओगे। प्रिज़्म लगाओगे, पोलारी लगाओगे। और ये सब करने के बाद आपकी लाइट प्लेन पोलराइज़्ड लाइट बन जाएगी।
प्लेन पोलराइज़्ड लाइट मतलब जो एक ही डायरेक्शन में हो। किसी एक डायरेक्शन में लाइट को बदल दिया। तो वो लाइट कहलाती है
आपकी प्लेन पोलराइज्ड लाइट। ठीक है? अब इस प्लेन पोलराइज़्ड लाइट को आपने पास कराया। ये जो कार्बोटायन का एक ऑप्टिकली एक्टिव
ग्रुप आपने लिया। ऑप्टिकली एक्टिव का मतलब समझो। अगर इस प्लेन पोलराइज़्ड लाइट को राइट साइड या लेफ्ट साइड रोटेट कर दिया तो
वो ग्रुप हमारा ऑप्टिकली एक्टिव होता है। ऑप्टिकली एक्टिव। ऑप्टिकली एक्टिव का मतलब है जो
प्लेन पोलराइज़ लाइट है जो एक ही डायरेक्शन में लाइट है उसको या तो क्लॉकवाइज घुमा दिया या तो एंटीक्लॉकवाइज घुमा दिया। ठीक
है? जैसे अगर क्या बोलते हैं इसको? राइट साइड रोटेट किया तो आप इसको बोलते हो डेक्स्रो रोटेटरी।
और अगर इसने प्लेन पोलराइज़्ड लाइट को लेफ्ट साइड रोटेट किया तो आप बोलते हो लेवो रोटेटरी।
मैम अगर किसी भी साइड नहीं किया तो तो फिर वो ऑप्टिकली इनएक्टिव हो गया। ठीक? तो बोल रहा है जो कार्बोटायन वाला आप ग्रुप देख
रहे हो ना वो ऑप्टिकली एक्टिव है। वो प्लेन पोलराइज़्ड लाइट को या तो राइट साइड या तो लेफ्ट साइड रोटेट कर सकता है। ठीक
है? वो लाइट्स राइट साइड या फिर लेफ्ट साइड रोटेट कर सकता है। ठीक है? तो जो कार्बोय है वो प्लेनर है वो अल्काइल
हैलाइड ऑप्टिकली एक्टिव है। जो हमने अल्काइल हैलाइड देखा ना वो ऑप्टिकली एक्टिव है। मतलब वो प्लेन पोलराइज़्ड लाइट
को लेफ्ट साइड या राइट साइड घुमा सकता है। ठीक है? प्रोडक्ट जो बनता है बेटा वो लेफ्ट डी वो डी फॉर्म एंड एल फॉर्म दोनों
का बनता है। और इसीलिए उसको आप बोलते हो रेसमिक मिक्सचर। मतलब मैम वो राइट साइड भी रोटेट कर सकता है, रेस लेफ्ट साइड भी
रोटेट कर सकता है। ठीक है? और जो आपको प्रोडक्ट मिलता है वो इन दोनों का मिक्सचर मिलता है। तो ऐसे मिक्सचर जिसमें आप दोनों
साइड देख रहे हो ये डी फॉर्म और एल फॉर्म दोनों बन रहे हैं उसको आप बोलते हो रेसमिक मिक्सचर। ठीक है? रेसमिक मिक्सचर मतलब
दोनों फॉर्म आपको मिल रहे हैं डी फॉर्म और एल फॉर्म। टेक्स रोटेटरी लेवो रोटेटरी दोनों साइड। इट इज़ बिकॉज़ द अटैक ऑफ़
न्यूक्लियोफाइल ऑन द प्लेनर कार्बोटायन कैन अकर फ्रॉम बोथ द फेसेस फ्रंट और रेयर। आपसे कोई बोले रेसमिक मिक्सचर का मतलब
बताओ। डेक्स्रो रोटेटरी लेवर रोटेटरी ये है। तो आप क्या बोलोगे? नहीं। आप बोलोगे भाई आपने जब अटैक कराया तो अटैक कहां से
हुआ? देखो। अटैक इस साइड से भी आके हो सकता है। है ना?
सामने से। अटैक पीछे से भी आके हो सकता है। कोई दिक्कत नहीं है। पीछे से भी। फ्रंट से भी अटैक पॉसिबल था। रेयर से भी
अटैक पॉसिबल था। मतलब बैक साइड से। क्यों? क्योंकि हैलोजन तो लगा ही नहीं है। हैलोजन नहीं लगा तो कहीं से भी अटैक करा दो।
हैलोजन नहीं है किसी बात का डर ही नहीं है। मैं जा के कहीं से भी अटैक कर दूंगा। तो क्योंकि दोनों साइड से अटैक पॉसिबल है।
इसीलिए आपको वहां रेसमिक मिक्सचर मिल रहा था। देखो इसका मतलब समझो आप। भाई या तो कार्बन ये ऐसे लगा हुआ है। देखो ये कार्बन
लगा हुआ है। ऐसे सपोज ये कार्बन है। इससे न्यूक्लियोफाइल आके अटैक कर रहा है। तो मान लो फ्रंट साइड से न्यूक्लियोफाइल आया
तो वो एज़ इट इज़ लग जाएगा। और मान लो इसी से ऐसे आया। ये कार्बन है। इससे न्यूक्लियोफाइल इस साइड आ रहा है। इस साइड
से अटैक कर रहा है। तो ये कार्बन ऐसे बन जाएगा। है ना? इसको उल्टा होना पड़ गया। पूरा
उल्टा हो गया ये। भाई या तो सामने से आ रहा है और अगर पीछे से आ रहा है अटैक करने तो ये पूरे जो ग्रुप्स लगे हैं उसको उधर
साइड जाना पड़ गया। तो ये दोनों फॉर्म मिल रहे हैं आपको। तो रेसमिक मिक्सचर आपको दोनों में से कुछ भी मिल सकता है। रेसमिक
मिक्सचर बन रहा है। रेसमिक मिक्सचर बन रहा है। ठीक है? चांसेस ऑफ़ बोथ द अटैक्स आर इक्वल। तो मिक्सचर जो है वो इक्वल बन के आ
सकता है। मतलब आप कुछ भी कह सकते हो। आप यहां से भी न्यूक्लियोफाइल लगा सकते हो। उधर साइड से भी लगा सकते हो। डीफॉर्म एल
फॉर्म आपको दोनों चीजें मिल रही हैं। ठीक है? तो ये आपका स्टीरियो केमिस्ट्री यहां पे आप जान रहे हो बेसिकली। ठीक है? अब ये
जो दो इमेजज़ मिल रही हैं, ये आपस में एक दूसरे की मिरर इमेजज़ हैं। ठीक? ये जो दो इमेजज़ मिल रही है, द प्रोडक्ट्स आर मिरर
इमेजज़ ऑफ़ ईच अदर। तो इसीलिए आप इनको बोलोगे इन एंशियोमर्स। है ना? भाई ये दोनों आपस में
ये दोनों जो आपस में हैं ये मिरर इमेजज़ हैं। ये एक दूसरे के मिरर इमेजज़ हैं। ठीक है? तो आप इसको बोलोगे ये इन एंशियोमर
फॉर्म कर रहे हैं। ठीक है मैम समझ गए? और वन फॉर्म डेक्स रोटेटरी है। एक फॉर्म लेवो रोटेटरी है। मतलब एक है जो लाइट को राइट
साइड घुमा रहा होगा और दूसरा है जो लाइट को लेफ्ट साइड घुमा रहा होगा। तो लेवो रोटेटरी और डेक्स्रो रोटेटरी। ठीक है?
रेसमिक मिक्सचर का जो प्रोसेस है उसको आप रेसमाइजेशन बोलते हो। ठीक है? टर्शरी अल्काइल हैलाइड जो है वो सब्सीट्यूशन SN1
मैकेनिज्म सबसे अच्छे से दिखाएगा। मैम ने स्टार्टिंग में ही बता दिया क्योंकि कार्बोटायन का स्टेबिलिटी ऑर्डर सबसे
ज्यादा होता है 3° में। ठीक है? तो SN1 की कहानी भी समझ गए हम। चलो तो इसका स्क्रीनशॉट ले लिया होगा मेरे ख्याल से।
अब दो-तीन क्वेश्चन आपसे फैक्टर पूछे जा सकते हैं। जैसे अगर मैं आपसे बोलूं नेचर अल्काइल हैलाइड किसका सबसे ज्यादा है? 3°
सबसे अच्छा है मैम। फिर 2° फिर 1° समझ गए? मैं आपसे बोलूं लिविंग ग्रुप कैसा है? तो ईजीली लीव कर जाए जो है ना? जैसे मैं
पूछूं फ्लोरीन, क्लोरीन, ब्रोमीन, आयोडीन में सबसे अच्छा लिविंग ग्रुप कौन हो सकता है? फ्लोरीन। क्या बात कर रहे हो? क्या
बात कर रहे हो? क्या बात कर रहे हो? बोल भी मत देना, पिट जाओगे। ठीक है? फ्लोरीन कैसे हो सकता है? बड़ा स्ट्रांग बॉन्ड
बनाता है। फ्लोरीन नहीं मैम। आयोडीन एक बड़ा सा एटम होता है। आसानी से टूट सकता है। बॉन्ड डिस्टेंस ज्यादा होती है। तो
ब्रेक कर सकते हैं। हां। आयोडीन। तो आयोडीन हमारा जो है वो सबसे आसानी से बॉन्ड तोड़ेगा। ठीक है? फिर उसके बाद
हमारा ब्रोमीन, फिर क्लोरीन और फिर क्लोरीन तो ना के ही बराबर मान लो। है ना? चलो सॉल्वेंट कैसा लेना है? पोलर प्रोटिक
सॉल्वेंट लेना है। H2O वगैरह, मीथेनॉल वगैरह। पोलर प्रोटिक सॉल्वेंट होना चाहिए मैम। जो पकड़ के रखे हैलोजन को। चलो आगे
बढ़ते हैं। अब हम आते हैं SN2 में। SN2 इसी का जस्ट उल्टा कर दो सारी चीजें। ठीक है? तो SN2 में क्या होगा? रेट ऑफ़ इसके
रिएक्शंस का अगर मैं रेट की बात करूं तो ये कैसा होगा? ये यहां पे भी न्यूक्लियोफाइल भाई आने वाला है। पर यहां
पे न्यूक्लियोफाइल और सब कुछ जो भी कहानी हमने पढ़ी बस वो एक ही स्टेप में होगी। एक ही स्टेप में। ये कार्बन है। इसमें 1°
सबसे स्टेबल होता है। फिर 2° फिर 3°। ठीक है? इसमें स्टेरिक हिंडरेंस काम करता है। स्टीरियो केमिस्ट्री वहां पे कार्बोटायन
लग रहा था। यहां पे स्टेरिक हिंडरेंस लगता है। समझाऊंगी अभी मैं। ठीक है? ये कार्बन हैलोजन है। न्यूक्लियोफाइल आना चाहता है।
कहां से आएगा मैम? बैक साइड से। बैक साइड से आना चाहता है न्यूक्लियोफाइल। और आ के इस पे अटैक करना चाहेगा और इसको बाहर
निकालना चाहेगा। तो पहले ही स्टेप में एक ही स्टेप में ये कार्बन से आके ज जुड़ जाएगा न्यूक्लियोफाइल।
ठीक है? और हैलोजन जो है वो बाहर निकलेगा। ठीक है? मैम समझ गए? थोड़ा-थोड़ा तो समझे। अब एक ही स्टेप में हो रहा है। पहला ही
स्टेप इसका रीडिटरमाइनिंग स्टेप हो जाएगा। है ना? सेकंड ऑर्डर रिएक्शन है ना? क्यों? क्योंकि स्टार्टिंग में दो चीजें प्रेजेंट
हैं। न्यूक्लियोफाइल और कार्बन और हैलोजन वाला ग्रुप। तो दो चीजें वहां पे देखो पहले में न्यूक्लियोफाइल आया ही नहीं था।
तो वो फर्स्ट ऑर्डर था। यहां पे अ इट डज़ नॉट डिस्क्राइब मॉलिक्यूलैरिटी। हमें पता है वो तो रेट बताता है मॉलिक्यूलैरिटी
नहीं। अच्छा रेट में देखो दोनों चीजें प्रेजेंट है। इसलिए इसको हमने बोला सेकंड ऑर्डर रिएक्शन। समझ गए मैम हम ये बात। ठीक
है? हम समझ गए मैम ये बात। आगे देखो क्या है? तो ये कैसा होगा? ये कुछ ऐसा दिखेगा। देखो इसको देखो। ये इसके साथ जुड़ा हुआ है।
है ना? और ये इससे जुड़ना चाह रहा है। तो इसकी बनती है एक बहुत कम टाइम पीरियड के लिए ट्रांजिशन स्टेट। ये न्यूक्लियोफाइल
है। ये अपना हैलोजन है। ठीक? ये कार्बन है। ये बॉन्ड, ये बॉन्ड और ये बॉन्ड कार्बन लगा हुआ है। ठीक है? तो ये कार्बन
क्या करेगा? ऐसे दिख रहा है और इस पे आ रहा है हैलोजन अटैक करने। थोड़ी देर के लिए हमें पता है क्या दिखेगा? ट्रांज़िशन
स्टेट। ऐसा लगेगा जैसे कार्बन हैलोजन और न्यूक्लियोफाइल दोनों से लगा है। पांच बॉन्ड कार्बन के बनते हुए दिखेंगे। क्यों?
