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THE HIGH. THE LOW. EVERYTHING ELSE IS NOISE | MARK DOUGLAS

THE HIGH. THE LOW. EVERYTHING ELSE IS NOISE | MARK DOUGLAS

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[00:00]

आपने भी ऐसा बहुत बार किया होगा। सुबह

[00:02]

चार्ट ओपन किया। एक ट्रेड लिया। 10 पॉइंट

[00:04]

का प्रॉफिट आया। खुश होकर बुक कर लिया।

[00:06]

फिर थोड़ी देर बाद दूसरा ट्रेड लिया। इस

[00:08]

बार 12 पॉइंट का लॉस हो गया। फिर तीसरा

[00:11]

ट्रेड, फिर चौथा, फिर पांचवा दिन भर

[00:13]

स्क्रीन के सामने बैठे रहे। हर छोटी सी

[00:15]

मूवमेंट पर रिएक्ट करते रहे। और शाम को जब

[00:18]

अकाउंट चेक किया तो पता चला कि पूरे दिन

[00:21]

की मेहनत के बाद भी अकाउंट लगभग वहीं है

[00:24]

जहां सुबह था। ना बड़ा प्रॉफिट, ना बड़ा

[00:27]

लॉस। बस एक थकान, एक खालीपन और दिमाग में

[00:31]

100 सवाल। फिर आपने वही चार्ट दोबारा

[00:33]

खोला। लेकिन इस बार ज़ूम आउट करके पूरे दिन

[00:36]

का कैंडल देखा और तब आपको दिखा कि उस दिन

[00:39]

मार्केट अपने लो से हाई तक या हाई से लो

[00:42]

तक 100 200 पॉइंट तक मूव कर गया था।

[00:45]

[संगीत] एक सीधा साफ क्लीन मूव। अगर आप

[00:48]

सिर्फ उस एक मूव में होते बस एक ही ट्रेड

[00:51]

तो जो प्रॉफिट आपने दिन भर की मेहनत और 10

[00:53]

ट्रेड्स के बाद भी नहीं बनाया वो सिर्फ एक

[00:56]

ट्रेड में बन जाता। यही वह पल होता है जब

[00:59]

दिमाग में एक अजीब सी सच्चाई उतरती है कि

[01:02]

शायद मार्केट में पैसा बनाने का तरीका वह

[01:04]

नहीं है जो आप कर रहे हैं। शायद सारा

[01:07]

प्रॉफिट कहीं और है। शायद सारा प्रॉफिट उस

[01:09]

हाई और लो के बीच में है जहां आप थे ही

[01:12]

नहीं। यह सिर्फ एक दिन की बात नहीं है। यह

[01:16]

हर दिन की कहानी है। हर उस ट्रेडर की

[01:18]

कहानी है जो स्क्रीन पर बैठकर हर मूवमेंट

[01:21]

को पकड़ने की कोशिश करता है। जरा सोचिए।

[01:24]

मार्केट हर दिन एक रेंज बनाता है। एक हाई,

[01:28]

एक लो। इस रेंज के अंदर कई छोटी-छोटी

[01:31]

मूवमेंट्स होती हैं। ऊपर नीचे, ऊपर नीचे

[01:35]

जिन्हें आप नॉइज कह सकते हैं।

[01:36]

[गला साफ़ करने की आवाज़] और फिर इसी रेंज

[01:38]

के अंदर एक बड़ी मूवमेंट भी होती है जो

[01:40]

असली दिशा बताती है जो दिन का सबसे

[01:43]

महत्वपूर्ण हिस्सा होती है। ज्यादातर

[01:45]

रिटेल ट्रेडर्स अपना सारा समय, सारी

[01:48]

एनर्जी, सारा फोकस उस नॉइज़ में लगा देते

[01:51]

हैं। वह हर छोटी कैंडल पर रिएक्ट करते

[01:54]

हैं। हर छोटे पुलबक पर एंट्री लेते हैं।

[01:56]

हर छोटे मूव पर एग्जिट कर देते हैं। और जब

[01:59]

असली बड़ा मूव शुरू होता है [संगीत] तब वह

[02:02]

या तो पहले से एक छोटे लॉस में बैठे होते

[02:05]

हैं या एक छोटे प्रॉफिट में एग्जिट हो

[02:07]

चुके होते हैं या फिर साइड लाइन पर बैठकर

[02:09]

सोच रहे होते हैं कि अभी एंट्री लूं या

[02:12]

नहीं पहले ही बहुत मूव हो गया। नतीजा यह

[02:14]

होता है कि दिन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा

[02:17]

जिसमें असली पैसा बनता है, वह हिस्सा उनके

[02:21]

ट्रेड्स [संगीत] में कहीं नहीं होता।

[02:23]

मानिए एक ट्रेडर है। नाम है विक्रम।

[02:26]

विक्रम पिछले डेढ़ साल से ट्रेडिंग कर रहा

[02:29]

है। उसने कई स्ट्रेटजी सीखी हैं। कई

[02:32]

इंडिकेटर्स लगाए हैं। कई कोर्स खरीदे हैं।

[02:35]

उसकी विन रेट भी ठीक-ठाक [संगीत] है। लगभग

[02:38]

50 से 60% ट्रेड्स में उसे छोटा प्रॉफिट

[02:41]

