विद्युत आवेश (Electric Charge) की मूल अवधारणा
- आवेश दो प्रकार के होते हैं: धनात्मक (Positive) और ऋणात्मक (Negative)।
- यह पदार्थ का एक आंतरिक (Intrinsic) गुण है।
- SI मात्रक: कूलॉम (C) है, जिसे एम्पियर-सेकंड (A·s) भी कहते हैं।
- CGS मात्रक: इलेक्ट्रोस्टैटिक यूनिट (esu) या स्टैटकूलॉम।
1 C = 3 × 10⁹ esu
- आवेश को
qयाQसे निरूपित किया जाता है।
आवेश के महत्वपूर्ण गुण (Properties of Charge)
योगात्मकता (Additivity)
आवेश एक अदिश राशि है। किसी निकाय पर कुल आवेश, उस पर स्थित सभी आवेशों के बीजगणितीय योग के बराबर होता है।
संरक्षण (Conservation)
आवेश को न तो उत्पन्न किया जा सकता है और न ही नष्ट किया जा सकता है। यह केवल एक पिंड से दूसरे पिंड में स्थानांतरित होता है। ब्रह्मांड में कुल आवेश स्थिर रहता है।
क्वांटीकरण (Quantization)
यह सबसे महत्वपूर्ण गुण है। किसी भी पिंड पर कुल आवेश हमेशा e (एक इलेक्ट्रॉन का आवेश) का पूर्णांक गुणज (integral multiple) होता है।
- सूत्र:
q = neजहाँnएक पूर्णांक (0, ±1, ±2, ...) है। e = 1.6 × 10⁻¹⁹ C- इसका अर्थ है कि आवेश हमेशा पैकेटों (packets) में स्थानांतरित होता है। आधा इलेक्ट्रॉन स्थानांतरित नहीं किया जा सकता।
आवेशन की विधियाँ (Methods of Charging)
-
घर्षण द्वारा (Friction): दो वस्तुओं को रगड़ने पर एक से दूसरी में इलेक्ट्रॉन स्थानांतरित होते हैं।
- काँच की छड़ + रेशम (Silk): काँच की छड़ धनात्मक आवेशित हो जाती है, रेशम ऋणात्मक।
- एबोनाइट की छड़ + फर/ऊन (Wool): एबोनाइट की छड़ ऋणात्मक आवेशित हो जाती है, फर/ऊन धनात्मक।
- याद रखने का ट्रिक: "Ebonite Electron" यानी E से शुरू, एबोनाइट पर इलेक्ट्रॉन (ऋण) आता है।
-
चालन द्वारा (Conduction): जब कोई आवेशित वस्तु किसी अन्य अनावेशित वस्तु को सीधे स्पर्श करती है, तो आवेश का स्थानांतरण होता है। दोनों वस्तुओं पर समान प्रकार का आवेश आ जाता है।
-
प्रेरण द्वारा (Induction): बिना स्पर्श किए किसी अनावेशित वस्तु के एक सिरे पर विपरीत और दूसरे सिरे पर समान आवेश उत्पन्न हो जाता है।
- प्रक्रिया:
- एक आवेशित वस्तु को अनावेशित वस्तु के पास लाया जाता है (स्पर्श नहीं)।
- अनावेशित वस्तु पर आवेशों का पृथक्करण (separation) होता है।
- विपरीत आवेश वाले सिरे को अर्थिंग (earthing) करके स्थायी रूप से आवेशित किया जा सकता है।
- प्रक्रिया:
कूलॉम का नियम (Coulomb's Law)
यह नियम दो स्थिर बिंदु आवेशों के बीच लगने वाले विद्युत बल (Electrostatic Force) का वर्णन करता है।
कथन: दो बिंदु आवेशों के बीच आकर्षण या प्रतिकर्षण का बल:
- दोनों आवेशों के परिमाण के गुणनफल के अनुक्रमानुपाती होता है।
- उनके बीच की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है।
सूत्र: F = k |q₁ q₂| / r²
जहाँ:
k= कूलॉम नियतांक (Coulomb's constant) =9 × 10⁹ N m² / C²kको1 / (4πε₀)के रूप में भी लिखा जाता है।ε₀= निर्वात की विद्युतशीलता (Permittivity of free space) =8.85 × 10⁻¹² C² / N m²
- माध्यम में: बल
F' = F / Kहो जाता है, जहाँKपरावैद्युतांक (Dielectric constant) है।
सदिश रूप (Vector Form):
F₁₂ = k q₁ q₂ (r₁ - r₂) / |r₁ - r₂|³
यहाँ F₁₂ आवेश q₁ पर q₂ के कारण लगने वाला बल है।
सीमाएँ:
- यह केवल स्थिर (stationary) बिंदु आवेशों के लिए मान्य है।
- आवेशों का विस्तार (size) उनके बीच की दूरी की तुलना में बहुत कम होना चाहिए।
- यह
10⁻¹⁵ m(नाभिकीय आकार) से कम दूरी के लिए मान्य नहीं है, क्योंकि वहाँ प्रबल नाभिकीय बल प्रभावी होता है।
अध्यारोपण का सिद्धांत (Superposition Principle)
जब किसी आवेश पर अनेक आवेश बल लगा रहे हों, तो उस पर लगने वाला कुल बल सभी व्यक्तिगत बलों का सदिश योग होता है।
F_net = F₁ + F₂ + F₃ + ...
यह एक रैखिक नियम है। कोई भी दो आवेशों के बीच का बल तीसरे आवेश की उपस्थिति से प्रभावित नहीं होता।
विद्युत क्षेत्र (Electric Field)
परिभाषा: किसी बिंदु पर विद्युत क्षेत्र की तीव्रता (E) उस बिंदु पर रखे एकांक धनात्मक परीक्षण आवेश (q₀) पर लगने वाला बल है।
सूत्र: E = F / q₀
बिंदु आवेश के कारण विद्युत क्षेत्र:
E = kQ / r²
यहाँ Q स्रोत आवेश (source charge) है।
- दिशा: धनात्मक आवेश से दूर की ओर, ऋणात्मक आवेश की ओर।
- यह भी एक व्युत्क्रम वर्ग नियम (inverse square law) का पालन करता है।
Eका SI मात्रक: न्यूटन/कूलॉम (N/C) या वोल्ट/मीटर (V/m) है।
विद्युत क्षेत्र में बल
- यदि कोई आवेश
qकिसी विद्युत क्षेत्रEमें रखा है, तो उस पर लगने वाला बल होता है:
F = qE
- महत्वपूर्ण:
- धनात्मक आवेश (
q>0) पर बल विद्युत क्षेत्र की दिशा में होगा। - ऋणात्मक आवेश (
q<0) पर बल विद्युत क्षेत्र की विपरीत दिशा में होगा।
- धनात्मक आवेश (
विद्युत क्षेत्र रेखाएँ (Electric Field Lines)
ये काल्पनिक रेखाएँ हैं जो विद्युत क्षेत्र को प्रदर्शित करने के लिए बनाई जाती हैं।
गुण (Properties):
- ये अखंड (continuous) और चिकने (smooth) वक्र होते हैं। ये टूटती नहीं हैं।
- ये धनात्मक आवेश से शुरू होकर ऋणात्मक आवेश पर समाप्त होती हैं।
- यदि केवल एकल आवेश है, तो ये अनंत (infinity) से शुरू या समाप्त होती हैं।
- ये कभी बंद लूप (closed loop) नहीं बनातीं।
- किसी बिंदु पर क्षेत्र रेखा की स्पर्श रेखा (tangent) उस बिंदु पर विद्युत क्षेत्र की दिशा बताती है।
सारांश: यह वीडियो पूरे अध्याय की नींव रखता है, जिसमें कोर कॉन्सेप्ट को समझने और एनसीईआरटी के कठिन प्रश्नों को हल करने पर जोर दिया गया है। अगले भाग में चुंबकत्व एवं द्रव्य: आसान अध्याय, डेरिवेशन कॉपी, महत्वपूर्ण प्रश्न जैसे आगामी अध्यायों से जुड़ने वाले व्युत्पत्तियों पर चर्चा की जाएगी।
रक्षक सर टीचिंग केमिस्ट्री बिफोर जीटीए सिक्स। रक्षक सर टीचिंग बायोलॉजी बिफोर जीटीए सिक्स। बाय जीटीए सिक्स से पहले
क्या-क्या होने वाला है ना तुम सोच भी नहीं सकते। ठीक है? क्योंकि रक्षक सर टीचिंग क्लास 12th ऑन हिज ओन चैनल और पहला
चैप्टर है ये आप लोगों के लिए इलेक्ट्रिक [संगीत] चार्जेस एंड फील्ड जो कि आप लोग की वेरी वेरी वेरी हैवी डिमांड के ऊपर
अपलोड किया जा रहा है। क्योंकि आप लोगों ने भाई सारे के सारे कमेंट सेक्शन में थे वो भर डाले थे कि सर क्लास 12th के लिए भी
कुछ लाओ, क्लास 12th के लिए भी कुछ लाओ, क्लास 12th के लिए भी वन शॉट चालू करो। तो भाई उसके लिए अभी [संगीत] यह डिटेल्ड वन
शॉट चालू किया है। मैंने इस चैप्टर को इस तरीके से प्रिपेयर किया है कि इसमें जितनी भी डेरिवेशंस हैं वो सब इंक्लूड होंगी।
जितनी थ्योरी है वो सब कुछ इंक्लूड होगी। प्रीवियस ईयर सवाल भी इंक्लूड होंगे और मैं अपने हाथ से बहुत सारी चीजें यहां पर
करने वाला हूं। यानी कि ये कोई रिवीजन के लिए वन शॉट नहीं है। तो कंफ्यूज ना हो आप। यह डिटेल्ड वन शॉट है। सब चीजें इसके अंदर
कवर होंगी। और इस चैप्टर को पढ़ने के बाद आप सीधा-सीधा जाकर के एनसीईआरटी के सवालों को भी अटेम्प्ट करोगे तो आपको सवाल समझ
में आने लगेंगे। नीचे डिस्क्रिप्शन में क्लिक करके देखोगे तो आपको एक Telegram का लिंक मिलेगा जहां पर यह वाले नोट्स आपको
अपलोड करवा दिए जाएंगे। तो टेंशन बिल्कुल नहीं लेनी। जैसे ही लेक्चर अपलोड होता है उसके थोड़ी देर के बाद Telegram पर भी
नोट्स जो है वो अपलोड हो जाएंगे। ठीक है ना? [संगीत] आइए बिना टाइम वेस्ट किए स्टार्ट करते हैं अपना पहला चैप्टर
इलेक्ट्रिक चार्जेस एंड फील्ड। स्टार्ट होती है कहानी चार्ज को लेकर के। तो भाई आप सभी जानते हो कि चार्ज दो प्रकार के
होते हैं। पॉजिटिव और नेगेटिव। नेगेटिव चार्ज इलेक्ट्रॉन का फंडामेंटल इंट्रिंसिक प्रॉपर्टी मानी जाती है। इसी प्रकार
प्रोटॉन की अपनी इंट्रिंसिक प्रॉपर्टी यानी जो प्रोटॉन चार्ज शो करता है वो क्या है? वो पॉजिटिव चार्ज है। तो दो प्रकार के
चार्जेस आपको एटम के अंदर ही मिलते हैं। पॉजिटिव चार्ज मिलता है अंदर। प्रोटॉन में है ना? जो कि न्यूक्लियस के अंदर रहता है।
और आसपास कौन घूमते हैं? नेगेटिवली चार्ज्ड इलेक्ट्रॉन्स घूमते हैं। ये बेसिक एटॉमिक मॉडल है जो हम सभी के माइंड में
कभी क्लास नाइंथ से बैठा हुआ है। ठीक है? आइए इलेक्ट्रिक चार्ज का मतलब समझ लेते हैं एक बार क्या है? देखो इलेक्ट्रिक
चार्ज असल में इंट्रिंसिक प्रॉपर्टी होती है मैटर की। ठीक है ना? कोई आपसे पूछे कि चार्ज क्या है? तो इट इज़ प्रॉपर्टी ऑफ़
मैटर। और कैसी प्रॉपर्टी है? इंट्रिंसिक प्रॉपर्टी कहते हैं इसको। कैसी प्रॉपर्टी? इंट्रिंसिक प्रॉपर्टी। ये इंट्रिंसिक का
वर्ड क्या होता है भाई? देखो, इंट्रिंसिक का मतलब होता है प्योर। इंट्रिंसिक का मतलब होता है उसका अपना। तो मतलब मैटर की
उसकी अपनी प्रॉपर्टी। जैसे भाई एक मिठाई की प्रॉपर्टी क्या है? कि वो मीठी ही होगी। कभी खट्टी मिठाई सुनी है क्या आपने?
नहीं। पानी की प्रॉपर्टी क्या है? कि वो शीतल ही होगा। है ना? शीतल जल बोलते हैं जैसे। आग की प्रॉपर्टी क्या है? तो आग की
इंट्रिंसिक प्रॉपर्टी है कि भाई वो गर्म ही करेगी। इसी प्रकार मैटर की एक इंट्रिंसिक प्रॉपर्टी है चार्ज होना। अब
चार्ज की भी एसआई यूनिट होती है भाई। और यह होती है कूलम जिसको एंपियर सेकंड भी कहते हैं। करंट वाले फार्मूले से निकल कर
के आते हैं। जो कभी आपने क्लास 10th में पढ़ा था यह वाला। I = q / t तो यहां से q जो है वो IT बन जाता है। है ना? तो ये
करंट से आ गया एंपियर और टाइम से आ गया सेकंड। तो आपको एंपियर सेकंड देखने को मिले तो घबराना मत देखो। ठीक है ना? तो
कूलम बोलो एंपियर सेकंड बोलो एक ही बात है। कुछ सीजीएस यूनिट भी है। फटाफट से देख जाते हैं। ज्यादा यूज़ तो नहीं होती है।
कहते हैं इसको इलेक्ट्रोस्टेटिक यूनिट यूनिट ऑफ चार्ज यानी ईएसयू ऑफ़ चार्ज या फिर स्टार्ट कूलॉम भी इसको बोलते हैं। अगर
आप याद भी रखना चाहें तो रख सकते हैं कि एक कूलम जो होता है वो 3 * 10 की पावर 9 ईएसयू होता है किसी भी चार्ज का। ठीक है
ना? तो ईएसयू ऑफ़ चार्ज बोलते हैं या फिर स्टार्ट कूलम बोलते हैं इसको। ये इसकी सीजीएस यूनिट है। तो ये मोटी मोटी बातें
हो गई चार्ज के बारे में। अच्छा, चार्ज को डिनोट करते हैं q से। ठीक है? याद रखिएगा ये बात आपको यहां पर कभी-कभी कैपिटल q यूज़
होता दिखेगा और मोस्टली आपको स्मॉल q यूज़ होता दिखेगा। ये दोनों ही लेटर्स के साथ चार्ज का डिनोशन होता है। आगे बढ़ चलते हैं
हम लोग। बात आती है एक वेरी वेरीेंट प्रॉपर्टी की जिसको बोलते हैं क्वांटाइजेशन। देखो वैसे तो चार्ज की कई
सारी प्रॉपर्टीज है। जैसे एडिटिविटी है। एडिटिविटी का मतलब होता है कि चार्ज की स्केलर प्रॉपर्टी है। किसी भी बॉडी पर
कितना चार्ज होगा? वो सारे चार्जेस को ऐड करके आपको मिल जाएगा। यानी सीधे-सीधे चार्ज क्या होते हैं? ऐड होते हैं। स्केलर
प्रॉपर्टी है। इसको बोलते हैं एडिटिविटी। फिर एक और बड़ी इंपॉर्टेंट प्रॉपर्टी आती है जिसका नाम है कंजर्वेशन ऑफ़ चार्ज। ये
लिखते जाना साथ के साथ। है ना? कॉपी पेन लेकर के बैठो। एकदम पॉपकॉर्न लेकर के मूवी नहीं देखनी है भाई आपने। कॉपी पेन साथ में
डायरी पेन साथ में रखिए और नोट करते जाइएगा। पहली प्रॉपर्टी कौन सी बताई मैंने? एडिटिविटी। दूसरी प्रॉपर्टी मैं
आपको बता रहा हूं। कंजर्वेशन ऑफ़ चार्ज। कंजर्वेशन का मतलब होता है कि चार्ज ना कभी पहले बना था और ना ही कभी चार्ज नष्ट
हो सकता है। ये बिल्कुल मैटर यानी कि मास की तरीके से ही ना कभी बना था और ना कभी नष्ट होगा। जितना चार्ज कभी पहले था उतना
ही आज भी है। आगे भी उतना ही रहेगा। बस एक जगह से दूसरी जगह ट्रांसफर होता रहता है। ये थी दूसरी प्रॉपर्टी। अब तीसरी और सबसे
इंपॉर्टेंट प्रॉपर्टी जो जिस पर सवाल भी आते हैं वो है क्वांटाइजेशन। मैंने आपसे अभी-अभी क्या बोला? मैंने बोला कि चार्ज
एक बॉडी से दूसरी बॉडी में क्या हो सकता है? ट्रांसफर हो सकता है। यानी चार्ज लिया जा सकता है, चार्ज दिया जा सकता है। यानी
आप मुझे चार्ज दे सकते हो। मुझसे आप चार्ज ले सकते हो। ठीक बात है ना? तो जब चार्ज कोई बॉडी देती है या लेती है तो वो किस
हिसाब से देती लेती है? वो हिसाब बताता है क्वांटाइजेशन। क्वांटाइजेशन का मतलब होता है पैकेट्स बनाना। तो नेचर ने चार्ज के
पैकेट्स डिफाइन कर रखे हैं। पैकेट्स डिफाइन कर रखे हैं मतलब कि आपको अगर किसी बॉडी से किसी बॉडी में चार्ज देना है तो
वो e के मल्टीपल में दे पाओगे। e का मल्टीपल मतलब इलेक्ट्रॉन का मल्टीपल। इलेक्ट्रॉन का मल्टीपल मतलब अरे
इलेक्ट्रॉन का जितना चार्ज होता है उसे e बुलाते हैं। ये देखो ये देखो यहां पर लिखा हुआ है e। ये दिख रहा है। e लिखा दिख रहा
है ये e। इस e का मतलब होता है यानी एक इलेक्ट्रॉन का चार्ज और एक इलेक्ट्रॉन का चार्ज होता है 1.6 टाइम्स 10 टू दी पावर
-19 कूलॉम यानी इतना चार्ज आप एक बार में ट्रांसफर कर सकते हो इससे ज्यादा करना है तो इसका दुगना करना
पड़ेगा इससे ज्यादा करना है तो इसका तीन गुना करना पड़ेगा इससे ज्यादा करना है तो इसका चार गुना यानी एक इलेक्ट्रॉन ही तो
ट्रांसफर हो सकता है ना आधा इलेक्ट्रॉन थोड़ी ना तोड़ के ट्रांसफर करोगे तो मेरी बात समझ में आई ना इलेक्ट्रॉन के टुकड़े
ट्रांसफर नहीं हो सकते ना इलेक्ट्रॉन ही पूरा ट्रांसफर होगा। यानी इलेक्ट्रॉन जब पूरा ट्रांसफर होगा तो इलेक्ट्रॉन का
चार्ज भी पूरा का पूरा ही ट्रांसफर होगा। समझे? तो ना तो कभी चार्ज फ्रैक्शन में लिया जा सकता है। यानी कि इलेक्ट्रॉन को
फ्रैक्शन में तोड़ दें हम नहीं हो सकता। ना डेसिमल में लिया जा सकता है। तो ये पूरा का पूरा लिया जाएगा नेचुरल नंबर की
फॉर्म में। इसलिए यहां पर फार्मूला क्या है? q = ne। n का मतलब क्या है? नंबर ऑफ इलेक्ट्रॉन्स। तो कितने इलेक्ट्रॉन्स हैं
मल्टीप्लाई बाय कितना? एक इलेक्ट्रॉन पे चार्ज है। दोनों को मल्टीप्लाई करोगे टोटल चार्ज ऑन द बॉडी आ जाएगा। और n की वैल्यू
कुछ भी हो सकती है। ज़ीरो भी हो सकती है। यानी ज़ीरो मतलब चार्ज है ही नहीं। जी। प्लस या -1 भी हो सकती है। प्लस किसके लिए
होगी? प्रोटॉन्स के लिए होगी। माइनस किसके लिए होगी? इलेक्ट्रॉन्स के लिए होगी। भाई प्रोटॉन भी तो ट्रांसफर हो सकता है ना। और
प्रोटॉन पर जितना चार्ज होता है उतना ही इलेक्ट्रॉन पर चार्ज होता है। तो इसे बुलाते हैं इलेक्ट्रॉनिक चार्ज। क्या
बुलाते हैं इसे? इसे बुलाते हैं इलेक्ट्रॉनिक चार्ज। क्या बुलाते हैं बेटा? इसे बुलाते हैं इलेक्ट्रॉनिक चार्ज।
समझ गए होगे। कोई मुश्किल वाली बात नहीं है। है ना? देखो यार यहां पर क्या लिखा हुआ है? जो चार्ज यूनिट्स हैं वो e के
टर्म्स में दिए जाते हैं। जैसे 1E, 2ee, 3, 4E, 5, 6 ऐसा नहीं हो सकता कभी भी कि 5.5 चार्ज ट्रांसफर हो रहा है। कि 5 1/2
इलेक्ट्रॉन ट्रांसफर हो रहे हैं। क्या ऐसा हो सकता है क्या? नहीं हो सकता। तो मेरी बात होपफुली आपको समझ में आई होगी। एक बार
पढ़ लो। डेफिनेशन क्या है? द क्वांटाइजेशन ऑफ इलेक्ट्रिक चार्ज का मतलब होता है मींस दैट द टोटल चार्ज यानी कि q ऑफ अ बॉडी इज
ऑलवेज एन इंटीग्रल मल्टीपल ऑफ बेसिक क्वांटम ऑफ चार्ज और बेसिक क्वांटम ऑफ चार्ज मतलब बेसिक पैकेट क्या है वो e है e
मतलब इलेक्ट्रॉन का चार्ज होपफुली आपको बात समझ में आई होगी आगे बढ़ते हैं अब बात आती है कि मेथड्स कौन कौन से कौन से हैं
चार्जिंग करने के देखो भाई तीन मेथड हैं टोटल जो आपके एनसीईआरटी में दिए हुए हैं पहला दिया हुआ चार्जिंग बाय फ्रिक्शन,
दूसरा दिया हुआ है कंडक्शन, तीसरा दिया हुआ है इंडक्शन। फटाफट से सुन जाते हैं। तीनों की तीनों में से दो की डिटेल थोड़ी
सी ज्यादा है। एक की डिटेल काफी कट कर दी एनसीआरटी ने। तो ठीक है। जितनी भी जितनी डिटेल है मैं आपको सब कुछ समझाता हूं।
सबसे पहले आते हैं हम लोग फ्रिक्शन पर। देखो फ्रिक्शन से बॉडी कैसे चार्ज होती है? जब भी आप कोई दो बॉडीज को रगड़ते हो।
जैसे मान लो ये रोड है और ये कपड़ा है। ये आपस में अगर रगड़ रहे हैं। ये आपस में क्या कर रहे हैं? रब कर रहे हैं अगर तो
कुछ इलेक्ट्रॉन गर्मी से एनर्जी पा के ट्रांसफर हो जाते हैं दूसरी बॉडी के अंदर। तो जिस बॉडी में से इलेक्ट्रॉन निकलेंगे
वो बॉडी पॉजिटिव हो जाएगी। और जिसमें इलेक्ट्रॉन आ के बैठ जाएगा क्योंकि इलेक्ट्रॉन का चार्ज नेगेटिव होता है। वो
बॉडी कैसी हो जाएगी? नेगेटिव हो जाएगी। समझ गए ना? तो इसको बोलते हैं चार्जिंग बाय फ्रिक्शन। इलेक्ट्रॉन्स ट्रांसफर्ड
बाय रबिंग टू ऑब्जेक्ट्स। दो ऑब्जेक्ट को रब करने से इलेक्ट्रॉन ट्रांसफर हो जाता है। इसके दो एग्जांपल बड़े महत्वपूर्ण है
जो कि आपको पढ़ने हैं। एक है ग्लास रोड का एग्जांपल। दूसरा है एबोनाइट रोड का एग्जांपल। ठीक है ना? तो ग्लास रोड
को दिखाते हैं सिल्क के साथ रगड़ता हुआ। और एबोनाइट रोड को फर या वूल के साथ रगड़ता हुआ दिखाते हैं। कई-कई जगह पे फर
लिखा होता है। किसीकिसी किताब में वूल लिखा होता है। एक ही बात है। कोई दिक्कत नहीं। ठीक है? तो एबोनाइट रोड को अगर वूल
के साथ रगड़ेंगे तो कहां से कहां इलेक्ट्रॉन जाएगा? ऐसे ही ग्लास रोड सिल्क के साथ करेंगे तो कहां से कहां इलेक्ट्रॉन
जाएगा? इसके लिए मैंने आपको एक जुगाड़ भी सिखाया था। एक आरडीएक्स भी सिखाया था। जिन बच्चों को वो आरडीएक्स याद हो जरा वो
कमेंट सेक्शन में अभी पॉज करके लिखना। मैं देखता हूं कौन-कौन सा बच्चा पहले से मुझसे पढ़ा हुआ है ये वाला टॉपिक। ठीक है ना? एक
बार जरूर बताना। ठीक है? जरूर जरूर जरूर। ठीक है? जल्दी से जल्दी से। तो मैं मैं साइड हो जाता हूं। हां जी। तो इसका
आरडीएक्स ये था कि जो ये e से एबोनाइट स्टार्ट हो रहा है। इसका मतलब एबोनाइट रोड पर इलेक्ट्रॉन आएगा। यानी एबोनाइट रोड
होगी नेगेटिवली चार्ज्ड। और वूल से ट्रांसफर हो के आएगा भाई। है ना? तो ये हो गई नेगेटिवली चार्ज्ड और वूल हो जाएगी
पॉजिटिवली चार्ज्ड। ठीक है ना? इसमें उल्टा होता है। इसमें यहां से यहां इलेक्ट्रॉन जाता है। रोड से कपड़े की तरफ
इलेक्ट्रॉन जाता है यानी सिल्क हो जाता है नेगेटिवली चार्ज्ड और ग्लास रोड हो जाती है पॉजिटिवली चार्ज। ये ई से याद रखना। ई
फॉर एबोनाइट। ठीक है ना? मैंने भी ऐसे ही याद रखा था। वैसे ही आपको भी याद दिलवा रहा हूं। ठीक है? दूसरे पर आते हैं। दूसरा
है बेटा कंडक्शन। कंडक्शन का मतलब होता है कि एक बॉडी के पास कोई चार्ज है। मान लो पॉजिटिव चार्ज है और दूसरी बॉडी के
पास कोई चार्ज नहीं है। चार्जलेस है वो। ऐसा मान लो कि अभी उसके ऊपर कोई भी चार्ज नहीं आया हुआ। तो आपने क्या किया? आपने
दोनों को टच करवा दिया। इसे बोलते हैं कंडक्शन करना। जब आप एक्चुअली में टच करवा देते हो। एक्चुअल कांटेक्ट में ले आते हो
दो बॉडीज को। दैट इज कॉल्ड कंडक्शन। यहां पर देखो क्या लिखा हुआ है? डायरेक्ट कांटेक्ट अलाउज़ चार्ज ट्रांसफर। जैसे ही
आप दो बॉडीज को डायरेक्टली कनेक्ट करोगे तो एक से चार्ज निकल के दूसरे के अंदर ट्रांसफर होना चालू हो जाएगा। यानी एक
बॉडी जो पॉजिटिवली चार्ज थी दूसरी बॉडी जो न्यूट्रल थी अब वो जो पॉजिटिव वाली चार्ज थी उसमें से कुछ पॉजिटिव चार्ज समझ लो
निकल कर के उस न्यूट्रल बॉडी पे आ जाएंगे। तो न्यूट्रल बॉडी पहले से कुछ चार्ज हो जाएगी और जो पहले से चार्ज बॉडी थी वो कुछ
कम चार्ज हो जाएगी। क्योंकि उसका चार्ज ही तो ट्रांसफर हुआ है ना भाई। अरे उसी ने तो अपने जेब से रुपए निकाल के दूसरे को दिए
ना तो उसका रुपया थोड़ा घट गया और दूसरे का रुपया बढ़ गया। ऐसा हुआ है। यह है कंडक्शन। थोड़ा सा रुपया घट जाता है जहां
से चार्ज चल के आता है। तो ठीक? तीसरा वाला है इंडक्शन। इंडक्शन को जल्दी से सुन जाते हैं कि क्या है? इंडक्शन में क्या
होता है? देखो एक तरफ ऐसी बॉडी लाते हैं जो कि चार्ज्ड होती है। दूसरी तरफ ऐसी बॉडी होती है जो
कि अनचार्ज होती है। और बिना टच किए यहां पर क्या हुआ था? यहां पर टच हुआ था। यहां पर दोनों को छुआ दिया था। दोनों को वायर
से भी कनेक्ट कर देते हैं। ये भी एक तरीका होता है। क्या कर देना? वायर से कनेक्ट कर देना। जैसे यहां से एक वायर ली। इससे यहां
से जोड़ दी। तो वायर से जोड़ भी देना। ये भी एक तरीका होता है कंडक्शन का। लेकिन यहां पर देखो दूर-दूर से टच मतलब दूर-दूर
से देख रहे हैं। टच नहीं करवाना। इंडक्शन के अंदर याद रखना टच नहीं होगा। तो फिर क्या होगा? होगा क्या कि जो इसका पॉजिटिव
चार्ज है ना वो इसके इलेक्ट्रॉन्स को अट्रैक्ट करेगा। इसमें से जो इलेक्ट्रॉन है वो निकल निकल के आएंगे और इस हिस्से
में आकर के जमा हो जाएंगे। आप बात को समझे? इस पूरी बॉडी में से इलेक्ट्रॉन दो दौड़ दौड़ के भागेंगे और दौड़ते हुए आएंगे
यहां इकट्ठे हो जाएंगे और यहां पर डेफिशिएंसी हो जाएगी इलेक्ट्रॉन्स की। कमी हो जाएगी इलेक्ट्रॉन्स की तो वहां पे
पॉजिटिवली चार्ज्ड आपको चीजें ज्यादा दिखने लगेगी। यहां पर पॉजिटिव चार्ज ज्यादा अपीयर हो जाएगा। मतलब जो एक
न्यूट्रल बॉडी थी ना उसका एक पासा उसकी एक साइड चार्ज कर दी। दूसरी साइड दूसरा चार्ज आ गया। अब क्या किया कि पिछले वाली साइड
को ये क्या कर रखा है? देखो अर्थ कर रखा है। अर्थ करने का मतलब होता है एक वायर ली और धरती में डाल दी। वायर लेके धरती में
डालने से क्या हुआ? वायर लेके धरती में डालने से ये हुआ कि जितना भी चार्ज इस तरफ था ना वो सारा का सारा एक तरीके से समझो
न्यूट्रलाइज हो गया। क्योंकि अर्थिंग हो गई है भाई। अर्थिंग होती है तो ज़ीरो पोटेंशियल मिल जाता है। ज़ीरो पोटेंशियल
मिल जाएगा तो चार्ज का ट्रांसफर धरती में हो जाएगा। ऐसा समझ सकते हो। अब ये पूरी बॉडी कैसी हो जाएगी? नेगेटिवली चार्ज हो
जाएगी। यहां पर क्या लिखा हुआ है? देखो। चार्ज सेपरेशन अकर्स विदाउट डायरेक्ट कांटेक्ट। बिना कोई डायरेक्ट कांटेक्ट के
दूर-दूर से अट्रैक्शन से ही खाली इलेक्ट्रॉन्स को क्या कर लेना? एक तरफ बुला लेना। इसी को कहते हैं इंडक्शन।
होपफुली आपको समझ में आया होगा। आगे बढ़ते हैं फटाफट से। अब आते हैं भाई कूलम्स लॉ पर। देखो भाई कूलम्स लॉ के बारे में यहां
पर क्या बात लिखी हुई है? कूलम्स लॉ कहता है दो चार्जेस के बीच में फोर्स की बात। यहां देखो क्या बना हुआ है? एक चार्ज ये
रहा, एक चार्ज ये रहा। दोनों के बीच में कुछ r डिस्टेंस है। है ना? कुछ r डिस्टेंस है। ये वाला चार्ज इस वाले चार्ज पर फोर्स
लगाएगा। ये वाला चार्ज इस वाले चार्ज पर क्या लगाएगा? फोर्स लगाएगा। दोनों एक दूसरे पर क्या लगाएंगे? रिपल्सिव फोर्स
लगाएंगे। तो कूलम साहब ने ये कहा था कि ये जो फोर्स होती है, ये जो फोर्स होती है, ये डायरेक्टली प्रोपोर्शनल होती है किसके?