क्योंकि ये बॉन्ड टूटने जा रहा होगा और हैलोजन ने भाई पीछे से अटैक कर दिया। हैलोजन आया उसने अटैक कर दिया। कार्बन कह
रहा है सॉरी न्यूक्लियोफाइल आया उसने अटैक कर दिया। तो कार्बन क्या कह रहा है हैलोजन यार जाओ मैं पांच बॉन्ड नहीं बना सकता।
मैं अनस्टेबल हो जाऊंगा। निकलो यहां से तो वो हैलोजन को जाना पड़ेगा। अच्छा वो क्यों जाएगा? क्योंकि हमें पता है ऑलरेडी उनका
पोलर बॉन्ड था। टूट सकता है। है ना? तो ये जाके अटैक करेगा। और फिर उसके बाद न्यूक्लियोफाइल जुड़ जाएगा और लिविंग
ग्रुप अपना हैलोजन बाहर हो जाएगा। ये SN2 मैकेनिज़्म है। एक ही स्टेप में पूरी कहानी हुई। अटैक कहां से होगा? हमेशा बैक साइड
से होगा। है ना? चलो सुनना। न्यूक्लियोफाइल अब स्ट्रंग न्यूक्लियोफाइल लेना पड़ेगा। क्यों? क्योंकि वो वेट नहीं
कर रहा हैलोजन के जाने का। वो खुद ही अटैक करेगा। है ना? तो वो अटैक करेगा पॉजिटिव कार्बन के ऊपर। ठीक है? साइमलटेनियसली
अटैक करना चाहेगा। और जैसे ही ये होगा इलेक्ट्रॉनिक कॉन्फ़िगरेशन पलट जाएगी पूरी तरीके से। देखा ना तुमने? ऐसे
न्यूक्लियोफाइल आ रहा था तो वो कार्बन अपने बॉन्ड को पूरा पलट दे रहा था। क्यों? जैसे बहुत तेज़ से हवा चलती है तो छाता
एकदम उल्टा हो जाता है। है ना? यहां पे भी वैसे ही हो रहा था। क्यों ऐसा हो रहा होगा मैम? वो फ्रंट साइड से अटैक कर ही नहीं
सकता था बेटा। सोचो न्यूक्लियोफाइल फ्रंट साइड से कैसे आएगा? चाहे जितना भी वीक अपना अ क्या बोलते हैं उसको हैलोजन क्यों
ना बैठा हो वीक से क्या लेना देना? उस पे नेगेटिव चार्ज है तो उसका तो रिपल्शन हो जाएगा ना न्यूक्लियोफाइल से। तो
न्यूक्लियोफाइल हमेशा बैक साइड से आना चाहेगा। न्यूक्लियोफाइल हमेशा बैक साइड से अटैक करना चाहेगा। और इस प्रोसेस में
इन्वर्जन ऑफ कॉन्फ़िगरेशन होगा। है ना? पहले इन्वर्जन रेसमिक मिक्सचर क्यों बन रहा था? क्योंकि इन्वर्जन भी हो सकता था।
है ना? और क्या बोलते हैं उसको? वो रेजिस्ट भी कर सकता था। तो इसीलिए रेसमिक मिक्सचर बन रहा था। है ना? वहां पे
इन्वर्जन भी पॉसिबल हो सकता था और वो अपने पोजीशन को रिटेन भी कर रहा था। है ना? तो वहां पे दोनों चीजें प्रेजेंट थी। डीफॉर्म
एल फॉर्म। इसीलिए उसका रेसमिक मिक्सचर बन रहा था। है ना? तो वो होता है इन्वर्जन और क्या बोलते हैं उसको? सेकंड वाला नाम क्या
था वो? एक तो होता है कि इन्वर्जन हो जाए। है ना? यानी कि जैसे कार्बन लगे वो पूरे पलट जाएं। अगर बैक साइड से आ गया तो सारे
कार्बन जो उस कार्बन से लगे थे जिससे हैलोजन लगा उनको पलटना पड़ जाता है। तो हम उसको क्या बोलते हैं? हम बोलते हैं
इन्वर्जन हो गया। है ना? रिटेंशन भी हो सकता था। रिटेंशन बोल रही थी मैं। रिटेंशन मतलब जैसे वो वैसे ही लग रहा सामने से आ
गया वो। तो वहां दोनों साइड चीजें पॉसिबल थी। इन्वर्जन भी हो सकता था। रिटेंशन भी हो सकता था। इसीलिए वहां रेसमिक मिक्सचर
बन रहा था। पर यहां पे केवल इन्वर्जन होगा। भाई अगर न्यूक्लियोफाइल लगा है और कोई आगे कार्बन बैठा तो उनको पलटना पड़ेगा
ताकि वो न्यूक्लियोफाइल आके लग पाए और हैलोजन हट पाए। ठीक है? तो द कार्बन इज़ साइमलटेनियसली बॉन्डेड टू इनकमिंग
न्यूक्लियोफाइल एंड आउटगोइंग उससे थोड़ी देर के लिए ट्रांजिशन स्टेट देखने को मिलेगी। है ना? तो मैम कार्बन पांच कार्बन
से लग जाएगा। नहीं नहीं वो बहुत माइक्रो सेकंड्स की कंडीशन होती है। ठीक है? तो ट्रांजिशन स्टेट देखने को मिलता है। अच्छा
तो न्यूक्लियोफाइल यहां पे आएगा। है ना? कार्बन एटम के पास आएगा और लिविंग ग्रुप को बाहर जाना पड़ेगा। अच्छा मैम यहां पे 1°
2° 3° क्यों बोला आपने? अब सोचो आप मेरी बात को। ये कार्बन ऐसे कार्बन कार्बन से लगा है और हैलोजन से लगा है और
न्यूक्लियोफाइल को अटैक करना है और एक बार ये वाला ग्रुप है जिसमें न्यूक्लियोफाइल को अटैक करना है और यहां पे कार्बन
हाइड्रोजन से लगा है। ठीक है? यहां पे कार्बन हाइड्रोजन से लगा है। ठीक? अब न्यूक्लियोफाइल किस में सबसे आसानी से
अटैक कर सकता है? सोचो। यहां से आके सबसे आसानी से अटैक करेगा या यहां पे? ऑब्वियसली ये वाली कंडीशन में। स्टेरिक
हिंडरेंस देखिए। अगर यहां पे तीन कार्बन बैठे हुए हैं तो भाई न्यूक्लियोफाइल को आने में थोड़ी दिक्कत होगी। हिंडरेंस।
उसको रुकावट दिख रही है। तीन ग्रुप बैठे हैं मेरे सामने भाई। लेकिन अगर केवल हाइड्रोजन छोटे-छोटे से ग्रुप लगे हैं तो
वो आसानी से चला जाएगा। तो स्टेरिक हिंडरेंस के बेसिस पे SN2 मैकेनिज़्म होता है। ठीक है? तो यहां पे जो प्रेजेंस है
बलकी ग्रुप और नियर द कार्बन एटम हैव इनहिबिटिंग इफ़ेक्ट। वहां पे थोड़ा सा कम इफ़ेक्ट हो जाएगा अपने न्यूक्लियोफाइल का।
ठीक है? तो CH3X भाई सबसे मस्त एकदम रिएक्शन करके दिखा देगा। 3° वाले में बलकी ग्रुप लग गया मैम। है ना? तो स्टेरिक
हिंडरेंस आ जाएगा यहां पे। 10 ऑर्डर ऑफ़ रिएक्टिव रिएक्टिविटी ऑफ़ SN2 मैकेनिज़्म की क्या होगी? अगर मैं ऑर्डर ऑफ रिएक्टिविटी
की बात करूं तो भाई जो अपना 3° वाला है वो सबसे कम है। यानी कि 1° फिर 2° और फिर 3° इसकी रिएक्टिविटी ऑर्डर है। क्योंकि 3°
में बलकी ग्रुप्स बैठे हैं। अंदर न्यूक्लियोफाइल को आने में थोड़ा सा टाइम लग जाएगा और 1° में बड़े छोटे-छोटे से
ग्रुप है तो वो आसानी से अंदर आ जाएगा। ठीक है? तो यहां पे नेचर ऑफ़ अल्काइल हैलाइड की अगर मैं बात करूं वो तो सेम
रहेगा। है ना? भाई आयोडाइड सबसे सही है। फिर उसके बाद ब्रोमाइड है। फिर उसके बाद क्लोराइड है और फिर उसके बाद
क्या आएगा? फ्लोरीन। वो तो ना के बराबर है। ठीक है? न्यूक्लियोफाइल की मैं बात करूं तो न्यूक्लियोफाइल बहुत स्ट्रांग
होना चाहिए। बहुत स्ट्रांग न्यूक्लियोफाइल होना चाहिए। अच्छा सॉल्वेंट कैसा ले? क्या सॉल्वेंट को पकड़ने की जरूरत है हैलोजन
को? नहीं मैम। पहले ही केस में आके न्यूक्लियोफाइल ने अटैक कर दिया। हैलोजन को तो वैसे भी निकलना पड़ जाएगा। तो हम
यहां पे यूज़ करते हैं पोलर अप्रोटिक सॉल्वेंट। पोलर अप्रोटिक सॉल्वेंट। चलो आगे बढ़ते
हैं। ये दोनों के बीच का डिफरेंस दिया है। ठीक है? यहां पे यूनमॉलिक्यूलर होता है। यहां पे बामई मॉलिक्यूलर होता है। यहां पे
कार्बोटायन की वजह से ऑर्डर होता है 3°, 2° 1° यहां पे स्टेरिक हिंडरेंस की वजह से 1°, 2°, 3°। ठीक? यहां पे थोड़ा सा वीक
न्यूक्लियोफाइल होगा तो भी चलेगा। पर यहां पे बहुत स्ट्रंग न्यूक्लियोफाइल चाहिए। क्योंकि एक ही स्टेप में अटैक होगा। फ्रंट
से अटैक कभी नहीं होगा। सिर्फ रेयर साइड से अटैक होगा। यहां पे रेसमिक मिक्सचर बन सकता था। है ना? क्योंकि रिटेंशन और
इन्वेंशन इन्वर्जन। हां, वही मैं सोच रही हूं। रिटेंशन और इन्वर्शन दोनों हो रहा है। तो वहां रेसिमिक मिक्सचर बन रहा है।
पर यहां पे सिर्फ और सिर्फ इन्वर्जन होगा। यहां पे पोलर अप प्रोटिक सॉल्वेंट ले रहे हैं। वहां पे पोलर प्रोटिक सॉल्वेंट। पोलर
प्रोटिक जैसे कि अपने अल्कोहल हो गए, वाटर हो गए। और अप्रोटिक मतलब डाई मिथाइल सल्फर ऑक्साइड, डीएमएसo और एसीटोन। ठीक है? तो
ये हो गए। चलो भाई। तो ये इनके बीच का डिफरेंस हो गया। आगे बढ़ जाए। नेक्स्ट एलिमिनेशन रिएक्शन। नाम से समझो।
एलिमिनेशन। किसी को एलिमिनेट करना है। किसी को हमें बाहर निकालना है तो हम उसको बोलेंगे एलिमिनेशन रिएक्शन। ठीक है?
एलिमिनेशन रिएक्शन वो टाइप की रिएक्शन है जिसमें बेटा क्या होता है? किसी को एलिमिनेट करना है। एलिमिनेशन मतलब कोई
बाहर निकल रहा है। कोई अंदर नहीं आ रहा। बस कोई बाहर निकल रहा है। दैट इज़ एलिमिनेशन रिएक्शन। ठीक है? टू रिमूव्ड
फ्रॉम अ मॉलिक्यूल इज़ इदर वन और टू स्टेप। ये भी E1 और E2 दो टाइप के मैकेनिज़्म में हो सकता है। ठीक है? दीज़ आर एंडोथर्मिक
रिएक्शन। मतलब अगर आप कभी कंफ्यूज हो SN1 हो रहा है या इवन हो रहा है। एक्चुअली आपको बता दें दे दे अकर हैंड इन हैंड।
मतलब एलिमिनेशन और SN1 कई बार एक साथ हो रहा होता है E1 और SN1 बट दोनों में डिफरेंस क्या होता है कि ये एंडोथर्मिक
रिएक्शन होती है। ठीक है? वो थोड़ी सी एग्जोथर्मिक होती है। ये हाई टेंपरेचर में होती है। है ना? वो बड़े कम टेंपरेचर में
हो रही होती है सब्सीट्यूशन रिएक्शंस। ठीक है? यहां पे आप सैचुरेटेड को अनसैचुरेटेड में बदल देते हो। है ना? कोई सैचुरेटेड है
उसको अनसैचुरेटेड में कन्वर्ट करते हो। क्योंकि एलिमिनेशन का मतलब सोचो। मतलब ये कार्बन लगे हुए हैं। और यहां पे कुछ लगाने
इसको एलिमिनेट हटा दिया इसको। तो मैंने इसको मतलब डबल बॉन्ड में कन्वर्ट कर दिया। ठीक? तो यहां पे एलिमिनेशन रिएक्शन जो
होती है उसमें आप सिंगल बॉन्ड को डबल बॉन्ड में कन्वर्ट करते हो। ठीक है? दो पाई बॉन्ड टूट के एक सिंगल सिग्मा और एक
पाई में बदल सकते हैं। वन स्टेप मैकेनिज्म को आप E2 बोलते हो और टू स्टेप वाले को आप E1 बोलते हो। ठीक है? ये तो अपना वही SN1
SN2 की तरह हो गया। ठीक है मैम ये वाली बात भी हम समझ गए। अच्छा अब यहां पे आप बीटा एलिमिनेशन पढ़ते हो। अल्फा और बीटा का
मतलब समझो। जिस कार्बन से हैलोजन लगा है वो अपना अल्फा कार्बन होता है। और उसके बगल वाला कार्बन बीटा कार्बन होता है।
ठीक? मतलब मैं ऐसा कोई ग्रुप उठा लूं। ठीक? ठीक? और मैं इसमें बोलूं ये वाला अल्फा है। इससे लगा दिया मैंने हैलोजन।
ठीक? तो ये वाला कार्बन अल्फा हो गया। तो ये वाला कार्बन बीटा हो गया। इसके बगल वाला गामा। अल्फा बीटा गामा। उसके बगल
वाला डेल्टा इस तरीके से। तो इतना आपको काम नहीं आएगा। आपको सिर्फ अल्फा बीटा से मत करना है। ठीक है? अच्छा मैं ऐसे बोल
दूं। यहां पे कार्बन यहां पे कार्बन। यहां पे हैलोजन। तो अगर ये अल्फा है तो ये भी बीटा हो गया और ये भी बीटा हो गया। ठीक
है? तो इस तरीके से अल्फा और बीटा कार्बन होते हैं। ठीक है? अल्फा कार्बन जिससे सब्स्टट्यूट लगा है और बीटा कार्बन जो
उसके जिससे सब्स्टट्यूट लगा है उसके बगल वाले कार्बन को मैम हम बीटा कार्बन बुलाते हैं। ठीक है? अब हम आते हैं एलिमिनेशन के
फर्स्ट मेथड पे। इवन मैकेनिज़्म। इवन मैकेनिज्म जो होता है वो क्या होता है? यूनमॉलिक्यूलर एलिमिनेशन रिएक्शन। ठीक है?
