India Economics Subtitles: Crisis, Gold, Middle Class & Rupee
Economics Expert: India’s Real Crisis, Gold, Middle Class & Falling Rupee |Jayant |FO510 Raj Shamani
Raj Shamani
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हम सबको इंस्ट्रशंस आए हमारे प्राइम
मिनिस्टर से कि आप गोल्ड और मत खरीदिए।
क्या है ऐसा? क्यों गोल्ड नहीं खरीदा
हमने?
देखिए सिचुएशन बहुत ज्यादा सीरियस है।
गोल्ड इज वन ऑफ द बिगेस्ट इंपोर्ट सेंटर्स
फॉर इंडिया। क्लोज टू अबाउट 800 टन्स ऑफ़
गोल्ड अ ईयर एंड वी प्रोड्यूस क्लोज टू
अबाउट वन टन। दैट इज अ सीरियस प्रॉब्लम कि
ये पैसा हमको बाहर चुकाना है। एंड अभी हम
एक ऐसे सिचुएशन में है जहां पे रुपए का
वैल्यू लगातार गिरते जा रहा है।
जयंत मुंद्रा वन ऑफ द शार्पेस्ट वॉइसेस
टुडे ऑन इकोनॉमिक्स, जिओपॉलिटिक्स एंड
इंडियास लॉन्ग टर्म ग्रोथ स्टोरी। इस
एपिसोड में हम बात करेंगे गोल्ड
इंपोर्ट्स, डॉलर डिपेंडेंसी, इंडिया की
मैन्युफैक्चरिंग रियलिटी और क्या इंडिया
सच में नेक्स्ट सुपर पावर बन सकता है या
नहीं?
बहुत सारे लोग ये बात करते हैं कि रूपी
अगर वो डेप्रिसिएट होता है ना, हमारे
एक्सपोर्ट्स के लिए बहुत अच्छा है। जी,
एक्सपोर्ट्स बहुत बढ़ेंगे। हकीकत क्या है?
ओवर द लास्ट 14 ऑड इयर्स, रूपी हैज़
डेप्रिशिएटेड बाय ओवर 60%। हमारे
एक्सपोर्ट्स एज अ परसेंट ऑफ़ जीडीपी 25% से
21% पे आ गए। कहां बढ़े एक्सपोर्ट? कम हो।
मेरा एक सिंपल सा प्रेडिक्शन है कि मैं
यहां पे भी दिखा सकता हूं।
वी आर गोइंग टू सी दैट रूपी हिट $150
इंडिया वन ऑफ़ द फास्टेस्ट ग्रोइंग इकॉनमीज़
इन द वर्ल्ड। पर ऑन इंडिविजुअल लेवल
उन्हें और गरीब फील क्यों होता है? हमारी
अच्छी खासी जनता ऐसी है जो कि बहुत-बहुत
गरीब है। अनइंप्लॉयमेंट बहुत ज्यादा हो।
उसको सॉल्व करने के लिए आपको और ज्यादा
तेजी से ग्रो करने की जरूरत है। फास्टेस्ट
ग्रोइंग इन द वर्ल्ड इज़ नॉट इनफ। इफ इट इज
नॉट फास्ट इनफ फॉर रिक्वायरमेंट्स।
मेक अ सिंपल महंगाई होती क्या है वो बताओ।
सो देखो इनफ्लेशन का मतलब है महंगाई कि
कोई चीज आज इतने की है अगले साल इतने की
हो गई तो इतना जो बीच में डिफरेंस आया दैट
इज योर महंगाई लेकिन दिक्कत कहां आती है
हमारी सरकार डिफाइन करती है कि बॉस अगर आप
ओवरल इनफ्लेशन देखें महंगाई उसको एक नंबर
में आप आखिर कैसे पिरोएंगे इतने सारे आइटम
होते हैं तो उसके लिए निकाल दिया है एक
इंडेक्स जिसको बोलते हैं कंज्यूमर प्राइस
इंडेक्स एक एवरेज इंडियन के हिसाब से वो
क्या खाता है पीता है क्या सर्विस कंज्यूम
करता है उस हिसाब से आपको एक वेटेज दे
दिया जाता है अलग-अलग चीजों का तो लगभग
46% जो ओवरऑल वेटेज है दैट वास फॉर फूड
अलोन कि हमारे देश की अधिकतर जनता के लिए
असली खर्चा खाना है आपके बच्चे की स्कूल
की जो फीस है उसको सीपीआई की कैलकुलेशन
में कम वेटेज मिला है। वर्सेस प्याज का
क्या रेट चल रहा है? क्योंकि प्याज के रेट
अगर थोड़े ऊपर गए सरकार का इलेक्शन
जितनातना मुश्किल हो जाता है। प्रेडिक्शन
नंबर टू जो मैं लेके आया था जो जिसके ऊपर
मुझे जरूर बात करनी थी। ये मेरा सिंपल सा
प्रेडिक्शन है। मोस्ट इंडियंस विल नेवर बी
एबल टू ओन अ होम। अगर किसी को हिम्मत करके
घर लेना भी है या तो उसके घर और छोटे
होंगे या फिर उसकी ईएमआई बड़ी होगी। एंड
बहुत सारे लोग ये दोनों ही अफोर्ड नहीं कर
सकते। व्हाट्स इज द थर्ड प्रेडिक्शन जो
हमने कवर नहीं किया। सो प्रेडिक्शन नंबर
थ्री इज दैट
आगे बढ़ने से पहले इस चैनल को सब्सक्राइब
कर लीजिए ताकि हम आपके लिए इसी तरह से और
इनसाइटफुल और बेहतर पॉडकास्ट बनाते रहें
एंड इस पूरे शो का ऑडियो एक्सपीरियंस
स्पॉटिफाई पे अवेलेबल है जहां पर आप हमें
फॉलो कर सकते हैं। एंजॉय द शो।
टेल मी इफ इफ समवन इज वाचिंग यू फॉर द
फर्स्ट टाइम। किसी को पता ही नहीं आप कौन
हो, क्या हो?
क्या करते हो आप? हाउ वुड यू एक्सप्लेन
देम? हु यू आर? व्हाट डू यू डू? व्हाई शुड
नेक्स्ट वन आवर किसी को स्पेंड करना चाहिए
टू लिसन टू यू?
यार मेरा सिंपल सा दैट आई टॉक अ लॉट ऑफ़
डेटा एंड सेकंड मैं यूजुअली वो बातें करता
हूं जो कि ज्यादा लोग बातें नहीं कर रहे
होते हैं।
मैं ये नहीं कह रहा कि मैं अच्छी बातें
करता हूं, बुरी बातें करता हूं। मैं खाली
ये कह रहा हूं मैं वो बातें करता हूं जो
ज्यादा लोग नहीं कर रहे होते हैं।
ओके?
इंटरेस्टिंग। एंड क्यों किसी को सुनना
चाहिए आज का पडकास्ट? क्योंकि मेरा एक
सिंपल सा ये मानना है कि आपको अपना खुद का
ब्रेन चलाना आना चाहिए। आपके माता-पिता
अगर आप अभी पढ़ रहे हैं तो ऑलरेडी लगा रहे
हैं और आप पढ़ के आगे बढ़ चुके। आपके
माता-पिता ने आपकी पढ़ाई पे आपको अपने से
बेहतर बनाने में बहुत ज्यादा खर्चा किया
है। इन्वेस्टमेंट किया है। उनकी आपकी बहुत
उम्मीद है आपसे। वो इसलिए नहीं किया कि
आपको जो भी कोई बताएं आप उसमें हां जी।
हां जी करने वाले बन जाए। तो ये मैं जो भी
कंटेंट डालता हूं वो इसी के लिए कि मैं
लोगों को ये चीज पुश कर सकूं। अपना दिमाग
का इस्तेमाल करें। इस पूरे पॉडकास्ट में
भी मैं जो भी बातें बताऊंगा उसके थ्रू में
यही मैं पुश करने की कोशिश करूंगा।
इंटरेस्टिंग। सो अपना दिमाग यूज़ करें। हां
जी। हां जी नहीं बोले। वेरी गुड पॉइंट टू
स्टार्ट। राइट?
या कल हम सबको इंस्ट्रक्शंस आए इंडिया में
हर सिटीजन को हमारे प्राइम मिनिस्टर से।
यस।
तो उस पे हांजी हांजी करना चाहिए कि नहीं
करना चाहिए? बट बिफोर वी गो देयर आई वांट
मेक पीपल अंडरस्टैंड। तो कल एज वी स्पीक
यस्टरडे हमें यह इंस्ट्रश आए थे कि आप
गोल्ड और मत खरीदिए। घर में ज्यादा रहिए।
वर्क फ्रॉम होम करिए। कार पूलिंग वगैरह
ज्यादा यूज करिए और फॉरेन ट्रिप्स कम करो।
फॉरेन शादियां कम करो। राइट? दिस इज
मोटा-मोटी। दिस इज़ व्हाट ही हैव सेड इन
लेमन टर्म्स। तो फर्स्ट पॉइंट पे जाते हैं
कि व्हाई एक कंट्री के प्राइम मिनिस्टर को
पब्लिकली जाके यह बोलना पड़ रहा है कि
गोल्ड मत खरीदो। क्या है ऐसा? क्यों गोल्ड
नहीं खरीदें हम? देखिए, सिचुएशन बहुत
ज्यादा सीरियस है। ठीक है? मैं आपको सिंपल
से एक वे में समझाता हूं। आपको पता है हम
साल का कितना गोल्ड हम इंपोर्ट करते हैं
और हम कितना हम खुद यहां पे प्रोड्यूस हम
करते हैं। वी इंपोर्ट क्लोज टू अबाउट 800
टन्स ऑफ़ गोल्ड अ ईयर इंटू इंडिया एंड वी
प्रोड्यूस क्लोज टू अबाउट 1 टन।
800 टन वन टन। ओके? सिंपल। एंड हम बनाते
थे प्रोड्यूसिव एक टन करते हैं।
यस। ओके। अब लोग बोल सकते हैं कि हमारे
पास तो केजीएफ था जो कुलार गोल्डफी जो यश
की मूवी से बहुत पॉपुलर हो गया। राइट?
थिंग इज़ वो माइन थी तब भी हम उतने कोई बड़े
प्रोड्यूसर्स नहीं थे। सोने की माइन है
बोल के बहुत अच्छा लगता है। एंड इंडिया की
ओनली एक्टिव मेजर माइन थी तो और ज्यादा वो
लगता है। बट थिंग इज़ उससे इतना सोना नहीं
आता था। अभी आज के दिन आपका लॉयड ग्रुप है
एक। आई थिंक हां लॉयड ग्रुप है। वही अभी
एक इन्वेस्टमेंट करके वो लोग अभी आंध्र
प्रदेश के अंदर एक और माइन को भी एक्टिवेट
कर रहे हैं। उससे लगभग लगभग पीक कैपेसिटी
पे लगभग लगभग 1ढ़ टन और आएगा। 1.5 टन्स
कितना हो जाएगा हमारा? घुमा फिरा के
2.5 टन्स 3 टन्स हो गया। हमारे इंपोर्ट्स
ऑलरेडी 800 टन्स अ ईयर है और बढ़ रहा है।
800 टन। आप रफली कैलकुलेशन करके भी देखोगे
ये नंबर कितना पहुंचेगा। दिमाग किसी का भी
हिल जाएगा। गोल्ड इज़ वन ऑफ द बिगेस्ट
इंपोर्ट सेंटर्स फॉर इंडिया। एंड अभी हम
एक ऐसी सिचुएशन में हैं जहां पर रुपए का
वैल्यू लगातार गिरते जा रहा है। तो ये बिल
जो है 800 टन से अगर हम अगले साल दोबारा
800 टन ही मंगाते हैं ये जो बिल है ये और
बढ़ते जा रहा है। लेकिन
वॉल्यूम में नहीं बढ़ रहा है। वैल्यू में
उसकी वैल्यू बढ़ती जा रही है
इंडिया के अंदर। एंड दैट इज अ सीरियस
प्रॉब्लम कि ये पैसा हमको बाहर चुकाना है।
तो एक आम आदमी के लिए मेरे लिए क्या फर्क
पड़ता है?
आपको यहां से इस तरह फर्क पड़ेगा कि अगर
आप सोना और खरीदेंगे तो सोने की पेमेंट
करने के लिए हमारी सरकार को चाहिएगा डॉलर।
आरबीआई को चाहिएगा डॉलर। कि पेमेंट
मोस्टली डॉलर्स के अंदर होती है। हम
अब वो डॉलर अगर आपको चाहिए $ पहले $ के
लिए कितने रुपए हमारी आरबीआई को खर्चा
करना पड़ता है एक तरीके से। मैं बहुत ही
लेमन लैंग्वेज में बता रहा हूं। $ के लिए
पहले $1 की अगर आपको पेमेंट करना है। आपको
चाहिए था मान लीजिए ₹85। अब सडनली चाहिए
₹94।
सडनली और ज्यादा रुपए हैं जो कि बाहर जा
रहे हैं। आपकी इकॉनमी में नहीं रह रहे
हैं। और वो कौन पे कर रहा है? हम लोग कर
रहे हैं। आप ऐसे सोचिए बाहर वाले को सोना
लेना उसे $1 ही देना पड़ रहा है। हमें अगर
लेना है तो हम पहले 85 दे रहे थे। अब हम
95 दे रहे हैं। हमारी इनकम वहां पे टाइट
हो जाती है।
हम 10
हर घर घर पे इंपैक्ट आता है। मैं आपको एक
सिंपल सा एक दूसरा एग्जांपल से बताता हूं।
अभी 95 समथिंग हो गया ना?
ऐसा ही कुछ चल रहा है।
तो हम ₹10 एक्स्ट्रा दे रहे हैं हर गोल्ड।
या एंड
मान लीजिए
कि सोने का रेट यही रहता है। अभी जो लगभग
आई थिंक कितना चल रहा है? $4500 $4600 पर
आउंस। ठीक है? मान लीजिए सोने का रेट यही
रहता है बाहर के मार्केट में। लेकिन रुपए
अगर डेप्रिशिएट होता जाता है, सोने की
वैल्यू बाहर वही है। लेकिन हमारी जेब से
उतना ही सोना इंपोर्ट करने के लिए ज्यादा
पैसा लगेगा। हम जो दुकानों से सोना खरीदते
हैं उसका रेट और बढ़ेगा।
इस वजह से है कि हमारी सरकार बोल रही है
कि भैया कम इंपोर्ट करो। लेकिन अब यहां पे
बात आती है कि ऐसा है तो हमारी करेंसी को
स्ट्रांग बनाओ।
हम्म।
अब मेरा ये कहना है करेंसी को स्ट्रांग
बनाना हमारे हाथ में ही नहीं है।
ओके। व्हाई डू आई से दैट एक करेंसी की
वैल्यू कहां से निकलती है? या तो उसके दो
ही उसके तरीके हैं। नंबर वन या तो आपकी
करेंसी में बहुत ज्यादा ट्रेड होता हो।
ट्रेड तो ज्यादा डॉलर में हो रहा है।
रुपीस के ऊपर ज्यादा ट्रेड नहीं होता। कुछ
हमारे बॉर्डर शेयरिंग जो हमारे स्टेट्स
हैं या फिर जो आसपास के हैं मालदीव्स हो
गया, नेपाल हो गया, भूटान हो गया। इनके
साथ फिर भी थोड़ा बहुत चलता है। यूएई के
साथ हमने एक दो ट्रांजैक्शंस कर लिए।
रशिया के साथ हमने बीच में बहुत किया वो
स्लो डाउन हो गया है। और ज्यादा नहीं हो
रहा है।
सो वो वाला तो आप बढ़ा नहीं सकते हो। कैसे
बढ़ाओगे? उसको बढ़ाने का एक ही तरह है
ट्रेड वाले को कि आप लोगों के लिए वह चीज़
बनाना शुरू करो जो कि बाहर वालों को आपसे
चाहिए।
वो हम ज्यादा करते नहीं है।
दूसरा तरीका है कि आप लोगों के लिए रिजर्व
करेंसी बनना शुरू कर दो। लेकिन रिजर्व
करेंसी आप कब बनोगे लोगों के लिए? जब बाकी
कंट्रीज के लिए आपकी करेंसी के बिना खुद
का गुजारा मुश्किल हो जाए।
हम
चाइना को पता था वो ट्रेड में ईजीली डॉलर
को रिप्लेस नहीं कर सकता। चाइना ने क्या
किया? चाइना बिगेन टू गिव अ लॉट ऑफ़ डेप्ट।
अब वो डेप्ट को सर्विस करने के लिए ये
आपके डेप्ट में आपके पास दो ऑप्शन होते
हैं कि इदर यू टेक डॉलर लोन
और यू टेक युवान बेस्ड लोन
युवान वाला अगर वो आपको पड़ रहा है 0.25
बेसिस पॉइंट सस्ता
तो जांबिया केन्या ये जाके लेते हैं युवान
वाला लोन
ओके उसकी पेमेंट
2.5 बेसिस
ठीक है
25 बेसिस सस्ता क्या होता है
सो आई विल गिव यू एन एग्जांपल
लोग लोन डॉलर की जगह चाइना की करेंसी में
क्यों लेना प्रेफर करते हैं
आपको एग्जांपल देता हूं सो केन्या
अफ्रीका का एक बहुत बड़ा देश है। पावरफुल
कंट्री है वहां का। उसके पास 5 बिलियन
डॉलर का एक पूरा रेलवे लाइन उसने पूरा
बनाया था।
जिसके लिए जो लोन जो लिया गया था वो डॉलर
में था। हम
ठीक है? नाउ चाइना केम इन। उन्होंने कहा
कि यार बनाया तो हमने है ना। तुम्हें
पेमेंट हमें ही करनी है। यूआ में कर दो।
कोई दिक्कत नहीं है। ठीक है? जो डॉलर वहां
पे देने हैं हम अभी दे रहे हैं। तुम हमें
फिर यूआ में चुका है। रीफाइनेंस किया
हम
और वो वाला जो पूरा ट्रांजैक्शन है
क्योंकि अब बीच की करेंसी हटा दी गई है।
जो कि चाइना को भी देना पड़ता, जांबिया को
भी देना पड़ता। जांबिया इज़ नाउ सेविंग
अराउंड $250 मिलियन डॉलर्स ऑन दिस वन।
राइट?
अगर आपका कर्जा आपको जो आप लिया है उसका
पेमेंट आपको चाइना को करना है। चाइना के
लिए युवानेंट है। डॉलर नहीं है तो आप
युवान में करो ना। डॉलर बीच में आया है तो
आप किसी से आप वहां से ले रहे हो। किसी को
दे रहे हो उसको भी फिर वापस उसको यूज़ करने
का टेंशन। टेंशन ही खत्म। वो वाला एंगल है
यहां पे। नाउ इट कम्स टू इंडिया। फाइव
बेसिस कम समझ नहीं आया मुझे। सो ऐसे समझिए
कि अगर मैं जांबिया हूं हम
ठीक है मान लीजिए मैं जांबिया हूं आप
चाइना है हम
ठीक है अब मेरे को आपको मैंने आपसे लोन
लिया आपको चुकाना है
हां
ठीक है एक होता है कि यार राजमानी करेंसी
है मैं उसी में कर दूं खत्म आर एस करेंसी
डन
बट हम बोलते हैं कि नहीं यार ये कोई थर्ड
करेंसी है उसी में मेरे को चाहिए तो मुझे
जाके पहले वो करेंसी खरीदनी पड़ेगी वो
खरीदनी तो ऑलरेडी किसी और के पास है। आई
हैव टू पे ट्रांजैक्शन फी ऑन दैट।
एक्सचेंज रेट ऑन दैट।
उसमें भी थोड़ा सा कुछ जाता है। प्लस वो
जब आपके पास जाएगा राइट? वो आपके पास तो आ
गई। अब आप भी जब उसे दोबारा कहीं यूज़
करोगे किसी और ट्रेड के लिए अगेन आपको भी
फिर वो दोबारा करना पड़ेगा। लॉसेस होते
हैं।
चाइना ने ये बोला हमारे युवान ही यूज़
करो। हमारे एंड का बच गया। तुम्हारे वाला
हम कर देंगे।
तो जांबिया के पास युवान कहां से आए?
चाइना ने आके कहा।
नहीं पड़ रहा है ना। हम
चाइना ने कहा कि भाई साहब आपका जो डॉलर
वाला लोन है हम चुका देते हैं खत्म का
नहीं क्योंकि उनके पास डॉलर्स के रिजर्व
कम थे।
ओके
हम चुका थे खत्म काम तुम हमें यूआरान में
चुकाते रहना।
ओके। सो इट्स जस्ट लाइक आई विल टेक द लोड
ऑफ योर लोन
या
मैं तुम्हारा जो 5 बिलियन डॉलर है वो लोन
मान लो 2 साल में तुम्हें चुकाना है। तो
मैं 2 साल में चुका दूंगा।
मुझे तुम 3 साल में धीरे-धीरे करके दे दो।
तुमको एक साल एक्स्ट्रा दे दिया या तुम
मुझे 2 साल में थोड़ा सस्ते में दे देना।
व्हाटएवर है?
एंड ये क्यों होता है पता है? नाउ व्हेन
इट कम्स टू से अ कंट्री लाइक जांबिया उसके
पास डॉलर्स की शॉर्टेज है।
वीक इकॉनमी है। सब कुछ है। बट व्हेन इट
कम्स टू चाइना उनके प्ला उनके लास्ट ईयर
का जो आपका एक्सपोर्ट्स का सरप्लस था दैट
वाज़ $1.1 ट्रिलियन डॉलर्स। उनके पास
डॉलर्स का सरप्लस पड़ा है। पहाड़ पड़ा है।
उनको पता नहीं उसका करना क्या है। बोला हम
चुका देंगे खत्म नहीं। तुम हमारे युवान
में करो। हम दे कैन एक्चुअली डू दैट। नाउ
अगर हमें रूपी को स्टंग बनाना है या तो
ट्रेड सेटलमेंट ज्यादा उसप हो या फिर वी
बिकम अ रिजर्व करेंसी। नाउ फॉर सम कंट्रीज
वी आर अ डिसेंट इन रिजर्व करेंसी।
मालदीव्स के लिए थोड़ा है। आपका नेपाल के
लिए थोड़ा सा है। आपका श्रीलंका के लिए
थोड़ा है। भूटान के लिए बहुत बड़ा है। बट इन
द एंड दीज़ आर वेरी वेरीरी स्माल इकॉनमीज़
वैरी स्मॉल कंट्रीज।
मिनिस्ट या हमारे मेजॉरिटी स्टेट्स इनसे
बड़ी इकॉनमीज़ है अपने आप में। नो ऑफेंस टू
एनीबडी फ्रॉम दीज़ कंट्रीज। बट है जो है
राइट? सो वहां पे आता है बात कि बॉस हमारी
करेंसी की डिमांड कहां है?
ऊपर से प्रॉब्लम क्या आती है? वी इंपोर्ट
एवरीथिंग। लिटरली एवरीथिंग। हम जो बात
करते हैं ना कि अच्छा ठीक है वी आर दी
फार्मेसी ऑफ द वर्ल्ड पीपल डोंट रियलाइज
दैट फार्मेसी आपका मेडिसिन आपकी बनती
किससे है
एपीआई
एपीआई राइट रफली अबाउट 70% ऑफ़ ऑल द एपीआई
दैट वी नीड इज़ कमिंग फ्रॉम चाइना
हम
जो 30% यहां बना रहे हैं वो किससे बनते
हैं केएसएम्स केएसएम्स इज़ व्हाट की
स्टार्टिंग मटेरियल्स केएसएम्स आपका 90%
सारा चाइना से आ रहा है अब होता क्या है
हमारी सरकार इसलिए रेमेडी निकालती है।
लेट्स डू अ पीएलआई स्कीम। अपनी इंडस्ट्रीज
को पैसा दो। इंसेंटिव देंगे तुम। लेकिन
एपी यहां बनाना शुरू करो।
हम
कुछ प्लांट्स एक्टिव होते हैं। और Farma
का एक प्लांट है। डॉक्टर रेडीज का एक
प्लांट है। ये सब लाइव हुआ। व्हाट डिड
चाइना डू? क्रैश दोज़ वैरी ईपीआई का
प्राइसेस अप टू 40% 50% हाउ डू यू कमट?
जो इंडिया में बनने लग गया उसे 40% कम कर
दिया चाइना ने।
या नाउ द रिजल्ट इज़
हम कैसे उसे कमपीट करें? राइट? तो यहां पे
बात ये आती है कि बॉस बहुत ज्यादाेंट है।
नंबर वन आर वी रेडी टू पे अ बिट एक्स्ट्रा
फॉर द इंडिया मीट स्टफ? नंबर वन। नंबर टू
विदाउट दैट देयर इज़ अ सशन टू इट। वी हैव
टू रियली फिगर आउट टू थिंग्स। नंबर वन
हाउ डू वी कंज्यूम मोर ऑफ़ व्हाट वी मेक इन
इंडिया? हम नंबर टू हाउ डू वी इंश्योर दैट
व्हाट वी आर मेकिंग इन इंडिया उसका बैक
एंड कहीं बाहर से नहीं आ रहा है। सो फॉर
एग्जांपल हम बड़ा प्राउडली ये चीज़ बोलते
हैं कि यार यू नो व्हाट? हम काफी सारे
फर्टिलाइज़र्स सब इंडिया में बनाने लग गए
हैं। उसका पोटैश आज भी बाहर से आता है।
सल्फर आज भी बाहर से आता है। दोज़ आर दी
बेसिक मटेरियल्स। अभी ये पूरी जो सिचुएशन
हुई है बिकॉज़ ऑफ़ वॉर। पोटैश आपका कहां से
आता है? मिडिल ईस्ट से आता है मेजॉरिटी।
हमारी लंका लग गई है। सभ्य भाषा में कह
रहा हूं। सल्फर आपका कहां से आता है?
मेजोरिटी आपका बाहर से आता है। हमारी अगेन
लंका लग गई है। रिजल्ट इज़ हम यहां पे बना
नहीं पा रहे हैं। तो होता क्या है? अब
बाहर के रेट पे हमें खरीदना पड़ता है।
हम
एग्जांपल से बताता हूं। सो यूरिया राइट?
यूरिया की अगर बात करें तो वी इंपोर्ट
क्लोज टू अबाउट सो हमारा ओवरऑल जो
डोमेस्टिक कंसमशन है दैट्स अबाउट 40
मिलियन टन्स अ ईयर हम
30 मिलियन टन्स हम इंडिया में बनाने लग गए
हैं 30 आज भी नहीं बनाते हैं 30 इज़ व्हाट
25% ऑफ़ अ कंसमशन इट्स नॉट अ स्माल नंबर
हाउ डू वी सॉल्व फॉर इट उसका एक रास्ता
बनता है अगर इंडिया में नहीं बना सकते हो
कैप्टिव कैपेसिटीज बाहर बना लो
इंडिया ने क्या किया 50-50 जॉइंट पेंचर
किया रशिया के क्योंकि ऑलरेडी यूरिया
हमारा अच्छा खासा रशिया से भी आता है। वी
डिड अ जॉइंट वेंचर जो कि अब 2 मिलियन टन
का हम पे प्लांट लगा रहा है। इट विल
एलिमिनेट द हर्डल्स फॉर एटलीस्ट 20% ऑफ़ द
इंपोर्ट्स दैट वी डू।
लेट्स डू दैट। उस तरह के कई सारे रास्ते
जो हमें अपनाने पड़ेंगे अक्रॉस डिफरेंट
सेक्टर्स जो हम उसको एड्रेस करेंगे तब
जाके कुछ होगा। अब जरा सोचिए एक बात कि
अभी कोल इंडिया जो हमारी है राइट? कोल
इंडिया ने बीएचईएल नाम से एक और पीएसओ
उसके अंदर एक जॉइंट वेंचर किया और बोला कि
यू नो व्हाट कोल से चाइना वाले यूएस वाले
और दूसरे कंट्री इतने सारे पेट्रोल बनाते
हैं। सो इट आप सोचो ना कि आपका ये जो
पेट्रोल है, डीजल है ये क्रूड से आता है।
क्रूड क्या है? इन द एंड इट्स अ
हाइड्रोकार्बन।
हम
कोल इज़ आल्सो हाइड्रोकार्बन।
ओके?
इट्स अ कार्बन प्रोडक्ट। राइट? उस कार्बन
से यहां पे भी तो हम केमिकल्स बना सकते
हैं। बट इट्स अ कॉस्टलीियर प्रोसेस। कोल
इंडिया ने फाइनली बोला कि यू नो व्हाट?
ओके चलो करते हैं कि सरकार इंसेंटिव अब दे
रही है। बीएचएल गया टाई अप किया नाउ दे आर
बिल्डिंग अ प्लांट जो कि एल&टी एग्जीक्यूट
कर रहा है एंड दे आर बिल्डिंग अ प्लांट
फॉर अमोनियम नाइट्रेट। अमोनियम नाइट्रेट
हमारा एनुअल कंसमशन इज़ 8.8 लाख टन्स दीपक
ग्रुप है यहां पे जो कि लगभग लगभग 6 जिसका
लगभग लगभग 6 लाख टन्स का उनकी कैपेसिटी
है। बट वो ऑपरेट करते हैं लगभग 75% ओवरऑल
कैपेसिटी पे। क्यों? रशिया से बहुत ज्यादा
चीप इंपोर्ट्स आ जाते थे। नाउ बिकॉज़ ऑफ़
गवर्नमेंट इंसेंटिव्स कोल इंडिया और बेल
का कहना है कि यार हम तो उस रेट पे कमट कर
पाएंगे। सो लेट्स बिल्ड अ प्लांट। अब ये
जो प्लांट लगा रहे हैं दैट हैज़ 6.6 लाख
टन्स का एनुअल कैपेसिटी। मतलब क्या हुआ?
हम नेट इंपोर्टर से सीधा नेट एक्सपोर्टर
बन जाएंगे।
हम
लेट्स डू मोर ऑफ़ दीज़। जैसे-जैसे एक-एक
करके बेसिक्स और ये बहुत सारे बेसिक्स
हैं। हर इंडस्ट्री के छोटे-छोटे हैं।
जैसे-जैसे उनको सॉल्व किया जाएगा। तब जाके
होगा कि बाहर से हम जो हर छोटी-छोटी चीज़
हम इंपोर्ट करते हैं वो चीज़ एलिमिनेट
होगी। सप्लाई चेन वहां से सॉल्व होगी। इट
इज़ नॉट द टॉप डाउन अप्रोच कि चलो पहले
असेंबली करते हैं फिर वो बना लेंगे। कुछ
इंडस्ट्रीज में वो चलता है,
इलेक्ट्रॉनिक्स में वो चलता है। इन
मेजॉरिटी ऑफ़ द थिंग्स आपको उल्टा करना
पड़ेगा।
बट देन अगर गवर्नमेंट हर किसी पे एक
इंसेंटिव देगी, एक सब्सिडी देगी उसको
मेंटेन करने के लिए, तो उसके लिए पैसा
लगेगा।
या
तो वो अगर गवर्नमेंट के पास ज्यादा पैसा
ही नहीं है, जहां पे वो मेजर फाइट है, वो
सारी सारी इंडस्ट्रीज को देगी कैसे?
पैसा तो ऑलरेडी दिया जा रहा है, सर। सो
पहली बात यह चाइना भी हर इंडस्ट्री को
पैसा देता है। ठीक है? इंडिया भी दे रहा
है। सो फॉर एग्जांपल जीएसडब्ल्यू ग्रुप
आता है। जीएसw ग्रुप ने अनाउंस किया
महाराष्ट्र के अंदर कि नागपुर के पास
बूटीबुरी रीजन है। मैं वहां पे 25,000
करोड़ का इन्वेस्टमेंट करूंगा।
एंड क्या बनाऊंगा वहां पे? मैं वहां पे एक
बनाऊंगा लिथियन आयरन बैटरीज का प्लांट और
दूसरा मैं वहां पे बनाऊंगा सोलर का पूरा
इकोसिस्टम
मैन्युफैक्चरिंग। ग्रेट। उसके लिए उनको
क्या उन्हें उन्हें दिए गए? को पता है
110% ऑफ द इन्वेस्टमेंट जो आप करने जा रहे
हो 110% ऑफ़ दैट एज एसजीएसटी रिफंड
एसजीएसटी जो सरकार का जो कंपोनेंट बनेगा
ये आने वाले सालों में उसका रिफंड आपको
मिलेगा साथ में आपको मिल रही है
इलेक्ट्रिसिटी प्रैक्टिकली आपका जो
इन्वेस्टमेंट है सब कुछ वापस आपको मिल रहा
है हम भी तो दे रहे हैं वो पैसा है नहीं
सरकार के पास वो सरकार ये कह रही है आप जो
हमें दोगे वापस आपको दे देंगे
वो वाला मॉडल तो है ही ना उसके लिए सरकार
को पैसे की शॉर्टेज तो नहीं होगी
हम सो दैट इज़ पॉसिबल। अब प्रॉब्लम वही आती
है खाली जीएसब्ल्यू ग्रुप को नहीं मिलना
चाहिए। सबको मिलना चाहिए। नाउ दैट इज़ अ
होल्ड टुगेदर अदर डिबेट। अगर कोई आदमी
फरीदाबाद के अंदर अपना एक 40 लोगों का
अपना यूनिट लगा रहा है कि वो कुछ बनाएगा
वहां पे उसको ये सब कुछ नहीं मिलेगा। बट
यहां पे ये सब मिल जाता है कि वो बड़े
स्केल का इन्वेस्टमेंट है। दैट इज़ समथिंग
डू वी फिगर आउट। बट पॉसिबिलिटीज़ तो है ही
ना।
ओके।
एंड सेकंड थिंग इज़ आप जरा ऐसे सोचिए इन
एफआई 25
हमारे पैन इंडिया आरबीआई का जो कैन है
उसके हिसाब से लगभग 5.5 लाख करोड़ का
अक्रॉस स्टेट्स एंड सेंटर हमने फ्री बीस
हमने बांटे। ठीक है? स्टेट गवर्नमेंट्स ने
जो कि इलेक्शन बाउंड जो स्टेट्स थे
उन्होंने यह टाइम्स ऑफ इंडिया में आया था
दैट दे प्रॉमिस सम 1.05 लाख करोड़
उन्होंने बजट्स में जो अनाउंस किया था फॉर
फ्री बीस एंड कैश एंड्स में मिल जाता।
इलेक्शंस आए तो उस साल के अंदर दे
एक्चुअली अंडर स्पेंडिंग समथिंग टू 1.6
लाख करोड़। पैसे की कमी कहां है सर?
पैसा तो है। इट्स मोर अबाउट प्रायोरिटीज।
ऐसा क्यों है कि Bajaj Tata Motors वालों
को यह बोलना पड़ रहा है कि यार दो दो साल
हो गए हमारे इंसेंटिव नहीं आ रहे। नाउ दैट
इज अ प्रॉब्लम। व्हाई इट एक्चुअली
डिस्ट्रॉयस दी इन्वेस्टमेंट क्लाइमेट।
इंडस्ट्रीज को क्या मैसेज जा रहा है कि
हां यार ये बोलते तो हैं कि देंगे लेकिन
आते नहीं है। एंड दैट्स अ वै बिग
प्रॉब्लम। तो कहां जाते हैं पैसे? अब आप
दूसरी चीजों में खर्च हो जाते हैं ना।
पैसा एंडलेस तो नहीं है ना। इट्स मोर
अबाउट व्हाट आर योर प्रायोरिटीज। सो दैट्स
व्हाट माय पॉइंट इज़ राइट? गवर्नमेंट की
प्रायोरिटीज में मेबी एक्स व जी है तो अगर
वो इन पे लगाती तो दूसरी जगह कहीं से
सिस्टम खत्म होगा ना कहीं पे तो जा रहा
होगा वो पैसा
देयर आर टू काइंड ऑफ़ इंसेंटिव्स एक
पैसा नहीं है गवर्नमेंट के पास
अनलिमिटेड तो है ही नहीं
अगर उनके पास ₹100 हैं जो हर साल आते हैं
वो ₹100 में से वो चाहते हैं कि यार मैं
20% ₹20 इन इंडस्ट्रीज को दे दूं इंसेंटिव
करने में ताकि हम चाइना से कमट कर पाएं या
दूसरे देशों से कमट कर पाएं।
राइट? लेकिन ये ₹20 आज तो कहीं और जा रहे
होंगे ना। ये कहां जा रहे हैं? सी आई विल
पुट इट दिस वे
वी आर नॉट अ वेरी वेरीरी स्ट्रांग सोसाइटी
इकोनमी
ठीक है इन मोस्ट ऑफ़ द थिंग्स वी आर इन अ
डेफिसिट
इंफ्रास्ट्रक्चर की बात करें गुड वाटर की
बात करें हर चीज में हम डेफिसिट में ही चल
रहे हैं
ठीक है
तो प्रायोरिटीज एंडलेस हैं इट्स मोर अबाउट
व्हाट नीड्स टू बी सॉल्व फर्स्ट
सो टू इंश्योर कि द रिसोर्सेज कीप ऑन
राइजिंग टू सॉल्व मोर ऑफ़ प्रॉब्लम्स लेटर
ऑन
ओके
इट्स मोर अबाउट दैट सो अगर हमें ये लगता
है कि ठीक है एजुकेशन पे बाद में सॉल्व कर
लेंगे पहले यह सॉल्व कर लेते हैं। तो कुछ
लोगों के लिए शायद सही हो सकता है क्योंकि
उनको आज उन्हें फायदा मिलेगा। बट लॉन्ग
टर्म मेरा ऑब्वियसली एक एजुकेटेड वर्क
फ़ोर्स नहीं है तो प्रॉब्लम बन जाता है।
सिमिलर वे इंडस्ट्रीज के लिए भी यही हमें
यहां पे डिसाइड करना है।
इज इट नाउ अ प्रायोरिटी? या फिर ठीक है।
अभी ये सब ऐसे ही चलने दो। पहले ये बांट
लेते हैं। पहले अगर कोई अनइंप्लॉयड है
उसको हर महीने का ₹21,000 देना उसको शुरू
करते हैं। पहले अगर कोई भी अगर लेडी है
जिसके पास मतलब क्या कहते हैं? अगर बच्चा
है तो उसको उसको मतलब कह देते हैं ₹3,000
महीने देना शुरू करते हैं। इफ दैट इज़ अ
प्रायोरिटी। तो पहले उसको सॉल्व कर लेते
हैं। बट उसको सॉल्व करोगे तो यह वाला पीछे
रह जाएगा। एंड द बिगर प्रॉब्लम इज दुनिया
इसके लिए रुकने नहीं वाली कि ठीक है यार
अभी पहले उनको ये बांटना है तो हम रुक
जाते हैं। वियतनाम वाले रुकेंगे नहीं।
चाइना वाले रुकेंगे नहीं। इनफैक्ट चाइना
वाले तो अभी नहीं रुक रहे। मेरे को इतना
हंसी आती है। लोग बात करते हैं चाइना +1।
चाइना प्लस वन कहां हो रहा है चाइना +1?
चाइना शेयर ऑफ़ ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हैज़
ओनली रीज़न इन द लास्ट लास्ट फाइव इयर्स।
चाइना +1 कहां से हुआ? चाइना इज़ इटसेल्फ
बिकमिंग चाइना +1 एंड दैट इज़ समथिंग नोबडी
टॉक्स अबाउट। हो रहा है।
इंटरेस्टिंग बाइट आई विल गिव यू। सो
लोग जैसे बोलते हैं ना कि यार बहुत लोग
जैसे हम करेंसी के ऊपर बात कर रहे हैं
राइट कि रुपी डेप्रिशिएट हो रहा है।
एसेट्रा बहुत सारे लोग ये बात करते हैं कि
व्हेन इट कम्स टू अ योर रूपी अगर वो
डेप्रिशिएट होता है ना अगर रुपी की वैल्यू
कम हो रही है। हमारे एक्सपोर्ट्स के लिए
बहुत अच्छा है। जी एक्सपोर्ट्स बहुत
बढ़ेंगे।
हकीकत क्या है?
ओवर द लास्ट 14 ऑडियर्स रूपी हैज़
डेप्रिशिएटेड बाय ओवर 60% हम
60% वैल्यू गई है। ठीक है? हमारे
एक्सपोर्ट्स एज अ परसेंट ऑफ़ जीडीपी
25% से 21% पे आ गए हैं। कहां बड़े
एक्सपोर्ट्स? कम हुए हैं। नाउ टॉक अबाउट
वियतनाम। वियतनाम मोर और लेस स्ट्रक्चरल
वे में अपनी करेंसी को हर साल लगभग लगभग
3% से इंडिवैल्यू करता है। ठीक है? इट्स अ
मेथोडिकल वे। उनके एक्सपोर्ट्स हर साल
लगभग 14% से बढ़ रहे हैं पिछले 15 साल
में।
तो इट्स नॉट अबाउट कि हां आपकी करेंसी
डीवैल्यू हो रही है तो एक्सपोर्ट बढ़
जाएंगे। नाउ देयर इज़ अ प्रॉब्लम? आपके
एक्सपोर्ट्स तब जाके बढ़ेंगे जब
आपका जो भी रॉ मटेरियल है जो भी बैक एंड
जो सप्लाई चेन है वो भी आप खुद बनाते हो।
हम
अगर आपके रॉ मटेरियल्स भी महंगे हो रहे
हैं कि वो आप इंपोर्ट ही करते हो। आप नहीं
कर पाओगे कमट। सो डबल वमी है वो। लेकिन
लोग ये बात समझते नहीं है। मैं इसलिए एक
चीज हमेशा बोलता हूं कि यार जब तक इसको
सॉल्व नहीं करेंगे प्रैक्टिकली हम जो
दुनिया भर से हम इंपोर्ट कर रहे हैं वो
बढ़ते ही जाएगा।
या राइट? एट द सेम टाइम हम जो दुनिया को
बेच रहे हैं वो कम होते जाएगा। सो रिजल्ट
इज़ रूपी का डिमांड तो और ज्यादा कम हो
जाएगा ना। डिमांड कम होगा तो क्या होगा?
उसका वैल्यू्यूएशन कम होगा।
वो और डीवैल्यू होगा। इसीलिए मैं जैसे ये
लिख के भी लेके आया था। मेरा एक सिंपल सा
प्रेडिक्शन है। राइट? कि मैं लिख के लेके
आया था पहले से। बाय चांस हमारी बातचीत ही
चल गई। लुक एट दिस वन। कैमरा ये वाला है।
मैं यहां पे भी दिखा सकता हूं।
दिस इज योर प्रेडिक्शन वन।
यस। मैं तीन प्रेडिक्शन ऐसे लेके आया हूं।
एंड आई एम वेरी क्लियर दैट हम जिस रास्ते
पे चल रहे हैं आज के दिन रूपी इस गोइंग टू
बी एट $150 एंड ये कोई बड़ी बात नहीं होगी।
वी आर गोइंग टू सी द रूपी हिट $150।
$150 पर डॉलर यस। एंड एंड मुझे पता है
बहुत लोगों को गुस्सा आएगा देख के। मेरा
खाली एक बात कहना यार दिस शुड नॉट मेक यू
एंग्री। दिस शुड मेक यू आस्क। ओके। व्हाट
कैन वी डू टू सॉल्व दिस? दिस इज़ सीरियस
प्रॉब्लम। नोबडी एवर टॉक्स अबाउट दिस वन।
इसके लिए वी हैव टू सीरियसली डू थिंग्स जो
कि हमारे मोदी जैसे फॉर एग्जांपल बोल रहे
हैं ना कि ओके लेट्स इंपोर्ट लेस ऑफ़
गोल्ड।
हम
लेट्स यू नो कम्यूट लेस। लेट्स गो आउटलेस।
कम बाहर जाना है ताकि पेट्रोल बचा है,
डीजल बचा सकें। कब तक कर लोगे ये?
150 करोड़ की जनता को आप कब तक घर के अंदर
बिठा लोगे? दिस इज़ नो मोर कोविड। एंड टू
बी वेरी फ्रैंक लोगों को बुरा लगेगा। बट
ये आज से 5 साल पहले वाला इंडिया भी है भी
नहीं कि मोदी ने कहा कि तालियां बजा दो आज
बजा देंगे। वो नहीं होगा। राइट? पीपल हैव
बिगन टू आस्क सर्टेन क्वेश्चंस। पीपल हैव
पीपल आर नो मोर दैट।
तो यहां पे अब सीधी सी आपकी एक बात आती है
कि वी रियली नीड टू सॉल्व द बेसिक्स। अगर
आप चाहते हो कि लोग गोल्ड कम इंपोर्ट
करें। हम एज अ कंट्री कम इंपोर्ट करें।
सॉलशन इज़ कम खरीदें ताकि हम कम इंपोर्ट
करें।
अगर हम चाहते हैं हम कम इंपोर्ट करें।
उसका एक ही तरीका है आप डोमेस्टिकली
प्रोड्यूस करना शुरू करें। अब लोग बोल
सकते हैं कि यार है ही नहीं कहां से
करेंगे? चाइना के पास भी नहीं था। चाइना
डिड वाज़ चाइना ने क्या किया? एक्सप्लोरेशन
शुरू किया। आउटकम क्या होता है?
इन नवंबर चाइना अनाउंस्ड अ मेजर गोल्ड
डिस्कवरी टुवर्ड्स अ नॉर्दन पार्ट जहां पे
उसके डेजर्ट्स हैं।
हम
ठीक है? लो ग्रेड ऑफ गोल्ड लेकिन वहां पे
गोल्ड है। अब वो उसका वो काम शुरू कर रहे
हैं। टुवर्ड्स एंड ऑफ़ दिसंबर वन मोर सच
अनाउंसमेंट इन दिसंबर दे अनाउंस एशियास
लार्जेस्ट ये प्लीज आप लोग Google
कीजिएगा। ये वाला कैमरा है। आप प्लीज
Google जरूर कीजिएगा। एशियास लार्जेस्ट
अंडर सी डिपॉजिटिज ऑफ़ गोल्ड। हम इतनी बात
करते हैं ना ब्लू इकॉनमी ब्लू इकॉनमी।
हमारे बजट में अनाउंस हुआ था इससे पहले
वाले साल में निर्मला सीतारमण जी ने किया
था।
उनकी हमारे ब्लू इकोनमी में हम इसके ऊपर
ये हो जाते हैं कि हमारी फिशिंग इकोनमी ये
वो जो फिशरमैन इकोसिस्टम इतना बड़ा है फिश
फार्मर्स हैं उनका क्या ये वो उसके साथ हम
कुछ कर नहीं रहे हैं वहां पे उन्होंने
समुंदर के अंदर जाकर के समुंदर में लगभग 6
किमी की डेप्थ पे एशिया का सबसे बड़ा
गोल्ड डिपॉजिट ढूंढ लिया है वो उसकी
माइनिंग की प्लानिंग कर रहे हैं उनके पास
था नहीं सोना उन्होंने ढूंढा इट्स अप टू
अस
हमेशा से क्या बोलते हैं सर कि वी आर दी
बिग बिगेस्ट रिपॉजिटरी ऑफ़ वी हैव द
बिगेस्ट रिजर्व्स ऑफ़ थोरियम
हम
राइट
चाइना टॉप फाइव में भी नहीं आता था
हम
एंड क्वाइट रिसेंटली दे अनाउंस दैट ओके वी
हैव फाउंड थोरियम था नहीं ढूंढा है जो चीज
नहीं है उसके लिए उन्होंने क्या किया दे
वेंट अब्रॉड एंड एक्वायर्ड द माइंस बाय
एंड बी डूइंग इट और प्रॉब्लम ये है कि
सोना बाहर से इंपोर्ट करते हैं और वो डॉलर
का रेट हो रहा है इंश्योर करो कि जो कंपनी
को हम पेमेंट कर रहे हैं इंपोर्ट करने के
लिए वो कंपनी इंडियन
हम जो रशिया में जो हम ये जॉइंट वेंचर हम
प्लांट लगा रहे हैं यूरिया का वो क्यों
लगा रहे हैं क्योंकि एटलीस्ट वो कंपनी तो
हमारी है ना अगर हमारी सरकार इतनी बड़ी
सब्सिडी देती है यूरिया के ऊपर वो जाए तो
उसी कंपनी से जिसमें कम से कम 50% हमारा
हक है
हम
इन द एंड तो हमारे पास वापस आ जाएगा व्हेन
इट कम्स टू दीज़ थिंग्स हम क्यों नहीं
बाहर एक्वायर कर रहे थे दोज़ आर द वे टू
सॉल्व इट
ऑयल एंड गैस मैं मानता हूं जो इससे पहले
की सरकारें थी उन्होंने भी कुछ खास नहीं
इस सरकार ने कोशिश बहुत करी है। लेकिन अब
ऑयल एंड गैस का क्या होता है कि यार आप
बहुत सारा आप एक्सप्लोरेशन के लिए आप
एरिया खोल सकते हो।
यू कैन स्टार्ट एक्सप्लोरेशन बट उसमें
मिलेगा नहीं मिलेगा गारंटी नहीं होता है।
वी आर आपको मिल भी जाए। जैसे अभी रिसेंट
में आपने न्यूज़ पढ़ा होगा हरदीप सिंह
पुरी जी जो कि हमारे पेट्रोलियम एंड गैस
के जो मिनिस्टर हैं उन्होंने बताया कि ओके
बिग इवेंट फॉर इंडिया कि अंडमान में वी
हैव फाउंड अ गैस का डिपॉजिट।
वहां से मीथेन गैस रिलीज हो रहा था। सो
इट्स अ बिग पॉजिटिव
बट लेट अस बी रियलिस्टिक एज वेल। अभी वहां
पर डिस्कवरी हुई कि हां गैस है।
इज इट कमर्शियली वायबल टू एक्सट्रैक्ट इट?
उसमें और लगने हैं चार से पांच साल। और वो
प्रूव होता है तो जाके वहां पे
इन्वेस्टमेंट शुरू होंगे। टू एक्सट्रैक्ट
इट। व्हिच इज़ अनदर थ्री फोर इयर्स। तब तक
शायद दो सरकारें और आ चुकी होंगी। बट आई
एम ट्राइंग टू से इज़ इट्स अ वेरी लॉन्ग
जस्टिशन थिंग। हमें सवाल पूछने चाहिए कि
सर पिछले 12 साल हो गए शायद। राइट? उसमें
नहीं हुआ। ठीक है। आई डोंट हैव अ इस पर
मेरी शिकायत नहीं है। रीज़न बीइंग वी हैव
एक्चुअली इंक्रीज्ड अ लॉट ऑफ़ एक्सप्लोरेशन
एक्टिविटी। अब वो हमारे हाथ में नहीं है
और कहीं पे आप खोज रहे हो नहीं निकल रहा
है। बट व्हाट आर वी डूइंग टू इंश्योर कि
यार और कर सकें। क्योंकि ये प्रॉब्लम एक
दिन में खत्म नहीं होने वाली। ये बार-बार
आएगा। व्हेन मोदी जी केम टू पावर 83%
हमारा बाहर से इंपोर्ट होता था एनर्जी। आज
के 80 89% के आसपास आ चुका है। बहुत जल्दी
95 हो जाएगा ऐसे।
हमारा कंट्रोल ही नहीं है उसके ऊपर। दैट
इज़ द प्रॉब्लम टू सॉल्व फॉर। बट इंडिया
इतना अगर हंगरी है, पावर हंग्री, कंसमशन
हंगरी एट दिस पॉइंट। हम लोग ग्रोइंग
इकॉनमी। हम लोग बढ़ रहे हैं। तो हमारी
नीड्स बढ़ते जा रही है ना। तो डेफिनेटली
83, 89, 89 से 95 ये होना ही है। व्हाट
कैन
व्हाट कैन एनीबडी डू इन दिस एट दिस पॉइंट?
