कंप्यूटर नेटवर्किंग बूटकैंप - चैप्टर 1: नेटवर्किंग फंडामेंटल्स
इंटरनेट की शुरुआत और ज़रूरत
- 1969 में ARPANET प्रोजेक्ट: यूएस डिपार्टमेंट ऑफ डिफेंस ने फंड किया, कोल्ड वॉर के दौरान एक ऐसा नेटवर्क बनाना था जो एक नोड फेल होने पर भी काम करे।
- पहला मैसेज: 29 अक्टूबर 1969, UCLA और स्टैनफोर्ड के बीच 'LO' भेजा गया (LOGIN का प्रयास था, सिस्टम क्रैश हो गया)।
- 1983 में TCP/IP अपनाया गया: इंटरनेट को एक यूनिवर्सल लैंग्वेज मिली।
बेसिक टर्मिनोलॉजी
- कंप्यूटर नेटवर्क: दो या अधिक नोड्स (होस्ट) के बीच डिजिटल कम्युनिकेशन जो रिसोर्सेज (डेटा, फाइल्स) शेयर करने की अनुमति देता है।
- होस्ट: कोई भी डिवाइस जिसे IP एड्रेस मिलता है (पीसी, लैपटॉप, सर्वर, मोबाइल)।
- नेटवर्किंग: डेटा और रिसोर्सेज को शेयर करने की प्रक्रिया।
- इंटरनेट: नेटवर्क का नेटवर्क (Network of Networks) - छोटे-छोटे नेटवर्क (LAN, MAN, WAN) का संग्रह।
इंटरनेट कैसे काम करता है?
- फिजिकल इंफ्रास्ट्रक्चर: इंटरनेट केबल्स, हार्डवेयर्स, डेटा सेंटर और बिल्डिंग्स से मिलकर बना है।
- सबमरीन केबल्स: ओशियन फ्लोर पर बिछी ऑप्टिकल फाइबर केबल्स पूरे विश्व को जोड़ती हैं।
- www vs इंटरनेट: इंटरनेट एक ग्लोबल नेटवर्क/ट्रांसपोर्ट सिस्टम है, जबकि WWW एक एप्लीकेशन है जो इंटरनेट पर चलती है।
नेटवर्क के प्रकार (Scale के अनुसार)
| प्रकार | पूरा नाम | स्केल | उदाहरण | | :--- | :--- | :--- | :--- | | PAN | Personal Area Network | सबसे छोटा (ब्लूटूथ रेंज) | AirPods, स्मार्ट वॉच | | LAN | Local Area Network | प्राइवेट, छोटा एरिया | घर, ऑफिस, कैंपस | | MAN | Metropolitan Area Network | शहर/मेट्रो एरिया | क्लाउड रीजन (AWS मुंबई) | | WAN | Wide Area Network | देशों/महाद्वीपों में | इंटरनेट, बैंकों का प्राइवेट नेटवर्क |
नेटवर्क टोपोलॉजी (डिवाइसेस की अरेंजमेंट)
- बस टोपोलॉजी: सभी डिवाइसेस एक सिंगल केबल (बस) से जुड़े होते हैं।
- रिंग टोपोलॉजी: डिवाइसेस सर्कुलर फैशन में जुड़े होते हैं, डेटा एक रिंग में ट्रैवल करता है।
- स्टार टोपोलॉजी: सभी डिवाइसेस एक सेंट्रल हब/स्विच से जुड़े होते हैं।
- मैश टोपोलॉजी: हर डिवाइस हर दूसरे डिवाइस से जुड़ा होता है (हाई रिडंडेंसी, हाई कॉस्ट)।
- ट्री टोपोलॉजी: बस और स्टार टोपोलॉजी का कॉम्बिनेशन (हायरार्किकल स्ट्रक्चर)।
चैप्टर 2: नेटवर्क मॉडल (OSI और TCP/IP)
लेयर्ड मॉडल की ज़रूरत क्यों?
अलग-अलग वेंडर्स (Apple, Samsung, Airtel, Jio, YouTube) के डिवाइसेस एक-दूसरे से कम्युनिकेट कर पाते हैं, क्योंकि एक कॉमन सेट ऑफ लैंग्वेज (स्टैंडर्ड) है।
OSI मॉडल (7 लेयर्स)
- फिजिकल लेयर (Layer 1): डेटा को बिट्स के रूप में फिजिकल मीडियम (केबल, वायरलेस) पर ट्रांसमिट करता है।
- डेटा लिंक लेयर (Layer 2): डेटा को फ्रेम्स में फॉर्मेट करता है, फिजिकल एड्रेसिंग (MAC एड्रेस) करता है।
- नेटवर्क लेयर (Layer 3): लॉजिकल एड्रेसिंग (IP एड्रेस) और रूटिंग करता है।
- ट्रांसपोर्ट लेयर (Layer 4): एंड-टू-एंड डिलीवरी, सेगमेंटेशन, फ्लो कंट्रोल और एरर चेकिंग करता है।
- सेशन लेयर (Layer 5): होस्ट के बीच सेशन को मेंटेन, क्रिएट और मैनेज करता है।
- प्रेजेंटेशन लेयर (Layer 6): डेटा को प्रेजेंटेबल फॉर्मेट (एन्क्रिप्शन, कंप्रेशन, ट्रांसलेशन) में बनाता है।
- एप्लीकेशन लेयर (Layer 7): यूज़र के साथ इंटरेक्ट करने वाली एप्लीकेशन्स (ब्राउज़र, ईमेल) इस लेयर पर काम करती हैं।
याद रखने का ट्रिक (Top to Bottom): ऑल पीपल सीम टू नीड डेटा प्रोसेसिंग (A-P-S-T-N-D-P)
TCP/IP मॉडल (5 लेयर्स)
OSI मॉडल की टॉप तीन लेयर्स (एप्लीकेशन, प्रेजेंटेशन, सेशन) को एक लेयर (एप्लीकेशन) में मर्ज कर दिया गया है।
प्रैक्टिकल एग्जांपल (Chrome से YouTube सर्वर तक):
- एप्लीकेशन लेयर: Chrome YouTube सर्वर से बात करता है।
- ट्रांसपोर्ट लेयर: पोर्ट नंबर (443) और सेगमेंटेशन का उपयोग करता है।
- इंटरनेट लेयर: IP एड्रेस (192.168.1.1 → 142.250.x.x) की मदद से पैकेट रूट करता है।
- डेटा लिंक लेयर: MAC एड्रेस की मदद से हॉप-टू-हॉप डिलीवरी।
- फिजिकल लेयर: बिट्स को इलेक्ट्रिकल/ऑप्टिकल सिग्नल में बदलता है।
इनकैप्सुलेशन और डीकैप्सुलेशन
- एन्कैप्सुलेशन: डेटा हर लेयर पर एक नया हेडर (और कभी-कभी ट्रेलर) जोड़ता है।
- एप्लीकेशन → सेगमेंट (ट्रांसपोर्ट) → पैकेट (नेटवर्क) → फ्रेम (डेटा लिंक) → बिट्स (फिजिकल)
- डीकैप्सुलेशन: रिसीवर साइड पर हर लेयर अपने हेडर को हटाता है और डेटा को ऊपर की लेयर को भेजता है।
मैसेज डिलीवरी के प्रकार
- यूनिकास्ट (1:1): एक सोर्स से एक डेस्टिनेशन (जैसे, SSH, Netflix स्ट्रीम)।
- ब्रॉडकास्ट (1:सभी): एक सोर्स से लोकल नेटवर्क के सभी डिवाइसेस (जैसे, फैमिली ग्रुप में गुड मॉर्निंग मैसेज)।
- मल्टीकास्ट (1:समूह): एक सोर्स से एक स्पेसिफिक ग्रुप (जैसे, YouTube Members Only लाइव स्ट्रीम)।
- एनीकास्ट (1:नजदीकी): एक सोर्स से उन डिवाइसेस में सबसे नजदीकी (जैसे, Cloudflare DNS - 1.1.1.1 पर क्वेरी भेजना)|
चैप्टर 3: नेटवर्क डिवाइसेस
NIC (नेटवर्क इंटरफेस कार्ड)
- हर इंटरनेट-कनेक्टेड डिवाइस में होता है (लैपटॉप, फोन, सर्वर, स्मार्ट टीवी)।
- दो प्रकार: वायर्ड (इथरनेट पोर्ट) और वायरलेस (Wi-Fi एडॉप्टर)।
- MAC एड्रेस: हर NIC का एक यूनिक 12-डिजिट का पता।
- macOS:
ifconfig en0 | grep ether - Windows:
Get-NetAdapter(PowerShell में)
- macOS:
हब (Layer 1)
- काम: एक पोर्ट से आया सिग्नल सभी पोर्ट्स पर ब्रॉडकास्ट करता है।
- सीमा: MAC एड्रेस नहीं समझता, इसलिए बैंडविड्थ बर्बाद करता है और सुरक्षित नहीं है।
ब्रिज (Layer 2)
- MAC एड्रेस सीखता है और उसी आधार पर डेटा को सही पोर्ट पर फॉरवर्ड करता है।
- दो अलग-अलग LAN सेगमेंट को जोड़कर एक सिंगल नेटवर्क बनाता है।
स्विच (Layer 2)
- ब्रिज का सफल विकल्प: अधिक पोर्ट्स (8, 16, 24, 96), तेज़, और ज्यादा एफिशिएंट।
- अपनी एक MAC एड्रेस टेबल बनाए रखता है और डेटा को सिर्फ सही डेस्टिनेशन डिवाइस तक भेजता है।
महत्वपूर्ण: यह सीरीज़ डेवोप्स इकोसिस्टम के लिए नेटवर्किंग का एक संपूर्ण 'बूटकैंप' है। अगले चैप्टर में नेटवर्क लेयर (IP एड्रेसिंग, रूटिंग) पर गहराई से चर्चा की जाएगी। IP एड्रेसिंग की बेहतर समझ के लिए, आप IPv4 एड्रेसिंग: क्लासिफिकेशन, सबनेटिंग और नेटवर्क आईडी समझना और गेट कंप्यूटर नेटवर्क्स पूरा कोर्स: आईपी एड्रेसेस, क्लासिफिकेशन और subnetting पर हमारे विस्तृत लेख भी देख सकते हैं। इसके अलावा, साइबर सुरक्षा में रुचि रखने वालों के लिए WSCube का संपूर्ण साइबर सुरक्षा कोर्स: रोडमैप, करियर स्कोप और हैकिंग की शुरुआत उपयोगी हो सकता है।
हां जी कैसे हैं आप सभी? स्वागत है आप सभी का चाय और कोड में एंड वेरी हैप्पी कि मैं आपके सामने यह वीडियो लेके आ पाया। आप में
से काफी लोग कह रहे थे और मेरा भी पर्सनली मन था कि थोड़ा सा यार डेवोप्स साइड भी टच तो किया जाए। अब जब चाय कोड इकोसिस्टम पर
इतनी वैरायटी है और अब हम बहुत सारे टॉपिक्स को कवर कर रहे हैं तो डेवोप्स वि इज वन ऑफ माय पर्सनल फेवरेट और जो कि हम
पूरी टीम यूज़ भी करती है ऐसे सारे कांसेप्ट्स को क्योंकि हम बहुत सारे प्रोडक्ट्स बिल्ड करते हैं। बहुत सारे
प्रोडक्ट शिप भी करते हैं। तो उन सभी के लिए डेवोप्स इकोसिस्टम पे टच करना तो जरूरी है। और डेवोप्स के इन सब्जेक्ट्स को
YouTube पे लेके आना ओ दैट इज माय फेवरेट थिंग टू डू। तो पाइपलाइन में बहुत कुछ है बट हां जैसा कि हम हमेशा करते हैं कुछ
फ्यूचर प्रॉमिस नहीं करते हैं। तो अभी जो ले आए हैं हम उसी पर बात करेंगे। देखो डेवोप्स एक बहुत ही बड़ा फील्ड है और बहुत
ही वाइड वैरायटी है। बट कभी भी डेवोप्स और क्लाउड फील्ड को एक साथ मर्ज करने की ऐसी गलती मत करना। क्लाउड इंजीनियर अलग
सब्जेक्ट होता है। जहां पे आप क्लाउड इकोसिस्टम के बारे में जानते हो। डेवोप्स इकोसिस्टम एक अलग इकोसिस्टम होता है। जहां
पर क्लाउड वन ऑफ दी पार्ट है। लेकिन डेवोप्स अपने आप में एक अलग चीज है। तो डेवोप्स के लिए सबसे ज्यादा जरूरी क्या
है? देखो बजाय कि मैं आपके सामने एक-एक करके रोड मैप लेके आऊं। बेटर है कि मैं आपके सामने सारे वीडियोस ही ले आऊं। पर
डेवोप्स देखो आप चाहे कहीं से भी पढ़ रहे हो, किसी से भी पढ़ रहे हो। एक चीज याद रखना की स्टार्टिंग हमेशा नेटवर्किंग के
फंडामेंटल से होती है। एक अच्छे इंजीनियर्स को नेटवर्किंग के फंडामेंटल्स आने ही चाहिए। ऑलदो हमारी 50 वीडियो की
सीरीज एक फुल्ली इन डेप्थ नेटवर्किंग सीरीज है। लेकिन डेवोप्स के लिए जब आप नेटवर्किंग पढ़ते हो तो ऐसा नहीं कि कोई
अलग नेटवर्किंग बुक आती है। अलग कांसेप्ट आते हैं। कांसेप्ट वही है बट उनको फिल्टर डाउन कर दिया जाता है कि ये वाले कांसेप्ट
तो हमारे रेगुलर यूज़ में आएंगे। बाकी सबको हम अवॉइड कर सकते हैं। तो ये जो सीरीज है, यह आपके डेवोप्स के लिए जो रिक्वायरमेंट
है नेटवर्किंग के फंडामेंटल्स की उन सभी को कवर करते हैं। अगर आपने यह वीडियो देख ली, दैट इज़ इट। आपको नेटवर्किंग की दोबारा
चिंता नहीं करनी है। एटलीस्ट डेवोप्स फील्ड में। वैसे तो यह सेम वीडियो ही आपके लिए नेटवर्किंग के एज ए बैक एंड इंजीनियर
के लिए भी फाउंडेशन का वगैरह का काम कर सकता है। बट हमें कहीं ना कहीं फोकस तो होना ही था। तो हमने कहा हम एक काम करते
हैं इस नेटवर्किंग के फंडामेंटल और फाउंडेशन को डेवोप्स एंड ट्रिक रखते हैं। तो वेरी हैप्पी टू प्रेजेंट द वेरी फर्स्ट
वीडियो इन दिस सीरीज। और भी वीडियोस आएंगे इस पूरी सीरीज में। हां, टाइम हम लेंगे। ऐसे जल्दीबाजी में नहीं देंगे। बट जब
देंगे तब वन ऑफ दी बेस्ट रिसोर्स ऑफ इंटरनेट देंगे। तो स्वागत है आप सभी का चाय और डेवोप्स के अंदर और हमारी पहली
प्लेलिस्ट सीरीज के अंदर यह बहुत बड़ा वीडियो है। बहुत सारे वीडियोस को कंबाइन करके बनाया गया है। तो आप इसको चाहे
प्लेलिस्ट मान लो चाहे तो एक ही वीडियो मान लो जैसा आप चाहो। तो पहला वीडियो हमारा चाय और डेवोप्स के अंदर एंड वेरी
हैप्पी टू प्रेजेंट अनदर टीम मेंबर ऑफ चाय और कोड आकाश। आकाश आपको लीड करेंगे इस कंप्लीट वीडियो के अंदर डेवोप्स इकोसिस्टम
के अंदर। आकाश हमारे साथ काफी टाइम से हैं और बहुत सारे प्रोजेक्ट्स और बहुत सारे वर्क संभालते हैं। ही वियर्स अ लॉट ऑफ हट
एट चाय कोड और बहुत मजा आएगा आपको इसके साथ में। द अमाउंट ऑफ प्रिपरेशन दैट हैज़ बीन डन टू डिलीवर दीज़ वीडियोस और जितना
टाइम हमने लिया है वो एक्चुअली में काफी है। बट देखो क्वालिटी के लिए वी आर फाइन विद इट। तो उम्मीद है आप हमारा मोटिवेशन
कमेंट सेक्शन में एकदम टॉप नच तरीके से बढ़ाते रहेंगे। ज्यादा कमेंट का टारगेट तो नहीं लेता बट 200 कमेंट्स तो देखो मिनिमम
चाहिए इस सीरीज के अंदर और स्पेशली इस वीडियो के अंदर जैसे ही हमारा 200 वीडियोस का कमेंट टारगेट पूरा हो जाता है तभी ही
नेक्स्ट वीडियो ड्रॉप करेंगे उससे पहले नहीं करने वाले इस सीरीज के अंदर तो तो मिलिए आकाश से और स्टार्ट करते हैं चाय और
डेवोप्स अपने दोस्तों को जरूर बता देना कि हां जी चाय और कोड पर डेवोप्स भी आ रहा है और प्रिपेयर कर लो रेडी हो जाओ मिलते हैं
अगले वीडियो के अंदर और हां अब मिलिए आकाश से आप हाय, आई एम आकाश, सीनियर डेवलपर एट चाइक
कोड एंड योर इंस्ट्रक्टर फॉर दिस बूट कैंप। ओवर द लास्ट फोर इयर्स आई हैव वर्क्ड अक्रॉस डिजाइन इंजीनियरिंग, फ्रंट
एंड, बैक एंड, क्लाउड एंड डेवोप्स। सो व्हाटएवर पाथ यू आर हेडिंग इंटू, चांसेस आर आई हैव बीन देयर लर्न फ्रॉम इट एंड
बिल्ड थिंग्स अराउंड इट। पीपल कॉल मी वाई एनटीपी योर नेक्स्ट टेक पार्टनर एंड दैट इज एक्जेक्टली आई वांट टू बी थ्रूआउट दिस
बूट कैंप। बिफोर वी बिगिन, आई वांट टू शेयर समथिंग पर्सनल। जब मैं कॉलेज में था, कंप्यूटर नेटवर्क्स मेरे लिए उन
सब्जेक्ट्स में से एक था जो हमेशा थोड़ा सा कंफ्यूजिंग लगता था। मोस्ट ऑफ़ द टाइम इट वाज़ टॉट एज अ प्योर थ्योरी। एग्जाम्स
के लिए चीजें याद हो जाती थी, लेकिन एक्चुअल में नेटवर्क काम कैसे करता है? सारे कांसेप्ट्स एक दूसरे से कैसे
कनेक्टेड है? यह क्लियर नहीं होता था। एंड ऑनेस्टली दैट्स द रीज़न दिस बूट कैंप एकिस्ट।
माय गोल वाज़ नॉट टू क्रिएट अनदर कोर्स फुल ऑफ़ डेफिनेशन एंड डायग्राम। इंस्टेड मैं एक ऐसा लर्निंग एक्सपीरियंस क्रिएट करना
चाहता था जो मुझे खुद कॉलेज के टाइम मिलना चाहिए था। विथ प्रैक्टिकल एग्जांपल्स, विचुअल एक्सप्लेनेशन एंड रियल वर्ल्ड यूज़
केसेस। इस बूट कैंप में हम नेटवर्किंग स्टेप बाय स्टेप सीखेंगे। काफी सारे टॉपिक एक दूसरे से इंटरकनेक्टेड है। कभी-कभी
आपको लगेगा कि यह टॉपिक मुझे पहले से पता है, लेकिन ट्रस्ट मी नेटवर्किंग में हर कांसेप्ट, किसी फ्यूचर कांसेप्ट की
फाउंडेशन होती है। दैट्स व्हाई आई हाइली रेकमेंड टू वाच दिस बूट कैंप फ्रॉम स्टार्ट टू फिनिश। हां, अगर आप किसी
स्पेसिफिक टॉपिक के लिए आए हैं या फ्यूचर में रिवीजन करना चाहते हो तो टाइम स्टैंप अवेलेबल है। यू कैन डायरेक्टली जंप टू दैट
सेक्शन। लेकिन अगर आप नेटवर्किंग को जेनुइनली समझना चाहते हो सिर्फ एग्जाम के लिए नहीं बल्कि क्लाउड, डेवोप्स, साइबर
सिक्योरिटी, बैक एंड सिस्टम डिज़ और इवन इंटरव्यूज के पर्सपेक्टिव से तो मैं स्ट्रांगली रेकमेंड करूंगा आप पूरा बूट
कैंप देखिए। आई जेनुइनली होप दैट बाय द एंड ऑफ़ दिस जर्नी कंप्यूटर नेटवर्क बिकम्स वन ऑफ द इज़िएस्ट एंड मोस्ट इंट्यूटिव
सब्जेक्ट फॉर यू। तो चलिए मिलकर कंप्यूटर नेटवर्क को आसान बनाते हैं। अब स्क्रीन पर चलते हैं और शुरुआत करते हैं।
स्वागत है सभी का नेटवर्किंग की बूट कैंप में। कंप्यूटर नेटवर्किंग की दुनिया में आगे बढ़ने से पहले ऐसी तीन चीजें हैं जो
मैं आपके साथ शेयर करना चाहता हूं जो आप अच्छे से फॉलो करोगे तो इट विल हेल्प यू टू लर्न फास्टर एंड यू विल लर्न मोर
इफेक्टिवली। फर्स्ट गैब अ नोटबुक। फिजिकल हो, नोटपैड हो, दैट इज योर कॉल। बट आई रेकमेंड गो विथ फिजिकल। बिकॉज़ जब आप खुद
से नोट्स लिखते हो, वह 10 गुना ज्यादा इफेक्टिव होता है। इंस्टेड ऑफ़ जस्ट पैसिवली वाचिंग। आप एक्टिवली पार्टिसिपेट
कर सकते हो। जब भी जरूरत पड़े यू कैन पॉज फॉर अ वाइल एंड देन नोट डाउन देंट बुलेट पॉइंट्स, डायग्राम्स, डेफिनेशंस, द समरी
ऑफ़ टॉपिक और चैप्टर। सेकंड, लर्न इन पब्लिक। शेयर व्हाट यू लर्न। आपको फास्टेस्ट वे में पढ़ना है तो आपको आपकी
जर्नी शेयर करनी चाहिए। एंड देयर आर लॉट ऑफ़ वेज़ टू शेयर इट बट यू कैन शेयर इट ऑन Lindin, Twitter। इवन बेटर आप उसमें से
कुछ टॉपिक्स के या चैप्टर्स वाइज आप आर्टिकल्स लिख सकते हो। वो आर्टिकल्स आप अपने मीडियम#श नोट जैसे प्लेटफार्म या
अपने खुद के ब्लॉग वेबसाइट पे पब्लिश कर सकते हो एंड शेयर कर सकते हो एज अ प्रूफ ऑफ वर्क दैट यू नो द टेक और आपका
नेटवर्किंग फाउंडेशन बहुत तगड़ा है। जो स्टूडेंट्स नए हैं दे आर नॉट कंफर्टेबल विद लर्निंग पब्लिक एंड सोशल मीडिया
पोस्ट। उनके लिए एक है कि आप अभी जीरो से स्टार्ट कर सकते हो। इट्स वेरी सिंपल थिंग। आपको जस्ट जाके बोलना है कि आई
स्टार्टेड लर्निंग कंप्यूटर नेटवर्किंग थ्रू दिस एक्स वाईसी वीडियो। वहां से अपनी जर्नी स्टार्ट कर सकते हो। क्या-क्या पढ़
रहे हो वो शेयर कर सकते हो। मेजोरिटी लोग ऐसे होंगे वो अभी भी डर रहे होंगे कि हम करें या ना करें। तो उनके लिए मैं बताता
हूं एटलीस्ट इस वीडियो के नीचे आप कमेंट कीजिए कि आप डे वन पे हो। डे वन पे आपने इतना बूट कैंप कवर किया। डे टू पे इतना
किया। डे थ्री पे इतना किया। हमारी चाय कोर्ट की टीम कम्युनिटी आपके स्टूडेंट्स पीियर्स देख पाए। एक दूसरे से इंस्पायर
होके वो भी अपनी नेटवर्किंग की जर्नी खत्म कर पाए। कुछ लोग टाइम स्टैंप लिखते हैं। कुछ लोग चैप्टर वाइज लिखते हैं। दैट इज
योर कॉल। बट टाइम स्टैंप लिखोगे तो इट विल बी इज़ियर। आपने इस डेट को चालू किया था। आपने ऐसे-से कवर करके यहां तक वो खत्म कर
दिया। एंड थर्ड पॉइंट इज डोंट रश द फाउंडेशन। आपके जो भी फेवरेट एथलीट्स हैं विराट कोहली, राफेल, नदाल, क्रिस्टियानो,
रोनाल्डो अगर आप देखते हो कि दे आर डूइंग रियली गुड। एक्सेप्शनली गुड बिकॉज़ ऑफ देयर फाउंडेशंस। उनके जो कोर वर्कआउट्स है,
उनकी जो कोर स्ट्रेंथ है, वो बहुत अच्छी है। इवन जो इंजीनियर्स आज कॉम्प्लेक्स प्रॉब्लम्स को टैकल कर रहे हैं,
कॉम्प्लेक्स चीजों को हैंडल कर रहे हैं। उन्होंने कभी भी अपने बेसिक स्किप नहीं किए। आई नो दैट देयर इज अ एआई। और आपको लग
रहा है कि एआई बेसिक चीजें कर देता है। जूनियर इंजीनियर्स वाली। थोड़ा कुछ सीनियर वाली चीजें सीखता हूं। एडवांस चीजें सीखता
हूं। सिस्टम डिजाइन की तरफ भागता हूं। एआई कैसे काम करता है वो सीखता हूं। एलएलएम्स देखता हूं। मशीन लर्निंग क्या होती है वो
देखता हूं। कंप्यूटर विज़ क्या है वो समझता हूं। बट इन सबका फाउंडेशन होता है कंप्यूटर नेटवर्क, ऑपरेटिंग सिस्टम इन
सारे कांसेप्ट से। तो पहले हम लोग फाउंडेशंस अच्छे कर लेते हैं। तो जो भी एडवांस चीज आपको करनी है दैट इज बिल्ट ऑन
टॉप ऑफ दिस। तो अगर आपका बेस पक्का है तो आने वाली जो इमारत है, आने वाला आपका जो भविष्य है वो बहुत मजबूत बनेगा। ब्रेन को
ट्रेन करते हैं या स्टेप बाय स्टेप चलते हैं। ट्रस्ट द प्रोसेस। तो क्या कवर करने वाले हैं हम इस बूट कैंप में? हमने ये बूट
कैंप एट चैप्टर्स में डिवाइड किया है। स्टार्टिंग बिल्कुल स्क्रैच से फंडामेंटल से होगी। फंडामेंटल स्टार्ट करते-करते एंड
में हम एडवांस चीजें करेंगे और प्रैक्टिकल ये जो हम सीखने वाले हैं इनको अप्लाई कैसे करते हैं? आईपी एड्रेसेस कैसे हैं? फायर
वाल्स इवन मल्टीपल सिस्टम्स को कनेक्ट कैसे किया जाता है? राउट्स राउटिंग टेबल्स कैसे होते हैं? ये सारी चीजें हम लोग
सीखेंगे। स्टार्टिंग शुरुआत फर्स्ट चैप्टर इज़ अबाउट फंडामेंटल्स। इंटरनेट क्या है? क्यों आया? क्या जगन्स है? उसके बाद
नेटवर्क मॉडल्स। मॉडल्स क्यों लाए गए? उनका फायदा क्या है? लेयर्ड मॉडल्स का एडवांटेजेस क्या है? उनको अप्शन कैसे
मिला? टीसीpआईपी, ओएसआई मॉडल, नेटवर्किंग डिवाइस ऑन दिस जो हमने मॉडल पढ़े ऑन द बेसिस ऑफ़ दैट नेटवर्किंग डिवाइसेस कैसे
काम करते हैं? और हमारा इंटरनेट कैसे चलता है? अलग-अलग डिवाइसेस होते हैं। उनके क्या रोल्स हैं? कौन से लेयर में काम करते हैं?
फिर नेटवर्क लेयर। वेरीेंट थिंग बिकॉज़ नेटवर्क लेयर ही डिसाइड करता है कि डाटा ए पॉइंट से B पॉइंट तक कैसे पहुंचे। उसके
बाद ट्रांसपोर्ट लेयर जो होती है वो एंड टू एंड ट्रांसपोर्टेशन का दिखती है। ट्रांसपोर्ट मुझे करना है। कौन से
एप्लीकेशन पे उसको पैकेजिंग अच्छे से करूं। फिर मैं उसको नेटवर्क लेयर की तरफ भेजूं। फिर नेटवर्क लेयर आगे वो फॉरवर्ड
करता है। ट्रांसपोर्ट लेयर के बारे में हम पढ़ेंगे। देन एप्लीकेशन लेयर दिस इज द मोस्टेंट लेयर बिकॉज़ ऑलमोस्ट सारे
डेवलपर्स यूज़र्स एप्लीकेशन लेयर से ही रेगुलरली डील करते हैं। तो उनके कुछ प्रोटोकॉल्स हैं। एप्लीकेशन लेयर पे
क्या-क्या प्रोटोकॉल्स हैं? एसएसएच, http, टीएलएस वो कैसे वर्क करते हैं वो अगर हम अच्छे से समझ पाए तो एप्लीकेशन लेयर पे जो
हम एप्स बनाते हैं वो हम अच्छे से बना पाए। सेवंथ इज अबाउट मैनेजिंग इंफ्रास्ट्रक्चर जो बिग इंफ्रास्ट्रक्चर
होते हैं उनको कैसे मैनेज किया जाता है थ्रू प्रॉक्सी उनको कैसे सिक्योर किया जाता है यूजिंग लोड बैलेंसर केबल
आर्किटेक्चर कैसे बनाते हैं वो हम यहां देखेंगे। एट द लास्ट बट नॉट लीस्ट अप्लाइड नेटवर्किंग फॉर डेवोप्स। ये जो भी चीजें
हमने यहां एक्सप्लोर की हम इनको हैंड्स ऑन प्रैक्टिकल देखेंगे। यह जो फर्स्ट सेवन चैप्टर्स है किसी भी रोल के लिए आपको
सॉफ्टवेयर इंजीनियर बनना है। आपको फुल स्टक डेवलपर बनना है। फ्रंट एंड डेवलपर बनना है। बैक एंड डेवलपर बनना है। वेब
डेवलपर बनना है। टेस्टिंग में जाना है। आपको ऐप डेवलपर बनना है। क्लाउड इंजीनियर बनना है आपको। नेटवर्क इंजीनियर बनना है।
जो रोल ले ले वो नाम लो। साइबर सिक्योरिटी में जाना है। एआई इंजीनियर बनना है। फॉरवर्ड डिप्लॉयड इंजीनियर बनना है। दीज़
आर रिक्वायर्ड फॉर ऑल द टेक रोल्स। एंड चैप्टर एट इज अबाउट डेवोप्स एंड क्लाउड। वहां तक जब पहुंचोगे तो एक बार ये सारे
कांसेप्ट रियल वर्ल्ड में कैसे चलते हैं वो हम वहां देखेंगे। हमारे घर पे लैब नहीं है, सारे इक्विपमेंट्स नहीं है। बट स्टिल
थ्रू द क्लाउड कंप्यूटिंग वी कैन लर्न दिस कांसेप्ट एंड हैंड्स ऑन प्रैक्टिस। एक-एक करके हम अपनी जर्नी पे बढ़ते हैं पहले
चैप्टर से। नेटवर्किंग फंडामेंटल्स। देयर इज़ वेरी फेमस प्रिंसिपल कॉल्ड गोल्डन सर्कल रूल
बाय साइमन सिने। उन्होंने बताया है कि इट इज वेरीेंट टू अंडरस्टैंड व्हाई बिफोर व्हाट एंड हाउ। लेट्स अंडरस्टैंड क्यों
जरूरत पड़ी हमें इंटरनेट की कैसे वो आया एंड फिर आगे उनके कैरेक्टरिस्टिक्स पढ़ेंगे। इंटरनेट की शुरुआत हुई थी जब
कोल्ड वॉर अपने पीक पे थी। यूएस मिलिट्री हमेशा थोड़ा तनाव में रहती थी। बिकॉज़ उनको ऐसा लगता था कि अगर सोवियत यूनियन ने उनका
एक भी कम्युनिकेशन सेंटर डिस्ट्रॉय कर दिया तो पूरा आर्मी है। उनका कामकाज ठप हो जाएगा। इस चीज को इस प्रॉब्लम को उन्होंने
जब टैकल किया तब इंटरनेट का जन्म हो गया। आज हम जो इंटरनेट यूज़ करते हैं वह पहले यूएस डिपार्टमेंट ऑफ डिफेंस ने एक
प्रोजेक्ट फंड किया था 1969 में। उसका नाम था आरपा नेट एडवांस रिसर्च प्रोजेक्ट एजेंसी नेटवर्क। इसी प्रोजेक्ट को आगे बढ़
के वहां से इंटरनेट की शुरुआत हुई। उनका गोल तब बहुत सिंपल था। हमें ऐसा नेटवर्क बनाना है। एक नोट भी अगर डाउन चला गया तो
कोई दूसरे रास्ते से मैसेजेस पास हो। उन्होंने रिसर्च चालू कर दी। उस रिसर्च के थ्रू उन्होंने फर्स्ट टेस्टिंग करने का
सोचा। तो फर्स्ट टेस्टिंग हुआ था वो 1969 अक्टूबर 29 को हुआ था। यूसीएलए एंड स्टैनफोर्ड दो कंप्यूटर्स थे। उनके बीच
उन्होंने कम्युनिकेशन का फर्स्ट मैसेज भेजा। तो फर्स्ट मैसेज वो जब भेज रहे थे दैट वाज़ अ लॉग इन एल ओ जी आई एन। बट कुछ
सिस्टम डिफिकल्टीज आई और सिस्टम क्रैश हो गया और बस पहले दो लेटर्स ही पहुंच पाए। तो जो फर्स्ट मैसेज इंटरनेट पे सेंड हुआ
था वो था एल ओ ये दो वर्ड्स थे। फिर 70ज 80ज में आरपनेट एक्सपैंड होते गया बट वो लिमिटेड था रिसर्च के लिए एंड
यूनिवर्सिटीज के लिए साइंटिस्ट अपने एक दूसरे से बात करने लगे शेयर करने लगे एंड आर्मी उसको यूज करने लगी ये नेटवर्क ऐसे
बढ़ने लगा 1983 में आरपा नेट ने एक सिस्टम को अडॉप्ट किया कि हम कम्युनिकेट कैसे करेंगे यूजिंग टीसीpआईपी दिस वाज़ द लिटरली
मोमेंट वेयर इंटरनेट को एक यूनिवर्सल लैंग्वेज मिल गया था आज जो भी कंप्यूटर मोबाइल एनी डिवाइस कनेक्ट एंड कम्युनिकेट
यूजिंग दिस दिस कॉमन सेट ऑफ स्टैंडर्ड दैट इज टीसीपीआईपी वो हम आगे पढ़ेंगे। हियर आर सम बेसिक टर्मिनोलॉजीस। फर्स्ट वन इज़
कंप्यूटर नेटवर्क। तो कंप्यूटर नेटवर्क क्या है? दो नोड्स के बीच में एक डिजिटल कम्युनिकेशन है जिसमें हम रिसोर्सेज शेयर
कर सकते हैं। डेटा, फाइल्स, एनीथिंग। सो इट इज कम्युनिकेशन मीडियम व्हिच अलाउस नड्स टू शेयर रिसोर्सेज। दैट इज अ
कंप्यूटर नेटवर्क। और नड्स उनको होस्ट कहा जाता है। होस्ट इज अ एनी डिवाइस दैट गेट्स IPपी एड्रेस। वो आपका पीसी हो सकता है,
लैपटॉप हो सकता है, मोबाइल फोन हो सकता है, सर्वर हो सकता है। यह जो प्रोसेस है डेटा शेयरिंग की, रिसोर्स शेयरिंग की, इस
प्रोसेस को नेटवर्किंग कहते हैं। कंप्यूटर नेटवर्क इज अ कम्युनिकेशन मीडियम एंड नेटवर्किंग इज द प्रोसेस थ्रू व्हिच वी
शेयर द डेटा एंड रिसोर्सेज। नेक्स्टेंट थिंग इज़ व्हाट इज इंटरनेट? एट इट्स को? सिंपल है। इंटरनेट नेटवर्क्स का नेटवर्क
है। जो छोटे-छोटे नेटवर्क्स हैं, सभी नेटवर्क्स को अगर मिला दें, बड़ा इंटरनेट हमें मिलता है। नेटवर्क ऑफ नेटवर्क्स। एक
एग्जांपल लेते हैं। हमारे घर में Wi-Fi है। हमारे ऑफिस में भी नेटवर्क है। कॉलेज में भी नेटवर्क है। अपने फोन में भी
कंपनीज़ का नेटवर्क होता है। डाटा सेंटर का खुद का नेटवर्क होता है। आईएसपी जो इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर है। Airtel, Jio
उनके भी मैसिव नेटवर्क्स होते हैं। ये सभी चीज मिला के इंटरनेट बनता है। सबसे एक इंटरेस्टिंग बात तो यह है कि पीपल थिंक
दैट इंटरनेट इज अ वर्चुअल थिंग और अ कांसेप्ट बट इंटरनेट फिजिकल चीजें इंटरनेट केबल्स, हार्डवेयर्स, डेटा सेंटर,
बिल्डिंग्स इनसे बनता है। तो अगर हम इंटरनेट के ब्रॉडर पिक्चर पे देखें नोबडी ओन्स द इंटरनेट एवरीबडी ओन्स अ पीस ऑफ इट।
फॉर एग्जांपल हमारे जो इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडेड है एटलीस्ट इन इंडिया Jio, Airtel, BSNL उनके खुद के केबल्स है,
इक्विपमेंट्स हैं वो हमारे घर पे कनेक्ट करते हैं उसके थ्रू। उनके पास इंटरनेट का एक पीस है। बट कंप्लीट इंटरनेट का कोई
मालिक नहीं है। डाटा सेंटर कंपनी के पास अपने सर्वर्स इंफ्रास्ट्रक्चर होते हैं। आपके मन में बहुत बड़ा सवाल होगा। आपका
फोन Wi-Fi से कनेक्टेड है एंड Wi-Fi आपके राउटर से कनेक्टेड है। राउटर इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर जहां से आप सर्विस लेते
हो उनसे कनेक्टेड है। अगर आपको कोई इंडिया में बैठ के यूएसए की वेबसाइट यूएसए का कोई रिसोर्स एक्सेस करना है वो कैसे करता है?
वैसे उड़ के तो जाता नहीं होगा। वायरलेसली तो इतनी दूर पहुंचता नहीं होगा इंडिया से। इसका आंसर है केबल्स। सबमरीन केबल्स। यह
जो केबल्स है आप जब यहां से मैसेज भेजते हो यूएस का कोई रिसोर्स एक्सेस करने के लिए वह आपके राउटर थ्रू आपके आईएसपी थ्रू
कोस्टल लैंडिंग स्टेशंस होते हैं वहां जाता है। वहां के थ्रू अंडर सी जो केबल्स है उसके थ्रू ट्रैवल करके अनदर साइड के
डेटा सेंटर में जाता है। एंड दिस इज अ रियल इंजीनियरिंग जो बिग बिग ओशंस है सारे उनके नीचे थाउजेंड्स किलोमीटर ऑफ ऑप्टिकल
फाइबर बिछाई हुई है जो पूरे इंटरनेट को कनेक्ट करती है थ्रूउ द एंटायर अर्थ। आप देख सकते हो ऐसे इंटरनेट केबल्स होती है
डीप डाउन ऑन द ओशियन फ्लोर। यह है उनका मैप। इतनी सारी केबल्स है। कुछ एशिया को कनेक्ट करती है, कुछ अफ्रीका को कनेक्ट
करती है। उसमें से कुछ इंडिया को कनेक्ट करती है। तो अगर आपको यह सारी सबमरीन केबल्स एंटायर प्लनेट रियल टाइम में देखनी
है तो दिस इज द वेबसाइट सबमरीन केबल map.com। आप इस वेबसाइट पे जाओगे तो आपको डिटेल एक्टिव जो सबमरीन केबल्स है वह दिख
जाएगी। कितनी दूर है, एक्टिव कब से है, कौन ऑन करता है? एक-एक केबल को देख सकते हो। अभी आगे बढ़ते हैं। www वर्सेस
इंटरनेट। व्हेन आई वास इन द कॉलेज। मुझे एक ओरल में एक क्वेश्चन पूछा था। व्हाट इज डिफरेंस बिटवीन www एंड इंटरनेट? मैं तो
सोच रहा था कि यार मैं बचपन से सुनते आ रहा हूं कि वर्ल्ड वाइड वेब होता है, इंटरनेट होता है। ये दोनों एक ही चीज होती
है। बट कंसेप्चुअली अगर देखा जाए तो ये थोड़ा डिफरेंट है। अब कैसे वो हम देखते हैं यार। जब भी मैं इंटरनेट की बात करूं,
आपको क्या याद आता है? ब्राउजिंग करना, वेबसाइट, वीडियोस, YouTube देखना, एप्स यूज़ करना, Instagram, Snapchaat, एक्सट्रा
एक्सट्रा। इट्स नॉट जस्ट अ इंटरनेट, इट्स थिंग व्हिच इज बिल्ट ऑन टॉप ऑफ इंटरनेट। इट इज़ नॉट डायरेक्ट इंटरनेट। इट इज कॉल्ड
एज वर्ल्ड वाइड वेब। अगर आप इंटरनेट के बारे में समझोगे तो इंटरनेट एक ट्रांसपोर्ट सिस्टम जैसा है। ग्लोबल
नेटवर्क है। उसमें से डेटा ट्रांसपोर्ट होता है। अब वो डेटा कुछ भी हो सकता है। इमेज हो सकती है, ऑडियो हो सकती है,
वीडियो हो सकती है, फाइल हो सकती है, WhatsApp मैसेज हो सकता है, गेम रिलेटेड कोई चीज हो सकती है। इंटरनेट क्या करता
है? जस्ट मूव्स द डेटा। इट इज अ इंफ्रास्ट्रक्चर ट्रांसपोर्ट सिस्टम। बट जो वर्ल्ड वाइड वेब है, दैट इज अ
एप्लीकेशन व्हिच रंस ऑन द ट्रांसपोर्ट सिस्टम। इंफ्रास्ट्रक्चर। 1991 में टीम बर्नर्स ली एक ब्रिटिश साइंटिस्ट थे।
उन्होंनेडब्ल्यूडब्ल्यू निर्माण किया था। कैसे किया था? उनका आईडिया बहुत सिंपल था। ह प्रॉब्लम स्टेटमेंट वाज़ एक ऐसा सिस्टम
क्रिएट करते हैं जिसमें जो डॉक्यूमेंट्स हैं जो रिस्चरर्स यूज करते हैं, यूनिवर्सिटीज यूज कर रही है उनको इंटरलिंक
करते हैं। सो दैट बाकी जितने भी लोग हैं वो उसको एक्सेस कर पाए यूजिंग देयर ब्राउज़र। ये करने के लिए उन्होंने तीन
चीजों का इन्वेंशन किया। फर्स्ट इज़ HTML, सेकंड इज़ HTP, थर्ड इज़ यूआरएल। HTML ऐसी एक लैंग्वेज है जिसमें हम डॉक्यूमेंट्स
लिख सकते हैं एंड स्ट्रक्चर कर सकते हैं। HTP एक प्रोटोकॉल है। वह डिफाइन करता है कि यह जो डॉक्यूमेंट्स हमने बनाए हैं उनको
रिक्वेस्ट कैसे किया जाए और उनको डिलीवरी कैसे की जाए एंड यूआरएल सिस्टम्स मदद करती है उन डॉक्यूमेंट्स को फाइंड करने में ओवर
द इंटरनेट यूनिक एड्रेस उस डॉक्यूमेंट को दिलाती है। तो अगर आप इन तीनों को कंबाइन कर दें एचटीएमएल पेजेस एचटीपी प्रोटोकॉल
से डिलीवर करेंगे रिक्वेस्ट करेंगे यूआरएल से हम उनको लोकेट करेंगे तो वी गेट मैसिव कलेक्शन ऑफ वेब पेजेस वर्ल्ड वाइड वेब अगर
समराइज किया जाए इंटरनेट क्या है एक इंफ्रास्ट्रक्चर है एंड वर्ल्ड वाइड वेब क्या है एक सर्विस और एप्लीकेशन व्हिच रंस
ऑन दैट इंफ्रास्ट्रक्चर नेक्स्ट क्लाइंट सर्वर आर्किटेक्चर क्लाइंट सर्वर आर्किटेक्चर बहुत इंपॉर्टेंट टॉपिक है इफ
यू आर डेवलपिंग वेब एप्लीकेशनेशंस फुल स्टक एप्लीकेशनेशंस डेवोप्स क्लाउड फंडामेंटल लेवल पे एवरीथिंग इज क्लाइंट
क्लाइंट सर्वर आर्किटेक्चर। आप जो भी सिस्टम डिजाइन के एडवांस पैटर्न पढ़ लो। एवरीथिंग इज अ क्लाइंट सर्वर आर्किटेक्चर।
तो इसको समझते हैं। क्लाइंट सर्वर आर्किटेक्चर कंसिस्ट ऑफ टू थिंग्स। फर्स्ट इज द क्लाइंट पार्ट एंड सेकंड इज द सर्वर
पार्ट। क्लाइंट इज़ एनीथिंग दैट मेक्स द रिक्वेस्ट। अब हमारा ब्राउज़र क्लाइंट हो सकता है। मोबाइल ऐप हो सकता है। अगर
लैपटॉप से हम टर्मिनल थ्रू रिक्वेस्ट कर रहे हैं तो दैट टर्मिनल क्लाइंट बी अ क्लाइंट। एंड सर्वर इज़ एनीथिंग दैट लिसंस
फॉर द रिक्वेस्ट कमिंग फ्रॉम क्लाइंट एंड रिसोंड टू देम। सर्वर रिक्वेस्ट सुनता है और फिर उनको रिसोंड करता है। अब जब हम
सर्वर की बात करते हैं तो लोगों को लगता है कि ओके बड़ा सर्वर कुछ होगा, बहुत बड़ी मशीन होगी। बट ऐसा नहीं है। हमने क्या
पढ़ा? सर्वर मींस एनीथिंग दैट लिसंस एंड रिसोंड। सर्वर पे एक स्पेशल प्रोग्राम या सॉफ्टवेयर रन होता है ऑन अ स्पेसिफिक
पोर्ट व्हिच वेट्स फॉर इनकमिंग रिक्वेस्ट एंड सेंड बैक द रिस्पों्ससेस। हमारे लैपटॉप पे भी हम सर्वर रन कर सकते हैं
यूजिंग एनी लैंग्वेज। Gang, jवास्क्रिप्ट, नोट js, रस, Python अपना सर्वर रन करा सकते हो। क्लाइंट क्या करता है? सर्वर को
रिक्वेस्ट भेजता है। सर्वर उस रिक्वेस्ट को प्रोसेस करता है एंड फिर रिसोंड भेजता है। आजकल जो कंपटीशन पावर इतनी एडवांस हो
चुकी है कि एक सिंगल सर्वर थाउजेंड समटाइम्स मिलियंस ऑफ रिक्वेस्ट साइमलटेनियसली हैंडल कर सकता है। टाइप्स
ऑफ नेटवर्क। लेट्स टेक एग्जांपल। हमारा फ़ है वह Wi-Fi से कनेक्टेड है। Wi-Fi राउटर थ्रू कनेक्टेड है। एंड राउटर हमारे आईएसपी
से कनेक्टेड है। इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर से एंड देन थ्रू सबमरीन केबल्स एंड एवरीथिंग हम लोग वर्ल्ड से कनेक्टेड है।
तो अगर आप यहां सही से देखो तो एवरीथिंग इज वर्किंग स्मूथली बट दिस ईच कनेक्शन इज अ सेपरेट नेटवर्क। उनके अलग नाम है। वो
डिफरेंट स्केल पे काम करते हैं। उनके डिफरेंट पर्पजेस हैं। इस डायग्राम में आप देख सकते हो देयर आर फोर नेटवर्क्स।
फर्स्ट इज़ पैन देन लन इज़ देयर मैन मेट्रोपोलियन एरिया नेटवर्क देन वाइड एरिया नेटवर्क एक-एक करके समझते हैं। पैन
पैन स्टैंड्स फॉर पर्सनल एरिया नेटवर्क। इसका स्केल बहुत स्माल होता है। इट इज़ बेसिकली नेटवर्क ऑफ डिवाइसेस अराउंड अ
सिंगल पर्सन। फॉर एग्जांपल आपके जो एयरपड्स है वो ब्लूटूथ के थ्रू आपके फोन से कनेक्ट होते हैं। वो पैन होता है। आपका
स्मार्ट वॉच आपके फोन से सिंक होता है। दैट इज अ पर्सनल एरिया नेटवर्क। स्मॉल रेंज होती है पर्सनल डिवाइसेस एंड ऑलमोस्ट
इंटरनेट की ज़रूरत होती नहीं। नेक्स्ट इज़ लोकल एरिया नेटवर्क। इट इज़ काइंड ऑफ़ प्राइवेट नेटवर्क। आप इसको मिनी नेटवर्क
कह सकते हो रिलेटिवली स्मॉल एरिया कवर करता है। लाइक होम्स, ऑफिसेस, स्मॉल कैंपसेस। लैंड जो है वो परफेक्ट रहता है
रिसोर्स शेयरिंग के लिए लाइक प्रिंटर्स, शेयरिंग द फाइल्स और कम्युनिकेटिंग बिटवीन द डिवाइसेस ऑन अ स्मॉलर एरिया। सो, आई एम
जस्ट गिविंग यू टीज़र। जब हम एक चैप्टर में जाएंगे, तो हम लोग प्राइवेट नेटवर्क्स इनसाइड वीपीसी पढ़ेंगे। प्राइवेट सबनेट्स
क्या होती है? अब हम लन के बारे में ही बात कर रहे होंगे। प्रैक्टिकली कैसे हम लोग उसको यूज़ कर सकते हैं। नेक्स्ट इज़
मैन। मैन स्टैंड्स फॉर मेट्रोपोलियन एरिया नेटवर्क। आप इसको लैन का बड़ा भाई कह सकते हो। थोड़ा बड़ा ज्योग्राफिकल एरिया कवर करता
है। टिपिकली लाइक सिटी और मेट्रोपोलिकन एरिया। मैन जो है उसमें हम क्या करते हैं? मल्टीपल लैं्स को एक दूसरे से कनेक्ट करते
हैं और बड़ा नेटवर्क बन जाता है विद इन दैट रीजन। मैन इज़ मोस्टली यूज़्ड फॉर बिनेसेस, एजुकेशनेशनल इंस्टीट्यूट्स एंड गवर्नमेंट
ऑर्गेनाइजेशंस। जब हम लास्ट चैप्टर में क्लाउड रीजंस एंड अवेलेबिलिटी ज़ों्स के बारे में पढ़ेंगे, तो दैट इज अ मैन स्केल
नेटवर्क। देयर आर डिफरेंट क्लाउड रीजंस जैसे एडब्ल्यूएस के मुंबई रीजन है, हैदराबाद रीजन है, सिंगापुर रीजन है। एंड
कुछ अवेलेबिलिटी ज़ों्स होते हैं मल्टीपल डेटा सेंटर्स इन मुंबई। वो मैन लेवल की बात करते हैं। लास्ट बट नॉट लीस्ट वैन
वाइड एरिया नेटवर्क व्हिच इज अक्रॉस कंट्रीज और कंटिनेंट्स। बट ऐसा नहीं है कि वाइड एरिया नेटवर्क मतलब इंटरनेट ही हो
गया। देयर कैन बी प्राइवेट वैस फॉर एग्जांपल कुछ बैंक्स होती है कुछ एयरलाइंस होती है उनके मल्टीपल सिटीज में मल्टीपल
कंट्रीज में ऑफिसिसेस होते हैं लाइक मुंबई बेंगलुरु न्यूयॉर्क लंदन तो उन सबको कनेक्ट करने के लिए वो प्राइवेट वैन का
यूज करते हैं तो अगर हम समराइज किया जाए हमने अभी चार टाइप के नेटवर्क देखे पैन पर्सनल एरिया नेटवर्क पर्सनल डिवाइसेस
ब्लूटूथ रेंज जस्ट लिमिटेड टू यू देन लैन आपका होम ऑफिस कैंपस प्राइवेट काइंड ऑफ नेटवर्क मैन सिटी और लार्ज कैंपसेस
मल्टीपल बिल्डिंग्स आर कनेक्टेड रीजनल काइंड ऑफ नेटवर्क वैन ग्लोबल नेटवर्क इंटरनेट इज़ एग्जांपल इंटरनेट इज अ कलेक्शन
ऑफ़ ऑल दिस नेटवर्क्स लैन मैन वैन सबका मिलाके इंटरनेट बनता है नेटवर्क ऑफ नेटवर्क्स। नेक्स्ट टॉपिक इज़ वेरी
इंटरेस्टिंग टॉपिक। फॉर एग्जांपल हमें एक टास्क मिला है। एक ऑफिस में सेटअप करना है पूरा सिस्टम। उसमें छह कंप्यूटर है, एक
प्रिंटर है। उन सबको उनको इंटरनेट के थ्रू वाई-फाई के थ्रू कनेक्ट कराना है। हम जब कनेक्ट कर रहे होंगे हमारे पास बहुत सारे
सवाल आएंगे। लाइक कैसे कनेक्ट किया जाए? सेंट्रली किसी डिवाइस से कनेक्ट करें या फिर लाइन में कनेक्ट करें या सर्कुलर फैशन
में कनेक्ट करें। उनमें डेटा शेयरिंग कैसे कराएं? इन्हीं सभी का आंसर है नेटवर्क टोपोलॉजी। टोपोलॉजी एक ग्रीक वर्ड है।
इसका मीनिंग होता है प्लेसमेंट और अरेंजमेंट एंड इन द कॉन्टेक्स्ट ऑफ कंप्यूटर नेटवर्क एंड इन द कॉन्टेक्स्ट ऑफ
नेटवर्किंग, टोपोलॉजी मींस वे डिवाइसेस आर अरेंज्ड एंड कनेक्टेड टू इच अदर। अभी देखते हैं कि क्या-क्या नेटवर्क टोपोलॉजीस
होती है। फर्स्ट इज़ अ बस टोपोलॉजी। हियर ऑल डिवाइसेस आर कनेक्टेड टू अ सिंगल केबल कॉल्ड बस। आप इसको WhatsApp ग्रुप जैसा
कंसीडर कर सकते हो जिसमें सभी लोग एक दूसरे का मैसेज देख सकते हैं एंड पार्टिसिपेट कर सकते हैं इन कन्वर्सेशन।
सेकंड इज़ रिंग टोपोलॉजी। सारे डिवाइसेस सर्कुलर फैशन में अरेंज किए गए हैं। व्हिच फॉर्म्स अ रिंग। डेटा जो है वो इन रिंग के
थ्रू ट्रैवल होता है। पासिंग थ्रू ईच डिवाइस। नेक्स्ट इज़ स्टार्स टोपोलॉजी। इन स्टार टोपोलॉजी सभी डिवाइसेस एक सेंट्रल
हब से कनेक्टेड होते हैं। उनको हम स्विच भी कहते हैं। इट एक्ट्स एज अ सेंट्रल पॉइंट ऑफ कम्युनिकेशन। सो सारे
कम्युनिकेशन इनके थ्रू होते हैं। दिस इज़ आल्सो वन वे टू अरेंज द डिवाइसेस। देन नेक्स्ट वन इज़ मैश टोपोलॉजी। स्टार
टोपोलॉजी में क्या है? अगर सिंगल पॉइंट ऑफ फेलर हो गया तो सबका कम्युनिकेशन बंद हो जाता है। तो देन देयर इज़ अ सपोस्टिकेटेड
नेटवर्क। मेश सारे डिवाइसेस एक दूसरे से कनेक्ट रहते हैं। जैसे कि यह डिवाइस है। इफ ही वांट टू सेंड मैसेज टू दिस वन
डायरेक्टली भेज सकता है। वो इससे भी कनेक्टेड है। इससे भी कनेक्टेड है। इनसे भी कनेक्टेड है। इनसे भी कनेक्टेड है। बट
इसमें सेटअप करना कॉम्प्लेक्स हो जाता है। एक न्यू डिवाइस को ऐड करना भी डिफिकल्ट हो जाता है। और बहुत कॉस्टिंग आता है बिकॉज़
वायर्स वगैरह है वो एक्स्ट्रा लगती है सभी डिवाइसेस को कनेक्ट करने के लिए। नेक्स्ट इज़ अ ट्री टोपोलॉजी व्हिच इज अ कॉम्बिनेशन
ऑफ़ बस एंड स्टार टोपोलॉजी। तो अगर आप देखा जाए तो यहां यह बस टोपोलॉजी है। दिस इज अ बस टोपोलॉजी और फिर एक स्टार जैसा स्टार
टोपोलॉजी है। इट लुक्स लाइक अ हायरार्की। दैट्स व्हाई इट कॉल्ड एज अ रीट टोपोलॉजी। तो दीज़ आर द डिफरेंट टोपोलॉजीस जहां से हम
डिवाइसेस को अरेंज कर सकते हैं। इसके हर एक के प्रोज़ होते हैं, क्स होते हैं। हमारी जो रिक्वायरमेंट है, उस हिसाब से हम
लोग अपना टोपोलॉजी डिसाइड कर सकते हैं। दिस इज़ ऑल अबाउट नेटवर्किंग फंडामेंटल्स। कांग्रेचुलेशंस टू ऑल ऑफ यू। यू कंप्लीटेड
द फर्स्ट चैप्टर ऑफ़ दिस नेटवर्किंग बूट कैंप। जहां हमने हिस्ट्री देखी कंप्यूटर नेटवर्क्स की, टर्मिनोलॉजीस पढ़ी बेसिक।
इंटरनेट क्या होता है? इंटरनेट काम कैसे करता है? बड़े स्केल पे। देन वर्ल्ड वाइड वेब क्या है? क्लाइंट सर्वर आर्किटेक्चर
क्या है? डिफरेंट-डिफरेंट टाइप्स ऑफ़ नेटवर्क्स देखे हमने। पैन, लैन, मैन, वैन नेटवर्क टोपोलॉजीस देखी कि बस टोपोलॉजी
होती है। स्टार टोपोलॉजी, रिंग टोपोलॉजी, मैश, ट्री। हम इस टोपोलॉजीस का यूज करके कैसे नेटवर्क बना सकते हैं। वह हमने देखा।
अगले चैप्टर में हम लोग समझेंगे कि जो डाटा है वह इंटरनेट में अक्रॉस द नेटवर्क ट्रैवल कैसे करता है। बिकॉज़ इंटरनेट इज अ
नेटवर्क ऑफ नेटवर्क बट एव्री नेटवर्क इज कनेक्टेड बाय अ डिफरेंट थिंग। इट कैन बी अ लैन मैन। उसके थ्रू डेटा ट्रैवल कैसे करता
है वो हम देखते हैं अगले चैप्टर में। वेलकम टू द सेकंड चैप्टर ऑफ कंप्यूटर नेटवर्किंग बूट कैंप व्हिच इज अबाउट
नेटवर्क मॉडल्स जो हमें एक कॉमन लैंग्वेज देता है जिसके थ्रू जो सिस्टम्स है वो इंटरनेट में एक दूसरे से कम्युनिकेट कर
सकते हैं। कौन-कौन से नेटवर्क मॉडल्स हैं? उनका एप्लीकेशनेशंस क्या है? आर्किटेक्चर्स क्या है? वो समझने से पहले
हम ये समझते हैं कि नेटवर्क मॉडल्स की जरूरत क्यों पड़ी? फॉर एग्जांपल अभी आप ये बूट कैंप है वो YouTube पे देख रहे हो।
आपके लैपटॉप या फोन से यह रिक्वेस्ट वी थ्रू आपके राउटर, वाई-फाई, इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर सम हाउ YouTube के डाटा सेंटर्स
पे जा रही है और वहां से वो प्रोसेस हो के आपको डाटा वापस आ रहा है विद इन फ्यू सेकंड्स। इंटरेस्टिंग बात यह है कि आपका
जो फोन है Apple का, Samsung का हो सकता है। इवन जो डिवाइसेस है आपके जो राउटर्स है वो भी अलग मैन्युफैक्चर से हो सकते
हैं। उसके बाद जो सर्वर्स है जिस पे YouTube अपना डाटा सेंटर्स रन करते हैं वो Linux पे रन कर रहे हैं। Linux के भी
अलग-अलग फ्रेवर्स होते हैं। Ubt है, Redat एंटरप्राइज Linux है। आपके जो इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर है Airtel, Jio उनके भी
अलग-अलग इक्विपमेंट्स हो सकते हैं। बट स्टिल दे आर एबल टू कम्युनिकेट विद ईच अदर। एक दूसरे से बात कर रहे हैं। एक
दूसरे की बात समझ रहे हैं। एक दूसरे को इंफॉर्मेशन डेटा आगे पहुंचा रहे हैं। यह पॉसिबल हो पा रहा है। बिकॉज़ देयर इज़ अ