दोनों चार्जेस के मल्टीप्लिकेशन के। यहां पे चार्ज q1 ले लो। यहां दूसरा चार्ज q2 ले लो। तो दोनों चार्जेस का मल्टीप्लिकेशन
यहां पर लेना पड़ेगा। यानी q1 * q2 लेना पड़ेगा। सही है? अच्छा। इसके अलावा उन्होंने कहा था कि भाई ये इन्वर्सली
प्रोपोर्शनल भी होगी दोनों के बीच के डिस्टेंस के स्क्वायर के यानी इनवर्स स्क्वायर लॉ फॉलो होगा। इन्वर्स स्क्वायर
लॉ क्या कहता है? वो कहता है भाई चार्जेस को जितना दूर लेके जाओगे चार्जेस के बीच में सेपरेशन जितनी ज्यादा बढ़ाओगे फोर्स
उतनी कम हो जाएगी। तो सेपरेशन के साथ कैसा है? इन्वर्सली प्रपोर्शनल का रिश्ता है। इसे जोड़ दिया अगर तो फोर्स बन जाती है
प्रोपोर्शनल Q1Q2 / R² के। और जब प्रोपोर्शनैलिटी का साइन हटाया जाता है, इक्वल टू लगाया जाता है, तो यहां पर एक K
कांस्टेंट लगाते हैं। KQ1Q2 / R² और ये जो K है ना भाई, इसे बोलते हैं कूलम्स कांस्टेंट। इस K को बुलाते हैं
कूलम्स कांस्टेंट। ये K कौन है भाई? ये है कूलम्स कांस्टेंट। इसकी वैल्यू बताता हूं आपको क्या होती है? ये है कूलम्स
कांस्टेंट। इसकी वैल्यू होती है बेटा 9 * 10 की पावर 9। यूनिट की बात करेंगे थोड़ी देर में। आप खुद ही निकाल पाओगे इसकी
यूनिट को। तो टेंशन ना लेना। ठीक है ना? तो K की वैल्यू क्या है? 9 * 10 की पावर 9। अब ये K क्या होता है? देखो K असल में
होता है। ये कूलम्स कांस्टेंट जो है ना ये असल में होता है 1 / 4 पाई नंबर ही है। देखो 4π और फिर आएगा
एप्स 0। ये एप्स 0 कौन है भाई? ये कौन है? इस एप्स 0 को बोलते हैं परमिटिविटी ऑफ़ द फ्री स्पेस।
परमिटिविटी ऑफ़ द फ्री स्पेस का मतलब आप ऐसे समझना कि भाई स्पेस कितना? अलाउ कर रहा है इन चार्जेस को एक दूसरे पर फोर्स
लगाने कितनी दे रहा है ऐसे समझ सकते हो आप ठीक है ना तो परमिटिविटी का मतलब हो गया कि इसकी भी कुछ वैल्यू है भाई है ना तभी
तो तभी तो ये वैल्यू बनती है तभी तो 9 * 10 की पावर 9 बनी है ना एप्स नॉट की भी कुछ वैल्यू है पहले इसका नाम पूरा लिख दूं
मैं इसका नाम है परमिटिविटी ऑफ फ्री स्पेस ठीक है और इसकी वैल्यू होती है
8.85 टाइम्स 10 टू दी पावर -1 यूनिट क्या होगी? थोड़ी देर में बात करते हैं इस बारे में।
इसकी भी यूनिट और इसकी भी यूनिट कैसे निकलती है? बहुत ईजी है यूनिट निकालना। बहुत ईजी है। पर बताऊंगा कैसे निकालनी है।
अभी के लिए इतनी बातें समझ में आई। है ना? f = k q1 q2 / r² मतलब चार्जेस जितने ज्यादा होंगे, फोर्स उतनी ज्यादा। चार्जेस
जितने कम, फोर्स उतनी कम। ठीक है? और डिस्टेंस जितना ज्यादा, फोर्स उतनी कम और डिस्टेंस जितना कम, फोर्स उतनी ज्यादा। तो
ये कहानी बताई कूलम साहब ने। तो ये कूलम साहब का लॉ था। इसे कूलम्स लॉ बुलाते हैं भाई। ठीक है? बढ़िया। अच्छा अब एक बात और
करते हैं। मान लो मान लो कि इन चार्जेस को उठा के किसी मीडियम में रखा हुआ है। जैसे मान लेते हैं कि भाई ये दो चार्जेस थे। ये
वाला Q1 चार्ज। ये वाला Q2 चार्ज। और इन्हें हमने क्या किया? एक मीडियम में प्लेस कर दिया। ठीक है? ये रहा मीडियम।
ठीक है जी? यह कोई मीडियम है। अब हर मीडियम का ना अपना एक डाईइलेक्ट्रिक कॉन्स्टेंट होता है। क्या चीज़ होती है?
थोड़ा आगे जाकर के अपने आप सीखेंगे इसको हम। ठीक है ना? अभी के लिए आप ये समझो कि बस ये एक वैल्यू है। इसको कैपिटल K से
डिनोट करते हैं। ये छोटा K है बेटा। कर्सिव K है ये वाला। ये वाला कर्सिव K है। इसको कूलम्स कांस्टेंट बोलते हैं। मैं
दोनों एक ही पेज पे दिखा रहा हूं ताकि आपको कभी कंफ्यूजन ना हो इस बारे में। ये छोटा K जो होता है वो कूलम्स कांस्टेंट
है। बड़े K का नाम क्या है? बड़े K का नाम है डाईइलेक्टिक कांस्टेंट। पहले इसका नाम पूरा लिख देता हूं। डाईइलेक्ट्रिक
कांस्टेंट। ठीक है? तो हर मीडियम का ना अपना एक डइलेक्टिक कांस्टेंट होता है। और जब ये
फोर्स लगेगी अब इनके बीच में जैसे यहां पर जो फोर्स ये वाली लग रही थी ये वाली है ना वो अब पता है कितनी हो जाएगी? वो अब हो
जाएगी डइलेक्टिक कांस्टेंट से डिवाइड। बहुत सिंपल है। बहुत सिंपल। मतलब ये अब भी एक दूसरे पर फोर्स तो लगा रहे हैं। q1 ने
भी q2 पर फोर्स लगाई। q2 ने भी q1 पर फोर्स लगाई। वो फोर्स अब जो लग रही है मान लो f' लग रही है तो वो पुरानी वाली फोर्स
के डिवाइड बाय डाई इलेक्ट्रिक कांस्टेंट यानी कैपिटल K होगी। ये लगेगी फोर्स।
ये लगेगी फोर्स। समझ गए क्या? ये कहानी है। ठीक है? ठीक है जी। तो ये फोर्स जो लगती है बेटा ये डइलेक्टिक कांस्टेंट से
डिवाइड हो के लगती है। बढ़िया। आगे बढ़ता हूं। और यूनिट की बात अभी करते हैं। ठीक है? एक क्वेश्चन देखो जरा। क्या लिखा हुआ
है? कह रहा है दो आइडेंटिकल इंसुलेटेड कॉपर स्फीयर्स हैं। A एंड B हैव देयर सेंटर सेपरेटेड बाय अ डिस्टेंस 50 सें.मी.
व्हाट इज द म्यूचुअल फोर्स ऑफ इलेक्ट्रोडिक रिपल्शन बिटवीन द चार्जेस ऑन ईच इज़ इतना। ठीक है ना? तो यहां पर आपको
चार्जेस की वैल्यू बता दी है। दोनों के बीच में डिस्टेंस बता दिया है। तो कितनी फोर्स लगेगी? तो बेटा फोर्स आप ऐसे आराम
से निकाल सकते हो। देखो ये वाला है स्फीयर A ये वाला है स्फीयर B। दोनों एक दूसरे पर
क्या लगा रहे हैं? फोर्स लगा रहे हैं। दोनों के बीच की जो दूरी है वो 50 सें.मी. यहां पर आपको गिवन है। ठीक है ना? 50
सें.मी. गिवन है। ठीक? और चार्जेस भी गिवन है आपको 6.5 * 10 की पावर -7 तो फोर्स जो होगी इनके बीच में उसका फार्मूला होता है
k q1 q2 / r²। जरा एक बार पुट करो। k की वैल्यू क्या है? 9 * 10 की पावर 9 है। चार्जेस की वैल्यू क्या है? 6.5
* 10 की पावर -7 और फिर से 6.5 * 10 की पावर -7 डिवाइड बाय ये r कितना है? ये है 50 सेंटीमीटर। तो 50 / 100 कर दोगे और
इसका भी स्क्वायर जरूर कर देना बेटा। 100 से क्यों डिवाइड किया? क्योंकि सेंटीमीटर में था। मीटर में चेंज होना जरूरी है।
इसलिए 100 से डिवाइड किया है। और स्क्वायर क्यों किया? क्योंकि फार्मूले में स्क्वायर आता है बेटा। ठीक है ना? अब आप
जब इसको कैलकुलेट कर लोगे, अब मैं ये आपके लिए छोड़ रहा हूं। सिंपल कैलकुलेशन है। कोई मुश्किल कैलकुलेशन नहीं है। ईजी
कैलकुलेशन है। ये मैं आपके लिए छोड़ रहा हूं। मैं फर्दर कंटिन्यू करता हूं। कांसेप्ट पर आता हूं। लॉजिक पर आता हूं।
एक अच्छा सवाल है ये। तो इसको देखो एक बार। इसके बाद ये कह रहा है। कह रहा है एक तीसरा स्फीयर भी है। एक थर्ड स्फीयर भी
है। कह रहा है वो भी सेम साइज का है। हमने कहा अच्छा भाई। कह रहा है लेकिन वो अनचार्ज्ड है। न्यूट्रल है। मतलब कह रहा
है उसे ब्रॉट इन कांटेक्ट विद द फर्स्ट। उसे फर्स्ट के साथ टच करवाया। मतलब उसको लाए फर्स्ट के साथ टच करवा दिया। ठीक? कह
रहा है देन ब्रॉट इन कांटेक्ट विद द सेकंड। फिर लेकर के गए और सेकंड से भी टच करवा दिया। अच्छा कह रहा है फाइनली
रिमूव्ड फ्रॉम बोथ। फिर रिमूव कर दिया। कह रहा है व्हाट इज द न्यू फोर्स ऑफ़ रिपल्शन बिटवीन A एंड B? कह रहा है अब इनके बीच
में रिपल्शन वाली फोर्स निकालो। मुझे एक बात बताओ। जब एक न्यूट्रल कंडक्टर ले के आया और A से टच करवाया। तो क्या वो उसका
आधा चार्ज ले जाएगा कि नहीं ले जाएगा? कंडक्शन याद करो। अभी बताया था। कंडक्शन का मतलब क्या है? कि भाई जितना भी चार्ज
है और दूसरा भी आइडेंटिकल स्फीयर ही अगर आ गया तो वो उसका चार्ज ले जाएगा ही ले
जाएगा। है ना भाई? वो उससे चार्ज हो जाएगा। उसका चार्ज कुछ कम हो जाएगा। इसका चार्ज बढ़ जाएगा। तो आप आए आपने इससे टच
करवाया। इसका चार्ज ले गए भाई। है ना? तो ले गए तो कितना ले गए? आधा ले गए। आधा ले गए। और फिर उसी चार्ज को ले जाकर के आपने
इस पे टच कर दिया। तो अब दोनों का एवरेज चार्ज जो होगा जो यहां से चार्ज आया है, स्फीयर आया है। है ना? वो और इसके पास जो
चार्ज है दोनों का जो एवरेज होगा वो बचेगा B के पास। क्या बात को समझे? तो मतलब पहले अगर इसके पास Q चार्ज था और इसके पास भी
मान लो Q चार्ज था और फोर्स ऐसे थी KQQ / R² थी तो अब कितनी होगी? अब होगा भाई A के पास A की बात अगर करें तो A के पास चार्ज
होगा Q / 2 आधा चला गया ना इसका। तो इसका चार्ज हो जाएगा Q / 2 है ना? और जो हम इस हमने C वाले स्फीयर को ला कर के B से टच
करवाया है। तो B का चार्ज अब क्या होगा भाई? B का चार्ज अब क्या होगा? देखो, पहले B का चार्ज था Q. अब इससे आकर के मान लो
कोई C टच करता है जिस पर चार्ज Q / 2 है। C था ना वो तीसरा वाला स्फीयर वो Q / 2 है। तो आप बताओ दोनों का एवरेज क्या
बनेगा? तो देखो भाई Q + Q / 2 / 2 तो इतना चार्ज बचेगा। आप समझ गए ना? तो कितना चार्ज आ गया ये देखो 2q + q 3q
3q / 2 / 2 यानी 3q / 4 ये चार्ज बचेगा भाई। क्या सही बात है? 3q / 4 चार्ज बचेगा। बस इन दोनों के बीच में डिस्टेंस
अभी भी 50 ही है। आप अभी भी यूज़ कर सकते हो इसको। है ना? ये 50 का डिस्टेंस है दोनों के बीच में 50 का।
50 सें.मी. का है ना? फोर्स जो नई वाली आएगी उसे f' लिख लेना। अब तो f नहीं लिख सकते। यहां पर f लिखा था
तो यहां पे f नहीं लिख सकते। यहां f' लिखना पड़ेगा आपको। तो f' लिखोगे तो क्या लिखोगे? k
q / 2 और 3q / 4 / 50 / 100 का स्क्वायर। बस इसे कैलकुलेट कर लेना है आपने। अब क्या दिक्कत है बताओ? वैल्यूज़ आपको पहले से पता
है। 6.5 6.5 है। वो यहां यहां रख देना। चार्ज तो q का तो उतना ही रहेगा। और ये 3 / 4 है। ये टू है तो 3 / 8 है ना? ये 3/8
टाइम्स हो जाएगी पुरानी वाली f के। तो एक काम करना जितना भी वैल्यू इसका आए जितना भी वैल्यू इसका आए उसका 3/8 टाइम्स कर
देना बस खत्म। बहुत ईजी था भाई। समझ में आया? लेकिन क्वेश्चन कितनाेंट है पता है आपको? ये क्वेश्चनेंट है भाई। वेरी
वेरीेंट क्वेश्चन। ठीक है? मतलब दिमाग के घोड़े खोल देता है। ऐसा क्वेश्चन है ये। और मैं हल्के क्वेश्चन लाया भी नहीं हूं।
हल्के क्वेश्चन लाऊंगा भी नहीं। ठीक है? आगे चलते हैं। आगे बढ़ते हैं। वेक्टर फॉर्म के अंदर भी देख लेते हैं कूलम्स लॉ
किस तरीके से काम कर रहा है। ठीक है? तो बेटा वेक्टर फॉर्म में देखने के लिए बहुत जरूरी होता है कि अपन एक ग्राफ बनाएं।
y x ठीक है जी? एक ग्राफ बनाया। दो चार्जेस दिखाए।
एक q1 q2 q1 q2 पर लगा रहा है रिपल्सिव फोर्स। q1
q2 पर लगा रहा है रिपल्सिव फ़। कोई दिक्कत नहीं है। ठीक है? दोनों का पोजीशन वेक्टर लिया जा सकता है। बिल्कुल। तो यहां से
पोजीशन वेक्टर q1 का लिखता हूं r1 वेक्टर। ठीक? और q2 का लिखता हूं पोजीशन वेक्टर तो r2 वेक्टर लिखूंगा। सही है?
ठीक? अच्छा। इन दोनों के बीच का ये डिस्टेंस r होता है ना वैसे तो r। तो इसको भी वेक्टर के फॉर्म में लिखने के लिए मुझे
r वेक्टर ऐसे लिखना पड़ेगा। डायरेक्शन कुछ ना कुछ देनी पड़ेगी। तो मैंने डायरेक्शन q2 से q1 के टुवर्ड्स दे दी। ठीक है ना?
q2 से q1 के टुवर्ड्स दे दी। ठीक है? अच्छा। अब अगर मैं एक ट्रायंगल लॉ लगा के देखूं यहां पर जो वेक्टर का ट्रायंगल लॉ
होता है। उसमें आपको पता है कि भाई जब ट्रायंगल लॉ हम लगाते हैं तो दो वेक्टर दिखा रहे हैं। एक एक r2 दिखाया, एक r
दिखाया। और इसी सेंस में अगर r1 दिखा दिया तो फिर नेट वेक्टर ज़ीरो हो जाएगा इसका। तो ऐसा नहीं दिखाते है ना हम R2 दिखाएंगे फिर
R दिखाएंगे और फिर वो इक्वल होगा R1 के। है ना? तो यानी हम इसे लिख सकते हैं कि भाई जो R2 वेक्टर है हमारा प्लस में हमारा
जो R वेक्टर है वो इक्वल है किसके? R1 वेक्टर के। तो यहां से जब मैं R निकालूंगा तो क्या लिखूंगा? R1 वेक्टर - R2 वेक्टर
लिखूंगा। मैग्नीट्यूड वाइज़ भी लिखना होगा। तो R1 वेक्टर - R2 वेक्टर को मोड में लिखूंगा। आप समझे बात को? तो ये जो r है
ना यहां पर ये जो r है ना वो असल में r1 - r2 वेक्टर का मोड है। अब एक बार फोर्स लिख के देखते हैं। आ जाओ आ जाओ। फोर्स क्या है
भाई? फोर्स क्या होता है? फोर्स होता है सर k q1q2 / r² सिर्फ मैग्नीट्यूड वाइज़ लिखा है। देखो मैंने। तो ये जो बेटा लिखा
है मैंने ये मैग्नीट्यूड वाइज लिखा है। अब इसे वेक्टर वाइज लिखते हैं। देखो वेक्टर वाइज अगर लिखेंगे वेक्टर के तरीके से
लिखेंगे तो f के ऊपर वेक्टर लगाना पड़ेगा। सही है? ये इसका मैग्नीट्यूड हो गया। हां। तो KQ1
Q2 / R² ये इसका मैग्नीट्यूड हो गया। सही बात है सर। अच्छा साथ में आपको पता है कि आपको एक R कैप भी लिखना पड़ता है। ये
डायरेक्शन के लिए आता है भाई। है ना? क्योंकि डायरेक्शन आपको पता है ये वाली है। इस डायरेक्शन में फोर्स लग रही है। तो
यही डायरेक्शन हमने डिनोट कर दी किससे? R कैप से। सही है? अच्छा। अब ये R कैप क्या होता है? देखो कोई भी वेक्टर कोई भी
वेक्टर दो चीजों से मिलके बना होता है। एक उसका मैग्नीट्यूड और एक उसकी डायरेक्शन। अगर आपको a कैप लिखना है बेटा, तो कैसे
लिखोगे? इसको इसके डिवाइड में ले आओगे। तो a वेक्टर के डिवाइड में कौन आ गया? a का मैग्नीट्यूड आ गया। आ गया कि नहीं आ गया?
बस यहां पर इसको आप पुट कर दोगे। k q1q2 / r² और r कैप को क्या पुट करेंगे? वेक्टर डिवाइड बाय मैग्नीट्यूड।
वेक्टर बाय मैग्नीट्यूड। तो r वेक्टर क्या है यार? r वेक्टर देखो ये रहा r1 - r2 और ये r क्या है? r है r1 - r2 का मोड। तो
इसको पूरा लिखना हो अगर तो मैं ऐसे लिखूंगा। देखो ऐसे लिखूंगा k q1q2 r वेक्टर तो है ही है। डिवाइड बाय ये r²
है और ये भी r है देखो तो मिलके बन जाएगा r है ना? मिल के बन जाएगा ये r
बस फाइनली आप लिख दो इसको kq1 q2 r वेक्टर की जगह r1 r1 वेक्टर - r2 वेक्टर r1 वेक्टर - r2 वेक्टर ठीक है ना और
डिवाइड बाय या यहीं पे डिवाइड लगा देते हैं r1 वेक्टर - r2 वेक्टर के मोड का होल क्यूब
या ऐसे लिख दो समझ गए ना ये r वाला r वाला वाला जो है R मोड जो है वो R1 - R2 मोड है। वो यहां लिखा उसका क्यूब लगा दिया और
ये रहा आपका R1 वेक्टर - R2 वेक्टर। ये है सही तरीका कूलम्स
लॉ का वेक्टर फॉर्म लिखने का। ये कूलम्स लॉ का वेक्टर फॉर्म लिखने का। सबसे सही तरीका है।
ठीक जी। होपफुली आपको समझ में भी आया होगा कि मैंने किया क्या है ये। चलिए अब आते हैं भाई इनकी यूनिट्स पर जो कि हम पीछे
छोड़ आए थे। आइए थोड़ी सी यूनिट्स को भी डिस्कस करते हैं भाई। देखो यूनिट्स कैसे निकाली जाएंगी इसकी। यूनिट्स ऑफ k है ना
और0 ये कैसे आएंगी? देखो सीखो। आप जानते हो फोर्स होती है kq1 q2 / r² यही होती है। ठीक है? तो आपको किस-किस की यूनिट पता
है इसमें? बस मुझे ये बता दो। आप किस-किस की यूनिट को जानते हो पहले से? बस ये बता दो। बता दो। किस-किस की यूनिट जानते हो?
क्या फोर्स की जानते हो? हां सर। जानते हैं न्यूटन होती है। K की जानते हो? नहीं सर इसकी नहीं जानते। इसको छोड़ दो। चार्ज
की जानते हो? हां सर कूलम्ब होता है कूलम। तो एक कूलम दो कूलम सर दो बार कूलम। तो कूलम कूलम ऐसे लिखेंगे और ये R क्या है?
ये डिस्टेंस है। डिस्टेंस होता है मीटर में। ये हो जाएगा मीटर का स्क्वायर। तो मीटर का स्क्वायर चला गया ऊपर और कूलम का
स्क्वायर आ गया नीचे। यह बन गया न्यूटन मीटर स्क्वायर डिवाइड में कूलम स्क्वायर या फिर n m2 c - 2 ठीक है ना nm2
c - 2 ये यूनिट है इसकी न्यूटन मीटर स्क्वायर कूलॉम -2 और एक बात बताओ सोच के बताना क्या ये k और एप्स 0
इनवर्सली नहीं है एक दूसरे के क्या इनवर्स नहीं है क्या एक दूसरे के है ना तो फिर जो भी इसकी यूनिट है इसकी इनवर्स यूनिट इसकी
बनेगी जो भी k की यूनिट बनेगी वो एप्स 0 की इनवर्स ही तो बनेगी तो अगर वो न्यूटन है वो n की पावर +1 है ये n की पावर -1
आएगा वो मीटर की पावर +2 है यहां मीटर की पावर -2 आएगा वहां कूलम की पावर -2 है। यहां कूलॉम की पावर +2 आएगा। बस हो गई
यूनिट। समझ गए क्या? उल्टी यूनिट होंगी ना यार। है ना? तो जैसे K की यूनिट ऐसी है बेटा एप्स नॉट की यूनिट इसकी एकदम उल्टी
होगी क्योंकि ये 1 / K ही तो है। उल्टा ही तो है। अगर आप प्रोपोर्शनैलिटी ही देख लो खाली है ना? तो K ही तो है। इससे इसकी
यूनिट क्या बन गई? n - 1, M - 2 और C + 2 खत्म। आ गया। खत्म। आगे बढ़ते हैं। चलिए, ये भी एक इंपॉर्टेंट थ्योरी का
पॉइंट है भाई। कूलम्स लॉ की लिमिटेशन कभी-कभी पूछ ली जाती है दो नंबर के अंदर। आइए सुनिए। कह रहा है इलेक्ट्रिक चार्जेस
रेस्ट पर होने चाहिए भाई। अगर चलते चार्जेस होते हैं तो कूलम्स लॉ डिफाइन नहीं है उसके लिए। दूसरा इलेक्ट्रिक
चार्जेस मस्ट बी पॉइंट चार्जेस दैट इज एक्सटेंशन ऑफ़ चार्जेस मस्ट बी मच स्मॉलर देन द सेपरेशन बिटवीन द चार्जेस। ये क्या
लिखा हुआ है? ये कह रहा है कि भाई जो चार्जेस है ना वो पॉइंट चार्ज मानने हैं आपने। अभी आप बोलोगे कि सर आपने तो वो a b
c बड़े-बड़े स्फीयर माने थे। बेटा बड़े-बड़े स्फीयर बेशक से मैंने माने हो पर कितने बड़े कोई डिफाइन है क्या उसका?
