परिचय
- विषय: भारत का संविधान
- कोर्स: AKTU बीटेक थर्ड ईयर, कंपलसरी
- क्रेडिट: शून्य (पास होना आवश्यक)
यूनिट 1 का सिलेबस
- भारतीय संविधान का इंट्रोडक्शन
- भारत सरकार के मुख्य तीन अंग: विधायी (लेजिसलेचर), कार्यपालिका (एग्जीक्यूटिव), न्यायपालिका (जुडिशरी)
- संविधान का कार्य: सरकार के ढांचे, शक्तियों और कार्यों का निर्धारण
संविधान के कार्य और महत्व
- सरकार की शक्तियों की सीमाएं तय करना
- नागरिकों के मौलिक अधिकारों और कर्तव्यों का संरक्षण
- अल्पसंख्यकों के हितों की रक्षा
- सामाजिक न्याय और समानता को बढ़ावा देना
- संवैधानिक संशोधन द्वारा समय-समय पर बदलाव (Understanding Recent Constitutional Amendments in India)
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
- कंस्टीट्यूएंट असेंबली की स्थापना: 1946
- महत्वपूर्ण सदस्य: डॉ. राजेंद्र प्रसाद (अध्यक्ष), डॉ. भीमराव अंबेडकर (ड्राफ्टिंग कमेटी चेयरमैन)
- संविधान स्वीकार: 26 नवम्बर 1949
- संविधान लागू: 26 जनवरी 1950
महत्वपूर्ण कानूनी अधिनियम
-
गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट 1935:
- सबसे बड़ा और प्रभावशाली अधिनियम
- संघीय ढांचा, द्विसदनी विधानमंडल, शासकीय स्वायत्तता
- रिजर्व बैंक की स्थापना
-
इंडियन इंडिपेंडेंस एक्ट 1947:
- भारत और पाकिस्तान का विभाजन
- ब्रिटिश शासन का अंत
- स्वतंत्र दो डोमिनियनों का निर्माण
संविधान के प्रमुख विशेषताएँ
- विश्व का सबसे लंबा लिखित संविधान
- सोवरेन, सोशलिस्ट, सेकुलर, डेमोक्रेटिक, रिपब्लिक
- संघीय ढांचा जिसमें केंद्र और राज्य के बीच सत्ता विभाजन
- स्वतंत्र न्यायपालिका
- एकल नागरिकता
- परिवर्तनशील और अनुकूलनीय संवैधानिक संरचना
मौलिक अधिकार
- समानता का अधिकार (आर्टिकल 14-18)
- स्वतंत्रता का अधिकार (आर्टिकल 19-22)
- शोषण के विरुद्ध अधिकार (आर्टिकल 23-24)
- धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार (आर्टिकल 25-28)
- सांस्कृतिक एवं शैक्षिक अधिकार (आर्टिकल 29-30)
- संवैधानिक उपाय (आर्टिकल 32)
मौलिक कर्तव्य
- संविधान का सम्मान और राष्ट्रीय प्रतीकों का आदर
- देश की अखंडता संरक्षण
- सामाजिक सद्भावना बढ़ावा
- पर्यावरण संरक्षण
- जिम्मेदार नागरिकता को प्रोत्साहित करना
पार्लियामेंट्री सिस्टम
- द्विसदनी संसद: लोकसभा और राज्यसभा
- राष्ट्रपति: संवैधानिक प्रमुख
- प्रधानमंत्री और मंत्री: वास्तविक कार्यकारिणी
- लोकसभा के प्रति जवाबदेही
संवैधानिक आपातकाल प्रावधान
- राष्ट्रीय आपातकाल (आर्टिकल 352)
- राष्ट्रपति शासन/स्टेट आपातकाल (आर्टिकल 356)
- वित्तीय आपातकाल (आर्टिकल 360)
स्थानीय स्वशासन
- पंचायती राज (73वां संशोधन)
- शहरी स्थानीय निकाय (74वां संशोधन)
- प्रशासन की जमीनी पर पहुंच और विकेंद्रीकरण
संशोधन प्रक्रिया
- विधेयक का परिचय और चर्चा
- सरल और विशेष बहुमत की आवश्यकता
- राज्यों की सहमति
- राष्ट्रपति की मंजूरी
अध्ययन सामग्री और सहायता
- वीडियो के अंत में मुफ्त नोट्स उपलब्ध
- AKTU सिलेबस के अनुसार संपूर्ण कवर
- गेटवे क्लासेस एप्लीकेशन द्वारा पूर्ण पाठ्यक्रम एवं संसाधन उपलब्ध
यह सारांश बीटेक छात्रों को AKTU के संविधान विषय की यूनिट 1 की समझ और परीक्षा की तैयारी में सहायक होगा। विषय के ऐतिहासिक, वैधानिक और संवैधानिक पहलुओं को संक्षेप में प्रस्तुत किया गया है, जिससे विद्यार्थियों का आत्मविश्वास वर्धित होगा।
अधिक जानकारी के लिए देखें Complete Guide to the Indian Constitution: Key Points and Insights.
हेलो एवरीवन वेलकम टू द गेटवे क्लासेस तो कैसे हैं आप सभी लोग आई होप कि आप सभी अच्छे होंगे और आपकी पढ़ाई भी अच्छी चल
रही होगी मेरा नाम है महेद्र सिंह तोमर और मैं आपको एकेटीयू बीटेक थर्ड ईयर का एक कंपलसरी सब्जेक्ट पढ़ाने जा रहा हूं
सब्जेक्ट का नाम है कॉन्स्टिट्यूशन ऑफ इंडिया भारत का संविधान और इस सब्जेक्ट को हम यूनिट वाइज वन शॉट के माध्यम से कवर
करेंगे आज की इस वीडियो में हम यूनिट नंबर वन का वन शॉट करने वाले हैं तो यह बात आप सभी जानते हैं कि यह जो सब्जेक्ट है आपका
ट्यूशन ऑफ इंडिया ये एक कंपलसरी सब्जेक्ट है और कुछ स्टूडेंट्स इसको फिफ्थ टाम के अंदर पढ़ेंगे और जो स्टूडेंट्स फिफ्थ टाम
में नहीं पढ़ेंगे तो उसको सिक्स सेम में पढ़ने वाले हैं और इसका जो क्रेडिट है वो जीरो क्रेडिट है आप यहां पर देख सकते हैं
कांस्टिट्यूशन ऑफ इंडिया यहां पर जो क्रेडिट है इसका जीरो है क्योंकि कुछ सब्जेक्ट के क्रेडिट कितने होते हैं फोर
और कुछ सब्जेक्ट के क्रेडिट आपके थ्री भी होते हैं जो लैब्स होती हैं उनके क्रेडिट होते हैं आपके वन लेकिन इस सब्जेक्ट का
कोई क्रेडिट नहीं है बट माय डियर स्टूडेंट्स इस सब्जेक्ट को पास करना जरूरी है ठीक है आप यहां पर देख सकते हैं जैसे
बाकी के सब्जेक्ट जो हैं एक्सटर्नल थ्योरी के जो एग्जाम्स होते हैं 70 मार्क्स के होते हैं तो ये सब्जेक्ट जो है ये भी आपका
70 मार्क्स का है और जो इंटरनल है बाकी के जो इंटरनल होते हैं 30 मार्क्स के इसके भी इंटरनल मार्क्स आपके 30 हैं ठीक है तो आप
इस बात का ध्यान रखिएगा कि यह सब्जेक्ट जो है कंपलसरी सब्जेक्ट है और इसमें पास होना जरूरी है तो जल्दी से एक बार हम देख लेते
हैं कि जो हमारा सिलेबस है यूनिट यू नो कॉन्स्टिट्यूशन ऑफ इंडिया का पांच यूनिट आपको पढ़नी है यूनिट नंबर वन आप देख सकते
हैं ये एक एट का सिलेबस है और पूरे का पूरा कंटेंट आपको एकटी के हिसाब से ही मैं यहां पर पढ़ाने वाला हूं देखिए ये जो
कॉन्स्टिट्यूशन ऑफ इंडिया है इसको आप किसी अदर एग्जाम के पॉइंट ऑफ व्यू से पढ़ेंगे जैसे सिविल सर्विसेस के लिए तो यू नो काफी
मेहनत करनी पड़ती है इसमें लेकिन मैं मानता हूं कि ये जो हम सब्जेक्ट पढ़ने वाले हैं अकॉर्डिंग टू एकेटीयू सिलेबस
पढ़ेंगे और जितना टाइम आप यहां पर लगाएंगे जो मैं आपको पढ़ाने वाला हूं आपको नॉलेज मिलेगी आपका जो सब्जेक्ट है वो क्लियर हो
जाएगा आपके मार्क्स आ जाएंगे किसी तरह की कोई दिक्कत आपको आएगी नहीं चलिए तो यूनिट नंबर वन का ये सिलेबस है यूनिट नंबर वन
में हम पढ़ने वाले हैं क्या इंट्रोडक्शन टू इंट्रोडक्शन यहां पे देखिएगा इंट्रोडक्शन एंड बेसिक इंफॉर्मेशन अबाउट
इंडियन कॉन्स्टिट्यूशन ये जो आप देख रहे हैं ये सभी टॉपिक्स मैं आज इसी वन शॉर्ट वीडियो में आपको कवर कराने वाला हूं यूनिट
नंबर टू के अंदर हम पढ़ेंगे यूनियन एग्जीक्यूटिव एंड स्टेट एग्जीक्यूटिव ठीक है नेक्स्ट जो हमारा वन शॉर्ट होगा यूनिट
थ्री का उसमें हम पढ़ने वाले हैं मॉड्यूल थ्री के अंदर कि इंट्रोडक्शन एंड बेसिक इंफॉर्मेशन अबाउट द लीगल सिस्टम यूनिट
नंबर फोर में हम पढ़ेंगे इलेक्शन प्रोविजंस इमरजेंसी प्रोविजंस एंड अ अमेंट ऑफ द कांस्टिट्यूशन यूनिट नंबर फाइव लास्ट
यूनिट में पढ़ने वाले हैं बिजनेस ऑर्गेनाइजेशन एंड ई-गवर्नेंस के बारे में राइट अब ध्यान दीजिएगा यहां पे ये जो
मैंने आपके लिए नोट्स बनाए हैं अकॉर्डिंग टू एकेटीयू सिलेबस बनाए हैं एकदम बिल्कुल ब्रीफ नोट है ब्रीफ नोट्स है कंसाइनर बहुत
सिंपल लैंग्वेज में नोट्स बनाए गए हैं आप देख सकते हैं जो भी टॉपिक हम पढ़ेंगे उस टॉपिक के सामने हमने लिख भी दिया है कि ये
जो क्वेश्चन है ये कब आया हुआ है एकेटीयू में प्रीवियस इयर्स में जैसा आप देख सकते हैं कि ये टॉपिक एकेटीयू 2021 22 22 23 23
24 में आया हुआ है है ना तो हर एक टॉपिक के सामने हमने यहां पर लिख दिया है तो लगभग य 30 टू 35 पेजेस की पूरी पीडीएफ
आपको मिलेगी पूरा यूनिट आपका यहां पर कवर हो जाएगा और आप ये भी जानते हैं और आप ये भी जानते हैं कि आपको जब मैं आपको यहां पर
पढ़ा रहा हूं तो आपको किसी तरह की कोई दिक्कत आने वाली नहीं है इजली आपको चीजें याद हो जाएंगी और इजली आप एग्जाम में लिख
के आएंगे साथ ही साथ आपको क्योंकि ये जो सब्जेक्ट है भाई आपके करिकुलम में अगर ऐड किया गया है तो कुछ तो इंपॉर्टेंस रही
होगी कुछ तो इंपॉर्टेंस रही होगी तो एक बेसिक अंडरस्टैंडिंग एक बेसिक नॉलेज आपके पास होनी चाहिए किसकी कॉन्स्टिट्यूशन ऑफ
इंडिया की भारत के संविधान की तो इससे क्या होगा आपका कॉन्फिडेंस बढ़ेगा और मार्क्स भी आएंगे ठीक है चलिए तो स्टार्ट
करते हैं तो ये जो नोट्स मैंने आपको अभी दिखाए हैं बेटा ये नोट्स आपको फ्री ऑफ कॉस्ट एप्लीकेशन के अंदर मिल जाएंगे ये
नोट्स आपको फ्री ऑफ कॉस्ट एप्लीकेशन के अंदर मिल जाएंगे तो जिन्होंने एप्लीकेशन डाउनलोड नहीं किया गेटवे क्लासेस का
एप्लीकेशन आप डाउनलोड कर लीजिए वहां पर ये नोट्स आपको फ्री ऑफ कॉस्ट मिलेंगे ठीक है और जिन स्टूडेंट्स को नहीं पता है लेक्चर
को स्टार्ट करने से पहले मैं आपको बता देता हूं कि एकेटीयू बीटेक फर्स्ट ईयर सेकंड ईयर और थर्ड ईयर के अब फुल कोर्स
हमारे गेटवे क्लासेस एप्लीकेशन के अंदर मिल जाते हैं ऑड सेम का इवन सेम का या इवन और ऑड दोनों सेम का कमो पैक आपको मिलता है
जो भी आपके ब्रांचेस सीएसआईटी इलेक्ट्रिकल ईसी मैकेनिकल है ना सभी ब्रांचेस के लिए हमारे पास कमो जो कोर्सेस है इंडिविजुअल
और कमो पैक में अवेलेबल है तो चलिए बेटा स्टार्ट करते हैं फिर आज की अपनी क्लास को यूनिट नंबर वन कॉन्स्टिट्यूशन ऑफ इंडिया
का वन शॉर्ट रिवीजन करते हैं तो सबसे पहले यहां पर हम समझेंगे व्हाट इज द मीनिंग ऑफ कॉन्स्टिट्यूशन एंड कांस्टिट्यूशन लिज्म
देखो समझिए व्हाट इज कांस्टिट्यूशन संविधान होता क्या है कि ये एक रिटन डॉक्यूमेंट है है ना कॉन्स्टिट्यूशन इज अ
फॉर्मल डॉक्यूमेंट दैट आउटलाइंस द फ्रेमवर्क ऑफ द गवर्नमेंट ऑफ ए कंट्री कि किसी कंट्री का जो किसी भी कंट्री को
चलाने के लिए व एक सेट ऑफ रूल्स होता है तो वो इसके अंदर लिखा होता है ठीक है ध्यान दीजिएगा इट डिफाइंस द स्ट्रक्चर
पावर्स एंड फंक्शंस ऑफ डिफरेंट ऑर्गन्स ऑफ गवर्नमेंट कि जो गवर्नमेंट होती है उसके जो डिफरेंट ब्रांच होती है डिफरेंट
ऑर्गन्स होते हैं है ना उनके फंक्शंस क्या होंगे है ना उनकी पावर्स क्या होंगी उसका स्ट्रक्चर क्या होगा ठीक है जैसे अगर मैं
बात करूं कि जो गवर्नमेंट है जैसे हमारे इंडिया गवर्नमेंट है कि इसके तीन मेन ऑर्गन्स होते हैं गवर्नमेंट के तीन मेन
ब्रांच होती हैं तीन ऑर्गन्स होते हैं जैसे लेजिसलेच्योर
फॉर मेकिंग द लॉ अब जब लॉ बन गया उस लॉ को इंप्लीमेंट कौन कराता है एग्जीक्यूटिव तो एग्जीक्यूटिव इज रिस्पांसिबल फॉर
इंप्लीमेंटिंग द लॉ देन उसके बाद अगर उस लॉ का पालन नहीं हो रहा है उसका उल्लंघन हो रहा है ठीक है अगर लॉ का वायलेशन हो
रहा है तो उसके लिए कौन है यहां पे जुडिशरी है कौन है उसके लिए यहां पर जुडिशरी है जैसे फॉर एग्जांपल फॉर
एग्जांपल मैं बात करूं जैसे एक लॉ है राइट टू एजुकेशन तो राइट टू एजुकेशन लॉ किसने बनाया होगा लेजिसलेच्योर
टू एजुकेशन जो लॉ बन चुका है उसको इंप्लीमेंट करने का काम कौन करेगा एग्जीक्यूटिव अगर उस उसका उल्लंघन हो रहा
है राइट टू एजुकेशन का उल्लंघन हो रहा है मान लीजिए स्कूल के अंदर गवर्नमेंट स्कूल में किसी बच्चे को एडमिशन नहीं मिल रहा है
और वो कंप्लेन कर सकता है तो उसके लिए कौन रिस्पांसिबल है जुडिशरी नाउ कांस्टीट्यूशनलिज्म क्या है अ ये जो देखिए
कांस्टिट्यूशन की हमने बात कर ली अब कांस्टिट्यूशन को ये इंश्योर करना है कि जो गवर्नमेंट को जो पावर्स मिली है उन वो
