केमिकल बॉन्डिंग की बुनियादी बातें
- ऑक्टेट रूल: एटम तब स्थिर होते हैं जब उनकी बाहरी शेल में 8 इलेक्ट्रॉन होते हैं। नोबल गैस (He को छोड़कर) में यही पैटर्न होता है।
- बॉन्ड बनने के चार चरण:
- ऑक्टेट: एटम अपनी ऑक्टेट पूरी करने के लिए इलेक्ट्रॉनों का लेन-देन या साझा करते हैं।
- फोर्स ऑफ अट्रैक्शन: विपरीत चार्ज वाले आयन एक-दूसरे को आकर्षित करते हैं।
- लोअरिंग द एनर्जी: जब आयन पास आते हैं, तो अतिरिक्त ऊर्जा बाहर निकल जाती है (जैसे लेटिस एनर्जी)।
- स्टेबिलिटी: ऊर्जा कम होने पर एटम स्थिर हो जाते हैं।
आयनिक (इलेक्ट्रोवेलेंट) बॉन्ड
- परिभाषा: एक इलेक्ट्रोपॉज़िटिव मेटल और एक इलेक्ट्रोनेगेटिव नॉन-मेटल के बीच इलेक्ट्रॉनों का पूर्ण स्थानांतरण।
- उदाहरण: सोडियम (Na, 2,8,1) अपना एक इलेक्ट्रॉन क्लोरीन (Cl, 2,8,7) को देता है, जिससे Na⁺ और Cl⁻ बनते हैं। Na₂S के लिए दो Na परमाणु अपना-अपना इलेक्ट्रॉन S को देते हैं।
- गुण:
- क्रिस्टलीय ठोस होते हैं।
- उच्च गलनांक और क्वथनांक (मजबूत इलेक्ट्रोस्टैटिक बलों के कारण)।
- ठोस अवस्था में बिजली के कुचालक, लेकिन पिघली हुई अवस्था में सुचालक।
कोवेलेंट बॉन्ड
- परिभाषा: दो इलेक्ट्रोनेगेटिव नॉन-मेटल्स के बीच इलेक्ट्रॉनों का आपसी साझाकरण।
- उदाहरण:
- H₂: दो हाइड्रोजन परमाणु एक-एक इलेक्ट्रॉन साझा करते हैं (सिंगल बॉन्ड)
- O₂: प्रत्येक ऑक्सीजन (2,8,6) दो-दो इलेक्ट्रॉन साझा करता है (डबल बॉन्ड)
- N₂: प्रत्येक नाइट्रोजन (2,8,5) तीन-तीन इलेक्ट्रॉन साझा करता है (ट्रिपल बॉन्ड)
- गुण:
- प्रायः गैस, तरल या नरम ठोस होते हैं।
- कम गलनांक और क्वथनांक (कमज़ोर वैन डर वाल्स बलों के कारण) अपवाद: डायमंड, सिलिका।
- नॉन-पोलर होने के कारण बिजली के कुचालक।
कोऑर्डिनेट बॉन्ड
- परिभाषा: एक प्रकार का कोवेलेंट बॉन्ड जहाँ एक परमाणु इलेक्ट्रॉनों का एकाकी जोड़ा (लोन पेयर) प्रदान करता है, और दूसरा परमाणु उसे स्वीकार करता है।
- उदाहरण: NH₃ में नाइट्रोजन के पास एक लोन पेयर होता है, जो H⁺ आयन को देकर NH₄⁺ बनाता है।
लेटिस एनर्जी
- परिभाषा: वह ऊर्जा जो तब मुक्त होती है जब एक मोल आयनिक यौगिक बनाने के लिए धनायन और ऋणायन संघनित होते हैं।
- निर्भरता:
- आयनों पर आवेश: आवेश जितना अधिक (जैसे +3), लेटिस एनर्जी उतनी ही अधिक। AlCl₃ की लेटिस एनर्जी NaCl से अधिक होती है।
- आयनों के बीच की दूरी: दूरी जितनी कम (आयन का आकार जितना छोटा), लेटिस एनर्जी उतनी ही अधिक। LiF की लेटिस एनर्जी LiI से अधिक होती है।
लुईस संरचना (इलेक्ट्रॉन-डॉट संरचना)
- नियम: केवल वैलेंस शेल के इलेक्ट्रॉनों को दर्शाया जाता है। आंतरिक शेल (कोर) के इलेक्ट्रॉन कभी बॉन्डिंग में भाग नहीं लेते।
- उदाहरण: Na (·), Mg (··), Cl (·······), Ca (··) आदि।
वैलेंसी और कॉम्बिनिंग कैपेसिटी
- परिभाषा: किसी एटम की संयोजन क्षमता, जो वैलेंस इलेक्ट्रॉनों की संख्या पर निर्भर करती है।
- निर्धारण:
- यदि वैलेंस इलेक्ट्रॉन ≤ 4, तो वैलेंसी = वैलेंस इलेक्ट्रॉनों की संख्या (देने की प्रवृत्ति)
- यदि वैलेंस इलेक्ट्रॉन > 4, तो वैलेंसी = 8 - वैलेंस इलेक्ट्रॉनों की संख्या (लेने की प्रवृत्ति)
- यदि वैलेंस इलेक्ट्रॉन = 4, तो वैलेंसी = 4 (दोनों समान)
- नोबल गैसों की वैलेंसी = 0
बॉन्ड के प्रकार (साझाकरण के आधार पर)
- सिंगल बॉन्ड: एक इलेक्ट्रॉन जोड़ा साझा होता है (H-H)
- डबल बॉन्ड: दो इलेक्ट्रॉन जोड़े साझा होते हैं (O=O)
- ट्रिपल बॉन्ड: तीन इलेक्ट्रॉन जोड़े साझा होते हैं (N≡N)
- नोट: चार बॉन्ड (क्वाड्रुपल) नहीं बनते क्योंकि इलेक्ट्रॉनों के बीच प्रतिकर्षण बहुत अधिक होता है।
आयनिक और कोवेलेंट यौगिकों की तुलना
| गुण | आयनिक | कोवेलेंट | |---|---|---| | अवस्था | ठोस (क्रिस्टलीय) | गैस, तरल, या नरम ठोस | | गलनांक/क्वथनांक | उच्च | निम्न | | विद्युत चालकता | ठोस में कुचालक, पिघल में सुचालक | कुचालक | | बंधन बल | मजबूत इलेक्ट्रोस्टैटिक | कमज़ोर वैन डर वाल्स |
अधिक जानकारी के लिए, ऑर्गेनिक केमिस्ट्री की बेसिक समझ | कार्बन, कोवेलेंट बॉन्ड, हाइड्रोकार्बन और कार्बन एंड इट्स कंपाउंड: कोवेलेंट बॉन्ड, एल्केन-एल्कीन-एल्काइन, IUPAC नामकरण पढ़ें।
हाय एवरीवन। तुम लोग बहुत वेट कर रहे थे केमिकल बॉन्डिंग। एंड फाइनली गाइस वी आर हियर विथ द नेक्स्ट वन शॉट ऑफ़ केमिकल
बॉन्डिंग। अगर तुम्हारे मन में कोई भी डाउट आ रहा है कि भैया ये चैप्टर समझ में नहीं आ रहा बहुत लेंग्थी चैप्टर है।
क्वेश्चंस कैसे होंगे? अगर तुम्हें कुछ भी समझ में नहीं आ रहा है तो दिस इज द फाइनल वन शॉट जिसको देखने के बाद में आई गारंटी
यू कि इस चैप्टर का कोई भी क्वेश्चन तुमसे नहीं छूटेगा। और बहुत ही बेस्ट एक्सप्लेनेशन के साथ में जो कि हर बार
होता है। द लेगसी ऑफ़ एपीएम विल कंटिन्यू इन दिस वन शॉट एज वेल। आई प्रॉमिस। तो इस वनशॉट में हम कर रहे होंगे सारे टॉपिक्स
की डिटेल एक्सप्लेनेशन। अगर तुम्हारे मन में कोई भी डाउट हो वो सारे डाउट आज निकल जाने वाले हैं। बहुत सारे क्वेश्चंस
प्रैक्टिस करेंगे इस वन शॉट के अंदर। तो चलो बिना किसी देरी के शुरू करते हैं। लेकिन हां एस ऑलवेज जैसे मैं तुमसे हर बार
बोलता हूं। तो अगर रेडी हो तो कमेंट में एपीएम लिख देना बिल्कुल मत भूलना। और जल्दी से आग लगा दो। जॉर्ज को कर दो
बिल्कुल हाई। क्योंकि अब हम करने वाले हैं अगले ढाई से 3 घंटे के अंदर इस केमिकल बॉन्डिंग की शानदार एक्सप्लेनेशन के साथ
में कंप्लीट करने वाले हैं इस चैप्टर को। चलिए शुरू करते हैं। आ जाओ जल्दी से वन शॉट के अंदर। तो चलिए स्टार्ट करते हैं
अपने इस वन शॉट को एंड बिलीव मी के जब तुम इस वन शॉट को अब देख रहे होंगे ना तुम्हें इस संसार का सबसे ज्यादा मजा आने वाला है।
ऐसा मैं तुमसे प्रॉमिस कर रहा हूं पहले ही कि तुम्हें बहुत मजा आएगा जब तुम इस चैप्टर को मेरे साथ में पढ़ोगे। जब-जब मैं
बोलूं एपीएम लिखना बिल्कुल मत भूलना। तो चलिए स्टार्ट करते हैं। सबसे पहले क्वेश्चन तुम्हारे मन में आना चाहिए। भैया
व्हाट इज केमिकल बॉन्डिंग या केमिकल बॉन्डिंग होता क्या है? अगर तुम्हें केमिकल बॉन्डिंग को समझना है गाइस तो
तुम्हारे सामने मैं चार वर्ड्स रखूंगा। उन चार वर्ड्स में पूरा चैप्टर तुम्हें समराइज करूंगा। ध्यान से देखना बहुत
जबरदस्त तरीके से मजा आएगा। तो अगर तुम्हें केमिकल बॉन्डिंग को समझना है तो सबसे पहली बात होती है भैया हमारी क्या?
ऑकटेट। क्या होती है हमारी? पहली चीज ऑकटेट होती है। अच्छा भैया ऑकटेट हो गई। ऑक्टेट क्या होती है बताऊंगा। उसके बाद
ऑक्टेट के बाद तुम्हारा जो अगला वर्ड आएगा वो आएगा भैया फोर्स ऑफ अट्रैक्शन। क्या आएगा? फोर्स ऑफ अट्रैक्शन आएगा। बिल्कुल
सही बात है। फोर्स ऑफ अट्रैक्शन आएगा। ये भी आ गया भैया। ठीक है? फोर्स ऑफ़ अट्रैक्शन आ गया। फोर्स ऑफ अट्रैक्शन के
बाद में यहां पे आएगी एक टर्म स्टेबिलिटी। क्या टर्म आएगी? स्टेबिलिटी से पहले लिख दो लोअरिंग द एनर्जी। स्टेबिलिटी से पहले
लिख दो लोअरिंग द एनर्जी। अच्छा भैया ये भी लिख दिया। लोवरिंग द एनर्जी लिख दिया। और उसके बाद जो अपना चौथा वर्ड है ये है
भाई साहब स्टेबिलिटी। अगर तुम्हें समझना है रियलिटी में केमिकल बॉन्डिंग क्या तो बस ये चार वर्ड्स हैं जो तुम्हें इस पूरे
चैप्टर को समराइज करके रख देंगे और पूरा का पूरा चैप्टर इन्हीं चार्ट के चार वर्डों के अराउंड घूमने वाला है। ध्यान से
देखना। तो सबसे पहले मैं शुरुआत करता हूं अपने नोबल गैसेस से। चलिए तो सभी को ये पता है कि भैया नोबल गैसेस क्या होते हैं?
नोबल गैसेस वो होते हैं भैया जो ग्रुप हमारे 18 एलिमेंट के सारे के सारे एलिमेंट्स हैं। माना जाता है दे आर वन ऑफ
द मोस्ट स्टेबल एलिमेंट्स इन द होल पीरियडिक टेबल। दे आर इनर्ट, दे आर नॉन रिएक्टिव। और ये ऐसा क्यों माना जाता है?
क्योंकि जब हम उनकी इलेक्ट्रॉनिक कॉन्फ़िगरेशन देखते हैं तो हीलियम के केस में तो भाई अब अगर मैं एटॉमिक नंबर की बात
करूं तो यहां पे होता है दो ये होता है 10 ये होता है 18 ये होता है 36 ये होता है 54 और ये होता है 86 है ना मैंने तुम्हें
स्ट्रक्चर ऑफ एटम में भी करके बताया है ये मैंने तुम्हें पीरियडिक क्लासिफिकेशन में भी बताया तुम्हें अब तक याद हो गया होगा
ठीक है अगर मैं इलेक्ट्रॉनिक कॉन्फ़िगरेशन करूं इसमें तो भाई दो इलेक्ट्रॉन है तो दो ही आएंगे यहां अगर मैं करूंगा तो आएगा 2 8
यहां अगर मैं करूंगा तो आएगा 2 8 {कॉमा} 8 यहां अगर मैं इलेक्ट्रॉनिक कॉन्फ़िगरेशन करूंगा तो 2 8 18 बहुत अमेजिंग है ये बात।
उसके बाद 2 8 ये है इसकी इलेक्ट्रॉनिक कॉन्फ़िगरेशन। इसकी करूंगा तो आएगा। 2मा 8
32 8। अब सरप्राइजिंगली सारे साइंटिस्ट लोगों की भाई साहब बुद्धि ख़राब हो गई। ने जब ये देखा कि यार अबे सारे एलिमेंट्स को
अगर देखोगे नोबल गैस के तो हीलियम को छोड़ के क्योंकि वहां पे दो ही इलेक्ट्रॉन्स हैं। सब में आखिरी शेल में आठ इलेक्ट्रॉन
बैठे हैं। भाई यहां देखोगे तो आखिरी शेल में आठ हैं। आठ हैं आठ हैं। आठ हैं आठ हैं। याद आ गया वो लाल है। लाल है। ठीक
है? बहुत बढ़िया। तो जब साइंटिस्ट लोगों ने देखा कि नोबल गैस कैसी हैं भाई? हाइली स्टेबल है। कैसी हैं? हाइली स्टेबल हैं।
सारी की सारी हाइली स्टेबल हैं। नॉन रिएक्टिव है। और जब ये देखा कि सब के सब में आखिरी शेल में वैलेंस शेल कहते हैं
आखिरी शेल को। उनमें सब में ओक्टेट पूरी हो रखी है। तो मान लिया गया कि एक्चुअली में वही एटम स्टेबल हो सकता है जिसकी
आखिरी शेल में आठ इलेक्ट्रॉन्स होंगे। और इसी को नाम दे दिया गया भैया ऑक्टेट रूल। इसको क्या नाम दिया? ऑक्टेट रूल नाम दिया।
पेपर में दो नंबर में आ सकता है कि भैया डिफाइन ऑक्टेट रूल। ओक्टेट रूल क्या होता है? आपको वो लिखना है पहले पूरा का पूरा।
और फिर बताना है। अकॉर्डिंग टू दिस रूल डिफरेंट स्पीशीज़ कंबाइंड। इस रूल के अकॉर्डिंग डिफरेंट स्पीशीज आपस में कंबाइन
होती है टुगेदर आइदर बाय कंप्लीट ट्रांसफर या फिर म्यूचुअल शेयरिंग ऑफ इलेक्ट्रॉन्स इन ऑर्डर टू गेट मैक्सिमम स्टेबिलिटी या
फिर इन ऑर्डर टू गेट कंप्लीट देयर ऑक्टेट ऑक्टेट का मतलब है आठ इलेक्ट्रॉन अगर आप 1s2 में लिखोगे तो ns2 np6 6 + 2 आठ
इलेक्ट्रॉन टू गेट मैक्सिमम स्टेबिलिटी एंड हेंस मिनिमम एनर्जी इज कॉल्ड एज़ ऑक्टेट रूल अभी समझ में नहीं आ रहा होगा
तुम्हारा भाई खड़ा है समझा देगा टेंशन मत लो देखो यार यहां पे सिंपल सी बातें ये कही जा रही है कि ऑक्टेट रूल ये कहता है
कि हर एक एलिमेंट इसलिए कंबाइन होता होगा क्योंकि उसको भी नोबल गैस की तरह अपनी ऑक्टेट पूरी करनी है। इसका एक बेहतरीन
एग्जांपल दूंगा। भई मेरे पास एक सोडियम है। हां भैया ये सोडियम है। अगर तुम सोडियम देखोगे तो ये होता है 2 8 1 बहुत
बढ़िया। इसकी आउटर शेल में अभी के लिए एक इलेक्ट्रॉन है। अच्छा! और ये भी चाहता है कि मेरी ऑक्टेट पूरी हो जाए। तो मुझे एक
बात बताओ इसकी ऑक्टेट पूरी करने के लिए ये यहां पे सात इलेक्ट्रॉन या तो लेगा या फिर एक इलेक्ट्रॉन दे देगा। भैया सात लेगा तो
आठ हो जाएंगे और अगर एक दे देगा तो केवल और केवल यहां तक की कॉन्फ़िगरेशन बचेगी उसमें आखिरी शैल में आठ इलेक्ट्रॉन हैं।
क्या आसान है सोडियम के लिए? अरे भैया सब लोग जानते हैं सात देना या फिर एक लेना भैया सिंपल सी बात है कि सात लेना बहुत
कठिन है। एक देना आसान है। नंबर्स में देखूंगा। तो सोडियम क्या करता है? एक इलेक्ट्रॉन देने की कोशिश करता है। बहुत
बात समझ में आ रही है? ठीक है? अब वहीं पे आऊं मैं अगर यहां पे मेरे सामने क्लोरीन घूम रहा है भाई साहब। क्लोरीन होता है
हमारा 2 {कॉमा} 8 {कॉमा} 7। मतलब इसकी वैलेंस शेल में सात इलेक्ट्रॉन्स मैंने बना दिए। बहुत बढ़िया। अब यहां पे क्लोरीन
भी चाहता है मेरी आखिरी शेल में आठ इलेक्ट्रॉन हो जाए उसके लिए क्या करेगा भैया? या तो सात देगा या फिर एक लेगा।
बताइए क्या आसान है भैया? एक लेना आसान है। तो अब ध्यान से देखोगे तो सोडियम के लिए एक देना आसान है। क्लोरीन के लिए एक
लेना आसान है। रब ने बना दी जोड़ी, एक सोडियम, एक क्लोरीन। बात समझ में आ रही है? तो यहां पे सोडियम क्या करेगा? अपना
एक इलेक्ट्रॉन इसको देने की कोशिश करेगा। और ये ऐसा क्यों कर रहा है? सोडियम ऐसा इसलिए कर रहा है क्योंकि ओक्टेट रूल ने
बोला है कि भैया आठ इलेक्ट्रॉन होंगे तो मजा आएगा। क्लोरीन ऐसा क्यों कर रहा है? क्योंकि ऑक्टेट रूल ने बोला है भैया आठ
इलेक्ट्रॉन होंगे तो मजा आ जाएगा। दिल खुश हो जाएगा। क्योंकि ओक्टेट रूल में हमें कुछ ऐसा ही दिखाई दे रहा है। इस वजह से
ऑक्टेट को पूरा करने के लिए इलेक्ट्रॉन्स या फिर आप कह दो एटम्स जो होते हैं वो अपने इलेक्ट्रॉन का लेनदेन करते हैं। जो
कि यहां पे लिखा है ट्रांसफरिंग ऑफ इलेक्ट्रॉन। और कभी-कभी लेन देन ना हो पाए तो भैया म्यूचुअल शेयरिंग भी कर लेते हैं,
बांट भी लेते हैं हम आगे अभी पढ़ने वाले हैं इस चैप्टर के अंदर। तो ये एग्जांपल है कंप्लीट ट्रांसफरिंग ऑफ इलेक्ट्रॉन का।
सोडियम अपना एक इलेक्ट्रॉन दे देगा और जब भी कोई इलेक्ट्रॉन देता है गंदी चीज देता है उसके ऊपर पॉजिटिव चार्ज आता है और अब
इसकी वैलेंस शेल में एक भी इलेक्ट्रॉन नहीं बचा क्योंकि इसकी वैलेंस शेल हो गई। यहां तक टू कॉमाइट फुल्ली फिल्ड हो गई। तो
इसकी आखिरी शेल का इलेक्ट्रॉन तो वो भाग गया यहां से। और अगर मैं बात करूं क्लोरीन की तो क्लोरीन में सात इलेक्ट्रॉन वैलेंस
शेल में यानी कि आउटर मोस्ट शेल में पहले से थे। अब एक और बढ़ गया और अब इसके ऊपर आ गया एक नेगेटिव चार्ज। क्यों? क्योंकि भाई
साहब इसने गंदी चीज को लिया है। हमने ऑलरेडी पढ़ रखा है ये अच्छी चीज गंदी चीज क्या होती है? ठीक है भैया। तो यहां से
देखोगे तो पहला वर्ड हमारा जस्टिफाई होता है कि ऑक्टेट की वजह से केमिकल बॉन्डिंग होती है। हां जी भैया जस्टिफाई हो गया। अब
आते हैं दूसरे पे। जब na पॉजिटिव बना नेगेटिव बना। दोनों है पॉजिटिव और नेगेटिव। दोनों के बीच में प्यार मोहब्बत
की बात होगी। फोर्स ऑफ अट्रैक्शन आ जाएगी। दोनों एक दूसरे को खींचने लगेंगे। तो यहां से दोनों जब एक दूसरे को खींचेंगे तो भैया
फोर्स ऑफ अट्रैक्शन आ जाएगी। मेरा दूसरा वर्ड होता है जस्टिफाई कि फोर्स ऑफ अट्रैक्शन भी है। अच्छा अब ध्यान से देखना
बहुत जबरदस्त बात बताऊंगा मैं तुम्हें। यहां पे अगर तुम ध्यान से देखोगे तो सोडियम पॉजिटिव क्लोरीन नेगेटिव को खींच
रहा है। किसी एनर्जी से खींच रहा होगा। क्लोरीन नेगेटिव सोडियम पॉजिटिव को एक एनर्जी से खींच रहा होगा। दोनों के अंदर
एनर्जी है खींचने वाली फोर्स ऑफ अट्रैक्शन वाली। लेकिन जब मैं इनको पास-पास ले आऊंगा इस खींचने की वजह से तो ये बन जाएगा NaCl
कंडेंस्ड फॉर्म में चिपकने के फॉर्म में। क्या अब एक दूसरे को खींचेंगे? भई अब क्यों नहीं खींच रहे? पहले तो खींच रहे थे
क्योंकि पहले दूर-दूर थे तो दूसरे पे फोर्स लगा देते हैं। अब पास-पास आ गए। तो क्या अब खींच रहे? नहीं। क्या अब खींचने
वाली एनर्जी यानी कि पोटेंशियल एनर्जी ड्यू टू चार्ज। इसके अंदर बहुत एनर्जी है पोटेंशियल एनर्जी ड्यू टू चार्ज। क्योंकि
ये खींच रहा है सामने वाले को। इसके अंदर बहुत सारी एनर्जी है पोटेंशियल एनर्जी ड्यू टू चार्ज। क्योंकि ये सामने वाले को
खींच रहा है। क्या अब खींचेंगे? नहीं खींचेंगे। तो अब वो एनर्जी कहां चली गई? तो जो भी एनर्जी है एनर्जी कैन नाइदर बी
क्रिएटेड नॉर बी रेस्ट्रॉयड। जो भी वो एनर्जी थी वो सारी बाहर निकल जाएगी। वो सारी बाहर निकल जाएगी। और उसे ही कहते हैं
लोवरिंग द एनर्जी। क्या कहते हैं? लोवरिंग द एनर्जी। अगर आपको केमिस्ट्री को, केमिकल बॉन्डिंग को बहुत प्यार से समझना है तो एक
बात हमेशा ध्यान रखना कि जिस दिन मैं स्टेबल हो जाऊंगा उस दिन मुझे ऐसे यहां पे खड़े होकर के चिल्लाने की जरूरत नहीं
पड़ेगी। क्यों? मैं अपनी सारी एनर्जी को रखूंगा साइड में। भाई साहब आराम से आराम करेंगे अब। एनर्जी गई भाड़ में। बोलूंगा
कि नहीं बोलूंगा? तो अगर आपका कोई भी मॉलिक्यूल स्टेबल होता है तो उसके पास जो भी एनर्जी होती है वो सबको बाहर फेंक देता
है क्योंकि अब उसको रिएक्शन नहीं करनी। अब वो रिएक्ट नहीं करना चाहता। अगर एनर्जी होगी तो कुछ ना कुछ तो करना पड़ेगा। अब वो
करना ही नहीं चाहता क्योंकि वो तो स्टेबल है। तो वो एनर्जी को बाहर फेंक देता है। तो पहला हुआ केस ऑक्टेट का। दूसरा हुआ
फोर्स ऑफ़ अट्रैक्शन का फोर्स ऑफ़ अट्रैक्शन का। और जब पास आ गए तो यहां केस बन गया लोवरिंगदा एनर्जी का। जो भी एनर्जी थी
अपने अंदर वो सारी की सारी बाहर फेंक दी। इस एनर्जी को आयनिक बॉन्ड। अभी आगे देखेंगे। चलो इसको लेटिस एंथैल्पी कहते
हैं। अभी आगे बताऊंगा। क्या आ गया? लो ब्रिंग एनर्जी। जैसे ही सारी एनर्जी बाहर निकली। अब इसके अंदर एनर्जी नहीं है तो
क्या ये रिएक्ट करेगा? नहीं करेगा। क्या करेगा? शांति से बैठेगा। मतलब फाइनली इसके पास आ गई है भैया स्टेबिलिटी। आशा करता
हूं ये चार वर्ड्स ने आपके केमिकल बॉन्डिंग के कांसेप्ट को आपके भेजे में डाल दिया होगा। ऑक्टेट रूल समझ में आ गया?
हमारी बेसिक केमिकल बॉन्डिंग की बातें समझ में आ गई। अगर सब कुछ समझ में आ गया जल्दी से एक बार चैट बॉक्स में भाई साहब एपीएम
लिख देंगे। भैया कोई दिक्कत वाली बातचीत नहीं है। मजा आ गया है भैया। आग लगा देंगे। जल्दी से बोल दो क्या सारी बातें
यहां तक सभी को क्लियर है? सिंपल सी बात है। ऑक्टेट के लिए इलेक्ट्रॉन्स का लेनदेन करेंगे। जिस वजह से आ जाएगा भैया यहां पर
चार्ज। चार्ज से होती है फोर्स ऑफ अट्रैक्शन। फोर्स ऑफ अट्रैक्शन आ गई। फोर्स ऑफ अट्रैक्शन आ गई। जब पास-पास
जाएंगे तो जो भी एक्स्ट्रा एनर्जी है जो भी उनके अंदर एनर्जी है सबको बाहर निकालेंगे। लोवरिंग द एनर्जी हो गई। और
जैसे ही एनर्जी बाहर गई अब शांति से बैठ जाएंगे। काम नहीं करेंगे मतलब स्टेबिलिटी आ गई है। ये हुआ तुम्हारा बेसिक
इंट्रोडक्शन ऑफ केमिकल बॉन्डिंग। अब बहुत बढ़िया। चलिए जी। अब बात कर लेते हैं। मैं यहां पे इस चैप्टर में ना बहुत बार
एलिमेंट्स को रिप्रेजेंट करूंगा। तो एलिमेंट्स को सही तरीके से रिप्रेजेंट करने का तरीका जो है वो हमें कॉसल लुईस
नाम के मतलब एक लुईस नाम के साइंटिस्ट ने बताया। कौशल अलग है। है ना? लुईस नाम के एक साइंटिस्ट ने बताया। तो लुईस सिंबल ऑफ़
एलिमेंट्स। तो एलिमेंट्स आर रिप्रेजेंटेड बाय सराउंडिंग देयर सिंबल्स विद देयर वैलेंस शेल इलेक्ट्रॉन्स। मतलब क्या हुआ?
इसका ये हुआ मतलब। मान लो आपके पास कोई भी इलेक्ट्रॉन है। लेट्स सपोज आपके पास सोडियम है, मैग्नीशियम है, सल्फर है,
क्लोरीन है, उसके बाद आपके पास लेट्स सपोज़ कैल्शियम है। ये सारे जो भी एलिमेंट्स हैं अगर आप इनकी एक रिप्रेजेंटेशन करना चाहते
हो चैप्टर में, तो आपको सबसे पहले इनकी इलेक्ट्रॉनिक कॉन्फ़िगरेशन लिखनी है। क्या लिखनी है? इलेक्ट्रॉनिक कॉन्फ़िगरेशन। जैसे
कि ये है 2 8 1 ये है तुम्हारी 2 8 2 ये है तुम्हारा 2 8 6 ये है तुम्हारा 2 8 7 ये है तुम्हारा 2मा 8 और जी तुम्हारा एट
ठीक है ना अरे गलत तो नहीं भाई साहब जल्दी से बताओ मुझे ठीक है ये आपका हो गया इस तरीके से ठीक है ना अभी कैल्शियम को तो दो
सेकंड के लिए कर दो साइड बताऊंगा अभी क्यों करना है ठीक है कैल्शियम के अलावा कोई और भी ले लो कभी कोई भी ले लो अभी है
ना कोई भी और ले लो अभी अ मान लो तुमने चलो कैल्शियम को ले ही लो यार तुम क्या याद रखोगे 2 टॉ 8 {कॉमा} 2. ठीक है? चलिए।
अब मेरी बात को बहुत गौर से सबको समझना है। ध्यान से समझना। हमेशा केमिकल बॉन्डिंग में इलेक्ट्रॉन्स का लेनदेन होता
है या फिर इलेक्ट्रॉन्स की बातें होती हैं। लेकिन कौन से इलेक्ट्रॉन्स की? जो इलेक्ट्रॉन्स न्यूक्लियस से सबसे दूर है।
इनमें बताओ पहले वाले सोडियम में कौन से इलेक्ट्रॉन न्यूक्लियस से सबसे दूर है? भैया ये वाला सबसे दूर है। मैग्नीशियम में
ये वाले सबसे दूर है। सल्फर में ये सबसे दूर है। क्यों? क्योंकि भ न्यूक्लियस आपका यहां से स्टार्ट हो रहा है। है ना? तो
पहली शेल, दूसरी शेल जो सबसे आखिरी वाली शेल है वो न्यूक्लियस से सबसे दूर मानी जाएगी। है ना? ये सबसे दूर है। कैल्शियम
में ये सबसे दूर है। तो जो सबसे दूर वाली होती है, जो सबसे आउटर मोस्ट वाली शेल होती है, जो सबसे आउटर मोस्ट वाली शेल
होती है भाई साहब, इसे बोलते हैं वैलेंस शेल। इसे क्या बोलते हैं? वैलेंस शेल। इसे क्या बोलते हैं भाई साहब? इसे बोलते हैं
वैलेंस शेल। अब कोई पूछे भैया वैलेंस शेल इसे ही क्यों बोलते हैं? क्योंकि आप बोलोगे ओनली द इलेक्ट्रॉन्स प्रेजेंट इन
ओनली द इलेक्ट्रॉन्स ओनली द इलेक्ट्रॉन्स प्रेजेंट इन वैलेंस
शेल इन वैलेंस शेल कैन पार्टिसिपेट इन केमिकल बॉन्डिंग। कैन पार्टिसिपेट इन केमिकल बॉन्डिंग। केमिकल बॉन्डिंग में
भाई साहब केवल और केवल वैलेंस शेल ही पार्टिसिपेट कर सकते हैं क्योंकि न्यूक्लियस के दबाव से यही बहुत दूर हैं।
जो न्यूक्लियस के दबाव में हैं वो कभी भी कुछ नहीं कर सकते। न्यूक्लियस जाने ही नहीं देगा। न्यूक्लियस इज़ लाइक तुम्हारे
पापा। पापा घर में बैठे हैं। तुम खेलने आना चाहते हो। पापा तुरंत पकड़ के बैठ जाएंगे। नहीं जाएगा। पढ़ा आज तो बैठ। आज
तो पढ़ना है तुझे बैठ के। पूरे दिन पढ़ना है तुझे। आज तो तुझे 48 घंटे पढ़ना है दिन में। कुछ भी हो जाए पढ़ना ही पड़ेगा। करते
हैं ना पापा ऐसे। तो ऐसे ही। तो अब ध्यान से अगर आप देखोगे तो ये सारी क्या है? वैलेंस शेल के इलेक्ट्रॉन्स हैं। अब जो
इनर शेल होती है भाई साहब ये तो हो गई आउटर मोस्ट शेल की बात। अब आउटर मोस्ट शेल के इनर शेल भी तो है ना। इनर शेल भी तो है
ना। जो बाकी की इनर शेल हैं इन इलेक्ट्रॉन्स को कहते हैं ये जो इनर शेल के इलेक्ट्रॉन्स हैं ये कहलाते हैं
कर्नल्स। क्या कहलाते हैं? कर्नल्स। ठीक है ना? तो आप लिख सकते हो कर्नल इलेक्ट्रॉन्स नेवर पार्टिसिपेट दीज़
इलेक्ट्रॉन्स दीज़ इलेक्ट्रॉन्स नेवर पार्टिसिपेट इन बॉन्डिंग नेवर पार्टिसिपेट इन बॉन्डिंग ये कभी भी
बॉन्डिंग में पार्टिसिपेट नहीं करते न्यूक्लियस के दबाव में होते हैं भाई साहब गोलू बेटा समझे कि नहीं समझे समझ में आ
गया हां भैया समझ में आ गया अब और मजे की बात समझो अब ध्यान से देखना मुझे सही रिप्रेजेंटेशन करनी है तो लुईस कहता है कि
केमिकल बॉन्डिंग में जो इलेक्ट्रॉन्स पार्टिसिपेट करेंगे केवल वही ही आपको दर्शाने हैं रिप्रेजेंटेशन में। मतलब
कर्नल्स को कभी भी नहीं दर्शाना। तो, अगर आप सोडियम का एक सिंबल लिखोगे केमिकल बॉन्डिंग में, तो आपको उसके ऊपर एक
इलेक्ट्रॉन बनाना है। क्यों? क्योंकि उसके वैलेंस शेल में एक इलेक्ट्रॉन है। मैग्नीशियम में आपको दो बनाने हैं। सल्फर
में आपको छह बनाने हैं। क्लोरीन में आपको सात बनाने हैं और कैल्शियम में आपको दो बनाने हैं। ये होती है एक सही
रिप्रेजेंटेशन अकॉर्डिंग टू लुईस सिंबल ऑफ एलिमेंट्स। जो आपको हमेशा ध्यान रखना है क्योंकि जो इलेक्ट्रॉन्स बॉन्डिंग में
पार्टिसिपेट करेंगे केवल हमें उन्हीं की रिप्रेजेंटेशन करनी है क्योंकि इस पूरे चैप्टर में हम केवल बॉन्डिंग कराना चाहते
और कुछ नहीं कराना चाहते। बात मेरी समझ में आ रही है? डन है बातचीत? गोलू बेटा कोई दिक्कत वाली बात तो नहीं है? बहुत
बढ़िया भैया। अब अब कुछ बातें हैं केमिकल बॉन्डिंग को पढ़ने के लिए जो हमें समझनी पड़ेंगी। तो इलेक्ट्रॉनिक थ्योरी ऑफ
वैलेंसी जिसे हम कौशल और लुईस की एप्रोच कहते हैं। कौशल और लुईस दो भाई हैं जिनकी एप्रोच है जो बताते हैं कि भ केमिकल
बॉन्डिंग होती कैसे है? अभी तक आई होप कि आपको बहुत फन आ रहा होगा। बहुत मजा आ रहा होगा। आपके कांसेप्ट बहुत दिमाग में बैठ
रहे होंगे। मैं मैं तुम्हें विश्वास दिलाता हूं कि इस वन शॉट को देखने के बाद में तुम केमिकल बॉन्डिंग अपने जीवन में
नहीं भूलोगे। अगर भूल जाओ तो आगे के बता देना मुझे। ठीक है ना? टेंशन ना लेनी बिल्कुल भी। मजे करने हैं। केमिस्ट्री में
एटलीस्ट फुल मजे होंगे। पूरे साल मजे होंगे। अभी थर्मोडायनेमिक्स ऐसे फेंक के मारूंगा तुम्हारे मुंह पे। तुम बोलोगे
भैया क्या वनशॉट दिया यार आपने थर्मोडायनामिक्स। मतलब इतना इतना टफ चैप्टर माना जाता है। अभी देखते रहो तुम।
ठीक है? चलो खैर बहुत बढ़िया। अब यहां पे आते हैं कॉसल लुईस की एप्रोच। पे तो कॉशल लुइस और की जो एप्रोच है पहला पॉइंट ये
कहती है। देखो जी क्या कहती है? वैलेंसी और कंबाइनिंग कैपेसिटी ऑफ एन एटम डिपेंड्स ऑन मेनली ऑन द नंबर ऑफ़ इलेक्ट्रॉन्स
प्रेजेंट इन द आउटर मोस्ट शेल कॉल्ड वैलेंस शेल इलेक्ट्रॉन्स। चलिए क्या कहते हैं? ये कहते हैं देखो यार कौन एलिमेंट
कितने इलेक्ट्रॉन देगा या कितने इलेक्ट्रॉन लेगा मतलब उसकी वैलेंसी कोई पूछे व्हाट इज वैलेंसी तो वैलेंसी वो कहते
हैं द कंबाइनिंग कैपेसिटी ऑफ़ एटम्स द कंबाइनिंग द कंबाइनिंग
कैपेसिटी द कंबाइनिंग कैपेसिटी ऑफ़ एन एटम किसी एटम की कंबाइनिंग कैपेसिटी कितनी है वो कहलाती
है उसकी वैलेंसी फॉर एग्जांपल फॉर एग्जांपल बहुत बेसिक सा एग्जांपल दूंगा मेरे पास यहां पर है सोडियम गाइज़ सोडियम
है 2 8 1 इसका कितने इलेक्ट्रॉन है जो उसको परेशान कर रहा है जो उसको कंप्लीट ऑक्टेट नहीं होने दे रहा भैया एक
इलेक्ट्रॉन क्योंकि इसका वैलेंस शेल एक है तो इसकी कंबाइनिंग कैपेसिटी ये क्या चाहता है अरे यार सिंपल सी बात है तुम मेरे पास
एक दिन उधार मांगने आए हां बड़े भाई पैसा दे दो पैसा है ना कितना पैसा चाहिए भैया ₹50 चाहिए तो तुम्हारी कंबाइनिंग कैपेसिटी
कितनी है ₹50 भाई तुम जो मेरे से रिश्ता बना रहे हो वो उधारी का रिश्ता बना रहे हो और तुम्हारी रिक्वायरमेंट है ₹50 अगर मान
मान लो मैं तुम्हें दे सकता हूं ₹100। मैं कह रहा हूं यार 50 नहीं 100 ले भाई 100 ले ले। तो मेरी तरफ से कंबाइनिंग कैपेसिटी
कितनी है? ₹100 की है। मैं तुमसे उधारी का रिश्ता देनदारी का रिश्ता बना रहा हूं ₹100 का। मतलब कौन कितना ले सकता है? कौन
कितना दे सकता है? उसकी कंबाइनिंग कैपेसिटी कितनी है? वो सामने वाले से किस चीज के लिए कंबाइन हो सकता है? उसे कहते
हैं उसकी वैलेंसी। तो सोडियम किसी भी एलिमेंट से अगर कंबाइन होगा तो बोलेगा मेरी भाई कंबाइनिंग कैपेसिटी है। मेरे
अंदर कैपेसिटी है एक इलेक्ट्रॉन के देने की। तो मेरी वैलेंसी क्या कहलाएगी भैया? वन कहलाएगी। वैलेंसी क्या कहलाएगी? वन
कहलाएगी। यही बात हमसे बोली है किसने? कॉसल लुइस एप्रोच के पहले पॉइंट ने। वो यह कह रहे हैं कि देखो यार जो आपकी कंबाइनिंग
कैपेसिटी है, वैलेंसी है ये डिपेंड करती है नंबर ऑफ इलेक्ट्रॉन्स प्रेजेंट इन द आउटर मोस्ट शेल यानी कि वैलेंस इलेक्ट्रॉन
पे। ये वैलेंस इलेक्ट्रॉन पे डिपेंड करती है कि उसकी कंबाइनिंग कैपेसिटी कितनी होगी। आपको मैं एग्जांपल देता हूं फॉर
एग्जांपल। आपके सामने वैलेंस इलेक्ट्रॉन लिखे हैं। आउटर मोस्ट शेल के इलेक्ट्रॉन। अब यहां पे अगर किसी एलिमेंट का एक वैलेंस
इलेक्ट्रॉन है लाइक सोडियम। तो या तो ऑक्टेट पूरी करने के लिए सात लेगा या फिर ये एक देगा। बताइए क्या आसान है भैया? एक
देने का। तो इसकी कंबाइनिंग कैपेसिटी कितनी होगी? एक ही तो हो गई। वैलेंसी कितनी होगी इसकी? एक ही तो हो गई। अरे हां
या ना? ये तो बहुत बेसिक बातें बता रहा हूं तुम्हें। नौवीं क्लास की बात बता रहा हूं मैं। लेकिन बता इसलिए रहा हूं क्योंकि
तुम में से आधे जो हैं वो कहते हैं भैया हमारी 10वीं बर्बाद है। हमारी नौवीं बर्बाद है। हमारा जीवन बर्बाद है। प्लीज
पढ़ा दीजिए ना भैया। है ना? तो इसलिए बता रहा हूं उसको क्योंकि आगे इसकी बहुत काम आएगा अभी। तो रिककैप कर लेते हैं। कोई
दिक्कत वाली बातचीत नहीं है। अगर मान लो वैलेंस इलेक्ट्रॉन में दो हैं तो यार या तो छह लेगा या फिर दो देगा। क्या आसान है
भैया दो देना? तो कंबाइनिंग वैलेंस कैपेसिटी हो गई दो। भैया तीन है तो तीन लेना आसान है या फिर सॉरी पांच लेना आसान
है या फिर तीन देना आसान है? भाई यहां पे देखोगे आप तो तीन पांच लेना आसान है कि तीन देना आसान है? भैया तीन देना आसान है।
तो इसकी वेलोसिटी कंबाइनिंग कैपेसिटी होगी तीन। यहां पे आ जाओ। चार लेना आसान है कि चार देना आसान है? बताइए जल्दी से। भैया
कुछ भी आसान नहीं है। दोनों बराबर ही तो हैं भई। चार-चार हैं दोनों। तो इसकी वेलोसिटी वैलेंसी वेलोसिटी बोल रहा हूं
भाई साहब। फिजिक्स याद आ रही है। इसकी जो वैलेंसी हम चार ही लिख देते हैं। क्योंकि दोनों केस में चार ही बनता है। अगर आप
यहां पे आओगे तो यहां पे आपके वैलेंसी इलेक्ट्रॉन हैं और ये आपकी वैलेंसी है। अगर आपके पास मामला कैसा है भैया? मामला
है आपके पास पांच वाला। तो यहां पे तीन लेने हैं, पांच देने हैं। भैया तीन वाला काम आसान है। वैलेंसी तीन है। यहां पे दो
लेने हैं, छह देने हैं भैया। दो वाला काम आसान है। दो हो गया। यहां पे एक लेना है, सात देने हैं भैया। एक यहां पे आ गया यहां
पे यहां पे हो गया भैया ए क्या करेगा भैया ऑक्टेट पहले से पूरी है इसकी कोई कंबाइनिंग कैपेसिटी नहीं है ये केस है
नोबल गैसेस का जिसकी आखिरी शेल में आठ इलेक्ट्रॉन होते हैं यहां पर आपको मिलेंगे भैया ज़ीरो वैलेंसी तो कौशल लुईस की एप्रोच
कहती है कि भ किसकी कंबाइनिंग कैपेसिटी कितनी होगी ये वैलेंस इलेक्ट्रॉन पे डिपेंड करता है बहुत सिंपल सी बातचीत है
बहुत सिंपल सी बातचीत है चलिए अब जो कंबाइनिंग कैपेसिटी तुम्हें समझ में आ गई तो सेकंड पॉइंट जो है तुम्हारा कॉस्टल
लुईस एप्रोच का बहुत ही बेहतरीन पॉइंट है क्या कहता है ये कहता है कि देयर आर टू वेज़ एटम्स के पास दो तरीके होते हैं गाइस।
एटम्स के पास कितने तरीके होते हैं? दो तरीके होते हैं एटम्स के पास। ठीक है? अपनी ऑक्टेट को पूरा करने के लिए। कौन से
दो तरीके हैं? पहला तरीका है गाइज़ बाय लूजिंग और एक्सेप्टिंग इलेक्ट्रॉन। इलेक्ट्रॉन को लूज़ करना है या फिर
एक्सेप्ट करना कंप्लीटली। और दूसरा तरीका है बाय शेयरिंग इलेक्ट्रॉन्स। अभी मैं बताऊंगा कौन-कौन से हैं? कैसे-कैसे हैं।
बाय लूजिंग और एक्सेप्टिंग इलेक्ट्रॉन और बाय शेयरिंग इलेक्ट्रॉन। अब बाय शेयरिंग इलेक्ट्रॉन का मतलब क्या है? शेयरिंग में
क्या होगा? भाई साहब यहां पे मिल बांट के खाएंगे। मैं तुम्हें एक बहुत ही बेहतरीन सा एग्जांपल दूंगा। तुम लोग मेरी बात को
समझ पाओगे। चलिए तो मानिए कि एक प्लॉट है। है ना? एक प्लॉट है जिसकी कीमत है मात्र ₹8 लाख। मतलब एक्चुअली में इसकी कीमत है
भाई साहब ₹20 लाख। लेकिन मार्केट में कुछ ऐसी मजबूरी आ गई है कि जो मालिक है उन्होंने बोला कि भाई साहब ₹8 लाख में दे