मिल जाता है। लेकिन महीने के अंत में जब

[02:43]

वह अपनी जर्नल देखता है, तो पाता है कि

[02:46]

उसका टोटल रिजल्ट लगभग जीरो के आसपास है।

[02:49]

कभी थोड़ा प्रॉफिट, कभी थोड़ा लॉस। एक दिन

[02:53]

विक्रम ने एक अलग काम किया। उसने अपनी

[02:56]

पिछले 20 ट्रेडिंग डेज के चार्ट्स निकाले

[02:58]

और हर दिन का हाई और लो मार्क किया।

[03:00]

[संगीत] फिर उसने देखा कि हर दिन हाई से

[03:02]

लो के बीच या लो से हाई के बीच एक साफ

[03:05]

मूवमेंट थी जो कम से कम 100 पॉइंट से लेकर

[03:08]

250 पॉइंट तक की थी। 20 में से 18 दिन ऐसे

[03:12]

थे जहां यह मूव बहुत साफ और ट्रेड करने

[03:15]

योग्य था। फिर उसने अपने उन 20 दिनों के

[03:17]

ट्रेड्स देखे और पाया कि 18 में से सिर्फ

[03:20]

तीन बार उसकी एंट्री उस बड़े मूव की दिशा

[03:23]

में थी और उनमें भी उसने एग्जिट बहुत

[03:26]

जल्दी कर लिया था मूव के सिर्फ 2030%

[03:29]

हिस्से में ही बाकी 15 ट्रेड्स वो सब उस

[03:33]

बीच के जोन में लिए गए थे जहां मार्केट

[03:35]

सिर्फ इधर-उधर घूम रहा था। कोई साफ दिशा

[03:38]

नहीं थी और इन्हीं 15 ट्रेड्स में उसका

[03:40]

ज्यादातर लॉस छुपा हुआ था। यह देखकर

[03:43]

विक्रम को एक झटका लगा। उसे पहली बार समझ

[03:46]

आया कि उसकी समस्या उसकी एंट्री एग्जिट

[03:48]

टाइमिंग नहीं थी। उसकी समस्या यह थी कि वह

[03:51]

गलत जगह ट्रेड कर रहा था। मार्केट उसे रोज

[03:54]

एक मौका दे रहा था। एक साफ बड़ा ट्रेड

[03:58]

करने लायक मूव और वह उस मौके के पास भी

[04:00]

नहीं जा रहा था। वो उस नो मैनस लैंड में

[04:03]

फंसा हुआ था। जहां कीमत बस ऊपर नीचे झूलती

[04:07]

रहती है। जहां कोई बड़ी ताकत, कोई बड़ा

[04:09]

संस्थागत खिलाड़ी, कोई स्मार्ट मनी दिशा

[04:12]

तय नहीं कर रहा होता। बस छोटे ट्रेडर्स एक

[04:15]

दूसरे से लड़ रहे होते हैं। अब सवाल यह

[04:18]

आता है, आप ऐसा क्यों करते हैं? आप जानते

[04:21]

हैं कि बड़ा मूव कहीं और है। फिर भी आप

[04:23]

वहां नहीं जाते। आप यहीं इस बीच के जोन

[04:26]

में बार-बार ट्रेड लेते हैं। इसका जवाब

[04:29]

आपकी स्ट्रेटजी में नहीं है। इसका जवाब

[04:32]

आपके दिमाग के अंदर है। जब आप सुबह

[04:34]

स्क्रीन के सामने बैठते हैं तो आपका दिमाग

[04:37]

एक चीज चाहता है। एक्शन। आपने पैसे लगाए

[04:41]

हैं। आपने समय निकाला है। आप चाहते हैं कि

[04:44]

कुछ हो। कि इंतजार करना, चुपचाप बैठना,

[04:47]

कुछ ना करना यह दिमाग को असहज करता है।

[04:51]

डेनियल कारनेमन ने अपने काम में बताया है

[04:54]

कि इंसानी दिमाग दो तरह से सोचता है। एक

[04:56]

तेज इंस्टिंक्टिव ऑंटोमेटिक सिस्टम और एक

[04:59]

धीमा सोच समझकर काम करने वाला सिस्टम।

[05:03]

ट्रेडिंग के दौरान जब चार्ट पर कैंडल बन

[05:05]

रही होती है, [संगीत] कीमत ऊपर जाती है,

[05:08]

नीचे आती है तो आपका तेज सिस्टम हर छोटी

[05:11]

मूवमेंट को एक सिग्नल की तरह देखने लगता

[05:13]

है। अरे यह ऊपर जा रहा है। चलो लो लेते

[05:16]

हैं। अरे यह नीचे आ रहा है। चलो शॉर्ट कर

[05:18]

लेते हैं। यह सोच आपके अनुभव से नहीं आती।

[05:21]

यह आपके दिमाग की उस आदत से आती है जो हर

[05:24]

हलचल को महत्वपूर्ण मान लेती है। इसके साथ

[05:27]

एक और चीज जुड़ी है। प्रॉफिट का डर। जब

[05:31]

आपका कोई ट्रेड 101 पॉइंट में प्रॉफिट में

[05:34]

चला जाता है तो आपके दिमाग में एक डर बैठ

[05:36]