जो गवर्नमेंट है गवर्नमेंट पावर का अपनी पावर का मिसयूज ना करे वो संविधान के दायरे में कांस्टिट्यूशन के दायरे में रह
कर के काम करें मतलब ये जो इंश्योर करता है इट र् द गवर्नमेंट एक्ट विद इन द कॉन्स्टिट्यूशन लिमिट कांस्टिट्यूशन लिमिट
के दायरे में रह कर के ही काम करे कौन गवर्नमेंट अपनी पावर का मिसयूज ना करे मतलब ये जो है ये अकाउंटेबिलिटी
अकाउंटेबिलिटी को मतलब प्रमोट करता है प्रमोट द अकाउंटेबिलिटी एंड रिस्ट्रिक्टर्स
मतलब आर्बिट्रेरी यूज ऑफ पावर जो गवर्नमेंट है मनमाने तरीके से मिसयूज ना करे पावर का एक लिमिट के अंदर
कांस्टीट्यूशनल जो लिमिट है उसी के अंदर काम करें एग्जांपल के तौर पर हम कह सकते हैं जुडी इन इंडिया एक्ट एज अ गार्डियन ऑफ
द कांस्टिट्यूशन टू एंस्यो द कांस्टीट्यूशनलिज्म ये जो कांस्टीट्यूशनलिज्म है इसको इंश्योर करने
के लिए कौन है हमारे पास जुडिशरी जैसे हम कह सकते हैं जो सुप्रीम कोर्ट है इंडिया के अंदर जो सुप्रीम कोर्ट है दैट इज द
गार्डियन ऑफ दी कॉन्स्टिट्यूशन चलिए आगे बढ़ते हैं नेक्स्ट अब देखिए ये जो क्वेश्चन है सॉरी फंक्शंस ऑफ
कॉन्स्टिट्यूशन ये एकट 202021 में क्वेश्चन पूछा जा चुका है समझते हैं वन बाय वन व्हाट आर द फंक्शन ऑफ
कॉन्स्टिट्यूशन संविधान के कौन-कौन से फंक्शंस होते हैं फर्स्ट वन एस्टेब्लिश द फ्रेमवर्क ऑफ द गवर्नमेंट ये क्या करता है
गवर्नमेंट के फ्रेमवर्क को एस्टेब्लिश करता है द कांस्टिट्यूशन इंडिया कांस्टिट्यूशन डिफाइंस द स्ट्रक्चर जैसे
कि अभी बताया था स्ट्रक्चर को अ स्ट्रक्चर को डिफाइन करता है पावर्स एंड फंक्शंस ऑफ दी थ्री मेन ऑर्गन्स ऑफ दी गवर्नमेंट जैसे
मैंने यहां पर बताया था कि जो लेजिसलेच्योर मेंट की ठीक है उनकी फंक्शंस उनके पावर
उनका स्ट्रक्चर को डिफाइन करता है जैसे कि मैंने अभी आपको बताया था फर्स्ट वन इज लेजिस्लेटर लेजिस्लेटर क्या होता है इट इज
रिस्पांसिबल फॉर मेकिंग द लॉ जो लॉ बनाए जाते हैं जो कानून बनाए जाते हैं वो किसका काम होता है लेजिस्लेटर विधायिका का सेकंड
वन है एग्जीक्यूटिव कार्यपालिका जो लॉ बन चुके हैं उनको इंप्लीमेंट कराने का काम होता है एग्जीक्यूटिव का कार्यपालिका एंड
थर्ड वन इज जुडिशरी न्यायपालिका इंटरप्रेट द लॉ एंड इंश्योर द जस्टिस जस्टिस को इंश्योर करना कि जो अगर मान लीजिए जो लॉ
बने हैं उन लॉ का अगर पालन नहीं हो रहा है उल्लंघन हो रहा है वायलेशन हो रहा है तो उसके लिए कौन रिस्पांसिबल है उसके लिए
रिस्पांसिबल है जुडिशरी ठीक है दूसरा जो फंक्शन है कांस्टिट्यूशन का डिफाइंस राइट एंड ड्यूटीज जो सिटीजंस हैं उनकी राइट्स
उनके फंडामेंटल राइट्स उनके फंडामेंटल ड्यूटीज को ये डिफाइन करता है इट प्रोवाइड्स द फंडामेंटल राइट्स जैसे जैसे
इक्वलिटी है ना अ फ्रीडम और जो राइट टू एजुकेशन ये सब क्या है हम पढ़ेंगे आगे है ना फंडामेंटल राइट्स जो है ये कौन कौन
देता है हमको हमारा कांस्टीट्यूशन देता है और ये बड़ा इंपोर्टेंट क्वेश्चन है व्हाट आर द फंडामेंटल राइट्स एंड व्हाट आर द
फंडामेंटल ड्यूटीज ये आगे सेपरेट आएगा है ना देख सकते हैं आप यहां फंडामेंटल ड्यूटी के अर फंडामेंटल ऑफ ड्यूटीज के अंदर क्या
आएगा जैसे यू नो ड्यूटीज कौन-कौन सी होती है जैसे रिस्पेक्टिंग द कॉन्स्टिट्यूशन कि कांस्टिट्यूशन की रिस्पेक्ट करनी है हर
सिटीजन को नेशनल फ्लैग जो हमारा नेशनल फ्लैग है उसकी रिस्पेक्ट करनी है एंड प्रमोटिंग द हार्मोनी हार्मोनी को प्रमोट
करना है तीसरा जो फंक्शन है लिमिट्स द पावर ऑफ द गवर्नमेंट कांस्टीट्यूशन क्या करता है गवर्नमेंट की पावर को लिमिट करता
है कि गवर्नमेंट अपने मनमानी तरीके से अपनी पावर का यूज नहीं करेगा एक लिमिट के अंदर कांस्टीट्यूशनल लिमिट के अंदर रह कर
के ही गवर्नमेंट जो है वो काम करेगी ठीक है अपनी ऑटोनॉमी नहीं चलाएगी नेक्स्ट जो फंक्शन आता है कांस्टीट्यूशन का वो क्या
है प्रोटेक्ट द माइनॉरिटी इंटरेस्ट जो माइनॉरिटी ज हैं उनके इंटरेस्ट को ध्यान में रखते हुए उनके जो राइट्स हैं उनका
वायलेशन ना हो ठीक है उनका ध्यान रखता है कौन कांस्टिट्यूशन इट सेफगार्ड द राइट्स ऑफ माइनॉरिटी जो माइनॉरिटी के राइट्स हैं
उनको सेफ रखता है एंड इंश्योर दैट दे आर नॉट डिस्क्रिमिनेट डिस्क्रिमिनेटेड कि उनको डिस्क्रिमिनेट ना किया जाए प्रोवाइड
इक्वल अपॉर्चुनिटी एंड सोशल हार्मोनी इक्वल अपॉर्चुनिटी सबको प्रोवाइड करानी है चाहे वो मेजॉरिटी में हो या माइनॉरिटी में
हो प्रोवाइड्स द लीगल फ्रेमवर्क प्रोवाइड्स द लीगल फ्रेमवर्क द कांस्टिट्यूशन एक्ट एज अ सुप्रीम लॉ ये
सुप्रीम लॉ है अ कंस्ट कांस्टिट्यूशन के अंदर क्या है सुप्रीम लॉ की मतलब आपको जस्टिस मिलेगा आपको एक लीगल फ्रेमवर्क
मिलेगा सभी के लिए प्रोवाइड द फाउंडेशन फॉर ऑल द लॉज एंड गवर्नेंस नेक्स्ट आता है फंक्शन इंश्योर द सोशल जस्टिस द
कांस्टिट्यूशन प्रमोट्स इक्वलिटी इक्वलिटी को प्रमोट करता है कांस्टिट्यूशन बाय एड्रेस द डिस्क्रिमिनेशन बेस्ड ऑन द कास्ट
मतलब कास्ट के बेसिस पे रिलीजन के बेसिस पे या फिर जेंडर के बेसिस पे आप जो है डिस्क्रिमिनेट नहीं कर सकते इंश्योर द
सोशल जस्टिस ओके नाउ द ट्रीटमेंट फॉर ऑल द सिटीजंस जितने ऑल सभी सिटीजंस के लिए एक फेयर ट्रीटमेंट होगा सभी के लिए जस्टिस
होगा नेक्स्ट आता है फैसिलिटेट्स चेंज एंड अडॉप्टेबल देखिए कई बार जब हमारा एक बार संविधान बन चुका है है ना 26 जनवरी 1950
को जब हमारा देश का संविधान लागू हो चुका है उसके बाद क्या होते है कि धीरे-धीरे कभी इकोनॉमिक रिफॉर्म्स आते हैं कभी किसी
तरह के रिफॉर्म्स आते हैं तो कई बार क्या होता है कि संविधान में अकॉर्डिंग टू द नीड ऑफ द नेशन नेशन की नीड को ध्यान में
रखते हुए कि कांस्टिट्यूशन में क्या करने पड़ते हैं अमेंडमेंट करने पड़ते हैं उसमें कुछ परिवर्तन करना पड़ता है जरूरत के
हिसाब से तो यही बात इसमें है कि फैसिलिटेट द चेंज एंड अडॉप्टेबल कि संविधान यह अधिकार देता है गवर्नमेंट को
कि आप उसमें अपने नेशन के नीड के हिसाब से परिवर्तन कर सकते हैं वो भी हम आगे पढ़ेंगे स्पेशल मेजॉरिटी की जरूरत पड़ती
है कभी सिंपल मेजॉरिटी की जरूरत पड़ती है अमेंडमेंट करने के लिए अभी आप लोगों ने देखा होगा जब लोकसभा का इलेक्शन हो रहा था
तो उसमें अपोजिशन जो है वो अ आरोप लगा रहे थे कि इनकी इतनी 400 पाच सीटें चली जाएंगी तो ये संविधान को बदलेंगे क्योंकि कई बार
क्या होता है अमेंड जो मेजर अमेंडमेंट होते हैं संविधान के अंदर उसमें बहुत ज्यादा मतलब एक स्पेशल मेजॉरिटी की जरूरत
पड़ती है आइए नेक्स्ट जो क्वेश्चन है बेटा दैट इज अ वेरी वेरी इंपोर्टेंट एकेटीयू 2021 22 22 23 एंड 23 24 में ये क्वेश्चन
पूछा गया है क्या कि हिस्टोरिकल बैकग्राउंड ऑफ दी कंसीट असेंबली जो संविधान सभा है उसकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
को समझते हैं समझते हैं इसको तो पहले ये समझते हैं जो कॉन्स्टिट्यूशन कांस्टीट्यूएंट असेंबली है इसका फॉर्मेशन
कब हुआ है ना इसके मेंबर्स कौन-कौन थे इसमें जो की पर्सन की पर्सनेलिटीज थी वो कौन-कौन थी और इसका हम टाइमलाइंस देखेंगे
सबसे पहले देखते हैं एस्टेब्लिश अंडर दिस कैबिनेट मिशन प्लान ऑफ 1946 जो 1946 का कैबिनेट मिशन प्लान था ठीक है ना कैबिनेट
मिशन प्लान था उसके तहत इसका फॉर्मेशन हुआ इसका गठन हुआ किसका कांस्टीट्यूएंट असेंबली का मेंबर्स वर इलेक्टेड
इनडायरेक्टली बाय द प्रोविंशियल लेजिसलेच्योर 46 की बात हो रही है तो 1947 से पहले तो
ब्रिटिश है ना ब्रिटिश शासन था तो ब्रिटिश इंडिया था उसके पहले तो उस समय जो राज्य हुआ करते थे प्रोविंशियल
लेजिसलेच्योर हैं तो हम क्या करते हैं जैसे सांसद होते हैं जैसे विधायक हैं है ना एमपी एमएलएस
हैं तो उनको हम वोट करते हैं वो होता है डायरेक्ट इलेक्शन एक होता है इनडायरेक्ट इलेक्शन कि जब हम उनको वोट नहीं करते
हमारे चुने हमारे द्वारा चुने गए लोग हमारे द्वारा इलेक्टेड किए हुए जो हमारे प्रतिनिधि हैं जब वो किसी को अ मतलब किसी
को अपना मतलब एक मेंबर बना लेते हैं तो वो कहलाता है आपका इनडायरेक्ट इ इलेक्टेड इनडायरेक्टली नाउ
इसका जो कंपोजीशन की अगर मैं बात करूं कि कंसीट एंट असेंबली का जो कंपोजीशन था उसमें कितने मेंबर्स थे तो फर्स्ट वन
इनिशियली जो थे वो 389 मेंबर्स थे और ये टू इसमें 389 में से 292 में र्स ब्रिटिश प्रोविंसेस जो ब्रिटिश प्रांत जो पहले
ब्रिटिश के शासन में राज्य हुआ करते थे वहां से लिए गए थे 93 मेंबर्स फ्रॉम प्रिंसली स्टेट्स ये प्रिंसली स्टेट्स
क्या थी जो रियासतें थी है ना जैसे पहले रियासतें थी बहुत सारी कई कई स रियासत थी जैसे हैदराबाद थी है ना जूनागढ़ जम्मू एंड
कश्मीर इस तरह की जो रियासतें थी 93 मेंबर्स वहां से लिए गए थे एंड फोर मेंबर्स फ्रॉम चीफ कमिश्नर्स चीफ
कमिश्नर्स प्रोविंसेस आफ्टर द पार्टीशन जब पार्टीशन हुआ इंडिया का जब 1947 में कि जब दो ब्रिटिश इंडिया जब पहले हुआ करता था
फिर उसके दो पार्ट दो पार्ट दो दो पार्ट हो गए एक इंडिया और एक पाकिस्तान तो ये 389 से घट कर के मेंबर कितने रह गए इस
असेंबली में 299 मेंबर्स क्योंकि जो जो मेंबर्स पाकिस्तान के हिस्से के थे वो वहां से अलग हो गए नाउ की पर्सनेलिटीज की
अगर हम बात करें तो डॉक राजेंद्र प्रसाद जो थे वो चेयर पर्सन थे चेयरमैन थे ऑफ द कंसीट असेंबली संविधान सभा के अध्यक्ष थे
डॉक्टर भीमराव अंबेडकर ये चेयरमैन थे ड्राफ्टिंग कमेटी के जो एक जब संविधान तैयार किया जा रहा था क्योंकि ये जो
असेंबली थी इसका काम ही क्या था संविधान को तैयार करना कि और भी बहुत सारे काम थे हम आगे देखेंगे तो संविधान को जब तैयार कर
रहे थे तो संविधान क्या एक ड्राफ्टिंग कमेटी बनाई गई थी संविधान को तैयार करने के लिए तो उसके जो चेयरमैन थे डॉक्टर
भीमराव अंबेडकर एच सी मुखर्जी वाइस चेयरमैन थे कांस्टीट्यूएंट असेंबली के नाउ थोड़ा सा एक टाइमलाइंस की अगर हम बात करें
तो इसकी जो इसको इसकी जो कांस्टेंट असेंबली की जो फर्स्ट मीटिंग हुई थी वो नाइंथ ऑफ दिसंबर 1946 में हुई
कांस्टिट्यूशन अडॉप्टेड कि जो हमारा संविधान है 26 जनवरी 1947 को भाई ये जो असेंबली थी यही तो इसको तैयार कर रही थी
तो 26 जनवरी 1949 को ध्यान देना कि 26 जनवरी 1949 को कांस्टिट्यूशन जो है वो अडॉप्ट कर लिया गया था एंड कांस्टिट्यूशन
एनफोर्सड मतलब यह लागू कर दिया गया था एंफोर्स कर दिया गया था नेक्ट कर दिया गया था कि 26 जनवरी 1950 को और संविधान को
बनाने में 2 साल 11 महीने और 18 दिन का समय लगा था ू इयर्स 11 मंथ्स एंड 18 डेज ठीक है चलिए आगे बढ़ते हैं तो ये आपको समझ
में आ गया कि कांस्टेंट असेंबली के बारे में आपने यहां पर देख लिया इट वाज अ इट इज अ वेरी इंपोर्टेंट क्वेश्चन कई बार
एकेटीयू एग्जाम में पूछा जा चुका है अब देखिए यही अगर शॉर्ट क्वेश्चन में आपसे टू मार्क्स में अगर पूछा जाएगा तो आप लिख
सकते हैं बड़े आराम से मोर देन सफिशिएंट यहां पर इस स्लाइड में लिखा हुआ है और अगर मान लीजिए यही क्वेश्चन लॉन्ग आपसे पूछ
लिया जाता है तो अब आप बीटेक थर्ड ईयर के स्टूडेंट्स हैं आप किस तरह से अपनी आंसर शीट को भर के आते हैं वो आप सब सीख गए
होंगे है ना कई बार तो क्या होता है कि अगर कोई क्वेश्चन नहीं भी आ रहा होता है किसी को दो-तीन कीवर्ड्स अगर किसी अगल-बगल
