ETF क्या है? (एक आसान उदाहरण के साथ)
ETF का पूरा नाम एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (Exchange Traded Fund) है। इसे एक स्टॉक्स की टोकरी (Basket) की तरह समझें। जैसे एक फलों की टोकरी में कई तरह के फल होते हैं, वैसे ही एक ETF में कई कंपनियों के शेयर, बॉन्ड, या सोना जैसी कई एसेट्स शामिल होती हैं।
- उदाहरण: निफ्टी 50 ETF में भारत की टॉप 50 कंपनियों के शेयर शामिल होते हैं। इस ETF को खरीदने का मतलब एक साथ इन सभी कंपनियों में निवेश करना है।
- विदेशी उदाहरण: Nasdaq 100 ETF में अमेरिका की Apple, Microsoft, Tesla जैसी टॉप 100 नॉन-फाइनेंशियल कंपनियों के शेयर शामिल होते हैं।
ETF का Price किसी सामान्य स्टॉक की तरह पूरे मार्केट आवर्स में लगातार बदलता रहता है।
म्यूचुअल फंड और ETF में मुख्य अंतर (5 बड़े पॉइंट्स)
| फीचर | ETF | म्यूचुअल फंड | | :--- | :--- | :--- | | प्रबंधन (Management) | स्व-प्रबंधित (Self-managed), आप खुद चुनते और बेचते हैं | फंड मैनेजर (Fund Manager) आपके पैसे का प्रबंधन करता है | | प्राइस अपडेट | रियल टाइम में मार्केट आवर्स के दौरान लगातार बदलता है | NAV दिन के अंत में एक बार अपडेट होती है | | खर्च अनुपात (Expense Ratio) | बहुत कम (0.05% से 0.5% तक) | अपेक्षाकृत अधिक (0.5% से 2.5% तक) | | तरलता (Liquidity) | बहुत अधिक, किसी भी समय स्टॉक की तरह बेच सकते हैं | कम, कुछ फंड्स में लॉक-इन पीरियड भी हो सकता है | | | भारत में औसत Expense Ratio: 0.01% | भारत में एक्टिव फंड्स का Expense Ratio: 1-2% |
विभिन्न प्रकार के ETF (6 कैटेगरी)
- इक्विटी ETF: इसमें कंपनियों के स्टॉक शामिल होते हैं। जैसे Nifty 50 ETF, Sensex ETF। लॉन्ग टर्म ग्रोथ और वेल्थ क्रिएशन के लिए अच्छा है।
- डेट ETF: इसमें पैसा बॉन्ड्स और सरकारी सिक्योरिटीज में लगता है। कम रिस्क और स्थिर रिटर्न के लिए कंजर्वेटिव निवेशकों के लिए बेस्ट है। (उदा. भारत बॉन्ड ETF)
- गोल्ड ETF: यह फिजिकल गोल्ड की जगह डिजिटल गोल्ड खरीदने जैसा है। सोने की कीमत बढ़ने पर इसका रेट बढ़ता है। (उदा. Nippon India Gold ETF)
- तथ्य: भारत में गोल्ड ETF का बाजार ₹18,000 करोड़ से अधिक का है।
- सेक्टोरल / थीम बेस्ड ETF: ये किसी एक विशेष सेक्टर (जैसे बैंकिंग, IT) या थीम (जैसे रिन्यूएबल एनर्जी) पर केंद्रित होते हैं। (उदा. SBI Banking ETF)
- इंटरनेशनल ETF: इनमें निवेश करके आप अप्रत्यक्ष रूप से दुनिया की बड़ी कंपनियों (Amazon, Google) में निवेश कर सकते हैं। (उदा. Motilal Oswal Nasdaq 100 ETF)
भारत बनाम अमेरिका: ETF बाजार की तुलना
एक तुलनात्मक अध्ययन से पता चलता है कि भारत में ETF का बाजार अमेरिका के मुकाबले बहुत छोटा है।
| पैरामीटर | भारत | अमेरिका | | :--- | :--- | :--- | | बाजार का आकार | ~$60 बिलियन (₹5 लाख करोड़) | $6.7 ट्रिलियन | | कुल लिस्टेड ETF | लगभग 120 | 3000 से अधिक | | लिक्विडिटी | बहुत से ETF में कम (खरीदार/विक्रेता कम होते हैं) | बहुत अधिक और स्थिर | | पॉपुलैरिटी | अभी बढ़ रही है (2019 के बाद से तेजी) | पहले से ही इंस्टीट्यूशनल और रिटेल निवेशकों के बीच बहुत लोकप्रिय |
ETF के फायदे और नुकसान
फायदे (Advantages)
- डायवर्सिफिकेशन: एक ETF में कई कंपनियों में निवेश, जिससे रिस्क कम होता है। अगर आपको लगता है कि आपके पोर्टफोलियो में बहुत सारे खराब स्टॉक्स हैं, तो पहले 5 सरल चरणों में 95% खराब स्टॉक्स को कैसे हटाएं? (स्टॉक स्क्रीनिंग) पढ़ें।
- कम लागत (Low Cost): म्यूचुअल फंड की तुलना में Expense Ratio बहुत कम।
- पारदर्शिता (Transparency): ETF का पोर्टफोलियो सार्वजनिक रूप से उपलब्ध होता है।
- लचीलापन (Flexibility): आप अपनी इच्छानुसार कभी भी खरीद और बेच सकते हैं।
- शुरुआती-अनुकूल (Beginner-Friendly): स्टॉक मार्केट की जानकारी के बिना भी आसानी से निवेश शुरू कर सकते हैं।
नुकसान (Disadvantages / Risks)
- मार्केट रिस्क: अगर पूरा बाजार या इंडेक्स गिरता है, तो ETF का प्राइस भी गिरेगा।
- ट्रैकिंग एरर: कभी-कभी ETF का प्राइस इंडेक्स के प्राइस से थोड़ा अलग हो सकता है।
- कम लिक्विडिटी (Liquidity Risk): भारत में कुछ कम लोकप्रिय ETF में खरीदार या विक्रेता नहीं मिलने पर बेचना मुश्किल हो सकता है।
- समाधान: हमेशा अच्छी लिक्विडिटी वाले (ज्यादा बायर्स और सेलर्स वाले) ETF में ही निवेश करें।
ETF से मुनाफा कैसे होता है? (एक सरल उदाहरण)
- स्थिति: आपने निफ्टी 50 ETF में ₹10,000 का निवेश किया जब इसका प्राइस ₹200 था। आपको 50 यूनिट्स मिलीं।
- बाद में: निफ्टी 50 इंडेक्स 5% बढ़ा।
- परिणाम: ETF का नया प्राइस ₹210 (₹200 + 5%) हो जाएगा।
- कुल मूल्य: 50 यूनिट्स × ₹210 = ₹10,500। इस तरह आपको ₹500 का प्रॉफिट हुआ।
प्रैक्टिकल: Groww ऐप पर ETF में निवेश कैसे करें?
