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Mechanical Properties of Fluids | CBSE Class 11th Physics | Full Chapter in 🔟 Min | Rapid Revision
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नमस्कार भाइयों बहनों स्वागत करता हूं आप
सभी का नेक्स्ट टॉपर के ये शानदार जानदार
और वजनदार प्लेटफार्म पर जहां पर हम जीरो
को हीरो बनाने की और हीरो को सुपर हीरो
बनाने के प्रयास में जुड़े हुए हैं
क्योंकि हम नेक्स्ट टॉपर हैं हम देश का
भविष्य बनाते हैं। तो रैपिड रिवीजन की इस
सीरीज में चैप्टर का नाम है फ्लूइड
मैकेनिक्स नहीं सर मैकेनिकल प्रॉपर्टी ऑफ
फ्लूइड्स। फ्लूइड मैकेनिक्स जेई की
प्रिपरेशन में कहा जाता है। इस फ्लूइड
मैकेनिक्स का इस मैकेनिकल प्रॉपर्टी ऑफ़
फ्लूइड्स का पूरा का पूरा पार्ट पूरा का
पूरा एक चैप्टर है वो हमने वन शॉट के
माध्यम से पढ़ा था। और इवन जितना एनसीईआरटी
में दे रखा था उससे बड़े लेवल पे जाकर भी
हमने समझा था। बहुत सारे ढेर सारे
न्यूमेरिकल्स लगाए थे। अब इस 15 रेपिड
डिवीजन की सीरीज में होता ये है कि हम उसी
चैप्टर को उसी पूरे के पूरे चैप्टर को 15
से 20 मिनट में कवर करने की कोशिश करते
हैं जिसमें मेजर मेजर कांसेप्ट्स सारे कवर
हो जाएंगे। तो क्या कहता है ये चैप्टर? तो
शुरुआत होती है इस चैप्टर की कि पहले
फ्लूइड होता क्या है? सॉलिड और फ्लूइड के
बीच का डिफरेंस क्या होता है? तो सर एक
टेक्निकल डिफरेंस दोनों के बीच का ये होता
है कि शियर स्ट्रेस सॉलिड है वो बियर कर
सकता है। वो सस्टेन कर सकता है लेकिन
फ्लूइड नहीं कर सकता है। यही एक टेक्निकल
डिफरेंस है जहां जाके उसी के बेसिस पे ये
सारी की सारी मैकेनिकल प्रॉपर्टी वो डिफर
डिराइव होती है या डिफाइन की जाती है। तो
वहां पर प्रेशर की बात की जाती है कि सर
विथ अ डेप्थ प्रेशर है वो बढ़ता है। क्यों
बढ़ता है उसका डेरिवेशन वहां पर करवाया
है। सर कितना बढ़ता है? उसकी बात मैं
सीधी-सीधी करवाता हूं कि अगर तुम पी ए
प्रेशर से जा रहे हो नीचे की ओर कितना जा
रहे हो सर? h डेप्थप नीचे जा रहे हो तो
रोgh जितना जिस लिक्विड में तुम चल रहे हो
उसका लिखा जाएगा रो लिक्विड जी ग्रेविटी
ठीक है सर एक्सीलरेशन ड्यू टू ग्रेविटी
रोgh जितना बढ़ जाएगा तो pb - pa मतलब
नीचे की ओर ज्यादा प्रेशर होगा बढ़िया सर
ये बात हमें समझ में आई नीचे की ओर प्रेशर
ज्यादा होगा कितना ज्यादा होगा रोgh जितना
ज्यादा होगा अब ये भी साथ-साथ हमने खास
बात पढ़ी थी उस चैप्टर में भी अब क्या
कहता है ये कि सर कोई एक पार्टिकल
इक्विलिब्रियम सिचुएशन में तो हर
डायरेक्शन में से हर डायरेक्शन में से फील
किए जाने वाला प्रेशर है वो क्या रहता है
सेम सेम सेम रहता है और खास बात ये कही
जाएगी कि सर अगर तुम h डेप्थ नीचे आ रहे
हो सेम लिक्विड में तो वो डिपेंड नहीं
करता है कि तुम किस शेप से नीचे आ रहे हो
हर जगह ये प्रेशर नीचे वाला प्रेशर है वो
सेम सेम सेम रहता है कितना चेंज आएगा यहां
से यहां तक का रोज ये जितना चेंज आएगा ठीक
है इसको कहा जाता था हाइड्रोस्टेटिक
पैराडॉक्स वहां पर डिटेल में पढ़ा था और
एनसीआरटी में भी ये चीज हमें दे रखी है और
बात आती थी पास्कल्स लॉ की। पास्कल्स लॉ
ये कहता है कि अगर मैं कोई एक्सटर्नल
फोर्स अप्लाई करूं जिसकी वजह से चेंज इन
प्रेशर आए तो चेंज इन प्रेशर हर चेंज इन
प्रेशर सेम फील होगा हर एक पार्टिकल के
लिए हर एक फ्लूइड के पार्टिकल के लिए। तो
देख इसका एक एप्लीकेशन वाला पार्ट आता था
कि मैं यहां से एक फोर्स लगाऊं छोटा वाला
फोर्स भी लगाऊं तब भी मैं इस व्हीकल को
उठा सकता हूं। ये क्यों होता था? तो
डेल्टा पी दोनों के लिए सेम सेम लिखा
जाएगा। फोर्स अपॉन एरिया फोर्स अपॉन
एरिया। यहां पर एरिया बड़ा है तो फोर्स
हमें कम अप्लाई करना पड़ेगा f1 वाला। ये
खास बात थी। ये कि कहा जाती है?
हाइड्रोलिक लिफ्ट के नाम से जानी जाती है।
यहां से न्यूमेरिकल पूछे जाते हैं। अपनी
एनसीआरटी में भी दे रखे हैं। एग्जांपल में
भी और एक्सरसाइज में भी दे रखे हैं और
एग्जाम में भी पूछे जा सकते हैं। और बात
आती थी दूसरे लॉ यानी आर्किमडीज प्रिंसिपल
की।
प्रिंसिपल ये कहता है कि अगर कोई लिक्विड
का कंटेनर है, उसमें तुम कोई मास डुबो दो,
तो वो मास जितना रिप्लेस करेगा ना लिक्विड
को, उस उतना उसके ऊपर एक फोर्स लगेगा
अपवर्ड डायरेक्शन में जिस फोर्स को कहा
जाता है बायोड्ड फोर्स। बायोड्ड फोर्स की
इक्वेशन लिखी जाती है कि रोgh जहां पर रो
क्या है? रो ऑफ़ लिक्विड। v क्या है?