से मिल जाए तो दो-तीन कीवर्ड्स से आप जो है आंसर शीट को भरने का काम करते हो लेकिन यहां तो आपको एकदम पूरा हाईलाइट मैं दे
रहा हूं ठीक है ना ताकि आपको लोड भी ना लगे और आपको बेसिक अंडरस्टैंडिंग में हो जाए सब्जेक्ट की कॉन्फिडेंस बढ़ता है ठीक
है क्योंकि आपके ये करिकुलम का पार्ट है ठीक है इग्नोर नहीं कर सकते आप इसको नाउ द फंक्शंस ऑफ कंसंट असेंबली ये जो हमने
कांस्टीट्यूएंट असेंबली पढ़ी है यहां पे संविधान सभा पढ़ी है इसके फंक्शन क्या थे इसके काम क्या थे ध्यान दीजिएगा सबसे पहले
ड्राफ्टिंग ऑफ द कॉन्स्टिट्यूशन कि भाई जब हमको पता था कि हमारा देश अब आजाद होने जा रहा है 1947 को तो संविधान अपना अपना
संविधान बनाना था किसको इंडिया को अपना संविधान बनाना था और पाकिस्तान को अपना अलग संविधान बनाना था तो इसका एक तो यह था
कि ड्राफ्टिंग द कॉन्स्टिट्यूशन अपना अपना संविधान तैयार करना होगा डिबेटिंग द प्रोविजन ऑफ द कांस्टिट्यूशन संविधान के
प्रावधानों पर कि भाई जो भी उसमें जो भी टॉपिक्स आए उसपे चर्चा करी जाएगी उसपे डिबेट करी जाएगी नेक्स्ट है इंटीग्रेटिंग
द प्रिंसली स्टेट्स जो रियासतें थी उनका एकीकरण करना बहुत सारी रियासतें थी उनको मिलाना था एकीकरण करना था यह काम भी किसका
था इसमें सरदार वल्लभ भाई सरदार वल्लभ भाई पटेल और पंडित जवाहरलाल नेहरू और भी कई लोग थे जिनको ये जो इसको मतलब काम था कि
रियासतों को मिलाना एस्टेब्लिशिंग द फंडामेंटल राइट फंडामेंटल राइट को एस्टेब्लिश करना था अ प्रोवाइड अ
फ्रेमवर्क फॉर द गवर्नेंस कि गवर्नमेंट जो है वो किस तरह से काम करेगी फ्रेमवर्क बनाना था इंश्योरिटी सोशल
जस्टिस जो है वो सोशल जस्टिस के प्रावधान इसके अंदर डालने थे क्रिएटिंग द अमेंडमेंट प्रोसेस कि अगर मान लीजिए आने वाले टाइम
में अमेंडमेंट की जरूरत पड़ेगी और पड़ती ही है नो डाउट कि किसी भी काम को हम कर रहे होते हैं जब हम एक प्लान तैयार करते
हैं उसके बाद उसमें कुछ ना कुछ बदलाव करना पड़ता है जरूरत के हिसाब से तो उसका क्या प्रोसेस रहेगा अमेंडमेंट का वो इनको तैयार
करना था एंड प्रिपेयरिंग फॉर द पार्टीशन क्योंकि विभाजन होना था इंडिया और पाकिस्तान को अलग-अलग होना था तो उसकी अलग
होने की जो तैयारियां थी वो भी इनका ही काम था नाउ इसी के अंदर ये भी इसका इन्होंने जो कंसंट असेंबली है इन्होंने और
क्या किया था कि जैसे हमारा यू नो नेशनल एंथम है जनगणमन तो जो कि लिखा था किसने यू नो रविंद्रनाथ टैगोर ने लिखा था इनको ये
भी अडॉप्ट किया गया था इसी असेंबली के द्वारा कब अडॉप्ट किया गया था 24th ऑफ जनवरी 1950 यानी कि 26 जनवरी 1950 को जब
हमारा देश लागू हुआ था उसके दो दिन पहले 24 जनवरी 1950 को जनगण मन एज अ थल एज अ नेशनल एंथम जो है ये अडॉप्ट कर लिया गया
था टू डेज बिफोर द जो हमारा जो कांस्टीट्यूशन है जब केम इन टू द इफेक्ट ओके दो दिन पहले ड्यूरेशन कितना है इसका
आप सभी जानते होंगे 52 सेकंड का हमारा ये नेशनल एंथम है जनगणमन देन उसके बाद इसी दिन जो वंदे मातरम है जो हमारा नेशनल
सॉन्ग है इसको भी अडॉप्ट किया गया था इसी कमेटी के द्वारा है ना और इसको किसने लिखा था बंकिम चंद्र चटर्जी बंकिम चंद्र चटर्जी
ने ठीक है संस्कृत में और बंगाली में पहले लिखा गया था उसके बाद ये कई और लैंग्वेज में आया तो ये कुछ हाईलाइट मैंने दे दी
हैं व्हाट आर द फंक्शंस ऑफ कंसीट असेंबली नेक्स्ट आता है अगेन अ वेरी इंपोर्टेंट क्वेश्चन गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट यू नो
गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट 1935 एंड इंडियन इंडिपेंडेंस एक्ट 1947 तो ये क्वेश्चन अलग-अलग आता है एक तो ये वाला एक्ट आपसे
पूछा जाएगा इंडिया एक्ट 1935 और अलग से ये क्वेश्चन पूछा जाता है इंडियन एक्ट अ इंडियन इंडिपेंडेंस एक्ट 1947 और कई बार
इनको एक साथ पूछ लेता है एटय 2020 21 22 23 और 23 24 में ये क्वेश्चन आपसे पूछा गया था ठीक है तो एक्चुअली जब पहले
ब्रिटिश इंडिया था जब पहले ब्रिटिश इंडिया की बात हो रही थी तो ध्यान देना कि जो 1935 वाला एक्ट है यह ब्रिटिश
पार्लियामेंट के द्वारा पास किया गया सबसे बड़ा एक्ट था ये सबसे बड़ा एक्ट था और इसमें बहुत सारी चीजें अच्छी भी थी है ना
और इसमें से जो 1935 वाला एक्ट है इसमें से जो कुछ फीचर्स थे जब हमारा देश आजाद हुआ था हमारे संविधान में
19 यू नो 26 जनवरी 1950 26 जनवरी 1950 वाला जो हमारा संविधान है उसमें भी इस वाले एक्ट के कुछ फीचर्स वहां पर आपको
देखने के लिए मिलते हैं चलिए आगे बढ़ते हैं तो सबसे पहले हम समझते हैं गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट 1935 हम पहले 1935 की बात
करेंगे और उसके बाद नेक्स्ट स्लाइड में हम बेटा बात करेंगे 1947 की देखिए ये भी क्वेश्चन कई बार आया हुआ है चलिए समझते
हैं भारत सरकार अधिनियम 1935 द गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट 1935 वाज द लांगेस्ट एक्ट ये सबसे बड़ा
एक्ट था पास्ड बाय द ब्रिटिश पार्लियामेंट एंड लेड द फाउंडेशन फॉर द फेडरल स्ट्रक्चर इन इंडिया जो पावर ट्रांसफर हो होने वाली
थी पावर ट्रांसफर होने वाली थी ब्रिटिश से किस में जो हमारी इंडियन गवर्नमेंट को पावर ट्रांसफर होनी थी उसके लिए सबसे बड़ा
इंपोर्टेंट एक्ट था सबसे बड़ा एक्ट था इंपोर्टेंट एक्ट था मेनी ऑफ इट्स फीचर इस एक्ट के बहुत सारे फीचर्स जो है बाद में
इनकॉरपोरेट कर दिए गए इन द इंडियन कांस्टिट्यूशन इंडियन कॉन्स्टिट्यूशन ऑफ 1950 जरा ध्यान
दीजिएगा कि जो 1935 वाला एक्ट है इसके कौन-कौन से मेन फीचर्स हैं फर्स्ट वन प्रोविंशियल ऑटोनॉमी मतलब प्रोविंसेस वर
ग्रांटेड ऑटोनॉमी इन देयर एडमिनिस्ट्रेशन कि जो ब्रिटिश सरकार के समय जो प्रांत थे उस समय के जो राज्य थे उनको पावर उनको
अधिकार था अधिकार दिया गया था ठीक है उनको जो है एडमिनिस्ट्रेशन में उनकी पार्टिसिपेशन बढ़ा दी गई थी गवर्नर्स एक्ट
एज द कांस्टीट्यूशनल हेड बट सर्टेन स्पेशल पावर्स मतलब यह था कि भाई पावर तो उनको दे दी गई थी एडमिनिस्ट्रेशन के लिए लेकिन फिर
भी ब्रिटिश सरकार का एकएक गवर्नर उनको था कि ताकि संविधान को वो संविधान को देखता था जो उस समय के रूल्स थे जो
कांस्टिट्यूशन था कि उसमें कुछ अमेंडमेंट तो नहीं करना है या उसमें किसी उसका पालन हो रहा है कि नहीं हो रहा है वो देखने के
लिए बाय कैमरल बाय कैमरल लेजिसलेशन यहां पर द्विसदनीय विधायिका का फॉर्मेशन हुआ था जैसे लोअर हाउस एंड अपर हाउस है ना
सेंट्रल लेवल पे सेंट्रल लेवल ध्यान देना कि उस समय ब्रिटिश सरकार में 1935 के अंदर क्या प्रोविजन कर दिया था कि दो हाउस बना
दिए गए थे एक लोअर हाउस एक अपर हाउस है ना एक फेडरल असेंबली दूसरा काउंसिल ऑफ स्टेट्स राज्य परिषद और फेडरल असेंबली आज
की डेट में भी अगर आप देखेंगे जो हमारा आज का इंडिया है तो उसमें भी ये जो है आज भी हमारे पास क्या है दो सेंट्रल लेवल पे
हमारे पास लोकसभा है और राज्यसभा है है ना एक अपर हाउस है एक लोअर हाउस है जो लोकसभा है लोअर हाउस राज्यसभा अप हाउस तो बिल्कुल
कुछ ऐसा आज भी आपको देखने के लिए मिलेगा तभी मैं कह रहा हूं कि जो 1935 वाला एक्ट था इसके कई सारे फीचर्स जो है आज भी हमारे
संविधान में देखने को मिलते हैं नेक्स्ट जो फीचर है इसका डिवीजन ऑफ पावर पावर का डिवीजन कर दिया गया था पावर्स वर डिवाइडेड
बिटवीन द सेंटर एंड प्रोविंसेस जो उस समय प्रोविंसेस से प्रांत हुआ करते थे इन थ्री लिस्ट तीन लिस्ट में बांट दिया गया है ना
फेडरल लिस्ट एक संघ सूची है फेडरलिस्ट इसमें वो सब्जेक्ट्स या वो मैटर्स आते थे जो मतलब इस सूची के अंदर वो सभी मैटर्स थे
जो किसके कंट्रोल में थे किसके अंडर में आते थे सेंट्रल गवर्नमेंट के ठीक है दूसरा है प्रोविंशियल लिस्ट यानी कि प्रांतीय
सूची ये वो थे जो सब्जेक्ट्स थे जो जो प्रोविंशियल स्टेट्स के अंदर आते थे जो राज्य थे प्रोविन है ना तीसरा आता है
कॉन्करेंट लिस्ट ये वो मैटर्स हैं या वो सब्जेक्ट्स हैं जो शेयर्ड बाय बोथ यानी कि किसके अंडर में आएंगे ये केंद्र सरकार के
और जैसे आज भी अगर आप देखेंगे तो ये आज भी लिस्ट है आज भी है कि भाई बहुत सारे टॉपिक्स ऐसे आज भी हैं जो केंद्र सरकार के
अंडर में आते हैं कुछ राज्य सरकार के अंडर में आते हैं और कुछ ऐसे भी हैं जो राज्य सरकार और केंद्र सरकार दोनों के अंडर में
आते हैं ठीक है जैसे एजुकेशन है एजुकेशन किस में है सेंट्रल गवर्नमेंट का भी है और ये राज्य सरकारों का आज की डेट में भी है
तो ये आज की डेट में भी चल रहा है बस थोड़ा सा नाम बदल दिए गए हैं नेक्स्ट जो फीचर आता है इसका फेडरल कोर्ट
इस्टैब्लिशमेंट कि एक कोर्ट का इस्टैब्लिशमेंट कर दिया गया था कि सेंटर में और स्टेट में यानी कि जो उस समय के
प्रोविंसेस थे है ना प्रोविंशियल थे प्रोविंशियल जो थे उस समय के और केंद्र सेंटर में जो भी डिस्प्यूट्स होंगे उनको
सुलझाने के लिए कौन इसके लिए कोर्ट एस्टेब्लिश कर दिया गया था प्रपोज्ड ऑल इंडिया फेडरल अ फेडरेशन तो प्रपोज्ड अ
फेडरेशन कंप्रा इजिंग प्रिंसली स्टेट्स एंड ब्रिटिश प्रोविंसेस एंड दिस फीचर वाज नेवर इंप्लीमेंटेड एज प्रिंसली स्टेट्स
डिड नॉट जॉइन मतलब एक ऑल इंडिया फेडरेशन बनाया गया था जिसमें ये कहा गया था कि जो प्रिंसली स्टेट्स थे जो रियासतें थी उनको
जो है मिलाया जाए लेकिन ये इंप्लीमेंट हो नहीं पाया था उस समय तक क्योंकि प्रिंसली स्टेट्स राजी नहीं थे ये मानने के लिए वो
वो इंडिपेंडेंट इंडिपेंडेंट रहना चाहते थे सेपरेट इलेक्टोरेट्स यहां पर एक जो मतलब एक अ जो कंटिन्यू द प्रोविजंस फॉर द
सेपरेट इलेक्टोरेट्स फॉर द कम्युनिटीज लाइक मुस्लिम सिख एंड अदर्स जैसे कुछ कम्युनिटीज हैं मुस्लिम है सिख हैं तो वो
अपने-अपने प्रतिनिधि अपने-अपने रिप्रेजेंटेटिव चुनने का उनको अधिकार था लेकिन सभी लोग वोट नहीं कर पाते थे यहां
पे ध्यान दीजिएगा उस समय ब्रिटिश सरकार के टाइम सभी लोग वोट नहीं कर पाते थे और ध्यान दीजिएगा 1935 के अंदर और क्या क्या
किया गया एक्सपेंशन ऑफ फ्रेंचाइजिंग का विस्तार मतलब जो वोट डालने वाले लोगों की संख्या थी उनको बढ़ा दिया गया लेकिन अभी
भी 10 पर से ज्यादा लोग मतदान नहीं कर सकते टोटल पॉपुलेशन का केवल 10 पर लोग ही मतदान कर सकते थे सोचिए 1935 में तो 1935
से पहले तो 10 पर से भी कम लोगों को अधिकार था वोट डालने का तो लिखा है द राइट टू वोट वाज एक्सपेंडेड वोट डालने का जो
अधिकार था उसको बढ़ाया गया बट स्टिल लिमिटेड टू अबाउट 10 पर अभी भी 10 पर से 10 पर तक ही रखा गया और ये 10 पर कौन लोग
थे जो वोट कर सकते थे ये यू नो बेस्ड ऑन द प्रॉपर्टी प्रॉपर्टी के बेस पे जिसके पास प्रॉपर्टी ज्यादा होगी वोट कर सकता है
एजुकेशन के बेसिस पे जो एजुकेट अब आप सोच सकते हैं कि उस टाइम एजुकेशन का क्या हाल रहा होगा तो जो एजुकेशन के बेस पे वोटिंग
करनी होती थी देन टैक्स क्वालिफिकेशन के आधार पे जो ज्यादा टैक्स देगा वो वोट कर पाएगा नेक्स्ट एक और इसमें देखिए
इंपॉर्टेंट चीज रही 1935 के अंदर कि रिजर्व बैंक ऑफ रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की स्थापना हुई उस समय द एक्ट लेड टू दी