सो अ लॉट कैन बी डन। नंबर वन एक्सप्लोरेशन
पार्ट दैट वी टॉक अबाउट। नंबर टू वो तो हो
रहा है। वो पहले से बहुत ज्यादा बड़ा है।
या नंबर टू इज रिप्लेसमेंट पार्ट ऑफ इट।
सो फॉर एग्जांपल हमें पता है कि यार गैस
हम प्रोड्यूस ही नहीं करते।
हम
बहुत कम हम प्रोड्यूस करते हैं। रफ्ली 55%
ऑफ़ व्हाट वी नीड कम्स फ्रॉम इंपोर्ट।
राइट? दैट्स अ बिग बिग क्रिटिकल
डिपेंडेंसी।
तो हम हर घर में हर घर में गैस का सिलेंडर
हम क्यों प्रमोट कर रहे हैं? नीति आयोग ने
जब 2015 में कहा था कि यार वी शुड बी
प्रमोटिंग इलेक्ट्रिक स्टोर्स। कि
इलेक्ट्रिसिटी तो हम इंडिया के अंदर में
बना सकते हैं। हम
और गवर्नमेंट का प्रोग्राम है
इलेक्ट्रिसिटी हर घर पहुंचाने का। सॉल्व
हो जाएगा ना इससे। वी शुड हैव फोकस ऑन
दैट। क्यों नहीं किया? व्हाट डू यू थिंक?
सिंपल सा एक प्रॉब्लम है कि यार हर घर में
इलेक्ट्रिसिटी पहुंचाना इज़ अ फाइव टू 10
ईयर का प्रोजेक्ट। हर घर में सिलेंडर
पहुंचाना इज़ अ टू इयर्स का प्रोजेक्ट।
इलेक्शन में तो
इट्स मोर अबाउट जो अटल जी हमेशा से बोलते
थे। हम रहे ना रहे ये देश रहना चाहिए। देश
की लाइफ पांचप साल में डिफाइन होती है।
यहां पे बुरा लगे किसी को तो माफी। लेकिन
हकीकत है कि हमारी अच्छी खासी पॉलिसीज जो
होती है वो इसी पे हार जाती है कि अरे यार
5 साल के आगे तो इसका फिर पता नहीं कौन
आएंगे। हमें तो इलेक्शन भी जितन है ना तो
पहले उसमें जो दिखे वो पहले करते हैं। दैट
इज व्हाट द प्रॉब्लम कम्स। व्हाट वी नीड
इज़ एंड अगेन यू नो दो बहुत ही प्यारी
सीइंग्स हैं। नंबर वन आवर गवर्नमेंट्स
टर्न सीरियस डू रिफॉर्म्स टेक एक्शन
डिलीवर थिंग्स कब? तब जबकि इंडिया की लग
जाती है
क्योंकि तब ऑप्शन नहीं रहता है। अदरवाइज
दे डोंट रियली डू मच रिफॉर्म्स। क्यों?
शोरशराबा बहुत होता है। बैकलैश बहुत आता
है। इट्स नॉट अ ईजी कंट्री टू ऑपरेट ऑन दी
गवर्नमेंट साइड भी मैं फेवर लेता हूं।
आसान नहीं है। हर स्टेट के अलग सिस्टम है।
हर स्टेट के अंदर अपने मुल्ले की चार तरह
की भांति के लोग रह रहे हैं। सबके विचार
कभी मिलते नहीं है। आसान नहीं है कोई भी
चीज करना। मैं वो मानता हूं। बट एट द सेम
टाइम इसीलिए तो एक इतने स्ट्रांग आदमी को
चुना गया ना कि ठीक है सबसे मिलजुल के इन
द एंड जो देश के लिए अच्छा है वो करे खैर
देश की तकदीर बदलनी है वहां पे बहुत
ज्यादाेंट हो जाता है नंबर वन नंबर टू इज़
कि यार
आप आपके लिए बहुत ज्यादा इंपॉर्टेंट है ये
हम आज जिस स्टेट में हैं वी आर
प्रैक्टिकली इंपोर्टिंग एवरीथिंग
इसको अगर हम नहीं सॉल्व करते हैं ना हम
खुद खुद को एक कंज्यूमर कंट्री बनाते जा
रहे हैं। मैं एक सीधा एक स्टैट दूंगा।
यूरोप और यूएस का जो डायवर्जेंस हुआ है
पिछले 16 17 साल के अंदर इन 2008 यूरोप
एंड यूएस जब फाइनेंसियल क्राइसिस हुआ था।
यूरोप एंड यूएस हैड सिमिलर आपका लेवल्स ऑफ
इकॉनमी। दोनों की इकॉनमी लगभग लगभग 15 से
16 ट्रिलियन डॉलर की थी।
ओके?
फास्ट फॉरवर्ड टू टुडे
यूरोप्स इकॉनमी इज़ ऑलमोस्ट 70% ऑफ यूएस।
30% छोटी हो गई है।
व्हाई हैज़ दैट हैपेंड? बिकॉज़ ओवर द इयर्स
मैन्युफैक्चरिंग तो दोनों देशों से बाहर
गई।
यूरोप ने अपनी सर्विज भी बाहर भेज दी है
ना।
यूरोप की सर्विज आप अगर मेजर एक्सपेंस
देखो सब कुछ यूएस की कंपनी से हो रहा है।
सब कुछ हो रहा है। व्हेन वाज़ द लास्ट टाइम
यू हर्ड अ 10 बिलियन डॉलर का टेक आईपीओ इन
यूरोप। कहीं पे नहीं हुआ है। यूएस में तो
आए दिन हो रहे हैं। चाइना में हो रहे हैं।
यूरोप में नहीं हो रहे हैं। दे आर नेट
इंपोर्टर्स ऑफ़ सर्विसेस ऑफ टेक्नोलॉजी।
सेम इज़ प्लेइंग आउट विद अस। हमें सैटेलाइट
इंटरनेट चाहिए। हम खुश होते हैं भाई साहब
अब देखो स्टार्लिंग आएगा ईलन मस्क का
व्हाट आर यू सेलिब्रेटिंग हमें उस टाइम ये
पूछना चाहिए न्यूजीलैंड वाले अपना खुद का
सैटेलाइट इंटरनेट का वेंचर बना रहे हैं जो
बोल रहे हैं हम दुनिया भर में न्यूजीलैंड
इतना सा देश है यार वो लोग बोल रहे हैं हम
दुनिया भर में सप्लाई करना चाहते हैं आपका
ये सैटेलाइट इंटरनेट हम क्यों नहीं कर रहे
हैं
सीरियस क्वेश्चंस यहां पे होने चाहिए
बिकॉज़ इफ यू डोंट सॉल्व फॉर इट व्हाट इज़
गोइंग टू हैपन इज हम इसके नेट बायर रहेंगे
नेट इंपोर्टर रहेंगे फॉर लाइफ लोंग
हम्म हम
हम इतना सेलिब्रेट करते हैं कि यार BSNL
ने एक फॉरेन कंपनी के साथ जॉइंट वेंचर
किया है कि वो हमें सर्विज देगा। BSNL उसे
डिस्ट्रीब्यूट करेगा फॉर सैटेलाइट
इंटरनेट। हम एक फॉरेन टेक के
डिस्ट्रीब्यूटर बनके इतने खुश हो रहे हैं।
एंड दिस इज़ अ स्ट्रेटेजिक पीएसयू ऑफ़ द
गवर्नमेंट ऑफ़ इंडिया। इसका काम है कि हम
उस डिपेंडेंसी को खत्म करें। और हम उस पे
ताली बजा रहे हैं आज के दिन। दिस डजंट मेक
एनी सेंस एट ऑल। दीज़ आर थिंग्स टू सॉल्व
फॉर। मैं इसी वजह से यह भी बोलता हूं कि
बहुत सारे लोग बोलते हैं कि यार हम
एलएलएम्स क्यों बना रहे हैं? यह वो अरे
भैया
हाउ मेनी मेंबर डू यू हैव आउट हियर इन योर
टीम? कितने लोग हैं आपकी टीम में?
150 140
हाउ मेनी पीपल ऑफ़ देम यूज़ इदर चार्ज
जीपीटी और क्लाउड?
ऑलमोस्ट एवरीवन।
राइट? अच्छे खासे लोग जो दोनों भी यूज़
करते होंगे। मैं मानता हूं चलो 200
सब्सक्रिप्शन है आपके पास। हर एक पे अगर
$20 का सब्सक्रिप्शन है। आपने $200 वाला
नहीं लिया तो वी
नहीं फुल पैकेज सबका सब है। राइट?
सो वी यूज़ अ लॉट।
कितना एक्सपेंस है? एंड दिस इज नॉट जस्ट
यू। मैं यह वो हर इंडस्ट्री हर कंपनी ये
चीज कर रही है। यह पैसा कहां जा रहा है?
दिस इज प्योर आउटगो ऑफ़ मनी फ्रॉम इंडिया।
एंड वी आर क्रिटिकली डिपेंडेंट ऑन फॉरेन
कंट्रीज। चाइना इज़ नॉट।
यूरोप इज़ एक्चुअली सॉल्विंग फॉर इट।
फ्रांस के पास मिस्तरल है। दे डोंट वांट
टू बी डीलिंग वि ओपन एआई और वि जेमिनाई
एटसेट्रा। दे आर बिल्डिंग फॉर इट। व्हाट
आर वी डूइंग अबाउट इट। दिस इज़ अ सीरियस
क्वेश्चन। वहां पे्ट है कि ठीक है यार
सर्वम जैसी कंपनीज़ को सपोर्ट करो। मैं
उन्हें नहीं जानता हूं। मेरे को कोई पैसे
नहीं मिले हैं। बट वी रियली नीड दी कंपनीज़
टू कम आउट। इमरजेंट आप भी उसकी बात करते
हो। मैं भी करता हूं। मैं उनके साथ कुछ
पेड कोलैबोरेशंस भी कर चुका हूं। बट वी
रियली नीड दीज़ कंपनीज़।
हम ये कब जानेंगे कि ऐसी और कंपनीज़ हम
क्यों नहीं बना रहे? अदरवाइज़ हर एक चीज़ के
लिए वी आर ओनली बिकमिंग नेट नेट नेट
डिपेंडेंट्स। एंड दैट्स अ बिग प्रॉब्लम।
यह एक-एक चीज जो है ना यह हमें वह जो ₹150
पर डॉलर का जो है हमें उसके और पास लेके
जा रही है। हम उसे रियलाइज़ नहीं करते।
सी यू आर सेइंग कि आपका प्रेडिक्शन है कि
रुपी और गिर के ₹150 जितना हो जाएगा $1 के
लिए।
एंड वो तब तक होते रहेगा क्योंकि
दो स्ट्रक्चरल चीजें चाहिए होती है अगर
आपको आपकी करेंसी और आपका पैसा स्ट्रांग
करना हो। या वन इज आपकी ग्लोबल डिमांड
होनी चाहिए कि आपकी करेंसी की डिमांड है
किसी ना किसी तरीके की वजह से। या तो आपने
दुनिया में बहुत लोन दे रखा है या दुनिया
में आप किसी को कोई एक बेटर पेमेंट ऑप्शन
देते हो या दूसरी कंट्री की हेल्प करते हो
किसी रीज़न से जो हम अभी कर नहीं पा रहे
हैं और करते नहीं है ज्यादा। राइट? दैट इज
वन। सेकंड इज़ या तो आपके पास कुछ ऐसा है
जो दुनिया को चाहिए।
या
और वो तब तक नहीं हो सकता जब तक दो
स्पेसिफिक चीजें नहीं होगी। वन इज या तो
सप्लाई चेन डेप्थ नहीं बनाओगे आप कि एंड
टू एंड रॉ मटेरियल से ले एंड तक आप ही बना
रहे हो ताकि आप की चीजें आप बना पा रहे हो
तो देन आप इतना अच्छा बना पा रहे हो इतने
सस्ते में बना पा रहे हो कि दुनिया में
बेच पाओगे दैट इज वन और सेकंड इज़ या तो
टेक्नोलॉजिकल एडवांसमेंट कि टेक्नोलॉजी के
लिए आपने इतना फोड़ दिया कि आप सेटेलाइट
में इंटरनेट प्रोवाइड इंटरनेट प्रोवाइड कर
रहे हो वाई-फाई प्रोवाइड कर रहे हो और
सेटेलाइट के थ्रू पूरी दुनिया में देना
चाहते हो राइट ये दोनों चीजें इंडिया में
नहीं हुई जो ये सारे लोग बोलते हैं कि
करेंसी अगर अगर डी वैल्यू होती है और कम
होती है तो उससे एक्सपोर्ट बढ़ता है। वो
तो फॉल्स एक टेक्स्ट बुक डेफिनेशन है। वो
नहीं हो रहा है क्योंकि पिछले कुछ सालों
में या पिछले डेकेड में हमने वो नहीं
देखा। दूसरी कंट्री जिधर ऐसा नहीं हुआ है
वियतनाम जो एक कंटेंडर है चाइना प्लस वन
के लिए जैसे इंडिया एक कंटेंडर है उनकी
करेंसी इतनी तेजी से नहीं गिरती है लेकिन
तो भी वो ज्यादा एक्सपोर्ट बढ़ाते जा रहे
हैं इंडिया अब एक्सपोर्ट नहीं बढ़ा पा रहा
है
या
दिस इज योर सेइंग फॉर दिस एंड देन यू आर
सेइंग कि उसके बाद अब जो कंट्री में एक
सेंटीमेंट है जहां पे ये बोल रहे हैं कि
हमें बाहर के प्रोडक्ट्स यूज़ नहीं करने
चाहिए व्हिच इज ट्रू व्हिच इज गुड वी शुड
डू दैट और जो यह गोल्ड नहीं खरीदने का है।
व्हिच इज़ आल्सो गुड इन अ वे कि हमको गोल्ड
कम खरीदना चाहिए ताकि हम लोग और लेस
डिपेंडेंट बने ताकि यह हमारा आपका जो
प्रेडिक्शन है ₹150 का वो नहीं हो।
या
पर दैट इज नॉट अ लॉन्ग टर्म एक्चुअल
स्यूशन।
पॉसिबल नहीं है।
उससे कोई पॉसिबल नहीं है कि भाई ये अगर कर
देंगे लोग गोल्ड गम खरीदेंगे तो कुछ हो
जाएगा। इसमें कुछ नहीं है।
मैं दो चीज़ और ऐड करता हूं। ठीक है? ऐसे
समझिए।
बट आई समराइज्ड योर पॉइंट
परफेक्टली। परफेक्टली।
मैं खाली दो चीजें बोलूंगा। नंबर वन। सो
ऑन द मैन्युफैक्चरिंग साइड ऑफ़ थिंग्स राइट
द प्ले बिक वै सिंपल मैं एक ऐसी कंट्री का
एग्जांपल दूंगा जो लोगों को आज के दिन
अच्छा नहीं लगता हिंदुस्तान में
बांग्लादेश
हम
हम जो जींस वगैरह पहनते हैं कपड़े पहनते
हैं अच्छे खासे उसमें से बांग्लादेश के से
बन के आते हैं बांग्लादेश इंडिया से
ज्यादा करता है एक्सपोर्ट मजाक है क्या
कैसे हो सकता है कमाल की बात आपको बताऊं
कैसे है ये बिफोर बिकमिंग अ बिग टाइम
एक्सपोर्टर ऑफ़ टेक्सटाइल्स और गमेंट्स
उन्होंने ऐसा अपना पूरा सेटअप किया दे
रीच्ड अ पॉइंट वेयर 85% ऑफ़ व्हाटएवर एनी
पर्स पर्सन वाज़ वेरिंग इन बांग्लादेश वाज़
मेड इन बांग्लादेश।
ये कैसे किया? दे सॉल्व फॉर द बेसिक्स।
अपने कपड़े पहले बनाने शुरू किए ना।
इंपोर्ट्स को पलेटाया। एज़ आई सेड सॉल्व द
बेसिक्स। यहां पे भी वही करना पड़ेगा हर
इंडस्ट्री के लिए। लेट अस फर्स्ट बिगेन टू
मेक फॉर आल्स। फिर पता होता क्या है? वो
जो सेटअप बन चुका है मशीनें एमोटाइज़ होने
लग जाती है। उसका खर्चा तो ऑलरेडी निकल
चुका है। अब उसके लिए एक्सपोर्ट्स के लिए
आप सामान बनाते हो। अब थोड़ा सा और सस्ता
बना सकते हो। यू बिन टू कमट विद अदर्स।
डंप करना। चाइना की एक खासियत है। सो फॉर
एग्जांपल ऐसे सोचिए कि इंडिया में एक
कंपनी है जो कि अपने आप कह सकते हो कि
सूटकेसेस बनाती है। ठीक है? उसने अपने
इन्वेस्टमेंट के अपने लिए बना रही है।
चाइना में एक कंपनी है जो कि 12 कंपनीज़ के
लिए सूटकेसेस बनाती है। उसके जो मशीनंस का
सेटअप का जो भी उसका खर्चा है, राइट? वो
12 कंपनीज़ से ऑलरेडी वो निकाल चुकी है। वो
और 12 के लिए और सस्ता बना सकती है आने
वाले के लिए। दैट इज़ व्हाई थिंग्स चेंज।
या
लेट्स सॉल्व फॉर द बेसिक्स फर्स्ट। अपनी
नीड के लिए औरों के लिए करना और अपने आप
आसान हो जाएगा। हर कैटेगरी के अंदर हर
स्मालस्मॉल कैटेगरी के अंदर इट्स नॉट जस्ट
कि अच्छा ईवी बैटरी खुद बनाते हैं या फिर
कैमरा बनाए। कैमरा नहीं बनेगा हमसे। व्हाट
वी हैव टू सॉल्व फॉर स्मॉल मॉड्यूल्स दैट
गोइंग टू इट। लेट्स बीन टू मेक दोस। सो आई
एग्री विद दिस पॉइंट। एंड ये बहुत बेसिक
डेफिनेशन है। आई थिंक ये सब समझते होंगे।
क्यों नहीं कर पा रहे हैं? इज़ अ क्वेश्चन।
हम क्यों नहीं बना पा रहे हैं? उसका रीजन
लार्जेस्ट यू आर सेइंग कि वो हमें
गवर्नमेंट लेड इंसेंटिव नहीं मिलते ताकि
हम वो सस्ता बना पाए जिसकी वजह से हम
दूसरी कंट्री से कमट कर पाएं।
गवर्नमेंट लेड इंसेंटिव्स मिलते हैं बट
कुछ ही लोगों को मिलते हैं।
सो यू आर सेइंग कि ये डेमोक्रेटाइज हो
जाना चाहिए और हर किसी को मिलना चाहिए।
सो बट हर किसी को मिलेगा। डोंट थिंक दैट्स
अ फेयर वे टू डू इट?
यस अब्सोलुटली। इट हैज़ वर्क आउट वेरी फेयर
वे फॉर कंट्रीज लाइक साउथ कोरिया, जापान,
वियतनाम, चाइना
चाइना एंड देन दैट अक्रॉस टू स्टेट्स ऑफ़
इंडिया एक्चुअली तमिलनाडु एंड गुजरात। सो
फॉर एग्जांपल
गुजरात
क्या कह रहा हां
गुजरात में इतना बिज़नेस बूम होता है, सब
कुछ होता है। राइट?
व्हाट इज द बेस्ट थिंग अबाउट गुजरात?
आई डोंट नो।
सबके लिए एक पॉलिसी है।
तो उधर आप छोटे एंटरप्रेन्योर हो या बड़े
एंटरप्रेन्योर हो डजंट मैटर।
डजंट मैटर। अगर आप इस पॉकेट के अंदर आप
इन्वेस्टमेंट कर रहे हो तो आपको ये मिलेगा
खत्म हम नॉट एवरीबडी हैज़ गो टू द हैज़ टू
गो टू दी अप्रोच दी गवर्नमेंट अपने-अपने
लेवल के हिसाब से एंड देन नेगोशिएट अ
पैकेज कि हां जी मुझे 110% एसजीएसटी का
रिफंड मिलना चाहिए। मुझे इतना मिलना
चाहिए। तब जाके मैं प्लांट लगाऊंगा। वो तब
होता है जब किसी ऐसे सेक्टर का
इन्वेस्टमेंट आप कर रहे हो जिसके लिए
पॉलिसी अभी एक्सिस्ट नहीं करती। अनदर थिंग
फॉर यू एंड दी ऑडियंस एज वेल। गुजरात एंड
तमिलनाडु आर टू स्टेट्स
जो कि हमेशा हर बार किसी भी इंडस्ट्री के
लिए जब भी कोई पॉलिसी निकाली जाती है
डेडिकेटेड कि हां इसकी मैन्युफैक्चरिंग
यहां होनी चाहिए। इसका सेटअप यहां होना
चाहिए। दीज़ आर द टू स्टेट्स जो सबसे पहले
आते हैं। सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग
पॉलिसी इंडिया में आती है लगभग 12 स्टेट्स
के पास है। द फर्स्ट वन टू कम आउट विथ इट
वाज़ गुजरात।
स्पेस टेक के लिए मैन्युफैक्चरिंग का जो
आपका था जो पॉलिसी है गुजरात, तमिलनाडु
एंड कर्नाटका एंड तेलंगाना वर दी फर्स्ट
वंस टू कम विद अगेन गुजरात तमिलनाडु इसमें
भी आते हैं। पिक एनी सेक्टर
डेडिकेटेड पॉलिसी फॉर दैट वेरी सेक्टर ये
दो स्टेट्स आपको हमेशा वहां दिखते हैं।
इंटरेस्टिंग
क्वेश्चन इज़ एमपी वाले क्यों नहीं कर रहे
भाई? हरियाणा वाले क्यों नहीं कर रहे यार?
राइट? बिहार वालों को किसने रोका है?
ऐसा क्यों है कि गुजरात की जब सेमीकंडक्टर
पॉलिसी आई उससे ढाई साल बाद यूपी की आई।
सवाल यह होना चाहिए। क्यों होता है ऐसा?
अपनी-अपनी प्रायोरिटीज है सर। आप ऐसे
सोचिए ना इंडिया पॉलिसीज कौन बना? देयर आर
ब्यूरोक्रेट्स। राइट? ब्यूरोक्रेट्स
देमसेल्व्स हैव टू बी अ दैट एंटरप्राइजिंग
एज वेल एज उनको उतना नॉलेज भी होना चाहिए।
मैं ये नहीं कह रहा हूं कि वहां वालों के
पास नॉलेज नहीं है। बट मोर अबाउट अगर आप
गुजरात में हैं। यू आर सराउंडेड बाय
इंडस्ट्रीज, बिज़नेसमैन एवरीवेयर
सोचते रह। यू आर डीलिंग विथ देम एव्री
सिंगल डे। आप उनके डेली आप ब्रेस्ट स्टंप
कर रहे हैं। अच्छा और क्या नए
इन्वेस्टमेंट ला सकते हैं? क्या करें
एसेट्रा। वो आपको बताते हैं यार ये वाला
करते हैं। इसका यहां पे फ्यूचर है। ये
देखो चाइना में क्या हो रहा है। यूएस में
क्या हो रहा है। अब आगे फ्यूचर इसका है।
तब जाके आपको वो पॉलिसीज बनती है। फेयर
टेल मी वन थिंग आई एम स्विचिंग हियर ऑन
दिस।
कि इंडिया ऑन द आउटसाइड नंबर्स, डेटा,
नॉइज़ ऑल अराउंड द वर्ल्ड। नॉट जस्ट हमारे
अंदर
एक नैरेटिव है हम लोगों का वि इज बहुत
सारा डाटा उसको बैक भी करता है कि इंडिया
वन ऑफ़ द फास्टेस्ट ग्रोइंग इकॉनमीज़ इन द
वर्ल्ड हर कोई इंडिया को आए देख लाइक
एवरीबडी इज़ आईंग इंडिया स्टार दिख रहा है
अभी नेक्स्ट डेकेड हमारा दिख रहा है राइट
तो वन ऑफ़ द फास्टेस्ट ग्रोइंग इकॉनमीज़ इन
द वर्ल्ड हर साल हम देखते हैं अब ये बढ़
गया ये बढ़ गया बट ऑन एन इंडिविजुअल लेवल
पीपल लाइक यू एंड मी और जो सैलरीड
एंप्लाइजज़ हैं या जो जो भी इसको देखें
उन्हें और गरीब फील क्यों होता है? और
पोरर क्यों होता है? व्हाई? ऐसा क्यों है
कि हमारी इकॉनमी इतनी तेजी से बढ़ रही है।
बट हमें ऐसा लगता है कि हमारा जो पैसा है
वो महंगाई इतनी बढ़ते जा रही है या महंगा
इतना होता जा रहा है जहां मैं शायद और
गरीब होते जा रहा हूं।
यार मेरे इस पे
दैट ओनली अ फीलिंग कि ये डाटा भी बैक करता
है।
यार मेरा इस पे कुछ ओपिनियन है। ठीक है?
नंबर वन यू एंड आई डोंट कम इंटू दैट
इंडिया। अगर इंडिया 6% से ग्रो कर रहा है
तो हम लोग शायद 30 40 50% से कर रहे
होंगे। ठीक है? बट अगर हम उससे ग्रो कर
रहे हैं तो अच्छा खासा इंडिया तो 1 2% पे
भी नहीं चल रहा होगा। मोरेंटली
एक बहुत बड़ी विडंबना है। ये जो एक टैग जो
होता है ना एक तो टैग्स ना टैग फेमस हो
जाते हैं। टैग क्या है? फास्टेस्ट ग्रोइंग
मेजर इकॉनमी। हम क्या करें हम उसका अगर
हमारे देश के लोग फिर भी 80 करोड़ लोगों
को फ्री का खाना चाहिए। अभी तो फ्री का वो
छोड़ो। हम भी भैया फ्री का खा रहे हैं।
हमें रियलाइज नहीं होता है।
यूरिया नैनो यूरिया हमने बनाना शुरू किया
है। सो यूरिया की जब बात करते हैं राइट?
लगभग लगभग $800 कुछ का आता था।
हम
ठीक है? इसका रेट भयंकर बढ़ गया।
हम
लेकिन किसान के लिए रेट अभी भी वही है। तो
ये एक्स्ट्रा जो है वो कौन भर रहा है?
हमारी सरकार भरती है अपनी जेब से। सरकार
कितना भर रही है? आपको पता है? हमारे जो
फर्टिलाइजर की जो सब्सिडी होती है टू
इंश्योर कि अच्छा किसान को महंगा ना पड़े।
सरकार ने पिछले बजट किया था 1.7 लाख
करोड़। दे एंडेड स्पेंडिंग 2.1 लाख करोड़।
इस साल बिकॉज़ ऑफ़ दिस सिचुएशन नाउ ये नंबर
कहीं भी जा सकता है। 2.7 लाख करोड़, 3 लाख
करोड़। ये 3 लाख करोड़ वो है जिसके कारण
सब्जियां, फ्रूट सब कुछ सस्ते रहते हैं और
वो हम भी खाते हैं। हम
हम रियलाइज नहीं करते। कि अच्छा हम जो ये
शिमला मिर्च खा रहे हैं चाहे लोगों के घर
हरी आती है हमारे घर में चलो हम थोड़ा आगे
निकल गए हमारे घर लाल और हरी लाल और पीली
वाली भी आने लग गई राइट
वो जिस रेट पे आ रही है शायद उससे और डबल
रेट पे होती अगर हमारी सरकार ये साल का 2
लाख 3 लाख करोड़ इन सब्सिडीज पे नहीं
निकाल रही होती तो बट इसके ऊपर कोई बात
नहीं करता
नो बट ये वाली रियलिटीज भी हैं। एंड ओवरऑल
आई टेल यू कि यू एंड आई
हम लोग भी जो हमारे स्पेंड्स हैं
जितना तेजी से वो बढ़ रहे हैं उतनी तेजी
से हम लोगों की भी इनकम नहीं बढ़ती
नो अब्सोलुटली एंड आई एम नॉट टॉकिंग अबाउट
न्यू वेंचर्स एंड न्यू एलोकेट्स मैं बात
कर रहा हूं स्टेडी बिनेस इनकम या स्टेडी
आपका सैलरी इनकम
आप ईयर ऑन ईयर अगर आप
सिर्फ फॉर एग्जांपल हेल्थ इंश्योरेंस ले
लो तो 14-15% हर साल बढ़ता है सरकार बोलती
है कि भाई महंगाई तो सिर्फ शायद 2 से 5%
के बीच में ही बढ़ती है। डिफरेंट डिफरेंट
थिंग्स डिफरेंट था। राइट?
या
तो हेल्थ इंश्योरेंस वैसे होता है। आप अगर
आप महंगे स्पेंड्स की बात कर लो खाना
वगैरह सब छोड़ के
या
ऑयल डेफिनेटली ऑयल तेल ये तो बहुत ज्यादा
तेजी से बढ़ते जा रहा है।
देन जो आपकी जिम मेंबरशिप्स है आपका
रोजमर्रा का रेंट है।
एवरीडे ये बहुत तेजी से है। रेंट आपका
बहुत ज्यादा इनफ्लेट हो जाता है। घरों की
प्राइस है जिसको घर खरीदना है। ऑप्शन थ्रू
द रूफ। कोई आदमी कितना भी अमीर है घर की
प्राइस देख के उसको लगता है वो गरीब ही
है। क्योंकि जिस हिसाब का घर उसको चाहिए
था 5 साल पहले आज वो घर वो खरीद ही नहीं
सकता। उसने 5 साल मेहनत करके इसलिए पैसे
कमाए थे कि ये घर खरीदूं आज वो उसकी औकात
के बाहर है।
राइट? सो ओवरऑल इट फील्स लाइक देयर इज़ सम
काइंड ऑफ़ मनी इल्लुजन
कि हमें इल्लुजन तो है कि यार 2 से 5%
महंगाई बढ़ रही है लेकिन एक्चुअल आप रेट
देखने जाओ तो शायद 10 15% हर हर साल बढ़ते
जाते हैं।
ठीक है राज देखो आपने ना तीन बातें आपने
बोली है इसमें। ओके
तीनों को एक-एक कर देते हैं। नंबर वन
क्यों ग्रे ग्रोथ अगर हमारी इतनी अच्छी है
तो हमें फील क्यों नहीं होती? मैं आपको
सीधा उसका आंसर देता हूं।
वी आर द फास्टेस्ट ग्रोइंग मेजर इकॉनमी बट
वी आर नॉट गोइंग ग्रोइंग फास्ट इनफ। चाइना
के पास लगभग 15 साल ऐसे थे जब उसने
कंसिस्टेंटली 10% से ऊपर उसने ग्रो किया
है। हमने नहीं किया है। एंड ये क्यों मैटर
करता है? हमारी अच्छी खासी जनता ऐसी है जो
कि बहुत-बहुत गरीब है।
हम
जिनके पास काम नहीं है। अनइंप्लॉयमेंट
बहुत ज्यादा है। ऑफिशियल स्टार्ट जो भी
कहे हम सब जानते हैं।
हम
उसको सॉल्व करने के लिए आपको और ज्यादा
तेजी से ग्रो करने की जरूरत है। फास्टेस्ट
ग्रोइंग इन द वर्ल्ड इज़ नॉट इनफ। इफ इट इज़
नॉट फास्ट इनफ फॉर रिक्वायरमेंट्स। हमारे
देश की नीड और ज्यादा है। इसी वजह से कई
इकोनॉमिस्ट और बहुत सारे लोग आके बोल चुके
हैं दैट वी हैव टू नाउ एम फॉर 10% प्लस।
हमारी सरकार के अपने इकोनॉमिस्ट अरविंद
पानगरिया जी जो कि पहले हमारे वाइस
चेयरमैन या वाइस चांसलर जो भी बोलते हैं
ऑफ नीति आयोग थे। ही यूज़्ड टू ओपनली
टॉकिंग कि हमने वो रेल्स हमने बना दी हैं
जिसके कारण आने वाले सालों में वी आर
लुकिंग एट 8% प्लस ऑफ सस्टेंड ग्रोथ। कहां
है वो 8%?
जब तक हम आठ फिर 10 की तरफ नहीं जाएंगे।
इन लोगों के लिए हम काम हम नहीं जनरेट कर
सकते। रिजल्ट इज वी आर डेफिनेटली दी
फास्टेस्ट ग्रोइंग मेजर इकॉनमी बट वी आर
नॉट ग्रोइंग फास्ट इनफ। दैट्स वेरी
डिफरेंट थिंग्स। नंबर वन अगला आपने बोला
इनफ्लेशन के ऊपर। अब ये अपने आप में बहुत
बड़ा किस्सा है। इनफ्लेशन के नंबर पे
विश्वास करना बंद कर दो जनता। मैं ये
बोल-बोल के थक गया हूं। व्हाई हमारी सरकार
खुद ये चीज़ बोलती है कि हमारे इनफ्लेशन के
जो कैलकुलेशन होता है ना लोगों को लोगों
को खाली ये दिखता है। अच्छा इनफ्लेशन का
नंबर ये है।
हम
लोग कभी डेफिनिशंस के अंदर नहीं जाते।
ओके।
गोइंग टू डेफिनेशनंस
पहले इनफ्ले मेक अ सिंपल
महंगाई होती क्या है वो बताओ और सीपीआई
सीपीआई से हम जज करते हैं इसको राइट
या सो देखो इनफ्लेशन का मतलब है महंगाई कि
कोई चीज आज इतने की है अगले साल इतने की
हो गई तो इतना जो बीच में डिफरेंस आया दैट
इज अ महंगाई
ठीक है
ठीक है अब कुछ चीजें जो सस्ती भी होती है
सो फॉर एग्जांपल एक टीवी अगर आप उठाते हैं
टीवी 1990 में जितने का आता था आज इतने का
आता है बहुत ज्यादा प्राइस करेक्शन हो गया
टेक्नोलॉजी लेड प्राइस रिडक्शन हुआ सोलर
पैनल आप ले लो रिडक्शन हुआ बहुत चीज़ लेकिन
महंगी भी होती जाती है
आपका एजुकेशन या फिर आपका खाने पीने का
खर्चा आपका हेल्थ केयर हो हो गया और बहुत
सारी चीजें होती है। हमारे कपड़े हो गए।
हर चीज़ के रेट बढ़ते जा रहे हैं। राइट? तो
बहुत सारे आस्पेक्ट्स होते हैं।
लेकिन दिक्कत कहां आती है?
हमारी सरकार डिफाइन करती है कि बॉस अगर आप
ओरल इनफ्लेशन देखें महंगाई उसको एक नंबर
में आप आखिर कैसे पिरोएंगे? इतने सारे
आइटम होते हैं।
और जरूरी नहीं है ना कि आप जिन चीजों पे
खर्चा करते हैं उस पे मैं भी करूं।
तो आपके लिए महंगाई अलग होगी। मेरे लिए
अलग है।
कैसे करेंगे?
हम
तो उसके लिए निकाल दिया एक कि इंडेक्स
जिसको बोलते हैं कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स।
सीपीआई।
ओके?
सीपीआई यानी कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स। अब
उसको कैसे कैलकुलेट किया जाता है? उसके
अंदर क्या किया गया? एक एवरेज इंडियन के
हिसाब से अब एक एवरेज इंडियन इतना वेल टू
डू नहीं है। हम
एक एवरेज इंडियन के हिसाब से वो क्या खाता
है, पीता है, क्या सर्विस कंज्यूम करता
है? उस हिसाब से आपको एक वेटेज दे दिया
जाता है अलग-अलग चीजों को।
298 ऐसे आइटम्स थे जिनको 2011 के टाइम पे
हम
सीपीआई के अंदर रखा गया कि इनका हम ट्रैक
करेंगे। क्या प्राइस मूवमेंट्स हो रहा है।
उस हिसाब से हम देखेंगे।
12 फरवरी 299 थे 298
299 या 298 आई
299
299 होगा बेसिकली उतने आइटम्स इन्होंने
रखे थे जिसके वो अलग-अलग चीजों के प्राइस
मेजर करते हैं कि अच्छा प्याज का क्या रेट
चल रहा है आलू का क्या चल रहा है एटरा
एटरा
ऐसे 299
या अमेजिंग पार्ट इज नाउ अगर आप ये 298 को
ओवरऑल ब्रैकेट्स में डाल दें तो लगभग 46%
जो ओवरऑल वेटेज है दैट वास फॉर फूड अलोन
कि हमारे देश की अधिकतर जनता के लिए असली
खर्चा खाना
खाना है जो हम बात करते हैं ना 80 करोड़
जनता को फ्री का खाना क्यों देना पड़ता
है? यह उसकी असलियत है। क्योंकि असली
अच्छी खासी जनता उतना कमाती ही नहीं है कि
वह और किसी के बारे में सोचे। उसके लिए
रोटी कपड़ा मकान जो है ना उसमें मकान तो
बहुत दूर है। कपड़ा वही वाला वो दो तीन
चार साल पहन लेगा लेकिन रोटी रोज का कैसे
लाए? वो खाना रोज का कैसे लाए? वो
इंपॉर्टेंट पार्ट है। ये 46% जो है ये
2011 में जो सेट हुआ था 2011-12 में। अभी
12 फरवरी 2026 यानी लगभग कितने तीन महीने
हुए? 3 महीने पहले तक यही चल रहा था। 15
साल में 16 साल में हमारे देश की इकॉनमी
कितनी बदली है? ट्रांसपोर्टेशन ये वो
मोड्स आपका डिजिटल इकॉनमी, फूड डिलीवरी,
ई-कॉमर्स, इंटरनेट, आपके टेलीकॉम के फोन
के रेट्स ये सब कुछ इसमें कैप्चर नहीं हो
रहा है।
तो जिन चीजों पे हम खर्चा करते हैं वो
गवर्नमेंट काउंट ही नहीं करती। एंड हेल्थ
केयर
तो महंगाई तो काउंट ही नहीं होती। फिर
हेल्थ केयर में डायग्नोस्टिक सर्विज वर
नॉट इंक्लूडेड व्हाइल कैलकुलेटिंग दिस।
क्यों? वो जो 298 जो आइटम्स थे उसके अंदर
डायग्नोस्टिक सर्विज को नहीं रखा गया था।
आपको पता है कितना बड़ा मार्केट है इंडिया
है डायग्नोस्टिक्स का। साल का लगभग $15
बिलियन का। और यह बढ़ रहा है हर साल लगभग
15 से 20% से। दीज़ आर नॉट मेरे नंबर्स।
Feasजी के सीईओ हैं। अह राहुल गुहा नाम
है। उन्होंने रिसेंट में इंटरव्यू दिया
था। आई थिंक द कैपिटेबल को उसमें उन्होंने
बताया था उनका क्लेम है मेरा नहीं है बट
अगर आप देखोगे $5 बिलियन डॉलर का मार्केट
है एक एवरेज हिंदुस्तान का आदमी अगर आप इस
15 बिलियन के हिसाब से मैथ करें आई थिंक
साल का लगभग लगभग ₹1000 खर्च करता है
डायग्नोस्टिक्स के ऊपर
एक एवरेज आदमी की जो साल की इनकम है जो
महीने की कमाई है पर कैपिटल इन दिखे ये
बहुत बड़ा रकम है और यह हम महंगाई में
काउंट नहीं कर रहे हैं दैट्स व्हाई 12
फरवरी जो अभी गई है उस टाइम अभी चेंजेस
अनाउंस किए गए। तो आज तक की जो महंगाई
हमें लगता है कि हर साल से जो महंगाई है
वो 2% 5% 6% व्हाटएवर अलग-अलग अलग-अलग
नंबर्स अलग-अलग साल के उस हिसाब से जो बढ़
रही है वो सब यूज़लेस है। कोई मतलब नहीं
है।
आपके मेरे लिए यूज़लेस है। शहरों में रहने
वाले मेजॉरिटी के लिए यूज़लेस है। ऐसे
समझिए कि वो ऐसे डिज़ है।
मोस्टली जो लोग ये देख पा रहे होंगे उनके
लिए यूज़लेस होगा।
हां। अगर इंटरनेट है, फोन है, हाथ में देख
रहे हैं तो मेजॉरिटी लोग प्रोब्ली इस इस
बिल पे खर्चा कर रहे हो।
चलो इंटरनेट फोन तो बहुत छोटे बिल हैं। आप
सीधे ऐसे समझिए ना कि आपके बच्चे की स्कूल
की जो फीस है उसको सीपीआई की कैलकुलेशन
में कम वेटेज मिला है। वर्सेस प्याज का
क्या रेट चल रहा है? मैं इससे बेहतर तरीके
से पुट नहीं कर सकता। और इसीलिए है ना कि
यार आप देखते हो ना कि प्याज के लिए जो
ऊपर जाते हैं। लोगों को टेंशन होती है अरे
इलेक्शन में आ रहा है। फिर आप देखते हो
अच्छा ठीक है हम प्याज के हम इंपोर्ट्स
करते हैं इजिप्ट से सब कुछ उस टाइम पे बीच
में हुआ है कई बार। वो क्यों किया जाता है
कि प्यास बहुत ज्यादाेंट है। आपके बच्चे
की पढ़ाई से ज्यादा सरकार के लिए वोेंट हो
जाता है। क्योंकि प्यास के रेट अगर थोड़े
ऊपर गए
सरकार का इलेक्शन जितनातना मुश्किल हो
जाता है।
80 करोड़ की बात है ना।
एक्सक्ट्ली
मोर देन 50%
एक्सैक्टली। सो इससे बढ़िया कोई तरीका
नहीं बताने का। आपके हमारे बच्चे, हमारे
पेरेंट्स के या हमारे हेल्थ केयर उससे
ज्यादा इंपॉर्टेंट हमारे देश में सीपीआई
की कैलकुलेशन में प्याज का रेट होता है।
आपके खाने पीने का आटे का चावल का रेट
होता है। एंड ये मैं किसी को क्रिटिक करके
नहीं बोल रहा हूं। इसमें एक ही सशन बनता
है। आइडियली
आइडियली आपका इंडिया इज़ इक्वल टू जो ऐसे
सजित पाई है आपके ब्लूम वेंचर्स के इफ यू
नो हिम वो बोलते हैं देयर आर थ्री
इंडियाज। इंडिया वन, इंडिया टू, इंडिया
थ्री। मैं बोलता हूं देयर आर सेवन
इंडियाज़। हर सेवन के हिसाब से अलग-अलग
कैटेगरीज हैं। बिल्कुल अलग वे में ये
बिहेव करते हैं। बिल्कुल अलग टाइप की इनकी
पर कैपिटा इनकम्स हैं। बिल्कुल अलग टाइप
की इनके स्पेंड है। तो उस हिसाब से
अलग-अलग इनफ्लेशन के इनके नंबर निकालो।
तो आपके लिए महंगाई अलग तरीके से कैलकुलेट
होनी चाहिए और जो बहुत ज्यादा पैसे कमाता
है उसके लिए अलग और जो बहुत ज्यादा गरीब
है उसके लिए अलग।
बिल्कुल। क्योंकि उनके खर्चे ही अलग है
ना।
कोई ऐसा आदमी जिसका बच्चा आज की इन सरकारी
स्कूल में पढ़ता है। उसको अगर मैं जाकर
बोलता हूं कि यार एजुकेशन इंक्लेशन इन दिस
कंट्री इज 14 15 20% उसके लिए इरिलेवेंट
है।
कोई मतलब नहीं।
उसके ऊपर में वो क्यों उसका मैं उसके
कैलकुलेशन उसके बताने जाऊं। वैसे तो
बताएगा ही नहीं कोई। लेकिन पॉइंट इज़ उसके
लिए इरिलेवेंट है। एट द सेम टाइम आपको
मुझे कोई आके बोलता है कि यार भाई प्याज
जो ₹40 का था ना वो 80 का हो गया। हमें
उतना फर्क पड़ेगा क्या? टू बी फ्रैंक हम
खाएंगे ना। तो हमारे कैलकुलेशन में उसको
इतना क्यों वेटेज मिला? मुझसे फर्क पड़ेगा
कि यार मैं जो हेल्थ इंश्योरेंस में लिया
था उसका प्रीमियम एक साल में 25% क्या बढ़
गया? मुझे उससे फर्क पड़ेगा। मुझे उससे
फर्क पड़ेगा कि यार मैं जिस हॉस्पिटल में
जाता हूं 2 साल पहले मैंने मम्मी का वहां
ऑपरेशन करवाया था किडनी स्टोन का मेरे ₹
लाख लगे थे। अब सडनली ₹45 लाख कैसे लग रहे
हैं पापा के टाइम पे। हमें उससे फर्क
पड़ता है। तो वेरी डिफरेंट इंडियास वी
कांट कंपेयर द टू। बट सीपीआई एज अ ब्रॉड
इंडेक्स एंड टू बी वेरी क्लियर। सरकार
इसके दो तरह के इसके इंडेक्स निकालती है।
रूरल एंड अर्बन। बट रूरल एंड अर्बन भी आप
कैसे कंबाइन करोगे? हमारे देश की जीडीपी
अगर आप देखोगे तो
मुंबई एंड दिल्ली 4% ऑफ़ देश की पॉपुलेशन
इनके पास है। लगभग 15% जीडीपी इन दो
सिटीज से आती है। अगर आप टॉप 10 अगर आप
सिटीज देखेंगे उससे आती है 30 32 33% के
आसपास। मतलब क्या हुआ? पहली दो सिटीज़ 15%
ऑफ़ द जीडीपी। अगली आरसीटीज और 15% ऑफ द
जीडीपी आप पहली दो से बाकियों को ही आप
कंपेयर नहीं कर सकते।
उससे पिछड़ा वाला तो फिर छोड़ ही दो।
Reliance बोलता है कि वी आर लाइव इन हमारा
जो Jio दैट इज़ लाइव इन सम 1300 ऑड सिटीज।
हम तो पहले 10 की बात कर रहे हैं सर। बाकी
ये जो 1300 वो उसके बाद आ रही हैं। राइट?
इट्स अ वेरी डिफरेंट इंडिया। इंडिया इज़
सेवन डिफरेंट प्रोबेबबली 17 डिफरेंट
इंडियाज़। 17 अलग आप इनफ्लेशन के नंबर मत
निकालो। बट सात भी मत निकालो। कम से कम
चारप तो निकालो। बिकॉज़ वी आर वेरी डिफरेंट
पीपल। द वे समबडी इन उत्तर प्रदेश
स्पेंड्स इज वेरी डिफरेंट फ्रॉम द वे
समबडी इन कर्नाटका स्पेंड्स। फॉर एग्जांपल
उत्तर प्रदेश में आपका पर कैपिटा इनकम इज़
रफली समथिंग लाइक $200 या $00
आपका यही अगर आप कर्नाटका आते हो इट्स अ
वेरी डिफरेंट नंबर। कैसे आप दोनों का एक
साथ आप रख सकते हो? जैसे फॉर एग्जांपल मैं
आपको एक और एग्जांपल देता हूं।
अनइंप्लॉयमेंट का हमारा क्या फिगर आपको
पता है? हमारे सरकार का एक सर्वे होता है
जिसको बोलते हैं पीएलएफएस पीरियडिक लेबर फ़
सर्वे। हम
अब यह मैं कई और जगह पहले बता चुका हूं।
तो कुछ लोगों को ऑलरेडी पता होगा शायद
मेरी ऑडियंस में पर्टिकुलरली। मैं बड़ा
शौक था जब मेरे को यह पता चला कि पीएलएफएस
का सर्वे बहुत सिंपल होता है। आप सर्वे
करते हो सिंपल मैथ है।
अगर जयंत और राज एक चाय की टपरी पे बैठे
हुए हैं। दो मजदूर हैं।
जयंत ऐसा आदमी जिसको हफ्ते भरों से चाय की
टपरी पे बैठा है। कोई आके काम पे नहीं
लेके गया। राज एक ऐसा आदमी जिसको किसी ने
आके बोल दिया चल भाई गोडाउन में चल। ₹100
दूंगा। घंटे भर का काम है। सामान उठा के
गाड़ी में रख दे। राज इस काउंटेड एस एन
एंप्लॉयड पर्सन। आई एम काउंटेड
अनइंप्लॉयड। क्या राज और जन्म में कोई
फर्क है यहां पे?
हम दोनों बेरोजगार उस पे बैठे थे। बाय
चांस किसी ने आके राज को बोल दिया कि चल
क्या हम एंप्लॉयड हुए?
बट डेफिनेशन इज़ सच। अब जब मैंने इसके ऊपर
जब मैंने थोड़ा मैंने अवेयरनेस मैंने
क्रिएट किया तो कुछ लोग आके बोलते हैं दैट
इज़ अ यूएन डिफाइंड स्ट्रक्चर। हर जगह ये
होता है। मैं बोला दैट इज़ योर जस्टिफिकेशन
कि अच्छा ठीक है हम मिसलीड हो रहे तो कोई
दिक्कत नहीं है क्योंकि वो नंबर हमें कुछ
सॉल्व नहीं कर रहा है। राइट? सो दैट पार्ट
इज़ समथिंग दैट वी रियली नीड टू अंडरस्टैंड
कि इससे फर्क नहीं पड़ना चाहिए। अच्छा
दुनिया भी यही करती है। पॉइंट इज़ क्या
इससे पर्पस सॉल्व हो रहा है? नहीं हो रहा
है तो लेट्स डिमांड फॉर समथिंग बेटर।
सिमिलरली अब आते हैं तीसरे वाले पॉइंट पे
जो आपने भी रेज़ किया था। व्हिच इज़ लोग घर
कैसे खरीदेंगे एंड ऑल दैट। राइट? उस पे
आता है मेरा एक और प्रेडिक्शन। सो
प्रेडिक्शन नंबर टू जो मैं लेके आया था जो
जिसके ऊपर मुझे जरूर बात करनी थी। बाय
चांस आपने वो टोपिक उसके ऊपर भी करते हैं।
हम
तो यह मेरा सिंपल सा प्रेडिक्शन है। मोस्ट
इंडियंस विल नेवर बी एबल टू ओन अ होम। एंड
ये मैं बहुत दिल से चाहता हूं कि भाई मैं
गलत साबित हो जाऊं।
मोस्ट इंडियंस
मोस्ट इंडियंस अधिकतर इंडियंस
यस।
कभी घर नहीं खरीद पाएंगे।
नहीं।
और ये मुझे बोलते हुए अच्छा नहीं लग रहा।
एंटायर ड्रीम इज हम सब काम इसलिए करते हैं
मेजोरिटी इंडियंस कि एक दिन अपना घर
बनाएंगे और घर खरीदेंगे।
या
एंड यू आर सेइंग दैट ड्रीम अब इंडिया में
पॉसिबल नहीं होगा।
इंडिया में मेजोरिटी लोगों को क्या चाहिए?
महंगे घर सस्ते घर?
घर चाहिए और महंगे घर चाहिए।
अफोर्ड क्या कर सकते हैं लोग? महंगे घर या
सस्ते घर?
सस्ते घर।
सस्ते घर। राइट?
12% ऑफ न्यू सप्लाई कमिंग इन द मार्केट एस
पर एनरॉक। अगेन Google पे सर्च करो। एनरॉक
के हिसाब से 12% ऑफ द न्यू सप्लाई कमिंग
इन द मार्केट्स इज फॉर अफोर्डेबल हाउसिंग
मोर देन 50% सॉरी रेस्ट ऑफ़ दैट इज नॉट
अफोर्डेबल हाउसिंग मोर देन 50% इज़ हाउसेस
बिय्ड 1.5 करोड़
लग्जरी होम्स या
कैसे खरीदेंगे लोग एंड बाय द वे दिस इज़
ऑलरेडी हैपनिंग कमाल की बात है
2 करोड़ से 2.07 करोड़ से 2.17 करोड़ ऐसे
हाउसेस हैं हमारे यहां पे जो बने हुए हैं
दे आर एम्प्टी बने बनाए घर है। खाली पड़े
हैं।
साथ में ये भी बोलते हैं देयर इज़ अ
शॉर्टेज ऑफ़ 1.9 करोड़ हाउसेस इन इंडिया। हम
कहां पे बैठते हैं ये दोनों चीज़? आप
बिठाओ। कैसे बिठाओगे?
लग्जरी हाउसेस एम्प्टी हैं। अफोर्डेबल
हाउसेस है ही नहीं। पॉइंट इज़ इज दैट व्हाट
यू ट्राइंग टू से? हाउसेस हैव बिकम एन
इन्वेस्टमेंट एसेट।
वो किसी का छत नहीं रहा है।
हमारे देश में अच्छा खासा पैसा जो हमारा
रियलस्टेट सेक्टर है उसके अंदर कहां से
आता है? दो जगह से आता है। वन इज
रेमिटेंसेस। बाहर का पैसा जो इंडिया में
आता है
कि बाहर जो लोग काम कर रहे हैं।
हां। अब ऐसा होता है ना देखो बाहर जो काम
कर रहा है। बाहर जो आदमी काम कर रहा है
जैसे यूएई में है, यूएस में है एसेटरा।
यू कांट इन्वेस्ट इंटू ऑल सॉर्ट ऑफ़ थिंग्स
आउट देयर। लिमिटेशंस होती हैं।
हम
इंडिया तो आपका अपना ग्राउंड है। यहां पे
पैसा लेके आते हो। अब यहां पे लेके उसको
करोगे क्या?