दूंगा। बहुत बढ़िया भैया दे दो ₹8 लाख में। अब एक इधर मैं बैठा हूं तुम्हारा बॉडी आकाश त्यागी और एक तरफ तुम बैठे हो।
ये तुम हो। तुम्हारी मेरी बहुत तगड़ी दोस्ती है। हम मिल बैठ के अपना जो है भाईचारा निभाते हैं। तो जब प्लॉट की बारी
आई तो भैया यहां पे क्या हुआ कि मेरे पास जो है वो हैं ₹7 लाख और तुम्हारे पास जो है ₹1 लाख हैं। तो यहां पे जब बात आई कि
भैया ₹8 लाख का प्लॉट है। तो बहुत ही असमंजस वाली बात हो गई। ना ही मैं ले पा रहा हूं ना ही तुम ले पा रहे हो। लेकिन
यहां पे तुम देखोगे कि यार मैं तो बहुत ही गरीब आदमी। मेरे तो बस की है ही नहीं। 8 लाख 1 लाख में बहुत फर्क है। लेकिन हमारे
मां साहब ले सकते हैं 7 लाख हैं। क्यों ना उनको 1 लाख मैं दे दूं। इतना तो यार गुरु दक्षिणा कर ही सकता हूं मैं। तो तुमने
क्या सोचा कि भैया 1 लाख लो आप ले लो कोई दिक्कत वाली बातचीत नहीं है और आप जाके प्लॉट को खरीद लो। तो पहली जो पॉसिबिलिटी
है वो आ गई है जहां पे आपने कंप्लीट ट्रांसफरिंग कर दी अपने पैसों की। क्या कर दी? कंप्लीट ट्रांसफरिंग कर दी अपने पैसों
की। कंप्लीट ट्रांसफरिंग कर दी। लेकिन मान लो मैं आपको दूसरी कंडीशन दूं। इस कंडीशन में आपके पास भी 4 लाख हैं और मेरे पास भी
4 लाख हैं। अब यहां पे अभी भी वही बात है। ना तो आप ही ले पा रहे हैं ना फिर मैं ही ले पा रहा हूं। लेकिन अब की बार आप ये
नहीं सोचेंगे मां साहब का मैं भला करता हूं। गुरु दक्षिणा देता हूं। अब की बार आप बोलोगे क्यों मैं क्यों दे दूं? मेरे पास
भी तो बराबर 4 लाख है। आपके पास भी 4 लाख है। आप दे दो। आप दे दो। आप बड़े हो। आप कर दो मेरे पे दया। आप दे दो। मैंने कहा
कि भाई साहब मैं क्यों दे दूं? 4 लाख मेरे पास। दोनों बराबर है। जब बात दोनों बराबर की आ जाएगी तो कोई भी दरियादिली नहीं
दिखाएगा। भाई ना मैं दूंगा ना तू देगा बात फंस जाएगी लेकिन 8 लाख का अपलोड भाई साहब बहुत जबरदस्त मामला है यहां पे तो ऐसे में
हम क्या करेंगे कि मां साहब एक काम करते हैं भैया बड़ी गुरु जी एक काम कर लेते हैं एक काम करो चार आप डालो चार मैं डालता हूं
दोनों आठ कर लेते हैं और आधा प्लॉट आपका और आधा प्लॉट मेरा तो यहां पे जो कंडीशन सेट बैठी वो ट्रांसफरिंग की नहीं बैठी वो
बैठी आपसी शेयरिंग वाली इसे कहते हैं म्यूचुअल शेयरिंग वाली कंडीशन क्या कहते हैं म्यूचुअल शेयरिंग वाली कंडीशन हम इसे
कहते हैं। तो दो कंडीशन है। एक है कंप्लीट ट्रांसफरिंग वाली जहां पे एक लूज़ करता है, एक गेन करता है और एक है म्यूचुअल शेयरिंग
वाली जहां पे कोई लूज़ नहीं करता, कोई गेन नहीं करता। दोनों मिल बांट के मजे करते हैं। एक आपको एक बहुत ही एग्जांपल तरीका
बताता हूं। एक बहुत ही जबरदस्त तरीका मैं आपको बताता हूं एग्जांपल से। जैसे मान लो कि यहां पे मेरे पास एक सोडियम है। ये
होता है 2 8 1 तुम मुझे खुद इसका आंसर दोगे। इसके वैलेंस शेल में एक इलेक्ट्रॉन है। ये मेरे पास क्लोरीन है व्हिच इज़ 2 8
7। इसके वैलेंस शेल में सात इलेक्ट्रॉन हैं। जल्दी से मुझे कमेंट सेक्शन में सोच समझ के बताइए कि यहां पे शेयरिंग होगी या
फिर ट्रांसफरिंग ऑफ इलेक्ट्रॉन्स होगी? बताइए भैया। जल्दी से बताइए। साफ-साफ आप लोग देख पा रहे हैं। इसके लिए एक देना
आसान है और इसके लिए एक लेना आसान है। तो यहां पे क्या होगा? कंप्लीट ट्रांसफरिंग होगी और यहां पे पहला केस का बनेगा। एक ने
लूज़ किया है और एक ने गेन किया है। आशा करता हूं कि आपको बात समझ में आ रही होगी। यहां पर होती है ट्रांसफरिंग ऑफ
इलेक्ट्रॉन्स की कंडीशन क्योंकि एक दे सकता है और दूसरा ले सकता है। जब एक दे सकता हो, दूसरा ले सकता हो तो यहां पे
ट्रांसफरिंग होगी। लेकिन मैं आपको दूसरी कंडीशन देता हूं। एक क्लोरीन घूम रहा था यहां पे अकेला। क्लोरीन है 2 8 7 इसके पास
है सात इलेक्ट्रॉन आउटर मोस्ट शेल में। बहुत बढ़िया। घूमते-घूमते इसे कोई मिल नहीं रहा जो इसकी ऑक्टेट को पूरी कर दे।
इसका बहुत मन है कि काश काश काश कोई फरिश्ता आए और मुझे एक इलेक्ट्रॉन दे जाए और मेरे मजे आ जाए। लेकिन कोई फरिश्ता मिल
नहीं रहा है भाई साहब इसे। ये क्लोरीन घूमते घूमते इसके साइड में एक और क्लोरीन आ गया। बहुत सारे क्लोरीन इस संसार में
भैया इस संसार में एक क्लोरीन थोड़ी ना है बहुत है। अब ये भी जब आया तो ये भी 2 8 7 है। ये भी एक फरिश्ता ही ढूंढ रहा था कि
कोई एक फरिश्ता आएगा मुझे एक इलेक्ट्रॉन देगा। लेकिन फरिश्ता इसको भी नहीं मिल रहा है। दोनों एक दूसरे के पास में बोले भाई
भाई भाई मेरे साथ बहुत प्रॉब्लम चल रही है। एक इलेक्ट्रॉन की जो है इच्छा रखता हूं लेकिन कोई फरिश्ता आ नहीं रहा है। यह
भी कहता है भाई भाई भाई मेरे साथ भी ऐसा ही है कुछ। दोनों जब मिल बैठ के बैठते हैं तो कहते हैं भैया दोनों बहुत ही परेशान
है। क्या करें? मुझे एक इलेक्ट्रॉन की जरूरत है। कह रहा है मुझे भी एक इलेक्ट्रॉन की जरूरत है। फिर एकदम से याद
आता है कि एक काम करें क्या? बोला क्या काम करें? बोल रहा है कि तुझे एक की जरूरत है। कह रहा है हां मुझे भी एक की जरूरत
है। एक काम कर तू अपना सात में से एक इलेक्ट्रॉन उठा के बीच में रख। रख दिया। कह रहा है मैं भी अपने सात में से एक
इलेक्ट्रॉन उठा के बीच में रखूंगा। बहुत बढ़िया। कह रहा है जब मुझे जरूरत पड़ेगी तो मैं घेर लूंगा। मेरे आठ हो गए गिन ले।
2 4 6 8 कह रहा है जब तुझे जरूरत पड़ेगी तू भी ले लियो। मतलब एक-एक इलेक्ट्रॉन बीच में रख दिए जब उसको जरूरत पड़ेगी वो ले
लेगा। यहां पर किसी ने किसी को दिया ही नहीं। क्योंकि दोनों सेम कंडीशन में बैठे थे। 4 लाख, 4 लाख, 7 लाख, सात लाख, सात
इलेक्ट्रॉन, सात इलेक्ट्रॉन। कह रहे हैं भैया, मैं नहीं दूंगा। वो कह रहा है क्लोरीन तू दे दे। कह रहा है, मैं क्यों
दे दूं? मुझे खुद एक की जरूरत है। तो ऐसे में शेयरिंग हो जाएगी। और यहां पे आपका केस बनेगा भैया म्यूचुअल शेयरिंग ऑफ
इलेक्ट्रॉन्स। क्या बनेगा? म्यूचुअल शेयरिंग बनेगा। ध्यान दीजिएगा भाई साहब। बहुत जबरदस्त बात है। जब भी आप देखेंगे कि
भाई लूजिंग और एक्सेप्टिंग इलेक्ट्रॉन्स कोई बॉन्ड बनता है उसे कहा जाता है आयनिक बॉन्ड। या फिर इलेक्ट्रोवेलेंट बॉन्ड।
दोनों में से कोई भी अपना मिस्टे इसको प्रोनाउंस कर सकते हैं। और अगर यहां पर बाय शेयरिंग इलेक्ट्रॉन्स है तो भाई साहब
उसे बोला जाता है कोवेलेंट बॉन्ड। शेयरिंग वाले को बोलेंगे कोवेलेंट बॉन्ड। अब इन्हें बहुत विस्तार में पढ़ने वाले हैं।
ठीक है भैया? अब जब कोवेलेंट बनता है शेयरिंग ऑफ इलेक्ट्रॉन से तो आप ध्यान से देखेंगे यहां वाली जो शेयरिंग है म्यूचुअल
शेयरिंग है और इक्वल शेयरिंग है। इक्वल का मतलब है एक तूने रखा, एक मैंने रखा। दोनों ने बराबर-बराबर शेयर किया। चार मैंने दिए,
चार तूने दिए। दोनों ने बराबर-बराबर शेयर किया। लेकिन ये शेयरिंग कभी-कभी अनकल तरीके से भी हो सकती है। जब इक्वल होगी तो
आप बोलोगे खाली कोवेलेंट बॉन्ड और जब अनकल होगी तो इसका नाम हो जाएगा कोऑर्डिनेट बॉन्ड। अभी थोड़ी देर में पढ़ेंगे कि अनकल
शेयरिंग भी कैसे होती है? क्या बोलेंगे इसको? कोऑर्डिनेट बॉन्ड बोलेंगे। तो तीन तरह के बॉन्ड बताए हैं। एक बताया है आयनिक
जहां पर हम लोग करते हैं ट्रांसफरिंग ऑफ इलेक्ट्रॉन एक देता है एक लेता है और जहां कोई देने वाला नहीं है बस लेने-लेने वाले
हैं। दोनों गरीब ही आदमी बैठे हैं कि भैया मैं भी भिखारी तू भी भिकारी बोल क्या किसको देगा? तो भैया वहां पे हम करेंगे
कोवेलेंट बॉन्ड। लेकिन उसमें भी अगर इक्वल शेयरिंग है। दोनों ने बराबर शेयरिंग करी है तो कोवेलेंट है। अदरवाइज कोआर्डिनेट
है। अगर अनकल शेयरिंग है। अभी देखेंगे इसको। ठीक है? चलिए बहुत बढ़िया। आइए अब थोड़ा सा इलेक्ट्रोवेलेंट बॉन्ड को और
कोवेलेंट बॉन्ड को एक बार थोड़ा ध्यान से देख लेते हैं। मजा आएगा। तो द बॉन्ड व्हिच इज़ फॉर्म्ड बाय द कंप्लीट ट्रांसफरिंग ऑफ
इलेक्ट्रॉन्स बिटवीन एन इलेक्ट्रो पॉजिटिव मेटल एंड एन इलेक्ट्रोनेगेटिव नॉन मेटल। देखो ध्यान से मेरी बात को समझिएगा। यहां
पे अगर आप देखेंगे तो पोटेशियम k पॉजिटिव यहां पे जो पोटैशियम k है, वो एक मेटल है। मेटल यानी कि इलेक्ट्रो पॉजिटिव, यानी कि
जो हमेशा इलेक्ट्रॉन देना चाहते हैं। मतलब देने वाला है। यहां पे है Cl व्हिच इज़ अ नॉन मेटल और नॉन मेटल होते हैं
इलेक्ट्रोनेगेटिव। यानी के जो इलेक्ट्रॉन हमेशा लेना चाहते हैं। तो अगर एक देने वाला है, एक ने लेने
वाला है तो बेस्ट पहचान है कि यहां पर क्या बनेगा? आयनिक बॉन्ड बनेगा। आपसे कोई बोले कि इसका सही स्ट्रक्चर बना के हमें
दिखाइए। तो आप लिखेंगे कि भैया पोटैशियम होता है 2 {कॉमा} 8 {कॉमा} 8 {कॉमा} अह वन। यानी कि एक इलेक्ट्रॉन आउटर मोस्ट शेल
में। क्लोरीन होता है 2 {कॉमा} 8 {कॉमा} 7। तो यहां पे इसके साथ कोई बोले भैया यहां स्टार बना रहे हो वहां गोला बना रहे
हो। ये कैसी नाइंसाफी है? कनचक्कर इसलिए बना रहा हूं जिससे कि तू कंफ्यूज ना हो जाए। तुझे पता रहे कि एक वहां से आया है।
इसके पास सात ऐसे तो क्रॉस का मतलब ये नहीं है इलेक्ट्रॉन्स ही हैं। बस अलग-अलग दिखाने का तरीका जिससे कि आप पहचान पाओ कि
कौन से किसके थे। ठीक है? तो यहां पे क्या होगा? ये कंप्लीट ट्रांसफरिंग करेगा और फिर ये बन जाएगा K पे पॉजिटिव। इसके ऊपर
कोई भी इलेक्ट्रॉन नहीं बचेगा आउटरमोस्ट शेल में क्योंकि इसका एक ही था वो जा चुका है। लेकिन क्लोरीन जो नेगेटिव है उसके पास
सात पहले से थे और एक और आ जाएगा और ऊपर रहेगा नेगेटिव चार्ज। ऐसे बनता है हमारा K पॉजिटिव Cl नेगेटिव यानी के KCl आशा करता
हूं बहुत मज़ा आ गया होगा आपको इसको समझने में। अगर आपसे कोई पूछे बताओ भाई Na2S में क्या यहां पे कंप्लीट ट्रांसफरिंग वाला
आयनिक और इलेक्ट्रोवेलेंट बॉन्ड बनेगा तो आप क्या बोलेंगे? आप बोलेंगे पहचानने का तरीका है क्या ये एक मेटल है? हां जी भैया
ये एक मेटल है। क्या वो दूसरा वाला एक नॉन मेटल है? हां जी वो एक नॉन मेटल है। तो एक लेने वाला एक देने वाला बिल्कुल बात ऐसे
ही होगा। लेकिन अब ध्यान से देखिएगा। बड़ी मजे की बात बताऊंगा मैं आपको। मेरे पास सल्फर है। सल्फर होता है 2 {कॉमा} 8
{कॉमा} 6। यानी कि इसके आउटर मोस्ट शेल में 1 2 3 4 5 6 इलेक्ट्रॉन हैं। इसको दो की रिक्वायरमेंट है। इसकी कंबाइनिंग
कैपेसिटी दो की है। ये कहता है मुझे दो चाहिए। और जो मेरे पास सामने सोडियम है भाई साहब सोडियम होता है हमारा 2 {कॉमा} 8
{कॉमा} 1 इसके पास बस एक ही इलेक्ट्रॉन है देने के लिए। इसकी कंबाइनिंग कैपेसिटी एक है इसकी दो है। ये बोलेगा मुझे तो दो
इलेक्ट्रॉन चाहिए। वो कह रहा है मैं तो बस एक दूंगा। कह रहा है बॉन्ड नहीं बनाऊंगा। रिश्ता कहा टूट। भैया रिश्ता टूट जाएगा तो
कैसे काम चलेगा? पूरी केमिस्ट्री तहसनहस हो जाएगी। ऐसे कैसे काम चलेगा? तो सल्फर बोलेगा कि देख तू एक दे सकता है। अपने एक
भाई को बुला के ला। कह रहा है कौन सा भाई? कह रहा है सोडियम तेरे पास और कोई भाई नहीं है। कह रहा हां मेरे पास भाई है। कह
रहा है एक भाई को और लेके आ। कह रहा है लेके आ। भाग के गया। लेके आ दूसरे भाई को। कह रहा है अब एक तू दे और एक तेरा भाई
देगा। क्या बात है भाई साहब। दोनों मिलके देंगे। क्या दिक्कत वाली बातचीत हो रही है। तो यहां पे इस तरीके से आपके बनेंगे
दो Na पॉजिटिव। और आपका जो सल्फर है वो बनेगा 1 2 3 4 5 6 7 8 इस पे आएगा टू नेगेटिव। इस तरीके से आपका बनेगा भाई साहब
Na2S आशा करता हूं कि आपको बहुत मजा आ रहा होगा। आपको समझ में आ गया कि इलेक्ट्रोवेलेंट बॉन्ड आयनिक बॉन्ड कब
बनेगा। अब बात करते हैं भैया कोवेलेंट बॉन्ड कब बनेगा? आइए। द बॉन्ड व्हिच इज फॉर्म्ड बाय द म्यूचुअल शेयरिंग ऑफ
इलेक्ट्रॉन्स बिटवीन टू इलेक्ट्रोनेगेटिव नॉन मेटल्स। भई ये देने वाला था ना लेने वाला था? ये देने वाला था या लेने वाला
था? यहां पे दोनों ही नॉन मेटल हैं। दोनों ही लेने वाले हैं। ऐसे में बनेगा आपका म्यूचुअल शेयरिंग वाला कोवेलेंट बॉन्ड।
आइए चर्चा करते हैं, समझते हैं। आ जाओ समझते हैं। तो इसका एक परफेक्ट एग्जांपल अगर मैं आपको दे दूं यहां पे तो इसका सबसे
पहला परफेक्ट एग्जांपल है आपका हाइड्रोजन गैस। हाइड्रोजन होता है भैया हमारा एक इलेक्ट्रॉन वाला। तो इसके आउटर मोस्ट शेल
में एक इलेक्ट्रॉन है। इसका दूसरा भाई आया उसके पास भी दो एक ही इलेक्ट्रॉन है। इसको भी ड्यूप्लेट पूरी करनी है। भाई हाइड्रोजन
को दो हो जाएं वही बहुत बड़ी बात है। तो ये क्या करते हैं? दोनों ऐसे-ऐसे करके शेयरिंग कर लेते हैं।
बहुत शानदार। ऐसे बहुत सारे एग्जांपल और हैं। जैसे मैं बात करूं ऑक्सीजन और ऑक्सीजन की तो यहां पे ऑक्सीजन होता है
हमारा 2 {कॉमा} 8 6 आउटर मोस्ट शेल में छह इलेक्ट्रॉन हैं। 1 2 3 4 पांच छह। इसके आउटर मोस्ट शेल में भी पांच छह छह ही
होंगे। क्यों? क्योंकि भई ये भी ऑक्सीजन ही है। इसको दो चाहिए तो इसके वाले दो को घेर लेगा। इसको दो चाहिए। इसके वाले दो को
घेर लेगा। ये बन जाएगा आपका O2। ये किसका एग्जांपल है? आपके O2 का एग्जांपल है। बहुत बढ़िया। और एग्जांपल लीजिए। आपके पास
है नाइट्रोजन। नाइट्रोजन होता है हमारा 2 8 5। इसके आउटरमोस्ट शेल में पांच इलेक्ट्रॉन हैं और ये तीन की कंबाइनिंग
कैपेसिटी रखता है। कहता है मुझे तीन चाहिए। दूसरा नाइट्रोजन यहां पे इसका दोस्त आया 1 2 3 4 5 बोला तुझे तीन चाहिए
मैं तेरे तीन ले लूंगा। तुझे चाहिए तू मेरे तीन ले ले। और ऐसे करके दोनों ने म्यूचुअल शेयरिंग कर ली और ये बन गया आपका
N2 का मॉलिक्यूल। आशा करता हूं कि आपको समझ में आ रहा है कि कोवेलेंट बॉन्डिंग कहां होगी। देखो जरा ध्यान से। ये भी लेने
वाला ये भी लेने वाला दोनों नॉन मेटल की तरह बिहेव कर रहे हैं। ये भी लेने वाला लेने वाला दोनों नॉन मेटल है। ये भी लेने
वाला ये भी लेने वाला दोनों नॉन मेटल हैं। ऐसे में आपको बनाना है भैया म्यूचुअल शेयरिंग वाला आपका कोवलेंट बॉन्ड। आशा
करता हूं मजा आ गया होगा। बहुत बेहतरीन तरीके से मजा आ गया होगा। अब एक बात समझना जो कोवलेंट बॉन्ड होते हैं यहां पे जब
शेयरिंग होती है तो उसके बेसिस पे टाइप्स ऑफ कोवलेंट बॉन्ड डिसाइड होते हैं। जैसे कि अगर अगर अगर अगर एक टाइप है सिंगल
कोवेलेंट बॉन्ड, एक है डबल कोवेलेंट बॉन्ड, एक है थर्ड कोवेलेंट बॉन्ड या फिर ट्रिपल कोवेलेंट बॉन्ड। अगर ध्यान दीजिएगा
दोनों एटम्स एक-एक इलेक्ट्रॉन दे के एक बॉन्ड का जोड़ा मतलब एक इलेक्ट्रॉन का जोड़ा बीच में रखते हैं। यहां पे आप देखेंगे
दोनों ने एक-एक इलेक्ट्रॉन दिया। एक बॉन्ड का जोड़ा एक इलेक्ट्रॉन का जोड़ा आया। तो ये एग्जांपल है सिंगल कोवेलेंट बॉन्ड का।
किसका? सिंगल कोवेलेंट बॉन्ड का एग्जांपल है। यहां पे अगर आप देखेंगे दोनों ने दो-दो इलेक्ट्रॉन की शेयरिंग की है। मतलब
दो जोड़े बने हैं इलेक्ट्रॉन्स के। भाई दो जोड़े बनेंगे ना दो इलेक्ट्रॉन का एक जोड़ा। तो ये एग्जांपल है आपके डबल कोवेलेंट
बॉन्ड का। बात समझ में आ रही है? और अगर मैं बात करूं नाइट्रोजन की तो यहां पे तीन इसने किए हैं। तीन इसने किए हैं। मतलब तीन
इलेक्ट्रॉन के जोड़े हैं। ये आपका है भैया एग्जांपल ट्रिपल बॉन्ड का। कोई बोले भैया चार बॉन्ड का भी एग्जांपल
दिखाई देते। भाई आप कह सकते हो भैया। ऐसे कर दो ना। भाई देखो कार्बन क्या होता है? 2 4 होता है। तो 1 2 3 4 और यहां पे 1 2 3
4 भैया ऐसे करा दो ना। बेटा ऐसे में जब कार्बन-कार्बन का केस अगर बनता तो उसमें ना चार्ज देखो इलेक्ट्रॉन्स इलेक्ट्रॉन्स
में होता है रिपल्शन सारे नेगेटिवली चार्ज्ड हैं। तीन बॉन्ड तक रिपल्शन झेल लिया जाता है। हमारा स्ट्रक्चर बन जाता है
लेकिन चौथे बॉन्ड में रिपल्शन झेल नहीं पाता। इसलिए चार बॉन्ड वाला कोई भी कोवेलेंट बॉन्ड एग्ज़िस्ट नहीं करता। कभी
भी चार-चार मतलब आठ इलेक्ट्रॉन्स बीच में शेयर नहीं होते। केवल आपके पास तीन ही ऑप्शन होते हैं। सिंगल, डबल और ट्रिपल।
आशा करता हूं कि आपको समझ में आया होगा कि आयनिक बॉन्ड कैसा और कोवेलेंट बॉन्ड कैसा। जल्दी से मुझे सारे लोग चैट बॉक्स में
एपीएम लिख के बताएंगे कि भैया बहुत मजा आ गया भाई साहब कैसी बात कर रहे हो। मामला बहुत शानदार चल रहा है। कोई दिक्कत वाली
बातचीत है ही नहीं। एपीएम इन द चैट बॉक्स। डन बातचीत? बहुत बढ़िया। मजा आ रहा है। ठीक है। अब ध्यान से देखना। आगे जो मैं
बात करने वाला हूं अभी। तुम्हें याद है मैंने बोला था कि जब भी दो चार्ज जब भी दो चार्ज पास में आते हैं तो उनके देखो इसके
पास एक पोटेंशियल एनर्जी थी है ना जिसकी वजह से ये खींच रहा है इसके पास एक पोटेंशियल एनर्जी थी जिसकी वजह से ये खींच
रहा है अब ये पासपास आ गए हैं फोर्स ऑफ़ अट्रैक्शन है ना तो जो एनर्जी है वो गई कहां जाएगी फिर अब तो अब तो कोई नहीं है
नो पोटेंशियल एनर्जी क्योंकि पासपास आ चुके हैं कोई पोटेंशियल एनर्जी नहीं है तो जो एनर्जी है कैन नेदरली बी क्रिएटेड नर
बी रेस्टेड वो गई कहां वो सारी की सारी एनवायरमेंट में चली जाती जाती है। इसे हम कहते हैं लोअरिंग द एनर्जी। ये लेकिन
ध्यान देना एक बहुत इंपॉर्टेंट बात जब पॉजिटिव नेगेटिव है तब बहुत सारी एनर्जी बाहर निकलती है। और इसी एनर्जी को हम
आयनिक बॉन्ड यानी कि पॉजिटिव नेगेटिव वाले केस में नाम देते हैं लेटिस एंथैल्पी। पेपर में आएगा एक नंबर में, दो नंबर में।
व्हाट इज़ लेटिस एंथैल्पी? द एनर्जी रिलीज्ड व्हेन नंबर ऑफ पॉजिटिव एंड नेगेटिव आयंस कंडेंस्ड मतलब चिपक जाना
इंटू क्रिस्टल मतलब सॉलिड फॉर्म में टू फॉर्म वन मोल ऑफ द कंपाउंड एक कंपाउंड का ढेर बनाने के लिए इसे कहते हैं लेटिस
एनर्जी। क्या कहते हैं इसको? लेटिस एनर्जी कहते हैं। मतलब मेरा तात्पर्य यह है कहने का ये है कि जैसे आपने अभी देखा यहां पे K
पॉजिटिव और Cl नेगेटिव चिपके। तो यहां से कुछ एनर्जी बाहर निकली क्योंकि स्टेबल हो गए। जब भी स्टेबिलिटी आती है, एनर्जी जाती
है। अरे मेरी सिंपल सी बात समझ लो कि अगर आज मैं स्टेबल होता, मेरे पास होते 10 20 करोड़ तो मैं यहां खड़ा हो के क्यों
चिल्ला रहा होता? मेरी एक रिक्वायरमेंट है जिसकी वजह से मैं अनस्टेबल हूं कि भाई साहब मुझे जो है मिनिमम टू मिनिमम 100
करोड़ का जो है अमाउंट चाहिए। मजा तभी आएगा एक शिपवे खरीदूंगा बढ़िया सा। है ना? तो समझ रहे हो? जब तक 100 करोड़ नहीं
होंगे तब तक भाई साहब लग के मेहनत करूंगा। बात मेरी समझ में आ रही है? अरे हां या ना? जब तक मेहनत करूंगा बहुत सारी एनर्जी
मेरे अंदर है। मतलब मैं अनस्टेबल हूं। लेकिन जैसे ही मेरे पास 100 करोड़ आया खेलूंगा मैं नहीं। बुलवा ले जो बुलवाना
है। ले मैं नहीं बोल रहा कुछ भी। भाड़ में गया वन छोड़ हां मैं नहीं ले रहा। कर सकता हूं कि ऐसे नहीं कर सकता हूं। हालांकि
नहीं करूंगा। है ना? जस्ट बिकॉज़ कि मुझे मजा आता है पढ़ाने में। लेकिन तू एक बड़े सिनेरियो में देखेगा तो। तो कहेगा ना कि
भैया 100 करोड़ है। क्या जरूरत है? शांति से बैठो। कोई काम नहीं करना। मुंह से बोलूंगा भी नहीं। मस्त शिप पे लेटा हूं।
धूप आ रही है भाई साहब। वो हो गया अंडर द कॉकरोच। में देखा तुमने वो सनस्क्रीन लगा के जो लेट जाता है चश्मा पहन के बिल्ला
चश्मा पहन के बिल्ला लेटता है ना ऐसे ऐसे भाई साहब बात समझ में आ रही है तो अगर स्टेबिलिटी मिल गई तो सारी एनर्जी बाहर
शांति से लेटना है तो यहां तो स्टेबिलिटी आ गई है पॉजिटिव नेगेटिव चिपक गए हैं ऑक्टेट पूरी हो गई है और क्या चाहिए जीवन
में तो बहुत सारी एनर्जी निकली वो कहलाती है लेटेस्ट एनर्जी यहां बहुत सारी एनर्जी निकली वो कहलाती है लेटिस एनर्जी अरे हां
या ना गोलू जल्दी बोल दे अरे जल्दी बता दे अरे हां या ना? तो आयनिक बॉन्ड के केस में स्पेशली जो लेटेस्ट एनर्जी है वो हम
डिफाइन करते हैं। कुछ इस तरीके से ध्यान रखिएगा जितनी ज्यादा स्टेबिलिटी है उतनी ज्यादा एनर्जी बाहर जाएगी। क्यों? क्योंकि
स्टेबिलिटी का मतलब ही है एनर्जी नहीं होनी चाहिए। काम नहीं करना कुछ नॉन रिएक्टिव होना है। तो लेटेस्ट एनर्जी इज़
डायरेक्टली प्रपोर्शनल टू स्टेबिलिटी। अरे आशा करता हूं आपको बात समझ में आ रही है? और स्टेबिलिटी कब आती है भैया? स्टेबिलिटी
तब आती है ध्यान दीजिएगा। चार्ज प्रेजेंट ऑन आयंस। अगर बहुत सारा चार्ज है और वो सारा का सारा चार्ज पॉजिटिव नेगेटिव चिपक
गया कितना मजा आएगा। भाई एक बहुत पॉजिटिव था एक बहुत ही नेगेटिव था। बहुत पोटेंशियल एनर्जी थी। अब दोनों चिपक गए हैं। सारी
पोटेंशियल एनर्जी बाहर चली गई है। भाई सिंपल सी बात है। अगर आपके पास मैं दो केस दे दूं यहां पे मेरे पास NaCl है। MgCl2
है। AlCl3 है यहां पे मेरे पास। लेट्स सपोज़। तो NaCl के ऊपर यहां पे +1 का चार्ज होता है भाई। Na एक इलेक्ट्रॉन देता है।
मैग्नीशियम के ऊपर दो का होता है। मैग्नीशियम दो इलेक्ट्रॉन देता है और एलुमिनियम के ऊपर तीन का होता है।
एलुमिनियम तीन देता है। बताओ सबसे ज्यादा चार्ज कहां है भैया? एलुमिनियम पे। तो जब चिपकेंगे तो सबसे ज्यादा स्टेबिलिटी भई
सबसे ज्यादा चार्ज मतलब सबसे ज्यादा फोर्स ऑफ अट्रैक्शन, सबसे ज्यादा अनस्टेबिलिटी। और जब ये चिपकेंगे तो +3 के चार्ज की वजह
से जो मजा आएगा और जो एनर्जी निकलेगी वो बहुत ज्यादा होगी एज़ कंपेयर टू Na पॉजिटिव वन वाले से भी। अरे समझ में मेरी बात आ
रही है कि नहीं आ रही है? जितनी ज्यादा चार्ज उतनी ज्यादा पोटेंशियल एनर्जी और जब चिपक जाएंगे वही पोटेंशियल एनर्जी बाहर
जाएगी। बहुत सारी जाएगी। तो चार्ज प्रेजेंट ऑन द आयंस इज़ डायरेक्टली प्रोपोर्शनल टू लेटिस एनर्जी। जितना
ज्यादा चार्ज होगा उतनी सारी लेटिस एनर्जी बाहर निकलेगी। क्या बात है? डिस्टेंस बिटवीन द टू चार्जेस। भाई सिंपल सी बात
है। जितना ज्यादा चिपकेंगे उतनी ज्यादा स्टेबिलिटी आएगी। भाई पॉजिटिव नेगेटिव चिपकना चाहते हैं क्योंकि फोर्स ऑफ
अट्रैक्शन है। जितना ज्यादा चिपकेंगे उतनी ज्यादा स्टेबिलिटी आएगी। और चिपकने का मतलब है डिस्टेंस बिटवीन द टू चार्ज।
जितना कम डिस्टेंस होगा उतना ज्यादा बढ़िया होगा। तो कम डिस्टेंस ज्यादा लेटेस्ट एनर्जी। तो यहां हो गया आपका
इन्वर्सली प्रोपोर्शनल का रिलेशन। अरे समझ में आ रही है कि बात नहीं समझ में आ रही है। इस बेसिस पे आपके पेपर में
क्वेश्चन आएगा। आपको बताएंगे पूछेंगे किसकी लेटेस्ट एंथैल्पी ज्यादा है तो आपको ये दो फैक्टर याद रखने हैं। पहले केस में
चार्ज देखोगे Na पॉजिटिव इस पे +1 है। इस पे +2 इस पे +3 है। क्यों? क्योंकि देखो भ आप वैलेंसी देखोगे इसकी एक है। इसकी दो है
इसकी तीन है। तो इस बेसिस पे ज्यादा लेटेस्ट एंथैल्पी AlCl3 की होगी। अगले क्वेश्चन में आप देखोगे तो सब केस में
आपको मिल रहा है भाई Nax, KX, RBX और CX जो नॉन मेटल है वो सब में X है। तो नॉन मेटल को तो देखो मत। उसके बाद देखो मेटल
को। मेटल सारे आपके कौन से ग्रुप के हैं? ग्रुप वन के हैं। है ना? सारे के सारे हमारे लिए ना करो रब से फरियाद वाले सारे
ग्रुप वन में है तो सबकी वैलेंसी +1 है। सबको पता है एक ग्रुप में सबकी वैलेंसी सेम होती है। तो सों पे चार्ज भी बराबर
है। अगर चार्ज सब पे बराबर है तो चार्ज नहीं देखोगे तो क्या देखोगे भैया? साइज देखोगे। जितना कम डिस्टेंस होगा जितना कम
साइज होगा एटम्स का। जितना कम डिस्टेंस होगा उतनी लेट्स एंथैल्पी ज्यादा। सिंपल सी बात बता रहा हूं। Na छोटा है तो जो
बॉन्ड होगा कुछ ऐसा होगा। पोटेशियम बड़ा है तो जो बॉन्ड है कुछ ऐसा होगा। रूबिडियम उससे भी बड़ा है तो जो बॉन्ड होगा कुछ ऐसा
होगा। है ना? उसके बाद भाई x तो सब में सेम है ना। x तो सब में सेम है। x का साइज तो सब में सेम है। सीज़ियम सबसे बड़ा है। x
का साइज तब भी सेम है। तो x तो सब में सेम है। लेकिन यहां पे सोडियम छोटा है तो देखो कम डिस्टेंस है। पोटेशियम बड़ा हुआ तो
ज्यादा डिस्टेंस है। रुबेडियम उससे बड़ा हुआ तो उससे ज्यादा डिस्टेंस है। और सीज़ियम सबसे बड़ा तो सबसे ज्यादा डिस्टेंस
है। जितना ज्यादा डिस्टेंस होगा उतना भैया दूरियां होंगी। और जितनी दूरियां होंगी उतनी कम स्टेबिलिटी होगी। चार्ज को चाहिए
पासपास आने में मजा आता है। तो बताइए कौन बहुत खुश होगा जिसका छोटा साइज होगा? छोटे साइज वाला ज्यादा लेटेस्ट एंथैल्पी
क्योंकि डिस्टेंस क्या होगा? कम होगा। तो इस बेसिस पे अगर मैं बताऊं आपको तो लेटेस्ट एंथैल्पी सोडियम वाले केस की
ज्यादा होगी। अगला क्वेश्चन मैं तुम्हें देता हूं। जल्दी से मुझे बताइए कमेंट सेक्शन में थर्ड वाले केस में सबसे
हाईएस्ट लेटेस्ट एंथैल्पी किसकी होगी? लिथियम आयोडाइड की या फिर लिथियम तुम्हारा यहां पे किसको कर दूं मैं? ये कौन है भाई
साहब? ये x क्यों छोड़ दिया यहां पे? एक सेकंड रुक जाओ रुक जाओ फिर सीबीआई इसको छोड़ दो यहां पे कुछ नहीं है lix कुछ नहीं
है यहां पे इसको देंगे छोड़ है ना इसको छोड़ दो इसको छोड़ दो यहां पे ये कुछ नहीं है डन है बातचीत तो इन तीनों में से आपको
मुझे बताना है कि किसकी लेटेस्ट एंथैल्पी ज्यादा होगी फ्लोराइड वाले की आयोडाइड वाले की आपको बताना है हाईएस्ट कमेंट
सेक्शन में जल्दी से करेंगे कमेंट का कोड है भैया एपीएम लिख देना और बताना कि आपका आंसर क्या है मैं देख लूंगा आई होप कि
आपको बहुत मजा आ रहा होगा बहुत फन आ रहा होगा क्या बात है। आगे बढ़ जाए क्या गाइस? आगे बढ़ जाए।
कुछ नहीं करना। एक सेकंड इसको पॉज करना और [गला साफ़ करने की आवाज़] चलो भाई तो अब एक बार लास्ट में देख लेते
हैं आयनिक कंपाउंड और कोवेलेंट बन कंपाउंड्स की मतलब जो कंपाउंड्स ये बनते हैं इन बॉन्ड के बाद में उनकी क्या-क्या
कैरेक्टरिस्टिक्स होती हैं। तो पहली बात करते हैं हम लोग इलेक्ट्रोवेलेंट बॉन्ड की भाई। तो इलेक्ट्रो इलेक्ट्रोवेलेंट
कंपाउंड्स आर ऑलवेज प्रेजेंट इन क्रिस्टलाइन नेचर। मतलब इनके क्रिस्टल्स बनते हैं। सॉलिड फॉर्म होती है ये। और
बेसिकली क्रिस्टल्स का मतलब ये होता है जहां पे एक ऑर्डर में सारे के सारे आयंस अरेंज होते हैं। फॉर एग्जांपल अगर तुम
यहां पे देखोगे तो NaCl में तुम्हें साफ-साफ दिख रहा होगा कि भई पहले एक Na पॉजिटिव है तो फिर एक Cl नेगेटिव है। फिर
Na+ पॉजिटिव है। फिर Cl नेगेटिव है। तो इस तरीके से एक सॉलिड फॉर्म में सारे आयंस आपस में चिपक जाते हैं। दिस इज़ व्हाट वी
कॉल्ड एज क्रिस्टलाइन नेचर। बहुत बढ़िया। इनका हाई मेल्टिंग और बोइलिंग पॉइंट होता है। अब कोई पूछे क्यों होता है? तो उसका
एक बहुत ही बेहतरीन रीज़न है कि Na पॉजिटिव और Cl नेगेटिव के जो बीच में बॉन्ड जो फोर्स ऑफ़ अट्रैक्शन होती है उसे कहते हैं
स्ट्रांग स्ट्रांग इलेक्ट्रोस्टेटिक फोर्स ऑफ़ अट्रैक्शन। इलेक्ट्रोस्टेटिक फोर्स ऑफ अट्रैक्शन। ध्यान दीजिएगा। बहुत
इंपॉर्टेंट बात मैं बता रहा हूं तुम्हें कि स्ट्रांग का मतलब है बहुत तगड़ी। इलेक्ट्रोस्टेटिक स्टेटिक मतलब रुका हुआ
इलेक्ट्रॉनिक चार्ज। पॉजिटिव नेगेटिव। रुका हुआ है। पॉजिटिव नेगेटिव रुके हुए हैं। आपस में चिपके हुए हैं। तो बहुत तगड़ी
फोर्स ऑफ अट्रैक्शन होती है। जिस वजह से ये बहुत तगड़े चिपके हुए होते हैं। एंड इनका मेल्टिंग और बॉइलिंग पॉइंट इनको
तोड़ना बहुत मुश्किल होता है। बहुत टेंपरेचर देना पड़ेगा भाई साहब। ठीक है? दे आर हार्ड एंड ब्रिटल। बहुत हार्ड होते
हैं। ठीक है? दे आर बैड कंडक्टर ऑफ़ इलेक्ट्रिसिटी इन सॉलिड स्टेट बट गुड कंडक्टर इन मोल्टन स्टेट। अब देखो यार
सॉलिड स्टेट में बिल्कुल चिपके हुए होते हैं। इलेक्ट्रिसिटी क्या होता है? फ्लो ऑफ चार्ज। चार्ज यहां पे कौन है? Na पॉजिटिव।
Cl नेगेटिव। अगर सॉलिड फॉर्म में सारे पेटी पैक हैं। कहां से फ्लो करेंगे? नहीं करेंगे। आप इन्हें हीट करो। इनको मेल्ट कर
दो। अब मेल्ट में लिक्विड कैन फ्लो तो यहां पे फ्लो ऑफ चार्ज पॉसिबल होगा। इसलिए मोल्टन स्टेट में ये अच्छे कंडक्टर
इलेक्ट्रिसिटी के बन जाते हैं। बट सॉलिड स्टेट में नहीं होते हैं। बहुत बढ़िया। देयर जनरली एकज़िस्ट इन गैस, लिक्विड और
सॉफ्ट सॉलिड। वो प्योरली सॉलिड थे। क्रिस्टलाइन नेचर था। ये कैसे थे? सॉलिड स्टेट में एक्सिस्ट करते थे क्योंकि बहुत
हार्ड होते हैं। लेकिन ये क्या होंगे? नॉर्मली या तो गैस होंगे या फिर लिक्विड होंगे या फिर सॉलिड होंगे। तो बहुत सॉफ्ट
सॉलिड होंगे। ऐसा क्यों? क्योंकि कभी भी ध्यान रखना कोवेलेंट बॉन्ड में कोई पॉजिटिव नेगेटिव चार्ज नहीं होता। भाई
सिंपल सी बात है। मान के चलो कि मेरे पास ये हाइड्रोजन है। मेरे पास ये क्लोरीन है। हाइड्रोजन कह रहा है भ मेरे पास मोस्ट शेल
में वन इलेक्ट्रॉन है। मुझे एक और चाहिए। और क्लोरीन कह रहा है भाई साहब मेरे पास आउटर मोस्ट शेल में सात इलेक्ट्रॉन्स हैं।
मुझे भी एक चाहिए। अब ध्यान देना नॉर्मली यहां पे सोडियम होता Na होता तो उसके पीछे वाली शेल में 2 8 होता। वो एक देके ऑक्टेट
पूरी कर लेता। हाइड्रोजन तो वो कर ही नहीं सकता। इसके पास तो है ही एक इलेक्ट्रॉन तो क्या ये अपना एक देगा? नहीं देगा। जब देने
वाला कोई नहीं है तो यहां पे होगी म्यूचुअल शेयरिंग। तो हाइड्रोजन बोलेगा कि भाई तू मेरा बीच में रख लेता हूं मैं। तू
मेरा ले ले और मैं तेरा ले लेता हूं। इस तरीके से भाई साहब यहां पे क्या होगा? शेयरिंग वाला बॉन्ड बनेगा। जब शेयरिंग
वाला बॉन्ड बनता है तो ना तो हाइड्रोजन ने कोई इलेक्ट्रॉन लूज किया है ना क्लोरीन ने गेन किया है। तो कोई पॉजिटिव नहीं है। कोई
नेगेटिव नहीं है। इसका मतलब अगर यहां पे आप देखोगे दो NaCl के बीच में जो फोर्स है वो है इलेक्ट्रोस्टेटिक फोर्स ऑफ़
अट्रैक्शन। लेकिन यहां पे ऐसा कुछ नहीं है। यहां पे जो थोड़ी बहुत छोटी-मोटी जो फोर्स ऑफ़ अट्रैक्शन होती है जिस वजह से
लिक्विड होते हैं उसे कहते हैं वीक वेंडर वॉल फोर्स ऑफ़ अट्रैक्शन। वीक वेंडर वॉल फोर्स ऑफ अट्रैक्शन कहते हैं। बहुत वीक
होती है क्योंकि कोई पॉजिटिव नेगेटिव नहीं होते हैं। थोड़ा बहुत टक्करवक्कर लगने की वजह से कोलीजन होने की वजह से तो जो भी
थोड़ा बहुत चार्ज क्रिएट हो जाता है। उस वजह से बहुत छोटा सा जो चार्ज क्रिएट होता है उस वजह से वंडर वाल फोर्स ऑफ़ अट्रैक्शन
होती है। अदरवाइज कोई स्ट्रांग नहीं होती। इसी वजह से क्या है भाई साहब? ये कैसे होते हैं? लिक्विड गैस होते हैं।
कंप्लीटली टाइटली पैक्ड नहीं हो पाते। बहुत बढ़िया। दिस इज़ ड्यू टू द फैक्ट दैट दे आर हेल्ड टुगेदर बाय एक वीक वंडर वाल
फोर्स ऑफ़ अट्रैक्शन। बहुत बढ़िया। इनका लो मेल्टिंग और बॉइलिंग पॉइंट है। भाई साहब टाइटली पैक्ड ही नहीं है। क्या करें?