- अपने ट्रेडिंग ऐप (जैसे Groww) को खोलें।
- नीचे टैब में "ETF" का ऑप्शन चुनें।
- आप Index, Gold, Global आदि कैटेगरी में ETF को सर्च और ब्राउज़ कर सकते हैं।
- कोई ETF चुनें (जैसे Motilal Oswal Nasdaq 100 ETF)।
- उसकी सभी डिटेल्स (1 साल का रिटर्न, ओपनिंग/क्लोज़िंग प्राइस) चेक करें।
- "बाय (Buy)" पर क्लिक करें और आप जितने ETF खरीदना चाहते हैं उतनी क्वांटिटी डालें।
- "प्लेस ऑर्डर" पर क्लिक करके ऑर्डर कंफर्म करें।
शुरुआती निवेशकों के लिए 4 जरूरी टिप्स
- निवेश उद्देश्य तय करें: ETF में निवेश करने से पहले जानें कि आपका लक्ष्य क्या है - लॉन्ग टर्म ग्रोथ, डायवर्सिफिकेशन, या रिस्क कम करना। अगर आप ETF के बारे में और गहराई से जानना चाहते हैं, तो Understanding Exchange Traded Funds (ETFs): A Comprehensive Guide पढ़ें।
- Expense Ratio की तुलना करें: हमेशा दो समान ETF के खर्च अनुपात (Expense Ratio) की तुलना करें और कम वाला चुनें।
- लिक्विडिटी चेक करें: निवेश से पहले ETF की ट्रेडिंग वॉल्यूम और बायर्स/सेलर्स की संख्या जरूर देखें।
- लॉन्ग टर्म सोचें: ETF शॉर्ट टर्म प्रॉफिट के लिए नहीं, बल्कि लंबी अवधि में धीरे-धीरे अच्छा रिटर्न देने के लिए होते हैं।
दोस्तों अगर मैं आपको कहूं कि आप एक ही जगह अपने पैसे लगाकर Reliance, TCS, HDFC बैंक जैसे इंडिया की टॉप बड़ी-बड़ी
कंपनियों में अपने पैसे लगा सकते हो, इन्वेस्ट कर सकते हो और इतना ही नहीं बल्कि आप विदेश में जो कंपनियां फेमस है
Amazon, Google, Tesla जैसी बड़ी-बड़ी कंपनियों में भी इन्वेस्ट कर सकते हो। वो भी सिर्फ एक जगह इन्वेस्ट करोगे और आपकी
इन्वेस्टमेंट इन सभी कंपनियों में हो जाएगी। यह पॉसिबल होता है ईडीएफ की वजह से। तो आज की इस वीडियो में हम इसी के
बारे में बात करेंगे कि ईडीएफ होता क्या है? यह काम कैसे करता है? और सबसे बड़ी बात कि म्यूच्यूल फंड और ईटीएफ में क्या
डिफरेंस है? आखिर इसमें अंतर क्या है? ईटीएफ कितने तरह के होते हैं? हमें कौन सा ईटीएफ चुनना चाहिए? इसके अलावा मैं आपको
इंडिया के ईटीएफ इन्वेस्टमेंट और अमेरिका के ईटीएफ इन्वेस्टमेंट के बीच में एक कंपैरिजन करके बताऊंगा जो कि बड़ा कमाल का
कंपैरिजन होने वाला है। इस डाटा को देखकर आपके होश उड़ने वाले हैं। इसके अलावा मैं ईटीएफ के फायदे और नुकसान भी आपको बताऊंगा
और सबसे बड़ी बात मैं आपको थ्योरेटिकल नॉलेज के बाद प्रैक्टिकली ईटीएफ में इन्वेस्ट करके भी दिखाऊंगा ताकि आप यह सीख
सको कि कैसे ईटीएफ में इन्वेस्ट किया जाता है। और वीडियो के लास्ट में बिगिनर्स के लिए मैं कुछ ईटीएफ से रिलेटेड टिप्स भी
देने वाला हूं। सबसे पहले ईटीएफ को समझते हैं। देखो ईटीएफ क्या होता है? एक तरह की बास्केट होती है। एक तरह की टोकरी होती है
जिसके अंदर मल्टीपल एसेट्स होते हैं। जैसे कि स्टॉक हो गया, बोंड हो गया। इन सभी एसेट्स को होल्ड किया जाता है जिसे ईटीएफ
कहते हैं। कंफ्यूज होने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। एक एग्जांपल ले लेते हैं। मान लेते हैं आपके पास ईटीएफ की बास्केट की
जगह एक फलों की बास्केट है। एक फलों की टोकरी है। कोई भी [संगीत] फ्रूट जिसके अंदर 50 अलग-अलग तरह के फ्रूट है। आम सेब
कुछ भी। अब दुकानदार ने उस बास्केट का एक रेट फिक्स खरीद दिया कि मैं यह बास्केट ₹5,000 की बेचूंगा। अब आपको उस बास्केट के
सभी फलों को खरीदने के लिए अलग-अलग पैसे नहीं देने कि सेब का अलग से पैसा दिया, केले का अलग से, आम का अलग से। ऐसा नहीं
है। आपने पूरी बास्केट खरीदी जिस बास्केट का प्राइस ₹5,000 है। आपने वह अमाउंट पे किया और आपको उस बास्केट में वह 50 सभी फल
मिल गए। ठीक है? तो ईटीएफ में भी बिल्कुल यही होता है। ईटीएफ एक बहुत सारी कंपनियों के पोर्टफोलियो को ट्रैक करता है और इसका
शेयर प्राइस किसी नॉर्मल कंपनी के शेयर प्राइस की तरह घटता बढ़ता रहता है। यानी कि एक ईटीएफ में कई सारे एसेट्स हो सकते
हैं। एसेट्स मैंने आपको पहले ही बताया गोल्ड हो गया, स्टॉक्स हो गया, बों्स हो गया। ऐसे बहुत सारे एसेट्स एक ही ईटीएफ
में भी हो सकते हैं या एक ही ईटीएफ में एक ही एसेट्स कई तरह के हो सकते हैं। अब यह तो एक एग्जांपल हुआ। अब मैं आपको रियलिटी
में ईटीएफ का एक एग्जांपल देता हूं। जैसे कि निफ्ट्टी 50 ईटीएफ इसमें क्या होता है? निफ्ट्टी 50 में आने वाली जो इंडिया की