कॉमन सेट ऑफ लैंग्वेज व्हिच इज इंट्रोड्यूस्ड बाय मॉडल्स। अर्लियर डेज में क्या होता था? जब इंटरनेट की जस्ट
शुरुआत हुई थी। तब जो वेंडर्स थे उन्होंने अपने-अपने डिवाइसेस बिल्ड करना चालू किया। अपने केबल्स एंड स्विचेस, हब्स। तो वो एक
दूसरे से तो कंपैटेबल बिकॉज़ है उनका डेटा सेंडिंग का, डेटा रिसीविंग का जो वेज़ थे वो सिमिलर थे। बट ऑन द ग्लोबल स्केल अगर
उनको हम दूसरे किसी डिवाइस को उस नेटवर्क में ऐड करते थे तो दे वर नॉट एबल टू कम्युनिकेट विथ ईच अदर। तो इसी वजह से
पूरे ग्लोबल स्केल पे हमें कॉमन लैंग्वेज की बहुत जरूरत थी। नॉट जस्ट फॉर केबल्स कि ओके ये केबल्स इस ब्रांड की होनी चाहिए या
सिग्नल्स कि सिग्नल्स की कैपेसिटी स्ट्रेंथ ये होनी चाहिए। फॉर यूनिवर्सल लाइक जो डेटा है वह क्लाइंट से सर्वर तक
मूव होने तक फॉर एव्री एस्पेक्ट फॉर एव्री लेवल हमें कॉमन लैंग्वेज चाहिए थी। इस प्रॉब्लम को टैकल करने के लिए हमने लेयर्ड
मॉडल्स इंट्रोड्यूस किए वेयर ईच लेयर का अलग-अलग प्रॉपर्टीज एंड रिस्पांसिबिलिटीज होता है। उनमें अलग-अलग प्रोटोकॉल्स काम
करते हैं। दीज़ आर द एग्जांपल्स ऑफ द लेयर मॉडल्स। दिस इज़ फर्स्ट ओजी लेयर मॉडल ओएसआई अह सेवन लेयर मॉडल। उसके बाद TCPIP
फोर लेयर्ड वाला इंट्रोड्यूस हुआ था। एंड नाउ दिस TCP आईपी अपडेटेड मॉडल बिफोर डाइविंग इंटू द डिटेल्स ऑफ़ ओएसआई मॉडल,
TCP मॉडल, हम यह मॉडल्स कौन डिफाइन करता है उसके बारे में समझते हैं। दीज़ मॉडल्स आर नॉट डिफाइंड बाय सिंगल कंपनी और वेंडर।
ये इंडिपेंडेंट ऑर्गेनाइजेशन डेवलप करते हैं वि द पार्टिसिपेशन ऑफ इंजीनियर्स फ्रॉम मेनी कंट्रीज एंड कंपनीज़। द फर्स्ट
ऑर्गेनाइजेशन इज़ आई ट्रिपलई इंस्टट्यूट ऑफ़ इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियर्स। इन्होंने लैंडस्केल पे बहुत सारे
टेक्नोलॉजीज़ हमें दी है। फॉर एग्जांपल इथर 802.3 Wi-Fi 802.1 सेकंड वन इज़ आईटीएफ इंटरनेट इंजीनियरिंग
टास्क फोर्स। ये जो अलग-अलग प्रोटोकॉल्स होते हैं TCP यूडीपी HTP इन सभी प्रोटोकॉल्स को मेंटेन करना, उनको डेवलप
करना, उनको अपग्रेड करने का काम यह करते हैं। तो एक-एक करके सारे मॉडल समझते हैं। फर्स्ट वन इज़ ओएसआई। ओएसआई स्टैंड्स फॉर
ओपन सिस्टम इंटरकनेक्शन। ओएसआई एक कॉनसेप्चुअल मॉडल है। कॉनसेप्चुअल फ्रेमवर्क है जो हमें कम्युनिकेशन
स्टैंडर्ड्स को सेट करने में मदद करता है। इस मॉडल में टोटल सात लेयर्स हैं और एव्री लेयर को अलग-अलग रिस्पांसिबिलिटीज़ एंड
टास्क स्पेसिफाई किया गया है। एंड ड्यू टू दिस सेपरेशन ऑफ कंसर्न जो इनोवेशन है और जो फ्लेक्सिबिलिटी है वो हमें मिलती है।
फॉर एग्जांपल एव्री लेयर को हम इंडिपेंडेंटली इंप्रूव कर सकते हैं। इन द केस ऑफ़ फिजिकल लेयर अगर हमने एडवांस और
अच्छी वायर्स ले ली तो डेटा का जो फ्लो है वह और स्पीड से हो सकता है। और सबसे इंपॉर्टेंट इट इज़ कंपैटेबल विद एवरीथिंग।
मतलब हमने खाली फिजिकल लेयर जो एक लेयर है उसका हमने वायर चेंज किया। बाकी जो राउटर बाकी जो डिवाइसेस स्विच हब्स ये सारे
डिवाइसेस हैं वो एज़ इट इज़ काम कर रहे हैं। लेट्स सी द सेवन लेयर्स ऑफ़ ओएसआई मॉडल। फर्स्ट लेयर इज़ फिजिकल लेयर। फिजिकल लेयर
क्या करती है? जो डेटा है वो ट्रांसमिट करती है ओवर द फिजिकल मीडियम इन द फॉर्म ऑफ बिट्स। उसके बाद सेकंड लेयर इज़ अ डेटा
लिंक लेयर व्हिच डिफाइन द फॉर्मेट ऑफ़ डेटा। कौन से फॉर्मेट में डेटा है वो डिफाइन करती है बिफोर ट्रांसमिटिंग इंटू द
बिट्स। थर्ड इज़ अ नेटवर्क लेयर जो डिसाइड करती है कि डेटा का फ्लो कैसे होता है? कौन से पाथ से डेटा जाएगा? एफिशिएंटली
फास्टेस्ट पहुंच सकता है। बेस्ट पाथ कौन सा है? फोर्थ लेयर इज़ अ ट्रांसपोर्ट लेयर जो क्या करती है? डेटा को एंड टू एंड
ट्रांसमिट करती है। एक प्लेस से एक एप्लीकेशन से सर्वर पे जो एप्लीकेशन है वहां तक एंड टू एंड देन सेशन लेयर। सेशन
लेयर मेंटेन करती है सेशंस बिटवीन द होस्ट क्लाइंट और सर्वर के बीच में जो डेटा ट्रांसफर हो रहा है उसके सेशंस मेंटेन
करती है। उसके बाद सिक्स्थ लेयर इज़ अ प्रेजेंटेशन लेयर जो डेटा है उसको प्रेजेंटेबल यूज़बल फॉर्मेट में बनाते हैं।
सो दैट हम लोग एप्लीकेशन लेयर पे उससे एप्लीकेशनेशंस के थ्रू इंटरेक्ट कर पाए। ये जो सेवन लेयर्स है ओएसआई मॉडल की ये
अगर आपको याद रखनी है तो आप एज अ नेम वाइज भी याद रख सकते हो। मेरे पास बहुत सिंपल निमोनिक है जिससे आप इनको याद रख सकते हो।
फॉर टॉप टू बॉटम आप ये निमोनिक याद रख सकते हो। ऑल पीपल सीम टू नीड डेटा प्रोसेसिंग। ए स्टैंड्स फॉर एप्लीकेशन
लेयर, पी स्टैंड्स फॉर प्रेजेंटेशन लेयर, एस स्टैंड्स फॉर सेशन लेयर, टी स्टैंड्स फॉर ट्रांसपोर्ट लेयर, एन स्टैंड्स फॉर
नेटवर्क लेयर, देन डेटा लिंक लेयर एंड फिजिकल लेयर। अगर आपको बॉटम टू टॉप लेयर्स याद रखने हैं तो यू कैन यूज़ द सेकंड
न्यूमोनिक दैट इज प्लीज डू नॉट टेल स्टूपिड पीपल एनीथिंग। बट मुझे पता है कि आप लोग बहुत क्रिएटिव हो और आपके पास अगर
कोई इससे इंटरेस्टिंग और मजेदार वे है इन ओएसआई के सातों लेयर्स को रिवाइंड करने का याद रखने के लिए तो प्लीज लेट अस नो इन द
कमेंट्स। नाउ लेट्स चेक योर क्रिएटिविटी। अभी एक-एक लेयर को समझते हैं ओएसआई के। फर्स्ट वन इज़ एप्लीकेशन लेयर। एप्लीकेशन
लेयर पर मोस्ट ऑफ द एप्लीकेशनेशंस लाई करते हैं जिससे ह्यूमन इंटरेक्शन होता है। फॉर एग्जांपल वेब ब्राउज़र्स प्रेजेंटेशन
लेयर में यह तीन स्टेप्स होते हैं जो डेटा को प्रेजेंटेबल बनाते हैं। फर्स्ट इज़ इंक्रिप्शन फिर कंप्रेशन एंड देन
ट्रांसलेशन। तो ट्रांसलेशन हम जो डेटा है जो रॉ फॉर्मेट में स्काई फॉर्मेट में होता है उसको हम बाइनरी फॉर्मेट में ट्रांसलेट
करते हैं। दिस हैपेंस ऑन अ क्लाइंट सेट। सर्वर पे एग्जैक्ट इसका उल्टा होता है। इंस्टेड ऑफ इंक्रिप्शन वहां डिक्रिप्शन
होता है। कंप्रेशन की जगह वहां डीकंप्रेस करते हैं और ट्रांसलेट टू बाइनरी की जगह बाइनरी से उसको अस स्काई में ट्रांसलेट
करते हैं। प्रेजेंटेशन लेयर का काम है डेटा को करेक्ट फॉर्मेट में दिखाना। इंक्रिप्शन, डिक्रिप्शन, कंप्रेशन,
डीकंप्रेशन एंड ट्रांसलेशन वाली प्रोसेस वहां होती है। नेक्स्ट इज़ सेशन लेयर जो दो होस्ट के बीच में सेशंस मेंटेन करती है
एंड क्रिएट करती है। सेशन लेयर में ऑथेंटिकेशन एंड ऑथराइजेशन ये दोनों चीजें इन्वॉल्व होती है। सो दैट आप YouTube
सर्वर समझ के जिससे बात कर रहे हो वो YouTube ही है कि नहीं वो हमें सेशन लेयर बताती है। सेशन लेयर ये सब सेशंस
मैनेजमेंट के लिए टाइम फ्रेम्स का यूज़ करती है। जिसमें अलग-अलग चीज होती है कि सेशन कब स्टार्ट हुआ? कि कब उसका
एस्टीिमेशन टाइम क्या है? उसमें डेटा का फ्लो क्या है? कैसे मेंटेन रखना है? वह सब टाइम फ्रेम के थ्रू हैंडल होता है।
नेक्स्ट इज़ अ ट्रांसपोर्ट लेयर। ट्रांसपोर्ट लेयर मेक श्योर करती है कि जो डेटा हमारा है वो एक एंड से दूसरे एंड तक
एंड टू एंड पहुंचे। तो इसमें अलग-अलग प्रोटोकॉल्स होते हैं। जैसे टीसीp या यूडीपी प्रोटोकॉल यूज़ किया जाता है।
ट्रांसपोर्टेशन तीन स्टेप्स में डिवाइड होता है। फर्स्ट वन इज़ अ सेगमेंटेशन, सेकंड वन इज़ अ फ्लो कंट्रोल, थर्ड वन इज़
एरर कंट्रोल। तो पहले सेगमेंटेशन होता है। फिर उसको ट्रांसपोर्ट किया जाता है और रिअसेंबल हम लोग करते हैं। तब हम एरर चेक
करते हैं। ट्रांसपोर्टेशन में फ्लो का ध्यान रखा जाता है। हमें जो डेटा आता है फ्रॉम सेशन लेयर वो हम डिवाइड करते हैं
स्मालसालॉल पैकेट्स में उसको सेगमेंट बोला जाता है। सेगमेंट में सोर्स पोर्ट, डेस्टिनेशन पोर्ट एंड सीक्वेंस नंबर होते
हैं। पोर्ट नंबर्स हमें एंड टू एंड डिलीवरी में मदद करते हैं और सीक्वेंस नंबर जब सेगमेंट्स को असेंबल करते वक्त
काम में आता है। ट्रांसपोर्टेशन में जब हम लो कंट्रोल करते हैं दैट डिपेंड्स कि अगर नेटवर्क बहुत कंजेस्टेड है मतलब बहुत
ज्यादा ट्रैफिक है तो हम थोड़ा स्लो सेगमेंट्स भेजते हैं। अदरवाइज फिर थोड़ा अगर नेटवर्क आइडियल है तो हम और ज्यादा
डाटा भेज सकते हैं। जब हम सर्वर साइड पे इन सभी सेगमेंट को असेंबल करते हैं तो अगर कोई बिट्स स्लिप हो गई या कोई फाइल करप्ट
हो गई ये चेक करने के लिए ट्रांसपोर्ट लेयर चेक सम का यूज करता है। वो वेरीफाई करता है कि ये जो डेटा है वो करप्टेड है
या सही सलामत है। उसके बाद नेटवर्क लेयर आती है। नेटवर्क लेयर में लॉजिकल एड्रेसिंग होती है। हमने पढ़ा था कि होस्ट
इज अ डिवाइस व्हिच गेट्स अ IPपी एड्रेस। तो ये जो आईपी एड्रेसिंग होती है वो नेटवर्क लेयर करती है। नेटवर्क लेयर का और
एक इंपॉर्टेंट रोल होता है। दैट इज राउटिंग। जो पैकेट है उसको सोर्स टू डेस्टिनेशन को मूव करने का काम नेटवर्क
लेयर करते हैं। यहां पे लोड बैलेंसिंग भी की जाती है। फॉर एग्जांपल अगर नेटवर्क बहुत ज्यादा कंजेस्टेड है, बहुत ट्रैफिक
है तो नेटवर्क लेयर उसको अलग राउट से भेजने का प्रयास करती है। नेक्स्ट वन इज अ डेटा लिंक लेयर। डाटा लिंक लेयर में हमें
नेटवर्क लेयर से जो ब्रैकेट्स मिलते हैं उसको फ्रेम्स में कन्वर्ट किया जाता है और फिजिकल एड्रेसिंग होती है। तो जो फ्रेम
होती है फ्रेम कंसिस्ट ऑफ मैक एड्रेस पोस्ट मैक एड्रेस एंड डेस्टिनेशन मैक एड्रेस। मैक एड्रेस को और हम डिटेल में
समझेंगे। अभी के लिए ब्रीफ बता दूं। मैक एड्रेस एक यूनिक 12 डिजिट नंबर होता है जो हमारे नेटवर्क इंटरफसेस में एकिस्ट करता
है। ट्रू डाटा लिंक लेयर जो फ्रेम्स है वो पास की जाती है फिजिकल लेयर पे। फिजिकल लेयर रिप्रेजेंट्स अ फिजिकल मीडियम लाइक
इथरनेट केबल्स और वायरलेस सिग्नल्स। एनआईसी कार्ड फ्रेम्स को इनकोड करता है इन द फॉर्म ऑफ़ बिट्स। फिर ये जो बिट्स है वो
हम ट्रांसमिट करते हैं ओवर द इंटरनेट इन द फॉर्म ऑफ़ सिग्नल्स। दे कैन बी ऑप्टिकल सिग्नल्स, इलेक्ट्रिकल सिग्नल्स और रेडियो
सिग्नल्स। दीज़ आर द सेवन लेयर्स ऑफ़ ओएसआई मॉडल। इसका हम एक एंड टू एंड व्यू देखते हैं। तो आपको डेटा फ्लो एकदम क्लियर हो
जाए। फ्रॉम क्लाइंट साइड हमारे पास पहले रॉ डाटा होता है। तो वह रॉ डाटा हम एप्लीकेशन लेयर के थ्रू हम प्रेजेंटेशन
लेयर को भेजते हैं। फिर उसको इंक्रिप्ट किया जाता है। फिर हम उनको ट्रांसपोर्ट लेयर के पास भेजते हैं। वहां सेगमेंटेशन
किया जाता है। डेटा को सेगमेंट्स में डिवाइड करते हैं। पोर्ट नंबर्स हम लोग वहां ऐड कर देते हैं। उसके बाद नेटवर्क
लेयर में उसको पैकेट कहा जाता है। उसमें हम आईपी एड्रेसेस ऐड करते हैं। एंड देन दैट डेटा इज पास्ड टू द डेटा लिंक लेयर।
जहां उसकी फिजिकल एड्रेसिंग होती है एंड हमें फ्रेम्स मिलते हैं। फिर उस फ्रेम को हम फिजिकल लेयर पे पास करते हैं जो कि
इनकोडिंग करा के उनको बिट्स में कन्वर्ट करता है। और ये बिट्स जो है वो फिजिकली ट्रांसमिट होती है। हॉप बाय हॉप बीच-बीच
में जो राउटर्स है उनके थ्रू ट्रांसमिट हो के लास्ट में सर्वर के साइड पहुंचती है और फिर बॉटम लेयर टू टॉप वाला चीज चालू होता
है। जो बिट्स है फिर उनको गैदर करा के हम फ्रेम्स बनाते हैं। फिर फ्रेम्स को गैदर करा के पैकेट्स फिर पैकेट्स टू सेगमेंट्स
फिर सेगमेंट्स को हम डिक्रिप्ट करते हैं डीकंप्रेस करते हैं ट्रांसलेट करते हैं फ्रॉम बाइनरी टू ह्यूमन रिडेबल लैंग्वेज
फिर हमें रॉ डेटा मिलता है फिर उसके हिसाब से हम उस रिक्वेस्ट को प्रोसेस करा के सर्वर वापस ये रिस्पांस भेजता है तो दिस
इज द एंड टू एंड फ्लो ऑफ डेटा इन ओएसआई मॉडल नेक्स्ट वन इज़ टीसीpआईपी मॉडल टीसीpआईपी स्टैंड्स फॉर ट्रांसमिशन
कंट्रोल प्रोटोकॉल इंटरनेट प्रोटोकॉल और यह मॉडल डेवलप किया है आरपा ने रिमेंबर हिस्ट्री ऑफ़ इंटरनेट आरपा पाओ टीसीpआईपी
मॉडल में अलग-अलग प्रोटोकॉल्स हैं जो यूज़ होते हैं थ्रू आउट द इंटरनेट एंड डिवाइसेस टू कम्युनिकेट विद ईच अदर। सिमिलर टू
ओएसआई मॉडल। TCP मॉडल भी एंड टू एंड कम्युनिकेशन प्रोवाइड करता है। बट इसमें पांच लेयर्स होती है। एप्लीकेशन लेयर,
ट्रांसपोर्ट लेयर, इंटरनेट और नेटवर्क लेयर, डेटा लिंक लेयर एंड फिजिकल लेयर। अगर आप इसको ओएसआई मॉडल से कंपेयर करोगे
तो यहां एप्लीकेशन लेयर, प्रेजेंटेशन लेयर और सेशन लेयर है। इन सबको मर्ज करा के एप्लीकेशन लेयर में बनाया गया। बिकॉज़ इनके
जो टास्क है वो इतना क्लोजली रिलेटेड थे एक दूसरे से। तो टीसीपीआईवी मॉडल उसको प्रैक्टिकली एक ही लेयर कंसीडर करता है।
दैट इज एप्लीकेशन लेयर। टीसीपीआईवी मॉडल्स के जो पांच लेयर्स है उसको देखते हैं। फर्स्ट वन इज़ फिजिकल लेयर जो इलेक्ट्रिकल,
ऑप्टिकल या रेडियो सिग्नल के थ्रू डेटा भेजता है इन द फॉर्म ऑफ़ बिट्स। सेकंड इज़ अ डेटा लिंक लेयर व्हिच इज़ रिस्पांसिबल फॉर
हॉप टू हॉप डिलीवरी यूजिंग फिजिकल एड्रेसिंग लाइक मैक एड्रेसेस। थर्ड इज़ नेटवर्क लेयर जो एंड टू एंड कम्युनिकेशन
करते हैं बिटवीन द होस्ट अक्रॉस द नेटवर्क्स यूजिंग IPपी एड्रेसेस। नेक्स्ट इज ट्रांसपोर्ट लेयर जो एंड टू एंड
कम्युनिकेशन करते हैं बिटवीन द एप्लीकेशनेशंस यूजिंग पोर्ट नंबर्स। नेटवर्क लेयर भी एंड टू एंड कम्युनिकेशन
करता है बट बिटवीन द होस्ट यूजिंग द IPपी एड्रेस कि इस डिवाइस से उस सर्वर को कनेक्ट करना है। इस डिवाइस का IPपी एड्रेस
ये है। उस सर्वर का आईपी एड्रेस वो है। ट्रांसपोर्ट लेयर उसके एक स्टेप आगे जाके प्रोवाइड्स एंड टू एंड कम्युनिकेशन बिटवीन
एप्लीकेशन। टॉप मोस्ट लेयर इज़ अ एप्लीकेशन लेयर। तो उसमें अलग-अलग प्रोटोकॉल्स होते हैं जिनके थ्रू हम एप्लीकेशन से बात कर
सकते हैं। अभी TCP आईपी वर्क कैसे करता है वो समझते हैं एक प्रैक्टिकल एग्जांपल से। मैं आपको गारंटी देता हूं अगर ये एग्जांपल
आपने अच्छे से समझ लिया तो आपके जो भी सारे डाउट्स हैं रिगार्डिंग TCP आईपी, ओएसआई मॉडल्स वो सारे क्लियर हो जाएंगे
थ्रू दिस सिंगल एग्जांपल। सपोज़ आप Chrome ब्राउज़र यूज़ कर रहे हो सर्वर से बात करने के लिए एज अ यूजर। Google के ही आप कोई
सर्विसेस अगर एक्सेस कर रहे हो जैसे कि YouTube हो गया या ईमेल हो गया आप उनसे बात कर रहे हो तो आपको ऑब्वियसली Google
के सर्वर के साथ कनेक्ट करना पड़ेगा। ये जो एप्लीकेशनेशंस है जो एक दूसरे से बात करते हैं दैट ऑपरेट्स ऑन द एप्लीकेशन
लेयर। दिस इज अ एप्लीकेशन लेयर जिसके थ्रू Chrome एप्लीकेशन जो है वो YouTube सर्वर से और मेल सर्विज से बात कर पा रहा है। अब
ये जो Google के सर्वर्स है ये बहुत सारी सर्विज रन कर रहे होंगे। ईमेल सर्विसिंग हो सकती है। Google डॉक्स हो सकते हैं।
YouTube रिलेटेड सर्विज हो सकती है। Chrome से जब मैं YouTube से बात कर रहा हूं तो मुझे YouTube सर्वर से रिस्पांस
चाहिए। जब मैं ईमेल रिलेटेड कुछ टास्क हैंडल कर रहा हूं तो मुझे ईमेल सर्विसेस से इंटैक्ट करना है। यह जो ट्रांसपोर्ट
लेयर है यह पोर्ट नंबर्स का यूज़ करता है एंड टू एंड कम्युनिकेशन के लिए। सपोज YouTube के सर्वर्स ऑन पोर्ट 443 व्हिच इज
यूज्ड फॉर HDPS वहां पे रन कर रहे हैं। एंड मेलिंग सर्विस के लिए एसएमटीपी प्रोटोकॉल होता है जो कि पोर्ट 25 पे रन
करता है। वहां पे ये ईमेल सर्विज रन कर रही है। तो ट्रांसपोर्ट लेयर हमें एंड टू एंड डिलीवरी देता है। बट नाउ इस यूजर के
थ्रू हमें डाटा भेजना है इस Google के सर्वर के पास। Google के डेटा सेंटर्स के पास। तो वो भेजे कैसे? हां जाने के बाद
क्या करना है वो मुझे ट्रांसपोर्ट लेयर बता रहा है। बट वो भेजना कैसे है वो बताता है इंटरनेट लेयर। फॉर एग्जांपल यूजर का
एड्रेस है 192.0.1 एंड Google सर्वर का एड्रेस है यह 142.25.0
ये जो इंटरनेट लेयर है ये हमें इस एड्रेस से उस एड्रेस में पैकेट्स भेजने में हेल्प करता है। नेक्स्ट लेयर इज़ डेटा लिंक लेयर
जिसमें हॉप टू हॉप ट्रांसफर होता है। फॉर एग्जांपल ये जो यूजर है वो स्विच के थ्रू राउटर वन से कनेक्टेड है। एंड फिर ये
राउटर अलग-अलग राउटर से कनेक्टेड हो के फाइनली एक राउटर टू नाम से एक राउटर है व्हिच इज क्लोजर टू द Google सर्वर। फिर
वो Google सर्वर उसको स्विच के थ्रू कनेक्टेड है वाया इथरनेट डेटा लिंक लेयर है वो हमें फिजिकल एड्रेसिंग के थ्रू हॉप
टू हॉब ट्रांसफर में हेल्प करता है यहां से इस राउटर में इस राउटर से इस राउटर के थ्रू फिर फाइनली यहां Google के सर्वर पे
यूजिंग मैक एड्रेसेस ये सब होने के बाद जो फ्रेम है वो पहुंचती है फिजिकल लेयर के तरफ और ये सब डिवाइसेस है वो एक दूसरे से
फिजिकली कनेक्टेड रहते हैं वाया फिजिकल मीडियम सो दिस इज द कंप्लीट पिक्चर ऑफ टीसीपीआईपी कैसे काम करता है इन रियल
वर्ल्ड इन द एप्लीकेशन लेयर हमारे पास जो डेटा होता है हम उसको इंक्रिप्ट करते हैं कंप्रेस करते हैं एंड फिर ट्रांसलेट करा
के हम ट्रांसपोर्ट लेयर के पास वो डेटा को भेजते हैं। ट्रांसपोर्ट लेयर उसको इनकैप्सुलेट करता है विथ लेयर फ़ॉर हेडिंग।
सोर्स पोर्ट नंबर, डेस्टिनेशन पोर्ट नंबर। यह जो पूरा सेगमेंट है, वह जाता है नेटवर्क लेयर के पास। नेटवर्क लेयर उसको
और लेयर थ्री का हेडर ऐड करता है जिसमें लॉजिकल एड्रेसिंग होती है। आईपी एड्रेसेस होते हैं। वो और एक लेवल का इनकैप्सुलेशन
हो गया। डेटा लिंक क्लियर भी उसको इनकैप्सुलेट करता है और वो इनकैप्सुलेशन दोनों साइड से करता है। फॉर एग्जांपल वो
स्टार्टिंग में हेडर भी ऐड करता है एल टू हेडर और एल2 का एक ट्रेलर भी ऐड करता है। एट द लास्ट इस फ्रेम का बिट्स में कन्वर्ट
करते हैं इनकोडिंग के थ्रू। यही सेम प्रोसेस इन रिवर्स डायरेक्शन होती है ऑन द सर्वर साइड ऑन द रिसीवर साइड। इसको
डीकैप्सुलेशन बोला जाता है। जैसे कि वहां फ़िज़िकल लेयर पे बिट्स पहुंचती है। फिर डाटा लिंक लेयर उनसे फ्रेम जनरेट कराता
है। डाटा लिंक लेयर इसको डीकैप्सुलेट करा के जो लेयर टू के हेडर और ट्रेलर है वो हटा के नेटवर्क लेयर के पास भेजता है।
नेटवर्क लेयर अपना जो L3 हेडर है उसको रिमूव करते हैं और वो [गला साफ़ करने की आवाज़] आगे जाता है।
फिर ऐसे डीकैप्सुलेट होते-होते फाइनली वी गेट द रॉ डेटा। यह जो डेटा है वो अलग-अलग लेवल पे अलग-अलग फॉर्मेट में होता है। इसी
को हम पीडीयू कहते हैं। प्रोटोकॉल डेटा यूनिट। सेगमेंट को या डाटाग्राम को आप लेयर फोर पीडीयू बोल सकते हो। पैकेट जो
लेयर थ्री में होता है डाटा का उसको आप लेयर थ्री पीडीयू बोल सकते हो। फ्रेम को आप लेयर टू पीडीयू बोल सकते हो। इंस्टेड
ऑफ़ गिविंग देम नेम्स लाइक सेगमेंट पैकेट और फ्रेम हम उसको लेयर टू पीडीयू, लेयर थ्री पीडीयू, लेयर फोर पीडीयू ऐसे बुला
सकते हो। ये जो प्रोटोकॉल डेटा यूनिट्स हैं, इनके कंटेंट्स को हम लोग पेलोड कहते हैं। और ये पेलोड अलग-अलग लेयर पे अलग-अलग
होता है। फॉर एग्जांपल इन केस ऑफ़ सेगमेंट, पेलोड इज़ अ एप्लीकेशन डेटा। इन केस ऑफ़ पैकेट, पेलोड इज़ अ सेगमेंट और डेटाग्राम
इटसेल्फ एंड इन केस ऑफ़ फ्रेम पेलोड क्या होता है? पूरा पैकेट ही आईपी पैकेट ही पेलोड होता है। दैट्स ऑल अबाउट TCP आईपी
प्रोटोकॉल। अभी हमने देखा TCP आईपी प्रोटोकॉल के थ्रू डिवाइसेस कैसे एक दूसरे से कम्युनिकेट करते हैं? बट कुछ
इंपॉर्टेंट सवाल है। जब वो रिस्पांस भेज रहे हैं या रिक्वेस्ट भेज रहे हैं तो कैसे भेजते हैं? सिंगल डिवाइस को भेजते हैं,
मल्टीपल डिवाइसेस को भेजते हैं या स्पेसिफिक ग्रुप ऑफ डिवाइसेस को भेजते हैं या नियरेस्ट डिवाइस को भेजते हैं। यह जो
सारे सिचुएशन है, यह सेम नहीं है। ऑल दीज़ आर डिफरेंट थिंग्स और इनको डिफरेंट तरीके से हैंडल किया जाता है। देयर आर फोर वेज़
ऑफ़ एसएस डिलीवरी। यूनकास्ट, ब्रॉडकास्ट, मल्टीकास्ट, यूनिकास्ट। यूनकास्ट मतलब वन टू वन। जैसे कोई Netflix की स्ट्रीम चल
रही है या आप आपके क्लाउड सर्वर को एक्सेस कर रहे हैं वाया एसएसएस प्रोटोकॉल। दैट इज वन टू वन थिंग। ब्रॉडकास्ट मींस वन टू ऑल।
फॉर एग्जांपल आप सभी का एक फैमिली ग्रुप होता है जिसमें एक अंकल होते हैं। वह सुबह-सुबह सुप्रभात का मैसेज सभी परिवार
को फॉरवर्ड कर देते हैं। तो वह ब्रॉडकास्ट हो जाता है। नेक्स्ट इज मल्टीकास्ट वन टू स्पेसिफिक ग्रुप। फॉर एग्जांपल YouTube पे
मेंबर्स ओनली लाइव स्ट्रीम का फीचर है। तो अगर आप उस चैनल के मेंबर हो एंड दैट लाइव स्ट्रीम इज पैक्ड एज अ मेंबर ओनली तो आप
उनको देख सकते हो। दैट इज वन टू स्पेसिफिक ग्रुप एंड लास्ट वन इज़ एनी कास्ट। वन टू नियरेस्ट। यूनकास्ट, ब्रॉडकास्ट,
मल्टीकास्ट ये समझने में इजी है। एनी कास्ट को थोड़ा और अच्छे से समझते हैं। बहुत इंटरेस्टिंग है बट लेस अंडरस्टुड।
लाइक यू गाइस आप भी इंटरेस्टिंग इंसान हो बट आपको बहुत ही कम लोग समझ पाते हैं। ना फैमिली, ना फ्रेंड्स। कमिंग टू द टॉपिक।
एनी कास्ट से क्या होता है? मल्टीपल सर्वर्स अराउंड द वर्ल्ड शेयर द सेम आईपी एड्रेस। और फिर अगर हम उस IPपी एड्रेस को
एक्सेस करना चाहेंगे जो नियर बाय सर्वर होगा वहां रिक्वेस्ट जाती है। हम लोग डीएनएस के एग्जांपल के थ्रू इसको समझते
हैं। सो जब भी आप टाइप करते हो डोमेन नेम लाइक chco.com तो chco.com नाम से कोई सर्वर तो है नहीं। सर्वर्स के तो IPपी
एड्रेस होते हैं। तो chco.com ये जो डोमेन है ये कौन से सर्वर को मैप्ड है वो चेक करने के लिए डीएनएस प्रोटोकॉल यूज़ किया
जाता है। और फिर हम डीएनएस रिजॉल्वर के पास ये क्वेरी भेज देते हैं। ये जब क्वेरी जब जाती है वो एनी कास्ट एड्रेस पे जाती
है। इन द एंटायर वर्ल्ड कुछ पॉपुलर डीएनएस रिज़ॉल्वर्स है। Google के है क्लाउड फेयर के है। लेट्स टेक एग्जांपल ऑफ़ क्लाउड
फेयर। क्लाउड फेयर का डीएनएस रिजॉल्वर है 11.1.1.1 पे। ये सिंगल एड्रेस पे साइमलटेनियसली 100्स ऑफ सर्वर्स होस्टेड
होते हैं अक्रॉस एंटायर वर्ल्ड। तो जब आप क्वेरी करते हो मुंबई में तो मुंबई के आजू-बाजू में जो सर्वर है होस्टेड इस आईपी
पे वहां डीएनएस वाली क्वेरी भेजी जाती है। आईपी तो सेम है बट डिफरेंट-डिफरेंट फिजिकल मशीनंस उसको यूज़ कर रहे हैं। जो नजदीक
वाला है वहां रिक्वेस्ट चली जाती है। ये है एनी कास्ट। कांग्रेचुलेशंस टू ऑल ऑफ यू। हमने सेकंड पड़ाव भी पार कर लिया है।
जहां हमने लैंग्वेज ऑफ कम्युनिकेशन के बारे में सीखा। फर्स्ट हमने नेटवर्क मॉडल्स का नीड समझा कि क्या नीड थी और फिर
कैसे उनको लाया गया और यह स्टैंडर्ड्स कौन डिफाइन करता है। फिर ओएसआई मॉडल हमने देखा। उसके सेवन लेयर्स देखे एंड टू एंड
डेटा कैसे जाता है डेटा? कौन-कौन से फॉर्म में होता है वो देखा। टीसीपीआईपी मॉडल को समझा प्रैक्टिकल एग्जांपल के थ्रू। देन वी
सॉ इनकैप्सुलेशन प्रोसेस, डीकैप्सुलेशन प्रोसेस। उसके बाद हमने मैसेज डिलीवरी के चार ऑप्शंस देखे। यूनिकास्ट, ब्रॉडकास्ट,
मल्टीकास्ट एंड एनीकास्ट। इन फर्स्ट चैप्टर वी कवर्ड नेटवर्किंग फंडामेंटल्स। देन हमने नेटवर्किंग के मॉडल कवर किए। अभी
अगले चैप्टर में हम लोग नेटवर्किंग डिवाइसेस के बारे में जानेंगे। अलग-अलग लेयर में वह कैसे ऑपरेट करते हैं। आई विल
सी यू इन द नेक्स्ट चैप्टर। वेलकम टू द थर्ड चैप्टर ऑफ कंप्यूटर नेटवर्किंग बूट कैंप व्हिच इज अबाउट
नेटवर्क डिवाइसेस। जहां हम इंटरनेट के पीछे कौन-कौन से मशीनंस डिवाइसेस काम करते हैं, उसके बारे में समझेंगे। सबसे पहले
एनआईसी। एनआईसी स्टैंड्स फॉर नेटवर्क इंटरफेस कार्ड। जो भी डिवाइसेस इंटरनेट के थ्रू एक दूसरे से कम्युनिकेट करते हैं उन
सभी के अंदर एनआईसी होता है। तो चाहे वो आपका लैपटॉप हो, आपका फोन हो, Google के सर्विस हो, Amazon के सर्विस हो, मेटा के
सर्विस हो, आपका स्मार्ट टीवी हो, स्मार्ट प्रिंटर हो, रेफ्रिजरेटर हो। अगर वो इंटरनेट से कम्युनिकेट कर रहा है तो उनके
अंदर एनआईसी है। जो पुराने सिस्टम्स कंप्यूटर्स होते थे उनमें एनआईसी एज अ सेपरेट कंपोनेंट आता था जो मदरबोर्ड में
हम प्लग करते थे वि द हेल्प ऑफ दिस गोल्डन पिंस। बट आजकल एनआईसी कार्ड मदरबोर्ड के अंदर ही बिल्ट इन होता है एज अ सिंगल
एंटिटी। एनआईसी के दो टाइप्स होते हैं। एक वायर्ड एनआईसी एंड सेकंड इज वायरलेस एनआईसी। वायर्ड एनआरसी हमें इथरनेट पोर्ट
प्रोवाइड करता है जिसमें हम लैंड केबल्स की मदद से फिजिकली इंटरनेट से कनेक्ट कर सकते हैं। दूसरा है वायरलेस एनआईसी जिसको
हम वायरलेस अप्टर भी बोलते हैं। ये रेडियो सिग्नल्स के थ्रू इंटरनेट से कम्युनिकेट करता है। हमारे जो लैपटॉप से फोन से जो
वाई-फाई से कनेक्ट होते हैं वाई-फाई टेक्नोलॉजी से ये वायरलेस एनआईसी प्रोवाइड करता है। मोस्ट मॉडर्न डिवाइसेस में ये
दोनों प्रकार के एनआईसीस होते हैं। इन प्रीवियस चैप्टर हम जब ओएसआई मॉडल पढ़ रहे थे तब हमने एनआईसी और मैक के बारे में
डिस्कशन किया था। एव्री एनआईसी कार्ड हैज़ यूनिक एड्रेस। उसको मैक एड्रेस बोलते हैं। मैक स्टैंड्स फॉर मीडिया एक्सेस कंट्रोल।
जब भी डिवाइसेस एक दूसरे से कम्युनिकेट करते हैं तो मैक एड्रेस उनको यूनिकली आइडेंटिफाई करता है। एनआईसी जो है वो बोथ
लेयर्स पे ऑपरेट करता है। लेयर वन पे भी एंड लेयर टू पे भी। लेयर वन पे फिजिकली डेटा सेंड करता है, रिसीव करता है। एंड
लेयर टू बिकॉज़ इट डील्स विद अ मैक एड्रेस। चलिए हम अभी समझते हैं कि आप अपने डिवाइस का यूनिक मैक एड्रेस कैसे जान पाओगे। अगर
आपके पास Mac OS है तो आप टर्मिनल खोल के यह कमांड रन कर सकते हो। आईएफ कॉन्फिग EN0 P ग्रे ईथर ये कमांड आप रन करने के बाद
आपको मैक एड्रेस दिखाई देगा। अगर आप Windows यूजर हो तो आप पावरशेल एप्लीकेशन ओपन करके वहां गेट मैक नाम की कमांड रन कर
सकते हो। आपको आपका मैक एड्रेस मिल जाएगा। मैक एड्रेस एक यूनिक आइडेंटिफायर है। हालांकि वह बैंक अकाउंट पासवर्ड जितना
सेंसिटिव नहीं है बट प्राइवेसी एंड सिक्योरिटी के चलते उसको पब्लिकली एक्सपोज करना भी सही नहीं है। अगला डिवाइस है हब।
अभी हमने देखा कि सभी डिवाइस एक दूसरे से कनेक्टेड होते हैं इंटरनेट पे वि द हेल्प ऑफ एनआईसी। जब मल्टीपल डिवाइसेस को एक
दूसरे से कम्युनिकेट करना है तो उनको एक दूसरे से कनेक्ट भी करने की जरूरत होती है। तो वो कनेक्शन हम हब के थ्रू करते
हैं। हब ऐसा दिखता है आप देख सकते हो उसमें लिमिटेड नंबर ऑफ पोर्ट्स होते हैं। एंड वो उनमें ब्रॉडकास्ट करता है सिग्नल
बट वो रिमेंबर नहीं करता कि ये जो डिवाइस वन है उन्होंने डिवाइस फिफ्थ को भेजा है या सिक्स्थ को भेजा है। एज इट डज़ नॉट डील
विद मैक एड्रेस। यह एक लेयर वन डिवाइस है। फिजिकल लेयर पे ही काम करता है। अगला डिवाइस है ब्रिज। ब्रिज में भी नंबर ऑफ़
पोर्ट्स लेस होते हैं। बट वो ऑपरेट करता है लेयर टू पे। जैसे ही लेयर टू यहां आ जाती है इक्वेशन में आपको मैक एड्रेस की
याद आनी चाहिए। तो ब्रिज मैक एड्रेसेस को लर्न करता है और अकॉर्डिंग टू दैट राउटिंग करता है जिससे हमारी बैंडविड्थ भी सेव
होती है। इंस्टेड ऑफ़ ब्रॉडकास्टिंग जिस डिवाइस को मैसेज भेजा था वो उसी डिवाइस के पास पहुंच जाता है। अभी ब्रिजेस में भी एक
दिक्कत यह है कि उनमें फ्यू पोर्ट्स होते हैं। जैसे आप यह देख सकते हो ब्रिज ऐसा दिखता है। अगर डायग्रामेटिकली समझे तो यह
एक लोकल नेटवर्क है। यह सेकंड लोकल नेटवर्क है। इनमें मल्टीपल डिवाइसेस हब से कनेक्टेड है। सेकंड में भी सेम है। इन
दोनों को ब्रिज से कनेक्ट किया जाता है। सो ये जो पूरा लोकल नेटवर्क है इट विल एक्ट्स एज अ सिंगल नेटवर्क। स्विच ब्रिज
का सक्सेसर माना जाता है। तो ब्रिज में जोज लिमिटेशंस थी वो स्विच एड्रेस करता है। फर्स्ट नंबर ऑफ पोर्ट्स जिसमें 8 16
24 और ज्यादा भी पोर्ट होते हैं। 96 पोर्ट्स के भी स्विच आते हैं। स्विच ऐसा दिखता है आप देख सकते हो। लाइक ब्रिज
स्विच आल्सो ऑपरेट्स ऑन डेटा लिंक लेयर। तो वो मैक एड्रेसेस के थ्रू एफिशिएंट राउटिंग करता है। बैंडविड्थ सेव करता है
इंस्टेड ऑफ़ ब्रॉडकास्टिंग। यह जो स्विच है, इट इज़ अ कॉम्बिनेशन ऑफ़ हब एंड ब्रिज। [गला साफ़ करने की आवाज़] तो, हम स्विच से
अलग-अलग डिवाइसेस कनेक्ट कर सकते हैं। राउटर, पीसी, आईपी कैमराज़, डिफरेंट-डिफरेंट फायर वॉल्स, फ़स,
प्रिंटर्स, सर्वसर्स यूजिंग स्विच हम बिग नेटवर्क्स डिजाइन कर सकते हैं। नेक्स्ट डिवाइस इज़ राउटर। राउटर दो नेटवर्क्स को
कनेक्ट करने में हेल्प करता है। सी, डोंट गेट कंफ्यूज्ड विद Bridge। Bridge जो है वो दो लोकल नेटवर्क्स को कनेक्ट करने में
हेल्प करता है। सो दैट दे विल एक्ट एज़ अ सिंगल नेटवर्क। बट राउटर जो है वह मल्टीपल नेटवर्क्स को कनेक्ट करने में हेल्प करता
है। अभी मल्टीपल नेटवर्क्स मतलब लाइक हमारे घर का एक नेटवर्क है। इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर्स हम जिनसे लेते हैं
Jio, Airtel उनका अलग नेटवर्क है। फिर जहां हम रिक्वेस्ट भेजना चाहते हैं Google, Amazon इनके जो सर्वर्स हैं उनका
अलग नेटवर्क है। राउटर इन्हीं सभी नेटवर्क को कनेक्ट करने का काम करता है। मॉडर्न राउटर्स ऐसे दिखते हैं। राउटर लेयर 4 पे
ऑपरेट करता है। तो वो मैक एड्रेसेस को रीड कर सकते हैं। एंड जब उनके पास डेटा आता है उस डेटा में डेस्टिनेशन का आईपी एड्रेस
होता है। राउटर में एक राउटिंग टेबल होता है। यूजिंग दिस राउटिंग टेबल राउटर इस पैकेट को बेस्ट पाथ से डेस्टिनेशन तक
पहुंचाता है। यह जो डेस्टिनेशन है डायरेक्ट डेस्टिनेशन के पास नहीं जाता। बीच में अलग-अलग राउटर्स होते हैं। इस
पूरे प्रोसेस को हॉप बाय हॉप राउटिंग कहा जाता है। हॉप बाय हॉप। यहां से यहां, यहां से यहां, यहां से यहां फिर डेस्टिनेशन तक।
नेक्स्ट डिवाइस इज़ मोडेम। मॉडेम ये जो नाम है ये दो प्रोसेस से मिलके बना है। फर्स्ट इज मॉड्यूलेशन सेकंड इज डीमोड्यूलेशन।
मॉड्यूलेशन मतलब जो डिजिटल सिग्नल है जीरो वन के फॉर्मेट में डिजिटल डेटा है इनको सिग्नल्स में कन्वर्ट करना। एंड
डीमोड्यूलेशन मतलब उसका उल्टा एग्जैक्ट रिवर्स उन्हीं सिग्नल्स को डिजिटल डेटा में कन्वर्ट करना। अगर आप यह डायग्राम
देखोगे तो इनमें यहां आप देख सकते हो कि इंटरनेट से जो सिग्नल आता है मॉडेम एक्ट्स एज अ ट्रांसलेटर फिर वो राउटर से थ्रू
हमारे सिस्टम्स पे पहुंचता है। अभी आप सोच रहे होंगे कि जब हमने इंटरनेट कनेक्शन लिया है तो हमें बस राउटर आया है। हमें
कहीं मोम आया नहीं तो ओ मेरे एरिया के लिए या मेरे सर्विस प्रोवाइडर सेंट्रल मोम यूज़ करते हैं क्या? तो आंसर इज़ नो। आजकल
राउटर्स आते हैं। दे आर कॉम्बिनेशन ऑफ़ राउटर प्लस मोम। इंस्टेड ऑफ गिविंग यू टू डिवाइसेस आपके इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर
में दोनों को कंबाइन करके दे दिया। तो राउटर ही मॉड्यूलेशन डीमोड्यूलेशन का प्रोसेस कर लेता है। नेक्स्ट डिवाइस इज
गेटवे। अब ये जो गेटवे है ना यह नेटवर्किंग, डेवोप्स एंड क्लाउड की दुनिया में बहुत फ्रीक्वेंटली यूज़ किए जाने वाली
टर्म है। इनका मीनिंग कॉन्टेक्स्ट टुल कॉन्टेक्स्ट अलग होता है। इन द कॉन्टेक्स्ट ऑफ़ कंप्यूटर नेटवर्किंग।
गेटवे दो नेटवर्क को कनेक्ट करता है जो डिफरेंट प्रोटोकॉल्स यूज़ करते हैं एंड उनमें ट्रांसलेशन का भी काम करता है। फॉर
एग्जांपल यह आपका नेटवर्क है। यह एक्सटर्नल नेटवर्क है। गेटवे बीच में ट्रांसलेट का काम करता है। एज अ नेम
सजेस्ट गेटवे। गेटवे एक एंट्री एंड एग्जिट प्रोवाइड करता है। आप एक टर्म बहुत बार सुनोगे डिफॉल्ट गेटवे। डिफॉल्ट गेटवे मतलब
आपका जो राउटर है उसका आईपीए। दैट इज द एग्जिट पॉइंट फ्रॉम योर लोकल नेटवर्क टू आउटसाइड वर्ल्ड। नेक्स्ट इज़ आईएसपी।
आईएसपी स्टैंड्स फॉर इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर। अब जैसे आप सब लोग कॉलेज में हो तो आपके कॉलेज के अलग-अलग टियर्स होते
हैं। टिए वन, टिएर टू, टिए थ्री, टिएर 100 तो वैसे ही आईएसपी में अलग-अलग टियर्स होते हैं। टिए वन में जो इंटरनेट सर्विस
प्रोवाइडर आते हैं वो बिग शॉट्स होते हैं। लाइक Tata कम्युनिकेशंस, एटीएटी, एनटीटी जो क्या करते हैं? मैसिव इंफ्रास्ट्रक्चर
प्रोवाइड करते हैं जो कोस्टल लेंस में उनके प्रॉपर डाटा सेंटर्स होते हैं। फिर वहां से वो जो सबमरीन केबल्स दिखती है तो
कुछ-कुछ सबमरीन केबल वो खुद ओन करते हैं। उसका एक्सपेंसेस बेयर करते हैं। दीज़ आर टिए वन सर्विस प्रोवाइडर्स। टिए टू जो है
वो रीजनल सर्विस प्रोवाइडर्स है। फॉर एग्जांपल इंडिया में Jio है, Airtel है, BSNL है। यह जो टिए टू सर्विस प्रोवाइडर
है वो टिएर वन से एक्सेस लेते हैं और फिर हमें इंटरनेट का सुविधा प्रोवाइड करते हैं। उसके बाद टिए थ्री। Airtel, Jio अभी
ऑलमोस्ट इंडिया में सभी जगह पहुंच रहा है। बट आपको याद होगा या और भी ऐसे कुछ प्लेसेस हैं जहां अभी तक इनकी सर्विज
पहुंची नहीं। तो वहां लोकल इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर होते थे। तो वो लोग लोकली अपना सेटअप करके इक्विपमेंट्स करके टियर टू
आईएसपी से सर्विसेस बाय करते थे और फिर हमें वो आगे बेचते थे थ्रू देयर इंफ्रास्ट्रक्चर। नेक्स्ट डिवाइस इज़ फायर
वॉल। सपोज आपके पास एक डेस्कटॉप है, लैपटॉप है और ये दोनों एक दूसरे से स्विच से कनेक्टेड है स्विच वन। यह जो स्विच है,
यह इंटरनेट से कनेक्टेड है यूजिंग राउटर और R1 ऑन द अदर साइड कुछ सर्वर्स है वह भी एक दूसरे से स्विच से कनेक्टेड है फिजिकली
एंड स्विच इंटरनेट से कनेक्टेड है थ्रू राउटर R2। अब यहां कुछ अटैकर्स हैकर्स विद प्रॉपर सेट ऑफ टूल्स एंड नॉलेज। हमारी जो
ट्रैफिक है उसको इंस्पेक्ट कर सकते हैं और हमारी जो सेंसिटिव इंफॉर्मेशन है उसमें वो छेड़खानी कर सकते हैं। अनऑथराइज्ड एक्सेस
करने का प्रयत्न कर सकते हैं। तो टू टैकल ऑल ऑफ दिस वी यूज़ फायर वाल्स जिसमें हम कुछ रूल्स लिखते हैं वो उस रूल्स के हिसाब
से ट्रैफिक को फिल्टर करती है। फायर वाल्स भी दो तरीके से सेट की जा सकती है। फर्स्ट इज़ आउटसाइड द नेटवर्क। जैसे ये फायर वाल
वन है। सेकंड इज़ इनसाइड द नेटवर्क। जैसे दिस फायर वॉल टू इज़ इनसाइड द नेटवर्क। यह जो नेटवर्क है R2 जिससे कनेक्टेड है उस
नेटवर्क के अंदर हमने यूजिंग फायर वॉल हम ट्रैफिक को मॉनिटर कर सकते हैं, कंट्रोल कर सकते हैं। अभी हमने देखा फायर वाल को
हम नेटवर्क के अंदर लगा सकते हैं, नेटवर्क के बाहर लगा सकते हैं। दो तरीके की फायर वाल होती है। नेटवर्क फायर वाल एंड होस्ट
बेस्ड फायर वॉल। नेटवर्क फायर वायरल जो होती है दैट इज हार्डवेयर डिवाइस जो ट्रैफिक फिल्टर करने में हेल्प करता है।
होस्ट बेस्ड फायर वॉल आर सॉफ्टवेयर बेस्ड फायर वाल वी जस्ट लर्न मल्टीपल डिवाइसेस जो अलग-अलग लेयर पे ऑपरेट करते हैं एंड
होस्ट जो है जो क्लाइंट है सर्वर है वो इन डिवाइसेस के थ्रू एक दूसरे से कम्युनिकेट करते हैं। वो जो कम्युनिकेशन है वो एंड टू
एंड कम्युनिकेशन कैसे होता है उसके बारे में हम समझते हैं। इट बेसिकली इनवॉल्व्स टू लेयर्स लेयर टू लेयर थ्री मैक एड्रेसेस
एंड IPपी एड्रेसेस लेट्स टेक एग्जांपल ऑफ़ Mac एड्रेसेस। आई हैव अ iPhone iPhone से मुझे MacBook में कुछ भेजना है और यह
दोनों चीजें एक नेटवर्क में कनेक्टेड है वायरलेसली यूजिंग Wi-Fi। मेरे पास इस Wi-Fi से और भी चीज कनेक्टेड हो सकती है।
आईपैड है या आईMAC है। ऐसी मल्टीपल चीजें कनेक्ट हो सकती है। इस फोन से जो डाटा भेजना है मैं वो ब्रॉडकास्ट करता हूं वि
Mac एड्रेस। यह जो मैसेज है वह सभी के पास जाता है और जिनका मैक एड्रेस मैच नहीं हुआ वह उसको रिजेक्ट कर देते हैं एंड फाइनली
वह फिर डेस्टिनेशन तक पहुंचता है। अब यह लोकल नेटवर्क पे ठीक है बट दिस इज नॉट गुड कि हम पब्लिक नेटवर्क पे कहीं डेटा एक
दूसरे को ब्रॉडकास्ट करें। वो सिक्योरिटी वाइज भी ठीक नहीं और बैंडविड्थ भी बहुत कंज्यूम होती है। टू सॉल्व दिस प्रॉब्लम
IPपी एड्रेसेस व इंट्रोड्यूस्ड। IP एड्रेस हमें क्या करते हैं? डिफरेंट नेटवर्क्स में डेटर आउट करने में हेल्प करते हैं।
उनके दो पार्ट्स होते हैं। फर्स्ट इज नेटवर्क एंड सेकंड इज़ होस्ट पार्ट। नेटवर्क पार्ट हमें नेटवर्क एड्रेस फाइंड
आउट करने में मदद करता है। एंड उस नेटवर्क में कौन सा होस्ट है वह होस्ट वाला पार्ट हमें बताता है। बट हमें स्टिल मैक
एड्रेससेस की जरूरत होती है। राउटिंग का एक एग्जांपल समझते हैं कैसे होता है। एक होस्ट है ए उनको होस्ट बी से बात करनी है।
होस्ट ए का एड्रेस है 192.168.1.1 होस्ट बी का एड्रेस है 10.5.3.2 होस्ट बी का एड्रेस देख के राउटर को पता
चल गया कि दिस इज नॉट इनसाइड द नेटवर्क। होस्ट ए अपने राउटर से कनेक्टेड होगा। होस्ट बी राउटर के थ्रू इंटरनेट से
कनेक्टेड होगा। तो यह अलग नेटवर्क है। यह अलग नेटवर्क है। तो राउटर क्या करता है? यह पैकेट्स जो है वो सेंड करता है
एप्रोप्रियट नेटवर्क एंड वो फिर इवेंचुअली बी तक पहुंचता है। तो हमने अभी तक दो चीजें देखी। मैक एड्रेसिंग से डेटा कैसे
ट्रांसफर होता है? ब्रॉडकास्ट होता है जिसका मैक एड्रेस है वो एक्सेप्ट कर लेता है या अगर स्विच से कनेक्टेड हो तो स्विच
इंटेलिजेंटली उस मैक एड्रेस पे डाटा भेज देता है। अगर हमें अक्रॉस द नेटवर्क्स बात करनी है तो हम IP एड्रेसेस यूज करते हैं।
और IP एड्रेसेस में जो नेटवर्क वाला पार्ट है उससे हम उस नेटवर्क को भेजते हैं। दैट इज अ डिफॉल्ट गेटवे राउटर। और फिर राउटर
उसका जो होस्ट वाला पार्ट है उसको देख के उस पर्टिकुलर होस्ट के पास डाटा पहुंचाता है। बट उस होस्ट पे मल्टीपल चीजें रन कर
रही होगी। यहां काम आते हैं पोर्ट नंबर्स। पोर्ट नंबर्स क्या करते हैं? हमें बताते हैं कि कौन सी सर्विस कौन से एप्लीकेशन को
हमें यह डाटा देना है। दीज़ आर सम स्टैंडर्ड पोर्ट पोर्ट 80 HTP पोर्ट 22 एसएसएच पोर्ट 53 डीएनएस। फॉर एग्जांपल
होस्ट ए होस्ट बी से HTP एस पे बात कर रहा होगा तो वो पोर्ट 443 पे जाएगी। होस्ट टू होस्ट कम्युनिकेशन की अगर समरी देखें तो
पहले हम मैक एड्रेस यूज़ करते हैं फॉर लोकल कम्युनिकेशन व्हिच इज़ लेयर टू थिंग। अगर हमें डिफरेंट अक्रॉस द नेटवर्क बात करनी
है तो वी यूज़ आईपी एड्रेसेस लेयर थ्री एंड फिर एंड टू एंड कम्युनिकेशन में पोर्ट नंबर यूज़ करते हैं व्हिच इज लेयर फोर
थिंग। तो इस प्रकार मैक एड्रेसेस आईपी एड्रेसेस एंड पोर्ट नंबर से एक होस्ट दूसरे होस्ट से बात कर सकता है। एंड दैट्स
ऑल अबाउट नेटवर्क डिवाइसेस। कांग्रेचुलेशंस हमने थर्ड चैप्टर भी कंप्लीट कर लिया है। जहां हमने अलग-अलग
नेटवर्क डिवाइसेस पढ़े। वी स्टार्टेड फ्रॉम एनआईसी देन वी सॉ हब के बाद हमने ब्रिज स्विच के बारे में पढ़ा। देन राउटर के बारे
में पढ़ा। मोड एम क्या होता है? देखा गेटवेज क्या होते हैं वह देखा। उसके बाद हमने फायर वाल्स के बारे में पढ़ा।
इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर्स के बारे में पढ़ा। फिर होस्ट टू होस्ट कम्युनिकेशन कैसे होता है? यूजिंग मैक एड्रेस, IPपी
एड्रेस एंड पोर्ट नंबर हमने देखा। अगले चैप्टर में हम ये जो डाटा है राउटर से दूसरे राउटर तक जाता है। ये राउटिंग कैसे
होती है? IP एड्रेसेस क्या है? फिर नेटवर्क आइडेंटिफिकेशन कैसे होता है? ये सारी चीजें समझेंगे।
वेलकम टू द चैप्टर फोर ऑफ कंप्यूटर नेटवर्किंग बूट कैंप व्हिच इज अबाउट द नेटवर्क लेयर एंड आईपी एड्रेसिंग। जहां हम
इंटरनेट की दुनिया की एड्रेसिंग सिस्टम कैसे काम करती है? उसके बारे में समझेंगे। पिछले कुछ चैप्टर्स में हमने फिजिकल लेयर
एंड डेटा लिंक लेयर कैसे काम करते हैं? फिजिकल लेयर में एनआईसी कार्ड होता है। देन मॉड्यूलेशन डीमोड्यूलेशन की प्रोसेस
कैसे होती है? सबमरीन केबल्स के थ्रू डेटा कैसे जाता है? ओवर द इंटरनेट उसके बारे में समझा था। डेटा लिंक लेयर में मैक
एड्रेससेस कैसे काम करते हैं? फ्रेम्स क्या होती है? उसके बारे में समझा था। और लास्ट में होस्ट टू होस्ट कम्युनिकेशन के
बारे में बात की थी यूजिंग मैक एड्रेसेस आईपी एड्रेससेस एंड पोर्ट नंबर्स। जब हम मैक एड्रेसिंग सिस्टम के बारे में बात कर
रहे थे तब हमने उसका एक प्रॉब्लम आइडेंटिफाई किया था। दैट इज मैक एड्रेसेस आर गुड फॉर लोकल नेटवर्क। जब भी हम लोकल
नेटवर्क के बाहर मैन या वैन स्केल पे जाते हैं तब मैक एड्रेसेस काम के नहीं होते। बिकॉज़ हम मैक एड्रेस से डिवाइसेस को
आइडेंटिफाई नहीं कर सकते। ग्लोबल स्केल पे। टू टैकल दिस प्रॉब्लम। हमें एक डिफरेंट एड्रेसिंग सिस्टम की जरूरत थी जो
ग्लोबल स्केल पे काम करे और इन एड्रेसेस से कोई भी डिवाइस जो इंटरनेट से कनेक्टेड हो वो यूजिंग दिस एड्रेसिंग अपना डेटा भेज
पाए एंड दैट्स हाउ आईपी एड्रेसिंग सिस्टम वास डेवलप्ड। IP एड्रेस यानी इंटरनेट प्रोटोकॉल एड्रेस है वो एक यूनिक नंबर है