जाता है। अगर मैंने अभी नहीं बुक किया और

[05:39]

मार्केट पलट गया तो यह प्रॉफिट चला जाएगा।

[05:42]

यह डर इतना मजबूत होता है कि आप उस छोटे

[05:45]

प्रॉफिट को तुरंत बुक कर लेते हैं। चाहे

[05:47]

चार्ट पर साफ दिख रहा हो कि मूव अभी शुरू

[05:50]

हुआ है। अभी बहुत आगे जाने की संभावना है।

[05:53]

दूसरी तरफ जब कोई ट्रेड लॉस में जाता है

[05:56]

तो वहां एक अलग डर काम करता है। अगर मैंने

[05:59]

अभी बुक कर दिया और मार्केट वापस मेरी तरफ

[06:01]

आ गया तो मैं बिना वजह लॉस ले लूंगा। इस

[06:04]

डर में आप लॉस को होल्ड करते रहते हैं,

[06:07]

उम्मीद करते हैं और लॉस बड़ा होता जाता

[06:09]

है। मार्क डगलस ने अपनी किताब ट्रेडिंग इन

[06:12]

द जॉन में इसी बात को बहुत साफ तरीके से

[06:15]

समझाया है कि ज्यादातर ट्रेडर्स अपने

[06:17]

प्रॉफिट को जल्दी काटते हैं और अपने लॉस

[06:20]

को बढ़ने देते हैं क्योंकि उनका दिमाग

[06:22]

दर्द से बचने और जल्दी रिवॉर्ड पाने की

[06:25]

तरफ झुका हुआ होता है ना कि लॉजिक [संगीत]

[06:28]

की तरफ। अब इसे हाई लो के कांसेप्ट से

[06:30]

जोड़कर देखिए। जब मार्केट दिन के लो के

[06:33]

पास होता है और वहां से ऊपर की तरफ एक

[06:35]

बड़ा मूव शुरू होने वाला होता है। उस वक्त

[06:38]

चार्ट पर क्या दिख रहा होता है? एक

[06:40]

गिरावट, एक सेलिंग प्रेशर हो सकता है एक

[06:43]

बड़ी रेड कैंडल या लो को थोड़ा तोड़कर

[06:46]

वापस आना। इस वक्त ज्यादातर ट्रेडर्स का

[06:48]

दिमाग कहता है, यह तो गिर रहा है। इसमें

[06:52]

शॉर्ट करो। वह लो के पास शॉट लेते हैं।

[06:54]

ठीक उस वक्त जब असली बड़े खिलाड़ी वहां से

[06:57]

खरीदारी कर रहे होते हैं। नतीजा उनका

[07:00]

शॉर्ट ट्रेड लॉस में जाता है और जब

[07:02]

मार्केट ऊपर की तरफ बड़ा मूव शुरू करता है

[07:05]

तो वह पहले से एक नेगेटिव अनुभव के साथ

[07:08]

साइड लाइन पर बैठे होते हैं और इस मूव में

[07:11]

एंट्री लेने की हिम्मत नहीं कर पाते। यही

[07:14]

सेम पैटर्न दिन के हाई के पास भी होता है।

[07:18]

कीमत ऊपर जा रही होती है। सब उत्साहित

[07:20]

होकर लॉन्ग ले रहे होते हैं। ठीक उस वक्त

[07:24]

जब बड़े खिलाड़ी अपनी पोजीशन बेच रहे होते

[07:26]

हैं और मार्केट नीचे की तरफ बड़ा मूव शुरू

[07:29]

करने वाला होता है। इसका मतलब यह है कि

[07:32]

आपका दिमाग ठीक उन्हीं जगहों पर गलत दिशा

[07:34]

में रिएक्ट करता है जहां असली अवसर बन रहा

[07:37]

होता है और ठीक उन्हीं जगहों पर सही दिशा

[07:40]

में काम करता है। जब अवसर खत्म हो चुका

[07:43]

होता है। जब मूव अपने आखिरी हिस्से में

[07:45]

होता है। इसीलिए ज्यादातर ट्रेडर्स बड़े

[07:48]

मूव के बीच में सबसे महंगी जगह पर एंट्री

[07:51]

लेते हैं और फिर मूव खत्म होते ही उन्हें

[07:53]

लॉस का सामना करना पड़ता है। [संगीत] अब

[07:56]

आते हैं उस पल पर जो आज की पूरी बात का

[07:58]

केंद्र है। प्रॉब्लम मार्केट में नहीं है।

[08:01]

मार्केट तो रोज अपना काम कर रहा है।

[08:03]

मार्केट रोज एक लो बनाता है। एक हाई बनाता

[08:06]

है और इन दोनों के बीच एक रास्ता बनाता है

[08:09]

जिसमें असली मूवमेंट होती है। यह प्रोसेस

[08:11]

हर दिन, हर हफ्ते, हर महीने, बिना रुके

[08:14]

चलता रहता है। मार्केट ने कभी आपसे यह

[08:16]

नहीं कहा कि आप उस बीच के नॉइस जोन में

[08:19]

ट्रेड करें। प्रॉब्लम आपकी सोच में है।

[08:21]

आपका दिमाग शांत नहीं बैठ सकता। आपका

[08:24]

दिमाग हर कैंडल को एक मौका समझता है। जबकि

[08:28]