अब आप पूरा SN1 से रिलेट कर सकते हो चीजों को। ठीक है? देयर आर यूजुअली टू स्टेप। दो स्टेप होते हैं। एक होता है आयनाइज़ेशन
स्टेप, एक होता है डीप्रोटोनेशन स्टेप। जैसे वहां पे क्या था दो स्टेप में? सबसे पहले क्या होता था? फॉर्मेशन ऑफ़
कार्बोटायन। उसके बाद अटैक ऑफ न्यूक्लियोफाइल। SN1 में और यहां पे क्या होता है? पहले आयोनाइज़ेशन होता है। फिर
डीप्रोटोोनेशन होता है। प्रोटोनेशन मतलब हाइड्रोजन का बाहर निकलना। ड्यूरिंग आयनाइज़ेशन देयर इज़ अ फॉर्मेशन ऑफ़
कार्बोटायन एज एन इंटरमीडिएट। तो पहले स्टेप में देखो सपोज़ थक गए ना? ब्रेक ले लिया ना? बहुत सारे बच्चों ने ब्रेक ले
लिया होगा। मुझे पता है। बट यार ये चैप्टर ऐसा है कि आपको समझना पड़ेगा थोड़ा अच्छे से। ठीक है? तो सुनना ध्यान से। सबसे पहले
क्या होगा? कार्बन है। ठीक है? और वो कार्बन क्या कर रहा है भाई? वो कुछ ग्रुप से लगा होगा। है ना? ये कार्बन है। सपोज
मैंने बोला यहां पे कार्बन है। यहां पे हैलोजन है और यहां पे हाइड्रोजन है। ठीक है मैम? स्टेप वन होता है आपका
आयोनाइजेशन। हमें पता है इनका बॉन्ड वीक है। इस पे नेगेटिव इस पे पॉजिटिव थोड़ा-थोड़ा चार्ज है। है ना? हमें पता है
ये ऐसा बॉन्ड है। पोलर बॉन्ड है। ठीक? तो स्टेप वन में होता है हमारे आयोनाइजेशन। आयोनाइज़ेशन। आयोनाइज़ेशन मतलब चार्जेस आना।
इस पे नेगेटिव चार्ज और इस पे पॉजिटिव चार्ज लाना चाहेंगे। अब आप समझ गए ऑर्डर 3° 2° 1° कार्बोटायन बनाना है तो 32 1°
होगा ना तो आयनाइजेशन लाना है और सेकंड स्टेप में डीप्रोटोनेशन डीप्रोटोनेशन मतलब सुनना अगर आपने यहां से हैलोजन हटा दिया
मान लो आपने यहां से हैलोजन हटा दिया तो इस कार्बन पे पॉजिटिव चार्ज है क्या वो कार्बन पॉजिटिव चार्ज चाहेगा बिल्कुल भी
नहीं चाहेगा तो आपको ये हाइड्रोजन हटाना पड़ेगा ताकि ये डबल बॉन्ड ले ले तो ये होता है आपकी पूरी रिएक्शन ठीक है तो
डीप्रोटोनेशन ऑफ़ प्रोटॉन इज़ लॉस्ट बाय अ कार्बोटायन दिस हैप्पेंस इन द प्रेज़ेंस ऑफ़ अ बेस अब जैसे वहां पे आप न्यूक्लियोफाइल
यूज़ कर रहे थे यहां पे और हैवी बेस होता है तो उसको आप बोलते बोलते हो बेस न्यूक्लियोफाइल ही है पर यहां पे बहुत
स्ट्रंग है तो वो बेस बोला जाएगा। कंसंट्रेशन ऑफ़ सब्सटेंस टू बी ट्रांसफॉर्म्ड। जैसे अगर वहां पे आपने
डाइल्यूटेड NaOH लिया है तो यहां पे आपने कंसंट्रेटेड NaOH लिया होगा। इस तरीके से इट एग्बिट एग्िबिट इन द फर्स्ट ऑर्डर
काइनेटिक्स। अभी बहुत लोग कंफ्यूज हो रहे होंगे तो हम रिएक्शन समझेंगे। ठीक है? अच्छा यूनमॉलिक्यूलर है तो इवन मान लिया।
ठीक है? इंटरमीडिएट बनेगा। लिविंग ग्रुप निकलेगा। स्टेप बिकम्स रेट डिटरमाइनिंग स्टेप बन जाएगा। स्लोएस्ट स्टेप है ना? तो
ये तो सब हम यार पढ़ के आए हैं अभी-अभी। ठीक है? तो यहां पे होगा क्या? यह देखो दो स्टेप होंगे। पहले मैम कार्बन और हैलोजन
का बॉन्ड टूटेगा। ठीक? तो, यह हैलोजन जो है यह बाहर निकलेगा। तो, पहला स्टेप हो गया आयोनाइज़ेशन स्टेप। फिर दूसरे स्टेप
में डीप्रोटोनेशन मतलब हमें क्या करना है? प्रोटॉन को बाहर निकालना है। प्रोटॉन मतलब हाइड्रोजन।
प्रोटॉन मतलब समझते हो H पॉजिटिव बेसिकली। है ना? तो हमें H पॉजिटिव। अब देखो अगर मैं इस 3° वाले ग्रुप को ले लूं। भाई अगर
मैंने नॉर्मल जो अभी क्वेश्चन दिया था उसमें हाइड्रोजन ही लगा दिए थे। तो समझ गए थे। मान लो मैम, CH3 लगाए तो। तो सुनो।
मान लो मैंने एक बहुत स्ट्रॉन्ग बेस ले लिया। जैसे इथाइल ईटी मतलब इथाइल, इथाइल हाइड्रोक्साइड। ठीक है? तो इसने आके अटैक
किया। ये जो CH3 लगा इसका एक हाइड्रोजन को उठा लिया। क्यों उठाया होगा मैम? क्योंकि कार्बन पे पॉजिटिव चार्ज था। वो कार्बन
बोलेगा यार मैं अनस्टेबल हो रहा हूं। तो वो हाइड्रोजन बाहर निकलेगा। जो एक बेस आ के खींचेगा उसको। एक बेस आया जिसके ऊपर
नेगेटिव चार्ज था। उसने H+ को घसीटा। और इस कार्बन ने इस कार्बन से डबल बॉन्ड बना लिया। एलिमिनेशन हुआ। ईटीओh होल ट्वाइस
निकला बाहर। एलिमिनेशन हुआ रिएक्शन में। ठीक? तो सेकंड में डीप्रोटोोनेशन पहले में आयोनाइजेशन। आई होप सो आपको ये चीज़ समझ
में आई होगी। है ना? आयोनाइजेशन और डीप्रटोनेशन। दो स्टेप में ये रिएक्शन है। और जो हाइड्रोजन जहां से निकलेगा वो हमेशा
बीटा कार्बन होगा। बीटा यू कैन से अ हाइड्रोजन होना चाहिए। मतलब जिस कार्बन से हैलोजन लगा तो उसके बगल वाला कार्बन। मैम
इससे भी हो सकता है। इससे भी और इससे भी। है ना? यस। यहां पे तो तीनों एक ही जैसे हैं ना? तीनों बीटा ही माने जाएंगे। ठीक?
मान लो मैंने ऐसे बोला कार्बन से हैलोजन लगा है। अब मैंने बोला इसमें कितने बीटा कार्बन है? तो ये अल्फा कार्बन है। ये
बीटा पर बाकी सब बीटा नहीं है। बीटा मतलब अगर इसी से कोई हैलोज कार्बन लगा है। इसके कार्बन को आप बीटा बोल रहे हो या उसके
हाइड्रोजन को बीटा हाइड्रोजन। ठीक है? तो अल्फा बीटा क्लियर रखना दिमाग में। चलो आगे बढ़ते हैं। तो E1 हम समझ गए। अब E2
में कहानी आ जाओ। वहां पे क्या हो रहा है? E1 में क्या हो रहा है? E1 में मैम वही अटैक वटकै हुआ। पूरा इथाइल हाइड्रोक्साइड
आया था। अटैक हो गया। दो स्टेप में वो चीजें हुई थी। एक में आयनाइज़ेशन दूसरे में डीप्रोटोनेशन। E2 में एक ही स्टेप में ये
सारी कहानी हो जाएगी। है ना? बायोमॉलिक्यूलर है यहां पे। है ना? यहां पे सारी चीजें एक ही में हो जाएंगी मैम।
बहुत स्ट्रांग बेस आएगा। बहुत ही ज्यादा स्ट्रांग बेस आएगा। ये देखो एक बहुत ही ज्यादा स्ट्रांग बेस की प्रेजेंस में ये
रिएक्शन होगी। तो पहले ही स्टेप में इस कार्बन से हैलोजन को निकाला। और जैसे ही वो हैलोजन निकला। कार्बन में आया पॉजिटिव
चार्ज। इसने देखा बेस ने हाइड्रोजन को पकड़ा बाहर निकाला और इस कार्बन को इलेक्ट्रॉन हाइड्रोजन ने दिए। यानी कि इस
पे नेगेटिव चार्ज। और दोनों के बीच में बन गया डबल बॉन्ड। और बेस ने पकड़ लिया हाइड्रोजन को एक ही
स्टेप में। तो वन स्टेप कहानी है E2 एलिमिनेशन। E2 एलिमिनेशन। इनके बीच का डिफरेंस देखो। E1 में वीक बेस E2 में काफी
स्ट्रांग बेस। सॉल्वेंट की बात करें। सॉल्वेंट यहां पे एक बहुत अच्छा आयनाइजिंग सॉल्वेंट होना चाहिए। क्योंकि पहला स्टेप
आयनाइज़ेशन था। यहां पे वेरीरी कर सकता है अलग-अलग सॉल्वेंट। यहां पे भी 3°, 2°, 1° और यहां पे भी। दोनों का ये ऑर्डर सेम
रहने वाला है यहां पे। ठीक है? यहां पे लिविंग ग्रुप बहुत अच्छा रिक्वायर्ड होता है दोनों में। ठीक है? और यहां पे ऑर्डर
ऑफ़ रिएक्शन आप समझ ही गए। ठीक? तो E1 और E2 का डिफरेंस है। चलो भाई, आगे बढ़ते हैं। अ चूज़िंग E1 एंड E2 इज़ नॉट ईज़ियर। है ना?