एक्सेप्शन है। डायमंड और सिलिका दो ऐसे कोवेंट कंपाउंड हैं जो बहुत स्ट्रांग होते हैं। तो ये इसका एक एक्सेप्शनल केस है।
अगली बात दे आर बैड कंडक्टर ऑफ इलेक्ट्रिसिटी ड्यू टू देयर नॉन पोलर इन नेचर। भाई साहब इलेक्ट्रिसिटी होता है
फ्लो ऑफ़ चार्ज। यहां पे चार्ज ही नहीं है। अबे चार्ज कहां है? नहीं है ना चार्ज? भैया चार्ज नहीं है। तो ये कैसे हैं? नॉन
पोलर हैं। नॉन पोलर का मतलब है चार्ज ना होना। जिस वजह से ये है बैड कंडक्टर ऑफ इलेक्ट्रिसिटी। आशा करता हूं कि आपको समझ
में बात आ गई होगी। दैट्स इट। तो चलिए ये थे हमारे आयनिक कंपाउंड्स और कोवेलेंट कंपाउंड्स के बारे में बातचीत। आइए अब आगे
बढ़ते हैं। याद होगा तुम्हें? मैंने तुम्हें बताया था कि कोवेलेंट बॉन्डिंग में दो टाइप होते हैं। अगर इक्वल
कॉन्ट्रिब्यूशन है तो कोवेलेंट होगा और अनकल है तो भैया कोऑर्डिनेट होगा। तो आइए एक बहुत जबरदस्त तुम्हें केस बताता हूं।
कोऑर्डिनेट बॉन्डिंग का मजा आ जाएगा भाई साहब। तुम्हें एकदम दिल खुश हो जाएगा तुम्हारा। चलिए तो एक कहानी सुनाऊं
तुम्हें। कहानी कहानी सुनाऊं? कहानी सुनना बहुत ध्यान से। तो कहानी कुछ ऐसी है कि एक दिन एक हाइड्रोजन पॉजिटिव मार्केट में घूम
रहा था। कौन? हाइड्रोजन पॉजिटिव। या फिर चलो मार्केट में घूम रहा है एक NH3 अमोनिया। NH3। अच्छा NH3 को बताने से पहले
मैं तुम्हें एक दो बातें बताऊंगा। चलो NH3 के थ्रू ही बता देता हूं मैं। जब भी कभी तुम बॉन्डिंग करते हो तो मैं तुम्हें एक
छोटी सी बात बता रहा हूं। ध्यान से देखना। मेरे पास ये नाइट्रोजन है व्हिच इज 2 8 नॉट टू कॉमा। ये है 2 5। इसके आउटर मोस्ट
शेल में पांच इलेक्ट्रॉन्स हैं। कितने हैं? पांच इलेक्ट्रॉन्स हैं। तो अगर आप इसको ध्यान से देखोगे तो इसको तीन
इलेक्ट्रॉन और चाहिए। क्या चाहिए इसको? तीन इलेक्ट्रॉन अभी और चाहिए। और जब इसको तीन इलेक्ट्रॉन चाहिए तो मान लो इसके
सामने हाइड्रोजन आ गया। है ना? कौन आ गया? हाइड्रोजन। तो हाइड्रोजन के आउटरमोस्ट शेल में एक ही इलेक्ट्रॉन होता है। इसके पास
होता ही एक है। हाइड्रोजन कभी देता है ही नहीं। दे नाइट्रोजन भी नहीं सकता क्योंकि इसको तो तीन ले के अपनी ऑक्टेट पूरी करनी
है। तो ये भी लेने वाला, ये भी लेने वाला। क्या कभी यहां पे आयनिक बॉन्ड बनेगा? आप बोलोगे भैया आयनिक क्यों बनेगा? यहां पे
बनेगा शेयरिंग वाला। तो जब शेयरिंग होगी तो नाइट्रोजन बोल रहा है भई मेरी कंबाइनिंग कैपेसिटी तीन की है। मुझे तीन
चाहिए तो तो एक ही आ रहा है। तो यह कहता है मैं अपने दो और भाइयों को बुला के लाता हूं। तो ये दो भाइयों को और बुला के लाया
NH3 के लिए। और ऐसे करके आप ध्यान से देखोगे तो एक शेयरिंग यहां हो गई। एक शेयरिंग यहां हो गई और एक शेयरिंग यहां हो
गई। इसके दो दो पूरे हो गए और इसके दो तीन पांच और तीन आठ पूरे हो गए। आप इसको ऐसे भी समझ सकते हो कि आप इसको ऐसे जो घेरा
करके बनाते हैं हम लोग इसको ऐसे भी तुम इसको बना सकते हो। ये तुम्हारा हो गया भैया शेयरिंग वाला बॉन्ड। या फिर आप इसको
नॉर्मली ऐसे लाइन से भी बना सकते हो जहां-जहां बॉन्ड आपका बना हुआ है। अब मेरी बात को फोकस करना बहुत जबरदस्त। मैं अगर
नाइट्रोजन के चारों तरफ देखूं तो जो भी नाइट्रोजन के इलेक्ट्रॉन्स हैं अब ये भी नाइट्रोजन का तो पहले से था ओरिजिनली। ये
भी नाइट्रोजन में ही काउंट होगा क्योंकि शेयरिंग में है तो नाइट्रोजन भी कहेगा कि मेरा भी है इसमें हिस्सा। ठीक है? तो
नाइट्रोजन के पास छह इलेक्ट्रॉन ऐसे हैं जो बॉन्ड में पार्टिसिपेट कर रहे हैं और बॉन्ड वाला जोड़ा बना रहे हैं। मतलब
नाइट्रोजन के पास तीन बॉन्ड पेयर्स हैं। बॉन्ड वाले इलेक्ट्रॉन के जोड़े हैं। कितने हैं? तीन बॉन्ड पेयर्स। बॉन्ड पेयर
कौन से होते हैं? जो बॉन्डिंग में पार्टिसिपेट कर रहे हैं। इसके पास नाइट्रोजन के पास कितने बॉन्ड पेयर हैं?
तीन बॉन्ड पेयर हैं। अब आप ध्यान से देखोगे तो एक इलेक्ट्रॉन का पेयर ऐसा है ये वाला जो कि बॉन्डिंग में पार्टिसिपेट
नहीं कर रहा। इसे कहते हैं लोन पेयर। तो नाइट्रोजन के पास तीन बॉन्ड पेयर हैं और एक लोन पेयर है। लोन पेयर का मतलब है द
पेयर ऑफ इलेक्ट्रॉन्स पेयर ऑफ इलेक्ट्रॉन्स पेयर ऑफ इलेक्ट्रॉन्स व्हिच व्हिच
डू नॉट पार्टिसिपेट डू नॉट पार्टिसिपेट डू नॉट पार्टिसिपेट इन बॉन्डिंग। तो आउटर मोस्ट शेल के जो इलेक्ट्रॉन्स हैं जिन्हें
हम कहते हैं वैलेंस शेल के इलेक्ट्रॉन्स। वैलेंस शेल के इलेक्ट्रॉन्स दो पार्ट में डिवाइड हो सकते हैं गाइस। कैसे-कैसे? एक
बॉन्ड पेयर में और एक आपका लोन पेयर में। एक बॉन्ड पेयर में और एक लोन पेयर में। बात समझ में आ रही है सभी को? लोन पेयर
वाले जो बॉन्डिंग में पार्टिसिपेट नहीं कर रहे। ऐसे ही बैठे हुए हैं। जिनकी जरूरत ही नहीं पड़ी। उससे पहले ही हमारी ऑक्टेट
पूरी हो गई। आशा करता हूं आपको बात समझ में आ रही होगी। बिल्कुल समझ में आ रही है। अब अगर आप ध्यान से देखोगे ना कोई भी
जो मॉलिक्यूल होता है ना वो लोन पेयर से बहुत दुखी रहता है। भाई सर पे इलेक्ट्रॉन बैठे हुए हैं यार बिल्कुल भी खुश नहीं है
वो। अच्छा चलो मान लिया खुश नहीं है। तो एक दिन ना ऐसे ही NH3 बैठा हुआ था जिसके सर पे एक लोन पेयर रखा हुआ था। मैंने बना
दिया NH3 कुछ ऐसे यहां पे लोन पेयर है। और जब ये घूम रहा था ऐसी मार्केट में तो वैसे तो स्टेबल है। कोई दिक्कत वाली बातचीत
नहीं है। लेकिन लोन पेयर तो है ही यार कोई बात नहीं। अब यहां पे सामने से ना चलता हुआ H पॉजिटिव आ रहा है। हाइड्रोजन का आयन
आ रहा है। व्हाट व्हाट इज़ H पॉजिटिव? H के पास ओरिजिनली एक इलेक्ट्रॉन होता है। ये कोई और H पॉजिटिव है कहीं और से आ रहा है।
इसके पास एक ही इलेक्ट्रॉन था वही किसी ने छीन लिया। इसके ऊपर है पॉजिटिव चार्ज। बहुत मारामारा घूम रहा है कि अरे मेरी कोई
मदद कर दो। मेरे ऊपर चार्ज आ गया है +1 का। मुझे न्यूट्रल कर दो। मेरी ड्यूप्लेट पूरी भी नहीं हुई है। मेरे तो एक
इलेक्ट्रॉन था वो भी ले लिया। जब ये ऐसे घूम रहा है तो इसको मिला अमोनिया। ये अमोनिया से कहता है अमोनिया अमोनिया मेरी
मदद करेगा। अमोनिया कहता है बिल्कुल करेंगे। क्या दिक्कत वाली बात चीज़ आ रही है? बिल्कुल करेंगे। तो अमोनिया कहता है
चल एक काम कर ले जा तेरे से शेयरिंग ऑफ इलेक्ट्रॉन्स कर लेता हूं। तू अपना एक बीच में रख मैं अपना एक बीच में रखूंगा। आजा
खुश हो जा तू भी। कह रहा है भाई मेरे पास इलेक्ट्रॉन ही नहीं है। कैसे करूं? तो वो कह रहा है तेरे पास एक भी नहीं है। कह रहा
नहीं। तो कह रहा अब मैं क्या करूं यार? अब तो मुश्किल है। कह रहा भाई प्लीज कुछ देख ले। तो यहां पे अमोनिया इतना बड़ा दिल
दिखाता है। एक तो इसके पास लोन पेयर हैं। दो इलेक्ट्रॉन जो खाली बैठे हुए हैं। तो ये इस हाइड्रोजन से बोलता है कि तू एक काम
कर। पहले तू आंटी में पीछे के रास्ते से इस लोन पेयर से एक इलेक्ट्रॉन ले ले और उसको अपने पास रख। पहले तू यह काम कर। इस
लोन पेयर में से एक इसको दे दिया। जब इसको एक इलेक्ट्रॉन पूरा का पूरा दे दिया पहले ही। तो अब इसका जो पॉजिटिव चार्ज था खत्म
हो गया। भ पॉजिटिव को एक नेगेटिव मिल गया। न्यूट्रल हो गया। अब वो पॉजिटिव किस पे आ गया? इस पे आ गया। लो नाइट्रोजन कह रहा है
मुझे कोई दिक्कत वाली बातचीत नहीं है। अभी ठीक हो जाएगा सब कुछ। अब हाइड्रोजन को एक तो दे दिया। अब जो लोन पेयर का एक
इलेक्ट्रॉन बचा हुआ है उससे कोवेलेंट बॉन्ड शेयरिंग वाला बॉन्ड बना लेता है। अब आप ध्यान से यहां पर देखेंगे तो हाइड्रोजन
की डुप्लेट पूरी है। हां जी। क्या नाइट्रोजन की ऑक्टेट पूरी है? हां। तीन बॉन्ड पेयर पहले से हैं। हाइड्रोजन के साथ
में छह इलेक्ट्रॉन वाले और दो ये रहे। इसके तो कहीं गए नहीं। नाइट्रोजन ने बस अपना लोन पेयर उठा के बीच में रख दिया।
इसके अभी भी आठ हैं। ऑक्टेट पूरी है। और ऐसे करके ये बना आपका अमोनियम आयन NH4 पॉजिटिव। ध्यान रखना। पहले जो पॉजिटिव था
वो H पे था। अब जो पॉज़िटिव है वो नाइट्रोजन पे है। ऐसे बनता है हमारा कोऑर्डिनेट बॉन्ड। तो ऊपर देखो डेफिनेशन
में क्या लिखा हुआ है? ड्यूरिंग द फॉर्मेशन ऑफ अ बॉन्ड बाय शेयरिंग ऑफ इलेक्ट्रॉन्स बिटवीन एटम्स व्हेन बोथ
इलेक्ट्रॉन्स ऑफ द शेयर्ड पेयर आर प्रोवाइडेड बाय वन एटम। केवल एक ही एटम है जो उस शेयरिंग वाले इलेक्ट्रॉन्स के जो
बॉन्ड बना है उसके दोनों इलेक्ट्रॉन्स को वहां पे लेता है। द बॉन्ड फॉर्म्ड इज़ कॉल्ड एज़ कोआर्डिनेट बॉन्ड। कोआर्डिनेट
बॉन्ड तब बनता है जब एक डोनर होता है जो डोनेट करता है एक लोन पेयर को डोनेट्स व्हिच डोनेट्स अ लोन पेयर ठीक है ना व्हिच
डोनेट्स अ लोन पेयर व्हिच डोनेट्स अ लोन पेयर जो पूरा लोन पेयर डोनेट करता है और एक होता है भाई साहब एक्सेप्टर जो
उस लोन पेयर को एक्सेप्ट करता है व्हिच एक्सेप्ट व्हिच एक्सेप्ट्स अ लोन पेयर आशा करता हूं आपको समझ में आया होगा। इस तरीके
से अमोनियम आयन बनता है। यहां पे बनता है कोआर्डिनेट बॉन्ड। कोआर्डिनेट बॉन्ड को दिखाने का एक तरीका होता है कि जिसने दिया
है ना जिसने अपना लोन पेयर दिया है उस तरफ से एक एरो लगा दो जिससे कि समझ में आए कि भई अमोनिया ने अपना लोन पेयर दिया है तो
एक एरो लगा देते हैं। बहुत बढ़िया क्या बात है। आइए एक और एग्जांपल आपको दूंगा। मजा आ जाएगा। दिल के चक्षू खुल जाएंगे भाई
साहब। एकदम से जबरदस्त मजा आ जाएगा। मेरे पास यहां पे पानी है। पानी है। पानी है। H2O है। सबको पता है H2O में दो लोन पेयर
होते हैं। किसी को नहीं पता है तो एक बार देख लो जरा। भाई ये ऑक्सीजन क्या होता है? ये होता है 2 6, है ना? और हाइड्रोजन क्या
होता है? ये होता है हमारा वन। है ना? तो अगर ऑक्सीजन की बात करूंगा तो इसके पास 1 2 3 4 5 6 इलेक्ट्रॉन्स हैं। इसको दो
चाहिए। दो इसकी कंबाइनिंग कैपेसिटी है। एक हाइड्रोजन आया। बोल रहा है मैं तो बस एक ही दे सकता हूं। तो तू अपने भाई को लेके
आ। अपने भाई को लेके आया। तो एक यहां बॉन्ड बना, एक यहां बॉन्ड बना। अब ऑक्सीजन के ऊपर दो लोन पेयर हैं। दिख रहे हैं
सबको? मैं गुंबद बना के दिखा रहा हूं कि दो लोन पेयर हैं। बाकी दो बॉन्ड पेयर हैं। आपसे पूछ सकते हैं। कितने लोन पेयर हैं?
दो लोन पेयर हैं। कितने बॉन्ड पेयर हैं ऑक्सीजन के? ऑक्सीजन के दो बॉन्ड पेयर हैं। बॉन्ड पेयर कहां है भैया? एक बॉन्ड
पेयर, दो बॉन्ड पेयर। लोन पेयर कहां है? ये रहे अपने। तो यहां पे दो लोन पेयर हैं। इसके पास मारामारा आया H पॉजिटिव। अरे
ऑक्सीजन पानी भाई पानी भाई पानी भाई मेरे साथ बहुत बुरा हुआ है। मेरे पास तो एक भी इलेक्ट्रॉन नहीं है। क्या आप मेरी मदद
करेंगे? तो पानी कहता है लास्ट एक इलेक्ट्रॉन दे देता हूं। कर ले शेयरिंग। कह रहा है एक भी नहीं है। कह रहा है अच्छा
नहीं है। तो अब मैं पूरा लोन पेयर तुझे दे दूंगा। टेंशन ना ले। तो क्या होगा यहां पे? पानी क्या करेगा? पानी क्या करेगा?
अपना एक लोन पेयर उठा के पूरा बीच में रख देगा। ऐसे करके और खुश कर देगा इसको। यह बन जाएगा आपका H3O पॉजिटिव जिसे हम कहते
हैं हाइड्रोनियम आयन। क्या कहते हैं? हाइड्रोनियम आयन। ये आपका हाइड्रोनियम आयन बन जाएगा। ध्यान रखना हाइड्रोनियम आयन में
जो पॉजिटिव चार्ज है जो पहले H पॉजिटिव पे था अब वो ऑक्सीजन पे चला जाता है। क्योंकि अब ऑक्सीजन ने एक इलेक्ट्रॉन पहले वहां
दिया है। जिस वजह से उस पे पॉजिटिव चार्ज आएगा। आशा करता हूं कि आपको समझ में आया होगा कोआर्डिनेट बॉन्ड क्या होता है। चलिए
जी बहुत शानदार बात है। बहुत मजेदार बात है। आशा करता हूं कि आपको बहुत मजा आ रहा होगा। अगर यहां तक भाई साहब फुल मौज आ
चुकी है तो ए पे इन द चैट बॉक्स देना चाहिए। बहुत जबरदस्त तरीके से। मैं तुम्हें बता नहीं सकता कि इस चैप्टर में
तुम्हें भी कितना मजा आने वाला है। बिलीव मी, बिलीव मी, बिलीव मी। बहुत मजा आएगा। ठीक है? चलिए तो बात कर लेते हैं भाई साहब
अपनी अगली एक्सेप्शनंस। एक्सेप्शनंस ऑफ ऑक्टेट रूल। ऑक्टेट रूल बहुत सटीक था। उसने हमें
केमिकल बॉन्डिंग सिखाई। लेकिन ऐसी कुछ जगह है जहां पे ऑक्टेट रूल कंप्लीटली फेल कर जाता है। आइए जानते हैं। तो पहला उसका
पार्ट है द इनकंप्लीट ऑक्टेट ऑफ द सेंट्रल एटम जिसका मतलब है इलेक्ट्रॉन डेफिशिएंट कंपाउंड्स। मतलब आइए समझाता हूं। अगर आप
ध्यान से देखेंगे बेरिलियम क्लोराइड जो मॉलिक्यूल बनता है बेरिलियम क्या होता है भैया? बेरिलियम होता है हमारा हमारा टू
{कॉमा} टू। कितना होता है? 2मा 2। इसके आउटर मोस्ट शेल में भैया दो इलेक्ट्रॉन हैं और अगर ये यहां पे शेयरिंग भी कर ले
दो क्लोरीन के साथ में क्योंकि क्लोरीन कभी ले सकता है लेकिन बेरिलियम दे नहीं पाएगा। अब आप बोलोगे भैया यहां पे मेरे
पास एक सवाल है। आपसे मैं सवाल पूछना चाहता हूं कि बेरिलियम ने यहां पर आयनिक बॉन्ड क्यों नहीं बना लेता बेरिलियम?
क्यों ना बेरिलियम क्या करे? क्यों ना बेरिलियम अपना एक इलेक्ट्रॉन इस क्लोरीन को दे दे और एक अपना इलेक्ट्रॉन इस वाले
क्लोरीन को दे दे और एक आयनिक बॉन्ड बना के यहां पर खुश हो जाए। आपको याद है पीरियडिक क्लासिफिकेशन ऑफ एलिमेंट्स में
मैंने आपको लास्ट में बताया था एनामोलस बिहेवियर ऑफ सेकंड पीरियड एलिमेंट्स। एनामोलस बिहेवियर ऑफ सेकंड पीरियड
एलिमेंट्स जिसमें लिथियम होता है, बेरिलियम होता है, बोरोन होता है। और मैंने आपको बताया था कि ये सारे के सारे
मेटल होते हुए भी सेकंड ग्रुप के एलिमेंट कोवेलेंट कंपाउंड ये बनाते हैं। क्या बनाते हैं? कोवेलेंट कंपाउंड। ये कभी
आयनिक बनाते ही नहीं है। और आपने मैंने बोला था एनामोलस बिहेवर चैप्टर नंबर फोर्थ में बताऊंगा। आज ही बताऊंगा। लेकिन मान
लेना हमेशा लिथियम, बेरिलियम, बोरोन ये जो टॉप सेकंड पीरियड के एलिमेंट हैं ये मेटल होते हुए भी कोवेलेंट बॉन्ड ही बना के आ
जाते हैं। इसका रीजन है अभी अगले टॉपिक में बताऊंगा। चिंता मत करना बस मुझे अगले 20 मिनट दे देना। लेकिन ये कोवेलेंट बॉन्ड
ही बनाते हैं। इसको ध्यान रखना है। ये एनामोलस बिहेवियर था। तो आयनिक तो यहां पे होगा नहीं। क्योंकि एनामोलस बिहेवियर है
भैया ने बताया। रीज़न दूंगा पूरा। प्रॉपर रीज़न दूंगा मैं इसका। टेंशन मत लेना। प्रॉपर रीज़न दूंगा मैं तुम्हें इसका।
प्रॉपर रीज़न दूंगा मैं तुम्हें इसका। ठीक है भैया। तो अब होगा क्या भाई? भाई बेरिलियम मैक्स टू मैक्स एक शेयरिंग यहां
कर सकता है। एक शेयरिंग यहां कर सकता है। दो बॉन्ड बनाएगा। जरा गिनना बेरिलियम के शेयरिंग के बाद कितने इलेक्ट्रॉन हो गए?
भैया एक दो तीन चार चार ही तो इलेक्ट्रॉन हैं। क्या बॉन्ड बनाने के बाद इसकी ऑक्टेट पूरी होती है? भैया ऑक्टेट पूरी नहीं होती
है। जबकि ये एक स्टेबल कंपाउंड है। बेरिलियम क्लोराइड एक्सिस्ट करता है। हमने पूछा अरे यार ऑक्टेट रूल तो पूरा हो ही
नहीं रहा तो ये बॉन्डिंग कर क्यों रहा है? पता नहीं जी क्यों कर रहा है? ऑक्टेट रूल फेल कर जाता है यहां पे क्योंकि सेंट्रल
एटम में आठ से कम इलेक्ट्रॉन हैं इसलिए इसको बोलते हैं इलेक्ट्रॉन डेफिशिएंट कंपाउंड एक ऐसा कंपाउंड जिसमें इलेक्ट्रॉन
की डेफिशिएंसी रह जाती है। वहीं एग्जांपल आप लोगे बीएफ थ्री का तो BF थ्री में भी आप देखेंगे कि भैया BF3 में होता है हमारा
2 {कॉमा} थ्री। यहां पे इसके चारों तरफ तीन इलेक्ट्रॉन होते हैं। अगर मैं तीन फ्लोरीन को लेके आऊंगा तो फ्लोरीन होता है
2 7 ये क्या होता है? 2 7 होता है। इसको एक इलेक्ट्रॉन की जरूरत होती है। है ना? इसको एक इलेक्ट्रॉन की जरूरत होती
है। तो ये क्या करेगा? यहां पे फिर से एनामोलस बिहेवियर दिखाते हैं। सेकंड पीरियड के एलिमेंट्स आपको मैंने बताया था
कोवलेंट बनाते हैं। तो एक बॉन्ड यहां, एक बॉन्ड यहां, एक बॉन्ड यहां। सेंट्रल मेटल जो हमारा बोरोन है उसके एक, दो, तीन, चार,
पांच, छह ही इलेक्ट्रॉन हुए हैं उसके पास। इसकी भी ऑक्टेट पूरी नहीं हुई है। ये भी एक इलेक्ट्रॉन डेफिशिएंट कंपाउंड है।
एक्सिस्ट करता है। पूछते हैं कि ऑक्टेट पूरी नहीं है, फिर भी एग्ज़िस्ट कर रहा है। आंसर है पता नहीं। तो ये पहली एक्सेप्शन
है हमारी ऑक्टेट रूल की। आशा करता हूं सभी को बात समझ में आई होगी। आइए अगले की बात करते हैं। बी यानी कि सेकंड नंबर की
एक्सेप्शन। द एक्सपेंडेड ऑक्टेट ऑफ द सेंट्रल एटम यानी कि इलेक्ट्रॉन रिच कंपाउंड्स। बहुत ही बेहतरीन केस है। आओ
बताता हूं। तो होता ये है कि PCL5 नामक कंपाउंड एकज़िस्ट करता है संसार में। नॉर्मली फास्फोरस होता है हमारा 2 {कॉमा}
8, 5। इसको बस तीन ही इलेक्ट्रॉन की जरूरत थी। लेकिन आप देखेंगे कि इसके चारों तरफ होते हैं भैया जी पांच इलेक्ट्रॉन और मजे
की बात ये है इसको बस तीन की जरूरत थी। इसे तीन ही बॉन्ड बनाने थे लेकिन पी सी यहां पे जो क्लोरीन जब आता है तो इसका मन
ललचाता है और ये पांच क्लोरीन से बॉन्ड बनाता है। कुछ ऐसे कुछ ऐसे बॉन्ड बनाता है। कुछ ऐसे बॉन्ड बनाता है भाई क्लोरीन
के पास आउटर मोस्ट शेल में सात होते हैं। है ना? तो ये इसको क्लोरीन को तो एक चाहिए होता है। तो ये क्या करता है? सबसे बॉन्ड
बना लेगा। और जब सबसे बॉन्ड बना लेगा जरा ध्यान से देखना फास्फोरस के कितने इलेक्ट्रॉन हो गए? 2 4 6 8 10 इलेक्ट्रॉन
हो गए इसके भैया। कितने हो गए? 10 हो गए। मतलब ये है एक इलेक्ट्रॉन रिच कंपाउंड। ध्यान दो ऑक्टेट से भी ऊपर चला गया और फिर
भी सुखी बैठा है। इसके आउटरमोस्ट शेल में 10 इलेक्ट्रॉन हो गए लेकिन फिर भी खुश बैठा है। ये हमारा एक्सपेंडेड ऑक्टेट का
केस है। बहुत सारे एग्जांपल आप SF6 को लोगे तो SF6 में भी कुछ ऐसा ही है। जल्दी से ध्यान से देखिए। अब ये आप मुझे होमवर्क
या फिर अभी कमेंट सेक्शन में बताएंगे कि अगर SF6 एक्सिस्ट करता है जिसमें सल्फर होता है 2 {कॉमा} 8 {कॉमा} सिक्स। तो यहां
पर सेंट्रल एटम में कितने इलेक्ट्रॉन हो जाएंगे जो कि ऑक्टेट से ऊपर होंगे। कितने इलेक्ट्रॉन होंगे सेंट्रल एटम में? जैसे
मैंने यहां पे बताया ना कितने हैं? 10 है यहां पे। ऐसे आपको बताना है मुझे कमेंट सेक्शन में कि सल्फर के कितने
इलेक्ट्रॉन्स होंगे? जिस वजह से ये कहलाता है इलेक्ट्रॉन रिच कंपाउंड। सवाल ये है कि ऑक्टेट पूरी करनी थी तो कहीं पे ऑक्टेट
छूट जाती है तब भी वो एक्सिस्ट करता है। कहीं पे ऑक्टेट उबल निकल जाती है तब भी वो एक्सिस्ट करता है। ऐसा क्यों? ये आपके
इलेक्ट्रॉन या फिर एक्सपेंडेड ऑक्टेट के एग्जांपल है। इसका आपको मुझे अभी कमेंट सेक्शन में आंसर बताना है। एपीएम इन द चैट
बॉक्स। तीसरी और बहुत ही जबरदस्त सी एक और यहां पर एक्सेप्शनल केस है। ध्यान से देखिएगा। बच्चे बड़े कंफ्यूज होते हैं।
इसका नाम है ओड इलेक्ट्रॉन मॉलिक्यूल। क्या नाम है इसका? ओड इलेक्ट्रॉन मॉलिक्यूल भाई साहब इसका नाम है। चलिए
समझेंगे। तो ओड इलेक्ट्रॉन मॉलिक्यूल में क्या होता है? ध्यान दो। ये एक इलेक्ट्रॉन डेफिशिएंट कंपाउंड का ही एक केस है। बस
इसको अलग से पढ़ते हैं। समझना क्यों? देखो मेरे पास है NO नाइट्रोजन की एक ऑक्साइड है। मोनो ऑक्साइड है। अगर मैं इसका
स्ट्रक्चर देखूं तो यहां पे नाइट्रोजन है। यहां पर ऑक्सीजन है। नाइट्रोजन के पास सबको पता है। 1 2 3 4 5 इलेक्ट्रॉन होते
हैं आउटर मोस्ट शेल में। और ऑक्सीजन के पास होते हैं भैया 1 2 3 4 5 6 इस तरीके से होते हैं। अब नाइट्रोजन को तीन चाहिए
लेकिन ऑक्सीजन की कंबाइनिंग कैपेसिटी मात्र दो है। आप मेरी बात समझ रहे है? अरे मेरी बात समझ रहे कि नहीं समझ रहे है?
ऑक्सीजन कह रहा है कि भई मेरे पास है 2 8 6 मुझे केवल दो इलेक्ट्रॉन चाहिए तो मैं बस दो ही बॉन्ड बनाऊंगा लेकिन नाइट्रोजन
कह रहा है कि मुझे तो तीन चाहिए मैं तो तीन बॉन्ड बनाऊंगा। लड़ाई बच गई। कैसे करें भैया? तो ऑक्सीजन कहता है चल पहले कर के
देखते हैं। तो ऑक्सीजन कहता है कि देख मैं तो दो बॉन्ड बनाऊंगा। तो ऑक्सीजन ने बोला कि भई चलो पहले तो मेरे दो बॉन्ड बनवाओ।
एक ये बना दिया। एक ये बना दिया। अब यहां पे इतने बनने के बाद ऑक्सीजन हो गया सुखी। ऑक्सीजन कह रहा है अब मत छेड़ दियो मुझे।
मेरे 2 4 6 8 हो गए हैं। लेकिन नाइट्रोजन रो रहा है बैठ के। मेरे साथ बहुत बुरा हुआ है। मेरे साथ ऐसा क्यों किया? है ना? ये
कह रहा है मेरे साथ ऐसा क्यों किया? मेरे साथ मैं इसको दोबारा लिख रहा हूं। एक बार ध्यान से देखना। ये कह रहा है मेरे साथ
ऐसा क्यों किया आपने? किससे कह रहा है ये? समाज से कह रहा है कि समाज से कह रहा है भैया मेरे साथ ऐसा क्यों किया? मेरी क्या
गलती थी? तो ये तो खुश हो गया। इसके पास अभी भी कितने हैं? 2, 4 और तीन सात है। तो क्या नाइट्रोजन यहां पर इलेक्ट्रॉन
डेफिशिएंट का केस है? अरे जल्दी बोलो हां या ना? क्या ये एक इलेक्ट्रॉन डेफिशिएंट का केस है? क्यों भैया? क्योंकि इसके तो
आठ हो गए। इसके तो कितने हैं? 1 2 3 4 5 6 7 इसके तो सात ही इलेक्ट्रॉन हैं। तो ये इलेक्ट्रॉन डेफिशिएंट है। लेकिन
इलेक्ट्रॉन डेफिशिएंट में ध्यान देने वाली बात ये है कि इसके सिर पे जो अभी फालतू इलेक्ट्रॉन जो खाली बैठे हुए हैं ये है
तीन इलेक्ट्रॉन्स खाली। कितने हैं? तीन इलेक्ट्रॉन और तीन नंबर है एक ओड नंबर। ये इलेक्ट्रॉन डेफिशिएंट भी है सात
इलेक्ट्रॉन के साथ में। लेकिन इसके ऊपर जो खाली बैठे हुए हैं वो हैं ओड नंबर ऑफ इलेक्ट्रॉन्स। भैया इससे क्या फिर इससे
क्या करूं अगर खाली ओड नंबर में बैठे हैं फायदा है। ध्यान से देखना। फायदा ये है कि जो एक N ओ है। एक N ओ है मैं इसको ऐसे लिख
रहा हूं। On लिख रहा हूं समझ जाना। मतलब मैं N O ही लिख रहा हूं। इसके पास तीन इलेक्ट्रॉन फालतू हैं जो इसके बराबर में
दूसरा NO है। मान लो बहुत सारे NO बने होंगे संसार में बहुत सारे NO है नाइट्रोजन मोनोऑक्साइड तो ये क्या करता है
ओड इलेक्ट्रॉन वाले जो इनका एक इलेक्ट्रॉन है ये आपस में दोनों जुड़ जाते हैं। नहीं समझे मैं समझाता हूं देखो जरा ध्यान से।
यहां पे आपके पास एक NO है। ठीक है? 1 2 3 यहां पे एक और NO है। 1 2 3 अभी ऑक्सीजन तो दोनों तरफ खुश बैठा है भाई। क्योंकि
ऑक्सीजन के तो आठ हमारे पूरे हो रखे हैं। लेकिन नाइट्रोजन के सात है। तो ये क्या करता है? अपने भाई बंधु से कहता है कि
दोनों मिलके एक बॉन्ड आपस में बना लेते हैं। दोनों जुड़वा बन जाते हैं। डायमराइज कर लेते हैं। डायमराइज करने का मतलब होता
है जुड़वा बन जाना। तो ओड इलेक्ट्रॉन मॉलिक्यूल में एक खास बात ये होती है इनके पास एक लिबर्टी होती है कि जो ओड नंबर
वाला इलेक्ट्रॉन है ना थ्री पांच एक तो जो एक इलेक्ट्रॉन है ये आपस में बॉन्ड बना लेते हैं। अब ध्यान से देखो नाइट्रोजन भी
पूरा हो गया है। दो 4 7 8 ये भी खुश ये भी खुश ये भी खुश और ये भी खुश। इलेक्ट्रॉन डेफिशिएंट की कैटेगरी में जो आते हैं
उनमें कोई भी ओड इलेक्ट्रॉन बचता ही नहीं है कि वो डायमराइज करके एक दूसरे को खुश कर दें। लेकिन ओड इलेक्ट्रॉन वाले जो होते
हैं इलेक्ट्रॉन डेफिशिएंट होते हैं। लेकिन डायमराइज करके जुड़वा बनके अपने आप को स्टेबलाइज कर लेते हैं। ऑक्टेट को पूरा कर
लेते हैं। इसलिए इनको सेपरेट कैटेगरी में पढ़ते हैं। तो NO और NO2 दोनों इसी केस के एग्जांपल हैं। आशा करता हूं आपको मजा आ
गया होगा। अब आते हैं हम अपने डी वाले केस में। ये बहुत ही बेहतरीन है। ये कहता है भ नोबल गैस को माना जाता था कि ये इनर्ट हैं
क्योंकि इनकी फुल्ली फिल्ड ऑक्टेट होती हैं। लेकिन फिर भी कुछ नोबल गैस ऐसी हैं जो रिएक्ट कर लेती हैं। जैसे कि ज़ीनोन
फ्लोराइड कैसे? भई ज़ीनोन है हमारा एक जो है नोबल गैस। इसकी आउटरमोस्ट शेल में आठ इलेक्ट्रॉन हैं। मतलब जीनोन अगर आप बनाओगे
तो 1 2 3 4 5 6 7 आठ इलेक्ट्रॉन बनेंगे। फिर भी ये क्या करता है? ऑक्टेट पूरी होने के बावजूद भी यह दो फ्लोरीन से इस तरीके
से बॉन्ड बना लेता है और जीनोन की फ्लोराइड एग्ज़िस्ट करती है। जबकि इसे बॉन्ड नहीं बनाना चाहिए था। इट इज़
कंप्लीटली फुल्ली फिल्ड ऑक्टेट लेकिन फिर भी ऐसा करता है जिस वजह से ये एक एक्सेप्शनल केस है। आशा करता हूं बहुत मजा
आ गया होगा। बहुत जबरदस्त तरीके से फन आ गया होगा। बहुत शानदार। यहां कोवेलेंट बॉन्ड क्यों बना? आयनिक क्यों नहीं बना?
एनामोलस बिहेवियर था। इसका रीज़न आपको अभी 20 मिनट बाद मिल जाएगा। मैंने पहले ही बोला था कि इतना मजेदार इस वनशॉट को ले
रहा हूं मैं कि तुम्हें हर एक चीज़ समझ में आएगी। हर एक चीज़ में तुम्हें मजा आएगा। बस बस [गला साफ़ करने की आवाज़] मुझे समय दो
थोड़ा सा। चलिए आगे बढूं। यहां तक अगर सारी बातें क्लियर हैं तो एक बार एपीएम छाप दो क्योंकि अब जो आने वाला है ये आने वाला है
बहुत मजेदार, बहुत ही लड्डू, बहुत ही जबरदस्त, बहुत ही इंपॉर्टेंट टॉपिक जिसका नाम है मॉलिक्यूलर स्ट्रक्चर। क्या होता
है मॉलिक्यूलर स्ट्रक्चर? भैया? पहले एपीएम लिखेंगे चैट बॉक्स में बहुत मज करके। अगर यहां तक कोई दिक्कत वाली बातचीत
नहीं है तो। लिख दिया सभी ने। ठीक है? अब समझो मॉलिक्यूलर स्ट्रक्चर क्या होता है? इट इज द इट इज द अरेंजमेंट
अरेंजमेंट अरेंजमेंट ऑफ ऑल एटम्स ऑफ ऑल एटम्स ऑल एटम्स
प्रेजेंट इन अ मॉलिक्यूल। किसी भी मॉलिक्यूल में जितने भी एटम्स हैं उन सबका जो एक
अरेंजमेंट होता है उससे बनने वाला स्ट्रक्चर मॉलिक्यूलर स्ट्रक्चर कहलाता है। कोई नहीं पूछ रहा क्या होता है। लेकिन
आपको हर एक कंपाउंड का स्ट्रक्चर सही स्ट्रक्चर बनाना आना चाहिए। ये बड़ा इंपॉर्टेंट है। चलिए जी। तो अगर आपको
मॉलिक्यूलर स्ट्रक्चर सीखना है बहुत तरीके से बहुत मजे से। छोटे-मोटे कंपाउंड का तो कोई भी बना देगा मॉलिक्यूलर स्ट्रक्चर।
लेकिन जब कोई बड़ा कंपाउंड आता है हम लोग बहुत ज्यादा दिक्कत में आ जाते हैं। हमसे नहीं बनता कैसे बनाएं। कंफ्यूज होते हैं
तो आज जो ट्रिक बताऊंगा मतलब मैं तुम्हें बोल रहा हूं मजा आएगा ध्यान से देखना। सबसे पहले किसी भी
स्ट्रक्चर को बनाने के लिए तुम्हें ढूंढना है सेंट्रल एटम। सबसे मेन आदमी मतलब वो स्ट्रक्चर का राजा होगा। सबसे पहले आपको
राजा को ढूंढना है। राजा की पहचान कैसे होगी? पूरे स्ट्रक्चर में जो लीस्ट इलेक्ट्रोनेगेटिव एलिमेंट होगा वो आपका
बेटा जी राजा होता है। वो क्या होता है? राजा होता है। बहुत बढ़िया। उसके बाद आपको दूसरा ढूंढना है सब एटम। सब एटम का मतलब
है यहां से रानी। आपको रानी ढूंढनी है जो होती है मोस्ट इलेक्ट्रोनेगेटिव एलिमेंट। मोस्ट इलेक्ट्रोनेगेटिव
एलिमेंट। बहुत बढ़िया। और तीसरे नंबर पे आएगा भाई साहब आपका राजकुमार। कौन आएगा? राजकुमार आएगा इन दोनों का
बेटा। जो आपको 99.99% हाइड्रोजन को लेना होता है। अगर हाइड्रोजन उस कंपाउंड में है। हाइड्रोजन मोस्ट ऑफ द
टाइम ध्यान रखना 99.99% ना तो कभी राजा होगा ना कभी रानी होगी। हाइड्रोजन हमेशा राजकुमार होगा। अब अगर
आपको ये थोड़ा सा भी समझ में आ रहा है ना, अब मैं आपको कुछ एग्जांपल लेके बताऊंगा। आपको मजा आ जाएगा। जल्दी से मुझे उस
स्ट्रक्चर में बताओ। CO2 में बताओ मुझे राजा कौन है गाइज़? जल्दी से बताइए राजा कौन है? भैया राजा होता है लीस्ट
इलेक्ट्रोनेगेटिव। कार्बन कम इलेक्ट्रोनेगेटिव है। ऑक्सीजन ज्यादा इलेक्ट्रोनेगेटिव है। हमने पिछले ही
चैप्टर में पढ़ा था कि लेफ्ट टू राइट जाने में इलेक्ट्रोनेगेटिविटी बढ़ती है। टॉप टू बॉटम आने में इलेक्ट्रोनेगेटिविटी घटती
है। तो कार्बन तो लेफ्ट में है मतलब इस तरफ है और यहां पे हमारा ऑक्सीजन है तो ये ज्यादा इलेक्ट्रोनेगेटिव है। तो यहां पे
जो मेरा सेंट्रल एटम है वो है कार्बन। कार्बन को लिखेंगे बीच में। उसके बाद आपको बताना है कितनी रानियां हैं। भैया कार्बन
की दो रानियां हैं। तो दोनों रानियों को एक को यहां जगह दी, एक को यहां जगह दी। सबको पता है ऑक्सीजन होता है 2 6 दो बॉन्ड
बनाने हैं और सबको ये भी पता है कि कार्बन के वैलेंस इलेक्ट्रॉन चार होते हैं तो दो बॉन्ड यहां बनेंगे दो बॉन्ड यहां बनेंगे
दोनों रानियां खुश हो जाएंगी क्योंकि दोनों रानियों के हो गए हैं आठ इलेक्ट्रॉन पूरे आपको सारे इलेक्ट्रॉन बना के दर्शाना
है ये आपका बन गया स्ट्रक्चर राजा एक था उनकी दो रानियां थी दोनों रानियों को दो-दो बॉन्ड बनाने हैं और राजा भी दो ही
बॉन्ड बना सकता है एक साइड में एक साइड में क्योंकि चार बॉन्ड बना सकता है राजा क्योंकि इसके वैलेंस इलेक्ट्रॉन चार थे
सबको पता है कार्बन कार्बन होता है 2मा 4 और ऑक्सीजन होता है 2मा 6 इसको दो चाहिए थे इसको दो इसको शेयरिंग में चार चाहिए थे
तो इसने दो इधर से लिए दो इधर से लिए इस तरीके से पूरा हो गया हमारा स्ट्रक्चर आइए अगला स्ट्रक्चर अगला है मेरा H3PO4 जल्दी
से मुझे कमेंट सेक्शन में बता दो मैं वेट कर रहा हूं तुम्हारा कि इसमें से राजा कौन है हु इज द राजा गाइज़ कौन राजा है H3PO4
में तो आप बोलेंगे भैया साफ-साफ समझ में आ रहा है मुझे H3PO4 में राजा है मेरा फास्फोरस क्योंकि हाइड्रोजन हमेशा
राजकुमार होता है और फास्फोरस और ऑक्सीजन में हमारा हमारा राजा होगा फोस्फरस और सिंपल सी बात है राजा कम होते हैं रानियां
ज्यादा होती हैं। पुराने समय में ऐसा होता था कि एक-एक राजा की चार-चार रानियां होती थी। अब नहीं होता ऐसा लेकिन पहले होता था
उस एग्जांपल को हम यहां पे फॉलो कर लेते हैं। ठीक है? ज्यादा खुश मत हो जाना भैया कभी ऐसे ही आज हो जाए तो मजा आ जाए। अरे
कैसी बात कर रहे हो यार ये गलत बात होती है। ठीक है यहां पे आ जाओ भैया। तो मेरे पास है राजा। फास्फोरस है मेरे पास। अब
फास्फोरस राजा की चार रानियां हैं। तो एक रानी को यहां बनाओ। एक रानी यहां, एक रानी यहां और एक रानी यहां। कितने राजकुमार
हैं? तीन राजकुमार हैं। राजकुमार अगर राजकुमार से आप पूछो कि बेटा किसके पास जाओगे? पापा के पास कि मम्मी के पास मम्मी
के पास जाऊंगा। पापा के पास क्यों नहीं? पापा मारते हैं। होता है कि नहीं होता? राजा भी मारते होंगे अपने राजकुमार को।
पापा तो पापा होते हैं भाई साहब। तो हमेशा पहली प्रेफरेंस होगी राजकुमार की रानी के पास। तो तीन रानियों को एक-एक राजकुमार दे
दो क्योंकि आपके पास तीन ही राजकुमार हैं। आइए जी बहुत शानदार। अब हाइड्रोजन को एक बॉन्ड बनाना है तो इस राजकुमार ने यहां एक
बॉन्ड बनाया, यहां एक बॉन्ड बनाया, यहां एक बॉन्ड बनाया। क्योंकि हाइड्रोजन को डुप्लेट पूरी करनी होती है। एक इलेक्ट्रॉन
के शेयरिंग से हो जाती है। अच्छा अब रानी है ऑक्सीजन। ऑक्सीजन को दो बॉन्ड बनाने हैं। तो एक बॉन्ड उधर राजकुमार से बन चुका
है। एक राजा से बन गया। राजकुमार से बन चुका है। राजा से बन गया। राजकुमार से बन चुका है। राजा से बन चुका है। बहुत
बढ़िया। एक रानी अकेली बैठी है। बहुत गुस्सा है। कह रही है राजा जी मुझे राजकुमार आपने नहीं दिया। मेरा क्या होगा?
