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C Language Tutorial Subtitles for Beginners with Practice

C Language Tutorial for Beginners (with Notes & Practice Questions)

C Language Tutorial for Beginners (with Notes & Practice Questions)

Apna College

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[00:03]

[संगीत]

[00:12]

हाय एवरीवन मैं हूं आपकी श्रद्धा दीदी एंड

[00:14]

वेलकम टू अपना कॉलेज आज की सी ट्यूटोरियल

[00:16]

में हमने बेसिक से लेकर एडवांस तक पूरी की

[00:19]

पूरी सी को खत्म कर रखा है तो इस वीडियो

[00:21]

को देखने के बाद आप कोडिंग प्रोग्रामिंग

[00:23]

सीख जाएंगे और अगर आपका कॉलेज में एग्जाम

[00:26]

है जिसके अंदर सी पूछी जाती है तो उसकी

[00:28]

आपकी पूरी तैयारी हो जाएगी इस ट्यूटोरियल

[00:30]

को हमने 11 चैप्टर्स के अंदर डिवाइड किया

[00:32]

है जिनके नीचे आपको टाइम स्टंप्स मिल रहे

[00:35]

होंगे तो आप इंडिविजुअली भी अगर आपको कोई

[00:37]

टॉपिक पढ़ना है तो वो भी जाकर आप पढ़ सकते

[00:39]

हैं और चैप्टर्स के साथ हमने 100

[00:41]

क्वेश्चंस इस वीडियो के अंदर इंक्लूड किए

[00:43]

हैं जिसमें से 70 क्वेश्चन मैंने पर्सनली

[00:46]

आपको अपने सामने सॉल्व करवाए हैं और 30

[00:49]

क्वेश्चंस को मैंने आपकी प्रैक्टिस के लिए

[00:50]

होमवर्क में दिया है साथ के साथ वीडियो के

[00:53]

साथ कोड्स जितने भी हैं या नोट्स जितने भी

[00:55]

हैं उनका लिंक भी आपको नीचे मिल रहा होगा

[00:58]

ताकि एक बार ट्यूटोरियल खत्म करने के बाद

[01:00]

आप कभी भी आकर फ्री में रिवीजन कर सके

[01:03]

इसके साथ अगर कोई भी ऐसी चीज है जो आपको

[01:05]

इंपॉर्टेंट लगती है या आप मुझे बताना

[01:07]

चाहते हैं तो उसको आप नीचे मुझे कमेंट

[01:09]

करके बता सकते हैं और बीच में अगर आपको

[01:11]

कोई भी लेक्चर बुकमार्क करना है कोई भी

[01:13]

टॉपिक बुकमार्क करना है उसका आप नीचे

[01:16]

सिंपली टाइम लिख दीजिए और उसको कमेंट कर

[01:18]

दीजिए तो अगली बार हम आएंगे तो वो कमेंट

[01:20]

हमें ऊपर दिख रहा होगा तो शुरुआत करते हैं

[01:22]

अपने सबसे नए और सबसे बड़े सी ट्यूटोरियल

[01:25]

की तो सी में कोड करने से पहले हमें दो

[01:29]

चीजें अपने सिस्ट सिस्टम के अंदर इंस्टॉल

[01:30]

करनी पड़ेंगी जिनमें से सबसे पहला है

[01:32]

हमारा वीएस कोड यानी कोड एडिटर अब कोड

[01:35]

एडिटर एक नोटबुक की तरह होता है जैसे

[01:37]

नोटबुक के अंदर हम इंग्लिश में हिंदी में

[01:39]

चीजें लिख रहे होते हैं वैसे ही अपने कोड

[01:42]

एडिटर के ऊपर हम कोई कोड लिखते हैं और हम

[01:44]

जिस कोड एडिटर का इस्तेमाल करेंगे उसका

[01:46]

नाम है वीएस कोड अब इसके अलावा आपने देखा

[01:49]

होगा कि कॉलेजेस के अंदर स्कूल्स के अंदर

[01:51]

कुछ लोग कोड ब्लॉक्स पर काम कर रहे होते

[01:52]

हैं कुछ लोग किसी और सॉफ्टवेयर पर काम कर

[01:54]

रहे होते हैं पर यहां हम वीएस कोड इसलिए

[01:57]

यूज़ कर रहे हैं क्योंकि ये बहुत अच्छा

[01:58]

सॉफ्टवेयर है और इसमें आप सिर्फ सी की

[02:01]

प्रोग्रामिंग नहीं उसके बाद अगर आपको c+ प

[02:03]

जावा या फिर किसी और लैंग्वेज में

[02:05]

प्रोग्रामिंग करनी है तो उसके लिए भी हम

[02:08]

आपको एटमॉस्फेयर ये पूरा ऐसे तैयार करके

[02:10]

दे देंगे कि आपको कुछ और इंस्टॉल ना करना

[02:12]

पड़े तो शुरुआत से ही जब हम एक अच्छे कोड

[02:15]

एडिटर पर काम करते हैं ना तो उसके बहुत

[02:16]

सारे फायदे होते हैं दूसरी चीज जो हमें

[02:19]

इंस्टॉल करनी पड़ेगी वो है हमारा कंपाइलर

[02:21]

जिसके लिए हम सर्च करेंगे फॉर जीसीसी अब

[02:24]

कंपाइलर एक ऐसा सिस्टम एक ऐसा सॉफ्टवेयर

[02:26]

होता है जिसके अंदर रूल्स लिखे होते हैं

[02:28]

हमारी प्रोग्रामिंग लैंग के तो सी का

[02:31]

कंपाइलर होगा जिसके अंदर सी की लैंग्वेज

[02:33]

के जो भी रूल्स है ना वो लिखे होंगे तो आप

[02:35]

जो भी कोड लिखेंगे वह आपके कोड के लिखने

[02:37]

के बाद चेक करेगा कि क्या आपने कोड सही

[02:39]

लिखा है और उस कोड को रन करने का काम भी

[02:42]

कंपाइलर करता है तो कंपाइलर्स के बारे में

[02:44]

हम बाद में डिटेल में पढ़ रहे होंगे अभी

[02:46]

सबसे पहले इंस्टॉल करते हैं अपने कोड

[02:48]

एडिटर को यानी वीएस कोड को तो वीएस कोड को

[02:51]

इंस्टॉल करने के लिए हमें अपनी स्क्रीन पर

[02:53]

सबसे पहले

[02:59]

लोड वीएस कोड फॉर विंड अब यहां पर सबसे

[03:03]

पहला हमारे पास ऑप्शन आएगा कि हम विज के

[03:05]

लिए डाउनलोड करना चाहते हैं

[03:29]

नेक्स्ट पर अब एक चेक बॉक्स की जो लिस्ट

[03:33]

है वह हमारे पास आ रही होगी और हमें क्या

[03:35]

करना है सारे के सारे चेक बॉक्सेस को टिक

[03:37]

कर देना है ऊपर वाला कहता है कि डेस्कटॉप

[03:39]

पर एक आइकन हमारे लिए क्रिएट हो जाए तो और

[03:42]

नीचे वाले पथ्स वगैरह की काफी सारी

[03:44]

इंफॉर्मेशन हमें दे रहे हैं तो सारे चेक

[03:46]

बॉक्सेस को टिक कर देंगे एंड उसके बाद कर

[03:48]

देंगे हम इंस्टॉल तो फाइनली वीएस कोड

[03:51]

हमारे लिए इंस्टॉल हो जाएगा और क्लिक कर

[03:53]

देंगे फिनिश पर अब इसके बाद हम सिस्टम में

[03:56]

जाकर सर्च कर सकते हैं फॉर वीएस कोड वीएस

[03:58]

कोड सर्च करने के बाद वो खुल जाएगा और ऐसा

[04:00]

कुछ हमारे पास स्क्रीन पर डिस्प्ले होकर आ

[04:03]

जाएगा जिसके अंदर सबसे पहले तो हम एक थीम

[04:05]

चूज कर सकते हैं हमारी मर्जी है कि हम एक

[04:07]

लाइट थीम चूज करें या डार्क थीम चूज करें

[04:09]

तो वी विल गो विद डार्क उसके बाद आपको

[04:11]

नेक्स्ट सेक्शन नेक्स्ट सेक्शन करते जाना

[04:13]

है अगर हम चाहे तो गट भी इंस्टॉल कर सकते

[04:16]

हैं पर गट के लिए अभी हम काम नहीं करेंगे

[04:18]

अभी इंस्टॉल नहीं करेंगे और मार्क कर

[04:20]

देंगे एज डन अब वीएस कोड के अंदर कोई हमें

[04:22]

नई फाइल खोलनी है जिसके अंदर हम चीजें लिख

[04:24]

सक तो न्यू फाइल पर क्लिक कर सकते हैं और

[04:27]

ऐसे फाइल्स के अंदर हम डिफरेंट डिफरेंट

[04:29]

कोड्स को प्रोग्राम्स को लिख रहे होंगे अब

[04:31]

यहां हमने वीएस कोड डाउनलोड किया है लेकिन

[04:33]

अगर आप किसी और कोड एडिटर पर भी काम करना

[04:35]

चाहते हैं आपके पास ऑलरेडी डाउनलोडेड है

[04:37]

तो आप उसका भी इस्तेमाल कर सकते हैं सेम

[04:39]

कोड हम कर रहे होंगे दूसरी चीज जो हम

[04:41]

डाउनलोड करेंगे वो है सी का कंपाइलर अब सी

[04:44]

के कंपाइलर को डाउनलोड करने के लिए सबसे

[04:47]

पहले हमें लिखना पड़ेगा

[04:58]

chromecast.com दिख रहा होगा उसपे हमें

[05:00]

क्लिक करना है तो डाउनलोड हमारे लिए

[05:02]

स्टार्ट हो जाएगा सबसे पहले जो विंडो

[05:04]

अपीयर करेगी पॉपअप आएगा उसके ऊपर

[05:06]

इंस्टॉलेशन डायरेक्ट्रीएंट्री

[05:15]

जें हैं वो डाउनलोड होती रहेंगी फिर एक

[05:17]

विंडो खुलेगी जिसमें वो हमसे पूछ रहा है

[05:19]

कि हमें और कौन से पैकेजेस डाउनलोड करने

[05:21]

हैं तो उसमें जो चेक बॉक्स हमारे पास आएगा

[05:23]

वो डिफरेंट डिफरेंट लैंग्वेजेस के लिए है

[05:25]

अभी के लिए क्या करेंगे बेसिक सब के लिए

[05:28]

डाउनलोड कर लेते हैं तो इंस्टॉल में सब पे

[05:30]

हमें क्लिक कर देना है मतलब चेक बॉक्स सब

[05:32]

के लिए टिक करना है फिर लेफ्ट में जाके एक

[05:34]

इंस्टॉलेशन का ऑप्शन आएगा इंस्टॉलेशन के

[05:37]

ऑप्शन में हमें क्लिक करना है और फिर

[05:40]

अप्लाई चेंजेज पर क्लिक करके सबके लिए

[05:43]

हमें डाउनलोड कर लेने हैं अपने पैकेजेस तो

[05:45]

ये पैकेजेस हो सकता है आपकी इंटरनेट स्पीड

[05:47]

के हिसाब से कुछ टाइम बाद डाउनलोड हो तो

[05:49]

उसके लिए आपको थोड़ा वेट करना पड़ सकता है

[05:52]

अब जैसे ही ये पैकेजेस डाउनलोड हो जाएंगे

[05:54]

ना उसके बाद हमारे पास आएगा कि ऑल चेंजेज

[05:56]

आर अप्लाइड सक्सेसफुली तो फिर हम उस चीज

[05:59]

को को कर देंगे क्लोज तो अभी हमने कोड

[06:01]

एडिटर को डाउनलोड कर लिया यानी वीएस कोड

[06:03]

को हमने सीके कंपाइलर को डाउनलोड कर लिया

[06:05]

इंस्टॉल कर लिया है पर एक छोटी सी चीज बची

[06:07]

है वो है हमारे एनवायरमेंट वेरिएबल अब

[06:10]

एनवायरमेंट वेरिएबल क्या होता है या इस

[06:12]

स्टेप में हम एगजैक्टली कर क्या रहे हैं

[06:14]

उसके हम डिटेल में नहीं जाएंगे बेसिक चीज

[06:16]

यह समझनी है कि आपको अगर सी का कोड अपने

[06:18]

सिस्टम के अंदर चलाना है तो उससे पहले

[06:21]

आपको यह सारे स्टेप्स जो हैं वोह फॉलो

[06:23]

करने पड़ेंगे इसके लिए सबसे पहले हम क्या

[06:25]

करेंगे हम अपने कंप्यूटर के सिस्टम में

[06:28]

फाइल्स में जाएंगे और उसमें दिस पीसी पर

[06:31]

जा रहे होंगे दिस पीसी के अंदर हम सर्च

[06:33]

करेंगे फॉर मजी डब् एम आई एन जीड तो सर्च

[06:37]

करने के बाद मजीड के फोल्डर में जाना है

[06:40]

उसके अंदर हमें जाना है बिन के फोल्डर में

[06:42]

तो बिन के फोल्डर में जब ऊपर पूरा का पूरा

[06:45]

पाथ एक डिस्प्ले हो रहा होगा उस पर जब हम

[06:47]

क्लिक करेंगे ना तो हमारा एक पाथ हाईलाइट

[06:49]

होगा व्हिच इज सी ड्राइव स् मजीड बिन इस

[06:54]

पूरे के पूरे पाथ को हमें कॉपी करना है

[06:56]

क्योंकि इसको हम अपने सिस्टम के

[06:57]

एनवायरमेंट वेरिएबल में ऐड करने वाले

[07:00]

तो राइट क्लिक करके इसको कॉपी कर लेंगे हम

[07:02]

अब हमें क्या करना है अब हमें अपने

[07:04]

कंप्यूटर के अंदर सर्च करना है कंट्रोल

[07:06]

पैनल के लिए कंट्रोल पैनल के अंदर जाकर

[07:09]

जाएंगे हम सिस्टम्स में सिस्टम्स के अंदर

[07:11]

हम जा रहे होंगे एडवांस सिस्टम सेटिंग्स

[07:13]

में अब जैसे ही एडवांस सिस्टम सेटिंग्स पर

[07:15]

जाएंगे तो एक पॉपअप दिखेगा हमें स्क्रीन

[07:17]

पर जिसके अंदर हमें इस एनवायरमेंट वेरिएबल

[07:20]

वाले ऑप्शन पर जाना है तो एक और

[07:22]

एनवायरमेंट वेरिएबल का ऑप्शन हमारे पास आ

[07:24]

रहा होगा इस ऑप्शन के अंदर इन एनवायरमेंट

[07:28]

वेरिएबल में नीचे सिस्टम वेरिएबल के अंदर

[07:30]

हमें पाथ को ढूंढना है जैसे ही हम पाथ को

[07:33]

ढूंढ लेंगे ना पाथ पे हमें जाना है तो

[07:35]

हमारा ब्लू कर्सर जैसे ही पाथ पे आ जाएगा

[07:37]

फिर हम कर देंगे उसको एडिट तो हम पाथ को

[07:40]

एडिट करने वाले हैं इसमें हम एक नया पाथ

[07:43]

एडिट करेंगे और नए पाथ के अंदर हम कॉपी कर

[07:45]

देंगे अपनी वो लोकेशन जिसके अंदर हमारे

[07:49]

मजी डब् का बिन फोल्डर है उस लोकेशन को

[07:52]

हमने कॉपी कर दिया उस लोकेशन को हमने

[07:54]

पेस्ट कर दिया है फिर एंटर प्रेस करेंगे

[07:57]

फिर प्रेस करेंगे ओके दोबारा से केके एंड

[07:59]

फाइनली लास्ट का ओके तो इस तरीके से हमारे

[08:03]

वेरिएबल के अंदर पाथ वेरिएबल के अंदर हमने

[08:05]

अपने मंजी डब् के बिन के पाथ को ऐड करा

[08:08]

दिया है अब वीएस कोड को खोलेंगे और अब हम

[08:10]

क्या करने वाले हैं एक सैंपल कोड करके मैं

[08:12]

बस आपको रन करके दिखाने वाली हूं जिसके

[08:15]

अंदर अभी हमें ये नहीं समझना कि सी के

[08:16]

अंदर प्रोग्रामिंग किस तरीके से होती है

[08:19]

या चीजें रन कैसे करते हैं या जो भी हम

[08:20]

लिख रहे हैं उसका मतलब क्या है बस सिंपली

[08:23]

देखना है कि जैसे ही हमने अपना एनवायरमेंट

[08:25]

सेट किया है हमारा सी का कोई भी कोड इस पर

[08:28]

रन करता है तो फाइल के अंदर खोलकर मैं एक

[08:31]

सैंपल कोड लिखने वाली हूं तो वीएस कोड के

[08:34]

अंदर हम एक नई फाइल खोलने वाले हैं उस नई

[08:36]

फाइल को सबसे पहले सेव कर लेते हैं h

[08:51]

world.con करने से पहले वीएस कोड में कुछ

[08:53]

एक्सटेंशंस होती हैं जिनको हमें इंस्टॉल

[08:56]

करना पड़ता है ताकि वीएस कोड समझ पाए कि

[08:58]

आप कौन सा कोड कोड रन करने वाले हैं व

[09:00]

उसके लिए कुछ और एडिशनल आपको फंक्शनैलिटीज

[09:02]

लाकर दे दे तो नीचे आपको एक्सटेंशंस का

[09:05]

ऑप्शन मिल रहा होगा अब सी को रन करने के

[09:07]

लिए हमें c c+ प का जो एक्सटेंशन पैक है

[09:11]

उसको अपने वीएस कोड के अंदर इंस्टॉल करना

[09:13]

पड़ेगा इसको इंस्टॉल एक बार हमने कर लिया

[09:15]

तो ऊपर टर्मिनल में जाकर हम ओपन करेंगे

[09:17]

न्यू टर्मिनल अब मैं कुछ कमांड्स लिखने

[09:20]

वाली हूं जो बहुत ही ज्यादा

[09:24]

कॉम्प्लेक्टेड लिख लिखकर बहुत अच्छे

[09:27]

एडवांस लेवल के सी के प्रोग्राम्स लिखने

[09:28]

वाले हैं तो बिल्कुल अभी चिंता नहीं करनी

[09:30]

कि ये

[09:33]

कॉम्प्लेक्शन करने वाली हैं तो मैंने कुछ

[09:35]

कोड लिखी कमांड्स लिखी नीचे और जैसे ही

[09:38]

मैंने कमांड लिखी मेरे लिए हेलो वर्ल्ड

[09:40]

मेरी स्क्रीन पर प्रिंट होकर आ जाएगा एंड

[09:43]

आप नोटिस करेंगे ऊपर कोड के अंदर भी मैंने

[09:44]

प्रिंट एफ एक चीज लिखी है जिसके अंदर

[09:46]

मैंने हेलो वर्ल्ड लिखा है तो मैंने ऊपर

[09:48]

कोड में भी लिखा है नीचे मेरी स्क्रीन में

[09:50]

भी आ गया है तो कुछ इस तरीके से हमारे सी

[09:53]

का कोड काम कर रहा होता है

[09:59]

के लिए अलग से भी बहुत सारे वीडियोस बनाए

[10:01]

हुए हैं तो आपको अगर कोई भी डाउट आता है

[10:03]

इंस्टॉलेशन में आप उस पर्टिकुलर वीडियो को

[10:06]

जाकर देख सकते हैं एंड उसमें काफी सारे जो

[10:08]

डाउट्स है वो आपके क्लियर हो रहे होंगे अब

[10:10]

अपने सी कोड को लिखने के लिए हम सबसे पहले

[10:12]

एक फाइल क्रिएट करेंगे फाइल को क्रिएट

[10:14]

करने के लिए ऊपर जाना है फाइल में और वहां

[10:16]

पर क्लिक करना है ओपन पर अब ओपन के अंदर

[10:19]

हमारे पास ऑप्शन आएंगे कि कोई हमारे पास

[10:21]

पुराना फोल्डर हो उसको हम पहले से खोल दें

[10:23]

लेकिन हम एक नया फोल्डर बनाने वाले हैं

[10:25]

जिसका हम नाम देंगे सी ट्यूटोरियल्स

[10:29]

इस सी फोल्डर को हम ओपन करने वाले हैं अब

[10:33]

हमारे पास एक ओपन हो गया है फोल्डर इसके

[10:35]

अंदर पर कोई फाइल नहीं है तो सबसे पहले हम

[10:37]

एक सी की फाइल लगाएंगे जैसे हम क्या करते

[10:40]

थे प्रैक्टिकल फाइल बनाया करते थे ना

[10:42]

स्कूल के अंदर जिसमें सारे की सारी हम

[10:44]

चीजें लिखा करते थे वैसे ही यहां पर हम एक

[10:46]

फाइल बनाएंगे जिसके अंदर सारा का सारा

[10:48]

अपना कोड हम लिखने वाले हैं फाइल बनाने के

[10:50]

लिए हम क्लिक करेंगे इस आइकन पर और अपनी

[10:52]

फाइल का हम नाम देंगे हेलोड सी तो ये

[10:56]

हमारी फाइल आ गई है यहां से हम इसे कर

[10:57]

देते हैं बंद अब यहां पर फाइल का नाम हमने

[11:00]

h . स दिया हम अपनी फाइल को कोई भी नाम दे

[11:02]

सकते हैं हो सकता है हम उसे लिखना चाहे

[11:05]

फर्स्ट प्रोग्राम तो हम लिख सकते हैं

[11:06]

फर्स्ट प्रोग्राम स ये डॉ स जो है इसको

[11:09]

एक्सटेंशन कहते हैं जैसे अगर हम t एकटी

[11:11]

फाइल नोटपैड पे कभी फाइल बना देते विज के

[11:14]

सिस्टम में तो उसको हम लिखते थे

[11:19]

abc.xyz

[11:26]

लिखा होता है

[11:29]

पे डॉट पवा लिखा होता है तो जो एक्सटेंशन

[11:31]

होता है वो बता देता है कि फाइल के अंदर

[11:33]

क्या है यहां पे डॉट सी जो है वो सी का

[11:36]

एक्सटेंशन है और ये बता रहा है हमें कि

[11:38]

हमने एक सी की फाइल क्रिएट करी है अब इस

[11:41]

फाइल के अंदर हम क्या करेंगे एक सैंपल कोड

[11:43]

लिखेंगे सी का इस कोड से हम समझेंगे कि सी

[11:46]

को लिखना कितना आसान है और बिल्कुल जितना

[11:48]

लोग बता देते हैं ना प्रोग्रामिंग कोडिंग

[11:50]

बहुत तोप चीज है उतनी कोई बड़ी चीज नहीं

[11:52]

है बहुत ही आसान है इसके अंदर हम कुछ-कुछ

[11:54]

चीजें लिखेंगे जो अभी हमें समझ नहीं आएंगी

[11:57]

लेकिन चैप्टर वन हमारा जैसे ही कंप्लीट ट

[11:59]

होगा सारी चीजें क्लियर हो जाएंगी तो यहां

[12:02]

पर हम कुछ-कुछ चीजें लिखने वाले हैं जो

[12:06]

शायद एलियन लैंग्वेज लग सकती है एसटीडी आड

[12:10]

ए इंट मेन प्रिंट एफ हेलो वर्ल्ड रिटर्न

[12:17]

रो अब यहां हमने हेलो वर्ल्ड लिखा है अब

[12:19]

ये सॉर्ट ऑफ कन्वेंशन होता है कि जो भी नई

[12:22]

प्रोग्रामिंग लैंग्वेज आप सीखते हैं ना

[12:23]

उसमें सबसे पहला कोड जो ये मतलब रूल है

[12:26]

कोडिंग वर्ल्ड का कि सबसे पहला कोड आपको

[12:28]

हेलो वर्ल्ड ही लिखना पड़ता है तो उसका

[12:30]

हमने कोड लिखा है इस कोड का काम है कि यह

[12:32]

हेलो वर्ल्ड को स्क्रीन पे प्रिंट करवा

[12:34]

देगा तो देखते हैं कैसे इसको कर लेते हैं

[12:37]

सेव और किसी भी सी कोड को रन करने के लिए

[12:39]

हमें ऊपर जाना पड़ता है टर्मिनल पे और हम

[12:41]

खोलेंगे न्यू टर्मिनल न्यू टर्मिनल में

[12:44]

सबसे पहले एक लाइन लिखते हैं जीसीसी h स

[12:48]

यहां पर ये जीसीसी जो है वो हमारा कंपाइलर

[12:50]

है c का तो हम उस कंपाइलर को इवोक कर रहे

[12:53]

हैं और उसके बाद लिखेंगे अपनी फाइल का नाम

[12:56]

तो बेसिकली हम क्या कह रहे हैं कि हमारे

[12:58]

जो फाइल में हमने कोड लिखा है उसको कंपाइल

[13:00]

कर दो ये कंपाइल इतना डिफिकल्ट जो शब्द है

[13:02]

ना ये भी चैप्टर वन के एंड तक क्लियर हो

[13:04]

जाएगा तो फाइल को हमने कर दिया कंपाइल अब

[13:06]

इसको रन करेंगे कोड को कैसे रन करेंगे हम

[13:09]

लिखेंगे / एड आउट ये a एक अ बाय डिफॉल्ट

[13:15]

फाइल क्रिएट हो जाती है जिसका एक्सटेंशन

[13:17]

है डॉट आउट यानी डॉट आउटपुट इसको हम कर

[13:20]

देंगे रन तो प्रिंट होगा हमारे लिए हेलो

[13:22]

वर्ल्ड अब जो कोडर्स विंडोज पर हैं उन्हें

[13:24]

यहां पर लिखना पड़ेगा ड a.exe क्योंकि

[13:27]

विंडोज में बाय डिफॉल्ट a.exe फाइल क्रिएट

[13:30]

होती है जिसकी एक्सटेंशन होती है डटी यानी

[13:32]

एग्जीक्यूटेबल फाइल लेकिन जो स्टूडेंट्स

[13:34]

हमारे

[13:59]

बहुत सिंपल और बहुत लॉजिकल है अगर थोड़ा

[14:01]

सा अब हम कोडिंग सीख पाते हैं तो हम

[14:03]

डिस्कवर करेंगे कि उससे हम कितनी सारी

[14:04]

इंटरेस्टिंग चीजें बना सकते हैं तो ये लिख

[14:07]

दिया है हमने अपना हेलो वर्ल्ड प्रोग्राम

[14:09]

इसके अंदर ये मेन क्या होता है ये इंक्लूड

[14:12]

क्या होता है ये यहां पे हैश क्यों लिखा

[14:14]

हुआ है ये ज़ीरो क्यों लिखा हुआ है इन सब

[14:16]

का मतलब हमें धीरे-धीरे समझ में आने वाला

[14:18]

है अब अपने चैप्टर वन के अंदर हम कुछ

[14:19]

बेसिक कांसेप्ट पढ़ेंगे जिनको पढ़ने के

[14:21]

बाद हमें प्रोग्रामिंग समझ में आने लग

[14:23]

जाएगी इसके अंदर हम सबसे पहले पढ़ने वाले

[14:26]

हैं वेरिएबल के बारे में कीवर्ड्स क्या

[14:28]

होते हैं हमारे कांस्टेंट्स क्या होते हैं

[14:30]

साथ में कॉमेंट्स किस तरीके से लिखे जाते

[14:32]

हैं हमने जो अभी सी का बेसिक प्रोग्राम

[14:34]

लिखा है इसका स्ट्रक्चर क्या होता है और

[14:35]

ये जो हमने कंपाइलेशन की बात करी थी हमारा

[14:38]

कोड एक्चुअली रन कैसे हो रहा है इस मशीन

[14:40]

पे इस कंप्यूटर पे इस सब के बारे में हम

[14:42]

सिर्फ अपने चैप्टर वन में पढ़ेंगे और सारी

[14:44]

चीजें सीख लेंगे सबसे पहला टॉपिक जिसके

[14:47]

साथ हम शुरुआत करने वाले हैं ये है

[14:49]

वेरिएबल वेरिएबल की डेफिनेशन की अगर बात

[14:52]

करें तो ये होता है नेम ऑफ अ मेमोरी

[14:54]

लोकेशन व्हिच स्टोर्स सम डेटा अब वेरिएबल

[14:57]

मेमोरी लोकेशन का नाम होता है जब भी हमें

[15:00]

कोई चीज स्टोर करनी पड़ती है उसके लिए

[15:02]

पहले जगह चाहिए होती है जैसे मान लीजिए

[15:04]

हमें कोई जूते रखने हैं तो जूतों के लिए

[15:05]

पहले डब्बे होते हैं ना किसी भी दुकान में

[15:07]

बहुत सारे हर डब्बे के अंदर कुछ जूते आते

[15:09]

हैं एक डब्बे के अंदर हील्स रखी होंगी एक

[15:12]

डब्बे के अंदर चप्पल रखी होंगी तो वो जो

[15:14]

चप्पल है वो हील्स है वो शूज हैं

[15:16]

स्पोर्ट्स शूज हैं वो सारा हमारा डाटा है

[15:19]

और उस डब्बे को हम एक कंटेनर कह सकते हैं

[15:22]

जिसके अंदर हमारा डेटा रहता है और उसी

[15:24]

कंटेनर को अगर हम कोई नाम दे दें तो वो

[15:26]

नाम होगा हमारा वेरिएबल उसी तरीके से

[15:29]

मम्मी जब किचन में बहुत सारे मसाले रखा

[15:31]

करती हैं मान लीजिए एक डब्बा है जिसमें

[15:34]

मसूर की दाल रखी है एक डब्बा है जिसमें

[15:35]

हल्दी रखी है एक डब्बा है जिसमें नमक रखा

[15:37]

है तो ये जो कंटेनर्स होते हैं इनके अंदर

[15:40]

हमारा डाटा होता है यानी कोई हमारा खाने

[15:42]

का सामान होता है बाहर वाला जो कंटेनर

[15:44]

होता है उसको हम कह देते हैं वेरिएबल अब

[15:46]

इसी तरीके से कंप्यूटर भी कुछ डाटा स्टोर

[15:48]

करता है ये डाटा जहां पर जाकर स्टोर होता

[15:51]

है मान लीजिए यह है हमारे कंप्यूटर की

[15:53]

मेमोरी और इसमें खुद के कुछ-कुछ डब्बे बने

[15:56]

हुए हैं और इस मेमोरी के अंदर अगर हमें

[15:59]

नंबर 25 स्टोर कराना है तो उसको हम किसी

[16:01]

एक डब्बे में स्टोर करा देंगे और उस डब्बे

[16:03]

को हम एक नाम दे देंगे जो नाम है यहां पर

[16:06]

a और इसी a को हम कह देते हैं वेरिएबल अब

[16:10]

मान लो इसके बाद नंबर नहीं कोई कैरेक्टर

[16:12]

स्टोर कराना है तो ये कैरेक्टर s को हम एक

[16:14]

नई मेमोरी लोकेशन यानी नए डब्बे पर स्टोर

[16:16]

करा देंगे उस मेमोरी लोकेशन का हम नाम दे

[16:19]

देंगे b और ये b क्या कहलाएगा ये कहलाएगा

[16:22]

हमारा वेरिएबल तो मेमोरी के अंदर अगर हमें

[16:25]

कुछ भी स्टोर कराते हैं तो उस मेमोरी

[16:27]

लोकेशन को जब कोई नाम दे देते हैं उस

[16:29]

डब्बे को कोई नाम दे देते हैं उसको हम

[16:30]

वेरिएबल कहते हैं अब वेरिएबल को एक्चुअली

[16:33]

इंप्लीमेंट कैसे करते हैं उसका कोड लिखकर

[16:35]

देख लेते हैं हल्का सा यह वाली लाइन हम

[16:38]

हटा रहे होंगे यह जो सारा का सारा कोड है

[16:41]

यह हमारा बाय डिफॉल्ट कोड है यानी इसको हम

[16:43]

हर बार लिखने वाले हैं अभी हमें इस पर

[16:45]

ध्यान नहीं देना अभी हमें बीच के कुछ

[16:46]

पार्ट पर ध्यान देना है मान लीजिए हमें

[16:49]

नंबर 25 को स्टोर कराना है तो हम यहां पर

[16:52]

लिखेंगे इंट नंबर इज इक्वल टू 25 तो इस

[16:56]

सिंगल लाइन की वजह से हमारा नंबर 25 में

[16:58]

मेरी में स्टोर हो गया उस डब्बे के अंदर

[17:00]

जाके और उस डब्बे का नाम हमने यहां पर

[17:02]

लिया है नंबर वैसे ही अगर कोई कैरेक्टर

[17:05]

स्टोर कराना हो कैर स्टार इ इक्वल टू

[17:09]

स्टार तो अपनी मेमोरी के अंदर हमारे

[17:11]

कीबोर्ड पे जो स्टार बना हुआ है इसको हमने

[17:13]

स्टोर करा दिया मेमोरी में और उस वेरिएबल

[17:15]

का उस कंटेनर का नाम हमने दे दिया स्टार

[17:18]

उसी तरीके से अगर हमें एज स्टोर करानी है

[17:21]

तो हम लिखेंगे इंट ए इ इक्वल टू 22 तो

[17:24]

यहां पे हमने अपनी एज 22 मेमोरी के अंदर

[17:27]

स्टोर करा दी और उस लोकेशन का नाम हमने दे

[17:29]

दिया एज यहां पर यह जो इंट क्या है यह

[17:32]

कैरेक्टर क्या है इसको हम अभी के लिए

[17:34]

इग्नोर करेंगे और ध्यान देंगे सिर्फ इस

[17:36]

लाइन पर वैसे ही मान लीजिए हमें कोई

[17:38]

डेसीमल वैल्यू स्टोर करानी हुई तो हम

[17:41]

लिखेंगे फ्लोट पा =

[17:45]

3.14 तो ये जो पाई की हमारी वैल्यू होती

[17:47]

है 3.14 ये भी अब मेमोरी के अंदर जाके

[17:50]

स्टोर हो गई है और उस मेमोरी लोकेशन का उस

[17:52]

कंटेनर का हमने नाम दे दिया पाई तो कुछ इस

[17:55]

तरीके से कोई भी नंबर कोई भी वैल्यू अपनी

[17:57]

मेमोरी के अंदर हम स्टोर करा सकते हैं और

[17:59]

वह जहां पर स्टोर हुई है उस कंटेनर का हम

[18:02]

नाम याद रख सकते हैं तो इनको हम वेरिएबल

[18:04]

कहते हैं अब c के अंदर वेरिएबल को लिखने

[18:07]

के कुछ-कुछ रूल्स होते हैं इनमें से सबसे

[18:09]

पहला रूल हमारा होता है कि वेरिएबल आर केस

[18:12]

सेंसिटिव केस सेंसिटिव कहने का क्या मतलब

[18:15]

है कि छोटा a और बड़ा a अलग-अलग होंगे जो

[18:18]

हमारा कैपिटल a और हमारा स्मल a होता है

[18:20]

ये अलग-अलग होंगे इनको हम सेम नहीं मान

[18:22]

सकते जैसे अगर हमें कोई नंबर स्टोर कराना

[18:25]

है 30 तो हम लिख सकते हैं इंट a = 30 तो

[18:28]

मेमोरी के अंदर 30 स्टोर हो गया और उस

[18:31]

लोकेशन का नाम जहां पे स्टोर हुआ उसको

[18:32]

हमने a दे दिया अब हमें दूसरा नंबर स्टोर

[18:34]

कराना है 40 तो अगर हम लिखें इंट a = 40

[18:39]

तो दूसरी लोकेशन पर 40 हमारे पास स्टोर हो

[18:42]

गया और उस लोकेशन का नाम हमने कैपिटल a दे

[18:44]

दिया यहां पर ये स्ल a और यह कैपिटल a

[18:47]

दोनों अलग-अलग वेरिएबल हैं सेम नहीं है

[18:49]

दूसरा रूल जो c का कहता है वेरिएबल के

[18:51]

बारे में वो यह कहता है कि फर्स्ट

[18:53]

कैरेक्टर इज अल्फाबेट और अंडरस्कोर इसका

[18:56]

क्या मतलब है कि वेरिएबल के नाम में जो भी

[18:59]

हमारा पहला कैरेक्टर होता है वह या तो एक

[19:01]

नॉर्मल इंग्लिश का कैरेक्टर हो सकता है या

[19:03]

फिर अंडरस्कोर हो सकता है इसके अलावा और

[19:06]

कोई वैल्यू नहीं हो सकती जैसे अगर हमें एज

[19:09]

स्टोर करानी थी तो हमने क्या लिखा था यहां

[19:11]

पर हमने लिखा था इंट एज इसे हम इस तरीके

[19:14]

से भी लिख सकते थे इंट ए = 22 लेकिन इसको

[19:18]

हम ऐसे नहीं लिख सकते हाइन ए = 22 क्योंकि

[19:22]

यहां पे हमारी रेड लाइन आ जाएगी और यह गलत

[19:24]

हो जाएगा यहां पे अगर हम वन एज भी लिखना

[19:26]

चाहे तो यह रेड हो गया यानी गलत आगे सिर्फ

[19:29]

कोई इंग्लिश का कैरेक्टर या फिर अंडरस्कोर

[19:32]

ही आ सकता है वेरिएबल के नाम में तीसरा

[19:34]

रूल हमारा कहता है नो कॉमा और ब्लैंक

[19:37]

स्पेस यानी वेरिएबल के नाम में ना कोई

[19:38]

कॉमा हो सकता है ना कोई ब्लैंक स्पेस हो

[19:40]

सकती है जैसे अगर हमें कोई फाइनल प्राइस

[19:42]

स्टोर कराना है तो हम लिखेंगे इंट फाइनल

[19:47]

अंडरस्कोर प्राइस इ इ ₹1 अब ये जो

[19:51]

अंडरस्कोर है ना सिर्फ यही एक ऐसा स्पेशल

[19:54]

कैरेक्टर है जो हमारे वेरिएबल के नाम के

[19:56]

अंदर आ सकता है मान लीजिए इस अंडरस्कोर की

[19:58]

जगह हम यहां पर स्पेस दे देते हैं तो यहां

[20:01]

पे हमारे पास आ जाता एरर क्योंकि हम स्पेस

[20:03]

नहीं दे सकते वेरिएबल के नाम में या फिर

[20:05]

स्पेस की जगह अगर हम कॉमा दे देते तो भी

[20:07]

एरर आता क्योंकि कॉमा भी नहीं दे सकते हम

[20:10]

एक ही स्पेशल कैरेक्टर को यूज़ कर सकते

[20:11]

हैं वेरिएबल में जो होता है अंडरस्कोर जो

[20:13]

लेकर आता है हमें फोर्थ रूल की तरफ व्हिच

[20:16]

इज नो अदर सिंबल अदर दन अंडरस्कोर कैन बी

[20:18]

यूज्ड अब वेरिएबल के बारे में एक स्पेशल

[20:21]

चीज वेरिएबल की वैल्यू जो है ना वो फिक्स

[20:23]

नहीं होती वो चेंज हो सकती है जैसे हमने

[20:26]

डिफाइन कर दिया हमारा एज वेरिएबल क्योंकि

[20:28]

आज की डेट में हमारी एज जो है वो 22 है

[20:31]

लेकिन कल को यानी 2 साल बाद हमारी एज 24

[20:34]

हो जाएगी अपडेट होके तो उसको हम किस तरीके

[20:36]

से लिखेंगे एज इ इक्व

[20:38]

24 तो पहले हमारा जो एज वेरिएबल था यानी

[20:42]

वो जो मेमोरी लोकेशन थी उसमें 22 स्टोर्ड

[20:44]

था पर अब 2 साल बाद हमारी एज में हमने

[20:46]

स्टोर करा दिया 24 तो इस तरीके से किसी भी

[20:49]

वेरिएबल की वैल्यू को हम अपडेट कर सकते

[20:51]

हैं तो वेरिएबल जो हैं हमारे कोड के अंदर

[20:53]

वो चेंज होते रहते हैं एंड इनफैक्ट

[20:55]

वेरिएबल का जो इंग्लिश मतलब होता है वो भी

[20:57]

होता है कोई ऐसी चीज जो चेंज होती रहती है

[21:00]

तो इट ऑल मेक्स सेंस नाउ अब वेरिएबल को जब

[21:02]

भी हम लिखते हैं एक स्पेशल टिप हर

[21:04]

प्रोग्रामर को दी जाती है जो एक सीनियर

[21:07]

प्रोग्रामर दे रहा होता है कि वेरिएबल के

[21:09]

नाम हमेशा मीनिंगफुल होने चाहिए यानी

[21:11]

वेरिएबल को पढ़ते ही देखते ही हमें समझ

[21:13]

में आ जाए इसके अंदर स्टोर क्या हुआ है

[21:15]

जैसे हमने यहां पर एज स्टोर की तो वेरिएबल

[21:17]

का नाम एज दे दिया एक स्टार स्टोर कर दिया

[21:20]

तो उसका नाम स्टार दे दिया कोई रैंडम नंबर

[21:22]

स्टोर किया है तो नाम हमने नंबर दे दिया

[21:24]

कभी-कभी रैंडम हां हम ए बी सी इस तरीके के

[21:27]

नाम रख सकते हैं क्योंकि वो इजी पड़ता है

[21:29]

लेकिन जब भी हम कोई बड़ा प्रोग्राम लिख

[21:31]

रहे हैं ना उसमें ए बी सी करके बहुत सारे

[21:33]

वेरिएबल हो जाएंगे इसीलिए वहां पर

[21:35]

मीनिंगफुल नाम देने बहुत जरूरी हैं तो अगर

[21:38]

आगे जाकर आप अपने इंटरव्यूज में बैठते हैं

[21:40]

कंपनीज में प्लेसमेंट्स के लिए या फिर कोई

[21:42]

अपना प्रोजेक्ट बना रहे हैं अच्छे लेवल का

[21:44]

फ्रीलांसिंग करें तो उसके अंदर अपने

[21:46]

वेरिएबल के नाम हमें बहुत अच्छे से लिखने

[21:48]

हैं जैसे अगर हमें 100 ही स्टोर कराना था

[21:51]

तो यहां पे सीधा सिर्फ एफ लिख सकते थे

[21:53]

लेकिन हमने पूरा नाम लिखा फाइनल प्राइस

[21:55]

जिससे समझ आए कि 100 जो है एक प्राइस है

[21:58]

अब जो नेक्स्ट चीज जिसके बारे में हम

[21:59]

पढ़ने वाले वेरिएबल के बाद वो है हमारी

[22:01]

डाटा टाइप्स सी के अंदर बहुत सारे डेटा

[22:04]

टाइप्स होते हैं ये डिफरेंट जो डेटा

[22:06]

टाइप्स हैं उनकी हमने आपको लिस्ट दी हुई

[22:08]

है और ये सारी की सारी स्लाइड्स आपको नीचे

[22:10]

डिस्क्रिप्शन बॉक्स में अवेलेबल होंगी तो

[22:12]

यहां पर अभी कुछ भी याद करने की जरूरत

[22:14]

नहीं है इनफैक्ट ये सारे के सारे हमें याद

[22:16]

करने भी नहीं पड़ते इसमें कुछ-कुछ ऐसे हैं

[22:18]

जो कोडिंग करते करते हमें डेफिनेटली याद

[22:20]

हो जाएंगे तो उसी से सारी चीजें जो है

[22:22]

दिमाग में रहती है डेटा टाइप होता है कि

[22:24]

मेमोरी के अंदर आप किस तरीके का डाटा

[22:26]

स्टोर कर रहे हैं और जिस भी तरीके का डाटा

[22:29]

होता है ना उसके लिए स्पेसिफाइड होता है

[22:30]

कि ये इतनी ही मेमोरी खाएगा जैसे जब भी

[22:32]

पेन ड्राइव खरीदते हैं तो उसपे लिखा होता

[22:34]

है कि ये 8gb की पेन ड्राइव है या 16gb की

[22:36]

पेन ड्राइव है उसी तरीके से हमारा जो

[22:38]

कैरेक्टर टाइप का डाटा होता है वो खाता है

[22:41]

हमारी वन बाइट की मेमोरी को अगर इंटी जर

[22:44]

टाइप के डाटा की बात करें तो वो खाता है

[22:45]

हमारी 2 बाइट की मेमोरी को अगर फ्लोट डाटा

[22:48]

की बात करें तो वो खाता है हमारी फोर वाली

[22:50]

मेमोरी को अब वो स्टूडेंट्स जो दूसरी

[22:53]

लैंग्वेजेस सीखने के बाद सी को सीख रहे

[22:55]

हैं वो मेरी तरह थोड़े से सरप्राइज्ड हो

[22:57]

जाएंगे क्यों क्योंकि उन्हें पता चलेगा कि

[22:59]

सी के अंदर ना तो बोलियन टाइप का डेटा

[23:01]

टाइप होता है ना स्ट्रिंग टाइप का डटा

[23:03]

टाइप होता है ये दोनों सी के अंदर एजिस्ट

[23:06]

नहीं करते हैं क्योंकि सी सबसे पहले आई थी

[23:08]

यानी सी 1970 में आई थी उसके बाद c+ प आई

[23:11]

थी उसके बाद जावा आई थी उसके बाद

[23:13]

जावास्क्रिप्ट आई थी तो सी हमारी बहुत ही

[23:15]

पुरानी लैंग्वेज है इसीलिए इसमें काफी

[23:17]

सारी ऐसी चीजें हैं जैसे ऑब्जेक्ट्स और

[23:19]

क्लासेस हो गए जो मिसिंग होते हैं तो ये

[23:21]

कॉन्सेप्ट्स जो हैं इनके लिए हमें दूसरी

[23:23]

लैंग्वेजेस बाद में सीखनी पड़ती है तो इन

[23:25]

सारे डाटा टाइप्स में से हम कुछ-कुछ

[23:27]

इंपॉर्टेंट डे डाटा टाइप्स जो हैं उनको

[23:29]

लिखकर देखेंगे और सिर्फ उन्हें ही अभी

[23:31]

हमें याद रखना है बाकियों को याद अभी रखने

[23:33]

की जरूरत नहीं है तो अपने कोड के अंदर

[23:35]

हमने जो ऑलरेडी काफी सारी चीजें लिखी थी

[23:37]

उनको एक बार हटा देते हैं और तीन डेटा

[23:39]

टाइप्स की यहां पे बात करेंगे सबसे पहला

[23:42]

डेटा टाइप है हमारा इंट इंट क्या स्टोर

[23:44]

करता है इंट स्टोर करता है इंटी जर

[23:46]

वैल्यूज को यानी जो वैल्यूज हमारी होल

[23:48]

होती हैं या तो पॉजिटिव हो सकती है या

[23:50]

नेगेटिव हो सकती हैं जैसे + 1 हो गया + 2

[23:53]

हो गया + 5 हो गया -1 हो गया 0 हो गया इस

[23:56]

तरीके की वैल्यूज तो अगर हमें एज स्टोर

[23:59]

करवानी है तो एज हमारी एक होल वैल्यू होती

[24:01]

है यूजुअली तो उसको हम स्टोर करवाएंगे इंट

[24:03]

डाटा टाइप में तो यहां लिखेंगे इंट एज इ

[24:06]

इक्वल टू 22 तो इस लाइन से हमें तीन चीजें

[24:09]

पता चली सबसे पहला जो डाटा हम स्टोर करा

[24:11]

रहे हैं वो है 22 जिस मेमोरी लोकेशन पे

[24:14]

स्टोर कराया है उसका नाम हमने दिया है एज

[24:16]

और जिस टाइप का डाटा है वो है इंटी जर

[24:19]

वैल्यू अब वैसे ही अगर हमें पाई की वैल्यू

[24:21]

स्टोर करानी हो पाई तो हमारा इंटी जर होता

[24:23]

नहीं है उसके अंदर तो डेसीमल वैल्यूज आती

[24:25]

हैं इसीलिए उसको हम स्टोर कराएंगे फ्लोट

[24:27]

डेटा टाइप में तो यहां लिखेंगे फ्लोट फिर

[24:30]

लिखेंगे पाई और इसकी वैल्यू हम दे देंगे

[24:33]

3.14 तो ये डेसिमल वैल्यूज वाला एक नंबर

[24:36]

है इसको हमने फ्लोट डेटा टाइप में स्टोर

[24:38]

कराया है अब इसके अलावा एक और डटा टाइप

[24:41]

होता है जिसका नाम होता है कैरेक्टर तो जो

[24:43]

भी हमारी स्पेशल कैरेक्टर्स होते हैं ना

[24:45]

जैसे हैश हो गया हमारा एम पर हो गया रेट

[24:48]

हो गया स्टार हो गया यानी एस्ट रिस्क उन

[24:50]

सबको हम कैरेक्टर डाटा टाइप में स्टोर

[24:51]

कराते हैं कैरेक्टर के लिए लिखना पड़ेगा

[24:53]

कैर और यहां पर मान लीजिए हम लिखते हैं

[24:55]

अपना शैग

[24:58]

तो यहां पर सबसे पहले कैरेक्टर्स को स्टोर

[25:01]

कराने के लिए हमें सिंगल कोट लिखने पड़ते

[25:03]

हैं और अंदर हम लिख सकते हैं अपना

[25:05]

कैरेक्टर तो इस तरीके से हमने कैर डटा

[25:08]

टाइप का एक वेरिएबल स्टोर करा लिया फ्लोट

[25:10]

का करा लिया इंट का करा लिया अभी के लिए

[25:12]

क्योंकि हम बेसिक लेवल से चल रहे हैं यही

[25:14]

तीन जो हैं ये तीनों मेन हैं जिनको हमें

[25:16]

याद रखने की जरूरत है बाकी हम टाइम के साथ

[25:19]

और ज्यादा सीखते चले जाएंगे अब नेक्स्ट

[25:21]

टॉपिक जिसकी हम बात करेंगे वो है हमारे

[25:23]

कांस्टेंट्स हमने बात की थी इससे पहले

[25:26]

वेरिएबल की वेरिएबल में क्या इशू था

[25:27]

वेरिएबल की वैल्यू चेंज हो सकती थी अब अगर

[25:30]

जब भी हम बड़ी-बड़ी कंपनीज में बड़े-बड़े

[25:32]

सॉफ्टवेयर्स बनाते हैं जैसे कोई एडमिन

[25:34]

पैनल हमने बनाया कोई वेबसाइट बनाई उसके

[25:37]

टेस्टिंग पर्पसस के लिए हम क्या करते हैं

[25:39]

एक अपना खुद का ईमेल पासवर्ड रख लेते हैं

[25:41]

जो फिक्स्ड होता है जिसकी वैल्यू हमें

[25:42]

चेंज नहीं करनी हर बार उसी ईमेल पासवर्ड

[25:44]

से हमें लॉग इन करना है तो हम क्या कर

[25:46]

सकते हैं किसी फाइल के अंदर एक ईमेल

[25:48]

वेरिएबल बना सकते हैं एक पासवर्ड वेरिएबल

[25:49]

बना सकते हैं और दोनों के अंदर कोई वैल्यू

[25:51]

रख सकते हैं सी के अंदर वो वैल्यूज जो

[25:54]

हमेशा कांस्टेंट रहती हैं जिनकी वैल्यू

[25:56]

चेंज नहीं होती उनको हम कहते हैं

[25:58]

कांस्टेंट्स कांस्टेंट्स हमारे तीन टाइप

[26:00]

के होते हैं इनमें से सबसे पहले हैं इंटी

[26:02]

जर कांस्टेंट्स जैसे हमारा नंबर वन हो गया

[26:05]

वन की वैल्यू हमेशा वन ही रहेगी वन की

[26:07]

वैल्यू नेगेटिव 1 या 0 या नेगेटिव फ वो

[26:11]

नहीं हो सकती वन की वैल्यू हमेशा

[26:13]

कांस्टेंट रहेगी फिक्स्ड रहेगी तो हमारे 1

[26:16]

2 3 0 -1 -2 इस तरीके के जो कांस्टेंट्स

[26:19]

होते हैं इनको इंटी जर कांस्टेंट्स कहते

[26:21]

हैं उसके बाद आते हैं हमारे रियल

[26:23]

कांस्टेंट्स रियल कांस्टेंट्स यानी जिनके

[26:25]

अंदर रियल नंबर्स होते हैं जैसे वन 0 अब

[26:29]

1.01 भी होता है लेकिन यह रियल कांस्टेंट

[26:33]

है इसको दिखाने के लिए इसका पट 0

[26:35]

एक्स्ट्रा लिखा गया है उसी तरीके से 2 का

[26:38]

प0 एक्स्ट्रा लिखा गया है अगर ये सिर्फ टू

[26:40]

होता तो फिर ये इंटी जर कांस्टेंट बन जाता

[26:43]

अभी ये रियल कांस्टेंट है 3.14 यहां पर

[26:46]

हमारे पास आना चाहिए था - 2.4 तो फिर ये

[26:50]

एक रियल कांस्टेंट होता अब तीसरा टाइप ऑफ

[26:52]

कांस्टेंट हमारे पास होते हैं कैरेक्टर

[26:54]

कांस्टेंट्स कैरेक्टर्स में क्या-क्या आ

[26:56]

जाते हैं हमारे सारे अल्फाबेट्स आ जाते

[26:58]

हैं अपर केस लोअर केस में हमारे पास

[27:01]

कैपिटल ए आ गया स्पेशल कैरेक्टर्स भी आ

[27:03]

जाते हैं जैसे हमारे पास हैश आ गया हमारा

[27:06]

एम परसेंट आ गया हमारा एस्ट रिस्क आ गया

[27:09]

या इसके अलावा हमारा ट द रेट आ गया तो इस

[27:12]

तरीके के सारे कैरेक्टर्स मिलकर हमारे

[27:14]

कैरेक्टर कांस्टेंट्स बनाते हैं और एक चीज

[27:16]

नोट करनी पड़ेगी यहां पर कि कैरेक्टर

[27:18]

कांस्टेंट जो होते हैं ना इस कैपिटल a की

[27:20]

वैल्यू हमेशा कैपिटल a ही रहेगी स्ल ए

[27:22]

नहीं हो जाएगी और जब भी कैरेक्टर

[27:24]

कांस्टेंट्स को कोड के अंदर लिखना होता है

[27:26]

तो उनको हम लिखते हैं सिंगल कोड्स के अंदर

[27:29]

यानी जब भी हम कोई कैरेक्टर कांस्टेंट

[27:31]

लिखेंगे कोड में तो वहां पर हमें सिंगल

[27:33]

कोड्स लगाने पड़ेंगे अब नेक्स्ट टॉपिक

[27:36]

जिसकी हम बात करेंगे उसका नाम है कीवर्ड्स

[27:38]

जैसे डिक्शनरी के अंदर कुछ-कुछ वर्ड होते

[27:41]

हैं हर वर्ड का अपना एक फिक्स्ड मतलब होता

[27:43]

है उसको चेंज नहीं कर सकते वैसे ही हर

[27:45]

प्रोग्रामिंग लैंग्वेज की अपनी एक

[27:46]

डिक्शनरी होती है सी की भी अपनी एक

[27:48]

डिक्शनरी है जिसके अंदर कुछ-कुछ वर्ड्स जो

[27:50]

हैं वो रिजर्व्ड हैं यानी वो फिक्स्ड है

[27:52]

उसका मतलब सिर्फ वही रहेगा उसको हम

[27:55]

वेरिएबल नाम की तरह यूज़ नहीं कर सकते ना

[27:57]

ही करना चाहिए

[27:58]

तो इसी तरीके से सी के अंदर कुछ रिजर्व्ड

[28:00]

वर्ड्स हैं जिनका कुछ स्पेशल मीनिंग है और

[28:03]

यह मीनिंग कंपाइलर को पता है तो सी

[28:05]

प्रोग्रामिंग लैंग्वेज के अंदर 32

[28:07]

कीवर्ड्स होते हैं और इन कीवर्ड्स का हमें

[28:10]

खास ध्यान देना है अगर इन 32 की लिस्ट की

[28:12]

बात करें तो हमारे 32 कीवर्ड्स कुछ ऐसे

[28:15]

होते हैं सी के अंदर इस लिस्ट में हमें

[28:17]

दिख रहा होगा कि इंट हमारा एक रिजर्व्ड

[28:19]

वर्ड है हमारा कीवर्ड है सी का तो इसको

[28:22]

यानी किसी भी वेरिएबल का नाम हम इंट नहीं

[28:24]

रख सकते वैसे ही हम इसमें ढूंढने निकले तो

[28:27]

फ्लोट भी हम हमारा एक कीवर्ड है इसके

[28:29]

अलावा कैरेक्टर भी हमारा एक कीवर्ड है और

[28:32]

ये जो सारे के सारे कीवर्ड्स हैं ना इनको

[28:34]

अब अपने पूरे कोर्स के अंदर हम कहीं ना

[28:36]

कहीं एक्सप्लोर कर लेंगे तो हमें पता चल

[28:38]

जाएगा कौन-कौन से कीवर्ड्स हैं इसीलिए जब

[28:40]

भी अपने प्रोग्राम में देखते हैं ना हम

[28:42]

जैसे हमारे पास ये इंट लिखा हुआ है इस इंट

[28:44]

का एक स्पेशल मतलब है जो सिर्फ कंपाइलर को

[28:46]

पता है तो किसी भी वेरिएबल का नाम हमें

[28:48]

इंट नहीं रखना ये रिटर्न है रिटर्न भी एक

[28:50]

कीवर्ड है किसी भी वेरिएबल का नाम हमें

[28:52]

रिटर्न नहीं रखना क्योंकि ये स्पेशल

[28:54]

वर्ड्स है जिनके मतलब फिक्स्ड हैं जो

[28:56]

कंपाइलर को पता है अब एक बार अपने

[28:58]

प्रोग्राम के स्ट्रक्चर को समझते हैं कि

[29:00]

जिस भी प्रोग्राम को जिस भी कोड को हम लिख

[29:02]

रहे हैं उसको एक्चुअली समझ कैसे सकते हैं

[29:05]

हम कि वो बना कैसे होता है तो जैसे ह्यूमन

[29:08]

बॉडी का एक स्केलेटन होता है वैसे ही हर

[29:09]

एक कोड का हर एक प्रोग्राम का एक

[29:11]

स्ट्रक्चर होता है अगर हम अपने सी के

[29:13]

प्रोग्राम के स्ट्रक्चर की बात करें तो

[29:15]

हमारा प्रोग्राम कुछ ऐसा दिखता है ये

[29:17]

हमारा इनिशियल कोड है जिसको हमने लिखा था

[29:19]

इसमें सबसे पहले लिखा हुआ है हैश इंक्लूड

[29:21]

फिर हमारे एंगुलर ब्रैकेट्स आ जाते हैं और

[29:23]

बीच में आया है एसटीडी आड ए इसको कहते हैं

[29:27]

हम अपना प्री

[29:29]

प्रोसेसर डायरेक्टिव अब एक प्री प्रोसेसर

[29:33]

डायरेक्टिव होता क्या है इसको बाद में

[29:34]

पढ़ेंगे अभी के लिए ये समझना है कि इस

[29:37]

लाइन को हमें हमेशा अपने कोड के अंदर

[29:39]

लिखना है नहीं तो हमारा सी को कोड नहीं चल

[29:42]

रहा होगा उसके बाद हम हमेशा ये लाइन लिखते

[29:45]

हैं इंट मेन उसके बाद हमारे पेंसिस और फिर

[29:48]

कर्ली ब्रेसस और इन कर्ली ब्रेसस के अंदर

[29:51]

जो भी पार्ट लिखा होता है यह होता है

[29:52]

हमारा मेन का कोड हमारा जो प्रोग्राम का

[29:55]

एग्जीक्यूशन होता है वो मेन फंक्शन से

[29:57]

शुरू होता है यानी इस फंक्शन से फंक्शन

[29:59]

हमारे कोड का एक ऐसा पार्ट होता है जो

[30:01]

हमें कुछ काम करके देता है हम फंक्शंस के

[30:03]

बारे में भी डिटेल में पढ़ने वाले हैं मेन

[30:05]

फंक्शन से हमेशा किसी भी सी प्रोग्राम का

[30:07]

एग्जीक्यूशन शुरू होगा और वो एग्जीक्यूशन

[30:09]

होगा लाइन बाय लाइन यानी सबसे पहले ये

[30:11]

लाइन आई है तो पहले ये एग्जीक्यूट होगी

[30:14]

फिर ये लाइन आई है तो फिर ये एग्जीक्यूट

[30:16]

होगी इसके बाद हमारा मेन फंक्शन जो है वो

[30:18]

खत्म हो जाता है अब आप नोटिस करेंगे कि हर

[30:20]

लाइन के पीछे हम कोड के अंदर एक सेमीकलन

[30:23]

लिखते हैं यानी इस लाइन के पीछे भी एक

[30:25]

सेमीकलन लिखा है इस लाइन के पीछे भी एक

[30:27]

सेमीकलन लिखा है यह सेमीकलन हमारी लाइन

[30:29]

में एक फुल स्टॉप की तरह होता है जैसे हम

[30:31]

हिंदी में पूर्ण विराम लगाते हैं हम

[30:33]

इंग्लिश के सेंटेंसेस में एंड में डॉट

[30:35]

लगाते हैं यानी पीरियड लगाते हैं वैसे ही

[30:37]

हम अपने सी प्रोग्राम के अंदर एक सेमीकलन

[30:39]

लगाकर ये दिखाते हैं कि यहां पर हमारी

[30:41]

लाइन खत्म हो गई है अब आगे जो भी लिखा हुआ

[30:43]

है वो नेक्स्ट लाइन का है इस पूरी की पूरी

[30:46]

चीज को हम यहां भी लिख सकते थे इसके बाद

[30:48]

और हमें पता होता कि वो नेक्स्ट लाइन में

[30:50]

है क्योंकि सेमी कोलन के बाद आ रहा है और

[30:52]

इसके साथ-साथ हमारा जो कोड है ना उसकी

[30:54]

सारी इंस्ट्रक्शंस केस सेंसिटिव है यानी

[30:56]

यहां पर अगर हम लिख लिखना चाहे इंट मेन तो

[31:00]

यह गलत होगा क्योंकि ये सारे अपर केस में

[31:02]

आ गए क्योंकि सी एक के सेंसिटिव लैंग्वेज

[31:05]

है तो जो स्मॉल है वो स्मॉल केस में रहेगा

[31:07]

जो अपर है वो अपर केस में रहेगा उसको हम

[31:10]

इंटरचेंज या रिप्लेस नहीं कर सकते तो इस

[31:13]

तरीके का स्ट्रक्चर रहता है जब भी हम अपना

[31:15]

एक सी प्रोग्राम क्रिएट करते हैं ऊपर

[31:17]

हमेशा एक हेडर फाइल या अपना प्रीप्रोसेसर

[31:19]

डायरेक्टिव इंक्लूड करना है उसके बाद इंट

[31:21]

मेन लिखना है और ये कर्ली ब्रेसेज लगाने

[31:23]

हैं और इसके बीच में हम कुछ भी लिख सकते

[31:26]

हैं पर एंड में हम हमेशा हमेशा एक रिटर्न

[31:28]

जरो वाली लाइन लिखते हैं यह रिटर्न रो में

[31:31]

रो दिखाता है जरो एरर्स यानी हमारा कोड

[31:33]

सक्सेसफुली एग्जीक्यूट हो गया इसमें कोई

[31:35]

एरर नहीं आया तो ये रिटर्न जरो भी हमेशा

[31:37]

एंड में लिखेंगे यहां पर ये वाला पार्ट है

[31:40]

जिसको हम अपने कोड के अंदर कभी भी कहीं भी

[31:42]

चेंज कर सकते हैं अब नेक्स्ट टॉपिक जिसके

[31:44]

बारे में हम पढ़ेंगे इस चैप्टर में वो है

[31:46]

हमारे कमेंट्स जैसे हम लाइफ के अंदर

[31:48]

कुछ-कुछ कमेंट्स देते रहते हैं ना लोगों

[31:50]

को या हम किसी

[31:57]

चीज लिखना जो हमारे कोड का पार्ट नहीं है

[31:59]

कुछ एक्स्ट्रा पार्ट है कॉमेंट्स इंग्लिश

[32:01]

में भी हो सकते हैं कुछ-कुछ लैंग्वेजेस

[32:03]

अलाउ करती हैं कि हमारे कॉमेंट्स हम

[32:04]

डिफरेंट लैंग्वेजेस में भी लिखते हैं हम

[32:06]

चाइनीज में कॉमेंट्स लिख सकते हैं रशियन

[32:08]

में लिख सकते हैं तो ये वो पार्ट है जो

[32:10]

कोड में इंक्लूडेड नहीं है ये हमारे

[32:12]

एक्स्ट्रा इंस्ट्रक्शंस होते हैं अब

[32:14]

कॉमेंट दो टाइप्स के होते हैं सी के अंदर

[32:16]

सबसे पहले होते हैं हमारे सिंगल लाइन

[32:18]

कॉमेंट्स जिनको हम डबल स्लैश लगाकर लिखते

[32:21]

हैं और उसके बाद होते हैं हमारे मल्टीपल

[32:23]

लाइन कॉमेंट्स जिनको हम इस फॉर्मेट में

[32:25]

लिखते हैं अब अपने कोड में एक्चुअली

[32:27]

कमेंट्स लिख कर देखते हैं कि लिखे कैसे

[32:29]

जाते हैं जैसे इस कोड के अंदर हमने अंदर

[32:32]

बताया है कि डेटा टाइप्स क्या होते हैं तो

[32:34]

यहां पर हम एक कॉमेंट लिख सकते हैं डबल

[32:36]

स्लैश लगाकर दिस कोड डिस्प्लेज हाउ डेटा

[32:42]

टाइप्स वर्क इन सी तो ये एक ऐसी चीज है जो

[32:46]

इंग्लिश में लिखी गई है और कोड का पार्ट

[32:49]

नहीं है ऐसे ही मान लो कि हमें मल्टीपल

[32:51]

लाइन में कॉमेंट्स लिखने होते हैं तो हम

[32:53]

लिखते हैं स्लश एस्ट रिस्क और एस्ट रिस्क

[32:58]

स्लैश और इसके बीच में हम कुछ भी लिख सकते

[33:00]

थे दिस इज अ मल्टी लाइन कमेंट तो यह हमारी

[33:06]

मल्टीपल लाइंस पर हम कुछ-कुछ चीजें लिखे

[33:09]

जा रहे हैं और ये सारी कॉमेंट का पार्ट है

[33:12]

अब अगर इसको हम हटा दें तो ये जो इंग्लिश

[33:14]

वाली चीज है ना ये हमें एरर देगी क्योंकि

[33:17]

ये एक्चुअली सी को समझ ही नहीं आ रही

[33:19]

कंपाइलर समझ ही नहीं पा रहा कि इसका मतलब

[33:21]

क्या है ये एक्चुअली लिखा क्या हुआ है

[33:23]

इसीलिए वो पार्ट जो सेंस नहीं बना था

[33:25]

कंपाइलर के लिए उसको हम हमेशा कमेंट्स में

[33:27]

लिखते हैं जैसे बड़ी-बड़ी कंपनीज में जब

[33:28]

भी आप कोड लिखने चलेंगे तो कोड इतना

[33:31]

ज्यादा हजारों लाइनों के कोड हो जाते हैं

[33:33]

कि उसको समझना मुश्किल हो जाता है इसीलिए

[33:35]

दूसरे प्रोग्रामर्स को हेल्प करने के लिए

[33:37]

हम अपने कोड के अंदर कमेंट्स लिखते हैं

[33:38]

उनको ये बताने के लिए कि कोड का कौन सा

[33:41]

पार्ट क्या फंक्शन परफॉर्म करता है अब

[33:43]

नेक्स्ट टॉपिक जिसको हम पढ़ेंगे वो है

[33:45]

आउटपुट जब भी हम किसी भी लैंग्वेज में

[33:47]

प्रोग्रामिंग करते हैं इनपुट आउटपुट बहुत

[33:49]

एसेंशियल बहुत जरूरी पार्ट है

[33:51]

प्रोग्रामिंग का सबसे पहले सीखेंगे सी के

[33:53]

अंदर हम आउटपुट कैसे दिखाते हैं उसके बाद

[33:55]

सीखेंगे सी के अंदर हम इनपुट कैसे लेते

[33:57]

हैं तो आउटपुट दिखाने के लिए सी के अंदर

[33:59]

अभी हमने लिखा था एक स्टेटमेंट वो होती है

[34:02]

प्रिंट एफ और उसके बाद लगाते हैं हम

[34:04]

पैरेंस पैरेंस के अंदर हम लिखते हैं डबल

[34:07]

कोट्स और डबल कोट्स के अंदर हम कुछ भी लिख

[34:09]

सकते हैं हमने लिखा था हेलो वर्ल्ड पर

[34:11]

यहां पर हम लिख सकते हैं हेलो श्रद्धा

[34:14]

यहां पर हम लिख सकते हैं हेलो अपना कॉलेज

[34:17]

यहां पर हम लिख सकते हैं हेलो सी तो कुछ

[34:20]

भी लिखा जा सकता है इन डबल कोड्स के अंदर

[34:22]

और जो भी चीज हम लिखेंगे वो वैसी की वैसी

[34:25]

स्क्रीन पे हमारे पास प्रिंट हो जाएगी और

[34:27]

इस प्रिंट प्रिंट करवाने का

[34:28]

रिस्पांसिबिलिटी जो है इस प्रिंट एफ नाम

[34:31]

के एक फंक्शन ने लिखी है प्रिंट एफ हमारे

[34:33]

लिए कुछ भी प्रिंट करवा देता है स्क्रीन

[34:35]

पे और इस लाइन के एंड में हम लगा देंगे

[34:37]

सेमीकलन यह दिखाने के लिए की लाइन यहां पर

[34:39]

खत्म हो गई इसका एग्जांपल अगर

[34:41]

देखें तो अपने कोड के अंदर हम यहां पर लिख

[34:44]

सकते हैं प्रिंट एफ और उसमें लिख सकते हैं

[34:46]

हेलो सी इसको कर लेते हैं सेव ऊपर वाली

[34:50]

एक्स्ट्रा स्पेस को उडा देते हैं और रन

[34:52]

करते हैं अपने कोड को टर्मिनल खोलकर ऊपर

[34:55]

आएगा जीसीसी हेलोड स और हमारे लिए प्रिंट

[34:58]

हो गया हेलो सी अब मान लीजिए हमें बार-बार

[35:00]

बार-बार हेलो सी प्रिंट करना है उसको कैसे

[35:02]

प्रिंट करेंगे इसी लाइन को कॉपी कर लेते

[35:05]

हैं पेस्ट पेस्ट पेस्ट तो चार बार हमने

[35:09]

हेलो सी को प्रिंट कर लिया इसको सेव कर

[35:11]

लेते हैं और यहां पर दोबारा से रन करेंगे

[35:14]

अब हमारे पास हेलो सी प्रिंट हुआ उसके

[35:16]

इमीडिएट बाद दोबारा से हेलो सी प्रिंट हुआ

[35:19]

इसी तरीके से चार बार प्रिंट हुआ पर हम तो

[35:21]

चाहते थे कि अगली अगली अगली अगली लाइन में

[35:23]

प्रिंट हो तो वो नेक्स्ट लाइन हमेशा करने

[35:25]

के लिए ना यहां पर हमें एक चीज लिखनी

[35:27]

पड़ती है स्पेशल चीज जो है हमारा बै स् n

[35:32]

ये बै स् n दिखाता है कि जो भी हमें

[35:34]

प्रिंट करना था ना प्रिंट f में वो तो

[35:36]

प्रिंट हो जाएगा उसके बाद एक नेक्स्ट लाइन

[35:38]

आ जाएगी इसी सेम को यहां पर बै स् n लिख

[35:41]

देते हैं इसके बाद भी नेक्स्ट लाइन चाहिए

[35:42]

इसके बाद भी नेक्स्ट लाइन चाहिए और इसके

[35:45]

बाद भी नेक्स्ट लाइन चाहिए तो इसको कर

[35:47]

देते हैं सेव अब यहां पर दोबारा रन करेंगे

[35:49]

इसको तो अब हमारा जो आउटपुट है वो नेक्स्ट

[35:52]

लाइन में चला गया है एक्चुअली हुआ क्या

[35:55]

इसने हेलो सी प्रिंट किया तो हेलो सी

[35:57]

प्रिंट हो गया उसके बाद बै स्ल ए प्रिंट

[36:00]

किया तो बैक स्ल ए यानी नेक्स्ट लाइन तो

[36:02]

हम यहां पर आ गए फिर दोबारा से हेलो सी

[36:04]

प्रिंट हुआ फिर दोबारा से बै स् n तो

[36:06]

नेक्स्ट लाइन में आ गए इसी तरीके से जब भी

[36:08]

हमें आउटपुट नेक्स्ट लाइन में लेके आना हो

[36:10]

ना तो हम बै स् n लिख देते हैं अब मान

[36:13]

लेते हैं हमने कोई वेरिएबल बनाया है अपने

[36:15]

कोड के अंदर जैसे अगर हमने लिखा इंट ए इ

[36:19]

इक्वल टू 22 और इस एज को हम प्रिंट करवाना

[36:23]

चाहते हैं अपनी स्क्रीन पर कैसे प्रिंट

[36:26]

करवाए इस एज को तो हमें इसके लिए लिखना

[36:28]

पड़ेगा प्रिंट एफ एज इज क्या हम लिखें एज

[36:33]

एक बार इस चीज का हम आउटपुट देखते हैं एज

[36:36]

इज एज तो ये जो डबल कोट्स के अंदर हमने जो

[36:39]

भी लिखा ना इसको हम स्ट्रिंग कहते हैं

[36:41]

यानी ये चीज वैसी की वैसी प्रिंट हो जाएगी

[36:43]

पर हमें तो इसके एज के अंदर का नंबर

[36:46]

प्रिंट करवाना था तो आउटपुट को प्रिंट

[36:48]

करवाने के स के अंदर कुछ-कुछ केसेस आ जाते

[36:51]

हैं इनमें से सबसे पहला केस होता है कि जब

[36:53]

भी हमें कोई इंटी जर प्रिंट करवाना हो तो

[36:56]

उसके लिए हमें अपनी प्रिंट स्टेटमेंट में

[36:58]

लिखना पड़ता है सबसे पहले परसेंटेज का

[37:01]

साइन और डी यह डी दिखाता है डबल वैल्यू को

[37:04]

डबल भी एक डाटा टाइप होता है इसके बारे

[37:05]

में हम बाद में पढ़ रहे होंगे तो परसेंटेज

[37:08]

का साइन और डी और उसके बाद जैसे ही लाइन

[37:10]

खत्म हो जाए फिर लिखेंगे कॉमा और फिर लिख

[37:13]

देंगे अपने वेरिएबल की वैल्यू तो जब भी

[37:15]

चीज प्रिंट होगी ना यह पूरा का पूरा तो

[37:17]

प्रिंट हो जाएगा और इस परसेंटेज डी की जगह

[37:20]

हमारी एज की वैल्यू आ जाएगी जो उसको

[37:22]

रिप्लेस कर देगी उसी तरीके से अगर रियल

[37:25]

नंबर्स के लिए करवाना है तो हम लिख

[37:27]

लिखेंगे परसेंटेज f और फिर लिख देंगे

[37:29]

वेरिएबल तो ये वेरिएबल की वैल्यू रिप्लेस

[37:31]

कर लेगी इस परसेंटेज f को जब भी आउटपुट

[37:33]

प्रिंट होगा अगर कैरेक्टर्स के लिए कराना

[37:36]

है तो लिखेंगे परसेंटेज c और फिर लिख

[37:38]

देंगे अपना वेरिएबल तो वेरिएबल यहां पर इस

[37:41]

परसेंटेज c को रिप्लेस कर लेगा तो इस

[37:43]

तरीके से हमें जब भी कोई वेरिएबल प्रिंट

[37:46]

करवाना होता है जिसका डटा टाइप है कुछ

[37:48]

जिसका कुछ टाइप है तो उसके लिए हम

[37:50]

परसेंटेज डी लिखते हैं इंटी जर टाइप में

[37:52]

परसेंटेज f लिखते हैं रियल नंबर्स में और

[37:54]

परसेंटेज स लिखते हैं कैरेक्टर्स में और

[37:56]

इनको एक्चुअली सी के अंदर इन तीनों को हम

[37:59]

कहते हैं फॉर्मेट

[38:01]

स्पेसिफाई करते हैं कि आउटपुट किस फॉर्मेट

[38:04]

में हमारे पास आएगा और ये जो प्रिंट एफ

[38:06]

फंक्शन है ये एक्चुअली हमारा लाइब्रेरी

[38:08]

फंक्शन है जो बाय डिफॉल्ट सी के अंदर हमें

[38:10]

पहले से परोस के दे दिया जाता है तो एक

[38:12]

बार इन आउटपुट के केसेस को हम भी देख लेते

[38:15]

हैं एग्जीक्यूट करके अब अगर हमें एज लिखनी

[38:17]

है तो हमें पता है कि यहां हमें लिखना

[38:19]

पड़ेगा परसेंटेज डी यहां लगाना पड़ेगा

[38:21]

कॉमा और यहां हम लिखेंगे एज इसको कर लेते

[38:23]

हैं सेव और खोलते हैं अपना टर्मिनल अब

[38:26]

हमारे पास प्रिंट हो कर आ गया है एज इज 22

[38:30]

यहां पे यह परसेंटेज का साइन इसलिए आ रहा

[38:32]

है क्योंकि हमने नेक्स्ट लाइन नहीं दिया

[38:34]

तो इसको सेव करके अगर हम नेक्स्ट लाइन दे

[38:37]

अब हमारे पास आया एज इज 22 अब सिमिलर

[38:40]

तरीके से अगर एज की जगह हमें प्रिंट

[38:42]

करवानी है पाई की वैल्यू तो हम लिखेंगे

[38:44]

फ्लोट पा =

[38:47]

3.14 और यहां पर हम लिखेंगे परसेंटेज f और

[38:52]

यहां लिखेंगे पाई इसको कर लेते हैं सेव तो

[38:55]

अब हमारे पास प्रिंट हुआ एज इज

[38:59]

3.14 तो बाय डिफॉल्ट फ्लोट के अंदर कुछ

[39:02]

नंबर ऑफ डेसिमल्स हैं जो हमेशा प्रिंट ही

[39:04]

होने होते हैं तो उनको हमने यहां पर

[39:06]

प्रिंट कर दिया है अब आप सोच रहे होंगे कि

[39:08]

बार-बार ये जो स्टेटमेंट है एग्जीक्यूशन

[39:10]

की ये कैसे आ रही है तो आपकी जो एरो कीज

[39:12]

होती हैं कीबोर्ड पर आप उनको अपर वाली की

[39:15]

जो है प्रेस कर सकते हैं तो पुरानी

[39:16]

कमांड्स में जा सकते हैं तो तो आपको

[39:18]

बार-बार पूरी स्टेटमेंट एग्जीक्यूट करने

[39:19]

के लिए लिखनी नहीं पड़ेगी आप डायरेक्टली

[39:21]

उस की को प्रेस करके एग्जीक्यूट कर सकते

[39:23]

हैं अब सिमिलर वे में अगर हमें कोई

[39:25]

कैरेक्टर प्रिंट करवाना हो मान लो हमने

[39:26]

कैरेक्टर बनाया है एक स्टार जो स्टार

[39:29]

वेरिएबल का नाम है और इसके अंदर एस्टरिस

[39:33]

को स्टोर कराया है तो हम यहां लिखेंगे

[39:35]

स्टार इज यहां आ जाएगा परसेंटेज सी और

[39:39]

यहां आ जाएगा स्टार इसको कर लेते हैं सेव

[39:42]

और इसको रन किया तो आउटपुट हमारे पास आया

[39:45]

स्टारस एस्ट डिस्क तो कुछ इस तरीके से

[39:48]

हमारे डिफरेंट तरीके के डाटा को हम अपनी

[39:51]

स्क्रीन के ऊपर प्रिंट करवा सकते हैं अब

[39:53]

नेक्स्ट कांसेप्ट जो काफी इंपॉर्टेंट

[39:55]

कांसेप्ट है इस लैंग्वेज का वो है हमारा

[39:59]

इनपुट स के अंदर इनपुट लेने के लिए हम एक

[40:02]

फंक्शन का इस्तेमाल करते हैं जो एक दूसरा

[40:05]

लाइब्रेरी फंक्शन है जिसका नाम है स्कैन

[40:07]

एफ जैसे प्रिंट करने के लिए यूज किया था

[40:10]

प्रिंट एफ वैसे ही कुछ भी इनपुट लेने के

[40:12]

लिए स्कैन करने के लिए यूज करेंगे स्कैन f

[40:15]

अब इसका फॉर्मेट यह रहता है कि जो भी

[40:16]

वैल्यू हमें इनपुट लेनी है उसका सबसे पहले

[40:20]

टाइप लिख देंगे तो फॉर्मेट

[40:22]

स्पेसिफाई परसेंटेज डी हमें दिखाता है कि

[40:25]

हम एक इंट टाइप की वैल्यू को इनपुट लेने

[40:27]

वाले हैं तो सबसे पहले अपने कोट्स लगा

[40:29]

देंगे डबल कोट्स उसके अंदर अपना फॉर्मेट

[40:34]

स्पेसिफाई कॉमा कॉमा के बाद हमें लिखना है

[40:37]

कि ये जो वैल्यू हम इनपुट ले रहे हैं उसका

[40:38]

टाइप तो हमने समझ लिया अब उसको कौन से

[40:41]

वेरिएबल में स्टोर कराना है तो लिखेंगे

[40:44]

अपने वेरिएबल का नाम और उस वेरिएबल के नाम

[40:46]

से पहले एम परसेंट लगा देंगे ये एम परसेंट

[40:49]

यानी एंड एक्चुअली एक एड्रेस है ये इस

[40:52]

वेरिएबल का एड्रेस है यानी ये क्या करेगा

[40:55]

मेमोरी के अंदर जहां पर एज को कोई मेमोरी

[40:59]

का ब्लॉक दिया गया है उस एड्रेस पर जाएगा

[41:02]

और जो भी इनपुट हमारे पास आएगा उसको उस

[41:05]

एड्रेस प जाके स्टोर करा देगा तो कुछ इस

[41:08]

तरीके का काम रहता है स्कैनफ का अब क्या

[41:11]

करते हैं एक नंबर को इनपुट लेके देखते हैं

[41:13]

कि एक्चुअली स्कैन एफ जो है स्कैन कैसे

[41:15]

करता है नंबर को हम बना लेते हैं एक

[41:18]

वेरिएबल एज अब यहां पर लिखेंगे प्रिंट एफ

[41:21]

एंटर एज अब इस वेरिएबल को स्कैन कर लेते

[41:24]

हैं स्कैन एफ से परसेंटेज डी एड्रेस एज और

[41:29]

जो भी वैल्यू हमारे पास वहां पर जाकर

[41:31]

स्टोर हो जाएगी उसी को हम प्रिंट करवा

[41:33]

देंगे यानी दोबारा से परसेंटेज डी इससे

[41:35]

पहले लिख देते हैं एज इज एज इसको कर लेते

[41:39]

हैं सेव अब ऊपर जाकर अपना टर्मिनल खोलते

[41:41]

हैं सबसे पहले एंटर करनी है हमें अपनी एज

[41:45]

एंटर कर देंगे 22 हमारे पास प्रिंट हुआ है

[41:47]

एज इज 22 तो जो भी हमने एज एंटर की थी वो

[41:50]

हमारे पास वापस प्रिंट होकर आ गई है यहां

[41:53]

पे स्कैनफ ने क्या किया एज को एंटर किया

[41:56]

और मेमोरी के अंदर एज वेरिएबल जिस भी

[41:58]

लोकेशन पर पॉइंट कर रहा था वहां पे जाके

[42:00]

उस एज को हमने स्टोर करा दिया उस नंबर 22

[42:03]

को स्टोर करा दिया और जब प्रिंट एफ ने वो

[42:05]

नंबर वापस मांगा तो उसके बाद हमारे पास

[42:07]

प्रिंट हो गया एज इज और यहां पर इसने

[42:10]

दिखाया कि इंट टाइप की वैल्यू प्रिंट करनी

[42:12]

है और फिर हमने एज के अंदर से डाटा निकाल

[42:14]

के अपनी स्क्रीन पे दिखा दिया तो कुछ इस

[42:16]

तरीके से हमारा इनपुट आउटपुट वर्क करता है

[42:18]

सी के अंदर अब हम यहां पर एक छोटा सा

[42:21]

प्रोग्राम बनाने वाले हैं इस छोटे से

[42:22]

प्रोग्राम में क्या करेंगे एक नंबर ए को

[42:25]

इनपुट लेंगे एक नंबर बी को इनपुट लेंगे और

[42:28]

इन दोनों के सम को हम आउटपुट करा देंगे

[42:31]

तोय छोटा सा कोड हम लिखने वाले हैं इस कोड

[42:34]

के लिए सबसे पहले उन नंबर्स को हम क्रिएट

[42:36]

कर लेते हैं तो इंट ए एंड बी अब सबसे पहले

[42:40]

प्रिंट एफ करते हैं एंटर ए उसके बाद स्कैन

[42:45]

कर लेंगे ए को डी एंड ए उसके बाद प्रिंट

[42:51]

एफ कर देंगे एंटर बी फिर स्कैनफ से इसको

[42:55]

ले लेंगे इनपुट एंड b अब इन दोनों के सम

[43:00]

को एक तीसरे वेरिएबल में स्टोर करा देंगे

[43:02]

यानी इंट सम इ इ a + b तो यहां पे भी प्लस

[43:09]

माइनस मल्टीप्लाई डिवाइड रिमाइंडर ये सब

[43:12]

मैथ की तरह काम करते हैं तो प्लस के लिए

[43:14]

प्लस साइन होता है माइनस के लिए माइनस

[43:16]

साइन होता है और ये इक्वल टू क्या करता है

[43:18]

इन दोनों की वैल्यू को कैलकुलेट करेगा और

[43:20]

उसको सम के अंदर डाल देगा ये इक्वल टू जो

[43:23]

है इसको असाइनमेंट ऑपरेटर कहते हैं प्लस

[43:25]

को हम एडिशन ऑपरेटर की तरह यूज़ करते हैं

[43:29]

इन ऑपरेटर्स के बारे में डिफरेंट डिफरेंट

[43:31]

जो भी सी के अंदर होते हैं बाद में हम

[43:32]

डिस्कस कर रहे होंगे डिटेल में तो यह जो

[43:35]

सम हमारे पास आया है इसको अब प्रिंट करवा

[43:37]

देंगे प्रिंट एफ से सम

[43:40]

इज परसेंटेज

[43:42]

d सम इस कोड को कर लेते हैं सेव इसके अंदर

[43:46]

क्या किया हमने दो वेरिएबल बनाए a और b

[43:49]

सबसे पहले लिखा एंटर कर दो a तो a को हमने

[43:52]

एंटर करवा दिया और उसको उस वेरिएबल की

[43:54]

मेमोरी लोकेशन में जाके स्टोर कर दिया

[43:56]

उसके बाद b को एंटर करवाया उसको b की

[43:58]

मेमोरी लोकेशन में जाके स्टोर कर दिया

[44:00]

उसके बाद एक नया वेरिएबल बनाया सम जिसके

[44:02]

अंदर a और b को ऐड करके जो फाइनल वैल्यू

[44:04]

आई उसको स्टोर करा दिया उसके बाद हमने

[44:07]

प्रिंट करवा दिया है सम की वैल्यू को अब

[44:10]

अपने टर्मिनल को खोलकर इसका आउटपुट

[44:12]

एनालाइज करते हैं सबसे पहले हम a की

[44:15]

वैल्यू को एंटर करेंगे तो एंटर करते हैं

[44:18]

टू फिर एंटर करेंगे b की वैल्यू को इसमें

[44:21]

एंटर कर देते हैं फाइव तो हमारे पास

[44:23]

आउटपुट में आया सम इज सेवन इस तरीके से टू

[44:26]

और फाइव का दोनों का सम हुआ और फिर सेवन

[44:29]

प्रिंट हो गया अब यहां पे हम छोटी सी

[44:31]

ट्रिक सीखने वाले हैं यहां पर एक तीसरा

[44:34]

वेरिएबल सम हमने बनाया इसको तो हम हटा

[44:37]

देते हैं और डायरेक्टली क्या करेंगे इस सम

[44:40]

को हटाकर यहां लिख देंगे a + b और इसको कर

[44:44]

लेते हैं सेव और एक बार दोबारा से अपनी

[44:46]

कोड को रन करते हैं 2 5 तो डायरेक्टली

[44:50]

हमारे पास सेवन जो है जो हमारा सम है वो

[44:52]

प्रिंट हो गया तो हमें एक तीसरा वेरिएबल

[44:54]

बनाने की जरूरत नहीं पड़ी जब भी हमें सम

[44:56]

प्रिंट करवाना है अगर हमें यहां पर

[44:57]

डिफरेंस भी प्रिंट करवाना होता तो हम प्लस

[44:59]

की जगह माइनस लिख सकते थे दोनों का

[45:01]

प्रोडक्ट प्रिंट करवाना होता तो एस्टरिस

[45:04]

करके इनको मल्टीप्लाई भी कर सकते थे तो इस

[45:06]

तरीके से जो भी वैल्यू प्रिंट करवानी है

[45:08]

डायरेक्टली उस पर ऑपरेशंस कर सकते हैं और

[45:10]

उसको यहां पर हम लिख सकते हैं अब हमने

[45:12]

काफी सारी चीजें सीख ली है सी के अंदर और

[45:15]

ये सारी की सारी चीजें कैसे रन की इनको

[45:18]

हमने एक फाइल में लिखा और उस फाइल से

[45:20]

हमारे पास आउटपुट आते चले गए अब इस पूरे

[45:22]

के पूरे प्रोसेस को हम कंपाइलेशन कहते हैं

[45:25]

इस प्रोसेस को समझते हैं कि एक्चुअली होता

[45:27]

क्या है कंपाइलेशन की जो डेफिनेशन है वो

[45:30]

है अ कंप्यूटर प्रोग्राम दैट ट्रांसलेट्स

[45:33]

सी कोड इनटू मशीन कोड तो कंपाइलर एक ऐसा

[45:37]

प्रोग्राम होता है जो सी का कोड लिखता है

[45:39]

और उसको मशीन कोड में ट्रांसलेट कर देता

[45:41]

है जैसे जो हमारे पार्लियामेंट होते हैं

[45:44]

उसमें अगर कोई फॉरेन गेस्ट आए होते हैं तो

[45:46]

बीच में ट्रांसलेटर्स आते हैं अगर फ्रेंच

[45:48]

के प्राइम मिनिस्टर आएंगे तो बीच में

[45:49]

ट्रांसलेटर होगा जो उनकी फ्रेंच को समझेगा

[45:52]

और प्राइम मिनिस्टर यानी इंडियन प्राइम

[45:53]

मिनिस्टर तक पहुंचाएगा उसी तरीके से हमारे

[45:56]

कंप्यूटर के अंदर भी लैंग्वेजेस के लिए

[45:58]

ट्रांसलेटर्स होते हैं कंप्यूटर जो है वो

[46:00]

सी को नहीं समझता हमारी जो विंडोज मशीन है

[46:03]

मैक मशीन है

[46:25]

linux.com सी वाली एक फाइल थी उसको हमने

[46:29]

कंपाइलर के पास भेजा और सी के कंपाइलर ने

[46:31]

क्या किया सबसे पहले चेक करेगा कि फाइल जो

[46:34]

है सी जो रूल्स डिफाइन करता है जो

[46:36]

सिंटेक्स डिफाइन करता है उन सब को फॉलो कर

[46:38]

रही है ना कोई गलती तो नहीं है इसके अंदर

[46:40]

कोई एरर तो नहीं है हमारा जो वेरिएबल का

[46:42]

नाम है उसको हमने एक नंबर से तो शुरू नहीं

[46:45]

कर दिया अंडरस्कोर ही लगाया ना शुरुआत में

[46:47]

तो इस तरीके के बेसिक एरर्स को वो चेक

[46:49]

करता है और अगर एरर्स होते हैं तो फिर वो

[46:52]

कंपाइलेशन फेल कर देता है लेकिन अगर

[46:55]

कंपाइल हो जाती है हमारी फ मतलब उसमें कोई

[46:57]

सिंटेक्स वाले एरर्स नहीं है और उसके बाद

[47:00]

यह कंपाइलर उसको कन्वर्ट कर देता है

[47:04]

windows.exe फाइल में कन्वर्ट कर देता है

[47:06]

और

[47:20]

linux.com में भी डसी बना सकते हैं और विज

[47:24]

में भी डॉट आउट बना सकते हैं पर बाय

[47:25]

डिफॉल्ट जो आपको एक्सटेंशन दिख रही होगी

[47:28]

आपकी मशीन के अंदर वो यह एक्सटेंशन होगी

[47:31]

तो घबराने की बात नहीं है अगर आपको अभी

[47:33]

मेरी स्क्रीन पर डॉट आउट दिख रहा है और

[47:35]

अपनी स्क्रीन पर आपको डॉटसी दिख रहा है तो

[47:37]

अब हमने सी के जो है बेसिक बेसिक कांसेप्ट

[47:40]

समझ लिए हैं और अभी तक हमें थोड़ा बहुत

[47:42]

आईडिया लग चुका है कि एक्चुअली

[47:44]

प्रोग्रामिंग है क्या तो इसके अंदर हम दो

[47:46]

ऐसे सवाल सॉल्व करेंगे जो अगर आप कॉलेज की

[47:49]

पढ़ाई कर रहे हैं तो उसमें यूजुअली बेसिक

[47:51]

से अगर आपसे कोई इजी लेवल सवाल पूछे जाते

[47:53]

हैं तो वो कुछ ऐसे से देखेंगे इनमें सबसे

[47:56]

पहला प्रैक्टिस क्वेश्चन जिसको हम सॉल्व

[47:57]

करेंगे वो है राइट अ प्रोग्राम टू

[47:59]

कैलकुलेट एरिया ऑफ अ स्क्वायर तो स्क्वायर

[48:02]

का एरिया हमें कैलकुलेट करना है साइड

[48:04]

हमारे पास गिवन है हमें पता है मैथ हमने

[48:06]

छोटी क्लास में पढ़ ी रखी है कि स्क्वायर

[48:08]

का एरिया क्या होता है साइड मल्टीप्ला बाय

[48:11]

साइड तो हम क्या करेंगे एक ऐसा प्रोग्राम

[48:14]

बनाएंगे जिसमें साइड को इनपुट ले लेंगे और

[48:16]

फिर एरिया को आउटपुट दे देंगे अपने कोड के

[48:19]

अंदर यह चीज करके देखते हैं ऊपर एक कॉमेंट

[48:22]

लिख लेते हैं एरिया

[48:23]

ऑफ स्क्वायर सबसे पहले एक वेरिएबल डिफाइन

[48:27]

करेंगे साइड उसके बाद प्रिंट एफ कर लेते

[48:29]

हैं

[48:31]

एंटर साइड अब स्कैन एफ से उसको ले लेते

[48:36]

हैं इनपुट तो लिखेंगे परसेंटेज डी एंड

[48:39]

साइड अब हम प्रिंट करवा सकते हैं एरिया

[48:44]

इज परसेंटेज डी साइड इनटू साइड इसको कर

[48:50]

लेते हैं सेव और अपने टर्मिनल को खोलकर

[48:52]

इसको करते हैं रन हमारी साइड हम एंटर करते

[48:56]

हैं फोर तो हमारा एरिया आ गया स्क्वायर का

[48:58]

16 क्योंकि 4 * 4 इ 16 अब यहां पर जरूरी

[49:02]

नहीं है कि जो हमारी साइड हो वो एक इंटी

[49:03]

जर हो ये हमारी फ्लोट वैल्यू भी हो सकती

[49:06]

है अगर साइड हमारी फ्लोट वैल्यू हुई तो इस

[49:09]

केस में यहां पर परसेंटेज d की जगह

[49:11]

परसेंटेज f आ जाएगा यहां पर भी परसेंटेज f

[49:14]

आ जाएगा क्योंकि दो फ्लोट्स अगर

[49:15]

मल्टीप्लाई होते हैं तो फ्लोट वैल्यू

[49:17]

प्रोड्यूस होती है इसको कर लेंगे सेव और

[49:20]

दोबारा से करेंगे रन तो अब अगर साइड हम

[49:23]

एंटर करें फोर तो आएगा हमारे पास एरिया इज

[49:26]

[49:27]

16.00 तो ऑटोमेटिक फोर को उसने अंदर ही

[49:30]

इंटरनली फ्लोट में कन्वर्ट कर लिया अब

[49:33]

नेक्स्ट प्रैक्टिस क्वेश्चन जिसको हम करने

[49:35]

वाले हैं ये कहता है राइट अ प्रोग्राम टू

[49:38]

कैलकुलेट एरिया ऑफ अ सर्कल हमें यहां पर

[49:40]

लिखा है साइड पर यहां पर होना चाहिए कि

[49:42]

हमें सर्कल की रेडियस गिवन है और एरिया ऑफ

[49:46]

अ सर्कल हमें पता है होता है हमारे पास पा

[49:48]

r स् तो पा की वैल्यू तो पता ही है कि

[49:51]

कांस्टेंट होती है 3.14 इसमें r स् और

[49:54]

मल्टीप्लाई कर देंगे तो इस तरीके से एरिया

[49:56]

ऑफ़ अ सर्कल हमारे पास आ जाएगा इसके लिए

[49:58]

प्रोग्राम को थोड़ा सा चेंज कर लेते हैं य

[50:01]

फ्लोट रेडियस लिख देते हैं और यहां लिख

[50:05]

देते हैं

[50:06]

एंटर

[50:08]

रेडियस अब हमें जो भी वैल्यू एंटर होगी अब

[50:13]

जो भी वैल्यू एंटर होगी उसको हम रेडियस

[50:15]

वेरिएबल में स्टोर करा देंगे अब लिखेंगे

[50:18]

एरिया

[50:19]

इज पाई यानी 3.14 मल्टीप्ला बाय

[50:25]

रेडियस मलाड बाय रेडियस क्योंकि हमें लेना

[50:29]

है रेडियस का स्क्वायर इसको कर लेते हैं

[50:31]

सेव यहां पर रेडियस को हमने डिफाइन किया

[50:34]

वेरिएबल को उसके बाद प्रिंट एफ से लिखा

[50:37]

हमने स्क्रीन पर एंटर रेडियस फिर रेडियस

[50:39]

को हमने स्टोर करा लिया फिर हमने एरिया को

[50:41]

स्टोर करा लिया एरिया को कैसे स्टोर कराया

[50:43]

3.14 को मल्टीप्लाई कर दिया रेडियस से और

[50:46]

दोबारा मल्टीप्लाई कर दिया रेडियस से इसको

[50:49]

हम रन कर लेते हैं टर्मिनल में रेडियस अगर

[50:53]

हम एंटर करें थ्र तो आउटपुट हमारे पास आ

[50:56]

है कि सर्कल का एरिया है 28.2 600 तो इस

[51:00]

तरीके से हम इन सवालों को सॉल्व कर सकते

[51:02]

हैं अभी तक जितना भी हमने इस चैप्टर के

[51:05]

अंदर पढ़ा है अभी हमारा चैप्टर वन खत्म हो

[51:07]

चुका है हमने यहां पर अपना चैप्टर वन यानी

[51:10]

सी के सारे बेसिक कॉन्सेप्ट्स को बहुत

[51:12]

सक्सेसफुली कंप्लीट कर लिया है इन सारे

[51:14]

कांसेप्ट को यूज़ करके ऐसे-ऐसे क्वेश्चंस

[51:16]

होते हैं जो कभी-कभी आपके मिड सेमेस्टर या

[51:18]

एंड सेमेस्टर एग्जाम में पूछ लिए जाते हैं

[51:20]

जैसे हो सकता है फारेनहाइट से सेल्सियस का

[51:22]

कन्वर्जन दे दिया जाए सेल्सियस से

[51:24]

फारेनहाइट का कन्वर्जन दे दिया जाए या फिर

[51:26]

हमारे पास सिंपल इंटरेस्ट कैलकुलेट करने

[51:28]

के फॉर्मूले आपको बोल दिया जाए कि इस

[51:29]

फॉर्मूले को लगाओ या फिर यहां पे जैसे

[51:32]

हमने रेडियस निकाल रेडियस से हमने एरिया

[51:34]

निकाला है स्क्वायर का एरिया निकाला वैसे

[51:36]

रेक्टेंगल का एरिया बोल सकते हैं ट्रायंगल

[51:38]

का एरिया बोल सकते हैं या बोल सकते हैं

[51:40]

कंपाउंड इंटरेस्ट आप कैलकुलेट करें तो

[51:42]

बेसिकली मैथ के छोटे-मोटे फॉर्मूले लगाकर

[51:44]

जो भी चीजें पॉसिबल हो सकती हैं या इनपुट

[51:47]

आउटपुट से जो भी चीजें पॉसिबल हो सकती हैं

[51:49]

उस तरीके का हमें यह कांसेप्ट करने के बाद

[51:52]

कोड मिल सकता है अब नेक्स्ट चैप्टर है

[51:54]

हमारा चैप्टर टू यानी इंस्ट्रक्शंस एंड

[51:56]

ऑरेटर्स इसके अंदर हम पढ़ेंगे कि सी के

[51:58]

अंदर इंस्ट्रक्शंस और ऑपरेटर्स का क्या

[52:01]

मतलब होता है अब इस चैप्टर के अंदर हम

[52:03]

काफी सारी न्यूमेरिकल चीजें करेंगे जो

[52:04]

मैथ्स से रिलेटेड होंगी साथ के साथ हम

[52:07]

काफी सारे नए कांसेप्ट सीखेंगे तो अगर हम

[52:09]

नोट्स के अंदर ऐसे पेजेस देख रहे हैं

[52:11]

जिसके अंदर काफी सारी इंफॉर्मेशन लिखी हुई

[52:13]

है तो घबराना नहीं है क्योंकि उन चीजों को

[52:15]

एक साथ रटने की जरूरत नहीं है हमें सारे

[52:17]

के सारे नोट्स आपके पास नीचे अवेलेबल

[52:19]

होंगे जब आपका मन करे रिवीजन करने का जब

[52:21]

आपका मन करे कि अब मुझे इन चीजों को याद

[52:23]

करने की जरूरत है जैसे एग्जाम से एक दिन

[52:25]

पहले या इंटरव्यू के लिए अगर रिवीजन करना

[52:27]

है तब आप इनको जाकर एक्सेस कर सकते हैं उन

[52:29]

नामों को पढ़ सकते हैं अभी क्लास के चलते

[52:32]

टाइम पर जो चीजें हमारे दिमाग में रह रही

[52:34]

है उनको नेचुरली दिमाग में रखना है

[52:36]

एक्स्ट्रा अभी हमें चीजें मेमोराइज करने

[52:38]

का जो कष्ट है वो बिल्कुल नहीं लेना है तो

[52:41]

चैप्टर की शुरुआत करते हैं सबसे पहले हम

[52:43]

पढ़ेंगे कि इंस्ट्रक्शंस क्या होती है सी

[52:45]

के अंदर इंस्ट्रक्शंस की बेसिक डेफिनेशन

[52:47]

होती है कि दीज आर स्टेटमेंट्स इन अ

[52:49]

प्रोग्राम यानी अभी तक हम सी के जितने भी

[52:51]

प्रोग्राम लिख रहे थे कोड लिख रहे थे सब

[52:54]

में क्या था एक सीक्वेंस ऑफ इंस्ट्रक्शंस

[52:55]

थी एक के बाद एक के बाद एक के बाद एक के

[52:58]

बाद स्टेटमेंट्स लिखी हुई थी जब भी हम

[53:00]

प्रोग्राम की ऑफिशियल डेफिनेशन देखते हैं

[53:02]

ना तो इट इज अ सीक्वेंस ऑफ इंस्ट्रक्शंस

[53:04]

जैसे हमें मान लो मैगी बनानी होती है तो

[53:06]

सीक्वेंस ऑफ इंस्ट्रक्शंस क्या होते हैं

[53:08]

कि सबसे पहले पानी उबाल लो उसके अंदर मैगी

[53:10]

मसाला डालो और उसके अंदर अपनी एक्चुअल

[53:12]

मैगी डालो और फिर उसको गर्म होने दो चाय

[53:15]

बनानी होती है तो पहले पानी डालो उसके

[53:16]

अंदर हमारा दूध डाल देते हैं चीनी डाल

[53:19]

देते हैं चाय पत्ती डाल देते हैं अदरक डाल

[53:21]

देते हैं फिर उसको बॉयल करने देते हैं फिर

[53:24]

उसको छान लेते हैं तो ये कुछ सीक्वेंस ऑफ

[53:25]

इंस्ट्रक्शंस है वैसे ही किसी भी

[53:27]

प्रोग्राम के अंदर एक सीक्वेंस ऑफ

[53:29]

इंस्ट्रक्शंस होती हैं जो प्रोग्राम को

[53:30]

बताती हैं कि उसको क्या-क्या करना है अब

[53:33]

हम जब टाइप्स ऑफ इंस्ट्रक्शंस पढ़ते हैं

[53:35]

तो उसमें तीन टाइप्स हमारे आते हैं सबसे

[53:36]

पहला टाइप डिक्लेरेशन इंस्ट्रक्शन दूसरी

[53:39]

है हमारी एरिथ मेे िक इंस्ट्रक्शन और

[53:41]

तीसरी है हमारी कंट्रोल इंस्ट्रक्शन इन

[53:43]

तीनों इंस्ट्रक्शंस के अलग-अलग काम होते

[53:45]

हैं और काम के अकॉर्डिंग इनका नाम रखा हुआ

[53:47]

है तो ऐसा नहीं है कि इनको याद करना बहुत

[53:50]

मुश्किल होगा सबसे पहले अगर बात करें टाइप

[53:52]

डिक्लेरेशन इंस्ट्रक्शंस की तो टाइप

[53:54]

डिक्लेरेशन से क्या समझते हैं टाइ टाइप

[53:56]

डिक्लेरेशन यानी किसी भी वेरिएबल को

[53:58]

डिक्लेयर करना उसके टाइप के साथ तो जब भी

[54:01]

हम ऐसी स्टेटमेंट्स लिखते हैं ऐसी

[54:03]

इंस्ट्रक्शंस लिखते हैं जहां पर हमें एक

[54:05]

वेरिएबल बताना होता है और उसका टाइप हमें

[54:08]

डिक्लेयर करना होता है उसको हम टाइप

[54:09]

डिक्लेरेशन स्टेटमेंट दे देते हैं हम बहुत

[54:12]

टाइम से अपने सी कोड के अंदर टाइप

[54:13]

डिक्लेरेशन स्टेटमेंट्स लिखते आ रहे हैं

[54:16]

इसको हम लिख सकते हैं जैसे अगर हमने लिखा

[54:18]

इंट a = 4 यह भी हमारी एक टाइप डिक्लेरेशन

[54:22]

स्टेटमेंट है अगर हमने लिखा कैरेक्टर c इ

[54:25]

इक्व टू एस्ट रिस्क ये भी हमारी एक टाइप

[54:28]

डिक्लेरेशन स्टेटमेंट है पर जब भी हम ये

[54:30]

स्टेटमेंट्स लिखते हैं ना एक छोटी सी गलती

[54:32]

हम कर देते हैं कि एक रूल को भूल जाते हैं

[54:35]

रूल हमारा कहता है डिक्लेयर वेरिएबल बिफोर

[54:38]

यूजिंग इट जब भी हम किसी वेरिएबल को यूज

[54:41]

कर रहे हैं उसको यूज़ करने से पहले हमें

[54:44]

डिक्लेयर जरूर कर देना है यानी देखना है

[54:46]

उसके अंदर कोई वैलिड वैल्यू हो हमने

[54:48]

कंपाइलर को पहले ही बता दिया हो कि यह

[54:50]

वेरिएबल एजिस्ट करता है कोड में और फिर हम

[54:52]

यूज करें अगर ऐसा नहीं होगा और सी कंपाइलर

[54:55]

अचानक से किसी वेरिएबल को देख लेगा कि ये

[54:57]

कहां से आ गया तो फिर वो एरर थ्रो करेगा

[55:00]

जैसे इसके वैलिड एग्जांपल्स अगर देखें तो

[55:02]

हमने यहां पर इंट a को डिक्लेयर किया एज

[55:05]

22 फिर इंट b में लिखा है कि a की वैल्यू

[55:08]

b में डाल दो यह बिल्कुल सही है क्योंकि a

[55:10]

ऑलरेडी डिक्लेयर हो चुका है और फिर b में

[55:12]

उसकी वैल्यू गई है और इसी को अगर हम कोड

[55:15]

की फॉर्म में लिखकर देखें तो अपने फंक्शन

[55:17]

के अंदर हम लिख सकते हैं इंट a = 22 और

[55:22]

फिर लिखें अगर इंट b = a तो यहां पर कोई

[55:25]

भी ए एरर हमारे पास नहीं आया यह कोड जो है

[55:28]

हमारा बहुत अच्छे से काम करेगा उसके बाद

[55:30]

हम क्या कर सकते हैं अगर हम इस तरीके से

[55:32]

भी लिख रहे हैं इंट c = ू b + 1 यानी

[55:35]

ऑलरेडी डिक्लेयर्ड एक वेरिएबल है उसमें आप

[55:37]

कुछ ऐड कर रहे हैं या फिर इसमें अगर -1

[55:40]

होता या फिर ये मल्टीप्ला बाय 2 होता

[55:43]

डिवाइडेड बाय 3 होता तो इस तरीके की भी

[55:46]

अगर हम एरिथ मेे ऑपरेशंस करते राइट हैंड

[55:49]

साइड पे और फिर उसको c में असाइन करते हैं

[55:51]

तो वो भी वैलिड है वो भी बिल्कुल सही है

[55:54]

इसको एक्चुअली लिख के देखते हैं प्रोग्राम

[55:55]

में c इ इक्वल टू हमारा हो जाए अगर b

[55:59]

मल्टीप्ला बाय 6 तो कोई एरर नहीं आया

[56:02]

हमारे पास क्योंकि एक वैलिड स्टेटमेंट है

[56:05]

एक और टाइप ऑफ वैलिड इंस्ट्रक्शन क्या हो

[56:06]

सकता है इंट d = 1 e इसमें हमारे पास क्या

[56:11]

हुआ कि हमने एक वेरिएबल डिक्लेयर किया d

[56:14]

जिसको वैल्यू दे दी वन इसके साथ-साथ हमने

[56:16]

एक और इंटी जर वेरिएबल डिक्लेयर किया e

[56:18]

लेकिन e को अभी कोई वैल्यू हमने दी नहीं

[56:21]

है तो ये बिल्कुल वैलिड स्टेटमेंट है जहां

[56:23]

d की वैल्यू असाइन हो रही है पर e की नहीं

[56:25]

हो रही इसको भी हम कोड में लिख के देख

[56:27]

लेते हैं इंट d

[56:30]

= हमने वन दे दिया पर e जो है उसको कोई

[56:33]

वैल्यू नहीं दी तो यह भी बिल्कुल वैलिड

[56:36]

स्टेटमेंट होगा अब कुछ एग्जांपल्स देखते

[56:38]

हैं इनवैलिड स्टेटमेंट्स के c के अंदर

[56:41]

जैसे अगर हम कोई वेरिएबल बनाए ओल्ड एज अब

[56:45]

ओल्ड एज वेरिएबल के अंदर अगर हम कोई

[56:47]

वैल्यू स्टोर करा दें व्हिच इज़ 22 और फिर

[56:50]

हम एक नया वेरिएबल बनाएं न्यू एज न्यू एज

[56:54]

को हम बना दें ओल्ड एज

[56:57]

प्लस इयर्स यानी कितने इयर्स पास हो गए

[57:00]

हैं तो यहां पर ओल्ड एज वेरिएबल तो ऑलरेडी

[57:02]

है पर इयर्स नहीं है अब मान लो इयर्स को

[57:05]

भी हम डिक्लेयर करने निकले इंट इयर्स इ

[57:07]

इक्व 2 कि 2 साल के बाद हमारी नई एज क्या

[57:11]

होने वाली है अब इयर्स हमने बता तो दिया

[57:13]

कोड के अंदर कि उसकी वैल्यू टू है फिर भी

[57:15]

यहां पे रेड लाइन क्यों आ रही है क्योंकि

[57:17]

हमने ईयर्स को बताने से पहले उसको यूज कर

[57:19]

लिया है तो वेरिएबल को डिक्लेयर करने से

[57:22]

पहले जब हम उसको यूज कर लेते हैं तो वो

[57:24]

एरर देता है स के अंदर यानी कंपाइलर क्या

[57:27]

करता है लाइन बाय लाइन जाता है इस लाइन

[57:28]

में उसने पढ़ लिया कि ओल्ड एज एक वेरिएबल

[57:30]

है उसकी वैल्यू 22 है इस लाइन में पढ़

[57:33]

लिया कि इन न्यू एज भी हमारा एक इंट

[57:35]

वेरिएबल है उसकी वैल्यू है ओल्ड एज की

[57:37]

वैल्यू जो उसको पता है क्या था प्लस इयर्स

[57:39]

अब वो यहां पे कंफ्यूज हो जाएगा कि इयर्स

[57:41]

तो अभी तक पढ़ा ही नहीं मैंने इयर्स तो वो

[57:43]

अगली लाइन में पढ़ने वाला था इसीलिए अगर

[57:46]

इस तरीके की कोई स्टेटमेंट है तो उसमें

[57:47]

इयर्स को ऊपर होना चाहिए तभी ये एक वैलिड

[57:51]

स्टेटमेंट होगी तभी जो हमारी टाइप

[57:53]

डिक्लेरेशन स्टेटमेंट्स होती हैं उनके

[57:54]

अंदर एरर्स नहीं आएंगे अब एक और टाइप की

[57:57]

हम वैलिड स्टेटमेंट समझे अगर तो मल्टीपल

[57:59]

वेरिएबल को हम एक साथ डिक्लेयर कर सकते

[58:01]

हैं यानी यहां पर हमने उनको डिक्लेयर कर

[58:03]

दिया इंट a b c एंड उसके बाद a को b को c

[58:07]

को तीनों को सेम वैल्यू असाइन कर दी व्हिच

[58:09]

इज़ वन यह वैल्यू कैसे असाइन हुई वन की

[58:11]

वैल्यू c में असाइन हुई फिर c की वैल्यू

[58:13]

यानी व b में असाइन हुई फिर b की वैल्यू

[58:15]

यानी व a में असाइन हुई तो इस तरीके का

[58:17]

प्रोसेस रहा इसको एक बार अपने कोड में हम

[58:20]

करके भी देख लेते हैं जैसे अगर हम कुछ

[58:23]

वेरिएबल डिक्लेयर करते हैं x y और z

[58:27]

तो हम वैल्यूज दे सकते हैं x = y = z = 4

[58:32]

तो इस तरीके की जो स्टेटमेंट है वो c के

[58:35]

अंदर वैलिड है पर वही अगर इसका दूसरा हम

[58:37]

वर्जन देखें जिसमें हम डिक्लेरेशन के टाइम

[58:40]

पर ही यहां पे फोर दे

[58:42]

दे यानी इन सबको इक्वल टू करें और हम सोचे

[58:46]

कि एक लाइन स्किप कर देते हैं एक्स्ट्रा

[58:49]

हमें क्यों लिखना तो यहां पर रेड लाइन

[58:51]

ऑटोमेटिक आ जाती है ये रेड लाइन क्यों आई

[58:54]

क्योंकि जब हम फोर को z में असाइन कर रहे

[58:57]

हैं तो फिर उसकी वैल्यू y के पास जा रही

[59:00]

है और वह सोच रहा है अभी तक तो जो z है वह

[59:03]

कंपाइलर को पता ही नहीं क्या है क्योंकि

[59:05]

ये लाइन अभी खत्म नहीं हुई है सेम लाइन के

[59:07]

अंदर हम जो z है उसमें वैल्यू असाइन भी कर

[59:10]

रहे हैं और उसकी वैल्यू किसी और को भी दे

[59:11]

रहे हैं सेम स्टेटमेंट में हम y को एक

[59:14]

वैल्यू असाइन भी कर रहे हैं और फिर उसकी

[59:16]

वैल्यू किसी और को भी दे रहे हैं यानी

[59:18]

यूज़ और डिक्लेयर साथ में नहीं कर सकते

[59:21]

पहले हमेशा डिक्लेयर करना पड़ेगा उसके बाद

[59:23]

वेरिएबल को यूज करना पड़ेगा नहीं तो c

[59:26]

हमें एरर दे देगा तो इस तरीके के जो एरर्स

[59:28]

हैं उन्हें हमें नहीं करना जब भी मल्टीपल

[59:30]

वेरिएबल साथ में डिफाइन कर रहे हैं c के

[59:32]

अंदर डिक्लेयर कर रहे हैं तो उनको एक साथ

[59:34]

डिक्लेयर कर दीजिए पर उनकी वैल्यूज जो है

[59:36]

उनका यूसेज जो है वो बाद में होगा नेक्स्ट

[59:39]

टाइप ऑफ इंस्ट्रक्शंस जो सी के अंदर

[59:40]

एजिस्ट करती हैं वो है हमारी एरिथ मेे िक

[59:42]

इंस्ट्रक्शंस एरिथ मेे शब्द ऐसा है जो

[59:45]

हमने 11 12थ में नाथ 10थ में या सिक्सथ टू

[59:47]

एथ की मैथ्स में जरूर पढ़ा होगा एरिथ मेे

[59:49]

िक का मतलब हम समझते हैं कि जहां प्लस

[59:51]

माइनस मल्टीप्लाई डिवाइड ये सब चल रहा

[59:54]

होता है यानी बेसिकली मैथ्स से रिलेटेड

[59:56]

सारी चीजें तो मैथ की अगर हम कोई भी

[59:58]

स्टेटमेंट देखें जैसे मान लीजिए हम a + b

[60:01]

का एग्जांपल लें तो उसके अंदर जिन चीजों

[60:04]

पर ऑपरेशन परफॉर्म होता है यानी प्लस हो

[60:06]

रहा है जो चीज मल्टीप्लाई हो रही है

[60:08]

डिवाइड हो रही है जिसका रिमाइंडर हम निकाल

[60:09]

रहे हैं क्वेश निकाल रहे हैं इनको हम कहते

[60:12]

हैं ऑपरेंट तो यहां पर a बन जाएगा हमारा

[60:15]

ऑपरेंट वन बी बन जाएगा हमारा ऑपरेंट टू

[60:18]

इसी तरीके से अगर कोई और स्टेटमेंट होती

[60:20]

जैसे a + b - c ल्ड बा d तो यहां पर a b c

[60:25]

d हमारे चार ऑपरेंट होते हैं और दूसरी

[60:29]

टर्म जिसको हमें सीखने की जरूरत है वो है

[60:31]

ऑपरेटर ऑपरेटर क्या होता है वो सिंबल जो

[60:34]

बताता है कि क्या ऑपरेशन परफॉर्म होने

[60:36]

वाला है जैसे यहां पर हमारा ऑपरेटर है

[60:39]

अपना प्लस ऑपरेटर हो सकता है यहां पे

[60:41]

माइनस परफॉर्म हो रहा होता सबट क्शन

[60:43]

परफॉर्म हो रहा होता तो हमारा माइनस जो

[60:45]

होता वो बन जाता हमारा ऑपरेटर अगर

[60:47]

मल्टीप्लाई हो रहा होता तो एस्ट रिस्क

[60:49]

हमारा ऑपरेटर बन जाता डिवाइड हो रहा होता

[60:51]

तो इस स्लैश को हम अपना ऑपरेटर कह देते तो

[60:54]

स के अंदर वो इंस्ट्रक्शंस जि उसके अंदर

[60:56]

कुछ-कुछ ऑपरेंड्स होते हैं कुछ-कुछ

[60:57]

ऑपरेटर्स होते हैं उनको हम एरिथ मेे िक

[60:59]

इंस्ट्रक्शंस कहते हैं अब एरिथ मेे िक

[61:01]

इंस्ट्रक्शंस के एग्जांपल्स क्या-क्या हो

[61:03]

सकते हैं इनको हम लिख के देखते हैं जैसे

[61:05]

अगर हम एक नया वेरिएबल डिफाइन करें इंट a

[61:08]

= 1 है और b = 2 है और यहां पर हम नया

[61:13]

वेरिएबल डिफाइन करते हैं सम = a + b तो

[61:17]

यहां पर ये एक एरिदमेटोसस

[61:21]

लिया जा रहा है a और b ऑपरेंड्स हैं प्लस

[61:24]

हमारा एक ऑपरेटर है और सम हमारा एक नया

[61:27]

वेरिएबल है जिसके अंदर वैल्यू हमारी असाइन

[61:29]

हो जाती है यानी स्टोर हो जाती है जाकर

[61:31]

ऐसे ही हम बना सकते हैं

[61:35]

इंट मल्टीप्लाई = a * बा b अब यहां पर

[61:41]

मल्टीप्लाई एक वेरिएबल है जिसके अंदर a *

[61:43]

b की वैल्यू जाकर स्टोर हो रही है अब जब

[61:45]

भी हम एरिथ मेे िक इंस्ट्रक्शंस की बात

[61:47]

करते हैं एक स्पेशल चीज़ हमें ज़रूर नोट

[61:49]

करनी है वह यह है कि सिंगल वेरिएबल ऑन द

[61:51]

लेफ्ट हैंड साइड जब भी हम कोई एरिथ मेे

[61:54]

ऑपरेशंस परफॉर्म करते हैं वो सारे के सारे

[61:57]

हमारे राइट हैंड साइड पे जाते हैं यानी a

[61:59]

+ b - c * बा d ऐसा कुछ हमारे पास

[62:03]

एक्सप्रेशन होगा उसकी सारे की वैल्यू हम

[62:06]

किसी वेरिएबल लेफ्ट में असाइन करेंगे जो

[62:09]

लेफ्ट हैंड साइड पर लिखा होगा और ये सारी

[62:11]

की सारी वैल्यू राइट से लेफ्ट में जाकर

[62:14]

स्टोर हो जाएगी और लेफ्ट साइड में हमें

[62:16]

हमेशा ध्यान रखना है कि एक सिंगल वेरिएबल

[62:19]

हमारे पास हो सिंगल वेरिएबल के अंदर ही

[62:21]

सारा का सारा आउटपुट निकल के जाके स्टोर

[62:24]

होगा हम लेफ्ट साइड में अगर रखें कि हम तो

[62:27]

दो वेरिएबल स्टोर कराना चाहते हैं इंट x y

[62:31]

= a * b तो इस केस में क्या होगा कि a * b

[62:37]

की वैल्यू y को असाइन हो जाएगी पर x को

[62:39]

असाइन नहीं होगी क्योंकि x यहां पर हमने

[62:41]

सिर्फ एक नया वेरिएबल डिक्लेयर कर दिया है

[62:43]

y एक नया वेरिएबल डिक्लेयर किया जिसमें a

[62:45]

* b की वैल्यू गई है तो लेफ्ट में मतलब इस

[62:48]

एक्सप्रेशन के लिए हमारे पास सिर्फ y है

[62:50]

जिसमें इसकी वैल्यू स्टोर हुई है इसके बाद

[62:53]

हम बात करने वाले एरिथ मेे िक

[62:54]

इंस्ट्रक्शंस में क्या-क्या हमारे

[62:55]

एक्सप्रेशंस वैलिड होते हैं क्या-क्या

[62:57]

नहीं होते कुछ बेसिक ऑपरेशंस हम समझ लेते

[63:00]

हैं एरिथ मेे िक इंस्ट्रक्शंस में हमारे

[63:02]

पास आ जाता है प्लस ऑपरेटर माइनस ऑपरेटर

[63:05]

मल्टीप्लाई ऑपरेटर और डिवाइड ऑपरेटर इसके

[63:08]

साथ-साथ एक और ऑपरेटर हमारे पास होता है

[63:10]

मॉड्यूल जिसके बारे में हम अभी पढ़ने वाले

[63:12]

हैं इसी चैप्टर के अंदर तो ये पांच हमारे

[63:14]

मेन ऑपरेटर्स होते हैं अब इसमें वैलिड

[63:17]

स्टेटमेंट्स क्या-क्या होंगी जैसे a = b +

[63:19]

c हमने लिखा है ये एक वैलिड स्टेटमेंट है

[63:22]

यानी यहां पर ये दोनों हमारे ऑपरेंट हैं

[63:24]

ये ऑपरेटर है और लेफ्ट हैंड साइड में हमने

[63:26]

सिंगल जो है एक वेरिएबल लिखा हुआ है

[63:28]

नेक्स्ट की बात करें तो b * c भी एक वैलिड

[63:31]

ऑपरेशन है क्योंकि हमारे पास

[63:32]

मल्टीप्लिकेशन आया और उसको हमने a में

[63:34]

स्टोर करा दिया अब राइट हैंड साइड में

[63:36]

इनवैलिड की अगर बात करें तो राइट हैंड

[63:38]

साइड में है a और लेफ्ट में है हमारा b +

[63:41]

c अब अगर मैथ हम पढ़ रहे होते तो ये

[63:43]

बिल्कुल सही स्टेटमेंट होती मैथ के हिसाब

[63:45]

से पर यहां पर हमारे लिए बिल्कुल गलत

[63:47]

स्टेटमेंट है ये स्टेटमेंट कंपाइलर को कह

[63:50]

रही है कि a की वैल्यू को लो और उसको b +

[63:52]

c में स्टोर करा दो जबकि b + c एक सिंगल

[63:55]

वेरिएबल नहीं है क्योंकि लेफ्ट हैंड साइड

[63:56]

पे सिंगल वेरिएबल नहीं लिखा हुआ तो

[63:58]

स्टेटमेंट हमारी बिल्कुल गलत हो जाती है

[64:01]

इसको एक बार कोड में लिख लेते हैं जैसे

[64:03]

अगर हम लिखते हैं इंट b + c = a अब यहां

[64:07]

पर एक रेड लाइन आ गई क्योंकि ये स्टेटमेंट

[64:09]

गलत है क्योंकि लेफ्ट साइड पे हमारे पास

[64:10]

एक ही वेरिएबल होना चाहिए जिसके अंदर

[64:12]

वैल्यू स्टोर हो पर यहां पर अगर हम इसको

[64:14]

रिवर्स कर देंगे यानी यहां लिख देंगे a और

[64:16]

यहां पर लिख देंगे b + c तो ये सही हो

[64:19]

जाएगी पर ऊपर हमें b और c को डिफाइन करना

[64:23]

पड़ेगा b को हम लिख लेते हैं = c = 1 तो

[64:28]

अब यह स्टेटमेंट बिलकुल सही हो जाएगी

[64:30]

क्योंकि सारे वेरिएबल डिफाइन हैं और लेफ्ट

[64:31]

साइड में हमने लिखा है सिर्फ a को अब और

[64:34]

क्या एक्सप्रेशंस हो सकते हैं जैसे मैथ के

[64:36]

अंदर हम क्या लिखते हैं दो नंबर्स को

[64:38]

मल्टीप्लाई करना होता है तो लिख देते हैं

[64:39]

इ x = 2 * 3 हम वहां पर डॉट लगा देते हैं

[64:44]

या फिर 2 * 3 इसको भी मल्टीप्लिकेशन की

[64:47]

तरह देखा जाता है पर यह सेम चीज़ c के

[64:49]

अंदर वैलिड नहीं है c के अंदर अगर आप लिख

[64:52]

देंगे a =

[64:55]

c की तरह नहीं देखा जाएगा इसको एक एरर की

[64:57]

तरह देखा जाएगा इसका एग्जांपल क्या हो

[64:59]

सकता है जैसे हम लिखें इंट d =

[65:11]

bc-c तो a के अंदर क्या स्टोर होगा b c से

[65:14]

डिवाइड होगा और जो भी हमारे पास क्श आएगा

[65:17]

वो a के अंदर जाकर स्टोर हो जाएगा वहीं पर

[65:19]

इनवैलिड एक्सप्रेशन यह हो सकता है कि

[65:21]

कहीं-कहीं हमने देखा है कि b की पावर c

[65:24]

अगर हमें लिखना हो तो हम कैसे लिख दे ते

[65:25]

हैं b c यह वाला जो एक्सप्रेशन है यह गलत

[65:29]

होता है c के अंदर c के अंदर पावर हमारे

[65:32]

पास एक सिंगल ऑपरेटर नहीं होता पावर के

[65:34]

लिए हमें पड एक फंक्शन यूज करना पड़ता है

[65:37]

जिसके अंदर पहले हम डालेंगे b फिर हम

[65:39]

डालेंगे c ये हमें देगा वैल्यू b टू द

[65:41]

पावर c तो अगर a के अंदर हमें स्टोर कराना

[65:44]

है पावर ऑफ b टू द पावर c तो हम कुछ ऐसा

[65:47]

लिख रहे होंगे अगर हमने ये लिखा तो ये

[65:49]

वैल्यू हमारी गलत हो जाएगी यह वैल्यू सही

[65:52]

हो जाएगी इसका एग्जांपल देखते हैं अपने

[65:53]

कोड के अंदर इंट

[65:56]

पावर इ इक्वल टू b की पावर c ऊपर हमें बस

[66:01]

एक और हेडर फाइल को इंक्लूड करना पड़ेगा

[66:04]

इंक्लूड

[66:05]

मैथड h ये मैथड ए एक हेडर फाइल है यानी

[66:09]

इसके अंदर ऑलरेडी कुछ-कुछ चीजें हैं जो हम

[66:11]

यूज कर सकते हैं तो पावर जो हम फंक्शन

[66:14]

यूज़ कर रहे हैं वह मैथड h से ही आया है

[66:16]

हमारे पास अब पावर को अगर हम प्रिंट

[66:19]

करवाएं तो 1 की पावर व हमें ऑलरेडी पता है

[66:21]

कि हमारे पास वन ही प्रिंट होकर आएगा पावर

[66:24]

को हम प्रिंट करवाना चाहते हैं

[66:26]

इसको कर लेते हैं सेव और करते हैं रन तो

[66:29]

हमारे पास वन प्रिंट होकर आया है वहीं पर

[66:31]

यहां अगर हम लिख देते b इसको अगर हम सेव

[66:34]

करके रन कराएं तो क्या आउटपुट आएगा हमारे

[66:36]

पास हमारे पास आउटपुट आया है रो अब ये रो

[66:40]

क्यों आया है हमारे पास तो एरर आना चाहिए

[66:42]

था क्योंकि पावर तो एजिस्ट ही नहीं करता

[66:44]

एक्चुअली ये जो ऑपरेटर होता है ना स के

[66:46]

अंदर इसको जॉर ऑपरेटर कहते हैं जॉर के

[66:49]

बारे में हम बाद में सीखने वाले हैं ये

[66:50]

बिट वाइज ऑपरेशन करने के लिए परफॉर्म होता

[66:52]

है हमें पता है कि c के अंदर हर जो नंबर

[66:55]

होता है वो मशीन को तो समझ में आता है

[66:57]

नहीं मशीन को कौन सा कोड समझ में आता है

[66:58]

मशीन को समझ में आता है मशीन कोड जो लिखा

[67:01]

होता है जीरोज और वनस में तो जब भी हम

[67:03]

जीरोज और वंस के बीच में ऑपरेशन परफॉर्म

[67:05]

करते हैं वो हमारे बिट वाइज ऑपरेशंस होते

[67:07]

हैं तो ये हमारा एक जॉर ऑपरेटर है जो

[67:09]

बिट्स के बीच में परफॉर्म होता है बिट्स

[67:11]

का यानी सेम बिट्स के बीच में जब आप जौर

[67:13]

करते हैं तो उसका आउटपुट जरो हमारे पास

[67:16]

आता है बिट वाइज ऑपरेटर्स के बारे में हम

[67:18]

बाद में पढ़ रहे होंगे पर अभी के लिए b टू

[67:20]

द पावर c अगर हम इस तरीके से लिखने की

[67:22]

कोशिश करें हैं वो वैलिड स्टेटमेंट है ऐसा

[67:24]

नहीं है कंपाइल र हमें एरर देगा पर आउटपुट

[67:27]

हमारे पास गलत आएगा b की पावर c हमारा

[67:29]

आउटपुट नहीं आएगा आउटपुट कुछ और आएगा

[67:31]

इसीलिए इसको हम नहीं लिखेंगे अगर हम पावर

[67:33]

दिखाना चाहते हैं पावर दिखानी है तो फिर

[67:35]

हमें मैथड ए का यूज करना पड़ेगा और यूज

[67:38]

करना पड़ेगा अपने पावर फंक्शन का नेक्स्ट

[67:40]

टॉपिक जिसकी हम बात करने वाले हैं वो है

[67:42]

हमारा मॉड्यूलर ऑपरेटर तो इसको मॉड्यूलर

[67:46]

या मॉडलो भी कहा जाता है इसको परसेंटेज का

[67:50]

जो साइन होता है ये होता है हमारा मॉड्यूल

[67:53]

ऑपरेटर ये ऑपरेटर क्या करता है अगर हमने

[67:55]

लिखा है a मॉडलो b तो यह हमें रिटर्न कर

[67:59]

देगा रिमाइंडर ऑफ a डिड बा b का जैसे इसके

[68:03]

कुछ एग्जांपल्स अगर देखें तो 4 मॉडलो 2

[68:06]

हमें रिटर्न करेगा रो 5 मॉडलो 3 हमें

[68:09]

रिटर्न करेगा ू क्योंकि फोर को टू से

[68:12]

डिवाइड करेंगे तो रिमाइंडर हमारे पास आएगा

[68:14]

़ फव को थ्री से हम डिवाइड करेंगे तो

[68:16]

रिमाइंडर हमारे पास आएगा टू क्श एट आएगा

[68:19]

वन तो अगर हम 5 / 3 करते तो क्ट हमारे पास

[68:23]

आता वन यहां पर मॉड्यूल और ंडर देता है तो

[68:26]

हमारे पास रिमाइंडर आया टू उसी तरीके से

[68:28]

12 मॉड्यूल 10 करेंगे तो रिमाइंडर टू ही

[68:31]

आएगा और 20 मॉड्यूल 10 करेंगे तो रिमाइंडर

[68:34]

आएगा हमारे पास जीरो तो कुछ इस तरीके से

[68:37]

जब भी रिमाइंडर फाइंड आउट करना होता है तब

[68:39]

यूज करते हैं अपने मॉड्यूल ऑपरेटर का इसका

[68:41]

एग्जांपल लिख के देखते हैं अगर हमें

[68:43]

प्रिंट एफ करना हो एक इंटी जर वैल्यू

[68:46]

जिसमें हम प्रिंट करवाना चाहते हैं 16 मड

[68:48]

10 तो हमें ऑलरेडी पता है कि आंसर हमारे

[68:51]

पास क्या आना चाहिए आंसर आना चाहिए सिक्स

[68:54]

और आंसर में प्रिंट हुआ है हमारे हमारे

[68:55]

पास 6 क्योंकि 16 को जब 10 से डिवाइड

[68:59]

करेंगे तो छह रिमाइंडर में बचेगा अब

[69:00]

मॉड्यूल ऑपरेटर जो है ना हमारे फ्लोट

[69:03]

वैल्यूज पर काम नहीं करता जैसे अगर हम

[69:05]

यहां पर लिखें 1.6 / 1.0 और इसको सेव करके

[69:10]

अगर हम रन करना चाहे तो रन नहीं करेगा

[69:12]

क्योंकि इनवैलिड ऑपरेंड्स है ऑपरेंट है

[69:14]

हमारा 1.6 और दूसरा ऑपरेंट है 1.0 तो

[69:18]

मॉड्यूल ऑपरेटर जो है सिर्फ इंटी जर्स पे

[69:20]

काम करता है जब भी इंटी जर को इंटी जर से

[69:22]

डिवाइड करते हैं तो हमें रिटर्न करके देता

[69:24]

है एक इ इंटी जर रिमाइंडर वैल्यू अब इंटी

[69:27]

जर में भी दो केसेस होते हैं या तो हमारा

[69:29]

जो न्यूमरेशन है वो पॉजिटिव हो सकता है या

[69:30]

हमारा न्यूमरेशन नेगेटिव हो सकता है जब भी

[69:33]

हमारा न्यूमरेशन पॉजिटिव होता है तो हमारे

[69:35]

पास जो रिमाइंडर आता है वो भी एक पॉजिटिव

[69:37]

रिमाइंडर आता है पर जब हमारा न्यूमरेशन

[69:39]

नेगेटिव होता है तो हमारा रिमाइंडर भी

[69:42]

नेगेटिव आता है हमारे पास इसके एग्जांपल्स

[69:44]

कैसे देख सकते हैं यहां पर अगर हम लिखें

[69:48]

-8 मॉडलो 3 इसको कर लेते हैं सेव और इसको

[69:53]

करते हैं रन तो हमारे पास आंसर में आया -2

[69:57]

क्योंकि 8 को जब थ्री से डिवाइड करेंगे तो

[69:59]

रिमाइंडर में आएगा टू क्योंकि सिक्स हमारा

[70:01]

ऑलरेडी डिवाइड हो जाएगा क्योंकि हमारे

[70:04]

न्यूमरेशन नेगेटिव है तो हमारा आंसर भी

[70:05]

रिमाइंडर में आया है नेगेटिव पर इसी को

[70:08]

अगर हम पॉजिटिव एट बना दें और इसको हम सेव

[70:10]

करके रन करें तो अब आउटपुट में आएगा + 2

[70:14]

तो इस तरीके से जब भी हमें नेगेटिव

[70:15]

रिमाइंडर चाहिए तो हमने न्यूमरेशन को

[70:17]

नेगेटिव रखना है जब भी पॉजिटिव रिमाइंडर

[70:19]

चाहिए तो अपने न्यूमरेशन को पॉजिटिव रखना

[70:21]

है नेक्स्ट टॉपिक जिसकी हम बात करेंगे

[70:22]

एरिथ मेे िक इंस्ट्रक्शंस में उसका नाम है

[70:24]

टाइप कन्वर्जन जब भी हमारे जो डिफरेंट

[70:27]

डिफरेंट ऑपरेंट होते हैं उनके अगर सेम

[70:30]

टाइप है तो आउटपुट भी सेम टाइप का आएगा

[70:32]

लेकिन उनके डटा टाइप अगर अलग-अलग हैं तो

[70:34]

आउटपुट भी अलग डाटा टाइप का आएगा जब भी हम

[70:38]

इंट का कोई ऑपरेशन परफॉर्म कराते हैं इंट

[70:40]

के साथ तो आउटपुट में इंट ही आएगा जब भी

[70:43]

फ्लोट का ऑपरेशन कराते हैं फ्लोट के साथ

[70:45]

तो आउटपुट में फ्लोट ही आएगा लेकिन अगर

[70:48]

इंट का ऑपरेशन हुआ फ्लोट के साथ तो आउटपुट

[70:50]

में फ्लोट आएगा जब हम अपने डटा टाइप्स

[70:53]

वाली टेबल की बात करते हैं ना तो इंट

[70:55]

हमारा जो लेता है वो लेता है दो बाइट और

[70:57]

फ्लोट हमारा लेता है चार बाइट्स तो इस

[70:59]

तरीके से फ्लोट का जो कंटेनर है इस डाटा

[71:02]

टाइप का जो कंटेनर है वो बड़ा है यानी

[71:03]

ज्यादा वैल्यू स्टोर कर सकता है तो सी

[71:05]

कंपाइलर क्या करता है थोड़ा सा लॉजिक

[71:07]

लगाता है लॉजिक कैसे लगाया कि अगर इंट

[71:10]

वैल्यू है वो तो छोटी है पर फ्लोट की

[71:12]

वैल्यू तो बड़ी है ना और इनके बीच में कोई

[71:14]

ऑपरेशन हुआ मान लीजिए प्लस हुआ या

[71:15]

मल्टीप्लाई हुआ या डिवाइड हुआ उसमें एक

[71:18]

बड़ा नंबर आउटपुट में आएगा अब उस बड़े

[71:20]

नंबर को स्टोर कराने के लिए एक बड़ा

[71:22]

कंटेनर चाहिए यानी फ्लोट जैसा कंटेनर

[71:24]

चाहिए तो इसीलिए आउट ट में हम इंट को नहीं

[71:26]

रखते फ्लोट को रखते हैं तो जब भी इंट का

[71:29]

ऑपरेशन परफॉर्म होगा फ्लोट के साथ हमारे

[71:30]

पास आउटपुट में आएगा फ्लोट इसके

[71:32]

एग्जांपल्स क्या हो सकते हैं एग्जांपल

[71:34]

जैसे इंट का इंट के साथ अगर हम मल्टीप्लाई

[71:37]

करें टू तो आंसर में आएगा फोर पर यहां पर

[71:39]

2.0 को मल्टीप्लाई करें अगर टू के साथ तो

[71:43]

आउटपुट में हमारे पास आएगा 4.0 और यहां पर

[71:46]

2.0 को मल्टीप्लाई करें 2.0 के साथ तो

[71:49]

आउटपुट में आएगा 4.0 इसको अपने कोड में

[71:52]

लिखकर देखते हैं तो सबसे पहले प्रिंट एफ

[71:54]

करवाएंगे हम

[71:55]

2 * 2 इसको कर लेते हैं सेव तो आउटपुट में

[71:59]

आया 4 लेकिन 2.0 को अगर मल्टीप्लाई कराए

[72:03]

टू के साथ तो यहां पर ये एरर आ गया सबसे

[72:06]

पहले ही एरर क्यों आया क्योंकि आउटपुट जो

[72:08]

है एक फ्लोट वैल्यू होना चाहिए था पर हमने

[72:10]

बोला कि आउटपुट इंटी जर वैल्यू होगा तो

[72:12]

इसको अब हमें चेंज करना पड़ेगा टू f इसको

[72:15]

कर लेते हैं सेव और दोबारा से इसको करते

[72:17]

हैं रन रन करने के बाद आउटपुट हमारे पास

[72:20]

आया

[72:21]

4.00 जो भी फ्लोट का हमारे पास बाय

[72:23]

डिफॉल्ट जितने भी डे मिल जाते हैं इसके

[72:26]

बाद अगर यह 2.0 * 2.0 होता तो उस केस में

[72:29]

क्या होता उस केस में भी हमारे पास सेम

[72:32]

आउटपुट आता व्हिच इज अ फ्लोट वैल्यू अब इस

[72:35]

ऑपरेशन की जगह हम डिवाइड भी यूज़ कर सकते

[72:37]

हैं अगर मान लीजिए हम चार को डिवाइड कर

[72:39]

रहे होते 2.2 से तो इस केस में भी फ्लोट

[72:42]

जो है आउटपुट आना चाहिए क्योंकि एक ऑपरेंट

[72:44]

हमारे पास फ्लोट का है तो आउटपुट में आया

[72:47]

है एक फ्लोट वैल्यू तो इस तरीके से टाइप

[72:50]

कन्वर्जन हो जाता है टाइप कन्वर्जन कैसे

[72:52]

हुआ अगर कंपाइलर देखता है कि आउट पुट जो

[72:55]

है वो बड़े कंटेनर में स्टोर होना चाहिए

[72:57]

क्योंकि बड़ा आउटपुट है तो वो जबरदस्ती

[73:00]

उसको छोटे कंटेनर में स्टोर नहीं कराता

[73:02]

खुद से यानी इंट में स्टोर नहीं कराएगा वो

[73:04]

कोशिश करेगा इस पूरे के पूरे आउटपुट को

[73:06]

सेव कर लिया जाए तो वो फ्लोट के अंदर उसको

[73:08]

बाय डिफॉल्ट स्टोर कराता है अब हम इसके

[73:10]

थोड़े से और स्पेशल केसेस देख लेते हैं

[73:13]

जैसे अगर हमने टू को डिवाइड किया थ्री के

[73:15]

साथ तो क्योंकि ये दोनों के दोनों हमारे

[73:17]

इंटी जर वैल्यूज है आउटपुट हमारा इंटी जर

[73:19]

आना चाहिए आउटपुट एक बार देखते हैं यहां

[73:22]

पे इंटी जर आएगा तो इसको कर देते हैं हम d

[73:25]

आउटपुट हमारे पास आया है रो क्योंकि हमेशा

[73:28]

एक इंटी जर आउटपुट आएगा अब टू को जब हम थ

[73:30]

से डिवाइड करेंगे तो 0 पॉइंट समथिंग

[73:32]

समथिंग आता है पर क्योंकि एक इंटी जर

[73:34]

वैल्यू है इसके अंदर सिंगल डिजिट हम हमारे

[73:36]

होल डिजिट स्टोर होते हैं डेसीमल स्टोर

[73:39]

नहीं होते तो इसको वो जीरो बना देगा वहीं

[73:41]

पर अगर हम 2.0 इसको ले लेते तो अब हमारे

[73:44]

पास आउटपुट में आती है एक फ्लोट वैल्यू

[73:47]

फ्लोट वैल्यू में क्या आउटपुट आता है

[73:48]

हमारे पास ये हमें दे देता 0.666

[73:52]

667 तो अगर हमें एग्जैक्ट आउटपुट चाहिए तो

[73:55]

उसके लिए हम फ्लोट बना देंगे दोनों में से

[73:57]

किसी एक को पर अगर हम चाहते हैं कि डेसीमल

[73:59]

का जितना भी पार्ट आए वो कंप्लीट हट जाए

[74:02]

तो उसको हम बना देंगे इंटी जर्स तो थ्री

[74:05]

को हम डिवाइड कर सकते हैं टू के साथ थ्री

[74:07]

को जब भी टू के साथ डिवाइड करेंगे तो यहां

[74:10]

पर आउटपुट हमारे पास आना चाहिए एक इंटी जर

[74:12]

वैल्यू आउटपुट में आएगा वन लेकिन 3.0 को

[74:17]

अगर टू से डिवाइड करेंगे तो आउटपुट में वन

[74:19]

नहीं आएगा इसको भी कर देते हैं f आउटपुट

[74:23]

में अब हमारे पास आएगा 1.5 तो जब एग्जैक्ट

[74:26]

आंसर चाहिए तब फ्लोट बनाना है जब हम

[74:29]

बिल्कुल डेसीमल को हटाना ही चाहते हैं तब

[74:31]

हम बना देंगे उसको इंटी जर तो टाइप

[74:33]

कन्वर्जन कुछ इस तरीके से होता है टाइप

[74:35]

कन्वर्जन पे बेस्ड एक काफी इंटरेस्टिंग

[74:37]

सवाल अभी सॉल्व करेंगे सवाल में हमें यह

[74:40]

करना है कि इंट a को देखना है उसकी वैल्यू

[74:42]

जो है 1.99 999 है कैसे काम करेगा ये अगर

[74:47]

इस वैल्यू को हम एक इंटी जर में असाइन

[74:50]

करेंगे तो वो क्या करेगा इसके डेसिमल्स

[74:52]

हटा देगा डेसिमल्स हटा देगा यानी इस पार्ट

[74:55]

को कंपलीटली हटा देगा तो यहां पर a की

[74:58]

वैल्यू वन होनी चाहिए या ए की वैल्यू टू

[75:01]

होनी चाहिए वो हम अपने कोड से एनालाइज

[75:03]

करने वाले कोड में हम लिखेंगे इंट ए =

[75:09]

1.99

[75:11]

999 इसको कर लेते हैं सेव और अब प्रिंट

[75:15]

करवा देंगे अपने ए को और इसकी वैल्यू

[75:19]

देखेंगे कि एक्चुअली प्रिंट क्या होता है

[75:22]

यहां पर उसने सबसे पहले तो एरर दे दिया कि

[75:25]

डबल से इंट में कन्वर्जन जो है वो पॉसिबल

[75:28]

नहीं है इंप्लीड कन्वर्जन पॉसिबल नहीं है

[75:31]

जब भी टाइप कन्वर्जन होता है ना सी के

[75:32]

अंदर दो टाइप ऑफ कन्वर्जन होते हैं सबसे

[75:35]

पहला हमारा जो कन्वर्जन होता है वो होता

[75:38]

है इंप्ली इंप्ली कन्वर्जन कंपाइलर खुद कर

[75:42]

देता है और दूसरा टाइप हमारा होता है

[75:44]

एक्सप्लिसिट एक्सप्लिसिट कन्वर्जन हम एज अ

[75:48]

प्रोग्रामर हम एज अ यूजर खुद करते हैं

[75:50]

हमारा कंपाइलर हमें करके नहीं देता ये वो

[75:53]

कन्वर्ज है जो हम खुद से करना चाहते हैं

[75:55]

ये एक्सटर्नल कन्वर्जंस है तो इंप्लीड

[75:57]

कन्वर्जंस कहते हैं कि जो छोटे टाइप्स हैं

[76:00]

जैसे इंट जैसा टाइप वही फ्लोट में जाकर

[76:03]

स्टोर हो सकता है इंट जैसा टाइप डबल में

[76:05]

जाकर स्टोर हो सकता है पर फ्लोट या डबल

[76:08]

इंट के अंदर आकर स्टोर नहीं हो सकता

[76:10]

इसीलिए ऑटोमेटिक इसको कन्वर्ट नहीं करेगा

[76:13]

लेकिन अगर हम खुद से एज अ प्रोग्रामर एज अ

[76:15]

कोडर कन्वर्ट कराना चाहते हैं तो हम यहां

[76:17]

इस तरीके से वैल्यू लिख देते हैं हम दो

[76:20]

पैरेंस लगाते हैं दोनों के बीच में उस

[76:22]

टाइप में लिख देते हैं जिसमें हम कन्वर्ट

[76:24]

कराना ना चाहते हैं तो क्या करेगा कंपाइलर

[76:26]

फोर्सफुली कन्वर्ट करेगा कंपाइलर करना

[76:28]

नहीं चाहता बड़े टाइप को छोटे में कन्वर्ट

[76:30]

पर उसको करना पड़ेगा क्योंकि हमने इंट लिख

[76:32]

दिया है आगे अब इसको सेव करते हैं और अब

[76:35]

एक बार इसको दोबारा कंपाइल करके देखते हैं

[76:37]

तो अब उसने सक्सेसफुली कंपाइल कर दिया है

[76:39]

और अब हम अगर अपने कोड को रन करें तो उसका

[76:41]

जो आउटपुट आएगा दैट विल बी वन तो जब भी

[76:44]

इसने कन्वर्ट किया ना इस डबल वैल्यू को

[76:47]

बाय डिफॉल्ट सी में जो सारी फ्लोट वैल्यूज

[76:49]

होती है उनको डबल की तरह देखा जाता है

[76:50]

क्योंकि डबल बड़ा डटा टाइप है अब जब इसने

[76:53]

इस डबल वैल्यू को यानी इस वैल्यू को इंट

[76:55]

में कन्वर्ट किया तो इसने ये

[76:59]

999999 को कंप्लीट हटा दिया वो राउंड ऑफ

[77:02]

नहीं करता सी का कंपाइलर एरिथ मेे ऑपरेशंस

[77:05]

में जब भी फ्लोट से इंट में कन्वर्ट करता

[77:07]

है राउंड ऑफ नहीं करता कि 1.99 है तो उसको

[77:10]

टू बना दो और फिर टू डाल दो इंटी जर में

[77:12]

वो मैथ की तरह इतना ज्यादा लॉजिक नहीं

[77:14]

लगाता अगर डेसीमल हटाने हैं तो वो पूरे के

[77:16]

पूरे हटा देगा और सिर्फ वन स्टोर कराएगा

[77:18]

तो इस चीज का हमें खास ध्यान रखना है जब

[77:20]