क्रिएशन ऑफ रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया इन 1935 1935 में इस एक्ट के माध्यम से ही रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की स्थापना हुई थी जो
बैंकिंग को और करेंसी को रेगुलेट करता था और ये आज भी है ये आज भी चल रहा है नाउ फेडरल पर ध्यान दीजिएगा कि 1935 की देखो
हम क्या बात कर रहे हैं हम बात कर रहे हैं यहां पर कि जो 1935 वाला एक्ट है उसकी यहां पर बात चल रही है उसके क्या-क्या
फीचर्स थे तो रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की स्थापना हो गई देन फेडरल पब्लिक सर्विस कमीशन उसी समय जो सिविल सर्वेंट थे उनको
अपॉइंट्स करने के लिए उनके सर्विस के लिए एक स्थापना हुई किसकी फेडरल पब्लिक कमीशन की और आज ही किस नाम से जाना जाता है तो
यूपीएससी है ना यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन आज की डेट में इसका नाम क्या है यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन जिसके माध्यम
से सिविल सर्वेंट को अपॉइंट्स सर्विस कमीशन वाज एस्टेब्लिश फॉर द रिक्रूटमेंट एंड सर्विस मैटर ऑफ द सिविल
सर्वेंट तो सिविल सर्वेंट के लिए अभी क्या है हमारे देश में यूपीएससी है दैट इज यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन पहले क्या हुआ
करता था फेडरल पब्लिक सर्विस कमीशन नाउ द कम्युलस मेंटेशन तो जो कम्युनिटी होती है अलग-अलग उनके रिप्रेजेंटेटिव हुआ करते थे
और है ना जैसे अ इंडस्ट्रियलिस्ट हैं है ना या लेबर्स हैं ये अपने-अपने रिप्रेजेंटेटिव को अ मतलब उनको जो अपना
अपना प्रतिनिधि चुन सकते थे और आज की डेट में भी जो है इस इसकी वजह से क्या हो रहा था जो अलग-अलग कम्युनिटी की वजह से जो
प्रतिनिधि बनते हैं जो रिप्रेजेंटेटिव बनते हैं तो उसकी वजह से कहीं ना कहीं जो है सांप्रदायिकता बढ़ती है और वो आज भी
आपको देखने को मिलती है तो नाउ द नेक्स्ट इज अब हमने 1935 पढ़ लिया बेटा अब हम पढ़ने जा रहे हैं इंडियन इंडिपेंडेंस एक्ट
1947 कि हमारा देश जब आजाद हुआ 1947 में तो तब क्या-क्या चीजें हुई इस एक्ट के माध्यम से क्या-क्या चीजें पास
हुई तो ध्यान दीजिएगा ध्यान देना द इंडियन इंडिपेंडेंस एक्ट 1947 वाज द लीगल फ्रेमवर्क दैट
फैसिलिटेटेड द ट्रांजीशन ऑफ इंडिया एंड पाकिस्तान फ्रॉम ब्रिटिश कॉलोनी टू इंडिपेंडेंट सोवन नेशंस मतलब 1947 में
1947 में हमारे देश जो है व आजाद हुआ ब्रिटिश सरकार का जो कंट्रोल था वो खत्म हो गया था यहां पे एंड ऑफ द ब्रिटिश
गवर्नमेंट ठीक है तो यहां से हमको दो न नेशंस मिले अपना इंडिया भारत और दूसरा पाकिस्तान इन 1947 इट वाज अ टर्निंग पॉइंट
इन द हिस्ट्री ऑफ साउथ एशिया साउथ एशिया की हिस्ट्री में ये एक टर्निंग पॉइंट था ठीक है नाउ तो सबसे पहला जो फीचर आएगा
इसका 1947 का एंड ऑफ द ब्रिटिश रूल ब्रिटिश रूल का अंत हुआ द एक्ट डिक्लेयर्ड इंडिया एज इंडिपेंडेंट एंड सोवन नेशन
फ्रॉम द 15th ऑफ अगस्त 1947 इट एंडेड द ब्रिटिश कंट्रोल ओवर द इंडिया 1947 में ब्रिटिश का जो कंट्रोल हो गया कंट्रोल जो
है व खत्म हो गया ओवर दी इंडिया ना पार्टिजन ऑफ इंडिया और क्या हुआ था 1947 में पार्टिजन हुआ किसका इंडिया का
पार्टिजन हुआ जो ब्रिटिश इंडिया था पहले उसका पार्टिजन हो गया तो डिवाइडेड ब्रिटिश इंडिया इनटू टू इंडिपेंडेंट डोमिनियंस अरे
1947 से पहले इंडिया क्या कहलाता था ये ब्रिटिश इंडिया अब ब्रिटिश इंडिया के दो डोमिनियंस बन गए एक कौन सा इंडिया भारत
दूसरा पाकिस्तान ठीक है तो प्रोविंसेस अब इसके अलावा कुछ रियासतें भी थी वहां पे तो प्रोविंसेस लाइक पंजाब बंगाल व पार्टिजन
बेस्ड ऑन द रिलीज अब देखिए जो यहां पर जो पार्टीशन हुआ था इसमें एक इंपॉर्टेंट रोल किसका रहा है लॉर्ड माउंट बेटन सबने नाम
सुना होगा उसकी रिस्पांसिबिलिटी थी इसको किस तरह से कराया जाए है ना भाई एक तो असेंबली बन गई थी उस असेंबली को जैसे
उसमें कौन थे बहुत सारे लोग थे आपके सरदार वल्लभ भाई पटेल है ना यू नो भीमराव अंबेडकर ऐसी बहुत सारी कीपर्स
थी उनके साथ कौन थे लॉर्ड माउंट बेटन तो लॉर्ड माउंट बेटन प्लान आया था उसके तहत क्या करना था कि ये दो ऑब्जेक्टिव थे उसके
मेन एक तो ब्रिटिश इंडिया को जो दो भाग होने उनको बंटवारा करना इंडिया और पाकिस्तान ये किस बहे किस बिहाव पे होने
वाला था कि जहां पर पॉपुलेशन मुस्लिम की ज्यादा होगी वो पाकिस्तान का हिस्सा बनेंगे और जहां पर हिंदू की पॉपुलेशन
ज्यादा होगी वो इंडिया का हिस्सा बनेंगे ठीक है तो वो फिर लॉर्ड माउंट बेटन प्लान को पास करने के लिए एक कानून बनाया गया था
1940 7 ठीक है चलिए और देखते हैं और क्या इसके फीचर्स थे 1947 के क्रिएशन ऑफ कंटेंट असेंबली कि कांस्टीट्यूएंट असेंबली जो हम
पढ़ चुके हैं अभी पहले इसने क्या करा इसी प्लान के तहत जो कांस्टीट्यूशनल अस असेंबली है उसका क्रिएशन किया गया इसके
असेंबली के हम जो फंक्शन है वो भी पढ़ चुके हैं कि भाई जब हम ईच डोमिनियन जो ईच डोमिनियन थे जो दो बन गए थे इंडिया और
पाकिस्तान वाज हैव टू इट्स ओन कॉन्टेंट असेंबली इन दोनों की अपनी-अपनी कंटेंट असेंबली होगी वो अपना-अपना संविधान बना
सकते हैं अपने-अपने रूल्स बना सकते हैं कि देश को कैसे चलाना है प्रिंसली स्टेट्स की यहां पर देखिए बात हुई प्रिंसली स्टेट्स
मैंने बताया था आपको जो रियासतें थी इनको विकल्प दिया गया था इनको ऑप्शन दिया गया था कि जो पहले इंडिपेंडेंट थी ना जो
रियासतें थी जैसे जूनागढ़ हो गया नाम सुना होगा आपने हैदराबाद हो गया जम्मू एंड कश्मीर हो गया जयपुर हो गया भोपाल हो गया
ये क्या थे इनके इनके अपने नवाब हुआ करते थे जैसे हैदराबाद का नवाब था निजाम है ना तो ऐसी राजा महाराजा हुआ करते थे तो ये जो
राजा महाराजा थे ना जिनकी प्रिंसली स्टेट्स थी इनको ऑप्शन दिया गया कि या तो आप इंडिया जवाइन कर लीजिए या तो आप
पाकिस्तान जवाइन कर लीजिए ये या फिर आप इंडिपेंडेंट भी रह सकते हैं या फिर आप इंडिपेंडेंट भी रह सकते हैं 1947 में तो
ज्यादातर तो जो थे वो इंडिया के साथ आना चाहते थे और इंडिया के साथ मिल गए थे कुछ एक जो है वो पाकिस्तान की तरफ चले गए थे
लेकिन कुछ थे जो इंडिपेंडेंट रहना चाहते थे कुछ रियासतें ऐसी थी जो इंडिपेंडेंट रहना चाहती थी जो हाईलाइट भी हुई बाद में
हैदराबाद तो बाद में जो कुछ नहीं मिलना चाह रहे थे उसके बाद कुछ जो है अलग-अलग तरीके से कुछ मतलब कुछ स्पेशल ट्रीटमेंट
दिया गया उनको कि भाई आ जाओ आप इंडिया मिल जाओ या फिर जो नहीं मान रहे थे थोड़ा सा सरदार वल्लभ भाई पटेल ने आप सभी जानते
होंगे कई आपने वेब सीरीज या मूवी में देखा भी हो लाठी के दम प उन्होंने मिलाने का प्रयास किया था जम्मू एंड कश्मीर देखो आज
तक भी जो है कोशिश कर रहा है इंडिपेंडेंट रहने की लेकिन वो नामुमकिन जैसा हो गया है ठीक है चलिए का तो प्रिंसली स्टेट्स को
ऑप्शन दिए गए थे या तो वो इंडिया जवाइन करें या पाकिस्तान को जवाइन करें या फिर वो इंडिपेंडेंट भी रह सकते हैं लेकिन
इंडिपेंडेंट उनको रहने दिया नहीं है ले नेक्स्ट जो फीचर आता है लेजिस्लेटिव पावर्स यानी कि द ब्रिटिश पार्लियामेंट
हैड नो अथॉरिटी अब ब्रिटिश पार्लियामेंट के पास कोई भी अथॉरिटी नहीं थी ओवर द डोमिनियन आफ्टर 15th ऑफ अगस्त 1947 15
अगस्त 1947 के बाद ब्रिटिश पार्लियामेंट का कोई भी कंट्रोल नहीं रहेगा दोनों डोमिन के ऊपर इंडिया और पाकिस्तान के ऊपर एंड
बोथ द डोमिनेंस वर ग्रांटेड टू पावर द मेक देयर ओन लॉज अपने वो नियम बना सकते थे अपना संविधान बना सकते थे गवर्नर जनरल ईच
डोमिनियन वुड हैव इट्स ओन गवर्नर जन गवर्नर जनरल क्योंकि अभी तक क्योंकि संविधान तो बना नहीं है अभी तक क्या नहीं
बना है संविधान नहीं बना है तो तब तक जो है अपने अपने जो है डोमिनियन के क्या रहेंगे गवर्नर जनरल रहेंगे टर्मिनेशन ऑफ
एग्रीमेंट्स 19 1947 में क्या हो गया था कि जो भी ब्रिटिश गवर्नमेंट की और मतलब जो भी
अ वो थे क्या नाम है एग्रीमेंट्स थे उनको सब जो है वो उनका ट उनको टर्मिनेट कर दिया गया था ऑल एसिस्टिंग
ट्रीटीज एंड जो संध्या थी ट्रीटी होता संध्या एंड एग्रीमेंट्स बिटवीन द ब्रिटिश क्राउन एंड द प्रिंसली स्टेट्स जो
प्रिंसली स्टेट्स थे जो रियासतें थी भाई जैसे ब्रिटिश गवर्नमेंट थी है ना ब्रिटिश क्राउन और जो आपके प्रिंसली स्टेट थ जो
रियासत थी उनके बीच में कुछ संधिया थी कुछ ट्रीटमेंट थे कुछ जो है उन्होंने कुछ बनाया हुआ था कि हम ऐसे करेंगे मतलब होता
है ना पार्टनरशिप टाइप की तो वो सब खत्म कर दी गई थी ठीक है नेक्स्ट आता है आपका ये बात हो गई तो मैंने आपको बता दिया बेटा
दोनों इंपॉर्टेंट टॉपिक थे 1935 वाला एक्ट इंपॉर्टेंट है उसके बाद 19 47 वाला जो है एक्ट वो भी क्या था इंपॉर्टेंट था नाउ द
इंफोर्समेंट ऑफ दी कांस्टिट्यूशन अब 1935 के बाद 1947 आया तो 1947 में तो 1947 से लेकर के 1950 तक क्या हुआ ये जो कांस्टेंट
असेंबली बनी थी उसने संविधान को बना कर के तैयार कर दिया तो अब हमारा देश संविधान के हिसाब से चलेगा और ध्यान न रखिएगा कि जो
हमारा संविधान है ये जो इंफोर्समेंट है है ना इंफोर्समेंट ऑफ द कॉन्स्टिट्यूशन कब कब हुआ तो पहली बात तो ध्यान रखो एडॉप्शन कब
उसको अपनाया गया जो हमारा संविधान था द कॉन्स्टिट्यूशन वाज अडॉप्टेड ऑन 26th ऑफ नवंबर 1949 26 जनवरी 1949 में ये अडॉप्ट
कर लिया गया एंड दिस डे इज सेलिब्रेटेड एज द कॉन्स्टिट्यूशन डे और इसको हम कांस्टिट्यूशन डे संविधान दिवस के रूप में
सेलिब्रेट करते हैं इंफोर्समेंट कब उसको लागू किया गया एनफोर्सड ऑन 26 ऑफ जनवरी 1950 26 जनवरी 1950 को य देश का संविधान
लागू कर दिया गया एंड दिस वाज से दिस वाज दिस डेट वाज चोजन टू ऑनर द पूर्ण स्वराज रेजोल्यूशन पास्ड इन 1930 जो 1930 में
पूर्ण स्वराज रेजोल्यूशन पास हुआ था ये उसको सेलिब्रेट मतलब अब यहां पर जाकर के हम 26 जनवरी 1950 को वो हमको पूरी आजादी
मिली है सिग्निफिकेंट ऑफ रिपब्लिक डे इसका सिग्निफिकेंट क्या है अब जब 26 जनवरी 1950 को हमारा देश का संविधान जब लागू ला हो
चुका था तो इंडिया बिकम द रिपब्लिक अब हमारा इंडिया जो है वो रिपब्लिक है एंड द प्रेसिडेंट जो है हमारे देश का जो
राष्ट्रपति है बिकम द हेड ऑफ द स्टेट वो हमारे देश का हमारे स्टेट का क्या होगा हेड होगा द ट्रांजीशन फ्रॉम द गवर्नमेंट
ऑफ इंडिया एक्ट 1935 टू द इंडियन कॉन्स्टिट्यूशन वाज कंप्लीटेड ठीक है चलिए आगे बढ़ते हैं नेक्स्ट आता है इंडिया
इंडियन कॉन्स्टिट्यूशन एंड इट्स फीचर जो इंडियन कांस्टिट्यूशन है उसके फीचर्स क्या है व्हाट आर द फीचर्स एंड अगेन इट इज
इंपोर्टेंट क्वेश्चन ये पहले भी कई बार पूछा जा चुका है तो पहला जो फीचर है हमारे संविधान का लेंथीएस्ट रिटन कांस्टिट्यूशन
ये वर्ल्ड का सबसे बड़ा रिटन डॉक्यूमेंट है एक रिटन संविधान है रिटन कांस्टिट्यूशन है कांट ठीक है ना कॉन्स्टिट्यूशन है
इंडिया देखो लिखा है द इंडियन कॉन्स्टिट्यूशन इज द लोंगे लांगेस्ट रिटन कॉन्स्टिट्यूशन इन वर्ल्ड इट कंटेंस
448 आर्टिकल्स हैं 25 पार्ट्स हैं एंड 12 शेड्यूल है पहले ओरिजनली 395 आर्टिक से ये लिखा हुआ है इतना यहां पे ठीक है नाउ द
दूसरा जो इंपॉर्टेंट है इसका फीचर कि जो हमारा संविधान है वो सोवन है इंडिया इज इंडिपेंडेंट इन मेकिंग इट्स डिसीजन मतलब
