यह अध्याय भौतिकी के तीन मूलभूत सिद्धांतों - कार्य (Work), ऊर्जा (Energy) और शक्ति (Power) पर केंद्रित है। यहाँ एक-एक टॉपिक को परीक्षा के दृष्टिकोण से समझाया गया है।
कार्य (Work)
कार्य का अर्थ है बल और विस्थापन का गुणनफल।
- मूल सूत्र: W = f · s
- जब कोण हो: W = fs cosθ
- यहाँ
fबल है,sविस्थापन है, औरθबल और विस्थापन के बीच का कोण है।
- यहाँ
- महत्वपूर्ण: यह सूत्र केवल नियत बल (Constant Force) के लिए है।
कार्य की प्रकृति (Nature of Work)
कार्य तीन प्रकार का हो सकता है:
- शून्य कार्य (Zero Work): तीन स्थितियों में कार्य शून्य होता है:
- जब बल (
f) शून्य हो। - जब विस्थापन (
s) शून्य हो। (जैसे दीवार को धक्का देना पर दीवार का हिलना नहीं) - जब बल और विस्थापन के बीच का कोण 90° (θ = 90°) हो। (क्योंकि cos 90° = 0)
- उदाहरण:
- कुली सिर पर सामान रखकर चलता है, तो बल (g) नीचे और विस्थापन आगे होने के कारण कोण 90°, अतः कार्य शून्य।
- सरल लोलक (Simple Pendulum) में डोरी का तनाव (Tension) द्वारा किया गया कार्य शून्य होता है।
- एकसमान वृत्तीय गति में अभिकेंद्रीय बल (Centripetal Force) द्वारा किया गया कार्य शून्य होता है।
- उदाहरण:
- जब बल (
- धनात्मक कार्य (Positive Work): जब कोण θ < 90° हो।
- ऋणात्मक कार्य (Negative Work): जब कोण θ > 90° हो।
परीक्षा टिप: यदि प्रश्न में पूछा जाए कि कार्य शून्य क्यों है और आपको कारण न पता हो, तो सीधा उत्तर लिखें कि बल और विस्थापन के बीच का कोण 90° है।
चर बल द्वारा कार्य (Work Done by a Variable Force)
जब बल स्थिर न होकर बदलता रहे (जैसे f = 2x), तो कार्य ज्ञात करने के लिए समाकलन (Integration) का उपयोग किया जाता है।
- सूत्र: W = ∫ f · dx
- ग्राफीय विधि: बल-विस्थापन (F-x) ग्राफ के नीचे का क्षेत्रफल (Area) किए गए कार्य के बराबर होता है।
- यदि ग्राफ एक आयत है, तो कार्य = लंबाई × चौड़ाई
- यदि ग्राफ एक त्रिभुज है, तो कार्य = 1⁄2 × आधार × ऊंचाई
ऊर्जा (Energy)
ऊर्जा कार्य करने की क्षमता (Capacity to do work) है। कार्य और ऊर्जा समतुल्य हैं।
- गतिज ऊर्जा (Kinetic Energy): यह किसी वस्तु की गति के कारण होती है।
- सूत्र: K = 1⁄2 mv²
- यह एक अदिश राशि है।
- स्थितिज ऊर्जा (Potential Energy): यह किसी वस्तु की स्थिति या विन्यास (Configuration) के कारण होती है।
- गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा (Gravitational PE): U = mgh
- प्रत्यास्थ स्थितिज ऊर्जा (Elastic PE): U = 1⁄2 kx² (स्प्रिंग के लिए)
कार्य-ऊर्जा प्रमेय (Work-Energy Theorem)
यह प्रमेय कहता है कि किसी वस्तु पर किया गया कुल कार्य उसकी गतिज ऊर्जा में हुए परिवर्तन के बराबर होता है।
- नियत बल के लिए: W = ΔK = 1⁄2 mv² - 1⁄2 mu²
- प्रमाण: गति के तीसरे समीकरण v² - u² = 2as का उपयोग करके सिद्ध किया जा सकता है।
- चर बल के लिए: W = ∫ f · dx = m ∫ v · dv = 1⁄2 mv²f - 1⁄2 mvi²
संरक्षी और असंरक्षी बल (Conservative and Non-Conservative Forces)
- संरक्षी बल: यदि किसी बल द्वारा किया गया कार्य पथ पर निर्भर नहीं करता, केवल प्रारंभिक और अंतिम स्थिति पर निर्भर करता है।
- उदाहरण: गुरुत्वाकर्षण बल (mg), स्थिरवैद्युत बल।
- असंरक्षी बल: यदि बल द्वारा किया गया कार्य पथ पर निर्भर करता है।
- उदाहरण: घर्षण बल (Friction), श्यान बल (Viscosity), वायु प्रतिरोध (Air Drag) कारण ऊर्जा का क्षय होता है।
यांत्रिक ऊर्जा का संरक्षण (Conservation of Mechanical Energy)
यदि केवल संरक्षी बल ही कार्य कर रहे हों, तो किसी निकाय की कुल यांत्रिक ऊर्जा (TME = KE + PE) नियत रहती है। इस सिद्धांत को Understanding Work, Energy, and Power: Physics Concepts Explained में विस्तार से समझाया गया है।
- स्वतंत्र रूप से गिरती वस्तु के लिए प्रमाण:
- बिंदु A (शीर्ष) पर: KE = 0, PE = mgh, TME = mgh
- बिंदु B (जमीन) पर: PE = 0, KE = 1⁄2 mvb²
- गति के समीकरण से, vb² = 2gh, अतः KE = 1⁄2 m(2gh) = mgh, TME = mgh
- निष्कर्ष: A और B दोनों बिंदुओं पर कुल यांत्रिक ऊर्जा समान (mgh) है, अतः ऊर्जा संरक्षित रहती है।
गतिज ऊर्जा और संवेग में संबंध
- K = p² / (2m) (जहाँ p = mv, संवेग)
- p = √(2mK)
शक्ति (Power)
शक्ति कार्य करने की दर (Rate of doing work) है।
- औसत शक्ति (Average Power): P_avg = W / t
- तात्क्षणिक शक्ति (Instantaneous Power): P_inst = F · v
संघट्ट (Collision)
जब दो वस्तुएं टकराती हैं तो इसे संघट्ट कहते हैं।
- प्रत्यास्थ संघट्ट (Elastic Collision):
- संवेग संरक्षित रहता है।
- गतिज ऊर्जा भी संरक्षित रहती है।
- उदाहरण: दीवार से टकराकर वापस आती बिलियर्ड बॉल।
- अप्रत्यास्थ संघट्ट (Inelastic Collision):
- केवल संवेग संरक्षित रहता है।
- गतिज ऊर्जा संरक्षित नहीं रहती (कुछ ऊर्जा ऊष्मा में बदल जाती है)।
- उदाहरण: दीवार पर फेंकी गई गीली मिट्टी का चिपक जाना।
एक-विमीय प्रत्यास्थ संघट्ट (1D Elastic Collision)
दो वस्तुओं के टकराने के बाद के वेग (v₁ और v₂) ज्ञात करने के लिए निम्न सूत्र उपयोगी हैं:
- वेगों का सूत्र: v₁ = [(m₁ - m₂)u₁ + 2m₂u₂] / (m₁ + m₂)
- यह परीक्षा में सबसे अधिक पूछा जाने वाला भाग है।
सो मेरे प्यारे बच्चों वी आर गोइंग टू स्टार्ट द वेरी इजी चैप्टर। यहां से जो क्वेश्चन आता है वो भी बता दूंगा मैं
आपको। पर अभी पूरा बढ़िया से एक-एक चीज को पढ़ेंगे हर एक टॉपिक को। टॉपिक का नाम है वर्क, एनर्जी एंड पावर। पहले वर्क समझना
है, फिर एनर्जी समझना है, फिर पावर समझना है। इसके अंदर मैंने एग्जामिनेशन पॉइंट ऑफ व्यू से सारे पॉइंट्स को कवर किया है जो
एग्जाम में पूछा जाता है। ठीक है? तो देखिए, यहां पर लिखा है वर्क। सबसे पहले वर्क। तो वर्क को हम बचपन से जानते हैं।
वर्क का फार्मूला होता है f.S f.S का मतलब होता है फोर्स इंटू में डिस्प्लेसमेंट।
फोर्स इंटू में डिस्प्लेसमेंट। अच्छा देखिए ये ऐसा है कि वर्क इक्व a.b जैसा है।
और डॉट का मतलब फिजिक्स में होता है cos थीटा। क्या होता है? cosθ
यानी कि अगर हम वर्क की बात करें तो वर्क का एक और फार्मूला हमारे हाथ में आ गया। फोर्स * डिस्प्लेसमेंट इंटू में cos थीटा
इंटू में cosθ जहां पर f का मतलब फोर्स है। s का मतलब
डिस्प्लेसमेंट है और थीटा का मतलब है एंगल बिटवीन फोर्स एंड डिस्प्लेसमेंट कि फोर्स एंड डिस्प्लेसमेंट के बीच में कितना एंगल
है वो यहां पुट करना है। तो इसे बोलते हैं fs cos थीटा। यहां पर जो फोर्स होता है ना इस फॉर्मूले के अंदर वो होता है कांस्टेंट
फोर्स। कांस्टेंट मतलब जैसे मैंने बोल दिया फोर्स इक्वल टू 2 न्यूटन। तो ये कांस्टेंट है। तो ऐसा फोर्स मिलेगा आपको।
कभी ऐसा लिखे f = 2x तो यहां पर x क्या है? वेरिएबल। तो इसको बोलते हैं हम वेरिएबल फोर्स। क्या बोलते हैं इसको?
वेरिएबल। और ये है आपका कांस्टेंट फोर्स। तो ये जो हमने फार्मूला पढ़ा है वर्क का f.fs या फिर
fs cos थीटा। यहां पर थीटा का मतलब पता लग गया। फोर्स एंड डिस्प्लेसमेंट के बीच का एंगल। यहां पर f का मतलब पता लग गया।
कांस्टेंट फोर्स। सारी बात पता लग गई। और s का मतलब क्या होता है? डिस्प्लेसमेंट। अब अगला टॉपिक हमारा यहीं पर स्टार्ट होता
है। एक बार इसको रीड करो। एक सेकंड का टाइम लेके। रीड कर लिया सबने? सबको क्लेरिटी है? कभी भी ये क्वेश्चन नहीं आता
एग्जाम में। कभी भी आज तक क्वेश्चन नहीं आया एग्जाम में कि भाई तुम मुझे ये बता दो कि ये कि वर्क क्या होता है? कोई नहीं
पूछता। वर्क का फार्मूला पता होना चाहिए बस। f. या फिर fs cos थीटा। यानी मैं ऐसे लिखूं रफ भाषा में तो वर्क का एक फार्मूला
है f. F डॉट फोर्स * डिस्प्लेसमेंट। या वर्क का एक और फॉर्मूला है FS cos थीटा। जब एंगल
दिया हो तो ये फार्मूला इस्तेमाल करो। जब एंगल ना दिया हो तो ये फार्मूला इस्तेमाल करो। ये डिपेंड्स
अपॉन यू। देखिए अगला ये खत्म होते ही अगला टॉपिक जिसके ऊपर एग्जाम में एक कॉनंसेप्चुअल क्वेश्चन आता है। क्या
क्वेश्चन आता है क्वेश्चन का? देखो टॉपिक का नाम क्या है? नेचर ऑफ़ वर्क। वर्क का नेचर क्या हो सकता है? तो आपका जो वर्क है
वो जीरो हो सकता है। वर्क जीरो कब होगा? तीन केस में जीरो हो सकता है। देखिए अगर आप अगर आप ईमानदारी से देखते हैं स्क्रीन
में बेटा आ रहा है सबको देखना इसमें। इसमें भी आ रहा है। ठीक है? ईमानदारी से देखिए ईमानदारी से कि यहां पर वर्क कब
जीरो होगा? जब फोर्स जीरो हो जाए या फिर डिस्प्लेसमेंट जीरो हो जाए या फिर एंगल 90° हो जाए। क्योंकि cos 90 क्या
होता है? ज़ीरो। तो ध्यान रखना वर्क आपका जीरो हो सकता है। कब-कब? जब फोर्स जीरो हो, डिस्प्लेसमेंट जीरो हो, एंगल 90° हो।
एग्जाम में 2019 के 19 नहीं शायद 20 में क्वेश्चन आया कि एक दीवार एक एक पत्थर को पुश करने में वर्क जीरो क्यों है? क्योंकि
पत्थर हिला ही नहीं। अरे पत्थर का डिस्प्लेसमेंट नहीं हुआ। इतनी इतनी सी बातें नहीं लिख पाओगे आप लोग। मेरी बात
समझ पा रहे हो? तो ऐसे सिंपल-सिंपल क्वेश्चन आते हैं कि दीवार पर वर्क दीवार को एक इंसान धक्का मार रहा था। वर्क ज़ीरो
है। क्यों भाई? क्योंकि दीवार का डिस्प्लेसमेंट ही नहीं हुआ। दीवार हिला ही नहीं। तो यहां पर डिस्प्लेसमेंट जीरो था
इसलिए वर्क ज़ीरो है। फिर एक एग्जाम में क्वेश्चन आता है कि भैया जो कुली है कुली किसकी बात कर रहा हूं मैं? कुली। तो जो
कुली के द्वारा किया गया वर्क जीरो होता है? क्योंकि पता है देखो ऐसा है? हां एंगल 90 हो जाता है कूली के केस में। देखो कूली
जो है मान लो ये कूली है। ये बंदा कोई कूली है। ठीक है? अब ये कूली अपने सर पे वजन लिए हुए हैं। क्या लिया हुआ है? वजन।
इसने अपने सर पे वजन लिया हुआ है। ये हाथ है हाथ। अब वजन लिया है तो आपको पता है जो वेट है वेट। ऐसे बहुत रफ्ली बता रहा हूं।
वेट किधर होगा? वेट होगा नीचे। वेट नीचे होगा। तो वेट नीचे है और बंदा आगे बढ़ रहा है। ऐसा कह सकते हो फोर्स फोर्स नीचे है
और जा कहां रहा है वो? आगे। तो दोनों के बीच में एंगल कितना हो गया? 90 नहीं समझ में आया? नीचे फोर्स और बंदा आगे तो एंगल
कितना हो गया? 90 तो हम कहते हैं कि वर्क डन बाय कूली इज़ जीरो। मेरी बात समझ पा रहे हो? तो छोटी-मोटी बातें समझना कि एग्जाम
में कूली वाला क्वेश्चन आएगा। तुम तो बोलोगे नहीं रियल में कूली ने तो काम किया है। भाई रियल में कूली ने काम किया है पर
फिजिक्स के हिसाब से उसने काम नहीं किया है। मेरी बात समझ पा रहे हो? जैसे एक एग्जांपल
लेता हूं। तुम्हारी मम्मी ने कहा कि बेटा इस अलमारी को उस कोने तक पहुंचा दे और तुम चार साल के हो। तुमने पूरी जान लगा दी
अपनी। चुप हो जाओ। तुमने पूरी जान लगा दी। उस उस अलमारी में सुबह पसीने पसीने तर बदर हो गए। और अलमारी का वहीं का वही है।
मम्मी आते ही कह रही है निकम्मा कहीं का नकारा कहीं का। एक छोटा सा काम दिया तो तुमने काम भी नहीं किया।
तो तुमने काम किया नहीं किया? तुमने तो किया। तो तुम्हारे हिसाब से काम हुआ है लेकिन
फिजिक्स के हिसाब से काम नहीं हुआ। फिजिक्स काम तभी मानेगा जब डिस्प्लेसमेंट
हुआ। क्या हुआ हो? डिस्प्लेसमेंट। मेरी बात नहीं समझे?