असली मौका दिन में सिर्फ एक या दो बार आता

[08:30]

है और बाकी समय सिर्फ इंतजार होता है। आप

[08:34]

इंतजार को टाइम वेस्ट समझते हैं। इसीलिए

[08:37]

आप कुछ ना कुछ करते रहते हैं और यही कुछ

[08:40]

ना कुछ करना आपको असली मौके से दूर ले

[08:43]

जाता है। [संगीत] जब आप यह बात समझ लेते

[08:45]

हैं तो एक चीज साफ हो जाती है। ट्रेडिंग

[08:48]

में सफलता इस बात पर निर्भर नहीं करती कि

[08:51]

[संगीत] आप दिन में कितने ट्रेड्स लेते

[08:53]

हैं। यह इस बात पर निर्भर करती है कि आप

[08:56]

कितनी बार उस हाई लो मूव के साथ होते हैं।

[08:59]

उस मूव के साथ जो दिन का असली प्रॉफिट

[09:02]

कैरी करता है। अगर आप एक दिन में सिर्फ एक

[09:04]

ही सही ट्रेड लेते हैं। लेकिन वो ट्रेड उस

[09:07]

बड़े मूव की दिशा में है तो वह एक ट्रेड

[09:10]

आपके 10 छोटे ट्रेड से ज्यादा कमा सकता

[09:13]

है। यही सोच अब आपकी पूरी ट्रेडिंग को फिर

[09:16]

से डिजाइन करने का आधार बनेगी। इसके लिए

[09:19]

कुछ नियम है। पांच नियम जो आपको अपनी

[09:22]

ट्रेडिंग में लाने हैं एक-एक करके बिना

[09:24]

जल्दी किए। पहला नियम है मार्केट खुलने से

[09:28]

पहले पिछले दिन का हाई और लो मार्क कीजिए।

[09:31]

यह आपका नक्शा है। यह वह दो लाइनें हैं जो

[09:34]

बताती हैं कि कीमत ने पिछले सेशन में

[09:37]

कहां-कहां रिजेक्शन दिखाया, कहां खरीदारी

[09:39]

आई, कहां बिकवाली आई। मानिए कल का हाई था

[09:43]

22,500 और कल का लो था 22,300। आज जब

[09:47]

मार्केट खुलेगा तो यह दोनों लेवल्स आपके

[09:50]

लिए सबसे महत्वपूर्ण जोन होंगे। अगर आप यह

[09:53]

मार्किंग नहीं करते तो आपके सामने सिर्फ

[09:55]

एक खाली चार्ट होता है जिसमें हर कैंडल

[09:57]

बराबर दिखती है और आपका दिमाग किसी भी

[10:00]

कैंडल पर रिएक्ट करने लगता है। लेकिन जब

[10:03]

आपके सामने यह दो लेवल्स होते हैं तो आपकी

[10:06]

नजर अपने आप उन ज़ों्स पर फोकस होने लगती

[10:08]

है और बीच का इलाका आपके लिए खाली जगह बन

[10:12]

जाता है जिसमें आपको कुछ करने की जरूरत

[10:14]

नहीं है। दूसरा नियम है जब तक कीमत इन

[10:17]

लेवल्स के पास नहीं आती तब [संगीत] तक कोई

[10:20]

ट्रेड मत लीजिए। यह नियम सुनने में आसान

[10:23]

है लेकिन करने में सबसे मुश्किल है

[10:25]

क्योंकि यही वह नियम है जो आपके दिमाग की

[10:27]

एक्शन की भूख को रोकता [संगीत] है। मानिए

[10:30]

मार्केट खुला और कीमत उस बीच के जोन में

[10:33]

घूम रही है ना हाई के पास ना लो के पास।

[10:36]

इस वक्त आपका दिमाग कहेगा देखो यह ऊपर जा

[10:40]

रहा है। कुछ करते हैं। देखो यह नीचे आ रहा

[10:42]

है। कुछ करते हैं। आपको यहां सिर्फ एक काम

[10:45]

करना है। चार्ट को देखना लेकिन कुछ ना

[10:47]

करना। यह कुछ ना करना ट्रेडिंग का सबसे

[10:50]

बड़ा स्किल है और यही वह स्किल है जो

[10:53]

ज्यादातर ट्रेडर्स कभी नहीं सीखते। याद

[10:56]

रखिए हर मिनट जो आप बिना ट्रेड लिए

[10:59]

गुजारते हैं वो मिनट आपको लॉस से बचा रहा

[11:02]

है बशर्ते वो मिनट उस बीच के जोन में हो।

[11:05]

तीसरा नियम है [संगीत] जब कीमत हाई या लो

[11:08]

के पास पहुंचे तब सीधा ट्रेड मत लीजिए

[11:11]

बल्कि देखिए कि वहां क्या हो रहा है। यहां

[11:15]

पर लिक्विडिटी स्वीप का कांसेप्ट काम आता

[11:18]

है। जब कीमत किसी पुराने लो के पास आती है

[11:21]

तो अक्सर वह उस लो को थोड़ा तोड़ती है।

[11:23]

यानी लो से थोड़ा नीचे जाती है। उन

[11:26]

ट्रेडर्स के स्टॉप लॉस को हिट करती है जो

[11:29]