ध्यान रखना सोवन का मतलब क्या होता है सोवन का मतलब है कि जो इंडिया है वो इंडिपेंडेंट इन मेकिंग डिसीजन इंडिया अपने
डिसीजन अब खुद लेगा अब ब्रिटिश सरकार का यहां पर कंट्रोल खत्म है सोशलिस्ट है सोशलिस्ट मतलब प्रमोट सोशल एंड इकोनॉमिक
इक्वलिटी सेकुलर है है ना आप ये टर्म बहुत ज्यादा सुनते होंगे जब इलेक्शंस आते हैं तब तो और भी ज्यादा सुनते होंगे कि ऑल
रिलीजस आर ट्रीटेड इक्वली बाय स्टेट मतलब सेकुलर का मतलब है कि हमारे देश का कोई ऐसा मतलब मतलब कोई धर्म नहीं है कोई
रिलीजन नहीं है कि सभी रिलीजस को इक्वल माना गया है ठीक है अ लेकिन ये भी ध्यान रखना कि अपने-अपने धर्म को अपने-अपने
रिलीजस को प्रमोट भी कर सकते हैं वो आगे आएगा प्रमोट कर सकते हैं और किसी भी धर्म को आप मान सकते हैं डेमोक्रेटिक है
डेमोक्रेटिक का मतलब है कि पावर इज वेस्टेड इन द हैंड्स ऑफ द पीपल डेमोक्रेटिक मतलब लोकतांत्रिक जो हमारे जो
पावर है वो किसके हाथ में है जनता के हाथ में है क्योंकि जो जो जो भी गवर्नमेंट फॉर्म होती है वो जनता के द्वारा होती है
और जनता के लिए होती है ठीक है भाई आप एमपी एमएलए चुनते हो सरकारें बनती है तो वो आप ही तो चुनते हैं हम लोग सब चुनते
हैं उनको नेक्स्ट आता है आपका रिपब्लिक रिपब्लिक मतलब गणराज्य द हेड ऑफ द गणतंत्र का मतलब है गणराज्य का मतलब है रिपब्लिक
का मतलब है हेड ऑफ द स्टेट इज इलेक्टेड एंड नॉट यू नो हे हेरि मतलब वंशानुगत नहीं है
मतलब ऐसा नहीं कि राजा है कोई उसका बेटा ही राजा बनेगा तो कोई भी बन सकता है है ना कोई भी बन सकता है इलेक्ट किया जाता है
चुना जाता है है ना नेक्स्ट आता है आपका डायरेक्टिव प्रिंसिपल्स ऑफ स्टेट पॉलिसी ये क्या होते हैं डायरेक्ट डायरेक्टिव
प्रिंसिपल्स ऑफ स्टेट पॉलिसी ये गवर्नमेंट के लिए गाइडलाइंस होती हैं ताकि गवर्नमेंट जो है इनके हिसाब से इन प्रिंसिपल के
हिसाब से काम करें टू इंश्योर द वेलफेयर इकोनॉमिक जस्टिस करें सोशल इक्वलिटी है ना नॉट एनफोर्सेबल इन कोर्ट्स बट फंडामेंटल
इन द गवर्नेंस तो ये फंड ये जो होते हैं आपके डायरेक्टिव प्रिंसिपल्स होते हैं गाइडलाइंस होती है गवर्नमेंट के लिए कि वो
वेलफेयर के लिए काम करें तो ये हम क्या पढ़ रहे हैं बेटा इंडियन कांस्टिट्यूशन के फीचर्स पढ़ रहे हैं तो ये हो गया हमारा
नेक्स्ट आता है फोर्थ वन फेडरल स्ट्रक्चर विद यूनिटरी बायस द डिवीजन ऑफ पावर बिटवीन द सेंटर एंड स्टेट्स मतलब ये हुआ कि जो
हमारी पावर है जो हमारे संविधान के हिसाब से जो पावर है वो क्या हो गई डिस्ट्रीब्यूटर गई है सेंटर के पास भी है
और राज्यों के पास भी है इन टाइम ऑफ इमरजेंसी लेकिन ये ध्यान रखिएगा ये ध्यान रखिएगा इमरजेंसी के टाइम पे इमरजेंसी के
टाइम पे द सेंटर बिकम मोर पावरफुल रिफ्लेक्टिंग द यूनिटरी बायस ये दिखा रहा है कि फेडरल स्ट्रक्चर है फेडरल स्ट्रक्चर
का मतलब क्या हुआ कि जो पावर डिस्ट्रीब्यूटर है वो केंद्र के पास पावर है और कुछ पावर किसके पास है राज्यों के
पास है लेकिन ध्यान रखना अगर कोई इमरजेंसी अगर आती है अगर कोई इमरजेंसी आती है एट द टाइम ऑफ इमरजेंसी तो वो क्या पावर किसके
पास ज्यादा हो जाती है अभी भी ज्यादा रहती है इन जनरल भी ज्यादा रहती है लेकिन उस समय ज जो पावर्स होती हैं वो केंद्र सरकार
के पास चली जाती हैं जो कि दिखाता है कि यूनिटरी फीचर्स है संविधान का नेक्स्ट आता है इंडिपेंडेंट जुडिशरी कि इंडिया के पास
क्या है तो जुडिशरी जो है इंडिपेंडेंट है द जुडिशरी इज फ्री फ्रॉम इन्फ्लुएंस ऑफ द एग्जीक्यूटिव मैंने बताया था एग्जीक्यूटिव
क्या होती है जो कार्यपालिका होती है जो कानून को इंप्लीमेंट करवाती है उससे क्या होगी ये फ्री होगी एंड लेजिस्लेटर
लेजिसलेच्योर द सुप्रीम कोर्ट इज द गार्डियन ऑफ द कांस्टिट्यूशन कि भाई संविधान के हिसाब से
हर चीज होनी चाहिए उसका एक तरह सुप्रीम कोर्ट जो है वो संविधान का जो कांस्टिट्यूशन का क्या होता है गार्डियन
होता है सिंगल सिटीजनशिप संविधान के हिसाब से हमारा एक ही हमारे जो देश के अंदर एक सिटीजनशिप होती है ठीक है ऐसा नहीं कि
अलग-अलग राज्य है है ना राजस्थान की उत्तर प्रदेश की सिटीजनशिप नहीं होती एक ही होती है वो क्या है भारतीय नागरिक जैसे यूएसए
में क्या होता है यूएसए में क्या होता है कि दोदो सिटीजनशिप मिल जाती है ठीक है नाउ तो लिखा हु भी यहां पे इंडियन सिटीजंस आर
ग्रांटेड अ सिंगल सिटीजनशिप है ना भारतीय नागरिक अनलाइक कंट्रीज लाइक यूएसए जैसे यूएसए में क्या होता है कि दो सिटीजनशिप
मिल जाती है डुअल सिटीजन का कांसेप्ट होता है वहां पे यूनिवर्सल एडल्ट फ्रेंचाइजी सिटीजन अब 18 साल से ज्यादा का अगर कोई
व्यक्ति है तो वो वोट डाल सकता है यह भी संविधान अधिकार देता है फ्लेक्सिबल एंड रिजिंग मैंने बताया था आपको जब संविधान बन
चुका है भाई संविधान के अंदर ऐसा भी प्रोविजन दिया गया है कि आने वाले टाइम में अकॉर्डिंग टू द नीड ऑफ द नेशन नेशन की
ज के हिसाब से उसमें अमेंडमेंट भी किया जा सकता है और अमेंडमेंट का क्या प्रोसेस होता है उसको हम बाद में समझेंगे अभी
नेक्स्ट आता है आपका फंडामेंटल ड्यूटीज संविधान जो है वो हमको फंडामेंटल ड्यूटीज भी मतलब फंडामेंटल ड्यूटीज भी हैं और
फंडामेंटल राइट्स भी है इंट्रोड्यूस्ड इन 1976 थ्रू द एक्ट 4 सेकंड अमेंडमेंट के माध्यम से यहां पर क्या दिए गया आपको
फंडामेंटल ड्यूटीज हैं जैसे सिटीजंस आर एक्सपेक्टेड ये उम्मीद करी जाती है कि सिटीजंस हैं वो रेस्पेक्ट करें
कांस्टिट्यूशन की नेशनल फ्लैग की एंड प्रोटेक्ट द एनवायरमेंट एनवायरमेंट को प्रो प्रोटेक्ट करें पार्लियामेंट्री
सिस्टम ऑफ दी गवर्नमेंट है ना हमारा जो संसदीय प्रणाली है हमारे यहां पे तो इंडिया फॉलो पार्लियामेंट्री सिस्टम हम
पार्लियामेंट्री सिस्टम को फॉलो करते हैं वयर द प्रेसिडेंट इज द नॉमिनल हेड जो प्रेसिडेंट है उसको नॉमिनेट किया जाता है
जो कि हेड होता है स्टेट का देश का हेड होता है एंड प्राइम मिनिस्टर्स इज द रियल एग्जीक्यूटिव ये आप सभी जानते हैं कि जो
हमारे यहां जो हेड होता है स्टेट का जो हेड है देश का जो हेड है वो कौन है राष्ट्रपति प्रेसिडेंट ठीक है लेकिन जो जो
रियल पावर होती है वो प्राइम मिनिस्टर के पास होती है इमरजेंसी का प्रोविजन भी इसके अंदर डाला गया है आपातकालीन प्रावधान द
कांस्टिट्यूशन प्रोवाइड फॉर द इमरजेंसी लाइक नेशनल इमरजेंसी होती है दूसरा स्टेट इमरजेंसी एंड फाइनेंसियल इमरजेंसी तो
इमरजेंसी करके एक टॉपिक फिर से आएगा उधर मैं एक्सप्लेन कर दूंगा अदर वाइज आपकी बिना बात के वीडियो बहुत लंबी हो जाएगी इन
तीनों को मैं एक्सप्लेन करूंगा नेशनल इमरजेंसी स्टेट इमरजेंसी एंड फाइनेंसियल इमरजेंसी है ना जो स्टेट इमरजेंसी होती है
जैसे आपकी जो राज्य सरकार है राज्य सरकार में अगर कांस्टिट्यूशन का पालन नहीं हो रहा है कांस्टीट्यूशन को फॉलो नहीं हो जा
रहा है लॉ एंड ऑर्डर की व्यवस्था खराब लॉ एंड ऑर्डर जो है वो नहीं मेंटेन हो पा रहा है तो उस केस में राष्ट्रपति शासन लगाया
जाता है अभी देखेंगे हम बाद में इसको लेटर ऑन नेक्स्ट आता है आपका द प्रीमल ऑफ दी कांस्टिट्यूशन संविधान की प्रस्तावना तो
ध्यान देना इसके जो की एलिमेंट्स होते हैं प्रेमल के कौन-कौन से होते हैं सोवन सोवन का मतलब होता है कि इंडिया इज फ्री एंड
इंडिपेंडेंट नॉट अंडर द कंट्रोल ऑफ एनी एक्सटर्नल पावर सोवन का मतलब है कि कोई भी कंट्री जो है वो किसी के अंडर में नहीं है
वो खुद अपना कानून बनाएगी खुद अपने चीजें अपने आप देखेगी अपने डिसीजन खुद से लेगी बाह्य बाहरी जो शक्तियां है एक्सटर्नल
पावर के कंट्रोल में नहीं है दूसरा आता है सोशलिस्ट द गवर्नमेंट वर्क टू रिड्यूस द इनक्व एंड इंश्योर द इकोनॉमिक एंड सोशल
जस्टिस फॉर ऑल सभी के लिए अ इकोनॉमिक जस्टिस होना चाहिए सोशल जस्टिस होना चाहिए सेकुलर का मतलब है द स्टेट हैज नो ऑफिशियल
रिलीजन स्टेट का कोई ऑफिशियल रिलीजन नहीं है एंड रेस्पेक्ट ऑल द रिलीजस इक्वली सभी रिलीजन का इक्वली रेस्पेक्ट होनी चाहिए
डेमोक्रेटिक मतलब लोकतांत्रिक द पीपल ऑफ इंडिया इलेक्ट देयर गवर्नमेंट थ्रू फ्री एंड फेयर इलेक्शंस इलेक्शंस के माध्यम से
इंडिया जो है गवर्नमेंट को चुनती है गवर्नमेंट को बनाती है वोट करती है रिपब्लिक मतलब गणराज्य इसका मतलब है हेड
ऑफ द स्टेट इज इलेक्टेड नॉट मतलब हेरेडिटरी मतलब वंशानुगत नहीं है राजा का बेटा राजा नहीं बनेगा तो क्या होगा इलेक्ट
हेड ऑफ द स्टेट जो है इलेक्ट किया जाता है जस्टिस इंश्योर सोशल इकोनॉमिक एंड पॉलिटिकल जस्टिस फॉर ऑल द
सिटीजंस लिबर्टी लिबर्टी का मतलब है ये इंश्योर करता है लिबर्टी फ्रीडम ऑफ द थॉट है ना इट इंश्योर्स फ्रीडम ऑफ द थॉट्स जो
आपके अपने विचार हैं उनकी आजादी है आपको फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेशन अभिव्यक्ति की आजादी है आपके मन में जो विचार आ रहे हैं उन
विचारों को आप रख सकते हो अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर रख सकते हो फ्रीडम ऑफ बिलीफ एंड फेथ विश्वास और आस्था की स्वतंत्र
स्ता है आपको आप किस पर विश्वास कर रहे हो ये आपकी स्वतंत्रता है है ना आस्था किस पे है आपकी आपकी आपकी जो है यह भी स्वतंत्रता
है है ना आप किसी भी किसी को भी पूछ सकते हो फ्रीडम ऑफ वर्ड शिप पूजा की स्वतंत्रता है इक्वलिटी नेक्स्ट आता है इक्वलिटी
प्रमोट्स इक्वल अपॉर्चुनिटी फॉर ऑल सभी के लिए इक्वल अपॉर्चुनिटी ये प्रोवाइड कराता है कांस्टिट्यूशन
फ्रेटरनिटी इनकरेज द यूनिटी एंड ब्रदरहुड इंश्योरिटी ऑफ एवरी इंडिविजुअल्स तो ये मैंने आपको बता दिए द की एलिमेंट्स ऑफ द
प्रीमल ऑफ दी कांस्टिट्यूशन आगे बढ़ते हैं नेक्स्ट आता है फंडामेंटल राइट्स और ये जो क्वेश्चन है काफी इंपॉर्टेंट है एकेटीयू
2021 22 22 23 और 23 24 में पूछा गया है देखिए आपको एक बेसिक अंडरस्टैंडिंग हो जाएगी संविधान की क्योंकि कई बार आप किसी
इंटरव्यू में अगर आप जाते हैं तो यह देखने के लिए कि आप अपने जो करिकुलम रहा है आपका कि बीटेक के दौरान आप कितना सीरियस थे हम
मैं ये तो नहीं कहूंगा आपको कि आप इस सब्जेक्ट को जो है बहुत ज्यादा समय दो है ना क्योंकि आप सिविल सर्विसेस की तैया तो
करोगे नहीं मतलब करोगे तो फिर उसके बाद पढ़ोगे उसको नो प्रॉब्लम एट ऑल लेकिन फिलहाल फिलहाल मैं बात कर रहा हूं कि जब
आप बीटेक के दौरान है अच्छी बात है कि अभी से आप में से हो सकता है कि कुछ कुछ स्टूडेंट्स ने डिसाइड कर रखा हो कि हम
सिविल सर्विस की तैयारी करेंगे तो वो ज्यादा डिटेल में पढ़े और जो मैं पढ़ा रहा हूं दैट इज नॉट सफिशिएंट ये एटय के लिए
सफिशिएंट है सिविल सर्विसेस के लिए तो सफिशिएंट नहीं है उसके लिए डिटेल में आप पढ़ ही रहे होंगे जिन्होंने डिसाइड कर रखा
होगा ठीक है या अभी जब पास आउट होने के बाद आप सिविल सर्विस की तैयारी करेंगे तो बहुत अच्छे से इसको पढ़ेंगे लेकिन एक
बेसिक अंडरस्टैंडिंग आपको को होनी चाहिए आपको ये पता होना चाहिए कि हां यार हमने हमारे इस करिकुलम का ये पार्ट था और हम
इसको पढ़ के आए तो कई बार इंटरव्यूअर आपसे क्वेश्चन इस तरह के पूछ लेता है अच्छा ये आपने पढ़ा था कि नहीं पढ़ा था या छोड़
दिया था या ऐसे कुछ भी लिख के आ गए थे क्योंकि आप सभी जानते हैं कि कुछ भी लिख के आओगे तो पास तो हो ही जाओगे ना टीचर