कोई दिक्कत तो नहीं है? तो फिजिक्स अलग हिसाब से काम करता है और हमारे सोच अलग हिसाब से काम करते हैं। बेटा बाहर जाओ
जल्दी तुम लोग जिस व्यक्ति को अपने टीचर के लिए रिस्पेक्ट नहीं है। अपने काम के लिए
रिस्पेक्ट नहीं है। डेढ़ घंटे के लिए यहां पे आते हो एक घंटे के लिए डेढ़ दो घंटे के लिए यहां पे आते हो। उसमें भी बातें करनी
है बकबक करनी है। कूल समझते हो अपने आप को तुम। कीड़े-मकोड़े पे जैसे रह जाओगे जीवन भर।
इंसान अगर पैदा हुए हो तो इंसान बनने के लिए ना मेहनत करनी पड़ती है, सुनना पड़ता है। पहले दूसरों को सुनो। मैं यहां पर
इतना बढ़िया से ट्राई कर रहा हूं कि तुम्हें हर एक चीज बताई जाए और तुम बकबक बकबक कर रहे हो। इतनी एक बार हो गया, दो
बार हो गया, तीन बार हो गया। लिमिट पार नहीं करना है। वरना उठा के फेंक दूंगा यहां से मैं।
डोंट गो बियों्ड द लिमिट। और ये गुस्सा करने वाली बात नहीं। सच बात है ये। इफ यू डोंट रिस्पेक्ट। ठीक है? कोई बात नहीं।
जाओ यहां से। पढ़ना है तो पढ़ो यार। नहीं पढ़ना है तो मत पढ़ो। खुद को डिस्टर्ब कर रहे हो। मेरा मूड डिस्टर्ब कर रहे हो
बार-बार। तो वर्क डन हमारा हो सकता है जीरो। नेचर ऑफ़ वर्क क्या हो सकता है? जीरो। जब
फोर्स ज़ीरो हो, डिस्प्लेसमेंट जीरो हो, एंगल 90 हो। कूली के केस में एंगल 90 बनता है। सिंपल पेंडुलम के केस में भी एंगल 90
बनता है। देखो, अगर कोई पेंडुलम है यहां पे और आपने पेंडुलम को यहां कर दिया। तो देखो यहां पर अब आना ये इस तरफ से आता है।
है ना? और जो फोर्स होता है रस्सी में इस तरफ होता है। पेंडुलम समझते हैं पेंडुलम? तो टेंशन जो है टेंशन
जो टेंशन है वो 90° बनाता है कितना बनाता है? 90°
टेंशन मेक्स 90° तो वर्क डन इसके केस में भी ज़ीरो होता है। तो सिंपल पेंडुलम के केस में वर्क डन बाय टेंशन। टेंशन मतलब
स्ट्रिंग के अंदर का फोर्स ज़ीरो होता है। ध्यान रखना। तो ऐसे ही अगर कभी क्वेश्चन आए कि वर्क क्यों ज़ीरो है? और तुम्हें
आईडिया ना हो तो सबसे पहले चेक करो फोर्स है कि नहीं। अगर फोर्स है तो फोर्स का आंसर मत लिखना। फिर चेक करो कि वो
डिस्प्लेसमेंट हो रहा है कि नहीं हो रहा है। डिस्प्लेसमेंट है तो समझ जाना आंसर एक ही। अगर फोर्स है और डिस्प्लेसमेंट भी है
तब भी वर्क ज़ीरो है। तब भी वर्क क्या है? ज़ीरो। तो आंसर होगा 90°।
आंख बंद करो 90 लिखो। कभी गलत नहीं होता। कभी गलत नहीं होगा। तुम्हें पता भी नहीं है कहां-कहां पे 90 बन रहा है। तुम्हें
पता है कि कहां-कहां पे 90 बनता है? अरे तुम्हें एंगल पता है कि कहां-कहां 90 बनता है? मैंने बोला कि सर्कुलर मोशन में वर्क
डन ज़ीरो है। सर्कुलर मोशन में सेंट्रिपेटल फोर्स द्वारा वर्क डन ज़ीरो है। तुम बोलोगे यार सर्कुलर मोशन है तो फोर्स है।
एक्सीलरेशन तो है। चल रहा है तो डिस्प्लेसमेंट भी है। दोनों है। फिर वर्क क्यों जीरो है? एंगल 90 होगा। कितना है?
एंगल 90। तो अपने आप आंसर लिख के आना है। जहां पर तुम्हें लगे कि वर्क जीरो नहीं होना
चाहिए और वहां पर वर्क ज़ीरो है। मतलब एंगल कितना हो जाएगा? 90°।
समझे मेरी बात को? नहीं समझे? क्योंकि देखो जब हम सर्कुलर मोशन करते हैं। सुनो मेरी बात। जब हम सर्कुलर मोशन करते हैं तो
फोर्स इस तरफ लग जो सॉरी जो फोर्स होता है फोर्स यूनिफॉर्म सर यूनिफॉर्म सर्कुलर मोशन में सेंट्रिपेटल फोर्स अंदर की तरफ
होता है। और पार्टिकल आगे बढ़ रहा होता है। पार्टिकल तो कितना एंगल बन रहा है?
90 इसलिए वर्क डन कितना होता है? तुम कहोगे यार वर्क हो तो रहा है काम हो
तो रहा है भैया जीरो ही होगा वो क्यों फिजिक्स के हिसाब से नहीं बात समझे अब मैं दिन भर इस दीवार
को धकेलता रहूं पसीना पसीना हो जाऊं और कहूं मैंने बहुत काम किया है साहब बहुत काम किया है फिजिक्स कहेगा नहीं मेरा
दीवार नहीं हिला कोई काम नहीं तो फिजिक्स अलग तरीके से बात करता है अब लॉजिक ढूंढो भी मत ठीक है फिजिक्स तो
ये हमने सीख लिया अब देखो यहां पर क्या है वर्क डन पॉजिटिव भी हो सकता है वर्क डन पॉजिटिव कब जब हमारा एंगल देखो फोर्स और
डिस्प्लेसमेंट की बात चल रही है। अगर हमारा देखो अब मैं एक छोटी सी बात सिखाता हूं जो अगर cos थीटा ना cos थीटा की बात
करें तो इसमें थीटा थीटा अगर 90 तक है कितने तक है 90 तक तो हम मानते हैं कि भाई पॉजिटिव वैल्यू देगा क्या देगा
मतलब 90 में तो ज़ीरो हो जाता है मतलब देखो ना cos 0 कितना होता है cos0 वन होता है फिर 90 तक समझ रहे हो बात को लेकिन अगर 90
को पार कर लोगे ना तो cos cosθ हो जाएगा तो नेगेटिव क्या हो जाता है 90 के बाद cosθ नेगेटिव हो जाता है सुनो
मेरी बात तो यहां पे क्या लिखा हुआ है देखिए आपका वर्क डन पॉजिटिव होगा। अगर थीटा 90
से कम हुआ। एंगल अगर 90 से कम है तो वर्क डन क्या होगा? पॉजिटिव। लेकिन अगर आपका एंगल 90 से बड़ा हो गया तो
वर्क डन क्या हो जाएगा? क्योंकि cos 90 से पहले पॉजिटिव होता है और 90 के बाद क्या होता है?
नेगेटिव। अगर cos पॉजिटिव तो वर्क पॉजिटिव। वर्क पॉजिटिव।
cos नेगेटिव तो वर्क नेगेटिव। क्या बात समझ में आ गया? तो ये नेचर ऑफ़
वर्क डन वाला टॉपिक हमने कर लिया। याद कर लेना। सबसेेंट ये वाला होता है ज़ीरो वाला कि फोर्स ज़ीरो तो वर्क ज़ीरो डिस्प्लेसमेंट
ज़ीरो तो वर्क ज़ीरो और आईडिया नहीं लग रहा कि क्यों है वर्क ज़ीरो तो एंगल क्या आंसर क्या होगा 90
90 समझ में आ गया अगर आईडिया नहीं लग रहा कि भाई क्यों है ज़ीरो तो 90 लिख के आ जाना वो
टीचर हंसते-हंसते आंसर देगा हंसते-हंसते खिलखिला के मजाक नहीं मतलब आंसर बोल रहा हूं वो नंबर देंगे ठीक है सो गाइस वी आर
एट व्हाट देखो वर्क डन मैं बताऊं मुझे दुख क्यों होता है मैं ऑलवेज ट्राई करता हूं कि यार हर बच्चे
को अच्छी एजुकेशन अच्छा मिले अच्छा कुछ लाइफ में बने। बट देखो अपनी फैमिली की सिचुएशन देखते हो आप लोग कि पापा कितना
काम अच्छा मतलब पापा इतना हार्ड वर्क कर रहे हैं। मम्मी इतना हार्ड वर्क कर रही है। इतना स्ट्रगलिंग है। स्टिल आप लोग ऐसी
बचकानी हरकतें करते हो यार 11th क्लास के बच्चे को हम बच्चा कहेंगे क्या? तुम्हें मतलब बाकी गाली देने के लिए, दोस्तों के
सामने कूल बनने के लिए फालतू जोक जोक मतलब हर चीज के लिए तुम बच्चे नहीं हो। एंड जहां पढ़ाई की बात है, सीरियसनेस की बात
है, वहां तुम बच्चे बन जाते हो कि हम तो बच्चे हैं भाई। बच्चे ऐसे ही होते क्यों फिर गर्ल्स ऐसे क्यों नहीं है अभी फिलहाल
बॉयज क्यों ऐसे हो जाते क्योंकि भाई क्या बोलूं मैं तुम लोगों को तुमने हद मचा दी सीरियसनेस पता है मजाक के वक्त मजाक
पढ़ाते वक्त पढ़ा मैं हंसीज़ाक नहीं करता क्या मैं करता हूं जब मुझे फील होता है कि नहीं भाई ठीक है थोड़ा अच्छा अच्छा थोड़ा
ऐसा नॉर्मल हो जाते हैं तो हो जाते पढ़ाई के वक्त तो यार सीरियस होना है सबको है ना देखो वक्त से पहले जो भी मिला है वो गलत
है जिसको जो भी वक्त से पहले जो भी मिल रहा है सब गलत है। हर चीज वक्त पर ही सही लगती है। तो हंसी मजाक वक्त पे सही है।
पढ़ाई लिखाई वक्त पे सही है। कहीं घूमने जाना है तो वक्त पे सही है। तो इस बात को समझो। अगर तुम्हें ये सब समझ में नहीं आ
रहा है तो समय तुम्हें अपने आप समझाएगा। समय टाइम इज वेरी पावरफुल। मतलब टाइम ऐसा नहीं होता कि टाइम तुम्हें ऐसे प्यार से
समझा रहा हूं जैसे मैं समझा रहा हूं कि बेटा पढ़ लो यार। ऐसे नहीं। [गला साफ़ करने की आवाज़] टाइम ऐसे बाल
पकड़ता है जमीन पर पड़कता है। चार बार। समझ रहे हो? तो उसका इंतजार करो। जो टाइम है तुम्हारा बाल पकड़ेगा जमीन पर तुम्हारी
नाक को रगड़ेगा अपने आप पता लग जाएगा जब तुम कुछ भी नहीं बनोगे कुछ नहीं कर पाओगे जीवन में लड़के हो तो लाइफ और हार्ड है
लड़की हो तो बहुत ज्यादा हार्ड है ना बिना एजुकेशन के फिर तुम्हें जीवन भर किसी के अंडर रहना पड़ेगा वो जो बोल रहा है जैसे
कर रहा है वैसे मत तो बहुत सारी बातें होती है लाइफ में अभी तुम्हें पता नहीं है तुम अभी मां-बाप तुम्हें सब कुछ दे रहे
हैं हाथ में तो यू आर फीलिंग कि हां भाई ठीक है लेकिन जिस दिन उनका साया हटेगा पता लग जाएगा अपने आप की व्हाट इज लाइफ
है ना? अपने आप पता लग जाएगा वो देख लेना तुम। ठीक है? अपने आप अपने आप पता लगता है यार। टाइम आएगा अपने आप देख लेना। सो यहां
तक तो हम समझ गए। नाउ द टॉपिक इज़ वर्क डन बाय वेरिएबल फ़ है ना? तो अब वेरिएबल फ़ का मतलब क्या है? पहले ही समझा चुका हूं मैं।
देखिए वेरिएबल फ़ से मेरा तात्पर्य क्या होता है? हमेशा। वेरिएबल फ़ मीन होता है कि भैया फ़ ऐसा लिखा है कुछ। 2 * x यानी अगर x
की वैल्यू वन होगी, तो फ़ कितना आएगा? 2 न्यूटन। x की वैल्यू टू होगी। टू पुट करो x की
वैल्यू। तो फोर्स कितना आ गया? 4 न्यूटन। यानी फोर्स समय-समय पर चेंज हो रहा है। फोर्स समय-समय पर
चेंज हो रहा है। तो जब भी हमारा फोर्स वेरिएबल होता है, वर्क डन का फार्मूला है ना इंटीग्रेशन से
करते हैं हम। f * dx जहां f का मतलब होता है फोर्स और dx का मतलब होता है स्मॉल डिस्प्लेसमेंट। क्या मतलब होता है?
स्मॉल डिस्प्लेसमेंट। और ये इंटीग्रेशन है। क्या है ये? इंटीग्रेशन।
तो आपको f * dx का इंटीग्रेशन करना पड़ता है। अच्छा अगर मैं ग्राफ बनाऊं यहां पे ग्राफ इधर देखो ये फोर्स है और ये है
डिस्प्लेसमेंट। तो अगर मैं यहां पर कोई भी एक से लाइन खींचूं एक मैंने रेक्टेंगल लिया। क्या
लिया? एक रेक्टेंगल। तो आप ठीक से एक चीज को फील करो मेरे साथ। ये जो दूरी होगी दूरी ये तो dx होगा। क्या होगा?
dx बोलो dx क्यों होगा? क्योंकि बहुत छोटा सा लिया मैंने। क्या लिया है?
दिख रहा है आप लोगों को? dx मतलब स्मॉल डिस्प्लेसमेंट। और ये क्या है? इस तरफ क्या है? f तो ये एक रेक्टेंगल दिख रहा है
आपको रेक्टेंगल। इस रेक्टेंगल का एरिया कैसे निकालते हैं बताओ? हाइट * विड्थ लेंथ * विड्थ तो लेंथ किसके बराबर होगा? f के
बराबर। दिख रहा है आपको? ये f है ना? तो लेंथ हो गया f के बराबर। और विड्थ किसके बराबर हो गया?
dx के बराबर। तो रेक्टेंगल का एरिया क्या होता है बताओ? f * dx
यानी कि f * dx का मतलब एरिया भी होता है। क्या होता है? यानी कि जो वर्क है हम एरिया से निकालते
हैं। किससे निकालते हैं? वर्क या तो इंटीग्रेशन से निकालेंगे या तो वर्क हम एरिया से निकालेंगे। क्या सबको ये
बात समझ में आती है? तो देखो यहां पर हमने क्या लिखा है? तो हमने ये लिखा है कि जब भी आपको ग्राफ दिया हो क्या दिया हो?
तो उसका अगर आप एरिया निकालोगे तो आपको ऑटोमेटिक क्या मिल जाएगा? आपको मिल जाएगा वर्क। क्या मिल जाएगा आपको? ऑटोमेटिक
कोई दिक्कत तो नहीं किसी को? पक्का पक्का। इसमें सब आ रहा है या नहीं आ रहा? आ ही रहा होगा।
ठीक है? तो कोई दिक्कत तो नहीं किसी को? मतलब अगर कभी ग्राफ दिया होगा जैसे मुझे किसी ने ऐसे बोल दिया कि भाई साहब बात ऐसी
है। ऐसा क्वेश्चन आता है एग्जाम में। ठीक है? उसने फोर्स ऐसे दिया, डिस्प्लेसमेंट दिया और वो कह रहा है भाई साहब बात ऐसी है
ना? बताओ कितना वर्क हुआ? तो मैं कहूंगा या तो इंटीग्रेशन या तो एरिया। वो ऐसे दे देगा आपको कि ये दो है, यह फोर्स है चार।
ऐसे कुछ भी दे देगा यार। फोर्स हो गया वन दे दिया उसने वन। बताओ भाई कितना वर्क होगा? तुम कहोगे पगले मुझे एरिया निकालना
है। तो लेंथ * विड्थ 2 * 1 2 अब देखो एग्जाम में क्वेश्चन ऐसा आ गया ना मजा आ गया नहीं कर रहा तुम बोलेगा ये बंदा अच्छा
नहीं पढ़ाता अगर उसने ट्रायंगल दे दे ट्रायंगल भाई कितने सारे कूद जाएंगे पता है तुम्हें गलती से ट्रायंगल दे दिया अब
ट्रायंगल का उन्हें पता है क्या अब उनको ट्रायंगल का वही पता नहीं है क्या बोलते हैं उसे भाई
ट्रायंगल का फार्मूला नहीं पता होगा एरिया का फस जाएंगे वो वो बोल देंगे आपको कि ये टू है। ये बोल देंगे ये मान लो थ्री है।
अब बोलेंगे बताओ वर्क कितना है? अब घर से वो घर से ये पढ़ के गए हैं। इसका कर नहीं पाएंगे क्योंकि उनको ट्रायंगल मतलब बोलता
रहा हूं 1/2 बेस * हाइट। बेस कितना है? थ्री। हाइट कितना है? टू। तो आंसर कितना आ गया?
3 जूल। कितना आ गया? 3 जूल आ गया वर्क। यानी कि मैं ये समझाने का प्रयास कर रहा हूं। थिंग्स आर ईजी।
कांसेप्ट्स भी बहुत ईजी है। आप अप्लाई नहीं कर पाते। रीज़न क्या? बहुत बेसिक-बेसिक बातें नहीं आती है। आपको
ये सब नहीं आता कि कैसे हम वर्क निकालें, कैसे एरिया निकालें। सिंपल-सिंपल बातें तो आपको आनी चाहिए। ठीक है? ठीक है? बात समझ
पा रहे हो अच्छे से? नाउ अब ये टॉपिक हमारा खत्म हो गया। देखो हमने अभी क्या खत्म किया? हमने वर्क को खत्म किया। किसको
खत्म किया? वर्क। नाउ वी आर गोइंग टू प्रोसीड फॉर द टॉपिक। टॉपिक है हमारे पास एनर्जी। टॉपिक का नाम क्या है बेटा?