सॉरी अ अगर मैं बात करूं E1 और E2 को पता करो कौन है E1, कौन है E2? दोनों में ही तो बेस आ रहा है। तो मैम फर्स्ट एक तो ये
हो गया कि स्टेप वाइज़ हम देख लेंगे। साथ ही साथ रिएक्टिविटी पैटर्न को देख लो। दोनों का रिएक्टिविटी पैटर्न ऑलमोस्ट सेम
है। है ना? रेट ऑफ़ E1, E2 इंक्रीज़ विद द डिग्री ऑफ़ सब्स्टट्यूट। तो E1 और E2 हम कैसे पता करेंगे? कि फैक्टर इज़ द स्ट्रेंथ
ऑफ़ द बेस। बेस कैसा है? बहुत स्ट्रंग बेस है, बहुत वीक बेस है। उसके बेसिस पे E2 रिएक्शन आर फेवर्ड बाय अ वेरी स्ट्रांग
बेस। और E1 की अगर हम बात करेंगे तो उसमें थोड़ा-थोड़ा वीक बेस रहता है एज़ कंपेयर टू E2। जैसे SN1 SN2 में है। है ना? तो वो
कहानी भी यहां पे सेम है। मूविंग फॉरवर्ड नेक्स्ट इज़ अपना बीटा एलिमिनेशन रिएक्शन। अब अगर मैं बात करती हूं बीटा एलिमिनेशन
की तो बात हम समझ गए। बीटा पोजीशन से एलिमिनेशन होना। अब यहां पे एक बड़ा इंपॉर्टेंट सा रूल आने वाला है। सेडफ रूल।
भाई ये कौन से बीटा पोजीशन से निकलेगा? जैसे अगर मैंने बोला मैम यहां पे कार्बन लगाएं यहां पे हाइड्रोजन लगाएं हैलोजन
लगाए ठीक है तो तो हम समझ गए बड़ा ईजी तरीका है मैम ये वाला अपना अल्फा हो गया ये वाला अपना बीटा हो गया ईजी था लेकिन
अच्छा अगर मैं बोल दूं बेटा कि इससे हैलोजन लगा है और इससे यहां भी कार्बन लगा है फिर एक और कार्बन लगा है फिर और कार्बन
लगे हैं तो ये भी तो बीटा हुआ तो इस बीटा से हाइड्रोजन निकाले या इस बीटा से हाइड्रोजन निकाले दोनों तो बीटा पोजीशन
में है ना तो उसके बारे में बताया जा रहा है ठीक है तो सुनना ध्यान से सो व्हेन हैलो एल्केन या अल्काइल हैलाइड में अह
बीटा हाइड्रोजन एटम को हम क्या करते हैं? निकालते हैं। अल्कोहलिक सॉल्यूशन से रिएक्ट कराते हैं। और इसी को हम बोलते हैं
एलिमिनेशन रिएक्शन। है ना? बीटा एलिमिनेशन रिएक्शन इसको हम बोला करते हैं। ठीक है मैम? तो बीटा एलिमिनेशन तो हम थोड़ा-थोड़ा
समझ गए। ठीक? तो जैसे मान लो यह अल्फा पोजीशन है। ये बीटा पोजीशन है। ये अपना हैलोजन लगा है। तो हमने अल्कोहलिक KOH अब
देखो E2 एलिमिनेशन होगा। है ना? अल्कोहलिक KOH है। अल्कोहलिक KOH जो है वो ज्यादा स्ट्रांग होगा। ठीक है? तो वो डायरेक्टली
अटैक करना चाहेगा। वो चाहेगा मैं तुरंत-तुरंत भाई इसको अटैक करूं इस पे अटैक करूं और जैसे ही मैं अटैक करूं मैं
इसको बना दूं अपने एक एल्कीन की तरह है ना यहां पे एलिमिनेशन कर दूं मैं तो ये यही चाहेगा तो ये अटैक करेगा अब ये जब अटैक
करना चाहेगा तो ब्रोमीन को क्या करेगा पहले तो ब्रोमीन को बाहर भगाएगा ठीक है मैम और एक साइड जाएगा हाइड्रोजन सॉरी एक
साइड हाइड्रोजन को बाहर निकालेगा है ना दोनों चीजों को ये करेगा जस्ट अ सेकंड हां ठीक है तो यहां पे ये क्या करेगा मैम
दोनों कार्बन में से एक कार्बन से हाइड्रोजन निकालेगा और एक कार्बन से हैलोजन निकालेगा। बीटा एलिमिनेशन क्योंकि
बीटा कार्बन से हाइड्रोजन निकला। ठीक है? तो ये हो गया रिएक्शन। ठीक है मैम? समझ गए हम? यहां पे भी सेम कहानी है। देखो ये
वाला अपना अल्फा है। ये बीटा और ये बीटा। पर दोनों बीटा सेम ही लगे हुए हैं। दोनों में तीन-तीन हाइड्रोजन है। किसी से भी
कहानी कर दो। है ना? किसी से भी आप हाइड्रोजन निकाल दो। किसी से भी आप हैलोजन निकाल दो। हो गया। है ना? जैसे ये कार्बन
है। तो ये बीटा पोजीशन पे, ये बीटा पोजीशन पे, ये बीटा पोजीशन पे। और ये हैलोजन लगा है तो ये वाला कार्बन अल्फा। तो अल्फा
कार्बन से हैलोजन निकलेगा और किसी भी बीटा से हाइड्रोजन निकाल दो। यहां पे मैम एक वर्ड यूज़ कर रही है किसी भी। क्यों?
क्योंकि हर कार्बन से नंबर ऑफ़ हाइड्रोजन बराबर लगे हैं। तो किसी से भी कर सकते हैं। लेकिन अगर मैं इस केस को बदल दूं अगर
मैं इस केस को बदल दूं मतलब मैं हाइड्रोजन नंबर ऑफ़ हाइड्रोजन जो अल्फा कार्बन सॉरी बीटा कार्बन है या जो बीटा हाइड्रोजन है
वो डिफरेंट नंबर पे हूं तो क्या होगा? तो उस पे आएंगे अब फिलहाल। ठीक है? तो पहले तो हम मैम ये बात समझ गए कि द रिएक्शन इज़
आल्सो नोन ऐज़ बीटा डिहाइड्रो हैलोजिनेशन। बीटा डिहाइड्रोहैलोजिनेशन मतलब डी मतलब रिमूवल। हाइड्रो मतलब हाइड्रोजन और हैलो
मतलब हैलोजन। तो डीहाइड्रोहैलोजेनेशन भी बोल सकते हैं हम इसको। क्यों? क्योंकि बीटा पोजीशन से हाइड्रोजन और हैलोजन। बीटा
पोजीशन से हाइड्रोजन निकल रहा है। अल्फा पोजीशन से हैलोजन निकल रहे हैं। तो हम इसको डिहाइड्रोहैलोजिनेशन बोल सकते हैं।
ठीक है? यस मैम। और सबसे अच्छे से ये मैम इस वाले कार्बन में होगा। फिर इस वाले कार्बन में फिर इस वाले कार्बन में। मतलब
प्राइमरी, सेकेंडरी और टर्शरी की तरह लगा होगा। ठीक है? यहां पे भी R अल्काइल ग्रुप है ये। ठीक है? तो ये इसका रिएक्टिविटी।
बाकी तो सब मैम हम समझ गए क्योंकि हमने SN1, SN2 बहुत डिटेल में समझ लिया है। तो इसमें दिक्कत नहीं आएगी। लेकिन अगर मैम
बीटा में जो कार्बन है उसमें अलग-अलग हाइड्रोजन लगे तब क्या करें? आई होप सो आप मेरे क्वेश्चन को समझ रहे हो। क्वेश्चन पे
ध्यान दो। अगर इस कार्बन से ऐसे लगे हुए हैं ये कार्बन हमारे। ठीक है? यहां पे लगा हैलोजन, यहां पे लगा है हाइड्रोजन। तो
हमने क्या किया? हमने कोई अपना अल्कोहलिक सपोज़ KOH उठाया। तो वो सबसे पहले हैलोजन को तोड़ेगा बॉन्ड। और फिर जा के बेस जो है
वो सॉरी यहां पे दोनों जगह मैंने लगा दिया ना। इसको हाइड्रोजन लिख दो। है ना? और फिर जा के ये अरे अरे अरे अरे अरे अरे अरे हम
ठीक है फिर ये हाइड्रोजन को निकालना चाहेगा तो इस कार्बन पे डबल बॉन्ड लगेगा। ठीक है तो उस कंडीशन में ये अल्फा है और
ये वाला बीटा है तो बीटा एलिमिनेशन हम इतनी देर से समझ गए। अब मैम बोल रही है कि मान लो कोई ऐसी कंडीशन आ गई। चलो अच्छा ये
भी देख लो। ये भी देख लो। चलो ये भी कंडीशन देख लो अगर आपको ये लग रहा है। ये कार्बन है मैम। यहां पे हैलोजन है। यहां
पे हाइड्रोजन, हाइड्रोजन, हाइड्रोजन, हाइड्रोजन, हाइड्रोजन, हाइड्रोजन। ठीक? अब इस कंडीशन
में भी देखो सेम कहानी है। मान लो मैं यही रिएक्शन करा दूं। तो ये एक हाइड्रोजन को उठाएगा और एक हैलोजन को उठाएगा। अब अगेन
इस कार्बन के हाइड्रोजन को भी उठा सकते थे। क्यों? क्योंकि सब में तीन-तीन हाइड्रोजन है इन दोनों में। बीटा पे दो
कार्बन हैं। और दोनों में तीन-तीन हाइड्रोजन हैं। तो ये कंडीशन में हमें कोई कंफ्यूजन नहीं आ रही थी। कंफ्यूजन
स्टार्टस व्हेन व्हेन व्हेन व्हेन केमिस्ट्री स्टार्ट्स। नहीं नहीं नहीं ये तो तुम दिल की बात बोल रहे हो यार। ये सब
पे नहीं जाने का। इस पे जाने का नहीं। ठीक है? कंफ्यूजन स्टार्ट्स जब मैम ने बोल दिया कि यहां पे हैलोजन लगा है। ठीक? ये
बीटा है। ये भी बीटा है। ठीक? यहां पे दो हाइड्रोजन लगे हैं। ठीक है? यहां पे
तीन। अब देखो ये क्या है? अल्फा है। इसके बगल-बगल वाले बीटा यानी कि ये भी बीटा और ये वाला भी बीटा। वो बीटा है? नहीं। वो
बगल के बगल में लगा है। अल्फा बीटा तो हम समझ गए यस मैम। अब इस बीटा से हाइड्रोजन निकालूं क्योंकि इसमें तीन हाइड्रोजन है।
या फिर इस बीटा से हाइड्रोजन निकालूं जिसमें दो हाइड्रोजन हैं। तो यहां पे आता है हमारे पास सेड जिफ रूल। सेडजिफ रूल।
मैं इस रूल को बस एक लाइन से बताऊं तुमको। केवल एक लाइन और ये रूल याद हो जाएगा। कौन सा है मैम? वो एक लाइन बता दो। ये सेडजिफ
रूल तो बड़ा कंफ्यूज करता है। दिमाग ही खा लेता है। तो मैं तो बस एक लाइन बोलूं। गरीब को गरीब बनाओ। बस दुनिया का जो खेल
है यार समझ रहे हो समझ रहे हो तुम जो हो रहा है इंडिया में आज मतलब सॉरी गरीब को गरीब बनाना है
बेसिकली और कुछ नहीं क्या कर सकते हैं ठीक है तो सेडजेफ रूल भी यही कहता है गरीब को गरीब बनाओ जिसके पास कम हाइड्रोजन है उससे
हाइड्रोजन निकालो कहानी खत्म जिसके पास कम हाइड्रोजन है उससे हाइड्रोजन निकालो मतलब अगर मैं इसका प्रोडक्ट बनाऊंगी ना तो मैं
यहां से एक हाइड्रोजन हटा के इसको डबल बॉन्ड दूंगी ना कि यहां यहां से हाइड्रोजन निकाल के इसका डबल बॉन्ड आया समझ में?
गरीब को गरीब बनाओ। चलो और समझते हैं और समझते हैं। कोई बात नहीं। सेड्स ए रूल इफ हाइड्रोजन एटम्स आर प्रेजेंट एट टू
डिफरेंट बीटा पोजीशन। दो जगह बीटा पोजीशन पे है। तो हाइड्रोजन इज़ एलिमिनेटेड फ्रॉम दैट कार्बन व्हिच कंटेन लेसर नंबर ऑफ़
हाइड्रोजन। तो क्योंकि मुझे ये रूल कभी याद नहीं होता था। तो मैं सोचती थी इस रूल के लिए ऐसा क्या बोलूं? क्योंकि समझ आ गया
सब हो गया। पर इसको लिखूंगी कैसे? तो सिंपल ट्रिक है। गरीब को गरीब बनाओ। जिसके पास कम हाइड्रोजन उसी से हाइड्रोजन
निकालो। खत्म। इन दिस वे हाईली सब्स्टट्यूटेड एल्कीन इज़ फॉर्म। एक्चुअली मैं सेडफ रूल इसकी वजह से नहीं बना था कि
हाइड्रोजन जहां कम है वहां से निकालो। वो इसलिए बना था ताकि ऐसा करने पे ज्यादा सब्स्टट्यूटेड वाला ग्रुप मिले। समझ रहे
हो? ज्यादा सब्स्टिट्यूटेड वाला ग्रुप मिलेगा। ज्यादा सब्स्टिट्यूटेड जो बीटा था देखो इससे हमारे पास दो कार्बन लगे हुए
थे। ये ज्यादा हाइली सब्स्टिट्यूटेड था। तो वो बनाने के लिए हमने ये काम किया। ठीक है? तो रियलिटी इसकी ये होती है। चलो।
एल्कीन कंटेनिंग लेस नंबर ऑफ़ हाइड्रोजन एटम आर कॉल्ड हाइली सब्स्टिट्यूटेड। ठीक है? द ईज़ ऑफ़ डी हाइड्रोहैलोजनेशन ऑफ़ एल
हैलोएकेन जो है वो इस तरीके से होगा। हमें पता है 3° से सबसे ईजीली होगा। फिर 2° और फिर 1° तो ऑर्डर यही रहेगा। 3 टू 1° ठीक
है? तो ये हो गया आपका। अब देखो मान लो मैंने बोला ये अल्फा है। ये वाला कार्बन अल्फा है। तो ये भी बीटा हो गया और ये भी
बीटा हो गया। अब सोचो कहां से आप हाइड्रोजन निकालोगे? इस बीटा के पास दो हाइड्रोजन। इस बीटा के पास तीन हाइड्रोजन।
मैम इससे निकाल लो। तो देखो इस वाले कार्बन से डबल बॉन्ड बना। फिर बगल में जो CH3 है वो एज़ इट इज़ रहा। समझ रहे हो? समझ
रहे हो मैम? ये बन सकता था क्या? हम उल्टा कर दें मैम हम बोले नहीं नहीं मैम इस वाले बीटा से तो वो हो सकता है बट वही बात है
मार्कोनिकॉफ रूल की तरह यहां पे भी वो माइनर प्रोडक्ट होता है। 80% आपको ये वाला प्रोडक्ट मिलता है। ठीक? तो गरीब को गरीब
बनाने वाली स्कीम यहां पे चल रही होती है। ठीक है? अब इसी तरीके से यहां पे और भी क्वेश्चंस गिवेन है। आप कोई भी देख लेना।
ठीक है? जैसे ये वाला है। ठीक? देखो ये भी बीटा है और ये भी बीटा है और ये भी बीटा है। कौन से बीटा से हाइड्रोजन निकालोगे?