तो जो बाहर नौकरी करते हैं वो इंडिया पैसे
बेचते हैं। रेमिटेंस बिग फॉर
इंडिया इज़ द बिगेस्ट कंट्री व्हेन इट कम्स
टू रेमिटेंसेस। हमारे देश के लगभग 3.3
करोड़ लोग बाहर हैं। वो बाहर पैसा कमाते
हैं। अपनी मेहनत से इंडिया का नाम रोशन कर
रहे हैं। अपना नाम रोशन कर अपने परिवार का
नाम रोशन कर रहे हैं। पैसा कमाते हैं।
उसके प्रपोर्शन यहां पे भेजते हैं। वो
नंबर 129 बिलियन डॉलर्स ईयर तक आ चुका है।
प्रोजेक्टेड है बाय टू एफवाई 30। ये नंबर
लगभग$0 बिलियन डॉलर्स के आसपास पहुंचेगा।
मुझे याद नहीं है। नीति आयोग ने बोला था
कि या फिर इकोनॉमिक सर्वे बोला किसी में
तो था।
ओके।
ठीक है? दीज़ आर वेरी बिग नंबर्स।
अभी जो पैसा आता है ऐसा नहीं है कि लोग
इसलिए बेचते हैं कि चलो हमारे घर वाले
वहां बैठे हैं वो खर्चा करेंगे। उसके लिए
भी आता है बट अच्छा खासा इन्वेस्टमेंट
पर्पस के लिए आता है। कुछ शेयर मार्केट
में जाता है। कुछ एफडीस में जाता है। कुछ
आपका रियलस्टेट में जाता है।
फॉर आवर टिए वन बिल्डर्स डीएलएफओ लोदा हो
या फिर आपका प्रेस्टीज ग्रुप हो
एनआरआई मनी यूज़्ड टू अकाउंट फॉर अबाउट 5
टू 10% ऑफ़ बुकिंग्स एज ऑफ़ 15 इयर्स एगो।
हम् टुडे दैट इज़ बिटवीन 20 टू 25% इन
रीसेंट डीएलएफ का प्रोजेक्ट जो कि
गुड़गांव में ल्च हुआ है इट हैज़ गॉन अप टू
30%
पैसा वहां से आ रहा है वो लोग यहां रहने
नहीं वाले हैं दीज़ आर इन्वेस्टमेंट्स घर
खरीद के रख लिए नंबर वन नंबर टू ब्लैक मनी
जब डीमोनेटाइजेशन हुआ था पिच क्या थी कि
बॉस इससे ब्लैक मनी खत्म हो जाएगा जब
डीमॉननेटाइजेशन हुआ था कैश इन सर्कुलेशन
हमारी इकॉनमी में 17 लाख करोड़ था आज के
₹34 लाख करोड़ है डेबिट
अब किसी को लगता है कि हां भाई ब्लैक मनी
नहीं है इंडिया में गुड फॉर यू। मैं एक
बेवकूफ आदमी हूं जिसको लगता है कि ब्लैक
मनी तो एक्सिस्ट करता है और जब ब्लैक मनी
होता है वो आपकी तीन जगह जा सकता है और
चौथी जगह वो जा नहीं सकता।
चौथी भी जगह है वो भी बता देता हूं। नंबर
वन इज़ आप उसको गद्दे के नीचे अलमारी में
चावल के उसके अंदर दबा के रख दोगे। कितना
रखोगे? लिमिट करोड़ 30 रख दोगे। फ्रेज़ अ
लिमिट तो फिर दो और ऑप्शन आते हैं। गोल्ड
में ले लो क्योंकि गोल्ड का अच्छा खासा
व्यापार आज भी कैश में होता है। सरकार यही
तो कहती है ना कि एक सर्टेन नंबर से ऊपर
का लोगे तो आपको पैन कार्ड आधार देना
पड़ेगा। लोग उसके छोटे-छोटे बहुत सारे
ट्रांजैक्शन करते हैं। गोल्ड वैसे ले लिया
जाता है। दूसरा क्या है? रियलस्टेट।
खुला सच है। सबको पता है। अगर आप कोई
प्रॉपर्टी लेते हो अगर आप मेरी तरह आदमी
हो। आपकी तरह कि हमारी है ही खाली कमाई
वाइट वाली। क्या आज का हमारा काम ही नहीं
है। तो आप जब प्रॉपर्टी लेने जाते हो तो
वो आपको सीधा बोलता है अच्छा भैया हम जब
बात करते हैं कि कितना वाइट कितना ब्लैक
हमारे तो खाली वाइट है तो वाइट के नाम पे
क्यों सामने वाले का टैक्स ज्यादा लगेगा
वो आपका रेट बढ़ा देता है पब्लिक नॉलेज है
ये फिर भी हम ऐड करते हैं कि नहीं नहीं
ब्लैक मनी तो है नहीं ये क्या बकती है
सिमिलरली एट द सेम टाइम वो जो ब्लैक वाला
जो कॉम्पोनेंट है 17 लाख करोड़ का 34 लाख
करोड़ जो हुआ है राइट वो सारा सर्कुलेशन
में नहीं है इट इज़ हुडेड एज वेल वो होडेड
कहां पे है वो यहां पे डिप्लॉय किया जाता
आता है। आप सारा गद्दे के नीचे नहीं दबा
सकते। सोना कितना खरीद लोगे? तो बहुत सारे
लोग रियलस्टेट करते हैं। वो जो 2 करोड़ से
ऊपर अपार्टमेंट्स या घर बंद करके वीकेंड
पड़े हैं। उनमें ये वाला पैसा अच्छा खासा
लगा हुआ है।
अब ऑफ कोर्स अब उसके लिए बायरर्स आपको जब
मिलेंगे तो आप डिप्लॉय करोगे। कोई रेंटल
के लिए मिलेगा उतना देने के लिए। अब किसी
ने अगर वाइट पे दिखता होगा कि हां भाई
मैंने 50 लाख में घर लिया है। लेकिन किसी
ने लिया है अगर ₹.5 करोड़ का घर वो रेंटल
फिर 50 लाख के हिसाब से तोड़ेगा। तो उसको
तो अपना रिटर्न बनाना है तो रेंटल उतना
बड़ा चला के देता है। उतना रेंटल देने
वाले लोग नहीं मिलते ईजीली। तो रेंट भी
इससे ऊपर जा रहे हैं।
स्यूशन क्या है इसका? अच्छा पहले मैं बता
दूं एक चौथा रेवेन्यू जिस पे कैश डिप्लॉय
होता है वो होता है कि रोजमर्रा की जर्नी
में जो जो भी हम खर्चे करते हैं हम कैश
में करने लग जाते हैं। फाइव स्टार होटल
में गए खाना पीना किया। अच्छा ठीक है।
10,000 का बिल है। ये लो कैश ले लो। बहुत
सारे लोग करते हैं। बहुत कॉमन है।
आपका एरोसिटी है। T3 एयरपोर्ट के जस्ट साथ
में है। एयरपोर्ट पूरा जो है वो लैंडस्केप
वहीं पे है। उसके अंदर देयर आर लॉट ऑफ़
फाइव स्टार होटल्स। आप जाओ लोग ओपनली ऐसे
बैग लेके घूमते हैं। एंड वो बैग से
निकालते हैं ऐसे काउंट करके। हां जी ये लो
₹500 एक्स्ट्रा कीप दैट टिप।
बिकॉज़ है इतना।
ऐसे ही थोड़ी है। वो ब्लैक का पैसा है।
राइट? कि अब कहीं तो डिप्लॉय करना है। ये
चार तरीके हैं। रियलस्टेट में मुझे इतना
पैसा जा रहा है। रिजल्ट उसका क्या होता
है? 2 करोड़ घर ऐसे बन के खड़े हैं जिसमें
कोई रहता नहीं है। जो घर चाहिए उसकी नीड
खत्म हो। उसकी नीड है लेकिन वह कोई सप्लाई
नहीं कर रहा है। क्यों? डिमांड ही लग्जरी
वाले की है। क्योंकि पैसा इतना पड़ा है वो
डिप्लॉय तो वो लोग करेंगे ना। उनकी तरफ से
डिमांड है। अरे बना क्यों नहीं रहे? हम
खरीदने को रेडी हैं। इतना कैश कहां
लगाएंगे? कितना सोना खरीदेंगे? कितना फाइव
स्टार में या फिर कपड़े की दुकान में जाके
खर्चा करेंगे। दैट्स द बिग प्रॉब्लम।
रिजल्ट इज
मेरे को बोलने में बड़ा अजीब लगता है कि
घरों के रेट ऐसे बढ़े हैं लोग खरीद नहीं
सकते। एज आई सेड फिर से बोल रहा हूं मैं
एनरोक का डाटा ये कहता है 12% घर जो आ रहे
हैं मार्केट के अंदर वो अफोर्डेबल हाउसिंग
है। बाकी सब अफोर्डेबल हाउसिंग में नहीं
काउंट होता है। लगभग 50% के आसपास ऐसे हैं
जो कि 1.5 करोड़ से ऊपर के घर हैं। नहीं
खरीद सकता हिंदुस्तानी आदमी। फिर खरीदने
का एक ही तरीका रह जाता है। या तो यह कि
अपने पास जो भी अब तक का है एकिस्टिंग घर
है कोई वो निकाल दो। जो एसेट्स हैं सब कुछ
निकाल लो और ले लो। कुछ लोग वैसे करते हैं
कि लेना है अब इस इस घर में 40 साल से
रहने इसकी हालत खराब हो गई और कैसे रहोगे
तो आप लेते हो। दूसरा तरीका क्या है? बांध
लो अपनी 202 साल की 18 साल की ईएमआई। और
अपने आने वाली आगे की 20 साल उसके नाम कर
दो। और कोई तरीका नहीं बचता। सो वी विल कम
टू दिस पार्ट। ओके?
यू आर सेइंग कि लोगों की
वेट सो यूजुअली लेट लेट्स गो बेसिक्स पे
पहले यूजुअली एंड आई कैन बी प्योरली रोंग
हियर राइट बिकॉज़ मुझे ये समझ नहीं आता
इतना ज्यादा तो आई एम ट्राइंग टू
अंडरस्टैंड फ्रॉम अ वेरी क्यूरस पॉइंट
घरों के प्राइसेस एक शहर में एक देश में
लोगों की सैलरी कितनी है या इनकम कितनी है
या बिजनेस इनकम कितनी है उसके ऊपर डिपेंड
नहीं करता रियल स्टेट प्राइसेस इजंट
लेट्स से मेजर्ड बाय द बाइंग कैपेसिटी और
द इनकम मेकिंग कैपेसिटी ऑफ एन इंडिविजुअल।
सर सब कुछ इकोनॉमिक्स की एक सिंपल सी
इक्वेशन होती है जिसमें दो वेरिएबल होते
हैं। डिमांड एंड सप्लाई सब उससे चलता है।
तो ये कोई सैलरीवैलरी से कोई मतलब नहीं।
तो मुंबई की सैलरी
डिमांड खाली सैलरी वालों की थोड़ी होती
है।
डिमांड में तो वो वाला पैसा भी है ना कि
यार जो ब्लैक वाला है
बट इससे कोई लेना देना नहीं होता। राइट?
तो हम डिमांड आई हैव रेड सम टेक्स्ट बुक
डेफिनेशन समवेयर वेयर कि रियलस्टेट
प्राइसेस आर डिफाइंड बाय द पीपल हु आर
मेकिंग इनफ मनी एक्सट्रा पता नहीं समवेयर
आई कैन बी रोंग तभी मैंने पहले
आई बिलीव दैट आई बिलीव मैं भी गलत हो सकता
हूं मेरा ये मानना है कि
अगर डिमांड है तो रेट ऊपर चढ़ेगी नहीं है
तो उतनी देर से गिर सकती है सो वो बन रहा
है सो इसीलिए बहुत सारी जो सरकारें हैं
स्पेशली लेट्स से ब्रिटिश कोलंबिया या
कनाडा। दिस इज द रीज़न डिमांड एंड सप्लाई।
कि जो लोग अगर तुम्हारे देश के लोग हैं वो
बाहर जाते हैं, बाहर जाके बहुत कमाते हैं
और फिर कमा के अपने देश में आके खरीदने लग
जाते हैं और ऐसे घरों में पैसे डालते हैं
जहां पे वो रहते नहीं है। राइट? दिस इज़
व्हाट इंडिया का भी इसकी वजह से इनफ्लेट
हो रहा है। और ये लगभग 20 से 30% तक आ
चुका है। राइट?
या
तो
बहुत सारी कंट्रीज इसको एक्स करती है या
रोकने की कोशिश करती है। राइट? आई आई रेड
इट समवेयर कि ब्रिटिश कोलंबिया ने उसको
नॉन रेजिडेंट स्पेककुलेशन टैक्स करके कुछ
बोला था और 20% का टैक्स इंपोज किया था कि
भाई अगर एक से 5% के ऊपर हो गया हमारा तो
फिर हम टैक्स करके उसको कम कर देंगे।
इनफैक्ट फेडरल कनाडा ने तो बना ही कर दिया
था एक टाइम पे।
कोई भी नॉन रेजिडेंट खरीद ही नहीं सकता
घर।
राइट? तो ये 5% के ऊपर जाता है तो दूसरे
देश इसके ऊपर ट्रिगर करते हैं। फ्लैग कर
देते हैं।
खाली 5% का भी नहीं है।
हां। हां। सो आई एम सेइंग 5% पे दूसरे
दूसरी कंट्रीज फ्लैग कर देती है। इंडिया
में अगर ये 20-30% हो गया है तो व्हाई आर
वी नॉट फ्लैगिंग? क्योंकि इससे तो फिर
हमारे देश के लोग अब नहीं खरीद पाएंगे।
अप टू द लॉ मेकर्स, द पॉलिसी मेकर्स बट दे
इंसेंटिव होता होगा। इसीलिए
आई बिलीव कि इंसेंटिव है, इंसेंटिव है
बिल्डर्स की तरफ से एंड वो इकोसिस्टम बहुत
ज्यादा स्ट्रांग होता है। हम सब जानते हैं
कि रियलस्टेट इज़ अ ग्रेट प्लेस टू डिप्लॉय
द ब्लैक मनी। जैसा अभी हमने बात किया। वो
ब्लैक मनी इंजीन बना कौन रहा है? इट्स द
बिग पीपल, द पीपल ऑफ़ पावर, द पीपल ऑफ बट
इजंट दैन एनआरआई मनी कमिंग इनसाइड आवर
कंट्री इज गुड? इजंट दैट गुड? कि वो लोग
कमा के इधर पैसे डाल रहे हैं और फिर यहां
के एसेट्स खरीद रहे हैं। तो एक तरीके से
अच्छी चीज भी है ना। पॉइंट इज़ अगर वो एसेट
यूज़ नहीं हो रहा तो उसका फायदा क्या रहा?
देखिए ऐसे समझिए एक इकोनमिक एक्टिविटी
होती है ना उसके मल्टीप्लायर इफेक्ट होता
है।
अगर आपने उसका मल्टीप्लायर इफेक्ट ही आपने
खत्म कर दिया तो फायदा क्या रहा? अगर किसी
चीज की मल्टीप्लायर इफेक्ट यह थी कि यार
एक घर बनाएं। ठीक है? वो घर एक बिल्डर ने
बनाया। किसी ने खरीदा। अब उसमें कोई आगे
रहने लग गया। वहां पे कुछ इंपैक्ट आया।
राइट?
यहां पे आपने रेट आपने इतने बढ़ा दिए कि
वो छोड़ो और 10 लोग घर ले नहीं सकते। अब
बट इसकी वजह से शायद
इसका नेगेटिव मल्टीवर इंपैक्ट आ रहा है
ना। रेंट कहां कम हुआ ना? रादर क्योंकि
किसी ने वो घर इतने महंगे रेट पे खरीदा
है। उसको भी अपना रिटर्न बनाना है। वो
रेंट ही इतना हाई रखता है। अब बट अब देखो
मुंबई में तो 2-3% के आसपास आ गया रेंट।
सर आप एक बात समझो ना कि आप जब घर आप कहीं
पे भी लेते हो। राइट? एक यूजुअली लोग क्या
कहते हैं 11 महीने का एग्रीमेंट कर लो।
उससे ऊपर का नहीं करेंगे। व्हाई? क्योंकि
उससे ऊपर नहीं तो रजिस्ट्री कराना पड़ेगा।
ठीक है? अब 11 महीने बाद में जब रिन्यूल
का टाइम आता है, ऑफन इट इज़ नॉट द यूजुअल
फाइव और 10% वो बढ़ाया जाता है ज्यादा। एंड
दिस इज व्हाई क्योंकि आस्क है
एंड दैट इज द प्रॉब्लम। एंड सेकंड थिंग एक
बड़ी चीज है व्हाट हैपेंस इन रियलस्टेट डज़
नॉट एंड एट रियलस्टेट। रियलस्टेट
कंज्यूम्स अ लॉट ऑफ़ सीमेंट, अ लॉट ऑफ़
स्टील, अ लॉट ऑफ़ पेंट, अ लॉट ऑफ़ ट्रक्स।
ट्रक्स चलते हैं तो उसके अंदर डीज़ल जाता
है। डीज़ल कौन बनाता है? ऑल रिफाइनरीज
बनाती है 30% ऑफ़ जीडीपी कंट्रीब्यूशन
सेक्टर का जब ट्रक्स कम चलते हैं डीजल
आपका कम कंज्यूम हो रहा है। रिफाइनरीज का
पूरा मैथ चेंज हो जाता है
या
जो पेंट बनाने वाली कंपनीज़ है उनको 3 साल
लगे हैं वो बन में कि ओके नाउ वी आर गोइंग
टू बिकम एक्सपोर्ट फोकस्ड। अब वो दुनिया
भर में पेंट एक्सपोर्ट करने लग गए हैं।
रिजल्ट इज़ अब बाकी बाकी कंट्रीज की भी लग
रही है। सेम गोज़ फॉर स्टील। चाइनीस स्टील
का बिगेस्ट कंसमशन सेंटर वाज़ द रियलस्टेट।
इट गॉट टू अ पॉइंट वेयर मल्टीपल बिग
चाइनीस प्लेयर्स लाइक जैसे मैंने अभी
कंट्री गार्डन का नाम लिया दे हैड बोट आउट
सम ऑफ़ द बिगेस्ट शॉपिंग मॉल्स इन लंदन इन
यूएस उन्होंने बड़े डिस्काउंट इनफैक्ट सो
हैव यू हेड ऑफ़ दिस थिंग कॉल्ड सिटी ऑफ़
लंदन
नहीं
सो देयर इज़ लंदन हैव यू बीन टू लंदन अवेयर
या
लंदन के अंदर एक स्पेशल एक इकोनमिक ज़ोन है
जिसको बोलते हैं सिटी ऑफ़ लंदन जहां पे
सारे आपको एक्सरसा वो मिलेंगे हाई हाई
राइज़ एंड टावर्स एंड ऑल वो सारे एक ही जगह
पे हैं।
ओके
एंड ऑल दी फाइनेंसियल सर्विज जो हब है वो
वही है।
सो एक बड़ा इंटरेस्टिंग स्टार्ट था। मेरे
को याद नहीं मैंने कहां पढ़ा था। लगभग 2ाई
साल पहले मैं पढ़ा था। दैट्स सम 70% ऑफ
सिटी ऑफ़ लंदन कि हाईराइज़ेस आर ओन बाय
चाइनीज़ पीपल।
उस पे क्विप भी लिखा था। क्विप मतलब एक
मजाक की बात लिखी थी कि द क्वीन ऑफ़ लंदन
ओन्स लेस ऑफ़ सिटी ऑफ़ लंदन देन द चाइनीज़
पीपल। बट ये इंडियंस के लिए ना इंडियन
बिलिनेयर्स आर द हाईएस्ट रियलस्टेट ओनर्स
इन द कंट्री।
इन इट डजंट लंदन।
नॉट रियली। सो देयर इज लंदन एंड देयर इज
सिटी ऑफ़ लंदन।
ओके? देन सिटी ऑफ़ लंदन यू आर टॉकिंग।
सिटी ऑफ़ लंदन इज़ द फाइनेंसियल सर्विज। अब
हम
जैसे यहां पे है ना कि यहां का एक फोर्ट
है मुंबई में फोर्ट वाला एरिया। वहां के
मैं उसकी बात कर रहा हूं। एंड आउट देयर एक
पूरा अलग ही वहां पे लॉज़ चलते हैं।
फाइनेंसियल रेगुलेशंस बहुत अलग हैं। उसको
पूरा अलग ही डिस्ट्रिक्ट बनाया हुआ है।
एंड रेस्ट ऑफ लंदन में मिलाकर के इतने हाई
रेज़ नहीं जितने उस एक छोटे से डिस्ट्रिक्ट
के अंदर।
एंड मेजॉरिटीज़ ओन बाय चाइनीज़। एंड व्हाई
चाइनीस पीपल चाइनीस रियलस्टेट प्लेयर्स आर
गोइंग आउट एंड बाइंग दी थिंग्स रियलस्टेट
तो हर जगह चलेगा ना
बट उनकी जब हालत यहां पे इतनी टाइट हुई थी
दैट टू सेल ऑल ऑफ दीज़ ऑल तो नहीं बट काफी
सारे इन्होंने बेचे हैड हैवी डिस्काउंट्स
टू फाइंड मनी टू पे बैक दे्स इन चाइना
तो उन्होंने सिटी ऑफ़ लंदन में बेचना
स्टार्ट कर दिया टू
नॉट जस्ट सिटी ऑफ़ लंदन यूएस में दे हैव
सोल्ड मॉल्स एंड एवरीथिंग लास्ट वीक उसमें
कई उनके बड़े-बड़े कसीनोस थे वो सब बेचे हैं
अक्रॉस द वर्ल्ड एंड ये सब कुछ हुआ है एंड
नॉट जस्ट टू पे बैक डे्स बैक इन चाइना
बहुत सारे जो रियलस्टेट बना रहे थे उसके
लिए दे इशू ग्लोबल बॉन्ड जैसे अडानी ग्रुप
का आपको बताया था ना अभी कि उनके डॉलर
डिनॉमिनेटेड बॉन्ड्स थे इनके भी थे वो सब
चुकाने हैं आपको
तो पैसा कहां से लाओगे आपका डोमेस्टिक
मार्केट क्रैश हो गया रिस्ट्रक्चरिंग्स हो
रही है सब कुछ हो रही है वहीं पे चाइनीस
गवर्नमेंट ने आके एक और हेल्प भी किया कि
दे फॉर्म्ड मल्टीपल यूनिट्स अक्रॉस
डिफरेंट प्रोविंसेस जहां पे हम स्टेट
बोलते हैं वहां पे प्रोविंस होते हैं। तो
उन व्हीकल्स ने इन प्रॉपर्टीज़ को
डिस्काउंट पे खरीदना शुरू किया ताकि
गवर्नमेंट की तरफ से इन बिल्डर्स को
लिक्विडिटी मिले कि अपने डे्स वगैरह पेबैक
कर सकें। ये सब भी हुआ है। बहुत कुछ हुआ।
इट्स बीन अ वेरी-वेरी लिख एंड पेनफुल
अफेयर।
नाउ
व्हाट डस दिस मीन? अगर एक मार्केट जहां पे
6 करोड़ इनकंप्लीट सॉरी कंप्लीटेड बट
वेकेंट हाउसेस हैं। एंड येट देयर इज़
डिमांड फॉर हाउसेस जो कि लोगों के पास अभी
है नहीं। उनको अफोर्डेबल चाहिए। वहां पे
ये हो रहा है। प्रैक्टिकली यहां पे भी हो
सकता है। यू फील सिमिलर काइंड ऑफ़ क्रैश
अगर इंडिया ने ध्यान नहीं दिया तो इंडिया
में भी होगा।
डिपेंड्स ऑन मल्टीपल थिंग्स। क्योंकि रियल
स्टेट तो मेजॉरिटी इंडियन वेल्थ जो भी
क्रिएट करता है वो रियल स्टेट में ही
लगाता है। मैं ये कहूंगा कि डिपेंड्स ऑन
मल्टीपल थिंग्स। नंबर वन इफ यू वांट टू
प्रायोरिटाइज
कि हां भैया हर हर आदमी के सर पे एक छत
होनी चाहिए।
तब तो यार क्रैश ही होना पड़ेगा। अगर हम
उस पर कॉम्प्रोमाइज करने को रेडी हैं कि
यार ठीक है यार नहीं होगा घर ठीक है लेकिन
यह मार्केट नहीं टूटना चाहिए क्योंकि उससे
बहुत लोगों की जो इन्वेस्टमेंट्स है जो
उनकी नेटवर्क वो खत्म हो जाएगी। दैट इज़
अनदर वेरी लेजिटमेट चैलेंज टुडे। तो फिर
लोगों को घर नहीं मिलेंगे। व्हाट्स योर
थिंग व्हाट डू यू?
नहीं हो पाएगा। रीज़न बीइंग रियलस्टेट पीपल
आर वेरी-वेरी पावरफुल, वेरी रिच पीपल एंड
दीज़ पीपल आर डायरेक्टली लिंक टू द
पॉलिटिशियंस द मनी इंटरचेंज बहुत ज्यादा
होता है। एंड ये सारी वो चीजें जो ऑफ
कोर्स ना जब हम बोल रहे हैं कि ये जो इतना
ब्लैक का पैसा है जो यहां पे अब्सॉर्ब
होता है और खुला होता है। राइट?
जस्ट लाइक रियल स्टेट नीचे नहीं आएगा। यू
डोंट फील सो
इट्स अ पार्ट एंड पार्सल ऑफ द एंटायर
पॉलिटिकल मशीनरी।
फेयर बट
एंड पॉलिटिशियंस अपने खिलाफ कभी भी लॉज़
नहीं बनाते।
सो रियल स्टेट का पैसा नीचे नहीं आएगा।
रियल स्टेट इतना क्रैश नहीं करेगा।
हुआ रेंज बाउंड रहेगा।
चाइना जैसा क्रैश नहीं होगा। पर उसका
रिजल्ट और कॉन्सिक्वेंस यह होगा कि एक
एवरेज इंडियन को घर खरीदने में बहुत
दिक्कत होगी।
बिल्कुल होगा सर। मैं आपको एक एग्जांपल
देता हूं। ठीक है? सो योर प्रेडिक्शन दिस
वन विल बी विल माइट बिकम ट्रू। एंड मैं
दिल से दुआ करता हूं भाई मैं गलत साबित
हूं। मैं चाहता हूं यार हर इंडियन ऑन कर
पाए। क्यों नहीं होना चाहिए यार? है ना?
हमारे पेरेंट्स ने अपनी पूरी जिंदगी उसके
ऊपर लगाई। और भी बहुत सारे लोग हैं उनको
ही मिलना चाहिए ना। सबको मिलना चाहिए। एक
सिंपल सी चीज है
कि मैं मैं लिख के लेके आया था। आपको
बताता हूं। रुको एक सेकंड।
सो गुड़गांव का डाटा है। ठीक है? पिछले 4
साल के अंदर गुड़गांव में अगर आप द्वारका
5 साल का डाटा है। और आप द्वारका
एक्सप्रेसवे देखेंगे वहां पे प्रॉपर्टी
प्राइसेस आर जंप बाय एवरेज 93%। अगर आप
गोलफकोर्स रोड देखेंगे अबाउट 80% गोलफोर्स
एक्सटेंशन रोड देखेंगे वी हैव गॉन फ्रॉम
80 ₹8800 पर स्क्वायर फीट एवरेज टू 20,000
प्लस
लेफ्ट राइट सेंटर
आपको लगता है कि लोगों की कमाई इस हिसाब
से बड़ी है? अगर किसी को हिम्मत करके घर
लेना भी है
या तो उसके घर और छोटे होंगे या फिर उसकी
ईएमआई बड़ी होगी।
एंड बहुत सारे लोग ये दोनों ही अफोर्ड
नहीं कर सकते। यू नो वन वेरी इंटरेस्टिंग
थिंग दैट आई सॉ इन देयर नोट्स इज कि
यूजुअली क्या होता है लोग अपनी
सैलरी को गाली देते हैं।
लोग अपनी डिग्रीज को गाली देते हैं। लोग
बोलते हैं कि मेरी स्किल्स इसकी वजह से
मैं पैसे ज्यादा नहीं कमा पा रहा हूं। मैं
इसलिए आगे नहीं बढ़ पा रहा हूं क्योंकि
शायद दुनिया बहुत तेजी से चेंज हो गई है।
मुझ में इतनी स्किल्स नहीं है। मैं शायद
उस तरीके से टेक नहीं सीख पाया या
व्हाटएवर एसेट्रा एसेटरा। राइट? और लोग
बोलते हैं मेरी कंपनी खराब है या ठीक है
इन सबको गाली देते हैं। यू सेड कि इन सबको
गाली देने से कोई मतलब नहीं है। पैसे लोग
इसलिए नहीं कमा पाएंगे क्योंकि कॉस्ट ऑफ
डूइंग बिज़नेस इन कॉस्ट ऑफ डूइंग बिज़नेस इन
इंडिया इज़ हाई।
व्हाट डू यू मीन बाय दैट? कि
लोगों का कोई लेना देना नहीं है। सिस्टम
इज़ रिग्ड। नो इट्स बोथ थिंग्स। मैं ये
नहीं कहता कि लोगों का रोल नहीं है। बट
सिस्टम इज़ इटसेल्फ आल्सो रिग्ड। आप ऐसे
समझिए कि
आपके पापा मैन्युफैक्चरिंग में है। राइट?
आई थिंक क्या डिटर्जेंट
डिटर्जेंट में है। राइट?
सो रिटर्न ब्रांड जब आप बनाते हो आपका
लॉजिस्टिक्स भी बहुत अच्छा खासा आपका उसका
आपका कॉस्ट आता होगा। आई एम डैम श्योर।
ठीक है?
लॉजिस्टिक लॉजिस्टिक्स का जो भी आपका
खर्चा होता है उसमें एक अच्छा खासा
कॉम्पोनेंट होता है आपका फ्यूल।
हम
आपका फ्यूल में लगभग आधा तो लेकिन आप
सरकार को टैक्स या पे कर रहे हो।
बट उस पे आपको जीएसटी का आपको रिबिल तो
आपको मिलता नहीं है।
आपको वो इनपुट टैक्स रेट भी आपको मिलता
नहीं है।
सो इट इज डायरेक्टली एडेड टू द कॉस्ट। एंड
इन द एंड आपका जो प्रोडक्ट है वो ज्यादा
कॉस्टली हो गया। राइट?
यही वाला प्रोडक्ट आप बाहर भी बेचते हो
क्योंकि जब आप एक्सपोर्ट कर रहे हो तो भी
इस पे तो आपको जीएसटी का कोई आपको वापस
नहीं मिल रहा है।
हम
अब आपको एक्सपोर्ट अगर करना है तो हाउ वुड
यू कमपीट?
सरकार ने खुद आपके फ्यूल का प्राइस आधा
चढ़ा रखा है। सो अब
ये वाले जो टैक्सेस हैं ये इन द एंड क्या
कर रहे हैं? ये आपके एंड जो प्रोड्यूस है
उसको और कॉस्टली बना रहे हैं। व्हेन इट
कम्स टू से योर एनर्जी।
हम
ठीक है? एनर्जी के ऊपर लगा दिया जाता है
एनर्जी का ड्यूटी फॉर इंडस्ट्रीज। हम अभी
जो ड्यूटी जो लगाई गई है नाउ व्हाट हैपेंस
इज जब जीएसडब्ल्यू ग्रुप ने अपना
नेगोशिएशन किया फॉर दैट बटीबुरी में अपना
प्लांट लगाने के लिए 25000 करोड़ का
इन्वेस्टमेंट उनको वहां पे जो एसजीएसटी का
110% का रिफंड उनको प्रॉमिस किया गया साथ
में एक और चीज प्रॉमिस की गई कि यू विल बी
एक्सेंप्टेड ऑफ आपका इलेक्ट्रिसिटी
ड्यूटी।
आपके पापा को मिलेगा क्या?
सो आपके लिए तो वो भी एक एडेड कॉस्ट है।
आप कैसे कल को एक्सपोर्ट करोगे? आपके
पिताजी ने चलो फिर भी सब कुछ चलाया, सब
कुछ किया। राइट? उनका बिजली का अच्छा खासा
खर्चा आता है हम
क्योंकि फैक्ट्री चला रहे हैं।
हां।
बिजली का अगर आपके घर में जो बिल आता है
और आपकी फैक्ट्री में आता है उसकी यूनिट
की कॉस्ट में क्या फर्क होता है?
बहुत फर्क होता है।
क्यों होता है?
क्योंकि कमर्शियल लेते हैं तो कमर्शियल का
पैसे ज्यादा लगते हैं।
क्यों लगते हैं ज्यादा?
वो इसलिए कि हमारी सरकार ने एक सिस्टम बना
रखा है। और खाली हमारी सरकार नहीं आज की
सरकार नहीं हमेशा से ये रहा है। इस
प्रिंसिपल को बोलते हैं क्रॉस
सब्सिडाइजेशन।
किसान है बिल्कुल सस्ते या फ्री में उसे
बिजली दो। हाउसहोल्ड है थोड़ा महंगा कर
दो। आजकल यह भी हो रहा है अप टू कुछ
यूनिट्स फ्री में दे दो। कमर्शियल है
थोड़ा और बढ़ा दो। इंडस्ट्रियल है और बढ़ा
दो। रिजल्ट ये होता है जो घर बार होते हैं
उनके लिए रेट पड़ता है आई थिंक 5 6 ₹7 पर
यूनिट। डिपेंडिंग आप कहां पे हो और आप
इंडस्ट्री हो। आपका पड़ता है 11 12 ₹17 पर
यूनिट।
वो रेट किसने बढ़ाया आपकी फैक्ट्री का?
सरकार की पॉलिसी ने। इन द एंड इन सब चीजों
के कारण प्रोड्यूस किसका महंगा हो रहा है?
आपके पिताजी के उस डिटर्जेंट का। वो और
महंगा हो गया है। इन द एंड चाहे वो
डोमेस्टिक बेचे चाहे एक्सपोर्ट में बेचे
महंगा है।
उनके लिए तो महंगा ही है। डोमेस्टिक वाले
पास सॉरी ऑप्शन नहीं है। वो फिर भी खरीद
लेंगे। चलो क्योंकि ऑप्शन नहीं है क्योंकि
बाकी जो प्लेयर्स यहां बेच रहे हैं उनके
लिए भी वही सच्चाई है। एक्सपोर्ट मार्केट
में जब जाओगे वो सच्चाई सबके लिए नहीं है।
वो हमारी सरकार ने हमारे लिए सिस्टम बना
रखा है। तो हमारे आपके पिताजी या फिर और
कोई इंडस्ट्रियलिस्ट मैं खाली एग्जांपल के
लिए बोल रहा हूं। वो कैसे बार कमपीट
करेंगे? कर ही नहीं पाएंगे। दैट इज हाउ
सिस्टम पूरा ऐसा बनाया गया। अब ऐसे में ये
होता है। फिर से मैं उसी बात पे आऊंगा।
चलो जीएसडब्ल्यू ग्रुप की बहुत बात हो गई।
बूटी बुरी वाला। ठीक है। आई विल गिव यू
अनदर एग्जांपल। अब आप चलते हो आंध्र
प्रदेश।
हम
आंध्र प्रदेश में बहुत ही प्यारी पॉलिसी
है दैट अगर आप 50 करोड़ से लेकर के 1000
करोड़ के बीच का कोई भी इन्वेस्टमेंट कर
रहे हो तो आपको हम अप टू 12% का कैपिटल
सब्सिडी देंगे। अप टू अ सर्टेन अमाउंट ऑफ़
इन्वेस्टमेंट। हम आपको इलेक्ट्रिसिटी पे
जो चार्जेस है वो हम आपको ₹1 पे कुछ करके
दे देते हैं। वो आपको डिस्काउंट मिल
जाएगा। यह सब ठीक है ये सब अनाउंस कर
लिया।
आंध्र प्रदेश में कोई फैक्ट्री उसको तो ये
मिल रहा है। बाकियों को मिल रहा है।
बाकी स्टेट्स में तो नहीं मिल रहा ना।
वहां पे जिसने फैक्ट्री लगाई थी आज से 2
साल पहले वो रिग्रेट करो यार। मैं 2 साल
रुक जाता। चंद्रबा नायडू वहां पे आए थे।
उन्होंने ये वाली अनाउंस की मैं वहीं पे
लगा लेता। मेरे तो लग गए ना।
प्रॉब्लम इज
सेटअप इज डिजाइन इन सच अ मैनर
दैट कॉस्ट ऑफ मैन्युफैक्चरिंग इन इंडिया
अच्छा खासा हमारी सरकार खुद इनग्रेड कर
देती है हम इतनी बार हमारी सरकार ये बोलती
है कि हमारी मैन्युफैक्चरिंग को और
कॉम्पिटिटिव बनाना है कॉम्पिटिटिव बनाना
है उसके लिए हम क्या करेंगे कॉस्ट ऑफ
लॉजिस्टिक्स एज अ परसेंट जीडीपी हमारा 14%
पे है 15% पे 13% पे उसको गिरा के हम 7 8%
पे लेके आएंगे ये भी तो बताना है कि उसमें
अच्छा खासा कॉस्ट बिकॉज़ आपने ने ही
टैक्सेस घुसा रखे हैं। वो आप हो कॉस्ट वो
आपकी कमाई है। आप उससे मलाई निकाल रहे हो
और वो कीमत हमारा देश चुका रहा है। शायद
वो अगर आप नहीं चूसते
हम
तो हमारे देश शायद ज्यादा एक्सपोर्ट कर
रहा होता। हमारे देश के लोगों के लिए वही
चीजें सस्ती होती। वो अपना पैसा और दूसरी
चीजों में स्पेंड करते। आप जीएसटी शायद
वहां से कमा लेते। बाहर की कमाई हम शायद
लेके आते क्योंकि हम एक्सपोर्ट हम ज्यादा
कर पाते। बट चीजें तो हमने ही महंगी बना
दी ना। हम
इसीलिए हमारी इंडस्ट्रीज बार-बार बोलती है
दैट आपका जो पेट्रोल है, डीजल है इन सबके
ऊपर हमें इनपुट टैक्स क्रेडिट देना शुरू
करो। नेचुरल गैस के ऊपर हमें इनपुट इनपुट
टैक्स देना शुरू करो। जिनको नहीं पता
इनपुट टैक्स क्रेडिट जीएसटी के इकोसिस्टम
में एक होता है कि अगर आप एक
मैन्युफैक्चरर हो। आपने जो जीएसटी आपने जो
टैक्सेस आपने भरे उस चीज को बनाने के लिए
या फुलफिल करने के लिए वो आप रिक्यूपरेट
कर सकते हो। आप वो वापस ले सकते हो। बट
अगर वो पेट्रोल डीजल वाला खर्चा आप उसे
वापस नहीं ले पाते हो। सो वो तो बड़ा
प्रॉब्लम हो गया ना।
यह हमारी सरकार का किया हुआ है। स्टेट एज
वेल एज सेंटर। आप जरा सोच के देखिए। 2010
में जो एक्साइज वाला जो कॉम्पोनेंट है जो
ये सेंटर लगाती है।
डीजल के ऊपर ये लगभग कुछ चार ₹4.5 था।
4.7
आज के ये 33 ₹34 के आसपास चल रहा है।
यार
4.7 टू 33
ये कॉस्ट ऑफ लॉजिस्टिक्स किसने बढ़ाया है?
15 सालों में पिछले
सरकार ये बोल सकती है कि ठीक है वी नीड द
मनी टू डू अदर थिंग्स बट देन इट्स अ चॉइस
दैट यू हैव मेड जिसके कारण हमारा
मैन्युफैक्चरिंग महंगा हो रहा है। हमारा
लॉजिस्टिक्स एज अ परसेंटेज जीडीपी भर रहा
है। वो आपने इनफ्लेट किया है। हमारे
इंडस्ट्रियलिस्ट ने या बिज़नेसमैन ने नहीं
किया है। ये बात कुछ लोगों को समझने बहुत
वैसे लग सकती है कि मैं इंडस्ट्रियलिस्ट
के प्रो हो के बोल रहा हूं। एटसेट्रा मैं
वो नहीं बोल रहा। मैं प्रो इंडिया हो के
बोल रहा हूं कि इंडिया को अगर अपना कॉस्ट
ऑफ लॉजिस्टिक सस्ता करना है तो सरकार ने
जो महंगाई डाल रखी है उसको एटलीस्ट कम कर
देना चाहिए हटा देना चाहिए उसके कारण जो
डिमांड बढ़ेगी कि चीजें सस्ती होगी उसके
कारण जो हमारे एक्सपोर्ट्स बढ़ेंगे सरकार
तो उससे भी कमाएगी ना बट वो बेट कौन लेना
चाहता है बात उतनी है
तो डू यू फील कि ये क्योंकि मान लो 600%
से एक ऑलमोस्ट 600% के आसपास आ गया राइट
तो 600% महंगाई एक जगह पे हो रही है इन
लास्ट लाइक वन डेड डेकेड इन हाफ राइट ऐसे
और भी बहुत सारे सेक्टर्स होंगे जो हमने
बहुत सारे भी पडकास्ट में कवर करे
जिसकी वजह से इंडिया में मैन्युफैक्चरिंग
बन नहीं पा रही जिसकी वजह से हम आज भी
बाहर से बहुत ज्यादा इंपोर्ट कर रहे हैं
जिसकी वजह से हमारा रुपया गिरते जा रहा है
और उसकी वजह से हम और ज्यादा इकॉनमी हमारी
खराब होती जा रही है। राइट
या नाउ
डू यू फील कि ये एक ऐसा ये यू नो द
बॉइलिंग वाटर द बॉइलिंग फ्रॉग वाला
फिनोमिन
ये वैसा हो रहा है क्या कि एट वन पॉइंट इट
विल जस्ट बी टू लेट सो टू एक्सप्लेन पीपल
इट्स लाइक कि अगर आप
ओके सो जैसे अगर ये एक एक पानी है उसमें
अगर आप मेंढक को रख देते हो आप एकदम से
बहुत में बहुत गर्म कर दोगे इसको तो वो
मेंढक उचक के बाहर निकल जाता है यू आर
राइट पर अगर आपने इतने पानी है और उसमें
धीरे-धीरे गर्म करते गए करते गए करते गए
करते एक टाइम में वो इतना गर्म हो जाता है
कि इट्स जस्ट मेंढक उसको एडजस्ट एडजस्ट
करता रहता है करता रहता है बट एट सम पॉइंट
इट जस्ट डाइस क्योंकि अब उसके बाद तो
निकलने का मौका भी नहीं होता बिकॉज़ इट्स
टू हॉट
राइट सो इट्स लाइक दैट कि आपने ₹1 का सीधे
₹3 नहीं करे आपने हर महीने थोड़ा थोड़ा थोड़ा
थोड़ा थोड़ा थोड़ा थोड़ा थोड़ा बढ़ा बढ़ा के बढ़ा
बढ़ा के डीजल की प्राइस इतनी लेवल पे आगे
लेके आ गए इतने टैक्सेस बढ़ा दिए या इतनी
जो भी ड्यूटी ड्यूटी टैरे व्हाटएवर यू
वांट कॉल इट यू आपने वो बढ़ा दिया कि अब एक
टाइम पे इतना अनबेरेबल हो जाएगा दैट
मैन्युफैक्चरिंग इन इंडिया ग्लोबल लेवल पे
कंपटीशन के सामने खड़े होने के लायक भी
नहीं रहेगी।
सर ऑलरेडी हो रहा है ना ये तो हम किसी भी
मैन्युफैक्चर खत्म ही हो जाएंगे बिफोर इवन
वी आर वी हैव अ चांस टू कम्पीट आस्क एनी
मैन्युफैक्चरर सच्चाई हम सबके सामने है।
दे ऑलरेडी फील दिस। दे ऑलरेडी नो दिस।
इट्स नॉट जस्ट की कैपेबिलिटी नहीं है। चलो
चाइना से मशीन लेंगे होगी कैपेबिलिटी बना
लेंगे अब तो दिक्कत है कॉस्ट पे फिर भी हम
कमट नहीं कर पाते क्योंकि ये एडेड कॉस्ट
बहुत सारे हैं और इसमें अभी वो सब तो
मैंने गिने नहीं है जो सरकार के एंड
कंप्लायंस के कॉस्ट आते हैं
इतनी फनी मेरे को फोटो लगती है इंटरनेट पे
बहुत अभी चली थी पिछले दो साल से मैं
बार-बार हर दूसरे महीने में देखने को मिल
जाती है एक कोई आटा की कोई मिल चला रहा है
आटा मैदा की मिल उसने अपने ऑफिस में लेकिन
वो लाला जी बैठे हुए हैं उन्होंने अपने
बेटों के साथ फोटो डाली है ऊपर उसमें लगी
हुई है बहुत सारी फोटो
हम
जिसमें 16 या 17 ऐसे सर्टिफिकेट ऊपर टंगाए
हुए हैं फ्रेम करा करके कि इस चीज का
अप्रूवल इसका सर्टिफिकेशन इस डिपार्टमेंट
में
एक आटा मिल चलाने के लिए 16 तो उन्होंने
चढ़ा के कल को इसको ऑफिस चला जाए तो हम
दिखा सकेंगे देखो जी ऊपर आपका लगा हुआ है
आपके में पहले ये वाले जो थे ना उन्होंने
ये किया हुआ है
ये सब खर्चे अलग है देयर आर अदर हर्डल्स
उसकी तो मैं बात ही नहीं कर रहा उसके जो
कॉस्ट आता है राइट
लेट अस ट्राई टू एटलीस्ट एड्रेस द कॉस्ट
क्योंकि सरकार ने खुद इस तरीके से हमारी
जनता के ऊपर या फिर हमारे मैन्युफैक्चरर्स
के ऊपर थोप दिया है। सबसे बड़ी दिक्कत पता
है क्या है? अब कहने को तो प्रॉब्लम तो
मैंने बता दी तो इसका सशन ये हटा दो। इतना
लगा रखा है तो हमारी केंद्र सरकार ने मेरे
पास एफy 24 का नंबर है 25 का हमने देखा
नहीं है एफy 25 में हमारी केंद्र सरकार ने
साल का लगभग लगभग 7.5 लाख करोड़ से
एक्साइज ड्यूटी अकेले से कमाया था पेट्रोल
डीजल के ऊपर वाले से 7 लाख करोड़ स्टेट्स
ने भी लगभग 5 लाख करोड़ कमाया था अब जब हम
बोल रहे हैं कि इसको हटा दो मतलब यह है कि
मैं कह रहा हूं कि भैया 13 लाख ऑलमोस्ट
करोड़ है जो कि आप बोल रहे हो कि इसके ऊपर
बेट लो कि हटा दोगे तो बाद में डिमांड
इतनी बूस्ट होगी एक्सपोर्ट इतने बढ़ेंगे
तुम वैसे भी कमा लोगे। यह एक बेट है।
यह डिसीजंस कोई भी पॉलिटिशियन नहीं लेता
है। दिस इज सम ब्यूरोकट हु हैज़ टू टेक इट।
कोई भी ब्यूरोक्रेट अपने ऊपर 13 लाख करोड़
की मिसाइल तो नहीं चलाएगा
कि भाई साहब मैं बेट ले लूं और कल को नहीं
आया तो
इट्स अ सुसाइड। ब्यूरोक्रेटिक सुसाइड कि
बॉस अब तो मेरे को किसी अच्छे डिपार्टमेंट
में काम ही नहीं मिलेगा। मेरे को उठा के
भेज देंगे अंडमान में। जाओ वहां पर चलाओ।
नाउ हाउ डू वी सॉल्व दिस व्हाट वी नीड इज
अ स्ट्रांग लीडर हुस बोल्ड इन अ विज़ टू से
कि ओके आई एम रेडी फॉर व्हाट इज़ कंसीडर्ड
अनऑर्थोडॉक्स मेथड्स
आपके एक बीजेपी के एक बहुत सीनियर लीडर
हैं जो कि काइंड ऑफ़ अ रेबल लीडर ही कहलाते
हैं आज के दिन। हिज़ नेम इज़ सुब्रमण्यम
स्वामी। आपने सुना उनके बारे में।
मेरे को बड़े कमाल के आदमी लगते हैं। फॉर
वन स्पेसिफिक रीजन
ओनली वन स्पेसिफिक रीज़ इकोनमिक टर्म्स पे
जो भी बोलते हैं ना इट ऑल मेक्स अ लॉट ऑफ़
सेंस। सो उनका क्या कहना है? इनकम टैक्स
इज़ अ स्कैम। जस्ट बिकॉज़ बाहर की इकोनॉमज़्म
में वो एक स्ट्रक्चर लगाया गया। हमने भी
लगा दिया। बट थिंक ऑफ इट दिस वे बिकॉज़ ऑफ़
इनकम टैक्स देयर इज़ एन इंसेंटिव टू इवेट
टैक्सेस। सो देयर इज़ अ इंसेंटिव टू हाइड द
इनकम नाउ बिकॉज़ यू आर हाइडिंग द इनकम
व्हाट हैपेंस? आपके पास एक कारण है कि बॉस
अब मैं खाली तीन ही जगह पर इसको डाल सकता
हूं। वो पैसा शायद और 40 कामों में लग
सकता था हिंदुस्तान में। लेकिन अब वो जाता
कहां है घुमा फिरा के? रियलस्टेट, गोल्ड
या गद्दे के नीचे या फिर चावल की बोरी में
जिसमें भी तो पहली बात क्या किया? आपने
लोगों के हाथ से रियलस्टेट इतना महंगा कर
दिया। सोने की इतनी डिमांड क्रिएट कर दी
जो कि देश का ही फिर करंट अकाउंट डेफिसिट
पूरा बिगाड़ देता है। क्योंकि इतना ज्यादा
आप इंपोर्ट करते हो।
पहले तो वो उससे प्रॉब्लम क्रिएट हुई।
सेकंड थिंग अब क्योंकि यह इतना सारा ब्लैक
मनी यहां पर क्रिएट हो रहा है। लोग छुपा
रहे हैं। आम आदमी छुपाता है। छोटा
दुकानदार भी बोलता है कि बिना बिल के दे
दूं क्या? हर छोटे लेवल पे इतना बन रहा
है। अब इसको पकड़ने के लिए यू आर
स्पेंडिंग थाउजेंड्स एंड थाउजेंड्स ऑफ
करोड़ हर साल। आपने पूरा मशीनरी बना रखा
है उसके लिए। जिसका काम ही है तुम इन
लोगों को पकड़ो।
अब वो घुमा फिरा के साल का आप ₹00 करोड़
आप उसके ऊपर खर्चा करते हो।
10,000 करोड़ आप इकट्ठा करते हो। हु इज इट
सर्विंग बट इन द एंड इज दैट हर्टिंग
इंडिया आंसर इज अ बिगेस्ट ऊपर से यह
दिक्कत आती है इसके चक्कर में
आपका जो पूरा जो इकोनमिक साइकिल है उसमें
आती है इनफिशिएंसीज़
पीपल आर नॉट डिप्लॉयंग मनी वेयर इट शुड बी
डिप्लॉयड बट वेयर इट कैन बी केप्ट एज़ अ
हिडन रिसोर्स
हाउ इज़ दैट सर्विंग द इंटरेस्ट ऑफ़ दी
कंट्री? तो सुब स्वामी जी की थीसिस से
बोलते हैं इनकम टैक्स हटा दो। अब इस पे
सवाल आता है इनकम टैक्स तुम हटा दोगे। हम
तो मार्केट में तो एकदम से लोगों के पास
बहुत ज्यादा स्पेंडिंग पावर आ जाएगा। प्लस
क्योंकि लोग रियलस्टेट में इतना खर्चा
नहीं करेंगे। गोल्ड पे नहीं करेंगे तो
गोल्ड की डिमांड कम होगी। रियलस्टेट कहीं
क्रैश ना हो जाए और ऊपर से इतना पैसा और
दूसरी चीजों में जाएगा तो उनके रेट तो
बहुत बढ़ जाएंगे। डिमांड इतनी आ जाएगी
इनफ्लेशन हो जाएगा। इट विल बी अ
कैटस्ट्रोफी।
तो उसके लिए एक तरीका है कि उनका कहना है
कि बॉस आप जो बैंक के जो इंटरेस्ट रेट है
उसको बढ़ा देना। वो एब्सॉर्ब कर लेगी
लिक्विडिटी।
फिर सवाल आता है और बैंक्स की अगर आप
इंटरेस्ट बढ़ा दोगे तो इंडस्ट्रीज के लिए
बिजनेसेस के लिए लोन महंगे हो जाएंगे। तो
वो कैसे चलेगा?