एनर्जी। अब एनर्जी के बारे में हम सब जानते हैं। एनर्जी का बहुत सीधा मतलब होता है। सीधा
मतलब क्या होता है बताओ? एनर्जी इज़ बेसिकली व्हाट? कैपेसिटी टू डू वर्क। कैपेसिटी टू डू वर्क। अब देखो मेरे अंदर
एनर्जी ज्यादा है क्योंकि मैं भाई बहुत काम करता हूं। मेरी कैपेसिटी ज्यादा है तो एनर्जी ज्यादा है।
मान लो इस बच्चे की कैपेसिटी कम है तो एनर्जी क्या होगी? कम
कोई बिस्तर पे पड़ा हुआ है। क्या एनर्जी है भाई तेरे पास? कोई कैपेसिटी ही नहीं है तेरे पास यार। तो सिंपल सी बात है। एनर्जी
बेसिकली कैपेसिटी टू वर्क। यानी कि एनर्जी और वर्क दोनों एक ही बात है। नहीं समझे? मैंने कितना काम किया वही मेरी एनर्जी है।
मैंने कितना काम किया वही मेरी एनर्जी है। बात समझ में आ रही है ना बात? तो बहुत
सिंपल सी बात है। यानी कभी भी फ्यूचर में मुझे एनर्जी निकालना होगा तो मैं वर्क निकालूंगा। क्या निकालूंगा?
कि मैंने कितना काम किया वही मेरी एनर्जी बन जाएगी। वही मेरी एनर्जी होगी। तो यहां पर अगर हम बात करें तो हमें इस चैप्टर के
अंदर काइनेटिक एनर्जी के बारे में पढ़ना होता है। पोटेंशियल एनर्जी के बारे में पढ़ना होता है। जनरली अगर मैं बात करूं तो
पूरे मैकेनिक्स में या पूरे 11थ क्लास में काइनेटिक और पोटेंशियल से हम डील करते हैं। तो काइनेटिक एनर्जी किसकी वजह से
होता होता है ड्यू टू मोशन। काइनेटिक एनर्जी इज़ एनर्जी इन अ बॉडी ड्यू टू इट्स मोशन। जैसे ये पेन अभी मोशन में है। तो इस
पेन के पास काइनेटिक एनर्जी है। किसके पास है? काइनेटिक एनर्जी। और पोटेंशियल एनर्जी एक होता है। ये होता है ड्यू टू
कॉन्फ़िगरेशन। कॉन्फ़िगरेशन का मतलब क्या होता है? समझाता हूं। देखो, जैसे मैंने कहा, ये एक स्प्रिंग है, स्प्रिंग। अभी
स्प्रिंग की ये है कॉन्फ़िगरेशन। कॉन्फ़िगरेशन का मतलब समझ लो। शेप साइज की बात कर रहे हैं। किसकी बात कर रहे हैं?
शेप साइज की बात कर रहे हैं। कॉन्फ़िगरेशन से क्या समझोगे आप? शेप और साइज
यह कॉन्फ़िगरेशन समझोगे आप। तो देखो इस स्प्रिंग की जो कॉन्फ़िगरेशन यह है अभी। लेकिन अगर मैंने इस स्प्रिंग को समझना
मेरी बात को। मैंने इस स्प्रिंग को उठा के आगे कर दिया। मैंने इस इस इस बॉक्से को जो बॉक्स बॉक्सा है यहां बॉक्स लगा हुआ है
स्प्रिंग से उसको उठा के आगे कर दिया थोड़ा सा। आगे कर दूंगा तो क्या चेंज हो जाएगी बताओ? कॉन्फ़िगरेशन चेंज हो जाएगी।
कॉन्फ़िगरेशन? चेंज हो जाएगी। तो स्प्रिंग को जैसे ही खींच दिया उसकी
कॉन्फ़िगरेशन चेंज हो गई। अब तुम छोड़ दो उछलेगा वो क्योंकि तुमने उसके अंदर एनर्जी भर दी। कौन सी एनर्जी भर दी? पोटेंशियल
एनर्जी। तो जैसे ही किसी का शेप चेंज करोगे, जैसे ही किसी का साइज चेंज करोगे, जैसे ही
एटम्स के बीच का डिस्टेंस चेंज करोगे, तुरंत एक एनर्जी उसके अंदर डेवलप हो जाएगा, स्टोर हो जाएगा। उसका नाम है
पोटेंशियल एनर्जी। क्या नाम है? पोटेंशियल एनर्जी। तो काइनेटिक एनर्जी आता है ड्यू टू मोशन।
पोटेंशियल एनर्जी आता है ड्यू टू कॉन्फ़िगरेशन। ड्यू टू कॉन्फ़िगरेशन। क्या बात समझ में आ गई आप लोगों को? तो यह छोटा
सा टॉपिक है। इसको आप एक बार रीड कर लो अच्छे से। एक शॉर्ट नोट्स बना लो। फिर हम फटाफट आगे बढ़ेंगे। है ना? पॉज करना यार
नीचे से। कट हो गया? तो हमने अभी देखा था एनर्जी काइनेटिक और पोटेंशियल के बारे में। तो काइनेटिक
एनर्जी के बारे में हमारे पास क्या है? सुनिए। काइनेटिक एनर्जी का जो फार्मूला होता है बेसिकली 1/2 mv² होता है। सबको
पता होता है। और स्केलर क्वांटिटी और इसकी यूनिट होती है जूल। अब बात करते हैं कि भई काइनेटिक एनर्जी पढ़ लिया। अब इस चैप्टर
में जो सबसे इंपॉर्टेंट टॉपिक होता है एग्जामिनेशन पॉइंट ऑफ व्यू से ये वर्क एनर्जी थ्योरम फोर दो तरीके से होता है।
एक कांस्टेंट फोर्स के लिए एक वेरिएबल फोर्स के लिए। अभी हम वर्क एनर्जी थ्योरम फॉर और कांस्टेंट फोर्स देख रहे हैं। मतलब
फोर्स हमारा कांस्टेंट है। चेंज नहीं होगा समय के साथ। तो इसके लिए हम वर्क एनर्जी थ्योरम को पहले समझते हैं। स्टेटमेंट
देखेंगे। फिर प्रूफ देखेंगे। तो स्टेटमेंट हम क्या देखेंगे? स्टेटमेंट ये रहा देखो। ये ये बहुत लॉजिकल बात है। ये बहुत सिंपल
सी बात है। देखो अगर मैं आपसे ये कहूं बहुत सिंपल सी बात है। देखो मैंने कहा ये एक एक बॉल है यहां पे बॉल और इस बॉल की जो
वेलोसिटी है 10 मीटर पर सेकंड है। तो इसका मास m है। तो काइनेटिक एनर्जी कितना होगा? आप बोलोगे 1/2 m वेलोसिटी का
स्क्वायर 10 का स्क्वायर। ये कोई कोई ऐसी बात है कि अजीब सी नहीं। अगर मान लो इस पर मैं फोर्स लगा दूं। क्या लगा दूं?
और कुछ डिस्प्लेसमेंट कर दूं। क्या कर दूं? डिस्प्लेसमेंट। तो इसकी कुछ वेलोसिटी चेंज
होगी। वेलोसिटी कितनी चेंज होगी बताओ? तो मान लो वेलोसिटी 20 हो गई। मान लो कितनी हो गई?
20 तो काइनेटिक एनर्जी कितनी होगी? बताओ काइनेटिक एनर्जी 1/2 m 20² तो क्या
हम फोर्स लगाने पे या ऐसे कह दे कि फोर्स इन फोर्स और डिस्प्लेसमेंट लगाने से फोर्स लगाओगे तो डिस्प्लेसमेंट तो आएगा ही आएगा।
तो फोर्स एंड डिस्प्लेसमेंट की वजह से क्या इसके काइनेटिक एनर्जी में चेंज आ रहा है?
यही वर्क एनर्जी थ्योरम है कि व्हनेवर यू डू वर्क ऑन अ सिस्टम। इट्स काइनेटिक एनर्जी चेंजेस। नहीं समझे मेरी बात को? तो
यही वर्क एनर्जी थ्योरम है। क्या है? देखो जब भी इट स्टेट्स दैट वर्क डन बाय नेट फोर्स जो भी आपने वर्क किया। नेट मतलब
टोटल फोर्स इज़ इक्वल टू चेंज इन काइनेटिक एनर्जी ऑफ़ ए बॉडी। नहीं समझ में आया? अरे वर्क करोगे तो क्या चेंज होगा?
काइनेटिक एनर्जी। ये बहुत लॉजिकल बात नहीं है। बच्चे कहते हैं यार साइंस बहुत टफ हो गया। फिजिक्स इज़ वेरी टफ। क्या टफ है
इसमें? ये तो बहुत सिंपल बातें है ना। दैट इज वेरी सिंपल सिंपल सिंपल चीज है। तो यहां
से प्रूफ देखो प्रूफ। तो प्रूफ हम कैसे करते हैं इसको? यहां पर आपको दिख रहा होगा तो लिखा है प्रूफ ऑफ़ वर्क एनर्जी थ्योरम
फॉर अ कांस्टेंट फोर्स। तो हम ये मानते हैं कि अगर कोई बॉडी है जिसकी इनिशियल वेलोसिटी u है। इनिशियल क्या है?
u और फाइनल वेलोसिटी उसकी v हो गई। क्यों? क्योंकि हमने इस पे फोर्स लगाया। क्या
लगाया? फोर्स। फोर्स लगा के अगर हम डिस्प्लेसमेंट करेंगे
तो पहले वेलोसिटी u होगी। बाद में वेलोसिटी क्या हो जाएगी? तो हमें पता है कि v² - u² 2s होता है। क्या होता है? 2s
तो मैंने क्या किया? ध्यान देंगे। मैंने ना मल्टीपाइंग बोथ साइड बाय 1/2 m मैंने 1/2 m से यहां भी मल्टीप्लाई कर दिया तो
ये बन गया 1/2 mv² यहां मल्टीप्लाई कर दिया तो 1/2 mu² और यहां क्या हो गया? 1/2 m
a2। दिख रहा है आप लोगों को? तो टू से टू तो कट ही जाएगा। मेरी बात नहीं समझे? अब यहां
पर देखो जादू हो गया। जादू। जादू कैसे हो गया? मास * एक्सीलरेशन फोर्स होता है। देखो दोबारा बोल रहा हूं। जिसको ये नहीं
पता होगा कि मास * एक्सीलरेशन फोर्स होता है। मैं रिश्वत दूंगा यमराज को [हंसी] कि भाई नर्क के दरवाजे स्पेशल खोल
के रखो। ये है पापी व्यक्ति। है ना? इसको ये नहीं पता कि फोर्स * एक्सीलरेशन वो मास * एक्सीलरेशन फोर्स। सबको तो पता होगा ये।
कोई है ऐसा सादिक? पता है? ठीक है। इधर ध्यान दो। तो ऐसे मजाक कर रहा हूं। लेकिन भाई बहुत बेसिक
बात तो आनी चाहिए। तो हम बोलेंगे मास * एक्सीलरेशन जो होता है वो क्या होता है बेटा? फोर्स।
और बगल में डिस्प्लेसमेंट तो है ही। और फोर्स * डिस्प्लेसमेंट क्या होता है? वर्क।
और यहां क्या था? k फाइनल। फाइनल काइनेटिक एनर्जी और ये क्या है? k इनिशियल। क्योंकि इसमें वेलोसिटी फाइनल
है। तो फाइनल काइनेटिक एनर्जी। ये वेलोसिटी क्या है? इनिशियल। तो काइनेटिक एनर्जी इनिशियल। तो देखिए
वर्क किसके बराबर हो गया? क्या वर्क हमारा चेंज इन काइनेटिक एनर्जी के बराबर हो गया? चेंज। डेल्टा का मतलब क्या होता है? चेंज।
तो लो प्रूफ हो गया। तो क्या ये बहुत मुश्किल प्रूफ है? क्या तुम्हें इतनी 10 बार रटना पड़ेगा इसको? एक इसका खेल है
सारा। 1/2 m से मल्टीप्लाई किया। 1/2 m से मल्टीप्लाई किया। वो वर्क बन गया। ये फाइनल माइनस इनिशियल हो गया। खत्म। तो
फटाफट इसको रीड करो। 2 मिनट का टाइम लो। फिर हम आगे बढ़ेंगे। पॉज कर दो। ऑन कर दो।
हो गया। सो अगला टॉपिक होता है वर्क एनर्जी थ्योरम फॉर वेरिएबल फोर्स। क्या लिखा है? वर्क एनर्जी थ्योरम फॉर वेरिएबल
फोर्स। अब वेरिएबल फोर्स का मतलब क्या है? देखो सुनो आपको मैंने सिखाया था कि वेरिएबल फोर्स के
लिए वर्क का फार्मूला क्या होता है बताओ? f * dx अब छोटी-छोटी बातें समझते हैं कि देखो
यहां पर जो f है f का मतलब होता है मास * एक्सीलरेशन और एक्सीलरेशन का मतलब होता है dv / dt पता है आप लोगों को x एक्सीलरेशन
होता है चेंज इन वेलोसिटी / टाइम रेट ऑफ़ चेंज ऑफ़ वेलोसिटी है ना? तो मैं यहां पर ये जो फोर्स की जगह यही लिखने वाला हूं।
दिख रहा है आपको? f था। f की जगह पर ये लिख दिया और dx तो dx ही है। अब एक जादू जादू देखो जादू dx / dt ले लो dx / dt अब
सबको पता होगा x/ टाइम क्या होता है वेलोसिटी डिस्टेंस अप टाइम हो गया ना इधर से तो ये
वेलोसिटी हो गया तो आंसर क्या आया md तो m dv अब यहां पे हमने क्या किया मास कांस्टेंट
होता है बाहर ले लिया और अंदर v * dv कर दिया v * यहां सब लिखा है v का मतलब dx/ dt होता है
a का मतलब dv/ dt होता है और f का मतलब ma होता है जो भी यूज़ कर रहा हूं बता रहा हूं। तो m का फार्मूला क्या हो गया? ओ m
सॉरी। तो हमारे पास वर्क का फार्मूला क्या हो गया? m इंटीग्रेशन ऑफ़ v * में dv v * में
d और जिसको नहीं पता इसका इंटीग्रेशन का आंसर क्या होता है? बता दे रहा हूं मैं।
देखो इसका आंसर पता है क्या होता है? देखो इसका आंसर ये होता है। m की जगह पर m रहेगा। और v * dv का मतलब
होता है v² / 2 v² / 2 अच्छा जिसको नहीं पता मैं बता दूं मैंने YouTube पे इंटीग्रेशन के लिए और
डिेंशिएशन की डाल रखी है। 20 25 मिनट की वीडियो। किसी को अगर इंटरेस्ट हो तो देख सकते हो। देखा है किसी ने? नहीं देखा तो
कोई बात नहीं। देखना चाहो तो देख सकते हो। ठीक है ना? क्या किसको? बच्चों को।
मुझे दिखा और पेन कलर। अच्छा इधर क्यों बैठे हो? इधर कितनी जगह है। देखो पीछे।
चश्मा नहीं पहनते आप। कोई बात नहीं। अब देखो ध्यान से देखो ध्यान से। ध्यान दो इधर। तो ये यू है। और
ये ये लो गड़बड़ हो गया। अब टाइम लगाएगा ये पॉज कर देना प्रिपेयरिंग टू स्कूल अब देखो ध्यान से यहां पर u लिखा है
यहां पे v लिखा है क्या लिखा है v और ये क्या है पता है कैसे क्या बोलते हैं
इनिशियल लिमिट इनिशियल वैल्यू और फाइनल वैल्यू तो जब भी ये आंसर आ जाएगा ना देखो ये होती
है लिमिट u से लेके v को बोलते हैं हम लिमिट तो लिमिट u से v तक गई और v * dv का मतलब हो गया v² / 2 तो एक बार फाइनल
वैल्यू पुट करेंगे v की जगह पे और एक बार इनिशियल वैल्यू तो ये हो गया u और v देखो टू को है ना टू को मैंने बाहर ले लिया m /
2 कर दिया m / अब एक बार मैं फाइनल वैल्यू पुट करूंगा तो एक बार मैं यहां पर v पुट करूंगा तो आंसर
आएगा v² और माइनस इनिशियल वैल्यू तो आंसर आएगा u का स्क्वायर समझे तो फाइनल का स्क्वायर माइनस इनिशियल का स्क्वायर और
बाहर m / 2 चल ही रहा है। अब इस m / 2 को मल्टीप्लाई कर दो तो ये हो जाएगा इससे मल्टीप्लाई करो m / 2 तो m / 2 v² और m /
2 u² जो कि ये क्या हो गया? चेंज इन काइनेटिक एनर्जी। बात समझ में आ रहा है? ये फाइनल
हो गया इनिशियल। तो हमने क्या प्रूफ कर दिया? वर्क इक्वल टू चेंज इन इसी को बोलते हैं वर्क एनर्जी थ्योरम फॉर
वेरिएबल फोर्स। तो एग्जाम में आने का चांस है। ध्यान रखेंगे आप लोग। ठीक है? आई ट्राइड माय बेस्ट। एक बार आप भी इसे कर
लो। प्लीज इसको पॉज कर दो। ऑन करो। अब सुनो। वर्क एनर्जी थ्योरम फॉर वेरिएबल
फोर्स पढ़ने के बाद वी हैव द टॉपिक पोटेंशियल एनर्जी। ड्यू टू कॉन्फ़िगरेशन या सीधी भाषा में कहे
तो पोजीशन। जब भी किसी का पोजीशन चेंज होगा, फोर्स अगर वहां पर कोई फोर्स फील्ड है, मतलब वहां पर फोर्स भी होना चाहिए।
फोर्स के प्रेजेंस में अगर कहीं पोजीशन चेंज होता है, तो उसके अंदर पोटेंशियल एनर्जी आता है। जैसे स्प्रिंग को अगर हम
खींचेंगे, तो यहां पर पक्का फोर्स तो इन्वॉल्व है ही, तभी उसके अंदर एनर्जी आएगा ना? वर्क कर रहे हैं हम उसके ऊपर। है
ना? तो पोटेंशियल एनर्जी क्या होता ड्यू टू कॉन्फ़िगरेशन या पोजीशन लेकिन वहां पर फोर्स फोर्स होना चाहिए। समझ मेरी बात को?
