मुख्य बिंदु और व्याख्या
अटॉर्नी जनरल ऑफ इंडिया (आर्टिकल 76)
- सुनवाई का अधिकार: अटॉर्नी जनरल को देश के सभी न्यायालयों में सुनवाई का अधिकार है।
- पद धारण: वह राष्ट्रपति के प्रसाद पर्यंत (till the pleasure of the President) पद धारण करता है, जैसे गवर्नर और मंत्रिपरिषद।
- मुख्य भूमिका: भारत का सर्वोच्च विधि अधिकारी (highest legal officer) होता है, जो केंद्र सरकार को कानूनी मामलों में सलाह देता है।
यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC)
- आर्टिकल: यह अनुच्छेद 44 (राज्य के नीति निदेशक तत्व - डीपीएसपी) में वर्णित है, जो एक उदारवादी-बौद्धिक (liberal-intellectual) डीपीएसपी है।
- वर्तमान स्थिति: यह पूरे देश में लागू नहीं हुआ है। अब तक केवल तीन राज्यों - उत्तराखंड (पहला), गुजरात (दूसरा), और असम (तीसरा) में लागू हुआ है। गोवा का पुर्तगाली कोड इससे अलग माना जाता है।
लोकसभा अध्यक्ष (स्पीकर): पद और शक्तियां
- प्रभाव: भारतीय संसदीय प्रणाली में स्पीकर का पद ब्रिटेन की संसदीय प्रणाली से प्रभावित है।
- निर्वाचन: स्पीकर और डिप्टी स्पीकर का चुनाव अनुच्छेद 93 के तहत होता है।
- चुनाव की तिथि: स्पीकर के चुनाव की तिथि राष्ट्रपति निर्धारित करता है, जबकि डिप्टी स्पीकर के चुनाव की तिथि स्वयं स्पीकर निर्धारित करता है।
- वर्तमान स्थिति: फिलहाल डिप्टी स्पीकर का पद 2019 से खाली है।
- वोटिंग पावर (आर्टिकल 100): स्पीकर के पास पहले मतदान का अधिकार नहीं है, केवल कास्टिंग वोट (गतिरोध तोड़ने का मत) होता है।
- अयोग्यता: दलबदल के मामलों में स्पीकर का निर्णय अंतिम होता है, लेकिन यह न्यायिक समीक्षा (Kihoto Hollohan vs Zachillhu केस) के अधीन है।
- प्रोटेम स्पीकर: यह एक अस्थायी स्पीकर होता है, जिसे नवनिर्वाचित सदस्यों को शपथ दिलाने के लिए नियुक्त किया जाता है। आमतौर पर यह सबसे वरिष्ठ सदस्य होता है।
राज्यसभा: सभापति और उपसभापति
- सभापति: भारत का उपराष्ट्रपति राज्यसभा का पदेन सभापति (ex-officio Chairperson) होता है। यह किसी भी सदन का सदस्य नहीं होता।
- उपसभापति: राज्यसभा का सदस्य होता है।
- संयुक्त बैठक (आर्टिकल 108): संयुक्त बैठक की अध्यक्षता लोकसभा अध्यक्ष करता है।
विशिष्ट शक्तियां (Residuary Powers)
- परिभाषा: वे शक्तियां जो संघ सूची, राज्य सूची और समवर्ती सूची में से किसी में भी उल्लिखित नहीं हैं।
- निहित: ये शक्तियां संसद के पास हैं।
- स्रोत: यह प्रावधान कनाडा के संविधान से लिया गया है।
- अनुच्छेद: अनुच्छेद 248 में इसका उल्लेख है।
भारतीय संविधान के स्रोत
- ब्रिटेन से लिए गए: संसदीय शासन प्रणाली, एकल नागरिकता, मार्शल लॉ, रिट्स (आर्टिकल 32, 226), CAG का पद, द्विसदनात्मक विधायिका।
- आयरलैंड से लिए गए: राज्य के नीति निदेशक तत्व (DPSP), राष्ट्रपति का चुनाव, राज्यसभा का गठन।
- यूएसए से लिए गए: न्यायिक समीक्षा, न्यायपालिका की स्वतंत्रता, मौलिक अधिकार, राष्ट्रपति और न्यायाधीशों का महाभियोग।
- फ्रांस से लिए गए: स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के आदर्श।
- कनाडा से लिए गए: प्रबल केंद्र वाली संघव्यवस्था, राज्यपालों की नियुक्ति, परामर्शी क्षेत्राधिकार (आर्टिकल 143), अवशिष्ट शक्तियां।
- ऑस्ट्रेलिया से लिए गए: संयुक्त बैठक (आर्टिकल 108), व्यापार और वाणिज्य, समवर्ती सूची।
- दक्षिण अफ्रीका से लिए गए: संविधान संशोधन की प्रक्रिया।
- जर्मनी (वाइमर संविधान) से लिए गए: राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान मौलिक अधिकारों का निलंबन।
मूल संरचना सिद्धांत (Basic Structure Doctrine)
- स्थापना: यह सिद्धांत केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य (1973) के मामले में स्थापित हुआ।
- मुख्य बात: संसद संविधान में संशोधन तो कर सकती है, लेकिन संविधान की मूल संरचना या पहचान (core identity) को नष्ट या परिवर्तित नहीं कर सकती।
- मिनर्वा मिल्स केस (1980): इसी मामले में स्पष्ट किया गया कि मौलिक अधिकार और DPSP के बीच संतुलन ही संविधान की आधारशिला है।
बीएनएस 2023 के प्रमुख प्रावधान
- संगठित अपराध में मृत्यु: यदि संगठित अपराध के परिणामस्वरूप मृत्यु होती है, तो दोषी को मृत्युदंड या आजीवन कारावास हो सकता है।
- लघु संगठित अपराध: इसके लिए सामुदायिक सेवा का प्रावधान है।
- डिजिटल साक्ष्य: भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) 2023 ने इंडियन एविडेंस एक्ट 1872 का स्थान लिया। इसमें इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल साक्ष्य शामिल हैं।
- दस्तावेज़ की परिभाषा: BSA की धारा 2(8) में डॉक्यूमेंट को परिभाषित किया गया है, जिसमें इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल रिकॉर्ड भी शामिल हैं।
- स्वीकारोक्ति (Admission): धारा 15 के तहत परिभाषित है, जिसमें किसी पक्ष द्वारा किया गया कोई बयान या दस्तावेज शामिल है जो मामले के तथ्यों से संबंधित हो।
सो हेलो एवरीवन एंड गुड इवनिंग सभी को। उम्मीद करता हूं मेरी वॉइस प्रॉपर आ रही है। तो एक बार कंफर्म करेंगे।
तो मौसम कैसा है? जल्दी बताइए। सब एकदम बारिश वारिश प्रॉपर तरीके से हो रही है कि नहीं हो रही है एक बार कंफर्म
करेंगे सभी लोग [गहरी सांस लेने की आवाज़] कैसा है चलो शुरू
[नाक से की जाने वाली आवाज़] करें अस्सलाम वालेकुम सर वालेकुम अस्सलाम वालेकुम अस्सलाम रिक गेमर्स कैसा है बेटा
तुम बताओ उसकी याद दिला रहे हो मुझे नमस्ते अंकल [नाक से की जाने वाली आवाज़] जी नमस्ते नमस्ते नमस्ते याद आया कुछ सबको
याद नहीं आ सकता है नमस्ते नमस्ते कुछ लोग को पुरानी मेमोरीज हिट हो गई होंगी नॉट सो पुरानी लेकिन हां
बारिश बढ़िया हो रहा है नमस्ते बेटा नमस्ते [नाक से की जाने वाली आवाज़]
आज धूप खिली बिहार में अच्छा अच्छा हमारे यहां तो नहीं खेल रही तीन दिन से आशीष कुमार समझ गया कल
होला [हंसी] तेज तो हो तुम लोग का होला [हंसी] पकड़ लिया कुछ लोग हैं नस्ते नमस्ते
[गला साफ़ करने की आवाज़] नहीं [नाक से की जाने वाली आवाज़] बेटा टीटू मामा नहीं टीटू मामा नहीं तुम पहुंच
तो गए लेकिन कररेक्टर तुमने गलत पकड़ लिया [नाक से की जाने वाली आवाज़] टीटू के ऐसे ही बोलता तो नहीं तो चलो शुरू
करते हैं यहां पे 69 क्वेश्चंस नहीं है यहां पे 60 क्वेश्चंस हैं पिटी के शुरू करें ठीक है [गला साफ़ करने की आवाज़]
माहौल तो क्या है बनाना बाकी माहौल तो बन ही चुका है हम लोग क्या-क्या कर चुके हैं वो मैं आपको बताता हूं आगे क्या करेंगे
[गला साफ़ करने की आवाज़] तो हमने अ ज्योग्राफी के सारे क्वेश्चंस कर लिए हैं। हिस्ट्री के सारे क्वेश्चंस
कर लिए हैं। और हमने स्टैटिक जीके के सारे क्वेश्चंस कर लिए हैं। आज सुबह करंट अफेयर्स भी कर लिया है। और आज अभी हम पिटी
खत्म कर लेंगे। कल सुबह इकोनॉमिक्स और कल शाम को साइंस और बीच में साइंस एंड टेक्नोलॉजी ऐसे भी इंक्लूड कर दूं। अलग से
डालूंगा उसका। [गला साफ़ करने की आवाज़] अभी थोड़ा करके आवाें आ सकती हैं। तो उसके लिए थोड़ा सा ना थोड़ा माफ़ करना। लेकिन
क्या करें हम? दिक्कत है तो है तुम लोग बोलते हो डॉक्टर को दिखाया कैसे जाएं टाइम नहीं मिलता तुम लोग या ऐसे ठीक तो
इकोनॉमिक्स कल सुबह करेंगे और एक रिकॉर्डेड वीडियो मैं डाल दूंगा साइंस एंड टेक का क्योंकि बायोटेक्नोलॉजी करके एक
नया टॉपिक इंक्लूड हुआ है सिलेबस में और वो बायोटेक्नोलॉजी जो है वो मैं अलग से मतलब वो डालना जरूरी है तो इसे अलग से
डालूंगा नहीं करवा तो मैं साइंस में वाले में देता लेकिन साइंस के क्वेश्चन फिजिक्स केमिस्ट्री बायो एनवायरमेंट ये चार टॉपिक
हो जाएंगे साइंस में कल शाम को इसी टाइम और ये जो बायोटेक्नोलॉजी और स्पेस मिशन है स्पेस के दो-तीन क्वेश्चन तो आज हमने किए
थे करंट अफेयर वाले में लेकिन ज्यादातर उसी में करेंगे हम स्पेस मिशनंस और बायोटेक्नोलॉजी के ठीक है जो
बायोटेक्नोलॉजी नया टॉपिक आया है ठीक है शुरू करते हैं बाकी इसकी पीडीएफ telegram और एप्लीकेशन पे मिल जाएगी वहां पे आपको
क्विज भी मैं डलवा दूंगा बिकॉज़ आप में से काफी लोगों की आ रही थी डिमांड ओके सर हम थोड़ा सा गरम काढ़ा पिए अब यार पी
सोचते तो हैं लेकिन टाइम नहीं मिलता ना जैसे सुबह उठे ठीक है। सर कल संडे है। अच्छा अरे तो कल
संडे है तो मतलब क्या हुआ? हैं? नहीं कल संडे तो मतलब क्या हुआ? मैं दिन देख के थोड़ी ना पढ़ाता हूं।
अ यहां से मुझे कोई एक डायलॉग याद आया लेकिन काफी वाहियात डायलॉग था वो। ठीक है? तो मैं दिन देख के नहीं पढ़ाता हूं। ठीक
है? जो हमारा सिलेबस है वो अपने को खत्म करना है। ठीक है? चलो अभी क्वेश्चंस पे आते हैं। द अटर्नी जनरल अभी यहां पे फोकस
करो। द अटर्नी जनरल ऑफ़ इंडिया हैज़ द राइट ऑफ़ ऑर्डियंस इन व्हाट? भारत के अटर्नी जनरल को इन मामलों में सुनवाई का अधिकार
है। किन मामलों में? आर्टिकल 76, क्लॉज़ वन, क्लॉज़ टू, क्लॉज़ थ्री, क्लॉज़ फोर। ओ ये क्या बात करता है? ये इसकी अपॉइंटमेंट
की बात करता है। कौन करता है? प्रेसिडेंट कर करता है। एलिजिबिलिटी क्या होनी चाहिए? सुप्रीम कोर्ट के जज वाली होनी चाहिए।
दूसरा इसकी ड्यूटीज के बारे में लिखा हुआ है। क्या ड्यूटी है इसकी? इसको सेंट्रल गवर्नमेंट को असिस्ट करना है लीगल मैटर्स
में। यानी ही इज दी हाईएस्ट लीगल [गला साफ़ करने की आवाज़] ऑफिसर ऑफ द कंट्री। भारत का सर्वोच्च विधि
अधिकारी हाईएस्ट लॉ ऑफिसर है ये कंट्री का। तो लीगल मैटर्स में सेंट्रल गवर्नमेंट को एडवाइस करता है। ही हैज़ राइट टू ऑडियंस
इन ऑल द कोर्ट्स ऑफ द कंट्री। ऑप्शन नंबर थर्ड राइट ऑफ़ ऑडियंस इन ऑल द कोर्ट्स ऑफ़ द कंट्री। एंड फोर्थ इज़ ही सर्व टिल द
प्लेज़र ऑफ़ प्रेसिडेंट। राष्ट्रपति को जब तक प्लेजर देता रहता है तब तक अह ये रहता है ऑफिस में यानी कि राष्ट्रपति के प्रसाद
पर्यंत पद धारण करता है। जैसे कि आप गवर्नर के लिए भी यही सेम टर्म एनोलॉजी देखोगे। गवर्नर भी प्रेसिडेंट के प्लेजर
तक सर्व करता है। काउंसिल ऑफ जोिस्टर्स होते हैं हमारे मंत्री परिषद वो भी प्रेसिडेंट के प्लेजर तक ही सर्व करते
हैं। जैसे कि आपको पता होगा आर्टिकल नंबर [खांसने की आवाज़][गला साफ़ करने की आवाज़] 75 क्लॉज़ टू में लिखा हुआ है कि काउंसिल
ऑफिस्टर्स होल्ड ऑफिस टिल द प्लेजर ऑफ़ प्रेसिडेंट। एक्चुअल में जिन-जिन ऑफिससेस का कॉन्स्टिट्यूशनल ऑफिसिसेस का
कॉन्स्टिट्यूशनल पोजीशंस का रिमूवल प्रोसीजर नहीं लिखा हुआ है उनके लिए इस टर्म का यूज़ किया गया है। बट दैट डज़ नॉट
मीन कि जो काउंसिल ऑफिस्टर्स हैं जब प्रेसिडेंट चाहेगा तब उनको हटा देगा। पहली बात तो किसी मिनिस्टर को अगर हटाना है तो
वो प्राइम मिनिस्टर जब रिकमेंड करेगा तभी हटा सकता है। और दूसरा पूरी सरकार को हटाना है तो आर्टिकल 75 क्लॉज़ थ्री यहां
पर लिखा हुआ है कि काउंसिल ऑफ मिनिस्टर शैल बी कलेक्टिवली रिस्पांसिबल। तो इंडिविजुअली रिस्पांसिबल तो प्रेसिडेंट के
लिए है कि प्रेसिडेंट जब चाहे हटा सकता है प्राइम मिनिस्टर रिकमेंड करेगा उसके बाद लेकिन कलेक्टिव अगर हटाना है पूरा अगर
उनको पूरी तरीके से हटाना है पूरी सरकार गिराना है तो वो लोकसभा कर सकता है प्रेसिडेंट नहीं ठीक है जो आपका आर्टिकल
75 क्लॉज़ थ्री वो कलेक्टिव रिस्पांसिबिलिटी बताता है काउंसिल ऑफ मिनिस्टर्स के टुवर्ड्स द हाउस ऑफ़ पीपल
हाउस ऑफ़ पीपल मींस लोकसभा एज़ ऑफ़ जुलाई 28 2025 अह डैश हैज़ दी यूनिफॉर्म्स। ओके? एज ऑफ़
जुलाई 28, 2025 हैज़ द यूनिफॉर्म सिविल कोड बीन इंप्लीमेंटेड अक्रॉस ऑल द इंडियन स्टेट? क्या जो यूनिफॉर्म सिविल कोड है
क्या सारे भारतीय राज्यों में लागू हो चुका है? तो यूनिफॉर्म सिविल कोड कौन से आर्टिकल में दिया हुआ है? जरा कमेंट में
जल्दी से बताएंगे। तो उत्तराखंड वाज़ द फर्स्ट स्टेट जहां पर ये लागू हुआ। देन दैट द सेकंड वाज़ द गुजरात एंड द थर्ड वाज़
द असम। तो ये तीन स्टेट हैं जहां आपने अभी यूसीसी लागू किया है। यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू किया है। ये ध्यान रखना है आपको। जो
गोवा वाला है उसका पोर्तुगीज़ कोड के हिसाब से है। तो इसलिए उसको हम कंसीडर अलग करते हैं। इसमें नहीं कंसीडर करते हैं। ठीक है?
तो ये यूसीसी होता क्या है कि सभी धर्मों सभी जेंडरर्स के लिए एक ही लॉ होगा। अलग-अलग नहीं होगा कि हिंदू पर्सनल लॉ अलग
है, मुस्लिम पर्सनल लॉ अलग है। ऐसा नहीं होगा। सबके लिए एक ही कानून चलेगा। वो है यूनिफॉर्म सिविल कोड। तो अभी नेशन वाइड तो
नहीं आया है। तो गलत। यस एक्सेप्ट जेएनके जेनके को छोड़ के हर जगह आ गया। यह भी गलत होगा। नो नॉट नेशन वाइड ओनली इन
उत्तराखंड। तो ओनली इन उत्तराखंड यह भी नहीं होगा क्योंकि बाकी स्टेट में भी आ चुका है। ठीक है? तो हैज़ द क्या यून हैज़
सिविल द यूनिफॉर्म सिविल कोड बीन इंप्लीमेंटेड अक्रॉस ऑल द इंडियन स्टेट? नो नॉट नेशन वाइड। नेशन वाइड नहीं आया।
सिर्फ कुछ स्टेट्स में आया है। और आर्टिकल की बात करेंगे 44 है। और ये किस तरीके की डीपीएसपी है? लिबरल इंटेलेक्चुअल डीपीएसपी
है ये। ठीक है? द ऑफिस ऑफ़ द स्पीकर इन द पार्लियामेंट इंडियन पार्लियामेंट्री सिस्टम इज़ हैवली इन्फ्लुएंस्ड बाय। तो
भारतीय संसदीय प्रणाली में लोकसभा अध्यक्ष का पद मुख्य रूप से किससे प्रभावित है? ब्रिटिश कॉन्स्टिट्यूशन, कनाडियन
कॉन्स्टिट्यूशन, फ्रेंच कॉन्स्टिट्यूशन या फिर आरिश कॉन्स्टिट्यूशन। बताइए। बहुत आसान है। बहुत आसान है। कर लिया आपने। और
यहां मैं आपको ये भी बताऊंगा कि कौन-कौन से क्वेश्चंस गलत हैं जो स्टेनो में पूछे गए हैं पिटी में। बाकी तो हमने देखा था कि
अ जो ज्योग्राफी है वहां पे दो क्वेश्चंस गलत है। एक तो डिफरेंशियल हीटिंग वाला गलत था और एक मैंगनीज़ वाला भी गलत था। मैंने
नोटिस नहीं किया था। आंसर तो मैंने मध्य प्रदेश ही बताया था। हाईएस्ट प्रोड्यूसर ऑफ़ मैंगनीज़ एमपी। लेकिन मुझे पता नहीं था
कि ऑफिशियल आंसर की में उन्होंने कुछ और ही मान रखा है। तो वो दो गलत हैं आपके ज्योग्राफी में। मैं एक साथ कल वीडियो बना
दूंगा कि कौन-कौन से गलत हैं एक साथ सारे। ठीक है? और जिनको आप चैलेंज कर सकते हो। इंग्लिश में तो पीएसपी सर ने बना दिया।
जीके में मैं कल बना के डाल दूंगा। ठीक है? ऑफिस ऑफ़ स्पीकर इन द इंडियन पार्लियामेंट्री सिस्टम इज़ हैवली
इन्फ्लुएंस्ड बाय अ पार्लियामेंट्री सिस्टम ऑफ़ गवर्नमेंट हमने कहां से लिया है? ब्रिटेन से। तो सिंपल है। वहीं पर ही
स्पीकर पार्लियामेंट्री सिस्टम में ही हमारा स्पीकर होता है। तो पार्लियामेंट्री सिस्टम जहां से लिया है वहीं से हमने ये
ऑफिस ऑफ स्पीकर भी लिया होगा। क्योंकि [गला साफ़ करने की आवाज़] पार्लियामेंट के जो हमारे हाउसेस होते हैं
उनको प्रिसाइड करता है। लोअर हाउस को प्रिसाइड करता है स्पीकर। और ये कौन से आर्टिकल में है? लिखा हुआ है कि हाउस शैल
सेलेक्ट अ स्पीकर एंड अ डेपुटी स्पीकर ऐज़ सून ऐज़ दे जो हमारे जैसे ही हाउस बनता है, हाउस कब बनता है? जब लोकसभा के इक्शंस
होते हैं तो नया नए काउंसिल ऑफिस्टर्स आते हैं और उसी को हम बोलते हैं कि हाउस ऑफ पीपल अभी बैठा हुआ है। तो आर्टिकल नंबर जो
93 है अनुच्छेद नंबर 93 है हमारे संविधान का वो बोलता है ये चीज कि स्पीकर और डिप्टी स्पीकर चुन लेना है। वो बात अलग है
कि अभी तक कोई डेपटी स्पीकर लोकसभा ने चुना ही नहीं है। ठीक है? स्पीकर की जो इलेक्शन की डेट होती है वो कौन फिक्स करता
है? स्पीकर के इलेक्शन की डेट प्रेसिडेंट करता है और जो डेप्टी स्पीकर होता है उसके इलेक्शन की जो डेट है वो आपका स्पीकर ही
डिसाइड करता है। ये चीज़ ध्यान रखना है। और क्या चीज़ आपको यहां पे याद रखना है? पहले स्पीकर कौन थे? जेवी मावलंकर थे। और
डिप्टी स्पीकर की जो अभी पोस्ट है ये वेकेंट है 2019 से। ओम बिरला अभी स्पीकर हैं लोकसभा के। ठीक है? ओम बिरला। लेकिन
डिप्टी स्पीकर का पद खाली पड़ा हुआ है। जो कि कॉन्स्टिट्यूशनल पोजीशन है 2019 से खाली पड़ा हुआ है। ठीक है? ये चीज़ आपको
ध्यान रखनी है। बाकी अगर हम बात करेंगे प्रोटेम स्पीकर कौन होता है? तो प्रोटेम स्पीकर एक टेंपरेरी स्पीकर होता है जो
सिर्फ इसलिए बनाया जाता है सिर्फ इसलिए उसको अपॉइंट किया जाता है सो दैट कि न्यूली अपॉइंटेड लोकसभा के जो नए मेंबर्स
हैं उनको वो शपथ दिला सके उनको वो ओथ दिला सके सिर्फ उसका वो काम होता है जनरली सीनियर मोस्ट मेंबर होता है जिसको
प्रेसिडेंट चुनता है सिर्फ ओथ दिलाने के लिए और फिर हाउस अपना स्पीकर इ कर लेता है हाउस जनरली जो जो हाउस का जो स्पीकर होता
है वो जनरली रूलिंग पार्टी से होता है जैसे अभी बीजेपी तो उसे बीजेपी से लेकिन यूके में ऐसा नहीं होता है यूके में
न्यूट्रल होना पड़ता है। यानी कि आप जिस भी पार्टी से बिलोंग करते हैं, अगर आप एक बार चुन
गए, तो आपको अपनी पार्टी से इस्तीफा देना होता है। भारत में ऐसा कुछ नहीं है। ठीक है? ये चीज़ आपको ध्यान रखना है। इनको
रिमूव करने के लिए इफेक्टिव मेजॉरिटी चाहिए। यानी ऑल द मेंबर्स ऑफ़ द हाउस। वो हटाएंगे। इफेक्टिव प्रभावी बहुमत उसको
बोलते हैं। ये ध्यान रखना है। और [खांसने की आवाज़][गला साफ़ करने की आवाज़] आर्टिकल नंबर 100 में इनकी वोटिंग पावर के
बारे में लिखा हुआ है कि दे डू नॉट हैव वोटिंग एट दी फर्स्ट इंस्टेंस। स्पीकर के पास कास्टिंग वोट होता है। अगर डिप्टी
स्पीकर स्पीकर के तौर पर फंक्शन कर रहा होगा तो उसके पास कास्टिंग वोट होगा। नहीं तो जब स्पीकर हाउस को प्रिसाइड कर रहा
होगा तो डेपुटी स्पीकर विल बी लाइक एनी अदर मेंबर ऑफ द हाउस। वो किसी और मेंबर की तरह बैठा रहेगा। स्पीकर अगर एब्सेंट है या
वेकेंट है देन उस केस में डिप्टी स्पीकर स्पीकर बन जाता है। ठीक है? ये चीज़ आपको ध्यान रखना है। स्पीकर म किसी बिल को मनी
बिल के तौर पे सर्टिफाई करता है। द फर्स्ट थिंग एंड दूसरा डिफेक्शन के ग्राउंड में अगर डिसक्वालीफ़िकेशन होता है तो स्पीकर का
डिसीजन ही फाइनल होता है। बट इज़ सब्जेक्ट टू जुडिशियल रिव्यु ये किस केस में बोला गया था? कि होटो होलोहान वर्सेस जो जचिलू
केस था उसमें बोला गया था। ये चीज़ आपको ध्यान रखनी है। ठीक है? अगर हम बात करें राज्यसभा की तो राज्यसभा में चेयर पर्सन
होता है और डिप्टी चेयर पर्सन होता है। तो राज्यसभा में चेयर पर्सन होगा और डिप्टी चेयर पर्सन होगा। चेयर पर्सन कौन होता है?
जो वाइस प्रेसिडेंट होता है कंट्री का वही चेयर पर्सन होता है राज्यसभा का। आर्टिकल नंबर 64 और आर्टिकल नंबर 89 में ये लिखा
हुआ है कि वाइस प्रेसिडेंट शैल बी द एक्स ऑफिशियल चेयर पर्सन ऑफ द राज्यसभा। डेपुटी चेयरमैन जो होता है वो हाउस का मेंबर होता
है। लेकिन जो चेयरमैन होता है जैसे जो जॉइंट सीटिंग होती है अंडर आर्टिकल नंबर 108 ऑफ़ द कॉन्स्टिट्यूशन। उसको प्रिसाइड
कौन करता है? उसको प्रिसाइड स्पीकर ऑफ दी लोकसभा करता है। लेकिन अगर वो नहीं होगा तो डेपुटी स्पीकर करेगा। और वो भी नहीं
होगा। जैसे अभी तो कोई है ही नहीं। तो फिर कौन करेगा? डेपुटी चेयरमैन है और राज्यसभा करता है। बिकॉज़ जो चेयरमैन है राज्यसभा का
वो किसी हाउस का मेंबर है ही नहीं। डेप्टी चेयरमैन जो होता है ये हाउस का मेंबर होता है। राज्यसभा का ही मेंबर होता है ये।
लेकिन जो वाइस प्रेसिडेंट है हु इज़ दी एक्स ऑफिशियल चेयर पर्सन ऑफ़ राज्यसभा ये किसी भी हाउस का मेंबर नहीं होता है। ओके?
क्लियर है? आयरलैंड के कॉन्स्टिट्यूशन से क्या लिया है? तो आयरलैंड को हम इस तरीके से लिखते हैं। और यहां से हम तीन लेटर्स
को निकालते हैं आर ई डी यानी रेड को। ठीक है? आर ई और डी। डी से हम लेते हैं। डीपीएसपी को हमने लिया है। यहां से
इलेक्शन प्रोसीजर लिया है हमने प्रेसिडेंट का। और आर से क्या लिया है? जरा बताएंगे कमेंट में। आर से हमने क्या लिया है?
जल्दी से। राज्यसभा का क्या लिया है? ठीक है? और फ्रेंच कॉन्स्टिट्यूशन से हमने क्या लिया है? लिबर्टी, इक्वलिटी और
फ्रेटरनिटी के कांसेप्ट लिए हैं। जस्टिस के जो प्रिंसिपल्स हैं जस्टिस के वो हमने रशिया से लिया है। लेकिन लिबर्टी
इक्वलिटी, फ्रेटरनिटी और फ्रेंच कॉन्स्टिट्यूशन से लिया है। कनाडा से अभी आगे देखते हैं। ठीक है?