वॉल्यूम डिस्प्लेड बाय दिस बॉडी। और g
क्या है? एक्सीलरेशन ड्यू टू ग्रेविटी।
इसके एप्लीकेशन बेस पे हमने सीखा था कि
फ्लोटिंग का रूल क्या होता है? अगर
डेंसिटी ज्यादा है, मटेरियल की डेंसिटी
ज्यादा है तो डूब जाएगा। अगर दोनों की सेम
सेम है तो तैरेगा। ठीक है? और अगर
सर लिक्विड मतलब लिक्विड की डेंसिटी
ज्यादा है और इस मटेरियल की डेंसिटी कम है
तो वो फ्लोट करेगा। ठीक है सर ये सबमर्ज
वाली बात आ जाएगी। ये बीच वाला और सबमर्ज
दोनों की डेंसिटी सेम सेम है तो सबमर्ज
वाली बात आएगी। नहीं पूरा का पूरा डूबेगा
नहीं पूरा का पूरा तैेगा। ठीक है? अब बात
आएगी अपेरेंट वेट की कि थोड़ा डूबा है,
थोड़ा नहीं डूबा है। तो इसका मास हमें
एक्चुअल में मेजर करते हैं तो थोड़ा कम
प्रतीत होता है। क्यों? क्योंकि अपपर की
डायरेक्शन में एक फोर्स लगता था। जिस
फोर्स को हमने बाय फ़ नाम दिया था। तो mg
जो एक्चुअल वाला mg नीचे फ़ोर्स लग रहा था
वो माइनस करके बाय फ़ यानी रोG। तो वहां से
सिंपलीफाई करके इक्वेशन बनती है और यहां
से भी एमसीक्यू पूछे जाते हैं या
न्यूमेरिकल भी पूछे जाते हैं। लिख के ले
लें यहां से क्वेश्चन बनाए जा सकते हैं।
अब ये पूरा का पूरा पार्ट हुआ करता था
स्टैटिक्स फ्लूइड का। दूसरा पार्ट दूसरा
अध्याय इस चैप्टर का मतलब डायनेमिक्स
डायनेमिक फ्लूइड डायनेमिक्स। यहां पर हम
फ्लो की बात करेंगे। किस-किस टाइप के फ्लो
होंगे? यूनिफॉर्म, नॉन यूनिफॉर्म, स्टेडी,
अनस्टेडी। फिर बात आएगी लेमिनार फ्लो की
अन लेमिनार फ्लो, टर्बुलेंट फ्लो की बात
आएगी। स्ट्रीमलाइन फ्लो की बात आएगी। तो
लेमिनार, स्ट्रीमलाइन एक-एक वाली बात। ठीक
है? इसके बारे में डिटेल में पढ़ा था।
स्टडी क्या कहता है कि सर एक पोस्ट एक
पॉइंट पे हर कोई पार्टिकल जो निकलेगा ये
स्टेडी फ्लो क्या कहता है कि कोई एक पॉइंट
P पे जितने भी पार्टिकल निकेंगे उन सबकी
वेलोसिटी सेम सेम सेम रहेगी। इस पार्टिकल
से जितने भी जितने भी जितने भी स्पीड से
कोई निकलेगा उन सबकी स्पीड क्या होगी? इस
पोजीशन पे सेम सेम सेम रहेगा। अनस्टेडी
इसका अपोजिट। लेमिनार ये कहता है कि सर
एकदम सीक्वेंस पे एकदम मक्खन की तरह फ्लो
बहेगा। ठीक है? तो सर स्मूथ पाथ होगा।
लेयर एक दूसरे में मिक्स नहीं होगी और ये
खास बात रहेगी इसकी। ये खास बात रहेगी एक
दूसरे में मिक्स नहीं होगी। सर, इसके ऊपर
अगर टेंजेंट ड्रॉ किया जाए इस फ्लो के
ऊपर, तो वह डायरेक्शन देगी वेलोसिटी की।
और टर्बुलेंट इसका अपोजिट रन रुके
टर्बुलेंट जाएगा। वह इसका अपोजिट। मोस्टली
जो पाए जाते हैं वो टर्बुलेंट फ्लो पाए
जाते हैं। और कहानी आगे बढ़ती है। फिर हम
समझते हैं इस इस पूरे के पूरे चैप्टर के
दो ब्रह्मास्त्र यानी इक्वेशन ऑफ
कंटिन्यूटी और बर्नुलीस इक्वेशन। आईएमपी
वाले टॉपिक है। हॉट टॉपिक है इस चैप्टर
के। ये इक्वेशन ऑफ प्रोजेक्टिटी क्या कहती
है? कि सर जितना मास अंदर गया उतना ही मास
उस सेम टाइम में बाहर निकलेगा। उतना ही
मास सेम टाइम में बाहर निकलेगा। तो ये
बेसिकली मास कंजर्वेशन पे बेसिस है। ये
बेसिकली मास कंजर्वेशन पे बेसिस है। वहां
से फार्मूला लिखता है a1 v1 = a2v2। अगर
मैं इसको n पार्ट n पार्ट में जैसे शावर
हुआ करता है। हुआ क्या है? ये भी देखा हुआ
पार्ट है। तो यहां से जितना निकला ये
एरिया a है। वेलोसिटी v से एंटर किया है।
सर ये छोटे-छोटे छोटे छोटे-छोटे हमने छेद
बना लिए। n नंबर ऑफ़ छेद। ठीक है? उसमें से
जितना जो लिक्विड निकलेगा उसकी वेलोसिटी
क्या होगी? तो सर एरिया लिखा हमने। ओ हो
हो हो। ये एरिया लिखा हमने इंटू करके
वेलोसिटी। यहां से वेलोसिटी निकाली जा
सकती है। बर्नुलस इक्वेशन एनर्जी
कंजर्वेशन पे बेसिस है। एनर्जी कंजर्वेशन
वाली बेसिस पे हमने पूरा का पूरा इसका
डेरिवेशन ये पूछा भी जाता है डेरिवेशन।
इसका डेरिवेशन पूछा भी जाता है और यहां से
न्यूमेरिकल भी बनाए जाते हैं। ठीक है? दो
पॉइंट तुमने पसंद किए ये और ये यहां से इन
दोनों के बीच में क्या टर्म कांस्टेंट
रहेगा? तो पूरा का पूरा p + रोGS = 1 / 2
रोv² कांस्टेंट रहेगा। इसलिए लिखा गया p1
रोgh कितनी हाइट ऊपर है। प्लस करके 1/2 रो
जितनी वेलोसिटी से भागेगा रो1 का