जैसे चलो छोड़ो। समझ गए तुम्हें कि फोर्स की नीड है। अब पोटेंशियल एनर्जी का जो सिंबल है वो कैपिटल U इस्तेमाल होता है।
कैपिटल और फार्मूला होता है mgh। एक ग्रेविटेशनल पोटेंशियल एनर्जी है ये। वैसे सिंपल भाषा
में बताऊं तो मतलब ग्रेविटी वाला। जैसे मान लो एक बक्सा है। इस बक्से का मास है m और इसको हम h हाइट पर ले गए। कितने हाइट
पर ले गए? h हाइट। तो क्या हमने इसकी पोजीशन चेंज करी? हां।
इसको उठा के अगर मैं यहां ले गया तो मैंने इसकी पोजीशन में चेंज किया। जैसे ही मैं पोजीशन में चेंज करूंगा इसके पास एक
एनर्जी आएगी। उस एनर्जी का नाम है पोटेंशियल एनर्जी और फार्मूला होता है m * एक्सीलरेशन ड्यू टू ग्रेविटी इंटू में h
तो mgh होता है पोटेंशियल एनर्जी का फार्मूला। आई होप ये क्लियर होगा बचपन से पढ़ते आ रहे हो। तुम्हें क्या लगता है कि
तुम 11th क्लास में हो और तुम्हें क्या लगता है तुम 11th क्लास में हो और तुमसे कोई ये पूछेगा व्हाट इज पोटेंशियल एनर्जी?
बहुत ऑब्वियस सी बात है नो। तो इसके ऊपर इतना टाइम वेस्ट करने का कोई फायदा नहीं है। ये है टॉपिक पूछने वाला एग्जाम में।
इसके ऊपर पूछा जाता है। टॉपिक का नाम है कंजर्वेटिव फोर्स एंड नॉन कंजर्वेटिव फोर्स। तो इसके ऊपर क्वेश्चन एग्जाम में
पूछे जाते हैं। ठीक है ना? तो अगर हम कंजर्वेटिव फोर्स की बात करें तो इफ वर्क डन बाय द फोर्स इज़ इंडिपेंडेंट ऑफ़ पाथ देन
फोर्स इज़ कंजर्वेटिव। इंडिपेंडेंट का मतलब होता है आजाद। ये तो सबको पता होगा। तभी हम मनाते हैं आजादी का दिन। इंडिपेंडेंस
डे। मतलब अगर हमने कोई वर्क किया वर्कन बाय द फोर्स। आजाद है किससे? पाथवे से। जो पाथ पर डिपेंड ना करे तो उसको कहते हैं हम
कंजर्वेटिव फोर्स। जैसे फॉर एग्जांपल मेरी बात को समझना। जैसे एग्जांपल ये है कि मान लो यहां पर एक बक्सा रखा हुआ है। क्या रखा
हुआ है? बक्सा। और इस बक्से के ऊपर हम मान रहे हैं कि फोर्स है mg। कितना फोर्स है? mg।
अब इस बक्से को मुझे इस हाइट तक लेके जाना है। तो एक बंदा है वो ऐसे बिहार गया। पहले बिहार से राजस्थान, राजस्थान से इधर फिर
यहां पर लेके आया। तो हमने कहा तू भाई कहां पर आया है? वो कहेगा मैं तो यहां पर आया हूं सर। कितनी एनर्जी गई इसके अंदर?
हाइट कितनी है? h [गला साफ़ करने की आवाज़] एनर्जी कितनी हो गई? mgh। अगर हम बात करें वर्क की बात
करें चलो वर्क की। वर्क का मतलब क्या होता है? वर्क का मतलब होता है फोर्स * डिस्प्लेसमेंट।
फोर्स mg है। फोर्स क्या है? mg और जो डिस्प्लेसमेंट का मतलब पता है ना आपको? स्ट्रेट लाइन पाथ क्या होता है?
डिस्प्लेसमेंट। स्ट्रेट लाइन पाथ। तो स्ट्रेट लाइन पाथ क्या है? h
तो वर्क कितना आया? mgh। किसी ने कहा नहीं मैं इस बक्से को उठाऊंगा। पहले जाऊंगा घुमा मनाली घूम-घूम के फिर यहां पे
रखूंगा। मैंने कहा अच्छा भाई। तेरा फिर इसका वर्क निकाला हमने। बोला भैया वर्क का फार्मूला क्या होता है? फोर्स इंटू में
डिस्प्लेसमेंट। फोर्स है mg। फोर्स क्या है? और डिस्प्लेसमेंट कितना है बताओ?
डिस्प्लेसमेंट अभी भी h है। क्योंकि डिस्प्लेसमेंट का मतलब होता है इनिशियल और फाइनल पोजीशन के बीच की दूरी। अब बताओ
क्या ये जो वर्क है रास्ते पे डिपेंड किया? तो इधर से जा या इधर से जा क्या फर्क पड़
रहा है? वर्क तो हमेशा क्या रहेगा? mgh। यानी कि अगर वर्क पाथ पर डिपेंड नहीं कर रहा है तो ये जो फोर्स है वो कंजर्वेटिव फ़
है। यानी जो ग्रेविटेशनल फ़ होता है वो कंजर्वेटिव फ़ होता है। क्या होता है? कंजर्वेटिव फ़। क्या आपको बात समझ में आया?
या नहीं आया? बताओ। तो यहां पर क्या लिखा है? पढ़ो। इसको क्या लिखा है? इफ इफ वर्क डन बाय द फोर्स इज़ इंडिपेंडेंट ऑफ़ पाथ,
देन फोर्स इज़ कंजर्वेटिव। एग्ज़ांपल क्या है? mg. mg यानी ग्रेविटेशनल फ़ोर्स। लिख देता हूं मैं gf. क्या लिख रहा हूं मैं?
GF. अब हम भी देख लेंगे दिक्कत हो जाएगी। ठीक है? तो एग्जांपल क्या है यहां पर? GF। खुद लिखोगे ग्रेविटेशनल फोर्स। दूसरा है
इलेक्ट्रोस्टेटिक फोर्स। क्या है? इलेक्ट्रोस्टेटिक फोर्स। बात समझ में आ गया? तो इलेक्ट्रोस्टेटिक
फोर्स से भी हम वर्क करते हैं ना, तो पाथ पे डिपेंड नहीं करता। अच्छा, यहां पर क्या लिखा है? अगर वर्क डन इफ वर्क डन बाय द
फोर्स इज डिपेंडेड ऑन द पाथ जो पाथ पर डिपेंड करे देन फोर्स इज नॉन कंजर्वेटिव एग्जांपल है फ्रिक्शन कोई भैया इस रास्ते
से गया तो अलग फ्रिक्शन इस रास्ते से गया तो अलग
नहीं समझे मेरी बात को फ्रिक्शन जो है पाथ पे डिपेंड करता है तो फ्रिक्शन फोर्स द्वारा किया गया वर्क डन कैसा है
पाथ डिपेंडेंट और पाथ पर अगर डिपेंड कर रहा है तो जो फ्रिक्शन फोर्स है कैसा होगा नॉन
कंजर्वेटिव तो एग्जांपल है इसका फ्रिक्शन है फ्रिक्शन और विस्कोसिटी भी बोल सकते हो क्या बोल सकते हो
विस्कोसिटी या विस्कोसिटी क्या होता है फ्लूइड्स के अंदर होता है फ्रिक्शन। पानी के अंदर जो फ्रिक्शन होता है उसको बोलते
हैं विस्कोसिटी। एयर ड्रैग। एयर ड्रैग समझते हो? हवा के अंदर जो फ्रिक्शन होता है
समझ में आया? जैसे मैं इधर से गया। इधर हवा कुछ और है। उधर गया उधर हवा कुछ और है। तो अलग-अलग हमें समझ रहे हो ना बात
को? तो छोटी-मोटी बात थी। बहुत हीेंट बात थी। इसको लिख लेंगे। फिर हम पढ़ेंगे मैकेनिकल एनर्जी। प्लीज नोट इट डाउन। तो
प्यारे बच्चों, पिछले टॉपिक में ना पिछले पिछले एक पेज पे नीचे वाला पॉइंट छूट गया था। तो टॉपिक का नाम है रिलेशन बिटवीन
काइनेटिक एनर्जी एंड मोमेंटम। दिस इज़ेंट बहुत हीेंट है। अब देखिए काइनेटिक मतलब काइनेटिक एनर्जी और मोमेंटम कैसे जुड़े हुए
हैं। टिक मारने को भी आ जाता है कई बार। टिक मार्क वैसे एमसीक्यू में आ सकता है। है ना? बड़ीेंट रिलेशन है। ये देखो
काइनेटिक एनर्जी का फार्मूला होता है 1/2 mv² और मोमेंटम का फार्मूला होता है मास *
वेलोसिटी। मास * तो सुनो जो काइनेटिक एनर्जी के फॉर्मूले हैं उसमें आप नीचे m लिखो और ऊपर भी एक m
लिखो। तो ये क्या हो जाएगा? m² क्या हो जाएगा? यानी मास से मल्टीप्लाई डिवाइड कर दिया
मैंने। मेरी बात समझे? तो नीचे एक m लगाया। ऊपर भी एक m लगाया तो m² हो गया। अब ये हो गया m² v²
तो वो तो p² हो जाएगा। अगर m पे भी स्क्वायर करेंगे v पे स्क्वायर करेंगे तो p का क्या हो जाएगा?
तो हमने इसको बोल दिया भैया ये p² हो गया। क्या हो गया? तो p² हो गया। तो काइनेटिक एनर्जी का
फार्मूला क्या बन गया? 1/2 ऊपर p² / m p² / m तो काइनेटिक एनर्जी का फार्मूला होता है
1/2 मोमेंटम का स्क्वायर / 2m जहां p का मतलब होता है मोमेंटम। मोमेंटम हमेशा मास * वेलोसिटी होता है। आई होप आप ये समझ गए
होंगे। तो ये क्या होता है? मास इंटू में वेलोसिटी। तो मास * वेलोसिटी मोमेंटम होता है। क्या
बात समझ में आ गया? तो ये रिलेशन है। ध्यान रखना। काइनेटिक एनर्जी हमेशा क्या होता है? 1/2 मोमेंटम का स्क्वायर / 2m।
तो फटाफट इसे लिखो। है पॉज करना। लिख सकते हैं। देखो इसको ऐसे भी लिख सकते हैं। जैसे एक
बार मैं लिख के दिखाता हूं। p यहां पर p² / 2m काइनेटिक एनर्जी के बराबर आया ना? तो इस 2m को इधर भेज दोगे
तो क्या बन जाएगा? 2m = p² p को रूट लगा सकते हो यहां पे। तो ये 2mk का रूट लग जाएगा ना? और यहां हो जाएगा p तो मोमेंटम
= 2mk समझ में आ गया? पॉज कर दो। सो वो देख लिया हमने यहां तक देख लिया था। पिछला पेज भी कवर कर लिया। अब सुनो अगला टॉपिक
होता है हमारे पास मैकेनिकल एनर्जी। मैकेनिकल एनर्जी इस चैप्टर में है। एक प्रकार से समझ लो ये है टोटल मैकेनिकल
एनर्जी। इसे रफ में बोलते हैं टोटल एनर्जी। क्या बोलते हैं? टोटल एनर्जी। तो दो तरह की एनर्जी हमें पढ़ना होता है
काइनेटिक एंड पोटेंशियल। तो हम काइनेटिक और KE का मतलब काइनेटिक एनर्जी। P का मतलब पोटेंशियल। दोनों को ऐड कर देंगे तो
मिलेगा टोटल मैकेनिकल एनर्जी। बात समझ में आ गया? बहुत ईजी है? तो कुछ बोलूं क्या इसमें?
काइनेटिक जमा पोटेंशियल [हंसी] जमा मतलब हुआ। अब यहां पर एग्जाम में जो
क्वेश्चन फेमस आता है, दैट इज़ अ क्वेश्चन फेमस। क्वेश्चन ये आता है देखो कंजर्वेशन ऑफ़ मैकेनिकल एनर्जी इन अ फ्रीली फॉलिंग
बॉडी। कहने का मतलब क्या है? कि अगर कोई बॉडी है, देखिए ये ग्राउंड ये ग्राउंड है और यहां पर A पर, कुछ हाइट पर कुछ h हाइट
पर दिख रहा होगा आप लोगों को। एक बॉडी रखा हुआ है बॉडी। और इसकी इनिशियल वेलोसिटी जीरो है। फ्री फॉल कहते हैं इसको। वो
फ्रीली फॉल कर रहा है। तो हमें ये बताना है कि इसका एनर्जी हमेशा कंजर्व रहेगा। आपको पता है ना एनर्जी कैन नॉट बी
क्रिएटेड नॉट बी डिस्ट्रॉयड। है ना? तो एनर्जी कभी भी क्रिएट नहीं होता। डिस्ट्रॉय नहीं होता। ये
ट्रांसफॉर्म होता है। क्या होता है? ट्रांसफॉर्म। जैसे अभी मैं घर से कुछ भी खाना खा के आया हूं। अब देखो
ये हीट में कन्वर्ट हो गया। समझे? क्योंकि मैंने अभी वर्क किया तो वो हीट में कन्वर्ट हो गया। तो एनर्जी हमेशा कन्वर्ट
होता है। एनर्जी कभी खत्म नहीं होता। अब बोलोगे सर हां तो ठंडा हो गया। अब क्योंकि वो अब एयर में चला गया और यहां के एयर
मॉलिक्यूल ने ले लिया। सर फिर तो फिर क्या हुआ? तो एयर यहां के एयर मॉलिक्यूल तेज हो गए। ऐसे करने से यहां के एयर मॉलिक्यूल
हल्के से गर्म हो गए। पता नहीं चला हमें। तो एनर्जी ट्रांसफॉर्म होता रहता है। एनर्जी अनंत काल तक चलता रहता है। बहता
रहता है। एनर्जी बहता रहता है। तो वही हमें प्रूफ करना है कि कंजर्वेशन ऑफ़ एनर्जी कि इस बॉडी की जो एनर्जी है वो
कंजर्व्ड हमेशा सेम रहेगी। पोटेंशियल प्लस काइनेटिक। क्योंकि यहां पर बात कर रहे हैं हम मैकेनिकल की। किसकी बात कर रहे हैं?
तो हमने कहा ठीक है। A पॉइंट पर एनर्जी निकालते हैं। देखो सुनो देखो। मैंने यहां पर दो लिया है। आप तीन लेके चार लेके भी
प्रूव कर सकते हैं। मैंने दो पॉइंट लिया है A एंड B ईजी के लिए। अब एनर्जी एट A की बात करें तो A पर अगर हम निकालेंगे टोटल
एनर्जी। टोटल मैकेनिकल एनर्जी क्या है ये? टोटल एनर्जी या फिर मैकेनिकल एनर्जी। बात समझ में नहीं आ रही क्या?
या तो T बोल दो या Me T का मतलब टोटल एनर्जी। ME का मतलब कई लोग परेशान हो गए होंगे। तो मैं इसको
इसको भी Me ही लिख देता हूं। मैकेनिकल एनर्जी लिख रहा हूं यहां पे। पता लगे कई लोग तीसरी मंजिल ढूंढ रहे हैं। कि भाई
क्या लिख दिया इसने? ठीक है? तो मैकेनिकल एनर्जी है। ठीक है? तो काइनेटिक प्लस पोटेंशियल कहां पे लगा
रहा हूं मैं? A पर एनर्जी निकाल रहा हूं। लेकिन देखूंगा मैं कंसेप्ट है कि नहीं? तो मैं काइनेटिक एनर्जी का फार्मूला होता है
1/2 mv² पर a पर तो वेलोसिटी जीरो है। फॉल कर रहा है ना अभी? पोटेंशियल की बात करें तो हाइट हमेशा
ग्राउंड से मेजरमेंट होता है। किससे मेजरमेंट होता है? ग्राउंड से।
हाइट हमेशा ग्राउंड से मेज़मेंट होता है। तो यहां तक की हाइट कितनी है? h तो mgh यानी कि मैकेनिकल एनर्जी कितनी आई?
mgh। तो A पर इतनी एनर्जी आई है। [गला साफ़ करने की आवाज़] अब हम B की बात करते हैं। किसकी बात करते
हैं? B की। तो हमने कहा B पर बात करते हैं B पर। तो अगर हम B की बात करें B पे तो जो
मैकेनिकल एनर्जी होगा वो होगा काइनेटिक प्लस पोटेंशियल। अगर हम काइनेटिक की बात करें तो 1/2 m वेलोसिटी ऑफ़ b²
और पोटेंशियल की बात करें तो हाइट ज़ीरो हो गया। अरे b पर हाइट कितना हो गया?