[खांसने की आवाज़] [गला साफ़ करने की आवाज़] [नाक से की जाने वाली आवाज़]
यस नॉमिनेशन इन राज्यसभा बिल्कुल सही है सभी का नॉमिनेशन इन राज्यसभा बिल्कुल चलो अगला है अंडर द बीएनएस 2023 व्हाट इज़ दी
पनिशमेंट फॉर डेथ एज अ रिजल्ट ऑफ़ ऑर्गेनाइज़्ड क्राइम नाउ टेल मी दी सेक्शन ऑफ द बीएएनएस व्हिच टॉक्स अबाउट दी
ऑर्गेनाइज़्ड क्राइम ऑर्गेनाइज़्ड क्राइम पे सेक्शन कौन सा है? ऑर्गेनाइज़्ड क्राइम का सेक्शन है 1 1
कितना ऑर्गेनाइज़्ड लग रहा है? नहीं लग रहा है। और अगर मैं बात करूंगा ऑर्गेनाइज्ड पेटी क्राइम अगर मैं बात करूंगा
ऑर्गेनाइज़्ड क्राइम तो है लेकिन पेटी क्राइम है। यानी कि बहुत कोई सीरियस या हीनियस क्राइम नहीं है। दैट इज़ 11 1 2 ठीक
है? तो अगर तो वो अगर वो पेटी क्राइम होता अगर वो ऑर्गेनाइज्ड पेटी क्राइम होता यानी कि ज्यादा हीनियस ना होता तो तो कम्युनिटी
सर्विस करवा ली जाती। कम्युनिटी सर्विस यानी कि चलो साफ सफाई कर दो। चलो थोड़ा सी सेवा कर दो। चलो ट्रैफिक पुलिस वालों के
साथ काम कर लो। तो इसे जेल में भी भरेंगे नहीं और जो फर्स्ट टाइम ऑफेंडर्स हैं जनरली उनके साथ ही किया जाता है। फर्स्ट
टाइम ऑफेंडर और पेटी ऑफेंस किया है थोड़ी बहुत चोरी कर ली मान लो है ना 5 10 की चोरी टाइप तो उनसे ये करवा लिया जाता है
कम्युनिटी सर्विस ठीक है डेथ और लाइफ इंप्रज़नमेंट मिलता है अगर डेथ हो जाती है किसी के ऑर्गेनाइज्ड क्राइम की वजह से तो
फिर डेथ या फिर लाइफ इंप्रज़नमेंट ही है। ठीक है? यह तो इंडिया में होता नहीं कि डिपोर्ट कर दिया जाएगा। पहले ब्रिटिशर्स
के टाइम पे होता था कि काले पानी की सजा मिल गई। डिपोर्ट कर दिया। जैसे बहादुर शाह ज़फर को भेज दिया था। म्यांमार की जो है ना
जो उस टाइम पे बर्मा कहलाता था वहां पे जो जेल थी। ठीक है? वहां पर भेज दिया था। कमिटी सर्विस आपकी जैसे मैंने आपको बताया
पेटी क्राइम्स के लिए होती है। और अगर किसी की डेथ हुई है तो उसमें सिंपल इंप्रेज़मेंट दो साल की तो नहीं ही होगी।
ठीक है? अच्छा आप ये बताओ कि जो टेररिस्ट एक्टिविटीज़ हैं वो किस सेक्शन में लिखी हुई है? जो टेररिस्ट एक्टिविटीज़ हैं वो
किस सेक्शन में है? अगले पे आते हैं। व्हाट इज मेंट? व्हाट इज द मीनिंग ऑफ रेजडुरी पावर्स अंडर दी इंडियन
कॉन्स्टिट्यूशन? भारतीय संविधान के अंतर्गत अवशिष्ट शक्तियों का क्या अर्थ है? व्हाट आर रेजिडुअरी पावर्स? पावर्स
ओनली गिवेन टू स्टेट्स, पावर ओनली टू जुडिशरी, पावर नॉट मेंशन इन एनी लिस्ट, वेस्टेड इन पार्लियामेंट, ऑल पावर्स टू
यूटीज़। रेजिडुअरी पावर क्या है? तो सेवंथ शेड्यूल में हम पढ़ते हैं कि तीन लिस्ट हैं यूनियन, स्टेट, कनकरेंट। ठीक है? उनमें
सब्जेक्ट्स लिखे हुए हैं जिनमें कि लॉ बनाने की पावर लिखी हुई है। पार्लियामेंट के पास है, स्टेट लेजिस्लेचर के पास है।
लेकिन अगर कोई एक ऐसा सब्जेक्ट है जो इन तीनों लिस्ट में मेंशन नहीं है। ना तो लिस्ट वन, ना तो टू, ना तो थ्री। लिस्ट वन
मतलब यूनियन, लिस्ट टू मतलब स्टेट, लिस्ट थ्री मतलब कॉनकरेंट। तो अगर ऐसा कोई सब्जेक्ट है तो उसको हम रेजिडुअरी पावर
बोलते हैं। और उस पे लॉ बनाने की पावर हमारे पार्लियामेंट के पास होती है। पावर नॉट मेंशंड इन एनी लिस्ट वेस्टेड इन
पार्लियामेंट। ऑप्शन नंबर थर्ड यहां पर सही आंसर होगा। ठीक है? चलो। और ये चीज़ हमने कहां से ली है? दिस हैज़ बीन बोरोड
फ्रॉम दी कनाडियन कॉन्स्टिट्यूशन। इसको कनाडा के कॉन्स्टिट्यूशन से लिया गया है। कनाडा से और क्या लिया है? फेडरेशन विद अ
स्ट्रांग सेंटर। अपॉइंटमेंट ऑफ़ गवर्नर बाय दी सेंटर। एंड एडवाइज़री जुरिसडिक्शन जो होता है ना एडवाइज़री जुरिसडिक्शन कौन सा
आर्टिकल है? जहां पर प्रेसिडेंट एडवाइस लेने जाता है सुप्रीम कोर्ट से। वो भी हमने कनाडा से लिया। आर्टिकल नंबर 143
एंड रेजिडुअरी पावर को लेके आर्टिकल बता सकते हैं आप। कौन से आर्टिकल में लिखा हुआ है कि रेजिडरी पावर वेस्ट विद द
पार्लियामेंट यानी कि ऐसा कोई सब्जेक्ट जो किसी लिस्ट में मेंशन नहीं उस पे लॉ बनाने की पावर पार्लियामेंट के पास है। द
आर्टिकल इज़ आर्टिकल नंबर 248 248 अंडर द बीएनएस 2023 द टर्म डॉक्यूमेंट इज़ डिफाइंड अंडर व्हिच सेक्शन। तो डॉक्यूमेंट
की डेफिनेशन किस सेक्शन में दी हुई है? ये आपसे पूछा है। अब ये ऐसा क्वेश्चन है कि सिर्फ सेक्शन तक वो सीमित नहीं है। वो
सेक्शन के क्लॉज़ में भी घुस गया है। सेक्शन टू क्लॉज़ सिक्स एट, 10, 12। ठीक है? तो थोड़ा सा डीप में ये घुसा है
क्योंकि सेक्शन टू में बहुत सारी चीजों की डेफिनेशन दी हुई है। जैसे चाइल्ड कौन है? इस तरीके से बहुत सारी डेफिनेशंस दी हुई
है। तो स्पेसिफिकली डॉक्यूमेंट की बात करेंगे तो सेक्शन टू क्लॉज़ एट में डेफिनेशन दी हुई है डॉक्यूमेंट की व्हिच
ऑल्सो रिकॉर्ड्स इन इलेक्ट्रॉनिक एंड डिजिटल रिकॉर्ड्स। ठीक है? इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल रिकॉर्ड भी इंक्लूड करता है।
ओके? चलो। और अगर बात करेंगे बाकी की तो जैसे फॉर एग्जांपल ये सिक्स वाला है। ये डेप्थ को डिफाइन करता है।
10 की अगर बात करेंगे जेंडर को डिफाइन करता है और 12 की अगर बात करेंगे यह गवर्नेंट यानी सरकार को डिफाइन करता है।
अगला करिए। [गला साफ़ करने की आवाज़] चलिए
द सेवन शेड्यूल ऑफ़ द कॉन्स्टिट्यूशन डील्स विद पंचायत से डील करता है। पंचायत से हमारा 11थ शेड्यूल है। अमेंडमेंट 73
फंक्शनल आइटम्स कितने हैं 11थ शेड्यूल में? 29 ठीक है? लोकल से रूरल लोकल सेल्फ
गवर्नमेंट है। 73 अमेंडमेंट जो 1992 में हुआ था। लागू हुआ था 24th अप्रैल 1993 को जिस दिन हम पंचायती राज दिवस मनाते हैं।
बलवंत राय मेहता कमेटी 1957 के रिकमेंडेशंस पर थ्री ईयर पंचायती राज सिस्टम को लागू किया गया था। ठीक है?
शेड्यूल नंबर 11 है लेकिन ध्यान रखिएगा पार्ट नंबर जो है वो नाइन है। पार्ट नाइन है कॉन्स्टिट्यूशन का जिससे इसको ऐड किया
गया था। आर्टिकल नंबर 243 से लेके 243 पी। आर्टिकल से पूछता नहीं है तो इसलिए मैं बताता भी नहीं हूं वो। ठीक है? डिवीज़ ऑफ़
पावर्स दिया हुआ है सेवंथ शेड्यूल में। फंडामेंटल ड्यूटीज़। इससे भी बहुत ज्यादा क्वेश्चंस नहीं आते हैं। एडिक्वटी पैटर्न
में पहले आते थे टीसीएस में। पार्ट फोर ए में दी हुई है फंडामेंटल ड्यूटीज़। आर्टिकल 51 ए में दी हुई है फंडामेंटल ड्यूटीज़।
टोटल 11 है नंबर में। ऐड किया गया था 42 अमेंडमेंट से सरदार सोन सिंह कमेटी के रिकमेंडेशंस पर। तब 10 ही थी। लेकिन 86
अमेंडमेंट ऑफ़ 2002 से 11वीं ड्यूटी ऐड करी थी कि बच्चों को एजुकेट करो। ऐसा गार्डियंस को ड्यूटी दिया गया था। 86
अमेंडमेंट से हमारा आर्टिकल 21 ए भी ऐड किया गया था। जिसने प्राइमरी एजुकेशन को एक फंडामेंटल राइट बनाया और साथ ही साथ
आर्टिकल 45 जो कि एक डीपीएसपी है उसका सब्जेक्ट मैटर चेंज करके उसमें अर्ली चाइल्डहुड केयर को यहां पर ऐड किया गया।
किसको? अर्ली चाइल्डहुड केयर को। कि क्लियर है इतनी चीज़? कमिटी कौन सी थी? जिस रिकमेंडेशन से इसको ऐड किया गया था। सरदार
स्वर्ण सिंह कमिटी। इमरजेंसी प्रोविज़ंस की अगर बात करेंगे तो कौन से पार्ट ऑफ़ कॉन्स्टिट्यूशन में दी हुई है? तो पार्ट
नंबर 18 में दी हुई है। इमरजेंसी हमारी तीन तरीके की है। आर्टिकल 352 अह नेशनल इमरजेंसी, 356 नॉट स्टेट इमरजेंसी लिखा
नहीं है। बट ये प्रेसिडेंट रूल है जिसको ही हम स्टेट इमरजेंसी बोल देते हैं। आर्टिकल 360 फाइनेंसियल इमरजेंसी जो आज तक
नहीं लगी है। फाइनेंसियल इमरजेंसी और प्रेसिडेंट जो रूल है इसको अप्रूव अप्रूवल चाहिए पार्लियामेंट से विद इन 2 मंथ। 2
महीने के अंदर अप्रूवल चाहिए और इसमें सिंपल मेजॉरिटी चाहिए होती है। ये आज तक नहीं लगी। आपको पता होना चाहिए। लेकिन
यहां पर अगर ये लग गई तो जो प्रेसिडेंट है वो जजेस की सैलरी डिक्रीज कर सकता है। ये पता होना चाहिए। आर्टिकल 352 नेशनल
इमरजेंसी के बारे में बात करता है। अब आप इसमें डीप जाने तो बहुत जाया जा सकता है। लेकिन अब रुकते हैं यहीं पे। नहीं काफी
लोग का जैसे मैं कल कमेंट देख रहा था सर ज्यादा आप डीप घुस जाते हैं कभी-कभी। तो ठीक है। आगे बढ़ते हैं। अभी ओके। चलो आगे
बढ़ते हैं। द कॉन्स्टिट्यूशन ऑफ़ पार्लियामेंट कम्स अंडर। तो कॉन्स्टिट्यूशन ऑफ़ पार्लियामेंट का मतलब
है कि पार्लियामेंट का जो गठन है, संसद का जो गठन है, वो किस अनुच्छेद के तहत आता है? 72 [गला साफ़ करने की आवाज़]
75 77 या 79 तो 72 की अगर बात करेंगे आर्टिकल नंबर 72 की अगर बात करेंगे तो यह बात करता है पार्डनिंग पावर की क्षमा
शक्ति की बात करता है यानी जुडिशियल पावर है प्रेसिडेंट की अगर हम बात करें ठीक है यानी कि प्रेसिडेंट क्षमा दे सकता है। अब
इसमें पार्डन कम्यूट रेस्पाइट रिप्राइव और ये सारी चीजें हम पढ़ते हैं। ठीक है? जो मैं आपको एमएसपी और पीसीएम करके पढ़ाता
हूं। लेकिन ठीक है अभी यहीं पे रुकते हैं। ठीक है? पार्लिनिंग पावर के बारे में दिया हुआ है जो प्रेसिडेंट की जुडिशियल पावर
है। ठीक है? और कोई भी कभी भी इस तरीके का आपको स्टेटमेंट दिखे कि दिस इज़ नॉट सब्जेक्ट टू जुडिशियल रिव्यु। वो आप गलत
ही मानना। [गला साफ़ करने की आवाज़] ऐसा नहीं कि हर चीज 100% चीजें ही जुडिशरी रिव्य्यू कर सकती है। ऐसा कुछ है ही नहीं।
लेकिन जनरली आप ये मान के चलना जब भी इस तरीके से लिखे कि दिस इज़ एक्सप्लसिटली डिफाइंड इन द कॉन्स्टिट्यूशन। या दिस इज़
बाइंडिंग ऑन दिस पर्टिकुलर अथॉरिटी। या फिर कि ये सब जुडिशरी इस पे रिव्यु कर ही नहीं सकती। जनरली 95% चांसेस में गलत ही
होते हैं। ये तीनों चीजें जो अभी मैंने आपको बताई। तो इस चीज इसका ध्यान रखेंगे। अब कुछ चीजें हैं जैसे एग्जांपल के तौर पे
जुडिशरी में ये क्वेश्चन नहीं पूछा जा सकता है कि काउंसिल ऑफ मिनिस्टर ने प्रेसिडेंट को क्या एडवाइस दी। ये कभी
नहीं पूछा जा सकता है। ठीक है? तो कुछ चीजें हैं। जैसे आर्टिकल 262 वाटर ट्रिब्यूनल के केस में पार्लियामेंट कोर्ट
के जुरिसडिक्शन को बार कर सकता है कि तुम इस मैटर में इंटरफेयर नहीं कर सकते हो। ठीक है? अब इसी तरीके से गवर्नर की जो
पार्निंग पावर है वो किस आर्टिकल में दी हुई है और किस तरीके से दोनों अलग हैं ये बताइए। कॉन्स्टिट्यूशन ऑफ पार्लियामेंट
दिया हुआ है। आर्टिकल 75 है। इसमें क्लॉज़ वन है, क्लॉज़ टू है, क्लॉज़ थ्री है, क्लॉज़ फोर है, क्लॉज़ फाइव है और क्लॉज़ सिक्स है।
छह क्लॉज़ हैं इसमें। पहला बात करता है अपॉइंटमेंट की कि प्राइम मिनिस्टर की अपॉइंटमेंट और काउंसिल ऑफ मिनिस्टर की
अपॉइंटमेंट कौन करेगा? प्रेसिडेंट करेगा। ठीक है? काउंसिल ऑफ मिनिस्टरर्स की प्राइम मिनिस्टर की एडवाइस पे करेगा। दूसरा मैंने
अभी आपको बताया कि इंडिविजुअल रिस्पांसिबिलिटी दी है। यानी कि ये प्रेसिडेंट के प्लेजर तक सर्व करते हैं।
इंडिविजुअल रिस्पांसिबल होते हैं। किसके प्रति? दे आर इंडिविजुअली रिस्पांसिबल टुवर्ड्स दी प्रेसिडेंट। दे आर कलेक्टिवली
रिस्पांसिबल। दे आर कलेक्टिवली रिस्पांसिबल टुवर्ड्स लोकसभा। फोर्थ में क्या दिया हुआ है? इनकी ओथ दी हुई है। शपथ
कौन दिलाता है? या तो प्रेसिडेंट या फिर उसके द्वारा अपॉइंट किया गया कोई पर्सन जैसे [गला साफ़ करने की आवाज़]
प्रोटेम स्पीकर। 6 महीने तक विद इन सिक्स मंथ्स किसी भी हाउस की मेंबरशिप लेनी होगी। नहीं तो अगर आप मिनिस्टर हैं और आप
किसी भी हाउस के मेंबर नहीं है तो विदिन छह 6 महीने आप किसी भी हाउस की मेंबरशिप ले लीजिए नहीं तो आपकी मिनिस्टरशिप भी चली
जाएगी। तो 6 महीने तक की आपको महलत दी जाती है कि आप बिना किसी हाउस का मेंबर हुए भी मिनिस्टर रह सकते हैं। बट मैक्सिमम
6 महीने के लिए और यहां पर दिया हुआ है कि इनकी सैलरी कौन डिसाइड करता है? तो इनकी सैलरी ये खुद डिसाइड करते हैं। यानी कि
इनकी सैलरी पार्लिया किनकी ये जोिस्टर्स वगैरह हैं इनकी सैलरी पार्लियामेंट खुद ही डिसाइड करता है। ये ठीक है? आर्टिकल 77
किसकी बात करता है? कि जो धंधा है यानी कि जो भी बिजनेस है ठीक है? यूनियन का वो किसके नाम पे चलेगा? वो राष्ट्रपति के नाम
पे चलेगा प्रेसिडेंट के। यानी ऑल द कंडक्ट ऑफ द बिज़नेस शैल बी कंडक्टेड इन द नेम ऑफ़ द प्रेसिडेंट। आर्टिकल 79 इसका सही आंसर
होगा। कंपोज़िशन में लोअर हाउस होता है लोकसभा, अप्पर हाउस होता है राज्यसभा। और इसमें आता है आपका प्रेसिडेंट।
पार्लियामेंट में प्रेसिडेंट भी आता है। [गला साफ़ करने की आवाज़] क्यों? क्योंकि कोई भी बिल एक्ट नहीं बन
सकता बिना प्रेसिडेंट के एसेंट के। ये चीज आपको ध्यान रखनी है। गवर्नर का जो पार्निंग पावर है वो आर्टिकल नंबर 161 में
दिया हुआ है अनुच्छेद नंबर 161 में। अंतर यह है कि गवर्नर जो है डेथ सेंटेंस को पार्डन नहीं कर सकता है। और अगर मार्शियल
लॉ के तहत अगर कोई सेंटेंस मिला है यानी कि अगर कोई डिफेंस कोर्ट है जैसे हमारी डिफेंस फोर्सेस में जो कोर्ट होती है उनको
मार्शल कोर्ट बोला जाता है। तो अगर उन्होंने कोई जजमेंट पास किया तो उसके खिलाफ भी गवर्नर के पास आप नहीं जा सकते
हैं। किसके पास जा सकते हैं? प्रेसिडेंट के पास ही। [खांसने की आवाज़]
[गला साफ़ करने की आवाज़] अंडर द कॉन्सिट्यूशन ऑफ इंडिया व्हिच डीपीएसपी सर्व एस द फाउंडेशनल बेसिस फॉर द
एडवोकेसी ऑफ यूनिफॉर्म सिविल कोड बताइए। तो आर्टिकल 40 रिकॉल करेंगे। ये बात किसकी करता है? ये बात करता है आपकी पंचायत की
बात करता है। ये आर्टिकल 44 सही आंसर होगा। आर्टिकल फाइव किसकी बात करता है? इंटरनेशनल पीस एंड सिक्योरिटी की बात
करेगा ये। ठीक है? इंटरनेशनल पीस और सिक्योरिटी की बात करेगा ये। आर्टिकल 25 राइट टू रिलीजियस फ्रीडम फॉर
एन इंडिविजुअल दिया हुआ है। यानी कि धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार दिया हुआ है यहां पर। वैसे रिलीजियस जो फ्रीडम है वो
आपकी 25 में दी हुई है। 26 में दी हुई है, 27 में दी हुई है और 28 में दी हुई है। राइट टू रिलीजियस फ्रीडम फॉर एन
इंडिविजुअल। रिलीजियस डोम डिनॉमिनेशन के लिए राइट टू रिलीजियस फ्रीडम है। यहां पर है फ्रीडम फ्रॉम टैक्सेशन। धर्म के नाम पे
टैक्स नहीं लगाया जा सकता है। और 28 में है कि किसी गवर्नमेंट एडेड स्कूल में रिलीजियस इंस्ट्रक्शन धार्मिक जो
इंस्ट्रक्शंस है वो नहीं दिए जा सकते हैं। तो ये रिलीजियस फ्रीडम की बात करते हैं ये। चलिए अगला है व्हिच आर्टिकल डील्स विद
द कंपोज़शन ऑफ़ द लोकसभा। बाकी तो अगर आपको पूरा पॉलिटी रिवाइज़ करना है तो पॉलिटी का अभी मैंने स्मार्ट शॉट लिया था। आप उससे
कर सकते हैं अगर आपको करना है तो। ठीक है? बाकी यहां पर मैं ऑप्शंस वगैरह सब बताते चलूंगा। व्हिच आर्टिकल डील्स विद दी
कंपोज़िशन ऑफ़ लोकसभा? तो अभी 79 हमने देखा यह पार्लियामेंट के कंपोज़िशन से डील करता है। 80 में आता है राज्यसभा और 81 में आता
है आपका लोकसभा। लोकसभा के कंपोज़िशन की बात करेंगे तो मैक्सिमम 550 मेंबर्स हो सकते हैं जिसमें कि डिवीज़ कुछ इस तरीके से
हो सकता है। होता है 530 स्टेट से इलेक्टेड होते हैं और 20 आपके मैक्सिमम यूटी से। तो मैक्सिमम इतने हो सकते हैं।
लेकिन करेंटली हैं कितने? तो 545 मेंबर्स हैं। लोकसभा का अगर यहां पे बात करें लोकसभा और जो आपके राज्यसभा होते हैं उनके
क्वालिफिकेशंस क्या होते हैं? तो क्वालिफिकेशंस की अगर बात करेंगे तो 25 की मिनिमम एज होनी चाहिए। ठीक है? लोकसभा का
सदस्य आपको अगर बनना है तो मिनिमम 25 की एज होनी चाहिए। ओके? और राज्यसभा का अगर मेंबर बनना है आपको तो 30 एज होनी चाहिए।
प्रेसिडेंट, वाइस प्रेसिडेंट या गवर्नर बनना है तो 35 ऐज होनी चाहिए। 75 में बता चुका हूं। 77 बता चुका हूं और 79 भी हम
देख चुके हैं। क्वालिफिकेशंस की अगर बात करेंगे इनकी मेंबरशिप ऑफ़ पार्लियामेंट की तो आर्टिकल नंबर 84 में क्वालिफिकेशन दी
हुई है। ये ध्यान रखना है। यानी कि इनको क्या क्वालिफिकेशन चाहिए? तो ये तो मैंने ऐज वाली बताई थी। बाकी तो एक कॉमन ही होती
है। एंड दैट इज़ देयर शुड बी अ सिटीजन ऑफ़ इंडियाज़। भारत के नागरिक होने चाहिए। बाकी ऐज वाला तो मैंने बता ही दिया है। लोकसभा
में 25 और राज्यसभा में 30। इसीलिए राज्यसभा को हाउस ऑफ़ एल्डर्स बोलते हैं। और राज्यसभा को हम क्या बोलते हैं?
परमानेंट हाउस बोलते हैं। परमानेंट इसलिए बोलते हैं बिकॉज़ उसके 1/3 जो मेंबर्स हैं हर 2 साल में रिटायर होते रहते हैं। लेकिन
पूरा हाउस एक साथ खाली नहीं होता है। तो परमानेंट हाउस है। तो हर मेंबर का वहां टर्म छ साल का होता है। लोकसभा की अगर बात
करेंगे तो मैक्सिमम इसका खुद का और मेंबर्स का टर्म 5 साल का हो सकता है। बस कुछ एक्सेप्शनल सरकमस्ट्ससेस हैं जैसे कि
नेशनल इमरजेंसी वाले जहां पर एक्सटेंड किया जा सकता है। नहीं तो मैक्सिमम 5 साल। आर्टिकल 85 में क्या दिया हुआ अनुच्छेद 85
में तो 85 में दिया हुआ है कि हाउस को समन प्रोरोग और डिॉल्व यह कौन कर सकता है? तो हाउस को समन, प्रोरोग और डिॉल्व ये सारे
काम प्रेसिडेंट ऑफ इंडिया कर सकता है। ये ध्यान रखना है आपको। बट एक चीज़ ध्यान रखनी है एंड दैट इज़ कि डिॉल्व सिर्फ आपका
लोकसभा ही हो सकता है। राज्यसभा इज़ नॉट सब्जेक्ट टू डिोल्यूशन। क्योंकि राज्यसभा इज़ अ परमानेंट हाउस। इट इज़ अ कंटिन्यूइंग
चेंबर। वो कंटिन्यू रहता है हमेशा के लिए। ठीक है? बस 1/3 मेंबर रिटायर होते रहते हैं 2 साल के लिए। अगला है दी पावर ऑफ़
जुडिशियल रिव्य्यू इन इंडिया इज़ पार्ट फ्रॉम वि कंट्री? तो जुडिशियल रिव्य्यू हमने कहां से लिया है?