नहीं ना। कोई डेफिनेशन दी क्या? नहीं। तो मोटी बात यह होती है बड़े-बड़े मानने का मतलब या ज्यादा डिस्टेंस मानने का मतलब या
पॉइंट चार्ज मानने का मतलब यह होता है कि कंपैरिजन में बहुत छोटे होने चाहिए। मतलब उनके बीच में डिस्टेंस इतना ज्यादा हो कि
चार्जेस बहुत छोटे-छोटे दिखाई दें। ऐसा चाहता है कूलम्स लॉ। समझ गए ना? यही लिखा हुआ है देखो यहां पर। एक्सटेंशन ऑफ़
चार्जेस मस्ट मस्ट बी मच स्मॉलर देन द सेपरेशन बिटवीन द चार्जेस। जो चार्जेस के बीच में दूरी हो ना वो बहुत ज्यादा होनी
चाहिए। एज़ कंपेयर टू चार्ज का साइज। तो इसका मतलब ये नहीं कि पॉइंट चार्ज ही ढूंढने हैं आपको कि भ इलेक्ट्रॉन ढूंढने
जाओगे प्रोटॉन ढूंढने नहीं बॉडीज ही होंगी वो लेकिन वो अच्छे खासे डिस्टेंस पर रखी होनी चाहिए। ठीक है? तीसरा द सेपरेशन
बिटवीन द चार्जेस मस्ट बी ग्रेटर देन द न्यूक्लियर साइज। ये बात बहुत जरूरी है भाई। कहीं ऐसा ना हो कि आप न्यूक्लियस के
अंदर स्टडी करने लगो कूलम्स लॉ की नहीं हो पाएगी। न्यूक्लियस के अंदर स्टडी कूलम्स लॉ की नहीं होती है। वहां पे कूलंबिक
फोर्स नहीं काम करती। वहां पर न्यूक्लियर फ़ काम करती है। तो मोटी बात समझो क्या है? कि अगर 10 से 10 की पावर -15 से छोटा
डिस्टेंस हुआ तो वहां पर कूलम्स लॉ काम नहीं करता। तो बड़े डिस्टेंससेस पर काम करता है। बिकॉज़ ऑफ़ द डिस्टेंस लेस दैन
इतना द स्ट्रांग न्यूक्लियर फोर्स डोमिनेट्स ओवर लिखा हुआ है ना न्यूक्लियर फ़ जो क्या करेगी? डोमिनेट करेगी।
न्यूक्लियर फ़ वहां पर डोमिनेट करती है किसको? इलेक्ट्रोस्टेटिक फोर्स को। तो समझिए बात को। इलेक्ट्रोिक फ़ोर्स जो है वो
बड़े डिस्टेंससेस के लिए। बड़ी सेपरेशन के लिए छोटे-मोटे डिस्टेंसेस के लिए नहीं है वो। ऐसा यहां पर बता रखा है। ठीक है? आगे
चलते हैं। नेक्स्ट आते हैं। बात करते हैं सुपरपजीशन प्रिंसिपल के बारे में। देखो, सुपरपजीशन प्रिंसिपल कोई नया नहीं है।
पहली बार सुपरपजीशन प्रिंसिपल आपने न्यूटंस लॉज़ ऑफ मोशन में पढ़ा था क्लास 11th में। कोई बात नहीं, नहीं भी पढ़ा था
तो। सुपरपजीशन प्रिंसिपल का मतलब होता है जैसे एक चार्ज है। उस चार्ज पर मल्टीपल चार्जेस अपनी-अपनी फोर्स लगाएंगे। लगाएंगे
ना? जैसे ये एक चार्ज है। देखो। तो ये चार्ज पर ये भी अपनी फोर्स लगाएगा। कुछ ये भी लगाएगा, कुछ ये भी लगाएगा और ये भी
उल्टा करेगा, ये भी उन पर लगाएगा। है ना? तो ये जो डिस ये जो रिलेशनशिप है ना ये म्यूचुअल है। म्यूचुअल का मतलब इन दोनों
का आपसी है। कोई तीसरे का इंटरफेरेंस कभी भी नहीं होता। इसी को बोलते हैं लॉ ऑफ़ सुपरपजीशन प्रिंसिपल। क्या लिखा हुआ है? द
सुपरपजीशन प्रिंसिपल का मतलब व्हेन अ नंबर ऑफ़ चार्जेस आर इंटरेक्टिंग। द टोटल फोर्स ऑन द गिवन चार्ज इज़ द वेक्टर सम ऑफ़ द
फोर्सर्सेस एग्जर्टेड इट ड्यू टू ऑल अदर चार्जेस। समझ गए ना? मतलब सबका वेक्टर सम लिया जाएगा। जैसे एक चार्ज पर ये मान लो
कोई चार्ज है q नॉट चार्ज है। इसका नाम है q नॉट। इस पर कोई q1 चार्ज भी क्या कर रहा है जी? फोर्स लगा रहा है।
F1 कोई q2 चार्ज भी क्या कर रहा है? इसके ऊपर फोर्स लगा रहा है। F2 कोई q3 चार्ज भी क्या कर रहा है? इसके ऊपर फोर्स लगा रहा
है। F3 तो आपको नेट फोर्स जो देखनी है वो तीनों का वेक्टर सम लेके देखनी है। ठीक है ना? तीनों का वेक्टर सम ही जो होगा, f नेट
ही जो होगा, वही आपको फाइनल फ़ोर्स देगा। f1 वेक्टर, f2 वेक्टर, f3 वेक्टर का जो वेक्टर सम होगा,
वही आपको नेट फ़ोर्स देने वाला है। मोटी बात यह है। ठीक है ना? इसी को बोलते हैं सुपरपजीशन प्रिंसिपल। और देखो क्या लिखा
हुआ है? द फोर्स बिटवीन टू चार्जेस इज़ नॉट अफेक्टेड बाय द प्रेज़ेंस ऑफ़ अदर चार्जेस। दो लोगों के बीच में जो रिश्ता है, वह
उनके बीच का है। तीसरा वाला आएगा, तो इंटरफेयर कर नहीं पाएगा। इस तरीके की बॉन्डिंग होती है। इस तरीके की बातचीत
होती है सुपर पोजीशन प्रिंसिपल में। आइए एक सवाल भी देख लेते हैं। कह रहा है टू आइडेंटिकल चार्जेस q ईच आर केप्ट एट अ
डिस्टेंस r फ्रॉम ईच अदर। ठीक है जी। कह रहा है अ थर्ड चार्ज q इज़ प्लेस्ड ऑन द लाइन जॉइनिंग द अबव टू चार्जेस सच दैट ऑल
द थ्री चार्जेस आर इन इक्विलिब्रियम। इक्विलिब्रियम में हो जाए। व्हाट इज़ द मैग्नीट्यूड साइन एंड पोजीशन? बहुतेंट
सवाल है ये। ये आसान सवाल नहीं है। अच्छे सवाल ही लाया हूं मैं। जहां बच्चा फंसता है, जहां बच्चा अटकता है, जहां बच्चे को
प्रॉब्लम आती है। आइए देखते हैं सवाल कैसे करना है। मैं पहले थोड़ा सा साइड होता हूं। आप देखो आप कर पा रहे हो क्या इसको?
चलिए भाई क्या है ये सवाल? देखो ये सवाल ऐसा कह रहा है कि दो आइडेंटिकल चार्ज है। q है दोनों। ये भी q ये भी q। ठीक? ये रहे
दोनों। सही? कह रहा है दोनों को किसी डिस्टेंस पर रखा हुआ है। मान लो r डिस्टेंस पर रखा हुआ है। ये रहा r
डिस्टेंस। कह रहा है तीसरा चार्ज q भी प्लेस किया गया। कहां प्लेस करें? मान लेते हैं यहां प्लेस करते हैं इसको q को।
इधर इधर कहीं प्लेस किया। ठीक है ना? कह रहा है ऑन द लाइन जॉइनिंग द अबव टू। उसी लाइन पे ही जॉइन जिस जो लाइन इनको जॉइन कर
रही है उसी के ऊपर चार्ज रखा हुआ है। ठीक है ना? कह रहा है सच दैट ऑल द थ्री चार्जेस आर इन इक्विलिब्रियम।
इक्विलिब्रियम में होने का क्या मतलब है? कि इक्विलिब्रियम में होने का मतलब है सब रेस्ट पे आ जाए। कोई ना हिले। सब पर नेट फ़
क्या होनी चाहिए? ज़ीरो होनी चाहिए। मतलब q पर भी ये दोनों जब फ़ लगाएं तो ज़ीरो आए। बीच वाले छोटे के ऊपर भी ये दोनों जब
फोर्स लगाएं तो जीरो आए और कोने वाले के ऊपर भी ये दोनों जब फोर्स लगाएं तो जीरो आए। बेटा ऐसा सिर्फ तभी हो सकता है जब ये
चार्ज नेगेटिव हो। खुद सोचना। मान लो ये पॉजिटिव होता। सपोज़ कर ये पॉजिटिव होता। तो क्या ये इस पे रिपल्सिव फ़ लगाता?
लगाता। क्या ये भी इस पे रिपल्सिव फ़ लगाता भाई? हां लगाता। ये इस पे भी लगाता। हां लगाता। ये इस पे तो फिर एफ नेट ज़ीरो कैसे
होता? इक्विलिब्रियम आता कैसे? सोच। इसलिए ऐसा नहीं होगा। इसलिए ऐसा नहीं होगा। यह चार्ज कैसा रहना चाहिए? नेगेटिव रहना
चाहिए। अब आप चेक कर लो जरा। इस चार्ज पर ये दोनों अट्रैक्टिव फोर्स लगाएंगे। कटनी चाहिए, कट जाएगी। ये इस पर अट्रैक्टिव
लगाएगा। ये इस पर रिपल्सिव लगाएगा कट जाएगी। ये इस पर रिपल्सिव लगाएगा लेकिन ये इस पर अट्रैक्टिव लगाएगा कट। ऐसा आपको
सिस्टम बनाना है। ये बोल रहा है। ऐसा सिस्टम बनाइए कि भाई ये -q चार्ज की कुछ वैल्यू हो और कुछ डिस्टेंस भी हो। तो आओ
देखते हैं फिर क्या डिस्टेंस हो के? के इक्विलिब्रियम बैठे ही बैठे हैं। है ना? तो एक काम करते हैं। एक काम करते हैं। हम
यहां से कुछ डिस्टेंस सपोज़ कर लेते हैं। किधर से? ये बड़े q और छोटे q के बीच में कुछ दूरी x मान लेते हैं। कितनी मान ली? x
मान ली। तो ये वाली दूरी कितनी होगी? ये वाली होगी r - x। आप ऐसा क्यों मान रहे हो कि बीचोंबीच रखा हुआ है। पहले से थोड़ी
मान सकते हैं ऐसा। अरे पहले से थोड़ी मान सकते हैं। आप एक डिस्टेंस x मानो, दूसरे को r - x मानो। ठीक है? अब इस पर
इक्विलिब्रियम करके दिखाओ बैलेंस एट -q ठीक है ना? इक्विलिब्रियम कहां देख रहे हैं? -q पर देख रहे हैं। कैसे देखेंगे?
दोनों की फोर्सेस को बैलेंस करेंगे। आओ फोर्सेस लिखते हैं। देखो बड़ा q छोटे q पे फोर्स लगाएगा। वो फोर्स होगी k q q / x²
सही है? ये डिस्टेंस कितना है दोनों के बीच में? x है। ऐसे ही ये दोनों फोर्स लगाएंगे तो क्या आएगा? k q q डिवाइड बाय r
- x होल स्क्वायर आप में से काफी सारे बच्चे पूछेंगे सर ये -q क्यों नहीं लगाया आपने बेटा मैग्नीट्यूड ही तो देख रहा है
हम डायरेक्शन से कहां कोई सरोकार रख रहे हैं कोई मतलब ही नहीं है हमें डायरेक्शन से हम सिर्फ मैग्नीट्यूड में इंटरेस्टेड
हैं इस टाइम पर इसलिए मैंने यहां पर सिर्फ q और q ही रखा आप अगर माइनस भी रख लेते ना बेटा तो भी कोई फर्क नहीं पड़ता लो दोनों
के माइनस भी कट जाएंगे आमने सामने तो आप बात को समझो। ठीक है ना? तो कोई जरूरत नहीं है रखने की खास। ठीक है? अब k q q kq
q कट गया। बचा क्या? बचा सर 1 / x² = 1 / r - x² दोनों तरफ रूट ले लो। ले लेते हैं सर। रूट लेते ही यहां पर आ जाएगा 1 / x.
यहां आ जाएगा 1 / r - x. रेसिप्रोकल कर लो एक बार ज़रा। कर लो। यह आ जाएगा x. यह आ जाएगा r - x. x को यहां ले गए, तो 2x हो
गया। 2x = r और x आ गया r / 2 ये आपका आंसर है r / 2 तो कहां रखना है वो
समझ में आ गया सर r / 2 पे ही तो रखना था सर आप पहले से क्यों अरे पहले से नहीं रख सकते भाई आपको प्रूव करना पड़ेगा ये कि r
/ 2 पे ही रख के इक्विलिब्रियम बैठ रहा है तो पहला इक्विलिब्रियम मैंने कहां बिठाया -q पे बिठाया अब तीसरी चीज है यहां पर
चार्ज की वैल्यू पता करने की कि ये वैल्यू कितनी हो चार्ज की देखो ना यही पूछा हुआ व्हाट इज द मैग्नीट्यूड वो तो निकाला ही
नहीं साइन वो हमने बता दिया नेगेटिव होना चाहिए लॉजिक से बताया है वो और पोजीशन बतानी है जी पोजीशन तो बता दी sin बता
दिया पोजीशन बता दी मैग्नीट्यूड रह गया आओ मैग्नीट्यूड भी निकालते हैं अब आप अब आप इक्विलिब्रियम बैलेंस करो किसी भी एक बड़े
q पे इस पे कर लो चाहे उस पे कर लो जिस पे मर्जी कर लो ठीक है आइए इस बड़े वाले q पे चार्ज को मतलब फोर्सेस को बैलेंस करते हैं
ठीक है जब ये दोनों फोर्स लगाएंगे बेटा बड़ा बड़ा Q बड़ा Q एक दूसरे पर तो फोर्स लिखी जाएगी K
QQ अपॉन में ये डिस्टेंस कितना है सर r² है बहुत बढ़िया अब ये छोटा Q और बड़ा Q लगाएगा तो सर KQ छोटा Q / ये डिस्टेंस
कितना है या वो वाला ले लो चलो एक ही बात है जो मर्जी ले लो है ना वैसे आपको ये डिस्टेंस मिल गया है ना आपको ये x मिल गया
है वो क्या है r / 2 है तो r / 2 भी लिख सकते हो यहां पर आप सीधा-सीधा r / 2 होल स्क्वायर कोई दिक्कत नहीं, बढ़िया। अब देख,
कौन-कौन कटेगा बेटा। k से K गया, q से q गया, r² से r² भी गया। है ना? ये भी चला गया। पर ये जो टू का स्क्वायर है वो चार
बन जाएगा और चार जा के ऊपर बैठ जाएगा। यानी ये q हो जाएगा 4 q और स्मॉल q आ जाएगा q / 4 ऑलवेज विद अ माइनस साइन।
माइनस साइन क्यों आया? आप समझ गएगे। है ना? यह मैंने लॉजिक से आपको पहले ही समझा दिया है।
तो जितना भी चार्ज ये बड़े वाले Q का है छोटे वाले का डिवाइड बाय 4 रख दोगे काम चल जाएगा। डिवाइड बाय 4 रखने से ही काम हो
जाएगा। तो Q / 4 इज़ द चार्ज ऑफ़ स्मॉल Q। मैग्नीट्यूड भी आ गया बेटा, साइन भी आ गया बेटा और पोजीशन भी आ गई। ठीक है ना? जरा
फील ले लो सवाल की। ठीक बात है कि नहीं? चलें आगे। चलो जी। नेक्स्ट चीज़ आती है इलेक्ट्रिक फील्ड। देखो इलेक्ट्रिक फील्ड
को हम लोग ऐसे डिफाइन करते हैं कि भाई ये किसी स्पेस में लाई करती है। ये किसी स्पेस में होती है
स्पेस में। मतलब 3D स्पेस की बात हो रही है। 3D स्पेस की बात हो रही है। इसे इस तरीके से लाइंस के साथ दिखाया जाता है।
अभी इलेक्ट्रिक फील्ड लाइन हम लोग पढ़ेंगे। कोई टेंशन वाली बात नहीं है। मैं यहां पे आपको ये बताने के लिए आया हूं कि भाई ये
जो फील्ड होती है ये कितनी होती है? इसकी वैल्यू क्या होती है? तो सुनिएगा। देखो इसे डिफाइन कैसे किया जाता है कि मान लो
एक चार्ज है। ठीक है? Q चार्ज है। वह सब दिशाओं में अपनी फील्ड निकाले हुए हैं। सब दिशाओं में अपनी फील्ड
निकाले हुए हैं। अपनी फील्ड निकाले हुए हैं। अब सपोज़ करो कि इसके सामने कोई छोटा सा चार्ज आता है। एक छोटा चार्ज आता है q
नॉट। क्या नाम है इस चार्ज का? q नॉट। यह एक पॉजिटिव टेस्ट चार्ज है। क्या बुलाते हैं इसको? पॉजिटिव टेस्ट चार्ज। ये कौन
है? इसे बुलाते हैं सोर्स चार्ज। इसे क्या बोलते हैं? मोटे चार्ज को बोलते हैं सोर्स चार्ज। इस छोटे को क्या बोलते हैं? टेस्ट
चार्ज। जब यह मोटे चार्ज के सामने छोटा चार्ज आता है ना भाई तो ये छोटा चार्ज घबरा जाता है क्योंकि बड़े चार्ज का कुछ
उखाड़ नहीं सकता। आप समझो बात को छोटे चार्ज की बदौलत बड़े चार्ज पर फोर्स लग भी गई तो भी वो हिलेगा नहीं। ऐसा फिक्स रखते
हैं बड़े वाले चार्ज को सोर्स चार्ज को। पर ये छोटे वाले पर क्या होगा? छोटे वाले पर फोर्स लगेगी रिपल्सिव। ये आप समझते हो।
है ना? तो इस पर फोर्स लगती है पीछे की तरफ। ऐसे लगेगी नहीं लगेगी? बिल्कुल लगेगी। आप इस फोर्स को लिखो एक बार। कैसे
लिखते हैं इस फोर्स को? बताइए क्या होता है? k q q नॉट डिवाइड बाय ये कुछ डिस्टेंस होगा ना तो इस डिस्टेंस को आप r ले लो।
ठीक है? तो ये कितना आ गया? r² आ गया। दिस इज़ द फोर्स। अभी फील्ड नहीं लिखी। अभी इलेक्ट्रिक फील्ड की बात नहीं हो रही। अभी
सिर्फ फोर्स की बात हो रही है। ठीक है? अब आप क्या करोगे? आप जब इलेक्ट्रिक फील्ड निकालना चाहोगे ना इस पॉइंट पर कि भाई इस
पॉइंट पर कितनी इलेक्ट्रिक फील्ड है? ये तो बताओ। जो फोर्स लग रही है वो फील्ड की वजह से ही तो लग रही है। हां या ना? जो
फोर्स लगी वो क्यों लगी? वो फील्ड ही उसके पीछे का कारण है। अगर ग्रेविटी हम पर फोर्स लगाती है। ग्रेविटी हम पर फोर्स
लगती है तो वो ग्रेविटेशनल फील्ड की वजह से तो है। जो धरती की अपनी फील्ड है। दूर-दूर तक कहीं-कहीं किलोमीटर ऊपर। तो
चीजों को वो खींच लेती है। तो फील्ड की वजह से फोर्सेस आती हैं। समझ गए ना? तो ऐसी फील्ड की वजह से क्या आई है? फोर्स
आई। अब फील्ड कैसे निकालोगे? तो बोला भाई फील्ड निकलेगी। फील्ड निकलेगी इस फोर्स को डिवाइड कर दो टेस्ट चार्ज से।
जिस पर भी ये फोर्स देख रहे हो उसी को डिवाइड कर दो। जिस पर भी आप फोर्स देख रहे हो उसको डिवाइड कर दो। फोर्स / q नॉट
फोर्स / q नॉट। तो ये आ जाएगा kq q नॉट / r² q नॉट q नॉट से q नॉट कट गया। kq / r² आ गया। तो इलेक्ट्रिक फील्ड इज
व्हाट? यहां लिख दूं। इलेक्ट्रिक फील्ड इज व्हाट? KQ / r² बहुत छोटी सी प्यारी सी डेरिवेशन है।
डेरिवेशन भी क्या बोले इसको? डिफाइन ही ऐसे करते हैं। इसे डिफाइन ही डेफिनेशन ही ऐसे दी जाती है इसकी कि फोर्स कितनी लग
रही है? डिवाइड बाय टेस्ट चार्ज। जिस पर फोर्स देख रहे हो उससे डिवाइड कर दो। समझ गए ना? तो मतलब मान लो पहले से कोई
इलेक्ट्रिक फील्ड है। यहां देखना जरा। मान लो पहले से कोई इलेक्ट्रिक फील्ड है और उसमें हमने कोई चार्ज ला के रख दिया। मान
लो हमने इस पर हमने q चार्ज ला के इस पर रख दिया। तो बताओ ये फील्ड इस चार्ज पर फोर्स लगाएगी कि नहीं लगाएगी? ये फील्ड इस
चार्ज पर फोर्स लगाएगी हां या ना? लगाएगी सर। जैसे फील्ड ने यहां पर फोर्स लगाई वैसे यहां भी लगाएगी। तो इस फोर्स को पता
है कैसे लिख सकते हैं? हम इसे ऐसे लिख सकते हैं। देखो e क्या होता है? e होता है फोर्स / चार्ज। हां सर होता है। तो फोर्स
को यहां से क्या आप q टाइम्स e नहीं लिख सकते क्या? q को ले गए और e से मल्टीप्लाई कर दिया। अरे जो इस पॉइंट पर e है और जो
इसका चार्ज है दोनों को मल्टीप्लाई कर दो। फोर्स निकल के आ जाएगी। तो फोर्स किसी भी चार्ज पर जब लगती है फील्ड के अंदर तो वो
qe लगती है। कितनी लगती है? qe याद रखोगे ये बात? कितनी लगती है? QE
तो फोर्स लगती है Q टाइम्स E चार्ज मल्टीप्लाई बाय इलेक्ट्रिक फील्ड चार्ज मल्टीप्लाई बाय इलेक्ट्रिक फील्ड इज द
फोर्स एक्टिंग ऑन दिस चार्ज क्लियर हुआ क्या? और इलेक्ट्रिक फील्ड की खुद की वैल्यू कोई आपसे पूछे तो KQ / R² है। एक
चार्ज से r डिस्टेंस पर कितनी फील्ड लग रही है? दैट इज़ KQ / R² समझ गए ना? अच्छा एक बात और देखो यहां पर। क्या ये
इलेक्ट्रिक फील्ड इन्वर्सली प्रोपोर्शनल टू r² नहीं है क्या? हां सर है। ये भी इनवर्स स्क्वायर
लॉ फॉलो कर रही है। ठीक है ना? और इसका जब आप जब आप ग्राफ बनाओगे ना r के साथ E का r के साथ जब ग्राफ बनेगा ना वो ऐसे गिरता
हुआ बनेगा। आप समझ गए ना क्यों? है ना? पैराबोला बनेगा ना बेटा। r² है ना? तो गिरता हुआ पैराबोला ऐसे आपको दिखाना
पड़ेगा इसका। E के साथ R का ग्राफ ऐसे गिरता हुआ दिखाना है फॉर अ पॉइंट चार्ज। ठीक है ना? फॉर अ सोर्स चार्ज। क्लियर है
बात? तो काफी सारी बातें हम लोगों ने इस बारे में कर ली है। तो आइए एक ओके सवाल देख लेते हैं। कह रहा है कैलकुलेट द
इलेक्ट्रिक फील्ड स्ट्रेंथ रिक्वायर्ड टू जस्ट सपोर्ट अ वाटर ड्रॉप ऑफ मास 10 की पावर - kg हैविंग अ चार्ज इतना। एक अच्छा
सवाल है। अगेन क्या बोल रहा है? कह रहा है भाई एक एक वाटर की ड्रॉपलेट है। ठीक है? पानी की
बूंद है। वो पानी की बूंद जो है उस पर नीचे की तरफ mg लग रहा है। लगेगा ना? भाई ग्रेविटी तो लगाएगी ना उसे नीचे खींचने के
लिए। लेकिन किसी ने उसको ऊपर रोक रखा है। बोले किसने रोक रखा है? बोले इलेक्ट्रिक फील्ड ने रोक रखा है। देखो लिखा हुआ है
इलेक्ट्रिक फील्ड स्ट्रेंथ। ऊपर की तरफ लग रही है वो। तो पक्की बात है कि ऐसे कोई इलेक्ट्रिक फील्ड है। है ना?