ज़ीरो। b पर हाइट ज़ीरो हो गया ना? तो ये तो ज़ीरो हो गया। यानी जो मैकेनिकल एनर्जी है वो हो
गया 1/2 m वेलोसिटी ऑफ़ b² और ये ज़ीरो हो गया। तो क्या बचा? 1/2 m वेलोसिटी ऑफ़
b²। अब हम वेलोसिटी ऑफ़ b निकालते हैं। देखो चलो मैं वेलोसिटी ऑफ़ B यहां निकाल के
दिखाता हूं। आपको पता है कि ये पॉइंट A है, ये पॉइंट B है। तो आपको पता है ना कि वेलोसिटी ऑफ़ A² ऐसा ऐसा हमने पढ़ा है ना?
फाइनल का स्क्वायर - इनिशियल का स्क्वायर = 2gh पढ़ा है आप लोगों ने? अरे ये पढ़ा होगा ना? बता रहा हूं। देखो सुनो। आपने
ऐसा पढ़ा है ना? v² - u² = 2as तो यहां पर v मतलब फाइनल। फाइनल मतलब पॉइंट v। तो यहां जाएगा वेलोसिटी ऑफ़ v²। u
मतलब इनिशियल। इनिशियल कितना है? ज़ीरो। टू। और एक्सीलरेशन कौन है? ग्रेविटी। g एक्सलरेशन है ग्रेविटी। और S का मतलब
डिस्प्लेसमेंट। डिस्प्लेसमेंट है h तो वेलोसिटी ऑफ़ B का स्क्वायर कितना आ गया बताओ?
2gh यानी कि यहां से मैंने देखो, यहां से मैंने वेलोसिटी ऑफ़ B का स्क्वायर निकाला।
दिख रहा है आपको? जो कि कितना है? 2gh। कितना है? 2gh।
तो मेरा मैकेनिकल एनर्जी का जो फार्मूला आया था, 1/2 m वेलोसिटी ऑफ़ b² वेलोसिटी [नाक से की जाने वाली आवाज़] ऑफ़ b की जगह
पर पुट कर दूंगा। तो जैसे ही मैं वेलोसिटी ऑफ़ b की जगह पर पुट करूंगा।
वेलोसिटी ऑफ़ b की जगह पर पुट करूंगा। क्या होगा सोचो? 1/2 m रहेगा। 1/2 m और वेलोसिटी ऑफ़ b का स्क्वायर 2gh है।
वेलोसिटी ऑफ़ b का स्क्वायर कितना है? 2gh। टू से टू कट गया। आंसर कितना आ गया? mg तो A पर भी एनर्जी mgh था।
B पर भी एनर्जी कितना है? mgh। तो हम बोलेंगे मैकेनिकल एनर्जी एट A इक्वल
टू मैकेनिकल एनर्जी एट B तो एनर्जी इज़ कंजर्व्ड। बस फर्क इतना है
कि यहां पर A पर था पोटेंशियल। A पर क्या था? पोटेंशियल।
और B पर क्या हो चुका है? तो एनर्जी कन्वर्ट हुआ है पोटेंशियल से काइनेटिक में। पर डिस्ट्रॉय नहीं हुआ है।
अगर हमने इसको आगे सॉल्व किया। 1/2 mv² को आगे सॉल्व किया तो पोटेंशियल के बराबर ही आया है। a के बराबर ही आया है। तो एनर्जी
है ना? पर ट्रांसफॉर्म हो गया है। बात समझ पा रहे हो? तो हम बोलेंगे A पर जितनी एनर्जी आई उतनी ही B पर एनर्जी आई हमारी।
कोई दिक्कत तो नहीं। किसी को कोई दर्द हो रहा है? एनी प्रकार का पेन पेन हो रहा है किसी को? नहीं।
ठीक। अब सुनो देखो डायग्राम जो एग्जाम में आता है सुनो। तो ये इस तरफ है हाइट वाला एक्सिस डिस्टेंस। और इस तरफ है एनर्जी। तो
देखो काइनेटिक देखो सुनो। ये है पोटेंशियल का। किसका है? पोटेंशियल का लाइन। ये है काइनेटिक का लाइन। यहां पर P लिखा होगा
दिख रहा है आपको? और ये लिखा है K। तो पोटेंशियल का लाइन ऐसे काइनेटिक का लाइन ऐसे बोलो क्यों जब डिस्टेंस घट रही है
सुनो डिस्टेंस बढ़ने से पोटेंशियल बढ़ रहा है समझे तो ये और ये इन दोनों को मिला देंगे तो बन जाएगा टोटल क्या बन
जाएगा तो टोटल क्या होता है काइनेटिक प्लस पोटेंशियल एनर्जी तो ये ग्राफ एग्जाम में
पूछते हैं ध्यान रखना ये ग्राफ भी पूछते हैं एनर्जी का हाइट के साथ और ये ये क्या बोलते हैं प्रूफ भी पूछते हैं तो एग्जाम
में ये प्रूफ करके आएंगे ठीक है ना कई लोग तीन पॉइंट चार पॉइंट कई लोग तो ऐसा होता है तीन-तीन पॉइंट लेके प्रूफ करते हैं।
चार-चार पॉइंट लेके प्रूफ करते हैं। मैंने ईजी करने के लिए दो ही पॉइंट लिया है। ऐसा कुछ एग्जाम में लिखा नहीं आता कि तुम तीन
पॉइंट लो, चार पॉइंट लो। प्रूफ करना था कर दिया। ठीक है ना? देखो सिंपल सी बात है। इसे नोट कर लो। फिर आगे बढ़ते हैं। सो
पिछली बार देखो प्यारे बच्चों पिछली बार हमने ये किया था एनर्जी कंजर्वेशन प्रूफ किया था और ग्राफ समझाया
था मैंने आपको ग्राफ है ना कि पोटेंशियल जब बढ़ेगा काइनेटिक घटेगा। कन्वर्ट होते हैं आपस में। है ना?
तो अभी अपना ये चल रहा है। अगला टॉपिक है हमारे पास कि पोटेंशियल एनर्जी ऑफ अ स्प्रिंग। एक स्प्रिंग को जब हम खींचते
हैं जैसे ही हम स्प्रिंग को खींचते हैं तो वो ऑसिलेट करता है। भाई स्प्रिंग ऐसे-से हो रहा है। तो एनर्जी कहां से आया? तो हम
ऐसा कहते हैं जब हमने खींचा था तो हमने खींचा तो हमने क्या किया? वर्क। तो जो भी हमने काम किया वो स्प्रिंग के अंदर चला
गया। और जमा हो गया एज अ एनर्जी। जमा हो गया एज ए एनर्जी।
क्योंकि देखो मैं खाना पीना खाया। मैं सुबह से खाना पीना खाया और मैंने स्प्रिंग को खींचा खींचा। मैं थक गया। तो मेरे अंदर
की एनर्जी कहां गई? स्प्रिंग के अंदर। तो स्प्रिंग के अंदर एनर्जी मेरी ट्रांसफर हो गई। है ना? तो वही वाली बात है। तो हमें
ये पढ़ना है कि स्प्रिंग के अंदर कितनी एनर्जी ट्रांसफर हो जाती है? क्या पढ़ना है हमें? स्प्रिंग के अंदर कितनी एनर्जी
ट्रांसफर हो जाती है? देखो, तो यहां पर लिखा है स्प्रिंग फोर्स। fs स्प्रिंग फोर्स। सुनो मेरी बात। तो इसको स्प्रिंग
फोर्स का फार्मूला होता है - kx। क्या होता है? माइनस मतलब अगर कोई स्प्रिंग है सुन लो मेरी बात
अगर ये कोई स्प्रिंग है और मैंने इसको x दूरी पर ले गया। कितनी दूरी पर ले गया? x
तो स्प्रिंग के पीछे फोर्स पैदा होगा। अगर मैं स्प्रिंग को आगे करूंगा तो फोर्स कहां पैदा होगा? पीछे। और वो जो फोर्स होता है
वो होता है -k * x। जहां पर ये जो k है इसको बोलते हैं स्प्रिंग का कांस्टेंट। स्प्रिंग कांस्टेंट। ये आपने न्यूटंस लॉ
में पढ़ा है स्प्रिंग फोर्स के बारे में। फिर भी मैंने यहां रिवाइज करवा दिया कि भैया K का मतलब है स्प्रिंग कांस्टेंट और
ये X होता है डिस्प्लेसमेंट। अच्छा अब काम की बात क्या है? काम की बात ऐसा है कि हमने माना कि हमारा सुनो हमने ये माना
कि ये हमारा मास है यहां पे रखा हुआ है। स्प्रिंग से कनेक्टेड है स्प्रिंग से। और कुछ देर बाद मैंने क्या किया? मैंने इसको
थोड़ा आगे बढ़ा दिया। यहां से आगे बढ़ा दिया। क्या बढ़ा दिया? आगे। तो ये मेरा फोर्स हो गया। और पीछे हो गया स्प्रिंग फोर्स। समझे
मेरी बात को? स्प्रिंग फ़ हमें पीछे लगेगा। तो यहां पर हम वर्क निकालेंगे। वर्क वर्क क्योंकि जो हमने काम किया है वही स्प्रिंग
की एनर्जी है। समझ पा रहे हैं बात को? जो जितना हम काम करेंगे उतना एनर्जी भर पाएंगे स्प्रिंग में। मैं स्प्रिंग को
बहुत तेज खींचूंगा तो बहुत तगड़ी अगर एनर्जी आएगी ना उसके अंदर फिर तो स्प्रिंग बहुत तेज चलेगा। है ना? तो स्प्रिंग के
अंदर कितनी एनर्जी भरना है? वो किस बात पे डिपेंड करता है? आपने कितना वर्क किया है। तो वर्क का फार्मूला होता है f * dx का
इंटीग्रेशन। अब देखिए फोर्स का फार्मूला होता है - kx। अभी मैंने बताया आपको। तो यहां पर क्या होगा? देखो इंटीग्रेशन का
नियम क्या होता है? देखो -k तो बाहर आ गया और x का जो इंटीग्रेशन होता है प्यारे बच्चों वो हमेशा होता है x² / 2 क्या होता
है इंटीग्रेशन? x² / 2 और यहां पर लिमिट क्या है? x इनिशियल से x फाइनल। लिमिट समझ रहे हो? लिमिट का मतलब ये होता है कि आप
कहां से कहां [गला साफ़ करने की आवाज़] ले जाना चाहते हो? आप कहां से कहां पे ले जाना चाहते हो। जैसे मैंने कहा ये मेरा
स्प्रिंग है तो अभी जो स्प्रिंग है वो इनिशियली यहां पर है। अब मैं कहां ले जाऊंगा? तो ये x इनिशियल हो गया मेरा x
इनिशियल। जैसे मान लो इसको बोल रहा हूं x इनिशियल। अब मैं चाहूं तो इसको यहां ले जा सकता
हूं। तो ये हो गया मेरा x फाइनल। तो मुझे डिस्टेंस इनिशियल से डिस्टेंस फाइनल तक ले जाना है स्प्रिंग को। तो देखो यहां पर
इंटीग्रेशन का साइन था और ये - k हो गया बाहर। और x का जो x * dx का मतलब होता है x² / 2 और ये लिमिट होती है x इनिशियल से
x फाइनल। अब मैं लिमिट पुट करूंगा लिमिट। तो कैसे लिमिट पुट करूंगा? देखो मैं लिमिट ऐसे पुट करूंगा। देखो सुनो फाइनल वैल्यू
एक बार x की जगह पर फाइनल तो ये हो जाएगा देखो माइनस ये टू तो टू को बाहर ले लो। तो - k / 2 हो गया। फिर यहां पर क्या हो
जाएगा? ये देखो x फाइनल का स्क्वायर फिर माइनस x इनिशियल का स्क्वायर x में फाइनल वैल्यू - x में इनिशियल वैल्यू। इसको हम
ऐसे भी लिखते हैं और करके अगर हम माइनस साइन को इग्नोर कर दें तो आपका जो आंसर आएगा वो आएगा वर्क = k/ 2 k/2 x फाइनल
स्क्वायर दिख रहा है आप लोगों को - x इनिशियल स्क्वायर अगर मैं ये मान लूं कि स्टार्टिंग में मेरा स्प्रिंग ज़ीरो पर था
स्टार्ट x इनिशियल ज़ीरो है। स्टार्टिंग में स्प्रिंग मूव नहीं हुआ। मतलब स्टार्टिंग पोजीशन क्या है? ज़ीरो। तो यहां
पर हम x इनिशियल को जीरो पुट कर सकते हैं। यदि इनिशियल स्टार्टिंग पॉइंट जीरो है हमारा तो आंसर कितना आएगा? 1/2 k x² x
फाइनल स्क्वायर तो यही हमारा वर्क होता है। क्या होता है ये वर्क? यानी हमने इतना वर्क किया है स्प्रिंग के ऊपर। अगर हमने
इतना वर्क किया स्प्रिंग के ऊपर तो इतना ही एनर्जी उसके अंदर भर जाएगा। समझे? तो हम कहेंगे अगले स्लाइड में कि भैया देखो
जो भी आपने काम किया है दिस वर्क स्टर्ड एज अ इलास्टिक पोटेंशियल एनर्जी ऑफ़ ए स्ट्रेच्ड स्प्रिंग। कि स्प्रिंग की
एनर्जी बन गई है। क्या बन गई है? और सिंबल हमने दे दिया इसको u तो ये बन गया पोटेंशियल एनर्जी ऑफ स्प्रिंग। इसको u बोल
दो या कुछ भी बोल दो तुम्हारी मर्जी है। 1/2 kx² इसको p भी बोल देते हैं। p फॉर p पोटेंशियल एनर्जी ऑफ़ स्प्रिंग। तो
पोटेंशियल एनर्जी का फार्मूला क्या आ गया बताओ? 1/2 kx²। तो ये डेरिवेशन एग्जाम में आती है काफी बार। थ्री मार्क्स में आती
है। ठीक है ना? तो इसको आप एक बार नोट कर लेंगे कि टॉपिक का नाम क्या है? और कैसे डेरिवेशन हुआ है? क्या एक बार और
करवाऊंगा? स्क्वायर हो गया। पक्का है ना? समझ में आ गया ना? देख लो अपने हिसाब से ना बढ़िया है ये तो पोटेंशियल इंटीग्रेशन
करना है खाली इंटीग्रेशन करके लिमिट पुट करनी है x फाइनल - x इनिशियल और फिर x इनिशियल को जीरो पुट करना है प्लीज नोट इट
डाउन फिर हम आगे बढ़ेंगे टॉपिक इज वेरी सुंदर चलो प्यारे बच्चों ग्राफ को समझते हैं
ग्राफ को देखो ये ना एनर्जी और डिस्टेंस के बीच का ग्राफ है ध्यान रखना देखो कभी भी ध्यान रखना छोटी सी बात
कि यहां पर आप फील करेंगे कि देखो यहां पर ये जो लाइन है ये पोटेंशियल की है तो अगर पोटेंशियल बढ़ बढ़ रही है तो उसी पॉइंट पर
आपका काइनेटिक घटेगा। ये हमेशा होता है। एनर्जी कन्वर्ट होता है। पोटेंशियल काइनेटिक में पोटेंशियल पोटेंशियल में। तो
देखो जहां पर पोटेंशियल बढ़ेगा ना इस ग्राफ में तो वहीं पर काइनेटिक घटेगा। स्प्रिंग के लिए है। ठीक है? ध्यान रखना
है। स्प्रिंग के लिए ग्राफ ये बनाना है। तो ये एनर्जी बस इस डिस्टेंस के बीच का ग्राफ है। x और ये -x मतलब x + x का मतलब
स्प्रिंग को हमने खींच दिया। -x का मतलब स्प्रिंग को दबा दिया। तो जहां पर आप देखो यहां पोटेंशियल बढ़ रहा है तो काइनेटिक घट
रहा है। तो ये जो ये काइनेटिक है जो घट रहा है जो बढ़ रहा है वो पोटेंशियल है। और जब दोनों को मिला देंगे दोनों लाइन को टच
करवा देंगे तो ये बन जाएगा टोटल क्या बन जाएगा? काइनेटिक प्लस पोटेंशियल। तो ये ग्राफ को
याद करना है। वैसे बता दूं ये ग्राफ इस चैप्टर में कम यूज़ होता है। और सिंपल हार्मोनिक मोशन नाम का एक चैप्टर है। वहां
पर अच्छे से समझ में आएगा ये। ठीक है? तो ये हमारा एनर्जी खत्म हो गया अच्छे से। नाउ वी आर गोइंग टू स्टार्ट पावर। हमने
वर्क खत्म कर लिया। एनर्जी खत्म कर लिया। नाउ वी आर हैविंग पावर। देखिए पावर बेसिकली क्या होता है? रेट ऑफ डूइंग वर्क।
मतलब कितना वर्क आप कितने टाइम में करोगे आपकी पावर होगी। जैसे मेरे को किसी ने कहा कि भाई यहां पर 100 ईंटें हैं और कहीं
पहुंचाना है। मैंने 2 सेकंड में कर दिया। भाई क्या पावर है यार। समझे मेरी बात को? 2 सेकंड में 100 ईंटें उठा के रख दिया
कहीं पर। तो पावर अच्छी है। इसको बोलूंगा तीन जन्म। एक और जन्म ले रहा है। फिर तो बहुत टाइम लग गया तो पावर क्या है? कम।
समझ रहे हो? जन्म लेना पड़ रहा है तो दिक्कत है इसमें। तो देखो पावर का फार्मूला छुपा जाओ क्या होता है? वर्क अप
टाइम। ये एवरेज पावर का फार्मूला है। वर्क अप टाइम। अब देखिए वर्क का फार्मूला क्या होता है बताइए? फोर्स इंटू में
डिस्प्लेसमेंट। वर्क क्या होता है? फोर्स इंटू में डिस्टेंस।
और नीचे टाइम तो चल ही रहा है। तो डिस्प्लेसमेंट अप टाइम क्या हो जाएगा बताओ? वेलोसिटी।
तो पावर का एक और फार्मूला आज हमने पढ़ लिया। फोर्स इंटू वेलोसिटी। फोर्स इंटू तो पावर f. V होता है।
तो पावर इक्वल टू फोर्स * वेलोसिटी। इसको बोलते हैं हम इंस्टेंटेनियस पावर। क्या बोलते हैं?