कर लिया। तो ब्रिटेन से हमने क्या-क्या लिया? लेट्स रिकॉल। तो पार्लियामेंट्री फॉर्म ऑफ़ गवर्नमेंट तो आप समझ गए। अभी
पीछे देखा था जिसको वेस्ट मिनिस्टर मॉडल ऑफ़ गवर्नमेंट भी बोलते हैं। क्योंकि इनकी जो ब्रिटेन की पार्लियामेंट है वो वेस्ट
मिनिस्टर में ही लोकेटेड है। और क्या लिया है हमने यहां से? तो यहां से हमने लिया सिंगल सिटीजनशिप यानी कि एकल नागरिकता का
कांसेप्ट लिया है। प्लस मार्शियल लॉ लिया है। ठीक है? प्लस प्रेरोगेटिव जो हमारी रेट्स हैं आर्टिकल 32 और 226 में वो ली
है। ऑफिस ऑफ जो हमारा कैग है कंट्रोल ऑडिटर जनरल वो लिया है। प्लस हमने यहां से बाईकमरल लेजिस्लेचर यानी कि द्विसदनीय
विधानमंडल लिया है। बाईकमरल लेजिस्लेचर ये सारी चीजें ली है। फ्रेंच कॉन्स्टिट्यूशन से लिबर्टी इक्वलिटी एंड फ्रेटरनिटी
आयरलैंड से भी मैंने आपको बता ही दिया। और यूएस से हमने लिया जुडिशियल रिव्यु एंड जुडिशियल इंडिपेंडेंस आल्सो। जुडिशरी की
इंडिपेंडेंस भी हमने यहीं से ली है। ठीक है? जुडिशियल इंडिपेंडेंस। ठीक है? ये ध्यान रखना है आपको। और क्या
लिया है? फंडामेंटल राइट्स जिनको मैग्नाकार्ट ऑफ इंडियन कॉन्स्टिट्यूशन बोलते हैं। प्लस जो रिमूवल ऑफ प्रेसिडेंट
और जजेस है। ठीक है? यानी कि जो इंपीचमेंट होता है ना जो रिमूवल प्रेसिडेंट को हम इंपीचमेंट बोलते हैं। कौन से आर्टिकल में
आता है? और जजेस हो गया। ये सब हमने यहां से लिया। ऑफिस ऑफ़ भी है। ऑफिस भी हमने प्रेसिडेंट का यहीं से लिया है। तो इसको
हम इंपीचमेंट बोलते हैं। व्हिच कम्स अंडर आर्टिकल नंबर 61 ऑफ़ द कॉन्स्टिट्यूशन। ठीक है? एक चीज़ यहां पे ध्यान रखना कि
व्हाट इज़ जुडिशियल ओवर रीच? यह जुडिशियल ओवर रीच क्या चीज होती है? तो जुडिशियल ओवर रीच एंड जुडिशियल एक्टिविज्म जब इस
तरीके के वर्ड्स आए तो रिमेंबर कि जब जुडिशरी अपने जुरिसडिक्शन से बाहर जाके काम करने लगे प्रोएक्टिव जिसको हम बोलते
हैं प्रोएक्टिव जुडिशियल रोल अगर होने लगे। ठीक है? है? यानी कि आपको पता है इंडिया में सेपरेशन ऑफ़ पावर तो है। यानी
कि जो हमारा लेजिस्लेचर है यानी कि जो लॉ बनाता है एग्जीक्यूटिव जो उसको इंप्लीमेंट करता है जुडिशरी जो उसको रिव्य्यू करता है
इनके बीच में सेपरेशन ऑफ़ पावर तो है। लेकिन इंडिया में स्ट्रिक्ट सेपरेशन ऑफ़ पावर नहीं है जैसा यूएसए में है। यूएसए
में है बहुत स्ट्रिक्ट है। वहां पे जैसे जैसे कि डोनाल्ड ट्रंप है जिसको चाहे उसको मिनिस्टर बना दे और वो किसी को आंसरेबल
नहीं है। लेकिन इंडिया में यू नो कि एग्जीक्यूटिव यानी कि काउंसिल ऑफ़ मिनिस्टर आर इज़ कलेक्टिवली रिस्पांसिबल टू दी
लोकसभा। ठीक है? ठीक है? तो इसका मतलब है कि स्ट्रिक्ट सेपरेशन ऑफ़ पावर नहीं है। जैसे फॉर एग्जांपल डेलीगेटेड लेजिसलेशन
नाम की एक चीज होती है। व्हाट इज़ डेलीगेटेड लेजिसलेशन? जहां पर लेजिस्लेचर जो है डेलीगेटेड लेजिसलेशन। लेजिस्लेचर जो
है एग्जीक्यूटिव को लेजिसलेशन की पावर दे देता है। लॉ बनाने की पावर दे देता है। तो दैट मींस कि स्ट्रिक्ट सेपरेशन ऑफ़ पावर
नहीं है। और यहां पर भी वही होता है। एग्जांपल के तौर पर आर्टिकल 142 ये क्या बोलता है कि सुप्रीम कोर्ट किसी भी मैटर
में कंप्लीट जस्टिस देने के लिए कोई भी ऑर्डर या डिक्री पास कर सकता है। तो एक तरीके से फिर वो अपने बाउंड्री से बाहर भी
निकल जाता है कभी-कभी। या फिर एग्जीक्यूटिव को बोलने लगता है कि ये काम करो। लेजिस्लेचर को बोलने लगता है तुम ये
काम करो। तो उसी को बोलते हैं जुडिशियल ओवररीच। [नाक से की जाने वाली आवाज़] ठीक है? तो ये चीज़ समझ में आएगा थोड़ा सा।
आगे बढ़ते हैं। अभी व्हिच आर्टिकल डिस्क्राइब्स दी कंपोज़शन ऑफ़ राज्यसभा एज़ सिंपल एज दैट ये पार्लियामेंट के बारे में
बात करता है। ये राज्यसभा के बारे में बात करता है। लोकसभा के बारे में बात करता है। और ये किसकी बात करता है? जरा बताएंगे। तो
इसमें मैक्सिमम 250 सीट्स हो सकती हैं। जिसमें 238 इेड होती हैं और 12 नॉमिनेटेड होती हैं। वहां पर 550 में क्या था? 530
इलेक्टेड और मतलब 550 इेड थी। 530 स्टेट से और बाकी यूटी से। वहां पहले एंग्लो इंडियन का नॉमिनेशन हुआ करता था जो अभी
खत्म किया जा चुका है बाय 104 कॉन्स्टिट्यूशन अमेंडमेंट। अब इनको हम किस या फिर हमको हम क्या मतलब जो प्रेसिडेंट
है वो किस ग्राउंड में इनको नॉमिनेट करता है बताएंगे। इसमें अगर बात करेंगे तो डीलिमिटेशन कमीशन के बारे में लिखा हुआ है
कि हर सेंसस के बाद एक डीलिमिटेशन कमीशन बनना चाहिए। लेकिन जो डीलिमिटेशन कमीशन है वो अभी उस पे फ्रीज़ लग रखा है। डीलिमिटेशन
कमीशन अभी सिर्फ चार बार बैठा है। अगर मैं बात करूं आजादी के बाद से वैसे हर सेंसेस के बाद बैठना था। लेकिन सदर्न स्टेट्स जो
थे उन्होंने बोला था कि नॉर्थ वाले दबा के पापुलेशन बढ़ा रहे हैं और उनका रिप्रेजेंटेशन भी बढ़ रहा है पार्लियामेंट
में इसकी वजह से। तो ये तो हम पॉपुलेशन एक तो कंट्रोलिंग मेजर्स भी ले रहे हैं और ऊपर से उसकी हमें सजा भी भुगतनी पड़ रही
है। तो फिर इसको फ्रीज़ कर दिया गया था। तो 1952 में ये बैठा था 1951 के सेंसस के बाद। देन 1963 1963 में ये बैठा था। 1973
और ये बैठा था आपका 2002 में। तो ये चार बार बैठा है। ठीक है? और लेकिन ये आपका 2026 तक फ्रीज़ कर दिया गया था थ्रू दी
84th कॉन्स्टिट्यूशनल अमेंडमेंट। 84 अमेंडमेंट से इसको फ्रीज़ कर दिया गया। तो 2026 तक तो नहीं होगा। 2026 के बाद
जो पहला सेंसस होगा उसके बाद ही डीलिमिटेशन कमीशन बनाया जा सकता है। तो ये चीज़ है इस तरीके से। ध्यान रखेंगे थोड़ा
सा। आगे बढ़ते हैं। और यहां पर कौन से जो फील्ड्स हैं उसमें नॉमिनेट कर सकता है प्रेजेंट? उसको हम बोलते हैं लिसस प्लस
कोऑपरेटिव सोसाइटी। लिटरेचर, साइंस, आर्ट, सोशल सर्विस और कोऑपरेटिव सोसाइटी। साहित्य हो गया। ठीक है? लिटरेचर साइंस
यानी कि आपका विज्ञान हो गया, कला हो गया और समाज सेवा हो गया। और ये आपका कोऑपरेटिव सोसाइटी हो गई। कोऑपरेटिव
सोसाइटी की अगर बात करेंगे तो कोऑपरेटिव सुनते ही कौन सा अमेंडमेंट दिमाग में याद आना चाहिए? 97 अमेंडमेंट ऑफ़ 2011 जिसने कि
पार्ट नंबर नाइन बी कॉन्स्टिट्यूशन में ऐड किया था। एंड आर्टिकल नंबर 243 हम 243 पी जेड जी से ले सॉरी Z एच से लेके Z टी तक
यहां पर दिए हुए हैं आर्टिकल्स अगर बात करेंगे अह पार्ट नंबर नाइन बी जो कोऑपरेटिव सोसाइटी की बात करता है। प्लस
आर्टिकल नंबर 19 क्लॉज़ वन सब्लॉज़ सी जब हम पढ़ते हैं 19 क्लॉज़ वन तो उसमें हम सामरो पढ़ते हैं। छह राइट्स दिए हुए हैं। स्पीच
एंड एक्सप्रेशन, असेंबल पीसफुली अदर टर्म्स और एसोसिएशन। तो राइट टू फॉर्म असोसिएशन एंड कोऑपरेटिव सोसाइटी भी यहां
पर जोड़ा गया था। प्लस ध्यान रखना है आर्टिकल 43 जो बी है वो यहां पे ऐड किया गया था। ये भी आपको ध्यान रखना है 97
अमेंडमेंट से। तो सारी 97 अमेंडमेंट कोऑपरेटिव सोसाइटी से ही रिलेटेड है। द कंडक्ट ऑफ बिज़नेस ऑफ़ द गवर्नमेंट ऑफ
इंडिया कम्स अंडर। तो अभी मैंने आपको बताया कंडक्ट ऑफ़ बिज़नेस किस में आता है? इसमें। बाकी आर्टिकल सारे डिस्कस हो चुके
हैं। पहले ही 78 किसकी बात करता है? तो 78 बात करता है ड्यूटीज़ ऑफ़ प्राइम मिनिस्टर यानी प्रधानमंत्री के कार्यों की बात करता
है। ये क्या ड्यूटी होती है? तो ये एज अ लिंकेज के तौर पर एक्ट करता है बिटवीन दी काउंसिल ऑफ मिनिस्टर्स एंड दी प्रेसिडेंट
ऑफ इंडिया। जैसे कि यहां पर प्राइम मिनिस्टर बैठा हुआ है तो यहां पर काउंसिल ऑफिस्टर्स हैं और यहां पर प्रेसिडेंट है।
तो इनके बीच में लिंकेज के तौर पे ऐड करता है। इसलिए नेहरू जी ने प्राइम मिनिस्टर के ऑफिस को लिंचपिन ऑफ़ गवर्नमेंट बोला था।
मतलब मतलब ये होता है कि एक कम्युनिकेशन बिठा के रखना होता है काउंसिल ऑफ़ मिनिस्टर और प्रेसिडेंट के बीच में। मान लो कि किसी
पर्टिकुलर मैटर पे काउंसिल ऑफ़ मिनिस्टर ने किसी मिनिस्टर ने डिसीजन लिया लेकिन बाकीर्स को उसके बारे में पता नहीं है तो
उसको कम्युनिकेट करना प्रेसिडेंट तक। ठीक है? यानी एक तरीके से समन्वय बिठा के रखना एक तरीके का ये कोई एक कम्युनिकेशन गैप
नहीं होना चाहिए। तो वो काम होता है प्राइम मिनिस्टर का। ठीक है? जैसे कि घर में कुछ एक दो लोग होते हैं ना जो जैसे कि
मान लो कि ये घर के पापा हैं। ये घर का बेटा है। ठीक है? तो जो बहन होती है वो इधर से उधर इधर से उधर ये सब करती है तो
वही है बहन ही है ये पीएम ठीक है अंडर दी और ध्यान रखना कभी भी जैसे मान लो कि यहां पर पीएम की ड्यूटीज पूछी है अगर मान लो कि
सीएम की ड्यूटी पूछ ले स्टेट में क्या है तो क्या कर देना है कौन सा आर्टिकल है 79 ऐड कर देना है ओ सॉरी 89 ऐड कर देना है
ठीक है 90 कब ऐड करना है आर्टिकल 111 के बाद ऐड करना है ठीक है 112 से ऐड करना है वहां पर ये चीज आपको पता होगी अंडर बीएसए
2023 व्हिच ऑफ़ द फॉलोइंग पेसर्स इज़ करेक्टली मैच्ड बताओ [गहरी सांस लेने की आवाज़][अचानक ज़ोर से सांस लेने की आवाज़]
[गहरी सांस लेने की आवाज़] कर लिया सभी ने? एक सेकंड। डिफाइंड अह सेक्शन 15। ठीक है? व्हाट इज
दिस एडमिशन डिफाइंड? एडमिशन डिफाइंड क्या है? देखो, एडमिशन डिफाइंड का मतलब ये है मैं आपको एकदम सिंपल टर्म्स में समझाता
हूं। जैसे मान लो ठीक है? तुम हो डुम डुम डुम। ठीक है? हम [गला साफ़ करने की आवाज़] ठीक है? तुम्हारे लिए क्या-क्या कर रहा
हूं मैं? सोचो। गाड़ी की आवाज निकाल रहा हूं। ठीक है? इस तरीके से गाड़ी जा रही जा रही जा रही। ठोक दिया तुमने किसी को। ठीक
है? ठोक दिया तुमने किसी को। ठीक। तुमने ठोक दिया किसी को। अब चला तुम्हारा केस। यह है कोर्ट। ठीक
है? तुम खड़े हुए हैं। यह अदालत में तुम खड़े हुए हो। जज साहब जज साहब मैंने कुछ नहीं किया। मैंने मारा ही नहीं। मैंने इस
ये ये तो ये ये पगला था। मेरी गाड़ी के सामने आ गया। नहीं तो मैं इतना स्लो ड्राइव कर रहा था। इतना स्लो ड्राइव कर
रहा था कि जज जी आप भी शर्मा जाते अगर देखे होते। लेकिन यह पगला सामने आ गया। इस वजह से यह इसकी इसकी यह हालत हुई है।
जज साहब दूसरे पक्ष का वकील माय लॉर्ड मुझे इजाजत दीजिए। मुझे एक गवाह पेश करना है। इजाजत
है। डिन तुमने देखा तुम्हारे पैरों तले से जमीन
खिसक गई। लेट्स क्रिएट दी जमीन एंड लेट्स खिसकाओ दी जमीन। यह जमीन खिसक गई आपके पैरों के नीचे से। क्यों? क्योंकि यह कोई
और नहीं आपका ही दोस्त था। जिसको आपने जिस दिन ठोका था मतलब जिसको जब भी आपने ठोका तो घर पहुंचते ही उसी दिन
रात में आपने इसी बंदे को मैसेज किया था और बोला था भाई यार बहुत जोर की गाड़ी चला रहा था मैं और ठुक गया भाई एक आदमी और
इसने आके वो चैट्स आके दिखा दी आपको जो चैट्स हैं उसने आके दिखा दी दिस इज़ एडमिशन डिफाइंड व्हाट इज दिस दिस मींस कि
इस चीज को एडमिट कर लिया जाएगा कोर्ट में इस चीज को एडमिट कर लिया जाएगा कोर्ट में। ये लिखा हुआ है यहां पे कि कोई भी
डॉक्यूमेंट चाहे वो डिजिटल फॉर्म में क्यों ना हो, कोई भी वर्ड कोई भी ऐसा बंदा प्रेजेंट करे जिसका केस से डायरेक्ट लेना
देना है। अब ये इसका क्या लेना देना है? तो इसका इसलिए लेना देना है वो ना तो क्राइम सीन में था। या तो फिर कोई क्राइम
सीन में हो। वो आ जाएगा वहां के लिए कि मैंने देखा तो बहुत जोर गाड़ी भगाया था यह। या तो वह डायरेक्टली क्राइम सीन में
क्योंकि उस टाइम प्रेजेंट था। और इस तरीके का कोई वैलिड डॉक्यूमेंट या डिजिटल तरीके से डॉक्यूमेंट हो या फिर ऐसा कोई चैट हो
तो वो अब ऐसा नहीं कि इसके इसके डालो इसको जेल में ऐसा नहीं होगा। ये बोल सकता है ना कि हां किया था मैसेज लेकिन हम तो ये
थोड़ा डर गए थे इसलिए बोला था कि यार तेज ड्राइव कर रहे थे। लेकिन हां फिर भी ओवर स्पीड में नहीं थी हमारी गाड़ी तेज थी
लेकिन ओवर स्पीड में नहीं थी। जितनी लिमिट में उतनी थी तो अपना सफाई दे सकता है वो। लेकिन क्या चीजें एडमिट हो सकती हैं क्या
नहीं वो यहां पे लिखा है। ठीक है? वो डिफाइंड है सेक्शन 15 में। ठीक है? तो ये चीज आपको ध्यान में रखनी है। क्लियर है
इतनी चीज? चलिए आगे बढ़ते हैं। 15th व्हिच एक्ट प्रोवाइडेड दी लेजिसलेटिव फ्रेमवर्क फॉर द यूज़ ऑफ इलेक्ट्रॉनिक एविडेंस इन
कोर्ट्स फ्रॉम जुलाई 2024? बताइए। [गहरी सांस लेने की आवाज़][अचानक ज़ोर से सांस लेने की आवाज़] ये जो बर्डन ऑफ़ प्रूफ है ना, ये बर्डन ऑफ़
प्रूफ ये 104 में है। ठीक है? बर्डन ऑफ़ प्रूफ सेक्शन 104 में है। ओके? ये ध्यान रखना है। चलो। तो वो वि एक्ट प्रोवाइड दी
लेजिसलेटिव फ्रेमवर्क फॉर द यूज़ ऑफ इलेक्ट्रॉनिक एविडेंस इन कोर्ट्स फ्रॉम जुलाई 2024 बताओ
कर लिया सभी ने तो ये है आपका बीएसए क्योंकि यहां पर एविडेंस की बात हो रही है। साक्ष्यों की बात हो रही है। तो
साक्ष्य अधिनियम आएगा एज़ सिंपल एज़ दैट जिसने किसको रिप्लेस किया है? इंडियन एविडेंस एक्ट ऑफ़ 1987 को रिप्लेस किया है।
कितने इसमें से कितने इसमें वो हैं? तो 170 सेक्शंस हैं। कितने पार्ट्स में डिवाइडेड हैं? चार पार्ट्स में डिवाइडेड
हैं। चैप्टर्स कितने हैं? तो चैप्टर्स यहां पर आपको 10 देखने को मिलेंगे। ठीक है? और ये किस सेक्शन में दिया हुआ है? तो
ये एविडेंस जो है ये सेक्शन नंबर 63 में दिया हुआ है। सेक्शन 63 ऑफ़ बीएसए में एविडेंसेस की बात है कि एंड इट आल्सो
इंक्लूड्स द इलेक्ट्रॉनिक एंड डिजिटल एविडेंसेस। रिमेंबर दिस थिंग कि ये आपका सॉरी इसमें 12 चैप्टर होंगे ना कि 10। ठीक
है? तो इसमें आपका जो है इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल एविडेंसेस भी दिए हुए हैं। इलेक्ट्रॉनिक
और डिजिटल एविडेंसेस के बारे में भी मेंशंड है। सेक्शन 63 ऑफ़ बीएसए 16 द रेजिडुअरी पावर इन द कॉन्स्टिट्यूशन वर
इंस्पायर्ड बाय द कॉन्स्टिट्यूशन ऑफ़। तो अभी मैंने आपको बताया यह क्या हो जाएगा? सॉरी कनाडा। ऑस्ट्रेलिया में एस ट्रा और
एल लेना है। एस से हो जाएगा सिंग। दैट इज़ जॉइंट सिंग व्हिच कम्स अंडर द आर्टिकल नंबर 108
जॉइंट सिंग कौन बुलाता है? हु कॉल्स ओ समंस फॉर द जॉइंट सिंग। प्रेसिडेंट कौन प्रिसाइड करता है? अभी बताया था स्पीकर ऑफ
लोकसभा प्रिसाइड करता है। लोकसभा के रूल्स के हिसाब से चलती है। सिर्फ और सिर्फ ऑर्डिनरी बिल के केस में बुलाई जा सकती।
वो भी सेंटर में। मनी बिल के केस में नहीं बुलाई जा सकती है। ना ही अमेंडमेंट बिल के केस में बुलाई जा सकती है। ना ही स्टेट
में बुलाई जाती है जॉइंट सिंग। सिर्फ सेंटर में ऑर्डिनरी बिल के केस में तीन बार बुलाई गई है। प्रिवेंशन ऑफ टेररिज्म
बिल को पास करने के लिए, डरी प्रोहिबिशन बिल को पास करने के लिए एंड बैंकिंग सर्विज कमीशन बिल को पास करने के लिए। ये
ध्यान रखना है आपको। ठीक है? ट्र से हो जाएगा आपका ट्रेड एंड कॉमर्स। तो ट्रेड एंड कॉमर्स को हमने यहीं से लिया है। और
एल से हो जाएगा आपका क्या? लिस्ट। दैट इज़ कॉनकरेंट लिस्ट। जो समवर्ती सूची है उसको हमने लिया है वो लिस्ट जहां पे दोनों यानी
पार्लियामेंट और स्टेट लेजिस्लेचर दोनों लॉ बना सकते हैं। जॉइंट सिंग किस आर्टिकल में आर्टिकल 108 में आपको पता होना चाहिए।
साउथ अफ्रीका से लिया क्या लिया हमने? तो कॉन्स्टिट्यूशन का जो अमेंडमेंट का प्रोसीजर है कॉन्स्टिट्यूशनल अमेंडमेंट वो
लिया है। यूएसए से अगर बात करेंगे तो वो हम पहले ही डिस्कस कर चुके हैं। व्हिच आर्टिकल प्रोवाइड्स फॉर अ काउंसिल ऑफ
मिनिस्टर टू एयर एंड एडवाइस दी प्रेसिडेंट? तो कौन सा आर्टिकल है ये जो एयर एंड एडवाइस की बात करता है? बताइए।
आर्टिकल नंबर 64 कर लिया सभी ने? आर्टिकल नंबर 64 अभी मैं बता चुका हूं कि वाइस प्रेसिडेंट शैल बी द एक्स ऑफिशियल
चेयर पर्सन ऑफ राज्यसभा। वो मैं पीछे डिस्कस कर चुका हूं। ठीक है? यहां पे ये लिखा हुआ है टाइम ऑफ। ठीक है? टाइम और
टाइम वही है। टाइम ऑफ होल्डिंग इलेक्शन। ठीक है? टाइम ऑफ होल्डिंग इलेक्शन टू फिल दी वैकेंसी ऑफ वाइस प्रेसिडेंट। टू
फिल दी वैकेंसी ऑफ प्रेसिडेंट। यह लिखा हुआ है। जैसे कि प्र वाइस सॉरी वाइस प्रेसिडेंट नॉट प्रेसिडेंट। जैसे कि वाइस
प्रेसिडेंट अभी जगदीप धनकड़ थे। रेिग्नेशन दिया उन्होंने। ठीक है? किसको दिया? प्रेसिडेंट को। तो वाइस प्रेसिडेंट जो
होता है रेिग्नेशन प्रेसिडेंट को देता है। प्रेसिडेंट वाइस प्रेसिडेंट को देता है। ये आई होप आपको पता होगा। तो अगर मान लो
वाइस प्रेसिडेंट रेिग्नेशन दे दिया या डेथ हो गया या उसको रिमूव कर दिया गया बाय इफेक्टिव मेजॉरिटी। आपको पता है ना वाइस
प्रेसिडेंट को अगर रिमूव करना होता है तो इसके रिमूवल का रेज़ोल्यूशन राज्यसभा में ही आ सकता है। लोकसभा में इसके रिमूवल का
रेज़ोल्यूशन नहीं आ सकता है। यहां से इफेक्टिव मेजॉरिटी से पास किया जाएगा। उसके बाद लोकसभा के पास जाएगा जिसको सिर्फ
एग्री करना है। एग्री करना है सिर्फ सिंपल मेजॉरिटी से और वो हट जाएगा। तो अगर रिमूवल होता है, अगर डेथ होती है, अगर
रिजाइन करता है, तो ऐसे केस में वैकेंसी क्रिएट होती है। एब्सेंसी ही नहीं। नहीं एब्सेंसी तो है कि मतलब बीमार हो गया घर
में शादी है किसी की बाहर घूमने गया है तो वो टाइप है कि कुछ टाइम के लिए एब्सेंट है लेकिन वैकेंसी हो गई डेथ रेज़िग्नेशन या
रिमूवल की वजह से होती है वो तो अगर ऐसा हो गया तो कितने टाइम में सीट भरी जाएगी ऐसा कुछ नहीं लिखा है आर्टिकल 68 में ठीक
है प्रेसिडेंट के लिए लिखा है आर्टिकल नंबर जो 62 आप देखोगे टाइम ऑफ़ होल्डिंग इलेक्शन टू फिल द वैकेंसी ऑफ़ प्रेसिडेंट
उसमें लिखा हुआ है कि विद इन सिक्स मंथ जिस दिन से वैकेंसी क्रिएट हुई विद इन सिक्स मंथ भरना है वाइस प्रेसिडेंट के लिए
कोई टाइम नहीं है। जगदीश धनकड़ ने रेिग्नेशन दिया। आपको पता है किसको दिया होगा? द्रौपदी मुर्मू जी को दिया होगा और
उसके बाद आपके नए सीपी राधाकृष्णन जी बने वाइस प्रेसिडेंट। लेकिन ऐसा कुछ टाइम लिमिट नहीं होता है उसमें। ठीक है? तो
आर्टिकल 71 आर्टिकल 71 बताइए जल्दी से। क्या बोलते है? तो उसमें आर्टिकल नंबर 74 हो जाएगा जो अभी हमने देखा था कि यहां पर
काउंसिल ऑफिस्टर्स होंगे। ध्यान रखना हेडेड बाय प्राइम मिनिस्टर। अब यहां पर एक काफी इंपॉर्टेंट चीज है। हेडेड बाय प्राइम
मिनिस्टर। व्हिच मींस कि जो प्राइम मिनिस्टर होता है उसके पास रियल पावर होती हैं। क्योंकि सरकार का हेड यही होता है।
तो डीफैक्टो हेड या रियल हेड इसी को बोलते हैं। लेकिन जो हमारा प्रेसिडेंट होता है प्रेसिडेंट इज़ जस्ट अ डीजरे हेड और नॉमिनल
हेड। ठीक है? और टाइटलर हेड। ठीक है? ये ध्यान रखना है आपको। ठीक है? डीजरे हेड, नॉमिनल
हेड या फिर टाइटलर हेड। तो प्रेसिडेंट आपका ये होता है। ठीक है? ठीक है? यानी कि नाम की पावर होती है। रियल पावर्स इसके
पास नहीं होती है प्रेसिडेंट के पास। ओके? तो ऑप्शन नंबर फोर्थ वुड बी दी करेक्ट आंसर। आर्टिकल 71 में क्या लिखा हुआ है?
तो सिंपल ये लिखा हुआ है कि अगर कोई भी इलेक्शन डिस्प्यूट है प्रेसिडेंट का और वाइस प्रेसिडेंट का तो उसमें एक्सक्लूसिव
जुरिसडिक्शन है सुप्रीम कोर्ट का। सुप्रीम कोर्ट हैज़ एक्सक्लूसिव जुरिसडिक्शन विद रिगार्ड टू इट। रिमेंबर दिस थिंग। ओके?
ऑलराइट। व्हाट डज़ दी और एक चीज 74 में यह लिखा हुआ है कि काउंसिल ऑफ मिनिस्टरर्स जो होते हैं
वह एडवाइस देते हैं प्रेसिडेंट को और वह जो एडवाइस मिलती है प्रेसिडेंट को रिमेंबर दिस थिंग दैट इज़ बाइंडिंग ऑन हिम और हर
ठीक है वो बाइंडिंग एडवाइस होती है ये बाइंडिंग किसने करी थी तो जो 42 कॉन्स्टिट्यूशनल अमेंडमेंट था उसने
बाइंडिंग करी थी प्रेसिडेंट पर एडवाइस किसकी काउंसिल ऑफ मिनिस्टर की एडवाइस बाइंडिंग करी थी लेकिन 44 अमेंडमेंट ने
बोला था कि नहीं एक बार रिटर्न कर सकता है फॉर द रिकंसीडरेशन लेकिन अगर दोबारा जो एडवाइस आएगी रिकंसीडर्ड एडवाइस वो तो फिर
माननी ही पड़ेगी प्रेसिडेंट को। वो तो बाइंडिंग है। फिर व्हाट डज़ दिस बेसिक स्ट्रक्चर डॉक्ट्रिन एस्टैब्लिश्ड बाय द
सुप्रीम कोर्ट होल्ड? सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्थापित मूल संरचना सिद्धांत क्या कहता है? व्हाट इज़ दिस बेसिक स्ट्रक्चर
डॉक्ट्रिन? बताइए। तो बेसिक स्ट्रक्चर डॉक्ट्रिन निकल के आया था किस केस से? तो ये निकल के आया था
केशवनंदा भारती केस से। कब हुआ था? 24 अप्रैल 1973 में। जहां सुप्रीम कोर्ट ने देखो हुआ क्या था? 20 पहले देखो सबसे शुरू
से शुरू करते हैं। गोलकनाथ जी केस हुआ। ठीक है? गोलकनाथ केस में सुप्रीम कोर्ट ने बोला ए पार्लियामेंट खबरदार तुमने अगर
फंडामेंटल राइट को हाथ लगाया उखाड़ के फेंक दूंगा। पार्लियामेंट बोला ऐसे नहीं हमसे 24 अमेंडमेंट उसने किया 1971 में
बोला अब क्या पार्लियामेंट कि बिल्कुल कर सकते हैं फंडामेंटल राइट अमेंडमेंट। होते कौन हो तुमको रोकने वाले? और क्योंकि हम
कर सकते हैं। लाओ कर ही देते हैं लगे हाथ। ओला लाओ नहीं ले आओ तुम अब। ठीक है? तो इसने इंसर्ट किया आर्टिकल 31 सी 31 ए और
31 बी जो है वो फर्स्ट अमेंडमेंट ने ऐड किया था और 31 जो है वो राइट टू प्रॉपर्टी हुआ करता था जो अभी नहीं है आपको पता है
44 अमेंडमेंट से वो हट चुका है तो 31 सी इंसर्ट किया और बोला 31 सी का पहला क्लॉज़ में सुनो 39 बी और जो 39 सी में जो
डीपीएसपी दी हुई है अगर इसको इंप्लीमेंट करने जाएंगे तो फंडामेंटल राइट्स आर्टिकल 14 19 और 31 के ग्राउंड में इसको नल एंड
वॉइड डिक्लेअर नहीं किया जा सकता और दूसरा तुम यानी जुडिशरी रिव्यू मत कर लेना इस चीज को। जुडिशरी इस पे रिव्यु नहीं कर
सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने सोचा मामला गरम हो रहा है तो थोड़ा जो है हमको भी झुकना पड़ेगा। नहीं तो मामला ज्यादा ये तो गम हो
रहा है ये तो तो केशवंद भारती केस हुआ फिर 1963 में 73 में सॉरी उसमें सुप्रीम कोर्ट ने ठीक है ठीक है कर सकते हो और ये जो
पहली जाती चीज बोल रहे हो ना आर्टिकल 39 बी सी वाली ये भी ठीक है तुम्हारी बात लेकिन जो दूसरी बात तुमने बोली ना जुडिशरी
ने ये ज्यादा हो रहा है तुम्हारा पार्लियामेंट भी लाइक ज्यादा वादा तो कहीं नहीं हो रहा है रुको अभी बताते हैं 1976
में उसने 4 सेकंड अमेंड किया पता है क्या बोला सुनो अब 31 बी इन्हारा मूड चेंज हो गया है अब कोई भी डीपीएस एसपी को
इंप्लीमेंट करने जाएंगे एनी डीपीएसपी और वो फंडामेंटल राइट्स के ग्राउंड में उसको नल एंड वॉइस डिक्लेअर नहीं कर सकती
सुप्रीम कोर्ट। सुप्रीम कोर्ट भी लाइक सुनो बहुत ज्यादा हो रहा है तुम्हारा। हैं चूहे विल्ली का खेल खत्म करो फालतू है। और
1980 में एक केस हुआ जिसको बोलते हैं मिनरवा मिल केस। और बोला ना हमारी ना तुम्हारी। ठीक है ना? ना फंडामेंटल राइट
ऊपर है और ना डीपीएसपी ऊपर है। कोई ऊपर नहीं है। जो हमारा कॉन्स्टिट्यूशन है इट इज़ फाउंड ऑन द बेड ड्रॉक ऑफ बैलेंस बिटवीन
दी फंडामेंटल राइट एंड डीपीएसपी हॉट। ठीक है? यानी कि बैलेंस में चलेंगी चीजें। सो वहीं से आया बेसिक स्ट्रक्चर डॉक्ट्रिन।
मतलब इसी केस में बोला था वैसे केबीसी केस में कि सुप्रीम कोर्ट सॉरी पार्लियामेंट फंडामेंटली अमेंड कर सकता है। लेकिन बेसिक
स्ट्रक्चर्स को डिस्ट्रॉय नहीं कर सकता कॉन्स्टिट्यूशन के क्योंकि ये हार्ट एंड सोल है एक तरीके का। हार्ट एंड सोल
आर्टिकल 32 बोला था अंबेडकर जी ने। आर्टिकल 32 लेकिन आप समझ पा रहे होंगे जैसे जो बेसिक बेसिक मूलभूत चीजें हैं भाई
अगर ये खत्म कर गया ये अमेंड कर दिया गया तो बेसिक जो मूलभूत चीजें हैं वही खत्म हो जाएंगी जैसे कि आप समझ पा रहे होंगे कि
भाई संविधान में बदलाव कर सकते हो फंड अमेंड कर सकते हो लेकिन जो मूलभूत संविधान की चीजें हैं उनको मत खत्म करें नहीं तो
पूरा संविधान ही बदल जाएगा वो तो पार्लियामेंट कैन नॉट ऑल्टर दी कोर आइडेंटिटी ऑफ़ द कॉन्स्टिट्यूशन ठीक है डू
यू गेट माय पॉइंट द लॉ मेकिंग प्रोसीजर इन इंडियन कॉन्स्टिट्यूशन इज़ टेकन फ्रॉम तो लॉ मेकिंग कहां कहां से लिया होगा? लॉ
मेकिंग लिया होगा ब्रिटेन से। पार्लियामेंट्री फॉर्म ऑफ़ गवर्नमेंट है वहां पर। बट यूके इज़ नॉट अ रिपब्लिक।
ब्रिटेन इज़ नॉट अ रिपब्लिक। बट वी आर अ रिपब्लिक। बिकॉज़ हमारे यहां पे हेड ऑफ़ स्टेट इेड उनके यहां नहीं होता। अच्छा।
कौन से फंडामेंटल राइट्स होते हैं? कौन से फंडामेंटल राइट्स हैं जो जो ज़ूज ज़ू ओनली टू सिटीज़ंस को अवेलेबल है। ये सब हमें
करना नहीं आता है। ठीक है? जुजू ज़ूज़ या ये सब हम नहीं कर पाते। ऐसा किसने कहा था? बताइए। ये भी कंटिटी में आ सकता है। हु
वाज़ द प्रेसिडेंट ऑफ द कॉन्स्टिटुएंट असेंबली इन द ईयर ऑफ़ 1946? कौन था? तो ये तो थे हमारे ड्राफ्टिंग कमेटी यानी
प्रारूप समिति यानी मसौदा समिति के चेयर पर्सन ड्राफ्टिंग कमेटी के जिसमें कितने मेंबर्स थे? जरा बताइए। जिस कमेटी के नाम
के आगे यूनियन लग जाए या स्टेट लग जाए उस कमेटी के चेयर पर्सन थे ये। ठीक है? [अचानक ज़ोर से सांस लेने की आवाज़]
राजेंद्र प्रसाद सही आंसर होगा। टेंपरेरी अगर चेयर पर्सन की बात करेंगे यानी कि अस्थाई चेयर पर्सन की बात करेंगे तो कौन
था तो टेंपरेरी चेयर पर्सन थे आपके सच्चिदानंद सिन्हा
लेकिन परमानेंट ये बनाए गए थे और आपके वाइस प्रेसिडेंट कौन बने थे एचसी मुखर्जी और बी टी कृष्णमचारी ओनली टू सिटीजंस 15
16 19 29 30 ठीक है ये जो फंडामेंटल राइट हैं ये सिर्फ सिटीजंस को हैं बाकी सबको हैं सिटीज़ंस को भी हैं फॉरेनर्स को भी हैं
ठीक है सरदार पटेल जी की अगर बात करेंगे तो जो प्रोविंशियल कॉन्स्टिट्यूशन कमिटी थी वो इस इन्होंने हेड किया था। प्लस
फंडामेंटल राइट्स की जो एक सब कमेट थी उसको हेड करने का काम किया था किसने? हमारे सरदार पटेल जी ने। तो ये चीज आपको
ध्यान रखना है। बाकी यूनियन कॉन्स्टिट्यूशन कमिटी हो गया स्टेट कमेटी वो इन्होंने होल्ड करी थी किसने? ठीक है?
सॉरी फंडामेंटलाइज सब कमिटी तो उन्होंने करी थी और जेबी कृपलानी ने। प्रोविंशियल कॉन्स्टिट्यूशन कमिटी करी थी हमारे सरदार
पटेल जी ने। और एक कमेटी और मैं नाम भूल रहा हूं जो फंडामेंटल हां एडवाइज़री कमिटी ऑन फंडामेंटल राइट। ठीक है? तो ये इसमें
कंफ्यूज नहीं होना है। प्रोविंशियल कॉन्स्टिट्यूशन कमिटी और एडवाइज़री कमिटी ऑन फंडामेंटल राइट। एडवाइज़री
कमिटी ऑन फंडामेंटल राइट। वही इन्होंने प्रिसाइड करी थी। फंडामेंटल राइट सब कमिटी जेपी कृपलानी ऑर्डर ऑफ़ बिज़नेस कमिटी मुंशी
जी धंधा देख रहे थे। तो मुंशी जी थे। केएम मुंशी थे। ऑर्डर ऑफ़ बिज़नेस कमिटी मुंशी जी इसके मेंबर भी थे। जो ड्राफ्टिंग कमेटी थी
उसके मेंबर भी थे मुंशी जी। ठीक है? चेयर पर्सन बिज़नेस कमेटी के थे। हाउस कमेटी को पट्टा भी सीतारामैया लीड कर रहे थे। है
ना? हाउस कमेटी को पट्टा भी सीतारामैया थे। रूल्स ऑफ प्रोसीजर कमिटी राजेंद्र प्रसाद ही देख रहे थे। रूल्स ऑफ़ प्रोसीजर।
स्टीयरिंग कमिटी प्रोसीजर कौन बनाएगा? गाड़ी का स्टीयरिंग किसके हाथ में होगा? जो गाड़ी का मालिक होगा। रूल कौन बनाएगा? जो
घर का मालिक होगा। मालिक कौन है? प्रेसिडेंट कौन है? जो मालिक है प्रेसिडेंट वही बनाएगा राजेंद्र प्रसाद।
साफसी दीबा नो बकवास। ऑप्शन नंबर थर्ड। आगे बढ़ते हैं। द डीपीएसपी और कॉन्स्टिट्यूशनल या लीगल एडवाइजर कौन था?