उसका जवाब है जो चाइना मॉडल है व्हिच इज़
गवर्नमेंट सब्सिडाइजेस द लोंस। वो
सब्सिडीज देती है। लगाओ इंडस्ट्रीज। कोई
दिक्कत नहीं है। मैं बैठा हूं। तुम जो
कमाओगे, जीएसटी वगैरह भरोगे, जो टैक्स
वगैरह इतना कलेक्ट कराओगे, डिमांड बढ़ेगी।
मैं उससे कमा लूंगा।
दिस इज़ अ कंप्लीटली डिफरेंट मॉडल। मैं
नहीं कह रहा सही है या गलत है बट एटलीस्ट
अ फ्रेश डिफरेंट अप्रोच टू द स्टफ
आई डोंट आई डोंट नो एंड आई डोंट हैव
मैं भी कह रहा हूं
मैं भी कह रहा हूं आई डोंट स्टैंडिंग ऑफ
इकोनॉमिक्स एंड कंट्री टू मे बी इविल
मैं भी नहीं कह रहा दिस
मैं भी नहीं कह रहा कि मुझे सब कुछ पता
है। मैं इतना कह रहा हूं दैट हियर इज़ एन
अल्टरनेट मॉडल दैट साउंड्स लाइक इट मेक्स
सेंस। नाउ थिंग इज़ अभी वाले सिस्टम में
प्रॉब्लम है देन दिस इज़ वन ऑफ़ दी पॉसिबल
सॉलशंस। लेट्स आल्सो हैव एक्टिव डिस्कशंस
कि और क्या-क्या सॉल्यूशन हो सकते हैं। वी
हैव व्हिच हम ये जो इनफिशिएंसीज हमने यहां
क्रिएट कर दिए उसको हम एड्रेस कर पाएं। आज
के दिन वो नहीं हो रही है। दैट्स अ बिग
प्रॉब्लम। आप जरा सोच के देखिए ना। इसके
रेपकेशंस खाली इतने नहीं होते और भी होते
हैं।
हम एक मैं हमेशा पायलट्स का एक एग्जांपल
देता हूं। राइट? एक इंडियन पायलट है और एक
आपका एक इंडियन पायलट है और एक आपका यूएई
या यूएस में बैठा हुआ एक इंडियन पायलट है
जो वहां पे उड़ा रहा है। सबसे पहला तो
उसके लिए इंसेंटिव है कि वो वहां पे उड़ाए
क्योंकि इंडिया में मोस्टली आपके नैरो
बॉडी प्लेेंस होते हैं। वहां पे आपके वाइट
बॉडी होते हैं। उसका पैसा ज्यादा उसको
मिलता है। नंबर टू यहां पे वो जो कमाता है
उसका लगभग 30- 40% सरकार इनकम टैक्स ले
जाती है। वहां पे है ही नहीं।
किधर?
यूएई में।
ओके।
राइट? यूएई में, कतर में, सऊदी में वहां
पे वो टैक्स ही नहीं है।
या
यहां पे आपका 30% तो सरकार लेगी। पहली बात
आप छोटा प्लेन उड़ा रहे हो तो वैसे ही
कमाई कम ऊपर से जो कमाई उसका 30% सरकार
ऐसे ले गई ऊपर से उस जो पैसा बचा उससे जो
खर्चे करोगे उसका 15 20% और आप सरकार को
दे दोगे कैसे पेट्रोल में टैक्स है या फिर
आपका ये जो आप सामान खरीदते हो उसके
जीएसटी लग जाता है करके इन द एंड वहां पे
तो वो वाला भी नहीं है वट वुड कुछ
एग्ज़िस्ट नहीं करता जीएसटी वहां
एग्ज़िस्ट नहीं करता एक जगह आप ज्यादा कमा
रहे हो पूरा अपने पास रख रहे हो एक जगह आप
जो कमा रहे हो उसका घुमा फिरा के आप 45 टू
तो 50% अपने हिसाब से आप रखते हो और वो भी
कम कमा रहे हो। वेयर इज़ द इंसेंटिव?
टैलेंट वहां जाएगा। वो यहां रुकेगा ही
नहीं। दिस इज़ अनदर प्रॉब्लम दैट दिस
एंटायर स्ट्रक्चर क्रिएट्स?
हो रहा है ऑलरेडी।
ऑलरेडी हो रहा है। अक्रॉस सेक्टर्स हो रहा
है। नाउ हाउ इज़ दिस सर्विंग इंडिया एस
इंटरेस्ट।
तो थ्योरी है। ऐसे और भी सॉलशंस हो सकते
हैं। बट वी हैव टू हैव एक्टिव डिस्कशंस ऑन
इट। कि ओके ये प्रॉब्लम तो है। इसको सॉल्व
तो करना पड़ेगा।
तो मैंने एक पोस्ट लिखा कि यार चाइना ने
इसका एक सशन निकाला हम
दैट हम चाहते हैं लोग बाहर जाए हम
व्हाई हम उतने एडवांस नहीं है ये चीज आज
से 10 12 साल पहले की है व्हेन दे ल्च अ
प्रोग्राम कॉल्ड सी टर्टल्स प्रोग्राम या
फिर थाउजेंड टैलेंट्स प्रोग्राम ये सब सी
टर्टल स्ट्रेटजी की सी टर्टल का स्ट्रेटजी
आपको पता है क्या होता है कछुए जो होते
हैं समुद्री कछुए जब वो पैदा होते हैं
थोड़े से बड़े होते हैं ना उनकी मां जो
होती है वो उनको समुंदर में छोड़ देती है
उनकी खासियत है वो दुनिया भर में घूम फिर
के पांच छ सात सात साल दुनिया भर के
समुंदर में घूम फिर के वापस वहीं पे आ
जाते हैं। पता नहीं कैसे आते हैं। बट वो
जब आते हैं वो मैच्योर ग्रोन अप टर्टल्स
हो चुके हैं। उनके हर तरह के रफॉर्स में
जीना उनको आ चुका होता है। चाइना की सी
टेट स्ट्रेटजी ये थी। लेट पीपल गो आउट।
बिकॉज़ हमारे पास वो टेक नहीं है। वो
टैलेंट नहीं है। वो स्किल सेट्स नहीं है।
वो पढ़ाई नहीं है जो कि बाहर है। उनको बाहर
जाने दो। उन्हें सीखने दो। उन्हें काम
वहां करने दो। लेट देम लर्न।
एंड देन उनको वापस ले आएंगे। कैसे ले
आएंगे? गिव देम टैक्स ब्रिक्स,
गिव देम सब्सिडाइज हाउसेस।
गिव देम रिसर्च ग्रांट्स।
हमारी तरह नहीं कि रिसर्च ग्रांट के नाम
पे हम स्टार्टअप्स को ₹1 लाख देते हैं।
वहां पे मिलियंस ऑफ़ डॉलर्स में बात होती
है। डिपेंडिंग कि उस प्रोजेक्ट की नीड है।
यहां पे तो किसी को और आपने ₹1 करोड़ दे
पहले तो सवाल आएंगे। आपकी जरूर कोई ना कोई
लिंक होगा। ये वो वो अलग डिबेट हो जाती
है। सो मैंने जब ये पोस्ट लिखा कि वी
आल्सो नीड टू डू दिस। लोगों ने उसको अलग
एंगल में ले लिया। कि तुम तो स्कीम दे रहे
हो लोगों को और भगाने की कि चलो बाहर जाते
हैं। 5 साल बाद लौट के आ जाएंगे। सरकार
हमसे टैक्स भी नहीं लेगी। अगले 10 साल घर
भी सब्सिडाइज पे देगी। आई एम लाइक अरे
नहीं यार इट्स अबाउट इंश्योरिंग कि बाहर
जो टैलेंट जो हमारे पास है ना उसको वापस
लाना है। आप जरा सोच के देखो डिपेंड करता
है आप कौन से न्यूज़ रिपोर्ट पे बिलीव
करते हो। कोई कहता है किसी का सर्वे बोलता
है कि 40% ऑफ़ आईटी बॉम्बे के ग्रेजुएट्स
हर साल निकल के फॉरेन चले जाते हैं। कोई
बोलता है कि 60% जाते हैं।
अब आधे लोग हमारे देश के बोलते हैं ये तो
गद्दार हैं। क्यों? इनको इतनी सब्सिडी दे
के सब कुछ हमने हमारे पैसे से इनको पढ़ाया
लिखा है। ये तो छोड़ के चले गए।
उनका अपना बच्चा होता है ना। वो खुद बोलते
हैं बेटे चले जा। तेरे को Facebook ज्यादा
दे रही है। ये तो मानते हो आप। राइट?
सेकंड थिंग इज अगर वो जा रहा है दैट्स
बिकॉज़ उसको वहां पर अपॉर्चुनिटी मिल रही
है। वी शुड एम्ब्रेस दैट एंड इंश्योर कि
ओके वो जो गया है वहां पे वो सीख रहा है।
हमें ऐसा कोई सिस्टम बनाना पड़ेगा। कोई
प्रोग्राम ऐसे जैसे चाइना ने बनाया कि 5
10 साल के एक्सपीरियंस के बाद हम उसको
यहां वापस लेके आ सके।
वी आर नॉट डूइंग दैट।
चाइना हैज़ गॉन अ लेवल अहेड।
अभी एक पोलिश एक केमिकल साइंटिस्ट हैं,
केमिस्ट हैं जिनका नाम तीन बार नोबेल
प्राइज के लिए भी रेकमेंड हुआ है। उनका
नाम बड़ा अजीब सा है। मैं ले ही नहीं
पाऊंगा। बट मैं आपसे शेयर कर दूंगा। आप
चाहे तो उनकी फोटो यहां पे डाल सकते हो।
सो दिस गाय पुलिस थे। कनाडा यूएस में कई
साल पढ़ाया। फिर कनाडा जाके कनाडा रॉयल
सोसाइटी के मतलब कि वन ऑफ द मोस्ट
एक्रेडिटेड आदमी बने। कनाडा का हाईएस्ट जो
ओनर है फॉर केमिस्ट्री वो उनको मिला
एवरीथिंग। चाइना भी उनको पोज करके ले आया
है। उनको प्रोफेसर बना दिया अपने यहां पे।
दिस गाय हैज़ बीन साइटेड इन 88 थाउजेंड
प्लस रिसर्च पेपर्स। दिस इज नो जोक।
वेस्ट से उठा के लेके गए हैं। कोई रोक
नहीं पाया। चाइना के पास उसके लिए
प्रोग्राम्स हैं। हमारे पास इसके लिए नहीं
कि हम अपने ही लोगों को वापस ले आ रहे
हैं।
या तो आप टैक्सेस हटा दो और ये सब करो एंड
कमट ऑन दैट लेवल। हम
अगर नहीं कर सकते हो तो फिर ये करना
पड़ेगा कि जो गए हैं उनको वापस लाना
पड़ेगा ये करके कि आप कोई वैल्यू ऐड करने
के लिए यहां पे आ रहे हो। आप बाहर से सीख
के कुछ एक्स्ट्रा लिख रहे हो जो इंडिया
में नहीं था। आई एम रेडी टू गिव यू
एक्स्ट्रा। हमने पहले किया ये आजकल एक
ट्रेंड है ना कि कुछ भी हो तो नेहरू जी के
टाइम ऐसे हुआ था। मैं बोलता हूं कि यार
उसी जमाने में ऐसा भी हुआ था कि एक आदमी
थे वर्गज़ कुरियन। उनको सरकार के पैसे से
बाहर भेजा गया था। पढ़ाया लिखाया गया। सब
कुछ किया गया। वापस से उन्होंने अमूल बना
दिया।
व्हाई आर वी नॉट बिल्डिंग मोर वर्गज़
कुरियंस टुडे? लेट्स बिल्ड दैट। सरकार के
पैसे उन्हें पढ़ा लिखा के आईआईटी बॉम्बे
आईआईटी दिल्ली आईटी खरगपुर ये वो हर जगह
से अच्छा लेवल कौन एजुकेशन बना दिया गया
है कि वो दुनिया के लिए अच्छे रिसोर्सेज
बन जाते हैं। बाहर जाके फिर वो अपना और
एमबीए या फिर जो भी एमटेक और बाकी चीजें
करते हैं और बेटर बनते हैं। उसके बाद वापस
लाने का स्कीम कहां गया? लेट्स बिल्ड दैट।
उनको वापस लेके आओगे ना तो पता है क्या
होगा? वो लोग वहां पे जो इतने स्टार्टअप्स
बना रहे हैं वो नई टेक्नोलॉजी बना रहे
हैं। यहां पे होगा। मेरे को इतना फनी लगता
है। मेटा का अभी लास्ट ईयर बड़ा न्यूज़
आया था। आपने सुना होगा कि ज़करबर्ग वास
गिविंग पीपल 400 मिलियन डॉलर का पैकेज, $
बिलियन डॉलर का पैकेज। वो लिस्ट बाद में
आई थी। टोटल 36 लोग थे। 36 में से 11 और
12 वर इंडियंस रेस्ट वर ऑल पीपल ऑफ़ चाइनीज़
ओरिजिंस। नो पाकिस्तानीज़, नो मिडिल
ईस्टर्न ये वो कोई नहीं। लिटरली इंडियन
एंड चाइनीज़ ओरिजिन पीपल।
नाउ चाइना हैज़ एन एक्टिव प्रोग्राम टू
पोस्ट दीज़ पीपल बैक। इंडिया का कहां पे
है? तो लेट्स से यू आर टॉकिंग अबाउट
क्राइसिस। ओके? अनदर क्राइसिस जो नोट्स
में मैं पढ़ रहा था वास अबाउट
माइक्रोफेंस।
ये क्या क्राइसिस है?
क्राइसिस नहीं है यार मेरे को
वाइट बट यू यू से समथिंग कि
कर्नाटका और तमिलनाडु में जो अभी हो रहा
है वो आंध्र प्रदेश में पहले हो चुका है
2010 में। व्हाट इज अ माइक्रो फाइनेंस
क्राइसिस जो हो रहा है।
मेरा मानना है कि माइक्रो फाइनेंस
क्राइसिस बोलना हमेशा गलत है। लोगों को
समझ में नहीं आता कि माइक्रोफेंस इंडिया
में 14 अलग इंडस्ट्रीज हैं। 14 का मतलब है
कि हर स्टेट में अलग आ रही है।
ठीक है?
सो पहली बात देखो
जिनको नहीं पता
हम
लगभग 45% ऑफ इंडिया का जो टोटल
माइक्रोफाइनेंस इंडस्ट्री है दैट इज इन
टर्म्स ऑफ अमाउंट ऑफ लोंस।
हम
दैट इज जस्ट थ्री स्टेट्स।
तमिलनाडु, कर्नाटका, बिहार।
पूरा माइक्रो फाइनेंस वहीं जाता है। 45%
मतलब तीन स्टेज
हाफ ऑफ इट ऑलमोस्ट।
ठीक है? और माइक्रो फाइनेंस होता क्या है?
पहले सिंपल लैंग्वेज में सुन।
सो देखो माइक्रोफेंस ऐसे समझिए छोटे-छोटे
लोंस। ठीक है? फॉर एग्जांपल
आप एक
नॉर्मल छोटे से घर में रहते हैं। एकदम
झुग्गी झोपड़ी वाले। आप सोचते हैं कि यार
मेरे को ना व्यापार करना है। मैं अपना खुद
के पान का एक मैं छोटा सा एक ठेला लगाना
चाहता हूं। जहां पे पान बेचूंगा और एक दो
चीजें रखूंगा। ट्रॉफी वफी रख लूंगा
एटसेट्रा उसके लिए मुझे कितना चाहिए 11000
12000 15000 का लोन चाहिए दैट इज अ
माइक्रो लोन लेकिन आप एक ऐसी कैटेगरी में
हो जिसको लोन देने में कोई भरोसा नहीं
आदमी भाग ही जाए
हम
तो ऐसे आदमी को बैंक्स तो लोन देते ही
नहीं है एनबीएफसी भी लोन नहीं देती है
तो कौन देगा तो वहां पे आते हैं बहुत
ज्यादा रिस्क टेकिंग एबिलिटी रखने वाले
माइक्रोफेंस इंस्टीट्यूशन जो बोलते हैं हम
देंगे लेकिन यहां पे इंटरेस्ट आपके जाते
हैं 24% 36% 30% बहुत ज्यादा
एग्जोर्बिटेंट होते हैं बट अगर अगर आप
ऑफलाइन इनफॉर्मल मार्केट से देखो जहां पे
रेट्स आपके 50 60 100% तक चले जाते हैं
साल के उससे बहुत बेटर है
हम
तो ये चलता है यहां पे बहुत ज्यादा आपका
वो वाला मॉडल भी चलता है कि कुछ लोग मिलके
लोन ले लेते हैं कि वो वाला एग्रीमेंट
होता है कि बेसिकली इससे सोचिए ना कि
हमारा सोसाइटी जो है एक सोशल स्ट्रक्चर
इसका आज भी बहुत स्ट्रांग है। एक होता है
ना कि राज और मैं पड़ोस में रहते हैं। अब
मैंने एक लोन लिया मैंने चुकाया नहीं। हम
तो राज की फैमिली तो ऑलवेज अरे यह तो
फ्रॉड है। यह तो लोन लेके भाग जाते हैं।
राइट? इस मॉडल में क्या चलता है? तीन चार
लोगों को क्लब कर दो। अगर इसने नहीं
चुकाया तो वो चुकाएगा। जो चुकाएगा वो
गालियां देगा। अबे पैसे तूने लिए, मैं
चुका रहा हूं। पता है तेरे को? वहां रहना
मुश्किल कर देते हैं। इस तरह की चीजें
होती हैं जिसके थ्रू पूरा इंडस्ट्री चलता
है। बहुत सारे इसमें और भी फैसेट्स हैं।
मैं बहुत सिंपलीफाई करके बता रहा हूं। फिर
तो इन लोगों को जब कर्जा चाहिए तो ये लोग
माइक्रोफेंस के पास जाते हैं। अब
माइक्रोफाइनेंस
जैसा मैं कह रहा था 45% ऑफ़ द लोोंस टोटल
जो हैं वो घुमा फिरा के तीन स्टेट्स में
है।
तमिलनाडु, कर्नाटका, बिहार
और 62% ऑफ़ द जो एनपीए जो है डिलिंग जो हुई
है आपकी वो अगेन आपके तीन स्टेट्स में है।
तमिलनाडु, बिहार एंड उत्तर प्रदेश। उत्तर
प्रदेश आपका टॉप थ्री में तो आता नहीं है
लोंस में। लेकिन एनपीए में आ रहा है। इसका
मतलब क्या हुआ?
कि वहां लोग लोन लेते हैं। देते ही नहीं
है वहां पे।
ज्यादा है वहां पे केसेस। इसी वजह से अभी
कुछ समय पहले आरबीआई ने एक्चुअल में यह तक
कहा कि पूरी इंडस्ट्री को मैसेज था।
एक्चुअल में यह ऑफिशियल था स्लो डाउन इन
यूपी एनबीआर एमएफआई के लिए बिकॉज़ दिस इज़
नॉट रियली वर्किंग आउट फॉर यू। पर
2023 में था। 2025 में उन्होंने वापस
रिलीज़ कर दिया।
सी एक बार चीज़ सेटल होने लग जाती है।
नंबर्स बेटर होने जाते हैं तो आरबीआई फिर
वापस कहता है कि ठीक है नाउ थिंग्स आर
बेटर गेट बैक टू जॉब। बट कहीं पे भी अगर
बबल अगर बनने लगता है आरबीआई कम्स इंटू
इंटरवीन। नाउ पॉइंट इज दैट ये तीन स्टेट्स
हैं। राइट? उसके अलावा भी बहुत सारे स्टेट
जहां पर माइक्रोफेंस चलता है। हर स्टेट की
अलग कहानी चल रही है। एंड सबसे बड़ी तकलीफ
ये है माइक्रो फाइनेंस इंडस्ट्री में
मेजरिटी ऑफ़ द प्लेयर्स आर कंसंट्रेटेड। Bन
बैंक का नाम आपने सुना है कभी? Bन बैंक
माइक्रोफेंस से बहुत बड़ा प्लेयर।
ओके। पूरा कंसंट्रेशन मेजरली आपका आज से 5
साल तक 5 साल पहले तक खाली दो जगह था।
वेस्ट बंगाल एंड आसाम। धीरे-धीरे अब वो
क्राइसिस ऐसी कुछ हुई जो अभी मैं आपको
बताऊंगा जिसके उन्होंने डवर्सिफाई करना
शुरू किया। लेकिन आज भी मेजरली आपका वेस्ट
बंगाल एंड आसाम है। अब होता क्या है? जैसे
अभी इलेक्शन आया ना आसाम वेस्ट बंगाल एक
साथ हुआ उस टाइम भी एक साथ आए। इनके दोनों
मेजर मार्केट्स एक साथ आते हैं इलेक्शंस।
दोनों जगह जो पॉलिटिकल पार्टीज हैं एक साथ
अनाउंस कर देती है। अगर हम जीते तो ये जो
माइक्रो फाइनेंस वाले लोंस हैं हम लोन
वेवर दे देंगे। इलेक्शन होने में 6 महीने
हैं। लोन वेवर का अनाउंस होते ही क्या
होता है? लोग जो हैं हम लोग क्या बोलते
हैं? सरकार आएगी चुकाएगी। हम क्यों पागल
हैं ईएमआई भर रहे हैं? हम बंद कर देते
हैं। बैंक को तो वेट था ना कि पैसा आएगा।
बैंक की हालत अब टाइट हो रही है। कक्शंस
उनके जम के ड्रॉप होते हैं। फिर आप गुंडे
भेजो कुछ करो। कुछ नहीं काम चलता। कलेक्शन
एजेंट्स आप बेचते रहो। गुंडों का जो
सोफिस्टिकेटेड वर्ड है। बट नहीं चलता फिर
वो सिस्टम।
क्योंकि सरकार ने बोल दिया है। रादर अगर
आप ज्यादा एक्शन ले लो
हम
तो सरकार ही आपके ऊपर क्रैक डाउन कर देगी।
क्योंकि उनके लिए भी अब वो पॉलिटिकली
सेंसिटिव मैटर है। इलेक्शन आ रहे हैं।
मैंने बोला मैं दूंगा।
फिर होता है इलेक्शन होता है। ऐसा तो है
नहीं कि इलेक्शन हुआ और अगले दिन भैया
बैंक के पास पैसे पहुंच गए। फिर कुछ समय
निकलता है। तब जाकर के अब बैंक बैंक वाले
भी पीछे पड़ती है कि सर अब तो दे दो अब तो
दे दो। तो हमारी सरकारें फिर क्या करती
है? फिर निकालती है पॉलिसी। अच्छा ठीक है
अब हम ये देंगे।
सॉल्यूशन एक ही है।
हम
और इंडस्ट्रीज लाइए और इकोनमिक एक्टिविटी
बढ़ाइए कि ये जो लोग हैं
से बात कर रहे हैं।
बेसिक्स बेसिक्स वही है। हर चीज का निवारण
वही है कि अच्छी पढ़ाई कराओ। लोगों को
अपॉर्चुनिटीज दो इन वहीं पर आ जाते हैं।
व्हाट इज द थर्ड प्रेडिक्शन जो हमने कवर
नहीं किया।
यार थर्ड मेरा जो प्रेडिक्शन है दैट इज
बेसिकली कि लोग जो इतना कर रहे हैं ना कि
एआई से आईटी सेक्टर में ये होगा वो होगा।
कुछ लोग बोलते हैं कि कुछ नहीं होगा। कुछ
लोग बोलते हैं कि
कुछ लोग दिस इज़ योर थर्ड प्रेडिक्शन। ओके।
सो प्रेडिक्शन नंबर थ्री इज़ दैट एआई से
खाली आईटी सेक्टर की जॉब्स नहीं जाएंगी।
और भी बहुत सारी जॉब्संगी और जो लोग सोचते
हैं कि आईटी सेक्टर में इतना इंपैक्ट नहीं
आएगा बहुत बड़ा इंपैक्ट आएगा जी बहुत बड़ा
एंड मेरे को खुशी नहीं हो रही है बोलते
हैं लेकिन अगेन समथिंग दैट वी रियली नीड
टू थिंक अबाउट सिर्फ आईटी की जॉब्स नहीं
जाएंगी या
बहुत लोगों की जॉब जाएगी
अरे लोग एक ना समझ नहीं पाते कि यार आईटी
सेक्टर उतना बड़ा नहीं है इन टर्म्स ऑफ
नंबर ऑफ पीपल
हिंदुस्तान का जो वर्किंग पापुलेशन है दैट
इज अबाउट 62 करोड़ पीपल हम
हिंदुस्तान का वो पपुलेशन जो कि आईटी
सेक्टर में काम करता
इंडिया के जो आपके बड़े-बड़े आईटी जॉइंट्स
हैं राइट TCS ये वो पूरा जो आईटी सेक्टर
है TCS Infosys, Tech Mahindra, WPRO ये
वो अशोक सूट जी का अशोक सुटा जी का आपका
ये हैप्पीएस्ट माइंड्स है, केपीआईटी है,
बिरला सॉफ्ट है। कितने लोग हैं इसमें?
घुमा फिरा के 19 से 20 लाख लोग इसमें काम
करते हैं। ठीक है?
उसके बाद आपके जीसीस हैं जो कि ग्लोबल
कैपिटल सेंटर्स हैं कि एमx जो कि अमेरिकन
एक्सप्रेस है। उसने खुद कहा कि गुड़गांव
में अपना एक बड़ा सा सेंटर खोल लिया और भी
बहुत सारे खोल रहे हैं। तो बोइंग वालों ने
अपना एक सेंटर खोल आरडी का बोर में
एसेट्रा इसमें कितने लोग हैं लगभग 25 लाख
लोग हैं बाकी भी और होंगे छोटे-मोटे आईटी
वाले बहुत सारे कितने लोग होंगे सब में
मिला के 60 लाख लोग 1% ऑफ़ द टोटल वर्क
फोर्स ऑफ कोर्स दिस 1% अर्न्स अ लॉट मोर
वर्सेस अदर पीपल बट इन टर्म्स ऑफ़ पीपल
एक्स जस्ट 1% हम
हम एआई का इंपैक्ट पहली बात तो बहुत लोग
बोलते हैं कि इस पे ज्यादा इंपैक्ट आएगा
नहीं मैं बोलता हूं बहुत आएगा वो एक
सेपरेट पूरा डिस्कशन अभी वो भी करेंगे
मोरेंटली असली एआई का इंपैक्ट तो इसके
बाहर आ रहा है। हम उसकी बात ही नहीं करते।
चाइना वापस एक बार वहां लेके जाऊंगा।
आपने वीडियो जरूर देखी होगी। चाइना में
बंदा था जो कि होटल जाता है।
होटल में है। वो कुछ ऑर्डर करता है। वो
गेट खोलता है जब बेल बजती है। वो गेट
खोलता है देखता है कि अरे कोई सामान लेके
वैसे नहीं आया है। इट्स अ रोबोट। हम इट्स
अ रोबोटिक फ्रिज या फिर जो भी आप कह लो
टेंपरेचर कंट्रोल जो भी यूनिट वह अपने आप
ऐसे खुलता है एंड आपका वह ट्रे बाहर आ
जाता है। यू कैन पिक इट अप। व्हाट डिड दे
डू? उनके पास एक एजिंग सोसाइटी है जहां पे
लेबर की शॉर्टेज है। लेबर को ही रोबोटिक्स
से पूरा रिप्लेस कर दिया। एफिशिएंसीज आर
एनॉर्मस। कोई लेबर की झगझिक नहीं कुछ
नहीं। सून और लेटर दैट विल हैपन इन इंडिया
एज वेल। आपको लगता है ताजवाले नहीं
करेंगे। ओबेरॉय नहीं करेंगे। आईएcएल नहीं
करेगा, आईटीसी होटल्स नहीं करेगा, लीला
वाले नहीं करेंगे। सब करेंगे। ब्लूम वाले
नहीं करेंगे जो ब्लूम मैं तो अभी चलो टियर
वन होटल्स की बात किया जो आप एक नीचे लेवल
भी आओ जो कि आपका हम लोग जिसमें यूजली मैं
तो रह लेता हूं ब्लूम और ट्रीबो हो गया
ताज वालों की सॉरी ये आईएसएल जो टाटा
ग्रुप है उन्हीं की और जिंजर नाम से होटल
है। ये लोग नहीं करेंगे सब करेंगे। किनकी
नौकरियां यहां जाएगी वेटर्स की सर्वर्स की
कितने हैं इंडिया में? दिस इज अ ह्यूज
अमाउंट ऑफ एंप्लॉयमेंट दैट्स गोइंग टू बी
हिट।
हमारे यहां पर India पोस्ट जम के लॉसेस
करता है। क्यों लॉसेस करता है? बाय डिज़
नहीं है। इट्स बेसिकली नॉट एन ऑप्शन।
इंडिया पोस्ट का दायित्व क्या है? एक
सरकारी कंपनी है जो कि बोलती है कि यार आप
देश के किसी भी कोने में रहते हो। चाहे
वहां खाली आपका अपना घर हो। अगर कोई
चिट्ठी आएगी हम आपको पहुंचाएंगे। कोई
पार्सल आएगा हम आपको पहुंचाएंगे। वो हमारी
रिस्पांसिबिलिटी है। अब ऑफ कोर्स है ना
अगर आप वैसी जगह पहुंचाओगे आप प्रॉफिटेबली
नहीं कर सकते।
व्हाट डिड चाइना डू?
देयर आर लिटरली रोबोट वैस कोई ड्राइवर
नहीं होता उसमें। वो भरभर के सो मेजॉरिटी
ऑफ़ चाइनास इकोनमिक एक्टिविटी हैपेंस ऑन द
ईस्ट कोस्ट।
हम
जहां पे बेजिंग, शंगाई ये वो और थोड़ा सा
साउथ साइड पे होता है। व्हेन यू एज यू गो
नॉर्थ और द वेस्ट वहां पे नहीं होती
एक्टिविटी। शिजियांग बारे में अब होने लगा
है। पहले ज्यादा नहीं था। तो वहां पे ऑफ
कोर्स लोग भी कम रहते हैं। एरिया इतना
ज़्यादा बहुत कम डेंसिटी
वहां पे अगर अब आप चाइना पोस्ट की बात करो
इट्स नॉट ऐज़ इकोनॉमिकल टु सर्विस देम
लॉसेस वो भी करते थे दे हैव नाउ डिप्लॉयड
दीज़ ऑटोनॉमस ट्रक्स वीडियोस है प्लीज आप
जाके सर्च करो चाइना पोस्ट के ट्रक्स
ऑटोनॉमस खाली इतना Google करो YouTube पे
देख लेना आपको दिखेगा वो ऑटोमेटिकली चल
रही हैं दे हैव सेव्ड सो मच ऑन द कॉस्ट
ड्रोंस हैं जो कि माउंटेनियस है तो ड्रोंस
के थ्रू कर रहे हैं दीज़ आर ऑटोनॉमस ड्रोंस
हमें लगता है ना कि यार sविg Zomato
इन्होंने देखो डिलीवरी का कितना कमाल का
काम कर दिया वो व्हेन यू गो टू वहान इन
चाइना जिसको बोलते हैं ना वहां से कोविड
निकला था एटसेट्रा यू गो टू हेई यू गो टू
आर्न हुई व्हेन पीपल ऑर्डर स्टफ
बहुत बार होता है कोई देने आता है बट इन अ
लॉट ऑफ़ पॉकेट्स नाउ देयर आर डेडिकेटेड
ज़ों्स इन एव्री सोसाइटी जहां पे एक बंदा
बैठा है वहां पे अपने आप छत के ऊपर पूरा
इंफ्रास्ट्रक्चर वैसे बनाया है। उड़ के एक
पूरा ड्रोन आता है। वो उस पॉट पे बिल्कुल
बैठता है। मशीन सीधा सामान को नीचे खींचती
है। उस आदमी को देती है जाके डिलीवर कराओ।
कितना बड़ा कॉस्ट ऑप्टिमाइजेशन है ऑन द
डिलीवरी साइड ऑफ़ थिंग्स। आपको लगता है ये
Instाart वाले, Zepto वाले या फिर Zomato
वाले नहीं करेंगे आने वाले 5 साल में।
ऑफ कोर्स करेंगे।
जब होगा किसकी नौकरी जाने वाली है। दीज़ आर
नॉट आईटी प्रोफेशनल्स। ये वो 60 लाख लोग
नहीं है। उनका तो अलग ही कहानी चलेगी।
दिस इज ब्रॉड बीस्ट अक्रॉस इंडस्ट्रीज
ट्रकिंग इंडस्ट्री यूएस यूरोप लुक एट
चाइना मिडिल ईस्ट में हो रहा है ऑटोनॉमस
ट्रक्स चलने शुरू हो रहे हैं सर
चाइना में दिस इज़ हैपनिंग एट अ नेक्स्ट
लेवल स्केल
फुल फ्लेजर्ड बड़े वाले ट्रक्स उसमें भी
मैं अभी बताता हूं आपको आप वीडियो देखना
इसका यू विल बी माइंड ब्लोन ठीक है ट्रक
चल रहा है जिसमें कोई बैठा नहीं है आइडियल
इंडिया में अगर आपको ट्रक चलाना है हर 8
से 12 घंटे बाद यू नीड अ ड्राइवर चेंज।
आपको हर ट्रक के लिए आपको दो ड्राइवर
चाहिए। आपको चाहिए
दो बंदे वहां बैठते हैं।
इट्स अ कॉस्ट।
दे आर रिप्लेसिंग दैट।
नंबर वन। नंबर टू नाउ व्हाट दे हैव गॉन
फॉर इज़ एक ट्रक चल रहा है। सेंसर्स ऐसे
लगे हुए हैं। उसके पीछे देयर आर फोर मोर।
जिनका काम है पहले वाले के हिसाब से चलना।
सड़क पे ट्रक्स की ट्रेन बना दी है।
पांच-पांच एक साथ चल के जा रही है। आर
लिटल आप वीडियोस देख सकते हो। आप न्यूज़
में पढ़ सकते हो। साउथ चाइना मॉर्निंग
पोस्ट प्लीज लोग पढ़ना शुरू करो। आप पढ़ोगे
पता चलेगा चाइना में क्या हो रहा है।
हमारी मीडिया नहीं बताती है।
यू विल बी माइंड ब्लोन कि वो अपने आपको
कैसे और एफिशिएंट बनाए जा रहे हैं। कॉस्ट
ऑफ लॉजिस्टिक्स वैसे कम होता है।
हम नहीं करेंगे क्या? जिनको लगता है नहीं
करेंगे। कुछ हद तक हम भी शुरू कर रहे हैं।
जितना कर सकते हैं जो हमारी सर्कल अलव
करती है। हमारी सरकार ऑटोनॉमस ट्रक तो अलव
नहीं करती है। तो डिलीवरी ने क्या किया?
ट्रेलर ट्रक शुरू कर दिए। एक बड़ा वाला
ट्रेलर ट्रक है। उसके पीछे जॉइंट एक और
ट्रेलर लगा दिया। वो एक साथ चल रहे हैं
हम। दो ड्राइवर्स की नीड वहां खत्म हो गई
है। सूर और लेटर यहां पर भी ऑर्डर
स्ट्रक्स होंगे ही होंगे। बिकॉज़ हमें
ग्लोबली कॉम्पिटिटिव तो रहना है। कैसे
करोगे?
एआई ये सारी जॉब्स भी खाने वाला है। आईटी
सेक्टर में लोग कई बोलते हैं कि नहीं यार
उतना नहीं होगा एटसेट्रा कुछ नहीं होगा।
हियर इज़ व्हाट इज़ रियली हैपनिंग? Infosys
का एग्जांपल लेते हैं।
दे हायर्ड सम 80,000 पीपल इन अ ईयर।
नेक्स्ट डे दे हायर्ड 50,000 पीपल।
नेक्स्ट ईयर दे हाय सम 13,000 पीपल लास्ट
ईयर देर हेड काउंट रिड्यूस्ड नेट लेवल पर
टीसीएस 57 इयर्स की अपनी हिस्ट्री में 57
ईयर जितने भी इयर्स की उनकी हिस्ट्री है
37 की 57 की दो में से एक नंबर है। दे
नेवर डिड एनी मास लेऑफ्स। किसी को हटाया
तो मतलब कि काम अच्छा नहीं करे। वो सब
हटाना अलग चीज होती है। बट मास ले ऑफ्स
कभी नहीं हुए। लास्ट ईयर ओपन हम 12,000
लोगों को हटाएंगे।
उनका नेट जो हेड काउंट है वो लगभग 24,000
लोगों से कम हुआ। यह मतलब है
बट पॉइंट इज़ 12,000 आने से 24,000 से नेट
हेड काउंट कम हुआ है। मतलब इसका क्या होता
है कि जो लोग वंटरी छोड़ रहे हैं उनको हम
रिप्लेस भी नहीं करना चाह रहे हैं।
एंड दिस इज़ हैपनिंग एट अ टाइम वेयर आपके
मार्जिनस और कंप्रेस हो रहे हैं। व्हाई?
बिकॉज़ क्लाइंट को भी तो पता है ना कि एक
आदमी अब चार का काम कर सकता है। तो मैं
पहले वाले रेट्स क्यों दूंगा?
श्योर।
डील्स आर बीइंग रीनेगोशिएटेड एक्टिवली। जो
रीनेगोशिएट नहीं हो रही है वो डील जो पांच
साल की थी उसको बढ़ा के आठ साल का किया जा
रहा है ताकि क्लाइंट के लिए जस्टिफाई हो
जाए कि भाई वो छोड़ के ना चले जाए। दिस इज
ऑल एआई
अरे हर जगह हो रहा है।
हर जगह हो रहा है।
एवरीवेयर
एंड
इट्स स्केरी।
मैं इस पे इसलिए इतना मैं बात करना पसंद
करता हूं क्योंकि अगर इतने लोगों कीियां
इससे इंपैक्ट होने वाली हैं। वी शुड
एक्चुअली बी प्रमोटिंग मोर एंड मोर
डिस्कोर्स अराउंड इट। क्योंकि उन लोगों को
जिनको अभी एहसास नहीं उनको पता होना चाहिए
कि अच्छा यार हमें भी इसका असर आएगा। वी
नीड टू अपस्किल। हमें कुछ और सोचना पड़ेगा
क्योंकि घर तो हमें भी चलाने हैं। बच्चे
हमारे भी हैं। बड़े बुजुर्ग हमारे घर में
भी हैं। मेरे भी कुछ एंबिशन से कैसे
करूंगा मैं?
बट मैं इसको ओपोरर्चुनिटी जैसे देखता हूं।
फॉर सम पीपल इट इज।
नो नॉट फॉर सम पीपल फॉर एवरीबॉडी। आई थिंक
बहुत लोगों के लिए एक यह एआई का
रेवोल्यूशन एक मोमेंट बन जाएगा कि भाई
मैंने पुराना 10 साल पहले या 15 साल पहले
शायद मेरी टैलेंट की वजह से या मेरे दिमाग
की वजह से या रेस की वजह से या मेरे
मां-बाप की पैसे की सिचुएशन की वजह से या
मेरे आसपास परिवार की सिचुएशन की वजह से
जो मैं पढ़ाई नहीं कर पाया जो दिमाग नहीं
लगा पाया उसकी वजह से जो मैं सीख नहीं
पाया मैं आज आईआईटीए जितना स्मार्ट नहीं
बन पाया। है आज वो सब ना है इंजीनियर से
लेके एक नॉन डिग्री वाला सब एक सेम लेवल
पे आ जाएंगे। यस तो सबके लिए एक एक तरीके
से नई ओपोरर्चुनिटी है कि भाई आज से इसमें
नई तरीके से अपने आप को आप स्किल करना कुछ
सीखना स्टार्ट कर दो एआई में।
क्या पता
ये ओपोरर्चुनिटी ये टाइम है कि जहां आप
शायद जो आज 15 2000 कमा रहा है वो 5 लाख
कमाने लग जाए। जो 5 लाख कमा रहा है वो 5
करोड़ का कमाने लग जाए। जो 5 करोड़ कमा रहा
है और वो एोगेंट है तो वो जीरो कमाने लग
जाए। तो इट्स अ इट्स डेफिनेटली बहुत
रिस्की है। बहुत स्केरी है। बहुत लोगों की
नौकरियां जाने वाली है। बहुत खतरनाक बात
है। बट अगर यह लोगों तक पहुंच रहा है तो
बहुत लोगों के लिए एक ओपोरर्चुनिटी भी बन
सकती है। सो आई आई फील बहुत लोगों को ना
डर की जगह अगर उनमें इतना दिमाग है कि वो
ये पॉडकास्ट देखते हैं, कॉन्वर्सेशन देखते
हैं, इंटरनेट चलाते हैं। उन्हें यह सब समझ
आता है। इतनी बातें तक सुनते हैं। तो इतना
दिमाग होगा कि ए के साथ प्ले करके कुछ ना
कुछ सीख जाएंगे। ये बस अब विल और इंटेंशन
की बात है। मैं थोड़ा सा इसमें एग्री करता
हूं। थोड़ा सा डिसएग्री करता हूं। मैं
आपको बताता हूं क्यों। ठीक है? आपकी 150
लोगों की टीम है। राइट? नो ऑफेंस टू
एनीबडी इन दैट। बट आप भी मानोगे कि सबके
अंदर बराबर की चूल्हा और भूख नहीं होती।
बिल्कुल नहीं होती। राइट? जिनके अंदर चूल
और भूख होती है ना उनके लिए जो भी ये
हर्डल्स थे कि यार मैं उतना आईआईटी वाला
नहीं हूं। मेरे अंदर उतना दीवानी मुझे टेक
नहीं आता। एटसेटरा। व्हाट एआई इज़ डूइंग इज़
उनके लिए वो सारे बेंचमार्क हटा दिए गए
हैं।
एक्साक्ट्ली। इनेबल कर दिया गया है। बट
जिनके अंदर चूल्हा और भूख ही नहीं है ना
उसके लिए कुछ नहीं करने वाला। ट्रू।
एंड अपना-अपना ओपिनियन हो सकता है। मुझे
ज्यादा लोग ऐसे नजर नहीं आते। परसेंटेज
में देखो तो जिनके अंदर वो चूल है। एंड
मेजॉरिटी लोग जो मुझे चार्ट GBT पे खेलते
हुए देखते हैं वो यही होते हैं कि हे दिस
इज़ द फोटो आई एम गोइंग टू पुट आउट। इसके
लिए कैप्शन बता दो। या फिर जनरल लाइफ
क्वेश्चंस। उससे कुछ वैल्यू क्रिएट करना
सीखने के ऊपर मेरे को नहीं लगता लोग कर
रहे हैं आज के दिन।
दे अ फ्रेंड ऑफ़ माइन वैभव वो एआई स्कूल
चलाता है बहुत बड़ा। आई थिंक वन ऑफ़ द वैभव
सिसडी वन ऑफ़ द लार्जेस्ट
एआई अपस्किलिंग स्कूल्स इन द वर्ल्ड राइट
ग्रोथ स्कूल नाम है ना ग्रोथ स्कूल ग्रो
स्कूल
आउटस्किल करके एआई पे चलाता है। ओके। सो
वो उसने एक बहुत अच्छी टर्म देता है वो
एआई को काफी अच्छी चीज बोलता है। वो बोलता
है कि
जो लोग एआई को ऐसे देखेंगे कि ये एक ऐसा
एंप्लई है जो मेरी जॉब खा जाएगा उनकी जॉब
जाएगी।
या
जो लोग एआई को ऐसे देखेंगे कि अब मेरे पास
एक ऐसा जीनी एम्प्लई है जिसको जो मैं
बोलूंगा वो कर देगा।
या
तो वो लोग अपस्किल कर देंगे और
1000% एग्री
एंड आई लव दिस वे। आई विल गिव यू
एग्जाम्पल। ठीक है? तो हर किसी के पास एक
ऐसा एंप्लई आ गया है जिससे आप कुछ भी करा
लो। तो आपके और मेरे पास जो आज शायद आप जो
₹ लाख का आदमी ले सकते थे और मैं जब 5000
का ले सकता था ना अपन दोनों के पास
ऑलमोस्ट अब वो बराबर हो गया है।
मेरा 5000 वाला आपके 50 लाख वाले जैसा काम
करके दिखा सकता है।
बिल्कुल 1000% एग्री ऑन दिस वन। कोई डाउट
ही नहीं है।
अगर किसी के अंदर तलब है,
हम
चल लाइक कि भाई मैं इससे और क्या-क्या कर
सकता हूं? वो कुछ भी नहीं हो सकता।
ट्रू ट्रू।
एंड हम ऑलरेडी एग्जांपल्स देख रहे हैं।
बतेरे लोगों का देख रहे हैं।
हद से ज्यादा। वेल हियर इज़ माय लास्ट
क्वेश्चन टू यू। ओके? आई ऍम गोना गिव यू
नेक्स्ट 60 सेकंड्स। ओके? 60 सेकंड्स में
टेक अ पॉज। पेन एंड पेपर ले लो भले। थिंक
प्रॉपर्ली कि अगर आज के पडकास्ट में से
टॉप थ्री इंसाइट्स
लोगों को उठानी हो व्हिच पीपल शुड जस्ट
पिक इट अप एंड इंप्लीमेंट या जस्ट पिक इट
अप एंड अंडरस्टैंड या जस्ट पिक इट अप एंड
ऑब्ज़र्व व्हाटएवर जो आपकी टॉप थ्री
लर्निंग्स होगी इनसाइट्स होगी जो लोगों को
देखना चाहिए वो क्या होंगी मे बी राइट
थिंक जस्ट गो थ्रू द एंटायर पॉडकास्ट
व्हाट वी हैव डन टुडे लेट्स बिगिन
हम
क्या
डन।
नंबर वन
हर किसी की लाइफ में बहुत सारी ऐसी चीजें
होती हैं जो कि हम कर रहे हैं लेकिन वो
ग्राइंड वर्क है। जिससे हमारे दिमाग का
ज्यादा यूज़ नहीं हो रहा है। हम उसमें कोई
वैल्यू क्रिएट नहीं क्रिएटिव नॉलेज वहां
पे नहीं लग रही है। सट डाउन विद सम
एलएलएम। $20 का सब्सक्रिप्शन लो। क्लाउड
का लो। क्लाउड का आपको लगता है जल्दी
एग्जॉस्ट हो जाता है। ओपन एयर का चार्जिटी
का ले लो, जेमिनाई का ले लो, ग्रॉक का ले
लो। उस पे खेल करके ऑटोमेट करना सीखो।
एक चीज जब ऑटोमेट करना सीख जाओगे ना अपने
आप दिमाग दौड़ेगा। अरे इससे और चार चीजें
कर सकता हूं। एंड उस दिन से तुम्हारी
जिंदगी बदल जाएगी। दैट इज द फर्स्ट थिंग
दैट एनीबडी एंड एवरीबडी शुड बी डूइंग राइट
नाउ। ऑटोमेट वो चीज जिसमें तुम्हारा
ग्राइंड वर्क हो रहा है। ऑटोमेट कर दो।
दैट इज वन। नंबर टू है साउथ चाइना
मॉर्निंग पोस्ट नाम से एक अखबार है। प्लीज
प्लीज प्लीज पढ़ना शुरू करो। नॉट बिकॉज़
और आपको पता चलना चाहिए कि अच्छा ठीक है
क्या-क्या हो रहा है। बट बिकॉज़ यू शुड नो
कि दुनिया कहां जा रही है और हम कहां
स्टैंड कर रहे हैं।
अगर दुनिया में कुछ हो रहा है हमें वो पता
ही नहीं है तो हम कभी उतने बेहतर बन भी
नहीं पाएंगे क्योंकि हमें तो पता ही है
अच्छा ठीक है दुनिया उतनी आगे निकल चुकी
है। प्लीज पढ़ना शुरू करो। आपको
अपना-अपना मत हो सकता है। मेरा मानना है
कि व्हेन इट कम्स टू चाइना
हमें कोई भी मीडिया प्लेटफार्म वो चीजें
नहीं दिखाता जो कि एक्चुअल में वहां पे हो
रही है। वो लोग भी अपना बढ़ा चढ़ा के
दिखाते होंगे। बट इस प्लेटफार्म पे आपको
जो रियल आपको चीजें देखने को मिलेंगी। यू
आर गोइंग टू बी बी ब्लोन एव्री सिंगल डे।
आपको उस टाइम ना खुद इंस्पिरेशन लगने लग
जाएगी कि यार ये हम क्यों नहीं कर रहे?
ऐसे क्यों नहीं कर रहे? मेरे को अपने
पॉलिटिशियन से ये पूछना चाहिए या फिर इसके
ऊपर मैं स्टार्टअप क्यों नहीं कर रहा?
साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट डू इट। मैं
पिछले तीन साल से पढ़ रहा हूं। मैं बता
नहीं सकता मेरी लाइफ में क्या चेंजेस आए
हैं। इसके कारण मेरी थिंकिंग में क्या
चेंजेस आए हैं। नंबर थ्री फॉर मेजॉरिटी ऑफ़
अस पीपल
एआई इज़ गोइंग टू डिसररप्ट अस। अनलेस वी
लर्न टू यूज़ इट। सो या तो उसके यूज़ करके
अपने काम में ऐसा बनने के लॉज़ निकाल लो कि
आप अपने से 40 गुना आप काम अप कर सको आने
वाले 2 साल में। वरना बिगेन टू आल्सो फिगर
आउट आप और क्या-क्या कर सकते हो। हफ्ते भर
का टाइम है आपके पास। बैठ के इतना तो आप
सोच सकते हो कि यार मैं और किस चीज में
अच्छा हूं। मुकुल है क्लास प्लस के फाउंडर
जिनके जो मेरे गुरु हैं, मेंटोर हैं।
उन्होंने मुझे एक चीज कहें कंपनी छोड़ी
थी। हर आदमी तीन से चार चीजों में अच्छा
होता है। अगर आप आचिन खाली किसी एक से
अपना पैसा कमा रहे हो, अपना घर चला रहे
हो। आपके पास दो तीन चीजें और होंगी। सोचो
निकलेंगी। एंड बिगिन टू स्किल अपॉन दोज़
थिंग्स। बिगिन टू टेक दोज़ थिंग्स टुवर्ड्स
मोनेटाइजेशन।
जैसे आप वो करने लगोगे एआई से जो भी
डिसेप्शन आपकी जॉब में आएगा आप उसके
अगेंस्ट ओजा रेिलिएंट बनना शुरू कर दोगे
एंड वो बहुत ज्यादा इंपॉर्टेंट है सिर्फ
आपके लिए नहीं आपके परिवार के लिए आप सबकी
वेल बीइंग के लिए हमारी इकोनमिक के लिए
हमारे देश के लिए दीज़ आर द थ्री थिंग्स जो
कि आइडियली कोई भी आने वाले तीन चार दिन
या फिर हफ्ते भर के अंदर-अंदर ट्राई कर
सकता है। एक्सपीरियंस कर सकता है। प्लीज
डू इट।
थैंक यू सो मच सर। थैंक यू सो मच फॉर
स्पेंडिंग टाइम विथ अस। प्लेजर हैविंग यू।
थैंक यू सो मच राज। बहुत अच्छा लगा आपके
शो पे आके। बीन अ लॉन्ग टर्म एडमायरर।
आपके बहुत सारे पॉडकास्ट देखे हैं। एंड
झूठ नहीं कहूंगा। इट्स सॉर्ट ऑफ़ लाइक अ
ड्रीम टू बी आउट हियर। जहां से मैं आता
हूं बहुत बड़ी बात है। मैं अपने मुझे नहीं
पता पडकास्ट में आएगा नहीं आएगा। बट मैं
जिस-जिस को बता रहा था ना कि राजमान की
पॉडकास्ट में हरता। राज के दिस वन इज़ बिग।
भाई।
सो दैट्स इज़ टू थिंग्स। नंबर वन, व्हाट अ
बिग थिंग यू हैव बिल्ट आउट हियर। नंबर टू,
व्हाट एन एस्पिरेशन एंड अ जॉय इट इज कि
अच्छा ये मैनिफेस्ट हुआ है आज। थैंक यू सो
मच फॉर हैविंग मी या हियर। इट रियली मीन्स
अ लॉट, जेन्युइनली।
थैंक यू। थैंक यू सो मच। थैंक यू फॉर
कमिंग। आय थिंक इट जस्ट बी यू एंड आई वेर
डूइंग समथिंग व्हिच वी बोथ शुड डू। यू डू
इट इन अ डिफरेंट वे। आई डू इट इन अ
डिफरेंट वे। यू यू टॉक अबाउट
द मिसिंग लूप होल्स व्हिच वी हैव इन आवर
कंट्री एट अ ग्लोबल स्टेज। आई टॉक अबाउट
दी पॉजिटिव दैट वी आर एक्चुअली बिल्डिंग
इन द कंट्री बट बोथ आर इम्पोर्टेन्ट एट द
सेम टाइम एंड दैट्स व्हाई वांटेड टू डू
दिस पॉडकास्ट।
थैंक्स। रियली थैंक्स अ लॉट।
क्योंकि अगर दोनों नहीं होंगे तो वी वोंट
एक्चुअली अंडरस्टैंड वेयर वी आर। एंड वी
वोंट बी एबल टू फिल दोस गैप्स एंड टेक आवर
कंट्री मच अहेड।
अब्सोलुटली एग्री विथ थैंक यू डन।
थैंक यू।
हाउ यू डूइंग? वैरी नाइस टू मीट यू।
मीटिंग यू।
कैसे हो आप?