इस डायरेक्शन में लगने वाली कोई इलेक्ट्रिक फील्ड तो है। स्पेस में जो ऊपर की तरफ फोर्स लगा के शायद इसको रोक रही
है। कुछ ऐसा ही हो रहा होगा। बिल्कुल बढ़िया बात है। है ना? तो मुझे एक बात बताओ जो ऊपर की तरफ ये फोर्स लगती है किसी
q चार्ज पर क्या वो qe नहीं होती क्या? हां या ना बोलो। भाई इलेक्ट्रिक फील्ड जो चार्ज पे फोर्स लगाएगी वो क्या होगी? qe।
तो यानी दोनों फोर्सेस बैलेंस हो जा रही है ना। तभी तो सपोर्ट हो पा रहा है। कैसे सपोर्ट मिल रहा है उसको? कैसे लटकी हुई है
वो? क्योंकि ऊपर की तरफ जो फोर्स qe है और नीचे की तरफ जो mg है वो आपस में बैलेंस हो रहे हैं। कट रहे हैं। कटेंगे कब? जब
इक्वल होंगे। तो इसलिए समझिए इलेक्ट्रिक फोर्स और ग्रेविटेशनल फोर्स बैलेंस हो रही हैं।
हां या ना बोलो। और बैलेंस हो रही है तो इलेक्ट्रिक फोर्स को लिखते हैं qe। ग्रेविटेशनल फोर्स को लिखते हैं mg पुट कर
दो। चार्ज कितना है? 1.6 टाइम्स 10 टू दी पावर -19 इलेक्ट्रिक फील्ड आपको निकालनी है। ठीक? मास कितना है? मास मास है 10 की
पावर -3 और g को 10 ले लो यार। क्या दिक्कत है? यहां से e निकल के आ जाएगा। निकाल पाओगे? E की यूनिट न्यूटन पर कूलॉम
होती है। वो आप समझ गए होगे। क्यों? क्योंकि इलेक्ट्रिक फील्ड को हम लिखते हैं फोर्स / चार्ज। ये देखो। ये देखो क्या
लिखते हैं? इलेक्ट्रिक फील्ड को क्या लिखते हैं? फोर्स डिवाइड बाय चार्ज। ये देखो फोर्स डिवाइड बाय चार्ज। तो फोर्स से
यूनिट बनती है न्यूटन और चार्ज से यूनिट बनती है कूलम। तो न्यूटन पर कूलम। न्यूटन पर कूलम। इलेक्ट्रिक फील्ड की यूनिट क्या
है बेटा? न्यूटन पर कूलम। एसआई यूनिट है न्यूटन पर कूलम। एक और भी होती है। वो होती है वोल्ट पर मीटर। पर चैप्टर टू में
पढ़ाऊंगा क्यों? वो चैप्टर टू में पढ़ेंगे। अभी नहीं। एक वोल्ट पर मीटर भी दिखेगी आपको। जैसे न्यूटन पर कूलम दिख रही है ऐसी
वोल्ट पर मीटर भी मिलती है लेकिन सेकंड चैप्टर में आएगी तब बात करेंगे। सही है? आगे बढ़ते हैं। ये मैंने आपको ऑलरेडी बता
ही दिया है ना? कि जब भी कोई पॉजिटिव चार्ज होगा तो उस पर ये जो फोर्स लगती है इलेक्ट्रिक फील्ड के द्वारा वो लगती है
qe। ठीक है ना? और इसी से बात कर लेते हैं कि सपोज़ करो कोई नेगेटिव चार्ज हुआ तो क्या होगा सर? कोई माइनस का चार्ज हुआ तो
क्या होगा? मान लो इलेक्ट्रिक फील्ड में कोई पॉजिटिव चार्ज रख दिया तो वो इधर भाग रहा है। इलेक्ट्रिक फील्ड की दिशा में ही
भागेगा ना भाई। अरे इलेक्ट्रिक फील्ड भी तो वेक्टर है। उसकी भी तो डायरेक्शन है। तो फोर्स की भी तो डायरेक्शन वही होगी। तो
फोर्स की डायरेक्शन इलेक्ट्रिक फील्ड की डायरेक्शन सेम है। अब यहां पे फोर्स कहां लगेगी? लेकिन सर यहां पर तो आप इधर फोर्स
दिखाओगे। नेगेटिव चार्ज पर फोर्स दिखाते हैं पीछे। क्यों? क्योंकि वो -qe आएगा ना भाई। तो इलेक्ट्रिक फील्ड उधर है।
इलेक्ट्रिक फील्ड उधर है लेकिन फोर्स उससे नेगेटिव में पीछे की तरफ लगती है। तो ध्यान रखिएगा ये बात कि एक नेगेटिव चार्ज
अगर होगा तो फोर्स पीछे खाएगा। पॉजिटिव चार्ज अगर होगा तो फोर्स आगे खाएगा। ठीक है? ये काम आएंगी चीजें। ठीक है? नेगेटिव
चार्ज पर इलेक्ट्रिक फील्ड में उल्टी फोर्स लगती है। अगर आप अगर आप कोई इलेक्ट्रॉन रख दोगे ना ऐसे तो वो पीछे
दौड़ने लगेगा। आप प्रोटॉन रखोगे तो वो आगे दौड़ने लगेगा। ठीक है ना? तो फोर्स इलेक्ट्रिक फील्ड के अंदर इस प्रकार से
चलती है। एक और बड़ा तगड़ा सवाल, इंपॉर्टेंट सवाल। आइए देखते हैं इसको भी। कह रहा है एक इलेक्ट्रॉन है जो कि कुछ
डिस्टेंस चलता है। कितना चला? 6 सें.मी. चला। व्हेन एक्सीलरेटेड फ्रॉम रेस्ट। रेस्ट से एक्सीलरेट करके 6 सें.मी. चला।
बाय एन इलेक्ट्रिक फील्ड इतने स्ट्रेंथ की। देखो न्यूटन पर कूलम में दिया हुआ है यहां पर। कह रहा है कैलकुलेट द टाइम ऑफ
ट्रेवल कितनी दूरी में पहुंच कितनी देर में पहुंच जाएगा उस दूरी तक? द मास एंड चार्ज ऑफ इलेक्ट्रॉन फलाने डिमकाने यहां
पर दिए हुए हैं। तो आओ कैसे करते हैं? देखते हैं इसको। देखो यार आपको इतना समझ में आ रहा है कि इलेक्ट्रिक फील्ड है
और उसमें इलेक्ट्रॉन चल रहा है। तो इलेक्ट्रॉन तो उल्टा चल रहा होगा ऐसे। क्या सही बात है? क्या सही बात है? ऐसे
चलेगा ना उल्टा? हां सर ऐसे चलेगा। ठीक। तो फोर्स कहां लगेगी इस पर? पीछे की तरफ लगेगी। और वो फोर्स होगी qe।
जिसको आप e भी लिख सकते हो। है ना? ये भी देखो जरा। e क्योंकि q इलेक्ट्रॉन के चार्ज को e भी तो लिखते हैं ना भाई। तो
इसको q की जगह पर e भी तो लिखा जा सकता है। तो e लिख सकते हैं इसको। e टाइम्स e छोटा ही क्या है? चार्ज। बड़ा ही क्या है?
इलेक्ट्रिक फील्ड। ठीक है? ऐसा भी देखने की फील लो थोड़ा सा। ऐसा भी देखने की फील आपको आनी चाहिए। ठीक? अब ये कह रहा है कि
भाई वो रेस्ट से चला है। मतलब यहां पर उसकी स्पीड ज़ीरो थी यार। यहां उसकी स्पीड ज़ीरो थी। कुछ टाइम चल के कुछ दूरी चल के
कुछ दूरी चला है। यह देखो कितनी दूरी चला है बोल रहा है 6 सें.मी. चला है। 6 सें.मी. की दूरी चला है। ठीक है? तो 6
सें.मी. चल के उसकी वेलोसिटी कुछ बढ़ गई होगी। अभी वेलोसिटी क्या है? ज़ीरो। बाद में बढ़ गई होगी। कह रहा है कितने टाइम
में ट्रेवल हुआ है। ये गिवन क्या-क्या है? एक बार देखें जरा। कह रहा है इनिशियल वेलोसिटी ज़ीरो है। डिस्प्लेसमेंट गिवन है
6 सें.मी. लेकिन इसको 100 से डिवाइड करोगे तो 0.6 मीटर आ गई है। तो सही है? डिस्प्लेसमेंट भी आ गई। ठीक है? अच्छा
फोर्स हमको पता है e है। पर क्या फोर्स को मैं ma लिख सकता हूं? बताओ यार। क्या f की जगह मैं ma लिख सकता
हूं? हां सर लिख सकते हो। तो क्या यहां से एक्सीलरेशन निकाल लूं? e / m * में e सही बात है। e को पुट करो कितना है? e
क्या होता है? चार्ज ऑफ़ एन इलेक्ट्रॉन। वो कितना है? इतना। 1.6 * 10 की पावर -19 मास कितना है? ये
रहा 9 * 10 की पावर -31 और इलेक्ट्रिक फील्ड की वैल्यू कितनी है भाई? ये रही दी हुई 2 * 10 की पावर 4 2 * 10 की पावर 4 ये
है एक्सीलरेशन। ये है पूरी एक्सीलरेशन। समझ रहे हो बात को? ठीक है? और आपसे क्या पूछा हुआ है?
आपसे पूछा हुआ कितने टाइम में पहुंचेगा यहां? एक बात बताओ। S हुआ है, U दिया हुआ है, A दिया हुआ है, T पूछा हुआ है। बेटा
हम लगाएंगे S = UT + 1/2 AT² यस और नो। और S कितना दिया हुआ है? 0.6
UT वाला पार्ट तो ज़ीरो हो जाएगा। + 1/2 एक्सीलरेशन कहां है? ये पूरी है। ये पूरी एक्सीलरेशन आप यहां रखोगे और t² देखो यहां
से निकल जाएगा। है ना? ये ये ऐसे लिख सकते हो। 0.6 * 2 है ना? डिवाइड बाय a = t² तो यहां से t आप अंडर रूट करके निकाल लोगे।
क्या दिक्कत है बताओ? समझ में आया? कैसे निकालना है टाइम? ठीक है जी। समझ में आ पा रहा है? कैसे
निकालना है टाइम? नहीं आ पा रहा तो कैलकुलेशन लाया हूं मैं। [हंसी] ठीक है? घबराओ मत। ठीक है। नहीं समझ में आया तो
कैलकुलेशन लाया हूं। ठीक है। s देखो 0.6 ठीक है ना? 06 ही आएगा यार। हां। 0.06 ही आएगा। ये तो 0
06 यहां पर भी यही आएगा 0.06 ठीक बस उसके बाद तो आपने ये देखो s = utफ²
लगा रखा है। यहां से t निकाल सकते हो अंडर रूट करके। ठीक है ना? अप्रोक्समेट आंसर भी लिख सकते हो। ऐसी कोई दिक्कत वाली बात
नहीं है। ठीक है ना? टेंशन ना लेना। ठीक है? आप लॉजिक समझो। लॉजिक क्या है? आइए इलेक्ट्रिक फील्ड लाइंस की प्रॉपर्टीज पर
चलते हैं। एक-एक करके सारी प्रॉपर्टीज समझते हैं। सारी की सारी इंपॉर्टेंट है। आओ देखो। कह रहा है द लाइंस ऑफ फोर्स आर
कंटीन्यूअस स्मूथ कब्स विदाउट एनी ब्रेक्स। कोई ब्रेक्स नहीं होते। कोई टूटफुट बीच में नहीं होगी। अगर इलेक्ट्रिक
फील्ड लाइन ऐसे जा रही है तो फिर वो पूरी जाएगी। बीच-बीच में ऐसे ऐसे ऐसे ऐसे टुकड़ों में नहीं चलती वो। वो पूरी ही
चलेगी। बढ़िया पहला समझ में आया होगा आपको। दूसरा कह रहा है द लाइंस ऑफ़ फोर्स स्टार्ट एट द पॉजिटिव चार्ज एंड एट द
नेगेटिव। देखो पॉजिटिव से हमेशा बाहर निकालते हैं इलेक्ट्रिक फील्ड को और नेगेटिव की तरफ लाते हैं हमेशा। ये एक
प्रॉपर्टी बड़ी इंपॉर्टेंट है। प्लस से हमेशा बाहर और माइनस में अंदर। ठीक है ना? कह रहा है दे कैन नॉट फॉर्म क्लोज्ड
लूप्स। वो क्लोज्ड लूप नहीं बना पाएंगे क्योंकि प्लस से निकली हैं और माइनस में जा के टर्मिनेट हो जाएंगी। जैसे बस चलती
है ना एक जगह से चली दूसरी जगह जाकर के टर्मिनेट हो गई। अब अब छुट्टी अब ड्राइवर की भी छुट्टी। अब कल आएगा सुबह और उल्टा
चलवाएगा। है ना? तो ऐसा वाला सीन है। समझ गए ना? कि भाई एक जगह से चली, दूसरी जगह पर आकर टर्मिनेट हो गई, छुट्टी घर जाओ।
समझ गए? इफ देयर इज़ अ सिंगल चार्ज देन द लाइंस ऑफ़ फोर्स विल स्टार्ट और एंड एट इंफिनिटी। अगर कोई चार्ज अकेला ही है,
मतलब अकेला ही पॉजिटिव है। सोचो नेगेटिव है ही नहीं। तो फिर कहां जा के एंड होगी ये? तो बोलते हैं इंफिनिटी तक जाएगी। कहां
जा के एंड होगी? इंफिनिटी तक जाएगी। तभी तो वो ग्राफ जो था वो ज़ीरो को टच नहीं हुआ। है ना? जो E का ग्राफ R के साथ था वो
ऐसे-ऐसे चलता जा रहा था। वो टच नहीं होगा कभी भी। है ना? है ना? वो नीचे टच नहीं हो सकता क्योंकि ये इनफिनिटी तक जाती है। ठीक
है? इलेक्ट्रिक फील्ड इंफिनिटी तक जाती है। तीसरा देखो। कह रहा है द टेंजेंट टू अ लाइन ऑफ़ फोर्स एट एनी पॉइंट गिव्स द
डायरेक्शन ऑफ़ द इलेक्ट्रिक फील्ड एट दैट पॉइंट। मतलब क्या हुआ? कह रहा है कोई भी इलेक्ट्रिक फील्ड अगर जा रही है मान लो तो
उस पर आप कहीं पर भी टेंजेंट डाल लो। जैसे इलेक्ट्रिक फील्ड गई ना ये। आप कहीं भी टेंजेंट डाल लो। जैसे ये टेंजेंट डाल
लिया। इस पॉइंट को टच करता हुआ होता है ना भाई टेंजेंट। ये पॉइंट है। इसको टच करता हुआ टेंजेंट ऐसे होगा। तो आपको इलेक्ट्रिक
फील्ड की डायरेक्शन मिल जाएगी। उससे आप फोर्स की भी डायरेक्शन निकाल पाओगे। है ना? इलेक्ट्रिक फील्ड की डायरेक्शन में ही
फ़ लगती है किसी पॉजिटिव चार्ज पर। आप यहां पर सोचो आपने इधर डाला टेंजेंट तो इलेक्ट्रिक फील्ड की डायरेक्शन यहां पा
लोगे आप। समझ गए ना? तो टेंजेंट डाल के आप इलेक्ट्रिक फील्ड की डायरेक्शन पता कर पाओगे। उससे क्या होगा? उससे भाई तू फोर्स
निकाल पाएगा। क्योंकि जिस डायरेक्शन में इलेक्ट्रिक फील्ड जाती है उसी डायरेक्शन में पॉजिटिव चार्ज भी चलता है। यानी उस पर
भी फोर्स वही लगती है। ठीक है? आगे कह रहा है कि कभी भी कोई दो लाइंस इंटरसेक्ट नहीं
करेंगी। नेवर इंटरसेक्ट ईच अदर। और इसका रीज़न क्या दिया हुआ है? इसका रीज़न दिया हुआ है कि भाई फिर दो टेंजेंट हो जाएंगे।
जैसे मान लो कि मान लो कि दो लाइनें इंटरसेक्ट कर ही रही हैं। ठीक है ना? तो एक ही पॉइंट पर दो टेंजेंट हो जाएंगे। और
दो टेंजेंट हो जाएंगे तो मतलब दो-दो दिशाएं हो जाएंगी। तो चार्ज कहां जाएगा? कौन सी दिशा में जाएगा? फिर तो ये
प्रॉब्लम है ना भाई? टेंजेंट तो डायरेक्शन देता है ना। तो चार्ज यहां रख के कहां जाएगा? फिर यहां जाएगा कि यहां जाएगा? तो
बात समझ में नहीं आती है ना? तो इसलिए बोल रहे हैं कि इफ दे इंटरसेक्ट देन देयर विल बी नो देयर विल बी टू टेंजेंट एट द पॉइंट
ऑफ़ इंटरसेक्शन एंड हेंस टू डायरेक्शंस ऑफ़ द इलेक्ट्रिक फील्ड एट द सेम टाइम व्हिच इज़ नॉट पॉसिबल। एक ही टाइम पर एक ही पॉइंट
पर दो दिशाओं में फील्ड नहीं हो सकती। फोर्स नहीं हो सकती। इसीलिए आपसे ये कहा जा रहा है कि भाई इंटरसेक्शन कभी नहीं
करेंगी। ठीक है ना? दो फील्ड लाइन कभी भी क्रॉस नहीं करती एक दूसरे को। ठीक है? आगे द लाइंस ऑफ फोर्स हैव अ टेंडेंसी टू
एक्सपेंड लिटरली। यह भी एक प्रॉपर्टी लिखी हुई है कि भाई जब पॉजिटिव पॉजिटिव चार्ज सामने आते हैं ना तो ये ट्राई करती है एक
दूसरे से दूर भागने की। तो ये एक्सपेंड करती खींचती है ये पीछे की तरफ। देखो। सो एज़ टू एग्जर्ट अ लेटरल प्रेशर ऑन द
नेबरिंग लाइंस ऑफ़ फोर्स। दिस एक्सप्लेंस रिपल्शन बिटवीन द टू सिमिलर चार्जेस। सिमिलरली जब एक पॉजिटिव नेगेटिव होगा ना
तो एक तरीके से दबती हैं, बंधती हैं आ के। प्लस प्लस वाला लेटरली एक्सपैंड करेगा और प्लस माइनस वाला एक तरीके से श्रिंक
करेगा। ऐसा समझ सकते हो आप। लिखा है द रिलेटिव क्लोजनेस ऑफ द लाइंस ऑफ़ फोर्स गिव्स अ मेजर ऑफ़ द स्ट्रेंथ ऑफ़ द
इलेक्ट्र। मतलब जितनी ज्यादा डेंस फील्ड होगी उतनी ज्यादा स्ट्रांग फील्ड होगी। जैसे यहां पर देखो इस इलाके में देखो क्या
फील्ड स्ट्रंग नहीं है क्या? है तो यहां पर हम क्या बोलेंगे कि फील्ड क्या है? स्ट्रंग है। समझ गए ना? जहां पर भी ये
पासपास आ रही होगी वहां बोलेंगे फील्ड स्ट्रॉन्ग है। और इस एरिया में क्या है? इस एरिया में यहां पे वीक फील्ड है। समझ
गए ना? इसे बोलेंगे स्ट्रांग फील्ड। इसे बोलेंगे स्ट्रांग फील्ड। इसे बोलेंगे वीक फील्ड। ठीक है? जब गैपिंग ज्यादा हो
जाती है लाइन में तो वीक है। जब लाइनें पासपास होती हैं तो स्ट्रंग है। बढ़िया। और ये होती है यूनिफॉर्म फील्ड जिसमें लाइन
स्पेसिंग सेम रहती है। देखो ना लाइन स्पेसिंग सेम है। सेम लाइन स्पेसिंग है। यहां भी, यहां भी, यहां भी, यहां भी, यहां
भी। सेम लाइन स्पेसिंग है तो बोलते हैं यूनिफॉर्म फील्ड। क्या बोलते हैं? यूनिफॉर्म फील्ड।
एक और इंपॉर्टेंट बात। लेकिन इसकी चर्चा जो है वो चैप्टर टू में ज्यादा है। वन में चर्चा नहीं है। लेकिन फिर भी सुन लो। किसी
भी कंडक्टर के अंदर कोई इलेक्ट्रिक फील्ड कभी नहीं होती। इसके पीछे का कारण यह है कि जब बाहर से
फील्ड आती है ना तो वो अंदर में भी उल्टी फील्ड चलानी चालू कर देता है। अब ये क्यों करता है जानने के लिए चैप्टर टू का आपको
वेट करना पड़ेगा। ठीक है ना? तो अंदर में कोई भी फील्ड नहीं होती है। द लाइंस ऑफ़ फोर्स डू नॉट पास थ्रू अ कंडक्टर बिकॉज़ द
इलेक्ट्रिक फील्ड इनसाइड अ चार्ज कंडक्टर इज़ ज़ीरो। चार्ज ना भी हो ना तो भी ज़ीरो। मतलब कंडक्टर के अंदर इलेक्ट्रिक फील्ड
नहीं हो सकती। सीधी बात। ठीक है जी? मैं यहां पे लिख देता हूं कि e इंसाइड इनसाइड इज़ ज़ीरो। ऐसे ही लिखते हैं। इंसाइड
इलेक्ट्रिक फील्ड क्या है? जी ज़ीरो है। चलिए अब आते हैं हम लोग डपोल पर। एक और इंपॉर्टेंट टॉपिक है भाई डपोल। ठीक है ना?
एक्सियल इक्विटोरियल की बातें यहां पर होती हैं। डेरिवेशन भी है यहां पर। वो भी इंपॉर्टेंट है। आइए सुनते हैं, समझते हैं
क्या कहानी है। ठीक है? देखो, डपोल का मतलब होता है दो चार्जेस। दो चार्जेस लिख दूं। डाई मतलब दो है ना भाई? तो, दो
चार्जेस सेम मैग्नीट्यूड के ठीक है? सेम मैग्नीट्यूड होगा। ऑपोजिट
साइन होगा और शॉर्ट डिस्टेंस पर होंगे। ये सारी बातें अगर ट्रू हैं तो ही हम उसे डपोल
बुलाते हैं। नहीं तो नहीं बुलाते। समझ गए? ये तीनों बातें ट्रू होनी चाहिए। क्या-क्या? मैग्नीट्यूड सेम रहे। मतलब ये
भी पांच कूलॉम तो ये भी पांच कूलम। साइन अपोजिट रहे। ये प्लस ये माइनस देखो अपोजिट है। और दोनों के बीच में जो डिस्टेंस है
ना d ये काफी छोटा रहना चाहिए। बस तो ये जनरली देखा जाता है मॉलिक्यूल्स के अंदर। पोलर मॉलिक्यूल्स शब्द आपने सुना होगा।
नॉन पोलर मॉलिक्यूल्स शब्द आपने सुना होगा। ये जो शब्द यूज़ होते हैं पोलर नॉन पोलर वो यहीं से ही आए हैं। डायपोल से ही
आए हैं। समझ गए ना? अब सुनिएगा। अब सुनिएगा। यहां पर हम एक P को डिफाइन करते हैं। जिसे बोलते हैं इलेक्ट्रिक डायपोल
मोमेंट। क्या बोलते हैं? इलेक्ट्रिक डाइपोल मोमेंट। क्या होती है ये? बहुत सिंपल है। कुछ नहीं है। देखो बहुत सिंपल
है। इलेक्ट्रिक डायपोल मोमेंट
और इसे डिनोट करते हैं बेटा p वेक्टर से। ठीक है? मोमेंटम को भी P से लिखते हैं। पर डाइपोल मोमेंट को भी इलेक्ट्रिक डपोल
मोमेंटम को भी किससे लिखते हैं? P से लिखते हैं। क्या होता है ये इलेक्ट्रिक डपोल मोमेंट? सुनिएगा। देखो डपोल मोमेंट
का फार्मूला होता है। डपोल मोमेंट का फार्मूला होता है चार्ज। कोई भी एक उठा लो चाहे ये उठा लो चाहे ये
उठा लो। बात एक ही है। दोनों चार्ज सेम ही है। है ना? तो चार्ज मल्टीप्लाई बाय दोनों के बीच में जो सेपरेशन है। चार्ज टाइम्स
सेपरेशन। बस इसी को बोलते हैं डपोल मोमेंट। इसी को बोलते हैं डपोल मोमेंट। यही है डपोल मोमेंट। चार्ज मल्टीप्लाई बाय
सेपरेशन। अब मुझे बता। डपोल मोमेंट को P से डिनोट करते हैं। यस। चार्ज क्या है सर? Q है। और सेपरेशन क्या है दोनों के बीच
में? तो D है। जनरली ये 2D ली जाती है। जनरली इसको हम लोग 2D लेते हैं। बीच में से आधा-आधा D कर लेते हैं। मतलब ये भी D
है और ये भी D है। ऐसे करके तो DD बोल देते हैं 2D। तो जनरली इसको 2D लिया जाता है। तो ये हो जाएगा Q * 2D। यह फार्मूला
बनता है डपोल मोमेंट का। ठीक? एक छोटी सी बात और सुनो। क्योंकि मैंने यहां पर
एरो भी लगा दिया है। यह देखो। तो इसका मतलब यह वेक्टर भी है। और वेक्टर है तो फिर इसकी डायरेक्शन भी होगी। तो इसकी
डायरेक्शन होती है टुवर्ड्स पॉजिटिव। नेगेटिव टू पॉजिटिव ही इसकी डायरेक्शन हमेशा ली जाती है। मैं यहां पे कहीं लिख
भी देता हूं। ठीक है ना? जो डायरेक्शन लेते हैं, डायरेक्शन जो लेते हैं, वो हमेशा नेगेटिव टू पॉजिटिव ही ली जाती है।
याद रखिएगा ये बात। ठीक है ना? हमेशा माइनस से प्लस की तरफ ही डपोल मोमेंट की डायरेक्शन को लिया जाता है। बढ़िया। आगे
बढ़ते हैं। अब बात कर रहे हैं हम लोग कि एक डपोल जो होता है उसकी इलेक्ट्रिक फील्ड कैसी दिखती
है। कहां-कहां पर कैसे-कैसे निकाली जाती है? और क्या-क्या उसके फॉर्मूले बनते हैं। पूरी डेरिवेशन कंप्लीट करवाऊंगा क्योंकि
मैंने आपसे प्रॉमिस किया है कि भाई डेरिवेशन कोई नहीं छूटेगी तो नहीं छूटेगी। पक्की बात है। एक बार शक्ल देखो जरा। क्या
हमेशा प्लस चार्ज से अवे फील्ड नहीं आनी चाहिए? क्या? आनी चाहिए और माइनस चार्ज की तरफ नहीं आनी चाहिए क्या आनी चाहिए
बिल्कुल तो जैसे ये एरोस चल के आ रहे हैं ऐसे ऐसे ऐसे तो इसका मतलब प्लस से अवे आ रहे हैं बिल्कुल और माइनस की तरफ घुस रहे
हैं या टर्मिनेट हो रहे हैं है ना माइनस में टर्मिनेट हो रहे हैं आ के तो ऐसा ही होना चाहिए ठीक है अब हम क्या करते हैं हम
दो पोजीशंस पर इनकी स्टडी करते हैं दो पोजीशंस पर कौन-कौन सी एक पोजीशन होती है एक्सियल पोजीशन ठीक है क्या बोलते हैं
एक्सियल पोजीशन और दूसरी होती है इक्विट ोरियल पोजीशन मैं आपको दोनों दिखाता हूं। इक्विटोरियल
लाइन एक्सियल लाइन इक्वेटोरियल लाइन कौन सी है एक्सियल? कौन
सी है इक्वेटोरियल? आइए समझते हैं। देखो मान लो कि आपका ये डपोल है। ये माइनस ये प्लस ठीक है? इनके बीच में डिस्टेंस ये
वाला जो 2D लिया है वो है। ठीक है? तो इस लाइन को बोलेंगे एक्सियल बेटा ये वाली लाइन।
ठीक है? ये लाइन जो है ना ठीक है? ये वाली जो लाइन है इसे बोलते हैं एक्सियल। ठीक है? सिमिलरली इस लाइन को
बोलेंगे इक्वेटोरियल। ठीक है ना? यह इक्वेटोरियल लाइन है। यह एक्सियल लाइन है। तो, हम दोनों पर ही क्या
करने वाले हैं? इलेक्ट्रिक फील्ड की डेरिवेशन करने वाले हैं। आइए, बिना टाइम वेस्ट किए स्टार्ट करते हैं। तो, सबसे
पहले बात करते हैं एक्सियल लाइन पर क्या कहानी है? देखो, एक्सियल लाइन का मतलब क्या हो गया
कि भाई, यहां कोई प्लस चार्ज है, यहां कोई माइनस चार्ज है। ठीक है? इनके बीच की दूरी क्या है? 2D है। और ऐसे करके इसका P मतलब
P बोले तो डपोल मोमेंट दिखाया गया है। ठीक है? ये होगी यार एक्सियल लाइन। यह वाली ये वाली एक्सियल लाइन होगी। हां जी
बिल्कुल सही बात है। अच्छा प्लस चार्ज से ये प्लस चार्ज है। ये माइनस चार्ज है। है ना? प्लस चार्ज से हम कुछ x डिस्टेंस मान
लेते हैं। तो हम क्या करेंगे? हम इसके मिड पॉइंट से x डिस्टेंस पर
एक पॉइंट p लेट कर लेंगे। ठीक है? अब इस p ही पॉइंट पर क्योंकि ये एक्सियल पॉइंट है ना यार। एक्सिस पर ये पॉइंट है ना? तो इसी
पर हम लोग क्या देखने वाले हैं? इलेक्ट्रिक फील्ड देखने वाले हैं। तो प्लस वाला चार्ज भी इस पर कुछ इलेक्ट्रिक फील्ड
बनाएगा? बनाएगा। माइनस वाला चार्ज भी इस पर कुछ इलेक्ट्रिक फील्ड बनाएगा? हां जी बनाएगा। बिल्कुल बनाएगा। तो हम उसका
इलेक्ट्रिक फील्ड टोटल कैलकुलेट करेंगे। आइए करते हैं। तो भाई E नेट जो होगा यानी जो नेट इलेक्ट्रिक फील्ड होगी वो दोनों का
सम होगा। है ना? E1 + E2 का वेक्टर सम होगा। तो वेक्टर सम करने के लिए बहुत जरूरी है कि आप इस प्लस वाले की
इलेक्ट्रिक फील्ड दिखाओ। यार ये प्लस वाला चार्ज यहां पर कैसे इलेक्ट्रिक फील्ड बनाएगा? सर बाहर की तरफ बनाएगा ऐसे। बाहर
की तरफ ऐसे। है ना? तो इसको मैं E1 ले लेता हूं या E पॉजिटिव ले लेता हूं क्योंकि पॉजिटिव वाला बना रहा है ना तो E
प्लस ले लिया। अच्छा माइनस वाला कैसे बनाएगा सर? माइनस वाला तो अंदर बनाएगा। वो तो अंदर बनाएगा। अच्छा फिर ये भी बताओ
दोनों में से किसकी फील्ड बड़ी होगी? भाई प्लस वाला चार्ज पास में है तो वो ज्यादा फील्ड बनाएगा। है ना? भाई इलेक्ट्रिक
फील्ड का फार्मूला होता है KQ / R² तो r जितना कम रहेगा इलेक्ट्रिक फील्ड उतनी ज्यादा। यानी ये डिस्टेंस जो है वो छोटा
है ना? तो यहां पर इसकी इलेक्ट्रिक फील्ड ज्यादा होगी और ये दूर है देखो इससे। ये इससे दूरी पर है। है ना? डिस्टेंस ज्यादा
है। तो इसलिए इलेक्ट्रिक फील्ड क्या बनेगी? कम बनेगी। समझ गए ना? तो अल्टीमेटली आप वेक्टोरियली तो ऐड कर रहेगे
लेकिन एक्चुअली में दोनों को माइनस कर रहे होगे। तो आइए एक बार इसको ढंग से लिखते हैं कि भाई ई नेट को अगर हमें
मैग्नीट्यूड वाइज़ लिखें, तो दोनों को माइनस ही करना पड़ेगा यार। है ना? हमें E1 को
और E2 को ऐसे लिखना पड़ेगा सबट्रैक्शन में। है कि नहीं? E1 बड़ी है, E2 छोटी है। आइए E1 लिखते हैं पहले। लिखें? चलो। क्या
होता है भाई? K Q / R² यही फार्मूला है ना इलेक्ट्रिक फील्ड का KQ / R² r कितना लेंगे? ये डिस्टेंस
कितना है भाई? ये डिस्टेंस बताइए कितना है? तो ये डिस्टेंस होगा बेटा यहां से लेके यहां तक। यहां से ले यहां तक x - d
देखो ये पूरा x है और ये 2d 2D ये 2d था ना तो dd हो रखा है ये भी d है ये भी d है ना तो x - d बनेगा ये
x - d सिमिलरली p से लेकर के नेगेटिव तक का डिस्टेंस कितना होगा ये डिस्टेंस कितना होगा ये होगा x + d
क्या बात समझते हो है ना भाई यहां तक x है ये d और है यहां तक x था ये भी d था तो x - d हो गया और ये x + d हो गया।
तो यहां पर हम क्या करेंगे? यहां पर हम लिखेंगे kq / x - d² kq / r² होता है ना भाई? तो kq / x - d
होल स्क्वायर। ठीक है? अब इसमें से माइनस कर दो k e2 क्या है भाई? e2 के लिए इसका चार्ज इसका चार्ज क्या है?