संविधान सभा का कॉन्स्टिट्यूएंट असेंबली का कॉन्स्टिट्यूशनल एडवाइजर कौन था? बताना जरा। डीपीएसपी आर इंस्पायर्ड बाय द
कॉन्स्टिट्यूशन ऑफ़ तो कहां से इंस्पायर्ड हैं ये? क्यों? सिंपल है। ठीक है? जर्मनी से हमने क्या लिया? यहां का वेमार
कॉन्स्टिट्यूशन है। यहां से लिया है हमने सस्पेंशन। सस्पेंशन ऑफ फंडामेंटल राइट्स ड्यूरिंग
नेशनल इमरजेंसी। ठीक है? ड्यूरिंग नेशनल इमरजेंसी। थी। ओके। कॉन्स्टिट्यूशनल एडवाइजर की अगर बात करेंगे तो सर वेनेगल
नरसिंह राव बी एन राव ये जो है थे कॉन्स्टिट्यूशनल एडवाइजर टू द कॉन्स्टिटुएंट असेंबली। और
चीफ ड्राफ्ट्समैन कौन थे? तो एसए मुखर्जी चीफ ड्राफ्ट्समैन थे। हु इज़ रिगार्डेड एज़ अ चीफ आर्किटेक्ट एंड चेयरमैन ऑफ़ चीफ
आर्किटेक्ट एंड ड्राफ्टिंग कमेटी के चेयर पर्सन पधार रहे हैं। कौन है? हमारे अंबेडकर जी हैं। ठीक है? तो ऑप्शन नंबर
सेकंड हो जाएगा। मुंशी जी मेंबर एन गोपालस्वामी अयंगर और अलादी कृष्णा स्वामी अय्यर अयंगर अय्यर ये भी मेंबर थे। तीन हो
गए। चौथे अंबेडकर जी हो गए। तीन और कौन थे? सादुल्लाह थे मोहम्मद सादुल्लाह और आपके थे एन माधवराव जिन्होंने बीएल मेट्रो
को रिप्लेस किया था। और टीटी कृष्णमचारी जिन्होंने डीपी खैतान को रिप्लेस किया था। ये आपने भूलना नहीं है। आ जाओ जरा इसमें।
5 अमेंडमेंट ऑफ़ 1985 इज़ कंसीडर्ड अ लैंडमार्क इन करबिंग द पॉलिटिकल डिफिकेशंस। व्हिच ऑफ़ द फॉलोइंग
स्टेटमेंट्स एक्यूरेटली रिफ्लेक्ट दी मोस्ट सिग्निफिकेंट कॉन्स्टिट्यूशनल इंपैक्ट ऑफ दिस अमेंडमेंट? 52वां
संवैधानिक संशोधन। सुपर ईजी क्वेश्चन है। पिटी में तो बस दो तीन ही क्वेश्चन मुझे लगे। मतलब अभी आप देखोगे तो हो सकता है
आपको ना लगे। देखते हैं अभी लगे कि ना लगे। बता जल्दी से। आज पहली बार आपकी लाइव क्लास अटेंड कर रही
हूं। बस यह बताने कि आपसे जीके पढ़ने से मुझे जीके बोरिंग लगना बंद हो गया। अच्छा ग्रेट टू हियर दैट अनुष्का जी। चलिए तो 5
सेकंड अमेंडमेंट वी नो किसने 10थ स्ेड्यूल को इंसर्ट किया था व्हिच टॉक्स अबाउट दी ग्राउंड्स ऑफ़ डिसक्वालीिफिकेशन फॉर दी और
ऑन दी ग्राउंड्स ऑफ़ द डिफेक्शन। तो ऑप्शन नंबर थर्ड आंसर हो जाएगा। और डिसीजन कौन किसका फाइनल होता है इस केस में? वैसे
डिसक्वालीिफिकेशन का अगर होगा तो प्रेसिडेंट ध्यान से सुनना मैं क्या बोल रहा हूं।
[गहरी सांस लेने की आवाज़][अचानक ज़ोर से सांस लेने की आवाज़] वैसे अगर डिसक्वालीिफिकेशन का होगा तो डिसक्वालिफिकेशन पहली बात तो किस आर्टिकल
में दिया हुआ है 102 में। तो कौन करता है डिसक्वालीिफिकेशन? प्रेसिडेंट करेगा इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया से पूछ के जिसके
खुद के लगे हुए हैं आजकल। ठीक है? और अगर डिफेक्शन की वजह से होगा तो वो 10थ स्ेड्यूल। ठीक है? वो आपका कौन
करेगा? डिफेक्शन अगर 10 शेड्यूल के तहत डिसक्वालीफिकेशन होगा तो लोकसभा का स्पीकर या फिर प्रिसाइडिंग ऑफिसर करता है और उसका
डिसीजन इस सब्जेक्ट टू जुडिशियल एवहोटोो होलोहान वर्सेस जचिलू केस में लिखा हुआ है। एक चीज़ दूसरी चीज़ आर्टिकल 75 जब मैं
बता रहा था उसमें क्लॉज़ वन पढ़ा रहा था तो उसमें सब क्लॉज़ ए है। सब क्लॉज़ बी है। इन दोनों को हमने ऐड किया 91 अमेंडमेंट ऑफ़
2003 से। ये बात करता है कि काउंसिल ऑफिस्टर्स 15% ऑफ लोअर हाउस से ज्यादा नहीं हो सकते हैं। यानी कि 15% ऑफ लोकसभा
की मेंबरशिप से ज्यादा काउंसिल ऑफ मिनिस्टर नहीं हो सकते हैं। और ये किसकी बात करता है कि अगर कोई मिनिस्टर डिफेक्शन
के ग्राउंड में डिसक्वालीिफाइड है तो वो मिनिस्टरशिप के से भी डिसक्वाली डिसक्वालीिफाइड हो जाएगा। ठीक है? बट
इसमें जो मर्जर का है मर्जर ठीक है? तो जो मर्जर वाला केस है ये एक्सेप्शन के तौर पे है। यानी कि अगर
किसी पार्टी के 2/3 मेंबर्स जो हैं एक पार्टी छोड़ के दूसरे में चले जाएं उसको मर्जर और उस केस में डिफेक्शन नहीं लगता
है। जो आपको पता है राघव चड्डा के केस में हुआ था। आम आदमी पार्टी के 2/3 से ज्यादा मेंबर्स राज्यसभा में वो बीजेपी में चले
गए थे। तो इसलिए कोई डिफेक्शन नहीं लगा था। बाकी 23 से कम भी होता तो कौन ही क्या कर लेता? राज्यसभा में प्रिसाइडिंग ऑफिसर
अपना है। लोकसभा में प्रिसाइडिंग ऑफिसर अपना है। किसी के मजा अब जैसे मान लो कि कोई पार्टी छोड़ के चला जाए। ठीक है?
कांग्रेस या बीजेपी में डिफेक्शन कौन करेगा डिसक्वालीिफिकेशन? ओम बिरला डू यू थिंक ही विल डिसक्वालीफाई। नहीं तुमको तुम
तुम सपने भी सोच सकते हो कि ओम बिरला डिसक्वालीफाई कर देंगे उस बंदे को। ठीक है। अब आई नो तुम्हारे मन में क्या हो रहा
है? अच्छा मतलब सर जो हैं कांग्रेस वाले हैं। हमको साफ समझ में आ रहा है सर बीजेपी की थोड़ी बुराई कर रहे हैं। बस मुझे पता
है तुम्हारे दिमाग में क्या होगा? लेकिन मैं क्या मैं तेज हूं। मैं तुरंत न्यूट्रलाइज करता हूं। कैसे न्यूट्रलाइज़
करूंगा मैं? मैं ऐसे न्यूट्रलाइज़ करूंगा कि कल को अगर मान लो कांग्रेस की सरकार आ गई वो भी वही करेगी। हां, अब ठीक है। चलो।
एक्ट ऑफ़ सेटलमेंट 1781 वाज़ इनक्टेड टू करेक्ट व्हाट मेजर फ्लॉ ऑफ़ द रेगुलेटिंग एक्ट। तो 1781 का जो एक्ट आया था वो 1773
के रेगुलेटिंग एक्ट को सही करने के लिए आया था। कल क्वेश्चन किया था क्या सही करना था? सुप्रीम कोर्ट जबरदस्ती जो है
उंगली किए पड़ी थी ईस्ट इंडिया कंपनी के। ईस्ट इंडिया कंपनी ने बोला ब्रिटेन गवर्नमेंट समझा लो इसको। ये जो तुमने
सुप्रीम कोर्ट बनाई है ना रेगुलेटिंग 1773 से बहुत चू चपाट कर रहा है ये। इसमें सुप्रीम कोर्ट जो कोलकाता में बनाई गई थी।
इसमें आपको पता होना चाहिए एक सीजीआई और 3000 जजेस जो है दिए गए थे। ठीक है? तो इसमें जो पहला पहला वो क्या था? मतलब पहला
इसका चीफ जस्टिस कौन था? तो एलीजा एमपी थे। इस पे भी सवाल आ चुका है। एक्सपेक्टेड पेपर मैंने करवाया था और डायरेक्टली अभी
आया है। ठीक है? एलीजा एमपी जो थे वो इसके क्या थे? पहले चीफ जस्टिस थे। ये तो ये ध्यान रखना है आपको। तो इस तरीके से एक
सुप्रीम कोर्ट एलीजा इम्पी होगा यहां पे। ठीक है? इम्पी इम्पी इस तरीके से। ठीक है? तो एलीजा इम्पी जो थे पहले चीफ जस्टिस थे
और तीन अदर पीयूष जजेस थे। एक्स्ट्रा जजेस थे। तो चू चपाट कर रहे है। इसको समझा लो। तो फिर समझाया देखो हे सुप्रीम कोर्ट क्या
कर रहे हो यार तुम फालतू में यार उंगली मत करो उसके मतलब काम करने दो देखो पैसा कमा रहा है पैसा कमाना है तो पैसे में उसके
बिल्कुल तुम फालतू में दिमाग मत खराब तो सुप्रीम कोर्ट को बोला गया रेवेन्यू मैटर्स में सुप्रीम को जो है ईस्ट इंडिया
कंपनी के तुम्हारा कोई जुरिसडिक्शन नहीं है और तुम सिर्फक तक रहोगेक के बियों्ड तुम्हारा कोई जुरिसडिक्शन नहीं है। ये
बोला गया सुप्रीम कोर्ट को थ्रू दिस 1781 का एक्ट। और 1773 ने क्या किया था? गवर्नर ऑफ़ बंगाल को गवर्नर जनरल ऑफ़ बंगाल बनाया
था। पहला कौन बना था? वारेन हेस्टिंग बना था। ठीक है? चलो 25 और 1784 का रिकॉल करो जिसको हाफ लॉ सिस्टम बोलते हैं जिसने
बोर्ड ऑफ़ गवर्नर बनाया था एडमिनिस्ट्रेटिव अफेयर्स को मैनेज करने के लिए। अंडर द ए इंडियन एविडेंस एक्ट ऑफ़ 1872 व्हिच ऑफ़ द
फॉलोइंग स्टेटमेंट मोस्ट एक्यूरेटली डिस्क्राइब्स दी रूल रिगार्डिंग दी एडमिसिबिलिटी ऑफ़ कन्फेशंस मेड टू पुलिस
ऑफिसर? बताओ जल्दी से। इंडियन एविडेंस एक्ट 1872 के अंतर्गत पुलिस अधिकारियों को दिए गए इकबालिया
बयानों की गायता के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक सटीक है? कर लिया सभी ने। ऑल कन्फेशंस मेड टू पुलिस
ऑफिसर्स एडमिसिबल एस पर सेक्शन अ कन्वेंशन मेड टू पुलिस ऑफिसर एडमिल इफ रिकॉर्डेड इन द प्रेजेंस ऑफ़ मजिस्ट्रेट। मैंने आपको
बताया था कि पुलिस के सामने दिया गया बयान कोर्ट में मान्य नहीं होता है क्योंकि ये माना जाता है कि हो सकता है कि पुलिस किसी
को पेल-पेल मतलब पिटाई कर करके उससे वो बयान जो है दिलवा दे जबरदस्ती फोर्सफुली। ठीक है? तो मान्य नहीं होता है। मान्य तभी
हो सकता है जैसे मान लो कोई बोले कि पुलिस को बोल दे कि मैंने ना चाकू जो है वो पानी की टंकी में छुपा रखा है। क्या बात कर रहे
हो? पुलिस गई वहां पर उसको प्राप्त हो गया। तो ऐसी चीजों को सही माना जा सकता है। यानी कि अगर उसके उसके बयान से किसी
उसके फैक्ट से किसी चीज की डिस्कवरी हो कोई चीज मिल जाए पता लग जाए वो बाकी हर केस में ये इनएड इनएडबल है सिर्फ
एक ही सर इसमें तो ओनली लगा हुआ है ये तो एक्सट्रीम होता है हां बस यही तो तुम फंस जाओगे इसमें तो ओनली लगा हुआ है ये तो
एक्सट्रीम होता है ये सीधा गलत मारो पढ़ लो बेटा पहले पढ़ लो उसको क्या लिखा हुआ है मैंने क्या बता रखा है पुलिस ऑफिसर के
दिया गया सामने बयान मान्य नहीं होता है ठीक है अगर या तो कुछ उसे मिल जाए तो अब लगे हाथ जरा तुम ये बता दो जीरो एफआईआर
ईएफआईआर जे का हो तो है। जल्दी बताओ जीरो एफआईआर और ईएफआईआर क्या होता है? तो जीरो एफआईआर की अगर बात करेंगे तो इसका मतलब है
कि किसी भी आप अ पुलिस थाने में रिपोर्ट दर्ज करवा सकते हैं। एफआईआर दर्ज करवा सकते हैं। जरूरी नहीं कि जहां पे क्राइम
हुआ है उसी क्राइम जो प्लेस है उसके जो रेडिक्शन में आने वाले थाने में करवा सकते हैं। कहीं भी करवा सकते हैं। ईएफआईआर का
मतलब है ऑनलाइन आप अपनी एफआईआर ल्च कर सकते हैं। एंड विद इन थ्री डज़ उस ऑनलाइन एफआईआर को आपके किसी जो रेस्पेक्टिव जो
थाना है उसको एलोकेट करना इज़ मैंडेटरी। जीरो एफआईआर की अगर बात करेंगे तो सेक्शन 173 क्लॉज़ वन ऑफ बीएएसएस
में दिया हुआ है। इसके बारे में ध्यान रखेंगे। सेक्शन 173। ठीक है? आगे बढ़ते हैं। द प्रएमबल ऑफ़ द इंडियन
कॉन्स्टिट्यूशन डिक्लेयर्स इंडिया एज अ तो प्रएमबल क्या डिक्लेअर करता है भारत को? तो वी द पीपल ऑफ़ इंडिया हैविंग सोलेमनी
रिज़ोल्व टू कॉन्स्टिट्यूट इंडिया इंटू अ सोवन सेुलर सोशलिस्ट डेमोक्रेटिक रिपब्लिक एंड टू सिक्योर टू ऑल इट्स सिटीज़ंस।
जस्टिस जस्टिस ऑफ एक तो ये और परेशान की मक्खी देर से यहां पे प्रियमबल चल रहा है इसको
अलग पड़ी है अपनी ठीक है ठीक है तो जस्टिस कितने तरीके का दिया हुआ है तीन तरीके का सोशल इकोनमिक पॉलिटिकल
लिबर्टी ऑफ़ थॉट एक्सप्रेशन बिलीफ फेथ एंड वरशिप इक्वलिटी ऑफ स्टेटस एंड अपॉर्चुनिटी ठीक है और फ्रेटर्निटी सिर्फ एक ही तरीके
की दी हुई है तो लिबर्टिक फ्रेटनिर् हमने फ्रांस से ली है और ये आपका रशिया से लिया गया है एंड देन देन वी डू हियर बाय अडॉप्ट
इन एक्ट एंड गिव टू आवरसेल्फ दिस कॉन्स्टिट्यूशन ऑन द डे ऑफ़ 26 नवंबर 1949। तो 26 नवंबर 1949 क्या है? डे ऑफ़ अडॉप्शन
ऑफ़ कॉन्स्टिट्यूशन यानी कॉन्स्टिट्यूशन डे है। लेकिन एनफोर्स कब हुआ था? 26 जनवरी 1950 को इनफोर्स हुआ था, लागू हुआ था।
लेकिन कुछ प्रोविज़ंस आपको पता होना चाहिए कि जिस दिन हमने अडॉप्ट किया था कॉन्स्टिट्यूशन डे को। 26 नवंबर 1949 को
ही लागू हो गए थे। अ प्रोविज़ंस विद रिस्पेक्ट टू सिटीजनशिप, प्रोविजनल पार्लियामेंट एंड इलेक्शंस।
ओके? डन। सोवन का मतलब होता है वी आर इंडिपेंडेंट टू टेक आवर डिसीज़ंस। कोई हमें गवर्न नहीं करेगा। सेकुलर का मतलब होता है
पंथनिरपेक्ष, धर्मनिरपेक्ष यानी कि हर धर्म को मान्यता है। एंड रिपब्लिक का मतलब है जहां पे हेड ऑफ़ स्टेट आपका इड है।
प्रएमबल हमने कहां से लिया? तो प्रएमबल का कांसेप्ट हमने यूएस से लिया। वहां पर भी इसी तरीके से स्टार्ट होता है वि द पीपल
ऑफ़ यूएसए। ऐसा। ठीक है? तो ये चीज़ आपको ध्यान रखनी है। ओके? आगे बढ़ते हैं। और प्रएमबल में क्या अमेंडमेंट अलाउड है? यस
अलाउड है। बिल्कुल है। तो पहले बोला गया था बेरूबारी जो यूनियन केस हुआ था बेरूबारी जो यूनियन केस हुआ था 1960 में
उसमें सुप्रीम कोर्ट ने बोला था कि प्रियमबल इज़ नॉट अ पार्ट ऑफ़ कॉन्स्टिट्यूशन। एंड हेंस इट कैन नॉट बी
अमेंडेड। लेकिन इसको करेक्ट कर दिया गया था केबीसी केस में। क्योंकि आपको पता है आर्टिकल नंबर 130 जो सेवन है उसमें
सुप्रीम कोर्ट का क्या है? है। सुप्रीम कोर्ट के पास पावर है कि वह अपने ही द्वारा दिए गए जजमेंट को रिव्यू कर सकती
है। यह पावर है। ठीक है? अपने ही जजमेंट को रिव्य्यू करने की पावर है सुप्रीम कोर्ट के पास। तो केबीसी 1973 में उसने
रिव्य्यू किया और बोला कि नहीं प्रिएमबल इज़ अ पार्ट ऑफ़ कॉन्स्टिट्यूशन एंड हेंस इट कैन बी अमेंडेड। तो इसीलिए इस पे फिर एक
बार अमेंडमेंट हुआ भी। यानी प्रएमबल सिर्फ अभी तक एक ही बार अमेंड किया गया। 42 अमेंडमेंट जिसको मिनी कॉन्स्टिट्यूशन भी
बोलते हैं। क्योंकि बहुत सारी चीजें इसने ऐड करी थी इसलिए। जैसे फंडामेंटल ड्यूटीज भी इसी ने ऐड करी थी। तो कौन से तीन वर्ड
ऐड किए थे? तो सोशलिस्ट सेकुलर एंड इंटेग्रिटी। ठीक है? यह तीन वर्ड्स
इसने जो है ऐड किए थे। ध्यान रखना है आपको। व्हिच आर्टिकल प्रोवाइड्स रेमेडीज़ फॉर द इनफोर्समेंट ऑफ़ फंडामेंटल राइट्स?
तो कौन सा अनुच्छेद मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन के लिए उपाय प्रदान करता है? इनफोर्समेंट ऑफ़ फंडामेंटल राइट के लिए?
जल्दी बताइए जल्दी-जल्दी। ये तो फंडामेंटल ड्यूटीज़ है आपका। आर्टिकल नंबर 19 किसकी बात करता है? राइट टू फ्रीडम ऑफ स्पीच एंड
एक्सप्रेशन। ठीक है? के फ्रीडम की बात करता है। आर्टिकल 20 की अगर बात करेंगे तो राइट टू लाइफ एंड पर्सनल लिबर्टी की बात
करता है ये। ठीक है? आर्टिकल 21 आर्टिकल 32 बात करते हैं रेमेडीज़ की। क्या रेमेडीज़ हैं? तो सुप्रीम कोर्ट जो है पांच तरीके
के रिट्स इशू कर सकता है। कौन-कौन सी रिट इशू कर सकता है? तो एक तो हेबियस कॉरपस है। ठीक है? हेबियस कॉरपस है। देन आपके
इशू कर सकता है मैडमस को। ठीक है? देन इशू कर सकता है प्रोहिबिशन को।
देन इशू कर सकता है सर शररी को सर शररी और इशू कर सकता है क्यों क्यों वंटो ठीक है क्यों वरंटो ओके तो हेबिस कॉर्पस का
मतलब क्या होता है टू हैव दी बॉडी ऑफ ठीक है अगर किसी का अनलॉफुल तरीके से डिटेंशन हो जाए तो उसके लिए इशू करी जाती है हेबिस
कॉर्पस मैडमस का मतलब होता है वी कमांड यानी कि हम आपको निर्देश देते हैं कि यह आप काम करिए यानी कि जब कोई गवर्नमेंट
गवर्नमेंट ऑफिशियल एक मैंडेटरी काम ना कर रहा हो तब इशू किया जाता है। यहां पर किसी का अगर अनलॉफुल तरीके से डिटेंशन हो जाए
जैसे कि ए के गोपाल सॉरी जैसे कि आपका एडीएम जबलपुर वाले केस में हुआ था। ठीक है? इसको जो है हम किस नाम से जानते हैं?
हेबिस कॉर्पस केस कौन सा केस है? तो एडीएम जबलपुर केस को इस नाम से जानते हैं। प्रोहिबिशन का मतलब होता है टू फॉरबिट
जहां पर हायर कोर्ट लोअर कोर्ट को निचली अदालत को जो उच्च अदालत हाई कोर्ट की बात नहीं कर रहा हूं। हायर कोर्ट सुप्रीम
कोर्ट भी हो सकता है। वो लोअर कोर्ट को अपने जुरिसडिक्शन में रहने के लिए बोल रहा है कि औकात में रहो बाहर मत निकलो उससे।
सरशरी में क्या होता है? जब निचली अदालत अपने औकात से बाहर निकल गई है तो उसके ऑर्डर को क्वैश करने के लिए यानी नलिफाई
करने के लिए उसके डिसीजन को और उस केस को अपने जुरिसडिक्शन में लेने के लिए सरशरी को यूज़ किया जाता है। क्यों? वरंटो का
मतलब होता है बाय व्हाट अथॉरिटी ऑफ़ किस अथॉरिटी से तुम यहां पर बैठे हो। यानी कि अगर कोई एक पब्लिक ऑफिस को कोई एक ऐसा
बंदा उसमें बैठा हुआ है जो उसके लिए एलिजिबल ही नहीं है तो वहां पर इशू किया था बाय बॉट अथॉरिटी ऑफ़ यानी कि किसने
तुमको यहां अथॉरिटी दी बैठने के लिए भागो यहां से। तो वो वाली चीज़ है। आर्टिकल 32 को हार्ट एंड सोल ऑफ़ कॉन्स्टिट्यूशन
अंबेडकर जी ने बोला था। क्यों बोला था? क्योंकि इसमें हमें रेमेडी मिलती है। अगर कोई फंडामेंटल राइट हमारा अगर कोई वायलेट
होता है तो हम आर्टिकल 32 को यूज़ करके सुप्रीम कोर्ट जा सकते हैं। एंड सुप्रीम कोर्ट कैन नॉट रिफ्यूज टू इशू द राइट
बिकॉज़ दिस इज़ अ फंडामेंटल राइट। बट वेयर एज आर्टिकल 226 में हम हाई कोर्ट अगर जाते हैं रिट को इशू करवाने तो बिल्कुल कर सकता
है हाई कोर्ट बट इट कैन रिफ्यूज आल्सो बिकॉज़ दिस इज़ नॉट अ फंडामेंटल राइट। बट हाई कोर्ट का जो रिट जुरिसडिक्शन है ये
वाइड है एज़ कंपेयर टू सुप्रीम कोर्ट। क्यों वाइड है? बिकॉज़ फंडामेंटल राइट्स के साथ-साथ लीगल राइट्स को एनफोर्स करने के
लिए भी विधिक अधिकारों जैसे फॉर एग्ज़ांपल राइट टू प्रॉपर्टी। तो उनको भी इशू अह वह करवाने के लिए क्या कर सकता है? रिट को
इशू कर सकता है कौन? हाई कोर्ट। तो इसीलिए हम बोलते हैं कि इसका सुप्रीम हाई कोर्ट का जुरिसडिक्शन वाइड है। ठीक है?
जुरिसडिक्शन अगर बात करेंगे तो सुप्रीम कोर्ट का पूरे देश में जुरिसडिक्शन चलता है। हाई कोर्ट का सिर्फ अपने स्टेट में
चलेगा। लेकिन अगर हम इस मैटर में देखें तो लीगल राइट्स को इनफोर्स करने के लिए भी रिट इशू कर सकता है हाई कोर्ट। व्हिच
सेक्शन डील्स विद द राइट टू प्राइवेट डिफेंस इन मॉब अटैक केसेस एज इंट्रोड्यूस्ड इन जूली 2024? बताओ।
कर लिया सभी ने? चलो। तो यहां पर कौन सा है जो मॉब अटैक से डील डील तो मॉब लिंचिंग तो आपका ओके सॉरी मॉब लिंचिंग आपका सेक्शन
नंबर 103 में दिया हुआ है लेकिन यह बात क्या किसकी कर रहा है मॉब लिंचिंग की बात नहीं कर रहा है ये प्राइवेट डिफेंस की बात
कर रहा है ठीक है तो प्राइवेट डिफेंस आपका सेक्शन 44 ऑफ़ बीएएनएस में आएगा 10 जो थ्री है आपका वो भी आईपीसी का नहीं ओके ये तो
बिल्कुल ही नहीं होगा भाई ठीक है एज इंट्रोड्यूस्ड इन जुलाई 204 आपको पता है कि जुलाई 204 से नए क्रिमिनल लॉज़ आए हैं।
बीएएनएस आया है, बीएएसएस आया और बीएसए आया। बीएएनएस क्या है? सब्सटेंटिव लॉ है। और बीएएसएस और बीएसए आपके प्रोसीजरल लॉज़
हैं। आईपीसी तो है ही नहीं। तो फिर कैसे हो सकता है? बट सेक्शन एक 103 ऑफ़ बीएएनएस ध्यान रखना ये मॉब लिंचिंग की बात करता
है। मॉब लिंचिंग का मतलब है जो भीड़ पीट-पीट के मार मार देती है। क्योंकि इंडिया में कुछ ज्यादा ही पगलाई भीड़ रहती
है। आपने मूवीज़ में भी देखा होगा। इसी ने ही कत्ल किया है। मारो इसको और सब झुंड झुंड के झुंड मारने चले जाते हैं। ठीक है?
फिर हर कोई तो सनी देओल नहीं होता है कि एकदम नीचे से करके सबको फेंक दे एकदम ऐसे करके हाथ ऊपर करके। है ना? तो खैर तो मॉब
लिंचिंग है 103 में। 113 ऑफ़ बीएएनएस में क्या दिया हुआ है? सेक्शन 113 ऑफ़ बीएनएस में जरा बताएंगे क्या दिया हुआ है इसमें?
तो प्राइवेट डिफेंस आप कर सकते हैं। यानी कि सनी देओल की तरह घूसेवसे अगर बॉक्सिंग-वॉक्सिंग सीख रखे हो तो मुंह में
जड़ सकते हो थोड़े से। जैसे बॉक्सिंग का क्या होता है? क्रॉस क्रॉस बॉक्सिंग आती है तुम लोगों को मुझे आती है पता है तुम
मेरे से पंगा वंगा मत लेना कभी अगर मिल जाओ गलती से और बोल दो कि अरे ये तो परमानें फोटो खींच लेता हूं गलती मत करना
बॉक्सिंग आती है मेरे को ठीक है वही जड़ दूंगा तो सेक्शन 130 113 ऑफ़ विनस की अगर बात करेंगे तो ये किसकी बात करता है
टेररिस्ट एक्टिविटीज की पहली बार टेररिस्ट एक्टिविटीज को जो है यहां पर डिफाइन किया गया है ध्यान रखिएगा वन वन जो आपका
[नाक से की जाने वाली आवाज़] वन वन अगर बात करेंगे [गहरी सांस लेने की आवाज़][अचानक ज़ोर से सांस लेने की आवाज़]
क्या बात कर रहा था मैं तो वन 111 बात करेंगे ऑर्गेनाइज्ड टाइम 112 पेटी ऑर्गेनाइज्ड टाइम और 113 आपका टेररिस्ट
एक्ट की बात करता है। ठीक है? आगे बढ़ते हैं। इन बीएएस 2023 व्हिच क्राइम कैन अट्रैक्ट कैपिटल पनिशमेंट। कैपिटल
पनिशमेंट यू नो डेथ सेंटेंस मौत की सजा। अब तो तुम्हें फांसी होगी। ठीक है? वो वाला तो बाय एक्सप्लिट
एक्सप्लसिट प्रोविज़न पोस्ट जुलाई 2024 तो मॉब लिंचिंग चोरी करने तुमको क्या फांसी की सजा चढ़ा चढ़ा देंगे तुमने किसी से
बेईमानी कर दी तुमको फांसी की सजा हो जाएगी नहीं भाई कंप्यूटर हैक कर लिया फांसी हो जाएगी नहीं भाई ठीक है ऑप्शन
नंबर फर्स्ट यहां लोग उड़ा देते हैं गाड़ी से लोगों को कुछ नहीं होता ऐसे लिखवा के छोड़ दिया जाता है ऐसे देश में तुमको लगता
है कंप्यूटर हैक करने में तो मौत की सजा होगी हु अपॉइंट्स अ चीफ मिनिस्टर ऑफ एन इंडियन स्टेट तो कौन अपॉइंट करता है चीफ
मिनिस्टर को तो गवर्नर करता है। ठीक है? अब जैसे कि प्रेसिडेंट अपॉइंट करता है प्राइम मिनिस्टर को। आर्टिकल नंबर 75
क्लॉज़ वन। इसका क्या होगा? इसका 89 ऐड कर दो। 164 क्लॉज़ वन। सिंपल। व्हाट इज़ एंशाइंड इन
पार्ट थ्री ऑफ़ द कॉन्स्टिट्यूशन। पार्ट थ्री में क्या है? तो वी नो फंडामेंटल राइट्स हैं। आर्टिकल 12 से लेके 35 के बीच
में। यूएसए ली है हमने। छह फंडामेंटल राइट्स हैं। कौन-कौन से हैं? लेट्स डिस्कस। तो राइट टू इक्वलिटी है। ठीक है?