भी हम इंटरव्यूज में बैठते हैं और ऐसे कुछ

[77:21]

सवाल हमसे पूछ लिए जाते हैं कि सी में आप

[77:24]

बताओ या क्लास टेस्ट में मिट सेम में एंड

[77:26]

सेम में क्वेश्चन आता है कि इसके आउटपुट

[77:28]

में हम क्या लिखेंगे तो हमें अपने

[77:30]

डेसिमल्स को कंप्लीट उड़ा देना है नेक्स्ट

[77:33]

टॉपिक जिसकी हम बात करेंगे वो है ऑपरेटर

[77:35]

प्रेसीडेंट जैसे मैथ के अंदर हमने एक रूल

[77:38]

पढ़ा था छोटा सा जिसको हम कहते थे बॉर्ड

[77:40]

मास रूल बॉर्ड मास रूल हमारा क्या कहता था

[77:42]

पहले ब्रैकेट ओपन कर लो उसके बाद पहले

[77:45]

डिवाइड करो फिर मल्टीप्लाई करो फिर ऐड करो

[77:47]

फिर सबट क्ट करो तो इस तरीके से मैथ में

[77:49]

अगर बहुत सारे ऑपरेशंस दिए हुए हैं तो कौन

[77:51]

से ऑपरेशन को पहले करना है कौन से ऑपरेशन

[77:53]

को बाद में करना है उसका हमारे पास एक

[77:55]

प्रॉपर सीरीज होता था सीक्वेंस होता था

[77:58]

वैसे ही सी के अंदर है कौन सा ऑपरेशन पहले

[78:01]

परफॉर्म होगा कौन सा ऑपरेशन बाद में

[78:02]

परफॉर्म होगा ये सी के कंपाइलर के अंदर

[78:05]

पहले से ही हमारे पास डिफाइंड है अब इसमें

[78:07]

प्रायोरिटी ऑर्डर को हम प्रेसीडेंट कह

[78:09]

देते हैं यानी प्रायोरिटी में जो ऊपर आएगा

[78:12]

उसकी प्रेसीडेंट हाई है जो प्रायोरिटी में

[78:14]

नीचे आएगा उसकी प्रेसीडेंट लो है तो सबसे

[78:17]

पहले प्रायोरिटी में आते हैं हमारे पास

[78:19]

मल्टीप्लाई डिवाइड एंड मॉड्यूल ऑपरेटर इन

[78:22]

तीनों ऑपरेटर्स की प्रायोरिटी सबसे ऊपर

[78:25]

होती है उसके बाद प्रायोरिटी में आते हैं

[78:27]

प्लस माइनस उसके बाद प्रायोरिटी में आता

[78:29]

है ये इक्वल टू इक्वल टू को c के अंदर हम

[78:33]

असाइनमेंट ऑपरेटर भी कहते हैं असाइन करना

[78:36]

किसी चीज को यानी किसी चीज को उसको दे

[78:38]

देना जैसे अगर हम कहते थे कि स्कूल में जो

[78:42]

मॉनिटर बनता था उसको कहते थे कि इसको

[78:43]

मॉनिटर वाली जो पोस्ट है वो असाइन हो गई

[78:45]

है यानी इसको दे दी गई है तो जब भी कोई

[78:48]

वैल्यू हम देते हैं उसको हम कहते हैं

[78:49]

असाइनमेंट तो अगर a + b = c हमने लिखा है

[78:53]

तो इस a + b की वैल हमने c के अंदर असाइन

[78:56]

कर दिया है तो इस तरीके से हम मतलब समझते

[78:59]

हैं चीजों का c के अंदर अब एक एग्जांपल

[79:02]

अगर देखें x = 4+ 9 * 10 लिखा हुआ है तो

[79:07]

इसको हम सॉल्व कैसे करेंगे प्रेसीडेंट देख

[79:09]

लेंगे सबसे पहले कि 4+ 9 पहले करना है या

[79:12]

9 * 10 ओबवियसली हमारे मल्टीप्लाई की

[79:15]

प्रेसीडें हाई है तो 9 * 10 पहले करेंगे 9

[79:18]

* 10 करेंगे तो 90 आ गया इसमें अब हम फोर

[79:21]

को ऐड करेंगे तो फोर को ऐड करेंगे तो

[79:24]

हमारा जो ना 94 आंसर है वो x के अंदर जाकर

[79:26]

स्टोर हो जाएगा पर अगर हम गलत तरीके से

[79:29]

करते तो गलत तरीका करने का क्या होता कि

[79:32]

ना को फोर में ऐड कर देते तो 13 हो जाता

[79:35]

मल्टीप्ला बाय 10 जिसका आउटपुट आता 130 पर

[79:37]

ये एक गलत आउटपुट होता सही आउटपुट है इसका

[79:40]

94 इसको एक बार कोड भी करके देख लेते हैं

[79:43]

कि कितना हमने सही किया है इंट ए के अंदर

[79:46]

हम स्टोर करेंगे 4 प् 9 इन 10 इसको करते

[79:52]

हैं रन और आउटपुट में हमारे पास आया है 94

[79:56]

अब एक और दूसरे तरीके के हमारे पास जो है

[79:59]

एक्सप्रेशंस लिखे हो सकते हैं तो यह हमारे

[80:01]

पास केस आ गया ऑपरेशंस ऑफ सेम प्रेसीडेंट

[80:05]

यानी मल्टीप्लाई की भी उतनी प्रेसीडेंट है

[80:07]

और डिवाइड की भी उतनी प्रेसीडेंट है तो

[80:09]

पहले कौन सा सॉल्व होगा तो इसके लिए हमारे

[80:12]

पास एसोसिएटिविटी रूल आता है ये जो रूल्स

[80:15]

है ना ये दिखने में खतरनाक लग रहे होंगे

[80:17]

पर बहुत लॉजिकल है इनको अभी रटना नहीं है

[80:20]

ये जैसे-जैसे हम डिफरेंट डिफरेंट प्रॉब्लम

[80:22]

सॉल्व करेंगे अपने प्रैक्टिस प्रॉब्लम्स

[80:23]

भी सॉल्व करेंगे अपने आप आ जाएंगी और बहुत

[80:26]

लॉजिकल है समझने में तो बिल्कुल इनके नाम

[80:28]

याद करने कि इसको एसोसिएटिविटी कहते थे

[80:31]

इसको प्रेसीडेंट कहते थे इतने भारी शब्द

[80:34]

बिल्कुल रट्टेड की बिल्कुल अभी जरूरत नहीं

[80:36]

है नोट्स आपको पूरे अवेलेबल होंगे उनको आप

[80:38]

जाकर कभी भी रिवाइज कर सकते हैं कभी भी

[80:40]

एक्सेस कर सकते हैं एसोसिएटिविटी हम यूज

[80:43]

करते हैं जब भी हमारे पास आते हैं

[80:44]

ऑपरेटर्स ऑफ सेम प्रेसिडेंस सेम

[80:47]

प्रेसिडेंस में जैसे अगर हम अपने एग्जांपल

[80:49]

की बात करें एसोसिएटिविटी कहता है कि

[80:52]

लेफ्ट से राइट कर लो यानी लेफ्ट लेफ्ट से

[80:55]

लेकर राइट तक ऑपरेशंस को परफॉर्म करते जाओ

[80:57]

अगर सेम प्रेसीडें के है तो जैसे यहां पर

[81:00]

मल्टीप्लाई डिवाइड और यह वाला मल्टीप्लाई

[81:02]

सेम प्रेसीडें के है तो हम क्या करेंगे

[81:04]

लेफ्ट से राइट कैलकुलेट कर लेंगे लेफ्ट से

[81:07]

राइट कैलकुलेट करते हैं तो सबसे पहले

[81:09]

कैलकुलेट होगा 4 * 3 4 * 3 हो जाएगा हमारा

[81:12]

12 फिर कैलकुलेट होगा 12 / 6 ये बन जाएगा

[81:15]

हमारा ू फिर कैलकुलेट होगा 2 * 2 ये बन

[81:18]

जाएगा हमारा फर तो सबसे पहले हमने फोर को

[81:21]

थ्र से मल्टीप्लाई किया फिर इसके आउटपुट

[81:24]

को हमने सिक्स के साथ डिवाइड किया फिर

[81:26]

इसके आउटपुट को हमने टू के साथ मल्टीप्लाई

[81:29]

किया तो इस तरीके से लेफ्ट से राइट हम

[81:31]

चलते चले गए अगर इसको ब्रैकेट फॉर्म में

[81:34]

मुझे दिखाना हो तो मैं क्या लिख सकती हूं

[81:35]

मैं लिख सकती हूं पहले मल्टीप्लाई कर दो

[81:37]

फोर को थ्री से फिर डिवाइड कर दो इसको और

[81:40]

फिर इसके बाद मल्टीप्लाई कर दो इसको टू से

[81:42]

और फाइनल वैल्यू को x में असाइन कर दो और

[81:44]

हमारी फाइनल वैल्यू आई थी हमारे पास फोर

[81:47]

इसी का हम कोड लिख लेते हैं कोड में

[81:49]

लिखेंगे 4 * 3 / बा 6 * 2 इसको कर लेते

[81:56]

हैं सेव तो इस वैल्यू के लिए जो हमारे पास

[81:58]

आउटपुट

[81:59]

आएगा वो आया है फोर क्योंकि यहां पे

[82:02]

एसोसिएटिविटी रूल लगा है लेफ्ट से राइट तक

[82:06]

हमारी कैलकुलेशंस होती चली गई अब हमने

[82:08]

काफी सारी चीजें पढ़ ली एरिथ मेे िक

[82:10]

इंस्ट्रक्शन में तो उनके थोड़े से हम सवाल

[82:12]

कर लेते हैं ताकि दिमाग में चीजें सारी की

[82:14]

सारी बैठ जाए तो प्रैक्टिस क्वेश्चन फोर

[82:17]

करते हैं इन चारों के लिए हमें सवाल सॉल्व

[82:18]

करना है सबसे पहले अपने बोर्ड के अंदर

[82:21]

सॉल्व करके देखेंगे अपनी स्लाइड्स पे

[82:22]

सॉल्व करके देखेंगे उसके बाद क्या क्या

[82:24]

करेंगे उसका कोड लिखकर उसको वेरीफाई कर

[82:26]

लेंगे अब पहला सवाल है हमारे पास 5 * 2 -

[82:30]

2 * 3 यहां पे मल्टीप्लाई और इस

[82:32]

मल्टीप्लाई दोनों की प्रेसीडेंट ऊपर है और

[82:35]

माइनस जो है हमें बाद में करना है तो

[82:37]

प्रेसीडेंट दोनों की सेम है मल्टीप्लाई की

[82:39]

तो क्या करेंगे लेफ्ट वाला रूल लगा देंगे

[82:42]

सबसे पहले मल्टीप्लाई करेंगे 5 * 2 को तो

[82:44]

इसकी जगह लिख देंगे 10 बीच में है माइनस

[82:47]

फिर प्रेसीडें के हिसाब से सॉल्व होना

[82:49]

चाहिए 2 * 3 तो 2 * 3 को हमने सॉल्व करके

[82:53]

लिख दिया 6 और इन दोनों का आउटपुट हमारे

[82:55]

पास आया फोर तो सबसे पहले यह सॉल्व होगा

[82:58]

क्योंकि हायर प्रेसीडें में और लेफ्ट में

[83:00]

भी आता है फिर यह सॉल्व होगा क्योंकि हायर

[83:02]

प्रेसीडें में और लेफ्ट के बाद राइट में आ

[83:05]

गया फिर हमारा माइनस सॉल्व होगा तो ये हो

[83:07]

जाएगा 10 - 6 = 4 इसी को कोड फॉर्म में

[83:11]

लिख लेते हैं कोड में हम लिखेंगे 5 न 2 -

[83:16]

3 *

[83:19]

2 यहां पर लगा देते हैं अपना स्टेटमेंट

[83:23]

टर्मिनेटर सेमी जो होता है उसको टर्मिनेटर

[83:25]

कहा जाता है टर्मिनेटर हमारा वो एआई मूवी

[83:28]

वाला रोबॉट वाला टर्मिनेटर नहीं टर्मिनेटर

[83:31]

यानी किसी चीज को रोक देना तो जैसे वो

[83:33]

अपोकलिप्टो कने आया था मूवी के अंदर यहां

[83:35]

पर यह क्या करता है स्टेटमेंट को वहीं पे

[83:37]

रोक देता है तो अब इसको कर देते हैं

[83:40]

कंपाइल एंड रन रन करके आउटपुट हमारे पास

[83:43]

आया फोर सेकंड प्रॉब्लम है हमारे पास 5 *

[83:47]

2 डिवाइड बा 2 * 3 यहां पर क्योंकि तीन

[83:51]

ऑपरेटर्स हैं तीनों की प्रेसीडेंट हाईएस्ट

[83:54]

है तो इसमें हम लगाएंगे अपना एसोसिएटिविटी

[83:56]

रूल एसोसिएटिविटी रूल क्या कहता है लेफ्ट

[83:58]

से राइट भैया कैलकुलेट कर लो तो 5 * 2 को

[84:01]

सबसे पहले कैलकुलेट करेंगे आ गया हमारे

[84:03]

पासस 10 फिर 10 डिवाइड बा 2 को कैलकुलेट

[84:06]

करेंगे आ गया हमारे पास 5 अब इसका आउटपुट

[84:10]

आया 5 इसको मल्टीप्लाई कर लेंगे ्र के साथ

[84:12]

तो आउटपुट हमारे पास आएगा 15 इसको वेरीफाई

[84:16]

भी कर लेते हैं हम आउटपुट लिखेंगे इसको कर

[84:19]

लेते हैं डिवाइड कंपाइल रन सिक्स इसलिए

[84:23]

आया है क्योंकि यहां पर 3 मल्ला बा 2 हमने

[84:26]

लिख दिया ये एक्चुअली होना चाहिए था 2

[84:27]

मल्ला बा 3 इसको कर लेते हैं कंपाइल एंड

[84:31]

रन आउटपुट में हमारे पास आया 15 थर्ड जो

[84:34]

प्रॉब्लम है उसमें है 5 मड बा 2 / 2 म 3

[84:40]

अब इसको कैसे सॉल्व करना है क्योंकि

[84:42]

ब्रैकेट तो दीदी हम पहली बार देख रहे हैं

[84:44]

तो जब भी ब्रैकेट आता है ना सबसे पहले

[84:46]

ब्रैकेट के अंदर की चीज को सॉल्व करने है

[84:48]

ये सिंगल चीज है जो वर्ड मैस के साथ मैच

[84:50]

करती है कि ब्रैकेट आए तो पहले ब्रैकेट

[84:52]

ओपन कर लो तो ब्रैकेट के अंदर की चीज सबसे

[84:54]

पहले सॉल्व होगी यानी ये एक्सप्रेशन हमारे

[84:57]

पास बन जाएगा 5 मल बा 1 मल्ला बा 3 अब

[85:02]

क्या करेंगे अब दो ऑपरेशंस बच गए ये

[85:04]

मल्टीप्लाई और ये मल्टीप्लाई दोनों की

[85:06]

प्रेसीडेंट सेम है तो एसोसिएटिविटी रूल

[85:08]

लगा दो तो ये बन जाएगा हमारे पास 5 * 3

[85:14]

यानी 15 इसका भी आउटपुट 15 आना चाहिए तो

[85:18]

यहां पर हल्का सा चेंज कर लेते हैं एक

[85:20]

ब्रैकेट लगा लेते हैं इसको कर लेते हैं

[85:22]

सेव आउटपुट में आएगा 15 और जो लास्ट सवाल

[85:26]

है इसके अंदर वह यह है 5 + 2 / 2 * 3

[85:31]

इसमें क्या चीज़ होगी इसमें हमारे पास तीन

[85:33]

ऑपरेशंस हैं सबसे पहले है एडिशन फिर है

[85:36]

डिवाइड फिर है मल्टीप्लाई अब हायर

[85:38]

प्रेसीडेंट किसकी हायर प्रेसीडेंट है

[85:39]

डिवाइड और मल्टीप्लाई की दोनों की सेम

[85:42]

प्रेसीडेंट है तो लगा देंगे लेफ्ट

[85:43]

एसोसिएटिविटी लेफ्ट एसोसिएटिविटी से यह

[85:46]

किसमें कन्वर्ट हो जाएगा 5 प् सबसे पहले

[85:49]

कर देंगे 2 / 2 फिर कर देंगे मल्टीप्ला बा

[85:52]

3 फिर उसको ऐड कर देंगे फाइव से तो ये हो

[85:55]

जाएगा 5 प् अंदर वाला एक्सप्रेशन बन गया 1

[85:59]

* 3 उसके बाद करेंगे 5 + 3 और ये बन जाएगा

[86:04]

हमारे पास 8 अब इसी को सेम आउटपुट में कर

[86:07]

लेते हैं एक्सप्रेशन हमारे पास था 5 + 2

[86:11]

डिवाइड बा 2 ल्ड बा 3 इसको कर लेते हैं

[86:15]

सेव और रन करेंगे आउटपुट में हमारे पास

[86:18]

आया एट तो इस तरीके के जो सवाल हैं ये

[86:21]

आपके एमसीक्यू में भी पूछ लिए जाएंगे

[86:23]

प्लेसमेंट टाइम पे या फिर आपसे अपने स्कूल

[86:27]

के कॉलेज के टेस्ट के अंदर पूछ लिए जाएंगे

[86:29]

तो सवाल का जवाब किस तरीके से करना है अगर

[86:31]

थ्योर पेपर है तो उसमें एक्चुअली सॉल्व

[86:33]

करके दिखाना है कि लेफ्ट एसोसिएटिविटी

[86:35]

लगेगी कैसे कौन सी चीज पहले सॉल्व होगी

[86:38]

बेस्ट इसको करने का तरीका है अपनी सुविधा

[86:40]

के लिए आप ये पैरेंस लगा लें ब्रैकेट्स

[86:42]

लगा लें तो पता चल जाएगा कौन सी चीज पहले

[86:44]

सॉल्व करनी है कौन सी चीज बाद में सॉल्व

[86:46]

करनी है और अगर कोड में लिखना है तो कोड

[86:48]

में तो ऑटोमेटिक सी का कंपाइलर कर ही लेगा

[86:50]

तो काफी आसान है इन चीजों को करना जैसे

[86:53]

बॉर्ड मास का रूल होता है होता है वैसे यह

[86:54]

भी रूल होता है थोड़े से चार पांच सवाल

[86:56]

होमवर्क प्रॉब्लम्स और हम कर लेंगे तो

[86:58]

उसके बाद चीजें काफी क्लियर हो जाएंगी

[87:01]

नेक्स्ट जिस टॉपिक की हम बात करेंगे वो है

[87:03]

हमारी कंट्रोल इंस्ट्रक्शंस अब शुरुआत में

[87:06]

हमने पढ़ा था कि इंस्ट्रक्शंस तीन टाइप की

[87:08]

होती है टाइप डिक्लेरेशन हमने पढ़ लिया कि

[87:10]

वेरिएबल को पहले डिक्लेयर करना है फिर

[87:12]

यूज़ करना है सेकंड हमने पढ़ लिया एरिथ

[87:15]

मेे िक इंस्ट्रक्शन जिसके अंदर मॉड्यूल

[87:16]

हमने नया सीखा हमने टाइप कन्वर्जन सीखा

[87:19]

हमने प्रेसीडेंट सीखी अब हम पढ़ने वाले

[87:21]

हैं कंट्रोल इंस्ट्रक्शंस कंट्रोल

[87:24]

इंस्ट्रक्शंस वो इंस्ट्रक्शंस होती हैं जो

[87:25]

डिटरमिन करती हैं हेल्प करती हैं बताने

[87:28]

में हमारा फ्लो ऑफ प्रोग्राम अभी तक हमने

[87:31]

क्या पढ़ा था सीक्वेंस में इंस्ट्रक्शंस

[87:32]

चल रही थी एक कोड लिखा हु है उसमें पहली

[87:34]

स्टेटमेंट पहले एग्जीक्यूट होगी यानी ये

[87:36]

वाली स्टेटमेंट पहले एग्जीक्यूट होगी उसके

[87:38]

बाद ये स्टेटमेंट एग्जीक्यूट होगी उसके

[87:40]

बाद ये स्टेटमेंट एग्जीक्यूट होगी लेकिन

[87:42]

कुछ ऐसी स्टेटमेंट होती है सीके कोड के

[87:44]

अंदर जो फ्लो चेंज कर सकती हैं हो सकता है

[87:46]

हमारी नीचे वाली स्टेटमेंट पहले

[87:48]

एग्जीक्यूट हो और ऊपर वाली बाद में हो ये

[87:51]

जो स्टेटमेंट्स होती है ना जो फ्लो को

[87:53]

अल्टर करने की चेंज करने की पावर रखते हैं

[87:55]

इनको हम कहते हैं कंट्रोल इंस्ट्रक्शंस जो

[87:58]

कंट्रोल कर सकती है फ्लो ऑफ इंस्ट्रक्शंस

[88:00]

इन अ प्रोग्राम अब ये चार टाइप्स की होती

[88:03]

है इनमें से सबसे पहली होती है सीक्वेंस

[88:04]

कंट्रोल सीक्वेंस कंट्रोल इंस्ट्रक्शंस वो

[88:07]

होती हैं जो सीक्वेंस वाइज चलती रहती है

[88:10]

यानी एक के बाद एक के बाद एक अगर हमारा

[88:12]

फ्लो बनता है तो उनको हम सीक्वेंस कंट्रोल

[88:14]

इंस्ट्रक्शंस कहते हैं जैसे हमने अभी तक

[88:16]

सीखते आए हैं जिनको हम ये सारी की सारी

[88:18]

हमारी सीक्वेंस कंट्रोल इंस्ट्रक्शंस है

[88:20]

सेकंड टाइप ऑफ कंट्रोल इंस्ट्रक्शन हमारे

[88:22]

पास होती है डिसीजन कंट्रोल सजन कंट्रोल

[88:24]

में हम पढ़ेंगे इफ एल्स के बारे में यह वो

[88:27]

इंस्ट्रक्शंस है जिनके बारे में हम आने

[88:29]

वाले चैप्टर्स के अंदर पढ़ने वाले हैं

[88:31]

क्योंकि बहुत डिटेल में इनको डिस्कवर करना

[88:33]

होता है और यह सारी की सारी मिलाकर हमारी

[88:35]

सी प्रोग्रामिंग के बेसिक्स फॉर्म करती

[88:38]

हैं तो डिसीजन कंट्रोल के अंदर हम आगे

[88:40]

इफल्स वाला टॉपिक पढ़ेंगे लूप कंट्रोल के

[88:43]

अंदर हम जो डिफरेंट डिफरेंट लूप्स होते

[88:45]

हैं सी के अंदर जैसे हमारा फॉर लूप हो गया

[88:47]

हमारा वाइल लूप हो गया डिफरेंट लूप

[88:49]

पढ़ेंगे यानी किसी काम को अगर हमें

[88:51]

बार-बार बार बार बारबार करना होता है सेम

[88:54]

कुछ लाइंस को यूज करके उसमें हम लूप

[88:56]

कंट्रोल इंस्ट्रक्शन यूज करते हैं जब हमें

[88:58]

कोई डिसीजन लेना होता है कि आज बारिश हो

[89:01]

रही है तो छाता लेकर जाना है या नहीं जाना

[89:04]

सूरज है और संडे है तो आज हम खुश होंगे या

[89:07]

नहीं होंगे ऐसे कुछ-कुछ डिसीजंस होते हैं

[89:09]

इनको जब भी हम कोड में लिखते हैं वो लिखते

[89:10]

हैं डिसीजन कंट्रोल इंस्ट्रक्शंस की हेल्प

[89:13]

से उसके बाद लास्ट आती है हमारे पास केस

[89:15]

कंट्रोल इंस्ट्रक्शन जिसके अंदर कुछ-कुछ

[89:17]

केसेस के हिसाब से हम अलग-अलग चीजें करते

[89:19]

हैं जैसे अगर मंडे टू फ्राइडे है तो काम

[89:21]

पे जाना है और संडे आ गया तो फिर काम पर

[89:23]

नहीं जाना फिर हमें घर पे बैठ के रेस्ट

[89:25]

लेना है इस पूरे एक फ्लो को हमें कोड में

[89:29]

कैसे दिखा सकते हैं वेरिएबल की हेल्प से

[89:31]

और केसेस की हेल्प से कि कौन से दिन में

[89:33]

काम पे जाना है कौन से दिन में घर पे रहना

[89:34]

है तो उन स्टेटमेंट्स का जब भी हम लिख रहे

[89:37]

होते हैं उन इंस्ट्रक्शंस को उनको हम केस

[89:39]

कंट्रोल के अंदर डालते हैं इन तीनों को हम

[89:42]

आने वाले चैप्टर्स के अंदर पढ़ेंगे

[89:43]

सीक्वेंस कंट्रोल हम ऑलरेडी पढ़ चुके हैं

[89:46]

इसके साथ नेक्स्ट टॉपिक इसी चैप्टर के

[89:49]

अंदर जिसकी हम बात करेंगे वो है हमारे

[89:51]

ऑपरेटर्स अब ऑपरेटर्स हमने ऑलरेडी बेसिक

[89:54]

देख लिया है एरिथ मेे िक ऑपरेटर्स क्या

[89:56]

होते थे एरिथ मेे ऑपरेटर्स की कैटेगरी में

[89:58]

हमारे पास आ गया था प्लस माइनस मल्टीप्लाई

[90:02]

डिवाइड ये मल्टीप्लाई ये डिवाइड और

[90:05]

मॉड्यूल तो ये पांच मेजर एरिथ मेे िक

[90:08]

ऑपरेटर्स हम ऑलरेडी पढ़ चुके हैं अब c के

[90:10]

अंदर और भी डिफरेंट टाइप्स ऑफ ऑपरेटर्स

[90:12]

होते हैं हमारे पास रिलेशनल ऑपरेटर्स होते

[90:14]

हैं जो दो ऑपरेंट के बीच का रिलेशन बताते

[90:17]

हैं हमारे पास लॉजिकल ऑपरेटर्स होते हैं

[90:19]

जो दोनों के बीच में लॉजिकल चीज निकाल के

[90:21]

लेकर आते हैं फिर बिट वाइज ऑपरेटर्स भी

[90:23]

होते हैं अभी हमने बात की थी कि मशीन

[90:25]

लैंग्वेज के अंदर मशीन कोड के अंदर सब कुछ

[90:27]

जीरोज और वनस की फॉर्म में होता है और उन

[90:29]

जीरोज और वंस के बीच में अगर हम ऑपरेशन

[90:31]

करते हैं उसको बिट वाइज ऑपरेशन कह देते

[90:33]

हैं फिर असाइनमेंट ऑपरेटर्स भी होते हैं

[90:35]

फिर एक होता है टरनरी ऑपरेटर ये हमारा

[90:37]

कंडीशनल ऑपरेटर होता है यानी अगर किसी

[90:40]

कंडीशन के हिसाब से हमें कोई चीज करनी है

[90:43]

और दूसरी चीज नहीं करनी वो हम टरनरी

[90:45]

ऑपरेटर की हेल्प से भी लिख सकते हैं उसको

[90:48]

इफल्स की हेल्प से भी लिखा जाता है इसकी

[90:50]

हेल्प से भी लिखा जाता है मेजर इसमें

[90:52]

समझने वाली चीज है रिलेशनल और लॉजिकल और

[90:55]

असाइनमेंट यह तीनों इनमें से सबसे इजी है

[90:58]

एरिथ मेे िक के बाद इनको हम अभी पढ़ लेंगे

[91:00]

टरनरी ऑपरेटर को नेक्स्ट चैप्टर में हम

[91:02]

पढ़ेंगे जब भी हम कंडीशनल स्टेटमेंट्स पढ़

[91:04]

रहे होंगे और बिट वाइज ऑपरेटर्स को हम आने

[91:07]

वाले चैप्टर्स में पढ़ेंगे तो सबसे पहले

[91:10]

बात करते हैं अपने रिलेशनल ऑपरेटर्स की अब

[91:12]

रिलेशनल ऑपरेटर्स दो ऑपरेंट के बीच का

[91:14]

रिलेशन बताते हैं मैथ के अंदर जब भी हम

[91:17]

लिखते हैं ना कि a = b हमें चेक करना हो

[91:20]

कि a b के इक्वल है क्या वो हम c के अंदर

[91:23]

ऐसे का ऐसा नहीं नहीं लिख सकते c के अंदर

[91:24]

अगर कहीं लिख देंगे a = b तो इसका मतलब हो

[91:27]

जाएगा b की वैल्यू को उठाकर a में डाल दो

[91:30]

वो तो इक्वलिटी चेक करना नहीं हुआ तो जब

[91:32]

भी चेक करना होता है कि a की वैल्यू मतलब

[91:34]

एक वैल्यू किसी दूसरी वैल्यू के इक्वल है

[91:36]

क्या तो हम लगाते हैं डबल इक्वल टू a इ इ

[91:40]

= b का मतलब है कि हम यहां पर पूछ रहे हैं

[91:43]

क्वेश्चन कर रहे हैं कि a की वैल्यू b की

[91:44]

वैल्यू के इक्वल है क्या और a = b का मतलब

[91:47]

है कि b की वैल्यू को a में डाल रहे हैं

[91:50]

तो जब भी हम रिलेशनल ऑपरेटर्स की बात करते

[91:52]

हैं रिलेशन चेक करने की बात करते तो हम

[91:54]

इसको यूज कर रहे होंगे यानी डबल इक्वल टू

[91:56]

को अगर अपने कोड में हम लिखना चाहे आउटपुट

[92:00]

करवाते

[92:01]

हैं यहां पर लिखेंगे a इक्वल टू इक्वल टू

[92:05]

या a डिफाइंड नहीं है तो 4 इक्व टू इक्वल

[92:08]

टू 4 अगर हम लिखे इसको कर लेते हैं सेव और

[92:11]

उसको रन करते हैं तो हमारे पास आउटपुट में

[92:14]

आएगा वन ये वन क्या दिखाता है वन कहता है

[92:16]

ट्रू है स्टेटमेंट यानी 4 = इ 4 रिटर्न कर

[92:20]

रहा है ट्रू यानी सही बता रहा है सी

[92:21]

कंपाइलर पर अगर यहां ते 4 = = 3 तो इस केस

[92:26]

में हमारे पास वन नहीं प्रिंट होता इस केस

[92:28]

में प्रिंट होता रो यानी 4 = = ू 3 फॉल्स

[92:32]

रिटर्न कर रहा है गलत है तो सी एक स्पेशल

[92:35]

लैंग्वेज है जिसके अंदर ट्रू फॉल्स नहीं

[92:37]

होते ट्रू फॉल्स की जगह ट्रू की जगह हमारे

[92:40]

पास होता है वन और फाल्स की जगह हमारे पास

[92:43]

होता है रो इनफैक्ट कोई भी नॉन जीरो इंटी

[92:46]

जर अगर c के अंदर हम लिख दें जैसे 2 3 4 5

[92:51]

6 7 -1 -5 ये सारे के सारे रिप्रेजेंट

[92:56]

करते हैं ट्रू को पर अगर जहां जीरो आ गया

[92:59]

उसका मतलब फाल्स होता है स के अंदर तो जो

[93:02]

स्टूडेंट्स जो जावा सीखने के बाद सी सीख

[93:03]

रहे हैं c+ प्स के बाद जावास्क्रिप्ट के

[93:06]

बाद उन्हें ये थोड़ा सा अजीब लगेगा कि सी

[93:08]

के अंदर ट्रू फॉल्स जैसा कुछ नहीं होता वन

[93:11]

होता है ट्रू की जगह और जीरो होता है

[93:13]

फाल्स की जगह तो अगर इक्वल टू इक्वल टू

[93:15]

में वन प्रिंट हुआ तो मतलब ट्रू है

[93:18]

स्टेटमेंट और फाल्स प्रिंट हुआ तो हमारे

[93:21]

पास आएगा स्क्रीन पर जीरो वहीं पर दूस

[93:23]

दूसरा रिलेशन जो हम चेक करते हैं वो होता

[93:25]

है ग्रेटर देन का या ग्रेटर दन इक्वल टू

[93:28]

का जैसे अगर हम 3 ग्र दन 4 लिखें ये

[93:31]

रिटर्न करेगा रो क्योंकि फाल्स है 3 तो

[93:33]

ग्रेटर दन 4 होता नहीं पर अगर हम 4 ग्र दन

[93:36]

3 करें ये रिटर्न करेगा हमारे पास ट्रू पर

[93:39]

अगर हम 4 ग्रेटर दन 4 कर दें ये रिटर्न

[93:41]

करेगा रो क्योंकि फोरर इज नॉट ग्रेटर दन 4

[93:44]

लेकिन 4 ग्रेटर दन इक्वल टू 4 करें तो ये

[93:47]

रिटर्न करेगा वन तो ये कुछ-कुछ केसेस होते

[93:49]

हैं जिनके हिसाब से हम आउटपुट अपना

[93:51]

प्रोड्यूस कराते हैं इनको कोड में करके

[93:53]

देख लेते 4 ग्रेटर 3 अगर

[93:56]

लिखा तो आउटपुट में आया

[93:59]

न पर यहीं पर अगर 3 ग्रेटर दन 4 हमने लिख

[94:05]

दिया तो आउटपुट में अब आना चाहिए जीरो

[94:08]

यानी फॉल्स अगर हमने 3 ग्रेटर दन 3 लिखा

[94:12]

तो आउटपुट में आएगा जीरो क्योंकि थ इज

[94:14]

नेवर ग्रेटर दन 3 पर अगर हमने 3 ग्रेटर दन

[94:17]

इक्वल टू कर दिया तो ग्रेटर देन तो चेक

[94:19]

करेगा इक्वल टू भी चेक करेगा इस केस में

[94:22]

आउटपुट आएगा हमारे पास 1 तो यह ग्रेटर दन

[94:25]

और ग्रेटर दन इक्वल टू हो गया थर्ड

[94:27]

रिलेशनल ऑपरेटर जिसकी हम बात करेंगे यह है

[94:30]

हमारा लेस दन इक्वल टू लेस दन और लेस दन

[94:33]

इक्वल टू सेम केसेस रहेंगे 3 इज लेन 4

[94:37]

इसमें रिटर्न करेगा ट्रू 4 इज लेन 3 इसमें

[94:40]

रिटर्न करेगा फाल्स 3 इज लेसन 3 इसमें

[94:44]

रिटर्न करेगा 0 और 3 इज लेन इक्व 3 इसमें

[94:47]

रिटर्न करेगा वन यानी ट्रू इनके भी केसेस

[94:50]

बना लेते हैं इज ग्रेटर दन इक्वल टू कर

[94:52]

देते हैं लेसन इक्वल टू तो लेस दन इक्वल

[94:55]

टू में हमारे पास प्रिंट होगा ट्रू अगर

[94:57]

सिर्फ लेस दन किया तो उस केस में हमारे

[95:00]

पास प्रिंट

[95:02]

होगा रो अगर 4 < 3 किया इस केस में प्रिंट

[95:08]

होगा फॉल्स क्योंकि ये गलत स्टेटमेंट है

[95:10]

यानी रो और अगर किया हमने 4 लेसन 5 इस केस

[95:15]

में प्रिंट होगा ट्रू तो कुछ इस तरीके से

[95:18]

हमारी रिलेशनल स्टेटमेंट्स काम करती हैं

[95:20]

अब एक लास्ट स्पेशल रिलेशनल ऑपरेटर हमारे

[95:23]

पास है जिसको हम कहते हैं नॉट इक्वल टू

[95:26]

इसका नाम हम रखते हैं नॉट इक्वल टू इसको

[95:29]

हम कहते थे इक्वल टू जब भी इक्वल होंगी दो

[95:33]

वैल्यूज यह वन रिटर्न करेगा जब भी नहीं

[95:35]

होंगी जीरो रिटर्न करेगा जब भी इक्वल नहीं

[95:39]

होंगी दो वैल्यूज तब यह वन रिटर्न करेगा

[95:42]

और जब भी इक्वल होंगी तब यह जीरो रिटर्न

[95:44]

करेगा यानी यह दोनों एक दूसरे के ऑपोजिट्स

[95:48]

है जैसे अगर हम अपनी स्टेटमेंट में लिखना

[95:51]

चाहे फर इज नॉट = 4 और वहीं पर हम प्रिंट

[95:56]

करवाना चाहे 4 = ू = 4 जब भी हम

[96:01]

एक्सक्लेमेशन मार्क लगा देते हैं सी के

[96:03]

अंदर प्रोग्रामिंग के अंदर तो उसको हमेशा

[96:05]

नॉट की तरह हमें पढ़ना होता है जहां भी

[96:07]

एक्सक्लेमेशन आया मतलब नॉट नॉट नॉट तो नॉट

[96:11]

ऑपरेटर जो होता है अलग से एक ऑपरेटर होता

[96:13]

है अभी यह जो है व कंप्लीट है नॉट इक्वल

[96:16]

टू इन दोनों के बीच में हम स्पेस नहीं दे

[96:18]

सकते इन दोनों को हमें साथ में लिखना होता

[96:21]

है अब आउटपुट एक बार एनालाइज कर हैं

[96:24]

फर्स्ट स्टेटमेंट का आउटपुट आया जीरो यानी

[96:26]

फाल्स फोर इज नॉट इक्वल टू 4 इस स्टेटमेंट

[96:29]

में हम कह रहे हैं कि चार चार के इक्वल

[96:31]

नहीं होता ओबवियसली एक फॉल्स स्टेटमेंट है

[96:33]

इसलिए प्रिंट हुआ जीरो सेकंड स्टेटमेंट

[96:35]

में कह रहे हैं चार चार के इक्वल ही होता

[96:36]

है तो इसीलिए प्रिंट हुआ वन अब यहीं पर

[96:39]

अगर हम कह देते कि चार तीन के इक्वल नहीं

[96:41]

होता या हम कह देते कि चार तीन के इक्वल

[96:44]

होता है इसमें फर्स्ट स्टेटमेंट में तो

[96:46]

प्रिंट होगा हमारे पास वन क्यों क्योंकि

[96:50]

हम सही कह रहे हैं कि चार तीन के इक्वल

[96:51]

होता ही नहीं है और सेकंड स्टेटमेंट में

[96:53]

प्रिंट होगा फाल्स क्योंकि हम कह रहे हैं

[96:55]

चार तीन के इक्वल होता है जो कि ऑब् वियस

[96:56]

फॉल्स है तो प्रिंट होगा ज़ीरो तो इस

[96:58]

तरीके से जब भी इक्वल टू चेक करना है तो

[97:00]

दो इक्वल टू लगाएंगे जब भी नॉट इक्वल टू

[97:03]

चेक करना है तो एक्सक्लेमेशन मार्क के साथ

[97:05]

इक्वल टू को हम नॉट इक्वल टू कहते हैं

[97:07]

नेक्स्ट टाइप ऑफ ऑपरेटर जिसकी हम बात

[97:09]

करेंगे वो है हमारे लॉजिकल ऑपरेटर्स

[97:11]

कभी-कभी ऐसा होता है c के अंदर कि हमें

[97:13]

लॉजिक चेक करना होता है चीजों का जैसे

[97:16]

लॉजिकल स्टेटमेंट को हम किन केसेस में

[97:18]

यूज़ कर सकते हैं मान लेते हैं हमने c को

[97:20]

यूज़ करके एक सिस्टम बनाया है कोडिंग वाला

[97:22]

सिस्टम जिसके अंदर हम उसके मार्क्स फीड कर

[97:25]

रहे हैं और अगर हम कहते हैं कि उसके

[97:27]

मार्क्स अगर 30 से ज्यादा है और 90 से कम

[97:31]

है तो तो उसको ग्रेड दे दो a और 90 से अगर

[97:35]

ऊपर है या 100 और 90 के बीच में तो फिर

[97:39]

उसको ग्रेड दे दो a प् अगर ऐसे हमें केसेस

[97:42]

चेक करने हैं तो हमें चेक करना पड़ेगा कि

[97:44]

मार्क्स 90 से ऊपर भी हो और 100 से नीचे

[97:46]

भी हो यहां पे चेक करना पड़ेगा मार्क्स 30

[97:49]

से ऊपर भी हो और 90 से नीचे भी हो तभी a

[97:52]

देना पड़ेगा तो जब दो कंडीशंस एक साथ चेक

[97:55]

करनी हो या दो कंडीशंस में से मान लो कोई

[97:57]

एक ट्रू है जैसे आज अगर कोई नेशनल हॉलीडे

[98:00]

है या फिर आज संडे है तभी हम बाहर घूमने

[98:02]

जाएंगे दोनों में से कोई भी एक चीज ट्रू

[98:05]

हो गई तो फिर हमें काम करना पड़ेगा अगर

[98:07]

दोनों ही ट्रू है तो तो करना ही है दोनों

[98:09]

में से एक भी ट्रू है तब भी करना है तो

[98:11]

ऐसे कुछ-कुछ केसेस होते हैं ना रियल लाइफ

[98:13]

केसेस जिनको हम कोड में डालना चाहते हैं

[98:15]

तब हमारे लॉजिकल ऑपरेटर्स हमारे काम आते

[98:17]

हैं सबसे पहला लॉजिकल ऑपरेटर है एंड

[98:20]

ऑपरेटर इसको हम एंड भी कहते हैं इसके अंदर

[98:22]

हम दो एंड लगाते हैं अगर आप ध्यान से

[98:24]

देखें तो m पर m पर सिंगल एंड अगर हम

[98:27]

लिखेंगे तो ये बिट वाइज ऑपरेटर होता है

[98:29]

जिसको हमें यहां पर नहीं लिखना दो एंड

[98:31]

हमेशा लिखेंगे तो वो लॉजिकल ऑपरेटर होगा

[98:33]

इसको हम कैसे यूज़ कर सकते हैं जैसे मान

[98:35]

लो हम फर्स्ट स्टेटमेंट लिखते हैं 4 इ > 3

[98:38]

ये क्या देगी हमें ये देगी वन यानी ट्रू

[98:42]

और हम दूसरी स्टेटमेंट लिखते हैं 5 इज

[98:45]

ग्रे द 2 ये स्टेटमेंट भी हमें वन देगी

[98:47]

यानी ट्रू देगी अगर इन दोनों स्टेटमेंट्स

[98:50]

को हम चाहते हैं दोनों स्टेटमेंट जब ट्रू

[98:52]

हो तभी हमारे पास फाइ फाइनल आउटपुट ट्रू

[98:54]

आए तो इन दोनों के बीच में हम लगा देंगे

[98:56]

एंड तो ये ट्रू होगा और ये ट्रू होगा तभी

[98:58]

आउटपुट ट्रू आएगा पर इनमें से अगर एक भी

[99:00]

ट्रू नहीं है यानी यहां पर हमारे पास आ

[99:03]

जाता है 2 इज ग्रेटर दन 5 तो ये दे देगा

[99:06]

जीरो यानी फॉल्स तो आउटपुट हमारे पास

[99:09]

फॉल्स आएगा एंड के लिए जरूरी है कि फर्स्ट

[99:12]

स्टेटमेंट और सेकंड स्टेटमेंट या जितनी भी

[99:14]

हम स्टेटमेंट्स के बीच में एंड लगा रहे

[99:16]

हैं वो सारी की सारी ट्रू हो नहीं तो

[99:18]

फाल्स आउटपुट आ जाएगा जैसे इसका आउटपुट

[99:20]

अगर हम देखें तो यहां पर हम लिख सकते हैं

[99:23]

4 इ ग्र द 3 एंड एंड 5 इ ग्रे द 2 तो ये

[99:28]

दोनों स्टेटमेंट्स हमारी सच है यानी 4 भी

[99:31]

ग्रेटर दन 3 है और 5 भी ग्रेटर दन टू है

[99:34]

तो ट्रू और ट्रू का जो एंड होगा वो हमारे

[99:36]

पास ट्रू आएगा लेकिन यहां पर एक भी हम

[99:38]

फाल्स बना दें यानी यहां पर लिख दें 3 इज

[99:40]

ग्रेटर दन फॉल्स फर तो यहां पर जो आउटपुट

[99:44]

हमारे पास आएगा वो आएगा रो ये स्टेटमेंट

[99:47]

तो सच है हमारी 5 ग्र 2 पर ये एक फॉल्स हो

[99:50]

गई जहां भी फॉल्स हो गई मतलब पूरा फॉल्स

[99:52]

हो गया अगर एंड लगाया है तो दोनों फॉल्स

[99:54]

होंगे तब भी फॉल्स है दोनों में से एक

[99:56]

फॉल्स होगा तब भी फॉल्स है दोनों ट्रू

[99:58]

होंगे तभी ट्रू प्रिंट होगा तो इसकी हम

[100:00]

टेबल भी बनाते हैं कभी-कभी एक दो आपके

[100:03]

सब्जेक्ट होते हैं इलेक्ट्रॉनिक्स के अंदर

[100:04]

भी कंप्यूटर साइंस के अंदर भी आईटी के

[100:06]

अंदर भी जहां पर ये तीनों लॉजिकल ऑपरेटर्स

[100:08]

की एक टेबल बनती है और अगर आपने लॉजिक

[100:11]

गेट्स पढ़े होंगे कॉलेज के अंदर तो आपको

[100:13]

समझ आएगा कि हम किसके बारे में बात कर रहे

[100:15]

हैं अगर नहीं पढ़े तो अगले वाले

[100:16]

सेमेस्टर्स में शायद आप पढ़ रहे होंगे तो

[100:18]

टेबल ये बनती है कि फर्स्ट एक्सप्रेशन और

[100:20]

सेकंड एक्सप्रेशन हमारे पास अगर कुछ इस

[100:22]

तरीके के क्यों तो फाइनल आउटपुट क्या आएगा

[100:25]

फर्स्ट एक्सप्रेशन ट्रू है सेकंड भी ट्रू

[100:26]

है तो आउटपुट में आएगा ट्रू अगर हम एंड की

[100:28]

बात कर रहे हैं फर्स्ट ट्रू है सेकंड

[100:30]

फॉल्स है तो आउटपुट में आएगा फॉल्स फर्स्ट

[100:32]

फॉल्स है सेकंड ट्रू है तो आउटपुट में

[100:34]

आएगा फॉल्स फर्स्ट फॉल्स है सेकंड भी

[100:36]

फॉल्स है तो भी आउटपुट में आएगा फॉल्स तो

[100:38]

ये छोटी सी टेबल है जिससे हम हल्का सा

[100:41]

विजुलाइज कर सकते हैं कि किस तरीके से

[100:44]

हमारे आउटपुट्स आते हैं जब भी हम लॉजिकल

[100:46]

एंड की बात करते हैं नेक्स्ट हम बात करने

[100:48]

वाले हैं लॉजिकल र की और में हमारे

[100:51]

कीबोर्ड के अंदर पाइप वाला एक सिंबल होता

[100:53]

है यानी एक स्ट्रेट लाइन का सिंबल होता है

[100:56]

इसको जब हम दो बार लिख देते हैं तो वो

[100:57]

हमारा लॉजिकल और ऑपरेटर बन जाता है अब

[101:00]

सिंगल पाइप भी एक ऑपरेटर होता है वो बिट

[101:03]

वाइज र होता है यहां पर हम बात कर रहे हैं

[101:05]

लॉजिकल र की लॉजिकल र क्या करता है दो

[101:08]

स्टेटमेंट या तीन स्टेटमेंट या जितनी भी

[101:10]

स्टेटमेंट अगर हम दे दें और सबके बीच में

[101:12]

लॉजिकल और लगा दें तो उनमें से अगर एक भी

[101:15]

ट्रू हो जाए तो फिर आउटपुट हमारे पास ट्रू

[101:17]

आएगा बाकी सारी चाहे फॉल्स हो पर एक भी

[101:20]

ट्रू होगी तो आउटपुट ट्रू आएगा नहीं तो

[101:22]

सारी फॉल्स तो आउटपुट फॉल्स आएगा तो इसका

[101:24]

अगर कोड लिखकर देखें तो सबसे पहले हमारे

[101:27]

पास है 3 ग्र द 4 जो कि एक फॉल्स

[101:29]

स्टेटमेंट है यहीं पर अगर हम और लगा दें

[101:31]

और लिख दें और 5 ग्र द 2 तो यहां पर ये

[101:35]

स्टेटमेंट फॉल्स है ये स्टेटमेंट ट्रू है

[101:37]

तो इसका आउटपुट एंड में तो हमारे पास

[101:39]

फाल्स आया था पर और में हमारे पास ट्रू आ

[101:41]

जाएगा तो इसकी भी अपनी एक टेबल बन सकती है

[101:45]

टेबल में अगर हम ले फर्स्ट और सेकंड

[101:48]

एक्सप्रेशन और उसके बाद फाइनल आउटपुट को

[101:51]

एनालाइज करें तो यहां पर अगर ट्रू ट्रू

[101:53]

दिए होंगे तो आउटपुट में ट्रू आएगा ट्रू

[101:55]

फॉल्स दिए होंगे तो आउटपुट में ट्रू आएगा

[101:57]

फॉल्स ट्रू दिया होगा तो भी आउटपुट में

[101:59]

ट्रू आएगा लेकिन दोनों फॉल्स होंगे तभी

[102:01]

हमारे आउटपुट में फॉल्स आ रहा होगा तो ये

[102:04]

हमारा है लॉजिकल ऑर इसके अलावा एक और

[102:07]

स्पेशल ऑपरेटर होता है जो होता है हमारा

[102:09]

लॉजिकल नॉट ऑपरेटर लॉजिकल नॉट ऑपरेटर कहता

[102:12]

है कि अगर ट्रू दिया है तो उसको फॉल्स कर

[102:14]

दो फॉल्स दिया है तो उसको ट्रू बना दो

[102:16]

यानी जो भी हमें दिया हुआ है एक्सप्रेशन

[102:18]

के अंदर उसको उल्टा कर देना है चाहे वो

[102:21]

कुछ भी हो जैसे अगर एक एक्सप्रेशन है 3 >

[102:24]

4 हमें पता है यह फॉल्स देगा पर इसके आगे

[102:26]

नॉट लगा दिया तो यह ट्रू दे देगा वहीं पर

[102:29]

अगर दूसरा एक्सप्रेशन है 5 > 1 हमें पता

[102:32]

है यह ट्रू देगा पर वहीं पर नॉट लगा दिया

[102:34]

तो यह फॉल्स दे देगा तो इस तरीके से जब भी

[102:36]

एक्सप्रेशन के आउटपुट को उल्टा करना होता

[102:38]

है फ्लिप करना होता है तो हम नॉट लगा देते

[102:41]

हैं यहां पर देखते हैं हमें पता है कि 5 >

[102:45]

1 हमें देगा ट्रू पर आगे इसके नॉट लगा

[102:48]

दिया तो आउटपुट में हमारे पास आएगा फाल्स

[102:51]

यानी ज़ीरो अगर दो एक्सप्रेशंस की भी बात

[102:54]

करें यानी 5 ग्र 1 जो है यह हमें देगा

[102:57]

ट्रू और और या यहां पर लगा देते हैं एंड

[103:01]

एंड 3 ग्र 4 इसका आउटपुट अगर हम गेस करने

[103:04]

निकले 5 ग्र द 1 देगा ट्रू 3 ग्र 4 देगा

[103:09]

फॉल्स दोनों के बीच में लगा है एंड एक

[103:11]

ट्रू है एक फॉल्स है तो आउटपुट में आएगा

[103:13]

फॉल्स लेकिन इस सब के बाहर हमने नॉट लगा

[103:16]

दिया तो फाल्स की जगह हमारे पास प्रिंट

[103:18]

होने वाला है ट्रू यहां पर एक और ब्रैकेट

[103:21]

लगा देते हैं आउटपुट में में हमें पता है

[103:23]

हमारे पास ट्रू प्रिंट होकर आना चाहिए तो

[103:25]

प्रिंट हुआ है ट्रू यानी वन तो कुछ इस

[103:28]

तरीके से हमारे लॉजिकल ऑपरेटर्स काम करते

[103:30]

हैं इन लॉजिकल ऑपरेटर्स की जो एक्चुअल

[103:32]

इंपॉर्टेंस है ना वो हम नेक्स्ट चैप्टर

[103:34]

में सीखेंगे जब हम कंडीशनल स्टेटमेंट्स की

[103:36]

बात करेंगे जब भी इफ एल्स वाले कंडीशनल

[103:38]

स्टेटमेंट्स हम लिखते हैं तो उसके अंदर

[103:39]

कंडीशन डालनी होती है कि वो कंडीशन ट्रू

[103:41]

है या फॉल्स है तो वहां पर इन एक्सप्रेशंस

[103:44]

को हम सबसे ज्यादा यूज़ कर रहे होंगे अब

[103:45]

यहां पर हमारे पास एक सवाल आता है कि

[103:47]

सिंगल एक्सप्रेशन के अंदर हम कुछ एरिथ मेे

[103:49]

िक ऑपरेटर्स भी लिख सकते हैं एरिथ मेे

[103:51]

ऑपरेटर्स जैसे सिंगल एक्सप्रेशन में हम

[103:53]

लिख सकते हैं a + b - c + d * e इस तरीके

[103:58]

से और सिंगल एक्सप्रेशन के अंदर हम उनको

[104:01]

कंपेयर भी कर सकते हैं यानी इस वैल्यू को

[104:04]

ग्रेटर द 4 * 3 * 5 इस तरीके की वैल्यू को

[104:11]

हम फिर एंड एंड कर सकते हैं 4 > 2 तो इतना

[104:14]

लंबा हम एक एक्सप्रेशन लिख सकते हैं जिसके

[104:16]

अंदर एरिदमेटोसस

[104:20]

हमारे रिलेशनल ऑपरेटर्स आ रहे होंगे तो

[104:23]

फिर इनमें प्रेसीडेंट कैसे डिसाइड होती है

[104:25]

तो इनका भी अपना एक ऑपरेटर प्रेसीडेंट

[104:28]

ऑर्डर होता है जिसमें प्रायोरिटी वाइज

[104:30]

प्रेसीडेंट होती है सबसे हायर प्रेसीडेंट

[104:32]

जो दी जाती है वो दी जाती है हमारे नॉट

[104:34]

ऑपरेटर को जहां भी नॉट ऑपरेटर आ गया सबसे

[104:37]

पहले नॉट करना है उसके बाद बाकी सारी

[104:40]

चीजें करनी है उसके बाद मल्टीप्लाई डिवाइड

[104:42]

मॉड्यूल को फिर प्लस माइनस आ जाते हैं फिर

[104:44]

आ जाते हैं हमारे रिलेशनल ऑपरेटर्स फिर आ

[104:46]

जाते हैं रिलेशनल ऑपरेटर्स में इक्वल टू

[104:48]

और नॉट इक्वल टू फिर आते हैं हमारे लॉजिकल

[104:50]

ऑपरेटर्स जिसमें सबसे पहले देखा जाता है

[104:52]

एंड कैसे होगा फिर देखा जाता है और कैसे

[104:54]

होगा फिर आ जाता है इक्वल टू यानी

[104:56]

असाइनमेंट ऑपरेटर पहले ऊपर वाली सारी

[104:58]

चीजें हो जाएंगी फिर लेफ्ट हैंड साइड में

[105:00]

जाके जो भी लिखा होगा उसमें हम असाइन कर

[105:02]

देंगे वैल्यू को तो कुछ इस तरीके से

[105:05]

प्रेसीडेंट रहता है इसको भी याद करने की

[105:07]

जरूरत नहीं है मेजर चीजें जो इसमें याद

[105:09]

रखनी है वो ये है कि सबसे पहले नॉट को

[105:11]

किया जाएगा रिलेशनल ऊपर आते हैं लॉजिकल

[105:15]

नीचे आते हैं तो इस तरीके से हम रखेंगे

[105:18]

बाकी जब भी आपको कैलकुलेशन में रेफर करना

[105:20]

पड़े आप इन सेम नोट्स को जाकर रेफर कर

[105:22]

सकते हैं

[105:23]

अब इसके बाद एक और ऑपरेटर का टाइप हम पढ़

[105:25]

लेते हैं यह काफी आसान ऑपरेटर है सबसे

[105:28]

आसान ऑपरेटर जो होने वाले हैं हमारे

[105:29]

असाइनमेंट ऑपरेटर असाइन करना हम ऑलरेडी

[105:32]

पढ़ चुके हैं इक्वल टू क्या करता है a इ b

[105:35]

है तो b की वैल्यू को a में डाल देगा c =

[105:37]

d है तो d की वैल्यू को c में डाल देगा e

[105:40]

= f + g - h है तो इस पूरे एक्सप्रेशन की

[105:44]

वैल्यू को e में डाल देगा ये होता है

[105:46]

असाइनमेंट ऑपरेटर का काम उसके बाद हमारा

[105:48]

प्लस इक्वल टू वाला ऑपरेटर होता है ये

[105:51]

बेसिकली हमारे शॉर्ट हैंड ऑपरेटर है क्या

[105:53]

है शॉर्ट हैंड ऑपरेटर्स यह क्या करते हैं

[105:58]

मुश्किल लंबी लंबी जो स्टेटमेंट होती है

[106:00]

ना उसको छोटा करने के तरीके बताते हैं

[106:02]

जैसे अगर हमने लिखा है a = a प् बी अगर हम

[106:06]

अपने कोड में इस चीज को

[106:08]

लिखें इंट a =

[106:12]

1 इंट बी = 4 और हम लिखना चाहते हैं इंट

[106:17]

या a = ए प् बी तो यहां पर क्या आना चाहिए

[106:22]

b है 4 a है व तो 1 प् 4 होगा 5 तो a की

[106:26]

वैल्यू अब फ बन जाएगी इसको प्रिंट भी

[106:29]

कराकर हम टैली कर सकते

[106:32]

हैं आउटपुट में आएगा फाइव तो a की वैल्यू

[106:35]

फाइव बन गई क्योंकि फोर और वन को मिलाकर

[106:37]

फाइव हो गया अब हम नोटिस करेंगे लेफ्ट में

[106:39]

भी a लिखा हुआ है राइट में भी a लिखा हुआ

[106:41]

है जब लेफ्ट और राइट में सेम एक्सप्रेशन

[106:43]

होता है ना यानी सेम वेरिएबल लिखा होता है

[106:46]

तो उसको हम छोटा कर सकते हैं छोटा कैसे कर

[106:48]

सकते हैं इस a = a + b को हम लिख सकते हैं

[106:51]

a प् इक्वल टू b तो यहां पर प्लस इक्वल टू

[106:56]

ने रिप्लेस कर लिया है इक्वल टू a को तो

[106:59]

इस तरीके से हम बार-बार बार-बार जब भी सेम

[107:02]

वेरिएबल को लेफ्ट में और राइट में यूज

[107:04]

करते हैं तो हम इक्वल टू को रिप्लेस कर

[107:07]

सकते हैं प्लस इक्वल टू से तो वो ऑपरेशन

[107:08]

परफॉर्म हो जाएगा जैसे यहां पर अगर हम

[107:11]

स्टेटमेंट लिखें a +

[107:15]

= b और फिर इसकी वैल्यू को चेक करें तो

[107:18]

सेम आउटपुट हमारे पास आएगा व्हिच इज अब जो

[107:20]

सेम चीज हमने प्लस के साथ की वो

[107:22]

मल्टीप्लाई के साथ भी कर सकते हैं यहां पर

[107:24]

अग लिख दिया मल्टीप्लाई इक्वल टू तो क्या

[107:27]

होगा 4 * 1 दोनों मल्टीप्लाई हो जाएंगे

[107:29]

आउटपुट में फर आएगा वहीं पर माइनस लिख

[107:31]

दिया तो माइनस में क्या होगा इस स्टेटमेंट

[107:34]

का मतलब है a = a - b तो a है 1 b है 4 1

[107:41]

- 4 - 3 आ जाएगा तो a में हमारे पास

[107:44]

प्रिंट होकर आना चाहिए -3 इसको टैली कर

[107:47]

लेते हैं आउटपुट में आया -3 तो इस तरीके

[107:50]

से जब भी एक्सप्रेशंस को छोटा करना हो

[107:52]

क्योंकि हम लेफ्ट और राइट में सेम ऑपरेंट

[107:54]

यूज़ कर रहे हैं तो क्या करेंगे माइनस

[107:56]

इक्वल टू लिख देंगे मल्टीप्लाई इक्वल टू

[107:58]

सेम फॉर डिवाइड सेम फॉर मॉड्यूल ये होते

[108:01]

हैं हमारे सबसे आसान ऑपरेटर्स हमारे

[108:03]

असाइनमेंट ऑपरेटर्स तो इस तरीके से हमारे

[108:06]

जो बेसिक ऑपरेटर्स थे बेसिक इंस्ट्रक्शंस

[108:08]

थे हमने कंप्लीट कर लिए हैं अब हम कुछ-कुछ

[108:11]

प्रॉब्लम्स करेंगे यह प्रॉब्लम्स करने के

[108:14]

बाद जो चीजें अभी हमने पढ़ी हैं चैप्टर टू

[108:16]

में व हमारे दिमाग के अंदर बैठ जाएंगी

[108:18]

सबसे पहला सवाल करते हैं राइट अ प्रोग्राम

[108:20]

टू चेक इफ अ नंबर इज़ डिविजिबल बाय टू ऑर

[108:22]

नॉट

[108:23]

अब नंबर इज डिविजिबल बाय टू और नॉट का

[108:26]

प्रोग्राम हमें लिखना है कोई भी नंबर मान

[108:28]

लो x हमें दिया है x की वैल्यू पाच हो

[108:30]

सकती है छ हो सकती है 10 हो सकती है देखना

[108:32]

है यह टू से डिवाइड होगा या नहीं होगा जो

[108:35]

भी नंबर किसी दूसरे नंबर से डिवाइड हो

[108:37]

जाता है जैसे मान लीजिए 4 ू से डिवाइड हो

[108:40]

जाता है 10 5 से डिवाइड हो जाता है तो

[108:43]

रिमाइंडर क्या देता है जीरो देता है 4 डि

[108:46]

बा 2 भी रिमाइंडर हमें जीरो देगा तो यहां

[108:49]

पे हमें दिमाग लगाना है कि रिमाइंडर टू दे

[108:51]

दे जो भी नंबर दूसरे से डिवाइड हो जा

[108:53]

तो यहां हम इस्तेमाल करेंगे अपने मॉडलो

[108:55]

ऑपरेटर का तो क्या करेंगे किसी भी नंबर एक

[108:58]

को इनपुट ले लेंगे इनपुट में हमने ले लिया

[109:01]

एकस को अब x का मॉडलो देख लेंगे ू के साथ

[109:04]

अगर यह मॉडलो जीरो हो जाता है एक केस है

[109:07]

कि जीरो हो गया मतलब हो गया डिवाइड एक केस

[109:10]

है जीरो नहीं हुआ जीरो के अलावा मान लो न

[109:14]

प्रिंट होर आ गया ू आ गया मानव या माइन फ

[109:17]

कुछ भी आ गया जीरो के अलावा तो मतलब नॉट

[109:20]

डिवाइड हो जाएगा तो सिंपली क्या करना है

[109:23]

एक नंबर इनपुट लेंगे यूजर से फिर उसका

[109:25]

मॉड्यूल चेक कर लेंगे टू के साथ अगर

[109:27]

मॉड्यूल जीरो रिटर्न कर रहा है तो मतलब

[109:29]

डिवाइड होता है नहीं तो नहीं होता अब इसके

[109:32]

लिए कोड लिखकर देख लेते हैं सबसे पहले

[109:34]

एक्स को हम कर लेते हैं डिक्लेयर फिर

[109:37]

स्कैन एफ करके सबसे पहले प्रिंट एफ कर

[109:39]

देते

[109:40]

हैं एंटर

[109:43]

अ नंबर यहां पर हमारे पास नंबर एंटर होगा

[109:47]

फिर उसको हम कर लेंगे

[109:49]

स्कैन परसेंटेज डी

[109:53]

एंड x अब दोबारा प्रिंट कर लेंगे हम

[109:58]

परसेंटेज

[109:59]

डी कैसे चेक करेंगे डिवाइड होता है या

[110:02]

नहीं होता हम लिख देंगे x

[110:05]

मॉडलो

[110:07]

2 इक्वल टू इक्व

[110:09]

0 यहां पर हमने दो को कंबाइन किया एरिथ

[110:12]

मेे ऑपरेटर को कंबाइन किया किसके साथ अपने

[110:15]

रिलेशनल ऑपरेटर के साथ मॉड्यूल लिया पहले

[110:18]

और फिर रिलेशनल आया अब जब हमने ऑपरेटर

[110:20]

प्रेसीडें देखा था तो उसमें क्या था हमारे

[110:22]

एरिदमेटोसस

[110:24]

ऑपरेटर्स नीचे थे तो यहां पर सबसे पहले x

[110:27]

का मॉड्यूल निकलेगा टू के साथ अगर वो

[110:30]

वैल्यू जीरो के इक्वल होती है तो प्रिंट

[110:32]

होगा ट्रू यानी वन मतलब ये डिवाइड हो जाता

[110:35]

है अगर नहीं होती तो प्रिंट होगा जीरो

[110:37]

मतलब ये डिवाइड नहीं होता है तो इसको सेव

[110:39]

कर लेते हैं आउटपुट अपना देखते हैं हम

[110:42]

एंटर करते हैं नंबर फाइव फाइव के लिए

[110:44]

प्रिंट हुआ जीरो क्योंकि फाइव जो है टू के

[110:47]

साथ डिवाइड नहीं होता वहीं पर इसको दोबारा

[110:49]

रन करें अबकी बार एंटर करेंगे 10

[110:53]

10 में प्रिंट हुआ वन क्योंकि 10 हमारा टू

[110:55]

के साथ डिवाइड हो जाता है जब भी 10 एंटर

[110:57]

किया 10 का मॉड्यूल निकला पहले टू के साथ

[111:00]

फिर मॉड्यूल क्या आया रो उस रो को हमने रो

[111:02]

से ही कंपेयर कर दिया तो आ गया ट्रू तो

[111:04]

ट्रू रिटर्न हो गया पर यहां पे फाइव के

[111:07]

केस में फाइव का मॉड्यूल टू के साथ आया वन

[111:10]

तो वन को हमने कंपेयर किया रो के साथ तो

[111:12]

वो इक्वल टू नहीं आया तो इसलिए प्रिंट हुआ

[111:14]

रो यानी फाल्स अब इसका एक दूसरा वर्जन

[111:17]

होता है इसी प्रोग्राम का वो वर्जन होता

[111:19]

है टेल इफ अ नंबर इज इवन और ऑड जो नंबर्स

[111:24]

टू के साथ डिवाइड हो जाते हैं वो होते हैं

[111:26]

हमारे इवन नंबर्स जो नंबर्स टू के साथ

[111:28]

डिवाइड नहीं होते यानी उनका मॉड्यूल हमारे

[111:31]

पास जीरो नहीं आता वो होते हैं हमारे ऑड

[111:34]

नंबर्स तो जब भी इवन ऑड चेक करना हो कोई

[111:36]

नंबर है या नहीं तो उसके लिए भी टू से

[111:38]

डिवीजन चेक कर लो तो यही है हमारा नेक्स्ट

[111:40]

प्रैक्टिस क्वेश्चन जिसमें राइट अ

[111:42]

प्रोग्राम टू चेक इफ अ नंबर इज ऑड और इवन

[111:44]

जब भी इवन वाला हमारे पास केस होगा तो

[111:47]

उसमें हम प्रिंट करवाने वाले हैं वन और ऑड

[111:50]

वाला केस होगा उसमें प्रिंट करवाने वाले

[111:52]

हैं जीरो तो नंबर हमने एंटर कर लिया सेम

[111:55]

लाइन से उसको x में स्टोर करा लिया अब

[111:57]

क्या प्रिंट करेंगे उसी नंबर को टू से

[111:59]

मॉड्यूल ले लेंगे मॉडलो में अगर जीरो आएगा

[112:02]

तो वो नंबर इवन है नहीं तो ऑड है इसी

[112:04]

प्रोग्राम को दोबारा रन कर देंगे पहले

[112:07]

लेते हैं हम 16 16 में प्रिंट हुआ वन यानी

[112:11]

16 हमारा इवन नंबर है क्योंकि टू से हो

[112:13]

गया

[112:15]

डिवाइड अब वहीं पर अगर हम बात करें सेवन

[112:18]

की तो सेवन के केस में प्रिंट हुआ जीरो

[112:20]

क्योंकि सेवन हमारा ऑड नंबर है नेक्स्ट

[112:23]

क्वेश्चन कहता है आर द फॉलोइंग वैलिड और

[112:25]

नॉट सबसे पहली स्टेटमेंट है इंट इ 8 और यह

[112:29]

वाला सिंबल 8 अब यहां पर हमारी जो

[112:31]

एक्सपेक्टेशन होगी इसके बारे में ऑलरेडी

[112:33]

बात कर चुके हैं हम एक्सपेक्ट कर रहे हैं

[112:35]

8 टू द पावर 8 जो कि होना चाहिए कोई बड़ी

[112:38]

सी

[112:39]

वैल्यू वह तो यहां पर प्रिंट नहीं होगा

[112:42]

यहां पर बल्कि प्रिंट होगा जीरो कैसे

[112:44]

प्रिंट होगा जीरो एक बार कोड में देख लेते

[112:46]

हैं इस पूरे को हटाते हैं और यहां प्रिंट

[112:50]

करवाते हैं 8

[112:53]

जीरो प्रिंट हुआ है क्योंकि कंपाइलर ने

[112:55]

क्या किया इसको 8 की पावर 8 की तरह नहीं

[112:57]

लिया इसको लिया 8 एजोर 8 और जब सेम नंबर

[113:01]

का सेम नंबर के साथ एजर करते हैं तो

[113:03]

आउटपुट में हमेशा जीरो आता है इसीलिए यहां

[113:05]

पर हमारे पास आउटपुट में जीरो आया है ये

[113:06]

बिट वाइज ऑपरेटर है जिसके बारे में हम

[113:08]

ऑलरेडी बात कर चुके हैं कि हम बाद में बात

[113:10]

करेंगे तो और इसका आउटपुट हमारे पास पावर

[113:12]

नहीं आता पावर के लिए पीओ डब् पाव फंक्शन

[113:15]

यूज करना पड़ता है पर क्या ये स्टेटमेंट

[113:17]

चल गई हां ये स्टेटमेंट चल गई क्या

[113:19]

कंपाइलर ने कोई एरर रिटर्न किया नहीं

[113:21]

कंपाइलर ने कोई एरर रिटर्न नहीं किया

[113:23]

इसीलिए स्टेटमेंट हमें पावर तो नहीं देती

[113:26]

पर यह है एक वैलिड स्टेटमेंट दूसरी

[113:30]

स्टेटमेंट की बात करते हैं इंट x उसके बाद

[113:33]

है हमारा टर्मिनेटर फिर इंट y = x फिर है

[113:36]

टर्मिनेटर क्या ये स्टेटमेंट वैलिड है अब

[113:39]

इसमें ध्यान से देखें तो पहली स्टेटमेंट

[113:41]

तो हमारी यही खत्म हो गई है दूसरी

[113:44]

स्टेटमेंट शुरू हुई है दूसरी स्टेटमेंट

[113:46]

में हमने x को x की वैल्यू को y में डाल

[113:49]

दिया है अब ये जो स्टेटमेंट है सेम लाइन

[113:52]

में तो लिखी है पर क्योंकि टर्मिनेटर आ

[113:54]

गया तो नेक्स्ट स्टेटमेंट बन गई तो पहले

[113:57]

हमने x को डिक्लेयर किया बाद में यूज़

[113:58]

किया है तो यह स्टेटमेंट भी वैलिड है इसको

[114:02]

सॉल्व करके एक बार देख लेते हैं इंट

[114:06]

x और इंट y = x अब यहां पर अगर हम सेव

[114:11]

करें तो कोई एरर नहीं आया क्योंकि क्या

[114:13]

हुआ पहले x को डिक्लेयर कर लिया फिर y को

[114:16]

कर दिया अगर हम इसको ऐसे लिखें या हम इसको

[114:19]

ऐसे लिखें दोनों में कोई डिफरेंस नहीं है

[114:21]

दोनों सिंटेक्स वाइज सही है और सेम है पर

[114:24]

यहीं पर अगर हम ये टर्मिनेटर हटा देते और

[114:26]

यहां कॉमा लगा देते और फिर उसको सेव करते

[114:29]

तो यहां पर आ जाता एरर क्यों आता है एरर

[114:31]

क्योंकि टर्मिनेटर हट गया तो मतलब ये सेम

[114:33]

लाइन पर है सेम लाइन पर है तो एक को हमने

[114:36]

यूज कर लिया जिस लाइन में डिक्लेयर कर रहे

[114:38]

हैं उसी लाइन में तो यहां तो टाइप

[114:40]

डिक्लेरेशन का रूल ब्रेक हो गया और यहीं

[114:42]

पर आता है हमारा थर्ड प्रॉब्लम थर्ड

[114:45]

प्रॉब्लम में क्या था हमारे पास कि सेम

[114:47]

लाइन में है और बीच में आ गया हमारे पास

[114:49]

कॉमा तो यह तो वैलिड था पर ये हो गया

[114:53]

हमारा इनवैलिड स्टेटमेंट चौथी स्टेटमेंट

[114:56]

है एक कैरेक्टर हमने डिफाइन किया स्टार्स

[114:58]

नाम से उसके अंदर दो स्टार हमने स्टोर कर

[115:00]

दिए ये देखते हैं कि वैलिड है या नहीं है

[115:03]

अपने कोड के अंदर लिखते हैं कैर स्टार्स

[115:06]

इज इक्वल टू स्टार स्टार उसको करते हैं

[115:09]

सेव अब इस स्टेटमेंट को कंपाइल करते हैं

[115:12]

एक बार कंपाइल करके हमारे पास वॉर्निंग

[115:14]

जनरेट हुई वॉर्निंग क्या कहती है कि हमने

[115:17]

एक मल्टी कैरेक्टर कांस्टेंट बना दिया

[115:19]

मतलब हमने मल्टीपल कैरेक्टर्स यहां पर डाल

[115:21]

दिए तो ये एक एरर वाली चीज है ये हम नहीं

[115:23]

कर सकते अगर हम स्पेस भी डालें कैरेक्टर

[115:25]

के अंदर तो वो भी कंपाइल नहीं करेगा सेम

[115:28]

चीज बोलेगा कि आपने स्पेस क्यों डाल दिया

[115:30]

तो इसीलिए जब भी कैरेक्टर्स बनाते हैं

[115:32]

उनके अंदर सिंगल वैल्यू जो है हमें डालनी

[115:34]

होती है तभी वो कंपाइल करेंगे सक्सेसफुली

[115:37]

अगर हम यहां पर वन भी लिख रहे हैं तो वन

[115:40]

जो होगा वो तो कंपाइल कर जाएगा पर वन के

[115:42]

साथ अगर टू लिख दिया तो यहां पर दो

[115:43]

कैरेक्टर्स आ गए एक तरीके से तो ये हमारा

[115:46]

कंपाइल नहीं करेगा ये दे देगा हमें इंप्ली

[115:49]

कन्वर्जन की वार्निंग ये वार्निंग्स क्यों

[115:51]

दी गई है क्य कि अगर हम मल्टीपल

[115:53]

कैरेक्टर्स डालते हैं ना अगर हम स्टार

[115:54]

स्टार भी डालते हैं तो वो मेमोरी के अंदर

[115:56]

इतनी जगह ले लेता है जो कैरेक्टर को जितनी

[115:58]

जगह दी जाती है उससे बड़ी होती है तो इसको

[116:00]

क्या हमें बड़े कंटेनर में डालना चाहिए तो

[116:02]

वो सोचता है कैरेक्टर वाले छोटे कंटेनर

[116:04]

में तो ये आएगा नहीं इसको क्या इंट वाले

[116:06]

कंटेनर में डाल दूं पर वो ऑटोमेटिक इंप्ली

[116:09]

वो कर नहीं पाता क्योंकि कैरेक्टर को

[116:11]

ऑटोमेटिक वो इंटी जर में डालता नहीं है

[116:13]

इसीलिए यहां पर ये वार्निंग जनरेट होती है

[116:15]

तो ऐसा नहीं करना है जब भी कैरेक्टर

[116:17]

डिफाइन कर रहे हैं सिंगल वैल्यू वाला

[116:18]

कैरेक्टर हमें डिफाइन करना है इस

[116:20]

स्टेटमेंट को हम इनवैलिड कहेंगे क्योंकि

[116:23]

यहां पर कंपाइलर हमें वार्निंग थ्रो कर

[116:25]

रहा है नेक्स्ट जो प्रैक्टिस क्वेश्चन है

[116:26]

उसमें हमें बताना है कि प्रिंट कर दो ट्रू

[116:29]

या फॉल्स फॉर द फॉलोइंग स्टेटमेंट पहली

[116:31]

स्टेटमेंट है इफ इट्स संडे एंड इट्स नोइंग

[116:35]

देन प्रिंट करो ट्रू यानी अगर संडे का दिन

[116:38]

है और स्नो कर रहा है तो फिर ट्रू प्रिंट

[116:41]

करना है कैसे इसको प्रोग्राम की फॉर्म में

[116:43]

कैसे कन्वर्ट करेंगे सबसे पहले तो दो

[116:45]

वेरिएबल ले लेते हैं पहला वेरिएबल है इंट

[116:49]

इज संडे दूसरा वेरिएबल है इंट

[116:53]

इज स्नोइंग तो अब इज संडे में अगर हम ट्रू

[116:56]

डाल दे और इज स्नोइंग में भी अगर हम ट्रू

[116:59]

डाल द तो फिर प्रिंट एफ करते

[117:03]

हैं इस संडे जब ट्रू होगा एंड एंड इज

[117:07]

स्नोइंग जब ट्रू होगा तभी हमारे पास ट्रू

[117:11]

प्रिंट हो यानी यह भी ट्रू हो और यह भी

[117:13]

ट्रू हो संडे हो और स्नो पड़ रही हो तभी

[117:15]

हम करेंगे ट्रू प्रिंट तो ऑलरेडी हमने इन

[117:18]

दोनों को ट्रू कर रखा है देख लेते हैं

[117:19]

आउटपुट हमारा ट्रू आ रहा है या नहीं आ रहा

[117:23]

तो आउटपुट में हमारे पास आया ट्रू वहीं पर

[117:26]

मान लेते हैं कि संडे का दिन नहीं है कोई

[117:27]

और दिन है तो इस संडे तो फॉल्स हो जाएगा

[117:30]

और अब अगर हम इसको रन करें तो आउटपुट में

[117:32]

हमारे पास आएगा जीरो क्योंकि दोनों में से

[117:35]

एक कंडीशन फॉल्स हो गई और एंड क्या करता

[117:37]

है एक भी कंडीशन फॉल्स हुई तो पूरे को

[117:39]

फॉल्स बना देगा अब सेकंड जो क्वेश्चन है

[117:42]

वो कहता है इफ इट्स मंडे और इट्स रेनिंग

[117:46]

तो ट्रू कर दो या तो मंडे हो या रेन हो

[117:48]

रही हो तो ट्रू प्रिंट हो जाए यहां पे और

[117:51]

जो है उसकी जगह हम करेंगे अपना लॉजिकल और

[117:54]

ऑपरेटर तो इज संडे को बना देंगे इज मंडे

[117:57]

इस नोइंग को बना देंगे इज रेनिंग यहां पर

[118:02]

मंडे नहीं है तो जीरो कर लेंगे रेनिंग है

[118:04]

तो वन कर लेंगे यहां पर कर लेते हैं इज

[118:07]

मंडे यहां कर लेते हैं

[118:09]

इज रेनिंग अब एक कंडीशन जो है वो है फॉल्स

[118:12]

एक कंडीशन है ट्रू अब दोनों में से कोई भी

[118:15]

अगर ट्रू हो तो हमें प्रिंट करवाना है

[118:17]

ट्रू तो उसके लिए यूज कर लेंगे लॉजिकल और

[118:20]

और इसको रन करके देख लेते हैं प्रिंट होगा

[118:21]

हमारा पास ट्रू थर्ड कंडीशन कहती है इफ अ

[118:25]

नंबर इज ग्रेटर दन ना यानी एक नंबर है x

[118:28]

वो अगर नाइन से बड़ा है एंड लेस दन 100

[118:31]

100 से छोटा है तो इसको हम प्रिंट करवा

[118:35]

देंगे ट्रू तो एक नंबर के लिए चेक करना है

[118:37]

कि वो नाइन से बड़ा हो एंड वो सेम नंबर

[118:42]

100 से छोटा हो ये दोनों कंडीशन है दोनों

[118:44]

कंडीशन ट्रू होनी चाहिए बीच में लगा देंगे

[118:46]

अपना लॉजिकल एंड ऑपरेटर और फिर प्रिंट

[118:49]

करवा देंगे हम ट्रू की जगह वन अब ये जो हम

[118:52]

स्टेटमेंट लिखने वाले कंडीशन लिखने वाले

[118:54]

हैं इसको हम एक तरीके से कह सकते हैं कि

[118:56]

हम चेक करें कि टू डिजिट नंबर है या नहीं

[118:58]

है जो नंबर नाइन से बड़ा होगा और 100 से

[119:01]

छोटा होगा वो हमेशा एक टू डिजिट नंबर होगा

[119:03]

तो जब भी टू डिजिट नंबर की हमें कंडीशन

[119:05]

चेक करनी है यह स्टेटमेंट अपने कोड में हम

[119:07]

लिख लेते हैं तो जब भी ऐसा कोई सवाल आए ये

[119:10]

सेम की सेम स्टेटमेंट हमें छाप देनी है उस

[119:12]

सवाल के अंदर इसके लिए कोड लिख लेते हैं

[119:15]

सबसे पहले एक वेरिएबल डिफाइन करते हैं एक

[119:17]

फिर स्क्रीन पर प्रिंट कर देते हैं एंटर

[119:20]

नंबर

[119:22]

नंबर एंटर करवा लेते हैं फिर उस नंबर को

[119:25]

कर लेते परसेंटेज डी एंड x अब चेक कर

[119:30]

लेंगे यहां पर कि x इ ग्रेटर दन 9 एंड एंड

[119:34]

x इ ले 100 अगर यह दोनों कंडीशंस ट्रू हो

[119:39]

गई तो फिर वो नंबर एक टू डिजिट नंबर है तो

[119:41]

प्रिंट होगा वन अगर नहीं हुई तो प्रिंट

[119:43]

होगा जीरो इसको रन करते हैं सबसे पहले जो

[119:47]

नंबर एंटर करेंगे वो करते हैं 78 78 के

[119:49]

लिए प्रिंट हुआ वन अब सेम कोड को अगर रन

[119:52]

करें और अबकी बार नंबर एंटर करें हम

[119:55]

101 तो प्रिंट होगा जीरो क्योंकि ये टू

[119:58]

डिजिट नंबर नहीं है तो अभी तक सी के अंदर

[120:00]

हमने जितना पढ़ा है डिफरेंट डिफरेंट

[120:02]

ऑपरेटर्स को मिलाकर हम बहुत ब्यूटीफुल

[120:04]

लॉजिकल प्रोग्राम्स बना सकते हैं दुनिया

[120:06]

के अंदर कोई भी ऐसा लॉजिक है जो एजिस्ट

[120:09]

करता है यानी मैथ जैसी चीज जो कि बहुत

[120:11]

ज्यादा लॉजिकल है फिजिक्स जैसी चीज जो

[120:13]

बहुत ज्यादा लॉजिकल है कहीं भी अगर लॉजिक

[120:15]

एजिस्ट करता है जिसका हम कोई फार्मूला बना

[120:17]

सकते हैं कोई प्रोसेस बना सकते हैं उस चीज

[120:19]

को हमेशा एक कोड में कन्वर्ट किया जा सकता

[120:22]

सता है तो यहां पे हमने अपनी चीज को एक

[120:24]

कोड में कन्वर्ट कर दिया है बहुत सारे

[120:26]

ब्यूटीफुल प्रोग्राम्स हमने सीखे क्या

[120:27]

सीखा कि ऑड इवन कैसे चेक करते हैं बहुत

[120:29]

बेसिक है और बहुत सारे मिड सेमेस्टर्स में

[120:31]

पूछ लिया जाता है कॉलेजेस में अगर आप

[120:34]

इनिशियल राउंड्स दे रहे हैं टीसीएस जैसी

[120:36]

कंपनीज के तो वो भी इनिशियली पूछ सकते हैं

[120:38]

आपसे नहीं तो आपके एमसीक्यू राउंड्स में आ

[120:40]

जाते हैं ऐसे सवाल अगर हमें चेक करना है

[120:42]

कोई नंबर टू डिजिट नंबर है क्या तो उसकी

[120:43]

हमने कंडीशन देख ली है इसके अलावा नेक्स्ट

[120:46]

चैप्टर्स के अंदर बहुत सारे ऐसे लॉजिकल

[120:48]

सवाल हम और ज्यादा डिस्कवर कर रहे होंगे

[120:50]

और ज्यादा सॉल्व कर रहे होंगे बहुत सिंपल

[120:52]

तरीकों से इसके बाद हमें एक होमवर्क

[120:54]

प्रॉब्लम जो है होमवर्क शीट हमें दी होगी

[120:57]

उसको हमें पॉज करना है खुद से सॉल्व करना

[120:59]

है अगर सॉल्व नहीं कर पाते कोई भी एरर आता

[121:01]

है तो अपने नोट्स के अंदर हमें सॉल्यूशन

[121:03]

मिल जाएंगे उन प्रॉब्लम्स के उनको जाकर हम

[121:05]

देख सकते हैं और खुद से सवाल करने की

[121:07]

प्रैक्टिस कर सकते हैं तो यहां पर हमारा

[121:08]

चैप्टर टू खत्म होता है और नेक्स्ट चैप्टर

[121:10]

की तरफ बढ़ते हैं जो है कंडीशनल ऑपरेटर्स

[121:12]

हाय एवरीवन और अब हम शुरू करने वाले हैं

[121:15]

अपने थर्ड चैप्टर के साथ जिसका नाम है

[121:17]

कंडीशनल स्टेटमेंट्स सी के अंदर कंडीशनल

[121:19]

स्टेटमेंट्स बहुत इंपॉर्टेंट होते हैं और

[121:21]

ये हमारा बेसिस ऑफ प्रोग्रामिंग फॉर्म कर

[121:23]

रहे हैं अब कंडीशनल स्टेटमेंट्स को पढ़ने

[121:26]

से पहले ना थोड़े से उसके रियल लाइफ

[121:27]

एग्जांपल्स देख लेते हैं जैसे मान लो कि

[121:30]

हमारे पास हमें कोई कैरेक्टर दिया जाएगा

[121:33]

जैसे एम फॉर मंडे टी फॉर ट्यूजडे या अ

[121:36]

डब्लू फॉर वेनसडे तो इस तरीके से हमें

[121:39]

कैरेक्टर लेके वो जिस भी कैरेक्टर के

[121:41]

हिसाब से जो भी दिन होगा हमें वो प्रिंट

[121:43]

करवाना है या इसके अलावा हमें मार्कशीट

[121:46]

मिलती है स्कूल के अंदर जिसमें क्या होता

[121:47]

है हमें कुछ ग्रेड्स दिए होते हैं जैसे

[121:49]

अगर आपके 90 प्लस आए होंगे तो आपको ए प्लस

[121:52]

प्लस दिया होगा 80 से 90 में a प्लस दिया

[121:54]

होगा 70 से 80 में आपको a दिया होगा 60 से

[121:58]

70 में आपको बी दिया होगा इस तरीके से

[122:00]

ग्रेडिंग सिस्टम रहता है तो इसी पूरे के

[122:02]

पूरे ग्रेडिंग सिस्टम को अगर हमें कोड की

[122:04]

फॉर्म में लिखना है तो हमें कंडीशनल

[122:06]

स्टेटमेंट्स की जरूरत पड़ेगी अगर मान

[122:08]

लीजिए ऐसा कोई सिनेरियो बन रहा है कि अगर

[122:11]

हमारी रोशनी है तो प्रिंट करवाना है

[122:13]

मॉर्निंग और डार्कनेस है तो प्रिंट करवाना

[122:16]

है नाइट ऐसे-ऐसे कुछ-कुछ चीजें होती हैं

[122:18]

जो कभी-कभार कोड में लिखनी पड़ती हैं या

[122:20]

फिर अगर हम मार्केट से कोई सामान खरीदने

[122:22]

जा रहे हैं जैसे मान लीजिए आप क्लोथ्स

[122:23]

खरीदते हैं आप गैजेट्स खरीदते हैं तो उनके

[122:25]

ऊपर आपको कुछ टैक्स भरना पड़ता है लेकिन

[122:28]

वहीं आप मार्केट से अगर बुक्स खरीदते हैं

[122:30]

तो उनके ऊपर टैक्स नहीं देना पड़ता तो कौन

[122:32]

सा आप सामान खरीद रहे हैं उस हिसाब से

[122:34]

आपका जो सॉफ्टवेयर है वो डिसाइड करेगा कि

[122:36]

आपके ऊपर कितना टैक्स लगेगा इस तरीके के

[122:38]

जो प्रोग्राम्स होते हैं इनमें कंडीशंस

[122:40]

आपकी चेक होती है जैसे कंडीशन में आइटम के

[122:44]

ऊपर टैक्स कैलकुलेट करने के लिए कंडीशन

[122:46]

चेक होगी कि आइटम कौन सा है फिर बताया

[122:48]

जाएगा उस पर कितना टैक्स लगेगा पहले देखा

[122:50]

जाएगा अंधेरा है है या लाइट है और फिर

[122:53]

बताया जाएगा क्या प्रिंट करवाना है पहले

[122:55]

देखा जाएगा कैरेक्टर कौन सा है फिर प्रिंट

[122:58]

करवाया जाएगा कि कौन से हफ्ते के दिन की

[123:00]

हम बात कर रहे हैं पहले देखा जाएगा आपके

[123:02]

सब्जेक्ट के मार्क्स कितने आए हैं फिर

[123:04]

प्रिंट करवाया जाएगा कि आपके उस सब्जेक्ट

[123:06]

में कितने ग्रेड्स हैं तो ऐसी सिचुएशंस

[123:08]

जहां पर हम किसी कंडीशन को देखकर उस हिसाब

[123:11]

से काम करते हैं उस हिसाब से कोई भी चीज

[123:14]

करवाते हैं तो उन्हें हम कंडीशनल

[123:16]

स्टेटमेंट्स की कंडीशनल ऑपरेटर्स की

[123:19]

कैटेगरी में लेके आते हैं अब जब भी हम सी

[123:21]

के अंदर कंडीशनल स्टेटमेंट्स की बात करते

[123:23]

हैं तो हम दो टाइप की स्टेटमेंट्स को

[123:25]

पढ़ेंगे इनमें से सबसे पहली हमारी एफएल

[123:27]

स्टेटमेंट्स और दूसरी है हमारी स्विच

[123:30]

स्टेटमेंट इफ का मतलब इंग्लिश के अंदर

[123:33]

होता है अगर और एल्स का मतलब होता है अगर

[123:36]

वो चीज नहीं हुई तो यह चीज कर दो तो इस

[123:38]

तरीके से हमारी फफएल स्टेटमेंट्स फॉर्म

[123:40]

होती हैं अब अगर सिंटेक्स देखें कि फफएल

[123:43]

स्टेटमेंट्स को लिखा कैसे जाता है तो सबसे

[123:45]

पहले हम इफ कीवर्ड लिखते हैं ये सी का एक

[123:48]

कीवर्ड है मतलब ऑलरेडी सी के कंपाइलर को

[123:50]

पता है कि इफ का मतलब क्या होता होता है

[123:52]

फिर हम पैरेंस लगाते हैं फिर उसके अंदर

[123:54]

कोई कंडीशन हम लिखते हैं अब कंडीशंस हम

[123:57]

ऑलरेडी पढ़ चुके हैं किस तरीके की हम कोई

[123:59]

रिलेशन लिख देंगे कि क्या हमारा जो

[124:01]

कैरेक्टर है वो इक्वल टू m है उस केस में

[124:04]

मंडे प्रिंट करवा दो या फिर मार्क्स की

[124:07]

अगर कंडीशन लिखनी है तो मार्क्स अगर हमारे

[124:10]

ग्रेटर दन 80 हैं एंड एंड मार्क्स अगर

[124:13]

हमारे लेस दन इक्वल टू 90 हैं तो इस केस

[124:17]

में ग्रेड जो हम प्रिंट करवाना चाहते हैं

[124:19]

मान लीजिए वो a+ है तो इस तरीके की

[124:21]

कंडीशंस जो हैं वह हम यहां पर लिख रहे

[124:24]

होते हैं कि क्या कंडीशन चेक करूं मैं जो

[124:27]

अगर ट्रू हो जाए तो फिर यह वाली चीज कर दो

[124:30]

और फाल्स हो जाए तो फिर यह वाली चीज कर दो

[124:33]

तो यह है हमारी इफ स्टेटमेंट ये है हमारी

[124:36]

एल्स स्टेटमेंट एल्स का अपना एक ब्लॉक

[124:38]

होता है एल्स भी एक कीवर्ड है अगर यह

[124:41]

कंडीशन ट्रू हो जाती है तो इसके अंदर जो

[124:43]

भी लिखा होगा मतलब इन दो कर्ली ब्रेसस के

[124:46]

अंदर जो भी लिखा होगा वो एग्जीक्यूट हो

[124:48]

जाएगा लेकिन अगर ये स्टेटमेंट फाल्स हो

[124:50]

जाती है तो फिर ये जो एल्स वाला ब्लॉक है

[124:53]

ना ये दो कर्ली ब्रेसे इसके अंदर जो भी

[124:55]

लिखा होगा वो प्रिंट हो जाएगा या जो जो भी

[124:59]

काम हमने दिया होगा कंपाइलर को करने के

[125:01]

लिए वो हो जाएगा अब इफ एल्स कंडीशंस के

[125:03]

अंदर ये एल्स जो है वो कंपलसरी नहीं होता

[125:06]

इफ तो ओबवियसली कंपलसरी होता है एल्स

[125:08]

हमारा ऑप्शनल होता है हमारी मर्जी होती है

[125:10]

एल्स हम कुछ और काम करवाना चाहते हैं अगर

[125:12]

कंडीशन फॉल्स हो गई या नहीं भी करवाना

[125:14]

चाहे तो एल्स को हम कंप्लीट हटा सकते हैं

[125:17]

अब इसके कुछ एग्जांपल्स करके देखते हैं

[125:19]

अपने कोड के अंदर सबसे पहले एक वेरिएबल

[125:21]

डिफाइन करते हैं एज एज में मान लो हमने 19

[125:24]

स्टोर किया है या फिर इससे भी अच्छा एज को

[125:28]

यूजर से इनपुट ले लेते हैं पहले प्रिंट

[125:30]

करते हैं एंटर

[125:32]

एज और उसके बाद स्कैन कर लेंगे एज को

[125:36]

परसेंटेज डी एंड

[125:40]

एज यहां से डिक्लेरेशन से जो असाइनमेंट है

[125:43]

इसको हटा देते

[125:44]

हैं अब जैसे ही हमारे पास एज आ गई सबसे

[125:47]

पहले हम चेक करेंगे अब एज में हमें पता है

[125:50]

जिसकी एज 18 से ऊपर ऊपर होती है वो एक

[125:52]

एडल्ट होता है जिसकी ऐज 18 से नीचे होती

[125:54]

है वो एक एडल्ट नहीं होता तो उसी

[125:56]

स्टेटमेंट को हम यहां पर कोड में लिखने

[125:58]

वाले हैं इफ हमारी एज जो है वो ग्रेटर दन

[126:01]

18

[126:02]

है उस केस में हम प्रिंट करना चाहते हैं

[126:08]

एडल्ट इस स्टेटमेंट को थोड़ा सा ध्यान से

[126:11]

देखेंगे सबसे पहले हमने इफ कंडीशन को चेक

[126:14]

करने के लिए इफ कीवर्ड लिखा है अंदर हमने

[126:16]

लिखी अपनी कंडीशन कंडीशन हमारी क्या थी कि

[126:19]

एज हमारी ग्रेटर दन 18 हो तभी जिस भी बंदे

[126:22]

की हमने एज ली है वो एक एडल्ट है तो हमने

[126:25]

ऑलरेडी पढ़ा था रिलेशनल ऑपरेटर को कैसे

[126:27]

यूज़ करते हैं वेरिएबल के साथ कंपैरिजन

[126:29]

लगा देंगे इस कांस्टेंट का कि एज हमारा

[126:31]

वेरिएबल 18 जो हमारा कांस्टेंट है उससे

[126:34]

बड़ा है या नहीं और अगर ये स्टेटमेंट ट्रू

[126:36]

हो जाती है ये वाली कंडीशन अगर ट्रू हो

[126:38]

जाती है तो उस केस में हम यहां पर लिखा

[126:40]

हुआ कुछ भी एग्जीक्यूट कर देंगे तो यहां

[126:42]

पे लिखा है एडल्ट तो अगर ये कंडीशन ट्रू

[126:44]

हो गई तो हमारे पास प्रिंट हो जाएगा

[126:46]

स्क्रीन में एडल्ट लेकिन मान लो यह कंडीशन

[126:48]

फाल्स हो जाती है और उस केस में हम प्रिंट

[126:52]

करवाना चाहते हैं नॉट एडल्ट तो हम क्या

[126:54]

करेंगे हम एल्स लिख देंगे इस तरीके से फिर

[126:56]

उसके भी कर्ली ब्रेसे का ब्लॉक बना देंगे

[126:58]

जो कर्ली ब्रेसस के बीच में जितनी भी

[127:00]

लाइंस होती है ना इसको हम ब्लॉक कहते हैं

[127:02]

कर्ली ब्रेसस का अगर यहां पर अपना हम

[127:05]

प्रिंट एफ कंप्लीट करें तो उसमें लिखेंगे

[127:07]

नॉट

[127:08]

एडल्ट नेक्स्ट लाइन और इसको कर लेंगे सेव

[127:12]

अब यहां पर हम मल्टीपल लाइंस भी लिख सकते

[127:14]

थे अब अगर वो एडल्ट है तो ओबवियसली हमें

[127:17]

पता है कि दे कैन वोट अगर वो 18 के हैं तो

[127:21]

वोट कर पाएंगे अगर 18 के हैं तो ड्राइव भी

[127:26]

कर पाएंगे तो यहां पर लिख देते हैं दे कैन

[127:28]

ड्राइव आल्सो तो इस तरीके से अगर यह वाली

[127:32]

कंडीशन ट्रू होगी तो ये तीनों की तीनों

[127:34]

स्टेटमेंट्स प्रिंट होंगी और अगर कंडीशन

[127:36]

ट्रू नहीं होगी तो फिर इस वाले ब्लॉक में

[127:38]

सिर्फ एक ही स्टेटमेंट है अब इन दो कर्ली

[127:40]

ब्रेसे के बीच में जो यह पूरी की पूरी

[127:43]

स्टेटमेंट्स का चंक आता है यह ग्रुप आता

[127:45]

है इनको हम ब्लॉक कहते हैं सी के अंदर या

[127:47]

किसी भी प्रोग्रामिंग लैंग्वेज के अंदर

[127:49]

ब्लॉक जो होता है एक कॉमिनेशन ऑफ

[127:51]

स्टेटमेंट्स होता है जिसमें हम बहुत सारी

[127:52]

स्टेटमेंट्स घुसा देते हैं तो ये तीनों एक

[127:54]

साथ एग्जीक्यूट हो रही होंगी इसको कर लेते

[127:57]

हैं सेव और इसको करते हैं रन कंपाइल कर

[128:00]

लेंगे रन करेंगे एंटर करते हैं सबसे पहले

[128:04]

15 कि हमारी ऐज 15 है इस केस में प्रिंट

[128:06]

हुआ नॉट एडल्ट अब दोबारा से अगर रन करें

[128:10]

इस बार एंटर करेंगे एज 22 और इस बार

[128:13]

प्रिंट हुआ दे आर एन अडल्ट दे कैन वोट दे

[128:16]

कैन ड्राइव तो जिस केस में हमने वो

[128:19]

स्टेटमेंट डाली जो ट्रू नहीं होगी मतलब

[128:22]

यहां पे तो फाल्स हो गया तो फिर वोह एल्स

[128:24]

के अंदर चला गया तो नॉट एडल्ट उसने प्रिंट

[128:26]

कर दिया पर जहां पर हमने 22 डाला और यह

[128:28]

कंडीशन ट्रू हो गी उसमें फिर ये सारी

[128:30]

स्टेटमेंट एग्जीक्यूट हुई पर साथ में ये

[128:33]

नहीं हुई मतलब ये वाली स्टेटमेंट नहीं हुई

[128:35]

अब इसके बाद अगर हम लास्ट में कुछ लिखना

[128:38]

चाहे थैंक

[128:40]

यू तो ये एग्जीक्यूट होगा क्या ऑब् वियस

[128:43]

हां ये वाली स्टेटमेंट हर केस में

[128:45]

एग्जीक्यूट होगी क्योंकि इसके आगे ना तो

[128:47]

इफ लगा है ना एल्स लगा है मतलब कोई भी

[128:49]

कंडीशन हो इसको जरूर एग्जीक्यूट होना है

[128:51]

इसका भी हम एग्जांपल देख लेते हैं इसको कर

[128:54]

लेते हैं कंपाइल एंड रन अब अगर हम एंटर

[128:58]

करें 19 तो उस केस में यह सारी कंडीशंस तो

[129:01]

प्रिंट हुई यह सारी स्टेटमेंट्स साथ के

[129:04]

साथ लास्ट वाला थैंक यू हमेशा प्रिंट होगा

[129:06]

चाहे हम एज 18 से छोटी डालें चाहे 18 से

[129:08]

बड़ी डालें अब यह जो एल्स है यह कंपलसरी

[129:11]

नहीं है इसको अगर हम हटा भी दें मान लीजिए

[129:13]

हमें सिर्फ चेक करना है 18 से बड़ा है या

[129:15]

नहीं अगर छोटा है तो उस केस में कुछ भी

[129:17]

प्रिंट नहीं कराना तो भी हमारा प्रोग्राम

[129:19]

जो है सक्सेसफुली कंपाइल और हो जाएगा इस

[129:22]

बार अगर 15 हम एंटर करेंगे तो सिर्फ थैंक

[129:24]

यू प्रिंट होगा कुछ और प्रिंट होगा ही

[129:26]

नहीं क्योंकि एल्स है ही नहीं सिर्फ ये

[129:28]

स्टेटमेंट ट्रू है या नहीं है वो चेक होगा

[129:30]

तो इस तरीके से हमारा इफ एल्स काम करता है

[129:33]

अब इफ एल्स के अंदर एक स्पेशल चीज है अगर

[129:35]

मल्टीपल स्टेटमेंट्स हमने लिखी है ना इफ

[129:37]

के अंदर या एल्स के अंदर तब तो हमें कर्ली

[129:39]

ब्रेसे लगाने पड़ते हैं पर ये कर्ली

[129:41]

ब्रेसेज ना कंपलसरी नहीं है अगर हमें

[129:44]

सिर्फ मान लो एक ही स्टेटमेंट लिखनी है

[129:46]

जैसे इफ के केस में एक ही स्टेटमेंट लिखनी

[129:48]

है एल्स के केस में भी एक ही स्टेट लिखनी

[129:51]

है लास्ट वाला थैंक यू हम यहां से हटा

[129:53]

देते हैं अभी के लिए और इसको हम सेव करें

[129:55]

तो बिना कर्ली ब्रेसेज के भी यह प्रोग्राम

[129:58]

कंपाइल हो रहा होगा और रन हो रहा होगा 23

[130:02]

अगर डालें तो देखिए एडल्ट प्रिंट हो गया

[130:04]

है और कोई एरर नहीं आया तो अगर हमारे पास

[130:07]

एक स्टेटमेंट है तब तो हम बिना कर्ली

[130:10]

ब्रेसेज के भी काम चला सकते हैं पर सही

[130:12]

अच्छे जो प्रोग्रामर्स होते हैं ना वो

[130:14]

कंसिस्टेंसी लेके आते हैं प्रोग्राम में

[130:16]

और अगर हमें अच्छा प्रोग्रामर बनना है तो

[130:18]

हर बार कर्ली ब्रेस लगाने हैं तो मैं तो

[130:19]

हर बार कर्ली ब्रेसेज लगाती हूं क्योंकि

[130:22]

एक एग्जांपल देखते हैं जब कर्ली ब्रेसेज

[130:24]

नहीं लगाए और मल्टीपल स्टेटमेंट्स लिख दी

[130:26]

तो क्या होगा दे कैन

[130:29]

वोट दे कैन वोट को हमने यहां पे लिख दिया

[130:32]

है अब इसको कर लेते हैं सेव तो यहां पे

[130:35]

पहले ही एरर आ गया कि एल्स जो है ना हमेशा

[130:38]

एक इफ के बाद आना चाहिए इसने क्या किया इस

[130:41]

इफ के साथ इस सिंगल वाली जो शुरुआत वाली

[130:44]

प्रिंटेड स्टेटमेंट है इसको तो मिला दिया

[130:46]

पर सेकंड जो प्रिंटेड स्टेटमेंट है ना

[130:48]

उसको इसने इफ के साथ नहीं काउंट किया उसको

[130:50]

इसने अलग से काउंट किया

[130:51]

फिर आया यह एल्स पे एल्स पे आके सोचा इसका

[130:54]

इफ कहां है क्योंकि इसके लिए तो ऊपर इफ है

[130:56]

ही नहीं ऊपर तो नॉर्मल स्टेटमेंट लिखी हुई

[130:59]

है इंस्ट्रक्शन लिखी हुई है इसीलिए इस

[131:01]

तरीके का कंफ्यूजन नहीं रखना जब भी कोई भी

[131:03]

प्रोग्राम लिखना है उसमें हमेशा हमें

[131:04]

कर्ली ब्रेसेज जरूर लगाने हैं चाहे कितनी

[131:07]

भी लाइंस हो अब जब भी हमारा इफ ट्रू नहीं

[131:09]

होता उसके बाद अगर हमें चेक करनी है कि

[131:11]

कोई और कंडीशन ट्रू है क्या ऊपर वाली तो

[131:14]

नहीं हुई नीचे वाली ट्रू है क्या तो हम

[131:16]

लिखते हैं एल्स इफ एल्स इफ लिखने का क्या

[131:19]

फॉर्मेट रहता है अगर हमने ऊपर लिख दिया इफ

[131:21]

तो उसके अंदर हम कंडीशन वन अपनी डाल सकते

[131:23]

हैं फिर जो भी अगर करना हो उसको पहले

[131:26]

ब्लॉक में डाल दो फिर लिखो एल्स इफ उसके

[131:29]

अंदर कंडीशन ट्रू डालो जैसे मार्क्स का

[131:31]

अगर एग्जांपल लें अगर हमारे जो मार्क्स

[131:34]

हैं वो ग्रेटर दन 90 हैं तो आप प्रिंट कर

[131:37]

दो a + + और यहां पे चेक कर लो कि मार्क्स

[131:40]

जो हैं वो लेस दन 90 है पर ग्रेटर दन 80

[131:43]

है तो उस केस में सिर्फ a+ प्रिंट करो और

[131:46]

वो कंडीशन ट्रू का जो आउटपुट होगा वो इसके

[131:49]

अंदर आ जाएगा इस तरीके से इसके के बाद हम

[131:51]

एक और एलसीएफ लिख सकते हैं एक और एलसीएफ

[131:53]

लिख सकते हैं जितने मर्जी एलसीएफ लिख सकते

[131:55]

हैं और उसके बाद एंड में अगर हमें करना है

[131:58]

ऊपर में से कुछ भी ट्रू नहीं हुआ तो एल्स

[132:00]

कर दो तो इस तरीके से जब भी हमारा फ्लो ऑफ

[132:02]

प्रोग्राम बनता है ना सबसे ऊपर हम अपना इफ

[132:05]

वाला ब्लॉक बनाते हैं उसके बाद अपना

[132:07]

एलसीएफ वाला ब्लॉक बनाते हैं उसके बाद एक

[132:10]

और एलसीएफ जितने भी एलसीएफ हम लिखना चाहे

[132:12]

और लास्ट में एक एल्स लिख देते हैं तो अगर

[132:14]

आपको सारे के सारे यूज़ करने हैं तो इस

[132:16]

तरीके का फ्लो होगा इसमें क्या होगा सबसे

[132:18]

पहले एक कंडीशन चेक हो जाएगी अगर यह सच

[132:20]

नहीं है तो फिर दूसरी कंडीशन चेक होगी अगर

[132:23]

यह सच नहीं है तब तीसरी कंडीशन चेक होगी

[132:26]

अगर ये सच हो जाती है मान लो ये ट्रू हो

[132:28]

गई तो उसके बाद ये कोई भी चेक नहीं होगी

[132:31]

और अगर ऊपर वाली सारी फॉल्स हैं तो फिर

[132:34]

लास्ट वाला एल्स में कुछ चेक नहीं होता

[132:36]

एल्स में ऊपर वाले सारे फॉल्स हैं तो जो

[132:38]

काम लिखा है वो हो ही जाता है बिना चेकिंग

[132:40]

के अब अगर हम चाहते हैं कि हमारी सारी की

[132:43]

सारी कंडीशंस में चेक हो मतलब अगर ये भी

[132:45]

ट्रू हो जाए तब भी ये चीज जो है चेक हो

[132:47]

रही हो तो उस केस में हम इफ लिखते हैं

[132:49]

बहुत सारे एक के बाद एक के बाद एक

[132:52]

यह चेक होगा अगर ट्रू है तो हो जाएगा नहीं

[132:54]

तो नहीं होगा फिर यह चेक होगा ट्रू है तो

[132:56]

हो जाएगा नहीं यह नहीं होगा इसको ऊपर वाला

[132:59]

ट्रू था या फाल्स था उससे कोई फर्क नहीं

[133:01]

पड़ता तो जब ऊपर वाली कंडीशन से नीचे वाली

[133:04]

कंडीशन को फर्क ना पड़े तो इफ बार-बार

[133:06]

बारबार बार-बार लिखते जाओ और अगर ऊपर वाली

[133:08]

कंडीशन से फर्क पड़ रहा है जैसे मार्क्स

[133:10]

अगर हमें चेक करने थे तो ऊपर एक बार a + प

[133:13]

प्रिंट हो गया तो नीचे a+ दोबारा प्रिंट

[133:15]

ना हो इसका ध्यान हमें रखना है इसीलिए

[133:17]

उसमें हम एलसीएफ यूज़ करेंगे तो एलसीएफ के

[133:20]

लिए भी हम अपना ना एक फॉर्मेट लिख लेते

[133:22]

हैं एक एग्जांपल के साथ इसको सॉल्व करके

[133:24]

देखते हैं एज के केस में ही करते हैं अगर

[133:26]

एज ग्रेटर दन 18 है तब तो एडल्ट लिख देंगे

[133:29]

अब इसमें एक एल्स इफ करके कंडीशन लगा देते

[133:31]

हैं कि एज हमारी ग्रेटर दन 13

[133:35]

है एंड एंड एज इज लेस देन इक्वल टू 18

[133:41]

वैसे यहां पर इक्वल टू 18 आना चाहिए और यह

[133:44]

होना चाहिए लेस दन 18 तो यहां पर हम

[133:47]

लिखेंगे

[133:49]

टीनेजर और लास्ट में लिखेंगे

[133:53]

एल्स प्रिंट

[133:56]

एफ

[133:58]

चाइल्ड इस थैंक यू को हम हटा लेते हैं अब

[134:01]

ध्यान से देखें तो हमने क्या किया एज

[134:02]

मांगी है यूजर से एज अगर हमारी 18 या 18

[134:06]

से बड़ी हो जाती है तो उस केस में एडल्ट

[134:07]

प्रिंट करवाना है एज अगर 13 से बड़ी है पर

[134:10]

18 से छोटी है उस केस में जो भी व्यक्ति

[134:12]

है वो एज के हिसाब से एक टीनेजर है तो उस

[134:14]

केस में टीनेजर प्रिंट करवा देंगे तो एल्स

[134:16]

इफ ने ये कंडीशन चेक कर ली और अगर कोई भी

[134:19]

केस नहीं है ऊपर वाले दोनों में से तो यह

[134:21]

वाला केस प्रिंट हो जाएगा यानी चाइल्ड

[134:23]

वाला अब 18 से ऊपर भी नहीं है 13 से 18 के

[134:25]

बीच में भी नहीं है तो ओबवियसली 13 से

[134:27]

नीचे ही होगा तो चेक करने की जरूरत नहीं

[134:28]

है सिर्फ चाइल्ड प्रिंट करवा दो इसको कर

[134:31]

लेते हैं सेव और इसको करते हैं कंपाइल एंड

[134:34]

रन सबसे पहले एज डालते हैं हम फाइव ईयर्स

[134:37]

तो उस केस में चाइल्ड प्रिंट हुआ उसके बाद

[134:39]

दोबारा एज डालें अगर मान लीजिए 16 हमने

[134:42]

डाल ली इस केस में टीनेजर प्रिंट हुआ और

[134:45]

दोबारा हमने एज डाली है अपनी 22 तो उस केस

[134:48]

में प्रिंट हुआ एडल्ट तो इस तरीके से

[134:50]

डिफरेंट डिफरेंट कंडीशन के हिसाब से

[134:52]

क्या-क्या चीजें होनी चाहिए वो हम अपने

[134:54]

कोड में एफएस की मदद से कर सकते हैं अब

[134:57]

नेक्स्ट टाइप ऑफ स्टेटमेंट जिसकी हम बात

[134:59]

करेंगे स्विच से पहले हम बात करने वाले

[135:01]

हैं कंडीशनल ऑपरेटर की सेकंड चैप्टर में

[135:04]

हमने पढ़ा था कि कुछ पांच टाइप ऑफ पांच

[135:06]

प्रकार ऑफ ऑपरेटर्स होते हैं जिनमें से

[135:08]

पढ़ा था कुछ हम आगे वाले चैप्टर्स में

[135:09]

पढ़ेंगे अब उनमें से काफी इंपॉर्टेंट टाइप

[135:12]

होता है हमारा टरनरी ऑपरेटर प्लेसमेंट के

[135:15]

टाइम पे काफी सारे जो एमसीक्यू के सवाल

[135:17]

होते हैं बहुत सारी कंपनीज टरनरी ऑपरेटर

[135:19]

से रिलेटेड पूछ लेती है यह टर्नर ऑपरेटर

[135:22]

आपका c+ प में भी होता है जावा में भी

[135:24]

होता है और सेम सिंटेक्स होता है बिल्कुल

[135:27]

सेम दिखता है दोनों लैंग्वेजेस में और

[135:29]

इनफैक्ट वो स्टूडेंट्स जो एक बार c सीख

[135:31]

लेते हैं उनको c+ प या जावा में शिफ्ट

[135:33]

होने में बिल्कुल इशू नहीं आता क्योंकि

[135:34]

ऑलमोस्ट सिंटेक्स काफी चीजों का सेम होता

[135:36]

है बस इनपुट आउटपुट का डिफरेंस हो जाता है

[135:39]

अब टर्नर ऑपरेटर को लिखने का क्या तरीका

[135:41]

रहता है टर्नर ऑपरेटर का पहले यूसेज समझ

[135:44]

लेते हैं जब भी हमारे पास ना बहुत लाइनें

[135:46]

हो रही होती हैं सिंपल से इफ एल्स में

[135:48]

मतलब इफ में कंडीशन चेक कर रहे हैं फिर

[135:51]

कुछ कर रहे हैं उसको अगर हम शॉर्ट कर सकते

[135:53]

हैं जैसे मान लो हमें वेरिएबल की वैल्यू

[135:55]

चेक करनी है अगर एज हमारी ग्रेटर दन 18 है

[135:58]

तो यहां पे एज वेरिएबल हो गया तो एडल्ट

[136:00]

प्रिंट कर दो नहीं तो नॉट एडल्ट उसमें

[136:02]

हमने देखा कि हमने बहुत सारी लाइनें लिख

[136:04]

दी हैं मतलब अगर पहले वाली भी देखे 1 2

[136:06]

तीन और एल्स की तीन और तो छह लाइनों में

[136:09]

हमारा कोड हो रहा है उस छह लाइनों के कोड

[136:11]

को सिंगल लाइन में करने का तरीका होता है

[136:13]

टरनरी ऑपरेटर तो टरनरी ऑपरेटर का सिंटेक्स

[136:16]

होता है कि सबसे पहले तो अपनी कंडीशन बता

[136:18]

दो कि क्या कंडीशन है उसके बाद क्वेश्चन

[136:20]

क् मार्क लगा दो ये क्वेश्चन मार्क का काम

[136:22]

होता है कि वो चेक करेगा क्वेश्चन करेगा

[136:24]

कि आपकी कंडीशन सच है या नहीं है अगर आपकी

[136:27]

कंडीशन ट्रू रिटर्न करती है तो फिर यहां

[136:31]

पर जो भी लिखा होगा वो एग्जीक्यूट हो

[136:34]

जाएगा नहीं तो ये कोलन फिर उसके बाद हम

[136:38]

लगाते हैं इसका मतलब होता है नहीं तो यह

[136:42]

चेक करेगा कंडीशन को ट्रू आया तो यह होगा

[136:47]

नहीं तो उसके बाद जो लिखा है यानी ये होगा

[136:50]

अगर कंडीशन फॉल्स हो जाती है तो यह हमारा

[136:53]

सिंटेक्स रहता है इसको हम एक बार टरनरी

[136:56]

ऑपरेटर का एक एग्जांपल लिख के देख लेते

[136:58]

हैं जैसे एज को हमने एंटर करवाया था अब

[137:00]

इसी का टरनरी ऑपरेटर को कैसे एग्जीक्यूट

[137:03]

करते हैं अगर हमारी एज ग्रेटर देन इक्वल

[137:06]

टू 18 है अगर 18 है और यह ट्रू चीज है तो

[137:10]

उस केस में हम प्रिंट करवाने वाले हैं

[137:14]

एडल्ट नहीं तो हम प्रिंट करवाने वाले हैं

[137:19]

नॉट एडल्ट

[137:22]

अब एक चीज इस लाइन में काफी ध्यान देने

[137:25]

वाली है वो यह कि ये प्रिंट एफ स्टेटमेंट

[137:27]

के बाद हमने जो है सेमीकलन नहीं लगाया

[137:30]

मतलब टर्मिनेटर नहीं लगाया क्यों क्योंकि

[137:32]

अभी हमें स्टेटमेंट खत्म नहीं करनी

[137:34]

स्टेटमेंट हमें एंड में करनी है तो इवन

[137:37]

अगर ट्रू हो जाए और प्रिंट एफ हमें लिखना

[137:39]

पड़े बीच में या स्कैन एफ कुछ भी लिखना

[137:40]

पड़े तो हम यहां पे टर्मिनेटर नहीं

[137:42]

लगाएंगे क्योंकि अगर टर्मिनेटर लगा दिया

[137:44]

तो वहीं पर हमारी कंडीशन जो है खत्म हो

[137:46]

जाएगी हमारी स्टेटमेंट जैसे अगर इसको एक

[137:49]

बार पहले रन कर लेते

[137:52]

कंपाइल किया रन करके अब एज अगर

[137:54]

डाले 15 तो प्रिंट हुआ नॉट एडल्ट इसने

[137:59]

क्या किया पहले कंडीशन चेक करी उसके बाद

[138:01]

अगर ट्रू थी तो यह करवाना था पर ट्रू तो

[138:03]

नहीं थी तो नहीं तो इसने बाद वाली कंडीशन

[138:06]

जो है नॉट एडल्ट को प्रिंट करवा दिया अब

[138:09]

यहीं पर अगर हम एक टर्मिनेटर लगा देते तो

[138:12]

एक तो सबसे पहले एरर ही आ जाता क्योंकि

[138:14]

टर्मिनेटर के बाद हम सेमीकलन नहीं लगा

[138:16]

सकते इसीलिए टर्मिनेटर यहां पर लगाना सही

[138:19]

नहीं होगा आल्सो टर्न ऑपरेटर को तभी यूज़

[138:22]

करना है जब हमारे पास सिंगल लाइन कुछ हो

[138:24]

यहां पे क्योंकि टर्मिनेटर तो लगा ही नहीं

[138:26]

सकते तो जब भी इफ एल्स में हमें सिंगल

[138:28]

स्टेटमेंट लिखनी हो उसकी जगह हम टरनरी

[138:30]

ऑपरेटर यूज कर सकते हैं लद ये काफी

[138:32]

इंपॉर्टेंट है सिंटेक्स बहुत अच्छा है इस

[138:34]

ऑपरेटर का इसका प्रैक्टिकल यूसेज ज्यादा

[138:36]

नहीं है मोस्टली आपके प्लेसमेंट्स या

[138:38]

एग्जाम्स में य पूछा जाता है तो इसको हम

[138:40]

ध्यान रख सकते हैं अब नेक्स्ट जिस कंडीशनल

[138:43]

ऑपरेटर की बात करेंगे हम उसका नाम है

[138:46]

स्विच जैसे हमने घर में लाइट के स्विच

[138:48]

देखे होंगे पंखे के स्विच देखे होंगे टीवी

[138:50]

का स्विच देखा होगा स्विच क्या करता है

[138:52]

अगर उसको ऑन कर दो तो कुछ काम कर देता है

[138:56]

ऑफ कर दो तो कुछ काम नहीं करता उसी तरीके

[138:59]

से हमारा कोडिंग के अंदर स्विच होता है

[139:01]

जिसकी अगर आपने कंडीशन ऑन कर दी तो वह

[139:04]

आपको काम करके दे देगा और नहीं करी तो

[139:06]

आपका काम नहीं होगा अब स्विच को लिखने का

[139:09]

सिंटेक्स कुछ ऐसा रहता है जिसमें सबसे

[139:11]

पहले तो कीवर्ड लिख देते हैं हम स्विच

[139:13]

उसके अंदर हम लिखते हैं कुछ नंबर या

[139:16]

कैरेक्टर और स्विच बेसिकली क्या करता है

[139:19]

उस नंबर या कैरेक्टर से कुछ कांस्टेंट्स

[139:21]

को मैच करता है जैसे नंबर आपने दे दिया एज

[139:24]

फिर कांस्टेंट हमारा हो गया 1 2 3 4 5 6 7

[139:28]

8 9 10 लद ये बहुत इंप्रैक्टिकल केस है

[139:30]

स्विच के लिए इस तरीके से हमारे बहुत सारे

[139:32]

कांस्टेंट नंबर्स हो गए तो वो आपकी एज को

[139:35]

जिस भी केस में मैच कर देगा मतलब वन के

[139:37]

साथ अगर उसने आपकी एज को मैच कर दिया आपने

[139:39]

एज में वन डाला था उसने वन के साथ उसको

[139:41]

मैच कर दिया तो उसके आगे जो भी लिखा होगा

[139:44]

वो उस काम को करके आपको दे देगा तो इस

[139:46]

तरीके से आपने उसका स्विच ऑन कर दिया केस

[139:48]

मैच करवा के फिर वो आपको काम करके दे देगा

[139:51]

अब स्विच हम लिखते हैं उसके अंदर जिसके

[139:53]

साथ भी जिस भी वेरिएबल के साथ नंबर या

[139:55]

कैरेक्टर ही डाल सकते हैं य पे हमें मैच

[139:58]

करवाना है फिर वो केसेस चेक करता है यहां

[140:00]

पर हम कुछ कांस्टेंट लिखते हैं जैसे वन हो

[140:02]

गया टू हो गया तो हम कुछ इस तरीके से

[140:04]

लिखते हैं केस

[140:06]

वन केस टू केस ्र और इन टर्म्स ऑफ

[140:12]

कैरेक्टर अगर मान लो कैरेक्टर के साथ

[140:14]

करवाना है तो केस ए केस बी केस

[140:21]

केस के बाद कांस्टेंट लिखना है उसके बाद

[140:23]

हमें कोलन लगाना है फिर अपनी जो भी

[140:25]

स्टेटमेंट जितनी भी स्टेटमेंट है वो सारी

[140:27]

लिख दो इसी तरीके से अगला केस लिखेंगे जो

[140:29]

भी स्टेटमेंट है सारी और लास्ट में ब्रेक

[140:31]

जरूर लिखना है ब्रेक का काम होता है केस

[140:34]

के बाद बाहर निकालना आपको स्विच से अगर

[140:37]

स्विच से ये ब्रेक नहीं होगा तो ये सारी

[140:40]

की सारी स्टेटमेंट्स एग्जीक्यूट हो जाएंगी

[140:42]

अगर एक स्विच ऑन हो गया और ब्रेक आपने

[140:45]

नहीं लिखा तो सारे स्विच ऑन हो जाएंगे

[140:47]

उसके बाद वाले यह मतलब होता है ब्रेक का

[140:49]

कि अगर आपको सार सारे स्विच ऑन नहीं करने

[140:51]

अगर करना चाहते हो तो वो तो डिफॉल्ट

[140:53]

बिहेवियर है अगर सारे स्विच ऑन नहीं करने

[140:55]

तो पहले स्विच के बाद ही ब्रेक कर दो और

[140:59]

लास्ट में हमारा केस होता है एक डिफॉल्ट

[141:00]

केस कि ऊपर वाला कुछ भी ट्रू नहीं हुआ तो

[141:03]

ये चीज कर दो अब ये हमारे एल्स की तरह

[141:06]

होता है कि ऊपर वाला कोई भी इफ एल्स या

[141:08]

एल्स इफ ट्रू नहीं हुआ तो फिर अपना एल्स

[141:11]

एग्जीक्यूट कर दो स्विच का एल्स होता है

[141:13]

डिफॉल्ट अब इसका एक एग्जांपल लेते हैं

[141:16]

एग्जांपल के अंदर क्या करेंगे हम यूजर से

[141:18]

इनपुट लेने वाले हैं डे

[141:21]

तो

[141:22]

इंट डे हम इनपुट ले लेंगे यूजर

[141:26]

से डे का यहां पर मतलब क्या है वन मतलब

[141:31]

मंडे टू मतलब

[141:33]

ट्यूसडे थ्री मतलब वेनसडे एंड सो ऑन हमने

[141:38]

सात तक जो नंबर है डेज के वो यूजर को बोला

[141:41]

है एंटर करने के लिए यहां हम लिख सकते हैं

[141:43]

वन से सेन तक एंटर करने है और फिर यहां

[141:45]

लिख देंगे एंड डे फिर लिखेंगे अपना स्विच

[141:50]

स्विच के अंदर ये अ सिर्फ आप वीएस कोड के

[141:53]

अंदर कोड कर रहे हैं तो एक बार आप एंटर

[141:55]

दबाए सारी की सारी चीजें जो है लिखी आ

[141:57]

जाएंगी पर सिंस हम फर्स्ट टाइम लिख रहे

[141:59]

हैं हम शुरुआत से

[142:00]

लिखेंगे स्विच के बाद लगते हैं पैरेंस

[142:03]

पैरेंस के अंदर जिसको भी हमें चेक करना है

[142:05]

वेरिएबल को वो लिखेंगे हमें किसको करना है

[142:07]

डे को चेक करना है फिर लगाएंगे कर्ली

[142:09]

ब्रेसेज अब इस ब्लॉक के अंदर सारी

[142:11]

स्टेटमेंट्स लिखेंगे सबसे पहले लिखेंगे

[142:13]

केस वन केस वन क्या कहता है कि हमारा दिन

[142:16]

जो

[142:18]

है वो मंडे है

[142:21]

तो मंडे हमने लिख दिया अब इसके बाद हम कर

[142:23]

देंगे

[142:25]

ब्रेक इसी तरीके से छह और केसेस हम लिखने

[142:29]

वाले

[142:33]

हैं तो यहां पर हम कर देंगे केस टू उसके

[142:36]

अंदर लिखेंगे अपना दिन

[142:39]

ट्यूजडे इसमें नेक्स्ट लाइन डाल देते हैं

[142:41]

इसमें भी नेक्स्ट लाइन डाल देते हैं यहां

[142:43]

पर हमारा केस थ्री इसके अंदर भी नेक्स्ट

[142:46]

लाइन केस फोर दिस इज गोइंग टू बी

[142:51]

केस फाइ इज

[142:55]

फ्राइडे अब मान लेते हैं हमारे यूजर ने

[142:57]

हमें 29 एंटर करके दे दिया तो उस केस में

[143:00]

तो कुछ प्रिंट ही नहीं कर सकते हम तो उस

[143:02]

केस में हम डिफॉल्ट लिख देंगे यहां पे

[143:05]

यानी हमारा एल्स वाला केस अब डिफॉल्ट में

[143:07]

हम प्रिंट करवा देंगे नॉट अ वैलिड

[143:15]

डे अब डिफॉल्ट के बाद हमें ब्रेक नहीं

[143:17]

लिखना पड़ता क्योंकि डिफॉल्ट के बाद कोई

[143:19]

स्विच ही नहीं है जो इसके बाद हम ऑन करवा

[143:21]

लें अब इसको कर लेते हैं सेव एक बार कोड

[143:24]

को रन करते हैं तो हमें अच्छे से समझ में

[143:26]

आएगा एग्जीक्यूट होता कैसे है कंपाइल रन

[143:29]

सबसे पहले हमें एंटर करना है डे डे हम

[143:32]

एंटर करते हैं मान लीजिए थ्री थ्री हमने

[143:34]

एंटर किया तो हमारे लिए वेनसडे प्रिंट हो

[143:36]

गया जैसे ही डे की वैल्यू में थ्री स्टोर

[143:38]

हुआ स्विच ने क्या किया थ्री का मैच

[143:41]

ढूंढना शुरू कर दिया कांस्टेंट्स के साथ

[143:43]

सबसे पहले वन के साथ चेक किया फॉल्स आया

[143:45]

टू के साथ चेक किया फॉल्स आया थ्री के साथ

[143:48]

थ्री मैच हो गया जैसे ही मैच हो गया यह

[143:50]

वाली कंडीशन इसने कर दी एग्जीक्यूट उसके

[143:52]

बाद कर लिया ब्रेक तो यह बाहर आ गया अब

[143:55]

मान लेते हैं यह ब्रेक यहां पर नहीं होता

[143:57]

या फिर इसको कर लेते हैं कॉमेंट आउट इस

[144:00]

ब्रेक को भी कर देते हैं कॉमेंट

[144:03]

आउट यह जो सारे ब्रेक्स हैं इनको अगर हम

[144:07]

कॉमेंट आउट कर

[144:10]

दें और कर लेते हैं सेव और दोबारा से एक

[144:12]

बार कंपाइल करके इसको रन करें तो फिर अब

[144:15]

अगर हम थ्री एंटर करेंगे थ्री हमने एंटर

[144:17]

किया तो हमारे लिए क्या प्रिंट हुआ पहले

[144:19]

तो वेनसडे प्रिंट हुआ मतलब मंडे और

[144:22]

ट्यूजडे तो प्रिंट हुए नहीं क्योंकि वहां

[144:23]

पे तो मैच ही नहीं किया जैसे ही थ्री के

[144:25]

साथ मैच कर दिया मतलब हमने स्विच ऑन कर

[144:27]

दिया अब वेनसडे प्रिंट हो गया उसके बाद

[144:29]

सारे प्रिंट हो गए थर्सडे भी प्रिंट हुआ

[144:31]

फ्राइडे भी प्रिंट हुआ सैटरडे भी संडे भी

[144:33]

एंड उसके बाद नॉट अ वैलिड डे भी प्रिंट

[144:35]

हुआ यानी उसके बाद वाले जो सारे स्विच है

[144:37]

ना यहां से बाद वाले वो सारे ऑन हो गए

[144:40]

इसीलिए ब्रेक हमारा काम आता है क्योंकि

[144:41]

हमें सारे स्विच ऑन नहीं करने सिर्फ एक

[144:43]

स्विच ऑन करना है जैसे ये ऑन हो जाए आप

[144:45]

यहां से बाहर निकल जाओ आगे के

[144:50]

इसीलिए जब भी स्विच लिखें बहुत इंपॉर्टेंट

[144:52]

है ब्रेक लगाना अब एक बार डिफॉल्ट को भी

[144:54]

चेक कर लेते

[144:56]

हैं अगर हम एंटर करें मान लीजिए 19 तो 19

[145:00]

नॉट अ वैलिड डे हमारे लिए प्रिंट हो जाएगा

[145:03]

तो इस तरीके से हमारा स्विच जो है वो काम

[145:05]

करता है अब इसी सेम कोड के लिए हम

[145:07]

कैरेक्टर्स के साथ भी खेल सकते हैं जैसे

[145:09]

ये जो डे हमने बनाया ना इसको इंटी जर टाइप

[145:12]

का नहीं इसको कैरेक्टर टाइप का बनाते हैं

[145:14]

और मंडे के लिए एम होगा ट्यूसडे के लिए

[145:17]

हमारा टी होगा छोटे वाला वेनसडे के लिए

[145:19]

डब्लू थर्सडे के लिए हम कैपिटल टी रख लेते

[145:22]

हैं फ्राइडे के लिए एफ रख लेते हैं सैटरडे

[145:25]

के लिए स्मल एस और संडे के लिए कैपिटल एस

[145:27]

तो इस तरीके से हम अपना डे ले लेंगे और

[145:30]

यहां पर अब केस चेंज कर देते हैं केस में

[145:32]

लिखेंगे कैरेक्टर्स

[145:35]

इसको कर लेते हैं सेव और अब इसको दोबारा

[145:38]

करते हैं रन तो यहां पर हमें लिखना है

[145:44]

एस अगर हम डे अपना एंटर करें तो इस बार हम

[145:47]

एंटर करने वाले हैं

[145:49]

एफ तो हमारे लिए फ्राइडे प्रिंट हो गया और

[145:52]

इस बार हमने कोई दूसरा कैरेक्टर जैसे मान

[145:54]

लीजिए हमने एंटर किया ट द रेट तो उस केस

[145:57]

में प्रिंट हुआ नॉट अ वैलिड डे तो हम

[146:00]

कैरेक्टर्स भी एज अ कांस्टेंट यूज़ कर

[146:02]

सकते हैं और अपने इंटी जर्स भी एज अ

[146:03]

कांस्टेंट यूज़ कर सकते हैं अब इसके बाद

[146:05]

स्विच की अपनी कुछ-कुछ प्रॉपर्टीज होती

[146:07]

हैं जैसे दो प्रॉपर्टीज के बारे में

[146:09]

मेजर्ली हम बात करेंगे सबसे पहले कि केसेस

[146:11]

कैन बी इन एनी ऑर्डर हमने जैसे लिखा ना कि

[146:14]

अ सबसे पहले लिखा था कि वन के लिए मंडे

[146:16]

प्रिंट होना है टू के लिए ट्यूजडे प्रिंट

[146:18]

होना है तो हम उनको ऊपर नीचे भी कर सकते

[146:20]

थे हो सकता है ट्यूजडे वाली कंडीशन कि टू

[146:23]

हो तो ट्यूजडे प्रिंट हो वो ऊपर आ रही है

[146:24]

और वन हो तो मंडे प्रिंट हो वो नीचे आ रही

[146:26]

है उसमें स्विच जो है एरर नहीं देता जैसे

[146:29]

हमने यहां पे किया हुआ है डब जो है अब

[146:31]

हमारे कैरेक्टर्स में एफ के बाद आता है पर

[146:34]

डब् वाला केस हमारे पास ऊपर है ए वाला

[146:36]

नीचे है अगर इस फ्राइडे वाले को भी हम ऊपर

[146:38]

लिख देंगे तो कोई एरर नहीं आ रहा होगा

[146:40]

सेकंड चीज है कि नेस्टेड स्विच मतलब स्विच

[146:43]

इनसाइड स्विच आर अलाउड हम हो सकता है

[146:47]

स्विच के अंदर हम हो सकता है स्विच के अर

[146:50]

अंदर अपना एक अलग स्विच लिख दें जैसे बाहर

[146:53]

है डे कौन सा है उसका हमने केसेस बना दिए

[146:56]

हैं और केस मान लो थ्री नंबर जब ट्रू हो

[146:59]

जाता है तो उसके बाद एक और स्विच लगा दो व

[147:02]

लगा देंगे हम ईयर का कि ईयर कौन सा चल रहा

[147:05]

है या लगा देंगे मंथ का कि मंथ कौन सा चल

[147:08]

रहा है तो उसमें भी हमारे केस फोर मान लो

[147:11]

ट्रू हो गया तो ऐसी तरीके से स्विच के

[147:13]

अंदर हम स्विच जो है डाल सकते हैं और ऊपर

[147:16]

हमें पढ़ना था कि इफ के अंदर भी हम

[147:19]

डिफरेंट इफ जो है वो डाल सकते हैं एक बार

[147:22]

इफ के अंदर इफ यानी इफ है कंडीशन वन है वो

[147:27]

ट्रू हो जाती है तो दूसरा इफ है जिसके

[147:29]

अंदर कंडीशन टू है उसको आप प्रिंट कर दो

[147:33]

इस तरीके की इफ स्टेटमेंट्स को हम नेस्टेड

[147:38]

नेस्ट यानी घोसला बना लेना एक के अंदर एक

[147:40]

जाके तो इसको हम नेस्टेड इफ कहते हैं इसका

[147:43]

भी एक एग्जांपल देख लेते हैं जैसे मान लो

[147:45]

हमें एक नंबर एंटर करवाना है यूजर से इंट

[147:49]

नंबर

[147:52]

तो प्रिंट

[147:55]

करेंगे एंटर नंबर और फिर स्कैन कर लेंगे

[147:59]

नंबर के

[148:00]

लिए अब कुछ कंडीशंस लिखते हैं सबसे पहले

[148:03]

चेक करेंगे कि नंबर हमारा पॉजिटिव है या

[148:06]

नेगेटिव है तो पॉजिटिव नंबर के लिए क्या

[148:08]

करेंगे चेक कर लेंगे इफ नंबर इज ग्रेटर

[148:11]

देन इक्वल टू

[148:14]

0 उस केस में नंबर के लिए हम प्रिंट करवा

[148:17]

रहे

[148:18]

होंगे पॉजिट

[148:21]

और अगर ऐसा नहीं है मतलब एल्स वैसे इस

[148:24]

एल्स को हम यहां भी लिख सकते हैं यूजुअली

[148:26]

मैं प्रेफर करती हूं कि सेम लाइन में लिख

[148:28]

दू तो एल्स के लिए हम प्रिंट करवाएंगे

[148:34]

नेगेटिव अब इसके अंदर जैसे ही नंबर

[148:37]

पॉजिटिव हो जाता है फिर हमें चेक करना है

[148:38]

कि नंबर हमारा इवन है या ऑड है वो भी हम

[148:41]

प्रिंट करवाएंगे तो यहां पर एक और फ लिख

[148:43]

सकते हैं कि नंबर मॉडलो टू अगर हमारा

[148:48]

इक्वल टू जीरो हो जाता है डल्स की कंडीशन

[148:51]

हम ऑलरेडी चैप्टर टू के प्रैक्टिस सेट के

[148:53]

अंदर पढ़ चुके हैं तो यह काफी आसान होना

[148:55]

चाहिए हमारे लिए समझने में कि यहां पर

[148:57]

कैसे हमने चेक किया कि नंबर इवन है तो

[148:59]

यहां पर हम प्रिंट करवा देंगे

[149:03]

इवन नहीं तो इसका भी खुद का एल्स हो सकता

[149:06]

है हम प्रिंट करवाने वाले हैं

[149:11]

ऑड इसको कर लेते हैं

[149:13]

सेव अब एक बार रन करते

[149:17]

हैं हम जो नंबर एंटर कर दैट इज 24 24 के

[149:22]

लिए प्रिंट हुआ कि ये पॉजिटिव नंबर भी है

[149:24]

और इवन नंबर भी है तो इसने क्या किया एक

[149:26]

कंडीशन ट्रू हो गई उसके बाद इसने दूसरी

[149:28]

कंडीशन भी चेक करी कि उसको भी देखना है

[149:31]

क्या कि सही है या नहीं है ये सेम कंडीशंस

[149:33]

हम एल्स के अंदर भी लिख सकते हैं यहां पर

[149:35]

जाकर हम अपना कोई इफ कंडीशन बना सकते हैं

[149:37]

फिर एल्स कंडीशन तो इस तरीके से जब भी इफ

[149:40]

कंडीशन दूसरे इफ के अंदर लिखी होती है इस

[149:43]

सिचुएशन को हम नेस्टेड इफ या नेस्टेड एल्स

[149:46]

सिचुएशन कहते हैं अब कुछ क्वेश्चंस

[149:48]

प्रैक्टिस कर लेते हैं अपने कांसेप्ट को

[149:50]

दिमाग के अंदर बहुत ही अच्छे से डालने के

[149:53]

लिए सबसे पहला हमारा सवाल है कि राइट अ

[149:55]

प्रोग्राम टू चेक इफ अ स्टूडेंट पास्ड और

[149:58]

फील्ड हमारे पास एक स्टूडेंट के मार्क्स

[150:00]

होंगे जो गिवन होंगे 100 में से मार्क्स

[150:02]

हमें दिए जाएंगे अगर मार्क्स हमारे 30 से

[150:05]

ज्यादा है तो बच्चा पास हो गया अगर 30 से

[150:08]

कम है तो बच्चा हमारा फेल हो गया तो इसी

[150:10]

सिचुएशन को हमें कोड में कन्वर्ट करना है

[150:13]

तो सबसे पहले तो क्या करेंगे मार्क्स को

[150:15]

एंटर करा लेंगे यहां पर इस वेरिएबल को बना

[150:18]

देंगे मार्क्स एंटर मार्क्स मार्क्स की

[150:21]

रेंज दे देते हैं जीरो से 100 कुछ बच्चे

[150:24]

को जीरो भी आते हैं जो बेचारे एब्सेंट हो

[150:27]

जाते हैं पेपर वाले दिन और यहां लिख देंगे

[150:29]

हम

[150:32]

मार्क्स अब हमें दो कंडीशंस लिखनी है एक

[150:35]

तो पास वाली और एक फेल वाली तो सबसे पहले

[150:37]

इसको फफल से लिखने की कोशिश करते हैं इफ

[150:40]

में डालेंगे अगर हमारे जो मार्क्स

[150:42]

है दे आर लेस देन

[150:47]

30 या फिर हमारे क्वेश्चन में दिया हुआ

[150:50]

लेस दन इक्वल टू 30 तो उस केस में हमें

[150:53]

प्रिंट करवाना

[150:56]

है

[150:59]

फेल और अगर ऐसा नहीं है तो उस केस में

[151:03]

प्रिंट करवाना है पास तो यहां पे टर्मिनल

[151:08]

ऑन करेंगे कंपाइल रन मार्क्स अपने डालेंगे

[151:12]

हम 56 हम हो चुके हैं पास दोबारा से इसको

[151:16]

रन करके मान लो हमने डाला 105 क्योंकि हम

[151:19]

क्लास के शैतान बच्चे हैं 105 डालने के

[151:22]

बाद भी पास प्रिंट हुआ जबकि हमें डालना था

[151:24]

100 तक के लिए तो इसमें हम अपनी कंडीशन

[151:27]

लगा सकते हैं कि एल्स

[151:29]

इफ मार्क्स जो है

[151:33]

हमारे ग्रेटर दन 30 तो है एंड मार्क्स

[151:38]

हमारे लेसन इक्वल टू 100 है तो उस केस में

[151:42]

तो पास प्रिंट कर दो नहीं तो एक और एल्स

[151:45]

है जिसके अंदर हम प्रिंट करने वाले हैं

[151:49]

रंग मार्क्स इसके अंदर भी कंडीशन लगा सकते

[151:52]

हैं कि मार्क्स जो है दे शुड बी ग्रेटर

[151:55]

देन इक्वल टू 0 एंड एंड मार्क्स लेस दन

[151:59]

इक्वल टू 30 तो इस तरीके की जब सारे जो

[152:02]

केसेस होते हैं उनको कवर करने वाली हम

[152:03]

स्टेटमेंट्स लिखते हैं तो हमारा कोड जो है

[152:05]

सेफ रहता है ज्यादा अब इसको भी कंपाइल कर

[152:09]

लेंगे और इस बार अगर हमने सोचा कि हम 105

[152:12]

डालेंगे तो इस बार हमारे लिए प्रिंट हो

[152:14]

जाएगा रॉन्ग

[152:15]

मार्क्स तो इस तरीके से सेफ केसेस जो है

[152:18]

हमें डालने पड़ते हैं के अंदर अब इसी सेम

[152:22]

चीज को हम टरनरी स्टेटमेंट की हेल्प से भी

[152:24]

कर सकते थे यानी इसको अगर कर दे कॉमेंट

[152:27]

आउट यह सारे लाइंस को एक साथ कॉमेंट करने

[152:30]

के लिए हमें प्रिंट करना हमें प्रेस करना

[152:32]

पड़ता है कमांड और स्लैश तो अगर आपको

[152:35]

दोबारा से किसी भी मेजॉरिटी चंक जो

[152:38]

स्टेटमेंट्स है उनको कॉमेंट में कन्वर्ट

[152:40]

करना है तो कमांड स्लैश आपको प्रेस करना

[152:43]

पड़ेगा या अगर हम विंडोज सिस्टम पे

[152:50]

मार्क्स अगर हमारे पर इसमें ज्यादा

[152:53]

स्टेटमेंट्स हम चेक नहीं कर पाएंगे

[152:55]

क्योंकि टरनरी बहुत ही सिंपल कंडीशन के

[152:57]

लिए होता है मार्क्स अगर हमारे लेस देन

[153:00]

इक्वल टू 30 है क्वेश्चन मार्क उस केस में

[153:03]

हम प्रिंट करवा देंगे

[153:05]

फेल नहीं तो हम प्रिंट करवा

[153:09]

देंगे

[153:12]

पास तो यहां पर हमें मैजिक समझ में आता है

[153:15]

टरनरी ऑपरेटर का कि एक सिंगल लाइन में यह

[153:19]

चार पांच लाइन का इसने कोड जो है कन्वर्ट

[153:21]

कर दिया है अब इसको करते हैं रन मार्क्स

[153:24]

हम एंटर कर रहे हैं अपने 23 तो हम हो चुके

[153:27]

हैं फेल और वहीं पर अगर हम 89 एंटर करें

[153:31]

तो उस केस में हम हो जाएंगे पास अब सेकंड

[153:34]

जो प्रैक्टिस क्वेश्चन है उसकी बात करें

[153:37]

तो इस केस में हमें ज्यादा केसेस दिए हुए

[153:40]

हैं जैसे राइट अ प्रोग्राम टू गिव ग्रेड्स

[153:42]

टू अ स्टूडेंट इसमें सबसे पहली कंडीशन है

[153:44]

मार्क्स अगर लेस दन 30 है तो सी ग्रेड

[153:46]

देना है 30 और 70 के बीच में तो बी देना

[153:49]

है 70 और 90 के बीच में तो a देना है और

[153:51]

90 और 100 के बीच में तो a प्स देना है अब

[153:54]

इन चारों कंडीशंस को हमें कोड की फॉर्म

[153:56]

में लिखना है तो एक के बाद एक शुरू हो

[153:58]

जाते हैं मार्क्स हमें दिए होंगे इस केस

[154:00]

में टरनरी नहीं यूज कर सकते क्योंकि टरनरी

[154:02]

बहुत

[154:06]

कॉम्प्लेक्शन में चेक कर लेंगे मार्क्स

[154:08]

अगर

[154:09]

हमारे लेस दन 30

[154:13]

है तो उस केस में हम प्रिंट कर

[154:18]

देंगे सी हमारा ग्रेड अब फिर एल्स इफ

[154:23]

लगाएंगे अगर ऊपर वाली कंडीशन फॉल्स हो गई

[154:25]

है तो नीचे वाला चेक कर लो कि मार्क्स

[154:29]

हमारे मार्क्स आर ग्रेटर दन इक्वल ट 30

[154:34]

एंड एंड मार्क्स आर लेस देन हमारी कंडीशन

[154:38]

क्या थी 70

[154:41]

की अब मैं जब भी मार्क्स वाले क्वेश्चन

[154:44]

लेती हूं ना मैं बहुत कोशिश करती हूं कि

[154:47]

ज्यादा ज्यादा ग्रेड्स दूं ताकि किसी

[154:48]

बच्चे की अगर कम भी आए हैं तो उन्हें बुरा

[154:50]

ना लगे वीडियो देखते

[154:52]

हुए तो इस केस में यह ग्रेड आ जाएगा फिर

[154:56]

लिखेंगे एल्स

[154:57]

इफ अबकी बार मार्क्स आर ग्रेटर देन इक्वल

[155:02]

टू हमारे 70 एंड

[155:04]

एंड 70 एंड एंड मार्क्स आर लेस देन

[155:10]

90 तो इस केस में हम प्रिंट करने वाले हैं

[155:14]

सेम कंडीशंस प्रिंट करने वाले हम ए

[155:19]

और लास्ट हमारा एल्स केस आ जाएगा जिसमें

[155:22]

हम प्रिंट कर देंगे अपने लिए ए प्लस प्लस

[155:26]

या ए प्लस ज्यादा प्लस प्लस नहीं देते

[155:29]

टीचर्स तो यह हमारी चार कंडीशन जो है हमने

[155:33]

लिख दिए है फफ एल्स की फॉर्म में टर्मिनल

[155:35]

विंडो हम खोलेंगे कंपाइल कर देंगे कोड को

[155:38]

रन करेंगे अब अपने मार्क्स हमें एंटर करने

[155:40]

हैं मान लेते हैं हमारे मैं फिजिक्स के

[155:43]

मार्क्स 98 वाउ आई गट एन ए प्लस वहीं पर

[155:48]

अगर आप किसी और सब्जेक्ट के डालना चाहे तो

[155:50]

हम वो भी डाल सकते हैं जैसे मान लीजिए

[155:51]

किसी सब्जेक्ट में हमारे 40 आए हैं तो

[155:53]

उसमें हमारा ग्रेड जो है बी आ जाएगा तो इस

[155:55]

तरीके से आप अपना एक छोटा सा मिनी

[155:57]

प्रोजेक्ट बना सकते हैं जिसमें अपने

[155:59]

मार्क्स के हिसाब से अपना ग्रेड आप

[156:01]

कैलकुलेट करने के फॉर्मूले लगा सकते हैं

[156:03]

अपने कॉलेज के या स्कूल की जो आपकी

[156:06]

करिकुलम शीट होती है जो डिफाइन करती है

[156:08]

कितने मार्क्स पे क्या ग्रेड मिलेगा उस

[156:10]

हिसाब से या इवन आप सुपरमार्केट का अगर

[156:13]

कोई एप्लीकेशन बनाना चाहे तो उसमें कौन से

[156:15]

आइटम पे कितना टैक्स लगाना है और टैक्स

[156:17]

लगा के जो फाइनल वैल्यू आएगी

[156:19]

उसके लिए भी आप कोई प्रोग्राम बना सकते

[156:21]

हैं तो ऐसे काफी सारे प्रोग्राम्स होमवर्क

[156:23]

प्रॉब्लम्स में भी दिए होंगे अब बढ़ते हैं

[156:25]

अपने नेक्स्ट सवाल की तरफ नेक्स्ट सवाल है

[156:27]

हमारा एक प्रैक्टिकल कोड हमें दिया हुआ है

[156:31]

विल दिस कोड यहां पे क्वेश्चन मार्क होना

[156:33]