तो राजा जी कहते हैं चिंता ना करें रानी आप दोनों बॉन्ड मुझसे ही बनाइए। तो दोनों बॉन्ड यहां पे राजा के इससे बन जाएंगे इस
रानी से। अब आप ध्यान से देखेंगे तो सबकी वैलेंसी पूरी है। फास्फोरस होता है यहां पर हमारा फोस्फोरस की जो इलेक्ट्रॉनिक
कॉन्फ़िगरेशन है वो है 2 8 5 इसके वैलेंस इलेक्ट्रॉन होते हैं पांच। 1 2 3 4 5 और इस तरीके से आप देखेंगे सारा कुछ मामला
सेट हो गया है। जल्दी से मुझे बताएंगे कि ये जो H3PO4 मैंने यहां पे बनाया है इज इट अ इलेक्ट्रॉन डेफिशिएंट कंपाउंड और इज इट
अ इलेक्ट्रॉन रिच कंपाउंड? जल्दी से बताइए। यहां पे जो मेरा कंपाउंड बनाया है मैंने ये इलेक्ट्रॉन डेफिशिएंट है कि
इलेक्ट्रॉन रिच है? आप साफ-साफ देखेंगे कि फास्फोरस के बॉन्ड बनने के बाद दो 4 6 8 10 इलेक्ट्रॉन हो चुके हैं इसकी आउटर
मोस्ट शेल में। तो ये एक इलेक्ट्रॉन रिच का परफेक्ट एग्जांपल हमें शो होता हुआ दिखाई दे रहा है। ये आपका स्ट्रक्चर बन के
तैयार हुआ। आइए अगले स्ट्रक्चर पे बढ़ते हैं। H3PO2 अब की बार हमारे पास राजा कौन है भैया? राजा है मेरे पास फास्फोरस। उसकी
दो रानियां हैं और उसके तीन राजकुमार हैं। दो राजकुमार मिल गए भैया रानियों को। अब रानी ने बोला कि एक ही राजकुमार संभाल
सकता हूं। राजा जी ज्यादा टेंशन नहीं चाहिए मुझे। रानी हूं मैं। मेरे बहुत सारे 70 काम होते हैं। तो अब जो एक राजकुमार
बचा वो मजबूरन राजा को ही संभालना पड़ेगा। तो वो राजकुमार चला गया वहां पर। यहां पे अगर आप बॉन्ड देखेंगे तो एक राजकुमार ने
यहां बॉन्ड बनाया। राजकुमार ने यहां बॉन्ड बनाया। रानी ने यहां बॉन्ड बनाया। रानी ने यहां बॉन्ड बनाया। सही बात है। हमारे पास
था H3PO2। क्या बात है? अब यहां पे एक जो बॉन्ड बनेगा राजकुमार का यहां बनेगा। और
फास्फोरस के पास पांच वैलेंस इलेक्ट्रॉन होते थे। तीन यूज़ में आ गए। एक रहेगा यहां पे लोन पेयर की तरह एज इट इज। आशा करता
हूं कि आपको समझ में आया होगा। एवरीबडी इन द हाउस मेक सम नॉइज़ इन द चैट बॉक्स। मुझे लगता है कि इट इज़ वन ऑफ द बेस्ट
एक्सप्लेनेशन जो आपको स्ट्रक्चर बनाने में हेल्प करेगी। चलिए आगे बढ़ते हैं गाइस। आगे बढ़ते हैं। आइए। तो अब मेरे पास और बहुत
सारे स्ट्रक्चर हैं। आइए राजा को ढूंढते हैं। तो राजा मेरे पास यहां पे कार्बन है। कार्बन के बाद उसके बाद तीन रानियां यहां
पर हैं और तीन रानियों के पास दो राजकुमार हैं। तो एक राजकुमार एक रानी को एक राजकुमार एक रानी को ये रानी यहां पे खुश।
एक राजकुमार के साथ ये भी खुश। इसका एक बॉन्ड बचा यहां पे बना लिया। इस राजा के साथ यहां पे बॉन्ड बना लिया। इस राजा के
साथ ऊपर वाली रानी कह रही है रानी कि राजा मैं बहुत परेशान हूं। आपने मुझे राजकुमार क्यों नहीं दिया? मेरी क्या गलती थी? क्या
मैं इतनी बुरी हूं? राजा जी कहते हैं चिंता ना करो रानी। आप हमसे दो बॉन्ड बनाइए। देखिए दो बॉन्ड बन गए। स्ट्रक्चर
बन के तैयार हो चुका है। कोई टेंशन वाली बात ही नहीं है। कार्बन को वैसे भी चार बॉन्ड बनाने होते हैं क्योंकि इसकी
वैलेंसी कितनी होती है? वैलेंस इलेक्ट्रॉन इसके चार होते हैं। बहुत बढ़िया। आइए 2s4 की बात करते हैं। सल्फर रखा भाई यहां पे
राजा एक है। रानियां चार हैं। बहुत बढ़िया। क्या बात है। दो राजकुमार हैं। एक राजकुमार इनको दिया। एक राजकुमार इनको
दिया। एक बॉन्ड यहां, एक बॉन्ड यहां, एक बॉन्ड यहां, एक बॉन्ड यहां। भैया दो रानियां कह रही हैं। दो रानियां कह रही
हैं कि हम तो आपसे बहुत नाराज हैं। आपने हमें कोई राजकुमार नहीं दिया। राजा कह रहा है कोई चिंता वाली बात नहीं है। आप हमसे
दो बॉन्ड बनाइए। दो बॉन्ड यहां बनाइए, दो बॉन्ड यहां बनाइए। बन के तैयार हुआ H2SO4 ये भी एक परफेक्ट एग्जांपल है ये
इलेक्ट्रॉन रिच कंपाउंड का अगर आप देखेंगे तो दो 4 6 8 10 12 इलेक्ट्रॉन यहां पे ऑक्टेट में आपको दिखाई दे रहे है जो की
ऑक्टेट से ऊपर जा रहे हैं। बहुत बढ़िया। H2O2 की बात करते हैं। यहां पर कोई राजा नहीं है राजा गया है जंग पे और यहां पे
आपके पास बस राजकुमार है हाइड्रोजन और दो रानियां हैं। क्योंकि रानियां दो ही आपको दिख रही होंगी। राजकुमार यहां पर राजा कोई
भी यहां पर है ही नहीं। बात समझ रहे हो? भाई एक ही एलिमेंट है। ना तो कोई लीस्ट है ना कोई मोस्ट इलेक्ट्रोनेगेटिव है। तो यही
रानी है आपकी। रानी है यहां पे। में दो रानियां हैं। दोनों आपस में मिलके बैठी हुई हैं। कह रही हैं दीदी दीदी हम दोनों
मिलके जो है आपस में यूनिटी बना के रखेंगे। राजा जी राजंग पे गए हैं। एक राजकुमार आप रखिए। एक राजकुमार मुझे दे
दीजिए। कोई दिक्कत वाली बात नहीं है। आप एक बॉन्ड यहां बनाइए। राजकुमार से मैं बनाता हूं यहां पे और दोनों आपस में भी एक
बॉन्ड बनाएंगे क्योंकि दोनों को दो-दो बॉन्ड पूरे करने होते हैं। ऑक्सीजन हमेशा दो बॉन्ड बनाता है। ये आपका स्ट्रक्चर बन
के तैयार हो चुका है। CO2 हम ऑलरेडी कर चुके हैं। H3PO2 भी हम ऑलरेडी पिछले वाले पेज पे ही कर चुके हैं। क्या बात है?
शानदार। मजा आ रहा होगा। H2O की बात करूंगा तो यहां पर भी राजा जी जंग पर गए हुए हैं। एक ही रानी है एक ही रानी को
दोनों राजकुमार को संभालना है। तो एक बॉन्ड इस राजकुमार से एक बॉन्ड इस राजकुमार से बना लेंगी और इस रानी के पास
वैलेंस इलेक्ट्रॉन छह हैं क्योंकि ऑक्सीजन है तो दो यहां पे लोन पेयर होते होंगे एज़ इट इज़। NH3 की बात करूंगा भाई साहब बहुत
ध्यान से देखना। NH3 में राजा जी फिर से जंग पे गए हुए हैं। एक ही रानी है और रानी के पास तीन राजकुमार हैं। बेचारी अकेली
रानी इन तीनों राजकुमार को संभालेगी। तो एक राजकुमार यहां बैठा, एक राजकुमार यहां बैठा और एक राजकुमार यहां बैठा। अब मेरा
तुमसे एक क्वेश्चन है जल्दी से मुझे कमेंट सेक्शन में बताना कि इस नाइट्रोजन के पास इस स्ट्रक्चर में कितने सारे लोन पेयर्स
हैं और कितने सारे बॉन्ड पेयर्स हैं। क्या तुम मुझे बता सकते हो? एनीबडी इन द हाउस मेक्स सम नॉइस जल्दी से बता दो मुझे। क्या
कोई है जो मुझे कमेंट सेक्शन में ये बता सके कि NH3 के स्ट्रक्चर में कितने लोन पेयर हैं और कितने बॉन्ड पेयर हैं इस
स्ट्रक्चर में नाइट्रोजन के पास में? तो बहुत सारे बच्चे बोलेंगे कि भैया आसान है। आपके सामने देखो यहां पे तीन बॉन्ड पेयर
हैं। दो एक दो तीन। तीन बॉन्ड के पेयर हैं। जोड़े हैं। लोन पेयर एक भी नहीं है। ज़ीरो लोन पेयर है। अरे तू पागल है क्या?
कैसी बात कर रहा है? नाइट्रोजन होता है भैया हमारा 2 5 अगर फाइव वैलेंसी इलेक्ट्रॉन बनाओगे तो 1 2 3 4 5 तीन से ही
बॉन्ड पेयर बना है। एक लोन पेयर है। यहां पर मतलब इसका ये हुआ कि बॉन्ड पेयर तो तीन ही है। वो तो आपने सही बताया था। लेकिन
लोन पेयर यहां पे एक होगा। अगर आपने वही कमेंट में लिखा है एक और थ्री। तो आप जीत चुके हैं। बहुत शानदार। आगे बढ़िए। H2CO3
हम ऑलरेडी कर चुके हैं। H2SO4 हम ऑलरेडी कर चुके हैं। आइए आगे बढ़ते हैं और स्ट्रक्चर बनाने की चेष्टा करेंगे। अगला
जो हमारा स्ट्रक्चर है, ये बहुत ही इंपॉर्टेंट स्ट्रक्चर है। बहुत सारे बच्चे यहां पे गलती करेंगे। वेरी इंपॉर्टेंट
स्ट्रक्चर है। ध्यान से देखिएगा। तो हमारा स्ट्रक्चर है भैया HNO3। क्या है हमारा स्ट्रक्चर? HNO3 है। तो HNO3 में क्या
होता है? बहुत ध्यान से, बहुत शानदार तरीके से देखिएगा। राजा कौन है भैया? राजा है नाइट्रोजन। कितनी रानियां हैं भैया? एक
दो तीन रानियां है और राजकुमार एक राजकुमार है तो उस राजकुमार को यहां दे दो एक इलेक्ट्रॉन यहां बन गया। एक इलेक्ट्रॉन
यहां बन गया। अब आप ध्यान से देखेंगे तो दो रानियां बड़ी ही नाराज हैं। कह रही है राजा जी आपने अच्छा नहीं किया उसको
राजकुमार दे दिया। हमें राजकुमार नहीं दिया। हम क्या करें अब हम? तो राजा जी कहते हैं दो बॉन्ड बना लेंगे। आइए दो
बॉन्ड बनाते हैं। तो यहां पे दो बॉन्ड बनाया। यहां पे दो बॉन्ड बनाया। राजा जी खुश रहो खुश। लेकिन गाइस एवरीवन इन द हाउस
मेक सम नॉइज़। बहुत ही इंपॉर्टेंट बात बताने जा रहा हूं यहां पे। HNO3 में ध्यान से देखोगे तो नाइट्रोजन एक एक्सपेंडेड
ऑक्टेट बन जा रहा है और इसके पास अब इलेक्ट्रॉन हो गए हैं 2 4 6 8 10 मतलब ये एक इलेक्ट्रॉन रिच कंपाउंड की तरह बिहेव
कर रहा है। अब आपको मैं एक बहुत ही शानदार बात बताने जा रहा हूं यहां पे ध्यान से देखना। नोट डाल के लिखना क्या? लिखो।
नाइट्रोजन कैन नेवर हैव कैन नेवर हैव कैन नेवर हैव नेवर हैव एक्सपेंडेड ऑक्टेट नाइट्रोजन के पास कभी
भी ऑक्टेट एक्सपेंडेड नहीं हो सकती आठ से ऊपर नहीं हो सकती आप पूछोगे भैया क्यों तो आप ध्यान दीजिएगा भैया जब हमने आपको
एनामोलस एनमोलस एनामोलस बिहेवियर बताया था तो बताया था कि जो पहली सेकंड पीरियड के एलिमेंट्स हैं तो वो कोवेलेंट बॉन्ड बनाते
हैं मेटल्स होते हुए भी। वहीं आप अगर आगे बढ़ेंगे बेरिलियम के बाद बोरोन, कार्बन, नाइट्रोजन। तो सेकंड पीरियड के एलिमेंट्स
में n की वैल्यू होती है टू। मतलब l की वैल्यू बस ज़ीरो पॉसिबल है, वन पॉसिबल है, टू भी पॉसिबल नहीं है क्योंकि l हमेशा
छोटा होना चाहिए। तो यहां s ऑर्बिटल होता है जिसमें दो इलेक्ट्रॉन आ सकते हैं। p ऑर्बिटल होता है जिसमें मैक्स टू मैक्स छह
इलेक्ट्रॉन आ सकते हैं। टोटल और टोटल सेकंड शेल के एलिमेंट के अंदर 2 + 6 आठ ही इलेक्ट्रॉन आ सकते हैं। क्यों? क्योंकि
इसमें डी ऑर्बिटल नहीं होता। इसमें क्या होती है? सेकंड पीरियड में एब्सेंस ऑफ़ d ऑर्बिटल होता है। मैंने आपको ये बताया था।
अरे याद है कि नहीं है? अरे जल्दी बोला भैया। अरे जल्दी बोलो यार कैसी बात कर रहे हो? जैसे फॉर एग्जांपल अगर आप फास्फोरस को
देखेंगे तो फास्फोरस जो आता है वो नाइट्रोजन से नीचे आता है। मतलब ये थर्ड शेल का है। ये थर्ड पीरियड का है। मतलब
यहां पे n की वैल्यू थ्री है। एल की वैल्यू जीरो भी हो सकती है। वन भी हो सकती है, टू भी हो सकती है। मतलब एस पी डी।
यहां पर दो इलेक्ट्रॉन एस में, छह इलेक्ट्रॉन पी में, और 10 इलेक्ट्रॉन d में। यहां पर मैक्स टू मैक्स 10, 6, 2, 18
इलेक्ट्रॉन्स आ सकते हैं। फास्फोरस में तो फिर भी 10 ही थे। भी तो आठ और आ सकते हैं क्योंकि यहां पर एब्सेंस ऑफ़ डी ऑर्बिटल
नहीं है। मतलब जो आपने HNO3 का अब स्ट्रक्चर बनाया है ये कतई गलत स्ट्रक्चर है। अगर कॉपी में बना के आ गए, पेपर में
बना के आ गए तो जीरो नंबर आपको यहां पर मिलने वाले हैं। तो ऐसे में HNO3 का सही स्ट्रक्चर क्या होगा? आइए बताता हूं क्या
होगा। चलिए कहां बताऊं यही बताता हूं। यहां पे देख लो। तो ये तो गलत स्ट्रक्चर है। तो HNO2 का सही स्ट्रक्चर क्या होगा?
ध्यान से देखिएगा। ये मेरे पास नाइट्रोजन है। तीन रानियां हैं। 1 2 3 यहां पे एक राजकुमार है। जब इतना बॉन्ड बन जाएगा और
यहां डबल बॉन्ड बन जाएगा तो आप ध्यान से देखेंगे। 1 2 3 4 5 यहीं पे नाइट्रोजन हो गया है एकदम पेटी पैक मामला सेट। इसके हो
गए आठ इलेक्ट्रॉन पूरे। अब गिन लो। दो चार छह और दो आठ। अब ये नाइट्रोजन रानी से बॉन्ड नहीं बनाएगा लेकिन रानी इसकी अपनी
है। रानी हो गई नारा। रानी कह रही है राजा जी गुस्सा आ जाऊंगी बहुत तगड़ा। मेरे घर वाले भी कोई कम अमीर नहीं है। बहुत लेके
आई थी। सोना चांदी लेके आई थी। मुझे आप ऐसे ही छोड़ दोगे। राजा जी फंस चुके हैं। क्या करें? क्या करें? क्या करें? जब भी
कभी ऐसा होगा कि एक्सपेंडेड ऑक्टेड नहीं हो सकती। लेकिन बॉन्ड बनाना है तब हमेशा काम आपको आएगा कोऑर्डिनेट बॉन्ड। क्या काम
आएगा आपको? कोऑर्डिनेट बॉन्ड काम आएगा। तो राजा जी बोल रहे हैं कि देखो मैं आपसे डायरेक्टली बॉन्ड नहीं बना पाऊंगा।
क्योंकि मेरे पास इलेक्ट्रॉन फुल हो चुके हैं। अब मुझे और इलेक्ट्रॉन नहीं आ पाएंगे मेरे पास। तो मैं क्या करता हूं? अपने इस
लोन पेयर में से जो बचा हुआ है एक पहले आपको देता हूं। दे दिया। आपके पास हो गए सात। हां। और अब मैं आपसे करता हूं यहां
पर शेयरिंग। तो आपके पास हो गए 1 2 3 4 5 6 7 8 आप खुश हैं और मेरे पास भी इलेक्ट्रॉन का बर्डन नहीं है। मेरे पास
अभी भी आठ ही हैं। 2 4 6 8 मैं भी खुश हूं। तो हमेशा यहां पर बन जाएगा कोऑर्डिनेट बॉन्ड। इस तरीके से सही
स्ट्रक्चर है HNO3 का। आशा करता हूं आपको समझ में आया होगा। बहुत बेहतरीन। बात कर रहे हैं SO2 की। तो SO2 में भैया दो
रानियां हैं। एक राजा है। राजकुमार नहीं है। दो बॉन्ड इधर, दो बॉन्ड इधर। H2SO3 की बात करेंगे तो एक राजा है, तीन रानियां
हैं। दोनों को एक-एक राजकुमार दे दिया है। बहुत बढ़िया। एक बॉन्ड, एक बॉन्ड, एक बॉन्ड, एक बॉन्ड, दो बॉन्ड यहां बना दो।
सारे लोग खुश हैं। H3PO4 हम ऑलरेडी बना चुके हैं। आइए H3P2O7 बहुत सारे बच्चे यहां पर हो जाते हैं
कंफ्यूज। ये समझ लो तो आपका सारा काम बन जाएगा। जल्दी से मुझे बताइए यहां पर कितने राजा हैं। H3P2O7 में कितने राजा हैं?
भैया यहां पे दो राजा हैं। दो फास्फोरस हैं। दो राजा हैं। भैया रानियां कितनी है? सात रानियां हैं। अब दो राजा में सात
रानियां कैसे बांटोगे? प्रॉब्लम हो जाएगी। तो ऐसे में जब भी ओड नंबर ऑफ रानियां होंगी और दो राजा होंगे तो एक रानी को बीच
में रखेंगे। है ना? अब बची छह। तो 1 2 3 1 2 3 हो गई रानी। और कितने राजकुमार हैं? तीन राजकुमार हैं। भैया तीन राजकुमार हैं।
अच्छा यहां पे मिस प्रिंट है। यहां पे होगा h2o7। हां जी दो राजकुमार हैं। तो अब दो राजकुमार हैं। तो एक रानी एक राजकुमार
इधर वाली रानी को दे दो। एक राजकुमार इधर वाली रानी को दे दो। अब देखो बॉन्ड बनाओ। एक बॉन्ड। ठीक है? उसके बाद इसका यहां से
एक बॉन्ड बना दो। एक बॉन्ड, एक बॉन्ड। फास्फोरस मैक्स मैक्स पांच बॉन्ड बना सकता है क्योंकि वैलेंस इलेक्ट्रॉन में पांच
इलेक्ट्रॉन्स होते हैं। तो एक बन चुका, दो बन चुका। ठीक है? उसके बाद उसके बाद उसके बाद उसके बाद उसके बाद उसके बाद दो यहां
पे बना दो। ठीक है? दो यहां पे बना दिए। अच्छा जी। उसके बाद कितने थे? H3 थे। H2 था। हां। H2 था। P2 है। P2 है। O7 है। O7
है। ठीक है? एक बॉन्ड यहां बना और एक बॉन्ड यहां बना। ठीक है जी। ये डबल बॉन्ड हमारा यहां बन गया। बिल्कुल सही बात है।
और क्या हो सकता है गाइज़ यहां पे? और क्या हो सकता है यहां पे? अब एक ही इलेक्ट्रॉन ओ हो भाई बात फंस गई ना? अरे बात फंस गई
भाई साहब। H2 है। हां जी। H2 है, P2 है, O7 है। तीन और तीन छह। हमारे पास फास्फोरस है। मैक्स टू मैक्स कितने बॉन्ड बना सकता
है? H4, P2O7। यहां पे गाइज़ H4 होना चाहिए ना कि H3। इसको कर दो H4। इट वाज़ अ मिस प्रिंट। ठीक है ना? इट वाज़ H4 P2O7
क्योंकि तभी पॉसिबल हो पाएगा। अदरवाइज़ पॉसिबल नहीं हो पाएगा। तो एक हाइड्रोजन यहां और दे दो। एक हाइड्रोजन यहां और दे
दो। ये यहां पे हो गया। ये यहां पे हो गया। इसका एक बॉन्ड यहां हो गया। इसका एक बॉन्ड यहां हो गया। अब आई थिंक सारे बॉन्ड
सबके पूरे हो गए हैं। फास्फोरस ने मैक्स टू मैक्स पांच बॉन्ड बना सकते हैं। क्योंकि पांच ही वैलेंस इलेक्ट्रॉन हैं। 1
2 3 4 5 सब खुश हो गए हैं। सारी रानियां खुश है। सब कोई खुश है। आशा करता हूं कि आपको H4P2O7 का भी सही स्ट्रक्चर समझ में
आ गया है। इट वाज़ H4P2O7 ना कि H3P2O7। सही बात है? डन है बातचीत? तो ये हो गया आपका स्ट्रक्चर खल्लास। बहुत बेहतरीन। इस
तरीके से आपको बनाने हैं मॉलिक्यूलर स्ट्रक्चर। आइए अब समझते हैं एक अगला टॉपिक एनसीईआरटी के अकॉर्डिंग फॉर्मल
चार्ज। व्हाट इज फॉर्मल चार्ज? क्या होता है फॉर्मल चार्ज? ध्यान से देखिएगा। ध्यान से देखिएगा। बहुत सारे बच्चों का कंसर्न
होता है कि भैया केमिकल बॉन्डिंग बहुत ही बड़ा चैप्टर है। तो बहुत सारे वन शॉट्स में टॉपिक छुड़वा दिए जाते हैं। वो उड़ा के
चले जाते हैं। वो पढ़ाते ही नहीं है कुछ टॉपिक्स। तो लेकिन इस वन शॉट में आपको सारे के सारे टॉपिक्स मिलेंगे। मैं इसकी
गारंटी दे रहा हूं तुम्हें। ठीक है ना? हर एक टॉपिक जो एनसीआरटी में है वो तुम्हें सारा यहां पे मिलेगा। चलिए फॉर्मल चार्ज
की बात करते हैं। इट इज द इंडिविजुअल चार्ज पोसेस्ड बाय एन एटम इन अ पॉली एटॉमिक फॉर्म। अगर मैं तुमसे पूछूं कि
HNO3 पे टोटल कंपाउंड पे कितना चार्ज है? तो वो है कंपाउंड का चार्ज। वो कभी भी फॉर्मल चार्ज नहीं कहलाता। मैं तुमसे
बोलूं HNO3 के अकेले नाइट्रोजन पे कितना चार्ज है? तो वो कहलाएगा नाइट्रोजन का फॉर्मल चार्ज। मतलब इंडिविजुअल एटम पे जो
चार्ज होता है उसे फॉर्मल चार्ज कहते हैं। बात समझ में आ रही है? फॉर्मल चार्ज निकालने का फार्मूला है। क्या है फार्मूला
फॉर्मल चार्ज निकालने का? नंबर ऑफ वैलेंस इलेक्ट्रॉन्स माइनस नंबर ऑफ इलेक्ट्रॉन्स इन लोन पेयर माइनस 1/2 नंबर ऑफ
इलेक्ट्रॉन्स इन बॉन्ड पेयर। आइए एक आपको आंसर दिखाता हूं मैं। एक तरीका बताता हूं मैं। आपको अच्छा ये वाला स्ट्रक्चर आपका
गलत है ना? ये वाला स्ट्रक्चर तो गलत है आपका। कौन सा सही है? ये वाला सही है। है ना? ये वाला। अगर आप इस स्ट्रक्चर में
आपसे बोलूं कि भ मुझे नाइट्रोजन पे बताइए फॉर्मल चार्ज क्या है? तो नाइट्रोजन का फॉर्मल चार्ज HNO3 में आपको बताना है
किसका? नाइट्रोजन का। तो आपको पहले रखने हैं वैलेंस इलेक्ट्रॉन। नाइट्रोजन पे वैलेंस इलेक्ट्रॉन हमेशा पांच होते हैं।
वैलेंस इलेक्ट्रॉन फिक्स होते हैं जो कि आप इलेक्ट्रॉनिक कॉन्फ़िगरेशन से निकालते हो। तो 2 फाइव होता है। इसके वैलेंस
इलेक्ट्रॉन पांच हैं फिक्स हैं। माइनस नंबर ऑफ इलेक्ट्रॉन्स इन लोन पेयर। क्या नाइट्रोजन के ऊपर कोई भी खाली इलेक्ट्रॉन
बैठा हुआ दिख रहा है? नहीं भैया जीरो है। -1 / 2 नंबर ऑफ इलेक्ट्रॉन्स इन बॉन्ड पेयर। अब नाइट्रोजन के चारों तरफ कितने
बॉन्ड है? 1 2 3 4 कितने इलेक्ट्रॉन्स हो गए? मतलब 1 2 3 4 5 6 7 8 ये हो गए आठ। जरा सॉल्व करेंगे तो 2 * 4 कटेगा। 5 - 4
हो जाएगा। आंसर आएगा प्लस का वन। तो नाइट्रोजन का जो फॉर्मल चार्ज है वो है प्लस का वन। हालांकि HNO3 पे पूरे पे कोई
चार्ज नहीं होता। लेकिन नाइट्रोजन पे चार्ज है फॉर्मल चार्ज कितना? प्लस का वन। इस तरीके से आप निकालते हो फॉर्मल चार्ज।
एक और क्वेश्चन मैं आपको देता हूं। जरा इस वाले केस में चलो इसको भी छोड़ो। आपसे मैं पूछ रहा हूं यहां पे अगर मैं इस इसकी बात
करूंगा सल् इस SO2 की बात करूंगा तो यहां पे एक लोन पेयर होगा। क्यों? क्योंकि वैलेंस इलेक्ट्रॉन होते हैं सल्फर के छह।
इस तरीके से होगा। जरा मुझे SO2 में सल्फर का बताइए फॉर्मल चार्ज। ठीक है ना? SO2 में सल्फर का फॉर्मल चार्ज बताइए। किसमें?
SO2 में सल्फर का। ठीक है? कैसे बताओगे? तो सल्फर के वैलेंस इलेक्ट्रॉन वैलेंस उससे अलाउ इलेक्ट्रॉनिक कॉन्फ़िगरेशन से। 2
8 6 तो सिक्स हो गए इसके वैलेंस माइनस में। लोन पेयर कितने हैं? दो लोन पेयर के इलेक्ट्रॉन्स हैं माइनस में। 1/2 बॉन्ड
पेयर कितने हैं? 1 2 3 4 5 6 7 8 आठ हैं। 2 4 से काट दो। 6 - 2 - 4 आंसर आ गया ज़ीरो। इसके ऊपर ज़ीरो फॉर्मल चार्ज है। अब
मैं आपको एक क्वेश्चन दे रहा हूं जो आपको अभी रुक के कमेंट मैंने पहले ही बोला था कमेंट सेक्शन में हर एक आंसर करना तभी मजा
आएगा। तो जल्दी से मुझे बता दो इस H4P2O7 में इस एक फास्फोरस के ऊपर क्या फॉर्मल चार्ज
है? इस एक फास्फोरस के ऊपर क्या फॉर्मल चार्ज है? जल्दी से मुझे सारे लोग कमेंट सेक्शन में इसका आंसर देंगे। और अब हम
बढ़ेंगे गाइस आगे। एवरीबॉडी क्लियर है क्या? जल्दी बता दो मुझे एवरीवन। डन है बातचीत। तो ये हो गए हमारे मॉलिक्यूलर
स्ट्रक्चर्स गाइस। चलिए बहुत बेहतरीन। अब मॉलिक्यूलर स्ट्रक्चर को समझने के बाद में जो हमारा अगला मोस्ट इंपोर्टेंट टॉपिक है
एग्जाम पर्सपेक्टिव से ये वाला वेरी इंपॉर्टेंट है। रेजोनेंस स्ट्रक्चर ऑलमोस्ट हर बार आपसे एग्जाम में पूछ लिया
जाता है। व्हाट आर रेजोनेंस स्ट्रक्चर्स? रेजोनेंस स्ट्रक्चर्स क्या होते हैं? तो बहुत सिंपल भाषा में समझाऊंगा मजेदार
तरीके से। डेफिनेशन क्या है पहले वो समझ लेते हैं। व्हनेवर अ सिंगल मॉलिक्यूल डज़ नॉट रिप्रेजेंट द मॉलिक्यूल कंप्लीटली। जब
एक सिंगल मॉलिक्यूल मॉलिक्यूल को ठीक से रिप्रेजेंट ना कर पाए, एक्सप्लेन ना कर पाए, देन वी ड्रॉ अ नंबर ऑफ़ स्ट्रक्चर्स,
तो हम उसे जो भी पॉसिबल तरीका है उससे ड्रॉ करने की कोशिश करते हैं और कुछ नंबर ऑफ स्ट्रक्चर्स बनाते हैं। जिससे कि
मॉलिक्यूल को सही से एक्सप्लेन किया जा सके। वो सारे स्ट्रक्चर जो हमने तरीके से बनाए हैं उन सबको कहते हैं रेजोनेंस
स्ट्रक्चर्स। आपको नहीं समझ में आया होगा। मुझे पता है। आओ बताता हूं कैसे। चलिए तो मैं आपको एक परफेक्ट एग्जांपल दूंगा। आपको
पता है आ एक स्ट्रक्चर है H2CO3 H2CO3 हमने अभी भी बनाया था तो H2CO3 कैसा होता है? H2CO3 कुछ ऐसा होता है। ऐसा
ऐसा और ऐसा ये हमारा H2CO3 होता है। सभी को दिख रहा है H2CO3 कैसा होता है भाई? है ना? दो राजकुमार हैं। दोनों रानी को मिल
गए हैं। और एक रानी ने दो बॉन्ड बनाए हैं। अगर मैं आपसे पूछूं तो यहां पे कितने बॉन्ड हैं कार्बन के? भैया कार्बन और
ऑक्सीजन का एक तो डबल बॉन्ड है और एक ऐसा है और दो बॉन्ड हैं कार्बन ऑक्सीजन के सिंगल वाले। देखो, यह सिंगल वाले हैं और
यह डबल वाले हैं। है ना? सबको यह पता होगा। हालांकि मैं अभी इस चैप्टर में बॉन्ड पैरामीटर्स पढ़ाऊंगा तो मैं
पढ़ाऊंगा भी। मैं तो मैं अभी बताता हूं। हिंट देता हूं भाई। अगर आप एक एटम का दूसरे एटम से सिंगल बॉन्ड बनाओगे। फॉर
एग्जांपल मैं आपसे बस हाथ मिलाने आता हूं तो दूर से मिला लेता हूं। लेकिन अगर मुझसे आपसे गले मिलना है तो हाथ मिलाया। गले
मिलने के लिए और पास आना पड़ेगा। तो जितने ज्यादा बॉन्ड बनते हैं दो एटम के बीच में उतने-उतने वो पास आ जाते हैं और बॉन्ड
लेंथ छोटी हो जाती है। जो डिस्टेंस है वो कम हो जाता है। तो अगर आपसे कोई पूछे इन दोनों में बॉन्ड लेंथ कहां कम है? तो आप
बोलोगे इसकी बॉन्ड लेंथ छोटी है, डबल बॉन्ड वाले की और सिंगल वाले की बड़ी है। बात मेरी समझ में आ रही है? जस्ट मैं एक
नंबर अगर आपको दे दूं, रैंडमली नंबर दे रहा हूं बस। रैंडमली नंबर दे रहा हूं। तो मान लो इसकी बॉन्ड लेंथ दो है तो इसकी
बॉन्ड लेंथ वन है। मैंने आपको रैंडमली बस समझने के लिए नंबर दे दिए। भाई इसकी बॉन्ड लेंथ दो क्यों है? क्योंकि दूर से भी एक
सिंगल बॉन्ड बन सकता है। लेकिन डबल बॉन्ड के लिए आपको बहुत पास आना पड़ेगा। तो आपको इस तरीके से ध्यान रखना है जो बॉन्ड लेंथ
होती है वो सिंगल बॉन्ड की ज्यादा है या डबल बॉन्ड की कम है। अच्छा ठीक बात है। तो ये आपको आपके लुईस स्ट्रक्चर के बनाने के
तरीके से समझ में आ रही है। लेकिन गाइज़ रियलिटी में जब हम एक्सपेरिमेंट से फाइंड करते हैं तो पता है क्या होता है?
एक्सपेरिमेंटली एक्सपेरिमेंटली यह पाया गया यह पाया गया कि
H2CO3 के स्ट्रक्चर में तीनों कार्बन ऑक्सीजन के बॉन्ड एक जैसे हैं। ऐसा नहीं है कि दो अलग है और एक अलग है। नहीं। और
तीनों की जो बॉन्ड लेंथ है। ना तो वो डबल बॉन्ड जितनी छोटी वन है ना ही वो सिंगल बॉन्ड जितनी अच्छा आधे लोगों को तो
कंफ्यूजन ये भी हो रहा होगा भैया इसमें दो था आपने वन लिख दिया। इसमें एक था आपने दो लिख दिया। अरे अरे लाडले अरे मेरी बात तो
सुन ले। अरे रुक जा कंफ्यूज मत हो। मुझे मैं तेरे मन की बात समझ गया। देख डबल बॉन्ड का बॉन्ड लेंथ छोटा है। तू ऐसे भी
कह सकता है कि भ इसकी बॉन्ड लेंथ 10 है। है ना? और इसकी बॉन्ड लेंथ 20 है। या फिर आप ये कह दे कि इसकी आठ है और इसकी लेट्स
सपोज 16 है। ऐसे मान ले। है ना? कुछ भी नंबर दे दे बॉन्ड लेंथ का। बस डबल बॉन्ड वाला छोटा होगा और सिंगल बॉन्ड वाली बड़ी
होगी। क्योंकि सिंगल बॉन्ड दूर से बन जाता है। अब डबल बॉन्ड वाली लेंथ थी आठ। सिंगल बॉन्ड वाली थी 16। तो हमें ऐसा लग रहा था
कि एक बॉन्ड तो होगा आठ बॉन्ड लेंथ वाला दो होंगे 16 वाले। लेकिन रियलिटी में एक्सपेरिमेंटली जब हमने H2CO3 कार्बोनिक
एसिड का एक्सपेरिमेंट किया तो हमने क्या पाया? तीनों बॉन्ड एक जैसे हैं और तीनों की बॉन्ड लेंथ ना तो आठ जितनी छोटी ना 16
जितनी बड़ी करीब 12 आ रही थी। मतलब करीब इनके बीच में आ रही थी। ना तो सिंगल बॉन्ड था ना डबल बॉन्ड था। ये तो कुछ बीच में
था। भाई साहब बुद्धि घूम गए साइंटिस्ट लोगों की। कह रहे हैं ये कैसे पॉसिबल है भाई साहब? हम तो हमने तो मॉलिक्यूलर
स्ट्रक्चर बनाना सीखा था। वो अपने आकाश त्यागी सर ने तो ट्रिक बताई थी राजा रानी वाली। ये तो फेल कर दी भाई साहब सारी।
साइंटिस्ट लोगों का दिमाग घूम गया। अब कुछ साइंटिस्ट वहां पे आए कह रहे हैं अरे कोई बात नहीं अब दुखी मत हो। क्या पता हमने
स्ट्रक्चर को थोड़ा सही नहीं बनाया हो। चलो और ट्राई कर लेते हैं। तो एक साइंटिस्ट कहते हैं पता है एक काम कर सकते
हैं। क्या काम कर सकते हैं? वो कहते हैं देखो यार आपने पहले जो बनाया था कार्बोनिक एसिड वो कैसा बनाया था। वो बनाया था ऐसा।
पता है मैं क्या कर सकता हूं इसमें? कह रहा है मैं ना एक काम करूंगा। क्या करोगे? मैं ना अब की बार ना इस डबल बॉन्ड को यहां
ना बना के डबल बॉन्ड को यहां ले आता हूं। क्या पता इस वाले से सही हो जाए। एक महानुभव और है। वो कहते हैं अरे नहीं नहीं
नहीं नहीं पता है एक काम और कर सकते हैं। कहता क्या कर सकते हैं? कहता है अब की बार ना एक काम करो यार अब भी एक्सप्लेन नहीं
कर पा रहे हो ना तो अब की बार डबल बॉन्ड को यहां बना दो। क्या बात है? अब तो शायद एक्सप्लेन हो जाएगा। अब तो शायद एक्सप्लेन
हो जाएगा। तो एक स्ट्रक्चर को जब वो ठीक से एक्सप्लेन नहीं हो पा रहा था। जितने पॉसिबल तरीके हैं सबसे ड्रॉ कर लिया। डबल
बॉन्ड यहां रख दिया। यहां भी रख दिया, वहां भी रख दिया। भाई ये ये तो पॉसिबिलिटी है ना कि डबल बॉन्ड तो कहीं भी हो सकता
है। बात समझ में आ रही है? तो इन सब स्ट्रक्चर्स को कहा गया कि भाई ये हैं रेजोनेंस स्ट्रक्चर्स। व्हेन अ सिंगल लुईस
स्ट्रक्चर कैन नॉट एक्सप्लेन द मॉलिक्यूल कंप्लीटली देन वी ड्रॉ ऑल द पॉसिबल स्ट्रक्चर्स ऑफ़ दैट स्ट्रक्चर टू
एक्सप्लेन द मॉलिक्यूल कंप्लीटली। इन स्ट्रक्चर्स को कहते हैं रेजोनेंस स्ट्रक्चर। लेकिन कोई एक भी अभी भी इस
रियलिटी को एक्सप्लेन नहीं कर पा रहा है। फिर यहां पे एक और साइंटिस्ट की एंट्री होती है। वो कहते हैं एक काम करो। क्या हम
ये कह सकते हैं कि डबल बॉन्ड यहां भी हो सकता है, यहां भी हो सकता है, यहां भी हो सकता है। मतलब डबल बॉन्ड पूरे स्ट्रक्चर
के चक्कर लगा रहा है। अगर आप इन तीनों का एवरेज निकालो, तो इन तीनों के एवरेज के अनुसार इन तीनों के एवरेज के अनुसार मान
लो h यहां पे रख दिया h रख दिया। सिंगल बॉन्ड तो कार्बन ऑक्सीजन का हर जगह फिक्स है। भाई, एक बॉन्ड तो हर जगह है ही है। जो
डबल बॉन्ड है, वह इधर से उधर घूम रहा है। तो क्या पता थोड़ा सा डबल बॉन्ड यहां डिस्टर्ब यहां चला गया हो, थोड़ा सा यहां
चला गया हो, थोड़ा सा यहां चला गया हो। इन सबका आपने एवरेज ले लेना है। और जैसे ही आप एवरेज लेते हो, तुरंत ये वाली कंडीशन
आपकी मीट हो जाती है कि भई तीनों बॉन्ड एक जैसे और तीनों की बॉन्ड लेंथ एक से ऊपर, दो से नीचे मतलब बीच में। और तब जाके आपको
एक फाइनल स्ट्रक्चर मिला। और जो इनका एवरेज होता है उसे कहते हैं रेजोनेंस हाइब्रिड।
इनके एवरेज को कहते हैं रेजोनेंस हाइब्रिड। और फिर ये मान लिया जाता है क्योंकि रेजोनेंस हाइब्रिड ही सही से
एक्सप्लेन कर रहा है रियलिटी को। मतलब यही रियल में एग्ज़िस्ट करता है। ये सारे इमेजिनरी स्ट्रक्चर्स हैं। ये कहां होता
है? केवल जहां पे रेजोनेंस की पॉसिबिलिटी है। जहां पे रियलिटी में कुछ हो रहा है। हर जगह ऐसे होने के चांसेस नहीं है।
कहीं-कहीं पे ही ऐसा होता है। आशा करता हूं आपको समझ में आया होगा। जहां पे डबल बॉन्ड होता है ना वहां पे अक्सर ऐसा होता
है। ध्यान से देखिएगा। द कैनोनिकल इन्हें कहते हैं कैनोनिकल रेजोनेंस स्ट्रक्चर। इन्हें ही कैनोनिकल या फिर रेजोनेंस
स्ट्रक्चर कहते हैं। इनकी कोई रियल एक्सिस्ट नहीं रियल एकिस्टेंस नहीं है। बट ये बस विजुअलाइजेशन करने के काम आ जाते
हैं क्योंकि हम इन तीनों का एवरेज निकालते हैं। ओनली रेजोनेंस हाइब्रिड हैज़ द रियल एकज़िस्टेंस व्हिच इज़ एवरेज ऑफ़ ऑल द
रेजोनेंस स्ट्रक्चर्स। आशा करता हूं कि आपको ये बात समझ में आई होगी। एवरीवन इन द हाउस मेक सम नॉइज़। अगर आपको समझ में आ गया
है रेजोनेंस का कांसेप्ट तो ए पे हम लिखेंगे चैट बॉक्स में रेड हर्ट बनाना बिल्कुल मत भूलना। ये था आपका भाई साहब
रेजोनेंस स्ट्रक्चर्स। क्या सभी को इतनी बातें क्लियर हैं भाई साहब? बड़े भाई गोलू जल्दी बोल दे। ठीक
बात है। अगर किसी भी स्ट्रक्चर में आपसे कोई पूछे कि नंबर ऑफ रेजोनेंस स्ट्रक्चर्स कितने बनेंगे? तो कैसे बताओगे? कैसे
बताओगे? जितनी पॉसिबल डबल बॉन्ड घूम सकता है उतने रेजोनेंस स्ट्रक्चर्स बनेंगे। जैसे कि ये डबल बॉन्ड कितनी जगह पे हो
सकता है? एक दो तीन जगह पे तो तीन रेजोनेंस स्ट्रक्चर्स बनेंगे। सिंपल है। बहुत सिंपल है। एक क्वेश्चन मैं तुम्हें
दिखा देता हूं। एक क्वेश्चन मैं तुम्हें दिखाता हूं। ध्यान से देखो। अगर आप देखोगे सेम क्वेश्चन ने बोला है कि भ SO3 के NO2
के और NO3 नेगेटिव के स्ट्रक्चर्स बनाओ रेजोनेंस। तो SO2 ऐसे बनता है। बताओ SO2 में कितने रेजोनेंस बन सकते हैं? भई डबल
बॉन्ड यहां हो सकता है। यहां यहां तो तीन ही बनेंगे। देखो एक ये रहा, दूसरा ये रहा और तीसरा ये रहा। कोई पूछे रेजोनेंस
हाइब्रिड बता बता सकते हो इसका क्या होगा? भाई कुछ भी नहीं करना। आपको इसका रेजोनेंस हाइब्रिड बताना है तो सिंगल बॉन्ड को तो
फिक्स कर दो और डबल बॉन्ड को यहां यहां यहां यहां तीनों जगह घुमा दो। अब देखो NO2 में ये स्ट्रक्चर है NO2 का। ठीक है? आपको
बताना है कितने रेजोनेंस? भाई डबल बॉन्ड या तो यहां पे हो सकता है पर यहां पे तो दो ही पॉसिबिलिटी हैं। एक ये रहा, दो ये
रहा। दो रेजोनेंस स्ट्रक्चर्स बन गए। कोई कह रहा है NO3 नेगेटिव में भाई डबल बॉन्ड यहां हो सकता है। यहां हो सकता है, यहां
हो सकता है। तो इसमें एक ये रहा, एक ये रहा और एक ये रहा। तीन रेजोनेंस पॉसिबल हैं। है ना? तो इस तरीके से आपको कितने
रेजोनेंस बन सकते हैं? ये आप इस तरीके से क्वेश्चन में बता सकते हो। आशा करता हूं कि आपको बहुत फन आ रहा होगा। बहुत ज्यादा
मजा भी आ रहा होगा। चलिए आइए आगे बढ़ता हूं। बहुत ही जबरदस्त, बहुत ही मजेदार टॉपिक पे जिसका नाम है पोलरिटी ऑफ बॉन्ड्स
एंड डपोल मूवमेंट। वेरी इंपॉर्टेंट टॉपिक है। अगेन केमिकल बॉन्डिंग बहुत ही मजेदार इनऑर्गेनिक केमिस्ट्री का चैप्टर है। बहुत
फन चैप्टर है। आशा करता हूं कि आपको मजा तो आ रहा होगा अभी तक जितना भी हमने पढ़ लिया। एनर्जी के साथ पढ़ रहे हैं, जोश के
साथ पढ़ रहे हैं। ठीक है? तो पोलरिटी ऑफ़ बॉन्ड एंड डपोल मोमेंट क्या होता है भाई? अच्छा एक क्वेश्चन तुमसे पूछूंगा। तुम लोग
मुझे बताना। मान लो एक कोवेलेंट बॉन्ड बना। एक कोवेलेंट बॉन्ड बना। क्या एक कोवेलेंट बॉन्ड 100% कोवेलेंट बॉन्ड होता
है? नहीं। नहीं नहीं राजा जी। नहीं। लिखेंगे ध्यान से लिखेंगे ध्यान से एक नोट डाल के लिखेंगे लिखेंगे
ऑल ऑल कोवेलेंट बॉन्ड्स या फिर आप कह दो या फिर आप कह दो या फिर आप कह दो क्या कि देयर इज़
देयर इज़ एन आयनिक कैरेक्टर देयर इज़ एन आयनिक कैरेक्टर एग्ज़िस्ट एग्ज़िस्ट
इन कोवेलेंट बॉन्ड्स इन कोवेलेंट बॉन्ड्स मींस मींस मींस नॉट ऑल कोवेलेंट बॉन्ड्स नॉट ऑल कोवेलेंट बॉन्ड्स
आर 100% कोवेंट हर एक कोवलेंट बॉन्ड 100% कोवेलेंट बॉन्ड नहीं होता। कुछ कोवेलेंट बॉन्ड ऐसे हैं
जिनमें आयनिक कैरेक्टर भी पाया जाता है। और यहीं पे हमें टॉपिक पढ़ना है। पोलैरिटी ऑफ़ बॉन्ड्स एंड डपोल मोमेंट। आइए चर्चा
करते हैं। चलिए पहली बात क्या लिखी है? अ कोवलेंट बॉन्ड इन व्हिच इलेक्ट्रॉन्स आर शेयर्ड अनक्वली एंड द बॉन्डेड एटम्स
एक्वायर अ पार्शियल पॉजिटिव एंड नेगेटिव चार्ज उसे कहते हैं पोलर कोवलेंट बॉन्ड। देखो बहुत बढ़िया एग्जांपल दूंगा। मेरे
पास एक हाइड्रोजन का मॉलिक्यूल है। तो हाइड्रोजन के मॉलिक्यूल में ये इस तरीके से शेयरिंग हुई है ऐसे। है ना? अब अगर आप
ध्यान से देखोगे तो मैं आपसे सिंपल सी बात पूछूं कि हाइड्रोजन एक एलिमेंट है और एलिमेंट की एक प्रॉपर्टी होती है
इलेक्ट्रोनेगेटिविटी। इलेक्ट्रोनेगेटिविटी के अनुसार एक इलेक्ट्रॉन साइज में छोटा होने के कारण उसका न्यूक्लियस बहुत पास
होता है और उसके अंदर बहुत न्यूक्लियर चार्ज होने के कारण वो शेयरिंग वाले इलेक्ट्रॉन्स को अपनी तरफ खींचता है। याद
है सभी को इलेक्ट्रोनेगेटिविटी बताई थी। शेयरर्ड पेयर ऑफ इलेक्ट्रॉन्स के इलेक्ट्रॉन्स को अपनी तरफ खींचने की
टेंडेंसी को इलेक्ट्रोनेगेटिविटी कहते हैं। ये बात सबको पता है? हां जी भैया। तो यहां पे जो भी इलेक्ट्रोनेगेटिविटी इसकी
है वो ही इलेक्ट्रोनेगेटिविटी इसकी क्योंकि दोनों एक ही जैसे एटम है। तो यहां पे जो शेयरिंग है बहुत ही जबरदस्त शेयरिंग
है। कोई दिक्कत वाली बातचीत नहीं है। ये 100% कोवेलेंट कंपाउंड है। ये 100% कोवेलेंट कंपाउंड है। और जो कोवेलेंट है
उसमें चार्ज नहीं है। मतलब ये एक नॉन पोलर कोवेलेंट कंपाउंड है। पोल का मतलब होता है पॉजिटिव नेगेटिव वाले चार्ज। लेकिन गाइज़
ध्यान दीजिए। अगर मैं बना दूं HCl का कंपाउंड तो HCl में सबको पता है क्लोरीन के ऊपर 17 प्रोटॉन का न्यूक्लियर चार्ज
है। साइज में छोटा है। न्यूक्लियस बहुत बराबर में है। इन शेयरिंग वाले इलेक्ट्रॉन्स को थोड़ा सा अपनी तरफ शिफ्ट
करने लगेगा। क्योंकि जो इलेक्ट्रोनेगेटिविटी है क्लोरीन की वो ज्यादा है इलेक्ट्रोनेगेटिविटी ऑफ़
हाइड्रोजन से। जिस वजह से क्लोरीन इस शेयर्ड पेयर ऑफ़ इलेक्ट्रॉन्स को अपनी तरफ खींचेगा, शिफ्ट करेगा। ध्यान रखना। कभी
पूरा नहीं लेगा इलेक्ट्रॉन्स को। बस शिफ्ट करता है। जिस वजह से इसके ऊपर बहुत छोटा सा नेगेटिव, इसके ऊपर बहुत छोटा सा
पॉजिटिव। इसे कहते हैं पार्शियल। पार्शियल का मतलब है बहुत छोटा। और इस वजह से अब ये 100% कोवेलेंट तो नहीं है क्योंकि इसके
ऊपर थोड़ा सा चार्ज आ रहा है। नॉट 100% कोवलेंट। इसके अंदर कुछ ना कुछ आयनिक करैक्टर आ जाएगा। और अब ये क्या कहलाएगा?