यहां पर मैं इन शॉर्ट डिस्कस कर रहा हूं। अगेन अगर आपको डिटेल में पूरा वो करना है तो 6 6.5 घंटे का लेक्चर है। स्मार्ट शॉट
अभी लिया था। आप देख सकते हैं। इफ टाइम परमिट्स नहीं टाइम परमिट्स तो कोई नहीं। क्योंकि अगर आप सीजीएल अभी एग्जाम देने जा
रहे हो आपको मान लो छह सात दिन हफ्ते बाद एग्जाम है तो मैं रिकमेंड नहीं करूंगा फिर उस केस में। ठीक है? लेकिन हां ठीक है? वो
है मतलब आउटपुट है उसका। तो आप इसी लेक्चर को करो और इसको बार-बार रिवाइज़ करो। इतना टाइम नहीं है अभी। ठीक है? तो राइट टू
इक्वलिटी हो गया, फ्रीडम हो गया, राइट अगेंस्ट एक्सप्लइटेशन हो गया। ठीक है? शोषण के विरुद्ध अधिकार हो गया।
एक्सप्लइटेशन शोषण। ठीक है? और बात करें राइट टू और रिलीजियस फ्रीडम।
धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार। ठीक है? और अह कल्चरल एंड एजुकेशनेशनल राइट्स।
कल्चरल एंड एजुकेशनल राइट्स। सांस्कृतिक एवं शिक्षा का अधिकार। और राइट टू कॉन्स्टिट्यूशनल रेमेडीज़ जो अभी पढ़ के आए
हैं आर्टिकल नंबर 32। तो इक्वलिटी बात करेंगे 14 से 18 हर आर्टिकल में रिकॉल करो जल्दी-जल्दी क्या-क्या दिया हुआ है। मैं
सब नहीं बता पाऊंगा नहीं तो फिर यही बताता रह जाऊंगा। 19 टू 22 इसमें है। ये 23 और 24 है। ये आपका 25 से लेके 28 तक है जो
मैंने पीछे बता दिए हैं। ये 29 30 को जो माइनॉरिटीज को मिले हुए हैं। माइनॉरिटी टर्म कहीं पे डिफाइन नहीं है। और ये आपका
आर्टिकल नंबर 32 है। ठीक है? आर्टिकल 31 में जो आपका राइट टू प्रॉपर्टी हुआ करता था। ठीक है? यानी कि संपत्ति का अधिकार।
राइट टू प्रॉपर्टी सिर्फ आर्टिकल 31 में नहीं था। था। आर्टिकल नंबर 19 सब सॉरी 19 क्लॉज़ वन सब क्लॉज़ एफ इसमें भी हुआ करता
था। इन दोनों को हटा के यहां से किस अमेंडमेंट से? तो 44 जो कॉन्स्टिट्यूशन अमेंडमेंट था 1978 का उसने इनको हटा के
आर्टिकल नंबर 3A में रख दिया था। लीगल राइट बना दिया था। पार्ट नंबर 12 ऑफ़ कॉन्स्टिट्यूशन में आता है जो फाइनेंस,
प्रॉपर्टी, कॉन्ट्रैक्ट्स एंड सूट्स की बात करता है। यूटीज़ किस पार्ट में दिया हुआ है? तो पार्ट नंबर एट ऑफ
कॉन्स्टिट्यूशन में दिया हुआ है यूटीज़। फंडामेंटल ड्यूटी और डीपीएसपी तो हम पहले ही देख चुके हैं। डीपीएसपी फोर और ड्यूटीज़
फोर ए ड्यूटीज़ ध्यान रखना सिर्फ सिटीज़ंस के लिए हैं। अह फॉरेनर्स के लिए नहीं है। व्हिच आर्टिकल गिव्स पार्लियामेंट
एक्सक्लूसिव पावर टू मेक लॉज़ ऑन आइटम्स इन द यूनियन लिस्ट। कौन सा आर्टिकल है जो इसको एक्सक्लूसिव पावर देता है? यू हैव
एक्सक्लूसिव पावर। एक्सक्लूसिव का मतलब सिर्फ तुम। हां, सिर्फ तुम। ठीक है? तो आर्टिकल नंबर 245 में बात
करेंगे तो यहां पर लेजिसलेटिव जुरिसडिक्शन मेंशंड है। पार्लियामेंट और लेजिसटिव। जुरिसडिक्शन मेंशंड है किसका?
पार्लियामेंट का और स्टेट लेजिस्लेचर का कि पार्लियामेंट ए पार्लियामेंट तुम जो है तुम बहुत अच्छे लग
रहे हो हमको। लिस्ट वन में जो है तुम लॉ बना सकते हो। ठीक है? ए स्टेट लेजिस्लेचर तुम लिस्ट टू में लॉ बना सकते हो। लिस्ट
टू मतलब आपका जो वो होता है स्टेट लिस्ट और लिस्ट थ्री होती है ककरेंट लिस्ट। ओके? तो फिर इसमें थोड़ा वो और इबोरेट किया
गया। आर्टिकल 256 246 पार्लियामेंट। तुम्हारे पास एक्सक्लूसिव पावर है। एक यूनियन लॉ में सिर्फ तुम ही बना सकते हो।
स्टेट तुम्हें एक्सक्लूसिव है कि तुम सिर्फ लिस्ट टू में बना सकते हो। लिस्ट थ्री में आप दोनों लोग यहां तो सिर्फ
लेजिसलेटिव फंक्शन लिखा है कि पार्लियामेंट यूनियन लिस्ट में है। मतलब पार्लियामेंट यूनियन के लॉ लॉ बना सकता
है। स्टेटस स्टेट के बदले बना सकता है। बस ये 246 में तो इसको इलैबोरेट किया गया कि पार्लियामेंट सिर्फ एक्सक्लूसिव पावर है
उसके पास लिस्ट वन में लॉ बनाने के लिए। स्टेट के पास लिस्ट टू में लॉ बनाने के लिए और लिस्ट थ्री में दोनों के पास पावर
है। 240 उसके बाद सेवन आएगा ना 247। 247 में यह लिखा हुआ है कि पार्लियामेंट जो है यह पार्लियामेंट तुम ना कोई एक नया कोर्ट
क्रिएट कर सकते हो। हम एक नया कोर्ट क्रिएट कर सकते हो 247 में। 248 में क्या है? अभी बताया था पीछे रेजिडुअरी पावर्स
हैं यहां पर कि रेजिडुअरी पावर्स वेस्ट विद दी प्रेसिडेंट ऑफ़ सॉरी विद दी पार्लियामेंट। ठीक है? कि पार्लियामेंट जो
है लॉ बना सकता है रेजिडुअरी पावर्स में। ऐसा कोई सब्जेक्ट जो तीनों लिस्ट में मेंशन नहीं है। 254 में क्या है?
डॉक्ट्रिन है किसकी? डॉक्ट्रिन ऑफ रिपग्नेंसी। रिपग्नेंसी का मतलब क्या होता है? देखो, इसका मतलब यह होता है आर्टिकल
254 में ये लिखा हुआ है कि कॉनकरेंट जो लिस्ट है उस पे दोनों लॉ बना सकते हैं। यानी कि आपका पार्लियामेंट भी बना सकता
है, स्टेट लेजिस्लेचर भी बना सकता है। लेकिन अगर दोनों ने बना दिया पार्लियामेंट यानी यूनियन का प्रिवेल करेगा। स्टेट का
सिर्फ एक ही केस में प्रिवेल कर सकता है। एंड दैट इज़ व्हेन दैट पर्टिकुलर यूनियन दैट पर्टिकुलर बिल वाज़ रिज़र्व। दैट
पर्टिकुलर स्टेट का बिल वाज़ रिज़र्व फॉर द प्रेसिडेंट। और उसको प्रेसिडेंट से एसेंट मिली है। तभी वह ओवराइड कर सकता है यूनियन
को। लेकिन इन फ्यूचर भी अगर यूनियन चाहे तो उसको भी ओवराइड कर सकती है। ये यहां पे लिखा हुआ है। ये ध्यान रखना है। डॉक्ट्रिन
ऑफ़ रिपग्नेंसी कहलाता है। ठीक है? अच्छा डॉक्ट्रिन ऑफ़ एयर लड़के। इधर आओ जरा तुम। डॉक्ट्रिन ऑफ़ सेवरेबिलिटी पता है तुमको?
सेवरेबिलिटी। डॉक्ट्रिन ऑफ़ एक्लिप्स पता है तुमको? नहीं मास्टर। ये तो नहीं पता है। हां। तो बस आ
जाओ इधर पे। डॉक्ट्रिन ऑफ़ सेरेबिलिटी क्या होती है? इसका मतलब ये होता है सुप्रीम कोर्ट ने बोला है इसमें डॉक्टर सेबिलिटी
का मतलब ये होता है अगर मान लो कि कोई कोई भी लॉ है वो प्री कॉन्स्टिट्यूशन लॉ भी हो सकता है पोस्ट कॉन्स्टिट्यूशन भी मतलब
प्री क्सीिट्यूशन मतलब जब 26 जनवरी 1950 के पहला हो सकता है यानी कि जब कॉन्सिट्यूशन इनफोर्स हुआ था या फिर उसके
बाद का हो सकता है अगर अगर अगर उस लॉ में कोई एक ऐसी चीज लगी कि ये खटक रही है चीज तो उस चीज को हटाया जाएगा पूरे के पूरे
बर्गर को नहीं फेंक दिया जाएगा मतलब सिर्फ उसी चीज को हटाया जाएगा जो चीज वलेट कर रही होगी फंडामेंटल राइट्स को लेट से।
आर्टिकल नंबर 13 हमें पता है क्या बोलता है? एनी लॉ व्हिच इज़ इन कंट्रीब्यूशन टू द फंडामेंटल राइट्स शैल बी डिक्लेयर्ड नल
एंड वॉइड। अगर वो फंडामेंटल राइट्स को वलेट करता है उसको नल एंड वॉइड डिक्लेअ किया जा सकता है। तो पूरे लॉ को डस्टबिन
में नहीं फेंका जाएगा। हां सिर्फ उस चीज को। ये है डॉक्टरबिलिटी। एक्लिप्स क्या है? इक्लिप्स बोलता है
मान लो ये मान लो खराबी इस चीज में है। ठीक है? खराबी इस चीज में है। खराबी इस चीज में अभी ठीक करके देता हूं। अभी ठीक
करके देता हूं। तो जो भी चीज ठीक है उसको इसके ऊपर लगा दो। ऐसे मान लो फंडामेंटल लाइट वुड लगा दिया। मरम पट्टी कर दी। समझ
आई बात? ध्यान से सुनना। अब मान लो ये जो ऊपर से हरी-हरी मरहम पट्टी मैंने करी। ठीक है? मान लो कल को जाके ये इन यही यही
इनवैलिड घोषित हो जाती है। तो जो जिसके ऊपर मरहम पट्टी करी वो लाल-लाल नीचे था ना उसके लाल-लाल नीचे था वो अपने आप उजागर हो
जाएगा। यानी कि हमें फिर से उस उस चीज को क्रिएट करने की या लॉ को क्रिएट करने की या उस उस लॉ में वो जो चीज थी उसको क्रिएट
करने की रिकक्रिएट करने की हमें नीड नहीं है। क्योंकि उसके ऊपर इक्लिप्स कर दी। मैंने उसके ऊपर चिपका दिया उसको इक्लिप्स
कर दिया। अगर ये कल को हटेगा तो वो अपने आप उसकी जगह पे आ जाएगा। ये सिर्फ प्री कॉन्स्टिट्यूशन जो लॉ है उनको लेके है ये
चीज़। ठीक है? तो दोनों आपस में काफी रिलेटेड है। बेटा ध्यान रखना क्वेश्चन आ सकता है। फिर मत बोलना कि मास्टर बताए
नहीं थे तुम। है ना? हां। आगे बढ़ो अभी। द पार्लियामेंट ऑफ इंडिया कंसिस्ट ऑफ व्हिच ऑफ़ द फॉलोइंग? सिंपल अभी पीछे बताया था
आर्टिकल 17। प्रेसिडेंट भी पार्ट होता है। बिकॉज़ कोई भी बिल उसके बिना एक्ट नहीं बन सकता है बिना उसकी एसेंट के। व्हिच ऑफ़ द
फॉलोइंग पेस इज़ करेक्टली मैच्ड विद रिगार्ड टू द सब्जेक्ट एंड इट्स रेस्पेक्टिव लिस्ट अंडर दिस इवेंच? बताओ
जल्दी से। कौन सा सही मैच्ड है? ये आपसे पूछा गया है। सर डॉक्टर बन गए क्या और क्या?
चलो। तो पुलिस यूनियन लिस्ट में नहीं स्टेट लिस्ट का सब्जेक्ट है पुलिस। ठीक है? एजुकेशन ये आपका कॉनकरेंट लिस्ट का
सब्जेक्ट है। ठीक है? वी नो कि कौन सा अमेंडमेंट था जिससे कि ट्रांसफर किया गया था। कई बार मैंने आपको बताया जिसका यूज़
करके [गहरी सांस लेने की आवाज़] जिसका यूज़ करके आपका ट्रांसफर किया गया था एजुकेशन को फ्रॉम स्टेट लिस्ट टू कॉनकरेंट
लिस्ट। तो दिस वाज़ योर 4 सेकंड अमेंडमेंट। यह मैंने कई बार आपको बता रखा है। 4 सेकंड अमेंडमेंट ने। पांच सब्जेक्ट्स ट्रांसफर
किए एजुकेशन, फॉरेस्ट्स, वेट्स एंड मेजर्स, प्रोटेक्शन ऑफ़ वाइल्ड एनिमल्स एंड बर्ड्स और एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ़ जस्टिस। इन
पांच सब्जेक्ट्स को ट्रांसफर किया गया था। ठीक है? अब नहीं याद तो लिखो उसको। मुझे नहीं पता कि तुमको याद नहीं इतने दिन से
बताते आ रहा हूं। तो नहीं पता तो लिखो उसको। ट्रेड एंड कॉमर्स जो है ये आपका कॉनकरेंट लिस्ट में आता है। बहुत ये
बिल्कुल सही है। ये ध्यान रखना कि इंटरस्ट ट्रेड अगर हो। ठीक है? काफी स्टूडेंट ने भेजा था कि सर ये गलत है क्या? गलत नहीं
है। ठीक है? सही है ये। इंटरस्ट ट्रेड की अगर बात करेंगे तो ये आता है आपका कौन सॉरी यूनियन लिस्ट में। यह आता है आपका
यूनियन लिस्ट में। इंटरस्ट अगर होगा जैसे हम इंटरस्टेट जीएसटी भी पढ़ते हैं। अगर आपको याद हो आर्टिकल नंबर 246 ए में हमने
पढ़ा इस चीज़ को। ठीक है? कि इंटरस्ट अगर जीएसटी होता है तो यूनियन लेवी करता है। अगर इंट्रास्ट है तो वो स्टेट ही करेगा।
लेकिन अगर इंटर आ गया तो वो यूनियन करता है। बैंकिंग आपका यूनियन का होगा। ठीक है? बैंकिंग हो गया, डिफेंस हो गया, सिटीजनशिप
हो गई। ठीक है? एटॉमिक एनर्जी ये सब आपके यूनियन लिस्ट के सब्जेक्ट है। तो कौन सा स्टेट लिस्ट में नहीं है? पुलिस भी,
एग्रीकल्चर भी, हेल्थ भी है, एटॉमिक एनर्जी यूनियन का होगा। डिफेंस, बैंकिंग, सिटीजनशिप, रेलवेज़ ठीक है? करेंसी ये सब
आएंगे यूनियन लिस्ट में। व्हिच मैकेनिज़्म प्रमोट्स कंसल्टेशन एंड कोऑर्डिनेशन बिटवीन यूनियन एंड स्टेट्स स्पेशली ऑन
मैटर्स लाइक जीएसटी? क्या होगा? वैसे तो ये जीएसटी काउंसिल होता है। लेकिन ऑप्शन में तो दिया नहीं
है। वैसे जीएसटी काउंसिल होनी चाहिए। यहां पर जो अपनी जीएसटी काउंसिल होती है वो होनी चाहिए। लेकिन जीएसटी काउंसिल तो दी
नहीं है यहां पर। जो आपका आर्टिकल 279 ए के तहत आती है जिसमें कि 33 मेंबर्स होते हैं जिसमें डिसीजन 3/4 मेजॉरिटी से लिया
जाता है जिसमें सेंटर के पास 1/3 वोटिंग पावर होती है जिसमें स्टेट्स के पास टू थर्ड वोटिंग पावर होती है जिस पे चेयर
पर्सन यूनियन फाइनेंस मिनिस्टर होता है ठीक है अमेंडमेंट नंबर 1001 से इसको क्रिएट किया गया था तो वो तो है नहीं
इसमें तो क्या होगा आंसर इंटरस्टेट काउंसिल फिर हम टेक करेंगे यूनियन और स्टेट के बीच में अगर हमें कोऑर्डिनेशन को
बिठाना है तो आर्टिकल नंबर 263 के तहत जो प्रेसिडेंट होता है वो 5 साल के लिए इंटरस्टेट काउंसिल बना सकता है लेकिन ये
कौन से ठीक है तो ये लेकिन क्या नहीं कर सकता तो बाइंडिंग रिकमेंडेशंस ये नहीं दे सकता
ध्यान रखना है इसमें जो चेयर पर्सन होता है वो कोई और नहीं हमारा जो प्राइम मिनिस्टर होता है वही होता है प्राइम
मिनिस्टर के अलावा इसमें सारे स्टेट्स के सीएम होंगे और जिन यूटीज़ में सीए लेजिसलेटिव असेंबली है जैसे दिल्ली
पुडुचेरी जैन के वहां के सीएम होंगे और जिन यूटी में नहीं है तो वहां के एलजी हो जाएंगे लेफ्टिनेंट गवर्नर हो जाएंगे प्लस
सिक्स यूनियन कैबिनेट रैंक केिस्टर्स होते हैं ये भी हमें पता है इंटरस्ट काउंसिल में इंटरस्ट काउंसिल को सबसे पहली बार कब
बनाया गया था बताओ? 1983 में जो सरकारिया कमीशन बना था उसने रिकमेंड किया था कि यार इंटरस्ट काउंसिल होना चाहिए। तो पहला जो
इंटरस्ट काउंसिल है वो 1990 में बना था। ये ध्यान रखना है आपको। फाइनेंस कमीशन आर्टिकल नंबर 280 में है। 1 + 4 का
कंपोज़िशन होता है। अभी 16 चल रहा है। अरविंद पनगड़िया चेयर पर्सन है। इसके भी डिसीजंस बाइंडिंग नहीं होते हैं। और ये
इसके जो मेंबर्स हैं उनको रीअपॉइंट किया जा सकता है। पहले जो बना था फाइनेंस कमिश्नर उसके केसी नियोजित थे चेयर पर्सन।
नीति आयोग ये आपका नॉन स्ट्यूटरी बॉडी है। यानी कि ना तो कॉन्स्टिट्यूशन में इसका कोई आर्टिकल है और ना ही ये कोई स्टट्यूट
से बना है। यानी कि किसी लॉ से भी नहीं बना है। ज़ोनल काउंसिल की अगर बात करेंगे तो स्टेट्स रिऑर्गेनाइजेशन एक्ट ऑफ 1956
जो है उसके थ्रू ज़ोनल काउंसिल्स क्रिएट करी गई। कितनी? तो पांच क्रिएट करी गई। ठीक है? नॉर्थ, साउथ, ईस्ट और वेस्ट और
सेंटर। पांच क्रिएट करी गई थी ज़ोनल काउंसिल्स। इसमें जो ज़ोनल काउंसिल्स में जो चेयर पर्सन होता है वो कौन होता है? इट
इज़ होम मिनिस्टर। गृह मंत्री होते हैं हमारे इसमें चेयर पर्सन याद रखना है। नॉर्थ ईस्ट की जोनल काउंसिल है वो 1971 का
नर्थ जो नॉर्थ ईस्ट जोनल काउंसिल एक्ट है उसके थ्रू बनाई गई है। होम मिनिस्टर इसमें चेयर पर्सन होते हैं और जो चीफ मिनिस्टर
होते हैं ये इसके वाइस चेयर पर्सन होते हैं। राउंडराउंड से इन रोटेशन बनते रहते हैं। ये ध्यान रखना है आपको। ठीक है? तो
स्टेट्स ऑर्गेनाइजेशन एक्ट का जो पार्ट नंबर थ्री है उसमें ये जो है जोनल काउंसिल के फॉर्मेशन के बारे में दिया हुआ है जो
कि स्टैट्यूटरी बॉडी है क्योंकि ये एक्ट के थ्रू क्रिएट हुई है इसलिए। इन केस ऑफ अ कॉन्फ्लिक्ट बिटवीन यूनियन एंड स्टेट लॉ
ऑन अ कनकरेंट लिस्ट का सब्जेक्ट व्हिच प्रिवेल्स। तो कॉनकरेंट लिस्ट हमने कहां से ली? ऑस्ट्रेलिया से। तो किसका प्रिवेल
करेगा? अगर क्फ्लिक्ट हो गया तो यूनियन का करेगा और स्टेट का करेगा अगर प्रेसिडेंट के द्वारा उस बिल को एसेंड किया गया तो।
और इसी को डॉक्ट्रिन ऑफ़ रिपग्नेंसी कहा जाता है। अगला अंडर व्हिच स्पेसिफिक कंडीशन डज़ द पार्लियामेंट गेन दी पावर टू
लेजिसलेट ऑन अ सब्जेक्ट इनटेड इन अ स्टेट लिस्ट इवन इन द एब्सेंस ऑफ़ एन इमरजेंसी और स्टेट रिक्वेस्ट? तो पांच ऐसे सिनेरियोस
मैंने आपको बताए थे जिनमें कि ठीक है जिनमें कि लॉ बना सकती है पांच ऐसे केसेस बताए थे जिनमें कि स्टेट लिस्ट के
सब्जेक्ट पे लॉ बना सकता है कौन पार्लियामेंट तो पांच सिनेरियोस कौन-कौन से मैंने आपको पढ़ाए थे चलो बता देता हूं
मैं आपको कौन-कौन से रिवाइज़ कर लेते हैं आपने क्वेश्चन तो कर ही लिया होगा है ना एक सेकंड
तो कौन-कौन से है आर्टिकल्स तो आर्टिकल 249 आर्टिकल नंबर 250 आर्टिकल नंबर 252 2 आर्टिकल नंबर 253 एंड आर्टिकल नंबर 356
249 बोलता है राज्यसभा अगर स्पेशल मेजॉरिटी से अगर विशेष बहुमत से अगर स्पेशल मेजॉरिटी से रेोल्यूशन पास कर दे
तो ऐसे केस में पार्लियामेंट एंपावर हो जाता है लॉ बनाने के लिए स्टेट लिस्ट के सब्जेक्ट पे। अगेन रिमेंबर लिस्ट वन यानी
यूनियन लिस्ट पे सिर्फ पार्लियामेंट लॉ बना सकता है। लिस्ट टू पे स्टेट लेजिस्लेचर लॉ बना सकता है। लेकिन पांच
ऐसे सिनेरियो हैं जहां लिस्ट टू स्टेट लिस्ट पे पार्लियामेंट लॉ बना सकता है। ठीक है? आर्टिकल 250 क्या बोलता है? ये
बोलता है कि अगर देश में तो राष्ट्रीय आपातकाल लगा हुआ है। नेशनल इमरजेंसी लॉ लगी हुई है तो भी स्टेट लिस्ट के सब्जेक्ट
पे पार्लियामेंट लॉ बना सकता है। इफ 252 बोलता है इफ टू और मोर स्टेट यानी दो या दो से ज्यादा राज्य बोले हैं किससे?
पार्लियामेंट से। से भैया हमारे लिए लॉ बना दो क्या? हम बना नहीं पा रहे तो बना देगा। आर्टिकल 253 क्या बोलता है? अगर
किसी इंटरनेशनल ट्रीटी या तो कन्वेंशन को लागू करवाना हो, उसको एनफोर्स करवाना हो तो स्टेट लिस्ट के
सब्जेक्ट पे लॉ बना सकता है। और यह है अगर उस राज्य में प्रेसिडेंट रूल यानी कि राष्ट्रपति शासन लगा हो। यह लॉ जो बनाया
जाएगा यह एक साल के लिए सिर्फ वैलिड रहता है। इस केस में यहां पर जब तक इमरजेंसी है तब तक यह वैलिड रहेगा। ये ध्यान रखना है
ये सिर्फ उन्हीं राज्यों के लिए लागू होगा जो राज्य बोले ए हमारे लिए लॉ बना दो क्या सिर्फ उन्हीं के लिए लागू होगा ये ठीक है
ये चीज़ आपने ध्यान रखना है ये तो खैर जब रहेगा जब तक खुद पार्लियामेंट रिपील ना कर दे और ये भी प्रेसिडेंट रूल तक रहेगा ये
ठीक है तो पूछ रहा है कि इमरजेंसी भी नहीं है यानी आर्टिकल 250 का भी केस नहीं है आर्टिकल 252 का भी केस नहीं है जहां टू और
मोर स्टेट्स रिक्वेस्ट करते हैं वो भी केस नहीं है तो फिर राज्यसभा वाला यहां पर हो गया राज्यसभा पाससेस अ रेोल्यूशन बाय अ
स्पेशल मेजॉरिटी दैट इट इज़ नेसेसरी इन दी नेशनल इंटरेस्ट यानी कि ये आपके राष्ट्रीय हित में आवश्यक है तो पार्लियामेंट तुम लॉ
बना दो। जाओ। लॉ बना तो लो जल्दी जल्दी से लिस्ट सब्जेक्ट में। द हेड ऑफ़ द स्टेट ऑफ़ काउंसिल ऑफ़ मिनिस्टर इज़। तो स्टेट काउंसिल
ऑफ़ मिनिस्टर का हेड कौन होगा? तो यूनियन काउंसिल ऑफ़ मिनिस्टर का हेड कौन होता है? प्राइम मिनिस्टर। तो स्टेट काउंसिल ऑफ़
मिनिस्टर कौन होगा? चीफ मिनिस्टर। सिंपल 40 इन इंडिया, द रेवेन्यू कलेक्टेड फ्रॉम एग्रीकल्चर इनकम टैक्स इज़ कलेक्टेड टू
एलोकेटेड टू व्हिच लेवल ऑफ़ गवर्नमेंट? बताओ। एग्रीकल्चर इनकम टैक्स से जो पैसा आएगा, वो कहां जाएगा? तो, एग्रीकल्चर कौन
सी लिस्ट का सब्जेक्ट है? क्यों? या फिर हां, कौन सी लिस्ट का सब्जेक्ट है? तो ये स्टेट लिस्ट का सब्जेक्ट है और अगर स्टेट
लिस्ट का सब्जेक्ट है तो स्टेट को पैसा जाएगा। नहीं सेंटर तो नहीं लेगा ना पैसा। स्टेट गवर्नमेंट सेंट्रल गवर्नमेंट
कलेक्टेड बाय स्टेट गवर्नमेंट डिलीवर टू सेंट्रल गवर्नमेंट। बिल्कुल नहीं होगा ये तो ये भी बिल्कुल नहीं होगा। किसको एलोकेट
होता है? तो स्टेट गवर्नमेंट्स को एलोकेट होता है। ये ध्यान रखना है आपको। ऑप्शन नंबर फर्स्ट सही आंसर हो जाएगा। दिस इज़
एलोकेटेड टू दी स्टेट गवर्नमेंट। ओके? ठीक है? चलो आगे बढ़ते हैं अंडर बीएएसएस ठीक है भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के
तहत कॉग्निजेबल ऑफेंस क्या है बताइए कॉग्निजबल ऑफेंस क्या है मैंने अच्छे से आपको ये समझा रखा है और अब अगर आप नहीं
बता पाए ठीक है तो कुछ नहीं मैं क्या ही कर लूंगा लेकिन फिर भी बताने की कोशिश करिए और सेक्शन भी बता दीजिएगा कहां
डिफाइंड है कॉग्निजिबल ऑफेंस तो भाई डिफाइंड तो वो सेक्शन टू में ही होगा देखो सेक्शन टू का जो क्लॉज़ वन है उसमें उसमें
डिफाइंड है ये। तो बहुत सीरियस नेचर का ऑफेंस होता है कॉग्निजिबल ऑफेंस। जहां पर पुलिस बिना वारंट के जो है आ सकती है।
बिना वारंट के। ठीक है? और अच्छा ये बताओ बिना वारंट के भी अगर मान लो आई ठीक है? और घर पुलिस वाले आपके घर की तलाशी ले रहे
हैं तो उसमें क्या मैंडेटरी है? उसमें वीडियो रिकॉर्डिंग मैंडेटरी है। ऐसे केस में। फॉरेंसिक टीम को भेजना किस केस में
मैंडेटरी है? अगर एक ऐसा आपने अपराध किया जिसमें 7 साल या उससे ज्यादा की जेल है तो फॉरेंसिक टीम को भेजना अनिवार्य हो जाता
है। यह आपने ध्यान रखना है। ठीक है? अब यही सीरियस क्राइम कॉग्निजेबल भी होता है और नॉन कंपाउंडेबल भी होता है। ठीक है?
उसी को ही नॉन कंपाउंडेबल बोलते हैं। नॉन कंपाउंडेबल का मतलब हो गया एक ऐसा ऑफेंस एक ऐसा अपराध जो जगन्य अपराध है जिसके लिए
आप लोक अदालत वगैरह नहीं जा सकते। आप एमकेबल सेटलमेंट ऑफ डिस्प्यूट नहीं कर सकते। कोर्ट ही सजा सुनाएगी। तो
कॉग्निजेबल ऑफेंस होते हैं, नॉन कंपाउंडेबल होते हैं और नॉन बेलेबल होते हैं। ठीक है? ये ऑफेंसेस जो सीरियस नेचर
के होते हैं। तो ये आपने नहीं भूलना है। 42 द ट्रांसलेशन इन हिंदी ऑफ़ एव्री अमेंडमेंट एक्ट वाज़ इंसर्टेड थ्रू व्हिच
अमेंडमेंट एक्ट। तो हर अमेंडमेंट एक्ट अह जो है उसका हिंदी ट्रांसलेशन करना था हर अमेंडमेंट का। ये किसने बोला था? 61
अमेंडमेंट ने देखो आई हैव ऑलवेज टोल्ड यू। दिस इज़ द रूल ऑफ़ लाइफ। ऑलवेज स्टार्ट फ्रॉम
नीचे। ओके? कल भी मैंने आपको बताया था नीचे से शुरू करो। यानी कि लोअर पीोलिथिक, मिडिल पीलियोलिथिक तब अपपर पिलोलिथिक। मैं
ये कहना चाह रहा हूं। ठीक है? उसी तरीके से नीचे से यहां पर मैं इसलिए शुरू कर रहा हूं क्योंकि मुझे साफ समझ में आ रहा है कि
ये मैं एलिमिनेट कर सकता हूं आराम से नीचे से आसानी से। 61 जो अमेंडमेंट है 1989 में जो लागू हुआ 1988 में हुआ। इसने वोटिंग ऐज
को डिक्रीज किया फ्रॉम 21 टू 18। जिसकी वजह से ये लागू 1989 में हुआ था। जिसकी वजह से आपको पता है इलेक्शन कमीशन ऑफ़
इंडिया का काम बढ़ गया था और फिर वहीं से ही रायता फैला था। मतलब कि इलेक्शन ऑफ़ इंडिया कमीशन ऑफ़ इंडिया को पहली बार
मल्टीबर्ड बॉडी बनाया गया। दो और मेंबर को जोड़ा गया। लेकिन फिर से जब काम खत्म हो गया तो उनको हटा दिया गया। लेकिन 1993 में
परमानेंट तरीके से इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया मल्टीबर्ड बॉडी बना। अब सोचो ना बना होता तो आज ज्ञानो जी की दिक्कत थोड़ी
ना होती इतनी। नहीं तुमको लगता है काम तो फिर भी हो जाता। लेकिन आज ज्ञानो जी की दिक्कत बढ़ी। इंडियन एक्सप्रेस ने छापा वो
इसलिए छापा क्योंकि जो बाकी 2000 इलेक्शन कमिश्नर थे वो ज्ञान जी को लेके जा रहे थे। ज्ञान जी कुछ तो दिक्कत है। ज्ञान जी
लाइक वो तो मुझे पता है लेकिन मैं इसमें एक्शन नहीं लूंगा वो तो मुझे पहले ही पता है। ठीक है? क्यों? क्योंकि ध्यान रखना
इलेक्शन कमीशन ऑफ़ इंडिया में जो भी डिसीजन है वो मेजॉरिटी से लिया जाता है। कोई ऐसा नहीं होता इलेक्शन कम कमिश्नर की ही चलती
है। चीफ इलेक्शन कमिश्नर की नहीं होता ऐसा। ठीक है? मेजॉरिटी से लिया जाता है। खैर ये चीज़ हो गई। 44 अमेंडमेंट जो है
1978 का इसने क्या किया था? राइट टू जो प्रॉपर्टी था उसको हटाया था। और भी काम किए थे। जैसे कि काउंसिल ऑफ़ मिनिस्टर एक
बार प्रेसिडेंट की एडवाइस को रिटर्न कर सकते हैं। बिना काउंसिल ऑफ़ मिनिस्टर कैबिनेट से पूछे हुए प्राइम मिनिस्टर
प्रेसिडेंट से इमरजेंसी लगाने नहीं बोल सकता। तो और भी ये चीजें करी थी। जैसे क्या था कि पहले हुआ करता था कि इमरजेंसी
को एम नेशनल इमरजेंसी लगानी है तो विद इन 2 मंथ्स अप्रूव करना है फ्रॉम द पार्लियामेंट। विद इन 2 महीने अप्रूव करना
है थ्रू अ स्पेशल मेजॉरिटी। 44 ने बोला नहीं दो मं 2 महीने नहीं 1 महीने विद इन 1 मंथ अप्रूव करना है उसको। ठीक है? ठीक है?