इंस्टेंटेनियस। किसी भी इंस्टेंट पे पावर चाहिए तो फोर्स को वेलोसिटी से मल्टीप्लाई कर दो। इंस्टेंट मतलब कम टाइम के लिए एकदम
झटके से कम टाइम में। अगर कम टाइम में आपको पावर निकालना है तो वेलोसिटी देख लो कितना है। कितना फोर्स है, कितना वेलोसिटी
है उनको मल्टीप्लाई कर दो। आपको पावर मिल जाएगा। तो प्लीज नोट इट डाउन। फिर अगला टॉपिक हम स्टार्ट करेंगे। कोलीजंस। अच्छे
से कर लो बेटा। है ना? कोई दिक्कत नहीं है। कोई दिक्कत आए तो बता देना मुझे। सो प्यारे बच्चों नाउ वी आर हैविंग द
टॉपिक कोलीजंस। यह इंपॉर्टेंट टॉपिक है। यहां से जो क्वेश्चन बताऊंगा वही आएगा। ठीक है ना?
कोलीजंस में हमारे पास दो टॉपिक होते हैं। पहला है इलास्टिक कोलीजन और दूसरा है इनइलास्टिक कोलीजन। कई बार तो क्वेश्चन ये
बन जाता है इलास्टिक और इनइलास्टिक कोलीजन में डिफरेंस बताओ। देखिए जो इलास्टिक कोलीजन होता है उसमें मोमेंटम कंजर्व रहता
है। मोमेंटम मतलब मास * वेलोसिटी। तो मास * वेलोसिटी की वैल्यू कभी चेंज नहीं होगी। नो चेंज।
मोमेंटम कंजर्व्ड होने का मतलब है कि मास * वेलोसिटी कभी चेंज नहीं होता। मतलब वेलोसिटी भी चेंज नहीं होगी। तो इलास्टिक
कोलीजन में मोमेंटम कांसेप्ट रहता है। फॉर एग्जांपल मैं बहुत आइडियल केस ले रहा हूं। आइडियल एक बॉल लेके मैंने दीवार पे मारा।
मैंने 10 की स्पीड से मारा और वो लौट के आ गया मेरे हाथ में। तो मैंने कहा अरे मोमेंटम कांसेप्ट है। मोमेंटम क्या है?
तो जो कोलाइड हुआ है। कोलीजन मतलब कोलीजन टकराना। ये जो कोलीजन है इलास्टिक है। क्या है?
इलास्टिक। तो इलास्टिक कोलीजन में क्या होता है? बात समझ में आया? इलास्टिक कोलीजन के अंदर
आपका मोमेंटम का कंजर्व रहता है। यानी बॉल को फेंकोगे तो बॉल वापस आएगा। आपने 10 की स्पीड दी तो वो आएगा वापस। समझे मेरी बात
को? तो यहां पे लिखा है काइनेटिक एनर्जी कंजर्वड। यहां पर एनर्जी भी कंजर्व रहता है। मतलब एनर्जी का समझ रहे हो? एनर्जी
कंजर्व रहता है। एनर्जी लॉस नहीं होता। यहां पर क्या है? टोटल एनर्जी कंजर्वड। यहां पर टोटल एनर्जी भी कंजर्व रहता है।
काइनेटिक एनर्जी भी कंजर्वड। टोटल एनर्जी भी कंजर्व्ड, मोमेंटम भी कंजर्वड। लेकिन अगर हम बात करें इनइलास्टिक कोलीजन
इनइलास्टिक का एग्जांपल क्या है? मैंने कहीं से कीचड़ उठाया कीचड़ या फिर मिट्टी गीली मिट्टी और दीवार पर मार दिया वो चिपक
जाएगी या आटा उठाया गीला आटा दीवार पे मारा चिपक गया तो इसको बोलते हैं हम इनलास्टिक कोलीजन मतलब इलास्टिक में लौट
के आता है इनइलास्टिक में लौट के नहीं आता मेरी बात समझे नहीं समझे कोई दिक्कत तो नहीं किसी को जैसे तुम्हें मैंने दलदल में
फेंक दिया पकड़ा इसका दलदल में फेंक दिया चिपक जाएगा दलदल में आएगा या नहीं आएगा लेकिन अगर इसी को मैं अगर मैं बॉलीवुड
मूवी की बात कर लूं जैसे वो ऐसे मारते हो और बंदा उनसे ज्यादा वो चल जाता है। ठीक है ना? टॉलीवुड बॉलीवुड जो भी है तो
वो इलास्टिक और दलदल में फेंक दिया तो इनलास्टिक। तो यहां पर देखो यहां पर मोमेंटम को तो देखो मोमेंटम हमेशा कंजर्व
होता है। मोमेंटम इज़ कंजर्व। मोमेंटम कंजर्वेशन इज़ ऑलवेज वैलिड। पर यहां पर देखो काइनेटिक
एनर्जी इज़ नॉट कंजर्व्ड। उसके पीछे रीज़न क्या है? काइनेटिक एनर्जी का लॉस हो रहा है। और टोटल एनर्जी इज़ कंजर्व्ड। यहां पर
टोटल एनर्जी तो कंजर्व्ड है, पर यहां पर बस काइनेटिक कंजर्व नहीं होता। मेरी बात समझे? तो इन दोनों में अगर फर्क निकालें
तो सबसे बड़ा फर्क क्या है? यहां पर काइनेटिक एनर्जी कंजर्व्ड है। यहां काइनेटिक एनर्जी कंजर्व नहीं होता। और
मोमेंटम तो हर जगह ही कंजर्व होता है। क्या बात समझ पा रहे हो? अच्छा मुद्दा समझ में आ गया? ठीक है? कोई दिक्कत नहीं है?
अच्छा देखिए किसी को प्रॉब्लम तो नहीं है? मोमेंटम कंजर्वेशन से? देखो, मोमेंटम कंजर्वेशन का मतलब है मास * वेलोसिटी का
जो समेशन है हमेशा क्या रहेगा? सेम। कि मैं अगर किसी बॉल को फेंकूं, उसका मास * वेलोसिटी निकालूं और बाद में भी उसका
मास को वेलोसिटी से मल्टीप्लाई करूं तो आंसर सेम आएगा। तो उसको बोलते हैं मोमेंटम कंसंट्रेशन। तो ये बातों को आप याद रखना।
ठीक है? आगे देखो आगे। अब हमें क्या पढ़ना होता है जो एग्जाम में आता है ये वाला क्वेश्चन आता है एग्जाम में। इलास्टिक
कोलीजन इन वन डायमेंशन। इलास्टिक कोलीजन इन वन डायमेंशन। वन डायमेंशन मतलब देखिए इस चैप्टर में टू
डायमेंशन भी है। पर टू डायमेंशन से आज तक क्वेश्चन नहीं आया। बहुत ही रेयर है। आएगा ही नहीं। पर मैंने लास्ट में टू डायमेंशन
का हल्का सा बताऊंगा जो जितना हमारी एनसीआरटी में लिखा है पर पेपर में नहीं आएगा तो उसको मैं ऐसे भगा भगा के करा
दूंगा। अब यहां पर क्या है? इलास्टिक कोलीजन वन डायमेंशन मतलब स्ट्रेट लाइन में इसमें देखो पढ़ना है हमें तो इलास्टिक
कोलीजन आपको पता है क्या होता है? जैसे कोई एक बॉडी जिसका मास है m1 जिसकी वेलोसिटी है u1 मान लो उस बॉडी का नाम है
a कोई दूसरी बॉडी होगी b उसका मास है m2 वेलोसिटी है u2 ये जो u1 और u2 है इनिशियल वेलोसिटी है दोनों आपस में टकरा गई जब
दोनों आपस में टकरा जाएगी तो इस वाले की जो मास है वो m1 है वेलोसिटी हो जाएगा v1 वेलोसिटी बदल गया यहां मास तो m2 रहेगा
इसका वेलोसिटी हो गया v2 टकरा के अलग हो गए तो हमने कहा भैया कौन कौन सा कोलीजन है? इलास्टिक है। तो यहां पर हमें निकालना
क्या होता है? तो एग्जाम में कुछ भी पूछ लेते हैं कुछ भी। तो जो जो चीजें आएगी बताऊंगा मैं आपको वो एग्जाम में ऐसे
क्वेश्चन आएगा। एग्जाम में ये आता है। देखो 99% पेपर्स में यही क्वेश्चन आया है बार-बार ये वाला कि प्रूफ करो वेलोसिटी ऑफ़
एप्रोच इज़ इक्वल टू वेलोसिटी ऑफ़ सेपरेशन। यानी कि जिस प्रकार दोनों बॉडी एप्रोच कर रहे हैं टक्कर खाने के बाद उस प्रकार से
ही क्या होंगे? सेपरेट। जैसे वो एप्रोच कर रहे हैं, जैसे वो पास आ रहे हैं, वैसे ही सेपरेट होंगे। ये प्रूफ करो। तो ये प्रूफ
करने के लिए एग्जाम में आता है और यही हम प्रूफ करेंगे इलास्टिक कोलीजन के अंदर। तो यहां पर इलास्टिक अगर कोलीजन है, तो हम
इलास्टिक कोलीजन में क्या-क्या बातें जानते हैं? वेरी फर्स्ट बात इलास्टिक कोलीजन का कि प्यारे बच्चों मोमेंटम
कंजर्वड है। मोमेंटम क्या है? तो हमें मोमेंटम कंजर्वेशन को पढ़ना पड़ेगा। तो मोमेंटम कंजर्वेशन कहता है कि
इसका मास * वेलोसिटी कितना है? m1u1 इसका मास इंटू वेलोसिटी क्या होगा? देखो इसका मास * वेलोसिटी होगा m2u2
तो जो इनका इनका जो मोमेंटम है इनका जो भी मोमेंटम है वह इसके मोमेंटम के बराबर होगा तो ये तो कंजर्वेशन है जैसे मैंने दीवार
पे फेंक के मारा तो मेरे स्टार्टिंग में कितना दिया और मेरे को मिला कितना वो बराबर होगा तो बोलेंगे कंजर्वेशन है क्या
है कंजर्वेशन तो हम कहेंगे m1v1 + m2v2 के बराबर है तो m1u1 + m2u2 मतलब इनिशियल मोमेंटम इन दोनों का इक्वल है फाइनल
मोमेंटम के m * v1 1 m2 * v2 तो ये मोमेंटम कंजर्वेशन हो गया। यहां से हम क्या गेम खेलते हैं कि वन वाले को वन वाले
के साइड, टू वाले को टू वाले के साइड। तो वन की तरफ वन को ले आऊंगा मैं m1 v1 को ले आया इस तरफ। और ये टू वाला है तो इस तरफ
इधर ले गया मैं। समझ पा रहे हो? ये m2 u2 को उस साइड ले गया। तो वन वाला वन तरफ टू वाला टू तरफ। अब कॉमन क्या आ रहा है? m1
यहां से कॉमन आ जाएगा। तो यहां अब बचेगा u1 - v1 समझ में आया? जब m1 कॉमन हो जाएगा, m1 कॉमन हो जाएगा,
तो u1 - v1 बचेगा। वैसे ही यहां पर m2 अगर कॉमन हो गया तो v2 - u2 ये आपका इक्वेशन वन होगा और ये आपका इक्वेशन टू होगा। अब
अगले स्टेप में क्या करोगे आप प्यारे बच्चों? ध्यान दो। अब बोलो अगर ये इलास्टिक कोलीजन है तो इसके अंदर काइनेटिक
एनर्जी भी कंजर्व होता है। तो काइनेटिक एनर्जी क्या कहता है? 1/2 m1 u1² 1/2 m2u2²
इक्वल टू में क्या? 1/2 m1 फाइनल का स्क्वायर 1/2 m2 फाइनल का स्क्वायर। तो इनिशियल काइनेटिक एनर्जी दोनों का इक्वल
होगा दोनों के फाइनल काइनेटिक एनर्जी के बराबर। फिर यहां पे भी वही गेम खेलना है। हाफ से हाफ तो कट जाएगा। साफ दिख रहा है।
वन वाले को वन वाले के साथ टू वाले को टू वाले के साथ। तो m1 u1 के पास कौन आ जाएगा? m1v1 आ गया माइनस हो के। वैसे ये
टू है तो ये टू वाला उस तरफ चला जाएगा। तो m2v2² था। माइनस में कौन आ गया? m2 u2 क्या बात समझ में आ गया? अगला नियम क्या
हो गया? आप समझ गए। यहां से दोबारा सेम है ना सब कुछ? यहां से लेंगे m1 कॉमन। क्या लेंगे? तो यहां बन जाएगा U1² चलो आगे बता
रखा है मैंने कर देता हूं। लिखने की जरूरत नहीं पड़ेगी। देखो फिर अगले स्टेप में कुछ नहीं करना हमें।
अगले स्टेप में मैंने m1 कॉमन लिया। देखो अगले स्टेप में मैंने m1 को कॉमन लिया प्यारे बच्चों। तो ये बन गया u1² - v1²
वहां से m2 कॉमन लूंगा तो क्या बचेगा? v2² -2 नहीं समझे नहीं मेरी बात को? देखो ना m1 कॉमन आ गया। U1² - V1² यहां से M2 कॉमन
आ गया। V1² - U2² क्या बात है। तो यहां से कॉमन आ गया। m1 m2 कॉमन आ गया।
अब इसका यहां पर एक रूल लग रहा है। देखो a - b² जो कि होता है सॉरी हो a² - b² लग रहा है। a² - b² जो कि होता है a + b a -
b तो u1 + v1 u1 - v1 समझ में आया? a² - b² तो a + b a - b लग गया। अच्छा तो इसको मान लिया हमने इक्वेशन थ्री। क्या मान
लिया? इक्वेशन थ्री। अब ध्यान से देखो ध्यान से। अगर आप इक्वेशन थ्री और इक्वेशन टू को डिवाइड करते हो तो क्या मिलेगा?