बहुत ही बढ़िया है सर। आ जाओ आ जाओ।
बट सो नाइस टू मीट यू बॉस। बीन अ लॉन्ग
टाइम इट मैटर ऑफ यूर्स। एंड या नाइस टू बी
हियर।
थैंक यू। थैंक यू। इट्स माय प्लेजर। मैं
भी आपको बहुत टाइम से फॉलो करता हूं। बड़ा
कुछ-कुछ टाइम पे तो मैं गुस्सा भी हो जाता
हूं यार। क्यों रैंड कर रहा है यार ये?
कभी-कभी मुझे भी लगता है। मेरी वाइफ को भी
लगता है। सो यू आर नॉट।
यू। आई ऍम 31 राइट नाउ।
31 व्हेन यू गेट मैरिड? आई गॉट मैरिड
ऑलमोस्ट 4 एंड हाफ इयर्स अगो हैड माय डॉटर
गोट 15 मंथ्स अगो
ओह स्वीट कांग्रेचुलेशन थैंक्स थैंक यू सो
मच यह एपिसोड एंड तक देखने के लिए अब आपको
तीन चीजें करनी है नंबर वन अभी इस चैनल को
सब्सक्राइब कर लो क्योंकि जितना आप
सब्सक्राइब करोगे उतने ही बेहतर हम गेस्ट
ला पाएंगे आपके लिए। नंबर टू प्लीज कमेंट
में हमें बताइए कि हमने क्या गलत किया और
क्या अच्छा किया ताकि उस फीडबैक से हम सीख
सकें और आपके लिए और बेहतर एक्सपीरियंस
क्रिएट कर सकें। एंड नंबर थ्री यह एपिसोड
किसी एक इंसान के साथ जरूर शेयर करना
क्योंकि एक कॉन्वर्सेशन इनफ होती है किसी
की जिंदगी चेंज करने के लिए। आई विल सी यू
नेक्स्ट टाइम अनटिल देन कीप फिगरिंग आउट।
Full transcript without timestamps
हम सबको इंस्ट्रशंस आए हमारे प्राइम मिनिस्टर से कि आप गोल्ड और मत खरीदिए। क्या है ऐसा? क्यों गोल्ड नहीं खरीदा हमने? देखिए सिचुएशन बहुत ज्यादा सीरियस है। गोल्ड इज वन ऑफ द बिगेस्ट इंपोर्ट सेंटर्स फॉर इंडिया। क्लोज टू अबाउट 800 टन्स ऑफ़ गोल्ड अ ईयर एंड वी प्रोड्यूस क्लोज टू अबाउट वन टन। दैट इज अ सीरियस प्रॉब्लम कि ये पैसा हमको बाहर चुकाना है। एंड अभी हम एक ऐसे सिचुएशन में है जहां पे रुपए का वैल्यू लगातार गिरते जा रहा है। जयंत मुंद्रा वन ऑफ द शार्पेस्ट वॉइसेस टुडे ऑन इकोनॉमिक्स, जिओपॉलिटिक्स एंड इंडियास लॉन्ग टर्म ग्रोथ स्टोरी। इस एपिसोड में हम बात करेंगे गोल्ड इंपोर्ट्स, डॉलर डिपेंडेंसी, इंडिया की मैन्युफैक्चरिंग रियलिटी और क्या इंडिया सच में नेक्स्ट सुपर पावर बन सकता है या नहीं? बहुत सारे लोग ये बात करते हैं कि रूपी अगर वो डेप्रिसिएट होता है ना, हमारे एक्सपोर्ट्स के लिए बहुत अच्छा है। जी, एक्सपोर्ट्स बहुत बढ़ेंगे। हकीकत क्या है? ओवर द लास्ट 14 ऑड इयर्स, रूपी हैज़ डेप्रिशिएटेड बाय ओवर 60%। हमारे एक्सपोर्ट्स एज अ परसेंट ऑफ़ जीडीपी 25% से 21% पे आ गए। कहां बढ़े एक्सपोर्ट? कम हो। मेरा एक सिंपल सा प्रेडिक्शन है कि मैं यहां पे भी दिखा सकता हूं। वी आर गोइंग टू सी दैट रूपी हिट $150 इंडिया वन ऑफ़ द फास्टेस्ट ग्रोइंग इकॉनमीज़ इन द वर्ल्ड। पर ऑन इंडिविजुअल लेवल उन्हें और गरीब फील क्यों होता है? हमारी अच्छी खासी जनता ऐसी है जो कि बहुत-बहुत गरीब है। अनइंप्लॉयमेंट बहुत ज्यादा हो। उसको सॉल्व करने के लिए आपको और ज्यादा तेजी से ग्रो करने की जरूरत है। फास्टेस्ट ग्रोइंग इन द वर्ल्ड इज़ नॉट इनफ। इफ इट इज नॉट फास्ट इनफ फॉर रिक्वायरमेंट्स। मेक अ सिंपल महंगाई होती क्या है वो बताओ। सो देखो इनफ्लेशन का मतलब है महंगाई कि कोई चीज आज इतने की है अगले साल इतने की हो गई तो इतना जो बीच में डिफरेंस आया दैट इज योर महंगाई लेकिन दिक्कत कहां आती है हमारी सरकार डिफाइन करती है कि बॉस अगर आप ओवरल इनफ्लेशन देखें महंगाई उसको एक नंबर में आप आखिर कैसे पिरोएंगे इतने सारे आइटम होते हैं तो उसके लिए निकाल दिया है एक इंडेक्स जिसको बोलते हैं कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स एक एवरेज इंडियन के हिसाब से वो क्या खाता है पीता है क्या सर्विस कंज्यूम करता है उस हिसाब से आपको एक वेटेज दे दिया जाता है अलग-अलग चीजों का तो लगभग 46% जो ओवरऑल वेटेज है दैट वास फॉर फूड अलोन कि हमारे देश की अधिकतर जनता के लिए असली खर्चा खाना है आपके बच्चे की स्कूल की जो फीस है उसको सीपीआई की कैलकुलेशन में कम वेटेज मिला है। वर्सेस प्याज का क्या रेट चल रहा है? क्योंकि प्याज के रेट अगर थोड़े ऊपर गए सरकार का इलेक्शन जितनातना मुश्किल हो जाता है। प्रेडिक्शन नंबर टू जो मैं लेके आया था जो जिसके ऊपर मुझे जरूर बात करनी थी। ये मेरा सिंपल सा प्रेडिक्शन है। मोस्ट इंडियंस विल नेवर बी एबल टू ओन अ होम। अगर किसी को हिम्मत करके घर लेना भी है या तो उसके घर और छोटे होंगे या फिर उसकी ईएमआई बड़ी होगी। एंड बहुत सारे लोग ये दोनों ही अफोर्ड नहीं कर सकते। व्हाट्स इज द थर्ड प्रेडिक्शन जो हमने कवर नहीं किया। सो प्रेडिक्शन नंबर थ्री इज दैट आगे बढ़ने से पहले इस चैनल को सब्सक्राइब कर लीजिए ताकि हम आपके लिए इसी तरह से और इनसाइटफुल और बेहतर पॉडकास्ट बनाते रहें एंड इस पूरे शो का ऑडियो एक्सपीरियंस स्पॉटिफाई पे अवेलेबल है जहां पर आप हमें फॉलो कर सकते हैं। एंजॉय द शो। टेल मी इफ इफ समवन इज वाचिंग यू फॉर द फर्स्ट टाइम। किसी को पता ही नहीं आप कौन हो, क्या हो? क्या करते हो आप? हाउ वुड यू एक्सप्लेन देम? हु यू आर? व्हाट डू यू डू? व्हाई शुड नेक्स्ट वन आवर किसी को स्पेंड करना चाहिए टू लिसन टू यू? यार मेरा सिंपल सा दैट आई टॉक अ लॉट ऑफ़ डेटा एंड सेकंड मैं यूजुअली वो बातें करता हूं जो कि ज्यादा लोग बातें नहीं कर रहे होते हैं। मैं ये नहीं कह रहा कि मैं अच्छी बातें करता हूं, बुरी बातें करता हूं। मैं खाली ये कह रहा हूं मैं वो बातें करता हूं जो ज्यादा लोग नहीं कर रहे होते हैं। ओके? इंटरेस्टिंग। एंड क्यों किसी को सुनना चाहिए आज का पडकास्ट? क्योंकि मेरा एक सिंपल सा ये मानना है कि आपको अपना खुद का ब्रेन चलाना आना चाहिए। आपके माता-पिता अगर आप अभी पढ़ रहे हैं तो ऑलरेडी लगा रहे हैं और आप पढ़ के आगे बढ़ चुके। आपके माता-पिता ने आपकी पढ़ाई पे आपको अपने से बेहतर बनाने में बहुत ज्यादा खर्चा किया है। इन्वेस्टमेंट किया है। उनकी आपकी बहुत उम्मीद है आपसे। वो इसलिए नहीं किया कि आपको जो भी कोई बताएं आप उसमें हां जी। हां जी करने वाले बन जाए। तो ये मैं जो भी कंटेंट डालता हूं वो इसी के लिए कि मैं लोगों को ये चीज पुश कर सकूं। अपना दिमाग का इस्तेमाल करें। इस पूरे पॉडकास्ट में भी मैं जो भी बातें बताऊंगा उसके थ्रू में यही मैं पुश करने की कोशिश करूंगा। इंटरेस्टिंग। सो अपना दिमाग यूज़ करें। हां जी। हां जी नहीं बोले। वेरी गुड पॉइंट टू स्टार्ट। राइट? या कल हम सबको इंस्ट्रक्शंस आए इंडिया में हर सिटीजन को हमारे प्राइम मिनिस्टर से। यस। तो उस पे हांजी हांजी करना चाहिए कि नहीं करना चाहिए? बट बिफोर वी गो देयर आई वांट मेक पीपल अंडरस्टैंड। तो कल एज वी स्पीक यस्टरडे हमें यह इंस्ट्रश आए थे कि आप गोल्ड और मत खरीदिए। घर में ज्यादा रहिए। वर्क फ्रॉम होम करिए। कार पूलिंग वगैरह ज्यादा यूज करिए और फॉरेन ट्रिप्स कम करो। फॉरेन शादियां कम करो। राइट? दिस इज मोटा-मोटी। दिस इज़ व्हाट ही हैव सेड इन लेमन टर्म्स। तो फर्स्ट पॉइंट पे जाते हैं कि व्हाई एक कंट्री के प्राइम मिनिस्टर को पब्लिकली जाके यह बोलना पड़ रहा है कि गोल्ड मत खरीदो। क्या है ऐसा? क्यों गोल्ड नहीं खरीदें हम? देखिए, सिचुएशन बहुत ज्यादा सीरियस है। ठीक है? मैं आपको सिंपल से एक वे में समझाता हूं। आपको पता है हम साल का कितना गोल्ड हम इंपोर्ट करते हैं और हम कितना हम खुद यहां पे प्रोड्यूस हम करते हैं। वी इंपोर्ट क्लोज टू अबाउट 800 टन्स ऑफ़ गोल्ड अ ईयर इंटू इंडिया एंड वी प्रोड्यूस क्लोज टू अबाउट 1 टन। 800 टन वन टन। ओके? सिंपल। एंड हम बनाते थे प्रोड्यूसिव एक टन करते हैं। यस। ओके। अब लोग बोल सकते हैं कि हमारे पास तो केजीएफ था जो कुलार गोल्डफी जो यश की मूवी से बहुत पॉपुलर हो गया। राइट? थिंग इज़ वो माइन थी तब भी हम उतने कोई बड़े प्रोड्यूसर्स नहीं थे। सोने की माइन है बोल के बहुत अच्छा लगता है। एंड इंडिया की ओनली एक्टिव मेजर माइन थी तो और ज्यादा वो लगता है। बट थिंग इज़ उससे इतना सोना नहीं आता था। अभी आज के दिन आपका लॉयड ग्रुप है एक। आई थिंक हां लॉयड ग्रुप है। वही अभी एक इन्वेस्टमेंट करके वो लोग अभी आंध्र प्रदेश के अंदर एक और माइन को भी एक्टिवेट कर रहे हैं। उससे लगभग लगभग पीक कैपेसिटी पे लगभग लगभग 1ढ़ टन और आएगा। 1.5 टन्स कितना हो जाएगा हमारा? घुमा फिरा के 2.5 टन्स 3 टन्स हो गया। हमारे इंपोर्ट्स ऑलरेडी 800 टन्स अ ईयर है और बढ़ रहा है। 800 टन। आप रफली कैलकुलेशन करके भी देखोगे ये नंबर कितना पहुंचेगा। दिमाग किसी का भी हिल जाएगा। गोल्ड इज़ वन ऑफ द बिगेस्ट इंपोर्ट सेंटर्स फॉर इंडिया। एंड अभी हम एक ऐसी सिचुएशन में हैं जहां पर रुपए का वैल्यू लगातार गिरते जा रहा है। तो ये बिल जो है 800 टन से अगर हम अगले साल दोबारा 800 टन ही मंगाते हैं ये जो बिल है ये और बढ़ते जा रहा है। लेकिन वॉल्यूम में नहीं बढ़ रहा है। वैल्यू में उसकी वैल्यू बढ़ती जा रही है इंडिया के अंदर। एंड दैट इज अ सीरियस प्रॉब्लम कि ये पैसा हमको बाहर चुकाना है। तो एक आम आदमी के लिए मेरे लिए क्या फर्क पड़ता है? आपको यहां से इस तरह फर्क पड़ेगा कि अगर आप सोना और खरीदेंगे तो सोने की पेमेंट करने के लिए हमारी सरकार को चाहिएगा डॉलर। आरबीआई को चाहिएगा डॉलर। कि पेमेंट मोस्टली डॉलर्स के अंदर होती है। हम अब वो डॉलर अगर आपको चाहिए $ पहले $ के लिए कितने रुपए हमारी आरबीआई को खर्चा करना पड़ता है एक तरीके से। मैं बहुत ही लेमन लैंग्वेज में बता रहा हूं। $ के लिए पहले $1 की अगर आपको पेमेंट करना है। आपको चाहिए था मान लीजिए ₹85। अब सडनली चाहिए ₹94। सडनली और ज्यादा रुपए हैं जो कि बाहर जा रहे हैं। आपकी इकॉनमी में नहीं रह रहे हैं। और वो कौन पे कर रहा है? हम लोग कर रहे हैं। आप ऐसे सोचिए बाहर वाले को सोना लेना उसे $1 ही देना पड़ रहा है। हमें अगर लेना है तो हम पहले 85 दे रहे थे। अब हम 95 दे रहे हैं। हमारी इनकम वहां पे टाइट हो जाती है। हम 10 हर घर घर पे इंपैक्ट आता है। मैं आपको एक सिंपल सा एक दूसरा एग्जांपल से बताता हूं। अभी 95 समथिंग हो गया ना? ऐसा ही कुछ चल रहा है। तो हम ₹10 एक्स्ट्रा दे रहे हैं हर गोल्ड। या एंड मान लीजिए कि सोने का रेट यही रहता है। अभी जो लगभग आई थिंक कितना चल रहा है? $4500 $4600 पर आउंस। ठीक है? मान लीजिए सोने का रेट यही रहता है बाहर के मार्केट में। लेकिन रुपए अगर डेप्रिशिएट होता जाता है, सोने की वैल्यू बाहर वही है। लेकिन हमारी जेब से उतना ही सोना इंपोर्ट करने के लिए ज्यादा पैसा लगेगा। हम जो दुकानों से सोना खरीदते हैं उसका रेट और बढ़ेगा। इस वजह से है कि हमारी सरकार बोल रही है कि भैया कम इंपोर्ट करो। लेकिन अब यहां पे बात आती है कि ऐसा है तो हमारी करेंसी को स्ट्रांग बनाओ। हम्म। अब मेरा ये कहना है करेंसी को स्ट्रांग बनाना हमारे हाथ में ही नहीं है। ओके। व्हाई डू आई से दैट एक करेंसी की वैल्यू कहां से निकलती है? या तो उसके दो ही उसके तरीके हैं। नंबर वन या तो आपकी करेंसी में बहुत ज्यादा ट्रेड होता हो। ट्रेड तो ज्यादा डॉलर में हो रहा है। रुपीस के ऊपर ज्यादा ट्रेड नहीं होता। कुछ हमारे बॉर्डर शेयरिंग जो हमारे स्टेट्स हैं या फिर जो आसपास के हैं मालदीव्स हो गया, नेपाल हो गया, भूटान हो गया। इनके साथ फिर भी थोड़ा बहुत चलता है। यूएई के साथ हमने एक दो ट्रांजैक्शंस कर लिए। रशिया के साथ हमने बीच में बहुत किया वो स्लो डाउन हो गया है। और ज्यादा नहीं हो रहा है। सो वो वाला तो आप बढ़ा नहीं सकते हो। कैसे बढ़ाओगे? उसको बढ़ाने का एक ही तरह है ट्रेड वाले को कि आप लोगों के लिए वह चीज़ बनाना शुरू करो जो कि बाहर वालों को आपसे चाहिए। वो हम ज्यादा करते नहीं है। दूसरा तरीका है कि आप लोगों के लिए रिजर्व करेंसी बनना शुरू कर दो। लेकिन रिजर्व करेंसी आप कब बनोगे लोगों के लिए? जब बाकी कंट्रीज के लिए आपकी करेंसी के बिना खुद का गुजारा मुश्किल हो जाए। हम चाइना को पता था वो ट्रेड में ईजीली डॉलर को रिप्लेस नहीं कर सकता। चाइना ने क्या किया? चाइना बिगेन टू गिव अ लॉट ऑफ़ डेप्ट। अब वो डेप्ट को सर्विस करने के लिए ये आपके डेप्ट में आपके पास दो ऑप्शन होते हैं कि इदर यू टेक डॉलर लोन और यू टेक युवान बेस्ड लोन युवान वाला अगर वो आपको पड़ रहा है 0.25 बेसिस पॉइंट सस्ता तो जांबिया केन्या ये जाके लेते हैं युवान वाला लोन ओके उसकी पेमेंट 2.5 बेसिस ठीक है 25 बेसिस सस्ता क्या होता है सो आई विल गिव यू एन एग्जांपल लोग लोन डॉलर की जगह चाइना की करेंसी में क्यों लेना प्रेफर करते हैं आपको एग्जांपल देता हूं सो केन्या अफ्रीका का एक बहुत बड़ा देश है। पावरफुल कंट्री है वहां का। उसके पास 5 बिलियन डॉलर का एक पूरा रेलवे लाइन उसने पूरा बनाया था। जिसके लिए जो लोन जो लिया गया था वो डॉलर में था। हम ठीक है? नाउ चाइना केम इन। उन्होंने कहा कि यार बनाया तो हमने है ना। तुम्हें पेमेंट हमें ही करनी है। यूआ में कर दो। कोई दिक्कत नहीं है। ठीक है? जो डॉलर वहां पे देने हैं हम अभी दे रहे हैं। तुम हमें फिर यूआ में चुका है। रीफाइनेंस किया हम और वो वाला जो पूरा ट्रांजैक्शन है क्योंकि अब बीच की करेंसी हटा दी गई है। जो कि चाइना को भी देना पड़ता, जांबिया को भी देना पड़ता। जांबिया इज़ नाउ सेविंग अराउंड $250 मिलियन डॉलर्स ऑन दिस वन। राइट? अगर आपका कर्जा आपको जो आप लिया है उसका पेमेंट आपको चाइना को करना है। चाइना के लिए युवानेंट है। डॉलर नहीं है तो आप युवान में करो ना। डॉलर बीच में आया है तो आप किसी से आप वहां से ले रहे हो। किसी को दे रहे हो उसको भी फिर वापस उसको यूज़ करने का टेंशन। टेंशन ही खत्म। वो वाला एंगल है यहां पे। नाउ इट कम्स टू इंडिया। फाइव बेसिस कम समझ नहीं आया मुझे। सो ऐसे समझिए कि अगर मैं जांबिया हूं हम ठीक है मान लीजिए मैं जांबिया हूं आप चाइना है हम ठीक है अब मेरे को आपको मैंने आपसे लोन लिया आपको चुकाना है हां ठीक है एक होता है कि यार राजमानी करेंसी है मैं उसी में कर दूं खत्म आर एस करेंसी डन बट हम बोलते हैं कि नहीं यार ये कोई थर्ड करेंसी है उसी में मेरे को चाहिए तो मुझे जाके पहले वो करेंसी खरीदनी पड़ेगी वो खरीदनी तो ऑलरेडी किसी और के पास है। आई हैव टू पे ट्रांजैक्शन फी ऑन दैट। एक्सचेंज रेट ऑन दैट। उसमें भी थोड़ा सा कुछ जाता है। प्लस वो जब आपके पास जाएगा राइट? वो आपके पास तो आ गई। अब आप भी जब उसे दोबारा कहीं यूज़ करोगे किसी और ट्रेड के लिए अगेन आपको भी फिर वो दोबारा करना पड़ेगा। लॉसेस होते हैं। चाइना ने ये बोला हमारे युवान ही यूज़ करो। हमारे एंड का बच गया। तुम्हारे वाला हम कर देंगे। तो जांबिया के पास युवान कहां से आए? चाइना ने आके कहा। नहीं पड़ रहा है ना। हम चाइना ने कहा कि भाई साहब आपका जो डॉलर वाला लोन है हम चुका देते हैं खत्म का नहीं क्योंकि उनके पास डॉलर्स के रिजर्व कम थे। ओके हम चुका थे खत्म काम तुम हमें यूआरान में चुकाते रहना। ओके। सो इट्स जस्ट लाइक आई विल टेक द लोड ऑफ योर लोन या मैं तुम्हारा जो 5 बिलियन डॉलर है वो लोन मान लो 2 साल में तुम्हें चुकाना है। तो मैं 2 साल में चुका दूंगा। मुझे तुम 3 साल में धीरे-धीरे करके दे दो। तुमको एक साल एक्स्ट्रा दे दिया या तुम मुझे 2 साल में थोड़ा सस्ते में दे देना। व्हाटएवर है? एंड ये क्यों होता है पता है? नाउ व्हेन इट कम्स टू से अ कंट्री लाइक जांबिया उसके पास डॉलर्स की शॉर्टेज है। वीक इकॉनमी है। सब कुछ है। बट व्हेन इट कम्स टू चाइना उनके प्ला उनके लास्ट ईयर का जो आपका एक्सपोर्ट्स का सरप्लस था दैट वाज़ $1.1 ट्रिलियन डॉलर्स। उनके पास डॉलर्स का सरप्लस पड़ा है। पहाड़ पड़ा है। उनको पता नहीं उसका करना क्या है। बोला हम चुका देंगे खत्म नहीं। तुम हमारे युवान में करो। हम दे कैन एक्चुअली डू दैट। नाउ अगर हमें रूपी को स्टंग बनाना है या तो ट्रेड सेटलमेंट ज्यादा उसप हो या फिर वी बिकम अ रिजर्व करेंसी। नाउ फॉर सम कंट्रीज वी आर अ डिसेंट इन रिजर्व करेंसी। मालदीव्स के लिए थोड़ा है। आपका नेपाल के लिए थोड़ा सा है। आपका श्रीलंका के लिए थोड़ा है। भूटान के लिए बहुत बड़ा है। बट इन द एंड दीज़ आर वेरी वेरीरी स्माल इकॉनमीज़ वैरी स्मॉल कंट्रीज। मिनिस्ट या हमारे मेजॉरिटी स्टेट्स इनसे बड़ी इकॉनमीज़ है अपने आप में। नो ऑफेंस टू एनीबडी फ्रॉम दीज़ कंट्रीज। बट है जो है राइट? सो वहां पे आता है बात कि बॉस हमारी करेंसी की डिमांड कहां है? ऊपर से प्रॉब्लम क्या आती है? वी इंपोर्ट एवरीथिंग। लिटरली एवरीथिंग। हम जो बात करते हैं ना कि अच्छा ठीक है वी आर दी फार्मेसी ऑफ द वर्ल्ड पीपल डोंट रियलाइज दैट फार्मेसी आपका मेडिसिन आपकी बनती किससे है एपीआई एपीआई राइट रफली अबाउट 70% ऑफ़ ऑल द एपीआई दैट वी नीड इज़ कमिंग फ्रॉम चाइना हम जो 30% यहां बना रहे हैं वो किससे बनते हैं केएसएम्स केएसएम्स इज़ व्हाट की स्टार्टिंग मटेरियल्स केएसएम्स आपका 90% सारा चाइना से आ रहा है अब होता क्या है हमारी सरकार इसलिए रेमेडी निकालती है। लेट्स डू अ पीएलआई स्कीम। अपनी इंडस्ट्रीज को पैसा दो। इंसेंटिव देंगे तुम। लेकिन एपी यहां बनाना शुरू करो। हम कुछ प्लांट्स एक्टिव होते हैं। और Farma का एक प्लांट है। डॉक्टर रेडीज का एक प्लांट है। ये सब लाइव हुआ। व्हाट डिड चाइना डू? क्रैश दोज़ वैरी ईपीआई का प्राइसेस अप टू 40% 50% हाउ डू यू कमट? जो इंडिया में बनने लग गया उसे 40% कम कर दिया चाइना ने। या नाउ द रिजल्ट इज़ हम कैसे उसे कमपीट करें? राइट? तो यहां पे बात ये आती है कि बॉस बहुत ज्यादाेंट है। नंबर वन आर वी रेडी टू पे अ बिट एक्स्ट्रा फॉर द इंडिया मीट स्टफ? नंबर वन। नंबर टू विदाउट दैट देयर इज़ अ सशन टू इट। वी हैव टू रियली फिगर आउट टू थिंग्स। नंबर वन हाउ डू वी कंज्यूम मोर ऑफ़ व्हाट वी मेक इन इंडिया? हम नंबर टू हाउ डू वी इंश्योर दैट व्हाट वी आर मेकिंग इन इंडिया उसका बैक एंड कहीं बाहर से नहीं आ रहा है। सो फॉर एग्जांपल हम बड़ा प्राउडली ये चीज़ बोलते हैं कि यार यू नो व्हाट? हम काफी सारे फर्टिलाइज़र्स सब इंडिया में बनाने लग गए हैं। उसका पोटैश आज भी बाहर से आता है। सल्फर आज भी बाहर से आता है। दोज़ आर दी बेसिक मटेरियल्स। अभी ये पूरी जो सिचुएशन हुई है बिकॉज़ ऑफ़ वॉर। पोटैश आपका कहां से आता है? मिडिल ईस्ट से आता है मेजॉरिटी। हमारी लंका लग गई है। सभ्य भाषा में कह रहा हूं। सल्फर आपका कहां से आता है? मेजोरिटी आपका बाहर से आता है। हमारी अगेन लंका लग गई है। रिजल्ट इज़ हम यहां पे बना नहीं पा रहे हैं। तो होता क्या है? अब बाहर के रेट पे हमें खरीदना पड़ता है। हम एग्जांपल से बताता हूं। सो यूरिया राइट? यूरिया की अगर बात करें तो वी इंपोर्ट क्लोज टू अबाउट सो हमारा ओवरऑल जो डोमेस्टिक कंसमशन है दैट्स अबाउट 40 मिलियन टन्स अ ईयर हम 30 मिलियन टन्स हम इंडिया में बनाने लग गए हैं 30 आज भी नहीं बनाते हैं 30 इज़ व्हाट 25% ऑफ़ अ कंसमशन इट्स नॉट अ स्माल नंबर हाउ डू वी सॉल्व फॉर इट उसका एक रास्ता बनता है अगर इंडिया में नहीं बना सकते हो कैप्टिव कैपेसिटीज बाहर बना लो इंडिया ने क्या किया 50-50 जॉइंट पेंचर किया रशिया के क्योंकि ऑलरेडी यूरिया हमारा अच्छा खासा रशिया से भी आता है। वी डिड अ जॉइंट वेंचर जो कि अब 2 मिलियन टन का हम पे प्लांट लगा रहा है। इट विल एलिमिनेट द हर्डल्स फॉर एटलीस्ट 20% ऑफ़ द इंपोर्ट्स दैट वी डू। लेट्स डू दैट। उस तरह के कई सारे रास्ते जो हमें अपनाने पड़ेंगे अक्रॉस डिफरेंट सेक्टर्स जो हम उसको एड्रेस करेंगे तब जाके कुछ होगा। अब जरा सोचिए एक बात कि अभी कोल इंडिया जो हमारी है राइट? कोल इंडिया ने बीएचईएल नाम से एक और पीएसओ उसके अंदर एक जॉइंट वेंचर किया और बोला कि यू नो व्हाट कोल से चाइना वाले यूएस वाले और दूसरे कंट्री इतने सारे पेट्रोल बनाते हैं। सो इट आप सोचो ना कि आपका ये जो पेट्रोल है, डीजल है ये क्रूड से आता है। क्रूड क्या है? इन द एंड इट्स अ हाइड्रोकार्बन। हम कोल इज़ आल्सो हाइड्रोकार्बन। ओके? इट्स अ कार्बन प्रोडक्ट। राइट? उस कार्बन से यहां पे भी तो हम केमिकल्स बना सकते हैं। बट इट्स अ कॉस्टलीियर प्रोसेस। कोल इंडिया ने फाइनली बोला कि यू नो व्हाट? ओके चलो करते हैं कि सरकार इंसेंटिव अब दे रही है। बीएचएल गया टाई अप किया नाउ दे आर बिल्डिंग अ प्लांट जो कि एल&टी एग्जीक्यूट कर रहा है एंड दे आर बिल्डिंग अ प्लांट फॉर अमोनियम नाइट्रेट। अमोनियम नाइट्रेट हमारा एनुअल कंसमशन इज़ 8.8 लाख टन्स दीपक ग्रुप है यहां पे जो कि लगभग लगभग 6 जिसका लगभग लगभग 6 लाख टन्स का उनकी कैपेसिटी है। बट वो ऑपरेट करते हैं लगभग 75% ओवरऑल कैपेसिटी पे। क्यों? रशिया से बहुत ज्यादा चीप इंपोर्ट्स आ जाते थे। नाउ बिकॉज़ ऑफ़ गवर्नमेंट इंसेंटिव्स कोल इंडिया और बेल का कहना है कि यार हम तो उस रेट पे कमट कर पाएंगे। सो लेट्स बिल्ड अ प्लांट। अब ये जो प्लांट लगा रहे हैं दैट हैज़ 6.6 लाख टन्स का एनुअल कैपेसिटी। मतलब क्या हुआ? हम नेट इंपोर्टर से सीधा नेट एक्सपोर्टर बन जाएंगे। हम लेट्स डू मोर ऑफ़ दीज़। जैसे-जैसे एक-एक करके बेसिक्स और ये बहुत सारे बेसिक्स हैं। हर इंडस्ट्री के छोटे-छोटे हैं। जैसे-जैसे उनको सॉल्व किया जाएगा। तब जाके होगा कि बाहर से हम जो हर छोटी-छोटी चीज़ हम इंपोर्ट करते हैं वो चीज़ एलिमिनेट होगी। सप्लाई चेन वहां से सॉल्व होगी। इट इज़ नॉट द टॉप डाउन अप्रोच कि चलो पहले असेंबली करते हैं फिर वो बना लेंगे। कुछ इंडस्ट्रीज में वो चलता है, इलेक्ट्रॉनिक्स में वो चलता है। इन मेजॉरिटी ऑफ़ द थिंग्स आपको उल्टा करना पड़ेगा। बट देन अगर गवर्नमेंट हर किसी पे एक इंसेंटिव देगी, एक सब्सिडी देगी उसको मेंटेन करने के लिए, तो उसके लिए पैसा लगेगा। या तो वो अगर गवर्नमेंट के पास ज्यादा पैसा ही नहीं है, जहां पे वो मेजर फाइट है, वो सारी सारी इंडस्ट्रीज को देगी कैसे? पैसा तो ऑलरेडी दिया जा रहा है, सर। सो पहली बात यह चाइना भी हर इंडस्ट्री को पैसा देता है। ठीक है? इंडिया भी दे रहा है। सो फॉर एग्जांपल जीएसडब्ल्यू ग्रुप आता है। जीएसw ग्रुप ने अनाउंस किया महाराष्ट्र के अंदर कि नागपुर के पास बूटीबुरी रीजन है। मैं वहां पे 25,000 करोड़ का इन्वेस्टमेंट करूंगा। एंड क्या बनाऊंगा वहां पे? मैं वहां पे एक बनाऊंगा लिथियन आयरन बैटरीज का प्लांट और दूसरा मैं वहां पे बनाऊंगा सोलर का पूरा इकोसिस्टम मैन्युफैक्चरिंग। ग्रेट। उसके लिए उनको क्या उन्हें उन्हें दिए गए? को पता है 110% ऑफ द इन्वेस्टमेंट जो आप करने जा रहे हो 110% ऑफ़ दैट एज एसजीएसटी रिफंड एसजीएसटी जो सरकार का जो कंपोनेंट बनेगा ये आने वाले सालों में उसका रिफंड आपको मिलेगा साथ में आपको मिल रही है इलेक्ट्रिसिटी प्रैक्टिकली आपका जो इन्वेस्टमेंट है सब कुछ वापस आपको मिल रहा है हम भी तो दे रहे हैं वो पैसा है नहीं सरकार के पास वो सरकार ये कह रही है आप जो हमें दोगे वापस आपको दे देंगे वो वाला मॉडल तो है ही ना उसके लिए सरकार को पैसे की शॉर्टेज तो नहीं होगी हम सो दैट इज़ पॉसिबल। अब प्रॉब्लम वही आती है खाली जीएसब्ल्यू ग्रुप को नहीं मिलना चाहिए। सबको मिलना चाहिए। नाउ दैट इज़ अ होल्ड टुगेदर अदर डिबेट। अगर कोई आदमी फरीदाबाद के अंदर अपना एक 40 लोगों का अपना यूनिट लगा रहा है कि वो कुछ बनाएगा वहां पे उसको ये सब कुछ नहीं मिलेगा। बट यहां पे ये सब मिल जाता है कि वो बड़े स्केल का इन्वेस्टमेंट है। दैट इज़ समथिंग डू वी फिगर आउट। बट पॉसिबिलिटीज़ तो है ही ना। ओके। एंड सेकंड थिंग इज़ आप जरा ऐसे सोचिए इन एफआई 25 हमारे पैन इंडिया आरबीआई का जो कैन है उसके हिसाब से लगभग 5.5 लाख करोड़ का अक्रॉस स्टेट्स एंड सेंटर हमने फ्री बीस हमने बांटे। ठीक है? स्टेट गवर्नमेंट्स ने जो कि इलेक्शन बाउंड जो स्टेट्स थे उन्होंने यह टाइम्स ऑफ इंडिया में आया था दैट दे प्रॉमिस सम 1.05 लाख करोड़ उन्होंने बजट्स में जो अनाउंस किया था फॉर फ्री बीस एंड कैश एंड्स में मिल जाता। इलेक्शंस आए तो उस साल के अंदर दे एक्चुअली अंडर स्पेंडिंग समथिंग टू 1.6 लाख करोड़। पैसे की कमी कहां है सर? पैसा तो है। इट्स मोर अबाउट प्रायोरिटीज। ऐसा क्यों है कि Bajaj Tata Motors वालों को यह बोलना पड़ रहा है कि यार दो दो साल हो गए हमारे इंसेंटिव नहीं आ रहे। नाउ दैट इज अ प्रॉब्लम। व्हाई इट एक्चुअली डिस्ट्रॉयस दी इन्वेस्टमेंट क्लाइमेट। इंडस्ट्रीज को क्या मैसेज जा रहा है कि हां यार ये बोलते तो हैं कि देंगे लेकिन आते नहीं है। एंड दैट्स अ वै बिग प्रॉब्लम। तो कहां जाते हैं पैसे? अब आप दूसरी चीजों में खर्च हो जाते हैं ना। पैसा एंडलेस तो नहीं है ना। इट्स मोर अबाउट व्हाट आर योर प्रायोरिटीज। सो दैट्स व्हाट माय पॉइंट इज़ राइट? गवर्नमेंट की प्रायोरिटीज में मेबी एक्स व जी है तो अगर वो इन पे लगाती तो दूसरी जगह कहीं से सिस्टम खत्म होगा ना कहीं पे तो जा रहा होगा वो पैसा देयर आर टू काइंड ऑफ़ इंसेंटिव्स एक पैसा नहीं है गवर्नमेंट के पास अनलिमिटेड तो है ही नहीं अगर उनके पास ₹100 हैं जो हर साल आते हैं वो ₹100 में से वो चाहते हैं कि यार मैं 20% ₹20 इन इंडस्ट्रीज को दे दूं इंसेंटिव करने में ताकि हम चाइना से कमट कर पाएं या दूसरे देशों से कमट कर पाएं। राइट? लेकिन ये ₹20 आज तो कहीं और जा रहे होंगे ना। ये कहां जा रहे हैं? सी आई विल पुट इट दिस वे वी आर नॉट अ वेरी वेरीरी स्ट्रांग सोसाइटी इकोनमी ठीक है इन मोस्ट ऑफ़ द थिंग्स वी आर इन अ डेफिसिट इंफ्रास्ट्रक्चर की बात करें गुड वाटर की बात करें हर चीज में हम डेफिसिट में ही चल रहे हैं ठीक है तो प्रायोरिटीज एंडलेस हैं इट्स मोर अबाउट व्हाट नीड्स टू बी सॉल्व फर्स्ट सो टू इंश्योर कि द रिसोर्सेज कीप ऑन राइजिंग टू सॉल्व मोर ऑफ़ प्रॉब्लम्स लेटर ऑन ओके इट्स मोर अबाउट दैट सो अगर हमें ये लगता है कि ठीक है एजुकेशन पे बाद में सॉल्व कर लेंगे पहले यह सॉल्व कर लेते हैं। तो कुछ लोगों के लिए शायद सही हो सकता है क्योंकि उनको आज उन्हें फायदा मिलेगा। बट लॉन्ग टर्म मेरा ऑब्वियसली एक एजुकेटेड वर्क फ़ोर्स नहीं है तो प्रॉब्लम बन जाता है। सिमिलर वे इंडस्ट्रीज के लिए भी यही हमें यहां पे डिसाइड करना है। इज इट नाउ अ प्रायोरिटी? या फिर ठीक है। अभी ये सब ऐसे ही चलने दो। पहले ये बांट लेते हैं। पहले अगर कोई अनइंप्लॉयड है उसको हर महीने का ₹21,000 देना उसको शुरू करते हैं। पहले अगर कोई भी अगर लेडी है जिसके पास मतलब क्या कहते हैं? अगर बच्चा है तो उसको उसको मतलब कह देते हैं ₹3,000 महीने देना शुरू करते हैं। इफ दैट इज़ अ प्रायोरिटी। तो पहले उसको सॉल्व कर लेते हैं। बट उसको सॉल्व करोगे तो यह वाला पीछे रह जाएगा। एंड द बिगर प्रॉब्लम इज दुनिया इसके लिए रुकने नहीं वाली कि ठीक है यार अभी पहले उनको ये बांटना है तो हम रुक जाते हैं। वियतनाम वाले रुकेंगे नहीं। चाइना वाले रुकेंगे नहीं। इनफैक्ट चाइना वाले तो अभी नहीं रुक रहे। मेरे को इतना हंसी आती है। लोग बात करते हैं चाइना +1। चाइना प्लस वन कहां हो रहा है चाइना +1? चाइना शेयर ऑफ़ ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हैज़ ओनली रीज़न इन द लास्ट लास्ट फाइव इयर्स। चाइना +1 कहां से हुआ? चाइना इज़ इटसेल्फ बिकमिंग चाइना +1 एंड दैट इज़ समथिंग नोबडी टॉक्स अबाउट। हो रहा है। इंटरेस्टिंग बाइट आई विल गिव यू। सो लोग जैसे बोलते हैं ना कि यार बहुत लोग जैसे हम करेंसी के ऊपर बात कर रहे हैं राइट कि रुपी डेप्रिशिएट हो रहा है। एसेट्रा बहुत सारे लोग ये बात करते हैं कि व्हेन इट कम्स टू अ योर रूपी अगर वो डेप्रिशिएट होता है ना अगर रुपी की वैल्यू कम हो रही है। हमारे एक्सपोर्ट्स के लिए बहुत अच्छा है। जी एक्सपोर्ट्स बहुत बढ़ेंगे। हकीकत क्या है? ओवर द लास्ट 14 ऑडियर्स रूपी हैज़ डेप्रिशिएटेड बाय ओवर 60% हम 60% वैल्यू गई है। ठीक है? हमारे एक्सपोर्ट्स एज अ परसेंट ऑफ़ जीडीपी 25% से 21% पे आ गए हैं। कहां बड़े एक्सपोर्ट्स? कम हुए हैं। नाउ टॉक अबाउट वियतनाम। वियतनाम मोर और लेस स्ट्रक्चरल वे में अपनी करेंसी को हर साल लगभग लगभग 3% से इंडिवैल्यू करता है। ठीक है? इट्स अ मेथोडिकल वे। उनके एक्सपोर्ट्स हर साल लगभग 14% से बढ़ रहे हैं पिछले 15 साल में। तो इट्स नॉट अबाउट कि हां आपकी करेंसी डीवैल्यू हो रही है तो एक्सपोर्ट बढ़ जाएंगे। नाउ देयर इज़ अ प्रॉब्लम? आपके एक्सपोर्ट्स तब जाके बढ़ेंगे जब आपका जो भी रॉ मटेरियल है जो भी बैक एंड जो सप्लाई चेन है वो भी आप खुद बनाते हो। हम अगर आपके रॉ मटेरियल्स भी महंगे हो रहे हैं कि वो आप इंपोर्ट ही करते हो। आप नहीं कर पाओगे कमट। सो डबल वमी है वो। लेकिन लोग ये बात समझते नहीं है। मैं इसलिए एक चीज हमेशा बोलता हूं कि यार जब तक इसको सॉल्व नहीं करेंगे प्रैक्टिकली हम जो दुनिया भर से हम इंपोर्ट कर रहे हैं वो बढ़ते ही जाएगा। या राइट? एट द सेम टाइम हम जो दुनिया को बेच रहे हैं वो कम होते जाएगा। सो रिजल्ट इज़ रूपी का डिमांड तो और ज्यादा कम हो जाएगा ना। डिमांड कम होगा तो क्या होगा? उसका वैल्यू्यूएशन कम होगा। वो और डीवैल्यू होगा। इसीलिए मैं जैसे ये लिख के भी लेके आया था। मेरा एक सिंपल सा प्रेडिक्शन है। राइट? कि मैं लिख के लेके आया था पहले से। बाय चांस हमारी बातचीत ही चल गई। लुक एट दिस वन। कैमरा ये वाला है। मैं यहां पे भी दिखा सकता हूं। दिस इज योर प्रेडिक्शन वन। यस। मैं तीन प्रेडिक्शन ऐसे लेके आया हूं। एंड आई एम वेरी क्लियर दैट हम जिस रास्ते पे चल रहे हैं आज के दिन रूपी इस गोइंग टू बी एट $150 एंड ये कोई बड़ी बात नहीं होगी। वी आर गोइंग टू सी द रूपी हिट $150। $150 पर डॉलर यस। एंड एंड मुझे पता है बहुत लोगों को गुस्सा आएगा देख के। मेरा खाली एक बात कहना यार दिस शुड नॉट मेक यू एंग्री। दिस शुड मेक यू आस्क। ओके। व्हाट कैन वी डू टू सॉल्व दिस? दिस इज़ सीरियस प्रॉब्लम। नोबडी एवर टॉक्स अबाउट दिस वन। इसके लिए वी हैव टू सीरियसली डू थिंग्स जो कि हमारे मोदी जैसे फॉर एग्जांपल बोल रहे हैं ना कि ओके लेट्स इंपोर्ट लेस ऑफ़ गोल्ड। हम लेट्स यू नो कम्यूट लेस। लेट्स गो आउटलेस। कम बाहर जाना है ताकि पेट्रोल बचा है, डीजल बचा सकें। कब तक कर लोगे ये? 150 करोड़ की जनता को आप कब तक घर के अंदर बिठा लोगे? दिस इज़ नो मोर कोविड। एंड टू बी वेरी फ्रैंक लोगों को बुरा लगेगा। बट ये आज से 5 साल पहले वाला इंडिया भी है भी नहीं कि मोदी ने कहा कि तालियां बजा दो आज बजा देंगे। वो नहीं होगा। राइट? पीपल हैव बिगन टू आस्क सर्टेन क्वेश्चंस। पीपल हैव पीपल आर नो मोर दैट। तो यहां पे अब सीधी सी आपकी एक बात आती है कि वी रियली नीड टू सॉल्व द बेसिक्स। अगर आप चाहते हो कि लोग गोल्ड कम इंपोर्ट करें। हम एज अ कंट्री कम इंपोर्ट करें। सॉलशन इज़ कम खरीदें ताकि हम कम इंपोर्ट करें। अगर हम चाहते हैं हम कम इंपोर्ट करें। उसका एक ही तरीका है आप डोमेस्टिकली प्रोड्यूस करना शुरू करें। अब लोग बोल सकते हैं कि यार है ही नहीं कहां से करेंगे? चाइना के पास भी नहीं था। चाइना डिड वाज़ चाइना ने क्या किया? एक्सप्लोरेशन शुरू किया। आउटकम क्या होता है? इन नवंबर चाइना अनाउंस्ड अ मेजर गोल्ड डिस्कवरी टुवर्ड्स अ नॉर्दन पार्ट जहां पे उसके डेजर्ट्स हैं। हम ठीक है? लो ग्रेड ऑफ गोल्ड लेकिन वहां पे गोल्ड है। अब वो उसका वो काम शुरू कर रहे हैं। टुवर्ड्स एंड ऑफ़ दिसंबर वन मोर सच अनाउंसमेंट इन दिसंबर दे अनाउंस एशियास लार्जेस्ट ये प्लीज आप लोग Google कीजिएगा। ये वाला कैमरा है। आप प्लीज Google जरूर कीजिएगा। एशियास लार्जेस्ट अंडर सी डिपॉजिटिज ऑफ़ गोल्ड। हम इतनी बात करते हैं ना ब्लू इकॉनमी ब्लू इकॉनमी। हमारे बजट में अनाउंस हुआ था इससे पहले वाले साल में निर्मला सीतारमण जी ने किया था। उनकी हमारे ब्लू इकोनमी में हम इसके ऊपर ये हो जाते हैं कि हमारी फिशिंग इकोनमी ये वो जो फिशरमैन इकोसिस्टम इतना बड़ा है फिश फार्मर्स हैं उनका क्या ये वो उसके साथ हम कुछ कर नहीं रहे हैं वहां पे उन्होंने समुंदर के अंदर जाकर के समुंदर में लगभग 6 किमी की डेप्थ पे एशिया का सबसे बड़ा गोल्ड डिपॉजिट ढूंढ लिया है वो उसकी माइनिंग की प्लानिंग कर रहे हैं उनके पास था नहीं सोना उन्होंने ढूंढा इट्स अप टू अस हमेशा से क्या बोलते हैं सर कि वी आर दी बिग बिगेस्ट रिपॉजिटरी ऑफ़ वी हैव द बिगेस्ट रिजर्व्स ऑफ़ थोरियम हम राइट चाइना टॉप फाइव में भी नहीं आता था हम एंड क्वाइट रिसेंटली दे अनाउंस दैट ओके वी हैव फाउंड थोरियम था नहीं ढूंढा है जो चीज नहीं है उसके लिए उन्होंने क्या किया दे वेंट अब्रॉड एंड एक्वायर्ड द माइंस बाय एंड बी डूइंग इट और प्रॉब्लम ये है कि सोना बाहर से इंपोर्ट करते हैं और वो डॉलर का रेट हो रहा है इंश्योर करो कि जो कंपनी को हम पेमेंट कर रहे हैं इंपोर्ट करने के लिए वो कंपनी इंडियन हम जो रशिया में जो हम ये जॉइंट वेंचर हम प्लांट लगा रहे हैं यूरिया का वो क्यों लगा रहे हैं क्योंकि एटलीस्ट वो कंपनी तो हमारी है ना अगर हमारी सरकार इतनी बड़ी सब्सिडी देती है यूरिया के ऊपर वो जाए तो उसी कंपनी से जिसमें कम से कम 50% हमारा हक है हम इन द एंड तो हमारे पास वापस आ जाएगा व्हेन इट कम्स टू दीज़ थिंग्स हम क्यों नहीं बाहर एक्वायर कर रहे थे दोज़ आर द वे टू सॉल्व इट ऑयल एंड गैस मैं मानता हूं जो इससे पहले की सरकारें थी उन्होंने भी कुछ खास नहीं इस सरकार ने कोशिश बहुत करी है। लेकिन अब ऑयल एंड गैस का क्या होता है कि यार आप बहुत सारा आप एक्सप्लोरेशन के लिए आप एरिया खोल सकते हो। यू कैन स्टार्ट एक्सप्लोरेशन बट उसमें मिलेगा नहीं मिलेगा गारंटी नहीं होता है। वी आर आपको मिल भी जाए। जैसे अभी रिसेंट में आपने न्यूज़ पढ़ा होगा हरदीप सिंह पुरी जी जो कि हमारे पेट्रोलियम एंड गैस के जो मिनिस्टर हैं उन्होंने बताया कि ओके बिग इवेंट फॉर इंडिया कि अंडमान में वी हैव फाउंड अ गैस का डिपॉजिट। वहां से मीथेन गैस रिलीज हो रहा था। सो इट्स अ बिग पॉजिटिव बट लेट अस बी रियलिस्टिक एज वेल। अभी वहां पर डिस्कवरी हुई कि हां गैस है। इज इट कमर्शियली वायबल टू एक्सट्रैक्ट इट? उसमें और लगने हैं चार से पांच साल। और वो प्रूव होता है तो जाके वहां पे इन्वेस्टमेंट शुरू होंगे। टू एक्सट्रैक्ट इट। व्हिच इज़ अनदर थ्री फोर इयर्स। तब तक शायद दो सरकारें और आ चुकी होंगी। बट आई एम ट्राइंग टू से इज़ इट्स अ वेरी लॉन्ग जस्टिशन थिंग। हमें सवाल पूछने चाहिए कि सर पिछले 12 साल हो गए शायद। राइट? उसमें नहीं हुआ। ठीक है। आई डोंट हैव अ इस पर मेरी शिकायत नहीं है। रीज़न बीइंग वी हैव एक्चुअली इंक्रीज्ड अ लॉट ऑफ़ एक्सप्लोरेशन एक्टिविटी। अब वो हमारे हाथ में नहीं है और कहीं पे आप खोज रहे हो नहीं निकल रहा है। बट व्हाट आर वी डूइंग टू इंश्योर कि यार और कर सकें। क्योंकि ये प्रॉब्लम एक दिन में खत्म नहीं होने वाली। ये बार-बार आएगा। व्हेन मोदी जी केम टू पावर 83% हमारा बाहर से इंपोर्ट होता था एनर्जी। आज के 80 89% के आसपास आ चुका है। बहुत जल्दी 95 हो जाएगा ऐसे। हमारा कंट्रोल ही नहीं है उसके ऊपर। दैट इज़ द प्रॉब्लम टू सॉल्व फॉर। बट इंडिया इतना अगर हंगरी है, पावर हंग्री, कंसमशन हंगरी एट दिस पॉइंट। हम लोग ग्रोइंग इकॉनमी। हम लोग बढ़ रहे हैं। तो हमारी नीड्स बढ़ते जा रही है ना। तो डेफिनेटली 83, 89, 89 से 95 ये होना ही है। व्हाट कैन व्हाट कैन एनीबडी डू इन दिस एट दिस पॉइंट? सो अ लॉट कैन बी डन। नंबर वन एक्सप्लोरेशन पार्ट दैट वी टॉक अबाउट। नंबर टू वो तो हो रहा है। वो पहले से बहुत ज्यादा बड़ा है। या नंबर टू इज रिप्लेसमेंट पार्ट ऑफ इट। सो फॉर एग्जांपल हमें पता है कि यार गैस हम प्रोड्यूस ही नहीं करते। हम बहुत कम हम प्रोड्यूस करते हैं। रफ्ली 55% ऑफ़ व्हाट वी नीड कम्स फ्रॉम इंपोर्ट। राइट? दैट्स अ बिग बिग क्रिटिकल डिपेंडेंसी। तो हम हर घर में हर घर में गैस का सिलेंडर हम क्यों प्रमोट कर रहे हैं? नीति आयोग ने जब 2015 में कहा था कि यार वी शुड बी प्रमोटिंग इलेक्ट्रिक स्टोर्स। कि इलेक्ट्रिसिटी तो हम इंडिया के अंदर में बना सकते हैं। हम और गवर्नमेंट का प्रोग्राम है इलेक्ट्रिसिटी हर घर पहुंचाने का। सॉल्व हो जाएगा ना इससे। वी शुड हैव फोकस ऑन दैट। क्यों नहीं किया? व्हाट डू यू थिंक? सिंपल सा एक प्रॉब्लम है कि यार हर घर में इलेक्ट्रिसिटी पहुंचाना इज़ अ फाइव टू 10 ईयर का प्रोजेक्ट। हर घर में सिलेंडर पहुंचाना इज़ अ टू इयर्स का प्रोजेक्ट। इलेक्शन में तो इट्स मोर अबाउट जो अटल जी हमेशा से बोलते थे। हम रहे ना रहे ये देश रहना चाहिए। देश की लाइफ पांचप साल में डिफाइन होती है। यहां पे बुरा लगे किसी को तो माफी। लेकिन हकीकत है कि हमारी अच्छी खासी पॉलिसीज जो होती है वो इसी पे हार जाती है कि अरे यार 5 साल के आगे तो इसका फिर पता नहीं कौन आएंगे। हमें तो इलेक्शन भी जितन है ना तो पहले उसमें जो दिखे वो पहले करते हैं। दैट इज व्हाट द प्रॉब्लम कम्स। व्हाट वी नीड इज़ एंड अगेन यू नो दो बहुत ही प्यारी सीइंग्स हैं। नंबर वन आवर गवर्नमेंट्स टर्न सीरियस डू रिफॉर्म्स टेक एक्शन डिलीवर थिंग्स कब? तब जबकि इंडिया की लग जाती है क्योंकि तब ऑप्शन नहीं रहता है। अदरवाइज दे डोंट रियली डू मच रिफॉर्म्स। क्यों? शोरशराबा बहुत होता है। बैकलैश बहुत आता है। इट्स नॉट अ ईजी कंट्री टू ऑपरेट ऑन दी गवर्नमेंट साइड भी मैं फेवर लेता हूं। आसान नहीं है। हर स्टेट के अलग सिस्टम है। हर स्टेट के अंदर अपने मुल्ले की चार तरह की भांति के लोग रह रहे हैं। सबके विचार कभी मिलते नहीं है। आसान नहीं है कोई भी चीज करना। मैं वो मानता हूं। बट एट द सेम टाइम इसीलिए तो एक इतने स्ट्रांग आदमी को चुना गया ना कि ठीक है सबसे मिलजुल के इन द एंड जो देश के लिए अच्छा है वो करे खैर देश की तकदीर बदलनी है वहां पे बहुत ज्यादाेंट हो जाता है नंबर वन नंबर टू इज़ कि यार आप आपके लिए बहुत ज्यादा इंपॉर्टेंट है ये हम आज जिस स्टेट में हैं वी आर प्रैक्टिकली इंपोर्टिंग एवरीथिंग इसको अगर हम नहीं सॉल्व करते हैं ना हम खुद खुद को एक कंज्यूमर कंट्री बनाते जा रहे हैं। मैं एक सीधा एक स्टैट दूंगा। यूरोप और यूएस का जो डायवर्जेंस हुआ है पिछले 16 17 साल के अंदर इन 2008 यूरोप एंड यूएस जब फाइनेंसियल क्राइसिस हुआ था। यूरोप एंड यूएस हैड सिमिलर आपका लेवल्स ऑफ इकॉनमी। दोनों की इकॉनमी लगभग लगभग 15 से 16 ट्रिलियन डॉलर की थी। ओके? फास्ट फॉरवर्ड टू टुडे यूरोप्स इकॉनमी इज़ ऑलमोस्ट 70% ऑफ यूएस। 