अप्रूवल लेना है पार्लियामेंट से। आंसर इसका 58थ अमेंडमेंट होगा। 4 अब ये 4 सेकंड भी अपन पढ़ते रहते हैं आए दिन। 44 61 कभी
पढ़ा है हम लोगों ने। ट्रांसलेशन ऑफ़ हिंदी नहीं पढ़ा है। एलिमिनेशन खेलो लगाओ आंसर। 4 को मिनी कॉन्स्टिट्यूशन बोलते हैं। क्यों
बोलते हैं? मैंने बताया। बहुत सारे चेंजेस किए थे। ओ हो काफी बड़ा नहीं लग रहा है ये। कोई बड़ा नहीं है। ठीक है? जितना बड़ा
क्वेश्चन उतना जितने ज़्यादा शब्द किसी क्वेश्चन में ऑप्शन में। ये समझ लो उतना ही हल्का सवाल है। ठीक है? एलिमिनेशन का
स्कोप बढ़ जाता है ना आपके पास। तो ये चीज है। ठीक है? हम तो ये चीज है। नोटिफिकेशन नहीं आया कब
क्लास स्टार्ट हो गई? अच्छा आज नोटिफिकेशन नहीं गया क्या क्लास का? ओके कोई नहीं। कर लिया सभी ने क्वेश्चन।
मैं कर रहा हूं इसको। तो पूछा है व्हिच ऑफ़ द फॉलोइंग बेस्ट इलस्टेट्स अ कंट्रोवर्शियल येट कॉन्स्टिट्यूशनली
अपहल्ड प्रोविज़न ऑफ़ जुनाइल जस्टिस केयर एंड प्रोटेक्शन ऑफ़ चिल्ड्रन एक्ट ऑफ़ 2015 दैट मार्क्स अ सिग्निफिकेंट शिफ्ट फ्रॉम द
अर्लियर 200 एक्ट। क्या चीज़ शिफ्ट ला रहा है 2000 एक्ट से 2015 में? 2015 एक्ट प्रोहिबिट्स ऑल फॉर्म्स ऑफ़ जुनाइल डिटेंशन
एंड मैंडेट्स ओनली रिहबिलिटेटिव केयर फॉर ऑल चिल्ड्रन बिलो 18। ये तो इतना एक्सट्रीम नहीं है। लेकिन दिस प्रोहिबिट्स
ऑल फॉर्म ऑफ़ जिनाइल डिटेंशन है कि जिनाइल को 18 या से नीचे का रिटेंशन हो ही नहीं सकता किसी केस में। ये चेंज लेके आए हैं।
द 2015 एक्ट परमिट्स द ट्रायल ऑफ़ चिल्ड्रन एज्ड 16 टू 18 एज़ एडल्ट फॉर हीनियस ऑफेंसेस बट ओनली आफ्टर प्रिलिमिनरी
असेसमेंट बाय अ चाइल्ड वेलफेयर कमिटी। यानी अगर 16 से 18 के किसी ने बच्चे ने क्योंकि बच्चा ये भी बोल सकते हैं आप उसको
18 से नीचे अगर बहुत ही क्राइम किया जगह ने अपराध किया तो उसका ट्रायल चलाया जा सकता है एडल्ट मान के अगर तो चाइल्ड
वेलफेयर कमेटी बोल दे जैसे एग्जांपल के तौर पे आपको पता है निर्भया केस में एक बंदा बच गया था फांसी से वो उसकी 18 से कम
ऐज थी और सिर्फ कुछ ही दिन बाकी था मतलब कि 18 होने में बस कुछ ही दिन बाकी था क्या हुआ उसका कुछ नहीं हुआ फांसी उन
लोगों को ही बाकियों को इसको क्या हुआ बस जो जुनाइल प्रोटेक्शन केयर होती है उसमें रखा गया चीजें सिखाई गई छोड़ दिया गया भाई
उसको मतलब वो मर गए और इसको छोड़ इसको जेल भी नहीं हुई ये हाल हुआ क्यों कुछ दिन बस बच गया था अगर कुछ दिन और ये बड़ा होता
कुछ दिन कुछ महीने और बड़ा होता ठीक है तो इसको ये भी मर चुका होता ये है ठीक है तो वहीं से ये बात निकल के आई कि भाई अब जो
हीनियस जो क्राइम्स होते हैं बहुत ज्यादा अगर कोई करता है 16 से 18 वाला तो उसका ऑफ उसको जो है एडल्ट की तरह ट्राई करना है
सब्जेक्ट टू अ प्रिलिमिनरी असेसमेंट बाय द जुनाइल जस्टिस बोर्ड रिगार्डिंग िंग द चाइल्ड्स मेंटल एंड फिजिकल कैपेसिटी
अंडरस्टैंडिंग ऑफ़ कॉन्सिक्वेंसेस एंड सरकमस्ट्ससेस ऑफ़ द ऑफेंस। दूसरा भी थोड़ा बहुत वही बोलने की कोशिश कर रहा था कि
एडल्ट की तरह ट्रायल चल सकता है। लेकिन थर्ड को जब मैंने पढ़ा तो ये समझ में आया कि यार ये बहुत एक्सप्लेनेटरी है ये तो और
बात सही भी लग रही है कि ऐसे जो 18 के क्योंकि हमारे यहां पे यही है कि किसी एक निर्दोष छूट कोई एक जो कोई दोषी
है वो छूट जाए वो चलेगा लेकिन किसी निर्दोष को सजा नहीं होनी चाहिए। तो इस तरीके की हमारी मेंटालिटी है। तो हम
बिल्कुल भी इस तरीके से नहीं कि नहीं नहीं बस अगर जैसे चाइल्ड वेलफेयर कमेटी ने बोल दिया तो इसको अडल्ट की तरह तुरंत ट्रीट कर
देंगे। नहीं अगर ये सारे कंडीशंस फुलफिल होते हैं तब तो कितना आसान है। ठीक है? लंबाडी तो लग ही रहा है। इन द कॉन्टेक्स्ट
ऑफ़ पोस्ट लिबरलाइजेशन इकोनॉमिक गवर्नेंस इन इंडिया? व्हाट डज़ दी कॉन्सप्ट ऑफ़ मिनिमम गवर्नमेंट एंड मैक्सिमम गवर्नेंस
फंडामेंटली इंप्लाई एंड हाउ डज़ इट रिफ्लेक्ट अ शिफ्ट इन द रोल ऑफ़ दी स्टेट? मिनिमम गवर्नमेंट और मैक्सिमम गवर्नेंस?
मोदी जी ने ये टर्म कॉइन किया था। व्हिच मींस कम लोग रहेंगे जितने तो भसड़ कम मचेगी। जैसे एग्जांपल के तौर पे हम पढ़ते
हैं लॉ ऑफ़ डिमिनिशिंग मार्जिनल यूटिलिटी। वह नहीं हम पढ़ते हैं क्या? लॉ ऑफ़ वो कौन से इकोनॉमिक्स में है? मैं एकदम से नाम
भूल रहा है। लॉ ऑफ़ डिमिनिशिंग अ क्या बोलते हैं उसको? एकदम दिमाग से नाम उतर रहा है। प्रोडक्टिविटी बोलते हैं ना कि
उसमें ये होता है कि धीरे-धीरे धीरे-धीरे जो हमारी प्रोडक्टिविटी है जैसे फॉर एग्जांपल मैं कोई एक रेस्टोरेंट चला रहा
हूं। ठीक है? मेरे पास दो वर्कर हैं। मैं तीसरा वर्कर लेके आया क्योंकि इतनी भीड़ रहती है। तो मैं तीसरा वर्कर लेके आया।
प्रोडक्टिविटी बढ़ी। सेल ज्यादा बढ़ने लगी। ठीक है? सेल ज्यादा बढ़ी। ठीक है? तीसरे को लाने के मैंने सोचा और लेके आता
हूं मैं। उससे और बड़ी सेल। लेकिन फिर मैं एक और लेके आया। अब घट गई। क्यों? क्योंकि वो बस आपस में लड़ते रहते हैं। कोई किसी
के रास्ते में आ जाता है। कोई किसी के रास्ते में आ जाता है। किसी को बोला कि सर ये हमको लगा उसने सुन लिया होगा। सर हमको
लगा उसने सुन लिया होगा। ठीक है? जैसे मैंने टीम में भी नोटिस किया। ठीक है? कि सर हमें तो लगा उन्होंने कर लिया होगा। सर
हमें तो लगा उन्होंने कर लिया होगा। फिर मीटिंग मीटिंग लोग खेलते हैं। ठीक है? तो लॉ ऑफ़ डिमिनिशिंग मार्जिनल प्रोडक्टिविटी।
ओके? ठीक है? यूटिलिटी नहीं भाई होता है। यूटिलिटी में तो यूटिलिटी का मतलब समझते हो ना? यूटिलिटी का तो होता है मजा,
संतुष्टि। तो लॉ डोमिनिशिंग मार्जिनलिटी तो ये होता है कि भ अगर मैं कोई एक्स्ट्रा यूनिट कंज्यूम कर रहा हूं तो उससे जो मुझे
मजा मिलेगा वो पिछली वाली से कम मिलेगा। कहां यार तुम लोग मार्जिनल यूटिलिटी लिखे डालो? पागल-वागल हो गया एकदम। हैं। बस
मार्जिनल बोलते यूटिलिटी तुम्हारे दिमाग में आता है। बस देखो सब लिखे पड़े हैं। मार्जिनल यूटिलिटी। माज यूटिलिटी हैं।
पगला वगला गए हो तुम लोग। अब हमको रिकमेंड कर रहे हो कि बादाम खाओ बड़े बादाम खिलाने वाले।
बताया तो मार्जिनल ऑफ़ डिमिनिशिंग प्रोडक्टिविटी और कैसे बताएं? बस मास्टर को एक मिनट भी अगर थोड़ा देर से
याद आए तो बादाम खाओ और खुद तुम तुम्हारी हालत क्या है? जो इतना बढ़ाते रहते तुमको। तुमको नहीं बताए थे। तुम एक चीज नहीं पलट
के बता सकते हो कुछ हमको तो लॉ ऑफ ड्यूमिनेशन मार्जिनल प्रोडक्टिविटी किसी एक सिंगल स्टूडेंट ने नहीं लिखा है एक चीज
बस बोल दो कि बच्चे याद दिला दो बच्चे बैठे हैं बस अरे वो वो वो नहीं आता है बाकी जो सब आता है वहां से बस वही जो तुम
पूछ रहे हो वही वाला नहीं आता है ठीक है तो धीरे-धीरे जो प्रोडक्टिविटी है व घटने लगती है इसको बोलते हैं तो वही है ये चीज़
एक तरीके से ठीक है सो इट अह प्रमोट्स अ डाउन साइज स्टेट दैट फोकसेस ऑन फैसिलिटेशन एफिशिएंसी एंड सिटीज़ सेंट्रिक सर्विस
डिलीवरी रादर दैन डायरेक्ट कंट्रोल एंड ओनरशिप इट एडवोकेट्स कंप्लीट विद कंप्लीट विथड्रॉल क्या है? एक्सट्रीम है। इट
एमावर्स पब्लिक सिटी एंटरप्राइज़ थ्रू ग्रेटर सब्सिडीज़ इट मैंडेट्स मैक्सिमम सेंट। ओह नो नो नो ऑप्शन नंबर सेकंड। ठीक
है? करो जरा। राइट टू बी फॉरगेटन करो जल्दी से। लंबा चौड़ा लग रहा है नहीं बेटा जो ये है ना जो भी विधि परमार जो
विधि परमार हो। ठीक है? तुमको क्या लगा? परमार हो तो छोड़ दूं मैं तुमको। बेटा सुताई कर दूंगा कायदे की। जो बोल रहे हैं
ना बीटल चेक कराओ। बीट रोज खाता हूं उनको अपना चेक कराओ जाके। समझे कि नहीं समझे? बढ़ है। बीट चेक करवाएंगे मेरा।
राइट टू बी फॉरगॉटन है। ध्यान रखना। मेरे पास भी अधिकार है कि मैं अभी भूल सकता हूं। ये मत भूलना।
चलो तो कराऊं मैं? चलो तो द राइट टू बी फॉरगॉटन इज़ एक्सप्लसिटली रेग ओहो पकड़े गए राजा जी।
मतलब एक्सप्लसिटली नहीं है। तभी तुम लिखे एक्सप्लसिसली। समझ गए हम? राइट टू बी फॉरगॉटन इज़ एक्सप्लसिटली रिकॉग्नाइज़्ड एज़
अ फंडामेंटल राइट एंड आर्टिकल 21 बाय द सुप्रीम कोर्ट। ग्रांटिंग इंडिविजुअल्स एब्सोल्यूट कंट्रोल टू रिमूव एनी पर्सनल
इनेशन फ्रॉम दी इंटरनेट विदाउट रेस्ट्रिक्शन। बस राजा जी बस अब एक शब्द मत बोलना। एकदम सर्वगुण कंपन हो। द राइट
टू बी फॉरगॉटन इज़ डिराइव्ड फ्रॉम द राइट टू प्रोवेसी अंडर आर्टिकल 21 एंड डेटा प्रोटेक्शन प्रिंसिपल्स बट इट इज़ नॉट
एब्सोल्यूट। ये हुई ना बात। ये जर्नलिस्टिक एंड मस्ट बी बैलेंस। ये हुई ना बात। बैलेंस होना चाहिए। अगेंस्ट द
फ्रीडम ऑफ़ स्पीच एंड द पब्लिक राइट टू इनफार्मेशन। वरमाला डाल दे इसके गले। एकदम सर्व संपन्न
नहीं लग रहा था तुमको। इंडियन लॉ करेंटली प्रोवाइड्स अ कॉम्प्रहेंसिव स्टटिव फ्रेमवर्क फॉर आरटीएफबी थ्रू दी इनेशन ऑफ़
दिस व्हिच एमावर्स इंडिविजुअल। तो बिल्कुल इसमें ठीक है? देखो आगे व्हिच एमावर्स इंडिविजुअल टू डिमांड ए इरेजर ऑफ़ एनी
ऑनलाइन कंटेंट वलेटिंग देयर प्राइवेसी। मैं ये नहीं बोलूंगा कि ये कोई बहुत एक्सट्रीम है। मैं नहीं बोलूंगा इस चीज़
को। लेकिन फिर भी आगे बढ़ते हैं। दिस अप्लाई ओनली टू गवर्नमेंट वेबसाइट एंड डेटाबेसिस एंड प्राइवेट प्लेटफॉर्म्स आर
एग्ेंप्ट फ्रॉम एनी ऑब्लिगेशन टू रिमूव पर्सनल डाटा और इनेशन अपॉन। ठीक है? ये तो एक्सट्रीम है। तो पहला और चौथा तो आराम से
एलिमिनेट कर सकते हो। और दूसरे और तीसरे मुझे चूज़ करना होगा। तो आई विल गो विद दो। नॉट ओनली बिकॉज़ कि इट इज़ लंबडी। ठीक है?
बट आल्सो बिकॉज़ कि वो पूरा एक्सप्लेन कर रहा है वो चीज़ को। ठीक है? कि एब्सोल्यूट नहीं है, बैलेंस्ड है। ठीक है? बाकी
राइट्स को भी कंसीडर कर रहा है। ठीक है? वैसे यहां पर एनी दिया हुआ है। लेकिन मैं फालतू में यहां पे लॉजिक नहीं लगाऊंगा।
एनी है तो इसलिए गलत हो जाएगा तुरंत। ठीक है? ये एक्सट्रीम सेंस नहीं दे रहा है वैसे यहां पे। ठीक है? वैसे थोड़ा तो है
एक्सट्रीम कि कोई भी ऑनलाइन कंटेंट को हटाया जा सकता है लेकिन उतना भी एक्सट्रीम नहीं है यह। ठीक है? फास्ट टैग स्पेशल
कोर्ट्स के बारे में स्टेटमेंट्स दिए हुए हैं। बताना है आपको इसके बारे में कौन सा गलत है। ध्यान रखिए यहां पर क्या पूछा
जाता है सही कि गलत? तो गलत पूछ रहा है यहां पर। व्हिच ऑफ़ द फॉलोइंग स्टेटमेंट्स अबाउट दी फर्स्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट स्कीम
इज़ इनकरेक्ट। दे आर एस्टैब्लिश्ड प्राइमरली टू एक्सपेडाइट। द ट्रायल ऑफ़ द केसेस रिलेटिंग टू द सेक्सुअल ऑफेंसेस
अगेंस्ट वमेन एंड चिल्ड्रन। तो फास्ट ट्रैक से समझ में आ रहा है कि जल्दी से केस को एक्सपेडाइट ही करना होगा तेजी से।
द स्कीम प्रोवाइड्स फाइनेंसियल असिस्टेंस फ्रॉम द सेंट्रल गवर्नमेंट फॉर सेटिंग अप एंड रनिंग एफटीएससीस इन स्टेट्स एंड
यूटीज़। दे हैव जुरिसडिक्शन ओनली ओवर केसेस रजिस्टर्ड आफ्टर एस्टैब्लिशमेंट ऑफ़ द कोर्ट एंड कैन नॉट राइट पेंडिंग केसेस। द
स्कीम एनकरेजेस स्टेट्स टू अपॉइंट डेडिकेटेड पब्लिक प्रोसकटर्स एंड सपोर्ट स्टाफ टू एनश्योर स्पीडी जस्टिस इन
एफटीएससी। तो एक ही एलिमिनेट कर पाए मिक्स टीम के उसमें और बाकी एलिमिनेट नहीं कर पाए। है भैया इनकरेक्ट ही तो पूछा था। ले
लि ठीक है? तो तीसरा हो जाएगा। तो ऐसा नहीं है कि दे
हैव जुरिसडिक्शन ओनली ओवर रजिस्टर्ड आफ्टर द एस्टैब्लिशमेंट ऑफ कोर्ट। उससे पहले भी बना है। ठीक है? तो भी हो सकता है। ठीक
है? मेनली रिलेटेड टू जो पॉक्सो होता है ना जो आपको पता है ना प्रिवेंशन ऑफ़ प्रोटेक्शन ऑफ़ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल जो
ऑफेंस एक्ट है आपका पॉक्सो एक्ट। कब आया था? क्यों? तो उसको लेके है ये आपका पर्टिकुलरस्ट टैग स्पेशल कोड को सेटअप
करके जल्दी से स्पीडी रेोल्यूशन किया जा सकता है और तुम खुद सोचो कोई मान लो कि कोई है कोई केस को वो करना हैस्ट टैग
कोर्ट बनाई गई अब अगर मान लो ये चीज़ सही है ठीक है नहीं येस्ट ट्रैक कोर्ट से बनने से तो पहले का केस है ये तो कर ही नहीं
सकती है तो कोई लॉजिक बन रहा है इस बात कास्ट ट्रैग कोर्ट बना ही इसी ले गई कि कोई केस को रिज़ॉल्व करना है और हर केस
ऑलमोस्ट ट्रैक कोर्ट के बनने से पहले ही हुआ होगा तो पॉक्स का 2012 में हुआ था और ये जेंडर न्यूट्रल एक्ट है जो बात करता है
किसकी मतलब मतलब कि ऐसा नहीं कि सिर्फ गर्ल्स के खिलाफ सेक्सुअल ऑफेंस ये बॉयज के खिलाफ भी सेक्सुअल ऑफेंस को डील करता
है और जेंडर न्यूट्रल एक तरीके से और डेफिनेशन भी दिया हुआ है एंड पेनिट्रेटिव नॉन प्रिंटेटिव सेक्स दोनों से डील करता
है। ठीक है? आगे व्हिच ऑफ़ द फॉलोइंग स्टेटमेंट्स अबाउट अह सॉरी मोस्ट एक्यूरेटली रिफ्लेक्ट्स दी अह पॉलिसी रैशन
एंड इंप्लीमेंटेशन चैलेंजेस एसोसिएटेड विथ द आइडेंटिफिकेशन एंड डेवलपमेंट ऑफ़ पीवीटीजीस पर्टिकुलरली वनरेबल ट्राइबल
ग्रुप्स। कितने पीवीटीजीस हैं? सुबह ही बताए थे। क्यों? 75 अरे सर सुबह का भूला शाम को लौटा को
भूला थोड़ी ना कहते हैं बेटा भूला नहीं कहते हैं चप्पल रखी नीचे समझे कि नहीं 75 पीवीटीजीस हैं जो एसटी कम्युनिटी में भी
आप ये समझ लो कि और डाउन ट्रडन है तो उनको और एंपावरमेंट की जरूरत है दो स्कीम बताई थी ना बता पाए ना देखना फिर तुम सारा बी12
और डी डी3 पूरा निकाल दूंगा अभी तुम्हारा पीवीटीजीस आर आइडेंटिफाइड थ्रू पीरियडिक नेचुरल सेंसेस एंड देयर स्टेटस इज़
ऑटोमेटिकली रिवाइज्ड एव्री 10 इयर्स बाय द मिनिस्ट्री ऑफ़ ट्राइबल अफेयर्स। ओके? मोस्ट करेक्टली रिफ्लेक्ट द पॉलिसी रैशन
एंड इंप्लीमेंटेशन चैलेंजेस। देख रहे हो? दो चीजें हैं। पॉलिसी रैशन और चैलेंज क्या आ रहा है? चैलेंज।
ठीक है? जो उनके आइडेंटिफिकेशन में चैलेंज क्या आता है। ठीक है? [गहरी सांस लेने की आवाज़][अचानक ज़ोर से सांस लेने की आवाज़]
पीवीटीस क्लासिफिकेशन अप्लाई ओनली टू ट्राइब्स विद नो एक्सेस टू फॉरेस्ट लैंड एंड ऑल पीवीटीजीस हैव नाउ बीन सेटल्ड थ्रू
फॉर्मल लैंड टाइटल्स अंडर दिस। सारे पीवीटीज़। कोई पीवीटीजीस बचा ही नहीं है जिसको सेटल ना किया गया हो लैंड में। ऐसा
पॉसिबल है। पीवीटीजीस आर आइडेंटिफाइड बेस्ड ऑन करक्टरिस्टिक्स सच ऐज़ प्री एग्रीकल्चर लेवल ऑफ़ टेक्नोलॉजी,
स्टैग्नेटेंट और डिक्लाइनिंग पापुलेशन, लो लिटरेसी एंड इकोनमिक बैकवर्डनेस। हाउएवर यही नहीं। अभी और सुनिए। देयर इज़ नो
मैकेनिज़्म अंडर द कॉन्स्टिट्यूशन फॉर पीरियडिक रिव्यु और एडिशन टू न्यू पीवीटीजीस। कितना अच्छा लग रहा है। नहीं।
नेगेटिव कनोटेशन है। नेगेटिव कनोटेशन है। नो मैकेनिज़्म कोई है नहीं अंडर द कॉन्स्टिट्यूशन। लेकिन वही तो चैलेंज हो
सकता है। चैलेंज तो पूछा है तो वही तो चैलेंज हो सकता है। ऑल ट्राइब्स क्लासिफाइड आर एस पीबीटीजी हैव बीन जितनी
भी ट्राइब्स हैं जो पीवीटीस क्लासिफाई हुई हैं हैव बीन ग्रांटेड एसटी स्टेटस इन द रेस्पेक्टिव स्टेट एंड आर यूनिफॉर्मली
एलिजिबल फॉर द सेम सेंट्रल डेवलपमेंट विदाउट वेरिएशन। बड़ी यूनिफॉर्म तरीके से हर हर जगह बड़ी यूनिफॉर्म तरीके से सारी
जगह चीजों को हो रहा है बिना कोई वेरिएशन के साथ। और सारी ट्राइब्स को पीटी से क्लासिफाई कर दिया गया। तुम मुझे बताओ
क्या यह सही हो सकता है? नहीं हो सकता। तुम मुझे बताओ क्या यह नहीं लग रहा है सर्वगुण संपन्न? हैं? नहीं लग रहा है।
चैलेंज भी दिया हुआ है कि ये भाई तुम्हें वो अंदर से जो ग फीलिंग है ना आ जानी चाहिए। अभी तक नहीं आई है तो ग को चेक
करवाओ जाके तुम। तुम्हारे माइक्रोबायोम से कुछ तो प्रॉब्लम है माइक्रोबायोटा में। हम अगर अभी भी नहीं आ रही है तो। अगर अभी भी
मुझे एक्सप्लेन करना पड़ रहा है कि क्यों सही है ये। वैसे मैंने किया है लेकिन अगर मुझे अभी वन और थर्ड में भी एक्सप्लेन
करना पड़े दिक्कत है। मैं ये नहीं बोल रहा हूं कि वन को बड़े आसानी से किया जा सकता है। पीवीटीज आर आइडेंटिफाइड थ्रू पीरियडिक
नेशनल सेंसेस। ठीक है? एंड देयर स्टेटस इज़ ऑटोमेटिकली रिवाइज़ एव्री 10 इयर्स। अपने आप रिवाइज़ हो जाता है वो मिनिस्ट्री ऑफ़
टाइप। ये पूरा पॉलिसी रैशनल कॉमा लगा के लंबडी भी है। चैलेंज भी बता रहा है। क्यों नहीं मानूंगा मेथड को? ठीक है? 48 पे आओ।
इन व्हिच ऑफ़ द फॉलोइंग सरकमस्ट्ससेस कैन दी प्रेसिडेंट एफेक्टिवली एक्सरसाइज अ पॉकेट वीटो अंडर आर्टिकल 11 वन? तो
अनुच्छेद 111 में क्या है कि हमें पता है कि प्रेसिडेंट के पास जब कोई भी बिल जाता है तो उसके पास ये पावर होती है। या तो वो
एसेंट दे दे उसको सहमति दे दे तो वो बिल एक्ट बन जाएगा। या तो वो वीटो पावर का यूज़ कर ले। अब वीटो पावर तीन है। एब्सोल्यूट
वीटो, सस्पेंसिव वीटो और पॉकेट वीटो। एब्सोल्यूट का मतलब होता है कि वो मना कर दे। भाई मैं ना दे पाऊंगा इसको। ठीक है?
हटा लो इसको। मैं नहीं दूंगा इसको। सस्पेंसिव इटो रिटर्न कर देता है कि फिर से देखो इस बिल को और अगर ध्यान से सुनना
इसको फिर से देखो हाउस बी लाइक देख लिया अब इसको मैंडेटरी है एसेंड देना मैंडेटरी है यानी कि दिस मींस पार्लियामेंट कैन
ओवराइट दी सस्पेंसिव वीटो पावर ऑफ़ प्रेसिडेंट बाय पासिंग द बिल अगेन तो प्रेसिडेंट ने बोला इसको फिर से देखो चाहे
देखे चाहे ना देखे सेम पास कर दे उसको प्रेसिडेंट को देनी पड़ेगी यानी कि इस तरीके से ओवराइट किया जा सकता है लेकिन
रिमेंबर दिस थिंग। अभी चलो आगे बताऊंगा। ठीक है? ठीक है? तो, यह चीज़ है। पॉकेट वीटो। पॉकेट वीटो। ठीक है? अब, यह ध्यान
रखना है। पॉकेट वीटो का मतलब होता है कि इनडेफिनेट टाइम के लिए अपने पॉकेट में डाल लिया। मैंने आपको बताया था कि इंडियन
प्रेसिडेंट की पॉकेट डीप है एज़ कंपेयर टू यूएस प्रेसिडेंट। बिकॉज़ यूएस प्रेसिडेंट के पास टाइम लिमिट प्रिस्क्राइब है कि
तुम्हें इतने टाइम में रेस्पोंड करना ही है। लेकिन इंडियन प्रेसिडेंट के लिए ऐसा कोई टाइम लिमिट नहीं है कि कब तक। तो
पोस्टल अमेंडमेंट बिल आया था 1987 में। ज्ञानी जेल सिंह ने उसको पॉकेट कर लिया। ठीक है? तब से वो पॉकेट में ही पड़ा हुआ
है उनकी। ठीक है? तो ये चीज है आपको ध्यान रखनी है। अब जो सस्पेंसिव वीटो है ये मनी बिल के केस में नहीं है। धन विद्या के केस
में बिल्कुल नहीं है। और कोई भी वीटो इन तीनों में से कॉन्स्टिट्यूशनल अमेंडमेंट बिल के केस में इन तीनों में से कोई वीटो
नहीं है। सस्पेंसिव वीटो मनी बिल में नहीं है। और एब्सोल्यूट सस्पेंसी और पॉकेट किसी ये तीनों अमेंडमेंट बिल में नहीं है। यानी
कि अमेंडमेंट बिल में प्रेसिडेंट को एसेंट देना मैंडेटरी है। ये किस कॉन्स्टिट्यूशन अमेंडमेंट ने बोला था? तो अ मनी बिल
सर्टिफाइड बाय द स्पीकर किस में यूटो यूज़ कर सकता है? बिल्कुल कर सकता है। इसमें पहला आंसर होगा।
ठीक है? लेकिन आपके एसएससी ने क्या माना है? ये माना है। गलत क्यों हुआ? मैं बता देता हूं। ऑर्डिनरी बिल ओरिजनेटिंग इन
राज्यसभा दैट हैज़ लैप्स्ड ओइंग टू द रेोल्यूशन ऑफ़ लोकसभा। ठीक है? ओइंग टू द रेोल्यूशन ऑफ़ लोकसभा।
ठीक है? ओइंग टू द रेोल्यूशन ऑफ़ लोकसभा। पहली बात तो पहली बात तो फंडामेंटल गलती क्या है इस क्वेश्चन इस ऑप्शन में? कि
राज्यसभा में अगर कोई बिल चलो ठीक है मान लेते हैं सही है देखो एक तो केस होता है कि लोकसभा ने राज लोकसभा में जन्मा वो बिल
राज्यसभा के पास पहुंचा लोकसभा डिॉल्व हो गई बिल लैप्स कर जाता है लेकिन अगर तो राज्यसभा में उस वो बिल ओरिजिनेट हुआ और
राज्यसभा में ही पेंडिंग है तो बिल लैप्स नहीं होता है लेकिन क्योंकि ये बोल रहे हैं लैप्स हुआ है लोकसभा के डिोल्यूशन की
वजह से तो मैं मान लेता हूं कि लोकसभा में ओरिजिनेट हुआ था राज्यसभा पहुंच गया लैप्स हो गया भाई जब लैप्स ही हो गया तो काहे का
वीटो और काहे की एसेंट बिल तो मर गया ना। वो तो जिंदा ही नहीं है। ऑर्डिनरी बिल ओरिजिनेटिंग विधानसभा
दैट हैज़ लैप्ड ओन टू द रेोल्यूशन ऑफ़ लोकसभा। वो तो लैप्स हो गया। वो तो मर गया है। तो उसमें पॉकेट विटो कहां से यूज़ कर
लेगा भाई? प्रेसिडेंट। क्या लॉजिक क्या है इसका? कोई लॉजिक नहीं है। चौथा गलत है आपका। आंसर नहीं होगा। पहला आंसर होगा।
मनी बिल में सस्पेंसिव वीटो यूज़ नहीं हो सकता है। बाकी वीटो यूज़ हो सकते हैं। बाकी वीटो हो सकते हैं। ठीक है? सर्टिफाई तो
स्पीकर ही करता है। ठीक है? मनी बिल को सर्टिफाई स्पीकर ही करता है। और कौन करता है? के एस पुटस्वामी केस में जो आधार केस
है जिसमें राइट टू प्राइवेसी को फंडामेंटल राइट बोला गया था आर्टिकल 21 [गहरी सांस लेने की आवाज़] के तहत तो उसमें
उसमें सुप्रीम कोर्ट ने बोला था कि ये स्पीकर का जो डिसीजन है इट इज़ सब्जेक्ट टू जुडिशियल रिव्यू ऐसा नहीं कि जो जिस बिल
को मना है तुम मनी बिल डिक्लेअर कर दोगे। ठीक है? और ये 24 अमेंडमेंट बिल था 1971 का जिसने बोला था प्रेसिडेंट के लिए
कॉन्स्टिट्यूशनल अमेंडमेंट बिल पे एसेंट देना मैंडेटरी है। यह ध्यान रखना। ठीक है? और 26 अमेंडमेंट ने क्या किया था?