इसको ना तो टीचर्स इसको मतलब अच्छे से ट्रीट करते हैं सब्जेक्ट्स को ना ही स्टूडेंट करते हैं लेकिन मेरा ये मानना है
कि ठीक है आप उतना समय इसमें इन्वेस्ट नहीं करो बट इतना करो कि आपको एक बेसिक नॉलेज मिल जाए इस सब्जेक्ट की एक बेसिक
अंडरस्टैंडिंग आपको मिल जाए आपको एटलीस्ट पता तो रहे कि हां इसके अंदर क्या-क्या टॉपिक्स थे जो हमको पढ़ने दे चार आदमी बैठ
कर के आप बातें कर सकते हो आपको आईडिया रहता है कि संविधान क्या होता है है ना क्या-क्या उसमें चीजें होती है तो वो आपको
एक अंडरस्टैंडिंग होना जरूरी है चलिए मतलब अगर बीटेक ना भी करो आप कोई भी कोर्स ना करो एटलीस्ट थोड़ा सा बेसिक अंडरस्टैंडिंग
बहुत जरूरी है देखिए तो फंडामेंटल राइट्स तो जो मेन फ छह फंडामेंटल राइट्स है उनके बारे में आपको बता रहा हूं बहुत
इंपोर्टेंट क्वेश्चन है राइट टू इक्वलिटी तो ये जो अब हमारे जो इसके संविधान के अंदर जो आर्टिकल्स है तो ये कौन से
आर्टिकल्स के अंदर मेंशन है राइट टू इक्वलिटी आर्टिकल 14 टू 18 एश्योर द इक्वलिटी बिफोर द लॉ एंड इक्वल प्रोटेक्शन
ऑफ द लॉ जो लॉ है लॉ के हिसाब से चीजें चल रही होती है तो आपको प्रोडक्शन मिलेगा मतलब ये राइट टू इक्वलिटी है मतलब ऐसा
नहीं कि किसी को जो है अलग से मतलब किसी को जो है दो मतलब कई मतलब अलग-अलग मान लीजिए किसी भी किसी भी आधार पर लोगों को
आप डिवाइड नहीं कर सकते इसके लिए ये लॉ है इसके लिए ये लॉ है सभी के लिए एक जैसा लॉ होगा डिस्क्रिमिनेशन नहीं होगा जो मैंने
आपको बताया कि डिस्क्रिमिनेशन नहीं होगा ऑन द ग्राउंड ऑन द रिलीजन बेसिस कास्ट बेसिस आप किस कास्ट से हैं आप किस रिलीजन
से हैं उसके बेसिस पे जो है आप डिस्क्रिमिनेट नहीं कर सकते तो राइट टू इक्वलिटी ये आपका राइट है फंडामेंटल राइट
है सेक्स के आधार पे आपका बर्थ कहां पे हुआ आप कहां पे पैदा हुए उसके हिसाब से डिस्क्रिमिनेट नहीं किया जा सकता
अकॉर्डिंग टू दी फंडामेंटल राइट जो हमको देता है कौन संविधान राइट टू फ्रीडम है ना स्वतंत्रता का अधिकार है ये आर्टिकल 19 से
22 के अंदर लिखे गए हैं इंक्लूड्स द वेरियस फ्रीडम लाइक फ्रीडम ऑफ स्पीच एंड एक्सप्रेशन है ना
आप अपने आपको को जो है जो आपके थॉट्स हैं उन थॉट्स को आप एक्सप्रेस कर सकते हो उसकी आजादी है फ्रीडम ऑफ असेंबल पीसफुली आप
पीसफुली इकट्ठा हो सकते हो ठीक है कोई प्रॉब्लम नहीं है फ्रीडम टू मूव फ्रीली थ्रू आउट द कंट्री कंट्री में आप फ्री
फ्रीली मूव कर सकते हो देयर इज नो प्रॉब्लम ऐसा नहीं कि राजस्थान का व्यक्ति पंजाब में नहीं जा सकता कि पंजाब का
व्यक्ति यूपी में नहीं जा सकता आप कहीं भी इंडिया के अंदर मूव कर सकते हो अ फ्रीडम टू रिसाइट एंड सेटल इन एनी पार्ट ऑफ द
कंट्री कंट्री के किसी भी पार्ट में आप जो है जा सकते हो बच सकते हो वहां रह सकते हो जैसे जम्मू एंड कश्मीर में 370 हटने से
पहले क्योंकि वो उसके अंदर बहुत सारे अलग से प्रोविजन थे तो 370 हटने के बाद आप वहां भी जा सकते हो फ्रीडम टू प्रैक्टिस
एनी प्रोफेशन प्रोफेशन और कैरी आउट एनी ऑक्यूपेशन किसी भी ऑक्यूपेशन को प्रोफेशन को आप अपना सकते हैं उसकी भी आजादी है
नेक्स्ट आता है राइट अगेंस्ट एक्सप्लोइटेशन मेंशन इन आर्टिकल 23 से लेकर के 24 में ये है एंड प्रोटेक्ट्स
अगेंस्ट द ह्यूमन ट्रैफिकिंग ट्रैफिकिंग मानव तस्करी मानव तस्करी को रोकने के लिए मानव तस्करी नहीं हो सकती है फोर्स लेबर
एंड चाइल्ड लेबर जैसे चाइल्ड लेबर एक्ट आपने देखा होगा है ना कि छोटे बच्चों से आप काम नहीं ले सकते और भी सही तरह से
एक्सप्लोइट किया जाता है जैसे बंगाल से यू नो कुछ कुछ वर्कर्स को वहां से मतलब पश्चिम बंगाल की तरफ आते हैं तो वहां पर
शोषण किया जाता है कई बार क्या होता है एक राज्य से छोटे बच्चों को वहां से कई जगह से है ना बच्चों को उठा लिया जाता है फिर
कहीं बहुत दूर ले जाकर के उनसे भीख मंगवाई जाती है तो कई तरह से शोषण किया जाता है तो उसके ये राइट अगेंस्ट एक्सप्लोइटेशन है
राइट टू फ्रीडम ऑफ रिलीजन ये मेंशन है आर्टिकल 25 से 28 के बीच में सिटीजंस कैन फी फली प्रैक्टिस प्रोफेस एंड प्रोपागेट
एनी रिलीजन कि सिटीजन जो है वो फ्रीली प्रैक्टिस कर सकते हैं किसी भी रिलीजन को है ना प्रोफेस कर सकते हैं प्रोपेगेटर
सकते हैं उसका प्रचार प्रसार कर सकते हैं ठीक है किसी भी रिलीजन का नेक्स्ट आता है कल्चरल एंड एजुकेशनल राइट्स ये है 29 और
30 आर्टिकल्स में प्रोटेक्ट द राइट ऑफ माइनॉरिटी टू प्रिजर्व देयर लैंग्वेज स्क्रिप्ट एंड कल्चर ये क्या है कि आपका
जैसा आदिवासी है है ना जो माइनॉरिटी होती है ये उन उनका जो कल्चर है उनको अ मतलब उनको संरक्षण देता है ठीक है ना और भी
मैंने एक एग्जांपल दिया आपको आदिवासी का और भी जो माइनॉरिटी ज हैं है ना उनकी भाषा उनके कल्चर को क्या करता है ये प्रोटेक्ट
करता है राइट टू कॉन्स्टिट्यूशन रेमेडीज द मेंशन इन आर्टिकल 32 एंपावर्स द सिटीजन टू अप्रोच द कोर्ट्स फॉर द इंफोर्समेंट ऑफ द
फंडामेंटल राइट अगर किसी के फंडामेंटल राइट्स का मतलब फंडामेंटल राइट्स के खिलाफ अगर कुछ हो रहा है तो वो कोर्ट में जा
सकता है उसके लिए भी यहां पर ये भी फंडामेंटल राइट के अंदर आता है नेक्स्ट आता है आपका फंडामेंटल ड्यूटीज ये भी आया
हुआ है दो-तीन बार क्वेश्चन फंडामेंटल ड्यूटीज कौन-कौन सी होती है तो फंडामेंटल ड्यूटीज वर एडेड टू द कंटेंट बाय द 4
सेकंड अमेंडमेंट देखो मैंने आपको बताया कि जो संविधान में अमेंडमेंट हो सकते हैं परिवर्तन हो सकते हैं जरूरत के हिसाब से
और 42 अमेंडमेंट जो था 42 वा जो संशोधन था 42वां जो अमेंडमेंट हुआ था संविधान के अंदर ये बहुत बड़ा अमेंडमेंट था इसको मिनी
कॉन्टेंट भी बोला जाता है है ना मिनी कॉस्ट भी मिनी कॉन्स्टिट्यूशन भी बोला जाता है ये कब हुआ था 1976 में हुआ था
अंडर द आर्टिकल 51a तो इसमें जो फंडामेंटल ड्यूटीज है वो कौन-कौन सी होती है जैसे लिस्ट ऑफ ड्यूटीज रेस्पेक्ट द
कांस्टिट्यूशन कांस्टिट्यूशन की रेस्पेक्ट करनी है सभी सिटीजन को नेशनल फ्लैग की रिस्पेक्ट करनी है और नेशनल एंथम की
रेस्पेक्ट करनी है दीज आर द फंडामेंटल ड्यूटीज जो एक्सपेक्ट की जाती है सभी नागरिकों से प्रोटेक्ट द सोवर निटी यूनिटी
को मेंटेन रखना है इंटीग्रिटी ऑफ इंडिया को क्या रखना है अ प्रोटेक्ट करना है प्रमोट द हार्मोनी एंड अवॉइड द
डिस्क्रिमिनेशन डिस्क्रिमिनेशन को अवॉइड करना है है ना सेक्स के आधार पे इकोनॉमिक कंडीशन के आधार पे कास्ट रिलीजन के आधार
पे प्रोटेक्ट द एनवायरमेंट एंड वाइल्ड लाइफ एनवायरमेंट एंड वाइल्ड लाइफ को प्रोटेक्ट करने की भी क्या है जिम्मेदारी
है जब मैंने आपको एनवायरमेंट एंड इकोलॉजी पढ़ाया था बीटेक फर्स्ट ईयर में तब आपको बताया था ये वहां भी एक टॉपिक था कि भाई
हमको क्या करना है प्रोटेक्ट करना है एनवायरमेंट को एंड वाइल्ड लाइफ को स्ट्राइव फॉर द एक्सीलेंस इन स्फियर्स ऑफ
इंडिविजुअल्स एंड कलेक्टिव एक्टिविटी मतलब इंडिविजुअल को भी और कलेक्टिव एक्टिविटी के माध्यम से हमको जो है ये ध्यान रखनी
होती है ये हमारा ड्यूटीज है सिग्निफिकेंट क्या है एंकरेज द रिस्पांसिबिलिटी रिस्पांसिबल सिटीजनशिप फंडामेंटल ड्यूटीज
क्या करती हैं एक सिटीजन को रिस्पांसिबल बनाती हैं यार ये हमारी रिस्पांसिबिलिटीज है ये हमारी फंडामेंटल ड्यूटीज हैं हर कोई
बात करता है कि ये हमारे ये तो मेरा फंडामेंटल राइट है भाई ये भी ध्यान रखना चाहिए कि ये मेरी फंडामेंटल ड्यूटी भी है
अपनी फंडामेंटल ड्यूटीज का भी ध्यान रखना है है ना कहीं भी कुछ भी खाया और कचरा गिरा दिया है ना रैपर्स कहीं भी गिरा दिए
सपोर्ट्स द इंफोर्समेंट ऑफ फंडामेंटल राइट्स फंडामेंटल राइट्स को इंफोर्स करने के लिए ये क्या करते
हैं प्रमोट करते हैं नेक्स्ट आता है आपका डायरेक्टिव प्रिंसिपल्स ऑफ स्टेट पॉलिसी मैंने बताया था आपको पहले भी कि
डायरेक्टिव डायरेक्टिव प्रिंसिपल ऑफ स्टेट पॉलिसी क्या होती है गाइडलाइंस होती है किसके लिए गवर्नमेंट्स के लिए ठीक है और
कितने टाइप्स की हो सकती हैं सोशल प्रिंसिपल्स प्रोवाइड द फ्री लीगल एड मतलब ये क्या करती है जो जो गरीब लोग होते हैं
है ना प्रमोट्स द वेलफेयर ऑफ वीकर सेक्शन वीकर सेक्शन के जो लोग होते हैं उनको एक निशुल्क कानूनी सहायता है ना प्रोवाइड अ
फ्री लीगल एड फ्री लीगल ऐड उनको प्रोवाइड कराया जाए मतलब कोई बंदा कोई वकील नहीं कर सकता तो उसको सरकारी वकील मिलने का
प्रोविन है प्रोविजन है ठीक है अ इकोनॉमिक प्रिंसिपल्स इक्वल पे फॉर इक्वल वर्क कि इक्वल वर्क के लिए सभी को इक्वल मिलना
चाहिए पता लगा इसने इतना काम करा इसने भी उतना ही काम करा इसको ज्यादा पे कर रहा है इसको ज्यादा पेमेंट मिल रहा है उसको कम
पेमेंट मिल रहा है प्रिवेंट द कंसंट्रेशन ऑफ वेल्थ वेल्थ का जो कंसंट्रेशन है वो नहीं होना चाहिए मतलब पूरे अब आप देख सकते
हो ये तो कंसंट्रेशन होना नहीं चाहिए लेकिन कंसंट्रेशन हो रहा है मतलब कुछ एक परसेंट के लिए कुछ एक परसेंट पे जो है जो
अ वेल्थ है जो धन है वो बहुत ज्यादा है और बहुत सारे लोग ऐसे हैं जिनके पास बहुत ही कम है मतलब कहने का मतलब है अमीरी और
गरीबी में डिफरेंस उसको जो इन इक्वलिटी है उनको इक्वलिटी है उसको दूर करना चाहिए इक्वलिटी लानी चाहिए लेकिन ऐसा है नहीं
ठीक है गांधियन प्रिंसिपल प्रमोट्स द कोटेज इंडस्ट्री जो कुटीर उद्ध होग उसको प्रमोट करना है ना प्रोविजन ऑफ दी अल्कोहल
है ना इंटॉक्सिकेटिंग ड्रिंक्स शराब पर जो प्रतिबंध है वो होना चाहिए लेकिन ऐसा भी आप देख सकते हैं है नहीं नेक्स्ट आता है
आपका पार्लियामेंट्री सिस्टम कि हमारे देश में क्या है बेटा पार्लियामेंट्री सिस्टम है संसदीय प्रणाली है अडॉप्टेड फ्रॉम द
ब्रिटिश पार्लियामेंट सिस्टम और ये ब्रिटिश पार्लियामेंट्री सिस्टम से लिया गया है फीचर्स अ बाय कैमरल लेजिस्लेटर ये
द्विसदनीय विधायिका होती है हमारे कंसिस्टिंग जैसे लोकसभा होती है और राज्यसभा इसको बोलते हैं हम लोग लोअर हाउस
इसको बोलते हैं अपर हाउस और यही कांसेप्ट कभी 1935 एक्ट में भी था मैंने आपको बताया था कि इसमें से कुछ फीचर्स आज भी एजिस्ट
करते हैं इसके की फीचर्स क्या हैं संसदीय प्रणाली के पार्लियामेंट्री सिस्टम के एक तो नॉमिनल हेड होता है ये प्रेसिडेंट ऑफ
इंडिया आप देख सकते हैं जो प्रेसिडेंट ऑफ इंडिया है इसको रबड़ की मोहर के नाम से भी जाना जाता है नाम मात्र का हेड होता है
इनके पास बहुत ज्यादा पावर नहीं होती है लेकिन जो रियल एग्जीक्यूटिव होते हैं देखिए जो हमारा पार्लियामेंट्री सिस्टम है
एक तो इसमें नॉमिनल हेड होता है जो प्रेसिडेंट ऑफ इंडिया होता है रियल एग्जीक्यूटिव्स होते हैं जो प्राइम
मिनिस्टर्स होते हैं और प्राइम मिनिस्टर जो होता है और काउंसिल ऑफ मिनिस्टर्स जो रियल पावर्स होती हैं वो प्राइम मिनिस्टर
और उनकी जो मिनिस्टर्स हैं उनके पास होती है कलेक्टिव रिस्पांसिबिलिटी टू द लोकसभा इन दोनों की जो कलेक्टिव रिस्पांसिबिलिटी
होती है किसके प्रति लोकसभा के प्रति है ना तो लोकसभा और राज्यसभा ये होता है हमारे दो सदन होते हैं पार्लियामेंट्री के
अंदर सिग्निफिकेंट क्या है इसका प्रमोट्स द अकाउंटेबिलिटी इनकी जवाबदेही होती है इंश्योर द इंश्योर द रिप्रेजेंटेशन ऑफ