वहां शॉर्ट पोजीशन में बैठे थे और उन

[11:31]

ट्रेडर्स को भी बाहर फेंकती है जिन्होंने

[11:33]

वहां लॉन्ग लिया था। लेकिन उनका स्टॉप लॉस

[11:36]

लो से नीचे था। यह एक झटका होता है और इस

[11:39]

झटके के बाद अगर कीमत तेजी से वापस लो के

[11:43]

ऊपर आ जाती है तो यह एक संकेत होता है कि

[11:46]

बड़े खिलाड़ियों ने अपनी खरीदारी पूरी कर

[11:48]

ली है और अब असली मूव ऊपर की तरफ शुरू हो

[11:51]

सकता है। यही पैटर्न दिन के हाई के पास भी

[11:54]

बनता है। सिर्फ दिशा उल्टी होती है। जो

[11:57]

ट्रेडर इस झटके को देखकर घबरा जाता है और

[12:00]

इसे ब्रेकउ समझकर उसी दिशा में ट्रेड ले

[12:04]

लेता है। वह ठीक उस वक्त गलत साइड पर खड़ा

[12:07]

हो जाता है जब बड़ी चाल शुरू होने वाली

[12:09]

होती है। चौथा नियम है जब रिवर्सल कंफर्म

[12:13]

हो जाए तब एंट्री लीजिए लेकिन टारगेट छोटा

[12:17]

मत रखिए। अगर आप लोगों के पास लिक्विडिटी

[12:20]

स्वीप देखकर लॉन्ग ले रहे हैं तो आपका

[12:22]

टारगेट दिन का हाई होना चाहिए। या कम से

[12:25]

कम उस रेंज का बड़ा हिस्सा। यही वह जगह है

[12:28]

जहां ज्यादातर ट्रेडर्स गलती करते हैं। वह

[12:31]

सही जगह एंट्री ले लेते हैं। लेकिन फिर

[12:33]

वही पुरानी आदत आ जाती है। 10-15 पॉइंट

[12:36]

में प्रॉफिट बुक कर लेते हैं। और बाकी का

[12:38]

मूव जो असली प्रॉफिट होता है, वह उनके

[12:40]

पोर्टफोलियो में कभी नहीं आता। मानिए

[12:42]

विक्रम ने आज लो के पास लिक्विडिटी स्वीप

[12:45]

के बाद लॉन्ग [संगीत] लिया। एंट्री 22,300

[12:48]

पर, लो था 22,280 और कल का हाई 22,500 था।

[12:53]

अगर विक्रम सिर्फ 20 पॉइंट में बुक कर

[12:55]

लेता है तो उसका प्रॉफिट है 20 पॉइंट।

[12:58]

लेकिन अगर वह अपने टारगेट को हाई के पास

[13:00]

रखता है और मूव वहां तक पहुंचता है तो

[13:03]

उसका प्रॉफिट है 200 पॉइंट। यह 10 गुना

[13:06]

फर्क है और यह फर्क सिर्फ होल्ड करने की

[13:09]

हिम्मत से आता है। किसी नई स्ट्रेटजी से

[13:12]

नहीं। पांचवा नियम है बीच के जोन को पूरी

[13:15]

तरह नो ट्रेड जोन मानिए। यह नियम चार और

[13:19]

नियमों को आपस में जोड़ता है। जब कीमत हाई

[13:23]

लो रेंज के बीच में हो तो वहां कोई एज

[13:25]

नहीं है। कोई साफ संकेत नहीं है। बस

[13:28]

छोटे-छोटे खिलाड़ी एक दूसरे से लड़ रहे

[13:30]

हैं। इस जोन में लिया गया कोई भी ट्रेड

[13:33]

चाहे वह जीते या हारे आपको लंबे समय में

[13:36]

नुकसान ही देगा। क्योंकि यह आपकी एनर्जी,

[13:39]

आपका फोकस और आपका कॉन्फिडेंस खा जाता है

[13:42]

जो आपको असली मौके के वक्त चाहिए होता है।

[13:45]

मानिए विक्रम अगर बीच के जोन में पांच

[13:47]

ट्रेड्स लेकर चाहे थोड़ा प्रॉफिट भी बना

[13:50]

ले फिर भी जब असली मूव शुरू होगा तो उसका

[13:53]

दिमाग पहले से थका हुआ होगा। उसका

[13:55]

कॉन्फिडेंस पहले से हिला हुआ होगा और वह

[13:58]

उस बड़े मूव में सही तरीके से एंट्री नहीं

[14:00]

ले पाएगा। इसलिए यह नियम सिर्फ ट्रेड ना

[14:03]

लेने का नियम नहीं है। यह अपनी मेंटल

[14:06]

एनर्जी बचाने का नियम है। अब जरा सोचिए

[14:09]

अगर विक्रम यह पांच नियम अगले 30 दिन तक

[14:12]

फॉलो करें। हर सुबह पिछले दिन का हाई लो

[14:14]

मार्क करें। बीच के जोन में कुछ ना करें।

[14:17]

हाई या लो के पास लिक्विडिटी स्वीप का

[14:20]

इंतजार करें। कंफर्मेशन के बाद एंट्री ले

[14:23]

और टारगेट को रेंज के दूसरे सिरे तक रखें।

[14:26]