जो हर डिवाइस को हम असाइन करते हैं। जैसे हर डिवाइस के पास एनआईसी कार्ड होता है और एनआईसी कार्ड में मैक एड्रेस होता है फॉर
लोकल कम्युनिकेशन। वैसे ही ग्लोबल स्केल पे अगर कम्युनिकेट करना है किसी डिवाइस से, सिस्टम से तो उन्हें एक यूनिक आईपी
नंबर दिया जाता है। इस IPपी एड्रेस के दो पार्ट होते हैं। पहला पार्ट नेटवर्क पोर्शन डिफाइन करता है और दूसरा पार्ट
हमें होस्ट के बारे में जानकारी देता है। फॉर एग्जांपल एक एड्रेस लेते हैं 172.217.14.206
इसमें जो फर्स्ट टू नंबर्स है वो नेटवर्क आईडी रिप्रेजेंट कर रहे हैं। सेकंड टू नंबर्स होस्ट आईडी रिप्रेजेंट कर रहे हैं।
ये सब नेट मास्क से डिसाइड होता है। वो हम आगे जाके पढ़ेंगे कि कौन सा पार्ट नेटवर्क वाला है, कौन सा होस्ट वाला है। IP
एड्रेसेस के दो वर्जन है। IP वर्जन 4, IP वर्जन सिक्स। एक-एक करके दोनों को समझते हैं। IP वर्जन 4 एड्रेस ऐसे दिखता है
192.168.1.1 चार नंबर्स होते हैं सेपरेटेड बाय डॉट्स। ईच नंबर का एक ऑक्टेट होता है व्हिच
रेंजेस फ्रॉम 0 टू 255। ऑक्टेट मतलब एट बिट्स स्टोर कर सकता है। सारी बिट्स की वैल्यू अगर ज़ीरो होगी तो बाइनरी टू डेसिमल
कन्वर्शन करते हैं। वो आता है ज़ीरो। एंड अगर सारी बिट्स की वैल्यू वन होगी तो उसका हम जब डेसिमल में कन्वर्ज़ करते हैं तो वो
आता है 255। ऐसे चार ऑक्टेट्स होते हैं। तो 4 * 8 टोटल 32 बिट्स का IPपी एड्रेस होता है। इन 32 बिट्स में आइदर ज़ीरो रख
सकते हैं या वन रख सकते हैं। तो ऐसे पॉसिबल कॉम्बिनेशन बनते हैं 2:32 व्हिच गिव्स अस अराउंड 4.3 बिलियन IPपी वर्जन 4
एड्रेसेस। जब IP वर्जन 4 सिस्टम डिजाइन की गई थी 1983 में तब यह नंबर बहुत बड़ा लग रहा था। और किसी ने इमेजिन नहीं किया था
कि एक समय पे हमारे पास बिलियंस ऑफ स्मार्टफोनोंस, आईओटी डिवाइसेस, लैपटॉप्स, सर्वर्स उन सबको यूनिक एड्रेस लगेगा। इसी
प्रॉब्लम को टैकल करने के लिए 1998 में IP वर्जन सिक्स को इंट्रोड्यूस किया गया। IP वर्जन सिक्स के एड्रेसेस ऐसे दिखते हैं
जिनमें एट ग्रुप्स ऑफ हेक्साडेसीिमल्स होते हैं। सेपरेटेड बाय कोलंस। IP वर्जन 4 में चार ऑक्टल्स होते हैं। 4 * 8 32। यहां
एट हेक्साडेसीिमल्स होते हैं। 8 * 16 दैट इज 128 बिट्स। 2 टू 128 अगर हम करें तो लगभग 340 अनडिसिलियन एड्रेसेस हमारे पास
होते हैं जो बड़ी वैल्यू है। विथ दिस ह्यूज नंबर ऑफ आईपी एड्रेसेस आईपी वर्जन सिक्स और भी इंप्रूवमेंट्स लाता है। जैसे
बेटर बिल्ट इन सिक्योरिटी होती है। एफिशिएंटली राउटिंग हो सकती है। बिकॉज़ यहां नेट प्रोसेसर की जरूरत ही नहीं
पड़ती। नेट क्या है? कैसे है? वो हम आगे देखेंगे। बट इट वाज़ टाइम कंज्यूमिंग एंड रिसोर्स कंज्यूमिंग। इसमें एक दिक्कत है
IP वर्जन सिक्स को अडॉप्ट करने के लिए हमें सारी सिस्टम्स इंफ्रास्ट्रक्चर को कैपेबल बनाना पड़ेगा, अपग्रेड करना
पड़ेगा। व्हिच इज प्रीटी कॉम्प्लेक्स एंड हार्ड टास्क। अगर ग्लोबल लेवल पे देखा जाए। आज IP वर्जन 4 एंड IP वर्जन सिक्स ये
दोनों कॉम्बिनेशन में यूज़ होते हैं। जैसा हमने पढ़ा था कि होस्ट इज अ डिवाइस व्हिच गेट इट्स IPपी एड्रेस। तो आपका डिवाइस
इंटरनेट से कम्युनिकेट कर रहा है। YouTube पे यह वीडियो देख रहा है। तो उसका खुद का भी एक IPपी एड्रेस होगा। तो उसको चेक करने
के लिए आप आईएफ कॉन्फ़िग नाम की कमांड रन कर सकते हो। आप इन द टर्मिनल आपके पास अगर Mac हो या Linux हो आप अपने Windows के
पावर शेल में IP कॉन्फ़िग नाम की कमांड रन कर सकते हो। और आई नेट फील्ड को देख सकते हो। वहां आपके डिवाइस का करंट IPपी एड्रेस
जो कि 192.168 या 10 डॉट या फिर 172.16 से स्टार्ट हो रहा होगा। अगर आप Google पे जाके सर्च
करोगे व्हाट इज माय IP? आपको एक डिफरेंट IPपी एड्रेस मिलता है। आपका डिवाइस तो सेम ही है और हमने पढ़ा था कि हर डिवाइस का एक
यूनिक आईपी एड्रेस होता है। तो यह क्या मामला है? जब आप टर्मिनल से चेक कर रहे हो कमांड्स की मदद से तो आपको एक IPपी एड्रेस
अलग दिखा रहा है। और जब आप Google से चेक कर रहे हो आपका करंट आईपी वहां आपको डिफरेंट दिखा रहा है। ये इसलिए हो रहा है
बिकॉज़ देयर आर टू टाइप्स ऑफ IPपी एड्रेस। एक प्राइवेट आईपी होता है और एक पब्लिक आईपी एड्रेस होता है। इसके अलावा और एक
स्पेशल एड्रेस होता है जिसको लोकल होस्ट या लूप बैकक एड्रेस कहा जाता है व्हिच इज 127.0.0.1।
जब आप कुछ डेवलपमेंट का काम कर रहे हो तब आप जो डेवलपमेंट सर्वर को रिक्वेस्ट भेजते हो वो आपके ब्राउज़र से कहीं बाहर इंटरनेट
पे नहीं जाती। वो आपके डिवाइस पे ही लूप बैकक हो जाती है। अभी प्राइवेट आईपी पब्लिक आईपी क्या है? उनको एक-एक करके
देखा है। प्राइवेट आईपीस लोकल नेटवर्क में काम करते हैं। उसके बाहर वह विज़िबल नहीं होते। आपका घर का ऑफिस का जो लोकल नेटवर्क
है उसके बाहर से हम उनको एक्सेस कर नहीं सकते। जब आपका राउटर आपके मोबाइल को, लैपटॉप को, टीवी को IPपी एड्रेस असाइन
करता है। वो प्राइवेट आईपीस होते हैं। आपके जो नेबर है उनके फोन का और आपके फोन का प्राइवेट IPपी एड्रेस सेम हो सकता है।
बट इट डजंट मैटर बिकॉज़ उसका जो अस्तित्व है वो इसी नेटवर्क के अंदर है। किसी भी आईपी एड्रेस को उठा के हम प्राइवेट आईपी
बना नहीं सकते। तीन रेंजेस ऑफ एड्रेस है जो रिजर्व की गई है। एक स्टैंडर्ड है आरएफसी 1918। इस स्टैंडर्ड के हिसाब से
तीन रेंजेस को रिजर्व किया गया है जो हम एज अ प्राइवेट आईपी यूज़ कर सकते हैं। यह तीन रेंजेस हैं। फर्स्ट स्टार्टेड फ्रॉम
10.0 टू 10.255255255 जिसमें अराउंड 16 मिलियन एड्रेसेस होते
हैं। लार्ज इंटरप्राइजेस इसको यूज कर सकते हैं। क्लाउड प्रोवाइडर्स यूज कर सकते हैं। सेकंड रेंज इज़ 172.16.0.02
टू 172.31.255.255 इसमें अराउंड 1 मिलियन एड्रेसेस होते हैं जो मिड साइड्स नेटवर्क के लिए यूज कर सकते
हैं। थर्ड रेंज जो मैक्सिमम हमारे होम नेटवर्क्स में यूज़ होती है। दैट इज 192.168.0.0
टू 192.168.255.255 इसमें लगभग 65,000 एड्रेसेस होते हैं। यह होम स्मॉल ऑफिस में हम लोग यूज़ करते हैं।
पब्लिक IPपी एड्रेस जो है वह इंटरनेट को विज़िबल होता है। आप इसको आपके राउटर का डिफ़ॉल्ट गेटवे का एड्रेस कह सकते हो।
ग्लोबली कोई भी दो डिवाइसेस का सेम पब्लिक IPपी एड्रेस नहीं होता। आपके होम नेटवर्क का भी एक पब्लिक IPपी एड्रेस है जो आपके
राउटर को असाइन किया गया है आईएसपी के द्वारा और हमारे जो डिवाइसेस है इनसाइड दैट लोकल एरिया नेटवर्क वो सारे प्राइवेट
आईपी जो है वो इस पब्लिक आईपी के थ्रू इंटरनेट से बात करते हैं। इसी पब्लिक आईपी पे YouTube अपनी वीडियोस भेज रहा है। इन
पब्लिक आईपीस को मैनेज और असाइन किया जाता है रीजनल इंटरनेट रजिस्ट्रीज। ऐसी अलग-अलग रजिस्ट्री है। फर्स्ट इज़ आयरन अमेरिकन
रजिस्ट्री इनेशन नंबर्स। देन एपनिक इज देयर एशिया पेसिफिक नेटवर्क इनफेशन सेंटर लैटनिक रिप एनेंसी एफनिक इज देयर ये
ऑर्गेनाइजेशंस मेक श्योर करते हैं कि एक पब्लिक एड्रेस मल्टीपल ऑर्गेनाइजेशन को असाइन ना हो। नेक्स्ट इज़ डायनेमिक आईपी।
डायनेमिक आईपीस जो है वो ऑटोमेटिकली असाइन होते हैं और वो चेंज हो सकते हैं। दिस इज द मोस्ट कॉमन वे जो हम यूज़ करते हैं होम्स
में, ऑफिस नेटवर्क्स में। इवन क्लाउड्स में भी जब आप मशीनंस पिन अप करते हो तो उनके भी आईपीस डायनेमिक होते हैं। तो आप
तो हमारा राउटर जो है वो डीएसीपी डायनेमिक पोस्ट कॉन्फ़िगरेशन प्रोटोकॉल के थ्रू हमारे जो सारे डिवाइसेस हैं इनको
डायनेमिकली आईपी असाइन करता है। और आप जब नेक्स्ट टाइम उस नेटवर्क से कनेक्ट करते हो तो आपको डायनेमिकली डिफरेंट एड्रेस भी
मिल सकता है। और यह बहुत एफिशिएंट है। बिकॉज़ हम किसी डिवाइस को एक एड्रेस दे के नहीं रख रहे हैं। इफ दैट डिवाइस गोस बियड
दैट नेटवर्क तो हम उसका वो एड्रेस किसी और को भी दे सकते हैं। नेक्स्ट इज स्टैटिक आईपी जो इसके एग्जैक्ट अपोजिट है जिसको हम
मैनुअली कॉन्फ़िगर करते हैं और वो कभी चेंज होता नहीं। अनलाइक डायनेमिक आईपी एड्रेस। फॉर एग्जांपल आपको कुछ सर्विस होस्ट करनी
है इस IP पे 203.0.113.N तो स्टैटिक आईपीस यूज़ करने पड़ेंगे। सो दैट इंटरनेट से आपकी जो सर्विस है वो एक्सेबल
हो पाए। क्लाउड एनवायरमेंट भी स्टैटिक आईपी की सर्विज प्रोवाइड करता है। एडब्ल्यूएस के टर्म में उनको इलास्टिक
आईपी बोला जाता है। जीसीबी के टर्म में उनको स्टैटिक एक्सटर्नल आईपीस बोला जाता है। तो डायनेमिक वर्सेस स्टैटिक का अगर
कंपैरिजन किया जाए तो डायनेमिक आईपी एड्रेसेस डीएचसीपी से ऑटोमेटिकली असाइन करता है हमारा राउटर। स्टैटिक आईपी हमें
मैनुअली कॉन्फ़िगर करने पड़ते हैं और परमानेंटली रिजर्व होते हैं। डायनेमिक आईपीस रिकनेक्ट होने के बाद चेंज हो सकते
हैं। स्टैटिक आईपी हमेशा सेम रहते हैं। डायनेमिक आईपी डिफॉल्टली होम नेटवर्क्स के लिए यूज किए जाते हैं। स्टैटिक आईपीस हम
सर्वर्स राउटर्स डेटाबसेस इनके लिए यूज करते हैं। आप ऐसा नहीं चाहोगे कि आपके राउटर का आईपी डायनेमिक वो हमेशा चेंज
होता रहे। आपका डेटाबेस का या आपके जो सर्वर है बैक एंड से एपीआई है उनका आईपी हमेशा चेंज होता रहे। तो उन केसेस में हम
स्टैटिक आईपीस यूज़ करते हैं। डायनेमिक आईपी इज़ नॉट सूटेबल फॉर होस्टिंग अ पब्लिक सर्विसेस। स्टैटिक आईपी बहुत एसेंशियल
होता है डीएनएस रेोल्यूशन के समय एंड पब्लिक सर्विसेस को एक्सेस करने के लिए। अभी भी कुछ डाउट है तो मैं एक गोल्डन रूल
बता देता हूं। अगर किसी को आपको इंटरनेट पे ढूंढना है तो आपको स्टैटिक आईपी की तरफ जाना पड़ेगा। अदरवाइज बाकी सभी कामों के
लिए नॉर्मल इंटरनेट ब्राउजिंग, मैसेज सेंडिंग एंड एवरीथिंग उनके लिए आप डायनेमिक आईपी से काम चला सकते हो। बिफोर
जंपिंग टू आईपी पैकेट्स एंड राउटिंग। एक इंटरेस्टिंग कांसेप्ट समझते हैं यूजिंग रियल वर्ल्ड एग्जांपल। सपोज आप एक कंपनी
में काम कर रहे हो जिसमें 500 एंप्लाइजस हैं। जिनके अलग-अलग डिपार्टमेंट्स हैं। इंजीनियरिंग टीम, एचआर टीमें, फाइनेंस
टीमें, मार्केटिंग टीमें, सेल्स टीमें ये सारे एक ही ऑफिस के बिल्डिंग में काम कर रहे हैं और सभी एक नेटवर्क से कनेक्टेड
है। नाउ आप इमेजिन करो अगर किसी के पास प्रॉपर सेट ऑफ टूल्स हो और वो नेटवर्क ट्रैफिक इंस्पेक्ट कर रहा हो तो फाइनेंस
डिपार्टमेंट हर एंप्लई को कितनी सैलरी देती है वो वो कोई भी देख सकता है। सिक्योरिटी वाइज तो इशू है ही। उसके अलावा
परफॉर्मेंस भी बहुत बॉटलिक होता है। बिकॉज़ अगर मुझे स्पेसिफिक टीम से बात करनी है तो मुझे अननेसेसरी 500 डिवाइसेस को यह मैसेज
ब्रॉडकास्ट करना पड़ रहा है। इस प्रॉब्लम को हम टैकल करते हैं नेटवर्क का सेपरेशन करके। तो हम अलग नेटवर्क्स नहीं बनाते।
इसी नेटवर्क में सब नेटवर्क्स बनाते हैं और इसी को सबनेटिंग कहा जाता है। सबनेट इज अ शॉर्ट वर्ड फॉर सब नेटवर्क जो कि एक
लॉजिकल डिवीजन है बड़े नेटवर्क की। अगेन आई एम रिपीटिंग इट इज अ लॉजिकल डिवीजन नॉट फिजिकल डिवीजन। हम फिजिकली अलग नेटवर्क
नहीं कर रहे। उसको बस बड़े नेटवर्क को हम लॉजिकली डिवाइड करते हैं। स्मॉलर नेटवर्क में, सेगमेंट्स में। हर सबनेट के पास ये
दो चीजें होती है। फर्स्ट इज़ नेटवर्क एड्रेस एंड सेकंड इज़ सबनेट मास्क। नेटवर्क एड्रेस इज यूज़फुल फॉर आइडेंटिफाइंग दैट
सबनेट इन द नेटवर्क कि मैं कौन से सबनेट को मैसेज भेजना चाहता हूं। एंड सबनेट मास्क जो डिफाइन करता है कि ये डिवाइस कौन
से नेटवर्क में आता है। यूजिंग दिस सबनेट मास्क हम एक लाइन ड्रॉ करते हैं नेटवर्क पार्ट में और होस्ट पार्ट में। सबनेट के
दो टाइप्स हैं। क्लासफुल एंड क्लासलेस सबनेटिंग। एक-एक करके दोनों को समझते हैं। क्लासफुल सबनेट्स हैं। उनकी आईडिया बहुत
सिंपल थी। हमने IP एड्रेसेस को डिफरेंट-डिफरेंट क्लासेस में डिवाइड कर दिया। और हर क्लास का एक डिफॉल्ट सबनेट
होता था। फॉर एग्जांपल क्लास ए के जो एड्रेसेस है वो स्टार्ट होते हैं वन से 126 तक। इसका डिफॉल्ट मास्क है 255.0.0.0
वि मींस पहले आठ बिट्स नेटवर्क पोर्शन डिफाइन करती है। बाकी के 24 बिट्स कोस्ट के लिए है। नंबर ऑफ पॉसिबल होस्ट इज 2 24
ओवर 16 मिलियन। क्लास बी के जो एड्रेसेस है उनकी रेंज है 1281। इनका डिफॉल्ट मास्क है 255.255.0.0
पहले दो नेटवर्क पोर्शन एंड देन नेक्स्ट दो ऑक्टेट्स होस्ट पोर्शन डिफाइन करते हैं। नंबर ऑफ पॉसिबल होस्ट इसमें 2 16 है।
65536 होस्ट क्लास बी में होते हैं। क्लास सी की सबनेट देखते हैं जिसकी रेंज है 192 से 223
तक और डिफॉल्ट मास्क है 255.255.255.0 लास्ट 8 बिट्स है वो होस्ट के लिए है। 2 8 256 पोस्ट इसमें हो सकते हैं। और दो
क्लासेस हैं। क्लास डी 224 टू 239 व्हिच इज रिजर्व फॉर मल्टीकास्टिंग। क्लास ई 240 से 255 तक जाता है। व्हिच इज रिजर्व फॉर
रिसर्च एंड एक्सपेरिमेंटल यूज़। क्लासफुल सबनेटिंग दिखने में बहुत सिंपल लगती है। ओके, मैंने ये क्लासेस डिफाइन कर दिए और
आराम से मैं सब नेटवर्क्स बना सकता हूं। बट इसमें एक बड़ा चैलेंज है। आपके सिनेरियो में कंपनी में 500 डिवाइसेस थे। क्लास सी
मैं सेलेक्ट नहीं कर सकता। बिकॉज़ क्लास सी में तो 256 ही होस्ट होते हैं। अगर मैं क्लास बी की तरफ जाऊं तो मुझे क्लास बी
में 65536 होस्ट मिलते हैं। तो मेरी रिक्वायरमेंट तो 500 होस्ट की थी। लगभग 65000
IPपी एड्रेसेस वेस्ट चले गए। मेरी रिक्वायरमेंट ही नहीं है। मैं कुछ कर भी नहीं सकता बिकॉज़ दिस इज़ हार्ड डिवीजन। इस
प्रॉब्लम को सॉल्व करने के लिए क्लासलेस सबनेटिंग को इंट्रोड्यूस किया गया। जिसको क्लासलेस इंटर डोमेन राउटिंग या शॉर्ट में
साइडर कहा जाता है। साइडर बोलता है यह जो आपने जो रिजिड क्लास सिस्टम बनाई थी उसको साइड में रखते हैं और आपको जितने एड्रेसेस
चाहिए उस हिसाब से आप सबनेटिंग कर सकते हो। साइडर ने एक नोटेशन डिजाइन किया जिसमें IPपी एड्रेसेस के बाद हम एक स्लैश
फॉललोड बाय नंबर यूज करते हैं। उसको प्रीफिक्स लेंथ भी बोला जाता है। ये जो एग्जांपल है 192.168.10
24 इसमें स्लश 24 ये प्रीफिक्स लेंथ है और ये बताता है कि ओके फर्स्ट 24 बिट्स आर रिजर्व फॉर नेटवर्क। IP वर्जन 4 के जो
एड्रेसेस है वो 32 बिट्स के होते हैं। फर्स्ट 24 बिट्स आर रिजर्व। तो टोटल बची है 8 बिट। 2:8 किए तो 256 पोस्ट इस
नेटवर्क में अकोमोडेट कर सकते हैं। इन 256 में भी फर्स्ट एड्रेस होता है नेटवर्क एड्रेस एंड लास्ट एड्रेस होता है
ब्रॉडकास्टिंग एड्रेस। तो टोटल बचते हैं 254 यूज़बल IPपी एड्रेसेस। स्लैश 25 प्रीफिक्स लेंथ है तो हमें 126 होस्ट
मिलते हैं। स्लैश 26 पे 62 होस्ट मिलते हैं। तो हमें जितने चाहिए हम उतने कर सकते हैं। हम एग्जैक्टली 256 या 65566
पे लॉक नहीं है। हमारे पास अभी फ्लेक्सिबिलिटी आ गई है। अब जब नेटवर्किंग के एग्जाम्स होते हैं। इसमें साइडर के
बहुत क्वेश्चन पूछे जाते हैं। आपको साइडर नोटेशन से एक IPपी एड्रेस मिलता है और इसका सबनेट मास्क ढूंढने को कहा जाता है।
उसका मैं आज आपको एक शॉर्टकट बताऊंगा और इस शॉर्टकट से आप किसी भी सबनेट का सबनेट मास ढूंढ सकते हो। जस्ट लाइक स्लश 8
करेस्पोंड्स टू 255 हमें टेबल याद करनी है। स्लश वन मीन्स 128 स्लश टू मीन्स 1923 मींस 224 स्लश 4 मीन्स 2405 मीन्स 248
स्लश सिक्स मीन्स 252 स्ल मींस 254 एंड स्लश 8 मींस 255 इस टेबल को मेमोराइज करके आप किसी भी सबनेट का सबनेट पास्क निकाल
सकते हो। जो प्रफिक्स लेंथ है आपको उसको एट के मल्टीपल्स में डिवाइड करके हर पार्ट को उसके करेस्पोंडिंग नंबर से रिप्लेस कर
देना है। फॉर एग्जांपल किसी IPपी एड्रेस में प्रफिक्स लेंथ स्लश 12 है तो स्लश 12 को एट के मल्टीपल्स में देखा जाए तो
फर्स्ट एक स्लैश एट आएगा और फिर फोर रिमाइंडर बचा है। तो स्लश 8 को हम रिप्लेस करेंगे 255 से स्लश 4 को रिप्लेस करेंगे
240 से। इस नेटवर्क का सबनेट मास्क हो गया 255.240.0.08 को अगर किया जाए तो ऐसे ही 88 +2 आता है
तो 255.25.192.0 और एक एग्जांपल लेते हैं। 192.168.1.0 26 अभी हमने जो ट्रिक सीखा एट वाले
मल्टीपल्स का उसको लगाते हैं। तो स्लैश 24 मींस 8 +8 +8 +2 जो सबनेट मास्क निकल के आता है वो है 255.25.25.1
192 बिकॉज़ सश 2 बिलोंग्स टू 192। अब अगर नंबर ऑफ होस्ट की कैलकुलेशन की जाए तो आउट ऑफ 32 बिट्स बचते कितने हैं? सिक्स बिट्स
फॉर होस्ट। 2 6 64 होते हैं। उसमें से फर्स्ट इज नेटवर्क एड्रेस। लास्ट इज ब्रॉडकास्ट एड्रेस। 62 होस्ट सब नेटवर्क
में हो सकते हैं। अब हमारे राउटर्स के थ्रू हम जो आईपी पैकेट्स भेजते हैं वो पैकेट कैसा होता है उसके बारे में समझते
हैं। आईपी पैकेट के दो प्राइमरी सेक्शंस होते हैं। फर्स्ट इज हेडर, सेकंड इज डेटा। हेडर की जो साइज है वो 20 टू 60 बाइट्स तक
हो सकती है। अगर हमने कुछ ऑप्शनल फ्लैग्स इंक्लूड किए तो मिनिमम 20 बाइट्स होती है। डेटा वाला जो पार्ट है उसमें मैक्सिमम हम
65536 बाइट्स तक का डेटा भेज सकते हैं। बट नेटवर्क की प्रैक्टिकल लिमिटेशन होती है।
दैट इज एमटीयू मैक्सिमम ट्रांसमिशन यूनिट जो रिस्ट्रिक्ट करती है डेटा साइज अप टू 1500 बाइट्स। अगर उससे ज़्यादा साइज़ हमने
भेजी तो फ्रेगमेंटेशन होने के चांसेस है जिसमें और कॉम्प्लेक्सिटीज़ बढ़ती है। अब हेडर में क्या-क्या चीज़ें होती है उनके
बारे में पढ़ते हैं। फर्स्ट इज़ वर्जन जो बताता है कि ओके ये वर्जन फोर का पैकेट है या वर्जन सिक्स का पैकेट है। फिर इंटरनेट
हेडर लेंथ जो हेडर की लेंथ कितनी है वो बताती है। उसके बाद आता है टाइप्स ऑफ सर्विसेस जो क्लासिफाई करता है और
प्रायोरिटाइज करता है कुछ पैकेट्स को अगर रिक्वायर्ड हो तो। नेक्स्ट फील्ड इज़ टोटल लेंथ जो आईपी पैकेट की टोटल लेंथ बताती है
इंक्लूडिंग हेडर प्लस डेटा। नेक्स्ट आइडेंटिफिकेशन जो एक यूनिक आइडेंटिफायर होता है अगर हम पैकेट्स को फ्रेगमेंट करते
हैं तो देन कुछ फ्लैग्स होते हैं जो फ्रेगमेंटेशन को कंट्रोल करते हैं। फ्रेगमेंट ऑफसेट भी होता है। अगर पैकेट को
फ्रेगमेंट करना पड़ा तो ये कौन सा फ्रेगमेंट है? इसका पोजीशन क्या है? फर्स्ट है, सेकंड है, थर्ड है वो बताता
है। उसके बाद टीएल टाइम टू लिव जो हॉप काउंट बताता है कि ओके यह मैक्सिमम 50 स्टेप तक जा सकता है। तो अगर 50 स्टेप तक
यह पहुंचा नहीं तो इसको डिस्कार्ड कर दो। नेक्स्ट फील्ड इज़ अबाउट प्रोटोकॉल जो अपर लेयर के प्रोटोकॉल बताती कि यह TCP यूज़ कर
रहा है, यूडीपी यूज़ कर रहा है, आईसीएमपी यूज़ कर रहा है। देन हेडर चेक सम होती है जो हेडर में अगर कुछ एरर आ गया वो चेक
करने में मदद करती है। सोर्स एंड डेस्टिनेशन के IPपी एड्रेस होते हैं। लास्ट इज़ एक्सप्लसिट कंजेशन नोटेशन। ये
बहुत से राउटर यूज़ करते हैं। अगर नेटवर्क कंजेस्टेड हो रहा है तो राउटर जो है वह एक्सप्लसिट कंजेशन नोटिफिकेशन भेजते हैं।
दिस इज़ हाउ आईपी पैकेट लुक्स। जो हेडर होता है वह 20 बाइट्स का होता है। अगर हमने कुछ उसमें ऑप्शनल चीजें ऐड कर दी तो
वह अप टू 60 बाइट मैक्सिमम हो सकता है। एंड देन वी हैव डेटा अप टू 1500 बाइट्स जो कि मैक्सिमम ट्रांसमिशन एमटीयू वाला
फैक्टर है। अभी हमने ये जो फील्ड्स देखे इनको डायग्रामेटिकली समझते हैं। सबसे पहले था वर्जन व्हिच इज अप टू फोर बिट्स। उसके
बाद इंटरनेट हेडर लेंथ देन टाइप्स ऑफ सर्विसेस 8 बिट्स की है। देन टोटल लेंथ 32 बिट की टोटल लेंथ है लेंथ ऑफ हेडर प्लस
डेटा। नेक्स्ट फील्ड इज़ आइडेंटिफिकेशन जो आइडेंटिफाई करती है फ्रेगमेंटेशन को। देन कुछ फ्लैग्स होते हैं जो फ्रेगमेंटेशन हुआ
है कि नहीं वह बताते हैं। फ्रेगमेंट ऑफसेट है जो बताता है उसके बाद टाइम टू लीव देन प्रोटोकॉल होता है। देन हेडर चेक सम होता
है जो हेडर करप्टेड है या प्रॉपर आया है वो बताता है। उसके बाद 32 बिट्स के दो एड्रेसेस होते हैं। दैट इज़ सोर्स आईपी
एड्रेस एंड डेस्टिनेशन IPपी एड्रेस। तो ये हो गई फर्स्ट बाइट। देन दिस इज़ सेकंड बाइट, थर्ड बाइट, फोर्थ बाइट। 1 2 3 4
बाइट की एक लाइन है ऐसी फाइव लाइंस तो मिनिमम 20 बाइट्स का हेडर होता ही है। उसके बाद ऑप्शंस हो सकते हैं अप टू 40
बाइट्स ऐसे मिला के 20 टू 60 बाइट होते हैं। एंड देन देयर इज डेटा। दिस इज द कंप्लीट पिक्चर ऑफ़ आईपी पैकेट। आईपी पैकेट
में इतनी सारी चीजें होती है। नेक्स्ट इज़ नेट। Net स्टैंड्स फॉर नेटवर्क एड्रेस। ट्रांसलेशन IP एड्रेसिंग एग्जॉस्टेशन की
प्रॉब्लम थी। उसको टैकल करने के लिए नेट सिस्टम डेवलप की गई थी। जैसे कि हमने पढ़ा था IP वर्जन 4 में 4.3 बिलियन यूनिक
एड्रेस होते थे। बट जो इंटरनेट की रैपिड ग्रोथ हुई है यह नंबर कम पड़ने लगा। IP वर्जन सिक्स आया 1998 में बट एकिस्टिंग
सिस्टम को अपग्रेड करना बहुत कॉम्प्लेक्स है। तो इसका वर्क अराउंड निकालने के लिए NAT ने कहा कि मल्टीपल डिवाइसेस एक सिंगल
IPपी एड्रेस यूज़ कर सकते हैं जो कि पब्लिक आईपी हो फॉर कनेक्टिंग विद इंटरनेट। NAT का जो प्रोसेस है, वह कैसे काम करता है,
वह देखते हैं। NAT मल्टीपल प्राइवेट आईपीज़ को मैप करता है विद अ पब्लिक IPपी एड्रेस। एंड फॉर एग्जांपल, आपके घर में मल्टीपल
डिवाइसेस हैं। हर डिवाइस के पास अपना एक प्राइवेट IPपी एड्रेस है। और सारे डिवाइसेस सेम पब्लिक IPपी एड्रेस यूज करते
हैं जो कि आपका राउटर का डिफॉल्ट गेटवे का IPपी एड्रेस है। तो जब हम इंटरनेट से बात करते हैं तो राउटर हमारा जो प्राइवेट IPपी
एड्रेस है उसको चेंज करके अपना पब्लिक IPपी एड्रेस देता है। सो दैट इंटरनेट लोकल नेटवर्क है उसको रिस्पांससेस भेज पाए। इन
सारे प्रोसेससेस में एक नैट टेबल क्रिएट किया जाता है। आपके फोन से इस वेबसाइट को रिक्वेस्ट गई है तो उस वेबसाइट से जब
रिस्पांस आता है तो राउटर फिर देखता है अपने नेट टेबल में ये आईपी पे किसने रिक्वेस्ट भेजी थी तो फिर वो जो रिस्पांस
है वो फॉरवर्ड करता है। फॉर एग्जांपल आप अपने सिस्टम से एक सर्वर एक्सेस करना चाहते हो ओवर द इंटरनेट। आपका एड्रेस है
192.168.1.2 एज़ इट स्टार्ट्स फ्रॉम 192.168 इट इज़ प्राइवेट IPपी एड्रेस। तो आप इस
एड्रेस से तो रिक्वेस्ट नहीं भेज सकते। राउटर के थ्रू रिक्वेस्ट भेजनी पड़ती है। बिकॉज़ राउटर इज कनेक्टेड टू टू नेटवर्क।
एक प्राइवेट नेटवर्क है और एक साइड से पब्लिक नेटवर्क है। तो दिस इज़ द प्राइवेट IPपी एड्रेस। नेटवर्क एड्रेस जो है
192.18.1.1 एंड उसका पब्लिक एड्रेस इज 72.23.86.1 अब आपके डिवाइस पे 3000 पोर्ट पे सपोज एक
एप्लीकेशन रन कर रहा है उसको यह रिक्वेस्ट भेजनी है इस सर्वर पे। तो ये रिक्वेस्ट जानी चाहिए 142.250.0.0
के 8080 पोर्ट पे। तो यह जो राउटर है वह अगर मैंने यह रिक्वेस्ट डायरेक्टली यहां भेज दी तो जब इसको इनको रिस्पांस भेजना है
ही कैन नॉट फाउंड 192.168.1.2 इन द पब्लिक इंटरनेट। तो राउटर यूजिंग नेटवर्क एड्रेस ट्रांसलेशन हमारा IP
एड्रेस जो है उसको रिप्लेस कर देता है अपने IP एड्रेस से। जब रिक्वेस्ट यहां जाती है तो इस फॉर्मेट में जाती है।
72.23.86.11 के 8888 पोर्ट से रिक्वेस्ट मैं भेज रहा हूं। डेस्टिनेशन पे नैट टेबल में फिर एक
एंट्री हो जाती है 192.168.1.2 पे जो 3000 पोर्ट पे जो एप्लीकेशन रन कर रहा है उस एप्लीकेशन ने 142.250
वाले सर्वर पे 8080 पोर्ट पे रिक्वेस्ट भेजी थी। अब 8080 पोर्ट पे रिक्वेस्ट पहुंची। उन्होंने प्रोसेस किया और
रिस्पांस रेडी किया और जो रिस्पांस है वो 72.23.86.11 के 888 पोर्ट पे आया। अब फिर से नैट टेबल
में राउटर देखता है कि ओके यह रिक्वेस्ट किसने की है और फिर उसको वह फ़ॉरवर्ड कर देता है। अगर आप डायग्राम अच्छे से समझोगे
तो आपको समझ आ जाएगा कि राउटर सोर्स आईपी एंड सोर्स पोर्ट को पब्लिक आईपी एड्रेस से एंड किसी भी पोर्ट से रिप्लेस कर देता है
जो अवेलेबल है। एंड जब वो रिस्पांस वापस आता है तब डेस्टिनेशन आईपी एंड डेस्टिनेशन पोर्ट को उस डिवाइस के प्राइवेट IPपी
एड्रेस एंड पोर्ट से रिप्लेस कर देता है। इन सबका ट्रैक रिकॉर्ड नेट टेबल में हम लोग रखते हैं। फॉर एग्जांपल अगर मैं इस
डिवाइस के अलग एप्लीकेशन से यह सर्विस एक्सेस करना चाहूंगा और एक एंट्री बनेगी बिकॉज़ पोर्ट इज डिफरेंट। नेट्स भी अलग-अलग
टाइप के होते हैं। फर्स्ट इज स्टैटिक नेट जिसमें वन टू वन मैपिंग होती है पब्लिक और प्राइवेट IPपी एड्रेसेस की। स्टैटिक आईपी
याद है? जब हमारी किसी सर्विस को इंटरनेट से एक्सेस कराना है तब हम स्टैटिक नेट यूज़ करते हैं। जिसमें IPपी एड्रेस फिक्स रहता
है उस सर्विस का। सेकंड इज़ डायनेमिक नेट। डायनेमिक आईपी एड्रेसिंग हमने देखी थी। मेनी टू मेनी मैपिंग मतलब डायनेमिकली कोई
भी IPपी एड्रेस असाइन हो सकता है उन डिवाइसेस को। थर्ड इज़ पोर्ट एड्रेस ट्रांसलेशन जिसको नेट ओवरलोड भी कहा जाता
है। यूजिंग दिस मल्टीपल डिवाइसेस को हम मैप कर सकते हैं सिंगल IPपी एड्रेस से। जस्ट उनके पोर्ट नंबर्स अलग-अलग होंगे।
नेट के यूज़ केसेस देखते हैं। फर्स्ट इज़ प्राइवेट IPपी एड्रेसिंग। मल्टीपल डिवाइस सिंगल IPपी एड्रेसेस यूज़ कर सकते हैं। तो
जो पब्लिक IPपी एड्रेसेस है वो ज्यादा एग्जॉस्ट नहीं होंगे। सेकंड इज पोर्ट फॉरवर्डिंग जिसमें अगर आपके लोकल नेटवर्क
पे कुछ सर्विस रन कर रहे हो या कुछ रिसोर्सेज हो उसको एक्सटर्नल डिवाइसेस के साथ शेयर कर सकते हो। फॉर एग्जांपल आपके
राउटर का पब्लिक IP है 203.0.113.1 और आपका इंटरनल वेब सर्वर रन कर रहा है 192.168.1.10
पे तो आप पोर्ट फॉरवर्डिंग रूल लगा सकते हो कि मेरे राउटर के पोर्ट 80 पे अगर कुछ भी ट्रैफिक आए तो वो यहां फॉरवर्ड कर
देना। थर्ड एप्लीकेशन इज लोड बैलेंसिंग। यूजिंग दैट हम इनकमिंग ट्रैफिक को डिस्ट्रीब्यूट कर सकते हैं थ्रू मल्टीपल
सर्वर्स। फॉर एग्जांपल हम मल्टीपल इंटरनल सर्वर्स रन कर रहे हैं। सर्वर ए, सर्वर बी, सर्वर सी ऑन थ्री सेपरेट सिस्टम्स। तो
हम एक रूल लगा सकते हैं लोल बैलेंसिंग का कि राउंड रॉबिन मैनर में जो भी ट्रैफिक आए रिक्वेस्ट इसको पहले डिवाइस को भेज देना
है। एक सेकंड को भेज देना है, एक थर्ड को भेज देना। आगे हम डिफरेंट सिनेरियोस में राउटिंग कैसे होती है वो देखेंगे।
सिनेरियो वन एक होस्ट है। उसको प्रिंटर को डाटा भेजना है। अब आप ध्यान से देखोगे तो ए एंड बी बोथ आर इन सेम नेटवर्क। सबसे
पहले होस्ट ए एक एआरपी रिक्वेस्ट भेजेगा बिकॉज़ होस्ट ए को बी का मैक एड्रेस पता ही नहीं है। होस्ट ए पूछता है हु हैज़ द
एड्रेस ऑफ़ 192.168.1.2 बिकॉज़ ये दोनों कनेक्टेड है थ्रू सिस्टम। तो होस्ट ए देख सकता है कि अपने नेटवर्क
में एक प्रिंटर है यूजिंग दिस IPपी एड्रेस। सो ये रिक्वेस्ट ब्रॉडकास्ट होती है। जब बी के पास ये रिक्वेस्ट पहुंचती है
तो वो एआरपी रिप्लाई भेजता है। अच्छा आपको मेरे से बात करनी है। लेट मी सेंड यू माय मैक एड्रेस। तो जब मैक एड्रेस पहुंचता है
स्विच के पास तो स्विच मैक एड्रेस स्टोर कर लेता है। नाउ ए को बी का मैक एड्रेस पता चल गया। स्विच को भी पता चल गया। ए जो
है वो डेटा पैकेट स्विच को भेजता है और स्विच उसको फॉरवर्ड करता है बी को। नेक्स्ट सिनेरियो देखते हैं जिसमें होस्ट
ए को होस्ट सी को पैकेट भेजना है। इफ यू सी केयरफुली होस्ट ए एंड होस्ट सी यह दोनों भी अलग नेटवर्क पे हैं। बट यह दो
होस्ट एक ही राउटर से कनेक्टेड है। एक साइड का प्राइवेट नेटवर्क का उसका एड्रेस है 192.168.1.0
सेकंड प्राइवेट नेटवर्क का उसका एड्रेस है 10.5.3.0 होस्ट ए वाली जो सिस्टम है वो मे बी स्विच
के थ्रू राउटर से कनेक्टेड हो सकती है। एंड इन दिस साइड ऑफ नेटवर्क ये जो लैपटॉप है ये वाई-फाई से कनेक्टेड है। तो ये जो
पैकेट भेजने की पहली स्टेप है दैट इज डिटरमाइनिंग गेटवे। तो फिर से एआरपी एड्रेस रेोल्यूशन प्रोटोकॉल रिक्वेस्ट
जाती है टू फाइंड आउट द मैक एड्रेस ऑफ गेटवे और फिर राउटर से मैक एड्रेस आता है। फिर होस्ट ए जो आईपी पैकेट है उसको फ्रेम
में इनकैप्सुलेट करके राउटर के मैक एड्रेस के पास भेजता है। उसके बाद राउटर के पास वो फ्रेम आती है। राउटर चेक करता है कि
ओके इसको इस डेस्टिनेशन पे भेजना है। एंड राउटर फिर एप्रोप्रियट नेटवर्क के पास वो पैकेट को फॉरवर्ड कर देता है। अगर सी से
कोई रिस्पांस चाहिए तो वो रिस्पांस राउटर के पास आता है। राउटर फिर स्विच के थ्रू ए को फॉरवर्ड कर देता है। तो अभी तक हमने दो
सिनेरियो देखे। पहले सिनेरियो में हमने सेम नेटवर्क में ही सेंड करना था। तो हमने एआरपी रिक्वेस्ट रिस्पांस के थ्रू मैक
एड्रेस फाइंड आउट करके उसको भेज दिया। सेकंड इसमें हमने अलग नेटवर्क में भेजना था। बट वो अलग नेटवर्क सेम राउटर से
कनेक्टेड था। तो हमने राउटर के मैक एड्रेस पे वो पैकेट भेजा और फिर राउटर ने दूसरे साइट को भेजा। थर्ड सिनेरियो इज आपको आपके
मोबाइल से कोई पब्लिक सर्वर एक्सेस करना है। इंटरनेट पे कोई भी चीज सर्च करनी है, YouTube वीडियो देखना है या Netflix शो
देखना है। आप आपके राउटर से कनेक्टेड होगे। राउटर का IPपी एड्रेस इज़ 192.168.1.0
आपके फोन का एड्रेस है 192.168.1.3 राउटर का पब्लिक एड्रेस भी होगा बिकॉज़ इट इज़ कनेक्टेड टू पब्लिक नेटवर्क आल्सो दैट
इज़ 1.2.3.4 फिर इंटरनेट के थ्रू यह होस्ट तक वो रिक्वेस्ट पहुंचेगी। स्टेप वन इज़ सेम एज
ऑफ़ सिनेरियो टू। गेटवे डिटरमाइन किया बिकॉज़ दिस इज़ आउटसाइड हिज़ नेटवर्क। दिस आईपी एड्रेस। एम को एस के साथ बात करनी
है। एम को पता चल जाता है कि यार यह तो मेरे लोकल सब नेटवर्क में है ही नहीं। एआरपी रिक्वेस्ट जाती है पहले। फिर एआरपी
रिस्पांस आता है। फिर राउटर प्रोसेस करता है। राउटर के पास जो पैकेट जाता है फिर वो फॉरवर्ड करता है। एज़ कंपेयर टू सिनेरियो
टू। यहां स्टेप फोर जो है वो इंटरनेट राउटिंग है। सिनेरियो टू में राउटर को बस जो सेकंड प्राइवेट नेटवर्क वहां भेजना था।
यहां इंटरनेट राउटिंग में हॉप बाय हॉप करके यह पैकेट वहां तक पहुंचता है। नेक्स्ट इज़ आईसीएमपी। आईसीएमपी स्टैंड्स
फॉर इंटरनेट कंट्रोल मैसेज प्रोटोकॉल। आईसीएमपी इज बिल्ट ऑन द टॉप ऑफ आईपी प्रोटोकॉल। इसका ज्यादातर यूज़ इंफॉर्मेशनल
मैसेजेस को एक्सचेंज करने में किया जाता है। अगर आपने कभी पिन या ट्रेस राउट की यूटिलिटी यूज़ की होगी तो आपने आईसीएमपी का
यूज किया है। आईसीएमपी को डिजाइन ही इसलिए किया था कि नेटवर्क में जो क्रूशियल प्रॉब्लम्स आ रही है कि पैकेज्स ड्रॉप हो
रहे हैं या सर्वर रिसोंड नहीं कर रहा या टीटीएल खत्म हो गया या फिर नेटवर्क बहुत कंजेस्टेड है। इन सारे सिचुएशन में
कम्युनिकेशन करने के लिए आईसीएमपी प्रोटोकॉल का यूज किया जाता है। आईसीएमपी अलग-अलग प्रकार के मैसेजेस भेजता है
अकॉर्डिंग टू द सिचुएशन। फर्स्ट इज़ इको रिक्वेस्ट एंड इको रिप्लाई। हाय हेलो टाइप। सेकंड इज़ डेस्टिनेशन अनरचेबल। कि आप
जिसको भेज रहे हो वो डेस्टिनेशन है ही नहीं। थर्ड इज़ फ्रेगमेंटेशन नीडेड। अगर एमटीयू मैक्सिमम ट्रांसमिशन यूनिट के बाहर
अगर चीजें भेज रहे हो तो वो फिर फ्रेगमेंटेशन नीडेड का मैसेज भेजता है। देन टीटीएल एक्सिडेड रीडायरेक्शन। तो
कभी-कभी ऐसा होता है ना कि अगर एक नेटवर्क बिजी हो या राउटर्स आगे वाला रिसोंड नहीं कर रहे हो तो इन पैकेट्स को रीडायरेक्ट
करा सकते हैं ऑन अनदर राउटर। आईसीएमपी के एक कुछ लिमिटेशंस भी है जैसे कि बहुत से फायर वाल आईसीएमपी को ब्लॉक करते हैं टू
अवॉयड अननेसेसरी फ्लड्स एंड डीडॉस अटैक। बट आईसीएमपी को ब्लॉक करने के बाद और अलग इशूज़ आते हैं। जैसे हम आगे पढ़ेंगे टीसीपी
ब्लैक होल। जहां कनेक्शन तो इस्टैब्लिश हो गया है बट डाटा ही सेंड नहीं हो रहा बिकॉज़ आईसीएमपी मैसेजेस ब्लॉक है। हम आईसीएमपी
मैसेज भेजते हैं कि ओके नेटवर्क कंजेस्टेड हो गया है बट आईसीएमपी मैसेज खुद भी एक गारंटेड डिलीवरी नहीं देता। अभी थोड़ी
यूटिलिटीज पढ़ते हैं जहां से आप हैंड्स ऑन कर सकते हो। फर्स्ट यूटिलिटी इज़ पिंग यूटिलिटी। आप अपने टर्मिनल में जाके
chikco.com को पिंग कर सकते हो। पिंग करना मतलब हाय बोलना। तो अगर हाय बोल दिया तो cyco.com अगर अप होगा तो आपको हेलो बोल
देगा। रिस्पांस भेज देगा। जहां यहां आप देख सकते हो कि आई एम रिसीविंग द 64 बाइट्स फ्रॉम दिस IPपी एड्रेस विद टीएल ऑफ़
59। नेक्स्ट इज़ ट्रेस राउट यूटिलिटी जो पूरा राउट ट्रेस करने में मदद करती है। जैसे कि मैं अगर करूं ट्रेस राउट चाय
कोड.com तो मेरी ये जो रिक्वेस्ट है वो कहां-कहां कौन-कौन से राउटर से गए उनका IPपी एड्रेस क्या था? वो सारे राउट को ये
ट्रेस करता है। एंड दैट्स ऑल अबाउट चैप्टर फोर नेटवर्क लेयर एंड आईपी एड्रेसिंग। जहां हमने IP एड्रेसिंग पढ़ी। फिर IPपी
वर्जन फोर, आईपी वर्जन सिक्स के बारे में देखा। प्राइवेट आईपी क्या होते हैं? पब्लिक आईपी क्या होते हैं उसके बारे में
समझा। स्टैटिक डायनेमिक आईपीस क्या होते हैं? वो देखे। देन हमने सबनेटिंग देखी। क्लासलेस सबनेटिंग देखी। क्लासफुल
सबनेटिंग देखी। सीआईडीआर नोटेशन देखा। आईपी पैकेट एनाटॉमी देखी कि आईपी पैकेट में क्या-क्या चीजें होती है। देन हमने
नेट के बारे में पढ़ा और डिफरेंट-डिफरेंट राउटिंग सिनेरियोस देखे। लास्ट में हमने आईसीएमपी प्रोटोकॉल देखा। आईसीएमपी के
अलग-अलग मैसेजेस कौन से होते हैं। पिंग यूटिलिटीज एंड ट्रेस राउट यूटिलिटीज वो हमने देखा। अगले चैप्टर में हम एंड टू एंड
ट्रांसपोर्टेशन कैसे होता है? उसके बारे में चर्चा करेंगे। वेलकम टू द फिफ्थ चैप्टर ऑफ कंप्यूटर
नेटवर्किंग बूट कैंप वि इज अबाउट ट्रांसपोर्ट लेयर जहां हम टीसीपी एंड यूबी के बारे में चर्चा करेंगे। बट बिफोर दैट
पहले पोर्ट नंबर को रिवजिट कर लेते हैं। पोर्ट नंबर एक स्पेशल नंबर है जो हमें एप्लीकेशनेशंस को आइडेंटिफाई करने में मदद
करता है। जैसे आप एक एरिया में रहते हो उस एरिया में एक प्रॉपर सोसाइटी में या किसी कॉलोनी में आपका घर होता है एंड देन आपके
घर का एक नंबर होता है या फ्लैट का नंबर होता है। उसी प्रकार वी हैव IP एड्रेसेस वी हैव मैक एड्रेसेस एंड देन एट द एंड वी
हैव पोर्ट नंबर्स। तो जब भी हम किसी को डेटा भेज रहे हैं या उसके IPपी एड्रेस के साथ पोर्ट नंबर भी इंक्लूड कर देते हैं।
पोर्ट एक 16 बिट नंबर है। वि मींस देयर आर 2 16 पॉसिबल पोर्ट नंबर्स दैट इज 65535। कुछ कॉमनली यूज़्ड पोर्ट नंबर्स हम देखते
हैं जो कि रिज़र्व है। जैसे कि पोर्ट नंबर 20 एंड 21 इज़ रिज़र्व्ड फॉर फाइल ट्रांसफर प्रोटोकॉल जो क्लाइंट और सर्वर के बीच में
फाइल ट्रांसफर के लिए काम आता है। पोर्ट 22 इज़ रिजर्व फॉर एसएसएच सिक्योर शेल जिसकी मदद से हम रिमोट सर्वर्स को एक्सेस
कर सकते हैं। नेक्स्ट इज पोर्ट 25 व्हिच इज़ यूज्ड फॉर एसएमटीपी सिंपल मेल ट्रांसफर प्रोटोकॉल जो ईमेल्स में यूज किया जाता
है। पोर्ट 53 इज यूज्ड फॉर डीएनएस। डीएनएस एक प्रोसेस है जिससे हम IP नंबर को डोमेन नेम से मैप करते हैं। पोर्ट 80 इज यूज्ड
फॉर HTP। नेक्स्ट इज़ पोर्ट 123 जो नेटवर्क टाइम प्रोटोकॉल के लिए यूज़ किया जाता है। नेटवर्क टाइम प्रोटोकॉल हमें कंप्यूटर के
क्लॉज़ को सिंक्रोनाइज़ करने में हेल्प करता है। पोर्ट 443 HTPS के लिए यूज़ होता है। पोर्ट 500 व्हिच इज यूज्ड फॉर आईएसकेएमपी
इंटरनेट सिक्योरिटी एसोसिएशन एंड की मैनेजमेंट प्रोटोकॉल जो आईपी से कनेक्शन में यूज होता है। नेक्स्ट इज पोर्ट 587 जो
मॉडर्न एसएमटीपी के लिए यूज किया जाता है व्हिच प्रोवाइड्स इंक्रिप्शन। पोर्ट 3389 जो रिमोट डेस्कटॉप प्रोटोकॉल है व्हिच
अलाउ अस टू रिमोटली कनेक्ट आवर डेस्कटॉप सिस्टम्स पीसीस फ्रॉम अदर डिवाइसेस 0 टू 1023 ये जो पोर्ट नंबर्स है ये रिजर्व है।
हम इसको पर्सनल यूजर्स के लिए या एप्लीकेशनेशंस के लिए यूज़ नहीं कर सकते। पोर्ट नंबर 1024 टू 4915 यह भी रिजर्व है
बट फॉर सम एप्लीकेशनेशंस लाइक मोंगो डीबी मायसक्यूएल पोस्ट ग्रेस एसक्यूएल फ्रॉम 4916 पोर्ट नंबर्स आर नॉट रिजर्व एंड हम
उनको पब्लिकली यूज़ कर सकते हैं अपने लोकल डेवलपमेंट के लिए हम उनको असाइन कर सकते हैं पोर्ट 805413
दैट्स ऑल अबाउट पोर्ट नंबर्स नेक्स्ट इज़ यूडीपी यूडीपी स्टैंड्स फॉर यूजर डेटा गैप प्रोटोकॉल यूडीपी एक फंडामेंटल प्रोटोकॉल
है जो लेयर फोर पे ऑपरेट करता है एंड इट सीट्स ऑन टॉप ऑफ आईपी प्रोटोकॉल हियर आर सम कैरेक्टरिस्टिक्स ऑफ़ यूडीपी इट इज़ अ
स्टेटलेस प्रोटोकॉल व्हिच मींस वो क्लाइंट पे सर्वर पे कोई भी स्टेट्स मेंटेन नहीं करता। जो यूडीबी का पैकेट होता है व्हिच
व्हिच इज़ कॉल्ड एज डेटाग्राम वो इंडिपेंडेंटली सेंड करता है विदाउट वरिंग अबाउट द सेंडर। एज़ इट इज़ अ स्टेटलेस इसमें
कोई प्रायर कनेक्शन रिक्वायर्ड नहीं होता। कोई हम कनेक्शन इस्टैब्लिश नहीं करते, टर्मिनेट नहीं करते। सीधा डेटा सेंड करना
स्टार्ट कर देते हैं टू द डेस्टिनेशन। एंड बिकॉज़ ऑफ द स्टेटलेस्ट नेचर यूडीबी का जो हेडर है वो बहुत लाइट वेट होता है व्हिच
इज अराउंड 8 बाइट्स एज कंपेयर टू टीसीपीस 20 बाइट्स। लास्ट चैप्टर में हमने IP एड्रेसिंग के बारे में पढ़ा। अब पोर्ट
एड्रेसिंग के बारे में पढ़ते हैं। वि द हेल्प ऑफ पोर्ट नंबर्स हम एप्लीकेशनेशंस को यूनिकली आइडेंटिफाई कर सकते हैं और वो
एप्लीकेशनेशंस एक दूसरे से कम्युनिकेट कर सकते हैं विदाउट एनी ओवरलैपिंग। बिकॉज़ वो अलग-अलग पोर्ट्स पे रन कर रहे हैं। आजकल
डिवाइसेस इतने एफिशिएंट हो गए कि हम सब लोग मल्टीटास्किंग करते हैं। फॉर एग्जांपल आप Instagram पे रील कंज्यूम कर रहे हैं
और बीच में आपको WhatsApp पे में एक मैसेज आ गया। तो आप वहां से WhatsApp पे चले गए। आपने उस मैसेज को रिप्लाई किया एंड उसके
बाद आपको WhatsApp पे YouTube का लिंक मिला। आप वहां से YouTube ऐप पे चले गए। फ्रॉम Instagram टू WhatsApp टू YouTube।
आप ऐसे मल्टीपल एप्लीकेशन साइमलटेनियसली यूज़ करते हो। पोर्ट एड्रेसिंग में जो मल्टीटास्किंग होती है, इसमें दो
प्रोसेससेस बहुत इंपॉर्टेंट है। फर्स्ट इज़ मल्टीप्लेक्सिंग एंड सेकंड इज़ डीमल्टीप्लेक्सिंग। मल्टीप्लेक्सिंग में
मल्टीपल डेटा स्ट्रीम्स है फ्रॉम मल्टीपल एप्लीकेशन उसको कंबाइन किया जाता है इनू वन स्ट्रीम और उसको फिर भेजा जाता है ओवर
द नेटवर्क। डीमल्टीप्लेक्सिंग इज़ एग्जैक्ट अपोजिट ऑफ़ दैट। जो कंबाइंड स्ट्रीम ऑफ़ डेटा है फ्रॉम डिफरेंट एप्लीकेशन उसको
स्प्लिट किया जाता है एप्लीकेशन वाइज़ और फिर वो पर्टिकुलर एप्लीकेशन को उसको रीडायरेक्ट किया जाता है। सेंडर क्या करता
है? मल्टीप्लेक्स करता है अपने ऑल एप्लीकेशनेशंस के रिक्वेस्ट। फॉर एग्जांपल सेंडर पे मल्टीपल एप्लीकेशन रन कर रहे
हैं। ऐप 1 2 3 इन सभी का जो डेटा है, रिक्वेस्ट है वो मल्टीप्लेक्स करा के एज अ सिंगल रिक्वेस्ट भेजता है ओवर टू द
रिसीवर। एंड रिसीवर डीमल्टीप्लेक्सिंग करता है एक सिंगल स्ट्रीम की इनू द मल्टीपल स्ट्रीम अकॉर्डिंग टू द ऐप।
नेक्स्ट वी विल लुक इंटू द यूजज़ ऑफ़ यूडीपी। फर्स्ट इज़ वीडियो स्ट्रीमिंग। बिकॉज़ ऑफ़ इट्स स्टेटलेस नेचर एंड सिंपल
हेडर। यूडीपी बहुत फास्ट है एंड यूज़फुल है वीडियो स्ट्रीमिंग में। जहां हमें अगर कुछ फ्रेम्स ड्रॉप हुई तब भी चलता है। बट वी
नीड फास्टर डिलीवरी फॉर द कंटीन्यूअस स्ट्रीम। वीpएस में भी यूडीपी यूज़ किया जाता है बिकॉज़ ऑफ इट्स एफिशिएंसी एंड लोअर
लेटेंसी। लेटेंसी तो बहुत कम होगी बिकॉज़ कुछ कनेक्शन बिल्डिंग नहीं, टर्मिनेशन नहीं। जस्ट डाटा भेजो। थर्ड इज़ डोमेन नेम
सिस्टम। डीएनएस जो प्रोटोकॉल है इट ऑपरेट्स ओवर यूडीपी फॉर क्विक एंड फास्ट क्वेरी रिस्पांस कम्युनिकेशन। वेब आरटीसी
जो प्रोटोकॉल है जहां हम रियल टाइम में ऑडियो वीडियो ट्रांसफर करते हैं। Google मीट zूम फेस टाइम यहां पे हम जब पीियर टू
पीियर ऑडियो एंड वीडियो ट्रांसफर कर रहे हैं तब यूडीपी यूज़ करते हैं तो हम रियल टाइम में एक दूसरे से बात कर पाए विदाउट
एनी हिंट रंस। लेट्स सी यूडीपी कम्युनिकेशन इन एक्शन। सपोज़ वी हैव होस्ट ए विथ IPपी एड्रेस ऑफ़ 10.2
उस पे एक एप्लीकेशन रन कर रहा है ऐप वन। सिमिलरली वी हैव होस्ट बी विथ IP एड्रेस ऑफ़ 10.0.3
ऑन व्हिच एप्लीकेशन Z इज़ रनिंग। एप्लीकेशन वन पोर्ट 5432 पे रन कर रहा है। एप्लीकेशन Z 27017 पे रन कर रहा है। तो होस्ट ए
मल्टीपल एप्लीकेशनेशंस रन कर रहा होगा। एंड होस्ट बी के पास भी अलग-अलग आपके एप्लीकेशन हो सकते हैं। F1 को FZ से अगर
बात करनी है उनको डेटाग्राम्स को ट्रांसफर करना है तो वो कैसे होगा उसको देखते हैं। पोर्ट 5432 पे जो ऐप है ऑन 10.0.2