देखो इक्वेशन टू को देखो। इक्वेशन टू में m1 है और u1 - v1 m2 है। v2 - u2 है। और इक्वेशन थ्री को देखो। इक्वेशन थ्री में
भी है सब है। देखो m1 है, u1 - v1 है, m2 है, v2 - u2 है। तो डिवाइड करने पे कट जाएगा।
नहीं समझे मेरी बात को? तो क्या-क्या कट जाएगा ना ये? M1 और ये पूरा कट जाएगा। m2 ये पूरा कट जाएगा क्योंकि डिवाइड करेंगे
ना ऊपर नीचे रहेगा। तो बचेगा क्या? u1 + v1 v2 + u2 तो बड़ा ईजी है। देखो दो तरह कंजर्वेशन लगाना है। काम खत्म।
तो u1 + v1 v2 + u2 अब कुछ नहीं किया मैंने। वन के पास वन को ले आया तो u1 - u2 v2 - v1 तो देखो इनिशियल वेलोसिटी का
डिफरेंस है ये और ये फाइनल वेलोसिटी का डिफरेंस मतलब इनिशियली कैसे वो एप्रोच कर रहे थे मान लो इसका 20 है और इसका 30 है
तो कितनी वेलोसिटी से वो आगे बढ़ रहे हैं 10 क्योंकि मैं 30 से चल रहा हूं तो 20 से चल रहा है तो हमारे में कितने का फासला है
10 का तो ये हो गया वेलोसिटी ऑफ़ एप्रोच कितनी वेलोसिटी से उसके पीछे भाग रहा है वो 10 की वेलोसिटी से और ये फाइन फाइनल
माइनस हो रहा है। फाइनल ऑफ़ सेकंड माइनस फाइनल ऑफ़ फर्स्ट। मतलब कितनी वेलोसिटी और सेपरेट हो रही है टकराने के बाद। तो क्या
प्रूफ हो गया? वेलोसिटी ऑफ़ एप्रोच इज़ इक्वल टू वेलोसिटी ऑफ़ सेपरेशन। अच्छा मेरी बात सुनो। अगर हम इस वैल्यू का इस्तेमाल
करें। ये इक्वेशन फोर है हमारा। क्या है? इक्वेशन फोर। अगर [नाक से की जाने वाली आवाज़] ये जो वैल्यू
आया है उसको हम पुट कर दे अगर इक्वेशन वन के अंदर। और इक्वेशन वन कौन सा है? इक्वेशन वन है आपका मोमेंटम कंजर्वेशन
वाला। ये इसके अंदर पुट करने से सुना नहीं है। ठीक है? तो उसके अंदर पुट करने से पता है
क्या मिलेगा आपको? ये मिलेगा। v1 मिलेगा। v1 पुट किया मैंने। देखो इक्वेशन वन में पुट
किया ये और दिखा दिया एक ही स्टेप। इतना ही करना होता है बुक्स में भी इतना ही होता है। तो इससे क्या प्रूफ हो जाएगा? v1
की वैल्यू। v1 मतलब फाइनल वेलोसिटी ऑफ़ फर्स्ट पार्टिकल आफ्टर कोलीजन। टकराने के बाद फाइनल वेलोसिटी का फार्मूला क्या है?
देखो। m1 - m2 m1 + m2 u1 2m2 m1 + m2 u2 और ये हो गया वेलोसिटी v2 v2 मतलब फाइनल वेलोसिटी ऑफ़ बताओ सेकंड पार्टिकल आफ्टर
कोलीजन तो एग्जाम में दो ही तरह के क्वेश्चन बनते हैं। पहला क्या? अगर तीन नंबर का आएगा तो यहां तक आएगा। पांच नंबर
का आएगा तो यहां तक आएगा। वेलोसिटी ऑफ़ एप्रोच इज़ इक्वल टू वेलोसिटी ऑफ़ सेपरेशन एंड फाइंड फाइनल वेलोसिटी। तो ये फाइनल
वेलोसिटी है। ये v1 v2 क्या निकाला आपने? फाइनल वेलोसिटी। दीज़ आर द फाइनल वेलोसिटीज। ये आपके फाइनल वेलोसिटी है।
फर्स्ट [नाक से की जाने वाली आवाज़] पार्टिकल सेकंड पार्टिकल का। अब याद करने का ट्रिक क्या रहेगा? देखो ट्रिक बड़ा आसान
है। देखो सुनो। देखो आप यहां पर वन है ना वन। तो आपने लिख दिया m1 - m2 m1 + m2 और यहां पर लिख दिया आपने
u1। क्या लिख दिया? फिर आपने यहां का याद कर लिया। देखो 2m2 नीचे तो m1 + m2 ही होता है। कोई दिक्कत
नहीं है। यहां पर आ गया u2 मतलब 2m2 u2 याद रखो बस। नीचे m1 + m2 चल ही रहा है और यहां v1 है तो यहां पर u1 हो ही जाएगा।
अच्छा मैं अगर कैसे याद करूंगा इसको अगर मुझे याद करना है तो मैं बोलूंगा v1 लिखना है मुझे। तो सबसे पहले मैं लिखता हूं m1 -
m2 m1 + m2 फिर मैं कहता हूं यहां पर वन है ना तो यहां पर u1 फिर मुझे याद है कि यहां पर 2m2 होता है। 2m2 m1 + m2 और जब
मैं u1 पहले लिख चुका हूं तो यहां पर क्या लिखना पड़ेगा? u2 अगर मुझे v2 लिखना है फाइनल वेलोसिटी ऑफ़
सेकंड पार्टिकल तो m2 - m1 कर दूंगा। यहां पर m2 + m1 कर दूंगा। यहां पर u1 की जगह पर u2 अब ये वन
है तो यहां पर क्या हो जाएगा? टू है तो यहां पर हो जाएगा वन 2 m2 + m1 और यहां पर क्या हो जाएगा बताओ? U1 तो ये आपको याद
करना है। कैसे भी करना है। मुझे नहीं फर्क पड़ता। कैसे करोगे? लेकिन करना पड़ेगा। देखो क्योंकि ये डेरिवेशन बहुत टफ होता
है। मैंने ईजी कराया जितना हो सकता है। तो इसको नोट करो फटाफट। फिर हम आगे बढ़ेंगे। टॉपिक का नाम है इलास्टिक कोलीजन इन वन
डायमेंशन और क्वेश्चन क्या था बता दिया मैंने। वेलोसिटी ऑफ़ सेपरेशन इक्वल टू वेलोसिटी ऑफ़ एप्रोच। ठीक है? ठीक है? ये
बातें लिख लो फटाफट। [गला साफ़ करने की आवाज़] सो बेटा ये एक डेरिवेशन है जो एग्जाम में
आता है। इलास्टिक कोलीजन का डेरिवेशन पढ़ने के बाद वी हैव दिस डेरिवेशन। चुप हो जाएंगे। परफेक्टली इनइलास्टिक कोजन इन वन
डायमेंशन या फिर शो दैट काइनेटिक एनर्जी इज इनवेरिएबली लॉस्ट इन सच अ कोलीजन मतलब
इसको सिंपल बोले तो लॉस्ट इन काइनेटिक एनर्जी जब भी हमारे पास एक इनलास्टिक कोलीजन होगा कौन सा कोलीजन है देखो
इनइलास्टिक तो हमें प्रूफ करना है कि ऐसे प्रकार के कोलीजन में क्या होता है काइनेटिक एनर्जी क्या होता है लॉस्ट
तो हमें ये प्रूफ करना है कि क्या बातें कर रहे हो ऐसे इधर ध्यान दो अब
कोई बातें नहीं करेगा अगर कोई मुंह पे हाथ रख के बातें करेगा पता लग जाएगा मुझे mg क्या होता है ये
कोई बात नहीं शांत हो गए सब चलो अब पढ़ लेते हैं सो शो दैट
काइनेटिक एनर्जी [हंसी] लॉस्ट इन सच अ कोलीजन। इनइलास्टिक कोलीजन में काइनेटिक एनर्जी लॉस होता है। प्रूफ
करना है। देखो तो प्रूफ करने के लिए ना पहले हम क्या करते हैं? देखो सुनो। हम मानते हैं एक बॉडी है m2 जिसकी वेलोसिटी
है जीरो। रेस्ट पर कोई बॉडी है और एक कोई दूसरा बॉडी आया m1 जिसका स्पीड है u1 वो गया और जा के टकरा गया। गया और जाके टकरा
गया। जब ये जाके इसमें टकराएगा तो ये जाके दोनों मान लो चिपक गया। बस में क्या हो गए? चिपक गए। तो ये m1 m2 आपस में चिपक गए
और एक कॉमन वेलोसिटी से चल रहे हैं। कॉमन वेलोसिटी से। अब हमें पता है ये जो कोलीजन है ये कोलीजन
है इनइलास्टिक। क्या है? तो अब ध्यान रखिएगा इनइलास्टिक कोलीजन में मोमेंटम कंजर्वड होता है। तो सबसे पहला
नियम क्या है? अब तुम बोलोगे करना क्या है इसके अंदर? लॉस निकालना है लॉस। काइनेटिक एनर्जी में कितना लॉस हुआ है वो निकालना
है। शो करना है कि लॉस होता है। तो वही हम करने जा रहे हैं। तो सबसे पहला नियम क्या है? कोई भी कोलीजन हो मोमेंटम हमेशा
कंजर्व होता है। तो यहां पर हम मोमेंटम कंजर्वेशन लगाने वाले हैं। मोमेंटम कंजर्वेशन क्या कहता है? कहता है कि मास *
वेलोसिटी पहले वाले का प्लस मास * वेलोसिटी दूसरे का। दूसरे का वेलोसिटी कितना है? ज़ीरो। इक्वल होगा मास *
वेलोसिटी फाइनल। तो फाइनली ये चिपक गए। तो दोनों का मास चिपक जाएगा और वेलोसिटी कॉमन हो जाएगा।
कॉमन क्या हो जाएगा? कॉमन। तो वेलोसिटी हमने माना है v। तो हमने यहां
से v की वैल्यू निकाल ली। फाइनल वेलोसिटी की वैल्यू। वो कितना आ गया देखो m1u1 और नीचे क्या आ जाएगा m1+ क्योंकि ये तो हट
गया ना ये पार्ट तो हट चुका है आपका तो ये वाला पार्ट जो नीचे आ जाएगा तो हमें मिल जाएगा
v तो ये वेलोसिटी का हमारे पास वो मिल गया कि भैया जब एक इनलास्टिक कोलीजन होता है और दोनों पार्टिकल आपस में चिपक जाए तो
चिपकने के बाद जो उनकी कॉमन वेलोसिटी होती है जिस वेलोसिटी से वो आगे बढ़ रहे होते हैं चिपक के उस वेलोसिटी का फार्मूला होता
है m1 इनिशियल ऑफ़ फर्स्ट m1 + m2 अब हमें निकालना है नाउ द लॉस इन काइनेटिक एनर्जी। हमें इसके अंदर लॉस इन काइनेटिक एनर्जी
निकालना होता है। तो द लॉस इन काइनेटिक एनर्जी ऑन कोलीजन कैसे मिलेगा? चेंज इन काइनेटिक एनर्जी। जिससे क्या पता चेंज
कितना चेंज हुआ है? वही तो लॉस होगा। k इनिशियल - k फाइनल। कि पहले 50 था। अब कितना हाथ में आया? 40 तो लॉस कितना हो
गया? 10। तो आपको फाइनल काइनेटिक एनर्जी इनिशियल काइनेटिक एनर्जी को फाइनल से माइनस करना होगा। तो फटाफट आगे देखते हैं।
देखिए तो कैसे बोलेंगे हम? चेंज इन काइनेटिक एनर्जी। तो टॉपिक है फाइनल काइनेटिक एनर्जी माइनस इनिशियल। तो फाइनल
क्या होगा? सॉरी इनिशियल माइनस फाइनल। इनिशियल ज्यादा था ना ज्यादा फाइनल कम हो जाएगा तभी तो लॉस होगा। तो इनिशियल माइनस
फाइनल। तो इनिशियल क्या था? देखो 1/2 m1 u1² 1/2 m2 0 का स्क्वायर। बोलो क्यों? दूसरा पार्टिकल रुका हुआ था। तो ये हो गया
आपका इनिशियल काइनेटिक एनर्जी दोनों का। फाइनल में क्या होगा? फाइनल में 1/2 चिपक गए वो दोनों चिपक गए। तो m1 + m2 और
वेलोसिटी कौन सा वाला? कॉम्बिनेशन वाला। चिपक के किस वेलोसिटी से चल रहे हैं वो? वेलोसिटी ऑफ़ कॉम्बिनेशन स्क्वायर। नहीं
समझे? काइनेटिक एनर्जी का फार्मूला होता है 1/2 * मास * वेलोसिटी का स्क्वायर। तो पहले पार्टिकल का दूसरे पार्टिकल का और
दोनों का कंबाइन माइनस कर रहा हूं। तो ये माइनस कर रहा हूं मैं। ये इनिशियल है या ये है फाइनल। फाइनल क्या होगा? 1/2 पूरा
मास पूरा वेलोसिटी। अब ये तो खत्म हो गया। ये तो ज़ीरो हो गया। तो यहां पर क्या बचा? 1/2 m1 u1² यहां पर
क्या चल रहा है? 1/2 m1 + m2 ये दिख भी रहा है नहीं दिख रहा?
सबको दिख रहा है? देखो इसमें दिख रहा है। दिख तो रहा है। देखो देखो तो ये हो गया हमारा 1/2 m1 + m2
चल ही रहा है। वेलोसिटी कॉम्बिनेशन का स्क्वायर। पीछे हमने वेलोसिटी निकाला था। कॉम्बिनेशन करा था आपको। m1 / u1 / m1 +
m2 यही निकाला था हमने। इसका हमें स्क्वायर करना है। तो ऊपर भी स्क्वायर नीचे भी स्क्वायर हो जाएगा। तो स्क्वायर
कर दिया हमने। m1u1 / m1 + m2 कोई तकलीफ कोई दर्द कोई पीड़ा कोई कष्ट नहीं तो ये 1/2 m1 + m2 m1u1 समझ में आ गया अब देखो
अगली बार क्या होगा सोचो कि यहां पर देखो नीचे स्क्वायर है m1 + m2 का स्क्वायर हो जाएगा पता है ना आप लोगों को क्योंकि होल
स्क्वायर है ना होल स्क्वायर तो नीचे स्क्वायर है और ऊपर एक है तो कट जाएगा तो नीचे सिर्फ एक बचेगा ये स्क्वायर ये कट
गया ना एक दो से ये कट गया तो नीचे सिर्फ m1 + m2 बचेगा और जो स्क्वायर इस पे लिख जगह m1² u1² समझ में आया नहीं आया
[गला साफ़ करने की आवाज़] भैया ये स्क्वायर है ना स्क्वायर इसको अंदर कर
दो m1² u1² m1 + m2 का होल स्क्वायर नहीं समझे सबको दे दिया स्क्वायर तो ये स्क्वायर से ये कट जाएगा क्योंकि ये एक है
और ये दो है तो नीचे सिर्फ एक बचेगा तो नीचे सिर्फ एक बचा और ऊपर हो गया m1² u1² क्या बात समझ में आ गई तो ये तो चल ही रहा
है ये तो यहां पर रहेगा तो ज़ीरो खत्म हो गया। यहां से क्या मिला? यहां से मिला हमें 1/2 m1u1²
और नीचे m1 + m2 अब यहां पे कॉमन क्या आ रहा है? कॉमन आ रहा है। देखो 1/2 m1 u1² कॉमन आ रहा है। देखो 1/2 m1 u1² तो यहां
से क्या कॉमन आ गया? 1/2 m1 u1² कॉमन आ गया। तो यहां से तो पूरा कॉमन आया है। तो यहां हो गया वन। पर इस तरफ से क्या कॉमन
आया है? 1/2 चला गया है। m1 का स्क्वायर है। और कॉमन क्या आया बताओ? तो m1 का स्क्वायर है। कॉमन आया सिर्फ m1 सिर्फ m1
कॉमन आया तो एक m1 बच जाएगा और u1 का स्क्वायर तो बाहर जा चुका है और नीचे का m1 + m2 नीचे का नीचे ही है। अब यहां से
एलसीएम लेंगे। क्या लेंगे? एलसीएम। ये एलसीएम लेंगे। ये इधर जाएगा क्रॉस मल्टीप्लाई करके तो m1 से m1 कट जाएगा। और
यहां क्या बचेगा? m2 / m1 + m2 क्या बचेगा? समझे? तो जो m1 + m2 नीचे बचेगा उसको
मैंने नीचे लिख दिया। यहां पर एक m1 था और यहां से m2 मिला तो लिख दिया मल्टीप्लाई में m1 * m2 और u1 का
स्क्वायर तो था ही और 1/2 तो है ही समझ पा रहे हो तो 1/2 m1 u1² पहले से था 1/2 m1 u1² पहले से था एक्स्ट्रा क्या आ गया m2 /
m1 + m2 जो कि यहां लिख दिया मैंने m2 / m1 + m2 तो यही लॉस ऑफ़ काइनेटिक एनर्जी है। समझ में आ गया? तो भाई देखो एलसीएम
एलसीएम है। उसके बाद तो एलसीएम लेना है। 1/2 पहले से था। m1 पहले से है। u1² पहले से है। यहां से क्या यहां से कट जाएगा।
एक्सेलनेट के बाद m2 m1 + m2 बच जाएगा। तो यही लॉस इन काइनेटिक एनर्जी है। क्या बात समझ में आ गई? प्लीज नोट इट डाउन। फिर हम
आगे बढ़ेंगे। जल्दी लिखो। टाइम नहीं है इतना। अच्छा करना साथ में लिख लेना। ठीक है? पीडीएफ भेज दूंगा। साथ में लिख लेना
वरना टाइम लग जाएगा। अब देखो ये टॉपिक है। एक सुनो। ये टॉपिक एग्जाम में नहीं आता कभी। चुप हो जाओ। ये है इलास्टिक कोलीजन
टू डायमेंशन। कभी एग्जाम में नहीं आता कभी भी। पर जब हम कर ही रहे हैं तो सारा ही कर लेते हैं। तो टू डायमेंशन का क्या मतलब
होता है? सुन लो। ध्यान दो इधर। टू डायमेंशन में क्या होता है? हम ऐसा मानते हैं कि एक पार्टिकल है जिसका मास है m1।
तो टॉपिक का नाम है इलास्टिक कोलीजन इन टू डायमेंशन। जिसका एक पार्टिकल है जिसका मास है m1। उसकी वेलोसिटी है u1। कोई दूसरा
पार्टिकल है जो रेस्ट पर है जिसका मास है m2 और किस पर है? रेस्ट पर। यह वाला पार्टिकल गया जैसे कैरम बोर्ड में होता
है। कैरम बोर्ड में एक रेस्ट पर होता है। एक मोशन में हम कर देते हैं उंगली से मार के उधर टकराते हैं। और टकराने के बाद ऐसे
रैंडम मोशन समझ पा रहे हो? तो सेम देखो ये कोई पार्टिकल है m1 जिसकी वेलोसिटी है u1 ये कोई पार्टिकल है m2 जो रेस्ट पर है और
ये जैसे ही आके टकराएगा इससे तो ये ऐसे दोनों बिखर जाएंगे। मान लो पहला पार्टिकल इधर चला गया। m1 पार्टिकल v1 वेलोसिटी के
साथ इधर चला गया। और m2 पार्टिकल v2 वेलोसिटी के साथ इधर चला गया। इसने एंगल बनाया θ1 इस लाइन के साथ और इसने एंगल
बनाया थीटा टू इस लाइन के साथ। तो देखो अब टू डायमेंशन हो गए। कितने डायमेंशन हो गए? तो बोलते हैं कोलीजन इन टू डायमेंशन। अब
मुद्दा क्या है मुद्दा कि ऐसे क्वेश्चन को सॉल्व करने के लिए देखो जब भी कोई चीज एंगल पे होता है तो हमें कॉम्पोनेंट
तोड़ना होता है। तो देखो इसका मास है m1 इसका वेलोसिटी है v1 तो मैंने m1 v1 को अलग से बना लिया। देखो यहां एक ट्रायंगल
चुप हो जाओ। मैंने मजाक नहीं कर रहा। किसी को क्या बोलूं मैं? छोड़ो। अभी भी शोर कर रहे हैं,
बातें कर रहे हैं। शर्म नहीं आ रही। यानी कि देख लो जब कभी दोबारा पढूंगा तो इजी लगेगा। तो देखो यहां पर है ना देखो पेपर
कुछ दिन बाद है। टाइम कम है। लेट आए हैं तब भी हम बात करेंगे। ऐसा नहीं होना चाहिए। बी फोकस्ड। समझ में आए ना आए वो
अलग बात है। जब हम इसे घर पे दो बार और पढ़ेंगे तो अपने आप आ जाएगा। अगर मैं बता दूंगा इसको रट लोगे तो ईली रट पाओगे। बिना
बताए नोट से तो रट ही नहीं पाओगे। तो मुद्दा यह है कि इधर m1 वाला पार्टिकल इधर m2 पार्टिकल है। तो हमने इस वाले एंगल का
सहारा लेके एक लाइन खींचा। ये लाइन खींचा इस तरफ और बोला ये एंगल हमारा θ1 है। और थीटा से ऊपर m1v1 है। समझ पा रहे हो? ये
लाइन खींचा और इधर बोल दिया m1v1 है। तो ये m1v1 है। अब m1v1 के कॉम्पोनेंट तोड़ेंगे इस तरफ। तो ये कहलाएगा m1v1
cosθ1 और इस तरफ का कॉम्पोनेंट होता है m1v1 sinθ1 यानी थीटा के बगल वाला cos होता है। ये कॉम्पोनेंट ब्रेकिंग होता है
वेक्टर्स में। वैसे ही देखो मैंने इस वाले का भी बनाया। इस वाले में पार्टिकल इस तरफ गया हमारा। तो ये मेरा m2v2 है। ठीक है?