तो उसकी ट्रेडिंग पूरी तरह बदल जाएगी।

[14:28]

उसके ट्रेड्स की संख्या कम हो जाएगी। शायद

[14:31]

महीने में सिर्फ 101 ट्रेड्स लेकिन हर

[14:34]

ट्रेड का औसत साइज बढ़ जाएगा क्योंकि अब

[14:36]

वह छोटे मूव्स नहीं बड़े मूव्स पकड़ रहा

[14:39]

है। उसकी स्क्रीन के सामने बैठने की जरूरत

[14:41]

कम हो जाएगी क्योंकि अब उसे हर मिनट कुछ

[14:44]

करने की जरूरत नहीं है। उसे सिर्फ कुछ खास

[14:47]

पलों का इंतजार करना है। और सबसे बड़ी बात

[14:50]

उसकी मेंटल थकान कम हो जाएगी क्योंकि अब

[14:53]

वह हर कैंडल से नहीं लड़ रहा। वह सिर्फ उस

[14:56]

एक मूव का इंतजार कर रहा है जो दिन का

[14:59]

असली प्रॉफिट कैरी करता है। लेकिन यहां एक

[15:02]

चीज साफ कर देना जरूरी है। यह तरीका आसान

[15:06]

नहीं है क्योंकि यह आपके दिमाग की सबसे

[15:08]

गहरी आदत के खिलाफ जाता है। आपका दिमाग

[15:11]

चाहता है कि आप कुछ करें और यह तरीका कहता

[15:14]

है कि ज्यादातर वक्त आप कुछ [संगीत] ना

[15:17]

करें। आपका दिमाग चाहता है कि आप छोटा

[15:20]

प्रॉफिट तुरंत बुक करें और यह तरीका कहता

[15:23]

है कि आप बड़े मूव को होल्ड करें। भले ही

[15:25]

बीच में कीमत थोड़ी पीछे आए। यह सिर्फ एक

[15:28]

टेक्निकल बदलाव नहीं है। यह एक मेंटल

[15:31]

बदलाव है और मेंटल बदलाव हमेशा धीरे-धीरे

[15:35]

आता है। एक दिन में नहीं आता। जब आप अगली

[15:38]

बार चार्ट खोलें तो सबसे पहले सिर्फ एक

[15:41]

काम कीजिए। पिछले दिन का हाई और लो मार्क

[15:44]

कीजिए और फिर सिर्फ देखिए बिना कुछ किए कि

[15:47]

कीमत कहां है। क्या वह बीच में है या किसी

[15:50]

एक सिरे के पास है? अगर बीच में है तो खुद

[15:53]

से कहिए। अभी मेरा काम सिर्फ देखना है।

[15:57]

ट्रेड लेना नहीं है। और [संगीत] जब कीमत

[15:59]

किसी सिरे के पास पहुंचे तब सिर्फ इतना

[16:02]

देखिए कि वहां रिजेक्शन है या नहीं, स्वीप

[16:04]

है या नहीं। अगर है तो तैयार रहिए। अगर

[16:08]

नहीं है तो फिर इंतजार कीजिए। ट्रेडिंग

[16:11]

में सबसे बड़ा सच यही है। आपको हर दिन

[16:14]

प्रॉफिट बनाने की जरूरत नहीं है। आपको

[16:16]

सिर्फ उस एक मूव के साथ होने की जरूरत है

[16:18]

जो असली प्रॉफिट कैरी करता है। बाकी सब

[16:21]

बाकी सारी हलचल, बाकी सारी कैंडल्स, बाकी

[16:25]

सारा शोर वो सिर्फ शोर है। सारा प्रॉफिट

[16:28]

हाई और लो के बीच में है। और जो ट्रेडर इस

[16:30]

बात को अपनी रोज की आदत बना लेता है, वही

[16:33]

धीरे-धीरे मार्केट से शांति से पैसा

[16:36]

निकालने लगता है। बाकी सब सिर्फ शोर के

[16:39]

साथ उलझे रहते हैं और हर महीने अपने आप से

[16:42]

वही सवाल पूछते रहते हैं। मैं इतनी मेहनत

[16:45]

करता हूं फिर भी मेरा अकाउंट क्यों नहीं

[16:47]

बढ़ रहा? इसके साथ एक तीसरी चीज भी काम

[16:50]

करती है। इंस्टेंट रिवॉर्ड की भूख। जब आप

[16:54]

लॉस में होते हैं तो आपका दिमाग एक जल्दी

[16:57]

रिवॉर्ड ढूंढता है ताकि वह बुरी फीलिंग

[17:00]

जल्दी खत्म हो जाए। यही वजह है कि लॉस के

[17:03]

बाद आप अपने नॉर्मल टाइम फ्रेम से छोटे

[17:06]

टाइम फ्रेम पर चले जाते हैं। क्योंकि छोटे

[17:08]

टाइम फ्रेम पर ट्रेड्स जल्दी रिजल्ट देते

[17:11]

हैं। चाहे वह रिजल्ट प्रॉफिट हो या लॉस।

[17:14]

आपका दिमाग रिजल्ट की क्वालिटी नहीं

[17:17]

चाहता। वह सिर्फ कुछ हो जाए, जल्दी हो जाए

[17:20]