30% छोटी हो गई है। व्हाई हैज़ दैट हैपेंड? बिकॉज़ ओवर द इयर्स मैन्युफैक्चरिंग तो दोनों देशों से बाहर गई। यूरोप ने अपनी सर्विज भी बाहर भेज दी है ना। यूरोप की सर्विज आप अगर मेजर एक्सपेंस देखो सब कुछ यूएस की कंपनी से हो रहा है। सब कुछ हो रहा है। व्हेन वाज़ द लास्ट टाइम यू हर्ड अ 10 बिलियन डॉलर का टेक आईपीओ इन यूरोप। कहीं पे नहीं हुआ है। यूएस में तो आए दिन हो रहे हैं। चाइना में हो रहे हैं। यूरोप में नहीं हो रहे हैं। दे आर नेट इंपोर्टर्स ऑफ़ सर्विसेस ऑफ टेक्नोलॉजी। सेम इज़ प्लेइंग आउट विद अस। हमें सैटेलाइट इंटरनेट चाहिए। हम खुश होते हैं भाई साहब अब देखो स्टार्लिंग आएगा ईलन मस्क का व्हाट आर यू सेलिब्रेटिंग हमें उस टाइम ये पूछना चाहिए न्यूजीलैंड वाले अपना खुद का सैटेलाइट इंटरनेट का वेंचर बना रहे हैं जो बोल रहे हैं हम दुनिया भर में न्यूजीलैंड इतना सा देश है यार वो लोग बोल रहे हैं हम दुनिया भर में सप्लाई करना चाहते हैं आपका ये सैटेलाइट इंटरनेट हम क्यों नहीं कर रहे हैं सीरियस क्वेश्चंस यहां पे होने चाहिए बिकॉज़ इफ यू डोंट सॉल्व फॉर इट व्हाट इज़ गोइंग टू हैपन इज हम इसके नेट बायर रहेंगे नेट इंपोर्टर रहेंगे फॉर लाइफ लोंग हम्म हम हम इतना सेलिब्रेट करते हैं कि यार BSNL ने एक फॉरेन कंपनी के साथ जॉइंट वेंचर किया है कि वो हमें सर्विज देगा। BSNL उसे डिस्ट्रीब्यूट करेगा फॉर सैटेलाइट इंटरनेट। हम एक फॉरेन टेक के डिस्ट्रीब्यूटर बनके इतने खुश हो रहे हैं। एंड दिस इज़ अ स्ट्रेटेजिक पीएसयू ऑफ़ द गवर्नमेंट ऑफ़ इंडिया। इसका काम है कि हम उस डिपेंडेंसी को खत्म करें। और हम उस पे ताली बजा रहे हैं आज के दिन। दिस डजंट मेक एनी सेंस एट ऑल। दीज़ आर थिंग्स टू सॉल्व फॉर। मैं इसी वजह से यह भी बोलता हूं कि बहुत सारे लोग बोलते हैं कि यार हम एलएलएम्स क्यों बना रहे हैं? यह वो अरे भैया हाउ मेनी मेंबर डू यू हैव आउट हियर इन योर टीम? कितने लोग हैं आपकी टीम में? 150 140 हाउ मेनी पीपल ऑफ़ देम यूज़ इदर चार्ज जीपीटी और क्लाउड? ऑलमोस्ट एवरीवन। राइट? अच्छे खासे लोग जो दोनों भी यूज़ करते होंगे। मैं मानता हूं चलो 200 सब्सक्रिप्शन है आपके पास। हर एक पे अगर $20 का सब्सक्रिप्शन है। आपने $200 वाला नहीं लिया तो वी नहीं फुल पैकेज सबका सब है। राइट? सो वी यूज़ अ लॉट। कितना एक्सपेंस है? एंड दिस इज नॉट जस्ट यू। मैं यह वो हर इंडस्ट्री हर कंपनी ये चीज कर रही है। यह पैसा कहां जा रहा है? दिस इज प्योर आउटगो ऑफ़ मनी फ्रॉम इंडिया। एंड वी आर क्रिटिकली डिपेंडेंट ऑन फॉरेन कंट्रीज। चाइना इज़ नॉट। यूरोप इज़ एक्चुअली सॉल्विंग फॉर इट। फ्रांस के पास मिस्तरल है। दे डोंट वांट टू बी डीलिंग वि ओपन एआई और वि जेमिनाई एटसेट्रा। दे आर बिल्डिंग फॉर इट। व्हाट आर वी डूइंग अबाउट इट। दिस इज़ अ सीरियस क्वेश्चन। वहां पे्ट है कि ठीक है यार सर्वम जैसी कंपनीज़ को सपोर्ट करो। मैं उन्हें नहीं जानता हूं। मेरे को कोई पैसे नहीं मिले हैं। बट वी रियली नीड दी कंपनीज़ टू कम आउट। इमरजेंट आप भी उसकी बात करते हो। मैं भी करता हूं। मैं उनके साथ कुछ पेड कोलैबोरेशंस भी कर चुका हूं। बट वी रियली नीड दीज़ कंपनीज़। हम ये कब जानेंगे कि ऐसी और कंपनीज़ हम क्यों नहीं बना रहे? अदरवाइज़ हर एक चीज़ के लिए वी आर ओनली बिकमिंग नेट नेट नेट डिपेंडेंट्स। एंड दैट्स अ बिग प्रॉब्लम। यह एक-एक चीज जो है ना यह हमें वह जो ₹150 पर डॉलर का जो है हमें उसके और पास लेके जा रही है। हम उसे रियलाइज़ नहीं करते। सी यू आर सेइंग कि आपका प्रेडिक्शन है कि रुपी और गिर के ₹150 जितना हो जाएगा $1 के लिए। एंड वो तब तक होते रहेगा क्योंकि दो स्ट्रक्चरल चीजें चाहिए होती है अगर आपको आपकी करेंसी और आपका पैसा स्ट्रांग करना हो। या वन इज आपकी ग्लोबल डिमांड होनी चाहिए कि आपकी करेंसी की डिमांड है किसी ना किसी तरीके की वजह से। या तो आपने दुनिया में बहुत लोन दे रखा है या दुनिया में आप किसी को कोई एक बेटर पेमेंट ऑप्शन देते हो या दूसरी कंट्री की हेल्प करते हो किसी रीज़न से जो हम अभी कर नहीं पा रहे हैं और करते नहीं है ज्यादा। राइट? दैट इज वन। सेकंड इज़ या तो आपके पास कुछ ऐसा है जो दुनिया को चाहिए। या और वो तब तक नहीं हो सकता जब तक दो स्पेसिफिक चीजें नहीं होगी। वन इज या तो सप्लाई चेन डेप्थ नहीं बनाओगे आप कि एंड टू एंड रॉ मटेरियल से ले एंड तक आप ही बना रहे हो ताकि आप की चीजें आप बना पा रहे हो तो देन आप इतना अच्छा बना पा रहे हो इतने सस्ते में बना पा रहे हो कि दुनिया में बेच पाओगे दैट इज वन और सेकंड इज़ या तो टेक्नोलॉजिकल एडवांसमेंट कि टेक्नोलॉजी के लिए आपने इतना फोड़ दिया कि आप सेटेलाइट में इंटरनेट प्रोवाइड इंटरनेट प्रोवाइड कर रहे हो वाई-फाई प्रोवाइड कर रहे हो और सेटेलाइट के थ्रू पूरी दुनिया में देना चाहते हो राइट ये दोनों चीजें इंडिया में नहीं हुई जो ये सारे लोग बोलते हैं कि करेंसी अगर अगर डी वैल्यू होती है और कम होती है तो उससे एक्सपोर्ट बढ़ता है। वो तो फॉल्स एक टेक्स्ट बुक डेफिनेशन है। वो नहीं हो रहा है क्योंकि पिछले कुछ सालों में या पिछले डेकेड में हमने वो नहीं देखा। दूसरी कंट्री जिधर ऐसा नहीं हुआ है वियतनाम जो एक कंटेंडर है चाइना प्लस वन के लिए जैसे इंडिया एक कंटेंडर है उनकी करेंसी इतनी तेजी से नहीं गिरती है लेकिन तो भी वो ज्यादा एक्सपोर्ट बढ़ाते जा रहे हैं इंडिया अब एक्सपोर्ट नहीं बढ़ा पा रहा है या दिस इज योर सेइंग फॉर दिस एंड देन यू आर सेइंग कि उसके बाद अब जो कंट्री में एक सेंटीमेंट है जहां पे ये बोल रहे हैं कि हमें बाहर के प्रोडक्ट्स यूज़ नहीं करने चाहिए व्हिच इज ट्रू व्हिच इज गुड वी शुड डू दैट और जो यह गोल्ड नहीं खरीदने का है। व्हिच इज़ आल्सो गुड इन अ वे कि हमको गोल्ड कम खरीदना चाहिए ताकि हम लोग और लेस डिपेंडेंट बने ताकि यह हमारा आपका जो प्रेडिक्शन है ₹150 का वो नहीं हो। या पर दैट इज नॉट अ लॉन्ग टर्म एक्चुअल स्यूशन। पॉसिबल नहीं है। उससे कोई पॉसिबल नहीं है कि भाई ये अगर कर देंगे लोग गोल्ड गम खरीदेंगे तो कुछ हो जाएगा। इसमें कुछ नहीं है। मैं दो चीज़ और ऐड करता हूं। ठीक है? ऐसे समझिए। बट आई समराइज्ड योर पॉइंट परफेक्टली। परफेक्टली। मैं खाली दो चीजें बोलूंगा। नंबर वन। सो ऑन द मैन्युफैक्चरिंग साइड ऑफ़ थिंग्स राइट द प्ले बिक वै सिंपल मैं एक ऐसी कंट्री का एग्जांपल दूंगा जो लोगों को आज के दिन अच्छा नहीं लगता हिंदुस्तान में बांग्लादेश हम हम जो जींस वगैरह पहनते हैं कपड़े पहनते हैं अच्छे खासे उसमें से बांग्लादेश के से बन के आते हैं बांग्लादेश इंडिया से ज्यादा करता है एक्सपोर्ट मजाक है क्या कैसे हो सकता है कमाल की बात आपको बताऊं कैसे है ये बिफोर बिकमिंग अ बिग टाइम एक्सपोर्टर ऑफ़ टेक्सटाइल्स और गमेंट्स उन्होंने ऐसा अपना पूरा सेटअप किया दे रीच्ड अ पॉइंट वेयर 85% ऑफ़ व्हाटएवर एनी पर्स पर्सन वाज़ वेरिंग इन बांग्लादेश वाज़ मेड इन बांग्लादेश। ये कैसे किया? दे सॉल्व फॉर द बेसिक्स। अपने कपड़े पहले बनाने शुरू किए ना। इंपोर्ट्स को पलेटाया। एज़ आई सेड सॉल्व द बेसिक्स। यहां पे भी वही करना पड़ेगा हर इंडस्ट्री के लिए। लेट अस फर्स्ट बिगेन टू मेक फॉर आल्स। फिर पता होता क्या है? वो जो सेटअप बन चुका है मशीनें एमोटाइज़ होने लग जाती है। उसका खर्चा तो ऑलरेडी निकल चुका है। अब उसके लिए एक्सपोर्ट्स के लिए आप सामान बनाते हो। अब थोड़ा सा और सस्ता बना सकते हो। यू बिन टू कमट विद अदर्स। डंप करना। चाइना की एक खासियत है। सो फॉर एग्जांपल ऐसे सोचिए कि इंडिया में एक कंपनी है जो कि अपने आप कह सकते हो कि सूटकेसेस बनाती है। ठीक है? उसने अपने इन्वेस्टमेंट के अपने लिए बना रही है। चाइना में एक कंपनी है जो कि 12 कंपनीज़ के लिए सूटकेसेस बनाती है। उसके जो मशीनंस का सेटअप का जो भी उसका खर्चा है, राइट? वो 12 कंपनीज़ से ऑलरेडी वो निकाल चुकी है। वो और 12 के लिए और सस्ता बना सकती है आने वाले के लिए। दैट इज़ व्हाई थिंग्स चेंज। या लेट्स सॉल्व फॉर द बेसिक्स फर्स्ट। अपनी नीड के लिए औरों के लिए करना और अपने आप आसान हो जाएगा। हर कैटेगरी के अंदर हर स्मालस्मॉल कैटेगरी के अंदर इट्स नॉट जस्ट कि अच्छा ईवी बैटरी खुद बनाते हैं या फिर कैमरा बनाए। कैमरा नहीं बनेगा हमसे। व्हाट वी हैव टू सॉल्व फॉर स्मॉल मॉड्यूल्स दैट गोइंग टू इट। लेट्स बीन टू मेक दोस। सो आई एग्री विद दिस पॉइंट। एंड ये बहुत बेसिक डेफिनेशन है। आई थिंक ये सब समझते होंगे। क्यों नहीं कर पा रहे हैं? इज़ अ क्वेश्चन। हम क्यों नहीं बना पा रहे हैं? उसका रीजन लार्जेस्ट यू आर सेइंग कि वो हमें गवर्नमेंट लेड इंसेंटिव नहीं मिलते ताकि हम वो सस्ता बना पाए जिसकी वजह से हम दूसरी कंट्री से कमट कर पाएं। गवर्नमेंट लेड इंसेंटिव्स मिलते हैं बट कुछ ही लोगों को मिलते हैं। सो यू आर सेइंग कि ये डेमोक्रेटाइज हो जाना चाहिए और हर किसी को मिलना चाहिए। सो बट हर किसी को मिलेगा। डोंट थिंक दैट्स अ फेयर वे टू डू इट? यस अब्सोलुटली। इट हैज़ वर्क आउट वेरी फेयर वे फॉर कंट्रीज लाइक साउथ कोरिया, जापान, वियतनाम, चाइना चाइना एंड देन दैट अक्रॉस टू स्टेट्स ऑफ़ इंडिया एक्चुअली तमिलनाडु एंड गुजरात। सो फॉर एग्जांपल गुजरात क्या कह रहा हां गुजरात में इतना बिज़नेस बूम होता है, सब कुछ होता है। राइट? व्हाट इज द बेस्ट थिंग अबाउट गुजरात? आई डोंट नो। सबके लिए एक पॉलिसी है। तो उधर आप छोटे एंटरप्रेन्योर हो या बड़े एंटरप्रेन्योर हो डजंट मैटर। डजंट मैटर। अगर आप इस पॉकेट के अंदर आप इन्वेस्टमेंट कर रहे हो तो आपको ये मिलेगा खत्म हम नॉट एवरीबडी हैज़ गो टू द हैज़ टू गो टू दी अप्रोच दी गवर्नमेंट अपने-अपने लेवल के हिसाब से एंड देन नेगोशिएट अ पैकेज कि हां जी मुझे 110% एसजीएसटी का रिफंड मिलना चाहिए। मुझे इतना मिलना चाहिए। तब जाके मैं प्लांट लगाऊंगा। वो तब होता है जब किसी ऐसे सेक्टर का इन्वेस्टमेंट आप कर रहे हो जिसके लिए पॉलिसी अभी एक्सिस्ट नहीं करती। अनदर थिंग फॉर यू एंड दी ऑडियंस एज वेल। गुजरात एंड तमिलनाडु आर टू स्टेट्स जो कि हमेशा हर बार किसी भी इंडस्ट्री के लिए जब भी कोई पॉलिसी निकाली जाती है डेडिकेटेड कि हां इसकी मैन्युफैक्चरिंग यहां होनी चाहिए। इसका सेटअप यहां होना चाहिए। दीज़ आर द टू स्टेट्स जो सबसे पहले आते हैं। सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग पॉलिसी इंडिया में आती है लगभग 12 स्टेट्स के पास है। द फर्स्ट वन टू कम आउट विथ इट वाज़ गुजरात। स्पेस टेक के लिए मैन्युफैक्चरिंग का जो आपका था जो पॉलिसी है गुजरात, तमिलनाडु एंड कर्नाटका एंड तेलंगाना वर दी फर्स्ट वंस टू कम विद अगेन गुजरात तमिलनाडु इसमें भी आते हैं। पिक एनी सेक्टर डेडिकेटेड पॉलिसी फॉर दैट वेरी सेक्टर ये दो स्टेट्स आपको हमेशा वहां दिखते हैं। इंटरेस्टिंग क्वेश्चन इज़ एमपी वाले क्यों नहीं कर रहे भाई? हरियाणा वाले क्यों नहीं कर रहे यार? राइट? बिहार वालों को किसने रोका है? ऐसा क्यों है कि गुजरात की जब सेमीकंडक्टर पॉलिसी आई उससे ढाई साल बाद यूपी की आई। सवाल यह होना चाहिए। क्यों होता है ऐसा? अपनी-अपनी प्रायोरिटीज है सर। आप ऐसे सोचिए ना इंडिया पॉलिसीज कौन बना? देयर आर ब्यूरोक्रेट्स। राइट? ब्यूरोक्रेट्स देमसेल्व्स हैव टू बी अ दैट एंटरप्राइजिंग एज वेल एज उनको उतना नॉलेज भी होना चाहिए। मैं ये नहीं कह रहा हूं कि वहां वालों के पास नॉलेज नहीं है। बट मोर अबाउट अगर आप गुजरात में हैं। यू आर सराउंडेड बाय इंडस्ट्रीज, बिज़नेसमैन एवरीवेयर सोचते रह। यू आर डीलिंग विथ देम एव्री सिंगल डे। आप उनके डेली आप ब्रेस्ट स्टंप कर रहे हैं। अच्छा और क्या नए इन्वेस्टमेंट ला सकते हैं? क्या करें एसेट्रा। वो आपको बताते हैं यार ये वाला करते हैं। इसका यहां पे फ्यूचर है। ये देखो चाइना में क्या हो रहा है। यूएस में क्या हो रहा है। अब आगे फ्यूचर इसका है। तब जाके आपको वो पॉलिसीज बनती है। फेयर टेल मी वन थिंग आई एम स्विचिंग हियर ऑन दिस। कि इंडिया ऑन द आउटसाइड नंबर्स, डेटा, नॉइज़ ऑल अराउंड द वर्ल्ड। नॉट जस्ट हमारे अंदर एक नैरेटिव है हम लोगों का वि इज बहुत सारा डाटा उसको बैक भी करता है कि इंडिया वन ऑफ़ द फास्टेस्ट ग्रोइंग इकॉनमीज़ इन द वर्ल्ड हर कोई इंडिया को आए देख लाइक एवरीबडी इज़ आईंग इंडिया स्टार दिख रहा है अभी नेक्स्ट डेकेड हमारा दिख रहा है राइट तो वन ऑफ़ द फास्टेस्ट ग्रोइंग इकॉनमीज़ इन द वर्ल्ड हर साल हम देखते हैं अब ये बढ़ गया ये बढ़ गया बट ऑन एन इंडिविजुअल लेवल पीपल लाइक यू एंड मी और जो सैलरीड एंप्लाइजज़ हैं या जो जो भी इसको देखें उन्हें और गरीब फील क्यों होता है? और पोरर क्यों होता है? व्हाई? ऐसा क्यों है कि हमारी इकॉनमी इतनी तेजी से बढ़ रही है। बट हमें ऐसा लगता है कि हमारा जो पैसा है वो महंगाई इतनी बढ़ते जा रही है या महंगा इतना होता जा रहा है जहां मैं शायद और गरीब होते जा रहा हूं। यार मेरे इस पे दैट ओनली अ फीलिंग कि ये डाटा भी बैक करता है। यार मेरा इस पे कुछ ओपिनियन है। ठीक है? नंबर वन यू एंड आई डोंट कम इंटू दैट इंडिया। अगर इंडिया 6% से ग्रो कर रहा है तो हम लोग शायद 30 40 50% से कर रहे होंगे। ठीक है? बट अगर हम उससे ग्रो कर रहे हैं तो अच्छा खासा इंडिया तो 1 2% पे भी नहीं चल रहा होगा। मोरेंटली एक बहुत बड़ी विडंबना है। ये जो एक टैग जो होता है ना एक तो टैग्स ना टैग फेमस हो जाते हैं। टैग क्या है? फास्टेस्ट ग्रोइंग मेजर इकॉनमी। हम क्या करें हम उसका अगर हमारे देश के लोग फिर भी 80 करोड़ लोगों को फ्री का खाना चाहिए। अभी तो फ्री का वो छोड़ो। हम भी भैया फ्री का खा रहे हैं। हमें रियलाइज नहीं होता है। यूरिया नैनो यूरिया हमने बनाना शुरू किया है। सो यूरिया की जब बात करते हैं राइट? लगभग लगभग $800 कुछ का आता था। हम ठीक है? इसका रेट भयंकर बढ़ गया। हम लेकिन किसान के लिए रेट अभी भी वही है। तो ये एक्स्ट्रा जो है वो कौन भर रहा है? हमारी सरकार भरती है अपनी जेब से। सरकार कितना भर रही है? आपको पता है? हमारे जो फर्टिलाइजर की जो सब्सिडी होती है टू इंश्योर कि अच्छा किसान को महंगा ना पड़े। सरकार ने पिछले बजट किया था 1.7 लाख करोड़। दे एंडेड स्पेंडिंग 2.1 लाख करोड़। इस साल बिकॉज़ ऑफ़ दिस सिचुएशन नाउ ये नंबर कहीं भी जा सकता है। 2.7 लाख करोड़, 3 लाख करोड़। ये 3 लाख करोड़ वो है जिसके कारण सब्जियां, फ्रूट सब कुछ सस्ते रहते हैं और वो हम भी खाते हैं। हम हम रियलाइज नहीं करते। कि अच्छा हम जो ये शिमला मिर्च खा रहे हैं चाहे लोगों के घर हरी आती है हमारे घर में चलो हम थोड़ा आगे निकल गए हमारे घर लाल और हरी लाल और पीली वाली भी आने लग गई राइट वो जिस रेट पे आ रही है शायद उससे और डबल रेट पे होती अगर हमारी सरकार ये साल का 2 लाख 3 लाख करोड़ इन सब्सिडीज पे नहीं निकाल रही होती तो बट इसके ऊपर कोई बात नहीं करता नो बट ये वाली रियलिटीज भी हैं। एंड ओवरऑल आई टेल यू कि यू एंड आई हम लोग भी जो हमारे स्पेंड्स हैं जितना तेजी से वो बढ़ रहे हैं उतनी तेजी से हम लोगों की भी इनकम नहीं बढ़ती नो अब्सोलुटली एंड आई एम नॉट टॉकिंग अबाउट न्यू वेंचर्स एंड न्यू एलोकेट्स मैं बात कर रहा हूं स्टेडी बिनेस इनकम या स्टेडी आपका सैलरी इनकम आप ईयर ऑन ईयर अगर आप सिर्फ फॉर एग्जांपल हेल्थ इंश्योरेंस ले लो तो 14-15% हर साल बढ़ता है सरकार बोलती है कि भाई महंगाई तो सिर्फ शायद 2 से 5% के बीच में ही बढ़ती है। डिफरेंट डिफरेंट थिंग्स डिफरेंट था। राइट? या तो हेल्थ इंश्योरेंस वैसे होता है। आप अगर आप महंगे स्पेंड्स की बात कर लो खाना वगैरह सब छोड़ के या ऑयल डेफिनेटली ऑयल तेल ये तो बहुत ज्यादा तेजी से बढ़ते जा रहा है। देन जो आपकी जिम मेंबरशिप्स है आपका रोजमर्रा का रेंट है। एवरीडे ये बहुत तेजी से है। रेंट आपका बहुत ज्यादा इनफ्लेट हो जाता है। घरों की प्राइस है जिसको घर खरीदना है। ऑप्शन थ्रू द रूफ। कोई आदमी कितना भी अमीर है घर की प्राइस देख के उसको लगता है वो गरीब ही है। क्योंकि जिस हिसाब का घर उसको चाहिए था 5 साल पहले आज वो घर वो खरीद ही नहीं सकता। उसने 5 साल मेहनत करके इसलिए पैसे कमाए थे कि ये घर खरीदूं आज वो उसकी औकात के बाहर है। राइट? सो ओवरऑल इट फील्स लाइक देयर इज़ सम काइंड ऑफ़ मनी इल्लुजन कि हमें इल्लुजन तो है कि यार 2 से 5% महंगाई बढ़ रही है लेकिन एक्चुअल आप रेट देखने जाओ तो शायद 10 15% हर हर साल बढ़ते जाते हैं। ठीक है राज देखो आपने ना तीन बातें आपने बोली है इसमें। ओके तीनों को एक-एक कर देते हैं। नंबर वन क्यों ग्रे ग्रोथ अगर हमारी इतनी अच्छी है तो हमें फील क्यों नहीं होती? मैं आपको सीधा उसका आंसर देता हूं। वी आर द फास्टेस्ट ग्रोइंग मेजर इकॉनमी बट वी आर नॉट गोइंग ग्रोइंग फास्ट इनफ। चाइना के पास लगभग 15 साल ऐसे थे जब उसने कंसिस्टेंटली 10% से ऊपर उसने ग्रो किया है। हमने नहीं किया है। एंड ये क्यों मैटर करता है? हमारी अच्छी खासी जनता ऐसी है जो कि बहुत-बहुत गरीब है। हम जिनके पास काम नहीं है। अनइंप्लॉयमेंट बहुत ज्यादा है। ऑफिशियल स्टार्ट जो भी कहे हम सब जानते हैं। हम उसको सॉल्व करने के लिए आपको और ज्यादा तेजी से ग्रो करने की जरूरत है। फास्टेस्ट ग्रोइंग इन द वर्ल्ड इज़ नॉट इनफ। इफ इट इज़ नॉट फास्ट इनफ फॉर रिक्वायरमेंट्स। हमारे देश की नीड और ज्यादा है। इसी वजह से कई इकोनॉमिस्ट और बहुत सारे लोग आके बोल चुके हैं दैट वी हैव टू नाउ एम फॉर 10% प्लस। हमारी सरकार के अपने इकोनॉमिस्ट अरविंद पानगरिया जी जो कि पहले हमारे वाइस चेयरमैन या वाइस चांसलर जो भी बोलते हैं ऑफ नीति आयोग थे। ही यूज़्ड टू ओपनली टॉकिंग कि हमने वो रेल्स हमने बना दी हैं जिसके कारण आने वाले सालों में वी आर लुकिंग एट 8% प्लस ऑफ सस्टेंड ग्रोथ। कहां है वो 8%? जब तक हम आठ फिर 10 की तरफ नहीं जाएंगे। इन लोगों के लिए हम काम हम नहीं जनरेट कर सकते। रिजल्ट इज वी आर डेफिनेटली दी फास्टेस्ट ग्रोइंग मेजर इकॉनमी बट वी आर नॉट ग्रोइंग फास्ट इनफ। दैट्स वेरी डिफरेंट थिंग्स। नंबर वन अगला आपने बोला इनफ्लेशन के ऊपर। अब ये अपने आप में बहुत बड़ा किस्सा है। इनफ्लेशन के नंबर पे विश्वास करना बंद कर दो जनता। मैं ये बोल-बोल के थक गया हूं। व्हाई हमारी सरकार खुद ये चीज़ बोलती है कि हमारे इनफ्लेशन के जो कैलकुलेशन होता है ना लोगों को लोगों को खाली ये दिखता है। अच्छा इनफ्लेशन का नंबर ये है। हम लोग कभी डेफिनिशंस के अंदर नहीं जाते। ओके। गोइंग टू डेफिनेशनंस पहले इनफ्ले मेक अ सिंपल महंगाई होती क्या है वो बताओ और सीपीआई सीपीआई से हम जज करते हैं इसको राइट या सो देखो इनफ्लेशन का मतलब है महंगाई कि कोई चीज आज इतने की है अगले साल इतने की हो गई तो इतना जो बीच में डिफरेंस आया दैट इज अ महंगाई ठीक है ठीक है अब कुछ चीजें जो सस्ती भी होती है सो फॉर एग्जांपल एक टीवी अगर आप उठाते हैं टीवी 1990 में जितने का आता था आज इतने का आता है बहुत ज्यादा प्राइस करेक्शन हो गया टेक्नोलॉजी लेड प्राइस रिडक्शन हुआ सोलर पैनल आप ले लो रिडक्शन हुआ बहुत चीज़ लेकिन महंगी भी होती जाती है आपका एजुकेशन या फिर आपका खाने पीने का खर्चा आपका हेल्थ केयर हो हो गया और बहुत सारी चीजें होती है। हमारे कपड़े हो गए। हर चीज़ के रेट बढ़ते जा रहे हैं। राइट? तो बहुत सारे आस्पेक्ट्स होते हैं। लेकिन दिक्कत कहां आती है? हमारी सरकार डिफाइन करती है कि बॉस अगर आप ओरल इनफ्लेशन देखें महंगाई उसको एक नंबर में आप आखिर कैसे पिरोएंगे? इतने सारे आइटम होते हैं। और जरूरी नहीं है ना कि आप जिन चीजों पे खर्चा करते हैं उस पे मैं भी करूं। तो आपके लिए महंगाई अलग होगी। मेरे लिए अलग है। कैसे करेंगे? हम तो उसके लिए निकाल दिया एक कि इंडेक्स जिसको बोलते हैं कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स। सीपीआई। ओके? सीपीआई यानी कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स। अब उसको कैसे कैलकुलेट किया जाता है? उसके अंदर क्या किया गया? एक एवरेज इंडियन के हिसाब से अब एक एवरेज इंडियन इतना वेल टू डू नहीं है। हम एक एवरेज इंडियन के हिसाब से वो क्या खाता है, पीता है, क्या सर्विस कंज्यूम करता है? उस हिसाब से आपको एक वेटेज दे दिया जाता है अलग-अलग चीजों को। 298 ऐसे आइटम्स थे जिनको 2011 के टाइम पे हम सीपीआई के अंदर रखा गया कि इनका हम ट्रैक करेंगे। क्या प्राइस मूवमेंट्स हो रहा है। उस हिसाब से हम देखेंगे। 12 फरवरी 299 थे 298 299 या 298 आई 299 299 होगा बेसिकली उतने आइटम्स इन्होंने रखे थे जिसके वो अलग-अलग चीजों के प्राइस मेजर करते हैं कि अच्छा प्याज का क्या रेट चल रहा है आलू का क्या चल रहा है एटरा एटरा ऐसे 299 या अमेजिंग पार्ट इज नाउ अगर आप ये 298 को ओवरऑल ब्रैकेट्स में डाल दें तो लगभग 46% जो ओवरऑल वेटेज है दैट वास फॉर फूड अलोन कि हमारे देश की अधिकतर जनता के लिए असली खर्चा खाना खाना है जो हम बात करते हैं ना 80 करोड़ जनता को फ्री का खाना क्यों देना पड़ता है? यह उसकी असलियत है। क्योंकि असली अच्छी खासी जनता उतना कमाती ही नहीं है कि वह और किसी के बारे में सोचे। उसके लिए रोटी कपड़ा मकान जो है ना उसमें मकान तो बहुत दूर है। कपड़ा वही वाला वो दो तीन चार साल पहन लेगा लेकिन रोटी रोज का कैसे लाए? वो खाना रोज का कैसे लाए? वो इंपॉर्टेंट पार्ट है। ये 46% जो है ये 2011 में जो सेट हुआ था 2011-12 में। अभी 12 फरवरी 2026 यानी लगभग कितने तीन महीने हुए? 3 महीने पहले तक यही चल रहा था। 15 साल में 16 साल में हमारे देश की इकॉनमी कितनी बदली है? ट्रांसपोर्टेशन ये वो मोड्स आपका डिजिटल इकॉनमी, फूड डिलीवरी, ई-कॉमर्स, इंटरनेट, आपके टेलीकॉम के फोन के रेट्स ये सब कुछ इसमें कैप्चर नहीं हो रहा है। तो जिन चीजों पे हम खर्चा करते हैं वो गवर्नमेंट काउंट ही नहीं करती। एंड हेल्थ केयर तो महंगाई तो काउंट ही नहीं होती। फिर हेल्थ केयर में डायग्नोस्टिक सर्विज वर नॉट इंक्लूडेड व्हाइल कैलकुलेटिंग दिस। क्यों? वो जो 298 जो आइटम्स थे उसके अंदर डायग्नोस्टिक सर्विज को नहीं रखा गया था। आपको पता है कितना बड़ा मार्केट है इंडिया है डायग्नोस्टिक्स का। साल का लगभग $15 बिलियन का। और यह बढ़ रहा है हर साल लगभग 15 से 20% से। दीज़ आर नॉट मेरे नंबर्स। Feasजी के सीईओ हैं। अह राहुल गुहा नाम है। उन्होंने रिसेंट में इंटरव्यू दिया था। आई थिंक द कैपिटेबल को उसमें उन्होंने बताया था उनका क्लेम है मेरा नहीं है बट अगर आप देखोगे $5 बिलियन डॉलर का मार्केट है एक एवरेज हिंदुस्तान का आदमी अगर आप इस 15 बिलियन के हिसाब से मैथ करें आई थिंक साल का लगभग लगभग ₹1000 खर्च करता है डायग्नोस्टिक्स के ऊपर एक एवरेज आदमी की जो साल की इनकम है जो महीने की कमाई है पर कैपिटल इन दिखे ये बहुत बड़ा रकम है और यह हम महंगाई में काउंट नहीं कर रहे हैं दैट्स व्हाई 12 फरवरी जो अभी गई है उस टाइम अभी चेंजेस अनाउंस किए गए। तो आज तक की जो महंगाई हमें लगता है कि हर साल से जो महंगाई है वो 2% 5% 6% व्हाटएवर अलग-अलग अलग-अलग नंबर्स अलग-अलग साल के उस हिसाब से जो बढ़ रही है वो सब यूज़लेस है। कोई मतलब नहीं है। आपके मेरे लिए यूज़लेस है। शहरों में रहने वाले मेजॉरिटी के लिए यूज़लेस है। ऐसे समझिए कि वो ऐसे डिज़ है। मोस्टली जो लोग ये देख पा रहे होंगे उनके लिए यूज़लेस होगा। हां। अगर इंटरनेट है, फोन है, हाथ में देख रहे हैं तो मेजॉरिटी लोग प्रोब्ली इस इस बिल पे खर्चा कर रहे हो। चलो इंटरनेट फोन तो बहुत छोटे बिल हैं। आप सीधे ऐसे समझिए ना कि आपके बच्चे की स्कूल की जो फीस है उसको सीपीआई की कैलकुलेशन में कम वेटेज मिला है। वर्सेस प्याज का क्या रेट चल रहा है? मैं इससे बेहतर तरीके से पुट नहीं कर सकता। और इसीलिए है ना कि यार आप देखते हो ना कि प्याज के लिए जो ऊपर जाते हैं। लोगों को टेंशन होती है अरे इलेक्शन में आ रहा है। फिर आप देखते हो अच्छा ठीक है हम प्याज के हम इंपोर्ट्स करते हैं इजिप्ट से सब कुछ उस टाइम पे बीच में हुआ है कई बार। वो क्यों किया जाता है कि प्यास बहुत ज्यादाेंट है। आपके बच्चे की पढ़ाई से ज्यादा सरकार के लिए वोेंट हो जाता है। क्योंकि प्यास के रेट अगर थोड़े ऊपर गए सरकार का इलेक्शन जितनातना मुश्किल हो जाता है। 80 करोड़ की बात है ना। एक्सक्ट्ली मोर देन 50% एक्सैक्टली। सो इससे बढ़िया कोई तरीका नहीं बताने का। आपके हमारे बच्चे, हमारे पेरेंट्स के या हमारे हेल्थ केयर उससे ज्यादा इंपॉर्टेंट हमारे देश में सीपीआई की कैलकुलेशन में प्याज का रेट होता है। आपके खाने पीने का आटे का चावल का रेट होता है। एंड ये मैं किसी को क्रिटिक करके नहीं बोल रहा हूं। इसमें एक ही सशन बनता है। आइडियली आइडियली आपका इंडिया इज़ इक्वल टू जो ऐसे सजित पाई है आपके ब्लूम वेंचर्स के इफ यू नो हिम वो बोलते हैं देयर आर थ्री इंडियाज। इंडिया वन, इंडिया टू, इंडिया थ्री। मैं बोलता हूं देयर आर सेवन इंडियाज़। हर सेवन के हिसाब से अलग-अलग कैटेगरीज हैं। बिल्कुल अलग वे में ये बिहेव करते हैं। बिल्कुल अलग टाइप की इनकी पर कैपिटा इनकम्स हैं। बिल्कुल अलग टाइप की इनके स्पेंड है। तो उस हिसाब से अलग-अलग इनफ्लेशन के इनके नंबर निकालो। तो आपके लिए महंगाई अलग तरीके से कैलकुलेट होनी चाहिए और जो बहुत ज्यादा पैसे कमाता है उसके लिए अलग और जो बहुत ज्यादा गरीब है उसके लिए अलग। बिल्कुल। क्योंकि उनके खर्चे ही अलग है ना। कोई ऐसा आदमी जिसका बच्चा आज की इन सरकारी स्कूल में पढ़ता है। उसको अगर मैं जाकर बोलता हूं कि यार एजुकेशन इंक्लेशन इन दिस कंट्री इज 14 15 20% उसके लिए इरिलेवेंट है। कोई मतलब नहीं। उसके ऊपर में वो क्यों उसका मैं उसके कैलकुलेशन उसके बताने जाऊं। वैसे तो बताएगा ही नहीं कोई। लेकिन पॉइंट इज़ उसके लिए इरिलेवेंट है। एट द सेम टाइम आपको मुझे कोई आके बोलता है कि यार भाई प्याज जो ₹40 का था ना वो 80 का हो गया। हमें उतना फर्क पड़ेगा क्या? टू बी फ्रैंक हम खाएंगे ना। तो हमारे कैलकुलेशन में उसको इतना क्यों वेटेज मिला? मुझसे फर्क पड़ेगा कि यार मैं जो हेल्थ इंश्योरेंस में लिया था उसका प्रीमियम एक साल में 25% क्या बढ़ गया? मुझे उससे फर्क पड़ेगा। मुझे उससे फर्क पड़ेगा कि यार मैं जिस हॉस्पिटल में जाता हूं 2 साल पहले मैंने मम्मी का वहां ऑपरेशन करवाया था किडनी स्टोन का मेरे ₹ लाख लगे थे। अब सडनली ₹45 लाख कैसे लग रहे हैं पापा के टाइम पे। हमें उससे फर्क पड़ता है। तो वेरी डिफरेंट इंडियास वी कांट कंपेयर द टू। बट सीपीआई एज अ ब्रॉड इंडेक्स एंड टू बी वेरी क्लियर। सरकार इसके दो तरह के इसके इंडेक्स निकालती है। रूरल एंड अर्बन। बट रूरल एंड अर्बन भी आप कैसे कंबाइन करोगे? हमारे देश की जीडीपी अगर आप देखोगे तो मुंबई एंड दिल्ली 4% ऑफ़ देश की पॉपुलेशन इनके पास है। लगभग 15% जीडीपी इन दो सिटीज से आती है। अगर आप टॉप 10 अगर आप सिटीज देखेंगे उससे आती है 30 32 33% के आसपास। मतलब क्या हुआ? पहली दो सिटीज़ 15% ऑफ़ द जीडीपी। अगली आरसीटीज और 15% ऑफ द जीडीपी आप पहली दो से बाकियों को ही आप कंपेयर नहीं कर सकते। उससे पिछड़ा वाला तो फिर छोड़ ही दो। Reliance बोलता है कि वी आर लाइव इन हमारा जो Jio दैट इज़ लाइव इन सम 1300 ऑड सिटीज। हम तो पहले 10 की बात कर रहे हैं सर। बाकी ये जो 1300 वो उसके बाद आ रही हैं। राइट? इट्स अ वेरी डिफरेंट इंडिया। इंडिया इज़ सेवन डिफरेंट प्रोबेबबली 17 डिफरेंट इंडियाज़। 17 अलग आप इनफ्लेशन के नंबर मत निकालो। बट सात भी मत निकालो। कम से कम चारप तो निकालो। बिकॉज़ वी आर वेरी डिफरेंट पीपल। द वे समबडी इन उत्तर प्रदेश स्पेंड्स इज वेरी डिफरेंट फ्रॉम द वे समबडी इन कर्नाटका स्पेंड्स। फॉर एग्जांपल उत्तर प्रदेश में आपका पर कैपिटा इनकम इज़ रफली समथिंग लाइक $200 या $00 आपका यही अगर आप कर्नाटका आते हो इट्स अ वेरी डिफरेंट नंबर। कैसे आप दोनों का एक साथ आप रख सकते हो? जैसे फॉर एग्जांपल मैं आपको एक और एग्जांपल देता हूं। अनइंप्लॉयमेंट का हमारा क्या फिगर आपको पता है? हमारे सरकार का एक सर्वे होता है जिसको बोलते हैं पीएलएफएस पीरियडिक लेबर फ़ सर्वे। हम अब यह मैं कई और जगह पहले बता चुका हूं। तो कुछ लोगों को ऑलरेडी पता होगा शायद मेरी ऑडियंस में पर्टिकुलरली। मैं बड़ा शौक था जब मेरे को यह पता चला कि पीएलएफएस का सर्वे बहुत सिंपल होता है। आप सर्वे करते हो सिंपल मैथ है। अगर जयंत और राज एक चाय की टपरी पे बैठे हुए हैं। दो मजदूर हैं। जयंत ऐसा आदमी जिसको हफ्ते भरों से चाय की टपरी पे बैठा है। कोई आके काम पे नहीं लेके गया। राज एक ऐसा आदमी जिसको किसी ने आके बोल दिया चल भाई गोडाउन में चल। ₹100 दूंगा। घंटे भर का काम है। सामान उठा के गाड़ी में रख दे। राज इस काउंटेड एस एन एंप्लॉयड पर्सन। आई एम काउंटेड अनइंप्लॉयड। क्या राज और जन्म में कोई फर्क है यहां पे? हम दोनों बेरोजगार उस पे बैठे थे। बाय चांस किसी ने आके राज को बोल दिया कि चल क्या हम एंप्लॉयड हुए? बट डेफिनेशन इज़ सच। अब जब मैंने इसके ऊपर जब मैंने थोड़ा मैंने अवेयरनेस मैंने क्रिएट किया तो कुछ लोग आके बोलते हैं दैट इज़ अ यूएन डिफाइंड स्ट्रक्चर। हर जगह ये होता है। मैं बोला दैट इज़ योर जस्टिफिकेशन कि अच्छा ठीक है हम मिसलीड हो रहे तो कोई दिक्कत नहीं है क्योंकि वो नंबर हमें कुछ सॉल्व नहीं कर रहा है। राइट? सो दैट पार्ट इज़ समथिंग दैट वी रियली नीड टू अंडरस्टैंड कि इससे फर्क नहीं पड़ना चाहिए। अच्छा दुनिया भी यही करती है। पॉइंट इज़ क्या इससे पर्पस सॉल्व हो रहा है? नहीं हो रहा है तो लेट्स डिमांड फॉर समथिंग बेटर। सिमिलरली अब आते हैं तीसरे वाले पॉइंट पे जो आपने भी रेज़ किया था। व्हिच इज़ लोग घर कैसे खरीदेंगे एंड ऑल दैट। राइट? उस पे आता है मेरा एक और प्रेडिक्शन। सो प्रेडिक्शन नंबर टू जो मैं लेके आया था जो जिसके ऊपर मुझे जरूर बात करनी थी। बाय चांस आपने वो टोपिक उसके ऊपर भी करते हैं। हम तो यह मेरा सिंपल सा प्रेडिक्शन है। मोस्ट इंडियंस विल नेवर बी एबल टू ओन अ होम। एंड ये मैं बहुत दिल से चाहता हूं कि भाई मैं गलत साबित हो जाऊं। मोस्ट इंडियंस मोस्ट इंडियंस अधिकतर इंडियंस यस। कभी घर नहीं खरीद पाएंगे। नहीं। और ये मुझे बोलते हुए अच्छा नहीं लग रहा। एंटायर ड्रीम इज हम सब काम इसलिए करते हैं मेजोरिटी इंडियंस कि एक दिन अपना घर बनाएंगे और घर खरीदेंगे। या एंड यू आर सेइंग दैट ड्रीम अब इंडिया में पॉसिबल नहीं होगा। इंडिया में मेजोरिटी लोगों को क्या चाहिए? महंगे घर सस्ते घर? घर चाहिए और महंगे घर चाहिए। अफोर्ड क्या कर सकते हैं लोग? महंगे घर या सस्ते घर? सस्ते घर। सस्ते घर। राइट? 12% ऑफ न्यू सप्लाई कमिंग इन द मार्केट एस पर एनरॉक। अगेन Google पे सर्च करो। एनरॉक के हिसाब से 12% ऑफ द न्यू सप्लाई कमिंग इन द मार्केट्स इज फॉर अफोर्डेबल हाउसिंग मोर देन 50% सॉरी रेस्ट ऑफ़ दैट इज नॉट अफोर्डेबल हाउसिंग मोर देन 50% इज़ हाउसेस बिय्ड 1.5 करोड़ लग्जरी होम्स या कैसे खरीदेंगे लोग एंड बाय द वे दिस इज़ ऑलरेडी हैपनिंग कमाल की बात है 2 करोड़ से 2.07 करोड़ से 2.17 करोड़ ऐसे हाउसेस हैं हमारे यहां पे जो बने हुए हैं दे आर एम्प्टी बने बनाए घर है। खाली पड़े हैं। साथ में ये भी बोलते हैं देयर इज़ अ शॉर्टेज ऑफ़ 1.9 करोड़ हाउसेस इन इंडिया। हम कहां पे बैठते हैं ये दोनों चीज़? आप बिठाओ। कैसे बिठाओगे? लग्जरी हाउसेस एम्प्टी हैं। अफोर्डेबल हाउसेस है ही नहीं। पॉइंट इज़ इज दैट व्हाट यू ट्राइंग टू से? हाउसेस हैव बिकम एन इन्वेस्टमेंट एसेट। वो किसी का छत नहीं रहा है। हमारे देश में अच्छा खासा पैसा जो हमारा रियलस्टेट सेक्टर है उसके अंदर कहां से आता है? दो जगह से आता है। वन इज रेमिटेंसेस। बाहर का पैसा जो इंडिया में आता है कि बाहर जो लोग काम कर रहे हैं। हां। अब ऐसा होता है ना देखो बाहर जो काम कर रहा है। बाहर जो आदमी काम कर रहा है जैसे यूएई में है, यूएस में है एसेटरा। यू कांट इन्वेस्ट इंटू ऑल सॉर्ट ऑफ़ थिंग्स आउट देयर। लिमिटेशंस होती हैं। हम इंडिया तो आपका अपना ग्राउंड है। यहां पे पैसा लेके आते हो। अब यहां पे लेके उसको करोगे क्या? तो जो बाहर नौकरी करते हैं वो इंडिया पैसे बेचते हैं। रेमिटेंस बिग फॉर इंडिया इज़ द बिगेस्ट कंट्री व्हेन इट कम्स टू रेमिटेंसेस। हमारे देश के लगभग 3.3 करोड़ लोग बाहर हैं। वो बाहर पैसा कमाते हैं। अपनी मेहनत से इंडिया का नाम रोशन कर रहे हैं। अपना नाम रोशन कर अपने परिवार का नाम रोशन कर रहे हैं। पैसा कमाते हैं। उसके प्रपोर्शन यहां पे भेजते हैं। वो नंबर 129 बिलियन डॉलर्स ईयर तक आ चुका है। प्रोजेक्टेड है बाय टू एफवाई 30। ये नंबर लगभग$0 बिलियन डॉलर्स के आसपास पहुंचेगा। मुझे याद नहीं है। नीति आयोग ने बोला था कि या फिर इकोनॉमिक सर्वे बोला किसी में तो था। ओके। ठीक है? दीज़ आर वेरी बिग नंबर्स। अभी जो पैसा आता है ऐसा नहीं है कि लोग इसलिए बेचते हैं कि चलो हमारे घर वाले वहां बैठे हैं वो खर्चा करेंगे। उसके लिए भी आता है बट अच्छा खासा इन्वेस्टमेंट पर्पस के लिए आता है। कुछ शेयर मार्केट में जाता है। कुछ एफडीस में जाता है। कुछ आपका रियलस्टेट में जाता है। फॉर आवर टिए वन बिल्डर्स डीएलएफओ लोदा हो या फिर आपका प्रेस्टीज ग्रुप हो एनआरआई मनी यूज़्ड टू अकाउंट फॉर अबाउट 5 टू 10% ऑफ़ बुकिंग्स एज ऑफ़ 15 इयर्स एगो। हम् टुडे दैट इज़ बिटवीन 20 टू 25% इन रीसेंट डीएलएफ का प्रोजेक्ट जो कि गुड़गांव में ल्च हुआ है इट हैज़ गॉन अप टू 30% पैसा वहां से आ रहा है वो लोग यहां रहने नहीं वाले हैं दीज़ आर इन्वेस्टमेंट्स घर खरीद के रख लिए नंबर वन नंबर टू ब्लैक मनी जब डीमोनेटाइजेशन हुआ था पिच क्या थी कि बॉस इससे ब्लैक मनी खत्म हो जाएगा जब डीमॉननेटाइजेशन हुआ था कैश इन सर्कुलेशन हमारी इकॉनमी में 17 लाख करोड़ था आज के ₹34 लाख करोड़ है डेबिट अब किसी को लगता है कि हां भाई ब्लैक मनी नहीं है इंडिया में गुड फॉर यू। मैं एक बेवकूफ आदमी हूं जिसको लगता है कि ब्लैक मनी तो एक्सिस्ट करता है और जब ब्लैक मनी होता है वो आपकी तीन जगह जा सकता है और चौथी जगह वो जा नहीं सकता। चौथी भी जगह है वो भी बता देता हूं। नंबर वन इज़ आप उसको गद्दे के नीचे अलमारी में चावल के उसके अंदर दबा के रख दोगे। कितना रखोगे? लिमिट करोड़ 30 रख दोगे। फ्रेज़ अ लिमिट तो फिर दो और ऑप्शन आते हैं। गोल्ड में ले लो क्योंकि गोल्ड का अच्छा खासा व्यापार आज भी कैश में होता है। सरकार यही तो कहती है ना कि एक सर्टेन नंबर से ऊपर का लोगे तो आपको पैन कार्ड आधार देना पड़ेगा। लोग उसके छोटे-छोटे बहुत सारे ट्रांजैक्शन करते हैं। गोल्ड वैसे ले लिया जाता है। दूसरा क्या है? रियलस्टेट। खुला सच है। सबको पता है। अगर आप कोई प्रॉपर्टी लेते हो अगर आप मेरी तरह आदमी हो। आपकी तरह कि हमारी है ही खाली कमाई वाइट वाली। क्या आज का हमारा काम ही नहीं है। तो आप जब प्रॉपर्टी लेने जाते हो तो वो आपको सीधा बोलता है अच्छा भैया हम जब बात करते हैं कि कितना वाइट कितना ब्लैक हमारे तो खाली वाइट है तो वाइट के नाम पे क्यों सामने वाले का टैक्स ज्यादा लगेगा वो आपका रेट बढ़ा देता है पब्लिक नॉलेज है ये फिर भी हम ऐड करते हैं कि नहीं नहीं ब्लैक मनी तो है नहीं ये क्या बकती है सिमिलरली एट द सेम टाइम वो जो ब्लैक वाला जो कॉम्पोनेंट है 17 लाख करोड़ का 34 लाख करोड़ जो हुआ है राइट वो सारा सर्कुलेशन में नहीं है इट इज़ हुडेड एज वेल वो होडेड कहां पे है वो यहां पे डिप्लॉय किया जाता आता है। आप सारा गद्दे के नीचे नहीं दबा सकते। सोना कितना खरीद लोगे? तो बहुत सारे लोग रियलस्टेट करते हैं। वो जो 2 करोड़ से ऊपर अपार्टमेंट्स या घर बंद करके वीकेंड पड़े हैं। उनमें ये वाला पैसा अच्छा खासा लगा हुआ है। अब ऑफ कोर्स अब उसके लिए बायरर्स आपको जब मिलेंगे तो आप डिप्लॉय करोगे। कोई रेंटल के लिए मिलेगा उतना देने के लिए। अब किसी ने अगर वाइट पे दिखता होगा कि हां भाई मैंने 50 लाख में घर लिया है। लेकिन किसी ने लिया है अगर ₹.5 करोड़ का घर वो रेंटल फिर 50 लाख के हिसाब से तोड़ेगा। तो उसको तो अपना रिटर्न बनाना है तो रेंटल उतना बड़ा चला के देता है। उतना रेंटल देने वाले लोग नहीं मिलते ईजीली। तो रेंट भी इससे ऊपर जा रहे हैं। स्यूशन क्या है इसका? अच्छा पहले मैं बता दूं एक चौथा रेवेन्यू जिस पे कैश डिप्लॉय होता है वो होता है कि रोजमर्रा की जर्नी में जो जो भी हम खर्चे करते हैं हम कैश में करने लग जाते हैं। फाइव स्टार होटल में गए खाना पीना किया। अच्छा ठीक है। 