स्क्वायर। सेम बात यहां पर P2 प्रेशर जो
होगा वो रोgh एक डेटम पॉइंट इसको रेफरेंस
बोला जाएगा। इस रेफरेंस से ये कितना ऊपर
है? रोgh प्लस करके 1/2 रोv2 का स्क्वायर
ये कितना ऊपर है? हां और रोgh वाला पार्ट।
और कितनी वेलोसिटी से भाग रहा होगा? तो
1/2 रोv2 का स्क्वायर। ये टर्म्स है वो
कांस्टेंट रहते हैं। यहां से न्यूमेरिकल
अच्छे खासे बनते हैं। दिमाग में बात बिठा
लें। इसी की एप्लीकेशन में हमने बहुत सारी
बातें पढ़ी थी। उस बहुत सारी बातें में दो
फेमस बात हुआ करती थी। एक वेंचुरी मीटर और
एक ई फ्लक्स वाली बातें। वेंचुरी मीटर ये
यूज़ होता है कंपनीज़ में कि हम प्रेशर या
वेलोसिटी नापने के लिए यूज़ करते हैं। तो
देख वेंचुरी मीटर हमने लगाई है। यहां से
हमें बात पता चली है कि ये डिफरेंस
हालांकि हुआ करता था। ये दोनों के बीच का
डिफरेंस है वो H करके लिखा करते थे। तो
लिखा जाएगा V1 यहां से जितनी वेलोसिटी से
निकलेगा फ्लूइड वो V1 = में 2gh ये
डिफरेंस h अपॉन करके a1 / a2. A1 / A2
स्क्वायर माइनस करके वन। यह लिखा जाएगा
वेलोसिटी। और रेट ऑफ़ फ्लो क्या होता है
सर? a1v1 लिख लो या A2V2 लिख लो। यह रेट
ऑफ़ फ्लो होता है। यह दोनों तो सेम सेम ही
रहेंगे ना। यही तो इक्वेशन ऑफ़ कंटिन्यूटी
कहती है। इसका पूरा प्रॉपर डेरिवेशन मैंने
वन शॉट पे करवाया है। अगर तुम्हें देखना
है तो वहां पर जा सकते हो। और बात आएगी सर
e फ्लक्स की कि अगर मैं यहां छोटा सा छेद
कर दूं छोटा सा छेद कर दूं तो ये पानी
सर्ट करके बाहर निकलेगा। सर्ट करके बाहर
निकलेगा। ठीक है? इसकी वेलोसिटी कितनी
होगी? तो जितनी डेप्थ से जितनी हाइट से वो
नीचे आ रहा होगा। अंडर रूट में 2g अ
टोरिसलीज़ इक्वेशन के नाम से इसको जाना
जाता है कि जितने जैसे कि बॉल हमने ड्रॉप
किया है। n साइड से ड्रॉप किया है तो यहां
पहुंचते-पहुंचते उसकी वेलोसिटी हो जाएगी
अंडर रूट में 2gh। सेम बात यहां पर भी। अब
यहां पर हमने रेंज कैसे निकाली जाएगी?
रेंज मैक्सिमम कब आती है? कहां पर आती है?
वो सारी बात भी हमने वन शॉट वाले वीडियो
में की है। यहां पर मैं उसकी बात नहीं कर
रहा। लेकिन तुम्हारा एक बेसिक सा कांसेप्ट
मैंने यहां पर इंक्लूड कर दिया है। और
कहानी आगे बढ़ती है और इस चैप्टर का एक
तीसरा अधि तीसरा मतलब एक होता है फ्लूइड
स्टेटिक, एक फ्लूइड डायनेमिक्स। फिर
विस्कोसिटी और सरफेस टेंशन। विस्कोसिटी और
सरफेस टेंशन। तो विस्कोसिटी वाली बात मतलब
सीधा समझ ले कि एक्चुअल में है क्या सर?
फ्रिक्शन है। वहां पर हम पढ़ते थे वो सर
सॉलिड सॉलिड मतलब सॉलिड जो ब्लक्स हुआ
करते थे उनके बीच का फ्रिक्शन हुआ करता
था। यह लिक्विड लेयर्स के बीच का फ्रिक्शन
है। सर ये आगे बढ़ने से रोकता है। तो
अपोजिट डायरेक्शन में एक फोर्स अप्लाई
करता है। ईटा एv / dz इस dv / dz को
वेलोसिटी ग्रेडियंट के नाम से जाना जाता
है। ईटा को जाना जाता है वेलो विस्कोसिटी
कोफिशिएंट। इसका एमएलटी वाला फॉर्म बहुत
पूछा जाता है। याद रख लें एमएलटी फॉर्म
कैसे डेरिवेट किया जाएगा? ठीक है? रटने
वाली बात है क्या? नहीं। तुम चाहो तो इस
इक्वेशन से निकाल सकते हो। θ a dv / dz dv
/ dz वेलोसिटी का चेंज और dz क्या है? ये
डेप्थ। dz क्या है? ये डेप्थ काम का
फार्मूला है। किसका? कैसा फ़ोर्स? ये ड्रैग
फोर्स के नाम से जाना जाता है। विस्कस
फोर्स के नाम से जाना जाता है। ओके सर। एक
तरह से ये फ्रिक्शन है। और कहानी आगे बढ़ती
है। हम समझते हैं स्टॉक्स लॉ के बारे में।
क्या होता है टर्मिनल वेलोसिटी के बारे
में बताता है। कोई भी पार्टिकल अगर गिर
रहा है, गिर रहा है उस लिक्विड में या
नीचे से ऊपर भी आ रहा है तो थोड़े समय के
बाद उसकी वेलोसिटी कांस्टेंट हो जाती है।
क्योंकि उसकी अपोजिट डायरेक्शन में एक इस
मटेरियल के द्वारा इस लिक्विड के द्वारा
एक फोर्स लगता है जिसको हमने नाम दिया था
6π etrv जिसकी वैल्यू लिखी थी 6RV। थोड़ा
सा सिंपलीफाई करके हमने टर्मिनल वेलोसिटी
की वैल्यू निकाली है। कैसे लिखी जाएगी
टर्मिनल वेलोसिटी? 2 / 9 ईटा रो बॉडी
माइनस करके रो लिक्विड r² इंटू करके g। अब
इसमें ईटा क्या है? r क्या है? v क्या है?