टॉप 50 कंपनियां होती हैं, उन सभी टॉप 50 कंपनियों को इस ईटीएफ में ट्रैक किया जाता है। तो कहने का मतलब यह है कि इसके अंदर
एक तरह से इंडिया की टॉप 50 कंपनियों के स्टॉक्स शामिल हैं। तो अगर आप इस ईटीएफ को खरीदते हो तो एक तरह से आप अपनी
इन्वेस्टमेंट इंडिया की स्टॉक 50 कंपनियों में कर रहे हो। इसका दूसरा बढ़िया एग्जांपल है nसdc 100 ईटीएफ। इस ईटीएफ के
अंदर यूएस की टॉप 100 नॉन फाइनेंसियल कंपनियां शामिल होती हैं। नॉन फाइनेंसियल का मतलब ऐसी कंपनियां जो फाइनेंस से
रिलेटेड बिज़नेस नहीं करती, पैसे से रिलेटेड बिज़नेस नहीं करती। जैसे कि बैंक हो गया या कोई और दूसरा फाइनेंसियल
इंस्टट्यूट। तो ऐसी कंपनियां जो नॉन फाइनेंसियल बिजनेस करती हैं जैसे कि Apple, Microsoft, Tesla ऐसी टॉप 100
अमेरिका की कंपनियों को यह ईडीएफ ट्रैक करता है और अगर कोई इसमें इन्वेस्ट करता है तो वो बेसिकली यूएस की टॉप 100
कंपनियों में इन्वेस्ट कर रहा है। तो आपको ईडीएफ अब समझ में आ रहा होगा लेकिन अभी भी एक डाउट आ रहा होगा कि आखिर इस ईटीएफ का
प्राइस कैसे ट्रैक होता है? आखिर इसका प्राइस कैसे कैलकुलेट किया जाता है? ये सभी चीजें हम आगे वीडियो में जरूर
समझेंगे। लेकिन उससे पहले एक बार हम ईटीएफ को म्यूचल फंड से कम बबैक कर लेते हैं क्योंकि ईटीएफ देखने में थोड़ा-थोड़ा
म्यूचल फंड की तरह आपको लग रहा होगा। लेकिन यह म्यूचल फंड से कैसे डिफरेंट है? मैं आपको यह बताता हूं। तो इसके लिए हम एक
बार अपनी वापस स्क्रीन पर चलते हैं और मैं यहां पर आपको ये डिफरेंस दिखा देता हूं। एक तरफ हमारे हैं फीचर्स, एक तरफ ईटीएफ रख
लेते हैं और एक तरफ म्यूचल फंड को रख लेते हैं। देखो सबसे पहले मैं आपको इनका अंतर बता देता हूं कि अगर आप म्यूच्यूल फंड में
इन्वेस्ट करते हो तो आप अपने पैसे किसी एक एएमसी कंपनी यानी एसेट मैनेजमेंट कंपनी को देते हो जो एक फंड मैनेजर अलॉट करती है और
वो फंड मैनेजर आपके पैसे को इन्वेस्ट करता है। [संगीत] लेकिन ईटीएफ में क्या होता है? आप खुद से एक एटीएफ चुनते हो जिसके
अंदर कई सारी कंपनियों के स्टॉक शामिल होते हैं। [संगीत] आपको जो ईटीएफ पसंद आता है आप उसमें अपने पैसे लगा देते हो और
उसमें आपकी इन्वेस्टमेंट किसी नॉर्मल स्टॉक की तरह किसी नॉर्मल कंपनी के शेयर की तरह घटती बढ़ती रहती है। तो यहां इन
दोनों बातों को समझकर हमें यह पता चल रहा है कि म्यूच्यूल फंड में हमारा पैसा एक फंड मैनेजर मैनेज करता है। जबकि ईटीएफ में
वो सेल्फ मैनेज्ड होता है। उसे हम ही मैनेज ही करते हैं। [संगीत] हमें कब पैसा निकालना है, कब लगाना है, यह हम खुद तय
करते हैं। ठीक है? अब देखो दूसरा डिफरेंस है कि जो ईटीएफ का प्राइस होता है वो रियल टाइम में स्टॉक की तरह घटता बढ़ता रहता
है। जबकि म्यूचल फंड में जो म्यूच्यूल फंड होता है उसका प्राइस दिन के लास्ट में अपडेट होता है। मैं आपको एक एग्जांपल दिखा
देता हूं। ईटीएफ में आप देख सकते हो कि इसका प्राइस किसी नॉर्मल स्टॉक की तरह घट बढ़ रहा है। ठीक है? इसके बाद अगर मैं
आपको म्यूचल फंड का चार्ट दिखाऊं तो यहां मार्केट ओपन होने के बावजूद इसका प्राइस फ्लक्चुएट नहीं हो रहा। घट बढ़ नहीं रहा।
इसका प्राइस दिन के लास्ट में ही अपडेट होता है। तो डिफरेंस यही हुआ कि म्यूच्यूल फंड की एनईवी दिन के लास्ट में अपडेट होती
है। जबकि ईटीएफ का जो प्राइस होता है किसी नॉर्मल स्टॉक की तरह हर सेकंड में अपडेट होता रहता है मार्केट आवर्स में। इसके बाद
जो सबसे मेजर डिफरेंस आता है वो होता है एक्सपेंस रेश्यो का। अगर आप किसी म्यूच्यूल फंड में अपने पैसे लगाते हो तो
आपका पैसा एक फंड मैनेजर मैनेज कर रहा है। तो अब क्योंकि वो मैनेजर अपनी सर्विस दे रहा है तो उसके बदले कोई चार्जेस तो जरूर
लेगा। तो इसलिए जो म्यूच्यूल फंड में चार्जेस होते हैं वो थोड़े से ज्यादा होते हैं। वो 0.5% से लेके 2.5% तक होते हैं।
जबकि अगर बात करें ईटीएफ की तो ये क्योंकि सेल्फ मैनेज्ड होता है इसलिए इन ईटीएफ्स की कॉस्ट बहुत ही कम होती है। इसमें 0.05%
से लेके 0.5% तक एक्सपेंस रेशियो होता है। इसके बाद एक और सबसे जरूरी जो डिफरेंस है वो है लिक्विडिटी का। सबसे पहले मैं आपको
लिक्विडिटी बता देता हूं। लिक्विडिटी का मतलब आप कितनी जल्दी किसी चीज को बेचकर उसे कैश में कन्वर्ट कर सकते हो। अब मान
लो अगर आपने ईटीएफ में अपने पैसे इन्वेस्ट कर रखे हैं तो क्योंकि ईटीएफ बिल्कुल किसी नॉर्मल स्टॉक की तरह होता है तो आप इसे