चाहिए था अब यहां पे हमें एक कोड दिया है

[156:36]

जिसमें इंट x हमारा एक वेरिएबल है जिसमें

[156:38]

हमने वैल्यू डाल रखी है 2 फिर लिखा है x =

[156:42]

1 और अगर यह स्टेटमेंट ट्रू हो जाती है तो

[156:46]

प्रिंट करेंगे x = 1 नहीं तो प्रिंट

[156:48]

करेंगे x इ नॉट इक्वल टू 1 तो इसमें

[156:51]

ऑप्शंस हमारे हैं क्या ये प्रोग्राम हमें

[156:53]

एरर देगा क्या यहां पे x = 1 प्रिंट हो

[156:56]

जाएगा या x इज नॉट इक्वल टू 1 प्रिंट हो

[156:59]

जाएगा काफी स्ट्रेट फॉरवर्ड सवाल है अगर

[157:01]

हमें एक छोटी सी बात याद होगी जो हमने

[157:04]

सीखी थी असाइनमेंट ऑपरेटर्स या रिलेशनल

[157:06]

ऑपरेटर्स पढ़ते टाइम कि c के अंदर कभी भी

[157:10]

आप रो लिख दो वह हो जाता है फॉल्स और कभी

[157:14]

भी नॉट जीरो वैल्यू लिख दो यानी वन लिख दो

[157:17]

ट लिख दो -1 लिख दो -2 लिख दो ये सारी

[157:20]

वैल्यूज हमारी हो जाती हैं ट्रू इस चीज को

[157:24]

हम यहां पे यूज करेंगे सबसे पहले आप रोक

[157:26]

कर एक बार खुद से गेस करिए खुद से लॉजिकली

[157:28]

गेस करिए गेस नहीं बेसिकली मैं कहूंगी

[157:31]

एनालाइज करिए कि इसका क्या आंसर होना

[157:33]

चाहिए तीनों में से इन तीनों में से हम

[157:36]

आंसर सोचे खुद रीजन लगाएं और नहीं आता है

[157:39]

या आ भी गया है तो उसके बाद रीजन को चेक

[157:42]

जरूर करना है इसको ना सबसे पहले

[157:44]

एग्जीक्यूट करके देख लेते हैं कि इसका

[157:45]

आउटपुट क्या होने वाला है इंट x को हमने

[157:49]

ऑलरेडी लिख रखा है ू अगर हमारा एक्व है हम

[157:53]

यह कहने की कोशिश कर रहे हैं जरूरी नहीं

[157:55]

है कह रहे हो तो प्रिंट करना है x इ इक्वल

[158:01]

टूव नहीं तो प्रिंट करना है एक्स इज नॉट

[158:07]

इक्वल

[158:09]

टूव इसको कर लेते हैं सेव इसको करते हैं

[158:15]

रन सबसे पहले तो यहां पर वार्निंग जनरेट

[158:18]

हो गई है पर ठीक है हम इस वनिंग इग्नोर

[158:19]

करने वाले

[158:20]

हैं प्रिंट हुआ है हमारे लिए x = 1 अब यह

[158:24]

प्रिंट क्यों हुआ क्योंकि x तो 2 के बराबर

[158:27]

है ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि अगर हमें चेक

[158:30]

करना होता है कि x अगर टू के इक्वल है तो

[158:32]

हम दो इक्वल टू लगाते हैं पर हम यहां पे

[158:35]

सिंगल इक्वल टू लगाया है तो ये सिंगल

[158:37]

इक्वल टू क्या कर रहा होगा ये सिंगल इक्वल

[158:39]

टू बेसिकली पहले मेमोरी के अंदर एक

[158:42]

वेरिएबल था x जिसके अंदर स्टोर्ड था टू इस

[158:44]

सिंगल इक्वल टू ने क्या किया वहां से टू

[158:48]

को हटा दिया और व वहां प वन को डाल दिया

[158:50]

तो अब इस इफ कंडीशन के अंदर x की वैल्यू

[158:53]

यानी कि वन जो है वो है अब वन एक नॉन जीरो

[158:56]

वैल्यू है तो ये ट्रू हो जाएगा और यहां पर

[158:58]

हम प्रिंट कर देंगे x = 1 अब अगर यहां पर

[159:03]

हम मान लीजिए यहां पर वन की जगह फर भी लिख

[159:05]

रहे होते तो भी यही प्रिंट होता जैसे अगर

[159:09]

x को हमने कोड में रिप्लेस कर दिया एस फोर

[159:12]

इसको कर लेते हैं सेव और इसको करते हैं

[159:14]

रन तो कंपाइल किया वार्निंग इग्नोर करेंगे

[159:17]

तो अब प्रिंट होगा x = 1 लद अगर हम प्रिंट

[159:22]

करवाना चाहे x को तो व वन नहीं है उसकी

[159:27]

वैल्यू फर हो चुकी है अब तो यहां पे

[159:30]

लिखेंगे x

[159:32]

को सेव इसको दोबारा से करते हैं

[159:35]

कंपाइल

[159:37]

रन तो x = 1 आया है उसके बाद हमारे पास

[159:41]

बाद में फर प्रिंट हो गया है बिना स्पेस

[159:43]

के तो य 14 लग रहा है यहां पे नेक्स्ट

[159:45]

लाइन लगाना चाहिए था तो x = 1 और फिर

[159:48]

प्रिंट हुआ है 4 तो बेसिकली क्या हुआ

[159:51]

लॉजिक क्या है लॉजिक यह है कि इस लाइन ने

[159:55]

x की वैल्यू में ट को हटाकर वहां पर वन

[159:58]

स्टोर कर दिया है और फिर इसके अंदर सिंस

[160:01]

हमारे पास नॉन जीरो वैल्यू है वन तो वो

[160:03]

ट्रू की तरह लेगा उसको ट्रू की तरह लेगा

[160:06]

तो इस स्टेटमेंट में जो भी लिखा हो वो

[160:07]

हमारा एग्जीक्यूट हो ही जाएगा यहां पर अगर

[160:10]

हम x = 0 लिख देते तब ये एग्जीक्यूशन नहीं

[160:13]

होता तब ये वाली कंडीशन एग्जीक्यूट होती

[160:16]

जैसे अगर हम यहां पर लिख दें x = 0

[160:20]

और इसको अब करें कंपाइल एंड रन इस केस में

[160:25]

प्रिंट होगा x इज नॉट इक्वल टू 1 क्योंकि

[160:27]

x की वैल्यू अगर जीरो हो गई तो यहां तो रो

[160:30]

आ गया इफ के अंदर वो एक फाल्स वैल्यू है

[160:32]

फाल्स हो गया तो हमेशा एल्स वाली

[160:34]

स्टेटमेंट जो है वो रन करेगी तो इस

[160:36]

क्वेश्चन का सही आंसर होना चाहिए था कि

[160:39]

एरर तो देगा नहीं एरर तो हमारे पास कोई

[160:41]

आया नहीं हां वार्निंग जरूर आई है क्योंकि

[160:44]

कंपाइलर को शक हो रहा है कि आप कुछ गलत कर

[160:47]

रहे हैं क्योंकि आप इक्वलिटी तो चेक नहीं

[160:49]

कर रहे हैं आप असाइनमेंट कर रहे हैं इफ के

[160:50]

अंदर जो लॉजिकली गलत माना जाता है पर

[160:53]

कंपाइलर रूल्स के हिसाब से गलत नहीं तो

[160:55]

यहां पर सही आउटपुट होगा प्रिंट x इ 1

[160:58]

क्योंकि x = 1 प्रिंट हो जाएगा क्योंकि x

[161:00]

= 1 करते ही हमारे इफ में वन आ जाएगा जो

[161:02]

कि एक ट्रू वेरिएबल है अब नेक्स्ट सवाल

[161:06]

जिसको हम करने वाले हैं यह आखिरी सवाल है

[161:08]

हमारा प्रैक्टिस सेट में वो है राइट अ

[161:10]

प्रोग्राम टू फाइंड इफ अ कैरेक्टर एंटर्ड

[161:12]

बाय यूजर इज अपर केस र नॉट अपर केस

[161:15]

कैरेक्टर्स क्या होते हैं a b कपिल a कपिल

[161:17]

b कपिल c इस तरीके

[161:19]

लोअर केस क्या होते है स्मल ए स्मल बी

[161:21]

स्मल सीमल डी इस तरीके से तो इनको हम अपर

[161:25]

केस कहते हैं इनको हम लोअर केस कहते हैं

[161:29]

हमें चेक करना है हमारा कैरेक्टर एक यूजर

[161:31]

ने जो एंटर किया है वो अपर केस है या नहीं

[161:33]

है इसके लिए देखते हैं क्या टेक्नीक हम

[161:35]

यूज करेंगे सबसे पहले तो एक प्रोग्राम बना

[161:37]

लेते

[161:38]

हैं जिसमें कैरेक्टर सीच हमें एंटर करवाना

[161:41]

है यूजर से

[161:43]

एंटर

[161:46]

कैरेक्टर इसमें कर लेंगे स्कैन एफ

[161:49]

परसेंटेज

[161:51]

सी एंड

[161:55]

सी अब चेक कर लेंगे कि हमारा जो सी है वो

[161:59]

ग्रेटर दन इक्वल टू a है यह चीज हमने नहीं

[162:02]

देखी होगी क्योंकि हमेशा हम इंटी जर के

[162:04]

साथ कंपेयर कर लेते हैं फ्लोट के साथ कर

[162:06]

लेते हैं फर्स्ट टाइम हम कैरेक्टर की

[162:08]

वैल्यू को कैरेक्टर के साथ कंपेयर कर रहे

[162:10]

हैं रिलेशनल ऑपरेटर से तो यह भी पॉसिबल है

[162:13]

क्योंकि इंटरनली सी कैसे काम करता है हर

[162:16]

कैरेक्टर की ना एक एस्का वैल्यू होती है

[162:19]

तो a जो है उसकी एस काई वैल्यू शायद 97 है

[162:22]

और इस तरीके से z तक हमारी बहुत सारी

[162:25]

अलग-अलग वैल्यूज हैं तो अगर हमें लोअर केस

[162:27]

चेक करना हो तो इसको a से चेक कर लेंगे

[162:30]

यहां पे यह हमारी एका वैल्यू प्रिंट भी हो

[162:33]

रही है 97 हमारे लिए अगर यहां पर हम b कर

[162:37]

लें तो उसकी एस काई वैल्यू क्या होगी 98

[162:39]

उसी तरीके से c करें तो 99 आ जाएगी तो एस

[162:42]

काई वैल्यूज होती हैं एका वैल्यू इज

[162:44]

बेसिकली कि हर कैरेक्टर का अपना एक इंटी

[162:47]

जर होता है जो उसके साथ एसोसिएटेड होता है

[162:49]

और कंपाइलर को पता होता है वो इंटी जर तो

[162:51]

या तो हम कैरेक्टर को डायरेक्टली एस काई

[162:53]

वैल्यू के साथ कंपेयर कर सकते हैं

[162:57]

जैसे कैरेक्टर इज ग्रेटर दन इक्वल ट 97

[163:01]

लिखना एंड कैरेक्टर इज ग्रेटर दन इक्वल टू

[163:05]

a लिखना इसका और इसका मतलब सेम है कंपाइलर

[163:09]

के लिए तो या तो यह लाइन लिख लो आप या यह

[163:11]

लाइन लिख लो कोई डिफरेंस नहीं आएगा तो

[163:13]

यहां पे हम कंपेयर करने वाले हैं कपिल a

[163:16]

के साथ तो कैपिटल a की एका वैल्यू है 65

[163:18]

एंड एंड सी इज लेस देन इक्वल टू कैपिटल

[163:23]

जीी कैपिटल जीी की एस काई वैल्यू है 90 तो

[163:26]

ये बढ़ती जाती है यानी कैपिटल ए की होगी

[163:29]

जो 65 तो कैपिटल बी की 66 कैपिटल सी की 67

[163:33]

इस तरीके से बढ़ती जाती

[163:35]

है अगर हमारा कैरेक्टर इस ए से बड़ा है

[163:38]

इसके इक्वल है और जी से छोटा है और उसके

[163:41]

इक्वल है अब मेरे एडिटर्स ने मुझसे पूछा

[163:44]

जड क्यों बोला है तो ब्रिटिश इंग्लिश में

[163:46]

जड बोलते हैं अमेरिकन इंग्लिश में जी

[163:48]

बोलते हैं

[163:50]

तो प्रिंट एफ हमें करना है अपर

[163:53]

केस इस केस में तो अपर केस हम लिख

[163:56]

देंगे वरना एल्स एल्स में एक और केस चेक

[164:00]

कर लेते हैं कि सीच हमारा

[164:03]

अगर सीच अगर हमारा ग्रेटर दन इक्वल टूल ए

[164:07]

है एंड एंड सी हमारा लेसन इक्वल टू स्लजी

[164:12]

है तो उस केस में हम प्रिंट करने वाले

[164:16]

हैं लोर केस

[164:20]

अब इसके अलावा जो हमारा एस्ट रिस्क होता

[164:23]

है एम परसेंट होता है वह सारे भी हैशटैग

[164:26]

हैश कैरेक्टर यह सभी कैरेक्टर्स होते हैं

[164:29]

उनके इसमें हम प्रिंट करेंगे नॉट

[164:34]

इंग्लिश लेटर इंग्लिश का लेटर नहीं है

[164:37]

आपने कोई और ही कैरेक्टर हमारे पास प्रिंट

[164:39]

करके हमें दे दिया है इन सबके बाद लगा

[164:42]

लेते हैं एक नेक्स्ट लाइन को कर लेते हैं

[164:45]

सेव और इसको करते हैं रन अब कैरेक्टर हमें

[164:47]

एंटर करना है मान लीजिए सब सबसे पहले एंटर

[164:49]

कर रहे हैं हम जी जी के लिए इसने बता दिया

[164:52]

कि अपर केस कैरेक्टर है पर अगर हम स्मल जी

[164:55]

एंटर करें तो बोल देगा लोअर केस है और अगर

[164:58]

हम परसेंटेज का साइन एंटर कर दें इस

[165:00]

कैरेक्टर तो बता देगा नॉट इंग्लिश लेटर तो

[165:03]

इस तरीके से हम अपना पूरा प्रोग्राम बना

[165:04]

सकते हैं जो चेक कर रहा है कि अपर केस है

[165:06]

या लोअर केस है बहुत सारे इसमें

[165:08]

अच्छे-अच्छे प्रोग्राम्स बन सकते हैं हमने

[165:10]

कुछ क्वेश्चंस प्रैक्टिस कर लिए जो

[165:12]

स्टैंडर्ड क्वेश्चंस है प्लेसमेंट में

[165:13]

आपके कॉलेज के क्वेश्चंस में पूछ लिए जाते

[165:15]

हैं इसके अलावा आपको होमवर्क प्रॉब्लम्स

[165:17]

दिए होंगे उनको खुद से सॉल्व करना है अगर

[165:19]

सवाल नहीं हो रहा तो फिर अपने नोट्स से

[165:21]

थोड़ी सी हेल्प लेनी है बहुत आसानी से

[165:24]

हमने बहुत ही इंपॉर्टेंट बहुत ही क्रुशल

[165:26]

चैप्टर जो है कंप्लीट कर लिया है एंड इसके

[165:28]

बाद बढ़ेंगे अपने फोर्थ चैप्टर की तरफ

[165:30]

जिसमें हम कवर करने वाले हैं लूप्स को हाय

[165:32]

एवरीवन और अब हम शुरुआत करने वाले हैं

[165:34]

अपने चैप्टर फोर की जिसका नाम है लूप

[165:36]

कंट्रोल इंस्ट्रक्शंस इसके अंदर हम पढ़ने

[165:38]

वाले हैं कि फॉर लूप क्या होता है वाइल

[165:40]

लूप क्या होता है डू वाइल लूप क्या होता

[165:41]

है साथ के साथ डिस्कस करेंगे कि दो

[165:43]

कीवर्ड्स ब्रेक और कंटिन्यू इनका कैसे

[165:46]

यूसेज होता है किस तरीके से इनको यूज़

[165:48]

करना है अपने कोड के अंदर अब लूप कंट्रोल

[165:50]

इंस्ट्रक्शंस क्या होते हैं और इसकी हमें

[165:52]

जरूरत क्यों पड़ती है उसको एक एग्जांपल के

[165:54]

साथ समझ लेते हैं मान लीजिए हमें कोड के

[165:57]

अंदर प्रिंट करवाना है हेलो वर्ल्ड तो हम

[165:59]

क्या करेंगे सिंपली एक प्रिंट एफ

[166:01]

स्टेटमेंट लिखेंगे जिसमें लिख देंगे हेलो

[166:03]

वर्ल्ड अब मान लीजिए हमें पांच बार हेलो

[166:05]

वर्ल्ड प्रिंट करवाना है तो आप बोलेंगे

[166:08]

कोई बात नहीं सिंपली इस लाइन को एक बार

[166:10]

कॉपी करके पेस्ट कर देंगे दोबारा से पेस्ट

[166:12]

कर देंगे दोबारा से दोबारा से तो इस तरीके

[166:15]

से पांच बार हम अपनी स्क्रीन पर हेलो

[166:18]

वर्ल्ड को प्रिंट करवा देंगे पर अगर मैं

[166:20]

कहूं कि मुझे हेलो वर्ल्ड को हज बार

[166:23]

प्रिंट करवाना है या 10000 बार प्रिंट

[166:25]

करवाना है या 1 लाख बार प्रिंट करवाना है

[166:27]

तो उस केस में क्या होगा उस केस में हम

[166:29]

मैनुअली बैठ के कंट्रोल सी कंट्रोल v तो

[166:32]

नहीं कर रहे होंगे यानी कॉपी पेस्ट वाला

[166:34]

जो तरीका है वो तो बहुत स्लो हो जाएगा और

[166:36]

हमें तो दिन लग जाएंगे और अगर मैं आपको

[166:38]

कहूं कि ये जो सेम काम है हज लाइन हेलो

[166:41]

वर्ल्ड की प्रिंट करवाना ये हम तीन लाइनों

[166:44]

के अंदर खत्म कर सकते हैं तो आप मुझसे

[166:45]

पूछेंगे कि दीदी ये कौन सी ट्रिक है

[166:47]

कोडिंग के अंदर तो कोडिंग के अंदर किसी भी

[166:50]

काम को अगर हमें बार-बार बार बार बार-बार

[166:52]

बार-बार करना पड़ता है तो उसके लिए हम

[166:54]

लूप्स का इस्तेमाल करते हैं जैसे पांच

[166:57]

लाइनों का कोड है इसको बार-बार लिखने की

[166:59]

जगह हम एक सिंपल सा छोटी सी इंस्ट्रक्शंस

[167:02]

यूज करते हैं और इन इंस्ट्रक्शंस को हम

[167:05]

लूप कंट्रोल इंस्ट्रक्शंस कहते हैं लूप का

[167:07]

मतलब इंग्लिश के अंदर होता है किसी चीज को

[167:10]

बार-बार बार-बार कराना जैसे हम बचपन में

[167:13]

फोन के अंदर गाने सुना करते थे तो फिर

[167:15]

क्या करते थे अपनी प्लेलिस्ट बनाते थे

[167:17]

फेवरेट गानों की और उनको पे सुनते रहते थे

[167:19]

यानी वही चार-पांच गाने बार-बार बज रहे

[167:21]

हैं या कुछ लोगों की अभी भी spotify.com

[167:48]

एक बेसिक चीज जो हमें याद करने की जरूरत

[167:50]

है वो यह है कि फॉर लूप से जो भी हम कर

[167:52]

सकते हैं वो सारी चीजें हम वाइल लूप से कर

[167:55]

सकते हैं और वो सारी चीजें भी हम डू वाइल

[167:58]

लूप से कर सकते हैं यानी ये तीनों जो

[168:00]

लूप्स हैं सेम काम करते हैं पर इनका

[168:03]

सिंटेक्स थोड़ा सा अलग-अलग होगा अब मेरा

[168:05]

फेवरेट सिंटेक्स है फॉर लूप का इसलिए मुझे

[168:07]

कभी भी कोड में इस्तेमाल करना होता है तो

[168:09]

मैं मोस्टली फॉर लूप का इस्तेमाल करती हूं

[168:11]

आने हमें तीनों चाहिए पर आपको जो भी

[168:14]

ज्यादा इजियर टू लर्न लगे आप उनमें से एक

[168:16]

को बार-बार अपने कोड्स में यूज़ कर सकते

[168:18]

हैं कोई परेशानी नहीं आएगी सारे के सारे

[168:20]

काम इन तीनों में से एक लूप से भी हो सकते

[168:22]

हैं पर तीनों इसलिए याद करने हैं पहला

[168:25]

इसलिए क्योंकि कॉलेज के एग्जाम में अगर

[168:27]

टीचर ने पूछ लिया कि इस सवाल का आप जवाब

[168:30]

दीजिए और सिर्फ फॉर लूप से या सिर्फ वाइल

[168:33]

लूप से देना है तो फिर उस टाइम पर परेशानी

[168:35]

हो सकती है तो उस केस में तीनों का

[168:36]

सिंटेक्स आना चाहिए सबसे पहले बात करते

[168:39]

हैं फॉर लूप की अब फॉर लूप का सिंटेक्स

[168:42]

कुछ ऐसा होता है जिसमें सबसे पहले हम अपना

[168:44]

कीवर्ड लिखते हैं जो है फॉर उसके बाद

[168:46]

लगाते हैं पैरेंस और फिर ये कर्ली ब्रेसेज

[168:49]

जैसे इफ के टाइम पर हमने ऑब्जर्व किया था

[168:51]

कि कुछ-कुछ कंडीशन होती है फिर हमारे

[168:53]

कर्ली ब्रेसेज आ जाते हैं और जो भी काम

[168:54]

कराना होता है वह बीच में हम लिख रहे होते

[168:56]

थे वैसा ही कुछ फॉर लूप्स में होता है फॉर

[168:59]

लूप में सबसे पहली जो कंडीशन आती है

[169:00]

पैरेंस में इसको हम कहते हैं इनिशियल

[169:03]

इजेशन इनिशियल इजेशन कंडीशन मतलब कोई भी

[169:07]

काम की हम शुरुआत यहां से कर रहे होंगे

[169:10]

जैसे अगर हमें हेलो वर्ल्ड को पांच बार

[169:12]

प्रिंट करवाना है तो कुछ तो एक हम वेरिएबल

[169:15]

लेंगे जो ट्रैक करेगा कि कितनी बार हेलो

[169:17]

वर्ल्ड प्रिंट हुआ है तो उस वेरिएबल की

[169:19]

वैल्यू शुरू हो सकती है हमारी रो से जा

[169:22]

सकती है चार तक या उस वेरिएबल की वैल्यू

[169:24]

शुरू हो सकती है एक से और जा सकती है पांच

[169:26]

तक तो वो वेरिएबल क्या करेगा जैसे एक

[169:29]

वेरिएबल ले सकते हैं i और ये i क्या करेगा

[169:31]

इसकी सबसे पहले वैल्यू होगी वन तो ये वन

[169:33]

गिन लेगा फिर टू फिर टू गिन लेगा थ्री फिर

[169:36]

फोर फिर फाइव और जैसे ही वन हुई वैसे ही

[169:38]

हेलो वर्ल्ड प्रिंट करवा दिया टू हुई वैसे

[169:40]

ही हेलो वर्ल्ड प्रिंट करवा दिया थ्री

[169:42]

हेलो वर्ल्ड प्रिंट करवा दिया फोर हेलो

[169:44]

वर्ल्ड प्रिंट करवा दिया फाइव में भी इसने

[169:46]

हेलो वर्ल्ड प्रिंट करवा दिया अब इसकी जो

[169:48]

शुरुआती वैल्यू है यानी i = 1 यह वाली जो

[169:53]

स्टेटमेंट है यह इनिश इजेशन स्टेटमेंट है

[169:56]

जो यहां पे आ सकती है दूसरी है हमारी

[169:59]

कंडीशन कंडीशन बताती है कि कब इस फॉर लूप

[170:02]

को खत्म करना है मतलब कब हमारा काम

[170:04]

कंप्लीट खत्म हो जाएगा जैसे यहां पर हमने

[170:07]

लिखा था कि इंट एक वेरिएबल ले लेते हैं i

[170:10]

जिसकी वैल्यू हम वन से शुरू कर देते हैं

[170:12]

और उस हर काम में हर लूप के अंदर अपने लूप

[170:16]

के अंदर फॉर के अंदर हम यहां पर प्रिंट

[170:18]

करवा रहे होंगे क्या हेलो वर्ल्ड और यहां

[170:22]

पर कंडीशन की जगह हम वो कंडीशन लिखेंगे

[170:24]

जिस केस में हमारा लूप रन होना चाहिए तो

[170:26]

हम चाहते हैं हमारा लूप तब तब रन हो जब

[170:29]

हमारे i की वैल्यू लेस दन इक्वल टू 5 रहे

[170:32]

तो i अगर हमारा लेस दन 5 है या इक्वल टू 5

[170:35]

है तब तब आप हेलो वर्ल्ड प्रिंट करते रहिए

[170:37]

और जैसे ही आ ग्रेटर दन 5 हो गया वैसे ही

[170:40]

अब हेलो वर्ल्ड प्रिंट नहीं करवाना

[170:41]

क्योंकि पांच बार प्रिंट करवा दिया और

[170:43]

अपडेशन स्टेटमेंट में हम अपने वेरिएबल को

[170:46]

या अगर हमने लूप में कोई भी अपडेशन करना

[170:48]

जा रहे हैं वो अपडेशंस लिखते हैं जैसे

[170:50]

यहां पर हम लिख सकते हैं i = i + 1 हर बार

[170:54]

i की वैल्यू को एक से बढ़ा देंगे एक से

[170:56]

बढ़ा देंगे तो इस लूप का कंट्रोल किस

[170:58]

तरीके से रहेगा सबसे पहले i की शुरुआत

[171:00]

होगी वन के साथ वन के साथ फिर उस वन की

[171:03]

कंडीशन देखी जाएगी कि क्या i < = 5 है हां

[171:07]

है फिर वो जाएगा अंदर लूप के अंदर जो भी

[171:10]

काम है वो उसको कर देगा उसके बाद यहां

[171:12]

आएगा अपडेट करने अब i की वैल्यू टू हो गई

[171:15]

i की वैल्यू टू हो गई फिर से कंडीशन चेक

[171:17]

होगी कंडीशन है कि i < = 5 है क्या हां है

[171:20]

क्योंकि टू की वैल्यू फाइव से कम है अब इस

[171:23]

इनिश इजेशन पर कभी भी दोबारा नहीं जाएगा

[171:25]

तो इस कंडीशन को चेक होने के बाद दोबारा

[171:27]

से काम कर देगा फिर दोबारा से अपडेट हो

[171:29]

जाएगा दो से तीन उसके बाद दोबारा कंडीशन

[171:32]

चेक करेगा फिर दोबारा काम कर देगा फिर

[171:34]

दोबारा अपडेट हो जाएगा तीन से चार फिर

[171:36]

दोबारा कंडीशन चेक करेगा तो इस तरीके से

[171:38]

इस तरीके के सर्कल में हमारा फॉर लूप रन

[171:41]

करता रहता है एक बार इसको एक्चुअली कोड

[171:43]

में लिखकर देखते हैं और समझते हैं कि इसको

[171:44]

करेंगे किस तरीके से तो सबसे पहले लिखेंगे

[171:47]

फॉर फॉर हमारा की वर्ड है फॉर लूप के लिए

[171:49]

उसके बाद लिखेंगे इनिश इइ जशन वाली

[171:51]

स्टेटमेंट यानी इंट i = 1 य एक तरीके से

[171:56]

हमने एक मिनी स्टेटमेंट लिख दिया अपने फॉर

[171:58]

लूप के अंदर तो तीन मिनी स्टेटमेंट्स का

[172:00]

कॉमिनेशन होता है फॉर लूप सबसे पहले आएगी

[172:03]

हमारी इनिश इइ स्टेटमेंट जिसने हमने i को

[172:05]

इनिश इज कर दिया उसके बाद लिखेंगे अपनी

[172:08]

कंडीशन कौन-कौन सी कंडीशन में लूप हमारा

[172:10]

चले तो i < = 5 की कंडीशन है फिर लिखेंगे

[172:13]

अपडेशन अपडेशन में लिख सकते हैं i = i + 1

[172:19]

और यहां पर अब क्या कर सकते हैं हम प्रिंट

[172:21]

एफ करवा देंगे

[172:24]

हेलो वर्ल्ड इसको कर लेते हैं सेव और एक

[172:27]

बार रन करके देखते हैं कि आउटपुट क्या आता

[172:29]

है हमारे पास जो आउटपुट आया है दैट इज

[172:32]

हेलो वर्ल्ड एक बार उसके बाद फिर से हमारा

[172:35]

हेलो वर्ल्ड प्रिंट हुआ है अब हम चाहते

[172:37]

हैं हर एक हेलो वर्ल्ड नेक्स्ट लाइन में

[172:38]

प्रिंट हो तो इसको भी कर लेते हैं सेव और

[172:41]

दोबारा से कंपाइल एंड रन अबकी बार पांच

[172:43]

बार हेलो वर्ल्ड हमारे लिए प्रिंट हो गया

[172:45]

है मान लो अगर हमें 1000 बार प्रिंट

[172:47]

करवाना होता तो कुछ नहीं बस इस फाइव को

[172:49]

1000 कर देते हैं एक सिंपल सा चेंज अपने

[172:52]

फॉर लूप के अंदर और किसी भी काम को हम

[172:55]

कितनी भी बार कर सकते हैं आप देखेंगे इसको

[172:57]

मैं स्क्रोल करूंगी तो ऊपर वो स्क्रॉल हुए

[172:59]

जा रहा है और हेलो वर्ल्ड एक्चुअली

[173:02]

स्क्रीन पर हजार बार प्रिंट हुआ है तो

[173:05]

किसी भी काम को बहुत बार बहुत बार करवाना

[173:07]

है तो हम फॉर लूप्स का इस्तेमाल कर सकते

[173:09]

हैं और अब मान लीजिए मुझे एक से 100 तक

[173:11]

अगर नंबर्स प्रिंट करवाने हैं तो वो कैसे

[173:13]

करवाएंगे लूप की हेल्प से अब नंबर्स को

[173:15]

मुझे प्रिंट करवाना है तो इस तरीके का कुछ

[173:18]

फैशन रहेगा जब सबसे पहले आएगा वन फिर टू

[173:20]

फिर थ्री फिर फर 5 6 एंड इस तरीके से 100

[173:24]

तक हमारे नंबर्स अब हमने ऑलरेडी क्या किया

[173:27]

है यह एक वेरिएबल ले लिया है जिसके अंदर

[173:29]

वैल्यूज क्या है अपडेट होती जा रही है तो

[173:31]

क्यों ना हम इसी वेरिएबल i की वैल्यू को

[173:33]

बार-बार प्रिंट करवा दें तो अगर इसी

[173:35]

वेरिएबल की वैल्यू को प्रिंट करवाएंगे तो

[173:37]

यहां लिखेंगे परसेंटेज d और उसके बाद

[173:40]

i इस 1000 को हम कर देंगे 100 आई होप कि

[173:44]

इसका मतलब हम सबको क्लियर हो रहा है कि

[173:47]

वेरिएबल i की वैल्यू वन से शुरू हो रही है

[173:49]

और 100 तक जाएगी और हर बार i की वैल्यू एक

[173:52]

से बढ़ रही है तो यहां हम क्या करेंगे वन

[173:55]

से लेकर 100 तक वैल्यूज को प्रिंट करवाने

[173:57]

वाले

[173:58]

हैं तो यह सारी की सारी वैल्यूज हमारी वन

[174:01]

से लेकर 100 तक प्रिंट हो गई है आउटपुट

[174:04]

स्क्रीन पर अब वही हम इस वेरिएबल को

[174:07]

डिक्रीज भी कर सकते हैं मतलब अपडेट करने

[174:09]

का मतलब हमेशा वेरिएबल की वैल्यू को

[174:11]

बढ़ाना नहीं होता अपडेट का मतलब में हम

[174:13]

वेरिएबल की वैल्यू कम भी कर सकते हैं जैसे

[174:15]

अगर मुझे 100 से लेकर या लेट्स से 10 से

[174:18]

लेकर एक तक वैल्यूज प्रिंट करवानी होती तो

[174:21]

मैं i की वैल्यू को शुरू करती 10 से और

[174:24]

फिर तब तक i की वैल्यू को बढ़ाते रहते जब

[174:27]

तक वो 10 से एक एक एक एक कम कम होकर वन ना

[174:30]

हो जाए हर बार अपडेट करेंगे i = i - 1 की

[174:33]

फॉर्म में और तब तक लूप चलाएंगे जब तक i

[174:35]

हमारा ग्रेटर दन इक्वल ट 1 नहीं रहता मतलब

[174:38]

अगर i की वैल्यू वन है तो भी लूप चलेगा टू

[174:41]

है तो भी लूप चलेगा थ्री है तो भी लूप

[174:43]

चलेगा और लूप चल कैसे रहा है सबसे पहले i

[174:45]

की वैल्यू 10 है उसके बाद नौ हो जाएगी

[174:47]

उसके बाद आठ हो जाएगी सात 6 5 4 3 2 1 एक

[174:51]

में जैसे ही अपडेट होगा एक के बाद वैल्यू

[174:53]

जीरो हो जाएगी उसके बाद यह लूप रन नहीं

[174:55]

करेगा अब एक बार सेव करके इसको रन कराते

[174:58]

हैं इस बार हमारी वैल्यूज जो प्रिंट होंगी

[175:01]

वो 10 के बाद से प्रिंट हो रही होंगी यानी

[175:03]

10 9

[175:04]

87654321 तो कुछ इस तरीके से हमारा जो ये

[175:09]

वेरिएबल है इसको अपडेशन के टाइम पर हम

[175:11]

बढ़ा भी सकते हैं और कम भी कर सकते हैं अब

[175:13]

जरूरी नहीं है यहां पर जो इनिश इजेशन करें

[175:16]

वो हमेशा एक इंटी जर वैल्यू का हो यहां पर

[175:18]

हम कैरेक्टर्स भी लिख सकते हैं स्ट्रिंग

[175:20]

भी लिख सकते हैं बेसिकली अपना लॉजिक बिल्ड

[175:22]

करते हैं क्वेश्चन के हिसाब से जो भी

[175:24]

जरूरत होगी इनिश इजेशन की उसको करेंगे पर

[175:27]

मोस्टली यहां पर ये आय ही आता है अब इस आय

[175:31]

को हम या तो इटरेटर कहते हैं इसको आइट

[175:35]

मेटर भी हम कह सकते हैं या फिर इसको कहते

[175:37]

हैं काउंटर वेरिएबल इसका मतलब होता है एक

[175:40]

ऐसा वेरिएबल जिसकी हेल्प से हम किसी भी

[175:42]

काम को बार-बार करवा रहे हैं तो आइट मेशन

[175:45]

का मतलब होता है इंग्लिश में किसी भी काम

[175:46]

को बार-बार करना काउंटर हो होता है कि एक

[175:49]

काउंटर रख लिया हमने जैसे दुकानों के ऊपर

[175:51]

काउंटर पर ट्रैक करते हैं ना कि कितने

[175:53]

कस्टमर आए वैसे ही यहां पर यह आए एक

[175:55]

काउंटर है या एक आइट मेटर है जो ट्रैक कर

[175:58]

रहा है कि काम कितनी बार हुआ अगर यहां पे

[176:01]

10 लिख दिया और यहां पर कंडीशन कहती है कि

[176:03]

एक से बड़ा हो तब तक काम होता रहे और

[176:05]

अपडेशन कंडीशन कहती है कि एक-एक कम होता

[176:08]

रहे तो हमें पता है हमारा काउंटर हमें बता

[176:10]

रहा है हमारा इटरेटर हमें बता रहा है कि

[176:11]

हमारा लूप 10 बार चलने वाला है अब एक सवाल

[176:14]

फॉर लूप्स के ऊपर कर लेते हैं सवाल हमारा

[176:17]

यह प्रिंट द नंबर फ्रॉम 0 टू 10 हमें रो

[176:19]

से लेकर 10 तक नंबर्स प्रिंट करने हैं इस

[176:22]

क्वेश्चन को हम ध्यान से देखेंगे क्योंकि

[176:24]

अभी तक हम नंबर्स प्रिंट कर रहे थे वन से

[176:26]

लेकर 10 तक अबकी बार जीरो भी एडिशनल है और

[176:29]

इन सारे नंबर्स को काउंट करें तो ये टोटल

[176:31]

11 नंबर्स हैं यहां पर एक छोटा सा

[176:33]

कंफ्यूजन जो शुरुआती स्टेजेस में

[176:35]

स्टूडेंट्स को हो जाता है वो समझते हैं कि

[176:37]

जीरो से लेकर 10 तक हमारे पास 10 नंबर्स

[176:40]

हैं पर एक्चुअली ऐसा नहीं है हमारे पास 11

[176:42]

नंबर होते हैं जीरो से लेकर 10 तक तो अब

[176:45]

हम इसका कोड लिखेंगे कोड के लिए सबसे पहले

[176:48]

तो अपना आइट मेटर बनाते हैं आइट मेटर है

[176:52]

हमारा आ जिसकी वैल्यू की शुरुआत अब हम

[176:54]

जीरो से करेंगे इसको जीरो से इनिला इज कर

[176:56]

दिया अब यहां पर कंडीशन ये डालेंगे कि i

[176:59]

की वैल्यू जब तक लेस दन इक्वल टू हमारी 10

[177:01]

की वैल्यू के इक्वल है मतलब i जब भी जब तक

[177:03]

10 के लेस या 10 से इक्वल है तब तक हमारा

[177:06]

लूप चले और अपडेशन के लिए लिखेंगे i = i +

[177:10]

1 हर बार एक से इसको इंक्रीज करना है और

[177:13]

यहां पर हम प्रिंट करवा देंगे परसेंटेज d

[177:17]

i यहां पर डाल देते हैं नेक्स्ट लाइन इसको

[177:20]

कर लेते हैं सेव एंड इसको करते हैं रन और

[177:24]

ये रहा हमारे पास हमारा आउटपुट जिसमें रो

[177:26]

से लेकर हमारी सारी की सारी वैल्यूज 10 तक

[177:29]

प्रिंट हो गई है तो इस तरीके से हमारे पास

[177:31]

टोटल 11 नंबर प्रिंट हुए हैं अब ये जो i =

[177:34]

i + 1 है ना इसको लिखने का एक शॉर्ट हैंड

[177:37]

होता है यानी इसको हम i + प् भी लिख सकते

[177:39]

हैं जैसे हमने सीखा था कि i = i + 1 को

[177:43]

अगर हमें लिखना हो तो इसको हम लिख सकते

[177:46]

हैं i + इ

[177:48]

1 ये शॉर्ट हैंड हमने असाइनमेंट ऑपरेटर्स

[177:51]

करते टाइम सीखा था अब i + = 1 को हम i + प

[177:56]

भी लिख सकते हैं तो ये शॉर्ट हैंड का

[177:57]

शॉर्ट हैंड बन जाता है और ये सिर्फ + व के

[178:00]

लिए होता है यानी अगर यहां पर टू होता और

[178:02]

यहां पर टू होता तो उसके लिए i प्स प्स

[178:06]

प्लस हम नहीं कर सकते i प् प्लस का मतलब

[178:08]

होता है हर बार i में एक को ऐड कर दो उसी

[178:12]

तरीके से एक प्लस प् आ भी होता है प्लस प्

[178:15]

आ प् प् आ का अलग मतलब होता है उसके अलावा

[178:18]

माइनस माइनस आ भी होता है और i माइनस

[178:20]

माइनस भी होता है अब एक बार इस प्लस प्लस

[178:22]

और माइनस माइनस वाली चीज को थोड़ा सा

[178:24]

डिटेल में डिस्कस कर लेते हैं इनको हम

[178:26]

इंक्रीमेंट और डिक्रिमेंट ऑपरेटर्स कहते

[178:28]

हैं सबसे पहले बात करते हैं अपने

[178:30]

इंक्रीमेंट ऑपरेटर की इंक्रीमेंट करने का

[178:32]

मतलब होता है अंग्रेजी में किसी चीज को

[178:34]

बढ़ाना यानी इंक्रीज करना तो इंक्रीमेंट

[178:37]

ऑपरेटर्स दो टाइप के होते हैं एक होता है

[178:39]

हमारा प् प् आ एक होता है हमारा i+ प् अगर

[178:43]

हम एक वेरिएबल ले ले i इसकी वैल्यू को हम

[178:45]

इनिशियलिज्म

[178:48]

फिर एक बार प्रिंट स्टेटमेंट लिखें जिसके

[178:50]

अंदर हम प्रिंट करवाना चाहते हैं i की

[178:51]

वैल्यू कोई परसेंटेज d स् n अब हम लिखवाता

[178:56]

हैं सबसे पहले i प्लस

[178:59]

प्लस इसको कर लेते हैं सेव और न्यू

[179:02]

टर्मिनल तो हमारे आउटपुट में हमारे पास

[179:04]

आया वन इस आ के बाद जब भी हम प्लस प्लस

[179:08]

लगाते हैं इसका मतलब यह होता है कि i की

[179:10]

वैल्यू को पहले यूज कर लो और फिर i की

[179:13]

वैल्यू को इंक्रीज कर दो यानी प्लस प्लस

[179:17]

जब भी बाद में लगता है उसका मतलब है यूज

[179:20]

देन इंक्रीज पहले यूज कर लो जो भी वैल्यू

[179:23]

है और उसको इंक्रीज कर दो आ की वैल्यू

[179:26]

क्या थी वन अब पहले उसको यूज करने का मतलब

[179:29]

है उसको प्रिंट करवा देना तो हमने वन को

[179:32]

ही प्रिंट करवा दिया पर अब यह इंटरनली

[179:34]

कंपाइलर के पास ये इंक्रीज हो चुकी है

[179:36]

वैल्यू यानी अब अगर हम दोबारा से i की

[179:39]

वैल्यू को प्रिंट करवाना चाहे इस बार हम

[179:42]

प्लस प्लस नहीं करेंगे इस बार सिंपली i

[179:44]

लिख देंगे तो यहां पर तो i की वैल्यू वन

[179:47]

प्रिंट हुई थी अब प्लस प्लस होकर इंटरनली

[179:49]

वह वैल्यू दो हो चुकी है और यहां पर जब हम

[179:52]

दोबारा i को प्रिंट करवाएंगे तो हमें पता

[179:54]

चलेगा कैसे दो हो गई है इसको कंपाइल कर

[179:56]

लेते हैं रन यानी पहले वन थी अब इंटरनली

[180:00]

इंक्रीज हो गई है यूज़ नहीं किया उसके बाद

[180:03]

इस सेकंड लाइन में फिर यूज़ कर लिया यूज़

[180:05]

कर लिया तो उसकी वैल्यू जो दो थी वह हमारे

[180:07]

पास प्रिंट होकर आ गई और यहीं पर अगर हम

[180:10]

सेम वेरिएबल के

[180:11]

लिए + + आ ले लेते तो उस केस में क्या

[180:15]

होता + + आ कहता है है

[180:19]

इंक्रीज देन यूज यानी पहले इंक्रीज करो

[180:22]

वैल्यू इंक्रीज करो इसलिए प्लस प्लस पहले

[180:24]

ही बता दिया प्लस प्लस मतलब पहले इंक्रीज

[180:27]

कर फिर i की वैल्यू को यूज़ करना तो

[180:29]

इंक्रीज करेगा और बाद में i की वैल्यू यूज

[180:31]

होगी इसको हम कर लेते हैं कॉमेंट आउट एक

[180:34]

बार सेव एंड अब रन करके आउटपुट देखते

[180:37]

हैं तो सबसे पहले प्रिंट हुआ टू और सेकंड

[180:40]

टाइम भी प्रिंट हुआ टू क्यों क्योंकि i की

[180:42]

वैल्यू शुरुआत में वन थी प्लस प्लस ने

[180:44]

क्या किया उसको पहले इंक्रीज करके दो कर

[180:46]

दिया उसके बाद i को हमने प्रिंट करवा दिया

[180:49]

यानी दो प्रिंट हो गया तो सेकंड टाइम जब

[180:51]

हम i की वैल्यू को प्रिंट करवा रहे हैं वो

[180:53]

ऑलरेडी दो हो चुकी है इसीलिए वहां पर भी

[180:54]

दो प्रिंट हो गया तो इसलिए प्लस प् आ जो

[180:57]

होता है इसको हम कहते हैं प्री इंक्रीमेंट

[181:00]

ऑपरेटर और i + प् को हम कहते हैं पोस्ट

[181:05]

इंक्रीमेंट ऑपरेटर तो प्लस प् आ मतलब प्री

[181:09]

इंक्रीमेंट यानी पहले इंक्रीमेंट हुआ और

[181:11]

बाद में यूसेज हुआ और पोस्ट इंक्रीमेंट

[181:13]

यानी पहले यूज हुआ और बाद में इंक्रीज हुआ

[181:17]

तो इस तरीके से से हम शॉर्ट हैंड लिख सकते

[181:19]

हैं प्व और -1 के लिए अब सेम तरीके से

[181:22]

हमारे पास डिक्रिमेंट ऑपरेटर्स होते हैं

[181:24]

डिक्रिमेंट ऑपरेटर क्या करता है डिक्रीज

[181:26]

कर देता है वैल्यू यानी यहां पर अगर हमारे

[181:30]

पास होता माइनस माइनस आए तो इसको हम कहते

[181:33]

प्री डिक्रिमेंट और वहीं पर होता आ माइनस

[181:37]

माइनस तो इसको हम कहते पोस्ट डिक्रिमेंट

[181:40]

अब जैसे एग्जांपल के तौर पर यहां पर इसको

[181:43]

कर लेते हैं कॉमेंट आउट और कॉमेंट तो आ की

[181:47]

वैल्यू शुरुआत में वन है अब यहां पर हम कर

[181:50]

दें i माइनस माइनस तो क्या आउटपुट आएगा

[181:53]

हमारे पास आउटपुट आया है वन एंड देन रो

[181:57]

यानी सबसे पहले i की वैल्यू यूज होगी

[181:59]

प्रिंट होगी तो वन है तो वन ही प्रिंट हो

[182:01]

गया उसके बाद डिक्रीज होगी तो वन की

[182:03]

वैल्यू डिक्रीज होकर हो जाएगी रो और सेकंड

[182:05]

टाइम जब हम प्रिंट करवाएंगे तो प्रिंट

[182:07]

होगा हमारे पास रो अब इसको कॉमेंट कर लेते

[182:09]

हैं सेकंड पार्ट को अगर रन करें यानी

[182:12]

माइनस - आ तो इस केस में सबसे पहले तो

[182:14]

हमारे पास जीरो प्रिंट होगा क्योंकि पहले

[182:16]

ही वो डिक्रीज हो जाएगी फिर प्रिंट होगी

[182:19]

तो यहां भी ज़ीरो यहां भी ज़ीरो क्योंकि

[182:21]

फर्स्ट टाइम डिक्रीज हो गई वन से ज़ीरो

[182:23]

में कन्वर्ट हो गई और उसके बाद प्रिंट हो

[182:25]

गई यानी वो ज़ीरो ही प्रिंट हो गया और

[182:27]

सेकंड टाइम जब प्रिंट करवाएंगे i की

[182:28]

वैल्यू तो ऑलरेडी ज़ीरो हो चुकी है तो वो

[182:30]

ज़ीरो प्रिंट हो जाएगा तो इस तरीके से c

[182:33]

के अंदर हमारा पोस्ट डिक्रिमेंट प्री

[182:35]

डिक्रिमेंट पोस्ट इंक्रीमेंट प्री

[182:36]

इंक्रीमेंट ऑपरेटर्स काम करते हैं और जब

[182:38]

भी हम लूप्स का यूज़ करते हैं ये

[182:40]

इंक्रीमेंट डिक्रिमेंट ऑपरेटर्स हमारे

[182:42]

बहुत काम आते हैं क्योंकि मोस्टली आप

[182:44]

देखेंगे कहीं भी सिंटेक्स वाइज इन्हीं का

[182:46]

यूज़ हो रहा होता है तो इनको हमें हमेशा

[182:48]

यूज़ करना है जो स्टैंडर्ड तरीका है फॉर

[182:50]

को लिखने का उसमें मोस्टली लोग या तो

[182:52]

वेरिएबल आ यूज करते हैं या जे यूज करते

[182:54]

हैं या k यूज़ करते हैं आप चाहे तो कुछ भी

[182:57]

यूज़ कर सकते हैं x वाज को जो आपका मन करे

[183:00]

वैसे स्टैंडर्ड तरीका आपको जब भी मैं कोड

[183:02]

लिख रही होंगी मोस्टली आई दिख रहा होगा

[183:04]

नेस्टेड लूप्स हैं यानी लूप के अंदर लूप

[183:06]

तो आपको जे के दिख रहे होंगे अब नेक्स्ट

[183:09]

चीज थोड़े स्पेशल चीजों की हम बात कर लेते

[183:12]

हैं हम ऑलरेडी डिस्कस कर चुके हैं

[183:14]

इंक्रीमेंट ऑपरेटर क्या होता है ऑलरेडी

[183:16]

डिस्कस कर चुके हैं डिक्रिमेंट ऑपरेटर

[183:18]

क्या होता है इसके बाद बात आती है लूप

[183:20]

काउंटर कैन बी फ्लोट और इवन कैरेक्टर यानी

[183:23]

हमने जो अभी तक फॉर लूप लिखा है उसमें

[183:25]

हमारा लूप का जो काउंटर है जो काउंटर

[183:27]

वेरिएबल था वो फ्लोट भी हो सकता है वो

[183:30]

हमारा कैरेक्टर भी हो सकता है कैसे जैसे

[183:32]

एक लूप लिखते हैं जिसमें हम वन से लेकर

[183:34]

फाइव तक नंबर्स को प्रिंट करवाना चाहते

[183:36]

हैं पर इस बार हम फ्लोटिंग नंबर्स को

[183:37]

प्रिंट करवाएंगे तो i की वैल्यू शुरू

[183:39]

करेंगे 1.0 से और i जब तक हमारा लेन इक्व

[183:43]

5.0 नहीं रहता यहां पर कर देंगे i को प्लस

[183:46]

प्लस और हर बार हम प्रिंट करवा देंगे

[183:49]

परसेंटेज f स् n आ की वैल्यू को इसको कर

[183:53]

लेते हैं सेव एंड नया टर्मिनल खोल को इसको

[183:57]

करते हैं रन तो हमारे पास प्रिंट क्या हुआ

[184:00]

1.00 2.00 3.0 4.0 एंड इसी तरीके से 5.0

[184:06]

यानी इस बार सारी वैल्यू स्लॉट में प्रिंट

[184:08]

हुई है और इस बार हमने जो अपना इटरेटर

[184:10]

अपना काउंटर वेरिएबल यूज़ करा है वो है

[184:13]

हमारा एक फ्लोटिंग वैल्यू साथ में मान

[184:15]

लीजिए हमें a से लेकर z तक कैरेक्टर्स

[184:17]

प्रिंट करवा करवाने हैं तो उसका लूप क्या

[184:18]

होगा हम शुरुआत में कैरेक्टर इटरेटर ले

[184:21]

लेंगे i = a उसके बाद क्या करेंगे कंडीशन

[184:25]

लगा देंगे या यहां पर i की जगह इस बार

[184:28]

वेरिएबल अलग लेते हैं स ले लेते हैं तो

[184:30]

कैरेक्टर के अंदर i की वैल्यू स्टोर है स

[184:33]

को तब तक इंक्रीज करते जाएंगे जब तक उसकी

[184:35]

वैल्यू लेस दन इक्वल टू z नहीं रहती स को

[184:39]

हर बार कर देंगे प्लस प्लस हमें पता है कि

[184:41]

कैरेक्टर्स जो है इंटरनली अपनी एस्का

[184:43]

वैल्यू में कन्वर्ट होते हैं तो वो नंबर्स

[184:45]

ही होते हैं इस a पर अगर स्क्रोल करें तो

[184:47]

97 इसकी एस काई वैल्यू है z पर स्क्रॉल

[184:50]

करें तो इसकी वैल्यू 122 है तो b की क्या

[184:54]

होगी a की 97 है b की होगी 98 तो इस तरीके

[184:57]

से बढ़ते रहते हैं तो जब भी कैरेक्टर को

[184:58]

बढ़ा रहे हैं यानी हम a से b में जा रहे

[185:00]

हैं b से c में जा रहे हैं c से d में जा

[185:02]

रहे हैं तो यहां पर हर बार हम प्रिंट करवा

[185:04]

देंगे किसको अपने कैरेक्टर को सी कर लेते

[185:09]

हैं सेव तो इस बार हम देखेंगे कि सारे के

[185:12]

सारे जो हमारे इंग्लिश अल्फाबेट में

[185:14]

लेटर्स हैं वो ए से लेकर एंड तक हमारे पास

[185:17]

प्रिंट होकर आ गए तो कुछ इस तरीके से

[185:19]

हमारा जो आइट मेटर है उसको फ्लोट भी ले

[185:21]

सकते हैं उसको कैरेक्टर भी ले सकते हैं

[185:23]

उसको इंट भी ले सकते हैं डबल भी ले सकते

[185:25]

हैं डिपेंड करता है हम कौन सा सवाल सॉल्व

[185:28]

कर रहे हैं नेक्स्ट चीज जिसकी हम बात

[185:30]

करेंगे वो है इंफाइटिंग

[185:42]

के साथ इंट i = 1 हमारी कंडीशन हो गई अब

[185:46]

यहां पर होती है हमारी टर्मिनेशन की

[185:48]

कंडीशन और आपका मन किया कि आप यहां पे

[185:50]

खाली छोड़ देंगे मतलब यहां कोई स्टेटमेंट

[185:52]

लिखेंगे ही नहीं जो टर्मिनेट कर दे इस लूप

[185:54]

को और यहां पर लिखेंगे अपनी अपडेशन

[185:57]

स्टेटमेंट यानी i+ प् और हर बार क्या कर

[186:00]

रहा है ये लूप हर बार यह लूप प्रिंट करवा

[186:02]

रहा है हमारे पास हेलो वर्ल्ड को इसको कर

[186:06]

लेते हैं सेव तो इस लूप का क्या कहना है

[186:09]

कि i की वैल्यू वन से शुरू हो रही है हर

[186:11]

बार आ की वैल्यू इंक्रीज हो रही है यानी

[186:13]

पहले वन है तो फिर टू हो जाएगी फिर थ्री

[186:15]

हो जाएगी फिर फोर हो जाएगी फिर फाइव हो

[186:17]

जाएगी पर यहां पे यह स्टेटमेंट हमने खाली

[186:19]

छोड़ दी हमारी मर्जी हम तीनों में से किसी

[186:21]

को भी खाली छोड़ सकते हैं प्रॉब्लम यह है

[186:23]

एरर्स आते हैं और क्या एरर्स आते हैं अभी

[186:25]

हम देखेंगे इस स्टेटमेंट को हमने खाली

[186:27]

छोड़ दिया तो इस लूप को पता ही नहीं चल

[186:29]

रहा सी के कंपाइलर को पता ही नहीं चल रहा

[186:31]

कि इस लूप को खत्म कब करना है ये लूप चलता

[186:33]

ही जाएगा चलता ही जाएगा कैसे चलता जाएगा

[186:36]

इसको रन करते हैं तो ये लूप तब तक हेलो

[186:39]

वर्ल्ड प्रिंट करवाएगा जब तक हमारे

[186:40]

कंप्यूटर की मेमोरी पूरी भर नहीं जाती तो

[186:43]

इसलिए इसको क्लोज कर दिया इसीलिए

[186:45]

इंपॉर्टेंट है कि हम हमेशा को कोई भी

[186:47]

कंडीशन को मिस ना करें जब तक हमें पता है

[186:50]

कि कोड हमारा सही से रन कर रहा है और काफी

[186:53]

ध्यान देना है कि कौन सी कंडीशन क्या करने

[186:55]

वाली है और इस तरीके का लूप जो कभी खत्म

[186:57]

ही नहीं होता हमेशा के लिए रन करते जाता

[186:59]

है उसको हम इंफाइटिंग

[187:03]

ये रुकेगा नहीं इंफाइटिंग

[187:12]

वेब डेवलपमेंट से रिलेटेड या किसी और चीज

[187:15]

में एप्स बनाएंगे या कंपनी में जाकर

[187:17]

एक्चुअली जाकर डेवलपमेंट करेंगे तो वहां

[187:19]

पर जब आपको कोडिंग करनी पड़ेगी तो ऐसे

[187:21]

मिस्टेक बहुत बेसिक मिस्टेक्स आपको

[187:23]

बिल्कुल नहीं करने जब भी लूप्स की बात

[187:25]

करें हमेशा ध्यान देना है कि आप एक

[187:27]

इंफाइटिंग अपने प्रोग्राम के अंदर तो ये

[187:30]

हो गया हमारा इंफाइटिंग

[187:38]

वो है हमारा वाइल लूप अब वाइल लूप को

[187:41]

लिखने का सिंटेक्स थोड़ा सा आसान होता है

[187:43]

शुरू में ही हमने सबसे जो हल्का सा

[187:46]

मुश्किल सिंटेक्स वाला कोड है वो कर लिया

[187:48]

है फॉर लूप अब सारे लूप्स हमें आसान

[187:50]

लगेंगे बाकी सारी चीजें काफी आसान लगेंगी

[187:52]

पर अगर फॉर लूप में अभी भी आपको हल्का सा

[187:54]

डाउट है उसको आप हल्का सा रिवाइंड करके

[187:56]

थोड़ा सा और देख लीजिए उसका जो हमने सवाल

[187:59]

डिस्कस किए हैं वो उनमें अगर डाउट है तो

[188:01]

उनको भी हल्का सा देख लीजिए नहीं तो नोट्स

[188:03]

पर नजर मार लीजिए और बिल्कुल अच्छे से समझ

[188:05]

में आ गया तो अब वाइल लूप्स पढ़ते हैं

[188:07]

वाइल का सिंटेक्स होता है कि हम सबसे पहले

[188:09]

लिखते हैं वाइल अपना कीवर्ड और उसके अंदर

[188:12]

अपनी कंडीशन लिखते हैं और फिर अंदर लिखते

[188:14]

हैं वो स्टेटमेंट्स जो हमारे लिए कोई ना

[188:16]

कोई काम हमें करके देंगे तो अभी जो हमने

[188:19]

कोड लिखा था कि वन से लेकर फ तक नंबर्स को

[188:22]

प्रिंट करवाना है उसमें फॉर लूप में तो

[188:24]

हमने कोड लिख ही दिया था अब एक बार फॉर और

[188:26]

वाइल का सिंटेक्स जो है कंपेयर कर लेते

[188:28]

हैं फॉर लूप में कैसे कोड लिखा था फॉर इंट

[188:32]

i = 1 आ जब तक लेन इक्व ट 5 है आ प्स प्स

[188:38]

यहां पर हम प्रिंट करवा रहे थे परसेंटेज

[188:40]

डी हमारा आई अब इसी का वाइल लूप में क्या

[188:44]

कन्वर्जन होगा वाइल अपना की कीवर्ड फिर

[188:48]

लिखेंगे अपनी कंडीशन कंडीशन हमारी क्या है

[188:51]

यहां पे अपना जो वेरिएबल है उसको बाहर

[188:53]

डिक्लेयर करना है यानी अपने कोड के अंदर

[188:56]

फॉर में तो हमने वेरिएबल को अंदर ही

[188:59]

डिक्लेयर कर दिया था पैरेंस के पर इस बार

[189:01]

हमें वेरिएबल को यहां पर बाहर डिक्लेयर

[189:03]

करना पड़ेगा क्योंकि वाइल में कोई जगह

[189:05]

नहीं होती या तो आप अंदर करें वाइल के पर

[189:07]

उसको फिर यहां पर यूज नहीं कर सकते कंडीशन

[189:09]

में तो उसको बाहर ही डिक्लेयर करेंगे

[189:11]

कंडीशन होगी हमारी कि आ जब तक लेसन इक्वल

[189:14]

टू 5 नहीं हो जाता तब तक प्रिंट कर दो

[189:18]

परसेंटेज d हमारे i की वैल्यू को अब यहां

[189:21]

पर आप पूछेंगे कि दीदी हमने दो चीजें कवर

[189:24]

कर ली यहां पर एक तो हमने कवर कर लिया

[189:26]

अपनी डिक्लेरेशन स्टेटमेंट डिक्लेरेशन को

[189:28]

हम वाइ लूप के बाहर लिखते हैं तो ये

[189:30]

डिक्लेरेशन इस डिक्लेरेशन की जगह आ गई

[189:32]

यहां पे आ गई है हमारी टर्मिनेशन कंडीशन

[189:35]

कि किन-किन केसेस में लूप हमारा खत्म हो

[189:37]

जाएगा किन-किन केसेस में रन करेगा तो

[189:39]

टर्मिनेशन कंडीशन यहां आ गई और इसमें यहां

[189:42]

आ गई पर ये अपडेशन की कंडीशन तो आई नहीं

[189:44]

अपडेशन कहां लिखेंगे तो वाइल लूप के अंदर

[189:47]

अपडेशन हमें अंदर ही लिखना पड़ता है यानी

[189:49]

एंड स्टेटमेंट में अपडेशन यहां पे लिख

[189:51]

देंगे लूप खत्म होने से पहले कि आय को एंड

[189:54]

में बाहर निकलते निकलते प्लस प्लस भी कर

[189:56]

देना तो अगली बार प्लस प्लस करेगा

[189:59]

स्टेटमेंट से + व हो जाएगा फिर दोबारा

[190:01]

वापस आएगा काम कर देगा फिर दोबारा प्लस

[190:04]

प्लस हो जाएगा फिर दोबारा वापस आएगा काम

[190:06]

कर देगा फिर दोबारा प्लस प्लस हो जाएगा

[190:08]

फिर दोबारा वापस आएगा तो इस तरीके से

[190:10]

हमारा लूप रन करता है वाइल लूप c के अंदर

[190:13]

अब अपने कोड को एक्चुअली रन करके भी देख

[190:15]

लेते हैं वेरिएबल डिक्लेयर करते हैं इंट आ

[190:17]

इ इ 1 जब तक i इज < इक्व 5 तब तक हम

[190:23]

प्रिंट करवा लेते हैं हेलो वर्ल्ड को फाइव

[190:26]

टाइम्स और हर बार कर देंगे i को प्लस प्लस

[190:30]

अब एक चीज ध्यान देनी है ये जो कर्ली

[190:31]

ब्रेसेज हैं इनके बाद कभी भी कभी भी c के

[190:34]

अंदर हम ये नहीं लगाते यानी स्टेटमेंट

[190:37]

टर्मिनेटर क्योंकि कर्ली ब्रेसस का मतलब

[190:39]

ये होता है कि यहां एक ब्लॉक ऑफ कोड है तो

[190:41]

उसके बाद स्टेटमेंट हमें पता ही है कि

[190:42]

खत्म होने वाली है तो स्टेटमेंट टर्मिनेटर

[190:44]

के लगाने की जरूरत नहीं है अब इसको कर

[190:46]

लेते हैं रन न्यू टर्मिनल तो हमारे पास

[190:50]

पांच बार हेलो वर्ल्ड प्रिंट होकर आ गया

[190:52]

है अब इसके सवालों की बात करें सवाल हमारा

[190:55]

है प्रिंट द नंबर्स फ्रॉम 0 टू n इफ n इज

[190:58]

गिवन बाय द यूजर अभी तक हम क्या कर रहे थे

[191:00]

रो से लेकर जैसे पांच तक नंबर प्रिंट

[191:02]

करवाना है या वन से लेकर पांच तक कराना है

[191:05]

तो हम खुद से टर्मिनेटिंग स्टेटमेंट लगा

[191:06]

रहे थे कि i की वैल्यू जब तक लेस दन इक्वल

[191:08]

टू 5 रहे पर इस बार यूजर बताएगा कि कहां

[191:11]

तक वैल्यू प्रिंट करनी है जैसे फॉर

[191:13]

एग्जांपल यूजर ने हमें भेजा फोर तो हमें

[191:16]

प्रिंट करना है रो 1 2 3 4 यूजर ने अगर

[191:19]

भेजा 10 तो हमें प्रिंट करना है 0 1 2 3 4

[191:23]

5 6 जब तक 10 नहीं आ जाता अब इसको करने का

[191:27]

तरीका क्या रहेगा सबसे पहले तो यूजर से

[191:29]

वैल्यू इनपुट ले लेंगे यूजर से वैल्यू

[191:32]

इनपुट ले ली उसको किसी वेरिएबल n में

[191:34]

स्टोर करा लिया नंबर n में स्टोर करा लिया

[191:37]

अब जब भी हम फॉर की कंडीशन लिखते थे या इस

[191:40]

केस में क्या करते हैं वाल लूप से सवाल को

[191:42]

सॉल्व करते हैं पहले जब भी हम वाइल की

[191:44]

कंडीशन लिखते थे तो वाइल के अंदर क्या

[191:46]

लिखेंगे जब तक हमारा i < इक्व टू n नहीं

[191:50]

हो जाता पहले लिखते थे लेसन इक्व टू 5 इस

[191:53]

केस में n एक चेंजिंग नंबर है हमेशा फाइव

[191:55]

नहीं हो सकता फोर भी हो सकता है 10 भी हो

[191:57]

सकता है 10000 भी हो सकता है तो लेन इक्व

[192:00]

ू n उसके अंदर हम प्रिंट करवा देंगे अपने

[192:03]

i को एंड बाद में कर देंगे i+ प् तो कुछ

[192:07]

इस तरीके का हमारा प्रोसेस रहेगा इसको कोड

[192:09]

करके देख लेते हैं तो ऊपर लिखते हैं

[192:11]

प्रिंट एफ एंटर नंबर और अपने नंबर को ऊपर

[192:14]

कर लेते हैं डिफाइन इंट n और यहां से कर

[192:16]

लेते हैं स्कैन

[192:18]

अब लिखेंगे अपना वाइल लूप वाइल एक आइट र

[192:22]

इंट i इ जब तक हमारा i < इक्व ट n है तब

[192:26]

तक हमारा वाइल लूप रन करेगा वाइल लूप के

[192:29]

अंदर क्या करेंगे हर बार प्रिंट करवा

[192:30]

देंगे अपनी वैल्यू को यानी अपने i को और

[192:35]

उसके बाद कर देंगे i + तो ये क्या हुआ

[192:37]

सबसे पहले हमने यूजर से नंबर मांगा यूजर

[192:39]

ने नंबर एंटर किया तो हमने उसको n में

[192:41]

स्टोर करा दिया उसके बाद i की वैल्यू को

[192:44]

रो से शुरू किया i जब तक लेस दन इक्वल टू

[192:46]

n रह तब तक वाइल लूप रन करेगा हर बार हम

[192:49]

प्रिंट करवा देंगे आ को और फिर उसको कर

[192:51]

देंगे अपडेट बाय वन इसको कर लेते हैं सेव

[192:54]

और इसको करते हैं रन तो सबसे पहले एंटर

[192:57]

करना है नंबर नंबर हम एंटर करने वाले हैं

[192:59]

सेवन सेवन हमने एंटर कर दिया तो हमारे लिए

[193:01]

रो से लेकर सेवन तक सारे नंबर्स प्रिंट हो

[193:03]

गए हैं अब यहीं पर हम कोई बड़ा नंबर भी

[193:06]

एंटर कर सकते थे जैसे मान लीजिए हमने 55

[193:10]

एंटर किया तो रो से लेकर 55 तक सारे के

[193:13]

सारे नंबर्स हमारे पास प्रिंट हो गए हैं

[193:15]

तो फॉर लूप्स को या सी के अंदर किसी भी

[193:18]

कांसेप्ट को अच्छे से सीखने का एक ही

[193:20]

तरीका है कि इसके बहुत सारे सवाल आप कर ले

[193:22]

जो जो चीजें हम प्रैक्टिस करते जा रहे हैं

[193:24]

वह अगर हमें अच्छे से क्लियर है तो कोई

[193:26]

परेशानी की बात नहीं है इसी सेम कोड को हम

[193:29]

वाइल की जगह फॉर से भी कर सकते हैं कैसे

[193:32]

यहां पर इसको कर देते हैं कॉमेंट आउट और

[193:35]

फॉर में सेम कोड लिखते हैं फॉर इंट आ = 0

[193:40]

आ की वैल्यू जब तक लेस दन इक्वल टू हमारे

[193:42]

पास n नहीं रहती आ प् प्स और य यहां पर

[193:47]

अपनी प्रिंट की स्टेटमेंट लिख देंगे

[193:49]

परसेंटेज डी n आ तो जैसे यहां पर आ की

[193:55]

वैल्यू पहले रो थी और यहां पर कंडीशन चेक

[193:57]

हो रही थी वैसे ही फॉर लूप में i की

[193:59]

वैल्यू पहले रो है कंडीशन हमने डाली जब तक

[194:01]

i < = n नहीं रहता और अपडेशन के लिए i+ प्

[194:05]

और हर बार हम प्रिंट कर रहे हैं i की

[194:07]

वैल्यू को तो इसको भी एक बार सेव करके रन

[194:09]

करते हैं अबकी बाद नंबर डालते हैं हम

[194:12]

सिक्स तो ये रो से लेकर सिक्स तक सारे के

[194:15]

सारे नंबर्स हमारे पास प्रिंट हो गए अब

[194:17]

मान लीजिए ज़ीरो से नहीं करना वन से लेकर

[194:19]

सिक्स तक प्रिंट करवाने हैं कोई बात नहीं

[194:20]

इस i की वैल्यू को

[194:24]

इनिशियलिज्म लो हमें थ्री से लेकर सिक्स

[194:26]

तक या थ्री से लेकर सेवन तक थ्री से लेकर

[194:28]

n तक प्रिंट करवाने हैं तो इनिश इइ जशन

[194:31]

स्टेटमेंट कर दो थ्री से लेकर n तक करवा

[194:32]

दो तो इस तरीके से जिस भी तरीके का कोड

[194:35]

रहेगा उस तरीके से हम अडॉप्ट और ओवरकम कर

[194:37]

रहे होंगे नेक्स्ट जिसकी हम बात करेंगे वह

[194:39]

है हमारे डू वाइल लूप डू वाइल लूप बिलकुल

[194:42]

वाइल लूप जैसा होता है अब वाइल लूप के

[194:45]

अंदर कंडीशन पहले ही चेक हो जाती है यानी

[194:47]

अगर बात करें वाइल लूप की तो वाइल में

[194:49]

क्या होता था सबसे पहले वाइल लिखा होता था

[194:52]

फिर लिखी होती थी हमारी कंडीशन तो अगर यह

[194:54]

कंडीशन फॉल्स है तो कभी भी इस ब्लॉक के

[194:58]

अंदर हम जा ही नहीं रहे होंगे जैसे इंट आ

[195:02]

इ इक्वल टू हमने लिख दिया वन और कंडीशन

[195:05]

चेक कर रही है i लेव तो आ लेन व तो कभी

[195:08]

ट्रू होगा ही नहीं इसीलिए अंदर वाली

[195:10]

स्टेटमेंट्स कभी हमारी एग्जीक्यूट होंगी

[195:12]

नहीं तो वाइल लूप हमारा एक बार भी नहीं रन

[195:15]

करेगा पर अगर हम ऐसा वाइल लूप लिख दें जो

[195:18]

एटलीस्ट एक बार हमेशा रन करे उसको हम डू

[195:21]

वाइल कह देते हैं तो डू वाइल लूप के भी

[195:24]

अलग-अलग केसेस होते हैं जिनमें उसको यूज

[195:26]

करना ज्यादा सेंस बनाता है सिंटेक्स की

[195:28]

अगर बात करें तो डू वाइल में सबसे पहले हम

[195:30]

लिखते हैं डू यानी यहां पर कंडीशन पहले

[195:32]

चेक नहीं होती काम पहले होता है डू कर दो

[195:35]

पहले काम कर दो पहले तो डू लिख के जो भी

[195:38]

काम होता है वो हम यहां पर लाइने अपनी लिख

[195:40]

सकते हैं फिर लास्ट में कंडीशन चेक होगी

[195:43]

मतलब यह काम करते रहना है जब तक यह काम

[195:47]

करते रहना है जब तक तो पहले काम होगा फिर

[195:51]

कंडीशन चेक होगी फिर काम होगा फिर कंडीशन

[195:53]

चेक होगी एंड में लिखेंगे फिर लिखेंगे

[195:55]

पैरेंस में अपनी कंडीशन और यहां पर हम लगा

[195:58]

रहे होंगे स्टेटमेंट टर्मिनेटर क्योंकि

[196:00]

ब्लॉक नहीं है यहां पर पैरेंस है पैरेंस

[196:02]

के बाद स्टेटमेंट टर्मिनेटर आ सकता है

[196:04]

इसलिए वो यहां पर आ गया है तो ये हमारा

[196:06]

सिंटेक्स होता है अब अगर हमें कोड लिखना

[196:09]

हो वन से लेकर फाइव तक नंबर्स को प्रिंट

[196:11]

करवाने का तो सबसे ऊपर तो अपना वेरिएबल

[196:13]

डिफाइन कर देंगे i = 5 उसके बाद लिखेंगे

[196:16]

डू डू में अपना काम बताना है काम क्या है

[196:19]

प्रिंट करना i की वैल्यू को इस वेरिएबल की

[196:21]

वैल्यू को तो लिख देंगे अपनी प्रिंट

[196:23]

स्टेटमेंट प्रिंट f परसेंटेज d ब n i और

[196:30]

अब बतानी है कंडीशन कंडीशन ये है जब तक

[196:33]

हमारे i की वैल्यू लेन इक्व ू 5 नहीं रहती

[196:36]

तब तक ये काम करना है और यहां पर बीच में

[196:39]

लगा देंगे अपडेशन की कंडीशन यानी i + प्

[196:42]

तो ये हमने लिख दिया i = 1 से लेकर 2 3 4

[196:46]

5 इन पांचों नंबर्स को प्रिंट करवाने का

[196:49]

कोड इसको एक बार रन भी कर लेते हैं सबसे

[196:51]

पहले लिखेंगे डू डू क्या करेगा कुछ काम

[196:54]

करवाएगा अब काम करने के लिए हमारे पास

[196:56]

वेरिएबल ऑलरेडी होना चाहिए तो उसको इनिश

[196:58]

इइ कर लेते हैं वन के साथ काम है हमारा

[197:00]

वेरिएबल को प्रिंट करवाना तो प्रिंट

[197:02]

करवाने के लिए लिख देंगे परसेंटेज d n i

[197:07]

और फिर लिखेंगे अपना वाइल वाइल में फिर

[197:10]

लिखेंगे कंडीशन को कंडीशन क्या है हमारी

[197:12]

जब तक i की वैल्यू लेसन इक्वल ट 5 नहीं

[197:15]

रहती और फिर हमारा स्टेटमेंट टर्मिनेटर तब

[197:18]

तक हम i को प्रिंट करवाते रहेंगे और हर

[197:20]

बार i को कर देंगे प्लस प्लस क्योंकि i +

[197:23]

प्लस नहीं हुआ ना तो ये हमारा फिर से क्या

[197:25]

बन जाएगा इंफाइटिंग

[197:28]

तो i की वैल्यू हमेशा लेस दन फ रहेगी

[197:32]

इसीलिए हर बार कंडीशन ट्रू होगी लूप चलेगा

[197:34]

हर बार कंडीशन ट्रू होगी लूप चलेगा तो एक

[197:36]

इंफाइटिंग

[197:42]

में जाके रन रन करके हमारे पास आउटपुट आया

[197:45]

1 2 3 4 5 यहीं पर फ से लेकर वन तक प्रिंट

[197:48]

करवानी होती वैल्यूज तो क्या करते i को

[197:50]

इनिश इइ करते फव के साथ यहां पर लिखते i

[197:53]

माइ माइनस टर्मिनेशन स्टेटमेंट हो जाती है

[197:56]

i जब तक ग्रेटर दन इक्वल टू 1 है इसको कर

[197:59]

लेते हैं सेव और रन तो अब प्रिंट हुआ

[198:02]

54321 तो इस तरीके से इंक्रीमेंट

[198:04]

डिक्रिमेंट यूज़ कर सकते हैं कहां से लेकर

[198:06]

कहां तक जाना है उसका हम कोड समझ सकते हैं

[198:08]

तो ये था हमारा डू वाइ लूप सवाल हमारा

[198:10]

कहता है प्रिंट द सम ऑफ फर्स्ट n नेचुरल

[198:13]

नंबर्स तो सबसे पहले ये फर्स्ट पार्ट

[198:15]

करेंगे उसके बाद ये सेकंड पार्ट देख रहे

[198:17]

होंगे तो हमें फर्स्ट n नेचुरल नंबर्स का

[198:20]

सम प्रिंट करना है हर बार की तरह यूजर

[198:23]

हमें ये n देगा फिर हम उनका सम प्रिंट

[198:25]

करें मान लीजिए यूजर ने दिया है n = 4 तो

[198:28]

वन से लेकर 4 तक जितने भी नंबर्स होंगे इन

[198:33]

सबका सम हमें प्रिंट करना है यह हो जाएगा

[198:35]

हमारे पास 10 अगर यूजर ने दिया फाइव तो

[198:39]

वही वन से लेकर फव तक सारे नंबर्स का हमें

[198:42]

सम प्रिंट करना पड़ेगा अगर थ्री दिया है

[198:45]

तो वही 1 + 2 + 3 = 6 तो इसको कैसे करेंगे

[198:49]

करने के लिए सबसे पहले तो हमें पता है

[198:51]

सबसे बेसिक चीज कि यूजर से स्कैन एफ करके

[198:54]

इनपुट ले लो हमारा n उसके बाद जैसे ही n

[198:57]

इनपुट आया उसके बाद हमें रन करना है एक

[198:59]

लूप फॉर लूप मान लीजिए हम रन करते हैं

[199:02]

जिसमें आ की वैल्यू जो है शुरू होती है वन

[199:05]

के साथ और जाती है हमारी चार तक या n तक

[199:09]

और उसमें कर देंगे i प्लस प्लस अब काम

[199:12]

हमारा क्या है लूप के अंदर काम लिखना होता

[199:14]

है काम है हमारा सम कैलकुलेट करना तो एक

[199:17]

वेरिएबल बना लेंगे सम और इस सम की वैल्यू

[199:19]

को इनिश इज कर देंगे रो के साथ यानी

[199:22]

शुरुआत में सम हमारा रो है और इस सम के

[199:24]

अंदर ऐड करते जाएंगे i की वैल्यू को तो i

[199:28]

= 1 है तो सम के अंदर वन ऐड हो गया i = 2

[199:31]

है तो सम के अंदर 2 ऐड हो गया i = 3 है तो

[199:34]

सम के अंदर 3 ऐड हो गया तो ऐसे ऐसे करते

[199:37]

करते हमारे पास सम के अंदर सारी की सारी

[199:39]

वैल्यूज का सम आ जाएगा जैसे i की वैल्यू

[199:41]

शुरुआत में वन है सम की वैल्यू शुरुआत में

[199:44]

रो है लूप के अंदर जाते ही क्या हो

[199:47]

जाएगा सम की वैल्यू बन जाएगी सम + आ यानी

[199:52]

वन फिर i की वैल्यू अपडेट होकर हो जाएगी

[199:55]

टू सम की वैल्यू हमारे पास है अब वन लूप

[199:59]

के अंदर क्या होगा सम इ इक्व टू सम + i

[200:02]

यानी 1 + 2 यानी 3 अब i की वैल्यू बन

[200:07]

जाएगी थ्र सम की वैल्यू बन जाएगी थ्र लूप

[200:10]

के अंदर क्या होगा सम = सम + i = 1 + 2 +

[200:15]

3 = 6

[200:17]

तो इस तरीके का कुछ हमारा प्रोसेस रहेगा

[200:19]

एक बार कोड लिख लेते हैं उसके बाद इसको

[200:21]

दोबारा डिस्कस कर लेंगे शुरुआत में क्या

[200:23]

करेंगे यूजर से सबसे पहले एक नंबर मांग

[200:25]

लेते हैं तो एंटर नंबर एक वेरिएबल बना

[200:29]

लेते हैं इंट n n के अंदर इसको करा लेंगे

[200:32]

स्टोर तो स्कैन इफ परसेंटेज d एंड n उसके

[200:35]

बाद एक और वेरिएबल बनाते हैं सम सम की

[200:38]

वैल्यू को इनिश इइ करेंगे ज़ीरो के साथ और

[200:40]

एक बना लेते हैं फॉर लूप फॉर में लिखेंगे

[200:42]

इं i = 0 या i = 1 i जब तक हमारा ले इक्व

[200:47]

n नहीं रहता i + प् और इस लूप के अंदर सम

[200:51]

में ऐड करवा देंगे सम + i या फिर इसको हम

[200:55]

लिख सकते हैं सम + इ i और एंड में क्या

[200:59]

करेंगे प्रिंट करवा देंगे अपने सम की

[201:01]

वैल्यू को तो सम इज परसेंटेज d आ इसको कर

[201:06]

लेते हैं सेव और इसको करते हैं रन यहां पर

[201:09]

हम आ की नहीं सम की वैल्यू को प्रिंट

[201:11]

करवाने वाले हैं एंड में तो एंटर करेंगे

[201:14]

नंबर नंबर एंटर हम करते हैं थ्री तो हमारे

[201:16]

पास सम प्रिंट होकर आ गया सिक्स अगर हम

[201:19]

मान लीजिए फाइव एंटर कर रहे हैं तो इस बार

[201:21]

फाइव एंटर किया सम प्रिंट होकर आ गया 15

[201:23]

तो इस तरीके से प्रोसेस क्या रहा सबसे

[201:26]

पहले n को एंटर करा लिया उसके बाद सम

[201:28]

वेरिएबल क्रिएट किया जिसकी वैल्यू को हमने

[201:30]

इनिश इज किया रो के साथ उसके बाद हमने एक

[201:33]

लूप चलाया वन से लेकर n तक हर बार हम क्या

[201:36]

करते थे उस आ को लूप के आइट मेटर को

[201:38]

प्रिंट करवा देते थे लेकिन इस बार हमने उस

[201:41]

आइट मेटर से कुछ और काम किया यानी अपना सम

[201:43]

कैलकुलेट किया सम को कैसे कैलकुलेट किया

[201:46]

सम = सम + i यानी हर बार सम में उस i को

[201:49]

ऐड करते चले गए तो सारे आई का सम निकल गया

[201:52]

फिर प्रिंट करवा दिया अपनी फाइनल सम की

[201:54]

वैल्यू को तो उसी तरीके से सबसे पहले अगर

[201:58]

i1 था और सम रो था तो सबसे पहले सम = सम +

[202:01]

i से हमारा सम वन बन गया फिर i2 था तो सम

[202:05]

वन बन गया लूप के अंदर जाते ही सम की

[202:07]

वैल्यू थ्री हो गई फिर i इंक्रीज होकर

[202:09]

थ्री हुआ सम की वैल्यू ऑलरेडी थ्री थी अब

[202:12]

सम के अंदर थ्री भी ऐड हो गया तो सम

[202:14]

फाइनली बन गया सिक्स तो ये आंसर होगा फॉर

[202:17]

हमारा n = 3 अब सेकंड पार्ट इस सवाल का ये

[202:22]

कहता है आल्सो प्रिंट देम इन रिवर्स यानी

[202:25]

हमने नंबर्स जो वन से लेकर n तक नंबर्स

[202:28]

जिनका हमने सम लिया है उन नंबर्स को

[202:30]

रिवर्स में भी प्रिंट कर दो रिवर्स में

[202:32]

कैसे प्रिंट करेंगे उसके लिए एक और सेपरेट

[202:34]

लूप बना लेते हैं अगर मान लीजिए सम हमने

[202:37]

प्रिंट करवा दिया अब फॉर इंट i = n i जब

[202:43]

तक हमारा ग्रेटर दन इक्वल टू 1 नहीं रहता

[202:46]

i - माइनस और हर बार हम प्रिंट f कर देंगे

[202:50]

परसेंटेज d n अपना i अब सबसे पहले नोट

[202:55]

करने वाली बात कि हमारा जो i था उसको हमने

[202:58]

यहां भी डिक्लेयर किया हुआ है इंट i = 1

[203:00]

और यहां भी डिक्लेयर किया इंट i = 1 तो

[203:02]

क्या एरर आएगा कंपाइलर तो बोलेगा दो बार

[203:05]

आपने सेम वेरिएबल को डिक्लेयर कर दिया

[203:06]

हमने तो सीखा था ये गलत होता है तो यहां

[203:08]

पर एरर नहीं आएगा क्योंकि फॉर लूप के अंदर

[203:11]

जिस भी वेरिएबल को हम यहां पर डिक्लेयर

[203:13]

करते हैं उसकी वैल्यू जो है वो उस फॉर लूप

[203:17]

तक ही रहती है यानी जैसे ही आपने देखा

[203:19]

होगा कि शुरुआत में सम की जगह मैंने यहां

[203:21]

पे i प्रिंट करवाने की कोशिश की थी पर

[203:23]

मेरे i की वैल्यू सिर्फ इस ब्लॉक के अंदर

[203:25]

है इस ब्लॉक से बाहर मैं अपने आ को यूज

[203:27]

नहीं कर सकती तो इस ब्लॉक के बाहर कंपाइलर

[203:30]

को पता ही नहीं आई क्या है इसीलिए यहां पर

[203:32]

i को यूज नहीं किया जा सकता यहां पर सिर्फ

[203:34]

सम को ही यूज किया जा सकता है इसीलिए i की

[203:37]

जो लाइफ टाइम था वो यहीं पर खत्म हो गया

[203:39]

तो यहां पे कंपाइलर को पता ही नहीं है कि

[203:41]

आ क्या है तो हम एक नया वेरिएबल आ दोबारा

[203:43]

से डिक्लेयर कर सकते हैं जिसको हमने किया

[203:45]

है i की वैल्यू वैल्यू को इनिश इज किया है

[203:47]

n के साथ यानी n ती होगा तो i शुरुआत में

[203:49]

तीन होगा n5 होगा तो शुरुआत में n5 होगा

[203:53]

फिर कंडीशन स्टेटमेंट हमारी ये जब तक i >

[203:56]

= 1 नहीं रहता i माइनस माइनस और उसके बाद

[203:58]

प्रिंट करवा रहे हैं हम i को तो इसको सेव

[204:00]

कर लेते हैं और करते हैं रन तो इस बार अगर

[204:03]

हमने थ्री दिया तो सबसे पहले तो सम इज

[204:05]

सिक्स पर प्रिंट होगा उसके बाद थ्री से

[204:08]

लेकर वन तक उल्टी काउंट में मतलब रिवर्स

[204:10]

ऑर्डर में हमारे सारे नंबर्स हमारे पास

[204:12]

प्रिंट हो कर आएंगे अब ये सारा का सारा

[204:14]

काम जो है ना हमने जो दो फॉर लूप में काम

[204:17]

किया इसको हम एक सिंगल फॉर लूप में भी कर

[204:19]

सकते थे कैसे इसको तो कर देते हैं कॉमन

[204:22]

डाउट और यहां पे क्या करते हैं एक और नया

[204:25]

वेरिएबल बनाते हैं j = n तो इस तरीके से

[204:29]

हम फॉर लूप के अंदर मल्टीपल वेरिएबल को

[204:31]

इनिश इइ कर सकते हैं तो i = 1 एंड j = n

[204:36]

अब यहां पर i इ < इक्व n जब तक नहीं होता

[204:39]

एंड एंड हमारा j इज ग्रेटर दन इक्वल ट 1

[204:44]

जब तक है और हर बार i को प्लस प्लस कर रहे

[204:47]

हैं तो j को माइनस माइनस कर देंगे और हर

[204:50]

बार प्रिंट करवा लेंगे हम अपने j को फर के

[204:53]

अंदर इस फॉर लूप को कंप्लीट अब हटा सकते

[204:56]

हैं अब ध्यान से सुनते हैं इसके अंदर क्या

[204:59]

हुआ ऑलरेडी हमारे पास एक वेरिएबल था i

[205:01]

जिसकी वैल्यू वन से शुरू हो रही थी इस बार

[205:03]

हमने एक नया वेरिएबल डाला और इसको नाम

[205:05]

दिया j j की वैल्यू हमने शुरू करा दी n के

[205:07]

साथ इस आ का काम होगा सम कैलकुलेट करना इस

[205:11]

j का काम होगा नंबर्स को रिवर्स ऑर्डर में

[205:13]

प्रिंट करवाना i की कंडीशन है कि i जब जब

[205:16]

तक लेस दन n ना रहे j की कंडीशन है कि j

[205:19]

जब तक ग्रेटर दन व ना रहे तब तक रिवर्स

[205:21]

ऑर्डर में चीजें प्रिंट होती रहे तो हमें

[205:23]

पता है कि जब तक i हमारा वन से लेकर n तक

[205:26]

जाएगा तब तक j हमारा n से लेकर वन तक आएगा

[205:29]

तो इक्वल टाइम लगने वाला है इसलिए हमने

[205:31]

यहां पर एंड लगा दिया दोनों कंडीशंस के

[205:33]

बीच में यानी दोनों हमारी ट्रू होनी चाहिए

[205:36]

हर बार हम i को प्लस प्लस कर रहे हैं

[205:38]

क्योंकि सम कैलकुलेट कर रहे हैं तो हर बार

[205:40]

हम j को माइनस माइनस भी कर सकते हैं

[205:42]

क्योंकि हम अपने नंबर्स को रिवर्स ऑर्डर

[205:44]

में प्रिंट कर रहे हैं तो अब इसको करते ते

[205:46]

हैं सेव और इसको करते हैं रन रन करके अब

[205:51]

हमारे पास प्रिंट होकर आया 3 2 1 और एंड

[205:55]

में प्रिंट हुआ सम इज सिक्स पहले क्या हो

[205:57]

रहा था सम इज सिक्स पहले प्रिंट हुआ था

[205:59]

नंबर्स बाद में प्रिंट हुए थे अबकी बार

[206:01]

नंबर्स पहले प्रिंट इसलिए हुए क्योंकि सम

[206:04]

जब तक पूरा कैलकुलेट हो रहा है और फिर

[206:05]

प्रिंट हो रहा है सम के प्रिंट होने से

[206:07]

पहले नंबर्स के प्रिंट होने की स्टेटमेंट

[206:09]

है साथ के साथ हम क्या कर सकते हैं इस आय

[206:12]

को कंप्लीट हटा भी सकते हैं आय को अगर हम

[206:14]

कंप्लीट हटा दें तो उससे क्या होगा j जो

[206:18]

है हमारा उसकी वैल्यू n से लेकर 1 तक जा

[206:20]

रही है अब चाहे हम 1 2 3 का सम ले या हम 3

[206:24]

टू 1 का सम ले दोनों का सम अल्टीमेटली छह

[206:27]

हमारे पास आने वाले है तो दोनों के सम की

[206:29]

वैल्यू इक्वल होगी इसीलिए लूप को हम वन से

[206:32]

लेकर n तक जा रहे हैं या n से लेकर व तक

[206:34]

जा रहे हैं वो फर्क नहीं पड़ेगा अगर हम सम

[206:35]

कैलकुलेट कर रहे हैं तो यहां पर हम सम में

[206:38]

कर देंगे सम = सम + j तो यह 1 + 2 + 3

[206:41]

होने के बजाय 3 + 2 + 1 हो जाएगा तो इसको

[206:45]

एक बार सेव कर लेते हैं

[206:47]

और इसको रन करते

[206:48]

हैं तो हमारे पास सेम आउटपुट आएगा दैट इज

[206:52]

3 टू 1 और सम हमारे पास सही कैलकुलेट होगा

[206:54]

दैट इज सिक्स तो इस तरीके से हमारा फॉर

[206:57]

लूप काम करता है और अलग-अलग चीजें हम उसके

[207:00]

अंदर कर सकते हैं अब नेक्स्ट अगर सवाल की

[207:02]

बात करें तो नेक्स्ट सवाल है प्रिंट द

[207:05]

टेबल ऑफ अ नंबर इनपुट बाय द यूजर यूजर

[207:07]

हमें एक नंबर दे रहा होगा उसकी हमें टेबल

[207:09]

प्रिंट करनी है जैसे यूजर ने टू दिया तो

[207:11]

टू की हम टेबल प्रिंट करेंगे कैसे सबसे

[207:13]

पहले प्रिंट करेंगे टू फिर फोर फिर सिक्स

[207:16]

फिर 8 10 12 14 16 18 एंड 20 अगर यूजर ने

[207:24]

हमें दिया 42 तो 42 की हमें टेबल प्रिंट

[207:27]

करनी पड़ेगी जो ओबवियसली मैं जल्दी-जल्दी

[207:29]

नहीं कर पाऊंगी तो अभी तक हमने क्या किया

[207:31]

है एक फॉर लूप हमने लिख लिया जिसके अंदर

[207:33]

अपनी कंडीशन बता दी i = 1 i इ < = n i +

[207:38]

और उसके अंदर हम क्या करते थे अपने आई को

[207:41]

प्रिंट कर लेते थे प्रिंट आई करके पर इस

[207:43]

बार हम प्रिंट नहीं करेंगे आ को इस बार हम

[207:45]

कुछ और फंक्शन परफॉर्म कर रहे होंगे और व

[207:48]

फंक्शन क्या होगा जैसे 2 को हम 2 मल्ला बा

[207:51]

1 भी लिख सकते हैं 4 को लिख सकते हैं 2

[207:53]

मल्ला बा 2 6 को हम लिख सकते हैं 2 म बा 3

[207:56]

क्योंकि ये सारी की सारी क्या है टू की

[207:58]

टेबल है अब एक चीज देखें तो यहां पर ये जो

[208:00]

टू है यह तो कांस्टेंट रह रहा है पर ये जो

[208:04]

हमारा वेरिएबल है ये तो बढ़ता जा रहा है

[208:06]

पहले वन था फिर टू था फिर 3 4 5 अगले में

[208:09]

6 7 8 9 10 तो ये जो वैल्यू है ये बढ़ती

[208:12]

जा रही है तो ओबवियसली ये नंबर हमारा

[208:16]

इटरेटर नहीं होगा यह नंबर हमारा आइट र आ

[208:19]

होगा आइट मेटर वो होता है जिसकी वैल्यू

[208:21]

चेंज होती रहती है अपडेट होती रहती है तो

[208:23]

यह नंबर हमारा आइट मेटर आ होगा तो इस कोड

[208:27]

में क्या करेंगे अपने आइट र आ की वैल्यू

[208:29]

को वन से शुरू करेंगे और उसको 10 तक लेकर

[208:32]

जाएंगे 10 तक लेकर जाएंगे और हर बार

[208:34]

प्रिंट करवा देंगे अपना नंबर मल्टीप्लाइज

[208:37]

आइट मेटर तो पहले नंबर 2 * 1 मल्टीप्लाई

[208:40]

होके प्रिंट होगा फिर 2 * 2 मल्टीप्लाई

[208:42]

होके प्रिंट होगा फिर 2 * 3 मल्टीप्लाई

[208:44]

होके प्रिंट होगा और इस तरीके से अपने

[208:46]

नंबर की हम पूरी की पूरी टेबल प्रिंट करवा

[208:48]

देंगे इसके लिए कोड लिखते हैं सबसे पहले

[208:51]

एंटर करा लेंगे अपना नंबर नंबर हमने एंटर

[208:53]

करा लिया उसके बाद एक लूप लिखते हैं फॉर

[208:57]

इंट i = 1 आ जब तक हमारा लेसन इक्वल टू 10

[209:02]

नहीं रहता i + 10 क्योंकि टेबल को हम वन

[209:05]

से लेकर 10 तक ही मान रहे हैं और हर बार

[209:07]

हम प्रिंट करवा रहे होंगे परसेंटेज d ब n

[209:12]

n * आ नंबर * आ इसको कर लेते सेव और रन

[209:18]

सबसे पहले अगर नंबर हम डालें टू तो टू की

[209:21]

पूरी टेबल हमारे पास प्रिंट होग आ जाएगी

[209:24]

अब जो काम मैं नहीं कर पाई थी वो कंप्यूटर

[209:28]

हमें करके दे देगा यानी टेबल ऑफ 42 ये

[209:30]

मुझे प्रिंट करके देगा तो ये 42 की पूरी

[209:33]

की पूरी टेबल हमारे पास प्रिंट होकर आ गई

[209:35]

है बहुत जल्दी-जल्दी तो इस तरीके से अगर

[209:38]

किसी भी नंबर की टेबल हमें प्रिंट करवानी

[209:40]

है तो उसको सी की हेल्प से हम प्रिंट करवा

[209:42]

सकते हैं अपनी स्क्रीन के ऊपर तो कभी भी

[209:44]

मैथ की कैलकुलेशन हो रही हो और कैलकुलेटर

[209:47]

आसपास ना हो और दिमाग खुद चलाना नहीं हो

[210:16]

बाहर ले जाता था यानी वो जो पूरा ब्लॉक चल

[210:18]

रहा होता था उससे हमें एग्जिट करवा देता

[210:20]

था उसकी वजह से सारे के सारे केसेस जो हैं

[210:23]

उनकी कंडीशन ऑन नहीं हो पाती थी इसीलिए

[210:26]

ब्रेक स्टेटमेंट यानी ब्रेक हमने जहां भी

[210:28]

लिख दिया उसका मेन मतलब है कि हमें एग्जिट

[210:31]

करना है अब लूप को जहां से भी लूप से हमें

[210:33]

बाहर निकलना हो वहां पर हम लिख दें ब्रेक

[210:36]

जैसे फॉर एग्जांपल अगर हमने एक कोड लिखा

[210:38]

है एक फॉर लूप लिखा है जिसके अंदर हम वन

[210:41]

से लेकर फाइव तक नंबर्स को प्रिंट करवा

[210:42]

रहे हैं फॉर इंट i = 1 i लेस इक्टू 5 आ प्

[210:49]

प्लस अब इसमें हम प्रिंट करवा

[210:53]

देंगे परसेंटेज डी ब स् ए

[210:59]

आ अब यहां पर अगर हम बीच में कंडीशन लिखते

[211:03]

इफ आ इ इक्वल टू इ इक्व ट 3 यानी आ जैसे

[211:08]

ही थ्री हो जाए ये इफ कंडीशन का काम है कि

[211:10]

ये चेक कर रहा है जैसे ही i3 हो जाए यहां

[211:12]

से हम कर जाए ब्रेक ब्रेक मतलब इस पूरे के

[211:15]

पूरे लूप से हम बाहर निकल के आ जाएं और

[211:18]

लास्ट में हम प्रिंट करवा दें एंड इसको कर

[211:21]

लेते हैं सेव और एक बार रन करके आउटपुट को

[211:23]

एनालाइज करते हैं हमारे पास प्रिंट हुआ वन

[211:26]

2 और एंड ये कैसे प्रिंट हुआ पहले i की

[211:30]

वैल्यू हमारे पास वन थी जैसे ही i की

[211:33]

वैल्यू वन थी हम लूप के अंदर गए i की

[211:35]

वैल्यू थ्री है क्या नहीं नहीं थ्री नहीं

[211:37]

है तो ये ट्रू नहीं होगा हमने प्रिंट करवा

[211:39]

दिया वन को i हो गया अपडेट i की वैल्यू हो

[211:42]

गई टू i2 हुआ तो ये कंडीशन फिर से फॉल्स

[211:45]

तो यहां पर प्रिंट करवा दिया टू को फिर i

[211:48]

की वैल्यू अपडेट होकर हुई थ्री जैसे ही i

[211:51]

की वैल्यू थ्री हुई ये इफ कंडीशन हो गई

[211:53]

ट्रू फिर हम आए ब्रेक पर ब्रेक पर जैसे ही

[211:56]

आए ब्रेक क्या करता है लूप से एग्जिट

[211:58]

कराता है तो इस फॉर लूप से हम पूरा बाहर

[212:01]

निकल गए और यहां पर आ गए और हमने प्रिंट

[212:02]

करवा दिया एंड यानी ये बाकी की जो कंडीशंस

[212:05]

थी या बाकी की जो अपडेशन थी हमने फिर इस

[212:08]

इस स्टेटमेंट को नहीं देखा कंडीशन को

[212:10]

टर्मिनेशन की ना हमने अपडेशन को देखा हमने

[212:12]

कुछ भी नहीं देखा अंधे होकर हम अपने फॉर

[212:15]

लूप से पूरी तरह बाहर आ जाएंगे और फिर

[212:17]

बाहर जो भी लिखा होगा फिर उसको एग्जीक्यूट

[212:19]

करेंगे तो ब्रेक का काम होता है जब आपको

[212:22]

अपने फॉर लूप को या डू लूप डू वाइ लूप को

[212:25]

या फिर वाइ लूप को जब भी बीच से बिल्कुल

[212:27]

काट देना है उसमें से बाहर निकल के आना है

[212:29]

कंप्लीट तब हम वहां पर ब्रेक लिख देते हैं

[212:32]

तो हम उससे कंप्लीट ब्रेक हो जाएंगे

[212:33]

एग्जिट हो जाएंगे इसके लिए एक सवाल करते

[212:35]

हैं सवाल का नाम है कीप टेकिंग नंबर्स एज

[212:38]

इनपुट फ्रॉम यूजर अंट्स एन ऑड नंबर तो

[212:41]

सवाल में हमें क्या करना है यूजर से

[212:43]

कुछ-कुछ नंबर्स हमें इनपुट लेते रहना है

[212:45]

जैसे यूजर ने एंटर किया 2 4 10 16 18 और

[212:51]

तब तक यूजर से नंबर्स इनपुट लेते रहना जब

[212:53]

तक यूजर एक ऑड नंबर नहीं एंटर करता यानी

[212:56]

अगर उसने सेवन एंटर कर दिया तो यहां पर हम

[212:59]

स्टॉप कर जाएंगे या फिर ब्रेक कर जाएंगे

[213:03]

तो तब तक यूजर से नंबर्स इनपुट लेने हैं

[213:05]

जब तक वो कोई ऑड नंबर एंटर नहीं करना अब

[213:09]

इसके लिए जब भी यूजर से कुछ इनपुट लेना

[213:11]

होता है ना और उसके लिए कंडीशन चलानी होती

[213:13]

है हम हमेशा प्रेफर करते हैं डू वाइल लूप

[213:15]

डू वा लूप क्यों क्योंकि अभी हमारा काम

[213:18]

क्या है यूजर से इनपुट लेना नंबर नंबर एक

[213:21]

बार इनपुट ले लेंगे तभी तो उस परे कुछ

[213:23]

कंडीशन लगा के चेक कर पाएंगे इसीलिए पहले

[213:25]

काम कर लो फिर कंडीशन लगाओ तो इसलिए यहां

[213:27]

पर डू वाइल का हल्का सा हम लॉजिक बिल्ड

[213:29]

करने की कोशिश करते हैं बाकी आप किसी भी

[213:32]

लूप के अंदर अपने इस सेम सवाल को कर सकते

[213:34]

हैं सबसे पहले हम क्या करेंगे एक डू वाइ

[213:36]

लूप बनाएंगे तो डू और बाद में लिख देंगे

[213:40]

वाइल अब इस डू वाइल लूप के अंदर काम हमें

[213:43]

क्या करना है काम करना है एक नंबर को बार

[213:45]

बार बारबार इनपुट लेने का तो ऊपर एक

[213:48]

वेरिएबल डिफाइन कर देते हैं इंट n यह है

[213:50]

हमारा नंबर और हर बार अपने डू लूप के अंदर

[213:53]

डवा लूप के अंदर स्कैनफ से नंबर को हम ले

[213:55]

लेंगे इनपुट परसेंटेज डी कॉमा एंड n तो इस

[214:01]

तरीके से हर बार नंबर इनपुट में आ गया और

[214:03]

जस्ट फॉर फन हम इस नंबर को आउटपुट भी करा

[214:06]

देते हैं परसेंटेज डी कि हमारे पास क्या

[214:09]

नंबर आया बै n n और कंडीशन हमें क्या रखनी

[214:14]

है कंडीशन इस केस में या तो हम ये रख सकते

[214:17]

हैं कि जैसे ही हमारा n क्या हो हमारा n

[214:19]

ऑड हो जाए वैसे ही हम बाहर निकल जाएं पर

[214:22]

इस केस में कंडीशन में हम सिर्फ लिख देते

[214:24]

हैं वन कंडीशन में वन लिखने का मतलब क्या

[214:26]

है कि हम ट्रू लिख रहे हैं हर बार कंडीशन

[214:28]

ट्रू होगी चाहे कुछ भी आया हो नंबर हम

[214:30]

हमेशा ट्रू अपनी कंडीशन के अंदर डाल रहे

[214:33]

हैं अभी तक हमने जो लूप बनाया है ये डू

[214:36]

वाइ लूप एक इंफाइटिंग

[214:39]

जब तक हमारी कंडीशन फॉल्स नहीं हो जाती पर

[214:42]

कंडीशन तो कभी फॉल्स ही नहीं होगी क्योंकि

[214:44]

वहां पर हमने वन डाल दिया

[214:46]

पर इसके अंदर से बचने का एक तरीका है कि

[214:48]

हम ब्रेक कर जाएं और ब्रेक कैसे करेंगे

[214:51]

ब्रेक करेंगे अपनी कंडीशन आने पर यानी

[214:53]

जैसे ही यूजर ने एक ऐसा n एंटर कर दिया जो

[214:56]

एक ऑड नंबर है ऑड नंबर कैसे चेक करेंगे n

[214:59]

परसेंटेज मॉड्यूल 2 = = 0 यहां पर आएगा

[215:03]

नॉट इक्वल टू 0 उस केस में हम कर जाएंगे

[215:06]

ब्रेक थोड़ा सा इसको समझते हैं हमने एक

[215:09]

वेरिएबल डिफाइन किया एंड जिसके अंदर अप

[215:11]

अपना नंबर जो है इनपुट लेने वाले हैं फिर

[215:13]

एक डू वाई लूप बनाया सबसे पहले हम स्कैन

[215:15]

कर रहे हैं अपने नंबर को इससे ऊपर हम एक

[215:18]

और प्रिंट की स्टेटमेंट लिख देते हैं एंटर

[215:22]

नंबर एंटर करके हमने नंबर जो है यूजर से

[215:26]

ले लिया है उसके बाद उस नंबर को वापस

[215:28]

प्रिंट भी करवा दिया कि यूजर ने क्या

[215:30]

प्रिंट किया था उसके बाद हम चेक कर रहे

[215:31]

हैं कि वो नंबर ऑड है या इवन है इस कंडीशन

[215:35]

में हम चेक कर रहे हैं वो नंबर ऑड है क्या

[215:37]

यानी n मॉड्यूल टू अगर जीरो के इक्वल नहीं

[215:40]

आया तो मतलब वो नंबर एक ऑड नंबर है जैसे

[215:43]

ही ऑड नंबर आएगा ब्रेक कर जाएंगे ब्रेक कर

[215:45]

गए यानी लूप के बाहर निकल गए और एंड में

[215:47]

निकल कर हम कुछ भी प्रिंट करवा सकते हैं

[215:50]

मान लीजिए एंड में निकल के प्रिंट करवा

[215:51]

देते हैं हम थैंक यू तो ये डू वाई लूप तब

[215:54]

तक चलेगा जब तक हमारा यूजर जो है इवन

[215:57]

नंबर्स को एंटर करता रहेगा इसको कर लेते

[215:59]

हैं सेव और इसको करते हैं रन एंटर करते

[216:03]

हैं नंबर टू हमने एंटर किया नेक्स्ट टाइम

[216:05]

तो टू हमारे पास प्रिंट होकर आ गया अब

[216:07]

नेक्स्ट टाइम हम फोर एंटर करते हैं तो फोर

[216:10]

हमारे पास प्रिंट होकर आ गया अबके बाद

[216:12]

सिक्स एंटर करते हैं सिक्स प्रिंट होके आ

[216:13]

गया 18 एंटर करते हैं 18 आ गया हम 20 एंटर

[216:17]

करते हैं तो 20 आ गया पर एक ऑड नंबर डालते

[216:19]

हैं थ्री हमने डाल दिया तो यहीं पर प्रिंट

[216:22]

हो गया थैंक यू और यहीं पर हमारा

[216:23]

प्रोग्राम हो गया खत्म तो इस तरीके से हम

[216:26]

एक ऐसा लूप बना सकते हैं जो जो यूजर के

[216:28]

इनपुट से कंट्रोल होगा तो यूजर जो जो हमें

[216:31]

इनपुट देगा उस हिसाब से हम चेंजेज कर रहे

[216:33]

हैं उस हिसाब से हम अपना लूप रन कर रहे

[216:35]

हैं अब नेक्स्ट सवाल जिसकी हम बात करेंगे

[216:38]

वो है कीप टेकिंग नंबर्स एज इनपुट फ्रॉम

[216:41]

यूजर अंट्स अ नंबर व्हिच इज अ मल्टीपल ऑफ़

[216:44]

सेवन यानी यूजर से तब ब तक इनपुट लेते

[216:46]

जाना है जब तक यूजर ऐसा नंबर ना एंटर कर

[216:48]

दे जो मल्टीपल ऑफ़ सेवन है जो सेवन की

[216:50]

टेबल में आता है तो बहुत ही सिंपल है

[216:53]

बिल्कुल एगजैक्टली जैसा हमने अभी कोड लिखा

[216:55]

है बिल्कुल वैसा है बस थोड़ी सी वैल्यूज

[216:57]

चेंज करनी है ये एंटर तो हम नंबर करवाते

[216:59]

रहेंगे बस कंडीशन ब्रेक करने की क्या

[217:01]

रहेगी जैसे ही n मड 7 इक्वल टू इक्वल टू 0

[217:06]

हो जाए इस कंडीशन का मतलब है नंबर n इज अ

[217:10]

मल्टीपल ऑफ 7 वैसे ही हम कर जाएंगे ब्रेक

[217:14]

तो इसको भी रन कर लेते हैं

[217:16]

कंपाइल रन सबसे पहले एंटर कर रहे हैं

[217:20]

सिक्स चल रहा है कोड थ्री एंटर किया थ्री

[217:22]

में भी चल रहा है 12 एंटर किया 12 में भी

[217:24]

चल रहा है पर जैसे ही 14 में एंटर कर दूं

[217:28]

तो थैंक यू प्रिंट हो जाएगा क्यों यहां पर

[217:30]

कोड खत्म क्यों कि क्योंकि 14 हमारा सेन

[217:33]

का मल्टीपल है 7 * बा 2 इज 14 तो यहां पर

[217:36]

ये मॉडलो जो है वो रो के इक्वल आ गया तो

[217:38]

यहां से हम कर गए ब्रेक ब्रेक कर गए मतलब

[217:41]

लूप की और कोई लाइन चले गई नहीं और लूप के

[217:43]

जो बाहर लिखा हुआ है अब वो एग्जीक्यूट

[217:45]

होना शुरू होगा अब एक और स्पेशल चीज ब्रेक

[217:47]

के बारे में ब्रेक जो है हमारा वो नेस्टेड

[217:50]

लूप से भी हमें एग्जिट करा देता है यानी

[217:53]

आपने एक फॉर लूप के अंदर कुछ-कुछ चीजें

[217:55]

लिखी हैं और उसके अंदर आपने लिखा है अपना

[217:58]

दूसरा फॉर लूप इसके अंदर कुछ-कुछ चीजें

[218:01]

लिखी हैं तो अगर ब्रेक यहां पर लिखा हुआ

[218:04]

है तो ये इस लूप से भी बाहर निकाल देगा और

[218:07]

इस लूप से भी बाहर निकाल देगा और यहां

[218:09]

वाली स्टेटमेंट्स हमारी रन होंगी तो ब्रेक

[218:11]

को जब भी इस्तेमाल करना है बहुत सोच समझ

[218:13]

के इस्तेमाल करना है कि आपके

[218:16]

जो प्रोग्राम है उसका फ्लो उसका कंट्रोल

[218:18]

किस तरीके से चेंज होने वाला है नेक्स्ट

[218:20]

हम पढ़ने वाले कंटिन्यू स्टेटमेंट के बारे

[218:22]

में ब्रेक से उल्टा है कंटिन्यू ब्रेक

[218:24]

कहता है यहां पे सारा काम रोक दो और आगे

[218:26]

बढ़ जाओ कंटिन्यू कहता है बस अभी वाला काम

[218:28]

रोकना है आगे वाला काम शुरू कर दो तो जब

[218:31]

भी हमें स्किप करना होता है टू नेक्स्ट आ

[218:33]

इटरेशन जब भी अगली बार में स्किप करना

[218:36]

चाहते हैं तो हम लिख देते हैं कंटिन्यू

[218:38]

यानी अभी की बारी की जो सारी लाइंस है वो

[218:41]

तो हट जाएंगी अगली बारी वाली रन होंगी

[218:43]

इसका एक एग्जांपल लिखते हैं कोड लिखकर

[218:45]

चीजें ज्यादा अच्छे से समझ में आएंगी फॉर

[218:49]

इंट i = 1 i इ ले इक्ट 5 i प् प्लस अब हम

[218:54]

वन से लेकर फाइव तक सारे नंबर्स को प्रिंट

[218:56]

करवाना चाहते हैं पर थ्री जो नंबर है ना

[218:58]

उससे हमें बड़ी नफरत है बड़ा अनलकी लगता

[219:00]

है उसको प्रिंट नहीं करवाना बाकी सारों को

[219:02]

प्रिंट करवाना है तो यहां क्या लिख सकते

[219:04]

हैं अगर सबसे पहले तो प्रिंट स्टेटमेंट

[219:06]

लिख देते हैं अपने सारे नंबर्स की लिख

[219:08]

देते हैं परसेंटेज d ब n और हमारा नंबर n

[219:12]

या हमारा नंबर आ और सबसे ऊपर चेक कर लेते

[219:15]

हैं अगर हमारा जो आ है इज इक्वल टू इक्वल

[219:18]

टू 3 हो जाता है तो ये अनलकी नंबर आ गया

[219:20]

हमारा इसको हम प्रिंट नहीं करवाएंगे तो उस

[219:23]

केस में हम कर देंगे कंटिन्यू अगर यहां पर

[219:25]

ब्रेक लिख देते तो मतलब इस लूप से हम

[219:27]

कंप्लीट बाहर आ जाते तो फोर और फाइव तो

[219:29]

प्रिंट होता ही नहीं मतलब थ्री तो होता ही

[219:31]

नहीं पर फर फ भी नहीं होता पर हमने लिख

[219:33]

दिया कंटिन्यू कंटिन्यू से देखते हैं क्या

[219:35]

आउटपुट आता है कंटिन्यू से आउटपुट आया 1 2

[219:39]

3 हमारा स्किप हो गया और 45 आ गया तो जब

[219:42]

भी हमें किसी चीज को स्किप करवाना होता है

[219:44]

कुछ पर्टिकुलर सेट ऑफ लाइंस को हम स्किप

[219:46]

करवाना चाहते हैं उनको छोड़ना चाहते हैं

[219:48]

और अगली आइट एशन पर जाना चाहते हैं तब

[219:51]

वहां पर हम कंटिन्यू का इस्तेमाल करते हैं

[219:53]

कंटिन्यू कहता है आगे कंटिन्यू करो अभी

[219:55]

वाली चीज को जाने दो अभी वाली चीज को छोड़

[219:57]

दो तो ये बेसिक मतलब है हमारे कंटिन्यू का

[219:59]

अब इसका अगर हम सवाल करें तो प्रिंट ऑल

[220:02]

नंबर्स फ्रॉम वन टू 10 एक्सेप्ट फॉर सिक्स

[220:05]

यानी छह के अलावा सारे वन से लेकर 10 तक

[220:07]

नंबर्स प्रिंट करने हैं इसको कैसे करेंगे

[220:10]

सिंपली यहां पे लिख देंगे बस कंडीशन में

[220:12]

वन से लेकर 10 अपनी स्किप वाली कंडीशन में

[220:15]

लिखेंगे जब i इ 6 हो जाए तो कर दो स्किप

[220:19]

या कंटिन्यू तो हम रन करें तो आउटपुट

[220:21]

हमारे पास आ गया वन से लेकर फ तक नंबर्स आ

[220:23]

गए और सेन से लेकर 10 तक नंबर्स आ गए

[220:26]

सिक्स हमारा स्किप हो गया है उसको हमने

[220:28]

प्रिंट नहीं किया नेक्स्ट सवाल की अगर बात

[220:30]

करें प्रिंट ऑल द ऑड नंबर्स फ्रॉम 5 टू 50

[220:35]

यह हमारा सवाल है पा से लेके 50 के बीच

[220:38]

में जितने भी ऑड नंबर्स आते हैं उन सबको

[220:41]

हमें प्रिंट करना है प्रिंट करने के लिए

[220:44]

कोड लिखते हैं

[220:45]

फॉर इंट आ

[220:48]

=

[220:50]

0 आ इज लेस देन इस बार इनिश जीरो से नहीं

[220:54]

पांच से करेंगे और आ लेन इक्वल टू जब तक

[220:58]

50 रहता है आ को कर देंगे हर बार प्लस

[221:01]

प्लस अब जब भी हमारा आ जो है वो एक ऑड

[221:04]

नंबर है तब हमें उसको प्रिंट करना है इवन

[221:07]

है तो प्रिंट नहीं करना इसको करने के

[221:09]

मल्टीपल तरीके हो सकते हैं आप इस सेम सवाल

[221:12]

को कंटिन्यू की हेल्प से भी कर सकते हैं

[221:14]

सेम सवाल को उल्टे तरीके से भी कर सकते

[221:16]

हैं यानी जिस तरीके से मैं करके दिखाऊंगी

[221:17]

उससे ऑपोजिट कंडीशंस को लेकर तो एक ही

[221:20]

सवाल को करने के मल्टीपल तरीके होते हैं

[221:22]

और जब हम शुरुआती स्टेज में है ना

[221:24]

प्रोग्रामिंग के तो हमें मल्टीपल तरीके

[221:26]

एक्सप्लोर जरूर करने चाहिए एक तरीके से एक

[221:28]

सवाल कर लिया अब कोशिश करनी है उसको दूसरे

[221:30]

तरीके से करके देखूं पहले इज इक्वल टू इज

[221:33]

इक्वल टू चेक किया था अब नॉट इक्वल टू से

[221:34]

करके देखता हूं सवाल को इस तरीके से जब भी

[221:37]

प्रोग्रामिंग करते हैं ना शुरुआत में तो

[221:39]

और ज्यादा हमारी एक तो क्रिएटिविटी और

[221:41]

लॉजिकल पावर बहुत ज्यादा बढ़ती है क्योंकि

[221:43]

हम मल्टीपल केसेस इमेजिन कर रहे होते हैं

[221:45]

सेम सिचुएशन के साथ के साथ जब प्लेसमेंट

[221:47]

के टाइम पर या कॉलेज के टाइम पर आपको कोई

[221:49]

कोडिंग क्वेश्चन दिया होगा ना करने के लिए

[221:51]

तो उसमें क्या-क्या आपके कॉर्नर केसेस आ

[221:53]

सकते हैं कहां-कहां आपका कोड फस सकता है

[221:56]

वो वाली कंडीशन स्टेटमेंट्स आप बहुत अच्छे

[221:58]

से इमेजिन कर पाएंगे तो सवाल के अंदर

[222:00]

बढ़ते हैं सबसे पहले हम चेक करना है कि

[222:02]

क्या हमारा नंबर ऑड है ऑड चेक करने के लिए

[222:04]

क्या करेंगे आ मॉडलो टू अगर नॉट इक्वल टू

[222:08]

0 है तो मतलब हमारा नंबर क्या है ऑड तो

[222:12]

यहां

[222:13]

पर हम लिख देंगे अपनी कंडीशन कंडीशन के

[222:16]

अंदर क्या करना है अगर ऑड है तो उसको

[222:18]

प्रिंट करवा देंगे परसेंटेज d n i नहीं तो

[222:23]

एल्स के अंदर क्या करना है एल्स के अंदर

[222:25]

कुछ भी नहीं करवाना एल्स के अंदर एल्स को

[222:27]

लिखने की जरूरत नहीं है क्योंकि एल्स के

[222:28]

अंदर कुछ करवाना ही नहीं है हमें तो इसको

[222:30]

कर लेते हैं सेव और इसको करते हैं अपने

[222:32]

टर्मिनल से रन आउटपुट हमारे पास क्या आया

[222:35]

5 7 9 11 और आप ध्यान से ऑब्जर्व करेंगे

[222:40]

ये सारे के सारे ऑड नंबर्स हैं जो 5 से

[222:42]

लेकर 50 के बीच में एजिस्ट करते हैं तो इस

[222:45]

तरीके से भी हम कोड लिख सकते हैं नेक्स्ट

[222:47]

सवाल कहता है प्रिंट द फैक्टोरियल ऑफ अ

[222:49]

नंबर n यानी एक नंबर n है उसका फैक्टोरियल

[222:52]

प्रिंट करना है सबसे पहले बात कर लेते हैं

[222:54]

फैक्टोरियल नाम की चीज होती क्या है किसी

[222:56]

भी नंबर का फैक्टोरियल होता है उस नंबर को

[222:59]

वन से लेकर सारे एक एक डिक्रीज करते करते

[223:02]

मल्टीप्लाई कर देना जैसे अगर हम

[223:05]

फैक्टोरियल ऑफ वन निकाले मैथ के अंदर वन

[223:07]

एक्सक्लेमेशन मार्क को वन फैक्टोरियल कहते

[223:09]

हैं तो वो होगा वन 2 फैक्टोरियल निकाले तो

[223:14]

वो होगा 1 ल्ड बा 2 3 फैक्टोरियल निकाले

[223:18]

तो वह होगा 1 * 2 * 3 = 6 यह होगा = 2 4

[223:23]

फैक्टोरियल होगा 1 म 2 * 3 * 4 = 24 5

[223:30]

फैक्टोरियल होगा 1 * 2 * 3 * 4 * 5 = 120

[223:37]

तो इस तरीके से हमारे फैक्टोरियल्स

[223:39]

कैलकुलेट होते हैं अब यहां पर जो

[223:41]

मल्टीप्लिकेशन है वो या तो हम वन से लेकर

[223:43]

फाइव तक मल्टीप्लाई कर सकते हैं या फाइव

[223:45]

से लेकर वन तक मल्टीप्लाई कर सकते हैं

[223:47]

मल्टीप्लाई एक नंबर को दूसरे नंबर से करने

[223:49]

पर सेम आउटपुट आता है मतलब a * b भी सेम

[223:52]

रहता है b * a भी सेम रहता है और प्लस में

[223:55]

भी सेम रहता है माइनस और डिवाइड में सेम

[223:57]

नहीं रहता तो किसी भी नंबर का अगर हमें

[223:59]

फैक्टोरियल निकालना है तो उसके लिए सिंपली

[224:01]

एक लूप लगा दें लूप कहां से शुरू हो हमारे

[224:04]

नंबर से ही शुरू हो जाए इंट i = 1 से शुरू

[224:07]

हो जाए और n तक चले जाए वन से लेकर n तक च

[224:10]

ले जाएंगे या n से लेकर वन तक ले जाएंगे

[224:12]

या वन से लेकर n है तो i प्लस प्लस कर

[224:14]

देंगे हर बार और एक और वेरिएबल ले लेंगे

[224:17]

फैक्टोरियल फैक्टोरियल वेरिएबल को इनिश इइ

[224:20]

करेंगे वन के साथ जब हमने सम किया था वन

[224:22]

से लेकर एंड तक का तो उसको रो से

[224:24]

इनिशियलिज्म

[224:26]

करते हैं वन से क्यों

[224:30]

इनिशियलिज्म कर दिया वो तो रो हो जाएगा

[224:33]

इसीलिए जब भी सम लेना हो तो रो से

[224:35]

इनिशियलिज्म करना हो तो वन से

[224:39]

इनिशियलिज्म

[224:41]

मल्टीप्लाई कर देंगे अपने नंबर आ को हर

[224:44]

बार यह वाला कोड जो है वह सम वाले कोड के

[224:47]

काफी सिमिलर लग रहा होगा सम में हम क्या

[224:49]

करते थे सम + i यहां पर हम क्या कर रहे

[224:51]

हैं फैक्टोरियल = फैक्टोरियल मल्टीप्ला

[224:53]

बाय i और इस तरीके से फाइनल फैक्टोरियल की

[224:56]

जो वैल्यू निकलेगी ना वो हमारा नंबर का

[224:58]

फैक्टोरियल हो जाएगा तो इसको भी हम करके

[225:01]

देख लेते हैं कोड कोड करने के लिए सबसे

[225:03]

पहले तो ऊपर हमें एक नंबर क्रिएट करना है

[225:05]

इंट n फिर प्रिंट कर देंगे एंटर

[225:09]

नंबर उसके बाद स्कैन कर लेंगे अपने नंबर

[225:12]

को परसेंटेज डी m परसेंट n और अब क्या

[225:16]

करेंगे एक लूप रन करेंगे लूप रन करने से

[225:18]

पहले एक और वेरिएबल डिफाइन कर लेते हैं

[225:20]

इंट फैक्टोरियल = 1 अब लूप के अंदर सबसे

[225:24]

पहले इनिश इज करेंगे i को वन के साथ i इ <

[225:27]

इ n i + प् और लूप का काम क्या है

[225:32]

फैक्टोरियल कैलकुलेट करना तो फैक्टोरियल इ

[225:35]

इक्वल टू फैक्टोरियल मल्टीप्ला बा i और

[225:38]

एंड में हमारा जो फाइनल फैक्टोरियल होगा

[225:40]

उसकी वैल्यू प्रिंट कर देंगे फाइनल

[225:43]

फैक्टोरियल इज परसेंटेज d व्हिच इज़ आर

[225:47]

फैक्ट अब एक चीज फैक्टोरियल के बारे में

[225:49]

हमें काफी ध्यान रखनी है वह यह कि

[225:51]

फैक्टोरियल की वैल्यू ना मल्टीप्लाई हो हो

[225:53]

के बढ़ती है जैसे सम में बहुत कम चेंज आता

[225:56]

है अगर आप 10 में पांच ऐड करेंगे तो

[225:59]

वैल्यू बस 15 होगी जो छोटी वैल्यू है पर

[226:01]

आप 10 को मल्टीप्लाई कर देंगे पाच के साथ

[226:04]

तो वैल्यू 50 हो जाएगी इसीलिए अगर

[226:06]

फैक्टोरियल जो है वह काफी तेजी के साथ

[226:09]

मतलब ऑलमोस्ट एक्सपो शियली बढ़ते हैं

[226:11]

इसीलिए जो आपका इंट है इस इंट डे डेटा

[226:15]

टाइप का अगर आप फैक्टोरियल बना रहे हैं तो

[226:16]

उसके अंदर बहुत कम नंबर्स होंगे जिनको

[226:18]

फैक्टोरियल स्टोर कर पाएंगे यानी अगर आप

[226:21]

इसमें कोई बड़ा नंबर दे देंगे जैसे आप

[226:22]

निकालना चाह रहे हैं 50 फैक्टोरियल तो उस

[226:25]

केस में इंट बहुत छोटा पड़ जाएगा उसको

[226:27]

स्टोर कराने के लिए तो आपको बिगर डेटा

[226:29]

टाइप्स यूज करने पड़ेंगे और कुछ-कुछ केसेस

[226:32]

में तो फैक्टोरियल इतना ज्यादा बड़ा हो

[226:34]

जाएगा कि कोई भी नंबर वाला डाटा टाइप उसको

[226:36]

स्टोर ही नहीं कर पाएगा तो उसको करने के

[226:39]

अलग तरीके होते हैं वो आपका कंपीटेटिव

[226:40]

प्रोग्रामिंग या एक्सट्रीम डीएसए वाली

[226:43]

साइड में चला जाता है जब आप स्ट्रिंग में

[226:45]

फैक्टोरियल स्टोर करा रहे होते हैं पर सी

[226:47]

के अंदर तो स्ट्रिंग्स भी नहीं होती तो

[226:48]

आपका कैरेक्टर एरे यूज़ होगा ये सारी

[226:50]

बातें क्या है ये हम डिटेल में आगे वाले

[226:52]

चैप्टर्स में पढ़ रहे होंगे अभी के लिए जो

[226:54]

दूसरी लैंग्वेजेस से आ रहे हैं उनको

[226:56]

ज्यादा अच्छे से समझ में आ रहा होगा बेसिक

[226:57]

इसका ये है कि इस प्रोग्राम को जब रन

[226:59]

करेंगे ना तो बड़े नंबर्स नहीं देने

[227:01]

फैक्टोरियल कैलकुलेट करने के लिए छोटे

[227:03]

नंबर्स का फैक्टोरियल कैलकुलेट करेंगे तो

[227:05]

वो हमारा प्रोग्राम हमें करके दे देगा अब

[227:07]

यहां पर इस कोड को कर लेते हैं सेव और

[227:09]

इसको करते हैं अब रन सबसे पहले कैलकुलेट

[227:12]

करते हैं तीन का फैक्टोरियल फाइनल

[227:13]

फैक्टोरियल इज सिक्स व्हिच इज करेक्ट अब

[227:17]

अगर हम रन करना चाहे 5 का फैक्टोरियल इज

[227:19]

120 यह भी सही है 6 का फैक्टोरियल हम

[227:23]

निकालें तो दैट इज 720 अब मान लीजिए हम

[227:26]

शैतानी दिमाग है और हम 50 एंटर करना चाह

[227:29]

रहे हैं तो हमारे पास रो आएगा क्यों

[227:31]

क्योंकि जो फाइनल फैक्टोरियल था वो नंबर

[227:34]

एक्सीड कर गया है इस डेटा टाइप को इसके

[227:36]

अंदर स्टोर ही नहीं हो पाया इसलिए बड़े

[227:38]

नंबर्स के साथ टेस्ट नहीं करना छोटे

[227:39]

नंबर्स के साथ हम टेस्ट कर सकते हैं

[227:41]

नेक्स्ट सवाल जिसकी बात करेंगे यह है

[227:43]

प्रिंट द रिवर्स ऑफ अ टेबल फॉर अ नंबर n

[227:46]

यानी यूजर हमें यह नंबर n देगा इसकी हमें

[227:49]

टेबल प्रिंट करनी है पर सीधी टेबल प्रिंट

[227:51]

नहीं करनी रिवर्स ऑर्डर में करनी है जैसे

[227:54]

यूजर ने दिया n = 2 तो हम प्रिंट करेंगे

[227:57]

20 फिर 18 16 14 12 10 8 6 4 2 इस तरीके

[228:05]

से उल्टे ऑर्डर में टेबल प्रिंट करनी है

[228:07]

तो कुछ नहीं पहले हम क्या करते थे इसको

[228:09]

लिखते थे 2 * 1 2 * 2 2 * 3 2 * 4 अब की

[228:14]

बार शुरुआत कर देंगे 2 * 10 के साथ फिर 2

[228:16]

* 9 2 * 8 और इस तरीके से तो यह जो है यह

[228:21]

हमारा आइट र बन जाएगा अपने लूप के लिए और

[228:24]

हर बार हम वैल्यू को डिक्रीज कर देंगे

[228:27]

यानी i माइनस माइनस इसके लिए भी कोड लिख

[228:30]

लेते हैं यूज़र से हम नंबर एंटर करा लेंगे

[228:33]

एंड उसके बाद प्रिंट करवाने वाले हैं अपने

[228:35]

नंबर की टेबल को तो फॉर इंट इस बार अपने

[228:39]

आइट मेटर को इनिश इज करेंगे अपने नंबर्स

[228:41]

के साथ या सॉरी आइट मेटर को इनिश करेंगे

[228:44]

10 के साथ

[228:45]

फिर i को जब तक ग्रेटर दन इक्वल टू 1

[228:47]

जाएगा i माइनस माइनस और हर बार हम प्रिंट

[228:50]

करवा रहे होंगे परसेंटेज d ब n नंबर

[228:54]

मल्टीप्ला बाय i इसको कर लेते हैं सेव और

[228:58]

इसको करते हैं रन नंबर हम अपना एंटर

[229:02]

करेंगे टू तो यह टू की टेबल पूरी की पूरी

[229:05]

उल्टी हमारे पास प्रिंट होकर आ गई है

[229:07]

स्टार्टिंग फ्रॉम 20 एंड एंडिंग एट टू तो

[229:10]

इस तरीके से अपने रिवर्स ऑर्डर में भी

[229:11]

टेबल्स को प्रिंट करा सकते हैं लास्ट

[229:13]

क्वेश्चन जिसको हम डिस्कस कर रहे होंगे इस

[229:15]

चैप्टर के अंदर उसका नाम है कैलकुलेट द सम

[229:18]

ऑफ ऑल नंबर्स बिटवीन 5 एंड 50 इंक्लूडिंग

[229:21]

5 एंड 50 यानी 5 और 50 को भी गिनना है

[229:24]

पांच से लेकर 50 तक के सारे नंबर्स का सम

[229:27]

हमें कैलकुलेट करके उसको स्क्रीन पर

[229:29]

प्रिंट करवाना है कैसे प्रिंट करवाएंगे इस

[229:32]

पार्ट को हटा लेते हैं और एक वेरिएबल ले

[229:35]

लेते हैं इंट सम = 0 इनिश इजेशन इस बार

[229:39]

होगा पांच से और खत्म कहां तक होगा आ जब

[229:42]

तक लेसन इक्वल ट 15 ही हो जाता और एंड में

[229:45]

कर देंगे i + + और यहां पर कर देंगे सम =

[229:49]

सम + i या फिर इसका शॉर्ट हैंड लिखते हैं

[229:52]

+ = i और एंड में प्रिंट करवा

[229:57]

देंगे सम

[229:59]

को परसेंटेज d i इसको कर लेते हैं सेव एक

[230:05]

बार कोड को थोड़ा सा एनालाइज करते हैं सम

[230:07]

को हमने इनिश इज किया ज़ीरो के साथ अपने

[230:10]

लूप की शुरुआत हमने की पांच के साथ और

[230:12]

उसको एंड किया जब i की वैल्यू 50 हो जाएगी

[230:14]

धीरे-धीरे एक-एक करके इंक्रीज किया पहले

[230:16]

पांच था फिर छह हुआ फिर सात हुआ फिर आठ

[230:18]

हुआ हर बार अपने सम के अंदर प्लस कर देंगे

[230:21]

अपने आ की वैल्यू को यानी 5 + 6 + 7 + 8

[230:25]

टिल हम 50 तक नहीं पहुंच जाते और एंड में

[230:28]

हम प्रिंट करवा देंगे अपने सम की वैल्यू

[230:30]

को इसको कर लेते हैं सेव और इसको रन करके

[230:33]

देखते हैं कंपाइल रन तो पाच से लेकर 50 तक

[230:38]

का सारे नंबर्स का सम हमारे पास आता है 1

[230:40]

2 6 5 और जिन-जिन स्टूडेंट्स को शक हो रहा

[230:43]

है वो मैनुअली खुद बैठकर कैलकुलेट कर सकते

[230:45]

हैं या फिर ग कर सकते हैं तो वो एक अच्छा

[230:47]

तरीका होगा अपने कोड को वेरीफाई करने का

[230:49]

तो अभी के लिए इतने ही प्रैक्टिस

[230:51]

क्वेश्चंस आई होप कि सफिशिएंट है क्योंकि

[230:54]

मेरे ख्याल से जब मैंने अपना सी पढ़ा था

[230:56]

या मैंने प्लेसमेंट के लिए बैठा था तो

[230:58]

इतने में हमारा यह वाला चैप्टर जो है

[231:01]

सफिशिएंट तरीके से हमें समझ आ गया होगा और

[231:03]

होमवर्क प्रॉब्लम हम खुद से बहुत अच्छे से

[231:05]

कर पाएंगे अगर फिर भी डाउट आ रहा है तो एक

[231:08]

बार फिर से हमें हल्का सा रीकैप मारने की

[231:09]

जरूरत है लेक्चर पर मैंने पूरी कोशिश की

[231:12]

है कि जो जो इंपॉर्टेंट कांसेप्ट हैं इंपो

[231:14]

टेंट चीजें हैं जहां-जहां मोस्टली

[231:16]

स्टूडेंट्स गलती करते हैं वो वाले

[231:18]

प्रॉब्लम्स मैंने डिस्कस करने की कोशिश की

[231:20]

है पूरी एंड साथ के साथ उन कांसेप्ट को भी

[231:22]

बहुत अच्छे से मैंने बताने की कोशिश की है

[231:24]

अब इसके बाद हम हल्का सा पॉज ले सकते हैं

[231:26]

हल्का सा ब्रेक ले सकते हैं थोड़ा सा पानी

[231:28]

पी के आ सकते हैं और अपने होमवर्क

[231:29]

प्रॉब्लम्स को सॉल्व कर सकते हैं और इसके

[231:31]

बाद बढ़ने वाले हैं हम अपने चैप्टर फाइव

[231:33]

की तरफ और अब हम बढ़ रहे हैं अपने चैप्टर

[231:35]

फाइव की तरफ जिसका नाम है फंक्शंस एंड

[231:37]

रिकर्स अब फंक्शंस बहुत ज्यादा इंपॉर्टेंट

[231:40]

टॉपिक है जब भी हम किसी भी लैंग्वेज की

[231:41]

बात करते हैं फंक्शन जो है लूप्स की तरह

[231:44]

या हमारी कंडीशनल स्टेटमेंट्स की तरह

[231:46]

बिल्कुल बेसिक कोर प्रोग्रामिंग के

[231:48]

कांसेप्ट में आता है जो बिल्कुल कोर

[231:50]

प्रोग्रामिंग के कांसेप्ट आपको सिखा रहा

[231:52]

होता है जिनको आप सिर्फ सी के अंदर नहीं

[231:54]

दूसरी लैंग्वेजेस के अंदर भी अप्लाई कर

[231:55]

रहे होंगे साथ के साथ रिकर्स की बात करें

[231:58]

तो सी के अंदर हम रिकर्स का बहुत सिंपल

[232:01]

फॉर्म देख रहे होंगे जिसमें अगर कभी आपसे

[232:03]

कॉलेज वाले सवाल पूछते हैं या प्लेसमेंट

[232:04]

वाले सवाल पूछते हैं सी से रिलेटेड तो

[232:06]

बहुत आपसे बेसिक सवाल पूछेंगे लेकिन रिकजन

[232:09]

की असली ताकत हमें तब देखने को मिलती है

[232:11]

जब हम डेटा स्ट्रक्चर्स और एल्गोरिथम सीख

[232:13]

रहे होंगे फिर चाहे वो c+ प में सीखें फिर

[232:16]

चाहे वो जावा के अंदर सीखें अब जब भी हम

[232:18]

डटा स्ट्रक्चर्स एंड एल्गोरिथम सीखते हैं

[232:20]

ना उसमें थोड़े से कॉम्प्लेक्शन आते हैं

[232:23]

जैसे ट्रीज आ गए ग्राफ्स आ गए और काफी

[232:26]

सारी जो चीजें हैं ना जैसे आप

[232:44]

वो फंक्शन की हेल्प से इंप्लीमेंट की जाती

[232:46]

है तो सबसे पहले बात करते हैं कि फंक्शंस

[232:48]

एक्चुअली होते क्या हैं अगर हम घर पे बैठ

[232:51]

के कभी हमने बचपन में टीवी देखा होगा आजकल

[232:53]

तो सब सोशल मीडिया ए

[233:14]

से चैनल पीछे जाता था म्यूट का बटन होता

[233:17]

था टीवी को म्यूट करने के लिए और पावर बटन

[233:19]

होता था टीवी को बंद या चालू करने के लिए

[233:21]

अब उस टीवी के रिमोट को अगर हम सी के अपने

[233:24]

प्रोग्राम से कंपेयर करें तो उसमें जो

[233:26]

डिफरेंट डिफरेंट बटंस होंगे ना हर एक बटन

[233:28]

एक फंक्शन होगा फंक्शन सी के अंदर ऐसा

[233:32]

पार्ट होता है कोड का जो कुछ काम हमें

[233:34]

करके देता है वो हमसे कुछ इनपुट लेता है

[233:37]

फिर काम करता है फिर कुछ आउटपुट देता है

[233:39]

जैसे अगर रिमोट के बटन की बात करें तो

[233:42]

उसको हमने प्रेस किया उसको दबाया वो हम ने

[233:44]

उसको इनपुट दिया फिर उसने हमारे लिए चैनल

[233:47]

चेंज कर दिया या वॉल्यूम बढ़ा दी यह उसने

[233:49]

काम किया या इसी को हम आउटपुट कह सकते हैं

[233:52]

आउटपुट वो हमें एक्स्ट्रा कुछ नहीं दे रहा

[233:54]

उसी तरीके से हमारे फंक्शंस काम करते हैं

[233:56]

c के अंदर और फंक्शंस बहुत पावरफुल होते

[233:59]

हैं जैसे फंक्शन को आसान भाषा में या आप

[234:03]

जो अपने एग्जाम में लिख कर आएंगे उस भाषा

[234:05]

में बात करें तो फंक्शन इज अ ब्लॉक ऑफ कोड

[234:08]

दैट परफॉर्म्स पर्टिकुलर टास्क यानी

[234:11]

फंक्शन हमारे प्रोग्राम का एक वो ब्लॉक

[234:13]

होता है एक वो पार्ट होता है जो किसी

[234:15]

पर्टिकुलर टास्क को परफॉर्म करता है और

[234:18]

सिंपलीसिटी के लिए एक फंक्शन का काम एक ही

[234:20]

होता है जैसे अगर एक फंक्शन है जिसको

[234:23]

वॉल्यूम बढ़ानी है तो वो बस वॉल्यूम ही

[234:24]

बढ़ाएगा वो वॉल्यूम कम नहीं करेगा या वो

[234:27]

चैनल चेंज नहीं करेगा दूसरा फंक्शन जिसका

[234:29]

काम है टीवी को म्यूट करना वो बस टीवी को

[234:31]

म्यूट ही करेगा वो ना वॉल्यूम बढ़ाएगा ना

[234:33]

वॉल्यूम कम करेगा इस तरीके से हर एक सी के

[234:36]

फंक्शन का एक काम होता है और वो वही काम

[234:39]

करता है वो दूसरे काम हम उससे करवाने की

[234:41]

कोशिश नहीं करते नहीं तो हमारा जो

[234:43]

प्रोग्राम है वो कॉम्लेक्स होता जाता है

[234:45]

अब फंक्शन को डायग्राम की हेल्प से समझे

[234:47]

तो फंक्शन हमारा हमें कुछ काम करके देता

[234:50]

है सबसे पहले वह हमसे कुछ आर्गुमेंट लेता

[234:52]

है आर्गुमेंट यानी कुछ इनपुट लेता है

[234:55]

इनपुट पैरामीटर्स इन पैरामीटर्स के बेसिस

[234:58]

पर वह हमें कुछ काम करके देता है और

[235:00]

आउटपुट में हमें एक रिजल्ट जो है व रिटर्न

[235:04]

करता है अब फंक्शंस का मेजर यूज सी के

[235:06]

अंदर या किसी भी प्रोग्रामिंग लैंग्वेज के

[235:08]

अंदर इसलिए होता है क्योंकि इट कैन बी

[235:10]

यूज्ड मल्टीपल टाइम्स मतलब एक ही फंक्शन

[235:13]

को हम बार-बार बार-बार बार-बार यूज कर

[235:15]

सकते हैं टीवी के रिमोट में कितनी बार भी

[235:17]

हम वॉल्यूम का बटन दबा सकते हैं या चैनल

[235:19]

चेंज करने के लिए बटन दबा सकते हैं या

[235:21]

पावर बटन को न जाने हमने लाखों बार जो है

[235:24]

अगर ज्यादा टीवी देखा होगा तो ऑन ऑफ किया

[235:26]

होगा तो एक फंक्शन ऐसा पार्ट होता है जो

[235:29]

एक काम करता है साथ के साथ उससे वही काम

[235:31]

बहुत बार जितनी बार हम चाहे उतनी बार

[235:33]

करवाया जा सकता है सेकंड प्रॉपर्टी ये

[235:36]

होती है कि इट इंक्रीजस कोड रीयूज बिलिटी

[235:39]

अगर हमारे कोड में हम देखते हैं वैसे ये

[235:41]

रूल ऑफ थंब है जो मैं करती हूं कि कोई भी

[235:44]

चीज अगर कोड के अंदर सेम चीज तीन बार करनी

[235:48]

पड़ रही है तीन बार से ज्यादा करनी पड़

[235:49]

रही है तो उसको फंक्शन बना दो मान लीजिए

[235:52]

हमें हेलो वर्ल्ड प्रिंट करना है अगर तीन

[235:54]

बार हेलो वर्ल्ड प्रिंट करना पड़ रहा है

[235:56]

या उससे ज्यादा प्रिंट करना पड़ रहा है तो

[235:57]

क्या करें उसका फंक्शन बना दें तो जब भी

[236:00]

फंक्शन को कॉल करेंगे ऑटोमेटिक वो चीज हो

[236:02]

रही होगी तो इसीलिए बार-बार बार-बार एक

[236:04]

बड़ा कोड लिखने की जगह हम क्या कर सकते

[236:07]

हैं उसको छोटे से फंक्शन में सिंपलीफाई कर

[236:09]

सकते हैं जिसकी वजह से कोड की रीयूज

[236:10]

बिलिटी बढ़ जाती है अब सी के अंदर फंक्शन

[236:13]

को एक्चुअली लिखते क्या कैसे फंक्शन के

[236:15]

कुछ-कुछ सिंटेक्स होते हैं फंक्शन को

[236:17]

लिखने का जो प्रोसेस रहता है यूजुअली

[236:19]

नॉर्मल केसेस में एक थ्री स्टेप प्रोसेस

[236:20]

होता है जिसमें से सबसे पहला सिंटेक्स

[236:23]

होता है फंक्शन प्रोटोटाइप का फंक्शन

[236:25]

प्रोटोटाइप का क्या मतलब है ये वो लाइन है

[236:28]

जिसकी वजह से हम सी कंपाइलर को बता रहे

[236:31]

हैं कि हम एक फंक्शन लिखने वाले हैं सी

[236:34]

कंपाइलर को पता होना चाहिए कि प्रोग्राम

[236:36]

के अंदर क्या-क्या चीजें लिखी हुई हैं तो

[236:38]

इस लाइन की हेल्प से यानी इस प्रोटोटाइप

[236:41]

की हेल्प से हम बताते हैं कि हम एक फंक्शन

[236:43]

डिक्लेयर करने वा वाले हैं तो इसको फंक्शन

[236:45]

प्रोटोटाइप या फंक्शन डिक्लेरेशन भी कहा

[236:48]

जाता है अब इसको लिखने का सिंटेक्स क्या

[236:50]

रहता है सिंटेक्स यह है कि ये जो प्रिंट

[236:53]

हेलो है ना ये हमारे फंक्शन का नाम है

[236:55]

हमारे फंक्शन का नाम कुछ भी हो सकता है

[236:57]

क्योंकि वो एक वेरिएबल के नाम की तरह है

[236:59]

वो यूजर डिफाइंड है जैसे हमारा फंक्शन

[237:01]

क्या करता है हमारा फंक्शन हेलो प्रिंट

[237:03]

करता है ये हमने अज्यू किया है तो इसीलिए

[237:05]

हमने फंक्शन को नाम दे दिया प्रिंट हेलो

[237:07]

अगर वो दो नंबर्स का एवरेज प्रिंट करता तो

[237:10]

हम उसे एवरेज नाम दे सकते थे या प्रिंट

[237:12]

एवरेज नाम दे सकते थे इस हिसाब से हमारा

[237:14]

फंक्शन जो भी काम करता है हम उस हिसाब से

[237:16]

उसका नाम रख देते हैं तो यहां पे हमने

[237:18]

उसको नाम दिया प्रिंट हेलो और फंक्शन को

[237:20]

लिखने के बाद हमेशा दो पैरेंस लगाने होते

[237:23]

हैं तो हमने यहां पर दो पैरेंस लगा दिए

[237:25]

उसके बाद लगा दिया स्टेटमेंट टर्मिनेटर अब

[237:28]

ये यहां पर हमने वॉइड जो लिखा है इस वॉइड

[237:30]

को लिखने का मतलब है हमारा फंक्शन रिजल्ट

[237:33]

में कुछ रिटर्न नहीं करके देगा मतलब वो

[237:36]

काम कर देगा पर एंड में कोई वैल्यू नहीं

[237:39]

मिलेगी हमें इसीलिए वॉइड वॉइड का इंग्लिश

[237:41]

में मतलब होता है खाली तो यहां पर वॉइड

[237:43]

लिखा है मतलब ये प्रिंट हेलो फंक्शन जो है

[237:46]

हेलो प्रिंट कर देगा पर कुछ रिटर्न नहीं

[237:48]

करेगा वैल्यू अब ये जो लाइन है प्रिंट

[237:51]

हेलो उससे पहले वॉइड और फिर पैरेंस ये

[237:54]

कंपाइलर को बताती है कि हमारा एक फंक्शन

[237:57]

जो है वो एजिस्ट करता है ये डिक्लेरेशन का

[238:00]

सिंटेक्स है दूसरा सिंटेक्स जिसकी बात कर

[238:02]

रहे होंगे वो है फंक्शन की डेफिनेशन एक

[238:05]

बार हमने कंपाइलर को बता दिया कि हमारा

[238:06]

फंक्शन एजिस्ट करता है उसके बाद हमें

[238:09]

फंक्शन लिखना तो पड़ेगा फंक्शन का काम तो

[238:11]

कहीं दिखाएं कि फंक्शन काम कैसे करता है

[238:13]

तो तो उस स्टेटमेंट को हम कहते हैं फंक्शन

[238:15]

डेफिनेशन और उसका सिंटेक्स ये होता है

[238:19]

सबसे पहले हम लिखते हैं रिटर्न टाइप

[238:20]

रिटर्न टाइप यानी वो क्या वैल्यू रिटर्न

[238:22]

करेगा उसका क्या टाइप है तो यहां पर कुछ

[238:24]

रिटर्न नहीं करेगा इसलिए वॉइड लिखा है फिर

[238:26]

लिखेंगे अपने फंक्शन का नाम प्रिंट हेलो

[238:28]

फिर लिखेंगे पैरेंस उसके बाद आएंगे हमारे

[238:31]

कर्ली ब्रेसेज तो ये ब्लॉक है जिसके अंदर

[238:33]

सारा का सारा हमारा कोड जो है एजिस्ट

[238:36]

करेगा फंक्शन का यहां पर क्योंकि हमें

[238:38]

सिर्फ हेलो प्रिंट करना है हम एक सिंगल

[238:40]

लाइन लिख देंगे प्रिंट ए जिसके अंदर लिख

[238:42]

देंगे हम हेलो तो इस तरीके से हमारी

[238:45]

फंक्शन डेफिनेशन भी कवर हो गई अब हम तीसरा

[238:48]

सिंटेक्स जिसकी बात करते हैं वो है फंक्शन

[238:51]

कॉल फंक्शन कॉल क्या करती है हमने कंपाइलर

[238:54]

को बता दिया कि हम फंक्शन बनाना चाहते हैं

[238:56]

फिर हमने फंक्शन बना भी दिया अब इस फंक्शन

[238:58]

को यूज कैसे करें तो फंक्शन को यूज करने

[239:01]

का जो काम होता है उसको हम फंक्शन कॉल

[239:03]