10,000 का बिल है। ये लो कैश ले लो। बहुत सारे लोग करते हैं। बहुत कॉमन है। आपका एरोसिटी है। T3 एयरपोर्ट के जस्ट साथ में है। एयरपोर्ट पूरा जो है वो लैंडस्केप वहीं पे है। उसके अंदर देयर आर लॉट ऑफ़ फाइव स्टार होटल्स। आप जाओ लोग ओपनली ऐसे बैग लेके घूमते हैं। एंड वो बैग से निकालते हैं ऐसे काउंट करके। हां जी ये लो ₹500 एक्स्ट्रा कीप दैट टिप। बिकॉज़ है इतना। ऐसे ही थोड़ी है। वो ब्लैक का पैसा है। राइट? कि अब कहीं तो डिप्लॉय करना है। ये चार तरीके हैं। रियलस्टेट में मुझे इतना पैसा जा रहा है। रिजल्ट उसका क्या होता है? 2 करोड़ घर ऐसे बन के खड़े हैं जिसमें कोई रहता नहीं है। जो घर चाहिए उसकी नीड खत्म हो। उसकी नीड है लेकिन वह कोई सप्लाई नहीं कर रहा है। क्यों? डिमांड ही लग्जरी वाले की है। क्योंकि पैसा इतना पड़ा है वो डिप्लॉय तो वो लोग करेंगे ना। उनकी तरफ से डिमांड है। अरे बना क्यों नहीं रहे? हम खरीदने को रेडी हैं। इतना कैश कहां लगाएंगे? कितना सोना खरीदेंगे? कितना फाइव स्टार में या फिर कपड़े की दुकान में जाके खर्चा करेंगे। दैट्स द बिग प्रॉब्लम। रिजल्ट इज मेरे को बोलने में बड़ा अजीब लगता है कि घरों के रेट ऐसे बढ़े हैं लोग खरीद नहीं सकते। एज आई सेड फिर से बोल रहा हूं मैं एनरोक का डाटा ये कहता है 12% घर जो आ रहे हैं मार्केट के अंदर वो अफोर्डेबल हाउसिंग है। बाकी सब अफोर्डेबल हाउसिंग में नहीं काउंट होता है। लगभग 50% के आसपास ऐसे हैं जो कि 1.5 करोड़ से ऊपर के घर हैं। नहीं खरीद सकता हिंदुस्तानी आदमी। फिर खरीदने का एक ही तरीका रह जाता है। या तो यह कि अपने पास जो भी अब तक का है एकिस्टिंग घर है कोई वो निकाल दो। जो एसेट्स हैं सब कुछ निकाल लो और ले लो। कुछ लोग वैसे करते हैं कि लेना है अब इस इस घर में 40 साल से रहने इसकी हालत खराब हो गई और कैसे रहोगे तो आप लेते हो। दूसरा तरीका क्या है? बांध लो अपनी 202 साल की 18 साल की ईएमआई। और अपने आने वाली आगे की 20 साल उसके नाम कर दो। और कोई तरीका नहीं बचता। सो वी विल कम टू दिस पार्ट। ओके? यू आर सेइंग कि लोगों की वेट सो यूजुअली लेट लेट्स गो बेसिक्स पे पहले यूजुअली एंड आई कैन बी प्योरली रोंग हियर राइट बिकॉज़ मुझे ये समझ नहीं आता इतना ज्यादा तो आई एम ट्राइंग टू अंडरस्टैंड फ्रॉम अ वेरी क्यूरस पॉइंट घरों के प्राइसेस एक शहर में एक देश में लोगों की सैलरी कितनी है या इनकम कितनी है या बिजनेस इनकम कितनी है उसके ऊपर डिपेंड नहीं करता रियल स्टेट प्राइसेस इजंट लेट्स से मेजर्ड बाय द बाइंग कैपेसिटी और द इनकम मेकिंग कैपेसिटी ऑफ एन इंडिविजुअल। सर सब कुछ इकोनॉमिक्स की एक सिंपल सी इक्वेशन होती है जिसमें दो वेरिएबल होते हैं। डिमांड एंड सप्लाई सब उससे चलता है। तो ये कोई सैलरीवैलरी से कोई मतलब नहीं। तो मुंबई की सैलरी डिमांड खाली सैलरी वालों की थोड़ी होती है। डिमांड में तो वो वाला पैसा भी है ना कि यार जो ब्लैक वाला है बट इससे कोई लेना देना नहीं होता। राइट? तो हम डिमांड आई हैव रेड सम टेक्स्ट बुक डेफिनेशन समवेयर वेयर कि रियलस्टेट प्राइसेस आर डिफाइंड बाय द पीपल हु आर मेकिंग इनफ मनी एक्सट्रा पता नहीं समवेयर आई कैन बी रोंग तभी मैंने पहले आई बिलीव दैट आई बिलीव मैं भी गलत हो सकता हूं मेरा ये मानना है कि अगर डिमांड है तो रेट ऊपर चढ़ेगी नहीं है तो उतनी देर से गिर सकती है सो वो बन रहा है सो इसीलिए बहुत सारी जो सरकारें हैं स्पेशली लेट्स से ब्रिटिश कोलंबिया या कनाडा। दिस इज द रीज़न डिमांड एंड सप्लाई। कि जो लोग अगर तुम्हारे देश के लोग हैं वो बाहर जाते हैं, बाहर जाके बहुत कमाते हैं और फिर कमा के अपने देश में आके खरीदने लग जाते हैं और ऐसे घरों में पैसे डालते हैं जहां पे वो रहते नहीं है। राइट? दिस इज़ व्हाट इंडिया का भी इसकी वजह से इनफ्लेट हो रहा है। और ये लगभग 20 से 30% तक आ चुका है। राइट? या तो बहुत सारी कंट्रीज इसको एक्स करती है या रोकने की कोशिश करती है। राइट? आई आई रेड इट समवेयर कि ब्रिटिश कोलंबिया ने उसको नॉन रेजिडेंट स्पेककुलेशन टैक्स करके कुछ बोला था और 20% का टैक्स इंपोज किया था कि भाई अगर एक से 5% के ऊपर हो गया हमारा तो फिर हम टैक्स करके उसको कम कर देंगे। इनफैक्ट फेडरल कनाडा ने तो बना ही कर दिया था एक टाइम पे। कोई भी नॉन रेजिडेंट खरीद ही नहीं सकता घर। राइट? तो ये 5% के ऊपर जाता है तो दूसरे देश इसके ऊपर ट्रिगर करते हैं। फ्लैग कर देते हैं। खाली 5% का भी नहीं है। हां। हां। सो आई एम सेइंग 5% पे दूसरे दूसरी कंट्रीज फ्लैग कर देती है। इंडिया में अगर ये 20-30% हो गया है तो व्हाई आर वी नॉट फ्लैगिंग? क्योंकि इससे तो फिर हमारे देश के लोग अब नहीं खरीद पाएंगे। अप टू द लॉ मेकर्स, द पॉलिसी मेकर्स बट दे इंसेंटिव होता होगा। इसीलिए आई बिलीव कि इंसेंटिव है, इंसेंटिव है बिल्डर्स की तरफ से एंड वो इकोसिस्टम बहुत ज्यादा स्ट्रांग होता है। हम सब जानते हैं कि रियलस्टेट इज़ अ ग्रेट प्लेस टू डिप्लॉय द ब्लैक मनी। जैसा अभी हमने बात किया। वो ब्लैक मनी इंजीन बना कौन रहा है? इट्स द बिग पीपल, द पीपल ऑफ़ पावर, द पीपल ऑफ बट इजंट दैन एनआरआई मनी कमिंग इनसाइड आवर कंट्री इज गुड? इजंट दैट गुड? कि वो लोग कमा के इधर पैसे डाल रहे हैं और फिर यहां के एसेट्स खरीद रहे हैं। तो एक तरीके से अच्छी चीज भी है ना। पॉइंट इज़ अगर वो एसेट यूज़ नहीं हो रहा तो उसका फायदा क्या रहा? देखिए ऐसे समझिए एक इकोनमिक एक्टिविटी होती है ना उसके मल्टीप्लायर इफेक्ट होता है। अगर आपने उसका मल्टीप्लायर इफेक्ट ही आपने खत्म कर दिया तो फायदा क्या रहा? अगर किसी चीज की मल्टीप्लायर इफेक्ट यह थी कि यार एक घर बनाएं। ठीक है? वो घर एक बिल्डर ने बनाया। किसी ने खरीदा। अब उसमें कोई आगे रहने लग गया। वहां पे कुछ इंपैक्ट आया। राइट? यहां पे आपने रेट आपने इतने बढ़ा दिए कि वो छोड़ो और 10 लोग घर ले नहीं सकते। अब बट इसकी वजह से शायद इसका नेगेटिव मल्टीवर इंपैक्ट आ रहा है ना। रेंट कहां कम हुआ ना? रादर क्योंकि किसी ने वो घर इतने महंगे रेट पे खरीदा है। उसको भी अपना रिटर्न बनाना है। वो रेंट ही इतना हाई रखता है। अब बट अब देखो मुंबई में तो 2-3% के आसपास आ गया रेंट। सर आप एक बात समझो ना कि आप जब घर आप कहीं पे भी लेते हो। राइट? एक यूजुअली लोग क्या कहते हैं 11 महीने का एग्रीमेंट कर लो। उससे ऊपर का नहीं करेंगे। व्हाई? क्योंकि उससे ऊपर नहीं तो रजिस्ट्री कराना पड़ेगा। ठीक है? अब 11 महीने बाद में जब रिन्यूल का टाइम आता है, ऑफन इट इज़ नॉट द यूजुअल फाइव और 10% वो बढ़ाया जाता है ज्यादा। एंड दिस इज व्हाई क्योंकि आस्क है एंड दैट इज द प्रॉब्लम। एंड सेकंड थिंग एक बड़ी चीज है व्हाट हैपेंस इन रियलस्टेट डज़ नॉट एंड एट रियलस्टेट। रियलस्टेट कंज्यूम्स अ लॉट ऑफ़ सीमेंट, अ लॉट ऑफ़ स्टील, अ लॉट ऑफ़ पेंट, अ लॉट ऑफ़ ट्रक्स। ट्रक्स चलते हैं तो उसके अंदर डीज़ल जाता है। डीज़ल कौन बनाता है? ऑल रिफाइनरीज बनाती है 30% ऑफ़ जीडीपी कंट्रीब्यूशन सेक्टर का जब ट्रक्स कम चलते हैं डीजल आपका कम कंज्यूम हो रहा है। रिफाइनरीज का पूरा मैथ चेंज हो जाता है या जो पेंट बनाने वाली कंपनीज़ है उनको 3 साल लगे हैं वो बन में कि ओके नाउ वी आर गोइंग टू बिकम एक्सपोर्ट फोकस्ड। अब वो दुनिया भर में पेंट एक्सपोर्ट करने लग गए हैं। रिजल्ट इज़ अब बाकी बाकी कंट्रीज की भी लग रही है। सेम गोज़ फॉर स्टील। चाइनीस स्टील का बिगेस्ट कंसमशन सेंटर वाज़ द रियलस्टेट। इट गॉट टू अ पॉइंट वेयर मल्टीपल बिग चाइनीस प्लेयर्स लाइक जैसे मैंने अभी कंट्री गार्डन का नाम लिया दे हैड बोट आउट सम ऑफ़ द बिगेस्ट शॉपिंग मॉल्स इन लंदन इन यूएस उन्होंने बड़े डिस्काउंट इनफैक्ट सो हैव यू हेड ऑफ़ दिस थिंग कॉल्ड सिटी ऑफ़ लंदन नहीं सो देयर इज़ लंदन हैव यू बीन टू लंदन अवेयर या लंदन के अंदर एक स्पेशल एक इकोनमिक ज़ोन है जिसको बोलते हैं सिटी ऑफ़ लंदन जहां पे सारे आपको एक्सरसा वो मिलेंगे हाई हाई राइज़ एंड टावर्स एंड ऑल वो सारे एक ही जगह पे हैं। ओके एंड ऑल दी फाइनेंसियल सर्विज जो हब है वो वही है। सो एक बड़ा इंटरेस्टिंग स्टार्ट था। मेरे को याद नहीं मैंने कहां पढ़ा था। लगभग 2ाई साल पहले मैं पढ़ा था। दैट्स सम 70% ऑफ सिटी ऑफ़ लंदन कि हाईराइज़ेस आर ओन बाय चाइनीज़ पीपल। उस पे क्विप भी लिखा था। क्विप मतलब एक मजाक की बात लिखी थी कि द क्वीन ऑफ़ लंदन ओन्स लेस ऑफ़ सिटी ऑफ़ लंदन देन द चाइनीज़ पीपल। बट ये इंडियंस के लिए ना इंडियन बिलिनेयर्स आर द हाईएस्ट रियलस्टेट ओनर्स इन द कंट्री। इन इट डजंट लंदन। नॉट रियली। सो देयर इज लंदन एंड देयर इज सिटी ऑफ़ लंदन। ओके? देन सिटी ऑफ़ लंदन यू आर टॉकिंग। सिटी ऑफ़ लंदन इज़ द फाइनेंसियल सर्विज। अब हम जैसे यहां पे है ना कि यहां का एक फोर्ट है मुंबई में फोर्ट वाला एरिया। वहां के मैं उसकी बात कर रहा हूं। एंड आउट देयर एक पूरा अलग ही वहां पे लॉज़ चलते हैं। फाइनेंसियल रेगुलेशंस बहुत अलग हैं। उसको पूरा अलग ही डिस्ट्रिक्ट बनाया हुआ है। एंड रेस्ट ऑफ लंदन में मिलाकर के इतने हाई रेज़ नहीं जितने उस एक छोटे से डिस्ट्रिक्ट के अंदर। एंड मेजॉरिटीज़ ओन बाय चाइनीज़। एंड व्हाई चाइनीस पीपल चाइनीस रियलस्टेट प्लेयर्स आर गोइंग आउट एंड बाइंग दी थिंग्स रियलस्टेट तो हर जगह चलेगा ना बट उनकी जब हालत यहां पे इतनी टाइट हुई थी दैट टू सेल ऑल ऑफ दीज़ ऑल तो नहीं बट काफी सारे इन्होंने बेचे हैड हैवी डिस्काउंट्स टू फाइंड मनी टू पे बैक दे्स इन चाइना तो उन्होंने सिटी ऑफ़ लंदन में बेचना स्टार्ट कर दिया टू नॉट जस्ट सिटी ऑफ़ लंदन यूएस में दे हैव सोल्ड मॉल्स एंड एवरीथिंग लास्ट वीक उसमें कई उनके बड़े-बड़े कसीनोस थे वो सब बेचे हैं अक्रॉस द वर्ल्ड एंड ये सब कुछ हुआ है एंड नॉट जस्ट टू पे बैक डे्स बैक इन चाइना बहुत सारे जो रियलस्टेट बना रहे थे उसके लिए दे इशू ग्लोबल बॉन्ड जैसे अडानी ग्रुप का आपको बताया था ना अभी कि उनके डॉलर डिनॉमिनेटेड बॉन्ड्स थे इनके भी थे वो सब चुकाने हैं आपको तो पैसा कहां से लाओगे आपका डोमेस्टिक मार्केट क्रैश हो गया रिस्ट्रक्चरिंग्स हो रही है सब कुछ हो रही है वहीं पे चाइनीस गवर्नमेंट ने आके एक और हेल्प भी किया कि दे फॉर्म्ड मल्टीपल यूनिट्स अक्रॉस डिफरेंट प्रोविंसेस जहां पे हम स्टेट बोलते हैं वहां पे प्रोविंस होते हैं। तो उन व्हीकल्स ने इन प्रॉपर्टीज़ को डिस्काउंट पे खरीदना शुरू किया ताकि गवर्नमेंट की तरफ से इन बिल्डर्स को लिक्विडिटी मिले कि अपने डे्स वगैरह पेबैक कर सकें। ये सब भी हुआ है। बहुत कुछ हुआ। इट्स बीन अ वेरी-वेरी लिख एंड पेनफुल अफेयर। नाउ व्हाट डस दिस मीन? अगर एक मार्केट जहां पे 6 करोड़ इनकंप्लीट सॉरी कंप्लीटेड बट वेकेंट हाउसेस हैं। एंड येट देयर इज़ डिमांड फॉर हाउसेस जो कि लोगों के पास अभी है नहीं। उनको अफोर्डेबल चाहिए। वहां पे ये हो रहा है। प्रैक्टिकली यहां पे भी हो सकता है। यू फील सिमिलर काइंड ऑफ़ क्रैश अगर इंडिया ने ध्यान नहीं दिया तो इंडिया में भी होगा। डिपेंड्स ऑन मल्टीपल थिंग्स। क्योंकि रियल स्टेट तो मेजॉरिटी इंडियन वेल्थ जो भी क्रिएट करता है वो रियल स्टेट में ही लगाता है। मैं ये कहूंगा कि डिपेंड्स ऑन मल्टीपल थिंग्स। नंबर वन इफ यू वांट टू प्रायोरिटाइज कि हां भैया हर हर आदमी के सर पे एक छत होनी चाहिए। तब तो यार क्रैश ही होना पड़ेगा। अगर हम उस पर कॉम्प्रोमाइज करने को रेडी हैं कि यार ठीक है यार नहीं होगा घर ठीक है लेकिन यह मार्केट नहीं टूटना चाहिए क्योंकि उससे बहुत लोगों की जो इन्वेस्टमेंट्स है जो उनकी नेटवर्क वो खत्म हो जाएगी। दैट इज़ अनदर वेरी लेजिटमेट चैलेंज टुडे। तो फिर लोगों को घर नहीं मिलेंगे। व्हाट्स योर थिंग व्हाट डू यू? नहीं हो पाएगा। रीज़न बीइंग रियलस्टेट पीपल आर वेरी-वेरी पावरफुल, वेरी रिच पीपल एंड दीज़ पीपल आर डायरेक्टली लिंक टू द पॉलिटिशियंस द मनी इंटरचेंज बहुत ज्यादा होता है। एंड ये सारी वो चीजें जो ऑफ कोर्स ना जब हम बोल रहे हैं कि ये जो इतना ब्लैक का पैसा है जो यहां पे अब्सॉर्ब होता है और खुला होता है। राइट? जस्ट लाइक रियल स्टेट नीचे नहीं आएगा। यू डोंट फील सो इट्स अ पार्ट एंड पार्सल ऑफ द एंटायर पॉलिटिकल मशीनरी। फेयर बट एंड पॉलिटिशियंस अपने खिलाफ कभी भी लॉज़ नहीं बनाते। सो रियल स्टेट का पैसा नीचे नहीं आएगा। रियल स्टेट इतना क्रैश नहीं करेगा। हुआ रेंज बाउंड रहेगा। चाइना जैसा क्रैश नहीं होगा। पर उसका रिजल्ट और कॉन्सिक्वेंस यह होगा कि एक एवरेज इंडियन को घर खरीदने में बहुत दिक्कत होगी। बिल्कुल होगा सर। मैं आपको एक एग्जांपल देता हूं। ठीक है? सो योर प्रेडिक्शन दिस वन विल बी विल माइट बिकम ट्रू। एंड मैं दिल से दुआ करता हूं भाई मैं गलत साबित हूं। मैं चाहता हूं यार हर इंडियन ऑन कर पाए। क्यों नहीं होना चाहिए यार? है ना? हमारे पेरेंट्स ने अपनी पूरी जिंदगी उसके ऊपर लगाई। और भी बहुत सारे लोग हैं उनको ही मिलना चाहिए ना। सबको मिलना चाहिए। एक सिंपल सी चीज है कि मैं मैं लिख के लेके आया था। आपको बताता हूं। रुको एक सेकंड। सो गुड़गांव का डाटा है। ठीक है? पिछले 4 साल के अंदर गुड़गांव में अगर आप द्वारका 5 साल का डाटा है। और आप द्वारका एक्सप्रेसवे देखेंगे वहां पे प्रॉपर्टी प्राइसेस आर जंप बाय एवरेज 93%। अगर आप गोलफकोर्स रोड देखेंगे अबाउट 80% गोलफोर्स एक्सटेंशन रोड देखेंगे वी हैव गॉन फ्रॉम 80 ₹8800 पर स्क्वायर फीट एवरेज टू 20,000 प्लस लेफ्ट राइट सेंटर आपको लगता है कि लोगों की कमाई इस हिसाब से बड़ी है? अगर किसी को हिम्मत करके घर लेना भी है या तो उसके घर और छोटे होंगे या फिर उसकी ईएमआई बड़ी होगी। एंड बहुत सारे लोग ये दोनों ही अफोर्ड नहीं कर सकते। यू नो वन वेरी इंटरेस्टिंग थिंग दैट आई सॉ इन देयर नोट्स इज कि यूजुअली क्या होता है लोग अपनी सैलरी को गाली देते हैं। लोग अपनी डिग्रीज को गाली देते हैं। लोग बोलते हैं कि मेरी स्किल्स इसकी वजह से मैं पैसे ज्यादा नहीं कमा पा रहा हूं। मैं इसलिए आगे नहीं बढ़ पा रहा हूं क्योंकि शायद दुनिया बहुत तेजी से चेंज हो गई है। मुझ में इतनी स्किल्स नहीं है। मैं शायद उस तरीके से टेक नहीं सीख पाया या व्हाटएवर एसेट्रा एसेटरा। राइट? और लोग बोलते हैं मेरी कंपनी खराब है या ठीक है इन सबको गाली देते हैं। यू सेड कि इन सबको गाली देने से कोई मतलब नहीं है। पैसे लोग इसलिए नहीं कमा पाएंगे क्योंकि कॉस्ट ऑफ डूइंग बिज़नेस इन कॉस्ट ऑफ डूइंग बिज़नेस इन इंडिया इज़ हाई। व्हाट डू यू मीन बाय दैट? कि लोगों का कोई लेना देना नहीं है। सिस्टम इज़ रिग्ड। नो इट्स बोथ थिंग्स। मैं ये नहीं कहता कि लोगों का रोल नहीं है। बट सिस्टम इज़ इटसेल्फ आल्सो रिग्ड। आप ऐसे समझिए कि आपके पापा मैन्युफैक्चरिंग में है। राइट? आई थिंक क्या डिटर्जेंट डिटर्जेंट में है। राइट? सो रिटर्न ब्रांड जब आप बनाते हो आपका लॉजिस्टिक्स भी बहुत अच्छा खासा आपका उसका आपका कॉस्ट आता होगा। आई एम डैम श्योर। ठीक है? लॉजिस्टिक लॉजिस्टिक्स का जो भी आपका खर्चा होता है उसमें एक अच्छा खासा कॉम्पोनेंट होता है आपका फ्यूल। हम आपका फ्यूल में लगभग आधा तो लेकिन आप सरकार को टैक्स या पे कर रहे हो। बट उस पे आपको जीएसटी का आपको रिबिल तो आपको मिलता नहीं है। आपको वो इनपुट टैक्स रेट भी आपको मिलता नहीं है। सो इट इज डायरेक्टली एडेड टू द कॉस्ट। एंड इन द एंड आपका जो प्रोडक्ट है वो ज्यादा कॉस्टली हो गया। राइट? यही वाला प्रोडक्ट आप बाहर भी बेचते हो क्योंकि जब आप एक्सपोर्ट कर रहे हो तो भी इस पे तो आपको जीएसटी का कोई आपको वापस नहीं मिल रहा है। हम अब आपको एक्सपोर्ट अगर करना है तो हाउ वुड यू कमपीट? सरकार ने खुद आपके फ्यूल का प्राइस आधा चढ़ा रखा है। सो अब ये वाले जो टैक्सेस हैं ये इन द एंड क्या कर रहे हैं? ये आपके एंड जो प्रोड्यूस है उसको और कॉस्टली बना रहे हैं। व्हेन इट कम्स टू से योर एनर्जी। हम ठीक है? एनर्जी के ऊपर लगा दिया जाता है एनर्जी का ड्यूटी फॉर इंडस्ट्रीज। हम अभी जो ड्यूटी जो लगाई गई है नाउ व्हाट हैपेंस इज जब जीएसडब्ल्यू ग्रुप ने अपना नेगोशिएशन किया फॉर दैट बटीबुरी में अपना प्लांट लगाने के लिए 25000 करोड़ का इन्वेस्टमेंट उनको वहां पे जो एसजीएसटी का 110% का रिफंड उनको प्रॉमिस किया गया साथ में एक और चीज प्रॉमिस की गई कि यू विल बी एक्सेंप्टेड ऑफ आपका इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी। आपके पापा को मिलेगा क्या? सो आपके लिए तो वो भी एक एडेड कॉस्ट है। आप कैसे कल को एक्सपोर्ट करोगे? आपके पिताजी ने चलो फिर भी सब कुछ चलाया, सब कुछ किया। राइट? उनका बिजली का अच्छा खासा खर्चा आता है हम क्योंकि फैक्ट्री चला रहे हैं। हां। बिजली का अगर आपके घर में जो बिल आता है और आपकी फैक्ट्री में आता है उसकी यूनिट की कॉस्ट में क्या फर्क होता है? बहुत फर्क होता है। क्यों होता है? क्योंकि कमर्शियल लेते हैं तो कमर्शियल का पैसे ज्यादा लगते हैं। क्यों लगते हैं ज्यादा? वो इसलिए कि हमारी सरकार ने एक सिस्टम बना रखा है। और खाली हमारी सरकार नहीं आज की सरकार नहीं हमेशा से ये रहा है। इस प्रिंसिपल को बोलते हैं क्रॉस सब्सिडाइजेशन। किसान है बिल्कुल सस्ते या फ्री में उसे बिजली दो। हाउसहोल्ड है थोड़ा महंगा कर दो। आजकल यह भी हो रहा है अप टू कुछ यूनिट्स फ्री में दे दो। कमर्शियल है थोड़ा और बढ़ा दो। इंडस्ट्रियल है और बढ़ा दो। रिजल्ट ये होता है जो घर बार होते हैं उनके लिए रेट पड़ता है आई थिंक 5 6 ₹7 पर यूनिट। डिपेंडिंग आप कहां पे हो और आप इंडस्ट्री हो। आपका पड़ता है 11 12 ₹17 पर यूनिट। वो रेट किसने बढ़ाया आपकी फैक्ट्री का? सरकार की पॉलिसी ने। इन द एंड इन सब चीजों के कारण प्रोड्यूस किसका महंगा हो रहा है? आपके पिताजी के उस डिटर्जेंट का। वो और महंगा हो गया है। इन द एंड चाहे वो डोमेस्टिक बेचे चाहे एक्सपोर्ट में बेचे महंगा है। उनके लिए तो महंगा ही है। डोमेस्टिक वाले पास सॉरी ऑप्शन नहीं है। वो फिर भी खरीद लेंगे। चलो क्योंकि ऑप्शन नहीं है क्योंकि बाकी जो प्लेयर्स यहां बेच रहे हैं उनके लिए भी वही सच्चाई है। एक्सपोर्ट मार्केट में जब जाओगे वो सच्चाई सबके लिए नहीं है। वो हमारी सरकार ने हमारे लिए सिस्टम बना रखा है। तो हमारे आपके पिताजी या फिर और कोई इंडस्ट्रियलिस्ट मैं खाली एग्जांपल के लिए बोल रहा हूं। वो कैसे बार कमपीट करेंगे? कर ही नहीं पाएंगे। दैट इज हाउ सिस्टम पूरा ऐसा बनाया गया। अब ऐसे में ये होता है। फिर से मैं उसी बात पे आऊंगा। चलो जीएसडब्ल्यू ग्रुप की बहुत बात हो गई। बूटी बुरी वाला। ठीक है। आई विल गिव यू अनदर एग्जांपल। अब आप चलते हो आंध्र प्रदेश। हम आंध्र प्रदेश में बहुत ही प्यारी पॉलिसी है दैट अगर आप 50 करोड़ से लेकर के 1000 करोड़ के बीच का कोई भी इन्वेस्टमेंट कर रहे हो तो आपको हम अप टू 12% का कैपिटल सब्सिडी देंगे। अप टू अ सर्टेन अमाउंट ऑफ़ इन्वेस्टमेंट। हम आपको इलेक्ट्रिसिटी पे जो चार्जेस है वो हम आपको ₹1 पे कुछ करके दे देते हैं। वो आपको डिस्काउंट मिल जाएगा। यह सब ठीक है ये सब अनाउंस कर लिया। आंध्र प्रदेश में कोई फैक्ट्री उसको तो ये मिल रहा है। बाकियों को मिल रहा है। बाकी स्टेट्स में तो नहीं मिल रहा ना। वहां पे जिसने फैक्ट्री लगाई थी आज से 2 साल पहले वो रिग्रेट करो यार। मैं 2 साल रुक जाता। चंद्रबा नायडू वहां पे आए थे। उन्होंने ये वाली अनाउंस की मैं वहीं पे लगा लेता। मेरे तो लग गए ना। प्रॉब्लम इज सेटअप इज डिजाइन इन सच अ मैनर दैट कॉस्ट ऑफ मैन्युफैक्चरिंग इन इंडिया अच्छा खासा हमारी सरकार खुद इनग्रेड कर देती है हम इतनी बार हमारी सरकार ये बोलती है कि हमारी मैन्युफैक्चरिंग को और कॉम्पिटिटिव बनाना है कॉम्पिटिटिव बनाना है उसके लिए हम क्या करेंगे कॉस्ट ऑफ लॉजिस्टिक्स एज अ परसेंट जीडीपी हमारा 14% पे है 15% पे 13% पे उसको गिरा के हम 7 8% पे लेके आएंगे ये भी तो बताना है कि उसमें अच्छा खासा कॉस्ट बिकॉज़ आपने ने ही टैक्सेस घुसा रखे हैं। वो आप हो कॉस्ट वो आपकी कमाई है। आप उससे मलाई निकाल रहे हो और वो कीमत हमारा देश चुका रहा है। शायद वो अगर आप नहीं चूसते हम तो हमारे देश शायद ज्यादा एक्सपोर्ट कर रहा होता। हमारे देश के लोगों के लिए वही चीजें सस्ती होती। वो अपना पैसा और दूसरी चीजों में स्पेंड करते। आप जीएसटी शायद वहां से कमा लेते। बाहर की कमाई हम शायद लेके आते क्योंकि हम एक्सपोर्ट हम ज्यादा कर पाते। बट चीजें तो हमने ही महंगी बना दी ना। हम इसीलिए हमारी इंडस्ट्रीज बार-बार बोलती है दैट आपका जो पेट्रोल है, डीजल है इन सबके ऊपर हमें इनपुट टैक्स क्रेडिट देना शुरू करो। नेचुरल गैस के ऊपर हमें इनपुट इनपुट टैक्स देना शुरू करो। जिनको नहीं पता इनपुट टैक्स क्रेडिट जीएसटी के इकोसिस्टम में एक होता है कि अगर आप एक मैन्युफैक्चरर हो। आपने जो जीएसटी आपने जो टैक्सेस आपने भरे उस चीज को बनाने के लिए या फुलफिल करने के लिए वो आप रिक्यूपरेट कर सकते हो। आप वो वापस ले सकते हो। बट अगर वो पेट्रोल डीजल वाला खर्चा आप उसे वापस नहीं ले पाते हो। सो वो तो बड़ा प्रॉब्लम हो गया ना। यह हमारी सरकार का किया हुआ है। स्टेट एज वेल एज सेंटर। आप जरा सोच के देखिए। 2010 में जो एक्साइज वाला जो कॉम्पोनेंट है जो ये सेंटर लगाती है। डीजल के ऊपर ये लगभग कुछ चार ₹4.5 था। 4.7 आज के ये 33 ₹34 के आसपास चल रहा है। यार 4.7 टू 33 ये कॉस्ट ऑफ लॉजिस्टिक्स किसने बढ़ाया है? 15 सालों में पिछले सरकार ये बोल सकती है कि ठीक है वी नीड द मनी टू डू अदर थिंग्स बट देन इट्स अ चॉइस दैट यू हैव मेड जिसके कारण हमारा मैन्युफैक्चरिंग महंगा हो रहा है। हमारा लॉजिस्टिक्स एज अ परसेंटेज जीडीपी भर रहा है। वो आपने इनफ्लेट किया है। हमारे इंडस्ट्रियलिस्ट ने या बिज़नेसमैन ने नहीं किया है। ये बात कुछ लोगों को समझने बहुत वैसे लग सकती है कि मैं इंडस्ट्रियलिस्ट के प्रो हो के बोल रहा हूं। एटसेट्रा मैं वो नहीं बोल रहा। मैं प्रो इंडिया हो के बोल रहा हूं कि इंडिया को अगर अपना कॉस्ट ऑफ लॉजिस्टिक सस्ता करना है तो सरकार ने जो महंगाई डाल रखी है उसको एटलीस्ट कम कर देना चाहिए हटा देना चाहिए उसके कारण जो डिमांड बढ़ेगी कि चीजें सस्ती होगी उसके कारण जो हमारे एक्सपोर्ट्स बढ़ेंगे सरकार तो उससे भी कमाएगी ना बट वो बेट कौन लेना चाहता है बात उतनी है तो डू यू फील कि ये क्योंकि मान लो 600% से एक ऑलमोस्ट 600% के आसपास आ गया राइट तो 600% महंगाई एक जगह पे हो रही है इन लास्ट लाइक वन डेड डेकेड इन हाफ राइट ऐसे और भी बहुत सारे सेक्टर्स होंगे जो हमने बहुत सारे भी पडकास्ट में कवर करे जिसकी वजह से इंडिया में मैन्युफैक्चरिंग बन नहीं पा रही जिसकी वजह से हम आज भी बाहर से बहुत ज्यादा इंपोर्ट कर रहे हैं जिसकी वजह से हमारा रुपया गिरते जा रहा है और उसकी वजह से हम और ज्यादा इकॉनमी हमारी खराब होती जा रही है। राइट या नाउ डू यू फील कि ये एक ऐसा ये यू नो द बॉइलिंग वाटर द बॉइलिंग फ्रॉग वाला फिनोमिन ये वैसा हो रहा है क्या कि एट वन पॉइंट इट विल जस्ट बी टू लेट सो टू एक्सप्लेन पीपल इट्स लाइक कि अगर आप ओके सो जैसे अगर ये एक एक पानी है उसमें अगर आप मेंढक को रख देते हो आप एकदम से बहुत में बहुत गर्म कर दोगे इसको तो वो मेंढक उचक के बाहर निकल जाता है यू आर राइट पर अगर आपने इतने पानी है और उसमें धीरे-धीरे गर्म करते गए करते गए करते गए करते एक टाइम में वो इतना गर्म हो जाता है कि इट्स जस्ट मेंढक उसको एडजस्ट एडजस्ट करता रहता है करता रहता है बट एट सम पॉइंट इट जस्ट डाइस क्योंकि अब उसके बाद तो निकलने का मौका भी नहीं होता बिकॉज़ इट्स टू हॉट राइट सो इट्स लाइक दैट कि आपने ₹1 का सीधे ₹3 नहीं करे आपने हर महीने थोड़ा थोड़ा थोड़ा थोड़ा थोड़ा थोड़ा थोड़ा थोड़ा बढ़ा बढ़ा के बढ़ा बढ़ा के डीजल की प्राइस इतनी लेवल पे आगे लेके आ गए इतने टैक्सेस बढ़ा दिए या इतनी जो भी ड्यूटी ड्यूटी टैरे व्हाटएवर यू वांट कॉल इट यू आपने वो बढ़ा दिया कि अब एक टाइम पे इतना अनबेरेबल हो जाएगा दैट मैन्युफैक्चरिंग इन इंडिया ग्लोबल लेवल पे कंपटीशन के सामने खड़े होने के लायक भी नहीं रहेगी। सर ऑलरेडी हो रहा है ना ये तो हम किसी भी मैन्युफैक्चर खत्म ही हो जाएंगे बिफोर इवन वी आर वी हैव अ चांस टू कम्पीट आस्क एनी मैन्युफैक्चरर सच्चाई हम सबके सामने है। दे ऑलरेडी फील दिस। दे ऑलरेडी नो दिस। इट्स नॉट जस्ट की कैपेबिलिटी नहीं है। चलो चाइना से मशीन लेंगे होगी कैपेबिलिटी बना लेंगे अब तो दिक्कत है कॉस्ट पे फिर भी हम कमट नहीं कर पाते क्योंकि ये एडेड कॉस्ट बहुत सारे हैं और इसमें अभी वो सब तो मैंने गिने नहीं है जो सरकार के एंड कंप्लायंस के कॉस्ट आते हैं इतनी फनी मेरे को फोटो लगती है इंटरनेट पे बहुत अभी चली थी पिछले दो साल से मैं बार-बार हर दूसरे महीने में देखने को मिल जाती है एक कोई आटा की कोई मिल चला रहा है आटा मैदा की मिल उसने अपने ऑफिस में लेकिन वो लाला जी बैठे हुए हैं उन्होंने अपने बेटों के साथ फोटो डाली है ऊपर उसमें लगी हुई है बहुत सारी फोटो हम जिसमें 16 या 17 ऐसे सर्टिफिकेट ऊपर टंगाए हुए हैं फ्रेम करा करके कि इस चीज का अप्रूवल इसका सर्टिफिकेशन इस डिपार्टमेंट में एक आटा मिल चलाने के लिए 16 तो उन्होंने चढ़ा के कल को इसको ऑफिस चला जाए तो हम दिखा सकेंगे देखो जी ऊपर आपका लगा हुआ है आपके में पहले ये वाले जो थे ना उन्होंने ये किया हुआ है ये सब खर्चे अलग है देयर आर अदर हर्डल्स उसकी तो मैं बात ही नहीं कर रहा उसके जो कॉस्ट आता है राइट लेट अस ट्राई टू एटलीस्ट एड्रेस द कॉस्ट क्योंकि सरकार ने खुद इस तरीके से हमारी जनता के ऊपर या फिर हमारे मैन्युफैक्चरर्स के ऊपर थोप दिया है। सबसे बड़ी दिक्कत पता है क्या है? अब कहने को तो प्रॉब्लम तो मैंने बता दी तो इसका सशन ये हटा दो। इतना लगा रखा है तो हमारी केंद्र सरकार ने मेरे पास एफy 24 का नंबर है 25 का हमने देखा नहीं है एफy 25 में हमारी केंद्र सरकार ने साल का लगभग लगभग 7.5 लाख करोड़ से एक्साइज ड्यूटी अकेले से कमाया था पेट्रोल डीजल के ऊपर वाले से 7 लाख करोड़ स्टेट्स ने भी लगभग 5 लाख करोड़ कमाया था अब जब हम बोल रहे हैं कि इसको हटा दो मतलब यह है कि मैं कह रहा हूं कि भैया 13 लाख ऑलमोस्ट करोड़ है जो कि आप बोल रहे हो कि इसके ऊपर बेट लो कि हटा दोगे तो बाद में डिमांड इतनी बूस्ट होगी एक्सपोर्ट इतने बढ़ेंगे तुम वैसे भी कमा लोगे। यह एक बेट है। यह डिसीजंस कोई भी पॉलिटिशियन नहीं लेता है। दिस इज सम ब्यूरोकट हु हैज़ टू टेक इट। कोई भी ब्यूरोक्रेट अपने ऊपर 13 लाख करोड़ की मिसाइल तो नहीं चलाएगा कि भाई साहब मैं बेट ले लूं और कल को नहीं आया तो इट्स अ सुसाइड। ब्यूरोक्रेटिक सुसाइड कि बॉस अब तो मेरे को किसी अच्छे डिपार्टमेंट में काम ही नहीं मिलेगा। मेरे को उठा के भेज देंगे अंडमान में। जाओ वहां पर चलाओ। नाउ हाउ डू वी सॉल्व दिस व्हाट वी नीड इज अ स्ट्रांग लीडर हुस बोल्ड इन अ विज़ टू से कि ओके आई एम रेडी फॉर व्हाट इज़ कंसीडर्ड अनऑर्थोडॉक्स मेथड्स आपके एक बीजेपी के एक बहुत सीनियर लीडर हैं जो कि काइंड ऑफ़ अ रेबल लीडर ही कहलाते हैं आज के दिन। हिज़ नेम इज़ सुब्रमण्यम स्वामी। आपने सुना उनके बारे में। मेरे को बड़े कमाल के आदमी लगते हैं। फॉर वन स्पेसिफिक रीजन ओनली वन स्पेसिफिक रीज़ इकोनमिक टर्म्स पे जो भी बोलते हैं ना इट ऑल मेक्स अ लॉट ऑफ़ सेंस। सो उनका क्या कहना है? इनकम टैक्स इज़ अ स्कैम। जस्ट बिकॉज़ बाहर की इकोनॉमज़्म में वो एक स्ट्रक्चर लगाया गया। हमने भी लगा दिया। बट थिंक ऑफ इट दिस वे बिकॉज़ ऑफ़ इनकम टैक्स देयर इज़ एन इंसेंटिव टू इवेट टैक्सेस। सो देयर इज़ अ इंसेंटिव टू हाइड द इनकम नाउ बिकॉज़ यू आर हाइडिंग द इनकम व्हाट हैपेंस? आपके पास एक कारण है कि बॉस अब मैं खाली तीन ही जगह पर इसको डाल सकता हूं। वो पैसा शायद और 40 कामों में लग सकता था हिंदुस्तान में। लेकिन अब वो जाता कहां है घुमा फिरा के? रियलस्टेट, गोल्ड या गद्दे के नीचे या फिर चावल की बोरी में जिसमें भी तो पहली बात क्या किया? आपने लोगों के हाथ से रियलस्टेट इतना महंगा कर दिया। सोने की इतनी डिमांड क्रिएट कर दी जो कि देश का ही फिर करंट अकाउंट डेफिसिट पूरा बिगाड़ देता है। क्योंकि इतना ज्यादा आप इंपोर्ट करते हो। पहले तो वो उससे प्रॉब्लम क्रिएट हुई। सेकंड थिंग अब क्योंकि यह इतना सारा ब्लैक मनी यहां पर क्रिएट हो रहा है। लोग छुपा रहे हैं। आम आदमी छुपाता है। छोटा दुकानदार भी बोलता है कि बिना बिल के दे दूं क्या? हर छोटे लेवल पे इतना बन रहा है। अब इसको पकड़ने के लिए यू आर स्पेंडिंग थाउजेंड्स एंड थाउजेंड्स ऑफ करोड़ हर साल। आपने पूरा मशीनरी बना रखा है उसके लिए। जिसका काम ही है तुम इन लोगों को पकड़ो। अब वो घुमा फिरा के साल का आप ₹00 करोड़ आप उसके ऊपर खर्चा करते हो। 