यहां पे मैम दो हाइड्रोजन है। यहां पे तीन-तीन है। दो वाले से बाहर निकालो। तो इसमें डबल बॉन्ड और ये आपका मेजर प्रोडक्ट
हो जाएगा। ठीक है? इसके अलावा कोई भी बनाते हो तो वो माइनर प्रोडक्ट हो जाएगा। चलो भाई तो सेटिफ रूल समझ गए। अब हमारे जो
हैलो एरीन्स है उनकी रिएक्शन मेटल से कराएंगे हम। तो मोस्ट ऑफ द ऑर्गेनिक क्लोराइड्स, ब्रोमाइडस, आयोडाइड्स जो आपके
होते हैं वो रिएक्ट करते हैं सर्टेन मेटल्स के साथ। ठीक है? सॉरी। और वो वो मेरा पूरा गला बैठ चुका है। मैं तुमको
सच बता दूं। ठीक है? अब इसके बाद इस वन शॉट के बाद बस एक गिलास चाय चाहिए। कप नहीं। ग्लास चाय समझ रहे हो? कप में चायवा
नहीं ग्लास में चाय होगी। इसके बाद तो यह जितना चैप्टर लंबा है ना कप से कोई काम नहीं बनेगा। ठीक है? सो ज्यादातर अपने जो
ऑर्गेनिक क्लोराइड्स, ब्रोमाइड्स, आयोडाइड्स ये सब होते हैं ना ये सर्टेन मेटल्स के साथ रिएक्ट कर सकते हैं और
रिएक्ट करके कार्बन मेटल का बॉन्ड बना सकते हैं। ठीक है? कार्बन और मेटल का बॉन्ड अब हम करने जा रहे हैं। ठीक है?
अच्छा इन कंपाउंड्स को बेटा आप बोलते हो ऑर्गेनोमेटलिक कंपाउंड्स। ऑर्गेनोमेटलिक कंपाउंड्स। मतलब एक ऑर्गेनिक कंपाउंड जब
एक मेटल के साथ जुड़ रहा है तो वो ऑर्गेनोमेटलिक कंपाउंड होता है। जैसे एक बहुत फेमस एग्जांपल है ग्रिग्नार्ड
रिएजेंट। RMG एक्स वाला ग्रुप, है ना? RMG एक्स वाला ग्रुप। अभी हम पढ़ेंगे इसके बारे में। तो ये एक ऑर्गेनोमेटिकल कंपाउंड है।
एक ऑर्गेनिक कंपाउंड एक मेटल से जुड़ा हुआ है ऑर्गेनोमेटलिक कंपाउंड। ठीक है? डिस्कवर्ड बाय विक्टर ग्रिग्नार्ड। इसको
विक्टर ग्रिग्नार्ड ने डिस्कवर किया था। अल्काइल मैग्नीशियम हैलाइड। है ना? अच्छा यहीं पे लिखा है RMGX। इसको आप बोलोगे
ग्रिग्नार्ड रिएजेंट। ठीक है? दीज़ रिएजएट्स आर ऑब्टेंड बाय रिएक्शन ऑफ़ हैोएकेन्स विद मैग्नीशियम इन द ट्राई ईथर
प्रेजेंस। ठीक है? मतलब अगर मैं क्या कर दूं? अगर मैं यहां पे क्या कर लूं? कोई हैलोएकेन ले लूं। ठीक है? कोई हेलोल्केन
और उसकी रिएक्शन करा दूं मैग्नीशियम से। है ना? हेलोएकेन CH3 सपोज़ ब्रोमीन है तो ब्रोमीन वाला ही सबसे
फेमस ग्रुप है। तो इसी को ले लो। इन द प्रेज़ेंस ऑफ़ ईथर ऑर्बिट इसको पास कराओगे तो ये पता है क्या बनेगा? R और इसके साथ
ये मैग्नीशियम अंदर जाएगा और ये हैलोजन भी लगा रहेगा। तो ये बन जाएगा एक ऑर्गेनोमेटिक कंपाउंड ग्रिग्नार्ड रिएजेंट
ग्रिग्नार्ड रिएजेंट RMGX RMGX एक ग्रिग्नार्ड रिएजेंट होता है। ठीक है? विक्टर मेयर ग्रिग्नार्ड ने इनको इसके
बारे में बताया था। अच्छा ग्रिग्नार्ड रिएजेंट एक बड़ा ही इंपॉर्टेंट ग्रुप है। क्यों मैम? वही वाली बात है। हैलोएकेन में
बहुत काम आएगा। ग्रिग्नार्ड रिएजेंट से बहुत सारी रिएक्शंस हो जाती हैं। एक बार ये ग्रिग्नड रिएजेंट बन जाता है ना तो
बहुत सारी रिएक्शन पॉसिबल होती है। तो ग्रिग्नार्ड रिएजेंट इज़ वेरीेंट ऑर्गेनोमेटलिक कंपाउंड। ठीक है? एक बार
बोर्ड्स में तो इसको ऑर्गेनिक ऑर्गेनोमेटलिक कंपाउंड से रिलेटेड एक नंबर का क्वेश्चन पूछा था। द ग्रग्नार्ड
रिएजेंट द कार्बन मैग्नीशियम बॉन्ड अच्छा अब ग्रिग्नड रिएजेंट बड़ा अजीब टाइप का बॉन्ड है। ग्रिग्नड रिएजेंट क्या होता है?
r mg x अब इसमें मैम मजेदार क्या है? इसमें ना दो चीजें होती हैं। जैसे कोई बॉन्ड होता है या तो वो कोवेलेंट होता है
या तो वो आयनिक होता है। इसमें दोनों चीजें हैं। इसमें दोनों चीजें हैं भाई साहब। देखो एक तो मेटल और हैलोजन का बॉन्ड
है। और दूसरा मेटल और किसका बॉन्ड है हमारे? कार्बन का बॉन्ड है। तो यहां पे दोनों टाइप के बॉन्ड हैं। ठीक है? कार्बन
मेलिक का जो बॉन्ड है ये वाला जो बॉन्ड है ये कोवेलेंट होता है। और ये वाला जो बॉन्ड है ये आयनिक होता है।
तो ये वैसे तो दुनिया के कोई भी बॉन्ड 100% आयनिक या 100% कोवेलेंट होता ही नहीं है इन रियलिटी। समझ रहे हो? कोई भी नहीं
होता जनरली। ठीक है? बट खैर इस केस में अगर आप देखोगे तो आपको आधा कोवेलेंट बॉन्ड भी दिख रहा है। आधा आयनिक बॉन्ड भी दिख
रहा है। दोनों टाइप के बॉन्ड दिखते हैं। ठीक है? तो ये जो इसका बॉन्ड है इन दोनों का ये कोवेलेंट है बट हाइली पोलर है बेटा।
हाइली पोलर है इनका बॉन्ड। है ना? पोलैरिटी है इनके बीच में। कोई डायरेक्ट नहीं है। बहुत मस्त शेयरिंग हो रही है।
नहीं नहीं मस्त तो नहीं हो रही है। है ना? विद कार्बन पुलिंग इलेक्ट्रॉन्स फ्रॉम इलेक्ट्रोपज़िटिव मैग्नीशियम। कार्बन अपनी
तरफ इलेक्ट्रॉन खींच रहा है इस बार। ठीक है? द मैग्नीशियम हैलोजन बॉन्ड इज़ एसेंशियली आयनिक। वो आयनिक है। उसमें
आयनिक कैरेक्टर है। आयनिक मतलब वो ट्रांसफर ऑफ इलेक्ट्रॉन से बन रहा है। पॉजिटिव और नेगेटिव में। ग्रिग्नट रीएजेंट
जो होते हैं बेटा वो बहुत ज्यादा रिएक्टिव होते हैं। किसी भी सोर्स ऑफ़ प्रोटॉन के साथ रिएक्ट कर जाते हैं। जिनके पास भी
सोर्स ऑफ़ प्रोटॉन है जो उनको चार्ज दे सकते हैं पॉजिटिव किसी भी उसके साथ रिएक्ट कर जाएंगे। ग्रिग्नार्ड रिएजेंट। बहुत
रिएक्टिव होते हैं। एंड रिएक्ट एनी सोर्स ऑफ़ प्रोटॉन टू गिव हाइड्रोकार्बन। तुरंत-तुरंत रिएक्ट करके हाइड्रोकार्बन
बनाना चाहते हैं। ठीक है? पानी, अल्कोहल किसी के साथ भी ये तुरंत रिएक्ट कर जाएंगे। तुरंत तुरंत तुरंत। ठीक है? वाटर,
अल्कोहल, अमीनस आर सफिशिएंटली एसिडिक टू कन्वर्ट देम टू करेस्पोंडिंग हाइड्रोकार्बंस। तुरंत उनसे हाइड्रोजन
छीनेंगे और हाइड्रोकार्बन बन जाएंगे। तो ये बहुत ही ज्यादा रिएक्टिव होते हैं। इसका एक क्वेश्चन आता है कि इनको क्यों
इतना ज्यादा प्रिजर्व करके रखा जाता है? तो उसका रीज़न है बिकॉज़ दे आर हाइली रिएक्टिव। ठीक है? इट इज़ देयर फॉर नेसेसरी
टू अवॉइड इवन ट्रेसेस ऑफ़ मॉइस्चर। ट्रेसेस ऑफ़ मॉइस्चर को भी आपको दूर रखना है इससे। मतलब अगर जो नॉर्मल सराउंडिंग में भी
मॉइस्चर प्रेजेंट है ना ये उससे भी रिएक्ट कर सकते हैं। सोचो फ्रॉम ग्रिगार्ड रिएजेंट दैट इज़ व्हाई आई कैरिड आउट इन अ
ड्राई ईथर की प्रेजेंस में होता है ये। यही रीज़न है। ऑन दी अदर हैंड दिस कुड बी कंसीडर्ड एज़ वन ऑफ़ द मेथड्स फॉर
कन्वर्टिंग हैलाइड्स टू हाइड्रोकार्बन। हां। अगर आपको किसी हैोएकेन को हाइड्रोकार्बन में बदलना है तो हम रिएक्शन
करवा देंगे ये वाली। तो मतलब ये नॉर्मल रूम टेंपरेचर पे रखोगे ये उससे भी मॉइस्चर एब्सॉर्ब करके तुरंत रिएक्ट कर लेंगे और
खत्म हो जाएंगे। ठीक है? हाइड्रोकार्बन बना लेंगे। तो इस तरीके से बहुत रिएक्टिव होते हैं। हमें इन्हें एक बहुत एयर टाइट
कंटेनर में रखना पड़ता है। ठीक है? अच्छा नेक्स्ट आते हैं हम रिएक्शन पे। वुड्स रिएक्शन। तो एक तो RMGX की रिएक्शन पढ़ी कि
हमने कोई हैोएकेन लिया और उसकी रिएक्शन मैग्नीशियम से कराई इन द प्रेज़ेंस ऑफ़ ड्राई ईथर तो हमें गिग्नाड रिएजेंट मिल
गया। एक होती है वुड्स रिएक्शन। अ वेरीेंट मेथड। इंडस्ट्रियल प्रिपरेशन करते हो आप यहां से फिनोल वगैरह का। ठीक है? तो वुड्स
रिएक्शन क्या होती है? वुड्स रिएक्शन क्या होती है? अगर मैंने किसी अल्काइल हैलाइड को ले लिया। है ना? मान लो मैंने अल्काइल
हैलाइड या अराइल हैलाइड है ना? खैर यहां पे अल्काइल आएगा। अथाइल वाला आपके फिटिक रिएक्शन में आएगा। अल्काइल हैलाइड मतलब
मैंने ले लिया C H3 क्या ले लूं? क्लोरीन ले लूं। चलो क्लोरीन लेती हूं। टू टाइम्स लेना पड़ेगा। इवन नंबर
ऑफ़ कार्बन के साथ ये कहानी होती है। और टू टाइम्स सोडियम से आपको इसकी रिएक्शन करानी होती है। इसको मैं थोड़ा ऐसे ही बनाती हूं
ताकि आपको भाई रिएक्शन भी समझ में आए। ठीक है? CH3Cl को मैंने Cl पहले लिखा है उसमें। क्यों लिखा है समझो। तो इस रिएक्शन
में होता क्या है बेटा? ये सोडियम क्लोरीन से रिएक्ट करता है टू टाइम्स। ठीक? 2 टाइम्स CH3Cl लिया और टू टाइम सोडियम
लिया। तो इनकी रिएक्शन रिएक्शन विद मेटल पढ़ रहे हो आप। हैलोएकेन की रिएक्शन आप मेटल से करा रहे हो तो। ठीक है? पहले भाई
मोटिव याद रखा करो रिएक्शन का। तो क्या होगा? NaCl बाहर निकलेगा टू टाइम। और क्या बनेगा? और क्या बनेगा? टू टाइम्स
NaCl बाहर निकलेगा। और ये दोनों आपस में जुड़ जाएंगे। CH3 सिंगल बॉन्ड
CH3 तो एल्केन बना दिया आपने। है ना? क्या है ये? इथेन
इवन नंबर ऑफ़ कार्बन वाले ग्रुप आप बना सकते हो। इसको आप बोलते हो असेंट ऑफ चेन हो रहा है। है ना? कार्बन के नंबर बढ़ गए।
नंबर ऑफ़ कार्बन यहां पे इंक्रीस करता है। अल्काइल लाइड्स रिएक्ट करता है सोडियम के साथ। अच्छा किसके प्रेजेंस में? इन द
प्रेज़ेंस ऑफ़ अगेन ड्राई ईथर। ड्राई ईथर। ठीक है? ड्राई ईथर की प्रज़ेस में ये रिएक्शन होता है। और ये क्या बनाता
है? ये बनाता है मैम हाइड्रोकार्बंस बना लेता है। तो अगर आपको कोई बोले कि यार किसी मेटल की हेल्प से ऐसा करो एल्केन बना
दो। तो आप बना सकते हो यहां पे। है ना? कंटेनिंग डबल द नंबर ऑफ कार्बन एटम्स प्रेजेंट इन द हैलाइड। डबल नंबर ऑफ़
कार्बन। पहले एक-एक कार्बन था। अब दो कार्बन बन गए वो जुड़ के। जुड़ जाता है यहां पे। दिस इज़ नोन ऐज़ वुड्स रिएक्शन। वुड्स
रिएक्शन समझ में आया? सोडियम की प्रज़ेस में होती है हमेशा ये रिएक्शन। ठीक है? आगे बढ़ते हैं। फिटिक रिएक्शन। फिटिक
रिएक्शन क्या है? सेम वुड्स रिएक्शन है। बस ये अराइल वाले ग्रुप के साथ है। बस आप रिएक्शन देखो पहले। इस बार क्या करोगे?