ये डेटा सेंड करेगी 10.0.3 के पोर्ट 27017 पे। तो ये जो पैकेट है इसका आपने स्ट्रक्चर देखा। तो इसमें सोर्स आईपी है,
डेस्टिनेशन आईपी है, सोर्स पोर्ट है, डेस्टिनेशन पोर्ट है। दैट इज एंड टू एंड डिलीवरी थ्रू यूडीp। यह पैकेट हमने
डायरेक्टली सेंड किया है। अगर Z को फिर से कुछ रिस्पांस भेजना है ऐप वन को तो सोर्स आईपी, डेस्टिनेशन आईपी एंड सोर्स पोर्ट
डेस्टिनेशन पोर्ट इनकी वैल्यू बस पैकेट में रिवर्स हो जाएगी। नेक्स्ट वी विल लुक इंटू द स्ट्रक्चर ऑफ यूडीपी डाटाग्राम।
यूडीपी का जो हेडर है हमने अभी पढ़ा कि बहुत सिंपल होता है अराउंड 8 बाइट्स का फॉर IP वर्जन 4। उस हेडर में क्या-क्या
चीजें होती है वो देख। पहले सोर्स पोर्ट होता है व्हिच आइडेंटिफाई अ सेंडिंग एप्लीकेशन। देन डेस्टिनेशन पोर्ट
आइडेंटिफाई करता है रिसीविंग एप्लीकेशन को। नेक्स्ट इज़ लेंथ व्हिच इज़ टोटल लेंथ ऑफ यूडीबी डाटाग्राम। उसमें उसका हेडर भी
आता है एंड डेटा भी आता है। नेक्स्ट इज़ चेक सम जो 16 बिट्स की होती है व्हिच इज यूज्ड फॉर एरर चेकिंग कि जो डाटाग्राम
रिसीव होता है रिसीवर के पास तो वो चेक सम के थ्रू वो चेक कर सकता है कि ये एज इट इज़ है या करप्ट हो गया है। एंड उसके बाद डेटा
सेक्शन होता है। फर्स्ट हेडर फॉललोड बाय डेटा। हेडर 8 बाइट्स का होता है। फॉललोड बाय डेटा उसमें पेलोड होता है। हेडर को
डिटेल में समझते हैं जो हमने अभी पढ़ा था कि हेडर में पहले एक सोर्स पोर्ट होता है 16 बिट्स का। देन डेस्टिनेशन पोर्ट होता
है। लेंथ होती है एंड चेक सम होता है। तो दिस इज़ फर्स्ट बाइट, सेकंड बाइट, थर्ड एंड फोर। तो फर्स्ट लाइन में फोर बाइट्स होती
है। सेकंड लाइन में फोर तो 4 + 4 8 बाइट्स का ये हेडर होता है फॉललोड बाय डेटा। दिस इज़ द कंप्लीट पिक्चर ऑफ़ यूडीपी डाटाग्राम।
नेक्स्ट हम यूडीपी के एडवांटेज देखते हैं। फर्स्ट वन इज़ सिंपलीसिटी। कोई ज्यादा ओवरहेड नहीं है। सिंपली बस डायरेक्टली
विदाउट कनेक्शन डाटा सेंड करो। लो ओवरहेड है। वी आर नॉट वरिड अबाउट फ्लो कंट्रोल, कंजेशन कंट्रोल, हेडर साइज बहुत स्माल है।
तो एफिशिएंटली सेंड हो सकता है। स्टेटलेस है। वी आर नॉट मेंटेनिंग एनी स्टेट। एंड बिकॉज़ ऑफ़ दिस स्टेटलेसनेस यूडीपी स्केल्स
रियली गुड। लेटेंसी भी लो है। डायरेक्टली हम सेंड करते हैं विदाउट एस्टैब्लिंग एनी प्रायर कनेक्शन। तो नो कंजेशन कंट्रोल।
कंजेशन कंट्रोल मींस द कैपेसिटी ऑफ़ नेटवर्क। तो हमारे पास अगर प्राइवेट नेटवर्क है तो हम जितना चाहे उतना डाटा
भेज सकते हैं विदाउट वरिंग अबाउट बैंडविड्थ। अब यूडीबी के डिसएडवांटेजेस देखते हैं। फर्स्ट इज़ नो एकनॉलेजमेंट कि
मैंने जो डाटाग्राम्स सेंड किए वो पहुंचे कि नहीं उसकी कुछ भी एकनॉलेजमेंट नहीं मिलती। दैट्स व्हाई देयर इज नो गारंटेड
डिलीवरी। रीट ट्रांसमिशन नहीं होता। कुछ नहीं होता। भेजा है गया तो ठीक है नहीं तो जाने दो। कुछ मेजर सिक्योरिटी इशूज़ भी है
बिकॉज़ हम कनेक्शन ही इस्टैब्लिश नहीं कर रहे। डायरेक्ट भेज रहे हैं और सर्वर फिर उसको डायरेक्ट एक्सेप्ट कर रहा है। एंड
बिकॉज़ ऑफ़ दिस यूडीबी बहुत यूज़ होता है डीडॉस अटैक में। बिकॉज़ इट्स डिज़ लाइक दैट। अगर आप यूडीबी पैकेट्स भेजते हो किसी
सर्वर को तो उनको एक्सेप्ट ही करना पड़ता है विदाउट चेकिंग कौन भेज रहा है, कैसे भेज रहा है। यूडीपी में कुछ फ्लो कंट्रोल
नहीं है कि हम फ्लो कंट्रोल कर पाए। रिसीविंग का कैपेसिटी के अनुसार। कंजेशन कंट्रोल में भी अगर डाटाग्राम्स पैकेट्स
ड्रॉप हुए तब भी यूडीपी उसको टैकल नहीं करता। दीज़ आर सम डिसएडवांटेजेस ऑफ़ यूडीपी। आगे बढ़ते हैं TCP पे। पे टीसीp स्टैंड्स
फॉर ट्रांसमिशन कंट्रोल प्रोटोकॉल। टीसीp ये सबसे ज्यादा यूज़ किया जाने वाला प्रोटोकॉल है। बिकॉज़ इट इज़ रिलायबल,
कनेक्शन ओरिएंटेड एंड एंड टू एंड डिलीवरी सपोर्ट करता है। रिलायबल मींस जो डाटा हम भेज रहे हैं वो एक्यूरेटली पहुंचता है एंड
इन द करेक्ट ऑर्डर पहुंचता है। टीसीp यूज़ करता है थ्री वे हैंडशक टू बी एस्टैब्लिश द कनेक्शन एंड देन वो डेटा सेंड करता है
व्हिच अलाउस कंसिस्टेंट एंड रिलायबल कम्युनिकेशन। टीसीp ऑपरेट करता है ऑन द लेयर फोर व्हिच मींस इट यूजेस पोर्ट
एड्रेस डिलीवर डेटा एंड टू एंड टीसीp कनेक्शन जो है वो एक एग्रीमेंट होता है क्लाइंट और सर्वर के बीच में एंड हमें अगर
डेटा भेजना है तो पहले सबसे पहले कनेक्शन क्रिएट करना पड़ेगा जब कनेक्शन इस्टैब्लिश होगा उसके बाद ही हम डेटा भेजना स्टार्ट
कर सकते हैं टीसीपी कनेक्शन चार चीजों से आइडेंटिफाई होता है फर्स्ट इज सोर्स आईपी सेकंड इज सोर्स पोर्ट थर्ड इज डेस्टिनेशन
आईपी फोर्थ इज़ डेस्टिनेशन पोर्ट सोर्स आईपी सोर्स पोर्ट इज वन वन सॉकेट डेस्टिनेशन आईपी डेस्टिनेशन पोर्ट इज अनदर
सॉकेट और अ फाइल डिस्क्रिप्टर टीसीपी कनेक्शन है वो थ्री वे हैंडशक से होता है। टीसीपी में डाटा होता है वो सेगमेंट के
फॉर्मेट में होता है। इन सेगमेंट को हम एक सीक्वेंस नंबर देते हैं और ऑर्डर वाइज सेंड करते हैं। जब वो रिसीव होते हैं तो
रिसीवर वहां से एकनॉलेजमेंट भेजता है। अगर कोई सेगमेंट लॉस हो गया तो हम उनको रीट्रांसमिट कर देते हैं। लेट्स
अंडरस्टैंड थ्री वे हैंड चेक। हमारे पास एक क्लाइंट है, एक सर्वर है। क्लाइंट का IPपी एड्रेस है 10.02.2 एंड सर्वर का है
10.0.3। क्लाइंट पे एक ऐप वन या टर्मिनल या एक सर्विस रन कर रही है पोर्ट 5432 पे। वो सर्वर को एक्सेस करना चाहती है यूजिंग
एसएसएच ओवर पोर्ट 22। थ्री वे हैंडशक में पहले क्लाइंट सर्वर को सीन पैकेट भेजता है। सीन स्टैंड्स फॉर सिंक्रोनाइजेशन। वंस
सर्वर रिसीव दैट पैकेट, सर्वर सेंड्स सिनेक पैकेट। सिंक्रोनाइज को एकनॉलेजमेंट करता है सर्वर। ओके आपको सिंक्रोनाइज़ करना
है। आई एकनॉलेज दैट। एंड थर्ड स्टेप इज़ एक्नॉलेजमेंट पैकेट। जहां क्लाइंट एकनॉलेजमेंट पैकेज भेजता है सर्वर को एंड
कनेक्शन इस्टैब्लिश हो जाता है। लेम वर्ड्स में समझा जाए तो क्लाइंट सर्वर से पूछता है चलो भाई कनेक्ट करें। सर्वर
बोलता है आपको कनेक्ट करना है। ओके। क्लाइंट फिर रिप्लाई देता है ओके डन एंड वो दोनों कनेक्टेड हो जाते हैं। अब थ्री
वे हैंडशक से कनेक्ट होने के बाद डेटा ट्रांसफर शुरू होता है। डेटा ट्रांसफर जब होता है वहां जो टीसीपी सेगमेंट्स है उनको
सीक्वेंस नंबर्स देते हैं टू कीप द ट्रैक ऑफ ऑर्डर। फॉर एग्जांपल क्लाइंट और सर्वर के बीच में थ्री वे हैंड चेक होने के बाद
हम सेगमेंट्स सेंड करना स्टार्ट करते हैं। तो जब हम उनको सेगमेंट्स भेजते हैं तो उनको सीक्वेंस नंबर देते हैं। लाइक
सीक्वेंस वन सीक्वेंस टू सेगमेंट विद सीक्वेंस नंबर थ्री। सर्वर एकनॉलेजमेंट सेंड करता है आफ्टर रिसीविंग दोज़
सेगमेंट्स। इन टीसीपीआईपी मॉडल हमने ये देखा था कि जो डेटा आता है ट्रांसपोर्ट लेयर के पास उसको हम डिवाइड करते हैं इन
मल्टीपल सेगमेंट्स और डेटाग्राम्स। दिस प्रोसेस इज़ कॉल्ड एज सेगमेंटेशन। ऑन द सर्वर साइड यह जो सेगमेंट्स हैं इनको
असेंबल किया जाता है बेस्ड ऑन देयर सीक्वेंस नंबर। डाटा ट्रांसफर में अगर कोई सेगमेंट लॉस हो गया तो रिसीवर कोई
एकनॉलेजमेंट भेजेगा ही नहीं। एंड अगर रिसीवर ने एकनॉलेजमेंट भेजी नहीं तो सेंडर को अपने आप पता चल जाएगा कि ओके दिस
सेगमेंट इज लॉस। मैं इसको रीिट्रांसमिट करता हूं। इस प्रकार एरर हैंडलिंग हम करते हैं। बट यहां एक कैच है कि सेंडर
इनफाइनाइट टाइम तक तो वेट नहीं कर सकता। तो दैट्स व्हाई वी हैव टाइम आउट्स। टाइम आउट ये इंश्योर करते हैं कि विदिन सर्टेन
टाइम फ्रेम हमें एकनॉलेजमेंट नहीं आई तो हम उन सेगमेंट्स को रीट्रांसमिट करते हैं। फॉर एग्जांपल सेंडर ने सेगमेंट विद
सीक्वेंस वन टू एंड थ्री ऐसे तीन सेगमेंट्स रिसीवर के पास भेजे। एंड फ्रॉम रिसीवर वी रिसीव्ड एकनॉलेजमेंट फॉर
सेगमेंट वन एंड सेगमेंट टू। व्हिच मींस सेगमेंट वन भी डिलीवर हुआ है, सेगमेंट टू भी डिलीवर हुआ है। कुछ टाइम फ्रेम तक वेट
करके भी अगर हमें एकनॉलेजमेंट रिसीव नहीं हुआ व्हिच मींस सीक्वेंस थ्री लॉस्ट हो गया है। तो सेंडर सेगमेंट विद सीक्वेंस
थ्री को रीट्रांसमिट करता है। एंड फिर उसका एकनॉलेजमेंट मिलने के बाद वो रिसीव हो गया। हमें पता चल जाता है। जब सारा
डाटा ट्रांसफर होने के बाद कनेक्शन जो है उसको टर्मिनेट कैसे करते हैं उसके बारे में देखते हैं। तो टीसीp का कनेक्शन
इस्टैब्लिश करते हैं तब थ्री वे हैंडशक करते हैं और कनेक्शन टर्मिनेशन में फोर वे हैंडशक किया जाता है। क्लाइंट है फोर वे
हैंडशक की फर्स्ट स्टेप होती है कोई भी एंड आइदर वो सेंडर हो या रिसीवर हो। कोई भी एंड से हम लोग एक फिन पैकेट भेजते हैं
टू इनिशिएट द क्लोजिंग प्रोसेस। फॉर एग्जांपल मैं एक क्लाइंट से फिन पैकेट भेज रहा हूं। सर्वर उसको रिसीव करता है। एंड
रिसीव करने के बाद ही सेंड्स द एकनॉलेजमेंट। आफ्टर एकनॉलेजिंग दैट सर्वर फिन ब्रैकेट क्लाइंट को भेजता है। एंड
क्लाइंट फिर से एक एकनॉलेजमेंट लास्ट एकनॉलेजमेंट भेजता है टू एंड द कनेक्शन कनेक्शन को टर्मिनेट करने के लिए। तो दिस
इज़ फोर वे हैंड चेक। पहले फिन रिक्वेस्ट जाती है एक साइड से। फिर दूसरे साइड से एकनॉलेजमेंट जाके फिर से फिन पैकेट जाता
है और फिर जिस साइड ने कनेक्शन टर्मिनेशन को इनिशिएट किया था वो लास्ट में फाइनल एकनॉलेजमेंट भेज के कनेक्शन को टर्मिनेट
कर देते हैं। टीसीपी के यूज़ केसेस देखते हैं। फर्स्ट इज चैट एप्लीकेशन बिकॉज़ आप सभी ने जो मैसेज भेजा है वो जैसा भेजा है
वैसा ही पहुंचना चाहिए। फॉर एग्जांपल आपने भेजा कि यू आर नॉट दैट बैड। एंड बीच में नॉट दैट चला गया। एंड यू आर बैड पहुंच गया
तो पंगा हो जाएगा। दैट्स व्हाई चैट एप्लीकेशनेशंस में हम TCP यूज़ करते हैं फॉर रिलायबल एंड एक्यूरेट डिलीवरी। रिमोट
सेल और डेटाबेस कनेक्शंस में TCP का यूज़ होता है। अगर आप कुछ कमांड्स रन कर रहे हो तो आप चाहते हो कि वो कमांड्स पूरी रन हो
एंड जिस सीक्वेंस में रन कर रहे हो उसी सीक्वेंस में रन हो। सिमिलरली आप अगर डेटाबेस में कुछ एसक्यूएल क्वेरीज रन कर
रहे हो तो आप वो पूरी क्वेरी एक साथ ही रन करना चाहोगे। अदरवाइज पता चला आप डेटाबेस से रो डिलीट कर रहे हो और वो क्वेरी
विदाउट वेयर क्लॉज़ ही रन हो गई और डेटाबेस ही उड़ गया। दैट्स व्हाई यहां TCP यूज़ किया जाता है। वेब कम्युनिकेशन में भी HTP वन,
एचटीपी टू प्रोटोकॉल आर बेस्ड ऑन TCP जो लेटेस्ट वर्जन है HTP3 दैट यूजज़ क्विक प्रोटोकॉल व्हिच इज़ बिल्ट ऑन टॉप ऑफ
यूडीपी। वी विल सी दैट इन अपकमिंग चैप्टर्स। एंड लास्ट इज़ एनी बायोडायरेक्शनल कम्युनिकेशन लाइक वेब
सॉकेट में TCP यूज़ होता है। फॉर रिलायबल डिलीवरी ऑफ़ डेटा। TCP सेगमेंट का स्ट्रक्चर समझते हैं। TCP सेगमेंट जो है
वो इनकैप्सुलेट होता है आईपी पैकेट में एज अ पेलोड। याद है प्रोटोकॉल डेटा यूनिट्स के बारे में पढ़ा था। इनकैप्सुलेशन
डीकैप्सुलेशन की प्रोसेस पढ़ी थी। तो टीसीp सेगमेंट का जो हेडर है उसकी मिनिमम साइज 20 बाइट होती है। अगर हमने उसमें कुछ
ऑप्शनल चीजें ऐड कर दी तो मैक्सिमम वो 60 बाइट तक जा सकती है। सिमिलर टू द आईपी पैकेट। जस्ट लाइक यूडीपी टीसीp हेडर में
भी पहले सोर्स पोर्ट होता है, डेस्टिनेशन पोर्ट होता है और कुछ एक्स्ट्रा चीजें होती है वो एक-एक करके समझते हैं।
सीक्वेंस नंबर शोर करता है सेगमेंट का सीक्वेंस। सेगमेंट जो है वो करेक्ट ऑर्डर में डिलीवर हो। एकनॉलेजमेंट नंबर होता है
जब सेंडर एकनॉलेजमेंट भेजता है एकनॉलेजमेंट टू एकनॉलेजमेंट थ्री वह नंबर डाटा ऑफसेट होता है जो हेडर की साइज बताता
है देन तीन बिट्स है वो फ्यूचर पर्पस के लिए रखी गई है उसके बाद नाइन कंट्रोल फ्लैग्स होते हैं इंक्लूडिंग अर्जेंट
फ्लैग एकनॉलेजमेंट फ्लैग पुश फ्लैग रिसेट फ्लैग जो रिसेट कनेक्शन रिसेट के लिए यूज़ होता है सीन फ्लैग इस सिंक्रोनाइजेशन
रिक्वेस्ट में भेज रहा हूं फिन फ्लैग टू टर्मिनेट द कनेक्शन देन ईसीएन इको एक्सप्लसिट कंजेशन नोटिफिकेशन इको जब हम
टीसीपी के थ्रू डाटा सेंड कर रहे होते हैं तो राउटर्स क्या करते हैं? इसको ऑन कर देते हैं अगर कंजेशन हो गया तो। एंड देन
वी हैव CW आर फ्लैग व्हिच इज़ कंजेशन विंडो रिड्यूस। वो सेंडर से जाता है राउटर की तरफ कि ओके आपका कंजेशन हो गया है तो
मैंने डेटा का स्पीड कम कर दिया है। वी विल सी दिस इन डेप्थ। जब हम फ्लो कंट्रोल एंड कंजेशन कंट्रोल के बारे में बात
करेंगे। लास्ट फ्लैग इज़ एनएस फ्लैग व्हिच इज एक्सपेरिमेंटल फ्लैग। उसके बाद विंडो साइज होती है। दैट इज रिसीवर्स विंडो
साइज। कि रिसीवर की कैपेसिटी कितनी है? डाटा रिसीव करने की। देन चेक सम होता है जो चेक करता है कि यह जो डाटा रिसीव हुआ
है वो करप्ट हुआ है या नहीं। नेक्स्ट इज़ अर्जेंट पॉइंटर जो अर्जेंट वाला डेटा कौन सा है उसको पॉइंट कराता है। ऑप्शनल
फील्ड्स भी है। अब अगर आपको कुछ एडिशनल इनेशन भेजनी है टीसीp के हेडर में तो आप वो भेज सकते हो। एंड लास्ट इज़ पैडिंग
व्हिच इज़ वेरिएबल बिकॉज़ TCP का हेडर शुड बी इन द मल्टीपल ऑफ़ 32। सो हम उतना पैडिंग फिर ऐड कर देते हैं। सो सिमिलर टू द आईपी
पैकेट स्ट्रक्चर। TCP का जो सेगमेंट है उसमें जो हेडर है वो 20 टू 60 बाइट हो सकता है। डिपेंड्स ऑन ऑप्शन मिनिमम 20 तो
होता ही है फॉललोड बाय डेटा। इस हेडर को थोड़ा डिटेल में समझते हैं। फर्स्ट होता है सोर्स पोर्ट देन डेस्टिनेशन पोर्ट। देन
सीक्वेंस नंबर होता है 32 बिट्स का। एकनॉलेजमेंट नंबर होता है जब हम एकनॉलेजमेंट भेज रहे हैं तो। नेक्स्ट इज़
डेटा ऑफसेट जो हेडर की साइज बताता है। देन तीन बिट्स है जो रिजर्व है। फिर उसके बाद नो फ्लैग्स होते हैं एक-एक बिट के। एनएस
फ्लैग है, कंजेशन विंडो रिड्यूस है, ईसीई फ्लैग है, अर्जेंट फ्लैग है, एकनॉलेजमेंट फ्लैग है, पुश फ्लैग है, रिसेट फ्लैग है,
सिंक्रोनाइज फ्लैग है, फिनिश फ्लैग है। ये बाद विंडो साइज होती है जो रिसीवर की कैपेसिटी कितनी है डेटा रिसीव करने की वो
बताती है। देन चेक सम इज़ देयर एंड अर्जेंट पॉइंटर। ये फर्स्ट बाइट, सेकंड, थर्ड, फोर्थ एक लाइन में फोर बाइट्स होती है।
ऐसे 4 * 1 2 3 4 5 20 बाइट्स का टीसीपी सेगमेंट का हेडर होता है। उसके अलावा ऑप्शनल फील्ड्स हो सकती है फॉललोड बाय
डाटा। दिस इज द कंप्लीट पिक्चर ऑफ टीसीपी सेगमेंट। नेक्स्ट इज़ एमएसएस मैक्सिमम सेगमेंट साइज। जब हम नेटवर्क के थ्रू
सेगमेंट्स भेज रहे हैं तो उनकी मैक्सिमम सेगमेंट साइज क्या है? वो थोड़ा कैलकुलेशन अभी समझते हैं। बिकॉज़ अगर नेटवर्क की
मैक्सिमम सेगमेंट साइज है फॉर एग्जांपल 1000 बाइट्स और आप भेज रहे हो 3000 बाइट्स का सेगमेंट तो उसको फ्रेगमेंटेशन के थ्रू
जाना पड़ेगा। व्हिच मेक्स थिंग्स मोर कॉम्प्लेक्स। इससे बढ़िया जब हम सेंड कर रहे हैं तो सेंड करते वक्त ही वी विल टेक
प्रिवेंशंस। सो इस कैलकुलेशन में हम सबसे पहले मैक्सिमम ट्रांसमिशन यूनिट ऑफ नेटवर्क व्हिच मींस नेटवर्क की कितनी
कैपेसिटी है वो पहले देखी जाती है। फॉर एग्जांपल इन केस ऑफ इथरनेट लार्जेस्ट पैकेट हम अप टू 1500 बाइट्स का भेज सकते
हैं। उससे ज्यादा भेजा तो फ्रेगमेंटेशन हो जाएगा। अगर हमें पेलोड की एग्जैक्ट साइज निकालनी है तो हमें जो आईपी हेडर है,
टीसीp हेडर है इन सब की साइज रिड्यूस करनी पड़ेगी। स्टैंडर्ड हेडर्स व्हिच डज़ नॉट इंक्लूड ऑप्शंस। IP हेडर 20 बाइट्स का
होता है। TCP हेडर भी 20 बाइट्स का होता है। 20 + 20 40 व्हिच मींस मैक्सिमम हम 14460 बाइट्स का पेलोड एक सेगमेंट में भेज
सकते हैं। TCP इज़ अ स्टेटफुल प्रोटोकॉल। तो वो अलग-अलग स्टेट मेंटेन करता है ऑन द क्लाइंट साइड एंड सर्वर साइड। तो सबसे
पहले जो कनेक्शन है वो इस्टैब्लिश स्टेट में होता है जब हम कनेक्शन ओपन करते हैं। थ्री वे हैंडशक होने के बाद कनेक्शन का
स्टेट इस्टैब्लिश्ड में चला जाता है। एंड ड्यूरिंग दिस स्टेट बोथ सेंडर एंड रिसीवर डेटा एक्सचेंज कर सकते हैं। नेक्स्ट स्टेट
इज़ फिनवेट वन। जब सारा डेटा ट्रांसफर हो जाता है एंड कनेक्शन टर्मिनेशन करने की बारी आती है। कोई भी साइट कनेक्शन
टर्मिनेशन इनिशिएट कर सकती है। फॉर एग्जांपल इन दिस केस क्लाइंट इनिशिएट्स दैट क्लाइंट पिन पैकेट सर्वर को भेजता है।
तो इट गोज़ इंटू द पिन वेट वन स्टेट। आफ्टर रिसीविंग दिस फिन पैकेट फ्रॉम क्लाइंट सर्वर उसके एकनॉलेजमेंट भेजता है। एंड इट
वेंट इनू द क्लोज वेट स्टेट। दैट इज़ थर्ड स्टेट। पहले इस्टैब्लिश स्टेट में होते हैं। फिर फ़िन वेट में चला जाता है जो
कनेक्शन इनिशिएट करता है। देन आफ्टर सेंडिंग द एकनॉलेजमेंट फॉर दैट फिन रिक्वेस्ट अदर साइड गोज़ इंटू द क्लोज वेट
स्टेट। व्हेन क्लाइंट रिसीव दिस एकनॉलेजमेंट वो चला जाता है फिन वेट टू स्टेट में। एंड उसके बाद आपको अगर याद
होगा फोरवे हैंडशक तो सर्वर ही फिन पैकेट सेंड करता है क्लाइंट को। एंड आफ्टर सेंडिंग दैट पैकेट इट गोज़ टू द नेक्स्ट
स्टेप दैट इज़ लास्ट एकनॉलेजमेंट। व्हिच मींस इट इज़ वेटिंग फॉर द लास्ट एकनॉलेजमेंट फ्रॉम द अदर साइड। व्हेन
क्लाइंट रिसीव्स फ़िन पैकेट फ्रॉम सर्वर, वह टाइम वेट स्टेट में चला जाता है आफ्टर सेंडिंग एकनॉलेजमेंट। यह जो टाइम वेट
स्टेट है, यह इंपॉर्टेंट होती है टू अवॉयड सेशन हाईजैकिंग। अभी भी कुछ एकनॉलेजमेंट अगर बची होगी, तो वो सारी रिसीव हो सकती
है। इन दिस टाइम वेट स्टेट, क्लाइंट को सर्टेन पीरियड तक वेट करना पड़ता है बिफोर क्लोजिंग द कनेक्शन। एंड दैट वेटिंग
पीरियड इज़ 2 एमएसएल मैक्सिमम सेगमेंट लाइफटाइम व्हिच इज़ अराउंड 2 मिनट्स। सो 2 * 2 मिनट्स दैट इज़ अप टू 4 मिनट्स इन दिस
केस क्लाइंट बिकॉज़ क्लाइंट ने इनिशिएट किया था फिन वाला। तो जो भी टाइम वेट स्टेट में जाता है उसको 4 मिनट्स वेट करना
पड़ता है। ये जो एकनॉलेजमेंट जब पहुंचती है सर्वर के साइट पे तो वो क्लोज स्टेट में चला जाता है। एंड आफ्टर 4 मिनट्स क्लाइंट
भी क्लोज स्टेट में चला जाता है। तो दीज़ ऑल आर द डिफरेंट कनेक्शन स्टेट इन TCP। पहले कनेक्शन इस्टैब्लिश्ड होता है थ्री
वे हैंड चेक के बाद फिर डाटा ट्रांसफर होता है। उसके बाद फ़िन वेट वन देन क्लज़ वेट फ़िन वेट टू उसके बाद लास्ट
एकनॉलेजमेंट टाइम वेट एंड देन लास्ट वन इज़ क्लोज स्टेट। नेक्स्ट इज़ टीसीपी फ्लो कंट्रोल व्हिच इंश्योरर्स दैट जो सेंडर है
वो सफिशिएंट डेटा भेजे रिसीवर को। सो दैट इट विल नॉट ओवरवेल्म। यह जो फ्लो कंट्रोल है इट इज़ डिफरेंट फ्रॉम कंजेशन कंट्रोल।
बिकॉज़ इट डील्स विद द कैपेसिटी ऑफ़ रिसीवर। व्हाइल कंजेशन कंट्रोल डील्स विद द कैपेसिटी ऑफ़ इंफ्रास्ट्रक्चर नेटवर्क्स,
मिडल बॉक्सेस। फ्लो कंट्रोल हमें रिसीवर की कैपेसिटी बताता है कि हाउ मच डेटा इट कैन हैंडल एंड वो कैपेसिटी वेरीरी कर सकती
है बेस्ड ऑन रिसीवर की प्रोसेसिंग पावर, सीपीू, रैम एंड करंट लो। टीसीपी में डेटा जो है वो सेगमेंट फॉर्मेट में होता है।
एंड फ्लो कंट्रोल ये डिसाइड करता है कि ये जो सेगमेंट्स है वो एक साथ मैक्सिमम कितने सेगमेंट्स हम रिसीवर को भेज सकते हैं।
टीसीपी में जो डाटा होता है उसको सेगमेंट कहा जाता है। और सेंडर जब डेटा भेज रहा है तो उसको इंश्योर करना होता है कि वो कितने
सेगमेंट्स भेजें बिफोर वेटिंग फॉर एकनॉलेजमेंट फ्रॉम रिसीवर। बिकॉज़ रिसीवर के पास एक बफर होता है। जो भी इनकमिंग
डेटा आ रहा है वो बफर में वो स्टोर कर सकता है बिफोर प्रोसेसिंग। नेक्स्ट टर्म इज़ रिसीवर विंडो। सो वी सॉ दैट दिस इज़
विंडो साइज इन द टीसीबी पैकेट एंड इट डिटरमाइंस अमाउंट ऑफ़ डेटा कैन बी सेंट बिफोर रिसीविंग एंड एकनॉलेजमेंट। ये जो है
वो डायनेमिक है एंड इट चेंज अकॉर्डिंग टू द करंट स्टेट ऑफ रिसीविंग बफर। फॉर एग्जांपल वी हैव टू ट्रांसफर दिस 10
सेगमेंट्स एंड रिसीवर विंडो साइज इज़ फोर। व्हिच मींस सेंडर एक साथ चार सेगमेंट भेज सकता है रिसीवर को। यह जो डाटा
ट्रांसफरिंग होती है, यहां स्लाइडिंग विंडो प्रोटोकॉल यूज़ किया जाता है। जो अलाउ करता है सेंडर को मल्टीपल सेगमेंट्स
भेजने में। बट विद इन द लिमिट ऑफ रिसीवर विंडो सेंडर ये चारों सेगमेंट्स रिसीवर को भेज देता है। एंड रिसीवर से हमें अगर एक
एकनॉलेजमेंट आ गई व्हिच मींस रिसीवर रिसीव्ड दैट फर्स्ट सेगमेंट तो ये जो विंडो है ये स्लाइड होती है। यू कैन सी
हियर नाउ दैट विंडो इज स्लाइड वी आर रेडी टू सेंड फिफ्थ सेगमेंट। फिफ्थ सेगमेंट भी पहुंचा तब तक हमें और दो एकनॉलेजमेंट आ
गई। सेकंड एंड थर्ड सेगमेंट भी रिसीव हो गया रिसीवर के साइड। तो अपनी जो विंडो है वो और दो से शिफ्ट हो के वी आर रेडी टू
ट्रांसमिट सेगमेंट नंबर सिक्स एंड सेवन। दिस इज हाउ दिस प्रोसेस कंटिन्यूस। अगर हमें लार्जर डेटा ट्रांसफर करना है इन केस
ऑफ डेटा सेंटर्स एंड एंड ऑल जहां जीबीपीएस की बैंडविड्थ होती है। वहां टीसीp एक विंडो स्केलिंग का ऑप्शन देता है जो हमें
अलऊ करता है लार्जर विंडो साइज। डीसीबी पैकेट में जो विंडो साइज है वो फिल्ट 16 बिट्स की है। व्हिच मींस 2 16 दैट इज़
65535 बाइट्स तक ही हम वहां विंडो साइज मेंशन कर सकते हैं। बट ये जो स्केलिंग फैक्टर है जो
ज़ीरो से 14 होता है व्हिच हेल्प्स अस अगर वो ज़ीरो है दैट मींस 2 16 - 1 दैट इज़ 65535
बाइट्स हम भेज सकते हैं। अगर उसको हमने स्केलिंग फैक्टर को 14 सेट कर दिया तो मैक्स अप टू 1GB तक विंडो साइज जा सकती है
फॉर फास्ट ट्रांसफरर्स इन द डेटा सेंटर एंड इन द कंट्रोलोल्ड एनवायरमेंट। यह जो स्केलिंग फैक्टर है इसका नेगोशिएशन टीसीपी
हैंडशक के वक्त ही होता है। नेक्स्ट इज़ टीसीपी कंजेशन कंट्रोल। रिमेंबर फ्लो कंट्रोल मींस कंट्रोलिंग द फ्लो अकॉर्डिंग
टू द रिसीवर्स कैपेसिटी एंड कंजेशन कंट्रोल मींस जो नेटवर्क है नेटवर्क के हिसाब से डेटा का फ्लो कंट्रोल करना।
कंजेशन कंट्रोल मींस नेटवर्क की कैपेसिटी क्या है हैंडल करने की एंड हाउ फ़ास्ट वी कैन सेंड डेटा थ्रू द नेटवर्क व्हिच मींस
वी हैव टू लुक इंटू द कैपेसिटी ऑफ़ मिडिल बॉक्सेस लाइक राउटर्स अब आप में से कुछ लोगों के दिमाग में आया होगा कि क्यों ये
फ्लो कंट्रोल करना कंजेशन कंट्रोल करना हम सिंपली एक-एक पैकेट भेजते हैं जब एकनॉलेजमेंट आ जाएगा तो दूसरा पैकेट
भेजेंगे आराम से चलेगा कोई कंजेशन नहीं होगा एक-एक भेजते हैं बट अगर हम वैसा करने लगे तो लेटेंसी बहुत इनक्रीस हो जाएगी
लेटेंसी को कम से कम रखने के के लिए हम यह इंश्योर करते हैं कि हम ज्यादा [गला साफ़ करने की आवाज़] से ज्यादा पैकेट
एक साथ वन शॉट में भेज सके एक राउंड ट्रिप में। टू अवॉयड दिस कंजेशन हम एक प्रॉपर्टी यूज़ करते हैं कंजेशन विंडो। हमने ज्यादा
डाटा सेंड कर दिया। राउटर ने ड्रॉप कर दिया। तो हमें उस डेटा को फिर से रीट्रांसमिट करना पड़ेगा। तो अल्टीमेटली और
ज्यादा टाइम लगेगा एंड नेटवर्क का परफॉर्मेंस भी रिड्यूस होगा। यह जो कंजेशन कंट्रोल की प्रोसेस है, इसमें हम दो
एल्गोरिदम्स यूज़ करते हैं। फर्स्ट इज़ टीसीपी स्लो स्टार्ट एंड कंजेशन अवॉयडेंस। एक-एक करके दोनों को समझते हैं। फर्स्ट
टीसीबी स्लो स्टार्ट। इसको स्लो स्टार्ट इसलिए बोला जाता है बिकॉज़ हम स्टार्ट बहुत स्लो करते हैं। हमारी स्टार्टिंग में
कंजशन विंडो की साइज 1 एमएसएस होती है। मैक्सिमम सेगमेंट साइज 1460 अगर हम 2020 बाइट्स के हेडर माइनस कर दे तो यह स्लो
स्टार्ट नाम आपको फूल कर सकता है। बिकॉज़ यह एल्गोरिदम स्लो नहीं है। जस्ट वी स्टार्टेड फ्रॉम वन एमएसएस। दैट्स व्हाई
इट कॉल्ड एज स्लो स्टार्ट। बट इसकी जो ग्रोथ है वो एक्सप्पोनेंशियली होती है। कैसे वो देखते हैं। इनिशियली हम कंजेशन
विंडो की साइज एक एमएसएस रखते हैं। फॉर एव्री एकनॉलेजमेंट जो हमें रिसीव होती है हम कंजेशन विंडो की साइज एक से बढ़ा देते
हैं। मतलब पहले एक थी हमें एक एकनॉलेजमेंट आई। हमने दो विंडो साइज कर दिए। हमने फिर दो सेगमेंट भेजे। दो एकनॉलेजमेंट रिसीव
हुई थी। दो की चार हुई। चार की आठ भी हो सकती है। ऐसा एक्सप्पोनेंशियली बढ़ते जाता है। अंटिल सर्टेन थिशहोल्ड इज अचीव। दैट
थिशोल्ड इज़ कॉल्ड स्लो स्टार्ट थिशहोल्ड। लेट्स सी टीसीपी स्लो स्टार्टिंग एक्शन। हमें होस्ट ए से होस्ट बी में डेटा भेजना
है। एंड ऑब्वियसली वी शेयर दैट थ्रू द नेटवर्क व्हिच कंसिस्ट ऑफ़ मल्टीपल राउटर्स। सपोज़ वी वांटेड टू सेंड दिस सेवन
सेगमेंट्स टू बी। इनिशियली कंजेशन विंडो की वैल्यू जो है वो क्या है? वन है। एक पहला सेगमेंट ट्रांसफर होगा। जैसे ही ये
पहला सेगमेंट वहां से हो जाएगा तो हमें एक्नॉलेजमेंट वन मिल जाएगी। फिर हम कंजेशन विंडो की साइज़ एक से बढ़ा देंगे। सो, इट
बिकम टू। इन द नेक्स्ट राउंड ट्रिप वी सेंड टू सेगमेंट्स दैट इज़ सेगमेंट नंबर टू एंड थ्री। जब वह रिसीव होंगे तो दोनों की
एकनॉलेजमेंट टू एंड एकनॉलेजमेंट थ्री हमारे पास आएगी। जैसे ही वो आती है तो हमारी जो कंजेशन विंडो है अब वो दो से
बढ़ेगी। अब वो चार हो गई। एंड नेक्स्ट राउंड ट्रिप में हम ये चारों के चारों सेगमेंट बी को भेज देगा और चारों के चारों
बी की तरफ रिसीव हो जाएंगे। तो ऐसे वो एक्सप्पोनेंशियली बढ़ते जाएगी अंटिल सर्टेन थिशोल्ड। और उस थिशोल्ड के बाद हम कंजेशन
अवॉयडेंस एल्गोरिदम पे शिफ्ट हो जाएंगे। तो इनिशियली हम स्टार्ट करते हैं टीसीपी स्लो स्टार्ट से और फिर कंजेशन अवॉयडेंस
एल्गोरिदम पे स्विच कर देते हैं। यहां हम कंजेशन विंडो को लीनियरली इनक्रीस करते हैं इंस्टेड ऑफ एक्स्पोनेंशियली। फॉर
एव्री राउंड ट्रिप हम कंजेशन विंडो की साइज एक एमएसएस से बढ़ाते हैं। व्हिच मींस अगर उस राउंड ट्रिप में हमें चार दो
एकनॉलेजमेंट आए, तीन आए, चार आए तब भी हम एव्री राउंड ट्रिप में खाली एक एमएसएस से ही कंजेशन विंडो की साइज बढ़ाएंगे। ये जो
लीनियर ग्रोथ है कंजेशन विंडो की वो स्लोअर है एज कंपेयर टू एक्सप्पोनेंशियल ग्रोथ। सो जो कंजेशन है वो हम अवॉयड कर
सकते हैं। लेट्स सी कंजेशन अवॉयडेंस इन एक्शन। वही एग्जांपल है होस्ट ए को होस्ट बी को डाटा सेंड करना है वाया नेटवर्क इफ
आई सेंड दिस सेगमेंट टू बी बी ने रिसीव करने के बाद उसकी एकनॉलेजमेंट भेजी तो आई इनक्रीस कंजेशन विंडो साइज बाय वन तो पहले
एक थी तो अभी दो हो गई नेक्स्ट मैं अभी 12 और 13 नंबर के सेगमेंट्स भेजता हूं होस्ट भी उनको रिसीव करेगा तो वो एकनॉलेजमेंट 12
एकनॉलेजमेंट 13 सेंड करेगा इवन दो यहां मुझे दो एकनॉलेजमेंट आई है तो मैं एव्री राउंड ट्रिप में एक से इनक्रीस करना तो दो
से अभी तीन होगी नॉट चार हर राउंड राउंड ट्रिप पे हमने एक से ही इंक्रीज़ किया। वहां स्लो स्टार्ट में हर राउंड ट्रिप में
हमने कंजेशन विंडो की वैल्यू जितने एकनॉलेजमेंट रिसीव हुए उतने से इंक्रीस किया था एक्सप्पोनेंशियली। दिस वर्ल्ड इज़
नॉट आइडियल। और ऐसी सिचुएशन आ गई जहां कंजेशन होने वाला है एंड हमें राउटर को जो भेजे हुए पैकेट्स है उनको भी ड्रॉप नहीं
कराना है। तो राउटर के पास ऐसी कुछ सिस्टम तो होनी चाहिए कि वो हमें इनफॉर्म कर पाए कि बॉस कंजेशन होने वाला है। ट्रैफिक जाम
होने वाला है। आप थोड़ा रुकिए। फॉर दैट वी हैव ईसीएन एक्सप्लसिट कंजेशन नोटिफिकेशन। याद है यह हमने आईपी पैकेट एनाटॉमी में भी
पढ़ा था एंड टीसीपी पैकेट के समय भी हमने इसका जिक्र किया था। जब सेंडर से पैकेट राउटर तक पहुंचेगा और राउटर को फील होगा
कि ओके नाउ ओवरलोड ज्यादा हो रहा है। कंजेशन होने लगा है तो वो जो आईपी पैकेट है उसको रिसीवर को भेजने से पहले राउटर
उसमें ईसीएन फ्लैग को ट्रू कर देगा। जब रिसीवर के पास यह पैकेट पहुंचेगा तो रिसीवर विल अंडरस्टैंड ओके कंजेशन हो रहा
है ऐसा राउटर ने मेरे को सिग्नल भेजा है। तो जब वह एकनॉलेजमेंट भेजता है वह सेंडर को बता देगा कि भाई थोड़ा आराम से ले लो
राउटर ओवरवेल्म हो रहा है। कंजेशन नोटिफिकेशन जो है वो आईपी हेडर की बिट है। नेक्स्ट इज़ कंजेशन डिटेक्शन। अगर कंजेशन
डिटेक्ट हो गया। राउटर ने कंजेशन नोटिफिकेशन भेजा। रिसीवर को रिसीवर ने फिर सेंडर को आगाह किया या पैकेट्स लॉस होने
लगे। इन दो सिचुएशन हम दो एकशंस करते हैं। फर्स्ट स्लो स्टार्ट थ्रेशोल्ड है उसको रिड्यूस करते हैं बाय सेटिंग इट टू द हाफ
ऑफ फ्लाइट साइज। करंट फ्लाइट साइज जो है उसके हाफ एसएसएस थ्रेशोल्ड की वैल्यू सेट कर देते हैं। फ्लाइट साइज मींस नंबर ऑफ
अनएकनॉलेज्ड पैकेट्स। मतलब मैंने 20 पैकेट भेजे। उसमें से 10 ही पैकेट का एकनॉलेजमेंट आया है। तो 10 पैकेट
अनएकनॉलेज्ड है। 10 बाय टू फाइव। तो एसएसएस थिशोल्ड में फाइव से कर दूंगा। सेकंड एक्शन इज़ रिसेट कंजेशन विंडो।
कंजेशन विंडो की वैल्यू जो भी होगी उसको रिसेट करके वापस वन कर देना। व्हिच मींस हम फिर से स्टार्ट करते हैं विथ लोअर
एसएसएस थ्रेशोल्ड टू अवॉइड कंजेशन अगेन। वन पॉइंट टू नोट दैट ये जो एसएसएस थिशोल्ड का जो रिडक्शन है वो मैक्सिमम टू एमएसएस
तक हो सकता है। उसके नीचे एसएस थिशोल्ड की वैल्यू जा नहीं सकती। वी जस्ट डिस्कस अबाउट स्लो स्टार्ट एल्गोरिदम फॉललोड बाय
कंजेशन अवार्डेंस। उसके बाद हमने कंजेशन नोटिफिकेशन क्या होता है? एंड कंजेशन डिटेक्शन करने के बाद क्या-क्या चीजें
करते हैं उसके बारे में समझा। बट फिर एक बार हम रिवाइज करते हैं और इन दोनों को साथ में ग्राफिकली देखते हैं कि यह दोनों
साथ में काम कैसे करते हैं। एंड आई एम डेफिनेटली श्योर दैट अगर आपने इसको अच्छे से समझा तो आप कभी स्लो स्टार्ट एंड
कंजेशन अवॉयडेंस के बारे में एक्सप्लेन करते हुए कभी फसोगे नहीं। लेट्स कंसीडर अ ग्राफ वेयर एक्स एक्सिस रिप्रेजेंट टाइम
एंड y एक्सिस रिप्रेजेंट कंजेशन विंडो। हमने अभी देखा था कि कंजेशन कंट्रोल के प्रोसेस में स्लो स्टार्ट एल्गोरिदम से हम
स्टार्ट करते हैं एंड देन हम स्विच करते हैं कंजेशन अवॉयडेंस पे। इनिशियली कंजेशन विंडो की वैल्यू 1 ms होती है। देन इन
स्लो स्टार्ट एल्गोरिदम हम उसको एक्सप्पोनेंशियली इंक्रीस करते हैं अंटिल सम थिशोल्ड। आई एम रिप्रेजेंटिंग स्लो
स्टार्ट एल्गोरिदम यूजिंग लाइट येलो कलर। एक थिशोल्ड है। वहां तक एक्सप्पोनेंशियली कंजेशन विंडो की वैल्यू इंक्रीस हुई।
आफ्टर दैट थिशोल्ड वी स्विच टू कंजेशन अवॉयडेंस एल्गोरिदम। तो मैं कंजेशन अवॉयडेंस को लाइट ग्रीन से रिप्रेजेंट कर
रहा हूं। तो ये कंजेशन अवॉयडेंस एल्गोरिदम से वैल्यू अभी लीनियरली इंक्रीस होने लगी कंजेशन विंडो की। आफ्टर सम टाइम अगर
कंजेशन ट्रिगरर्ड हो गया, पैकेट्स लॉस होने लगे या राउटर ने कंजेशन नोटिफिकेशन भेज दिया तो हम दो चीजें करते हैं। फर्स्ट
हम कंजेशन विंडो की वैल्यू वन एमएसएस पे सेट कर देते हैं। एंड सेकंड हम जो थ्रीशोल्ड है उसकी वैल्यू हाफ ऑफ करंट
फ्लाइट साइज करते हैं। फॉर एग्जांपल वो वैल्यू अब हमने इतनी कर दी। तो मैक्सिमम कंजेशन विंडो की साइज इतनी हो सकती है
स्लो स्टार्ट एल्गोरिदम के थ्रू। अगेन हम स्लो स्टार्ट एल्गोरिदम से धीरे-धीरे कंजेशन विंडो की साइज बढ़ाते जाएंगे
एक्सप्पोनेंशियली। फिर उसके बाद स्विच करेंगे कंजेशन अवॉयडेंस एल्गोरिदम पे। जब फिर से कंजेशन ट्रिगरर्ड होगा तो फिर से
कंजेशन विंडो की साइज वन एमएमएसएस सेट होगी। फिर थ्रीशोल्ड और कम होगा। एंड देन अगेन वी स्टार्ट फ्रॉम स्लो स्टार्ट
एल्गोरिदम देन वी स्विच टू कंजेशन अवयन एल्गोरिदम। अगेन आफ्टर कंजेशन इज ट्रिगरर्ड वी गो टू द वन एमएसएस। देन जो
थ्रीशोल्ड है उसकी वैल्यू हाफ होगी। तो ये ऐसे हाफ हाफ हाफ ऑफ द करंट फ्लाइट साइज होते मिनिमम 2 एमएसएस तक जा सकती है ये
वैल्यू। उसके नीचे यह नहीं जाएगी। एंड फिर यह कंजेशन अवॉयडेंस वाला एल्गोरििदम चलते रहेगा। तो यह प्रोसेस थ्रू आउट द डाटा
ट्रांसमिशन हम करते रहेंगे। सो दैट नेटवर्क कंजेस्टेड ना हो एंड स्मूथली डेटा ट्रांसफर होते रहे। आप अगर ये एक ग्राफ भी
अच्छे से समझ लोगे तो आपको स्लो स्टार्ट एंड कंजेशन अवॉयडेंस एल्गोरिदम कैसे काम करता है वो समझ आ जाएगा। तो दिस इज द बिग
पिक्चर ऑफ़ स्लो स्टार्ट एंड कंजेशन अवॉयडेंस एल्गोरिदम। टीसीबी के एडवांटेजेस देखते हैं। फर्स्ट इज गारंटेड डिलीवरी
व्हिच मींस जो डाटा हम भेज रहे हैं वो गारंटेड डिलीवरी होता है। वी हैव एकनॉलेजमेंट। अगर कुछ लॉस्ट हो गया तो वो
रीट्रांसमिशन होता है। नेक्स्ट इज़ कनेक्शन एस्टैब्लिशमेंट। डेटा सेंड करने से पहले हम कनेक्शन को इस्टैब्लिश करते हैं। सो
दैट रिसीवर भी रेडी हो पाए एंड सिक्योरली डाटा सेंड हो पाए। फ्लो कंट्रोल है, कंजेशन कंट्रोल है। हम फ्लो कंट्रोल कर
सकते हैं। रिसीवर को कितना डाटा भेजना है। कंजशन कंट्रोल कर सकते हैं कि नेटवर्क की बैंडविड्थ के हिसाब से कितने सेगमेंट्स
भेजने हैं, कम भेजने, ज्यादा भेजने हैं। स्लो स्टार्ट फॉललोड बाय कंजेशन अवार्ड्स एल्गोरिदम। देन ऑर्डर्ड पैकेट्स मतलब जिस
ऑर्डर में भेजा है डेटा उसी ऑर्डर में वो रिसीव होगा। सिक्योर है टीसीp बिकॉज़ थ्री वे हैंडशक हो रहा है फॉर कनेक्शन
एस्टैब्लिशमेंट। इवन फॉर टर्मिनेटिंग आल्सो वी डू फोर वे हैंडशक। तो डेटा सिक्योरली डिलीवर होता है। अनलाइक यूडीपी।
TCP के एक डिसएडवांटेजेस देखते हैं। लार्ज ओवरहेड एज कंपेयर टू यूडीबी पैकेट। टीसीपी का पैकेट का साइज 20 बाइट तक होता है।
बहुत सारे फ्लैग्स एंड एक्स्ट्रा इनेशन होती है जो कि एक ओवरहेड बन जाता है। दैट्स व्हाई इट इज़ लिटिल स्लोअर दन
यूडीपी। टीसीपी स्टेटफुल है तो इट कंज्यूम्स मेमोरी एंड रिसोर्सेज टू स्टोर दोज़ स्टेट। एंड स्पेशली टाइम वेट स्टेट
में हमें वो जो रिसोर्सेज है वो कंज्यूम रहते हैं फॉर फोर मिनट्स। लेटेंसी है बिकॉज़ कनेक्शन इस्टैब्लिश होता है। थ्री
वे हैंडशक होता है। उसके बाद फर्स्ट पैकेट ट्रांसफर होता है। यूडीबी में हम डायरेक्टली फर्स्ट पैकेट ट्रांसफर कर देते
हैं। फॉर मिनिमल लेटेंसी। हेड ऑफलाइन ब्लॉकिंग का एक प्रॉब्लम है। फॉर एग्जांपल आप टीसीपी के थ्रू पैकेट्स भेज रहे हो।
आपने चार पैकेट भेजे। पैकेट 1 2 3 4 फर्स्ट पहुंच गया। सेकंड नहीं पहुंचा। थर्ड और फोर्थ पहुंच गया। आपको फर्स्ट का,
थर्ड का, फोर्थ का एकनॉलेजमेंट आ गया। बट सेकंड पैकेट नहीं पहुंचा है। तो इसीलिए थर्ड और फोर्थ को भी वेट करना पड़ेगा।
अंटिल सेंडर सेकंड पैकेट को रीट्रांसमिट करें। तो दिस इज कॉल्ड एज हेड ऑफलाइन ब्लॉकिंग प्रॉब्लम व्हिच इज़ कॉमन प्रॉब्लम
इन टीसीपी। नेक्स्ट इज़ कॉम्प्लेक्सिटी। टीसीपी बहुत कॉम्प्लेक्स है। कनेक्शंस मैनेज करना, सीक्वेंस नंबर मैनेज करना,
एकनॉलेज नंबर, रीिट्रांसमिशन करना, लॉट ऑफ़ ओवरवेट इज़ देयर। टीसीपी के कुछ लिमिटेशन को एड्रेस करते हैं। फर्स्ट वन वाज़ हेड ऑफ
लाइन ब्लॉकिंग। अगर चार पैकेट भेजे उसमें फर्स्ट पैकेट ही लॉस्ट हो गया तो सब्सीक्वेंट प्लकेट ब्लॉक हो जाते हैं। इन
द रीसेंट प्रोटोकॉल्स लाइक क्विक ये इशू एड्रेस किया गया है बाय अलंग मल्टीपल स्ट्रीम्स विद इन अ सिंगल कनेक्शन। टीसीपी
क्या करता है? सभी डेटा को मल्टीप्लेक्स करके एज अ सिंगल कनेक्शन भेजता है। बट इन क्विक [गला साफ़ करने की आवाज़] ईच
स्ट्रीम इंडिपेंडेंटली रीिट्रांसमिट कर सकती है लास्ट वाले पैकेट्स का विदाउट ब्लॉकिंग द अदर पैकेट्स। एंड सिंगल
कनेक्शन की भी लिमिट है। आई जस्ट टोल्ड यू कि टीसीp यूज सिंगल कनेक्शन फॉर मल्टीपल स्ट्रीम्स ऑफ़ डेटा। अगर एप्लीकेशन वन और
एप्लीकेशन टू का डेटा हम लोग ओवर द टीसीp ट्रांसफर कर रहे हैं। एंड एप्लीकेशन वन का सब सही चल रहा था। बट एप्लीकेशन टू का जो
स्टार्टिंग के कुछ पैकेट्स है वो लॉस्ट हो गए। तो इवन दो एप्लीकेशन वन के नेक्स्ट पैकेट ट्रांसफर होने चाहिए थे। बट वो भी
होल्ड में चले गए। टू अवॉयड दिस हमारे पास कुछ टेक्निक्स है लाइक कनेक्शन पुलिंग। जहां हम मल्टीपल कनेक्शंस बना सकते हैं
एंड डिफरेंट स्ट्रीम को अलग-अलग कनेक्शन से कनेक्ट कर सकते हैं। इन द मॉडर्न डेवलपमेंट जब हम डेटाबेस को एक्सेस करते
हैं तो ये कनेक्शन पोलिंग बहुत बार यूज की जाती है थ्रू मॉडर्न ओआरएम्स लाइक प्रिज्मा एंड रिजल। दैट्स ऑल अबाउट द
फिफ्थ चैप्टर ऑफ़ ट्रांसपोर्ट लेयर। सबसे पहले वी स्टार्टेड फ्रॉम पोर्ट नंबर्स। देन वी इंट्रोड्यूस्ड यूडीपी। फिर हमने
डेटाग्राम को डिटेल में पढ़ा। देन वी लर्न अबाउट टीसीp प्रोटोकॉल एंड सेगमेंट क्या होता है? सेगमेंट का स्ट्रक्चर क्या होता
है? सेगमेंट में कौन-कौन से फील्ड्स होते हैं? टीसीबी के अलग-अलग कनेक्शंस के बारे में पढ़ा। देन फ्लो कंट्रोल एंड कंजेशन
कंट्रोल के बारे में पढ़ा। कंजेशन कंट्रोल के हमने दो एल्गोरिदम्स भी देखे। टीसीp स्लो स्टार्ट एंड कंजेशन अवॉयडेंस विद
ग्राफिकल एग्जांपल। इन द नेक्स्ट चैप्टर वी विल स्टडी अबाउट एप्लीकेशन लेयर एंड द डिफरेंट प्रोटोकॉल्स इन द एप्लीकेशन लेयर
लाइक एसएसएल प्रोटोकॉल, एचटीपी प्रोटोकॉल, डीएनएस प्रोटोकॉल एंड मोर। [संगीत] वेलकम टू द चैप्टर सिक्स ऑफ़ कंप्यूटर
नेटवर्किंग बूट कैंप व्हिच इज़ अबाउट एप्लीकेशन लेयर। अभी तक पिछले पांच चैप्टर्स में हमने फाउंडेशन से लेकर बहुत
सी चीजें कवर की। वी स्टार्टेड फ्रॉम डिफरेंट नेटवर्क मॉडल्स। उसके बाद हमने फिजिकल डिवाइसेस देखे। मैक एड्रेसिंग
देखी, आईपी एड्रेसिंग देखी, पोर्ट एड्रेसिंग देखा। डिफरेंट-डिफरेंट टाइप की राउटिंग कैसे होती है वो देखा।
ट्रांसपोर्ट प्रोटोकॉल्स देखे। टीसीp यूडीपी इन डेप्थ कैसे काम करते हैं? उनके रिलेटेड कुछ एल्गोरिदम्स देखे। ऑल ऑफ़ दैट
वाज़ अबाउट इंफ्रास्ट्रक्चर एंड इंटरनल्स। अब हम एप्लीकेशन लेयर की तरफ बढ़ने वाले हैं। एप्लीकेशन लेयर में जो प्रोटोकॉल्स
हैं उसके साथ इंजीनियर्स रेगुलरली इंटरेक्ट करते हैं एंड डिफरेंट-डिफरेंट सिस्टम्स एंड एप्लीकेशनेशंस कैसे बिल्ड
करते हैं उसके बारे में एक-एक करके जानते हैं। सबसे पहला प्रोटोकॉल है डीएनएस। डीएनएस एक क्रूशियल प्रोटोकॉल है जो
ऑलमोस्ट हम सारे कंप्यूटरटर्स में यूज़ करते हैं। व्हनेवर वी आर एक्सेसिंग एनी वेबसाइट। डीएनएस इज बिल्ट ऑन टॉप ऑफ यूडीp
एंड बाय डिफ़ॉल्ट डीएनएस पोर्ट 53 का यूज़ करता है। अगर आपको कोई भी वेबसाइट एक्सेस करनी है तो आप अपना ब्राउज़र खोलते हो और
उसमें वेबसाइट की यूआरएल टाइप करके एंटर दबा देते हो। फॉर एग्जांपल chikco.com ब्राउज़र को क्या पता कि ये जो chikco.com
है ये जो वेबसाइट आपने टाइप किया है वो aws पे या gसीp पे कौन से सर्वर पे होस्टेड है? उसका एड्रेस क्या है? ब्राउज़र
को इसके बारे में कुछ भी आईडिया नहीं होता। द रीज़न इज़ सिंपल। कंप्यूटर्स खाली नंबर समझते हैं जीरो एंड वंस। इंस्टेड ऑफ
रिमेंबरिंग डोमेन नेम्स कंप्यूटरटर्स IPपी एड्रेसेस को समझते हैं। तो जब भी हमें चाय.com को रिक्वेस्ट करनी है तो ब्राउज़र
को चाक.com के IPपी एड्रेस का पता होना चाहिए। यह जो प्रोसेस है इसको डीएनएस रेसोल्यूशन कहा जाता है जिसमें हम ह्यूमन
रीडेबल डोमेन नेम को मशीन रीडेबल IPपी एड्रेस में ट्रांसलेट करते हैं। अब आप में से कुछ लोगों के मन में ऐसा आया होगा कि
क्यों ये एक्स्ट्रा एडिशनल चीज करनी है ट्रांसलेशन की। ठीक है? थोड़ा तकलीफ होगा बट वी विल रिमेंबर वेबसाइट बाय देयर IPपी
एड्रेसेस और हम Google पे सर्च भी कर सकते हैं कि व्हाट इज IP एड्रेस ऑफ़ दिस एंड जब हमें वो मिल जाएगा तो हम उस आईपी एड्रेस
पे जा सकते हैं। बट इंसानों का जो दिमाग होता है वो विजुअल चीजें एंड वर्ड्स को जल्दी याद रखता है एज कंपेयर टू नंबर्स।
इसीलिए आप अपने दोस्तों का मोबाइल नंबर नाम से सेव करते हो। उनके नेम से, सरनेम से, उनका फोटो लगाते हो। सो, आपको वो
इजीली आइडेंटिफाई हो। इंस्टेड ऑफ रिमेंबरिंग देयर एंटायर फोन नंबर्स व्हिच इज नॉट प्रैक्टिकल। तो डीएनएस क्या करता
है? सारे डोमेन नेम्स को IP एड्रेसेस से मैप करता है। तो हम इजीली उनको रिमेंबर कर पाए। chcot.com hitesh. Yntp. Google.com
netflix.com amazon.com इससे रीडेबिलिटी तो बढ़ती है। इसके अलावा डीएनएस के थ्रू लोड बैलेंसिंग भी कर सकते हैं। व्हिच मींस
एक सिंगल डोमेन नेम में मल्टीपल IPपी एड्रेसेस को पॉइंट कर सकती है। एंड वो ट्रैफिक राउंड रबिन मैनर में या
डिफरेंट-डिफरेंट जो लोड बैलेंसिंग के एल्गोरिदम होते हैं उसके अनुसार ट्रैफिक को डिस्ट्रीब्यूट कर सकती है। chco.com
हमने एक ही सर्वर पे होस्ट करके नहीं रखा है। फॉर एग्जांपल वह सर्वर डाउन चला गया तो कोई yco.com वेबसाइट एक्सेस ही नहीं कर
पाएगा। वी होस्टेड दैट ऑन मल्टीपल सर्वर्स। तो मल्टीपल सर्वर्स के मल्टीपल IPपी एड्रेसेस हैं। अब ये जो डोमेन नेम्स
हैं इनका स्ट्रक्चर समझते हैं। सबसे पहले टीएलडी टॉप लेवल डोमेन व्हिच मींस डॉट.org.net.