कहते हैं यानी फंक्शन को बुलाना तो उसके

[239:06]

लिए कैसे स्टेटमेंट लिखी जाती है फंक्शन

[239:09]

को या तो हम इंट मेन से मेन फंक्शन से कॉल

[239:12]

लगा सकते हैं या किसी और फंक्शन से कॉल

[239:14]

लगा सकते हैं तो यहां पर हम मेन फंक्शन से

[239:16]

दूसरे फंक्शन को बुला रहे हैं हमारा जो

[239:18]

प्रिंट हेलो फंक्शन है उसका नाम लिख देंगे

[239:20]

पैरेंस लिख देंगे टर्मिनेटर लगा देंगे तो

[239:23]

यह बन जाएगी हमारी कॉलिंग स्टेटमेंट जो

[239:25]

हमने इंट मेन के अंदर लिखी है अब ध्यान से

[239:28]

अगर देखें तो हमारा मेन भी एक फंक्शन है

[239:30]

जिसका रिटर्न टाइप इंट है क्योंकि इंट

[239:32]

वैल्यू रिटर्न करता है इंट वैल्यू यानी ये

[239:34]

ज़ीरो रिटर्न करता है उसके बाद इसका नाम

[239:37]

है मेन पर यह मेन एक कीवर्ड है बाकी ज

[239:40]

सारे जो फंक्शंस के नाम होते हैं जो हम

[239:42]

बनाएंगे व सब कीवर्ड्स नहीं होंगे इसके

[239:44]

बाद इसमें पेंसिस आता है यह हमारा कर्ली

[239:46]

ब्रेसस और इसके अंदर सारा इसका ब्लॉक ऑफ

[239:49]

कोड तो इस तरीके से हम जैसे मेन फंक्शन

[239:52]

होता है वैसे दूसरे फंक्शन बनाने वाले हैं

[239:54]

जो हमारी मर्जी से काम कर रहे होंगे सबसे

[239:56]

पहले एक एग्जांपल के लिए एक फंक्शन लिखकर

[239:59]

देखते हैं तो बॉयलर प्लेट कोड हमारे पास

[240:01]

है जिसमें ऑलरेडी हमारी ऊपर हेडर फाइल है

[240:03]

नीचे इंट मेन है रिटर्न जीरो हम कर रहे

[240:05]

हैं अपना प्रिंट हेलो फंक्शन बनाते हैं

[240:07]

सबसे ऊपर बताएंगे कंपाइलर को कि हमने

[240:10]

फंक्शन बनाया कैसे बताएंगे वॉइड प्रिंट

[240:13]

हेलो उसके बाद एक्चुअली अपने प्रिंट हेलो

[240:16]

को बना रहे होंगे इस प्रिंट हेलो को हम

[240:19]

अपने मेन फंक्शन से नीचे बना रहे हैं अब

[240:21]

इसको ऊपर भी बना रहे हैं पर जब भी ऊपर

[240:23]

बनाते हैं ना तो आपको यह अलग से बताने की

[240:26]

जरूरत नहीं है पर बाय थोड़ा बहुत

[240:29]

ट्रेडिशनल जो सिंटेक्स है ट्रेडिशनल तरीका

[240:32]

लिखने का उसको फॉलो करते हुए हम मेन से

[240:34]

नीचे अपने फंक्शंस को बना रहे होंगे इस

[240:36]

क्लास के अंदर तो लिखेंगे वॉइड प्रिंट

[240:38]

हेलो उसके बाद पेंसिस फिर हमारा कर्ली

[240:42]

ब्रेस अब इस प्रिंट हेलो को इस मेन फंक्शन

[240:44]

से कंपेयर करें तो सबसे पहले इसमें रिटर्न

[240:46]

टाइप है तो इसमें भी रिटर्न टाइप है मतलब

[240:48]

मेन हमारा इंटी जर रिटर्न करता है प्रिंट

[240:50]

हेलो कुछ भी रिटर्न नहीं करता इसका नाम

[240:52]

मेन है इसका नाम प्रिंट हेलो है इसके बाद

[240:54]

हमने दोनों में पेंसिस लगाए हैं और दोनों

[240:56]

में कर्ली ब्रेसे लगाए हैं और प्रिंट हेलो

[240:58]

के अंदर हम अपना काम कर रहे होंगे जो काम

[241:01]

है प्रिंट एफ वर्ल्ड तो इस तरीके से हमारा

[241:05]

जो प्रिंट हेलो फंक्शन है वो हेलो वर्ल्ड

[241:07]

या लेट्स से हमें हेलो प्रिंट करके देता

[241:10]

है इसको कर लेते हैं सेव अब प्रिंट हेलो

[241:13]

लो को कॉल कैसे करें मतलब हेलो प्रिंट

[241:15]

कैसे करवाए उससे तो कॉलिंग हमारी यहां पर

[241:18]

होगी यहां हम लिखेंगे प्रिंट हेलो अपने

[241:21]

फंक्शन का नाम फिर पेंसिस और फिर

[241:24]

टर्मिनेटर तो यह हो गया हमारा

[241:27]

डिक्लेरेशन या फंक्शन

[241:30]

प्रोटोटाइप यह हो गई हमारी फंक्शन कॉल और

[241:35]

यहां पर सबसे मेन चीज हमारा

[241:39]

फंक्शन

[241:41]

डेफिनिशन इसको कर लेते हैं सेव और एक बार

[241:44]

रन करते हैं टर्मिनल से कंपाइल एंड रन तो

[241:48]

हमारे लिए हेलो प्रिंट होकर आ गया है यहां

[241:51]

नेक्स्ट

[241:52]

लाइन अब हम चाहे तो बार-बार प्रिंट एफ

[241:55]

लिखने की जगह बार-बार इस हेलो को प्रिंट

[241:57]

करवा सकते हैं कैसे फंक्शन को कॉल करके तो

[242:00]

हमने एक बार फंक्शन को कॉल किया अब हम

[242:02]

दोबारा फंक्शन को कॉल कर लेते हैं इनफैक्ट

[242:04]

हम तीन बार अपने फंक्शन को कॉल कर लेते

[242:06]

हैं को कर लेते हैं सेव और रन तो हमारे

[242:10]

लिए क्या हुआ तीन बार हेलो प्रिंट हो गया

[242:13]

अब हम चाहे तो कितनी बार भी अपने फंक्शन

[242:15]

से काम करवा सकते हैं अब यहां पर तो हमने

[242:17]

बहुत सिंपल एग्जांपल देखा जो क्या करता है

[242:19]

सिर्फ एक प्रिंट वाली स्टेटमेंट लिखता है

[242:21]

लेकिन इस फंक्शन के अंदर हम 10 20 25

[242:25]

कितनी भी लाइनें लिख सकते हैं और वो

[242:27]

लाइनें हमें बार-बार फिर अपने मेन फंक्शन

[242:29]

के अंदर नहीं लिखनी पड़ेगी वहां पर सिर्फ

[242:31]

अपने फंक्शन का नाम लिखना पड़ेगा तो इस

[242:33]

तरीके से हमारे कोड की रीयूज बिलिटी बढ़

[242:35]

जाती है हमें बहुत सारी लाइने नहीं लिखनी

[242:37]

पड़ती कोड हमारा छोटा हो जाता है और बहुत

[242:40]

सिस्टमिक होता है क्योंकि जो जिस चंक को

[242:42]

जो काम करना चाहिए वो हमारे फंक्शन का नाम

[242:45]

हमें बता देता है तो इस तरीके से

[242:46]

प्रोग्रामिंग जो है वो बहुत सिंपल हो जाती

[242:49]

है इसका फायदा चाहे हमें अभी ना देखने को

[242:51]

मिले पर जब हम कंपनीज के अंदर बड़े-बड़े

[242:53]

कोड्स लिखने जाते हैं तो वहां पर हजारों

[242:56]

लाइनों के कोड होते हैं तो वहां पे

[242:57]

फंक्शंस हमारे बहुत ज्यादा हेल्प करते हैं

[243:00]

अब ये जो फंक्शन है इसके अंदर हम कुछ भी

[243:02]

प्रिंट करवा सकते हैं मान लीजिए हम प्रिंट

[243:04]

करवा रहे हैं इसके

[243:06]

अलावा माय नेम इज शता एंड नेक्स्ट लाइन तो

[243:11]

अब इस फंक्शन के अंदर दो लाइन हमारे पास आ

[243:13]

गई अब हम दोबारा से इसको कॉल लगाएं तो

[243:16]

देखेंगे ये सेम चीज हमारे लिए तीन बार

[243:18]

प्रिंट हो गई है पर फंक्शन कॉल वैसे की

[243:21]

वैसी रही यानी अगर कोई चेंज भी हमें करना

[243:23]

है जैसे वॉल्यूम बटन पहले क्या करता था

[243:26]

वॉल्यूम बटन वन से इंक्रीज करके टू कर

[243:28]

देता था टू से थ्री कर देता था लेकिन हम

[243:30]

चाहते हैं अपने रिमोट में वॉल्यूम बटन जो

[243:32]

है वन से थ्री हो जाए थ्री से फाइव हो जाए

[243:35]

दो-दो स्किप करें तो अब हमें कॉल पे चेंज

[243:38]

करने की जरूरत नहीं है अब हम पूरा

[243:40]

डेफिनेशन में जाके ही चेंज कर देंगे ताकि

[243:42]

यूजर को फर्क ना पड़े उसको बस बटन पहले की

[243:44]

तरह दबाना पड़े तो यह भी फायदा होता है

[243:47]

फंक्शंस को लिखने का अब कुछ सवाल सॉल्व

[243:49]

करते हैं जिसमें हम डिफरेंट डिफरेंट

[243:51]

फंक्शंस को लिख कर देख रहे होंगे उनकी

[243:52]

प्रॉपर्टीज को देख रहे होंगे इसमें सबसे

[243:55]

पहला सवाल है राइट टू फंक्शंस वन टू

[243:58]

प्रिंट हेलो एंड सेकंड टू प्रिंट गुड बाय

[244:01]

सवाल में हमें दो फंक्शंस लिखने हैं सबसे

[244:02]

पहले एक फंक्शन बनाएंगे जो हेलो को प्रिंट

[244:04]

करता हो फिर एक फंक्शन बनाएंगे जो गुड बाय

[244:07]

को प्रिंट करता हो तो इसे कर देते हैं

[244:09]

क्रॉस हमने ऑलरेडी एक फंक्शन प्रिंट हेलो

[244:12]

बना लिया जो हेलो को प्रिंट कर करता है अब

[244:14]

क्या करेंगे एक फंक्शन बनाएंगे जो गुड बाय

[244:16]

को प्रिंट करेगा तो ऊपर सबसे पहले कंपाइलर

[244:19]

को बताना पड़ेगा वॉइड

[244:22]

प्रिंट गुड बाय यह हम एक फंक्शन बनाने

[244:26]

वाले हैं कंपाइलर को हमने बता दिया उसके

[244:28]

बाद उस फंक्शन को एक्चुअली बना लेते हैं

[244:31]

वॉइड प्रिंट गुड बाय और यहां पर अब प्रिंट

[244:37]

स्टेटमेंट लिख देंगे गुड बाय तो हमने एक

[244:40]

फंक्शन बनाया जिसका नाम है प्रिंट हेलो एक

[244:42]

फंक्शन बनाया इसका नाम है प्रिंट गुड बाय

[244:45]

हेलो के अंदर हम हेलो प्रिंट कर रहे हैं

[244:47]

गुड बाय के अंदर हम गुड बाय प्रिंट कर रहे

[244:49]

हैं दोनों फंक्शंस का प्रोटोटाइप हमने ऊपर

[244:51]

बता दिया है उसके बाद हम जैसे हेलो को कॉल

[244:55]

लगा रहे थे वैसे ही हम प्रिंट गुड बाय को

[244:57]

भी कॉल लगा सकते हैं यहां पर लिखेंगे

[244:58]

प्रिंट गुड बाय और इसको कर लेते हैं सेव

[245:01]

एंड रन तो सबसे पहले हमने हेलो को कॉल

[245:04]

किया तो हेलो प्रिंट हुआ फिर हमने गुड बाय

[245:07]

को कॉल किया तो गुड बाय प्रिंट हुआ जिस

[245:10]

फंक्शन को पहले कॉल लगाई जाती है वो पहले

[245:14]

एग्जीक्यूट होता है फिर बाद में कॉल

[245:16]

लगाएंगे जिस फंक्शन को वो बाद में

[245:17]

एग्जीक्यूट होगा यानी हमारा जो

[245:20]

एग्जीक्यूशन का तरीका है वो कैसे रहेगा

[245:23]

सबसे पहले शुरुआत हमेशा मेन फंक्शन से

[245:25]

होगी कोड की मेन फंक्शन में आए हम मेन

[245:28]

फंक्शन ने क्या किया प्रिंट हेलो को कॉल

[245:30]

लगाई तो ये बाकी का सारा कोड जो है ना ये

[245:32]

अभी के लिए रुक जाएगा जैसे जिन लोगों को

[245:34]

चल के जाना होता है ट्रैफिक के आगे से वो

[245:36]

लोग जा सके तो उसी तरीके का सीन है यहां

[245:39]

पे ये फंक्शन कंपलीटली रुक जाएगा और

[245:42]

प्रिंट हेलो को कॉल कर करेगा अब प्रिंट

[245:44]

हेलो का पूरा का पूरा कोड यहां पे रन होगा

[245:46]

प्रिंट हेलो क्या करवाता है हेलो प्रिंट

[245:48]

करवाता है हमने हेलो प्रिंट कर दिया अपनी

[245:50]

स्क्रीन पर उसके बाद वापस से मेन फंक्शन

[245:52]

के अंदर जाएंगे मेन फंक्शन में वहीं से

[245:54]

शुरू करेंगे जहां से हमने लास्ट टाइम खत्म

[245:56]

किया था यानी प्रिंट हेलो को कॉल लगाई थी

[245:58]

तो यहीं से शुरू करेंगे ये कॉल खत्म हो गई

[246:00]

फिर प्रिंट गुड बाय को कॉल लगाएगा फिर हम

[246:03]

प्रिंट गुड बाय में पहुंच जाएंगे फिर हम

[246:05]

गुड बाय प्रिंट कर देंगे तो वो हमारे

[246:07]

कंसोल में आ गया उसके बाद वापस से मेन के

[246:09]

अंदर आ जाएंगे प्रिंट गुड बाय खत्म हो

[246:11]

चुका है अब रिटर्न वाली स्टेटमेंट पे आ

[246:13]

रिटर्न कर देंगे रो रो रिटर्न हो गया यानी

[246:16]

मेन फंक्शन हमारा खत्म हो गया मतलब हमारा

[246:18]

प्रोग्राम खत्म हो गया इस तरीके से अगर

[246:21]

यहां पर हम दोबारा करते प्रिंट हेलो तो अब

[246:25]

क्या प्रिंट होगा अब सबसे पहले तो हेलो

[246:28]

प्रिंट होगा फिर गुड बाय प्रिंट होगा फिर

[246:29]

दोबारा हेलो प्रिंट होगा अब यहां पे क्या

[246:32]

हुआ पहले हेलो किया तो यहां पहुंच गए फिर

[246:35]

गुड बाय किया तो उसके बाद यहां पहुंच गए

[246:37]

उसके बाद दोबारा हेलो किया तो दोबारा

[246:39]

हमारा प्रोग्राम यहां पे पहुंच जाएगा तो

[246:41]

प्रोग्राम एक तरीके से जंप कर रहा है

[246:44]

हमारा कंट्रोल तो प्रोग्राम का कंट्रोल

[246:46]

जंप करवा सकते हैं हम अपने फंक्शंस की

[246:49]

हेल्प से अपने सब प्रोग्राम्स की हेल्प से

[246:51]

अब इसके बाद नेक्स्ट सवाल करते हैं

[246:52]

फंक्शंस का नेक्स्ट सवाल हमारा कहता है

[246:56]

राइट अ फंक्शन दैट प्रिंट्स नमस्ते इफ

[246:59]

यूजर इज इंडियन तो यहां पे हम अपने यूजर

[247:01]

से पूछ लेंगे कि वो इंडियन है या फ्रेंच

[247:04]

है इंडियन के लिए हम क्या कर सकते हैं आई

[247:06]

एंटर करा सकते हैं कैरेक्टर में फ्रेंच के

[247:09]

लिए हम एफ एंटर करा सकते हैं अगर हमारा

[247:11]

यूजर इंडियन है तो उस उस के केस में हम

[247:14]

नमस्ते प्रिंट करेंगे अगर हमारा यूजर

[247:17]

फ्रेंच है उसके केस में बंजू प्रिंट

[247:19]

करेंगे अब फ्रेंच मैंने सीखी नहीं तो आई

[247:22]

एम नॉट शर इसको कैसे प्रोनाउंस करेंगे

[247:24]

लेट्स से बजर इसको हम प्रोनाउंस कर रहे

[247:26]

हैं जिन बच्चों ने फ्रेंच सीखी है यह है

[247:28]

फ्रेंच का नमस्ते तो अब इन दोनों के लिए

[247:31]

हम एक एक फंक्शन बना लेते हैं एक फंक्शन

[247:33]

होगा जो नमस्ते प्रिंट करता है एक फंक्शन

[247:35]

होगा जो प्रिंट करता है दोनों के लिए

[247:37]

एक फंक्शन बना लेते हैं अपने पुराने कोड

[247:40]

को यहां

[247:41]

से हटा लेते हैं तो सबसे पहले डिक्लेयर

[247:44]

करेंगे अपने दोनों फंक्शंस को वॉइड प्रिंट

[247:48]

या इसको सिर्फ

[247:50]

नमस्ते लिखते

[247:52]

हैं और एक है वॉइड बनज अब सबसे पहले इनकी

[247:57]

डेफिनेशंस लिखेंगे वॉइड

[248:00]

नमस्ते यह क्या करता है प्रिंट करता है

[248:04]

नमस्ते उसके बाद दूसरा फंक्शन वॉइड नरूर

[248:08]

और यह प्रिंट करेगा हमारी फ्रेंच

[248:12]

नमस्ते तो ये पहला फंक्शन हो गया हमारे

[248:14]

पास यह हो गया हमारा दूसरा फंक्शन अब मेन

[248:17]

के अंदर क्या करेंगे सबसे पहले यूजर से

[248:20]

उसकी नेशनलिटी पूछ लेते हैं प्रिंट एफ

[248:22]

एंटर एफ फॉर फ्रेंच एंड आई फॉर इंडियन अब

[248:29]

वो जैसे ही कुछ भी एंटर करेगा हम एक

[248:32]

कैरेक्टर बना लेते हैं सीच वो हम स्कैन कर

[248:35]

रहे होंगे स्कैनर से परसेंटेज सी एंड

[248:39]

सी अगर हमारा जो नेशनलिटी है जो कैरेक्टर

[248:43]

है एंटर हुआ है वो आ के इक्वल है तो उस

[248:46]

केस में हम प्रिंट करेंगे नमस्ते एल्स हम

[248:51]

प्रिंट कर रहे होंगे नरूर तो एक बार कोड

[248:54]

को रीकैप कर लेते हैं ऊपर हमने फंक्शन का

[248:57]

प्रोटोटाइप बना दिया सबसे पहले हमने क्या

[248:59]

किया नेशनलिटी पूछी उसको कैरेक्टर सीच में

[249:02]

स्टोर करा लिया उसके बाद कैरेक्टर को

[249:03]

कंपेयर किया आई के साथ अगर मैच हो जाता है

[249:06]

तो फिर नमस्ते फंक्शन को कॉल करो अगर मैच

[249:09]

नहीं होता है और इफ कंडीशन के अंदर हम

[249:11]

जाते हैं तो बन जूर को कॉल करेंगे नीचे

[249:14]

हमने दोनों फंक्शंस की अपनी डेफिनेशन बता

[249:16]

रखी है कि दोनों फंक्शंस का क्या मतलब है

[249:18]

इसको कर लेते हैं सेव एंड रन अब क्या

[249:22]

करेंगे एंटर एफ फॉर फ्रेंच एंड आई फॉर

[249:24]

इंडियन हम इंडियन है तो आई एंटर कर देंगे

[249:27]

तो हमारे लिए नमस्ते प्रिंट हो गया इसी

[249:29]

कोड को दोबारा रन करें और एफ डालें तो इस

[249:31]

बार प्रिंट हुआ है बन रूट तो इस तरीके से

[249:35]

यूजर हमें जो जो कंडीशंस देता है उस हिसाब

[249:37]

से हम अलग-अलग फंक्शंस लिख सकते हैं और

[249:39]

अलग-अलग कोड्स को एग्जीक्यूट कर सकते हैं

[249:41]

नेक्स्ट चीज जिसकी हम बात करेंगे वो है

[249:42]

फंक्शन की कुछ प्रॉपर्टीज फंक्शन में सबसे

[249:45]

पहली प्रॉपर्टी जो है उसका नाम है कि

[249:47]

एग्जीक्यूशन ऑलवेज स्टार्टस फ्रॉम मेन

[249:50]

मतलब जब भी हम सी के प्रोग्राम की बात कर

[249:52]

रहे हैं इनफैक्ट चाहे हम c+ प् या जावा के

[249:55]

भी प्रोग्राम की बात करें हमारा जो कोड का

[249:57]

एग्जीक्यूशन होता है वो हमेशा मेन फंक्शन

[250:00]

से शुरू होता है आप प्रोग्राम में कितनी

[250:02]

भी लाइने लिख दें जैसे हमने प्रोग्राम में

[250:05]

ऊपर अगर कुछ लिखा हुआ है या हम अपने इस

[250:07]

फंक्शन डेफिनेशन को ऊपर भी शिफ्ट कर दें

[250:10]

तो ऐसा नहीं है कि नमस्ते वाला फंक्शन ऊपर

[250:12]

आ जाएगा तो पहले ले नमस्ते वाला फंक्शन

[250:14]

कॉल हो रहा होगा नहीं नहीं कंपाइलर

[250:16]

एग्जीक्यूशन के लिए हमेशा सबसे पहले मेन

[250:19]

फंक्शन के पास जाता है और मेन फंक्शन

[250:20]

बताता है कि अब क्या-क्या होने वाला है

[250:22]

अगर यहां से हम ये दोनों स्टेटमेंट्स हटा

[250:25]

दें मतलब नमस्ते और बंजू को कभी कॉल ही

[250:27]

नहीं करें तो हमारे कंपाइलर कभी कॉल ही

[250:30]

नहीं करेगा यह नमस्ते और यह दूसरा

[250:32]

ग्रीटिंग कभी प्रिंट ही नहीं कराएगा

[250:34]

स्क्रीन पर इसीलिए जब भी प्रोग्राम का

[250:36]

एग्जीक्यूशन शुरू होता है वो मेन फंक्शन

[250:39]

से शुरू होता है सेकंड चीज अ फंक्शन गेट्स

[250:42]

कॉल्ड डायरेक्ट और इनडायरेक्टली फ्रॉम मेन

[250:45]

जब भी सी के अंदर कोई फंक्शन की कॉल होता

[250:47]

है मतलब फंक्शन को बुलाया जाता है उससे

[250:49]

काम करवाने के लिए तो या तो उसको मेन

[250:51]

फंक्शन डायरेक्टली कॉल करता है जैसे हमने

[250:53]

अपने इस केस में किया इस केस में क्या हो

[250:55]

रहा है हमारे फंक्शंस को मेन फंक्शन के

[250:57]

अंदर से ही कॉल जा रही है या फिर दूसरा

[251:00]

फंक्शन किसी और फंक्शन को कॉल लगा रहा है

[251:03]

जैसे हम यहां क्या करें हम कॉल लगा दें

[251:06]

नमस्ते को मतलब नेशनलिटी चाहे कुछ भी हो

[251:09]

हम उसको दोनों ग्रीटिंग में ग्रीट करेंगे

[251:11]

हमने कॉल लगा दिया नमस्ते को और नमस्ते

[251:14]

क्या कर रहा है नमस्ते प्रिंट करवा के कॉल

[251:16]

लगा रहा है बन शू तो इस तरीके से क्या हुआ

[251:19]

मेन फंक्शन ने कॉल लगाई हमारे इस फंक्शन

[251:21]

को और नमस्ते वाले फंक्शन ने कॉल लगाई

[251:24]

हमारे सेकंड फंक्शन को तो ये जो सेकंड

[251:26]

फंक्शन है ये इनडायरेक्टली कॉल तो मेन

[251:29]

फंक्शन से ही हुआ है क्योंकि मेन फंक्शन

[251:30]

ने ही नमस्ते को कॉल लगाई थी तो इस तरीके

[251:33]

से कोई भी फंक्शन अगर c के अंदर कॉल होता

[251:35]

है तो या तो उसको मेन फंक्शन डायरेक्टली

[251:37]

कॉल लगाता है या उसको मेन फंक्शन

[251:39]

इनडायरेक्टली कॉल लगाता है किसी और फंक्शन

[251:41]

के थ्रू अब अगर हम इसके इस को एक बार

[251:43]

एनालाइज करें तो इसको सेव करते हैं और एक

[251:46]

बार इसको कंपाइल करके रन करें अगर तो अब

[251:51]

चाहे मैं कोई भी नेशनलिटी डालूं मेरे लिए

[251:53]

सबसे पहले नमस्ते कॉल हुआ क्योंकि क्या

[251:55]

हुआ मेन फंक्शन ने सबसे पहले नमस्ते को

[251:58]

कॉल लगाई नमस्ते ने क्या किया नमस्ते

[252:00]

प्रिंट कर दिया उसके बाद उसने सेकंड

[252:01]

फंक्शन को कॉल लगाई उसके बाद सेकंड फंक्शन

[252:04]

ने बं जूर प्रिंट कर दिया तो सबसे पहले

[252:05]

हमेशा नमस्ते प्रिंट होगा उसके बाद हमारी

[252:07]

सेकंड ग्रीटिंग प्रिंट होगी तो इस तरीके

[252:10]

से कंट्रोल क्या करता है मेन फंक्शन से

[252:12]

दूसरे में जाता है फिर दूसरे फंक्शन से

[252:13]

तीसरे फंक्शन में जाता है फिर वापस मेन के

[252:15]

अंदर आता है अब नेक्स्ट प्रॉपर्टी जिसकी

[252:17]

बात करेंगे देयर कैन बी मल्टीपल फंक्शंस

[252:19]

इन अ प्रोग्राम जो हम ऑलरेडी देख चुके हैं

[252:22]

हम दो फंक्शन ऑलरेडी बना चुके हैं जितना

[252:24]

आपका मन करे आप अपने रिमोट के अंदर उतने

[252:27]

बटन डाल सकते हैं वैसे ही अपने सी

[252:29]

प्रोग्राम के अंदर जितना मन करे उतने

[252:31]

फंक्शंस आप बना सकते हैं पर ये हो कि

[252:33]

फंक्शंस को आप लॉजिकली बनाएं ज्यादा

[252:36]

फंक्शंस बनाने के लिए एक्स्ट्रा कोड हम ना

[252:38]

लिख रहे हो अब फंक्शंस के ना दो टाइप्स

[252:41]

होते हैं सबसे पहला टाइप होता है हमारी

[252:43]

लाइब्रेरी फंक्शंस और दूसरे होते हैं

[252:45]

हमारे यूजर डिफाइंड फंक्शंस लाइब्रेरी

[252:47]

फंक्शन स्पेशल फंक्शंस होते हैं सी के

[252:49]

अंदर जो इनबिल्ट होते हैं मतलब सी के अंदर

[252:52]

डिफरेंट लाइब्रेरीज होती हैं जिसमें

[252:53]

ऑलरेडी पहले से कुछ फंक्शंस पड़े हुए हैं

[252:56]

उन फंक्शंस के नाम कीवर्ड है हमारे लिए

[252:58]

उनके फंक्शंस के नाम से हम दोबारा अपना

[253:00]

कोई फंक्शन नहीं बना सकते उनके काम भी

[253:03]

पहले से ही फिक्स्ड हैं और दूसरे होते हैं

[253:05]

हमारे यूजर डिफाइंड फंक्शन जिनको हम ही

[253:07]

डिक्लेयर करते हैं प्रोग्रामर और हम ही

[253:10]

डिफाइन करते हैं तो कोडर्स ही डिक्लेयर कर

[253:13]

कर रहे होते हैं कोडर्स ही डिफाइन कर रहे

[253:14]

होते हैं कोडस ही यूज़ कर रहे होते हैं

[253:16]

लाइब्रेरी फंक्शंस की अगर बात करें तो

[253:18]

ऑलरेडी हम लाइब्रेरी फंक्शंस को यूज़ कर

[253:20]

रहे होते हैं अगर हम प्रिंट एफ करते हैं

[253:23]

तो यह प्रिंट एफ एक लाइब्रेरी फंक्शन है

[253:25]

प्रिंट एफ को कॉल कैसे लगाई जा रही है

[253:28]

पहले उसका नाम लिखा जा रहा है उसके बाद

[253:30]

पैरेंस लगाए जा रहे हैं अब अंदर इसके कुछ

[253:33]

पैरामीटर्स पास होते हैं अभी बात करेंगे

[253:35]

पैरामीटर्स क्या होते हैं तो ये प्रिंट एफ

[253:38]

भी एक फंक्शन है ये स्कैन एफ भी एक फंक्शन

[253:40]

है तो प्रिंट एफ और स्कैनफ हमारे लाइ

[253:43]

ब्रेरी या इनबिल्ट फंक्शंस एंड सी के अंदर

[253:45]

और इनकी लाइब्रेरी क्या है हमने ऊपर अपना

[253:48]

प्रीप्रोसेसर डायरेक्टिव एसटीडी आड ए जो

[253:51]

है वो डाल रखा है इसीलिए हम इनको यूज कर

[253:54]

पा रहे हैं ये अगर हम हटा देंगे तो एरर

[253:56]

आने लग जाएगा कोड के अंदर इसीलिए उसको

[253:59]

स्टेटमेंट को लिखना जरूरी है और हमारे जो

[254:01]

फंक्शंस है प्रिंट एफ और स्कैनफ ये हमारे

[254:02]

लाइब्रेरी फंक्शंस है यूजर डिफाइंड फंक्शन

[254:05]

हमने देख ही लिए ये जो हमने नमस्ते बनाया

[254:07]

हुआ है ये जो हमने बं जूर बनाया हुआ है

[254:09]

इससे पहले हमने प्रिंट हेलो या प्रिंट गुड

[254:11]

बाय जो लिखे थे ये सारे हमारे यूजर

[254:13]

डिफाइंड फंक्शन नेक्स्ट बात करते हैं

[254:16]

पासिंग आर्गुमेंट अब फंक्शन जो क्या करते

[254:19]

हैं हमने शुरुआत में जब डेफिनेशन की बात

[254:21]

करी फंक्शन की प्रॉपर्टी क्या थी कि वो

[254:23]

कोई वैल्यू ले सकते हैं और वो कोई वैल्यू

[254:26]

दे सकते हैं तो जिस वैल्यू को फंक्शन लेता

[254:28]

है टेक करता है उसको कहते हैं पैरामीटर और

[254:31]

जिस वैल्यू को फंक्शन वापस देता है उसको

[254:33]

कहते हैं रिटर्न वैल्यू तो फंक्शन हमारा

[254:36]

पैरामीटर लेता है और हमें कोई रिटर्न

[254:39]

वैल्यू वापस देता है जब भी हम आर्गुमेंट

[254:41]

पास करते हैं ना जिन भी वैल्यूज को हम

[254:44]

देते हैं अपने फंक्शन को उनको आर्गुमेंट

[254:46]

कहते हैं तो हमारे फंक्शंस को हम तीन

[254:49]

तरीके से लिख सकते हैं एक तरीका है जैसे

[254:51]

हम पहले से लिखते आ रहे हैं यानी यहां पर

[254:53]

वॉइड लिखा होगा वॉइड यानी हमारा फंक्शन

[254:56]

कुछ रिटर्न नहीं करता खाली रहता है फिर

[254:59]

अपने फंक्शन का नाम फिर यहां पे हमने

[255:01]

पैरेंस लिख दिया अपना स्टेटमेंट टर्मिनेटर

[255:03]

यह नॉर्मल तरीके का फंक्शन है जिसकी हम

[255:05]

ऑलरेडी बात कर चुके हैं दूसरे तरीके से

[255:07]

फंक्शन कैसे लिख सकते हैं सबसे पहले लिखा

[255:10]

होगा वॉइड यानी फंक्शन कोई वैल्यू रिटर्न

[255:12]

नहीं करता

[255:13]

जैसे मान लीजिए हमें एक फंक्शन बनाना है

[255:16]

जिसका नाम है प्रिंट टेबल यह किसी भी नंबर

[255:18]

को लेता है और उसकी टेबल प्रिंट कर देता

[255:19]

है अब इसको कुछ रिटर्न तो नहीं करना सिर्फ

[255:22]

प्रिंट करवाना है तो अपने पैरामीटर्स में

[255:25]

यानी जो वैल्यू यह लेगा उसमें एक नंबर

[255:27]

जरूर होगा जिस नंबर की इसको टेबल प्रिंट

[255:29]

करानी है तो वो नंबर है हमारा इंट n तो ये

[255:33]

इस नंबर n को लेगा और इसकी टेबल प्रिंट

[255:36]

करवा देगा और वापस कुछ भी रिटर्न नहीं

[255:37]

करेगा तीसरा तरीका होता है फंक्शन को

[255:40]

लिखने का कि हमारा एक रिटर्न टाइप हो जैसे

[255:43]

सम के केस में हमने इंट को एक रिटर्न टाइप

[255:45]

लिया और ये फंक्शन क्या कर रहा है दो

[255:46]

पैरामीटर्स ले रहा है सबसे पहले पैरामीटर

[255:49]

a है दूसरा पैरामीटर b है दोनों

[255:51]

पैरामीटर्स को लेगा इनसे एक सम वैल्यू

[255:54]

बनाएगा जो a + b होगी और इसको कर देगा

[255:57]

रिटर्न अब रिटर्न कर रहा है तो इस वैल्यू

[256:00]

का टाइप क्या है इंट इसीलिए हमने अपने

[256:02]

फंक्शन के नाम के सामने इंट लिख दिया एक

[256:05]

फंक्शन बनाते हैं जो दो नंबर्स की वैल्यू

[256:07]

को लेगा यानी दो नंबर्स उसके पैरामीटर्स

[256:09]

होंगे a और b और वो रिटर्न करेगा हमें

[256:11]

दोनों वैल्यूज का सम तो इसके लिए सबसे

[256:15]

पहले अपना पुराना कोड जो है उसे हटा लेते

[256:18]

हैं एंटर फर्स्ट

[256:22]

नंबर इंट ए एंड बी तो सबसे पहले स्कैन कर

[256:27]

लेंगे ए उसके बाद एंटर कराएंगे अपना सेकंड

[256:30]

नंबर सेकंड नंबर में क्या स्टोर कराएंगे

[256:33]

बी में सेकंड नंबर की वैल्यू को हम स्टोर

[256:35]

करा रहे होंगे अब एक फंक्शन बनाते हैं जो

[256:37]

ए और बी दोनों का सम हमें देगा तो ऊपर

[256:40]

सबसे पहले इस बार लिख रहे होंगे इ

[256:43]

सम इंट a इंट b इस बार हमने यहां पर वॉइड

[256:48]

नहीं लिखा इस बार हमने यहां पर इंट लिखा

[256:50]

जैसे मेन के सामने इंट लिखा होता है

[256:52]

क्योंकि वो जरो रिटर्न करता है हमने भी

[256:54]

अपना रिटर्न वैल्यू का जो टाइप है वो यहां

[256:57]

पर लिखना होता है तो उसको हमने लिख दिया

[256:58]

इस बार इंटी जर उसके बाद अपने फंक्शन का

[257:01]

नाम और अंदर लिखे अपने पैरामीटर्स हमारे

[257:03]

पैरामीटर्स क्या होने वाले मतलब क्या-क्या

[257:05]

वैल्यू चाहिए होगी इसको सम कैलकुलेट करने

[257:07]

के लिए सबसे पहले इंटी जर वैल्यू a चाहिए

[257:09]

होगी हम हमारा पहला नंबर उसके बाद इंटी जर

[257:12]

वैल्यू ब चाहिए होगी हमारा दूसरा नंबर अब

[257:14]

क्या करते हैं फंक्शन की डेफिनेशन लिखते

[257:16]

हैं तो दोबारा से इंट सम इंट a इंट

[257:21]

b सम वैल्यू क्या होती है a + b तो हम

[257:26]

रिटर्न क्या कर रहे होंगे रिटर्न हम

[257:28]

कीवर्ड का यूज़ करते हैं कोई भी वैल्यू

[257:30]

वापस रिटर्न करने के लिए ये रिटर्न होके

[257:33]

किसके पास जाती है ये जाती है कॉलिंग

[257:34]

फंक्शन के पास यहां पे हम मेन फंक्शन से

[257:37]

कॉल लगाएंगे लेकिन मान लीजिए किसी दूसरे

[257:39]

फंक्शन से हम इस सम फंक्शन को कॉल लगाते

[257:42]

तो ये जो रिटर्न वैल्यू है ये उस दूसरे

[257:44]

फंक्शन के पास जाती मेन के पास नहीं जाती

[257:46]

तो जहां से भी कॉल लगती है वहीं पे वापस

[257:48]

रिटर्न वैल्यू आती है तो रिटर्न कर देंगे

[257:51]

a + b को तो इस फंक्शन को ध्यान से देखते

[257:54]

हैं सबसे पहले रिटर्न टाइप हमने बताया इंट

[257:57]

तो हमने रिटर्न किया a + b यहां से अगर हम

[258:00]

1 2 12 रिटर्न करते तो भी कोई एरर नहीं

[258:03]

आता क्योंकि अल्टीमेटली इसको एक इंटी जर

[258:05]

रिटर्न करना है ये लॉजिकली गलत होता

[258:07]

क्योंकि a जीरो हो सकता है b रो हो सकता

[258:09]

है तो हर बार 12 कैसे रिटर्न हो रहा है तो

[258:11]

लॉजिकली गलत हो सकता पर कि स का कंपाइलर

[258:14]

इसको गलत नहीं बोलेगा मतलब एरर की रेड

[258:16]

लाइन यहां पर नहीं आएगी क्योंकि

[258:17]

अल्टीमेटली इंटी जर तो रिटर्न हो ही रहा

[258:19]

है पर यहीं पर अगर हम 3.14 यानी पाई की

[258:22]

वैल्यू या कुछ और वैल्यू रिटर्न करें या

[258:25]

मान लीजिए हम कोई कैरेक्टर स रिटर्न करने

[258:27]

चले तो उसके बाद हमारे पास एरर आ रहा होगा

[258:30]

क्योंकि उन वैल्यूज को रिटर्न करना अलाउड

[258:32]

नहीं है अगर 3.14 भी आप रिटर्न करेंगे तो

[258:34]

वो रिटर्न में सिर्फ तीन भेजेगा वो पूरा

[258:37]

3.1 नहीं भेजेगा तो यहां पर हम रिटर्न

[258:39]

करेंगे a + b इसीलिए हमें अपना टर्न टाइप

[258:43]

पहले से पता होना चाहिए और ये इंटी जर्स ए

[258:45]

और इंटी जर b हमें एज पैरामीटर्स अपने

[258:48]

फंक्शन के अंदर मिल रहे होंगे तो यहां से

[258:51]

कॉल लगा लेते हैं सम a एंड b एक यहां पर s

[258:55]

नाम का वेरिएबल बना लेते हैं तो यहां क्या

[258:58]

हो रहा है सम को हमने कॉल लगाई जिसके अंदर

[259:01]

हमने सबसे पहले पास किया a उसके बाद पास

[259:03]

किया b ये a क्या करेगा अपनी वैल्यू भेज

[259:07]

देंगे हम यहां पर जो भी a के अंदर हमारा

[259:09]

यूजर एंटर करेगा उस a को भेज देंगे और वो

[259:11]

यहां पर डेफिनेशन के के अंदर इस a में

[259:13]

कॉपी हो जाएगा तो वैल्यूज कॉपी होती है

[259:16]

यहां से b की वैल्यू जाएगी तो वो b की

[259:18]

वैल्यू इस b के अंदर कॉपी हो जाएगी इसको

[259:21]

हम x और y भी लिख सकते थे तो यहां पर

[259:25]

सिंपलीसिटी के लिए अगर हम इसको x y लिख

[259:27]

दें तो यहां से a की वैल्यू जाएगी वो x

[259:29]

में कॉपी होगी b की वैल्यू जाएगी वो y में

[259:31]

कॉपी होगी फिर दोनों का सम जो है रिटर्न

[259:33]

हो जाएगा जो भी वैल्यू रिटर्न होकर जाएगी

[259:35]

ये हमारा असाइनमेंट ऑपरेटर है उसको हम एक

[259:37]

नए वेरिएबल में स्टोर करा देंगे जिसका नाम

[259:39]

है s और फिर हम प्रिंट करवा देंगे s की

[259:42]

वैल वैल्यू को लिख देंगे सम इज परसेंटेज d

[259:46]

एक बार सेव कर लेते हैं कोड को रन करते

[259:48]

हैं हल्का सा

[259:50]

कॉम्प्लेक्शन तो बिल्कुल टेंशन लेने की

[259:52]

जरूरत नहीं है हम बहुत सारे एग्जांपल और

[259:54]

बहुत सारे एक्सप्लेनेशन और बहुत सारी

[259:56]

प्रॉपर्टी देखेंगे कि फंक्शन का कांसेप्ट

[259:58]

बहुत सिंपल लगेगा और बहुत अच्छे से दिमाग

[260:00]

के अंदर बैठ जाएगा सबसे पहले अपना फर्स्ट

[260:02]

नंबर एंटर करते हैं इसको लॉजिकली समझना है

[260:05]

अभी कोड में जो लिखा है उस पर ध्यान नहीं

[260:06]

देना सिर्फ लॉजिक समझना है यूजर का इस कोड

[260:09]

को ना हम छोटे कैलकुलेटर की तरह देख सकते

[260:12]

हैं कैलकुलेटर में सबसे पहले पहला नंबर

[260:14]

डालते हैं मान लो फ डाल दिया उसके बाद

[260:16]

कैलकुलेटर में दूसरा नंबर डालते हैं दूसरा

[260:19]

नंबर हमने थ्री डाल दिया अब क्या प्रिंट

[260:21]

हुआ हमारे लिए प्रिंट हुआ है सम इज ए यह

[260:25]

प्रिंट हुआ है यहां पर यह हल्का सा

[260:28]

फॉर्मेटिंग हम थोड़ी अच्छी कर लेते

[260:32]

हैं एक बार और रन करते हैं सबसे पहले अपने

[260:36]

फर्स्ट नंबर में मतलब कैलकुलेटर में हमने

[260:38]

फोर डाल दिया उसके बाद अपना सेकंड नंबर

[260:40]

डाला टू तो सम इज सिक्स हम हमारे लिए

[260:42]

प्रिंट होकर आ गया तो हमारे कैलकुलेटर ने

[260:45]

काम कर दिया अब कैलकुलेटर इंटरनली काम

[260:47]

कैसे कर रहा है वो समझते हैं कैलकुलेटर के

[260:50]

अंदर एक फंक्शन है जिसका नाम है सम उसमें

[260:53]

उसने इंटी जर ए और इंटी जर ब को लिया है

[260:55]

तो हमने अपने a और बी लिए और उससे सम को

[260:58]

कॉल लगा दी सम की डेफिनेशन कहती है कि a

[261:00]

की वैल्यू सबसे पहले जो वेरिएबल भेजेंगे

[261:02]

उसकी वैल्यू x में कॉपी होगी फिर y में

[261:04]

कॉपी होगी रिटर्न कर देगा x + y वो रिटर्न

[261:07]

करके s में हमने स्टोर करा लिया और फिर उस

[261:09]

s की वैल्यू को यानी सम की वैल्यू को हमने

[261:11]

प्रिंट करवाया

[261:13]

तो यह हमारा पूरा फंक्शन जो है वह काम

[261:15]

करता है पैरामीटर्स और रिटर्न वैल्यू के

[261:18]

साथ अब जैसे हमने सम को प्रिंट करने का

[261:20]

कोड लिख लिया इसके अलावा एक और कोड लिखते

[261:22]

हैं जो क्या करेगा एक फंक्शन बनाते हैं जो

[261:25]

हमें अपने नंबर n की टेबल प्रिंट करके

[261:28]

देगा तो इस कोड के अंदर थोड़े से चेंजेज

[261:31]

कर लेते हैं हम एंटर करवा रहे होंगे एक

[261:34]

नंबर हमने n को एंटर कराया उसको स्कैन

[261:37]

किया और उसको अपने वेरिएबल n के अंदर

[261:39]

स्टोर कर लिया अब एक और फंक्शन बनाते हैं

[261:42]

जिस फ का नाम है वॉइड प्रिंट टेबल और इस

[261:45]

फंक्शन के अंदर हम एक वेरिएबल भेजेंगे इंट

[261:47]

n अब जरूरी नहीं है हम यहां पर इसको n ही

[261:50]

नाम दें इसको हम x वाजी नंबर कुछ भी नाम

[261:54]

दे सकते हैं यानी मेन फंक्शन के अंदर आप

[261:56]

उस वैल्यू को कौन से वेरिएबल में स्टोर

[261:58]

करते हैं और दूसरे फंक्शन के अंदर उसी सेम

[262:01]

वैल्यू को किस तरीके का नाम देना चाहते

[262:03]

हैं वो सेम भी हो सकते हैं अलग-अलग भी हो

[262:05]

सकते हैं सेम रखेंगे तो आसान रहेगा टली

[262:08]

करना कि कौन सी वैल्यू कहां पर जा रही है

[262:10]

तो सेम नाम होंगे तो हमें पता होगा सम

[262:12]

निकलना है तो a और b का ही निकलना है x और

[262:15]

y का नहीं निकलना इस तरीके से लेकिन हम

[262:18]

अलग-अलग भी रख सकते हैं अब जब भी हम किसी

[262:20]

वेरिएबल को डिक्लेयर करते हैं ना फंक्शन

[262:21]

के अंदर तो उस वेरिएबल के नाम का स्कोप उस

[262:24]

फंक्शन तक ही होता है यानी मेन फंक्शन में

[262:26]

अगर वेरिएबल n बनाया तो इस n को जो फंक्शन

[262:29]

पहचान पाएगा वो बस मेन ही होगा अब अगर सम

[262:32]

के अंदर मैं दूसरा नंबर n बनाऊं तो फिर वो

[262:35]

एक अलग वेरिएबल n होगा तो इस तरीके से

[262:37]

मेमोरी के अंदर दो वेरिएबल बन रहे होंगे n

[262:40]

नाम से एक हमारे मेन फंक्शन का होगा एक

[262:42]

हमारे दूसरे फंक्शन का होगा तो हम सेम नाम

[262:45]

भी दे सकते हैं अलग नाम भी दे सकते हैं

[262:47]

बाय कन्वेंशन हम सेम नाम देंगे प्रिंट

[262:49]

टेबल है जिसके अंदर एक सिंगल पैरामीटर आता

[262:51]

है जिसका नाम है इंट n अब डिफाइन करते हैं

[262:54]

अपने प्रिंट टेबल फंक्शन को रिटर्न टाइप

[262:57]

है वॉइड इसके बाद लिखेंगे प्रिंट टेबल

[263:00]

अपने फंक्शन का नाम और इंट n किसी भी नंबर

[263:03]

की टेबल कैसे प्रिंट करते थे एक लूप लगाकर

[263:05]

तो इस फंक्शन के अंदर सबसे पहले एक लूप

[263:07]

बना लेते हैं i की वैल्यू जो है वो शुरुआत

[263:10]

कर रही होगी वन के साथ

[263:13]

और i की वैल्यू जाएगी हमारी 10 तक और हर

[263:15]

बार करेंगे i प् प्स हर बार हम प्रिंट

[263:18]

करवा रहे होंगे i इन n तो यह हमारा प्रिंट

[263:22]

टेबल फंक्शन है जिसके अंदर हमने टेबल को

[263:24]

प्रिंट करने का पूरा अपना लूप लिख दिया तो

[263:26]

फंक्शन के अंदर लूप हम लिख रहे हैं अब इस

[263:29]

फंक्शन को क्या करेंगे मेन फंक्शन से कॉल

[263:30]

लगा लेंगे प्रिंट टेबल और इसमें पास कर

[263:34]

देंगे अपना वेरिएबल n जब भी हम कॉल करते

[263:36]

हैं ना किसी भी फंक्शन को और अपना वेरिएबल

[263:38]

जो है उसमें पास कर रहे हैं तो यहां पर

[263:41]

जिस वेरिएबल को हम पास कर रहे हैं उसको हम

[263:43]

आर्गुमेंट कहते हैं और यहां पर जो वेरिएबल

[263:46]

आता है इसको पैरामीटर कहते हैं यानी

[263:48]

कॉलिंग स्टेटमेंट में जिस वेरिएबल को

[263:50]

लिखते हैं इसको कहा जाता है आर्गुमेंट या

[263:53]

इसको एक्चुअल पैरामीटर भी कहा जाता है

[263:55]

आर्गुमेंट या फिर एक्चुअल पैरामीटर

[263:58]

एक्चुअल पैरामीटर क्यों क्योंकि ये वो n

[264:01]

है जिसके अंदर एक्चुअल वैल्यू होगी ये तो

[264:03]

वो n है ना जो बताएगा कौन से नंबर की टेबल

[264:05]

प्रिंट करनी है ये तो फंक्शन है इसके अंदर

[264:08]

जो n है ये तो खाली है इसके पास तो अभी

[264:10]

वैल्यू ही नहीं है वैल्यू कहां से आएगी

[264:12]

कॉलिंग फंक्शन से आएगी कॉलिंग स्टेटमेंट

[264:14]

से आएगी कॉलिंग स्टेटमेंट यहां पर है ये

[264:17]

वाली स्टेटमेंट बता रही होगी कि किस नंबर

[264:19]

की टेबल प्रिंट करनी है और यहां पर जो

[264:22]

वेरिएबल लिखा होता है इसको हम कहते हैं

[264:24]

पैरामीटर या फिर इसको फॉर्मल पैरामीटर भी

[264:28]

कहते हैं फॉर्मल यानी बताने बताने के लिए

[264:31]

है एक्चुअल जो वैल्यू होगी वो तो कॉलिंग

[264:33]

वाले से आएगी वो तो आर्गुमेंट देगा यहां

[264:35]

पे सिर्फ फॉर्मली हमने बता दिया है कि एक

[264:37]

इंटी जर वैल्यू होगी n यहां पे हमें बताने

[264:40]

की जरूरत नहीं है कि इंटी जर होगा क्या

[264:42]

यहां से हम डायरेक्टली बिना डटा टाइप बताए

[264:44]

कॉल लगा सकते हैं यह काफी इंपॉर्टेंट

[264:46]

कीवर्ड्स है जिनका हमें ध्यान देने की

[264:48]

जरूरत है कि इसे हम आर्गुमेंट कहते हैं

[264:50]

इसे हम पैरामीटर कहते हैं अब इस कोड को कर

[264:52]

लेते हैं सेव और इसको एक बार नई टर्मिनल

[264:55]

विंडो खोल के करते हैं रन तो प्रिंट एफ

[264:59]

में हम टाइप बता देते हैं परसेंटेज डी सेव

[265:03]

एंड रन अपना नंबर एंटर करें तो हमें फाइव

[265:07]

की टेबल प्रिंट करवानी है तो हमारे लिए

[265:09]

प्रिंट हो गया 5 10 15 इसे नेक्स्ट

[265:12]

नेक्स्ट लाइन में प्रिंट करवाना चाहिए था

[265:15]

दोबारा एक बार कंपाइल कर लेते हैं दोबारा

[265:17]

प्रिंट करवा लेते हैं फाइव की टेबल तो इस

[265:19]

बार फाइव की टेबल प्रिंट हो गई है 5 10 15

[265:23]

20 25 30 35 इस तरीके से अब एक बार कोड पे

[265:27]

नजर डाल लेते हैं क्या हमने किया थोड़ा सा

[265:29]

रीकैप हमने अपना फंक्शन बनाया जिसको

[265:32]

डिक्लेयर किया प्रिंट टेबल नाम से यूजर से

[265:34]

नंबर एंड ले लिया उसके बाद कॉल लगा ली

[265:37]

अपने प्रिंट टेबल नंबर n को ये जो वैल्यू

[265:39]

हमने पास की इसको कहते हैं आर्गुमेंट या

[265:41]

फिर हमारा पैरामीटर उसके बाद प्रिंट टेबल

[265:44]

ने क्या किया नंबर n लिया इस नंबर n को हम

[265:47]

कहेंगे पैरामीटर या हमारा फॉर्मल पैरामीटर

[265:49]

फिर उसने उस नंबर के हिसाब से अपनी टेबल

[265:51]

जो है वो प्रिंट करवा दी इस तरीके से

[265:54]

हमारा फंक्शन क्या करता है कोई वैल्यू

[265:56]

लेता है और वैल्यू रिटर्न कर देता है इस

[265:58]

केस में कुछ नहीं रिटर्न किया इस केस में

[266:00]

रिटर्न करी थी एक इंटी जर वैल्यू अब कुछ

[266:03]

कुछ डिफरेंसेस हम सीख लेते हैं डिफरेंसेस

[266:05]

सीखेंगे आर्गुमेंट और पैरामीटर के बीच में

[266:08]

ये काफी इंपॉर्टेंट सवाल है बहुत सारे

[266:10]

इंटरव्यूअर्स क्या कहेंगे आपसे पूछ लेंगे

[266:12]

आर्गुमेंट और पैरामीटर के बीच में क्या

[266:14]

डिफरेंसेस होते हैं या ये ऐसा क्लासिकल

[266:16]

सवाल है मैंने जब सी पढ़ी थी अपने फर्स्ट

[266:18]

सेमेस्टर के अंदर तो मेरे मिड सेमेस्टर और

[266:20]

एंड सेमेस्टर दोनों में ये सवाल बार-बार

[266:22]

आया था कि दोनों के बीच में डिफरेंसेस

[266:24]

लिखो मुझे अभी भी याद है तीन नंबर का वो

[266:27]

सवाल था और उसमें हर पॉइंट के एक-एक नंबर

[266:29]

थे तो आप अलग-अलग पॉइंट्स भी लिख सकते हैं

[266:31]

इसके अलावा और भी कुछ-कुछ पॉइंट्स होते

[266:33]

हैं पर मेजर जो पॉइंट्स होते हैं वो

[266:35]

डिफरेंसेस इसमें कवर हो रहे हैं आर्गुमेंट

[266:38]

क्या होते हैं वो वैल्यूज दैट आर पास्ड इन

[266:40]

फंक्शन कॉल फंक्शन कॉल के अंदर जो जो

[266:42]

वैल्यू हमने पास करी उसको आर्गुमेंट कहते

[266:44]

हैं पैरामीटर्स क्या होते हैं वैल्यूज इन

[266:46]

फंक्शन डिक्लेरेशन एंड डेफिनेशन

[266:49]

डिक्लेरेशन में जो वैल्यू लिखी होती है और

[266:51]

डेफिनेशन में उसको हम पैरामीटर कहते हैं

[266:52]

जैसे अपने कोड के अंदर यहां पर हमने इंट ए

[266:55]

भी लिखा है या इंट n लिखा है ये भी हमारा

[266:58]

पैरामीटर है और ये भी पैरामीटर है और जहां

[267:00]

कॉल कर दिया जहां डेटा टाइप नहीं लिखा हुआ

[267:03]

वो हमारा आर्गुमेंट है अब आर्गुमेंट का

[267:05]

काम होता है टू सेंड वैल्यू पैरामीटर का

[267:08]

काम होता है टू रिसीव वैल्यू आर्गुमेंट को

[267:10]

हम एक्चुअल पैरामीटर भी कहते हैं और

[267:12]

पैरामीटर को हम फॉर्मल पैरामीटर्स भी कहते

[267:15]

हैं ये कुछ-कुछ डिफरेंसेस हैं जो आप थोड़ा

[267:17]

सा हल्का सा याद कर सकते हैं याद करना भी

[267:20]

बहुत जरूरी है क्योंकि जब भी लैंग्वेज हम

[267:22]

कुछ-कुछ चीजें तो हमें याद तो करनी पड़ेगी

[267:24]

क्योंकि जब भी नया कोड आपके सामने आएगा

[267:26]

सिंटेक्स जो बेसिक प्रोग्रामिंग के

[267:28]

कांसेप्ट होते हैं वो हमें याद करने पड़ते

[267:30]

हैं आगे जाकर जब बड़ी प्रॉब्लम्स होते हैं

[267:32]

ना उनको हम लॉजिक से सॉल्व कर सकते हैं

[267:34]

जैसे ए बी सीडी में ए बी सीडी याद करने

[267:37]

पड़ते हैं कि कैसे लिखते थे प्रैक्टिस भी

[267:38]

करते थे बार-बार बार-बार लिखने की वैसे ही

[267:41]

अभी हम अपने c का ए बी सीडी सीख रहे हैं

[267:44]

इस ए बी सीडी को याद भी करना है अब कुछ

[267:47]

नोट्स होते हैं फंक्शंस को लेके सबसे पहला

[267:49]

फंक्शन कैन ओनली रिटर्न वन वैल्यू एट अ

[267:52]

टाइम जैसे फंक्शन में पैरामीटर्स तो आप

[267:54]

चाहे 100 लिख दीजिए यहां पर सम के अंदर

[267:57]

हमने x भी ले लिया y भी ले लिया अगर कुछ

[268:00]

और तीन नंबर्स का एवरेज निकालना होता तो

[268:02]

उसमें a बी c तीन नंबर ले सकते थे कितने

[268:04]

भी पैरामीटर्स ले सकते हैं पर रिटर्न

[268:06]

हमेशा एक वैल्यू होती है फंक्शन हमेशा एक

[268:09]

ही वैल्यू रिटर्न कर सकता है दो वैल्यू

[268:10]

रिटर्न नहीं कर सकता सेकंड है चेंजेज टू

[268:13]

पैरामीटर इन फंक्शंस डोंट रिफ्लेक्ट द

[268:15]

वैल्यूज इन कॉलिंग फंक्शन इसको सबसे पहले

[268:18]

एग्जांपल से देखते हैं क्योंकि ये

[268:19]

स्टेटमेंट हम देखेंगे तो

[268:23]

कॉम्प्लेक्शन देखेंगे हम क्या करते हैं

[268:25]

सबसे पहले एक फंक्शन बनाते हैं इसको नाम

[268:27]

देंगे प्रिंट प्राइस ये फंक्शन क्या करता

[268:30]

है ये इसको सिर्फ कैलकुलेट प्राइस भी नाम

[268:32]

दे सकते हैं किसी भी आइटम का प्राइस ये ले

[268:35]

लेगा उसमें 18 पर जीएसटी ऐड करेगा और फिर

[268:39]

उस वैल्यू को प्रिंट करवा देगा तो इस

[268:41]

फंक्शन का रिटर्न टाइप वॉइड रख देते हैं

[268:43]

नाम हम इसको देते हैं कैलकुलेट प्राइस और

[268:47]

इसके अंदर कोई वैल्यू आ रही होगी इंट

[268:49]

वैल्यू अब इस फंक्शन की डेफिनेशन लिखते

[268:51]

हैं वॉइड कैलकुलेट प्राइस इसके अंदर आएगी

[268:54]

कोई वैल्यू इंट वैल्यू अब यह वैल्यू में

[268:57]

ही क्या कर देगा वैल्यू प्लस इन फैक्ट इस

[269:00]

इंटी जर वैल्यू को फ्लोट बना देते हैं

[269:03]

फ्लोट क्यों क्योंकि 18 पर एक डेसीमल

[269:05]

वैल्यू होगी मोस्ट प्रोबेबली तो हमारे लिए

[269:08]

आसान रहेगा वैल्यू को बना देगा वैल्यू

[269:11]

प्लस

[269:13]

0.18 मल्टीप्ला बाय वैल्यू इसने क्या किया

[269:17]

18 पर यहां पर जीएसटी ऐड कर दिया इस

[269:19]

वैल्यू के अंदर और अब इस सेम वैल्यू को ये

[269:22]

करा देगा प्रिंट फाइनल प्राइस परसेंटेज ए

[269:27]

वैल्यू तो यहां पर हम अपनी जो वैल्यू है

[269:30]

उसको शुरुआत में कोई भी मान लीजिए 100

[269:33]

हमने इसको असाइन किया है अब 100 के हिसाब

[269:36]

से कैलकुलेट प्राइस को हम कॉल लगा देंगे

[269:39]

जिसमें अपनी वैल्यू को पास कर देंगे इसको

[269:41]

कर लेते हैं सेव और इसको करते हैं एक बार

[269:44]

रन रन करते ही क्या हुआ इसने हमारा प्राइस

[269:47]

हमें बता दिया कि ₹1 था उसमें इसने %

[269:50]

जीएसटी लगाया तो 11118 हो गया और वो इसने

[269:53]

हमें फाइनली प्रिंट करवा के दे दिया इतना

[269:55]

बिल्कुल क्लियर है अगर हमने फंक्शंस काफी

[269:58]

अच्छे से समझ ली हैं अच्छे से हमने देखे

[270:00]

हैं क्वेश्चंस क्वेश्चंस को खुद से भी

[270:02]

थोड़ा बहुत करने की कोशिश करिए अभी तक पॉज

[270:04]

करके वीडियो को बीच-बीच में तो अभी तक के

[270:06]

कोड में हमें कोई इशू नहीं होना चाहिए कोई

[270:08]

प्रॉब्लम नहीं होनी चाहिए बहुत आराम से

[270:10]

समझ में आना चाहिए क्योंकि सबसे बेसिक

[270:11]

चीजें करी हैं अपना फंक्शन डिक्लेयर करा

[270:13]

है फंक्शन डिफाइन किया है और फंक्शन को

[270:16]

कॉल लगाई है अब एक डिफरेंट चीज कर लेते

[270:19]

हैं यहां पे ना वैल्यू को प्रिंट करवाते

[270:21]

हैं पहले फंक्शन को कॉल लगा दी अब वैल्यू

[270:23]

को प्रिंट करवाते हैं तो वैल्यू इज

[270:26]

परसेंटेज f वैल्यू अब इसको सेव करते हैं

[270:30]

हमारे लॉजिक के हिसाब से क्या होना चाहिए

[270:32]

सबसे पहले हमने वैल्यू लिखी है 100 फिर

[270:35]

हुआ कैलकुलेट प्राइस को कॉल कैलकुलेट

[270:38]

प्राइस ने क्या किया वैल्यू में 100 मेंड

[270:42]

कर दिया 18 पर जीएसटी तो प्राइस हो गया

[270:44]

118 तो वैल्यू को उसने यहां पर प्रिंट

[270:47]

करवा दिया 118 अब वापस से मेन फंक्शन के

[270:50]

अंदर आएंगे अब दोबारा से वैल्यू को प्रिंट

[270:52]

करवा रहे हैं तो अब हमारे कंसोल में

[270:54]

प्रिंट होगा 118 और फिर रिटर्न होके हमारा

[270:57]

फंक्शन हो जाएगा खत्म यह हमारा लॉजिक हमें

[271:00]

बता रहा है अब इस फंक्शन को अगर सेव करके

[271:02]

रन करें तो इस बार प्रिंट हुआ है सबसे

[271:05]

पहले फाइनल प्राइस इ 118 बट वैल्यू इज 100

[271:09]

ऐसा क्यों प्रिंट हुआ यहां पर कैलकुलेट

[271:12]

प्राइस के अंदर तो हमारी वैल्यू 118 है पर

[271:14]

मेन फंक्शन के अंदर जैसे ही हम वापस जा

[271:16]

रहे हैं वैल्यू दोबारा से 100 हो जा रही

[271:18]

है ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि जो भी चेंज जो

[271:21]

भी काम हम अपने दूसरे फंक्शंस के अंदर

[271:24]

करते हैं जैसे कैलकुलेट प्राइस जैसे

[271:25]

फंक्शन के अंदर करते हैं अपने पैरामीटर

[271:28]

में हम कोई भी चेंज करें वो आर्गुमेंट में

[271:30]

रिफ्लेक्ट नहीं करेगा यानी इस वैल्यू को

[271:33]

चाहे आप जीरो बना दीजिए कैलकुलेट प्राइस

[271:35]

में वो हमारी इस वैल्यू वाले आर्गुमेंट को

[271:38]

चेंज नहीं कर पाएगा तो ये एक प्रॉपर्टी

[271:41]

होती है कि फंक्शंस के अंदर उसी वेरिएबल

[271:44]

में आप कितनी भी चेंजेज करते रहिए पर

[271:46]

ओरिजिनल जो कॉलिंग के टाइम पर आर्गुमेंट

[271:48]

था उसकी वैल्यू में कोई चेंज नहीं आएगा तो

[271:51]

अगर आपके फंक्शन में कोई गलत कोड लिखा हुआ

[271:53]

है जिसकी वजह से मान लीजिए कोई इश्यूज हो

[271:54]

गए हैं और वहां पे अ आपके वेरिएबल की

[271:56]

वैल्यू ज़ीरो हो गई नेगेटिव हो गई गलत हो

[271:58]

गई तो आपके मेन फंक्शन को फर्क नहीं

[272:00]

पड़ेगा क्योंकि उसके अंदर सारा कोड सही है

[272:03]

और वैल्यूज ठीक होंगी तो यहीं से ये

[272:05]

प्रॉपर्टी आती है कि चेंजेज टू पैरामीटर्स

[272:08]

इन फंक्शन पैरामीटर में जो चेंजेज होते

[272:10]

हैं दे डोंट चेंज द वैल्यूज कॉलिंग फंक्शन

[272:12]

कॉलिंग फंक्शन के अंदर वो आर्गुमेंट की

[272:14]

वैल्यू को चेंज नहीं करते और ऐसा क्यों

[272:16]

होता है ऐसा होने के पीछे रीजन है बिकॉज़

[272:18]

अ कॉपी ऑफ आर्गुमेंट इज पास्ड टू द फंक्शन

[272:21]

जब भी ये मेन फंक्शन कैलकुलेट प्राइस

[272:25]

से अपना प्राइस कैलकुलेट कराएगा उसको यह

[272:28]

वैल्यू भेजता है पर यह जो वैल्यू है ना यह

[272:32]

कॉपी होती है यह ओरिजिनल वैल्यू वेरिएबल

[272:34]

यहां पर नहीं आता कैलकुलेट प्राइस के पास

[272:37]

उसका जो वैल्यू वेरिएबल है उसके अंदर इस

[272:39]

आर्गुमेंट की वैल्यू कॉपी हो जाती है उसके

[272:42]

अंदर जो डाटा था वैल्यू के अंदर

[272:44]

100.0 वह सारा का सारा आर्गुमेंट की

[272:47]

वैल्यू पैरामीटर के अंदर कॉपी होती है यही

[272:49]

रीज़न है कि उस कॉपी में कुछ भी चेंज आप

[272:51]

करते रहो वह ओरिजिनल में आपको चेंज वापस

[272:55]

लाकर नहीं देगा नेक्स्ट एक सवाल सॉल्व

[272:57]

करते हैं सवाल यूज़ करता है हमारे

[273:00]

लाइब्रेरी फंक्शन को यूज़ लाइब्रेरी

[273:02]

फंक्शंस टू कैलकुलेट द स्क्वायर ऑफ़ अ

[273:04]

नंबर गिवन बाय द यूज़र अब हमें पता है

[273:07]

स्क्वायर ऑफ़ अ नंबर क्या होता है

[273:08]

स्क्वायर ऑफ़ अ नंबर होता है नंबर

[273:11]

मल्टीप्ला ड बाय नंबर पर हमें यहां यूज

[273:15]

करना है लाइब्रेरी फंक्शन तो एक लाइब्रेरी

[273:18]

होती है मैथड ए जिसके अंदर मैथ के सारे

[273:20]

फंक्शंस होते हैं इस लाइब्रेरी के अंदर एक

[273:23]

फंक्शन होता है जिसका नाम है पावर इसके

[273:25]

बारे में हम थोड़ा सा पहले भी डिस्कस कर

[273:27]

चुके हैं अब पावर फंक्शन का नाम होता है

[273:30]

पीओ डब् जिसके अंदर सबसे पहले हम डालते

[273:33]

हैं अपना नंबर यानी जिस भी नंबर का हमें

[273:35]

पावर लेना है उसके बाद डालते हैं पावर तो

[273:37]

हम डालेंगे टू तो ये क्या रिटर्न करेगा

[273:40]

रिटर्न कर देगा नंबर टू द पावर 2 यहीं पर

[273:45]

अगर हम डालते पाव n4 तो ये क्या रिटर्न

[273:48]

करता हमें n की पावर 4 पर हमें क्योंकि

[273:51]

स्क्वायर लेना है तो हम नंबर और टू को डाल

[273:55]

रहे होंगे तो इसको यूज करते हैं एक बार

[273:57]

ऊपर सबसे पहले इंक्लूड कर लेंगे अपनी

[274:00]

लाइब्रेरी को अगर इसको इंक्लूड नहीं

[274:01]

करेंगे तो फंक्शन को यूज नहीं कर पाएंगे

[274:03]

इसलिए ऊपर हमें ये मैथड ए को इंक्लूड करना

[274:07]

ही पड़ेगा उसके बाद क्या करेंगे अपने मेन

[274:09]

फंक्शन के अंदर इसको कर लेते हैं कॉमेंट

[274:12]

आउट एक नंबर लेते हैं इंट n इंट n की

[274:15]

वैल्यू को हम रख लेते हैं फोर अब प्रिंट

[274:17]

करवाते हैं परसेंटेज d यहां लिखेंगे हम

[274:21]

पावर सबसे पहले डालेंगे नंबर n और फिर टू

[274:24]

तो इस स्टेटमेंट को अगर ध्यान से देखें तो

[274:26]

हमने क्या किया पावर फंक्शन को कॉल लगाई

[274:28]

है फिर पैरेंस में पहला पैरामीटर है उसका

[274:31]

नंबर n और दूसरा पैरामीटर है उसका जो भी

[274:35]

पावर आपको नंबर के ऊपर डालनी है यानी दो

[274:38]

तो ये फंक्शन हमें n टू द पावर 2 कैलकुलेट

[274:40]

करके वापस दे देगा जिसको हमारा प्रिंट एफ

[274:43]

यानी हमारा दूसरा लाइब्रेरी फंक्शन प्रिंट

[274:45]

करवा देगा स्क्रीन के ऊपर अब इस कोड को एक

[274:48]

बार सेव करते हैं और रन करते हैं यहां पे

[274:51]

हमारे पास एक वार्निंग जनरेट हुई है

[274:53]

वार्निंग कहती है इंट बट द आर्गुमेंट टाइप

[274:55]

इज डबल यानी यह जो नंबर है हमारा यह पावर

[274:59]

फंक्शन क्या करता है हमें डबल वैल्यू

[275:01]

रिटर्न करके देगा इसमें अगर देखें तो पावर

[275:04]

फंक्शन का जो डिक्लेरेशन स्टेटमेंट है वो

[275:06]

आ गया हमारे पास डबल इसका रिटर्न टाइप है

[275:08]

पावर इसका नाम है और ये दो वैल्यूज लेता

[275:10]

है डबल और डबल अब यहां पे ऑटोमेटिक इंटी

[275:13]

जर जो है हमने इंटी जर n पास करा है और

[275:15]

इंटी जर 2 पास किया है यह दोनों वैल्यूज

[275:18]

अपने आप इंप्लीड डबल में कन्वर्ट हो सकती

[275:21]

हैं क्योंकि डबल बड़ा डाटा टाइप है छोटे

[275:23]

से बड़े कंटेनर में डाल सकते हैं बड़े कम

[275:25]

कंटेनर से छोटे में डालने में परेशानी

[275:27]

होती है तो कंपाइलर ऑटोमेटिक छोटे से बड़े

[275:29]

में डाल सकता है तो इनको कन्वर्ट कर देगा

[275:32]

पर वह अपने डबल को इंटी जर में कन्वर्ट

[275:35]

नहीं करेगा इसीलिए यहां पर f लिख देते हैं

[275:39]

फ्लोटिंग वैल्यू प्रिंट करवाने के लिए तो

[275:41]

हमारे जो जो परसेंटेज f होता है वो डबल के

[275:44]

लिए ही होता है पर फ्लोटिंग वैल्यूज भी

[275:45]

परसेंटेज f से ही प्रिंट हो जाती है

[275:47]

इसीलिए जब भी डबल प्रिंट करवाना हो जब भी

[275:49]

डबल को स्कैन करना हो तो परसेंटेज एफ का

[275:51]

यूज करेंगे फ्लोट ऑटोमेटिक उसी से हमारे

[275:53]

पास इनपुट होके आता है अब नेक्स्ट सवाल

[275:55]

जिसकी हम बात कर रहे होंगे उसका नाम है

[275:58]

राइट फंक्शंस टू कैलकुलेट एरिया ऑफ अ

[276:00]

स्क्वायर अ सर्कल एंड अ रेक्टेंगल तो तीन

[276:03]

फंक्शंस हमें बनाने हैं एक फंक्शन एरिया

[276:04]

ऑफ अ स्क्वायर कैलकुलेट करेगा एक सर्कल का

[276:07]

एरिया कैलकुलेट करेगा और एक रेक्टेंगल का

[276:09]

एरिया कैलकुलेट करेगा तीनों फंक्शन को

[276:12]

सबसे पहले अपने प्रोग्राम में ऊपर हम कर

[276:14]

लेंगे डिक्लेयर सबसे पहले एरिया ऑफ

[276:17]

स्क्वायर की बात करते हैं एरिया ऑफ

[276:18]

स्क्वायर क्या करेगा इसको मान लीजिए इंटी

[276:21]

जर ही साइड आएगी और इंटी जर ही स्क्वायर

[276:24]

आएगा तो इंटी जर इसका रिटर्न टाइप होगा या

[276:27]

फ्लोट कर लेते हैं फ्लोट इसका रिटर्न टाइप

[276:29]

होगा और इसका नाम है स्क्वेयर एरिया इसके

[276:32]

अंदर पास कर रहे होंगे हम साइड ऑफ द

[276:34]

स्क्वेयर इसकी डेफिनेशन लिख लेते हैं

[276:36]

फ्लोट ये इंटी जर साइड नहीं ये फ्लोटिंग

[276:40]

वैल्यू हो स्क्वायर एरिया अंदर आएगा हमारे

[276:43]

पास पैरामीटर फ्लोट साइड एरिया ऑफ़ अ

[276:46]

स्क्वायर होता है साइड मल्टीप्ला बाय साइड

[276:48]

तो यहां से डायरेक्टली हम रिटर्न कर देंगे

[276:50]

साइड मल्टीप्ला बाय साइड अब लिखेंगे एरिया

[276:53]

ऑफ़ अ सर्कल तो सबसे पहले फ्लोट सर्कल

[276:56]

एरिया अंदर आएगी हमारे पास फ्लोटिंग

[276:58]

वैल्यू उसकी रेडियस तो इसकी भी डेफिनेशन

[277:01]

लिख लेते हैं फ्लोट सर्कल एरिया अंदर आएगी

[277:04]

फ्लोट रेडियस क्या रिटर्न करेंगे क्या

[277:07]

होता है सर्कल का एरिया हमारे पास p r स्

[277:10]

तो 3.1 4 मल्टीप बाय रेडियस इन रेडियस अब

[277:15]

एक और फंक्शन बना लेते हैं जो रेक्टेंगल

[277:17]

का एरिया कैलकुलेट करेगा फ्लोट रेक्टेंगल

[277:21]

एरिया इसमें आएंगी दो वैल्यूज फ्लोट साइड

[277:24]

ए और

[277:25]

फ्लोट इसका भी रिटर्न टाइप हो गया फ्लोट

[277:28]

नाम इसको हमने दिया रेक्टेंगल एरिया दो

[277:31]

वैल्यूज आएंगे इसके अंदर हमारी सबसे

[277:35]

पहले साइड ए और उसके बाद साइड बी

[277:39]

रेक्टेंगल का एरिया क्या होता है a * बी

[277:41]

तो रिटर्न कर देंगे a मल्टी बा b तो

[277:44]

फ्लोटिंग वैल्यू फ्लोटिंग वैल्यू से

[277:45]

मल्टीप्लाई होगी तो आउटपुट में भी एक

[277:47]

फ्लोटिंग वैल्यू आएगी जो रिटर्न होकर

[277:49]

जाएगी मेन फंक्शन के अंदर क्या करते हैं

[277:51]

एग्जांपल के लिए रेक्टेंगल को कॉल लगा

[277:54]

लेते हैं फ्लोट a इज इ

[277:59]

5.0 फ्लोट b =

[278:04]

10.0 अब वैल्यू को प्रिंट करवा लेते हैं

[278:06]

अपने एरिया को एरिया इज परसेंटेज f

[278:12]

यहां कॉल लगा लेंगे रेक्टेंगल एरिया

[278:14]

जिसमें पास कर देंगे सबसे पहली वैल्यू a

[278:16]

फिर दूसरी वैल्यू हमारी बी इस कोड को कर

[278:19]

लेते हैं सेव तीनों फंक्शंस को डिक्लेयर

[278:21]

किया तीनों फंक्शंस को हमने डिफाइन किया

[278:24]

मेन फंक्शन के अंदर हम ए और बी को टेस्ट

[278:26]

करते हुए रेक्टेंगल का एरिया कैलकुलेट

[278:30]

करेंगे टर्मिनल खोल लेते हैं कंपाइल एंड

[278:33]

रन तो आउटपुट हमारे पास आ गया है 5 * 10 =

[278:36]

50 इस तरीके से बहुत सारे फंक्शंस आप बना

[278:39]

सकते हैं कोड के अंदर और स्वाद अनुसार जिस

[278:42]

भी फंक्शन की हमें जरूरत पड़े उसी फंक्शन

[278:44]

को कॉल करा के उससे वैसा सा ही हम काम

[278:46]

करवा सकते हैं नेक्स्ट जिस टॉपिक की हम

[278:48]

बात करने वाले हैं सी के अंदर उसका नाम है

[278:50]

रिकर्स अब रिकर्स जो स्टूडेंट्स पहली बार

[278:53]

प्रोग्रामिंग सीख रहे हैं उनको जादूई

[278:54]

टॉपिक लग सकता है जादू अगर आपको दिखने लगे

[278:57]

तो बिल्कुल परेशान की बात नहीं है आप

[278:59]

प्रोग्रामिंग सीख रहे हैं रिकर्स का मतलब

[279:02]

होता है कि जब भी एक फंक्शन खुद ही को कॉल

[279:05]

लगाता है तो उस प्रोसेस को हम रिकॉर्न

[279:07]

कहते हैं अब जैसे मेन फंक्शन दूसरे

[279:10]

फंक्शंस को कॉल लगा रहा था एक फंक्शन

[279:12]

दूसरे फंक्शन को कॉल लगा रहा था नमस्ते

[279:14]

फंक्शन ने बंजू फंक्शन को कॉल लगाई थी या

[279:16]

कोई और फंक्शन दूसरे फंक्शन को कॉल लगा

[279:18]

सकता है यह बिल्कुल नॉर्मली प्रोग्रामिंग

[279:20]

के अंदर चलता है पर जब कोई फंक्शन खुद ही

[279:23]

को कॉल लगा दे फिर दोबारा से खुद ही को

[279:26]

कॉल लगा दे इस तरीके के प्रोसेस को हम

[279:29]

रिकर्स कहते हैं जब एक फंक्शन बार-बार

[279:31]

बार-बार खुद ही को कॉल लगाता रहता है जैसे

[279:34]

इसको सबसे पहले एक एग्जांपल की हेल्प से

[279:36]

देखते हैं हमें एक सवाल करना है जिसका नाम

[279:39]

है प्रिंट हेलो वर्ल्ड पांच टाइम्स हमें

[279:41]

हेलो वर्ल्ड प्रिंट करना है पर पांच बार

[279:43]

प्रिंट करना है अब इसको हम आइट मेशन की

[279:46]

हेल्प से कर सकते थे यानी लूप्स की हेल्प

[279:48]

से कर सकते थे पर यहां पर हम यूज करेंगे

[279:51]

रिकर्स का अच्छा एक छोटी सी चीज जो काफी

[279:54]

इंटरेस्टिंग लग सकती है प्रोग्रामिंग के

[279:56]

अंदर कोई भी काम अगर लूप से हो सकता है तो

[279:59]

वो काम रिकर्स से भी हो सकता है और जो काम

[280:02]

रिकर्स से हो सकता है वो काम लूप से भी हो

[280:05]

सकता है पर डिफरेंस इतना है कि जिस काम को

[280:08]

लूप से करने में कभी-कभी हमें बहुत सारी

[280:10]

लाइनें लिखनी पड़ती है हैं वो रिकजन से

[280:12]

दो-तीन लाइनों में हो सकता है और जिस काम

[280:14]

को रिकजन से कभी-कभी करने में बहुत सारी

[280:16]

लाइनें लिखनी पड़ती हैं वो लूप से थोड़ी

[280:19]

सी लाइनों में हो जाता है तो हमें देखना

[280:21]

पड़ता है कि कहां आइट यानी लूप्स यूज

[280:24]

होंगे और कहां रिकॉर्न यूज होगा तो सबसे

[280:26]

पहले रिकर्ट का एग्जांपल देखने के लिए हम

[280:29]

हेलो वर्ल्ड प्रिंट करवाते हैं पांच बार

[280:31]

एक हमारा फंक्शन है जो हमें हेलो वर्ल्ड

[280:33]

प्रिंट करके देता है इसका नाम है वॉइड

[280:35]

प्रिंट हेलो वर्ल्ड और इसके अंदर हम पास

[280:38]

करते हैं एक पैरामीटर जो बताएगा कितनी बार

[280:40]

प्रिंट कर इसको हम काउंट भी कह सकते हैं

[280:43]

इंट काउंट इस फंक्शन की डेफिनेशन लिख लेते

[280:46]

हैं वाइंट प्रिंट हेलो वर्ल्ड और यहां पर

[280:48]

आ रहा होगा काउंट कि कितनी बार प्रिंट

[280:50]

करना है पर अंदर लूप नहीं लगाएंगे अंदर

[280:52]

क्या करेंगे फंक्शन एक ही बार प्रिंट

[280:54]

करवाएगा हेलो वर्ड ये फंक्शन क्या है

[280:56]

थोड़ा सा आलसी है थोड़ा सा काम खुद करेगा

[280:59]

और बाकी काम खुद ही से करवाएगा अगली कॉल

[281:02]

में तो अभी यह क्या करेगा हेलो वर्ल्ड को

[281:05]

प्रिंट करेगा हेलो वर्ल्ड पर उसको काउंट

[281:08]

टाइम्स प्रिंट नहीं करेगा काउंट टाइम्स

[281:10]

प्रिंट करवाने के लिए खुद ही को कॉल

[281:11]

लगाएगा तो प्रिंट हेलो वर्ल्ड अब एक बार

[281:15]

तो इसने प्रिंट करवा दिया एक बार हेलो

[281:17]

वर्ल्ड प्रिंट हो चुका है अब काउंट टाइम्स

[281:20]

प्रिंट करवाना था n टाइम्स यहां पर पांच

[281:23]

बार भी हो सकता है यहां पर 10 बार भी हो

[281:24]

सकता है अब एक बार प्रिंट करवा दिया तो

[281:27]

काउंट माइव टाइम्स प्रिंट करवाना बचा हुआ

[281:29]

है और अगर कभी भी ये काउंट -1 -1 -1 होते

[281:34]

होते इस काउंट की वैल्यू अगर जीरो हो जाए

[281:37]

उसके बाद तो कुछ प्रिंट कराने की जरूरत है

[281:39]

ही नहीं तो यहां पे सिर्फ लिख देंगे

[281:41]

रिटर्न नोटिस करेंगे यहां सिर्फ रिटर्न

[281:44]

लिखा है यहां रिटर्न ज़ीरो से ज़ीरो

[281:46]

रिटर्न हो रहा है रिटर्न के बाद अगर कुछ

[281:48]

नहीं लिखते तो कुछ नहीं रिटर्न होता

[281:49]

इसीलिए रिटर्न टाइप वॉइड तो ये हो गया

[281:52]

हमारा एक एग्जांपल रिकर्स का इसको हम र

[281:57]

कर्सिव फंक्शन भी कहते हैं अगर यह अभी

[281:59]

बिल्कुल समझ में नहीं आ रहा तो बिल्कुल

[282:02]

परेशानी की बात नहीं है इसको बस कंफ्यूज

[282:04]

करने के लिए रिकजन को इस तरीके से पहले

[282:07]

बताया जा रहा है ताकि मैजिक मैजिक सा लगाए

[282:09]

थोड़ा सा यहां पर क्या करेंगे प्रिंट हेलो

[282:11]

वर्ल्ड को कॉल लगाएंगे और काउंट अपना पास

[282:14]

करेंगे पांच क्योंकि हमें पांच बार प्रिंट

[282:15]

करना है इस कोड को कर लेते हैं सेव और

[282:18]

टर्मिनल में रन तो हमारे लिए हेलो वर्ल्ड

[282:21]

हेलो वर्ल्ड हेलो वर्ल्ड पांच बार प्रिंट

[282:23]

हो गया एक बार इसको फॉर्मेट कर लेते हैं

[282:25]

नेक्स्ट लाइन में तो पांच बार हेलो वर्ल्ड

[282:28]

प्रिंट हो गया अब अगर हम यहां पर 10 भी

[282:30]

लिखते 10 लिख के अगर सेव करते तो 10 बार

[282:34]

भी हेलो वर्ल्ड प्रिंट हो जाता अब इस

[282:36]

फंक्शन ने क्या किया प्रिंट हेलो वर्ल्ड

[282:38]

जो फंक्शन है यह अपने अंदर खुद ही को कॉल

[282:41]

लगा रहा है यानी प्रिंट हेलो वर्ल्ड को ई

[282:42]

कॉल लगा रहा है और बार-बार इस कॉल की वजह

[282:45]

से बार-बार बार-बार एक फंक्शन तो सिर्फ एक

[282:47]

बार हेलो वर्ल्ड प्रिंट करा रहा है तो ये

[282:49]

फंक्शन पांच बार खुद ही को कॉल लगाता है

[282:51]

और हेलो वर्ल्ड को बार-बार प्रिंट करवाता

[282:53]

है तो ये एक रिकर्स फंक्शन है और हमने अभी

[282:57]

रिकर्स का एग्जांपल देखा रिकर्स को हल्का

[283:00]

सा मैथ की हेल्प से समझते हैं अब मैथ जिन

[283:03]

बच्चों को स्कूल में पसंद नहीं थी उन्हें

[283:05]

हल्की सी बोरिंग लग सकती है पर बोरिंग मैथ

[283:07]

नहीं पढ़ाएंगे यहां पर बहुत छोटा सा

[283:08]

डिस्कशन करेंगे जैसे हमारे पास मैथ के

[283:10]

अंदर फंक्शन होते थे

[283:13]

fx1 निकालना होता था तो होता था व का

[283:16]

स्क्वायर यानी 1 अगर f2 निकालना होता था

[283:18]

तो वो होता था 2 का स्क्वायर यानी 4 अगर

[283:21]

f3 निकालना होता था तो वो होता था 3 का

[283:23]

स्क्वायर यानी 9 वैसे ही कुछ कुछ ऐसे ऐसे

[283:28]

टीचर्स थे जो परेशानी के लिए हमें थोड़े

[283:41]

तो इसको कैसे करेंगे पहले तो fxxx.pro

[284:11]

अपनी वैल्यू निकाल के हमें दे दी तो इसको

[284:14]

कह सकते हैं हमारा रिकर्स फंक्शन यह हमने

[284:17]

रिकर्स को मैथ में होते हुए देखा सबसे

[284:19]

पहले बाहर वाले f ने अंदर वाली वैल्यू

[284:22]

निकाली अंदर कॉल लगवाई फिर अंदर वाले ने

[284:25]

कुछ-कुछ काम किया बाहर वाले को दे दिया वो

[284:27]

काम फिर बाहर वाले ने कुछ-कुछ काम किया और

[284:29]

वो उसने हमें दे दिया तो लेवल्स हुए यहां

[284:32]

पर कॉलिंग के इसी तरीके से हो सकता है कोई

[284:36]

टीचर हमें क्या कहे f ऑफ f ऑफ f ऑफ x

[284:39]

निकालने के लिए जैसे f ऑफ f ऑफ f ऑफ एक्

[284:44]

अगर हमें निकालना हो तो इस केस में क्या

[284:46]

होगा सबसे पहले हम f एक की वैल्यू

[284:49]

निकालेंगे यहां पर इस फंक्शन ने खुद को

[284:52]

कॉल लगाई फिर इस फंक्शन ने दोबारा से खुद

[284:54]

को कॉल लगाई तो तीन कॉल्स हो गई है एक जो

[284:56]

हमने इसको लगाई एक जो इसने खुद को लगाई एक

[284:59]

जो दोबारा से इसने खुद को लगाई तो सबसे

[285:01]

पहले अंदर वाली कॉल काम करेगी अंदर वाली

[285:03]

कॉल क्या काम करेगी हमें x = 2 के लिए 4

[285:08]

दे देगी फिर बाहर वाली कॉल काम करेगी बाहर

[285:12]

वाली यानी इतना फंक्शन इतना फंक्शन क्या

[285:15]

काम करेगा f4 देगा f4 यानी 16 अब सबसे

[285:20]

बाहर वाला फंक्शन काम करेगा यानी यह वाला

[285:22]

फंक्शन यह वाला फंक्शन हमें 16 का

[285:25]

स्क्वायर रिटर्न करके देगा यानी हमारे पास

[285:27]

रिटर्न होकर आएगा

[285:29]

256 तो क्या हुआ लेवल वाइज काम हुआ और

[285:32]

इसको हम कह सकते हैं रिकजन का

[285:35]

एग्जांपल वैसे ही जो नॉर्मल फंक्शन कॉल

[285:38]

होती है यानी जब एक फंक्शन दूसरे फंक्शन

[285:40]

को कॉल लगाता है तो उसमें क्या होता है

[285:42]

हमारा एक मेन फंक्शन होता है मेन फंक्शन

[285:44]

क्या करता है एक नॉर्मल फंक्शन f को कॉल

[285:48]

लगाता है यह नॉर्मल फंक्शन कुछ कुछ कुछ

[285:51]

कुछ काम हमें करके देता है और वापस एक

[285:53]

वैल्यू मेन फंक्शन को रिटर्न करके दे देता

[285:55]

है हो सकता है यह नॉर्मल फंक्शन किसी और

[285:57]

फंक्शन y एक को कॉल लगा रहा हो वो y एक्

[286:01]

कोई काम रिटर्न करके f एक को दे और f एक

[286:04]

वापस से अपना जो कंट्रोल है वो मेन फंक्शन

[286:06]

को दे इस तरीके का हमारा नॉर्मल फंक्शन

[286:09]

कॉल रहता है पर जब भी हम रिकजन की बात

[286:11]

करते हैं ना रिकर्स के अंदर कुछ स्पेशल

[286:13]

होता है रिकर्स के अंदर हमारा मेन फंक्शन

[286:16]

अगर एक फंक्शन fxxx.pro

[286:41]

फंक्शन को दे रहा है तो हर बार जो कॉल लग

[286:43]

रही है वो लग तो खुद ही को रही है तो

[286:45]

बार-बार बार बार बार-बार खुद ही को कॉल

[286:47]

लगाने वाले फंक्शंस को रिकर्स फंक्शन कहते

[286:50]

हैं और इस प्रोसेस को हम रिकर्स कहते हैं

[286:52]

अब रिकर्स को करने का बहुत लॉजिकल तरीका

[286:55]

होता है और इस लॉजिकल तरीके को समझेंगे

[286:57]

सवाल की हेल्प से सवाल हमारा है सम ऑफ

[286:59]

फर्स्ट एंड नेचुरल नंबर्स हमें निकालना है

[287:02]

अब इसको थोड़ा सा एनालाइज करते हैं कि

[287:04]

फर्स्ट एंड नेचुरल नंबर्स का सम क्या हो

[287:06]

सकता है सम होता है 1 + 2 + 3 + 4 से लेकर

[287:11]

n - 1 + n तक जैसे 5 अगर n = 5 के लिए

[287:17]

हमें वैल्यू निकालनी हो तो वो होगा 1 + 2

[287:20]

+ 3 + 4+ 5 अगर n = 4 के लिए निकालना हो

[287:24]

वो होगा 1 + 2+ 3+ 4 n = 3 के लिए निकालना

[287:29]

हो 1+ 2+ 3 n = 2 के लिए निकालना हो 1+ 2

[287:34]

n = 1 के लिए निकालना हो 1 अब n = 0 हो

[287:38]

नहीं सकता क्योंकि रो होल नंबर है नेचुरल

[287:40]

नंबर है है नहीं यहां पे हम एक पैटर्न

[287:42]

ऑब्जर्व करेंगे पैटर्न यह है कि n

[287:46]

में सारे नेचुरल नंबर्स में यह वैल्यू

[287:49]

कॉमन है इसके बाद यह वैल्यू कॉमन है इसके

[287:52]

बाद यह वैल्यू कॉमन है फिर यह वैल्यू कॉमन

[287:54]

है इस तरीके से रहता है तो नेचुरल नंबर्स

[287:57]

के सम को हम क्या लिख सकते हैं n = 2 को

[288:01]

हम क्या लिख सकते हैं इसको लिख सकते हैं

[288:04]

सम ऑफ n - 1 + 2 मतलब आप n - 1 तक का सम

[288:09]

कैलकुलेट कर लो उस में बस दो को ऐड कर दो

[288:12]

तो हमारे पास क्या होगा सम ऑफ n नेचुरल

[288:13]

नंबर्स आ जाएगा या इसको और प्रेसा इजली

[288:16]

लिखें तो सम ऑफ वन तक का सम निकाल लो

[288:19]

उसमें टू ऐड कर दो यहां पे क्या है टू तक

[288:22]

का सम निकाल लो उसमें थ्री ऐड कर दो इसका

[288:25]

क्या मतलब है थ्री तक का सम निकाल लो और

[288:28]

उसमें फोर ऐड कर दो ये हमारा हो गया थ्री

[288:30]

तक का सम और इसमें हमने फोर को ऐड कर दिया

[288:34]

इसका क्या मतलब है फोर तक का सम निकाल लो

[288:37]

और उसमें फाइव ऐड कर दो तो ये हो गया

[288:39]

हमारा फोर तक का सम और उसमें हमने ऐड कर

[288:42]

दिया फाइव को इसका क्या मतलब है सम निकाल

[288:46]

लो n - 1 तक का और उसमें n को ऐड कर दो तो

[288:49]

ये सारे जो नंबर्स हैं ये हमें n - 1 तक

[288:52]

का सम दे रहे हैं और उसमें हमने ऐड कर

[288:54]

दिया अपने n को इसी तरीके से यहां पर टू

[288:57]

तक का सम है जिसमें ऐड कर दिया थ्री को

[288:59]

यहां पर वन तक का सम है जिसमें ऐड कर दिया

[289:01]

टू को तो एक तरीके से हम देख पा रहे हैं

[289:04]

कि सम हमें निकालना है n का तो हमें क्या

[289:06]

कह रहा है सम n का निकालने से पहले n - 1

[289:09]

का सम निकाल लो और उसमें n को को ऐड कर दो

[289:11]

तो सम फंक्शन तो सेम ही है मतलब यहां पर

[289:14]

जो हम काम करने की कोशिश कर रहे हैं और

[289:15]

यहां पर जो काम करने की कोशिश कर रहे हैं

[289:17]

वो सेम है बस उसमें हल्का सा डिफरेंस क्या

[289:19]

है बस एक वैल्यू को प्लस करना है तो ये

[289:22]

फंक्शन सम फंक्शन क्या करता है खुद ही को

[289:24]

कॉल लगा रहा है खुद ही को कॉल लगा रहा है

[289:26]

हम ये देख पा रहे हैं पहले n के लिए कॉल

[289:28]

लगा रहा है फिर n - 1 के लिए कॉल लगा रहा

[289:30]

है फिर n - 2 के लिए कॉल लगाएगा फिर n - 3

[289:33]

के लिए कॉल लगाएगा जब तक हम यहां तक नहीं

[289:36]

पहुंच जाते n = 1 तक नहीं पहुंच जाते ये

[289:39]

हमारी लास्ट वैल्यू है अब रिकजन को भी तो

[289:43]

कहीं ना कहीं खुद को कॉल तो लगाएगा पर एक

[289:45]

लिमिट तक कॉल लगा सकते हैं ना कि कितनी

[289:48]

बार खुद को कॉल लगानी है अगर n नंबर्स का

[289:50]

सम निकालना है तो n बार कॉल लगानी है और

[289:52]

ये कॉल कौन ट्रैक करेगा ये कॉल ट्रैक

[289:54]

करेंगे हमारे पैरामीटर्स क्योंकि पैरामीटर

[289:56]

में जैसे हमने काउंट की वैल्यू डिक्रीज

[289:58]

करते-करते ज़ीरो कर दी थी वैसे ही यहां पर

[290:01]

हम n की वैल्यू डिक्रीज करते-करते पहले

[290:03]

फाइव फिर फोर फिर थ्री फिर टू फिर वन वन

[290:06]

तक ले जाएंगे वन के बाद कोई और वैल्यू है

[290:08]

ही नहीं क्योंकि और नेचुरल नंबर्स है नहीं

[290:10]

तो यहां पर हमारी लास्ट वैल्यू होगी यहां

[290:13]

हमारी रिकजन खत्म हो जाएगी और इस कंडीशन

[290:15]

को हम बेस केस कहते हैं अब इस पूरे कोड को

[290:18]

हम एक बार लिख के देख लेते हैं और सारी

[290:20]

चीजों को समझते हैं सबसे पहले क्या करेंगे

[290:23]

अपने फंक्शन को ऊपर डिक्लेयर कर देंगे

[290:25]

फंक्शन का नाम है सम इसके अंदर हम पास

[290:29]

करेंगे अपना n तो अपने n की वैल्यू कुछ भी

[290:32]

हो सकती है सबसे पहले अपना रिकर्स फंक्शन

[290:34]

लिखते हैं अब ये जो फंक्शन है ना ये वॉइड

[290:36]

टाइप का नहीं है ये एक इंटी जर वैल्यू को

[290:38]

रिटर्न करेगा और ये इंटी जर वैल्यू क्या

[290:40]

इंजर वैल्यू होगी हमारा सम तो इंट सम इंट

[290:44]

ए एव से लेकर ए तक का हमें सम निकालना है

[290:48]

तो सम फंक्शन क्या कह रहा था न से लेकर n

[290:51]

तक सम निकालना है तो पहले न से लेकर n

[290:53]

माइव तक निकाल लो और उसम ए को ऐड कर दो तो

[290:56]

हम क्या करेंगे न से लेकर n माइनस तक का

[290:57]

सम निकाल लेंगे तो यहां लिख देंगे टू ए

[291:02]

माइव यह थोड़ा सा कॉम्लेक्स नाम हो गया तो

[291:05]

यहां बना लेंगे एक वेरिएबल इंटी

[291:07]

जर सम ऑफ

[291:10]

n माइन

[291:13]

1 इसको हम कहना चाह रहे हैं कि यह वैल्यू

[291:16]

इंडिकेट करती है सम

[291:18]

ऑफ टू ए व इस वेरिएबल के अंदर स्टोर कर

[291:23]

लेंगे व आएगा कहां से व आएगा इसी सम

[291:25]

फंक्शन से क्योंकि अगर यह सम फंक्शन ए

[291:28]

वैल्यूज का सम निकाल सकता है तो n माइव का

[291:30]

तो निकाल ही सकता है क्योंकि अभी हम लॉजिक

[291:32]

लिखेंगे यहां से हम निकाल लेंगे n माइव का

[291:36]

सम रिकजन के अंदर ना ट्रस्ट एक बहुत बड़ा

[291:39]

फैक्टर होता है हमें विश्वास रखना होता है

[291:42]

कि हमारा रिकर्स फंक्शन जो काम है वो हमें

[291:44]

करके दे देगा तो यहां पर हमें विश्वास

[291:46]

रखना है कि n-1 वैल्यूज का वो सम हमें

[291:48]

लाके दे देगा रिकजन जो है हल्का सा ट्रिकी

[291:51]

टॉपिक हो सकता है पर जितने ज्यादा इसके

[291:53]

सवाल सॉल्व करेंगे ना उतना ही हमें समझ

[291:55]

में आ जाएगा कि क्या मतलब होता है रिकजन

[291:57]

का खुद को कॉल करने का क्या लॉजिक होता है

[292:00]

तो सम माइव इसने निकाल लिया सम ऑफ n-1

[292:04]

उसके बाद क्या करेंगे जो हमारा सम होगा

[292:07]

टोटल सम ए तक का जो सम होगा वो होगा सम ऑफ

[292:12]

n - 1 + n

[292:16]

राइट और यह फंक्शन हमें पास रिटर्न करके

[292:19]

दे देगा सम ऑफ n तो एक बार दोबारा थोड़ा

[292:22]

सा समझते हैं इस फंक्शन का काम है कि ये

[292:25]

वन से लेकर n तक सारे नेचुरल नंबर्स का सम

[292:27]

हमें दे देगा तो सबसे पहले हम क्या करते

[292:29]

हैं n - 1 तक नेचुरल नंबर्स का सम ले लेते

[292:32]

हैं तो वो हमने लिया और इस वेरिएबल में

[292:34]

स्टोर करा दिया फिर सम ऑफ n क्या होता है

[292:36]

n - 1 तक का सम प्लस उसमें n तो उन दोनों

[292:39]

को सम ऑफ n में स्टोर करा दिया और रिटर्न

[292:41]

करवा दिया सम ऑफ n अब यहां पर बेस कंडीशन

[292:44]

क्या होगी हर बार हमारे n की वैल्यू जो है

[292:46]

वो -1 माइव होते जाएगी तो बेस कंडीशन होगी

[292:49]

अगर ए की वैल्यू वन हो जाए उस केस में

[292:52]

हमें पता है कि सम ऑफ वन क्या होता है न

[292:56]

तो य हम डायरेक्टली आंसर रिटर्न कर देंगे

[292:58]

च इज वन इसको कर लेते हैं सेव और अपने मेन

[293:01]

फंक्शन में कॉल लगाते हैं प्रिंट ए सम इज

[293:06]

परसेंटेज डी पास करते हैं सबसे पहले फ सम

[293:10]

ऑफ 1 टू 5 हमें कैलकुलेट करके प्रिंट

[293:12]

करवाना है इसको कर लेते हैं सेव एंड रन तो

[293:16]

पांच तक 1 + 2 + 3 + 4 + 5 का सम हमारे

[293:19]

पास 15 आया है और ये कैसे आया होगा उसको

[293:23]

एक बार हल्का सा एनालाइज कर लेते हैं तो

[293:25]

हमने सबसे पहले क्या किया हमने कॉल लगाई

[293:28]

सम ऑफ फाइव को सम ऑफ फाइव ने सोचा सबसे

[293:31]

पहले मैं सम ऑफ फोर कैलकुलेट कर लेता हूं

[293:33]

उसमें मैं क्या करूंगा पांच को ऐड कर

[293:35]

दूंगा सम ऑफ फोर ने सोचा सबसे पहले ना मैं

[293:38]

एक से तीन तक का सम निकाल लेता हूं उसमें

[293:41]

मैं चार को ऐड कर दूंगा फिर सम ऑफ़ तीन ने

[293:43]

यही चीज सोची कि मैं भी स्मार्ट बनता हूं

[293:46]

एक से दो तक का सम कैलकुलेट करता हूं

[293:47]

उसमें सिंपली तीन को ऐड कर दूंगा मैं

[293:49]

क्यों ज्यादा काम करूं सम ऑफ दो ने सोचा

[293:52]

दिस इज टू माय हैंडराइटिंग इज वेरी बैड कि

[293:55]

मैं सम ऑफ वन कैलकुलेट कर लेता हूं उसमें

[293:58]

मैं दो को ऐड कर दूंगा और सम ऑफ वन को तो

[294:00]

पता ही है कि उसकी वैल्यू वन होती है तो

[294:03]

इस तरीके का हमारा प्रोसेस रहा तो

[294:05]

एक्चुअली हुआ क्या वन हमारा बेस केस था वन

[294:08]

ने यहां पर वन रिटर्न कर दिया तो यहां पे

[294:11]

हुआ 1 + 2 यानी 3 यह वैल्यू 3 यहां पे

[294:15]

वापस रिटर्न होकर आई तो यहां हुआ 3 + 3

[294:20]

यानी 6 ये वैल्यू 6 यहां पर रिटर्न होकर

[294:23]

आई यहां हुआ 6 + 4 यानी 10 तो ये 10

[294:27]

वैल्यू यहां पर रिटर्न हो करर आई यहां हुआ

[294:30]

10 + 5 यानी 15 तो यह वैल्यू यहां से

[294:34]

रिटर्न होकर वापस हमारे मेन फंक्शन पे

[294:37]

हमारे पास आंसर आया 15 तो हर लेवल पर हमें

[294:41]

काम जो है वो अगले वाले लेवल को देते चले

[294:43]

गए पर कहीं ना कहीं तो उस काम को एक्चुअली

[294:45]

लिखना होगा और वो एक्चुअली लिखने का काम

[294:48]

हमने किया यहां पर हमारे बेस केस में बेस

[294:53]

केस क्या करेगा रिकर्स को रोक देगा प्लस

[294:56]

हम विश्वास कर रहे हैं कि अगले वाला लेवल

[294:57]

हमें कुछ काम करके दे देगा अगले वाला लेवल

[295:00]

हमें कुछ काम करके दे देगा पर वो एक्चुअली

[295:02]

काम कहीं तो करना पड़ेगा किसी ना किसी

[295:04]

लेवल पर तो वो काम होता है हमारे बेस केस

[295:06]

पर हमारे लास्ट लेवल पर तो ये n टाइम्स

[295:09]

हमारे लेवल्स जो है कॉल हुए यह पहला लेवल

[295:12]

था यह दूसरा लेवल था यह तीसरा लेवल था यह

[295:15]

चौथा लेवल था यह पांचवा लेवल था इसको

[295:17]

प्रोग्रामिंग की भाषा में कहते हैं रिकर्स

[295:19]

ट्री पर इतना डिटेल में हमें जाने की

[295:22]

जरूरत है नहीं रिकर्स ट्री शब्द भी मुझे

[295:24]

नहीं लगता कि सी प्रोग्रामिंग में हमें

[295:26]

याद रखने की जरूरत है क्या होता है पर अगर

[295:28]

डायग्राम से रिकजन को समझना है हमने क्या

[295:31]

किया हमने डब्बो से रिकजन को समझ लिया

[295:33]

हमने कोड से रिकर्स को समझ लिया हमने

[295:35]

मैथ्स से रिकजन को समझ लिया और अब हमने

[295:38]

डायग्राम से रिकर्स को समझ लिया तो रिकजन

[295:41]

को समझने के जो चारों दिशाओं वाले तरीके

[295:43]

होते हैं वो सारे के सारे हम डिस्कस कर

[295:45]

चुके हैं और बहुत सबसे ज्यादा प्यारे

[295:47]

तरीके से सबसे ज्यादा अच्छे तरीके से

[295:50]

मैंने बहुत कोशिश करी है कि रिकर्स को मैं

[295:53]

काफी अच्छे से जहन में बिठा पाऊं तो वो

[295:55]

चीज हम काफी अच्छे से कर चुके हैं अब अगले

[295:58]

सवाल को करते हैं अगला सवाल हमारा कहता है

[296:00]

फैक्टोरियल ऑफ n हमें करना है तो जैसे

[296:03]

हमने सम ऑफ n निकाला था वैसे ही

[296:05]

फैक्टोरियल ऑफ n कहता है अब रिकजन करने से

[296:07]

पहले ना पेपर पेन का हमें थोड़ा सा

[296:09]

इस्तेमाल करना होता है और थोड़ा सा दिमाग

[296:11]

पे हमें लॉजिकली सोच के फाइंड आउट करना

[296:13]

होता है कि रिकर्ट होगा कैसे ये बहुत ही

[296:16]

स्टैंडर्ड क्वेश्चंस हम कर रहे हैं सी के

[296:18]

अंदर मोस्टली यही क्वेश्चन पूछे जाते हैं

[296:19]

एग्जाम के अंदर तो इतनी टेंशन भी लेने की

[296:21]

जरूरत नहीं है एक बार आप ये क्वेश्चंस

[296:23]

प्रैक्टिस कर लेंगे साथ में एक दो होमवर्क

[296:25]

प्रॉब्लम होंगे वो कर लेंगे कोई परेशानी

[296:27]

नहीं आएगी आपको एग्जाम के अंदर फैक्टोरियल

[296:29]

ऑफ n हमें निकालना है तो जैसे सम क्या

[296:32]

कहता था सम कहता था कि सम ऑफ n निकालना है

[296:36]

तो सम ऑफ n - 1 निकाल लो उसमें n को ऐड कर

[296:39]

दो वैसा ही कुछ हमारा केस होता है

[296:41]

फैक्टोरियल का ध्यान से अगर फॉर्मूले को

[296:44]

देखें तो 5 फैक्टोरियल क्या कहता है 5

[296:48]

फैक्टोरियल होता है 1 * 2 * 3 * 4 * 5 4

[296:52]

फैक्टोरियल क्या होता है 1 * 2 * 3 * 4 3

[296:56]

फ्टो क्या होता है 1 * 2 * 3 2 फ्टो क्या

[297:00]

होता है 1 * 2 और 1 फ्टो क्या होता है

[297:02]

हमारा 1 तो इसको 5 फैक्टोरियल को हम क्या

[297:05]

लिख सकते हैं इसको लिखा जा सकता है 4 * 5

[297:09]

इसको क्या लिख सकते हैं 4 फ्टो को 3 फट *

[297:12]

4 इसको लिख सकते हैं 2 फ्टो * 3 इसको लिख

[297:17]

सकते हैं 1 फ्टो * 2 और ये तो हमारा वन ही

[297:20]

रहेगा हमेशा ओबवियसली इससे नीचे कैसे

[297:22]

कैलकुलेट करेंगे या तो 0 फैक्टोरियल

[297:24]

लिखेंगे दैट इज आल्सो रो पर इसको रो से

[297:26]

मल्टीप्लाई नहीं कर सकते तो बेस केस हम 1

[297:29]

फैक्टोरियल पे लगा सकते हैं जहां पे

[297:30]

वैल्यू ऑलरेडी डिफाइंड होगी तो यहां पे भी

[297:33]

हमारे पास एक रिकर्व फंक्शन बन गया रिकर्व

[297:36]

फंक्शन क्या बना कि फैक्टोरियल ऑफ n अगर

[297:40]

हमें निकालना हो तो उसकी वैल्यू क्या होगी

[297:42]

आप जी फैक्टोरियल ऑफ n - 1 मुझे बता दो

[297:45]

उसमें बस मुझे क्या करना है अपने n को

[297:47]

मल्टीप्लाई कर देना है यह हमारा रिकर्स

[297:49]

फंक्शन है बिल्कुल सम के जैसा है सम ऑफ n

[297:51]

निकालना है तो क्या करो सम ऑफ n - 1 मुझे

[297:55]

बता दो उसमें मैं n को ऐड कर दूंगा वैसे

[297:57]

ही फैक्टोरियल में फैक्टोरियल ऑफ n बता दो

[297:59]

उसमें n - 1 को मैं मल्टीप्लाई कर दूंगा

[298:02]

तो मेरा फैक्टोरियल ऑफ n मेरे पास आ जाएगा

[298:04]

तो इस सेम तरीके को हम कोड में कन्वर्ट

[298:07]

करते हैं सबसे ऊपर अपना फंक्शन लिखेंगे

[298:11]

फैक्टोरियल जिसमें हमें किसी भी नंबर n का

[298:14]

फैक्टोरियल निकालना है अब फंक्शन की

[298:16]

डेफिनेशन इंट फैक्टोरियल जिसके अंदर पास

[298:19]

करेंगे पैरामीटर n फैक्टोरियल ऑफ n

[298:22]

निकालने से पहले फैक्टोरियल ऑफ n - 1

[298:25]

निकाल लेते हैं विश्वास करते हैं ये

[298:26]

फंक्शन कैलकुलेट करके दे देगा फैक्टोरियल

[298:28]

ऑफ n-1 तो लिखेंगे इंट फैक्टोरियल ऑफ n -

[298:32]

1

[298:33]

= फैक्टोरियल

[298:36]

n-1 अब इंट फैक्टोरियल ऑफ n होगा

[298:41]

फैक्टोरियल ऑफ n - 1 मल्टीप्ला बाय n और

[298:46]

रिटर्न कर देंगे फैक्टोरियल ऑफ n और बेस

[298:50]

केस यहां पर क्या होगा कब हम रुक जाएंगे

[298:53]

हम तब रुक जाएंगे जब हमारे n की वैल्यू वन

[298:56]

हो जाएगी जैसे ही n की वैल्यू वन हो गई

[298:58]

वैसे ही हम रिटर्न कर देंगे वन या इनफैक्ट

[299:01]

यहां पर रो पे भी रुक सकते हैं जीरो

[299:03]

रिटर्न हुई तो उस केस में हम रिटर्न कर

[299:05]

देंगे वन को तो कर लेते हैं सेव अब यहां

[299:09]

पर हम लिखेंगे फैक्टोरियल इज़ फाइव का

[299:12]

फैक्टोरियल निकाल लेते हैं न्यू टर्मिनल

[299:14]

कंपाइल एंड रन तो पांच का फैक्टोरियल

[299:17]

हमारे पास 120 प्रिंट होकर आ गया ऐसे ही

[299:20]

हम चार का भी फैक्टोरियल निकाल सकते हैं 4

[299:22]

का फैक्टोरियल 24 प्रिंट होके आ जाएगा अब

[299:24]

एनालाइज करते हैं किया क्या हमने यहां पर

[299:26]

फैक्टोरियल में हमारे फैक्टोरियल फंक्शन

[299:28]

में हमें n का फैक्टोरियल निकालना था उसको

[299:31]

निकालने का सिंपलेस्ट तरीका क्या है

[299:32]

फैक्टोरियल ऑफ n - 1 निकाल लो वो कौन

[299:35]

निकालेगा सेम फंक्शन निकालेगा बस उसमें

[299:36]

पैरामीटर चेंज हो जाएगा उसके बाद

[299:38]

फैक्टोरियल n - 1 को मल्टीप्लाई कर देते

[299:41]

हैं n के साथ तो फैक्टोरियल n निकल गया

[299:43]

उसको हम कर देंगे फाइनली रिटर्न और यहां

[299:45]

पे भी एक ट्री स्ट्रक्चर बना के हम पूरा

[299:47]

का पूरा समझ सकते हैं कैसे चीजें काम

[299:49]

करेगी यहां पे भी वही सेम चीज होने वाली

[299:51]

है जो हमने पहले करी फैक्टोरियल पा को

[299:53]

हमने कॉल लगाया उसने सोचा पहले फैक्टोरियल

[299:56]

च निकाल लेता हूं उसमें मल्टीप्लाई कर

[299:58]

दूंगा पांच को फिर उसने कॉल लगाया

[300:01]

फैक्टोरियल 3 को उसमें मल्टीप्लाई कर

[300:03]

देंगे चार को फिर उसने कॉल लगाया

[300:05]

फैक्टोरियल दो को उसमें मल्टीप्लाई कर

[300:07]

देंगे तीन को फिर उसने कॉल लगाया

[300:09]

फैक्टोरियल वन को उसमें मल्टीप्लाई कर

[300:11]

देंगे टू को फैक्टोरियल व ने कॉल लगाया

[300:13]

फैक्टोरियल 0 को उसमें मल्टीप्लाई कर

[300:15]

देंगे वन को फैक्टोरियल ़ क्या कहता है वन

[300:17]

दे देता है क्योंकि यह है हमारा बेस

[300:21]

केस अब इसने यहां पे वैल्यू रिटर्न कर दी

[300:24]

1 1 * 2 हमें दे देगा 2 यहां पे टू रिटर्न

[300:27]

हुआ इसने दे दिया 2 * 3 6 यहां पे 6

[300:30]

रिटर्न हुआ इसने दे दिया 6 * 4 24 इसने 24

[300:34]

रिटर्न किया तो इसने दे दिया 24 * 5 = 120

[300:37]

तो फाइनल आंसर हमारे पास 120 प्रिंट हुआ

[300:40]

था फैक्टोरियल फव के लिए नेक्स्ट चीज

[300:42]

जिसकी हम बात करेंगे वो है कुछ प्रॉपर्टीज

[300:44]

ऑफ रिकजन तो रिकर्स की अपनी कुछ

[300:46]

प्रॉपर्टीज होती हैं सबसे पहला एनीथिंग

[300:49]

दैट कैन बी डन विद आइट मेशन कैन बी डन विद

[300:51]

रिकर्ट एंड वाइस वर्सा आइट मेशन से लूप से

[300:55]

हमने जो भी काम किए थे वो सारे काम रिकर्ट

[300:57]

से हो सकते हैं और रिकर्स से जो भी काम

[301:00]

करते हैं वो सारे आइट एशन से हो सकते हैं

[301:02]

बस कभी-कभी रिकर्ट हेल्प कर देता है बहुत

[301:04]

सिंपल कोड लिखने में कभी-कभी लूप हेल्प कर

[301:06]

देते हैं सेकंड प्रॉपर्टी है रिकजन कैन सम

[301:09]

टाइम्स गिव द मोस्ट सिंपल सॉल्यूशन ऐसे

[301:12]

ऐसे आगे जाकर डाटा स्ट्रक्चर हम पढ़ेंगे

[301:14]

ट्रीज के ट्री डाटा स्ट्रक्चर होता है वो

[301:16]

सी प् प्स में हम पढ़ सकते हैं जावा में

[301:18]

पढ़ सकते हैं उसको करते टाइम हम ट्री की

[301:20]

वैल्यूज लिखते हैं कुछ अभी हम इमेजिन नहीं

[301:22]

कर पा रहे होंगे पर वहां पर आइट का कोड

[301:25]

बहुत लंबा और कॉम्प्लेक्शन का कोड यूं तीन

[301:28]

लाइनों का कोड होता है सारी वैल्यूज को

[301:30]

प्रिंट कराने के लिए तो वहां पे रिकजन ऐसे

[301:33]

केसेस में बहुत ज्यादा सिंपल कोड लिखने

[301:35]

में हेल्प करता है बेस केस होता है रिकजन

[301:38]

के अंदर वो कंडीशन जो रिकजन को रोक देती

[301:41]

है तो रिकॉर्न बार-बार बार-बार चल रहा है

[301:43]

कहीं ना कहीं जाकर रुकेगा और जिस कंडीशन

[301:45]

में जाकर रुकेगा उसको हम कहते हैं अपना

[301:47]

बेस केस और चौथी प्रॉपर्टी होती है रिकजन

[301:50]

की कि आइट में जैसे हमारे पास

[302:07]

इनफाइनों पूरी भर जाएगी और उसके बाद हमारा

[302:10]

प्रोग्राम जो है क्रैश कर जाएगा वैसे ही

[302:13]

रिकजन अगर बार-बार बार-बार चलती रहे और

[302:15]

उसमें कोई बेस केस ना हो तो वहां पे उस

[302:18]

कंडीशन को हम कहते हैं स्टैक ओवरफ्लो

[302:20]

स्टैक ओवरफ्लो का बेसिक मतलब यही है कि

[302:22]

मेमोरी हमारी भर गई और अब हमारा प्रोग्राम

[302:25]

क्रैश कर जाएगा इसीलिए बेस केस बहुत

[302:27]

इंपॉर्टेंट होता है जब भी हम रिकजन की बात

[302:29]

करते हैं और जब भी रिकजन का प्रोग्राम लिख

[302:31]

रहे हैं बेस केस को हमें कभी नहीं भूलना

[302:34]

है जैसे एग्जांपल ले फैक्टोरियल केस कोड

[302:37]

में अगर मैं ये बेस केस हटा दूं

[302:40]

और य मान लो मैं हर बार प्रिंट करवा रही

[302:42]

हूं न दिस आई एम कैलकुलेटिंग कैलकुलेट

[302:46]

फैक्टोरियल ऑफ ए में कैलकुलेट कर रही

[302:49]

हूं जहां पर मुझे हर बार ए की वैल्यू को

[302:52]

प्रिंट करवाना है इसको कर लेती हूं सेव और

[302:55]

एक बार रन करती

[302:58]

हूं यहां पर मेरा प्रोग्राम एंड में क्रैश

[303:01]

हो गया है और प्रिंट हुआ सेगमेंटेशन फॉल्ट

[303:03]

सेगमेंटेशन फॉल्ट इसलिए हुआ है क्योंकि

[303:05]

रिकजन में कंडीशन जो

[303:08]

है बेस के मैंने नहीं लिखा एक बार दोबारा

[303:11]

से इसे रन कर लेते

[303:15]

हैं यह हुआ सेगमेंटेशन फॉल्ट प्रोग्राम

[303:18]

क्रैश यह क्यों हुआ ऊपर से जहां पर कॉल

[303:22]

लगाई थी वहां से अगर एनालाइज करें तो हर

[303:24]

बार हम देख रहे हैं कि ये नंबर जो है n था

[303:27]

पहले फिर n - 1 हुआ फिर n - 2 हुआ फाइव था

[303:29]

फोर्थ हुआ थ्री हुआ टू हुआ वन हुआ हर बार

[303:32]

फिर ज़ीरो हुआ हर बार हम क्या करते थे बेस

[303:35]

केस में रो पे रोक देते थे इस बार हमने वो

[303:37]

कंडीशन ही हटा दी कि ज़ीरो पे रुक जाओ तो

[303:39]

इस बार वो नेगेटिव में वैल्यूज उसकी शुरू

[303:41]

हो गई -1 हो गया -2 हो गया -3 हो गया -4

[303:44]

हो गया -5 हो गया और यहां पे हुआ -1 7338

[303:48]

फिर और नेगेटिव में और नेगेटिव में और

[303:51]

नेगेटिव में और नेगेटिव में और नेगेटिव

[303:53]

होता होता चला गया जब तक हमारा प्रोग्राम

[303:56]

जो है कंप्लीट भर नहीं गया और प्रोग्राम

[303:58]

क्रैश नहीं कर गया इसीलिए बेस केस को कभी

[304:01]

भी रिकॉर्न के टाइम में मिस नहीं करना है

[304:03]

क्योंकि बहुत सारे इश्यूज रेज हो जाते हैं

[304:05]

फिर आपका प्रोग्राम क्रैश कर जाएगा अब कुछ

[304:08]

सवाल करते हैं फंक्शंस के और रिकर्स के

[304:11]

सबसे पहला सवाल जिसको हम करने वाले हैं वो

[304:13]

है राइट अ फंक्शन टू कन्वर्ट सेल्सियस टू

[304:15]

फारेनहाइट हमने देखा था फिजिक्स पढ़ा करते

[304:18]

थे 11 12th में तो उसमें क्या सबसे पहले

[304:20]

बेसिक चीज कराते थे थर्मोडायनेमिक्स में

[304:22]

या पता नहीं कौन से चैप्टर में सेल्सियस

[304:24]

से फारेनहाइट में कन्वर्ट कर दो फारेनहाइट

[304:26]

से सेल्सियस में कन्वर्ट कर दो तो इसका

[304:28]

फार्मूला याद करने की जरूरत नहीं है

[304:30]

इंपॉर्टेंट ये नहीं है कि फॉर्मूला कौन सा

[304:32]

यूज़ होगा फॉर्मूला तो आप टीचर से भी पूछ

[304:34]

सकते हैं आपको यूजुअली एग्जाम्स में दिया

[304:36]

भी होगा या कोडिंग टेस्ट में अगर ये सवाल

[304:38]

दिया हो तो उसमें फॉर्मूला दिया होगा

[304:40]

फार्मूला होता है कि सेल्सियस की जो भी

[304:41]

वैल्यू है उससे मल्टीप्लाई कर दो 9/5 और

[304:44]

उसमें ऐड कर दो 32 तो जैसे 0 अगर हम ले 0

[304:49]

सेल्सियस क्या होता है मल्टीप्ला बा 0.18

[304:53]

+ 32 तो 0 डिग्री सेल्सियस होता है हमारा

[304:56]

32 डिग्री फट तो इस तरीके का कैलकुलेशन

[304:59]

हमारे पास रहता है इस फॉर्मूले का हम

[305:01]

इस्तेमाल कर रहे होंगे एक फंक्शन बनाता है

[305:04]

जो सेल्सियस वैल्यू को लेगा और फारेनहाइट

[305:06]

में कन्वर्ट कर देगा तो इस फंक्शन को हम

[305:08]

लिखते हैं सबसे पह फंशन को डिक्लेयर

[305:10]

करेंगे फंक्शन हमारा एक फ्लोटिंग वैल्यू

[305:12]

हमें रिटर्न करके दे देगा इस फंक्शन का

[305:14]

नाम है कन्वर्ट टेंपरेचर कन्वर्ट टेंपरेचर

[305:17]

में हमने कोई फ्लोटिंग वैल्यू इससे ले ली

[305:21]

जो

[305:21]

है सेल्सियस

[305:24]

अब इसको डिफाइन कर लेते हैं फ्लोट कन्वर्ट

[305:30]

टेंपरेचर और इसके अंदर वैल्यू हमारे पास

[305:33]

आई है

[305:35]

फ्लोट सेल्सियस हमें

[305:39]

सेल्सियस से फारेनहाइट में कन्वर्ट करना

[305:41]

है तो

[305:42]

इंट फारेनहाइट क्या होगा सेल्सियस वाली

[305:46]

हमारी वैल्यू मल्टीप्ला बाय

[305:49]

9/5 प्लस

[305:52]

32 तो अगर प्रेसीडें भी देखे तो सबसे पहले

[305:55]

मल्टीप्लाई होगा उसके बाद वैल्यू हमारी ऐड

[305:57]

हो रही होगी और इसको इंटी जर नहीं इसको

[306:00]

फ्लोट लिखते हैं और रिटर्न होकर

[306:03]

जाएगी हमारा फारेनहाइट वाली

[306:07]

वैल्यू मेन फंक्शन के अंदर क्या करेंगे

[306:11]

मेन फंक्शन के अंदर कॉल लगाएंगे कन्वर्ट

[306:15]

टेंपरेचर को उसमें पास कर देंगे मान लीजिए

[306:17]

रो डिग्री हमने पास

[306:18]

किया और यहां से हमारी फारेनहाइट वाली

[306:21]

वैल्यू हमारे पास रिटर्न होकर आ

[306:24]

जाएगी अब प्रिंट करवा देंगे अपने

[306:27]

फारेनहाइट वाले टेंपरेचर

[306:31]

को

[306:33]

परसेंटेज

[306:37]

ए इसको कर लेते हैं सेव तो कन्वर्ट

[306:40]

टेंपरेचर फंक्शन हमने बनाया जिसमें

[306:42]

सेल्सियस में वैल्यू आती है टेंपरेचर की

[306:44]

और रिटर्न हम करते हैं फारेनहाइट वाली

[306:45]

वैल्यू को इसको कर लेते हैं

[306:49]

रन तो हमारे पास 32 डिग्री फारेनहाइट

[306:52]

हमारे पास प्रिंट हो गया है ऐसे ही अगर

[306:55]

मान लीजिए सेल्सियस में कोई हम टेंपरेचर

[306:57]

भेज रहे हैं जैसे हम 32 अगर सेल्सियस भेज

[307:02]

रहे

[307:04]

हैं तो वो फारेनहाइट में कन्वर्ट हो जाएगा

[307:07]

64 डिग्री फट यहां पे एक छोटी सी मिस्टेक

[307:10]

हमसे हुई कि हमने यहां पे इंटी जर वैल्यूज

[307:11]

लिख दी 9/5 तो ये भी इंटी जजर है ये भी

[307:14]

इंटी जर है 9/5 अगर डिवाइड करेगा तो वन

[307:17]

देगा पर कायदे से इसको मल्टीप्लाई करना

[307:19]

चाहिए 1.8 के साथ तो यहां पे हम इसको 99.0

[307:22]

कर देते हैं इसको 5.0 कर देते हैं अब ये

[307:24]

फ्लोटिंग वैल्यूज हैं अब अपने कोड को रन

[307:27]

करते

[307:29]

हैं अब हमने पास किया था 32 डिग्री तो

[307:32]

हमारे लिए आया 89.5 1999 डिग्री फट अगर हम

[307:37]

नॉर्मल बॉडी टेंपरेचर पास करें व्हिच 37

[307:40]

डिग्री सेल्सियस तो 37 डिग्री सेल्सियस पर

[307:44]

आपको बुखार नहीं होता तो आपका बॉडी

[307:46]

टेंपरेचर यानी 98.5 फट तो जब भी हम बात

[307:50]

करते हैं ना कि बुखार हो गया है तो 98

[307:52]

डिग्री 99 डिग्री 100 डिग्री बुखार हो गया

[307:55]

103 बुखार हो गया है वो एक्चुअली

[307:57]

फारेनहाइट में होता है सेल्सियस में हमारे

[308:00]

पास यह टेंपरेचर होते हैं तो यह हमने

[308:02]

कन्वर्जन का एक फंक्शन लिख लिया है इस

[308:04]

तरीके से हमारे पास फारेनहाइट टू सेल्सियस

[308:06]

कन्वर्जन फंक्शन हम खुद से बना सकते हैं

[308:08]

और भी डिफरेंट डिफरेंट फंक्शन हो सकते हैं

[308:10]

फिजिक्स के जितने फॉर्मूले हैं उनको सबको

[308:12]

आप एक फंक्शन के अंदर कन्वर्ट कर सकते हैं

[308:14]

कोड में इनफैक्ट वो किया जाता है जब गेम

[308:17]

डेवलपमेंट होती है और c+ प् से कोड लिखे

[308:19]

जाते हैं तो हमारा जो मेन कैरेक्टर है वो

[308:22]

कितनी स्पीड से रन करेगा उसकी एक्सीलरेशन

[308:24]

क्या होगी वो जो बुलेट फायर कर रहा है उस

[308:26]

बुलेट की क्या डायरेक्शन डिसाइड होगी उसके

[308:28]

कोऑर्डिनेट्स क्या रहेंगे एक्वा प्लेन में

[308:30]

2d प्लेन में या 3d प्लेन में क्या

[308:32]

कोऑर्डिनेट्स रहेंगे ये सारा का सारे

[308:34]

फॉर्मूले जो होते हैं वो फंक्शंस की फॉर्म

[308:36]

में लिखे जाते हैं कोड में तो फंक्शंस

[308:38]

काफी इंपोर्टेंट है इनफैक्ट फिजिक्स काफी

[308:41]

इंपॉर्टेंट है अगर आप गेम डेवलपमेंट में

[308:43]

जाना चाहते हैं तो नेक्स्ट क्वेश्चन जो

[308:44]

हमें दिया हुआ है वो ये है राइट फंक्शन टू

[308:46]

कैलकुलेट परसेंटेज ऑफ अ स्टूडेंट एक

[308:48]

स्टूडेंट है जिसके हमें तीन सब्जेक्ट के

[308:50]

मार्क्स दिए हुए हैं साइंस के मार्क्स दिए

[308:52]

हैं मैथ के मार्क्स दिए हैं संस्कृत के

[308:53]

मार्क्स दिए हैं अब मैं इंग्लिश हिंदी में

[309:01]

डिफरेंशिएबल

[309:04]

है इसके लिए हम फंक्शन लिख लेते हैं

[309:07]

फंक्शन का नाम होगा

[309:09]

फ्लोट फ्लोटिंग वैल्यू यह परसेंटेज हमें

[309:12]

दे देगा इन फैक्ट क्या करते इंटी जर

[309:13]

वैल्यू ही कर लेते हैं फॉर सिंपलीसिटी

[309:16]

इंटी जर

[309:17]

कैलकुलेट परसेंटेज कैलकुलेट परसेंटेज तीन

[309:20]

सब्जेक्ट के मार्क्स लेता है सबसे पहले

[309:23]

मार्क्स लेगा साइंस के फिर मैथ के और

[309:28]

फिर संस्कृत के और यह इंटी जर में

[309:32]

परसेंटेज कैलकुलेट करके हमें वापस मिलेगा

[309:35]

अब इस फंक्शन को डिफाइन कर लेते हैं

[309:37]

कैलकुलेट परसेंटेज जिसके अंदर पास करेंगे

[309:41]

अपनी साइंस के मार्क्स इंटी जर साइंस इंट

[309:44]

मैथ एंड

[309:46]

इंट

[309:51]

संस्कृत परसेंटेज कैसे कैलकुलेट होगी

[309:53]

तीनों मार्क्सस को ऐड कर लेते हैं

[309:55]

डिवाइडेड बाय 3 कर लेते हैं मल्टीप्ला बाय

[309:57]

100 कर लेते हैं तो रिटर्न कर

[310:00]

देंगे साइंस के मार्क्स प्लस मैथ के

[310:04]

मार्क्स प्लस संस्कृत के मार्क्स डिवाइडेड

[310:08]

बाय 3 और इस पूरी वैल्यू

[310:11]

को मल्टीप्लाई कर देंगे

[310:14]

बाय

[310:16]

100 तो इस तरीके से हमें परसेंटेज मिल

[310:19]

जाएगी अब यहां पे साइंस के मार्क्स बना

[310:21]

लेते हैं मान लीजिए साइंस में हमारे 100

[310:23]

में से आए हैं

[310:25]

98 मैथ में हमारे आए

[310:28]

हैं सम 95 और संस्कृत

[310:35]

में मैं अपने 99 मार्क्स लिखना चाहूंगी

[310:38]

यहां पर जो मेरे काफी मेहनत के बाद एथ

[310:42]

क्लास में आए थे संस्कृत के अंदर अब

[310:45]

फाइनली प्रिंट कर लेते हैं अपनी

[310:48]

परसेंटेज परसेंटेज इ परसेंटेज डी एंड कॉल

[310:54]

कर देंगे अपने कैलकुलेट परसेंटेज फंक्शन

[310:56]

को जिसमें पास करेंगे साइंस के मार्क्स

[310:57]

मैथ्स के मार्क्स और संस्कृत के

[311:02]

मार्क्स इसको कर लेते हैं सेव हमने

[311:05]

कैलकुलेट परसेंटेज फंक्शन बनाया जिसमें

[311:07]

तीनों सब्जेक्ट के मार्क्स ले लिए और

[311:09]

रिटर्न कर ली परसेंटेज इसी फंक्शन को हमने

[311:11]

यहां पर डिफाइन कर लिया तीनों सब्जेक्ट के

[311:13]

मार्क्स हमने मेन फंक्शन के अंदर डिक्लेयर

[311:15]

कर दिए और अपने फंक्शन को हमने कॉल लगा

[311:17]

दिया इसको अब नई टर्मिनल विंडो खोल के

[311:20]

सबसे पहले कंपाइल एंड रन तो परसेंटेज आया

[311:24]

है

[311:24]

970 इसको एक्चुअली हमें 100 से मल्टीप्लाई

[311:28]

नहीं करना था क्योंकि ऑलरेडी अगर 100 से

[311:31]

निकाल रहे हैं मार्क्स तो परसेंटेज आएगा

[311:34]

97 पर तो इस तरीके से मार्क्स अगर

[311:36]

कैलकुलेट करने है आपको भी अपने कॉलेज के

[311:38]

तो आप एक फंक्शन बना सकते हैं उसमें जितने

[311:41]

भी आपके मार्क्स आ रहे हैं उनको आप ऐड

[311:42]

करके अपनी परसेंटेज निकाल सकते हैं

[311:45]

नेक्स्ट सवाल जिसको हम सॉल्व कर रहे होंगे

[311:47]

राइट अ फंक्शन टू प्रिंट एन टर्म्स ऑफ द

[311:49]

फिना सीक्वेंस यह फिना इटालियन वर्ड है

[311:53]

इसको फिना की नहीं कहते इसको कहते हैं

[311:57]

फिना अब फिना सीक्वेंस एक बहुत फेमस

[312:01]

सीक्वेंस है मैथ्स का जो काफी जगह हमारे

[312:04]

नेचर में भी फिना सीक्वेंस एक्जिस्ट करता

[312:06]

है एक बार इसको सर्च कर लेते फिना

[312:09]

सीक्वेंस को फबो

[312:11]

नाची

[312:16]

सीक्वेंस ये काफी फेमस सीक्वेंस है इस

[312:19]

तरीके से कुछ टाइल्स को आप स्क्वेयर की

[312:21]

फॉर्म में अरेंज करेंगे तो आपको फिना

[312:23]

सीक्वेंस दिख जाएगा या ऐसा सा अगर आपने

[312:26]

स्पाइरल देखा होगा कहीं पे तो वह भी फिना

[312:29]

स्पाइरल के नाम से जाना जाता है आपको किसी

[312:32]

भी प्रोग्रामिंग लैंग्वेज आप सीखने जाए

[312:33]

वहां पर आपको फबन सीक्वेंस मिल जाएगा

[312:36]

नेचुरल नंबर्स का क्या सीक्वेंस रहता है

[312:38]

नटू 3 4 5 6 होल नंबर्स का क्या सीक्वेंस

[312:41]

रहता है 0 1 2 3 4 5 6 हमारे ऑड नंबर्स का

[312:45]

क्या सीक्वेंस रहता है 1 3 5 7 इवन नंबर्स

[312:50]

का 2 4 6 8 10 वैसे ही एक सीक्वेंस होता

[312:53]

है नेचर में जिसको फिना सीक्वेंस कहते हैं

[312:56]

ये सीक्वेंस कुछ ऐसा दिखता

[312:58]

है 0 1 1 2 3 5 8 13 अब जब इसको पहली बार

[313:03]

देखते हैं ना ऐसा लगता है रैंडम नंबर लिखे

[313:05]

हुए हैं मतलब जो मन किया है वो नंबर

[313:07]

इन्होंने स्क्रीन पे लिख दिया है पर पर

[313:09]

ऐसा एक्चुअली है नहीं इसको इंडियन

[313:11]

मैथमेटिशियंस ने बनाया था और बहुत सोच समझ

[313:14]

के सीक्वेंस को बनाया था सीक्वेंस में

[313:16]

सबसे पहले आता है रो फिर आता है वन फिर

[313:18]

आता है वन फिर टू फिर 3 5 8 13 21 एंड सो

[313:25]

ऑन इस सीक्वेंस को थोड़ा सा गौर से देखने

[313:27]

के बाद पता चलता है कि हर नंबर अपने पिछले

[313:30]

दो नंबर्स का सम है जैसे ये नंबर तो

[313:33]

फर्स्ट नंबर तो हमेशा जीरो रहता है सेकंड

[313:35]

नंबर हमेशा वन रहता है थर्ड नंबर रो और टू

[313:39]

का सम है यानी 0 + 1 = 1 ये फोर्थ नंबर वन

[313:44]

और वन का सम है ये थ्री इस वन और 2 का सम

[313:47]

है ये फाइव इज टू और थ्री का सम है ये 8

[313:50]

इज थी और फव का सम है 13 5 और ए का सम है

[313:53]

21 8 और 13 का सम है और इस तरीके से पूरा

[313:56]

सीक्वेंस चलता रहता है तो यहां पर हर एक

[313:59]

नंबर पिछले अपने दो नंबर्स का सम है तो एक

[314:03]

तरीके से हम कह सकते हैं कि

[314:05]

फिना अगर हमें निकालना हो किसी भी नंबर को

[314:07]

मान लो फिना ऑफ टू निकालना है ये है फिना

[314:10]

ऑफ़ ज़ीरो ये है फिना ऑफ़ वन ये है फिना

[314:13]

ऑफ़ टू ये है फिना ऑफ़ थ्री ये है फबो ऑफ़

[314:17]

फोर एंड सो ऑन तो फबो ऑफ़ टू निकालना है

[314:20]

वो हम कह सकते हैं फिना ऑफ़ ़ प्लस फबो

[314:23]

ऑफ़ व फिना ऑफ थ्री अगर हमें निकालना है

[314:26]

तो उसको हम कह सकते हैं इट इज़ फबो ऑफ़ व

[314:29]

प्लस फबो ऑफ़ टू फबो ऑफ़ फर अगर हमें

[314:33]

निकालना है तो उसको भी हम कह सकते हैं

[314:35]

फिना ऑफ 2 प्स फिना ऑफ 3 तो इससे हमें

[314:40]

कॉमन फंक्शन निकलता है अगर किसी भी नंबर

[314:43]

का फिना निकालना है तो वह है उससे दो नंबर

[314:47]

पहले का एक नंबर पहले का नंबर प्लस उससे

[314:49]

दो नंबर पहले का यानी फिना ऑफ़ n - 1 +

[314:52]

फोनची ऑफ़ n - 2 एक तरीके से य हमने

[314:55]

रिकर्स इव फॉर्मूला निकाल लिया अपने

[314:56]

रिकर्स फंक्शन को लिखने का कि फिना एक

[314:59]

फंक्शन बना लो जो n के लिए फिना कैलकुलेट

[315:01]

करता है अब n वाला तो हमें पता नहीं है पर

[315:03]

शायद वह n - 1 और n - 2 वाला उसको पता हो

[315:06]

इतना विश्वास कर लेते हैं कि यह दोनों तो

[315:08]

निकाल ही देगा तो इन दोनों को कॉल लगा लो

[315:10]

इन दोनों को कॉल लगाने के बाद इन दोनों को

[315:13]

ऐड करके फिना ऑफ n में स्टोर कर लो तो इस

[315:16]

तरीके से हम अपने डिफरेंट फिनाज नंबर्स को

[315:19]

करते हैं प्रि इसके लिए कोड लिख लेते हैं

[315:21]

कोड लिखकर बेटर हमें समझ में आएगा इस

[315:23]

फंक्शन का रिटर्न टाइप है इंटी जर हर लेवल

[315:25]

पर यह अपना फिना निकालेगा एनत नंबर का और

[315:28]

उसको ऊपर वाले लेवल्स को कर देगा रिटर्न

[315:30]

इसको नाम दे देते हैं फि और यह निकालेगा

[315:33]

इंट n के लिए फिना सीक्वेंस

[315:39]

अब इस कर लेते हैं इस फंक्शन को डिफाइन

[315:41]

इंट फिना ऑफ नंबर ए तो फिना का क्या रूल

[315:47]

है फि बनाची का यह रूल है पिछले दो नंबर्स

[315:49]

का फिना सीक्वेंस में क्या नंबर थे वो

[315:51]

निकाल लो और दोनों को ऐड कर दो तो इंट

[315:56]

फिना ऑफ n इ टू फिना ऑफ n

[316:01]

माइव प्लस फिना ऑफ

[316:04]

n-2 अब ये फिना ऑफ n-1 और n-2 पहले कर

[316:09]

लेते हैं तो इंट फिना ऑफ n माइव इ फि को

[316:14]

कॉल लगा लेते हैं n माइव के लिए तो यह

[316:18]

फंक्शन खुद ही को कॉल लगा रहा है यानी

[316:20]

रिकजन हो रहा है यहां पर n के लिए

[316:23]

कैलकुलेट करना था तो पहले n माइव के लिए

[316:25]

कॉल लगा ली और उसको इस वेरिएबल में स्टोर

[316:27]

कर लिया अब एक और कॉल लगाएंगे फिना ऑफ n-2

[316:32]

को फि ऑफ

[316:35]

n-2 तो अब n माइट के लिए कॉल लगाई और उसको

[316:38]

इस वेबल में स्टोर कर लिया और फाइनली

[316:40]

दोनों को ऐड करके फिना ऑफ n हमने निकाल

[316:43]

लिया अब इस फिना ऑफ n को हम कर लेते हैं

[316:47]

प्रिंट फिना ऑफ n यहां पर लिख देंगे पहले

[316:51]

परसेंटेज

[316:53]

डी

[316:55]

इज दोबारा से परसेंटेज डी सबसे पहले

[316:58]

लिखेंगे n की वैल्यू यानी n उसके बाद

[317:01]

लिखेंगे अपने फिना ऑफ n की वैल्यू

[317:04]

को और रिटर्न कर देंगे अपने फिना ऑफ n की

[317:07]

वैल्यू को इस फंक्शन से तो ये हो गया

[317:10]

हमारा रिकर्स फंक्शन और हर रिकर्स फंक्शन

[317:12]

बेस केस के बिना अधूरा होता है यानी गलत

[317:14]

होता है अब इसमें बेस केस क्या होगा फबो

[317:17]

ऑफ रो और फिना ऑफ वन हमारे पास डिफाइंड

[317:20]

होता है तो

[317:22]

अगर n की वैल्यू कभी जीरो हो जाती है या

[317:27]

फिर n की वैल्यू किसी केस में वन हो जाती

[317:29]

है तो वहां पर हमें पता होगा कि n n = 0

[317:33]

के लिए क्या होगा इफ n = 0 उस केस में तो

[317:37]

हमें रिटर्न करना

[317:40]

है जीरो और अगर हमारे n की वैल्यू वन है

[317:45]

तो उस केस में हमें रिटर्न करना है

[317:51]

न अब यह हमारा पूरा कोड हो गया फिना को

[317:54]

कैलकुलेट करने का रिकसिव कोड यह हमारी बेस

[317:56]

कंडीशन होगी बेस केस में क्या करते हैं इन

[317:58]

दोनों को अलग-अलग कंडीशन की तरह ही लिख

[318:00]

देते हैं इंस्टेड ऑफ राइटिंग वन कंडीशन

[318:03]

अगर n हमारा जीरो हो गया है कहीं भी n

[318:06]

जीरो हो गया यानी फिना ऑफ जीरो हमें

[318:08]

रिटर्न करना है तो वो रो ही होता है अगर

[318:09]

कहीं भी n = 1 के लिए देना है तो फबो ऑफ़

[318:12]

वन हमेशा वन होता है अब यहां पे फिना ऑफ

[318:15]

वन के लिए हम फबो ऑफ़ ़ और फिना ऑफ़ -1

[318:18]

कैलकुलेट नहीं करेंगे क्योंकि -1 के लिए

[318:20]

तो एजिस्ट ही नहीं करता सीक्वेंस ये हमारा

[318:22]

बेस केस है यानी वो कंडीशन जो पहले से पता

[318:25]

होनी चाहिए फिना में हमें पता होता है

[318:27]

जीरो टर्म जरो होता है फर्स्ट टर्म वन

[318:29]

होता है ये हमें पहले से पता है ये हमने

[318:31]

कैलकुलेट किया है अब मेन फंक्शन के अंदर

[318:34]

क्या करेंगे इसको प्रिंट करवा

[318:37]

लेंगे यहां पर

[318:40]

कॉल लगा लेते हैं अपने फिना ऑफ मान लीजिए

[318:45]

हम सिक्स टर्म्स प्रिंट करवाना चाहते हैं

[318:48]

इसको कर लेते हैं सेव और इसको करते हैं

[318:52]

रन तो य हमारे पास छ टर्म्स की जगह काफी

[318:55]

सारी टर्म्स प्रिंट हो गई फिनाज की ऐसा

[318:58]

इसलिए हुआ इसका रीजन थोड़ा सा हम डायग्राम

[319:02]

से समझते हैं ऐसा क्यों हुआ य इतनी सारी

[319:04]

टर्म्स इसलिए प्रिंट हुई क्योंकि जब हम

[319:06]

फिना ऑफ पांच मान लीजिए कैलकुलेट करने

[319:10]

निकलते हैं तो ये कैलकुलेट करता है पहले

[319:12]

फिना ऑफ चार फिर फिना ऑफ तीन और फिना ऑफ

[319:16]

चार क्या करता है पहले कैलकुलेट करता है

[319:18]

फिना ऑफ तीन फिर फिना ऑफ दो फिना ऑफ तीन

[319:22]

पहले कैलकुलेट करता है फिना ऑफ दो और फिर

[319:24]

फिना ऑफ वन तो यहां पर ये वाला दो और ये

[319:29]

वाला दो दो बार कैलकुलेट हुए हैं तो दो

[319:32]

बार प्रिंट हुए हैं अगर तीन की भी बात

[319:34]

करें तो एक बार यहां पे तीन का प्रिंट

[319:36]

होगा यहां पे तीन का प्रिंट होगा इसीलिए

[319:38]

जितनी बार भी कॉल जा रहा है उतनी बार फिना

[319:40]

प्रिंट होगा तो दो सेकंड टर्म हमारी वन

[319:43]

होती है थर्ड टर्म हमारी टू होती है सेकंड

[319:45]

टर्म दोबारा से कॉल हुई वन तो ये हल्का सा

[319:48]

कॉम्प्लेक्टेड

[320:09]

इसको एक बार दोबारा करते हैं

[320:11]

रन और इसको करते हैं सॉल्व तो फिना ऑफ

[320:15]

सिक्स जो है वो आठ होता है एक बार फि

[320:17]

बनाची सीक्वेंस को लिखते हैं सीक्वेंस कुछ

[320:20]

इस तरीके का होता है 0 1 1 2 3 5 8 ये

[320:25]

जरूरत टर्म है ये फर्स्ट है ये सेकंड है

[320:27]

ये थर्ड है ये फोर्थ है ये फिफ्थ है ये

[320:29]

सिक्स्थ है तो सिक्स्थ टर्म सही है हमारी

[320:31]

आठ ही होती है फिनाज सीक्वेंस में तो ये

[320:34]

हमारा कोड है अपनी सीक्वेंस को लिखने का

[320:36]

और काफी सिंपल तरीके से हमने इस कोड को को

[320:38]

लिखा है बिल्कुल परेशानी नहीं होनी चाहिए

[320:40]

बहुत अच्छे से हमने एक कॉम्प्लेक्शन फिना

[320:43]

को समझ लिया है अब ये याद रखना क्योंकि

[320:45]

फिना के काफी सारे सवाल आपके आगे पूछ लिए

[320:48]

जाते हैं अगला सवाल हम ऑलरेडी सॉल्व कर

[320:50]

चुके हैं जो था कि राइट अ फंक्शन टू

[320:52]

प्रिंट द एथ टर्म ऑफ द फिना सीक्वेंस वो

[320:55]

सवाल हम कर चुके हैं अब एंड टर्म्स को

[320:57]

वैसे का वैसा करना हो फिना को अभी हमने

[320:59]

रिकर्स से किया है इस सेम चीज को हम लूप

[321:02]

से भी कर सकते हैं तो लूप से करना और आसान

[321:04]

होगा पर उसको मैं एज अ होमवर्क प्रॉब्लम

[321:06]

देना चाहूंगी क्योंकि मैं चाहती हूं इस

[321:07]

सवाल को आप खुद से करके देखें कि लूप से

[321:10]

हम कैसे इस क्वेश्चन को कर सकते हैं कैसे

[321:12]

इस सीरीज को हम लिख सकते हैं तो यह सारे

[321:15]

हमने काफी सारे सवाल कर लिए काफी सारे

[321:17]

कांसेप्ट पढ़ लिए हैं यहां पर मैं

[321:19]

रिक्वेस्ट करूंगी कि एक छोटा सा हल्का सा

[321:21]

ब्रेक लेना है थोड़ा सा पानी पी के आना है

[321:23]

थोड़ा सा रिफ्रेश करना है और उसके बाद

[321:25]

अपनी होमवर्क प्रॉब्लम्स करनी है बैठ के

[321:27]

नोट्स को हल्का सा रिवाइज करना है तो अब

[321:28]