कभी भी खरीद बेच सकते हो। आप उसे बेच के अपने पैसे वापस निकाल सकते हो। लेकिन म्यूच्यूल फंड को क्या है? आप हमेशा बाय
और सेल नहीं कर सकते। कुछ म्यूच्यूल फंड ऐसे भी होते हैं जिनमें लॉक इन पीरियड होता है। लॉक इन पीरियड का मतलब आप जब
उसमें अपने पैसे इन्वेस्ट करोगे तो कुछ समय तक आप अपने पैसे उसमें से निकाल नहीं सकते। उसमें लॉक लग जाएगा। जब वह समय पूरा
हो जाएगा तब आप उस पैसे को निकाल सकते हो। हालांकि कुछ म्यूच्यूल फंड्स ऐसे भी होते हैं जिनमें आप आसानी से पैसे निकाल सकते
हो लेकिन फिर भी उसमें जो लिक्विडिटी होती है वो ईटीएफ से कम होती है क्योंकि ईटीएफ बिल्कुल एक नॉर्मल स्टॉक की तरह है। ठीक
है? [संगीत] तो ये सारे कुछ जरूरी मेजर डिफरेंस थे ईटीएफ और म्यूच्यूल फंड में। अब आपको इनको देख के अंदाजा लग गया होगा
कि इनके बीच में क्या डिफरेंस है। अब आपको मैं कुछ और कमाल की चीजें बताता हूं। इंडिया में जो ईटीएफ का एवरेज एक्सपेंस
रेशियो है वो 0.01% है। जबकि इंडिया में जो अभी एक्टिव म्यूच्यूल फंड्स हैं उनमें जो एक्सपेंस
रेश्यो है वो 1 से 2% [संगीत] का है। आप अंदाजा लगा सकते हो कि कितना ज्यादा डिफरेंस है ईटीएफ और म्यूच्यूल फंड में।
इसके अलावा अमेरिका में जो ईटीएफ का एवरेज एक्सपेंस रेश्यो है वो 0.094% है। अब मैं आपको बता दूं कि जितना ये
ईटीएफ का एवरेज एक्सपेंस रेशियो कम रहता है उतना ही बढ़िया होता है एक इन्वेस्टर के लिए लॉन्ग टर्म में क्योंकि उतना ही
उनके कम चार्जेस करते हैं लॉन्ग टर्म में। ठीक है? अब हम जानते हैं कि ईटीएफ कितने तरह के होते हैं और हम जैसे लोगों के लिए
कौन सा ईटीएफ बेस्ट होता है। हम अपने पसंद के ईटीएफ कैसे ढूंढ सकते हैं। तो सबसे पहले आते हैं इक्विटी ईटीएफ। इक्विटी
ईटीएफ का मतलब होता है कि इन ईटीएफ्स में कंपनियों के स्टॉक शामिल होते हैं। कंपनियों के शेयर्स शामिल होते हैं। इसके
अलावा यह स्टॉक मार्केट के इंडाइससेस जैसे कि nft 50, sसेक्स या nसdk 100 को ट्रैक करते हैं। अब इक्विटी ईटीएफ का मैं आपको
एक रियल लाइफ एग्जांपल देता हूं। यह है ICICI Pidential NFT 50 ETF। अब यह कोई इन्वेस्टमेंट रिकमेंडेशन नहीं है। मैं
सिर्फ आपको एग्जांपल दे रहा हूं। ऐसे बहुत सारे ईटीएफ मार्केट में अवेलेबल है जिन्हें आप सर्च कर सकते हो। ठीक है? अब
यह सब कैसे करना है, मैं आपको प्रैक्टिकली करके भी दिखाऊंगा। लेकिन अभी मैं आपको यह बता दूं कि आखिर इक्विटी ईटीएफ किस तरह के
इन्वेस्टर के लिए बढ़िया होता है। देखो इक्विटी ईटीएफ लॉन्ग टर्म इन्वेस्टर के लिए बढ़िया होता है। जिन्हें लॉन्ग टर्म
में ग्रोथ चाहिए जिन्हें लॉन्ग टर्म में अपनी वेल्थ बनानी है। अब इक्विटी ईटीएफ के बाद आते हैं डे ईटीएफ। डेटी डेप की सबसे
खास बात यह होती है कि इनमें रिस्क कम होता है और रिटर्न भी काफी स्टेबल मिलता है क्योंकि इसमें जो हमारा पैसा होता है
वह बोंड्स या गवर्नमेंट सिक्योरिटीज में लगा होता है। ठीक है? और अगर मैं आपको डे ईटीएफ का एग्जांपल दूं तो भारत बॉन्ड
ईटीएफ इसका एक सबसे बढ़िया एग्जांपल है। अब बात करते हैं कि आखिर इस तरह के ईटीएफ किस तरह के इन्वेस्टर के लिए बढ़िया होता
है। देखो यह ईटीएफ थोड़ी कंजर्वेटिव इन्वेस्टर के लिए बढ़िया होता है। यानी कि ऐसे इन्वेस्टर जो रिस्क नहीं लेना चाहते
उनके लिए इस तरह का ईटीएफ सबसे बेस्ट होता है। इसके अलावा गोल्ड ईटीएफ भी होते हैं। अब अगर कोई गोल्ड ईटीएफ में अपना पैसा
लगाता है तो इससे क्या होगा? तो वो एक तरह से सोना ही खरीद रहा है। लेकिन फिजिकल गोल्ड की जगह वो एक डिजिटल गोल्ड खरीद रहा
है। जैसे-जैसे सोने का रेट बढ़ेगा वैसे-वैसे इस गोल्ड ईटीएफ का भी रेट बढ़ेगा और लॉन्ग टर्म में इन्वेस्टर को
फायदा होगा। अगर बात करें इसके एग्जांपल की तो nipon इंडिया गोल्ड ईटीएफ इसका सबसे बढ़िया एग्जांपल है। अब सवाल यह उठता है
कि इस तरह के ईटीएफ किसके लिए बेस्ट होते हैं? कि इस तरह के ईटीएफ उन लोगों के लिए बेस्ट होते हैं जो रिस्क नहीं लेना चाहते।
इसके अलावा जिनको लॉन्ग टर्म में लंबी ग्रोथ चाहिए। क्योंकि सबको यह पता है कि सोने का रेट लॉन्ग टर्म में बढ़ता ही है
और गोल्ड ईटीएफ इंडिया में काफी पॉपुलर भी है। इंडिया में गोल्ड ईटीएफ का मार्केट 18,000 करोड़ से भी ज्यादा का है। आप समझ
सकते हो कि गोल्ड ईटीएफ इंडिया में कितना ज्यादा पॉपुलर है। इसके अलावा होते हैं कुछ सेक्टोरल या थीम बेस्ड ईटीएफ।