प्रवीप्स को अबॉलिश किया था। यह ध्यान रखना। बस ऐसे दिमाग में आया तो मैंने सोचा आपको बता दिया जाए। ठीक है? अगला है व्हिच
ऑफ़ द फॉलोइंग सॉरी कंस व्हिच हां व्हिच ऑफ़ द फॉलोइंग पावर्स ऑफ़ द सुप्रीम कोर्ट बेस्ट एग्ेंंपलीफाई इट्स रोल एज़ द
गार्डियन ऑफ़ द कॉन्स्टिट्यूशन? [गला साफ़ करने की आवाज़] तो गार्डियन ऑफ़ कॉन्स्टिट्यूशन के तौर पे
क्या बेस्ट इसका रोल दिखाता है? जरा बताओ। ठीक है? [गहरी सांस लेने की आवाज़] तो कल मैं वीडियो बना के डाल दूंगा और उसमें मैं
आपको ये सारे जो भी क्वेश्चंस में मतलब दिक्कत है चैलेंज करने वाले बता दूंगा। ठीक है? [नाक से की जाने वाली आवाज़] तो
पावर टू रिव्यू इट्स ओन जजमेंट एंड ऑर्डर्स अंडर आर्टिकल 137 पावर टू डिक्लेअर लॉज़ अन कॉन्स्टिट्यूशन एंड
स्ट्राइक देम डाउन थ्रू जुडिशियल रिव्य्यू। तो ये आंसर होगा ये है गार्डियन ऑफ़ कॉन्स्टिट्यूशन। है ना? कि वो सारे लॉज़
पे उसका उसका रिव्य्यू वो कर सकता है। जुडिशियल रिव्य्यू का पावर है। और ये गार्डियन ऑफ़ कॉन्स्टिट्यूशन इसलिए बोलते
हैं। 50थ क्वेश्चन पे आ चुके हैं हम लोग। करिए जरा। इन द कॉन्टेक्स्ट ऑफ इंडियास कमिटमेंट टू मल्टीलिंग्वलिज्म इन एजुकेशन
व्हिच ऑफ़ द फॉलोइंग स्टेटमेंट्स बेस्ट रिफ्लेक्ट्स दी कॉन्स्टिट्यूशनल मैंडेट एजुकेशनल पॉलिसी अप्रोच एंड इंप्लीमेंटेशन
चैलेंजेस ऑफ़ प्रमोटिंग मदर टंग बेस्ड इंस्ट्रक्शंस एट दी फाउंडेशनल लेवल पहली बात तो तुम्हें पता होना चाहिए कि पार्ट
नंबर 17 ऑफ़ फॉर द कॉन्स्टिट्यूशन आर्टिकल 343 से 351 डील विद दी लैंग्वेजज़। ओके? तो इन द कॉन्टेक्स्ट ऑफ़ द कमिटमेंट टू
मल्टीलिंग्वलिज़्म पॉज़ करके कर लीजिए आप क्वेश्चन। फिर मैं करवाता हूं। इन एजुकेशन व्हिच ऑफ़ द फॉलोइंग स्टेटमेंट बेस्ट
रिफ्लेक्ट दी [अचानक ज़ोर से सांस लेने की आवाज़] कॉन्स्टिट्यूशन मैंडेट? ढंग ढंग से पढ़ा
करो क्वेश्चन। ठीक है? क्वेश्चन क्या बोल रहा है? ठीक है? एजुकेशन पॉलिसी अप्रोच। ठीक है? क्योंकि गरीब की एक ये भी आदत
होती है। मैंने बताई थी निट्टो में आपको कि गरीब की एक ये भी आदत होती है। क्वेश्चन ढंग से नहीं बढ़ता है। तो डोंट बी
अ गरीब। ठीक है? एजुकेशन पॉलिसी अप्रोच एंड इंप्लीमेंटेशन चैलेंजेस ऑफ़ प्रमोटिंग मदर टंग। चैलेंज के बारे में बात कर रहे
हैं। द कॉन्स्टिट्यूशन ऑफ़ इंडिया मैंडेट्स कंपलसरी एजुकेशन ओनली इन हिंदी फॉर ऑल प्राइमरी लेवल स्टूडेंट्स एंड द नेशनल
एजुकेशन पॉलिसी सपोर्ट दिस बाय प्रमोटिंग हिंदी एज़ द सोल मीडियम ऑफ़ इंस्ट्रक्शन। तीन-तीन एक्सट्रीम की वर्ड दिख गए।
आर्टिकल 350 ए ऑफ़ द कॉन्स्टिट्यूशन इंपोज़ ऑन एन ऑब्लिगेशन ऑन एव्री स्टेट टू प्रोवाइड फैसिलिटीज़ फॉर इंस्ट्रक्शन इन द
मदर टंग एट द प्राइमरी स्टेट। बट दिस इज़ लिमिटेड ओनली टू शेड्यूल ट्राइब चिल्ड्रन। संविधान का अनुच्छेद 300 का हर राज्य को
बोलता है ए राज्य तुमको मदर टंग में शिक्षा देनी है प्राइमरी स्टेज में लेकिन सिर्फ सेल ट्राइब वालों को बाकियों को
नहीं देनी है। नेशनल एजुकेशन पॉलिसी 2020 एनकरेजेस मदर टंग और रीजनल लैंग्वेज एज़ द मीडिया ऑफ़ इंस्ट्रक्शन एटलीस्ट अंटिल
ग्रेड फाइव प्रेफरेबली टिल ग्रेड एट फॉर ऑल चिल्ड्रन एलाइनिंग विद आर्टिकल 350 ए थ्रू एक्चुअल इंप्लीमेंटेशन फसेस
लिंग्विस्टिक डायवर्सिटी एंड रिसोर्स कंस्ट्रेंट्स। ठीक लग रहा है यह तो आर्टिकल 29 ऑफ़ द कॉन्स्टिट्यूशन
प्रोवाइड्स फॉर द राइट टू कंजर्व वंस डिस्टिंक्ट लैंग्वेज बट डज़ नॉट रिकॉग्नाइज़ द यूज़ ऑफ़ एनी लैंग्वेज अदर दैन इंग्लिश इन
एजुकेशन इंस्टीटशंस। ऐसा नहीं है। आर्टिकल नंबर 29 बोलता है एनी सिटीजन ऑफ़ इंडिया एंड नॉट नेसेसरी माइनॉरिटीज़। एनी सेक्शन
ऑफ़ सिटीजन हु हैज़ डिस्टिंक्ट लैंग्वेज, कल्चर एंड रिलीजन हैज़ राइट टू प्रोटेक्ट। और आर्टिकल 30 क्या देता है? राइट।
आर्टिकल 30 माइनॉरिटी को राइट देता है कि वह अपने मतलब का वो एक एजुकेशनल इंस्टट्यूट एस्टैब्लिश कर सकते हैं और
उसको अपने हिसाब से एडमिनिस्टर कर सकते हैं। ठीक है? तो ये ऑप्शन नंबर थर्ड आंसर होगा। एक्सप्लेनेटरी है। कॉमा लगा के
लंबडी भी है और वो चैलेंज भी के बारे में बता रहा है और आप देख सकते हो। ठीक है? वो ठीक है? ये बैलेंस्ड है। बैलेंस कौन सा
है? लैंग्वेज ऑफ़ द मीडियम सेक्शन एटलीस्ट अंटिल ग्रेड फाइव। प्रेफरेबली टिल ग्रेड एट। तो एक्सट्रीम नहीं जा रहा है कि पांच
तक करना है। आठ तक इतना हो सकता है उतना। तो सारे प्रोज़ एंड कॉन्स सब कुछ लिखे हुए हैं। सारा सारे उसमें सारे जितने भी तरीके
से वो हो सकता है वो सब कुछ लिखा हुआ है। शायद आप समझ पा रहे होंगे मैं कैसे एक्सप्लेन करूं उसको। ठीक है? 51 पे आओ।
व्हिच ऑफ़ द फॉलोइंग रिफ्लेक्ट्स दी करेक्ट आखिरी के 10 क्वेश्चंस हैं। ठीक है? करेक्ट लीगल एडमिनिस्ट्रेटिव अथॉरिटी
ऑफ़ द इलेक्शन कमीशन रिगार्डिंग द प्रिपरेशन ऑफ़ इलेक्टरल रोल्स एंड द इंक्लूजन और एक्सक्लूजन ऑफ़ नेम्स। मतदाता
सूचियों की तैयारी और नामों को जोड़ने या हटाने के संबंध में इलेक्शन कमिश्नर की कानूनी और प्रशासनिक शक्तियों को कौन सा
कथन सही ढंग से परिभाषित करता है बताओ ऐसी चीजें साझा करनी चाहिए क्या? ठीक है? तो कौन सा रिफ्लेक्ट करता है? करेक्ट लीगल
एडमिनिस्ट्रेटिव अथॉरिटी ऑन द। ठीक है? तो द इलेक्शन कमीशन प्रिपेयर्स इलेक्ट्रोरल रोल्स इन कंसल्टेशन विद द
स्टेट गवर्नमेंट एंड इज़ बाउंड बाय द रिकमेंडेशन। इलेक्शन कमीशन इलेक्टरल रोल जो है स्टेट गवर्नमेंट से पूछे करता है और
उसकी रिकमेंडेशन मैंडेटरी यानी जो स्टेट बोलेगा उसी को रखेगा और जो हटा बोलेगा हटा दो हटा दो तो अमित शाह क्या करेंगे गुया
छलेंगे बैठ के नहीं अमित शाह क्या करेंगे गुया छलेंगे बैठ के द इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया कैन सुओ मोटो इंक्लूड नेम्स ऑफ़
एलिजिबल सिटीज़ंस इवन विदाउट एन एप्लीकेशन अपने आप जिसका मन आ रहा है उसको वो सुमोटो अपने आप से बिना अगर एप्लीकेशन भी नहीं
आया है कि हमें इंक्लूड कर दो वो बोल भी नहीं है कर दो लेकिन जबरदस्ती कर देगी इलेक्शन कमीशन। ठीक है? तू वोट देना नहीं
चाहता लेकिन तू देगा। ठीक है? द इलेक्शन कमीशन सुपरवाइज़ द प्रिपरेशन एंड रिवाइज़ ऑफ सुपर रिवीज़ ऑफ़ इलेक्टोरल रोल्स बट एक्चुअल
चेंजेस आर मेड थ्रू द इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर्स एंड सिटीज़ंस हैव द राइट टू अपील एक्सक्लूज़ंस। लग रहा है
बिल्कुल सही है। लंबडी भी है। ठीक है? एक्सप्लेनेटरी भी है। एक्सप्लेन कर रहा है बहुत ज़्यादा अच्छे से। द प्रेसिडेंट
डायरेक्टली मेंटेन द इलेक्ट्रोल रोल्स। प्रेसिडेंट ही इलेक्ट्रॉल रोल मेंटेन करता है। अच्छा
व्हिच ऑफ़ द फॉलोइंग बिल्स इज़ प्रेजेंटेड टू द प्रेसिडेंट कैन बी सब्जेक्टेड ओनली टू एन एब्सोल्यूट वीटो एंड नॉट टू
सस्पेंसिव वीटो। किस में एब्सोल्यूट वीटो लग सकता है लेकिन सस्पेंसिव वीटो नहीं लग सकता है। नॉट अ सस्पेंसी वीटो। तो मनी बिल
में नहीं लग सकता सस्पेंसिव वीटो। ठीक है? मनी बिल पास्ड बाय बोथ द हाउससेस। हमने पढ़ा मनी बिल में सस्पेंसिव नहीं लगता है।
और कोई भी वीटो नहीं लगता। है वो कॉन्सिट्यूशन अमेंडमेंट बिल होता है। ख़ लेकिन इसमें भी जो आपका एसएससी है उसने इस
ऑप्शन को माना है। शायद तो शायद तो टू दैट हां शायद इसी को माना या इसको माना है। इन दोनों में से किसी एक को माना है शायद
एसएससी ने। पता नहीं आई थिंक इसको माना है फोर्थ को। लेकिन आंसर इसका थर्ड होगा। तो ये भी गलत
है। चैलेंज करिए इसको। ठीक है? तो यहां पे मैं आपको ये बता रहा हूं कि अगर कोई स्टेट बिल को गवर्नर ने रिजर्व कर लिया अंडर
आर्टिकल नंबर 200 तो वो प्रेसिडेंट के पास जाता है। ठीक है? प्रेसिडेंट उस पर एसेंट दे सकता है या
वीटो यूज़ कर सकता है। उसके पास भी अगर वह मनी बिल है स्टेट का तो उस पर वह सस्पेंसिव वीटो यूज़ नहीं कर पाएगा। लेकिन
अगर तो मनी बिल नहीं है ऑर्डिनरी बिल है तो सस्पेंसिव वीटो यूज़ कर सकता है प्रेसिडेंट स्टेट बिल के केस में भी यानी
वो रिटर्न कर सकता है स्टेट लेजिस्लेचर को वो बिल बट स्टेट लेजिस्लेचर कैन नॉट ओवराइड इट। जैसे अभी हमने पीछे बताया था
यूनियन यानी पार्लियामेंट कैन ओवराइड इट बाय पासिंग द बिल अगेन बट दिस कांट बी डन बाय स्टेट लेजिस्लेचर। वो फिर से मना कर
सकता है और मैं नहीं दे रहा हूं। फिर से रिटन कर फिर से देखो इसको रिगार्डिंग द ग्राम न्यायालय एक्ट ऑफ़ 208 एंड द
फंक्शनिंग ऑफ़ ग्राम न्यायालयज़ विलेज कोर्ट्स व्हिच ऑफ़ द फॉलोइंग स्टेटमेंट इज़ करेक्ट? कौन सा इसमें से सही है? सब में
देख रहे हो ये लंबे चौड़े सब में निट्टो लग रही है। यही तो कारण है भाई। किसी के 42 आ रहे हैं, 42.5 आ रहे हैं, 43 आ रहे हैं,
41.5 आ रहे हैं। किसी ने सोची भी ना होगी आज से 1 साल पहले या फिर कुछ महीने पहले, 2 महीने, 3 महीने पहले स्टेनो में इतने
नंबर भी ला लाए जा सकते हैं। मुझे नहीं लगता कि इससे पहले लोगों के 40 से ऊपर इतने बल्क में आए होंगे। कितने बल्क में
मैं आपको दिखाऊंगा। ठीक है? दिखाऊंगा मैं। जिन लोगों ने भेजे हैं सिर्फ उन्हीं लोगों के काफी लोगों ने तो स्टूडेंट भेजते भी
नहीं हैं। काफियों ने भेजे हैं। तो मैं दिखाऊंगा आपको। ठीक है? कितनों के 40 से ऊपर आए हैं? 41.5, 42.5, 40 बहुत सारे
स्टूडेंट के हैं। ठीक है? बहुत ही रेयर होगा इससे पहले अगर आते हो और क्वेश्चन आप देख सकते हो लंबे चौड़े वही हैं जैसे
पिछली बार आए थे। लेकिन इस बार जो है पूरी तैयारी के साथ चाबी फिट करके भेजा था। मैं समझ गया था एडीटी जो है। ठीक है? कैसे
घुमा के पकड़ना है इसको। अब पकड़ में आ गई है। ठीक है? भर-भर के नंबर आ रहे हैं अभी। तो रिगार्डिंग द ग्राम न्यायालय एक्ट ऑफ
2008 एंड द फंक्शनिंग ऑफ़ ग्राम न्यायालय विलेज कोर्ट्स व्हिच ऑफ़ द फॉलोइंग स्टेटमेंट इज़ करेक्ट? ग्राम न्यायालय आर
परमानेंट कोर्ट इस्टैब्लिश्ड आर्टिकल 39 ए ऑफ़ द कॉन्स्टिट्यूशन हैविंग द सेम जुरिसडिक्शन एज़ द पावर ऑफ़ डिस्ट्रिक्ट
कोर्ट। मतलब सेम पावर है भाई। देख रहे हो ग्राम न्यायालय के पास सेम पावर जो डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के पास होती है। अच्छा
तुमको लगता है ग्राम न्यायालय जो है ग्राम में गांव में न्यायालय जो डिस्ट्रिक्ट कोर्ट है वो उतनी पावर होगी। तो
डिस्ट्रिक्ट कोर्ट पागल है। ग्राम न्यायालय में सब नहीं चले जाएंगे। गांव के सब वहां तो कोई जाएगी नहीं। मर्डर हुआ
ग्राम न्यायालय में चले जाओ। रेप वगैरह कुछ हुआ ग्राम न्यायालय में चले जाओ। ग्राम न्यायालय देखा क्या यह सब? द ग्राम
न्यायालय एक्ट मैंडेट्स दैट एव्री ग्राम न्यायालय शैल बी प्रसाइडेड ओवर बाय जुडिशियल ऑफिसर विद दी पावर ऑफ़ सिविल जज
एंड एम्स टू प्रोवाइड स्पीडी एंड कॉस्ट इफेक्टिव जस्टिस एट द ग्रास रूट लेवल। सही लग रहा है थोड़ा सा तो ये।
[गहरी सांस लेने की आवाज़] ग्राम न्यायालय कैन ट्राई ऑल क्रिमिनल एंड सिविल केसेस विदाउट एनी टेरिटोरियल और पेक्यूरी
जुरिसडिक्शन लिमिट। कोई लिमिट है ही नहीं। ग्राम न्यायालय की। गांव छोड़ो। जैसे मान लो गांव छोड़ो। पूरे डिस्ट्रिक्ट का
जुरिसडिक्शन है। कोई कोई है ही नहीं। पूरे भारत का है। सोचो गांव में एक बैठा है ग्राम न्यायालय। पूरे भारत सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट फिर बोलेंगे हम जॉब छोड़ दें। नहीं नहीं हम जॉब छोड़ देते हैं। तुम ही सब देखो। तो हर गांव में न्यायालय है।
तो उनका पूरे देख क्या क्या चल रहा है ये सब। तो देख रहे हो कितना वाहियात स्टेटमेंट है ये। द इंप्लीमेंटेशन ऑफ़
ग्राम न्यायालय हैज़ बीन यूनिवर्सली सक्सेसफुल अक्रॉस ऑल स्टेट। ये सक्सेसफुल रहा है यूनिवर्सल तरीके से। हर राज्य में
सक्सेसफुल रहा है विद नो सिग्निफिकेंट चैलेंजेस रिलेटेड। कोई चैलेंज आया ही नहीं है। लागू किया हर राज्य में एक तरीके से
लागू हुआ। सब बढ़िया चंगा सी चल रहा है। कोई चैलेंज आया ही नहीं। क्यों? कोई चैलेंज आया ही नहीं।
इनमें से सबसे बेटर कौन सा लग रहा है आपको? सेकंड। ठीक है?
क्लियर है इतनी चीज? तो यहां पर करेक्ट आंसर क्या होगा? करेक्ट आंसर ऑप्शन नंबर टू होगा क्योंकि यहां पर टू ही है जो इन
सब में से चारों में से सबसे बेटर है जो सबसे बेटर लग रहा है। बाकी तो सब गलत ही है। ठीक है? यहां पर करेक्ट ही पूछा था।
तो यहां पर सेकंड यहां पर करेक्ट हो जाएगा। ओके? ठीक है? चारों में से आपका सेकंड डी ही
सबसे सही है। शल प्रसिड ओवर जुडिशियल द ग्राम न्यायालय मेंडेड दैट एव्री ग्राम न्याय शैल प्रेस ओवर जुडिशियल ऑफिसर द
सिविल जज। ठीक है? आगे बढ़ते हैं। मेनली तो यहां पर मेरे हिसाब से सीनियर डिवीज़ नहीं होना
चाहिए। जूनियर डिवीज़न होना चाहिए। ठीक है? लेकिन अब वही मैंने आपको बताया कि यहां पर सबसे जो बेस्ट ऑप्शन है वो सेकंड ही लग
रहा है। लेकिन अगर चैलेंज करना चाहते हैं तो कर सकते हैं। वैसे यहां पर सीनियर की जगह जूनियर होना चाहिए। ठीक है? सीनियर की
जगह जूनियर होना चाहिए। तो चाहें तो इसको आप चैलेंज कर सकते हैं। ठीक है? एक बार और इसको वेरीफाई कर लेना
ग्राम न्यायालय एक्ट पढ़ थोड़ा सा देख के 2008 से। लेकिन मेरे हिसाब से किया जा सकता है। बिकॉज़ यहां पे जूनियर होना
चाहिए। बट फिर भी चारों में से ये बेस्ट है। व्हिच ऑफ द फॉलोइंग डीपीएसपी इज इकोनमिक इन नेचर? तो हमें पता है कि
डीपीएसपी को हम तीन पार्ट में डिवाइड करते हैं। एक तो होती है हमारी सोशलिस्टिक जो समाजवाद की बात कर रही होती हैं
सोशलिस्टिक कि भाई इक्वल पे होना चाहिए। है ना? वर्कर वर्कर्स की कंडीशंस सही वर्किंग कंडीशन सही होनी चाहिए। ठीक है?