मैंने आपको बता दिया है और कहानी आगे
बढ़ती है सरफेस टेंशन की ओर। दो फॉर्मूले
बहुत काम के। एक्चुअल में होता ये है कि
सर लिक्विड की सरफेस है वो अपने आप को
स्ट्रेच में अपने आप को स्ट्रेच करने की
जिससे एरिया कम हो सरफेस एरिया कम हो उस
डायरेक्शन में वो प्रॉपर्टी वो नेचर धर
आती है। वो नेचर वो नेचर अचीव करना चाहती
है। इसलिए बोलते हैं कि सर एक स्ट्रेच
मेंब्रेन की तरह बिहेव करती है। तो इसकी
वजह से एक एक प्रॉपर्टी डेवलप होती है
जिसको नाम दिया जाता है सरफेस टेंशन। ये
सरफेस टेंशन का फार्मूला दो मिलता है हमें
एक एनर्जी के पॉइंट ऑफ व्यू से एक फोर्स
के पॉइंट ऑफ व्यू से। तो वो फोर्स लिखा
जाएगा कि अगर मैं इसमें इमेजिनरी लाइन
ड्रॉ कर दूं तो दोनों ओर से लिक्विड फोर्स
लगाएगा उसका एरिया कम करने के लिए। तो
फोर्स इक्वल टू टेंशन सरफेस टेंशन इंटू
करके ये इमेजिनरी लेंथ। अब यहां पर ध्यान
रखना ये फोर्स है वो हमेशा परपेंडिकुलर टू
द लाइन होगा। इस लें लाइन से परपेंडिकुलर
अलोंग द फ्री सरफेस। ये पूरी की पूरी
लिक्विड की सरफेस होगी। उससे परपेंडिकुलर
हो। उसका मकसद क्या होगा? इसका मकसद होगा
कि लिक्विड सरफेस से वो कैसे एक स्ट्रेच
मेंब्रेन की तरह बिहेव करे या कैसे अपना
एरिया कम करे? सरफेस एरिया कम करे। ये
उसका मकसद होगा। ओके? बढ़िया बात। अब सरफेस
टेंशन कैसे लिखा जाएगा? एक फार्मूला यहां
से फोर्स पर लेंथ। और दूसरा फार्मूला
बनेगा कि वर्क डन हमने अगर इसकी इसकी लेंथ
या इसका एरिया चेंज किया है तो वो चेंज इन
एरिया अपर टर्म में आएगा। जितना हमने काम
किया है जितना वर्क हमने किया है वो। तो
चेंज इन एनर्जी अपॉन करके लिखा जाएगा
डेल्टा ए। डेल्टा ए यानी चेंज इन एरिया।
इज़ इक्वल टू करके हम सरफेस टेंशन लिख
लेंगे। इसका यूनिट क्या होता है? तुम यहां
से निकाल सकते सकते हैं। एमएलटी वाला
फॉर्म भी यहां पर पूछा जाता है। और कहानी
आगे बढ़ती है और समझते हैं हम कि इंसाइड अ
ड्रॉप प्रेशर कितना ज्यादा है। कॉनकेव
साइड प्रेशर ज्यादा होता है। तो कहानी
बताई जाएगी कि अगर लेन ड्रॉप लिक्विड
ड्रॉप है तो 2t / r r क्या है? इसकी
रेडियस है। 2t / r जितना ज्यादा होगा। और
अगर बबल है सोप बबल है तो सर 40 / r
क्योंकि इसमें डबल लेयर आती है। सोप में
डबल लेयर आती है। याद रख लेना। इसका प्रूव
भी मैंने करवाया। 40 / r जितना ज्यादा
होता है। इंसाइड इंसाइड ज्यादा होता है।
याद रखना इंसाइड ज्यादा होता है। कितना
ज्यादा होता है? टूटी बायर लिक्विड ड्रॉप
में। 40 / सोप बबल में। और कहानी आगे
बढ़ती है और हम समझते हैं कैपिलरी के बारे
में। शानदार टॉपिक है ये। उससे पहले हमने
कॉन्टक एंगल समझा था और कोहेसिव एडेसिव
फोर्स क्या होता है वो समझा था। देख कोईको
सरफेस ऐसी होगी कि जहां पर है ना ऐसे डिप
देखने को मिलेगा और यहां पर ऐसे अप
डायरेक्ट दिखने को मिलेगा। तो वहां पर
थीटा 90° से बढ़ा मतलब ये अपने-अपने वालों
के बीच में अच्छा खासा प्यार दिखा रहा है।
इसका मतलब ये है कि कोहेसिव फ़ यहां पर
अच्छा खासा है। ये दूसरे वाले के लिए
देखिए लिक्विड की सरफेस है वो ग्लास के
साथ चिपक के ऊपर आ गई ना। तो इसका मतलब
थीटा है वो कैसा रहा? 90° से छोटा रहा।
मतलब कि सर ये दूसरे वाले के साथ ज्यादा
अच्छा खासा प्यार दिखा रहा है। इसलिए
बताया गया है कि एडेसिव फोर्स ज्यादा है।
और अगर सर 90° बना रहा है एग्जैक्ट ऐसे
90° बना रहा है तो हम बताते हैं सर किस पे
एडेसिव मतलब अपने वालों के बीच में भी सेम
प्यार है। दूसरे वाले मटेरियल के बीच में
भी सेम प्यार है। इसलिए एडेसिव इक्वल टू
कोहेसिव फोर्स हमने लिखा है थीटा = 90° और
सर इसी के बेसिस पे लिक्विड सरफेस है ना
वो ऊपर उठती है। बहुत पतली अगर स्ट्रिप की
बात करूं इसको कैपिलरिटी बोला जाता है।
उसमें पानी ऊपर चढ़ता है। कितना ऊपर चढ़ता
है? उसका फार्मूला लिखा है 2t cos थीटा। t
सरफेस टेंशन है cos थीटा अपॉन करके रोgr
थीटा कॉन्टेक्ट एंगल वाली बात कही जाएगी।
ठीक है? r क्या है? इस मिनिस की रेडियस
है। इस मिनिस की क्या है? रेडियस है।
मिनिस मतलब ये ये कैपिलरी की रेडियस है।
कैपिलरी की रेडियस है। तो लिख याद रखना
फार्मूला एमसीक्यू पूछा जाता है या
न्यूमेरिकल भी पूछे जा सकते हैं। 2t cos
थीटा अपॉन करके रोghर। अब याद ये भी रख कि
ये डेरिवेट कैसे किया था। याद ये भी रख कि
ये डेरिवेट कैसे किया था। तो मैंने उस
सेशन में पूरा का पूरा समझाया कैसे
डेरिवेट किया जाता है क्योंकि ऐसे
क्वेश्चंस भी आएंगे जहां पर ये फार्मूला
काम नहीं करेगा। आपको जरूरत पड़ेगी कि
डेरिवेशन कैसे किया गया था। तो ये पूरी
कहानी थी इस चैप्टर की। बाकी मैं आपको कुछ
एमसीक्यूस कुछ क्वेश्चंस देता हूं।