सेक्टोरल यह थीम बेस्ड का मतलब होता है कि इसके अंदर हमारा जो पैसा होता है ऐसी कंपनियों के स्टॉक्स में लगाया जाता है जो
एक ही थीम पर या एक ही सेक्टर के हो जैसे रिन्यूएबल एनर्जी मान लो एक थीम हो गई या फिर आईटी सेक्टर एक तरह का सेक्टर हो गया
बैंक सेक्टर एक तरह का सेक्टर हो गया तो इस तरह से किसी सेक्टर या किसी थीम के अकॉर्डिंग इसके अंदर कंपनियां चुनी जाती
हैं। उन कंपनियों के शेयर्स इसमें शामिल होते हैं। ठीक है? अगर आप इस तरह के एटीएम को खरीदते हो तो आप इनडायरेक्टली इस तरह
के सेक्टर में इन्वेस्ट करते हो। जैसे अगर किसी बैंक सेक्टर का ईटीएफ आपने खरीद लिया तो आप इनडायरेक्टली बैंक सेक्टर की टॉप
कंपनियों में अपने पैसे इन्वेस्ट करोगे। ठीक है? अब बात करें इसके एग्जांपल की तो SBI बैंकिंग एटीएफ इसका एक सबसे बढ़िया
एग्जांपल है जिसके अंदर HDFC या ICICI बैंक जैसे स्टॉक्स भी कवर होते हैं। ठीक है? अब बात करें अगर कि इस तरह के एटीएफ
किसके लिए बेस्ट होते हैं? तो ये इसका जवाब है इंटरेस्ट के ऊपर। अगर किसी को [संगीत] बैंकिंग सेक्टर अच्छा लगता है तो
उसके लिए बैंकिंग सेक्टर बढ़िया है। अगर किसी को आईटी बढ़िया लगता है तो आईटी बढ़िया है। तो कहने का मतलब यही है कि यह
इंटरेस्ट के ऊपर डिपेंड करता है कि आपको कौन सा सेक्टर या कौन सी थीम पसंद है। इसके बाद सबसेेंट आता है इंटरनेशनल ईटीएफ।
यह मेरा फेवरेट है क्योंकि इस तरह के ईटीएफ से आप इनडायरेक्टली विदेशी कंपनियों में इन्वेस्ट कर रहे हो। इसका रियल
एग्जांपल है मोतीवाल ओसवाल, nसdc 100 ईटीएफ। अब फॉरेन ईटीएफ में इन्वेस्ट करने से फायदा यह होता है कि हमारा जो
पोर्टफोलियो होता है वो और भी डायवर्सिफाइड हो जाता है। ओके तो जैसा कि मैंने आपको बताया था अब हम बात करेंगे
इंडिया के ईटीएफ के बारे में और अमेरिका के ईटीएफ मार्केट के बारे में। सबसे पहले तो मैं आपको बता दूं कि इंडिया और अमेरिका
के ईटीएफ मार्केट में जमीन आसमान का फर्क है। अब देखो इंडिया में जो ईटीएफ का मार्केट है वो लगभग $5 लाख करोड़ का यानी
कि लगभग 60 बिलियन का मार्केट है। जबकि अमेरिका में जो ईटीएफ का मार्केट है वो 6.7 ट्रिलियन का मार्केट है। आप अंदाजा
लगा सकते हो कि विदेश में यह बहुत ज्यादा पॉपुलर है क्योंकि वहां पर इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर और रिटेल इन्वेस्टर दोनों ही
ईटीएफ में इन्वेस्ट करते हैं। जबकि इंडिया में ईटीएफ इन्वेस्टिंग अभी उतना पॉपुलर नहीं है। उतना फेमस नहीं है। इसीलिए इसमें
लोग पैसे भी कम इन्वेस्ट करते हैं। इसके [संगीत] अलावा इंडिया में ईटीएफ में कम इन्वेस्टमेंट करने का एक और कारण है कि
इंडिया में ईटीएफ के ऑप्शन भी कम है। इंडिया में करीब 120 ईटीएफ ही लिस्टेड है। यानी कि इन्वेस्टर के पास बहुत ही कम
ऑप्शन है। जबकि अमेरिका की बात करें तो अमेरिका में लगभग 3000 से भी ज्यादा ईटीएफ लिस्टेड है। [संगीत] यानी कि उनके पास
ऑप्शन भी बहुत ज्यादा है। इसके अलावा इंडिया में और अमेरिका में एक और चीज ईटीएफ की जो सबसे बड़ी प्रॉब्लम है वो है
लिक्विडिटी की। इंडिया में कई सारे ईटीएफ ऐसे हैं जिनमें बयर और सेलर कम होने की वजह से लिक्विडिटी बहुत कम होती है। यूएस
में ईटीएफ का एवरेज डेली ट्रेडिंग जो वॉल्यूम है वो बहुत ज्यादा है। जबकि इंडिया में कई सारे एटीएफ ऐसे हैं जिनमें
जो ट्रेडिंग वॉल्यूम इतना कम है कि वहां पर बायर और सेलर मिलते ही नहीं। जिसकी वजह से इनकी लिक्विडिटी कम हो जाती है।
क्योंकि अगर आप अपने ईटीएफ को बेच ही नहीं पाओगे तो आप अपने पैसे वापस कैसे निकाल पाओगे? ठीक है? अब देखो इन फैक्ट्स को
देखकर निराश होने वाली कोई बात नहीं है क्योंकि इंडिया में ऑब्वियसली इन्वेस्टर्स अभी बहुत कम है। इंडिया में जो सबसे बड़ी
कमी है वो है इनकम इनकलिटी। इंडिया में कुछ ही लोगों के पास बहुत सारा पैसा है। जबकि मेजॉरिटी ऑफ इंडिया की पपुलेशन गरीब
है। अब जिनको डेली खाने पीने के लिए पैसा कमाना पड़ता है, स्ट्रगल करना पड़ता है, उन लोगों को हम यह तो नहीं कह सकते कि आप
ईटीएफ में इन्वेस्ट करो। तो, यह डाटा ऑब्वियसली अभी फिलहाल कैसा भी हो, फ्यूचर में जरूर बदल जाएगा। लेकिन फिर भी हमारे
देश के इन्वेस्टर्स काफी अच्छा कर रहे हैं। बहुत लोग अपना पैसा इन्वेस्ट कर रहे हैं। तो मेरे [संगीत] को उम्मीद है कि