हाईएस्ट लेवल ऑफ़ डोमेन होता है ये। उसके बाद डोमेन व्हिच इज़ द मेन पार्ट। एग्जांपल.com में जो एग्जांपल है दैट इज़ अ
डोमेन एंड डॉट है ये टॉप लेवल डोमेन है। नेक्स्ट इज़ सब डोमेन। सब डोमेन जो है वो डोमेन के आगे लगाया जाता है। फॉर एग्जांपल
www.example.com में एग्जांपल डोमेन है www सब डोमेन है। फॉर एग्जांपल अगर आपको चाय कोड के सारे
कोर्सर्सेस को एक्सेस करना है तो आप corres.com इस वेबसाइट पे जाते हो। इसमें डॉट ये टॉप
लेवल डोमेन है। चाय कोड यह डोमेन है एंड कोर्सेज सब डोमेन है। ईजी-पीजी। तो जब भी आप किसी नेटवर्क को कनेक्ट होते हो, सबसे
पहले डीएनएस रिजॉल्वर कॉन्फ़िगर होता है। बाय डिफॉल्ट यह डीएनएस रिजॉल्वर आपका राउटर होता है। बट आप इसको ओवराइड कर सकते
हो। Google के क्लाउड फ्लेयर के पॉपुलर डीएनएस रिज़ॉल्वर आते हैं। Google का 8.8.8.8
पे है। क्लाउड फ्लेयर का 11.1.1.1 पे है। क्लाउड फ्लेयर और Google ने इनके मल्टीपल रिप्लिकास ऑल ओवर द वर्ल्ड बना के रखी है।
एंड वो हैवली कैश करके रखते हैं पॉपुलर वेबसाइट्स के IP एड्रेसेस। समटाइ्स अगर इन डीएनएस रिज़ॉल्वर के पास आपके राउटर के पास
या जो Google क्लाउड फ्लेयर के डीएनएस रिज़ॉल्वर हैं उनके पास अगर IP एड्रेस कैश नहीं हुआ तो या आपने रिसेंटली डोमेन नेम
दूसरे प्लेटफार्म पे शिफ्ट किया है दूसरे IPपी पे शिफ्ट किया है या आपने रिसेंटली एक डोमेन नेम खरीदा है तब जो प्रोसेस होती
है एंड टू एंड उसके बारे में समझते हैं। सबसे पहले हम इनिशियल क्वेरी करते हैं डीएनएस रिज़ॉल्वर को। डीएनएस रिज़ॉल्वर चेक
करता है अपने कैश में इस डोमेन नेम का IPपी एड्रेस मेरे पास है कि नहीं। अगर नहीं होगा तो यह जो रिक्वेस्ट है वह मल्टी
स्टेप रिक्वेस्ट बन जाती है जिसमें सेकंड स्टेप है रूट सर्वर तो डीएनएस हमें डायरेक्ट कर देता है रूट सर्वर के पास रूट
सर्वर हमें डायरेक्टली IPपी एड्रेस नहीं देता रूट सर्वर हमें डायरेक्ट करता है टू टॉप लेवल डोमेन सर्वर अगर आपके पासai की
डोमेन है तो उसका टॉप लेवल डोमेन सर्वर अलग है का अलग हैg का अलग है का अलग है तो चाहे के केस में वो हमें टॉप लेवल सर्वर
के पास भेजेगा टॉप लेवल डोमेन सर्वर के पास रिक्वेस्ट जाएगी वहां हम पूछेंगे व्हाट इज द IPपी एड्रेस ऑफ़ chco.com तो
chco.com के जो ऑथोरिटेटिव नेम सर्वर्स हैं उनकी तरफ डायरेक्ट कर देंगे। लास्ट में यह जो डीएनएस क्वेरी है वो ऑथरिटेटिव
नेम सर्वर के पास जाती है एंड फिर वो बताते हैं कि ओके ये जो chco.com है इसका IPपी एड्रेस ये है। अब ये जो डीएनएस
क्वेरी है इसमें हम डीएनएस के अलग-अलग पैकेट्स भेजते हैं रिक्वेस्ट में और रिस्पांस में। इन पैकेट का स्ट्रक्चर कैसे
होता है, वह भी देखते हैं। डीएनएस कंसिस्ट ऑफ़ मल्टीपल हेडर्स। सबसे पहले आईपी हेडर है फॉललोड बाय यूडीपी हेडर देन डीएनएस
हेडर एंड डीएनएस पेलोड तो आईपी हेडर यूडीपी हेडर डीएनएस हेडर एंड डीएनएस पेलोड अब हेडर्स में जो फील्ड्स है उनको देखते
हैं सबसे पहले आईपी हेडर होता है वी सॉ आईपी हेडर इन डेप्थ इन चैप्टर फोर इसमें मेन फील्ड होती है सोर्स आईपी एंड
डेस्टिनेशन आईपी कौन से डिवाइस ने रिक्वेस्ट भेजी है और कहां भेजी है देन यूडीपी हेडर होता है जिसमें सोर्स पोर्ट
डेस्टिनेशन पोर्ट लेंथ एंड चेक सम होती है एंड उसके बाद डीएनएस हेडर है। डीएनएस हेडर में फर्स्ट फील्ड होती है ट्रांजैक्शन
आईडी जो एक यूनिक आइडेंटिफायर होता है व्हिच मैचेस डीएनएस क्वेरी रिक्वेस्ट एंड रिस्पांससेस। देन कुछ फ्लैग्स होते हैं
कंट्रोल फ्लैग्स फॉर इंडिकेटिंग द टाइप ऑफ क्वेरी। ये ऑथोरिटेटिव क्वेरी है या रिकर्सिव क्वेरी है वो फ्लैग्स बताते हैं।
देन क्वेश्चंस नंबर ऑफ क्वेश्चंस कितने हैं पैकेट में वो बताते हैं। नेक्स्ट इज़ नंबर ऑफ आंसर रिसोर्स रिकॉर्ड्स। देन
ऑथॉरिटी रिसोर्स रिकॉर्ड्स जो बताते हैं कि कितने नंबर ऑफ रिकॉर्ड्स हैं इन ऑथॉरिटी सेक्शन। लास्ट वन इज़ एडिशनल
रिसोर्स रिकॉर्ड्स जो एडिशनल सेक्शन में अगर हमने कुछ रिकॉर्ड्स भेजे उनके नंबर बताता है। आईपी हेडर में सबसे पहले आईपी
वर्जन होता है। इंटरनेट हेडर लेंथ होती है। देन टाइप्स ऑफ सर्विस टोटल लेंथ ऑफ आईपी ब्रैकेट आइडेंटिफिकेशन फ्लैग्स फैग
फ्रेगमेंट ऑफसेट होता है। देन टाइम टू लीव प्रोटोकॉल हेडर चेक सम सोर्स आईपी एड्रेस डेस्टिनेशन आईपी एड्रेस। दिस इज आईपी
हेडर। उसके बाद यूडीपी हेडर होता है जिसमें सोर्स पोर्ट, डेस्टिनेशन पोर्ट, लेंथ एंड चेक सम होती है। फिर डीएनएस हेडर
के फील्ड्स आते हैं जो कि ट्रांजैक्शन आईडी है, फ्लैग्स है, नंबर ऑफ क्वेश्चंस, नंबर ऑफ आंसर्स रिसोर्स रिकॉर्ड, नंबर ऑफ़
ऑथॉरिटी रिसोर्स रिकॉर्ड्स, नंबर ऑफ़ एडिशनल रिसोर्स रिकॉर्ड। इसके बाद हमारे पास डीएनएस पे लोड होता है। तो पेलोड में
एक्चुअल क्वेरीज़ होती है। ईच क्वेश्चन एज़ फॉलोइंग मेटा लाइक नेम। कौन से डोमेन नेम का आईपी एड्रेस हमने क्वेरी किया है? इन
आवर केस चा.com देन टाइप कौन से टाइप का रिकॉर्ड आपने रिक्वेस्ट किया है? ए नेम सी नेम एमx अलग-अलग टाइप के डीएनएस रिकॉर्ड
होते हैं वो हम आगे जाके देखेंगे। क्लास व्हिच रिप्रेजेंट क्लास ऑफ क्वेरी। क्वेश्चंस के बाद आंसर्स आते हैं। आंसर्स
में रिसोर्स रिकॉर्ड होते हैं रिगार्डिंग द आंसर्स टू द क्वेश्चन कि इस डीएनएस क्वेरी का आंसर ये है। देन ऑथॉरिटी सेक्शन
होता है जिसमें कुछ रिसोर्स रिकॉर्ड होते हैं व्हिच पॉइंट्स टू ऑथॉरिटेटिव नेम सर्वर्स। एंड एडिशनल रिकॉर्ड्स होते हैं
व्हिच कंटेन सम हेल्पफुल रिसोर्स रिकॉर्ड्स। नेक्स्ट इज़ डीएनएस रिकॉर्ड। जब भी आप डीएनएस का नाम सुनते हो तो बहुत से
लोगों के दिमाग में आता है ओके डोमेन नेम टू आईपी एड्रेस बट डीएनएस इज नॉट जस्ट लिमिटेड टू दैट इट इज मच रिचर सिस्टम फॉर
एग्जांपल एक डोमेन के अराउंड खाली उसका आईपी एड्रेस नहीं होता दैट डोमेन इज पॉइंटिंग टू वेरियस वेबसाइट्स सब डोमेनस
होती है ईमेल मैनेजमेंट्स होता है वेरिफिकेशन होता है तो ये सारी चीजें हम अलग-अलग रिकॉर्ड से मैनेज करते हैं एंड
एव्री रिकॉर्ड का स्पेसिफिक पर्पस होता है फर्स्ट रिकॉर्ड इज़ ए रिकॉर्ड व्हिच स्टैंड्स फॉर IP वर्जन 4 एड्रेस तो
chco.com का ए रिकॉर्ड इज दिस एंड इट मैप्स चाक.com वि द वर्जन 4 एड्रेस। नेक्स्ट इज़ 4a रिकॉर्ड। सिमिलर टू ए
रिकॉर्ड बट इट मैप्स डोमेन नेम टू IPपी वर्जन सिक्स एड्रेस। एंड 4A बिकॉज़ IPपी वर्जन सिक्स फोर टाइम्स होता है IP वर्जन
4K के। नेक्स्ट रिकॉर्ड इज़ सी नेम रिकॉर्ड व्हिच इज़ आल्सो कॉल्ड एज़ कैनोनिकल नेम। ये एलियस प्रोवाइड करता है। व्हिच मींस यहां
हम एक डोमेन [गला साफ़ करने की आवाज़] नेम दूसरे डोमेन नेम से मैप करते हैं। फॉर एग्जांपल www.code.com
टू chikco.com इसका यूज़ केस ऐसे होता है। फॉर एग्जांपल आपको मल्टीपल डोमेन नेम्स को एक वेबसाइट पे मैप करना है। chcodo.in
chikco.com chcode.i chcode.orj ये सारे डोमेन नेम्स को एक ही चाय कोड के वेबसाइट को अगर पॉइंट करना है तो मैं क्या करूंगा?
एक मेन रिकॉर्ड रहेगा chco.com उसको ए रिकॉर्ड बनाऊंगा एंड इट इज पॉइंटिंग टू द एक्चुअल आईपी एड्रेस ऑफ द सर्वर और बाकी
सभी को एज अ सी नेम रिकॉर्ड बना दूंगा। इसमें आसानी यह होगी कि कल मेरा IPपी एड्रेस चेंज हो गया तो मुझे बस एक ही आईपी
रिकॉर्ड अपडेट करना पड़ेगा। नेक्स्ट इज़ एमएक्स रिकॉर्ड व्हिच स्टैंड्स फॉर मेल एक्सचेंज रिकॉर्ड जो स्पेसिफाई करता है कि
इस डोमेन पे अगर मैं ईमेल भेजूंगा तो कौन से मेल सर्वर रिस्पांसिबल होंगे उन मेल को रिसीव करने के लिए। अगर आपने मुझे
[email protected] पे ईमेल भेजा तो आपका जो Gmail है वह पहले मेरे डोमेन के एमएक्स रिकॉर्ड ढूंढेगा।
फिर उन एमएक्स रिकॉर्ड के अकॉर्डिंग जो मेल है वो मेरे मेल बॉक्स में डिलीवर करेगा। नेक्स्ट इज़ टीएक्सटी रिकॉर्ड दैट
इज टेक्स्ट रिकॉर्ड जो वेरिफिकेशन और पॉलिसीज के लिए काम आते हैं। इट साउंड सिंपल बट इसके यूज़ केसेस बहुत इंटरेस्टिंग
है। जैसे कि डोमेन नेम का वेरिफिकेशन करना, ईमेल ऑथेंटिकेशन करना एंड सिक्योरिटी पॉलिसीज को स्टोर करना।
नेक्स्ट रिकॉर्ड इज़ एनएस नेम सर्वर रिकॉर्ड जो स्पेसिफाई करता है ऑथोरिटेटिव नेम सर्वर जो हमारे डोमेन कहां डिप्लॉयड
है, कौन से सर्वर पे है, उसका IPपी एड्रेस क्या है वो बताते हैं। जब भी आप कोई न्यू डोमेन लेते हो और उसको क्लाउड फ्लेयर पे
या राउट 53 पे पॉइंट करते हो तब हम उनके एनएस रिकॉर्ड ही अपडेट करते हैं। नेक्स्ट इज़ पीटीआर रिकॉर्ड पॉइंटर रिकॉर्ड व्हिच
इज़ रिवर्स डीएनएस। व्हिच मींस इंस्टेड ऑफ़ मैपिंग डोमेन नेम टू IPपी एड्रेस इट मैप्स IPपी एड्रेस टू डोमेन नेम। बहुत ही यूज़फुल
होता है रिवर्स डीएनएस लुकअप्स में। इट टेल्स यह आईपी कौन से डोमेन से कनेक्टेड है। ईमेल्स में इसका हैवीली यूज़ होता है।
बिकॉज़ यूजिंग दिस मेल सर्वर सेंडर की आइडेंटिटी वेरीफाई करते हैं। डीएनएस रिकॉर्ड की समरी दी जाए तो जो ए रिकॉर्ड
होता है इट मैप्स डोमेन टू IP4 एड्रेस। फोर ए रिकॉर्ड क्या करता है? डोमेन नेम को IP वर्जन सिक्स एड्रेस से मैप करता है। सी
नेम रिकॉर्ड क्या करता है? एक डोमेन को दूसरे डोमेन से मैप कर देता है। यूज़ फॉर सब डोमेनस एंड क्लाउड सर्विसेस। एमx
रिकॉर्ड इज़ रिस्पांसिबल फॉर डिलीवरिंग द ईमेल। टेक्स्ट रिकॉर्ड कंसिस्ट ऑफ टेक्स्ट डाटा फॉर वेरिफिकेशन, ईमेल ऑथेंटिकेशन एंड
सिक्योरिटी पॉलिसीज। एनएस रिकॉर्ड हमें बताता है कि हमारे ऑथोरिटेटिव नेम सर्वर कौन से हैं। पीटीआर रिकॉर्ड रिवर्स डीएनएस
लॉकअप देता है IP टू डोमेन नेम। जब हम डीएनएस रेोल्यूशन करते हैं तो दो टाइप की क्वेरीज हम रन करते हैं। एक रिकर्सिव
क्वेरी एंड इटरेटिव क्वेरी। और ये दोनों क्वेरी साथ में काम करती है। जब हम अपने रिसॉल्वर को क्वेरी करते हैं। दैट इज अ
रिकर्सिव क्वेरी। गिव मी द फुल आंसर। मुझे chco.com का IPपी एड्रेस आप बता दो। उसके बाद हम वेट करते हैं। दैट इज रिकर्सिव
क्वेरी। देन जो डीएनएस रिजॉल्वर है वो हमारे बिहाफ पे आगे इटरेटिव क्वेरीज सेंड करता है। लाइक रूट सर्वर, टॉप लेवल डोमेन
सर्वर्स एंड ऑथरेटेटिव नेम सर्वर्स। ये जो सेपरेशन ऑफ रिस्पांसिबिलिटी है जहां डीएनएस रिसॉल्वर रूट सर्वर्स के पास जाता
है। रूट सर्वर्स टॉप लेवल डोमेन सर्वर्स के पास और वहां से फिर ऑथोरिटेटिव नेम सर्वर के पास। इसकी वजह से डीएनएस इज़
स्केलेबल। ऑन द ग्लोबल स्केल वी हैव बिलियंस ऑफ़ वेबसाइट। और इन सारे वेबसाइट का जो डीएनएस है वो टोटल 13 रूट सर्व्सर्स
हैंडल करते हैं। बिकॉज़ उनप कुछ लोड ही नहीं है। वो कुछ खुद प्रोसेस ही नहीं करते। दे जस्ट रीडायरेक्ट टू द टॉप लेवल
डोमेनस। नेक्स्ट इज़ एसएसएल। इमेजिन करो कि आप एक कैफे में बैठे हो और आपको एक ट्रांजैक्शन करना है तो आपने नेट बैंकिंग
के थ्रू लॉगिन किया यूजिंग योर यूजरनेम एंड पासवर्ड। अगर वो सिस्टम इंक्रिप्टेड नहीं होगा तो आपका जो यूजरनेम और पासवर्ड
है वह ट्रैवल करेगा थ्रूउ द नेटवर्क एज अ प्लेन टेक्स्ट। एंड अगर [गला साफ़ करने की आवाज़] कोई हैकर उस
ट्रैफिक को इंस्पेक्ट कर रहा है वि द प्रॉपर सेट ऑफ टूल्स आपके क्रेडेंशियल्स एक्सपोज हो सकते हैं। अभी चीजें थोड़ी ठीक
हो गई बट पहले के समय में भी इंटरनेट ऐसे ही था। HTV पे हम नॉर्मली सभी चीजें प्लेन टेक्स्ट ही भेजते थे। कोई इंक्रिप्शन
नहीं, कोई वेरिफिकेशन नहीं। इसको सिक्योर बनाने के लिए पहले एसएसएल प्रपोज किया गया था। एसएसएल स्टैंड्स फॉर सिक्योर सॉकेट्स
लेयर। बट एसएल में खुद ही कुछ सिक्योरिटी वनरेबिलिटीज़ थी। दैट्स व्हाई नाउ इट कंसीडर ऐज़ ब्रोकन एंड डेपिकेटेड। लेटर
टीएलएस इंट्रोड्यूस किया गया है ऐज़ अ सक्सेसर टू एसएसएल टीएलएस स्टैंड्स फॉर ट्रांसपोर्ट लेयर सिक्योरिटी इसके अलग-अलग
वर्जनंस थे 1.0 1.1 1.2 करंट स्टैंडर्ड है 1.3 एंड जब भी आप ब्राउज़र में HTPS देखते हो सिक्यर्ड देखते हो दैट इज बिकॉज़ ऑफ़
टीएलएस। अभी भी आप पॉपुलर डोमेन प्रोवाइडर्स के पास जाओगे तो वहां एसएसएल सर्टिफाइड, एसएसएल सर्टिफिकेट, एसएसएल
प्रोटेक्टेड ये टर्म्स यूज़ करते हैं। इंस्टेड ऑफ़ टीएलएस। इट इज़ बिकॉज़ ऑफ़ देयर ओल्ड हैबिट और लेगसी नेमिंग। बट अभी आपको
पता है कि इट इज नॉट एसएसएल इट इज टीएलएस। एसएसएल इज़ डिप्लिकेटेड। टीएलएस तीन चीजें प्रोवाइड करता है। इंक्रिप्शन, ऑथेंटिकेशन
एंड इंटीग्रिटी। इंक्रिप्शन से हमारी प्राइवेसी प्रोटेक्ट होती है। ऑथेंटिकेशन हमें इंपर्सनलाइजेशन से बचाता है कि मैं
अगर chco.com को कुछ रिक्वेस्ट भेज रहा हूं तो मुझे रिस्पांस जो भेज रहा है वो चाक.com ही होना चाहिए। इंटीग्रिटी जो है
वो आपको प्रोटेक्ट करती है टपरिंग से। आपका जो डाटा है वो लीक होने से। अब यह जो ऑथेंटिकेशन वाला पार्ट है जिसमें ब्राउज़र
सर्वर को वेरीफाई करता है कि यह जो सर्वर है जो बोल रहा है कि मैं चाक.com हूं। यह सच में चाक.com है या कोई फर्जी वेबसाइट
है तो वो वेरिफिकेशन किया जाता है डिजिटल सर्टिफिकेट्स के थ्रू। इन डिजिटल सर्टिफिकेट्स को टीएलएस सर्टिफिकेट कहते
हैं। कई जगह एसएसएल सर्टिफिकेट भी कहा जाता है। टीएलएस सर्टिफिकेट एक डिजिटल डॉक्यूमेंट होता है जिसमें डिफरेंट
इंफॉर्मेशन होती है। लाइक डोमेन नेम कौन सा है? सर्वर की पब्लिक की क्या है? सर्टिफिकेट को किसने इशू किया? और यह कब
तक वैलिड है सर्टिफिकेट? ऐसे तो फिर कोई भी अपना डिजिटल सर्टिफिकेट बना लेगा, डीएलएस सर्टिफिकेट बना लेगा। कोई तो
सेंट्रलाइज ऑथॉरिटी चाहिए जो इसको इशू करे एंड ब्राउज़र इसको ट्रस्ट कर पाए। सर्टिफिकेट अथॉरिटीज़ जो होती है वो
ट्रस्टेड ऑर्गेनाइजेशन होती है जो वेरीफाई करती है डोमेन नेम्स को एंड फिर उनको सर्टिफिकेट इशू करती है। वंस वी गॉट
सर्टिफिकेट फ्रॉम सीए अथॉरिटीज़ वो कहते हैं कि ये ओरिजिनल वेबसाइट है। हम इसकी जिम्मेदारी लेते हैं। टीएलएस काम कैसे
करता है वो देखते हैं। टीएलएस में सिमेट्रिक एंड असिमेट्रिक इंक्रिप्शन दोनों यूज़ होता है। ये थोड़ी
क्रिप्टोग्राफी की टर्म्स है। तो आप उनके बारे में पढ़ सकते हो। सिमेट्रिक इंक्रिप्शन फास्ट होता है एज़ कंपेयर टू
असिमेट्रिक इंक्रिप्शन। बिकॉज़ वहां एक सिंगल की यूज़ होती है। असिमेट्रिक इंक्रिप्शन हम यूज़ करते थे टू एक्सचेंज
दैट सिमेट्रिक की। बिकॉज़ क्लाइंट और सर्वर को अगर सिक्योर कम्युनिकेशन करना है तो अगर वो क्लाइंट सर्वर को एक की सेंड करते
वक्त उस की को ही किसी ने हाईजैक कर लिया है तो आप जितनी भी सिक्योरली बात करो वो तो वो आराम से डिक्रिप्ट कर पाएगा उस की
के मदद से। तो इस की को सिक्योरली शेयर करने के लिए हम असिमेट्रिक क्री इंक्रिप्शन यूज़ करते थे। असिमिट्रिक क्री
इंक्रिप्शन का फंडा बहुत सिंपल है कि आपने अगर कोई चीज पब्लिक की से इंक्रिप्ट कर दी तो वह डिक्रिप्ट खाली प्राइवेट की से
होगी। जैसे आपका टीसीp पे हैंडशेक होता है वैसे ही टीएलएस हैंडशेक भी होता है जिसमें सर्वर क्या करता है? अपनी जो पब्लिक की है
वो क्लाइंट के पास भेज देता है एंड फिर क्लाइंट एक सिमेट्रिक की जनरेट करता है। उस की को वो सर्वर की पब्लिक की से
इंक्रिप्ट कर देता है और भेज देता है थ्रू द नेटवर्क। तो अगर बीच में कोई ट्रैफिक इंस्पेक्ट भी कर रहा हो स्टिल ही कैन नॉट
डिक्रिप्ट दैट मैसेज एंड ऑब्टेन द सिमेट्रिक की बिकॉज़ वो मैसेज डिक्रिप्ट खाली सर्वर के प्राइवेट की से होगा। जब वो
मैसेज सर्वर के पास पहुंचता था सर्वर उसको डिक्रिप्ट करता था यूजिंग प्राइवेट की एंड एंड टू एंड सिक्योर कम्युनिकेशन
इस्टैब्लिश हो जाता था क्योंकि दोनों के पास एक सेम की है। एक इस की से इंक्रिप्ट करके मैसेज भेज रहा है। उस साइट पे वो
मैसेज रिसीव हो के फिर वो डिक्रिप्ट हो रहा है उसी की से। यह प्रोसीजर TLS 1.1 एंड 1.2 तक होता था। TLS 1.2 और जो
अर्लियर वर्जन थे इनमें एक वनरेबिलिटी थी। दैट इज लैक ऑफ फॉरवर्ड सीक्रेसी। मतलब अगर अटैकर ने सारे इंक्रिप्टेड सेक्शंस को
रिकॉर्ड कर लिया और इन फ्यूचर कभी एक साल बाद, 2 साल बाद उसने कुछ भी जुगाड़ करके कुछ भी अटैक करके सर्वर से प्राइवेट की
अगर निकाल ली तो उस प्राइवेट की के मदद से वह सारे कम्युनिकेशंस को डिक्रिप्ट कर पाएगा। इस इशू को टैकल करने के लिए TLS
1.2 एंड द लेटेस्ट TLS 1.3 में की एक्सचेंज करने के लिए डेफिहेलमन की एक्सचेंज एल्गोरििदम और उसका एक अनदर
वेरिएंट भी है इलिप्टिक कर्व डेफिहेलमन एक्सचेंज एल्गोरिदम वो यूज़ करने लगे व्हिच इंश्योरर्स द फॉरवर्ड सीक्रेसी। इस
एल्गोरिदम में हम क्लाइंट इज़ क्रिएटिंग की एंड सेंडिंग इट टू द सर्वर। क्लाइंट और सर्वर दोनों अपने-अपने पब्लिक प्राइवेट की
से एंड सम मैथमेटिकल ऑपरेशन से दोनों एक सिमेट्रिक की जनरेट कराते हैं। तो इवन अगर अटैकर के पास इन फ्यूचर सर्वर की प्राइवेट
की चली गई या क्लाइंट की कुछ प्राइवेट की चली गई। स्टिल ही इज़ नॉट एबल टू डिक्रिप्ट दैट बिकॉज़ वो जो सिमेट्रिक की हमने डिराइव
की थी वो मल्टीपल मैथमेटिकल कैलकुलेशन से डिराइव की थी। टेक अ नोट आफ्टर दिस बूट कैंप आपको सिमेट्रिक क्रिप्टोग्राफी
असिमेट्रिक क्रिप्टोग्राफी एंड डेफी हेलमन की एक्सचेंज एल्गोरििदम के बारे में डिटेल में पढ़ना है। नेक्स्ट इज एसएआई। एसएआई
स्टैंड्स फॉर सर्वर नेम इंडिकेशन यूजिंग एसएआई हम मल्टीपल डोमेनस को सिंगल IPपी एड्रेसेस पे पॉइंट कर सकते हैं। एसएआई के
पहले सिंगल IPपी एड्रेस पे हम सिंगल वेबसाइट ही होस्ट कर पाते थे। बिकॉज़ टीएलएस के थ्रू चीजें इंक्रिप्टेड होती
थी। तो हम रिक्वेस्ट में देख नहीं पाते थे कि इस सर्वर के इस वेबसाइट को हमने भेजा है रिक्वेस्ट। अल्टीमेटली हमें एक सर्वर
पे एक ही वेबसाइट डिप्लॉय करनी पड़ती थी और फिर जब भी रिक्वेस्ट आती थी हमें कॉमन जो टीएलएस सर्टिफिकेट है वह हम रिस्पांस
में भेज देते थे। तो जो टीएलएस हैंडशेक होता था उसमें एसएआई ने एक एक्सटेंशन किया। sएआई कहता है कि हम इसमें एक
टारगेस्ट होस्ट नाम से फील्ड ऐड करेंगे जो हमें बताता है कि ओके आई एम एक्सेसिंग xyz.com लेट्स सी हाउ सिक्योर कम्युनिकेशन
हैप्स ओवर tls यूजिंग प्रैक्टिकल एग्जांपल। एक सर्वर है। उस सर्वर पे a.com ये वेबसाइट हमने होस्ट करके रखी है।
क्लाइंट a.com को एक्सेस करना चाहता है। तो सबसे पहले कनेक्शन ओपन होगा। देन क्लाइंट टीएलएस हेलो भेजेगा। देन सर्वर
हेलो आ जाएगा। फिर सर्वर टीएलएस सर्टिफिकेट भेजेगा। वंस ब्राउज़र वेरीफाई दैट सर्टिफिकेट हम इंक्रिप्टेड वे में
रिक्वेस्ट भेजना स्टार्ट करेंगे। गेट रिक्वेस्ट देन सर्वर सेंड्स हेडर्स विद सम इंडेक्स. देन आफ्टर रिक्वेस्ट इज़ डन
कनेक्शन इज़ क्लोज। अगर हमें सर्वर पे मल्टीपल वेबसाइट डिप्लॉय करनी है जैसे कि a.com एंड b.com तब हमें sएi की ज़रूरत
पड़ने लगे। बिकॉज़ मैंने तो क्लाइंट हेलो भेजा। सर्वर ने मुझे हेलो भेजा बट सर्वर को पता ही नहीं कि एसएसएल सर्टिफिकेट मैं
किसका सेंड करूं। a.com का करूं या b.com का करूं। ऐसा इसको रिॉल्व करता है बाय इंक्लूडिंग टारगेट होस्ट नेम। क्लाइंट
हेलो जब सेंड करता है तो वो बोलता है मुझे a.com को एक्सेस करना है। तो जब भी यह एसएसएल सर्टिफिकेट भेजता है सर्वर हेलो
में तो वो सर्वर रिस्पांस करते वक्त a.com का एसएसएल सर्टिफिकेट भेजता है। एंड फिर आफ्टर वेरीिफाइंग दिस सर्टिफिकेट ऑन द
क्लाइंट साइड फिर सिक्योर कम्युनिकेशन होता है। दिस इज़ ऑल अबाउट सर्वर नेम इंडिकेशन। नेक्स्ट इज़
[गला साफ़ करने की आवाज़] HTP। HTP स्टैंड्स फॉर हाइपर टेक्स्ट ट्रांसफर प्रोटोकॉल। HTP 1991 में इंट्रोड्यूस किया
गया था। एंड ओवर द थ्री डिकेड्स मल्टीपल वर्जनंस HTP के इंट्रोड्यूस हो चुके हैं। 1991 में जो आया था उसको HTP 1.0 बुलाया
गया था। देन 197 में HTP 1.1 इंट्रोड्यूस हुआ। 2015 में HTP टू इंट्रोड्यूस हुआ एंड 2022 में HTP 3 इंट्रोड्यूस हुआ व्हिच इज
बिल्ट ऑन टॉप ऑफ क्विक प्रोटोकॉल। लेट्स एक्सप्लोर देम वन बाय वन। फर्स्ट इज़ HTP 1.1. HTP 1.1 जो है वो 1997 में
इंट्रोड्यूस किया गया था। एंड इट इज़ बिल्ट ऑन द फाउंडेशन ऑफ़ HTP 1.0 जिसने सिग्निफिकेंट इंप्रूवमेंट लाई थी
एफिशिएंसी में, परफॉर्मेंस में एंड फ्लेक्सिबिलिटी में बिकॉज़ HTTP प्रोटोकॉल जो है वो क्लाइंट सर्वर मॉडल पे ऑपरेट
करता है। व्हिच मींस क्लाइंट रिक्वेस्ट सेंड करता है और सर्वर फिर उसके बाद उसका रिस्पांस सेंड करता है। HTTP 1.0 में क्या
था कि फॉर एव्री रिक्वेस्ट एंड रिस्पांस सल हमें न्यू टीसीपी कनेक्शन ओपन करना पड़ता था। व्हिच इज वेरी इनफिशिएंट एंड
स्लो। हर रिक्वेस्ट के लिए कनेक्शन ओपन करो। हैंड चेक करो। फिर इस्टैब्लिश होने के बाद रिक्वेस्ट करो। रिस्पांस आने के
बाद फिर से उसको कनेक्शन टर्मिनेट करो। यूजिंग फोर वे हैंड चेक। फिर से अगर न्यू रिक्वेस्ट भेजनी है तो न्यू कनेक्शन ओपन
करो। एचटीपी 1.1 रिसॉल्वड दिस प्रॉब्लम यूजिंग पर्सिस्टेंट कनेक्शन। इन व्हिच वी कैन सेंड मल्टीपल रिक्वेस्ट एंड रिसीव
मल्टीपल रिस्पांससेस एंड वो जो कनेक्शन है वो अंटिल हमारे रिक्वेस्ट रिस्पांससेस खत्म होने तक अलाइव रहेगा। फॉर एग्जांपल
एचटीपी 1.0 में कैसे होता था? क्लाइंट और सर्वर के बीच में फर्स्ट कनेक्शन ओपन होता था। देन हम गेट देन हम रिक्वेस्ट भेजते
थे। हमें रिस्पांस आता था। फिर वो कनेक्शन क्लोज हो जाता था। देन नेक्स्ट हमें फिर से कनेक्शन ओपन करना पड़ता था। फिर
रिक्वेस्ट भेजनी पड़ती थी। फिर उसका रिस्पांस आने के बाद फिर से कनेक्शन को क्लोज करना पड़ता था। व्हिच इज़ टीडीएस
प्रोसेस स्लो है और रिसोर्स भी ज्यादा कंज्यूम कर रहे थे। HDP 1.1 ने क्या बोला कि आप एक ही बार कनेक्शन ओपन करो और आपको
जो जितने भी रिक्वेस्ट भेजने हैं, रिस्पांस रिसीव करने हैं, वह आप करो। वंस एवरीथिंग इज डन, यू कैन क्लोज द कनेक्शन।
और इसका बेनिफिट क्या हुआ? सबसे पहले लेटेंसी बहुत कम हो गई। बिकॉज़ एक ही बार कनेक्शन इस्टैब्लिश हो रहा है एंड देन
टर्मिनेट हो रहा है। एंड सीपीयू का यूजज़ भी कम हो गया। बिकॉज़ एक ही बार कनेक्शन है, एक ही कनेक्शन हम मेंटेन कर रहे हैं।
तो CPU की जो रिसोर्सेज है, मेमोरी है, प्रोसेसर, प्रोसेसिंग पावर है, वो भी हम कम यूज़ कर रहे हैं। अब ये जो HTP की जो
रिक्वेस्ट है, इसका स्ट्रक्चर देखते हैं। सबसे पहले रिक्वेस्ट लाइन होती है जिसमें फर्स्ट फील्ड होती है मेथड। मेथड कैन बी
गेट, मेथड, पोस्ट, पुट एंड डिलीट। देन यूआरएल होती है कि आप कौन से यूआरएल पे रिक्वेस्ट भेज रहे हो? फॉर एग्ज़ांपल अगर
मुझे chco.com पे रिव्यूज़ देखने हैं तो मैं गेट मेथड से रिक्वेस्ट भेजूंगा इस यूआरएल पे व्हिच इज़ स्लैश रिव्यूज। देन
HTP वर्जन कौन सा है? 1.0 1.1 उसके बाद वाले लाइन में हेडर्स होते थे व्हिच टेल्स एडिशनल इनेशन इन द फॉर्मेट ऑफ़ की वैल्यू
पेयर्स। लाइक होस्ट कौन सा है? कंटेंट का टाइप क्या है? कंटेंट की लेंथ क्या है? उसके बाद बॉडी होती थी। ये बॉडी जो है वो
पोस्ट और पुट मेथड में हम ज्यादातर यूज़ करते थे कि डायग्रामेटिकली इसको देखते हैं कि जो रिक्वेस्ट वाली लाइन थी उसमें पहले
मेथड थी देन पाथ देन प्रोटोकॉल उसके बाद हेडर्स थे की वैल्यू पेयर्स एंड देन बॉडी यूजिंग कर्ल यूटिलिटी आई कैन सेंड
रिक्वेस्ट टू chco.com एंड अगर मैंने हपन वी वाला फ्लैग यूज़ किया तो वो वर्बोस रिक्वेस्ट जाती है। वहां मैं एग्जैक्ट
hटीtp रिक्वेस्ट का स्ट्रक्चर देख सकता हूं। दिस इज अ मेथड इट्स गेट देन पाथ इज स्लैश मैं चाक.com स् मतलब होम वाले पाथ
पे भेज रहा हूं रिक्वेस्ट देन प्रोटोकॉल इज http टू देन उसके बाद हेडर्स है होस्ट कौन सा है यूजर एजेंट कौन सा है एंड देन
उसके बाद बॉडी है अभी गेट रिक्वेस्ट में जनरली बॉडी होती नहीं तो दैट्स व्हाई हियर बॉडी इज एम्प्टी नेक्स्ट इज़ एचटीपी
रिस्पांस का स्ट्रक्चर सबसे पहले स्टेटस लाइन होती है जिसमें एचटीपी का वर्जन होता है कौन सा वर्जन है 1.1 1.0 देन स्टेटस
कोड होता देयर आर डिफरेंट स्टेटस कोड लाइक 200 इज फॉर ओके 404 इज फॉर नॉट फाउंड 500 इज फॉर इंटरनल सर्वर एरर 1001 इज फॉर
प्रोटोकॉल स्विचिंग स्टेटस मैसेज होता है जो कि ऑप्शनल है इन http 1.1 बट 1.0 में ये मैंडेटरी था हेडर्स होते हैं सिमिलर टू
द रिक्वेस्ट हेडर्स जिसमें की वैल्यू पेयर्स होती है लाइक कंटेंट टाइप्स कंटेंट की लेंथ एंड देन बॉडी होती है बॉडी में
रिस्पांस होता है लाइक hटीml कंटेंट json xml और इमेज डायग्रामेटिकली देखते हैं सबसे पहले http पी रिस्पांस में प्रोटोकॉल
होता है। कौन से प्रोटोकॉल से रिस्पांस जा रहा है। देन स्टेटस कोड होता है। देन कोड टेक्स्ट होता है जो कि ऑप्शनल होता है।
http 1.1 के बाद हेडर्स होते हैं की वैल्यू पेयर्स एंड देन फॉललोड बाय बॉडी। अगर आप एक रिस्पांस का एग्जांपल देखना
चाहोगे तो दिस इज द chcod.com को मैं जब रिक्वेस्ट भेजता हूं तो वो जो रिस्पांस है वो ऐसे आता है कि htp टू प्रोटोकॉल पे है।
कोड इज 200 मींस ओके स्टेटस इज ओके। आपकी रिक्वेस्ट जो है वो हमने रिसीव वो हमने सक्सेसफुल कर दी है। डेट, कंटेंट टाइप,
एक्सेस कंट्रोल, कैशे कंट्रोल एंड देन लास्ट लाइन में आप देख सकते हो जहां से डॉक टाइप HTML चालू होता है वहां से
रिस्पांस की बॉडी स्टार्ट हो रही है। व्हिच इज़ अ HTML फाइल। नेक्स्ट कांसेप्ट इज़ HTML पाइपलाइनिंग। HTML पाइपलाइनिंग के
थ्रू हम मल्टीपल HTP रिक्वेस्ट सेंड कर सकते हैं विदाउट वेटिंग फॉर द रिस्पांससेस। फॉर एग्जांपल क्लाइंट
मल्टीपल रिक्वेस्ट भेजता है ओवर द सिंगल TCB कनेक्शन। लाइक मुझे HTML फाइल दो, लोगो भी दो, सीएसएस फाइल्स दे दो। एंड
सर्वर फिर उन प्रोसेस को रिक्वेस्ट करता है एंड सेंड करता है रिस्पांससेस। बट दिस रिक्वेस्ट आर प्रोसेस्ड इन द ऑर्डर इन
व्हिच दे आर रिसीव्ड। तो इसमें कुछ लिमिटेशंस है। फर्स्ट इज़ हेड ऑफ लाइन ब्लॉकिंग। फॉर एग्जांपल मैंने फर्स्ट
रिक्वेस्ट भेजा, सेकंड भेजा, थर्ड भेजा। फर्स्ट रिक्वेस्ट मेरी फुलफिल हो गई। सेकंड रिक्वेस्ट थोड़ी बड़ी थी। उसमें कुछ
पॉकेट्स ड्रॉप हो गए थे। बट थर्ड रिक्वेस्ट छोटी रिक्वेस्ट थी। बिकॉज़ वो जो सेकंड रिक्वेस्ट के कुछ पैकेट्स ड्रॉप हो
गए। तो जब तक वो रीट्रांसमिट नहीं होते तब तक वो थर्ड रिक्वेस्ट भी अटकी रहेगी। तो दिस वाज़ हेड ऑफलाइन ब्लॉकिंग। फॉर
एग्जांपल मैं कनेक्शन ओपन करता हूं क्लाइंट से और मैं गेट इंडेक्स गेट रिक्वेस्ट भेजता हूं इंडेक्स देने के
लिए। फिर मैं लोगो भी के लिए भी गेट रिक्वेस्ट भेजता हूं। स्टाइल्स डॉटcs के लिए भी गेट रिक्वेस्ट भेज रहा हूं। आई
सेंड दिस रिक्वेस्ट वन आफ्टर अनदर एंड आई रिसीव द रिस्पांस इन द सेम सीक्वेंस। फिर उसके बाद कनेक्शन क्लोज हो गया। अब अगर
लोगो वाली जो रिक्वेस्ट है इसमें ज़्यादा टाइम लग गया या कुछ पैकेट ड्रॉप हो गए तो अंटिल दोज़ पैकेट्स आर रीट ट्रांसमिटेड इन
दिस रिस्पांस मेरी ये भी जो रिस्पांस है स्टाइल डॉट CSS वाली वो भी वेटिंग में रहेगी। तो ब्राउज़र ने इसको एक वर्क अराउंड
निकाला था इन अर्लियर वर्जन्स ऑफ़ http जहां वो सिक्स पैरेलल कनेक्शंस बिल्ड करते थे। सिक्स पैरेलल कनेक्शन मेंटेन करते थे
फॉर अ सिंगल डोमेन। तो check.com पे उन्होंने सिक्स पैरेलल कनेक्शन बना के रखे और वो अलग कनेक्शन पे अलग रिक्वेस्ट भेज
रहे थे। तो फिर यह जो हेड ऑफ लाइन ब्लॉकिंग वाली प्रॉब्लम है वो रिॉल्व हो। बिकॉज़ कनेक्शन ही डिफरेंट है। तो अगर
पैकेट रीट्रांसमिट भी होना होगा तो वो उस कनेक्शन पे होगा। बाकी कनेक्शन पे जो रिक्वेस्ट है वो इंडिपेंडेंटली चलती
रहेगी। बट दिस वाज़ नॉट अ परमानेंट सोलशन। ये वर्क अराउंड था। एक जुगाड़ था। बिकॉज़ छह पैरेलल कनेक्शन मेंटेन करने के लिए कितनी
रिसोर्सेज पावर लगेगी और ओवरहेड है कि छह के छह बार छह बार थ्री वे हैंड चेक करो। फिर टर्मिनेशन करने के लिए फोर वे हैंड
चेक करो छह बार। इस हेड ऑफ लाइन ब्लॉकिंग वाले प्रॉब्लम को टैकल करने के लिए HDP टू को इंट्रोड्यूस किया गया 2015 में। जिसके
थ्रू हम मल्टीपल रिक्वेस्टेस एंड रिस्पांस कॉनकरेंटली सेंड कर सकते हैं। ओवर अ सिंगल टीसीपी कनेक्शन इंस्टेड ऑफ़ मैनेजिंग
पैरेलल सिक्स कनेक्शंस। हम सिंगल कनेक्शंस पे मल्टीपल रिक्वेस्ट एंड रिस्पांस कॉनकरेंटली भेज सकते हैं। एक के बाद एक
नहीं कॉनकरेंटली एक साथ भेज सकते हैं। यह पॉसिबल हो पाया बिकॉज़ एचtपी टू में एव्री रिक्वेस्ट को एक यूनिक स्ट्रीम आईडी दिया
जाता था। एंड अकॉर्डिंग टू दैट स्ट्रीम आईडी हम इंडिपेंडेंटली रिक्वेस्ट को हैंडल करते थे। क्लाइंट और सर्वर स्ट्रीम आईडीज़
जो थे वह असाइन करते थे। क्लाइंट यूजुअली ऑड नंबर्स असाइन करता था रिक्वेस्ट को एंड देन सर्वर से जो रिस्पांससेस आते थे उसमें
इवन नंबर्स यूज किए जाते थे। बिकॉज़ ऑफ़ कॉनकरेंट रिक्वेस्ट एंड रिस्पांससेस। हम जो रिक्वेस्ट है वो प्रोसेस कर सकते थे
आउट ऑफ ऑर्डर। मतलब थर्ड रिक्वेस्ट का रिस्पांस पहले भी भेज सकते थे। बट स्टिल हमें टीसीपी के थ्रू कुछ कंस्टेंट रहते
बिकॉज़ टीसीp नीड्स ऑर्डर जो पैकेट्स जिस सीक्वेंस में गए उसी सीक्वेंस में डिलीवर होने चाहिए। एचटीपी जो हेडर्स थे वो
बार-बार हम रिपीट कर रहे थे प्रीवियस वर्जन में। वही मेटा डेटा की वैल्यू पेयर्स हम सेंड कर रहे थे। सेम ब्राउज़र
वर्जन एंड कुकीज़ एंड कंटेंट टाइप वो बार-बार सेंड कर रहे थे। बट तो HTP टू ने क्या किया? हेडर को कंप्रेस कर दिया। एंड
जो चेंज हुआ है उसी को भेजता है इंस्टेड ऑफ़ सेंडिंग हेडर ए्री टाइम। एंड बिकॉज़ ऑफ़ दैट सिग्निफिकेंट बैंडविड्थ हमारी सेव
होने लगी। कि HTP 1.1 वर्सेस टू का अगर कंपैरिजन देखना है तो HTP 1.1 में हम अलग-अलग रिक्वेस्ट भेजते थे कि मुझे यह
लाओ, यह लाओ, यह लाओ, यह लाके दो। बट HTP 2 में हम सभी को एक साथ ही मंगा सकते हैं। क्या हुआ? खाने की याद आ गई? रुक जाओ अभी
थोड़ा बचा है चैप्टर। और वैसे भी यह फास्ट फूड है। ईट हेल्दी, स्टे हेल्दी। नेक्स्ट इज़ HDP टू। HTP टू में हम क्लाइंट और
सर्वर के बीच में एक सिंगल कनेक्शन एस्टैब्लिश करते थे। एंड इन दैट कनेक्शन मल्टीपल स्ट्रीम्स ऑफ डाटा कैन बी देयर।
हर स्ट्रीम में हम रिक्वेस्ट रिस्पांस टाइप के मैसेजेस भेजते थे और उनको हम छोटे-छोटे पार्ट्स में डिवाइड करके एज अ
फ्रेम सेंड करते थे। एचटीपी टू आल्सो सपोर्टेड रिक्वेस्ट प्रायोरिटाइजेशन व्हिच मींस अगर हम किसी भी रिक्वेस्ट को
प्रायोरिटाइज करते तो उसका रिस्पांस पहले जा सकता था। नेक्स्ट इज़ htp3 व्हिच वाज़ इंट्रोड्यूस्ड इन 2022 एंड इट इज़ बिल्ट ऑन
टॉप ऑफ क्विक। एचटीबी2 में हम क्या करते थे कि मल्टीपल जो रिक्वेस्ट होती थी उनको करेस्पोंडिंगली हम भेज सकते थे यूजिंग द
मल्टीप्लेक्सिंग एंड डीमल्टीप्लेक्सिंग वर अ सिंगल कनेक्शन बट टीसीपी के कंस्ट्रेंट तो हमेशा रह गए बिकॉज़ टीसीपी इंश्यर्स दैट
डेटा शुड बी डिलीवर इन द ऑर्डर एंड कुछ भी एक आधा पैकेट भी लॉस्ट हो जाता था तो ऑल सब्सीक्वेंट पैकेट को वेट करना पड़ता था
अंटिल दैट मिसिंग पैकेट इज़ रीिट्रांसमिटेड दैट्स व्हाई थोड़ा डिले हो जाता था अ रिक्वेस्ट और रिस्पांस व्हिच इज़ टिपिकल
हेड ऑफलाइन ब्लॉकिंग प्रॉब्लम सिंस क्विक जो है वह TCP पे वर्क ही नहीं करता। तो देयर इज़ नो क्वेश्चन ऑफ़ हेड ऑफ लाइन
प्रॉब्लम। अगर कोई पैकेट लॉस भी हो गया तो जो डेटा स्ट्रीम है वही सिंगल डेटा स्ट्रीम अफेक्टेड होगी। बाकी जो अदर
रिक्वेस्ट रिस्पांस है वो अफेक्टेड नहीं होगी। बिकॉज़ ओवर क्विक हम मल्टीपल स्ट्रीम्स कर सकते हैं विद इन अ सिंगल
कनेक्शन। फॉर एग्जांपल क्लाइंट और सर्वर के बीच में HTP3 के थ्रू क्विक प्रोटोकॉल के थ्रू डेटा ट्रांसफर हो रहा है ओवर द
यूडीp। तो इन दिस सिंगल कनेक्शन देयर आर मल्टीपल स्ट्रीम्स व्हिच कैन मैनेज इंडिपेंडेंटली। तो अगर कुछ भी पैकेट अगर
लॉस हो गया है फॉर एग्जांपल इन द सेकंड स्ट्रीम अगर कुछ पैकेट लॉस्ट हो गया तो वो इंडिपेंडेंटली रीट्रांसमिट हो सकता है।
स्ट्रीम वन और स्ट्रीम थ्री को वो अफेक्ट नहीं करेगा। क्विक इज़ लिटिल फास्ट बिकॉज़ इट कंबाइन कनेक्शन एंड सिक्योरिटी हैंडशक
विद द सिंगल स्टेप। HTP टू में क्या होता था? पहले हमें TCP हैंडशक करना पड़ता था। फिर टीएलएस हैंडशक करना पड़ता था। क्विक
क्या करता है? ट्रांसपोर्ट एंड टीएलएस हैंडशक को कंबाइन कर लेता है इनू द वन हैंडशक। दैट्स व्हाई एचटीp थ्री इज मच
फास्टर एंड अगर वो रिपीिटेटिव कनेक्शन होगा तो जीरो राउंड ट्रिप में वी कैन डायरेक्टली स्टार्ट सेंडिंग डाटा विदाउट
एस्टैब्लिशिंग कनेक्शन अगेन। बिकॉज़ वो कनेक्शन ऑलरेडी कैश होके रखा है। HTP3 अब सारे मेजॉरिटी ब्राउज़र सपोर्ट कर रहे हैं।
Google, Facebook, क्लाउड फ्लेयर एंड मेजोरिटी सीडीएंस में यूज़ हो रहा है बिकॉज़ ऑफ़ इट्स एफिशिएंसी। उसका एडप्शन रेट
रैपिडली इंक्रीस हो रहा है बिकॉज़ ऑफ़ इट्स ह्यूज एडवांटेजेस। वन इंटरेस्टिंग थिंग क्विक हमें कनेक्शन माइग्रेशन का भी
सपोर्ट देता है। वि मींस अगर मैं सर्वर से वाई-फाई के थ्रू कनेक्टेड हूं और सम हाउ माय वाई-फाई गोज़ डाउन एंड आई स्विच टू माय
मोबाइल नेटवर्क। वो कनेक्शन स्टिल मेंटेन रहता है। अनलाइक TCP जहां वो कनेक्शन टर्मिनेट हो जाता था और मुझे रीस्टेब्लिश
करना पड़ता था कनेक्शन फ्रॉम द सेकंड नेटवर्क। यहां कनेक्शन आईडी के थ्रू वो कनेक्शन मेंटेन रहता है। फॉर एग्जांपल मैं
यहां डाटा सेंड कर रहा हूं थ्रू दिस कनेक्शन आईडी। और बाद में अगर मेरा नेटवर्क डिफरेंट भी हो गया। स्टिल दैट
कनेक्शन आईडी इज़ सेम एंड मैं वो जो सर्विस है वो कंज्यूम कर सकता हूं विदाउट एनी इंटरप्शन। व्हिच इज़ इंजीनियरिंग मार्वल।
HTP को समराइज करते हैं। हमने HTP के तीन वर्जन देखे। फर्स्ट वन वाज़ HDP 1.1 वो टेक्स्ट बेस्ड प्रोटोकॉल था। एक रिक्वेस्ट
एट अ टाइम जाती थी। एंड उसमें हेड ऑफलाइन ब्लॉकिंग का प्रॉब्लम था। स्टिल अभी वाइडली यूज़ कर रहे हैं। HTP टू
इंट्रोड्यूस किया गया था। 2015 में बाइनरी प्रोटोकॉल था। इट सपोर्टेड मल्टीप्लेक्सिंग ओवर अ टीसीp मतलब ऑन अ
सिंगल कनेक्शन हम मल्टीपल रिक्वेस्ट भेज सकते थे। इट इंट्रोड्यूस द हेडर कंप्रेशन व्हिच सेव्ड लॉट ऑफ़ बैंडविड्थ इंस्टेड ऑफ़
सेंडिंग रिपीिटेटिव हेडर्स हम उसको कंप्रेस करके जो चेंज हो रहा था वही चेंजेस भेज रहे थे। देन इट इंट्रोड्यूस
स्ट्रीम प्रायोरिटाइजेशन। तो हम कुछ रिस्पांससेस को कुछ स्ट्रीम को हम प्रायोरिटाइज कर सकते थे। लेटर इन 2022
HDP3 केम व्हिच इज़ बाइनरी प्रोटोकॉल बट इट इज़ बिल्ट ऑन टॉप ऑफ यूडीp। HDP3 ने ट्रू स्ट्रीम इंडिपेंडेंस दिया। जहां हम एक ही
कनेक्शन में मल्टीपल स्ट्रीम पैरेलली रन कर सकते हैं। एज इट इज बेस्ड ऑन यूडीp देयर इज नो हेड ऑफ लाइन बॉकिंग प्रॉब्लम
एंड क्विक का जो हैंडशेक है वो फास्टर होता है एज कंपेयर टू TCP प्लस टीएलएस हैंडशेक। अभी तक हमने जो देखा HDP1, HTP2
एंड HDP3 उनमें एक चीज कॉमन थी। क्लाइंट हमेशा पहले बात करता था। हमें रिक्वेस्ट भेजनी पड़ती थी। एंड देन उसके बाद सर्वर
रिसोंड करता था। सर्वर खुद से हमें कुछ सेंड नहीं कर पा रहा था इस मॉडल में क्लाइंट सर्वर आर्किटेक्चर में। नाउ
इमेजिन अगर आप WhatsApp जैसा कोई एप्लीकेशन बना रहे हो और आपके पास मैसेज आया तो आपके ब्राउज़र को आपके एप्लीकेशन
को समझेगा कैसे? सर्वर नोटिफाई करेगा कैसे कि आपको मैसेज आ गया है। यू कैन चेक द मैसेज और समबडी टैग्ड यू इन द ग्रुप। इसका
एक सॉलशन यह है कि आप फ्यू सेकंड्स बाद खुद ही पूछते रहो WhatsApp के सर्वर्स को कि मुझे मैसेज आया। मैसेज आ गया। किसी ने
मैसेज किया है? किसी ने मैसेज किया है? इस अप्रोच को पोलिंग कहा जाता है। जहां हम आफ्टर फ्यूट इंटरवल सर्वर को पोल करते हैं
फॉर द अपडेट्स। WhatsApp वाले तो परेशान हो जाएंगे अगर सब लोग ऐसा पूछने लगे तो और स्पेशली आपसे वो आपको बोलेंगे कि इस
दुनिया में आपको कोई मैसेज भेजने वाला नहीं है और उसका तो पक्का नहीं आएगा क्योंकि आप ब्लॉक हो चुके हो। क्यों फालतू
में टाइम और बैंडविड्थ की बर्बादी कर रहे हो। कमिंग बैक टू द टॉपिक। इसका और एक वे हो सकता है जहां सर्वर ही हमें बताएं कि
बॉस यू गॉट अ मैसेज। एंड दैट्स वेयर वेब सॉकेट कम्स इन। वेब सॉकेट एक एप्लीकेशन लेयर प्रोटोकॉल है जो प्रोवाइड करता है
फुल डुप्लेक्स एंड पर्सिस्टेंट कम्युनिकेशन बिटवीन क्लाइंट एंड सर्वर ओवर अ सिंगल टीसीबी कनेक्शन। फुल डुप्लेक्स
मींस दोनों साइड आइदर क्लाइंट और सर्वर डेटा सेंड कर सकते हैं एट अ सेम टाइम इंडिपेंडेंटली विदाउट वेटिंग फॉर ईच अदर।
जस्ट लाइक अ फोन कॉल जहां दो लोग साइमलटेनियसली बात करते हैं। अगर हम इसको एचडीपी से कंपेयर करें, तो एचडीपी हाफ
डुप्लेक्स है। मतलब अगर पहले रिक्वेस्ट भेजी तो क्लाइंट वेट करता है। फिर रिस्पांस आता है। फिर नेक्स्ट रिक्वेस्ट
जाती है। वेब सॉकेट में फुल डुप्लेक्स होता है। दोनों साइड से कंटीन्यूअस रिक्वेस्ट रिस्पांस चलते रहता है।
पर्सिस्टेंट कनेक्शन मींस वंस एक बार कनेक्शन हमने इस्टैब्लिश कर दिया। वह ऑलवेज ओपन रहता है। अंटिल एंड अनलेस आइदर
साइट डिसाइडेड टू क्लोज दैट। कुछ लोगों का यह सवाल होता है कि व्हाई नॉट टीसीp? क्यों यह वेब सॉकेट का अलग प्रोटोकॉल हमने
बनाया है? अगर हमें फुल डुप्लेक्स कम्युनिकेशन ही चाहिए ओवर अ सिंगल टीसीपी कनेक्शन। क्यों एक्स्ट्रा फालतू में और एक
प्रोटोकॉल बनाना स्टैंडर्ड्स बनाना। फिर उसको सपोर्ट करने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर अपडेट करते रहना। थ्रू टीसीp हम फुल
डुप्लेक्स कम्युनिकेशन कर सकते हैं। बट अगर हम डायरेक्टली एक्सपोज कर देंगे टीसीp ऑन द एप्लीकेशन साइड इट इज रिस्कीियर
बिकॉज़ ऑफ़ इट्स लो लेवल नेचर और वो मिसयूज़ भी हो सकता है। इसीलिए हमने TCP के ऊपर HTP प्रोटोकॉल बनाया एंड वेब सॉकेट इज़
बिल्ट ऑन टॉप ऑफ HTP में। तो ये टू लेयर्स का प्रोटेक्शन हो गया थ्रू व्हिच हम कंट्रोल वे में TCP को यूज़ कर सकते हैं।
व्हाइल मेंटेनिंग सिक्योरिटी। जो वेब सॉकेट कनेक्शन होता है वह स्टार्ट ऐज़ अ HTP रिक्वेस्ट ही होता है एंड देन दैट HTP
रिक्वेस्ट इज़ अपग्रेडेड इंटू द वेब सॉकेट कनेक्शन दैट्स व्हाई वेब सॉकेट आल्सो ऑपरेट ऑन AT और पोर्ट 443 जस्ट लाइक HTP
एंड HTPS वेब सॉकेट का यूआरएल होता है WS कोलन स्लैश स्लैश और WS कोलन स्लैश ऑलवेज यूज़ WS इन प्रोडक्शन बिकॉज़ इट इज़
इंक्रिप्टेड लाइक HTPS लेट्स सी हाउ वेब सॉकेट वर्क्स। सबसे पहले क्लाइंट सेंड करता है HTP गेट रिक्वेस्ट विथ द स्पेशल
अपग्रेड हेडर। सर्वर उसको एग्री करता है एंड रिस्पांस करता है विथ स्टेटस ऑफ 1001 स्विचिंग प्रोटोकॉल्स। उसके बाद यह जो
कनेक्शन है वो वेब सॉकेट पे अपग्रेड हो जाता है। इसके बाद हम रॉ वेब सर्किट फ्रेम्स भेज सकते हैं, रिसीव कर सकते हैं
इन फुल डुप्लेक्स मोड। दोनों में से कोई भी साइट क्लोज कर सकते हैं कनेक्शन अंटिल दैट इट विल रिमेन ओपन। फॉर एग्जांपल
क्लाइंट है सर्वर है। सबसे पहले 1.1 अपग्रेड की रिक्वेस्ट जाती है सर्वर के पास। सर्वर उसको एक्सेप्ट करके 1001
स्विचिंग प्रोटोकॉल का रिस्पांस भेजता है। एंड उसके बाद बायोडायरेक्शनल कम्युनिकेशन चालू होता है थ्रू वेब सॉकेट फ्रेम्स। एंड