एमसीक्यूस तो नहीं है। ये क्वेश्चंस ये
हैं जो एनसीईआरटी में ही दे रखे हैं। वो
क्वेश्चंस आपको करने हैं। एक बार सॉल्व
कर। एनसीईआरटी से आंसर चेक कर। एनसीईआरटी
से आंसर चेक कर। तुम्हें पता चलेगा कि ये
चैप्टर तुम्हें कितना समझ में आया है। और
अगर नहीं बन रहे हैं तो उस वन शॉट पे जा।
ये सारे के सारे क्वेश्चंस हैं वो मैंने
वहां पर सॉल्व करवा रखे हैं ऑलरेडी। तो
ज्यादा क्वेश्चन है लेकिन इतने भी ज्यादा
नहीं है कि तुम ना कर पाओ। इतने भी ज्यादा
नहीं है कि तुम ना कर पाओ। तो यही थी पूरी
की पूरी कहानी आज के सेशन की रैपिड रिवीजन
ऑफ मैकेनिकल प्रॉपर्टी ऑफ फ्लूइड्स की।
इसी के साथ सेशन का करते हैं स्वाहा।
Full transcript without timestamps
नमस्कार भाइयों बहनों स्वागत करता हूं आप सभी का नेक्स्ट टॉपर के ये शानदार जानदार और वजनदार प्लेटफार्म पर जहां पर हम जीरो को हीरो बनाने की और हीरो को सुपर हीरो बनाने के प्रयास में जुड़े हुए हैं क्योंकि हम नेक्स्ट टॉपर हैं हम देश का भविष्य बनाते हैं। तो रैपिड रिवीजन की इस सीरीज में चैप्टर का नाम है फ्लूइड मैकेनिक्स नहीं सर मैकेनिकल प्रॉपर्टी ऑफ फ्लूइड्स। फ्लूइड मैकेनिक्स जेई की प्रिपरेशन में कहा जाता है। इस फ्लूइड मैकेनिक्स का इस मैकेनिकल प्रॉपर्टी ऑफ़ फ्लूइड्स का पूरा का पूरा पार्ट पूरा का पूरा एक चैप्टर है वो हमने वन शॉट के माध्यम से पढ़ा था। और इवन जितना एनसीईआरटी में दे रखा था उससे बड़े लेवल पे जाकर भी हमने समझा था। बहुत सारे ढेर सारे न्यूमेरिकल्स लगाए थे। अब इस 15 रेपिड डिवीजन की सीरीज में होता ये है कि हम उसी चैप्टर को उसी पूरे के पूरे चैप्टर को 15 से 20 मिनट में कवर करने की कोशिश करते हैं जिसमें मेजर मेजर कांसेप्ट्स सारे कवर हो जाएंगे। तो क्या कहता है ये चैप्टर? तो शुरुआत होती है इस चैप्टर की कि पहले फ्लूइड होता क्या है? सॉलिड और फ्लूइड के बीच का डिफरेंस क्या होता है? तो सर एक टेक्निकल डिफरेंस दोनों के बीच का ये होता है कि शियर स्ट्रेस सॉलिड है वो बियर कर सकता है। वो सस्टेन कर सकता है लेकिन फ्लूइड नहीं कर सकता है। यही एक टेक्निकल डिफरेंस है जहां जाके उसी के बेसिस पे ये सारी की सारी मैकेनिकल प्रॉपर्टी वो डिफर डिराइव होती है या डिफाइन की जाती है। तो वहां पर प्रेशर की बात की जाती है कि सर विथ अ डेप्थ प्रेशर है वो बढ़ता है। क्यों बढ़ता है उसका डेरिवेशन वहां पर करवाया है। सर कितना बढ़ता है? उसकी बात मैं सीधी-सीधी करवाता हूं कि अगर तुम पी ए प्रेशर से जा रहे हो नीचे की ओर कितना जा रहे हो सर? h डेप्थप नीचे जा रहे हो तो रोgh जितना जिस लिक्विड में तुम चल रहे हो उसका लिखा जाएगा रो लिक्विड जी ग्रेविटी ठीक है सर एक्सीलरेशन ड्यू टू ग्रेविटी रोgh जितना बढ़ जाएगा तो pb - pa मतलब नीचे की ओर ज्यादा प्रेशर होगा बढ़िया सर ये बात हमें समझ में आई नीचे की ओर प्रेशर ज्यादा होगा कितना ज्यादा होगा रोgh जितना ज्यादा होगा अब ये भी साथ-साथ हमने खास बात पढ़ी थी उस चैप्टर में भी अब क्या कहता है ये कि सर कोई एक पार्टिकल इक्विलिब्रियम सिचुएशन में तो हर डायरेक्शन में से हर डायरेक्शन में से फील किए जाने वाला प्रेशर है वो क्या रहता है सेम सेम सेम रहता है और खास बात ये कही जाएगी कि सर अगर तुम h डेप्थ नीचे आ रहे हो सेम लिक्विड में तो वो डिपेंड नहीं करता है कि तुम किस शेप से नीचे आ रहे हो हर जगह ये प्रेशर नीचे वाला प्रेशर है वो सेम सेम सेम रहता है कितना चेंज आएगा यहां से यहां तक का रोज ये जितना चेंज आएगा ठीक है इसको कहा जाता था हाइड्रोस्टेटिक पैराडॉक्स वहां पर डिटेल में पढ़ा था और एनसीआरटी में भी ये चीज हमें दे रखी है और बात आती थी पास्कल्स लॉ की। पास्कल्स लॉ ये कहता है कि अगर मैं कोई एक्सटर्नल फोर्स अप्लाई करूं जिसकी वजह से चेंज इन प्रेशर आए तो चेंज इन प्रेशर हर चेंज इन प्रेशर सेम फील होगा हर एक पार्टिकल के लिए हर एक फ्लूइड के पार्टिकल के लिए। तो देख इसका एक एप्लीकेशन वाला पार्ट आता था कि मैं यहां से एक फोर्स लगाऊं छोटा वाला फोर्स भी लगाऊं तब भी मैं इस व्हीकल को उठा सकता हूं। ये क्यों होता था? तो डेल्टा पी दोनों के लिए सेम सेम लिखा जाएगा। फोर्स अपॉन एरिया फोर्स अपॉन एरिया। यहां पर एरिया बड़ा है तो फोर्स हमें कम अप्लाई करना पड़ेगा f1 वाला। ये खास बात थी। ये कि कहा जाती है? हाइड्रोलिक लिफ्ट के नाम से जानी जाती है। यहां से न्यूमेरिकल पूछे जाते हैं। अपनी एनसीआरटी में भी दे रखे हैं। एग्जांपल में भी और एक्सरसाइज में भी दे रखे हैं और एग्जाम में भी पूछे जा सकते हैं। और बात आती थी दूसरे लॉ यानी आर्किमडीज प्रिंसिपल की। प्रिंसिपल ये कहता है कि अगर कोई लिक्विड का कंटेनर