हम शुरुआत करने वाले हैं अपने चैप्टर

[321:30]

सिक्स की जिसका नाम है पॉइंट्स अब पॉइंट्स

[321:32]

एक बहुत इंपॉर्टेंट टॉपिक है जब भी हम सी

[321:34]

या c+ प् की बात करते हैं बिकॉज़ कोर ऑफ

[321:37]

प्रोग्रामिंग हमें सिखा बा है कि मेमोरी

[321:39]

में एक्चुअली चीजें चल कैसे रही है हमें

[321:41]

हमारे प्रोग्राम के थ्रू इसके साथ-साथ

[321:43]

पॉइंट में थोड़ा सा टेढ़ा मेढा टॉपिक है

[321:45]

कुछ लोगों को बहुत इंटरेस्टिंग लगता है

[321:47]

कुछ लोगों को थोड़ा सा मुश्किल लगता है पर

[321:49]

इस वीडियो के अंदर हम पूरी कोशिश कर रहे

[321:51]

हैं मतलब मैं पूरी कोशिश कर रही हूं कि

[321:53]

मैं पॉइंट्स को बहुत अच्छे से समझा पाऊं

[321:55]

जिसके बाद सारे क्वेश्चंस आराम आराम से

[321:57]

निकल जाए सारे बेसिक कांसेप्ट हम कवर कर

[322:00]

रहे होंगे कुछ सवाल लेंगे जो बिल्कुल कोर

[322:02]

ऑफ प्रोग्रामिंग फॉर्म करते हैं तो अच्छे

[322:04]

से सवालों को भी सॉल्व करेंगे एंड उसके

[322:07]

साथ-साथ कुछ प्रैक्टिस को क्वेश्चंस भी

[322:09]

करेंगे जैसे पॉइंट्स का टॉपिक ना दिमाग

[322:11]

में बैठ जाएगा हमारे तो शुरुआत करते हैं

[322:14]

पॉइंट्स के साथ पॉइंट्स का मतलब होता है अ

[322:17]

वेरिएबल दैट स्टोर्स द मेमोरी एड्रेस ऑफ

[322:19]

अनदर वेरिएबल यूजुअली क्या होता था हम

[322:22]

मेमोरी के अंदर कोई भी एक वेरिएबल बना

[322:24]

लेते थे मान लीजिए हमने एक वेरिएबल बनाया

[322:25]

इंट ए = 22 ये वेरिएबल एक वैल्यू स्टोर कर

[322:30]

रहा है और वो वैल्यू क्या है वो वैल्यू है

[322:32]

एक नंबर और यह एक कोई भी नंबर हो सकता है

[322:35]

यह एक डाटा वैल्यू है यानी कोई डटा स्टोर

[322:37]

कर रहा है पर अगर हमारे दिमाग में किसी

[322:40]

दिन आए अब यह सारा का सारा काम मेमोरी के

[322:44]

अंदर किस तरीके से हो रहा है यह हमने

[322:45]

ऑलरेडी बात की थी कि मेमोरी के अंदर

[322:48]

ब्लॉक्स होते हैं ब्लॉक्स के अंदर कुछ

[322:50]

डाटा स्टोर होता है उस डाटा जहां भी स्टोर

[322:53]

हुआ है उस जगह को हम कुछ नाम दे देते हैं

[322:55]

जिस नाम को हम वेरिएबल कहते हैं अब जो भी

[322:58]

वो ब्लॉक ऑफ मेमोरी है उसका कुछ एड्रेस

[323:00]

होता होगा मेमोरी के अंदर जैसे इस मेमोरी

[323:03]

का एड्रेस है 2010 इस मेमोरी का एड्रेस है

[323:07]

2013 हम यहां पर इन ब्लॉक्स के एड्रेस की

[323:10]

बात कर रहे हैं इसको कैसे समझ सकते हैं

[323:12]

मान लीजिए हमारे पास पूरी की पूरी अर्थ है

[323:15]

वो अर्थ हमारी मेमरी है उसके ऊपर डिफरेंट

[323:17]

डिफरेंट प्लॉट्स हैं जो अलग-अलग लोगों के

[323:19]

पास हैं अब ये हर एक ब्लॉक विजुलाइज कराता

[323:23]

है हमें एक प्लॉट ये एक प्लॉट है जिसके

[323:25]

ऊपर हमने घर बना लिया है उस घ घर का नाम

[323:27]

हमने एज रख दिया है और घर के अंदर रह रहा

[323:30]

है नंबर 22 और यह रहा उस घर का एड्रेस

[323:32]

20110 अब कल को इस घर में हम 22 को निकाल

[323:35]

कर 21 को भी रख सकते थे या 22 को हटाकर हम

[323:39]

20 को रख सकते हैं घर में कोई भी रह सकता

[323:41]

है यानी कोई भी डाटा स्टोर हो सकता है

[323:42]

किसी भी मेमोरी लोकेशन के अंदर और इसका

[323:45]

नाम भी बदल सकते हैं अब शाहरुख खान के घर

[323:48]

का नाम मन्नत है तो अंबानी के घर का नाम

[323:50]

कुछ और है तो यहां पर हम एज को हटा के कुछ

[323:53]

भी वेरिएबल का नाम रख सकते हैं लेकिन अर्थ

[323:55]

के ऊपर जो प्लॉट है जो वो लैंड है कहीं पर

[323:58]

अगर कोई खेत है तो वो तो वहीं रहेगा ना वो

[324:01]

लैंड वहीं पर रहेगी इसीलिए ये मेमोरी

[324:03]

ब्लॉक वहीं का वहीं रहेगा और उसका एड्रेस

[324:05]

हमेशा फिक्स्ड होता है जब हमारे मदर ब आते

[324:08]

हैं ना कंप्यूटर के तो उसके ऊपर ऑलरेडी

[324:10]

फिक्स्ड होता है कि क्या एड्रेस होने वाला

[324:12]

है अब ये जो एड्रेस है जरूरी नहीं है

[324:13]

20110 हो या 2000 हो ये कुछ भी हो सकता है

[324:17]

हो सकता है आपकी मशीन में अलग तरीके से

[324:19]

एड्रेस लिखे जाते हो और मेरी मशीन में अलग

[324:21]

तरीके से एड्रेस लिखे जाते हो ये कंप्लीट

[324:23]

डिपेंड करता है कि आप कौन सी मशीन यूज कर

[324:25]

रहे हैं वो 32 बिट की है 64 बिट की है किस

[324:28]

तरीके का आपका सिस्टम है किस तरीके का

[324:30]

मेरा सिस्टम है तो उसकी टेंशन नहीं लेनी

[324:32]

एड्रेस कुछ भी हो सकता है तो वो कोई फिक्स

[324:35]

नंबर नहीं है जब भी आपसे क्वेश्चन पेपर

[324:36]

में पूछा जाएगा किसी कॉलेज के टेस्ट के

[324:39]

अंदर तो उसमें कुछ भी एड्रेस हो सकता है

[324:41]

अगर आपसे इंटरव्यूअर पूछ रहा है तो उसको

[324:43]

भी आपको बताना पड़ेगा कि एड्रेस क्या है

[324:45]

क्योंकि कोई फिक्स्ड फॉर्मेट नहीं होता पर

[324:47]

आई होप कि यहां पर ये चीज हमारे पास

[324:49]

क्लियर हो गई होगी कि जब भी कोई वेरिएबल

[324:52]

क्रिएट होता है तो उसके अंदर एक डेटा

[324:54]

वैल्यू स्टोर होती है उस वेरिएबल का नाम

[324:55]

मेमोरी लोकेशन के पास जाता है और मेमोरी

[324:57]

लोकेशन का एक एड्रेस होता है पर आज हमारा

[325:01]

मन किया कि हम एक वेरिएबल में डेटा वैल्यू

[325:03]

यानी ये 22 हमें स्टोर नहीं कराना हमें

[325:06]

स्टोर कराना है एक मेमोरी लोकेशन एक

[325:09]

मेमोरी एड्रेस तो जिस भी वेरिएबल में हम

[325:12]

वो मेमोरी एड्रेस को स्टोर कराएंगे उस

[325:14]

वेरिएबल को हम नाम देते हैं पॉइंटर जैसे

[325:16]

अगर हमें इस एज वेरिएबल का मेमोरी एड्रेस

[325:19]

कहीं पर स्टोर कराना होगा तो उसके लिए हम

[325:20]

एक नया वेरिएबल बनाएंगे मान लीजिए इस

[325:23]

वेरिएबल का नाम हमने दिया है पीटीआर व्हिच

[325:25]

इज शॉर्ट फॉर पॉइंटर अब इसके अंदर स्टोर

[325:27]

होगा मेमोरी एड्रेस यानी

[325:29]

2010 जो एज का मेमोरी एड्रेस है पर इसका

[325:33]

अपना खुद का भी तो एक मेमोरी एड्रेस होगा

[325:35]

क्योंकि ये लोकेशन भी तो कहीं ना कहीं

[325:37]

एजिस्ट करेगी ये ये भी तो एक वेरिएबल ही

[325:39]

है बस ये एक ऐसा वेरिएबल है जो दूसरे

[325:41]

वेरिएबल का मेमोरी एड्रेस स्टोर करा रहा

[325:43]

है तो आई होप कि बेसिक चीज हमें समझ में

[325:45]

आई होगी अब वेरिएबल दैट स्टोर्स द मेमोरी

[325:47]

एड्रेस ऑफ अनदर वेरिएबल इज अ पॉइंटर अब

[325:50]

पॉइंट्स लिखने का एक सिंटेक्स होता है

[325:52]

पॉइंट्स को हम नॉर्मल वेरिएबल की तरह नहीं

[325:55]

लिख सकते क्योंकि हमें कंपाइलर को पहले से

[325:57]

बताना पड़ता है कि ये जो वेरिएबल हम लिख

[325:58]

रहे हैं ये नॉर्मल वैल्यू स्टोर नहीं करता

[326:01]

ये एक मेमोरी एड्रेस की वैल्यू स्टोर करता

[326:03]

है व्हिच इज अ स्पेशल वैल्यू तो उसको

[326:05]

लिखने का सिंटेक्स ऐसा रहता है कि नॉर्मल

[326:07]

वेरिएबल को हम लिखते हैं इंट ए इ इक्वल 22

[326:10]

पर पॉइंटर के लिए हम जब भी एक पॉइंटर

[326:12]

बनाते हैं तो इंट के साथ हम एक एस्टरिस

[326:15]

लगाते हैं एक स्टार लगाते हैं फिर हम अपने

[326:18]

पॉइंटर वेरिएबल का नाम लिखते हैं फिर

[326:20]

लिखते हैं इज इक्वल टू एंड का सिंबल और एज

[326:23]

यानी यह पॉइंटर एक वेरिएबल है जो इस एज का

[326:28]

एड्रेस स्टोर कर रहा है यहां पर हमने दो

[326:31]

नई चीजें सीखी एक तो ये स्टार ये स्टार जो

[326:34]

होता है इसको हम कहते हैं वैल्यू एट

[326:39]

एड्रेस ऑपरेटर वैल्यू एट एड्रेस ऑपरेटर और

[326:43]

ये जो एम परसेंट होता है इसको हम कहते हैं

[326:46]

एड्रेस ऑफ ऑपरेटर जिसके भी सामने हम ये

[326:49]

एंड लगा देते हैं हमें उसका एड्रेस मिल

[326:52]

जाता है जिसके भी सामने स्टार लगा देते

[326:54]

हैं हमें उसकी वैल्यू मिल जाती है इसका

[326:56]

क्या मतलब हुआ यहां पर हमने पॉइंटर एक

[327:00]

वेरिएबल बनाया एक पॉइंटर वेरिएबल बनाया

[327:02]

कैसे पता चला पॉइंटर वेरिएबल है क्योंकि

[327:04]

एस्ट रिस्क लगता है पॉइंटर वेरिएबल के

[327:06]

सिंटेक्स में और उसको क्या कर दिया एड्रेस

[327:09]

ऑफ एज यानी एज का जो भी एड्रेस था वो अब

[327:13]

इस पॉइंटर के अंदर जाकर स्टोर हो गया यानी

[327:15]

मेमोरी के अंदर यह लोकेशन आ गई जहां पर

[327:17]

पॉइंटर वेरिएबल आ गया और उसके अंदर स्टोर

[327:19]

हो गया एज का एड्रेस दैट इज 2010 और अब

[327:22]

अगर हम देखना चाहे कि पॉइंटर जिस एड्रेस

[327:26]

को स्टोर करा रहा है वहां पर क्या वैल्यू

[327:28]

स्टोर्ड है तो उसके लिए हम यूज कर सकते

[327:30]

हैं यह वाला ऑपरेटर यानी यहां पर हम एक

[327:33]

नया वेरिएबल बना रहे हैं अंडरस्कोर एज

[327:35]

जिसके अंदर हम स्टोर करवा रहे हैं वैल्यू

[327:38]

ट एड्रेस पीटीआर यानी पॉइंटर के अंदर जो

[327:41]

भी एड्रेस है उसकी वैल्यू निकाल लो और उस

[327:43]

नए वेरिएबल में स्टोर कर लो तो क्या होगा

[327:46]

सबसे पहले तो ये नया वेरिएबल बनेगा नया

[327:48]

वेरिएबल का नाम होगा अंडर एज इसका कुछ और

[327:51]

एड्रेस हो सकता है मान लीजिए दिस इज 2011

[327:54]

अब इसके अंदर पॉइंटर पर जो भी एड्रेस

[327:57]

स्टोर है उसकी वैल्यू वैल्यू एट एड्रेस

[328:00]

व्हिच इज स्टोर्ड एट पॉइंटर पॉइंटर में

[328:02]

एड्रेस स्टोर्ड है 210 तो हम 210 पे

[328:05]

जाएंगे देखेंगे वहां कौन सी वैल्यू है तो

[328:07]

पॉइंटर के के पास स्टोर्ड है वैल्यू 210

[328:10]

और 20110 पर कौन सी वैल्यू स्टोर्ड है तो

[328:12]

210 पे हम चले जाएंगे वहां पे वैल्यू

[328:15]

स्टोर्ड है हमारी 22 तो उस 22 वैल्यू को

[328:18]

उठा के ले आएंगे और उसको नए वाले

[328:19]

अंडरस्कोर रेज में डाल देंगे एक बार हल्का

[328:22]

सा रीकैप कर लेते हैं हमने एक ओरिजिनल

[328:24]

वेरिएबल बनाया इंट ए = 22 हम अपने पॉइंटर

[328:28]

को कैसे डिक्लेयर करते हैं लिखते हैं इंट

[328:30]

स्टार इंट स्टार लिखेंगे तो इंटी जर की

[328:32]

वैल्यू स्टोर करवाने वाला पॉइंटर आ जाएगा

[328:34]

हमारे पास उसका हमने नाम दे दिया पीटीआर

[328:37]

उसमें स्टोर करवा या एज का एड्रेस अब अगर

[328:40]

यहां पर पॉइंटर पर जो एड्रेस है उस पर रखी

[328:44]

हुई वैल्यू को एक्सेस करना है तो उसके लिए

[328:45]

यूज करेंगे स्टार ऑपरेटर जिसको हम कहते

[328:48]

हैं वैल्यू एट एड्रेस ऑपरेटर यानी ये उस

[328:51]

पॉइंटर में स्टोर्ड जो भी एड्रेस होगा

[328:53]

उसकी वैल्यू को निकाल कर ले आएगा तो इसने

[328:55]

2 10 की वैल्यू यानी 22 को निकाल कर ये ले

[328:58]

आया और 22 को हमने असाइन कर दिया अपने नए

[329:01]

वेरिएबल एज को तो वो यहां पर जाकर स्टोर

[329:04]

हो गया तो इस तरीके से हमारे पॉइंट्स वर्क

[329:07]

करते हैं एक बार हल्का सा इसका छोटा सा

[329:09]

कोड लिखकर देख लेते हैं सबसे पहले

[329:11]

डिक्लेयर करेंगे एक वेरिएबल एज जिसमें

[329:13]

स्टोर करवा रहे हैं 22 अब उसके बाद हम

[329:16]

क्रिएट करने वाले हैं एक इंटी जर पॉइंटर

[329:19]

इंट स्टार पटी इ m पर एज अब यहां पर इस

[329:26]

स्टार को हम इंटी जर के साथ भी लगा सकते

[329:28]

हैं या फिर अपने वेरिएबल के साथ भी लगा

[329:30]

सकते हैं दोनों सिंटेक्स ठीक है एंड उसके

[329:33]

बाद हम क्या करेंगे एक नया वेरिएबल

[329:34]

बनाएंगे अंडरस्कोर एज और इसमें लिख देंगे

[329:38]

स्टार पीटीआर एक बार क्या करेंगे इसकी

[329:41]

वैल्यू प्रिंट करवाते हैं परसेंटेज डी अ ए

[329:45]

सेव एंड

[329:50]

रन तो यहां पर हमारे पास 22 प्रिंट होकर

[329:53]

आया है हल्का सा समझते हैं क्या हुआ हमारे

[329:56]

पास हमने एक वेरिएबल बनाया था एज 22 उसके

[329:59]

लिए हमने एक पॉइंटर बनाया पॉइंटर क्या

[330:00]

होता है उस मेमोरी लोकेशन को पॉइंट करता

[330:03]

है एज की जो मेमोरी है लोकेशन है उसका

[330:05]

एड्रेस उसने अपने अंदर स्टोर करवा लिया अब

[330:08]

अगर उस एड्रेस पर जो वैल्यू स्टोर्ड है

[330:11]

उसको हमें एक्सेस करना है पॉइंटर पर जो

[330:13]

एड्रेस है उसकी वैल्यू हम इससे निकाल

[330:15]

लेंगे और वो वैल्यू हमने एज में डाल दी नए

[330:18]

वाले एज में तो नए वाले एज को जब प्रिंट

[330:20]

करवाया तो पुराने वाली वैल्यू हमारे पास

[330:22]

वापस आ गई क्योंकि वही हमने यहां पर स्टोर

[330:24]

करा दी थी तो 22 हमारे पास प्रिंट होकर आ

[330:26]

गया तो कुछ इस तरीके से हमारे पॉइंटर का

[330:29]

सिंटेक्स वर्क करता है अब एक बार क्या

[330:31]

करते हैं हल्का सा डिटेल में बात करते हैं

[330:33]

कि पॉइंट्स को हम डिक्लेयर किस तरीके से

[330:35]

करते हैं हम बिल्कुल बेसिक से और बहुत ही

[330:38]

आराम से पढ़ रहे हैं हर चीज को मैं एमफसा

[330:40]

इज कर रही हूं एक-एक दो-दो बार बताने का

[330:43]

क्योंकि उससे चीजें जो है ना दिमाग में

[330:44]

बैठ जाएंगी तो फिर आपको बार-बार बार-बार

[330:47]

रिवीजन की जरूरत नहीं पड़ेगी दो-तीन बार

[330:49]

सेम चीज हम सुन लेते हैं ना तो वो दिमाग

[330:51]

में बैठ जाती है अब सबसे पहले जब पॉइंट्स

[330:53]

को डिक्लेयर करते हैं तो पॉइंटर को

[330:56]

डिक्लेयर करने का उसका जो टाइप होता है वो

[330:58]

डिपेंड करता है कि आप किस वेरिएबल की तरफ

[331:01]

पॉइंट करवाना चाह रहे हैं मतलब आप इंटी जर

[331:03]

वेरिएबल का एड्रेस स्टोर कराएंगे तो आपको

[331:05]

लिखना पड़ेगा इंट स्टार पीटीआर अगर आप

[331:08]

कैरेक्टर वेरिएबल का एड्रेस स्टोर कराएंगे

[331:10]

तो लिखना पड़ेगा कैरेक्टर स्टार पीटीआर

[331:12]

अगर आप फ्लोटिंग वेरिएबल का एड्रेस स्टोर

[331:14]

करवाएंगे पॉइंटर के अंदर तो लिखना पड़ेगा

[331:16]

फ्लोट स्टार पीटीआर यानी इंट एज इ इक्व ट

[331:21]

22 अगर इसका एड्रेस स्टोर कराना है एज का

[331:24]

तो हम ये यूज करेंगे अगर हमने लिखा है

[331:27]

कैरेक्टर स्टार इ इक्वल टू एस्ट रिस्क

[331:31]

इसका एड्रेस स्टोर करवाना है वेरिएबल का

[331:33]

तो हम ये लिखेंगे और अगर हमने लिखा है

[331:36]

फ्लोट प्राइस इ इक्वल टू

[331:41]

₹1 तो इसका अगर हमें एड्रेस स्टोर कराना

[331:44]

है प्राइस का तो हम यह लिख रहे होंगे जो

[331:47]

पॉइंटर का टाइप होता है वह डिपेंड करता है

[331:49]

कि किस टाइप का आपने उसके अंदर एड्रेस

[331:52]

स्टोर कराया है अगर आपने इंटी जर टाइप का

[331:55]

एड्रेस स्टोर कराया तो आपको इंट लिखना

[331:56]

पड़ेगा कैरेक्टर टाइप का स्टोर कराया तो

[331:59]

कैरेक्टर स्टार लिखना पड़ेगा फ्लोटिंग

[332:00]

टाइप का स्टोर कराया तो आपको फ्लोट स्टार

[332:03]

लिखना पड़ेगा नेक्स्ट चीज जिसकी हम बात

[332:05]

करेंगे वो है फॉर्मेट

[332:07]

अब पॉइंट्स को जब भी हम प्रिंट करवाते हैं

[332:09]

ना पॉइंटर नॉर्मल वेरिएबल नहीं होते अगर

[332:11]

आपने इंट स्टार पीटीआर लिख दिया तो ऐसा

[332:15]

नहीं है कि आप जब भी उसको प्रिंट करवाएंगे

[332:17]

तो आप परसेंटेज d लिख पाएंगे क्योंकि उसके

[332:20]

अंदर एक इंटी जर वैल्यू स्टोर्ड नहीं है

[332:23]

उसके अंदर एक एड्रेस स्टोर्ड है और एड्रेस

[332:26]

का अपना एक टाइप होता है एड्रेस के टाइप

[332:28]

के लिए हमें लिखना पड़ता है परसेंटेज p

[332:31]

परसेंटेज p का मतलब होता है c के अंदर

[332:33]

पॉइंटर एड्रेस अब यह वाला स्पेसिफीज यूज

[332:38]

करते हैं पर जब भी आप परसेंटेज p लिखेंगे

[332:39]

ना एक अजीब सी वैल्यू प्रिंट होगी वो हम

[332:42]

लिखकर देखेंगे कैसे प्रिंट होगी पर वो जो

[332:44]

अजीब सी वैल्यू प्रिंट होती है ना उसको

[332:46]

कभी-कभी हम परसेंटेज य की हेल्प से भी लिख

[332:48]

देते हैं यानी यहां पर हमारे पास यूजुअली

[332:51]

हेक्साडेसिमल वैल्यू आ जाएगी अगर सिस्टम

[332:54]

में हेक्साडेसिमल फॉर्म में पॉइंटर का

[332:55]

एड्रेस स्टोर्ड है तो पर अगर हमें नॉर्मल

[332:58]

नंबर्स की फॉर्म में चाहिए तो उसको हम

[332:59]

टाइप कास्ट कर देते हैं ये परसेंटेज य

[333:02]

होता है अनसाइंड इंट के

[333:05]

लिए और परसेंटेज प होता है हमारे पॉइंटर

[333:08]

एड्रेस के लिए तो कभी-कभी पॉइंटर एड्रेस

[333:10]

अजीब सा ना दिखे इसलिए उसको परसेंटेज यू

[333:13]

करके भी हम प्रिंट करवाते हैं हम दोनों

[333:15]

सीख रहे होंगे दोनों को करके देखेंगे

[333:17]

दोनों में डिफरेंसेस भी समझेंगे कोड की

[333:19]

हेल्प से सबसे पहले क्या करते हैं अपने

[333:21]

थोड़े से सिंटेक्स को हम देखते हैं सबसे

[333:24]

पहले देखेंगे इस लाइन को इसमें लिखा है

[333:26]

प्रिंट ए परसेंटेज p मतलब हम एक पॉइंटर की

[333:29]

वैल्यू को प्रिंट करवाने वाले हैं एक

[333:30]

मेमोरी एड्रेस को प्रिंट करवाने वाले हैं

[333:32]

उसके बाद लिखा है एंड एज जब भी हम एंड

[333:35]

लिखते हैं और उसके बाद एक वेरि का नाम

[333:38]

लिखते हैं मतलब एंड इज एड्रेस ऑफ तो हमें

[333:41]

उस वेरिएबल का एड्रेस मिल जाता है अब

[333:43]

एड्रेस का टाइप क्या होता है परसेंटेज p

[333:45]

तो हम एड्रेस प्रिंट करवा देंगे नेक्स्ट

[333:47]

लाइन में हमने लिखा है पीटीआर अब पॉइंटर

[333:49]

भी तो वही करेगा ना अगर एम परसेंट एज हमें

[333:52]

एड्रेस देता है तो पॉइंटर भी हमें एड्रेस

[333:54]

देता है तो उसमें भी परसेंटेज p और अगर हम

[333:57]

लिखना चाहें एड्रेस ऑफ पॉइंटर यानी पॉइंटर

[334:01]

का भी तो कोई एड्रेस होगा जैसे एज का कोई

[334:04]

एड्रेस था तो एज का एड्रेस हमने पॉइंटर

[334:06]

में स्टोर करा दिया पर पॉइंटर भी तो किसी

[334:08]

लैंड पर खड़ा है ना पॉइंटर के पास भी अपना

[334:11]

खुद का प्लॉट है तो उसका भी कोई एड्रेस

[334:13]

होगा उस एड्रेस को भी अगर हमें प्रिंट

[334:15]

करवाना है तो उसके लिए भी परसेंटेज प हम

[334:17]

यूज करेंगे इसीलिए यहां पे

[334:21]

स्पेसिफाइड करके देखते हैं तो हमने क्या

[334:24]

किया है एक वेरिएबल बना रखा है जिसके अंदर

[334:27]

22 है और एक पॉइंटर के अंदर उस वेरिएबल का

[334:29]

एड्रेस स्टोर करा रखा है अब एक एक करके

[334:32]

चीजों को प्रिंट करवाएंगे

[334:33]

सबसे पहले हम प्रिंटिंग सीख रहे हैं

[334:36]

एड्रेस की कि एड्रेस को कैसे प्रिंट

[334:38]

करवाते हैं तो लिखेंगे परसेंटेज प उसके

[334:41]

बाद लिखेंगे एम परसेंट एज इसको कर लेते

[334:45]

हैं सेव और इसको करते हैं एक बार

[334:50]

रन तो यह कुछ वैल्यू हमारे पास आई है यहां

[334:54]

पर एक बै स्ल ए भी लगा लेते

[334:57]

हैं यह जो वैल्यू है यह एज के एड्रेस की

[335:02]

वैल्यू है ये जो फॉर्मेट है इसको

[335:04]

हेक्साडेसिमल फॉर्मेट कहते हैं अब हो सकता

[335:07]

है आप अप मशीन में जब प्रिंट करें तो आपको

[335:09]

कोई दूसरी अलग वैल्यू आए तो उसमें परेशानी

[335:11]

की बात नहीं है अलग-अलग सिस्टम्स के हिसाब

[335:13]

से अलग-अलग मेमोरी एड्रेस होते हैं तो

[335:15]

आपका एड्रेस और मेरा एड्रेस बिल्कुल अलग

[335:17]

हो सकता है सेम वेरिएबल के लिए उसमें

[335:19]

परेशानी की बात नहीं है पर ये जो फॉर्मेट

[335:21]

है ना इसको पढ़ने में थोड़ी सी तकलीफ आती

[335:23]

है तो हम क्या कर सकते हैं अपने पूरे के

[335:26]

पूरे एड्रेस को हेक्साडेसिमल से कन्वर्ट

[335:28]

करके अनसाइंड इंट में कन्वर्ट कर सकते हैं

[335:31]

अगर अनसाइंड इन में कन्वर्ट करेंगे वैसे

[335:34]

तो वार्निंग थ्रो करेगा कि ये सही तरीका

[335:36]

नहीं है इन चीजों को करने का पर पढ़ने में

[335:38]

आसानी हो इसीलिए इस एड्रेस को इसने क्या

[335:41]

किया इस नंबर में कन्वर्ट कर दिया तो हम

[335:43]

यहां पर देखें तो इसको हम अजूम कर सकते

[335:45]

हैं कि यह हमारा मेमोरी एड्रेस है अब चाहे

[335:47]

हम परसेंटेज प प्रिंट करें परसेंटेज य

[335:50]

हमारे लिए एड्रेस सेंस नहीं बनाएगा पर एक

[335:52]

चीज पता चल गई कि एड्रेस यह है अब क्या

[335:55]

करेंगे सेम चीज करके देखेंगे पीटीआर के

[335:58]

लिए इस परसेंटेज प को कर देते

[336:02]

हैं कॉमेंट आउट प्रिंट एफ परसेंटेज यू

[336:08]

ए एंड

[336:10]

पीटीआर इसको कर लेते हैं

[336:14]

सेव ये कुछ वार्निंग्स थ्रो हो रही है पर

[336:17]

इनको हम इग्नोर करेंगे यहां पे हमें एक

[336:19]

चीज दिख गई कि जब हमने एड्रेस एज का

[336:22]

प्रिंट करवाया तब जो वैल्यू प्रिंट हुई और

[336:24]

जब हमने पीटीआर को प्रिंट करवाया पीटीआर

[336:26]

यानी इस वेरिएबल की वैल्यू को प्रिंट

[336:28]

करवाया तो ये दोनों सेम है सेम इसलिए है

[336:30]

क्योंकि एज का जो भी एड्रेस था वो अब

[336:33]

अल्टीमेटली पीटीआर के अंदर ही जाके स्टोर

[336:35]

हो गया है तो इसी वजह से दोनों वैल्यूज

[336:37]

सेम है और इसके बाद अगर हम प्रिंट करवाना

[336:41]

चाहे अपने पीटीआर के एड्रेस को तो उसके

[336:44]

लिए क्या लिखेंगे एम पर यानी एड्रेस ऑफ

[336:47]

पीटीआर इसको भी कर लेते हैं सेव अब इसको

[336:50]

रन करते हैं ये फर्स्ट और सेकंड जो वैल्यू

[336:53]

है ये दोनों सेम है क्योंकि एज और पीटीआर

[336:56]

दोनों सेम वैल्यू होल्ड करते हैं पर जब भी

[336:59]

पीटीआर का एड्रेस प्रिंट करवाएंगे ये

[337:00]

वैल्यू अलग है इसमें आप नोटिस करेंगे

[337:03]

लास्ट के जो दो डिजिट्स हैं ये अलग हैं इन

[337:05]

दोनों में सेम है तो इन दोनों में सेम सेम

[337:07]

एड्रेस वैल्यू है और इसकी जो एड्रेस

[337:09]

वैल्यू है यानी पीटीआर का जो एड्रेस है वो

[337:11]

अलग है तो कुछ इस तरीके से हम अपना एड्रेस

[337:13]

जो है उसको प्रिंट करवाते हैं नेक्स्ट बात

[337:16]

करते हैं कि पॉइंटर पर जो एड्रेस स्टोर्ड

[337:18]

है उसकी वैल्यू कैसे प्रिंट करवाते हैं तो

[337:20]

इसमें हम सीख रहे होंगे वैल्यू एट एड्रेस

[337:23]

ऑपरेटर के बारे में अब सबसे पहले अगर हमें

[337:26]

एज की वैल्यू प्रिंट करवानी है तो हमें

[337:28]

ऑलरेडी पता है कि हमें परसेंटेज डी करने

[337:30]

की जरूरत है क्योंकि एज इंटी जर टाइप की

[337:32]

वैल्यू होल्ड करता है तो हम लिख देंगे

[337:34]

परसेंटेज डी ये सबसे नॉर्मल है पर अगर

[337:36]

हमें पॉइंट वैल्यू एट पॉइंटर प्रिंट

[337:39]

करवानी है तो हम उसके आगे लगा देंगे स्टार

[337:41]

ये एस्टरिस का मतलब है वैल्यू एट एड्रेस

[337:44]

तो पॉइंटर के अंदर जो भी एड्रेस होगा उस

[337:47]

एड्रेस के ऊपर जो भी वैल्यू होगी उसको वो

[337:49]

प्रिंट करवा देगा तो हमें पता है कि

[337:51]

पॉइंटर के अंदर हमारा एड्रेस है

[337:55]

1020 और 1020 के ऊपर स्टोर्ड है हमारा एज

[338:00]

वेरिएबल जिसमें है हमारी एज 22 तो क्या

[338:03]

करेगा पहले इस एड्रेस पे जाएगा फिर इस

[338:05]

एड्रेस पे वैल्यू पे जाएगा फिर इस वैल्यू

[338:07]

को वो प्रिंट करवा देगा तो यहां पे भी 22

[338:10]

प्रिंट होगा यहां पे भी 22 प्रिंट होगा अब

[338:13]

एक और हल्का सा दोनों का कॉमिनेशन देख

[338:15]

लेते हैं यहां पे सबसे पहले हमने लिखा

[338:17]

एड्रेस ऑफ एज तो यहां से हमारे पास एज का

[338:20]

एड्रेस आ गया फिर हमने लिखा स्टार एरिक्स

[338:24]

वैल्यू एट दैट एड्रेस तो एज का एड्रेस आया

[338:27]

है 210 ये बोलेगा उस पर जो वैल्यू है वो

[338:31]

मुझे दे दो तो 2 10 पर क्या वैल्यू है तो

[338:34]

यहां पर आ जाएगा सबसे पहले एज का एड्रेस

[338:36]

एज का एड्रेस है 1020 और ये कह देगा

[338:39]

वैल्यू एट 1020 मुझे दे दो आई वैल्यू एट

[338:42]

1020 क्या है ये 22 तो यहां पे भी हमारे

[338:45]

पास 22 ही प्रिंट होगा इसको कोड से

[338:47]

वेरीफाई करके देख लेते हैं सबसे पहले हमने

[338:50]

एड्रेस कैसे प्रिंट करता है वो सीखा था अब

[338:52]

हम सीखेंगे वैल्यू कैसे प्रिंट करते हैं

[338:54]

तो वैल्यू प्रिंट करने के लिए सबसे पहले

[338:56]

लिखेंगे प्रिंट एफ परसेंटेज डी क्योंकि हर

[339:01]

बार हम वैल्यू प्रिंट करने वाले हैं तो हर

[339:02]

बार टाइप हमारा परसेंटेज डी रहेगा सबसे

[339:05]

पहले एज प्रिंट करते हैं बैक स्ल ए

[339:08]

कंट्रोल

[339:10]

s एज को प्रिंट किया तो हमारे पास 22

[339:13]

नॉर्मली प्रिंट होकर आ गया पर अब हम क्या

[339:15]

करने वाले हैं अब हम पॉइंटर पर जो एड्रेस

[339:18]

है उसकी वैल्यू को स्टोर करेंगे इनफैक्ट

[339:21]

इसको कर लेते हैं कंट्रोल सी कंट्रोल व

[339:25]

एंड

[339:26]

कंट्रोल यहां पे

[339:29]

लिखेंगे वैल्यू एट एड्रेस पीटीआर और यहां

[339:33]

लिखेंगे वैल्यू एट एड्रेस एड्रेस ऑफ ए

[339:37]

इन दोनों को कर लेते हैं सेव एंड रन तो

[339:40]

हमारे पास हर बार 22 प्रिंट होकर आया

[339:43]

क्योंकि चाहे हम कुछ भी कोई भी सिंटेक्स

[339:45]

लिख रहे हैं इन सब में से हमारे पास

[339:47]

अल्टीमेटली हम पहुंच तो उसी एड्रेस प रहे

[339:49]

हैं उसी प्लॉट पे पहुंच रहे हैं चाहे इस

[339:51]

घर से होके जाए डायरेक्टली उसी के घर पे

[339:53]

पहुंच जाए पहुंच हम फाइनल उसी प्लॉट पे

[339:56]

रहे हैं इसीलिए हर बार उसी प्लॉट में रहने

[339:58]

वाले लोगों की वैल्यू को प्रिंट करा रहे

[340:00]

हैं मतलब 22 को प्रिंट करवा रहे हैं तो आई

[340:02]

होप कि हमें ये वाला सिंटेक्स भी क्लियर

[340:04]

होगा कि एस्ट रिस्क पीटीआर मतलब पॉइंटर

[340:06]

वैल्यू ट एड्रेस अगर हम लगा दें पॉइंटर के

[340:09]

सामने तो कौन सी वैल्यू प्रिंट होती है और

[340:11]

एस्टरिस को अगर एम परसेंट एज के सामने लगा

[340:14]

दें मतलब एड्रेस निकाल ले और फिर एस्ट

[340:16]

रिस्क लगाए तो कौन सी वैल्यू प्रिंट होती

[340:18]

है नेक्स्ट चीज जिसकी हम बात कर रहे होंगे

[340:21]

वो है एक प्रैक्टिस क्वेश्चन जिससे चीजें

[340:24]

और क्लियर हो जाएंगी इस क्वेश्चन में हमें

[340:26]

आउटपुट फाइंड आउट करना है क्वेश्चन हमारा

[340:28]

कुछ ऐसा है कि सबसे पहले हमने क्या किया

[340:31]

है एक पॉइंटर बनाया है पीटीआर नाम से और

[340:33]

एक इंटी जर बनाया है x अब पॉइंटर के अंदर

[340:36]

हमने x का एड्रेस डाल दिया है इसको हल्का

[340:40]

सा मेमोरी से विजुलाइज करते हैं हमारे पास

[340:42]

है एक पॉइंटर और हमारे पास है एक वेरिएबल

[340:45]

x अब x का जो एड्रेस है मान लीजिए एड्रेस

[340:48]

कुछ भी हो सकता है 2000 है ये एड्रेस इसको

[340:50]

हमने पॉइंटर के अंदर ऑलरेडी स्टोर करा

[340:52]

दिया है और एस्ट रिस्क पीटीआर में हमने

[340:55]

स्टोर करा दी है वैल्यू जीरो एस्ट रिस्क

[340:59]

पीटीआर मतलब वैल्यू एट एड्रेस ऑफ पीटीआर

[341:02]

पीटीआर में कौन सा एड्रेस है 2000 तो एस्ट

[341:05]

रिस्क पीटीआर क्या होगा x यानी 2000 2000

[341:09]

के अंदर स्टोर करा दिया है हमने जीरो यहां

[341:12]

पर कुछ ऐसा हुआ है हमारी यह वाली लाइन

[341:15]

बहुत इंपॉर्टेंट है जिसको हमें ध्यान देने

[341:18]

की जरूरत है इस लाइन में क्या हो रहा है

[341:21]

पीटीआर के अंदर जो भी एड्रेस है हम उस

[341:23]

एड्रेस पर जाएंगे और वहां पे जीरो स्टोर

[341:25]

करा देंगे पीटीआर के अंदर 2000 है तो हम

[341:27]

2000 पे जाएंगे और वहां पे जीरो स्टोर करा

[341:30]

देंगे तो इस तरीके का काम हमने किया है

[341:32]

यहां पे अब क्या कर रहे हैं x की वैल्यू

[341:34]

को प्रिंट कर रहे हैं और पीटीआर की वैल्यू

[341:36]

को प्रिंट कर रहे हैं तो यहां पर x की

[341:38]

वैल्यू हमारे पास क्या आएगी x की वैल्यू

[341:40]

आएगी 0 क्योंकि हमने x में इनडायरेक्टली

[341:43]

रो स्टोर करा दिया आप नोटिस करेंगे यहां

[341:45]

पे कोई भी लाइन ऐसी नहीं है जिसमें x इ टू

[341:47]

समथिंग लिखा हो पर हमने फिर भी x में

[341:49]

वैल्यू असाइन कर दी कैसे असाइन कर दी इस

[341:52]

लाइन की हेल्प से क्योंकि यहां पर

[341:53]

इनडायरेक्टली हमने x को एक्सेस कर लिया है

[341:56]

उसके एड्रेस की फॉर्म में तो यहां पे

[341:59]

ज़ीरो प्रिंट होगा और वैल्यू एट पीटीआर

[342:02]

मतलब पीटीआर के अंदर जो एड्रेस है उसपे आप

[342:04]

चले जाओ और वहां पे स्टोर्ड वैल्यू का आप

[342:05]

स्टोर करा दो तो यह भी

[342:08]

जरू नेक्स्ट हमने क्या किया इतने पार्ट को

[342:10]

ना इस पार्ट को हम कोड कर लेते हैं और

[342:13]

इसको कर लेते हैं वेरीफाई सबसे पहले एक

[342:15]

इंटी जर वेरिएबल बना लेते हैं जिसमें

[342:17]

स्टोर करा रहे हैं हम कुछ भी नहीं शुरुआत

[342:20]

में और उसके अलावा एक पॉइंटर बना लेते हैं

[342:22]

पीटीआर नाम

[342:24]

से अब पीटीआर के अंदर हम क्या कर रहे हैं

[342:27]

स्टोर करवा रहे हैं हमारे एक्स का एड्रेस

[342:31]

और फिर इनडायरेक्टली पीटीआर पर जो एड्रेस

[342:34]

है उस एड्रेस के अंदर स्टोर करा रहे हैं

[342:36]

हम जीरो तो सबसे पहले हम प्रिंट करने की

[342:39]

कोशिश करेंगे परसेंटेज डी ब n x की वैल्यू

[342:43]

को एंड उसके बाद हम प्रिंट करने की कोशिश

[342:47]

करेंगे अपने स्टार पीटीआर

[342:50]

को यहां पर लिख देते हैं x इ स्टार पीटीआर

[342:55]

इ तो अब हमने ऑलरेडी डिस्कस कर लिया है कि

[342:58]

इस लाइन की वजह से हमारी जो x की वैल्यू

[343:01]

है वो जीरो आ चुकी है तो यहां पर भी हमारे

[343:03]

पास जीरो प्रिंट होना चाहिए और यहां पर भी

[343:05]

हमारे पास जीरो प्रिंट होना चाहिए तो इसको

[343:08]

सेव करके वेरीफाई कर लेते

[343:10]

हैं तो हमारे पास दोनों केसेस में जीरो

[343:13]

प्रिंट हुआ है क्योंकि दोनों वैल्यू जीरो

[343:15]

है अब नेक्स्ट लाइन की तरफ बढ़ते हैं

[343:16]

नेक्स्ट लाइन इससे भी ज्यादा इंपॉर्टेंट

[343:18]

लगती है मुझे नेक्स्ट लाइन कहती है स्टार

[343:22]

पीटीआर + = 5 इस लाइन को भी कर लेते हैं

[343:26]

इंपॉर्टेंट मार्क थोड़ा सा इसको ब्रेक अप

[343:29]

करें तो ये कहती है स्टार पीटीआर = स्टार

[343:33]

पीटीआर + 5 ये कहने का क्या मतलब हुआ

[343:37]

कि पॉइंटर में जो एड्रेस है मतलब वैल्यूड

[343:40]

एड्रेस एट पॉइंटर मतलब 2000 जो भी एड्रेस

[343:43]

है यहां पर स्टार पीटीआर हम जब भी लिख रहे

[343:46]

हैं उसका मतलब है x स्टार पीटीआर क्या है

[343:48]

एड्रेस ऑफ x तो x पर जो भी वैल्यू है

[343:51]

उसमें आप फ ऐड कर दो और उसको वापस से इसका

[343:55]

मतलब भी x है x में असाइन कर दो तो क्या

[343:58]

होगा इस लाइन का बेसिकली मतलब है x + = 5

[344:02]

तो x के अंदर क्या वैल्यू थी 0 रो में

[344:04]

हमने ऐड किया फ तो यहां पर इस लाइन की मदद

[344:07]

से हमारी x की वैल्यू हो जाएगी 5 अब x की

[344:12]

वैल्यू फ होगी तो यहां पर हमारे लिए

[344:13]

प्रिंट होगा फ और स्टार पीटीआर भी क्या

[344:16]

होगा मतलब वैल्यू एट एड्रेस पीटीआर पे तो

[344:19]

x का एड्रेस है तो x की वैल्यू दोबारा से

[344:21]

प्रिंट होगी च्च इज 5 इसको भी हम वेरीफाई

[344:24]

कर लेते हैं अपने कोड में यहां पर हम

[344:27]

लिखेंगे स्टार पीटीआर प्स इक्ट 5 और अब

[344:31]

लगाएंगे अपनी प्रिंट स्टेटमेंट इस लाइन की

[344:35]

मदद से हमारे जो x की वैल्यू है है वो

[344:37]

फाइव बन गई है तो यहां पे भी प्रिंट होगा

[344:39]

फाइव और यहां पे भी प्रिंट होगा हमारे पास

[344:41]

फाइव इसको भी वेरीफाई कर लेते

[344:44]

हैं अब हमारे पास दोनों वैल्यूज जो हैं

[344:46]

पहले जीरो थी अब फाइव हो गई है नेक्स्ट

[344:49]

चीज जिसकी बात करेंगे नेक्स्ट लाइन थोड़ी

[344:52]

सी और इंपॉर्टेंट है देखते हैं कैसे अब

[344:55]

यहां पर हम कर रहे हैं इंक्रीमेंट ऑपरेटर

[344:57]

का इस्तेमाल ये इंक्रीमेंट ऑपरेटर क्या कर

[345:00]

रहा है इसको ब्रेक डाउन करें तो स्टार

[345:03]

पीटीआर = स्टार पटी + 1 इस तरीके का मतलब

[345:07]

है और हमने डिस्कस किया जब भी स्टार

[345:09]

पीटीआर आए उसका मतलब वेरिएबल ही होता है

[345:12]

स्टार पीटीआर यानी x + 1 = x तो x की

[345:16]

वैल्यू हो जाएगी पहले फव थी तो अब हो

[345:19]

जाएगी 6 तो यहां पर भी x की वैल्यू सिक्स

[345:22]

प्रिंट होगी और यहां पर भी स्टार पीटीआर

[345:24]

यानी x की वैल्यू प्रिंट हो गई 6 इन

[345:26]

लाइनों को भी एक बार लिख लेते हैं दोबारा

[345:29]

स्टार

[345:30]

पीटीआर प्लस प्लस आप नोटिस करेंगे कि

[345:33]

स्टार पीटीआर एक साथ है और प्लस प्लस

[345:36]

ब्रैकेट के बाद यानी स्टार पीटीआर का प्लस

[345:38]

हो रहा है पीटीआर का प्लस नहीं हो रहा तो

[345:41]

पॉइंटर प्लस प्लस नहीं हो रहा स्टार

[345:42]

पीटीआर पॉइंटर पे जो एड्रेस है उस पर जो

[345:45]

वैल्यू है वो वैल्यू प्लस प्लस हो रही है

[345:47]

यहां पे करवा लेते हैं अपनी वैल्यू प्रिंट

[345:49]

हमारे पास सिक्स आना चाहिए और यहां पर भी

[345:52]

प्रिंट होकर आना चाहिए

[345:54]

सिक्स दोबारा से इसको कंपाइल एंड रन तो अब

[345:59]

हमारे पास एंड में आया है सिक्स एंड स्टार

[346:01]

पीटीआर भी सिक्स तो पॉइंटर को लिखते कैसे

[346:04]

हैं पॉइंटर में क्या वैल्यू स्टोर होती है

[346:06]

उसको कैसे प्रिंट करवाना है वेरिएबल का

[346:09]

एड्रेस कैसे निकालना है एड्रेस से वेरिएबल

[346:11]

की वैल्यू कैसे निकालनी है पॉइंटर पर जो

[346:13]

एड्रेस टोड है उससे वैल्यू कैसे निकालनी

[346:15]

है हमने काफी सारी चीजें एक्सप्लोर कर ली

[346:17]

है और ये जो सवाल है ना आपसे पॉइंटर के

[346:20]

सवाल चाहे आपके कॉलेज वाले पूछे जाए

[346:22]

रिक्रूटर पूछे इसी ना इसी फॉर्म में होंगे

[346:25]

इसी का कोई फॉर्म चेंज देके का आपको कहीं

[346:27]

पर एम पर लगा के दे देंगे कहीं एस्ट रिस्क

[346:29]

लगा के दे देंगे कहीं आपको एड्रेस निकालने

[346:32]

को कह देंगे कहीं वैल्युएट एड्रेस निकालने

[346:34]

को कह देंगे और इसी कंफ्यूजन में मोस्टली

[346:36]

बच्चे जाते हैं बेस्ट तरीका यह है हमने जो

[346:39]

बेसिक अभी डिस्कस किए हैं उनको एक बार देख

[346:41]

लें और अगर हल्का सा भी कंफ्यूजन है तो एक

[346:44]

बार और देख लें उसके बाद सवाल ढेर सारे कर

[346:47]

ले पॉइंट्स पे एक बार हम बहुत सारे सवाल

[346:49]

कर लेते हैं ना स्पेशली पेपर से एक दिन

[346:51]

पहले या अपने इंटरव्यू से एक दिन पहले तो

[346:53]

सारी चीजें क्लियर हो जाएंगी पॉइंट्स के

[346:55]

बारे में अब नेक्स्ट चीज जिसकी हम बात

[346:57]

करेंगे वो है पॉइंटर टू पॉइंटर पॉइंटर टू

[346:59]

पॉइंटर एक ऐसा वेरिएबल है जो दूसरे पॉइंटर

[347:02]

का एड्रेस स्टोर करा रहा है तो वेरिएबल

[347:04]

दैट स्टोर्स द मेमोरी एड्रेस ऑफ अनदर

[347:06]

पॉइंट

[347:07]

जैसे एग्जांपल के तौर पर हमारी मेमोरी है

[347:10]

इसके अंदर सबसे पहले हमने एक वेरिएबल

[347:11]

बनाया ए जिसके अंदर स्टोर्ड है 22 इस

[347:14]

वेरिएबल का जो एड्रेस है वो है 210 अब

[347:18]

हमने एक नया पॉइंटर बनाया पीटीआर इसके

[347:20]

अंदर हमने क्या सोचा कि इसको पॉइंट करवा

[347:23]

देते हैं एज की तरफ तो एज का जो एड्रेस है

[347:26]

20110 वो यहां पे आ जाएगा अब इस पॉइंटर का

[347:29]

भी तो कुछ एड्रेस होगा ना 20113 जैसे हमने

[347:31]

प्रिंट करवा के देखा था तो कुछ वैल्यू आई

[347:33]

थी अब हम चाहते हैं इस पॉइंटर के भी

[347:36]

एड्रेस को हम किसी नए वेरिएबल में स्टोर

[347:38]

करा दें उसको कैसे स्टोर कराएंगे हम एक

[347:40]

नया वेरिएबल बनाएंगे पॉइंटर टू पॉइंटर पी

[347:43]

पीटीआर इसके अंदर हम स्टोर करा देंगे

[347:46]

पीटीआर की एड्रेस को तो यहां पे 20113 आकर

[347:49]

स्टोर हो जाएगा और इसका भी अपना कुछ

[347:50]

एड्रेस होगा अब ये चेन जो है कंटिन्यू कर

[347:53]

सकती है हो सकता है हम एक नया पॉइंटर टू

[347:55]

पॉइंटर बनाएं जो इसकी एड्रेस को स्टोर कर

[347:58]

ले फिर एक नया बनाए जो उसके एड्रेस को

[348:00]

स्टोर कर ले तो ये चेन अब चलती रहेगी हम

[348:02]

लास्ट लेवल ऑफ़ चेन पर आ गए हैं यानी

[348:04]

पॉइंटर टू पॉइंटर हम बहुत रेयरली रियल

[348:07]

लाइफ प्रोग्रामिंग में पॉइंटर टू पॉइंट्स

[348:08]

को यूज़ करते हैं पर इनको थोड़ा कांसेप्ट

[348:10]

बिल्ड अप करने के लिए पढ़ना जरूरी है

[348:12]

क्योंकि रिक्रूटर पूछ सकते हैं अगर वो

[348:14]

किसी वेबसाइट से इंटरव्यू से पहले देख के

[348:17]

आए टॉप फाइव पॉइंटर क्वेश्चंस या आपके

[348:19]

कॉलेज वाले प्रोफेसर इसको सिलेबस के अंदर

[348:21]

डाल सकते हैं तो पॉइंटर टू पॉइंटर को किस

[348:23]

तरीके से डिक्लेयर करते हैं यूज करते हैं

[348:26]

उसके सिंटेक्स की बात करते हैं जैसे

[348:28]

पॉइंट्स को हम लिखा करते थे इंट स्टार

[348:31]

पीटीआर की फॉर्म में और पॉइंटर टू पॉइंटर

[348:34]

हो गया है तो यहां एक स्टार की जगह हम बस

[348:36]

डबल स्टार लगा देंगे तो इसका मतलब है

[348:38]

पॉइंटर टू पॉइंटर तो अगर एक इंटी जर

[348:41]

पॉइंटर का एड्रेस स्टोर कराना है तो इंट

[348:43]

डबल स्टार पीपीटी आर अगर एक कैरेक्टर

[348:46]

पॉइंटर का एड्रेस स्टोर कराना है तो

[348:48]

कैरेक्टर डबल स्टार पीपीटी अगर एक

[348:51]

फ्लोटिंग वेरिएबल का फ्लोटिंग पॉइंटर का

[348:53]

एड्रेस स्टोर कराना है तो फ्लोट डबल स्टार

[348:55]

पीपीटी अब ये जो पीपीटी आर है ये एक

[348:58]

वेरिएबल का नाम है मतलब जरूरी नहीं है आप

[349:00]

पीपीटी रखें वो तो मैंने अंडरस्टैंडिंग के

[349:02]

लिए उसको पॉइंटर टू पॉइंटर दिखाने के लिए

[349:04]

आप इसको इस तरीके से भी लिख सकते हैं

[349:07]

कैरेक्टर डबल स्टार डबल स्टार स्टार यह भी

[349:11]

एक पॉइंटर टू पॉइंटर ही है क्योंकि इसका

[349:13]

टाइप कैरेक्टर स्टार स्टार है अब बात करते

[349:15]

हैं एक प्रैक्टिस क्वेश्चन की अब पॉइंटर

[349:17]

टू पॉइंटर को एक्चुअली बनाकर देख लेते हैं

[349:20]

हम क्या करेंगे एक वेरिएबल बनाते हैं सबसे

[349:22]

पहले वेरिएबल है फ्लोटिंग टाइप का इस बार

[349:25]

बनाते हैं प्राइस प्राइस के अंदर वैल्यू

[349:27]

स्टोर्ड है 00 अब एक नया पॉइंटर बनाएंगे

[349:31]

फ्लोट स्टार पीटीआर पीटीआर स्टोर करेगा

[349:35]

एड्रेस ऑफ प्राइस अब एक और नया पॉइंटर

[349:38]

बनाएंगे ये होगा पॉइंटर टू पॉइंटर यानी

[349:40]

पीपीटी आर पीपीटी आर के अंदर स्टोर

[349:43]

कराएंगे हम एड्रेस ऑफ पीटीआर तो पीटीआर का

[349:46]

हमने एड्रेस लिया उसको पी पीटीआर के अंदर

[349:48]

स्टोर करा दिया तो आई होप ये चेन हमें

[349:50]

क्लियर होगी कि नॉर्मल वेरिएबल का एड्रेस

[349:52]

स्टोर करता है हमारा पॉइंटर और पॉइंटर

[349:54]

वेरिएबल का एड्रेस स्टोर कराता है हमारा

[349:56]

पॉइंटर टू पॉइंटर तो ये चेंज चलती रहती है

[349:59]

अब एक सवाल की फॉर्म में इसको और थोड़ा सा

[350:01]

समझते हैं क्वेश्चन हमारा है प्रिंट द

[350:04]

वैल्यू ऑफ आ फ्रॉम इट्स पॉइंटर टू पॉइंट

[350:07]

यहां पर हमें कोई भी एक वेरिएबल दिया होगा

[350:09]

मान लीजिए इंट आ इ 5 य एक वेरिएबल दिया

[350:13]

हुआ है अब हमें इसका पॉइंटर टू पॉइंटर

[350:15]

गिवन है मतलब इसका सबसे पहले हमने कोई

[350:18]

पॉइंटर बनाया होगा इंट पीटीआर जिसमें

[350:20]

वैल्यू हमने स्टोर कराई होगी एड्रेस ऑफ आ

[350:23]

उसके बाद इसका कोई पॉइंटर टू पॉइंटर बनाया

[350:25]

होगा पी पीटीआर उसमें हमने स्टोर करवाया

[350:27]

होगा एड्रेस ऑफ पीटीआर अब हमारे पास यह

[350:31]

दोनों तो नहीं है पर यह है हमें सिर्फ इस

[350:35]

पीपीटी आर की हेल्प से अपने नंबर फाइव को

[350:38]

प्रिंट करवाना है वो कैसे प्रिंट करवाएंगे

[350:41]

थोड़ा सा इसको डायग्राम की हेल्प से समझते

[350:43]

हैं सबसे पहले मान लीजिए कि आपके पास है

[350:46]

एक वेरिएबल आ जो किसी मेमोरी एड्रेस पे

[350:49]

स्टोर्ड है जिसके अंदर स्टोर्ड है वैल्यू

[350:51]

हमारी पांच उसके अलावा आपके पास है पीपीटी

[350:54]

आर पीपीटी आर के अंदर कोई एड्रेस स्टोर है

[350:57]

पीटीआर भी उसके अंदर एड्रेस स्टोर है इसका

[350:59]

एड्रेस था मान लो 2000 पीटीआर के अंदर

[351:01]

2000 स्टोर्ड है इसका एड्रेस था 2010 तो

[351:04]

पीपीटी आर के अंदर 2010 स्टोर्ड है और

[351:06]

इसका एड्रेस 2020 इस तरीके का कुछ चेंज चल

[351:09]

रहा है अब वैल्यू जब भी निकालनी है ना तो

[351:11]

हमारे दिमाग में सबसे पहले एक घंटी बजनी

[351:13]

चाहिए और एक ऑपरेटर हमें याद आना चाहिए

[351:16]

व्हिच इज वैल्यू एट एड्रेस ऑपरेटर यानी

[351:18]

हमारा एस्ट रिस्क जब भी वैल्यू निकालनी हो

[351:21]

एस्ट रिस्क को याद रखना है जब भी एड्रेस

[351:23]

निकालना हो एम परसेंट को याद रखना है एरिस

[351:26]

कैसे काम आएगा हमें पता है कि स्टार

[351:29]

पीटीआर क्या देता है स्टार पीटीआर हमें दे

[351:32]

देता है i = 5 की वैल्यू यानी पांच हमें

[351:35]

दे देता है तो अगर हम स्टार पीपीआर कर दें

[351:39]

तो वह हमें क्या देगा स्टार पीपीआर वह

[351:42]

देगा जो इस एड्रेस के अंदर स्टोर्ड है

[351:45]

मतलब स्टार पीटीआर से हम यहां आएंगे और इस

[351:47]

एड्रेस पर स्टोर्ड वैल्यू पर आ जाएंगे पर

[351:50]

अगर हम स्टार स्टार पीपीआर कर द तो क्या

[351:54]

होगा तो एक चेन चलेगी चेन किस तरीके से

[351:58]

चलेगी सबसे पहले इस पहले स्टार की हेल्प

[352:01]

से हम 2010 से यहां पर आएंगे और इस 2000

[352:04]

पे आएंगे दूसरे स्टार की हेल्प से हम 2000

[352:06]

से यहां पर आएंगे और फिर इस पांच पर आएंगे

[352:08]

तो हमें डबल डबल स्टार मतलब वैल्यू एट

[352:11]

एड्रेस दो बार करना है दो बार वैल्यूज को

[352:14]

जंप करके उसके बाद हम प्रिंट करवा सकते

[352:16]

हैं अपने i = 5 इसको प्रैक्टिकली करके

[352:19]

देखते हैं कोड की हेल्प से अगर अभी इतना

[352:21]

क्लियर नहीं है इस पोर्शन को कर देते हैं

[352:24]

कॉमेंट आउट एक वेरिएबल बनाते हैं इंट आ

[352:27]

जिसके अंदर पांच स्टोर्ड है उसके अलावा एक

[352:29]

पॉइंटर वेरिएबल बनाएंगे इंट स्टार पीटीआर

[352:32]

इट एड्रेस ऑफ आ एंड एक पॉइंट टू पॉइंटर

[352:37]

बनाएंगे पी पीटीआर जिसके अंदर स्टोर

[352:38]

करवाएंगे एड्रेस ऑफ

[352:41]

पीटीआर अब क्या कराना है चीजें बस प्रिंट

[352:44]

करवानी है नॉर्मली एक सिंगल चीज हम प्रिंट

[352:47]

करवाएंगे व्हिच इज स्टार स्टार पी

[352:51]

पीटीआर टर्मिनल कंपाइल एंड रन तो स्टार

[352:56]

स्टार पीपीटी आर हमने प्रिंट करवाया और

[352:58]

हमारे लिए प्रिंट हो गया फाइव आई होप इसका

[353:00]

लॉजिक क्लियर हुआ कि स्टार पीटीआर तो मुझे

[353:03]

वैल्यू देगा एड्रेस ऑफ पीटीआर की और स्टार

[353:07]

स्टार पीटीआर कर दिया तो पीटीआर पे जो

[353:09]

एड्रेस स्टड है उसकी वैल्यू दे देगा यानी

[353:11]

पांच की वैल्यू दे देगा जिसको हमने प्रिंट

[353:12]

करवा लिया तो बहुत सिंपल था समझने में दो

[353:16]

ऑपरेटर्स का हमेशा ध्यान रखना है स्टार

[353:18]

कहां यूज करना है जब वैल्यू चाहिए एम

[353:20]

परसेंट कहां यूज करना है जब एड्रेस चाहिए

[353:22]

इन दोनों का ही इधर-उधर कॉमिनेशन हमें

[353:25]

दिया होगा हर जगह अब नेक्स्ट जिस टॉपिक की

[353:28]

बात करेंगे यह बहुत इंपॉर्टेंट टॉपिक है

[353:30]

जब भी प्रोग्रामिंग को समझने हैं और अभी

[353:32]

तक हमने जितने भी टॉपिक सीखे हैं ना सी के

[353:34]

अंदर सी यूजुअली स्कूल्स के के अंदर

[353:36]

कॉलेजेस के अंदर सबसे पहले इसलिए पढ़ा

[353:38]

देते हैं क्योंकि ये जो कांसेप्ट है ना ये

[353:40]

सिर्फ सी में नहीं होते ये सारी

[353:41]

प्रोग्रामिंग लैंग्वेजेस में आपको कहीं ना

[353:43]

कहीं दिख जाएंगे आप जावा पढ़ने निकलेंगे

[353:45]

आप c+ प् पढ़ने निकलेंगे आप जावास्क्रिप्ट

[353:48]

पढ़ने निकलेंगे आप मान लीजिए कोई और

[353:50]

प्रोग्रामिंग लैंग्वेज जैसे गो पढ़ रहे

[353:52]

हैं सी शप पढ़ रहे हैं उनके अंदर भी ये

[353:54]

कॉन्सेप्ट्स एजिस्ट करते हैं जो हम यहां

[353:56]

पर पढ़ रहे हैं हमारे फंक्शंस के

[353:58]

कॉन्सेप्ट्स हमारे लूप्स के कॉन्सेप्ट्स

[354:00]

हमारे इफ एल्स के कॉन्सेप्ट्स इवन कुछ

[354:02]

लैंग्वेजेस में पॉइंटर के साथ आप खेल

[354:04]

पाएंगे और अभी हम पढ़ने वाले हैं फंक्शन

[354:07]

कॉल के बारे में जो खुद में एक इंपॉर्टेंट

[354:09]

टॉपिक है हमारी जो फंक्शन कॉल होती है ना

[354:12]

जब हम कॉलिंग स्टेटमेंट लिखते हैं जैसे

[354:13]

हमने कोई फंक्शन बनाया सम उसके लिए हमने

[354:16]

लिख दिया सम ऑफ a एंड b फंक्शंस कॉल c के

[354:19]

अंदर दो टाइप की होती हैं सबसे पहली होती

[354:21]

है कॉल बाय वैल्यू और दूसरी होती है कॉल

[354:24]

बाय रेफरेंस सबसे पहले कॉल बाय वैल्यू का

[354:26]

हम एग्जांपल देखते हैं कॉल बाय वैल्यू को

[354:28]

हम ऑलरेडी पढ़ चुके हैं कोई इसमें नई चीज

[354:30]

नहीं है मैं एक ऐसी चीज करके दिखाऊंगी जो

[354:33]

हमने ऑलरेडी पढ़ी हुई है और फिर मैं

[354:34]

बताऊंगी कि इसको कॉल बाय वैल्यू कहते थे

[354:38]

तो एक नॉर्मल सा प्रोग्राम लिखते हैं यहां

[354:41]

पर आप यह सोच रहे होंगे अचानक से पॉइंटर

[354:44]

से फंक्शन में कैसे जंप कर गए पर हम अभी

[354:46]

सीखेंगे कि हाउ फंक्शन आर रिलेटेड टू

[354:49]

पॉइंटर तो सबसे पहले एक फंक्शन डिक्लेयर

[354:51]

करते हैं इसको नाम देंगे हम स्क्वेयर

[354:55]

वॉइड

[354:56]

स्क्वेयर

[354:58]

इंट

[355:00]

ए इसकी डेफिनेशन भी लिख लेते हैं वॉइड

[355:04]

स्क्वेयर

[355:06]

इंट

[355:09]

n यह फंक्शन क्या करेगा n में ही स्टोर

[355:13]

करवा देगा n मल्टीप्ला बाय ए और फिर हम

[355:15]

प्रिंट कर देंगे परसेंटेज डी यहां लिख

[355:18]

देते हैं स्क्वायर इ इक्वल

[355:22]

टू ब ए और

[355:26]

n इस फंक्शन ने क्या किया एक इंटी जर लिया

[355:29]

n अब n को n से मल्टीप्लाई करके उसी

[355:31]

वेरिएबल के अंदर स्क्वायर को स्टोर करा

[355:33]

दिया और फिर स्क्वायर को हमने प्रिंट करवा

[355:35]

दिया अब मेन फंक्शन के अंदर एक नंबर ले

[355:38]

लेते हैं इंट नंबर इ इक्वल टू 4 और उसके

[355:42]

लिए स्क्वेयर कॉल करते हैं स्क्वेयर को

[355:44]

कॉल करेंगे तो उसमें नंबर पास कर देते हैं

[355:47]

एंड फिर एक बार स्क्वेयर प्रिंट करवाने के

[355:50]

बाद दोबारा से उस नंबर को प्रिंट करवाते

[355:52]

हैं परसेंटेज डी नंबर

[355:55]

इज ब स् ए

[356:00]

नंबर हमने नंबर बनाया स्क्वायर प्रिंट

[356:03]

करवाया नंबर का और दोबारा से नंबर को

[356:05]

प्रिंट करवाया इसको एक बार रन करके देखते

[356:07]

हैं और आउटपुट अपना एनालाइज करते हैं तो

[356:10]

स्क्वायर हमारे पास 16 आ गया और नंबर की

[356:13]

वैल्यू फोर रही पर हम ध्यान से देखें तो

[356:15]

स्क्वायर वाले फंक्शन के अंदर हमने एंड को

[356:18]

चेंज कर दिया था ये जो नंबर यहां पर भेजा

[356:21]

गया है इसकी वैल्यू को तो हमने चेंज कर

[356:22]

दिया था इसको 4 मल्ला बा 4 यानी 16 कर

[356:25]

दिया था तो जब हमारा n वापस गया तो इसको

[356:27]

तो 16 हो जाना चाहिए था तो ये फोर क्यों

[356:30]

है अब इसको हम ऑलरेडी डिस्कस कर चुके हैं

[356:32]

ये फोर इसलिए है क्योंकि हमारी जब भी हम

[356:35]

वैल्यू पास करते हैं बाय डिफॉल्ट सी के

[356:37]

अंदर वो पास बाय वैल्यू होती है मतलब

[356:39]

कॉपीज बनती है इस कांसेप्ट को हमने

[356:41]

फंक्शंस में डिस्कस किया था कि ये जो नंबर

[356:43]

है ये एक आर्गुमेंट है जब इसको एक फंक्शन

[356:46]

के अंदर पास करेंगे तो फॉर्मल पैरामीटर

[356:48]

यानी पैरामीटर क्या करेगा इस आर्गुमेंट की

[356:51]

एक कॉपी बनाएगा और इस फंक्शन के अंदर जो

[356:53]

भी चेंजेज होते हैं वो सारे के सारे कॉपी

[356:55]

में चेंजेज होते इट्स सिमिलर टू कि आप

[357:06]

मैसेज वैसे का वैसा है तो दोस्त चाहे

[357:08]

मैसेज रिसीव होने के बाद उसके साथ कुछ भी

[357:10]

करें उसको चाहे फॉरवर्ड कर दे उसको डिलीट

[357:12]

कर ले उसको सेव कर ले पर मेरी तरफ से वो

[357:15]

मैसेज चेंज नहीं होगा मेरे पास मैसेज वैसा

[357:17]

का वैसा होगा तो हम जो है मेन फंक्शन है

[357:20]

और दोस्त हमारा स्क्वायर फंक्शन है

[357:21]

स्क्वायर फंक्शन पैरामीटर्स के साथ कुछ भी

[357:24]

करे वो मेन फंक्शन के पैरामीटर्स को

[357:26]

आर्गुमेंट को अफेक्ट नहीं करता इसीलिए

[357:28]

नंबर की वैल्यू वैसे की वैसी है पर अगर

[357:30]

मैं कहूं कि एक अलग तरीके से हम वेरिएबल

[357:33]

को पास कर सकते हैं जिसमें वैल्यू में

[357:35]

चेंज करना पॉसिबल है है तो वो एक अलग टाइप

[357:37]

की फंक्शन कॉल होगी तो बाय डिफॉल्ट जो

[357:39]

बिहेवियर रहता है कि कॉपी हमारी पास होती

[357:42]

है इसको इस कांसेप्ट को हम कहते हैं कॉल

[357:45]

बाय वैल्यू मतलब हम अपने आर्गुमेंट की

[357:49]

वैल्यू को पास करने अपने वेरिएबल की

[357:51]

वैल्यू को एज आर्गुमेंट पास कर रहे हैं

[357:54]

अपने फंक्शन को तो इसकी डेफिनेशन होती है

[357:56]

कि व्हेन वी पास वैल्यू ऑफ वेरिएबल एज

[357:59]

आर्गुमेंट तो अभी तक हमने जो भी फंक्शंस

[358:01]

लिखे वो सारे कॉल बाय वैल्यू थे पर अगर

[358:03]

हमें वेरिएबल को पास करना है तो हम कॉल

[358:05]

बाय रेफरेंस भी कर सकते हैं कॉल बाय

[358:07]

रेफरेंस कैसे करेंगे जब हम वेरिएबल के

[358:10]

एड्रेस को आर्गुमेंट की तरह पास कर द जैसे

[358:12]

इसका एक एग्जांपल लेते हैं एक और फंक्शन

[358:14]

बनाते हैं जिसको हम नाम देंगे अंडरस्कोर

[358:16]

स्क्वा ये हमारा नया स्क्वेयर फंक्शन है

[358:19]

इसके अंदर भी हमारे पास एक इंटी जर ए आएगा

[358:21]

वॉइड अंडरस्कोर स्क्वा इंट

[358:27]

n अब यहां पर हम क्या करेंगे इंट स्टार एन

[358:30]

लिखते हैं क्योंकि हम एक पॉइंटर यहां पर

[358:32]

लेने वाले हैं एड्रेस भेजेंगे तो एड्रेस

[358:35]

को रिसीव कर के लिए एक पॉइंटर वेरिएबल

[358:37]

होना चाहिए था और यहां सेम चीज लिखेंगे

[358:39]

स्टार n = स्टार n स्टार n और यहां पर भी

[358:43]

लिखेंगे स्टार n तो ये एक स्क्वेयर फंक्शन

[358:47]

है जो पॉइंटर लेता है मतलब एक नंबर का ये

[358:50]

पॉइंटर ले लेगा उसका एड्रेस ले लेगा अब

[358:52]

सारी की सारी जो चीजें होंगी डायरेक्टली

[358:54]

उस एड्रेस के साथ होंगी और यहां पर फंक्शन

[358:57]

के अंदर हम क्या करेंगे सबसे पहले

[358:59]

अंडरस्कोर स्क्वेयर को कॉल लगाएंगे और इस

[359:02]

अंडरस्कोर स्क्वायर के अंदर एड्रेस पास कर

[359:04]

देंगे अपने नंबर का

[359:07]

उसके बाद दोबारा से अपने नंबर को प्रिंट

[359:09]

करवा कर देखते हैं कि अब क्या वैल्यू

[359:11]

प्रिंट होगी हमारे नंबर की एक बार इस कोड

[359:13]

को रन करते हैं फिर उस कोड को एनालाइज

[359:14]

करेंगे तो यहां पर सबसे पहले तो 164

[359:17]

प्रिंट हुआ क्योंकि हमने फर्स्ट वाले

[359:19]

स्क्वायर को कॉल लगाई थी पर सेकंड वाले

[359:21]

स्क्वायर को कॉल लगाई तो सबसे पहले

[359:22]

स्क्वायर 16 प्रिंट हुआ वापस आए तो नंबर

[359:25]

हमारा फोर हो गया था पर अबकी बार स्क्वायर

[359:27]

को कॉल लगाई 16 तो उसने क्या किया हमारे

[359:29]

नंबर को भी चेंज कर दिया यानी चार था उसको

[359:31]

16 बना दिया तो कुछ इस तरीके का काम हमारे

[359:34]

पॉइंट्स करते हैं जब उनको फं फशन के अंदर

[359:36]

पास करते हैं पास कैसे करते हैं पॉइंट्स

[359:38]

को सबसे पहले जो भी फंक्शन बना रहे हैं ना

[359:40]

उसके पैरामीटर में लिखेंगे इ स्टार n मतलब

[359:43]

यहां पर एक पॉइंटर आने वाला है पॉइंटर आने

[359:45]

वाला है यानी किसी वेरिएबल के एड्रेस को

[359:48]

हम यहां पर देने वाले हैं जिसको स्टोर

[359:50]

करने के लिए हमें पॉइंटर वेरिएबल चाहिए तो

[359:52]

अपने जब डेफिनेशन लिखी उसके अंदर लिखा इंट

[359:54]

स्टार n अब ये इंट स्टार n ये जो n है ये

[359:57]

एक पॉइंटर वेरिएबल है पॉइंटर जिस वैल्यू

[360:00]

के एड्रेस को स्टोर करा रहे उसको कैसे

[360:01]

एक्सेस करते हैं एस्ट रिस्क से यानी स्टार

[360:03]

से तो वैल्यू एट एड्रेस ऑफ n हो जाए आएगा

[360:06]

वैल्यू एट एड्रेस ऑफ n मल्टीप्ला बाय

[360:07]

वैल्यू ऑफ एड्रेस ऑफ n तो यहां पर हम एक

[360:10]

तरीके से क्या कर रहे हैं 4 मल्ला बाय 4

[360:12]

कर रहे हैं और उसको वापस से उसी लोकेशन पे

[360:15]

स्टोर करा रहे हैं जो एड्रेस एंड में है

[360:17]

और फिर उस वैल्यू को हमने स्टोर करा दिया

[360:19]

अब क्या किया वापस गए तो वो वैल्यू तो

[360:21]

चेंज ही हो गई क्योंकि हमने डायरेक्टली

[360:23]

एड्रेस के अंदर चेंजेज कर दिए यहां कॉपी

[360:26]

के अंदर चेंजेज किए थे पर इस फंक्शन में

[360:28]

हमने एड्रेस के अंदर ही चेंजेज कर दिए तो

[360:30]

यहां पर जब वापस गए तो नंबर की वैल्यू

[360:32]

चेंज हो गई थी इसको थोड़ा सा ना डायग्राम

[360:34]

की हेल्प से और समझ लेते हैं हमारे पास

[360:36]

क्या हुआ हमारे पास एक वेरिएबल था जिसका

[360:39]

नाम था नंबर नंबर का कुछ एड्रेस होगा मान

[360:42]

लीजिए इसका एड्रेस था 2000 अब नंबर के

[360:45]

अंदर वैल्यू स्टोर थी हमारी चार हमने एक

[360:47]

फंक्शन कॉल लगाई फंक्शन कॉल में एक पॉइंटर

[360:51]

बना पॉइंटर ने क्या किया पॉइंटर ने अपना

[360:54]

नाम तो n रख रखा है पॉइंटर ने एड्रेस

[360:56]

स्टोर करा लिया 2000 का क्योंकि हमने एंड

[360:59]

नंबर पास किया था अपने इस फंक्शन को हम

[361:01]

ध्यान से देखेंगे लाइन के अंदर तो

[361:03]

अंडरस्कोर स्क्वायर को हमने नंबर का

[361:06]

एड्रेस दे दिया तो नंबर का एड्रेस दे दिया

[361:08]

वो उसने n के अंदर स्टोर करा लिया अब जो

[361:10]

भी चेंजेज होंगे वो एड्रेस के ऊपर होंगे

[361:13]

अगर हमने लिखा स्टार n ल्ड बाय स्टार n तो

[361:17]

इसका मतलब है कि हम इस फोर को एक्सेस कर

[361:19]

रहे हैं यानी इसका मतलब है नंबर और इसका

[361:23]

भी मतलब है नंबर तो यहां पे हमने फोर को

[361:26]

मल्टीप्लाई कर दिया फोर के साथ अब इसको

[361:28]

वापस से जब हमने स्टार ए में स्टोर कराया

[361:31]

तो मतलब एड्रेस में ही चेंज कर दिया तो

[361:33]

यहां पर हमने चार को काटकर 16 को स्टोर

[361:36]

करा दिया एड्रेस तो वही का वही है n के

[361:38]

अंदर एड्रेस अभी भी 2000 है क्योंकि प्लॉट

[361:40]

तो चेंज होता नहीं प्लॉट का एड्रेस तो अभी

[361:42]

भी 2000 है पर उसके अंदर जो रहने वाले लोग

[361:44]

हैं ना वो चेंज हो गए मतलब फोर का अब हमने

[361:47]

16 बना दिया अब चाहे हम स्क्वायर फंक्शन

[361:49]

में रहे मेन फंक्शन में रह किसी नए फंक्शन

[361:52]

में रहे अब वो वैल्यू परमानेंटली इस

[361:55]

एड्रेस के अंदर चेंज हो गई अब पुरानी

[361:57]

वैल्यू वापस नहीं आएगी तो कुछ इस तरीके से

[362:00]

जब हम एड्रेस को पास करते हैं और एक

[362:02]

पॉइंटर वेरिएबल उसको स्टोर कर लेता है और

[362:05]

हम चेंजेज कर पाते हैं एड्रेस के अंदर ही

[362:07]

तो उसको हम कहते हैं कॉल बाय रेफरेंस यानी

[362:10]

यहां पर जो फंक्शन कॉल हमने देखी इसको कॉल

[362:12]

बाय रेफरेंस कहते हैं वी पास एड्रेस ऑफ

[362:15]

वेरिएबल एज आर्गुमेंट अपने वेरिएबल के

[362:17]

एड्रेस को एज आर्गुमेंट पास करेंगे वो

[362:19]

पॉइंटर के अंदर स्टोर होगा और ओरिजिनल

[362:21]

वैल्यू के अंदर जब चेंजेज कर पाएंगे दैट

[362:24]

इज कॉल्ड बाय रेफरेंस तो ये दो तरीके की

[362:26]

हमारी फंक्शन कॉल होती है इसको सीखने का

[362:29]

इसको और अच्छे से समझने का बेस्ट एग्जांपल

[362:32]

है हमारे स्वप ंग फंक्शन स्वप टू नंबर्स a

[362:36]

एंड b ये हमारा नेक्स्ट क्वेश्चन है स्वप

[362:38]

का मतलब होता है इंटरचेंज या एक्सचेंज

[362:41]

जैसे a की वैल्यू है ती b की वैल्यू है

[362:45]

पांच तो एंड में स्वप ंग फंक्शन क्या

[362:47]

करेगा a की वैल्यू को पांच बना देगा और b

[362:50]

की वैल्यू को तीन बना देगा इंटरचेंज कर

[362:52]

देगा दोनों की वैल्यूज को अब एक बार देखते

[362:54]

हैं कि इंटरचेंज करने वाला प्रोसेस हम

[362:56]

एक्चुअली करते कैसे हैं हमारी जो मेमोरी

[362:59]

होगी ना उसके अंदर हमारे पास दो वेरिएबल

[363:02]

ऑलरेडी हैं सबसे पहला है हमारा ए वेरिएबल

[363:04]

दूसरा है हमारा ब वेरिएबल a के अंदर

[363:06]

वैल्यू स्टोर्ड है तीन बी के अंदर पाच जब

[363:08]

भी हमें कुछ स्वप करना है ना तो हम एक

[363:10]

थर्ड वेरिएबल का यूज करेंगे इसको समझने के

[363:13]

लिए एक और एग्जांपल लेते हैं जैसे हमारे

[363:15]

पास एक बाल्टी है पानी की जिसमें 3 लीटर

[363:17]

पानी स्टोर्ड है एक दूसरी बाल्टी है जिसके

[363:20]

अंदर हमारे पास पांच लीटर पानी स्टोर्ड है

[363:23]

अब इस बाल्टी को हमने नाम दिया है इसको

[363:25]

नाम दिया है बी हमें क्या करना है ए में

[363:27]

हमें 5 लीटर पानी चाहिए बी में हमें 3

[363:29]

लीटर पानी चाहिए तो कैसे करेंगे एक तीसरी

[363:31]

बाल्टी ले आएंगे यह तीसरी बाल्टी आ गई और

[363:34]

तीसरी बाल्टी खाली है इसके अंदर कुछ नहीं

[363:37]

है तो या तो हम पहले बी का पानी इसमें डाल

[363:39]

दें तो बी खाली हो जाएगा उसके बाद ए का

[363:42]

पानी बी में डाल दें अब ऐसा हमने किया तो

[363:46]

बी के अंदर तो आ गया हमारा 3 लीटर पानी ये

[363:49]

खाली जो बाल्टी थी इसके अंदर बी का 5 लीटर

[363:52]

पानी है और a को हमने बी में खाली किया था

[363:54]

तो अब ए खाली हो गया अब क्या करेंगे इस

[363:57]

बाल्टी का पानी वापस से a के अंदर डाल

[363:59]

देंगे तो फाइनली ए के अंदर 5 लीटर आ जाएगा

[364:02]

बी के अंदर 3 लीटर आ जाएगा और ये बाल्टी

[364:04]

पूरी हो जाएगी हमारी

[364:06]

खाली तो इस तरीके से हमें जब भी दो बाल्ट

[364:08]

का पानी इंटरचेंज करना होता है एक तीसरी

[364:10]

खाली बाल्टी ले आते हैं वैसे ही हम यहां

[364:13]

पर अगर दो वेरिएबल की वैल्यू को इंटरचेंज

[364:15]

करना है तो तीसरा खाली वेरिएबल ले आएंगे

[364:18]

तीसरे खाली वेरिएबल को हम मान लीजिए कह

[364:21]

लेते हैं टेंपररी वेरिएबल टेंपररी यानी

[364:24]

इसको नाम दे दिया हमने t टेंपररी है ये

[364:26]

खाली है अब सबसे पहले क्या करेंगे t की

[364:29]

वैल्यू में हमें a की वैल्यू डाल देंगे या

[364:32]

बी की वैल्यू डाल देंगे कुछ भी कर सकते

[364:33]

हैं मतलब a की वैल्यू t में स्टोर्ड हो गई

[364:36]

अब a के अंदर बी की वैल्यू डाल देंगे और

[364:39]

बी के अंदर t की वैल्यू डाल देंगे तो या

[364:41]

तो हम यह लिख सकते हैं या अगर हम इस तरीके

[364:44]

से भी लिखना चाहे यह दोनों सही है वर्जस

[364:47]

बेसिक पॉइंट यह है या तो a को पहले खाली

[364:49]

कर लो या बी को खाली कर लो तो उस तरीके से

[364:51]

हम दोनों वैल्यूज को स्वप कर पाएंगे तो हम

[364:54]

दो वर्जस लिखने वाले हैं स्पिंग के एक में

[364:56]

कॉल बाय वैल्यू करेंगे एक में कॉल बाय

[364:58]

रेफरेंस देखते हैं कौन सा सही निकलता है

[365:00]

सबसे पहले स्पिंग ट्राई करते हैं कॉल बाय

[365:02]

वैल्यूज एक फंक्शन बनाते हैं वॉइड स्वप

[365:06]

इसके अंदर दो वेरिएबल आएंगे इंट ए और इंट

[365:09]

बी मेन फंक्शन के अंदर ए की वैल्यू है तीन

[365:13]

बी की वैल्यू है पा और अपनी डेफिनेशन लिख

[365:17]

लेते

[365:20]

हैं वॉइड स्वप इंट ए इंट

[365:26]

बी हमें क्या करना है एक टेंपररी वेरिएबल

[365:29]

बनाना है t इसके अंदर ए की वैल्यू डाल

[365:31]

देंगे ए के अंदर बी की वैल्यू डाल देंगे

[365:34]

बी के अंदर ए की वैल्यू डाल देंगे और यहां

[365:37]

पर प्रिंट करवाते हैं कि स्वप करने के बाद

[365:40]

a इ टू

[365:42]

परसेंटेज

[365:44]

d एंड बी इ इक्वल टू परसेंटेज

[365:51]

डी ए एंड

[365:54]

बी इन फैक्ट मेन फंक्शन के जो अंदर

[365:57]

वेरिएबल यूज कर रहे हैं ना इसको एक्स एंड

[365:59]

y रखते हैं ताकि हम डिफरेंस समझ पाए तो

[366:02]

स्वप करवा रहे हैं ए और बी को और एक्स

[366:04]

एंडवा को पास कर ए आर्गुमेंट तो कॉल कर

[366:07]

लेते हैं अपना स्वप फंक्शन इसके अंदर पास

[366:09]

करेंगे एक्स और वा अब हमें ऑलरेडी पता है

[366:12]

यह फंक्शन जो है पास बाय वैल्यू करेगा तो

[366:15]

यहां पर तो स्पिंग हो जाएगी पर हमें यहां

[366:18]

पर स्पिंग नहीं चाहिए हमें स्पिंग चाहिए

[366:21]

कि हमारे मेन फंक्शन में के अंदर आकर

[366:23]

वैल्यूज को करा दे तो यहां पर देखेंगे

[366:25]

एक्स और वा की वैल्यू चेंज हुई है क्या

[366:28]

एक्स

[366:30]

एंडवा मतलब हमें पता है ए और बी तो चेंज

[366:32]

हो जाएंगे पर हमें चाहिए कि एक्स और वा भी

[366:35]

चेंज हो मेन फंक्शन के अंदर अब इसको करते

[366:38]

हैं एक बार रन अब यहां पर ना पॉज करना है

[366:41]

और खुद से सोच के बताना है कि एक्चुअली

[366:43]

स्वप होंगे या नहीं होंगे और अगर सही आंसर

[366:46]

निकलता है ना तो मतलब आपने पॉइंट्स अच्छे

[366:49]

से समझ लिए हैं अगर नहीं निकलना है तो

[366:51]

मतलब पीछे वाले कुछ कांसेप्ट जाकर थोड़ा

[366:53]

सा देखने की जरूरत है तो एक बार आंसर

[366:55]

लिखते

[366:56]

हैं हमने a = 5 और b = 5 कर दिया

[367:02]

है ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि यहां पर हमें

[367:05]

टेंपररी वेरिएबल हमें लिखना चाहिए था इसको

[367:08]

कर लेते हैं

[367:09]

क्लियर और दोबारा से एक बार कंपाइल एंड रन

[367:12]

करते

[367:13]

हैं तो a की वैल्यू पांच हो गई है और b की

[367:17]

वैल्यू तीन हो गई है यहां पर शुरुआत में

[367:19]

क्या था x हमारा तीन था y हमारा पांच था

[367:22]

पहले a ती था और b पा था तो यहां पर तो

[367:26]

चेंज हो गया पर वापस से जब मेन फंक्शन के

[367:28]

अंदर गए तो अब भी x हमारा तीन का तीन है

[367:32]

और y हमारा पांच का पांच है मतलब इस कॉल

[367:34]

बाय वैल्यू वाले फंक्शन ने हमारे लिए

[367:36]

स्पिंग करके नहीं दी तो स्पिंग कैसे होगी

[367:40]

स्पिंग होगी कॉल बाय रेफरेंस उसके लिए एक

[367:43]

और नया फंक्शन बना लेते हैं वॉइड

[367:45]

अंडरस्कोर स्प इसके अंदर क्या करेंगे

[367:48]

पॉइंटर ले लेंगे इंट

[367:52]

स्टार ए इंट स्टार बी कॉल बाय

[368:00]

रेफरेंस वॉइड अंडर स्वप इसके अंदर हमारे

[368:04]

पास आ रहे हैं पॉइंट्स ऑफ

[368:06]

एंड पॉइंटर ऑफ बी अब हमारे पास अगर

[368:10]

वेरिएबल पॉइंटर में आए हैं तो जो हम

[368:12]

टेंपररी बनाएंगे उसको भी हम पॉइंटर की

[368:14]

फॉर्म में बना सकते हैं अब यहां पर एक नया

[368:16]

वेरिएबल बना लेंगे टेंपररी टी इस टी के

[368:19]

अंदर सबसे पहले स्टोर करा लेंगे ए पर जो

[368:23]

वैल्यू है व वाली वैल्यू और फिर ए की

[368:27]

वैल्यू में हम डाल देंगे वैल्यू एट एड्रेस

[368:29]

ऑफ बी अब वैल्यू एट एड्रेस ऑफ बी में हम

[368:32]

डाल देंगे t की वैल्यू को तो यहां पर क्या

[368:35]

किया पॉइंटर जो a की तरफ जहां हम पॉइंट कर

[368:38]

रहे थे जहां a का जो पॉइंटर है वो a की

[368:40]

वैल्यू निकाल लेगा उसको t के अंदर डाल

[368:42]

देगा अब वैल्यू एट एड्रेस ऑफ a जो होगी वो

[368:44]

t के अंदर आ जाएगी b के अंदर जो होगी

[368:47]

वैल्यू वो a के अंदर आ जाएगी और वैल्यू एट

[368:49]

एड्रेस जो t के अंदर वैल्यू स्टोर्ड है वो

[368:51]

वैल्यू एट एड्रेस ऑफ b में आ जाएगी तो इस

[368:54]

तरीके से हम एड्रेस बाय एड्रेस स्पिंग कर

[368:56]

रहे हैं अब यहां पर दोबारा देख लेते हैं

[368:59]

इसको अंडरस्कोर कर देते हैं अब प्रिंट

[369:02]

करवा द हैं x और y की वैल्यू को यहां पे

[369:04]

हमें पास करना पड़ेगा एड्रेस ऑफ x एंड

[369:06]

एड्रेस ऑफ y इसको कर लेते हैं सेव एंड

[369:11]

रन तो अब हमारे पास क्या हुआ स्वप फंक्शन

[369:14]

ने हमारे मेन फंक्शन के अंदर चेंज लेकर

[369:17]

हमें दिखा दिया जैसे x की वैल्यू अब पांच

[369:21]

हो गई है और y की वैल्यू अब तीन हो गई है

[369:23]

यह पॉसिबल हो पाया कॉल बाय रेफरेंस की

[369:25]

हेल्प से क्योंकि हमने पॉइंटर पास किए

[369:27]

हमने एड्रेस पास किया और हमने और हमने

[369:30]

पॉइंट्स बनाए अपने फंक्शन के अंदर इसीलिए

[369:32]

वैल्यू जो है एड्रेस पे इंटरचेंज हो गई तो

[369:35]

हमारा जो फंक्शन होता है ना एक ही वैल्यू

[369:37]

रिटर्न कर सकता है पर जब हमें मल्टीपल

[369:39]

वैल्यूज चाहिए तो हम क्या कर सकते हैं

[369:41]

उसके अंदर किसी वेरिएबल का एड्रेस पास कर

[369:43]

दो और वहां पे चेंजेज करवा के उस वेरिएबल

[369:46]

के अंदर स्टोर करवा के वापस ले आओ तो

[369:48]

फंक्शन को कुछ रिटर्न भी नहीं करना पड़ेगा

[369:50]

और आपको आपकी वैल्यू मिल जाएगी तो इस

[369:52]

तरीके से कॉल बाय रेफरेंस हम तब यूज करते

[369:54]

हैं जब हमें एक फंक्शन से मल्टीपल वैल्यूज

[369:57]

रिटर्न करवानी हो उन वैल्यूज को हम रिटर्न

[369:59]

की हेल्प से रिटर्न नहीं करवाते पॉइंट्स

[370:01]

की हेल्प से रिटर्न करवाते हैं तो आई होप

[370:04]

कि ये कांसेप्ट क्लियर होगा अब नेक्स्ट

[370:06]

सवाल जिसकी बात करेंगे नेक्स्ट सवाल कहता

[370:08]

है विल द एड्रेस आउटपुट बी सेम इस सवाल के

[370:11]

अंदर हमारे पास फंक्शन हमने एक बनाया वॉइड

[370:14]

प्रिंट एड्रेस जिसमें हम पास कर रहे हैं

[370:15]

इंट n और हमारा फंक्शन डेफिनेशन क्या कहता

[370:19]

है कि प्रिंट कर दो एड्रेस ऑफ n को हमने

[370:23]

मेन फंक्शन के अंदर एक वेरिएबल लिया है n

[370:26]

n का हमने यहां पर एड्रेस प्रिंट करवाया

[370:28]

है तो एक मेमोरी लोकेशन होगी हमारी मेमोरी

[370:31]

के अंदर जिसको हमने नाम दिया है n n के

[370:33]

अंदर वैल्यू स्टोर्ड है चार का मान लीजिए

[370:35]

एड्रेस है 2000 तो जब भी आपको एनालाइज

[370:37]

करना हो ना कि आउटपुट सेम होगा क्या या इस

[370:39]

सवाल का क्या आउटपुट होना चाहिए तो एक

[370:41]

एग्जांपल ले लो और एग्जांपल में कोई भी

[370:44]

अपना एड्रेस अज्यू कर लो तो यहां पे हमने

[370:46]

2000 एड्रेस अज्यू कर लिया है तो यहां पर

[370:48]

तो प्रिंट होगा हमारे पास 2000 यह हमें

[370:51]

पता है फिर हमने कॉल लगाई है प्रिंट

[370:53]

एड्रेस को उसमें पास कर दिया n अब जब

[370:56]

प्रिंट एड्रेस को कॉल लगाई है हम ध्यान से

[370:58]

देखें तो ये कॉल बाय वैल्यू है जब भी कॉल

[371:01]

बाय वैल्यू होती है ना एक वेरिएबल की कॉपी

[371:04]

बनती है तो ये दूस दूसरी कॉपी बनी इस कॉपी

[371:06]

का नाम भी n होगा पर इसका एड्रेस कुछ और

[371:10]

होगा क्योंकि 2000 पे तो ऑलरेडी एक

[371:12]

वेरिएबल है तो इसका 21 होगा 2010 होगा कुछ

[371:15]

भी हो सकता है एड्रेस इसका 5000 हो सकता

[371:17]

है 10000 हो सकता है तो ये एक कॉपी बनी है

[371:20]

n की हमारी प्रिंट एड्रेस फंक्शन के लिए

[371:23]

और इसके अंदर वैल्यू जो है वो कॉपी हो गई

[371:25]

है तो इसके अंदर भी कॉपी होके हमारा चार

[371:28]

स्टोर हो गया है अब यहां पर हम इस वाले n

[371:30]

का एड्रेस प्रिंट करवा रहे हैं तो इस वाले

[371:33]

n का जो एड्रेस प्रिंट होगा वो हमारे पास

[371:35]

होगा 2000 मंथ तो ओबवियसली हमारा यह वाला

[371:38]

एड्रेस और यह वाला एड्रेस कभी भी सेम नहीं

[371:40]

हो सकते कॉल बाय वैल्यू में हां अगर यह

[371:42]

कॉल बाय रेफरेंस होता जब सेम वेरिएबल की

[371:45]

हम बात कर रहे हैं सेम मेमोरी लोकेशन की

[371:46]

बात करें हैं तब हमारे एड्रेस सेम होते

[371:49]

इसको वेरीफाई भी कर लेते हैं कोड की हेल्प

[371:50]

से सबसे पहले एक फंक्शन बना लेते हैं वॉइड

[371:53]

प्रिंट एड्रेस के नाम से और इसमें ले लेते

[371:55]

हैं एक वेरिएबल n अब क्या करेंगे मेन

[371:59]

फंक्शन के अंदर n के अंदर वैल्यू स्टोर

[372:01]

करा लेते हैं चार और प्रिंट एड्रेस को कॉल

[372:03]

लगाएंगे जिसमें n को हम पास कर

[372:06]

देंगे इसको क्रिएट भी कर लेते हैं प्रिंट

[372:09]

एड्रेस प्रिंट एड्रेस के अंदर हमारे पास

[372:12]

इंटी जर n आ रहा है और यहां पर हम इंटी जर

[372:14]

n की वैल्यू को प्रिंट करवाने वाले हैं तो

[372:18]

एड्रेस ऑफ n

[372:21]

इज परसेंटेज य ब स् ए और यहां पे हम

[372:27]

प्रिंट करवा देंगे एड्रेस ऑफ n और यही सेम

[372:30]

लाइन हम कॉपी करके यहां पर लिखते हैं अब

[372:32]

इस कोड को जब हम रन करेंगे अब अपना

[372:35]

टर्मिनल खोलते हैं

[372:37]

कंपाइल एंड यह जो वार्निंग्स आ रही है

[372:40]

इसलिए आ रही हैं क्योंकि पॉइंटर हमारा

[372:41]

परसेंटेज p से प्रिंट होता है पर हमने

[372:44]

अनसाइंड इंट में उसको टाइपकास्ट कर रखा है

[372:46]

तो वार्निंग का इतना टेंशन नहीं लेना अब

[372:48]

ध्यान से देखेंगे तो सबसे पहले प्रिंट

[372:51]

एड्रेस को कॉल लगाई तो वहां की स्टेटमेंट

[372:53]

रन करेगी तो इस वाले इंटी जर n की जो

[372:56]

वैल्यू है इसका जो एड्रेस है वो यहां पे

[372:58]

प्रिंट हो गया है और फिर हमारे ओरिजिनल n

[373:01]

का जो मेन फंक्शन के अंदर n है उसका

[373:02]

एड्रेस प्रिंट हो गया और दोनों एड्रेस

[373:05]

अलग-अलग हैं यह हो गया हमारा कॉल बाय

[373:07]

वैल्यू पर यहीं पर अगर कॉल बाय रेफरेंस

[373:09]

होता यानी यहां पर स्टार होता यहां पर भी

[373:13]

स्टार होता और यहां पे हम n की वैल्यू को

[373:16]

प्रिंट करवाते मतलब इस पॉइंटर में जो

[373:17]

वैल्यू स्टोर्ड है उसको प्रिंट करवाते और

[373:19]

यहां से प्रिंट एड्रेस में हम पास कर रहे

[373:21]

होते n का एड्रेस तो कॉल बाय रेफरेंस बन

[373:24]

गया अब एनालाइज करते हैं अपना आउटपुट अब

[373:28]

आउटपुट के अंदर जो दोनों एड्रेस आए हैं

[373:30]

इनके वो दोनों सेम है क्योंकि कॉल बाय

[373:32]

रेफरेंस किया है मतलब अब मेमोरी लोकेशन की

[373:35]

बातें चल रही हैं अब डायरेक्टली हम उस

[373:37]

प्लॉट की बात कर रहे हैं जिसका एड्रेस

[373:39]

हमें पता है अब उस वेरिएबल के नाम की बात

[373:42]

नहीं चल रही तो कॉल बाय वैल्यू के अंदर

[373:44]

जहां पर मेमोरी एड्रेस अलग-अलग है हमारी

[373:46]

वैल्यूज कॉपी होती है कॉल बाय रेफरेंस में

[373:49]

वैल्यूज सेम रहती हैं हम मेमोरी एड्रेस को

[373:51]

ही डायरेक्टली एक्सेस करते हैं ये बहुत

[373:53]

इंपॉर्टेंट डिस्टिंक्शन है इसको याद रखना

[373:56]

है लास्ट सवाल पॉइंट्स के अंदर जिसकी हम

[373:58]

बात करेंगे वो यह है राइट अ फंक्शन टू

[374:00]

कैलकुलेट द सम प्रोडक्ट एंड एवरेज ऑफ टू

[374:03]

नंबर्स प्रिंट दैट एवरेज इन द मेन फंक्शन

[374:05]

एवरेज के साथ-साथ प्रोडक्ट और सम को भी

[374:08]

मेन फंक्शन के अंदर प्रिंट करना है तो हम

[374:09]

यहां पर एक फंक्शन बनाएंगे जो दो नंबर्स

[374:11]

लेगा a और b और दोनों का सम कैलकुलेट

[374:14]

करेगा यानी a + b प्रोडक्ट कैलकुलेट करेगा

[374:17]

a * b और एवरेज कैलकुलेट करेगा a + b / 2

[374:20]

मेन फंक्शन को रिटर्न करेगा थ्री वैल्यूज

[374:24]

और हमने क्या सीखा है रिटर्न तो सिर्फ एक

[374:26]

ही वैल्यू होती है फंक्शन से पर जब भी

[374:28]

मल्टीपल वैल्यूज रिटर्न करने वाली सिचुएशन

[374:30]

आ जाए ना तो वहां पर यूज़ कर लो पॉइंट्स

[374:33]

तो यहां पे पॉइंट्स सेव की तरह आते हैं एक

[374:36]

बार इसका सॉल्यूशन लिखकर देखते हैं कि

[374:38]

कैसे पॉइंट्स काम आते हैं ी सिचुएशन में

[374:41]

सबसे पहले मेन फंक्शन के अंदर हम क्रिएट

[374:44]

करेंगे दो

[374:45]

वेरिएबल सबसे पहला वेरिएबल है ए ए को हम

[374:48]

ले लेते हैं ्र दूसरा वेरिएबल है बी बी की

[374:51]

वैल्यू ले लेते हैं फ अब एक फंक्शन बनाते

[374:54]

हैं वॉइड डू वर्क ये हमारे लिए कुछ काम कर

[374:57]

रहा है मतलब कोई कैलकुलेशन कर रहा है

[374:59]

इसमें हम दो वैल्यूज लेंगे इंट ए और इंट

[375:02]

बी एस

[375:03]

पैरामीटर अब क्या करेंगे इसको डिफाइन करते

[375:06]

हैं डू वर्क इंट a इंट बी हम सबसे पहले

[375:12]

कैलकुलेट करते हैं दोनों का सम इंट सम इ a

[375:17]

+ b फिर कैलकुलेट करते हैं दोनों का

[375:21]

प्रॉडक्ट इंट प्रॉड इ a मल्ला बा b फिर

[375:25]

कैलकुलेट करते हैं दोनों का एवरेज एवरेज

[375:28]

कैलकुलेट करने के लिए लिखेंगे a + b

[375:30]

डिवाइड बा 2 तो इस तरीके से तीन वेरिएबल

[375:33]

हमने लिख लिए पर इन तीनों को हम रिटर्न

[375:34]

नहीं कर सकते हैं तो हम क्या करते हैं

[375:36]

इन्हीं तीनों वेरिएबल को अपने मेन फंक्शन

[375:39]

के अंदर डिफाइन कर लेते हैं और पॉइंट्स

[375:41]

पास कर देते हैं तीनों के जैसे यहां पे हम

[375:44]

बना लेंगे सम प्रोडक्ट एंड

[375:48]

एवरेज पर ये तीनों पॉइंट्स की तरह पास

[375:51]

होंगे मतलब यहां पर तीन पॉइंट्स पास होंगे

[375:55]

इंट स्टार सम इंट स्टार प्रोडक्ट एंड इंट

[376:00]

स्टार एवरेज तो यहां प भी सेम वैल्यूज

[376:03]

आएंगी इंट स्टार प्रोडक्ट प्रोडक्ट इंट

[376:05]

स्टार यहां पर आएगा सबसे पहले सम फिर इं

[376:08]

स्टार प्रोडक्ट एंड देन इंट स्टार एवरेज

[376:13]

अब यहां पर हमें डिफाइन करने की जरूरत

[376:14]

नहीं है क्योंकि ये जो वेरिएबल है ये तो

[376:17]

ऑलरेडी मेन फंक्शन के अंदर

[376:21]

क्रिएटेडटेड चेंज करना चाह रहे हैं स्टार

[376:24]

ऑफ प्रॉड की क्योंकि यह जो सम है यह जो

[376:28]

प्रोडक्ट है और ये जो एवरेज है ये तीनों

[376:30]

पॉइंट्स हैं और वैल्यू एट पॉइंटर को

[376:32]

एस्टरिस की हेल्प से एक्सेस करेंगे तो

[376:35]

वहां पे स्टोर करवा देंगे a प् बी इस

[376:37]

प्रोडक्ट में स्टोर करवा देंगे a

[376:38]

मल्टीप्ला बा एवरेज में स्टोर करा देंगे a

[376:40]

प् b डिवाइड बा 2 तो अब कॉल लगाते हैं डू

[376:43]

वर्क को डू वर्क में पास करेंगे ए बी

[376:47]

एड्रेस ऑफ सम एड्रेस ऑफ प्रोडक्ट एंड

[376:52]

एड्रेस ऑफ हमारा

[376:55]

एवरेज उसके बाद मेन फंक्शन में जब आएंगे

[376:58]

ना तो तीनों वैल्यूज को हम प्रिंट करवा

[377:01]

लेंगे सम इज इक्वल टू परसेंटेज

[377:06]

प्रोडक्ट इ इक्वल टू परसेंटेज d एंड एवरेज

[377:10]

इज इक्वल टू परसेंटेज d और यहां पे सबसे

[377:13]

पहले सम फिर प्रोडक्ट फिर एवरेज आई होप कि

[377:19]

यह वाली चीज हमें क्लियर होगी कि इस

[377:21]

फंक्शन के अंदर हमने पास बाय रेफरेंस किया

[377:23]

है इन तीनों वेरिएबल का पास बाय रेफरेंस

[377:26]

किया है इन दोनों वेरिएबल का पास बाय

[377:28]

वैल्यू किया है a और बी की वैल्यू में

[377:30]

हमें कोई चेंजेज चाहिए नहीं मेन के अंदर

[377:31]

तो उनको नॉर्मली पास बाय वैल्यू पर इन

[377:34]

तीनों के अंदर चाहिए थी वैल्यूज तो इनको

[377:35]

पास बाय रेफरेंस कर दिया और इनकी वैल्यूज

[377:38]

को कर लिया कैलकुलेट कैलकुलेट करके मेन

[377:40]

फंक्शन के अंदर वैल्यूज को करा दिया स्टोर

[377:42]

इसको करवा लेते हैं रन तो हमारे थ्री और

[377:45]

फाइव का सम आ गया है एट प्रोडक्ट आ गया है

[377:49]

दोनों का 15 और एवरेज आ गया दोनों का फोर

[377:52]

यानी 5 + 3 = 8 एंड डिवाइडेड बा 2 इज 4 तो

[377:55]

इस तरीके से जब मल्टीपल वैल्यूज हमें

[377:57]

चाहिए हो ना रिटर्न में दूसरे फंक्शन के

[377:59]

अंदर तो क्या करो पास बाय रेफरेंस कर लो

[378:02]

पास बाय रेफरेंस करोगे उस वेरिएबल के वो

[378:04]

खाली भेजोगे उसके अंदर वैल्यू स्टोर करा

[378:06]

के वापस ले आओगे तो इस तरीके से पॉइंट्स

[378:08]

बहुत ज्यादा काम आते हैं हमारी नॉर्मल

[378:10]

प्रोग्रामिंग के अंदर तो आई होप कि

[378:12]

पॉइंट्स का कांसेप्ट हमें काफी हद तक

[378:14]

क्लियर हुआ होगा बहुत आसानी से सारे बेसिक

[378:17]

कॉन्सेप्ट्स को हमने कवर कर लिया है कुछ

[378:19]

एक दो कॉन्सेप्ट्स हैं पर उनको हम नेक्स्ट

[378:21]

चैप्टर में करेंगे जब हम एरे की बात कर

[378:23]

रहे होंगे अब पॉइंट्स का यूज़ हमें

[378:26]

धीरे-धीरे तब समझ में आएगा जब हम डाटा

[378:27]

स्ट्रक्चर करेंगे एरे हमारा एक स्ट्रक्चर

[378:29]

होता है एरे के बारे में अगले चैप्टर के

[378:32]

अंदर सीख रहे होंगे तब तक हम क्या कर सकते

[378:34]

हैं थोड़े से होमवर्क प्रॉब्लम्स कर सकते

[378:35]

हैं और सवाल कर सकते हैं खुद की स्किल्स

[378:37]

को इंप्रूव कर सकते हैं एंड चैप्टर को

[378:40]

रिवाइज जरूर कर सकते हैं ताकि हम चीजों को

[378:42]

भूले ना नोट्स हमने दे रखे हैं आपकी

[378:45]

सहूलियत के लिए एंड बढ़ते हैं हमारे

[378:47]

नेक्स्ट चैप्टर की तरफ अब हम शुरुआत करने

[378:50]

वाले हैं अपने चैप्टर सेवन की जिसमें

[378:52]

पढ़ेंगे हम अरेज के बारे में एरे की अगर

[378:54]

क्लासिकल डेफिनेशन की बात करें तो अरेज

[378:56]

होते हैं कलेक्शन ऑफ सिमिलर डेटा टाइप

[378:58]

स्टोर्ड एट कांटीगुअस मेमोरी लोकेशंस जैसे

[379:01]

अगर हमें किसी मेमोरी लोकेशन में किसी

[379:03]

वैल्यू को स्टोर स्टोर कराना होता है तो

[379:05]

उसको हम स्टोर करवाते हैं एक वेरिएबल की

[379:07]

हेल्प से एक वेरिएबल लेते हैं वो एक

[379:10]

मेमोरी लोकेशन को रिजर्व कर लेता है उसके

[379:12]

अंदर हम कुछ डाटा स्टोर करा देते हैं और

[379:14]

उस मेमोरी लोकेशन को कुछ नाम दे देते हैं

[379:16]

जो होता है हमारा वेरिएबल अगर हमें एक ही

[379:19]

तरह का बहुत सारा डाटा स्टोर करवाना है

[379:21]

मान लीजिए यहां पे हमने एक इंटी जर स्टोर

[379:23]

कराया था पर हमें तीन इंटी जर स्टोर कराने

[379:26]

हैं तो हम चाहते हैं वो तीन इंटी जर एक के

[379:28]

साथ एक के साथ एक स्टोर हो जाए जिसमें हम

[379:31]

मान लीजिए अलग-अलग डेट्स जो हैं वो स्टोर

[379:33]

कर पा रहे हैं और इन तीनों को हम कलेक्टिव

[379:36]

कोई एक नाम दे दें तो इस तरीके का जो

[379:38]

स्ट्रक्चर होता है इसको हम कहते हैं एरे

[379:41]

स्ट्रक्चर या एरस अगर इसकी डेफिनेशन देखें

[379:44]

तो इट इज अ कलेक्शन ऑफ सिमिलर डेटा टाइप

[379:46]

सिमिलर डेटा टाइप्स यानी आप तीन इंट या

[379:49]

पांच इंट ही एक साथ स्टोर करा सकते हैं दो

[379:52]

इंट और एक फ्लोट नहीं साथ में पांच फ्लोट

[379:54]

करवा सकते हैं साथ में पांच कैरेक्टर करवा

[379:57]

सकते हैं पर अलग-अलग डेटा टाइप्स को साथ

[379:59]

में कलेक्शन की फॉर्म में नहीं स्टोर करा

[380:01]

सकते स्टोर्ड एट कांटीगुअस मेमोरी लोके

[380:04]

कंटस का मतलब होता है कंटीन्यूअस तो

[380:07]

मेमोरी के अंदर जो ये डाटा स्टोर होता है

[380:09]

कंटीन्यूअस फैशन में यानी एक के बाद एक के

[380:11]

बाद एक स्टोर होता है तो इसको एक्सेस करना

[380:14]

आसान हो जाता है तो जब भी हमें मल्टीपल

[380:17]

वेरिएबल स्टोर कराने होते हैं ना तो उनको

[380:18]

अलग-अलग नाम देने की जगह हम एक एरे बना

[380:21]

लेते हैं जैसे इसका अगर एक एग्जांपल देखें

[380:23]

कोड में लिखकर तो मान लीजिए हमें तीन

[380:25]

स्टूडेंट्स के मार्क्स स्टोर कराने हैं तो

[380:27]

अगर हमारे पास एरे जैसा कोई स्ट्रक्चर

[380:29]

नहीं है तो हम नॉर्मली तीन वेरिएबल को बना

[380:30]

रहे होंगे इंट मार्क्स वन इसमें स्टोर

[380:33]

करवा देंगे फिजिक्स के मार्क्स फिर इंट

[380:35]

मार्क्स टू इसमें स्टोर करा देंगे

[380:38]

केमिस्ट्री के मार्क्स एंड देन

[380:40]

इंट मार्क्स थ इसमें स्टोर करवा लेंगे

[380:43]

अपने मैथ के

[380:45]

मार्क्स अब इन तीनों को एक्सेस करने के

[380:48]

लिए हमें अलग-अलग वेरिएबल की जरूरत है पर

[380:51]

अगर मैं कहूं कि मैं एक सिंगल वेरिएबल से

[380:53]

तीनों वैल्यूज को एक्सेस कर पाऊं तो उस

[380:55]

तरीके के स्ट्रक्चर को हम अरेज कहेंगे

[380:56]

अरेज को कैसे लिखते हैं उसे लिखते हैं कि

[380:59]

हम वो टाइप लिखेंगे जिसका हम एरे बनाने

[381:01]

वाले हैं फिर लिखेंगे मार्क्सस फिर

[381:03]

लगाएंगे स्क्वेयर ब्रैकेट्स जो दिखाते हैं

[381:06]

कि जो स्ट्रक्चर हम बना रहे हैं वो एक एरे

[381:07]

है एंड उसके बाद अपने मार्क्स को हम लिख

[381:10]

देंगे 97 98 89 कुछ इस तरीके से तो ये एरे

[381:15]

को लिखने का सिंटेक्स होता है जिसमें हमने

[381:17]

सिंगल वेरिएबल के अंदर तीन वैल्यूज को

[381:19]

स्टोर करवा दिया है तो मेमोरी के अंदर ये

[381:21]

वैल्यूज एक के बाद एक के बाद स्टोर होंगी

[381:23]

और सारा का सारा डाटा उन तीनों ब्लॉक्स के

[381:26]

अंदर चला जाएगा अब एरे को लिखने के अगर

[381:28]

सिंटेक्स की बात करें अगर हम एक इंटी जर

[381:30]

टाइप का एरे बनाना है तो सबसे पहले टाइप

[381:32]

लिखेंगे इंट उसके बाद लिखेंगे अपने एरे का

[381:35]

नाम उसके बाद लिखेंगे स्क्वायर ब्रैकेट्स

[381:37]

तो स्क्वायर ब्रैकेट्स के अंदर हम एक नंबर

[381:39]

लिखते हैं वो नंबर होता है साइज यानी किस

[381:42]

साइज की हमें लोकेशन चाहिए अगर हमें तीन

[381:44]

इंटी जर वैल्यूज चाहिए तो तीन लिखेंगे

[381:46]

पांच चाहिए तो इसकी जगह पांच लिख सकते हैं

[381:48]

10 चाहिए तो 10 100 चाहिए तो 100 भी लिख

[381:50]

सकते हैं तो इस तरीके से हम एक इंटी जर

[381:52]

एरे बनाएंगे जिसका साइज है तीन अगर हमें

[381:55]

कैरेक्टर एरे बनाना है तो हम लिखेंगे

[381:57]

कैरेक्टर अपने एरे का नाम फिर स्क्वायर

[381:59]

ब्रैकेट्स और अंदर लिखेंगे हमें कितने

[382:01]

कैरेक्टर्स उसमें स्टोर कराने हैं फ्लोट

[382:03]

बनाना है तो फ्लोट फिर उसका नाम स्क्वेयर

[382:06]

ब्रैकेट्स और अंदर लिखेंगे साइज क्या होना

[382:08]

चाहिए कितने फ्लोट स्टोर कराने हैं तो

[382:10]

जैसे ही हम ये वाली स्टेटमेंट लिखते हैं

[382:12]

इंट मार्क्स इज थ्री तो एक मार्क्स नाम से

[382:15]

मेमोरी लोकेशन आ जाती है हमारे मेमोरी के

[382:18]

अंदर जहां पर ये वन 2 3 तीन ब्लॉक्स हमारे

[382:22]

लिए रिजर्व हो जाते हैं और इन तीनों

[382:24]

ब्लॉक्स का साइज एक इंटी जर के बराबर है

[382:26]

इंटी जर हमने पढ़ा था डेटा टाइप्स के अंदर

[382:28]

कि चार बाइट्स लेता है मेमोरी के अंदर तो

[382:30]

हर एक ब्लॉक का साइज यहां पर चार बाइट्स

[382:33]

के इक्वल है ये भी चार बाइट्स है यह भी

[382:35]

चार बाइट्स है और यह लोकेशन भी चार बाइट्स

[382:38]

है तो चार-चार बाइट्स के तीन ब्लॉक्स आ

[382:40]

जाते हैं हमारे पास अब बाय कन्वेंशन हम इस

[382:43]

पहले ब्लॉक को जीरो एथ ब्लॉक कहते हैं

[382:45]

फर्स्ट ब्लॉक को सेकंड ब्लॉक को वन कहते

[382:48]

हैं और थर्ड ब्लॉक को टू कहते हैं ये बाय

[382:50]

कन्वेंशन होता है इसको कहा जाता है जरो

[382:53]

बेस्ड इंडेक्सिंग कुछ लैंग्वेजेस होते हैं

[382:55]

जिनमें वन बेस्ड इंडेक्सिंग होती है पर सी

[382:57]

c+ प जावा ऐसी लैंग्वेजेस हैं जिनमें जीरो

[383:00]

बेस्ड इंडेक्सिंग होती है जीरो बेस्ड यानी

[383:02]

फर्स्ट पोजीशन को हम वन नहीं कहेंगे जरो

[383:05]

कहेंगे तो ये चीज हमें हमेशा ध्यान रखनी

[383:07]

है अब बात करें कि एरे को इनपुट या आउटपुट

[383:10]

कैसे लेना होता है तो इनपुट लेने के लिए

[383:12]

हमें सबसे पहले लिखना पड़ता है परसेंटेज

[383:14]

डी जिस भी टाइप का हम वैल्यू इनपुट लेने

[383:16]

वाले हैं और इस मार्क्स ऑफ स्क्वायर

[383:19]

ब्रैकेट्स को हम एक वेरिएबल की तरह ट्रीट

[383:21]

करते हैं यानी जैसे नॉर्मल वेरिएबल की

[383:23]

वैल्यूज हम लिखते एज या मार्क्स वन

[383:25]

मार्क्स

[383:26]

टू उसी तरीके से हम एरे के वेरिएबल की जब

[383:30]

बात करते हैं तो उसको हम लिख सकते हैं

[383:32]

मार्क्स 0 मार्क्स वन मार्क्स टू ये भी एक

[383:36]

नॉर्मल वेरिएबल की तरह ट्रीट हो रहे होंगे

[383:38]

और इस नॉर्मल वेरिएबल के अंदर अगर हमें

[383:40]

कोई वैल्यू इनपुट लेनी है तो इसके सामने

[383:42]

लगा देंगे एड्रेस ऑफ ऑपरेटर अगर इसकी

[383:45]

वैल्यू को आउटपुट कराना है तो फिर हम

[383:47]

नॉर्मली उस वेरिएबल का नाम लिख देंगे अब

[383:49]

आप ध्यान देंगे कि हमने एरे का नाम लिखा

[383:51]

उसके बाद हमने ये लगाए स्क्वायर ब्रैकेट्स

[383:53]

पर अंदर हमने एक नंबर लिखा हुआ है इनपुट

[383:56]

में भी और आउटपुट में भी इसका यह मतलब है

[383:58]

कि जब भी हम मेमोरी की बात कर रहे हैं

[384:01]

हमारे पास मान लीजिए हमने एक मार्क्सस नाम

[384:03]

का एरे बनाया है जिके अंदर तीन मेमोरी

[384:05]

लोकेशन है तो उसके अंदर कोई कोई वैल्यू

[384:07]

हमने स्टोर करवाई होगी अब जब भी हम रो

[384:09]

लिखते हैं मार्क्स स्क्वायर ब्रैकेट 0 तो

[384:12]

उसका मतलब यह है कि हम इस नंबर को जानना

[384:15]

चाह रहे हैं या इनपुट कराना चाह रहे हैं

[384:17]

अगर हम मार्क्स ऑफ वन लिखते हैं तो उसका

[384:18]

मतलब है हम इस नंबर को या तो जानना चाह

[384:20]

रहे हैं या इनपुट कराना चाह रहे हैं और

[384:22]

मार्क्स ऑफ टू लिखते हैं तो उसका मतलब हम

[384:24]

इस नंबर को जानना चाह रहे हैं या इनपुट

[384:26]

करा रहे हैं तो जो भी आप नंबर लिखते हैं

[384:28]

वो उस लाइन के अंदर हमें बताता है कि एरे

[384:31]

की कौन सी पोजीशन वाले नंबर की हम बात

[384:33]

करें तो स्क्वायर ब्रैकेट्स के अंदर जो भी

[384:35]

हम नंबर लिखते हैं वो बताता है हमें कि

[384:37]

एरे में कौन सी पोजीशन वाले नंबर की हम

[384:39]

बात कर रहे हैं एक बार क्या करते हैं

[384:41]

एग्जांपल के लिए एक एरे को इनपुट और

[384:43]

आउटपुट करा के देखते हैं जैसे मार्क्सस

[384:46]

एरे था यह वाले सिंटेक्स की भी हम अभी बात

[384:48]

करेंगे पर इसको हम थोड़ी देर के लिए यहां

[384:50]

से हटा देते हैं और इसको कर लेते हैं

[384:52]

कॉमेंट आउट सबसे पहले एक एरे बनाते हैं

[384:55]

मार्क्स नाम से इस एरे का साइज है तीन अब

[384:59]

तीनों सब्जेक्ट के मार्क्स को हम एकएक

[385:01]

करके इनपुट करेंगे तो सबसे पहले लिखते हैं

[385:03]

प्रिंट स्टेटमेंट

[385:06]

एंटर

[385:09]

फिजिक्स स्कैनफ कर लेंगे सबसे पहले

[385:12]

लगाएंगे परसेंटेज डी क्योंकि एक इंटी जर

[385:14]

स्कैन कर रहे हैं फिर लगाएंगे एड्रेस ऑफ

[385:16]

ऑपरेटर एंड मार्क्स ऑफ

[385:19]

जीरो उसके बाद दोबारा से सेम प्रोसेस

[385:23]

रिपीट होगा

[385:24]

हमारा तीन बार अब केमिस्ट्री के मार्क्स

[385:28]

और यहां पर मैथ के मार्क्स और सेकंड टाइम

[385:31]

जब मार्क्सस इनपुट लेंगे तो जीरो पोजीशन प

[385:33]

तो ऑलरेडी हम फिजिक्स के मार्क्स लेके

[385:35]

इनपुट डाल चुके हैं अब केमिस्ट्री वाले

[385:37]

हमें फर्स्ट पोजीशन पर स्टोर करने हैं और

[385:39]

मैथ वाले सेकंड पर और अब प्रिंट करवाना है

[385:42]

तो प्रिंट करवाएंगे इस तरीके से फिजिक्स इ

[385:45]

इक्वल टू परसेंटेज डी केमिस्ट्री इ इक्वल

[385:49]

टू परसेंटेज डी मैथ इ इक्वल टू परसेंटेज

[385:53]

डी और यहां पर मार्क्स ऑफ जीरो मार्क्स ऑफ

[385:59]

वन तो आई होप ये अंडरस्टूड होगा कि

[386:01]

मार्क्स ऑफ जीरो यानी एक सिंगल वेरिएबल

[386:03]

सिर्फ जीरो पोजीशन वाली वैल्यू चाहिए

[386:05]

सिर्फ फर्स्ट पोजीशन वाली वैल्यू चाहिए और

[386:08]

सिर्फ सेकंड पोजीशन वाली वैल्यू चाहिए

[386:10]

इसको कर लेते हैं सेव एंड रन तो सबसे पहले

[386:13]

फिजिक्स के मार्क्स एंटर करेंगे फिर

[386:15]

केमिस्ट्री के मार्क्स एंटर करेंगे फिर

[386:17]

मैथ के मार्क्स एंटर करेंगे तो इस तरीके

[386:19]

से तीनों सब्जेक्ट के मार्क्स हमारे

[386:21]

पोजीशन वाइज स्टोर होकर आ गए हैं फिजिक्स

[386:23]

में हमने 97 स्टोर कराया है जीरो पोजीशन

[386:25]

पे केमिस्ट्री में 98 स्टोर कराया है

[386:27]

फर्स्ट पोजीशन पे और मैथ में 89 स्टोर

[386:30]

कराया है हमने सेकंड पोजीशन पे अगर यहां

[386:33]

पे हम जाए कि कि हमने एरे तो जी तीन का

[386:35]

डिक्लेयर करा है और एक्सेस हम कर रहे हैं

[386:37]

0 व और टू को और हम एक्सेस करने निकले अगर

[386:40]

थ्री को मान लीजिए थ्री को एक्सेस करते

[386:42]

हैं या यहीं पर हम थ्री लिख देते हैं कि

[386:45]

मैथ के मार्क्स थ्री में स्टोर कराएंगे तो

[386:47]

इसको एक बार देखते हैं कंपाइल करके रन तो

[386:50]

फिजिक्स के मार्क्स हमने स्टोर करवा लिए

[386:53]

97 केमिस्ट्री के 98 और अब मैथ के जैसे ही

[386:56]

हम स्टोर कराएंगे ना मान लीजिए 89 हम

[386:58]

स्टोर करा रहे हैं वैसे ही हमारा

[387:00]

प्रोग्राम अबोर्ड कर गया मतलब एंड कर गया

[387:02]

क्यों क्योंकि एरर आ गया और ये एक ऐसा एरर

[387:05]

है जो रन टाइम एरर है मतलब कंपाइलर नहीं

[387:08]

चेक कर पाएगा अगर आप ऐसी मिस्टेक कर देते

[387:11]

हैं जब आप एरे के साइज से बड़ी चीज एक्सेस

[387:14]

कर रहे हैं तो वो कंपाइलर आपको नहीं

[387:16]

बताएगा कि आप मिस्टेक कर रहे हैं वो आपका

[387:18]

प्रोग्राम रन टाइम में आपको बताएगा कि

[387:20]

आपने गलती कर दिया और वहीं पे रुक जाएगा

[387:22]

जैसे यहां पर हमने थ्री लिखा जबकि एरे के

[387:25]

अंदर तीन का ही साइज है जो 0 वन और टू को

[387:27]

जा चुका है अब तीन के लिए हमें इस एरे का

[387:29]

साइज चार करने की जरूरत थी तो इसको हम

[387:32]

नहीं लिख सकते क्योंकि ये हमें दे देगा

[387:34]

एरर इसीलिए जब भी एरे हम बना रहे होते हैं

[387:36]

हमें ध्यान देना होता है कि अपना जो

[387:38]

मैक्सिमम इंडेक्स जहां तक हम जा सकते हैं

[387:40]

उससे आगे हम ना जा रहे हो नेक्स्ट हम बात

[387:43]

करने वाले हैं प्रैक्टिस क्वेश्चन की बहुत

[387:45]

आसानी से इस सवाल को हम सॉल्व करेंगे सवाल

[387:48]

कहता है राइट अ प्रोग्राम टू एंटर प्राइस

[387:50]

ऑफ थ्री आइटम्स एंड प्रिंट देयर फाइनल

[387:53]

कॉस्ट विद जीएसटी यानी हमें तीन आइटम्स का

[387:56]

प्राइस लेना है अब ये प्राइस हम फ्लोटिंग

[387:58]

वैल्यू रख सकते हैं और फाइनल कॉस्ट देनी

[388:01]

है विद जीएसटी हर वैल्यू के साथ हमें ऐड

[388:03]

कर देना उसका 18 पर जीएसटी और फिर जो

[388:07]

फाइनल वैल्यू आएगी उसको हमें प्रिंट

[388:09]

करवाना है तो उसको देखते हैं किस तरीके से

[388:10]

करेंगे सबसे पहले तीन आइटम्स को हमें एंटर

[388:14]

करवाना है तो मतलब हम एक एरे बना सकते हैं

[388:16]

क्योंकि तीनों आइटम्स का सेम टाइप है जब

[388:19]

भी मल्टीपल वैल्यूज रखनी हो और ज्यादा

[388:21]

वैल्यूज हो और सेम टाइप हो तो वहां पर

[388:23]

हमें एरे बनाना होता है तो सबसे पहले बना

[388:25]

लेंगे एक एरे ऑफ फ्लोट जिसको नाम देंगे

[388:29]

प्राइस ऑफ साइज थ्री अब प्रिंट स्टेटमेंट

[388:32]

लिख लेते हैं

[388:34]

एंटर थ्री प्राइसेस सबसे पहले स्कैन कर

[388:38]

लेंगे परसेंटेज एफ से अपना फर्स्ट प्राइस

[388:41]

यानी एम परसेंट प्राइस ऑफ जीरो एंड उसी

[388:45]

तरीके से एम परसेंट प्राइस ऑफ वन एंड देन

[388:48]

टू उसके बाद हर बार प्रिंट करवा देंगे इन

[388:50]

फैक्ट टोटल प्राइस

[388:53]

वन इ इक्वल टू यहां पर लिखेंगे प्राइस ऑफ

[388:58]

0 प्लस

[389:01]

0.18 मल्टीप्ला बाय प्राइस ऑफ

[389:05]

जी एक तरीके से हमने 18 पर जीएसटी यहां पर

[389:08]

इस तरीके से ऐड कर दिया प्राइस के अंदर

[389:11]

सेम चीज को तीन बार रिपीट करेंगे यहां पर

[389:13]

प्राइस टू यहां पर प्राइस ्र 1 मल्टीप्ला

[389:17]

बा 0.18 ऑफव 2 मल्टीप्ला बा

[389:20]

0.18 इसको कर लेंगे सेव तो यह हमारे फाइनल

[389:24]

या टोटल प्राइसेस है विद जीएसटी और एक बार

[389:26]

इसको करते हैं रन तो यहां पर फॉर्मेट

[389:34]

परसेंटेज एफ परसेंटेज ए अब सबसे पहले तीन

[389:37]

प्राइसेस ऐड करने हैं तो 100 200 एंड 300

[389:41]

तो ये जीएसटी वैल्यूज हमारे पास आ गई सबसे

[389:43]

पहले 118 फिर 236 फिर 354 ये तीनों

[389:47]

प्राइसेस आ गए हैं थोड़ी सी स्पेस के लिए

[389:49]

हम बैक स् ए भी डाल सकते थे इसको कर लेते

[389:52]

हैं सेव एंड दोबारा से एक बार रन करें तो

[389:54]

ये तीनों प्राइसेस आ गए हैं विद एडेड

[389:56]

जीएसटी तो टोटल प्राइस हम इस तरीके से कर

[389:58]

सकते हैं तो यहां पर सबसे बड़ा बेनिफिट जो

[390:00]

हमें देखने को मिला एरस को यूज करके वो ये

[390:02]

था कि हमें तीन अलग-अलग वेरिए बल्स नहीं

[390:04]

मेंटेन करने पड़े एक सिंगल वेरिएबल हमने

[390:06]

बना लिया और उसी से हमारे सारे के सारे

[390:08]

काम चल रहे हैं जब हम सिमिलर डेटा टाइप्स

[390:10]

की बात कर रहे हैं अब बढ़ते हैं अपने

[390:11]

नेक्स्ट टॉपिक की तरफ जिसका नाम है इनिश

[390:14]

इजेशन ऑफ एरे अभी हमने देखा कि एरे को हम

[390:17]

डिक्लेयर कर सकते हैं उसके बाद उसमें

[390:18]

एलिमेंट्स डाल सकते हैं पर एरे को

[390:20]

डिक्लेरेशन के साथ भी इनिश इज किया जा

[390:22]

सकता है जैसे अगर एक इंट बनाते हैं तो

[390:25]

उसको हम लिख सकते हैं इंट x और फिर x = 10

[390:28]

या फिर उसको लिख सकते हैं इंट x = 10 ये

[390:32]

दोनों उनके इनिश के प्रोसेस हैं तो उसी

[390:35]

तरीके से एरे को भी हम डिक्लेयर करने के

[390:37]

साथ-साथ इनिश इज करा सकते हैं कैसे करा

[390:39]

सकते हैं इस सिंटेक्स की हेल्प से हम सबसे

[390:42]

पहले लिखते हैं डेटा टाइप उसके बाद अपने

[390:45]

एरे का नाम फिर स्क्वेयर ब्रैकेट्स अब

[390:47]

ध्यान देंगे स्क्वेयर ब्रैकेट्स के अंदर

[390:49]

हमें साइज को लिखने की जरूरत नहीं है

[390:51]

क्योंकि राइट साइड में हम जितने भी

[390:52]

एलिमेंट्स लिखेंगे वो ऑटोमेटिक हमें साइज

[390:54]

दे देंगे एरे उसके बाद राइट में लिखते हैं

[390:56]

कर्ली ब्रेसेज और उसके अंदर जितने भी

[390:58]

एलिमेंट्स यानी अगर हमने तीन एलिमेंट्स

[391:00]

लिखे हैं तो मतलब हम तीन साइज का एरे बना

[391:02]

रहे हैं अब या तो हम ये सिंटेक्स फॉलो कर

[391:04]

सकते हैं या फिर हम साइज को भी लिख सकते

[391:07]

हैं तो ये दोनों ही सिंटेक्स बिल्कुल सही

[391:09]

हैं जब हम डिक्लेयर करने के साथ-साथ अपने

[391:11]

एरे को

[391:17]

इनिशियलिज्म

[391:18]

कर लेते हैं कि एक मार्क्स नाम का एरे बन

[391:21]

जाएगा उसके अंदर क्या होगा सबसे पहली जो

[391:24]

वैल्यू है वो यहां पे आ जाएगी दूसरी

[391:26]

वैल्यू यहां आ जाएगी तीसरी वैल्यू यहां आ

[391:28]

जाएगी ये होगी हमारी जीरो एथ पोजीशन ये

[391:30]

फर्स्ट पोजीशन और ये सेकंड पोजीशन इस

[391:32]

फर्स्ट पोजीशन का साइज चार बाइट्स का होगा

[391:35]

सेकंड का भी चार बाइट्स का होगा और थर्ड

[391:37]

का भी चार बाइट्स का होगा क्योंकि इंटी जर

[391:39]

चार बाइट्स लेता है अब अगर आपकी 32 बिट

[391:42]

मशीन है या फिर आप किसी और सिस्टम पर काम

[391:44]

कर रहे हैं तो हो सकता है आपकी मशीन के

[391:46]

हिसाब से इंट का जो साइज हो वो दो बाइट्स

[391:48]

हो या कुछ और हो पर मेरी मशीन के हिसाब से

[391:51]

इंटी जर का साइज चार बाइट्स होता है तो जब

[391:53]

भी आपसे कोई कैलकुलेशन करवाए कि आप साइज

[391:56]

बताओ एरे कितना लेता है तो या तो आप इंट

[391:58]

को चार बाइट अज्यू कर सकते हो या फिर

[392:00]

क्वेश्चन के अंदर दिया होगा या इंटरव्यूअर

[392:02]

से या टीचर से पूछ भी सकते हैं कि इंटी जर

[392:04]

का मुझे साइज बता दो मशीन के हिसाब से तो

[392:06]

उसमें कोई परेशानी नहीं है क्योंकि साइज

[392:08]

अलग-अलग भी हो सकते हैं पर इस क्लास के

[392:10]

अंदर हम चार बाइट्स लेके चलेंगे तो अगर

[392:12]

हमें टोटल मेमोरी रिजर्व निकालनी हो कि इस

[392:14]

एरे ने कितनी मेमोरी जो है रिजर्व की तो

[392:17]

वो होगी हमारी 12 बाइट्स क्योंकि तीन इंटी

[392:20]

जर को स्टोर कराने में मेमोरी के अंदर

[392:22]

टोटल 12 बाइट्स कंज्यूम हो रहे होंगे तो

[392:24]

इस तरीके से अगर हमें कभी पता करना हो कि

[392:27]

कैरेक्टर अगर हमें स्टोर कराना है कोई

[392:29]

कैरेक्टर एरे जिसके अंदर हम 10 स्टोर करा

[392:31]

रहे हैं तो हमें पता है कि कैरेक्टर कितनी

[392:33]

मेमोरी लेता है एक बाइट और हम कितने

[392:36]

कैरेक्टर स्टोर करा रहे हैं 10 तो हम

[392:38]

कितनी मेमोरी ले रहे हैं टोटल 10 * 1 यानी

[392:41]

10 बाइट्स उसी तरीके से अगर हम मान लीजिए

[392:44]

एक और इंटी जर एरे स्टोर कराने हैं जिसमें

[392:46]

स्टोर करा रहे हैं रोल नंबर्स और हमने 30

[392:48]

बच्चों के रोल नंबर स्टोर करा दिए तो हमें

[392:50]

पता है इंटी जर लेता है चार बाइट्स और हम

[392:52]

स्टोर करा रहे हैं 30 बच्चों के लिए तो हम

[392:55]

30 इंटी जर स्टोर करा रहे हैं मेमोरी के

[392:56]

अंदर तो टोटल कितनी मेमोरी कंज्यूम होगी

[392:59]

30 * 4 दैट इज 120 बाइट्स तो ऐसे स सल

[393:04]

बहुत बार आ जाते हैं हमारे कॉलेज के

[393:05]

एग्जाम्स के अंदर जिसमें पूछते हैं कि एरे

[393:07]

कितनी मेमोरी रिजर्व करेगा वो हमें बताना

[393:10]

होता है तो उसकी कैलकुलेशन कुछ इस तरीके

[393:12]

से होती है कि जो भी हमारा डटा टाइप सिंगल

[393:15]

मेमोरी रिजर्व करेगा मेमोरी के अंदर जितनी

[393:17]

स्पेस रिजर्व करेगा उसको मल्टीप्लाई कर दो

[393:20]

कि कितने हमें स्टोर कराने हैं वैसे तो

[393:22]

उससे हमारी टोटल मेमोरी कंज्यूम टोटल

[393:23]

मेमोरी रिजर्व्ड आ जाएगी एक बार एक एरे को

[393:26]

मेमोरी के अंदर इनिश इज भी कराकर देख लेते

[393:28]

हैं तो जैसे यहां पर हमने प्राइस बनाया इस

[393:31]

प्राइस की वैल्यू को हम एंटर करने की जगह

[393:34]

इसको डायरेक्टली

[393:45]

इनिशियलिज्म

[393:47]

साइज हटा दें तो ये वाला सिंटेक्स भी

[393:50]

बिल्कुल सही रहता तो जो भी आपके यूज केस

[393:53]

में फिट कर रहा है आपको वो वाला सिंटेक्स

[393:55]

यूज़ करना है किसी भी एरे को इनिश इज करने

[393:57]

के लिए अब नेक्स्ट टॉपिक जिसकी हम बात

[393:59]

करेंगे वो है पॉइंटर एरिथ मेे िक एरिथ मेे

[394:01]

िक से मतलब हमने समझा था कि जिसमें प्लस

[394:04]

माइनस मल्टीप्लाई डिवाइड मॉड्यूल के साथ

[394:06]

खेलते हैं यहां पे पॉइंट्स की इसलिए बात

[394:08]

कर रहे हैं क्योंकि अरेज किसी ना किसी तरह

[394:10]

पॉइंटर से रिलेटेड होते हैं वो एक बार

[394:12]

पॉइंटर एरिथ मेे िक समझ लेंगे उसके बाद

[394:14]

समझेंगे कैसे रिलेटेड होते हैं तो पॉइंट्स

[394:16]

के अंदर हम मल्टीप्लाई डिवाइड मॉड्यूल ये

[394:19]

सब तो नहीं कर सकते हैं पर कुछ एरिथ मेे

[394:20]

िक ऑपरेशंस है जो परफॉर्म कर सकते हैं

[394:22]

इनमें आते हैं हमारे इंक्रीमेंट ऑपरेटर और

[394:25]

डिक्रिमेंट ऑपरेटर यानी पॉइंटर की वैल्यू

[394:27]

को हम प्लस या माइनस कर सकते हैं जैसे

[394:30]

सबसे पहला अगर केस देखें तो इसमें हमने एक

[394:32]

इंटी जर वेरिएबल बनाया है एज जिसके अंदर

[394:35]

स्टोर कराया 22 मान लीजिए ये एज वेरिएबल

[394:38]

हमारी मेमोरी में कुछ इस तरीके से है जहां

[394:40]

पे 22 स्टोर्ड है और ये है 2000 यहां

[394:43]

मेमोरी लोकेशन अब हम क्या कर रहे हैं एक

[394:46]

पॉइंटर बना रहे हैं जो एज को पॉइंट करता

[394:48]

है तो ये पॉइंटर कहीं पर बना होगा मतलब

[394:51]

मेमोरी में कोई और लोकेशन बनी होगी जिसका

[394:53]

नाम होगा पॉइंटर जहां पे स्टोर कराया होगा

[394:55]

हमने 2000 और इसका भी अपना कोई लोकेशन

[394:58]

होगा 4010 अब हमने कर दिया पॉइंटर को प्लस

[395:01]

प्लस तो अब हमें बताना है पॉइंटर कहां पे

[395:03]

पॉइंट कर रहा है पॉइंटर को प्लस प्लस करने

[395:05]

का मतलब हमने कर दिया पॉइंटर इज इक्वल टू

[395:07]

पॉइंटर + 1 पर जब भी हम पॉइंट्स को

[395:10]

इंक्रीमेंट या डिक्रिमेंट करते हैं तो एक

[395:12]

स्पेशल चीज होती है व उनकी वैल्यू + 1 या

[395:15]

-1 नहीं होती जब भी + व लिखा होता है इसका

[395:18]

मतलब है एक डेटा टाइप बढ़ा दो यानी अगर

[395:21]

पॉइंटर इंटी जर टाइप का है तो वो इंटी जर

[395:24]

के साइज से बढ़ जाएगा अगर पॉइंटर कैरेक्टर

[395:26]

टाइप का है तो वो कैरेक्टर के साइज से बढ़

[395:28]

जाएगा अगर पॉइंटर फ्लोट टाइप का है डबल

[395:31]

टाइप का है तो वो उस साइज से बढ़ जाएगा

[395:33]

यहां पे हमारा जो पॉइंटर है वो एक इंटी जर

[395:36]

का एड्रेस स्टोर करा रहा है तो मतलब उसमें

[395:38]

चार बाइट्स ऐड हो जाएंगी जैसे अगर पॉइंटर

[395:40]

की वैल्यू अभी 2000 थी और अब हमने कर दिया

[395:43]

पॉइंटर प्लस प्लस तो इसकी वैल्यू बढ़कर हो

[395:46]

जाएगी

[395:47]

2004 तो ये पॉइंटर जो है अब यहां पर पॉइंट

[395:51]

करवाने लग जाएगा यहां पर नहीं क्योंकि ये

[395:53]

मेमोरी अल्टीमेटली चार बाइट्स ले रही है

[395:55]

और इस मेमोरी लोकेशन का भी एड्रेस है 2004

[395:58]

और इस मेमोरी लोकेशन का है 1996 तो यहां

[396:01]

से इंटूटिव हम समझ सकते हैं कि अगर पॉइंटर

[396:03]

प्लस प्लस किया तो वो एक इंटी जर आगे

[396:06]

बढ़ेगा यानी चार बाइट्स आगे बढ़ेगा और अगर

[396:09]

पीटीआर माइनस माइनस हमने किया तो वो चार

[396:12]

बाइट्स पीछे जाएगा यानी 2004 को हमने उसके

[396:15]

बाद दोबारा से पॉइंटर माइनस माइनस कर दिया

[396:18]

तो वो वापस से अपनी ओरिजिनल लोकेशन में आ

[396:20]

जाएगा दैट इज 2000 अब एक बार इसको कोड

[396:23]

करके भी वेरीफाई कर लेते हैं अपने

[396:25]

प्रोग्राम के अंदर एक वेरिएबल बनाते हैं

[396:27]

इंट एज 22 और फिर बनाते हैं पॉइंटर पीटीआर

[396:32]

पीटीआर के अंदर स्टोर कर एड्रेस ऑफ एज अब

[396:35]

हमने कर दिया सबसे पहले पीटीआर को प्लस

[396:37]

प्लस करा लेते

[396:39]

हैं प्लस प्लस यहां पर करवा दिया और उससे

[396:43]

पहले पीटीआर की वैल्यू को करते हैं प्रिंट

[396:45]

पीटीआर इ इक्वल टू परसेंटेज अनसाइंड इंट

[396:50]

में इसको दिखाएंगे कंट्रोल सी एंड दोबारा

[396:53]

से पीटीआर की वैल्यू को तो इसको कर लेते

[396:56]

हैं रन तो सबसे पहले पीटीआर की वैल्यू जो

[396:59]

प्रिंट हुई दैट इज 18

[397:01]

22802 और उसके बाद जो प्रिंट हुई उसके

[397:04]

लास्ट में आया 156 अब ध्यान से देखेंगे तो

[397:07]

152 और 156 के अंदर डिफरेंस कितना है चार

[397:10]

का डिफरेंस है तो हम समझ सकते हैं जैसे ही

[397:12]

प्लस प्लस किया वैसे वैल्यू क्या है इंटी

[397:15]

जर के साइज से बढ़ गई यानी चार बाइट से

[397:17]

बढ़ गई अब यहां पर अगर हम दोबारा से माइनस

[397:19]

माइनस करें पीटीआर माइनस माइनस और उसके

[397:22]

बाद दोबारा से पीटीआर की वैल्यू को प्रिंट

[397:25]

करवाएंगे तो सबसे पहले पॉइंटर की वैल्यू

[397:27]

ये थी जिसमें लास्ट में आ रहा था 112 उसके

[397:30]

बाद पीटीआर प्लस प्लस किया तो आ गया 116

[397:32]

चार से बढ़ गई उसके बाद माइनस माइनस किया

[397:35]

तो वापस से 112 आ गया यानी ओरिजिनल मेमोरी

[397:37]

लोकेशन पे आ गया क्योंकि दोबारा से माइनस

[397:39]

माइनस किया तो उसको एक इंटी जर साइज से कम

[397:41]

होना है यानी चार बाइट्स कम हो गया तो इस

[397:44]

तरीके से हमारे डिक्रिमेंट और इंक्रीमेंट

[397:46]

ऑपरेटर काम करते हैं पॉइंट्स के अंदर

[397:48]

सेकंड केस लेते हैं सेकंड केस में क्या हो

[397:51]

रहा है हमने एक फ्लोटिंग वेरिएबल बनाया है

[397:53]

प्राइस जिसके अंदर स्टोर कराया है 20.00

[397:56]

अब हमने क्या किया पीटीआर को पॉइंट करवा

[397:58]

दिया प्राइस की तरफ और फिर कर दिया पीटीआर

[398:01]

प्लस प्लस तो इस बार जब पॉइंटर इ इक्व टू

[398:04]

पॉइंटर प्व हम करेंगे तो ये प्लव वाला जो

[398:07]

साइज होगा ये हमारे फ्लोट की बाइट्स होंगी

[398:09]

तो ये फ्लोट के साइज के हिसाब से

[398:11]

इंक्रीमेंट और डिक्रिमेंट होगा एक बार

[398:13]

इसको भी कोड करके देख लेते हैं यहां पे

[398:16]

लिखेंगे फ्लोट प्राइस इ इक्वल टू

[398:22]

100 अब ये पॉइंटर जो है प्राइस को पॉइंट

[398:25]

करा रहा है पहले हम पॉइंटर की ओरिजिनल

[398:27]

वैल्यू प्रिंट कराएंगे फिर प्लस प्लस वाली

[398:30]

और फिर माइनस माइनस वाली तो रन करते हैं

[398:32]

कोड को तो ओरिजिनल वैल्यू थी 904 जैसे ही

[398:35]

प्लस प्लस किया चार बाइट से बढ़ गई फ्लोट

[398:38]

की चार बाइट्स उसमें ऐड हो गई और जैसे ही

[398:40]

माइनस माइनस किया वापस से फ्लोट की चार

[398:42]

बाइट्स उसमें से कम हो गई तो इस तरीके से

[398:44]

फ्लोट के साइज के हिसाब से भी पॉइंटर चेंज

[398:46]

होता है और केस थ्री अगर लें तो ये हमारा

[398:48]

कैरेक्टर का केस है सबसे पहले हमने

[398:50]

कैरेक्टर बनाया स्टार उसके अंदर एस्टरिस

[398:52]

स्टोर कराया उसके बाद एक पॉइंटर बनाया जो

[398:55]

स्टार को पॉइंट कर रहा है और फिर कराया

[398:56]

पीटीआर तो कैरेक्टर में क्या होता है एक

[398:59]

बाइट होती है कैरेक्टर सिर्फ एक बाइट का

[399:02]

होता है तो जब भी इंक्रीमेंट होगा वो

[399:03]

एक्चुअली बाय वन होगा क्योंकि एक बाइट

[399:05]

इंक्रीमेंट हो रही है जैसे यहां पर है

[399:07]

2000 यहां पे 2001 और यहां पे है

[399:11]

2002 यहां पे अगर हमने स्टार नाम का

[399:14]

वेरिएबल बनाया जिसमें स्टार स्टोर है यानी

[399:16]

एस्टरिस स्टोर्ड है और पॉइंटर इसको पॉइंट

[399:19]

कर रहा है तो जैसे ही प्लस प्लस करेंगे

[399:21]

पॉइंटर पॉइंट करने लग जाएगा इसको अगर

[399:23]

माइनस माइनस कर दिया तो पॉइंटर पॉइंट करने

[399:25]

लग जाएगा इसको इसको भी कोड करके वेरीफाई

[399:27]

कर लेते हैं यहां पे बनाते हैं कैर स्टार

[399:30]

इ इक्वल टू एस्ट रिस्क इसमें स्टोर

[399:33]

कराएंगे स्टार का एड्रेस एंड उसके बाद

[399:36]

दोबारा से पॉइंट्स की वैल्यूज को तो सबसे

[399:38]

पहले पॉइंटर की वैल्यू एंड हो रही थी 0 टू

[399:41]

सेन से प्लस प्लस किया तो 0 टू 8 पे आ गई

[399:44]

क्योंकि एक बाइट से इंक्रीज होगा कैरेक्टर

[399:46]

और माइनस माइनस किया तो हो गई 0 टू से तो

[399:49]

इस तरीके से अगर आपके पास सवाल आते हैं कि

[399:51]

पॉइंट्स को इंक्रीमेंट करने हैं या

[399:52]

डिक्रिमेंट करने हैं तो उन सवालों में

[399:54]

कंफ्यूज नहीं होना है सिर्फ साइज को ऐड कर

[399:56]