10,000 करोड़ आप इकट्ठा करते हो। हु इज इट सर्विंग बट इन द एंड इज दैट हर्टिंग इंडिया आंसर इज अ बिगेस्ट ऊपर से यह दिक्कत आती है इसके चक्कर में आपका जो पूरा जो इकोनमिक साइकिल है उसमें आती है इनफिशिएंसीज़ पीपल आर नॉट डिप्लॉयंग मनी वेयर इट शुड बी डिप्लॉयड बट वेयर इट कैन बी केप्ट एज़ अ हिडन रिसोर्स हाउ इज़ दैट सर्विंग द इंटरेस्ट ऑफ़ दी कंट्री? तो सुब स्वामी जी की थीसिस से बोलते हैं इनकम टैक्स हटा दो। अब इस पे सवाल आता है इनकम टैक्स तुम हटा दोगे। हम तो मार्केट में तो एकदम से लोगों के पास बहुत ज्यादा स्पेंडिंग पावर आ जाएगा। प्लस क्योंकि लोग रियलस्टेट में इतना खर्चा नहीं करेंगे। गोल्ड पे नहीं करेंगे तो गोल्ड की डिमांड कम होगी। रियलस्टेट कहीं क्रैश ना हो जाए और ऊपर से इतना पैसा और दूसरी चीजों में जाएगा तो उनके रेट तो बहुत बढ़ जाएंगे। डिमांड इतनी आ जाएगी इनफ्लेशन हो जाएगा। इट विल बी अ कैटस्ट्रोफी। तो उसके लिए एक तरीका है कि उनका कहना है कि बॉस आप जो बैंक के जो इंटरेस्ट रेट है उसको बढ़ा देना। वो एब्सॉर्ब कर लेगी लिक्विडिटी। फिर सवाल आता है और बैंक्स की अगर आप इंटरेस्ट बढ़ा दोगे तो इंडस्ट्रीज के लिए बिजनेसेस के लिए लोन महंगे हो जाएंगे। तो वो कैसे चलेगा? उसका जवाब है जो चाइना मॉडल है व्हिच इज़ गवर्नमेंट सब्सिडाइजेस द लोंस। वो सब्सिडीज देती है। लगाओ इंडस्ट्रीज। कोई दिक्कत नहीं है। मैं बैठा हूं। तुम जो कमाओगे, जीएसटी वगैरह भरोगे, जो टैक्स वगैरह इतना कलेक्ट कराओगे, डिमांड बढ़ेगी। मैं उससे कमा लूंगा। दिस इज़ अ कंप्लीटली डिफरेंट मॉडल। मैं नहीं कह रहा सही है या गलत है बट एटलीस्ट अ फ्रेश डिफरेंट अप्रोच टू द स्टफ आई डोंट आई डोंट नो एंड आई डोंट हैव मैं भी कह रहा हूं मैं भी कह रहा हूं आई डोंट स्टैंडिंग ऑफ इकोनॉमिक्स एंड कंट्री टू मे बी इविल मैं भी नहीं कह रहा दिस मैं भी नहीं कह रहा कि मुझे सब कुछ पता है। मैं इतना कह रहा हूं दैट हियर इज़ एन अल्टरनेट मॉडल दैट साउंड्स लाइक इट मेक्स सेंस। नाउ थिंग इज़ अभी वाले सिस्टम में प्रॉब्लम है देन दिस इज़ वन ऑफ़ दी पॉसिबल सॉलशंस। लेट्स आल्सो हैव एक्टिव डिस्कशंस कि और क्या-क्या सॉल्यूशन हो सकते हैं। वी हैव व्हिच हम ये जो इनफिशिएंसीज हमने यहां क्रिएट कर दिए उसको हम एड्रेस कर पाएं। आज के दिन वो नहीं हो रही है। दैट्स अ बिग प्रॉब्लम। आप जरा सोच के देखिए ना। इसके रेपकेशंस खाली इतने नहीं होते और भी होते हैं। हम एक मैं हमेशा पायलट्स का एक एग्जांपल देता हूं। राइट? एक इंडियन पायलट है और एक आपका एक इंडियन पायलट है और एक आपका यूएई या यूएस में बैठा हुआ एक इंडियन पायलट है जो वहां पे उड़ा रहा है। सबसे पहला तो उसके लिए इंसेंटिव है कि वो वहां पे उड़ाए क्योंकि इंडिया में मोस्टली आपके नैरो बॉडी प्लेेंस होते हैं। वहां पे आपके वाइट बॉडी होते हैं। उसका पैसा ज्यादा उसको मिलता है। नंबर टू यहां पे वो जो कमाता है उसका लगभग 30- 40% सरकार इनकम टैक्स ले जाती है। वहां पे है ही नहीं। किधर? यूएई में। ओके। राइट? यूएई में, कतर में, सऊदी में वहां पे वो टैक्स ही नहीं है। या यहां पे आपका 30% तो सरकार लेगी। पहली बात आप छोटा प्लेन उड़ा रहे हो तो वैसे ही कमाई कम ऊपर से जो कमाई उसका 30% सरकार ऐसे ले गई ऊपर से उस जो पैसा बचा उससे जो खर्चे करोगे उसका 15 20% और आप सरकार को दे दोगे कैसे पेट्रोल में टैक्स है या फिर आपका ये जो आप सामान खरीदते हो उसके जीएसटी लग जाता है करके इन द एंड वहां पे तो वो वाला भी नहीं है वट वुड कुछ एग्ज़िस्ट नहीं करता जीएसटी वहां एग्ज़िस्ट नहीं करता एक जगह आप ज्यादा कमा रहे हो पूरा अपने पास रख रहे हो एक जगह आप जो कमा रहे हो उसका घुमा फिरा के आप 45 टू तो 50% अपने हिसाब से आप रखते हो और वो भी कम कमा रहे हो। वेयर इज़ द इंसेंटिव? टैलेंट वहां जाएगा। वो यहां रुकेगा ही नहीं। दिस इज़ अनदर प्रॉब्लम दैट दिस एंटायर स्ट्रक्चर क्रिएट्स? हो रहा है ऑलरेडी। ऑलरेडी हो रहा है। अक्रॉस सेक्टर्स हो रहा है। नाउ हाउ इज़ दिस सर्विंग इंडिया एस इंटरेस्ट। तो थ्योरी है। ऐसे और भी सॉलशंस हो सकते हैं। बट वी हैव टू हैव एक्टिव डिस्कशंस ऑन इट। कि ओके ये प्रॉब्लम तो है। इसको सॉल्व तो करना पड़ेगा। तो मैंने एक पोस्ट लिखा कि यार चाइना ने इसका एक सशन निकाला हम दैट हम चाहते हैं लोग बाहर जाए हम व्हाई हम उतने एडवांस नहीं है ये चीज आज से 10 12 साल पहले की है व्हेन दे ल्च अ प्रोग्राम कॉल्ड सी टर्टल्स प्रोग्राम या फिर थाउजेंड टैलेंट्स प्रोग्राम ये सब सी टर्टल स्ट्रेटजी की सी टर्टल का स्ट्रेटजी आपको पता है क्या होता है कछुए जो होते हैं समुद्री कछुए जब वो पैदा होते हैं थोड़े से बड़े होते हैं ना उनकी मां जो होती है वो उनको समुंदर में छोड़ देती है उनकी खासियत है वो दुनिया भर में घूम फिर के पांच छ सात सात साल दुनिया भर के समुंदर में घूम फिर के वापस वहीं पे आ जाते हैं। पता नहीं कैसे आते हैं। बट वो जब आते हैं वो मैच्योर ग्रोन अप टर्टल्स हो चुके हैं। उनके हर तरह के रफॉर्स में जीना उनको आ चुका होता है। चाइना की सी टेट स्ट्रेटजी ये थी। लेट पीपल गो आउट। बिकॉज़ हमारे पास वो टेक नहीं है। वो टैलेंट नहीं है। वो स्किल सेट्स नहीं है। वो पढ़ाई नहीं है जो कि बाहर है। उनको बाहर जाने दो। उन्हें सीखने दो। उन्हें काम वहां करने दो। लेट देम लर्न। एंड देन उनको वापस ले आएंगे। कैसे ले आएंगे? गिव देम टैक्स ब्रिक्स, गिव देम सब्सिडाइज हाउसेस। गिव देम रिसर्च ग्रांट्स। हमारी तरह नहीं कि रिसर्च ग्रांट के नाम पे हम स्टार्टअप्स को ₹1 लाख देते हैं। वहां पे मिलियंस ऑफ़ डॉलर्स में बात होती है। डिपेंडिंग कि उस प्रोजेक्ट की नीड है। यहां पे तो किसी को और आपने ₹1 करोड़ दे पहले तो सवाल आएंगे। आपकी जरूर कोई ना कोई लिंक होगा। ये वो वो अलग डिबेट हो जाती है। सो मैंने जब ये पोस्ट लिखा कि वी आल्सो नीड टू डू दिस। लोगों ने उसको अलग एंगल में ले लिया। कि तुम तो स्कीम दे रहे हो लोगों को और भगाने की कि चलो बाहर जाते हैं। 5 साल बाद लौट के आ जाएंगे। सरकार हमसे टैक्स भी नहीं लेगी। अगले 10 साल घर भी सब्सिडाइज पे देगी। आई एम लाइक अरे नहीं यार इट्स अबाउट इंश्योरिंग कि बाहर जो टैलेंट जो हमारे पास है ना उसको वापस लाना है। आप जरा सोच के देखो डिपेंड करता है आप कौन से न्यूज़ रिपोर्ट पे बिलीव करते हो। कोई कहता है किसी का सर्वे बोलता है कि 40% ऑफ़ आईटी बॉम्बे के ग्रेजुएट्स हर साल निकल के फॉरेन चले जाते हैं। कोई बोलता है कि 60% जाते हैं। अब आधे लोग हमारे देश के बोलते हैं ये तो गद्दार हैं। क्यों? इनको इतनी सब्सिडी दे के सब कुछ हमने हमारे पैसे से इनको पढ़ाया लिखा है। ये तो छोड़ के चले गए। उनका अपना बच्चा होता है ना। वो खुद बोलते हैं बेटे चले जा। तेरे को Facebook ज्यादा दे रही है। ये तो मानते हो आप। राइट? सेकंड थिंग इज अगर वो जा रहा है दैट्स बिकॉज़ उसको वहां पर अपॉर्चुनिटी मिल रही है। वी शुड एम्ब्रेस दैट एंड इंश्योर कि ओके वो जो गया है वहां पे वो सीख रहा है। हमें ऐसा कोई सिस्टम बनाना पड़ेगा। कोई प्रोग्राम ऐसे जैसे चाइना ने बनाया कि 5 10 साल के एक्सपीरियंस के बाद हम उसको यहां वापस लेके आ सके। वी आर नॉट डूइंग दैट। चाइना हैज़ गॉन अ लेवल अहेड। अभी एक पोलिश एक केमिकल साइंटिस्ट हैं, केमिस्ट हैं जिनका नाम तीन बार नोबेल प्राइज के लिए भी रेकमेंड हुआ है। उनका नाम बड़ा अजीब सा है। मैं ले ही नहीं पाऊंगा। बट मैं आपसे शेयर कर दूंगा। आप चाहे तो उनकी फोटो यहां पे डाल सकते हो। सो दिस गाय पुलिस थे। कनाडा यूएस में कई साल पढ़ाया। फिर कनाडा जाके कनाडा रॉयल सोसाइटी के मतलब कि वन ऑफ द मोस्ट एक्रेडिटेड आदमी बने। कनाडा का हाईएस्ट जो ओनर है फॉर केमिस्ट्री वो उनको मिला एवरीथिंग। चाइना भी उनको पोज करके ले आया है। उनको प्रोफेसर बना दिया अपने यहां पे। दिस गाय हैज़ बीन साइटेड इन 88 थाउजेंड प्लस रिसर्च पेपर्स। दिस इज नो जोक। वेस्ट से उठा के लेके गए हैं। कोई रोक नहीं पाया। चाइना के पास उसके लिए प्रोग्राम्स हैं। हमारे पास इसके लिए नहीं कि हम अपने ही लोगों को वापस ले आ रहे हैं। या तो आप टैक्सेस हटा दो और ये सब करो एंड कमट ऑन दैट लेवल। हम अगर नहीं कर सकते हो तो फिर ये करना पड़ेगा कि जो गए हैं उनको वापस लाना पड़ेगा ये करके कि आप कोई वैल्यू ऐड करने के लिए यहां पे आ रहे हो। आप बाहर से सीख के कुछ एक्स्ट्रा लिख रहे हो जो इंडिया में नहीं था। आई एम रेडी टू गिव यू एक्स्ट्रा। हमने पहले किया ये आजकल एक ट्रेंड है ना कि कुछ भी हो तो नेहरू जी के टाइम ऐसे हुआ था। मैं बोलता हूं कि यार उसी जमाने में ऐसा भी हुआ था कि एक आदमी थे वर्गज़ कुरियन। उनको सरकार के पैसे से बाहर भेजा गया था। पढ़ाया लिखाया गया। सब कुछ किया गया। वापस से उन्होंने अमूल बना दिया। व्हाई आर वी नॉट बिल्डिंग मोर वर्गज़ कुरियंस टुडे? लेट्स बिल्ड दैट। सरकार के पैसे उन्हें पढ़ा लिखा के आईआईटी बॉम्बे आईआईटी दिल्ली आईटी खरगपुर ये वो हर जगह से अच्छा लेवल कौन एजुकेशन बना दिया गया है कि वो दुनिया के लिए अच्छे रिसोर्सेज बन जाते हैं। बाहर जाके फिर वो अपना और एमबीए या फिर जो भी एमटेक और बाकी चीजें करते हैं और बेटर बनते हैं। उसके बाद वापस लाने का स्कीम कहां गया? लेट्स बिल्ड दैट। उनको वापस लेके आओगे ना तो पता है क्या होगा? वो लोग वहां पे जो इतने स्टार्टअप्स बना रहे हैं वो नई टेक्नोलॉजी बना रहे हैं। यहां पे होगा। मेरे को इतना फनी लगता है। मेटा का अभी लास्ट ईयर बड़ा न्यूज़ आया था। आपने सुना होगा कि ज़करबर्ग वास गिविंग पीपल 400 मिलियन डॉलर का पैकेज, $ बिलियन डॉलर का पैकेज। वो लिस्ट बाद में आई थी। टोटल 36 लोग थे। 36 में से 11 और 12 वर इंडियंस रेस्ट वर ऑल पीपल ऑफ़ चाइनीज़ ओरिजिंस। नो पाकिस्तानीज़, नो मिडिल ईस्टर्न ये वो कोई नहीं। लिटरली इंडियन एंड चाइनीज़ ओरिजिन पीपल। नाउ चाइना हैज़ एन एक्टिव प्रोग्राम टू पोस्ट दीज़ पीपल बैक। इंडिया का कहां पे है? तो लेट्स से यू आर टॉकिंग अबाउट क्राइसिस। ओके? अनदर क्राइसिस जो नोट्स में मैं पढ़ रहा था वास अबाउट माइक्रोफेंस। ये क्या क्राइसिस है? क्राइसिस नहीं है यार मेरे को वाइट बट यू यू से समथिंग कि कर्नाटका और तमिलनाडु में जो अभी हो रहा है वो आंध्र प्रदेश में पहले हो चुका है 2010 में। व्हाट इज अ माइक्रो फाइनेंस क्राइसिस जो हो रहा है। मेरा मानना है कि माइक्रो फाइनेंस क्राइसिस बोलना हमेशा गलत है। लोगों को समझ में नहीं आता कि माइक्रोफेंस इंडिया में 14 अलग इंडस्ट्रीज हैं। 14 का मतलब है कि हर स्टेट में अलग आ रही है। ठीक है? सो पहली बात देखो जिनको नहीं पता हम लगभग 45% ऑफ इंडिया का जो टोटल माइक्रोफाइनेंस इंडस्ट्री है दैट इज इन टर्म्स ऑफ अमाउंट ऑफ लोंस। हम दैट इज जस्ट थ्री स्टेट्स। तमिलनाडु, कर्नाटका, बिहार। पूरा माइक्रो फाइनेंस वहीं जाता है। 45% मतलब तीन स्टेज हाफ ऑफ इट ऑलमोस्ट। ठीक है? और माइक्रो फाइनेंस होता क्या है? पहले सिंपल लैंग्वेज में सुन। सो देखो माइक्रोफेंस ऐसे समझिए छोटे-छोटे लोंस। ठीक है? फॉर एग्जांपल आप एक नॉर्मल छोटे से घर में रहते हैं। एकदम झुग्गी झोपड़ी वाले। आप सोचते हैं कि यार मेरे को ना व्यापार करना है। मैं अपना खुद के पान का एक मैं छोटा सा एक ठेला लगाना चाहता हूं। जहां पे पान बेचूंगा और एक दो चीजें रखूंगा। ट्रॉफी वफी रख लूंगा एटसेट्रा उसके लिए मुझे कितना चाहिए 11000 12000 15000 का लोन चाहिए दैट इज अ माइक्रो लोन लेकिन आप एक ऐसी कैटेगरी में हो जिसको लोन देने में कोई भरोसा नहीं आदमी भाग ही जाए हम तो ऐसे आदमी को बैंक्स तो लोन देते ही नहीं है एनबीएफसी भी लोन नहीं देती है तो कौन देगा तो वहां पे आते हैं बहुत ज्यादा रिस्क टेकिंग एबिलिटी रखने वाले माइक्रोफेंस इंस्टीट्यूशन जो बोलते हैं हम देंगे लेकिन यहां पे इंटरेस्ट आपके जाते हैं 24% 36% 30% बहुत ज्यादा एग्जोर्बिटेंट होते हैं बट अगर अगर आप ऑफलाइन इनफॉर्मल मार्केट से देखो जहां पे रेट्स आपके 50 60 100% तक चले जाते हैं साल के उससे बहुत बेटर है हम तो ये चलता है यहां पे बहुत ज्यादा आपका वो वाला मॉडल भी चलता है कि कुछ लोग मिलके लोन ले लेते हैं कि वो वाला एग्रीमेंट होता है कि बेसिकली इससे सोचिए ना कि हमारा सोसाइटी जो है एक सोशल स्ट्रक्चर इसका आज भी बहुत स्ट्रांग है। एक होता है ना कि राज और मैं पड़ोस में रहते हैं। अब मैंने एक लोन लिया मैंने चुकाया नहीं। हम तो राज की फैमिली तो ऑलवेज अरे यह तो फ्रॉड है। यह तो लोन लेके भाग जाते हैं। राइट? इस मॉडल में क्या चलता है? तीन चार लोगों को क्लब कर दो। अगर इसने नहीं चुकाया तो वो चुकाएगा। जो चुकाएगा वो गालियां देगा। अबे पैसे तूने लिए, मैं चुका रहा हूं। पता है तेरे को? वहां रहना मुश्किल कर देते हैं। इस तरह की चीजें होती हैं जिसके थ्रू पूरा इंडस्ट्री चलता है। बहुत सारे इसमें और भी फैसेट्स हैं। मैं बहुत सिंपलीफाई करके बता रहा हूं। फिर तो इन लोगों को जब कर्जा चाहिए तो ये लोग माइक्रोफेंस के पास जाते हैं। अब माइक्रोफाइनेंस जैसा मैं कह रहा था 45% ऑफ़ द लोोंस टोटल जो हैं वो घुमा फिरा के तीन स्टेट्स में है। तमिलनाडु, कर्नाटका, बिहार और 62% ऑफ़ द जो एनपीए जो है डिलिंग जो हुई है आपकी वो अगेन आपके तीन स्टेट्स में है। तमिलनाडु, बिहार एंड उत्तर प्रदेश। उत्तर प्रदेश आपका टॉप थ्री में तो आता नहीं है लोंस में। लेकिन एनपीए में आ रहा है। इसका मतलब क्या हुआ? कि वहां लोग लोन लेते हैं। देते ही नहीं है वहां पे। ज्यादा है वहां पे केसेस। इसी वजह से अभी कुछ समय पहले आरबीआई ने एक्चुअल में यह तक कहा कि पूरी इंडस्ट्री को मैसेज था। एक्चुअल में यह ऑफिशियल था स्लो डाउन इन यूपी एनबीआर एमएफआई के लिए बिकॉज़ दिस इज़ नॉट रियली वर्किंग आउट फॉर यू। पर 2023 में था। 2025 में उन्होंने वापस रिलीज़ कर दिया। सी एक बार चीज़ सेटल होने लग जाती है। नंबर्स बेटर होने जाते हैं तो आरबीआई फिर वापस कहता है कि ठीक है नाउ थिंग्स आर बेटर गेट बैक टू जॉब। बट कहीं पे भी अगर बबल अगर बनने लगता है आरबीआई कम्स इंटू इंटरवीन। नाउ पॉइंट इज दैट ये तीन स्टेट्स हैं। राइट? उसके अलावा भी बहुत सारे स्टेट जहां पर माइक्रोफेंस चलता है। हर स्टेट की अलग कहानी चल रही है। एंड सबसे बड़ी तकलीफ ये है माइक्रो फाइनेंस इंडस्ट्री में मेजरिटी ऑफ़ द प्लेयर्स आर कंसंट्रेटेड। Bन बैंक का नाम आपने सुना है कभी? Bन बैंक माइक्रोफेंस से बहुत बड़ा प्लेयर। ओके। पूरा कंसंट्रेशन मेजरली आपका आज से 5 साल तक 5 साल पहले तक खाली दो जगह था। वेस्ट बंगाल एंड आसाम। धीरे-धीरे अब वो क्राइसिस ऐसी कुछ हुई जो अभी मैं आपको बताऊंगा जिसके उन्होंने डवर्सिफाई करना शुरू किया। लेकिन आज भी मेजरली आपका वेस्ट बंगाल एंड आसाम है। अब होता क्या है? जैसे अभी इलेक्शन आया ना आसाम वेस्ट बंगाल एक साथ हुआ उस टाइम भी एक साथ आए। इनके दोनों मेजर मार्केट्स एक साथ आते हैं इलेक्शंस। दोनों जगह जो पॉलिटिकल पार्टीज हैं एक साथ अनाउंस कर देती है। अगर हम जीते तो ये जो माइक्रो फाइनेंस वाले लोंस हैं हम लोन वेवर दे देंगे। इलेक्शन होने में 6 महीने हैं। लोन वेवर का अनाउंस होते ही क्या होता है? लोग जो हैं हम लोग क्या बोलते हैं? सरकार आएगी चुकाएगी। हम क्यों पागल हैं ईएमआई भर रहे हैं? हम बंद कर देते हैं। बैंक को तो वेट था ना कि पैसा आएगा। बैंक की हालत अब टाइट हो रही है। कक्शंस उनके जम के ड्रॉप होते हैं। फिर आप गुंडे भेजो कुछ करो। कुछ नहीं काम चलता। कलेक्शन एजेंट्स आप बेचते रहो। गुंडों का जो सोफिस्टिकेटेड वर्ड है। बट नहीं चलता फिर वो सिस्टम। क्योंकि सरकार ने बोल दिया है। रादर अगर आप ज्यादा एक्शन ले लो हम तो सरकार ही आपके ऊपर क्रैक डाउन कर देगी। क्योंकि उनके लिए भी अब वो पॉलिटिकली सेंसिटिव मैटर है। इलेक्शन आ रहे हैं। मैंने बोला मैं दूंगा। फिर होता है इलेक्शन होता है। ऐसा तो है नहीं कि इलेक्शन हुआ और अगले दिन भैया बैंक के पास पैसे पहुंच गए। फिर कुछ समय निकलता है। तब जाकर के अब बैंक बैंक वाले भी पीछे पड़ती है कि सर अब तो दे दो अब तो दे दो। तो हमारी सरकारें फिर क्या करती है? फिर निकालती है पॉलिसी। अच्छा ठीक है अब हम ये देंगे। सॉल्यूशन एक ही है। हम और इंडस्ट्रीज लाइए और इकोनमिक एक्टिविटी बढ़ाइए कि ये जो लोग हैं से बात कर रहे हैं। बेसिक्स बेसिक्स वही है। हर चीज का निवारण वही है कि अच्छी पढ़ाई कराओ। लोगों को अपॉर्चुनिटीज दो इन वहीं पर आ जाते हैं। व्हाट इज द थर्ड प्रेडिक्शन जो हमने कवर नहीं किया। यार थर्ड मेरा जो प्रेडिक्शन है दैट इज बेसिकली कि लोग जो इतना कर रहे हैं ना कि एआई से आईटी सेक्टर में ये होगा वो होगा। कुछ लोग बोलते हैं कि कुछ नहीं होगा। कुछ लोग बोलते हैं कि कुछ लोग दिस इज़ योर थर्ड प्रेडिक्शन। ओके। सो प्रेडिक्शन नंबर थ्री इज़ दैट एआई से खाली आईटी सेक्टर की जॉब्स नहीं जाएंगी। और भी बहुत सारी जॉब्संगी और जो लोग सोचते हैं कि आईटी सेक्टर में इतना इंपैक्ट नहीं आएगा बहुत बड़ा इंपैक्ट आएगा जी बहुत बड़ा एंड मेरे को खुशी नहीं हो रही है बोलते हैं लेकिन अगेन समथिंग दैट वी रियली नीड टू थिंक अबाउट सिर्फ आईटी की जॉब्स नहीं जाएंगी या बहुत लोगों की जॉब जाएगी अरे लोग एक ना समझ नहीं पाते कि यार आईटी सेक्टर उतना बड़ा नहीं है इन टर्म्स ऑफ नंबर ऑफ पीपल हिंदुस्तान का जो वर्किंग पापुलेशन है दैट इज अबाउट 62 करोड़ पीपल हम हिंदुस्तान का वो पपुलेशन जो कि आईटी सेक्टर में काम करता इंडिया के जो आपके बड़े-बड़े आईटी जॉइंट्स हैं राइट TCS ये वो पूरा जो आईटी सेक्टर है TCS Infosys, Tech Mahindra, WPRO ये वो अशोक सूट जी का अशोक सुटा जी का आपका ये हैप्पीएस्ट माइंड्स है, केपीआईटी है, बिरला सॉफ्ट है। कितने लोग हैं इसमें? घुमा फिरा के 19 से 20 लाख लोग इसमें काम करते हैं। ठीक है? उसके बाद आपके जीसीस हैं जो कि ग्लोबल कैपिटल सेंटर्स हैं कि एमx जो कि अमेरिकन एक्सप्रेस है। उसने खुद कहा कि गुड़गांव में अपना एक बड़ा सा सेंटर खोल लिया और भी बहुत सारे खोल रहे हैं। तो बोइंग वालों ने अपना एक सेंटर खोल आरडी का बोर में एसेट्रा इसमें कितने लोग हैं लगभग 25 लाख लोग हैं बाकी भी और होंगे छोटे-मोटे आईटी वाले बहुत सारे कितने लोग होंगे सब में मिला के 60 लाख लोग 1% ऑफ़ द टोटल वर्क फोर्स ऑफ कोर्स दिस 1% अर्न्स अ लॉट मोर वर्सेस अदर पीपल बट इन टर्म्स ऑफ़ पीपल एक्स जस्ट 1% हम हम एआई का इंपैक्ट पहली बात तो बहुत लोग बोलते हैं कि इस पे ज्यादा इंपैक्ट आएगा नहीं मैं बोलता हूं बहुत आएगा वो एक सेपरेट पूरा डिस्कशन अभी वो भी करेंगे मोरेंटली असली एआई का इंपैक्ट तो इसके बाहर आ रहा है। हम उसकी बात ही नहीं करते। चाइना वापस एक बार वहां लेके जाऊंगा। आपने वीडियो जरूर देखी होगी। चाइना में बंदा था जो कि होटल जाता है। होटल में है। वो कुछ ऑर्डर करता है। वो गेट खोलता है जब बेल बजती है। वो गेट खोलता है देखता है कि अरे कोई सामान लेके वैसे नहीं आया है। इट्स अ रोबोट। हम इट्स अ रोबोटिक फ्रिज या फिर जो भी आप कह लो टेंपरेचर कंट्रोल जो भी यूनिट वह अपने आप ऐसे खुलता है एंड आपका वह ट्रे बाहर आ जाता है। यू कैन पिक इट अप। व्हाट डिड दे डू? उनके पास एक एजिंग सोसाइटी है जहां पे लेबर की शॉर्टेज है। लेबर को ही रोबोटिक्स से पूरा रिप्लेस कर दिया। एफिशिएंसीज आर एनॉर्मस। कोई लेबर की झगझिक नहीं कुछ नहीं। सून और लेटर दैट विल हैपन इन इंडिया एज वेल। आपको लगता है ताजवाले नहीं करेंगे। ओबेरॉय नहीं करेंगे। आईएcएल नहीं करेगा, आईटीसी होटल्स नहीं करेगा, लीला वाले नहीं करेंगे। सब करेंगे। ब्लूम वाले नहीं करेंगे जो ब्लूम मैं तो अभी चलो टियर वन होटल्स की बात किया जो आप एक नीचे लेवल भी आओ जो कि आपका हम लोग जिसमें यूजली मैं तो रह लेता हूं ब्लूम और ट्रीबो हो गया ताज वालों की सॉरी ये आईएसएल जो टाटा ग्रुप है उन्हीं की और जिंजर नाम से होटल है। ये लोग नहीं करेंगे सब करेंगे। किनकी नौकरियां यहां जाएगी वेटर्स की सर्वर्स की कितने हैं इंडिया में? दिस इज अ ह्यूज अमाउंट ऑफ एंप्लॉयमेंट दैट्स गोइंग टू बी हिट। हमारे यहां पर India पोस्ट जम के लॉसेस करता है। क्यों लॉसेस करता है? बाय डिज़ नहीं है। इट्स बेसिकली नॉट एन ऑप्शन। इंडिया पोस्ट का दायित्व क्या है? एक सरकारी कंपनी है जो कि बोलती है कि यार आप देश के किसी भी कोने में रहते हो। चाहे वहां खाली आपका अपना घर हो। अगर कोई चिट्ठी आएगी हम आपको पहुंचाएंगे। कोई पार्सल आएगा हम आपको पहुंचाएंगे। वो हमारी रिस्पांसिबिलिटी है। अब ऑफ कोर्स है ना अगर आप वैसी जगह पहुंचाओगे आप प्रॉफिटेबली नहीं कर सकते। व्हाट डिड चाइना डू? देयर आर लिटरली रोबोट वैस कोई ड्राइवर नहीं होता उसमें। वो भरभर के सो मेजॉरिटी ऑफ़ चाइनास इकोनमिक एक्टिविटी हैपेंस ऑन द ईस्ट कोस्ट। हम जहां पे बेजिंग, शंगाई ये वो और थोड़ा सा साउथ साइड पे होता है। व्हेन यू एज यू गो नॉर्थ और द वेस्ट वहां पे नहीं होती एक्टिविटी। शिजियांग बारे में अब होने लगा है। पहले ज्यादा नहीं था। तो वहां पे ऑफ कोर्स लोग भी कम रहते हैं। एरिया इतना ज़्यादा बहुत कम डेंसिटी वहां पे अगर अब आप चाइना पोस्ट की बात करो इट्स नॉट ऐज़ इकोनॉमिकल टु सर्विस देम लॉसेस वो भी करते थे दे हैव नाउ डिप्लॉयड दीज़ ऑटोनॉमस ट्रक्स वीडियोस है प्लीज आप जाके सर्च करो चाइना पोस्ट के ट्रक्स ऑटोनॉमस खाली इतना Google करो YouTube पे देख लेना आपको दिखेगा वो ऑटोमेटिकली चल रही हैं दे हैव सेव्ड सो मच ऑन द कॉस्ट ड्रोंस हैं जो कि माउंटेनियस है तो ड्रोंस के थ्रू कर रहे हैं दीज़ आर ऑटोनॉमस ड्रोंस हमें लगता है ना कि यार sविg Zomato इन्होंने देखो डिलीवरी का कितना कमाल का काम कर दिया वो व्हेन यू गो टू वहान इन चाइना जिसको बोलते हैं ना वहां से कोविड निकला था एटसेट्रा यू गो टू हेई यू गो टू आर्न हुई व्हेन पीपल ऑर्डर स्टफ बहुत बार होता है कोई देने आता है बट इन अ लॉट ऑफ़ पॉकेट्स नाउ देयर आर डेडिकेटेड ज़ों्स इन एव्री सोसाइटी जहां पे एक बंदा बैठा है वहां पे अपने आप छत के ऊपर पूरा इंफ्रास्ट्रक्चर वैसे बनाया है। उड़ के एक पूरा ड्रोन आता है। वो उस पॉट पे बिल्कुल बैठता है। मशीन सीधा सामान को नीचे खींचती है। उस आदमी को देती है जाके डिलीवर कराओ। कितना बड़ा कॉस्ट ऑप्टिमाइजेशन है ऑन द डिलीवरी साइड ऑफ़ थिंग्स। आपको लगता है ये Instाart वाले, Zepto वाले या फिर Zomato वाले नहीं करेंगे आने वाले 5 साल में। ऑफ कोर्स करेंगे। जब होगा किसकी नौकरी जाने वाली है। दीज़ आर नॉट आईटी प्रोफेशनल्स। ये वो 60 लाख लोग नहीं है। उनका तो अलग ही कहानी चलेगी। दिस इज ब्रॉड बीस्ट अक्रॉस इंडस्ट्रीज ट्रकिंग इंडस्ट्री यूएस यूरोप लुक एट चाइना मिडिल ईस्ट में हो रहा है ऑटोनॉमस ट्रक्स चलने शुरू हो रहे हैं सर चाइना में दिस इज़ हैपनिंग एट अ नेक्स्ट लेवल स्केल फुल फ्लेजर्ड बड़े वाले ट्रक्स उसमें भी मैं अभी बताता हूं आपको आप वीडियो देखना इसका यू विल बी माइंड ब्लोन ठीक है ट्रक चल रहा है जिसमें कोई बैठा नहीं है आइडियल इंडिया में अगर आपको ट्रक चलाना है हर 8 से 12 घंटे बाद यू नीड अ ड्राइवर चेंज। आपको हर ट्रक के लिए आपको दो ड्राइवर चाहिए। आपको चाहिए दो बंदे वहां बैठते हैं। इट्स अ कॉस्ट। दे आर रिप्लेसिंग दैट। नंबर वन। नंबर टू नाउ व्हाट दे हैव गॉन फॉर इज़ एक ट्रक चल रहा है। सेंसर्स ऐसे लगे हुए हैं। उसके पीछे देयर आर फोर मोर। जिनका काम है पहले वाले के हिसाब से चलना। सड़क पे ट्रक्स की ट्रेन बना दी है। पांच-पांच एक साथ चल के जा रही है। आर लिटल आप वीडियोस देख सकते हो। आप न्यूज़ में पढ़ सकते हो। साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट प्लीज लोग पढ़ना शुरू करो। आप पढ़ोगे पता चलेगा चाइना में क्या हो रहा है। हमारी मीडिया नहीं बताती है। यू विल बी माइंड ब्लोन कि वो अपने आपको कैसे और एफिशिएंट बनाए जा रहे हैं। कॉस्ट ऑफ लॉजिस्टिक्स वैसे कम होता है। हम नहीं करेंगे क्या? जिनको लगता है नहीं करेंगे। कुछ हद तक हम भी शुरू कर रहे हैं। जितना कर सकते हैं जो हमारी सर्कल अलव करती है। हमारी सरकार ऑटोनॉमस ट्रक तो अलव नहीं करती है। तो डिलीवरी ने क्या किया? ट्रेलर ट्रक शुरू कर दिए। एक बड़ा वाला ट्रेलर ट्रक है। उसके पीछे जॉइंट एक और ट्रेलर लगा दिया। वो एक साथ चल रहे हैं हम। दो ड्राइवर्स की नीड वहां खत्म हो गई है। सूर और लेटर यहां पर भी ऑर्डर स्ट्रक्स होंगे ही होंगे। बिकॉज़ हमें ग्लोबली कॉम्पिटिटिव तो रहना है। कैसे करोगे? एआई ये सारी जॉब्स भी खाने वाला है। आईटी सेक्टर में लोग कई बोलते हैं कि नहीं यार उतना नहीं होगा एटसेट्रा कुछ नहीं होगा। हियर इज़ व्हाट इज़ रियली हैपनिंग? Infosys का एग्जांपल लेते हैं। दे हायर्ड सम 80,000 पीपल इन अ ईयर। नेक्स्ट डे दे हायर्ड 50,000 पीपल। नेक्स्ट ईयर दे हाय सम 13,000 पीपल लास्ट ईयर देर हेड काउंट रिड्यूस्ड नेट लेवल पर टीसीएस 57 इयर्स की अपनी हिस्ट्री में 57 ईयर जितने भी इयर्स की उनकी हिस्ट्री है 37 की 57 की दो में से एक नंबर है। दे नेवर डिड एनी मास लेऑफ्स। किसी को हटाया तो मतलब कि काम अच्छा नहीं करे। वो सब हटाना अलग चीज होती है। बट मास ले ऑफ्स कभी नहीं हुए। लास्ट ईयर ओपन हम 12,000 लोगों को हटाएंगे। उनका नेट जो हेड काउंट है वो लगभग 24,000 लोगों से कम हुआ। यह मतलब है बट पॉइंट इज़ 12,000 आने से 24,000 से नेट हेड काउंट कम हुआ है। मतलब इसका क्या होता है कि जो लोग वंटरी छोड़ रहे हैं उनको हम रिप्लेस भी नहीं करना चाह रहे हैं। एंड दिस इज़ हैपनिंग एट अ टाइम वेयर आपके मार्जिनस और कंप्रेस हो रहे हैं। व्हाई? बिकॉज़ क्लाइंट को भी तो पता है ना कि एक आदमी अब चार का काम कर सकता है। तो मैं पहले वाले रेट्स क्यों दूंगा? श्योर। डील्स आर बीइंग रीनेगोशिएटेड एक्टिवली। जो रीनेगोशिएट नहीं हो रही है वो डील जो पांच साल की थी उसको बढ़ा के आठ साल का किया जा रहा है ताकि क्लाइंट के लिए जस्टिफाई हो जाए कि भाई वो छोड़ के ना चले जाए। दिस इज ऑल एआई अरे हर जगह हो रहा है। हर जगह हो रहा है। एवरीवेयर एंड इट्स स्केरी। मैं इस पे इसलिए इतना मैं बात करना पसंद करता हूं क्योंकि अगर इतने लोगों कीियां इससे इंपैक्ट होने वाली हैं। वी शुड एक्चुअली बी प्रमोटिंग मोर एंड मोर डिस्कोर्स अराउंड इट। क्योंकि उन लोगों को जिनको अभी एहसास नहीं उनको पता होना चाहिए कि अच्छा यार हमें भी इसका असर आएगा। वी नीड टू अपस्किल। हमें कुछ और सोचना पड़ेगा क्योंकि घर तो हमें भी चलाने हैं। बच्चे हमारे भी हैं। बड़े बुजुर्ग हमारे घर में भी हैं। मेरे भी कुछ एंबिशन से कैसे करूंगा मैं? बट मैं इसको ओपोरर्चुनिटी जैसे देखता हूं। फॉर सम पीपल इट इज। नो नॉट फॉर सम पीपल फॉर एवरीबॉडी। आई थिंक बहुत लोगों के लिए एक यह एआई का रेवोल्यूशन एक मोमेंट बन जाएगा कि भाई मैंने पुराना 10 साल पहले या 15 साल पहले शायद मेरी टैलेंट की वजह से या मेरे दिमाग की वजह से या रेस की वजह से या मेरे मां-बाप की पैसे की सिचुएशन की वजह से या मेरे आसपास परिवार की सिचुएशन की वजह से जो मैं पढ़ाई नहीं कर पाया जो दिमाग नहीं लगा पाया उसकी वजह से जो मैं सीख नहीं पाया मैं आज आईआईटीए जितना स्मार्ट नहीं बन पाया। है आज वो सब ना है इंजीनियर से लेके एक नॉन डिग्री वाला सब एक सेम लेवल पे आ जाएंगे। यस तो सबके लिए एक एक तरीके से नई ओपोरर्चुनिटी है कि भाई आज से इसमें नई तरीके से अपने आप को आप स्किल करना कुछ सीखना स्टार्ट कर दो एआई में। क्या पता ये ओपोरर्चुनिटी ये टाइम है कि जहां आप शायद जो आज 15 2000 कमा रहा है वो 5 लाख कमाने लग जाए। जो 5 लाख कमा रहा है वो 5 करोड़ का कमाने लग जाए। जो 5 करोड़ कमा रहा है और वो एोगेंट है तो वो जीरो कमाने लग जाए। तो इट्स अ इट्स डेफिनेटली बहुत रिस्की है। बहुत स्केरी है। बहुत लोगों की नौकरियां जाने वाली है। बहुत खतरनाक बात है। बट अगर यह लोगों तक पहुंच रहा है तो बहुत लोगों के लिए एक ओपोरर्चुनिटी भी बन सकती है। सो आई आई फील बहुत लोगों को ना डर की जगह अगर उनमें इतना दिमाग है कि वो ये पॉडकास्ट देखते हैं, कॉन्वर्सेशन देखते हैं, इंटरनेट चलाते हैं। उन्हें यह सब समझ आता है। इतनी बातें तक सुनते हैं। तो इतना दिमाग होगा कि ए के साथ प्ले करके कुछ ना कुछ सीख जाएंगे। ये बस अब विल और इंटेंशन की बात है। मैं थोड़ा सा इसमें एग्री करता हूं। थोड़ा सा डिसएग्री करता हूं। मैं आपको बताता हूं क्यों। ठीक है? आपकी 150 लोगों की टीम है। राइट? नो ऑफेंस टू एनीबडी इन दैट। बट आप भी मानोगे कि सबके अंदर बराबर की चूल्हा और भूख नहीं होती। बिल्कुल नहीं होती। राइट? जिनके अंदर चूल और भूख होती है ना उनके लिए जो भी ये हर्डल्स थे कि यार मैं उतना आईआईटी वाला नहीं हूं। मेरे अंदर उतना दीवानी मुझे टेक नहीं आता। एटसेटरा। व्हाट एआई इज़ डूइंग इज़ उनके लिए वो सारे बेंचमार्क हटा दिए गए हैं। एक्साक्ट्ली। इनेबल कर दिया गया है। बट जिनके अंदर चूल्हा और भूख ही नहीं है ना उसके लिए कुछ नहीं करने वाला। ट्रू। एंड अपना-अपना ओपिनियन हो सकता है। मुझे ज्यादा लोग ऐसे नजर नहीं आते। परसेंटेज में देखो तो जिनके अंदर वो चूल है। एंड मेजॉरिटी लोग जो मुझे चार्ट GBT पे खेलते हुए देखते हैं वो यही होते हैं कि हे दिस इज़ द फोटो आई एम गोइंग टू पुट आउट। इसके लिए कैप्शन बता दो। या फिर जनरल लाइफ क्वेश्चंस। उससे कुछ वैल्यू क्रिएट करना सीखने के ऊपर मेरे को नहीं लगता लोग कर रहे हैं आज के दिन। दे अ फ्रेंड ऑफ़ माइन वैभव वो एआई स्कूल चलाता है बहुत बड़ा। आई थिंक वन ऑफ़ द वैभव सिसडी वन ऑफ़ द लार्जेस्ट एआई अपस्किलिंग स्कूल्स इन द वर्ल्ड राइट ग्रोथ स्कूल नाम है ना ग्रोथ स्कूल ग्रो स्कूल आउटस्किल करके एआई पे चलाता है। ओके। सो वो उसने एक बहुत अच्छी टर्म देता है वो एआई को काफी अच्छी चीज बोलता है। वो बोलता है कि जो लोग एआई को ऐसे देखेंगे कि ये एक ऐसा एंप्लई है जो मेरी जॉब खा जाएगा उनकी जॉब जाएगी। या जो लोग एआई को ऐसे देखेंगे कि अब मेरे पास एक ऐसा जीनी एम्प्लई है जिसको जो मैं बोलूंगा वो कर देगा। या तो वो लोग अपस्किल कर देंगे और 1000% एग्री एंड आई लव दिस वे। आई विल गिव यू एग्जाम्पल। ठीक है? तो हर किसी के पास एक ऐसा एंप्लई आ गया है जिससे आप कुछ भी करा लो। तो आपके और मेरे पास जो आज शायद आप जो ₹ लाख का आदमी ले सकते थे और मैं जब 5000 का ले सकता था ना अपन दोनों के पास ऑलमोस्ट अब वो बराबर हो गया है। मेरा 5000 वाला आपके 50 लाख वाले जैसा काम करके दिखा सकता है। बिल्कुल 1000% एग्री ऑन दिस वन। कोई डाउट ही नहीं है। अगर किसी के अंदर तलब है, हम चल लाइक कि भाई मैं इससे और क्या-क्या कर सकता हूं? वो कुछ भी नहीं हो सकता। ट्रू ट्रू। एंड हम ऑलरेडी एग्जांपल्स देख रहे हैं। बतेरे लोगों का देख रहे हैं। हद से ज्यादा। वेल हियर इज़ माय लास्ट क्वेश्चन टू यू। ओके? आई ऍम गोना गिव यू नेक्स्ट 60 सेकंड्स। ओके? 60 सेकंड्स में टेक अ पॉज। पेन एंड पेपर ले लो भले। थिंक प्रॉपर्ली कि अगर आज के पडकास्ट में से टॉप थ्री इंसाइट्स लोगों को उठानी हो व्हिच पीपल शुड जस्ट पिक इट अप एंड इंप्लीमेंट या जस्ट पिक इट अप एंड अंडरस्टैंड या जस्ट पिक इट अप एंड ऑब्ज़र्व व्हाटएवर जो आपकी टॉप थ्री लर्निंग्स होगी इनसाइट्स होगी जो लोगों को देखना चाहिए वो क्या होंगी मे बी राइट थिंक जस्ट गो थ्रू द एंटायर पॉडकास्ट व्हाट वी हैव डन टुडे लेट्स बिगिन हम क्या डन। नंबर वन हर किसी की लाइफ में बहुत सारी ऐसी चीजें होती हैं जो कि हम कर रहे हैं लेकिन वो ग्राइंड वर्क है। जिससे हमारे दिमाग का ज्यादा यूज़ नहीं हो रहा है। हम उसमें कोई वैल्यू क्रिएट नहीं क्रिएटिव नॉलेज वहां पे नहीं लग रही है। सट डाउन विद सम एलएलएम। $20 का सब्सक्रिप्शन लो। क्लाउड का लो। क्लाउड का आपको लगता है जल्दी एग्जॉस्ट हो जाता है। ओपन एयर का चार्जिटी का ले लो, जेमिनाई का ले लो, ग्रॉक का ले लो। उस पे खेल करके ऑटोमेट करना सीखो। एक चीज जब ऑटोमेट करना सीख जाओगे ना अपने आप दिमाग दौड़ेगा। अरे इससे और चार चीजें कर सकता हूं। एंड उस दिन से तुम्हारी जिंदगी बदल जाएगी। दैट इज द फर्स्ट थिंग दैट एनीबडी एंड एवरीबडी शुड बी डूइंग राइट नाउ। ऑटोमेट वो चीज जिसमें तुम्हारा ग्राइंड वर्क हो रहा है। ऑटोमेट कर दो। दैट इज वन। नंबर टू है साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट नाम से एक अखबार है। प्लीज प्लीज प्लीज पढ़ना शुरू करो। नॉट बिकॉज़ और आपको पता चलना चाहिए कि अच्छा ठीक है क्या-क्या हो रहा है। बट बिकॉज़ यू शुड नो कि दुनिया कहां जा रही है और हम कहां स्टैंड कर रहे हैं। अगर दुनिया में कुछ हो रहा है हमें वो पता ही नहीं है तो हम कभी उतने बेहतर बन भी नहीं पाएंगे क्योंकि हमें तो पता ही है अच्छा ठीक है दुनिया उतनी आगे निकल चुकी है। प्लीज पढ़ना शुरू करो। आपको अपना-अपना मत हो सकता है। मेरा मानना है कि व्हेन इट कम्स टू चाइना हमें कोई भी मीडिया प्लेटफार्म वो चीजें नहीं दिखाता जो कि एक्चुअल में वहां पे हो रही है। वो लोग भी अपना बढ़ा चढ़ा के दिखाते होंगे। बट इस प्लेटफार्म पे आपको जो रियल आपको चीजें देखने को मिलेंगी। यू आर गोइंग टू बी बी ब्लोन एव्री सिंगल डे। आपको उस टाइम ना खुद इंस्पिरेशन लगने लग जाएगी कि यार ये हम क्यों नहीं कर रहे? ऐसे क्यों नहीं कर रहे? मेरे को अपने पॉलिटिशियन से ये पूछना चाहिए या फिर इसके ऊपर मैं स्टार्टअप क्यों नहीं कर रहा? साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट डू इट। मैं पिछले तीन साल से पढ़ रहा हूं। मैं बता नहीं सकता मेरी लाइफ में क्या चेंजेस आए हैं। इसके कारण मेरी थिंकिंग में क्या चेंजेस आए हैं। नंबर थ्री फॉर मेजॉरिटी ऑफ़ अस पीपल एआई इज़ गोइंग टू डिसररप्ट अस। अनलेस वी लर्न टू यूज़ इट। सो या तो उसके यूज़ करके अपने काम में ऐसा बनने के लॉज़ निकाल लो कि आप अपने से 40 गुना आप काम अप कर सको आने वाले 2 साल में। वरना बिगेन टू आल्सो फिगर आउट आप और क्या-क्या कर सकते हो। हफ्ते भर का टाइम है आपके पास। बैठ के इतना तो आप सोच सकते हो कि यार मैं और किस चीज में अच्छा हूं। मुकुल है क्लास प्लस के फाउंडर जिनके जो मेरे गुरु हैं, मेंटोर हैं। उन्होंने मुझे एक चीज कहें कंपनी छोड़ी थी। हर आदमी तीन से चार चीजों में अच्छा होता है। अगर आप आचिन खाली किसी एक से अपना पैसा कमा रहे हो, अपना घर चला रहे हो। आपके पास दो तीन चीजें और होंगी। सोचो निकलेंगी। एंड बिगिन टू स्किल अपॉन दोज़ थिंग्स। बिगिन टू टेक दोज़ थिंग्स टुवर्ड्स मोनेटाइजेशन। जैसे आप वो करने लगोगे एआई से जो भी डिसेप्शन आपकी जॉब में आएगा आप उसके अगेंस्ट ओजा रेिलिएंट बनना शुरू कर दोगे एंड वो बहुत ज्यादा इंपॉर्टेंट है सिर्फ आपके लिए नहीं आपके परिवार के लिए आप सबकी वेल बीइंग के लिए हमारी इकोनमिक के लिए हमारे देश के लिए दीज़ आर द थ्री थिंग्स जो कि आइडियली कोई भी आने वाले तीन चार दिन या फिर हफ्ते भर के अंदर-अंदर ट्राई कर सकता है। एक्सपीरियंस कर सकता है। प्लीज डू इट। थैंक यू सो मच सर। थैंक यू सो मच फॉर स्पेंडिंग टाइम विथ अस। प्लेजर हैविंग यू। थैंक यू सो मच राज। बहुत अच्छा लगा आपके शो पे आके। बीन अ लॉन्ग टर्म एडमायरर। आपके बहुत सारे पॉडकास्ट देखे हैं। एंड झूठ नहीं कहूंगा। इट्स सॉर्ट ऑफ़ लाइक अ ड्रीम टू बी आउट हियर। जहां से मैं आता हूं बहुत बड़ी बात है। मैं अपने मुझे नहीं पता पडकास्ट में आएगा नहीं आएगा। बट मैं जिस-जिस को बता रहा था ना कि राजमान की पॉडकास्ट में हरता। राज के दिस वन इज़ बिग। भाई। सो दैट्स इज़ टू थिंग्स। नंबर वन, व्हाट अ बिग थिंग यू हैव बिल्ट आउट हियर। नंबर टू, व्हाट एन एस्पिरेशन एंड अ जॉय इट इज कि अच्छा ये मैनिफेस्ट हुआ है आज। थैंक यू सो मच फॉर हैविंग मी या हियर। इट रियली मीन्स अ लॉट, जेन्युइनली। थैंक यू। थैंक यू सो मच। थैंक यू फॉर कमिंग। आय थिंक इट जस्ट बी यू एंड आई वेर डूइंग समथिंग व्हिच वी बोथ शुड डू। यू डू इट इन अ डिफरेंट वे। आई डू इट इन अ डिफरेंट वे। यू यू टॉक अबाउट द मिसिंग लूप होल्स व्हिच वी हैव इन आवर कंट्री एट अ ग्लोबल स्टेज। आई टॉक अबाउट दी पॉजिटिव दैट वी आर एक्चुअली बिल्डिंग इन द कंट्री बट बोथ आर इम्पोर्टेन्ट एट द सेम टाइम एंड दैट्स व्हाई वांटेड टू डू दिस पॉडकास्ट। थैंक्स। रियली थैंक्स अ लॉट। क्योंकि अगर दोनों नहीं होंगे तो वी वोंट एक्चुअली अंडरस्टैंड वेयर वी आर। एंड वी वोंट बी एबल टू फिल दोस गैप्स एंड टेक आवर कंट्री मच अहेड। अब्सोलुटली एग्री विथ थैंक यू डन। थैंक यू। हाउ यू डूइंग? वैरी नाइस टू मीट यू। मीटिंग यू। कैसे हो आप? बहुत ही बढ़िया है सर। आ जाओ आ जाओ। बट सो नाइस टू मीट यू बॉस। बीन अ लॉन्ग टाइम इट मैटर ऑफ यूर्स। एंड या नाइस टू बी हियर। थैंक यू। थैंक यू। इट्स माय प्लेजर। मैं भी आपको बहुत टाइम से फॉलो करता हूं। बड़ा कुछ-कुछ टाइम पे तो मैं गुस्सा भी हो जाता हूं यार। क्यों रैंड कर रहा है यार ये? कभी-कभी मुझे भी लगता है। मेरी वाइफ को भी लगता है। सो यू आर नॉट। यू। आई ऍम 31 राइट नाउ। 31 व्हेन यू गेट मैरिड? आई गॉट मैरिड ऑलमोस्ट 4 एंड हाफ इयर्स अगो हैड माय डॉटर गोट 15 मंथ्स अगो ओह स्वीट कांग्रेचुलेशन थैंक्स थैंक यू सो मच यह एपिसोड एंड तक देखने के लिए अब आपको तीन चीजें करनी है नंबर वन अभी इस चैनल को सब्सक्राइब कर लो क्योंकि जितना आप सब्सक्राइब करोगे उतने ही बेहतर हम गेस्ट ला पाएंगे आपके लिए। नंबर टू प्लीज कमेंट में हमें बताइए कि हमने क्या गलत किया और क्या अच्छा किया ताकि उस फीडबैक से हम सीख सकें और आपके लिए और बेहतर एक्सपीरियंस क्रिएट कर सकें। एंड नंबर थ्री यह एपिसोड किसी एक इंसान के साथ जरूर शेयर करना क्योंकि एक कॉन्वर्सेशन इनफ होती है किसी की जिंदगी चेंज करने के लिए। आई विल सी यू नेक्स्ट टाइम अनटिल देन कीप फिगरिंग आउट।
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