धीरे-धीरे ईटीएफ भी पॉपुलर हो जाएगा इंडिया में भी। एक और कमाल का इफेक्ट बताता हूं आपको। 2019 में भारत मंड करके
एक ईटीएफ ल्च हुआ। जिसके बाद इंडिया में ईटीएफ का अडॉप्शन रेट भी काफी बढ़ने लगा। अब हालांकि यह अमेरिका के मार्केट से कम
है लेकिन फिर भी काफी अच्छी ग्रोथ है और आने वाले समय में यह नंबर डेफिनेटली और बढ़ेगा। ओके। तो अब बात करते हैं ईटीएफ के
फायदे और नुकसान के बारे में। सबसे पहले जानते हैं ईटीएफ के फायदे क्या होते हैं। देखो अब तक तो आपको यह क्लियरली पता चल
गया होगा कि ईटीएफ में पैसा इन्वेस्ट करने से सबसे बढ़िया जो फायदा होता है वो यह होता है हमारा पोर्टफोलियो डवर्सिफाई हो
जाता है। क्योंकि इसके अंदर एक ही ईटीएफ में कई सारी कंपनियों के स्टॉक शामिल होते हैं। जिसकी वजह से हमारी जो पोर्टफोलियो
होता है हमारी जो इन्वेस्टमेंट होती है वो डवर्सिफाई हो जाती है। लेट्स सपोज कि अगर कोई निफ्ट्टी 50 के ईटीएफ में इन्वेस्ट
करता है तो एक ही साथ इंडिया की टॉप 50 कंपनियों में इन्वेस्ट कर दे रहा है। जिसकी वजह से उसकी इन्वेस्टमेंट जो है वो
डवर्सिफाई हो जा रही है। अब डवर्सिफिकेशन का सबसे बढ़िया फायदा यह होता है कि इसमें रिस्क कम हो जाता है। इसके अलावा दूसरा
सबसे बढ़िया फायदा है लो कॉस्ट। क्योंकि इंडिया में जो ईटीएफ का एवरेज एक्सपेंस रेशियो है वो काफी कम है। स्पेशली इंडेक्स
ट्रैकिंग ईटीएफ का तो प्राइस काफी कम होता है। लो कॉस्ट होने की वजह से कई लोग ईटीएफ को ज्यादा प्रेफर करते हैं एज़ कंपेयर टू
म्यूच्यूल फंड्स। इसके अलावा तीसरा जो फायदा होता है वो होता है ट्रांसपेरेंसी का। ईटीएफ का जो पोर्टफोलियो होता है वह
पब्लिकली अवेलेबल होता है। इंटरनेट पर अवेलेबल होता है। आप आसानी से चेक कर सकते हो कि किस ईटीएफ में कौन-कौन [संगीत] से
कंपनियां शामिल है। कौन-कौन सी कंपनियों के स्टॉक्स को वो ट्रैक कर रहा है। ठीक है? चौथा फायदा होता है फ्लैक्सिबिलिटी
का। ईटीएफ में आपके ऊपर डिपेंड करता है कि कब आप उसे खरीदना चाहते हो, कब आप उसे बेचना चाहते हो। बिल्कुल किसी एक स्टॉक की
तरह। अब देखो इसका पांचवा सबसे बढ़िया फायदा यह है कि यह एक बिगिनर फ्रेंडली इन्वेस्टमेंट ऑप्शन है। अगर किसी को स्टॉक
मार्केट के बारे में ज्यादा नहीं पता [संगीत] या किसी को म्यूच्यूल फंड के बारे में नहीं पता या फिर किसी को डायरेक्ट
स्टॉक में इन्वेस्ट करने से थोड़ा रिस्की लगता है तो वो ईटीएफ में इन्वेस्ट कर सकता है क्योंकि यहां पर इन्वेस्ट करने से उसका
पोर्टफोलियो भी डवर्सिफाई होगा और ज्यादा उसको दिमाग लगाने की भी जरूरत नहीं है। ओके तो फायदा की बात तो हो गई लेकिन हर
चीज में कहीं ना कहीं थोड़ा बहुत रिस्क होता है। अब क्योंकि यह एक इन्वेस्टमेंट ऑप्शन है तो ऑब्वियसली इसमें भी रिस्क है।
तो ईटीएफ में कौन-कौन से रिस्क होते हैं? हम इसके बारे में जानते हैं। सबसे पहला होता है मार्केट रिस्क। अब भैया क्योंकि
इसमें हमारा पैसा लग तो स्टॉक मार्केट में ही रहा है। अगर स्टॉक मार्केट में किसी कंपनी का शेयर प्राइस गिरता है तो ईटीएफ
का प्राइस भी गिरेगा ही। इसके अलावा इसमें एक और रिस्क है जो बहुत ही कम लोग बताते हैं वो है ट्रैकिंग एरर का। देखो कई बार
क्या होता है इसका जो ईटीएफ का जो प्राइस होता है वह मार्केट के प्राइस से स्लाइटली डिफरेंट होता है। थोड़ा सा अंतर हो जाता
है इसमें। तीसरा जो सबसे मेजर रिस्क है वो है लिक्विडिटी का। देखो इंडिया में कुछ ऐसे
एटीएफ भी हैं जो बहुत ही कम पॉपुलर है। कहीं गलती से आपने ऐसे एटीएफ खरीद लिए जो बहुत ही कम पॉपुलर हैं तो उसमें दिक्कत यह
आ जाती है कि उसमें आपको बायर या सेलर नहीं मिलेगा जिसकी वजह से आप उस एटीएफ को बेच नहीं पाओगे और जब बेच नहीं पाओगे तो
उसे कैश में कन्वर्ट नहीं कर पाओगे। अपने पैसे निकाल नहीं पाओगे। इसलिए इसमें लो लिक्विडिटी का भी रिस्क है। अब इस
प्रॉब्लम का सॉलशन क्या है? देखो इसका सिंपल सॉलशन यह है कि आप ऐसे एटीएफ में अपना पैसा लगाओ जो पॉपुलर है।
या फिर मैं आपको एक और तरीका बता देता हूं। जब आप किसी भी ईटीएफ को खोलोगे तो उसके नीचे आ जाना। और यहां पर आप देख सकते
हो कि कितने बायर है, कितने सेलर हैं। [संगीत] अब यहां पर बायर और सेलर का नंबर जितना ज्यादा है उतना ही आपके लिए बढ़िया
रहेगा। उतना ही ज्यादा इसमें अच्छी लिक्विडिटी रहेगी। अब मैं आपको एक छोटा सा एग्जांपल दिखाऊंगा जिसे देखकर आपको यह पता