देना है अगर इंटी जर में + 1 लिखा है तो

[399:59]

उसका मतलब + 1 नहीं है उसका मतलब + 4 है

[400:02]

फ्लोट में लिखा है तो उसका भी मतलब + 4 है

[400:04]

कैरेक्टर में लिखा है तो उसका मतलब + 1 अब

[400:06]

पॉइंटर एरिथ मेे िक के अंदर दो और चीजें

[400:09]

आती है जिनमें से सबसे पहले है कि वी कैन

[400:10]

सबट क्ट वन पॉइंटर फ्रॉम अनदर यानी एक

[400:13]

पॉइंटर में से दूसरे पॉइंटर की वैल्यू को

[400:15]

माइनस कर सकते हैं जैसे अगर हमने लिखा इंट

[400:18]

पीटीआर व किसी इंटी जर एज को पॉइंट करा

[400:21]

रहा है और इंट पीटीआर 2 किसी इंटी जर एज

[400:26]

टू को पॉइंट करा र है तो अगर हम pt2 - pt1

[400:30]

करते हैं तो यह वाला जो ऑपरेशन है यह लिड

[400:33]

है साथ के साथ वी कैन आल्सो कंपेयर टू

[400:36]

पॉइंट्स यानी एक पॉइंटर की वैल्यू को

[400:38]

दूसरे पॉइंटर की वैल्यू से कंपेयर कर सकते

[400:40]

हैं उससे या तो आंसर ट्रू आएगा या फाल्स

[400:42]

आएगा इसका भी एक एग्जांपल देख लेते हैं

[400:44]

इंट ए इ 22 इंट ए इ 23 तो ये अंडरस्कोर एज

[400:51]

है जो कि एक अलग वेरिएबल है इन्हीं के

[400:53]

हिसाब से पॉइंट्स बनाते हैं इंट स्टार

[400:55]

पीटीआर सबसे पहले डिफरेंस प्रिंट करेंगे

[400:58]

परसेंटेज य ब n पटीर - पीटीआर और उसके बाद

[401:03]

प्रिंट करेंगे कंपैरिजन कंपैरिजन के लिए

[401:06]

क्या करते हैं हम अपना जो अंडरस्कोर

[401:08]

पीटीआर है ना उसमें स्टोर करा लेते हैं एज

[401:10]

का एड्रेस तो अब यहां पे कंपेयर कर लेंगे

[401:13]

कि दोनों सेम हो गए क्या कैसे कंपेयर

[401:15]

करेंगे अब पॉइंटर जो है नॉर्मल पीटीआर वो

[401:19]

स्टोर करा रहा है एज का एड्रेस और

[401:20]

अंडरस्कोर पीटीआर में भी एज का एड्रेस

[401:22]

स्टोर कराया है तो कायदे से लॉजिकली दोनों

[401:25]

के अंदर सेम एड्रेस की वैल्यू है तो इ

[401:27]

इक्वल टू इ इक्वल टू जब करेंगे तो दोनों

[401:29]

का कंपैरिजन जो है वो ट्रू रिटर्न करेगा

[401:31]

यानी वन रिटर्न करेगा तो आउटपुट भी देख ले

[401:33]

लेते हैं एक बार सेव करके इसको रन करते

[401:35]

हैं डिफरेंस आया है वन और कंपैरिजन भी वन

[401:37]

अब कंपैरिजन में वन का मतलब ट्रू है और

[401:39]

डिफरेंस में वन का मतलब बाय वन इंटी जर है

[401:43]

जैसे इनकी वैल्यूज को भी प्रिंट करवा लेते

[401:45]

हैं परसेंटेज u परसेंटेज u और यहां पे

[401:49]

प्रिंट करवाएंगे पीटीआर और अंडर पीटीआर तो

[401:52]

सबसे पहले पीटीआर की वैल्यू है

[401:54]

18700 जो एंड हो रही है 264 से अंडर

[401:58]

पीटीआर की वैल्यू एंड हो रही है 260 से तो

[402:01]

जब हमने किया पीटीआर - पीटीआर अंडरस्कोर

[402:04]

पीटीआर तो 264 में से 260 माइनस हुआ तो

[402:07]

डिफरेंस तो चार का आना चाहिए पर प्रिंट

[402:09]

हुआ वन क्योंकि ये चार नहीं दिखाएगा ये

[402:12]

मतलब बाइट्स में नहीं दिखाएगा डिफरेंस यह

[402:14]

दिखाएगा कि दोनों के अंदर कितने इंटी जर्स

[402:17]

का डिफरेंस है तो एक इंटी जर का डिफरेंस

[402:19]

है व्हिच इज इक्विवेलेंट टू चार बाइट्स और

[402:21]

कंपैरिजन में तो ट्रू आना ही था क्योंकि

[402:23]

दोनों सेम एड्रेस को पॉइंट कर रहे हैं तो

[402:25]

ओबवियसली दोनों की वैल्यू सेम है अब एक

[402:28]

छोटी सी चीज करके देखते हैं साथ में यहां

[402:30]

पे एज को बना देते हैं क्या कैरेक्टर और

[402:34]

इसको बना देते हैं कैरेक्टर पॉइंटर अब यह

[402:36]

जो कैरेक्टर पॉइंटर है कंपैरिजन तो ऑब्

[402:39]

वियस दोनों का ट्रू नहीं आएगा परट डिफरेंस

[402:41]

को एक बार एनालाइज करते हैं तो यहां पे

[402:43]

देखेंगे शुरुआत में ही एरर आ गया क्यों

[402:46]

क्योंकि हम एक इंटी जर पॉइंटर को एक

[402:48]

कैरेक्टर पॉइंटर में से डिफरेंस लेकर नहीं

[402:51]

देख सकते ये दोनों कंपैटिबल टाइप्स नहीं

[402:53]

है तो जब भी डिफरेंस लेना होगा मतलब एक

[402:55]

पॉइंटर से दूसरा पॉइंटर माइनस होगा तो वो

[402:57]

सेम टाइप के पॉइंट्स होने चाहिए अलग-अलग

[402:59]

टाइप्स के नहीं तो ये चीज ध्यान रखनी है

[403:01]

जब भी पॉइंट्स का डिफरेंस ले और डिफरेंस

[403:03]

नंबर नहीं आता मतलब दोनों में नंबर का जो

[403:06]

डिफरेंस है डिफरेंस आता है डेटा टाइप का

[403:08]

कि कितने डेटा टाइप्स का डिफरेंस है

[403:10]

नेक्स्ट टॉपिक की बात करेंगे नेक्स्ट

[403:11]

टॉपिक कहता है कि हमने पॉइंटर एरिथ मेे

[403:14]

पढ़ा क्यों ये इसलिए पढ़ा क्योंकि एरे इज

[403:16]

अ पॉइंटर जो हम अरेज पढ़ रहे थे वो

[403:19]

एक्चुअली पॉइंटर है कैसे अगर हम एक पॉइंटर

[403:22]

बनाते हैं इंट स्टार पॉइंटर और उसमें

[403:24]

पॉइंट करा देते हैं एरे की फर्स्ट लोकेशन

[403:26]

को यानी एरे ऑफ जीरो का एड्रेस अगर हम इस

[403:30]

पॉइंटर के अंदर स्टोर कर देते हैं तो हम

[403:32]

कुछ इस तर तरीके से कर रहे होंगे ये हमने

[403:34]

सिंटेक्स ऑलरेडी सीखा हुआ है पर अगर यह

[403:37]

वाली चीज को इस राइट साइड वाले पूरे पार्ट

[403:39]

को हम एरे से रिप्लेस करना चाहे तो भी कर

[403:42]

सकते हैं मतलब हमारा जो एरे होता है उसका

[403:46]

फर्स्ट इंडेक्स पे जो लोकेशन है एरे का

[403:48]

नाम वो एक्चुअली एक पॉइंटर होता है पॉइंट

[403:50]

कहां करता है एरे की जरूरत इंडेक्स प जैसे

[403:53]

अगर मेरे पास कोई एरे है मान लीजिए

[403:55]

मार्क्स नाम का एरे है जिसने काफी सारे

[403:58]

स्टूडेंट्स के मार्क्स स्टोर कराए हुए हैं

[403:59]

0 1 2 3 4 5 6 तो ये जो मार्क्स है इसका

[404:04]

आप टाइप देखेंगे तो ये एक्चुअली एक पॉइंटर

[404:07]

है और ये पॉइंट कहां कराता है पॉइंट कराता

[404:10]

है एरे की रोयत लोकेशन पे तो फिर चाहे हम

[404:13]

ये लाइन लिखें मतलब एड्रेस ऑफ रोयत लोकेशन

[404:17]

या फिर हम सीधा एरे का नाम लिखें दोनों

[404:19]

बराबर हैं दोनों का सिंटेक्स अलग-अलग है ब

[404:22]

दोनों का मतलब सेम है तो इस तरीके से एरे

[404:24]

का जो नाम होता है वो एक पॉइंटर होता है

[404:26]

और एक बहुत इंपॉर्टेंट चीज है जो हमें याद

[404:28]

रखनी है क्योंकि ये सवालों में पूछ ली

[404:30]

जाती है अब अगर किसी एरे पे हमें ट्रेवल

[404:32]

करना है यानी एक जगह से दूसरी जगह जाना है

[404:34]

अगर एरे के अंदर 100 एलिमेंट्स हैं तो

[404:37]

उनके एक के बाद एक के बाद एक वैल्यूज को

[404:39]

प्रिंट करवाना है तो कैसे करवाएं सबसे

[404:41]

पहले तो हम अब हमने नया-नया सीखा है कि एर

[404:43]

एक पॉइंटर होता है और यह भी सीखा है कि

[404:45]

पॉइंटर वैल्यू को हम प्लस भी कर सकते हैं

[404:47]

और माइनस भी कर सकते हैं तो सिंपली क्या

[404:49]

करेंगे एक लूप चलाएंगे लूप चला के अगर

[404:53]

हमारी वैल्यूज अगर हम शुरुआत में हमारा

[404:56]

पॉइंटर जीरो पर है तो उसको प्लस प्लस करते

[404:59]

हुए हम एंड तक लेके जाएंगे और उसी तरीके

[405:01]

से माइनस माइनस करते हुए वापस भी लेकर आ

[405:04]

सकते हैं और यहां पर हम रो से लेकर n तक

[405:07]

अपने पॉइंटर को प्रिंट करवाएंगे कैसे

[405:08]

करेंगे मान लीजिए आधार कार्ड आपने स्टोर

[405:10]

करा आधार वैल्यूज 10 लोगों की सबसे पहले

[405:14]

अगर एक्सेस करनी है हमें चीजें यानी स्कैन

[405:16]

एफ या प्रिंट एफ इनपुट आउटपुट दोनों के

[405:19]

लिए इसको एक एग्जांपल से समझते हैं मान

[405:21]

लीजिए आपने एक आधार नाम का एरे बनाया है

[405:24]

जो 10 लोगों का आधार कार्ड स्टोर कराता है

[405:26]

अब उसके लिए आपको एक लूप लगाना है जो 10

[405:29]

लोगों के आधार को इनपुट करे और फिर 10

[405:31]

लोगों के आधार को आउटपुट में दे तो उसके

[405:33]

लिए एक पॉइंटर बना लो पॉइंटर कहां पॉइंट

[405:35]

कर रहा है फर्स्ट इंडेक्स पर तो पॉइंटर

[405:37]

हमारा यहां पर पॉइंट कर रहा है इस लोकेशन

[405:40]

पर और सारे इंडेक्स में हमने जो है अपनी

[405:44]

वैल्यूज वो स्टोर करा ली है तो 10 वैल्यूज

[405:48]

के लिए हमने पूरा का पूरा अपना एरे बना

[405:50]

लिया इसको नाम दे दिया हमने आधार अब एक

[405:53]

पॉइंटर बना लिया है जो पॉइंट कर रहा है

[405:54]

फर्स्ट लोकेशन पे अब यह पॉइंटर क्या करेगा

[405:57]

सबसे पहले फर्स्ट लोकेशन पर जो भी वैल्यू

[406:00]

है उसको प्रिंट करवा देगा फिर कर देंगे

[406:02]

पॉट पॉइंटर प्लस प्लस फिर सेकंड लोकेशन पे

[406:05]

आ जाएगा यहां की वैल्यू को प्रिंट करवा

[406:07]

देगा फिर दोबारा से कर देंगे पॉइंटर प्लस

[406:09]

प्लस तो थर्ड लोकेशन पे आ जाएगा यहां की

[406:12]

वैल्यू को प्रिंट कराएगा फिर दोबारा से

[406:14]

प्लस प्लस यहां पे आएगा वैल्यू को प्रिंट

[406:16]

करवा देगा तो इस तरीके से हम एक लूप चला

[406:19]

सकते हैं उस लूप के अंदर एक पॉइंटर को

[406:21]

बार-बार प्लस प्लस कर देंगे तो वो आगे की

[406:23]

मेमोरी लोकेशंस को एक्सेस करता रहेगा फिर

[406:26]

चाहे हम इनपुट ले रहे हो या आउटपुट ले रहे

[406:28]

हो इसको करके देखेंगे तो कोड से हमें बेटर

[406:30]

समझ आएगा सबसे पहले अपना एक एरे बना लेते

[406:34]

हैं इंट आधार के नाम से इसका साइज यहां पर

[406:37]

रख लेते हैं फ क्योंकि 10 नंबर्स डालना

[406:40]

थोड़ा इनकन्वेनिएंट हो जाएगा अब सबसे पहले

[406:43]

इस एरे की वैल्यू को इनपुट कराएंगे इनपुट

[406:45]

कराने के लिए हमें पॉइंटर की हेल्प से

[406:48]

इनपुट कराना है तो एक पॉइंटर बना लेते हैं

[406:49]

जो कहां पॉइंट कर रहा है फर्स्ट मेमोरी

[406:52]

लोकेशन पर तो फर्स्ट मेमोरी लोकेशन का

[406:54]

एड्रेस इसमें डाल देते हैं उसके बाद एक

[406:57]

लूप लगाते हैं इंट आ इ 0 से जाएगा 10 तक

[407:01]

जाएगा आ प्

[407:04]

प्लस हम हर बार प्रिंट कर देते हैं कि कौन

[407:07]

से इंडेक्स की हमें वैल्यू चाहिए परसेंटेज

[407:10]

डी

[407:12]

इंडेक्स आई इंडेक्स की हमें वैल्यू चाहिए

[407:15]

और उस वैल्यू को हम कर लेते हैं स्कैन

[407:17]

परसेंटेज डी यहां पे एड्रेस दे देंगे

[407:21]

पॉइंटर प्लस आ का तो यहां पे फॉर लूप हमने

[407:24]

लगाया और ये फॉर लूप 08 इंडेक्स से हमारे

[407:26]

नाइंथ इंडेक्स तक जा रहा है तो वैल्यू

[407:28]

जीरो से लेकर लेस दन 10 तक रहेगी जीरो से

[407:31]

इसलिए शुरू किया है क्योंकि जीरो बेस्ड

[407:33]

इंडेक्सिंग होती है एरे के हिसाब से अब

[407:35]

यहां पर सबसे पहले प्रिंट कर देंगे कौन से

[407:36]

इंडेक्स की हमें वैल्यू चाहिए तो i हमारा

[407:38]

इंडेक्स है एक तरीके से और जिसको भी स्कैन

[407:41]

करना है उसमें हम लिख देंगे पॉइंटर प् आ

[407:43]

यानी पॉइंटर हमने लिख दिया पॉइंटर रो एथ

[407:46]

इंडेक्स को पॉइंट कर रहा है पर जैसे ही

[407:48]

उसमें प् आ होता रहेगा यानी उसमें + व

[407:50]

करेंगे तो वो फर्स्ट पोजीशन पे आ जाएगा +

[407:52]

ट करेंगे सेकंड पोजीशन पे + 3 करेंगे थर्ड

[407:55]

पोजीशन पे इस तरीके से एक एक डाटा टाइप से

[407:57]

वो बढ़ता रहेगा तो यहां पे स्कैनिंग हो

[407:59]

जाएगी फिर आउटपुट के लिए एक और लूप लगा

[408:01]

लेते हैं आई ले 10 i+ + प्रिंट f d

[408:06]

इंडेक्स में है वैल्यू परसेंटेज d अब यहां

[408:09]

पे सबसे पहले इंडेक्स प्रिंट कर देंगे

[408:11]

उसके बाद वैल्यू प्रिंट कर देंगे वैल्यू

[408:13]

प्रिंट करने के लिए हम पीटीआर + आ भी कर

[408:15]

सकते हैं तो एक बार ये करके देखते हैं

[408:17]

उसके बाद एक और थोड़ा सा हल्का सा चेंज

[408:19]

सिंटेक्स देखेंगे तो जरो तो इंडेक्स पे हम

[408:22]

डाल रहे हैं 12 13 14 15 एंड 16 यहां पर

[408:26]

अगर हमारे आधार का साइज पांच है तो हमें

[408:29]

10 की जगह यहां पे पांच करने की जरूरत है

[408:31]

क्योंकि हम 10 साइज का नहीं पांच साइज का

[408:33]

इस बार एरे अपना बना रहे हैं एक बार

[408:35]

दोबारा से रन कर लेते हैं 12 13 14 15 एंड

[408:39]

16 तो जरत इंडेक्स पे 12 आ गया है फर्स्ट

[408:41]

इंडेक्स पे 13 आ गया है सेकंड पे 14 थर्ड

[408:44]

पे 15 और फोर्थ पे 16 तो ये सारे के सारी

[408:47]

वैल्यूज हमारे एरे के अंदर स्टोर हो गई

[408:49]

हैं अब यहां पे स्टार पीटीआर + 1 किया यह

[408:52]

तो हो गया पॉइंटर से करने का तरीका यहां

[408:55]

पे हम यह भी कर सकते थे आधार ऑफ हमारा

[408:58]

इंडेक्स आ तो यह डायरेक्टली इंडेक्स आ पर

[409:01]

जो भी वैल्यू है वो आधार के हिसाब से

[409:03]

निकाल लेगा तो इसको भी सेव कर लेते हैं और

[409:06]

इनपुट लेते टाइम भी हम सेम चीज कर सकते थे

[409:09]

यानी आधार ऑफ आ तो ये आ चेंज होता रहेगा

[409:13]

और आधार के हिसाब से हम एड्रेस सेंड करते

[409:16]

रहेंगे तो यह भी बिल्कुल करेक्ट फॉर्मेट

[409:18]

होता चीजों को करने का 12 13 14 15 16 तो

[409:23]

इससे भी सेम इनपुट और आउटपुट हम ले पा रहे

[409:26]

हैं चाहे हम पॉइंट्स का इस्तेमाल करें

[409:28]

चाहे हम नॉर्मली ये चीजों का इस्तेमाल

[409:31]

करें मतलब स्क्वायर ब्रैकेट्स का दोनों

[409:33]

में आउटपुट इनपुट सेम रहेगा हमें बस जो भी

[409:35]

हमें कन्वेनिएंट ज्यादा पड़ता है उसका हम

[409:37]

यूज़ कर सकते हैं पर एक चीज हमेशा याद

[409:39]

रखनी है कि एरे का फर्स्ट इंडेक्स एरे खुद

[409:42]

में एक पॉइंटर होता है वो चीज कभी भूलनी

[409:45]

नहीं है नेक्स्ट चीज जिसकी हम बात करेंगे

[409:46]

वो है अरेज एज फंक्शन आर्गुमेंट अब जैसे

[409:49]

हम नॉर्मल इंटी जर को फ्लोट को कैरेक्टर

[409:52]

को फंक्शन में आर्गुमेंट की तरह पास कर

[409:54]

सकते हैं वैसे ही फंक्शन कॉल्स के अंदर हम

[409:56]

अरेज को भी भेज सकते हैं यानी किसी फंक्शन

[409:59]

को हम बना सकते हैं कि प्रिंट करो जी एरे

[410:01]

की वैल्यू को तो उसके अंदर कोई भी एरे आप

[410:03]

डाल दोगे वो उसकी वैल्यू को प्रिंट कर

[410:04]

देगा तो उसके आर्गुमेंट में उसके पैरामीटर

[410:07]

में आपको एक एरे डिफाइन करना पड़ेगा का

[410:10]

फॉर्मेट क्या रहता है सबसे पहले आती है

[410:12]

फंक्शन डिक्लेरेशन ऐसे फंक्शन को आप

[410:14]

डिक्लेयर कैसे करेंगे या तो उसके अंदर आप

[410:16]

आर्गुमेंट के अंदर नॉर्मल आपने फंक्शन

[410:18]

लिखा हुआ है पर पैरामीटर के अंदर आप

[410:20]

लिखेंगे इंट एरे और फिर स्क्वायर

[410:22]

ब्रैकेट्स इसके अंदर आपको साइज देने की

[410:24]

जरूरत नहीं है मतलब ये किसी भी साइज का हो

[410:27]

सकता है एरे इसीलिए साइज के लिए हमें अलग

[410:30]

से एक इंटी जर n पास करना पड़ेगा जो

[410:32]

बताएगा एरे का साइज क्या है या फिर उसको

[410:34]

पॉइंटर की तरह भी पास कर सकते हो ये है

[410:37]

स्क्वायर ब्रैकेट्स वाला तरीका और यह है

[410:39]

हमारा पॉइंट्स वाला तरीका और दोनों सही

[410:42]

हैं यहां पे इंट एस्ट रिस्क एरे तो ये

[410:46]

पॉइंटर की तरह भी पास कर सकते हैं और

[410:48]

फंक्शन कॉल के अंदर बस आपको एरे का नाम

[410:50]

लिख देना है तो हमें ऑलरेडी पता है दिस इज

[410:52]

इक्वल टू m पर ए आर आर ऑफ ज़ीरो तो ये इस

[410:56]

पॉइंटर में जाके वैल्यू स्टोर हो जाएगी तो

[410:58]

एरे खुद एक पॉइंटर है जाके पॉइंटर के अंदर

[411:00]

स्टोर हो जाएगा तो इसको एक बार करके देखते

[411:02]

हैं सबसे पहले तो एक फंक्शन बनाते हैं

[411:04]

फंक्शन को डिक्लेयर करेंगे वॉइड प्रिंट

[411:07]

नंबर्स प्रिंट नंबर्स के अंदर एक एरे आता

[411:10]

है और उसका साइज आता है तो ये एरे हमने

[411:12]

डिफाइन किया स्क्वायर ब्रैकेट्स की हेल्प

[411:14]

से और साइज को बनाया नॉर्मल इंटी जर अब

[411:16]

इसको डिफाइन भी कर लेते हैं वॉइड प्रिंट

[411:20]

नंबर्स जिसके अंदर आ रहा है हमारे पास इंट

[411:22]

एरे और इंट n अब एरे के साइज के हिसाब से

[411:27]

एक लूप चलाएंगे जो जीरो से लेकर n तक

[411:29]

चलेगा तो यहां लेस देन n वाली कंडीशन है

[411:32]

हर बार कर रहे हैं i+ प् और एरे के

[411:35]

एलिमेंट्स को करा देंगे प्रिंट तो प्रिंट

[411:38]

f परसेंटेज d बै स् t और यहां पर लिख

[411:43]

देंगे ए आर आर ऑफ आई जैसे बै स्ल ए

[411:46]

नेक्स्ट लाइन के लिए होता है बैल t हमारा

[411:48]

एक टैब का स्पेस दे देता है तो जो भी

[411:50]

नंबर्स प्रिंट होंगे ना वो थोड़ी-थोड़ी

[411:51]

स्पेस के बाद प्रिंट होंगे तो अच्छा लगेगा

[411:53]

देखने में तो इस तरीके से और लास्ट में एक

[411:55]

नेक्स्ट लाइन प्रिंट करवा लेते हैं ब n से

[411:58]

अब मेन फंक्शन के अंदर एक एरे बनाते हैं

[412:00]

जिसके अंदर कुछ नंबर्स हैं 1 2 3 4 5 एंड

[412:04]

6स और प्रिंट नंबर्स को लगाते हैं कॉल

[412:07]

प्रिंट नंबर्स के अंदर एरे लिख दिया ए

[412:09]

फर्स्ट आर्गुमेंट और नंबर लिख दिया कि

[412:11]

सिक्स एलिमेंट्स है इसके अंदर इसको कर

[412:13]

लेते हैं सेव एंड रन तो हमारे जो नंबर्स

[412:16]

है वो एक के बाद एक के बाद एक लिखे हुए

[412:18]

हमारे पास प्रिंट होकर आ गए हैं और यहां

[412:21]

चाहते हम तो स्क्वायर ब्रैकेट्स हटाकर

[412:23]

इसको एक पॉइंटर भी बना सकते थे स्टार्ट

[412:25]

पीटीआर और यहां पे इंट स्टार पीटीआर या

[412:29]

इनफैक्ट पीटीआर की जगह अगर इसको ए आर ही

[412:32]

रखते हैं हम दोबारा से कोड को रन करते हैं

[412:35]

और इस बार सेम आउटपुट हमारे पास आ गया है

[412:37]

तो मतलब एरे को आप पॉइंटर की तरह रखें अगर

[412:40]

अपने फंक्शन पैरामीटर्स में रखना है या

[412:42]

फिर आप स्क्वायर ब्रैकेट्स वाले नोटेशन

[412:44]

रखें दोनों नोटेशन में हमारे पास सेम

[412:46]

आउटपुट निकल के आएगा नेक्स्ट टॉपिक जिसको

[412:48]

डिस्कस करेंगे वो है मल्टी डायमेंशन अरेज

[412:50]

मल्टी डायमेंशन अरेज यानी अभी तक हमने जो

[412:53]

अरेज पढ़े वो वडी वाले अरेज हैं एक

[412:55]

डायमेंशन में काम करते हैं डायमेंशन क्या

[412:57]

है लीनियर इस तरीके से हमारा एरे हमारे

[413:00]

पास था पर मान लीजिए हमें दो एरे रखने हो

[413:02]

तो उनको एक के बाद एक के बाद एक रख सकते

[413:04]

हैं उसके बाद तीन एरे रखने हो तो एक के

[413:07]

बाद एक के बाद एक एरे रख सकते हैं तो यहां

[413:09]

पे हम डायमेंशन के साथ खेलते हैं यानी

[413:12]

हमें तीन एरे चाहिए और हर एरे का साइज

[413:14]

मुझे चाहिए 10 तो मैं एक 2d एरे बना दूं

[413:17]

2d एरे इस तरीके से हम डिफाइन करते हैं

[413:19]

सबसे पहले लिखेंगे उसका टाइप इंट उसके बाद

[413:22]

लिखेंगे उसका नाम एरे फिर लिखेंगे दो

[413:25]

स्क्वायर ब्रैकेट्स जितने स्क्वायर

[413:26]

ब्रैकेट्स मल्टी डायमेंशन एरे के अंदर

[413:28]

होंगे वो बताएगा कि उसकी डायमेंशन कितनी

[413:30]

है अब अभी तक हम लिख रहे थे इंट ए आ ऑफ 3

[413:34]

तो इसका मतलब था इसमें एक डायमेंशन है दो

[413:38]

स्क्वायर ब्रैकेट्स यानी इसमें दो

[413:40]

डायमेंशन है और राइट साइड में किस तरीके

[413:42]

से डिफाइन करेंगे बाहर वाले स्क्वायर

[413:44]

ब्रैकेट्स बताएंगे कि अंदर का टोटल कितना

[413:47]

डाटा स्टोर्ड है एक स्क्वायर ब्रैकेट का

[413:49]

मतलब एक एरे दूसरे स्क्वायर ब्रैकेट का

[413:52]

मतलब दूसरा एरे तो पहले एरे में एलिमेंट

[413:55]

है वन और टू दूसरे एरे में है थ्री और फोर

[413:57]

तो ये एरे एक्चुअली बनेगा कैसे मेमोरी के

[413:59]

अंदर अब इसको विजुलाइज करना है तो दो

[414:01]

तरीके हैं पहला तरीका है कि हम कुछ इस

[414:04]

तरीके से विजुलाइज करें कि यहां पे

[414:06]

स्टोर्ड है हमारा वन यहां पर टू यहां पर

[414:09]

थ्री यहां पर फर यह हमारा एरे है इसके

[414:12]

अंदर यह वाली जो लोकेशन है इसको 0 0

[414:14]

कहेंगे इसको 01 कहेंगे इसको 10 कहेंगे और

[414:18]

इसको वन वन कहेंगे तो ये मैट्रिक्स की तरह

[414:21]

हम इमेजिन कर सकते हैं 11वीं 12वीं में एक

[414:23]

मैट्रिक्स पड़ी होगी जिसके अंदर कुछ-कुछ

[414:24]

पार्ट्स हमारे होते थे तो यहां होता था रो

[414:27]

यहां वन यहां टू यहां रो यहां वन यहां टू

[414:30]

तो उसी तरीके का यह है कि यहां पे अगर वन

[414:33]

लिख दिया यहां पे टू लिख दिया यहां थ्री

[414:34]

लिख दिया या फोर लिख दिया तो ये हो गया 0

[414:37]

ये हो गया 0 व ये हो गया 10 ये हो गया व

[414:41]

इस तरीके का कुछ सिस्टम रहता है तो यहां

[414:44]

पे भी मतलब मेमोरी के अंदर भी ऐसा ही कुछ

[414:46]

है कि इसको हम जीरो जीरो कहेंगे इसको 0 व

[414:49]

कहेंगे इसको 10 कहेंगे इसको व व कहेंगे पर

[414:51]

ये एक्चुअली मेमोरी के अंदर कैसे स्टोर

[414:53]

होता है स्टोर होता है इस फॉर्मेट में

[414:55]

यानी पहले तो वन आ जाएगा फिर टू आ जाएगा

[414:57]

फिर थ्री आ जाएगा फिर फोर आ जाएगा तो ये

[414:59]

जीरो जीरो हो जाएगा ये रो वन ये वन ़ और

[415:02]

ये 1 1 अब अगर एक्सेस करना है हमें तो

[415:05]

एलिमेंट्स को एक्सेस कैसे करेंगे एरे ऑफ 0

[415:08]

0 निकालना हो तो वो होगा ये वैल्यू वन एरे

[415:12]

ऑफ़ ़ व निकालना हो तो ये वैल्यू होगी टू

[415:14]

एरे ऑफ़ व 0 निकालना हो तो ये वैल्यू होगी

[415:17]

थ्री एरे ऑफ 1 1 निकालना हो तो ये वैल्यू

[415:19]

होगी फर तो जब भी 2d एरे को विजुलाइज करना

[415:23]

है हम उसको मैट्रिक्स की फॉर्म में

[415:24]

विजुलाइज कर लेते हैं यहां पर यह वाला

[415:27]

हमारा फर्स्ट एरे हो जाएगा यह वाला हमारा

[415:30]

सेकंड एरे हो जाएगा अगर थर्ड थड एरे होता

[415:32]

तो वो उसके नीचे आ जाता यह वाला हो जाता

[415:35]

हमारा थर्ड एरे और हर एरे का साइज जो है

[415:38]

वो सेम रहता है इस एरे का साइज भी दो है

[415:41]

इस एरे का साइज भी दो है इस एरे का साइज

[415:43]

भी दो है पर हम बना कितने भी चाहे n एरे

[415:45]

बना लो चाहे n -1 बना लो n -2 जितने मर्जी

[415:48]

उतने एरे हम बना सकते हैं पर सबका साइज

[415:51]

हमारे पास सेम रहेगा और विजुलाइज कैसे

[415:53]

करना है मैट्रिक्स की हेल्प से अब इसका एक

[415:56]

सवाल करके देख लेते हैं अब यहां पर तो हम

[415:58]

बात कर रहे हैं 2d अरेज की ऐसे ही हमारे

[416:01]

पास 3d एरे भी होते हैं 4d अरेज भी होते

[416:03]

हैं 5d अरेज भी होते हैं पर ये इतना

[416:05]

प्रोग्रामिंग में यूज़ नहीं होते मोस्टली

[416:07]

जो सवाल आएंगे आपके पास वो 2d अरेज के आने

[416:09]

वाले हैं अब एक 2d एरे बनाते हैं एक एरे

[416:13]

को इस तरीके से बनाएंगे कि हम दो बच्चों

[416:15]

के तीन सब्जेक्ट्स के मार्क्स स्टोर करा

[416:17]

रहे हैं तो ये चीज ध्यान देनी है कि हमें

[416:21]

दो बच्चों के तीन सब्जेक्ट्स के मार्क्स

[416:24]

को स्टोर कराना है तो एक मार्क्स नाम का

[416:28]

2d एरे बनाते हैं जिसका साइज होगा टू और

[416:31]

थ्री

[416:33]

यानी दो एरे बन रहे हैं मेमोरी में किस

[416:35]

तरीके से

[416:36]

होगा सबसे

[416:38]

पहले तीन लोकेशन आ जाएंगी उसके बाद तीन और

[416:43]

लोकेश आ जाएंगी इसमें पहले स्टूडेंट के

[416:46]

तीन सब्जेक्ट के मार्क्स स्टोर्ड होंगे

[416:48]

इसमें दूसरे स्टूडेंट के तीन सब्जेक्ट्स

[416:50]

के मार्क्स स्टोर होंगे इस तरीके से

[416:52]

मेमोरी में एरे हमारा बनेगा अब मार्क्स हम

[416:54]

लिख लेते

[416:56]

हैं फर्स्ट स्टूडेंट के यानी रोत इंडेक्स

[417:00]

यहां पर भी रोए इंडेक्स होता है फर्स्ट

[417:02]

स्टूडेंट के फर्स्ट सब्जेक्ट के मार्क्स

[417:06]

यहां पर लिख सकते हैं

[417:08]

90 इंटी जर हम नहीं लिखेंगे अब दोबारा से

[417:11]

फर्स्ट स्टूडेंट के सेकंड सब्जेक्ट के

[417:14]

मार्क्स तो उसके लिए

[417:16]

89 दोबारा से फर्स्ट स्टूडेंट के थर्ड

[417:21]

सब्जेक्ट के मार्क्स तो

[417:23]

78 उसी तरीके से हम सेकंड स्टूडेंट के लिए

[417:26]

भी मार्क्स लिख सकते हैं तो सेकंड

[417:28]

स्टूडेंट के सेकंड सब्जेक्ट के सेकंड

[417:30]

स्टूडेंट के फर्स्ट सब्जेक्ट के और सेकंड

[417:33]

स्टूडेंट के थर्ड सब्जेक्ट के यहां पे

[417:35]

मार्क्स की वैल्यू हम चेंज कर सकते हैं तो

[417:37]

इन वैल्यूज को उसी तरीके से हम इनपुट

[417:39]

करेंगे उसी तरीके से आउटपुट करेंगे जैसे

[417:41]

करते आए थे जैसे फर्स्ट स्टूडेंट के

[417:43]

फर्स्ट सब्जेक्ट के मार्क्स अगर प्रिंट

[417:45]

करने हैं तो लिखेंगे बस प्रिंट एफ

[417:47]

परसेंटेज डी मार्क्स ऑफ 0 जीरो तो ये बता

[417:52]

रहा है रो इ स्टूडेंट यानी हमारा पहला

[417:55]

स्टूडेंट उसके जीरो एथ सब्जेक्ट के यानी

[417:57]

फर्स्ट सब्जेक्ट के मार्क्स देख लेते हैं

[417:59]

तो ये 90 हमारे पास प्रिंट होकर आ गया दिस

[418:02]

वैल्यू तो इस तरीके से 2d अरेज के साथ भी

[418:05]

हम खेल सकते हैं वह यूज़ केस पर डिपेंड

[418:07]

करता है कि आपका ऐसा केस है क्या जिसमें

[418:09]

आपको 2d एरे बनाने की जरूरत पड़ रही है

[418:12]

मोस्टली सी के अंदर हम बेसिक प्रोग्रामिंग

[418:14]

सीख रहे होते हैं तो हम वडी अरेज के साथ

[418:16]

ही खेलेंगे थोड़े बहुत डी अरेज के

[418:17]

क्वेश्चन आ जाएंगे 3d अरेज पर हम इतना

[418:20]

नहीं जा रहे होंगे लद वो भी पॉसिबल है

[418:22]

कई-कई

[418:23]

कॉम्प्लेक्टेड में हमने काफी कुछ सीख लिया

[418:26]

है तो हम उसके कुछ सवाल प्रैक्टिस कर लेते

[418:28]

हैं सबसे पहला सवाल जिसकी बात करेंगे वह

[418:30]

है राइट अ फंक्शन टू काउंट द नं ऑफ ऑड

[418:32]

नंबर्स इन एन एरे एक फंक्शन बनाएंगे वो

[418:35]

फंक्शन क्या करेगा एक एरे को पैरामीटर की

[418:38]

तरह लेगा आर्गुमेंट में पास करेंगे एरे व

[418:41]

फंक्शन के अंदर आएगा और उस एरे के अंदर

[418:43]

कितने ऑड नंबर्स हैं उनको हम काउंट करेंगे

[418:47]

जैसे फॉर एग्जांपल जैसे फॉर एग्जांपल

[418:49]

हमारे पास एक एरे है जिसके अंदर कुछ नंबर

[418:52]

स्टोर्ड है 1 2 3 4 5 एंड स अब इसके अंदर

[418:57]

ऑड नंबर्स है थ एंड 5 तो जो काउंट व

[419:02]

फंक्शन रिटर्न करके देगा वो होगा ्र उसके

[419:05]

लिए एक फंक्शन लिखते हैं

[419:07]

इंट काउंट

[419:09]

ऑड इस फंक्शन में पास करेंगे एक एरे ऑफ

[419:12]

नंबर्स और उसका साइज तो साइज हमेशा पास

[419:15]

करना है जब भी एक एरे को पास कर रहे हैं

[419:17]

इसको डिफाइन कर लेते हैं फंक्शन को काउंट

[419:20]

ऑड इंट एरे इंट साइज एंड सबसे पहले एक

[419:24]

वेरिएबल बना लेते हैं जिसमें स्टोर करवा

[419:26]

देंगे काउंट शुरुआत में काउंट है हमारा

[419:29]

जीरो उसके बाद एक लूप चला लेते हैं i = 0

[419:33]

से i = n तक जाएगा यह लूप यानी सारे एरे

[419:36]

को ट्रैवर्स करके देखेगा ट्रैवर्स यानी

[419:38]

ट्रैवल करके देखेगा लूप से हम एक-एक करके

[419:40]

एरे के एलिमेंट्स के अंदर जाएंगे हर

[419:43]

एलिमेंट के लिए चेक करेंगे इफ एरे ऑफ़ i

[419:48]

एरे ऑफ़ i से हमारे पास उस एलिमेंट की

[419:50]

वैल्यू आ गई उसे कैसे चेक करके देखेंगे

[419:52]

मॉड्यूल 2 इज़ नॉट इक्वल ट ़ यहां से क्या

[419:57]

आया सबसे पहले एलिमेंट निकाला एरे ऑफ़ i

[420:00]

से उसको देख लिया क्या वह से कंपलीटली

[420:02]

मल्टीप्लाई हो रहा है अगर मल्टीप्लाई नहीं

[420:05]

हो रहा मतलब रिमाइंडर अगर जीरो नहीं आया

[420:07]

तो मतलब वो एक ऑड नंबर है तो ऑड नंबर जैसे

[420:10]

ही हमारे पास आया काउंट को कर देंगे प्लस

[420:13]

प्लस काउंट शुरुआत में जीरो था यानी

[420:14]

शुरुआत में एक भी ऑड नंबर हमारे पास नहीं

[420:17]

था हर एलिमेंट के लिए चेक करेंगे ये ऑड है

[420:19]

क्या ये ऑड है क्या ये ऑड है क्या जैसे ही

[420:22]

ऑड होता है काउंट को इंक्रीज कर दो बाय वन

[420:24]

यानी काउंट प्लस प्लस एंड में क्या करेंगे

[420:27]

रिटर्न कर देंगे अपने काउंट को मेन फंक्शन

[420:30]

के अंदर एक एरे बना लेते हैं इंट एरे इ

[420:33]

इक्वल टू 1 2 3 4 5 एंड 6 और प्रिंट करवा

[420:39]

लेते

[420:40]

हैं काउंट को काउंट डॉट इसमें पास कर

[420:43]

देंगे अपना एरे और अपना साइज व्हिच इज स

[420:46]

कर लेते हैं सेव एंड रन तो हमारे पास तीन

[420:48]

रिटर्न होकर आया है मतलब हमारे एरे के

[420:50]

अंदर तीन ऑड नंबर्स प्रेजेंट है इसी तरीके

[420:53]

से आप इवन नंबर कैलकुलेट करने का फंक्शन

[420:55]

बना सकते हैं इसी तरीके से बना सकते हैं

[420:58]

कि आप थ्री के मल्टीपल कैलकुलेट कर लो

[421:00]

फाइव के मल्टीपल कैलकुलेट कर लो तो

[421:02]

अलग-अलग तरीके के फंक्शन इसी तरीके से

[421:04]

लिखे जाएंगे अगर एरे पे फंक्शंस करने हैं

[421:06]

तो नेक्स्ट सवाल जिसकी बात करेंगे हमें एक

[421:08]

इंटी जर एरे गिवन है उसके अंदर नंबर्स

[421:10]

स्टोर्ड है 1 2 3 4 5 सवाल है फॉर द गिवन

[421:14]

एरे व्हाट विल बी द फॉलोइंग तो सबसे पहले

[421:16]

हमें ये वैल्यू निकालनी है इस एरे के लिए

[421:18]

इस एरे को एक बार विजुलाइज कर लेते हैं

[421:20]

ऐसा कुछ स्ट्रक्चर मेमोरी के अंदर होगा

[421:22]

जिसके अंदर पांच वैल्यूज हमारे पास

[421:25]

स्टोर्ड होंगी और एक पॉइंटर होगा ए आरआर

[421:28]

जो पॉइंट कर रहा है जीरो एथ इंडेक्स को

[421:30]

यहां पे हम सबसे पहले निकाल arr2 तो इसकी

[421:33]

वैल्यू हो जाएगी यह है

[421:38]

ar01 और यह है ए आ + 2 तो इसकी वैल्यू हो

[421:42]

जाएगी हमारे पास थ्र क्योंकि यहां पर हम

[421:45]

वैल्यू एट एड्रेस ऑपरेटर यूज़ कर रहे हैं

[421:47]

तो ये हमें तीन प्रिंट करके दे देगा उसके

[421:49]

बाद नेक्स्ट करते हैं ar5 तो ये है ar3 ये

[421:53]

है एआर + 4 ar5 इस एरे में एजिस्ट ही नहीं

[421:57]

करेगा क्योंकि ये सिर्फ पांच साइज का एरे

[421:59]

तो यहां पे मेमोरी तो होगी कुछ पर वो

[422:01]

हमारे एरे का पार्ट नहीं है तो यहां पे

[422:03]

हमारे पास आ जाएगा एरर इसको एक बार कोड

[422:06]

करके वेरीफाई भी कर लेते हैं एक एरे बना

[422:08]

लेते हैं सिर्फ पांच साइज का अब इसके अंदर

[422:10]

सबसे पहले प्रिंट करवा के देखेंगे

[422:13]

परसेंटेज डी ब n हमारा ए आ + 2 एंड उसके

[422:19]

बाद एआर + 5 arr2 में प्रिंट हुआ थ्री

[422:24]

क्योंकि इस पोजीशन पे तीन है पर फाइव में

[422:26]

रो प्रिंट हुआ मतलब वहां कोई वैलिड वैल्यू

[422:28]

नहीं है वो हमारे एरे का पार्ट नहीं है

[422:30]

इसलिए रो उसने ट कर दिया जो भी वैल्यू

[422:32]

वहां पर पड़ी थी अब नेक्स्ट करेंगे

[422:34]

प्रैक्टिस क्वेश्चन 44 प्रैक्टिस क्वेश्चन

[422:37]

44 हमें कहता है राइट फंक्शन टू रिवर्स एन

[422:41]

एरे एक एरे हमें दिया होगा मान लो चार

[422:45]

साइज का एरे हमें दिया है इसके अंदर

[422:48]

वैल्यू है 1 2 3 4 हमें इस एरे की वैल्यूज

[422:52]

को करना है रिवर्स यानी एक फाइनल जो

[422:54]

आउटपुट एरे हमारे पास आना चाहिए उसके अंदर

[422:57]

4 3 2 और वन होना चाहिए तो एक काफी

[423:02]

इंपॉर्टेंट सवाल है इस सवाल को करने के ना

[423:05]

बहुत सारे तरीके होते हैं और उनमें से एक

[423:07]

क्लासिकल तरीका हम डिस्कस करेंगे क्लासिकल

[423:10]

तरीका ये है कि फर्स्ट को और लास्ट को

[423:12]

एक्सचेंज कर दो फिर फर्स्ट फिर सेकंड को

[423:15]

और सेकंड लास्ट को एक्सचेंज कर दो उसके

[423:17]

बीच में भी कुछ है तो थर्ड को और थर्ड

[423:19]

लास्ट को एक्सचेंज कर दो एक्सचेंज करते

[423:21]

रहेंगे तो हमारा जो एरे होगा वो रिवर्स हो

[423:24]

जाएगा पूरा कैसे वन की जगह फोर आ जाए फोर

[423:27]

की जगह वन आ जाए तो वन की जगह फोर आ गया

[423:29]

फोर की जगह वन आ गया टू की जगह थ्री आ जाए

[423:31]

थ्री की जगह टू आ जाए तो टू की जगह थ्री आ

[423:34]

गया थ्री की जगह टू आ गया तो हमारा एरे जो

[423:36]

है रिवर्स कर गया अब ये सेम जो स्ट्रेटेजी

[423:38]

है अभी हम सिर्फ स्ट्रैटेजी की बात कर रहे

[423:40]

हैं कोड की बात नहीं कर रहे कोड अभी

[423:42]

डिस्कस करेंगे किस तरीके से लिखा जाएगा

[423:44]

अगर एक ऑड साइज का हमारे पास एरे होता

[423:47]

जैसे 1 2 3 4 एंड फाइव इसमें भी सेम

[423:50]

स्ट्रेटेजी यूज़ होती वन और फाइव को

[423:53]

एक्सचेंज कर देते तो यहां फाइव आ जाता

[423:55]

यहां वन आ जाता फिर टू और फोर को एक्सचेंज

[423:58]

कर देते तो यहां फोर आ जाता यहां टू आ

[424:00]

जाता और थ्री को थ्री के के साथ एक्सचेंज

[424:02]

कर देते तो थ्री ही रहता इससे क्या सीखने

[424:04]

को मिला कि फाइनल जो एरे आया दैट वाज 5 4

[424:07]

3 2 एंड 1 तो एरे हमारा कंप्लीट रिवर्स हो

[424:11]

गया तो जब भी एक एरे को रिवर्स करना है एक

[424:14]

लिस्ट दी है नंबर्स की उनको रिवर्स करना

[424:16]

है तो क्या करो फर्स्ट को लास्ट के साथ

[424:18]

एक्सचेंज कर दो सेकंड को सेकंड लास्ट के

[424:20]

साथ एक्सचेंज कर दो थर्ड को थर्ड लास्ट के

[424:22]

साथ एक्सचेंज कर दो फोर्थ को फोर्थ लास्ट

[424:24]

के साथ एक्सचेंज कर दो तो आगे वाला पीछे

[424:26]

चला जाएगा पीछे वाला आगे आ जाएगा अब इसको

[424:29]

कोड में कैसे करेंगे अब हमें पता है कि

[424:31]

सबसे पहले तो हमें एक लूप चलाना पड़ेगा

[424:33]

ताकि हर एक एलिमेंट तक जा सके तो एक लूप

[424:36]

लगाएंगे वो लूप क्या करेगा रो से शुरू

[424:38]

होगा हम अपने एरे का दोबारा से एग्जांपल

[424:41]

लें तो 1 2 3 4 5 6 इस एरे का एग्जांपल

[424:45]

लेते हैं तो रो से लूप शुरू होगा और लूप

[424:48]

कहां तक जाएगा लूप हाफ ऑफ द एरे तक जाएगा

[424:50]

मतलब यहां तक जाएगा तो अब इस एलिमेंट को

[424:52]

एक्सचेंज कर देंगे इसके साथ इसको कर देंगे

[424:55]

इसके साथ इसको कर देंगे इसके साथ अब

[424:57]

दोबारा से एक्सचेंज नहीं करना दोबारा से

[424:59]

हाफ के बाद एक्सचेंज करने लगेंगे तो वापस

[425:01]

से ओरिजिनल पोजीशन पे आने वो शुरू हो

[425:03]

जाएंगे तो इसलिए लूप हमारा हाफ तक जाएगा

[425:05]

लेस देन साइज बाटू तो n जो भी होगा

[425:08]

डिवाइडेड बाय 2i + और लूप के अंदर क्या

[425:12]

होगा लूप के अंदर अरेज की वैल्यू एक्सचेंज

[425:14]

होंगी तो सबसे पहले तो फर्स्ट वैल्यू

[425:16]

फर्स्ट वैल्यू क्या होगी फर्स्ट वैल्यू

[425:18]

होगी हमारी एरे ऑफ i की वैल्यू यानी आयत

[425:21]

इंडेक्स पे जो भी वैल्यू है वो हमारी

[425:23]

फर्स्ट वैल्यू है और सेकंड वैल्यू जिसको

[425:25]

एक्सचेंज करना है सेकंड वैल्यू कैसे

[425:26]

निकालेंगे सेकंड वैल्यू है रो के लिए मतलब

[425:29]

जीरो एथ इंडेक्स के लिए सेकंड वैल्यू हो

[425:31]

हो जाएगी फाइव फर्स्ट इंडेक्स के लिए

[425:33]

सेकंड वैल्यू हो जाएगी फोर सेकंड इंडेक्स

[425:35]

के लिए सेकंड वैल्यू हो जाएगी थ्री तो हम

[425:38]

देख पा रहे हैं अगर यह वैल्यू i है तो ये

[425:40]

वैल्यू हमारी n - i - 1 है आई होप ये चीज

[425:45]

समझ में आई होगी इसको एक टेबल बनाक देखते

[425:48]

हैं टेबल में क्या करेंगे i की वैल्यू

[425:49]

लिखेंगे n - i - 1 की वैल्यू लिखेंगे अब

[425:53]

हमें पता है i हमारा रो से शुरू हो रहा है

[425:55]

और n की वैल्यू कांस्टेंट है व्हिच इज

[425:58]

सिक्स तो i की वैल्यू अगर रो है तो n - i

[426:01]

- 1 की वैल्यू होगी हमारे पास 5 i की

[426:04]

वैल्यू अगर वन है तो 6 - i - 1 की वैल्यू

[426:09]

होगी हमारे पास 4 i अगर 2 है तो 6 - 2 - 1

[426:14]

की वैल्यू होगी हमारे पास 3 तो जोड़ी

[426:17]

हमारे पास बन गई रो के लिए इंडेक्स है

[426:20]

फाइव वन के लिए इंडेक्स है फर टू के लिए

[426:23]

इंडेक्स है थ्री तो ़ के लिए 5 वन के लिए

[426:26]

फर एंड टू के लिए ्र तो सेकंड वैल्यू को

[426:30]

किस तरीके से निकालना है

[426:32]

यह अगर आप खुद से नहीं सोच पाए तो उसमें

[426:34]

परेशानी वाली बात नहीं है क्योंकि यह जो

[426:36]

चीजें है ना यह प्रैक्टिस के साथ आती हैं

[426:38]

ऐसे आपने छह बार किसी एरे को रिवर्स कर

[426:40]

लिया होगा ना उसके बाद जाके याद होगा कि n

[426:42]

- i - 1 से रिवर्स होता है क्योंकि

[426:44]

क्लासिकल तरीका है फिर चाहे c+ में

[426:47]

प्रोग्रामिंग कर रहे हो जावा में कर रहे

[426:48]

हो c में कर रहे हो हर बार जब भी एरे को

[426:50]

रिवर्स करना है n - i - 1 का यूज़ करना

[426:52]

पड़ेगा तो यहां पे लिख देंगे सेकंड वैल्यू

[426:54]

इज एरे ऑफ n - i - 1 तो फर्स्ट वैल्यू आ

[426:58]

गई सेकंड वैल्यू आ गई अब एक्सचेंज का

[427:01]

प्रोसेस कर लो एक्सचेंज कैसे करेंगे एरे

[427:03]

ऑफ i में डाल देंगे सेकंड वैल्यू और एरे

[427:07]

ऑफ n - i - 1 में डाल देंगे फर्स्ट वैल्यू

[427:11]

तो यह हो गई हमारी वैल्यूज एक्सचेंज और

[427:13]

यहां पे कर देंगे लूप को खत्म तो फाइनली

[427:16]

हमारा जो एरे होगा वो उल्टा हो जाएगा एक

[427:19]

नया एरे बना के इसको ड्राय रन करके देखते

[427:21]

हैं ड्राय रन होता है कोडिंग में कि आप

[427:23]

कोड को चलाने से पहले उसका आउटपुट एनालाइज

[427:27]

कर लें मान ले पांच साइज का एरिया है अब

[427:30]

सबसे पहले क्या करेंगे लूप की शुरुआत

[427:32]

करेंगे लूप की शुरुआत कैसे करेंगे हमारी i

[427:34]

की वैल्यू शुरुआत में 0 और n - i - 1 की

[427:37]

वैल्यू है 4 तो ये हो जाएगी फर्स्ट वैल्यू

[427:40]

ये हो जाएगी सेकंड वैल्यू इस पोजीशन में

[427:43]

हटा के सेकंड वैल्यू डाल देंगे यानी पांच

[427:46]

को डाल देंगे इसको हटा के फर्स्ट वैल्यू

[427:48]

यानी वन को डाल देंगे फिर i हो जाएगा प्लस

[427:51]

प्लस i आएगा यहां पे ये हो जाएगी फर्स्ट

[427:53]

वैल्यू ये हो जाएगी सेकंड वैल्यू इसके बाद

[427:54]

इसको हटा के सेकंड वैल्यू को डाल देंगे

[427:56]

इसको हटा के फर्स्ट वैल्यू को डाल देंगे

[427:58]

उसके बाद हो जाएगा i + प i आ जाएगा हमारा

[428:01]

i पहले अगर वन बना था तो इस बार बन जाएगा

[428:03]

टू अब हम देखेंगे कि i जो वैल्यू टू है इज

[428:07]

इट लेस देन हमारा 5/2 5/2 इंटी जर में

[428:11]

होता है 2 तो 2 < 2 जो है वो तो हो जाएगा

[428:14]

फॉल्स तो यहां पे लूप खत्म हो जाएगा तीन

[428:16]

तक हम पहुंच ही नहीं पाएंगे तो तीन वैसे

[428:18]

का वैसा रहेगा और फाइनल अगर एरे देखें तो

[428:21]

फाइनल एरे में क्या आएगा सबसे पहले पांच

[428:24]

फिर चार फिर तीन फिर दो फिर एक ये हो गया

[428:27]

हमारा रिवर्स देरे अब इसको कोड भी लिख

[428:30]

लेते हैं कोड में में एक एरे हमने ऑलरेडी

[428:32]

बनाया हुआ है ट 3 4 5 अब सिंपली क्या

[428:35]

करेंगे एक नया फंक्शन बना लेते हैं इंट

[428:37]

रिवर्स जिसके अंदर एक एरे लेंगे

[428:40]

और साइज

[428:43]

लेंगे इंट रिवर्स इंट एरे और एरे का साइज

[428:50]

n अब एक लूप चला लेते हैं इंट आ इ 0 से

[428:54]

लूप जाएगा आ लेसन n बाटू तक और आ प् प्स

[428:59]

और हर बार क्या करेंगे सबसे पहले फर्स्ट

[429:01]

वैल्यू निकाल

[429:03]

लेंगे फर्स्ट वैल्यू होती थी एरे ऑफ ़ और

[429:07]

हमारी सेकंड वैल्यू होती थी एरे ऑफ n - i

[429:12]

- 1 ये जरो नहीं होगा ये होगा एरे ऑफ i अब

[429:16]

एरे ऑफ i में डाल दो हमारी सेकंड

[429:20]

वैल्यू और एरे ऑफ n - i - 1 में डाल दो

[429:24]

हमारी फर्स्ट वैल्यू तो यह दोनों वैल्यूज

[429:27]

को हमने एक दूसरे के साथ एक्सचेंज कर दिया

[429:29]

है और यह हमारा एरे हो गया है रिवर्स अब

[429:31]

क्या करेंगे मेन फंक्शन के अंदर इसको

[429:33]

प्रिंट करवाएंगे एरे को सबसे पहले रिवर्स

[429:34]

को कॉल लगा लेंगे इसमें पास कर देंगे एरे

[429:37]

और अपना साइज n n की वैल्यू है पाच उसके

[429:41]

बाद अपने एरे को प्रिंट करवाने के लिए

[429:43]

फंक्शन बना लेते हैं एक वॉइड प्रिंट

[429:51]

एरे प्रिंट

[429:53]

एरे फॉर इंट i = 0 यह कोड हम ऑलरेडी लिख

[429:57]

चुके हैं तो मैं उम्मीद करती हूं कि यहां

[430:01]

पे आप आप वीडियो को पॉज करेंगे और इस वाले

[430:03]

फंक्शन को तो खुद से ही कंप्लीट करना है

[430:05]

जिसमें हम एरे की वैल्यूज को प्रिंट करवा

[430:07]

रहे हैं ए आर आर ऑफ

[430:11]

आ फाइनली एक नेक्स्ट लाइन दे देते हैं

[430:14]

इसको कर लेते हैं वॉइड यहां कॉल कर लेते

[430:17]

हैं प्रिंट एरे ए आरआर और फ तो सबसे पहले

[430:21]

रिवर्स कर दो एरे मेन फंक्शन के अंदर

[430:23]

रिवर्स कॉल किया फिर प्रिंट कर दिया एरे

[430:25]

इसको सेव करके रन करते हैं इस फंक्शन का

[430:28]

रिटर्न टाइप भी वॉइड रख है क्योंकि रिवर्स

[430:30]

कुछ रिटर्न नहीं कर रहा होगा तो एरे हमारा

[430:33]

रिवर्स होके क्या आ गया 0 4321 यहां पे

[430:36]

हमने एक छोटी सी मिस्टेक की जब सेकंड

[430:38]

वैल्यू को लिखा ना तो उसको n - i - 1 नहीं

[430:40]

लिखा n - i - i लिख दिया तो इसको n - i -

[430:43]

1 लिख देते हैं ये मिस्टेक्स जो है वो

[430:46]

नहीं करनी होती तो कोई नहीं दोबारा इसको

[430:48]

रन कर लेते हैं इस बार प्रिंट हुआ है एरे

[430:51]

हमारा रिवर्स 5 4 3 2 1 तो हमारा एरे जो

[430:54]

है वो रिवर्स हो गया हमने क्रिएट क्या

[430:56]

किया था 1 2 3 4 5 प्रिंट हुआ है 54321 और

[431:00]

रिवर्स कैसे किया आधे एरे में लूप चला

[431:03]

दिया फर्स्ट वैल्यू को सेकंड वैल्यू के

[431:05]

साथ इंटरचेंज कर दिया फर्स्ट को लास्ट के

[431:07]

साथ सेकंड को सेकंड लास्ट के साथ अब एक

[431:09]

चीज इसमें हम नोटिस करेंगे कि ये कॉल बाय

[431:11]

वैल्यू हुआ या कॉल बाय रेफरेंस हुआ ये

[431:14]

फंक्शन जो कॉल लगाई हमने रिवर्स वाली कॉल

[431:17]

बाय रेफरेंस की कॉल है क्यों एक तो एरे जो

[431:20]

है ना एरे हमारा पॉइंटर होता है तो पॉइंटर

[431:23]

से ही कॉल बाय रेफरेंस हो जाती है दूसरा

[431:24]

हमने देखा कि रिवर्स को जब हमने कॉल लगाई

[431:27]

तो रिवर्स ने तो हमारे एरे को रिवर्स कर

[431:29]

दिया पर मेन फंक्शन के अंदर भी एरे रिवर्स

[431:31]

हो गया तो यह दिखाता है कि अरेज को जब भी

[431:34]

फंक्शन के अंदर पास करते हैं ना तो हमेशा

[431:36]

कॉल बाय रेफरेंस होता है तो एरे को आप

[431:38]

किसी और फंक्शन को दे देंगे और फिर वो

[431:40]

फंक्शन अगर उसमें कुछ चेंजेज कर देगा तो

[431:42]

वो चेंजेज आपके पास भी होंगे रिफ्लेक्ट

[431:44]

होकर आएंगे इसीलिए अरेज की वैल्यूज को

[431:47]

किसी भी फंक्शन के अंदर बहुत ध्यान से

[431:48]

चेंज करना होता है क्योंकि वो कॉलिंग

[431:50]

फंक्शन के अंदर भी रिफ्लेक्ट करेंगे अब

[431:52]

नेक्स्ट सवाल जिसकी बात करेंगे ये है राइट

[431:55]

अ प्रोग्राम टू स्टोर द फर्स्ट एंड फबो

[431:58]

नंबर्स फबो नंबर्स के बारे में ऑलरेडी बात

[432:00]

कर चुके फि बनाची सीक्वेंस कुछ ऐसा होता

[432:03]

है 0 1 1 2 3 5 8 13 हमारा 21 एंड सो ऑन

[432:11]

अब फिना नंबर की खास बात यह है कि अगर एथ

[432:15]

नंबर आपको निकालना है तो n - 1 प् n - 2

[432:18]

एथ नंबर को ऐड कर लो तो सबसे पहले हमें

[432:21]

बनाना है फोना नंबर जिसमें हम n फिना

[432:24]

स्टोर कर सके तो इसको बनाने के लिए एक एरे

[432:27]

की हेल्प लेंगे इस पूरे कोड को हम कर देते

[432:30]

हैं कमेंट आउट इसको भी कमेंट

[432:39]

आउट सबसे पहले बनाते एक इंटी जर ए ये इंटी

[432:42]

जर ए बताएगा कितने ए फिना नंबर चाहिए तो

[432:45]

यूजर से पूछ लेते हैं प्रिंट ए एंटर

[432:49]

ए स्कैन कर लेते ए की वैल्यू को परसेंटेज

[432:53]

डी एंड

[432:55]

ए ए को हमने स्टोर करा लिया अब क्या

[432:59]

करेंगे अब एक एरे बना लेंगे इस एरे को नाम

[433:01]

लेते हैं फिना और इसका साइज हम देंगे n के

[433:04]

बराबर यानी n नंबर्स इस फिना के अंदर

[433:07]

स्टोर्ड होंगे अब हमें पता है फिना ऑफ रो

[433:11]

रो होता है और फिना ऑफ वन हमेशा वन होता

[433:16]

है इस n को जब भी एंटर कराएंगे तो इस n की

[433:19]

वैल्यू को ध्यान रखेंगे n की वैल्यू

[433:20]

ग्रेटर दन वन हो या ग्रेटर दन टू हो तो

[433:24]

फिना रो जीरो होता है फिना और वन वन होता

[433:26]

है ये हमेशा ट्रू होता है इसको हमेशा लिख

[433:30]

लेना है तो इनको हमने लिख लिया है अब हमें

[433:32]

आगे की फिना कैलकुलेट करने है तो उसके लिए

[433:34]

एक लूप लगा लेते हैं लास्ट टाइम हमने क्या

[433:36]

किया था रिकर्ट से फिना कैलकुलेट किया था

[433:38]

इस बार लूप से कर रहे हैं और लूप से करना

[433:40]

और भी आसान होता है कैसे लूप चलाएंगे दो

[433:43]

से और इसको लेकर जाएंगे n

[433:47]

तक तो रो और वन के लिए तो हो गया अब टू के

[433:51]

लिए फिना कैलकुलेट करना शुरू करेंगे और

[433:53]

कहां तक कैलकुलेट करेंगे n-1 तक तो हर बार

[433:56]

फिना ऑफ आ क्या हो जाएगा फिना ऑफ आ - 1

[434:02]

प्स फिना ऑफ आ - 2 आई होप यह वाली जो लाइन

[434:06]

है ये समझ में आई होगी यह बहुत ही

[434:09]

इंपोर्टेंट लाइन है जोब फिनाज वाले टॉपिक

[434:11]

की बात करते हैं n वाला क्या होता था

[434:14]

n-1 प् n-2 तो आ वाला क्या होगा i -1 प् आ

[434:19]

-2 बस सिंपल सा कांसेप्ट है और फिर इसी को

[434:22]

करा देंगे हम

[434:24]

प्रिंट परसेंटेज डी ब

[434:28]

t फिना ऑफ i को करा दिया प्रिंट तो सबसे

[434:33]

पहले जब i की वैल्यू दो हो जाएगी यहां पे

[434:36]

कैलकुलेट होगा ़ + 1 तो फोनची ऑफ़ 2 हमारे

[434:40]

पास निकल कर आ जाएगा व उसके बाद फोनची ऑफ़

[434:43]

थ के लिए कैलकुलेट करेंगे तो वह हो जाएगा

[434:45]

ी तो वह हो जाएगा 1 + 1 तो वह आ जाएगा

[434:49]

हमारे पास दो उसके बाद फिना ऑफ़ 4 के लिए

[434:52]

कैलकुलेट करेंगे तो वह हो जाएगा हमारे पास

[434:55]

2 + 1 तो यह आ जाएगी वैल्यू 3 अब फिना ऑफ़

[434:59]

फाइव के लिए कैलकुलेट करेंगे तो वह हो

[435:01]

जाएगा थ्री यानी यह वाला थ्री और टू तो

[435:04]

उसकी वैल्यू आ जाएगी हमारे पास फाइव एंड

[435:06]

सो ऑन अब इसको रन करके देखते हैं हमें

[435:09]

एंटर करवाने हैं 10 फिना नंबर्स तो ये 10

[435:12]

फिना नंबर्स हमारे पास आ गए इसमें पहले

[435:14]

वाले दो प्रिंट नहीं हुए यानी रो और वन को

[435:16]

अभी हमने प्रिंट नहीं कराया उसके लिए अलग

[435:18]

से यहां पे प्रिंट स्टेटमेंट हम लगा सकते

[435:20]

हैं रो और वन के अलावा बाकी के आठ फिना

[435:23]

नंबर्स हैं पहले वन आ गया फिर टू आ गया

[435:26]

फिर थ्री आ गया फिर फाइव आ गया फिर एट आ

[435:28]

गया ये हो गए हमारे पांच फिर फिर सिक्स्थ

[435:31]

आ गया 13 सेवंथ आ गया 21 और एथ आ गया

[435:35]

हमारे पास 34 तो इस तरीके से हम डिफरेंट

[435:38]

डिफरेंट जो n की वैल्यू है उनके लिए

[435:40]

एक्स्ट्रा नंबर ऑफ फबो ची नंबर्स को

[435:42]

प्रिंट करवा सकते हैं और आई होप कि रिकर्स

[435:44]

से हमने कैसे कराया था और आइट से यानी लूप

[435:47]

से हमने कैसे कराया उन दोनों का डिफरेंस

[435:49]

हमें समझ में आया होगा नेक्स्ट सवाल जिसकी

[435:51]

बात करेंगे वो है क्रिएट अ 2d एरे

[435:53]

स्टोरिंग द टेबल्स ऑफ टू एंड थ्री मतलब दो

[435:55]

और तीन की हमें टेबल स्टोर करानी है तो

[435:57]

इसके लिए 2d एरे बनाना है वो एरे हमारा

[436:00]

कुछ ऐसा दिखेगा जिसके अंदर यहां पर तो हम

[436:02]

टू की टेबल स्टोर कराएंगे और यहां पे तीन

[436:05]

की टेबल स्टोर कराएंगे

[436:06]

0 1 2 3 4 5 6 7 8 9 तो इस तरीके से

[436:13]

टेबल्स को स्टोर कराने के लिए तो इसका

[436:15]

साइज अगर हम देखना चाहे क्या होगा तो हमें

[436:17]

दो एरे चाहिए और दोनों का साइज 10 चाहिए

[436:20]

10 तक मल्टीप्लिकेशन टेबल स्टोर करानी है

[436:22]

तो हमें बनाना पड़ेगा एक एरे इसको टेबल्स

[436:26]

नाम दे देते हैं एक इंटी जर 2d एरे जिसका

[436:30]

नाम टेबल्स और इसका साइज होगा 2 बा

[436:35]

10 जिसमें दो एरे बनेंगे और हर एरे का

[436:39]

साइज 10 होगा तो यह पहला एरे जिसका साइज

[436:41]

10 हैय दूसरा एरे जिसका साइज है 10 इसके

[436:44]

अंदर इस तरीके से हम वैल्यूज को स्टोर

[436:46]

करवा रहे

[436:48]

होंगे इसके लिए कोड लिख लेते हैं सबसे

[436:51]

पहले टेबल्स नाम का एरे क्रिएट कर लेते

[436:53]

हैं ूमा

[436:56]

10 अब एक फंक्शन बना लेते हैं टेबल्स को

[436:59]

स्टोर कराने के लिए

[437:01]

फंक्शन है वॉइड स्टोर टेबल इसके अंदर पास

[437:05]

करेंगे डी

[437:07]

एरे और उसका साइज सबसे पहले ए और फिर ए तो

[437:13]

यहां दो लूप लगे दो लूप लगाने वाले सबसे

[437:15]

पहला फॉर इंट आ इ 0 आ लेस ए आ प्लस प्लस

[437:23]

और अंदर लगेगा फॉर इंट ज इ 0 ज ले ए ज प्

[437:29]

प्

[437:31]

और एरे ऑफ आई ज के अंदर हम स्टोर करा रहे

[437:34]

होंगे वैल्यू तो लूप चलाएंगे फॉर इंट आ इ

[437:38]

0 आ ले ए आ प्स

[437:41]

प्स यहां पर ए लिख लेते हैं क्योंकि ए

[437:44]

हमारा रोज है ए हमारा कॉलम है जिस भी कॉलम

[437:47]

की हम बात कर रहे हैं तो एरे ऑफ n ए इ

[437:50]

इक्वल टू वो नंबर जिसकी हमें टेबल स्टोर

[437:53]

करानी है इंट नंबर य आ जाएगा नंबर

[437:56]

मल्टीप्ला बाय आ प्व यहां पर डिक्लेरेशन

[438:01]

में ऐड कर लेते हैं इंट नंबर अब मेन

[438:04]

फंक्शन के अंदर कॉल लगाएंगे स्टोर टेबल्स

[438:06]

को जिसके अंदर पास कर देंगे सबसे पहले

[438:09]

अपना एरे 2d एरे उसके बाद नंबर ऑफ रोज पास

[438:12]

करेंगे कौन सी रो के लिए हम प्रिंट करवाना

[438:14]

चाहते हैं सबसे पहले जीरो तो रो के लिए और

[438:16]

उसमें कॉलम है 10 और नंबर कौन सी टेबल

[438:19]

प्रिंट करवानी है टू इसी को कॉपी कर लेते

[438:22]

हैं और दोबारा से अब फर्स्ट रो में क्या

[438:25]

करवाना है टेबल प्रिंट करवानी है थ्री की

[438:27]

यहां पर एरे की जगह हम पास करेंगे अपना टे

[438:30]

टेबल्स वाला 2d एरे तो सबसे पहले हमने

[438:33]

क्या किया एक टेबल्स नाम का 2d एरे बनाया

[438:35]

जिसका साइज है 2/10 यानी दो अरेज हैं इसके

[438:38]

अंदर और हर एरे का साइज 10 है फिर एक

[438:42]

फंक्शन बनाया स्टोर टेबल के नाम से जो

[438:44]

किसी एक नंबर की टेबल स्टोर कराता है ये

[438:46]

डी एरे लेगा कौन से एरे की हम बात कर रहे

[438:49]

हैं यानी हमारी रो और कौन से कॉलम पर हमें

[438:52]

मतलब कौन से क्या सेकंड नंबर वाली टेबल

[438:55]

प्रिंट करवा रहे हैं थर्ड नंबर वाले नंबर

[438:56]

पर है या फोर्थ नंबर वाले पर और किस नंबर

[438:59]

की टेबल कि टू की टेबल पर करवानी है

[439:01]

प्रिंट थ्री की करवानी है फाइव की करवानी

[439:03]

है एक लूप हमने चलाया है जो रो से लेकर m

[439:05]

तक जाएगा यहां m की वैल्यू जो हम पास कर

[439:08]

रहे हैं वो 10 तो ये जो लूप है ये रो से

[439:11]

लेकर 10 तक जाएगा और सारी मल्टीप्लिकेशंस

[439:13]

करके टेबल स्टोर करवा देगा कौन से नंबर की

[439:16]

यहां पर नंबर हमने पास किया सबसे पहले टू

[439:18]

उसके बाद थ्री तो सबसे पहले टू जो है

[439:20]

मल्टीप्लाई होगा i + 1 के साथ क्योंकि

[439:22]

हमने जीरो बेस इंडेक्सिंग की है तो i की

[439:24]

वैल्यू जीरो है तो सबसे पहले ये वैल्यू

[439:26]

देगा हमें दो फिर चार फिर छह फिर आठ फिर

[439:30]

10 एंड सो ऑन तो ये सारी जो वैल्यूज हैं

[439:33]

एक-एक करके हमारे एरे के अंदर टेबल्स वाले

[439:35]

एरे के अंदर स्टोर हो जाएंगी जिसमें हमारा

[439:38]

जो रो है वो कांस्टेंट रहेगा क्योंकि n

[439:41]

हमने कांस्टेंट पास किया है रो पर कॉलम

[439:43]

चेंज होता रहेगा तो सबसे पहले जो वैल्यू

[439:45]

होगी वो होगी एरे ऑफ 00 फिर होगी एरे ऑफ

[439:49]

01 फिर होगी एरे ऑफ 02 फिर होगी एरे ऑफ 03

[439:55]

एंड सो ऑन तो इस तरीके से वैल्यू हमारी

[439:58]

चेंज होती रहेगी जिसमें हमारा यह जीरो जो

[440:01]

है वो कांस्टेंट रहेगा जब हम जीरो पास

[440:02]

करेंगे n को और n को वन पास किया तो हर

[440:05]

जगह हमारे पास वन आ जाएगा आई होप ये वाला

[440:08]

पार्ट हमारे पास क्लियर है कि हमारा n

[440:11]

कांस्टेंट है और m की वैल्यू जीरो से लेकर

[440:13]

10 तक जाएगी नंबर भी कांस्टेंट है नंबर

[440:15]

हमें बताया हुआ है क्या है कि टू की टेबल

[440:17]

प्रिंट करवानी है या थ्री की प्रिंट

[440:18]

करवानी है तो अब अपनी टेबल्स को हम

[440:20]

एक्चुअली मेन फंक्शन के अंदर लिख भी सकते

[440:22]

हैं यही सेम लूप एक बार कॉपी कर लेते हैं

[440:25]

यहां पर लिख देंगे जीरो प्रिंट

[440:28]

ए परसेंटेज डी ब

[440:31]

टेबल्स ऑफ 0 टू ए तो ये टू की टेबल प्रिंट

[440:34]

कर देगा एंड यह वाला जो लूप है यह थ्र की

[440:38]

टेबल प्रिंट कर देगा यहां पर m की जगह हम

[440:42]

रिप्लेस कर देंगे इसको 10 के

[440:44]

साथ और इसको कर लेते हैं सेव और करते हैं

[440:47]

फिर रन यहां पर m की जगह हर बार आ आने

[440:50]

वाला है क्योंकि m हमारा कांस्टेंट नहीं

[440:54]

है वो चेंज होता रहेगा जीरो से लेकर 10 तक

[440:56]

वैल्यू आएगी तो यहां पर हर बार आएगा आ अब

[440:59]

यहां पर जब भी हम इस कोड को देख रहे हैं

[441:01]

ना हमें कांस्टेंटली एक रेड लाइन नजर आ

[441:02]

रही है एरे के नीचे ये इसलिए हो रही है

[441:05]

क्योंकि जब भी हम 2d अरेज को पास करते हैं

[441:07]

ना फर्स्ट जो डायमेंशन होती है हमारी वो

[441:10]

तो एक पॉइंटर की तरह ट्रीट होती है पर

[441:11]

सेकंड डायमेंशन एक एक्चुअल एरे की तरह

[441:13]

ट्रीट होती है जिसमें हमें साइज देने की

[441:15]

जरूरत है तो जैसे सेकंड एरे है ना इसके

[441:17]

अंदर हमें साइज अपना डिफाइन करना पड़ेगा

[441:20]

10 नहीं तो ये रेड लाइन कभी जाएगी नहीं

[441:22]

यहां से अगर हम साइज नहीं बताते तो फिर

[441:24]

हमें एरर देता है कि कंपैटिबल टाइप्स नहीं

[441:27]

है अब इस कोड को करते हैं रन

[441:33]

तो हमारे पास जो आउटपुट निकल के आया वो

[441:35]

कुछ ऐसा है जिसमें सबसे पहले टेबल टू की

[441:38]

प्रिंट हो रही है 2 4 6 8 12 ये 20 तक एंड

[441:41]

उसके बाद तीन की टेबल प्रिंट हो रही है लद

[441:44]

ये हमें नेक्स्ट लाइन में प्रिंट करवानी

[441:45]

चाहिए थी तो यहां पर एक स्टेटमेंट दे देते

[441:48]

हैं प्रिंट f ब ए तो सबसे पहले टू की टेबल

[441:53]

प्रिंट हुई है फिर थ्री की टेबल प्रिंट

[441:55]

हुई है और टेबल्स को हमने प्रिंट कैसे

[441:57]

किया एक 2d एरे यानी टेबल्स के अंदर स्टोर

[442:00]

करवा के के हमने अपना स्टोर टेबल फंक्शन

[442:02]

कॉल किया उसके अंदर टेबल्स कैलकुलेट करके

[442:04]

स्टोर करवाई एंड अपने फंक्शन के अंदर

[442:06]

प्रिंट किया और क्या सीखने को मिला कि जब

[442:08]

भी 2d एरे को फंक्शन के अंदर पास करने है

[442:10]

सेकंड डायमेंशन हमेशा बताना है तो यह हमने

[442:13]

काफी सारी चीजें पढ़ ली है अरेज के अंदर

[442:15]

2d अरेज के अंदर कुछ सवाल आपको दिए होंगे

[442:17]

नोट्स आपको दिए होंगे उनको आप जाकर देख

[442:19]

सकते हैं एंड आई होप कि एरस के अंदर हमारी

[442:21]

एक स्ट्रांग ग्रिप जो है वो आ रही होगी

[442:23]

नेक्स्ट बढ़ते हैं हमारे नेक्स्ट चैप्टर

[442:25]

की तरफ जिसका नाम है स्ट्रक्चर्स एंड

[442:27]

स्ट्रिंग्स तो अब हम शुरुआत करने वाले हैं

[442:29]

अपने चप र ए के साथ जिसका नाम है

[442:32]

स्ट्रिंग्स स्ट्रिंग्स की अगर बात करें तो

[442:34]

स्ट्रिंग का मतलब होता है अ कैरेक्टर एरे

[442:37]

टर्मिनेटेड बाय अ नल कैरेक्टर यह जो बै

[442:40]

स्ल 0 हमने दिखाया हुआ है ये एक नल

[442:42]

कैरेक्टर है जैसे हम बै स्ल ए लिखते हैं

[442:46]

उसका मतलब होता है नेक्स्ट लाइन अगर हम

[442:48]

बैक स्लटी लिखते हैं उसका मतलब होता है

[442:50]

टैब स्पेस तो बैक स्ल जीरो का मतलब होता

[442:53]

है नल कैरेक्टर नल कैरेक्टर का काम होता

[442:57]

है किसी भी स्ट्रिंग को टर्मिनेट करना

[442:59]

यानी खत्म कर देना अभी तक हमने क्या बात

[443:01]

की है अभी तक हमने बात की है कि हमारे पास

[443:04]

कैरेक्टर्स होते हैं सी के अंदर और

[443:05]

कैरेक्टर क्या करता है एक सिंगल लेटर

[443:08]

स्टोर कर लेता है या एक सिंगल सिंबल स्टोर

[443:10]

कर लेता है पर मान लीजिए हमें एक वर्ड

[443:12]

स्टोर कराना है तो वर्ड को किस तरीके से

[443:15]

स्टोर कराएं या किसी सेंटेंस को किस तरीके

[443:17]

से स्टोर कराए वहां पे हमारी पिक्चर में आ

[443:19]

जाती है स्ट्रिंग्स स्ट्रिंग्स क्या करती

[443:21]

हैं इंग्लिश में जो वर्ड्स होते हैं या जो

[443:23]

सेंटेंसेस होते हैं जो पैराग्राफ होते हैं

[443:26]

हम उनको स्ट्रिंग डाटा टाइप में स्टोर करा

[443:28]

सकते हैं अब एक नॉर्मल जो कैरेक्टर एरे

[443:31]

होगा मान लीजिए हमने कैरेक्टर एरे नेम

[443:33]

बनाया उसके अंदर हम कुछ-कुछ चीजें डिफाइन

[443:36]

करेंगे ए बी सी ये तीन कैरेक्टर्स उसके

[443:39]

अंदर लिखे हुए हैं इसको तो हम कहेंगे

[443:42]

कैरेक्टर एरे पर एक ऐसा कैरेक्टर एरे

[443:46]

जिसमें लास्ट में हम एक नल कैरेक्टर भी

[443:48]

जोड़ दें तो वो दिखाएगा कि ये ए बी सी

[443:51]

अलग-अलग नहीं है ये साथ में जुड़कर एक

[443:54]

वर्ड बना रहे हैं तो ये मतलब होता है नल

[443:56]

कैरेक्टर को लास्ट में ऐड करने का तो

[443:58]

स्ट्रिंग क्या दिखलाती है स्ट्रिंग दिखाती

[444:00]

है हमें कि वो एक वर्ड को रिप्रेजेंट कर

[444:02]

रहा है कैरेक्टर एरे अब इसके कुछ

[444:05]

एग्जांपल्स देखें तो हमारे पास एक

[444:07]

कैरेक्टर एरे है जिसका नाम है नेम अब नेम

[444:09]

के अंदर हमने काफी सारे कैरेक्टर्स जो है

[444:11]

स्टोर करा रखे हैं पर एंड में हमने बै स्ल

[444:14]

0 से नल को भी स्टोर करा है तो यह एक

[444:17]

तरीके से रिप्रेजेंट करता है कि नेम

[444:20]

अलग-अलग कैरेक्टर्स का कॉमिनेशन नहीं है

[444:23]

नेम एक पूरा का पूरा वर्ड बनाता है और नेम

[444:26]

एक्चुअली इस वैल्यू की तरफ पॉइंट करता है

[444:29]

उसके बाद अगर क्लास को देखें तो क्लास अलग

[444:33]

नहीं है क्लास पूरा का पूरा वर्ड बनाती है

[444:35]

इन सारे कैरेक्टर्स को जोड़ के और वह वर्ड

[444:38]

कुछ ऐसा दिखता है जब भी हम स्ट्रिंग्स को

[444:40]

लिखते हैं तो हम एक तरीके से इस नल

[444:42]

कैरेक्टर को इग्नोर कर देते हैं पर

[444:44]

डिक्लेयर करते टाइम इस नल कैरेक्टर को

[444:46]

दिखाना जरूरी है क्योंकि कंपाइलर को पता

[444:49]

होना चाहिए कि वो एक नॉर्मल कैरेक्टर एरे

[444:51]

बना रहा है या फिर एक स्ट्रिंग ऑफ वर्ड्स

[444:53]

बना रहा है तो एक बार स्ट्रिंग को हम

[444:55]

डिक्लेयर करके देखते हैं अपने मेन फंक्शन

[444:56]

के अंदर कैरेक्टर नेम और इसके के अंदर हम

[445:00]

अपने डिफरेंट कैरेक्टर्स जो हैं उनको लिख

[445:02]

सकते हैं एच आर ए डी एच एंड ए और लास्ट

[445:07]

में ये जो नल कैरेक्टर है इसको डालना नहीं

[445:09]

भूलना क्योंकि अगर इसको हम नहीं डालेंगे

[445:11]

तो फिर ये नॉर्मल कैरेक्टर एरे की तरह

[445:14]

लेगा अब नॉर्मल कैरेक्टर एरे की तरह लेने

[445:16]

में क्या डिफरेंस है जब भी हम स्ट्रिंग्स

[445:18]

की बात करते हैं तो स्ट्रिंग्स के साथ

[445:20]

कुछ-कुछ ना स्पेशल प्रॉपर्टीज एसोसिएटेड

[445:22]

होते हैं और हमें ऑटोमेटिक कुछ-कुछ अच्छे

[445:24]

फंक्शंस भी मिल जाते हैं स्ट्रिंग्स के

[445:26]

ऊपर रन करने के लिए पर वो नॉर्मल कैरेक्टर

[445:29]

एरे के ऊपर नहीं हो वो सिर्फ स्ट्रिंग्स

[445:31]

के ऊपर ही होते हैं तो वो स्पेशल

[445:32]

कैरेक्टरिस्टिक वो स्पेशल प्रॉपर्टीज वो

[445:35]

स्पेशल फंक्शंस को एक्सेस करने के लिए

[445:37]

हमें नल कैरेक्टर का लगाना जरूरी होता है

[445:40]

तो यहां हमने नेम नाम की एक स्ट्रिंग को

[445:42]

इनिश इइ कर दिया है और उसके अंदर स्टोर

[445:44]

करवा दिया है अपना पूरा नाम विद अ नल

[445:46]

कैरेक्टर पर स्ट्रिंग को इनिश इज करने का

[445:48]

एक सिंगल तरीका नहीं होता दो तरीके होते

[445:51]

हैं सबसे पहला तरीका हमने ऑलरेडी देख लिया

[445:53]

जिसमें हम क्या कर रहे हैं अलग-अलग

[445:55]

कैरेक्टर्स को जोड़कर उसके एंड में एक नल

[445:58]

कैरेक्टर डाल देते हैं पर हम स्ट्रिंग को

[446:00]

पूरे वर्ड की तरह भी इनिशियलिज्म

[446:04]

को दोबारा से

[446:07]

इनिशियलिज्म कोट्स लगाए हैं और अंदर पूरा

[446:11]

का पूरा अपना नाम हमने लिख दिया है अब

[446:13]

यहां पे आप पूछ सकते हैं दीदी इसमें तो बै

[446:15]

स्ल 0 यानी नल कैरेक्टर आया ही नहीं तो

[446:17]

उसमें मैं बोलूंगी कि अगर ऐसे हम अपने

[446:19]

स्ट्रिंग को इनिशियलिज्म नल कैरेक्टर सी

[446:23]

कंपाइलर ऑटोमेटिक डाल देता है यानी आप

[446:25]

इतना लिखेंगे और सी क्या करेगा ऑटोमेटिक

[446:29]

पीछे बैक स्लैश जीरो को डाल देगा अब एक और

[446:31]

चीज यहां पे नोटिस करने वाली ये है कि जब

[446:33]

भी कैरेक्टर को लिखते हैं ना तो सिंगल

[446:35]

कोड्स के साथ लिखते हैं पर स्ट्रिंग को

[446:37]

लिखने के लिए हम डबल कोड्स को यूज करते

[446:40]

हैं तो ये डिस्टिंक्शन हमेशा याद रखनी है

[446:42]

अगर यहां सिंगल कोट्स लिखेंगे तो फिर

[446:43]

हमारे पास एरर आ रहा होगा क्योंकि ये

[446:45]

तरीका गलत है अब इस तरीके से भी अपनी

[446:48]

स्ट्रिंग को

[446:51]

इनिशियलिज्म वेरिएबल को हमें बनाना हो इसी

[446:54]

सेम स्ट्रिंग को बनाना हो तो इसको बनाएंगे

[446:57]

कुछ ऐसे तो ये हमारे पास एक स्ट्रिंग आ गई

[446:59]

जिसका नाम है नेम और जिसके अंदर स्टोर्ड

[447:02]

है हमारी एक्चुअल वैल्यू और इसके अंदर बै

[447:05]

स्ल 0 जो है वो हम डालने की जरूरत नहीं है

[447:07]

वो हमारा कंपाइलर ऑटोमेटिक हमारे लिए डाल

[447:10]

देगा इसका एक और एग्जांपल देखें तो जैसे

[447:13]

हमने एक क्लास वेरिएबल बनाया है एक क्लास

[447:15]

स्ट्रिंग बनाई है उसके अंदर हम अलग-अलग

[447:17]

डाल सकते हैं अपने कैरेक्टर्स को या फिर

[447:21]

सेम वर्ड्स की फॉर्म में डाल सकते हैं

[447:23]

जैसे कैरेक्टर क्लास इ इक्वल टू अपना

[447:28]

कॉलेज तो यहां प स्पेस भी हमारे पास

[447:31]

ऑटोमेटिक आ जाएगी यानी हमने बीच में स्पेस

[447:33]

दिया है तो ये स्पेस ऑटोमेटिक हमारी

[447:35]

स्ट्रिंग के अंदर आ रही है और बै स्ल 0 जो

[447:37]

है जो हमारा नल कैरेक्टर है वो हमारा

[447:39]

कंपाइलर ऐड करेगा नेक्स्ट हम बात करेंगे

[447:42]

कि जब भी हम एक स्ट्रिंग को डिफाइन करते

[447:44]

हैं तो मेमोरी के अंदर क्या होता है मतलब

[447:46]

हमने एक नॉर्मल कैरेक्टर एरे डिफाइन किया

[447:48]

और एक स्ट्रिंग को डिफाइन किया इन दोनों

[447:50]

में डिफरेंसेस क्या आते हैं मेमोरी की

[447:52]

फॉर्म में तो मान लीजिए हमने अपनी कोई

[447:53]

स्ट्रिंग डिफाइन की है इस फॉर्मेट में तो

[447:55]

क्या होगा मेमोरी के अंदर जितने भी हमने

[447:58]

कैरेक्टर्स लिए हैं उतने ब्लॉक्स जो हैं

[448:01]

वो सेव हो जाएंगे हम इन ब्लॉक्स को नाम दे

[448:04]

देंगे नेम जो भी हमारे वेरिएबल का नाम है

[448:06]

अब हर एक ब्लॉक के अंदर एक सिंगल कैरेक्टर

[448:08]

सेव होगा क्योंकि हर एक ब्लॉक का साइज है

[448:10]

एक बाइट जिसके अंदर सिंगल कैरेक्टर हमारा

[448:13]

सेव हो सकता है हर एक ब्लॉक का अपना कुछ

[448:15]

एड्रेस होगा और ये सारे के सारे एड्रेस जो

[448:17]

है वो कांटीगुअस हो गे क्यों क्योंकि

[448:19]

स्ट्रिंग मेमोरी के अंदर जाकर एक कैरेक्टर

[448:22]

एरे ही तो है तो कैरेक्टर एरे की मेमोरी

[448:25]

जो है वो कंटीन्यूअस होती है यानी लगातार

[448:26]

होती है तो स्ट्रिंग की जो मेमोरी है वो

[448:29]

भी लगातार होगी और हर एक मेमोरी ब्लॉक के

[448:31]

अंदर हम एक इंडिविजुअल कैरेक्टर को स्टोर

[448:33]

कराते हैं पर एक स्पेशल चीज इसमें यह होती

[448:35]

है कि एंड में एक नल कैरेक्टर को भी स्टोर

[448:39]

कराया जाता है यानी 2006 अगर मेमोरी

[448:41]

लोकेशन पे लास्ट लेटर आ गया तो 2007 भी

[448:45]

हमारी स्ट्रिंग का पार्ट होगा जिसके अंदर

[448:47]

हम बै स् 0 को स्टोर करा रहे होंगे व्हिच

[448:50]

इज आवर नल कैरेक्टर तो कुछ इस तरीके से

[448:53]

हमारी स्ट्रिंग जो है मेमोरी के अंदर

[448:54]

स्टोर होती है अब एक प्रैक्टिस क्वेश्चन

[448:57]

करके देख लेते हैं क्वेश्चन हमारा यह कहता

[448:59]

है कि क्र कट अ स्ट्रिंग फर्स्ट नेम एंड

[449:01]

लास्ट नेम यानी दो स्ट्रिंग्स यहां पे

[449:03]

बनानी है एक का नाम लेना है फर्स्ट नेम एक

[449:05]

का नाम लेना है लास्ट नेम टू स्टोर द

[449:07]

डिटेल्स ऑफ यूजर एंड प्रिंट ऑल द

[449:10]

कैरेक्टर्स यूजिंग अ लूप यानी हमें एक

[449:12]

स्ट्रिंग बनानी है फर्स्ट नेम नाम से

[449:15]

जिसके अंदर हम कोई भी वैल्यू स्टोर करा

[449:17]

सकते हैं जैसे मान लीजिए हमने स्टोर कराया

[449:19]

श्रद्धा फिर एक दूसरी स्ट्रिंग बनाएंगे

[449:21]

लास्ट नेम नाम से लास्ट नेम के अंदर भी

[449:24]

कोई हम वैल्यू स्टोर करा सकते हैं मान

[449:25]

लीजिए हमने स्टोर कराया खाप और अब हम इन

[449:28]

दोनों वैल्यूज को प्रिंट करवाएंगे लूप की

[449:30]

फॉर्म में लूप की फॉर्म में कैसे प्रिंट

[449:32]

करवाएंगे एक-एक कैरेक्टर को प्रिंट करवाते

[449:34]

रहेंगे तो लूप हमारा कब से कब तक चलेगा

[449:37]

लूप के अंदर कंडीशन ये आएगी कि जब तक

[449:40]

हमारा कैरेक्टर इज नॉट इक्वल टू नल

[449:43]

कैरेक्टर एक स्ट्रिंग पर हम बार-बार

[449:46]

बार-बार ट्रव्स कब तक कर सकते हैं सबसे

[449:48]

पहले जब तक हमारा नल कैरेक्टर नहीं आता

[449:51]

जैसे हमने अगर अपनी स्ट्रिंग ली है एस एच

[449:55]

आर ए डी एच ए तो ऑटोमेटिक इसमें लास्ट में

[449:58]

एक बैक स्लैश होगा तो सबसे पहले हम इस

[450:01]

कैरेक्टर पे आएंगे इसको प्रिंट करवा देंगे

[450:03]

फिर इस कैरेक्टर पे आएंगे इसको भी प्रिंट

[450:05]

करवा देंगे और इसी तरीके से एक-एक

[450:08]

कैरेक्टर हम आगे बढ़ते रहेंगे और अपनी

[450:11]

स्ट्रिंग के कैरेक्टर्स को करवाते रहेंगे

[450:13]

प्रिंट और यह काम जब तक करेंगे जब तक

[450:15]

हमारा कैरेक्टर जो है वो नल कैरेक्टर नहीं

[450:18]

हो जाता यानी एक सी पॉइंटर बना लेंगे या

[450:21]

एक आई बना लेंगे और ये आई आइट मेटर या स

[450:24]

आइट मेटर क्या करेगा ट्रव्स करेगा लूप लगा

[450:27]

के और जैसे ही स की वैल्यू बैक स् यानी नल

[450:30]

कैरेक्टर हो जाती है वैसे ही लूप हो जाएगा

[450:32]

खत्म और नल कैरेक्टर को हम प्रिंट नहीं

[450:34]

करवाएंगे और एंड में हमारी जो पूरी की

[450:36]

पूरी स्ट्रिंग होगी उसको हम प्रिंट करवा

[450:38]

चुके होंगे इसको एक बार कोड की हेल्प से

[450:40]

विजुलाइज करके देखते हैं कि होगा कैसे

[450:42]

सबसे पहले दो वेरिएबल बनाते हैं पहले

[450:45]

हमारा फर्स्ट नेम इसमें स्टोर करा लेंगे

[450:47]

अपनी वैल्यू फिर बनाएंगे अपना लास्ट नेम

[450:50]

इसमें भी स्टोर करा लेंगे अपनी वैल्यू अब

[450:53]

क्या करेंगे एक अलग से फंक्शन बना लेते

[450:55]

हैं अपनी स्ट्रिंग्स को प्रिंट करवाने के

[450:56]

लिए वॉइड प्रिंट स्ट्रिंग अब ये ये जो

[451:00]

स्ट्रिंग है इसको फंक्शन को कैसे पास करें

[451:02]

एक नॉर्मल कैरेक्टर एरे की तरह पास कर दो

[451:04]

यहां लिख देते हैं कैरेक्टर एरे और यहां

[451:08]

पे हमें साइज भेजने की जरूरत नहीं है रेखा

[451:10]

क्योंकि स्ट्रिंग की एक स्पेशल बात ये है

[451:12]

कि स्ट्रिंग वहां पे खत्म हो जाती है जहां

[451:14]

नल कैरेक्टर आ जाए नॉर्मल एरे के अंदर

[451:16]

हमें पता ही नहीं होता कि एरे के अंदर

[451:18]

एलिमेंट्स कितने हैं कहां तक वो चलता

[451:20]

रहेगा पर स्ट्रिंग के अंदर पता होता है कि

[451:22]

जैसे ही नल कैरेक्टर आ गया यानी हमारा

[451:24]

स्ट्रिंग खत्म हो चुका है तो यहां साइज

[451:26]

पास नहीं कराएंगे इस फंक्शन को लिख लेते

[451:28]

हैं वॉइड प्रिंट स्ट्रिंग जिसके अंदर आएगा

[451:31]

हमारे पास हमारा स्ट्रिंग अब अपने फंक्शन

[451:34]

के अंदर हम एक लूप बनाएंगे लूप की शुरुआत

[451:37]

करते हैं एक इंटी जर आ के साथ जो जीरो से

[451:39]

शुरू हो रहा है और हर बार आ जो है वो

[451:41]

हमारा प्लस प्लस होता रहेगा अभी इस वाली

[451:43]

कंडीशन को थोड़ी देर के लिए टाल देते हैं

[451:46]

और अंदर क्या करेंगे हर बार हम प्रिंट एफ

[451:49]

करके प्रिंट करवाने वाले हैं अपने

[451:51]

कैरेक्टर्स को कैसे कराएंगे प्रिंट

[451:53]

कैरेक्टर्स को एरे ऑफ आ की हेल्प से अब

[451:56]

हमें पता है कि एरे में किसी भी स्पेसिफिक

[451:59]

इंडेक्स पे जाके वैल्यू को कैसे निकालते

[452:01]

हैं एरे ऑफ आ कर देते हैं यानी स्क्वायर

[452:04]

ब्रैकेट्स लगाते हैं ये हमारी एरे नोटेशन

[452:06]

है इसको पॉइंट्स की हेल्प से भी कर सकते

[452:08]

हैं पर मुझे जो अरेज वाली नोटेशन होती है

[452:10]

अरेज वाली चीजें होती हैं वो ज्यादा सिंपल

[452:13]

लगती है एज कंपेयर टू पॉइंट्स तो अरेज की

[452:15]

हेल्प से करवाएंगे अब यहां पे कंडीशन क्या

[452:18]

रखनी है कंडीशन ये रखनी है कि जब भी एरे

[452:21]

के इंडेक्स पर नल पॉइंटर आ जाए वैसे ही आप

[452:24]

रोक दें वहां पे एग्जीक्यूशन तो ये लूप तब

[452:27]

तक चलेगा जब तक एरे के इंडेक्स पर नल

[452:30]

कैरेक्टर नहीं आता तो उसके लिए कंडीशन लिख

[452:32]

लेते हैं जब तक हमारा एरे ऑफ आ इज नॉट

[452:36]

इक्वल टू हमारा नल कैरेक्टर तो ये जो

[452:39]

कंडीशन है यह सबसे इंपॉर्टेंट है कि कब तक

[452:42]

हमारा लूप चलेगा अगर हम सारे के सारे

[452:44]

कैरेक्टर्स प्रिंट करवाने हैं तो जब तक

[452:47]

हमारे इंडेक्स पर नल कैरेक्टर नहीं आ जाता

[452:50]

जैसे ही नल कैरेक्टर आ गया मतलब हमारी

[452:52]

स्ट्रिंग जो है वो खत्म हो चुकी है एंड

[452:55]

में क्या करेंगे एंड में प्रिंट करवा

[452:57]

देंगे एक नेक्स्ट लाइन क्योंकि यहां तो

[453:00]

कैरेक्टर्स जो है एक के बाद एक के बाद एक

[453:02]

के बाद प्रिंट होंगे सेम लाइन में उसके

[453:03]

बाद एक नेक्स्ट लाइन प्रिंट करवा रहे हैं

[453:05]

अब मेन फंक्शन से इस फंक्शन को कॉल लगाते

[453:08]

हैं सबसे पहले कॉल लगाएंगे फर्स्ट नेम के

[453:10]

लिए प्रिंट स्ट्रिंग में पास कर देंगे

[453:12]

अपना फर्स्ट नेम उसके बाद कॉल लगा देंगे

[453:15]

अपने लास्ट नेम के लिए तो प्रिंट स्ट्रिंग

[453:18]

में पास कर देंगे अपना लास्ट नेम एक चीज

[453:20]

हमने ध्यान दी होगी कि यहां पे सिर्फ

[453:22]

कैरेक्टर एरे यानी अपनी स्ट्रिंग पास की

[453:24]

है स्ट्रिंग का साइज हमने पास नहीं किया

[453:26]

क्योंकि साइज की जरूरत नहीं ही नहीं है

[453:28]

हमें पता है हमारी स्ट्रिंग वहां खम होगी

[453:30]

जहां नल कैरेक्टर आ जाएगा यह नॉर्मल अरेज

[453:32]

में हमें नहीं पता होता तो इसको कर लेते

[453:34]

हैं सेव और इसको करवा देते हैं रन तो सबसे

[453:37]

पहले हमारी स्ट्रिंग फर्स्ट नेम प्रिंट हो

[453:39]

गई उसके बाद हमारी स्ट्रिंग लास्ट नेम

[453:41]

प्रिंट हो गई तो कुछ इस तरीके से हम अपनी

[453:43]

स्ट्रिंग को कैरेक्टर बाय कैरेक्टर प्रिंट

[453:46]

करवा सकते हैं लूप लगाना है एक और उसमें

[453:48]

लूप में स्पेशल चीज जो याद रखनी है वो ये

[453:51]

है कि जब तक नल कैरेक्टर नहीं आता नेक्स्ट

[453:54]

चीज जिसकी बात करेंगे वो है हमारा

[453:55]

स्ट्रिंग फॉर्मेट

[453:58]

स्पेसिफीज करवाया स्ट्रिंग को हमने प्रिंट

[454:01]

करवाया परसेंटेज सी यानी कैरेक्टर बाय

[454:04]

कैरेक्टर और अगर इनपुट भी लेनी हो

[454:06]

स्ट्रिंग तो कैसे इनपुट लेंगे कैरेक्टर

[454:08]

बाय कैरेक्टर ही इनपुट लेनी पड़ेगी तो और

[454:10]

कुछ तो पता ही नहीं है हमें कैरेक्टर्स

[454:11]

में पर एक स्पेशल फॉर्मेट स्पेसिफीज होता

[454:15]

है परसेंटेज s ये फॉर्मेट

[454:21]

स्पेसिफिसिटी स्ट्रिंग बनाई हुई है जिसमें

[454:24]

कोई वैल्यू स्टोर्ड है अब इसको हमें

[454:26]

प्रिंट करवाना है ना तो कैरेक्टर बाय

[454:28]

कैरेक्टर प्रिंट करवाने की जगह एक बहुत ही

[454:30]

आसान तरीका है वो है कि परसेंटेज s लिख लो

[454:34]

मतलब यह वाला फॉर्मेट

[454:45]

स्पेसिफाई तो ये सब तो हमारा प्रिंट एफ के

[454:47]

लिए हो गया पर अगर स्कैन एफ करना हो तो वो

[454:49]

भी ऑटोमेटिक हम कर सकते हैं परसेंटेज एस

[454:52]

से जैसे मान लीजिए हमने कोई स्ट्रिंग

[454:54]

डिफाइन की कैरेक्टर नेम के नाम से

[454:57]

स्ट्रिंग का मैक्सिमम साइज हमने 40 दे

[454:59]

दिया है अब इसको अगर हमें स्कैन करना है

[455:02]

तो स्कैन एफ परसेंटेज s और यहां लिख देंगे

[455:05]

नेम यहां नेम क्यों लिखा एड्रेस ऑफ नेम

[455:08]

क्यों नहीं लिखा क्योंकि नेम अल्टीमेटली

[455:11]

स्ट्रिंग क्या है कैरेक्टर एरे कैरेक्टर

[455:13]

एरे क्या होता है एरे हमेशा एक पॉइंटर

[455:15]

होता है तो स्ट्रिंग का जो नाम है वो खुद

[455:18]

में एक पॉइंटर है यानी नेम एक पॉइंटर है

[455:20]

तो यहां एंड नेम लिखने की जरूरत नहीं है

[455:22]

सिर्फ नेम काफी है तो इस तरीके से हम

[455:25]

परसेंटेज s से स्कैन एफ भी कर सकते हैं और

[455:28]

प्रिंट एफ भी कर सकते हैं दोनों का

[455:29]

एग्जांपल देख लेते हैं अपने मेन फंक्शन के

[455:32]

अंदर हम क्या करेंगे एक स्ट्रिंग बना

[455:34]

लेंगे कैरेक्टर नेम और इस स्ट्रिंग का कुछ

[455:37]

मैक्सिमम साइज देंगे मान लीजिए 50 अब सबसे

[455:40]

पहले तो स्कैनफ से इस नाम को इनपुट लेंगे

[455:43]

फिर प्रिंट एफ से इस नाम को आउटपुट दे

[455:45]

देंगे स्कैन एफ परसेंटेज ए और फिर नाम और

[455:50]

उसके बाद कर देंगे प्रिंट एफ परसेंटेज ए

[455:53]

योर नेम इज और यहां लिख देंगे नेम बस अब

[455:57]

ये पूरा का पूरा जो प्रिंट स्ट्रिंग

[455:59]

फंक्शन है ना ये एक सिंगल लाइन में आ गया

[456:01]

प्रिंट एफ की हेल्प से जब हमने उसमें

[456:03]

परसेंटेज s वाला फॉर्मेट स्पेसिफाई लगाया

[456:06]

इसको कर लेते हैं सेव और उसको दोबारा से

[456:08]

करते हैं रन तो अब सबसे पहले तो हमें अपना

[456:10]

नाम एंटर करना है तो नाम हमने एंटर कर

[456:12]

दिया और अब हमारे लिए पूरी की पूरी

[456:14]

स्ट्रिंग जो आ गई है योर नेम इज अपेंड हो

[456:16]

गया है और हमारी स्ट्रिंग ये रही हमारे

[456:19]

आउटपुट के अंदर तो परसेंटेज s हमेशा यूज

[456:22]

करना है जब भी स्ट्रिंग को स्कैन एफ और

[456:24]

प्रिंट एफ की हेल्प से इनपुट और आउटपुट

[456:26]

हमें कराना है अब इसमें एक स्पेशल चीज आप

[456:28]

पूछ सकते हैं कि द जब हमने श्रद्धा नाम

[456:30]

एंटर किया यहां पे जब स्कैनफ ने एक नाम

[456:33]

लिया तो उसमें बै स्ल 0 तो हमने डाला ही

[456:36]

नहीं तो कैसे बैक स्ल 0 उसने स्ट्रिंग ले

[456:38]

लिया इसको अब यहां पे हम एक चीज पूछ सकते

[456:41]

हैं कि दीदी जब हमने अपना नाम एंटर किया

[456:43]

तो बै स् 0 तो डाला ही नहीं तो फिर सी को

[456:45]

कैसे पता चला ये एक स्ट्रिंग है तो सी

[456:48]

क्या करती है ऑटोमेटिक जब भी आप परसेंटेज

[456:50]

s लगा देते हैं जो भी आप चीज एंटर करेंगे

[456:52]

उसके बाद बैक स् 0 यानी नल कैरेक्टर को

[456:55]

खुद से लगा देगी ऑटोमेटिक लग जाएगा तो

[456:57]

उसकी हमें टेंशन लेने की जरूरत नहीं है

[456:59]

सिर्फ अपने कैरेक्टर्स हमें इनपुट करने

[457:01]

हैं नेक्स्ट चीज करेंगे एक प्रैक्टिस

[457:03]

क्वेश्चन को सॉल्व इसमें दो पार्ट्स हैं

[457:06]

दूसरे पार्ट से हमें कुछ कुछ नई चीजें

[457:08]

रिलाइज होगी तो सबसे पहले पहले पार्ट से

[457:09]

शुरुआत करते हैं आस्क द यूजर टू एंटर देयर

[457:12]

फर्स्ट नेम एंड प्रिंट इट बैक टू देम ये

[457:15]

तो बहुत आसान है ये तो हमने ऑलरेडी कर भी

[457:17]

दिया है आई थिंक अब यहां पे बस वेरिएबल को

[457:18]

थोड़ा सा चेंज कर देते हैं इसको नाम दे

[457:20]

देते हैं फर्स्ट नेम इसको कर लेते हैं

[457:23]

कॉपी तो यह भी हो जाएगा हमारा फर्स्ट नेम

[457:25]

और यह भी हो जाएगा हमारा फर्स्ट नेम इसको

[457:28]

सेव करके एक बार दोबारा से रन कर लेते हैं

[457:31]

मान लीजिए इस बार फर्स्ट नेम हमने एंटर

[457:32]

किया है अमन तो यहां पे प्रिंट होके आ गया

[457:35]

योर नेम इज अमन अब सेकंड पार्ट इसका

[457:37]

ज्यादा इंटरेस्टिंग है सेकंड पार्ट में

[457:39]

लिखा है ट्राई दिस विद योर फुल नेम अभी तक

[457:42]

तो फर्स्ट नेम एंटर कराया था अब फुल नेम

[457:44]

एंटर कराओ यानी फर्स्ट नेम भी और लास्ट

[457:46]

नेम भी तो वो भी करा के देख लेते हैं इस

[457:49]

पार्ट को कर देते हैं कमेंट आउट और नई

[457:51]

स्ट्रिंग बनाते हैं कैरेक्टर फुल नेम ऑफ

[457:54]

100 कैरेक्टर्स सबसे पहले स्कैन एफ करेंगे

[457:57]

फुल नेम को परसेंटेज ए फुल नेम उसके बाद

[458:01]

प्रिंट कर देंगे योर फुल नेम इज़ परसेंटेज

[458:05]

s फुल नेम अब इसको कर लेते हैं सेव और

[458:08]

इसको करते हैं रन सबसे पहले तो हमें अपना

[458:11]

फुल नेम एंटर करना है एंटर पर यहां पे एक

[458:13]

चीज़ नोटिस करेंगे कि योर फुल नेम इज़ में

[458:16]

सिर्फ फर्स्ट नेम एंटर हुआ मतलब यह स्पेस

[458:18]

के बाद वाली जो भी चीज़ है ना इसने इनपुट

[458:21]

ही नहीं की तो यहां पे हम एक स्पेशल

[458:23]

प्रॉपर्टी सीखते हैं कि जो स्कैन एफ होता

[458:25]

है ना वह नहीं इनपुट कर सकता मल्टी वर्ड

[458:28]

स्ट्रिंग्स यानी अगर एक स्ट्रिंग के अंदर

[458:31]

आप एक से ज्यादा वर्ड डाल देंगे जैसे आप

[458:33]

डालेंगे दिस इज अ सेंटेंस तो वो सिर्फ इस

[458:38]

दिस को इनपुट कर पाएगा जैसे ही एक स्पेस आ

[458:41]

जाएगी और उसके बाद वाली चीज यह वाला पार्ट

[458:44]

हमारी स्ट्रिंग के अंदर एंटर नहीं होगा तो

[458:46]

स्कैन एफ का ये ड्रॉबैक होता है इसकी

[458:48]

कमजोरी होती है कि मल्टी वर्ड स्ट्रिंग्स

[458:50]

जो होती है ना जिनमें मल्टीपल वर्ड्स होते

[458:52]

हैं उनको एंटर ही नहीं कर पाता क्योंकि

[458:54]

स्पेसेस को नहीं ट्रैक कर पाएगा तो यहां

[458:57]

पे हम दो स्पेशल फंक्शंस का इस्तेमाल

[458:58]

करेंगे जिनमें से सबसे पहले है गेट एस और

[459:01]

फिर है पुट एस तो ये हमारी पिक्चर में आते

[459:03]

हैं अब गेट एस जो है थोड़ा सा डेप्रिसिएशन

[459:05]

हो गया तो इसकी जगह हम यूज़ करेंगे यहां

[459:07]

पे f गेटस इन तीनों को डिटेल में पढ़ते

[459:10]

हैं तो स्ट्रिंग के हमारे पास तीन फंक्शंस

[459:14]

आते हैं जब भी हम स्ट्रिंग को इनपुट और

[459:15]

आउटपुट कराना चाहते हैं परसेंटेज s तो है

[459:18]

ही वो हमारा फॉर्मेट

[459:19]

स्पेसिफाई स्कैनफ में कमजोरी आ जाती है कि

[459:22]

वो मल्टी वर्ड्स को एक्सेस नहीं कर पाता

[459:24]

मान लो हमारी स्ट्रिंग तो जी पूरा सेंटेंस

[459:26]

है या फिर पूरा पैराग्राफ है वो तो फिर आ

[459:28]

ही नहीं पाएगा कभी एंटर ही नहीं हो पाएगा

[459:30]

यूजर से तो वहां पे हम यूज़ करते हैं एक

[459:32]

फंक्शन व्हिच इज कॉल्ड गेटस गेटस क्या

[459:34]

करता है एक स्ट्रिंग को इनपुट ले लेता है

[459:36]

मतलब हम एक स्ट्रिंग डिफाइन कर देंगे

[459:38]

कैरेक्टर एसटी जिसका हम मैक्सिमम कोई साइज

[459:42]

दे देंगे 100 अब उस स्ट्रिंग को यहां पे

[459:44]

लिख देंगे तो गेटस हमारी स्ट्रिंग को

[459:47]

इनपुट कर लेगा और पुट एस क्या करेगा पुट

[459:50]

एस हमारी स्ट्रिंग को आउटपुट कर देगा यानी

[459:52]

सिंपली हमें लिखना है पुट s एसआर इससे

[459:56]

हमारी स्ट्रिंग आउटपुट हो जाएगी और अगर

[459:58]

इससे से पहले हम करें गेट एस एटीआर इससे

[460:02]

हमारी स्ट्रिंग इनपुट हो जाएगी पर यहां पे

[460:05]

जो गेट एस फंक्शन होता है ना ये डेंजरस

[460:07]

फंक्शन है और आउटडेटेड फंक्शन है इसकी वजह

[460:10]

से काफी सारे जो सॉफ्टवेयर्स हैं वो हैक

[460:12]

हो जाते हैं क्योंकि गेट एस ये ट्रैक नहीं

[460:15]

करता कि एटीआर का मैक्सिमम साइज क्या है

[460:17]

तो इसकी वजह से गेटस को आजकल यूज नहीं

[460:20]

किया जाता इवन सी के जो 11थ वर्जन है

[460:22]

उसमें गेटस को कंपलीटली हटा दिया है कोई

[460:24]

यूसेज नहीं है उसका तो मेरे सिस्टम पे

[460:27]

मैंने जो है लेटेस्ट सी इंस्टॉल किया था

[460:29]

अब एक बार करके भी देख लेते हैं कि कैसे

[460:32]

हमारे गेटस और पुट्स काम करेंगे हमने एक

[460:34]

नेम बनाया 100 का अब हम क्या करेंगे इसको

[460:37]

इनपुट लेंगे सबसे पहले तो सिर्फ लिख देंगे

[460:40]

गेट एस और एटीआर फिर लिख देंगे पुट एस और

[460:43]

एटीआर इसको कर लेंगे सेव इस नेम को चेंज

[460:46]

कर लेते हैं टू एटीआर अब इसको एक बार रन

[460:49]

करते हैं रन करते ही यहां वार्निंग आ गई

[460:51]

कि दिस प्रोग्राम यूसेज गेटस व्हिच इज

[460:53]

अनसेफ तो गेट एस को यूज नहीं करना चाहिए

[460:56]

परट स्टिल हम अपने स्ट्रिंग में कुछ डाल

[460:58]

देते हैं हेलो वर्ल्ड हमने डाला और हमारे

[461:00]

पास हेलो वर्ल्ड वापस से एकको होकर आ गया

[461:03]

तो क्या किया गेटस ने पूरा का पूरा हेलो

[461:05]

वर्ल्ड जो है वो ले लिया मतलब स्पेस के

[461:07]

बाद वाली चीज भी ली अब यहां पे हम क्या

[461:10]

करेंगे अपना फुल नेम एंटर करवा के देखेंगे

[461:12]

फुल नेम को कैसे एंटर करें सबसे पहले अपना

[461:15]

फर्स्ट नेम लिखेंगे फिर अपना लास्ट नेम

[461:17]

लिखेंगे इज अ गुड स्टूडेंट इनफैक्ट पूरी

[461:20]

लाइन लिख देते हैं तो अब पटेस्ट ने क्या

[461:22]

किया वो पूरी की पूरी लाइन जो है हमारे

[461:24]

पास प्रिंट करवा दी इस तरीके से जब भी

[461:26]

हमें मल्टी वर्ड सेंटेंसेस लेने होते हैं

[461:28]

ना या मल्टी वड स्ट्रिंग्स लेनी होती है

[461:30]

तो हम गेट एस और पुट एस का यूज करेंगे अब

[461:32]

गेट एस क्योंकि डेंजरस है थोड़ा सा

[461:34]

आउटडेटेड है तो उसकी जगह एक और दूसरा

[461:36]

फंक्शन होता है जिसका नाम है एफ गेटस एफ

[461:38]

गेट एस का ऐसा कुछ फॉर्मेट होता है ये

[461:40]

एक्स्ट्रा चीज है जो काफी सारे स्टूडेंट्स

[461:42]

को शायद कॉलेज के अंदर ना पढ़ाई जाए या अ

[461:45]

जनरली आपको ना दिखे पर मुझे लगा कि ये

[461:48]

वाली चीज मैं सिखाऊं तो उसके साथ मुझे ये

[461:50]

वाली चीज भी सिखानी चाहिए तो एफ गेट एस

[461:52]

में सबसे पहले हम डालते हैं अपनी स्ट्रिंग

[461:53]

जो भी स्ट्रिंग हमें एंटर करनी है फिर

[461:55]

साइज डाल देते हैं स्ट्रिंग का कि

[461:56]

मैक्सिमम कितने कैरेक्टर्स हम इनपुट कर

[461:58]

सकते हैं एंड उसके बाद डाल देते हैं अपनी

[462:00]

फाइल का नाम अब इस फाइल के नाम क्या है

[462:03]

यहां पे क्या डालना चाहिए इसको अभी के लिए

[462:05]

भूल जाते हैं और इस फाइल के नाम की जगह हम

[462:07]

डाल देंगे एसटीडी आई ए बस इतनी सी लाइन

[462:09]

लिखनी है इसको कहते हैं स्टैंडर्ड इनपुट

[462:13]

तो ये क्या है क्यों हम इसको लिख रहे हैं

[462:15]

इस पे अभी ध्यान नहीं देना बस एसडीडी आई ए

[462:17]

डाल दो जब भी एफ गेट एस यूज़ करना है तो

[462:19]

एफ गेट एस क्या करता है इट स्टॉप्स व्हेन

[462:21]

n -1 कैरेक्टर्स इनपुट और न्यू लाइन इज

[462:24]

एडिटेड यानी आप पूरा अपने वर्ड जो है

[462:26]

लिखते रहेंगे डिफरेंट डिफरेंट वर्ड्स

[462:28]

लिखते रहेंगे जैसे ही आप एंटर प्रेस कर

[462:30]

देंगे या जैसे ही आपके n -1 यहां पे जो

[462:33]

साइज दिया है उससे एक कम अगर आप लेटर्स

[462:35]

एंटर करेंगे तो वहीं पे आपका जो सेंटेंस

[462:38]

है आपका जो स्ट्रिंग है वो खत्म हो जाएगा

[462:40]

इसका भी एक बार एग्जांपल देख लेते हैं

[462:42]

यहां पे गेटस की जगह ना एफ गेटस कर देते

[462:44]

हैं एटीआर लिख देते हैं फिर एटीआर में लिख

[462:46]

देंगे 100 एंड उसके बाद लिखेंगे हम एसटीडी

[462:49]

आ इसको कर लेते हैं सेव और रन इस बार

[462:52]

दोबारा से अपना पूरा वर्ड एंटर करते हैं

[462:54]

वो वापस से आ गया अब ये जो पुट एस क्या

[462:57]

करता है पुस ऑटोमेटिक एक नेक्स्ट लाइन दे

[462:59]

देता है प्रिंट करने के बाद तो आपने

[463:01]

प्रिंट कर दिया जो भी आपको प्रिंट करना था

[463:03]

अब आपका कर्सर नेक्स्ट लाइन पे आ गया और

[463:05]

सिंस फिर रिटर्न जरो हो गया तो यहां पे

[463:06]

प्रोग्रामिंग हमारी खत्म हो गई तो जब भी

[463:09]

पुट एस्ट डाल रहे हैं तो हमें बैक स्लैश

[463:11]

एंड करने की जरूरत नहीं है क्योंकि

[463:12]

नेक्स्ट लाइन ऑटोमेटिक आ जाएगा तो कुछ इस

[463:14]

तरीके से हमारे गेट एस पुट एस और एफ गेटस

[463:17]

काम करते हैं नेक्स्ट चीज जिसको सीखेंगे

[463:19]

वो काफी सीखी सिखाई चीज है जैसे हमारे एरे

[463:24]

पॉइंट्स होते थे वैसे ही हमारी स्ट्रिंग्स

[463:26]

भी पॉइंट्स होती हैं क्योंकि इसके पीछे

[463:28]

बहुत लॉजिकल आंसर है एरे अगर पॉइंटर है तो

[463:32]

स्ट्रिंग भी क्या है स्ट्रिंग भी तो एक

[463:35]

कैरेक्टर एरे है तो अल्टीमेटली वो भी एक

[463:38]

पॉइंटर है बहुत इजी चीज जैसे हम अपने ए

[463:41]

अरेज के लिए क्या करते थे हमने एक इंट नाम

[463:43]

का एरे बनाया इसको हम ऐसे भी बना सकते हैं

[463:46]

इसमें साइज लिख देंगे या इसको हम ऐसे भी

[463:48]

बना सकते हैं वैसे ही हम अपनी स्ट्रिंग को

[463:51]

एरे नोटेशन से भी बना सकते हैं और पॉइंटर

[463:54]

नोटेशन से भी बना सकते हैं अगर स्ट्रिंग

[463:56]

को हमें पॉइंटर नोटेशन से बनाना है तो

[463:57]

उसके लिए क्या करेंगे इसके लिए सिंपली

[463:59]

लिखेंगे कैरेक्टर पॉइंटर और फिर लिखेंगे

[464:02]

एटीआर या जो भी हम अपने स्ट्रिंग का नाम

[464:04]

रखना चाहते हैं एंड उसके बाद हमारी पूरी

[464:07]

की पूरी स्ट्रिंग तो इट स्टोर्स स्ट्रिंग

[464:09]

इन द मेमोरी एंड द असाइन एड्रेस इज

[464:11]

स्टोर्ड इन द कैरेक्टर पॉइंटर एसडीआर तो

[464:13]

ये हेलो वर्ल्ड जो है हमारी मेमोरी के

[464:16]

अंदर पूरा का पूरा हमारा हेलो वर्ल्ड

[464:18]

स्टोर हो जाएगा जिसके एंड में हमारे पास

[464:20]

बै स्ल 0 आ जाएगा और फिर इसका जो एड्रेस

[464:23]

है यानी फर्स्ट इंडेक्स का एड्रेस इस

[464:25]

इंडेक्स का एड्रेस ये पॉइंट करवा रहा होगा

[464:27]

एसडीआर इस एड्रेस की तरफ तो हमारी जो

[464:30]

स्ट्रिंग है वो अल्टीमेटली एक पॉइंटर है

[464:32]

क्योंकि वो खुद में कैरेक्टर एरे है अब

[464:35]

कैरेक्टर एरे और पॉइंटर के बीच में एक

[464:37]

फंडामेंटल डिफरेंस आता है वो डिफरेंस क्या

[464:39]

कहता है वो डिफरेंस कहता है अगर आप पॉइंटर

[464:41]

की हेल्प से एक स्ट्रिंग को डिफाइन करते

[464:43]

हैं ना तो स्ट्रिंग को री इनिश इज कर सकते

[464:45]

हो मतलब उस स्ट्रिंग की वैल्यू चेंज कर

[464:47]

सकते हो जैसे आज अगर हमने स्ट्रिंग के

[464:49]

अंदर हेलो वर्ल्ड स्टोर कराया तो कल को हम

[464:52]

स्ट्रिंग के अंदर सिर्फ हेलो भी स्टोर करा

[464:54]

सकते हैं और उसके बाद उसकी वैल्यू चेंज

[464:57]

करके सिर्फ वर्ल्ड भी स्टोर करा सकते हैं

[465:00]

पर अगर हमने एरे नोटेशन यूज करी तो उसके

[465:02]

अंदर हमेशा हेलो वर्ल्ड ही रहेगा उसको हम

[465:05]

री

[465:07]

इनिशियलिज्म

[465:11]

डिफाइन करें सबसे पहली स्ट्रिंग बनाते हैं

[465:14]

तो इसको हम बनाएंगे एक कैरेक्टर पॉइंटर के

[465:17]

हिसाब से कैन चेंज इसमें हम डाल देंगे

[465:20]

हेलो वर्ल्ड अब इसको प्रिंट करवा लेते हैं

[465:22]

पुस से यहां पे लिख देते हैं कैन चेंज एंड

[465:25]

उसके बाद इस स्ट्रिंग को चेंज भी कर देते

[465:27]

हैं तो स्ट्रिंग को जैसे ही चें च करेंगे

[465:29]

इसको मान लीजिए हमने हेलो बना दिया उसके

[465:31]

बाद दोबारा से इसको पुस कर देते हैं कैन

[465:34]

चेंज इसको सेव करके करा लेते हैं रन तो

[465:37]

सबसे पहले हमारी स्ट्रिंग थी हेलो वर्ल्ड

[465:39]

इस लाइन ने क्या किया पुस ने हेलो वर्ल्ड

[465:41]

प्रिंट कर दिया फिर हमने चेंज करके उसको

[465:43]

हेलो कर दिया तो इसने क्या किया फिर हेलो

[465:45]

प्रिंट कर दिया क्योंकि पॉइंट्स की वैल्यू

[465:48]

चेंज हो सकती है अब हम एक दूसरी स्ट्रिंग

[465:50]

बनाएं अगर कैरेक्टर कैन नॉट चेंज तो कैन

[465:55]

नॉट चेंज को इस तरीके से हम डिफाइन कर

[465:57]

सकते हैं इसमें भी हेलो वर्ल्ड डाल देंगे

[465:59]

हेलो वर्ल्ड डाल के इसको तो पटेस्ट करा

[466:01]

सकते हैं हम कैन नॉट चेंज पर अगर हम कैन

[466:05]

नॉट चेंज की वैल्यू कल को करना चाहे हेलो

[466:09]

तो अब यह सी का कंपाइलर हमें करने नहीं

[466:11]

देगा और रेड लाइन दिखा देगा क्यों क्योंकि

[466:13]

एक्सप्रेशन मस्ट बी अ मॉडिफाई बल वैल्यू

[466:16]

हमारा जो कैरेक्टर एरे होता है जब एरे

[466:18]

नोटेशन आ जाती है तो उसको मॉडिफाई नहीं कर

[466:20]

सकते हम वो वैल्यू वैसी की वैसी रहेगी पर

[466:23]

अगर मॉडिफाई करना था चेंज करना था तो आपको

[466:26]

कैरेक्टर पॉइंटर यूज करना चाहिए था तोय

[466:28]

हल्का सा डिफरेंस आ जाता है जब भी आप

[466:30]

स्ट्रिंग को एक कैरेक्टर पॉइंटर या फिर

[466:32]

एरे नोटेशन से डिक्लेयर करते हैं नेक्स्ट

[466:34]

चीज इसकी बात करेंगे इसमें हमें क्वेश्चन

[466:37]

नंबर 49 सॉल्व करना है मेक अ प्रोग्राम

[466:40]

दैट इनपुट यूजर्स नेम यूजर का नेम इनपुट

[466:43]

करता है और उसकी लेंथ प्रिंट कराता है एक

[466:45]

स्ट्रिंग लेनी है यूजर से जिसका नाम होगा

[466:48]

यूजर का नाम और फिर उसकी लेंथ हम इनपुट

[466:51]

करा देंगे जैसे फॉर एग्जांपल हम एक

[466:54]

स्ट्रिंग बनाते हैं कैरेक्टर नेम मान

[466:57]

लीजिए स्ट्रिंग जो है 100 साइज की हो सकती

[466:59]

है तो सबसे पहले तो एफ गेटस से स्ट्रिंग

[467:01]

को इनपुट ले लेंगे लिखेंगे नेम 100 एंड

[467:05]

उसके बाद एसटीडी इन या सिंपलीसिटी के लिए

[467:08]

इसमें ना हम सिर्फ फर्स्ट नेम डालेंगे

[467:10]

लास्ट नेम नहीं डालेंगे क्योंकि फिर बीच

[467:13]

में एक स्पेस भी आ जाता है तो स्पेस वाला

[467:15]

झंझट नहीं रखेंगे सिर्फ फर्स्ट नेम

[467:16]

डालेंगे अब हमें इसकी लेंथ प्रिंट करवानी

[467:18]

है तो मान लीजिए यूजर ने इनपुट किया हमारे

[467:20]

पास एस एच आर एडी ए और कंपाइलर ने

[467:25]

ऑटोमेटिक इसके पीछे बैक स्लैश 0 लगा दिया

[467:27]

तो हमें प्रिंट क्या करवाना है प्रिंट

[467:29]

करवाना है हमें 1 2 3 4 5 6 7 इस बैक्स

[467:33]

लास्ट जीरो को काउंट नहीं करेंगे तो लेंथ

[467:35]

जो आनी चाहिए प्रिंट होके वो आनी चाहिए

[467:37]

हमारे पास सेन अगर यूजर ने एंटर किया अमन

[467:41]

इसमें भी बैक स्लश जीरो आएगा लेंथ हमारे

[467:44]

पास क्या आनी चाहिए लेंथ आनी चाहिए हमारे

[467:46]

पास फोर तो नल कैरेक्टर को काउंट नहीं

[467:48]

करना है बाकी सारे कैरेक्टर्स को मिला के

[467:50]

कितने लेंथ की हमारे यूजर का नाम है वो

[467:53]

हमें प्रिंट करवाना है तो एक प्रोग्राम

[467:55]

बनाते हैं सबसे पहले तो नेम नाम का एक

[467:59]

स्ट्रिंग बना लेते हैं उसके बाद इसको कर

[468:02]

लेते हैं एफ गेटस नेम 100 एसटीडी इन अब

[468:07]

ऊपर एक फंक्शन बना लेते हैं जो लेंथ को

[468:09]

काउंट करेगा काउंट लेंथ इसमें पास कर रहे

[468:13]

होंगे हम अपना कैरेक्टर नेम या कैरेक्टर

[468:16]

एरे कह देते हैं जरूरी नहीं है कल को हो

[468:18]

सकता है कि हमें अगर कोई सेंटेंस है उसकी

[468:20]

लेंथ निकालनी हो तो उसके लिए भी इस फंक्शन

[468:22]

को यूज कर सकते हैं तो जरूरी नहीं है ये

[468:24]

सिर्फ नेम की लेंथ कैलकुलेट करें या किसी

[468:26]

भी स्ट्रिंग की लेंथ या किसी भी कैरेक्टर

[468:28]

की लेंथ को कैलकुलेट कर सकता है तो इस

[468:30]

फंक्शन को कर लेते हैं डिफाइन वॉइड

[468:33]

इनफैक्ट यहां से हमारी जो लेंथ है वो

[468:34]

रिटर्न हो जाएगी तो इंट लिख देते हैं इंट

[468:39]

काउंट लेंथ कैरेक्टर

[468:42]

एरे अब हमें तब तक कैरेक्टर्स को काउंट

[468:46]

करते रहना है लेंथ के लिए जब तक हमारा नल

[468:48]

कैरेक्टर नहीं आ जाता तो इस तरीके का लूप

[468:50]

तो हमने ऑलरेडी बनाया हुआ है जब स्ट्रिंग

[468:52]

को प्रिंट करवाया था कैरेक्टर बाय

[468:53]

कैरेक्टर तो क्या किया था एक तरीके से हर

[468:55]

कैरेक्टर पे गए थे जब तक नल नहीं आ जाता

[468:58]

तो यहां भी हर कैरेक्टर प जाएंगे जब तक नल

[469:00]

नहीं आ जाता तो एक वेरिएबल बना लेते हैं

[469:03]

काउंट जो जीरो से शुरू होगा और फिर एक लूप

[469:06]

लिखते हैं फॉर इंट आ = 0 जब तक हमारे एरे

[469:10]

ऑफ आ इज नॉट इक्वल टू हमारा नल कैरेक्टर

[469:15]

तब तक हम आई को करते रहेंगे प्लस प्लस तो

[469:18]

आई होप ये अंडरस्टूड होगा कि आई की शुरुआत

[469:21]

हम करेंगे जीरो के साथ तब तक बढ़ते जाएंगे

[469:24]

जब तक नल कैरेक्टर नहीं आता आ को करते

[469:26]

रहेंगे प्लस प्लस अब हर बार हम क्या

[469:28]

करेंगे काउंट को भी प्लस प्लस कर देंगे तो

[469:31]

काउंट को भी हमने हर बार प्लस प्लस किया

[469:33]

क्यों क्योंकि जब तक नल कैरेक्टर आएगा तब

[469:35]

तक काउंट भी तो प्लस प्लस होते रहेगा

[469:37]

क्योंकि हम सारे कैरेक्टर्स को काउंट कर

[469:38]

रहे हैं और एंड में अपने काउंट को कर

[469:41]

देंगे रिटर्न अपने मेन फंक्शन से इसको कॉल

[469:44]

लगाते हैं प्रिंट एफ के साथ परसेंटेज डी

[469:48]

लेंथ

[469:49]

इज काउंट लेंथ जिसमें पास कर देंगे अपना

[469:54]

नेम इसको कर लेते हैं सेव एंड रन सबसे

[469:58]

पहले तो हमें अपनी स्ट्रिंग एंटर करनी है

[470:00]

स्ट्रिंग एंटर की तो लेंथ हमारे पास आ गई

[470:02]

एक इसने क्या किया लेंथ में अभी नल

[470:04]

कैरेक्टर को भी काउंट कर लिया है कैसे

[470:06]

काउंट किया नल कैरेक्टर को क्योंकि काउंट

[470:08]

जो है पहले ही प्लस प्लस हो रहा है मतलब

[470:11]

जब भी इस फंक्शन के अंदर हम काउंट को भेज

[470:13]

रहे हैं ना तो काउंट की वैल्यू वैसे ही

[470:15]

बढ़ रही है जैसे i की वैल्यू बढ़ रही है

[470:17]

अब i एंड में जो है प्लस प्लस होके नल

[470:19]

कैरेक्टर को तो काउंट कर ही लेता है

[470:21]

इसीलिए लास्ट में हमें काउंट - 1 रिटर्न

[470:23]

करने की जरूरत है तो काउंट -1 हम रिटर्न

[470:26]

करेंगे तभी सही काउंट हमारे पास आएगा अब

[470:29]

नाम भेजते हैं तो अब प्रिंट हुई लेंथ सेवन

[470:31]

दोबारा से इसको रन करें अब अलग नाम

[470:33]

भेजेंगे तो लेंथ फोर प्रिंट हुई है तो इस

[470:35]

तरीके से हमारे पास कोई भी स्ट्रिंग हो

[470:38]

उसकी हम लेंथ कैलकुलेट कर सकते हैं खुद से

[470:40]

अपना एक फंक्शन बना सकते हैं कैरेक्टर बाय

[470:42]

कैरेक्टर जाना है और चीजें चेक कर लेनी है

[470:44]

अगर मान लीजिए इस स्ट्रिंग के अंदर हमें

[470:46]

चेक करना होता कि जो भी नाम एंटर कर रहा

[470:49]

है यूजर उसके अंदर आई कितनी बार आता है या

[470:52]

h कितनी बार आता है उसको भी हम कैरेक्टर

[470:54]

बाय कैरेक्टर लूप लगाते हैं और चेक करते

[470:56]

हैं कि कौन सा कैरेक्टर h के बराबर है और

[470:58]

उस काउंट को फिर प्लस कर लेते हैं तो इस

[471:00]

तरीके से काफी सारे केसेस बन सकते हैं

[471:02]

काफी सारे सवाल बन सकते हैं जो आपके

[471:04]

इंटरव्यूअर आपको अलग तरीके से दे सकते हैं

[471:06]

या फिर कॉलेज वाले अलग तरीके से दे सकते

[471:08]

हैं पर तरीका क्या है कैरेक्टर बाय

[471:10]

कैरेक्टर जाओ लूप में एंड में क्या कंडीशन

[471:13]

लगानी है जब तक नल कैरेक्टर के इक्वल नहीं

[471:15]

होता सारे के सारे ऑलमोस्ट 80 पर सवाल

[471:18]

स्ट्रिंग में ऐसे ही सॉल्व होते हैं

[471:19]

जिसमें हमें स्ट्रिंग के अंदर कोई

[471:20]

पर्टिकुलर चीज चेक करनी होती है नेक्स्ट

[471:23]

बात करते हैं स्टैंडर्ड लाइब्रेरी फंक्शंस

[471:25]

के बारे में अब ऑलरेडी हमने मैथड ए नाम की

[471:28]

एक क्लास के बारे में पढ़ा था जिसमें हमने

[471:30]

पाव नाम का एक फंक्शन पढ़ा था पावर जो

[471:32]

क्या करता था n की पावर m हमें रिटर्न

[471:35]

करके देता था तो उसमें ये मैथड ए हमारी एक

[471:38]

स्टैंडर्ड लाइब्रेरी थी जिसके अंदर मैथ के

[471:40]

फंक्शन थे वैसे ही सी के अंदर एक

[471:42]

स्टैंडर्ड लाइब्रेरी होती है जिसमें

[471:44]

स्ट्रिंग के फंक्शन होते हैं इसको हम नाम

[471:46]

देते हैं स्ट्रिड ए और इसके फंक्शन यूज़

[471:48]

करने हैं तो इसको ऊपर इंक्लूड करना पड़ता

[471:50]

है सबसे पहला फंक्शन जिसकी हम बात करेंगे

[471:52]

वह है स्ट्रिंग लेंथ अभी जो हमने बड़ा सा

[471:55]

फंक्शन लिखा ना जिसमें हम एक-एक एक-एक

[471:57]

करके कैक्ट पे गए और लेंथ कैलकुलेट करी यह

[472:00]

ऑलरेडी बना हुआ फंक्शन है इसको हमें

[472:02]

दोबारा बनाने की जरूरत नहीं है तो

[472:04]

स्ट्रिंग डॉट लेंथ एक फंक्शन है जिसमें हम

[472:06]

अपनी स्ट्रिंग को लिख देते हैं और ये हमें

[472:08]

काउंट करके दे देता है टोटल नंबर ऑफ

[472:10]

कैरेक्टर्स अब ये काउंट नंबर ऑफ

[472:12]

कैरेक्टर्स करता है पर एक्सक्लूड कर देता

[472:14]

है नल कैरेक्टर को तो जैसे हमने अभी नल

[472:16]

कैरेक्टर को नहीं गिना वैसे ही ये भी नल

[472:19]

कैरेक्टर को नहीं गिनता तो ये इंपॉर्टेंट

[472:22]

चीज है जो हमें याद रखनी है कि हमारा

[472:24]

स्ट्रिंग लेंथ नल कैरेक्टर को नहीं गिनता

[472:26]

हमें टोटल नंबर ऑफ कैरेक्टर रिटर्न करके

[472:29]

देता है एक बार देख लेते हैं अपनी लेंथ को

[472:32]

काउंट करके इस बार नेम को यहीं पे ही

[472:34]

डिफाइन कर लेते हैं नेम में हमने डाला

[472:37]

श्रद्धा और इस बार हम काउंट लेंथ की जगह

[472:40]

कॉल लगाएंगे एटीआर ए स्ट्रिंग लेंथ को ऊपर

[472:44]

इंक्लूड कर लेते हैं अपनी हेडर फाइल

[472:47]

इंक्लूड स्ट्रिंग ड

[472:50]

ए कर लेते हैं सेव यहां पे हमने स्ट्रिंग

[472:54]

लेंथ को कॉल लगाई है जिसमें अपना नेम हमने

[472:56]

पास किया है अब रन कर लेते हैं कोड को अब

[472:58]

एक्चुअली ये जो एसटीआरएल है ना स्ट्रिंग

[473:01]

लेंथ ये हमें रिटर्न करता है अनसाइंड

[473:03]

लॉन्ग मतलब ये इंटी जर वैल्यू रिटर्न नहीं

[473:06]

करता है लेंथ की अनसाइंड लॉन्ग रिटर्न

[473:08]

करता है पर इसको हम टाइप कास्ट भी कर सकते

[473:10]

हैं यानी एक वेरिएबल बना लेंगे लेंथ और इस

[473:12]

लेंथ में स्टोर करा लेंगे स्ट्रिंग लेंथ

[473:14]

का आउटपुट तो वो इंटी जर टाइप का बन जाएगा

[473:16]

और फिर इस लेंथ नाम के वेरिएबल को करा

[473:18]

लेते हैं प्रिंट दोबारा से कंपाइल एंड रन

[473:22]

तो लेंथ इ सेवन हमारे पास आउटपुट होकर आ

[473:24]

गया है अब अगर हम अपनी स्ट्रिंग चेंज कर

[473:26]

दें मान लीजिए दूसरा नाम हम यहां पे लिख

[473:28]

देते हैं तो दोबारा से क्या होगा हमारी

[473:30]

लेंथ जो है वो कैरेक्टर्स का जो नंबर है

[473:33]

वो सारा का सारा ऐड हो ग आ जाएगा यानी

[473:35]

लेंथ अब फोर हो जाएगी अब नेक्स्ट

[473:36]

लाइब्रेरी फंक्शन जिसकी बात करेंगे वो है

[473:38]

हमारा स्ट्रिंग कॉपी स्ट्रिंग कॉपी क्या

[473:40]

करता है इसको एटीआर सीपीवाई लिखते हैं

[473:43]

इसमें दो आर्गुमेंट पास होते हैं पहला

[473:45]

आर्गुमेंट है हमारी नई स्ट्रिंग दूसरा

[473:47]

आर्गुमेंट है हमारी ओल्ड स्ट्रिंग तो इट

[473:49]

कॉपीज द वैल्यू ऑफ ओल्ड स्ट्रिंग टू द

[473:52]

न्यू स्ट्रिंग मान लीजिए हमने दो स्ट्रिंग

[473:53]

बनाई है पहली है हमारी कैरेक्टर एसआर 1

[473:57]

इसके अंदर हमने लिखा हु है हेलो और दूसरी

[473:59]

है हमारी कैरेक्टर एसआर 2 इसके अंदर हमने

[474:02]

लिखा है वर्ल्ड अब यह हमारी नई स्ट्रिंग

[474:06]

यह है हमारी ओल्ड स्ट्रिंग अगर हम एसआर

[474:10]

सीपीवाई कॉल करें जिसमें सबसे पहले पास

[474:12]

करें अपना एटीआर वन और फिर पास करें अपना

[474:15]

एटीआर 2 तो हमारे एसआर व की वैल्यू चेंज

[474:19]

होकर हेलो से बन जाएगी वर्ल्ड यानी पुराने

[474:23]

वाली वैल्यू इसके अंदर कॉपी हो जाएगी

[474:26]

सेकंड वाली जो स्ट्रिंग है उसकी वैल्यू

[474:27]

फर्स्ट के अंदर कॉपी हो जाएगी देखते हैं

[474:29]

किस तरीके से रन करता है कोड के अंदर दो

[474:32]

स्ट्रिंग्स हम बनाएंगे सबसे पहली होगी

[474:34]

हमारी ओल्ड

[474:36]

स्ट्रिंग उसमें स्टोर करा देंगे ओल्ड

[474:39]

स्ट्रिंग फिर बनाते हैं अपना नई स्ट्रिंग

[474:42]

इसमें स्टोर करा देते हैं न्यू स्ट्रिंग

[474:45]

अब कॉल करते हैं एसटीटीआर सीपीवाई जिसमें

[474:47]

सबसे पहले पास करेंगे हमारी नई स्ट्रिंग

[474:50]

एंड देन ओल्ड स्ट्रिंग और अब प्रिंट

[474:54]

कराएंगे वैल्यू ऑफ न्यू स्ट्रिंग इसको कर

[474:57]

लेते हैं सेव एंड रन तो जैसे ही हमने न्यू

[475:00]

स्ट्रिंग को प्रिंट करवाया हमारे पास ओल्ड

[475:02]

स्ट्रिंग प्रिंट हुआ न्यू स्ट्रिंग प्रिंट

[475:04]

नहीं हुआ क्योंकि स्ट्रिंग कॉपी ने क्या

[475:06]

किया ओल्ड स्ट्रिंग की वैल्यू ली और नई

[475:08]

स्ट्रिंग में कॉपी कर दी तो नई स्ट्रिंग

[475:10]

की वैल्यू अल्टीमेटली चेंज हो गई और अब

[475:12]

हमारे पास वो चेंज्ड वैल्यू प्रिंट होकर आ

[475:14]

गई है तो इस तरीके से हमारा स्ट्रिंग कॉपी

[475:17]

काम करता है नेक्स्ट लाइब्रेरी फंक्शन

[475:19]

जिसकी बात करेंगे वो है स्ट्रिंग

[475:20]

कॉन्कैटिनेट यहां पे वैसे हम सारे

[475:22]

इंपॉर्टेंट लाइब्रेरी फंक्शंस की बात कर

[475:24]

रहे हैं तो सिर्फ चार ही डिस्कस करेंगे

[475:26]

वैसे स्ट्रिंग ड ए के अंदर बहुत सारे

[475:28]

लाइब्रेरी फंक्शंस होते हैं तो आपके लिए

[475:30]

होमवर्क ये रहेगा कि जाकर खुद से बाकी के

[475:33]

सारे लाइब्रेरी फंक्शंस को एक्सप्लोर करना

[475:35]

है google-translate

[475:58]

नो स्पेस हां अगर हेलो के बाद आपने स्पेस

[476:00]

छोड़ा हुआ है तो फिर बीच में स्पेस आएगा

[476:02]

पर खुद से कोई स्पेस ऐड नहीं होता दोनों

[476:05]

वर्ड बिल्कुल चिपक जाते हैं आके और एक नई

[476:07]

स्ट्रिंग बना लेते हैं इसको हम कहते हैं

[476:10]

कॉन कैटिनेशन ये शब्द आपको बार-बार

[476:13]

बार-बार सुनने को मिलेगा अगर आप

[476:14]

प्रोग्रामर हैं कोडर हैं नई लैंग्वेजेस आप

[476:17]

सीखने जाएंगे सी के बाद तो तो शब्द को

[476:19]

भूलना नहीं है तो स्ट्रिंग कॉन्कैटिनेट एक

[476:21]

फंक्शन है जिसके अंदर हम पहली स्ट्रिंग

[476:23]

पास करेंगे और सेकंड स्ट्रिंग पास करेंगे

[476:26]

और ये कंकट कर देता है फर्स्ट स्ट्रिंग

[476:28]

विद सेकंड स्ट्रिंग जैसे अगर हमने फर्स्ट

[476:31]

स्ट्रिंग मान लीजिए बनाई है हेलो और सेकंड

[476:36]

स्ट्रिंग हमने बनाई है वर्ल्ड तो अगर हम

[476:39]

यह फंक्शन कॉल करेंगे तो उसके बाद फर्स्ट

[476:42]

स्ट्रिंग की वैल्यू चेंज होकर हो जाएगी

[476:45]

हेलो वर्ल्ड के इक्वल तो एक तरीके से क्या

[476:47]

हुआ स्ट्रिंग कॉन्कैटिनेट ने सेकंड

[476:50]

स्ट्रिंग को लिया और उसको फर्स्ट स्ट्रिंग

[476:51]

के बाद जोड़ दिया तो फर्स्ट ट्रिंग की

[476:53]

वैल्यू इसके बराबर होगी अब एक स्पेशल चीज़

[476:56]

हमें यहां पे ध्यान रखने की जरूरत है कि

[476:57]

फर्स्ट स्ट्रिंग की कैपेसिटी होनी चाहिए

[476:59]

दोनों स्ट्रिंग को स्टोर कराने की यानी

[477:02]

फर्स्ट स्ट्रिंग का अगर साइज फर्स्ट

[477:04]

स्ट्रिंग की लेंथ लेंथ वन प्लस लेंथ टू के

[477:07]

बराबर है या इससे बड़ा है तभी हम वो

[477:10]

वैल्यू जो है उसके अंदर स्टोर करा पाएंगे

[477:12]

नहीं तो एरर आ जाएगा तो इस स्ट्रिंग को

[477:14]

फर्स्ट स्ट्रिंग को जब भी डिक्लेयर करेंगे

[477:16]

इसका साइज कुछ हमें बड़ा देना पड़ेगा एक

[477:18]

बार इसको एक्चुअली कोड में लिखकर देखते

[477:20]

हैं इसको कर लेते हैं कॉमेंट आउट सबसे

[477:23]

पहले बनाते हैं एक कैरेक्टर स्ट्रिंग

[477:25]

फर्स्ट स्ट्रिंग जिसका साइज हम 100 दे

[477:27]

देते हैं इसके अंदर स्टोर करा रहे हैं

[477:29]

हेलो विद अ स्पेस फिर बनाते हैं एक और

[477:31]

स्ट्रिंग सेकंड स्ट्रिंग इसमें हमें साइज

[477:34]

देने की जरूरत नहीं है इसमें हम स्टोर

[477:36]

कराते हैं वर्ल्ड और अब क्या करेंगे एटीआर

[477:39]

सीपीवाई जिसमें पास करेंगे पहले फर्स्ट

[477:41]

स्ट्रिंग फिर पास करेंगे सेकंड स्ट्रिंग

[477:44]

और फिर प्रिंट कर देंगे अपनी फर्स्ट

[477:46]

स्ट्रिंग को यूजर के पास इसको कर लेते हैं

[477:49]

सेव एंड

[477:50]

रन तो रन करके आउटपुट में हमारे पास अभी

[477:53]

सिर्फ वर्ल्ड आया क्योंकि हमने एसटीटीआर

[477:55]

सीपीवाई कॉल किया है जबकि हमें कंकट नेट

[477:58]

करना था तो एटीआर सीटी कंकट के लिए कॉल

[478:01]

लगाते हैं अब हमारे पास पूरा का पूरा हेलो

[478:05]

वर्ल्ड प्रिंट होके आया है हेलो वर्ल्ड

[478:06]

कैसे आया ये वाला हेलो तो फर्स्ट स्ट्रिंग

[478:08]

में था ही अब हमने वर्ल्ड को फर्स्ट

[478:10]

स्ट्रिंग के बाद कॉन्कैटिनेट कर दिया

[478:12]

अपेंड कर दिया पर अगर मान लीजिए यहां पे

[478:14]

हम ये 100 नहीं लिखते सिर्फ इतना लिखते तो

[478:17]

क्या होता तो एक बार प्रोग्राम को रन करके

[478:18]