ये भी q ही है। डिवाइड बाय ये डिस्टेंस क्या है? x + d x + d² ये भी कर दो मोड में बंद। अब मोड
में रखने का कोई फायदा नहीं क्योंकि हम समझ गए हैं कि मैग्नीट्यूड की चर्चा करनी है। प्लस माइनस चार जो भी कुछ रहा हो उससे
वन नहीं बढ़ता। तो इसलिए आइए इसको पूरा-पूरा लिख लें। kq कर लें कॉमन। kq हो गया सर कॉमन। यहां आ गया 1 / x - d²
- में 1 / x + d² कोई दिक्कत? नहीं सर। ठीक। तो x + d² यहां ले जाओ। तो x - d² यहां ले जाओ। यानी इसका
एलसीएम लेने चल रहे हैं हम। तो x + d² - x - d²
ठीक है? डिवाइड बाय a - b और a + b
अरे b क्यों लिख रहा हूं? क्योंकि मुंह से बोल रहा हूं इसीलिए। है ना? ये देखो ये क्या लिखा हुआ है? ध्यान से देखना। ये
लिखा हुआ है a + b a - b और फिर इनके स्क्वायर भी हो रखे हैं और a + b a - b क्या होता है? a² - b² और ये दो बार है तो
उसका भी स्क्वायर करना पड़ेगा। यानी मैं इसको ऐसे लिख सकता हूं। देखो kq था kq तो है ही ये है। इसे खोल लेते हैं एक बार। ये
आ जाएगा x² + d² + 2xd और माइनस में x² - d² + 2x ये मैंने खोल दिया और ब्रैकेट को भी खोल दिया। माइनस अंदर मल्टीप्लाई भी कर
दिया। एक ही साथ कर दिया सब कुछ। डिवाइड बाय यहां क्या आएगा? x² - d²
क्लियर है क्या? अब देख क्या-क्या कट रहा है? x² से x² गया। d² से d² गया है ना? 2x 2x हो जाएगा 4xd
तो kq डिवाइड बाय 4xd डिवाइड बाय x² - d² का होल स्क्वायर। ये आई भाई नेट इलेक्ट्रिक फील्ड कौन सी वाली?
एक्सियल वाली। इसे बोलेंगे नेट इलेक्ट्रिक फील्ड। कौन सी वाली? एक्सियल वाली। ठीक? ठीक? अभी इसको थोड़ा सा और रिफाइन
करूंगा फ़ूले को। टेंशन ना लो। अभी इसको थोड़ा सा और रिफाइन करेंगे। अभी के लिए इतना हजम करो जरा। है ना? और इसको मैं एक
काम करता हूं कि मैं इसको एक स्पेशल केस में ढालने की कोशिश करता हूं। ठीक है बेटा? स्पेशल केस क्या है? सुनना। स्पेशल
केस ये है कि ये जो x डिस्टेंस आपने लिया था ना ये वाला ये बहुत बड़ा है। ऐसा इमेजिन करो। ऐसा इमेजिन करो कि x जो है यह काफी
काफी बड़ा है d से और बेटा x अगर काफी काफी बड़ा होगा d से तो x² में से d² कर भी लोगे तो कोई फायदा नहीं होने वाला ये
x² ही आएगा अल्टीमेटली हां या ना सोचो हां या ना एक बार सोचो एक बहुत बड़ी चीज में से उसका भी स्क्वायर कर दिया सोचो है ना
और माइनस कर रहे हैं जिस चीज को उसका भी स्क्वायर कर दिया यानी बहुत छोटी चीज का स्क्वायर करोगे वो और छोटी हो जाएगी यार
बहुत छोटी चीज का जैसे 0.1 का स्क्वायर किया तो क्या आएगा 0.001 आएगा वो और छोटी छोटी हो जाएगी। तो ये समझो। है ना? तो x
बहुत-बहुत बड़ा है d से। इसलिए हम लिख सकते हैं x² - d² को लगभग x² इसको लिखते हैं एप्रोक्सीमेट के लिए। x² - d²
एप्रोक्सीमेटली x² के बराबर आएगा। यानी ये बन जाएगा eएक्सियल फॉर शॉर्ट डपोल। यह स्पेशल केस है शॉर्ट
डपोल का। शॉर्ट डपोल। ठीक है? और ये बन जाएगा exl kq
क्या था भाई? 4xd डिवाइड बाय x² का स्क्वायर यानी x की पावर 4 हे भगवान
x की पावर 4 हो गया सर ये तो हां 1 x से 1 x कट गया तो थ्री भी आ गया। हां अब सुन अब सुन बेटा ध्यान से देखियो। इस फोर को भी
ना टू टू करके लिख ले। 2 * 2 करके लिख लो। तो ये बन जाएगा देखो 2k q2d
/ x और ये बेटा q2d क्या होता है ये देखो q2d दिखाता हूं क्या होता है q2d क्या है बेटा? p होता है। है कि नहीं? तो यानी ये
क्या है बेटा? ये असल में p है। q2d क्या है? p है। तो अल्टीमेटली फार्मूला बन गया 2kp / x
कितने सवाल आते हैं इसके ऊपर? पर मैं बता भी नहीं सकता आपको। खूब सारे सवाल बनते हैं भाई इस 2kp / x पर। इस एप्रोक्सीमेशन
पर शॉर्ट डपोल की एप्रोक्समेशन पर खूब सारे सवाल बनते हैं। 2kp / x ठीक है ना? तो यहां पर मैं पूरा ढंग से एक बार लिख
देता हूं थोड़ा सा चौड़ा करके। eएक्सियल क्या है भाई? 2 kp / x
समझ गए ना? इसको वेक्टोरियली भी लिख सकते हो आप। बस इतना ध्यान रखना कि एंड में जो नेट इलेक्ट्रिक फील्ड आएगी वो
इसी तरफ ही आ रही है और डपोल मोमेंट भी इसी तरफ ही है। तो अगर आप वेक्टोरियली भी लिखना चाहो तो आपको कोई प्लस माइनस की
गड़बड़ करने की जरूरत नहीं है। ऐसे का ऐसा भी छोड़ सकते हो आप इसको। ठीक है जी? तो होपफुली आपको मोटी-मोटी बातें समझ में आ
गई होंगी कि क्या-क्या है। ठीक है? कैसे डेरिवेशन करनी है, कैसे कैलकुलेशन करनी है, उसका एप्रोक्समेशन कैसे बनाना है? ये
सारी बातें बहुत जरूरी थी। आइए एक बार इक्वेटोरियल लाइन पर भी चर्चा कर लें जरा। इक्विटोरियल
लाइन देखो भाई, यहां बनाता हूं प्लस।
यहां बनाता हूं माइनस भाई। यह लाइन होती है इक्वेटोरियल जो बीचोंबीच निकल रही हो। है ना?
और ये भी d है। आपको याद होगा। ये भी d है। ये भी आपको याद होगा। है ना? ये -q हो गया। ये +q हो गया। ठीक है? तो यहां पर
कोई पॉइंट है भाई। सपोज़ करो यहां पर कोई P पॉइंट है। ठीक है? तो इससे दूरी आप देख रहे हो तो बीच में से देखना। यहां
से देखना। यहां से दूरी देखना। और ये दूरी मैंने ले ली X। ठीक है? ये डिस्टेंस मैंने क्या ले लिया? X ले लिया। बढ़िया। अब एक
बात बताओ। इस P पॉइंट पर ये प्लस वाला चार्ज जब फोर्स लगाएगा, तो कैसे लगाएगा, सर? प्लस वाला फोर्स ऐसे लगाएगा। मतलब
इलेक्ट्रिक फील्ड जो बनेगी वो ऐसे बनेगी। तो यह आएगी e पॉजिटिव। सही बात है सर। अच्छा माइनस वाला जब यहां बनाएगा तो कैसी
बनाएगा? तो ये तो टुवर्ड्स बनाता है भाई। है ना? ये तो टुवर्ड्स बनाता है ऐसे। तो ये ऐसे बनाएगा। ऐसी
सही बोल रहा हूं ना? ये ऐसी बनाएगा। तो इसकी इलेक्ट्रिक फील्ड कुछ ऐसी आएगी। ये रही।
इसकी +i इसकी -i और दोनों की नेट कैसे बनेगी? हां जी। दोनों की नेट कैसे बनेगी? दोनों की नेट ऐसे बनेगी। ऐसे
और ऐसे और नेट इलेक्ट्रिक फील्ड का वेक्टर जो होगा वो ऐसे चलेगा।
ये होगा E नेट। आया या ना बोलो भाई? ये होगा E नेट। आया कि नहीं आया? तो इलेक्ट्रिक फील्ड का वेक्टर जो आ रहा है,
नेट इलेक्ट्रिक फील्ड जो आ रही है, वह ऐसे आ रही है। अब यह कैसे निकलेगी? सोचो भाई। कैसे निकालेंगे इस E नेट को? अ अगेन E नेट
जो आपका है वो फिर से E1 वेक्टर और E2 वेक्टर का रिजल्टेंट ही होगा। तो वो रिजल्टेंट कैसे
आएगा? अब मोटी बात ये है कि तय करें कि ये कैसे आएगा? ठीक है ना? तो देखो इसके लिए क्या करते हैं? सुनिएगा ध्यान से। इसके
लिए हम यहां पर एक एंगल डिफाइन करते हैं थीटा। ये भी उतना ही एंगल होगा सिमेट्री से थीटा। आप समझ रहे होंगे। ठीक है ना?
अच्छा अब एक चीज़ देखना। अगर ये एंगल थीटा है तो ये वाला होगा 90 - थीटा। देखो ये 90 है। ये 90 है। है ना? दिख रहा है? ये 90
है कि नहीं? हां। तो ये थीटा तो ये 90 - थीटा। यस। अच्छा। तो ये भी तो 90 है। ये भी तो 90 है तो फिर ये क्या होगा? ये
भी थीटा होगा। आया समझ में क्या? है ना? तो ये भी थीटा ही है। तो जब ये थीटा थीटा है तो ये भी थीटा थीटा होगा। ये दोनों
अंदर वाले 90 - थीटा होंगे। आई होप आपको ट्रायंगल से क्लियर हुआ होगा राइट एंगल ट्रायंगल से कि क्या किया गया है यहां पर।
ठीक? बढ़िया। ओके। अब सुनो। हम इतना जानते हैं कि अगर हम अगर हम इस E वाले प्लस का इस E वाले प्लस का cos कंपोनेंट ऐड कर दें
दोनों का ही तो हमें नेट इलेक्ट्रिक फील्ड मिल जाएगी। मतलब इस E- का भी cos कंपोनेंट और E प्लस का भी cos कंपोनेंट ऐड कर दें।
है ना? तो हमको E नेट मिल जाएगा। और इनका जो sin कंपोनेंट होगा वह आपस में कट जाएगा। यह देखो।
ये देखो यह sin कंपोनेंट है। है ना? E sinθ ये भी e sinθ ये तो कटने वाला है। तो ये
तो कट गया। सही है ना? तो यानी आप जब e नेट निकालोगे समझिएगा भाई। आप जब e नेट निकालोगे तो आप
2 cos थीटा निकालोगे और कुछ नहीं निकालोगे। हां या ना बोलो। e cos थीटा e cos थीटा जुड़ जाएगा यार। हां या ना? अरे
e प्लस का cos और e माइनस का cos जुड़ के क्या बन जाएंगे? 2 e cos थीटा बन जाएगा। बस इतना ध्यान रखना है आपने। आइए शुरू
करते हैं फिर कहानी को। तो टू टाइम्स है आगे e लगा हुआ है। है ना? e कैसे आएगा? किसी से भी e निकाल लो। चलो इसकी यहां पर
क्या बनेगी इलेक्ट्रिक फील्ड? तो सर ये बनेगी kq बाय ये डिस्टेंस कितना होगा बेटा?
ये डिस्टेंस होगा x² + d² हाइपोटेनस है ना ये? ये बेस हो गया। ये परपेंडिकुलर हो गया। इधर देखो। ये
बेस हो गया। ये परपेंडिकुलर ये क्या आ गया? हाइपोटेनस x² + d² का अंडर रूट तो x² + d² का होल स्क्वायर ये कौन करेगा?
करना पड़ेगा। डिस्टेंस का स्क्वायर करते हैं ना तो kq / r² हो गया। सही है? अब cos थीटा लिखते हैं। अच्छा जी। cos थीटा कैसे
लिखें हम। कोई भी ट्रायंगल पकड़ लो। ये ट्रायंगल पकड़ लो। चलो। इसका cos थीटा क्या होगा? बेटा cos थीटा होता क्या है?
बेस डिवाइड बाय हाइपोटेनस। इसका बेस क्या है? देखो थीटा के सामने वाली साइड परपेंडिकुलर
होती है। ये वाली साइड बेस होती है। तो दिस d इज बेस डिवाइड बाय ये हाइपेनस है। यानी x²
+ d² का रूट खत्म। हो गया। देखो कैसे लिखोगे आप इसको? आप इसे लिखोगे 2kd
अपॉन में x² + d² की पावर 2 है और इसकी पावर क्या है? मतलब इसको अगर हटा दे तो वन हो गया ये
क्योंकि रूट और स्क्वायर आपस में कट जाएंगे। है ना? और ये हाफ है। तो 1 + 1/2 क्या हो जाएगा? 3/2 हो जाएगा। 1 + 1/2 इज़
3/2 तो यानी हम लिखेंगे x² + d² की पावर 3 / 2 हुआ। आया समझ में? x² + d² की पावर 3/2
खत्म। ठीक है? तो ये आपकी e नेट बन गई। ये आपकी इ नेट बन गई। अब इसको मैं शॉर्ट डपोल के लिए स्पेशलाइज़ कर लेता हूं। कर
लें स्पेशलाइज़। चलो स्पेशल केस लिखते हैं। शॉर्ट डपोल का। शॉर्ट डपोल क्या कहता है?
वो कहता है भाई ये जो x है ना बहुत-बहुत बड़ा है d से। है ना? ये जो भी आप दूरी ले रहे हो ये बहुत बड़ी है। किससे? इनके बीच
की दूरी से तो x काफी काफी बड़ा हो गया d से और भाई जब x काफी काफी बड़ा हो गया d से तो आप यह लिख सकते हो कि x² में d²
जोड़ भी दोगे ना तो भी कोई खास फर्क नहीं आएगा वो x² ही रहेगा है ना 1 करोड़ में ₹1 जोड़ दूं अगर मैं तो आप तब भी तो करोड़पति
ही कहलाओगे भाई 2 करोड़पति तो नहीं हो जाओगे ना यार समझो तो x² + d² x² ही है यहां पे पुट कर देते हैं तो ये बन जाएगा
भाई e नेट बराबर 2kqd 2kd
/ x² की पावर 3 / 2 समझ गए ना? इस स्क्वायर से
ये टू कट जाएगा। है ना? और एंड में आ जाएगा बेटा। ध्यान से देखना जरा। ये भी 2qd है। q2d याद करो। p है। है ना? तो ये
आ गया kp / x है ना? क्यूब जिंदा बचेगा। तो e नेट क्या
आ गया बेटा? KP / x e नेट क्या आ गया? kp / x वो क्या था? वो था 2kp / x ये है kp / x
वो था 2kb / x ये क्या है? kp / x तो याद रखना ये जो e नेट है ये इक्वेटोरियल वाला है।
इसको e इक्व बोल देते हैं प्यार से। ठीक है ना? और कभी-कभी आपसे रेश्यो भी पूछा गया है भाई। है ना? ईएक्सियल
डिवाइड बाय e इक्वेटोरियल का। ये कभी-कभी पूछ लेता है आपसे। ईएक्सियल क्या है बेटा? छोटे डपोल के लिए 2kp / r
और इसका क्या ये है kp / r kr से कई बार r कट गया तो 2 / 1 ठीक है ना तो 2:1 होता है इसका रेश्यो याद रखना ठीक है ऐसी छोटी सी
बात बता दी मैंने साइड में दबा के नोट कर लेना ठीक है ऐसी छोटी सी बात बता दी काम आ जाती है कभी-कभी ठीक है जी तो ये कंप्लीट
डेरिवेशन एक्सिस एग्जियल और इक्विटोरियल दोनों पॉइंट्स की मैंने आपको करवा दी है ठीक है? आगे बढ़ते हैं। नेक्स्ट चीज जो
आती है बेटा वो आती है टॉर्क। ठीक है? तो डायपोल जब भी इलेक्ट्रिक फील्ड में रखा जाता है उस पर टॉर्क लगती है। लेकिन
क्यों? टॉर्क क्यों लगती है सर? एक बात सोचना। पॉजिटिव वाले चार्ज पर फॉरवर्ड फोर्स लगेगी। मतलब आगे की तरफ फोर्स लगेगी
ना। क्या होगा उस फोर्स का नाम? सर qe होगा। अच्छा पीछे वाले चार्ज पर भी तो पीछे की तरफ फोर्स लगेगी ना। हां। वो भी
qe होगी। हां। तो जब एक डायपोल पर सुनना एक डायपोल पर इस पर आगे की तरफ फोर्स है। इस पर पीछे की तरफ मतलब सोचो मैं इसको इधर
खींच रहा हूं। इसको इधर खींच रहा हूं। और दोनों को साथ में खींचो तो देखो क्या हो गया? ये रोटेट कर गया। क्या हो गया? रोटेट
कर गया। ऐसा ही होता है। तो जब भी आप कभी किसी डायपोल पर आगे और पीछे साथ में फोर्स लगाओगे। इसको बोलते हैं कपल लगाना। इसे
क्या बोलते हैं? कपल लगाना बोलते हैं। तो कपल जब भी एक्ट करेगा रोटेशन तो होगी। तो यह क्या करेगा? यह रोटेट करना चालू कर
देगा। यानी ऐसे घूमना चालू कर देगा। क्या फील आती है? ये ऐसे डिप होना ऐसे जाना चालू हो जाएगा। ये सही बात है कि नहीं?
ठीक है? तो इसीलिए हम अब टॉर्क लिखते हैं भाई। टॉर्क होती क्या है? टॉर्क होती है r क्रॉसf
अगर आपको ध्यान हो तो। rस f लिखते हैं इसको। RF अगर इसको पूरा-पूरा खोल के लिखें तो हम इसे ऐसे भी लिख सकते हैं। FR sin
थीटा सही है? अच्छा मुझे बताओ फोर्स यहां पे कौन सी है? कौन एक्ट कर रहा है फोर्स की
तरीके से? कौन है ये फोर्स? फोर्स है qe है ना? फोर्स क्या है? qe है। तो मैं यहां पर qe पुट करूंगा। लेकिन लेकिन ये r sin
थीटा समझते हो क्या होता है? दिस r sin थीटा इज़ r परपेंडिकुलर। देखो ये पूरा r है। है ना? ये अगर थीटा है तो ये r cos
थीटा होगा। और ये कौन होगा? ये r sin थीटा होगा। मतलब ये जो खड़ा है ना ये ये दिस इज़ एक्चुअली r sin थीटा। समझिएगा। ये है आपका
r sin थीटा। ये नीचे वाला जो होता है ना ये ये होता है r cos थीटा। क्या बात समझते हो? क्या बात समझते हो? इनके बीच की दूरी
हमने 2d लिखी है। मान लेते हैं। 2D तो ये हो गया 2D sin थीटा। ये हो गया 2D cos थीटा। डपोल में ऐसे होता है 2D लेते हैं
ना तो ये हो गया 2D sin थीटा ये हो गया 2D cos थीटा समझ गए तो इसलिए मैं यहां पर f को तो qe लिख दूंगा कोई दिक्कत नहीं है ना
और r की जगह पर लिखूंगा 2d है ना और फिर ये क्या है आगे sin थीटा है समझे बात को एक बात बताओ ये q2d क्या होता है
यू कैन गेस इट यस इट इज़ p डपोल मोमेंट है ना तो ये आ गया pe sin थीटा और बेटा pe sin थीटा आया तो इसको वेक्टर ोरियली हम P
क्रॉस E लिख देते हैं। तो टॉर्क बन जाती है P क्रॉस E खत्म। खत्म। कोई मैग्नीट्यूड पूछे आपसे अगर तो ये रहा मैग्नीट्यूड PE
sin थीटा। ठीक है? टॉर्क का फार्मूला क्या है? PE sin थीटा। ये दोनों आपके ध्यान में होने चाहिए। छोटी सी डेरिवेशन करके हमने
इसको खत्म कर दिया। वेरी वेरी ईजी। कैसा लगा? आसान लगा ना? टॉर्क को लेकर के बच्चे परेशान होते हैं। है ना? एक छोटा सा
फार्मूला 11th क्लास से आया था। उसी को मैंने यहां से समझा दिया। खत्म। ठीक है? ठीक है? तो फोर्स लग रही है कुछ डिस्टेंस
पर। उसका आपको परपेंडिकुलर लेना है। खत्म। r sin थीटा लेना है। हो गया। आगे बढ़ते हैं। कुछ इलेक्ट्रिक फील्ड लाइन के
पैटर्न्स देख लो भाई ताकि आप थोड़ा फमिलियर और हो जाओ लाइंस के साथ। देखो ये प्लस चार्ज होगा तभी इससे अवेज आ रहा है। देखो
q इज़ ग्रेटर दैन 0 मतलब पॉजिटिव चार्ज है। q इज़ लेस दैन ज़ीरो मतलब नेगेटिव चार्ज है। फील्ड लाइन इसकी तरफ आ रही है। सही? दोनों
ही पॉजिटिव पॉजिटिव हैं। तो देखो फील्ड लाइन अवे आ रही है। एक पॉजिटिव एक नेगेटिव है। तो डपोल वाला केस बन गया। फील्ड प्लस
से निकल के माइनस में आके टर्मिनेट हो रही है। ये सारे इंपॉर्टेंट है। अपने हाथ से प्रैक्टिस करनी पड़ेगी आपको। ऐसे मजा नहीं
आएगा। नेक्स्ट चीज़ आती है कंटीन्यूअस चार्ज डिस्ट्रीब्यूशन। देखो भाई, हमारे सिलेबस में अब गॉस लॉ स्टार्ट करना है तो
तीन प्रकार की चार्ज डिस्ट्रीब्यूशन आपको सुननी समझनी पड़ेगी। इसमें सबसे पहले आती है लीनियर चार्ज। इसे बोलते हैं लीनियर
चार्ज डिस्ट्रीब्यूशन। दूसरी आती है सरफेस चार्ज डिस्ट्रीब्यूशन। और तीसरी आती है वॉल्यूमेट्रिक
चार्ज डिस्ट्रीब्यूशन। ठीक है जी? फर्क क्या है तीनों में? सुनिएगा। लीनियर चार्ज हमेशा लाइन के लिए
डिफाइन होता है। आपने ट्यूबलाइट देखी है क्या? जैसे ट्यूबलाइट अपनी रोशनी निकालती है ना। बस इसी तरीके से समझ लो कि कोई
लाइन पर आपने चार्ज डाल दिया। कोई लाइन पर आपने क्या डाल दिया? चार्ज डाल दिया। अब वो क्या करेगा? अब वो फील्ड निकालेगा।
जैसे यहां पर देखो फील्ड निकल रही है। और सब दिशा ऐसे जैसे ट्यूबलाइट लाइट निकालती है ना। जैसे ट्यूबलाइट में से लाइट निकलती
है। ऐसे समझना कि वायर में से जिस पर चार्ज डाला हुआ है आपने उसमें से इलेक्ट्रिक फील्ड सब दिशाओं में बाहर
निकलेगी। सिलड्रिकल फील्ड एक तरीके से बनेगी ये। है ना? तो इसे बोलेंगे लीनियर चार्ज का एग्जांपल। सरफेस चार्ज क्या होता
है? सरफेस चार्ज में सारी 2D ऑब्जेक्ट्स होंगे। लीनियर में सब 1D ऑब्जेक्ट्स होंगे। सरफेस वाले में सब 2D ऑब्जेक्ट्स
होंगे। वॉल्यूम वाले में सब 3D ऑब्जेक्ट्स होंगे। समझ गए? समझ गए ना? तो सरफेस वाला कैसा हो गया? मतलब प्लेट हो गई, डिस्क हो
गई, रिंग हो गई। है ना? इस तरीके का कोई सरफेस हो गया जिस पर आपने चार्ज डाल रखा है। है ना? अब इस चार्ज में से फील्ड
निकलेगी तो कैसे निकलेगी? सब दिशाओं में ऐसे सीधी-सीधी सीधी-सीधी दिखानी होती है। वॉल्यूममेट्रिक के अंदर आप ये समझ लो कि
एक कोई भी वॉल्यूम ले लो क्यूब हो गया, क्युबॉयड हो गया, यहां पे स्फीयर लिया हुआ है। तो इससे फील्ड लाइन जब बाहर निकलेगी
तो वो दिखाई जा रही है। समझ गए ना? तो फील्ड लाइन पर ज्यादा फोकस नहीं करना। आपको बस इतना समझना है कि चार्ज
डिस्ट्रीब्यूशन की डेंसिटी क्या होती है? तो एक होती है लीनियर चार्ज डेंसिटी जिसको हम लोग लैम्ब्डा से डिनोट करते हैं और ये
हमेशा होगी चार्ज अपॉन में लेंथ। होगी कि नहीं होगी बताओ? है ना? क्योंकि चार्ज किस पर डिस्ट्रीब्यूटेड है? किसी लेंथ पर
डिस्ट्रीब्यूटेड है। सिमिलरली जब सरफेस चार्ज डेंसिटी देखते हैं तो इसको सिग्मा बोलते हैं। ये काफी इंपॉर्टेंट है बेटा।
सिग्मा। आपको लैम्ब्डा यूज़ होता है। एक आधी जगह पर दिखेगा। सिग्मा यूज़ होता मल्टीपल जगहों पर दिखेगा। आगे आने वाले
चैप्टर्स में भी। ठीक है? तो इसको याद रखना। इसको ध्यान रखना। सिग्मा क्या होता है? सरफेस पर कितना चार्ज डाला हुआ है?