है, उसमें तुम कोई मास डुबो दो, तो वो मास जितना रिप्लेस करेगा ना लिक्विड को, उस उतना उसके ऊपर एक फोर्स लगेगा अपवर्ड डायरेक्शन में जिस फोर्स को कहा जाता है बायोड्ड फोर्स। बायोड्ड फोर्स की इक्वेशन लिखी जाती है कि रोgh जहां पर रो क्या है? रो ऑफ़ लिक्विड। v क्या है? वॉल्यूम डिस्प्लेड बाय दिस बॉडी। और g क्या है? एक्सीलरेशन ड्यू टू ग्रेविटी। इसके एप्लीकेशन बेस पे हमने सीखा था कि फ्लोटिंग का रूल क्या होता है? अगर डेंसिटी ज्यादा है, मटेरियल की डेंसिटी ज्यादा है तो डूब जाएगा। अगर दोनों की सेम सेम है तो तैरेगा। ठीक है? और अगर सर लिक्विड मतलब लिक्विड की डेंसिटी ज्यादा है और इस मटेरियल की डेंसिटी कम है तो वो फ्लोट करेगा। ठीक है सर ये सबमर्ज वाली बात आ जाएगी। ये बीच वाला और सबमर्ज दोनों की डेंसिटी सेम सेम है तो सबमर्ज वाली बात आएगी। नहीं पूरा का पूरा डूबेगा नहीं पूरा का पूरा तैेगा। ठीक है? अब बात आएगी अपेरेंट वेट की कि थोड़ा डूबा है, थोड़ा नहीं डूबा है। तो इसका मास हमें एक्चुअल में मेजर करते हैं तो थोड़ा कम प्रतीत होता है। क्यों? क्योंकि अपपर की डायरेक्शन में एक फोर्स लगता था। जिस फोर्स को हमने बाय फ़ नाम दिया था। तो mg जो एक्चुअल वाला mg नीचे फ़ोर्स लग रहा था वो माइनस करके बाय फ़ यानी रोG। तो वहां से सिंपलीफाई करके इक्वेशन बनती है और यहां से भी एमसीक्यू पूछे जाते हैं या न्यूमेरिकल भी पूछे जाते हैं। लिख के ले लें यहां से क्वेश्चन बनाए जा सकते हैं। अब ये पूरा का पूरा पार्ट हुआ करता था स्टैटिक्स फ्लूइड का। दूसरा पार्ट दूसरा अध्याय इस चैप्टर का मतलब डायनेमिक्स डायनेमिक फ्लूइड डायनेमिक्स। यहां पर हम फ्लो की बात करेंगे। किस-किस टाइप के फ्लो होंगे? यूनिफॉर्म, नॉन यूनिफॉर्म, स्टेडी, अनस्टेडी। फिर बात आएगी लेमिनार फ्लो की अन लेमिनार फ्लो, टर्बुलेंट फ्लो की बात आएगी। स्ट्रीमलाइन फ्लो की बात आएगी। तो लेमिनार, स्ट्रीमलाइन एक-एक वाली बात। ठीक है? इसके बारे में डिटेल में पढ़ा था। स्टडी क्या कहता है कि सर एक पोस्ट एक पॉइंट पे हर कोई पार्टिकल जो निकलेगा ये स्टेडी फ्लो क्या कहता है कि कोई एक पॉइंट P पे जितने भी पार्टिकल निकेंगे उन सबकी वेलोसिटी सेम सेम सेम रहेगी। इस पार्टिकल से जितने भी जितने भी जितने भी स्पीड से कोई निकलेगा उन सबकी स्पीड क्या होगी? इस पोजीशन पे सेम सेम सेम रहेगा। अनस्टेडी इसका अपोजिट। लेमिनार ये कहता है कि सर एकदम सीक्वेंस पे एकदम मक्खन की तरह फ्लो बहेगा। ठीक है? तो सर स्मूथ पाथ होगा। लेयर एक दूसरे में मिक्स नहीं होगी और ये खास बात रहेगी इसकी। ये खास बात रहेगी एक दूसरे में मिक्स नहीं होगी। सर, इसके ऊपर अगर टेंजेंट ड्रॉ किया जाए इस फ्लो के ऊपर, तो वह डायरेक्शन देगी वेलोसिटी की। और टर्बुलेंट इसका अपोजिट रन रुके टर्बुलेंट जाएगा। वह इसका अपोजिट। मोस्टली जो पाए जाते हैं वो टर्बुलेंट फ्लो पाए जाते हैं। और कहानी आगे बढ़ती है। फिर हम समझते हैं इस इस पूरे के पूरे चैप्टर के दो ब्रह्मास्त्र यानी इक्वेशन ऑफ कंटिन्यूटी और बर्नुलीस इक्वेशन। आईएमपी वाले टॉपिक है। हॉट टॉपिक है इस चैप्टर के। ये इक्वेशन ऑफ प्रोजेक्टिटी क्या कहती है? कि सर जितना मास अंदर गया उतना ही मास उस सेम टाइम में बाहर निकलेगा। उतना ही मास सेम टाइम में बाहर निकलेगा। तो ये बेसिकली मास कंजर्वेशन पे बेसिस है। ये बेसिकली मास कंजर्वेशन पे बेसिस है। वहां से फार्मूला लिखता है a1 v1 = a2v2। अगर मैं इसको n पार्ट n पार्ट में जैसे शावर हुआ करता है। हुआ क्या है? ये भी देखा हुआ पार्ट है। तो यहां से जितना निकला ये एरिया a है। वेलोसिटी v से एंटर किया है। सर ये छोटे-छोटे छोटे छोटे-छोटे हमने छेद बना लिए। n नंबर ऑफ़ छेद। ठीक है? उसमें से जितना जो लिक्विड निकलेगा उसकी वेलोसिटी क्या होगी? तो सर एरिया लिखा हमने। ओ हो हो हो। ये एरिया लिखा हमने इंटू करके वेलोसिटी। यहां से वेलोसिटी निकाली जा सकती है। बर्नुलस इक्वेशन एनर्जी कंजर्वेशन पे बेसिस है। एनर्जी कंजर्वेशन वाली बेसिस पे हमने पूरा का पूरा इसका डेरिवेशन ये पूछा भी जाता है डेरिवेशन। इसका डेरिवेशन पूछा भी जाता है और यहां से न्यूमेरिकल भी बनाए जाते हैं। ठीक है? दो पॉइंट तुमने पसंद किए ये और ये यहां से इन दोनों के बीच में क्या टर्म कांस्टेंट रहेगा? तो पूरा का पूरा p + रोGS = 1 / 2 रोv² कांस्टेंट रहेगा। इसलिए लिखा गया p1 रोgh कितनी हाइट ऊपर है। प्लस करके 1/2 रो जितनी वेलोसिटी से भागेगा रो1 का स्क्वायर। सेम बात यहां पर P2 प्रेशर जो होगा वो रोgh एक डेटम पॉइंट इसको रेफरेंस बोला जाएगा। इस रेफरेंस से ये कितना ऊपर है? रोgh प्लस करके 1/2 रोv2 का स्क्वायर ये कितना ऊपर