चाहता है। [संगीत] यही वजह है कि रिवेंज

[17:22]

ट्रेडिंग में लोग अक्सर 1 मिनट या 3 मिनट

[17:24]

के चार्ट पर चले जाते हैं। बार-बार एंट्री

[17:27]

एग्जिट करते हैं और हर छोटे मूव पर रिएक्ट

[17:30]

करते हैं। अब इसे एक साथ देखिए। पहला लॉस

[17:34]

की वजह से दर्द हुआ जो प्रॉफिट से कहीं

[17:37]

बड़ा महसूस हुआ। दूसरा [संगीत] ईगो को चोट

[17:40]

लगी और दिमाग ने मार्केट को हराने की जिद

[17:43]

पकड़ ली। तीसरा दिमाग को इंस्टेंट रिवॉर्ड

[17:46]

चाहिए था। इसलिए टाइम फ्रेम छोटा हो गया।

[17:49]

फ्रीक्वेंसी बढ़ गई। यह तीन चीजें मिलकर

[17:52]

एक ऐसा कॉम्बिनेशन बनाती हैं जिसमें

[17:54]

प्लान, रिस्क मैनेजमेंट, सेटअप सब कुछ

[17:57]

पीछे छूट जाता है और बस एक चीज बचती है।

[18:00]

इसे वापस लाओ। यहां पर एक चीज साफ कर देना

[18:04]

जरूरी है। प्रॉब्लम मार्केट में नहीं है

[18:06]

और प्रॉब्लम उस पहले लॉस में भी नहीं है।

[18:09]

प्रॉब्लम उस पहले लॉस और आपके अगले ट्रेड

[18:11]

के बीच के उस छोटे से गैप में है जिसमें

[18:14]

आपका दिमाग फैसला करता है कि अब क्या करना

[18:17]

है। उस गैप में अगर आपका दिमाग शांत रहता

[18:20]

है तो आप या तो ट्रेड नहीं लेंगे या अगला

[18:23]

ट्रेड भी आपके प्लान के मुताबिक होगा।

[18:26]

लेकिन अगर उस गैप में दिमाग, गुस्से, ईगो

[18:28]

और जल्दी की पकड़ में आ जाता है तो अगला

[18:31]

ट्रेड प्लान का नहीं होता। वह रिवेंज का

[18:33]

होता है। इसका मतलब यह है कि आपकी पूरी

[18:36]

ट्रेडिंग की क्वालिटी, [संगीत]

[18:38]

आपकी पूरी महीने की प्रॉफिटेबिलिटी इस एक

[18:41]

छोटे से गैप पर टिकी होती है और ज्यादातर

[18:44]

ट्रेडर्स इस गैप पर कभी काम ही नहीं करते।

[18:47]

इस गैप को संभालने के लिए पांच नियम हैं।

[18:50]

आइए एक-एक करके समझते हैं। पहला नियम है

[18:54]

किसी भी लॉस के बाद चाहे वह कितना भी छोटा

[18:57]

हो। अगला ट्रेड लेने से पहले एक तय समय का

[19:00]

ठहराव लीजिए। मान लीजिए 10 मिनट। यह 10

[19:04]

मिनट सिर्फ इसलिए हैं ताकि वह इंस्टेंट

[19:06]

रिएक्शन वाला दिमाग शांत हो सके और सोच

[19:09]

समझकर फैसला लेने वाला दिमाग आगे आ सके।

[19:12]

इन 10 मिनट में स्क्रीन से नजर हटाइए।

[19:15]

उठिए, पानी पीजिए, कुछ भी कीजिए जो चाट से

[19:19]

दूर हो। मानिए रवि ने अगर अपने तीसरे

[19:21]

ट्रेड के लॉस के बाद या 10 मिनट का ठहराव

[19:24]

लिया होता तो उसका दिमाग शांत हो जाता और

[19:27]

शायद वह देख पाता कि अभी कोई वैलिड सेटअप

[19:29]

नहीं बना है। इसलिए ट्रेड लेने की कोई

[19:32]

जरूरत नहीं है। दूसरा नियम है किसी भी लॉस

[19:36]

के बाद पोजीशन साइज कभी मत बढ़ाइए बल्कि

[19:39]

अगला ट्रेड हमेशा अपने नॉर्मल साइज से

[19:42]

छोटा या बराबर रखिए। ज्यादातर रिवेंज

[19:45]

ट्रेडिंग में सबसे बड़ा नुकसान पोजीशन

[19:47]

साइज बढ़ाने से होता है। क्योंकि दिमाग

[19:50]

सोचता है बड़ा लगाऊंगा तो जल्दी रिकवर

[19:52]

होगा। लेकिन सच यह है कि जब आप इमोशनल हो

[19:56]

तब आपकी एंट्री एग्जिट क्वालिटी सबसे खराब

[19:58]

होती है और उस खराब क्वालिटी के साथ बड़ा

[20:01]

साइज लगाना आग में घी डालने [संगीत] जैसा

[20:04]

है। रवि के मामले में अगर उसने तीसरे लॉस

[20:07]

के बाद अपना साइज बढ़ाने के बजाय आधा कर

[20:10]

दिया होता तो भले ही अगले कुछ ट्रेड्स गलत

[20:12]

होते। उसका टोटल लॉस 3000 के बजाय शायद

[20:16]