किसी पर्टिकुलर सरफेस एरिया पर कितना चार्ज डेंसली पॉपुलेटेड है? डेंसली पॉपुलेटेड समझ गए ना? कितनी भीड़भाड़ है
चार्ज की। तो सिग्मा क्या हो गया बेटा? चार्ज अपॉन में एरिया। चार्ज अपॉन में एरिया। तीसरा आता है रो से
डिफाइन होने वाला। तीसरा आता है रो से डिफाइन होने वाला। चार्ज डिवाइड बाय वॉल्यूम। ये रेयरली मिलता है आपको देखने
को। लेकिन फिर भी पढ़ना तो चाहिए। ठीक है? ओके। अच्छा तो लैम्ब्डा की यूनिट क्या हो गई बेटा? देखो चार्ज की होती है कूलम।
लेंथ की होती है मीटर। तो कूलॉम पर मीटर हो गई। चार्ज की कूलम एरिया की मीटर स्क्वायर तो कूलॉम पर मीटर स्क्वायर हो
गई। चार्ज की कूलॉम वॉल्यूम की मीटर तो कूलॉम पर मीटर सिंपल है यार। खुद से भी कर सकते थे इस चीज को तो। है ना? कर सकते थे
कि नहीं? है ना? अच्छा। अब गाउस लॉ शुरू करने से पहले एक बार इलेक्ट्रिक चार्ज जब किसी इलेक्ट्रिक फील्ड में होता है तो उस
पर किस प्रकार से मोशन होता है इसको भी फटाफट से करते चलते हैं। फिर हम फ्लक्स से शुरुआत करेंगे बातों की और गॉस लॉ को पूरा
करेंगे। सारी डेरिवेशंस करेंगे। सवाल करेंगे और एंड करेंगे इस चैप्टर को। ठीक है ना? देखो सपोज़ करना कि आपको
इलेक्ट्रिक फील्ड दी हुई है। ठीक है? गिवन इलेक्ट्रिक फील्ड है कोई। ठीक है जी। यह कोई गिवन इलेक्ट्रिक फील्ड
है। इसमें क्या हुआ कि आपने एक प्लस चार्ज रखा। ठीक? एक पॉजिटिव चार्ज रखा। अब ये पॉजिटिव
चार्ज पर क्या लगेगी भाई? फोर्स लगेगी। आप सभी जानते हैं। qe फोर्स लगती है इसके ऊपर। है ना? है ना? ऐसे ही आपने कोई
नेगेटिव चार्ज रखा तो क्या होगा? इस पर पीछे फोर्स लगेगी qe। ठीक? समझ गए? ओके। बढ़िया। अब मुझे एक बात
बताओ। हम पढ़ रहे हैं कि चार्ज कैसे मोशन करता है फील्ड के अंदर। तो यार अभी तो चार्ज रुका हुआ था। अगले ही पल क्या होने
वाला है? वो एक्सीलरेट करने वाला है। उस पर फोर्स लग गई ना? देखो फोर्स लगती है तो एक्सीलरेशन तो होती ही होती है। तभी हम
एक्सीलरेटेड मोशन की इक्वेशंस लगाते हैं। वो तो तीन इक्वेशन ऑफ़ मोशन है। एक्सीलरेटेड फॉर्म में लगती है वो। है ना?
तो यानी ये चार्ज क्या कर रहा है? पहले रुका हुआ था। पहले रेस्ट पे था। अब यह मोशन करना चालू करेगा। यानी दौड़ना चालू
करेगा। क्या क्लियर बात है? बिल्कुल क्लियर बात है। ऐसे ही माइनस वाला चार्ज भी क्या करेगा? पीछे की तरफ दौड़ना चालू
करेगा। सही बात है। एकदम सही है। अब एक बात बताना मान लो चार्ज पहले से ही चल रहा था। भाई ये तो रुका हुआ था ना। ये तो u
ज़ीरो था ना भाई। मान लो कि चार्ज पहले से ही चलता आ रहा था। पहले से ही उसके पास कुछ u है। इसका u तो ज़ीरो था। इसके पास
पहले से मान लो कुछ U है। और इस पर फील्ड भी फोर्स लगाने लगी। यानी इस पर इस पर फोर्स भी लगना चालू हो गई। QE भी लगना
चालू हो गई। तो मुझे बताओ अगले पल क्या होने वाला है? अगले पल ये अपनी स्पीड को बढ़ाएगा।
अगले पल इसकी स्पीड क्या होगी? बढ़ेगी। है ना? तो हम ये बोल सकते हैं कि भाई ये जो v है ये इंक्रीज करेगी।
क्लियर है क्या बात? है ना? इसकी स्पीड क्या करने वाली है? बढ़ने वाली है। अच्छा एक बात और बताना। मान लो एक प्लस चार्ज को
ही हम ऐसे फेंक देते तो फील्ड में। आप समझ पा रहे हो? एक प्लस चार्ज लिया और फील्ड के उल्टे फेंक दिया। बेटा उल्टे फेंकोगे
तो भी तो फोर्स ने अपना काम इधर ही करना है। फोर्स ये थोड़ी ना कि आपने उधर फेंका तो वो उधर सपोर्ट करने लगेगी। ऐसा तो नहीं
होगा। तो यहां पर भी qe फोर्स जो है वो पीछे लगेगी। पर आपने वेलोसिटी तो इस तरफ दी है। तो आप मुझे बताओ थोड़े समय के बाद
यानी अगले ही पल क्या होने वाला है? इसकी स्पीड बढ़ने वाली है या घटने वाली है? तो जवाब आपका बिल्कुल सही है और मैं सुन पा
रहा हूं वो आवाज बिल्कुल दिलो दिमाग तक जा रहा है मेरे। के कि इसकी स्पीड धीमे-धीमे घट जाएगी। यानी इसकी जो वेलोसिटी v होगी,
इसकी जो वेलोसिटी v होगी, वो डिक्रीज करेगी। इट डिक्रीजसेस। क्लियर है कि नहीं? तो
पहले इसकी स्पीड बढ़ी है, तो v इंक्रीज हुआ है और उल्टा उल्टा फेंका है तो स्पीड डिक्रीज हुई है और स्पीड डिक्रीज ही होगी।
समझ गए ना? अब एक और केस लेते हैं। इस केस में क्या किया? आपने एक चार्ज पार्टिकल को लेकर के और ऐसे फेंका।
ऐसे फेंका अंदर। ठीक है ना? V वेलोसिटी से। आप बताओ अगले पल क्या होने वाला है? आप बताओ अगले पल क्या होने वाला है? अगर
आपने चार्ज को ऐसे फेंका है तो क्या होगा? देखो जैसे ही ये फील्ड में घुसा समझिएगा। जैसे ही ये फील्ड में घुसा इस पर इधर की
तरफ qe लगनी चालू हो जाएगी। और बेटा जब भी कभी किसी पार्टिकल पर किसी मास पर ऐसे हो वेलोसिटी ऐसे हो उसकी डिस्प्लेसमेंट और
फोर्स लग रही हो 90° पर तो उसे सेंट्रिपेटल फोर्स बोलते हैं। ये गोल घूमना चालू हो जाएगा। ये कर्व मोशन लेना
चालू कर देगा। यानी ये ये ऐसे घूम जाएगा। समझ गए ना? तो ये क्या करेगा? यह सेंट्रिपेटल फोर्स की तरह काम करेगी।
एक्ट्स एज सेंट्रिपेटल। बेटा जितने केस मैंने करवाए
हैं सारे लिख लेना सारे के सारे। ठीक है? एक लास्ट केस और बता देता हूं। बेटा जब आप कोई न्यूट्रल पार्टिकल ला के छोड़ देते हो
तब क्या होगा? या आपने न्यूट्रल पार्टिकल फेंक के मारा तो क्या होगा? तो आंसर है कोई फोर्स नहीं लगेगी। नो फोर्स विल एक्ट।
तो इस केस में कोई फ़ोर्स जितने केस मैंने आपको करवाए सब लिख लीजिएगा अलग-अलग। ठीक है ना? पहला पॉजिटिव चार्ज को रोका रोक के
छोड़ दिया तो क्या होगा? चलने लगेगा। नेगेटिव चार्ज को रोक के छोड़ दिया पीछे चलने लगेगा। पॉजिटिव चार्ज पहले से फेंक
के मारा था तो वो अपनी स्पीड और बढ़ाने लगेगा अगर फील्ड की दिशा में ही है तो। पॉजिटिव चार्ज उल्टी दिशा में फेंका है तो
स्पीड घटाने लगेगा। धीरे-धीरे रुक भी सकता है आगे जाकर के वो। है ना? और आपने कोई परपेंडिकुलर चार्ज फेंका तो जिस तरफ फोर्स
है उस तरफ को घूमना। कर्ववी लीनियर मोशन लेना चालू कर देगा। बहुत बढ़िया। मेरे हिसाब से आपको कहानी सारी समझ में आ गई
होगी। हम चलते हैं और फ्लक्स की चर्चा करते हैं। देखो भाई, फ्लक्स का मतलब होता है किसी पर्टिकुलर एरिया में से कितनी
फील्ड लाइंस पास हो रही हैं, उसकी कैलकुलेशन करना। लिखा हुआ है। इलेक्ट्रिक फ्लक्स थ्रू अ गिवन एरिया हेल्ड इनसाइड एन
इलेक्ट्रिक फील्ड इज द मेजर ऑफ़ मेजर ऑफ़ पढ़ो, पढ़ो। मेजर ऑफ़ टोटल नंबर ऑफ़ इलेक्ट्रिक लाइंस ऑफ़ फोर्स पासिंग नॉर्मली
थ्रू दैट एरिया। कि उस एरिया में से कितनी लाइनें नॉर्मली पास हो रही हैं। परपेंडिकुलरली पास हो रही हैं। उन्हें
कैलकुलेट करने को ही कहते हैं इलेक्ट्रिक फील्ड। इलेक्ट्रिक फ्लक्स बताना। ठीक है ना? तो इस फ्लक्स को डिनोट करते हैं बेटा
इस सिंबल से। कभी-कभी इसके पैर में E भी लगा दिया जाता है ताकि पता चले कि इलेक्ट्रिक फ्लक्स है। क्या है?
इलेक्ट्रिक फ्लक्स है। अब इस इलेक्ट्रिक फ्लक्स को कैलकुलेट कैसे करते हैं? सुनिएगा। देखो इलेक्ट्रिक फ्लक्स की
कैलकुलेशन होती है e वेक्टर डॉट a वेक्टर से डॉट प्रोडक्ट होता है इलेक्ट्रिक फील्ड और एरिया वेक्टर का। अब
एरिया वेक्टर कैसे डिफाइन करते हैं? इसके बारे में जानकारी ले लो क्या है? देखो एरिया वेक्टर होता है किसी भी सरफेस से
आउटवर्ड नॉर्मल लेना अगर वो 3D सरफेस है तो। जैसे मान लो कोई स्फीयर है। मान लो कोई स्फीयर है तो 3D हो गया ना ये। 3D हो
गया ना? तो 3D ऑब्जेक्ट से आप मान लो यह सरफेस की बात कर रहे हो। इसका एरिया वेक्टर लेना है आपने। तो हमेशा बाहर
की तरफ़ निकलता हुआ होगा ये। आउटवर्ड नॉर्मल बोलते हैं इसको। क्या बोलते हैं? आउटवर्ड नॉर्मल। किसकी बात हो रही है?
एरिया वेक्टर की। बेटा किसकी बात हो रही है? एरिया वेक्टर की। एरिया वेक्टर हमेशा कैसे लिया जाएगा? आउटवर्ड नॉर्मल। अब
बच्चा बोलता है सर अगर 3D ऑब्जेक्ट ना हुआ तो ऐसा हुआ तो 2D है ना? जैसे ये प्लेट है। जैसे ये प्लेट है 2D हुआ तो क्या
होगा? तो भाई अगर 2D ऑब्जेक्ट अगर है समझना 2D ऑब्जेक्ट अगर है तो इलेक्ट्रिक फील्ड
के साथ जो एक्यूट एंगल बना सके वो वाला एरिया वेक्टर लेना। मतलब देखो अगर ये 2D ऑब्जेक्ट है तो इसका एरिया वेक्टर पीछे भी
हो सकता है। आगे भी हो सकता है। तो कौन सा वाला लेंगे? बेटा पीछे वाला ना बड़ा एंगल बना रहा है।
ऑब्ट्यूस एंगल बना रहा है। तो ये नहीं चलेगा। जो छोटा एंगल बनाता है वही जिंदाबाद होता है। समझे ना? क्लियर हो
गया? तो 2D के लिए क्या देखोगे? जो इलेक्ट्रिक फील्ड के साथ छोटा एंगल बनाए वो एरिया वेक्टर जिंदाबाद। और 3D ऑब्जेक्ट
के साथ क्या देखोगे? कि भाई जो आउटवर्ड नॉर्मल निकल रहा उसमें तो कुछ सोचने वाली बात ही नहीं है। 3D में सोचने वाली बात ही
नहीं है। आउटवर्ड नॉर्मल ही लेना है आपने। आउटवर्ड मतलब बाहर निकलता हुआ परपेंडिकुलर। ठीक है ना? और यहां पर क्या
लोगे? ये भी परपेंडिकुलर ही है सरफेस के। लेकिन इलेक्ट्रिक फील्ड के साथ छोटा एंगल बनाना चाहिए। ठीक है? अब आते हैं एक बार
दोबारा से जरा फार्मूले पर। देखो फार्मूला क्या बताया मैंने आपको? इलेक्ट्रिक फ्लक्स का फार्मूला बताया e वेक्टर. A वेक्टर। और
कभी-कभी जब इसको इंटीग्रेशन के फॉर्म में भी लिखा जाता है तो लिखा जाता है e .DA
ऐसा लिखते हैं। ठीक है ना? अब बेटा कभी भी डॉट प्रोडक्ट अगर लिखा जाता है तो उसे खोलते हैं ऐसे
e का मैग्नीट्यूड a का मैग्नीट्यूड और दोनों के बीच का cos का एंगल ये भी ऐसे ही खुलेगा ऑब्वियसली अभी वेक्टर फॉर्म में
लिखा हुआ है खुल जाएगा तो e a और cos थीटा आएगा साथ में बढ़िया कोई टेंशन नहीं अब बात करते हैं cos थीटा ही क्यों फ्लक्स के
लिए cos थीटा ही डिफाइन क्यों किया गया sin क्यों नहीं किया गया इसका आंसर आपको ऐसे मिलेगा
कि भाई देखो ये एक प्लेनर सरफेस आपको दिख रहा है। एक प्लेट दिख रही है। एक शीट दिख रही है। इस शीट
में से इस एरिया में से कितनी लाइनें पास हो रही हैं? कितना फ्लक्स पास हो रहा है? वो कैलकुलेट करने के लिए आपको एरिया
वेक्टर लिखना पड़ेगा। सही बात है? तो इसका एरिया वेक्टर जो है वो ये रहा। देखना जरा देखना जरा। ये रहा इसका एरिया वेक्टर। है
ना? यही क्यों लिया? क्योंकि इलेक्ट्रिक फील्ड के साथ छोटा एंगल बना रहा है। भाई पीछे वाला भी ले सकते थे ये वाला। लेकिन
वो बड़ा एंगल बनाता। इलेक्ट्रिक फील्ड इस तरफ है। आप समझो बात को तो यह नहीं चलेगा। यही लेंगे। सही है? आप मुझे बताओ कितना
एंगल है इलेक्ट्रिक फील्ड के साथ? एरिया वेक्टर का इलेक्ट्रिक फील्ड के साथ थीटा 0° है। बेटा थीटा 0° यहां पुट करना
एक बार जरा। cos 0 क्या होता है? वन। हां। यानी मैक्सिमम फ्लक्स पास होगा। जब इलेक्ट्रिक फील्ड के सामने ऐसे सरफेस खड़ा
है भाई तो ज्यादा लाइनें चीर पा रही हैं। फ्लक्स का मतलब होता है लाइनें कितनी चीर के निकली। ऐसे समझ लो। फ्लक्स का मतलब
होता है लाइनें कितनी चीर के निकली। तो लाइनें कब चीर के निकलेंगी? जब सरफेस ऐसा पड़ा होगा तब। है ना? लाइनें ऐसे आ रही
हैं और सरफेस ऐसा है। तो इसको चीर के निकलेंगी ना? आर-पार हो जाएंगी ना इसके। ये देखो ये देखो आर-पार हो गई। आर-पार हो
गई। है ना? अच्छा एक बात बताओ अगर ऐसे रखें सरफेस को तो ऐसे तो फील्ड लाइन कुछ ऊपर से निकल गई कुछ
नीचे से निकल गई क्या आरपार हो पाएगी आरपार होने के लिए ऐसे रखना जरूरी है ना ऐसे रखोगे
ऊपर से छू के निकल गई नीचे से छू के निकल गई यही हो रहा है बेटा यहां पर देखो यहां पर यहां पर ये है एरिया वेक्टर
और ये है इलेक्ट्रिक फील्ड फील्ड है। दोनों के बीच का एंगल देखो क्या है? दोनों के बीच का एंगल है 90°
ये एरिया वेक्टर है बेटा। ये इलेक्ट्रिक फील्ड है। है ना? तो जो फ्लक्स आएगा वो ज़ीरो आएगा। क्योंकि cos 90 क्या होता है?
पुट करो जरा थीटा यहां। थीटा 90 क्या आएगा? ज़ीरो आएगा। तो फ्लक्स यहां पे क्या है? ज़ीरो है। यहां फ्लक्स क्या होगा? यहां
फ्लक्स होगा मैक्सिमम। आप समझ पा रहे हो? अगर थीटा 0 हुआ तो cos 0 1 तो यहां पर मैक्सिमम फ्लक्स पास हो रहा है। यहां पे
जीरो फ्लक्स पास हो रहा है और ये कुछ बीच की कहानी हो गई। आप समझ पाए ना कि भ ऐसे रख दिया तो मान लो तो ऐसे निकलेगी कुछ
लाइनें और कुछ ये वाली लाइनें नहीं निकल पाएंगी। ये वाली भी नहीं निकल। तो कुछ लाइनें कम हो गई हैं। जब ये तिरछा हो
जाएगा कुछ लाइनें कम हो जाएंगी। फ्लक्स कुछ कम हो जाएगा। यानी फ्लक्स होगा तो सही पर मैक्सिमम से कम और ज़ीरो से ज्यादा
होगा। क्या कहते हो हां या ना? मैक्सिमम से कम जीरो से ज्यादा होगा। क्लियर हुआ? इसलिए cos थीटा लिखा गया है ताकि एंगल आप
देखो जीरो डाल करके तो मैक्सिमम ea आएगा। मैक्सिमम कितना आ रहा है? ea ea है ना? और यहां क्या आ रहा है? यहां ज़ीरो
आ रहा है। क्लियर है बात? आइए शुरू करते हैं। जब फ्लक्स की बातें हो गई हैं तो फिर गॉस लॉ अभी दूर नहीं है। गॉस लॉ बेटा क्या
कहता था? सुनिएगा। गौस साहब ने कहा था दिस थ्योरम गिव्स अ रिलेशनशिप बिटवीन टोटल फ्लक्स पासिंग थ्रू एनी क्लोज्ड सरफेस।
याद रखना हमेशा गॉस लॉ जो है वो क्लोज्ड सरफेस के लिए ही लग सकता है। ठीक है? और ये निकालता है ये कैलकुलेट करता है कि
कितना फ्लक्स उसमें से पास कर रहा है। तो गॉस ने बोला कि भाई जो फ्लक्स पास कर रहा है ना किसी क्लोज सरफेस में से वो उसके
अंदर बैठे चार्ज के डिवाइड बाय एप्स 0 होता है। क्या लिखा है? द टोटल फ्लक्स पासिंग थ्रू
एनी क्लोज सरफेस एंड द नेट चार्ज एनक्लोज्ड विद इन द सरफेस। जो अंदर नेट चार्ज है जैसे-जैसे-जैसे मान लो कि ये कोई
सरफेस है। ये कोई सरफेस है। इस सरफेस में से कितना फ्लक्स निकल रहा है? कौन जाने? कितना
फ्लक्स निकल रहा है? कौन जाने? बोला ऐसे जानो कि भाई अंदर कितना चार्ज पड़ा है? अंदर कितना चार्ज एनक्लोोज्ड है? इस सरफेस
ने चार्ज अंदर एनक्लोज कर लिया ना। हां बस कितना चार्ज अंदर एनक्लोज्ड है? डिवाइड कर दो एप्स 0 से। उतना ही फ्लक्स बाहर आ रहा
है। ये देखो फ्लक्स निकल रहा है ऐसे। ये देखो निकला। ये देखो निकला। निकल रही है ना फील्ड लाइंस। फील्ड लाइंस का निकलना
किसी सरफेस में से। इसी को तो फ्लक्स कहते हैं। इसी का नाम तो फ्लक्स है। हां या ना? कि कितनी भीड़ बाहर आ रही है। कितनी
लाइनें बाहर आ रही हैं। तो बस फ्लक्स के बारे में बताया कि कितना चार्ज एनक्लोोज्ड है। डिवाइड कर दो 0 से। बस
इतनी छोटी सी बात बोली गॉस ने और तबाही मच गई इतनी सी बात पे। ठीक है? कह रहा है गॉस थ्योरम कहती है टोटल फ्लक्स थ्रू अ
क्लोज्ड सरफेस इज़ 1 / 0 टाइम्स। देखा ना? चार्ज को एप्सॉट से डिवाइड कर दो। 1 / 0 टाइम्स द नेट चार्ज एनक्लोज्ड बाय द क्लोज
सरफेस। तो किसी भी क्लोज सरफेस में जितना भी चार्ज अंदर रखा हुआ है, उस चार्ज को ही नॉट से डिवाइड कर दो। सीधा-सीधा फ्लक्स
निकल के आ जाएगा। इतना सिंपल कर दिया उन्होंने लंबी चौड़ी बातों को। ठीक है ना? आइए इसको एक बार समझते हैं कि ये पूरी बात
क्या कही गई है। उसके बाद प्रूफ भी करेंगे हम। है ना? हमने प्रूफ भी करना है। देखो ये बोल रहे हैं कि जो फ्लक्स होगा वो
चार्ज डिवाइड बाय एप्स 0 होगा। फ्लक्स होता क्या है? फ्लक्स होता है e डॉट da या e
का सरफेस इंटीग्रल ये गॉस ने कहा था क्योंकि पूरा सरफेस ले रहे हो ना एक एनक्लोोज्ड सरफेस ले रहे हो
ना भाई तो eडी करोगे भाई eडीs बोल लो e बोल लो ea बोल लो जो मर्जी बोल लो या रिंग लगा देना एक रिंग लगाने का मतलब होता है
आपने पूरा सरफेस के सारे के सारे एरिया ले लिए छोटे-छोटे छोटे छोटे छोटे-छोटे सारे एरिया लेके आपने एनक्लोज कर लिए तो एक
इनक्लोज्ड इंटीग्रेशन कर रहे हो आप और ये चार्ज / 0 के बराबर होगा। दिस इज़ योर फ्लक्स। इलेक्ट्रिक फ्लक्स यही है आपका।
तो ये फार्मूला हम यूज़ होता हुआ देखेंगे। है ना? पहले एक बार हम इसको प्रूफ भी कर लेते हैं। एक बार इसके प्रूफ भी देख लो।
ठीक है? आओ प्रूफ देखते हैं। सिंपल है बहुत। क्या कर रखा है मैं आपको? पीछे मैथमेटिक्स समझने से पहले डायग्राम
समझो। एक चार्ज है। ठीक? इस चार्ज से यह जो स्फीयर बना रखा है, यह एक इमेजिनरी स्फीयर बना रखा है। इस इमेजिनरी स्फीयर को
बोलते हैं गशियन सरफेस। क्या बोलते हैं? गौसियन सरफेस। ठीक? अब इस चार्ज से कुछ दूरी पर इलेक्ट्रिक फील्ड लिखी गई है। मैं
दिखाता हूं कहां है। ये रही देखो। क्या लिखा हुआ है? इलेक्ट्रिक फील्ड एट एनी पॉइंट s इज़ e = देखो। kq / r² ही तो लिखा
है। ये k ही तो है। 1/4 नॉट क्या होता है? K ही तो होता है। तो KQ / R² लिखा हुआ है। बढ़िया। कह रहा है दिस फील्ड पॉइंट्स
रेडियली आउटवर्ड। ये रेडियली आउटवर्ड निकल रही है। एट ऑल पॉइंट्स ऑल्सो एनी एरिया एलिमेंट पॉइंट्स रेली आउटवर्ड। सो इट इज़
पैरेलल टू E यानी थीटा हो गया ज़ीरो। अब फ्लक्स देखो कैसे लिखा हुआ है इसने। कह रहा है जो फ्लक्स होगा इस छोटे से एरिया
में से। यहां देखो छोटा सा एरिया दिया हुआ है। दिख रहा है छोटा सा एरिया। ये छोटे से एरिया का नाम है ds। कह रहा है जानबूझ के
मैंने ये एरिया लिया है। बोले क्यों लिया है? क्योंकि भाई इलेक्ट्रिक फील्ड और ds आपस में जीरो एंगल बना रही हैं। तो फ्लक्स
निकालना कितना सिंपल होगा? बात तो सही है। तो इसलिए देखो इसने क्या किया? E.DS के लिए E.S लिखा है ना? देखो ये फ्लक्स लिखा
हुआ है। E छोटा सा फ्लक्स लिखा है क्योंकि छोटा सा एरिया लिया है। तो उसमें से फ्लक्स भी छोटा सा निकलेगा। eds cos 0 cos
0 होता है वन। ये eds आ गया। बढ़िया है। बहुत सही। अब कह रहा है टोटल फ्लक्स कैसे आएगा? बोले इंटीग्रेट कर दो। तो
इंटीग्रेशन का साइन लगा दिया। देखो है ना? इंटीग्रेशन eds e बाहर आ गया क्योंकि इलेक्ट्रिक फील्ड तो सब जगह कांस्टेंट
होगी। यहां से यहां भी उतनी ही इलेक्ट्रिक फील्ड होगी। यहां से यहां भी उतनी इलेक्ट्रिक फील्ड होगी। यहां से यहां भी
उतनी इलेक्ट्रिक फील्ड। यहां से यहां भी उतनी इलेक्ट्रिक फील्ड। यहां से यहां ये सब पॉइंट्स पर इलेक्ट्रिक फील्ड तो सेम
हीच होगी। हां या ना? सभी पॉइंट्स पर सेम ही इलेक्ट्रिक फील्ड होगी कि नहीं? तो इलेक्ट्रिक फील्ड देख
लो। बाहर आ गई इंटीग्रेशन से। अंदर बचा ds। आप एक काम करो। यह ds ds ds ds सारा जोड़ दो। यह पूरा स्फीयर बन जाएगा। और इस
स्फीयर का एरिया क्या होता है? 4πr² बस देखो ds ds जोड़ के क्या कर दिया यहां पे? 4πr² कर दिया। ये फोर है। ये फोर है। 4πr²
फोर से फोर कट गया। पाई से पाई कट गया। r² से r² कट गया। क्या आ गया बेटा? चार्ज डिवाइड बाय एप्सिलॉन नॉट चार्ज /0 दिस
प्रूव्स गॉस थ्योरम। छोटी सी प्रूफ। छोटी सी प्रूफ। है ना? मैं इसको मिटा देता हूं। सिर्फ समझाने समझाने के लिए मैं चीजें
यहां पर लिख रहा था। बाकी अपने हाथ से लिख के देखोगे आपको प्रॉपर समझ में आएगा कि क्या बात हो रही है। ठीक है? एक बार अपने
हाथ से कॉपी तो करो। मेरे पे यकीन करते हो ना भाई? ट्रस्ट करते हो ना? तो मेरी बात भी मानो। एक बार इसे अपने हाथ से लिख के
देखो। ब्लाइंडली लिख करके देखो। आप जब ब्लाइंडली भी लिख रहे होंगे ना, आपको 50% बातें समझ में आ रही होंगी कि ये मैं
क्यों लिख रहा हूं। ये मैं क्यों लिख रही हूं? ये साइन मैंने क्यों लगाया। ठीक है? एक बार करके देखो। ठीक है? ट्रस्ट करना।
अगर आए हो यहां तक तो भाई ट्रस्ट जरूर करना। ठीक है? देखो उसी उसी को थोड़ा सा और सुंदर तरीके
से यहां पर भी लिखा हुआ है। आप चाहो तो यहां से भी देख सकते हो। है ना? वो वाला। चलो मैं मिटा दूंगा। आप यहां से देख लेना।
ठीक है? इलेक्ट्रिक फील्ड एट एनी पॉइंट s क्या होता है बेटा? kq / r² होता है। अब देखो e.ds क्या कर रखा है? cos ज़ीरो यानी
eds हो गया। e बाहर आ गया। ds अंदर है। और ds से ds से ds मिल जाएगा सारा। तो पूरा 4πr² बन जाएगा। 4 से 4π से π r² से r² कट
गया। q नॉट निकल कर के आ गया। प्रूफ हो गई गॉस थ्योरम की। ईजी था। है ना? चलिए भाई अब हम गॉस लॉ तीन जगह पर लगा
करके देखेंगे। तीनों जगह आपके लिए बहुत इंपॉर्टेंट है। एनसीईआरटी के अंदर सीबीएसई के अंदर जिस तरीके से दी गई है ये उसी
तरीके से हम लोग काम करने वाले हैं। ठीक है? देखो सबसे पहली चीज जो आपने पढ़नी है वो है लाइन चार्ज के बारे में कि
इलेक्ट्रिक फील्ड कोई लाइन चार्ज कैसी बनाता है? कितनी वैल्यू की होती है? तो हमने क्या किया? हमने यहां पे एक लीनियर
चार्ज ले लिया। दिख रहा है आपको? इनफाइनाइटली लॉन्ग है ये। उधर से भी इनफिनिटी लंबा, इधर से भी इनफिनिटी लंबा
ही लंबा है। उधर से भी लंबा, इधर से भी लंबा। ठीक है? तो एक लाइन चार्ज है। डन। इस लाइन चार्ज का हमने जो डेंसिटी लिया
है, लीनियर चार्ज डेंसिटी वो क्या है? लैम्ब्डा है। ये देखो यहां पर लिखा हुआ दिख रहा होगा आपको लैम्ब्डा। है ना? छोटा
सा अपने हाथ से मैंने बोल्ड भी कर दिया इसको। ये लैम्ब्डा। ठीक है? और आप सभी जानते हो कि जो लैम्ब्डा होता है वह होता
है चार्ज डिवाइड बाय लेंथ। q / l होता है। सही है ना? q / l अच्छा अब मुझे एक बात बताओ अगर हम गॉस लॉ लगाने वाले हैं तो
हमें क्लोज सरफेस चाहिए होता है। गॉस लॉ लगता ही क्लोज सरफेस के लिए। तो हम इसके लिए ऐसा कैसा क्लोज सरफेस लें? यहां पर
वैसे बना हुआ है लेकिन आप थोड़ा सा सोचिए अगर कि एक लाइन चार्ज है उसके लिए कैसा क्लोज सरफेस हम लोग लें कि जहां के लिए
इलेक्ट्रिक फील्ड की वैल्यू फ्लक्स की वैल्यू ऐसी निकले कि इलेक्ट्रिक फील्ड और एरिया का या तो एंगल जीरो बने या तो 90
बने। यह गाउस लॉ के तोड़ हैं जो मैं आपको बता रहा हूं। जब भी गाउस लॉ लगाना लगे ना कभी लगे ना कि गाउस लॉ लगाने में दिक्कत
हो रही है तो एक बात ध्यान रखना ऐसा सरफेस लेट करना है अपने को जिसका एरिया वेक्टर के साथ इलेक्ट्रिक फील्ड का जो एंगल है वो
या तो ज़ीरो आए या तो 90° आए क्योंकि देखो बीच में आ गया तो फंस जाएगा मामला है ना ज़ीरो आ जाए तो ठीक है cos 0 1 होता है और
90 आ जाए तो बिल्कुल ही खत्म हो गया cos 90 0 होता है पूरा फ्लक्स ही ज़ीरो हो गया तो ट्राई अपने को ऐसा करना है कि हम ऐसा
गौसियन सरफेस लें क्या बोलते हैं इसको इसे क्या बोलते बोलते हैं। इसे बोलते हैं गशियन सरफेस। तो यहां पर गसियन सरफेस कैसा
लिया हुआ है बेटा? सिलड्रिकल लिया हुआ है। दिख रहा है आपको? सिलेंडर लिया दिख रहा है ना? सिलेंडर है ये। ये पूरा सिलेंडर है।
अब सिलेंडर में कहां-कहां पे एरिया होते हैं? एक तो सर ऊपर एरिया होता है। एक नीचे एरिया होता है। ढक्कन नीचे, ढक्कन ऊपर और
गोल बॉडी इसकी जो है वो भी एक सरफेस एरिया है। हां। तो तीन सरफेस एरिया है यहां पर। ध्यान से सुनना। तीन सरफेस एरिया है। ठीक?