हैलो एरीन लोगे। हैलो एल्केन की जगह। मान लो क्लोरीन लिख दिया मैंने। है ना? और इसी को मैंने दोबारा बना दिया।
क्लोरीन। ठीक? और रिएक्शन कराई। रिएक्शन कराई विद टू टाइम्स ऑफ़ सोडियम। ठीक? तो ये रिएक्शन इसके साथ होगी। टू
टाइम्स ऑफ़ NaCl अगेन बाहर निकलेगा। ठीक है? बाहर क्या निकलेगा? टू टाइम्स ऑफ़ NaCl। साथ ही साथ दोनों फिनाइल ग्रुप आपस
में जुड़ जाएंगे। दोनों बेंजीन के ग्रुप आपस में जुड़ जाएंगे। बाय फिनाइल। यह बेंजीन था। यह दूसरा बेंजीन था।
यह एक बेंजीन था और यह दूसरा बेंजीन था। बायफिनाइल बन जाएगा। तो ये हो गई रिएक्शन। वापस से
बताऊं। सेम वुड्स रिएक्शन में आपको एराइल ग्रुप ले लेना है। अराइल हैलाइड्स आल्सो गिव एनालोगस कंपाउंड्स व्हेन ट्रीटेड विद
सोडियम इन ड्राई ईथर। अगेन टू अराइल ग्रुप्स जॉइन हो जाएंगे एक दूसरे के साथ। और इसको हम फिटग रिएक्शन बोलेंगे। ड्राई
ईथर की प्रज़ेंस में होगा ये भी। तो वुड्स रिएक्शन में हमने हैलोएकेन लिया है। यहां जैसे वहां पे क्लोरो एल्केन
लिया। क्लोरो मिथेन लिया था हमने। है ना? क्लोरो मीथेन का एग्जांपल था। यहां पे क्लोरो बेंजीन वाला ग्रुप है। ठीक? क्लोरो
बेंजीन वाला ग्रुप है। ठीक है? या बेंज़ाइल क्लोराइड जिसको आप बोल सकते हो। चलो आगे बढ़ते हैं। अब वुड वुड्स पढ़
लिया, फिटिक पढ़ लिया। अब इन दोनों को जोड़ दो। तो वुड्स फिटिक बनता है। वुड्स में क्या कर रहे हो? ले रहे हो। फिटिक में
क्या ले रहे हो? हैलो एरीन ले रहे हो। अब एक हैलोएकेन और एक हैलो एरीन ले लो। सोडियम से पास करा दो इन द प्रेजेंस ऑफ़
ड्राई ईथर। तो वापस से एक ऑर्गेनोमेटलिक कंपाउंड बना सकते हो आप। देखो अब मैंने क्या किया? CH3Cl लिया। टू टाइम्स ऑफ
सोडियम लिया। प्लस बेंजीन में लगाया क्लोरीन। ब्रोमीन के साथ भी रिएक्शन हो सकती है। एज़ इट इज़ होगी। ठीक है? ये। अब
क्या होगा? इनकी रिएक्शन होगी। अगेन इन द प्रेज़ेंस ऑफ़ ड्राई ईथर। अब क्या हो जाएगा? टू टाइम्स ऑफ़ सोडियम
बाहर निकलेगा। अब क्या हो जाएगा? टू टाइम्स ऑफ़ सोडियम के साथ क्लोराइड बाहर निकलेगा। और क्या बन जाएगा? टॉलीन बन के
आएगा इस क्वेश्चन में। देखो CH3 जुड़ जाएगा किससे? बेंजीन की रिंग से। टॉलीन बन गया। है ना? टॉलीन बन गया। बोलो आया? तो
मिक्सचर ऑफ़ अल्काइल हैलाइड और अराइल हैलाइड इस बार हमने ले लिया। तो वुड्स रिएक्शन, फिटिक रिएक्शन और वुड्स फिटिक
रिएक्शन। आई गेस आपको तीनों बहुत अच्छे से समझ में आ गई होगी। अब आते हैं हम हेलो एरीन के ऊपर। हैलो एरीन होता क्या है?
ऑर्गेनोजन कंपाउंड्स यानी कि जिनमें हैलोजन लगाओ, क्लोरो, क्लोरीन, ब्रोमियम, आयोडीन कोई भी लगाओ। पर वो किससे लगाओ?
हेलो एरीन से लगाओ। मतलब बेसिकली एक हैलो एरीन उठाया। उसमें से हाइड्रोजन हटा के हैलोजन हटा दिया। हाइड्रोजन हटा के क्या
किया? उस रिंग से हैलोजन लगा दिया। जो मैम ने आपको फर्स्ट स्लाइड में समझाया। ठीक है? जैसे कि क्लोरो बेंजीन, ब्रोमो
बेंजीन, आयोडी आयोडो बेंजीन है ना? ऐसे कोई भी ग्रुप आप ले सकते हो। तो ये होते हैं हमारे हेलो एअरस। ठीक है? मैम समझ गए?
नोमेनक्लेचर पे आ जाए तो मैम ने पहले ही बता दिया ऑर्थोमेटा पैरा और ये सब पोजीशन होती है इनकी। ठीक है? तो ऑर्थोमेटा पैरा
हमने एज़ इट इज़ समझ लिया था। ठीक है? इनमें बेटा नोमेनक्लेचर जो ज्यादा फेमस होती है वो होती है आपकी कॉमन नेम। जैसे कि टॉलीन
बेंजीन पे CH3 क्रिसोल अ बेंजीन पे OH और CH3 दोनों लगा दो तो क्रिसोल सैलिसिलिक एसिड बेंजीन पे CHO लगा दो। सैलिस
एल्डिहाइड सॉरी सैलिस एल्डिहाइड मतलब बेंजीन पे CHO लगा दो। सैलिसिलिक एसिड मतलब बेंजीन पे कार्बोक्सिलिक एसिड लगा दो
COOH। बेंजीन पे CH3 लगा दो टॉलीन। है ना? बेंजीन पे OH लगा दो फिनोल। तो इसके कॉमन नेम्स बड़े फेमस होते हैं एज़ कंपेयर टू
आईयूपीएसी। ठीक है? टॉलीन एक बड़ा इंपॉर्टेंट ग्रुप होता है। फिनाइल क्या होता है? अगर आपने अह बेंजीन की रिंग को
कभी सब्सीट्यूट मान लिया, तो उसको फिनाइल बोलने लग जाते हो। फिनोल समझ गए क्या होता है? बेंजीन पे डायरेक्टली OH लग जाए तो
फिनोल होता है। क्रिसोल क्या होता है? बेंजीन पे OH और CH3 दोनों लग जाए मैम। है ना? इसी तरीके सेलिसिलिक एसिड, सेलिस
एल्डिहाइड एंड सो ऑन सो ऑन। ठीक है? मैंने आपको सेलिसिलिक सेलिस एल्डिहाइड बोल दिया गलती से। वो बेंजेल्डिहाइड था। बेंजीन पे
CHO सही बोला था। ठीक है? चलो आगे बढ़ते हैं। आगे बढ़ते हैं। तो इस तरीके से नोमेनक्लेचर होता है ना? ऑर्थोमेटा पैरा
पोजीशन आप समझ ही गए। ऑर्थोमेटा और पैरा पोजीशन होगी उसकी। ठीक है मैम। तो ये तो हो गया फिजिकल प्रॉपर्टी पे। आइए मेल्टिंग
पॉइंट और बॉइलिंग पॉइंट की बात करते हैं। सबसे पहले अब आप समझ ही गए होंगे यार वही है हेलोएकेन की कहानी है ना मेल्टिंग
पॉइंट में क्या है? अब देखो ये तो बड़े बहुत भारी से ग्रुप्स हैं। कार्बन कार्बन छह तो कार्बन नॉर्मल लगे होते हैं इसमें।
फिर और कार्बन लग जाए तो अलग बात है। तो यहां पे क्या होगा? ये हमारे जो ग्रुप्स हैं बहुत हैवी ग्रुप्स होते हैं। मेल्टिंग
पॉइंट वैसे भी ज्यादा ही होगा इनका। है ना? और बाकी कंपेयर करोगे मैम। तो ऑफ कोर्स हैलोजन वाले जो ग्रुप हैं जैसे-जैसे
हैलोजन का साइज बढ़ा ऑफ कोर्स उसका मेल्टिंग पॉइंट भी बढ़ा। है ना? सेम हैलोजन लग गए। तो आप मेल्टिंग बॉइलिंग पॉइंट कैसे
निकालोगे मैम? मॉलिक्यूलर मास के हिसाब से निकाल लेंगे इस बार। है ना? इन केस ऑफ़ आइसोमेरिक है तो भी समझ गए मैम। आइसोमर के
फॉर्म में भी समझ गए कि ब्रांचेस जितनी ज्यादा उसके बेसिस पे। अच्छा एक लाइन लिखी है यहां पे बहुत ध्यान से सुनना। अगर
आइसोमेरिक है। आइसोमेरिक मतलब नंबर ऑफ़ हैलोजन लगे हैं। और वो आइसोमर्स फॉर्म कर रहे हैं। मॉलिक्यूलर फार्मूला सेम है।
स्ट्रक्चरल फार्मूला अलग है। मेल्टिंग पॉइंट ऑफ़ पैरा आइसोमर जो होगा वो ज्यादा होगा। पैरा वाले का मेल्टिंग पॉइंट हमेशा
ज्यादा होगा एज़ कंपेयर टू दैट ऑफ़ मीज़ोमर। ठीक है? ठीक है? इट इज़ बिकॉज़ पैरा आइसोमर इज़ मोर सिमिट्रिकल। नोट कर लेना। एक
बड़ाेंट पॉइंट है। पैरा वाले का जो मेल्टिंग पॉइंट होगा वो हमेशा ज्यादा होगा क्योंकि उसकी सिमिट्री ज्यादा होती है।
ठीक है? मॉलिक्यूल्स इसके ज्यादा क्लोजली पैक्ड होते हैं क्रिस्टल लैटिस में। पैरा वाले के। इसीलिए बहुत सारे मॉलिक्यूल्स एक
साथ जुड़ सकते हैं इसके। ठीक है? क्रिस्टल लैटिस बहुत अच्छा बनाते हैं ये। ठीक है? इंटरमॉलिक्यूलर फोर्सेस ऑफ़ अट्रैक्शन जो
पैरा वाले का होता है वो भी सबसे ज्यादा होता है। तब भी इसका एक और रीज़न है कि मेल्टिंग पॉइंट इसलिए भी ज्यादा होता है।
ठीक है? ऑर्थो और पैरा वाले को आप बहुत ईज़ली सेपरेट कर सकते हो। क्योंकि इनके मेल्टिंग और बॉइलिंग पॉइंट में काफी हाई
डिफरेंस होता है। तो वो उसका रीज़न हो गया जो हमने पहले भी पढ़ा है। सॉलीबिलिटी की अगर हम बात करें तो यार देखो हैलोरीन में
तो बहुत सारे कार्बन लगे हैं। तो ये तो जनरली इनसॉल्युबल रहा होगा। है ना? सॉलीबल नहीं होगा पानी में। है ना? क्या रीज़न है?