डावर्स ग्रुप मतलब अब देखिए जो पार्लियामेंट के अंदर जो अलग-अलग जगह से लोग चुन कर के जाते हैं तो डावर्स का मतलब
है डावर्स ये लिखा हुआ है ना डावर्स ग्रुप्स मतलब अलग-अलग तरह अलग-अलग जो कम्युनिटीज है अलग-अलग जगह से जो लोग चुन
कर के आते हैं और वह पूरा एक क्या बनता है एक संसद के अंदर वह लोग बैठते हैं और गवर्नमेंट को चलाते हैं नेक्स्ट आता है
आपका फेडरल सिस्टम ध्यान दीजिएगा फेडरल सिस्टम फेडरल सिस्टम का मतलब मैंने पहले भी आपको बताया था अभी कि फेडरल सिस्टम का
मतलब होता है एक तरह से पावर को डिस्ट्रीब्यूटर देना ठीक है तो डिवीजन ऑफ पावर बिटवीन द सेंटर एंड स्टेट्स ऐसा नहीं
कि सारी की सारी पावर सेंटर के पास है स्टेट के पास है तो पावर का डिस्ट्रीब्यूशन है सेंटर यानी केंद्र के
पास स्टेट मतलब राज्य के पास एज पर द सेवंथ शेड्यूल आर्टिकल 246 आर्टिकल 246 के हिसाब से जो पावर होगी वो सेंट्रल के पास
भी होगी केंद्र सरकार के पास भी होती है और राज्य सरकार के पास भी होती है नेक्स्ट डिवीजन ऑफ पावर देखते हैं सबसे पहले आता
है यूनियन लिस्ट यूनियन लिस्ट का मतलब है कि मैटर ऑफ द नेशनल इंपॉर्टेंस दैट ओनली द सेंटर कैन लेजिसलेट अपॉन जैसे डिफेंस की
अगर हम बात करें है ना डिफेंस किसके अंदर में आता है केंद्र सरकार के अंदर में आता है है ना फॉरेन अफेयर्स ये भी केंद्र
सरकार का मैटर है एटॉमिक एनर्जी करेंसी और रेलवे अब जैसे करेंसी है तो ऐसा तो नहीं कि इ पाकिस्ता सॉरी जो राजस्थान है यूपी
है एमपी है इनके यहां पे अलग-अलग करेंसी है तो ये इंडिया मतलब केंद्र सरकार का मैटर है ना कि स्टेट वाइज नेक्स्ट आता है
स्टेट लिस्ट स्टेट लिस्ट का अंदर है कि इसमें वो सभी मैटर्स आ जाएंगे जो राज्य सरकार के अंदर आते हैं तो मैटर्स ऑफ लोकल
एंड रीजनल इंपॉर्टेंस दैट ओनली द स्टेट कैन लेजिसलेट अपऑन जैसे पुलिस है तो पुलिस तो राज्यों की होती है केंद्र सरकार की तो
नहीं होती है ठीक है ना जैसे अगर हम कुछ यूनियन टेरिटरी को छोड़ दें जैसे दिल्ली को छोड़ दें तो दिल्ली की जो सरकार है वो
जो भारत के गृहमंत्री है उनके अंडर में आती है वो एक अलग विषय है तो पुलिस जो है वो राज्यों की होती है पब्लिक हेल्थ
एग्रीकल्चर और लोकल गवर्नमेंट मार्केटस जो हैं वो राज्य सरकार के अंदर में आते हैं तो एक तो हो गया यूनियन लिस्ट ये किसकी
होगी केंद्र सरकार के लिए एक स्टेट लिस्ट होगी जो राज्य सरकार के लिए होगी दूसरा आता है कॉन्करेंट लिस्ट है ना ये ये वो
मैटर्स होंगे जो राज्य सरकार और केंद्र सरकार दोनों क अंडर में आते हैं मैटर्स ऑन व्हिच बोथ द सेंटर एंड स्टेट कैन लेजिसलेट
इन केस ऑफ कॉन्फ्लेट द सेंटर लॉ प्रीवेल्स और कई बार होता आपने देखा होगा कि कुछ ऐसी चीजें हो जाती है कि जो केंद्र सरकार कहती
है कि हमारा मैटर है राज्य सरकार कहती है कि हमारा मैटर है तो उसमें अगर कोई कॉन्फ्लेट होता है तो वो झुकाव जाता है
फिर केंद्र सरकार की तरफ ठीक है इन केस ऑफ कॉन्फ्लेट द सेंटर लॉ प्रीवेल्स ये इसमें कौन-कौन से विषय आते हैं कौन-कौन से
सब्जेक्ट आते हैं एजुकेशन एजुकेशन सेंट्रल गवर्नमेंट के अंदर में भी आता है और अ स्टेट गवर्नमेंट के अंदर फॉरेस्ट हो गया
ट्रेड यून हो गया मैरीज एडॉप्शन ईटीसी ये सब इसके अंडर में आते हैं दोनों के अंडर में आते हैं नाउ द सेंटर स्टेट रिलेशन एक
होता है लेजिसलेटिव रिलेशन है ना द सेंटर हैज ओवरराइडिंग पावर्स ऑन द मैटर्स इन द कॉन्करेंट लिस्ट ये जो कॉन्करेंट लिस्ट है
ना इसमें जो मैंने बताया आपको कि कोई कॉन्फ्लेट होता है तो झुकाव किसकी तरफ जाता है वो सेंट्रल पावर सेंट्रल
गवर्नमेंट की तरफ इन केस ऑफ डिस्प्यूट्स बिटवीन द सेंटर एंड स्टेट लॉ द सेंटर्स लॉ प्रीवेल्स ठीक है नाउ द फाइनेंशियल
रिलेशंस फाइनेंशियल रिलेशंस का मतलब मतलब होता है द सेंटर कलेक्ट्स द कलेक्ट एंड डिस्ट्रीब्यूशन द टैक्सेस अमंग द स्टेट्स
जो सेंट्रल गवर्नमेंट है जैसे जीएसटी है तो सेंट्रल गवर्नमेंट क्या करेगी उसको कलेक्ट करेगी और राज्यों के हिसाब से
जहां-जहां से टैक्स कलेक्ट हुआ है उसको वो डिस्ट्रीब्यूटर देगी राज्यों को फॉर द वेलफेयर ऑफ दी सिटीजंस
हिस्टोरिकल पर्सपेक्टिव ऑफ द कांस्टीट्यूशनल अमेंडमेंट इन इंडिया ध्यान देना सबसे पहले हम बात करेंगे इंपोर्टेंट
पीरियड्स की है ना हिस्टोरिकल पर्सपेक्टिव ऑफ कांस्टिट्यूशन अमेंडमेंट बात हो रही है यहां पर अमेंडमेंट की जो कांस्टिट्यूशन
बना है उसमें ये भी प्रोविजन दिया गया है कि नेशन की जरूरतों के हिसाब से उसके अंदर अमेंडमेंट परिवर्तन किया जा सकता है अर्ली
अमेंडमेंट्स हुए थे 19 भाई 1950 को तो हमारा देश का संविधान लागू ही हुआ था बन कर के तैयार हुआ था तो ये 50 से लेकर के
70 तक एड्रेस द सोशियो इकोनॉमिक ूज को ध्यान में रखते हुए कुछ अमेंडमेंट्स हुए इमरजेंसी एरा रहा 1975 से 1977 तक इंदिरा
गांधी के समय जो इमरजेंसी लगी थी उस समय बहुत ज्यादा अमेंडमेंट हुए थे है ना तो 42 अमेंडमेंट जो है यह काफी ज्यादा आज भी
चर्चाओं में रहता है क्योंकि इसमें इतने ज्यादा अमेंडमेंट्स हुए थे कि वो मिनी कॉन्स्टिट्यूशन के नाम से जाना जाता है
पोस्ट लिबरलाइजेशन 1991 के बाद 1991 के बाद फोकस्ड ऑन द इकोनॉमिक रिफॉर्म्स इकोनॉमिक रिफॉर्म्स
हुए है ना तो वहां पर भी डिसेंट्रलाइजेशन डी मतलब चीजों को डिसेंट्रलाइज किया गया तो वहां पर भी कुछ रिफ मतलब अमेंडमेंट्स
किए गए चैलेंज आए यहां पे कि कि बैलेंसिंग फ्लेक्सिबल एंड रिजिंग ऑफ दी कांस्टिट्यूशन अब कांस्टिट्यूशन का एक
फीचर ये है कि वो फ्लेक्सिबल भी है और वो रिजिन भी है हमारे देश का जो संविधान है वो फ्लेक्सिबल भी है और वो रिजट भी है
रिजट का मतलब ये है कि आप एकदम से कुछ भी बदलाव नहीं कर दोगे उसके अंदर एक जो उसका स्ट्रक्चर है संविधान का वो मेंटेन रहना
चाहिए ठीक है अब उसमें भी अब क्या होता है कि जो पॉलिटिकल पार्टीज होती है तो पॉलिटिकल मिसयूज होने लग जाता है
अमेंडमेंट्स अमेंडमेंट करले जो पार्टी मेजॉरिटी में है मतलब जो बहुत ज्यादा सीट्स आ गई हैं और उसके पास यू नो बहुत यू
नो वो अपने हिसाब से क्या करते हैं ना अपनी पावर का मिसयूज करने के लिए बहुत अलग मतलब ज्यादा ही अमेंडमेंट कर देते हैं
जैसे कि आप देख सकते हैं यहां पर बहुत ज्यादा अमेंडमेंट हुए थे इंदिरा गांधी के टाइम पे क्योंकि वहां पर इंदिरा गांधी
बहुत ज्यादा बड़ी पावर में थी आइएगा स्टेप्स इन द अमेंडमेंट प्रोसेस अगर अमेंडमेंट करना है तो उसका प्रोसेस क्या
होगा अगर संविधान को बदलना बदलना मतलब जैसा अभी तुमने देखा होगा लोकसभा में ये एक चल गया था कि ये संविधान को बदलने वाले
हैं संविधान को बदलने वाले हैं संविधान को बदलना मतलब संविधान के अंदर जो कांस्टिट्यूशन है उसके अंदर जो अमेंडमेंट
है जो परिवर्तन है वो जरूरतों को ध्यान में रखते हुए वो बहुत पहले जब से संविधान बना है तब से लेकर के अब तक संविधान के
अंदर परिवर्तन होते रहे हैं कुछ-कुछ जो है बदलाव होते रहे हैं अमेंडमेंट होते रहे हैं ठीक है लेकिन बदलाव करने के लिए कुछ
बदलाव ऐसे होते हैं जो सिंपल मेजॉरिटी से हो जाते हैं कुछ बदलाव ऐसे होते हैं जो स्पेशल मेजोरिटी चाहिए होती है तो इसीलिए
तो 400 पार का जो नारा आपने सुना होगा इस बार 400 पार तो अपोजिशन क्या कह रहा था कि ये संविधान को बदल देंगे कि भाई इनकी नंबर
ऑफ सीट्स अगर ज्यादा आ जाएंगी तो फिर इनके लिए आसान हो जाएगा है ना इनके लिए आसान हो जाएगा संविधान में बहुत सारे करेक्शन
करेंगे ठीक है तो चलिए ध्यान देते हैं कि संविधान के अंदर स्टेप्स इन अमेंडमेंट प्रोसेस संविधान के अंदर कांस्टिट्यूशन के
अंदर अमेंडमेंट कैसे किया जाते हैं उसका प्रोसेस क्या है सबसे पहले इंट्रोडक्शन ऑफ बिल कोई भी बिल जो होता है विधेयक होता है
उसको इंट्रोड्यूस करा जाता है लोकसभा में या राज्यसभा में अ कांस्टीट्यूशनल अमेंडमेंट बिल जो भी
अमेंडमेंट करना है जो बिल तैयार होगा कैन बी इंट्रोड्यूस्ड इन आइर लोकसभा और राज्यसभा या तो उसको लोकसभा में या
राज्यसभा में करा जाएगा इंट्रोड्यूस इट कैन नॉट बी इंट्रोड्यूस्ड इन स्टेट लेजिसलेच्योर
में केंद्र सरकार के उसम होंगे ठीक है इसको बिल को इंट्रोड्यूस कौन करेगा कोई भी मिनिस्टर कर सकता है मेंबर कर सकता है
डिस्कशन एंड वोटिंग जब यह बिल लोकसभा में जाएगा या राज्यसभा में जाएगा तो वहां पर वोटिंग होगी डिस्कशन होगा आप देखते रहते
होंगे बहुत सारी वीडियो आती है उसमें सब लोग नेता लोग आपस में लड़ते रहते हैं वो डिस्कशन होता है उनका ठीक है द बिल इज
डिबेटेड बिल पर डिबेट होगी चर्चा होगी उसके ऊपर और वोट कराए जाएंगे बोथ द हाउसेस लोकसभा और राज्यसभा के जो मेंबर्स होते
हैं वो उसमें वोटिंग करेंगे डिपेंडिंग ऑन द टाइप ऑफ अमेंडमेंट अ सिंपल मेजॉरिटी और स्पेशल मेजॉरिटी इ रिक्वायर्ड कुछ बिल ऐसे
होते हैं जिसमें सिंपल मेजॉरिटी से काम चल जाता है कुछ बिल ऐसे होते हैं जिसमें स्पेशल मेजॉरिटी चाहिए होती है अमेंडमेंट
करने के लिए ठीक है नाउ रटिफिकेशन रटिफिकेशन स्टेट्स बाय स्टेट्स द फेडरल प्रोविजंस द बिल मस्ट बी
रेटियर इफाइन द स्टेट लेजिसलेच्योर सहमति उसमें होनी चाहिए तभी अमेंडमेंट हो
पाएगा लेकिन कुछ बिल ऐसे भी हो सकते हैं कि जिनमें राज्यों की सहमति जरूरी नहीं है नेक्स्ट आता है प्रेसिडेंट्स एसेंट आफ्टर
पासिंग बोथ द हाउस कि जब बिल लोकसभा और राज्य राज्यसभा दोनों हाउस से पास हो जाएगा तो वो किसके पास जाता है वो
राज्य प्रेसिडेंट के पास जाता है रटिफिकेशन बाय स्टेट्स अगर जरूरी है तो उसको रेट राज्य सरकार की सहमति चाहिए होगी
तो ठीक है अदर वाइज दोनों हाउसेस लोकसभा और राज्यसभा से जब ये बिल पास आ पास हो जाएगा तो प्रेसिडेंट के पास जाएगा और द
बिल इज सेंड टू द प्रेसिडेंट फॉर अप्रूवल द प्रेसिडेंट कैन नॉट विद होल्ड एसेंट है ना तो प्रेसिडेंट क्या करेगा इसको जो है
या तो एक बार मतलब अगर सहमत नहीं होगा तो एक बार वापस करेगा अगर दोबारा से बिल चला गया प्रेसिडेंट के पास तो उसको करना ही
होगा मतलब कहने का मतलब ये है अल्टीमेटली मतलब मोर और लेस आप ये कह सकते हैं कि प्रेसिडेंट को जो बिल है वो पास
करना ही होता है अगर जब प्रेसिडेंट के बिल पर साइन हो जाएंगे इसका मतलब अमेंडमेंट हो चुका है और वो कानून बन चुका है ठीक है
वंस द प्रेसिडेंट गिव द एेंट द अमेंडमेंट बिकम पार्ट ऑफ द कांस्टिट्यूशन जो बिल पेश किया था उस बिल को अगर लोकसभा राज्यसभा से
पास करा लिया गया और उसके बाद उसको प्रेसिडेंट के पास भेज दिया प्रेसिडेंट ने अगर साइन कर दिए तो वो कांस्टिट्यूशन का
पार्ट बन चुका है बोले तो लॉ बन चुका है ठीक है चलिए आगे बढ़ते हैं ये तो हो गया आपका स्टेप्स इसके अमेंडमेंट के नेक्स्ट
आता है आपका एग्जांपल्स ऑफ इंपॉर्टेंस ऑफ अमेंड अब ये देखिए मैंने आपको बताया कि 40 सेकंड
में जरूरत के अलग अलग जरूरतों के हिसाब से नेशन के नीड के हिसाब से अमेंडमेंट होते रहे
हैं यह इंपॉर्टेंट है इमरजेंसी प्रोविजन मैंने बोला था आपको पहले भी य टर्म आई थी कि मैं इसको बाद में समझाऊ एक 2022 में
पूछा गया है पहला जो इमरजेंसी है वो है नेशनल इमरजेंसी राष्ट्रीय आपातकाल डिक्लेयर्ड अंडर आर्टिकल 352 ड्यूरिंग वॉर
एक्सटर्नल देखिए ध्यान देना ड्यूरिंग वॉर यह जो नेशनल है जब कोई युद्ध हो जाए या एक्सटर्नल एग्रेस हो जाए कोई बाह्य शक्ति