देखते हैं तो हमारे पास एरर आ जाता और

[478:20]

प्रोग्राम कभी एग्जीक्यूट ही नहीं करता

[478:22]

क्यों क्योंकि जब हमने फर्स्ट स्ट्रिंग को

[478:24]

बिना साइज के डिक्लेयर किया तो उसने साइज

[478:27]

इसके बराबर लिया जिसमें 1 2 3 4 5 6 तो

[478:31]

फर्स्ट ट्रिंग का साइज अभी सिक्स है सिक्स

[478:33]

के अंदर हम वर्ल्ड को फिट इन ही नहीं कर

[478:35]

सकते पर जब हमने फर्स्ट स्ट्रिंग का साइज

[478:37]

100 दे दिया तो अब मतलब हेलो तो उसके अंदर

[478:40]

है ही उसके बाद और खाली जगह भी पड़ी हुई

[478:42]

है तो उसके अंदर हम वर्ल्ड को लाके जोड़

[478:45]

सकते हैं तो जब भी कंकट ट करना है ये

[478:47]

इंश्योर करना है कि पहली स्ट्रिंग के अंदर

[478:49]

हमारे पास कुछ स्पेस खाली हो जिसके अंदर

[478:51]

दूसरी स्ट्रिंग आकर जुड़ सके नेक्स्ट

[478:53]

लाइब्रेरी फंक्शन जिसकी बात करेंगे वो है

[478:55]

एटीआर सीएमपी यहां पे गलती से जो है है

[478:58]

सीपीएम लिख गया है दिस इज सीएम ये होता है

[479:01]

फॉर स्ट्रिंग कंपैरिजन तो स्ट्रिंग को हम

[479:04]

कंपेयर भी कर सकते हैं कि एक स्ट्रिंग

[479:05]

क्या दूसरी स्ट्रिंग के बराबर है या बराबर

[479:08]

नहीं है इनफैक्ट एक स्ट्रिंग दूसरी

[479:10]

स्ट्रिंग से छोटी है या बड़ी है ये भी

[479:11]

कंपेयर कर सकते हैं कैसे कंपेयर करेंगे हम

[479:14]

एटीआर सीएमपी के अंदर दो स्ट्रिंग्स पास

[479:16]

करते हैं एक फर्स्ट स्ट्रिंग और एक सेकंड

[479:17]

स्ट्रिंग अब ये जो फंक्शन है ये एक इंटी

[479:19]

जर रिटर्न करता है अगर इसने रिटर्न किया

[479:21]

जीरो मतलब दोनों स्ट्रिंग्स हमारी इक्वल

[479:23]

है तो जैसे अगर हमने हेलो पास किया और

[479:26]

दूसरे में भी हेलो पास किया तो मतलब मब ये

[479:28]

हमारा फंक्शन रिटर्न करेगा हमारे पास जीरो

[479:30]

अब अगर इसने कोई पॉजिटिव वैल्यू रिटर्न

[479:32]

करी इसका मतलब है फर्स्ट स्ट्रिंग इज

[479:34]

ग्रेटर दन सेकंड स्ट्रिंग और ये एका

[479:36]

वैल्यूज पे डिपेंड करेगा इसका एग्जांपल है

[479:38]

फर्स्ट स्ट्रिंग के अंदर हमने पास किया

[479:40]

बनाना दूसरी स्ट्रिंग में हमने पास किया

[479:42]

एपल तो ये एक पॉजिटिव वैल्यू रिटर्न करेगा

[479:46]

अब बनाना और एपल जब भी हम एस्का वैल्यूज

[479:50]

देखते हैं तो a सबसे पहले आता है फिर बी

[479:52]

आता है फिर सीडी इस तरीके से एस काई

[479:54]

वैल्यूज बढ़ती रहती है तो बनाना की जो एस

[479:57]

काई वैल्यू है ना इसमें सबसे पहले b की

[479:58]

वैल्यू a के साथ कंपेयर होगी अगर ये दोनों

[480:01]

एच एच होते तो दोनों की वैल्यू सेम होती

[480:03]

तो फिर अगले वाला कैरेक्टर हमारे कंपेयर

[480:05]

हो रहे होते पर वैसा केस नहीं है यहां पे

[480:07]

पहला ही कैरेक्टर अलग है तो b की वैल्यू

[480:10]

कुछ होगी नंबर्स में a की वैल्यू कुछ होगी

[480:12]

नंबर्स में इन दोनों का हम डिफरेंस

[480:14]

निकालेंगे तो b का जो एस्का कैरेक्टर होता

[480:17]

है वो बड़ा होता है ए का हमारा छोटा होता

[480:19]

है तो एस्का कैरेक्टर्स माइनस हो जाएंगे

[480:21]

जैसे अगर हम b का एका कैरेक्टर देखें

[480:24]

कैरेक्टर b = b तो b का एस का कैरेक्टर

[480:29]

होता है 66 तो यहां पे 66 आएगा तो a का

[480:32]

होना चाहिए 65 तो इंटरनली क्या हो रहा है

[480:34]

66 - 65 होगा जिसका डिफरेंस आएगा + 1 तो

[480:39]

इसीलिए एक पॉजिटिव वैल्यू प्रिंट होगी

[480:41]

मतलब फर्स्ट जो स्ट्रिंग है उसके एस्का

[480:44]

में से सेकंड स्ट्रिंग के एस्का को माइनस

[480:46]

कर देंगे जब भी डिफरेंट हमारे लेटर्स आ

[480:49]

जाते हैं तो इसीलिए जब भी फर्स्ट स्ट्रिंग

[480:51]

बड़ी होगी सेकंड स्ट्रिंग छोटी होगी तो

[480:53]

पॉजिटिव वैल्यू प्रिंट होगी एंड वाइस

[480:55]

वर्सा होगा यानी फर्स्ट स्ट्रिंग अगर छोटी

[480:57]

है सेकंड स्ट्रिंग अगर अगर बड़ी है तो

[480:58]

हमारे पास एक नेगेटिव वैल्यू प्रिंट होके

[481:00]

आ जाएगी इसका भी एक एग्जांपल देख लेते हैं

[481:02]

जैसे पहली स्ट्रिंग है हमारे पास एल और

[481:05]

दूसरी स्ट्रिंग है हमारे पास बनाना तो

[481:08]

फर्स्ट में a का एस्काय हो जाएगा हमारे

[481:10]

पास 65 b का एस्काय हो जाएगा 66 तो 65 -

[481:14]

66 हमें नेगेटिव 1 दे देगा तो सिंस ये एक

[481:18]

नेगेटिव वैल्यू है तो हमें पता चल जाएगा

[481:20]

स्ट्रिंग कंपैरिजन से कि हमारी फर्स्ट

[481:22]

स्ट्रिंग जो है छोटी है हमारी सेकंड

[481:24]

स्ट्रिंग से इन सब को एक बार कोड केल से

[481:26]

वेरीफाई जरूर करके देख लेना तो कोई भी

[481:28]

कांसेप्ट हम सीखते हैं ना प्रोग्रामिंग

[481:30]

में उसको हमेशा वेरीफाई करना ऐसा नहीं हो

[481:32]

कि हमने सिर्फ थ्योरी थ्योरी पढ़ ली और

[481:33]

उसका कोड हमने करके नहीं देखा तो सबसे

[481:35]

पहले कैरेक्टर स्ट्रिंग बनाते हैं फर्स्ट

[481:37]

स्ट्रिंग जिसके अंदर स्टोर कराते हैं

[481:40]

एल फिर सेकंड

[481:43]

स्ट्रिंग जिसके अंदर स्टोर कराएंगे बनाना

[481:46]

और अब प्रिंट कर लेते हैं परसेंटेज डी

[481:49]

क्योंकि इंटी जर प्रिंट होगा कंपैरिजन के

[481:52]

लिए हम प्रिंट करेंगे एसटी आर सी एम प

[481:55]

जिसमें पास करेंगे पहले फर्स्ट स्ट्रिंग

[481:58]

फिर पास करेंगे सेकंड स्ट्रिंग कर लेते

[482:01]

हैं सेव एंड रन तो प्रिंट होकर आया है -1

[482:04]

जो कि एक्सपेक्टेड था क्योंकि a का जो एका

[482:07]

65 है बी का एकाय 66 है तो 65 - 66 एक

[482:12]

नेगेटिव वैल्यू आएगी जो दिखाएगी कि फर्स्ट

[482:14]

वाली स्ट्रिंग हमारी सेकंड वाली स्ट्रिंग

[482:15]

से छोटी है अब अगर हम इन्हीं वैल्यूज को

[482:18]

चेंज कर द यानी पहले पास कर दें अपनी

[482:19]

सेकंड स्ट्रिंग फिर पास कर दें अपनी

[482:22]

फर्स्ट स्ट्रिंग तो उस केस में आउटपुट

[482:24]

क्या आएगा उस केस में आउटपुट एक पॉजिटिव

[482:26]

वैल्यू आएगा यानी + 1 + 1 इसलिए आया

[482:29]

क्योंकि b - a अब यहां पे हुआ है और एक और

[482:32]

छोटी सी चीज करके देखते हैं इस बार ना

[482:34]

स्ट्रिंग को कर देते हैं h ए ए ए और यहां

[482:38]

पे स्ट्रिंग को कर देते हैं h एच ए बी

[482:42]

यहां पे दोबारा से हम फर्स्ट स्ट्रिंग पास

[482:44]

करते हैं और यहां पे पास करते हैं अपनी

[482:47]

सेकंड स्ट्रिंग सेव एंड रन अब रन करने से

[482:50]

पहले खुद से अगर डिस्कस करना हो क्या

[482:52]

आउटपुट आएगा तो फर्स्ट स्ट्रिंग के अंदर

[482:54]

है एच एच एच ए सेकंड स्ट्रिंग में है एच

[482:57]

एचएच b दोनों के अंदर डिफरेंट कैरेक्टर

[483:00]

सबसे पहला कौन सा है वो है a और b तो

[483:03]

दोबारा से a का एस्का b के एस्का से माइनस

[483:06]

होगा तो a का एस्का है 65 - b का एस्काय

[483:09]

66 तो ये भी एक नेगेटिव वैल्यू हमें

[483:11]

रिटर्न करके देगा उसको वेरीफाई कर लेते

[483:13]

हैं प्रिंट होके आएगा -1 और यहां पर अगर

[483:17]

हम इसको हटा दें a और b को और अब दोनों को

[483:20]

कंपेयर करें तो अब हमारे पास आने वाला है

[483:23]

जीरो क्योंकि दोनों स्ट्रिंग्स हैं सेम तो

[483:25]

स्ट्रिंग्स को अगर कंपेयर करना हो तो उसको

[483:28]

हम कर सकते हैं ऐसा जो स्ट्रिंग कंपैरिजन

[483:30]

वाला फंक्शन है रियल लाइफ के केसेस देखें

[483:32]

तो कहां यूज़ हो सकता है ये यूज़ हो सकता

[483:34]

है अगर हम एक ऐसा फंक्शन बनाए जो हमारी

[483:36]

डिक्शनरी फॉर्म कर रहा है डिक्शनरी के

[483:38]

अंदर क्या होता है जो लेटर्स पहले आते हैं

[483:40]

ना अल्फाबेट में तो मतलब उनकी एका वैल्यूज

[483:43]

भी कम होगी तो वो हमारे डिक्शनरी के अंदर

[483:45]

पहले आ जाते हैं और बाकी सारे हमारे बाद

[483:47]

में आ जाते हैं तो नेगेटिव वैल्यू के

[483:49]

हिसाब से हम सॉर्ट कर सकते हैं जिनकी सबसे

[483:51]

कम नेगेटिव वैल्यू है मतलब जितना ज्यादा

[483:53]

नेगेटिव है उतना जल्दी डिक्शनरी के अंदर

[483:55]

आएगा जितना ज्यादा पॉजिटिव है उतना

[483:56]

डिक्शनरी के अंदर बाद में आएगा तो इस

[483:58]

तरीके से जब भी कैरेक्टर्स को कंपेयर करना

[484:00]

हो कौन सा कैरेक्टर छोटा है उसको डिक्शनरी

[484:03]

के शुरुआत में जो बड़ा है उसको डिक्शनरी

[484:05]

के एंड में नेक्स्ट बात करेंगे सवाल की

[484:07]

सवाल हमारा ये है कि टेक अ स्ट्रिंग इनपुट

[484:10]

फ्रॉम द यूजर यूजिंग कैरेक्टर्स मतलब अभी

[484:13]

तक स्ट्रिंग को कैसे इनपुट ले रहे थे या

[484:15]

तो परसेंटेज s की फॉर्म में इनपुट ले रहे

[484:17]

थे या फिर एफ गेट एस कर रहे थे या गेट एस

[484:21]

कर रहे थे अब हमें क्या करना है परसेंटेज

[484:24]

सी यानी कैरेक्टर बाय कैरेक्टर उसको इनपुट

[484:26]

लेना है इसके लिए एक फंक्शन बनाते हैं

[484:28]

फंक्शन को नाम दे देते हैं इनपुट स्ट्रिंग

[484:30]

या इन फैक्ट फंक्शन बनाने की जगह ना पूरा

[484:32]

प्रोग्राम ही बना लेते हैं अपने मेन

[484:34]

फंक्शन के अंदर सबसे पहले एक स्ट्रिंग

[484:36]

डिफाइन करते हैं एटीआर जिसमें 100

[484:37]

कैरेक्टर्स आ सकते हैं फिर डिफाइन करेंगे

[484:39]

कैरेक्टर और यह वो कैरेक्टर है जो बार-बार

[484:42]

हमें यूजर से इनपुट करना है इस कैरेक्टर

[484:45]

सीच को इनपुट करेंगे और स्ट्रिंग के अंदर

[484:47]

ऐड करते रहेंगे एक-एक करके तो एक लूप चला

[484:50]

लेते हैं वाइल जब तक हमारा कैरेक्टर इज

[484:53]

नॉट इक्वल टू बै स् n जब भी हम अपने कंसोल

[484:58]

वाली विंडो से किसी भी स्ट्रिंग को इनपुट

[485:00]

करते हैं तो क्या होता है हम एक कैरेक्टर

[485:02]

डालते हैं दूसरा कैरेक्टर डालते हैं तीसरा

[485:04]

डालते हैं चौथा डालते हैं पांचवा डालते

[485:06]

हैं लास्ट में एंटर मार देते हैं

[485:07]

कैरेक्टर्स को तब तक इनपुट लेते रहना है

[485:09]

अपने कोड के अंदर अपने लूप के अंदर जब तक

[485:12]

हम नेक्स्ट लाइन वाला कैरेक्टर नहीं डाल

[485:14]

देते इसीलिए उसी को कंडीशन बना देते हैं

[485:16]

जब तक हमारा कैरेक्टर इज नॉट इक्वल टू बै

[485:18]

स्ल ए यानी नेक्स्ट लाइन जब तक एंटर हमने

[485:20]

प्रेस नहीं किया तो तब तक क्या करेंगे

[485:22]

स्कैन एफ कर लेंगे स्कैन एफ करेंगे

[485:25]

परसेंटेज सी हमारा सी एक और वेरिएबल ले

[485:28]

लेते हैं i जो ट्रैक करेगा हमारे इंडेक्स

[485:31]

को तो i को इनिश इज कर देंगे रो के साथ

[485:33]

यहां पे हम एक-एक करके कैरेक्टर लेंगे और

[485:36]

उसको एक-एक करके अपनी स्ट्रिंग के अंदर

[485:37]

स्टोर करा देंगे तो एटी ऑफ i = स फिर कर

[485:42]

देंगे i + अब इस लूप को थोड़ा सा और गहराई

[485:45]

से समझते हैं सबसे पहले हमने एक स्ट्रिंग

[485:47]

बना दी उसके बाद हमने कैरेक्टर बना दिया

[485:49]

हमारा गोल है एक-एक करके यूजर से कैरेक्टर

[485:52]

लेना है उसको स्ट्रिंग के अंदर ऐड करना है

[485:54]

और स्ट्रिंग का इंडेक्स कैसे ट्रैक करेंगे

[485:56]

अपने वेरिएबल की हेल्प से अब हम एक लूप

[485:59]

बनाएंगे वाइल लूप बना रहे हैं इसके अंदर

[486:01]

कंडीशन यह है कि जब तक हमारा यूजर एंटर

[486:04]

नहीं दबाता तब तक उसमें जो भी कैरेक्टर्स

[486:07]

हमारे पास दिए हैं वो सारे के सारे

[486:09]

स्ट्रिंग में डाल दो तो एक-एक करके

[486:11]

कैरेक्टर्स को स्कैनर से इनपुट लेते

[486:12]

रहेंगे उसके बाद क्या करेंगे उनको ऐड कर

[486:15]

देंगे स्ट्रिंग के अंदर और स्ट्रिंग के

[486:16]

इंडेक्स को बढ़ा देंगे बाय वन इसको कर

[486:18]

लेते हैं सेव और अब इसको फाइनली क्या

[486:20]

करेंगे एटीआर ऑफ आ के अंदर हमें नल

[486:22]

कैरेक्टर खुद से डालना पड़ेगा क्योंकि नल

[486:25]

कैरेक्टर अब ऑटोमेटिक कंपाइल नहीं डालेगा

[486:28]

क्योंकि परसेंटेज सी में नल कैरेक्टर

[486:30]

ऑटोमेटिक नहीं डालता परसेंटेज s में डालता

[486:33]

है तो नल कैरेक्टर अलग से हमें डालना

[486:35]

पड़ेगा यह दिखाने के लिए कि एक स्ट्रिंग

[486:37]

है उसके बाद अपनी पूरी स्ट्रिंग को प्रिंट

[486:39]

करा देंगे पुट एस से एटीआर इसको कर लेते

[486:42]

हैं सेव एंड नाउ रन ये वार्निंग हमें दे

[486:45]

रहा है क्योंकि यहां पे हमें एड्रेस ऑफ

[486:48]

सीए डालना

[486:49]

था अब हम कोई भी स्ट्रिंग अपनी डाल सकते

[486:52]

हैं मान लीजिए हमने डाला हेलो वर्ल्ड तो

[486:55]

हमारे लिए हेलो वर्ल्ड जो है एकको होके

[486:57]

प्रिंट होके वापस आ गया तो इसमें इसने

[487:00]

स्पेसेस भी काउंट कर ली तो ये जो फंक्शन

[487:02]

है जो हमने खुद से बनाया है ये वाला पार्ट

[487:05]

ये वाला पार्ट हमारे गेटस की तरह एक्ट

[487:07]

करता है या हमारे एफ गेटस की तरह एक्ट

[487:09]

करता है पूरा सेंटेंस ले लेगा जब तक हमारा

[487:11]

साइज 100 से कम हम डाल रहे हैं उसमें चाहे

[487:15]

आप स्पेस डालो स्पेशल कैरेक्टर डालो अपर

[487:17]

केस में लेटर डालो स्मॉलर केस में डालो

[487:19]

नंबर्स डालो सब कुछ इनपुट ले लेगा पर जैसे

[487:22]

ही आप एंटर दबाए वैसे ही इनपुट लेना बंद

[487:24]

कर देगा और हमारी स्ट्रिंग में नल

[487:26]

कैरेक्टर को ये अपेंड कर देगा नेक्स्ट

[487:29]

सवाल जिसकी बात करेंगे वो है एक स्पेशल यह

[487:33]

सवाल है जो मैंने खुद बनाए हैं साल्टिंग

[487:35]

नाम का एक कांसेप्ट होता है जब भी हैकिंग

[487:37]

करते हैं ना तो पासवर्ड हमारे सिक्योर किए

[487:40]

जाते हैं कंपनीज के अंदर तो पासवर्ड किस

[487:42]

तरीके से सिक्योर होते हैं जिस तरीके से

[487:44]

सिक्योर होते हैं उस टेक्निक को सॉल्टिस

[487:47]

पहले सॉल्टिस हैं मान लीजिए आपने एक

[487:50]

पासवर्ड सेट किया पासवर्ड आपका है टेस्ट 1

[487:54]

2 3 ये आपका पासवर्ड है और कंपनी के पास

[487:57]

एक स्ट्रिंग है स्ट्रिंग है कंपनी की ए बी

[487:59]

सी तो सॉल्टिस है कि कंपनी आपका पासवर्ड

[488:03]

लेगी और उसके अंदर अपना सॉल्ट ऐड कर दगी

[488:06]

जैसे सब्जी के अंदर हम नमक छिड़क देते हैं

[488:08]

वैसे ही कंपनी जब भी पासवर्ड को सेव करती

[488:10]

है ना तो उसके अंदर अपना सॉल्ट छिड़क देती

[488:13]

है तो अपना सॉल्ट छिड़क देगी कहीं भी बीच

[488:15]

में रैंडम कहीं भी डाल सकती है और फिर 1 2

[488:18]

3 तो आपका जब पासवर्ड सेव होगा ना इस

[488:20]

फॉर्मेट में वो सेव हो रहा होगा जिसमें

[488:23]

बीच में एक सॉल्ट आ गया है तो अब हैकर हैक

[488:25]

भी कर लेगा तो उसको तो पता नहीं है कि

[488:27]

कंपनी का सॉल्ट क्या था उसको लगेगा यह

[488:29]

पूरा का पूरा पासवर्ड आपका ही है तो वह

[488:31]

आपके अकाउंट के अंदर कभी एंटर नहीं कर

[488:33]

पाएगा अगर कंपनी का सिस्टम हैक भी हो गया

[488:36]

तो सॉल्ट क्या होता है सॉल्ट हमारी एक ऐसी

[488:39]

स्ट्रिंग होती है जिसको हम नॉर्मल पासवर्ड

[488:41]

के अंदर डाल देते हैं और कहीं रैंडम ली

[488:43]

डाल देते हैं वो कंपनी डिसाइड करती है

[488:45]

जैसे

[488:54]

instagram2 पे डालना है कल को

[488:58]

google3 जिसको मुझे पासवर्ड के अंदर अपने

[489:01]

इंडेक्स जीरो और इंडेक्स फाइ दो इंडेक्स

[489:03]

पे डालना है तो कंपनी का सॉल्ट कुछ भी हो

[489:06]

सकता है आपके पासवर्ड के अंदर वो जिस

[489:08]

पोजीशन पे डालेगा वो भी कुछ भी हो सकता है

[489:10]

सॉल्टिस हमारा ये रहता है अब सवाल हमारा

[489:13]

सॉल्टिस है सवाल ये कहता है कि यूजर से एक

[489:17]

पासवर्ड को एंटर करा लो यूजर ने अपना

[489:20]

पासवर्ड एंटर कर दिया और उसके अंदर अपना

[489:23]

सॉल्ट है हमारा 12थ उसको ऐड कर दो एट दी

[489:27]

एंड

[489:27]

यानी यूजर से पासवर्ड एंटर करेंगे और उसके

[489:30]

एंड में हम सॉल्ट टूथ ऐड कर देंगे और उसके

[489:33]

बाद नया पासवर्ड यूजर को वापस प्रिंट करवा

[489:36]

कर देना है तो कैसे करवाएंगे मान लीजिए

[489:38]

यूजर ने पासवर्ड एंटर किया अपना टेस्ट और

[489:41]

सॉल्ट है हमारा ट 3 तो जो अब हमें नया

[489:45]

पासवर्ड देना है ना न्यू

[489:47]

पासवर्ड उसकी वैल्यू होनी चाहिए टेस्ट और

[489:50]

सॉल्ट को हम एंड में ऐड कर देंगे यानी टूथ

[489:55]

तो यह हमारा नया पासवर्ड हो जाएगा जिस

[489:57]

इसको हमें यूजर को वापस देना है तो इसके

[489:59]

लिए प्रोग्राम लिखेंगे हम एक फंक्शन बनाने

[490:02]

वाले हैं यह फंक्शन क्या करेगा हमारी

[490:04]

स्ट्रिंग ले लेगा और फिर एक नई स्ट्रिंग

[490:06]

बनाएगा नया पासवर्ड जिसमें पुरानी

[490:08]

स्ट्रिंग को तो कॉपी कर लेगा प्लस पीछे

[490:10]

हमारा टूथ ऐड कर देगा तो मेन फंक्शन के

[490:13]

अंदर सबसे पहले कैरेक्टर स्ट्रिंग बनाते

[490:15]

हैं पासवर्ड 100 कैरेक्टर्स का य हो सकता

[490:18]

है मैक्सिमम यूजर से इस पासवर्ड को इनपुट

[490:20]

ले लेंगे यानी स्कैन एफ परसेंटेज एस हमारा

[490:25]

पासवर्ड अब इसके अंदर पासवर्ड के अंदर हम

[490:28]

जा रहे हैं कि स्पेसेस ना हो इसलिए

[490:29]

परसेंटेज एस यूज कर सकते हैं और फिर एक

[490:31]

फंक्शन कॉल कर देंगे सॉल्टिस तो फंक्शन को

[490:34]

बना भी लेते हैं ये फंक्शन रिटर्न करेगा

[490:36]

कुछ भी नहीं रिटर्न करेगा बस नया पासवर्ड

[490:38]

आपको प्रिंट करवा के दे देगा तो वॉइड इसका

[490:40]

रिटर्न टाइप है सॉल्ट इसके अंदर हमारे पास

[490:43]

आएगा कैरेक्टर पासवर्ड इस फंक्शन को

[490:46]

क्रिएट करते हैं वॉइड सर्टिंग कैरेक्टर

[490:50]

पासवर्ड सबसे पहले अपनी स्ट्रिंग डिफाइन

[490:53]

कर लेते हैं जो हमें ऐड करनी है तो हमारा

[490:55]

कैरेक्टर सॉल्ट है टू 3 अब एक नया

[490:58]

कैरेक्टर बनाते हैं न्यू पासवर्ड और इसका

[491:01]

साइज दे देते हैं डबल तो हमें नए पासवर्ड

[491:04]

के अंदर अपने सबसे पहले अपने पासवर्ड को

[491:08]

कॉपी करना है फिर अपने सॉल्ट को कॉपी करना

[491:10]

है तो सबसे पहले तो स्ट्रिंग कॉपी फंक्शन

[491:13]

यूज कर लेते हैं एसटीटीआर सीपीवाई

[491:15]

स्ट्रिंग कॉपी में फर्स्ट स्ट्रिंग क्या

[491:17]

पास करेंगे फर्स्ट स्ट्रिंग हम पास करेंगे

[491:19]

अपना नया पासवर्ड और सेकंड स्ट्रिंग अपना

[491:22]

पासवर्ड तो एटीआर सीपीवाई क्या करेगा

[491:25]

हमारे पासवर्ड की वैल्यू को न्यू पासवर्ड

[491:27]

के अंदर डाल के कॉपी कर देगा एंड उसके बाद

[491:30]

कॉल करेंगे एसटीटीआर सीटी अब करेंगे कंकट

[491:34]

यानी न्यू पासवर्ड के अंदर हम अपने सॉल्ट

[491:38]

को कंकट ट करना चाह रहे हैं इसने क्या

[491:40]

किया नए पासवर्ड के अंदर हमने पुराने

[491:43]

पासवर्ड को डाल दिया टेस्ट को और

[491:46]

कॉन्कैटिनेट ने क्या किया नए पासवर्ड की

[491:49]

वैल्यू को बना दिया टेस्ट प्लस 123 तो ये

[491:53]

टेस्ट 123 बन जाएगा हमारा नया पासवर्ड अब

[491:56]

इसी को हम प्रिंट करवा देंगे पटस न्यू

[492:00]

पासवर्ड तो एक छोटा सा फंक्शन सॉल्टिनी के

[492:03]

लिए और ये काफी

[492:04]

कॉम्प्लेक्शन का फंक्शन आप खुद से लिख पा

[492:07]

रहे हैं ना तो मतलब आपको अच्छे खासे लेवल

[492:09]

की लॉजिकल चीजें आ रही है और प्रोग्रामिंग

[492:10]

आ रही है तो इस फंक्शन के अंदर हमने दो

[492:13]

लाइब्रेरी फंक्शंस को यूज़ कर लिया एक

[492:15]

स्ट्रिंग को कॉपी करवाने वाला काम और एक

[492:17]

स्ट्रिंग को कंकट करवाने वाला काम इतना

[492:20]

सारा काम हमारा आसान हो गया और दो लाइंस

[492:22]

के अंदर हमने सिंपली इसको कर लिया तो ये

[492:24]

पावर होती है हमारे लाइब्रेरी फंक्शंस की

[492:27]

तो फाइनली अपने नए पासवर्ड को प्रिंट करवा

[492:29]

देंगे मेन फंक्शन के अंदर क्या करेंगे इस

[492:32]

फंक्शन को कॉल कर लेते हैं सर्टिंग जिसमें

[492:35]

पास कर देंगे अपना पासवर्ड इसको कर लेते

[492:38]

हैं सेव और इसको करते हैं रन अपना पासवर्ड

[492:40]

डालते हैं टेस्ट तो नया पासवर्ड हमारे पास

[492:43]

टेस्ट टूथ प्रिंट हो गया दोबारा एक बार रन

[492:46]

करें तो इस बार मान लीजिए हमने पासवर्ड

[492:48]

डाला है अपना कॉलेज तो इस बार प्रिंट हो

[492:52]

गया अपना कॉलेज टूथ तो इस तरीके से बहुत

[492:56]

सारे लाइब्रेरी फंक्शन को यूज़ करके हम

[492:58]

काफी सारे इंटरेस्टिंग फंक्शंस जो है उनको

[493:00]

बना सकते हैं काफी सारी इंटरेस्टिंग चीजें

[493:02]

कर सकते हैं और बहुत आसान हो जाएगा कोड

[493:04]

क्योंकि सिंगल लाइन में आपको पूरा का पूरा

[493:06]

फंक्शन जो है वो मिल रहा है तो सवाल हमारा

[493:08]

कुछ ऐसा है कि राइट अ फंक्शन नेम स्लाइस

[493:10]

व्हिच टेक्स अ स्ट्रिंग एंड रिटर्न्स अ

[493:13]

स्लाइस स्ट्रिंग फ्रॉम इंडेक्स n टू n

[493:15]

इसको एक एग्जांपल से समझते हैं एक फंक्शन

[493:18]

है स्लाइस इसका काम है कि एक स्ट्रिंग

[493:21]

लेगा मान लीजिए हमने स्ट्रिंग ली हेलो

[493:24]

वर्ल्ड और इसके अंदर हमें दो इंडेक्स दिए

[493:26]

जाएंगे एक एक इंडेक्स होगा n एक होगा m

[493:29]

हमारे जो n की वैल्यू है वह हमें दी हुई

[493:32]

है 3 m की वैल्यू दी हुई है 6 तो हमें एक

[493:36]

स्ट्रिंग वापस रिटर्न करनी होगी जो n = 3

[493:40]

से शुरू होगी m = 6 तक खत्म होगी यानी इस

[493:43]

स्ट्रिंग की बात करें तो इसमें इंडेक्स है

[493:44]

1 2 3 4 5 6 7 8 एंड ना तो हमारा जो

[493:49]

स्लाइस फंक्शन होगा वो स्ट्रिंग को इनपुट

[493:52]

लेगा और आउटपुट में हमें देगा थ्री से

[493:54]

लेकर सिक्स तक यानी ए से लेकर ओ तक एल ओ

[494:00]

डब् ओ तो हेलो वर्ल्ड जो स्ट्रिंग थी एच इ

[494:03]

एल एल आर एल डी इसके अंदर से ये एओड वाला

[494:08]

पार्ट हमें रिटर्न होके आ जाएगा क्योंकि n

[494:11]

= 3 इंडेक्स से शुरू होता है और m = 6

[494:14]

इंडेक्स पर खत्म होता है तो स्लाइस का काम

[494:17]

है यहां पे इस स्ट्रिंग को यहां से स्लाइस

[494:21]

कर देना पहली जो स्लाइस आएगी स्लाइस यानी

[494:24]

काट देना पहला कट लगेगा n = 3 पे दूसरा कट

[494:27]

लगेगा m = 6 पे और बीच वाला जो पार्ट होगा

[494:30]

ये हमें हो जाएगा

[494:32]

रिटर्न तो इसके लिए भी एक फंक्शन बना लेते

[494:34]

हैं फंक्शन का नाम रखते हैं ये फंक्शन

[494:37]

क्या करेगा हमें रिटर्न करेगा अपना स्लाइस

[494:39]

पार्ट तो इसका नाम रखते हैं वॉइड स्लाइस

[494:42]

इसके अंदर हम पास करेंगे अपना कैरेक्टर इस

[494:45]

फंक्शन को भी डिफाइन कर लेते हैं वॉइड

[494:48]

स्लाइस इसमें पास करेंगे कैरेक्टर एसआर

[494:51]

साथ के साथ एक इंडेक्स n भी आएगा और एक

[494:54]

इंडेक्स m भी आएगा तो इनको भी लिख लेते

[494:57]

हैं इंट n इंट m अब स्लाइस फंक्शन के अंदर

[495:01]

एक नई स्ट्रिंग बना लेते हैं कैर न्यू ए

[495:05]

इस स्ट्रिंग का साइज वैसे तो हमें पता ही

[495:07]

है m - n + 1 पर इसका साइज हम बाय डिफॉल्ट

[495:10]

अभी 100 रख लेते हैं अब एक लूप चला लेते

[495:13]

हैं लूप कहां से शुरू होगा लूप शुरू होगा

[495:15]

इं i = n से और लूप हमारा जाएगा जब तक

[495:18]

हमारा i m के इक्वल नहीं हो जाता और यहां

[495:21]

पे अज्यू कर रहे हैं कि कोई बदमाशी नहीं

[495:23]

करेगा स्लाइस को कॉल करते हुए यानी n और m

[495:26]

जो है n एंड m आर वैलिड वैल्यूज ऐसा नहीं

[495:30]

है ए तो जी नल कैरेक्टर के बाद वाली

[495:32]

वैल्यू दे दी n को नेगेटिव फ दे दिया ऐसा

[495:35]

नहीं है सिर्फ वैलिड वैल्यूज देनी है जो

[495:37]

स्ट्रिंग के बीच में कहीं पर लाई करती तो

[495:39]

n से लेके m तक हमारा लूप जाएगा और नई

[495:42]

स्ट्रिंग के अंदर हम क्या करेंगे न्यू

[495:44]

स्ट्रिंग के लिए भी एक अपना बना लेते हैं

[495:48]

j = 0 से शुरू होगा और ज हमारा बार बार

[495:51]

प्लस होगा ये ज जो है हमारे नए स्ट्रिंग

[495:53]

का इंडेक्स है न्यू स्ट्रिंग ऑफ ज इ इक्वल

[495:57]

टू एटी ऑफ आ आई होप ये वाली चीज क्लियर

[496:01]

होगी कि नई स्ट्रिंग के अंदर j इंडेक्स है

[496:03]

और स्ट्रिंग के अंदर i इंडेक्स है इसको

[496:05]

एग्जांपल की फॉर्म में देखते हैं कि हम

[496:07]

करना क्या चाह रहे हैं यहां पे हमने एक

[496:08]

स्ट्रिंग एटीआर पास की है जिसके अंदर मान

[496:12]

लीजिए हमने दिया है हेलो वर्ल्ड और अब

[496:16]

हमने बनाई है एक न्यू एसडीआर न्यू एसडीआर

[496:19]

अभी खाली है मतलब उसमें काफी सारी जगह जो

[496:22]

है वो खाली होंगी यहां पे हम हमने पास

[496:25]

किया n = 3 और m = 6 तो ये जो लूप है 0 1

[496:30]

2 3 इस l से हमारा लूप शुरू हो रहा होगा

[496:33]

और न्यू एस के लिए j = 0 से शुरू हो रहा

[496:37]

होगा यहां पे i = 3 से शुरू हो रहा होगा

[496:40]

तो इस l को सबसे पहले हम यहां पे कॉपी कर

[496:43]

देंगे यानी इसको यहां लाके कॉपी कर देंगे

[496:45]

इसको यहां लाके इसको यहां लाके और इसको

[496:48]

यहां लाके इस तरीके से लूप हमारा चलेगा तो

[496:51]

सबसे पहले i = 3 के लिए कॉपी करके यहां l

[496:53]

ले आएंगे फिर j बन जाएगा व i बन जाएगा 4

[496:57]

तो फिर o को भी कॉपी कर देंगे फिर j बन

[496:59]

जाएगा टू तो w को कॉपी कर देंगे फिर j बन

[497:02]

जाएगा 3 i भी हमारा सिक्स बन चुका होगा तब

[497:05]

तक तो इस o को कॉपी कर देंगे यहां पे तो

[497:08]

जैसे ही i6 हुआ वैसे ही हमारा स्लाइस खत्म

[497:11]

हो गया और फाइनल जो हम स्ट्रिंग रिटर्न

[497:13]

करेंगे उसमें होगा एओड हमारे न्यू

[497:16]

स्ट्रिंग के अंदर तो एक-एक करके j की

[497:18]

वैल्यू तो रो से बढ़ती जा रही है और i की

[497:20]

वैल्यू n से बढ़ती जा रही है और m तक होकर

[497:23]

जाएगी तो ये हम चीज अचीव करने की कोशिश

[497:25]

करें इस लाइन से और और लास्ट में क्या

[497:27]

करेंगे न्यू एटीआर में हम अपेंड करा देंगे

[497:30]

जे लिख लेते हैं यहां पे हम अपेंड करा

[497:32]

देंगे यहां पे बै स् 0 अब ये ज हमें यहां

[497:35]

पे चाहिए तो j को बाहर ही डिक्लेयर कर

[497:37]

लेते हैं इंट ज = 0 तो यहां पे इनिश इज

[497:41]

नहीं करना पड़ेगा इसको कर लेते हैं सेव अब

[497:44]

लास्ट में पुट एस करके अपने न्यू स्ट्रिंग

[497:46]

को प्रिंट भी करवा देंगे मेन फंक्शन के

[497:48]

अंदर अपना कैरेक्टर एसडीआर बनाते हैं

[497:51]

जिसके अंदर लिख देते हैं हेलो वर्ल्ड अब

[497:55]

कॉल लगा लेंगे स्लाइस को स्ला इसमें पास

[497:57]

करेंगे अपनी स्ट्रिंग साथ के साथ n = 3 m

[498:00]

= 6 इसको कर लेते हैं सेव एंड रन तो यहां

[498:04]

पे एक स्पेस आ गया क्योंकि हेलो वर्ल्ड

[498:05]

में हमने स्पेस दे दिया बिना स्पेस का

[498:07]

हेलो वर्ल्ड के साथ दोबारा से ट्राई करते

[498:09]

हैं तो इस बार

[498:11]

एओड तीन से लेकर छह इंडेक्स तक जो हमारी

[498:14]

स्ट्रिंग थी वो कट लग के यानी स्लाइस होके

[498:18]

हमारे पास वापस आ गई उसको हमने प्रिंट

[498:20]

करवा दिया है तो ये हमने स्लाइस फंक्शन

[498:22]

बनाया है और ये जो जितने भी हम क्वेश्चंस

[498:24]

प्रैक्टिस कर रहे हैं ना इनसे बहुत ज्यादा

[498:26]

हमारी लॉजिकल थिंकिंग जो है वो बिल्ड अप

[498:28]

हो रही है मतलब सी प्रोग्रामिंग

[498:30]

प्रोग्रामिंग इज नॉट अबाउट सिंटेक्स कि

[498:33]

हमने सीख लिया जी स्ट्रिंग को ऐसे

[498:34]

डिक्लेयर करते हैं या हमने सीख लिया इंटी

[498:36]

जर को ऐसे डिक्लेयर करते हैं ऐसे इसको

[498:38]

प्रिंट कराते हैं प्रोग्रामिंग इज अबाउट द

[498:40]

लॉजिक आप कोई भी लैंग्वेज यूज़ करें लॉजिक

[498:43]

सेम का सेम रहता है ये स्लाइस फंक्शन अब

[498:45]

आप c+ प के अंदर भी लिख सकते हैं आप जावा

[498:48]

के अंदर भी लिख सकते हैं आप जावास्क्रिप्ट

[498:50]

के अंदर भी लिख सकते हैं आप सी शप के अंदर

[498:52]

गो के अंदर पाइथन के अंदर जिस लैंग्वेज के

[498:55]

अंदर लिख सकते हैं लॉजिक य यही रहेगा आपको

[498:57]

फॉर लूप लगाना पड़ेगा उसके अंदर आपको

[499:00]

चीजें ऐसे कॉपी करनी पड़ेंगी और फिर आप

[499:02]

प्रिंट करवा सकते हैं या रिटर्न करवा सकते

[499:04]

हैं लॉजिक सेम रहेगा प्रोग्रामिंग

[499:07]

लैंग्वेज हमारी चेंज हो सकती है नेक्स्ट

[499:09]

सवाल जिसकी बात करेंगे यह है राइट अ

[499:11]

फंक्शन टू काउंट द अरेंस ऑफ वोवेल्स इन अ

[499:14]

स्ट्रिंग यानी कितनी बार वोवेल्स अकर कर

[499:16]

रहे हैं एक स्ट्रिंग में वो हमें काउंट

[499:18]

करना है जैसे हमें एक स्ट्रिंग दी हुई है

[499:22]

हेलो वर्ल्ड हेलो वर्ल्ड के अंदर वोवेल्स

[499:24]

कितनी बार आते हैं एक दो तीन अब जिन

[499:28]

स्टूडेंट्स को नहीं पता वोवेल्स क्या होते

[499:30]

हैं वोवेल्स होते हैं हमारे लेटर्स ए ई आई

[499:35]

ओ एंड यू पांच वोवेल्स होते हैं इंग्लिश

[499:37]

लैंग्वेज के अंदर इन पांचों में से कोई भी

[499:40]

अगर आता है तो काउंट को कर देंगे प्लस

[499:41]

प्लस हमने ऑलरेडी डिस्कस कर लिया कैसे

[499:44]

करना है इसको फॉर लूप लगाना है और कब तक

[499:46]

लगाना है जब तक नल कैरेक्टर नहीं आ जाता

[499:49]

और एक-एक करके कैरेक्टर्स को एनालाइज

[499:51]

करेंगे कैरेक्टर अगर वर्बल आ जाता है तो

[499:53]

प्लस प्लस कर दो नहीं आता तो उसको छोड़ के

[499:55]

आगे बढ़ जाओ

[499:57]

सिंपल तरीका होने वाला है इसके लिए भी एक

[499:59]

फंक्शन बना लेते हैं काफी सारे फंक्शन हम

[500:01]

बना चुके हैं इस कोड के अंदर तो कंफ्यूज

[500:03]

नहीं होना है जो लेटेस्ट फंक्शन जिसको

[500:05]

डिस्कस कर रहे हैं उसकी बात हो रही है

[500:06]

इनफैक्ट मैं क्या करती हूं बाकी सार जो

[500:08]

कोड है ना उसको कॉमेंट आउट कर देती हूं

[500:10]

फॉर सिंपलीसिटी ताकि हमें पता रहेगा हम

[500:13]

बात किस चीज की कर रहे हैं इसको भी कर

[500:14]

देती हूं कमेंट आउट इंट काउंट वॉबल्स इसके

[500:19]

अंदर पास कर रहे होंगे अपनी एक स्ट्रिंग

[500:22]

इंट काउंट वल्स कैरेक्टर एसआर इसके अंदर

[500:26]

हमारे पास स्ट्रिंग आएगी एक वेरिएबल ले

[500:28]

लेते हैं काउंट जो रो से शुरू होगा अब एक

[500:31]

लूप चला लेते हैं जिसमें इंटी जर आ को

[500:33]

इनिश इज करेंगे i के साथ जब तक हमारा

[500:36]

स्ट्रिंग ऑफ i इज नॉट इक्वल टू नल

[500:39]

कैरेक्टर और अब कर लेते हैं i + प् तो हर

[500:42]

बार कंपेयर करेंगे यानी कंडीशन लिख देंगे

[500:45]

इफ एटी ऑफ i इक्व टू इक्वल टू एक और और या

[500:51]

स्ट्रिंग ऑफ i हमारा e के इक्वल हो जाए

[500:54]

उसके बाद लिखेंगे स्ट्रिंग ऑफ i इक्वल टू

[500:57]

इक्वल टू आ और और स्ट्रिंग ऑफ आ इक्व टू

[501:02]

इक्वल टू o और और स्ट्रिंग ऑफ आ इक्वल टू

[501:07]

इक्वल टू य तो चेक कर लिया क्या हमारी आयत

[501:10]

इंडेक्स प जो स्ट्रिंग है हमारे जो

[501:12]

कैरेक्टर है स्ट्रिंग के अंदर वो ए है या

[501:14]

ई है या आई है या ओ है या यू है मतलब

[501:17]

वोवेल्स में से कुछ है तो उस टाइम पे कर

[501:19]

देंगे काउंट प्लस प्लस और एंड में क्या

[501:21]

करना है फंक्शन के रिटर्न कर देंगे काउंट

[501:24]

तो मेन फंक्शन के अंदर अप अपनी इस

[501:28]

स्ट्रिंग के लिए कॉल लगाते हैं काउंट

[501:30]

वोवेल्स को काउंट वोवेल्स में पास कर

[501:32]

देंगे अपनी स्ट्रिंग और जो भी रिटर्न होके

[501:35]

आएगा उसको हम करवा देते हैं प्रिंट

[501:38]

परसेंटेज डी वोवेल्स

[501:40]

आर तो हमने लाइन लिख दिया वोवेल्स प्रिंट

[501:43]

कराने के लिए इसको कर लेते हैं सेव एंड रन

[501:46]

तो तीन वोवेल्स है हेलो वर्ल्ड के अंदर

[501:48]

पहला है ई दूसरा है ओ और तीसरा है ये

[501:52]

दूसरा हो इसके अलावा दूसरा अगर कोई वर्ड

[501:54]

यहां पर लिखे मान लीजिए श्रद्धा हम लिख

[501:56]

लेते हैं तो इसको भी कर लेते हैं सेव एंड

[501:58]

रन तो इसके अंदर दो वोवेल्स हैं मतलब दो

[502:00]

एज आते हैं तो इस तरीके से डिफरेंट

[502:03]

डिफरेंट आपके जो वर्ड्स हैं उसके अंदर आप

[502:04]

वोवेल्स काउंट कर सकते हैं इसी नंबर को

[502:07]

अगर हम माइनस कर दें टोटल लेंथ के साथ

[502:09]

मतलब जितने वोवेल्स हमारे आ गए टोटल लेंथ

[502:11]

निकालें एसटी आर एल एन से और काउंट

[502:14]

वोवेल्स का काउंट माइनस कर दें तो हम टोटल

[502:16]

कॉन्सोनेंट काउंट कर सकते हैं यानी ववलू

[502:19]

कौन से लेटर्स नहीं है उनका काउंट निकाल

[502:21]

सकते हैं या फिर हमें निकालना हो कितनी

[502:23]

बार इस वर्ड के साथ कितनी बार इस वर्ड में

[502:26]

आता है तो h दो बार आता है तो यहां पे बस

[502:29]

कंडीशन चेंज हो जाएगी इफ वाली कंडीशन चेंज

[502:31]

हो जाएगी h से कंपेयर कर लेंगे उनका काउंट

[502:33]

कर लेंगे या डी कितनी बार आता है या ए

[502:36]

कितनी बार आता है तो अलग-अलग तरीके के हम

[502:38]

फंक्शन बना सकते हैं अलग-अलग कंडीशन के

[502:39]

हिसाब से नेक्स्ट जो सवाल जिसकी बात

[502:41]

करेंगे वो है चेक इफ अ गिवन कैरेक्टर इज

[502:43]

प्रेजेंट इन अ स्ट्रिंग र नॉट जैसे हमें

[502:46]

स्ट्रिंग दी है हेलो वर्ल्ड अब हमें एक

[502:49]

कैरेक्टर दिया है साथ में कैरेक्टर सी जो

[502:52]

है डब् हमें चेक करना है ये कैरेक्टर इस

[502:55]

स्ट्रिंग के अंदर प्रेजेंट है या नहीं है

[502:57]

यस और नो तो ड इसके अंदर प्रेजेंट है तो

[503:00]

प्रिंट होगा यस अगर कैरेक्टर स हमारा मान

[503:04]

लीजिए ए होता कैपिटल ए तो कैपिटल ए तो

[503:07]

प्रेजेंट नहीं है स्मल एल प्रेजेंट है तो

[503:09]

उस केस में हम प्रिंट करते हैं नो या फिर

[503:11]

कैरेक्टर स हमारा होता x तो x तो प्रेजेंट

[503:15]

है नहीं हेलो वर्ल्ड में तो इस केस में भी

[503:17]

प्रिंट करते हैं नो तो हमें चेक करना है

[503:19]

हमारा पर्टिकुलर कैरेक्टर स्ट्रिंग के

[503:20]

अंदर प्रेजेंट है या नहीं है क्या लॉजिक

[503:23]

रहेगा एक-एक करके हर एक कैरेक्टर पे

[503:25]

जाएंगे स्ट्रिंग के और चेक कर लेंगे अगर

[503:27]

आयत कैरेक्टर है क्या इक्वल अगले वाला i+

[503:30]

1 है क्या इक्वल सीच के जैसे ही इक्वल हो

[503:33]

जाता है वैसे एस प्रिंट कर दो नहीं तो एंड

[503:35]

में नो प्रिंट कर दो सिंपल लॉजिक के साथ

[503:38]

काम करेंगे तो एक फंक्शन बना लेते हैं

[503:40]

इसको भी कर देते हैं कॉमेंट आउट एक फंक्शन

[503:42]

बनाते हैं इंट चेक इनफैक्ट इसको कर लेते

[503:45]

हैं वॉइड चेक कैरेक्टर इसमें पास करेंगे

[503:49]

सबसे पहले तो अपनी स्ट्रिंग और साथ के साथ

[503:51]

एक कैरेक्टर सीच वॉइड चेक कैरेक्टर जिसमें

[503:55]

पास करेंगे

[503:56]

स्ट्रिंग और हमारा कैरेक्टर सी अब

[504:00]

कैरेक्टर कैसे चेक करेंगे एक लूप लगा

[504:02]

लेंगे फॉर इंट आ इक्व 0 आ जब तक या एटीआर

[504:06]

ऑफ आ जब तक नॉट इक्वल टू हमारा नल

[504:10]

कैरेक्टर आ होता रहेगा प्लस प्लस अगर

[504:13]

हमारा जो एटीआर ऑफ आ है वो सीच के इक्वल

[504:16]

हो जाता है तो उस केस में प्रिंट करवा

[504:19]

देना है कैरेक्टर इज प्रेजेंट और प्रिंट

[504:23]

करवा के यहीं से रिटर्न करवा दो मतलब

[504:25]

फंक्शन को हीं पे ही खत्म कर दो कैरेक्टर

[504:27]

जैसे ही हमें मिल गया वैसे ही फंक्शन खत्म

[504:30]

हो जाएगा तो कोई झंझट ही नहीं रहेगा

[504:32]

कैरेक्टर मिल गया वैसे ही रिटर्न करवा दो

[504:34]

और उसके बाद क्या होगा पूरा का पूरा आगे

[504:37]

के जो चेक होने हैं ना वो नहीं होंगे

[504:38]

क्योंकि कैरेक्टर तो यहां पे मिल गया और

[504:40]

अगर नहीं मिलता तो कुछ नहीं करना सारा का

[504:42]

सारा चेक करना है और लूप अगर खत्म हो गया

[504:44]

और अभी तक रिटर्न नहीं हुआ तो फिर एंड में

[504:47]

हमें प्रिंट करवाना होगा कि कैरेक्टर इज

[504:49]

नॉट प्रेजेंट तो यहां प्रिंट करवा देंगे

[504:51]

कैरेक्टर इज नॉट प्रेजेंट फिर यहां से

[504:54]

रिटर्न कर रहे होंगे हम तो एकएक करके

[504:56]

कैरेक्टर को हम चेक कर रहे हैं कि सीच के

[504:58]

इक्वल है या नहीं स्ट्रिंग का कोई भी

[505:00]

कैरेक्टर उसके बाद अगर कहीं भी मिल जाता

[505:03]

है तो प्रिंट करवा देंगे प्रेजेंट है और

[505:04]

वहां से करवा देंगे रिटर्न अगर नहीं मिलता

[505:06]

है तो एंड में लिखवाना है कि कैरेक्टर

[505:08]

प्रेजेंट नहीं है इसको कर लेते हैं सेव

[505:10]

एंड रन अब मेन फंक्शन के अंदर भी अपना

[505:13]

कैरेक्टर का कोई स्ट्रिंग बना लेते हैं

[505:15]

मान लीजिए हमने स्ट्रिंग बनाई है अपना

[505:18]

कॉलेज कैरेक्टर सीच जो हम भेजना चाह रहे

[505:21]

हैं वो शुरुआत में है ई और कॉल करेंगे चेक

[505:24]

कैरेक्टर फ आर एंड ई यहां पे सी अब इसको

[505:29]

सेव करके रन करते हैं तो कैरेक्टर इज

[505:31]

प्रेजेंट लिखा हुआ आ गया लेकिन यहां पर ई

[505:34]

की जगह अगर हम x कर देते तो क्या होता तो

[505:37]

लिखा हुआ था कैरेक्टर इज नॉट प्रेजेंट तो

[505:40]

इस तरीके से देख सकते हैं कैरेक्टर हमारा

[505:42]

प्रेजेंट है स्ट्रिंग के अंदर या नहीं है

[505:44]

लॉजिक क्या रहना है लॉजिक यही रहना है

[505:46]

स्ट्रिंग को एक-एक करके ट्रैवर्स करेंगे

[505:48]

कैरेक्टर्स को निकालते रहेंगे और अपनी

[505:49]

कंडीशंस को चेक करते रहेंगे तो आई होप कि

[505:52]

स्ट्रिंग के बारे में हमें काफी कुछ सीखने

[505:54]

को मिला क्लास के अंदर कुछ एडिशनल

[505:56]

क्वेश्चंस हैं वो हम सॉल्व कर सकते हैं

[505:58]

नेक्स्ट जिस चैप्टर की हम बात करेंगे वोह

[506:00]

होने वाला है हमारा स्ट्रक्चर्स व्हिच इज़

[506:02]

अ रियली इंपॉर्टेंट चैप्टर जब भी हम बात

[506:05]

करते हैं सी प्रोग्रामिंग की क्योंकि

[506:07]

स्ट्रक्चर्स जो है ना बेसिस फॉर्म करते

[506:08]

हैं c+ प् का स्ट्रक्चर्स पढ़ने के बाद

[506:11]

हमें समझ में आने लग जाएंगी कुछ-कुछ चीजें

[506:13]

जो c+ प के अंदर एजिस्ट करती हैं तो अब हम

[506:16]

शुरुआत करने वाले हैं अपने चैप्टर नाइन की

[506:18]

जिसका नाम है स्ट्रक्चर्स अब इससे पहले

[506:21]

हमने काफी सारे कलेक्शन डटा टाइप्स देखे

[506:23]

हैं जैसे हमने इंटी जर्स का कलेक्शन देखा

[506:25]

एक इंटी जर एरे कैरेक्टर्स का कलेक्शन

[506:27]

देखा एक स्ट्रिंग उसी तरीके से अगर हम एक

[506:30]

ऐसा कलेक्शन बनाना हो जिसमें बहुत सारे

[506:32]

डिफरेंट टाइप्स के डाटा स्टोर्ड हो जैसे

[506:35]

मान लीजिए हमें एक इंट भी स्टोर करना है

[506:38]

एक कैरेक्टर भी स्टोर करना है एक फ्लोट भी

[506:40]

स्टोर करना है और एक स्ट्रिंग भी स्टोर

[506:42]

करनी है अब इन चारों को मिलाकर हम एक एरे

[506:46]

को फॉर्म नहीं कर सकते क्योंकि एरे क्या

[506:48]

होता है एरे एक कलेक्शन ऑफ डाटा होता है

[506:50]

जिनका डेटा टाइप सेम होता है पर यहां पर

[506:52]

हमें ऐसा कलेक्शन बनाना है जिसमें डेटा

[506:54]

टाइप हमारे अलग-अलग हो ऐसे कलेक्शंस को

[506:57]

फॉर्म करने के लिए हम इस्तेमाल करते हैं

[506:59]

स्ट्रक्चर्स का तो स्ट्रक्चर्स की

[507:00]

डेफिनेशन देखें तो स्ट्रक्चर इज अ कलेक्शन

[507:03]

ऑफ वैल्यूज ऑफ डिफरेंट डटा टाइप्स यानी

[507:06]

अलग-अलग आप डाटा टाइप्स ले लेंगे और फिर

[507:08]

उनको सेम एक स्ट्रक्चर के अंदर एक कलेक्शन

[507:11]

के अंदर आप रखना चाहते हैं तो उसको हम

[507:13]

स्ट्रक्चर कहेंगे स्ट्रक्चर का एग्जांपल

[507:15]

क्या हो सकता है कि जैसे एक स्टूडेंट की

[507:17]

हमें इंफॉर्मेशन स्टोर करानी है तो उस

[507:19]

इंफॉर्मेशन को स्टोर कराने के लिए सबसे

[507:21]

पहले हमें उसका नाम स्टोर करवाना पड़ेगा

[507:23]

जो एक स्ट्रिंग टाइप का होगा उसका रोल

[507:25]

नंबर स्टोर करा ना पड़ेगा जो एक इंटी जर

[507:27]

टाइप का होगा और उसका सीजीपीए स्टोर कराना

[507:29]

पड़ेगा जिसको हम फ्लोटिंग वैल्यू ले सकते

[507:31]

हैं तो जब इस तरीके की हमें कोई

[507:32]

इंफॉर्मेशन स्टोर करानी होती है तो उसको

[507:34]

हम कराते हैं स्ट्रक्चर्स की हेल्प से अब

[507:36]

सिंटेक्स क्या होगा एक स्ट्रक्चर को

[507:38]

क्रिएट करने का सिंटेक्स में सबसे पहले हम

[507:40]

स्ट्रक्ट कीवर्ड लिखते हैं स्ट्रक्ट

[507:42]

कीवर्ड हमें बताता है कि हम एक स्ट्रक्चर

[507:44]

क्रिएट करने वाले हैं उसके बाद लिखते हैं

[507:46]

स्ट्रक्चर का नाम जैसे अगर हम स्टूडेंट की

[507:48]

इंफॉर्मेशन स्टोर कराना चाहते हैं तो

[507:50]

उसमें हम डिफरेंट डिफरेंट वैल्यू स्टोर

[507:51]

करा रहे होंगे तो स्ट्रक्चर को हमने नाम

[507:53]

दे दिया स्टूडेंट मान लीजिए आप एक एंप्लॉई

[507:56]

की इंफॉर्मेशन स्टोर करा रहे होते तो इसको

[507:58]

हम नाम देते थे एंप्लॉई अगर हम एक बैंक

[508:01]

अकाउंट होल्डर की इंफॉर्मेशन स्टोर करा

[508:03]

देते तो इसको हम नाम दे देते बैंक अकाउंट

[508:06]

जिसमें हम अकाउंट नंबर आईएफएससी कोड बैंक

[508:09]

का नाम बैंक का एड्रेस ये सारी चीजें जो

[508:11]

है स्टोर करा रहे होते तो यहां पे हमने

[508:13]

अपने स्ट्रक्चर को नाम दिया है स्टूडेंट

[508:16]

और इसके अंदर हमने तीन वैल्यू स्टोर कराई

[508:18]

हैं इनमें से सबसे पहला है कैरेक्टर एरे

[508:20]

यानी हमारी स्ट्रिंग नेम उसके बाद हमारे

[508:23]

पास है एक इंटी जर वेरिएबल जिसका नाम है

[508:25]

रोल नंबर फिर एक फ्लोट वेरिएबल जिसको हमने

[508:27]

नाम दिया सीजीपीए और इस पूरे स्ट्रक्चर को

[508:30]

हम पैरेंस के अंदर लिखते हैं मतलब

[508:33]

स्ट्रक्चर के अंदर जो जो एलिमेंट्स आने

[508:34]

वाले हैं उसको हम पैरेंस के अंदर लिखते

[508:36]

हैं और एंड में हम लगा देते हैं एक

[508:38]

स्टेटमेंट टर्मिनेटर यूजुअली बच्चे लगाना

[508:40]

भूल जाते हैं जिसकी वजह से एरर आता है तो

[508:42]

स्टेटमेंट टर्मिनेटर को हमें नहीं भूलना

[508:44]

है अब एक बार डिस्कस करते हैं कि डेटा

[508:47]

टाइप्स ना दो तरीके के होते हैं एक होते

[508:49]

हैं हमारे इनबिल्ट डेटा टाइप्स जो पहले से

[508:52]

ही हमारी प्रोग्रामिंग लैंग्वेज के अंदर

[508:54]

एजिस्ट करते हैं जैसे हमारा इंटी जर हो

[508:56]

गया हमारा फ्लोट हो गया या फिर हमारा

[508:59]

कैरेक्टर हो गया या इनफैक्ट अरेज भी इसी

[509:02]

कैटेगरी के अंदर आ जाते हैं अब वहीं पर

[509:04]

दूसरी तरफ हमारे आते हैं यूजर डिफाइंड

[509:06]

डेटा टाइप्स यूजर डिफाइंड डेटा टाइप्स को

[509:09]

यूजर बनाते हैं अभी तक अगर हम एक इंटी जर

[509:11]

चाहिए होता था तो वो ऑलरेडी मेमोरी में

[509:13]

एजिस्ट करता था कि इंटी जर का मतलब होता

[509:15]

है कि मेमोरी के अंदर आपके लिए चार बाइट

[509:17]

सेव हो गई हैं अगर कैरेक्टर चाहिए होता था

[509:20]

तो वो भी पहले से एजिस्ट करता था सी

[509:22]

प्रोग्रामिंग बताती है कि कैरेक्टर पहले

[509:23]

से एजिस्ट करता है तो आपको एक बाइट चाहिए

[509:26]

अगर जिसमें आप कोई भी कैरेक्टर कोई भी

[509:28]

लेटर स्पेशल कैरेक्टर स्टोर कराना चाहते

[509:30]

हैं तो ऑलरेडी सी प्रोग्रामिंग में एजिस्ट

[509:32]

करता है पर मान लो अगर हमें ऐसा डेटा टाइप

[509:35]

चाहिए जिसके अंदर फ्लोट के लिए हमें चार

[509:36]

बाइट्स चाहिए इंटी जर के लिए चार बाइट्स

[509:38]

चाहिए और उसमें हमें कैरेक्टर भी स्टोर

[509:40]

कराना चाहते हैं तो एक ऐसा कस्टम डेटा

[509:42]

टाइप यूजर को खुद बनाना पड़ेगा वो ऑलरेडी

[509:44]

सी में एजिस्ट नहीं करता अब ऐसे जो डेटा

[509:47]

टाइप्स होते हैं इनको यूजर डिफाइन कहते

[509:48]

हैं और स्ट्रक्चर हमारा एक यूजर डिफाइन

[509:51]

डाटा टाइप की कैटेगरी में आता है यानी

[509:53]

इसको यूजर खुद डिफाइन कर सकता है तो जैसे

[509:56]

हमारे पास एक इंटी जर एरे होता है इंटी जर

[509:58]

एरे में क्या होता है मान लीजिए हमने एक

[510:01]

इंटी जर एरे बनाया ए आरआर जिसका साइज़

[510:03]

हमने दिया तीन अब इसमें क्या होगा एक तीन

[510:07]

इंटी जर्स जितनी मेमोरी हमारे लिए सेव हो

[510:10]

जाएगी कंप्यूटर की मेमोरी में वैसे ही जब

[510:13]

भी हम स्टूडेंट क्रिएट करते हैं ना तो

[510:15]

स्टूडेंट के क्रिएट होते ही हमारे पास एक

[510:18]

स्ट्रिंग के बराबर मेमोरी एक इंटी जर के

[510:20]

बराबर मेमोरी और एक फ्लोट के बराबर मेमोरी

[510:22]

रिजर्व हो जाती है तो अब हमारे पास एक नया

[510:25]

डटा टाइप आ गया जिसमें हम तीन अलग-अलग

[510:26]

वैल्यूज एक साथ स्टोर करवा सकते हैं और

[510:29]

इसको क्रिएट कैसे करना है ये तो हमने

[510:32]

डिफाइन कर लिया अपने डाटा टाइप को ये चीज

[510:34]

एक बार लिखनी है कि हमारा डाटा टाइप कुछ

[510:36]

ऐसा दिखेगा उसके बाद अगर डटा टाइप को यूज

[510:39]

करना है तो जैसे हम इंटी जर को कैसे यूज

[510:41]

करते थे इंट n = 5 उसी तरीके से यहां पर

[510:46]

हमें लिखना है स्ट्रक्ट स्टूडेंट यह है

[510:49]

हमारा डेटा टाइप स्टूडेंट स्ट्रक्चर उसके

[510:53]

बाद n की जगह हमारे पास s1 आ गया है और अब

[510:57]

अगर हमें s1 के लिए यानी स्टूडेंट के लिए

[510:59]

डिफरेंट डिफरेंट पैरामीटर्स को एक्सेस

[511:01]

करना है जैसे नेम के लिए हम लिखेंगे s1

[511:05]

नेम रोल नंबर के लिए लिखेंगे s1 रोल नंबर

[511:09]

और सीजीपीए के लिए लिखेंगे s1

[511:12]

cp7 5 तो कुछ इस तरीके से हम इसको

[511:16]

डिक्लेयर कर रहे होंगे इसको यूज़ कर रहे

[511:18]

होंगे और फिर इसके अंदर वाले पैरामीटर्स

[511:21]

को भी एक्सेस कर रहे होंगे अब एक्चुअली

[511:23]

कोड के अंदर एक स्ट्रक्चर बनाकर देख लेते

[511:25]

हैं कि इसको लिखा कैसे जाता है सबसे पहले

[511:27]

हम लिखेंगे स्ट्रक्ट कीवर्ड स्ट्रक्ट उसके

[511:30]

बाद लिखेंगे स्टूडेंट हमारे स्ट्रक्चर का

[511:31]

नाम अब इसके अंदर हम तीन चीजें डिफाइन

[511:34]

करने वाले हैं रोल नंबर सीजीपीए और नाम तो

[511:37]

सबसे पहले लिखते हैं इंट रोल उसके बाद

[511:41]

फ्लोट सीजीपीए एंड उसके बाद कैरेक्टर नेम

[511:45]

ऑफ 100 कैरेक्टर्स और एंड में लगा देंगे

[511:47]

स्टेटमेंट टर्मिनेटर तो यह हमने अपना डेटा

[511:50]

टाइप डिफाइन कर दिया है स्ट्रक्चर हमारा

[511:53]

यूजर डिफाइन डाटा टाइप है अब मेन फशन के

[511:56]

अंदर अब स्ट्रक्चर टाइप का एक वेरिएबल

[511:58]

बनाएंगे स्ट्रक्ट स्टूडेंट हमारा टाइप एंड

[512:02]

उसके बाद वेरिएबल का नाम है s1 जिसको हमने

[512:04]

अभी बस इनिश इइ नहीं किया सिर्फ डिक्लेयर

[512:07]

किया है

[512:13]

इनिशियलिज्म

[512:15]

और ये है इसकी प्रॉपर्टीज अब s1 के रोल

[512:19]

प्रॉपर्टी रोल नंबर प्रॉपर्टी को एक्सेस

[512:21]

करना है तो बीच में लगा देंगे डॉट ऑपरेटर

[512:23]

यानी s1 ड रोल नंबर इसको इक्वल टू कर

[512:26]

देंगे हमारी वैल्यू के फिर लिखेंगे s1 सज

[512:30]

इसमें भी कोई वैल्यू हम ऐड कर देते हैं

[512:32]

फिर अब हम लिखना है s1 . n अगर हम इसको

[512:36]

नॉर्मली लिखने लगे जैसे हमने सिंपली लिखा

[512:39]

s1 . n = श्रद्धा तो ये वाला जो सिंटेक्स

[512:43]

है ना अपनी स्ट्रिंग को डिक्लेयर करने का

[512:46]

उसको पास ऑन करने का s1 . ने में ये गलत

[512:48]

है क्यों गलत है क्योंकि स्ट्रिंग्स के

[512:50]

अंदर हमने ऑलरेडी पढ़ा था कि जो

[512:52]

स्ट्रिंग्स एरे नोटेशन से डिफाइन होती है

[512:54]

उसकी वैल्यूज आप चेंज नहीं कर सकते उसमें

[512:57]

वैल्यूज कॉपी कर सकते हैं उस स्ट्रिंग को

[512:59]

कंपेयर कर सकते हैं इनबिल्ट स्ट्रिंग के

[513:01]

फंक्शन यूज कर सकते हैं पर उसकी वैल्यू को

[513:03]

डायरेक्टली आप इज इक्वल टू से चेंज नहीं

[513:06]

कर सकते हां अगर यह कैरेक्टर पॉइंटर होता

[513:09]

तो फिर वो चीज पॉसिबल थी पर यहां पर ये

[513:11]

एरे नोटेशन से डिफाइन हुआ है इसीलिए यहां

[513:14]

पर हमें यूज करना पड़ेगा अपना एक स्ट्रिंग

[513:16]

फंक्शन स्ट्रिंग कॉपी तो उसके लिए ऊपर

[513:18]

लाइब्रेरी इंक्लूड कर लेते हैं स्ट्रिंग ड

[513:20]

ए और नीचे क्या करते हैं इसको करते हैं

[513:23]

कॉमन डाउट और लिखते हैं

[513:26]

स पवा हम किसको किस में कॉपी करना चाहते

[513:28]

हैं हम अपने नाम को s1 . नेम में कॉपी

[513:31]

करना चाहते हैं तो पहली लिखेंगे s1 नेम

[513:35]

दूसरी स्ट्रिंग होगी हमारी हमारा नाउ तो

[513:39]

ये सेकंड स्ट्रिंग हमारी फर्स्ट स्ट्रिंग

[513:41]

के अंदर कॉपी हो जाएगी एंड इसके बाद क्या

[513:43]

करेंगे तीनों प्रॉपर्टीज को हम डिस्प्ले

[513:45]

कराने वाले हैं सबसे पहले लिख देते हैं

[513:47]

स्टूडेंट नेम इज इक्वल टू परसेंटेज s s1 .

[513:52]

n अब जब वैल्यू असाइन करनी थी तब भी s1 .

[513:55]

नेम करना है और जब वैल्यू प्रिंट करनी है

[513:57]

तब भी s1 ड नेम करना है अगर हम डायरेक्टली

[514:00]

सोचे कि s1 को हम यहां पर सिंपली लिख

[514:02]

देंगे और डॉट नहीं यूज करेंगे यानी इसी के

[514:05]

साथ हम सिर्फ s1 की वैल्यू प्रिंट करवाए

[514:08]

उसके बाद हम प्रिंट करने वाले हैं अपने

[514:10]

स्टूडेंट का रोल नंबर परसेंटेज डी से s1

[514:15]

डॉट रोल एंड उसके बाद प्रिंट करेंगे अपने

[514:18]

स्टूडेंट का सीजीपीए परसेंटेज f s1 सज प

[514:24]

और सबके एंड में लगा देंगे बैक स्ल n इसको

[514:29]

कर लेते हैं सेव और इसको रन करके देखते

[514:30]

हैं तो सबसे पहले तो हमारे पास स्टूडेंट

[514:33]

का नाम आ गया है उसके बाद रोल नंबर आ गया

[514:35]

है एंड उसके पास हमारे पास आ गई है

[514:36]

स्टूडेंट का सीजीपीए तो कुछ इस तरीके से

[514:39]

हमारा स्ट्रक्चर जो होता है उसको हम

[514:41]

डिक्लेयर करते हैं सबसे पहले उसके बाद

[514:43]

उसका एक वेरिएबल बनाते हैं फिर वेरिएबल

[514:46]

में पैरामीटर्स को वैल्यू असाइन करते हैं

[514:48]

फिर उस वैल्यू को हम यूज कर सकते हैं कहीं

[514:50]

भी मतलब उसको प्रिंट करवा सकते हैं उस

[514:52]

वैल्यू को चेंज भी कर सकते हैं और उस

[514:54]

वैल्यू को किसी और दू दूसरी वैल्यू को भी

[514:56]

असाइन कर सकते हैं नेक्स्ट चीज इसके अंदर

[514:58]

जो हम पढ़ेंगे कि स्ट्रक्चर को जब हम

[514:59]

डिक्लेयर करते हैं तो मेमोरी के अंदर

[515:01]

एक्चुअली क्या होता है हमने पढ़ा था कि

[515:03]

इंटी जर एरे को डिक्लेयर करते हैं तो

[515:05]

मेमोरी के अंदर तीन कंटीन्यूअस लोकेशंस जो

[515:07]

है ना वो स्टोर हो जाती हैं जैसे इंटी जर

[515:09]

टाइप का हमने एरे बनाया तो उसमें 1 2 3 ये

[515:13]

तीन हमारी मेमोरी की लोकेशंस सेव हो गई

[515:15]

हैं वैसे ही जब हम स्ट्रक्चर बनाते हैं तो

[515:18]

उसके अंदर जो भी डेटा टाइप्स हम डिफाइन

[515:20]

करते हैं उन डेटा टाइप्स के हिसाब से

[515:22]

हमारे मेमोरी के अंदर कुछ-कुछ एरिया है जो

[515:24]

स्टोर हो जाता है वो भी कंटस फैशन में

[515:27]

यानी लगातार जैसे एरे के अंदर एक के बाद

[515:30]

एक के बाद एक ब्लॉक्स होते हैं वैसे ही

[515:32]

यहां पर भी कंटस मेमोरी लोकेशंस होती हैं

[515:34]

जैसे अगर हमने एक स्टूडेंट स्ट्रक्चर

[515:36]

बनाया जिसमें सबसे पहले हमने कैरेक्टर एरे

[515:39]

रखा स्ट्रिंग के लिए तो सबसे पहले एक

[515:41]

स्ट्रिंग के बराबर मेमोरी लोकेशन हमारे

[515:43]

पास स्टोर हो जाएगी जिसको हम नाम दे देंगे

[515:45]

नेम और नेम के अंदर अब हम जितने भी

[515:47]

कैरेक्टर्स अपने नेम स्ट्रिंग के अंदर

[515:49]

स्टोर कराना चाहते हैं वो सारे के सारे

[515:51]

स्टोर हो जाएंगे अब यहां पर हमने साइज जो

[515:53]

दिया है नेम को वो 100 कैरेक्टर के बराबर

[515:56]

है तो नेक्स्ट इंटी जर जो होगा ना वो 100

[515:58]

कैरेक्टर्स बाद एलोकेट होगा तो 21 आ गया

[516:02]

उसके बाद 2110 आएगा तब जाके रोल नंबर को

[516:05]

स्पेस मिलेगी रोल नंबर इंटी जर टाइप का है

[516:07]

तो इसको स्पेस मिलेगी चार बाइट्स की अब

[516:09]

चार बाइट्स के बाद 2114 आएगा जहां पे आएगा

[516:13]

सीजीपीए सीजीपीए हमारा फ्लोट टाइप का है

[516:15]

तो इसको भी उसी के बराबर मेमोरी मिल रही

[516:17]

होगी तो इस तरीके से कंटस फैशन में यानी

[516:19]

लगातार वाले फैशन में एक के बाद एक हमारे

[516:22]

पास मेमोरी लोकेशन स्टोर होती है जब भी हम

[516:24]

एक स्ट्रक्चर को क्रिएट करते हैं ऑब् वियस

[516:26]

कुछ-कुछ कंपाइलर्स के हिसाब से कुछ-कुछ

[516:28]

मशीनस के हिसाब से ये जो फॉर्मेट है हल्का

[516:30]

सा चेंज हो सकता है पर अगर कोई पूछे तो

[516:32]

बाय डिफॉल्ट हम यही अज्यू म करते हैं यही

[516:34]

बताते हैं नेक्स्ट एक प्रैक्टिस क्वेश्चन

[516:36]

कर लेते हैं प्रैक्टिस क्वेश्चन कहता है

[516:38]

राइट अ प्रोग्राम टू स्टोर द डाटा ऑफ थ्री

[516:40]

स्टूडेंट्स एक प्रोग्राम लिखना है उसमें

[516:42]

तीन स्टूडेंट्स का हमें डाटा स्टोर कराना

[516:44]

है तो उसके लिए ऑलरेडी हमने एक स्ट्रक्चर

[516:47]

जो है वो तो क्रिएट ही कर लिया था यानी

[516:49]

हमने अपना स्टूडेंट स्ट्रक्चर बना लिया था

[516:51]

हमने एक स्टूडेंट की इंफॉर्मेशन भी बना ली

[516:53]

है अब क्या करेंगे एक दूसरे स्टूडेंट

[516:55]

स्टूडेंट को क्रिएट करेंगे तो उसको क्रिएट

[516:57]

करने के लिए सारी की सारी इंफॉर्मेशन हम

[516:59]

कॉपी कर सकते हैं सबसे पहले लिख देंगे

[517:01]

यहां पे s2 अब s2 का रोल नंबर लिखेंगे

[517:06]

1660

[517:08]

88.7 यहां पे नाम को हम चेंज कर लेते हैं

[517:11]

और हर जगह कर देते हैं s2 अब सिमिलरली

[517:14]

कॉपी करके एक और स्टूडेंट बनाते हैं इसको

[517:17]

हम नाम देंगे s3 s3 के अंदर भी हम वैल्यूज

[517:20]

को चेंज कर रहे होंगे ऊपर यहां भी चेंज कर

[517:22]

देते हैं s2 यहां भी चेंज कर देते हैं s2

[517:25]

य यहां पर हो गया हमारा s3 एंड s3 तो

[517:28]

शुरुआती जो क्वेश्चंस होते हैं ना उसमें

[517:30]

मैं चाहती हूं कि आप ये कॉपी करने की बजाय

[517:32]

ना इस सिंटेक्स को अगर खुद से फर्स्ट टाइम

[517:34]

लिख रहे हैं तो टाइप करके लिखना है कॉपी

[517:36]

नहीं करना तीनों स्टूडेंट्स के लिए शुरुआत

[517:38]

में कोई नई चीज सीखते हैं ना तो उसको

[517:40]

बिल्कुल बेसिक तरीके से करते हैं इंस्टेड

[517:42]

ऑफ कॉपी पेस्टिंग तो वो ज्यादा टाइम तक

[517:44]

याद रहेगी तो इस तरीके से तीन बार अगर आप

[517:46]

तीन स्टूडेंट्स बना लेंगे ना तो हमारे

[517:48]

स्ट्रक्चर को यूज कैसे करना है उसकी

[517:49]

वैल्यूज को एक्सेस कैसे करना है डिक्लेयर

[517:51]

कैसे करना है वो हमें याद हो जाएगा तो अगर

[517:53]

आप फर्स्ट टाइम खुद से स्ट्रक्चर सीख रहे

[517:55]

और खुद से को सवाल कर रहे हैं तो इसको

[517:57]

बेसिक से लिखना है मतलब कॉपी नहीं करनी

[517:59]

तीनों स्टूडेंट्स की वैल्यूज को अब इसमें

[518:01]

तीनों में s3 हो गया यहां पे चेंज कर देते

[518:03]

हैं रोल नंबर्स और हमारा

[518:06]

सीजीपीए इसको कर लेते हैं सेव एंड रन तो

[518:10]

सबसे पहले फर्स्ट स्टूडेंट की वैल्यूज

[518:12]

हमारे पास आ गई उसके बाद सेकंड स्टूडेंट

[518:14]

की वैल्यूज आ गई एंड उसके बाद थर्ड

[518:16]

स्टूडेंट की वैल्यूज आ गई अब इसकी

[518:18]

फॉर्मेटिंग हम चेंज कर सकते हैं जिस भी

[518:20]

हिसाब से डिस्प्ले करना हो अब यहां पे ना

[518:22]

स्ट्रक्चर्स को यूज़ करके काफी सारे

[518:23]

इंटरेस्टिंग प्रॉब्लम सॉल्व हो सकते हैं

[518:25]

जैसे मान लीजिए आप अपने स्कूल के लिए कोई

[518:27]

सिस्टम बना रहे हैं या कॉलेज के लिए कोई

[518:29]

सिस्टम बना रहे हैं जो स्टूडेंट्स की सारी

[518:31]

इंफॉर्मेशन को स्टोर करता है या फिर आप एक

[518:34]

पूरा का पूरा परसेंटेज कैलकुलेट करना

[518:36]

चाहते हैं जिसमें हर सब्जेक्ट के सेमेस्टर

[518:37]

वाइज मार्क्स स्टोर हो अब ऐसा डाटा स्टोर

[518:40]

कराने के लिए मार्क्स तो खैर सेम टाइप का

[518:42]

हो गया पर स्टूडेंट के पास बहुत सारे

[518:43]

अलग-अलग डिफरेंट टाइप्स का डाटा होता है

[518:46]

उसको स्टोर कराने के लिए अगर आपको एक

[518:47]

सिस्टम बनाना है तो सी में आपको

[518:49]

स्ट्रक्चर्स का इस्तेमाल करना पड़ेगा

[518:51]

जिसमें आप काफी सारी अलग-अलग टाइप की

[518:52]

इंफॉर्मेशन स्टोर करा सकते हैं और अपना

[518:54]

खुद का एक प्रोजेक्ट बना सकते हैं जो आपके

[518:56]

कॉलेज के स्टूडेंट्स के डाटा को हैंडल

[518:58]

करता हो नेक्स्ट टॉपिक की बात करें तो

[519:00]

नेक्स्ट टॉपिक है बेनिफिट्स ऑफ स्ट्रक्चर

[519:02]

यानी स्ट्रक्चर हमने देख लिया कि हां ठीक

[519:04]

है अलग-अलग टाइप का डाटा हम स्टोर करा

[519:05]

लेते हैं पर एक्चुअली कोई

[519:07]

थोरेट्स होते हैं आपके पेपर में सवाल आ

[519:10]

जाए या इंटरव्यू और पूछ ले स्ट्रक्चर्स के

[519:12]

बेनिफिट्स क्या होते हैं जैसे एरे का

[519:14]

बेनिफिट हमने समझा था एरे का बेनिफिट क्या

[519:16]

था कि सेम टाइप का डटा स्टोर कराने के लिए

[519:19]

सबसे पहले तो आपको अलग-अलग वेरिएबल नहीं

[519:21]

बनाने पड़ते मान लीजिए आपको 100 इंटी जर

[519:24]

स्टोर कराने तो आपको 100 डिफरेंट वेरिएबल

[519:26]

याद रखने की जरूरत नहीं है सिंगल एरे

[519:28]

बनाना है और एक एक वेरिएबल इंटी जर को

[519:31]

हमें याद रखना है बाकी सारे हम उससे

[519:33]

एक्सेस कर लेंगे एंड इवन सॉर्ट ंग जैसी जो

[519:36]

एक्टिविटीज होती हैं वो सारी उस पर जैसे

[519:38]

इंक्रीजिंग ऑर्डर में सॉर्ट कर देना

[519:40]

डिक्रीजिंग ऑर्डर में सॉर्ट कर देना एंड

[519:41]

जब हम डिफरेंट डिफरेंट कॉम्प्लेक्शन

[519:43]

एल्गोरिथम्स करेंगे वो बहुत सारे अरेज को

[519:45]

यूज़ करके सॉल्व होते हैं तो वहां पर अरेज

[519:47]

का बेनिफिट आ जाता है वैसे हमसे

[519:49]

स्ट्रक्चर्स का कोई बेनिफिट पूछ सकता है

[519:51]

स्ट्रक्चर का सबसे पहला बेनिफिट होता है

[519:53]

सेव्स अस फ्रॉम क्रिएटिंग टू मेनी वेरिएबल

[519:55]

जैसे अरेज होते हैं अब यहां पे अगर हम

[519:58]

स्टूडेंट के लिए स्ट्रक्चर नहीं बनाते तो

[520:00]

सबसे पहले इसको लिखते s2 रोल नंबर इसको

[520:03]

लिखते s2 सीजी पे इसको s3 रोल नंबर s3

[520:06]

सीजी पे तो कितने सारे अलग-अलग वेरिएबल हो

[520:08]

जाते जिनको हमें डिक्लेयर करना पड़ता तो

[520:10]

हमें ज्यादा वेरिएबल डिक्लेयर नहीं करने

[520:12]

पड़ते क्योंकि स्ट्रक्चर्स पिक्चर में आ

[520:14]

गए हैं दूसरा बेनिफिट ये होता है गुड डेटा

[520:16]

मैनेजमेंट एंड ऑर्गेनाइजेशन अब हमें पता

[520:19]

है हर स्टूडेंट के लिए नाम स्टोर होना है

[520:22]

सीजीपीए स्टोर होना है रोल नंबर स्टोर

[520:24]

होना है हो सकता है कि कहीं पर सीजीपीए की

[520:26]

जगह परसेंटेज स्टोर हो हर स्टूडेंट के लिए

[520:28]

पेरेंट्स का नाम स्टोर हो सकता है हर

[520:30]

स्टूडेंट के लिए उनका आधार आईडी स्टोर हो

[520:32]

सकता है मतलब सारी इंफॉर्मेशन कॉमन रहेगी

[520:35]

तो बार-बार सेम तरीके के वेरिएबल बनाने से

[520:38]

अच्छा है कि अच्छी मैनेजमेंट करें डेटा

[520:40]

मैनेजमेंट भी एक बहुत इंपॉर्टेंट कोर

[520:42]

कांसेप्ट होता है जब हम प्रोग्रामिंग करते

[520:44]

हैं तो अच्छे तरीके से डाटा को कैसे मैनेज

[520:46]

करना है सेम तरीके की इंफॉर्मेशन है तो

[520:49]

उसके लिए सेम डेटा टाइप बना दो जो हम

[520:51]

स्ट्रक्चर की हेल्प से बनाते हैं इसीलिए

[520:53]

सारा जो डाटा होता है ना वो स्ट्रक्चर्ड

[520:55]

फॉर्मेट में हमारे पास आ जाता है नेक्स्ट

[520:57]

अगर बात करें तो नेक्स्ट पढ़ेंगे हम एरे

[520:59]

ऑफ स्ट्रक्चर्स अब हमने पढ़ा था कि हम

[521:02]

इंटी जर्स का एरे बना सकते हैं जैसे

[521:04]

स्टूडेंट्स के हमें रोल नंबर स्टोर करने

[521:06]

हैं तो 100 स्टूडेंट्स के लिए हमने एक एरे

[521:08]

बना लिया स्टूडेंट्स रोल नंबर वैसे ही हम

[521:11]

फ्लोट में अगर प्राइस स्टोर करना चाहते

[521:13]

हैं तो आगे लिख देंगे फ्लोट फिर प्राइस

[521:16]

फिर 100 आइटम्स का प्राइस तो यहां पे पहले

[521:19]

हम डेटा टाइप लिखते हैं फिर वेरिएबल का

[521:22]

नाम और फिर क्वांटिटी पहले डेटा टाइप फिर

[521:24]

वेरिएबल का नाम फिर क्वांटिटी वैसा ही

[521:27]

स्ट्रक्चर्स में होता है स्ट्रक्चर्स के

[521:28]

भी हम ऐसे ही अरेज बना सकते हैं पहले डेटा

[521:30]

टाइप यानी हमारा स्ट्रक्चर स्टूडेंट फिर

[521:33]

वेरिएबल का नाम और फिर उसके बाद क्वांटिटी

[521:35]

पहले डटा टाइप फिर वेरिएबल का नाम फिर

[521:38]

क्वांटिटी तो यहां पे हमने जो एरे ऑफ

[521:40]

स्ट्रक्चर्स डिक्लेयर किया है उसको अगर

[521:42]

समझने निकले तो सबसे पहले तो हमने डेटा

[521:44]

टाइप बता दिया कि स्ट्रक्चर स्टूडेंट है

[521:46]

तीनों अरेज का डेटा टाइप फिर हमने लिया है

[521:49]

ईसी तो यहां पे इलेक्ट्रॉनिक्स के 100

[521:51]

बच्चों की इंफॉर्मेशन स्टोर कराएंगे

[521:53]

स्ट्रक्चर के अंदर तो हमने नंबर दे दिया

[521:55]

है 100 फिर सीओई के 100 बच्चों की

[521:57]

इंफॉर्मेशन स्टोर कराएंगे फिर आईटी के 100

[521:59]

बच्चों की इंफॉर्मेशन स्टोर कराएंगे तो ये

[522:01]

तीन अलग-अलग एरे हो गए अब स्टूडेंट तो

[522:04]

एजिस्ट करते थे ही स्टूडेंट स्ट्रक्चर

[522:05]

हमने ऑलरेडी बना लिया अब यहां पे हम चाहते

[522:08]

हैं कि ईसी के जो 100 बच्चे हैं सीओई

[522:10]

कंप्यूटर साइंस के जो 100 बच्चे हैं और

[522:11]

आईटी के जो 100 बच्चे हैं इनके लिए

[522:13]

अलग-अलग इंफॉर्मेशन स्टोर हो तो आप इनके

[522:15]

लिए अब अलग-अलग एरिज बना लेंगे और एक्सेस

[522:18]

कैसे करेंगे एक्सेस इस फॉर्मेट में करेंगे

[522:20]

कि पहले एरे का नाम लिखना है फिर इंडेक्स

[522:23]

लिखना है फिर डॉट रोल नंबर तो इससे क्या

[522:26]

होगा कि हमने मेमोरी के अंदर अपने 100

[522:30]

स्ट्रक्चर्स बना लिए इसमें यह है हमारा

[522:34]

ईईसीई का रोए स्टूडेंट ये ईसी का फर्स्ट

[522:39]

स्टूडेंट ये ईसी का सेकंड स्टूडेंट एंड सो

[522:42]

ऑन इस स्टूडेंट के अंदर अपने पास अपना एक

[522:46]

नाम एक रोल नंबर और एक सीजीपीए स्टूडेंट

[522:49]

के पास भी अपना एक नाम एक रोल नंबर और एक

[522:53]

सीजीपीए एंड सेम थ्री इंफॉर्मेशन फॉर दिस

[522:56]

स्टूडेंट हर स्टूडेंट के पास अपनी एक

[522:58]

इंडिविजुअल इंफॉर्मेशन है और इस

[523:00]

इंफॉर्मेशन को अगर मान लीजिए इस स्टूडेंट

[523:02]

के ईसी 0 ए स्टूडेंट के हम रोल नंबर को

[523:04]

एक्सेस करना चाहते हैं तो क्या लिखेंगे

[523:07]

ईसी ऑफ 0 डट रोल नंबर अब इसको रोल नंबर

[523:11]

असाइन करना चाहते हैं जो चाहे मान लीजिए

[523:13]

1664 असाइन कर दिया तो वह असाइनमेंट इस

[523:16]

तरीके से पॉसिबल है तो हम सबसे पहले अपने

[523:19]

एरे का नाम लिखेंगे फिर इंडेक्स लिखेंगे

[523:21]

उसके बाद डॉट लगाकर हम लिखेंगे अपनी उस

[523:25]

प्रॉपर्टी का नाम जिसको हम एक्सेस करना

[523:26]

चाहते हैं वैसे ही आई0 रोल नंबर एंड आई0

[523:30]

सीजीपीए अब एक्चुअली एक एरे ऑफ स्टूडेंट्स

[523:32]

बनाकर देखते हैं पुराने वाले कोड को हटा

[523:35]

लेते हैं तो स्ट्रक्चर स्टूडेंट हमने

[523:37]

ऑलरेडी बनाया हुआ है यहां लिखते हैं

[523:39]

स्ट्रक्ट स्टूडेंट अब एरे का नाम हम देने

[523:41]

वाले हैं ईसी ईसी के अंदर हमारे पास 100

[523:44]

बच्चे हैं तो ईसी के रोत बच्चे का अगर

[523:48]

हमें रोल नंबर स्टोर कराना है तो उसको

[523:50]

लिखेंगे 1664 ईसी के इसी बच्चे का अगर

[523:54]

हमें सीजीपीए स्टोर कराना है सीजीपीए तो

[523:58]

इसको हम लिख देंगे 99.2 और इसी बच्चे का

[524:01]

अगर हमें नाम स्टोर कराना है तो फिर से

[524:03]

एटीआर सीपीवाई सबसे पहले लिखेंगे

[524:07]

0 नेम एंड फिर लिखेंगे अपना नाम अब इसी

[524:11]

इंफॉर्मेशन को प्रिंट भी करा सकते हैं

[524:13]

प्रिंट एफ की फॉर्म में सबसे पहले लिखेंगे

[524:15]

नेम परसेंटेज एस अभी सिर्फ नेम प्रिंट

[524:18]

करवा लेते हैं आप फर्स्ट टाइम कोड लिख रहे

[524:20]

हैं तो आपको तीनों प्रिंट करवाने हैं डॉट

[524:22]

नेम एंड इसको कर लेंगे एक बार रन

[524:25]

तो नाम हमारे पास यहां पर प्रिंट होके आ

[524:27]

गया है सिंटेक्स क्या आ रहा नॉर्मल पहले

[524:30]

डटा टाइप लिखना है फिर वेरिएबल का नाम

[524:32]

लिखना है एरे का नाम और फिर एरे का साइज

[524:34]

और उसमें वही इंडेक्स वाले फॉर्मेट से ही

[524:37]

वैल्यूज को एक्सेस करना है जब भी वैल्यूज

[524:39]

असाइन कर रहे हैं या वैल्यूज प्रिंट करवा

[524:41]

रहे हैं या यूज़ कर रहे हैं नेक्स्ट बात

[524:42]

कर लेते हैं इनिशियल इजेशन ऑफ स्ट्रक्चर्स

[524:44]

की अभी तक हमने क्या किया हमने एक

[524:47]

स्ट्रक्चर को डिक्लेयर कर दिया फिर उसका

[524:49]

एक वेरिएबल बना लिया फिर वेरिएबल की

[524:50]

प्रॉपर्टीज को एक-एक करके एक-एक करके हम

[524:52]

असाइन करते हैं लेकिन हम बार बार डॉट

[524:55]

ऑपरेटर यूज़ करने की जगह एक साथ सारी

[524:57]

प्रॉपर्टीज को भी असाइन कर सकते हैं इसको

[524:59]

कहते हैं इनिश इजिंग स्ट्रक्चर्स तो

[525:01]

स्ट्रक्चर्स को किस फॉर्मेट में इनिश इज

[525:03]

करते हैं सबसे पहले अपने स्ट्रक्चर का नाम

[525:04]

लिख देंगे यानी डेटा टाइप उसके बाद अपने

[525:06]

वेरिएबल का नाम और राइट साइड के अंदर लिख

[525:09]

देंगे अपनी तीनों वैल्यूज को जैसे नाम

[525:11]

लिखना है तो नाम पहले लिख दिया उसके बाद

[525:13]

रोल नंबर उसके बाद हमारा सीजीपीए स्टूडेंट

[525:16]

s2 की बात करें तो उसके लिए भी नाम पहले

[525:18]

लिख दिया फिर रोल नंबर फिर सीजीपीए अब अगर

[525:21]

हम राइट साइड में पैरेंस के अंदर रो लिख

[525:24]

देते हैं तो इसका मतलब होता है कि तीनों

[525:26]

वैल्यूज जो होंगी s3 के लिए वो नल वैल्यूज

[525:28]

होंगी मतलब ज़ीरो सब में चला जाएगा

[525:30]

ऑटोमेटिक तो यहां पे हम डिक्लेयर कर रहे

[525:32]

हैं पर ऑटोमेटिक ज़ीरो उनको असाइन हो

[525:35]

जाएगा तो एक सिंगल लाइन में इनिश इज करने

[525:37]

का फायदा यह होता है कि आपको चार डिफरेंट

[525:38]

लाइंस नहीं लिखनी पड़ती पहले आप क्या करते

[525:41]

s1 को डिक्लेयर करते फिर s1 रोल नंबर

[525:43]

बनाते फिर s1 सीजीपीए बनाते पर अब हम ये

[525:47]

सारे के सारे काम सिंगल लाइन में कर पा

[525:49]

रहे हैं एक बार इसको करके भी देख लेते हैं

[525:51]

इसको कर लेते हैं डिलीट एंड स्ट्रक्ट

[525:55]

स्टूडेंट s1 इ इक्व ट सबसे पहले रोल नंबर

[525:58]

लिख लेते हैं 1664 मैं उसी फॉर्मेट में जा

[526:01]

रही हूं जिस फॉर्मेट में स्ट्रक्चर के

[526:03]

अंदर मैंने पैरामीटर्स को डिफाइन किया है

[526:05]

और मैं यही सजेस्ट करती हूं कि जब भी आप

[526:07]

जैसे चीजों को डिक्लेयर करते हैं ना हमेशा

[526:09]

उसी ऑर्डर में जाना चाहिए जिससे अगर कोई

[526:11]

नया इंसान आके आपका कोड पढ़ रहा है ना कोई

[526:13]

दूसरा प्रोग्रामर तो दिस इज़ अ वेरी गुड

[526:15]

प्रोग्रामिंग हैबिट कि जिस ऑर्डर में आप

[526:17]

चीजें डिक्लेयर करते हैं उसी ऑर्डर में

[526:19]

उनको वैल्यूज असाइन करें ताकि देखने में

[526:21]

सिस्टमिक लगे अच्छा हां सबसे पहले रोल

[526:23]

नंबर लिखा है तो यह रोल नंबर ही होगा उसके

[526:25]

बाद सीजीपीए लिखना है तो सीजीपीए हम अपनी

[526:28]

लिख लेते हैं एंड उसके बाद नाम लिख लेते

[526:30]

हैं और इसको कर देते हैं सेव अब वैल्यूज

[526:33]

को हम पहले की तरह एक्सेस कर पाएंगे जैसे

[526:34]

अगर मैं प्रिंट एफ करना चाहूं स्टूडेंट का

[526:37]

रोल नंबर परसेंटेज डी से तो यहां पे हम

[526:40]

लिख सकते हैं s1 डॉट रोल नंबर इसको कर

[526:43]

लेते हैं सेव एंड

[526:45]

रन तो ये क्या हो रहा है नॉर्मली रन कर

[526:48]

रहा है यानी पहले की तरह तो सिंगल लाइन के

[526:50]

अंदर हमने अपना जो है स्ट्रक्चर का

[526:52]

वेरिएबल बनाया और उसके अंदर वैल्यूज असाइन

[526:54]

कर दी एंड उसके बाद नेक्स्ट लाइन में उन

[526:56]

वैल्यूज को हमने यूज़ कर लिया तो इसी

[526:58]

तरीके से अगर आपको पहले से ही पता है सारी

[527:00]

की सारी वैल्यूज एक स्ट्रक्चर के लिए तो

[527:01]

एक ही गो में उसको असाइन करना सबसे बढ़िया

[527:03]

होता है नेक्स्ट बात करते हैं पॉइंट्स टू

[527:05]

स्ट्रक्चर्स जैसे हमारे पॉइंट्स टू एरे

[527:08]

होते हैं पॉइंट्स टू स्ट्रिंग्स होते हैं

[527:09]

पॉइंट्स टू कैरेक्टर्स होते हैं हर एक

[527:12]

वेरिएबल के लिए हम पॉइंटर बना सकते हैं

[527:13]

वैसे ही एक स्ट्रक्चर के लिए भी हम एक

[527:16]

पॉइंटर बना सकते हैं क्योंकि अल्टीमेटली

[527:18]

स्ट्रक्चर भी एक डेटा टाइप ही है अगर हमने

[527:20]

एक स्ट्रक्चर टाइप का वेरिएबल डिक्लेयर

[527:22]

किया है s1 तो उसके लिए पॉइंटर केसे

[527:24]

डिक्लेयर करेंगे पॉइंटर डिक्लेयर करने के

[527:26]

लिए सबसे पहले तो टाइप हमें लिखना पड़ता

[527:28]

है जैसे हम लिखते हैं इंट स्टार पीटीआर और

[527:32]

ऊपर हमने लिखा इंट a और फिर हम लिखते हैं

[527:36]

पीटीआर = m पर a वही सेम फॉर्मेट रहेगा बस

[527:40]

यहां पे इंट की जगह आ जाएगा स्ट्रक्ट

[527:42]

स्टूडेंट फिर हमारा स्टार पीटीआर और

[527:45]

पीटीआर के अंदर हम असाइन कर देंगे m पर

[527:47]

यानी एड्रेस ऑफ s1 तो सारा का सारा

[527:49]

फॉर्मेट वही रखना है बस डेटा टाइप में इंट

[527:52]

फ्लोट कैर उनकी जगह हमें डेटा टाइप रखना

[527:55]

है स्ट्रक्ट स्टूडेंट जिससे हम बता सकें

[527:57]

कि ये स्ट्रक्चर का पॉइंटर है इसको भी एक

[528:00]

बार करके देख लेते हैं हमने ऊपर जो

[528:02]

स्टूडेंट बनाया है s1 उसके लिए एक पॉइंटर

[528:04]

बनाते हैं स्ट्रक्ट स्टूडेंट स्टार पीटीआर

[528:08]

और इस पीटीआर के अंदर असाइन कर देते हैं

[528:11]

एड्रेस ऑफ s1 अब अगर हमें ये सेम रोल नंबर

[528:14]

प्रिंट करवाना है तो सेम रोल नंबर कैसे

[528:16]

प्रिंट करवाएंगे पहले तो हमने s1 रोल लिख

[528:19]

दिया था अब हम पॉइंटर की हेल्प से प्रिंट

[528:22]

करवाना चाहते हैं तो स्टार पॉइंटर हमें

[528:24]

क्या देगा यहां पे स्टार पॉइंटर हमें

[528:26]

पॉइंटर की वैल्यू दे देता है जैसे अगर

[528:28]

मैंने यहां पे स्टार पॉइंटर लिख दिया

[528:30]

एस्टरिस पॉइंटर या वैल्यू एट एड्रेस ऑफ

[528:33]

पॉइंटर तो ये जो वैल्यू है ये है वैल्यू

[528:36]

पूरे के पूरे s1 की यानी अभी मैं इसकी तरफ

[528:39]

पॉइंट करवा रही हूं पर मुझे पर्टिकुलर

[528:41]

सिर्फ रोल नंबर ही चाहिए तो स्टार पॉइंटर

[528:44]

से मेरे पास पूरा s1 आ गया अब मैं इसके

[528:46]

सामने डॉट रोल लगाकर इसका रोल नंबर ले

[528:49]

आऊंगी आई होप ये चीज हमें क्लियर होगी कि

[528:51]

स्टार पॉइंटर से हम पूरे के पूरे s1 पे पे

[528:54]

पॉइंट करवा रहे हैं और जब डॉट रोल कर रहे

[528:57]

हैं तो हमारे पास पूरा रोल नंबर आ रहा है

[528:59]

तो ये है हमारा पूरा का पूरा वेरिएबल और

[529:02]

यह है सिर्फ एक सिंगल पैरामीटर को

[529:04]

डिस्प्ले कराने का तरीका अब इसको सेव करके

[529:06]

रन करवाते हैं तो फर्स्ट टाइम जो रोल नंबर

[529:09]

हमारे लिए प्रिंट हुआ था स्टूडेंट का

[529:11]

सेकंड टाइम भी सेम वैल्यू हमारे लिए

[529:13]

प्रिंट हुई पर इस बार हमने प्रिंट करवाया

[529:14]

पॉइंट्स की हेल्प से एक छोटा सा मैं चेंज

[529:17]

करके देखती हूं ये अगर आप मेरी स्क्रीन को

[529:19]

देखकर कोड लिख रहे होंगे ना तो हो सकता है

[529:21]

आप में से काफी सारे स्टूडेंट्स ये

[529:22]

मिस्टेक कर दें हम क्या मिस्टेक कर देते

[529:24]

हैं हम यहां पर यह जो पैरेंस है ना इसको

[529:27]

लगा देते हैं स्टार के बाद यानी कुछ इस

[529:29]

तरीके से हम चीज़ कर देते हैं कि पैरेंस

[529:32]

यहां आ गया और यहां आ गया यह क्या देता है

[529:34]

यह हमें एरर देता है क्योंकि स्टार को

[529:36]

हमेशा पॉइंटर के साथ रखना है क्योंकि अब

[529:38]

क्या हो रहा है यह पॉइंटर डॉट रोल ले रहा

[529:41]

है और उसके बाद उसमें स्टार ऑपरेटर लगा

[529:43]

रहा है पर हमें पहले स्टार ऑपरेटर लगाना

[529:45]

है पॉइंटर के साथ और फिर हमें डॉट रोल

[529:48]

नंबर उसका लेना है तो यह फॉर्मेट हमेशा

[529:51]

याद रखना है कि जब भी स्टार पॉइंटर हो

[529:53]

स्ट्रक्चर्स के लिए मतलब ऐसा पॉइंटर हो जो

[529:55]

स्ट्रक्चर की तरफ पॉइंट कर रहा है तो उसको

[529:57]

पहले पेंसिस में डालना है फिर हमें डॉट

[529:59]

ऑपरेटर का इस्तेमाल करना है नेक्स्ट देख

[530:01]

लेते हैं अपना एक एरो ऑपरेटर अभी तक हमने

[530:04]

जो स्ट्रक्चर्स की बात की है तो

[530:06]

स्ट्रक्चर्स के अंदर हम क्या करते हैं s1

[530:09]

रोल नंबर या s1 नेम और अगर यही फॉर्मेट

[530:13]

हमें पॉइंटर में लिखना है तो लिखेंगे

[530:15]

स्टार पीटीआर डॉट रोल नंबर या फिर लिखेंगे

[530:18]

स्टार पीटीआर ड नेम पर अगर हम यह वाला

[530:22]

पॉइंटर वाला फॉर्मेट फॉलो करते हैं ना तो

[530:24]

यह बहुत ज्यादा कॉम्प्लेक्शन आ जाता है तो

[530:26]

इस डॉट फॉर्मेट की जगह हम एरो ऑपरेटर का

[530:29]

इस्तेमाल कर सकते हैं यानी अगर हमने कहीं

[530:32]

पर लिखा है स्टार पीटीआर ड कोड तो उसको हम

[530:35]

चेंज कर सकते हैं टू पीटीआर एरो कोड ये

[530:38]

एरो कैसे लिखना है आपकी स्क्रीन पे आएगा

[530:40]

हाइ फन और ग्रेटर दन का ऑपरेटर तो ये अपने

[530:43]

आप में एक एरो फॉर्म करता है तो जब भी आप

[530:46]

ये एरो बीच में लिख देते हैं ना तो इस

[530:49]

सिंटेक्स को आप इस सिंटेक्स में कन्वर्ट

[530:51]

कर देते हैं और एरो ऑपरेटर वाला जो

[530:53]

सिंटेक्स है वो बहुत ही आसान होता है जैसे

[530:56]

पॉइंट्स में आप यूज कर रहे हैं तो कभी-कभी

[530:58]

एस्टरिस को देख के ना लोग कंफ्यूज हो जाते

[531:00]

हैं कि स्टार किसके साथ जुड़ा हुआ है कौन

[531:01]

सी वैल्यू की हम बात कर रहे हैं पर यहां

[531:03]

से बहुत क्लियर हम देख पा रहे हैं कि

[531:05]

पॉइंटर जिस वैल्यू को पॉइंट कर रहा है

[531:07]

उसमें से आप कोड मुझे लाकर दे दो तो स्टार

[531:09]

किसके साथ असाइन करना है पेंसिस कहां पे

[531:11]

लगाने हैं वो वाली प्रॉब्लम हमारी सॉल्व

[531:14]

हो जाती है और सिंपली हम सिर्फ एक एरो को

[531:16]

लगा पाते हैं इसको भी करके देख लेते हैं

[531:18]

अभी हमने क्या किया था पॉइंटर डॉट रोल

[531:21]

प्रिंट करवाया था यही सेम लाइन कॉपी कर

[531:24]

लेते हैं और पेस्ट कर लेते हैं ये है

[531:26]

हमारा स्टूडेंट डॉट रोल विद पॉइंटर अब हम

[531:31]

प्रिंट करवाएंगे स्टूडेंट एरो रोल इसको

[531:34]

करवाने के लिए यहां पर लिखेंगे पीटीआर एरो

[531:37]

यानी हाइन और ग्रेटर दन का साइन और उसके

[531:39]

बाद लिखेंगे रोल नंबर तो उसको कर लेते हैं

[531:42]

सेव एंड रन तो डॉट रोल नंबर किया तो सेम

[531:46]

वैल्यू प्रिंट हुई पॉइंट्स के साथ भी सेम

[531:48]

और जब एरो ऑपरेटर का इस्तेमाल किया तब भी

[531:50]

हमारे पास सेम वैल्यू प्रिंट होकर आ गई है

[531:52]

अपना नाम और अपना सीजी भी इस एरो ऑपरेटर

[531:56]

से हम प्रिंट करवाने वाले हैं ताकि अच्छे

[531:58]

से जो है चीज दिमाग के अंदर बैठ जाए यहां

[532:01]

पर लिखेंगे नेम नेम परसेंटेज एस और यहां

[532:05]

लिखेंगे अपना

[532:08]

सीजीपीए तो अब हमारे पास रोल नंबर भी आ

[532:10]

गया नेम भी आ गया अपना सीजीपी भी आ गया तो

[532:13]

जब भी पॉइंट्स का इस्तेमाल कर रहे हैं तो

[532:15]

सजेशन ये रहता है आपके लिए कि सिंपलीसिटी

[532:17]

के लिए कोड में कि रीड करने वाले को भी

[532:19]

आसानी हो आपको भी आसानी हो अगली बार पढ़

[532:21]

रहे हैं तो कि आप एरो ऑपरेटर का इस्तेमाल

[532:23]

कर ले वरना आप नॉर्मल अगर स्ट्रक्चर का

[532:26]

वेरिएबल बना रहे हैं तो फिर डॉट ऑपरेटर इज

[532:28]

आल्सो फाइन ये अलग-अलग चीजें ना प्रेफरेंस

[532:30]

दे देती है मतलब चॉइस दे देती हैं

[532:32]

प्रोग्रामर को कि आप अपनी मर्जी से अपने

[532:34]

हिसाब से जो आपका मन करे उस फॉर्मेट में

[532:36]

आप अपना कोड लिख पाए तो चॉइस होने से क्या

[532:39]

होता है तो दो-तीन फॉर्मेट दिख जाते हैं

[532:41]

ना तो एक प्रोग्रामर को लगता है मुझे तो

[532:43]

यार ये डॉट वाला सिंपल लग रहा है या मुझे

[532:45]

तो पॉइंटर का एस्ट रिस्क वाला बढ़िया लग

[532:47]

रहा है या मुझे तो एरो वाला सबसे बढ़िया

[532:49]

लग रहा है मुझे तो ये इस्तेमाल करना है तो

[532:51]

थोड़ा पर्सनलाइजेशन वाली फीलिंग आने लगती

[532:53]

है अपने कोड में कि हां हमने अपनी मर्जी

[532:55]

से जो है सिंटेक्स थोड़ा सा चूज किया है

[532:57]

नेक्स्ट बात करते हैं पासिंग स्ट्रक्चर्स

[532:59]

टू फंक्शन जिस तरीके से हम अलग-अलग डेटा

[533:02]

टाइप्स के वेरिएबल को पास कर सकते हैं

[533:04]

वैसे हम स्ट्रक्चर्स के वेरिएबल को भी पास

[533:06]

कर सकते हैं एक फंक्शन के पास जैसे हम एक

[533:09]

इंटी जर टाइप का a इंटी जर टाइप का बी जो

[533:11]

नंबर है वो एक फंक्शन को पास कर देते थे

[533:13]

वैसे ही हम यहां पे स्ट्रक्चर्स के जो

[533:15]

वेरिएबल बनाते हैं स्टूडेंट वन स्टूडेंट

[533:17]

टू स्टूडेंट थ्री उनको भी हम अपने फंक्शंस

[533:19]

के अंदर पास कर सकते हैं जैसे जिन फंक्शंस

[533:22]

के पैरामीटर्स के अंदर एक एक स्ट्रक्चर

[533:24]

आता है उनको किस तरीके से लिखते हैं

[533:26]

नॉर्मली फंक्शन का टाइप लिखते हैं यानी

[533:28]

रिटर्न टाइप और उसके बाद फंक्शन का नाम और

[533:31]

अगर उसके अंदर पैरामीटर स्ट्रक्चर आना है

[533:33]

तो सबसे पहले टाइप लिखेंगे जैसे हम लिखते

[533:35]

थे इंट a तो यहां पर इंट की जगह आ जाएगा

[533:37]

स्ट्रक्ट स्टूडेंट और a की जगह यानी

[533:39]

वेरिएबल के नाम में आ जाएगा हमारे पास s1

[533:42]

तो अगर पास ऑन करना है फंक्शन को पैरामीटर

[533:44]

मान लीजिए हमने कोई स्ट्रक्ट स्टूडेंट

[533:47]

बनाया s1 नाम से मेन फंक्शन के अंदर तो अब

[533:51]

मुझे कॉल करना है अगर प्रिंट इंफो तो

[533:53]

प्रिंट इंफो के अंदर आई कैन सिंपली राइट

[533:55]

s1 जिससे s1 मेरा इस फंक्शन के पास चला

[533:59]

जाएगा तो अब एक फंक्शन लिख लेते हैं इसी

[534:01]

सेम चीज को करने के लिए यहां पर लिखेंगे

[534:03]

वॉइड प्रिंट इंफो और फिर लिखेंगे टाइप

[534:07]

स्ट्रक्ट स्टूडेंट s1 अब अगर ये सेम लाइन

[534:11]

हम यहां पर लिखने की बजाय ऊपर लिख देते और

[534:14]

इसको सेव करवाते तो हमारे पास एरर आ जाता

[534:17]

एरर इसलिए आता क्योंकि स्टूडेंट को अभी

[534:19]

हमने डिफाइन नहीं किया कंपाइलर क्या करता

[534:21]

है ऊपर से लाइन बाय लाइन शुरू करता है

[534:23]

पहले उसने ये लाइन रीड कर यह लाइन रीड करी

[534:25]

फिर यह लाइन रीड करी यहां पे वो कंफ्यूज

[534:27]

हो गया कि इंटी जर फ्लोट कैरेक्टर तो मुझे

[534:29]

पता था यह स्ट्रक्ट स्टूडेंट क्या है अभी

[534:32]

तक क्योंकि उसने स्ट्र स्टूडेंट को पढ़ा

[534:34]

नहीं है इसीलिए पहले जो स्ट्रक्चर

[534:36]

डिक्लेयर कर दिया ना उसी के बाद उसको हम

[534:38]

यूज कर सकते हैं दूसरे डिफरेंट फंक्शंस

[534:39]

में या इनफैक्ट अपने मेन फंक्शन के अंदर

[534:41]

भी अब यहां पे हमने अपने फंक्शन को कर

[534:44]

दिया है डिक्लेयर यहां पे उसको डिफाइन कर

[534:47]

लेते हैं इस फंक्शन के अंदर हम प्रिंट

[534:49]

करवाने वाले हैं अपने तीनों वैल्यूज को तो

[534:52]

स्टूडेंट की अगर इंफॉर्मेशन कभी प्रिंट

[534:54]

करवानी है तो इस फंक्शन को कॉल करेंगे

[534:56]

यहां पे एक और प्रिंट एफ स्टेटमेंट लिख

[534:58]

देते हैं ऊपर स्टूडेंट इंफॉर्मेशन

[535:00]

इस बार हम डॉट ऑपरेटर का इस्तेमाल करेंगे

[535:04]

एरो ऑपरेटर को यूज़ नहीं कर रहे होंगे

[535:06]

यहां लिख देते हैं डॉट रोल नंबर s1 . नेम

[535:09]

और हमारा s1

[535:15]

cp1 के लिए इस प्रिंट इंफो फंक्शन को कॉल

[535:19]

लगाते हैं यहां पर हमने s1 ऑलरेडी एक

[535:21]

क्रिएट कर रखा है अब कॉल लगाएंगे प्रिंट

[535:24]

इंफो को उसमें पास कर देंगे अपना s1 तो

[535:28]

यहां पे s1 को हमने एज आर्गुमेंट पास किया

[535:31]

और इसके अंदर इस s1 के अंदर हमारा जो

[535:34]

आर्गुमेंट है वो कॉपी होकर जाएगा

[535:36]

स्ट्रक्चर्स जो है वो कॉल बाय वैल्यू से

[535:38]

जाते हैं मतलब यहां पर हमने जो स्ट्रक्चर

[535:40]

बनाया है वो यहां पर नहीं है ये s1 एक

[535:43]

दूसरा स्ट्रक्चर है जिसमें हमारे

[535:45]

आर्गुमेंट की एक कॉपी बन रही होगी तो जब

[535:48]

हमने प्रिंट इंफो कॉल किया तो मेमोरी के

[535:50]

अंदर दो स्ट्रक्चर एजिस्ट करेंगे जिन

[535:52]

दोनों का नाम s1 होगा तो इसको कर लेते हैं

[535:54]

सेव और इसको करते हैं अब

[535:56]

रन तो यह स्टूडेंट की पूरी इंफॉर्मेशन

[535:58]

हमारे पास प्रिंट होकर आ गई है अब कॉल बाय

[536:01]

वैल्यू हो गया है कॉल बाय रेफरेंस उसको भी

[536:03]

एक बार हल्का सा चेक कर लेते हैं s1 की

[536:06]

वैल्यू को यानी इसके रोल नंबर को चेंज

[536:08]

करके हम यहां पे इसको कर लेते हैं 1660

[536:12]

पहले 1664 था अब हमने 1660 कर दिया और इस

[536:16]

रोल नंबर को अब मेन फंक्शन के अंदर प्रिंट

[536:18]

करवा देते हैं फंक्शन कॉल के बाद तो क्या

[536:21]

हुआ मेन फंक्शन ने जो रोल नंबर प्रिंट

[536:23]

करवाया वो 1664 ही है ओरिजिनल ही है चेंज

[536:26]

नहीं हुआ क्यों क्योंकि स्ट्रक्चर्स पास

[536:27]

हुए हैं कॉल बाय वैल्यू से वहीं पर अगर ये

[536:30]

वाला जो चेंज है ये हम इस लाइन से पहले

[536:32]

मेन फंक्शन के अंदर ही कर देते तो उस केस

[536:34]

में हमारे पास जो रोल नंबर प्रिंट होकर

[536:36]

आता वो होता 1660 तो मेन फंक्शन के अंदर

[536:39]

चेंज हो सकता है पर दूसरे स्ट्रक्चर की

[536:41]

वैल्यू को चेंज नहीं कर सकता क्योंकि वहां

[536:43]

पर जो पैरामीटर है वो ओरिजिनल आर्गुमेंट

[536:45]

की कॉपी है नेक्स्ट जिस टॉपिक की हम बात

[536:47]

करेंगे उसमें पढ़ने वाले हैं टाइप डेफ

[536:49]

कीवर्ड को अभी तक बहुत सारे हमने कीवर्ड्स

[536:51]

पढ़ लिए हैं केस कीवर्ड पढ़ लिया है इंट

[536:54]

हमारा एक कीवर्ड है फ्लोट एक कीवर्ड है

[536:56]

उसके अलावा स्विच एक कीवर्ड है ब्रेक एक

[536:59]

कीवर्ड है कंटिन्यू एक कीवर्ड है वैसे ही

[537:02]

एक और कीवर्ड होता है सी के अंदर जिसका

[537:04]

नाम है टाइप डेफ टाइप डेफ का काम होता है

[537:06]

टू क्रिएट एन एलियस फॉर डेटा टाइप्स अब

[537:09]

जैसे घर में हमारा जो नाम जिस नाम से हमें

[537:12]

पुकारा जाता है शायद ही वह हमारा असली नाम

[537:15]

हो हर किसी का अपना एक कोई निकनेम होता है

[537:17]

जैसे मान लीजिए आपका दोस्त है कोई सुरेश

[537:20]

और उसका निकनेम है चिंटू अब उसको हम चिंटू

[537:22]

के नाम से बुलाना ज जदा पसंद करेंगे

[537:24]

ज्यादा वो यूसेज रहेगा उसके नाम का राद

[537:27]

देन कि हम उसको उसके ऑफिशियल पूरे नाम से

[537:30]

बुलाए तो वैसे ही काम होता है हमारे टाइप

[537:33]

डेफ का टाइप डेफ का काम है निक नेम्स

[537:35]

क्रिएट कर देना निक नेम्स यानी एलियस जब

[537:38]

एक व्यक्ति के लिए जो स्पाइज होते हैं ना

[537:40]

जैसे जेम्स बॉन्ड आपने देखी होगी तो जेम्स

[537:42]

बॉन्ड का जो एलियस है वो 007 है या फिर

[537:46]

जेम्स बॉन्ड पता भी नहीं है कि उसका असली

[537:48]

नाम है या नहीं तो जितने भी जो मूवी के

[537:49]

एक्टर्स आए जिन्होंने वो रोल जो प्ले किया

[537:52]

है उन सबका नाम जेम्स बॉन्ड है तो मान स

[537:54]

सकते हैं कि जेम्स बॉन्ड एक एलियस की तरह

[537:55]

है यानी वो उस कैरेक्टर के लिए एक निकनेम

[537:58]

है जरूरी नहीं है वो उसका असली नाम है तो

[538:01]

एलियस क्या होते हैं एलियस एक अल्टरनेटिव

[538:03]

एक अलग एक डिफरेंट नाम होता है जिससे हम

[538:06]

उसी चीज को बुलाते हैं तो अगर हमें अपने

[538:09]

डेटा टाइप्स के लिए एलियस क्रिएट करना

[538:10]

होता है तो हम यूज़ करते हैं अपने टाइप

[538:12]

डेफ कीवर्ड का अब ये एलियस हम अपने इंटी

[538:15]

जर डाटा टाइप के लिए भी क्रिएट कर सकते

[538:17]

हैं फ्लोट के लिए भी कर सकते हैं अपने केर

[538:19]

के लिए भी कर सकते हैं पर ये ना ऑलरेडी

[538:22]

छोटे डाटा टाइप्स हैं इनके लिए और छोटे का

[538:24]

वेरिएबल हम क्या ही क्रिएट कर सकते हैं

[538:25]

ज्यादा से ज्यादा हम क्या कर देंगे

[538:27]

कैरेक्टर को सीच के नाम से बुलाने लग

[538:29]

जाएंगे फ्लोट को एफएल के नाम से बुलाने लग

[538:31]

जाएंगे इंट को आई के नाम से बुलाने लग

[538:33]

जाएंगे पर बुलाना नहीं चाहिए क्योंकि आई

[538:35]

ऑलरेडी हम काफी ज्यादा लूप्स में इस्तेमाल

[538:37]

कर लेते हैं पर इनका असली यूसेज यानी टाइप

[538:41]

डेफ का असली यूसेज आता है जब हम

[538:42]

स्ट्रक्चर्स की बात करते हैं क्योंकि

[538:44]

स्ट्रक्चर को तो आप कुछ भी नाम दे सकते

[538:46]

हैं जैसे यहां पर मैंने एग्जांपल लिया है

[538:48]

कि हमने एक स्ट्रक्चर बनाया इसको हमने नाम

[538:51]

दे दिया कंप्यूटर इंजीनियरिंग स्टूडेंट पर

[538:53]

हर बार जब भी हम स्ट्रक्चर का वेरिएबल

[538:55]

डिक्लेयर करेंगे उसको हम कंप्यूटर

[538:56]

इंजीनियरिंग स्टूडेंट नहीं लिखना चाहते

[538:59]

इसीलिए कंप्यूटर इंजीनियरिंग स्टूडेंट की

[539:01]

जगह मतलब हर बार मैं लिखूं स्ट्रक्ट

[539:04]

कंप्यूटर इंजीनियरिंग स्टूडेंट उसकी जगह

[539:07]

मैं एक सिंपल नाम जाती हूं तो व सिंपल नाम

[539:09]

मैंने ले लिया सीओई सीओई में स्टूडेंट s1

[539:13]

और इस सीओई का मतलब है कंप्यूटर

[539:15]

इंजीनियरिंग स्टूडेंट नाम का स्ट्रक्चर तो

[539:17]

यह चीज कैसे पॉसिबल हो पाएगी यह पॉसिबल हो

[539:19]

पाएगी टाइप डेफ कीवर्ड से तो स्ट्रक्चर को

[539:23]

जब भी हम डिफाइन करते हैं ना उसमें पहले

[539:25]

टाइप डेफ उसके बाद स्ट्रक्चर एंड उसके बाद

[539:27]

हमारे स्ट्रक्चर का पूरा नाम फिर नॉर्मली

[539:30]

उस स्ट्रक्चर के सारे के सारे पैरामीटर्स

[539:32]

को डिफाइन करना है पैरेंस को बंद कर देना

[539:34]

है और फिर उसका एलियस लिख देना है यानी यह

[539:37]

है असली नाम हमारे स्ट्रक्चर का और यह है

[539:39]

उसका निक नेम जिससे हम उसको बुला रहे

[539:41]

होंगे एलियस लिख देंगे उसके बाद लिख देंगे

[539:44]

स्टेटमेंट टर्मिनेटर और अब अगर हमें उसी

[539:47]

स्ट्रक्चर का एक वेरिएबल बनाना है तो

[539:48]

सिंपली एलियस को लिखना है यानी सिर्फ सीओई

[539:50]

लिखेंगे यहां पे सीओई स्टूडेंट वन राद देन

[539:53]

कंप्यूटर ए इंजीनियरिंग स्टूडेंट वन तो एक

[539:55]

बार करके देखते हैं सबसे पहले क्या करेंगे

[539:57]

मेन फंक्शन में अपने कोड को हटा देते

[540:00]

हैं अपने एसिस्टिंग स्टूडेंट के लिए एक

[540:03]

एलियस बनाते हैं तो यहां लिखेंगे टाइप डेफ

[540:06]

तो स्ट्रक्चर स्टूडेंट के सामने सिंपली

[540:08]

टाइप डेफ लिख देना है और लास्ट में उसका

[540:10]

एलियस तो स्टूडेंट के लिए एलियस हमने बना

[540:12]

दिया स्टू इसको कर लेते हैं सेव तो पहले

[540:15]

अगर हम क्या करते थे पहले लिखते थे

[540:18]

स्ट्रक्ट स्टूडेंट

[540:20]

s1 इसकी जगह अब हमें सिंपली लिखना पड़ेगा

[540:24]

s2 यानी इस पूरे स्ट्रक्ट स्टूडेंट को

[540:28]

सिर्फ एयू ने रिप्लेस कर लिया अब ना हमें

[540:30]

स्ट्रक्ट बताना पड़ा ना हमें स्टूडेंट

[540:32]

बनाना पड़ा सिंपली हम एसटी यू लिख सकते

[540:34]

हैं अगर डिफरेंट एक एग्जांपल ले तो उसमें

[540:37]

लिख सकते हैं टाइप डेफ

[540:39]

स्ट्रक्ट कंप्यूटर

[540:42]

इंजीनियरिंग स्टूडेंट जिसके अंदर हम यह

[540:45]

सेम तीनों वैल्यूज जो हैं वो लिख रहे

[540:48]

होंगे और इसका एलियस हमने बना दिया

[540:51]

सीओई तो अब हम इसको सीओई के नाम से भी

[540:54]

बुला सकते हैं इस लंबे नाम की जगह सीओई का

[540:57]

एक वेरिएबल बना लेते हैं सीओई s1 अब इस s1

[541:01]

में हम सारी की सारी वैल्यूज को असाइन कर

[541:03]

देते हैं रोल नंबर इ इक्व 1664 s1 सीजीपीए

[541:08]

इ 9.2 वहीं पर एटीआर सीपीवाई भी कर सकते

[541:12]

हैं जिसमें पास कर देंगे s1 नेम एंड उसके

[541:15]

बाद हमारा नाम इन वैल्यूज को नॉर्मली हम

[541:19]

प्रिंट भी कर सकते हैं प्रिंट कैसे करेंगे

[541:21]

स्टूडेंट नेम इज

[541:24]

परसेंटेज s s1 नेम तो वो पूरा स्ट्रक्ट

[541:29]

कंप्यूटर इंजीनियरिंग स्टूडेंट की जगह

[541:31]

सिंपली हमें एक छोटा सा प्यारा सा नाम

[541:33]

लिखना पड़ा जिसको लिखने में भी टाइम नहीं

[541:34]

लगा समझने में भी टाइम नहीं लगा और फिर

[541:37]

हमने सारे के सारे पैरामीटर्स को डिफाइन

[541:38]

कर दिया इसको भी एक बार रन करके देख लेते

[541:41]

हैं रन करके हमारे पास सही आउटपुट आ र है

[541:44]

तो अगर आप एक स्ट्रक्चर बना रहे हैं और

[541:46]

उसका नाम आप चाहते हैं कि यार अब मुझे तो

[541:49]

कंप्यूटर इंजीनियरिंग पूरा लिखना पड़ेगा

[541:51]

इन केस कोई नया प्रोग्रामर आता है यहां पे

[541:53]

मैं सिर्फ सीओई नहीं लिख सकती क्योंकि

[541:55]

सीओई बच्चों को समझ में आता होगा टीचर्स

[541:56]

को समझ में आता होगा पर एक नए कोडर को समझ

[541:58]

में नहीं आएगा तो वहां पे आप हां

[542:00]

स्ट्रक्चर को डिफाइन करते हुए पूरा नाम

[542:02]

लिखिए पर बाकी जगह कोड में जब भी यूज करना

[542:04]

है तो उसको बार-बार लिखने का क्या पॉइंट

[542:06]

है तो वहां पे आप छोटा सा निकनेम दे दो

[542:08]

अपने स्ट्रक्चर को यही सेम चीज हम डिफरेंट

[542:10]

इंटी जर के लिए भी कर सकते हैं फ्लोट के

[542:12]

लिए भी कर सकते हैं कैरेक्टर के लिए भी कर

[542:14]

सकते हैं पर करते नहीं है क्योंकि उनके

[542:15]

ऑलरेडी बहुत ही छोटे-छोटे नाम है तो उनको

[542:17]

एलियस देने का ज्यादा कोई मतलब बनता नहीं

[542:19]

है मोस्टली केसेस में इसीलिए टाइप डेफ को

[542:22]

जब भी इस्तेमाल करते हैं मोस्टली

[542:23]

स्ट्रक्चर्स के केसेस में उसका इस्तेमाल

[542:25]

होता है अब स्ट्रक्चर्स पर बेस्ड कुछ

[542:27]

सवालों को हम सॉल्व कर लेते हैं इनमें से

[542:29]

सबसे पहला सवाल है एंटर एड्रेस एड्रेस में

[542:33]

क्या हाउस नंबर आपका ब्लॉक नंबर या इसको

[542:35]

गली नंबर भी कह सकते हैं हमारी सिटी और

[542:38]

हमारी स्टेट ऑफ फाइव पीपल अब यहां पे जो

[542:40]

सबसे पहली चीज हम नोटिस करेंगे कि हमें

[542:42]

लोगों का एड्रेस जो है वो स्टोर कराना है

[542:45]

जिसमें हाउस नंबर ब्लॉक नंबर सिटी और

[542:47]

स्टेट ये चार पैरामीटर्स है अब पांच लोगों

[542:50]

के लिए चार पैरामीटर सेम है इसमें जो हाउस

[542:53]

नंबर होगा यह कोई इंटी जर टाइप का होगा

[542:55]

ब्लॉक नंबर होगा यह भी हमारा इंटी जर टाइप

[542:58]

का हो सकता है सिटी जो होगी वो हमारी

[543:01]

स्ट्रिंग होगी और स्टेट भी हमारी क्या

[543:04]

होगी स्ट्रिंग होगी तो यहां पे बेसिकली

[543:07]

हमें कह रहे हैं अलग-अलग टाइप को आप ग्रुप

[543:09]

करके एक एड्रेस बना दो तो यहां हमारे

[543:12]

दिमाग में चमकेगा कि हमें तो जी स्ट्रक्चर

[543:14]

टाइप का एक वेरिएबल चाहिए होगा और इस

[543:16]

स्ट्रक्चर के हमें ऐसे पांच वेरिएबल चाहिए

[543:19]

होंगे पांच स्ट्रक्चर्स चाहिए होंगे पांच

[543:21]

लोगों की इंफॉर्मेशन स्टोर कराने के लिए

[543:23]

तो उ इस में क्या करेंगे एक एरे ऑफ

[543:25]

स्ट्रक्चर्स बना देंगे पहले स्ट्रक्चर

[543:26]

डिफाइन करेंगे एड्रेस नाम का फिर उसका एरे

[543:29]

बना देंगे और फिर पांच लोगों की

[543:30]

इंफॉर्मेशन उस एरे के अंदर स्टोर करा

[543:32]

लेंगे इसको एक बार थोड़ा सा गहराई में

[543:34]

जाके देखते हैं हम सबसे पहले क्या करेंगे

[543:37]

सबसे पहले लिखेंगे स्ट्रक्ट फिर हमारे

[543:39]

स्ट्रक्चर का नाम एड्रेस उसके अंदर अपने

[543:42]

स्ट्रक्चर की इंफॉर्मेशन को लिखेंगे

[543:43]

इंफॉर्मेशन में सबसे पहले आ जाएगा हमारा

[543:46]

इंटी जर हाउस नंबर उसके बाद आ जाएगा इंटी

[543:49]

जर ब्लॉक फिर आ जाएगा हमारा कैरेक्टर

[543:53]

स्ट्रिंग

[543:54]

हमारी सिटी इसको 100 कैरेक्टर्स का बना

[543:57]

लेते हैं एंड उसके बाद आ जाएगी हमारी

[543:59]

कैरेक्टर स्ट्रिंग हमारा स्टेट इसको भी

[544:02]

100 कैरेक्टर्स का बना लेते हैं एंड यहां

[544:04]

पे हो जाएगा हमारा एड्रेस तो इस तरीके से

[544:07]

हमें अपना एड्रेस नाम का स्ट्रक्चर बनाना

[544:09]

है उसके बाद इसी सेम स्ट्रक्चर का हम एक

[544:12]

एरे बना लेंगे यानी क्या लिखेंगे स्ट्रक्ट

[544:15]

एड्रेस यह हो गया हमारा टाइप इनफैक्ट हम

[544:18]

इसको टाइप डेफ से क्या कर सकते हैं एलियस

[544:20]

भी बना सकते हैं यहां लिख देंगे टाइप डेफ

[544:23]

यहां लिख देंगे हमारा एडीडी तो हर जगह हम

[544:26]

एडीडी लिख सकते हैं इंस्टेड ऑफ राइटिंग

[544:28]

स्ट्रक्ट एड्रेस पर यहां पर अभी के लिए

[544:29]

स्ट्रक्ट एड्रेस ही देख लेते हैं फिर लिख

[544:31]

देंगे अपने वेरिएबल का नाम एड्रेसस कितने

[544:35]

लोगों के लिए पांच लोगों के लिए तो इस

[544:38]

तरीके से यह बन जाएगा हमारा एरे ऑफ

[544:41]

स्ट्रक्चर्स अब इसमें पांचों लोगों की

[544:43]

इंफॉर्मेशन को या तो यूजर से इनपुट करा लो

[544:46]

या खुद से जो भी है वैल्यू असाइन करके

[544:48]

उसको हम प्रिंट करवा सकते हैं अब कोड करके

[544:50]

देख लेते हैं सेम चीज का इस कोड को यहां

[544:53]

से डा देते हैं और अब बनाते हैं एक नया

[544:55]

स्ट्रक्चर स्ट्रक्ट एड्रेस नाम से इसके

[544:58]

अंदर सबसे पहले स्टोर कराएंगे इंट हाउस

[545:01]

नंबर उसके बाद इंट ब्लॉक फिर लिखेंगे

[545:05]

कैरेक्टर सिटी ऑफ 100 फिर कैरेक्टर स्टेट

[545:10]

ऑफ 100 और यहां पे स्टेटमेंट टर्मिनेटर

[545:14]

तोय एड्रेस नाम का हमने स्ट्रक्चर बना

[545:16]

लिया अब इसका एक एरे बना लेते हैं

[545:19]

स्ट्रक्ट एड्रेस एरे को नाम छोटा दे देते

[545:23]

हैं तो एड्स नाम इसको दे देते हैं और इसको

[545:25]

साइज रखते हैं पांच एक फंक्शन बना लेते

[545:28]

हैं एड्रेस की इंफॉर्मेशन को प्रिंट

[545:29]

करवाने के लिए और मेन फंक्शन के अंदर यूजर

[545:31]

से इनपुट ले लेते हैं तो सबसे पहले इनपुट

[545:33]

लेने के लिए

[545:36]

प्रिंट एंटर इंफो फॉर पर्सन वन पर्सन वन

[545:42]

के लिए इंफॉर्मेशन एंटर

[545:44]

होगी स्कैन कर लेंगे हम उस इंफॉर्मेशन को

[545:46]

सबसे पहले हमारे पास हाउस नंबर आएगा तो

[545:49]

एड्स ऑफ 0 डॉट हाउस नंबर सेम तरीके से

[545:54]

हमारे पास आएगा हमारा ब्लॉक तो यहां लिख

[545:56]

देंगे डस

[545:57]

डॉ0 ड ब्लॉक अब हमारे पास आएगी हमारी

[546:02]

स्ट्रिंग यानी हमारी सिटी तो डॉट सिटी एंड

[546:06]

फिर हमारा स्टेट और यहां पर क्योंकि हम

[546:09]

इंटी जर लिख रहे हैं तो यहां पर हमें

[546:11]

लगाना पड़ेगा m पर ताकि हम एड्रेस ऑफ

[546:14]

ब्लॉक या एड्रेस ऑफ हाउस नंबर तक पहुंच

[546:16]

जाए उसी सेम तरीके से हम चार और लोगों की

[546:20]

इंफॉर्मेशन जो है एंटर करा लेंगे यहां पर

[546:22]

लिख देते हैं टू और ये सारी इंफॉर्मेशन

[546:24]

प्रिंट कराने के लिए एक फंक्शन भी बना

[546:26]

लेते हैं इसका नाम लिखते हैं प्रिंट

[546:28]

एड्रेस जिसमें पास करेंगे हम स्ट्रक्चर

[546:32]

एड्रेस एंड इस फंक्शन में लिख लेते हैं

[546:37]

एड्रेसस इस एड्रेस को अब कंबाइन करके

[546:40]

प्रिंट करवाते हैं कंबाइन करके कैसे

[546:41]

प्रिंट करवाएंगे सबसे पहले लिखेंगे हाउस

[546:44]

नंबर परसेंटेज डी हाउस नंबर के बाद

[546:46]

लगाएंगे कॉमा इसके बाद लिखेंगे अपना ब्लॉक

[546:48]

नंबर परसेंटेज डी ब्लॉक नंबर के बाद

[546:51]

लिखेंगे परसेंटेज s हमारी सिटी और फिर

[546:54]

परसेंटेज एस हमारा स्टेट तो यहां पर लिख

[546:57]

देते हैं ऐड डॉट सबसे पहले आएगा हमारा

[546:59]

हाउस नंबर फिर ऐड डॉट हमारा ब्लॉक फिर ऐड

[547:04]

डॉट हमारी सिटी एंड देन फाइनली ड डॉट

[547:07]

हमारा स्टेट तो एक सिंगल लाइन में पूरा का

[547:10]

पूरा एड्रेस हमें स्टोर कराना है जैसे

[547:12]

हमारा नॉर्मली डेली लाइफ में पूरा एड्रेस

[547:14]

हम सिंगल लाइन में लिखते हैं तो इसको कर

[547:16]

लेते हैं सेव एंड इस पूरे के पूरे कोड को

[547:19]

रन करेंगे पहले हम अपने मेन फंक्शन से

[547:22]

क्या करते हैं वैल्यू जो है उसके लिए

[547:25]

प्रिंट एड्रेस फंक्शन कॉल करते हैं सबसे

[547:27]

पहले कॉल लगाएंगे एड्स ऑफ जीरो के लिए एंड

[547:32]

सिमिलर तरीके की चार और कॉल्स हम लगाने

[547:35]

वाले हैं हल्की सी फॉर्मेटिंग जो इसको ठीक

[547:39]

कर लेते हैं कि अच्छी फॉर्मेटिंग मुझे कोड

[547:41]

के अंदर बहुत अच्छी लगती है फोर अब इसको

[547:45]

सेव करके रन कर लेते हैं तो काफी सारी

[547:47]

इंफॉर्मेशन हमें ऐड करनी पड़ेगी तो इस

[547:49]

इंफॉर्मेशन को जल्दी जल्दी ऐड कर लेते हैं

[547:51]

पहले हमने हाउस नंबर एंटर किया है फिर

[547:52]

हमने ब्लॉक नंबर एंटर किया दोनों इंटी

[547:54]

जर्स पहले एंटर करने हैं फिर दो

[547:55]

स्ट्रिंग्स एंटर करनी है पहले सिटी फिर

[547:58]

हमारी

[548:00]

स्टेट पांच लोगों की हमने इंफॉर्मेशन एंटर

[548:03]

कर दिया और पांचों का हमारे पास एड्रेस आ

[548:05]

गया है एड्रेस वन हमने ये एंटर किया था

[548:08]

एड्रेस टू में ये एंटर किया था एड्रेस

[548:10]

थ्री में ये एंटर किया था एड्रेस फोर में

[548:12]

ये और एड्रेस फाइव में ये तो ये सारी की

[548:14]

सारी इंफॉर्मेशन हम अलग-अलग तरीके से एंटर

[548:16]

करवा रहे हैं इस सेम सवाल के अंदर हमने

[548:18]

काफी सारे कांसेप्ट सीख लिए सबसे पहला कि

[548:20]

स्ट्रक्चर को कैसे डिफाइन करने हैं दूसरा

[548:23]

स्ट्रक्चर को फंक्शन के अंदर कैसे यूज

[548:25]

करना है तीसरा यह कि स्ट्रक्चर का एरे

[548:27]

कैसे बनाना है ओबवियसली इनपुट आउटपुट तो

[548:30]

है ही तो एक सिंगल सवाल में काफी सारे

[548:32]

कांसेप्ट हमारे रिवाइज हो गए नेक्स्ट सवाल

[548:34]

जिसकी बात कर रहे होंगे क्रिएट अ

[548:36]

स्ट्रक्चर टू स्टोर वेक्टर्स एंड देन मेक

[548:39]

अ फंक्शन टू रिटर्न सम ऑफ टू वेक्टर्स

[548:42]

सबसे पहले बात करते हैं कि वेक्टर होता

[548:44]

क्या है एक्चुअली इसको अगर मैं सर्च करूं

[548:47]

वेक्टर्स तो वेक्टर्स में ऊपर हमारे पास

[548:50]

ऐसे तरीके के कुछ फिगर्स आते हैं तो

[548:52]

वेक्टर्स ज्योमेटिक एंटिटीज दैट हैव

[548:55]

मैग्निटिया या मैथ्स पढ़ा होगा उनको

[548:58]

ऑलरेडी पता होगा कि वेक्टर्स क्या होते

[548:59]

हैं वेक्टर्स हमारे कुछ-कुछ एंटिटीज होती

[549:03]

हैं जिसकी एक डायरेक्शन होती है और साथ के

[549:05]

साथ उसकी एक

[549:20]

मैग्निटिया हमारा y एक्सिस अब वेक्टर्स को

[549:24]

कैसे डिफाइन कर सकते हैं वेक्टर्स होती

[549:25]

हैं हमारे x और y एक्सिस वाले 2d प्लेन पे

[549:28]

स्ट्रेट लाइंस एक मान लीजिए ये स्ट्रेट

[549:30]

लाइन है तो इस लाइन को इस पर्टिकुलर लाइन

[549:33]

को हम एक वेक्टर कहते हैं इस वेक्टर का

[549:36]

मतलब इस स्ट्रेट लाइन का इस एरो का हमारे

[549:39]

x एक्सिस से कुछ डिस्टेंस होगा इस

[549:41]

डिस्टेंस को हम कह देते हैं y कैपिटल y रख

[549:44]

लेते हैं और इसका y एक्सिस से कुछ

[549:47]

डिस्टेंस होगा इसको कह देते हैं कपि x तो

[549:50]

एक वेक्टर को इस लाइन को जब हमें

[549:52]

रिप्रेजेंट करना हो तो इसको रिप्रेजेंट

[549:54]

करते हैं इन दो वैल्यूज की फॉर्म में तो

[549:56]

इन दो वैल्यूज को कैसे लिखा जाता है इसको

[549:59]

लिखा जाता है x आ कैप + y ज कैप तो अब ये

[550:04]

रिप्रेजेंट करता है x एक्सिस में डिस्टेंस

[550:06]

ये रिप्रेजेंट करता है y एक्सिस में

[550:08]

डिस्टेंस तो इस तरीके का फार्मूला रहता है

[550:11]

इससे हम प्रोग्रामर्स को कोडर्स को मैथ

[550:13]

वाली चीज में नहीं घुसना सिंपल कांसेप्ट

[550:15]

याद रखना है कि जब भी वेक्टर को डिफाइन

[550:17]

करना है तो उसके लिए एक x पैरामीटर होगा

[550:20]

एक y पैरामीटर होगा यहां से हमें सिंपल सी

[550:22]

बात पता चली कि जब भी वेक्टर को कोड के

[550:24]

अंदर लिखना है तो एक स्ट्रक्चर बनाना

[550:26]

पड़ेगा उस स्ट्रक्चर के अंदर एक x वाली

[550:28]

वैल्यू लेंगे और एक y वाली वैल्यू लेंगे

[550:31]

और देन मेक अ फंक्शन टू रिटर्न सम ऑफ टू

[550:34]

वेक्टर्स अब सम ऑफ टू वेक्टर्स को कैसे

[550:36]

कैलकुलेट किया जाता है मैथ के अंदर मान

[550:38]

लीजिए हमारे पास पहला वेक्टर है x1 आ कैप

[550:42]

् y1 ज कैप और दूसरा वेक्टर है हमारे पास

[550:47]

x2 आ कैप + y2 ज कैप तो इन दोनों का सम

[550:51]

हमारे पास निकल कर आता है x1 + x2 i कैप

[550:56]

यानी यह अलग वेरिएबल के अंदर स्टोर होगा ्

[550:59]

y1 + y2 j कैप और यह अलग वेरिएबल के अंदर

[551:04]

स्टोर होगा तो एक वेरिएबल की वैल्यू सेम

[551:07]

के पास जाती है दूसरे वेरिएबल की वैल्यू

[551:09]

सेम के पास जाती है तो इस तरीके से हम सम

[551:11]

लेंगे इसको कोड की हेल्प से करेंगे तो

[551:14]

ज्यादा हमें अच्छे से बेटर तरीके से

[551:16]

चीज़ें समझ आएंगी सबसे पहले क्या करते हैं

[551:19]

एक स्ट्रक्चर बनाते हैं स्ट्रक्ट वेक्टर

[551:23]

वेक्टर के लिए स्ट्रक्चर बनाएंगे अब एक

[551:25]

वेक्टर के दो कॉम्पोनेंट्स होते हैं एक x

[551:27]

कॉम्पोनेंट होगा एक y कॉम्पोनेंट होगा तो

[551:29]

यहां लिखेंगे इंट x और यहां लिखेंगे इंट y

[551:33]

अब इसके लिए हम 2d एरिया भी बना सकते थे

[551:35]

पर स्ट्रक्चर बनाने का फायदा ये होता है

[551:37]

कि हमें पता रहेगा कि एक वेक्टर के दो

[551:39]

कॉम्पोनेंट्स होते हैं एक x होता है एक y

[551:41]

होता है 2d एरे में या एरे में हमें ट्रैक

[551:45]

करना पड़ता कि कौन सा कहां पर है 2d एरे

[551:47]

भी इसका एक काफी अच्छा हम सॉल्यूशन कह

[551:49]

सकते हैं वडी एरे में हमें काफी सारी

[551:51]

परेशानी आती पर वेक्टर से हम बनाएंगे तो x

[551:53]

वा कॉम्पोनेंट हमारे लिए थोड़ा बेटर रहेगा

[551:56]

समझने में अब पहला वेक्टर बनाते हैं

[551:59]

स्ट्रक्ट वेक्टर v1 v1 को वैल्यू असाइन कर

[552:03]

देते हैं x में वैल्यू रखी पाच y में

[552:05]

वैल्यू रखी 10 एंड अब सेम तरीके से हम

[552:09]

बनाते हैं दूसरा वेक्टर हमारा v2 v2 के

[552:12]

अंदर आ जाता है पहली वैल्यू तीन और दूसरी

[552:14]

वैल्यू सात तो ये पहला वेक्टर हमने बना

[552:18]

लिया ये बना लिया हमने दूसरा वेक्टर अब

[552:20]

हमें क्या करना है इन दोनों वेक्टर्स का

[552:22]

ये स्टेटमेंट टर्मिनेटर यहां पे नहीं

[552:24]

भूलना इन दोनों वेक्टर्स का हमें एक सम

[552:26]

वेक्टर कैलकुलेट करना है सम वेक्टर के लिए

[552:29]

पहले बना लेते हैं स्ट्रक्ट वेक्टर सम सम

[552:32]

को इनिश इज कर देते हैं जीरो के साथ मतलब

[552:34]

अभी इसमें कोई वैल्यू नहीं और हमें बनाना

[552:37]

है एक फंक्शन सम कैलकुलेट करने के लिए तो

[552:39]

उसमें लिख देते हैं वॉइड कैलकुलेट सम इसके

[552:42]

अंदर तीन वेक्टर्स पास होंगे सबसे पहला जो

[552:45]

होगा स्ट्रक्ट वेक्टर वो होगा v1 उसके बाद

[552:48]

आएगा स्ट्रक वेक्टर v2 उसके बाद आएगा

[552:52]

स्ट्रक वेक्ट

[552:53]

सम इस फंक्शन को बनाने के लिए को यहां

[552:56]

डिफाइन कर लेते हैं हमें क्या करना है सम

[553:00]

का जो x कॉम्पोनेंट होगा वो होगा v1 का x

[553:04]

कॉम्पोनेंट प्लस v2 का एक कॉम्पोनेंट और

[553:07]

सम का जो y कॉम्पोनेंट होगा वो होगा v1 का

[553:11]

y कॉम्पोनेंट प्लस v2 का y कॉम्पोनेंट तो

[553:14]

आई होप ये चीज समझ आई होगी कि सम का जो

[553:17]

एक् कॉम्पोनेंट होगा वो v1 और v2 के एक्स

[553:20]

से बनेगा और सम का जो y कॉम्पोनेंट होगा

[553:22]

वो v1 और v2 के वा से बनेगा अब एक हल्की

[553:25]

सी चीज जो हम यहां मिस आउट कर रहे हैं वो

[553:27]

ये है कि फंक्शन कॉल जब भी होती है वो पास

[553:29]

बाय वैल्यू होती है तो यहां जो सम हमने

[553:32]

वैल्यूज असाइन करी है ये मेन फंक्शन के

[553:34]

अंदर रिफ्लेक्ट नहीं करेंगे इसीलिए इनको

[553:36]

रिफ्लेक्ट करने के लिए या तो हम पॉइंटर

[553:39]

पास करें या फिर इसी फंक्शन के अंदर

[553:41]

प्रिंट करवा लेते हैं अपने सम को प्रिंट

[553:44]

सम ऑफ एक

[553:46]

इज परसेंटेज डी सम ड एक्स एंड सेम फॉर

[553:50]

हमारा वा कॉम्पोनेंट सम ऑफ y इज सम

[553:56]

डवा यहां पे लगा देते हैं ब स् ए और मेन

[554:00]