है? हां और रोgh वाला पार्ट। और कितनी वेलोसिटी से भाग रहा होगा? तो 1/2 रोv2 का स्क्वायर। ये टर्म्स है वो कांस्टेंट रहते हैं। यहां से न्यूमेरिकल अच्छे खासे बनते हैं। दिमाग में बात बिठा लें। इसी की एप्लीकेशन में हमने बहुत सारी बातें पढ़ी थी। उस बहुत सारी बातें में दो फेमस बात हुआ करती थी। एक वेंचुरी मीटर और एक ई फ्लक्स वाली बातें। वेंचुरी मीटर ये यूज़ होता है कंपनीज़ में कि हम प्रेशर या वेलोसिटी नापने के लिए यूज़ करते हैं। तो देख वेंचुरी मीटर हमने लगाई है। यहां से हमें बात पता चली है कि ये डिफरेंस हालांकि हुआ करता था। ये दोनों के बीच का डिफरेंस है वो H करके लिखा करते थे। तो लिखा जाएगा V1 यहां से जितनी वेलोसिटी से निकलेगा फ्लूइड वो V1 = में 2gh ये डिफरेंस h अपॉन करके a1 / a2. A1 / A2 स्क्वायर माइनस करके वन। यह लिखा जाएगा वेलोसिटी। और रेट ऑफ़ फ्लो क्या होता है सर? a1v1 लिख लो या A2V2 लिख लो। यह रेट ऑफ़ फ्लो होता है। यह दोनों तो सेम सेम ही रहेंगे ना। यही तो इक्वेशन ऑफ़ कंटिन्यूटी कहती है। इसका पूरा प्रॉपर डेरिवेशन मैंने वन शॉट पे करवाया है। अगर तुम्हें देखना है तो वहां पर जा सकते हो। और बात आएगी सर e फ्लक्स की कि अगर मैं यहां छोटा सा छेद कर दूं छोटा सा छेद कर दूं तो ये पानी सर्ट करके बाहर निकलेगा। सर्ट करके बाहर निकलेगा। ठीक है? इसकी वेलोसिटी कितनी होगी? तो जितनी डेप्थ से जितनी हाइट से वो नीचे आ रहा होगा। अंडर रूट में 2g अ टोरिसलीज़ इक्वेशन के नाम से इसको जाना जाता है कि जितने जैसे कि बॉल हमने ड्रॉप किया है। n साइड से ड्रॉप किया है तो यहां पहुंचते-पहुंचते उसकी वेलोसिटी हो जाएगी अंडर रूट में 2gh। सेम बात यहां पर भी। अब यहां पर हमने रेंज कैसे निकाली जाएगी? रेंज मैक्सिमम कब आती है? कहां पर आती है? वो सारी बात भी हमने वन शॉट वाले वीडियो में की है। यहां पर मैं उसकी बात नहीं कर रहा। लेकिन तुम्हारा एक बेसिक सा कांसेप्ट मैंने यहां पर इंक्लूड कर दिया है। और कहानी आगे बढ़ती है और इस चैप्टर का एक तीसरा अधि तीसरा मतलब एक होता है फ्लूइड स्टेटिक, एक फ्लूइड डायनेमिक्स। फिर विस्कोसिटी और सरफेस टेंशन। विस्कोसिटी और सरफेस टेंशन। तो विस्कोसिटी वाली बात मतलब सीधा समझ ले कि एक्चुअल में है क्या सर? फ्रिक्शन है। वहां पर हम पढ़ते थे वो सर सॉलिड सॉलिड मतलब सॉलिड जो ब्लक्स हुआ करते थे उनके बीच का फ्रिक्शन हुआ करता था। यह लिक्विड लेयर्स के बीच का फ्रिक्शन है। सर ये आगे बढ़ने से रोकता है। तो अपोजिट डायरेक्शन में एक फोर्स अप्लाई करता है। ईटा एv / dz इस dv / dz को वेलोसिटी ग्रेडियंट के नाम से जाना जाता है। ईटा को जाना जाता है वेलो विस्कोसिटी कोफिशिएंट। इसका एमएलटी वाला फॉर्म बहुत पूछा जाता है। याद रख लें एमएलटी फॉर्म कैसे डेरिवेट किया जाएगा? ठीक है? रटने वाली बात है क्या? नहीं। तुम चाहो तो इस इक्वेशन से निकाल सकते हो। θ a dv / dz dv / dz वेलोसिटी का चेंज और dz क्या है? ये डेप्थ। dz क्या है? ये डेप्थ काम का फार्मूला है। किसका? कैसा फ़ोर्स? ये ड्रैग फोर्स के नाम से जाना जाता है। विस्कस फोर्स के नाम से जाना जाता है। ओके सर। एक तरह से ये फ्रिक्शन है। और कहानी आगे बढ़ती है। हम समझते हैं स्टॉक्स लॉ के बारे में। क्या होता है टर्मिनल वेलोसिटी के बारे में बताता है। कोई भी पार्टिकल अगर गिर रहा है, गिर रहा है उस लिक्विड में या नीचे से ऊपर भी आ रहा है तो थोड़े समय के बाद उसकी वेलोसिटी कांस्टेंट हो जाती है। क्योंकि उसकी अपोजिट डायरेक्शन में एक इस मटेरियल के द्वारा इस लिक्विड के द्वारा एक फोर्स लगता है जिसको हमने नाम दिया था 6π etrv जिसकी वैल्यू लिखी थी 6RV। थोड़ा सा सिंपलीफाई करके हमने टर्मिनल वेलोसिटी की वैल्यू निकाली है। कैसे लिखी जाएगी टर्मिनल वेलोसिटी? 2 / 9 ईटा रो बॉडी माइनस करके रो लिक्विड r² इंटू करके g। अब इसमें ईटा क्या है? r क्या है? v क्या है? मैंने आपको बता दिया है और कहानी आगे बढ़ती है सरफेस टेंशन की ओर। दो फॉर्मूले बहुत काम के। एक्चुअल में होता ये है कि सर लिक्विड की सरफेस है वो अपने आप को स्ट्रेच में अपने आप को स्ट्रेच करने की जिससे एरिया कम हो सरफेस एरिया कम हो उस डायरेक्शन में वो प्रॉपर्टी वो नेचर धर आती है। वो नेचर वो नेचर अचीव करना चाहती है। इसलिए बोलते हैं कि सर एक स्ट्रेच मेंब्रेन की तरह बिहेव करती है। तो इसकी वजह से एक एक प्रॉपर्टी डेवलप होती है जिसको नाम दिया जाता है सरफेस टेंशन। ये सरफेस टेंशन का फार्मूला दो मिलता है हमें एक एनर्जी के पॉइंट ऑफ व्यू से एक फोर्स के पॉइंट ऑफ व्यू से। तो वो फोर्स लिखा जाएगा कि अगर मैं इसमें इमेजिनरी लाइन ड्रॉ कर दूं तो दोनों