दोनों में से कोई भी साइड कनेक्शन क्लोज कर देती है। उसके बाद कनेक्शन टर्मिनेट हो जाता है जो टीसीp कनेक्शन है वो। वन
इंटरेस्टिंग थिंग इज़ दिस अपग्रेड मैकेनिज्म इज़ सपोर्टेड बाय HTP 1.1 ओनली। HTP2 यूज एक्सटेंट कनेक्ट व्हिच फॉलोस
आरfc 8441 स्टैंडर्ड। उसमें ब्राउज़र ऐसा एक मैसेज सेंड करता है कि मेथड इज कनेक्ट। आई वांटेड टू यूज़ वेब सॉकेट प्रोटोकॉल ओवर
दिस पाथ। यूआरएल पाथ जो है इस पे मैं वेब सॉकेट प्रोटोकॉल से कनेक्ट करना चाहता हूं। यह जो वेब सॉकेट कनेक्शन है वो लीव
करता है इंसाइड HTP टू स्ट्रीम्स। HTP3 तो क्विक पे काम करता है। देयर इज़ नो TCP तो कोई HTP 1.1 अपग्रेड एरर नहीं। 1001
स्विचिंग प्रोटोकॉल नहीं होता। यहां भी एक्सटेंडेड कनेक्ट ओवर क्विक यूज़ किया जाता है HTP3 में वेब सॉकेट कनेक्शन करने
के लिए। वेब सॉकेट के कुछ यूज़ केसेस देखते हैं। वेब सॉकेट इज अ राइट टूल व्हेनएवर यू नीड रियल टाइम बायोडायरेक्शनल
कम्युनिकेशन। हियर आर द मोस्ट कॉमन एग्जांपल्स यू विल बिल्ड और वर्क विद। लेट्स सी सम यूज़ केसेस ऑफ़ वेब सॉकेट। जब
भी आप कुछ रियल टाइम एप्लीकेशन बना रहे हो जिसमें बायोडायरेक्शनल कम्युनिकेशन की जरूरत है। वेब सॉकेट इज द राइट टूल फॉर
दैट। फॉर एग्जांपल चैट एप्लीकेशनेशंस, लाइव डैशबोर्ड्स, कोलबोरेटिव एडिटिंग, ऑनलाइन गेमिंग, लाइव नोटिफिकेशन इन सब में
आप वेब सॉकेट का इस्तेमाल कर सकते हो। वी कैन इंप्लीमेंट वेब सॉकेट ऑन बोथ क्लाइंट एंड सर्वर साइट। क्लाइंट साइट पे ब्राउज़र
प्रोवाइड्स नेटिव वेब सॉकेट एपीआई एंड वो बहुत सिंपल है। जस्ट चार एपीआई है। फर्स्ट वन इज़ फॉर ओपनिंग द कनेक्शन यूजिंग न्यू
वेब सॉकेट। जब हमने सॉकेट बना लिया उस सॉकेट ऑब्जेक्ट पे एक ऑन मैसेज फील्ड होती है। उसके थ्रू हम मैसेजेस को सुन सकते
हैं। देन वी हैव वन मेथड कॉल्ड सेंड टू सेंड द मैसेजेस एंड देन वी हैव अनदर मेथड कॉल्ड क्लोथ्स टू क्लोज दैट कनेक्शन।
एंटायर वेब सॉकेट एपीआई इन जस्ट फोर लाइंस। बाकी जो हैवी लिफ्टिंग है वो ब्राउज़र अपना इंटरनली कर लेता है। तो हम
क्लाइंट साइड पे बस ये चार एपीआई यूज़ करते हैं ब्राउज़र से वेब सॉकेट सर्वर से इंटैक्ट करते वक्त। एंड ऑन द सर्वर साइड
जब आप वेब सॉकेट सर्वर बना रहे हो, तो वी हैव लॉट ऑफ़ फ्रेमवर्क्स। फॉर एग्ज़ांपल, इन केस ऑफ़ Node JS, वी हैव WS वेब सॉकेट
लाइब्रेरी एंड सॉकेट आईo फॉर मोर एब्स्ट्रैक्शन। इन द Python, जेंगो वर्ल्ड, देयर आर चैनल्स। रेल्स में एक्शन
केबल्स होते हैं। एंड आप कोई सी भी लाइब्रेरी, कोई से भी फ्रेमवर्क में आप वेब सॉकेट इंप्लीमेंट कर सकते हो। अंडर द
हुड जो फंडामेंटल्स है वेब सॉकेट कैसे काम करता है बायडायरेक्शनल मैसेज पर्सिस्टेंट कनेक्शन और अ सिंगल टीसीp वही यूज़ होता
है। आफ्टर फिनिशिंग दिस बूट कैंप अगर आपको वेब सॉकेट का इंप्लीमेंटेशन करके देखना है वि द कोड तो आप इसी चैनल पे पीयूष की
वीडियो चेक कर सकते हो। वीडियो टाइटल इज़ फ्रॉम वन कनेक्शन टू 1 मिलियन वेब सॉकेट एक्सप्लेन विद कोड। एंड दैट्स ऑल अबाउट
एप्लीकेशन लेयर जहां हमने स्टार्ट किया था डीएनएस प्रोटोकॉल से। उसके बाद हमने डीएनएस रिकॉर्ड्स के अलग-अलग टाइप पढ़े।
देन वी अंडरस्टैंड रिकर्सिव वर्सेस इटरेटिव क्वेरी इन डीएनएस रेोल्यूशन देन एसएसएल वर्सेस टीएलएस आफ्टर दैट वी स्टडी
अबाउट सर्वर नेम इंडिकेशन देन वी सॉ htp फ्रॉम htp 1.1 टू htp 2 टू लेटेस्ट एचtपी 3 उसके बाद हमने वेब सॉकेट के बारे में
समझा कि वेब सॉकेट बायडायरेक्शनल प्रोटोकॉल है। अगले चैप्टर में हम डिस्कस करेंगे कि हम जो मॉडर्न इंफ्रास्ट्रक्चर
है उसको कैसे कनेक्ट करते हैं उसमें कैसे लोड बैलेंसिंग करते हैं। वेलकम टू द चैप्टर सेवन ऑफ कंप्यूटर
नेटवर्किंग बूट कैंप वि इज अबाउट प्रॉक्सीस एंड लोड बैलेंसर्स जिनके थ्रू हम मॉडर्न इंफ्रास्ट्रक्चर्स को मेंटेन
करते हैं। आप में से मेजॉरिटी लोगों ने कॉलेज के टाइम प्रॉक्सीस लगाई होगी। इन दोज़ प्रॉक्सीस आपका कोई दोस्त आपके बिहाफ
पे आपकी प्रेजेंट ही मार्क कर देता था या आपकी असाइनमेंट सबमिट कर देता था। सिमिलरली इन द वर्ल्ड ऑफ नेटवर्किंग
प्रॉक्सीस एक मिडिलमैन की तरह एक्ट करती है। प्रॉक्सीस के दो टाइप होते हैं। फॉरवर्ड प्रॉक्सी एंड रिवर्स प्रॉक्सी।
लेट्स स्टार्ट विद फॉरवर्ड प्रॉक्सीस। फॉरवर्ड प्रॉक्सी सीट्स ऑन फ्रंट ऑफ़ क्लाइंट एंड इट मेक्स रिक्वेस्ट ऑन बिहाफ
ऑफ़ क्लाइंट। फॉर एग्जांपल क्लाइंट को Google.com एक्सेस करना है। एंड क्लाइंट ने एक प्रॉक्सी सर्वर कॉन्फ़िगर करके रखा
है। तो क्लाइंट जो है वो सबसे पहले प्रॉक्सी सर्वर से कनेक्ट करेगा यूजिंग TCP और यूडीp एंड प्रॉक्सी फिर वो जो
रिक्वेस्ट है उसको आगे फॉरवर्ड करता है एंड डेस्टिनेशन पे। नाउ आप में से बहुत से लोगों के दिमाग में यह क्वेश्चन आया होगा
कि व्हाई दिस एडिशनल एक्स्ट्रा स्टेप? हम डायरेक्टली क्लाइंट से डेस्टिनेशन सर्वर तक रिक्वेस्ट भेज सकते थे। हमने क्यों ये
एक्स्ट्रा फॉरवर्ड प्रॉक्सी सर्वर बीच में ऐड किया? उसको फिर कॉन्फ़िगर करते बैठो। फिर उसको रिक्वेस्ट भेजो। फिर वो
रिक्वेस्ट आगे फॉरवर्ड करेगा। इससे बढ़िया तो डायरेक्टली भेज देते। तो लेट्स सी द पर्पस ऑफ फॉरवर्ड प्रॉक्सी। सबसे पहले
एनोनिमिटी। एज आई टोल्ड यू फॉरवर्ड प्रॉक्सी सीट्स इन फ्रंट ऑफ क्लाइंट। व्हिच मींस आप जो भी रिक्वेस्ट भेज रहे
हैं वह सर्वर के साइड जब पहुंचती है तो दैट रिक्वेस्ट गोज़ ऑन बिहाफ ऑफ़ फ़ॉरवर्ड प्रॉक्सी। तो आपका जो पब्लिक आईपी एड्रेस
है वो क्लाइंट के पास पहुंचता नहीं। आपकी जो आइडेंटिटी है वो एनोनिमस रहती है। फॉरवर्ड प्रॉक्सीस से हम कैशिंग भी कर
सकते हैं। जो रिपीटेडली रिक्वेस्ट है, हम उसके रिस्पांससेस कैश करके रख सकते हैं। फॉर फास्टर डिलीवरी। फॉरवर्ड प्रोसेस के
थ्रू हम नेटवर्क ट्रैफिक की मॉनिटरिंग कर सकते हैं। उसके लॉग्स हम स्टोर कर सकते हैं। सो दैट वी विल अंडरस्टैंड कि कौन से
रिक्वेस्ट को कितना टाइम गया है। आपके नेटवर्क से कहां-कहां रिक्वेस्ट जा रही है और जो रिस्पांस आ रहा है उसको कितना टाइम
लगा, कहां से आ रहा है, कितना बड़ा रिस्पांस आ रहा है। वो सारी चीजें हम ट्रैक कर सकते हैं, मॉनिटर कर सकते हैं ऑन
द फॉरवर्ड प्रॉक्सी सर्वर्स। इन एडिशन टू दैट फॉरवर्ड प्रॉक्सेस के थ्रू हम कुछ वेबसाइट को ब्लैक लिस्ट कर सकते हैं। फॉर
एग्जांपल आपको आपके ऑफिस स्पेस में Instagram.com, x.com ये वेबसाइट्स को ब्लैक लिस्ट करना है, तो आप प्रॉक्सी में
कॉन्फ़िगरेशन कर सकते हो। तो, आपके जो ऑफिसेस के सिस्टम है, ऑफिसेस के नेटवर्क है उनके थ्रू जो भी रिक्वेस्ट जाएगी, वह
वहां तक पहुंचेगी ही नहीं। फॉरवर्ड प्रॉक्सी उनको ब्लॉक कर देगी। नेक्स्ट इज़ रिवर्स प्रॉक्सी व्हिच वर्क्स कंप्लीटली
अपोजिट ऑफ़ फॉरवर्ड प्रॉक्सीज़। फॉरवर्ड प्रॉक्सी सट्स इन फ्रंट ऑफ़ क्लाइंट। तो रिवर्स प्रॉक्सी जो है वह इट सीट्स इन
फ्रंट ऑफ़ सर्वर इन रिवर्स डायरेक्शन। फ्रॉम द क्लाइंट पर्सपेक्टिव क्लाइंट को तो ऐसा लगता है कि इट इज़ इंटरेक्टिंग वि द
फाइनल सर्वर बट क्लाइंट रिवर्स प्रॉक्सी से डील कर रहा होता है। एंड रिवर्स प्रॉक्सीस आगे बैक एंड से कनेक्टेड होती
है। रिवर्स प्रॉक्सी के थ्रू हम ट्रैफिक को डिस्ट्रीब्यूट कर सकते हैं। दैट मींस इट कैन एक्स एज अ लोड बैलेंसर। रिवर्स
प्रॉक्सीस पे हम जो रिपीिटेटिव रिक्वेस्ट है उसको कैश कर सकते हैं। जिसके कारण जो एंड सर्वर्स है उस पे लोड कम हो। रिवर्स
प्रॉक्सी एक सिक्योरिटी भी प्रोवाइड करती है बिकॉज़ इट डज़ नॉट एक्सपोज द एंड सर्वर्स टू द यूज़र्स। रिवर्स प्रॉक्सी जो है वह एज
अ एपीआई गेटवे भी एक्ट करती है। वि मींस वह यूआरएल बेस्ड राउटिंग कर सकती है। इन केस ऑफ़ माइक्रो सर्विसेस अगर स्लैश ऑथ
वाले पाथ पे रिक्वेस्ट आ रही है ऑथेंटिकेशन रिलेटेड तो वो ऑथेंटिकेशन माइक्रो सर्विस के पास वो सारी रिक्वेस्ट
भेज सकती है। अगर पेमेंट रिलेटेड कोई रिक्वेस्ट आए तो रिवर्स प्रॉक्सी उन रिक्वेस्ट को पेमेंट वाले माइक्रो सर्विस
पे भेज सकती है। अगर कोई सीपीू इंटेंसिव रिलेटेड रिक्वेस्ट आई तो जो हैवी सर्वर है वहां वो उस रिक्वेस्ट को फॉरवर्ड कर सकते
हैं। इसके अलावा रिवर्स प्रॉक्सी टेस्टिंग के लिए भी यूज होती है जिसमें हम एक सर्वर पे न्यू वर्जन ऑफ एप्लीकेशन को रिलीज करते
हैं या न्यू वर्जन ऑफ एपीआई को डिप्लॉय करते हैं और कुछ यूज़र्स को फिर बेच के टेस्ट करते हैं कि ओके एवरीथिंग इज
वर्किंग फाइन और नॉट बिफोर शिफ्टिंग ऑल ट्रैफिक टू द अपडेटेड वर्जनंस एंड बिकॉज़ ऑफ़ ऑल दिस फीचर्स रिवर्स प्रॉक्सी
प्रैक्टिकल वर्ल्ड में सीडीियंस में एंड माइक्रो सर्विस आर्किटेक्चर में बहुत यूज़ होती है। सीडियंस एक्ट्स हैज़ अ रिवर्स
प्रॉक्सी एंड वो कैश कंटेंट सर्व करते हैं फ्रॉम द लोकेशनेशंस व्हिच इज़ नियर टू द यूजर। यूजिंग रिवर्स प्रॉक्सीस हम माइक्रो
सर्विस कम्युनिकेशन को ऑर्केस्टेड कर सकते हैं। अच्छे से मैनेज कर सकते हैं। दैट्स ऑल अबाउट प्रॉक्सीस। अब लोड बैलेंससेस की
दुनिया में आगे बढ़ते हैं। तो लोड बैलेंससेस भी अलग-अलग प्रकार के होते हैं। कुछ लेयर फोर पे ऑपरेट करते हैं। कुछ लेवल
सेवन पे ऑपरेट करते हैं। लेयर फोर लोड बैलेंसर्स जो है वो ट्रांसपोर्ट लेयर जो कि फोर्थ लेयर है ओएसआई मॉडल उन पे ऑपरेट
करते हैं। व्हिच मींस इट डील्स विद आईपी एड्रेसेस एंड पोर्ट नंबर्स। फॉर एग्जांपल दो बैक एंड सर्वर है दे आर कनेक्टेड टू
लेयर फोर लोड बैलेंसर। इट जस्ट लुक इंटू IP एड्रेसेस एंड पोर्ट नंबर्स एंड फॉरवर्ड्स द ट्रैफिक। क्लाइंट इज़ कनेक्टेड
टू द लोड बैलेंसर थ्रू 3cp सिनेक एकक हैंडशेक हो गया। लोड बैलेंसर उसके बाद एक कोई सर्वर को चूज़ करता है। जो क्लाइंट की
रिक्वेस्ट है उसके सारे सेगमेंट्स उसी एक सर्वर को भेजता है। लेट्स सी द वर्किंग ऑफ लेयर फॉर लोड बैलेंसर। सबसे पहले क्लाइंट
कनेक्ट करता है लोड बैलेंसर से। देन लोड बैलेंसर डिफरेंट-डिफरेंट एल्गोरिदम्स होते हैं। जैसे राउंड रॉबिन एल्गोरिदम या लिस्ट
कनेक्शन एल्गोरिदम। इनको यूज़ करके एक सर्वर को सेलेक्ट करता है एंड उस सर्वर पे फिर ट्रैफिक को राउट करता है। यह जो
राउटिंग है वह ऑन द बेसिस ऑफ़ IPपी एड्रेस एंड पोर्ट नंबर्स होती है। लेयर फोर लोड बैलेंसर जो है वो एव्री कनेक्शन का स्टेट
मेंटेन करता है। बिकॉज़ इट इज़ अ स्टेटफुल कनेक्शन। फॉर एग्जांपल क्लाइंट A का फर्स्ट पैकेट सर्वर वन पे पहुंच गया। तो
उसके बाद वाले सभी जो पैकेट्स हैं वो सारे सर्वर वन की तरफ ही भेजे जाएंगे। लेट्स सी दिस इन एक्शन। दो बैक एंड सर्वर्स हैं एंड
वी कॉन्फिगरर्ड द लेयर फोर लोड बैलेंसर्स इन फ्रंट ऑफ देम। जब क्लाइंट लेयर फोर लोड बैलेंसर्स को रिक्वेस्ट भेजता है तो वह जो
रिक्वेस्ट पैकेट्स होते हैं उन पैकेट्स का डेस्टिनेशन आईपी आइडेंटिफाई करके वो एक-एक करके उन पैकेट को एक ही सर्वर पे भेजता
है। लेयर फोर लोड बैलेंससेस के कुछ एडवांटेजेस देखते हैं। इट इज़ वेरी सिंपल टू इंप्लीमेंट बिकॉज़ इट ओनली अपरेट्स ऑन
TCP यूडीपी लेयर। तो IP एड्रेस एंड पोर्ट नंबर को डील करके वह लोड बैलेंस कर सकता है। ट्रैफिक को डिस्ट्रीब्यूट कर सकता है।
एज इट डज़ नॉट नीड टू इंस्पेक्ट पे लोड ऑफ द रिक्वेस्ट। लेयर फोर लोड बैलेंसर का परफॉर्मेंस बहुत हाई होता है। इट डज़ नॉट
टेक टाइम टू डिस्ट्रीब्यूट द ट्रैफिक। लेयर फोर लोड बैलेंसर प्रोटोकॉल एग्नोस्टिक होता है। एसएसएच, HTPS, FTP,
एसएमटीपी, वेब सॉकेट किसी भी प्रोटोकॉल की ट्रैफिक को वो लोड बैलेंस कर सकता है। उसमें कुछ एडिशनल कॉन्फ़िगरेशन नहीं लगता।
एज कंपेयर टू लेयर सेवन लोड बैलेंसर। लेयर फोर लोड बैलेंसर मोर सिक्योर होता है बिकॉज़ इट डज़ नॉट नीड टू इंस्पेक्ट डाटा।
तो जो सिक्योर अपनी एंड टू एंड इंक्रिप्टेड एचटीपी रिक्वेस्ट है, एचटीपी एस कनेक्शन है उसमें जो डेटा है वो एंड टू
एंड इंक्रिप्टेड रहता है। बीच में लोड बैलेंसर पे हमें उसको डिक्रिप्ट करना नहीं पड़ता। कुछ डिसएडवांटेजेस देखते हैं लेयर
फोर। लोड बैलेंसर के सबसे पहले लिमिटेड लोड बैलेंसिंग डिसीजंस। एज़ वी आर नॉट लुकिंग इंटू द डाटा कि रिक्वेस्ट क्या है?
कौन से पाथ पे भेजी है? कौन से माइक्रो सर्विसेस पे यह रिक्वेस्ट भेजी है? हम यूआरएल बेस्ड राउटिंग या कुकी बेस्ड
राउटिंग नहीं कर सकते। जो कनेक्शंस है वो स्टिकी होते हैं। व्हिच मींस अगर आपका क्लाइंट ए सर्वर वन से कनेक्टेड हुआ है तो
थ्रूउ दैट सेशन उसको सर्वर वन से ही कनेक्टेड रहना पड़ेगा। इवन दो सर्वर वन अगर ओवरवेम हो जाए तो। उसके बाद हम कुछ
कैशिंग भी नहीं इंप्लीमेंट कर सकते। बिकॉज़ हम अगर डाटा ही इंस्पेक्ट नहीं कर रहे हैं जो पेलोड आ रहा है। तो हमें पता ही नहीं
कि कौन सी रिक्वेस्ट है, कौन सी यूआरएल पे रिक्वेस्ट है। तो हाउ वी कैन आइडेंटिफाई द रिपीिटेटिव रिक्वेस्ट। सो हम कैशिंग भी
नहीं कर सकते एंड जो लॉगिंग एंड [गला साफ़ करने की आवाज़] मॉनिटरिंग है वो भी लिमिटेड है बिकॉज़ वी आर जस्ट रिलाई ऑन
आईपी एंड पोर्ट नंबर्स। नेक्स्ट इज़ लेयर सेवन लोड बैलेंसर जो लेयर सेवन ऑफ ओएसआई मॉडल व्हिच इज एप्लीकेशन लेयर पे काम करता
है। लेयर सेवन लोड बैलेंस प्रोटोकॉल स्पेसिफिक होते हैं क्योंकि जो पैकेट हम भेज रहे हैं उस पैकेट के अंदर जो पेलोड है
पेलोड के अंदर जो एप्लीकेशन डाटा है उसको समझ के इंटरपिट करके उस हिसाब से ट्रैफिक को डिस्ट्रीब्यूट करते हैं। लेयर सेवन लोड
बैलेंसर को हम सेटअप करते हैं। सबसे पहले जो मेन सर्वर्स है उनको कनेक्ट करते हैं और ये जो कनेक्शंस है वो हमेशा वार्म रखते
हैं। सो दैट इट कैन हैंडल एनी अमाउंट ऑफ ट्रैफिक। उसके बाद जब वह क्लाइंट से कनेक्ट करते हैं तो क्लाइंट से जो भी
पैकेट्स आते हैं उन सभी पैकेट्स को कंपाइल करके पार्स करके रिक्वेस्ट को अंडरस्टैंड करके उस हिसाब से राउटिंग करते हैं। टू
इंस्पेक्ट द इंक्रिप्टेड डाटा लेयर सेवन लोड बैलेंसर को अपने पास टीएलएस सर्टिफिकेट्स एंड पब्लिक कीज़ रखनी पड़ती
है। लेयर सेवन लोड बैलेंसर की वर्किंग देखते हैं। सबसे पहले इट पारसेस द रिक्वेस्ट। तो क्लाइंट जो भी रिक्वेस्ट
भेज रहा है, जो भी पैकेट्स भेज रहा है, उन सभी पैकेट्स को वह अपने बफर में पहले स्टोर करता है। फिर उनको कंबाइन करके उसके
अंदर जो रिक्वेस्ट है, उस रिक्वेस्ट की बॉडी को समझता है कि कौन से यूआरएल पे रिक्वेस्ट जा रही है और उस हिसाब से वो
रिक्वेस्ट एप्रोप्रियट सर्वर को फॉरवर्ड करता है। व्हाइल फॉरवर्डिंग ट्रफिक लेयर सेवन लोड बैलेंसर प्रोटोकॉल बेस्ड
प्रोसेसिंग भी करता है। अब जब हम पैकेट्स के डेटा को इंस्पेक्ट ही कर रहे हैं तो हम कैशिंग एस स्मार्ट राउटिंग कर सकते हैं।
तो जो रिपीिटेटिव रिक्वेस्ट है उन रिस्प्ससेस को कैश करके हम लेटेंसी कम कर सकते हैं एंड यूआरएल बेस्ड राउटिंग कर
सकते हैं। लेट्स सी इट इन एक्शन। वी हैव अ क्लाइंट एंड टू बैक एंड सर्वर्स व्हिच आर कनेक्टेड टू लेयर सेवन लोड बैलेंसर।
क्लाइंट जब लेयर सेवन लोड बैलेंसर को कुछ रिक्वेस्ट भेजता है। फॉर एग्जांपल एचtपी गेट रिक्वेस्ट। तो उनके जो पैकेट्स है
फर्स्ट वो सारे पैकेट्स पहले लोड बैलेंसर अपने बफर में एक-एक करके स्टोर करता है एंड सारे पैकेट्स को कंबाइन करके उस
रिक्वेस्ट को अंडरस्टैंड करता है। फिर वो एक-एक पैकेट को एप्रोप्रियट बैक एंड सर्वर पे डिस्ट्रीब्यूट करता है, फॉरवर्ड करता
है। इन केस ऑफ लेयर फोर लोड बैलेंसर, हम डायरेक्टली पैकेट को फॉरवर्ड कर देते हैं। जस्ट बाय चेकिंग हपी एड्रेस एंड पोर्ट
नंबर। लेयर सेवन लोड बैलेंसर्स के केस में इन पैकेट्स को पहले कंबाइन किया जाता है, इंस्पेक्ट किया जाता है। फिर इनको आगे
भेजा जाता है। लेयर सेवन लोड बैलेंस के एडवांटेजेस देखते हैं। लेयर सेवन लोड बैलेंस इफेक्टिव होते हैं। बिकॉज़ हम
स्मार्ट लोड बैलेंसिंग करते हैं बेस्ड ऑन द रिक्वेस्ट कंटेंट। एंड यहां हम कैशिंग कर सकते हैं। प्रोटोकॉल स्पेसिफिक
ऑप्टिमाइजेशन कर सकते हैं। डिसएडवांटेजेस की बात की जाए तो लेयर सेवन लोड बैलेंसिंग ज्यादा एक्सपेंसिव है एज़ कंपेयर टू लेयर
फोर। बिकॉज़ हमें उन सारे पैकेट्स को असेंबल करके फिर उस रिक्वेस्ट को अंडरस्टैंड करके फिर उनको सेगमेंटेशन करके
आगे एप्रोप्रियट सर्वर को फॉरवर्ड करना होता है। कभी-कभी अगर बहुत ट्रैफिक हो तो इससे परफॉर्मेंस अफेक्ट हो सकता है। बॉटल
नेक हो सकती है। प्लेयर सेवन लोड बैलेंसर्स पे हमें टीएस सर्टिफिकेट रखने पड़ते हैं। व्हिच माइट बी अ सिक्योरिटी
कंसर्न फॉर सम ऑर्गेनाइजेशन। दैट्स ऑल अबाउट चैप्टर सेवन प्रॉक्सीस एंड लोड बैलेंसर्स। जहां हमने पहले फॉरवर्ड
प्रॉक्सीस के बारे में पढ़ा। देन रिवर्स प्रॉक्सीस के बारे में पढ़ा। देन वी सॉ लेयर फोर लोड बैलेंसर क्या होता है? कैसे
काम करता है। उसके बाद हमने लेयर सेवन लोड बैलेंसर के थ्रू कैसे ट्रैफिक डिस्ट्रीब्यूट होती है, स्मार्ट राउटिंग
होती है, वह देखा। इन द फिनाले ऑफ दिस बूट कैंप, अभी तक हमने जो जो चीजें एक्सप्लोर की इन द वर्ल्ड ऑफ नेटवर्किंग, उन सभी को
हैंड्स ऑन अप्लाई करके देखेंगे। एंड डेवोप्स और क्लाउड की दुनिया में हम लोग एंटर करने वाले हैं।
वेलकम टू द चैप्टर एट ऑफ कंप्यूटर नेटवर्किंग, बूट कैंप व्हिच इज अबाउट अप्लाइड नेटवर्किंग फॉर डेवोप्स। जिसमें
हमने अभी तक जितने भी नेटवर्किंग के इंपॉर्टेंट कांसेप्ट्स पढ़े उन सभी को एक-एक करके प्रैक्टिकली अप्लाई करके
देखेंगे। बिफोर डायरेक्टली जंपिंग इंटू द क्लाउड आई वुड लाइक टू डिस्कस वन इंपॉर्टेंट प्रोटोकॉल व्हिच इज एसएसएच।
एसएसएस स्टैंड्स फॉर सिक्योर सेल। यह एक क्रिप्टोग्राफिक प्रोटोकॉल है जिसके थ्रू हम रिमोट सर्वर से रिमोट मशीन से कनेक्ट
कर सकते हैं। जब भी हम क्लाउड प्रोवाइडर से मशीनंस रेंड करते हैं वो मशीन उनके डेटा सेंटर से ऑपरेट करती है। अब यह जो
डेटा सेंटर्स है वो मुंबई, सिंगापुर या दुनिया में कहीं भी हो सकते हैं। हमें उन रिमोट मशीनंस पे कुछ कमांड्स एग्जीक्यूट
करनी होती है या कुछ सॉफ्टवेयर्स के न्यू वर्जनंस इंस्टॉल करने होते हैं या किसी सर्विस को कॉन्फ़िगर करना होता है या हमारा
एप्लीकेशन डिप्लॉय करना होता है। यू डोंट हैव डायरेक्ट एक्सेस टू दोज़ फिजिकल सर्वर। इन दैट केस हम एसएसएच की मदद से अपने
लैपटॉप से अपने सिस्टम के थ्रू एक सिक्योर टर्मिनल कनेक्शन ओपन कर सकते हैं एंड उस रिमोट मशीन से बात कर सकते हैं। उनको
एक्सेस कर सकते हैं। वंस द कनेक्शन इज़ एस्टैब्लिश्ड एज़ अ नेम सजेस्ट इट इज़ अ सिक्योर शेल कनेक्शन व्हिच मींस सारी
चीजें इंक्रिप्टेड होती है। आप जो कमांड एग्जीक्यूट करते हो उसका जो रिस्पांस आता है, आपको जो लॉक्स मिलते हैं, वह सारी
चीजें इंक्रिप्टेड होती है। सो दैट कोई थर्ड पार्टी अगर उस ट्रैफिक को इंस्पेक्ट कर रही है तो दे विल नॉट गेट एनीथिंग आउट
ऑफ इट। एसएसएच बाय डिफॉल्ट पोर्ट 22 पे रन करता है। एंड इट्स वर्ड टू रिमेंबर दिस पोर्ट नंबर बिकॉज़ ऑलमोस्ट ऑल द टाइम
व्हेनएवर वी रेंट एनी मशीन और एक्सेस एनी सर्विस ऑन द क्लाउड वी हैव टू कॉन्फ़िगर द फायर वॉल जहां हम पोर्ट 22 के थ्रू एसएसएच
ट्रैफिक अलऊ करते हैं। एसएसएच दो वे से ऑथेंटिकेशन सपोर्ट करता है। फर्स्ट इज़ पासवर्ड बेस्ड ऑथेंटिकेशन। सेकंड इज़ की
बेस्ड ऑथेंटिकेशन। पासवर्ड बेस्ड ऑथेंटिकेशन बिल्कुल रेकमेंडेड नहीं है। बिकॉज़ आपका पासवर्ड क्या होता है? उनका
नाम @ डेट ऑफ़ बर्थ। ओ वो तो है ही नहीं। आपका नाम हो सकता है एंड डेट ऑफ़ बर्थ हो सकती है। या कुछ महानुभाव ऐसे होते हैं
उनका पासवर्ड पासवर्ड ही होता है। पास @ 1 2 3 4 होता है। दैट कैन बी ब्रूट फोर्स। दैट्स व्हाई की बेस्ड इज अ यूनिवर्सल
स्टैंडर्ड। जिसमें हम क्रिप्टोग्राफिक कीज़ की पेयर यूज करते हैं। एक पब्लिक की होती है, एक प्राइवेट की होती है। पब्लिक की जो
होती है वो सर्वर्स में हम लोग स्टोर करते हैं इन अ स्पेशल फाइल कॉल्ड एज ऑथराइज्ड अंडरस्कोर कीज़ एंड वो की ही पब्लिक होती
है। दैट मींस इट इज़ नॉट अ सीक्रेट ऑन द अदर हैंड जो प्राइवेट की है वो टॉप सीक्रेट होता है। वो आपको कहीं पुश नहीं
करना है। किसी को शेयर नहीं करना है। जनरली ये प्राइवेट कीज़ है वो हमारे सिस्टम में एसएसएच नाम के हिडन फोल्डर में एकिस्ट
करती है। जब भी हम एसएसएच के थ्रू किसी रिमोट मशीन को कनेक्ट करते हैं तो इसी प्राइवेट की का यूज करके मैथमेटिकली हमारी
आइडेंटिटी प्रूव की जाती है। एंड वंस [गला साफ़ करने की आवाज़] दैट इज वेरीिफाइड बाय सर्वर यूजिंग द पब्लिक की
हमें उन मशीनंस का एक्सेस मिल जाता है विदाउट एनी पासवर्ड एंड वी विल सी दिस इन एक्शन। एसएसएच प्रोटोकॉल टनलिंग भी सपोर्ट
करता है जिसके थ्रू इंक्रिप्टेड कनेक्शन के थ्रू हम ट्रैफिक भेज सकते हैं। वन ऑफ द कॉमन यूज़ केस ऑफ दिस टनलिंग इज पोर्ट
फॉरवर्डिंग जहां एक पर्टिकुलर पोर्ट से जो ट्रैफिक है वो फॉरवर्ड कर देते हैं अनदर सिस्टम पे या अनदर सर्विस पे। एंड बिकॉज़
ऑफ़ दैट टनलिंग के थ्रू हम सिक्योरली एक्सेस कर सकते हैं। जो इंटरनल रिसोर्सेज होते हैं, प्राइवेट रिसोर्सेज होते हैं।
हम जो रिक्वेस्ट है वो पब्लिक फेसिंग एपीआई पे करते हैं और वो उस रिक्वेस्ट को आगे इंटरनल सर्विसेज पे रन करके हमें
रिस्पांससेस देते हैं। लेट्स सी एसएसएच इन एक्शन जहां हम पहले एडब्ल्यूएस क्लाउड पे अपना अकाउंट क्रिएट करेंगे एंड एक रिमोट
मशीन पिन अप करके उसको एसएसएच के थ्रू एक्सेस करेंगे। इफ यू गो टू द google.com एंड सर्च aws आपको फर्स्ट वेबसाइट मिल
जाएगी aws.com वंस यू एंटर्ड इंटू दिस वेबसाइट आपको यहां क्रिएट अकाउंट करना है। आपको साइन अप के
लिए दो रिक्वायरमेंट्स लगेगी। एक आपका ईमेल आईडी एंड देन आपको आपके अकाउंट का नाम क्या रखना है? पर्सनल अकाउंट, लर्निंग
अकाउंट, एजुकेशनल अकाउंट, टीचिंग अकाउंट, बिजनेस अकाउंट। अगर आपका पहले से ही एडब्ल्यूएस का अकाउंट है तो यू कैन
डायरेक्टली साइन इन इंटू दैट एंड कंटिन्यू द फर्दर प्रोसेस। फॉर द बिगिनर्स लेट्स क्रिएट द अकाउंट। लेट्स एंटर द ईमेल आकाश@
कोd.com एंड माय अकाउंट नेम इज टीचिंग। फर्स्ट वी हैव टू वेरीफाई द ईमेल एड्रेस। ईमेल एड्रेस पे मेरे वेरिफिकेशन कोड गया
होगा। आई हैव टू पुट दैट वेरिफिकेशन कोड हियर। लेट्स सी दैट कोड। दिस इज़ द वेरिफिकेशन कोड। लेट मी पुट दैट। ओके।
मेरा ईमेल सक्सेसफुली वेरीफाई हो गया है। आई हैव टू क्रिएट अ रूट पासवर्ड एंड कंफर्म द रूट पासवर्ड। तो अब मैं एक रूट
पासवर्ड क्रिएट करूंगा। सिक्योर विद अप्पर केस लेटर, लोअर केस लेटर्स, नंबर्स एंड नॉन अल्फा न्यूममेरिक कररेक्टर्स। यू हैव
टू पुट अ सिक्योर पासवर्ड एंड देन लेट्स कंटिन्यू टू द स्टेप टू। यहां आपको दो ऑप्शंस मिलेंगे। फर्स्ट वन इज फ्री प्लान,
सेकंड इज़ पेड प्लान। वी विल गो विथ द पेड प्लान बट डोंट वरी। दिस इज पे एज यू गो। मतलब अगर आपने सर्विसेस टर्न ऑन करके रखी,
यूज कर रहे हो रेगुलरली तब भी आपको एडब्ल्यूएस चार्ज करेगा। फ्री प्लान में क्या है? आपको लिमिटेड सर्विसेस मिलती है।
यू कैन नॉट एक्सेस ऑल एडब्ल्यूएस सर्विज एंड फीचर। दैट्स व्हाई आई रेकमेंड टू गो विथ द प्लेड प्लान। बाकी आपको यहां आपकी
डिटेल्स भरनी है। आपका फुल नेम, ऑर्गेनाइजेशनल नेम, फोन नंबर, कंट्री एंड फुल एड्रेस। दिस इज द स्टेप टू अपार्टमेंट
नंबर सभी ने पता होगा। लेट्स गो अहेड विद द स्टेप टू। यहां आपको स्टेप थ्री में दो ऑप्शंस हैं बिलिंग के। एक तो आप यूपीआई
ऑटो पे सेट कर सकते हो। दूसरा क्रेडिट और डेबिट कार्ड पे जा सकते हो। नाउ इंडिया में तो यूपीआई बहुत कॉमन हो गया है। तो आई
विल गो विद द यूपीआई ओनली बिकॉज़ जो ऑटो पे होता है वह हम जब भी चाहे कैंसिल कर सकते हैं एज कंपेयर टू क्रेडिट और डेबिट कार्ड।
तो यूपीआई ऑटो पे हम जाएंगे। ऑटोमेटिक पेमेंट लिमिट इज ₹15,000। तो यह 15,000 अमाउंट देख के डरना नहीं है। 15,000 इज द
मैक्सिमम अमाउंट एडब्ल्यूएस कैन ऑटो पे फ्रॉम योर बैंक। वि मींस अगर आपका बिल आ गया ₹00 300 तो एडब्ल्यूएस मैक्सिमम
₹15,000 ही ले सकता है। आपके अकाउंट से बस ₹2 डिडक्ट होंगे। वो भी रिफंडेबल है। वंस एडब्ल्यूएस वेरीिफाई यू आर जेन्युइन पर्सन
वो ₹2 फिर से क्रेडिट हो जाएंगे। एंड दिस ऑटो पे लिमिट एक सेट हो जाएगी। तो मंथली आपका अगर कुछ कॉस्टिंग आ रहा है तो वो ऑटो
डेबिट हो जाएगा। बट वी विल टेक केयर ऑफ इट बिकॉज़ वंस वी लर्न एवरीथिंग वी विल मेक श्योर टू टर्मिनेट ऑल द सर्विसेस एंड द
मशीनंस। सो हमें कॉस्टिंग ना आए। डोंट वरी। यहां हमें एक यूपीआई पेमेंट करना होता है। एंड इट इज टेलिंग कि अगर आपने
बाद में जाकर यूपीआई ऑटो पे कैंसिल किया तो आपकी एडब्ल्यूएस की सर्विज मे बी इंटरप्ट हो सकती है। तो वी विल नॉट कैंसिल
इट। वी विल जस्ट कीप इट ओपन बट विथ द प्रिकॉशन दैट हमने जो भी सर्विज टर्न ऑन की है दैट शुड बी टर्न ऑफ टर्मिनेटेड
अनलेस अंटिल इट इज़ रिक्वायर्ड। यहां हमें ₹2 का पेमेंट करना है। तो इस स्टेप के बाद दो और स्टेप है। फोर्थ स्टेप में आपको
आपकी आइडेंटिटी प्रूव करनी होती है। एज अ इंडियन सिटीजन आपको आधार कार्ड या पैन कार्ड देना होता है। आधार कार्ड डीजीकर के
थ्रू वेरिफिकेशन हो जाता है। पैन कार्ड को आपको बस पैन कार्ड का नंबर एंड फोटो देना है। वंस दैट इज डन इन द लास्ट स्टेप आपने
जो स्टार्टिंग में जो नंबर दिया है वो नंबर आपको वेरीफाई करना है। अब आई एम नॉट डूइंग दोज़ स्टेप्स बिकॉज़ मैंने नंबर ही
गलत दिया है। आई डोंट वांट टू गिव यू माय नंबर बिकॉज़ पहले ही उसने ब्लॉक करके रखा है। मुझे मैसेज करोगे मैं भी ब्लॉक कर
दूंगा तो और डिप्रेशन में चले जाओगे। यह पांच स्टेप्स कंप्लीट करने के बाद विद इन 10 टू 15 सेकंड्स आपका अकाउंट सेटअप हो
जाएगा। एंड उसके बाद आपको एडब्ल्यूएस के कंसोल पे जाना है। तो इस प्रकार आपका कंसोल दिखेगा आपको। वंस यू लॉन्च इनू द
कंसोल। यू कैन सी द सर्च बार हियर। इन दैट सर्च बार यू हैव टू सर्च ईसी2। एक वर्चुअल सर्वर्स होते हैं क्लाउड्स पे हम जिनको
रेंट कर सकते हैं। लेट्स गो एंड रेंट वन सर्वर। यहां जाके आपको लॉन्च इंस्टांस पे क्लिक करना है। दे विल शो यू ऑल दिस वॉक
थ्रू एंड समथिंग लाइक दैट वी कैन लॉन्च विदाउट दैट वॉक थ्रू व्हाट इज द नेम ऑफ द सर्वर माय फर्स्ट मशीन। यहां आपको अलग-अलग
ऑपरेटिंग सिस्टम्स मिलेगी। Amazon मैनेज्ड Linux Mac OS माय फेवरेट उबंतू Windows रेड एट उ Untu सेलेक्ट करते हैं। मल्टीपल
इंस्टेंसेस के टाइप होते हैं। अभी के लिए ऑल गुड। यहां हमें एक नया की पेयर जनरेट करना है। अगर आपके पास एकिस्टिंग की पेयर
होगा तो आप वो यूज़ कर सकते हो। बट मोस्टली अगर आपने नया अकाउंट क्रिएट किया होगा तो आपके पास कोई भी की पेयर नहीं होगी। तो
लेट्स क्रिएट अ न्यू की पेयर नेम इज डेमो। कीप पेयर का टाइप है आरएसए एंड यह फॉर्मेट जैसे के वैसे रख के हमें फटाक से एक की
क्रिएट करनी है। और यह हमें स्टोर करनी है। बिकॉज़ आफ्टर दैट वी कैन नॉट डाउनलोड इट। दिस इज़ द नेटवर्क सेटिंग्स। ये सब सेम
रखनी है। अलाउ एचटीपीएस ट्रैफिक एंड एचटीपी ट्राफिक हम कर देते हैं फटाक से एंड लॉन्च कर देंगे। एसएसएच का भी हमने
अलऊ कर दिया था। वहां उसके ऊपर बाय डिफ़ॉल्ट टर्न ऑन था वो। माय इंस्टेंस इज़ लॉन्चिंग। तो मैं इंस्टेंसेस पे क्लिक
करता हूं। यू कैन सी माय इंस्टेंसेस इज़ रनिंग। स्टेटस चेक इनिशियलाइजिंग है। वो जब तक स्टेटस सारे चेक नहीं कर लेता। वी
विल नॉट एक्सेस इनू दैट। ला ला ला ला ला अंटिल देन वी विल ओपन द टर्मिनल। आपका जो भी टर्मिनल होगा आप वो ओपन कर सकते हो। आई
एम यूजिंग गोस्टी एज अ टर्मिनल। ऑलराइट वी आर इन। इन पे जब क्लिक करोगे तो यहां कनेक्ट करने का ऑप्शन आता है। देयर आर
मल्टीपल ऑप्शंस। आप एसी टू इंस्टेंस कनेक्ट से कनेक्ट कर सकते हो। एसएसएच क्लाइंट के थ्रू कनेक्ट कर सकते हो। दिस
इज द इजीिएस्ट ऑप्शन। आप जाके यहां कनेक्ट कर सकते हो। तो लेट मी रिफ्रेश दैट इट इज़ एस्टैब्लिशिंग कनेक्शन। ऑलराइट वी आर इन
हमने एसएसएच प्रोटोकॉल के थ्रू एक रिमोट सर्वर को कनेक्ट कर लिया है। बट दिस इज़ हैपनिंग इन द ब्राउज़र। एब्ल्यूएस ने हमें
अच्छा यूजर एक्सपीरियंस प्रोवाइड करके दिया है। इफ आई से हु एम आई दिस इज़ उबंतू प्रेजेंट वर्किंग डायरेक्टरी इज़ दिस। अब
दूसरा वे देखते हैं कनेक्ट करने का। एसएसए क्लाइंट इंस्ट्रशंस आर प्रीटी क्लियर वी हैव टू रीड इट नाइसली फर्स्ट इज़ ओपन
एसएसएच क्लाइंट ओके लोकेट योर प्राइवेट की फाइल हमारी डेमो डॉट नाम से डाउनलोड फोल्डर्स में अभी रन दिस कमांड टू चेंज द
नेसेसरी परमिशंस परमिशंस हम चेंज करते हैं इसकी बाय डिफॉल्ट रीड राइट कर सकता है इसको कोई भी तो उसका राइट एक्सेस हम हटा
देते हैं यूजिंग दिस कमांड वी विल लर्न दिस व्हेन वी आर लर्निंग अबाउट लinक्स एंड देन हम कनेक्ट कर सकते हैं यूजिंग दिस
पब्लिक डीएनएस यूआरएल और उन्होंने फिर यह कमांड एग्जीक्यूट करने को बोली है कनेक्ट करने के लिए। तो लेट्स कॉपी दिस कमांड
फर्स्ट एंड चलते हैं हमारे टर्मिनल की तरफ। जब हम एसएसए के बारे में पढ़ रहे थे देन हमने पढ़ा था कि जनरली ये सारी जो
प्राइवेट कीज़ है वो होम फोल्डर में एसएसएच नाम का हिडन फोल्डर होता है। वहां होती है। बट करेंटली हमारी जो फाइल है वो
डाउनलोड फोल्डर में है। तो एज अ बेस्ट प्रैक्टिस उसको हम मूव करते हैं। डाउनलोड्स फोल्डर में एक फाइल है डेमो पेम
नाम की। उस फाइल को मैं मूव कर रहा हूं एसएसएच में विद दिस नेम। तो दिस इज अ कमांड एमवी स्टैंड्स फॉर मूव। इसको मैं
मूव कर रहा हूं। इसमें आप फाइल एक्सप्लोरर से भी ड्रैग ड्रॉप कर सकते हैं। या आपको नहीं करना है। दैट इज आल्सो ओके। आई एम
जस्ट फॉलोइंग स्टैंडर्ड प्रैक्टिससेस। तो अगर मैं अभी एसएसएच वाले फोल्डर में जाऊं सीडी टिल्टा एसएसएच और यहां मैं एलएसएलए
करूं तो आई हैव डेमो पेम फाइल। उन्होंने एक कमांड दिया था व्हिच इज़ सीए मोड टू दिस। एसएसएच फोल्डर में है। अब जाके ये
कमांड मैं लर्न रन कर रहा हूं। अगर आपने मूव नहीं की है फाइल तो आप डाउनलोड फोल्डर में जाके यह कमांड रन कर सकते हो। आई रन
दैट कमांड एंड अगेन मैंने एलएस हपन एलए डाला तो पहले रीड और राइट की परमिशन थी डेमो फाइल को खाली रीड की परमिशन है। डोंट
वरी ये अगर ओवरवेल में लग रहा है तो यह हम लinक्स जब पढ़ेंगे तब की बात है। अब मैं जस्ट आपको एज अ एक्स्ट्रा इनेशन दे रहा
हूं। आई एम गोइंग बैक टू द होम। उसके बाद उन्होंने हमें एक कमांड दी थी व्हिच इज दिस। लेट्स रन दैट। अब मेरी जो फाइल है वो
है होम मेंsh फोल्डर में आपके डाउनलोड में होगी तो आप होम स्ल डाउनलोड डेमो डॉटpएम एंड फिर आपका जो है उबंतू सर्वर का ये जो
यूआरएल वो डाल सकते हो एंड एंटर कर सकते हो यहां आपको यस कहना है एंड वी आर इन तो इस प्रकार हम एसएसएच क्लाइंट के थ्रू लोकल
सिस्टम से रिमोट मशीन को एक्सेस कर सकते हैं। आई कैन रन हु एम आई देन पीwजी देन सीडी यहां एक एसएसएच फोल्डर है। जाता हूं
मैं उसमें एलएस एल ए करते हैं एलए ऑथोराइज्ड कीज़ नाम का एक फोल्डर है। लेट्स सी दैट कैट ऑथराइज्ड कीज़ दिस इज़ माय
पब्लिक की। हां ये पब्लिक की है। तो इसका अगर हम किसी को दिखा दे तो कुछ इतना कुछ होता नहीं। बट डेफिनेटली आई विल डिलीट दिस
लेटर जो हमने पढ़ा था ऑथोराइज्ड की नाम के फाइल में ये पब्लिक की स्टोर होती है। ऑलराइट लेट्स गो बैक टू होम ईडी डॉट डॉट
ईडी टिलडा हम लोग होम पे आ गए प्रेजेंट वर्किंग डायरेक्टरी टिलडा हमें होम पे ले जाता है। अब यहां तक आ ही गए हो तो एक
मजेदार चीज बता देता हूं। चैप्टर सेवन में हमने रिवर्स प्रॉक्सीस के बारे में पढ़ा था। तो हम रिवर्स प्रॉक्सीस इंजीनिx एचए
प्रॉक्सी जैसे अलग-अलग सॉफ्टवेयर्स आते हैं, प्रोडक्ट्स आते हैं उनके थ्रू लगा सकते हैं। अब हमारा जो सर्वर है आई डोंट
वांट टू एक्सपोज दैट सर्वर डायरेक्टली। यहां मैं फ्रंट एंड एप्लीकेशन, बैक एंड या एपीआई रन कर सकता हूं, माइक्रो सर्विस रन
कर सकता हूं। तो मैं फ्रंट में रिवर्स प्रॉक्सीस लगा होगा। लेट्स सेट अ बेसिक रिवर्स प्रॉक्सी एंड उसके थ्रू फिर हम लोग
सर्वर को एक्सेस करके देखेंगे पब्लिकली। आई विल गो विथ द कैडी राइट नाउ। आप इंजीनिinx पे भी जा सकते हो। बट कैडी इज़
प्रीटी इजी। तो मैं जब कैडी पे जाऊंगा दिस इज़ cd server.com यहां मैं डॉक्स में जाता हूं। इंस्टॉलेशन पे उबंतू पे इंस्टॉलेशन
की प्रोसेस ये है। ये सारे कमांड्स हमें रन करने हैं। उससे पहले जब भी हम कोई भी न्यू सर्वर स्पिन करते हैं उसको हमें
अपडेट एंड अपग्रेड करना चाहिए। दो कमांड होती है। वो हमें यहां उन्होंने बताई भी होगी। लिस्ट ऑफ अवेलेबल अपडेट्स इज मोर दन
वीक ओल्ड। मतलब यह एक वीक पुराना है। टू चेक न्यू [गला साफ़ करने की आवाज़] अपडेट्स यू कैन रन सूडो एपीटी अपडेट। तो
मैं इसको कॉपी करता हूं एंड पेस्ट करता हूं। फटाक से यह रन हो जाएगा। सूडो एपीटी अपग्रेड अपडेट किया। फिर हमने अपग्रेड
किया। अपडेट से हमें अपडेटेड पैकेज मिले। फिर उन अपडेटेड पैकेज को हमने अपग्रेड कर दिया। तो सारा अभी मेरा जो Linux
एनवायरमेंट है रिमोट मशीन है वो पूरा अप टू डेट हो जाएगा। आई विल फास्ट फॉरवर्ड टू दिस। ऑलराइट। वी आर डन विद द अपग्रेड
आल्सो। तो हमने यहां दो स्टेप्स की। फर्स्ट हमने उनके जो ओल्ड पैकेजेस हैं उनको हमने अपडेट किया। फिर अपग्रेड से
हमने उन सारे पैकेजेस अपडेटेड पैकेजेस को सर्विसेस को प्रोग्राम्स को रीइंस्टॉल कर दिया। नाउ वी आर गुड टू गो। इफ यू गो अगेन
टू द ब्राउज़र एंड ऑन दैट पेज हियर देयर इज़ अ कमांड sudo एपीटी इंस्टॉल कैडी। हमने ये अपडेट वगैरह सब कुछ कर लिया है अभी। Sudo
एपीटी इंस्टॉल कैडी ऑलराइट कैडी इज़ देयर। वो बता रहा है आफ्टर इंस्टॉलिंग प्लीज रीड दिस इंस्ट्रक्शंस। तो देखते हैं सिस्टम
सीटीएल स्टेटस कैडी नाम से एक कमांड है। उनको हम उनको हम रन करते हैं और चेक करते हैं कि क्या स्टेटस है। लेट्स पेस्ट इट।
ऑलराइट। तो कैडी चल रही है। कंट्रोल सी से मैंने एग्जिट किया एंड आई एम अगेन बैक टू द टर्मिनल। एंड दैट्स इट। वी आर ऑलमोस्ट
डन। चलते हैं हम अपने एडब्ल्यूएस कंसोल पे। इस इंस्टांस पे हम लोग थे। इस इंस्टांस के आईडी पे चलते हैं। एंड हियर
वी कैन सी पब्लिक डीएनएस। इस एड्रेस को अगर मैं कॉपी करता हूं, न्यू टैब में पेस्ट करता हूं, तो वी विल सी कैडिंग या
डेफिनेटली इट्स ऑन एचटीपी नॉट एचटीपीएस बिकॉज़ हमने वो सेटअप किया ही नहीं। टीएलएस सर्टिफिकेट्स एंड ऑल बट कैन यू सी कि आपने
एक मशीन रेंट की। उस मशीन पे आपने यह कैडी को सेटअप किया एंड कैडी एक बाय डिफ़ॉल्ट उनका पेज दे रहा है। तो वी आर गुड टू गो।
इस IPपी एड्रेस से भी उस वेबसाइट को एक्सेस कर सकते हो। नाउ इट्स यूजिंग HTPS इफ आई से HTTP देन यू कैन एक्सेस दिस। बट
जनरली हम यूआरएल से करते हैं जो हमने डीएनएस में पढ़ा था। तो हमने एसएसएच क्या होता है? वह पढ़ा। कीप पेयर्स क्या होती
है? उनको कैसे एक्सेस करना होता है? उनके थ्रू कैसे सिक्योरली रिमोट मशीनंस को कनेक्ट करना होता है? उसके बारे में देखा।
अब जो हमने डेमो इंस्टांस क्रिएट किया था, मशीन रेंड की थी, उसको क्लोज करते हैं। इसको टर्मिनेट करते हैं। तो मैं
इंस्टेंसेस पे जाता हूं। यहां मुझे सारे इंस्टेंसेस दिख रहे हैं। अभी मैंने खाली एक ही इंस्टेंस बनाया है। माय फर्स्ट
इंस्टेंस। वो उसका इंस्टेंस स्टेट करेंटली रनिंग है। तो आई सेलेक्टेड दैट। यहां से आप सेलेक्ट कर सकते हो उसको। एंड इंस्टेंस
स्टेट को मैं टर्मिनेट करता हूं। टर्मिनेट करने के बाद आफ्टर फ्यू सेकंड नाउ इट्स शटिंग डाउन एंड आफ्टर फ्यू सेकंड इट इज
टर्मिनेटेड। सो आपको इसका कोई चार्जेस नहीं लगेगा। इसका बिलिंग नहीं होगा। लेट्स जंप इंटू द नेक्स्ट टॉपिक। नाउ वी आर
कंफर्टेबल विद रेंटिंग द मशीन एंड कनेक्टिंग टू देम। लेट्स अंडरस्टैंड द फर्दर कॉनंसेप्ट्स। फर्स्ट वन इज़ वर्चुअल
प्राइवेट क्राउड। जब भी आप कोई ऑफिस रन करते हो, उस बिल्डिंग में कपल ऑफ़ अदर ऑफिसिसेस होते हैं। आपका जो नेटवर्क है,
वह उन ऑफिसिसेस के साथ कॉमनली यूज़ नहीं करते। यू हैव योर डिफरेंट नेटवर्क व्हिच इज अ प्राइवेट टू यू। आपके फिर वहां
राउटर्स होते हैं। अलग-अलग सिस्टम्स होते हैं। वो एक दूसरे से बात कर सकते हैं। बट आपका जो डेटा है, आपका जो कन्वर्सेशन है,
वो ऊपर वाले फ्लोर के या नीचे वाले फ्लोर के ऑफिस इंस्पेक्ट नहीं कर सकते। बिकॉज़ यू सिक्यर्ड दैट नेटवर्क। वर्चुअल प्राइवेट
क्लाउड वही सिमिलर चीज़ है। फॉर एग्जांपल जब हम एप्लीकेशनेशंस को क्लाउड पे डिप्लॉय करते हैं, वह एप्लीकेशनेशंस एक शेयरर्ड
इंफ्रास्ट्रक्चर पे रन करते हैं जो मल्टीपल यूज़र्स यूज कर रहे हैं। तो टू अवॉयड द कॉन्फ्लिक्ट्स एंड मेंटेनिंग द
प्राइवेसी वीपीसी क्या करता है? हमें डेडिकेटेड प्राइवेट नेटवर्क प्रोवाइड करता है एव्री कस्टमर को। भले ही आपने अभी जो
EC2 इंस्टांस बनाया, मैंने अभी जो EC2 इंस्टेंस बनाया, वह मुंबई में एक ही डाटा सेंटर में रन कर रहा हो। स्टिल वी कैन नॉट
एक्सेस ईच अदर बिकॉज़ वीपीसी मेक श्योर दैट योर नेटवर्क एंड माय नेटवर्क इज अ प्राइवेट नेटवर्क। प्राइवेट नेटवर्क के
थ्रू हर यूज़र्स के जो रिसोर्सेज है वो लॉजिकली आइसोलेट होते हैं। नॉट फिजिकली। फिजिकली दे आर रनिंग ऑन अ शेयरर्ड
इंफ्रास्ट्रक्चर। जब भी आपको कुछ रिक्वायरमेंट की जरूरत पड़ी तो आपके लिए वह अलग सीपीू अलग रैम थोड़ी लगाएंगे। तो
यह क्लाउड प्रोवाइडर है। इसमें अलग-अलग वीपीसीस हम क्रिएट कर सकते हैं। प्राइवेट नेटवर्क क्रिएट कर सकते हैं। सारे क्लाउड
प्रोवाइडर्स हमें यह लॉजिकल आइसोलेशन प्रोवाइड करते हैं। एडब्ल्यूएस में वो वीपीसी के थ्रू मिलता है। वीपीसी स्टैंड्स
फॉर वर्चुअल प्राइवेट क्लाउड। इट इज अ वर्चुअल प्राइवेट आइसोलेटेड नेटवर्क विद इन एडब्ल्यूएस। जहां हम अपने रिसोर्सेज को
मैनेज कर सकते हैं, लॉन्च कर सकते हैं। वीपीसी के थ्रू हमें कंप्लीट कंट्रोल मिलता है अपने नेटवर्किंग एनवायरमेंट पे।
लाइक सबनेटिंग क्या-क्या हो सकती है? राउटिंग कैसे होनी चाहिए? फायर वाल्स हम लगा सकते हैं यूजिंग नेटवर्क एक्सेस
कंट्रोल लिस्ट, एनएससीएल एंड सिक्योरिटी ग्रुप्स। आल्सो गेटवे कौन-कौन से होते हैं? इंटरनेट गेटवे, नेट गेटवे। ईच अकाउंट
कैन हैव मल्टीपल वर्चुअल प्राइवेट क्लाउड्स। फॉर एग्जांपल, मैं मेरे एडब्ल्यूएस अकाउंट में तीन वीपीसी सर्वर
रन कर सकता हूं। एक डेवलपमेंट के लिए, एक स्टेजिंग के लिए एंड एक प्रोडक्शन के लिए। तो इसमें डेवलपमेंट का काम चलेगा यहां
स्टेजिंग एनवायरमेंट पे टेस्टिंग का काम चलेगा। वंस एवरीथिंग इज गुड, वी कैन पुश दैट फीचर इनू द प्रोडक्शन। नेक्स्ट इज
एब्ल्यूएस रीजंस। रीजन एक एरिया होता है जिसमें क्लाउड प्रोवाइडर्स अलग-अलग डेटा सेंटर्स प्रोवाइड करते हैं। एंड हर रीजन
में मल्टीपल अवेलेबिलिटी ज़ों्स होते हैं। दीज़ रीजंस आर ऑल ओवर द वर्ल्ड। बिकॉज़ ऑफ़ दैट हम डेटा रिडंडेंसी, कंप्लायंस एंड
लेटेंसी रिक्वायरमेंट सॉल्व कर सकते हैं। जब भी हम रीजन चूज़ करते हैं, कौन से रीजन पे हमें डिप्लॉय करना है? हमारा
एप्लीकेशन, वी शुड कंसीडर द फैक्टर्स लाइक लेटेंसी कितनी हो सकती है? हमारे मेजॉरिटी यूज़र्स कहां है? अदर कंप्लायंसेस क्या है?