दे कैन नॉट फॉर्म हाइड्रोजन बॉन्ड। सेम पहले तो वही कहानी है। है ना? और जो पानी में सॉल्युबल नहीं होते हैं वो अल्कोहल,
ईथर इनसॉल्युबल सॉल्वेंट में सॉरी ऑर्गेनिक इनऑर्गेनिक सॉल्वेंट में सॉल्युबल होते हैं। तो ये भी वैसे ही काम
करेंगे सेम। डेंसिटी की बात करें भाई मॉलिक्यूलर मास के हिसाब से होगा। स्टेबिलिटी की बात करें तो भाई सबसे
ज्यादा स्टेबल फ्लोरीन वगैरह वाले हैं। रिएक्टिविटी की बात करें सबसे ज्यादा आयोडीन वाले हैं। कोई भी डिफरेंस नहीं है।
सेम है सारी की सारी चीजें हैलोल्केनेंस की तरह। ठीक है? अच्छा अब हम बात करते हैं कि ये कैसे रिएक्शन दिखाएंगे? जैसे हमारे
हैलोएल्केनेंस जो थे वो न्यूक्लियोफिलिक भी दिखा रहे थे। है ना? और वो क्या कहते हैं? हमारे इलेक्ट्रोफिलिक भी दिखा रहे
थे। हैलो एरीन क्या दिखाएंगे? हैलो एरीन न्यूक्लियोफिलिक ना के बराबर दिखाते। बहुत ही खराब न्यूक्लियोफिलिक रिएक्शन
दिखाएंगे। ये इलेक्ट्रोफिलिक बड़ी अच्छी रिएक्शन दिखाते हैं। ठीक है मैम। क्यों? ऐसा तो हो नहीं सकता। हम पूछे नहीं आपसे।
हां। उड़ाओगे क्या? वन शॉट है तो? नहीं नहीं नहीं। माफ़ करो भाई। समझाने वाले हैं। सुनो। तो जो हमारे अराइल हैलाइड्स होते
हैं ना बेटा, इनमें ना चारप रीज़न होते हैं जिसकी वजह से ये इलेक्ट्रोफिलिक नहीं दिखाते हैं। पहली चीज़ होती है इनके
रेजोनेंस इफ़ेक्ट। इसमें रेजोनेंस इफ़ेक्ट होते हैं। हैलोरीन जो होता है उसमें इलेक्ट्रॉन पेयर प्रेजेंट होते हैं ऑन
हैलोजन एटम। एंड आर इन कंजुगेटिंग विद पाई इलेक्ट्रॉन्स इन द रिंग। यार एक बात बताओ। बेंजीन जो होती है आपको पता है ना बेंजीन
ये भी बेंजीन है। यहां पे बॉन्ड लगा दो तो भी बेंजीन है। सर्कल बना दो तो भी बेंजीन है। सब तो
बेंजीन है। ये क्यों होता है? क्योंकि इसके पास डीलोकलाइज्ड पाई इलेक्ट्रॉन होते हैं। पाई इलेक्ट्रॉन घूम रहे होते हैं
कंटीन्यूअसली। तभी तो एक सर्कल दिखाते हो। घूम इलेक्ट्रॉन्स घूम रहे हैं। सोचो डीलोकलाइड्ड। भटक रहे हैं इलेक्ट्रॉन। तो
क्या कोई नेगेटिव चीज उसके पास आना चाहेगी? न्यूक्लियोफाइल पे नेगेटिव चार्ज होता है।
वो आना चाहेगा? बिल्कुल भी नहीं। रेजोनेंस इफ़ेक्ट दिखा रहे हैं। ठीक है? पाई इलेक्ट्रॉन्स विद द रिंग रेजोनेटिंग
स्ट्रक्चर। इतने सारे रेजोनेटिंग स्ट्रक्चर बनते हैं। है ना? मान लो मैंने एक हैलोल्केन उठाया। पांच रेजोनेटिंग
स्ट्रक्चर बना रहा है। है ना? पहले वो इलेक्ट्रॉन इसको इलेक्ट्रॉन डोनेटिंग ग्रुप पे यहां दे रहा है। फिर ये
इलेक्ट्रॉन यहां दे रहा है। फिर ये इलेक्ट्रॉन आगे बढ़ रहे हैं। इस तरीके से उसके रेजोनेटिंग स्ट्रक्चर्स बन रहे हैं
डिफरेंट-डिफरेंट। है ना? तो जो कार्बन क्लोरीन का बॉन्ड है उसमें पार्शियल बेटा पहली चीज़ पहला पहला चीज़ वो नहीं वो तो चलो
ठीक है। डीलोकलाइड इलेक्ट्रॉन भी एक बहुत मेन रीज़न है। पर एक बहुत इंपॉर्टेंट सी बात ये भी है कि इसमें जो कार्बन और
हैलोजन का आपको बॉन्ड दिख रहा है ना जो हम दो देख रहे हैं क्लोरो बेंजीन क्लोरो ब्रोमो बेंजीन वो रियलिटी में उसमें
थोड़ा-थोड़ा डबल बॉन्ड भी है। और डबल बॉन्ड को तोड़ना तो मुश्किल होता है। मैम डबल बॉन्ड है क्यों? क्योंकि इसके इलेक्ट्रॉन
मान लो इलेक्ट्रॉन डोनेटिंग ग्रुप है। क्लोरीन जो है वो इलेक्ट्रॉन विथड्रॉइंग डोनेटिंग दोनों की तरह काम कर सकता है। तो
डोनेटिंग ग्रुप बना है यहां पे। तो वो इलेक्ट्रॉन दे रहा है रिंग में। फिर वापस इलेक्ट्रॉन वापस और एंड में देखो ऐसे
इलेक्ट्रॉन वापस भी आ रहे तो हल्का-हल्का डबल बॉन्ड बनता हुआ दिखेगा आपको क्लोरीन से। देखने में लग रहा है सिंगल है पर वो
थोड़ा-थोड़ा डबल बॉन्ड है। अब देखो सिंगल बॉन्ड को तोड़ना मुश्किल। फिर डबल भी तोड़ना पड़ जाए तो और मुश्किल हो गया काम
है ना? तो बॉन्ड क्लीवेज इज़ मोर डिफिकल्ट एज़ कंपेयर टू नॉर्मल जो आप ग्रुप अभी तक पढ़ते आ रहे हो। तो न्यूक्लियोफाइल इतनी
जल्दी अटैक नहीं कर पाएगा। दो बॉन्ड टूटने पड़ेंगे। आगे बढ़ते हैं। हाइब्रिडाइजेशन का डिफरेंस है ना? हाइब्रिडाइजेशन का
डिफरेंस। कार्बन हैलोजन बॉन्ड में sp2 हाइब्रिडाइज्ड हो गया भाई। डबल बॉन्ड है तो sp2 हाइब्रिडाइज्ड है। sp2
हाइब्रिडाइज्ड है यानी कि s कर कैरेक्टर ज्यादा है। आपको पता है भाई sp3 में 25% s कर कैरेक्टर होता है। sp3 में हां और sp2
की अगर आप बात करोगे तो 33.33% s कर कैरेक्टर होता है। s कैरेक्टर बढ़ जाएगा तो अगेन सेम कहानी होती है। s कर कैरेक्टर
जिसका ज्यादा होता है उसका बॉन्ड को तोड़ना मुश्किल होता है। फिर इनस्टेबिलिटी ऑफ़ फिनाइल कैटायन। ये ज़्यादा स्टेबल नहीं
होता। इन केस ऑफ़ हैलोरीन जो फिनाइल कैटायन है वो कैसे बन रहा है? सेल्फ आयनाइज़ेशन से बन रहा है। विल नॉट बी स्टेबलाइज़्ड बाय
रेजोनेंस एंड देयरफ़ SN1 मैकेनिज़्म जो है वो खत्म हो जाएगा। हो ही नहीं पाएगा। है ना? स्टेबिलिटी ऑर्डर की वजह से। फिर उसके
बाद पॉसिबल रिपल्शन जो मैंने आपको बताया भाई इलेक्ट्रॉन जो है डीलोकलाइज़्ड हैं। घूम रहे हैं। तुम कहां से न्यूक्लियोफाइल
लेके लगा दोगे? इतना आसान थोड़ी है। उसके पास खुद ही इतने सारे इलेक्ट्रॉन हैं। वो इलेक्ट्रॉन रिचेस्ट स्पीशी है बेंजीन की
रिंग। तुम बोल रहे हो कोई न्यूक्लियोफ़ाइल आके अटैक कर देगा। ऐसे ही कुछ भी। हमारा बॉन्ड इतना वीक नहीं है। ये ऐसे बोलेगा।
ठीक है? चलो। तो खैर इतनी जल्दी उसकी रिएक्शन नहीं होती। कुछ-कुछ ग्रुप्स दिखा सकते हैं थोड़ा बहुत न्यूक्लियोफिलिक
रिएक्शन बट सबसे खराब न्यूक्लियोफिलिक आपको हैलोरीन में देखने को मिलता है। क्लोरो बेंजीन कैन बी कनवर्टेड इंटू
फिनोल। है ना? अच्छा ये बड़ी प्यारी सी रिएक्शन है। डाउस प्रोसेस है। डॉस्ट चलो नीचे लिख दूंगी। समझो क्या होता है। मैंने
मान लो कोई क्लोरो बेंजीन उठाया। बेंजीन पे मैंने क्लोरीन लगा दिया। ठीक? और मैंने इसको क्या बनाना है? मैंने इसको
फिनोल बनाना है। फिनोल तो मैं कैसे बनाऊंगी? मैं इसकी रिएक्शन करा सकती हूं NaOH के साथ। टू टाइम्स लेते हैं वैसे पर
लिख देती हूं NaOH के साथ। ठीक है? अब इसमें टेंपरेचर और प्रेशर बड़ा इंपॉर्टेंट होता है। नहीं लिखोगे नंबर कट जाएगा आपका।
ठीक है? 623 केल्विन का टेंपरेचर रखना पड़ेगा और 300 एटीएम का प्रेशर रखना पड़ेगा आपको। इस कंडीशन में क्या होगा? OH
ग्रुप अंदर जाएगा। अब वैसे तो पूरा मैकेनिज्म होता है इसका। बट फिर भी आप पहले यहां पे समझो। होता क्या है? बेंजीन
में OH ग्रुप अंदर जाएगा। ठीक? OH ग्रुप इसका अंदर जाएगा। और Na जो है वो Cl को पकड़ के बाहर हो जाएगा। ठीक है? तो इसका OH
ग्रुप इस टेंपरेचर पे अंदर जाता है और Na के साथ Cl बाहर निकलता है। OH ग्रुप इसकी जगह जाएगा और ये Na के पास आ जाएगा। ठीक
है? फिनोल बाय हीटिंग एक्वस सोडियम एक्वस कंडीशन में लेना। है ना? एक्वस सोडियम हाइड्रोक्साइड एट टेंपरेचर 623 एंड 300
एटीएम ऑफ़ प्रेशर। इतने हाई टेंपरेचर और हाई प्रेशर में आप फिनोल बना सकते हो। डस प्रोसेस। एक इंडस्ट्रियल मेथड होता है टू
प्रिपेयर फिनोल। फिनोल अल्कोहल फिनोल ईथर में भी पढ़ोगे। तो इस तरीके से आप सोडियम की रिएक्शन कराओगे तो ये एक डस प्रोसेस के
नाम से जाना जाता है। बहुत प्यारी रिएक्शन होती है जो कि यूज़ की जाती है इंडस्ट्रीज वगैरह में।
अगर आपसे कोई बोले इंडस्ट्री लेवल पे हमको फिनोल बनाना है तो आप बोलना डाउऊस प्रोसेस लगा दो। ठीक? मतलब सोडियम हाइड्रोक्साइड
एक्वस स्टेट में ले जाओ और पास करा दो क्लोरो बेंजीन से। ठीक? तो आप फिनोल बना सकते हो। तो ये बन गया पहला स्टेप। अच्छा।
प्रेजेंस ऑफ इलेक्ट्रॉन विथड्रॉइंग ग्रुप अगर बेटा लगा है एट ऑर्थो एंड पैरा पोजीशन इंक्रीजिंग द रिएक्टिविटी ऑफ़ हैलोरीन।
इसका मतलब समझो। मतलब अभी मैंने आपको समझाया कि क्लोरीन था जो इलेक्ट्रॉन डोनेटिंग ग्रुप था। अगर कोई NO2 जैसा
ग्रुप लग गया बेंजीन के साथ तो वो इलेक्ट्रॉन क्या होता है? वो इलेक्ट्रॉन विथड्रॉइंग ग्रुप होता है। तो वो
रिएक्टिविटी बढ़ा सकता है उसकी उस टाइम पे। ठीक है? अगर कोई इलेक्ट्रॉन विथड्रॉइंग ग्रुप है तो फिर वो इलेक्ट्र उसकी
रिएक्टिविटी बढ़ा सकता है। लेकिन हमें पता है ये सबसे ज्यादा हमें कौन सी रिएक्शन दिखाएगा? ये हमें अ न्यूक्लियोफिलिक
रिएक्शन नहीं दिखाता है। है ना? ये हमें इलेक्ट्रोफिलिक सब्सीट्यूशन रिएक्शन अच्छे से दिखा सकता है। ठीक है? तो
इलेक्ट्रोफाइल आ के सब्स्टिट्यूट करेगा। ठीक है? इसको जरा एक मिनट सही कर दूं मैं। यहां पे आप पढ़ोगे
इलेक्ट्रोफिलिक सब्स्टट्यूशन रिएक्शन। इलेक्ट्रोफिलिक सब्स्टट्यूशन रिएक्शन। ठीक है? इसको हटा दे रहे हैं। यहां पे आप
पढ़ने वाले हो सबसे ज्यादा। इलेक्ट्रो फिलिक
सब्सीट्यूशन रिएक्शन। ठीक है? तो आप सबसे ज्यादा यहां पे जो देखते हो वो देखते हो इलेक्ट्रोफिलिक सब्स्टट्यूशन। ठीक? यानी
कि इलेक्ट्रोफाइल आएगा सब्स्टट्यूट कर जाएगा। ठीक? अब यहां पे छह रिएक्शन, पांच रिएक्शन सबसे इंपॉर्टेंट है। जैसे कि सबसे
पहली रिएक्शन आपको पढ़ा चुकी हूं। एनहाइड्रस FeCl3 के प्रेजेंस में मान लो Cl2 ने रिएक्ट कराया तो Cl2 अंदर जाके
लगना चाहेगा। सबसे ज्यादा ऑर्थो और पैरा पोजीशन पे। ये सारी रिएक्शन ऑर्थो और पैरा पे ही होंगी। ठीक है? तो अगर ये रिएक्शन
मैंने करा दी तो क्लोरो बेंजीन जहां पे ऊपर क्लोरीन लगा है इसमें ऑर्थो पोजीशन पे भी क्लोरीन लग सकता है। प्लस इसका एक
प्रोडक्ट ये भी बन सकता है पैरा पे क्लोरीन। ठीक? दोनों प्रोडक्ट बन सकते हैं। ठीक है? अगर आपने H2SO4 के साथ सब
में क्या होगा? इलेक्ट्रोफिलिक सब्स्टिट्यूशन। अब मैं इसका मैकेनिज़्म समझा चुकी हूं। है ना? क्या था वहां? फ्री