ये कहलाएगा एक पोलर कोवेलेंट बॉन्ड। कोवेलेंट बेशक है लेकिन इसके ऊपर चार्ज है। तो ये कैसा है? पोलर कोवेलेंट बॉन्ड
है। आशा करता हूं आपको बात समझ में आई होगी। इसे कहते हैं पोलरिटी ऑफ़ बॉन्ड। कहां होती है पोलरिटी ऑफ़ बॉन्ड? जहां
डिफरेंस इन इलेक्ट्रोनेगेटिविटी है। अगर इलेक्ट्रोनेगेटिविटी इक्वल है तो यहां पर कोई चार्ज नहीं आएगा। आशा करता हूं आपको
बात समझ में आई होगी। बहुत बढ़िया। अब व्हाट इज़ डपोल मूवमेंट? भाई, जब पोलर चार्ज जब पोलर कोवेलेंट बॉन्ड बनेगा, तो
कितनी शिफ्टिंग हुई है, कितनी पोलरिटी आई है, कितना चार्ज आया है, उसके मेज़मेंट को कहते हैं डपोल मूवमेंट। डपोल मोमेंट इज द
मेजरमेंट ऑफ डिग्री ऑफ़ पोलैरिटी ऑफ़ अ बॉन्ड। वो बॉन्ड कितना पोलर है उसको जब कैलकुलेट करेंगे उसे डपोल मोमेंट कहते
हैं। इसे कैलकुलेट करते हैं भैया। इसे डिनोट करते हैं μ से। बहुत बढ़िया। अब ध्यान देना मान के चलो यहां पे मेरे पास
एक HCL है। है ना? भाई जब इधर शिफ्टिंग हुई तो लेट्स सपोज़ इसके ऊपर -q चार्ज आएगा। इसके ऊपर +q चार्ज क्योंकि इसके पास
इलेक्ट्रॉन है तो नेगेटिव इसके पास से गए हैं तो पॉजिटिव। इनके बीच का जो बॉन्ड डिस्टेंस है वो d है। तो जो डपोल मोमेंट
होता है हमेशा वो होता है गाइज़ चार्ज मल्टीप्लाई बाय डिस्टेंस। क्या होता है? चार्ज * बाय डिस्टेंस होता है। तो यहां से
जो फार्मूला बनेगा μ का वो बनेगा q * बाय d। ये आपका बेटा जी डपोल मोमेंट का फार्मूला होता है। एक बहुत ही मजे की बात।
इस डपोल मोमेंट की एसआई यूनिट या फिर इसकी यूनिट क्या होती है? वो समझ लेते हैं। तो ये जो चार्ज होता है बहुत छोटा होता है।
तो जो चार्ज कैलकुलेट होता है वो कैलकुलेट होता है इलेक्ट्रोस्टेटिक यूनिट में। बहुत छोटा होता है। तो हमेशा आपको 10 टू दी
पावर -10 के ऑर्डर में मिलेगा। है ना? तो -10 के ऑर्डर में मिलेगा क्योंकि बहुत छोटा चार्ज होता है। जैसे कि 2.10 टू दी
पावर -10 कूलम में नहीं होता क्योंकि बहुत छोटा है। एक नई यूनिट होती है इलेक्ट्रोस्टेटिक यूनिट esय। अच्छा। वही
जो आपका डिस्टेंस है बॉन्ड लेंथ का ये हमेशा आपको मिलेगा 10 की पावर -8 सें.मी. के ऑर्डर में क्योंकि बहुत ज्यादा छोटा
होता है। ठीक है? तो यहां से अगर आप देखेंगे तो आपका जो q होगा वो होगा समथिंग अराउंड 2 * 10 की पावर -10 ईएसuय और जो
आपका d पावर -8 सें.मी. में 2 * 10 की पावर -8 सें.मी. तो यहां पे आपका ये तो हमेशा कॉमन रहेगा ना। क्या हमेशा कॉमन
रहेगा? 10 की पावर -10 और -8 10 की पावर -18 esu सेंटीमीटर। बेटा इसी को कह देते हैं
एक नई यूनिट डपोल मोमेंट की डिबाई। तो ये आपका आंसर जो आएगा वो आएगा 1 डिबाई। तो यूनिट जो बनेगी वो बनती है डिबाई। कोई
पूछे व्हाट इज 1 डिबाई? तो आप हमेशा ध्यान रखिएगा कि 1 डिबाई जो होता है वो होता है 10 टू दी पावर माइनस में 18 ईएसयू सें.मी.
व्हाट इज ईएसयू? तो ईएसयू एक नहीं जैसे कूलम होता है वैसे ही होता है एक इलेक्ट्रोस्टेटिक यूनिट। बहुत छोटे चार्ज
के लिए इस यूनिट का यूज करते हैं। ध्यान रखना है क्या होगी बेटा? वन डिवाई होगी यूनिट किसकी? डपोल मोमेंट की। हमेशा
ध्यान रखेंगे। आशा करता हूं आपको बात समझ में आई होगी। डपोल मोमेंट कैसे डिफाइन होता है? द प्रोडक्ट मल्टीप्लिकेशन ऑफ़
डिस्टेंस सेपरेटिंग द चार्जेस ऑफ इक्वल मैग्नीट्यूड एंड द विद द मैग्नीट्यूड ऑफ़ चार्ज। मैग्नीट्यूड ऑफ़ चार्ज लेना है,
डिस्टेंस लेना है। ऐसे आएगा आपका डपोल मोमेंट। यूनिट बनेगी हमेशा d / क्यों? क्योंकि हमेशा जो चार्ज आएगा वो इस ऑर्डर
में आएगा। बहुत छोटा है। डिस्टेंस इस ऑर्डर में आएगा। बहुत छोटा है। दोनों को कंबाइन करोगे 10 टू पावर -18 वो कहलाता है
1 डिय तो जो आंसर बनेगा वो बनेगा 1 / फॉर एग्जांपल आपको देता हूं एक एग्जांपल। मैं आपको एक एग्जांपल दूंगा। आपको बातें समझ
में आएगी। लेट्स सपोज कि जैसे मान के चलो आपका जो q की वैल्यू आई है वो आई है 3 * 10 टू दी पावर -8 सें.मी. जो आपके
डिस्टेंस की सॉरी माइनस का माइनस का लेट्स सपोज 10 ईएसu आया है आपका चार्ज और जो आपका डिस्टेंस आया वो आया है आपका 2 * 10
टू दी पावर माइनस में 8 सें.मी. तो आपका जो μ आएगा वो आएगा q * बाय d तो आप इसको लिख सकते हो कितना? अ 3 * 10 टू दी पावर
-10 ईएसयू मल्टीप्लाई 2 * 10 टू दी पावर -8 सें.मी. तो आप इसको लिख दोगे 3 * बाय 2 ठीक है? 10 टू दी पावर -10 - 10 टू दी
पावर -18 ईएसuय सें.मी. अब इसी को कहते हो आप 1 डियर तो आपका आंसर आ जाएगा 3 * 2 = 6d / इस तरीके से आपका इसका मतलब है। आशा
करता हूं आपको बात समझ में आई होगी। चलिए बहुत बढ़िया। अब मैंने तुम्हें एक बात बताई है। क्या बताई है कि जब भी पोलरिटी
आएगी या फिर आयनिक कैरेक्टर आएगा वो आएगा डिफरेंस इन इलेक्ट्रोनेगेटिविटी की वजह से। एक इलेक्ट्रोनेगेटिव ज्यादा है एक कम
है। मैं आपको जस्ट एक एग्जांपल देता हूं। जैसे यहां पर मान लो हाइड्रोजन की जो इलेक्ट्रोनेगेटिविटी है लेट्स सपोज वो है
0.1 ये भी है 0.1 कुछ भी नंबर ले लो आप वन वन ले लो दोनों का। है ना? तो जो डिफरेंस आएगा वो तो ज़ीरो आएगा। भाई ये भी वन है ये
भी वन है। तो डिफरेंस इन इलेक्ट्रोनेगेटिविटी कितना आ गया? 1 - 1 0 आ गया। तो कोई डिफरेंशियल इन
इलेक्ट्रोनेगेटिविटी नहीं है। इसलिए यहां पर कोई भी शिफ्टिंग नहीं हो रही है। लेकिन मान लो क्लोरीन बहुत इलेक्ट्रोनेगेटिव है।
ये तो कम है। इसका नंबर वन है। इसका थ्री है। 3 - 1 करोगे टू आएगा। तो एक बड़ा नंबर आएगा इलेक्ट्रोनेगेटिविटी का। यहां पर
डिफरेंस इन इलेक्ट्रोनेगेटिविटी होता है। तो मेजर जो कारण है पोलरिटी का वो है डिफरेंस इन इलेक्ट्रोनेगेटिविटी। एक की
इलेक्ट्रोनेगेटिविटी माइनस दूसरे की इलेक्ट्रोनेगेटिविटी। है ना? इलेक्ट्रोनेगेटिविटी ऑफ़ A माइनस
इलेक्ट्रोनेगेटिविटी ऑफ़ B. जब ये डिफरेंस आप निकालोगे, अगर यह डिफरेंस इन इलेक्ट्रोनेगेटिविटी ज़ीरो है, कोई डिफरेंस
इन इलेक्ट्रोनेगेटिविटी नहीं है, कोई खींच खिंचाव नहीं है, तो वो प्योरली कोवेलेंट है। जैसे कि हाइड्रोजन था और आंसर आएगा कि
भ आयनिक कैरेक्टर तो 0% है। अगर वो डिफरेंशियल इन इलेक्ट्रोनेगेटिविटी जीरो या 0.8 के बीच में है तो 15% तक का आयनिक
करैक्टर हो सकता है। लेकिन बॉन्ड अभी भी कोवेलेंट ही कहलाएगा। क्यों? क्योंकि आयनिक करैक्टर बहुत माइन्यूट सा है। अगर
आपकी डिफरेंशियल इलेक्ट्रोनेगेटिविटी 0.9 से 1.8 के बीच में है तो यहां पे 47% तक का आयनिक करैक्टर हो सकता है। तो यहां
पे कोवलेंट को आपको कहना पड़ेगा कि ये पोलर कोवेलेंट है। चार्ज वाला कोवेलेंट कंपाउंड है। जैसे कि आप HCL को बोलते हो
कि ये पोलर कोवेलेंट है। समझ रहे हो मेरी बात को? जैसे कि आप H2 को बोलते हो ये एक प्योरली कोवेलेंट है। बात आप मेरी समझ पा
रहे इस तरीके से। ठीक है? उसके बाद अगर आपका 1.9 का डिफरेंस आ रहा है तो भाई साहब ये 50% आयनिक है। 50% कोवेलेंट है। ना तो
आप इसको कोवेलेंट कह सकते हैं ना ही आप इसको आयनिक कह सकते हैं। अगर चार्ज का डिफर इलेक्ट्रोनेगेटिविटी का डिफरेंस आया
टू से लेके 3.2 तक तो ये 93% तक आयनिक हो जाएगा और ये आयनिक ही कहलाएगा फिर। क्या ये आपको वैल्यूज याद रखनी है? नहीं।
अब एक कांसेप्ट क्लेरिटी के लिए दे रहा हूं। मैं चाहता इसको ना लेके आता। कांसेप्ट क्लेरिटी के लिए इंपॉर्टेंट है।
तो ये है आपका डपोल मोमेंट। अब एक मजे की बात आपको बहुत शानदार बात बताऊंगा। बहुत जानदार बात बताऊंगा। डाइपोल मोमेंट के लिए
आपको कुछ नोट डाल के बात लिखनी है। जहां से आपके पेपर में क्वेश्चन बनेगा। पहला नोट क्या जी? कि डाइपोल मूवमेंट डाइपोल
मोमेंट इज अ वेक्टर क्वांटिटी। यह एक वेक्टर क्वांटिटी है। कोई पूछे भैया वेक्टर
क्वांटिटी का मतलब क्या होता है? तो सब लोगों को पता है वेक्टर क्वांटिटी का मतलब है इट हैज़ बोथ। इट हैज़ बोथ। इसके पास
दोनों हैं। मैग्नीट्यूड भी है। मैग्नीट्यूड एज वेल एज एज वेल एज डायरेक्शन। दोनों हैं
इसके पास। अच्छा जी। बहुत बढ़िया। इट फॉलोज़ भाई ये फॉलो करती है। अगर वेक्टर है तो इट फॉलोज़ वेक्टर एडिशन लॉ। वेक्टर एडिशन लॉ
को भी भाई साहब ये फॉलो करती है। हम क्या करते हैं भाई? हम क्या करते हैं? सपोज़ करो दो वेक्टर्स आ रहे हैं। एक वेक्टर ये है,
एक वेक्टर ये है। μ1 μ2 तो आप इसके बीच में किसका रिजल्टेंट लेते हो? μR है ना? जो कि इक्वल होता है तुम्हारा क्या? जो कि
इक्वल होता है तुम्हारा किसके? अंडर रूट में। आप कहते हो भाई μ1 का स्क्वायर + में μ2² + में 2 म्यू1 μ2 cos थीटा आप करते हो
ना ऐसे। तो यहां पर भी ये रूल अप्लाई होता है। दूसरी बात ध्यान रखना। ध्यान रखना इक्वल एंड अपोजिट इक्वल एंड अपोजिट डपोल
मोमेंट अपोजिट डपोल मूमेंट क्या करते हैं एक दूसरे को कैंसिल आउट कर सकते हैं जैसे
वेक्टर करता है कैंसिल आउट ईच अदर एक दूसरे को कैंसिल आउट भी कर देते हैं बात सभी को समझ में आ रही है अच्छा एक बात और
ध्यान रखना एक बात और ध्यान रखना एक बात और ध्यान रखना हमेशा ध्यान रखेंगे कि बॉन्ड पेयर में डाइपोल मोमेंट आएगा
डिेंशियल इलेक्ट्रोनेगेटिविटी की वजह लोन पेयर का भी अपना एक डपोल मोमेंट होता है। और ध्यान रखना द लोन पेयर द डपोल मोमेंट
ऑफ लोन पेयर क्योंकि वो फ्री इलेक्ट्रॉन्स होते हैं। इज ग्रेटर देन इज़ ग्रेटर देन डपोल मोमेंट ऑफ बॉन्ड पेयर। ये बातें अगर
आपने ध्यान रखी तो अगली जो स्लाइड है वो आपको बहुत बेहतरीन तरीके से समझ में आएगी और आपके पेपर का एक क्वेश्चन पूरा सटीक
तरीके से आपको समझ में आ जाएगा। अब इसका मतलब मैं आपको अभी बताऊंगा। टेंशन मत लेना। हर एक वर्ड का मतलब बताऊंगा। यह
वाली बात बिल्कुल बेसिक है। यह वाली बात बिल्कुल बेसिक है। यह आपको यूज़ कहीं नहीं करना। बस बता रहा हूं कि रिजल्टेंट लेते
हो आप इसका। अपोजिट इक्वल कैंसिल आउट करते हैं। बड़ा ही इंपॉर्टेंट है। और लोन पेयर का जो डपोल मोमेंट है क्योंकि वो भी एक
चार्ज है। लोन पेयर एक चार्ज है। इलेक्ट्रॉन है। वो ग्रेटर होता है बॉन्ड पेयर से। क्योंकि लोन पेयर तो खाली होते
हैं। वो तो ज्यादा चार्ज का दबदबा दिखाएंगे। ठीक बात है। अच्छा। आओ जरा। अब मैं आपको कुछ दिखाता हूं। यहां पर। आपसे
क्वेश्चन पूछेगा कि बताइए ये मॉलिक्यूल पोलर है कि नॉन पोलर है? पोलर कौन होगा? पोलर कौन होगा? जहां पे डपोल मोमेंट नॉट
इक्वल्स टू ज़ीरो है। डपोल मोमेंट ग्रेटर दैन ज़ीरो है। है ना? तो ये पोलर है क्योंकि डपोल मोमेंट है मतलब चार्ज है। और
नॉन पोलर कौन होगा? नॉन पोलर होगा आपका जहां पे डपोल मोमेंट ज़ीरो होगा। भाई यहां पर कोई चार्ज नहीं है। एग्जांपल ले लो
जरा। पहला एग्जांपल है CO2। CO2 बनता है। ऐसा स्ट्रक्चर बनाना आपको सिखा दिया है। यहां पर ऑक्सीजन ज्यादा इलेक्ट्रोनेगेटिव
है। तो जो डपोल मोमेंट क्रिएट होगा वो होगा ऑक्सीजन की तरफ। यहां पर होगा ऑक्सीजन की तरफ। दोनों इक्वल एंड अपोजिट
हैं। कैंसिल आउट करेंगे। तो ये आपका नॉन पोलर आ जाएगा। CO2 इज़ अ नॉन पोलर कंपाउंड। ध्यान रहेगा? आगे बढ़ो। BF3 का जो
स्ट्रक्चर है वो कुछ ऐसा होता है। मैंने आपको बना के भी दिखाया। है ना? अभी हमने बताया था वो और एक्सेप्शन देखी ऑक्टेट रूल
की। तो यहां पे फ्लोरीन इज़ मोर इलेक्ट्रोनेगेटिव। यहां पर ये खींच रहा है अपनी तरफ। यहां पर ये खींच रहा है अपनी
तरफ। यहां पर ये खींच रहा है अपनी तरफ। इन दोनों की डायरेक्शन आप देखोगे तो वेक्टर लॉ एडिशन के अकॉर्डिंग रिजल्टेंट आएगा
यहां। अब ये और ये अपोजिट है। कैंसिल आउट करेंगे। μ की वैल्यू ज़ीरो है। O3 पे आ जाओ। O3 पे आ जाओ। O3 में स्ट्रक्चर हमारा
कुछ ऐसा होता है यहां पर। यहां पर लोन पेयर होता है। ध्यान से देखेंगे तो यहां पर कोई डपोल मोमेंट नहीं है। क्योंकि क्या
है? भाई दोनों ऑक्सीजन ऑक्सीजन है। बराबर की इलेक्ट्रोनेगेटिविटी है। डिफरेंस ज़ीरो है। कोई डपोल मोमेंट नहीं है। यहां पर कुछ
नहीं है। तो बॉन्ड पेयर का कोई डपोल मोमेंट नहीं है। लेकिन लोन पेयर का एक डपोल मोमेंट होता है। तो इस लोन पेयर के
डपोल मोमेंट की वजह से यहां पर डपोल मोमेंट है और ये एक पोलर मॉलिक्यूल होता है भाई साहब ओज़ोन O3। आगे बढ़ो। H2O की बात
कर रहा हूं। पानी का मॉलिक्यूल कुछ ऐसा होता है। इसके सिर पे दो लोन पेयर होते हैं। एक ये और एक ये। ध्यान से देखिएगा।
अगर आप ध्यान से देखोगे तो लोन पेयर सिर पे हैं तो लोन पेयर का डपोल मोमेंट है वो ये है। ऑक्सीजन ज्यादा इलेक्ट्रोनेगेटिव
है तो ये ऐसे खींचेगा ये ऐसे खींचेगा। इन दोनों का रिजल्टेंट होगा जो ऊपर को होगा क्योंकि दोनों की डायरेक्शन ऊपर है। ये भी
ऊपर को ये भी ऊपर को दोनों एक ही डायरेक्शन में ऐड हो जाएंगे। तो लेसर मतलब नॉट इक्वल्स टू ज़ीरो है। पानी बहुत ज्यादा
पोलर होता है। आइए CH4 की बात करते हैं। CH4 का जो स्ट्रक्चर होता है वो कुछ ऐसा होता है आपका। ऐसा कुछ स्ट्रक्चर होता है
जिसमें आपका कार्बन माना जाता है ज्यादा इलेक्ट्रोनेगेटिव। तो यहां पे ऐसे है। यहां पर ऐसे है। यहां पर ऐसे है। यहां पर
ऐसे है। नीचे वाले तीनों का रिजल्टेंट ऊपर की तरफ है। ऊपर वाले का नीचे कैंसिल आउट करेंगे। म्यू यहां पर ज़ीरो आ जाएगा। ये हो
जाएगा आपका एक नॉन पोलर मॉलिक्यूल। आइए CCL4 में देखिए। CCL4 में आपका स्ट्रक्चर कुछ ऐसा होता है। क्लोरीन इज़ मोर
इलेक्ट्रोनेगेटिव। तो सबको पता है। यहां पर क्लोरीन ने खींचा होगा। यहां पर क्लोरीन ने, यहां पर क्लोरीन ने, यहां पर
क्लोरीन ने। नीचे वाले तीनों का रिजल्टेंट नीचे की तरफ। अपोजिट डायरेक्शन है। कैंसिल आउट करोगे ज़ीरो आएगा। क्या बात है बहुत
बढ़िया। आइए SO2 में। SO2 का स्ट्रक्चर कुछ ऐसा होता है। बहुत बढ़िया। यहां पे क्या बात है। शानदार शानदार। अगर मैं बोलूं
ऑक्सीजन सल्फर में ऑक्सीजन ज्यादा इलेक्ट्रोनेगेटिव है। तो ऑक्सीजन ने यहां खींचा यहां खींचा। दोनों का रिजल्टेंट
नीचे को आया। लोन पेयर का ऊपर को है। ये डपोल मोमेंट लोन पेयर का है। ये डपोल मोमेंट बॉन्ड पेयर का है। कैंसिल आउट होगा
लेकिन लोन पेयर का स्लाइटली ज्यादा होता है। जिस वजह से वो वाली बात आप याद करेंगे कि कैंसिल आउट तो होगा लेकिन बहुत ज्यादा
कैंसिल आउट नहीं होगा। थोड़ा सा बच जाएगा। जिस वजह से ये स्लाइटली पोलर है। SO2 क्या है? स्लाइटली पोलर है। ज्यादा नहीं है
लेकिन स्लाइटली है। क्योंकि कैंसिल होते-होते भी थोड़ी सी वैल्यू रहेगी क्योंकि लोन पेयर की वैल्यू ज्यादा थी।
आपसे पेपर में ये जरूर पूछा जाएगा कि NH3 और NF3 में कौन हाइली पोलर है? व्हिच वन इज़ हाइली पोलर? कैसे बताओगे? ध्यान दो।
स्ट्रक्चर की बात करूं। NH3 का स्ट्रक्चर कुछ ऐसा होता है। ठीक है? और NF3 का स्ट्रक्चर कुछ ऐसा होता है। ठीक है जी?
बहुत बढ़िया। आपको बताना है कौन हाईली पोलर है। डपोल मोमेंट NH3 का ज्यादा है या फिर NF3 का ज्यादा है? अगर कोई ट्राई करना
चाहता है कम कमेंट सेक्शन में तो जल्दी से मुझे आंसर बताएं। फिर मैं सॉल्व करूंगा। अगर कोई ट्राई करना चाहता है कि इन दोनों
में से किसका डपोल मोमेंट ज्यादा है। जल्दी से मुझे बताओ कमेंट सेक्शन में। मैं देखता हूं कौन लोग सही बताएंगे। चलो ट्राई
कर लेते हैं। अब यहां पर नाइट्रोजन ज़्यादा इलेक्ट्रोनेगेटिव है। नाइट्रोजन ज़्यादा है। नाइट्रोजन ज़्यादा है। किनों का
रिज़ल्टेंट ऊपर है। लोन पेयर हमेशा ऊपर ही दिखाता है। जहां पे लोन पेयर है वहीं दिखाएगा। डपोल मोमेंट तो ऊपर। दोनों ऊपर
ऊपर हैं। ऐड हो जाएगा और ऐड हो जाएगा तो इसका एक लोन पेयर आएगा। NH3 व्हिच इज़ नॉट इक्वल्स टू ज़ीरो जो कि बड़ा ही हाई है
क्योंकि दोनों ऐड हो गए हैं। लेकिन अगर मैं नीचे वाले की बात करूंगा तो इसका लोन पेयर ऊपर। इसका ऊपर कोई लोन पेयर का
फ्लोरीन ज्यादा इलेक्ट्रोनेगेटिव है। तो इन तीनों का रिजल्टेंट नीचे की तरफ आएगा। यहां होगा कैंसिल आउट। अब ध्यान दो ये है
लोन पेयर का तो कैंसिल आउट हो के जीरो तो नहीं आएगा है ना कैंसिल आउट हो के जीरो तो नहीं आएगा आएगा तो नॉन ज़ीरो ही लेकिन बहुत
स्लाइटली पोलर होगा क्योंकि हुआ तो कैंसिल आउट है ये है स्लाइटली पोलर और ये कैसा है ये है हाइली पोलर ये कैसा है हाइली पोलर
है इसका मतलब हुआ NH3 वाली वैल्यू ज्यादा हो गई ये आपके सामने बहुत इंपॉर्टेंट इंपोर्टेंट बातें हैं जो आपके पेपर में
आपसे पूछी जाएंगी आशा करता हूं कि आपको बहुत मजा आया होगा बहुत फन आया होगा। दैट्स इट गाइज़। दैट्स इट गाइज़। दैट्स इट
गाइज़। समझ में आ रही है बात? समझ में आ रही है? डन है बात चीज़? तो ये था आपका भाई साहब कोवलेंट बॉन्ड का कांसेप्ट। आइए अब
बढ़ा जाएगा आगे। हमारा जो अगला टॉपिक है गाइज़, इसका नाम है पोलराइजेशन। वेरी वेरी इंपॉर्टेंट टॉपिक है। ध्यान से देखिएगा।
बहुत जबरदस्त तरीके से समझना है। बहुत जानदार टॉपिक है। बहुत शानदार टॉपिक है। नाम है पोलराइजेशन। चलिए शुरू करें।
पोलराइजेशन क्या होता है? चलिए व्हेन टू अपोजिट आ हा पहले एक बात बोल दूं बहुत जबरदस्त समझो मैंने अभी थोड़ी देर पहले
बताया कि हर कोवेलेंट बॉन्ड 100% कोवेलेंट हो जरूरी नहीं है उसमें कुछ ना कुछ आयनिक परसेंट करैक्टर हो सकता है ऐसे ही नोट डाल
के लिखेंगे यहां पे आपको मजा ही आ जाएगा कांसेप्ट में क्या नोट नोट ऑल आयनिक बॉन्ड्स
ऑल आयनिक बॉन्ड्स आर 100% आयनिक हर आयनिक बॉन्ड भी 100% आयनिक नहीं उसमें भी कोवेलेंट कररेक्टर पाया जा सकता है। मतलब
हर कोवलेंट बॉन्ड में आयनिक करैक्टर हो सकता है। ऐसे ही हर आयनिक बॉन्ड में कोवेलेंट कररेक्टर हो सकता है। इसको पढ़ने
के लिए हम पढ़ेंगे पोलराइजेशन। आइए पोलराइजेशन को शुरू करने से पहले मैं आपके सामने कुछ एग्जांपल्स लूंगा। आप मुझे
बताएंगे बहुत शानदार तरीके से। जल्दी से मुझे बताइए। अगर मेरे पास Na पॉजिटिव है और मेरे पास Cl नेगेटिव है तो बताइए कौन
साइज में बड़ा होगा? कौन सा में बड़ा होगा? तो कॉमन सेंस वाली बात है कि हमेशा कैटायन पे हाई न्यूक्लियर चार्ज है। मतलब
न्यूक्लियस इसको अंदर खींच के रखेगा जिस वजह से ये स्मॉल होगा साइज में स्मॉलर होगा। जबकि क्लोरीन में इलेक्ट्रॉन ज्यादा
है, नेगेटिव चार्ज है। तो यहां पर हाई स्क्रीनिंग इफेक्ट होता है। हमने पिछले चैप्टर में पढ़ा था। तो इसमें स्क्रीनिंग
इफेक्ट की वजह से साइज हमेशा बड़ा होता है। लार्जर होता है। क्या होता है? लार्जर होता है। तो सपोज़ करना बहुत ध्यान से बात
बताऊंगा। बहुत जबरदस्त बात बताऊंगा। ये मेरे पास छोटा सा सोडियम है जिसका ये न्यूक्लियस है सेंटर में। इसके पास भी
इलेक्ट्रॉन्स हैं चारों तरफ। और ये मेरा अनायन अच्छा ये ओवरऑल पॉजिटिव है क्योंकि ये कैटायन है। मैंने यहां पे
पॉजिटिव बना दिया और फिर ये है मेरा अनायन। ये आयनिक बॉन्ड में थे। आयनिक बॉन्ड ऐसे ही बनता है। इसके सेंटर में भी
एक न्यूक्लियस है भाई साहब। और इसके चारों तरफ भी क्या है भाई साहब? इलेक्ट्रॉन्स हैं। क्योंकि इसके भी तो वैलेंसी
इलेक्ट्रॉन्स हैं ना। इलेक्ट्रॉन्स सबके पास होते हैं। कोई भी हो। लेकिन ये ओवरऑल नेगेटिव है क्योंकि ये अनायन है। अनायन
बड़ा हो सकता है साइज में क्योंकि यहां पे स्क्रीनिंग स्क्रीनिंग चार्ज स्क्रीनिंग इफेक्ट ज्यादा होता है। क्यों? क्योंकि
यहां पे ज्यादा इलेक्ट्रॉन्स हैं। नेगेटिव चार्ज इलेक्ट्रॉन्स ज्यादा हैं। अब ध्यान से देखिएगा। बहुत जबरदस्त बात बताने वाला
हूं। इसका न्यूक्लियर चार्ज कटायन का इतना ज्यादा होता है कि इसकी नजर ना इस बराबर वाले अनायन के इलेक्ट्रॉन्स पे पड़ जाती
है। था ये आयनिक बॉन्ड। लेकिन इसकी गंदी नजर पड़ गई इसके इलेक्ट्रॉन्स पे। तो ये क्या करेगा? हाई न्यूक्लियर चार्ज है। ये
धीरे-धीरे इस बराबर वाले के इलेक्ट्रॉन्स खींचने लगेगा। अब इलेक्ट्रॉन्स को तो खींचेगा लेकिन इस न्यूक्लियस को दूर
धकेलेगा कि तू तो जा दूर तू तो पॉजिटिव है। तू माताजी हो मेरे मैं पॉजिटिव हूं। मुझे पॉजिटिव से कोई दिक्कत वो नहीं है।
भाग जा यहां से और इसके इलेक्ट्रॉन्स को इधर भाग बुलाएगा। एज अ रिजल्ट थोड़ी देर बाद आपको क्या दिखेगा। मैं आपको दिखाता
हूं क्या दिखेगा आपको थोड़ी देर बाद। थोड़ी देर बाद आपको ये दिखेगा कि जो मेरा अनायन कुछ यहां पर ऐसे रखा हुआ था। इसका
खिसक-खिसक के न्यूक्लियस तो पहुंच जाता है पीछे। पॉजिटिव तो पीछे पहुंच जाता है। और इसके सारे इलेक्ट्रॉन्स खिसक खिसक के आ
जाते हैं आगे। जो पहले इलेक्ट्रॉन्स ऐसे थे वो खिसक खिसक के आगे आ गए। क्यों? क्योंकि इस
न्यूक्लियस ने इनको खींच लिया था। आप मेरी बात समझ पा रहे हैं कि नहीं समझ पा रहे हैं? आप मेरी बात समझ पा रहे हैं कि नहीं
समझ पा रहे हैं? अब इस वजह से क्या हुआ? इस वजह से ये हुआ कि पहले जो आयनिक बॉन्ड था कोई शेयरिंग नहीं थी। यहां पर आप देख
पा रहे हैं कुछ इलेक्ट्रॉन्स अब इसके भी हैं। वो इसके भी अंदर आ गए हैं। यहां पर हो गई है इलेक्ट्रॉन्स की ओवरलैपिंग और जो
बॉन्ड परफेक्टली आयोनिक था गाइस इसमें आ गया है थोड़ा सा ओवरलैपिंग। थोड़ा सा शेयरिंग मतलब कोवेलेंट कैरेक्टर।
इस पूरे प्रोसेस को कहा जाता है पोलराइजेशन। व्हेन टू अपोजिटली चार्ज्ड आयंस ऑफ अनक्वल
साइज अप्रोच ईच अदर क्लोजली इन आयनिक फॉर्म द आयन स्मॉलर इन साइज अट्रैक्ट द आउटर मोस्ट इलेक्ट्रॉन ऑफ द अदर आयन एंड
रिपेल इट्स न्यूक्लियर चार्ज द नेट रिजल्ट इज़ डिस्टॉर्शन डिस्टॉर्शन का मतलब है तहस-नहस हो जाना इसके इलेक्ट्रॉन्स को
तहसनहस करके अपने पास बुला लिया इसे कहा जाता है पोलराइजेशन ऑफ द बिगर आयन कैटायन की वो एबिलिटी जिससे वो अनायन के
इलेक्ट्रॉन्स को खींच के पोलराइज करता है उसे कहते हैं पोलराइजिंग पावर और अनायन की वो कैपेबिलिटी जिसकी वजह से वो पोलराइज्ड
हो जाता है। इलेक्ट्रॉन को डिस्टोर्ट होने देता है उसे कहते हैं उसकी पोलराइज्ड एबिलिटी। आशा करता हूं कि आपको पोलराइजेशन
समझ में आया होगा। जहां जितना ज्यादा पोलराइजेशन वहां उतना कोवेलेंट कैरेक्टर। ध्यान रखिएगा भैया। जहां जितना ज्यादा
पोलराइजेशन होता है, वहां उतना ज्यादा इलेक्ट्रॉन खींच के सामने आ जाते हैं। शेयरिंग हो जाती है और कोवेलेंट कैरेक्टर
बढ़ जाता है। आशा करता हूं आपको बात समझ में आई होगी। अब सवाल यह आता है कि पोलराइज़ेशन कहां ज़्यादा होगा? यह कैसे
डिपेंड करेगा? तो, इसके लिए हम पढ़ते हैं फज़ान रूल। पहला फ़ज़ान रूल क्या कहलाता है? चार्ज ऑन द कैटायन। देखो भैया, कौन खींच
रहा है? कौन पोलराइजेशन करने के लिए रिस्पांसिबल है? कटायन का न्यूक्लियर चार्ज। जितना ज्यादा पॉजिटिव चार्ज होगा
कैटायन का, उतना ज्यादा वो खींचेगा। मतलब उतनी ज्यादा पोलराइजेशन होगी। और जितनी ज्यादा पोलराइजेशन होगी, उतना ज्यादा
कोवेलेंट कैरेक्टर आएगा। उतना ज्यादा कोवेलेंट कररेक्टर आएगा। बहुत बढ़िया भैया शानदार। साइज ऑफ द कैटायन। आ जाओ जी जरा।
न्यूक्लियस हमेशा ध्यान रखना कटायन का न्यूक्लियस खींचता है और कैटायन का न्यूक्लियस जितना पास होगा इन अनायन वाले
इलेक्ट्रॉन्स के उतना ज्यादा खींचेगा। अगर मैं कटायन का साइज बड़ा कर दूं। अगर मैं इस कटायन का साइज बड़ा कर दूं तो इसका जो
न्यूक्लियस है वो तो दूर हो जाएगा। वो तो क्या हो जाएगा? वो तो अब दूर हो गया इन इलेक्ट्रॉन से। भाई पहले ये मेरे अनायन के
नेगेटिव चार्ज थे। है ना? तो ये तो इतना दूर हो गया जबकि यहां पे पास था तो कहां ज्यादा खींच पाएगा कैटायन वहां पे। तो
कैटायन का साइज जितना छोटा होगा उतना हमारे लिए अच्छा है क्योंकि न्यूक्लियस इसके इलेक्ट्रॉन्स को खींच पाएगा। जितना
बड़ा साइज होगा कैटायन का उतना हमें दुख देगा क्योंकि उतना वो दूर हो जाएगा इन नेगेटिवली चार्ज अनायन के इलेक्ट्रॉन से।
तो कैटायन का जितना बड़ा साइज करोगे उतनी कम पोलराइजेशन हो जाएगी। वन अपॉन में आ जाएगा यहां पे पोलराइजेशन उतना कम हो
जाएगा कोवेलेंट कैरेक्टर। बहुत बढ़िया। उसके बाद साइज ऑफ द अनायन। तीसरा पॉइंट। भाई साहब ध्यान दो। अनायन पोलराइजेशन कब
होगा? जब अनायन के इलेक्ट्रॉन खींच जाएंगे। अगर मैं अनायन का साइज छोटा कर दूंगा तो अनायन का न्यूक्लियस इसके
इलेक्ट्रॉन्स पे पकड़ बना के रखेगा क्योंकि छोटा साइज है। न्यूक्लियस बगल में बैठा है। तो ये न्यूक्लियस अनायन का इन
इलेक्ट्रॉन्स को जाने ही नहीं देगा। पोलराइजेशन होने ही नहीं देगा। तो अनायन का जितना बड़ा साइज होगा उतना मेरे लिए
अच्छा है क्योंकि उतना न्यूक्लियस इन इलेक्ट्रॉन्स से दूर होगा वो खींच चले जाएंगे। तो पोलराइजेशन के लिए साइज ऑफ द
एनायन जितना ज्यादा होगा उतना हमारा पोलराइजेशन होगा। डायरेक्टली प्रपोर्शनल वाली बातचीत आ गई है। ठीक है ना?
पोलराइजेशन में इसमें कहीं Z लिखा है, कहीं S लिखा है तो टेंशन लेने की जरूरत नहीं है। कॉमन सेंस है समझ आ जाइएगा। ये
बात आपको ध्यान रखनी है। आइए इन्हीं बेसिस पे एक क्वेश्चन कर लेते हैं। हमारा पहला एग्जांपल है कि बताइए कहां पोलराइजेशन
ज्यादा होगा? तो आप सिंपल बताएंगे भैया कैटायन तो सब में एक है। सोडियम सोडियम तो कैटायन को तो देख नहीं सकते। अनायन को
देखेंगे और अनायन में सारे एनायन अलग-अलग हैं। अगर आप देखेंगे तो ये बन रहा है आपका फिर सी बी। यहां पे अगर साइज देखोगे तो
टॉप टू बॉटम साइज बढ़ता है और अनायन का साइज बड़ा है तो पोलराइजेशन ज्यादा अच्छे से हो पाएगा। तो आयोडीन यहां पे ये हो गया
आपका ऑर्डर फजान रूल लगा दिया। अगला देखो कैल्शियम कैल्शियम वाला। यहां पे सारे में देखोगे तो आपके कटायन तो फिक्स हैं।
कैल्शियम कैल्शियम कैल्शियम। अब फिर से अनायन देखोगे। अनायन का साइज बड़ा तो हमारे लिए बढ़िया। मतलब फिर से आयोडीन
वाला एग्जांपल हो गया। अगला बढ़िए। अगले में हमारे पास सारे कैटायन अलग-अलग हैं। और कौन से कौन से हैं ये आपके सेकंड ऑर्डर
के? बेटा, मांगे, कार, स्कूटर। सारे सेकंड ग्रुप के हैं। सब पे +2 चार्ज आएगा क्योंकि सबकी वैलेंसी में क्या है? +2 है।
चार्ज सबका बराबर है। साइज देख लो। कैटायन का जितना साइज छोटा होगा उतना अच्छा है। जितना साइज छोटा होगा उतना अच्छा है। तो
बेरिलियम सबसे छोटा है। सबसे ज्यादा पोलराइजेशन करेगा। क्योंकि कैटायन को छोटा होना पड़ेगा उसके न्यूक्लियस को। उस वाले
अनायन के पास होना पड़ेगा। मतलब बेरिलियम ज्यादा शो करेगा पोलराइजेशन। अब यहीं पे गाइस मैं तुमसे एक क्वेश्चन पूछ रहा हूं।
ये मेरा है सेकंड सेकंड पीरियड ली ना की रब से फरियाद। अगर मैं तुमसे बोलूं तो क्या मैं ये कह सकता हूं कि सेकंड पीरियड
वाले एलिमेंट्स साइज में सबसे छोटे हैं तो सबसे ज्यादा पोलराइजेशन करेंगे। और जब सबसे ज्यादा पोलराइजेशन करेंगे, मेटल्स की
बात कर रहा हूं। जब सबसे ज्यादा पोलराइजेशन करेंगे क्योंकि साइज में छोटे हैं। फजान रूल के अकॉर्डिंग हाई
पोलराइजेशन मतलब हाई कोवेलेंट कररेक्टर। इसी वजह से मेटल होते हुए भी एनामोलस बिहेवियर दिखाते हैं और भाई साहब कोवेलेंट
कैरेक्टर वाला बॉन्ड बना के चले जाते हैं। बनाना कौन सा था? आयनिक। इसलिए Becl2 क्या था? आयनिक नहीं था। उसमें पोलराइजेशन इतना
हो जाता है कि वो मेजरली बन जाता है कोवेलेंट। इस वजह से मैंने वहां पे ऐसा बनाया था। तो यहां पे क्या होता है? हाई
कोवेलेंट कैरेक्टर होता है। यही इनका एनामोलस बिहेवियर का रीज़न था। कोई पूछे क्यों है एनामोलस बिहेवियर? तो भाई साहब
आंख बंद करके एक्सेप्शन केस नहीं कह रहे। रीज़न बता रहे हैं। पोलराइजेशन वाज़ द रीज़न। जल्दी से इस क्वेश्चन का मुझे कमेंट
सेक्शन में आंसर देंगे। कौन इसमें हाईएस्ट होगा कोवेलेंट कररेक्टर? किस में हाई कोवेलेंट कररेक्टर होगा? इसमें आपको आंसर
देना है मुझे कमेंट सेक्शन में। जल्दी से लिखिए एपीएम। अगर मामला बहुत सेट तरीके से समझ में आ गया है। एपीएम इन द चैट बॉक्स
विद द रेड हार्ट। आशा करता हूं कि आपको मौज आ गई होगी। मजा आ गया होगा भाई साहब। आशा करता हूं कि आपको मजा आ गया होगा।
जल्दी से बताएंगे। अब हम बढ़ रहे होंगे आगे अपने अगले टॉपिक की ओर। डन बातचीत। जल्दी से बता दो। आगे बढ़ते हैं। ओके? तो
अगला हमारा टॉपिक है गाइज़ वेसर थ्योरी। बहुत इंपॉर्टेंट है पेपर पॉइंट ऑफ व्यू से तुम्हारे 11th क्लास के चैप्टर में वेरी
वेरीेंट केमिकल बॉन्डिंग वेसर थ्योरी। क्या है? आओ इसको समझते हैं। बहुत मजेदार भी है। ठीक है? आओ जरा इसको देखते हैं एक
बार क्या होता है यहां पे। तो वैस्पर थ्योरी का पूरा नाम है भाई साहब वैलेंस शेल इलेक्ट्रॉन पेयर रिपल्शन। क्या है?
वैलेंस शेल इलेक्ट्रॉन पेयर रिपल्शन थ्योरी। इलेक्ट्रॉन पेयर रिपल्शन थ्योरी। ठीक है ना? बहुत लंबा चौड़ा नाम है भाई
साहब इसका। ठीक है? इलेक्ट्रॉन पेयर रिपल्शन थ्योरी। क्या होता है इस थ्योरी में? बहुत ध्यान से देखना। एक क्वेश्चन
पेपर में पक्का यहां से पूछा जाता है। तो मैं तुम्हें ना इसको समझाने से पहले मैं तुम्हें कुछ एग्जांपल्स देता हूं।
तुम्हारे सामने कुछ एग्जांपल्स मैं रख रहा हूं यहां पे। मुझे सोच समझ के बताना। मुझे सोच समझ के बताना कि जो हमारी वैलेंस शेल
होती है भाई साहब। जो हमारी वैलेंस शेल होती है उसमें जो इलेक्ट्रॉन्स होते हैं वो कितने पार्ट में डिवाइड होते हैं? सबको
पता है भैया वो दो पार्ट में डिवाइड होते हैं। आइदर या तो वो बॉन्डिंग में पार्टिसिपेट कर रहे हैं तो वो बॉन्ड पेयर
हैं। सही बात है। और अगर वो बॉन्डिंग में पार्टिसिपेट नहीं कर रहे हैं तो वो लोन पेयर हैं। सही बात है। अब बॉन्ड पेयर
किसके बने हैं? इलेक्ट्रॉन्स के ही तो हैं बॉन्ड पेयर। लोन पेयर किसके हैं? इलेक्ट्रॉन्स के ही हैं लोन पेयर। है ना?