आक्रमण कर दे या आम रिबेलियस यानी कि कुछ ऐसे ग्रुप होते हैं जो हथियारों के साथ किसी गवर्नमेंट बॉडी के ऊपर सरकारी संस्था
के ऊपर अगर आक्रमण कर दे तब भी नेशनल इमरजेंसी लगाई जा सकती है इसके इफेक्ट्स क्या होते हैं सेंटर एज्यूम द ग्रेटर
कंट्रोल ओवर द स्टेट्स जब भी नेशनल इमरजेंसी लगेगी तो जो पावर्स हैं वो सेंटर के पास बढ़ जाती हैं फंडामेंटल राइट्स
फंडामेंटल राइट्स को भी क्या कर सकते हैं टर्म सस्पेंड करे जा सकते हैं लेकिन आर्टिकल 20 और 21 में जो ये तो इतने तो
भाई 20 और 21 का जो आर्टिकल है उसको आप सर्च करके देखेंगे तो वो आपको राइट वो फंडामेंटल राइट तो आपको चाहिए चाहे वो
नेशनल इमरजेंसी भी हो लेकिन इनके अलावा बाकी जो फंडामेंटल राइट्स है ड्यूरिंग नेशनल इमरजेंसी वो सस्पेंड करे जा सकते
हैं नेक्स्ट आता है प्रेसिडेंट रूल क्या आता है प्रेसिडेंट रूल डिक्लेयर्ड अंडर आर्टिकल 356 इफ अ स्टेट गवर्नमेंट फेल्स
टू फंक्शनल कटली मतलब अगर संविधान का पालन नहीं हो रहा है जैसे कई जगह क्या होता है दंगे हो जाते हैं तो लोग बोलने लग जाते
हैं कि यहां पर राष्ट्रपति शासन लगा देना चाहिए मतलब जो स्टेट गवर्नमेंट है वो फेल हो जाती है लॉ एंड ऑर्डर को मेंटेन करने
में संविधान का पालन अगर नहीं हो रहा होता है ठीक है संविधान के हिसाब से अगर सरकार नहीं चल पा रही होती है तो वहां पर
राष्ट्रपति शासन लगा दिया जाता है जैसा आपको ध्यान होगा इन 19 इन 1992 प्रेसिडेंट रूल वाज इंपोज्ड इन उत्तर प्रदेश फॉलोइंग
द ो डिमोलिशन ऑफ द बाबरी मस्जिद जब 1992 में बाबरी मस्जिद को डिमोट कर दिया उसको गिरा दिया गया था ढांचे को तो उस समय
राष्ट्रपति शासन लगाया गया था तो राष्ट्रपति शासन जैसे ही लगता है तो पावर किसके पास चली जाती है तो पावर चली जाती
है राष्ट्रपति के पास तो राष्ट्रपति क्या करता है जो स्टेट के गवर्नर होते हैं जो गवर्नर होता है वो वहां का हेड हो जाता है
उसके हिसाब से चल रही होती है और जो विधायक हैं वि विधायक फिर जो विधायकों की पावर होती है वो किसके पास चली जाती है
सांसदों के पास क्योंकि भाई हर क्षेत्र से सांसद भी चुने जाते हैं लोकसभा में और राज्य जब आपके विधायक वाले इलेक्शन होते
हैं एमएलए वाले तो वहां से विधायक चुने जाते हैं क्योंकि विधायक कहां जाते हैं ये तो स्टेट गवर्नमेंट के लिए होते हैं तो
स्टेट गवर्नमेंट को सस्पेंड कर दिया जाता है है ना स्टेट गवर्नमेंट को सस्पेंड कर दिया मतलब जो विधायकों की पावर थी वो खत्म
हो गई है तो फिर किसको जाएगी पावर वो राष्ट्रपति शासन जब लगता है तो पावर किसके पास चली जाती है वो पावर चली जाती है आपकी
सांसदों के पास ठीक है और उसको वो किसके अंडर में चल रही होती है सारी चीज गवर्नर और राष्ट्रपति राष्ट्रपति
उनका हेड होता है और उनका जो गवर्नर स्टेट का जो गवर्नर होता है वहां पे वो उनको हैंडल करते हैं मैक्सिमम ड्यूरेशन जो है
वो सिक्स मंथ होती है कि राष्ट्रपति शासन आप छ महीने के लिए लगा सकते हो कैन बी एक्सटेंडेड टू थ्री इयर्स अलग-अलग जो
सरकमस्टेंसस अगर इस तरह के हैं तो न साल तक मैक्सिमम आप उसको एक्सटेंड कर सकते हो तो एक हो गया आपका नेशनल इमरजेंसी दूसरा
हो गया प्रेसिडेंट रोल है ना और तीसरा हो गया आपका फाइनेंशियल इमरजेंसी फाइनेंसियल इमरजेंसी क्या होता है डिक्लेयर्ड अंडर
366 आर्टिकल 366 360 में ये डिक्लेयर किया गया था इन केस ऑफ फाइनेंसियल इंस्टेबल इंस्टेबिलिटी अगर देश के अंदर फाइनेंशियल
इनस्टॉल इमरजेंसी लगा दी जाती है इस केस में क्या करते हैं सैलरीज ऑफ द गवर्नमेंट ऑफिशियल कैन बी रिड्यूस जो गवर्नमेंट
गवर्नमेंट कर्मचारी होते हैं उनकी सैलरी भी रिड्यूस कर दी जाती है ठीक है तो ये तीन इमरजेंसी है नेशनल इमरजेंसी बेटा
ध्यान रखना कि बाहर कोई युद्ध हो जाए है ना कोई युद्ध हो जाए बाहरी शक्ति आक्रमण कर दे या फिर कोई अ कम्युनिटी या कुछ इस
तरह का जो सशस्त्र के साथ अपने अस्त्र शस्त्र के साथ जो है आक्रमण कर दे किसी के ऊपर तब भी जो है नेशनल इमरजेंसी लगाई जा
सकती है प्रेसिडेंट्स रूल मैंने आपको बताया कि स्टेट गवर्नमेंट जब फेल हो जाती है लॉ एंड ऑर्डर को मेंटेन करने में या
संविधान का पालन नहीं हो रहा होता है तो प्रेसिडेंट रूल लगता है फाइनेंशियल इमरजेंसी जब फाइनेंशियल अनस्टेबल हो जाती
है देश के अंदर तो ये लगाई जा सकती है नेक्स्ट आता है आपका लो लास्ट टॉपिक है लोकल सेल्फ गवर्नमेंट लोकल सेल्फ
गवर्नमेंट का मतलब है भाई एक तो हमारी होगी जो लोकसभा राज्यसभा है ना मतलब केंद्र सरकार एक केंद्र सरकार हो गई एक
राज्य सरकार हो गई तो उसके बाद ये लोकल सेल्फ गवर्नमेंट को लाया गया था कि जो पावर है उसको डी सेंट्रलाइज किया जाए
डिसेंट्रलाइज किया जाए तो यानी लोकल में भी कुछ अ लोकल बॉडी भी कुछ होनी चाहिए लोकल गवर्नमेंट भी कुछ होनी चाहिए जैसे
पंचायती राज विभाग है ना पंचायती राज सिस्टम पंचायती राज प्रणाली है इन इंट्रोड्यूस्ड बाय 73 अमेंडमेंट एक्ट इन
1992 में तो 1992 में अमेंडमेंट करके यह जोड़ा गया इसमें इंस्टीट्यूशन कौन-कौन से होते हैं जैसे ग्राम पंचायत होती है इसमें
पंचायती समिति होती है दूसरा जिला परिषद होता है तो आपने देखा हो ग्राम पंचायत के भी इलेक्शन होते हैं पंचायत समिति के भी
होते हैं जिला परिषद के भी इलेक्शन होते हैं दूसरा आता है आपका अर्बन लोकल बॉडी ये 74 अमेंडमेंट 1992 में इसी के साथ किया
गया था ये भी इसमें आपका नगरपालिका और नगर निगम आ जाते हैं ठीक है सिग्निफिकेंट केंस क्या है इसका कि पावर को डिसेंट्रलाइज
करना होता है है ना स्ट्रेंथ द ग्रास रूट्स डेमोक्रेसी जो ग्रास रूट्स है जो क्योंकि केंद्र सरकार कि जो वहां तक नहीं
पहुंच पाती है मतलब अलग-अलग गांव में है ना दूर के इलाकों में नहीं पहुंच पाती है है ना प्रमोट्स द डिसेंट्रलाइज गवर्नेंस
ठीक है डिसेंट्रलाइज कर दिया गया ताकि जो ग जो चीजें वो केंद्रित ना रहे हर जगह तक पहुंचे तो इसी तरह से हमारा ये आज का जो
वन शॉर्ट रिवीजन था वो कंप्लीट हुआ एक बार मैं फिर से आपको बता देता हूं कि जो मैंने आपको पढ़ाया अभी इसके जो फ्री नोट्स हैं
वो एप्लीकेशन के अंदर आपको मिल जाएंगे जैसे ही आप एप्लीकेशन डाउनलोड करते हैं तो लेफ्ट टॉप कॉर्नर में आपको थ्री बार पे
क्लिक करना है वहां पे आपको फ्री स्टडी मैटेरियल्स के अंदर जाना है और वहां से आपको ये नोट्स आपको पांचों यूनिट के वन
शॉर्ट के नोट्स या फिर अदर सब्जेक्ट्स भी हैं उनके वन शॉर्ट के नोट्स आपको फ्री ऑफ कॉस्ट मिल जाते हैं आप लोग पढ़ते रहे
अच्छे से ठीक है जीवन में कुछ अच्छा करते रहे जिन स्टूडेंट्स को नहीं पता है मैं आपको बता देता हूं कि एक ट बीटेक फर्स्ट
ईयर सेकंड ईयर और थर्ड ईयर के फुल कोर्सेस हमारे गेटवे क्लासेस एप्लीकेशन में अवेलेबल है वहां पर थोड़ा चार्ज आपको देना
पड़ता है और वहां पर आपको वीडियो लेक्चर पीडीएफ नोट्स और पी वाई क्यूज अकॉर्डिंग टू द एकेटीयू ईच एंड एवरीथिंग सब कुछ
एकेटीयू के सिलेबस के हिसाब से आपको मिल रहा होता है तो आपकी समय की बचत होती है आप अच्छे से पढ़ पाते हैं अच्छा स्कोर आप
अपने एग्जाम में कर पाते हैं एंड थाउजेंड्स ऑफ स्टूडेंट्स गेटवे क्लासेस पे ट्रस्ट करते हैं क्योंकि हम लोग उतनी
मेहनत करते हैं ठीक है चलिए तो सीएसआईटी इलेक्ट्रिकल मैकेनिकल एसी सभी के कोर्सेस अवेलेबल है ऑड समम के लिए इवन सैम के लिए
भी कमो और इंडिविजुअल अवेलेबल हैं ठीक है अब मिलेंगे हम नेक्स्ट वीडियो यूनिट नंबर टू के वन शॉर्ट रिवीजन के साथ है ना यहां
पर आप एक बार देखना चाहते हैं तो फि फिर देख लीजिएगा ये सब्जेक्ट जो है बेटा आपका नॉन क्रेडिट इस का क्रेडिट नहीं है लेकिन
पास होना जरूरी है डिग्री तभी मिलेगी जब आप इसमें पास हो जाओगे ठीक है तो यूनिट नंबर वन का आज हमने वन शॉर्ट रिवीजन कर
लिया आप यहां पर देख सकते हैं ये पूरा सिलेबस कितना बड़ा सिलेबस था इस पूरे सिलेबस को हमने एक सिंगल वन शॉर्ट वीडियो
में कवर किया है नेक्स्ट वीडियो में हम यूनिट नंबर टू यूनियन एग्जीक्यूटिव एंड स्टेट एग्जीक्यूटिव को कवर करने वाले हैं
ठीक है चलिए फिर मिलेंगे तब तक आप अगर चैनल पर फर्स्ट टाइम विजिट कर रहे हैं तो इसको सब्सक्राइब कर लीजिए और अपने दोस्तों
के साथ अपने क्लासमेट्स के साथ बैचमेट्स के साथ इसको शेयर कर दीजिए वीडियो को और नोटिफिकेशन को ऑन कर लीजिए ताकि अपकमिंग
वीडियोस के नोटिफिकेशन आप तक पहुंचते रहे ठीक है कीप लर्निंग एंड कीप एक्सप्लोरिंग थैंक यू विश यू वेरी ऑल द बेस्ट
भारतीय संविधान का प्रमुख उद्देश्य सरकार के ढांचे, शक्तियों और कार्यों का निर्धारण करना है। यह विधायी, कार्यपालिका और न्यायपालिका के रूप में तीन मुख्य अंगों को परिभाषित करता है, जो क्रमशः कानून बनाते हैं, लागू करते हैं और व्याख्या करते हैं। इससे सरकार की शक्तियों में संतुलन और पारदर्शिता सुनिश्चित होती है।
भारतीय संविधान विश्व का सबसे लंबा लिखित संविधान है जो समाजवाद, लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता और गणराज्य के सिद्धांतों पर आधारित है। इसमें संघीय ढांचे के तहत केंद्र और राज्यों के बीच सत्ता का स्पष्ट विभाजन, एक स्वतंत्र न्यायपालिका, एकल नागरिकता और परिवर्तनशील संरचना शामिल है जो समय के अनुसार अनुकूलित की जा सकती है।
मौलिक अधिकार वे अधिकार हैं जो प्रत्येक नागरिक को संविधान द्वारा सुरक्षित और सुनिश्चित किए गए हैं। इनमें समानता का अधिकार (आर्टिकल 14-18), स्वतंत्रता का अधिकार (आर्टिकल 19-22), धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार (आर्टिकल 25-28), और शोषण के विरुद्ध अधिकार (आर्टिकल 23-24) प्रमुख हैं। ये अधिकार नागरिकों को न्यायसंगत और स्वतंत्र जीवन जीने का अधिकार देते हैं।
संवैधानिक आपातकाल देश की सुरक्षा, आंतरिक व्यवस्था या वित्तीय संकट की स्थिति में लागू होने वाला विशेष प्रावधान है। इसके तीन प्रकार हैं: राष्ट्रीय आपातकाल (आर्टिकल 352), राष्ट्रपति शासन या स्टेट आपातकाल (आर्टिकल 356), और वित्तीय आपातकाल (आर्टिकल 360)। ये प्रावधान देश की एकता और सुशासन बनाए रखने के लिए आवश्यक होते हैं।
संविधान संशोधन के लिए संसद में संशोधन विधेयक पेश किया जाता है, जिसे पहले दोनों सदनों में चर्चा और पारित किया जाना होता है। कुछ मामलों में राज्यों की सहमति भी जरूरी होती है। इसके बाद राष्ट्रपति की मंजूरी से संशोधन लागू होता है। यह प्रक्रिया संविधान को यथासमय अनुकूल बनाने में मदद करती है।
पंचायती राज (73वां संशोधन) और शहरी स्थानीय निकाय (74वां संशोधन) संविधान में स्थानीय स्वशासन को बढ़ावा देते हैं। ये विकेंद्रीकरण के माध्यम से प्रशासन को जमीनी स्तर पर लेकर आते हैं, जिससे ग्रामीण और शहरी विकास अधिक सुगमता से होता है और जनता की भागीदारी बढ़ती है।
कंस्टीट्यूएंट असेंबली की स्थापना 1946 में भारतीय संविधान के निर्माण के लिए की गई थी। डॉ. राजेंद्र प्रसाद इसके अध्यक्ष और डॉ. भीमराव अंबेडकर इसके ड्राफ्टिंग कमेटी चेयरमैन थे। इस असेंबली ने 26 नवंबर 1949 को संविधान को स्वीकार किया और 26 जनवरी 1950 को इसे लागू किया। इसका काम स्वतंत्र और लोकतांत्रिक भारत की नींव रखना था।
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