अब मुझे एक बात बताओ जो ये लाइन चार्ज है इसकी इलेक्ट्रिक फील्ड कैसे निकलती है? तो देखो लाइन चार्ज की इलेक्ट्रिक फील्ड
हमेशा ऐसे निकलती है। ऐसे है कि नहीं? है कि नहीं? ऐसे ही निकलेगी ना भाई। है
ना? और इधर से भी ऐसे निकलेगी। कोई जरूरी नहीं कि एक ही तरफ यहां भी निकलेगी। है ना? यहां भी निकलेगी। यहां भी निकलेगी। तो
इतना सारा दिखाने की जरूरत नहीं है। जहां काम की बात है वहीं-वहीं दिखाते हैं हम लोग भी यार। है ना? क्यों इतना सेंटी होना
भाई? इतने सेंटी होने की जरूरत नहीं है। ठीक है ना? तो तीन जगह पे हमने क्या दिखा दी? इलेक्ट्रिक फील्ड दिखा दी। और
वहीं-वही जगह के हम एरिया भी ले लेते हैं छोटे-छोटे एरिया। जैसे यहां देखना जरा ध्यान से। यहां देखना जरा ध्यान से। यहां
पर मैंने एक छोटा सा एरिया लिया है जिसका नाम है ds। दिख रहा है? और वो नीचे वाला ढक्कन है। आउटवर्ड नॉर्मल क्या होगा? ये
वाला। नीचे से जो निकल रहा होगा यह आउटवर्ड नॉर्मल होगा इसके लिए। अच्छा ऊपर वाले
ढक्कन के लिए क्या होगा? यह देखो मेरे हाथ में अपने आप ही आया आउटवर्ड नॉर्मल यह होगा। और गोल जो कर्व्ड सरफेस एरिया है
उसके लिए क्या होगा? ऐसे आउटवर्ड नॉर्मल बाहर निकल रहा होगा। गोल है ना भाई? है ना? जैसे मान लो ये मेरा ये मेरा हाथ ही
सिलेंडर है। तो ये क्या है? ये जो ऐसे बाहर निकल रहा है ये क्या है? ये आउटवर्ड नॉर्मल ही तो है। समझ गए ना? तो इसका
आउटवर्ड नॉर्मल यहां पर जो सरफेस एरिया लिया उसका आउटवर्ड नॉर्मल ये रहा। ये रहा। इसका आउटवर्ड नॉर्मल ये रहा।
इसका आउटवर्ड नॉर्मल ये रहा। दिख रहे हैं आपको सारे आउटवर्ड नॉर्मल। तीन-तीन आउटवर्ड नॉर्मल हैं भाई। होंगे भी होने भी
चाहिए क्योंकि तीन-तीन सरफेस एरिया है। है ना? तो हम सभी के लिए फ्लक्स लिखना सीखते हैं। आ जाओ। आ जाओ भाई। भाई देखो हमें पता
है बाय गौस साहब का लॉ फ्लक्स जो होता है वह होता है e.
का क्या बोलते हैं इसको? सरफेस इंटीग्रल। है ना? क्या बोलते हैं? सरफेस इंटीग्रल। और
ये हमेशा चार्ज्ड एनक्लोज्ड डिवाइड बाय एप्स 0 के बराबर होता है। तो हम इसी को यूज़ करेंगे सब जगह पर। पहले एलएचएस को
सॉल्व करते हैं। ठीक है ना? फर्स्ट एलएचएस आओ जरा। क्या है भाई इसमें सर? इसमें है e.ds करने
का और सबको इंटीग्रेट कर देने का सभी के लिए अलग-अलग। है ना? तो करते हैं आ जाओ जरा।
तो भाई देखो नेट फ्लक्स निकालने के लिए आपको 1 चाहिए, 2 चाहिए, 3 चाहिए। क्यों? अबे तीन-तीन है ना भाई? एक सरफेस ये रहा।
एक सरफेस कर्व्ड वाला, एक नीचे वाला। तो तीनों का लिख लेते हैं। है ना? आइए एक-एक करके सबको
लिखते हैं। सबसे पहले 1 की बात करते हैं। ये ऊपर वाला वन है। हमारे लिए ये ऊपर वाला वन है। है ना? ये नीचे वाला टू मान लेते
हैं। कर्व्ड सरफेस वाला थ्री मान लेते हैं। कोई दिक्कत तो नहीं? नहीं एक ही बात है। कोई भी कैसे भी कहीं भी मान लो कोई
दिक्कत नहीं है। तो 1 क्या है भाई? e ठीक है? अच्छा e ड.ds करना है अपने को। इंटीग्रेट करना है साथ में। है ना? तो e
बाहर आ गया। आएगा ही। है ना? अच्छा ds क्या होगा? देखो ds अगर वन के लिए बात करें तो ये वाला पूरा ds होगा ये है ना
लेकिन बेटा ये एंगल नाम की भी तो कोई चीज होती है कि नहीं होती जो कि 90° है और cos 90 क्या होगा ज़ीरो यानी e डॉटds है मैं
मना नहीं कर रहा पर cos 90 भी तो है तो मैं क्यों आगे बढूं मार गोली इसको आगे बढ़ 2 की बात करते हैं ये नीचे वाला सरफेस
नीचे वाले सरफेस में भी देखो आप यह 90° बनता दिख रहा है दिख रहा है सर यस दिख रहा है तो यह आ गया e अंदर है ds साथ में फिर
cos 90 है। मारो गोली इसको भी प्लस 3 लिखते हैं। अब आएगी मेन बात। यहीं से आपको अब आंसर मिलने वाले हैं भाई। है ना? 3
लिखते हैं। क्या लिखें 3? आओ देखते हैं। आओ देखते हैं क्या लिख सकते हैं। 3 में हम लिखेंगे e क्योंकि e तो है ही है। और वो
हमें कैलकुलेट भी करना है। और ds क्या है? अरे ds तो इसके बगली बगल आ रहा है। एकदम बगली बगल यानी 0° का एंगल है। और 0° है तो
ds इंटीग्रेशन में तो रहेगा। है ना? गोल चक्कर भी घुमा दिया इसका और cos का 0° भी कर दिया। cos 0 1 है। अब मुझे बताओ ये भी
ज़ीरो। ये भी ज़ीरो। ये E है। cos 0 1 है। अब ds ds ds पूरा
घूम जाएगा। ये सारे छोटे-छोटे डीएस डीएस डीएस जुड़ जाएंगे। अगर सारे छोटे-छोटे डीएस अगर मिल गए तो बड़ा सा सरफेस कर्व्ड सरफेस
बन गया। और सिलेंडर का कर्व्ड सरफेस एरिया क्या होता है बेटा? 2πrh है ना? सिलेंडर का कर्व्ड सरफेस एरिया
क्या होता है? 2πrh यहां पर ले लेंगे 2πrl क्योंकि यहां से लेके यहां तक वाली लेंथ हम लोगों ने l लेट कर ली है। तो क्या हुआ?
ये देखो ना। q / l है। है ना? तो यहां पर मैं कैपिटल l लेट कर लेता हूं इसको। कोई टेंशन नहीं।
नहीं सर बढ़िया। तो ये हो जाएगा ds ds ds जुड़ गया। तो 2 π
r और L 2π RL ठीक है? और cos 0 1 है। यानी अल्टीमेटली फाइनाइट जो निकल के आ गया हमारा नेट फ्लक्स जो निकल के आ गया वो आ
गया 2ाई RL ठीक है? अब आप जानते हो एलएचएस हम लोगों ने सॉल्व कर लिया है। आरएचएस में चार्ज एनक्लोज ब्स नॉट करना है आपको। है
ना? आइए इधर लिखता हूं आरएचएस। मैं एक ही पेज पे करना चाहता हूं। दो पेज लेना नहीं चाहता। आप बेशक से दो तीन चार पेज लेके
करना आराम से इसको। पर मैं चाहता हूं कि जितना शॉर्ट में हो सके और जितना पासपास हो सके चीजें करवा दूं ताकि आप कभी दोबारा
पढ़ो या कॉपी करने पर आओ या रिवाइज करने पे आओ। तो एक ही पेज पे सब चीजें आपको मिल जाए। तो ऐसे प्रिसाइज नोट्स मैं आपको देना
चाह रहा हूं। इसलिए इसी पेज पर कर रहा हूं। आप चाहे तो नए पेज पे स्टार्ट कर सकते हैं। ठीक है ना? नाउ एलएचएस अ एलएचएस
हो गया। अब आरएचएस की बारी है। बेटा आरएचएस में क्या है? चार्ज एनक्लोड्ड एप्स नॉट है। यानी कि जो फ्लक्स है
वो q एनक्लोज्ड / नॉट है। अब मुझे बताओ q एनक्लोज्ड क्या लिखेंगे? यहां से लिखेंगे। देखो लैम्ब्डा क्या होता है? q / lम्डा
होता है q / l तो q को लिख सकते हैं लैम्ब्डा l खत्म। इस l लेंथ में इतना चार्ज ही तो
एनक्लोज है। यहां से यहां तक l लेंथ है ना उसमें कितना चार्ज है? इतना चार्ज है λl तो q एनक्लोज की जगह लिख दो म्ब्डा l / 0
बस खत्म। एलएचएस भी लिख दिया गया। आरएचएस भी लिख दिया गया। अब दोनों को इक्वेट कर दो। ठीक है ना?
इक्वेटिंग वन एंड टू। कौन है इधर भाई? 2πrl है। ठीक। 2πrl = 2 कौन है? λl /0
l से l कट गया बेटा। ठीक है ना? अरे e कहां e [हंसी] तो लिखा ही नहीं। e तो रह गया। हां। e 2πrl पूरा आएगा ना? हां। तो e
यहां आ गया। और e ही तो निकालना था अपने को। तो e निकल के क्या आ गया बेटा? 2pi चला गया। λ / 2pi0
r यह है भैया फाइनल इलेक्ट्रिक फील्ड का फार्मूला फाइनल इलेक्ट्रिक फील्ड का फार्मूला ये है
भैया फाइनल इलेक्ट्रिक फील्ड का फार्मूला ठीक है ना लैम्ब्डा / लैम्ब्डा / 2π0
r ठीक है म्ब्डा / 2 r क्लियर है? यह हम लोगों ने क्या किया है?
डिराइव किया है यूजिंग गाउस लॉ। सिलेबस का पार्ट है। हाथ से लिख के प्रैक्टिस करना। दो से तीन बार क्लियर हो जाएगा। बिल्कुल।
ठीक है ना? आगे चलते हैं। नेक्स्ट चीज है बेटा चार्ज शीट। ये भी आपके सिलेबस का पार्ट है। सुनिएगा। देखो क्या हो रखा है?
एक चार्ज शीट आपको दिख रही है। प्लेन चार्ज ऑफ शीट। ठीक है? अब इसमें आपको इलेक्ट्रिक फील्ड पता करनी है। कितनी
होगी, कितने डिस्टेंस पर वगैरह वगैरह जो भी है। ठीक है? तो हमने क्या किया? हमने गौसियन सरफेस माना। और मैंने आपको बताया
हुआ है गौसियन सरफेस ऐसा मानना कि इलेक्ट्रिक फील्ड के साथ उसके सारे सरफेससेस या तो जीरो एंगल बनाएं या तो 90°
बनाएं। तो यहां पर हमने फिर एक क्या किया? सिलेंडर को ही इमेजिन कर लिया। लेकिन सिलेंडर ऐसे समझो इसमें से घुस रहा है।
दोनों तरफ मान लिया। ठीक है? इलेक्ट्रिक फील्ड कैसे निकलेगी? देखो भाई, अगर कोई प्लेन शीट है, अगर कोई प्लेन चार्ज्ड शीट
है, तो इलेक्ट्रिक फील्ड ऐसे-ऐसे निकलती है उसमें से। सीधी-सीधी। पीछे को भी निकलेगी। हां बिल्कुल निकलेगी पीछे को भी।
ठीक है ना? तो बस वैसा ही इमेजिन किया गया है कि इलेक्ट्रिक फील्ड सीधी जा रही होगी। और एरिया वेक्टर कैसा होगा यार? हां जी।
एरिया वेक्टर कैसा होगा? तो यहां पर अगर बात करें तो यहां कोई एरिया वेक्टर अगर होगा तो ऐसे बाहर की तरफ ds होगा।
यहां कोई एरिया वेक्टर की बात करूं तो ऐसे बाहर की तरफ ds होगा। है ना? और अगर और अगर इस कर्व्ड सरफेस एरिया की बात करूं तो
ऐसे डीएस होगा। आउटवर्ड नॉर्मल लेते हैं ना यार एरिया वेक्टर को आउटवर्ड नॉर्मल लेते हैं ना तो ऐसे लेंगे
कि भाई ये गोला है। ये सिलेंडर है तो इसमें से ऐसे बाहर निकल रहा है। आउटवर्ड नॉर्मली तो हो गया ये। ठीक है? तो ds ऐसे
ऊपर है। कहीं भी ले लो, चाहे इधर ले लो, लो, चाहे इधर ले लो। एक ही बात है। ठीक है? तो टोटल तीन सरफेस हो गए।
यूजिंग फाई बराबर e का सरफेस इंटीग्रल हम नेट फ्लक्स निकाल पाएंगे। है ना? तो फाई नेट निकालने के लिए
हमको चाहिए होगा 1 + 2 + 3 तीन क्यों लिए बेटा? तीन सरफेस हैं। एक ये वाला गोला, एक ये वाला गोला और ये वाला कर्व्ड सरफेस।
तीन है। ठीक है ना? 1 2 3 1 लिखते हैं। पहले आ जाओ। किसको लिखें? इसको मान लो फर्स्ट। इसको मान लो सेकंड और ये गोले
वाले को मान लो थर्ड। है ना? ये वाला हो गया थर्ड। ठीक है? 1 2 3 ऐसे मान लिया। 51 लिखते हैं। क्या होगा भाई? e
और ds का इंटीग्रेशन cos का एंगल क्या लेंगे? सबसे पहले वन वाला देख रहे हैं ना? ये वन
है। देखो। देखो e भी बाहर है। हां। ds भी बाहर है। हां। दोनों के बीच में एंगल आएगा ज़ीरो। cos 0 cos 0 बढ़िया।
2 लेते हैं। 2 ये वाला है। e ऐसे आ रहा है यहां पर। हां और ds भी ऐसे है। हां। अगेन cos 0 वेरी गुड। e भी है और ds भी है। साथ
में cos 0 भी है। क्या बात है? 3 लेते हैं। 3 वाला केस देखो जरा। e बाहर को जा रहा है। हां। लेकिन ds ऐसे है। 90° एंगल
है। है ना बेटा? इलेक्ट्रिक फील्ड ऐसे जा रही होगी ना। ऐसे इलेक्ट्रिक फील्ड होगी। तो कितना बन रहा है? 90° बन रहा है ये।
90° 90° बनते ही सब कुछ खत्म हो जाएगा। है ना? सारी कहानी खत्म है। जी। तो ये आ गया cos 90। cos 90 ज़ीरो होता है। इस बार
कर्व्ड सरफेस की कोई औकात नहीं है। पिछले वाले केस में कर्व्ड सरफेस की ही सारी औकात थी। इस बार वो सारी हेकड़ी निकल गई।
इस बार कर्व्ड सरफेस का कोई काम नहीं है भाई। ये ज़ीरो हो चुका है। ठीक है? अब E तो है। हां। अच्छा। ds ds ds ds जोड़ देंगे तो
ये वाला गोला मिल जाएगा अपने को। गोले का एरिया A ले लेते हैं। चलो। तो ds ds ds जोड़ दिया तो A आ गया। cos 0 1 होता है।
प्लस e है। हां। इधर वाला भी ds ds ds जोड़ दो तो ये भी a आ जाएगा। हां। ठीक। तो ea ea क्या हो गया? ये हो गया 2ea
नेट फ्लक्स बन गया 2ea इक्वेशन नंबर वन ले लो। अब बारी है गॉस लॉ की। मतलब चार्ज एनक्लोज्ड बाय एप्स 0 की।
है ना? तो यूजिंग गॉस लॉ। गॉस लॉ कहता है कि जो फ्लक्स होता है वो चार्ज एनक्लोज्ड ब्स नॉट होता है। तो
हम एक बार क्या करते हैं कि चार्ज एनक्लोज्ड निकाल लेते हैं। निकाल लें। ठीक है? देखो चार्ज एनक्लोज कैसे आएगा? आपको
पता है ये प्लेन शीट है। शीट है तो सिग्मा लिया जाता है इसके लिए। है ना? और सिग्मा होगा चार्ज अपॉन में एरिया।
खत्म। चार्ज डिवाइड बाय एरिया। है ना? तो यहां से चार्ज निकालो। यहां से चार्ज निकालो। तो ये आएगा σa a उठा के वहां रख
दो। ठीक है? ठीक है जी। ये था चार्ज एनक्लोस अपॉन नॉट चार्ज एंड कक्लोज कितना है? सर
ये तो σ a / नॉट है। हां तो बस रख दो यहां σ / क्या दिक्कत है? ठीक है? इक्वेशन नंबर टू इक्वेटिंग वन एंड टू। सेम पेज पे कर
रहा हूं बेटा। है ना? एक पेज और भी ले सकता हूं। लेकिन वही नोट्स को प्रिसाइज करने के लिए कर रहा हूं ये काम। तो बेटा
ये वन है ये टू है। आमने-सामने रख दो दोनों को। तो 2ea एक तरफ है। नॉट a / a ये σ a / एक तरफ है। σ a / 0 एक
तरफ है। a से a कट गया। E निकल के आ गया σ / 2 0 σ / 2 0 ये होती है बेटा इलेक्ट्रिक फील्ड
किसी भी प्लेन शीट के लिए कोई प्लेन चार्ज शीट अगर है तो उससे डिस्टेंस देखो यहां पे डिफाइंड ही नहीं है। आप देख रहे हो ना
डिस्टेंस आया नहीं फॉर्मूले में। यानी डिस्टेंस मैटर ही नहीं करता। तो अगर मैं इसका ग्राफ E का ग्राफ
R के साथ बना भी दूं तो भी ऐसे जाएगा सीधा ऐसे जाएगा बिल्कुल सीधा है ना क्योंकि डिपेंड नहीं कर रहा ना R पे डिपेंड नहीं
कर रहा लेकिन पिछले वाले का ग्राफ बनाता अगर मैं है ना जगह है तो मैं बना के दिखाता हूं। ए जगह नहीं है भाई। ओ कोशिश
करते हैं कहीं तो बनाने की। यहां बना देता हूं। छोटा सा। आप इसको बड़ा सा बनाना अपने नोट्स
के अंदर। बेटा देखो E का R के साथ रिलेशन यहां पे कैसा है? E का R के साथ रिलेशन इन्वर्सली है। इनवर्स स्क्वायर नहीं है।
वैसे इलेक्ट्रिक फील्ड का डिस्टेंस के साथ स्क्वायर रिलेशन होता है। नॉर्मली। पर ऐसे लीनियर चार्ज के लिए नहीं है। लीनियर
चार्ज के लिए बनेगा क्या? इसके लिए बनेगा रेक्टेंगुलर हाइपरबोला। क्या बोलते हैं इसको? रेक्टेंगुलर हाइपरबोला। ऐसे बन
जाएगा। ठीक है? इन्वर्सली प्रोपोर्शनल बोलते हैं। रेक्टेंगुलर हाइपरबोला। ठीक है जी। और यहां पर कांस्टेंट है। यहां
पे कोई दिक्कत ही नहीं है। ठीक है ना? चलिए भाई। हां। लास्ट टॉपिक पर चलते हैं। हमारे जो
सिलेबस है उसके अंदर शेल दिया गया है। थिन स्फेरिकल शेल। शेल का मतलब होता है अंदर से खाली है। ये एक कंडक्टर है। स्फेरिकल
कंडक्टर है। अंदर में खाली है। अंदर इसके कुछ भी नहीं है। ठीक है ना? तो इस तरीके का एक ऑब्जेक्ट हमको दिया हुआ है। जो अंदर
से बिल्कुल हवादार है। खोखला है अंदर से। सरफेस सरफेस कंडक्टर है उसके ऊपर चार्ज आया हुआ है। ठीक है ना? तो ये लिखा हुआ है
इलेक्ट्रिक फील्ड ड्यू टू थिन स्फेरिकल शेल। अब क्या करेंगे? हम यहां पर क्योंकि तीन पॉइंट्स
यहां पर हैं जो कि इंपॉर्टेंट है। तो तीनों के लिए हम लोग बात करेंगे। एक बात करेंगे अंदर के लिए।
एक पॉइंट लेंगे अंदर का। ठीक है ना? एक पॉइंट लेंगे सरफेस का। और एक पॉइंट लेंगे बाहर का।
तीन पॉइंट्स में बात होगी। ठीक? वन टू थ्री। तीन पॉइंट से बात होगी। 1 2 3 वन वाला
होगा इनसाइड, टू वाला होगा सरफेस का और थ्री वाला होगा बाहर का। हम तीनों के लिए गॉस लॉ लगाएंगे अलग-अलग। आइए शुरू करते
हैं। सबसे पहले फॉर इनसाइड पॉइंट। अंदर की बात सबसे पहले कर लेते हैं भाई।
इनसाइड पॉइंट। ठीक है? तो इनसाइड पॉइंट में बेटा अगर मुझे अगर मुझे गॉस लॉ लगाना है तो गॉस लॉ के लिए मुझे एक सरफेस
एनक्लोज करना पड़ेगा। बिल्कुल करना पड़ेगा। तो ये सरफेस मान लेता हूं मैं फर्स्ट वाले के लिए।
ठीक है? ये मान लिया मैंने फर्स्ट वाले के लिए। एक सरफेस है छोटा सा स्फेरिकल सरफेस माना मैंने जो कि वन वाले पॉइंट को वन
वाले पॉइंट को इंक्लूड करे हुए हैं बल्कि उसको अपने सरफेस पे रखे हुए हैं। ठीक है? तो मैंने एक ऐसा गसियन सरफेस मान लिया।
ठीक? अब इसके लिए मैं लिखता हूं गाउस लॉ। आइए बेटा गॉस लॉ होता है फ्लक्स यानी e डॉटds का सरफेस इंटीग्रल जो कि चार्ज्ड
एनक्लोज्ड बटा एप्सिलॉन नॉट के बराबर होता है। सही कह रहे हो सर। है ना? तो इसलिए बेटा अगर मैं E अगर मैं सोचूं कि भाई E
देख रहा हूं और ये सारा छोटा छोटा छोटा छोटा छोटा भाई DS लूंगा ना तो ds ds ds ds ds मिलाता जाऊंगा अगर मैं तो ये छोटा सा
स्फीयर का एरिया मिल जाएगा। स्फीयर का एरिया क्या होता है? 4πr² होता है। है ना? तो मैं यहां पर लिख देता हूं इसको। है ना?