तुम्हारे इलेक्ट्रॉन्स के ही हैं और इलेक्ट्रॉन्स होते हैं नेगेटिवली चार्ज सबको पता है। तो वेसर थ्योरी क्या कहती
है? पहले तो इसका काम क्या है वो देख लो। वेसर थ्योरी थ्योरी में क्या लिख के आओगे? अगर मान लो दो नंबर में आती है, तीन नंबर
में आती है। तो आपको बोलना है इट इज़ यूज्ड टू प्रेडिक्ट द शेप ऑफ द मॉलिक्यूल्स फ्रॉम द इलेक्ट्रॉन पेयर्स दैट सराउंडेड द
सेंट्रल एटम ऑफ द मॉलिक्यूल। मतलब इस थ्योरी की मदद से मैं किसी भी मॉलिक्यूल की एक एग्जैक्ट शेप को प्रेडिक्ट कर सकता
हूं। इसका मतलब ये हुआ कि अगर कोई तुमसे पूछे कि बताओ भई CH4 का स्ट्रक्चर कैसा होता है? तो तुम्हारे मन में आएगा कि भई
CH4 का पूछा है? देखो मैं बता दूंगा। एक हाइड्रोजन यहां रख दो। एक यहां रख दो चार है ना एक यहां रख दो एक यहां रख दो। तुम
बोलोगे भैया कुछ ऐसा मॉलिक्यूल का स्ट्रक्चर है इसका। जबकि रियलिटी ये है कि ऐसा मॉलिक्यूल का स्ट्रक्चर है ही नहीं।
अभी थोड़ी देर पहले जब मैं तुम्हें पढ़ा रहा था भैया अपना डपोल मोमेंट तो मैंने तुम्हें बोला कि भई BF3 जो होता है ना वो
ऐसा होता है। है ना? वो ऐसा होता है। BF3 ऐसा होता है। ठीक है? अब इस बेसिस पे अगर मैंने डपोल मोमेंट देखा था तो मैंने
तुम्हें बोला कि भ इसका डपोल मोमेंट ऊपर जा रहा है। इसका नीचे जा रहा है। इन दोनों का रिजल्टेंट नीचे की तरफ है। फिर
रिजल्टेंट नीचे आया। ये कैंसिल आउट हो गया। लेकिन अगर मैं थोड़ी देर के लिए कह दूं कि BF3 ऐसा नहीं होता। BF3 तो ऐसा
होता है। BF3 तो ऐसा होता है। तो इस केस में तो भाई साहब ये जो है पोलर मॉलिक्यूल होना चाहिए। क्यों? क्योंकि यहां पे देखो
इस तरीके से है। यहां पे इस तरीके से ये दोनों कैंसिल आउट हो गए। ये वाला ऊपर को है। तो भाई ये दोनों कैंसिल आउट हो गए एक
दूसरे में। ऊपर वाला बचा। मतलब ये क्या होना चाहिए? यहां पे इस शेप के अकॉर्डिंग इसका डपोल मोमेंट जीरो आ रहा था। लेकिन इस
शेप के अकॉर्डिंग इसका डपोल मोमेंट नॉन ज़ीरो आ रहा था। तो हर मॉलिक्यूल की एक एक्चुअल शेप होती है। BF3 की एक्चुअल शेप
ये है। ये नहीं है। ये गलत शेप है। ये सही शेप है। CH4 की एक्चुअल शेप ये होती नहीं है। CH4 की एक्चुअल शेप कुछ ऐसी होती है।
3D में देखोगे तो कुछ ऐसा आपको दिखाई देगा कि यहां पे अगर मेरा मान के चलिए कार्बन है और इसके चारों तरफ चार हाइड्रोजन है।
तो आप ध्यान से देखेंगे तो एक हाइड्रोजन ऊपर है। एक हाइड्रोजन इस साइड में है। एक हाइड्रोजन तुम्हारे सामने की तरफ है। देखो
तुम्हारे मुंह की तरफ है। और एक है तुम्हारे पीछे की तरफ। मतलब इस कार्बन के पीछे की तरफ। ये होती है एक्चुअल शेप। अब
ये शेप आई कैसे? किसने बताई तुम्हें? ये शेप बताई है मुझे वैस्पर थ्योरी ने। वैस्पर थ्योरी का इसमें बहुत बड़ा रोल था
कि भैया BF3 ऐसा ही क्यों होता है? ऐसा क्यों नहीं होता? CH4 ऐसा क्यों नहीं होता? ऐसा क्यों होता है? ये हमें बताया
था वैस्पर थ्योरी ने। कैसे बताया था वो देखते हैं। ये थ्योरी दी थी सिडविक और पोवेल नाम के दो लोगों ने। ठीक है? अब
इनकी मेन मुद्दा सुनना। इनका मेन मुद्दा क्या है? ये कहते हैं वेस्पर थ्योरी बेस्ड ऑन द अजंपशन दैट द मॉलिक्यूल विल टेक अ
शेप सच दैट द इलेक्ट्रॉनिक रिपल्शन इन द वैलेंस शेल ऑफ द एटम इज मिनिमाइज्ड। भैया नहीं समझ में आया। आओ समझाता हूं। मेरी
बात को बहुत गौर से समझना है सारे लोगों को। अगर मैं BF3 को ऐसा बना दूं जैसे मैंने नीचे बनाया था ये वाला। जिसको मैं
कह रहा हूं ऐसा ये नहीं होता। तो आप ध्यान से देखेंगे कि यहां पे एक बॉन्ड पेयर ये है, एक बॉन्ड पेयर ये है, एक बॉन्ड पेयर
ये है। और बॉन्ड पेयर होते किसके? के इलेक्ट्रॉन्स के इलेक्ट्रॉन होते हैं नेगेटिव नेगेटिव में होगा रिपल्शन। तो
क्या ये इसको धक्का देगा? देगा। क्या ये भी इसको धक्का देगा? देगा। सब आपस में एक दूसरे को धक्का दे रहे हैं। और जब धक्का
दे रहे हैं तो मॉलिक्यूल हो जा रहा है अनस्टेबल। तो मॉलिक्यूल चाहता है स्टेबिलिटी। तो मॉलिक्यूल के जो बॉन्ड
पेयर है ना ये सारे ऐसे कोशिश भई तुम्हारी मान लो कहीं तुम्हारे दोस्तों की लड़ाई हो गई दोस्तों की तो कैसे छुड़वाओगे इन्ह?
अरे भाई पीछे हट जाओ। पीछे हट जाओ पीछे हट जाओ। तो मॉलिक्यूल अपने आप ही इन बॉन्ड पेयर के बीच में मैक्सिमम रिपल्शन मतलब
मिनिमम रिपल्शन करने के लिए मैक्सिमम पॉसिबल डिस्टेंस मेंटेन कर लेता है। यहां पे अगर आप देखोगे तो यहां पे इन दो बॉन्ड
पेयर के बीच में 90° का एंगल है। लेकिन जैसे ही आपने ये वाली शेप बनती हुई देखी। यहां पे दो बॉन्ड पेयर के बीच में 120° का
एंगल है। सबको पता है भई यहां पे मेरा सेंटर है। सेंटर में 120 120 120 360 हो गया। जबकि यहां पे जस्ट 90° था। तो यहां
पासपास थे। रिपल्शन ज्यादा था। अनस्टेबिलिटी थी। यहां दूर हो गए। रिपल्शन कम हो गया। अनस्टेबिलिटी घट गई। मतलब
स्टेबिलिटी बढ़ गई। तो हर एक केस में रिपल्शन को मिनिमाइज्ड करने के लिए मैक्सिमम पॉसिबल डिस्टेंस पर बॉन्ड खुद
खींच जाते हैं। खुद चले जाते हैं और एक पर्टिकुलर शेप बन जाती है। ये था पूरा मुद्दा वैस्पर थ्योरी का। आशा करता हूं
आपको समझ में आया होगा। अभी बहुत मजेदार समझ में आएगा। बस मुझे 2 मिनट और दे दो। लिख के दे रहा हूं मजा आ जाएगा। ठीक है?
चलिए भैया ये बात सबको समझ में आ गई। ये वाली बात सबको समझ में आ गई। तो अब मेरी बात को समझिए। फिर से मैं एक बार बताता
हूं आपको क्या यहां पे क्या हो रहा है। द वैलेंस शेल इलेक्ट्रॉन पेयर रिपल्शन थ्योरी एब्रवेटेड एज़ वेसर थ्योरी इज़ बेस्ड
ऑन द प्रमाइस दैट देयर इज़ अ रिपल्शन बिटवीन द पेयर ऑफ़ वैलेंस इलेक्ट्रॉन इन ऑल एटम्स। हर एटम्स में जो वैलेंस इलेक्ट्रॉन
के पेयर्स हैं उनमें रिपल्शन होती है क्योंकि सब नेगेटिवली चार्ज्ड हैं। द एटम्स विल ऑलवेज टेंड टू अरेंज देमसेल्व्स
इन अ मैनर व्हिच दिस इलेक्ट्रॉन पेयर रिपल्शन इज़ मिनिमाइज़्ड। अब एटम्स अपने आप को ऐसे अरेंज करना चाहते हैं जिससे कि
रिपल्शन मिनिमाइज्ड हो जाए। दिस अरेंजमेंट ऑफ द एटम डिटरमाइंस द ज्योमेट्री ऑफ़ द रिजल्टिंग मॉलिक्यूल और इसी अरेंजमेंट से
हमें फाइनल ज्योमेट्री शेप ऑफ द मॉलिक्यूल मिल जाती है। बात सबको समझ में आ रही है? ठीक बात है? अभी बताऊंगा टेंशन नहीं लेना।
जैसे मैं आपको एक और एग्जांपल अगर दे दूं तो मान के चलिए मेरे पास है बेरिलियम क्लोराइड। है ना? बेरिलियम क्लोराइड है
मेरे पास। मैं बेरिलियम क्लोराइड को भाई दो Cl के बॉन्ड बनने ऐसे भी तो बना सकता हूं। ऐसे मैंने क्यों नहीं बनाया? जो रियल
रियल शेप होती है ना बी बेरिलियम क्लोराइड की वो ये नहीं होती। रियल शेप होती है ये। एक Cl यहां पे एक Cl यहां पे क्यों?
क्योंकि क्लोरीन के जो दोनों एटम है उन्होंने देखा कि यहां देखूंगा तो एंगल छोटा बन रहा है। रिपल्शन ज्यादा है। क्या
है? हाई रिपल्शन है यहां पर। यहां पे क्या है? हाई रिपल्शन है। तो ऐसे में तो ये शेप अनस्टेबिलिटी को वो कर रही है। है ना?
सपोर्ट कर रही है। अगर मैं यहां पे आमने-सामने कर दूं दोनों बॉन्ड को तो मैक्सिमम डिस्टेंस आ गया 180° का एंगल बन
रहा है। यहां पे तो भैया मेरे ख्याल से 60 65 का एंगल बन रहा होगा। तो यहां पे आ गया आपका भैया मिनिमम रिपल्शन। इसी वजह से इसी
वजह से जो बेरिलियम क्लोराइड की एक्चुअल शेप मानी जाती है उसका नाम होता है लीनियर शेप। एक सीधी लाइन की तरह। कैसी होती है?
लीनियर शेप होती है बेरिलियम क्लोराइड की। ये है वेसर थ्योरी। लेकिन वेसर थ्योरी में आगे बढ़ने से पहले एक बात को समझना
पड़ेगा। कहां रिपल्शन ज्यादा है? कहां रिपल्शन कम है? तो मान के चलिए कि लोन पेयर ना निठल्ले इलेक्ट्रॉन हैं जो कभी भी
बॉन्डिंग में पार्टिसिपेट नहीं कर रहे। इधर-उधर मुंह मारते रहते हैं। जबकि बॉन्ड पेयर अपना भैया पार्टिसिपेट करते हैं।
बॉन्ड पेयर अपना काम में लगे हुए हैं। काम धंधे वाले आदमी हैं। रोज ऑफिस जाते हैं। लोन पेयर वाले ऐसा नहीं करते। तो बताओ
सबसे ज्यादा रिपल्शन एटम के ऊपर कौन कॉज करता होगा? आंसर है लोन पेयर। खाली बैठे इलेक्ट्रॉन्स हैं। तो हमेशा ध्यान रखिएगा
जो ऑर्डर ऑफ रिपल्शन होता है वैलेंस पेयर में ये आपको एक नंबर में पूछा जा सकता है। जो ऑर्डर ऑफ रिपल्शन होता है भाई आपका वो
क्या होता है? लोन पेयर लोन पेयर का सबसे ज्यादा लोन पेयर का बॉन्ड पेयर का उससे कम और सबसे कम होता है बॉन्ड पेयर बॉन्ड पेयर
का क्योंकि बहुत ही सभ्य आदमी होते हैं बॉन्ड पेयर बॉन्ड पेयर बॉन्डिंग में पार्टिसिपेट कर रहे हैं। रिपल्शन होता है
बहुत होता है। लेकिन सबसे कम होता है और सबसे ज्यादा होता है। ये आपको ऑर्डर ध्यान रखना है। निढले आदमी सबसे ज्यादा लड़ाई
करते हैं। सीधी सी बात है। है ना? खाली दिमाग शैतानी खाली आदमी शैतान का दिमाग। जो भी होता होगा यार। ठीक है? बात समझ में
आ रही है? तो ये आपको हमेशा ध्यान रखना है। आओ, अब इस पूरे कांसेप्ट की मदद से हम समझने वाले हैं गाइस शेप ऑफ द मॉलिक्यूल्स
को। बहुत ध्यान से देखना। तो सबसे पहले मैं उन उन मॉलिक्यूल्स की बात कर रहा हूं जहां पे केवल और केवल बॉन्ड पेयर होता है।
लोन पेयर नहीं होता। ऐसे बहुत सारे मॉलिक्यूल हैं जहां लोन पेयर होता ही नहीं है। भई जैसे कि तुम्हारे सामने एग्जांपल
दिख रहा है। तो मैंने यहां पे जितनी भी पॉसिबिलिटी थी वो लिख ली। तो पहला मॉलिक्यूल है मेरा AB2। यहां पे A है मेरा
सेंट्रल एटम। ठीक है? और B है मेरा सब एटम। जैसे कि AB2 का परफेक्ट एग्जांपल है BECL2 AB3 का परफेक्ट एग्जांपल है BF3 AB4
का परफेक्ट एग्जांपल है CH4 AB5 का परफेक्ट एग्जांपल है PCL5 और AB6 का परफेक्ट एग्जांपल है SF6 ठीक है इन सब में
आपको बॉन्ड पेयर दिख रहे हैं भाई AB2 में दो बॉन्ड पेयर हैं भाई दो सब एटम को जोड़ना है AB3 में तीन जो है मेरे नंबर ऑफ
बॉन्ड्स हैं इसमें चार नंबर ऑफ बॉन्ड्स हैं इसमें पांच हैं इसमें छह हैं। अभी ज्योमेट्री और शेप में क्या डिफरेंस है
आगे बताऊंगा। अभी मान लो कि ज्योमेट्री और शेप एक ही बात होती है। अब जरा ध्यान से देखेंगे। अगर मैं सबसे पहले बात करूं
बेरिलियम क्लोराइड की BECl2 की दो बॉन्ड एंगल हैं। मतलब दो बॉन्ड पेयर हैं। मैक्सिमम डिस्टेंस 180° पे बनेगा। इसलिए
जो इनकी शेप होगी वो लीनियर दिखाई देती है। वहीं मैं BF3 की बात करूं तो तीन बॉन्ड मैक्सिमम डिस्टेंस पे 120° पर जा
सकते होंगे। जिस वजह से इसकी जो शेप बनती है वो ट्रायंगल एक ट्रायंगुलर प्लेन की तरह आपको दिखाई दे रही होगी। दिख रही है
एक ट्रायंगल बनता हुआ आपको। तो इसकी शेप का नाम रख दिया ट्राइगोनल पिनर। याद रखना है पेपर में पूछेंगे आपसे। अगला है हमारा
CH4। CH4 को आप चाहते तो ऐसे बना सकते थे ना। ऐसे बना सकते थे। अगर आप ऐसे इसको बनाओगे तो इसमें होगा 90° का एंगल। लेकिन
साइंटिस्ट लोग कहते हैं कि देखो अगर मैं इसको ऐसे बना दूं अब आपको लगेगा भैया ऐसे कैसे? ध्यान से देखना। ऐसे ऐसे। यह 3D में
देखोगे तो ये वाला जो H है ना एक H पीछे की तरफ है। जिस वजह से जो हमारा पहले 90° का एंगल बन रहा था वो अब बनता है हमारा
109.28° का। 109° 28 मिनट का बनता है। तो बताओ कहां एंगल ज्यादा है? भैया यहां पे जो
एंगल है वो है 90°। यहां 109 है। तो कहां ज्यादा सुखी होंगे बॉन्ड पेयर? जहां पे ज्यादा एंगल है यहां पे ज्यादा डिस्टेंस
है। इसलिए जो शेप होती है CH4 की हम ऐसे नहीं बनाते। हम इस शेप को कभी भी आई से नहीं बनाते। गोलू कैसे बनाते हैं भैया? आई
से। इसका नाम क्या रखा है? टेट्राहेड्रल रखा है। अगर मैं बात करूं पांच केस में जहां पे मेरे पास पांच बॉन्ड पे हैं तो
PCL5 कैसे बनाएंगे? आप देखो एक बॉन्ड ऊपर, एक बॉन्ड नीचे। मैक्सिमम डिस्टेंस पॉसिबल करना है। तो ये जो आपको शेप दिख रही है ना
यहां पे ये तो है हॉरिजॉन्टल। एक Cl ऊपर, एक Cl नीचे। अब जो हॉरिजॉन्टल में यहां पे एक Cl सामने है और दो Cl ऐसे हैं। तो अगर
मैं इसको 3D में आपको थोड़ा सा दर्शाऊं तो यह कुछ आपको ऐसे दिखाई देगा 3D में। क्या आप मेरी बात समझ पा रहे हैं? यह
गुंबद है। इसकी गुंबद है। यह सारा हॉरिजॉन्टल प्लेन पे गुंबद है। तो दो गुंबद बनेंगे। एक ऊपर से बनेगी। ऐसे ही एक
नीचे से भी गुंबद बन सकती है। तो ये पिरामिड बन रहा है ऊपर से। ऊपर से पिरामिड दिख रहा है। तीन लाइन तीन लाइन का तीन
फेसेस का ट्र पिरामिड दिख रहा है आपको? तो इसका नाम रख दिया ट्राइगोनल। क्योंकि तीन फेसेस का पिरामिड है। बाय पिरामिडल
क्योंकि दो पिरामिड हैं। एक ऊपर से बनेगा पिरामिड, एक नीचे से बनेगा पिरामिड। तो इसका नाम रख दिया ट्राइगोनल बाय पिरामिडल।
उसके बाद लास्ट अगर छह बॉन्ड पेयर हैं तो उसमें आप कैसे बना सकते हो? आपको दिख रहा होगा। अब की बार देखो ये प्लेन है। एक
फ्लोरीन ऊपर, एक फ्लोरीन नीचे और एक फ्लोरीन दो फ्लोरीन यहां पे सरफेस पे हो गए इस पे अपने प्लेन पे। कुछ ऐसे आपको समझ
में आएगा। दिख रहा है? 3D का दिख रहा है? एक गुंबद ऊपर, एक गुंबद नीचे। लेकिन इसका नाम रखा
गया है ऑक्टाहेड्रल। क्या सभी को सारी बात समझ में आ गई है? तो ये था आपका आपका आपका आज का सारा का सारा गेम। ठीक है? तो मतलब
आज के इन द सेंस कि इस वेस्पर थ्योरी में जहां पे बॉन्ड पेयर ही हैं और कुछ भी नहीं है। क्या इतनी बात सभी को समझ में आ रही
है? याद करने का तरीका है एल डबल टी ओ लट्टू एल डबल टी ओ याद कर लो। है ना? लीनियर ट्राइगोनल पेनल टेट्राहेड्रल,
ट्राइलन बाप पिरामिड और ऑक्टाहेड्रल। अच्छा भैया ये तो ठीक है समझ में आ गया। अब भैया ऐसे भी तो मॉलिक्यूल होंगे जहां
पर लोन पेयर भी होंगे। हां जी बिल्कुल ऐसे भी है। जहां पे लोन पेयर बॉन्ड पेयर दोनों हैं। पहला केस हमारा AB टू। E का मतलब है
यहां पे लोन पेयर। एक E मतलब एक लोन पेयर। AB2 मतलब दो बॉन्ड पेयर क्योंकि दो सब एटम है। एक लोन पेयर। AB2 E2 टू और टू टू
बॉन्ड पेयर टू लोन पेयर। टू बॉन्ड पेयर थ्री लोन पेयर। थ्री बॉन्ड पेयर वन लोन पेयर। थ्री बॉन्ड पेयर टू लोन पेयर। आइए
जरा ध्यान से देखिए। आपको एग्जांपल बहुत याद रखने हैं आराम से। अभी मैं आपको ज्योमेट्री और शेप का मतलब भी बताने वाला
हूं। दोनों में क्या डिफरेंस है। चलो ध्यान से देखना गाइज़। तो सबसे पहले बात करता हूं मैं। ऐसा केस जहां पे दो बॉन्ड
पेयर होंगे और एक लोन पेयर होगा। परफेक्ट एग्जांपल है SO2। लेकिन आप बोलोगे भैया SO2 में तो दो बॉन्ड पेयर हैं। ध्यान रखना
डबल बॉन्ड को वैस्पर थ्योरी में डबल या फिर ट्रिपल बॉन्ड को एक ही बॉन्ड पेयर माना जाता है। है ना? क्योंकि शेप में तो
भाई दोनों चिपके हुए हैं। अलग-अलग तो काउंट नहीं होंगे। है ना? दोनों बराबर-बराबर में हैं। तो एक ही बॉन्ड पेयर
आपको इसको कंसीडर करना है। तो SO2 में आप देखोगे एक लोन पेयर है। अब आप बनाने को SO2 को ऐसे बना सकते थे। है ना? ऐसे बना
सकते थे। लेकिन ये इसको धक्का मारेगा। ये इसको धक्का मारेगा। बहुत तेज़ धक्का मारेगा। नीचे धकेल देगा। जिस वजह से शेप
आपकी बन जाएगी बेंट। कैसे शेप बनेगी? बेंट शेप बनेगी। सिमिलरली आपके पास है AB2 E2 यहां पे आपके पास दो बॉन्ड पेयर हैं और दो
लोन पेयर हैं। पानी इसका परफेक्ट एग्जांपल है। यहां पे इधर धक्का मारेगा, इधर धक्का मारेगा। बेंट शेप हो जाएगी। कैसी शेप है?
बेंट शेप है। बहुत बढ़िया। क्या बात है। शानदार बात है। बहुत बढ़िया। उसके बाद आपके पास अगला है AB2 E3। यहां पे आपके
पास तीन लोन पेयर हैं। अगर आप XCF2 को देखोगे। मैंने भी बताया था एक्सेप्शन ऑफ ऑक्टेट रूल में भी। यहां पे तीन लोन पेयर
हैं। एक दो तीन। है ना? सबने अपने बीच में मैक्सिमम डिस्टेंस पॉसिबल कर लिया। तो इस वजह से आपकी जो शेप बनती है वो लीनियर
बनती है। अगला आपका है AB3. यहां पे आपके पास परफेक्ट एग्जांपल है NH3। अब यहां पे आप NH3 देखोगे तो NH3 आप ध्यान से देखोगे
तो एक दिमाग लगाना है आपको ज्योमेट्री और शेप में क्या डिफरेंस है? शेप होती है जो एक्चुअली बॉन्ड से बनती है। जबकि
ज्योमेट्री में लोन पेयर को इनवॉल्व किया जाता है कि ओरिजिनली अगर लोन पेयर ना होता तो क्या बन सकता था। फॉर एग्जांपल पहले
केस में अगर आप देखोगे इस लोन पेयर को हटा के मैं यहां पे एक बॉन्ड बना दूं तो ये मेरा ट्राइगोनल प्लेनर वाला BF3 की तरह
बनता। तो इसकी जो एक्चुअल ज्योमेट्री सपोर्ट करती है इसको करती है ट्राइगोनल प्लेनर। लेकिन एक बॉन्ड यहां पर नहीं है।
यहां पे बॉन्ड की जगह लोन पेयर है। जिस वजह से इसकी शेप में ऊपर कुछ नहीं है। जस्ट लोन पेयर बैठा है। इसलिए उसकी
एक्चुअल शेप मानी गई है। वो बेंट मानी गई है। वहीं आप अगली बार देखेंगे तो H2O में चार बॉन्ड पेयर हो सकते थे CH4
टेट्राहेड्रल की तरह। तो एक्चुअल ज्योमेट्री का मतलब है जो एक्चुअली जो बिल्डिंग बेस है वो तो टेट्राहेड्रल का था
लेकिन दो लोन पेयर आ गए जिस वजह से बेंट दिखाई पड़ रहा है क्योंकि ऊपर कोई बॉन्ड पेयर नहीं है। समझ रहे हो बात को? अगर आप
अगला केस देखोगे XCF2 में तो यहां पे एक एक तीन बॉन्ड और आ सकते थे PCL5 की तरह ट्राइगोनल बाई पिरामिडल की ज्योमेट्री थी।
लेकिन तीन यहां से बॉन्ड पेयर हमारे हट गए। इसलिए ज्योमेट्री तो कह रही है कि भैया जो बेस बिल्डिंग बेस था वो ट्राइगोलन
बाप पिरामिडल का है। लेकिन यहां पे क्योंकि तीन लोन पेयर हैं। तीन बॉन्ड पेयर नहीं है। ये बन गया हमारा लीनियर शेप हमें
दिखाई पड़ रही है। कैसी शेप दिखाई पड़ रही है? लीनियर शेप दिखाई पड़ रही है। यहां पे आप देखेंगे अब NH3। NH3 में एक लोन पेयर
होता है। ये टेट्राहेड्रल की ज्योमेट्री वाला है। तो आपका टेट्राहेड्रल ज्योमेट्री है। लेकिन रियलिटी में शेप आपको कैसी
दिखाई दे रही है? ऊपर से एक आपने बॉन्ड पेयर हटा दिया। नीचे आपको तीन ऐसे-ऐसे आपको बॉन्ड दिखाई दे रहे हैं। ट्रायंगुलर
कुछ बनता हुआ दिखाई दे रहा है। तो ट्राइगोनल पिरामिडल कह दिया। नीचे की तरफ एक तीन फेस का पिरामिड बन रहा है। बहुत
बढ़िया। अगर आप आगे बढ़ेंगे तो आपके पास यहां पे फिर से पांच बॉन्ड हो सकते थे। बेस ज्योमेट्री पांच वाली है। ट्राइगोनल
बाइपरामिडल वाली है। लेकिन दो यहां पर बॉन्ड पेयर हैं। आपको टी जैसा कुछ मॉलिक्यूल दिखाई दे रहा है। इसलिए आपने
बोल दिया टी शेप। रीज़न है हर चीज का। आपको याद करने वाले होने चाहिए वो। तो ज्योमेट्री जब पूछेंगे तो लोन पेयर को
मानना है। वो बॉन्ड पेयर ही है। बेस ज्योमेट्री बतानी है। रियलिटी में बिल्डिंग ब्लॉक क्या है? लेकिन शेप में
केवल बॉन्ड पेयर ही काउंट होते हैं। आइए और एग्जांपल देखते हैं। उसके बाद AB फोर EE चार बॉन्ड पेयर एक लोन पेयर। तो यहां
पे आपके पास परफेक्ट एग्जांपल है SF4। पांच बॉन्ड वाला ट्राइगोनल बाइपिरामिडल PCL5 की तरह हो सकता था। एक को हटा दिया।
ये आपको अब दिखाई देता है सीसो शेप। इसे कहते हैं सीसो शेप। इसे कहीं-कहीं पे के शेप भी बोल देते हैं। के के जैसा दिखाई दे
रहा है। उसके बाद अगला आपके पास A4 AB4 E2 XCF4 इसका परफेक्ट एग्जांपल है। ऑक्टाहेड्रल SF6 में ऑक्टाहेड्रल की तरह
हो सकता था। एक बॉन्ड ऊपर से निकाल दिया, एक बॉन्ड नीचे से नीचे से निकाल दिया। बस स्क्वायर पिलनर रहने दिया। तो एक्चुअल शेप
आपको स्क्वायर पिलर दिखाई दे रही है। लेकिन ज्योमेट्री थी ऑक्टाहेड्रल की। अब अगला आते हैं अपने BRF5 में। अपना ये था
ऑक्टाहेड्रल की तरह। बस एक यहां पे SF6 का हमने यहां पे क्या कर दिया? नीचे वाला एक बॉन्ड हटा दिया क्योंकि यहां पे F5 है। Br
F5 है। तो ये हो सकता था ऑक्टाहेड्रल लेकिन अभी कैसा दिखाई दे रहा है? एक पिरामिड दिखाई दे रहा है आपको स्क्वायर
शेप का। तो स्क्वायर पिरामिडल इसका नाम रख दिया। वेस पर थ्योरी होती है खत्म। परफेक्ट एक्सप्लेनेशन के साथ में खत्म
होती है। इनमें से कौन-कौन सबसे इंपॉर्टेंट है? पेपर पॉइंट ऑफ व्यू से। एक वेरी इंपॉर्टेंट। दो वेरीेंट। पेपर में
पूछे जाने के सबसे ज्यादा हाई चांसेस हैं इनके। ये इंपॉर्टेंट है। ठीक है? ये इंपॉर्टेंट है और ये इंपॉर्टेंट है। एक
बात और ध्यान रखना आपसे बोन एंगल पूछेंगे किस-किस के? CH4 का याद रखना 109.28 ठीक है ना? इसका याद रखना है। BF3 का याद
रखना है। Becl2 का याद रखना है। उसके बाद उसके अलावा किसका पूछेंगे आपसे? उसके अलावा किसका पूछ सकते हैं? पानी का पूछ
सकते हैं भाई साहब। पानी का पूछ सकते हैं। NH3 का पूछ सकते हैं। अब देखो NH3 में चार बॉन्ड वाले में एक बॉन्ड हटा के लोन पेयर
कर दिया। जब चार बॉन्ड थे तो तो था 109 करके। कितना था? 109। कितना था? 109 था। लेकिन चार बॉन्ड से हटा के एक लोन पेयर को
निकाल दिया। एक लोन पेयर को लगा दिया। लोन पेयर और ज़्यादा धक्का देता है बॉन्ड पेयर के कंपैरिजन में। तो ये नीचे वाले बॉन्ड
थोड़े और पास आ जाएंगे। और बॉन्ड एंगल अब 109 से घट के हो जाएगा आपका 107.5°। बात समझ में आ रही है? वहीं अगर मैं पानी
में बात करूं तो एक और बॉन्ड हटा के एक और लोन पेयर हटा दिया। ये और धक्का देगा। ये और ज्यादा धक्का देगा। तो अब ये और
पास-पास आ जाएंगे। बॉन्ड एंगल 107 से घट के आ जाएगा 104.5°। ये आपको बोन एंगल याद रखने हैं। दैट्स इट
गाइस। ठीक है ना? ये थी आपकी वेस पर थ्योरी। मैंने एक अलग से चार्ट भी बना के आपको दे दिया ज्योमेट्री का और ये पूरा
कुछ करके। ठीक है? अच्छा अब एक बात देखना क्या मैं ऊपर वाले मॉलिक्यूल में कह सकता हूं जो शेप है वही ज्योमेट्री है क्योंकि
लोन पेयर वाला सिस्टम ही नहीं है। भाई जो बॉन्ड पेयर हमें दिख रहा है बेसिक ज्योमेट्री भी वही है। है ना? तो टेंशन
नहीं लेनी अपने को। आगे बढ़ते हैं। आइए। बेटा जी अगला हमारा टॉपिक है वैलेंस बॉन्ड थ्योरी। बहुत ही शानदार बहुत ही जबरदस्त
टॉपिक है। व्हाट इज़ वैलेंस बॉन्ड थ्योरी? तो एक कोवलेंट बॉन्ड के लिए किसी भी कोवेलेंट बॉन्ड की जो अंदर का मैकेनिज्म
होता है कि बॉन्ड कैसे बनता है उसको बताता है वैलेंस बॉन्ड थ्योरी। ये कहता है अ कोवेलेंट बॉन्ड इज़ फॉर्म्ड बाय ओवरलैपिंग
ऑफ़ एटॉमिक ऑर्बिटल्स ऑफ़ द वैलेंस शेल ऑफ़ द टू एटम्स। ये कहता है कि देखो यार मान के चलिए मान के चलिए कि आपके पास एक एटम है।
लेट्स सपोज एक हाइड्रोजन आपके पास व्हिच इज़ 1s1। इसके पास एक ही ऑर्बिटल है वो है अनपेयर्ड। ठीक है? तो जो अनपेयर्ड
अनपेयर्ड ऑर्बिटल्स होते हैं ना बड़े ही अनस्टेबल होते हैं। और ये हमेशा पेअरिंग अप करना चाहते हैं। क्या करना चाहते हैं?
पेयरिंग अप करना चाहते हैं। तो मान लो इसे कोई एक और हाइड्रोजन मिला व्हिच इज़ अगेन 1s1 इसका भी एक अनपेयर्ड है। तो यह भी
अनपेयर्ड है। दोनों अनपेयर्ड है। दोनों क्या करेंगे? एक दूसरे के ऊपर ओवरलैप कर जाएंगे। दोनों क्या करेंगे? एक दूसरे के
ऊपर ओवरलैप कर जाएंगे। और जब ओवरलैप करेंगे तो एक इलेक्ट्रॉन इसका एक इलेक्ट्रॉन इसका यहां पे पेयरिंग अप हो
जाएगी। इस तरीके से कोवेलेंट बनता है। कोवेंट बॉन्ड बनता है। ओवरलैपिंग करनी जरूरी है। क्या कहते हैं? ओनली हाफ फिल्ड
एटॉमिक ऑर्बिटल्स यानी कि ऐसे ऑर्बिटल्स जहां पे एक ही इलेक्ट्रॉन हैं केवल वही ओवरलैपिंग प्रोग्रेस प्रोसेस को करते हैं।
द रिजल्टिंग बॉन्ड एक्वायर्स अ पेयर ऑफ इलेक्ट्रॉन ऑफ डिफरेंट स्पिन। जब पेयरिंग नहीं हुई है तो स्पिन कैसी भी हो एक दोनों
ऊपर की तरफ दिखाई दे रहे हैं। दोनों क्लॉकवाइज़ दिखाई दे रहे हैं। लेकिन जब पेयरिंग अप हो जाएगी तो हमेशा ध्यान रखना
पेयरिंग में कभी भी दो इलेक्ट्रॉन्स के चारों क्वांटम नंबर एक जैसे नहीं होते। पॉलीज़ एक्सप्लोज़न ने बताया था। तो आपको
स्पिन हमेशा इनकी डिफरेंट रखनी है। आपको ध्यान रखना है। एज़ अ रिजल्ट ऑफ़ ओवरलैपिंग देयर इज़ अ मैक्सिमम इलेक्ट्रॉन डेंसिटी
समवेयर बिटवीन द टू एटम्स। जब ओवरलैपिंग होती है तो जो भी इलेक्ट्रॉन की डेंसिटी होती है वो सेंटर में आके बैठ जाती है।
इलेक्ट्रॉन डेंसिटी हाई हो जाती है। जहां पे ओवरलैपिंग है। क्यों? क्योंकि वहां पे कॉमन दोनों के इलेक्ट्रॉन्स बैठे हुए होते
हैं। तो संख्या बढ़ जाती है। बहुत बढ़िया। ग्रेटर द ओवरलैपिंग हायर इज़ द स्ट्रेंथ ऑफ़ द केमिकल बॉन्ड। जितनी ज्यादा ओवरलैपिंग
होगी उतना ज्यादा स्ट्रेंथ ऑफ़ द बॉन्ड होता है। अगली बात इलेक्ट्रॉन्स व्हिच आर ऑलरेडी पेयर्ड इन अ वैलेंसी शेल कैन एंटर
इंटू बॉन्ड फॉर्मेशन इफ दे कैन अनपेयर्ड फर्स्ट एंड देन शिफ्टेड टू वेकेंट ऑर्बिटल्स। ये परफेक्ट बहुत ही जबरदस्त एक
पॉइंट है इसका। ध्यान से देखना। मैं अगर बात करूं तुमसे C की कार्बन की। नॉर्मली कार्बन होता है 1s2, 2s2, 2p2 हमेशा
वैलेंस शेल। आउटर मोस्ट शेल को कहते हैं। मतलब ये दोनों आउटर मोस्ट शेल हैं। S में दो बैठे हैं और P में यहां पे ऐसे ऐसे
बैठे हैं। एक दो। तो अभी के लिए आपको क्या लग रहा है? कार्बन तो बस दो ही बॉन्ड बनाएगा। क्योंकि कार्बन में तो बस दो ही
ओवरलैपिंग होगी। एक यहां ओवरलैपिंग, एक यहां ओवरलैपिंग क्योंकि तो करेगा ही नहीं। भई ये तो ऑलरेडी पेयर्ड अप है। अरे हां या
ना? लेकिन कार्बन फिर भी चार बॉन्ड बनाता है। तो वहां ये वाला पॉइंट काम आता है। ये वाला पॉइंट ये कहता है कि हमेशा हर एक
ऑर्बिटल बॉन्डिंग में पार्टिसिपेट करना चाहता है। मजा आता है उसको। लेकिन ये कर नहीं पाएगा। लेकिन अगर इसके पास एक ऑप्शन
है कि भ इसके आसपास कोई वेकेंट खाली डिब्बा बैठा है तो अपने पेयरिंग वाले इलेक्ट्रॉन को ये एक्साइट करके यहां से
वहां भेज देगा। ये इसकी ग्राउंड स्टेट कहलाती है। ये इसकी एक्साइटेड स्टेट कहलाती है। और एक इलेक्ट्रॉन जो पेयरिंग
अप है अगर खाली डब्बा है तभी पॉसिबल है। उसमें खाली डब्बा था तो ये उठा के वहां भेजेगा। और अब ये चारों बॉन्डिंग में
पार्टिसिपेट कर सकते हैं। इसलिए कार्बन चार बॉन्ड बनाता है। क्या बोलते हैं इसको? ग्राउंड स्टेट। क्या बोलते हैं इसको?
ग्राउंड स्टेट। इसको बोलते हैं ग्राउंड स्टेट। और नीचे वाली को बोलते हैं भाई साहब एक्साइटेड स्टेट। ठीक है? सही बात
है। बिल्कुल सही बात है। ये आपके सारे पॉइंट्स थे वैलेंस बॉन्ड थ्योरी के व्हिच यू कैन राइट इन योर कॉपी। अगर आपसे
तीन-चार नंबर में एक्सप्लेन करने के लिए आएगा तो आपको ये सारे पॉइंट लिखने हैं। समझने के लिए बहुत इंपॉर्टेंट है हमारी
वैलेंस बॉन्ड थ्योरी के लिए। आइए। अब जब ओवरलैपिंग होती है तो उसके बेसिस पे हमारे दो टाइप के बॉन्ड होते हैं गाइस। जब
ओवरलैपिंग होती है तो ओवरलैपिंग के बेसिस पे दो टाइप मतलब कोवेलेंट के अंदर भी दो टाइप होते हैं ओवरलैपिंग के बेसिस पे।
कौन-कौन से? एक का नाम है सिग्मा बॉन्ड और एक का नाम है भाई साहब पाई बॉन्ड। आइए दोनों की चर्चा करेंगे। सिग्मा बॉन्ड तब
बनता है जब दो ऑर्बिटल्स एंड टू एंड ओवरलैप करते हैं। कैसा करते हैं? एंड टू एंड ओवरलैप। ये पॉसिबल है ss में, sp में
और p में। बताऊं एंड टू एंड का मतलब क्या है? सिंपल बताता हूं। चलिए सिंपल मतलब करके समझाता हूं। तो N2N का ये मतलब है कि
मान लो तुम्हारे पास एक वनs बनता हाइड्रोजन का एक S ऑर्बिटल में एक इलेक्ट्रॉन एक S ऑर्बिटल में एक
इलेक्ट्रॉन। अब दो हाइड्रोजन एटम है दोनों डुप्लेट बनाना चाहते हैं। दोनों एक दूसरे से ओवरलैपिंग करेंगे। तो दोनों आमने-सामने
कोनों से आके ओवरलैप करके ऐसे ऐसे एंड से एंड ओवरलैपिंग करिए। इसे कहते हैं एंड टू एंड ओवरलैपिंग। SS में पॉसिबल है। अगर मैं
बात करूं SP में मान लो मेरे पास एक हाइड्रोजन है। हाइड्रोजन होता है 1s1। तो इसका एक s ऑर्बिटल खाली है। क्लोरीन में
आप जाओगे तो 1s2 s2p 66 3s2 3p5। तो 3p5 में जो ये वाला P वाला है ये वाला इसका अनपेयर्ड है। ये ओवरलैप करने के लिए बैठा
हुआ है। तो ये इसका P है भ ये तो P है ना? P इसका ये है। ये P हो गया। ये S हो गया। दोनों ने सामने-सामने से ओवरलैपिंग की।
दिस इज़ व्हाट वी कॉल्ड एज N टू एंड ओवरलैपिंग। तो इसे कहते हैं हमने एसएस में SP में N टू एंड ओवरलैपिंग। फिर हम बात
करते हैं P में आ जाओ यहां पे जरा। अगर मेरे पास दो P हैं। और दो पी आमने-सामने से आते हैं ऐसे। इसे भी कहते हैं एंड टू
एंड ओवरलैपिंग। लेकिन P में एक और पॉसिबिलिटी है। अगर दो वर्टिकल P आपस में ऐसे ओवरलैप करें तो ये एंड टू एंड नहीं
होगी। इसे कहते हैं साइड वाइज़ ओवरलैपिंग। इसे क्या कहते हैं? साइड वाइज़ ओवरलैपिंग। तो एंड टू एंड में हमेशा ऐसे ओवरलैपिंग
होती है। साइड वाइज़ में ऐसे ओवरलैपिंग होती है। साइड वाइज़ केवल P में ही पॉसिबल है। क्योंकि आप S में तो कभी भी ऐसा कर ही
नहीं सकते। S में तो स्फेरिकल है। सर्कुलर है, स्फेरिकल है। सारा कुछ एंड ही होगा। हर जगह पे एंड ही होगा। बात समझ रहे हो?
इसमें कोई वर्टिकल शेप तो हो ही नहीं सकती। तो इस वजह से सिग्मा बॉन्ड बनता है एसएस में, sp में और पीपी में जहां पे एंड
टू एंड ओवरलैपिंग है। लेकिन पाई बॉन्ड हमेशा बनता है साइड वाइज जो कि केवल एक बार पीपी में ही यहां पे पॉसिबल है। बहुत
बढ़िया। ये एक स्ट्रांग बॉन्ड होता है क्योंकि यहां पे हाई एक्सटेंट ऑफ ओवरलैपिंग होती है। आप ऐसे ओवरलैपिंग कर
रहे हो हाई एक्सटेंट है। आप ऐसे कर रहे हो ठीक से नहीं हो पाएगी। है ना? साइड वाइज में ठीक से नहीं हो पाएगी। अब देखो साइड
वाइज में आपसे ठीक से नहीं देखने के लिए मिल रही है। छोटी सी ओवरलैपिंग मिल रही है। जबकि यहां पे देखो कितनी तगड़ी
ओवरलैपिंग है। यहां पे देखो कितनी तगड़ी ओवरलैपिंग है। यहां पे देखो कितनी तगड़ी ओवरलैपिंग है। है ना? तो हमेशा आपको ध्यान
क्या रखना है? आपको ये ध्यान रखना है कि भाई ये स्ट्रांग बॉन्ड होता है सिग्मा बॉन्ड क्योंकि हाई एक्सटेंट है ओवरलैपिंग
का। जबकि एक वीक बॉन्ड है क्योंकि लेस एक्सटेंट है ओवरलैपिंग का। इट इज़ इंडिपेंडेंट इन फॉर्मेशन। ये बहुत
इंपॉर्टेंट पॉइंट है। सिग्मा बॉन्ड फॉर्मेशन में इंडिपेंडेंट है। जबकि पाई बॉन्ड डिपेंड करता है सिग्मा बॉन्ड पे।
पूछेगा क्यों? आपको रीज़न बताता हूं मेरा रीज़न क्या है। तो ध्यान से समझिएगा मेरी बात को। मान लो आपके पास P ऑर्बिटल है। P
ऑर्बिटल में आपके पास तीन डब्बे होते हैं। मान लो तीनों अनपेयर्ड हैं। एक हमारा PX होता है, py होता है, pz होता है। इसका ये
मतलब है कि एक आपका X एक्सिस में, एक Y एक्सिस में, एक Z एक्सिस में। तो मान लो एक P ऑर्बिटल इस एटम का आया, एक एटम ये
था। है ना? और एक एटम मेरा ये था। दोनों ओवरलैपिंग करने के लिए चले दोनों के p में। एक-एक यहां पे सारे डब्बों में एक-एक
इलेक्ट्रॉन खाली हैं। तो एक ये p आया। तीनों का ग्रुप, एक ये तीनों का ग्रुप आया। जब ये आगे बढ़ेंगे ओवरलैप करने के
लिए सबसे पहले साइड वाइज ओवरलैपिंग पॉसिबल है कि एंड टू एंड ओवरलैपिंग पॉसिबल है? दिमाग लगाओ। सबसे पहले जब ये आगे बढ़ेंगे
तो सबसे पहले कौन सी ओवरलैपिंग पॉसिबल है भैया? सबसे पहले ये वाली ओवरलैपिंग पॉसिबल है। देख रहे हो आप? है ना? स्विच से स्विच
में एकदम से एकदम बढ़िया करके चलेगा मामला। तो सबसे पहले जो ओवरलैपिंग पॉसिबल है वो ये वाली है। व्हिच इज एंड टू एंड
ओवरलैपिंग। मतलब पहले बना सिग्मा बॉन्ड। सिग्मा के बिना पाई बन ही नहीं सकता। क्योंकि पहले जो पॉसिबल आपको दिख रहा है
वो कौन सा दिख रहा है? एंड टू एंड वाला दिख रहा है। उसके बाद उसके बाद ये वाला वर्टिकल वाला वर्टिकल वाले से आप बोलोगे
भैया ओवरलैपिंग हो ही नहीं रही। ये थोड़े से मुड़ जाते हैं ऐसे साइड वाइज़ करने के लिए जबरदस्ती। तो फिर उसके बाद ये वाला
पॉसिबल है। और ये साइड वाइज़ होगा क्योंकि वर्टिकल है। तो ये पाई बन रहा है। उसके बाद ये वाला पॉसिबल है इसका। ये वाला इससे
है ना? इसका इससे इसका इससे इसका इससे और इसका इससे तो पहला सिग्मा है बाकी दोनों पाई हैं। इसलिए ध्यान रखना इसलिए ध्यान
रखना जब भी कभी कार्बन से कार्बन का सिंगल बॉन्ड बनता है तो वो सिग्मा होता है। क्योंकि पहला बॉन्ड हमेशा कौन होता है?