सर्विस अवेलेबिलिटी कैसी है? और कॉस्टिंग कैसी है? अकॉर्डिंग टू द रीजन कॉस्टिंग चेंज होती है। यूएस के रीजन की कॉस्टिंग
हायर होती है एज़ कंपेयर टू अफ्रीकन और एशियन रीजंस। एडब्ल्यूएस का ग्लोबल इंफ्रास्ट्रक्चर देखते हैं। अगर आप सर्च
करोगे एडब्ल्यूएस रीजंस एंड अवेलेबिलिटी ज़ों्स तो आपको ग्लोबल इंफ्रास्ट्रक्चर में लगभग 39 रीजंस मिलेंगे। रीजंस आर द
ज्योग्राफिकल एरियाज। उनमें अवेलेबिलिटी ज़ोंस होते हैं। मल्टीपल डेटा सेंटर्स होते हैं। जैसे कि मुंबई एक रीजन है। मैं यहां
जाता हूं एशिया पेसिफिक में। यहां मुझे इतने चाइना, एशिया पेसिफिक, हांगकांग, हैदराबाद, मुंबई। तो ये जो मैं मुंबई वाला
रीजन देख रहा हूं, ये 2016 में ल्च किया गया था। बाय एडब्ल्यूएस एंड यहां तीन अवेलेबिलिटी ज़ों्स हैं। मतलब यहां तीन जगह
डेटा सेंटर्स हैं। लेट्स गो टू द नेक्स्ट थिंग। दैट इज़ अवेलेबिलिटी ज़ों्स। अवेलेबिलिटी ज़ों्स में वन और मल्टीपल डेटा
सेंटर्स होते हैं विद इन द क्लाउड रीजन। जैसे कि मुंबई रीजन है उसमें तीन अवेलेबिलिटी ज़ों्स हैं व्हिच कंसिस्ट ऑफ
सिंगल और मोर डेटा सेंटर्स। यह जो अवेलेबिलिटी ज़ोन है इनका खुद का अलग से पावर नेटवर्किंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर होता
है जो क्लाउड प्रोवाइडर्स मैनेज करते हैं। जहां ज्यादातर नेटवर्क इंजीनियर्स काम करते हैं। ये जो मल्टीपल अवेलेबिलिटी
ज़ों्स होते हैं वो एक दूसरे से इंटरकनेक्टेड रहते हैं विद हाई स्पीड लो लेटेंसी नेटवर्क। सो दैट दे कैन
कम्युनिकेट फास्टर। ये जो कम्युनिकेशन है वो इंक्रिप्टेड होता है एंड सिक्योर होता है। एक आधे अवेलेबिलिटी ज़ोन पे आउटेज आ
गया, इलेक्ट्रिसिटी चली गई, कुछ भी हो गया। तो जो एप्लीकेशनेशंस है वो कंटिन्यूली रन कर सकते हैं इन अदर
अवेलेबिलिटी ज़ों्स। ये जो अवेलेबिलिटी ज़ों्स है वो एक दूसरे के बहुत नजदीक भी नहीं होते बट बहुत दूर भी नहीं होते। सो
दैट दे कैन इंटरकनेक्ट विथ ईच अदर विदाउट लेटेंसी। तो अराउंड 100 कि.मी. के दायरे में वो एक दूसरे से दूर होते हैं टू
प्रोवाइड फास्ट एंड रिलायबल कनेक्शन। अब डायग्रामेटिकली समझते हैं। एडब्ल्यूएस का ग्लोबल नेटवर्क है। उनमें मल्टीपल रीजंस
है। उसमें एक रीजन है एपी साउथ वन जो मुंबई वाला है। उनमें तीन अवेलेबिलिटी ज़ोन है। अवेलेबिलिटी ज़ोन वन, टू एंड थ्री।
वीपीसी की बात की जाए तो वीपीसी जो है वो एक रीजन तक ही लिमिटेड रहता है। तो ये जो हमारा प्राइवेट नेटवर्क है वो हम इन सिंगल
रीजन वी कैन हैव दैट नेटवर्क। वी कैन नॉट हैव प्राइवेट नेटवर्क दैट इज़ अ वीपीसी इन अ मल्टीपल रीजंस। मतलब अलग-अलग नेटवर्क्स
हो सकते हैं। एक ही नेटवर्क मल्टीपल रीजंस में नहीं हो सकता। बट ऑन द अदर हैंड वीपीसी कैन स्पैन अक्रॉस मल्टीपल
अवेलेबिलिटी ज़ों्स। मींस ये जो तीनों अवेलेबिलिटी ज़ों्स है ये वीपीसी हमारा जो प्राइवेट नेटवर्क है वो हम एक तो एक ही
अवेलेबिलिटी ज़ोन में कर सकते हैं। दो या तीनों के तीनों अवेलेबिलिटी ज़ोन को इंक्लूड करके हम हमारा प्राइवेट नेटवर्क
क्रिएट कर सकते हैं। वी विल सी दिस इन एक्शन। वीपीसीस के दो टाइप्स होते हैं। फर्स्ट इज़ डिफ़ॉल्ट वीपीसी, सेकंड इज़ कस्टम
वीपीसी। तो आपके जो एडब्ल्यूएस अकाउंट में हर रीजन में एक तो डिफॉल्ट वीपीसी होता ही है। अगर आपको रिक्वायरमेंट होगी तो आप
कस्टम वीपीसी क्रिएट कर सकते हो। एंड दैट इज व्हाई वी हैव क्रिएटेड वीपीसी मैनुअली जब हम फर्स्ट एसएसएच का डेमो देख रहे थे
एंड हमने एक ईसी2 इंस्टेंस लॉन्च किया था। विदाउट वीपीसी हम एडब्ल्यूएस में कुछ नहीं कर सकते। वह जो वीपीसी है दैट इज़ अ
डिफ़ॉल्ट वीपीसी वह ऑटोमेटिकली क्रिएट किया जाता है। सो दैट वी कैन क्विकली एक्सेस एंड डायरेक्टली गो टू द डिप्लॉयमेंट
पार्ट। जैसे हमने किया डायरेक्ट लॉन्च किया इंस्टेंस और उसको एसएसएच करके हम फिर आगे वाली चीजें कर सकते थे। सेकंड इज़ अ
कस्टम वीपीसी जहां हमें मैनुअली कंफ़िगर करनी है कुछ चीजें या स्केलेबल सेटअप बनाना है अकॉर्डिंग टू द रिक्वायरमेंट ऑफ
द ऑर्गेनाइजेशन। तब हम कस्टम वीपीसीस की तरफ जाते हैं। लेट्स इंस्पेक्ट द डिफॉल्ट वीपीसी। हम चलते हैं हमारे कंसोल पे जहां
हमने एक इंस्टेंस टर्मिनेटेड करके रखा है। बट अगर मैं यहां सर्च करता हूं वीपीसी वर्चुअल प्राइवेट क्लाउड तो मुझे ऑल रीजंस
में वीपीसी दिख रहे हैं। मुंबई में दिख रहा है, ओसuका में दिख रहा है, सिविल में दिख रहा है, सिंगापुर में दिख रहा है। सम
रीजंस है जो एडब्ल्यूएस में ऑब्टेन नहीं किए बट बाय डिफ़ॉल्ट जितने भी मोस्ट कॉमन रीजंस है वहां आप एक डिफॉल्ट वीपीसी देख
सकते हो। ओहायो, नॉर्थ वर्जिनिया, नॉर्थ कैलिफोर्निया। लेट्स गो टू द एशिया पेसिफिक मुंबई। हियर वी हैव वन वीपीसी।
दैट इज अ डिफ़ॉल्ट वीपीसी। इसका नेम भी नहीं है। आप नेम यहां जाके दे सकते हो। डिफॉल्ट वीपीसी समथिंग लाइक दैट। अभी मैं
दे नहीं रहा। यहां चल जाए तो आपको सारी डिटेल्स मिल जाएगी। इस वीपीसी का यूनिक आईडी क्या है? स्टेट अवेलेबल है। और सारी
चीजें प्री कॉन्फ़िगरर्ड है। आप यहां रिसोर्स [गला साफ़ करने की आवाज़] मैप देख सकते हो। जाओ ईजीली एक हमें बर्ड आई व्यू
देता है। हमारे पास यह डिफॉल्ट वीपीसी है। उसका आईडी यह है। और उस वीपीसी में तीन सबनेट्स हैं। वी विल सी व्हाट आर द सबनेट।
सब नेटवर्क्स होते हैं। हमने पहले भी पढ़ा है सीआईडीआर नोटेशन पढ़ रहे थे तो कि ऐसे कैसे सबनेटिंग की जाती है। एपी साउथ वन ए,
एपी साउथ वन बी, एपी साउथ वन सी। राउट टेबल्स है क्योंकि राउटिंग करनी पड़ती है फिर उन सब नेटवर्क्स में एंड देन इंटरनेट
गेटवे कनेक्शन है। वी विल सी दिस वन बाय वन। तो दिस इज अ प्री कॉन्फ़िगरर्ड डिफॉल्ट वीपीसी। एव्री रीजन हैज़ वन डिफ़ॉल्ट
वीपीसी। डिफ़ॉल्ट वीपीसी को हमने स्लैश 16 वाला साइडर ब्लॉक दिया होता है। व्हिच मींस अराउंड 65536
IPपी एड्रेस। टोटल 16 बिट्स में 2 16 पॉसिबिलिटीज होती है। तो अराउंड 65536 IP एड्रेस हमें मिलते हैं। एंड फिर हर
अवेलेबिलिटी ज़ोन में डिफ़ॉल्ट सबनेट क्रिएट किया जाता है। एक सब नेटवर्क क्रिएट किया जाता है। और सब नेटवर्क का कॉन्फ़िगरेशन
होता है विद स्लश 20 मास्क। हमने अभी देखा कि डिफ़ॉल्ट वीपीसी को इंटरनेट गेटवे भी ऑटोमेटिकली अटैच होता है। सो दैट हम उसको
पब्लिक इंटरनेट से एक्सेस कर पाए। आल्सो बाय डिफॉल्ट फायर वाल्स का भी कॉन्फ़िगरेशन हो जाता है। यूजिंग सिक्योरिटी ग्रुप्स जो
इंडिविजुअल फायर वाल्स है एंड नेटवर्क एक्सेस कंट्रोल लिस्ट एनएसीएल जो सबनेट लेवल फायर वॉल है टू मैनेज एंड कंट्रोल द
ग्राफिक्स। अब एक कस्टम वीपीसी क्रिएट करते हैं। जैसे मैं वीपीसी डैशबोर्ड में जाता हूं। यहां क्रिएट वीपीसी का ऑप्शन
दिख गया मुझे। मैंने क्रिएट वीपीसी पे क्लिक किया। अभी मुझे जस्ट वीपीसी क्रिएट करना है। नेम ऑफ़ दैट वीपीसी इज़ डेमो
वीपीसी। मैं IP वर्जन 4 ही अभी कर रहा हूं। यह हमें IP वर्जन 4 का साइडर देना है। तो लेट्स गो 10.10.0.06
तो अराउंड हमें 65535 डिवाइसेस हम कनेक्ट कर सकते हैं इस नेटवर्क में। वीपीसी क्या है? एक प्राइवेट
नेटवर्क हम क्रिएट कर रहे हैं। कस्टम वाला डिफ़ॉल्ट तो बाय डिफ़ॉल्ट एक आता है जिसके थ्रू हम क्विकली डेवलपमेंट कर सकते हैं,
एक्सेस कर सकते हैं। रिसोर्सेज पिन कर सकते हैं। और IPV4 साइडर डालने के बाद मैं डायरेक्टली उनको क्रिएट कर दूंगा। एंड
टडाटा यू क्रिएटेड अ प्राइवेट नेटवर्क। अगर इसको फिजिकली करना होता तो कितना डिफिकल्ट होता कि जाओ पहले ऑफिस में जाओ
फिर सारे डिवाइसेस लेके आओ राउटर ये वो वायरिंग फिर उन सबको अटैच करो टेस्ट करो। बट हियर विदिन अ फ्यू क्लिक्स वी हैव आवर
प्राइवेट नेटवर्क। नेक्स्ट टॉपिक इज़ सबनेट। अब हमने एक प्राइवेट नेटवर्क क्रिएट कर दिया है। उस नेटवर्क में मैं
सबनेटिंग करूंगा। एडब्ल्यूएस में सबनेट एक कंटीन्यूअस रेंज ऑफ IPपी एड्रेस होते हैं विद इन द वीपीसी। वनेंट पॉइंट इज यह जो
सबनेट है वह लिमिटेड है अप टू अवेलेबिलिटी ज़ोन। जैसे कि जो वीपीसी है दैट इज लिमिटेड टू द रीजन। एक वीपीसी एक ही रीजन में हो
सकता है। वैसे ही [गला साफ़ करने की आवाज़] सबनेट जो है वह अवेलेबिलिटी ज़ोन के अंदर लाई करती है।
एडब्ल्यूएस सपोर्ट सबनेट साइजज़ फ्रॉम 16 टू 28 इन एव्री सबनेट AWS जो है वो पांच IPपी एड्रेसेस रिजर्व करके रखता है। फॉर
एग्जांपल एक वीपीसी है 192.168.0.016 उसमें हमने एक सब नेटवर्क बनाया है 192.168.10.04
तो जो फर्स्ट एड्रेस है दैट इज अ नेटवर्क एड्रेस। देन जो उसके बाद वाला एड्रेस है वो वीपीसी राउटर के लिए यूज़ किया जाता है।
वीपीसी राउटर जो है वो उसके थ्रू इस सब नेटवर्क में ट्रैफिक को राउट करता है। देन नेक्स्ट जो एड्रेस है वो डीएनएस के लिए
यूज़ होता है। डीएनएस रिलेटेड जो क्वेरीज है उनके लिए। फोर्थ IPपी एड्रेस इन दिस नेटवर्क इज़ रिजर्व फॉर फ्यूचर यूज़्ड बाय
AWS एंड द लास्ट इज़ 192.168.10.255 इज़ अ ब्रॉडकास्ट एड्रेस 24 मींस फर्स्ट थ्री बिट्स आर रिजर्व ओनली लास्ट बिट कैन
चेंज। तो इट कैन बी 0 1 2 3 अप टू 255 0 1 2 3 ये चार रिजर्व है एंड लास्ट वाला ब्रॉडकास्ट एज अ रिजर्व। तो टोटल फाइव IP
एड्रेसेस रिजर्व होते हैं। अब उसके बाद जो है 4 5 जब भी मैं रिसोर्सेज क्रिएट करता हूं एडब्ल्यूएस डायनेमिकली उनको वो वाले
एड्रेस एलोकेट कर देते हैं इन दैट सबनेट इनको डायग्रामेटिकली देखते हैं। एडब्ल्यूएस का आपका अकाउंट है उनमें एक
रीजन में वीपीसी आपने क्रिएट कर दिया है। दिस वीपीसी इज़ 192.168.0.0 विथ साइडर 16 उसमें एक अवेलेबिलिटी ज़ोन है
AG1 एंड इन दैट देयर इज़ वन सबनेट वीपीएस में मल्टीपल अवेलेबिलिटी ज़ोन हो सकते हैं। बट ये जो सबनेट है दैट इज लिमिटेड टू द
अवेलेबिलिटी ज़ोन। तो एक सबनेट एक ही अवेलेबिलिटी ज़ोन में एक्सिस्ट कर सकती है। एंड इन द सेकंड अवेलेबिलिटी ज़ोन वी कैन
हैव अनदर सबनेट। देयर आर टू टाइप्स ऑफ़ सबनेट। फर्स्ट इज़ पब्लिक एंड सेकंड इज़ प्राइवेट। बाय डिफ़ॉल्ट जब भी आप सबनेट
क्रिएट करते हैं, वह प्राइवेट होते हैं। प्राइवेट मींस दे कैन नॉट बी एक्सेस फ्रॉम आउटसाइड वाया इंटरनेट। जब हम किसी सबनेट
को इंटरनेट गेटवे से अटैच करते हैं, देन इट बिकम्स पब्लिक। इंटरनेट गेटवे के बारे में डिटेल पढ़ेंगे। बट इन सिंपल वर्ड्स इट
गिव्स एक्सेस टू द आउटसाइड वर्ल्ड। अगर इस सबनेट में एक मशीन होगी, एक ईसी2 इंस्टेंस होगा तो मैं उसको पब्लिकली इंटरनेट से
एक्सेस कर पाऊंगा। बट इन सबनेट टू आई कैन नॉट एक्सेस इट बिकॉज़ इट इज अ प्राइवेट। प्राइवेट सबनेट में जो सर्विसेस हैं उनको
अगर इंटरनेट का एक्सेस करना है टू अपडेट द पैकेजेस, डाउनलोड न्यू पैकेजेस और शेयर द लॉक्स और एलएलएम्स कॉल करने हैं। वो
पॉसिबल होते हैं नेट के थ्रू। हम नेट को इस प्राइवेट सबनेट को अटैच करते हैं। एंड नेट खुद पब्लिक सबनेट में एकिस्ट करता है।
एक स्टैटिक आईपी एड्रेस होता है उसका। उनको एडब्ल्यूएस के टर्म में इलास्टिक आईपी कहते हैं। तो वो फिक्स रहता है
हमेशा। इवन दो दिस नेट प्रोसेस रिस्ट्स और सिस्टम रिस्टार्ट्स। तो अगर प्राइवेट सबनेट से मुझे इंटरनेट को कनेक्ट करना है
तो मैं वाया नेट जाता हूं। तो फिर नेट पब्लिक सबनेट के थ्रू इंटरनेट गेटवे के थ्रू उस रिक्वेस्ट को आगे भेजता है। बट इट
ओनली एक्सेप्ट्स द रिस्पांससेस। रिक्वेस्ट वही करेंगे। उस रिक्वेस्ट का रिस्पांस वो एक्सेप्ट करेंगे। अब सबनेट के बारे में
जान लिया है तो सबनेट्स को क्रिएट करके देखते हैं। चलते हैं हमारे एडब्ल्यूएस कंसोल पे। हमने अभी एक वीपीसी क्रिएट किया
है जिसका नाम है डेमो वीपीसी। ऑलराइट। तो मैं यहां अभी सबनेट्स में जाता हूं। यह जो सबनेट्स है वो डिफॉल्ट वीपीसी की सबनेट्स
है। हमें नई सबनेट क्रिएट करनी है। सब नेटवर्क क्रिएट करना है। यह डिफॉल्ट वीपीसी है। हमारा कौन सा वीपीसी है? डेमो
वीपीसी में मुझे एक सबनेट क्रिएट करनी है। सबनेट का नाम देता हूं मैं डेमो पब्लिक सबनेट। पहले मैं पब्लिक सबनेट क्रिएट करता
हूं। वैसे बाय डिफ़ॉल्ट सभी प्राइवेट ही होती है। बट मैं इसको पब्लिक करूंगा। अवेलेबिलिटी ज़ोन कौन से अवेलेबिलिटी ज़ोन
पे करनी है आपको? मैंने कहा कि यह एशिया पेसिफिक है ना? जो तीन है तीन में से Aजी1 पे करो पहले देन वीपीसी साइडर ब्लॉक की
10.0.16 इसका मैं साइडर देता हूं 10.0.12 व्हिच गिव्स मी 256 व्हिच आर इनफ एंड
दैट्स इट। यह क्रिएट कर दिया मैंने सबनेट डन। और एक सबनेट क्रिएट करता हूं। इन डेमो वीपीसी ओनली व्हिच इज़ डेमो प्राइवेट
सबनेट। अवेलेबिलिटी ज़ोन अभी Aजी2 देता हूं। यह वीपीसी का साइडर ब्लॉक है। सबनेट का साइडर ब्लॉक। अब मैंने यह वाला तो कर
दिया है। आई कैन नॉट यूज़ दिस। तो इंस्टेड ऑफ़ 1.2 टू करता हूं। मैंने यह कैसे किया? इसके लिए आपको साइडर नोटिफिकेशन क्या है?
आईपी एड्रेसेस क्या है? वो थोड़ा पढ़ना पड़ेगा। सबनेटिंग क्या है? जो हमने पिछले चैप्टर्स में कवर किया है। बट मैं शॉर्ट
में बता दूं 16 मींस फर्स्ट टू ऑक्टेट्स तो सेम रह गए। 10.0 वाले। उसके बाद यहां 0.0.1.0
ये सब कर सकते हो। तो मैंने 1.0 पहले इसको किया था। 2.0 इसको कर रहा हूं। विथ स्लैश 24 व्हिच मींस ओनली लास्ट 8 बिट्स आर
देयर। सो 2 8 इज़ 256 आईपीस। इसको भी क्रिएट कर दे फटाक से। अभी हमारा जो डेमो वीपीसी है यह वाला इसमें हमने एक पब्लिक
सबनेट एंड एक प्राइवेट सबनेट क्रिएट की है। ऑलराइट। नेक्स्ट टॉपिक इज़ राउटिंग। तो वीपीसी में राउटिंग कैसे होती है, उसके
बारे में समझते हैं। जब भी आप वीपीसी क्रिएट करते हो, इट ऑटोमेटिकली कम्स विद लोकल राउटर। बिकॉज़ विदाउट राउटिंग वी कैन
नॉट सेंड द ट्रैफिक टू द डेस्टिनेशन। जो लोकल राउटर होता है, वह अलाउ करता है रिसोर्सेज़ को एक दूसरे से कम्युनिकेट करने
के लिए। हर वीपीसी में एक मेन राउट टेबल होता है, बाय डिफ़ॉल्ट वो भी मैं दिखा दूंगा अभी। एंड उस मेन राउट टेबल में यह
रूल होता है कि इसमें कई रिक्वेस्ट आई है यार, तो वो वीपीसी का जो लोकल राउटर है वो मैनेज कर लेगा। इसके अलावा हम कस्टम राउट
टेबल्स भी क्रिएट कर सकते हैं फॉर हैंडलिंग पब्लिक एंड प्राइवेट राउटिंग। तो राउट टेबल्स देखते हैं। राउट टेबल्स में
मैं गया। लेट मी रिफ्रेश इट। हमारे दो वीपीसी है। एक डिफ़ॉल्ट, एक कस्टम। तो दो मेन राउट टेबल होने ही चाहिए। हमारा डेमो
वीपीसी उसका साइडर है एंड दिस टारगेट इज अ लोकल। तो मैं जो भी रिक्वेस्ट इस IPपी एड्रेस को भेजूंगा वो यह लोकल राउटर हैंडल
कर लेगा। नेक्स्ट इज़ इंटरनेट गेटवे। इंटरनेट गेटवे के बारे में हमने थोड़ा पढ़ा था कि इट अलाउज़ अस टू एक्सेस द इंटरनेट।
बाय डिफ़ॉल्ट जो न्यूली सबनेट क्रिएट किए जाते हैं, वह प्राइवेट होते हैं। हमने पहले देखा। इंटरनेट गेटवे अलाउ करता है
वीपीसी में जो रिसोर्सेज हैं उनको आउटसाइड वर्ल्ड से कम्युनिकेट करना ओवर द इंटरनेट एंड देयर इज अ कंस्ट्रेंट आप एक वीपीसी पे
ओनली वन इंटरनेट गेटवे लगा सकते हो हियर आर सम स्टेप्स टू कनेक्ट सबनेट टू इंटरनेट मैंने सबनेट्स क्रिएट किए मैंने उसको
इंटरनेट को कनेक्ट नहीं किया था तो अब हम उसको कनेक्ट करके देखेंगे लेट्स सी व्हाट आर द स्टेप्स फर्स्ट क्रिएट ए इंटरनेट
गेटवे ओके हम क्रिएट कर लेंगे उसके बाद अटैच दैट इंटरनेट गेटवे टू वीपीसी ओके मैंने क्रिएट कर लिया है एक गेटवे वे और
फिर उसको मैंने एक वीपीसी को अटैच कर दिया। एस एव्री वीपीसी को एक ही गेटवे होता है। तो अगर पहले से अटैच होगा तो वह
अटैच नहीं होगा। थर्ड क्रिएट अ कस्टम राउट टेबल। एक हमें राउट टेबल भी बनाना पड़ेगा। बिकॉज़ राउट टेबल में एंट्री डालनी पड़ेगी
ना कि अगर पब्लिक सबनेट को कुछ एक्सेस करना है तो वो इंटरनेट गेटवे के थ्रू करें। उसके बाद हमें सबनेट को एसोसिएट
करना है टु दैट राउट टेबल। एंड लास्ट स्टेप इज़ ऐड डिफ़ॉल्ट राउट इन राउट टेबल एंड पॉइंट दैट टू द इंटरनेट गेटवे। दैट्स
इट। दिखने में कॉम्प्लिकेटेड लगता है बट जस्ट 2 मिनट में हो जाएगा। लेट्स जंप इंटू द एडब्ल्यूएस कंसोल। क्यों कर रहे हैं हम?
हम एक प्राइवेट नेटवर्क बना रहे हैं। उसमें हमने सब नेटवर्क्स बनाए। ये पब्लिक सब नेट प्राइवेट तो ये पब्लिक वाले को नाम
दिया था खाली। अभी इसको पब्लिक हम करते हैं। कैसे? इंटरनेट गेटवे के थ्रू। ये एक इंटरनेट गेटवे है ऑलरेडी व्हिच इज अटैच टू
द डिफॉल्ट वीपीसी। दैट्स व्हाई हम डिफॉल्ट वीपीसी में जो भी ईसी2 इंस्टेंस बना रहे हैं उसको इंटरनेट से कनेक्ट कर पा रहे
हैं। एसएसएच कर पा रहे हैं आराम से। डेमो इंटरनेट गेटवे इस नाम से मैं इंटरनेट गेटवे क्रिएट कर रहा हूं। आई अलव द
एडब्ल्यूएस गाइज़। उन्होंने बहुत अच्छे से मैसेज लिखे। उन्होंने क्या कहा कि आपका इंटरनेट गेटवे क्रिएट हो गया है। यह आपका
उसका आईडी है। एंड यू कैन नाउ अटैच टू वीपीसी टू इनेबल वीपीसी टू कम्युनिकेट विथ द इंटरनेट। अभी मैंने बस क्रिएट किया इसको
अटैच करते हैं। यहां मैंने क्लिक किया अटैच पे। सेलेक्ट किया वीपीसी। डेमो वीपीसी पे अटैच करना है क्योंकि डिफॉल्ट
वीपीसी को ऑलरेडी अटैच है। मैंने अटैच कर दिया। सी दिस गेटवे इज अटैच टू द डेमो वीपीसी ऑल गुड अगर मैं डेमो वीपीसी के
डैशबोर्ड पे चले जाऊं तो अगर रिसोर्स मैप अगर देखेंगे तो डेमो वीपीसी नाम से हमने एक कस्टम वीपीसी क्रिएट किया था उसमें
हमने दो सबनेट्स क्रिएट किए थे। एक पब्लिक एक प्राइवेट। अभी के लिए दोनों प्राइवेट है। एक डिफॉल्ट राउट टेबल जो बनता है विथ
द एंट्री ऑफ़ साइडर ऑफ़ दैट वीपीसी एंड टारगेट सेट टू द लोकल। एंड देन नेटवर्क कनेक्शंस। अभी तक आए नहीं है। बिकॉज़ वी
हैवेंट कंप्लीटेड द स्टेप्स। एज़ इट इज़ अटैच। द नेक्स्ट स्टेप वाज़ क्रिएट ए कस्टम राउट टेबल। मैं गया राउट टेबल में। एक मैं
राउट टेबल क्रिएट कर रहा हूं। डेमो पब्लिक राउट टेबल। आरटीबी राउट टेबल। वीपीसी कौन सा? डेमो वीपीसी और मैं क्रिएट कर रहा हूं
राउट टेबल। सो दिस राउट टेबल इज़ क्रिएटेड। नाउ इट हैज़ दिस बाय डिफ़ॉल्ट। ये जो राउट टेबल मैंने अभी बनाया है, इसको सबनेट को
एसोसिएट करने को बोला है। व्हाई? अगर मैं यह डायग्राम देखूंगा तो यहां मैंने वीपीसी क्रिएट कर दिया है। एक अवेलेबिलिटी ज़ोन
में एक सबनेट क्रिएट कर दिए। दूसरे अवेलेबिलिटी ज़ोन में सेकंड सबनेट क्रिएट कर दी। मैंने इंटरनेट गेटवे क्रिएट कर
दिया। उसको मैंने इस वीपीसी से अटैच भी कर दिया है। नाउ मुझे बस इसको या इससे कनेक्ट करना है। तो यह जो राउटिंग होती है वो
हमेशा राउट टेबल से होती है। डिफॉल्ट राउट टेबल तो था ही फॉर इंटरनल राउटिंग। मैंने एक राउट टेबल क्रिएट किया जो मुझे पब्लिक
इंटरनेट का एक्सेस देगा। तो यह जो पब्लिक राउट टेबल है उसको मुझे पहले इस सबनेट से एसोसिएट तो करना पड़ेगा। फिर मैं एक रूल
ऐड करूंगा। तो जो भी ट्रैफिक मुझे इंटरनेट से आ रही है वो आईजी के थ्रू अगर आ रही है तो मैं उसको एक्सेप्ट करूंगा। लेट्स सी
हाउ इट विल वर्क। वेरी इजी नेटवर्किंग के सारे कांसेप्ट अभी आपके काम में आएंगे। एडिट सबनेट एसोसिएशन मुझे सबनेट एसोसिएट
करनी है। कौन सी वाली? इसलिए हमने नेमिंग अच्छी से की है। यह पब्लिक सबनेट जो है इसको मुझे एसोसिएट करना है पब्लिक राउट
टेबल से जो मैंने पब्लिक इंटरनेट पे राउटिंग करने के लिए बनाया है। तो ये सबनेट मैंने एसोसिएट कर दिया। अभी मुझे एक
राउट ऐड करना है। लेट्स ऐड वन राउट। ये तो बाय डिफ़ॉल्ट रहता ही है लोकल राउटिंग के लिए। ये
मतलब फ्रॉम एनीवेयर फ्रॉम इंटरनेट व्हिच एंट्री वाज़ दैट इंटरनेट गेटवे। कौन सा इंटरनेट गेटवे है? डेमो आईजीW सेव चेंजेस
एंड नाउ इफ आई गो टू द वीपीसी डेमो वीपीसी नाउ वी विल सी वी हैव अ नेटवर्क कनेक्शन मैंने एक कस्टम वीपीसी बनाया उसमें मैंने
दो सबनेट्स बनाई एक पब्लिक एंड प्राइवेट ये जो पब्लिक सबनेट है इसको मैंने इंटरनेट गेटवे से कनेक्ट किया इंटरनेट गेटवे पहले
मैंने बनाया उसको हमने वीपीसी को अटैच किया फिर एक राउट टेबल बनाया उस राउट टेबल को मैंने यह पब्लिक सबनेट एसोसिएट किया
एंड देन देन मैंने एक राउटिंग का रूल डाला कि जो इंटरनेट से ट्रैफिक आ रही है वाया आईजीW वो इस सबनेट को फॉरवर्ड कर दो। दिस
इज द मैजिक ऑफ क्लाउड कंप्यूटिंग जो आपको मैनुअली करना पड़ता था मशीनंस लेके आओ ये करो वो ये हम लोग एक यूआई से कर सकते हैं।
सिमिलरली और एक राउट टेबल क्रिएट कर लेते हैं। अभी हमने पब्लिक राउट टेबल क्रिएट किया ही है। तो एक एक प्राइवेट राउट टेबल
भी क्रिएट कर लेते हैं। डेमो इज़ बिकॉज़ वी आर यूजिंग डेमो वीपीसी। इसको क्रिएट करके इसको एसोसिएट कर देते
हैं। प्राइवेट से पब्लिक के लिए एक क्राउड टेबल है। प्राइवेट के लिए क्राउटे है। आगे जाके देखेंगे प्राइवेट को कैसे हम इंटरनेट
का एक्सेस दे सकते हैं। वैसे यू हैव हिंट बिकॉज़ वी सॉ द डायग्राम अरर्लियर व्हिच इज़ अबाउट द नेट। नेट गेटवे जो है वो प्राइवेट
सबनेट को इंटरनेट का एक्सेस देता है। फॉर ओएस अपडेट्स, पैकेज डाउनलोड्स, एक्सटर्नल एपीआई एंड सर्विसेस। बट यहां एक कंडीशन
है। कनेक्शन मस्ट बी इनिशिएटेड फ्रॉम विद इन द वीपीसी। वीपीसी से इंटरनेट को कनेक्शन रिक्वेस्ट जानी चाहिए। फिर उसका
रिस्पांस आता है। हम अगर बाहर से उस प्राइवेट सबनेट की रिसोर्स को एक्सेस करना चाहेंगे। इवन दो इट इज कनेक्टेड वाया नेट
टिल वी कैन नॉट डू दैट। एज वी सॉ इट रिक्वायर्स इंटरनेट गेटवे फॉर वीपीसी टू अपस्ट्रीम द कनेक्टिविटी। मींस इंटरनेट से
कनेक्ट करने के लिए हमें इंटरनेट गेटवे को वीपीसी से अटैच करना पड़ता है। थ्रू दैट। फिर वह पब्लिक सबनेट में जाती है। पब्लिक
सबनेट में हम नेट गेटवे को रखते हैं। एंड फिर वह नेट आगे प्राइवेट सबनेट में उसको फॉरवर्ड कर देता है। नेट को एक इलास्टिक
आईपी लगता है। स्टैटिक आईपी लगता है। एज आई टोल्ड यू। सो जब हम उसको प्रैक्टिकली करके देखेंगे हमारे पास अवेलेबल होना
चाहिए इलास्टिक आईपी। वी विल सी इट्स वेरी इजी। फॉर एग्जांपल एक सबनेट है। मैंने उसमें एक इजी टू इंस्टेंस बनाया। अब मैंने
फिर से उस रीजिस्टेंस को रीस्टार्ट किया या कुछ हो गया, रिबूूट हो गया। तो नेक्स्ट टाइम उसको वही IPपी एड्रेस मिले ऐसा नहीं
होता। दिस इज कॉल्ड एज डायनेमिक IPपी एड्रेसिंग। स्टैटिक मींस जब हम सिस्टम को रिस्टार्ट कर रहे हैं, रिबूूट कर रहे हैं,
तब भी उसको सेम आईपी मिले। हम नेट गेटवे एव्री अवेलेबिलिटी ज़ोन में रखते हैं वेयर यू हैव प्राइवेट सबनेट्स। लेट्स
इंप्लीमेंट द नेट। तो मैं यहां जाता हूं। मैं नेट गेटवे क्रिएट करूंगा अभी। सो व्हेन आई गो टू हियर डेमो नेट गेटवे। पहले
ज़ोनल होता था। एडब्ल्यूएस ने रीजनल भी लेटेस्ट ऑप्शन लेके आए हैं। रीजनल मींस फॉर एंटायर रीजन वी कैन हैव अ नेट गेटवे
इंस्टेड ऑफ़ ज़ोनल। ज़ोनल मींस एव्री अवेलेबिलिटी ज़ोन में हम नेट गेटवेज़ अटैच करते हैं। वी विल गो विथ द रीजनल एट इट्स
एफिशिएंट एंड कन्वीनिएंट फॉर आवर यूज़ केस राइट नाउ। वीपीसी मैंने सेलेक्ट किया। मुझे डेमो वीपीसी में नेट गेटवे चाहिए।
कनेक्टिविटी टाइप पब्लिक। ओके बाय डिफ़ॉल्ट वही है। यह इलास्टिक आईपी एलोकेशन मैंने बोला कि हमें एक इलास्टिक आईपी चाहिए। तो
यहां दो ऑप्शन है। ऑटोमेटिकली एडब्ल्यूएस करेगा या मैनुअली करेगा? आज के एआई के जमाने में कौन मैनुअली करेगा? मैनुअली जाओ
इलास्टिक आईपी सर्च करो। एक आईपी रिजर्व करो। उस आईपी को यहां मैनुअली फिर जाके उसका एड्रेस डालो। उससे बढ़िया ऑटोमेटिक
करने दो। बट दैट विल बी स्टैटिक आईपी। व्हिच मींस नेट गेटवे जो है उसका जो IP एड्रेस है वो कांस्टेंट रहेगा। डायनेमिक
नहीं होगा। स्टैटिक होगा। लेट्स क्रिएट इट। इसको थोड़ा टाइम लगता है बिकॉज़ आईपी एड्रेस एलोकेशन को एडब्ल्यूएस जरा टाइम
लेता है तब तक मैं ला ला ला ला ला ओके दिस इज स्टिल हैपनिंग तो इफ यू रिमेंबर हमने जो सबनेट्स बनाए हैं वो एम्प्टी है उसमें
हमने कुछ रिसोर्सेज नहीं बनाए जब तक ये चल रहा है तब तक हम कुछ रिसोर्सेज क्रिएट करते हैं उन सबनेट्स में मैं जा रहा हूं
EC2 में यहां मैं लॉन्च करता हूं EC2 को लॉन्च करना है लॉन्च विदाउट वॉक थ्रू डेमो वीपीसी में मुझे पब्लिक क्लिक वाली जो
सबनेट है उसमें एक टू इंस्टेंस डालना है। उबन तो लेते हैं अपना रिलैक्स वाला। बाकी कुछ छेड़खानी नहीं करनी है। की पेयर लॉग
इन अभी अपने पास ये वाली डेमो वाली की हमने बनाई थी। वही यूज़ करेंगे आराम से। हर बार अलग भी कर सकते हो फॉर सिंपलीसिटी
गोइंग विद द सेम की। यहां आपको एसएसएच ट्रैफिक बाय डिफ़ॉल्ट अलाउ की जाती है। सो दैट वी कैन एक्सेस दैट सर्वर वाय एसएसएच।
अगर ये अनटिक करोगे तो फायर वॉल में जाके हमें ऑन करनी पड़ती है जो हम आगे पढ़ेंगे। इसके बाद HTPS एंड HTP भी मैं अलऊ कर रहा
हूं। सो दैट हम उसको पब्लिक इंटरनेट से एक्सेस कर पाए। जैसे हमने HTP के थ्रू कैडी का सर्वर एक्सेस किया था। यहां आपको
नेटवर्क सेटिंग्स एडिट करनी है। नेटवर्क सेटिंग्स में जाओगे तो ये डिफॉल्ट इस पे जा रहा है। बट अभी हमें डेमो वीपीसी के
पब्लिक सबनेट में डेमो पब्लिक ईसी2 इंस्टेंस क्रिएट करना है। ऑलराइट सब अच्छे से जा रहा है। यह तो मैंने सेटअप कर दिए
और कुछ बचा है। नथिंग ल्च इंस्टेंस। [नाक से की जाने वाली आवाज़] ऑल राइट ऑल राइट सक्सेसफुली ल्च दिस
इंस्टेंस चलते हैं इधर इट्स वर्किंग नाइसली कनेक्ट करते हैं इसको ओ यू कैन सी नो पब्लिक IPV4 एंड IPV6 एड्रेस आर असाइन
तो अगर इसको IPV4 एंड V6 एड्रेस ही नहीं मिले तो हम इसको कनेक्ट ही नहीं कर सकते ना। दिस वन इज़ अ प्राइवेट एड्रेस। दिस इज
जस्ट फॉर इंटरनल पर्पस। अब तो फिर पंगा हो गया। बिकॉज़ हमने एक सेटिंग मिस कर दी है। एंड थैंक गॉड आई मिस दिस बिकॉज़ लॉट ऑफ
स्टूडेंट्स विल डू दिस मिस्टेक। एंड फिर कमेंट्स में आप पूछते रहोगे यार मेरा चल नहीं रहा। आपके इसमें यह ऑप्शन आया मेरे
इसमें कनेक्ट नहीं हो रहा। तो इट्स गुड। नाउ लेट्स गो टू इंस्टेंसेस। इन जनाब को सेलेक्ट करते हैं। इनका काम तमाम करते
हैं। टर्मिनेट फिर से मैं इंस्टेंसेस में जाता हूं। लॉन्च करते हैं। अभी न्यू देखो आप सही से करते हैं। डेमो पब्लिक करना है
मुझे। EC2 उबंतू T3 माइक्रो जैसे वैसे रखना है। कीप पेयर भी डेमो वाली सेलेक्ट करता हूं। यहां जब मैं यह दो सेलेक्ट कर
रहा हूं। उसके साथ जब मैं एडिट करता हूं नेटवर्क सेटिंग्स कि मुझे डिफॉल्ट वीपीसी में मत करो। डेमो वीपीसी के पब्लिक सबनेट
में कराओ। बट ऑटो असाइन कर दो। डीएसीपी डायनेमिक वो कॉन्फ़िगरेशन प्रोटोकॉल के थ्रू आप ऑटो असाइन कर दो IP एड्रेस को।
मैं खुद नहीं करते बैठूंगा। ठीक है? सो नाउ इट विल ऑटोमेटिकली असाइन द आईपी एड्रेस एंड वी कैन एसएसएच इनू इट। अब सभी
का फंडा क्लियर हो गया। लेट्स लॉन्च नाउ वी हैव द इंस्टेंस। लेट्स गो टू दैट इंस्टेंस। लेट्स कनेक्ट एंड नाउ वी कैन
कनेक्ट इट। ये हुआ कनेक्ट फटाक से। अपना ओजी कमांड रन करके देखा। ऑल गुड इट वाज़ वर्किंग नाइसली। तो मैं इसको क्लोज करता
हूं। इंस्टेंसेस पे जाते हैं। और एक इंस्टेंस ल्च करते हैं। डेमो प्राइवेट EC2 उबंतू। अब तो आपका ये सेकंड नेचर हो गया।
फटाफट से आप जाके कर सकते हो। कीपर सेलेक्ट कर लेना। सेम वाला ही करना एटलीस्ट इन द वीपीसी। सो ज्यादा कंफ्यूजन
ना हो। नेटवर्क सेटिंग्स में जाते हैं। मुझे डेमो वीपीसी चाहिए। प्राइवेट सबनेट में ही मुझे क्रिएट करना है। प्राइवेट
इंस्टेंस से ही है। इनेबल करना है ऑटो। क्रिएट सिक्योरिटी ग्रुप। सेलेक्ट एकिस्टिंग सिक्योरिटी ग्रुप। यह जो फायर
वॉल है वो है। अब मैं एकिस्टिंग सिक्योरिटी ग्रुप सेलेक्ट करूंगा। बिकॉज़ मैंने अभी वह लॉन्च विज़ार्ड FD जो है वह
क्रिएट किया था। आप न्यू भी कर सकते हो। हरिश के लिए न्यू कर सकते हो। बट दोनों की जो फायर वॉल रूल्स है वो सेम ही है। तो
मैं उसी को रीयूज कर रहा हूं। दिस इज़ जस्ट एक्स्ट्रा आई एम शोइंग यू। यू कैन क्रिएट न्यू वन। नो नो वरी अबाउट दैट। लेट्स गो
विद दिस लॉन्च विज़ार्ड फोर। अभी के लिए मैं इंस्टेंसेस पे जा रहा हूं। यह टर्मिनेट हो चुका था। हमने गलती की थी। बट
उसके बाद अगर आप इनको देखोगे तो ये टू इंस्टेंसेस आर देयर। एक पब्लिक एक प्राइवेट है। इसका स्टेटस चेक अभी हो रहा
है। इसका सिक्योरिटी ग्रुप कौन सा है? हां दोनों का सिक्योरिटी ग्रुप सेम है। लॉन्च विज़ार्ड 4 व्हिच मींस दोनों में HTPS HTP
एंड एसएसएच अलाउड है। नाउ बैक टू आवर वीपीसी वीपीसी में देखता हूं मेरा डेमो वीपीसी का हाल अभी देखो डेमो वीपीसी में
दो सबनेट्स थे। दो सबनेट्स में थोड़ा और डिटेल्स करते हैं। तो ये हमें IPपी एड्रेस भी दिखाते हैं। फॉर नाउ वी आर गोइंग
सिंपल। IP वर्जन सिक्स में नहीं जा आईपी वर्जन 4K के इसमें कर रहे हैं। तो ये राउट टेबल्स हैं। हमने डेमो पब्लिक राउट टेबल
किया है। प्राइवेट राउट टेबल भी किया है। दीज़ टू आर डिफॉल्ट राउट टेबल्स। फिर गेटवे है। एंड हमारे नेट का काम हो गया क्या?
देखते हैं। ऑल गुड। दिस नेट इज देयर। नेट गेटवे स्टेटस अवेलेबल। हमें आईपी एड्रेस एसोसिएट हो चुका है। इसमें थोड़ा टाइम
लगता ही है। 3-4 मिनट 4- 5 मिनट कभी-कभी। दैट्स व्हाई हमने पैरेलली वो कर लिया। तो बिग पिक्चर आपको समझ में आया? हमने एक
वीपीसी क्रिएट किया। उस वीपीसी में हमने सबनेट्स क्रिएट किए। उन सबनेट्स में से एक सबनेट को हमने पब्लिक किया। उसको हमने
इंटरनेट गेटवे से अटैच किया यूजिंग द राउट टेबल्स। उसके बाद हमने पब्लिक एंड प्राइवेट सबनेट्स में दोनों में एक
इंस्टेंस ल्च किया। तो उन दोनों इंस्टेंसेस पे चलते हैं। व्यू डैशबोर्ड। अभी मेरे दो इंस्टेंसेस
रनिंग है। तो मैं पब्लिक पे जा रहा हूं। कनेक्ट करना है मुझे इसे एसएसएच क्लाइंट से। यह सब मैंने करके रखा है। मुझे बस अभी
यह कमांड यूज करनी है। तो, टर्मिनल पर चलते हैं। यह कनेक्शन अपने आप लॉस्ट हो गया था। बिकॉज़ वी टर्मिनेटेड दैट सेशन। बट
हम एसएसएच करेंगे वि द सेम की हम यूज़ कर रहे हैं। हाईपन आई इज़ फॉर कहां से ये की आ रही है। तो इंस्टेड ऑफ़ दिस राइट नाउ उबंतू
@ आई विल पेस्ट दैट थिंग एंड लेट्स से एंटर। यस एंड गाइस वी आर इन दिस वाज़ द सेशन 1.0.1238
यू हैव टू लेट्स गो बैक। देखो यह इसका प्राइवेट IPपी वर्जन फॉर एड्रेस था। हम कस्टम वीपीसी के अंदर जो पब्लिक सबनेट है
उसके अंदर एक EC2 इंस्टेंस है उसके अंदर है। तो एज़ इट इज़ अ पब्लिक इट शुड हैव एक्सेस ऑफ़ इंटरनेट। अगर मैं इंटरनेट का
एक्सेस चेक कैसे करते हैं? मैं सिंपल एक कर्ल रिक्वेस्ट करता हूं। एग्जांपल.com आई एम गेटिंग द रिस्पांस। फ्रॉम दिस आई
कैन एक्सेस द पब्लिक इंटरनेट जो हमने इसके पहले करके रखा है मतलब सूडo अपडेट समथिंग लाइक दैट कैडी इंस्टॉल किया था तो वी आर
गुड टू गो नाउ द सेकंड जो हमने प्राइवेट इंस्टेंस क्रिएट किया है उसको कैसे चेक करें कि उसके थ्रू हम इंटरनेट को एक्सेस
कर सकते हैं कि नहीं उसके लिए पहले उसमें एंट्री मारनी पड़ेगी तो लेट्स ट्राई टू गो इंटू द प्राइवेट लेट्स कनेक्ट प्राइवेट
सबनेट थ्रू दिस एडब्ल्यूएस वाले बहुत होशियार है वो हमें वार्न कर रहे हैं कि बॉस दिस इंस्टंट इज नॉट इन पब्लिक सबनेट।
यू कैन नॉट कनेक्ट फ्रॉम द इंटरनेट। उसको बनाया ही प्राइवेट है। सो दैट कोई बाहर से उसको कनेक्ट ना कर पाए। बट अब यह हो गया
कि मैंने ताला भी लगा दिया है घर को और मैं खुद भी नहीं जा पा रहा अंदर। चाबी भी खो दिया। हमें कुछ रास्ता निकालना पड़ेगा
उसको एक्सेस करने के लिए। एसएसएच के थ्रू। लेट्स ट्राई। ये मैं आईपी एड्रेस कॉपी कर रहा हूं। एग्जिट करता हूं। एग्जिट कमांड
से आप एग्जिट कर जाओगे। वो पिछले वाले कनेक्शन में। अब मुझे इसकी जगह यह वाले IPपी एड्रेस पे जाना है। एंड यू कैन सी वी
आर नॉट एबल टु कनेक्ट इट। अगर थोड़ा और देखना है डैश वीवी कर सकते हो आप। या आपको थोड़ा वर्बोस आउटपुट ऑल मिलेगा कि इट्स
कनेक्टिंग ओवर दैट बट नॉट एबल टू कनेक्ट। वहां स्टक हो जा रहा है। इसको कैसे सॉल्व करते हैं? तो देयर आर टू वेज़। फर्स्ट वन
इज़ पब्लिक सबनेट में जो EC2 इंस्टेंस है वहां एसएसएच कर लो। एंड यहां जो प्राइवेट की थी आपकी डेमो डॉट पे नाम से उसको कॉपी
करके यहां से एसएसएच करो। प्राइवेट EC2 इंस्टेंस प्राइवेट सबनेट में जो है बट इट इज़ नॉट गुड जो हमारी की है वह प्राइवेट ही
इसलिए है वी डोंट हैव टू शेयर विद एनीथिंग तो कॉपी हम ऐसे नहीं करते एक कमांड होती है सिक्योरली कॉपी करने की उससे हम उसको
कॉपी कर सकते हैं तो आई विल शो दैट कमांड सिक्योर कॉपी दिस डेमो पेम की टू द दिस वन डेमो व्हाट वाज़ द आईपी ऑफ़ दैट आई कनेक्टेड
ऑन दिस 3.1 तो अगर मैं यह कमांड रन करूंगा तो यह यहां से मेरे लोकल वाले एसएसएच फोल्डर में जो डेमो पेम की है वो
सिक्योरली कॉपी हो जाएगी यह उबंतू सर्वर में इस लोकेशन पे बट देयर इज़ बेटर वे व्हिच इज़ एसएसएच एजेंट फॉरवर्डिंग जहां हम
एसएसए एजेंट के थ्रू जो की है वो सिक्योरली मेमोरी में रखते हैं एंड थ्रू दैट वी कैन एसएसए इनू द प्राइवेट सबनेट
रिसोर्सेज तो मैं सबसे पहले क्या करता हूं एसएसएच ऐड नाम की एक कमांड रन करता हूं और मैं एक की ऐड कर देता हूं इन द
कॉन्टेक्स्ट इन द मेमोरी अब मैं एसएसएच कर रहा हूं यह वाली कमांड तो नॉर्मल हम यूज़ ही कर रहे हैं हपन आई वाली। इसके अलावा
मैंने क्या किया? एसएसएच एजेंट में पहले मैंने ऐड कर दी वो की मेमोरी में एंड देन हपन ए वाला ऑप्शन यूज़ किया। सो दैट वी कैन
डू एजेंट फॉरवर्डिंग। आई एम इन इनू दैट पब्लिक EC2 इंस्टांस। अब देखते हैं प्राइवेट में कैसे चलते हैं। मैं यहां
इंस्टांस पे जा रहा हूं। दिस इज़ अ डेमो प्राइवेट EC2। डेमो VPC में प्राइवेट सबनेट में एक इंस्टेंस है। इसका प्राइवेट
IPपी एड्रेस क्या है? 10.02.2.41 मैंने इसको कॉपी किया। एंड नाउ लेट्स एस एस एच इंटू दैट उबू @ यस एंड वी आर इनने
देखा क्या क्रेजी थिंग की हमने फर्स्ट पब्लिक सबनेट में एक जो वीपीसी है उसमें हमने एसएसएच किया और उस पब्लिक रिसोर्सेज
के थ्रू प्राइवेट रिसोर्सेज को एक्सेस किया। देखते हैं नेटवर्क करता है कि नहीं। इतना तामझाम हमने क्यों किया? मुझे इस
सर्वर को एक्सेस करना था। सो मैं यहां से इंटरनेट को देख सकता हूं। सबसे पहले हम पिंग करके देखते हैं इसी के मित्र को जो
सेम वीपीसी में पब्लिक सबनेट में है। पिंग इज़ हैपनिंग कल भी फॉर verb htps google.com google.com या फ्रॉम दिस
प्राइवेट रिसोर्स आई शुड एबल टू एक्सेस द इंटरनेट। राइट? करते हैं। क्या हो रहा है ये?