और ये लाइन मैंने खुद बनाई। ये लाइन बना दिया और बोल दिया ये है θ2। क्या है ये? θ2 तो थीटा के बगल वाला cos होगा। तो ऊपर
कॉम्पोनेंट होगा m2v2 cosθ2 और इधर होगा m2v2 sinθ2 क्या बात समझ में आ गया तो कुल मिला के ये बात समझ में आ गई अब हम
बोलेंगे मोमेंटम कंजर्वेशन देखो मोमेंटम हमेशा कंजर्व होता है हम लगाएंगे मोमेंटम कंजर्वेशन इज x डायरेक्शन x का मतलब क्या
होता है x मतलब इस तरफ तो इस तरफ देखो इस तरफ इस तरफ स्टार्टिंग में था m1 u1 और बाद में कौन-कौन आया है बाद में x की तरफ
ही आया एक m1v1 cosθ1 और एक और आया है m2v2 cosθ2 तो x एक्सिस में हम बोलेंगे कि इनिशियल x एक्सिस में इनिशियल ये है m1 u1
और फाइनल क्या है m1v1 cosθ1 m2 देखो m1v1 cosθ1 m2v2 cosθ2 तो ये हो गया हमारा टॉपिक फिर हम बोलेंगे कि टू डायमेंशन है
तो y एक्सिस भी होगा तो मोमेंटम कंजर्वेशन इन y डायरेक्शन तो देखो y के अंदर y के अंदर देखो y के अंदर स्टार्टिंग में कुछ
भी नहीं है जीरो है। सिर्फ x के अंदर है स्टार्टिंग में। इनिशियल तो हम बोलेंगे इनिशियल इनिशियल y में है जीरो। y में
क्या है? जीरो। पर फाइनल y में है। फाइनल कैसे है? देखो एक ऊपर की तरफ क्या है? ऊपर की तरफ है m1v1 sinθ1 और नीचे की तरफ क्या
है? m2v2 sinθ2 तो यहां पर हो जाएगा हमारा m1v1 sinθ2 माइनस या प्लस
m2v2 sinθ2 क्योंकि डायरेक्शन ऑोजिट है ना इन दोनों का तो ये आप ध्यान रखेंगे ये हो गया हमारा मोमेंटम कंजर्वेशन इन y देखो m2
v2 और m1 v1 उल्टे हैं आपस में ठीक है इसलिए मैंने माइनस लगा दिया तो ये मोमेंटम कंजर्वेशन हो गया अब काइनेटिक एनर्जी
कंजर्वेशन की बात करते हैं 2d में तो देखो काइनेटिक एनर्जी कंजर्वेशन में क्या है कि कंजर्वेशन ऑफ़ काइनेटिक एनर्जी तो
स्टार्टिंग में क्या क्या है देखो 1/2 m1 u1² + 0 कोई दूसरा है ही नहीं और फाइनल क्या है फाइनल फाइनल क्या हो गया 1/2
m1v1² 1/2 m2v2² नहीं समझे मेरी बात को स्टार्टिंग में एक पार्टिकल है आपके पास
और दूसरा रेस्ट पर है तो m1 m 1 / 2 m1 u1² + 0 दोनों का काइनेटिक एनर्जी ये आ गया और फाइनल क्या होगा m1/2 m1v1² 1/2
m2v2² बस अगर कभी भी एंगल एंगल 0° हो तो कोई दिक्कत ही नहीं है। लेकिन कभी भी एंगल 90° हो θ1 देखो θ1 0° हो θ2
90° हो जाए तो इसको बोलते हैं हम गैलेंसी। ये रहा गैलेंसिंग कोलीजन। दोबारा बोल रहा हूं। तुम बोलोगे सर 2D
वाला टॉपिक अच्छे से नहीं करा रहे। क्यों करा रहा हूं? अच्छे से जब आता ही नहीं है। बस करा रहा हूं कि जब भी आपका θ1 0° हो और
θ2 90° हो तो इसको बोलते हैं गैलेंसिंग कोलीजंस। फॉर एग्जांपल कहने का मतलब क्या है? कि θ1 0° है। मतलब क्या है? देखो सुनो
यहां पर एक पार्टिकल है। यहां पर एक पार्टिकल है। ये आया टकरा के सीधा निकल गया। तो पहला एंगल कितना हो गया? ज़ीरो। और
ये वाला जो पार्टिकल था ऐसे आ जाए। दूसरा एंगल कितना हो गया? 90। यानी जब दो आदमी हो सामने और टकराने पर एक इधर चला जाए और
एक इधर तो इसको बोलते हैं क्या? एक के लिए एंगल जीरो। एक के लिए एंगल क्या है? दूसरे के लिए एंगल कितना है? 90। इसको
कितना बोलते हैं? इसको बोलते हैं गैलेंसिंग कोलीजन। तो दोबारा बोल रहा हूं। बड़ा आसान है। आप इसको याद करने का ट्राई
करना। मैंने कोशिश किया है कि मैं बेस्ट बताऊं जितना बेस्ट हो सकता है। टू डी वाला नहीं आता है। पर मैंने कहा कुछ भी छूटना
नहीं चाहिए। ईच एंड एव्री टॉपिक्स। अब देखो ये वाला टॉपिक आता है एग्जाम में। तो इसको मैंने अच्छे से लिखा है। देखो एक
टॉपिक होता है। टॉपिक का नाम होता है कोफिशिएंट ऑफ रेस्टिट्यूशन। ये लास्ट टॉपिक है इस टॉपिक का रेस्टिट्यूशन।
टॉपिक का नाम क्या है? कोफिशिएंट ऑफ रेस्टिट्यूशन। ये है कोफिशिएंट ऑफ रेस्टिट्यूशन। ये है कोफिशिएंट।
कोफिशिएंट ऑफ़ रेस्टिट्यूशन। ये क्या होता है? देखो इसको बोलते हैं हम e। इसको E से
रिप्रेजेंट करते हैं E से। ये होता है रिलेटिव वेलोसिटी ऑफ़ सेपरेशन बाय रिलेटिव वेलोसिटी ऑफ़ एप्रोच। यानी कि किस वेलोसिटी
से कोलीजन के बाद सेपरेट हो रहे हैं और किस किस वेलोसिटी से अप्रोच हुआ था। नहीं समझे? किस वेलोसिटी से वो पास आए थे और
किस वेलोसिटी से दूर जा रहे हैं। उनका रेश्यो होता है कोफिशिएंट ऑफ़ रेस्टिट्यूशन। तो एग्जाम में डेफिनेशन लिख
दोगे। इट इज़ द रेशियो ऑफ़ वेलोसिटी ऑफ़ सेपरेशन टू द वेलोसिटी ऑफ़ तो वेलोसिटी ऑफ़ सेपरेशन क्या होगा बताओ? v1 - v2 एप्रोच
क्या होगा? u1 - u2 तो ये है e। ये क्या है? e अब सुन लो e के बारे में कुछ बातें। अगर कभी e की वैल्यू वन है। एग्जाम में
लिखा होगा e की वैल्यू वन है। क्या मतलब है? इलास्टिक कोलीजन। अगर e की वैल्यू जीरो हो जाए तो परफेक्टली इनइलास्टिक
कोलीजन। अगर e की वैल्यू जीरो और वन के बीच में हो तब होगा इनइलास्टिक। क्या होगा?
इनलास्टिक। और e की वैल्यू वन से बड़ा हो जाए तो बोलते हैं हम सुपर इलास्टिक। अब तुम
बोलोगे को समझ नहीं आ रहा। देखो e की वैल्यू वन है। मतलब इलास्टिक कोलीजन है। बॉल को फेंकेंगे बॉल दोबारा हाथ में आ
गया। E की वैल्यू जीरो है। बॉल को फेंका। बॉल दीवार से चिपक गया। E की वैल्यू जीरो और वन के बीच में है। तो जब हम बॉल को
फेंकेंगे तो हो सकता है कि बॉल हल्का सा उछले। ये है परफेक्टली इनइलास्टिक। चिपक ही गया पूरी तरह। जैसे अगर मैं कीचर को भी
फेंकूंगा तो कीचर भी बाउंस बैक तो होता है। लेकिन कीचर पूरी तरह चिपक जाए। तो परफेक्टली इनइलास्टिक और कीचर हल्का सा
बाउंस बैक हुआ है तो इनइलास्टिक। समझे? इनलास्टिक और परफेक्टली इलास्टिक में ये फर्क है। और E की वैल्यू वन से बड़ी हो
जाए। देखो जब E की वैल्यू वन थी तो इलास्टिक बोल रहे थे। अब वन से बड़ी हो गई है। सुपर इलास्टिक मतलब आपने बॉल को ऐसे
फेंका वो बहुत ऊपर चला गया। ये देखा ना आप लोगों ने? एक बॉल आता है बॉल। क्या बोलते हैं उसको?
क्रेजी बॉल। वो उसमें ये होता है। सुपर इलास्टिक कोलीजन। मतलब कह सकते हैं कि क्या नाम है? क्रेजी बॉल।
मैंने देखा नहीं है तो मैं बोल दे रहा हूं। क्रेजी पागल बॉल। [हंसी]
तो उस बॉल को अगर हम हल्का सा ऐसे फेंकेंगे ना तो वो छत पार कर जाएगा। मतलब उसका कोलीजन जो है सुपर इलास्टिक है। बात
समझ में आ गया? तो दिस इज़ द एंड ऑफ़ द चैप्टर। आई होप आपको देखो इतना ही आता है। मैंने ट्राई किया पूरा एनसीआरटी का एक-एक
लाइन कवर करने का। तो अगर आप इसको अच्छे से प्रिपेयर कर लेते हो तो चैप्टर आपके हाथ में है। सो दिस इज़ द चैप्टर। आप नोट
कर लो। दिस इज़ द एंड ऑफ़ लेक्चर। भगवान आपका भला करे।
कार्य बल और विस्थापन का गुणनफल है, जिसे W = F s cosθ से दर्शाया जाता है। कार्य शून्य तब होता है जब बल शून्य हो, विस्थापन शून्य हो, या बल और विस्थापन के बीच का कोण 90° हो (जैसे कुली द्वारा सिर पर सामान रखकर चलने पर)। कार्य धनात्मक तब होता है जब कोण θ < 90° और ऋणात्मक तब होता है जब कोण θ > 90° हो।
चर बल द्वारा किए गए कार्य को समाकलन (Integration) का उपयोग करके ज्ञात किया जाता है, जिसका सूत्र W = ∫ f·dx है। ग्राफीय विधि में, बल-विस्थापन (F-x) ग्राफ के नीचे का क्षेत्रफल किए गए कार्य के बराबर होता है; उदाहरण के लिए यदि ग्राफ त्रिभुजाकार है, तो कार्य = ½ × आधार × ऊंचाई।
कार्य-ऊर्जा प्रमेय के अनुसार, किसी वस्तु पर किया गया कुल कार्य उसकी गतिज ऊर्जा में हुए परिवर्तन के बराबर होता है (W = ΔK = ½ mv² – ½ mu²)। नियत बल के लिए इसे गति के तीसरे समीकरण v² – u² = 2as से सिद्ध किया जा सकता है, जबकि चर बल के लिए W = ∫ f·dx = m∫ v·dv का उपयोग किया जाता है।
संरक्षी बलों द्वारा किया गया कार्य पथ पर निर्भर नहीं करता, केवल प्रारंभिक और अंतिम स्थिति पर निर्भर करता है, जैसे गुरुत्वाकर्षण बल और स्थिरवैद्युत बल। इसके विपरीत, असंरक्षी बलों द्वारा किया गया कार्य पथ पर निर्भर करता है और ऊर्जा का क्षय होता है, जैसे घर्षण बल, श्यान बल और वायु प्रतिरोध।
यांत्रिक ऊर्जा के संरक्षण का सिद्धांत कहता है कि यदि केवल संरक्षी बल कार्य कर रहे हों तो किसी निकाय की कुल यांत्रिक ऊर्जा (गतिज + स्थितिज) स्थिर रहती है। स्वतंत्र रूप से गिरती वस्तु के लिए, शीर्ष बिंदु A पर KE=0 और PE=mgh होता है, जबकि जमीन के पास बिंदु B पर PE=0 और KE=½ mvb² = mgh होता है, अतः दोनों स्थानों पर TME = mgh समान रहता है।
प्रत्यास्थ संघट्ट में संवेग और गतिज ऊर्जा दोनों संरक्षित रहते हैं (जैसे बिलियर्ड बॉल), जबकि अप्रत्यास्थ संघट्ट में केवल संवेग संरक्षित होता है और कुछ ऊर्जा ऊष्मा में बदल जाती है (जैसे दीवार पर गीली मिट्टी का चिपकना)। एक-विमीय प्रत्यास्थ संघट्ट में टकराने के बाद वेग ज्ञात करने के लिए सूत्र है: v₁ = [(m₁ – m₂)u₁ + 2m₂u₂] / (m₁ + m₂), जो परीक्षा में सबसे अधिक पूछा जाता है।
शक्ति कार्य करने की दर है, जो यह बताती है कि कार्य कितनी तेजी से हो रहा है। औसत शक्ति का सूत्र P_avg = W/t है, जबकि तात्क्षणिक शक्ति के लिए P_inst = F·v का उपयोग किया जाता है, जहाँ F बल और v वेग है।
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