ओर से लिक्विड फोर्स लगाएगा उसका एरिया कम करने के लिए। तो फोर्स इक्वल टू टेंशन सरफेस टेंशन इंटू करके ये इमेजिनरी लेंथ। अब यहां पर ध्यान रखना ये फोर्स है वो हमेशा परपेंडिकुलर टू द लाइन होगा। इस लें लाइन से परपेंडिकुलर अलोंग द फ्री सरफेस। ये पूरी की पूरी लिक्विड की सरफेस होगी। उससे परपेंडिकुलर हो। उसका मकसद क्या होगा? इसका मकसद होगा कि लिक्विड सरफेस से वो कैसे एक स्ट्रेच मेंब्रेन की तरह बिहेव करे या कैसे अपना एरिया कम करे? सरफेस एरिया कम करे। ये उसका मकसद होगा। ओके? बढ़िया बात। अब सरफेस टेंशन कैसे लिखा जाएगा? एक फार्मूला यहां से फोर्स पर लेंथ। और दूसरा फार्मूला बनेगा कि वर्क डन हमने अगर इसकी इसकी लेंथ या इसका एरिया चेंज किया है तो वो चेंज इन एरिया अपर टर्म में आएगा। जितना हमने काम किया है जितना वर्क हमने किया है वो। तो चेंज इन एनर्जी अपॉन करके लिखा जाएगा डेल्टा ए। डेल्टा ए यानी चेंज इन एरिया। इज़ इक्वल टू करके हम सरफेस टेंशन लिख लेंगे। इसका यूनिट क्या होता है? तुम यहां से निकाल सकते सकते हैं। एमएलटी वाला फॉर्म भी यहां पर पूछा जाता है। और कहानी आगे बढ़ती है और समझते हैं हम कि इंसाइड अ ड्रॉप प्रेशर कितना ज्यादा है। कॉनकेव साइड प्रेशर ज्यादा होता है। तो कहानी बताई जाएगी कि अगर लेन ड्रॉप लिक्विड ड्रॉप है तो 2t / r r क्या है? इसकी रेडियस है। 2t / r जितना ज्यादा होगा। और अगर बबल है सोप बबल है तो सर 40 / r क्योंकि इसमें डबल लेयर आती है। सोप में डबल लेयर आती है। याद रख लेना। इसका प्रूव भी मैंने करवाया। 40 / r जितना ज्यादा होता है। इंसाइड इंसाइड ज्यादा होता है। याद रखना इंसाइड ज्यादा होता है। कितना ज्यादा होता है? टूटी बायर लिक्विड ड्रॉप में। 40 / सोप बबल में। और कहानी आगे बढ़ती है और हम समझते हैं कैपिलरी के बारे में। शानदार टॉपिक है ये। उससे पहले हमने कॉन्टक एंगल समझा था और कोहेसिव एडेसिव फोर्स क्या होता है वो समझा था। देख कोईको सरफेस ऐसी होगी कि जहां पर है ना ऐसे डिप देखने को मिलेगा और यहां पर ऐसे अप डायरेक्ट दिखने को मिलेगा। तो वहां पर थीटा 90° से बढ़ा मतलब ये अपने-अपने वालों के बीच में अच्छा खासा प्यार दिखा रहा है। इसका मतलब ये है कि कोहेसिव फ़ यहां पर अच्छा खासा है। ये दूसरे वाले के लिए देखिए लिक्विड की सरफेस है वो ग्लास के साथ चिपक के ऊपर आ गई ना। तो इसका मतलब थीटा है वो कैसा रहा? 90° से छोटा रहा। मतलब कि सर ये दूसरे वाले के साथ ज्यादा अच्छा खासा प्यार दिखा रहा है। इसलिए बताया गया है कि एडेसिव फोर्स ज्यादा है। और अगर सर 90° बना रहा है एग्जैक्ट ऐसे 90° बना रहा है तो हम बताते हैं सर किस पे एडेसिव मतलब अपने वालों के बीच में भी सेम प्यार है। दूसरे वाले मटेरियल के बीच में भी सेम प्यार है। इसलिए एडेसिव इक्वल टू कोहेसिव फोर्स हमने लिखा है थीटा = 90° और सर इसी के बेसिस पे लिक्विड सरफेस है ना वो ऊपर उठती है। बहुत पतली अगर स्ट्रिप की बात करूं इसको कैपिलरिटी बोला जाता है। उसमें पानी ऊपर चढ़ता है। कितना ऊपर चढ़ता है? उसका फार्मूला लिखा है 2t cos थीटा। t सरफेस टेंशन है cos थीटा अपॉन करके रोgr थीटा कॉन्टेक्ट एंगल वाली बात कही जाएगी। ठीक है? r क्या है? इस मिनिस की रेडियस है। इस मिनिस की क्या है? रेडियस है। मिनिस मतलब ये ये कैपिलरी की रेडियस है। कैपिलरी की रेडियस है। तो लिख याद रखना फार्मूला एमसीक्यू पूछा जाता है या न्यूमेरिकल भी पूछे जा सकते हैं। 2t cos थीटा अपॉन करके रोghर। अब याद ये भी रख कि ये डेरिवेट कैसे किया था। याद ये भी रख कि ये डेरिवेट कैसे किया था। तो मैंने उस सेशन में पूरा का पूरा समझाया कैसे डेरिवेट किया जाता है क्योंकि ऐसे क्वेश्चंस भी आएंगे जहां पर ये फार्मूला काम नहीं करेगा। आपको जरूरत पड़ेगी कि डेरिवेशन कैसे किया गया था। तो ये पूरी कहानी थी इस चैप्टर की। बाकी मैं आपको कुछ एमसीक्यूस कुछ क्वेश्चंस देता हूं। एमसीक्यूस तो नहीं है। ये क्वेश्चंस ये हैं जो एनसीईआरटी में ही दे रखे हैं। वो क्वेश्चंस आपको करने हैं। एक बार सॉल्व कर। एनसीईआरटी से आंसर चेक कर। एनसीईआरटी से आंसर चेक कर। तुम्हें पता चलेगा कि ये चैप्टर तुम्हें कितना समझ में आया है। और अगर नहीं बन रहे हैं तो उस वन शॉट पे जा। ये सारे के सारे क्वेश्चंस हैं वो मैंने वहां पर सॉल्व करवा रखे हैं ऑलरेडी। तो ज्यादा क्वेश्चन है लेकिन इतने भी ज्यादा नहीं है कि तुम ना कर पाओ। इतने भी ज्यादा नहीं है कि तुम ना कर पाओ। तो यही थी पूरी की पूरी कहानी आज के सेशन की रैपिड रिवीजन ऑफ मैकेनिकल प्रॉपर्टी ऑफ फ्लूइड्स की। इसी के साथ सेशन का करते हैं स्वाहा।
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