चल जाएगा कि ईटीएफ का प्राइस कैसे बढ़ता है और ईटीएफ में हमें फायदा कैसे होता है। हमें प्रॉफिट कैसे होता है। ठीक है? मान
लो कि आप निफ्ट्टी 50 ईटीf में ₹10,000 इन्वेस्ट करते हो। अगर निफ्ट्टी 50 इंडेक्स ₹ 20,000 पॉइंट पर है और उस ईटीएफ
का प्राइस ₹200 है तो क्योंकि आप उसमें ₹10,000 इन्वेस्ट कर रहे हो और ₹200 के हिसाब से आपको उस ईटीएफ की 50 यूनिट्स मिल
जाएंगी। अब अगर निफ्ट्टी 50 इंडेक्स 5% ऊपर जाता है तो फिर उस ईटीएफ का प्राइस भी अप्रोक्स 5% बढ़ जाएगा। यानी कि उसका पहले
प्राइस था ₹200। अब उसका 5% यानी कि लगभग ₹10 उसका प्राइस बढ़ेगा। तो उसका अब जो प्राइस हो जाएगा ₹210 हो जाएगा। और
क्योंकि आपके पास उस ईडीएफ की 50 यूनिट्स हैं तो हम 50 को अगर ₹210 से मल्टीप्लाई करेंगे तो हमारी इन्वेस्टमेंट ₹10,500 की
हो जाएगी। हमने पहले ₹10,000 लगाए और अब हमारे पास ₹10,500 हो गए। तो इस तरह से आपको ईटीएफ में प्रॉफिट होता है। अब मैं
आपको प्रैक्टिकली ईटीएफ में इन्वेस्ट करके दिखाता हूं। सबसे पहले हम अपना लोन ऐप खोल लेंगे। ऐप खोलते ही नीचे आपको एटीएफ का
ऑप्शन दिख जाएगा। इस ईटीएफ वाले ऑप्शन पे क्लिक करने के बाद आपके स्क्रीन पर एटीएफ के सभी ऑप्शंस आ जाएंगे। अब आप यहां से
सभी पीडीएफ को स्क्रॉल कर सकते हो, सर्च कर सकते हो। यहां पर आपके पास कई सारे ऑप्शन दिए हुए हैं। इंडेक्स का, गोल्ड का।
इसके अलावा यहां पर और भी कई सारे ऑप्शंस दिए हुए हैं। अब जैसे मेरे को ग्लोबल ईटीएफ में इन्वेस्ट करना है। यानी कि मेरे
को ऐसे ईटीएफ में पैसा लगाना है जिन्होंने अपना पैसा विदेशी कंपनियों के स्टॉक्स में लगा रखा है। तो मैं इस ग्लोबल वाले ऑप्शन
पे क्लिक करूंगा और क्लिक करते ही ऐसे सभी ईटीएफ खुल जाएंगे जिन्होंने अपना पैसा विदेशी कंपनियों के स्टॉक्स में लगाया है।
अब यहां पर आप अपने हिसाब से अपने एनालिसिस के हिसाब से कोई भी ईटीएफ चूज़ कर सकते हो। एग्जांपल के लिए हम यहां पर
मोतीलाल ओसवाल nसdc 100 के एटीएफ को बाय करके देखते हैं। इस पे क्लिक करने के बाद इस एटीएफ की सभी डिटेल्स आपके सामने आ
जाएगी कि इसने एक साल में कितना रिटर्न दिया है। इसका ओपनिंग प्राइस, क्लोजिंग प्राइस सभी डिटेल्स आपके सामने आ जाएगी।
और इसको एनालाइज करने के बाद अगर आपको ऐसा लगता है कि यह एटीएफ ठीक है, तो आपको बाय वाले ऑप्शन पे क्लिक करना है। और यहां पर
क्वांटिटीज में आपको नंबर ऑफ एटीएफ्स डालने हैं कि आप कितने एटीएफ खरीदना चाहते हो। इसके बाद नीचे आपको प्लेस ऑर्डर का
ऑप्शन दिख जाएगा। इस पे क्लिक करने के बाद आपको ऑर्डर कंफर्म कर देना है और आपका ऑर्डर प्लेस हो जाएगा। तो अब आपने यह भी
देख लिया कि कैसे आप ईटीएफ में इन्वेस्टमेंट कर सकते हो। अब फाइनली बारी आती है बिगिनर्स के लिए कुछ जरूरी टिप्स
की जो आपको ईटीएफ इन्वेस्टिंग में काफी हेल्प करेगी। देखो सबसे पहली टिप यह है कि आप कभी भी ईटीएफ में जब इन्वेस्ट करोगे तो
उसके एक्सपेंस रेशियो को जरूर कंपेयर करना। इसके अलावा दोस्तों आपको यह ध्यान में रखना है कि आपका उस ईटीएफ में
इन्वेस्टमेंट करने का ऑब्जेक्टिव क्या है? आपको यह बात सबसे पहले पता होनी चाहिए। अब अगर मैं अपना एग्जांपल लेके आपको समझाऊं
तो क्योंकि मैं देखो डायरेक्टली स्टॉक्स में भी इन्वेस्ट करता हूं। तो यहां पर मेरा ऑब्जेक्टिव ये रहेगा कि मैं ऐसे
एटीएम ढूंढूं जहां पर जो मेरा इन्वेस्टमेंट है वो डवर्सिफाई हो जाए। [संगीत] क्योंकि अब मैं डायरेक्टली स्टॉक
में भी इन्वेस्ट करता हूं। तो मैं इंडियन स्टॉक्स में ही इन्वेस्ट कर रहा हूं। तो मैं चाहूंगा ऐसी कंपनियों में भी इन्वेस्ट
करना जो देश के बाहर हो। या फिर इसके अलावा जैसे देखूं क्योंकि मैं स्टॉक में इन्वेस्ट करके बहुत ज्यादा रिस्क ले रहा
हूं। तो मैं गोल्ड या सिल्वर जैसे ईटीएफ में इन्वेस्ट कर सकता हूं या बॉन्ड वाले ईटीएफ में इन्वेस्ट कर सकता हूं क्योंकि
इनमें रिस्क कम है। तो इससे मेरा जो पोर्टफोलियो है वह बैलेंस हो जाएगा। तो इस तरह से हमें अपना ऑब्जेक्टिव देखना है।
हमें अपनी करंट पोर्टफोलियो को देखना है कि अभी हम क्या कर रहे हैं। ठीक है? इसके अलावा सबसे जरूरी बात कि किसी भी ईटीएफ
में इन्वेस्ट करने से पहले थोड़ी बहुत तो रिसर्च करना बहुत जरूरी है कि आखिर उस ईटीएफ ने पहले कितना रिटर्न दिया है। अभी
उसका प्राइस क्या चल रहा है? उस [संगीत] ईटीएफ की ट्रेडिंग वॉल्यूम कितनी है?