अनेबल टू कनेक्ट। आर वी मिसिंग समथिंग? यहां आपके पेशेंस, यहां आपका इंजीनियरिंग दिमाग, यहां आपके नेटवर्किंग फाउंडेशंस
बहुत काम आते हैं। मैं जब यहां वीपीसी में आया और मैंने चेक किया डेमो वीपीसी का रिसोर्स मैप तो मैं देख रहा कि ऑल गुड
एवरीथिंग इज़ गुड। दिस नेड गेटवे इज़ नॉट कनेक्टेड टू दिस प्राइवेट राउट टेबल। तो मेरा प्राइवेट सबनेट से जो EC2 इंस्टेंस
है वो इस नैट गेटवे को कनेक्ट ही नहीं कर पा रहा। तो मेरी ग्राफिक आउटसाइड जाएगी कैसे? तो आई हैव टू गो टू राउट टेबल। डेमो
प्राइवेट राउट टेबल जाना पड़ेगा। मुझे यहां एक राउट एडिट करना पड़ेगा। यहां मुझे ऐड राउट करना पड़ेगा। एंड देन यहां मुझे
लिखना पड़ेगा नेट गेटवे। एंड देन आई हैव टू अटैच इट। एंड देन सेव चेंजेस। वंस दैट चेंजेस आर सेव। माय नेट गेटवे इज़
कनेक्टेड। मैं जाता हूं वीपीसी में। एक बार फिर से मैं यह रिफ्रेश मारता हूं। एंड यहां जाके अब मैं देखता हूं। मेरा जो
प्राइवेट राउट टेबल है वह कनेक्टेड हो गया है नेट गेटवे से। अब मैं फिर से वही कर्ल करके देखता हूं। अब मैं जा रहा हूं वापस
यहां एंड मैं कर्ल करके देख रहा हूं गाइस ऑल गुड। हमें google.com से रिस्पांस आया। कर्ल करते हैं। एग्जांपल
ऑल गुड। मैं चाहे तो पिन कर सकता हूं। Google का जो डीएनएस सर्वर है 8.8.8 उसको ऑल गुड आप कर्ल कर सकते हो चाहे.com को
मतलब इंटरनेट एक्सेस कर सकते हो। ऑल गुड बहुत बड़ा रिस्पांस आ गया। एग्जिट मैंने एग्जिट किया ये कनेक्शन फ्रॉम प्राइवेट
EC2। अब मैं गया फिर से पब्लिक में। फिर यहां से फिर मैं और एग्जिट करके अब मेरा कनेक्शन क्लोज हुआ। तो मैंने एसएसएच किया
था पब्लिक EC2 में और फिर वहां से मैंने एसएसएच किया था प्राइवेट EC2 में। तो इस तरीके से हम कॉम्प्लेक्स लेवल की
नेटवर्किंग करते हैं। प्रोडक्शन लेवल पे यही चीजें चलती है। जब आप कंपनीज़ में जाते हो तो आपको डायरेक्टली सर्वर का एक्सेस
नहीं मिलता। आपको पहले कंपनी में कंपनी के सिस्टम्स में एसएसएच करना होता है और उधर से फिर आगे आपको प्राइवेट रिसोर्सेज में
एसएसएच करना पड़ता है। दैट्स ऑल अबाउट नेट गेटवे। हमने गेटवे भी सेटअप किया। हमने बहुत सारी चीजें की है। हमने कस्टम वीपीसी
क्रिएट किया। उसमें सबनेट्स ऐड किए। उसमें रिसोर्सेज ऐड किए। पब्लिक वाले सबनेट को इंटरनेट गेटवे से अटैच किया। फिर प्राइवेट
जो सबनेट थी दूसरी वाली जिनको नड गेटवे के थ्रू हमने इंटरनेट का एक्सेस दिलाया। नेक्स्ट कांसेप्ट इज़ फायर वाल्स। वी लर्नड
अबाउट फायर वाल्स इन प्रीवियस चैप्टर। फायर वाल हमें मदद करती है ट्रैफिक को मॉनिटर करने के लिए। एंड कुछ रूल्स के
थ्रू ट्रैफिक को फिल्टर करने के लिए। जो रूल्स होते हैं वो दो प्रकार के होते हैं। इनबाउंड रूल्स एंड आउटबाउंड रूल। इनको
इनग्रेस एंड इग्रेस भी कहा जाता है। इनबाउंड मींस जो ट्रैफिक हमारे पास आ रही है, हमारे रिसोर्सेज के पास आ रही है।
आउटबाउंड मींस जो हमारे रिसोर्सेज से बाहर जा रही है। फायर वाल के दो टाइप्स होते हैं। स्टेटलेस एंड स्टेटफुल। एज अ नेम
सजेस्ट स्टेटलेस मींस इट डज़ नॉट मेंटेन एनी स्टेट। इनबाउंड एंड आउटबाउंड ट्रैफिक वो इंडिपेंडेंटली ट्रीट करते हैं। एंड
सेकंड इज़ स्टेटफुल फायर वाल्स। इट मेंटेनेंस द स्टेट। व्हिच मींस अगर मैंने अलऊ कर दी इनकमिंग रिक्वेस्ट तो आउटगोइंग
रिस्पांस इज़ ऑटोमेटिकली परमिटेड एंड वाइस आवर्स। तो दैट इज़ अ स्टेटफुल फायर वॉल। सो स्टेटलेस में क्या होता है कि अगर मैंने
कुछ इनकमिंग ट्रैफिक के लिए रूल्स डाल दिया है तो आउटकमिंग के लिए सेपरेटली डालना पड़ता है। आउटकमिंग के लिए डाला है
तो इनकमिंग के लिए सेपरेट डालना पड़ता है। स्टेट मेंटेन नहीं होती। बट स्टेटफुल फायर वाल स्टेट मेंटेन करती है। हमारा काम इजी
करती है। तो अगर मैंने इनकमिंग के लिए अप्लाई कर दिया तो वो आउटगोइंग के लिए भी लागू हो जाता है। ईजीपीजी एडब्ल्यूएस हमें
स्टेटफुल एंड स्टेटलेस दोनों फायर वाल ऑफर करता है। स्टेटफुल फायर वाल सिक्योरिटी ग्रुप्स के थ्रू मिलती है एंड स्टेटलेस
एनएससीएल्स के थ्रू मिलती है। एनएससीएल स्टैंड्स फॉर नेटवर्क एक्सेस कंट्रोल लिस्ट। ये जो फायर वाल होती है वो सबनेट
लेवल पे होती है। मतलब पूरा जो सबनेट है प्राइवेट और पब्लिक उसके लिए एक नेटवर्क एक्सेस कंट्रोल लिस्ट होती है। एंड ये
स्टेट लिस्ट होती है। व्हिच मींस हमें इनग्रेस एंड इग्रेस रूल्स अलग-अलग से कॉन्फ़िगर करने पड़ते हैं। दिस इज़ लिमिटेड
टू द सबनेट ओनली। तो सबनेट के अंदर जो रिसोर्सेज हैं उनके लिए फायर वाल लागू नहीं होती। उनमें वह फर्दर फिल्टरिंग नहीं
करते ट्रैफिक की। फॉर एग्जांपल यह हमारा एक वीपीसी है। वीपीसी में एक पब्लिक सबनेट एक प्राइवेट सबनेट है। तो यह जो एक्सेस
कंट्रोल लिस्ट में जो रूल्स है वह फायर वॉल प्रोवाइड करते हैं ऑन द सबनेट लेवल। ऑन द अदर हैंड सिक्योरिटी ग्रुप्स जो है
वो इंस्टेंस लेवल होते हैं। रिसोर्स लेवल होते हैं। इंडिविजुअल फायर वाल्स है ये। एंड दे आर स्टेटफुल। मींस वी हैव टू
डिफाइन ओनली इनिशियल ट्रैफिक डायरेक्शन। रिटर्न ट्रैफिक इज़ अलाउड ऑटोमेटिकली। तो हम मल्टीपल फायर वाल्स लगा सकते हैं एक
सिंगल रिसोर्सेज पे इन सोफिस्टिकेटेड नेटवर्क्स। फॉर एग्जांपल आई हैव वीपीसी इन दैट आई हैव टू सबनेट्स एक पब्लिक एंड
प्राइवेट पब्लिक सबनेट में मेरा वेब सर्वर है ईसी टू इंस्टांस पे एंड प्राइवेट सबनेट में मेरा Amazon आरडीएस का डेटाबेस है।
एक्सेस कंट्रोल लिस्ट के थ्रू मैं फायरवॉल सबनेट लेवल पे ये कर सकता हूं। बट अगर मुझे डेटाबेस को या उस बैक एंड वाले सर्वर
को फायर वॉल अटैच करनी है तो आई हैव टू यूज़ सिक्योरिटी ग्रुप्स। लेट्स सी दिस सिक्योरिटी ग्रुप्स एंड एनएससीएल इन आवर
कस्टम वीपीसी। हमने जो कस्टम वीपीसी बनाया है उसमें आप सिक्योरिटी में जाओगे तो फायर वाल सिक्योरिटी प्रोवाइड करती है। उनमें
दो फायर वाल्स हैं। एक स्टेटलेस और एक स्टेटफुल। यह नेटवर्क एक्सेस कंट्रोल लिस्ट है जो सबनेट लेवल पे फायर वाल
प्रोवाइड करते हैं। आई गेस वी हैव दिस वन बिकॉज़ दो सबनेट हमने बनाए थे इस वीपीसी में और ये नेटवर्क एक्सेस कंट्रोल लिस्ट
है हमारे पास विथ दिस रूल। करेंटली इट्स अलाउंग ऑल ट्रैफिक। सिक्योरिटी ग्रुप्स देखते हैं। सिक्योरिटी ग्रुप्स हमारे
अलग-अलग हैं। बट रिसेंटली आपको याद होगा हमने जो दो इंस्टेंसेस लॉन्च किए उनका सिक्योरिटी ग्रुप ये था लॉन्च विज़ार्ड 4।
तो अगर इसको हम देखते हैं HTPS, HTP एंड एसएसएच वाली ट्रैफिक अलाउ कर रहे हैं ऑन बोथ EC2 इंस्टेंसेस। नेक्स्ट इज़ इलास्टिक
लोड बैलेंसर। हमने चैप्टर सेवन में लोड बैलेंसिंग की रिक्वायरमेंट एंड डिफरेंट-डिफरेंट टाइप के लोड बैलेंससेस
देखे थे। इस डायग्राम में आप देख सकते हो कि लोड बैलेंसर का काम यह होता है कि जो ट्रैफिक आ रही है इंटरनेट से उसको बराबर
से बैलेंस करके डिफरेंट-डिफरेंट इंस्टेंसेस पर भेजना। सो दैट अपनी जो हमारी जो सर्विस है वो इंटरप्ट ना हो। फॉर
एग्जांपल Amazon का कोई सेल चल रहा है या Flipkart के बिग बिलियन डेज चल रहे हैं। सडनली एक सर्वर पे अगर सारे लोग चले गए तो
सारी सिस्टम्स फेल हो सकती है। इन दैट केस हम लोग लोड बैलेंस का इवली यूज़ करते हैं। सो दैट जो भी यूज़र्स आ रहे हैं मिलियंस
एंड बिलियंस तो वो डिस्ट्रीब्यूट हो अलग-अलग रेप्लिकास पे। क्लाइंट की सारी रिक्वेस्ट लोड बैलेंसर के पास जाती है।
लोड बैलेंसर फिर उस ट्रैफिक को डिस्ट्रीब्यूट करता है अक्रॉस द मल्टीपल सर्वर्स व्हिच प्रिवेंट्स वन सर्वर फ्रॉम
बीइंग ओवरलोडेड। यह जो लोड बैलेंसर्स है वो अवेलेबिलिटी इंप्रूव करते हैं, स्केलेबिलिटी इंप्रूव करते हैं एंड
रिलायबिलिटी इंप्रूव करते हैं। इंस्टेड ऑफ़ हैविंग वन सर्वर वी कैन हैव मल्टीपल सर्वर्स एंड वी कैन इंटेलिजेंटली
डिस्ट्रीब्यूट ट्रैफिक्स अलोंग देम व्हिच मेक्स आवर सिस्टम आवर सॉफ्टवेयर मोर रिलायबल। एडब्ल्यूएस ऑफर्स टू टाइप्स ऑफ़
इलास्टिक लोड बैलेंसर। फर्स्ट वन इज़ अ एप्लीकेशन लोड बैलेंसर व्हिच ऑपरेट्स ऑन लेयर सेवन लेयर सेवन लोड बैलेंसर। ऐज़ इट
ऑपरेट्स ऑन लेयर सेवन वह सारी ट्रैफिक इंस्पेक्ट करता है। रिमेंबर चैप्टर सेवन उसमें हमने ये चीजें पढ़ी थी। दैट्स व्हाई
इट कैन सपोर्ट एडवांस राउटिंग लाइक स्लैश एपीआई पे एपीआई वाले सर्वर पे भेज दिया। स्लैश इमेजेस पे इमेजेस वाले सीडीएन पे
भेज दिया। होस्ट बेस्ड राउटिंग लाइक वी कैन राउट यूजिंग डोमेन और सब डोमेन क्वेरी स्ट्रिंग बेस्ड राउटिंग। आल्सो वी कैन
मॉडिफाई एचटीपी हेडर्स बिफोर फॉरवर्डिंग द रिक्वेस्ट एंड इट सपोर्ट्स अ मल्टीपल लोड बैलेंसिंग एल्गोरिदम्स लाइक राउंड रबिन
लीड्स आउटस्टैंडिंग रिक्वेस्ट एंड वेटेड रैंडम वेटेड रैंडम में क्या होता है अकॉर्डिंग टू द वेट हम ट्रैफिक
डिस्ट्रीब्यूट करते हैं। जिसका वेट ज्यादा उसको हम ज्यादा ट्रैफिक डिस्ट्रीब्यूट करते हैं। फॉर एग्जांपल कोई बड़ा सर्वर
होगा तो ही हैव मोर वेट तो उसको ज्यादा ट्रैफिक हम सर्व कर सकते हैं। अब डायग्रामेटिकली इसको समझते हैं। बिकॉज़ लोड
बैलेंसिंग का प्रैक्टिकल दिखाना इस बूट कैंप के स्कोप के बाहर है। उसके लिए हमें पहले एप्लीकेशनेशंस बनाना पड़ेगा। फिर
उनको डिप्लॉय करना पड़ेगा। फिर हमें उन ईसी2 इंस्टेंसेस को लोड बैलेंसर के थ्रू कनेक्ट करना पड़ेगा एंड फिर ट्रैफिक को
डिस्ट्रीब्यूट करना पड़ेगा। तो लेट्स अंडरस्टैंड इट वाया एग्जांपल। सो दैट आपका जो कांसेप्ट है वो 100% क्लियर हो जाए।
एडब्ल्यूएस का एक रीजन है हमारे पास और उस रीजन में हमने पीपीसी अपना क्रिएट किया है व्हिच हैज़ टू अवेलेबिलिटी ज़ों्स। एक ज़ोन
में मल्टीपल सबनेट्स भी हो सकती है। अभी आई एम जस्ट शोइंग वन फॉर द सिंपलीसिटी। अब एज दीज़ सबनेट्स आर पब्लिक वी शुड कनेक्ट
देम टू इंटरनेट गेटवे। और हमने हमारा एप्लीकेशन फॉर बेटर अवेलेबिलिटी दोनों सबनेट में डिप्लॉय करके रखा है ऑन सर्वर
वन एंड सर्वर टू। अब जब भी रिक्वेस्ट यूजर से आएगी इंटरनेट गेटवे के थ्रू। इट विल बी कंफ्यूज्ड कि मैं इसको सर्वर वन पे भेजूं
या इसको सर्वर टू पे भेजूं। एंड टू रॉल्व दिस सिचुएशन वी हैव अ एप्लीकेशन लोड बैलेंसर व्हिच ऑपरेट्स ऑन लेयर सेवन। तो
इंटरनेट गेटवे के थ्रू जो रिक्वेस्ट है वो एप्लीकेशन लोड बैलेंसर के पास जाती है। एंड एप्लीकेशन लोड बैलेंसर अकॉर्डिंग टू
डिस्ट्रीब्यूशन एल्गोरिदम उनको डिस्ट्रीब्यूट करता है। नेक्स्ट इज अ नेटवर्क लोड बैलेंसर। यह जो लेयर फोर पे
ऑपरेट करता है। व्हिच मींस इट डज़ नॉट इंस्पेक्ट द बॉडी ऑफ़ दैट रिक्वेस्ट एंड दैट्स व्हाई इट्स एक्सट्रीमली फास्ट विथ द
लो लेटेंसी। नेटवर्क लोड बैलेंसर्स, टीसीपी, यूडीपी, टीएलएस जैसे प्रोटोकॉल सपोर्ट करता है। एंड रिसेंटली इट
स्टार्टेड सपोर्टिंग क्विक प्रोटोकॉल वि इज अ न्यू स्टैंडर्ड फॉर HTP3 इट प्रोवाइड्स स्टैटिक आईपी एड्रेसेस एंड ये
अक्रॉस आईपी वर्जन 4, IP वर्जन सिक्स बोथ सपोर्ट करता है। इट रिसेंटली स्टार्टेड सपोर्टिंग वेटेड टारगेट ग्रुप्स। व्हिच
मींस वी कैन डिस्ट्रीब्यूट ट्रैफिक अनइवनली अक्रॉस टारगेट्स यूजिंग द वेट। बाकी जो राउंड ड्रबिन एल्गोरिदम वगैरह
होते हैं उनमें हम क्या करते हैं? सारे में इवनली डिस्ट्रीब्यूट करते हैं। बट वेटेड टारगेट ग्रुप्स में हम अनइवनली
डिस्ट्रीब्यूट कर सकते हैं ट्रैफिक अकॉर्डिंग टू द वेट। डायग्रामेटिकली इसको देखते हैं। इट्स ऑलमोस्ट सेम एज एप्लीकेशन
लोड बैलेंसर। इंस्टेड ऑफ़ दैट इट जस्ट अ नेटवर्क लोड बैलेंसर। इट वर्क्स ऑन द लेयर फोर। दैट्स व्हाई इट्स एक्सट्रीमली फास्ट।
फॉर सिंपल केसेस वी कैन यूज़ नेटवर्क लोड बैलेंसर। व्हेन वी नीड एडवांस लोड बैलेंसिंग देन वी कैन गो फॉर एप्लीकेशन
लोड बैलेंसर। नेक्स्ट इज़ वीपीसी पेयरिंग। एज वी डिस्कस्ड एव्री वीपीसी एक प्राइवेट आइसोलेटेड नेटवर्क है। एक वीपीसी के अंदर
जो रिसोर्सेज हैं, वह अदर वीपीसी से बाय डिफॉल्ट कम्युनिकेट नहीं कर सकते। इन रियल वर्ल्ड सिनेरियो, इफ यू हैव टू कम्युनिकेट
विद योर ऑफिस इन अनदर नियर बाय सिटी, यू कैन नॉट डायरेक्टली कम्युनिकेट ओवर अ प्राइवेट नेटवर्क, यू हैव टू क्रिएट द
प्राइवेट कम्युनिकेशन चैनल बिटवीन दिस ऑफिस एंड दैट ऑफिस। देन बोथ ऑफिसेस कैन सिक्योरली कम्युनिकेट विथ ईच अदर। यूजिंग
वीपीसी पेयरिंग हम दो वीपीसीस को कनेक्ट करते हैं यूजिंग प्राइवेट नेटवर्क कनेक्शन। सो दैट उनके जो रिसोर्सेज है वह
एक दूसरे से कम्युनिकेट कर पाए। अब वो वीपीसीस सेम रीजन के हो सकते हैं या अक्रॉस डिफरेंट रीजन हो सकते हैं या
डिफरेंट अकाउंट्स के वीपीसी हो सकते हैं। वी कैन पेअर देम विद ईच अदर। अब फॉर एग्ज़ांपल एक एक बहुत बड़ी ऑर्गेनाइज़ेशन
होगी उस उसमें मल्टीपल एडब्ल्यूएस अकाउंट्स हो सकते हैं और एक एडब्ल्यूएस अकाउंट की जो एक सर्विस है उसको दूसरे
एडब्ल्यूएस अकाउंट के दूसरे सर्विस से बात करनी है वो हम वीपीसी पेयरिंग के थ्रू करा सकते हैं। लेट्स सी इट डायग्रामेटिकली
फर्स्ट वन इज़ पेयरिंग इन अ सिंगल रीजन। मतलब एक रीजन में दो वीपीसीस है। वी कैन पेअर देम सो दैट दे कैन टॉक विथ ईच अदर।
नेक्स्ट इज़ क्रॉस रीजन पेयरिंग जिसमें रीजन वन में एक वीपीसी है रीजन टू में दूसरा वीपीसी है। हम क्रॉस रीजन वीपीसी
उसको भी पेअर कर सकते हैं। एंड थर्ड पॉसिबिलिटी इज़ क्रॉस अकाउंट्स मतलब डिफरेंट अकाउंट्स में वीपीसी हो सकते हैं।
उनको भी हम पेअर कर सकते हैं। अब वीपीसी पेयरिंग की जो प्रोसेस है उसमें सबसे पहले हम रिक्वेस्ट करते हैं पेयरिंग की कि
वीपीसी वन वीपीसी टू से पेअर करना चाहता है। वंस दैट रिक्वेस्ट इज़ एक्सेप्टेड। अगर वह सेम अकाउंट पे सेम रीजन पे हो तो वही
अकाउंट से एक्सेप्ट होगी। अगर वह डिफरेंट अकाउंट में हो तो वो पर्सन फ्रॉम द अनदर साइड विल एक्सेप्ट दैट रिक्वेस्ट। वंस दैट
रिक्वेस्ट इज़ एक्सेप्टेड वी कॉन्फ़िगर राउटिंग टेबल। बिकॉज़ रिक्वेस्ट एक्सेप्ट हो गई मींस पेयरिंग हो गई। बट पेअर होने
के बाद उनको बताना तो पड़ेगा कि यू हैव वन मोर राउट वन मोर डोर नाउ व्हिच इज़ अनदर वीपीसी। तो वो हम राउट टेबल में
अकॉर्डिंगली कॉन्फ़िगर करते हैं। रिमेंबर वीपीसी की जो पेयरिंग है वो नॉन ट्रांजिटिव है। नॉन ट्रांजिटिव मींस इफ
वीपीसी वन पेयर्स विद वीपीसी टू एंड वीपीसी टू पेयर्स विद वीपीसी थ्री दैट डजंट मींस वीपीसी वन डायरेक्टली टॉक विद
वीपीसी थ्री वाया वीपीसी टू। इट इज़ नॉन ट्रांजिटिव। लेट्स सी वीपीसी पेयरिंग इन एक्शन। चलते हैं हमारे एडब्ल्यूएस कंसोल
पे। यहां हमारे वीपीसीस पे चलते हैं। अब डेमो वीपीसी को डिफ़ॉल्ट वीपीसी से थोड़ी पीियर करेंगे। और एक वीपीसी क्रिएट करते
हैं। नाउ यू विल से अरे फिर से वह सारी चीज़ करनी है। वीपीसी क्रिएट करो। सबनेट क्रिएट करो। इंटरनेट गेटवे क्रिएट करो।
फिर आउट टेबल के थ्रू सबनेट्स को इंटरनेट गेटवे से कनेक्ट कराओ। फिर प्राइवेट सबनेट्स के लिए नेट गेटवे क्रिएट करो।
नहीं इतना लंबा नहीं करेंगे। आई विल शो यू दस्ट फास्ट वे टू क्रिएट कस्टम वीपीसी। मैं यहां गया क्रिएट वीपीसी एंड आई विल
सेलेक्ट द सेकंड ऑप्शन व्हिच इज़ वीपीसी एंड मोर। एंड हियर इट कैन ऑटोमेटिकली क्रिएट इट अकॉर्डिंग टू द कॉन्फ़िगरेशन यू
चूज़। तो मैं प्रोजेक्ट वीपीसी का नेम देता हूं। बाकी सारे नेम ऑटो जनरेट होते हैं। अगर मैंने इस पे क्लिक किया तो ये सारे
विदाउट नेम रहते हैं। तो हमें इसके नाम देने पड़ पड़ेंगे। तो आई विल क्लिक ऑन ऑटो जनरेट एंड आई विल से टेस्ट। दैट वाज़ अ
डेमो वीपीसी। दिस इज़ अ टेस्ट वीपीसी। और फिर ये दो ये दो [गला साफ़ करने की आवाज़] रीजंस में साउथ एपी साउथ वन ए साउथ वन बी
में दो-दो सबनेट्स ऐसे टोटल चार सबनेट्स क्रिएट हुए। राउट टेबल्स क्रिएट हो गए। और फिर यह इंटरनेट गेटवे है। दिस इज गेटवे
फॉर एडब्ल्यूएस सर्विज। इसका सीआईडीआर ब्लॉक हम डिफरेंट रखेंगे बिकॉज़ हमारे डेमो बीपीसी का साइडर ब्लॉक यही है। अगर हम इसी
को इसी से पेअ करेंगे तो वो साइडर क्लैश हो जाएगा एंड दे कैन नॉट पेअ। तो इनका हम साइडर करेंगे अभी 172 वाली रेंज लेके।
172.16.0.016 एंड यहां आके फिर मैं चेक करूंगा मुझे कितने अवेलेबिलिटी ज़ों्स में चाहिए। अभी
फॉर सिंपलीसिटी आई विल गो विथ वन। आप दो या तीन में भी ले सकते हो। आई विल गो वि वन। कितने पब्लिक सबनेट चाहिए? एक पब्लिक,
एक प्राइवेट। ऑल गुड। नेड गेटवेज़ आपको यूज़ करने हैं। अभी मैं नन बोल सकता हूं। रीजनल भी बोल सकता हूं। ज़ोनल करना है तो ज़ोनल भी
जा सकते हैं। फॉर नाउ आई एम नॉट गोइंग इंटू दैट राउंड। थर्ड इज़ वीपीसी एंड पॉइंट्स। वी आर नॉट गोइंग इंटू दैट एंड
पॉइंट्स। अभी हम उसी के लिए भी नहीं जा रहे। डीएनएस ऑप्शन में आप यह कर सकते हो। तो ऐसा एकदम सिंपल फटाक से बना देते हैं।
एंड यू विल सी कितने कम स्पीड में रेडी हो जाता है। एवरीथिंग इज रेडी। राउट टेबल में एंट्रीज ऐड एवरीथिंग इज डन। बट फर्स्ट वी
हैव टू अंडरस्टैंड ब्रिक बाय ब्रिक। हमने स्टेप बाय स्टेप खुद किया। फिर अभी फास्ट कर सकते हैं। एंड देन वी कैन इंस्पेक्ट
बिकॉज़ हमें पता है कैसे बनाते हैं ये। उन्होंने ऑटोमेट कर दिया। बस सी हमारा सारी चीजें अभी रेडी हो गई। अब इन दो
वीपीसीस को पेअ करते हैं। डेमो वीपीसी को टेस्ट वीपीसी से पेअ करते हैं। तो मैं गया पेयरिंग कनेक्शन पे। मैंने किया क्रिएट
न्यू पेयरिंग कनेक्शन। इनकी जोड़ी बनाते हैं। पेयरिंग का नाम देना पड़ता है। व्हिच इज ऑप्शनल बट देते हैं। डेमो मीट्स टेस्ट
डेमो वीपीसी मीट्स टेस्ट वीपीसी। नाउ वीपीसी आईडी कौन रिक्वेस्ट कर रहा है? डेमो वीपीसी सेलेक्ट वीपीसी टू पेयर विद
मेरे अकाउंट में है या अनदर अकाउंट में है? अनदर अकाउंट में है तो उसका आईडी क्या है? इस रीजन में है या अनदर रीजन में है?
कौन सा रीजन में है? वो सेलेक्ट करना है। अभी तो मेरे ही अकाउंट में है। रीजन में भी इसी रीजन में वीपीसी है। एंड यह टेस्ट
वीपीसी है। तो मैं डेमो वीपीसी को टेस्ट वीपीसी से पेअ करा रहा हूं। डेमो मीट्स टेस्ट क्रिएट पेयरिंग कनेक्शन। लेट्स सी
पेयरिंग कनेक्शन को मैं सेलेक्ट करता हूं। एक्शन लेता हूं। एक्सेप्ट कर देता हूं। फ्रेंड रिक्वेस्ट अभी ज्यादा तंग किया तो
ब्लॉक कर देंगे। क्या लगता है? ऑलराइट। कनेक्शन एक्सेप्टेड। अभी यहां दिखाया उन्होंने। आपका कनेक्शन हो गया। बात शुरू
नहीं हुई। पहले हाय तो भेजना पड़ेगा। जस्ट फॉलो रिक्वेस्ट एक्सेप्ट टू और भी अपडेट करना पड़ता है। तो अब हम राउट टेबल अपडेट
करते हैं। सो दैट डेमो वीपीसी में जो रिसोर्सेज है वो टेस्ट वीपीसी के रिसोर्सेज से बात कर पाए। अब राउट टेबल्स
को अपडेट करने मैं जा रहा हूं। आई विल गो टू द पब्लिक राउट टेबल कि बिकॉज़ वो जो पब्लिक ईसी टू इंस्टेंस अभी रन कर रहा है
उसके थ्रू मुझे टेस्ट वाले वीपीसी रिसोर्सेज से बात करनी है। मैं यहां गया और मैंने यहां एक राउट ऐड किया व्हिच इज़
व्हाट वाज़ द साइडर ऑफ़ दैटिंग 172 इट वाज़ 172.16.0.016 यहां मुझे पीयरिंग कनेक्शन वाला सेट करना
है। और डेमो मिड्स टेस्ट तो इसको सेव करता हूं। सेम चीज मुझे इसमें भी करनी पड़ेगी। राउट टेबल्स में जाता हूं, रिफ्रेश करता
हूं। टेस्ट वाले वीपीसी का जो पब्लिक राउट टेबल है वो भी ऑटोमेटिकली बन गया था जब हमने बनाया था। सबनेट भी एसोसिएटेड सब कुछ
है। हमें बस यहां जाके एडिट करना है रूल। एक रूल ऐड करना है व्हिच इज़ 10.0.0.06 ये वाला जो है पीियरिंग कनेक्शन मी डेमो
टेस्ट ये करना है। टेस्ट वाले को डेमो का सीआईडीआर दे दिया। एंड डेमो को टेस्ट का दे दिया। एंड टारगेट क्या रखा? पीियरिंग
कनेक्शन जस्ट लाइक हमने इंटरनेट गेटवे में किया था। इंटरनेट इंटरनेट से जो भी आ रही है ज़ीरो स्लश ज़ीरो मींस फ्रॉम इंटरनेट।
इंटरनेट गेटवे को हमने टारगेट दिया था। एंड हमने सेलेक्ट भी किया था कौन से इंटरनेट गेटवे को अटैच करना है उस वीपीसी
को। नाउ हमने राउट टेबल को कॉन्फ़िगर कर दिया है। अब हम EC2 में जाके अपने जो नया वीपीसी है उसमें तो करें। टेस्ट वाले
वीपीसी में मुझे पब्लिक वाले सबनेट में EC2 चाहिए। नेमिंग अच्छी देनी चाहिए तो हम ट्रैक कर सकते हैं कौन कहां से। T3
माइक्रो मैं टच नहीं करूंगा। कीप पेयर भी मैं टच नहीं करूंगा। अभी डेमो यूज़ कर रहा हूं। HTPS एंड HTP पहले अलऊ कर लेता हूं।
एडिट करते हैं। फिर एडिट में जाके मैं टेस्ट वीपीसी को करूंगा। टेस्ट वीपीसी में पब्लिक सबनेट में मुझे चाहिए और यह हमेशा
इनेबल करना होता है। अदरवाइज़ मुझे इंस्टेंस टर्मिनेट करके फिर से ल्च करना पड़ेगा। एकिस्टिंग ग्रुप देखते हैं। कोई है
क्या नहीं। डिफ़ॉल्ट वाला ही है। इससे बढ़िया हम ही कर देते हैं। बिकॉज़ दिस इज़ डिफरेंट वीपीसी ना गाइस। तो ये तीनों हम
लोग ऐड कर देते हैं। HTP, HTPS, एसएसएच ऑल गुड। वी आर गुड टू गो। लेट्स लॉन्च [नाक से की जाने वाली आवाज़] इट। और इस
प्रकार हमने टेस्ट वीपीसी में जो पब्लिक सबनेट है एक अवेलेबिलिटी ज़ोन में उनमें एक रिसोर्स ल्च कर दिया है। टाइम टू कनेक्ट
दिस। जाते हैं एसएसएच क्लाइंट में। दिस इज़ द यूआरएल। इसको कॉपी करते हैं। एसएसएच हपन आई एंड पेस्ट करते हैं इसको। यस। एंड वी
आर इन। अब मैं [गला साफ़ करने की आवाज़] अगर यहां से डेमो सर्वर जो है EC2 इंस्टेंस कितने तीन रन कर रहे हैं। डेमो
वाले के प्राइवेट आईपी एड्रेस पिन करूंगा। मुझे प्राइवेट कनेक्शन चाहिए। प्राइवेट पेयर कनेक्शन। तो मैं यहां जाके पिन करता
हूं। नाउ यू कैन सी पिंग इज नॉट हैपनिंग। व्हाई? अगेन अब आपका फिर से नेटवर्किंग नॉलेज यहां टेस्ट होगा। बिकॉज़ नाउ वी विल
अंडरस्टैंड क्या बच रहा है। कुछ गलत कर रहे हैं या कुछ बच रहा है। पिंग जो यूटिलिटी है वह हमने कौन से प्रोटोकॉल के
यूज़ केसेस में पढ़ी थी? ट्राई टू रिमेंबर चैप्टर थ्री चैप्टर फोर या चैप्टर फाइव किसमें था? लेयर फोर आईपी लेयर जो है
उसमें एक प्रोटोकॉल होता है आईसीएमपी। पिंग यूटिलिटी उसी का यूज़ करती है। पिंग इज नॉट वर्किंग। दैट मींस आईसीएमपी
ट्रैफिक इज़ नॉट अलाउड। राइट? तो कमांड्स सी टर्मिनेट करते हैं जो अटक गया था उसको। जब भी कुछ ऐसा अटक जाए आपके टर्मिनल में,
पावर शेल में या कमांड प्र्ट में तो आप कमांड सी से बाहर आ सकते हो। अब मैं पहले यह जो इंस्टेंस है डेमो पब्लिक ईसी2 इसके
सिक्योरिटी ग्रुप्स में जाता हूं और उनको एडिट करता हूं। सिक्योरिटी सिक्योरिटी ग्रुप्स पे चलते हैं। लॉन्च विार्ड 4 पे
एडिट इनबाउंड रूल्स ऐड रूल ऑल आईसीएमपी आईपी वर्जन 4 पे ही खेल रहे हैं अभी हम। फॉर नाउ आई विल गो लिटिल वेयर आर वी दिस
इज़ विज़ार्ड 4 तो ये वाला नहीं 172 172.16 ये वाला यहां से आ गया। सेम मुझे EC2 इंस्टेंस में ये जो इंस्टेंस है टेस्ट
वीपीसी के पब्लिक सबनेट में उसके जो सिक्योरिटी ग्रुप्स है उनमें मुझे आईसीएमपी रूल डालना पड़ेगा। आईसीएमपी
ट्रैफिक को अलव करना पड़ेगा। कस्टम वि इज 10 16 सेव। नाउ लेट्स ट्राई। मैं 172.16.6.49
इस ईसी2 इंस्टेंस पे हूं। व्हिच मींस यह टेस्ट पीपीसी है। 172.16.0 वाले यहां से मैं पिंग कर रहा हूं।
10.0.1.238 व्हिच इज़ प्राइवेट IPपी एड्रेस। एंड यू कैन सी पिंग स्टार्टेड वर्किंग। दिस इज़ अ
प्राइवेट कनेक्शन। यू हैव टू अंडरस्टैंड दिस। इसी टू इंस्टेंस में जाओ। इसका जो पब्लिक IPपी एड्रेस है इसको तो मैं एनी
टाइम पिंग कर सकता हूं। वी आर पिंगिंग प्राइवेट IPपी एड्रेस व्हिच मींस इट इज़ अ प्राइवेट कनेक्शन नॉट अ पब्लिक कनेक्शन
वाया इंटरनेट। सो हमारी पेयरिंग जो है वह अच्छे से चल रही है। अभी फटाक से जाके एग्जिट करते हैं। दिस इज़ ओके व्हेन वी हैव
लेस वीपीसीस बट व्हाट इफ आवर ऑर्गेनाइजेशन हैज़ 10 और मोर देन 10 वीपीसीस। एज़ दिस वीपीसी पेयरिंग इज़ नॉट ट्रांजिटिव वो मेश
स्ट्रक्चर में कन्वर्ट हो जाएगा। रिमेंबर दिस डायग्राम मेश टोपोलॉजी। सो समथिंग लाइक दिस। एव्री पेयर नीड्स ओन पेयरिंग
कनेक्शन। हर पेयर को एक खुद का एक कनेक्शन लगेगा। तो इफ इफ इज़ वन वांटेड टू पेअर विद टू थ्री एंड फोर ही नीड अ थ्री कनेक्शन।
टू वांट टू पेअर विद वन फोर एंड थ्री ही नीड अ थ्री कनेक्शन। सो एव्री पेयर नीड्स अ ओन पेयरिंग कनेक्शन व्हिच इज़ नॉट गुड टू
रिसॉल्व दिस वी हैव ट्रांजिट गेटवे। जो एक लेयर थ्री वर्चुअल राउटर है व्हिच कनेक्ट्स मल्टीपल वीपीसी यूजिंग अ सेंट्रल
हब। तो सारे वीपीसीस हम उसको ट्रांजिस्ट गेटवे को अटैच करते हैं एंड ऑल वीपीसीस कम्युनिकेट थ्रू द हब लाइक अ स्टार
टोपोलॉजी। लेट्स सी सपोज वी हैव अ ट्रांजिट गेटवे एंड मल्टीपल वीपीसीस आर कनेक्टेड थ्रू दैट। सपोज दिस वीपीसी वांट
टू टॉक विथ दिस और दिस वांट टू टॉक विथ दिस दे कैन टॉक थ्रू ट्रांजिट गेटवे। इट सपोर्ट्स ऑटोमेटिक ट्रांजिटिव राउटिंग। टू
सपोर्ट दिस ट्रांजिटिव राउटिंग वी नीड ट्रांजिटिव गेटवे अटैचमेंट इन वि एडब्ल्यूएस हर एक अवेलेबिलिटी ज़ोन से एक
सबनेट सेलेक्ट करता है और उसमें ट्रांजिट गेटवे को अटैच कर देता है। फॉर एग्जांपल मेरे वीपीसी में तीन अवेलेबिलिटी ज़ोन है।
Ag1, Ag2, Ag3। ईच अवेलेबिलिटी ज़ोन से एक-एक सबनेट सेलेक्ट करते हैं और उन सबनेट को हम ट्रांजिट गेटवे अटैच
[गला साफ़ करने की आवाज़] करते हैं। एग्जांपल से समझते हैं। एक वीपीसी में AG1, Ag2, Ag3 ऐसे तीन अवेलेबिलिटी ज़ोंस
थे। Ag1 में सबनेट ए था, AGB का एक सबनेट लिया, Ag3 का एक सबनेट लिया। और इन तीनों को हमने ट्रांजिटिव गेटवे अटैच कर दिया।
ट्रांजिटिव गेटवे की जो अटैचमेंट है इनके थ्रू ट्रांजिटिव गेटवे राउटिंग करता है। लेट्स सी सम सिनेरियोस ऑफ़ ट्रांजिटिव
गेटवे डायग्रामेटिकली। फर्स्ट वन इज़ इंट्रा रीजन। मींस इन द सेम रीजन वी आर कनेक्टिंग मल्टीपल वीपीसीस। एक ट्रांजिटिव
गेटवे है व्हिच इज़ कनेक्टेड टू मल्टीपल वीपीसीस एंड अनदर ट्रांजिटिव गेटवे है। यह एक दूसरे को हम इंट्रा रीजन पेयरिंग कर
सकते हैं फॉर बेटर स्केलेबिलिटी। नेक्स्ट इज़ क्रॉस रीजन। रीजन वन में एक ट्रांजिटिव गेटवे है व्हिच इज कनेक्टेड टू द मल्टीपल
वीपीसीस एंड रीजन टू में अलग ट्रांजिटिव गेटवे है व्हिच इज़ कनेक्टेड टू अदर वीपीसीस दे कैन आल्सो पेअ यूजिंग क्रॉस
रीजन ट्रांजिटिव गेटवे का जो इंप्लीमेंटेशन है दैट इज होमवर्क फॉर यू आप उनको एक्सप्लोर कर सकते हैं आई कैन शो
यू आप यहां अगर वीपीसी सर्च करोगे वीपीसी में वीपीसी वाले सेक्शन में अगर जाओगे तो हियर यू विल गेट ट्रांजिट गेटवेज़ पहले
क्रिएट करना होता है ट्रांजिट गेटवे फिर क्रिएट करने के बाद उसको हम वीपीसी अटैच करते हैं। उसको हम डेमो वीपीसी एंड दिस
टेस्ट वीपीसी अटैच कर सकते हैं। नाउ आवर प्रैक्टिकल इज ओवर। सो इट्स टाइम टू क्लीन अप। जो भी रिसोर्सेज हमने क्रिएट किए हैं
उनको हमें ऑफ करना पड़ेगा। अदरवाइज बड़ा वाला बिल आ सकता है। तो फटाफट से क्लीन अप स्टार्ट करते हैं। पहले मैं सारे
रिसोर्सेज बंद करता हूं। मैं डैशबोर्ड पे गया। EC2 के इन तीनों को सेलेक्ट किया। तीनों का काम करते हैं तमाम। ऑल थ्री आर
टर्मिनेटेड विद इन फ्यू सेकंड्स वो शट डाउन हो जाएंगे। उसके बाद हम जो डेमो वीपीसी है उधर चलेंगे। वीपीसी माय वीपीसीस
डेमो। डेमो वीपीसीस में सबसे पहले हम नैट गेटवे को डिलीट करेंगे। बिकॉज़ इट इज कॉस्टलियर। इसमें हम स्टैटिक आईपी असाइन
करके रखे हैं। इसमें एक्शंस लेते हैं। डिलीट नैट गेटवे। लेट्स से डिलीट डिलीटिंग। इसके साथ ही वह जो इलास्टिक
आईपी है वह रिलीज़ हो जाएगा। उसके बाद पेयरिंग कनेक्शंस पे जाते हैं। कनेक्शन भी डिलीट करते हैं। एक्शन डिलीट पेयरिंग
कनेक्शन डिलीट राउट टेबल एंट्रीज इफ आई एम डिलीटिंग द पेयरिंग कनेक्शन टाइप डिलीट एंड डिलीट। सबसे पहले ईसी टू इंस्टेंसेस
हमने डिलीट किए। फिर हमने नेट गेटवे डिलीट किया। फिर पेयरिंग कनेक्शन डिलीट कर रहे हैं। और फिर एंड में हम वीपीसीस भी डिलीट
कर देंगे। लेट्स सी एक्शंस डिलीट डेमो वीपीसी। देखो यह सारी चीजें वह बता रहा है कि फॉलोइंग सेवन रिसोर्सेज विल बी
परमानेंटली डिलीटेड। ओके आई वांट टू डिलीट देम डिलीट एंड देन आई विल आल्सो डिलीट दिस टेस्ट
वीपीसी क्लीन अप भी करना जरूरी होता है। अदरवाइज़ फिर पैसे भरने पड़ते हैं। दिस इज़ डिफ़ॉल्ट।
इसको मत डिलीट कर देना। अभी इसको रिफ्रेश करते। देखो अब सारे चले गए। राउट टेबल्स को रिफ्रेश करते सारे डिलीट हो गए। एक बार
बस इलास्टिक आईपीस को देखते हैं। देखो इलास्टिक आईपीस भी चले गए रिफ्रेश करने के बाद। वीपीसी पे तो ऑल सही चल रहा है। ईसी
टू एक बार देखते हैं। इंस्टासेस रनिंग ज़ीरो। टोटल इंस्टासेस वेर थ्री। वो भी अभी टर्मिनेट हो गए आराम से। वी आर गुड टू गो
फॉरवर्ड। हमने सारी क्लीन अप कर ली। बहुत सारी चीजें हमने हैंड्स ऑन सीखी है। एंड दैट्स ऑल अबाउट लास्ट चैप्टर व्हिच इज़
अप्लाइड नेटवर्किंग फॉर डेवोप्स। जहां हमने एडब्ल्यूएस नेटवर्किंग में हैंड्स ऑन प्रैक्टिस की। फर्स्ट हमने स्टार्ट किया
था एसएसएच से। एसएसएच की थ्योरी पढ़ी थी। देन एडब्ल्यूएस पे हमने अकाउंट क्रिएट करके एसएसएच करके देखा था। वी अंडरस्टैंड
अबाउट प्राइवेट कीज़ पब्लिक कीज़ क्या होती है? कैसे हम एसएचएस सिक्योरली कर सकते हैं? उसके बाद हमने वीपीसीस के बारे में
समझा कि प्राइवेट नेटवर्क कैसे क्रिएट करते हैं? उनके कैरेक्टरिस्टिक्स क्या है? हमने अवेलेबिलिटी ज़ों्स पढ़े। रीजंस के
बारे में पढ़ा। वी सॉ टू टाइप्स ऑफ़ वीपीसीस डिफ़ॉल्ट एंड कस्टम। हमने कस्टम वीपीसी क्रिएट किया। देन वी सॉ सबनेट्स। फिर हमने
सबनेट्स भी क्रिएट करके देखे। वर्चुअल मशीनंस तो हम एसएसएच के डेमो से ही क्रिएट करते आ रहे थे। उसके बाद हमने राउट टेबल्स
समझे। डिफॉल्ट राउट टेबल्स कैसे होते हैं? वीपीसीस में हमने कस्टम राउट टेबल्स भी क्रिएट किए पब्लिक प्राइवेट वंस एंड उनमें
हमने सबनेट एसोसिएट किए थे। एंड देन उसके बाद हमने राउटिंग रूल्स भी ऐड किए थे। हमने इंटरनेट गेटवे के बारे में पढ़ा।
इंटरनेट गेटवे के बाद हमने नेट गेटवे के बारे में पढ़ा। देन हमने फायर वाल्स के बारे में समझा। स्टेटलेस फायर वाल
स्टेटफुल फायर वाल क्या होती है? एंड एट द एंड वी लर्न वीपीसी पेयरिंग एंड द बेटर वे ऑफ़ पेयरिंग थ्रू द
[गला साफ़ करने की आवाज़] ट्रांजिटिव गेटवे। इन द नेक्स्ट बूट कैंप वी विल डाइव इन द वर्ल्ड ऑफ़ Linux जहां से हमारी
डिवोप्स की जर्नी की शुरुआत होगी। ह्यूज कांग्रेचुलेशंस टू ऑल ऑफ यू फॉर कंप्लीटिंग दिस बूट कैंप। मैराथॉन में
पार्टिसिपेट करना इज एप्रिशिएटेड बट मैराथॉन को कंप्लीट करना, उसकी फिनिश लाइन क्रॉस करना इज अ लाइफटाइम अचीवमेंट। बहुत
सारे स्टूडेंट ने इस बूट कैंप को स्टार्ट किया है। बट आप उनमें से कुछ चुनिंदा रेयर स्टूडेंट हो जो फिनिश लाइन तक पहुंच पाए।
यू ऑल हैव दिस कॉमन क्वेश्चन व्हाट्स नेक्स्ट? आई फिनिश्ड द कोर्स। आई फिनिश्ड द ट्यूटोरियल नाउ। क्या करना चाहिए आगे? द
जर्नी वी स्टार्टेड इट शुड नॉट स्टॉप। ये कंटिन्यू होनी चाहिए। बिकॉज़ हमने नेटवर्किंग की सारी चीजें कवर नहीं की है।
वी जस्ट कवर्ड व्हाट मैटर्स मोस्ट। नेटवर्किंग ये टॉपिक कभी फिनिश भी नहीं होता। बिकॉज़ इन द टेक वर्ल्ड, एवरीथिंग इज
बिल्ट ऑन टॉप ऑफ द नेटवर्किंग। यू विल मीट दिस नेटवर्किंग अगेन इन द लinक्स। यू विल मीट अगेन इन द कंटेनर्स एंड यू विल मीट
दिस नेटवर्किंग अगेन इन द ऑर्केस्ट्रेशन। तो लinक्स में फाइल परमिशन हो, एसएसएच नेटवर्क कमांड्स या सॉकेट्स हो या डॉकर का
खुद का नेटवर्किंग मॉडल हो विद ब्रिजेस एंड पोर्ट मैप पिन या Kubernets की नेटवर्किंग की दुनिया हो। नेटवर्किंग की
मुलाकात आपसे बार-बार होगी। यह बूट कैंप खाली नेटवर्किंग के बारे में नहीं था। यह एक फाउंडेशन है फॉर एवरीथिंग दैट फॉलोस।
वी कवर्ड अ लॉट बट देयर आर सम टॉपिक्स यू शुड एक्सप्लोर। लाइक बॉर्डर गेटवे प्रोटोकॉल क्या होता है? वायर शार्क
सॉफ्टवेयर से हम पैकेट एनालिसिस कैसे करते हैं? नेटवर्क सिक्योरिटी को आप एक्सप्लोर कर सकते हो। जीरो ट्रस्ट क्या है? वीpएं
क्या है? उसके बारे में पढ़ सकते हो। लेटेस्ट एडवांस राउटिंग प्रोटोकॉल्स कौन से हैं? ओएसपीएफ, ईआईजीआरपी इनके बारे में
आप पढ़ सकते हो। एमपीएल्स एंड वीx लंस क्या होते हैं? उसके बारे में आप पढ़ सकते हो। नेक्स्ट आप डेटा सेंटर की नेटवर्किंग
के बारे में समझ सकते हो कि डेटा सेंटर में आर्किटेक्चर कैसे है? कैसे सिस्टम्स डिजाइन किए जाते हैं। डेटा सेंटर की
रिक्वायरमेंट ह्यूज होती है। दे नीड्स लॉट ऑफ बैंडविड्थ, स्पीड एंड ऑल। तो हाउ दे ऑप्टिमाइज? कौन से लेटेस्ट एल्गोरिदम्स
प्रोटोकॉल्स वो यूज़ करते हैं टू स्क्वीज़ एवरीथिंग आउट ऑफ द नेटवर्क उसके बारे में आप रिसर्च कर सकते हो। वंस यू एक्सप्लोर
दिस इट्स टाइम टू पिक द पाथ। एज़ आई टोल्ड यू इन द इंट्रोडक्शन इटसेल्फ दिस बूट कैंप इज डिज़ फॉर ऑल द रोल्स। सो आपको अगर वेब
डेवलपमेंट, ऐप डेवलपमेंट की दुनिया में जाना है तो यू कैन एक्सप्लोर द HTP रेस्ट एपीआई डिज़ वेब आरटीसी रियल टाइम सिस्टम्स
कैसे काम करती है? सीडीएम्स एंड एज नेटवर्किंग कैसे होती है? जीआरपीसी प्रोटोकॉल क्या है? एपीआई गेटवेज़ के
पैटर्न्स क्या है? अनदर ऑप्शन फॉर यू इज़ डेवोप्स एंड क्लाउड। जिसमें आप लinक्स में नेटवर्किंग कैसे होती है? डॉकर एंड कंटेनर
नेटवर्किंग कैसे होती है? क्यूबिस में कैसे नेटवर्किंग की जाती है? इंफ्रास्ट्रक्चर एज अ कोड क्या चीज है?
इसके बारे में अपलोड कर सकते हो। इफ यू वांट टू गो इन टू द नेटवर्क इंजीनियरिंग साइट। आप सीसीएनए नाम की एग्जाम होती है।
उसका प्रिपरेशन करना स्टार्ट कर सकते हो। उसके बाद यू कैन गो फॉर सीसीएनपी एग्जाम देन यू कैन एक्सप्लोर द नेटवर्क ऑटोमेशन
एंड डेटा सेंटर्स के आर्किटेक्चर्स कैसे होते हैं? बिकॉज़ नेटवर्क इंजीनियर्स का काम होता है इन सिस्टम्स को डिजाइन करना।
साइबर सिक्योरिटी में आप अगर जाना चाहते हो तो वायर शार्क के थ्रू ट्रैफिक एनालिसिस कैसे होती है इसके बारे में पढ़
सकते हो। कॉम टीआई सिक्योरिटी प्लस या सीएफएस सर्टिफाइड एथिकल हैकर एग्जाम होती है। यू कैन स्टडी फॉर दैट। इसके बाद आप
पेनिट्रेशन टेस्टिंग के बारे में सीख सकते हो या फायर वॉल को कॉन्फ़िगर कैसे किया जाता है? जीरो टेस्ट कॉन्फ़िगरेशन कैसे हम
बिल्ड करते हैं वो आप एक्सप्लोर कर सकते हो। तो वंस यू मास्टर नेटवर्किंग इट ओपन्स लॉट ऑफ़ पाथ फॉर यू। नाउ चॉइस इज यस कि
आपको वेब डेवलपमेंट या ऐप डेवलपमेंट साइट जाना है। क्लाउड या डेवोप साइट जाना है, नेटवर्क इंजीनियर बनना है या साइबर
सिक्योरिटी में जाना है। अब यहां तक आ ही गए हो तो आपकी क्रिएटिविटी देखते हैं। हियर आर सम टास्क फॉर यू। फर्स्ट आपने जो
नोट्स निकाले हैं, आपकी जो लर्निंग्स है, आपका जो एक्सपीरियंस था इस एंटायर बूट कैंप में, आपको उसको शेयर करना है Lindin
पे, Twitter पे। इसके एक स्टेप आगे जाके यू कैन क्रिएट रील्स और शॉर्ट वीडियोस टू शेयर योर बूट कैंप जर्नी एंड टेक अवेज।
एंड ट्रस्ट मी, अगर आपने यह सेकंड वाली चीज कंप्लीट कर ली, तो इट विल ड्रास्टिकली इंप्रूव योर कम्युनिकेशन स्किल एंड हेल्प
यू टू क्रैक इंटरव्यूज इजीली। इफ यू लाइक दिस बूट कैंप एंड नीड मोर बूट कैंप्स लाइक दिस प्लीज शेयर विथ योर फ्रेंड्स, कलीग्स
एंड जूनियर्स सो दैट वी कैन ब्रिंग सच हाई क्वालिटी बूट कैंप्स फॉर यू। हियर आर आवर सोशल्स। यू कैन टैग हितेश सर, चाइक्वड
एचक्यू एंड मी ऑन द सोशल्स। यहां तक आ ही गए हो तो वन स्पेशल सरप्राइज फॉर यू। वी आर सिलेक्टिंग बेस्ट रील्स, नोट्स या
लर्निंग समरीज, Lindin Twitter पोस्ट या एनी कम्युनिटी कंट्रीब्यूशन। जो भी मोस्ट क्रिएटिव एंड वैल्यूुएबल शेयर्स होंगे
उनको एक्सक्लूसिव चाय कोड स्वैग्स मिलेंगे। दैट्स व्हाई आई टोल्ड यू टू टैग अस। सो आवर टीम कैन रिवु इट एंड कीप द
ट्रैक ऑफ़ आल योर लर्निंग्स। बिफोर रैपिंग दिस बूट कैंप। आई वांट आल ऑफ़ यू टू रीमेर दिस। नेटवर्किंग इज द फाउंडेशन। एवरीथिंग
वि बिल्ड सीट्स ऑन टॉप ऑफ दिस। दिस इस योर नेक्स्ट टेक पार्टनर साइनिंग ऑफ।
कंप्यूटर नेटवर्किंग दो या अधिक उपकरणों (जैसे सर्वर, लैपटॉप) के बीच डेटा और संसाधनों को साझा करने की प्रक्रिया है। DevOps इंजीनियरों के लिए यह ज़रूरी है क्योंकि वे क्लाउड सेवाओं, माइक्रोसर्विसेज़ और इंफ्रास्ट्रक्चर को मैनेज करते हैं, जहाँ नेटवर्किंग की समझ के बिना समस्याओं का निवारण और सिस्टम को स्केल करना मुश्किल हो जाता है।
OSI मॉडल 7 लेयर्स का एक सैद्धांतिक मॉडल है जो नेटवर्किंग प्रक्रिया को समझने में मदद करता है, जबकि TCP/IP मॉडल व्यावहारिक है और इसमें OSI की टॉप तीन लेयर्स को एक एप्लीकेशन लेयर में मर्ज कर दिया गया है। DevOps इंजीनियरों के लिए यह समझना ज़रूरी है क्योंकि क्लाउड नेटवर्किंग, लोड बैलेंसिंग और फ़ायरवॉल कॉन्फ़िगरेशन इन्हीं मॉडलों पर आधारित होते हैं।
इनकैप्सुलेशन में डेटा हर लेयर पर एक नया हेडर जोड़ता है, जिससे यह एप्लीकेशन सेगमेंट, फिर पैकेट, फ्रेम और अंत में बिट्स में बदल जाता है। डीकैप्सुलेशन में रिसीवर साइड पर हर लेयर अपने हेडर को हटाकर डेटा को ऊपर की लेयर को भेजता है। यह प्रक्रिया डेटा को स्रोत से गंतव्य तक सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से पहुँचाने में मदद करती है।
LAN एक छोटे क्षेत्र जैसे घर या ऑफिस तक सीमित होता है, MAN एक शहर या मेट्रो क्षेत्र को कवर करता है, और WAN देशों या महाद्वीपों को जोड़ता है। उदाहरण के लिए, आपके घर का वाई-फाई नेटवर्क LAN है, AWS का मुंबई रीजन MAN है, और इंटरनेट WAN का सबसे बड़ा उदाहरण है।
हब (Layer 1) सिग्नल को सभी पोर्ट पर ब्रॉडकास्ट करता है और MAC एड्रेस नहीं समझता, जबकि स्विच (Layer 2) MAC एड्रेस टेबल बनाकर डेटा को सिर्फ सही डिवाइस तक भेजता है। राउटर (Layer 3) IP एड्रेस का उपयोग करके अलग-अलग नेटवर्क के बीच डेटा रूट करता है। DevOps में, स्विच का उपयोग डेटा सेंटर में और राउटर का उपयोग क्लाउड वीपीसी (Virtual Private Cloud) में किया जाता है।
नेटवर्क टोपोलॉजी डिवाइसों की भौतिक या लॉजिकल व्यवस्था है, जैसे बस, रिंग, स्टार, मैश, और ट्री। DevOps इन्फ्रास्ट्रक्चर (जैसे AWS VPC) में स्टार टोपोलॉजी सबसे ज़्यादा उपयोग होती है, जहाँ सभी डिवाइस एक केंद्रीय स्विच या हब से जुड़े होते हैं, क्योंकि यह आसानी से स्केल होती है और किसी एक डिवाइस के फेल होने पर पूरा नेटवर्क प्रभावित नहीं होता।
इंटरनेट एक वैश्विक नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर है जो लाखों कंप्यूटरों को जोड़ता है, जबकि WWW एक एप्लीकेशन है जो इंटरनेट पर चलती है, जिसमें वेबसाइटें, ब्राउज़र और हाइपरलिंक शामिल हैं। इसे समझने का सबसे आसान तरीका है: इंटरनेट एक सड़क ढांचा है, और WWW उस पर चलने वाली गाड़ियाँ (वेबसाइटें और ऐप्स) हैं।
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