फंक्शन के अंदर कॉल लगा देंगे कैलकुलेट सम

[554:03]

को कैलकुलेट सम में पास करेंगे v1 v2 एंड

[554:06]

हमारा सम वेक्टर सेव एंड

[554:10]

रन तो यह v1 में हमने पास किया था 5 आ कैप

[554:14]

10 ज कैप v2 में पास किया था 3 आ कैप 7 ज

[554:17]

कैप तो सम क्या हुआ एक्स कॉम्पोनेंट का 5

[554:19]

प् 3 = 8 और वा कॉम्पोनेंट के लिए 10 + 7

[554:23]

= 17 तो इस तरीके से हम दो वेक्टर्स का सम

[554:27]

भी निकाल सकते हैं ये एक्चुअली यहां पे

[554:29]

हमें अच्छे से यूज के समझ नहीं आते जब हम

[554:31]

शुरू शुरू में कांसेप्ट सीखते हैं मान

[554:33]

लीजिए आप एक शूटर का गेम बना रहे हैं c और

[554:36]

c+ प काफी सिमिलर होते हैं c+ प् के अंदर

[554:38]

भी जैसे स्ट्रक्चर्स होते हैं वैसे ही हम

[554:40]

क्लासेस बना सकते हैं वो सी के अंदर

[554:42]

एजिस्ट नहीं करती तो वो जब आप c+ प्

[554:44]

पढ़ेंगे या जावा पढ़ेंगे तब हमें पता

[554:45]

चलेगा क्लास क्या होती है पर स्ट्रक्चर

[554:47]

जैसी ही होती है तो वहां पे जब हम गेम

[554:50]

डेवलपमेंट में c+ प का यूज करते हैं तो

[554:52]

उसमें बहुत बार हमें क्या करना पड़ता है

[554:54]

वेलोसिटी डिफाइन करनी पड़ती है बुलेट को

[554:56]

किस स्पीड से हम फायर करने वाले हैं किस

[554:59]

स्पीड से हमारा जो मेन कैरेक्टर है उसकी

[555:00]

स्पीड कैसे दिखाएंगे उसकी वेलोसिटी क्या

[555:02]

होगी अगर किसी ने कोई चीज फेंक के मारी है

[555:05]

या मान लीजिए जैसे हमारा एंग्री बर्ड्स

[555:06]

होता था उसमें क्या वेक्टर्स रहेंगे क्या

[555:09]

डायरेक्शन रहेगी क्या मैग्नी ूडल स्टोन को

[555:12]

या बर्ड्स को थ्रो करने का वो सारा जो काम

[555:15]

होता है उसमें इसी तरीके के स्ट्रक्चर्स

[555:17]

यूज़ होते हैं इसी तरीके की कैलकुलेशन

[555:18]

चलती है जो मैथ और फिजिक्स के फॉर्मूले से

[555:21]

आती है पर उसको कोडिंग में हम कन्वर्ट कर

[555:23]

देते हैं नेक्स्ट जिस सवाल को हम सॉल्व कर

[555:25]

रहे होंगे यह है क्रिएट अ स्ट्रक्चर टू

[555:27]

स्टोर

[555:29]

कॉम्प्लेक्शन

[555:32]

कॉम्प्लेक्शन नंबर्स क्या होते थे एक ऐसा

[555:35]

नंबर होता था जिसका कुछ पार्ट रियल होता

[555:37]

था और कुछ पार्ट इमेजिनरी होता था तो कुछ

[555:40]

पार्ट इसका रियल होगा कुछ पार्ट इमेजिनरी

[555:42]

होगा बिल्कुल वेक्टर की तरह हमें एक

[555:43]

स्ट्रक्चर बनाना है इसको नाम हम दे देंगे

[555:49]

कॉम्प्लेक्टेड टाइप का और अपना इ इनरी

[555:53]

पार्ट वो भी इंटी जर टाइप का इस तरीके का

[555:57]

कुछ स्ट्रक्चर हम बना रहे होंगे और एरो

[555:59]

ऑपरेटर से वैल्यू को जो है हमें प्रिंट

[556:02]

करवाना है तो सबसे पहले ऊपर क्या करेंगे

[556:04]

ऊपर एक स्ट्रक्चर बना लेते हैं स्ट्रक्ट

[556:15]

कॉम्प्लेक्टेड मेंट टर्मिनेटर तो ये हो

[556:17]

गया हमारा

[556:19]

कॉम्प्लेक्शन के अंदर एक्चुअली कॉम्लेक्स

[556:22]

नंबर को क्रिएट करेंगे सबसे पहले लिखेंगे

[556:24]

स्ट्रक

[556:30]

कॉम्प्लेक्शन पार्ट रखना चाहते हैं एट अब

[556:33]

इसको प्रिंट कैसे करवाएंगे प्रिंट करवाना

[556:34]

है एरो ऑपरेटर से और एरो ऑपरेटर के लिए

[556:37]

चाहिए हमें पॉइंटर तो सबसे पहले पॉइंटर

[556:39]

बना लेते हैं पॉइंटर का टाइप क्या होगा

[556:41]

स्ट्रक्ट

[556:46]

कॉम्प्लेक्टेड ऑफ नंबर वन अब प्रिंट

[556:50]

करवानी है वैल्यूज तो उनको प्रिंट करवा

[556:51]

सकते हैं इमेजिनरी पार्ट इज इक्वल टू

[556:55]

परसेंटेज d पॉइंटर से कैसे प्रिंट करवाते

[556:58]

थे सबसे पहले लिखेंगे पैरेंस या यहां पे

[557:01]

हम एरो ऑपरेटर यूज करेंगे तो पीटीआर एरो

[557:04]

रियल यहां पे होगा रियल और यहां पे होगा

[557:07]

पीटीआर एरो इमेजिनरी एंड बै स्ल n तो इसको

[557:12]

कर लेते हैं सेव और इसको अब करते हैं हम

[557:14]

रन तो रियल पार्ट हमारे पास प्रिंट होकर आ

[557:17]

गया फाइव और इमेजिनरी पार्ट हमारे पास

[557:19]

प्रिंट होकर आ गया एट इस तरीके से आप

[557:21]

इमेजिनरी रियल नंबर्स के साथ भी जैसे

[557:23]

मैग्नी ूडल हो तो वो होता है अंडर स्कोर

[557:25]

इमेजिनरी पार्ट का स्क्वायर प्लस रियल

[557:28]

पार्ट तो अब अगर कॉम्प्लेक्शन का मैग्नी

[557:30]

ट्यूड जैसे निकालना होता है या वेक्टर्स

[557:31]

का मैग्नी ूडल होता है तो वो होता है

[557:34]

हमारा अंडर रूट इमेजिनरी पार्ट का

[557:35]

स्क्वायर प्लस रियल पार्ट का स्क्वायर तो

[557:38]

उसको भी हम कैलकुलेट करके निकाल सकते हैं

[557:40]

तो हम इन्हीं स्ट्रक्चर पर बेस्ड और थोड़े

[557:42]

से

[557:44]

कॉम्प्लेक्टेड करने की पूरी काबिलियत रखते

[557:46]

हैं नेक्स्ट एक

[557:48]

थोरेट्स आपके कांसेप्ट को टेस्ट करने के

[557:51]

लिए है यू हैव टू स्टोर द मार्क्स ऑफ़ 30

[557:54]

स्टूडेंट्स 30 बच्चों के मार्क्स स्टोर

[557:56]

करने हैं मार्क्स हमारे या तो इंटी जर

[557:58]

टाइप के होंगे या फ्लोट टाइप के होंगे अब

[558:00]

इसमें से क्या इस्तेमाल करेंगे फ्लोट टाइप

[558:02]

के मार्क्स हम यहां पे अज्यू कर रहे हैं

[558:04]

या तो एरे ऑफ 10 फ्लोट्स बना लो या एक

[558:07]

स्ट्रक्चर बना लो अब यहां पर 30 बच्चों के

[558:09]

मार्क्स अगर स्टोर करने हैं और हर वैल्यू

[558:11]

हमारी फ्लोट टाइप की है तो यहां स्मार्ट

[558:13]

डिसीजन ये होगा कि एरे ऑफ 10 फ्लोट्स बना

[558:16]

लो एरे ऑफ 10 फ्लोट्स बनाने का फायदा क्या

[558:18]

होगा स्ट्रक्चर के ऊपर सबसे पहला तो यह कि

[558:21]

स्ट्रक्चर्स का मेजर इस्तेमाल तब होता है

[558:23]

जब अलग-अलग टाइप्स के हम चीजें जो हैं वो

[558:26]

एक साथ कलेक्ट कर रहे होते हैं पर यहां पे

[558:28]

हमें सेम टाइप के 30 चीजें कलेक्ट करनी है

[558:30]

यानी फ्लोट टाइप की तो उसके लिए बेटर होगा

[558:32]

कि हम एरे बना सक बना हम दोनों सकते हैं

[558:34]

दोनों से सवाल हमारा सॉल्व हो जाएगा पर

[558:36]

ज्यादा स्मार्ट ये होगा ज्यादा

[558:38]

एक्सपीरियंस डिसीजन ये होगा कि आप एरे ऑफ

[558:41]

10 या इनफैक्ट यहां पे 30 फ्लोट्स बना रहे

[558:44]

हो नेक्स्ट सवाल हमारा है मेक अ स्ट्रक्चर

[558:46]

टू स्टोर बैंक अकाउंट इंफॉर्मेशन ऑफ अ

[558:48]

कस्टमर कोई एबीसी बैंक है उसमें बैंक

[558:51]

अकाउंट की आपको इंफॉर्मेशन स्टोर करनी है

[558:53]

और उसके लिए एक एलियस भी बनाना है यानी

[558:56]

यहां इस्तेमाल कर रहे होंगे हम टाइप डेफ

[558:59]

का अब बैंक अकाउंट के लिए हम क्याक

[559:01]

इंफॉर्मेशन स्टोर कर सकते हैं एक हो सकता

[559:03]

है अकाउंट होल्डर का नेम एक हो सकता है

[559:06]

अकाउंट नंबर इसके अलावा एक हो सकता है

[559:09]

हमारा आईएफएससी कोड पर इतना डिटेल में

[559:11]

नहीं जाएंगे अभी के लिए बस नेम और हमारे

[559:15]

अकाउंट नंबर को स्टोर कराएंगे इसके लिए एक

[559:18]

स्ट्रक्चर बना लेते हैं स्ट्रक बैंक

[559:21]

अकाउंट बैंक अकाउंट के अंदर क्या-क्या

[559:24]

स्टोर होगा सबसे पहले स्टोर होगा अकाउंट

[559:26]

नंबर इंट अकाउंट नंबर उसके बाद स्टोर होगा

[559:29]

हमारा स्ट्रिंग कैरेक्टर जिसका नाम होगा

[559:32]

नेम ऑफ 100 कैरेक्टर्स अब यहां पे हमें

[559:35]

इसके लिए एलियस बनाना है तो एलियस बनाने

[559:37]

के लिए सबसे पहले लिख देंगे टाइप डेफ और

[559:39]

बैंक अकाउंट की जगह इसको हम लिखेंगे

[559:41]

एसीसीसी सिर्फ अकाउंट और इसको लिख देते

[559:44]

हैं अकाउंट नंबर तो एसीसी के नाम से हम

[559:47]

अपने स्ट्रक्चर के जो हैं वेरिएबल को

[559:49]

डिक्लेयर कर सकते हैं सबसे पहले बनाएंगे

[559:51]

एसीसी एसीसी टाइप का अकाउंट वन इसमें

[559:56]

वैल्यूज पहले से ही असाइन कर लेते हैं

[559:57]

अकाउंट नंबर होगा टूथ और नेम हमारा आ

[560:01]

जाएगा श्रद्धा उसी तरीके से हमें कोई और

[560:04]

अकाउंट बनाना हो तो दूसरा हम अकाउंट खोल

[560:06]

सकते हैं अकाउंट टू इसमें अकाउंट नंबर जो

[560:09]

है इंक्रीज हो जाएगा बाय वन नेम हमारा

[560:13]

चेंज हो जाएगा सेम तरीके से अकाउंट थ्री

[560:16]

हम बना सकते हैं इसमें भी इंक्रीज हो

[560:18]

जाएगा बाय वन और नेम हमारा चेंज हो जाएगा

[560:21]

तो ये क्या हुआ अकाउंट नंबर हम चेंज कर

[560:23]

सकते हैं नेम चेंज कर सकते हैं और सिर्फ

[560:25]

एसीसी लिखना पड़ा पूरा यह स्ट्रक्ट बैंक

[560:28]

अकाउंट हमें नहीं लिखना पड़ा वैल्यूज को

[560:30]

भी ऐसे ही प्रिंट करवा सकते हैं प्रिंट ए

[560:32]

अकाउंट नंबर इज इक्वल ट परसेंटेज d

[560:36]

ए1 अकाउंट नंबर एंड नेम = परसेंटेज s

[560:42]

ए1 ने इसको कर लेते हैं सेव एंड रन तो

[560:46]

अकाउंट नंबर हमारा 12 2 3 आ गया नेम हमारा

[560:48]

श्रद्धा आ गया और यह पूरा स्क्रीन पर

[560:50]

प्रिंट होकर आ गया तो इस तरीके से हम हम

[560:52]

एलिस बना सकते हैं उनको क्रिएट कर सकते

[560:54]

हैं टाइप डेफ की हेल्प से और अपने

[560:56]

स्ट्रक्चर्स को यूज करके ना बहुत-बहुत

[560:57]

इंटरेस्टिंग चीजें हम कर सकते हैं सी में

[561:00]

तो यहां पे मैं एक स्पेशल होमवर्क

[561:02]

प्रॉब्लम दूंगी यहां पे कोई अलग से

[561:04]

प्रॉब्लम्स नहीं है होमवर्क प्रॉब्लम ये

[561:05]

होगा कि या तो अपने स्कूल के लिए या अपने

[561:08]

कॉलेज के लिए या किसी कंपनी के लिए ना एक

[561:10]

हमें ऐसा डेटाबेस क्रिएट करना है

[561:12]

स्ट्रक्चर्स की हेल्प से जिसमें हम वहां

[561:14]

पे रहने वाले लोगों की इंफॉर्मेशन को

[561:16]

स्टोर करें फॉर एग्जांपल हम एग्जांपल यहां

[561:18]

पे ले रहे हैं कॉलेज का तो कॉलेज में एक

[561:20]

स्ट्रक्चर आपको स्टूडेंट की फॉर्मेशन

[561:23]

स्टोर करने के लिए बनाना पड़ेगा एक

[561:24]

स्ट्रक्चर टीचर्स की इंफॉर्मेशन स्टोर

[561:26]

करने के लिए बनाना पड़ेगा और एक स्ट्रक्चर

[561:28]

हम कह सकते हैं कि बाकी का जो स्टाफ है

[561:30]

एडमिन वाला जो स्टाफ होता है उसकी

[561:32]

इंफॉर्मेशन स्टोर करने के लिए बना लेंगे

[561:34]

तो ये तीनों स्ट्रक्चर्स की हेल्प से पहले

[561:36]

आप इंफॉर्मेशन सेव करेंगे आप इसमें

[561:39]

डिफरेंट डिफरेंट सेग गन भी कर सकते हैं

[561:41]

जैसे स्टूडेंट की इंफॉर्मेशन तो ले ली

[561:43]

उसमें भी हम अलग-अलग अरेज बना सकते हैं कि

[561:45]

ये सीओई के स्टूडेंट हैं ये फर्स्ट ईयर के

[561:47]

स्टूडेंट हैं ये सेकंड ईयर के हैं थर्ड

[561:48]

ईयर आईटी के स्टूडेंट हैं ये फोर्थ ईयर

[561:50]

मैकेनिकल के स्टूडेंट हैं उस तरीके से से

[561:52]

आपको देखना पड़ेगा कि किस हिसाब से आप

[561:54]

इंफॉर्मेशन स्टोर कराना चाहते हैं तो ये

[561:56]

होमवर्क प्रॉब्लम यह है कि अपने पर्टिकुलर

[561:58]

कॉलेज के लिए आपके कॉलेज में जो जो

[562:01]

ब्रांचेस हैं जिस-जिस तरीके से सिस्टम

[562:02]

रहता है उस हिसाब से आपको एक पूरा सिस्टम

[562:05]

क्रिएट करना है स्ट्रक्चर्स की हेल्प से

[562:06]

जिसमें आप इंफॉर्मेशन को स्टोर करा सके

[562:09]

उसमें यूजर इंफॉर्मेशन एंटर भी कर सके और

[562:11]

उसको आप इंफॉर्मेशन प्रिंट भी करा कर दे

[562:13]

सके अब हम शुरुआत करने वाले हैं अपने

[562:16]

चैप्टर 10 के साथ जिसका नाम है फाइल इनपुट

[562:19]

आउटपुट अब इसको समझने के लिए सबसे पहले एक

[562:21]

बार अपने कंप्यूटर की मेमोरी को थोड़ा सा

[562:23]

समझते हैं हमारे कंप्यूटर के अंदर दो

[562:25]

तरीके की मेमोरी एजिस्ट करती है इनमें से

[562:27]

एक होती है वोलेटाइल मेमोरी वोलेटाइल यानी

[562:31]

जैसे ही कंप्यूटर की पावर बंद करी जैसे ही

[562:34]

आपने प्लग निकाल दिया लैपटॉप एकदम से बंद

[562:36]

हो गया बैटरी डिस्चार्ज हो गई वैसे ही ये

[562:39]

मेमोरी उड़ जाती है और दूसरे टाइप की

[562:41]

मेमोरी होती है हमारी नॉन वोलेटाइल मेमोरी

[562:44]

ये मेमोरी अपने अंदर ऐसा डाटा स्टोर करती

[562:46]

है जो पावर जाने से चेंज नहीं होता वो

[562:49]

वैसे का वैसा रहता है जैसे आप जब भी अपने

[562:51]

कंप्यूटर को खोले हो सकता है आपने कोई गेम

[562:54]

डाउनलोड किया हो तो हर बार वो गेम आपको

[562:56]

दिखाई देगा उसको आप खोल सकते हैं या आपने

[563:22]

कटर की पावर खत्म हो जाती है आपका लैपटॉप

[563:24]

जो है स्विच ऑफ हो जाता है तो क्या होगा

[563:26]

वापस से आप आएंगे तो हो सकता है वह फाइल

[563:28]

आपको ना दिखे या फिर उसमें जो आपने नए

[563:30]

चेंजेज किए थे वो आपको ना दिखें क्योंकि

[563:32]

वो स्टोर्ड थे हमारी वोलेटाइल मेमोरी में

[563:35]

अब कंप्यूटर के अंदर वोलेटाइल मेमोरी रैम

[563:38]

होती है इसको हम रैंडम एक्सेस मेमोरी भी

[563:40]

कहते हैं अब बेसिक्स ऑफ कंप्यूटर साइंस

[563:42]

में हमें पता होगा एक रम होती है एक रोम

[563:44]

होती है बहुत तरीके की मेमोरी होती है

[563:45]

कंप्यूटर के अंदर यहां पे हम मान रहे हैं

[563:47]

वोलेटाइल मेमोरी की जब भी बात कर रहे हैं

[563:49]

तो रम की बात कर रहे हैं और नॉन वोलेटाइल

[563:52]

की जब भी बात कर रहे हैं तो हार्ड डिस्क

[563:54]

की बात कर रहे हैं हार्ड डिस्क के अंदर

[563:55]

कंप्यूटर के अंदर काफी सारा आप डाटा स्टोर

[563:57]

कर सकते हैं इनफैक्ट उस डाटा को निकाल कर

[563:59]

आप किसी और अपने दोस्त को देकर आ सकते हैं

[564:01]

किसी और कंप्यूटर में आप जाकर ट्रांसफर कर

[564:04]

सकते हैं तो लोग यूजुअली क्या करते हैं

[564:06]

अपना जो सारा डाटा उनको बैकअप करना होता

[564:08]

है ना वो हार्ड डिस्क के अंदर बैकअप कर

[564:10]

लेते हैं फिर उसको निकाल देते हैं

[564:11]

कंप्यूटर की नई हार्ड डिस्क लगा देते हैं

[564:13]

इस तरीके से सालों सालों बहुत सारे लोग

[564:15]

बहुत सारा अपना डाटा जमा करते रहते हैं अब

[564:17]

हमारे काम की बात यहां पे यह होगी कि

[564:19]

कंप्यूटर की जो वोलेटाइल मेमोरी है और जो

[564:21]

नॉन वोलेटाइल मेमोरी है इनके बीच में डाटा

[564:24]

जो है ट्रांसफर होता रहता है जैसे आपका जो

[564:27]

कंप्यूटर प्रोग्राम है ना वह स्टोर्ड होता

[564:29]

है हमारे रम में तो प्रोग्राम आ जाता है

[564:33]

वोलेटाइल मेमोरी का पार्ट और हो सकता है

[564:35]

आपके कंप्यूटर सिस्टम में काफी ऐसी फाइल्स

[564:37]

हो जो पड़ी हो तो वो पड़ी होंगी हमारे

[564:40]

हार्ड डिस्क के अंदर तो कंप्यूटर

[564:42]

प्रोग्राम जो है उन फाइल्स को राइट कर

[564:45]

सकता है और उनको रीड भी कर सकता है तो

[564:48]

कंप्यूटर प्रोग्राम यानी रम के अंदर का

[564:50]

कोई पार्ट एक्सेस करना चा जा रहा है

[564:52]

फाइल्स को जो पड़ी है नॉन वोलेटाइल मेमोरी

[564:55]

यानी हमारी हार्ड डिस्क में तो ये जो

[564:57]

प्रोसेस रहता है इसको हम सी की हेल्प से

[564:59]

भी कर सकते हैं डिफरेंट डिफरेंट

[565:00]

प्रोग्रामिंग लैंग्वेजेस में डिफरेंट

[565:02]

डिफरेंट तरीके होते हैं फाइल्स को एक्सेस

[565:03]

करने के और इस चैप्टर के अंदर हम समझने

[565:06]

वाले हैं फाइल में इनपुट आउटपुट यानी फाइल

[565:10]

आओ स के अंदर किस तरीके से परफॉर्म होता

[565:13]

है तो सबसे पहले बात करते हैं कि फाइल

[565:15]

होती क्या है फाइल मेमोरी के अंदर एक

[565:17]

कंटेनर होता है इन अ स्टोरेज डिवाइस टू

[565:20]

स्टोर डाटा यहां पे हमारा स्टोर डिवाइस हो

[565:23]

जाएगा हमारी हार्ड डिस्क तो हार्ड डिस्क

[565:25]

के अंदर डिफरेंट डिफरेंट कंटेनर्स होते

[565:26]

हैं इनको हम चंक ऑफ मेमोरी भी कह सकते हैं

[565:29]

हर एक चंक ऑफ मेमोरी के अंदर काफी सारा

[565:31]

डाटा स्टोर्ड होगा और उसी डाटा को हम फाइल

[565:34]

करह देते हैं जैसे स्कूल्स के अंदर

[565:35]

कॉलेजेस के अंदर हमारी कुछ फाइल स्टोर्ड

[565:37]

होंगी जो हमारी टीचर्स के पास होंगी हमारे

[565:39]

एडमिन डिपार्टमेंट के पास होंगी उन फाइल्स

[565:41]

में हमारा कुछ पर्सनल डाटा स्टोर्ड होगा

[565:44]

मान लीजिए मेरी फाइल है जिसका नाम है

[565:45]

श्रद्धा खापर मेरा कोई क्लासमेट हो सकता

[565:47]

है उसकी फाइल उसके नाम से हो सकती है तो

[565:50]

इस तरीके से जैसे रियल लाइफ में फाइल्स

[565:52]

होती हैं वैसे ही कंप्यूटर सिस्टम के अंदर

[565:53]

भी डिफरेंट डिफरेंट फाइल्स होती हैं

[565:55]

इनफैक्ट अगर हमने पहले कभी कंप्यूटर चलाया

[565:57]

तो हमने जरूर किसी ना किसी फाइल को देखा

[565:59]

होगा अपने सिस्टम के अंदर अब जब भी हम

[566:01]

फाइल्स की बात करते हैं ना उसमें हमें ये

[566:03]

हमेशा याद रखना है r इज वोलेटाइल अब उसके

[566:06]

जो कंटेंट्स हैं दे आर लॉस्ट व्हेन

[566:07]

प्रोग्राम टर्मिनेट यानी प्रोग्राम जैसे

[566:10]

ही खत्म हो जाता है हमारे सी का प्रोग्राम

[566:12]

जैसे ही खत्म होता है हमारी जो डाटा है वो

[566:15]

अपने आप साफ हो जाता है क्योंकि हमारा

[566:17]

प्रोग्राम रम के अंदर है प्रोग्राम रम के

[566:19]

अंदर है मतलब हमारे प्रोग्राम के वेरिएबल

[566:21]

भी रम के अंदर है इसीलिए अपना जो हम c का

[566:23]

कोड लिखते हैं ना जिसमें हम इंट n का कोई

[566:25]

वेरिएबल बना लेते हैं एरे बना लेते हैं

[566:28]

अपनी स्ट्रिंग बना लेते हैं ये सारे के

[566:30]

सारे रम के अंदर आते हैं और सारे के सारे

[566:32]

वोलेटाइल मेमोरी में है जैसे ही आपका

[566:34]

प्रोग्राम खत्म होगा ये वेरिएबल भी मेमोरी

[566:36]

से साफ हो जाएंगे इसीलिए फाइल्स आर यूज्ड

[566:38]

टू पसेस द डेटा तो ऐसा क्या करें कि अगर

[566:42]

हम चाहते हैं हमारे जो वेरिएबल हैं हमारा

[566:44]

जो डटा है वो रम में ना रहकर किसी

[566:47]

परमानेंट स्टोरेज में चला जाए हम उस डटा

[566:49]

को किसी ना किसी तरह स्टोर कर पाएं तो

[566:51]

उसके लिए हम यूज करते हैं फाइल्स का जैसे

[566:53]

मान लीजिए आपने एक प्रोग्राम बनाया था अभी

[566:55]

हमने स्ट्रक्चर्स वाले में कि आपको स्कूल

[566:59]

का या कॉलेज का स्टूडेंट्स का डाटा जो है

[567:01]

इनपुट लेना है अपनी प्रोग्राम में अब जैसे

[567:03]

ही आपका प्रोग्राम खत्म होगा वो डाटा

[567:05]

लॉस्ट हो जाएगा अगली बार वापस से अपना

[567:07]

डाटा लेने के लिए आपको दोबारा प्रोग्राम

[567:08]

चलाना पड़ेगा और यूजर से दोबारा मांगना

[567:10]

पड़ेगा पर आप चाहते हैं कि आप एक ही बार

[567:12]

मांगे यूजर से उसको कहीं पे स्टोर करा लें

[567:14]

तो उसको स्टोर कहां कराएंगे उसको

[567:16]

परमानेंटली स्टोर करा रहे होंगे हम फाइल्स

[567:18]

नाम की चीजों में हमारे कंप्यूटर सिस्टम

[567:20]

के अंदर अब सबसे पहले बात करते हैं कि

[567:22]

फाइल्स पे हम क्या-क्या ऑपरेशंस कर सकते

[567:24]

हैं फाइल को ना वैसे ही इमेजिन करना है

[567:26]

जैसे रियल लाइफ की हमारी फाइल होती है बस

[567:28]

वैसी ही फाइल हमारे कंप्यूटर सिस्टम के

[567:29]

अंदर होती है सबसे पहला ऑपरेशन होता है कि

[567:32]

फाइल को हम क्रिएट कर सकते हैं दूसरा हम

[567:35]

फाइल को ओपन कर सकते हैं उसको क्लोज कर

[567:37]

सकते हैं किसी भी फाइल के डाटा को पढ़ने

[567:40]

के लिए पहले उसको खोलना पड़ेगा और पढ़ने

[567:42]

के बाद उसको बंद करना पड़ेगा उसमें से हम

[567:45]

डेटा को रीड कर सकते हैं और उसमें डाटा

[567:47]

लिख भी सकते हैं यानी डाटा को राइट भी कर

[567:49]

सकते हैं सबसे पहले बात कर लेते हैं

[567:51]

टाइप्स ऑफ फाइल्स की हमारे सिस्टम के अंदर

[567:54]

ना मेजर्ली हम दो टाइप्स ऑफ फाइल्स जो हैं

[567:56]

उनकी बात करेंगे जिनमें से सबसे पहली

[567:58]

हमारी टेक्स्ट फाइल्स टेक्स्ट फाइल्स के

[568:00]

अंदर डाटा टेक्चुअल होता है यानी उसको अगर

[568:04]

आप खोल के देखेंगे ना आपको रियल डाटा

[568:06]

दिखेगा उसमें ए बी सी डी ए सेंटेंसेस लिखे

[568:08]

होंगे या कुछ नंबर्स लिखे होंगे मतलब उसका

[568:11]

जब खोला हुआ डाटा आपको दिखाई देगा तो वो

[568:13]

सेंस बनाएगा हमारे लिए दूसरी तरह की

[568:15]

फाइल्स होती है हमारी बाइनरी फाइल्स

[568:17]

बाइनरी फाइल्स के अंदर डाटा जो होता है वो

[568:19]

रो व की फॉर्म में स्टोर्ड होता है या एक

[568:22]

बड़ा सा सीक्वेंस होगा जिसमें रोज और वनस

[568:24]

होंगे और वो हमारे लिए कोई सेंस नहीं बना

[568:26]

रहा होगा उस तरीके की फाइल को हम बाइनरी

[568:28]

फाइल कहते हैं अब बाइनरी फाइल के भी

[568:30]

अलग-अलग फॉर्मेट हो सकते हैं जैसे

[568:32]

एक्सटेंशंस की बात करें तो ड हमारी बाइनरी

[568:35]

फाइल होती है ड

[568:37]

mp3mp

[568:39]

4jp जिसमें हमारी फोटोज वगैरह होती हैं वो

[568:42]

ये सारी के सारे हमारे बाइनरी फाइल्स के

[568:44]

एक्सटेंशंस हैं और नॉन बाइनरी फाइल्स की

[568:46]

बात करें तो ड txx.com

[568:52]

भी एक टीटी फाइल है अगर डॉट जावा की बात

[568:54]

करें तो वो भी एक टी एकटी फाइल है क्योंकि

[568:56]

उसमें लिखा हुआ डाटा हमें समझ आएगा और

[568:58]

उसमें हम एडिट करेंगे तो वो चेंजेज हमें

[569:00]

दिखाई देंगे वो हमारे लिए सेंस बनाएंगे तो

[569:03]

हमारी एक टेक्स्ट फाइल्स होती हैं और

[569:04]

हमारी एक बाइनरी फाइल्स होती हैं अब यहां

[569:07]

पर मेजर्ली हम टेक्स्ट फाइल्स के ऊपर काम

[569:09]

करेंगे क्योंकि बाइनरी में कोड करना हमें

[569:11]

नहीं आता बट अगर हम सी का कोड लिखने चले

[569:14]

तो उससे सी से हम बाइनरी फाइल्स को भी

[569:17]

एडिट कर सकते हैं उनको भी रीड राइट क्लोज

[569:20]

ओपन सब कुछ कर सकते हैं पर एग्जाम पॉइंट

[569:22]

ऑफ व्यू से या इंटरव्यू पॉइंट ऑफ व्यू से

[569:24]

मोस्टली जो हमें चीजें पूछी जाएंगी वो

[569:26]

टेक्स्ट फाइल से रिलेटेड होंगी सबसे पहले

[569:28]

बात करते हैं फाइल्स को हम एक्सेस कैसे

[569:30]

करें हमने बोल दिया हमारा एक रम है जिसके

[569:32]

अंदर हमारा प्रोग्राम है वेरिएबल है और वो

[569:34]

चाह रहा है कि किसी परमानेंट डाटा स्टोरेज

[569:36]

को वो क्रिएट करे और उसमें से डाटा को

[569:39]

इनपुट आउटपुट करें यानी रीड करें राइट

[569:41]

करें उस फाइल को ओपन करें क्लोज करें पर

[569:43]

ये सारा का सारा काम कैसे होगा ये सारा

[569:46]

काम होता है हमारे फाइल पॉइंट्स की हेल्प

[569:48]

से अब कंप्यूटर के अंदर सी के अंदर हम जो

[569:52]

फाइल होती है ना इट इज अ हिडन स्ट्रक्चर

[569:54]

स्ट्रक्चर ही होता है फाइल एक पर हिडन

[569:56]

होता है मतलब हमसे छुपा होता है उस

[569:58]

स्ट्रक्चर के अंदर हम कोई चेंजेज नहीं कर

[570:00]

सकते कोई बदलाव नहीं लेकर आ सकते इसीलिए

[570:03]

उसका पूरा जो डिक्लेरेशन होती है ना उस

[570:05]

स्ट्रक्चर की वो हमसे हिडन होती है और हर

[570:07]

सिस्टम के हिसाब से अपनी एक अलग फाइल का

[570:09]

स्ट्रक्चर होता है जैसे आप

[570:21]

परट स्टोरेज से जब भी डाटा को रीड करने

[570:24]

जाते हैं तो एक स्ट्रक्चर के अंदर वह सारा

[570:26]

का सारा डाटा रीड इन होता है और वह

[570:28]

स्ट्रक्चर बनाना जरूरी है जब भी हम किसी

[570:30]

भी फाइल को ओपन कर रहे हैं अब उस

[570:32]

स्ट्रक्चर को ना एक फाइल पॉइंटर जो है व

[570:35]

पॉइंट करता है तो फाइल पॉइंटर दैट पॉइंट्स

[570:37]

टू द स्ट्रक्चर एंड इज यूज टू एक्सेस द

[570:39]

फाइल इज कॉल्ड द फाइल पॉइंटर फाइल पॉइंटर

[570:42]

एक स्पेशल टाइप का पॉइंटर होता है जिसका

[570:44]

टाइप तो हमारा फाइल होता है क्योंकि फाइल

[570:47]

का हमने स्ट्रक्चर बना दिया है तो उस फाइल

[570:50]

पॉइंटर की हेल्प से हम एक फाइल को को ओपन

[570:52]

कर सकते हैं क्लोज कर सकते हैं उसमें

[570:53]

चीजें लिख सकते हैं उससे चीजें पढ़ सकते

[570:55]

हैं एंड इनफैक्ट फाइल्स को क्रिएट भी कर

[570:57]

सकते हैं अब उसको लिखने का सिंटेक्स कुछ

[571:00]

ऐसा होता है कि सबसे पहले हम टाइप लिखते

[571:02]

हैं टाइप हो गया यहां पे हमारा फाइल

[571:04]

क्योंकि फाइल इज अ स्ट्रक्चर उसके बाद

[571:07]

हमने लिखा एस्ट रिस्क यानी स्टार उसके बाद

[571:09]

हम कोई भी वेरिएबल लिख सकते हैं यहां पे

[571:11]

क्योंकि एक फाइल का पॉइंटर है इसलिए हमने

[571:13]

एफ पीटीआर लिख दिया अगर आप पीटीआर लिख दें

[571:16]

या

[571:20]

fp4 काना नाम है हमारे लिए हम एफ पीटीआर

[571:24]

यूज करेंगे ताकि ये थोड़ा डिस्टिंक्शन रहे

[571:26]

कि नॉर्मल वेरिएबल के पॉइंटर पीटीआर होते

[571:28]

हैं और फाइल के पॉइंट्स को हम एफपीटीआर कह

[571:30]

रहे हैं तो सबसे पहले अपने कोड के अंदर ना

[571:32]

ये एफपीटीआर बना ही लेते हैं लिखेंगे हम

[571:35]

एफ आई एल ई मतलब हमारा फाइल टाइप और उसके

[571:38]

बाद लिखेंगे स्टार f पटी आ तो हमने क्या

[571:42]

किया फाइल टाइप का हमने एक पॉइंटर

[571:45]

डिक्लेयर कर दिया एफपीटीआर अब इस पॉइंटर

[571:47]

का यूज कैसे करना है मतलब इससे फाइल्स ओपन

[571:49]

कैसे होंगी तो फाइल को ओपन करने के लिए और

[571:52]

क्लोज करने के सिंटेक्स की अगर बात करें

[571:55]

सबसे पहले बात करते हैं फाइल को ओपन करने

[571:57]

की तो एक बार हमने एफ पीटीआर को क्रिएट कर

[571:59]

दिया उसके बाद हमारे पास एक फंक्शन होता

[572:01]

है एफ ओपन नाम से अब मोस्टली जो हम फाइल्स

[572:04]

के फंक्शन डिस्कस करेंगे ना उनके सामने एक

[572:06]

एफ होगा जिससे बहुत क्लियर पता चल जाता है

[572:09]

कि एक फाइल का फंक्शन है फिर चाहे वो

[572:10]

क्लोज करने के लिए ओपन करने के लिए हो

[572:12]

कैरेक्टर्स को रीड करने के लिए हो राइट

[572:14]

करने के लिए हो बहुत सारी चीजें करने के

[572:15]

लिए पर एक कॉमन चीज रहेगी कि फाइल्स के

[572:17]

फंक्शन के सामने एफ होता है ताकि दूर से

[572:19]

ही दिख जाए कि ये फाइल का फंक्शन है तो

[572:22]

फाइल को ओपन करने के लिए f ओपन नाम का एक

[572:24]

फंक्शन होता है यह दो पैरामीटर्स लेता है

[572:27]

इनमें से सबसे पहला पैरामीटर होता है फाइल

[572:29]

का नाम अगर मान लीजिए हमने कोई फाइल बनाई

[572:31]

है

[572:32]

टेड txt.gz

[572:51]

मोड हमें बताता है कि हमें फाइल के अंदर

[572:53]

रीड करना है या फाइल के अंदर राइट करना है

[572:56]

या कुछ और काम करना है क्योंकि हमारे

[572:59]

प्रोग्राम को हमारे सिस्टम को पता होना

[573:01]

चाहिए कि किसी भी फाइल को अगर हम खोल रहे

[573:03]

हैं तो उसको किस मोड में खोल रहे हैं किस

[573:05]

इंटेंशन के साथ खोल रहे हैं क्योंकि

[573:07]

कुछ-कुछ सिस्टम लेवल पे चेंजेज होते हैं

[573:09]

जो होने होते हैं अगर आपको रीड करना है

[573:10]

फिर तो वो बफर लेवल की कुछ चीजें इंटरनली

[573:13]

चल रही होती हैं जो अभी के लिए इतना हम

[573:15]

डिटेल में नहीं जाएंगे बेसिकली हमारे

[573:17]

सिस्टम को पता होना चाहिए कि हमारा

[573:19]

इंटेंशन क्या है किसी भी फाइल को ओपन करने

[573:21]

के पूछे ताकि वो हमारे काम को ना और थोड़ा

[573:23]

सा आसान बना सके अगर हम पहले ही बता देंगे

[573:26]

हमें तो जी राइट करना है तो वो काम को

[573:27]

आसान बना के देगा रीड करना है तो उस काम

[573:29]

को आसान बना के देगा इस पर्सपेक्टिव से हम

[573:31]

मान लेते हैं अब यहां पे हमने फाइल पॉइंटर

[573:34]

में असाइन कर दिया क्या हमने अपनी फाइल को

[573:36]

ओपन कर दिया उसमें दो पैरामीटर्स को पास

[573:39]

करके और फाइनली एफ पीटीआर में उसकी वैल्यू

[573:42]

असाइन कर दी यानी इस एफ ओपन ने क्या किया

[573:44]

होगा फाइल का एक पॉइंटर रिटर्न कर दिया

[573:46]

होगा जिसको हमने एफपीटीआर में स्टोर कर

[573:48]

दिया तो ये स्टेटमेंट होती है फाइल को ओपन

[573:51]

करने ने के लिए अब फाइल को ओपन करने के

[573:53]

लिए पहले फाइल का होना जरूरी है तो एक

[573:55]

फाइल हम क्रिएट कर लेते हैं अपने सेम

[573:57]

फोल्डर के अंदर यहां पर जाएंगे यह जो आइकन

[573:59]

है न्यू फाइल का न्यू फाइल से बनाएंगे .

[574:02]

txt.gz

[574:21]

f ओपन के अंदर पहला पैरामीटर फाइल का नाम

[574:23]

है यानी टेस्ट ड

[574:50]

txt.gz भी प्रैक्टिस करेंगे ना या आप किसी

[574:53]

कॉलेज के अपने पुराने क्वेश्चंस देख लेंगे

[574:55]

काफी सारे आसान क्वेश्चंस आते हैं इस

[574:57]

टॉपिक से मतलब जैसे एरे जैसे टॉपिक से आप

[575:00]

बहुत डिफिकल्ट क्वेश्चन निकाल सकते हो पर

[575:02]

फाइल्स ऐसा टॉपिक है जो अपने आप में हल्का

[575:04]

सा

[575:07]

कॉम्प्लेक्शन भी यहां से सवाल पूछेंगे तो

[575:09]

वो हल्के से हमारे आसान होंगे तो रीकैप कर

[575:11]

लेते हैं फाइल का हमने एफपीटीआर नाम का

[575:13]

पॉइंटर बनाया एफपीटीआर के अंदर फाइल को

[575:15]

ओपन करके उसमें असाइन कर दिए वैल्यू एफ

[575:18]

ओपन फंक्शन हमने यूज़ किया जिसमें पास किए

[575:20]

दो पैरामीटर्स एक हमारी फाइल का नाम और एक

[575:23]

हमारा मोड अब फाइल को जैसे हमने ओपन किया

[575:25]

वैसे ही फाइल को क्लोज कर सकते हैं क्लोज

[575:27]

करने के लिए फंक्शन हमारा होता है एफ

[575:30]

क्लोज एफ क्लोज को लिखने का सिंटेक्स बहुत

[575:33]

आसान है एफ और फिर क्लोज और अंदर सिर्फ उस

[575:36]

फाइल का पॉइंटर डाल दो जिस फाइल को हमें

[575:38]

क्लोज करना है अब क्लोज करने के पीछे

[575:40]

लॉजिक ये है कि जब भी हम किसी फाइल को

[575:42]

खोलते हैं ना हमारा सिस्टम आ जाता है हमें

[575:44]

रिसोर्सेस देने के लिए कि आपको इतनी

[575:47]

मेमोरी चाहिए होगी आपको यह रिसोर्स चाहिए

[575:48]

होगा वो रिसोर्स चाहिए होगा क्योंकि आप एक

[575:50]

इंपॉर्टेंट चीज करने वाले क्योंकि अपनी

[575:52]

परमानेंट मेमोरी से कोई डाटा को रीड करना

[575:54]

एक इंपॉर्टेंट काम है सिस्टम के लिए तो

[575:56]

उसने हमें रिसोर्सेस दे दिए पर अब अगर

[575:59]

हमारी फाइल का काम हमारे लिए एक बार खत्म

[576:01]

हो गया मतलब हमने रीड भी कर लिया उसमें

[576:02]

राइट भी कर लिया काम खत्म हो गया तो अब

[576:05]

हमें वो रिसोर्सेस कायदे से अपने सिस्टम

[576:07]

को वापस दे देने चाहिए हमारी मर्जी है

[576:09]

वैसे अगर हम फाइल क्लोज ना भी करें तो भी

[576:12]

परेशानी नहीं आएगी पर जब भी हम बड़े कोड्स

[576:14]

लिखते हैं ना उसके अंदर बहुत ज्यादा

[576:16]

एडवाइज किया जाता है बहुत ज्यादा अच्छी

[576:18]

प्रैक्टिस है कि आप एंड ऑफ द प्रोग्राम

[576:20]

में जब आपका काम खत्म हो गया है फाइल के

[576:22]

साथ तो फाइल को क्लोज जरूर कर दें क्योंकि

[576:25]

आपके सिस्टम के जो रिसोर्सेस हैं ना वो जा

[576:27]

रहे होते हैं फाइल को ओपन करने से आपका

[576:29]

सिस्टम स्लो हो रहा होता है तो सिस्टम की

[576:31]

एफिशिएंसी बढ़ाने के लिए आपको अपनी फाइल्स

[576:34]

को हमेशा क्लोज करना है ताकि कंपाइलर को

[576:36]

पता चल जाए कि यहां पे फाइल का काम खत्म

[576:38]

हो गया है तो अब हमें काम तो करना नहीं है

[576:40]

पर हम अपनी फाइल को क्लोज कर देते हैं लिख

[576:41]

देते हैं यहां पे एफ क्लोज और अंदर पास कर

[576:43]

देंगे फाइल पॉइंटर f पीटीआर तो ये क्या

[576:46]

हुआ यहां फाइल ओपन हुई थी हमने कुछ काम

[576:49]

करना नहीं था तो हमने सिंपली यहां पे एफ

[576:51]

क्लोज से फाइल को कर दिया क्लोज नेक्स्ट

[576:54]

बात करते हैं कि फाइल में क्या-क्या हम

[576:55]

मोड्स में हम किसी फाइल को खोल सकते हैं

[576:58]

अभी सबसे पहले मोड हमने जो पढ़ा वो था r

[577:00]

वाला यानी हम फाइल को पढ़ने के लिए रीड

[577:04]

करने के लिए ओपन कर रहे हैं दूसरा है

[577:07]

हमारा आरबी आरबी मोड में अगर ओपन करते हैं

[577:09]

तो रीड होती है फाइल इन बाइनरी फॉर्मेट तो

[577:11]

ये यूजुअली बाइनरी फाइल्स के लिए होगा

[577:13]

हमारे अभी इतने काम का नहीं है पर हां अगर

[577:15]

आपके क्वेश्चन पेपर में आपके अगर कॉलेज के

[577:18]

अंदर टेस्ट के अंदर सवाल आ जाता है कि

[577:20]

किसी बाइनरी फाइल को आप ओपन करो या बाइनरी

[577:23]

फॉर्म में आप ओपन करो तो फिर आपको ध्यान

[577:25]

रखना है कि आरब हमें मोड की तरह यूज़ करना

[577:27]

होता है आर नहीं अब इन दोनों के बारे में

[577:29]

ना एक स्पेशल चीज है ये दोनों फंक्शंस के

[577:31]

बारे में एक स्पेशल चीज ये है कि अगर मान

[577:33]

लो फाइल एजिस्ट ही नहीं करती आप कॉल करना

[577:36]

चाह रहे हैं h स और लोड स को कभी किसी ने

[577:39]

बनाया ही नहीं तो क्या होगा तो पॉइंटर के

[577:41]

अंदर आकर नल स्टोर हो जाएगा तो राइट मोड

[577:44]

में तो रीड मोड में और रीड बाइनरी मोड में

[577:47]

दोनों के अंदर अगर आपकी फाइल एजिस्ट नहीं

[577:49]

करती है तो पॉइंटर के अंदर एक नल पॉइंटर

[577:51]

वो बन जाएगा यानी न लाके स्टोर हो जाएगा

[577:54]

नेक्स्ट बात करते हैं हमारे राइट की राइट

[577:56]

मोड के अंदर आपका इंटेंशन ये है कि फाइल

[577:58]

के अंदर आप कुछ लिखना चाहते हैं और राइट

[578:01]

बाइनरी यानी आप अपनी फाइल के अंदर बाइनरी

[578:04]

फॉर्मेट में कुछ लिखना चाहते हैं अब यहां

[578:06]

पे भी एक स्पेशल चीज आ जाती है जब भी आप

[578:09]

फाइल को लिखने जाते हैं ना और अ मान लीजिए

[578:12]

आपने फिर से दोबारा लोड स को खोलने की

[578:14]

कोशिश की राइट करने के लिए उसमें चीजें पर

[578:16]

हेलो डॉट स एजिस्ट नहीं करता तो ये दोनों

[578:19]

फंक्शंस यानी राइट और राइट बाइनरी उस फाइल

[578:22]

को क्रिएट कर देंगे अगर वो एजिस्ट नहीं

[578:24]

करती आपने फाइल नहीं बनाई पर आप लिखना

[578:26]

चाहते हैं तो चलिए हम आपके लिए क्रिएट कर

[578:28]

देते हैं इस तरीके का सिस्टम रहता है और

[578:30]

अगर फाइल ऑलरेडी एजिस्ट करती है मान लीजिए

[578:33]

आपकी एक फाइल है जिसके अंदर आपने कुछ-कुछ

[578:35]

डाटा स्टोर कराया है और आप उसको राइट या

[578:37]

राइट बाइनरी फॉर्मेट में खोलते हैं इन

[578:39]

मोड्स में खोलते हैं तो सबसे पहले आपकी

[578:41]

फाइल खुलेगी फिर उसके अंदर का डाटा डिलीट

[578:43]

हो जाएगा एंड उसके बाद इनको जो डाटा राइट

[578:46]

कराना होगा वो वो राइट करा देंगे तो आपकी

[578:48]

पूरी फाइल का जो डाटा है वो ओवरराइट हो

[578:51]

जाता है अगर आप राइट या राइट बाइनरी से

[578:53]

खोलते हैं लेकिन आप चाहते हैं पुराना डाटा

[578:55]

भी सेव्ड रहे और उसमें नीचे आके मेरा नया

[578:58]

डाटा जो है वो स्टोर हो जाए तो उस केस में

[579:00]

हम यूज़ करते हैं अपेंड का यानी ए को एज अ

[579:03]

मोड यूज करते हैं अपेंड करने का मतलब है

[579:06]

पुराने में लाके जोड़ देना तो आपका नए

[579:09]

वाला डाटा पुराने वाले डाटा के बाद ऐड

[579:11]

होना शुरू होगा तो ये पांच सबसे

[579:13]

इंपॉर्टेंट मोड्स हैं जो हम यूज कर सकते

[579:15]

हैं जब भी हम किसी फाइल को ओपन करते हैं

[579:18]

अब सबसे पहले एक बेस्ट प्रैक्टिस देख लेते

[579:20]

हैं बेस्ट प्रैक्टिस हमारी यह है कि अगर

[579:22]

हम किसी फाइल को रीड करने के लिए ओपन कर

[579:24]

रहे हैं ना तो उसमें से डाटा रीड करने से

[579:26]

पहले सबसे पहले हमें यह चेक कर लेना चाहिए

[579:28]

कि क्या हमारी फाइल एजिस्ट भी करती है तो

[579:31]

फाइल एजिस्ट करती है या नहीं उसके लिए हम

[579:33]

कोड लिख लेते हैं हम मान लीजिए एक फाइल

[579:35]

ओपन करने की कोशिश कर रहे हैं जिसका नाम

[579:37]

है न्यू टेस्ट अब अगर न्यू टेस्ट एजिस्ट

[579:40]

नहीं करती होगी तो हमने अभी डिस्कस किया

[579:41]

कि एफ पीटीआर के अंदर रीड मोड में है तो

[579:44]

एफ पीटीआर के अंदर क्या आ गया होगा नल आ

[579:46]

गया होगा तो इसमें हम कंडीशन लगा सकते हैं

[579:48]

कि इफ ए पीटीआर इज इक्व टू इ इक्वल टू नल

[579:51]

उस केस में हम प्रिंट करवा देंगे फाइल डजन

[579:56]

एजिस्ट पर अगर ऐसा नहीं

[579:59]

है तो मतलब फाइल हमारी खुल गई है और अब हम

[580:03]

फाइल को कर देंगे अपनी क्लोज तो बहुत

[580:06]

सिंपल सी चीज करी हमने हमने ऑलरेडी पढ़

[580:08]

लिया था कि रीड मोड में फाइल को खोलते हैं

[580:09]

अगर और फाइल हमारी एजिस्ट नहीं करती तो

[580:11]

क्या होगा एफ पीटीआर के अंदर नल आ जाएगा

[580:14]

तो उसी पे हमने चेक लगा दिया कि एफ पीटीआर

[580:16]

अगर नल है तो प्रिंट करवा दो फाइल एजिस्ट

[580:18]

नहीं करती और एफ पीटीआर में अगर कोई

[580:20]

वैल्यू आई है तो ठीक है अभी कोई काम नहीं

[580:22]

है तो उसको हम क्लोज करवा देंगे अगर कोई

[580:24]

काम होता तो यहां पे इस तरीके से हम कोई

[580:26]

स्टेटमेंट लिख लेते उस काम को करवाने के

[580:28]

लिए तो इसको एक बार सेव भी कर लेते हैं और

[580:30]

रन भी कर लेते हैं देखते हैं क्या आउटपुट

[580:32]

आता है फाइल डजन एजिस्ट क्योंकि न्यू

[580:34]

टेस्ट नाम की फाइल एजिस्ट ही नहीं करती

[580:36]

अभी हमने बनाई नहीं अब यहीं पर अगर हम r

[580:39]

की जगह w लिख देते तो क्या होता राइट मोड

[580:42]

में हमारे लिए ये न्यूटेस्ट ड txt.gz

[580:51]

t एक्सटी खोलना चाहते हैं तो कंपाइल एंड

[580:53]

रन तो एट दी एंड क्या हुआ यह अचानक से एक

[580:57]

न्यू टेड t एकटी फाइल हमारे लिए आ गई और

[580:59]

इस फाइल को खोल भी सकते हैं अभी फाइल खाली

[581:01]

है क्योंकि उसमें कुछ राइट तो हमने किया

[581:03]

नहीं है पर वो फाइल क्रिएट जरूर हो गई

[581:05]

हमारे लिए नेक्स्ट बात करते हैं रीडिंग

[581:07]

फ्रॉम अ फाइल अब आपने फाइल ओपन करना सीख

[581:09]

लिया क्लोज करना सीख लिया उसमें से डटा

[581:11]

कैसे पढ़ा जाए ओपन तो हमने कर लिया अब

[581:13]

उसका डटा कैसे पढ़ा जाए तो डेटा हम पढ़ते

[581:16]

हैं फाइल पॉइंटर की हेल्प से सबसे पहले

[581:18]

मान लीजिए तो डेटा को पढ़ने के लिए हम

[581:21]

स्कैन एफ और प्रिंट एफ की जगह एफ स्कैनफ

[581:24]

और एफ प्रिंट एफ दो फंक्शंस का इस्तेमाल

[581:26]

करते हैं इनसे हम अलग-अलग टाइप का डाटा

[581:28]

पढ़ सकते हैं वो स्ट्रिंग डेटा भी हो सकता

[581:30]

है वो कैरेक्टर डेटा भी हो सकता है वो

[581:31]

इंटी जर डटा भी हो सकता है फ्लोट डेटा भी

[581:33]

हो सकता है तो एफ स्कैनफ में जैसे स्कैनफ

[581:36]

के अंदर जैसे स्कैन एफ की अगर बात करें

[581:39]

स्कैन एफ क्या करता था सबसे पहले ले लेता

[581:41]

था फॉर्मेट

[581:43]

स्पेसिफाइड ऑफ वेरिएबल तो दो पैरामीटर्स

[581:46]

इसके अंदर होते थे पर हमारे एफ स्कैनफ के

[581:49]

अंदर तीन पैरामीटर्स हैं जिनमें से पहला

[581:51]

है हमारा फाइल पॉइंटर दूसरा है हमारा

[581:53]

फॉर्मेट

[581:55]

स्पेसिफाइड ऑफ वेरिएबल तो सबसे पहले बता

[581:58]

देंगे कौन सी फाइल से हमें डाटा रीड करना

[582:00]

है तो एफ स्कैन एफ लिखेंगे अंदर फाइल

[582:03]

पॉइंटर उसके बाद लिखेंगे कि किस तरीके का

[582:06]

डाटा हमारा रीड हो रहा है मान लीजिए एक

[582:08]

कैरेक्टर हम रीड कर रहे हैं उस फाइल से और

[582:10]

उसके बाद उस कैरेक्टर को कहां पे रीड करके

[582:12]

स्टोर कराना है तो उसके लिए हमने ऑलरेडी

[582:14]

एक कैरेक्टर नाम का वेरिएबल बना लिया है

[582:16]

तो उसके लिए ऑलरेडी हमने कैरेक्टर टाइप का

[582:18]

वेरिएबल बना लिया है सी जिसमें हम अपने

[582:21]

डटा कैरेक्टर करके रीड करेंगे अब ये डाटा

[582:24]

रीड कैसे हो पा रहा है जैसे स्कन एफ क्या

[582:26]

करता है हम कीबोर्ड से अलग-अलग कीज को

[582:28]

प्रेस करते हैं और स्कैनफ उनको रीड करता

[582:30]

रहता है वैसा ही कुछ सिस्टम है एफ स्नफ का

[582:33]

फाइल के अंदर जो डाटा सारा का सारा लिखा

[582:35]

होता है ना उसको हमें अज्यू करना है कि वो

[582:37]

भी कीबोर्ड की कीज की तरह प्रेस हो रहा है

[582:39]

और जैसे-जैसे वो डाटा हमारा हमें मिलता

[582:42]

रहता है वैसे-वैसे वो एफ स्कैनफ से स्कैन

[582:45]

होता रहता है यानी इनपुट होता रहता है

[582:47]

इसको एक बार कोड से भी करके देख लेते हैं

[582:49]

हमारी टेस्ट के अंदर हम हमने ऑलरेडी एल जो

[582:52]

है वो लिख के सेव कराया हुआ है और हम रीड

[582:54]

करना चाह रहे हैं एक कैरेक्टर अपनी फाइल

[582:56]

से तो सबसे पहले क्या करेंगे कैरेक्टर बना

[582:59]

लेते हैं सी अब करेंगे स्कैन एफ जिसमें

[583:03]

सबसे पहले फाइल पॉइंटर पास करेंगे उसके

[583:05]

बाद पास करेंगे अपना फॉर्मेट स्पेसिफाइड

[583:07]

यानी परसेंटेज सी एंड उसके बाद अपने

[583:10]

वेरिएबल का एड्रेस एड्रेस ऑफ सी अब प्रिंट

[583:14]

कर देंगे हमने जो भी वेरिएबल रीड किया है

[583:16]

कैरेक्टर इज इक्वल टू परसेंटेज सी और इस

[583:19]

कैरेक्टर सी प्रिंट करवा देंगे और एट दी

[583:22]

एंड क्या करेंगे अपनी फाइल को कर देंगे

[583:26]

क्लोज बाय एफ

[583:28]

पीटीआर इसको सेव कर लेते हैं और एक बार

[583:31]

करते हैं रन तो यहां पे कुछ प्रिंट नहीं

[583:33]

हुआ कुछ इसलिए प्रिंट नहीं हुआ क्योंकि

[583:34]

हमने न्यू टेस्ट को खोल रखा है हमें टेस्ट

[583:36]

को खोलना है और यहां पे बै

[583:41]

n क्लियर कंपाइल रन तो रन करके अभी भी

[583:47]

कैरेक्टर की जो वैल्यू है वह प्रिंट नहीं

[583:49]

हुई हमारे पास इसीलिए प्रिंट नहीं हुई

[583:51]

क्योंकि हमने इसको खोला हुआ है अभी भी

[583:53]

राइट मोड में इसको रीड मोड में हमें खोलना

[583:55]

पड़ेगा एक बार दोबारा से कंपाइल एंड रन कर

[583:57]

लेते हैं कंपाइल एंड रन तो हमारे पास आ

[584:01]

गया हमारा कैरेक्टर इ इक्वल टू a इसने

[584:04]

क्या किया

[584:20]

स्कैन करवा के उसको सेम वेरिएबल के अंदर

[584:22]

स्टोर करवा देते हैं जैसे सीच की वैल्यू

[584:24]

तो हमने ऑलरेडी प्रिंट कर दी अब दोबारा से

[584:26]

अगले कैरेक्टर को भी सीच में ही रीड कर

[584:27]

लेते हैं और यहां पे प्रिंट करवा देते हैं

[584:30]

और ये सेम चीज हम बार-बार करेंगे पांच बार

[584:33]

क्योंकि हमें पूरे एल को रीड करना है इसको

[584:35]

भी सेव करके रन करवाते हैं तो यहां ध्यान

[584:37]

से अपनी आउटपुट स्क्रीन को हम देखें तो

[584:39]

सबसे पहले ए उसने रीड किया फिर p रीड किया

[584:42]

फिर दोबारा से कैरेक्टर में पी रीड किया

[584:44]

एंड फिर फोर्थ कैरेक्टर जो उसने रीड किया

[584:46]

वो एल है एंड फिफ्थ कैरेक्टर इज ई तो एक

[584:48]

तरीके से एक कैरेक्टर बाय कैरेक्टर जा जा

[584:51]

के हमारा जो पूरा का पूरा वर्ड है वो रीड

[584:54]

हो गया है अब यहां मान लीजिए हम कैरेक्टर

[584:55]

स्टोर नहीं करते हम स्टोर कर लेते कुछ

[584:58]

नंबर जैसे 1 2 3 4 5 6 8 9 8 तो इन नंबर्स

[585:03]

को अब हमने स्टोर कर दिया अब कैरेक्टर को

[585:04]

स्टोर नहीं करते वो भी केस लेख लेते हैं

[585:07]

इस बार हमें रीड करना है इंटी जर टाइप का

[585:09]

डाटा इसको सीच ही रखते हैं और इंटी जर

[585:12]

टाइप के लिए यहां हर जगह हमें चेंज करना

[585:15]

पड़ेगा बस परसेंटेज डी

[585:23]

एंड सिंस हमारे तीन ही नंबर्स हमने जो है

[585:25]

लिखे हुए हैं यानी यहां पर टेस्ट के अंदर

[585:27]

तीन ही नंबर्स हैं तो हम तीन ही बार स्कैन

[585:29]

करके प्रिंट करवाएंगे इसको कर लेते हैं

[585:31]

सेव एंड रन एक बार तो सबसे पहले हमारे लिए

[585:34]

1 2 3 रीड होके आ गया इसने एक साथ 12 23

[585:37]

को क्या किया अपने एक इंटी जर के अंदर

[585:39]

स्टोर करा दिया फिर 456 को एक इंटी जर के

[585:42]

अंदर स्टोर करा दिया और प्रिंट करवा दिया

[585:43]

फिर 898 को सिंगल इंटी जर के अंदर स्टोर

[585:46]

करवा के प्रिंट करवा दिया तो यहां पे अगर

[585:48]

फ्लोटिंग वैल्यूज होती स्ट्रिंग्स होती

[585:50]

हमारे दूसरे तरीके के इंटी जर्स होते हैं

[585:53]

तो सारी की सारी चीजें जो है ना स्कैन एफ

[585:55]

से हम स्कैन कर सकते हैं और उनको अपनी

[585:57]

स्क्रीन पे प्रिंट कर सकते हैं स्कैनफ से

[585:59]

नहीं एफ स्कैनफ से व्हिच इज यूज

[586:01]

एक्सक्लूसिवली फॉर फाइल्स अब जैसे हम फाइल

[586:03]

से रीड कर सकते हैं डाटा वैसे ही राइट भी

[586:05]

कर सकते हैं राइट करने के लिए हमारा

[586:07]

फंक्शन जो यूज होता है वो होता है एफ

[586:09]

प्रिंट एफ एफ प्रिंट एफ के अंदर भी तीन

[586:12]

हमारे अ पैरामीटर्स जो है पास होते हैं

[586:14]

पहला होता है हमारा फाइल पॉइंटर दूसरा

[586:16]

होता है हमारा फॉर्मेट

[586:20]

से वेरिएबल की वैल्यू प्रिंट करवानी है इस

[586:23]

फॉर्मेट स्पेसिफीज पे तो इसको भी करके देख

[586:26]

लेते हैं हम क्या करेंगे हमारी जो फाइल है

[586:28]

यानी टेस्ट फाइल के अंदर हमने स्टोर कराया

[586:50]

लिखने वाले हैं तो यहां पे हटा लेते हैं

[586:52]

तो सबसे पहले लिखते हैं एफ प्रिंट एफ एफ

[586:54]

प्रिंट एफ के अंदर सबसे पहले आर्गुमेंट

[586:56]

जाएगा हमारा फाइल पॉइंटर उसके बाद जाएगा

[586:59]

हमारा कैरेक्टर कैरेक्टर में सबसे पहले हम

[587:02]

भेजना चाहते हैं अपने एम को एंड इसी तरीके

[587:04]

से डिफरेंट डिफरेंट कैरेक्टर्स को भेजते

[587:07]

रहेंगे ए एन जी एंड ओ इसको कर लेते हैं

[587:13]

सेव एंड अब इसको रन करके देखते

[587:15]

हैं शुरुआत में एक बार टेस्ट भी कर लेते

[587:18]

हैं ड t एकटी के अंदर अभी एल है और जैसे

[587:21]

ही हम इस कोड को रन करेंगे ना वैसे ही

[587:23]

इसके अंदर एल से चेंज होके मैंगो हो गया

[587:25]

है तो फाइल का जो पूरा का पूरा टेक्स्ट था

[587:27]

पूरा का पूरा डाटा था उसको हम रिप्लेस कर

[587:29]

देते हैं जब भी हम राइट करते हैं पर इस

[587:31]

बार अगर हम अपेंड करना चाहे मतलब अपेंड

[587:34]

मोड में अगर इस फाइल को खोले तो मैंगो जो

[587:36]

है अब देखते हैं क्या आउटपुट आता है इसके

[587:39]

बाद एक और मैंगो जुड़ गया अब इस केस में

[587:41]

यानी जब हमने अपेंड किया तो हमारा पुराने

[587:43]

वाला डाटा जो है वो इरेज नहीं हुआ हमने उस

[587:46]

डाटा में कुछ एडिशनल चीजें ऐड कर दी है

[587:48]

नेक्स्ट बात करते हैं कि अगर हमें सिर्फ

[587:50]

एक कैक्ट टर बाय कैरेक्टर किसी फाइल को

[587:52]

रीड करना हो एक तो है कि आप परसेंटेज सी

[587:54]

लगाकर फॉर्मेट स्पेसिफाई लगाकर आप एफ

[587:57]

प्रिंट एफ या एफ स्कैनफ से करें वरना इसके

[588:00]

लिए दो स्पेशल फंक्शंस भी होते हैं फाइल्स

[588:02]

के अंदर जिसमें से सबसे पहला फंक्शन है एफ

[588:04]

गेट सी और दूसरा फंक्शन है एफ पुट सी एफ

[588:07]

गेट सी क्या करता है गेट सी यानी गेट

[588:10]

कैरेक्टर तो फाइल के अंदर से कैरेक्टर को

[588:13]

लेकर आता है और एफ पुट सी पुट कर देता है

[588:16]

एक कैरेक्टर को फाइल के अंदर तो यह

[588:19]

कैरेक्टर्स को रीड करने के लिए यूज़ होता

[588:21]

है और ये कैरेक्टर्स को फाइल के अंदर राइट

[588:23]

करने के लिए यूज़ होता है दोनों का जो

[588:26]

सिंटेक्स है वो काफी आसान सा है एफ गेट स

[588:28]

के अंदर आप सिंपली क्या करते हैं फाइल

[588:30]

पॉइंटर अपना डाल देते हैं यानी पहले जो

[588:33]

हमारा सिंटेक्स चल रहा था एफ स्कैनफ से हम

[588:36]

क्या कर रहे थे सबसे पहले फाइल पॉइंटर

[588:38]

डालते थे उसके बाद डालते थे परसेंटेज सी

[588:41]

एंड उसके बाद डालते थे उस कैरेक्टर का

[588:43]

एड्रेस जिसमें हमें रीड करके डाटा को

[588:45]

स्टोर करवाना है अब हमने यहां पे ये वाला

[588:48]

स्टेप और ये वाला स्टेप हटा दिया तो चीजें

[588:50]

जो है है आसान हो जाएंगी यहां पे सिंपली

[588:52]

पास करना है फाइल पॉइंटर और यह फाइल

[588:54]

पॉइंटर क्या करेगा सिंपली हमारे फंक्शन के

[588:56]

अंदर जाएगा और यह फंक्शन हमें रिटर्न करके

[588:58]

दे देगा वो कैरेक्टर जो इसने रीड किया है

[589:00]

हमारी फाइल के अंदर से सिमिलर चीज हमारा

[589:02]

पुट स करेगा पुट स क्या करेगा पहले वो

[589:04]

कैरेक्टर ले लेगा जिसको फाइल के अंदर राइट

[589:06]

करना है फिर ले लेगा उस फाइल का पॉइंटर

[589:09]

जिसके अंदर राइट करना है और सिंपली उस

[589:11]

फाइल के अंदर जाके उस कैरेक्टर को वो राइट

[589:13]

कर देगा इन दोनों से भी मतलब एफ पुट सी और

[589:17]

एफ गेट सी से भी अपने डाटा को रीड कर लेते

[589:19]

हैं पहले हमने क्या किया था एफ प्रिंट

[589:22]

किया था अबकी बार अपनी फाइल को खोलते हैं

[589:25]

सबसे पहले रीड मोड में रीड मोड में

[589:27]

खोलेंगे और यहां पर लिखेंगे एफ गेट सी

[589:32]

पीटीआर अब यहां से तो कैरेक्टर हमें

[589:34]

रिटर्न हो जाएगा पर उसको प्रिंट भी करवाना

[589:36]

पड़ेगा साथ के साथ तो प्रिंट एफ कर लेते

[589:38]

हैं परसेंटेज

[589:43]

सी दिस इ एफ

[589:45]

पीटीआर अब इस कोड को पांच बार हम कॉपी

[589:49]

करवा देते हैं

[589:52]

टेस्ट के अंदर जो है अपना वापस से एल जो

[589:55]

है उसको रीइंस्टॉल कर देते हैं अब अपने

[589:59]

कोड को सेव करके एक बार रन करते हैं

[590:01]

आउटपुट हम एनालाइज करेंगे कि सेम आएगा

[590:03]

क्या और आउटपुट सेम आया यानी हमारे

[590:05]

कैरेक्टर बाय कैरेक्टर जो है फाइल से रीड

[590:07]

हो हो के हमारी स्क्रीन के ऊपर हमारे लिए

[590:09]

प्रिंट हो गए हैं यूजिंग एफ गेट सी ऐसे ही

[590:12]

हम अगर राइट मोड में अपनी फाइल को खोले और

[590:15]

इस बार हम राइट करना चाहते हैं इसको भी

[590:17]

कॉमेंट आउट कर देते हैं सिंपली हमें लिखना

[590:19]

है f पुट सी उसके अंदर सबसे पहले लिखेंगे

[590:23]

अपना कैरेक्टर एंड हमारे फाइल का

[590:32]

पॉइंटर सेम चीज करने की कोशिश करेंगे

[590:34]

हमारी टेस्ट फाइल के अंदर एल स्टोर्ड है

[590:36]

उसको हम रिप्लेस करना चाह रहे हैं मैंगो

[590:38]

से तो राइट मोड में इस फाइल को खोलने वाले

[590:41]

हैं और मैंगो लिखने वाले हैं एफ पुट सी की

[590:43]

हेल्प से इसको भी सेव करके रन करते हैं

[590:52]

तो अब टेस्ट फाइल को देखें तो हमारे लिए

[590:54]

मैंगो आ गया इंस्टेड ऑफ एल तो कैरेक्टर के

[590:56]

लिए अगर करना हो तो कैरेक्टर के लिए f

[590:58]

स्कैन एफ भी कर सकते हैं या एफ गेट सी भी

[591:00]

कर सकते हैं पर अगर हमें बाकी जो डटा

[591:03]

टाइप्स हैं जैसे स्ट्रिंग हो गया इंटी जर

[591:05]

हो गया फ्लोट हो गया तो उन सब के लिए हमें

[591:06]

पता है कि हमें एफ स्कैनफ या एफ प्रिंट एफ

[591:08]

ही यूज़ करना पड़ेगा नेक्स्ट बात करते हैं

[591:10]

ईओएफ की ईओएफ एक स्पेशल चीज है जिसको एंड

[591:13]

ऑफ फाइल भी कहा जाता है अब ये जो ईओएफ है

[591:16]

ना अलग-अलग लैंग्वेजेस में एजिस्ट करता है

[591:18]

सी का ईओएफ कैपिटल ईओएफ होता है जावा के

[591:21]

अंदर भी स्मॉल ईओएफ होता है तो ईओएफ होता

[591:24]

है एंड ऑफ फाइल जब हम एफ गेट सी से

[591:26]

कैरेक्टर्स को रीड करते हैं तो जैसे ही

[591:29]

हमारी फाइल के अंदर एक-एक करके एक-एक करके

[591:31]

कैरेक्टर रीड कर करके हमारे सारे कैरेक्टर

[591:33]

खत्म हो जाते हैं तो हमारा एफ गेट सी

[591:36]

रिटर्न करता है ईओएफ और ईओएफ रिटर्न करने

[591:39]

का मतलब है ईओएफ इज लाइक नल जैसे नल

[591:42]

रिटर्न होता था तो हमें पता चलता था फाइल

[591:44]

एजिस्ट ही नहीं करती वैसे ही ईओएफ जब

[591:46]

रिटर्न होता है तब हमें पता चलता है कि हम

[591:48]

अपने फाइल के एंड पे पहुंच गए हैं मतलब

[591:50]

हमने सारे के सारे डाटा को ट्रेव्स कर

[591:52]

लिया है उसको रीड कर लिया अब हमारी फाइल

[591:54]

के अंदर कोई ऐसा डाटा नहीं है जिसको हमने

[591:56]

रीड ना किया हो तो एफ गेट स से जब भी डटा

[591:59]

को रीड करते हैं इसका फायदा यह होता है

[592:01]

कैरेक्टर्स को रीड करने का कि ईओएफ हमें

[592:03]

मिल जाता है डाटा को पढ़ने के बाद जैसे

[592:05]

मान लीजिए हमारी फाइल के अंदर हमने काफी

[592:07]

सारा डाटा स्टोर करा दिया दिस इज अ रैंडम

[592:11]

स्ट्रिंग ऑफ वर्ड्स तो इस तरीके का काफी

[592:14]

सारा डाटा हमने स्टोर करा दिया और इस पूरे

[592:16]

डाटा को हम रीड करना चाहते हैं तो इस पूरे

[592:19]

डटा को रीड करने के लिए हमें इसको

[592:20]

कैरेक्टर बाय कैरेक्टर रीड करना पड़ेगा

[592:23]

प्लस एंड में हम एक लिमिट लगा देंगे कब तक

[592:25]

रीड करना है जब तक ईओ नहीं आ जाता तो उसके

[592:28]

लिए एक सिंपल सा कोड लिख के देखते हैं आप

[592:30]

नोटिस करेंगे हर एक कोड के अंदर फाइल को

[592:32]

ओपन करने का और क्लोज करने का ये दोनों

[592:35]

लाइन तो कांस्टेंट ही हैं फाइल पॉइंटर को

[592:37]

डिक्लेयर करने के बाद अब इस जो फाइल है

[592:39]

इसको हम रीड मोड में खोलने वाले हैं और

[592:41]

इसको कैरेक्टर बाय कैरेक्टर रीड करेंगे तो

[592:44]

सबसे पहले कैरेक्टर बना लेते हैं सी जो

[592:46]

सारी की सारी वैल्यूज को रीड करने वाला है

[592:48]

अब सी के अंदर सबसे पहले फर्स्ट कैरेक्टर

[592:50]

को रीड करवाते हैं फर्स्ट कैरेक्टर कैसे

[592:52]

रीड करवाएंगे एफ गेट सी उसके अंदर डाल

[592:54]

देंगे एफ पीटीआर तो एफ गेट सी के अंदर एफ

[592:57]

पीटीआर डाल के हम अपने कैरेक्टर को अपने

[593:00]

कैरेक्टर को रीड कर लेंगे और उसको सी नाम

[593:02]

के वेरिएबल में स्टोर करा देंगे इसके बाद

[593:03]

क्या करेंगे एक वाइल लूप लगा देते हैं

[593:05]

वाइल लूप क्यों क्योंकि हमें बार-बार

[593:07]

बार-बार बार-बार लूप की फॉर्म में एक-एक

[593:09]

करके कैरेक्टर को रीड करना है जैसे टेस्ट

[593:11]

के अंदर जाएं तो सबसे पहले t को रीड

[593:13]

करेंगे फिर हम एच को रीड करेंगे फिर हम आई

[593:16]

को रीड करेंगे फिर हम ए को रीड करेंगे फिर

[593:18]

ये जो स्पेस है हम इसको रीड कर रहे होंगे

[593:20]

फिर दोबारा से आई को ए को इस तरीके से

[593:22]

पूरी की पूरी स्ट्रिंग ऑफ वर्ड्स को

[593:24]

इनफैक्ट यहां पे पैराग्राफ होता पूरा आपने

[593:41]

google2 कर दिया परसेंटेज सी उसी कैरेक्टर

[593:44]

को जिसको हमने अभी रीड किया है एंड दोबारा

[593:47]

से रीड कर लो यानी सीच के अंदर अब नई

[593:48]

वैल्यू ले लेंगे f गट स से इसके अंदर एफ

[593:51]

पीटीआर एंड फाइनली एक नेक्स्ट लाइन हम

[593:53]

प्रिंट करवा देते हैं अपने कंसोल पे इस

[593:56]

कोड को हल्का सा ध्यान से समझते हैं

[593:58]

कैरेक्टर सीए हमने एक डमी कैरेक्टर ले

[594:00]

लिया है इसके अंदर डाटा रीड करवा करवा के

[594:02]

फाइल से यहां पे स्टोर करा देंगे पहला

[594:04]

कैरेक्टर रीड करवाया और फिर एक लूप लगा

[594:07]

दिया लूप के अंदर तब तक कैरेक्टर्स को रीड

[594:09]

करते रहना है जब तक एंड ऑफ फाइल नहीं आ

[594:11]

जाता तो ये कंडीशन दिखाती है जब तक

[594:13]

कैरेक्टर इज नॉट इक्वल टू एंड ऑफ फाइल अब

[594:15]

प्रिंट करवाते रहेंगे सीच को फिर दोबारा

[594:17]

से अगला कैरेक्टर रीड कर लेंगे फिर उसको

[594:19]

प्रिंट करवा देंगे दोबारा से अगला

[594:20]

कैरेक्टर रीड कर लेंगे फिर से प्रिंट करवा

[594:22]

देंगे फिर से कैरेक्टर रीड कर लेंगे जब तक

[594:24]

इस कैरेक्टर के अंदर हमारे पास एंड ऑफ

[594:26]

फाइल नहीं आता जैसे ही एंड ऑफ फाइल आया

[594:28]

कंसोल पे नेक्स्ट लाइन प्रिंट करवा देंगे

[594:30]

और अपनी फाइल को कर देंगे क्लोज इसको कर

[594:33]

लेते हैं सेव और अब इसको टर्मिनल से करते

[594:36]

हैं

[594:38]

रन तो हमारी स्क्रीन के ऊपर पूरा का पूरा

[594:41]

वही सेंटेंस प्रिंट होके आ गया है दिस इज

[594:43]

अ रैंडम स्ट्रिंग ऑफ वर्ड्स जो हमने अपनी

[594:45]

टेक्स्ट फाइल के अंदर डाला था तो जब भी

[594:47]

पूरी की पूरी फाइल को रीड करना हो एफ गेट

[594:49]

सी का यूज़ कर लें और उसको ट्रैक कैसे

[594:51]

करना है एंड ऑफ फाइल की हेल्प से अब सबसे

[594:53]

पहले सवाल कर लेते हैं सवाल हमारा कहता है

[594:55]

मेक अ प्रोग्राम टू रीड फाइव इंटी जर्स

[594:57]

फ्रॉम अ फाइल हमें एक फाइल लेनी है और

[595:00]

उससे पांच इंटी जर्स को रीड करना है तो

[595:02]

अपनी टेस्ट फाइल के अंदर पांच इंटी जर्स

[595:04]

को लिख लेते हैं 1 2 3 4 एंड 5 इसको कर

[595:07]

लेते हैं सेव अब एक प्रोग्राम बनाते हैं

[595:09]

इनफैक्ट इस प्रोग्राम को क्या करेंगे

[595:11]

शुरुआत से ही बनाएंगे फाइल पॉइंटर हमने ले

[595:13]

लिया अब फाइल को करेंगे ओपन तो f पीटीआर =

[595:17]

इ f ओपन सबसे पहले पास करेंगे फाइल का नाम

[595:21]

च इज टेस्ट डटी एकटी उसके बाद पास करेंगे

[595:25]

हमारा मोड हमें करना है रीड अब इंटी जर

[595:28]

वेरिएबल बना लेंगे n जिसमें हम नंबर्स को

[595:31]

रीड करने वाले हैं एफ स्कैनफ परसेंटेज डी

[595:34]

उससे पहले एफ

[595:36]

पीटीआर और स्टोर करवा लेंगे नंबर को n में

[595:39]

उसके बाद करा देंगे उस नंबर को स्क्रीन पर

[595:41]

प्रिंट नंबर इ इक्वल टू परसेंटेज

[595:46]

डी और यह सेम चीज हमें पांच नंबर के लिए

[595:50]

रिपीट करनी

[595:52]

है तो इस पूरे कोड को सेव कर लेते हैं और

[595:56]

लास्ट में अपनी फाइल को क्लोज करना हमें

[595:58]

भूलना नहीं है उसके अंदर लिख देते हैं एफ

[596:00]

पीटीआर सेव एंड

[596:03]

रन यह हमारे लिए कुछ एरर जनरेट हो गया है

[596:07]

क्योंकि यहां पे हमें लगाना था एड्रेस ऑफ

[596:10]

n हम पास कर देंगे अपने एफ स्कैनफ

[596:14]

में इसको कर लेते हैं सेव एंड नाउ रन तो

[596:18]

नंबर्स एक-एक करके रीड हो गए वन 2 3 4 एंड

[596:21]

फाइव उसी ऑर्डर में रीड हुए हैं जिस ऑर्डर

[596:24]

में हमने अपनी फाइल के अंदर लिखे हुए थे

[596:27]

नेक्स्ट क्वेश्चन कर लेते हैं मेक अ

[596:29]

प्रोग्राम टू इनपुट स्टूडेंट इंफॉर्मेशन

[596:31]

फ्रॉम अ यूज़र एंड एंटर इट टू अ फ़ाइल तो

[596:34]

यूज़र से क्या करेंगे स्टूडेंट की

[596:36]

इंफॉर्मेशन ले लेंगे इसमें इंफॉर्मेशन में

[596:38]

हम लेने वाले हैं स्टूडेंट का नाम उसके

[596:40]

बाद स्टूडेंट की ऐज ले लेते हैं मार्क्स

[596:43]

ले लेते हैं या फिर इसको सीजीपीए कह देते

[596:45]

हैं ताकि हम फ्लोट टाइप भी बना सकें तो यह

[596:48]

तीन इंफॉर्मेशन स्टूडेंट की ले लेते हैं

[596:49]

और इस को एक फाइल के अंदर हम स्टोर

[596:51]

कराएंगे तो इसको कर लेते हैं डिलीट सबसे

[596:53]

पहले एक फाइल को ओपन करते हैं एफ पीटीआर

[596:56]

में एफ ओपन अब जिस फाइल को हम ओपन करने

[597:00]

वाले हैं ना वो एजिस्ट नहीं करती इसको हम

[597:01]

नया जो है क्रिएट करेंगे इसको नाम दे देते

[597:04]

हैं स्टूडेंट ड t एकटी और इसको ओपन कर रहे

[597:08]

हैं राइट मोड में राइट मोड में ओपन करें

[597:10]

तो अगर एजिस्ट भी नहीं करती तो भी खुद

[597:12]

क्रिएट हो जाएगी अब सबसे पहला हमारा काम

[597:14]

है यूजर से इंफॉर्मेशन इनपुट लेना तो यूजर

[597:17]

से इंफॉर्मेशन लेने के लिए सबसे पहले

[597:19]

लिखते हैं प्रिंट एफ

[597:20]

एंटर नेम एक स्ट्रिंग बना लेते हैं

[597:23]

कैरेक्टर नेम ऑफ 100 कैरेक्टर्स परसेंटेज

[597:27]

s और यहां पर लिख देते हैं नेम अब स्कैनफ

[597:30]

कर लेते हैं अपने नेम को परसेंटेज एस एंड

[597:32]

हमारा नेम उसके बाद क्या करेंगे उसके बाद

[597:36]

एंटर करवा लेंगे स्टूडेंट की एज उसके लिए

[597:38]

भी एक वेरिएबल बना लेते हैं इंट एज एंड

[597:43]

फ्लोट सीजीपीए तो थोड़ा सा अलग-अलग

[597:46]

पार्ट्स हो गए फाइल वाला पार्ट है ये

[597:48]

हमारे इंटरनल वेरिएबल वाला वा पार्ट है

[597:50]

यहां पे हम यूजर से इंफॉर्मेशन ले रहे हैं

[597:52]

कंट्रोल सी कंट्रोल v यहां पे एंटर करा

[597:55]

लेंगे सीजीपीए परसेंटेज f अब हमें क्या

[597:58]

करना है इस सारी की सारी इंफॉर्मेशन को

[598:01]

अपने फाइल के अंदर लिखना है यानी एफ ओपन

[598:03]

से जो हमने फाइल ओपन की उसके अंदर सारी

[598:05]

इंफॉर्मेशन को लिखना है तो उसके लिए यूज

[598:07]

करेंगे हम एफ प्रिंट एफ का कैसे करेंगे

[598:09]

सबसे पहले लिखते हैं एफ प्रिंट एफ उसके

[598:13]

अंदर पास करेंगे एफ पीटीआर अब हम सबसे

[598:15]

पहले अपनी स्ट्रिंग को लिखना चाहते हैं तो

[598:17]

लिखेंगे नेम और स्ट्रिंग के बाद हम लगाना

[598:20]

चाहते हैं कॉमा एंड कॉमा के बाद हम चाहते

[598:22]

हैं नेक्स्ट लाइन में जो है इंफॉर्मेशन

[598:23]

चली जाए या इनफैक्ट इस इंफॉर्मेशन को टैब

[598:26]

स्पेसेस से फॉर्मेट करते हैं फिर लिखेंगे

[598:29]

एफ प्रिंट एफ एफ पीटीआर इसके बाद हम

[598:31]

डिस्प्ले करना चाहते हैं अपनी एज और पास

[598:34]

कर देंगे अपनी एज को एफ प्रिंट एफ एफ

[598:38]

पीटीआर परसेंटेज एफ हमारा सीजीपीए एक बार

[598:42]

सेव करते हैं सबसे पहले नाम प्रिंट होगा

[598:43]

फिर टैब का स्पेस आएगा फिर एज प्रिंट होगी

[598:46]

फिर टैब का स्पेस आएगा फिर सीजी पे होगा

[598:48]

ये सारा का सारा स्टूडेंट फाइल के अंदर

[598:50]

होने वाला है जिसको हम नया क्रिएट करेंगे

[598:52]

एंड में हम क्लोज कर देंगे फाइल को अब एक

[598:54]

बार रन करते हैं कोड को जो एरे है वो खुद

[598:56]

में एक पॉइंटर है तो ये कैरेक्टर एरे जो

[598:58]

है नेम वो खुद में पॉइंटर है तो यहां एम

[599:00]

परसेंट लगाने की जरूरत नहीं है इसको कर

[599:02]

लेते हैं क्लियर एंड नाउ रन तो नाम हमने

[599:04]

एंटर कर दिया एज हमने एंटर कर दी मार्क्स

[599:07]

यानी सीजीपीए एंटर कर दिया और अब ऑटोमेटिक

[599:09]

हमारे लिए स्टूडेंट जो है फाइल क्रिएट हो

[599:11]

गई है नाम हमारा आ गया है फिर टैब की

[599:13]

स्पेस आई है फिर एज आ गई है फिर टैब की

[599:15]

स्पेस आई है फिर हमारे मार्क्स आ गए हैं

[599:17]

इस तरीके से हम फॉर्मेट कर सकते हैं अपनी

[599:19]

डाटा को इनफैक्ट इस डाटा को अलग तरीके से

[599:21]

फॉर्मेट करना होता तो यहां हम लिख देते

[599:23]

स्टूडेंट नेम उसके बाद लिखते स्टूडेंट एज

[599:28]

और सारी इंफॉर्मेशन जो है ना नेक्स्ट

[599:30]

नेक्स्ट लाइन में हमें करवानी होती है और

[599:31]

यहां लिखते हैं स्टूडेंट सीजीपीए इसको भी

[599:34]

एक बार सेव कर लेते हैं दोबारा से रन

[599:37]

करवाते हैं नेम हमने दोबारा से एंटर किया

[599:40]

अपनी एज एंटर की दोबारा से हमने मार्क्स

[599:42]

एंटर किए इस बार हमारी फाइल ऑलरेडी एजिस्ट

[599:44]

करती थी जिसका नाम है स्टूडेंट स्टूडेंट

[599:46]

को खोलेंगे तो अब हमारा डाटा इस फॉर्मेट

[599:48]

में हमारे पास आ गया पह नेम फिर नेक्स्ट

[599:50]

लाइन के अंदर एज फिर नेक्स्ट लाइन के अंदर

[599:52]

सीजीपीए तो अलग-अलग तरीके की अगर हमें

[599:54]

फॉर्मेटिंग करनी है फाइल के अंदर राइट

[599:56]

करते हुए तो हम वो भी कर सकते हैं नेक्स्ट

[599:58]

करते हैं अपना क्वेश्चन नंबर 63 क्वेश्चन

[600:00]

हमारा कहता है राइट अ प्रोग्राम टू राइट

[600:02]

ऑल द ऑड नंबर्स फ्रॉम वन टू n इन अ फाइल

[600:05]

यानी एक फाइल हमें क्रिएट करनी है और उसके

[600:08]

अंदर वन से लेकर n तक जितने भी ऑड नंबर्स

[600:10]

आते हैं ना वो उसमें राइट करने हैं और ये

[600:12]

n जो है ये n हमें दे रहा होगा हमारा यूजर

[600:16]

तो यूजर से n इनपुट करेंगे वन से लेकर n

[600:18]

तक लूप चलाएंगे जो जो ड नंबर है उसको

[600:20]

निकालेंगे और फाइल के अंदर राइट कर देंगे

[600:22]

तो इनको कर लेते हैं क्लोज अपने प्रोग्राम

[600:24]

के अंदर एक नई फाइल जो है उसको ओपन करने

[600:27]

की कोशिश करते हैं राइट से एफ पीटीआर इट

[600:31]

एफ ओपन अपनी फाइल का नाम ऑड डटी एक्सटी

[600:36]

एंड उसको ओपन कर रहे हैं हम राइट मोड में

[600:38]

तो राइट मोड में ओपन कर रहे हैं तो एजिस्ट

[600:40]

नहीं करती तो भी खुद से क्रिएट हो जाएगी

[600:42]

अब यूजर से रीड कर लेते हैं इंटी जर एंड

[600:46]

प्रिंट एंटर ए

[600:52]

स्कैनफ परसेंटेज

[600:54]

डी एंड

[600:57]

n इसके बाद लूप चला लेते हैं इंट आ = 0 आ

[601:02]

जब तक लेसन इक्व टू n है इनफैक्ट आ को

[601:05]

शुरू करते हैं वन से लेकर n तक i प् प् अब

[601:08]

ऑड चेक करने के लिए लिखना पड़ेगा इफ आ

[601:11]

मॉडलो 2 इज नॉट इक्वल टू 0 जब i डिवाइड बा

[601:16]

2 रिमाइंडर में रो नहीं देगा मतलब हमारा

[601:18]

नंबर ऑड है तो नंबर ऑड है तो अब हमें इसको

[601:21]

फाइल में राइट करना है फाइल में कैसे राइट

[601:23]

करेंगे एफ प्रिंट एफ की हेल्प से एफ

[601:25]

प्रिंट एफ कर देंगे सबसे पहला पैरामीटर

[601:27]

पास करेंगे अपना फाइल पॉइंटर जिसके अंदर

[601:30]

हमें राइट करना है उसके बाद पास कर देंगे

[601:32]

टाइप फॉर्मेट

[601:35]

स्पेसिफाई और इन नंबर्स को सेपरेट कर

[601:37]

लेंगे एक टैब स्पेस के साथ इनफैक्ट

[601:40]

नेक्स्ट लाइन में प्रिंट करवा देंगे सबको

[601:42]

इसको कर लेते हैं सेव एंड एंड में हमने

[601:44]

फाइल को क्लोज कर दिया है अब इसको रन

[601:46]

करवाते हैं मान लीजिए हमें शुरू के 10 ऑड

[601:49]

नंबर चाहिए तो ऑटोमेटिक ऑड .

[601:55]

tx1 तक जितने भी नंबर्स ऑड हैं वो हमारे

[601:57]

लिए प्रिंट हो गए 1 3 5 7 एंड 9 नेक्स्ट

[602:00]

क्वेश्चन करते हैं नेक्स्ट क्वेश्चन कहता

[602:02]

है कि एक फाइल के अंदर दो नंबर्स लिखे हुए

[602:04]

हैं एक नंबर है a दूसरा नंबर है b ये फाइल

[602:08]

के अंदर ऑलरेडी नंबर लिखे हुए हैं अब राइट

[602:10]

अ प्रोग्राम टू रिप्लेस देम विद देयर सम

[602:13]

हमें क्या करना है हमारी मान लीजिए यह एक

[602:15]

फाइल है इसके अंदर ऑलरेडी टू और थ्री दो

[602:18]

नंबर्स लिखे हुए हैं हमें इन दोनों को

[602:20]

फाइल से रीड करना है a में दो ले आएंगे b

[602:22]

में तीन ले आएंगे और इस फाइल को अंदर से

[602:25]

साफ करके मतलब इसका डाटा डिलीट करके दोनों

[602:29]

नंबर्स का सम हमें इसमें लिखना है यानी

[602:31]

इसके अंदर सिर्फ पांच होना चाहिए एट दी

[602:33]

एंड ऐसा सा कुछ हमारा सिस्टम रहेगा तो

[602:36]

लॉजिक क्या होगा इसके पीछे करने का सबसे

[602:38]

पहले तो डाटा को रीड कर लेंगे पहले फाइल

[602:41]

को खोलेंगे रीड मोड में उसके बाद फाइल को

[602:43]

क्लोज करने के बाद खोलेंगे अपने राइट मोड

[602:46]

में और राइट मोड में जैसे ही खोलेंगे तो

[602:48]

डटा अपने आप क्या हो जाएगा ओवरराइट हो

[602:50]

जाएगा तो पुराना डाटा डिलीट तब तक हम उस

[602:53]

डाटा को इंट a और b में अपने लोकल वेरिएबल

[602:55]

के अंदर स्टोर करा लेंगे तो इसके लिए भी

[602:58]

कोड लिखते हैं सबसे पहले फाइल क्रिएट कर

[603:00]

लेते हैं सम txt.gz

[603:19]

इसके अंदर पास करेंगे एफ पीटीआर एंड उसके

[603:22]

बाद हमारा फॉर्मेट

[603:27]

स्पेसिफीज करने वाले इंटी जर बी के लिए

[603:30]

इंट बी एंड एड्रेस ऑफ बी अब ए और बी को

[603:33]

हमने रीड कर लिया एंड अब हम फाइल को क्लोज

[603:35]

कर देते हैं फाइल को क्लोज करने के बाद अब

[603:37]

दोबारा खोलेंगे इसको सेम पॉइंटर की हेल्प

[603:40]

से दोबारा खोल सकते हैं अपने राइट मोड में

[603:43]

तो राइट मोड में खोलेंगे और फाइल के अंदर

[603:46]

प्रिंट एफ कर देंगे डाटा को ऐड करवा देंगे

[603:50]

[603:51]

पीटीआर परसेंटेज डी हमारा सम यानी a ् b

[603:56]

को अब दोबारा से फाइल को कर देंगे क्लोज

[604:00]

तो सबसे पहले हमने a और बी को रीड किया

[604:02]

फाइल से फाइल को क्लोज कर दिया और अगली

[604:04]

बार खोला उसको राइट मोड में राइट मोड में

[604:07]

क्या किया राइट मोड में अब फाइल के अंदर

[604:09]

ओवरराइट कर दिया a + b यानी दोनों नंबर्स

[604:11]

का सम और दोबारा से कर दिया फाइल को क्लोज

[604:13]

अब इसको रन करते हैं अपने सम

[604:18]

txt.gz ने क्या किया टू और थ्री को

[604:20]

रिप्लेस कर दिया फाइव के साथ ये हमारे

[604:23]

काफी सारे हमने फंक्शंस डिस्कस कर लिए हैं

[604:25]

जो फाइल के ऊपर होते हैं आप डिफरेंट

[604:27]

डिफरेंट सवाल सॉल्व कर सकते हैं फाइल्स की

[604:29]

हेल्प से और बहुत ही सिंपल सवाल होते हैं

[604:31]

बस क्या करना होता है तीन-चार फंक्शंस याद

[604:33]

करने हैं याद करने की सबसे अच्छी टिप यह

[604:35]

है कि ऑलरेडी एजिस्टिफाई

[604:37]

के लिए आप एफ लगा दो और बहुत ही इजी

[604:40]

सिंटेक्स है मतलब एफ ओपन और एफ क्लोज बहुत

[604:44]

इजी मैं कहूंगी वो फंक्शंस हैं जो दिमाग

[604:46]

में बैठ जाते हैं और अब पढ़ते हैं अपने

[604:48]

लास्ट और नेक्स्ट चैप्टर की तरफ जो है

[604:50]

चैप्टर 11 जिसमें पढ़ेंगे डायनेमिक मेमोरी

[604:52]

एलोकेशन के बारे में तो अब हम शुरुआत करने

[604:54]

वाले हैं अपने चैप्टर 11 और अपने लास्ट

[604:57]

चैप्टर के साथ जिसका नाम है डायनेमिक

[604:59]

मेमोरी एलोकेशन अब डायनेमिक मेमोरी

[605:01]

एलोकेशन की बात करने से पहले ये समझते हैं

[605:04]

कि मेमोरी किस तरीके से एलोकेट होती है जब

[605:06]

भी हम एक प्रोग्राम लिखते हैं एक होता है

[605:09]

स्टैटिक मेमोरी एलोकेशन एक होता है

[605:11]

डायनेमिक मेमोरी एलोकेशन जब भी हम कोई सी

[605:13]

का प्रोग्राम लिखते हैं और उसके अंदर हम

[605:15]

कोई वेरिएबल बनाते हैं तो सी का कंपाइलर

[605:17]

क्या करता है उस वेरिएबल का डेटा टाइप देख

[605:19]

लेता है है और उस हिसाब से मेमोरी पहले से

[605:21]

ही एलोकेट कर देता है यानी रिजर्व कर देता

[605:23]

है पर कभी-कभी ऐसे केसेस आ सकते हैं

[605:25]

जिसमें हमारी जो रिक्वायरमेंट है ना

[605:27]

मेमोरी की वो कोड के बीच में चेंज हो सकती

[605:30]

है जैसे अगर मान लीजिए आपने कोई एरे बनाया

[605:33]

है और उस एरे में आप स्टोर कराना चाहते

[605:35]

हैं कि आपकी क्लास में कितने बच्चे

[605:36]

एनरोल्ड हैं तो आपकी क्लास में मान लीजिए

[605:38]

30 बच्चे हैं और 30 बच्चों के हिसाब से

[605:40]

आपने एरे बना दिया लेकिन साल के बीच में

[605:43]

तीन नए बच्चे आपकी क्लास में एनरोल कर

[605:45]

जाते हैं तो उसके लिए क्या आप एक नया एरे

[605:47]

बनाएंगे जिसका साइज 33 होगा उसमें पुरानी

[605:49]

वाली वैल्यूज भी कॉपी करेंगे और नए वाली

[605:51]

वैल्यूज भी कॉपी करेंगे तो ये थोड़ा सा ना

[605:54]

ट्रिकी सिचुएशन हो जाती है जिसमें एनर्जी

[605:56]

बहुत वेस्ट होती है इसीलिए डायनेमिक

[605:58]

मेमोरी एलोकेशन की हमें जरूरत पड़ती है

[606:00]

क्योंकि एक ऐसा तरीका है जिससे हम

[606:02]

प्रोग्राम के बीच में डिसाइड कर सकते हैं

[606:04]

कि हमें कितनी मेमोरी चाहिए अगर हमने पहले

[606:07]

कम ले ली थी तो उसको ज्यादा कर सकते हैं

[606:09]

अगर पहले ज्यादा ले ली थी तो रिसोर्सेस

[606:11]

बचाने के लिए उस मेमोरी को प्रोग्राम के

[606:13]

बीच में हम कम कर सकते हैं तो डायनेमिक

[606:15]

यानी रन टाइम में हम डिसाइड कर पाएंगे कि

[606:18]

मेमोरी कितनी आ एलोकेट होनी है तो

[606:20]

डायनेमिक मेमोरी एलोकेशन होता है टू

[606:23]

एलोकेट मेमोरी टू अ डाटा स्ट्रक्चर

[606:25]

ड्यूरिंग द रन टाइम तो दो टाइम्स होते हैं

[606:28]

एक होता है हमारा कंपाइल टाइम और एक होता

[606:31]

है हमारा रन टाइम कंपाइल यानी जब सी का जो

[606:34]

कंपाइलर है वो रन कर रहा है और वो एनालाइज

[606:36]

कर रहा है कितनी मेमोरीज इंटी जर वेरिएबल

[606:38]

को चाहिए होगी कितनी मेमोरीज फ्लोट

[606:40]

वेरिएबल को चाहिए होगी कितनी मेमोरी एक

[606:42]

स्ट्रिंग को चाहिए होगी और फिर होता है

[606:44]

हमारी रन टाइम मेमोरी एलोकेशन रन टाइम

[606:46]

यानी जब हमारा कोड एक्चुअली रन कर रहा है

[606:48]

जब कंसोल की विंडो खुली हुई है उसमें यूजर

[606:51]

कुछ इनपुट कर रहा है कुछ आउटपुट प्रोड्यूस

[606:53]

हो रहा है प्रोग्राम के शुरू और खत्म होने

[606:55]

के बीच के टाइम को रन टाइम कहते हैं अब ये

[606:58]

जो डायनेमिक मेमोरी एलोकेशन हम करना चाहते

[607:00]

हैं ना इसके लिए हमें कुछ फंक्शंस चाहिए

[607:02]

होते हैं उन फंक्शंस को यूज करके हम

[607:04]

मेमोरी के साथ डायनेमिक खेल रहे होते हैं

[607:06]

तो चार फंक्शंस की हम इस टॉपिक में इस

[607:09]

चैप्टर में बात कर रहे होंगे मेजर्ली

[607:11]

जिनमें से सबसे पहला फंक्शन है हमारा मैलक

[607:14]

मैलक स्टैंड्स फॉर मेमोरी एलोकेशन दूसरा

[607:18]

है हमारा कैलक कैलक इज कंटीन्यूअस एलोकेशन

[607:22]

तीसरा है हमारा फ्री फंक्शन और चौथा है

[607:24]

हमारा री एलोक यानी री एलोकेशन अब इन

[607:29]

चारों फंक्शंस के बारे में हम डिटेल में

[607:31]

इस पूरे के पूरे चैप्टर में पढ़ रहे होंगे

[607:33]

और चारों फंक्शन बहुत आसान है लिखने

[607:36]

इनफैक्ट मैं बात करूं तो एक कंप्यूटर

[607:38]

प्रोग्राम अभी तक जितने हमने 10 चैप्टर

[607:39]

पढ़ लिए हैं ना ये चैप्टर सबसे आसान होना

[607:42]

चाहिए क्योंकि इसमें सिर्फ चार ही फंक्शन

[607:43]

है और बहुत इजी तरीके से हम इसको समझने

[607:46]

वाले हैं सबसे पहले फंक्शन की बात करते

[607:48]

हैं पहला फंक्शन है हमारा मैलक अब मैलक

[607:50]

फंक्शन का काम होता है कुछ पर्टिकुलर

[607:52]

अमाउंट ऑफ मेमोरी को एलोकेट कर देना मान

[607:56]

लीजिए आपको चाहिए 14 बाइट्स की मेमोरी या

[607:58]

30 बाइट्स की मेमोरी तो मलक आपको वो

[608:01]

मेमोरी लाके दे देगा कोड के बीच में इट

[608:03]

टेक्स द नंबर ऑफ बाइट्स टू बी एलोकेटेड

[608:06]

मेमोरी को जिन टर्म्स में मेजर करता है

[608:08]

जिन टर्म्स में लाके देता है वो बाइट्स

[608:10]

वाली टर्म है यानी बाइट्स में आपको इसको

[608:12]

बताना पड़ेगा इतने बाइट्स ऑफ मेमोरी मुझे

[608:14]

चाहिए एंड इट विल रिटर्न अ पॉइंटर ऑफ टाइप

[608:17]

वॉइड वो क्या करेगा हमारी जो टोटल मेमोरी

[608:21]

है उसके अंदर उन पर्टिकुलर बाइट्स का मान

[608:25]

लीजिए x बाइट्स आपने भेजी एक चंक ले लेगा

[608:28]

और उसको एक पॉइंटर असाइन कर देगा पीटीआर

[608:31]

जिसका टाइप होगा वॉइड और इस पॉइंटर के

[608:34]

थ्रू अब आप इस मेमोरी को जो है एक्सेस कर

[608:37]

पाएंगे तो x नंबर ऑफ बाइट्स ले लेगा उस

[608:39]

हिसाब से मेमोरी के अंदर जगह बनाएगा x

[608:41]

नंबर ऑफ बाइट्स की वो आपको रिटर्न करके दे

[608:44]

देगा और उसका क्या रिटर्न करेगा उसका

[608:46]

पॉइंटर रिटर्न करेगा उस पॉइंटर का टाइप

[608:48]

होता है हमारे पास वॉइड इसको लिखने का

[608:51]

सिंटेक्स क्या रहता है सबसे पहले हम लिखते

[608:53]

हैं मैलक मैलक के अंदर जाएंगी हमारी नंबर

[608:55]

ऑफ बाइट्स अब यहां पे नंबर ऑफ बाइट्स हमने

[608:58]

कुछ इंटरेस्टिंग चीज दी है पहले लिखा है

[609:00]

पांच फिर मल्टीप्लाई किया है साइज ऑफ इंट

[609:03]

से अब ये जो साइज ऑफ होता है ना ये साइज

[609:06]

ऑफ हमारा एक फंक्शन होता है और ये फंक्शन

[609:08]

क्या करता है ये फंक्शन किसी भी डेटा टाइप

[609:11]

का साइज हमें रिटर्न कर देता है अगर हमने

[609:13]

लिखा साइज ऑफ इंट तो इंटी जर का साइज

[609:17]

रिटर्न कर देगा अगर हमने लिखा साइज ऑफ

[609:20]

फ्लोट तो फ्लोट का साइज रिटर्न कर देगा

[609:23]

अगर हमने लिखा साइज ऑफ कैरेक्टर तो

[609:25]

कैरेक्टर का साइज रिटर्न कर देगा अब मेरी

[609:28]

मशीन के हिसाब से मुझे पता है ये रिटर्न

[609:29]

करेगा चार फ्लोट में भी चार और कैरेक्टर

[609:32]

में एक हो सकता है आपकी मशीन 32 बिट की हो

[609:35]

या कोई और सिस्टम पे आप काम कर रहे हो तो

[609:37]

उस केस में इंटी जर का साइज क्या पता है

[609:39]

ये टू रिटर्न करे आपके लिए या किसी और डटा

[609:41]

टाइप का कोई और साइज रिटर्न करें तो

[609:43]

डिपेंड करता है कि आपका सिस्टम क्या है

[609:45]

अपने सिस्टम के हिसाब से अगर आपको जानना

[609:46]

है कि यह डेटा टाइप कितनी बाइट्स ऑफ़

[609:48]

मेमोरी मेरे लिए लेता है तो वो ये साइज ऑफ

[609:51]

फंक्शन रिटर्न करके दे देगा तो एक बार

[609:53]

साइज ऑफ को देख भी लेते हैं सबसे पहले काम

[609:55]

कैसे करता है अगर मैं प्रिंट करना चाहूं

[609:58]

परसेंटेज डी साइज ऑफ इंट एंड इसके साथ-साथ

[610:02]

साइज ऑफ फ्लोट एंड साइज ऑफ कैरेक्टर इसको

[610:07]

एक बार मैं सेव कर लेती हूं और रन करती

[610:09]

हूं वार्निंग्स को हमें इग्नोर करना है

[610:12]

हां तो साइज ऑफ इंटी जर हमारे पास चार

[610:15]

बाइट्स आ गया साइज ऑफ फ्लोट भी चार बाइट्स

[610:17]

आ गया और साइज ऑफ कैरेक्टर आया है सि बाइट

[610:19]

तो ये साइज ऑफ ऑपरेटर होता है जिसकी हेल्प

[610:21]

से हम किसी भी डेटा टाइप का साइज अपने पास

[610:24]

निकाल कर ला सकते हैं तो यहां पे हमने

[610:26]

क्या किया मैलक के अंदर हमने पांच को

[610:28]

मल्टीप्लाई कर दिया है साइज ऑफ इंटी जर से

[610:31]

अब इंटी जर का साइज क्या है इंटी जर का

[610:33]

साइज है चार तो ये क्या करेगा 20 बाइट्स

[610:35]

की मेमोरी हमें लाकर दे देगा अगर मान

[610:37]

लीजिए आप 14 बाइट्स की मेमोरी लेना चाहते

[610:39]

हैं तो आपके लिए क्या होगा 14 बाइट्स

[610:41]

रिजर्व हो जाएंगी अब इसमें आप क्या कर

[610:43]

सकते हैं 12 बाइट्स के अंदर तो आप चार

[610:47]

इंटी जर स्टोर करा सकते हैं और दो बाइट के

[610:49]

अंदर आप दो कैरेक्टर स्टोर करा सकते हैं

[610:51]

पर मुझे तो जी पांच इंटी जर ही स्टोर

[610:53]

कराने थे इस मेमोरी में इसीलिए मैंने ऐसी

[610:55]

मेमोरी ली जो इंटी जर का मल्टीपल है

[610:58]

इसीलिए 5 मलाड बा 4 तो 20 बाइट्स की

[611:01]

मेमोरी मालक मुझे लाकर दे देगा मुझे

[611:03]

एक्चुअली लाकर दिया है इस मेमोरी का

[611:05]

पॉइंटर जिसका टाइप है वॉइड तो ये वॉइड

[611:07]

टाइप का पॉइंटर है पर मुझे तो एक इंटी जर

[611:10]

टाइप का पॉइंटर चाहिए था इसीलिए मैंने

[611:12]

यहां पे इसको कर दिया है टाइपकास्ट और ये

[611:14]

टाइपकास्ट के लिए हम स्टार इंट नहीं इंट

[611:16]

स्टार लिखते हैं तो इंट स्टार टाइप का

[611:19]

मुझे मेमोरी मिल गया है जिस मेमोरी में

[611:21]

मेरे पास 20 बाइट्स हैं यानी उसमें मैं

[611:24]

पांच इंटी जर्स को स्टोर करा सकती हूं और

[611:26]

यह पूरा का पूरा पॉइंटर मैंने इस वेरिएबल

[611:28]

पीटीआर में लाके स्टोर कर दिया है अब इस

[611:30]

मेमोरी को एक्सेस करना होगा तो पीटीआर की

[611:32]

फॉर्म में एक्सेस करेंगे आल्सो मालक को

[611:34]

यूज करने के लिए हमें ऊपर एक एसटीडी एई

[611:38]

बीड ए नाम की स्टैंडर्ड लाइब्रेरी जो है

[611:41]

इंक्लूड करनी पड़ती है जो हमें कैपेबल

[611:43]

बनाती है डीएमए के यानी डायनेमिक मेमोरी

[611:45]

एलोकेशन के तो एक बार इसको करके देख लेते

[611:47]

हैं ऊपर इंक्लूड करते हैं हैश इंक्लूड

[611:51]

एटीडी ए आई बीड

[611:54]

ए पहले बनाते हैं एक इंटी जर

[611:57]

पॉइंटर अब इस पॉइंटर को असाइन कर देंगे

[612:01]

मैलक ने जो मेमोरी हमें दी मैलक से कितनी

[612:03]

मेमोरी चाहिए हमें 5 इंटी जर्स के बराबर

[612:06]

तो साइज ऑफ इंटी जर और इस पॉइंटर को हम

[612:09]

टाइपकास्ट कर देंगे टू इंट पॉइंटर तो ये

[612:12]

हमारा पॉइंटर आ गया है जो पॉइंट कर रहा है

[612:14]

यहां 20 बाइट्स ऑफ मेमोरी को अब अगर ऐसी

[612:17]

सिचुएशन आ जाती है जिसमें लॉक हम मान

[612:19]

लीजिए यहां पे लिख दें फ करोड़ या करोड़

[612:22]

से भी कोई बड़ा नंबर तो एक पॉइंट आएगा जब

[612:24]

हम इतनी मेमोरी मांग रहे होंगे जो हमारे

[612:26]

सिस्टम के पास है ही नहीं तो ऐसा जब केस

[612:28]

आता है जब हमारा सिस्टम हमें हमारी

[612:30]

रिक्वायर्ड नंबर ऑफ बाइट्स नहीं दे पाता

[612:32]

तो उस केस में यहां पे रिटर्न होता है नल

[612:34]

सो हमारे पीटीआर की वैल्यू नल हो जाएगी जब

[612:36]

हमारा सिस्टम हमें रिक्वायर्ड नंबर ऑफ

[612:38]

बाइट्स नहीं दे पाएगा इसीलिए सोच समझ के

[612:41]

यहां पे ठीक-ठाक नंबर लिखना है जो

[612:42]

कैपेसिटी हमारे सिस्टम की है उसी हिसाब से

[612:45]

अब मुझे अगर इस मेमोरी के अंदर चीजें

[612:47]

स्टोर करानी हो जैसे मान लो लीजिए मेरे

[612:49]

पास पांच इंटी जजर्स के साइज की मेमोरी आ

[612:51]

गई है अब मुझे उसके अंदर पांच इंटी जर्स

[612:53]

एक्चुअली स्टोर कराने हैं तो उसके लिए

[612:55]

स्टोर कराने का तरीका बिल्कुल वैसा स ही

[612:57]

होगा जैसे हम अरेज को यूज करते हैं अरेज

[613:00]

में क्या होता है हमारे पास फिक्स साइज की

[613:01]

मेमोरी होती है यहां पे हम क्या कर रहे

[613:03]

हैं डायनेमिक साइज की मेमोरी को ले रहे

[613:05]

हैं तो इनको भी हम रेज की तरह यूज कर सकते

[613:07]

हैं बस साइज यहां पर फिक्स नहीं है इतनी

[613:09]

सी सिंपल चीज है जैसे जरूरत लोकेशन पे मैं

[613:12]

वन को स्टोर करा दूं फर्स्ट पे मैं थ्री

[613:14]

को स्टोर करा दूं फिर पीटीआर ऑफ टू में

[613:17]

मैं पांच को स्टोर करा दूं पीटी ऑफ 3 में

[613:20]

मैं सात को स्टोर करा दूं और पीटीआर ऑफ 4

[613:23]

में मैं स्टोर करवा दूं ना को तो इस तरीके

[613:26]

से पांचों इंटी जर लोकेशंस पे मैंने कोई

[613:29]

ना कोई वैल्यू स्टोर करा दि है एंड नाउ आई

[613:31]

कैन रन अ लूप लूप लगाकर इन सारी वैल्यूज

[613:34]

को मैं प्रिंट करवा सकती हूं i = 0 से i <

[613:38]

5i प् प् पीटीआर ऑफ आ तो जैसे एरे की

[613:43]

लोकेशंस को एक्सेस करते हैं और उसके बाद

[613:44]

उसमें वैल्यूज को स्टोर कराते हैं फिर उन

[613:46]

वैल्यूज को एक्सेस करके प्रिंट करवाते हैं

[613:49]

सेम वही प्रोसेस रहेगा जब भी हम मैलक से

[613:51]

मेमोरी एलोकेट करके एक पॉइंटर यूज करेंगे

[613:54]

इसको एक बार रन भी करके देख लेते हैं तो

[613:56]

हमारे पास सारे के सारे जो मैंने इंटी

[613:58]

जर्स थे स्टोर कराए थे अपनी मेमोरी के

[614:00]

अंदर वो मेरे पास रिटर्न होके आ गए हैं और

[614:02]

इनके साथ अगर कुछ ऑपरेशन करना है कोई

[614:04]

चेंजेज करना है तो उसी हिसाब से कर सकते

[614:06]

हैं ये जो मेमोरी है ये हमारी रन टाइम पे

[614:09]

एलोकेट हुई है कंपाइल टाइम पे एलोकेट नहीं

[614:11]

हुई है तो इस तरीके से तो हमने मेमोरी

[614:13]

एलोकेट कर दिया है अब नेक्स्ट बात करते

[614:15]

हैं अपने प्रैक्टिस क्वेश्चन की सवाल

[614:17]

हमारा कहता है राइट प्रोग ग्रम ये मैंने

[614:20]

डब्ल्यू एपी शॉर्ट फॉर्म इसकी लिख दि है

[614:22]

टू एलोकेट मेमोरी टू स्टोर फाइव प्राइसेस

[614:25]

अब प्राइसेस जनरली जो होते हैं हमारे

[614:27]

फ्लोट टाइप के होते हैं तो पांच फ्लोट

[614:29]

टाइप के प्राइसेस हमें स्टोर करने हैं

[614:31]

अपनी मेमोरी के अंदर तो वो कैसे करेंगे

[614:33]

उसको डायनेमिक करने का तरीका यह है कि हम

[614:35]

बना ले एक पॉइंटर जो पॉइंट कर रहा होगा

[614:38]

मैलक से एलोकेटेड मेमोरी पांच प्राइसेस

[614:41]

यानी साइज ऑफ फ्लोट और इसको टाइप कास्ट कर

[614:44]

देंगे टू फ्लोट पॉइंटर अब पीटीआर के अंदर

[614:48]

हम प्राइस अपने स्टोर करा सकते हैं यह जो

[614:50]

है चीजें सारी कन्वर्ट हो जाएंगी टू हमारी

[614:53]

फ्लोटिंग वैल्यूज इसको भी सेव करके रन

[614:55]

करते हैं एक बार दिस विल बी फ्लोटिंग

[614:58]

पॉइंटर और हम प्रिंट करवाना चाह रहे हैं

[615:01]

परसेंटेज f को तो ये हमारी सारी फ्लोटिंग

[615:04]

वैल्यूज हमारे पास प्रिंट होकर आ गई हैं

[615:06]

ये वैल्यूज जो है हम यूज़र से भी इनपुट ले

[615:08]

सकते हैं या अपने खुद से भी डिफाइन कर

[615:11]

सकते हैं और फिर इनके साथ डिफरेंट फंक्शंस

[615:12]

परफॉर्म कर सकते हैं बेसिकली जो भी हम

[615:15]

नॉर्मल मेमोरी के साथ कर सकते थे वो सब हम

[615:18]

डायनेमिक एलोकेटेड मेमोरी के साथ कर सकते

[615:20]

हैं अब नेक्स्ट समझते हैं अपने कैलक

[615:23]

फंक्शन को कैलक का मतलब होता है

[615:25]

कंटीन्यूअस एलोकेशन यानी इससे जो आप

[615:27]

मेमोरी एलोकेट करेंगे वो कंटीन्यूअस फैशन

[615:29]

में आएगी

[615:31]

जैसे अगर आपने 20 बाइट्स की मेमोरी एलोकेट

[615:34]

करी तो वो कंटीन्यूअस फैशन में आपके लिए

[615:36]

एलोकेट होगी और एक और चीज होती है कैलक से

[615:39]

मेमोरी को डिफाइन करने की डिक्लेयर करने

[615:41]

की एलोकेट करने की कि हर जो वैल्यू होती

[615:44]

है वो इनिशियल इज हो जाती है विद जरो मान

[615:46]

लीजिए आपने पांच इंटी जर के बराबर मेमोरी

[615:49]

जो है ली तो सारे के सारे इंटी जर्स में

[615:51]

बाय डिफॉल्ट जरो स्टोर हो जाएगा अगर आपने

[615:54]

पांच फ्लोट के बराबर ली तो उसमें बाय

[615:56]

डिफॉल्ट

[615:58]

0.0.0 ये वैल्यू स्टोर हो रही होगी तो जब

[616:01]

भी आपको मेमोरी डायनेमिक लेनी है और उसमें

[616:04]

नल वैल्यूज यानी ज़ीरो वैल्यूज असाइन करनी

[616:06]

है तो सिंपली क्या यूज़ करना है कैलक का

[616:08]

यूज़ कर लेना है इसको डिफाइन करने का

[616:10]

सिंटेक्स ये रहता है कि हम सिंपली लिखते

[616:12]

हैं कैलक और पहले जैसे हम बाइट्स भेजते थे

[616:15]

इस बार हम टोटल नंबर ऑफ बाइट्स नहीं

[616:17]

भेजेंगे इस बार हम भेजेंगे कि कितनी

[616:19]

लोकेशंस हमें चाहिए नंबर ऑफ लोकेशंस और पर

[616:23]

लोकेशन क्या साइज चाहिए तो पर लोकेशन साइज

[616:26]

हमें चाहिए एक इंटी जर के बराबर और पांच

[616:28]

इंटी जर्स की हमें लोकेशन चाहिए पहले क्या

[616:31]

करते थे टोटल नंबर ऑफ बाइट्स बेचते थे तो

[616:33]

इन दोनों को मल्टीप्लाई कर देते इस बार वो

[616:34]

नहीं करना इस बार अलग-अलग पैरामीटर्स

[616:37]

भेजने हैं और फिर यह भी रिटर्न करेगा हमें

[616:40]

वॉइड पॉइंटर वॉइड पॉइंटर को हमने टाइप

[616:43]

कास्ट कर दिया टू इंटी जर पॉइंटर और अब इस

[616:46]

पीटीआर की हेल्प से हम मेमोरी को एक्सेस

[616:48]

कर सकते उसमें वैल्यूज असाइन कर सकते हैं

[616:50]

उसकी वैल्यूज प्रिंट कर सकते हैं एक बार

[616:52]

इसका भी कोड लिख के देखते हैं पहली बार जो

[616:55]

हमने मेमोरी एलोकेट की थी उसमें चेंज कर

[616:58]

देते हैं उसको टू कैलक अब कैलक में कुछ भी

[617:01]

ना असाइन नहीं करेंगे मतलब ना वन लिखेंगे

[617:04]

थ्री लिखेंगे यह सब असाइनमेंट नहीं करेंगे

[617:06]

और सिंपली देखेंगे प्रिंट क्या होगा हमारे

[617:08]

लिए तो यहां पे पास करने हैं दो

[617:12]

पैरामीटर्स एक होगा हमारा टोटल नंबर ऑफ

[617:14]

हमें कितने स्लॉट्स चाहिए एक होगा क्या

[617:17]

साइज होगा ईच ब्लॉक का तो ये हर किसी

[617:20]

वैल्यू के लिए हमारे पास 0.0 आ गया वहीं

[617:23]

पर अगर हम इस मेमोरी को मैलक से करते और

[617:27]

फिर इसको रन करने की कोशिश करते हैं अब

[617:29]

यहां पे इस केस में हमारे मैलक ने भी 0.0

[617:32]

प्रिंट करवाया है पर ये जरूरी नहीं है

[617:34]

मतलब इसकी कोई गारंटी नहीं देता हमारा

[617:36]

प्रोग्राम कि हर बार 0.0 ही प्रिंट

[617:38]

करवाएगा हो सकता है उन ब्लॉक्स ऑफ मेमोरीज

[617:40]

में कुछ रैंडम नंबर आपके लिए प्रिंट करवा

[617:42]

दे आपके सिस्टम में मैलक कभी भी गारंटी

[617:44]

नहीं लेगा कि 0.0 ही आएगा कुछ केसेस में आ

[617:47]

सकता है कुछ केसेस में नहीं आएगा पर अगर

[617:49]

आपको रो से इनिश इज कराना है तो हमेशा

[617:51]

कैलक का यूज़ करना है क्योंकि वो आपके लिए

[617:53]

गारंटी ले सकता है अब नेक्स्ट बात करते

[617:55]

हैं अपने प्रैक्टिस क्वेश्चन की सवाल

[617:58]

हमारा कुछ ऐसा है कि राइट अ प्रोग्राम टू

[618:00]

एलोकेट मेमोरी ऑफ़ साइज n ये n साइज की

[618:03]

हमें मेमोरी एलोकेट करनी है वेयर n इज

[618:05]

एंटर्ड बाय द यूजर अब n साइज कहने का क्या

[618:08]

मतलब है कि n मल्टीप्ला बाय साइज ऑफ इंट

[618:11]

यहां पे हम ले रहे होंगे कि n इंटी जर्स

[618:14]

के साइज की हमें मेमोरी एलोकेट करनी है तो

[618:16]

इसको भी देख लेते हैं सबसे पहले बनाएंगे

[618:18]

एक इंटी जर पॉइंटर पीटीआर और एक इंटी जर n

[618:22]

अब यूजर से अपना इंटी जर n इनपुट ले लेंगे

[618:24]

एंटर

[618:26]

n नेक्स्ट हम क्या करेंगे अब इस n साइज की

[618:30]

मेमोरी हमें एलोकेट करनी है तो

[618:45]

pt01 n तक i + एंड हर बार हम प्रिंट करवा

[618:50]

रहे होंगे परसेंटेज डी पीटीआर ऑफ आ को तो

[618:54]

हमें चार साइज की जो है मेमोरी चाहिए तो

[618:57]

यह चार इंटी जर्स हमारे पास एलोकेट होकर आ

[619:00]

गए और हर इंटी जर के अंदर बाय डिफॉल्ट

[619:02]

ज़ीरो स्टोर्ड है नेक्स्ट देखते हैं हम

[619:04]

फ्री को फ्री भी एक सबसे इंपॉर्टेंट

[619:06]

फंक्शन है इनके अंदर फ्री अब ऐसा होता है

[619:08]

कि कैलक मैलक जो डायनेमिक मेमोरी प एलोकेट

[619:12]

करते हैं वह अपने आप फ्री नहीं होती जैसे

[619:15]

थोड़ा सा गहराई में समझते हैं इस चीज को

[619:17]

हमने कोई का प्रोग्राम लिखा उसके अंदर

[619:20]

हमने बनाया एक इंटी जर n और उसके अलावा n

[619:23]

को हमने बीच-बीच में यूज़ किया और फिर बाद

[619:25]

में मतलब ये बहुत लंबा प्रोग्राम है इसमें

[619:28]

हजारों लाइन है और इंटी जर n का यूज सिर्फ

[619:31]

फर्स्ट लाइन में और सेकंड लाइन में यूज़

[619:33]

हो रहा है तो c का कंपाइलर स्मार्ट है वो

[619:35]

क्या करेगा देख लेगा बाद में यूज़ नहीं हो

[619:37]

रहा तो इसके बाद वोह n को करा देगा फ्री

[619:40]

क्योंकि उसने देख लिया कि n जो है

[619:42]

स्टैटिकली एलोकेटेड है यानी शुरू में ही

[619:45]

एलोकेट हो गई थी इसको मेमोरी और उसको पता

[619:47]

है कि सी के कंपाइलर को पता है आगे क्या

[619:49]

होने वाला है इस मेमोरी के साथ उसने देख

[619:51]

लिया इस मेमोरी को कोई छेड़ ही नहीं रहा

[619:53]

इनकी मेमोरी को तो वो सेकंड लाइन के बाद

[619:55]

इस मेमोरी को फ्री करा देता है ताकि फालतू

[619:58]

की जो रिसोर्सेस हैं ना वो प्रोग्राम

[619:59]

होल्ड अप करके ना रखे पर डायनेमिक जो आप

[620:02]

मेमोरी एलोकेट करते हैं ना उसके बारे में

[620:04]

सी के कंपाइलर को कुछ नहीं पता होता तो उस

[620:06]

केस में क्या होता है अगर आपने मैलक या

[620:10]

कैलक से कोई मेमोरी एलोकेट की तो सी के

[620:13]

कंपाइलर को नहीं पता कि आगे जाके कोड में

[620:16]

उस मेमोरी को कोई एक्सेस भी कर रहा है

[620:18]

नहीं कर कर रहा कोई उसमें चेंजेज होने

[620:19]

वाले हैं या नहीं होने वाले इसीलिए वो उस

[620:21]

मेमोरी को वैसे का वैसा रखता है तो यहां

[620:24]

रिस्पांसिबिलिटी आ जाती है प्रोग्रामर पर

[620:26]

कि हमारा काम हो जाता है फिर उस मेमोरी को

[620:28]

फ्री करना उस मेमोरी को अगर हम यूज़ नहीं

[620:30]

कर रहे तो हम बीच प्रोग्राम में उसको फ्री

[620:33]

कर सकते हैं कि अब इस वेरिएबल को यूज नहीं

[620:34]

करना इस मेमोरी को आप फ्री कर दो और फ्री

[620:37]

कराने के लिए हम यूज़ करते हैं फंक्शन

[620:38]

फ्री सो वी यूज इट टू फ्री मेमोरी दैट इज

[620:41]

एलोकेटेड यूजिंग मैलक एंड कैलक और बहुत

[620:44]

सिंपल फॉर्मेट है इसको लिखने का बहुत

[620:46]

सिंपल सिंटेक्स है सिर्फ लिखेंगे फ्री और

[620:48]

अंदर डाल देंगे पॉइंटर ये वो पॉइंटर है जो

[620:51]

उस मेमोरी को पॉइंट कर रहा है जिसको हमें

[620:53]

फ्री कराना है तो इसके लिए भी एक

[620:54]

प्रोग्राम लिख लेते हैं छोटा सा हमने अभी

[620:57]

कैलक से जो है n इंटी जर्स को एलोकेट किया

[620:59]

था और एंड ऑफ द प्रोग्राम में हम इस

[621:02]

मेमोरी को कर देंगे फ्री तो पीटीआर जिस

[621:04]

मेमोरी को पॉइंट कर रहा था उसको फ्री कर

[621:05]

देंगे और दोबारा से पीटीआर को क्या करेंगे

[621:08]

पॉइंट करा देंगे किसी और मेमोरी की तरफ

[621:11]

जैसे यही स्टेटमेंट अगर हम दोबारा लिखना

[621:13]

चाहे तो इंटी जर n की जगह अब सिर्फ दो

[621:15]

इंटी जर्स की मेमोरी होगी और उसको भी हम

[621:17]

करा देंगे

[621:19]

प्रिंट इस कोड के अंदर हमने क्या किया

[621:21]

पहले तो n साइज की मेमोरी ले ली उसपे

[621:23]

पॉइंटर पॉइंट कर रहा है वो साइज हमने जो

[621:26]

भी वैल्यूज थी प्रिंट करवा दी फिर फ्री कर

[621:28]

दिया उस मेमोरी को अब उसी सेम पॉइंटर को

[621:31]

हम एक्सेस करा रहे हैं दो साइज की मेमोरी

[621:33]

पे और फिर अब हम उसकी वैल्यूज को प्रिंट

[621:36]

करवा रहे हैं तो पहले हम चार इंटी जर्स की

[621:38]

मेमोरी लेना चाहते हैं तो ये चार इंटी जर

[621:40]

हमारे लिए प्रिंट हो गए फिर हमने फ्री कर

[621:42]

दिया मेमोरी को अब हमारे पास टोटल दो इंटी

[621:45]

जर्स की मेमोरी है तो जीरो जीरो प्रिंट हो

[621:47]

जाएगा तो आई होप होप कि हम यहां पे फायदा

[621:49]

देख पा रहे हैं कि अगर इंटी जर पॉइंटर

[621:51]

होते हैं तो उसमें हम चेंजेज जो है

[621:53]

यूजुअली नहीं कर पाते पर डायनेमिक एलोकेट

[621:56]

मेमोरी के साथ हम कोड के बीच में उसको

[621:58]

फ्री कर पाते हैं एलोकेट कर पाते हैं

[622:00]

नेक्स्ट एक सवाल करते हैं सवाल ये है फ्री

[622:02]

द मेमोरी एलोकेटेड विद कैलक तो इस मेमोरी

[622:05]

को हमने फ्री कर दिया ऑलरेडी हम ये सवाल

[622:07]

कर चुके हैं नेक्स्ट बात करते हैं रिलक

[622:10]

रिलक का मतलब होता है रिएलोकेशन ऑफ मेमोरी

[622:13]

यानी किसी मेमोरी को दोबारा एलोकेट करना

[622:16]

जैसे अभी हमने एग्जांपल देखा था कि आपकी

[622:18]

क्लास के अंदर 30 बच्चे थे 30 बच्चों का

[622:21]

रोल नंबर स्टोर कराने के लिए आपने मेमोरी

[622:22]

रिजर्व कर ली व्हिच इज इक्वल टू 30 मल्ला

[622:25]

बाय साइज ऑफ इंट अब आपकी क्लास में तीन और

[622:29]

नए बच्चे आते हैं तीन और नए बच्चे आते हैं

[622:31]

तो आपको तीन और नए बच्चों का साइज जो है

[622:34]

वो एक्स्ट्रा ऐड करवाना पड़ेगा उस मेमोरी

[622:36]

के अंदर तो सेम चंक ऑफ मेमोरी में आप

[622:39]

थोड़ी सी मेमोरी और जोड़ सकते हैं जिससे

[622:42]

क्या होगा सेम पॉइंटर को यूज करते हुए आप

[622:44]

एक्स्ट्रा इंफॉर्मेशन भी ऐड करते जाएंगे

[622:45]

अपने कोड के अंदर तो रिएलोकेट यानी

[622:48]

इंक्रीज भी कर सकते हैं मेमोरी को डिक्रीज

[622:50]

भी कर सकते हैं मेमोरी यूजिंग द सेम

[622:53]

पॉइंटर एंड साइज़ सेम पॉइंटर को यूज़ करके

[622:55]

मेमोरी को बढ़ा भी सकते हैं कम भी कर सकते

[622:57]

हैं कम क्यों करेंगे किस केस में कम

[622:59]

करेंगे जब हमने शुरुआत में बहुत सारी

[623:01]

मेमोरी ले ली और प्रोग्राम के बीच में

[623:03]

हमें पता चला कि इतनी मेमोरी तो चाहिए ही

[623:05]

नहीं जैसे मान लीजिए आप कोई अ कॉलेज चला

[623:07]

रहे हैं जिसका आपने सिस्टम बनाया ऑनलाइन

[623:09]

उसमें आपको लग रहा है कि आपने एक डिजिटल

[623:11]

मार्केटिंग का कोर्स निकाला और उसमें 1000

[623:13]

बच्चे एनरोल करने वाले हैं तो आपने हजार

[623:15]

बच्चों के इंफॉर्मेशन के हिसाब से मेमोरी

[623:17]

एलोकेट कर दी पर इवेंचर पास जो बच्चे आए

[623:20]

वो 70 बच्चे आए तो काफी सारी मेमोरी है जो

[623:23]

वेस्ट हो जाएगी तो उसको कोड के बीच में

[623:25]

बाकी सारी मेमोरी को हम क्या करेंगे

[623:27]

रिएलोकेट कर देंगे 70 की तो रखे तो ये

[623:29]

डिफरेंस हो जाता है फ्री में पूरी साफ हो

[623:31]

जाएगी रिएलोकेट में फालतू मेमरी हटा देंगे

[623:33]

जितनी हमें हटानी है और जितनी हमें चाहिए

[623:36]

बस उतनी अपने पास रख लेंगे तो इसको लिखने

[623:38]

का सिंटेक्स ये रहता है पहले हम लिखते हैं

[623:40]

रिलक फिर डालते हैं वो पॉइंटर जिसकी

[623:42]

मेमोरी को रिएलोकेट करना है और उसके बाद

[623:45]

नया साइज कि मेमोरी का अब नया साइज क्या

[623:47]

होने वाला है और उससे वापस से असाइन कर

[623:50]

देंगे अपने पॉइंटर को तो इसमें सवाल करते

[623:53]

हैं एलोकेट मेमोरी फॉर फाइव नंबर्स देन

[623:55]

डायनेमिक इंक्रीज इट टू स्टोर एट नंबर्स

[623:59]

इसके लिए कोड कैसे लिखेंगे सबसे पहले बना

[624:01]

लेंगे इंटी जर पॉइंटर पीटीआर अब पीटीआर

[624:04]

क्या कर रहा है शुरुआत में पांच नंबर्स

[624:07]

जितनी मेमोरी को स्टोर कर लेगा इनफैक्ट

[624:10]

कलॉग का ही यूज करते हैं क्योंकि इनिश

[624:12]

इजेशन मुझे अच्छा लगता है तो कैलक के अंदर

[624:15]

हमें स्टोर कराना है पांच नंबर के बराबर

[624:17]

मेमोरी तो दूसरा

[624:18]

साइज ऑफ विंट अब पीटीआर ऑफ 0 को हमने लिख

[624:21]

दिया वन पीटीआर ऑफ वन को हमने लिख दिया टू

[624:26]

एंड पीटीआर ऑफ 3 को हमने लिख दिया थ अब

[624:30]

कोड के बीच में अगर दो और साइज बढ़ाना है

[624:32]

तो क्या करेंगे सिंपली पीटीआर इ इक्व टू

[624:35]

रि एलॉक इसके अंदर पास करेंगे सबसे पहले

[624:38]

पीटीआर और उसके बाद अपना नया साइज नया

[624:40]

साइज हमारे पास होने वाला है 8 तो जो

[624:42]

मेमोरी पहले पांच नंबर्स को होल्ड कर सकती

[624:44]

थी अब वो आठ नंबर्स को होल्ड कर सकती है

[624:46]

इनफैक्ट इसके लिए हम कोड लिख लेते हैं कि

[624:49]

यह जो नंबर्स है ना यह सारे हम यूजर से

[624:51]

एंटर कराएंगे प्रिंट एफ एंटर नंबर्स कितने

[624:55]

नंबर्स एंटर कराने शुरुआत में एंटर कराने

[624:57]

पांच नंबर तो लूप लगा लेते हैं आई से पाच

[625:01]

तक का जीरो से पा तक का और हर किसी में

[625:05]

स्कैन कर लेते हैं अपने नंबर्स को

[625:07]

परसेंटेज डी एंड पीटीआर ऑफ आई अब जैसे ही

[625:10]

ये मेमोरी आठ की हो गई तो उसके बाद दोबारा

[625:13]

से स्कैन करना पड़ेगा हमें नंबर्स के लिए

[625:15]

और अब हमें आठ नंबर्स जो है एंटर करने

[625:18]

पड़ेंगे और एक बार एंटर कर लिया तो अब इन

[625:20]

नंबर्स को करा देंगे प्रिंट तो उसके लिए

[625:23]

भी एक लूप लिख लेते हैं सेम लूप को दोबारा

[625:26]

यूज कर लेंगे प्रिंट एफ से नंबर परसेंटेज

[625:30]

डी इज पहले आई तो इसको करते हैं सेव एंड

[625:34]

रन हमें पांच नंबर शुरुआत में एंटर करने

[625:37]

है तो हम एंटर करेंगे 5 4 3 2 एंड वन अब

[625:41]

आठ नंबर्स एंटर करने हैं तो 8 7 6 5 4 3 2

[625:46]

एंड 1 तो ये नंबर्स हमारे लिए प्रिंट होकर

[625:49]

आ गए नंबर जीरो इज एट नंबर वन इज सेवन

[625:52]

नंबर टू इज सिक्स नंबर थ्री इज फाइव तो ये

[625:56]

थोड़ी फॉर्मेटिंग हल्की सी खराब है इसको

[625:59]

भी हल्का सा ठीक कर लेते हैं बैक स्लैश

[626:01]

एंड शुरुआत में एंटर किए हमने पांच नंबर्स

[626:05]

और अब एंटर करने आठ

[626:07]

नंबर्स तो ये सारे के सारे आठ नंबर्स आठ

[626:10]

मेमोरी लोकेशंस में हमारे पास स्टोर होक

[626:13]

आएंगे नेक्स्ट बात करते हैं इस सवाल की

[626:15]

क्रिएट एन एरे ऑफ साइज फाइव यूजिंग कैलक

[626:18]

एंड एंटर इट्स वैल्यूज फ्रॉम द यूज़र यानी

[626:21]

हमें एक कैलक से पांच इंटी जर्स के बराबर

[626:25]

साइज़ जो है वह एलोकेट करना है और फिर

[626:28]

यूज़र से उन पांच इंटी जर्स की वैल्यू को

[626:30]

इनपुट कराना है तो ऑलरेडी काफ़ी सारा जो

[626:33]

काम है वह हम कर चुके हैं पहले एक इंटी जर

[626:35]

पॉइंटर बनाया फिर उसमें पांच साइज़ इंटी

[626:38]

जर की मेमोरी जो है एलोकेट कर दी पांच

[626:41]

इंटी जर्स को इनपुट करा लिया एंड इनफैक्ट

[626:43]

अब उनको आउटपुट भी करा देते हैं तो यहां

[626:46]

लिख देते हैं फाइव तो हमारे नंबर्स हमारे

[626:48]

पास आ जाएंगे इसको कर लेते हैं

[626:50]

रन एंटर करेंगे पांच नंबर्स 1 3 5 7 9 तो

[626:56]

नंबर्स हमारे पास प्रिंट होकर आ गए

[626:58]

नेक्स्ट सवाल है एलोकेट मेमोरी टू स्टोर

[627:01]

फर्स्ट फाइव ऑड नंबर्स देन री एलोकेटेड टू

[627:04]

स्टोर फर्स्ट सिक्स इवन नंबर्स यानी पहले

[627:08]

पांच ऑड नंबर्स को स्टोर कराने के लिए

[627:11]

मेमोरी लेनी है जिसमें पांच हमारे पास 1 3

[627:15]

5 7 एंड नाइन स्टोर्ड होंगे उसके बाद इस

[627:18]

मेमोरी को रिएलोकेट कर देना है यानी

[627:20]

दोबारा इसको यूज कर देना है सबसे पहले

[627:23]

इसको छह साइज का बनाना है क्योंकि इसमें

[627:25]

छह नंबर्स हम स्टोर कराएंगे उसके बाद

[627:28]

इसमें शुरुआत

[627:29]

के छह इवन नंबर्स की वैल्यूज को स्टोर

[627:33]

कराना है तो यह हल्का सा हमारा

[627:35]

इंटरेस्टिंग कोड रहेगा सबसे पहले एक इंटी

[627:38]

जर पॉइंटर बनाते हैं पीटीआर पीटीआर के

[627:40]

अंदर पांच वेरिएबल पांच इंटी जर्स के

[627:43]

बराबर मेमोरी कॉम स्टोर करा रहे होंगे तो

[627:45]

लिखेंगे इंट स्टार और फिर इसको इनिश इज कर

[627:49]

लेते हैं कलॉग के साथ सबसे पहले पास

[627:51]

करेंगे पांच उसके बाद साइज ऑफ इंट पीटीआर

[627:54]

ऑफ जीरो में हम स्टोर करा देंगे वन को

[627:57]

पीटीआर ऑफव में हम स्टोर करा देंगे थ्री

[628:00]

एंड सिमिलरली ट थ एंड फर और यहां पे स्टोर

[628:05]

करा रहे होंगे अपने ऑड नंबर्स को तो यहां

[628:08]

सेन आ गया और यहां आ गया फ अब इसको हम

[628:11]

प्रिंट भी कर सकते हैं फॉर इंट आ = 0 i <

[628:16]

5i +

[628:18]

प्रिंट एफ स्टेटमेंट परसेंटेज डी ब ए

[628:22]

पीटीआर ऑफ 0 एंड इन फैक्ट पीटीआर ऑफ आई तो

[628:26]

ये हमने पांच शुरुआत वाले ऑड नंबर स्टोर

[628:28]

किए और फिर उनको प्रिंट करवा दिया अब हम

[628:30]

क्या करेंगे इस मेमोरी को रिएलोकेट करेंगे

[628:32]

मेमोरी को रिएलोकेट करने के लिए लिखेंगे

[628:34]

पीटीआर इ इक्वल टू रिलक रिलक के अंदर

[628:37]

डालेंगे अपना पुराना पॉइंटर और उसके

[628:39]

साथ-साथ नया साइज नया साइज होने वाला है

[628:41]

हमारे पास छ और अब हम इसी सेम लोकेशन में

[628:45]

प्रिंट करवाएंगे इवन नंबर्स

[628:48]

एंड पीटीआर ऑफ 5 12 और सेम वैल्यूज को करा

[628:53]

देंगे हम प्रिंट तो इस कोड को एक बार सेव

[628:56]

करके रन करते हैं तो सबसे पहले हमारे पास

[628:59]

इवन नंबर्स प्रिंट हुए हैं स्क्रीन पे फिर

[629:01]

सारे के सारे ऑड नंबर्स प्रिंट हुए हैं

[629:03]

स्पेशल चीज क्या देखने को मिली कि जो साइज

[629:05]

मतलब पीटीआर ऑफ फाइव जो हम पहले एक्सेस

[629:08]

नहीं कर पा रहे थे उसको हम सेम कोड में

[629:10]

एक्सेस कर पा रहे हैं ये जो चीज है साइज

[629:12]

इंक्रीज करने वाली डिक्रीज करने वाली ये

[629:15]

हम एरस के साथ नहीं देख सकते ये सिर्फ देख

[629:17]

सकते हैं डायनेमिक डली एलोकेटेड मेमोरी के

[629:19]

साथ तो जब ऐसी सिचुएशन अराइज करे कि

[629:22]

डायनेमिक हमें मेमोरी एलोकेट करनी है तो

[629:24]

उन सिचुएशंस में हमें यूज करना पड़ेगा रि

[629:27]

एलॉक का और कौन सी मेमोरी को डायनेमिक

[629:29]

एलोकेट कर सकते हैं वो मेमोरी को रिएलोकेट

[629:32]

कर सकते हैं जो मैलक या कैलक से डिफाइन

[629:34]

हुई थी और एट दी एंड इस मेमोरी को हम कर

[629:36]

सकते हैं फ्री बाय यूजिंग फ्री पीटीआर अब

[629:39]

इस कोर्स को बनाने में बहुत सारे लोगों की

[629:42]

मेहनत लगी है काफी दिन रात जो है इसकी

[629:44]

रिकॉर्डिंग हुई है तो आई होप कि सारे के

[629:46]

सारे जो चैप्टर्स हैं उनका जो थ्योरी

[629:48]

पार्ट है उनके जो नोट्स हैं या फिर जितना

[629:51]

भी वीडियो के अंदर एक्स्ट्रा चीजें बताई

[629:53]

गई है रिलेटेड टू द एडिटर रिलेटेड टू द

[629:55]

टॉपिक वो आप लोगों ने ध्यान से सुनी होंगी

[629:57]

उसके नोट्स बनाए होंगे एंड आई होप कि अगर

[629:59]

आपके कोई इंटरव्यूज होने वाले हैं आप कोई

[630:01]

कॉलेज के टेस्ट होने वाले हैं तो उसमें ये

[630:03]

सारी चीजें आपको हेल्प कर रही हूं अब इस

[630:04]

कोर्स को खत्म करने के बाद मैंने पूरी

[630:06]

कोशिश करी है कि इसको इस तरीके से बनाया

[630:08]

गया कि सारे बेसिक कांसेप्ट आपके लिए

[630:10]

क्लियर हो गए हैं एंड इनफैक्ट आपने आप एक

[630:12]

बार सी सीख लिए ना तो आप किसी भी लैंग्वेज

[630:14]

को जाकर सीख सकते हैं सिंटेक्स आपका एक

[630:16]

हफ्ते के अंदर कवर हो जाए गा उस लैंग्वेज

[630:18]

का क्योंकि सारे बेसिक टॉपिक्स जितने हमने

[630:20]

सीखे हैं ना बाकी लैंग्वेजेस में ऐसे ही

[630:23]

बेसिक टॉपिक होते हैं बस क्या हो जाता है

[630:24]

उनका सिंटेक्स चेंज हो जाता है तो नई

[630:27]

लैंग्वेजेस के जो कॉन्सेप्ट्स होंगे वो

[630:29]

सीखने में अब आपको कोई परेशानी नहीं आने

[630:31]

वाली अब सी एक बार हमने सीख लिया है तो

[630:32]

नेक्स्ट स्टेप यूजुअली होता है कि लोग एक

[630:34]

नई प्रोग्रामिंग लैंग्वेज सीखते हैं इसके

[630:36]

बाद क्योंकि सी के अंदर एक हल्की सी

[630:38]

मिसिंग चीज ये है कि इसके अंदर ऑब्जेक्ट

[630:40]

ओरिएंटेशन के कॉन्सेप्ट्स नहीं होते तो

[630:42]

क्लासेस एंड ऑब्जेक्ट्स यहां पे हम नहीं

[630:44]

बना सकते वो सिमिलर टू स्ट्रक्चर्स होती

[630:46]

हैं पर उनको हम नहीं बना सकते तो इसीलिए

[630:48]

हम c+ प या जावा जैसी लैंग्वेजेस में

[630:51]

शिफ्ट करते हैं जिसमें हम जाकर क्लासेस या

[630:53]

ऑब्जेक्ट्स को बना सकते हैं अब c+ प का

[630:55]

ऑलरेडी एक पूरा प्लेसमेंट के हिसाब से

[630:57]

कोर्स बनाया हुआ है और जावा का भी पूरा एक

[631:00]

प्लेसमेंट के हिसाब से कोर्स बनाया हुआ है

[631:01]

जिसमें काफी एडवांस टॉपिक्स ततक कवर कर

[631:04]

रखे हैं यानी बिल्कुल बेसिक से लेकर

[631:06]

इंस्टॉलेशन ऑफ एडिटर से लेकर दोबारा c+

[631:09]

प्स के अंदर कैसे वेरिएबल होते हैं जावा

[631:11]

के अंदर कैसे वेरिएबल होसे हैं उससे लेकर

[631:13]

बिल्कुल एंड तक के डाटा स्ट्रक्चर्स एंड

[631:15]

एल्गोरिथम्स तक के टॉपिक कवर कर रखे हैं

[631:17]

उन प्लेलिस्ट को जाके हम एक्सप्लोर कर

[631:19]

सकते हैं जिस भी लैंग्वेज में हमें आगे

[631:21]

बढ़ना है उसमें हम देख सकते हैं अब

[631:23]

यूजुअली एक मिथ होता है कि सी के बाद

[631:24]

मोस्टली c+ प् ही सीखनी चाहिए आप सी के

[631:27]

बाद जावा भी सीख लें c+ प सीख लें

[631:29]

जावास्क्रिप्ट सीख लें कोई फर्क नहीं

[631:30]

पड़ेगा प्रोग्रामिंग कांसेप्ट आपके लिए

[631:32]

सेम होंगे और अगर आपको ये वीडियो अच्छा

[631:34]

लगा हो अगर इसका कोई टॉपिक ऐसा है जो आपके

[631:37]

साथ आपको लगता है कि आपको याद रहेगा काफी

[631:39]

टाइम तक और कोई बहुत ही इंटरेस्टिंग चीज

[631:41]

सीखने को मिली है तो उसके बारे में आप

[631:42]

नीचे मुझे कमेंट करके बता सकते हैं जितना

[631:45]

आप कमेंट करेंगे उतना मुझे पता चलेगा कि

[631:47]

कितना वैल्युएबल यह कोर्स रहा और किन-किन

[631:49]

स्टूडेंट्स के लिए वैल्युएबल रहा ताकि मैं

[631:51]

सिमिलर वीडियोस सिमिलर जो है पढ़ाई वाली

[631:54]

टॉपिक्स या डिफरेंट डिफरेंट लैंग्वेजेस

[631:57]

वाली चीजें जो है डाल सकूं आज के लिए इतना

[631:59]

ही मिलते हैं नेक्स्ट वीडियो में टिल देन

[632:01]

कीप लर्निंग एंड कीप प्रैक्टिसिंग

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