कि सारा ds ds ds इंक्लूड कर लिया अगर है ना? सारा एक और स्टेप ले लेते हैं। चलो कोई नहीं। है ना? वैसे बेकार की बात है ये
करना। क्योंकि अभी आपको दिख जाएगा ऐसा क्यों है? ds ds ds इंक्लूड कर दिया तो 4π r² आ गया। ये छोटा r ले लेते हैं। अंदर
वाली जो रेडियस है ये छोटा r ले लेते हैं इसको। ठीक है? या x ले लेते हैं इसको x ठीक है? अंदर छोटे वाले की x ले ली मैंने।
ठीक है? और 4π x² लेकिन कोई फायदा नहीं है क्योंकि चार्ज एंड क्लोज ज़ीरो है। आप समझिए ये
बात। आप ये बात समझिए। बेटा ये स्फेरिकल शेल है। शेल का मतलब होता है अंदर कोई चार्ज नहीं है। जो चार्ज आपको यहां दिख
रहा है ना वो सब सरफेस के ऊपर आया हुआ है। फुटबॉल है या फुटबॉल? फुटबॉल के अंदर क्या होता है? हवा होती है। हवा है ना? तो
चार्ज तो नहीं है कोई भी। और चार्ज अगर अंदर नहीं है तो फिर इलेक्ट्रिक फील्ड कैसे होगी? अंदर कोई इलेक्ट्रिक फील्ड
नहीं है। समझ गए ना? तो चार्ज एनक्लोज्ड बाय बाय बाय बाय बाय बाय बाय बाय बाय बाय एप्स 0 कर भी रहे थे लेकिन इलेक्ट्रिक
फील्ड कुछ निकल के आई नहीं। तो इसका मतलब क्या है? कि इनसाइड पॉइंट पर इलेक्ट्रिक फील्ड जीरो होती है।
इसका प्रूफ भी मिल गया आपको कि किसी भी कंडक्टर के अंदर इलेक्ट्रिक फील्ड कैसे ज़ीरो है। ठीक है? लेकिन हां ये अभी शेल की
बात हो रही है खाली। तो इनसाइड पॉइंट की बात कर ली। अब बात करते हैं सरफेस पॉइंट की।
अब बेटा एक पॉइंट हमने कहां माना? सरफेस पर माना। यह दूसरा वाला पॉइंट है। एक अंदर माना था। उसमें फील्ड है नहीं। फिर सरफेस
वाले पॉइंट पर आ गए हम। अब सरफेस वाले पॉइंट पर हम जो गसियन सरफेस लेंगे वो सरफेस जितना ही लेना पड़ेगा। ऐसा
ऐसा समझ गए ना? जिसमें ये टू वाला पॉइंट इंक्लूड हो। ये टू वाला पॉइंट इसके अंदर इंक्लूड होना
चाहिए। सही बात है। ठीक है? तो हम एक काम करते हैं फ्लक्स लिखने के लिए क्योंकि हमें पता है e ड.ds करना है। इंटीग्रेशन
करना है। तो चार्ज एनक्लोोज बाय नॉट करना पड़ेगा। करना पड़ेगा। है ना? अच्छा अब एक बात
सोचना। चार्ज तो सारा सरफेस पे ही है। तो इलेक्ट्रिक फील्ड यहीं से बाहर निकाल रहा
है वो ऐसे। है ना? और ds भी मान लो हमने यहां मान लिया छोटा सा ds। छोटा सा ds भी हमने कहां मान लिया? यहीं मान लिया। ठीक
है? तो इलेक्ट्रिक फील्ड बेटा सारे ds के लिए सेम होगी। इसको बाहर निकाल लो इंटीग्रेशन से।
अंदर रह गया ds चार्ज एनक्लोज ब 0 ठीक है बेटा सारा ds ds ds ds ds ds जुड़ जाएगा अगर इंटीग्रेट हो
जाएगा अगर तो बन जाएगा पूरा सरफेस और पूरा सरफेस होता है 4πr² तो इलेक्ट्रिक फील्ड इंटू में 4π
r² लिख रहा हूं क्योंकि भाई रेडियस है ये स्फीयर की है ना r अच्छा चार्ज एनक्लोज्ड कितना है इसमें तो पूरा पूरा q चार्ज है।
ये देखो ये पूरा का पूरा q चार्ज जो इसमें है वो इंक्लूडेड ही है। तो यहां पर कैपिटल q लिखना पड़ेगा डिवाइड बाय एप्स 0 तो यहां
से इलेक्ट्रिक फील्ड क्या बन गई भाई? q / 4π0
r² सिंपली बोले तो kq / r² ही होगी। है ना? kq / r² सरफेस है ना? सरफेस है ना भाई? सरफेस है ना? तो KQ / R² ये है सरफेस
पे। ये है E सरफेस। अब बारी आती है आउटसाइड पॉइंट की। उसके लिए क्या होगा? देखो जरा।
थर्ड वाला है भाई आउटसाइड पॉइंट। वो कहां है? कहां है भाई? कहां है? यह वन था, यह टू था, यह थ्री है।
इसके लिए यह रहा गसियन सरफेस। देखो स्फेरिकल ले रखा है पहले से। इसमें भी एक ds एलिमेंट लिया हुआ है। इसकी भी
इलेक्ट्रिक फील्ड यहां तक भी आएगी तो उतनी ही होगी। यहां तक भी आएगी तो उतनी ही होगी। e मतलब सेम ही रहने वाला है। तो ds
से ds से ds इंटीग्रेट होगा। अभी देखते जाओ। फिर से e डॉटds करेंगे। इंटीग्रेशन चार्ज
एनक्लोज्ड / 0 करेंगे। हां। e बाहर आ गया। ठीक है? ds अंदर रह गया। ठीक है? चार्ज एनक्लोज्ड बटा एप्सिलॉन नॉट कर रहे हैं।
ठीक है? ds से ds से ds से ds जुड़ गया। यह दूरी को स्मॉल r ले रखा है यहां पर। मैं यहां लिख लेता हूं r. ठीक है ना? ये
दूरी स्मॉल r है। तो ds ds क्या बन जाएगा? 4π r² = चार्ज एनक्लोड बेटा अभी भी q ही
होगा। आप देखो ना इस बड़े वाले स्फीयर ने भी तो सारा चार्ज यही वाला ले रखा है। इस बड़े वाले स्फीयर ने भी तो सारा चार्ज
एनक्लोज क्या कर रखा है? Q ही कर रखा है तो कैपिटल Q ही तो लिखेगा और नीचे आ गया इसको ले जाओ इलेक्ट्रिक फील्ड आ गई Q /
4π0 r² यानी KQ / R²
आउटसाइड पॉइंट के लिए इलेक्ट्रिक फील्ड है। क्लियर हो गया? सही है? तो बेटा अंदर में
कोई फील्ड नहीं। सरफेस पर मैक्सिमम फील्ड होगी KQ r² और जैसे-जैसे बाहर जाता जाएगा r के हिसाब से ये डिक्रीज करती जाएगी। ठीक
है? अगर इसका ग्राफ देखना चाहो तो ग्राफ ऐसा बनेगा। R है, E है, पहले तो ग्राफ उठेगा ही नहीं
भाई। है ना? सोया रहेगा क्योंकि इनसाइड पॉइंट के लिए तो ग्राफ होता ही नहीं। कोई इलेक्ट्रिक फील्ड होती नहीं। तो, यह है
इनसाइड पॉइंट मान लो। है ना? जब तक r r के बराबर नहीं होता उससे पहले पहले
इलेक्ट्रिक फील्ड जीरो रहेगी ज़ीरो ठीक है फिर क्या होगा फिर एकदम से इलेक्ट्रिक फील्ड आ गई क्योंकि सरफेस पर पहुंच चुके
हो आप यहां फील्ड आ गई और फिर यहां से ऐसे गिरनी चालू हो जाएगी ठीक है ना फिर इन्वर्सली प्रोपोर्शनल हो रही है ना r² के
तो ये गिरनी चालू हो जाएगी समझ गए तो यहां पर होगी मैक्सिमम ये e मैक्स है। ठीक है? और उसके बाद
e इनवर्सली प्रोपोर्शनल टू r² हो के गिरना चालू हो जाएगी। ठीक है? तो ये फील्ड ज़ीरो सरफेस पर आते ही मैक्सिमम और उसके बाद ऐसे
डिक्रीज करेगी। डिक करेगी फिर क्लियर हो गई बात? ठीक है जी? नोट कर लें। जल्दी से और एक सवाल आपको बेहतरीन करवा करके आज का
लेक्चर मैं कंप्लीट करता हूं। ये देखो जरा। एक और बढ़िया सवाल यहां पर दे रखा है। बढ़िया बेहतरीन सवाल है ये। क्या कर
रखा है देखना जरा। एक तरफ बेटा पॉजिटिव प्लेट्स लगा रखी हैं। एक तरफ नेगेटिव प्लेट लगा रखी है। एक चार्ज फेंक के मारा
अंदर। इलेक्ट्रिक फील्ड आपको पता है हमेशा पॉजिटिव से नेगेटिव चलती है। ये देखो इलेक्ट्रिक फील्ड की डायरेक्शन ये है। है
ना? अच्छा। चार्ज जैसे ही अंदर घुसेगा उस पर फोर्स लगेगी। ये आप जानते हो। है ना? और ये फोर्स ऐसी लगी कि ये प्लस प्लेट की
तरफ चला गया। देखो जरा ध्यान से। कहां चला गया? ये प्लस वाली प्लेट की तरफ चला गया। मतलब पक्की बात है कि ये चार्ज नेगेटिव
होगा कोई ना कोई। क्या कहते हो हां या ना? ये चार्ज कोई ना कोई नेगेटिव चार्ज होगा। तभी तो प्लस की तरफ गया है। है कि नहीं?
तो ये कोई नेगेटिव चार्ज होगा। है ना? और इसके ऊपर जो फोर्स लगी होगी क्योंकि देखो मान लो ये चार्ज यहां आ गया है। ये चार्ज
मान लो यहां आ गया है। है ना? तो अगर इलेक्ट्रिक फील्ड ऐसे है तो पक्की बात है कि फोर्स इससे उल्टी लगी होगी qe क्योंकि
ये नेगेटिव चार्ज है। इसीलिए इसलिए ऊपर की ऊपर की तरफ लगी तो ये ऐसे चला गया। ठीक है ना? अब देखते हैं क्या पूछा हुआ है। कह
रहा है पार्टिकल ऑफ़ मास mn चार्ज -q। अबे -q ही था यार। इतनी क्या डिबेट कर रहे थे हम लोग इस बारे में। एंटर्स द रीजन बिटवीन
द टू चार्ज प्लेट्स इनिशियली मूविंग ऑन x एक्सिस विद द स्पीड vx। ठीक है जी? तो v की स्पीड से चार पार्टिकल अंदर घुसा है।
है ना? कह रहा है द लेंथ ऑफ द प्लेट इज़ l. अच्छा प्लेट की लेंथ दे रखी है। ये डिस्टेंस जो ये कवर करेगा वो l है। ठीक है
ना? एंड अ यूनिफॉर्म इलेक्ट्रिक फील्ड इज मेंटेंड बिटवीन द प्लेट्स शो दैट द वर्टिकल डिफ्लेक्शन ऑफ द पार्टिकल ये जो
वर्टिकल डिफ्लेक्शन हुई है ये वाली ये इसे y लेट कर सकते हैं हम y क्योंकि y डायरेक्शन में मूव हुआ है ना पार्टिकल
सीधा जा रहा था y में मूव हो गया है ना कह रहा है जो y में ये जो ये जो डिफ्लेक्शन आई है पार्टिकल की कह रहा है वो इतनी आई
है। प्रूव करके दिखाओ। ये जो डिफ्लेक्शन आई है सो दैट द वर्टिकल डिफ्लेक्शन ऑफ द पार्टिकल एट द फार एज ऑफ द प्लेट इज इतना।
कैसे निकालोगे इसको? ये डिस्टेंस कैसे आएगा? सोचो। सोचो भाई सोचो कैसे आएगा? देखो चार्ज ने
यहां पर क्या किया है? दो प्रकार के डिस्टेंस कवर किए हैं। एक तो चार्ज यहां से वहां पहुंच गया। मतलब वो l लेंथ चला है
x के अलोंग। और वो y लेंथ भी चला है y के अलोंग। आप समझ रहे हो ना? वो दोनों जगह मूव किया है बेटा। वो ऐसे भी चला है और वो
ऐसे भी चला है। वो x में भी चला है। वो कुछ y में भी चला है। आपको y वाली निकालनी है डिस्प्लेसमेंट। आप समझ रहे हो क्या
निकालना है? आपको y वाली डिस्प्लेसमेंट कैलकुलेट करनी है। कैसे होगी? देखो अगर आपको y वाली डिस्प्लेसमेंट कैलकुलेट करनी
है बेटा तो आप sy लिखना सीखो। sy होता है u + 1/2 ay² s = ut + 1/2 at² है। आपको y में
डिस्प्लेसमेंट निकालनी थी ना तो इसलिए आप sy लिखोगे। अब sy क्या है? असल में ये y ही है। अच्छा मुझे बताओ क्या पार्टिकल की
इनिशियली कोई वेलोसिटी y की तरफ थी क्या? सिर्फ x x की तरफ थी। यानी uy तो ज़ीरो था। ये पूरी कहानी तो ज़ीरो थी। प्लस 1/2 है।
हां, हाफ है। ay क्या होगा? एक्सीलरेशन क्या लग रही है? y की दिशा में? तो एक्सीलरेशन आएगी देखो इस qe से। क्योंकि
फोर्स ही एक्सीलरेशन देती है। हां या ना बोलो। अरे फोर्स अपॉन में मास ही तो एक्सीलरेशन होता है ना यार या नहीं होता
बताओ। तो qe / m ही तो एक्सीलरेशन है। अरे भाई क्या qe फोर्स नहीं है क्या? हां। क्या फोर्स को ma लिख सकते हैं? यस। तो
एक्सीलरेशन क्या आ गई बेटा? QE / M बस इसी को यूज़ कर लो। ay की जगह क्या रखेंगे? QE / M अब सारी कहानी बची इस
t² पर। और देखो कुछ-कुछ हम मैच करवा भी चुके हैं। आप ध्यान से देखो। कुछ-कुछ मैच करवा दिया। देखो नीचे टू है। ये देखो नीचे
टू आया हुआ है। है ना? m आया है। हां जी। नीचे भी m आया हुआ है। m भी आया हुआ है। q ही हां q ही आया हुआ है। ये l² vx² कैसे
आएगा? अब सारी कहानी इसके ऊपर रह गई है। तो ये आएंगे t² को हटा करके। अब t² कैसे हटेगा? कितना सिंपल सॉल्यूशन दे रहा हूं।
टू लाइन में सॉल्यूशन खत्म कर रहा हूं। देख कुछ नहीं करना भाई। हर एक चीज को ढंग से समझते हुए चलना है। कयनामेटिक्स यूज़
हो रही है बेटा जो आपने कभी 11th में पढ़ी थी। और नहीं पढ़ी थी तो भी कोई बात नहीं। आपको समझ में आ रहा होगा कि हम कर क्या
रहे हैं। मैं ट्राई कर रहा हूं समझाने की। ठीक है? बेटा टाइम कैसे निकालेगा? एक बात सोच जब चार्ज यहां पे था और अब फाइनली ये
यहां पहुंच चुका है। है ना? तो इसने कुछ टाइम लिया है ना? लिया है सर लिया है ये डिस्टेंस कितना चला है x में बताना y में
लिख चुके y में जो होना था हो चुका अब x में बता सर x में तो ये ऐसे चला है ना ऐसे तो ये l के बराबर चला है यस बिल्कुल तो हम
लगा सकते हैं स्पीड बराबर डिस्टेंस / में टाइम और टाइम होता है डिस्टेंस / में स्पीड यहां सही बोल रहा हूं कि नहीं कितना
डिस्टेंस चला है l चला है बेटा l तो डिस्टेंस की जगह पर l लिख दोगे और कितनी स्पीड से घुसा था? x डायरेक्शन की स्पीड
क्या थी? x डायरेक्शन की बातें कर रहे हैं ना हम यहां पर। हम यहां पर लिख रहे हैं स्पीड x में डिस्टेंस x में। और टाइम कोई
x y में नहीं होता। टाइम तो टाइम होता है। वो x में भी उतना ही है। y में भी उतना ही है। अलग-अलग नहीं है वो। है कि नहीं? तो
टाइम क्या आ गया बेटा? x में डिस्टेंस कितना है? और x में स्पीड कितनी है? x में डिस्टेंस l है और स्पीड x में कितनी थी? s
में स्पीड कि s कितना था? vx था। vx था। यह t है। उठाया और यहां घुसा दिया। खत्म। यह देख y बराबर क्या आ गया?
qe t² की जगह क्या पुट करेंगे? l / vx पुट करेंगे। तो l²
बटा 2 m vx² क्या यही नहीं प्रूव करना था? क्या चेक करो? क्या यही नहीं प्रूव करना था? क्या
चेक करो? [हंसी] हो गया ना? देखो ql² / 2mv² 2mvx² पूरा सॉल्यूशन यहां पे छपा भी हुआ है। पर क्या करोगे? इतना लंबा सशन दो
लाइन के अंदर खत्म कर दिया पूरा सॉल्यूशन भाई दो लाइन के अंदर। ठीक है? समझ में आया क्या? है ना? तो भाई जोज इस लेक्चर के
यहां इस पॉइंट तक पहुंच गए हैं। ठीक है? तो मैं उनसे सभी से रिक्वेस्ट करूंगा कि भाई Telegram चैनल ज्वाइन कर लो। इसे शुरू
में दिखाने का मतलब होता है कि भाई जो नॉन सीरियस बच्चे हैं उनकी भीड़ को भर लेना। मैं वो बिल्कुल नहीं चाहता था। इसलिए मैं
इसको एंड में ही लाता हूं। एंड में ही लाऊंगा हमेशा। ठीक है ना? अगर आपको इसके नोट्स चाहिए तो आप यहां से भी स्कैन करके
ज्वाइन कर सकते हो हमारे Telegram ग्रुप को। ठीक है ना? नहीं तो आप डिस्क्रिप्शन पे जाकर के भी Telegram वाला लिंक जो है
वो ढूंढ सकते हो। मिल जाएगा आपको बहुत ईज़ली। और जैसे ही ये लेक्चर अपलोड होता है इसके नोट्स भी साथ के साथ अपलोड हो
जाएंगे। तो मेरी तरफ से इलेक्ट्रिक चार्जेस एंड फील्ड के लिए इतना काफी है। होपफुली मैंने जितनी भी चीजें कवर करी है
यार सही बताऊं तो भाई बहुत दिल से और बहुत मेहनत के साथ मैंने ये पीपीटी तैयार करी थी और जब ये पीपीटी तैयार कर रहा था तो
मैं कोशिश कर रहा था। मैं सोच रहा था कि हर एक चीज इसके अंदर इंक्लूड करूंगा जो भी इस बच्चे को चाहिए होगी। जो भी एक 12वीं
क्लास का बोर्ड जो बच्चा दे रहा होगा उसके लिए कुछ भी ना छूटे। तो ऐसा सोच करके मैंने इस पीपीटी को प्रिपेयर किया था।
बीच-बीच में जो सवाल लेकर के आया हूं वो सारे इतने कैड़े सवाल हैं। वो सारे इतने टेढ़े सवाल हैं जो कि बच्चे से पहली बार
में तो पक्का नहीं होते। ठीक है ना? ईजी-इजी सवाल तो हर बच्चा कर लेता है। तो अब एक काम करिएगा। आप लोगों से रिक्वेस्ट
है कि भाई अगर आप इस ऐसे सेशन का फायदा जिसको वन शॉट कहते हो आप और मेरी तरफ से तो भाई मैं हर एक चीज बहुत डिटेल में बता
रहा हूं। तो मेरे लिए तो ये डिटेल्ड वन शॉट है। तो आप मुझे एक बार जरा कमेंट सेक्शन में जरूर बताना कि ये डिटेल्ड वन
शॉट आपको कैसा लगा। ये आपका काम है। ठीक है ना? और कुछ भी इंप्रूवमेंट अगर आपको चाहिए हो, कुछ भी और चाहिए हो जैसे
प्रैक्टिस सेशन तो ठीक है यार वो तो हम लाएंगे ही लाएंगे। ठीक है ना? लेकिन लेक्चर के अंदर भी अगर कोई चीज आप आप
चाहते हो कि नहीं ये चीज और इंक्लूड कर सकते हैं हम तो वो करेंगे। डेफिनेटली करेंगे। ठीक है ना? चाहे ड्यूरेशन थोड़ी
सी और बढ़ जाएगी पर वो आपको झेलनी पड़ेगी फिर। ठीक है? तो तो आप अगर कुछ सजेस्ट करते हो तो मैं जरूर पढूंगा और कमेंट्स
जरूर करना भाई और मुझे बताना कि किस तरीके का ये सेशन आपको लगा। हेल्पफुल रहा कि नहीं रहा। जिन बच्चों ने पहले से चैप्टर
पढ़ लिया था वो भाई इस वीडियो को चाहे तो 1.5x पर भी देख लेते तो भी उनका काम बन जाएगा। 1.2 25x पे देखेंगे तो भी उनका काम
बन जाएगा। उनके लिए रिवीजन स्थापित होगा। लेकिन जो बच्चे बिल्कुल भी कुछ नहीं पढ़े थे अभी तक उनके लिए भी यह लेक्चर सारे के
सारे कांसेप्ट्स को इस्टैब्लिश करता हुआ स्थापित करता हुआ आपको मिलेगा। तो भाई अ नेक्स्ट आपको जो कुछ भी चाहिए हो तो प्लीज
उसको कमेंट सेक्शन के अंदर जरूर बताइएगा। अब हम लोग 12th की सीरीज चालू कर चुके हैं। तो अब लाइन वाइज चैप्टर्स आपको देखने
को मिलेंगे। देखो कुछ बच्चों की डिमांड होती है कि सर रे ऑप्टिक्स पहले करा दो। कुछ बच्चे कहते हैं सर एटम न्यूक्लआई आ
रहा है वो करवा दो। तो यार ऐसा नहीं हो पाता है क्योंकि काफी सारी चीजें जो आप देखोगे ना वो पुरानी वाली यूज होती हैं।
एक दो परसेंट देख लो 510% देख लो वो होती मिलती ही मिलती हैं आपको जब पुरानी वाली जो चीजें होती हैं इसलिए अच्छा ये रहता है
कि एक ऑर्डर वाइज ही हम लोग चलें और जिस स्पीड से मैं 10थ के लेक्चर्स अपलोड कर रहा था अब ट्राई करूंगा कि वही स्पीड हम
12थ के लेक्चर्स की भी रखें तो मेरी तरफ से आज के लिए इतना ही काफी है। मिलते हैं हम लोग नेक्स्ट क्लास के अंदर
इलेक्ट्रोस्टेटिक पोटेंशियल एंड कैपेसिटेंस में। तब तक के लिए टेक केयर। टाटा बय। भारत माता की जय।
इस अध्याय में आवेश के तीन मुख्य गुण बताए गए हैं: योगात्मकता (कुल आवेश सभी आवेशों का बीजगणितीय योग होता है), संरक्षण (आवेश को न तो उत्पन्न किया जा सकता है और न ही नष्ट, केवल स्थानांतरित होता है), और क्वांटीकरण (कोई भी आवेश हमेशा e = 1.6 × 10⁻¹⁹ C का पूर्णांक गुणज होता है, यानी q = ne जहाँ n एक पूर्णांक है)।
कूलॉम का नियम दो स्थिर बिंदु आवेशों के बीच लगने वाले विद्युत बल का वर्णन करता है। इसका सूत्र F = k |q₁ q₂| / r² है, जहाँ k = 9 × 10⁹ N m²/C² कूलॉम नियतांक है। इस नियम की दो मुख्य सीमाएँ हैं: (1) यह केवल स्थिर बिंदु आवेशों के लिए मान्य है, जिनका विस्तार उनके बीच की दूरी से बहुत कम हो, और (2) यह 10⁻¹⁵ मीटर से कम दूरी पर मान्य नहीं है क्योंकि वहाँ प्रबल नाभिकीय बल प्रभावी होता है।
अध्यारोपण का सिद्धांत कहता है कि जब किसी एक आवेश पर कई अन्य आवेश बल लगा रहे हों, तो उस पर लगने वाला कुल बल सभी व्यक्तिगत बलों का सदिश योग होता है। इसे F_net = F₁ + F₂ + F₃ + ... के रूप में लिखा जाता है। यह एक रैखिक नियम है, जिसमें दो आवेशों के बीच का बल तीसरे आवेश की उपस्थिति से प्रभावित नहीं होता।
घर्षण द्वारा आवेशन में दो वस्तुओं को रगड़ने पर इलेक्ट्रॉन एक से दूसरे में स्थानांतरित होते हैं (जैसे काँच की छड़ + रेशम)। चालन द्वारा आवेशन में आवेशित वस्तु किसी अन्य वस्तु को सीधे स्पर्श करती है, जिससे दोनों पर समान प्रकार का आवेश आ जाता है। प्रेरण द्वारा आवेशन में बिना स्पर्श किए ही किसी अनावेशित वस्तु पर आवेश उत्पन्न किया जा सकता है, जिसमें वस्तु के एक सिरे पर विपरीत और दूसरे पर समान आवेश आता है।
विद्युत क्षेत्र रेखाएँ काल्पनिक रेखाएँ हैं जो विद्युत क्षेत्र को प्रदर्शित करती हैं। ये धनात्मक आवेश से शुरू होकर ऋणात्मक आवेश पर समाप्त होती हैं, कभी बंद लूप नहीं बनाती, और अखंड तथा चिकने वक्र होते हैं। किसी बिंदु पर इन रेखाओं की स्पर्श रेखा उस बिंदु पर विद्युत क्षेत्र की दिशा बताती है। ये रेखाएँ कभी एक-दूसरे को नहीं काटतीं।
किसी बिंदु पर विद्युत क्षेत्र की तीव्रता (E) उस बिंदु पर रखे एकांक धनात्मक परीक्षण आवेश पर लगने वाला बल है, जिसका सूत्र E = F/q₀ है। यदि कोई आवेश q किसी विद्युत क्षेत्र E में रखा है, तो उस पर लगने वाला बल F = qE होता है। ध्यान रखें कि धनात्मक आवेश पर बल विद्युत क्षेत्र की दिशा में होता है, जबकि ऋणात्मक आवेश पर बल विपरीत दिशा में होता है।
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