प्रॉपर वेजेस मिलनी चाहिए। तो वो सारी चीजें यहां पर हैं। इक्वल पे फॉर इक्वल वर्क ये सब लिखे हुए हैं। देन है हमारी
गांधियन जो गांधियन फिलॉसफी पे बेस्ड है। गांधियन आइडियोलॉजी पे बेस्ड हैं। जैसे कि जो बात करते हैं क्या आर्टिकल 40 हो गया
पंचायत के फॉर्मेशन की कोऑपरेटिव सोसाइटी के फॉर्मेशन की या फिर एग्रीकल्चर को और एनिमल हस्बेंडरी को प्रमोट करने की है ना
स्लॉटर ऑफ़ काउस को रोकने की, इनटॉक्सिकेंट्स को प्रो करने की, दलितों के उत्थान की। तो वो सब गांधीयन है। लिबरल
इंटेलेक्चुअल क्या है? तो लिबरल इंटेलेक्चुअल है जैसे कि मोन्यूमेंट्स को प्रोटेक्ट करो। सेपरेशन ऑफ़ जुडिशरी फॉर्म
एग्जीक्यूटिव करो। इंटरनेशनल पीस एंड सिक्योरिटी को प्रमोट करो। ये सब लिबरल इंटेलेक्चुअल में आते हैं। तो इकोनॉमिक
पूछ रहा है तो इकोनमिक लिविंग वेज होगा। भत्ता भत्ता इज़ इकोनमी से एसोसिएटेड है आपका। ठीक है? सिंपल है। ठीक है? 48 ए
प्रोटेक्शन ऑफ़ एनवायरमेंट की बात करता है। सारा डीपीएसपीआर मैंने डिटेल में डील करवा रखा है वहां पर। तो आप रिकॉल कर सकते हैं।
ठीक है? मैं डीप में जाऊंगा तो फिर बहुत ही डीप हो जाएगा वो। ठीक है? कौन सी डीपीएसपी को 4 सेकंड अमेंडमेंट से चार
डीपीएसपी कौन सी ऐड करी गई हैं। पूरी मैंने स्टोरी बता के आपको याद करवा रखी है डीपीएसपी। ठीक है? 55 व्हिच ऑफ द फॉलोइंग
प्रैक्टिससेस इज़ स्पेसिफिकली प्रोहिबिटेड बाय आर्टिकल 23 तो चाइल्ड लेबर इन हज़ार्डस इंडस्ट्रीज ये आर्टिकल 24 प्रोहिबिट करता
है कि जो बाल मजदूरी है वो नहीं करवाई जा सकती है। तो जो 14 साल तक के बच्चे हैं 14 साल तक के बच्चे हैं उनसे हज़ार्डस वर्क
नहीं करवाया जा सकता है। नॉन हज़ार्डस करवाया जा सकता है और वो भी नॉन स्कूल आवर्स में। नॉन स्कूल में करवाया जा सकता
है। 23 बेगारी और ह्यूमन ट्रैफिकिंग की बात करता है। बेगारी का मतलब होता है किसी से जबरन मजदूरी करवाना, बंधुआ मजदूरी
करवाना, मजदूरी करवाना, पैसे ना देना या मजदूरी करवा के उतने पैसे ना देना जितने उसको मिलने चाहिए। व्हिच एक्ट मार्क द
बिगनिंग ऑफ़ इंडियन [गहरी सांस लेने की आवाज़][अचानक ज़ोर से सांस लेने की आवाज़] पार्टिसिपेशन इन द हाईएस्ट एग्जीक्यूटिव
काउंसिल्स ऑफ़ द वॉइसरॉय एंड प्रोविंशियल गवर्नर्स फॉर दी फर्स्ट टाइम इन ब्रिटिश इंडिया। पहली बार एक तरीके से इंडियन
पार्टिसिपेशन हुआ इन द एग्जीक्यूटिव काउंसिल ऑफ़ द वॉइसरॉय। तो गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट ऑफ 199 को हम किस नाम से
जानते हैं? तो मॉन्टग्यू किलफोर्ड रिफॉर्म्स के नाम से किस से जानते हैं। ठीक है? इसने क्या किया था? इसने आपका
डार्की को इंट्रोड्यूस किया था। कहां पर इंट्रोड्यूस किया था? तो जो प्रोवेंसेस है वहां पर इंट्रोड्यूस किया था। कल भी मैंने
आपको बताया था जहां पर प्रोविंशियल सब्जेक्ट्स को फर्दर दो पार्ट में डिवाइड किया गया था। रिजर्व और ट्रांसफर्ड।
रिजर्व वर रिजर्व फॉर दी गवर्नर जनरल जो अपनेिस्टर्स के थ्रू वो करेगा। ठीक है? जो एग्जीक्यूटिव काउंसिल है उसकी और ट्रांसफर
सब्जेक्ट्स में जो लेस इंपॉर्टेंट सब्जेक्ट हैं जैसे एजुकेशन, हेल्थ, एग्रीकल्चर वो सब पढ़े हुए थे जो कि गवर्नर
देखेगा थ्रू जो इंडियनर्स हैं उनके थ्रू और इसके लिए वो आंसरेबल होगा बट इनके लिए आंसरेबल नहीं होगा हाउस को वो। ठीक है? तो
ये चीजें इसमें लिखी हुई थी। ठीक है? अब ठीक है? तो ये चीज़ 199 तो नहीं होगा। और इसने क्या किया था? 199 वाले ने बायकमल
लेजिस्लेचर इंट्रोड्यूस किया था। द्विसदन विधानमंडल सेंटर में इंट्रोड्यूस किया था ये। और क्या किया था? सेपरेट इलेक्टोरेट
को इंट्रोड्यूस नहीं किया था। वो तो 1909 वाला जो इंडियन काउंसिल्स एक्ट है 1909 का उसने इंट्रोड्यूस किया था सेपरेट
इलेक्टोरेट फॉर द मुस्लिम्स। इसने उस सेपरेट इलेक्टेट को पृथक निर्वाचन को और एक्सटेंड किया था। ठीक है? और बढ़ाया था
एंग्लो इंडियंस क्रिश्चियंस को दिया था। ठीक है? ये क्या है ये? 1892 ये ध्यान रखना। बजट में डिस्कशन की पावर दी गई थी
इससे। ठीक है? बजट में डिस्कशन की पावर इसी एक्ट से दी गई थी। 1861 इसने क्या किया था? इसने पोर्टफोलियो सिस्टम
इंट्रोड्यूस किया था। कल भी मैंने आपको बताया था जैसे आप पढ़ते हैं ना डिफेंस मिनिस्ट्री इनके हाथ में रोड ट्रांसपोर्ट
इनके हाथ में। इसी तरीके से इसको पोर्टफोलियो बोलते हैं। ठीक है? देन इसमें था कि जो ऑर्डिनेंस अ सॉरी ऑर्डिनेंस बोलो
और रेजिडुअरी जो पावर है जैसे आज रेजिडुअरी पावर किसके पास है? पार्लियामेंट के पास। तो रेिडुअरी पावर जो
है यह वॉइसरॉय को दी गई थी रेजिडुअरी पावर्स। ठीक है? वॉइसरॉय को। और क्या पावर? और डिसेंट्रलाइजेशन शुरू किया था।
डीसेंट्रलाइजेशन मैंने आपको बताया था डीसेंट्रलाइजेशन ये क्या होता है? तो 1773 के रेगुलेटिंग
एक्ट ने गवर्नर ऑफ़ बंगाल को ये गवर्नर ऑफ़ बंगाल ये बॉम्बे और ये मद्रास है। गवर्नर ऑफ़ बंगाल को गवर्नर जनरल ऑफ़ बंगाल बना
दिया था। 1833 वाले ने गवर्नर जनरल बंगाल को गवर्नर जनरल ऑफ इंडिया बना दिया था। यानी कि सेंट्रलाइजेशन ऑफ़ पावर हो रहा था।
बंगाल वाले को बहुत भयंकर पावर दी जा रही थी। ठीक है? तो इसका डिसेंट्रलाइज़ेशन यानी कि फिर से इनकी पावर्स रिस्टोर करी गई
बॉम्बे और मद्रास वालों की। क्वेश्चन यहां पूछ रहा है कि व्हिच एक्ट मार्क्ड द बिगिनिंग ऑफ इंडियन पार्टिसिपेशन इन द
हाईएस्ट एग्जीक्यूटिव काउंसिल ऑफ द वॉइस तो वॉइस के एग्जीक्यूटिव काउंसिल में जो 1909 का इंडियन काउंसिल एक्ट था उससे उससे
क्या है एक इंडियन को अलऊ किया गया था वॉइस के एग्जीक्यूटिव काउंसिल में और उनका क्या नाम था सत्येंद्र प्रसाद सिन्हा था
उनका नाम ठीक है तो आंसर तो है ही नहीं यहां पे। 1861 वाले ने इंडियंस को एसोसिएट किया था।
इट एसोसिएटेड इंडियंस विद द लॉ मेकिंग पावर। ठीक है? और विद द
लेजिसलेटिव पावर। ठीक है? विद द लॉ मेकिंग या फिर लेजिसलेटिव जो प्रोसेस है उसमें इंटीग्रेट किया था इंडियंस को एसोसिएट
किया था इंडियंस को। ठीक है? फॉर द फर्स्ट टाइम। ठीक है? लेकिन एग्जीक्यूटिव काउंसिल में नहीं किया था। एग्जीक्यूटिव काउंसिल
में तो 1909 ये भी क्वेश्चन गलत है सर अगर तो यही आई थिंक ऑप्शन होंगे। कोई एरर तो नहीं होगा इसमें। तो आई थिंक चौथा
क्वेश्चन हमें मिल रहा है पिटी में जो गलत है। ठीक है? मतलब इसमें चारों में से तो दूसरा सही है लेकिन उसमें भी वो सीनियर
जूनियर वाला है। और ये 56 वाले में भी दिक्कत है। ठीक है? 1909 वाला होगा इसमें। 57 में आ जाओ। व्हिच ऑफ़ द फॉलोइंग बेस्ट
कैप्चर्स द कॉन्स्टिट्यूशनल डिबेट एंड जुडिशियल स्टंस ऑन द इंप्लीमेंटेशन ऑफ यूनिफॉर्म सिविल कोड
[गहरी सांस लेने की आवाज़][अचानक ज़ोर से सांस लेने की आवाज़] व्हिच बेस्ट कैप्चरर्स द कॉन्स्टिट्यूशनल डिबेट एंड जुडिशियल स्टांस ऑन द
इंप्लीमेंटेशन ऑफ़ यूसीसी इन इंडिया। आर्टिकल 44 ऑफ़ डीपीएसपी मैंडेट्स द इमीडिएट एनफोर्समेंट ऑफ़ यूनिफॉर्म सिविल
कोर्ट। यह मैंडेट करता है भाई सिंपल समझो। जो डीपीएसपी है वो स्टेट को दिए गए डायरेक्शंस हैं कि स्टेट तुम ऐसा-सा करो
मैंडेटरी मतलब ऐसा कुछ नहीं है। इनफोर्सिएबल नहीं है। इनफोर्सिएबल होता तो मैंडेटरी होता है। डीपीएसपी और फंडामेंटल
ड्यूट दोनों नॉन जस्टिसिएबल और नॉन अनइनफोर्सिएबल है। मेकिंग इट लीगली बाइंडिंग। ठीक है? मेकिंग इट लीगली
बाइंडिंग ऑन ऑल स्टेट्स एंड सिटीज़ंस विदाउट एक्सेप्शन। लीगली बाइंडिंग है, मैंडेटरी है। कोई एक्सेप्शन नहीं है। बहुत
एक्सट्रीम है भाई ये तो। सर बोलो गमपन है ये तो। ठीक है? अब यहां पर देखो नॉन जस्टिसिएबल तो हैं दोनों बट
इनफोर्सिएबिलिटी को लेके एक थोड़ा सा वो क्लॉज़ है। मैं जानबूझ के उसको बोल मतलब सिंपल नॉन इनफोर्सिएबल बोल देता हूं। ठीक
है? मैं जानबूझ के डीप में नहीं घुसता हूं लेकिन थोड़ा सा बता देता हूं कि जैसे जो हमारी लॉज़ के थ्रू इनको इनफोर्सिएबल
करवाया जा सकता है। जैसे फंडामेंटल ड्यूटीज़ वगैरह हैं। खैर चलो उसको भी पॉज़ करते हैं। आगे बढ़ते हैं। द सुप्रीम कोर्ट
इन शाहब बानो एंड डेनियल लतीफी केस रूल दैट दैट अ यूनिफॉर्म सिविल कोर्ट ऑलरेडी एकज़िस्ट इन इंडिया मस्ट बी स्ट्रिक्टली
फॉललोड इन ऑल पर्सनल लॉ मैटर्स। ये एकिस्ट कर रहा है। तुमको पता नहीं लेकिन कर रहा है और इसको स्ट्रिक्टली फॉलो करना है और
सारे पर्सनल लॉ मैटर्स में एक्सट्रीम है। आर्टिकल 44 इन द डीपीएसपी अर्जस द स्टेट टू कंसीडर इनक्टिंग अ यूसीसी। ठीक है? ये
स्टेट को बोलता है कि प्लीज प्लीज बोलो हां जोड़ो कर लो। बट इट इज़ नॉट एनफोर्सिएबल बाय कोर्ट्स। इंप्लीमेंट इंप्लीमेंटेशन
रिक्वायर्स अ पार्लियामेंट्री लॉ बैलेंसिंग सेकुलिज़्म। कितना अच्छा है। सीधे जयमाल डाल दो इसमें। कॉन्स्टिट्यूशन
प्रोहिबिट्स द इनक्टमेंट ऑफ़ यूसीसी टू प्रोटेक्ट रिलीजियस माइनॉरिटीज़ अंडर और यूसीसी जो है आर्टिकल 44 किसके साथ टसल
में आता है? रिलीजियस फ्रीडम के साथ। यूसीसी इस सब में सिमिलरिटी लाना चाहता है कि चाहे किसी भी धर्म से हो सबके लिए सेम
चीज है। तो फिर ये जो जॉब राइट टू रिलीजियस फ्रीडम है तो ये तो फिर रहा ही नहीं है। जो आर्टिकल 25 में लिखा है कि हर
कोई अपने कस्टम्स को फॉलो कर सकता है। तो तो फिर कुछ रहा ही नहीं। अगर ऐसा है तो 45 अमेंडमेंट ने क्या किया था? यह आपसे पूछा
है। थर्ड लास्ट क्वेश्चन है। बताइए बताइए जल्दी से। [गहरी सांस लेने की आवाज़]
[गहरी सांस लेने की आवाज़] कर लिया तो एलिमिनेट करना शुरू करते हैं। तो मेकिंग एजुकेशन एंड जस्टिसबल राइट फॉर
ऑल चिल्ड्रन। तो फंडामेंटल राइट कब बना था ये? आर्टिकल 21 ए कब ऐड हुआ था? 86 अमेंडमेंट ऑफ़ 2002 से ऐड हुआ था। तो, यह
तो नहीं हो सकता है। गॉन। इट अबॉलिश द पावर ऑफ़ प्रेसिडेंट टू प्रोमोलगेट ऑर्डिनेंसेस ड्यूरिंग द रेसेस
ऑफ़ पार्लियामेंट। गॉन। क्योंकि प्रेसिडेंट ऑफ़ जो प्रेसिडेंट है, ऑर्डिनेंस वो रेसेस ऑफ़ पार्लियामेंट में ही प्रोमोलगेट करता
है। ठीक है? और यह पावर है भी प्रेसिडेंट के पास। कहीं नहीं गई है ये। ठीक है? रेसेस क्या होता है? जब हाउस सेशन में ना
हो। एक हाउस या दोनों हाउस। दोनों में से कोई अगर एक हाउस भी नहीं है। दोनों हाउस तो कर ही सकता है। एक भी नहीं है तो भी
प्रेसिडेंट आर्टिकल नंबर 123 का यूज करके ऑर्डिनेंस ला सकता है। ठीक है? और जहां-जहां यूनियन लॉ बना सकता है जिन-जिन
सब्जेक्ट्स पे वहां वहां प्रेसिडेंट ऑर्डिनेंस ला सकता है। गवर्नर के पास यही सेम पावर किस आर्टिकल के तहत है? जरा
बताइए। लोकसभा स्टेट लेजिसलेटिव असेंबली का जो टेन्योर है पांच से छ साल किया था। यह
किया था 42 अमेंडमेंट ने। ठीक है? है जिसको 44 अमेंडमेंट ने बाद में ठीक कर दिया था। फिर से 5 साल कर दिया था।
ठीक है? एक्सटेंड किया जा सकता है। लेजिसलेटिव असेंबली और लोकसभा का जो टेन्योर है एक साल के लिए एक साल के लिए
किया जा सकता है। तब कब? जब देश में राष्ट्रीय आपातकाल लगा हो। इनडेफिनेट पीरियड के लिए किया जा सकता है। लेकिन अगर
देश में राष्ट्रीय आपातकाल लगा हो तो और आपातकाल खत्म तो विद इन सिक्स मंथ्स आपको चुनाव करवाने हैं। बच गया यह खत्म। बच गया
यह आपका खत्म। आपको पता होना चाहिए कि एससी एसटी का जो रिजर्वेशन है, ठीक है? वो एक्सटेंड किया गया। और एंग्लो इंडियन का
रिजर्वेशन 10 साल के लिए एक्सटेंड किया गया। लेकिन अब यह खत्म हो चुका है। आर्टिकल
नंबर 330 में लोकसभा और आर्टिकल 332 में विधानसभा में एससी एसटी का रिजर्वेशन दिया हुआ है।
आर्टिकल नंबर 331 और आर्टिकल नंबर 333 में एंग्लो इंडियन का नॉमिनेशन दिया हुआ था कि प्रेसिडेंट दो एंग्लो इंडियन को लोकसभा
में नॉमिनेट कर सकता है और गवर्नर एक एंग्लो इंडियन को लेजिसलेटिव असेंबली में नॉमिनेट कर सकता है। इन दोनों को 104
कॉन्स्टिट्यूशन अमेंडमेंट एक्ट से क्या किया गया है? हटा दिया गया है। यानी कि एंग्लो इंडियंस का नॉमिनेशन इज गॉन। और यह
अगले 10 साल के लिए और एक्सटेंड कर दिया गया 104 अमेंडमेंट एक्ट ऑफ़ 2019। सिंपल। ठीक है? तो तब बढ़ा होगा ये 10 साल
के लिए एससी एसटी का रिजर्वेशन और एंग्लो इंडियन का बढ़ता चला आ रहा था। 10 10 साल 104 बोला बस नो 10 बस। ठीक है? तो ये 42
अमेंडमेंट से हुआ था। ये 86 थे। ये अभी हुआ ही नहीं है किसी भी अमेंडमेंट से। ठीक है? तो गया हमारा। सेकंड लास्ट क्वेश्चन
है रिगार्डिंग फिसल फेडरलिज्म इन इंडिया व्हिच ऑफ़ द फॉलोइंग स्टेटमेंट करेक्टली एक्सप्लेन द कॉन्स्टिट्यूशन फ्रेमवर्क एंड
प्रैक्टिकल चैलेंजज़ रिलेटेड टू द फाइनेंसियल रिलेशंस बिटवीन यूनियन एंड स्टेट? सिंपल है बताइए।
[गला साफ़ करने की आवाज़] कर लिया सभी ने? चलो [अचानक ज़ोर से सांस लेने की आवाज़]
[गहरी सांस लेने की आवाज़] मेरा जिम ओनर वाइस मेयर है। बन गए हैं जोधपुर के। अच्छा तो फिस्कल फेडरलिज्म का मतलब क्या होता
है? फिस्कल का मतलब होता है पैसा। फेडरलिज्म का मतलब होता है पावर डिस्ट्रीब्यूशन बिटवीन दी सेंटर एंड
स्टेट। तो कौन सा करेक्टली एक्सप्लेन कर रहा है? कॉन्स्टिट्यूशनल फ्रेमवर्क एंड पॉलिटिकल चैलेंजेस को। ठीक है? रिलेटेड टू
द फाइनेंसियल रिलेशंस बिटवीन क्वेश्चन ढंग से पढ़ना है। गरीब की क्या आदत होती है? क्वेश्चन ढंग से नहीं पढ़ता है। लेकिन
तुम्हें गरीब नहीं बनना है। फाइनेंस कमीशन रिकमेंडेशंस आर बाइंडिंग ऑन द यूनियन। तो बाइंडिंग नहीं होती कोई भी चीज़ फ़ाइनेंस
कमीशन के द्वारा बिलकुल बाइंडिंग नहीं होती है। आर्टिकल 280 मैंडेट्स द अपॉइंटमेंट ऑफ़ फ़ाइनेंस कमीशन एव्री फाइव
इयर्स टु रिकमेंड द डिस्ट्रीब्यूशन ऑफ़ टैक्स रेवेन्यूज़ बिटवीन द यूनियन स्टेट्स बट इट्स रेकमेंडेशंस आर एडवाइज़री और नॉट
बाइंडिंग। ये तो सही लग रहा है। अंडर जीएसटी रिजीम द स्टेट्स हैव कंप्लीटली सीडेड देयर टैक्सेशन पावर और टू द यूनियन।
स्टेट्स ने पूरी ले जो है टैक्सेशन पावर यूनियन को दे दी है। बिल्कुल नहीं दी। आर्टिकल 246 ए को रिकॉल करो। स्टेट
इंट्रास्ट ट्रेड को इंट्रास्ट नॉट इंटर इंटरस्टेट ट्रेड को लेके यूनियन ही लॉ बना सकता है। इंटरस्टेट ट्रेड को लेकर बिल्कुल
लॉ बना सकता है। ठीक है? तो जीएसटी को लेके बिल्कुल लॉ बनाने की पावर है किसके पास?
जो आपका अ क्या बोलते हैं? स्टेट है। ऐसा नहीं कि उसने पूरी पावर अपनी दे दी है। ठीक है? अपनी उसने पूरी पावर दे दी है।
ऐसा नहीं है। ठीक है? कॉन्स्टिट्यूशन ग्रांट्स इक्वल फाइनेंसियल ऑटोनोमी टू ऑल स्टेट्स इरिस्पेक्ट रेवेन्यू जनरेटिंग
कैपेसिटीज़ और डेवलपमेंट लेवल्स इंश्योरिंग यूनिफॉर्म फिसिकल फेडरिलिज्म। ऐसा नहीं है। इक्वल फाइनेंसियल ऑटोनोमी नहीं है।
जैसे फॉर एग्जांपल आर्टिकल नंबर आर्टिकल नंबर 293 में लिखा हुआ है स्टेट्स की इसके बारे में। क्या स्टेट बोरो स्टेट बोरो कर
सकते हैं लेकिन अंदर बोरो कर सकते हैं घर में यानी कि देश के अंदर बोरो कर सकते हैं। बाहर अगर बोरो करना है तो बिना सेंटर
से पूछे बोरो नहीं कर सकते और अगर अंदर भी बोरो करना है और अगर दे ओ डे टू दी सेंटर तो बिना सेंटर से पूछे अंदर भी बोरो नहीं
कर सकते अगर कोई उधारी उनकी बाकी है सेंटर को तो अगर उधारी बाकी है तो अंदर भी बिना सेंटर से पूछे बोरो नहीं कर सकते और बाहर
तो सेंटर से पूछना ही पड़ेगा ठीक है तो ऐसा नहीं कि सबके पास इक्वल वो है और इक्वल रेवेन्यू जनरेटिंग कैपेसिटी नहीं
हमें पता है कि हॉरिजॉन्टल जो डेवोल्यूशन है टैक्स का वो 40% है कि अगर ₹100 मिल रहा है सेंटर को तो 41 स्टेट को देना है।
फिर हॉरिजॉन्टल भी डिस्ट्रीब्यूशन होता है। यानी कि जो 28 राज्य और आठ केंद्र शासित प्रदेश उनके बीच में कैसे बंटेगा?
तो वो काफी सारे फैक्टर्स होते हैं। उनको वो करके फाइनेंस कमीशन की रिकमेंडेशन आती है और इसके बेसिस पे बांटा जाता है। तो
ऑप्शन नंबर सेकंड यहां पर करेक्टली एक्सप्लेन कर रहा है। थर्ड में भी अगर आप देखेंगे तो वो चीज़ नहीं है। ठीक है? एंड द
लास्ट क्वेश्चन इज़ दिस 44 अमेंडमेंट इज़ ऑफ़ेन सीन ऐज़ अ करेक्टिव अह टू द एक्सेस ऑफ़ द इमरजेंसी पीरियड। व्हिच ऑफ़ द फॉलोइंग
बेस्ट डिफ्लेक्ट्स दी कोर कॉन्स्टिट्यूशनल अह सेफगार्ड रिइंट्रोड्यूस्ड और स्ट्रेंथन बाय दिस अमेंडमेंट? किस चीज़ को स्ट्रेंथन
किया गया है? तो इसने राइट टू प्रॉपर्टी को फिर से फंडामेंटल राइट बना दिया। राइट टू प्रॉपर्टी तो हटाई गई थी एज अ
फंडामेंटल राइट। ठीक है? तो ये तो बिल्कुल नहीं होगा। ठीक है? इट ने सब फंडामेंटल राइट को सस्पेंड कर दिया। इसको यूनिटल
पावर दे दी। एक्सट्रीम सारे कि वो एक्सट्रीम स्टेटमेंट हैं कि पार्लियामेंट को एक तरफ़ा पावर दे दी प्राइम मिनिस्टर
को। सॉरी इमरजेंसी के टाइम पे। जबकि हमें पता है कि 44 अमेंडमेंट ने 42 अमेंडमेंट के द्वारा करी गई गलतियां बोल लो या फिर
जो भी चेंजेस हैं उनको सही करने का काम किया था। जैसे कि 25 जून 1975 को इंदिरा गांधी ने आपातकाल लगा दिया था देश में।
क्या हवाला देते हुए? इंटरनल डिस्टरबेंस यानी आंतरिक जो है थोड़ा सा डिस्टरबेंस चल रहा है। 44 अमेंडमेंट जैसे ही हुआ है
क्योंकि सरकार बदल गई थी। 1978 में सरकार बदल गई थी। चुनाव हुए थे और जनता पार्टी आ गई तो जनता पार्टी ने सारे चेंजेस किए
क्योंकि उनके काफी सारे पॉलिटिशियंस को इमरजेंसी के टाइम पे जेल भेजा गया। तो पहले तो मैंने आपको बताया वो 2 महीने का
टाइम पीरियड घटा के 1 महीने किया कि विद इन वन मंथ पार्लियामेंट से अप्रूवल लेना होगा थ्रू स्पेशल मेजॉरिटी 2 महीने नहीं
इंटरनल डिस्टरबेंस शब्द को हटा दिया और इसको रिप्लेस कर दिया कि आर्म रेवेलियंस से यानी इंटरनल डिस्टरबेंस नहीं आर्म
रेवेलियन ग्राउंड में लगाई जा सकती है इमरजेंसी और और बोल दिया कि जो इंदिरा गांधी ने बिना
अपने कैबिनेट से पूछ के फकरुद्दीन अली अहमद को बोल दिया था राम इमरजेंसी लगाने के लिए। तो अब ऐसा नहीं किया जा सकता है।
बिना कैबिनेट यहां तो काउंसिल ऑफ मिनिस्टर इन्होंने लिख दिया है। लेकिन अगर हम देखें आर्टिकल 352 में कैबिनेट वर्ड को जोड़ा था
44 अमेंडमेंट ने और उसको डिफाइन भी किया था। तो बिना कैबिनेट से पूछे जो प्राइम मिनिस्टर प्रेसिडेंट को फंड इमरजेंसी
लगाने नहीं बोल सकता है। तो कैबिनेट वर्ड 44 अमेंडमेंट से आर्टिकल 352 में इंसर्ट किया गया था। ये आप ध्यान रखिएगा। ठीक है?
तो 44 अमेंडमेंट ने बहुत सारे करेक्शंस किए थे। तो इमरजेंसी तीन ग्राउंड में लगाई जा सकती है। वॉर, एक्सटर्नल अग्रेशन और
आर्म रिबिलियन। पहले हुआ करता था वो। ठीक है? सस्पेंशन ऑफ़ फंडामेंटल राइट की अगर बात करेंगे ड्यूरिंग इमरजेंसी तो कौन से
आर्टिकल है? सस्पेंशन ऑफ़ फंडामेंटल राइट से डील करते हैं तो दे आर आर्टिकल 358 और आर्टिकल नंबर 359। अगर आर्टिकल नंबर 19
क्लॉज़ वन में जो छह राइट्स प्रोवाइडेड हैं अगर उनको सस्पेंड करना है तो ये 358 का यूज़ होता है। इसके अलावा अगर किसी और राइट
को सस्पेंड करना है अदर दैन व्हिच टू राइट्स जिनको कभी सस्पेंड नहीं किया जा सकता है तो इसका यूज़ होता है। राइट टू मूव
द कोर्ट सस्पेंड होता है। प्रेसिडेंट अपने ऑर्डर में जोजो राइट्स लिखेगा वो उनका राइट टू मूव कोर्ट सस्पेंड हो जाएगा। बट
आर्टिकल 20 और 21 यह कभी सस्पेंड नहीं हो सकते। चाहे इमरजेंसी किसी ग्राउंड में लगी हो। और यह भी सस्पेंड नहीं हो सकता अगर 19
वाला अगर टर्म डेबिलिन के ग्राउंड में इमरजेंसी लगी हो तो आज तक तीन बार लगी 1962 में लगी है
चाइना के साथ वॉर में 1971 में पाकिस्तान के साथ और 1975 में कोई वॉर नहीं हुई थी इंटरनल डिस्टरबेंसी ग्राउंड में लगाई गई
थी ठीक है जिसको काला दिवस के रूप में सेलिब्रेट किया था ब्लैक डे सॉरी संविधान हत्या दिवस के रूप में बीजेपी ने बोला था
इसको हम सेलिब्रेट करेंगे ठीक है या फिर ऑब्जर्व करेंगे रादर देन सेलिब्रेट [गहरी सांस लेने की आवाज़] 24 को एक बार
चेक करना है ओके रुको [हंसी] अच्छा आंसर नहीं मार्क किया क्या इसमें बी
होगा कल बता दिया था ना ठीक और कुछ चलो भाई थैंक यू बाकी आपका ये टॉपर्स बैच है स्टार्टिंग फॉर द नेक्स्ट
एग्जाम साइकिल क्लासेस आर इट इज़ स्टार्टिंग फ्रॉम 28थ ऑफ़ सेप्टेंबर यानी कल परसों से परसों से स्टार्ट हो रही
ठीक है? मेरी क्लास बस 5 तारीख से स्टार्ट होगी। 5 अक्टूबर से बाकी सब लोगों की 28 सितंबर से स्टार्ट हो जाएंगी। एंड अ एंड
व्हाट एंड व्हाट एंड व्हाट एंड व्हाट एंड व्हाट? एंड व्हाट? कल सुबह कल सुबह 9:30 यहां पे पहुंच जाना। तुम इकोनॉमिक्स की
क्लास सिर्फ तुम्हारे लिए मैंने रखी है। ठीक है? और शाम को इसी टाइम पे होगी साइंस की क्लास। फिजिक्स, केमिस्ट्री, बायो बहुत
ज्यादा टफ क्वेश्चन। मतलब कुछ-कुछ हैं अच्छे क्वेश्चंस करने लायक। बाकी तो ऐसा कुछ नहीं है। और बाकी अ दोपहर में एक
वीडियो डालूंगा 33 क्वेश्चंस जो स्पेस और बायोटेक्नोलॉजी के हैं। स्पेस वाले तो आप कर लेंगे लेकिन बायोटेक्नोलॉजी वाले मुझे
आपको करवाने हैं। तो अलग से वो मैं रिकॉर्डेड वीडियो नहीं होगा तो डाल दूंगा। ठीक है? चलो बैच ले लो गाइज़। यस बैच जो है
48 वाला चेक करना। अच्छा एक साथ बताओ जल्दी-जल्दी। है ना? हम बार-बार नहीं चेक कर पाएंगे। सही आंसर है। बता चुका हूं।
ठीक है। इन व्हिच ऑफ़ द फॉलोइंग कैन द प्रेसिडेंट अफेक्टिवली एक्सरसाइज़ द पॉकेट वीटो पॉकेट? ठीक है? दैट इज़ टेक नो एक्शन
इनडेफिनेटली। बिल्कुल। ठीक है? मैं तो आपको पढ़ाता था ना सस्पेंसिव वीटो यूज़ नहीं कर सकते मनी बिल में। बाकी सारे वीटो
अलाउड है। तो टेक्निकली ऑप्शन नंबर ए यहां पर फर्स्ट सही होगा। ठीक है? और एक और जो पीछे बताया था कि आगे बताया था।
पता नहीं कहां बताया था। ठीक है? कहां था वो क्वेश्चन?
ठीक है? ये वाला 52 था ये। ठीक है? 52 तो 52 48 52 53 56 इन सब में चैलेंज मार दो आप। ठीक है? इन सब में चैलेंज मार दो आप।
ठीक है? 53 में मैं कंफर्म नहीं हूं। लेकिन हां 53 में तो कंफर्म नहीं हूं। लेकिन इसमें तो मिलेगा ही मिलेगा। 40 52
हो गया। ठीक है? 52 हो गया। इसमें तो मिलेगा ही मिलेगा। 56 में भी मिलेगा। क्योंकि एग्जीक्यूटिव काउंसिल में वॉइस
एग्जीक्यूटिव काउंसिल में 1909 का जो इंडियन काउंसिल एक्ट है मोरले मिंटो। मोर्ले मिंटो क्यों बोलते हैं? क्योंकि
मोरले उस टाइम पे सेक्रेटरी था और मिंटो वॉइसरॉय था। जैसे मॉन्टग्यू के क्यों बोलते हैं 199 वाले को? मॉन्टग्यू आपका
सेक्रेटरी था। केस आपका क्या था? वॉइसरॉय था इसलिए। ठीक है? बाकी तो ये आपका मैथ्स और इसका कॉम्बो है। ठीक है? ये मैथ्स
रीजनिंग का है और ये मेरा जीके का बैच है अपना। ठीक है? बाकी इंडिविजुअल बैचेस भी हैं। इंग्लिश का, पीएसपी सर का। ठीक है?
चलिए थैंक यू। धन्यवाद सभी का। मिलते हैं कल। ये नेटो दुबा देगा एक दिन मजे मैं इसी के
भरोसा हूं। फुल मार्क्स आ रहे हैं मेरे। तो डरने की क्या बात है? क्यों? डरने की क्या बात है?
पीडीएफ मिल जाएगी। सर केदोई नगर में नदी बन गया है। अच्छा आ रहा हूं नाव लेके अपनी। ठीक है। कहां मिलना है? जल्दी बताओ।
हनुमान मंदिर के पास मिलूंगा। बताओ कहां उड़ना है उधर पे? नाव को किधर लेके आना है?
चलो सर सोने जाते हैं। आओगे तनिष्क बेटा [गला साफ़ करने की आवाज़] तुमको खैर छोड़ो अब ज्यादा पर्सनल हो जाएगा सर मेरा एक को
ही है एग्जाम कोई नहीं कोई नहीं चलो थैंक यू अ आपने बोला संडे को ऑफिशियली क्लास लेंगे
ले लेंगे यार मंडे को ले लेंगे संडे को नहीं तो मंडे को ले लेंगे मंडे को ले लेंगे चलो थैंक यू एवरीवन थैंक यू एडिटर ओ
भैया भाई एटर भैया तुम लोग की पर्सनल दोस्ती हो गई क्या क्यों पहली बात तो अगर जर्मन के साथ चल
गया ये वीडियो तो डूबा देगा अरे ऐसे डूबा देगा क्या नहीं ऐसे डूबा देगा क्या नॉलेज भी तो है अपने पास नॉलेज भी तो है अपने
पास क्यों यस अब जाके सीधा सुती बाबू ठीक है पीडीएफ मिल जाएगी tlegram में और
इसकी मैं क्विजेस भी डलवा दूंगा सबकी आपके ओके एप्लीकेशन पे बट आई एम लव वाचिंग ओके sis pro mus बोल रहे हैं कि सर आई एम जेई
स्टूडेंट बट आई लव वाचिंग अ क्लासेस कुड यू रिकमेंड सम नॉन एकेडमिक बुक्स टू रीड सिमिलर टू डीप वर्क व्हिच इज़ शेयर्ड वंस
ओके यू कैन रीड बी हियर नाउ रामदास की बुक है वो बहुत ही
अच्छी ब्यूटीफुली डिज़ है वो बुक ब्यूटीफुली रिटन तो क्या बोलूंगा द मोस्ट ब्यूटीफुली डिज़ बुक ठीक है तो वो है
बी हियर नाउ द पावर ऑफ नाउ एक टोले की ओके एंड है काफी बुक्स हैं और पीछे देख हाउ टू विन फ्रेंड्स एंड इनफ्लुएंस पीपल
है ना ये भी है एटॉमिक हैबिट्स वो तो खैर आपको पता भी होंगी सब आकाश का ब्रेकअप हो गया भाई इनको ब्रेकअप पार्टी दो कोई मतलब
कौन देता है जिसका होता है कि जिसके दोस्त होने वाले के दोस्त देते हैं कौन कौन देता है क्यों?
चलो हां रिव्यु होगा भाई। बाना जी बोल रहे हैं 30 को एग्जाम में रिव्यु होगा। सबसे पहले सबसे तेज सबसे सटीक
ठीक है। होगा रिव्यु तुम चिंता ना करो। सुबह सबसे पहले नहा धो के एकदम बैठूंगा मैं। थैंक यू। थैंक यू। थैंक यू। थैंक यू।
धन्यवाद।
अटॉर्नी जनरल ऑफ इंडिया राष्ट्रपति के प्रसाद पर्यंत पद धारण करता है, गवर्नर और मंत्रिपरिषद की तरह। वह भारत का सर्वोच्च विधि अधिकारी है, जो केंद्र सरकार को कानूनी मामलों में सलाह देता है और देश के सभी न्यायालयों में सुनवाई का अधिकार रखता है।
यूनिफॉर्म सिविल कोड अनुच्छेद 44 (राज्य के नीति निदेशक तत्व) में वर्णित है, जो एक उदारवादी-बौद्धिक डीपीएसपी है। अब तक केवल तीन राज्यों - उत्तराखंड (पहला), गुजरात (दूसरा), और असम (तीसरा) में लागू हुआ है। गोवा का पुर्तगाली कोड इससे अलग माना जाता है।
स्पीकर और डिप्टी स्पीकर का चुनाव अनुच्छेद 93 के तहत होता है। स्पीकर के पास पहले मतदान का अधिकार नहीं है, केवल कास्टिंग वोट (गतिरोध तोड़ने का मत) होता है। वर्तमान में डिप्टी स्पीकर का पद 2019 से खाली है। दलबदल के मामलों में स्पीकर का निर्णय अंतिम होता है, लेकिन यह न्यायिक समीक्षा के अधीन है।
विशिष्ट शक्तियां वे शक्तियां हैं जो संघ सूची, राज्य सूची और समवर्ती सूची में से किसी में भी उल्लिखित नहीं हैं। ये शक्तियां संसद के पास निहित हैं, और यह प्रावधान अनुच्छेद 248 में वर्णित है। यह प्रावधान कनाडा के संविधान से लिया गया है।
ब्रिटेन से संसदीय शासन प्रणाली, एकल नागरिकता, मार्शल लॉ, रिट्स और CAG का पद लिया गया है। यूएसए से न्यायिक समीक्षा, न्यायपालिका की स्वतंत्रता, मौलिक अधिकार और महाभियोग की प्रक्रिया ली गई है। कनाडा से प्रबल केंद्र वाली संघव्यवस्था, राज्यपालों की नियुक्ति और अवशिष्ट शक्तियां ली गई हैं।
यदि संगठित अपराध के परिणामस्वरूप मृत्यु होती है, तो दोषी को मृत्युदंड या आजीवन कारावास हो सकता है। लघु संगठित अपराध के लिए सामुदायिक सेवा का प्रावधान है। भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) 2023 में इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल साक्ष्य शामिल हैं, और BSA की धारा 2(8) में दस्तावेज़ की परिभाषा में इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल रिकॉर्ड शामिल हैं।
यह सिद्धांत केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य (1973) के मामले में स्थापित हुआ। मुख्य बात यह है कि संसद संविधान में संशोधन तो कर सकती है, लेकिन संविधान की मूल संरचना या पहचान को नष्ट या परिवर्तित नहीं कर सकती। मिनर्वा मिल्स केस (1980) में स्पष्ट किया गया कि मौलिक अधिकार और DPSP के बीच संतुलन ही संविधान की आधारशिला है।
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