एंड टू एंड वाला। अगर कार्बन से कार्बन के दो बॉन्ड बन रहे हैं तो पहला वाला सिग्मा दूसरा वाला पाई। क्योंकि पहला वाला सिग्मा
हो गया। अब एंड टू एंड तो हो गई। अब साइड वाइज ही होगी। क्योंकि दोनों जो बचे हुए दोनों हैं वो दोनों साइड वाइज करते हैं।
क्यों? क्योंकि वो वर्टिकल है। एक सीधा है, एक टेढ़ा है थोड़ा सा। है ना? एंड टू एंड केवल X एक्सिस वाला ही करता है। तो
यहां पे एक सिग्मा एक पाई है। और अगर तीन बॉन्ड बन रहे हैं इसकी तरह तो पहला सिग्मा है। बाकी दोनों पाई हैं। ये आपको याद रखना
है हमेशा। इसलिए मैंने क्या बोला? इसलिए मैंने आपसे बोला कि भाई साहब यहां पे आप हमेशा ध्यान रखेंगे कि ये इंडिपेंडेंट है।
क्योंकि ये तो हमेशा बनेगा ही बनेगा। पाई तब तक नहीं बनेगा जब तक सिग्मा ना बन जाए। पहले सिग्मा ही बनेगा इसलिए इंडिपेंडेंट
डिपेंडेंट है। उसके बाद सिग्मा बॉन्ड बहुत स्ट्रांग होता है। इसका बॉन्ड तोड़ना मुश्किल है। इसके इलेक्ट्रॉन्स कहीं नहीं
जाने वाले। तो इलेक्ट्रॉन्स को कंसीडर किया जाता है लोकलाइज़्ड। लोकल के हैं वहीं रहेंगे। कहीं बॉन्ड नहीं टूट रहा। लेकिन
पाई बॉन्ड वीक बॉन्ड है। आसानी से टूट जाता है। इलेक्ट्रॉन्स इधर-उधर भागते रहते हैं। तो डीलोकलाइज्ड इलेक्ट्रॉन कहलाते
हैं। लोकल के नहीं है भाई साहब। पता नहीं कहां से आए होंगे। टूट गए। टूट गए ना? इधर-उधर भागते रहते हैं। तो ये होते हैं
आपके टाइप्स ऑफ बॉन्ड। आशा करता हूं कि आपको बहुत बेहतरीन तरीके से, मजेदार तरीके से सब कुछ समझ में आ गया होगा इन सारे
कांसेप्ट में। क्लियर है बात? चलिए अगली बात कर रहे हैं गाइस। अगला हमारा टॉपिक आ रहा है हाइब्रिडाइजेशन।
मैं कह रहा हूं अगेन वन ऑफ द मोस्ट इंटरेस्टिंग टॉपिक है। आशा कर रहा हूं कि तुम्हें सच में यहां तक सब कुछ समझ में आ
रहा है। अगर हां, तो एपीएम इन द चैट बॉक्स होते रहना चाहिए गाइस। एपीएम इन द चैट बॉक्स होते रहना चाहिए। विद द रेड हार्ट
इज मैंडेटरी। ठीक है? चलिए। अब बात करेंगे हाई ब्रोटाइजेशन क्या होता है भाई? तो हर एक चीज का कारण है। जैसे मैं तुम्हें
बताता हूं सिंपल सी बात है। हमने अभी थोड़ी देर पहले यहां से स्टार्ट किया वेस्पर थ्योरी। तो वेसर थ्योरी ने हमें
प्रॉपर एक रीज़न बताया कि भ वैलेंस शेल में इलेक्ट्रॉन इलेक्ट्रॉन के पेयर में लोन पेयर में रिपल्शन होती है। उस रिपल्शन को
मिनिमाइज करने के लिए दूर-दूर हो जाते हैं। एक शेप बन जाती है। हमने वो सारी शेप देख ली। हमने वो सारी शेप देख भी ली।
बिल्कुल सही बात है। हां जी भैया। अब वैलेंस शेल इलेक्ट्रॉन पे रिपल्शन के बाद में आई वैलेंस बॉन्ड थ्योरी जो बताती है
कि भ कोवेंट बॉन्ड में तो ओवरलैपिंग होती है। हमने बात भी मान ली। सारी बात को समझा। दो टाइप के बॉन्ड होते हैं। दोनों
को समझा। दो टाइप के कैसे होते हैं भाई? हमने ये भी समझा। या तो सिग्मा बॉन्ड बनेगा। तो इन तीन केस में पॉसिबल है जहां
पे एंड टू एंड होगी या फिर साइड वाइज में। भाई पाई तो केवल यही बनता है। बाकी सब में तो सिग्मा बनता है। हमने ये भी देख लिया।
हमने ये भी देख लिया कि भ सिग्मा ही क्यों बनेगा? क्योंकि एंड टू एंड ओवरलैपिंग केवल इन्हीं वालों में पॉसिबल है। x एक्सिस
वालों में y और z में तो भैया पाई ही बॉन्ड बनेगा। क्योंकि साइड वाइज देखो ये साइड वाइज ओवरलैपिंग ये साइड वाइज
ओवरलैपिंग। बस ये वाला है जो एंड टू एंड ओवरलैपिंग कर रहा है। तो प्रॉपर रीज़न के साथ में हम सब कुछ समझ रहे हैं। बात समझ
रहे हो मेरी? अब मैं आ गया हूं हाइब्रिडाइजेशन में। आइए हाइब्रिडाइजेशन का रीज़न क्या है? पढ़ना क्यों है? ये समझ
लेते हैं। ठीक है? मजा आएगा इसमें। तो भाई साहब ध्यान से देखना। अगर मैं आपसे बोलूं कि यार आपने मॉलिक्यूलर स्ट्रक्चर बनाने
सीखे हैं। जरा CH4 का स्ट्रक्चर बनाओ तो आप बोलोगे भैया राजा जी गए हैं हमारे वॉर में जंग लड़ने गए हैं। अभी तो बताया था
आपने और जी जो है रानी है। रानी के चार राजकुमार हैं। तो रानी चार बॉन्ड बनाएगी। कार्बन को वैसे भी चार बॉन्ड बनाने होते
हैं। सबको पता है ना कार्बन चार बॉन्ड बनाता है भई ये होता है हमारा 1s2 2s2। ठीक है ना? 2p2 सबको पता है ये वाली बात।
तो इसमें चार इलेक्ट्रॉन्स हैं वैलेंस शेल में। तो ये ऐसे करके बनाता है। तो अगर आप इसको देखोगे ध्यान से तो आपको इस लुईस
स्ट्रक्चर में चारों कार्बन हाइड्रोजन के बॉन्ड एक जैसे दिखाई पड़ रहे हैं। अरे हां या ना? सारे एक जैसे दिखाई पड़ रहे हैं।
सबकी बॉन्ड स्ट्रेंथ एक जैसी दिखाई पड़ रही है। सबकी बॉन्ड लेंथ एक जैसी दिखाई पड़ रही है। सब कुछ एक जैसा है। हां जी
भैया। लेकिन, अगर आप वीबीटी को कंसीडर करोगे जो हमने अभी-अभी पढ़ी है। विबीटी के अनुसार कार्बन होता है कुछ ऐसा। ग्राउंड
स्टेट कुछ ऐसी होती है। लेकिन एक खाली डब्बा दिखेगा तो यह एक्साइट होके वहां चला जाएगा। तो एक्चुअल एक्साइटेड स्टेट कुछ
ऐसी होती है। अब चार बॉन्ड यहां पे तैयार हैं ओवरलैपिंग करने के लिए जिनमें से एक s है और तीन मेरे पी हैं। यहां पे हाइड्रोजन
अगर बॉन्ड करने आया हाइड्रोजन है 1s1 मतलब एक s ऑर्बिटल खाली तो यहां से s और s आप ध्यान से देखेंगे। यहां पे जब ओवरलैपिंग
शुरू होगी। पहली ओवरलैपिंग होगी ss के बीच में। फिर ओवरलैपिंग होगी sp की। फिर होगी sp की फिर होगी sp की। मतलब अगर मैं यहां
पे साफ-साफ देखूं, तो यहां पे मैं कह सकता हूं कि यहां पे मेरे चार बॉन्ड बन रहे हैं। लेकिन उनमें से एक बॉन्ड है s
ओवरलैपिंग की वजह से और तीन बॉन्ड हैं sp ओवरलैपिंग की वजह से। जल्दी से मुझे बताइए हां या ना? क्या चारों बॉन्ड एक जैसे हैं
जो लुईस स्ट्रक्चर कह रहा है? भैया चारों बॉन्ड एक जैसे नहीं है यार। एक में s ओवरलैपिंग हो रही है। एक में sp ओवरलैपिंग
हो रही है। चारों बॉन्ड एक जैसे नहीं है। चारों बॉन्ड एक जैसे नहीं है। यहां पे एक बॉन्ड अलग है, तीन बॉन्ड अलग है। भाई साहब
बुद्धि घूम गई। साइंटिस्ट लोगों के कह रहे हैं अब क्या करें यार? अगर लुईस को सही मानेंगे तो वीबीटी गलत है। वीबीटी को सही
मानेंगे तो लुईस कुछ नहीं बता रहा। फंस गए ना मामला? लेकिन लुईस भी कुछ तक सही है। मतलब इसने बहुत सारी बातें हमें ठीक बताई
हैं और ये भी सही है। अब क्या करें? तो साइंटिस्ट लोग एक नया कांसेप्ट निकालते हैं जिसका नाम रखते हैं हाइब्रिडाइजेशन।
इट इज अ कंप्लीटली हाइपोथेटिकल कांसेप्ट जो हमारे इस वीबीटी की प्रॉब्लम को सॉल्व करने वाला है।
ठीक है ना? हाइब्रिडाइजेशन इट्स अ हाइपोथेटिकल कॉन्सेप्ट। क्या है यह? इट्स अ हाइपोथेटिकल कॉन्सेप्ट। यह क्या है? एक
हाइपोथेटिकल कांसेप्ट है। चलिए, अब देखो हाइपोथेटिकल कांसेप्ट है तो कैसे इसको समझना है? आओ एक एग्जांपल से मैं तुम्हें
समझाऊंगा क्या होता है यहां पे। सपोज़ करिए कि मेरे घर पे ना एक दिन पूजा चल रही है। मम्मी पूजा में बैठने ही वाली है। पंडित
जी आने वाले हैं। मम्मी ने बोला कि बेटा आज हम चार भगवान की पूजा करेंगे। जो है अपनी शिव जी की पूजा करेंगे, गणेश जी की
पूजा करेंगे और अपनी शेरवाली माता की पूजा करेंगे और अपने बहुत सारे भगवान हैं। उनकी सब की पूजा करेंगे। तो आज हम मेजरली चार
भगवान की पूजा करने वाले हैं। आज का दिन बहुत ही शानदार है। तो जरा भाग के जाइए और हलवाई की दुकान से मिठाइयां लेके आइए।
लेकिन कोशिश करना है 100% आपको। नहीं तो आप में जो है भाई साहब झाड़ू बजेगी आज। आपको चारों मिठाई एक जैसी लानी है।
अदरवाइज भगवान बुरा मान जाएंगे। भाई आप एक के लिए रसगुल्ला ले आए, दूसरे के लिए लड्डू ले आए। एक के लिए आप जो है पता ले
आए, मीठे पतासे या ये क्या बात हो गई आप? चारों मिठाई एक जैसी होनी चाहिए। मैंने कहा ठीक है मम्मी। मैंने साइकिल उठाई में
भाग के गया। मैं भैया हलवाई की दुकान पे पहुंचा। मैंने कि हलवाई भैया है ना अपने हलवाई भैया जरा जल्दी से चार मिठाई दे
दीजिए चारों मिठाई एक जैसी होनी चाहिए हलवाई भैया कह रहे हैं भैया सर आज तो त्यौहार का दिन है आप गलत जगह पे आ गए हैं
आज तो बहुत ज्यादा सेल हुई है और सारी जो मेरी मिठाई है वो बिक चुकी है कोई भी मिठाई इतनी नहीं बची कि इसमें आपको मैं
चार मिठाई दे सकूं नहीं मेरे पास नहीं है मामला खत्म हो चुका है मैं भाई से फंस गया अब कितनी दूर जाऊंगा इस साइकिल से मैंने
की हलवाई जी भैया कुछ तो करिए मुझे चार मिठाई लेके जानी है समय से पहुंचना नहीं तो मम्मी मारेंगी तो हलवाई जी कहते हैं
अच्छा ऐसी प्रॉब्लम है कहते हैं मेरे पास एक सोलशन है मैंने पूछा क्या तो कहते हैं देखो यार मेरे पास पास चार मिठाई एक जैसी
नहीं है। लेकिन मेरे पास एक लड्डू बचा हुआ है। एक रसगुल्ला बचा हुआ है। एक काजू कतली बची हुई है। एक बर्फी बची हुई है। मैंने
अब क्या करूं? मम्मी मारेंगी इतने में तो। मम्मी बोल रही है कि भाई आपको एक एक भगवान को अब काजू कतली दे रहे हैं। दूसरे को
बर्फी देने बुरा मान जाएंगे। दिक्कत हो जाएगी। समझ रहे हो बात को? फल नहीं मिलेगा वहां पे। है ना? तो वो कहते हैं नहीं
नहीं। एक काम कर सकते हैं। कहते हैं क्या? कहते हैं मैं एक बाउल लेता हूं। क्या कहते हैं? मैं एक बाउल लेता हूं। इन बाउल में
चारों मिठाइयों को डालता हूं। एक दो तीन और चार। और इन सबको क्रश करता हूं। कर दिया भैया क्रश कर दिया। और क्रश करके फिर
चारों को ऐसे मिला मिला के चार मिठाई बनाता हूं। अब वो जो चार मिठाई हैं उसमें लड्डू का भी वो आएगा, टेस्ट आएगा,
रसगुल्ले का भी आएगा, काजू कतले का भी आएगा, बर्फी का भी आएगा। एक नई मिठाई बन जाएगी। मैंने भाई साहब क्या कह दिया हलवाई
भैया ने। अब कह रहे हैं क्या कह रहे हैं। कह रहे हैं चार नई मिठाई बनाऊंगा। 1 2 3 4 और उनका नाम भी ये नहीं रखूंगा। अब देखो
नाम क्या रखूंगा। लड्डू का ल, रसगुल्ला का रा, काजू का का और बर्फी का ब। मम्मी से आके बोलना नई मिठाई लेके आया हूं। क्या
नाम है मिठाई का? मिठाई का नाम है रा का रा लारा रा काबा। लारा काबा नाम है। मैंने भाई साहब मजे खड़े कर दिए हलवाई भैया आज
तो। मम्मी बोलेंगी चार मिठाई लेके आए। एक जैसी लेके आया। नई मिठाई लेके आए। बहुत दूर से लेके आए। नाम भी कुछ अलग बता रहा
है। ये तो भगवान प्रसन्न हो जाएंगे आज। तो ये हुआ भैया मिक्सिंग ऑफ मिठाई का कांसेप्ट। यही कांसेप्ट कर दिया गया हमारे
ऑर्बिटल्स में। हाइब्रिडाइजेशन कैन बी डिफाइंड एज़ द मिक्सिंग अप ऑफ ऑर्बिटल्स हैविंग डिफरेंट शेप, साइज एंड एनर्जी टू
फॉर्म न्यू ऑर्बिटल्स हैविंग सेम शेप, साइज एंड एनर्जी। अब ध्यान से देखिएगा कि सारी की सारी जो मेरी मिठाई हैं उन सब में
हमने मिक्सिंग कर दी है और अब आप देखेंगे जो शेप पहले थी उससे कुछ डिफरेंट है। अब इन सब में इन सबकी जो आपकी शेप और सबकी जो
टेस्ट है वो अलग-अलग था। इनकी सबकी शेप अलग-अलग थी। सब कुछ अलग-अलग था। लेकिन यहां पे जो नई मिठाइयां बन रही हैं वो
सारी कैसी बन रही हैं? सेम शेप, सेम साइज सेम एनर्जी की बन रही हैं। जबकि वो पहले कैसे थे? डिफरेंट थे। ठीक है? इट इज़ नॉट अ
फिजिकल फिनोमिना बट अ हाइपोथेटिकल कांसेप्ट। प्रभ लिए काम कैसे आएगा? आओ समझाता हूं। तुम्हारे दिमाग के चक्षु ना
खुल जाएं। तुम एकदम कूद के ना पड़ोगे भाई साहब। मजा खड़ा कर दिया भैया यहां तो आपने आगे लगा दी भाई साहब आज। मजा ही आ गया। ए
पे इन द चैट बॉक्स कर दोगे यार। आ जाओ जरा। अभी प्रॉब्लम क्या है? एक एसएस है और तीन एसपी हैं। तो साइंटिस्ट लोगों ने बोला
कि जब भी कोई भी एटम सेंट्रल एटम ओवरलैपिंग करता है उससे पहले। क्योंकि उसे प्रॉब्लम लगती है कि भाई शेप एंड साइज
डिफरेंट-डिफरेंट है। हो सकता है कि स्टेबिलिटी ना आए। हो सकता है ओवरलैपिंग ठीक से ना हो। तो पहले सारे सेंट्रल एटम
के जितने भी ऑर्बिटल्स हैं वो आपस में मिक्सिंग करते हैं और फिर उतने ही नए ऑर्बिटल्स बनाते हैं।
चारों ने मिक्सिंग की और चार नए ऑर्बिटल्स बने। जितनों की मिक्सिंग होती है उतने ही नए बनते हैं। चार मिठाई को मिक्स किया था।
चार ही नई बनाई थी। अब इनका नाम भी क्या रख दिया? जैसे वहां रखा था ना लारा बाका। ऐसे ही यहां पे s और 3p को मिक्स किया तो
इसका नाम रख दिया sp3 इसका भी sp3 इसका भी sp3 और इसका भी sp3 मिक्सिंग हो गई और यहां पे अब जब आप ओवरलैपिंग करवाओगे तो जो
ओवरलैपिंग होगी ss ss में तो सारे चार बॉन्ड एक जैसे बनेंगे sp3 के और भाई साहब खुशी की लहर दौड़ गई साइंटिस्टों के मन
में कह रहे हैं अब मैं कह सकता हूं कि लुईस के हिसाब से भी चारों बॉन्ड एक जैसे थे और विबीडी के हिसाब से भी चारों बॉन्ड
एक जैसे हैं और ये जो नाम दिया है ऑर्बिटल का इसी को कह देते हैं ऑर्बिटल की हाइब्रिडाइजेशन।
आप मेरी बात समझ पा रहे हैं? इसी को कहते हैं ऑर्बिटल्स की हाइब्रिडाइजेशन। मेन मुद्दा समझ में आ गया आपको मेन प्रॉब्लम
क्या थी? उसका सॉल्यूशन कैसे निकाला? ठीक है ना? तो ये कुछ साइंटिस्ट लोगों ने हमें बताया। आइए ऐसा एक और बार करके देखते हैं।
मेरे पास है बेरिलियम फ्लोराइड। अब बेरिलियम होता है मेरा क्या जी? 1s2 2s2। इसकी आखिरी शेल है टू। यहां पे दो
इलेक्ट्रॉन्स हैं। सबको पता है अगर n की वैल्यू टू है तो l की वैल्यू ज़ीरो भी पॉसिबल है। वन भी पॉसिबल है। मतलब p भी
पॉसिबल है। बस खाली बैठा है। आपको दिख नहीं रहा है। ठीक है? ये इसकी ग्राउंड स्टेट है। आप एक्साइटेड स्टेट लोगे तो जंप
करा दोगे तो यहां पे एक बचेगा एक वहां चला जाएगा। ठीक है जी? अब ये है s और ये है पी। लेकिन बिफोर ओवरलैपिंग यहां पे दो
फ्लोरीन जब ओवरलैपिंग करेंगे उससे पहले इनका मिक्सिंग अप करना जरूरी है। तो ये दो ऑर्बिटल आपस में मिक्स करेंगे। दो नए
ऑर्बिटल बनाएंगे और नाम क्या रखेंगे? एक S है, एक P है। तो इसका नाम SP है। इसका नाम SP है। और हाइब्रिडाइजेशन की जो वैल्यू
आपके पास आएगी वो कहलाएगी SP। क्या कहलाएगी? SP कहलाएगी। और उसके बाद ओवरलैपिंग होती रहेगी। BF2 बन जाएगा। आप
मेरी बात समझ पा रहे हैं? आप मेरी बात समझ पा रहे हैं। अब सेम यही कर सकते हैं। BF3 में आपके पास जो बोरोन है वो है 1s2 2s2
2p1 है ना? हाइड्रोजन, हीलियम, लिथियम, बेरिलियम, बोरोन। बिल्कुल सही बात है। S में हमारे पास दो थे। P में हमारे पास
यहां पर एक था। ये ग्राउंड स्टेट है। एक्साइटेड स्टेट आप निकालिए यहां से। एक को जंप कराइए यहां से वहां पर। अब यहां पे
तीन- जो ऑर्बिटल हैं वो एकदम तैयार बैठे हैं किसके लिए? ओवरलैपिंग करने के लिए लेकिन उससे पहले क्या करेंगे? मिक्सिंग अप
करेंगे। तो तीन नए ऑर्बिटल बनाएंगे और तीन नए ऑर्बिटल का नाम क्या होगा भैया? sp2 sp2 और sp2 यानी कि जो इस केस में जो
हाइब्रिडाइजेशन होगी सेंट्रल एटम की वो होती है sp2। इस तरीके से आप करते हैं। लेकिन इसकी एक शॉर्ट ट्रिक भी आपको मैं
बता देता हूं। अगर आपको हर बार ये तामझाम नहीं करना। तो एक शॉर्ट ट्रिक है। इसमें आप स्टेरिक नंबर निकालोगे। स्टेरिक नंबर
का फार्मूला होता है नंबर ऑफ सिग्मा बॉन्ड्स प्लस में लोन पेयर सेंट्रल एटम पे कितने हैं? स्टेरिक नंबर जो भी आएगा उसके
हिसाब से आप हाइब्रिडाइजेशन बताओगे। अगर दो स्टेरिक नंबर आया इनको प्लस करके तो दो ऑर्बिटल मिक्स होंगे पहले दो ऑर्बिटल है s
और p तो आंसर आया sp। अगर तीन आया तो पहले तीन मिक्स होंगे तो आंसर आएगा sp2। अगर चार ऑर्बिटल मिक्स हुए यहां पे चार नंबर
आया तो भाई साहब पहले चार यानी कि sp3 और अगर पांच मिक्स हुए तो पहले पांच यानी कि sp3d छह तो पहले छह यानी कि sp3d2 और सात
यानी कि पहले सात यानी कि sp3d3 इस तरीके से आप निकाल सकते हो फॉर एग्जांपल आपको CH4 का आंसर बताना है। आपको CH4 का पता है
भैया ने बताया था मॉलिक्यूल बनाना मुझे आता ही है। ऐसे बनता है। इसमें चार सिग्मा बॉन्ड है क्योंकि हर एक सिंगल बॉन्ड
सिग्मा बॉन्ड होता है। हर एक सिंगल बॉन्ड सिग्मा बॉन्ड होता है। ध्यान रखना मैंने आपको बताया था कि जब भी दो एटम्स के बीच
में अगर सिंगल बॉन्ड है तो वो सिग्मा है। अगर डबल बॉन्ड है तो उनमें से एक सिग्मा एक पाई है और अगर ट्रिपल बॉन्ड बनता है तो
उनमें से एक सिग्मा दो पाई होते हैं। आशा करता हूं कि आपको समझ में आया होगा चार सिग्मा है ज़ीरो लोन पेयर हैं। स्टेरिक
नंबर आएगा आपका यहां पे 4 + 0 4 यानी कि आंसर आ जाएगा आपका sp3। अगर इतनी बात समझ में आ गई तो जल्दी से कमेंट सेक्शन में
एपीएम लिख दो और मुझे बता दो इसका आंसर क्या होगा? व्हाट इज द हाइब्रिडाइजेशन ऑफ़ PCL5? जल्दी से मुझे बताओ एपीएम इज़ द कोड
और बताइए PCL5 की हाइब्रिडाइजेशन क्या आएगी? कर दिया कमेंट। कर दिया कमेंट सारे लोगों ने। डन है
बातचीत? बहुत शानदार। बहुत बढ़िया। चलिए और भी कुछ एग्जांपल्स देख लेते हैं। और भी कुछ एग्जांपल्स देख लेते हैं। मेरे पास
NH3 है। NH3 क्या होता है? ये होता है। इस तरीके से होता है। जरा देखिए। एक लोन पेयर है, तीन सिग्मा बॉन्ड है। आंसर आएगा यहां
पे चार। चार पे होता है आपके पहले चार ऑर्बिटल्स sp3। आइए H2O आइए। H2O कैसा होता होता है। H2O ऐसा होता है यहां पे दो
लोन पेयर होते हैं। एक सिग्मा ये एक सिग्मा ये तो दो सिग्मा है। दो लोन पेयर हैं। मतलब फिर से चार आंसर फिर से आया
आपका sp3। क्या बात है? अब बहुत इंपॉर्टेंट एग्जांपल आ गया C2H4। अगर आप C2H4 को देखोगे तो दो कार्बन हैं। दो
रानियां हैं और दो हमारे राजकुमार हैं। चार हमारे राजकुमार हैं। तो एक राजकुमार इसको यहां दे दिया। एक राजकुमार इसको दो
इधर इसको दे दिया। दो इसको दे दिए। दे दिए। कार्बन को टोटल चार बॉन्ड बनाने हैं। तो दो बॉन्ड ही आपस में बीच में बनाएंगे।
अच्छा जी। अब इस कार्बन को अगर आप देखोगे तो ये सिंगल बॉन्ड है। सिग्मा ये सिंगल बॉन्ड है सिग्मा। यहां पे कार्बन के डबल
बॉन्ड बन रहे हैं। पहला सिग्मा दूसरा पाई। हमेशा स्टेरिक नंबर में पाई को कभी भी नहीं लेते हैं। है ना? पाई को कभी भी नहीं
लेते हैं। तो आपको जो यहां पे लोन पेयर हैं ज़ीरो है। सिग्मा है 1 2 3 तो इसका स्टेरिक नंबर तीन आया। मतलब आंसर आया sp2।
इसके लिए भी एक सिग्मा एक सिग्मा। अब इधर डबल बॉन्ड में इसका ये सिग्मा भी तो इसका भी कैलकुलेट होगा ना? क्योंकि है तो ये
इसका भी ना। बॉन्ड तो इन दोनों के बीच में बन रहा है। तो इसके भी तीन सिग्मा है मतलब sp2। जल्दी से मुझे बताइए यहां पे कार्बन
की हाइब्रिडाइज़ेशन कितनी होगी? जल्दी से कमेंट सेक्शन में और अगर फुल मजा आ गया है एवरीबॉडी इन द हाउस मेक्स सम नॉइस एपीएम
छाप दिया जाए बहुत जल्दी करके जल्दी से एपीएम इन द चैट बॉक्स कर दिया जाए। फिर हम आगे बढ़ने वाले हैं गाइस। फिर हम आगे
बढ़ने वाले हैं। क्या शानदार बात है। मजा ही आ गया है। चलिए आगे बढ़ते हैं गाइज़ अगले टॉपिक की ओर। ओके? तो अगला हमारा है
गाइज़ वन ऑफ द अगेन मोस्टेंट टॉपिक क्योंकि केमिकल बॉन्डिंग सच में बहुत बड़ा चैप्टर है। लेकिन ये अब हम लास्ट में पहुंच चुके
हैं ऑलरेडी। अगला है हमारा मॉलिक्यूलर ऑर्बिटल थ्योरी। ये हमारा लास्ट टॉपिक होगा जो इस चैप्टर का सबसे बड़ा टॉपिक है।
इसके बाद तो बस हमें हाइड्रोजन बॉन्डिंग पढ़नी है छोटी सी और बॉन्ड पैरामीटर्स पढ़ने हैं छोटे से। डेड इट चैप्टर अपना खत्म हो
जाएगा। तो मुस्कुराना फिर मज़े आ जाएंगे तुम्हारे। आइए हम मॉलिक्यूलर ऑर्बिटल थ्योरी की बात करते हैं। बहुत जबरदस्त है।
बहुत मजेदार है। ध्यान से देखना क्या कहती है ये। व्हेन टू ऑर्बिटल्स अप्रोच ईच अदर देयर एटॉमिक ऑर्बिटल्स लूज देयर
आइडेंटिटी। जब हम ओवरलैपिंग कराने की बात कर रहे हैं ना तो मॉलिक्यूलर ऑर्बिटल उसके और डीप में जाती है कि जब ओवरलैपिंग होती
है तो और क्या होता होगा? तो ये थ्योरी कहती है कि जब दो ऑर्बिटल्स एक दूसरे को एप्रोच करते हैं एज एटॉमिक ऑर्बिटल्स।
जब वो ओवरलैपिंग करते हैं तो वो अपनी आइडेंटिटी को लूज़ कर देते हैं और म्यूचुअली ओवरलैप करके नए ऑर्बिटल्स बनाते
हैं जिन्हें कहते हैं मॉलिक्यूलर ऑर्बिटल्स। एटॉमिक ऑर्बिटल जब अकेले-अकेले थे और जब ये ओवरलैप करते हैं तो उसके बाद
अब ये एटॉमिक ऑर्बिटल ना कहला के ये कहलाते हैं मॉलिक्यूलर ऑर्बिटल। अच्छा मॉलिक्यूलर ऑर्बिटल आर पॉलीसेंट्रिक एंड
आर एसोसिएटेड विद द न्यूक्लियाई ऑफ़ ऑल द एटम्स कंस्टीट्यूटिंग द मॉलिक्यूल। जब मॉलिक्यूलर ऑर्बिटल बनता है तो वहां पे एक
से ज्यादा सेंटर होते हैं। इसका भी एक सेंटर था। इसका भी एक सेंटर था। इसमें दोनों सेंटर आएंगे। तो पॉलीसेंट्रिक होते
हैं। बहुत बढ़िया। ओनली एटॉमिक ऑर्बिटल्स ऑफ अबाउट सेम एनर्जी एंड सेम सिमिट्री इंटरेक्ट सिग्निफिकेंटली। जब भी आप ये
मॉलिक्यूलर ऑर्बिटल थ्योरी पढ़ते हो तो ये कहता है कि जो ऑर्बिटल्स जब ओवरलैप करते हैं तो उनकी जो एनर्जी है सिमिट्री है
सिमिलर होनी चाहिए। हाइब्रिडाइजेशन इस बात को एश्योर करती है कि सिमिलर ही होती है। क्यों? क्योंकि जब हम मिक्सिंग अप कर देते
हैं तो सारे ऑर्बिटल्स की जो जो एनर्जी है, जो शेप है, सब कुछ बराबर हो जाती है। अब ना कोई s है, ना कोई p है। दोनों ने
ओवरलैप करके दोनों क्या बन गए हैं? sps। तो हाइब्रिडाइजेशन के बाद हमें मॉलिक्यूलर ऑर्बिटल थ्योरी समझने में बड़ा ही मजा आता
है। क्योंकि यहां पे साफ-साफ लिखा है कि वही एटॉमिक ऑर्बिटल्स ओवरलैप करते हैं सिग्निफिकेंटली मॉलिक्यूल बनाते हैं जो
सेम एनर्जी और सेम सिमिट्री के होते हैं। और हाइब्रिडाइजेशन कांसेप्ट इस बात को असोर करता है। इस बात को असोर करता है कि
सबकी ज्योमेट्री एक जैसी है। अलग-अलग नहीं है। सबकी ज्योमेट्री एक जैसी है। ठीक है ना? क्या बात है? शानदार बात है। बहुत
बढ़िया। आइए आगे। उसके बाद हमेशा ध्यान रखेंगे जो नंबर ऑफ मॉलिक्यूलर ऑर्बिटल्स होते हैं वो इक्वल होते हैं एटॉमिक
ऑर्बिटल्स जितने आपने लिए हैं। अब यहां पे आपको दिख रहा है आपने कितने एटॉमिक ऑर्बिटल्स लिए हैं? दो एटॉमिक ऑर्बिटल्स
लिए हैं। एक ये रहा एक ये रहा। तो मॉलिक्यूलर ऑर्बिटल भी दो ही बनेंगे। आपको भी एक दिख रहा होगा। अभी बताऊंगा दो कैसे
होते हैं ये। दो ही बनेंगे। ध्यान रखना। नंबर ऑफ़ एटॉमिक ऑर्बिटल्स जितने लोगे उतने ही मॉलिक्यूलर ऑर्बिटल्स बनते हैं। ऐसा ये
थ्योरी कह रही है। अभी दिखाऊंगा कैसे बनेगा। ध्यान से देखो। जल्दी से बहुत शानदार तरीके से देखना। जब भी दो एटॉमिक
ऑर्बिटल्स आपस में ओवरलैप करते हैं ना तो दो तरह के ओवरलैप पॉसिबल हैं। एक है इनफेज ओवरलैप, एक है आउटफेज ओवरलैप। अगर इनफेज़
ओवरलैप हुआ है तो उसे कहते हैं बॉन्डिंग मॉलिक्यूलर ऑर्बिटल। और अगर आउट फेज हुआ है तो उसे कहते हैं एंटी बॉन्डिंग
मॉलिक्यूलर ऑर्बिटल। भैया समझ नहीं आया? आओ समझाता हूं। तो सपोज़ करिए ध्यान से मैं आपको एक एग्जांपल देता हूं। मेरे पास एक
पी ऑर्बिटल ये है। इसमें एक इलेक्ट्रॉन यहां पे है। एक पी ऑर्बिटल यहां पे मैंने ले लिया। इसमें एक इलेक्ट्रॉन यहां पे है।
जब ये ओवरलैप करेंगे तो मुझे बताइए कहां पे सक्सेसफुल ओवरलैप हुआ या कहां पे नहीं हुआ? अब ध्यान से देखेंगे कि इस पूरे के
पूरे पार्ट में केवल एक यही जगह है जहां पे सक्सेसफुली ओवरलैपिंग हुई है। मतलब इस वाली ओवरलैपिंग को मैं कह रहा हूं इन फेज
ओवरलैपिंग। अगर आप ध्यान से देखेंगे ये वाले पार्ट ने कभी ओवरलैप किया ही नहीं। मतलब ये वाला पार्ट किसको रिप्रेजेंट कर
रहा है? आउटफेज़ ओवरलैपिंग को रिप्रेजेंट कर रहा है। आउटफेज़ ओवरलैपिंग को। जिस कारण से यह दोनों अलग दो मॉलिक्यूलर ऑर्बिटल
काउंट होंगे। इस इनफेज़ वाले को मैं बोलूंगा बॉन्डिंग मॉलिक्यूलर ऑर्बिटल जो बॉन्डिंग में पार्टिसिपेट कर रहा है। जो
बॉन्डिंग में हमें सपोर्ट कर रहा है। और ये वाला मैं बॉन्डिंग में कभी सपोर्ट नहीं करता। मतलब इसे कहते हैं एंटी बॉन्डिंग
मॉलिक्यूलर ऑर्बिटल। आप ऐसा समझ सकते हैं कि भैया एटॉमिक ऑर्बिटल वेव्स हैं। हमने स्ट्रक्चर ऑफ़ एटम में देखा था। तो अगर आप
दो दो वेव्स लोगे कुछ ऐसे ठीक है एक वेव ये है और एक वेव ये है। तो आप देखोगे इसका ये वाला पार्ट जब इसके जब आप इन दोनों को
ओवरलैप करवाओगे मान लो ये एक ऊपर लिख दिया आपने एक नीचे लिख दिया यहां पे ऐसे करके है ना जब ये मिलेंगी तो दोनों का जो
एंप्लीट्यूड है वो ऐड हो जाएगा और हमारी एक कंस्ट्रक्टिव वेव बनेगी। कैसी बनेगी? कंस्ट्रक्टिव वेव दोनों ऐड हो जाएंगी। इसे
क्या बोलते हैं? कंस्ट्रक्टिव वेव बनती है हमारी। ठीक है? और जहां कंस्ट्रक्टिव वेव बनती है मतलब वहां पे सक्सेसफुली काम हो
गया है। लेकिन आउट फेज में क्या है? आउटफज़ में क्या है? दोनों अलग-अलग डायरेक्शन में कभी ओवरलैप कर ही नहीं पाएंगे। ऐसे मान लो
कि आपकी एक वेव तो ऐसी थी और आपकी एक वेव ऐसी है। तो क्या ये जब भी ओवरलैप करेंगी तो क्या कभी सक्सेसफुल ओवरलैप हो पाएगा?
नहीं। ये है आपकी डिस्ट्रक्टिव ओवरलैपिंग। या फिर डिस्ट्रक्टिव वेव जो आप फिजिक्स में पढ़ते हो। ये क्या है? आपकी
डिस्ट्रक्टिव वेव है। कभी भी सक्सेसफुली एक दूसरे में ऐड हो ही नहीं पाएंगी। ये ऊपर है, ये नीचे है। आप जोड़ोगे भी तो कभी
भी आपको ओवरलैप होता हुआ दिखाई नहीं देगा। ध्यान देना है हमेशा। हमेशा ध्यान दो इन फेज वाले में ही इलेक्ट्रॉन रहते हैं।
इलेक्ट्रॉन कहां रहते हैं? इन फेज वाले में। मतलब इसलिए बॉन्डिंग करती है। जबकि ये पीछे वाले जो होते हैं आउट फेज ये कभी
भी बॉन्डिंग नहीं करते। आपके एंटी बॉन्डिंग मॉलिक्यूलर ऑर्बिटल होते हैं। अब आपको समझ में आ गया होगा कि दो ऑर्बिटल
मैंने क्यों बोले थे। यहां पे क्यों है दो ऑर्बिटल? क्योंकि यहां तो है बॉन्डिंग वाला केस। और जो पीछे-पीछे वाले जिन्होंने
कभी ओवरलैप किया ही नहीं। यह हैं आपके एंटी बॉन्डिंग वाले। बात समझ में आई सभी को? डन है बातचीत? अब ठीक है। अब बॉन्डिंग
और एंटी बॉन्डिंग में दो तरह का डिफरेंस आपको पूछा जा सकता है। पहला ये फॉर्म्ड होते हैं इनफेज ओवरलैपिंग से। दोनों की जो
वेव फंक्शन है वो ऐड हो जाते हैं। कंस्ट्रक्टिव वेव वाला कांसेप्ट है। यहां पे दोनों की वेव माइनस हो जाती है। बहुत
बढ़िया। यहां पे बॉन्डिंग मॉलिक्यूलर ऑर्बिटल में इलेक्ट्रॉन डेंसिटी बढ़ जाती है क्योंकि इलेक्ट्रॉन की संख्या बढ़ जाती
है। वहां पे ओवरलैपिंग होती है। दोनों की इलेक्ट्रॉन बैठ जाते हैं। लेकिन यहां पे इलेक्ट्रॉन की डेंसिटी घट जाती है क्योंकि
इलेक्ट्रॉन वहां पे सही से ओवरलैपिंग तो हुई नहीं है ना। ओवरलैपिंग ही नहीं हुई वहां पे तो। ठीक है? बहुत बढ़िया। द
एनर्जी ऑफ़ बॉन्डिंग मॉलिक्यूलर ऑर्बिटल इज़ लोअर देन दैट ऑफ द एटॉमिक ऑर्बिटल फ्रॉम ऑफ व्हाट इट इज़ फॉर्म्ड। देखो ध्यान से
देखना। जो आपके एक्चुअल में एटॉमिक ऑर्बिटल्स थे बिफोर ओवरलैपिंग और आफ्टर ओवरलैपिंग यहां पे देखो जो बॉन्डिंग वाले
हैं यहां पे आती है स्टेबिलिटी। और केमिस्ट्री में जहां स्टेबिलिटी होती है वहां लेस एनर्जी होती है। तो इनकी तो होती
है लेस एनर्जी। किसके कंपैरिजन में? इनके कंपैरिजन में। और जो आपके आउटफज़ वाले हैं ये वाले हैं इनकी होती है हाई एनर्जी।
क्योंकि ये अनस्टेबल है क्योंकि यहां पे बॉन्डिंग नहीं हो रखी है। इनकी हाई एनर्जी एज़ कंपेयर टू दिस। ठीक है? यहां पे आप
क्या बोलोगे? द एनर्जी ऑफ़ द एंटी बॉन्डिंग मॉलिक्यूलर ऑर्बिटल इज़ हायर देन दैट ऑफ़ द एटॉमिक ऑर्बिटल फ्रॉम व्हिच दे या फिर इट
इज़ फॉर्म या फिर दे आर फॉर्म्ड। बात समझ में आ रही है? इन एटॉमिक ऑर्बिटल के कंपैरिजन में मॉलिक्यूलर ऑर्बिटल में जहां
पे इन फज़ बॉन्डिंग वाला केस है वहां स्टेबिलिटी तो लेस एनर्जी है। जबकि इनकी हाई एनर्जी है। बहुत बढ़िया। दे आर
रिप्रेजेंटेड एज़ सिग्मा एंड पाई। इनको नॉर्मली सिग्मा बॉन्ड और पाई बॉन्ड की तरह बोलते हैं ओवरलैपिंग से। लेकिन एंटी
बॉन्डिंग में स्टार लगा देते हैं कि भ ये एंटी बॉन्डिंग वाले हैं। यहां पे सपोर्ट नहीं करते बॉन्डिंग को। यहां पे देख लो। द
इलेक्ट्रॉन्स प्रेजेंट इन देयर इन देम रिजल्ट इन अट्रैक्शन बिटवीन द कंबाइनिंग एटम्स। यहां पे वो एटम्स एक दूसरे को
स्टेबलाइज़ करते हैं। कंबाइन करते हैं क्योंकि बॉन्ड बनता है। जबकि यहां पे जो इलेक्ट्रॉन अगर प्रेजेंट हैं कि मान लो
कोई इलेक्ट्रॉन यहां प्रेजेंट है, कोई इलेक्ट्रॉन मान लो यहां प्रेजेंट हैं। वो अभी ओवरलैपिंग हो ही नहीं पाई है। तो ये
क्या करते हैं? रिपल्शन करवाते हैं उन दोनों एटम्स का। ये आपको हमेशा ध्यान रखना है बॉन्डिंग में और एंटी बॉन्डिंग में।
क्लियर है बात सभी को? डन है बातचीत? चलिए अब आपको क्या होगा? मॉलिक्यूलर डायग्राम बनाने के लिए दिए जाएंगे। डॉ मॉलिक्यूलर
डायग्राम मतलब समझो मेरी बात को। जब एटॉमिक ऑर्बिटल जैसे मान के चलो आपको समझाता हूं। मान लो आपके पास एक ये कार्बन
है व्हिच इज़ 1s2 2s2 2p2। इस कार्बन को एक दूसरे कार्बन से बॉन्ड बनाना है। लेट्स सपोज इस कार्बन से। ये भी है 1s2 2s2 2p2।
तो हमेशा बॉन्डिंग मॉलिक्यूलर या फिर मॉलिक्यूलर ऑर्बिटल थ्योरी ने बोला था सेम ज्योमेट्री सेम सिमिट्री वाले ऑर्बिटल्स
से ओवरलैप करते हैं। तो यहां पे जो s वाला है वो s से ओवरलैप करेगा। ये इससे ओवरलैप करेगा। 2s वाला 2s या 2p वाला 2p वाले से
ओवरलैप करेगा। अरे हां या ना? तो यहां पे जब आप इनकी ओवरलैपिंग को दर्शाओगे इसे कहते हैं मॉलिक्यूलर ऑर्बिटल डायग्राम।
ठीक बात है। तो पहले आपने लेफ्ट साइड में बनाए एटॉमिक ऑर्बिटल्स। ठीक है? और बीच में कौन होंगे? मॉलिक्यूलर
ऑर्बिटल्स होंगे। इधर एटॉमिक ऑर्बिटल एक कार्बन का व्हिच इज़ 1s2 आपने 1s में दो भर दिए। इधर दूसरी तरफ यहां पे एटॉमिक
ऑर्बिटल है दूसरे कार्बन का। ये आपने 1s2 भर दिया यहां पे। जब ये दोनों ओवरलैपिंग करेंगे तो दो ऑर्बिटल बनेंगे। एक बनेगा
मॉलिक्यूलर ऑर्बिटल और एक एक बनेगा बॉन्डिंग वाला एक बनेगा एंटी बॉन्डिंग वाला। ठीक बात है। हमेशा बॉन्डिंग वाला
स्टेबल है तो वो एनर्जी लेवल में नीचे होगा। एंटी बॉन्डिंग वाला अनस्टेबल है तो ऊपर होगा। देखो स्टार वाला ऊपर है और ये
वाला नीचे है। सिग्मा सिग्मा क्योंकि ss हमेशा सिग्मा बनाते हैं। तो इस तरीके से आपकी क्या बनती है? एनर्जी डायग्राम बनता
है। बात समझ में आ रही है? और इस तरीके से आप उन सबका बॉन्डिंग और मॉलिक्यूलर ऑर्बिटल या फिर एंटी बॉन्डिंग वाला
डायग्राम बनाते हो। वेरी इंपॉर्टेंट है। बहुत इंपॉर्टेंट है। अभी थोड़ा सा कंफ्यूजन लग रहा होगा बट बिलीव मी मजा
आएगा। बस दो मिनट मुझे दे देना और। ठीक है? तो ये बात तुम्हें समझ में आ रही है? जब भी दो एटम आएंगे, तो 1s2 वाले 1s2 से
ओवरलैप करेंगे। 2s2 वाले 2s2 से 2p2 वाले 2p2 से। इस तरीके से मैंने ss 1s1s 2s 2s 2p 2p लेकिन कहानी में एक थोड़ा सा
ट्विस्ट है। क्या ट्विस्ट है कहानी में? ये जो एनर्जी डायग्राम है ना ध्यान रखना हमने सारे एटम्स को दो पार्ट में डिवाइड
किया हुआ है। एक है केस वन जिसे हम कहते हैं हे हैवियर एलिमेंट्स। जो कि नाइट्रोजन से ऊपर ऊपर होते हैं तुम्हारे ऑक्सीजन
फ्लोरीन ये वाले। इन सब में जब ये डायग्राम बनाओगे तो 1s और 2s वाला डायग्राम तो सिंपल बनेगा। ये 1s और 2s
वाला। लेकिन जो 2p वाला डायग्राम बनेगा इसमें दो केस पॉसिबल हैं। एक है 1221 एक है 2121। मतलब समझाऊंगा इसका क्या है?