रेडिकल मैकेनिज़्म। FeCl3 ने Cl को पकड़ लिया होगा। FeCl4 नेगेटिव और Cl पॉजिटिव ने अटैक किया होगा। इलेक्ट्रोफ़ाइल अटैक कर
रहा है और सब्स्टट्यूट हो रहा है तो इलेक्ट्रोफ़ाइल अंदर गया होगा। है ना? तो एक ऑर्थो प्रोडक्ट बन सकता है, एक पैरा
प्रोडक्ट बन सकता है। हर एक में ऑर्थो और पैरा बनेगा। आप अगर कंसंट्रेटेड नाइट्रिक एसिड इन द प्रेजेंस ऑफ कंसंट्रेटेड
सल्फ्यूरिक एसिड ले जाओ तो नाइट्रेशन होता है। ये क्लोरिनेशन है पहला वाला स्टेप। पहले स्टेप में बेटा हुआ क्लोरिनेशन।
क्लोरिनेशन। ठीक? और दूसरे में आप करा रहे हो नाइट्रिक एसिड के साथ। नाइट्रेशन। नाइट्रेशन।
आप करा सकते हो सल्फोनेशन भी। सल्फ्यूरिक एसिड के साथ केवल सल्फ्यूरिक एसिड लेके सल्फोनेशन।
ठीक? फिर आप करा सकते हो AlCl3 इन द प्रेजेंस ऑफ़ CH3Cl अल्काईलेशन अल्काईलेशन
ठीक आप AlCl3 इन द प्रेजेंस ऑफ़ CH3COCl एसिटलेशन एसाइलेशन सॉरी एसाइलेशन ठीक तो ये आपकी
रिएक्शन हो सकती है। समझते हैं वन बाय वन कोई बात नहीं। चलो भाई तो सबसे पहले तो हम समझ गए मैम क्लोरीनेशन तो हम पहले भी पढ़
के आए हैं। हैलोएकेन में तो उसी के तरीके से होगा। यस सल्फोनेशन कैसे होगा? सॉरी नाइट्रेशन कैसे होगा? नाइट्रेशन होता है
जब आप क्लोरो बेंजीन से नाइट्रिक एसिड इन द प्रेज़ेंस ऑफ़ सल्फोनिक एसिड पास सॉरी इन द प्रेज़ेंस सल्फ्यूरिक एसिड पास कर दो तो
NO3 NO2 वाला ग्रुप अंदर जाएगा। NO2 नाइट्रेशन बेंजीन पे जाके ऑर्थो और पैरा पोजीशन पे ऑर्थो पे NO2 लग जाएगा क्लोरो
बेंजीन से। देखो अगर मैं कहीं क्लोरीन भूल जाऊं तो याद रखना। ठीक है? मैं हर बार भूल जाती हूं इसको। ठीक है? चलो। तो यहां पे
NO2 ग्रुप पैरा पे। ठीक? तो ये भी दोनों बन सकते हैं। चलो अब मैंने करा दिया नेक्स्ट स्टेप में। नेक्स्ट स्टेप में
मैंने क्या करा है? सल्फोनेशन। SO3H ग्रुप अंदर जाता है। केवल सल्फ्यूरिक देखो नाइट्रेशन के टाइम पे HNO3 और सल्फ्यूरिक
एसिड दोनों ले रहे हो। ठीक? और सल्फोनेशन के टाइम पे केवल सल्फ्यूरिक एसिड ले रहे हो। तो यहां पे क्या होगा? SO3H ग्रुप
जाएगा ऑर्थो और पैरा पे। तो बेंजीन है क्लोरो बेंजीन क्लोरो बेंजीन। एक बार ऑर्थो पे जाएगा SO3H प्लस यही बेंजीन पे
पैरा पे जाएगा SO3H ग्रुप। ठीक? ये हो गया। नेक्स्ट क्या है? अल्काईलेशन। अल्काइल ग्रुप अंदर जाएगा। CH3Cl में से
CH3 ग्रुप अंदर जाएगा। अल्काईलेशन। ठीक है? तो बेंजीन पे एक बार जाएगा। एक बार जाएगा बेंजीन पे
ऑर्थो पोजीशन पे CH3 ग्रुप। ठीक? और एक बार जाएगा बेंजीन के पैरा पोजीशन पे CH3 ग्रुप।
ठीक? अल्काईलेशन। एल इसको बोलते हैं फ्रीडल क्राफ्ट अल्काइलेशन। फ्रीडल क्राफ्ट अल्काइलेशन। ये होता है फ्रिडल
क्राफ्ट एसाइलेशन। इसमें CH3 ग्रुप अटैक करता है और इसमें CH3CO ग्रुप अटैक करेगा। एसाइल ग्रुप। इसको बोलते हैं फ्रिडल
क्राफ्ट एसाइलेशन। एसाइल ग्रुप मतलब CH3CO वाला ग्रुप। ठीक? तो इसमें क्या होगा? बेंजीन क्लोरो बेंजीन था। हां मैम था। एक
बार यहां पे जाएगा COCH3 प्लस एक बार पैरा पोजीशन पे बनेगा। तो बेंजीन पे
Cl लगा हुआ है ऑलरेडी और यहां पे लग जाएगा COCH COCH3
ग्रुप। ठीक? एसाइलेशन हो गया। अच्छा एक चीज़ याद रखना ये सभी में जो पैरा वाले प्रोडक्ट्स बना रहे हो ना आप इन सभी में
जो आप पैरा वाले प्रोडक्ट्स बना लो ना दे आर मेजर प्रोडक्ट्स। सभी में पैरा वाले मेजर प्रोडक्ट्स हैं।
और जो बच गए वो सारे माइनर प्रोडक्ट्स हैं। ऑर्थो वाले माइनर होते हैं और पैरा वाले
सारे के सारे मेजर होते हैं। याद रखना ये बात। सभी में क्या हुआ? एक इलेक्ट्रो फाइल जनरेट किया हमने। E पॉजिटिव जनरेट किया।
सभी में हमने इ पॉजिटिव जनरेट किया है ना? जैसे यहां पे अ यहां पे Cl पॉजिटिव आया था। यहां पे NO2 पॉजिटिव आया था। है ना?
यहां पे क्या आया? SO3H पॉजिटिव आया। ठीक? इलेक्ट्रो फाइल है सब में। यहां पे CH3 पॉजिटिव आया। है ना? Cl को उसने पकड़ लिया
होगा। CH3 निकला। यहां पे Cl को पकड़ लिया। क्या निकला? CH3CO पॉजिटिव। है ना? तो हर बार इलेक्ट्रोफ़ाइल आ के सब्सीट्यूट कर रहा
है। इलेक्ट्रोफिलिक सब्सीट्यूशन रिएक्शन है सारी। तो ये हमारी बहुत अच्छी रिएक्शन हो सकती है। इलेक्ट्रोफ़ाइल बड़े अच्छे से
रिएक्ट करेगा। सिंपल रीज़न। चार रीज़न जो बताएं न्यूक्लियोफिलिक क्यों नहीं होते हैं? वही रीज़न है कि इलेक्ट्रोफिलिक क्यों
होते हैं? भाई उसमें डीलोकलाइड इलेक्ट्रॉन है। आसानी से रिएक्ट कर जाएगा। सबसे बेसिक तो एक रूल यही है। है ना? चलो भाई। लास्ट
कांसेप्ट पॉलीहैलोजन कंपाउंड्स। पॉलीहैलोजन कंपाउंड्स मतलब एक से ज्यादा हैलोजन रखने वाले कंपाउंड्स। है ना?
थ्योरेटिकल कांसेप्ट है। तो इसको समराइज करके समझाती हूं। सबसे पहले आता है हमारे पास क्लोरोफॉर्म। क्लोरोफॉर्म याद है भाई?
दे धना धन मूवी याद है? उसमें माइंड में बेहोश कर रहा होता है। समझा? तू समझा नहीं। ठीक है? आई गेस तू समझ गया भाई। तो
यहां पे क्या है? क्लोरोफॉर्म। क्लोरोफॉर्म क्या होता है? क्लोरोफॉर्म बेहोश-वहोश करने के लिए। है ना? पहले यूज़
करते थे। आज के टाइम पे कई जगह पे इसको बैन कर दिया गया। इसकी जगह अदर केमिकल्स को यूज़ किया जाता है। ठीक है? काफी
हार्मफुल इससे मतलब इससे कई दिक्कतें भी आ सकती हैं क्योंकि ठीक है? अगर इसको इन्हेल किया जाए, सॉल्व किया जाए तो कई सारी
प्रॉब्लम्स भी हो सकती हैं। तो आज के टाइम पे इसको इतना यूज़ नहीं कर सकते। ठीक है? तो इट इज़ अ कलरलेस वोलेटाइल लिक्विड होता
है जिसको एज अ सॉल्वेंट बहुत सारी इंडस्ट्री में तो आज भी यूज़ होता है ना और अगर इन्हेल या स्वॉलो कर लिया जाए तो इसको
बहुत ज्यादा दिक्कत आ सकती है। अच्छा क्यों आती है आपको पता है? क्योंकि इससे बहुत हार्मफुल केमिकल गैस निकलती है जो
होती है फॉस् जीन। फॉस् जीन। अगर ये क्लोरोफॉर्म ऑक्सीजन से रिएक्ट करता है ना तो ये COCL2 बनाता है। बोर्ड्स में
क्वेश्चन पूछा जा सकता है। फॉस् जीन फर्स्ट जीन इसको बोलते हो। ठीक है? और साथ ही साथ HCL बाहर निकलता है। ठीक है? फिर
आइडोफॉर्म होता है। येलो कलर का होता है। क्रिस्टलाइन सॉलिड का होता है। एक हॉस्पिटल टाइप स्मेल होती है इसकी। है ना?
हॉस्पिटल की स्मेल आती है ना वैसी आयडोफॉर्म। ठीक है? तो इसकी बड़ी अनप्लेज़ेंट स्मेल होती है। फिर आता है
टेट्रा क्लोरोथेन। ये कलरलेस ऑयली होता है लिक्विड एंड सिल्की स्मेल होती है इसकी। ठीक है? ग्रीन लिक्विड के नाम से भी इसको
कई जगह जानते हैं। फ्रियों्स क्लोरोफ्लोरोकार्बन होते हैं बेटा मिथेन और इथेन के। है ना? ओज़ोन लेयर डिप्लीशन की
वजह से। जैसे F12 इसमें बड़ा इंपॉर्टेंट होता है। एक है ना? तो होता है फ्रीऑ्स। बेसिक था। अच्छा एक आता है डाई क्लोरो
डाईफिनाइल ट्राई क्लोरो इथेन डी डी टी ए वेरीेंट डी डी टी ए डाई क्लोरो डाईफिनाइल ट्राई क्लोरो इथेन डी डी टीटीए इसका
स्ट्रक्चर भी इंपॉर्टेंट है फुल फॉर्म भी इंपॉर्टेंट है। ठीक है? इसको कीड़े वगैरह के छिड़काव में यूज़ किया जाता है।
इंसेक्ट्स को खत्म करने के लिए यूज़ किया जाता है। अ सिंथेटिक इंसेक्टिसाइड है ये। दैट इज़ अ पार्ट ऑफ़ ऑर्गेनिक हैलोजन
कंपाउंड फैमिली कलरलेस होता है। क्रिस्टलाइन होता है। ऑलमोस्ट अरलेस होता है। ठीक है? स्ट्रक्चर इज़ आल्सो वेरीेंट।
डीडीटीए का कैसे बनता है? डाई क्लोरो डाईफिनाइल यानी कि दो फिनाइल ग्रुप है। मतलब फिनाइल मतलब समझ गए ना? फिनाइल मतलब
तो तुम समझ ही गए भाई ये है ना ऐसे दो फिनाइल ग्रुप है। है ना? और इससे क्लोरीन लगे हैं। डाई क्लोरो डाईफिनाइल फिर ट्राई
क्लोरो इथेन। इथेन मतलब कार्बन कार्बन और ट्राई क्लोरो मतलब ऐसे क्लोरीन लगे होंगे। है ना? हाइड्रोजन फिल कर दो। ये तो फिल
है। इसमें एक हाइड्रोजन होगा। है ना? इस वाले कार्बन पे। तो ये हो गया फिनाइल ग्रुप। ठीक? तो ये होता है डाई क्लोरो।
डाईफिनाइल ट्राई क्लोरो इथेन। ठीक है? डाई क्लोरो डाईफिनाइल ट्राई क्लोरो इथेन उससे हाइड्रोजन लगाया मैंने। आप चाहो तो ऊपर
लिख दो उसको। ठीक है? मतलब अगर आप कंफ्यूज हो रहे हो तो इसको यहां पे लिख दो। ठीक? तो डाई क्लोरो डाईफिनाइल
डाई क्लोरो डाईफिनाइल ट्राई क्लोरो था ना? तीन क्लोरो और फिर इथेन डी डी टी ए डाई क्लोरो डाईफिनाइल ट्राई क्लोरो इथेन
वेरीेंट ऑर्गेनिक कंपाउंड। तो ये होता है इसका स्ट्रक्चर। ऑल राइट दैट्स इट। दैट्स ऑल अबाउट अपना हैोएकेन एंड हेलो एरीनंस।
आई होप सो आपको ये चैप्टर बहुत अच्छे से समझ में आया होगा। मैंने इसको टोटल डिटेल में जा के समझाया है। कोई भी रिएक्शन, कोई
भी मैकेनिज्म जो भी आपके कोर्स में सब समझा दिया है बहुत अच्छे से। ठीक है? बाकी आप इससे रिलेटेड क्वेश्चंस चाहते हो या
कुछ कुछ और डिमांड है तुम्हारी तो तुम बता देना यार चैट बॉक्स में। और अब मिलेंगे हम नेक्स्ट वन शॉट के साथ। अगर आपको ये
चैप्टर बहुत अच्छे से समझ में आया है ना? और मुझे इस चीज़ से ये भी पता चल जाता है किसने-किसने एंड तक वीडियो देखा है। तो
भाई क्लियर जरूर लिख देना चैट बॉक्स में क्योंकि हम क्लियर करने तो आए ही नहीं क्लियर तो हर जगह होता है। हम करने आए थे
क्लियर। अपडेटेड वर्शन ऑफ़ क्लियर। यानी कि इतने अच्छे से समझ में आ गया कि हम किसी भी स्टूडेंट को मतलब अपने दोस्तों को भी
समझा सकते हैं। समझ रहे हो? समझ गए मेरे ख्याल से आप। ठीक है? तो खत्म। टाटा बाय-बाय। फिर मिलेंगे अगली क्लास में अगले
वीडियो के साथ, अगले वन शॉट के साथ। और इससे रिलेटेड आपको और भी कुछ टॉपिक वाइज़ या कुछ भी चाहिए तो बता जरूर देना। सी यू
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