उसमें बायर सेलर तो हैं ताकि जब हम उस ईटीएफ को बेचना चाहे तो वो आसानी से बिक जाए। ठीक है? इसके [संगीत] अलावा सबसे
जरूरी टिप यही है कि चाहे आप कहीं पे भी अपने पैसे इन्वेस्ट करो हमेशा लॉन्ग टर्म पर्सपेक्टिव बना के चलो। जब आप लंबे समय
के लिए ही इन्वेस्ट करोगे तभी ईटीएफ में आपको फायदा होगा। अगर आप यह सोच रहे हो कि शॉर्ट टर्म में जल्दी से उसमें से पैसा
बना ले जल्दी से प्रॉफिट बना ले तो भैया एटीएफ आपके लिए [संगीत] नहीं है क्योंकि ईटीएफ में शॉर्ट टर्म में प्रॉफिट बनाना
मुश्किल है। अगर होगा भी तो थोड़ा बहुत प्रॉफिट होगा। इससे अच्छा यही है कि अगर आप लॉन्ग टर्म में प्रॉफिट देख रहे हो तो
एटीएफ एक बेस्ट ऑप्शन है लेकिन शॉर्ट टर्म के लिए बिल्कुल नहीं। अब अगर आप एटीएफ में इन्वेस्ट करते हो तो आप मेरे को कमेंट में
बताना और अगर आप एटीएफ में इन्वेस्ट नहीं करते तो भी इन सभी एटीएफ की कैटेगरी में से आपको कौन सा एटीएफ पसंद आया आप मेरे को
कमेंट में बताना और इस वीडियो को अपने दोस्तों के साथ शेयर करके इस चैनल को प्लीज सब्सक्राइब कर लो।
ETF (एक्सचेंज ट्रेडेड फंड) शेयरों की एक टोकरी की तरह है, जिसमें कई कंपनियों के शेयर शामिल होते हैं और यह स्टॉक की तरह स्टॉक एक्सचेंज पर ट्रेड होता है। इसके विपरीत, म्यूचुअल फंड का प्रबंधन एक फंड मैनेजर करता है और इसकी NAV दिन में केवल एक बार अपडेट होती है। ETF का प्राइस रियल-टाइम में बदलता रहता है, जबकि म्यूचुअल फंड में आप कारोबारी दिन के अंत में ही खरीद-बिक्री कर सकते हैं।
ETF के प्रमुख फायदे हैं: विविधीकरण (एक ETF में कई कंपनियों में निवेश), बहुत कम खर्च अनुपात (Expense Ratio), पारदर्शिता, और खरीद-बिक्री का लचीलापन। नुकसान में शामिल हैं: बाजार जोखिम (पूरे बाजार के गिरने पर ETF का प्राइस भी गिरता है), ट्रैकिंग एरर (ETF का प्राइस इंडेक्स से थोड़ा अलग हो सकता है), और कुछ ETF में कम लिक्विडिटी का जोखिम।
भारत में कई प्रकार के ETF उपलब्ध हैं: इक्विटी ETF (जैसे Nifty 50 ETF, Sensex ETF), डेट ETF (जैसे भारत बॉन्ड ETF), गोल्ड ETF, सेक्टोरल/थीम बेस्ड ETF (जैसे SBI Banking ETF), और इंटरनेशनल ETF (जैसे Motilal Oswal Nasdaq 100 ETF)। प्रत्येक का अपना निवेश उद्देश्य और जोखिम स्तर होता है।
Groww ऐप पर ETF में निवेश करना आसान है। सबसे पहले ऐप खोलें और नीचे टैब में 'ETF' ऑप्शन चुनें। यहां आप Index, Gold, Global जैसी कैटेगरी में ETF को ब्राउज़ कर सकते हैं। कोई ETF चुनने के बाद उसकी डिटेल्स चेक करें, 'Buy' पर क्लिक करें, क्वांटिटी डालें और 'प्लेस ऑर्डर' करें।
ETF से मुनाफा तब होता है जब ETF का प्राइस बढ़ता है। उदाहरण के लिए, यदि आपने Nifty 50 ETF में ₹10,000 का निवेश किया जब इसका प्राइस ₹200 था, तो आपको 50 यूनिट्स मिलेंगी। बाद में यदि Nifty 50 इंडेक्स 5% बढ़ता है, तो ETF का प्राइस ₹210 हो जाएगा, और आपकी 50 यूनिट्स की कुल वैल्यू ₹10,500 हो जाएगी, जिससे आपको ₹500 का प्रॉफिट होगा।
शुरुआती निवेशकों के लिए चार महत्वपूर्ण टिप्स हैं: पहले, अपना निवेश उद्देश्य स्पष्ट करें (जैसे लॉन्ग टर्म ग्रोथ या रिस्क कम करना)। दूसरा, दो समान ETF के Expense Ratio की तुलना करें और कम वाला चुनें। तीसरा, निवेश से पहले ETF की लिक्विडिटी (ट्रेडिंग वॉल्यूम) जांचें। चौथा, लॉन्ग टर्म सोचें, क्योंकि ETF शॉर्ट टर्म प्रॉफिट के बजाय लंबी अवधि में अच्छा रिटर्न देने के लिए होते हैं।
भारत का ETF बाजार (~$60 बिलियन) अमेरिका ($6.7 ट्रिलियन) के मुकाबले बहुत छोटा है। अमेरिका में 3000 से अधिक ETF लिस्टेड हैं, जबकि भारत में केवल लगभग 120। अमेरिकी बाजार में ETF की लिक्विडिटी बहुत अधिक और स्थिर है, जबकि भारत में कई ETF में खरीदार/विक्रेता कम होने से लिक्विडिटी कम है। भारत में ETF की लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है, खासकर 2019 के बाद।
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