हेवियर एलिमेंट्स के लिए हमेशा आपको रखना है 12-21 और लाइटर एलिमेंट्स के लिए आपको हमेशा रखना है 21-21। इसका मतलब समझा रहा
हूं। ध्यान से देखना। देखो 12-21 का मतलब है जैसे आप यहां पे देखेंगे। ये आपका एग्जांपल है 2121 का। दो ऑर्बिटल पहले
आएंगे। फिर एक ऑर्बिटल फिर दो ऑर्बिटल। फिर एक ऑर्बिटल। भैया ये क्या हो रहा है? भाई आपने एक s का इधर लिया। एक s का इधर
लिया। तो आपने एक ही ऑर्बिटल लिया यहां पे है ना एक ही ऑर्बिटल लिया तो एक बॉन्डिंग एक एंटी बॉन्डिंग फिर आपने 2s में लिया एक
इधर एक इधर तो दो एटॉमिक ऑर्बिटल थे दो बॉन्डिंग बनेंगे एक बॉन्डिंग वाला एक एंटी बॉन्डिंग वाला अब यहां पे 2p में आपने तीन
ऑर्बिटल इधर लिए एटॉमिक के तीन ऑर्बिटल इधर लिए तो छह एटॉमिक ऑर्बिटल हैं तो छह ही आपके कौन से बनेंगे मॉलिक्यूलर ऑर्बिटल
बनेंगे जिनमें से तीन कौन से होंगे बॉन्डिंग तीन कौन से होंगे एंटी बॉन्डिंग एंटी बॉन्डिंग हमेशा ऊपर है बॉन्डिंग
हमेशा नीचे लेकिन उसमें भी उन तीन में से कोई एक ही है जो सिग्मा बनाएगा p में कोई एक है जो सिग्मा बनाएगा बाकी दोनों क्या
बनाएंगे पाई बनाएंगे। तो हमेशा ध्यान रखना है आपके हमेशा हमेशा हमेशा लाइटर एलिमेंट्स में लाइटर एलिमेंट्स में जो दो
पाई वाले हैं पहले वो आते हैं फिर एक सिग्मा वाला फिर पाई वाले और फिर वो सिग्मा वाला। बात समझ रहे हो? ये आपको
लाइटर एलिमेंट्स में ध्यान रखना है। और अगर आपके हैवियर एलिमेंट्स हैं तो हैवियर एलिमेंट्स में उल्टा है। हेवियर एलिमेंट्स
में उल्टा है। हेवियर एलिमेंट्स में आपका जो पहले यहां पे नीचे आएगा वो आएगा 1 2 1 12 21। समझ रहे हो बात को? हमेशा जो दो
ऑर्बिटल है वो तो पाई वाले होंगे। क्योंकि पाई दो होते हैं। एक होता है सिग्मा वाला। तो जहां पे आपको दो डब्बे दिख रहे हैं वो
पाई वाले हैं। ठीक है? और जो आपको एक डिब्बा दिख रहा है वो आपका सिग्मा वाला है। नीचे तीन बॉन्डिंग वाले हैं। ऊपर तीन
एंटी बॉन्डिंग वाले हैं। इसको आपको याद रखना है अगर आपको अच्छे से डायग्राम बनाना सीखना है तो। अब आपको इनको यूज़ कैसे करना
है? आओ वो दिखाता हूं मैं अब तुम्हें। चलिए ध्यान से देखना। तो यहां पे आपको दिख रहा होगा। यहां पे आपको दिख रहा होगा एक
कार्बन में इधर 1s2। इधर 2s2 और उधर 2p में टू है। 1 2 इस वाले में 1s2 2s2 और फिर 2p में टू हैं। अब ध्यान दो। आपके
टोटल यहां पे चार इलेक्ट्रॉन हैं। जब आप यहां पे भरना शुरू करोगे तो वन टू भाई चार आपके एंट एटॉमिक ऑर्बिटल के इलेक्ट्रॉन्स
हैं तो आप यहां पे भरोगे तो दो यहां पे भरे जाएंगे दो यहां पे भरे जाएंगे। ठीक है? ऐसे यहां पे दो और दो चार हैं एक दो
तीन चार जो एटॉमिक ऑर्बिटल में हैं अब वो मॉलिक्यूलर ऑर्बिटल में भरने होते हैं आपको। यहां पे है दो और दो चार। आपको
हुंड्स रूल को फॉलो करना है। चार इलेक्ट्रॉन्स हैं तो ये एक एनर्जी लेवल पे हैं। 1 2 3 4 ये आपका इस तरीके से एनर्जी
डायग्राम बनता है। आपसे पूछी जाएगी कि एम ओ टी के अकॉर्डिंग इलेक्ट्रॉनिक कॉन्फ़िगरेशन बताओ। तो आप कैसे बताओगे? आप
बोलोगे यहां पे जो मैंने बनाया है उसके हिसाब से सिग्मा में दो आए हैं। सिग्मा एंटी बॉन्डिंग 1s में दो आए हैं। सिग्मा
दो में दो आए हैं। सिग्मा एंटी बॉन्डिंग 2s में 2 आए हैं। और उसके बाद पाई 2p में दो आए हैं। है ना? और पाई 2P में दो आए
हैं। जो अकेला वाला होता है उसको Z बोलते हैं। जो दो एक साथ वाले होते हैं उन्हें XY बोलते हैं। आपको ध्यान रखना है। ठीक
बात है? तो ये आपकी हो गई इलेक्ट्रॉनिक कॉन्फ़िगरेशन भी। एक और एग्जांपल मैं आपको देता हूं। शानदार तरीके से देखना। मैंने
अब की बार एग्जांपल ले लिया नाइट्रोजन के मॉलिक्यूल का। तो नाइट्रोजन होता है हमारा 1s2 2s2 2p3। दूसरा नाइट्रोजन भी हो जाएगा
मेरा 1s2 2s2 2p3। जरा भरना शुरू करेंगे जल्दी से। भरना शुरू करेंगे तो यहां पे 1 2 1 2 दोनों एटॉमिक ऑर्बिटल के दो-दो और
यहां पे कितने हैं? तीन हैं तो 1 2 3 1 2 3 सही बात है? जल्दी से भरना शुरू करेंगे तो क्या हो जाएगा? दो और दो चार तो 1 2 3
4 1 2 3 4 तीन और तीन छह हुंड्स रूल फॉलो करना है। 1 2 3 4 5 6 तो इलेक्ट्रॉनिक कॉन्फ़िगरेशन आपकी क्या हो गई? ध्यान दो।
इलेक्ट्रॉनिक कॉन्फ़िगरेशन हो गई। सिग्मा 1s2 सिग्मा एंटी बॉन्डिंग 1s2 सिग्मा 2s2 सिग्मा एंटी बॉन्डिंग 2s में टू उसके बाद
क्या बोलोगे? पाई 2px में टू पाई 2py में टू और तुम्हारा σ 2pz में टू। ये आपकी हो गई इलेक्ट्रॉनिक कॉन्फ़िगरेशन। आशा करता
हूं कि आपको बहुत जबरदस्त तरीके से सारी बातें समझ में आ गई होंगी। कोई दिक्कत वाली बात हो तो मुझे बताइए। अब मैं आपको
बताता हूं अगर मेरे पास मान लो हैवियर एलिमेंट्स हैं। मान लो मेरे पास हैवियर एलिमेंट है। O2 है मेरे पास। तो यहां पे
आप लोगे एक ऑक्सीजन व्हिच इज़ 1s2 2s2 2p 2p4 तो यहां पे दूसरा ऑक्सीजन भी क्या हो जाएगा? 1s2 2s2 2p4 हो जाएगा। बिल्कुल सही
बात है। बिल्कुल सही बात है। यहां पे आप भरना शुरू करोगे। 1 2 1 2 चार है ना? 1 2 3 4 यहां पे आ जाओ। 1 2 1 2 1 2 3 4 हो
जाएगा। ठीक है? अब देखो भरो। तो 1 2 3 4 हो गया। 1 2 3 4 हो गया। यहां पे देखो। चार और चार आठ हैं। तो 1 2 उसके बाद 3 4 5
6 हुंड रूल सेवन पेयरिंग नहीं कर सकते एट क्योंकि यहां पे सेम एनर्जी लेवल पे है। पेयरिंग ऑफ इलेक्ट्रॉन डज़ नॉट टेक्स प्लेस
एंट ऑल द ऑर्बिटल्स आर हाफ फिल्ड्ड जो हम जब हम उसकी बात कर रहे हैं। तो यहां पे पहले सबको हाफ फिल्ड करना पड़ेगा। तो मैंने
कैसे भरा 1 2 3 4 5 6 7 8 इस तरीके से। इलेक्ट्रॉनिक कॉन्फ़िगरेशन क्या हो गई मेरी? इलेक्ट्रॉनिक कॉन्फ़िगरेशन हो गई
मेरी सिग्मा में 1s में 2, सिग्मा में एंटी बॉन्डिंग 1s में 2, सिग्मा में 2s में 2। उसके बाद सिग्मा में एंटी बॉन्डिंग
2s में 2। उसके बाद मैंने क्या बोला यहां पे? उसके बाद मेरा यहां पे है सिग्मा 2pz में 2 उसके बाद पाई 2px π 2py इनमें मैंने
दो-दो भर दिए और लास्ट में मेरा फिर आ गया पाई एंटी बॉन्डिंग 2px और पाई यहां पे वन आया पाई एंटी बॉन्डिंग 2py में वन आया
मेरा। ठीक है? बहुत बढ़िया। अब यहां पे बहुत बार ऐसा पॉसिबल है कि आपको कोई भी मॉलिक्यूल पे कोई चार्ज दे दे। जैसे मान
लो यहां पे आपको दे दूं मैं O2 पे नेगेटिव। तो यहां पे आपको A को लेना है, a को लेना है। ये हो जाएगा आपका 1s2, 2s2,
2p, 2p4। लेकिन जो एक नेगेटिव है ना वो किसी भी एक ऑक्सीजन को दे दो। है ना? तो ये हो गया 1s2, 2s2। एक नेगेटिव का मतलब
एक इलेक्ट्रॉन लिया। अब आपको इसके अकॉर्डिंग इलेक्ट्रॉनिक कॉन्फ़िगरेशन वहां पे बतानी है। इसके अकॉर्डिंग फिलिंग करनी
है। कहीं पे हो जाए O2 में पॉजिटिव। तो O। एक को तो नॉर्मली रखो। और दूसरे से एक इलेक्ट्र पे पॉजिटिव रख के दूसरे से एक
इलेक्ट्रॉन निकाल दो। और अब इसके अकॉर्डिंग फिलिंग करो। इसके अकॉर्डिंग फिलिंग करो। कहीं पे लिख दिया O22 नेगेटिव
तो एक O नेगेटिव दूसरा भी नेगेटिव क्योंकि दोनों पे एक-एक नेगेटिव दे दो। ये बन जाएगा आपका 1s2 2s2 2p 5 और ये बन जाएगा
1s2 2s2 2p5 इसके अकॉर्डिंग आपको ऐसे करके बनाना है। फॉर एग्जांपल आपका मन कर रहा है भैया मुझे ना पांच वाला बना के दिखा दो।
ये वाला बना के दिखाओ। है ना? तो कैसे बनाऊंगा मैं यहां पे? यहां पे बोलूंगा 1 2 ठीक है? 1 2 1 2 1 2 उसके बाद 1 2 1 2 1 2
और 1 2 ठीक बात है। हां जी भैया। अब मेरे पास है यहां पे कितने? 1 2 3 4 5 यहां पे कितने हैं? 1 2 3 4 5 10 हो गए। 10 कैसे
भरूंगा? 1 2 3 4 5 6 7 8 9 और 10। इस तरीके से भाई साहब मुझे भरना होता है। आशा करता हूं कि आपको ये समझ में आ गया होगा।
डन है बातचीत? अब एमओटी आपको दो अलग-अलग बातें और बताती है। जैसे कि एक तो बता दी आपको इलेक्ट्रॉनिक कॉन्फ़िगरेशन। एक बताती
है एक तो बता दिया आपको इलेक्ट्रॉनिक कॉन्फ़िगरेशन कैसे निकालते हैं? दूसरा आपको बताती है मैग्नेटिक बिहेवियर। ध्यान से
देखना। दो तरह के सब्सटेंस होते हैं। एक होते हैं पैरामैग्नेटिक ये होते हैं डायमैग्नेटिक। पैरामैग्नेटिक सब्सटेंस वो
होते हैं जो वीकली अट्रैक्टेड होते हैं मैग्नेट से इंटू अ मैग्नेटिक फील्ड। मतलब ये मैग्नेटिक बिहेवियर दिखाते हैं। और ये
होता है अनपेयर्ड इलेक्ट्रॉन की वजह से। कोई पूछे क्यों होता है? ड्यू टू अनपेयर्ड इलेक्ट्रॉन की वजह से। और और वो कितना
ज्यादा मैग्नेटिक बिहेवियर दिखाते हैं उसको कैलकुलेट करने का तरीका होता है अंडर रूट में n + 2 जहां पे n हमारा होता है
अनपेयर्ड इलेक्ट्रॉन्स का नंबर। ठीक है? बहुत बढ़िया। उसके बाद जो डायमैग्नेटिक होते हैं ये होते हैं वीकली अट्रैक्टेड या
फिर आप कह दो रिपेल्ड बाय द मैग्नेटिक फील्ड मतलब मैग्नेटिक बिहेवियर नहीं दिखाते। क्यों? ड्यू टू एब्सेंस ऑफ इनके
पास कोई भी अनपेयर्ड इलेक्ट्रॉन नहीं होता। एब्सेंस ऑफ़ अनपेयर्ड इलेक्ट्रॉन। n की वैल्यू ज़ीरो होती है। ठीक है ना?
अनपेयर्ड इलेक्ट्रॉन। तो अनपेयर्ड इलेक्ट्रॉन जहां होते हैं वो पैरामैग्नेटिक होता है। जहां पर नहीं होते
वो डायमैग्नेटिक होता है। बात सबको समझ में आ रही है? अच्छा जी। आ जाओ जरा ध्यान से। अगर मैं तुमसे पूछूं जल्दी से मुझे
बताना क्या मेरा जो C2 का केस है जो C2 मॉलिक्यूल है क्या ये पैरामैग्नेटिक है या फिर ये डायमैग्नेटिक है? आपको मॉलिक्यूलर
ऑर्बिटल देखने होते हैं। क्योंकि अब मॉलिक्यूल बन रहा है। तो यहां पे कोई भी अनपेयर्ड नहीं है। सब के सब पेअर हैं। तो
ये आपका कैसा है एग्जांपल? ये आपका डायमैग्नेटिक का एग्जांपल है। कैसा एग्जांपल है आपका ये? डायमग्नेटिक का
एग्जांपल है। बहुत बढ़िया। उसके बाद अगर मैं आपसे पूछूं मेरा जो N2 है ये कैसा है? सारे पेयर्ड दिख रहे हैं आपको। ये भी आपका
डायमग्नेटिक का ही एग्जांपल है। बहुत बढ़िया। उसके बाद अगर मैं आपसे पूछूं अगला एग्जांपल मेरा O2
का है। यहां पे देखिए यहां पे आपको ये दो अनपेयर्ड दिखाई दे रहे हैं। मतलब ये है आपका पैरामैग्नेटिक का एग्जांपल। कैसा है
जी? पैरामैग्नेटिक का एग्जांपल है। अगर मैं आपसे पूछूं यहां पे मेरे पास जो मैंने लास्ट लिया था। मैंने आपको जो लास्ट बना
के दिखाया था वो इसका बना के दिखाया था। सही बात है? जल्दी से बताओ मुझे। हां जी भैया। यहां पे कोई भी आपको अनपेयर्ड दिखाई
दे रहा है नहीं। तो ये कैसा है आपका? डायमैग्नेटिक का एग्जांपल है। अब मैं आपसे कमेंट सेक्शन में पूछ रहा हूं। जल्दी से
मुझे बता दो डायमग्नेटिक है ना? जल्दी से मुझे बता दो कि ये वाला जो केस होगा क्या ये डायमैग्नेटिक होगा या
फिर पैरा होगा? जल्दी से अभी मुझे कमेंट सेक्शन में बता दो। तभी आगे बढ़ेंगे। इज इट डायमैग्नेटिक और पैरामैग्नेटिक ये वाला
ओ2 पॉजिटिव वाला केस। जल्दी से सोच समझ के मुझे बताओ। अच्छा हमारे इस एमओटी की बेटा जी एक और एप्लीकेशन है। ध्यान से देखना उस
एप्लीकेशन को। वो एप्लीकेशन क्या है? वो है गाइस आपका बॉन्ड ऑर्डर। एक और एप्लीकेशन है वो क्या है? बॉन्ड ऑर्डर।
व्हाट इज़ बॉन्ड ऑर्डर? इट इज़ द नंबर ऑफ़ नंबर ऑफ़ बॉन्ड्स। नंबर ऑफ़ बॉन्ड्स बिटवीन द टू एटम्स। ठीक है ना? अभी हम इसको बॉन्ड
उसमें करेंगे पैराटर्स में बिटवीन द टू एटम्स। और एम ओटी में इस नंबर को निकालने का एक फार्मूला है। क्या है वो फार्मूला?
बॉन्ड ऑर्डर निकालने का एक फार्मूला है। वो है 1/2 इलेक्ट्रॉन्स इन बॉन्डिंग मॉलिक्यूलर ऑर्बिटल माइनस इलेक्ट्रॉन्स इन
एंटी बॉन्डिंग मॉलिक्यूलर ऑर्बिटल। ये आपका फार्मूला है बॉन्ड ऑर्डर को निकालने का। तो किसी भी मॉलिक्यूल में कितना बॉन्ड
ऑर्डर है? आप ऐसे निकाल सकते हो। मैं आपको निकाल के दिखाता हूं। मतलब कितने नंबर ऑफ बॉन्ड्स हैं। जैसे कि मेरा पहला एग्जांपल
था ये वाला। आप ध्यान से देखेंगे यहां पे। यहां पे मैं फार्मूला लगाऊंगा। बॉन्ड ऑर्डर को निकालने का इक्वल्स टू 1/2 ध्यान
दो बॉन्डिंग मॉलिक्यूलर ऑर्बिटल मतलब जो बॉन्डिंग वाले हैं। एक ये वाला बॉन्डिंग है। ये वाला बॉन्डिंग है। ये वाला
बॉन्डिंग है। तो 2 4 6 8 मेरे बॉन्डिंग वाले हो गए। एंटी बॉन्डिंग वाले कौन से हैं? ये मेरा एंटी बॉन्डिंग है। ये मेरा
एंटी बॉन्डिंग है। ऊपर एंटी बॉन्डिंग में कोई इलेक्ट्रॉन नहीं है। तो दो और दो चार बस चार हैं। सॉल्व करूंगा तो आएगा 4 / 2
यानी के यहां पे दो बॉन्ड बनते होंगे C और C के बीच में। इस तरीके से आप निकाल रहे हो। अगले में देखो मुझे n2 के बीच में
निकालना है तो मैं फिर से फार्मूला लगाऊंगा बॉन्डिंग और बॉन्ड ऑर्डर का तो 1/2 बॉन्डिंग वाले में कितने हैं? दो 4
8 और दो 10 क्योंकि एंटी बॉन्डिंग वाले में कुछ नहीं है। 10 माइनस एंटी बॉन्डिंग वाले में दो और दो चार और तो कोई नहीं
एंटी बॉन्डिंग वाले में चार। ये आ गया आपका 6 / 2 यानी कि थ्री। क्या शानदार बात है। बहुत बढ़िया। इसी तरीके से आप सबके
अंदर निकाल सकते हो किसका क्या बॉन्ड ऑर्डर है। जल्दी से मुझे कमेंट सेक्शन में बताओ व्हाट इज द बॉन्ड ऑर्डर इन केस ऑफ
ऑक्सीजन और इसके साथ-साथ मुझे अगर मैं हीलियम का एक मॉलिक्यूल लूंगा तो उसका बॉन्ड ऑर्डर कितना आएगा? ये आपको मुझे
होमवर्क में बताना है। हीलियम एक लाइट एलिमेंट है। आपको उसका डायग्राम बनाना है। हीलियम में तो 1s2 2s2 होते हैं। बस यहीं
तक का डायग्राम बनेगा। पी पे जाने की जरूरत भी नहीं पड़ेगी। ये थी आपकी मॉलिक्यूलर ऑर्बिटल थ्योरी। आइए शानदार
तरीके से अगर मजा बांध दिया तो एपीएम इन द चैट बॉक्स हो जाए गाइस क्योंकि अब हम कर रहे हैं द सेकंड लास्ट टॉपिक ऑफ दिस
चैप्टर व्हिच इज हाइड्रोजन बॉन्डिंग। यहां तक अगर समझ में आ गया तो एक बार एपीएम छाप दो भाई साहब बहुत जल्दी करके। ठीक है ना?
आइए अगले टॉपिक की ओर अब हम बढ़ने चलते हैं। ठीक है? तो हाइड्रोजन बॉन्डिंग क्या है गाइज़? ध्यान से देखना। हाइड्रोजन बॉन्ड
कैन बी डिफाइंड एज द अट्रैक्टिव फोर्स व्हिच बाइंड्स हाइड्रोजन एटम ऑफ विद वन ऑफ द मॉलिक्यूल विद द इलेक्ट्रोनेगेटिव
एलिमेंट लाइक फोन ऑफ अनदर मॉलिक्यूल। देखो यार सिंपल सी बात है। किसी भी किसी भी केस में जहां पर हाइड्रोजन एटम है वो स्लाइटली
एसिडिक है। और उसका एक बॉन्ड बन रखा है। एक ऐसे एलिमेंट्स जो मोस्ट इलेक्ट्रोनेगेटिव है। देखो ध्यान से। आपको
यहां पे पानी दिख रहा है। पानी में सबको पता है ऑक्सीजन ज्यादा इलेक्ट्रोनेगेटिव है तो इसके ऊपर आ जाएगा स्लाइटली पॉजिटिव।
तो यहां पे आ जाएगा स्लाइटली नेगेटिव स्लाइटली पॉजिटिव। ये स्लाइटली पॉजिटिव या स्लाइटली नेगेटिव ये स्लाइटली पॉजिटिव। तो
जहां पे हाइड्रोजन अटैच है विद वन ऑफ द मोस्ट इलेक्ट्रोनेगेटिव एलिमेंट। जैसे कि फ्लोरीन, ऑक्सीजन, नाइट्रोजन ये तभी होता
है। यहां पे ऑक्सीजन है वहां हमें साफ़-साफ़ दिख रहा है। ठीक है? तो यहां पे क्या होगा? ये जो स्लाइटली एसिडिक हाइड्रोजन है
ये बराबर वाले मॉलिक्यूल के इस हाइली इलेक्ट्रोनेगेटिव एलिमेंट से बोलता है कि यार तेरे पास तो लोन पेयर हैं और मैं बड़ा
परेशान हूं। ये जो मेरा वाला है मुझे परेशान कर रहा है। क्या तू मेरी हेल्प करेगा? तू मेरे से बॉन्डिंग कर ले। देख
मेरे पास इलेक्ट्रॉन की कमी है। मेरे खींच रहा है। तो धीरे-धीरे एक बहुत ही वीक टाइप की बॉन्डिंग यहां पर बन जाएगी। इलेक्ट्रॉन
कोई यहां पे कोवलेंट बॉन्ड नहीं बनता। कोई ओवरलैपिंग नहीं हो रही। कोई ट्रांसफरिंग नहीं हो रही। बस ये लोन पेयर का थोड़ा सा
क्लाउड इसको दे देता है। मतलब इसके साथ शेयर कर लेता है। जिससे बनती है हाइड्रोजन बॉन्डिंग। इसे कहते हैं हाइड्रोजन
हाइड्रोजन बॉन्डिंग कहते हैं। तो हाइड्रोजन बॉन्डिंग किसके बीच में होती है? स्लाइटली एसिडिक यानी कि स्लाइटली
पॉजिटिव। एसिड का मतलब होता है इस पे पॉजिटिव चार्ज होता है। तो स्लाइटली पॉजिटिव हाइड्रोजन एंड द लोन पेयर ऑफ वन
ऑफ द मोस्ट इलेक्ट्रोनेगेटिव एलिमेंट। चाहे फ्लोरीन, ऑक्सीजन या फिर नाइट्रोजन हो। बात समझ में आ रही है? फॉर एग्जांपल
मेरे पास HF है। मेरे पास क्या है? HF है। यहां पे सबको पता है फ्लोरीन के ऊपर लोन पेयर होते हैं। सबको पता है इस स्ट्रक्चर
में। ठीक बात है। हां जी। यहां पे स्लाइटली नेगेटिव है। पॉजिटिव है। स्लाइटली नेगेटिव है। क्योंकि भैया
इलेक्ट्रोनेगेटिव का डिफरेंस है। तो यहां पे क्या करेगा? बॉन्ड बनाएगा। क्या होगा? हाइड्रोजन बॉन्डिंग होगी। सही बात है। अब
हाइड्रोजन बॉन्डिंग दो तरह की होती है। कैसी-कसी? एक का नाम होता है गाइस इंटरमॉलिक्यूलर। इंटरमॉलिक्यूलर इंटरनेशनल
मैच। दो कंट्रीज के बीच में। मतलब दो अलग-अलग मॉलिक्यूल के बीच में जो बॉन्डिंग है उसे कहते हैं इंटरमॉलिक्यूल। यह एक
मॉलिक्यूल है, एक मॉलिक्यूल है। इनके बीच की बॉन्डिंग है इंटर मॉलिक्यूलर। लेकिन मेरे पास ये है हमारा ऑर्थो नाइट्रोफिनोल।
इसमें अगर आप देखेंगे तो यहां पे इसके ऊपर स्लाइटली पॉजिटिव है। स्लाइटली नेगेटिव है। और यहां पे नाइट्रो का ऑक्सीजन है जिस
पे लोन पेयर है। तो यहां पे ये क्या कर रहा है? इस वाले से मदद मांग रहा है। इस वाले से मदद मांग रहा है। और यहां पे जो
हाइड्रोजन बॉन्डिंग है वो एक ही मॉलिक्यूल के बीच में हो रही है। इसे कहते हैं इंट्रा मॉलिक्यूलर हाइड्रोजन बॉन्डिंग।
बात समझ में आ रही है? इसे क्या बोला हमने? इंट्रा मॉलिक्यूलर हाइड्रोजन बॉन्डिंग बोला। तो ये था हमारा हाइड्रोजन
बॉन्डिंग। आओ अब चैप्टर को फिनिश करते हैं जल्दी से बॉन्ड पैरामीटर्स के साथ में। आ जाओ जल्दी से। ठीक है? आओ जल्दी से।
ऑलराइट। तो अब हम आ गए हैं गाइज़ बॉन्ड पैरामीटर्स के ऊपर। ठीक है? व्हाट आर बॉन्ड पैरामीटर्स? मतलब बॉन्ड्स की वो
कौन-कौन सी कैरेक्टरिस्टिक्स होती है जो उस चैप्टर में बहुत इंपॉर्टेंट है। तो पहली होती है बॉन्ड लेंथ। व्हाट इज़ बॉन्ड
लेंथ? बॉन्ड लेंथ होती है द डिस्टेंस बिटवीन द न्यूक्लियस ऑफ द टू एटम्स इसे हम बॉन्ड लेंथ कहते हैं। सिंपल सी बात है।
सिंपल सी डेफिनेशन है। दिस इज़ व्हाट वी कॉल्ड एज बॉन्ड लेंथ। व्हाट इज बॉन्ड एंगल? बॉन्ड एंगल क्या होता है? भाई जब भी
कभी मान लो हमने H2O को बनाया तो H2O के बीच में यहां पे जो भी दो बॉन्ड के बीच में एंगल बन रहा है इसे कहते हैं हम लोग
बॉन्ड एंगल। इसे क्या कहते हैं हम लोग? बॉन्ड एंगल कहते हैं। ये क्या था हमारा? ये थी हमारी बॉन्ड लेंथ थी हमारी। बात समझ
गए? सबको समझ में आ रही है? ये क्या है हमारी? बॉन्ड लेंथ है। बिल्कुल सही बात है। अगला है गाइज़ हमारा बॉन्ड एंथैल्पी।
व्हाट इज़ बॉन्ड एंथैल्पी? देखो कोई भी जब बॉन्ड बनता है तो स्टेबिलिटी आती है और एनर्जी बाहर निकल जाती है। लेकिन उसी
बॉन्ड को तोड़ने के लिए वही एनर्जी आपको उसको वापस देनी है। तो बॉन्ड हमेशा स्टेबिलिटी से बनता है और स्टेबिलिटी को
हटाने के लिए आपको एनर्जी देनी पड़ेगी। तो जो भी एनर्जी देनी है इट इज़ डिफाइंड एज द अमाउंट ऑफ एनर्जी रिक्वायर्ड टू ब्रेक वन
मोल ऑफ बॉन्ड ऑफ अ पर्टिकुलर टाइप बिटवीन द टू एटम्स। फॉर एग्जांपल अगर आपको H का एक बॉन्ड तोड़ना है तो आपको पर मोल
हाइड्रोजन गैस के गैस के लिए 43.5 43 435.8 किलJ एनर्जी देनी पड़ती है। हाइड्रोजन के
मॉलिक्यूल को तोड़ने के लिए पर मोल। पर मोल मतलब एक ढेर है आपके पास हाइड्रोजन मॉलिक्यूल का। तो हर एक हाइड्रोजन एटम
हाइड्रोजन एटम के बॉन्ड को तोड़ने के लिए आपको कितनी देनी पड़ती है? 435.8 किलजूल पर मोल की एनर्जी यहां पे देनी पड़ती है।
दिस इज़ व्हाट वी कॉल्ड एज बॉन्ड एंथैल्पी। उसी के बाद एक और यहां पे बॉन्ड पैरामीटर होता है गाइस। व्हिच इज़ बॉन्ड ऑर्डर जो कि
मैं तुम्हें अभी बता चुका हूं। अभी बताया था ना बॉन्ड ऑर्डर क्या होता है? नंबर ऑफ़ बॉन्ड्स। है ना? इन द लुईस डिस्क्रिप्शन
ऑफ़ अ कोवलेंट बॉन्ड। द बॉन्ड ऑर्डर इज़ गिवन बाय द नंबर ऑफ़ बॉन्ड बिटवीन द टू एटम्स इन अ मॉलिक्यूल। फॉर एग्जांपल अगर
मैं बात करूं हाइड्रोजन के केस में तो बॉन्ड एक है तो बॉन्ड ऑर्डर वन कहलाएगा। कितना कहलाएगा? बॉन्ड ऑर्डर वन कहलाएगा।
है ना? अगर मैं O2 की बात करूं तो दो बॉन्ड बनते हैं तो बॉन्ड ऑर्डर टू कहलाएगा। अगर मैं N2 की बात करूंगा तो
बॉन्ड ऑर्डर यहां पर तीन कहलाएगा। दिस इज़ व्हाट वी कॉल्ड एज बॉन्ड ऑर्डर। उसके बाद आते हैं आइसोइलेक्ट्रॉनिक स्पीशीज़ पे।
आइसोइलेक्ट्रॉनिक स्पीशीज़ एक वो थे स्ट्रक्चर ऑफ़ एटम वाले। नंबर ऑफ इलेक्ट्रॉन्स सेम होते हैं। बिल्कुल ऐसे
ही। आइसोइलेक्ट्रॉनिक मॉलिक्यूल्स एंड आयंस हैव आइडेंटिकल बॉन्ड ऑर्डर्स। फॉर एग्जांपल। अगर आइडेंटिकल बॉन्ड ऑर्डर्स
हैं आपके पास तो उस केस में भी आप उनको आइसोइलेक्ट्रॉनिक स्पीशीज़ कहते हो। ध्यान से देखिएगा। यहां पे आपको क्या दिख रहा है
यहां पे? F2 एंड O2 नेगेटिव है बॉन्ड ऑर्डर वन। बॉन्ड ऑर्डर वन है। और अब अगर आप नंबर ऑफ इलेक्ट्रॉन्स एक बार काउंट कर
लो जरा कितने हैं? F2 में नंबर ऑफ इलेक्ट्रॉन्स कितने होंगे? भाई नॉर्मली हमारे पास जो एक F होता है उसमें हमारे
पास कितने इलेक्ट्रॉन्स होते हैं? जल्दी से बताओ मुझे एक बार। कितने इलेक्ट्रॉन्स होते हैं? 1 2 3 4 अगर मैं नॉर्मली भी
देखूं ना अगर मैं नॉर्मली भी देखूं तो f में होते हैं नौ इलेक्ट्रॉन्स तो यहां पे कितने हो गए? 18 इलेक्ट्रॉन्स हो गए। दो f
है मेरे पास 18 इलेक्ट्रॉन्स हो गए। अगर मैं आ जाऊं O2 नेगेटिव में एक ऑक्सीजन में कितने होते हैं इलेक्ट्रॉन्स? आठ, 8 * 2 =
16, दो नेगेटिव है प्लस दो। तो बॉन्ड आर्डर भी सेम हो। मॉलिक्यूल्स को आइसो इलेक्ट्रॉनिक कब बोल रहे हैं? बॉन्ड आर्डर
भी सेम हो। बॉन्ड आर्डर आपको दोनों में कितना मिल रहा है? वन मिल रहा है। और इलेक्ट्रॉन्स भी फिर कितने हों? सेम ही
हो। इलेक्ट्रॉन्स भी कितने हो? फिर सेम ही हों। ये आपका होता है गाइस आइसोइलेक्ट्रॉनिक स्पेशीज़। फॉर एग्जांपल
अगर आप देखोगे N2 में इलेक्ट्रॉन्स कितने हैं? 7 * 2 = 14। यहां पे कितने हैं? अ 12 और 16 तुम्हारे कितने हो गए? 12 और एक
सेकंड। आठ और छह 14 इलेक्ट्रॉन्स हो गए। यहां पर भी आप इलेक्ट्रॉन्स निकालोगे। NO पॉजिटिव में तुम्हारे सात
[नाक से की जाने वाली आवाज़] इसके हो गए। ठीक है? आठ इसके हो गए। -1 है। 14 इलेक्ट्रॉन्स हैं। सब में सेम
इलेक्ट्रॉन्स मिल रहे हैं आपको। सब में सेम इलेक्ट्रॉन्स मिल रहे हैं। और सबका बॉन्ड ऑर्डर आपका थ्री है। इन्हें बोलते
हैं आइसो इलेक्ट्रॉनिक मॉलिक्यूल्स। बॉन्ड ऑर्डर सेम हो और नंबर ऑफ इलेक्ट्रॉन्स भी सेम हो। ये थे आपके गाइज़ बॉन्ड ऑर्डर की
बातें। अब बॉन्ड ऑर्डर में कुछ इंपॉर्टेंट बातें हैं वो एक बार देख लो। ये जो बॉन्ड पैरामीटर्स हैं किस पे कैसे डिपेंड करते
हैं? बॉन्ड लेंथ किस पे कैसे डिपेंड करता है? बॉन्ड मल्टीप्लसिटी पे। तो हमेशा ध्यान रखना जितने ज्यादा नंबर ऑफ़ बॉन्ड्स
होते हैं ना उतनी बॉन्ड लेंथ कम हो जाती है। क्यों? क्योंकि उतना एटम्स को पास-पास आना पड़ता है। तो बॉन्ड मल्टीप्लसिटी
जितनी ज्यादा होगी उतना कम आपका बॉन्ड लेंथ होगा। ये आपको भाई साहब ध्यान रखना है। एक तो ये बात अपने को ध्यान रखनी है
इस चैप्टर में। साइज ऑफ द एटम। जितना साइज छोटा है उतनी बॉन्ड लेंथ कम होती है। जितना साइज बड़ा है उतनी बॉन्ड लेंथ हमारी
ज्यादा होती है। तो साइज ऑफ़ द एटम पे डायरेक्टली प्रपोर्शनल है बॉन्ड लेंथ। इसको ध्यान रखना है सभी को। डिफरेंस इन
इलेक्ट्रोनेगेटिविटी ऑफ़ द टू एटम्स। जितनी ज्यादा डिफरेंस इन इलेक्ट्रोनेगेटिविटी होगी, उतना एटम्स अपने एक दूसरे के
इलेक्ट्रॉन्स को अपनी तरफ खींच लेंगे। खींच लेंगे, तो बॉन्ड लेंथ छोटी हो जाएगी। मतलब यहां पर बॉन्ड लेंथ इन्वर्सली
प्रोपोर्शनल होती है। उसके बाद भाई साहब इंक्रीजिंग एस कैरेक्टर देखो हाइब्रिडाइजेशन में sp पॉसिबल है। sp2 और
sp3 नॉर्मली अगर मैं बात करूं अगर आप sp देखोगे तो 50% s हो जाएगा। 50% p दोनों का आधा-आधा हिस्सा है। अगर मैं sp2 देखूंगा
तो ऑर्बिटल में तीन हिस्से होंगे। एक उनमें से 33.3s का होगा और दो p का हो जाएगा 66.6 sp3 में चार ऑर्बिटल है चार
हिस्से होंगे तो s का बचेगा 25 और बाकी पी का बचेगा 75। ध्यान देना हमेशा जिस एटम में जितना ज्यादा जिस ऑर्बिटल में जितना
ज्यादा s कैरेक्टर होता है s न्यूक्लियस के सबसे पास होता है। फिर p होता है। फिर d होता है। स्ट्रक्चर ऑफ़ एटम में पढ़ा था।
जहां ज्यादा S वो न्यूक्लियस के ज्यादा पास। और जहां वो न्यूक्लियस के ज्यादा पास वहां ज्यादा इलेक्ट्रोनेगेटिविटी। तो
इंक्रीजिंग S कैरेक्टर मतलब हाई इलेक्ट्रोनेगेटिविटी क्योंकि न्यूक्लियस के पास है और ज्यादा हाई
इलेक्ट्रोनेगेटिविटी तो लेस बॉन्ड लेंथ बॉन्ड लेंथ कम हो जाएगी। ये आपको हमेशा याद रखना है। आप इसको ऐसे भी समझ सकते हो।
देखो जरा ध्यान से। कौन सा कौन सा बॉन्ड छोटा लंबा होगा? S ऐसे बनता है। हमारा पी ऐसे बनता है। बताओ s के होने पे बॉन्ड
छोटा होगा कि p के होने पे? भैया s के होने पे ऐसे स्फेरिकल है? छोटा सा है। तो यहां पे लेस बॉन्ड लेंथ होगी। तो आपको दिख
रहा है कहां बॉन्ड लेंथ कम होगी और कहां बॉन्ड लेंथ ज्यादा होगी। जहां आपको S ज्यादा दिख रहा है वहां बॉन्ड लेंथ कम
होगी। यहां सबसे कम बॉन्ड लेंथ है। अगर मैं बॉन्ड लेंथ के ऑर्डर की बात करूं अगर मैं बॉन्ड लेंथ के ऑर्डर की बात करूं तो
सबसे कम बॉन्ड लेंथ सबसे ज्यादा बॉन्ड लेंथ होगी जहां पे P ज्यादा होगा क्योंकि P लोंगिट्यूडननेस दिखाता है। लंबा यहां पे
दिखाता है अपन। बॉन्ड एंगल की बात करूंगा तो गाइज़ बिल्कुल सिंपल सी बात है। अगर आप ध्यान से देखेंगे दो एटम है यहां पर ये।
है ना? यहां पर ये दो एटम हैं। अगर मैं बात करूं यहां पे साफ-साफ जितना जितना जितना जितना जितना जितना जितना जितना कम
बॉन्ड एंगल होगा उतनी एटम्स में रिपल्शन ज्यादा होगी। मतलब समझ रहे हो? धक्कामुक्की ज्यादा होगी। एटम्स खींचेंगे
बॉन्ड लेंथ बढ़ेगी। जितना बॉन्ड लेंथ कम उतना उतना बॉन्ड एंगल ज्यादा। आप मेरी बात समझ रहे हो? नहीं समझ रहे? अगर मैं आपसे
कह दूं कि ये दो एटम्स हैं। ध्यान से देखो। यह एक एटम है। यह B है और यह B है। सही बात है। बॉन्ड लेंथ ज्यादा है। बॉन्ड
लेंथ ज्यादा है तो रिपल्शन कम है। एटम्स आराम से रहेंगे। कोई दिक्कत वाली बातचीत नहीं है। लेकिन अगर आप ध्यान से देखेंगे
मान लो बॉन्ड लेंथ यहां पे इतनी है। तो यहां पे रिपल्शन ज्यादा होगी। जिस वजह से बॉन्ड लेंथ कम है तो बॉन्ड एंगल ज्यादा।
मतलब सिंपल सी बात ये है। मैं ये आपसे कहना चाहता हूं। देखो आप इसको बहुत शांति समझ सकते हो कि जहांजहां जहां लेंथ ज्यादा
है, रिपल्शन कम है, बॉन्ड एंगल कम होगा। मतलब कोई दिक्कत वाली बातचीत नहीं है। लेकिन वही सुबह साहब आई होप कि आपको इस
चैप्टर में सारी बातें बहुत अच्छे से समझ आ गई होंगी। आई होप कि आपको बहुत मजा आया होगा। दिस इज़ इट फ्रॉम माय साइड। आपका
फोर्थ चैप्टर केमिकल बॉन्डिंग मैंने कवर कर दिया है। ऐसे ही आपके लिए लेके आऊंगा बहुत ही जल्दी मैं अगला चैप्टर
थर्मोडायनेमिक्स। बहुत मजा आया हो तो बहुत शानदार तरीके से एपीएम इन द चैट बॉक्स जरूर लिख देना विद द रेड अर्ट। थैंक यू सो
मच गाइस। बाय एवरीवन। लव यू। दिस इज योर वन एंड ओनली बडी आकाश त्यागी। मिलेंगे अगले एम शो में। तब तक के लिए बाय गाइस।
ऑक्टेट नियम के अनुसार, परमाणु तब स्थिर होते हैं जब उनके बाहरी कक्ष में 8 इलेक्ट्रॉन होते हैं (हीलियम को छोड़कर, जिसमें 2 होते हैं)। यह नियम रासायनिक बंधन का आधार है क्योंकि परमाणु इलेक्ट्रॉनों का लेन-देन या साझा करके अपना ऑक्टेट पूरा करते हैं, जिससे वे अधिक स्थिर हो जाते हैं।
आयनिक बंधन एक धातु और एक अधातु के बीच इलेक्ट्रॉनों के पूर्ण स्थानांतरण से बनता है, जिससे धनायन और ऋणायन बनते हैं, जबकि सहसंयोजक बंधन दो अधातुओं के बीच इलेक्ट्रॉनों के आपसी साझाकरण से बनता है। आयनिक यौगिक क्रिस्टलीय ठोस होते हैं और उच्च गलनांक रखते हैं, जबकि सहसंयोजक यौगिक प्रायः गैस, तरल या नरम ठोस होते हैं और कम गलनांक रखते हैं।
उपसहसंयोजक बंधन एक विशेष प्रकार का सहसंयोजक बंधन है जहां एक परमाणु इलेक्ट्रॉनों का एकाकी जोड़ा प्रदान करता है और दूसरा परमाणु उसे स्वीकार करता है। सामान्य सहसंयोजक बंधन में दोनों परमाणु एक-एक इलेक्ट्रॉन देते हैं, लेकिन उपसहसंयोजक बंधन में केवल एक परमाणु इलेक्ट्रॉनों का पूरा जोड़ा प्रदान करता है, जैसे NH₃ में नाइट्रोजन H⁺ आयन को देकर NH₄⁺ बनाता है।
जालक ऊर्जा वह ऊर्जा है जो तब मुक्त होती है जब एक मोल आयनिक यौगिक बनाने के लिए धनायन और ऋणायन संघनित होते हैं। इसकी प्रबलता दो मुख्य कारकों पर निर्भर करती है: आयनों पर आवेश (आवेश जितना अधिक, जालक ऊर्जा उतनी ही अधिक, जैसे AlCl₃ की NaCl से अधिक) और आयनों के बीच की दूरी (दूरी जितनी कम, जालक ऊर्जा उतनी ही अधिक, जैसे LiF की LiI से अधिक)।
लुईस संरचना बनाते समय केवल वैलेंस शेल के इलेक्ट्रॉनों को दर्शाया जाता है; आंतरिक शेल के इलेक्ट्रॉन बंधन में भाग नहीं लेते। प्रत्येक परमाणु के चारों ओर बिंदुओं या क्रॉस के रूप में वैलेंस इलेक्ट्रॉनों को दिखाया जाता है, और साझा इलेक्ट्रॉनों को बंधन रेखाओं के रूप में प्रदर्शित किया जाता है।
वैलेंसी किसी परमाणु की संयोजन क्षमता है, जो वैलेंस इलेक्ट्रॉनों की संख्या पर निर्भर करती है। यदि वैलेंस इलेक्ट्रॉन 4 या उससे कम हैं, तो वैलेंसी उस संख्या के बराबर होती है; यदि 4 से अधिक हैं, तो वैलेंसी = 8 - वैलेंस इलेक्ट्रॉनों की संख्या होती है; और नोबल गैसों की वैलेंसी 0 होती है।
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