₹8,900 होता। तीसरा नियम है किसी भी ट्रेड

[20:20]

को लेने से पहले एक लाइन में लिखिए कि मैं

[20:23]

यह ट्रेड क्यों ले रहा हूं। अगर वह वजह

[20:26]

आपके प्लान का कोई सेटअप है [संगीत] तो

[20:28]

ठीक है ट्रेड लीजिए। लेकिन अगर वह वजह कुछ

[20:31]

ऐसी है जैसे मुझे यह पैसा वापस लेना है या

[20:35]

मुझे साबित करना है कि मेरा आईडिया सही था

[20:38]

तो वह ट्रेड मत लीजिए। चाहे चार्ट कितना

[20:42]

भी अच्छा क्यों ना दिख रहा हो। यह 1 मिनट

[20:44]

का काम है। लेकिन यही 1 मिनट उस गैप को

[20:48]

कंट्रोल करने का सबसे आसान तरीका है।

[20:50]

क्योंकि जब आप अपनी वजह को शब्दों में

[20:52]

लिखते हैं तो इमोशन और लॉजिक के बीच एक

[20:55]

छोटा सा फासला बन जाता है और उस फासले में

[20:58]

अक्सर सही फैसला आ जाता है। चौथा नियम है

[21:02]

दिन की एक मैक्सिमम लॉस लिमिट तय कीजिए और

[21:05]

जैसे ही वह लिमिट हिट हो उस दिन के लिए

[21:08]

ट्रेडिंग बंद कर दीजिए। चाहे मन कितना भी

[21:10]

क्यों ना करे यह लिमिट आपकी कैपिटल के

[21:13]

हिसाब से तय होनी चाहिए। मानिए कुल कैपिटल

[21:16]

का 2% [संगीत] रवि के मामले में ₹1 लाख की

[21:19]

कैपिटल पर 2% यानी ₹2000

[21:23]

अगर रवि का यह नियम होता तो जब उसका लॉस

[21:26]

₹2000 तक पहुंचता वह उस दिन ट्रेडिंग बंद

[21:29]

कर देता और बाकी ₹1000 का एक्स्ट्रा लॉस

[21:33]

कभी होता ही नहीं। यह नियम सुनने में बहुत

[21:36]

आसान है। लेकिन इसकी ताकत यह है कि यह

[21:39]

आपके सबसे बुरे दिन को भी मैनेजेबल बना

[21:42]

देता है। एक बुरा दिन सिर्फ एक छोटा सा

[21:45]

झटका रह जाता है। बड़ा गड्ढा नहीं बनता।

[21:48]

पांचवा नियम है हफ्ते के अंत में अपनी

[21:51]

जर्नल खोलिए और हर लॉस को दो कैटेगरी में

[21:54]

बांटिए। प्लान वाला लॉस और रिवेंज लॉस।

[21:58]

प्लान वाला लॉस वो है जो आपके सेटअप, आपके

[22:02]

रिस्क के मुताबिक हुआ और रिवेंज लॉस वो है

[22:05]

जो किसी पिछले लॉस की प्रतिक्रिया में

[22:07]

हुआ। ज्यादातर ट्रेडर्स जब यह एक्सरसाइज

[22:10]

पहली बार करते हैं तो उन्हें झटका लगता है

[22:12]

क्योंकि उन्हें पता चलता है कि उनका

[22:15]

70-80% महीने का लॉस सिर्फ रिवेंज ट्रेड

[22:18]

से आ रहा है। जबकि उनका असली स्ट्रेटजी

[22:21]

उनका असली एज [संगीत] ठीक-ठाक काम कर रहा

[22:24]

है। यह जानना बहुत जरूरी है क्योंकि इससे

[22:27]

आपको पता चलता है कि आपको अपनी स्ट्रेटजी

[22:30]

बदलने की जरूरत नहीं है। आपको सिर्फ उस

[22:33]

गैप पर काम करने की जरूरत है। अब जरा

[22:36]

सोचिए अगर रवि अगले 30 दिन तक यह पांच

[22:39]

नियम फॉलो करें। हर लॉस के बाद 10 मिनट का

[22:42]

ठहराव ले। पोजीशन साइज कभी ना बढ़ाए। हर

[22:46]

ट्रेड से पहले अपनी वजह लिखें। दिन की लॉस

[22:48]

लिमिट हिट होने पर रुक जाए और हफ्ते के

[22:51]

अंत में अपने लॉस को कैटेगराइज करें। तो

[22:53]

उसकी ट्रेडिंग बिल्कुल अलग दिखेगी। उसके

[22:56]

खराब दिन अब बहुत खराब नहीं होंगे। वह

[22:59]

सिर्फ थोड़े खराब रहेंगे। उसके अच्छे दिन

[23:02]

जो पहले रिवेंज ट्रेडिंग की वजह से बर्बाद

[23:04]

हो जाते थे। अब अच्छे ही रहेंगे। और सबसे

[23:08]

बड़ी बात उसका दिमाग धीरे-धीरे यह सीख

[23:11]

जाएगा कि एक लॉस के बाद कुछ करना जरूरी

[23:14]

नहीं है। बल्कि एक लॉस के बाद रुकना ही

[23:16]

सबसे ज्यादा प्रॉफिटेबल काम

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