Skip to content

Digital Electronics One Shot Video: B.Tech 4th Sem UNIT-01 के Subtitles डाउनलोड करें

View Summary
🔥01 Digital Electronics One Shot Video | Exam time Special  B.Tech 4th Semester UNIT-01 / JE CLASSES

🔥01 Digital Electronics One Shot Video | Exam time Special B.Tech 4th Semester UNIT-01 / JE CLASSES

JE CLASSES BTech

2297 segments HI
Save subtitles to LunaNotes

SRT - Most compatible format for video players (VLC, media players, video editors)

VTT - Web Video Text Tracks for HTML5 video and browsers

TXT - Plain text with timestamps for easy reading and editing

Subtitle preview

Scroll to view all subtitles

[00:08]

हेलो स्टूडेंट्स, वेलकम टू जेई क्लासेस।

[00:10]

मेरा नाम है मोनिका पाल और आप सभी

[00:12]

स्टूडेंट्स मेरे साथ पढ़ते हैं डिजिटल

[00:13]

इलेक्ट्रॉनिक्स। तो डिजिटल इलेक्ट्रॉनिक्स

[00:15]

में आज हम करने वाले हैं यूनिट वन की वन

[00:17]

शॉट। यानी आज के इस लेक्चर में हम एक ही

[00:20]

लेक्चर में पूरी यूनिट वन कंप्लीट करने

[00:23]

वाले हैं। तो फटाफट से स्टार्ट करते हैं।

[00:25]

ये वन शॉट क्लासेस जो है एग्जामिनेशन

[00:27]

पॉइंट ऑफ व्यू से आपके लिए बहुत

[00:28]

इंपॉर्टेंट है क्योंकि इसमें एक ही सिंगल

[00:30]

लेक्चर में आपकी कंप्लीट यूनिट का रिवीज़

[00:32]

हो जाता है। तो यहां हम स्टार्ट करेंगे

[00:34]

यूनिट वन जिसका नाम है लॉजिक सिंपलीफिकेशन

[00:36]

एंड कॉम्बिनेशन लॉजिक डिज़ाइन। तो जैसे कि

[00:39]

नाम से ही पता चल रहा है। हम यहां लॉजिक

[00:40]

सिंपलीफिकेशन पढ़ेंगे। बट उससे पहले यानी

[00:43]

बुलियन अलजेब्रा भी हम आगे पढ़ेंगे। बट

[00:45]

उससे पहले हम पढ़ेंगे कि नंबर सिस्टम क्या

[00:47]

होता है? बेसिकली नंबर सिस्टम क्या है?

[00:50]

नंबर सिस्टम में हम बहुत सारे न्यूमरल्स

[00:52]

या सिंबल्स का यूज़ करते हैं। यानी कि किसी

[00:54]

भी नंबर सिस्टम में वी हैव फाइनाइट सेट ऑफ़

[00:57]

सिंबल्स या कह सकते हैं वी हैव फिक्स्ड

[00:59]

सेट ऑफ़ सिंबल्स बाय व्हिच यू कैन

[01:01]

रिप्रेजेंट अ नंबर इन दैट नंबर सिस्टम।

[01:03]

किसी भी नंबर सिस्टम में किन्हीं नंबर्स

[01:05]

को बड़े से बड़े नंबर्स को रिप्रेजेंट करने

[01:07]

के लिए आप कुछ सिंबल्स या कह लीजिए

[01:09]

न्यूमरल्स का यूज़ करते हैं। और वो हर एक

[01:12]

नंबर सिस्टम में क्या होता है? फिक्स।

[01:13]

एग्जांपल के लिए डेसिमल नंबर सिस्टम की जब

[01:15]

हम बात करते हैं तो डेसिमल नंबर सिस्टम

[01:17]

में जीरो से नाइन तक के डिजिट होते हैं।

[01:20]

और ज़ीरो से नाइन तक के डिजिट का यूज़ करके

[01:22]

ही आप डिजिटल नंबर सिस्टम में किसी भी बड़े

[01:24]

से बड़े नंबर को रिप्रेजेंट करते हैं। तो

[01:27]

इन एनी नंबर सिस्टम वी हैव फाइनाइट सेट ऑफ़

[01:30]

सिंबल्स। और यू कैन से वी हैव फाइनाइट सेट

[01:33]

ऑफ़ न्यूमरल्स बाय व्हिच यू कैन रिप्रेजेंट

[01:35]

द नंबर इन दैट नंबर सिस्टम। तो नंबर

[01:38]

सिस्टम में हम क्या करते हैं? नंबर को

[01:41]

मैथमेटिकल वे में रिप्रेजेंट करते हैं।

[01:44]

बेसिकली जो नंबर होता है उसमें डिफरेंट

[01:46]

डिजिट या डिफरेंट न्यूमेरल जो है उसकी

[01:48]

वैल्यू को रिप्रेजेंट करते हैं। तो नंबर

[01:50]

सिस्टम क्या है? आप ये भी कह सकते हैं

[01:52]

नंबर सिस्टम इज़ अ वे टू रिप्रेजेंट एंड

[01:54]

एक्सप्रेस नंबर्स यूजिंग अ कंसिस्टेंट सेट

[01:56]

ऑफ़ सिंबल्स और डिजिट्स। उसमें हम सिंबल्स

[01:58]

भी डिजिट भी। बेसिकली अगर हम टू बना रहे

[02:00]

हैं, थ्री बना रहे हैं। ये भी एक तरह का

[02:02]

सिंबल ही तो है। इस सिंबल को हमने कहा ये

[02:04]

थ्री हो गया। एक सिंबल ऐसे बनाया फोर हो

[02:06]

गया। अब मैंने कहा एक सिंबल ऐसा हो गया।

[02:08]

आपने कहा ये ज़ीरो हो गया। तो हमने जो

[02:10]

सिंबल्स बनाए इन्हीं को हम क्या कहते हैं?

[02:12]

डिजिट भी कहते हैं। अ नंबर सिस्टम यूजज़ अ

[02:14]

बेस ऑफ रेडिक्स टू रिप्रेजेंट वैल्यूज़।

[02:17]

किसी भी नंबर सिस्टम में जो हमारे पास

[02:19]

सिंबल्स होते हैं या कह लीजिए न्यूमरल्स

[02:21]

होते हैं जिनकी हेल्प से हम नंबर्स को

[02:22]

रिप्रेजेंट करते हैं। उसी को हम कहते हैं

[02:25]

उसका बेस है रेडिक्स। फॉर एग्जांपल डेसिमल

[02:27]

नंबर सिस्टम की जब हम बात करते हैं तो

[02:29]

डेसिमल नंबर सिस्टम में ज़ीरो से नाइन तक

[02:31]

के डिजिट हैं। यानी कुल मिला के 10

[02:32]

डिजिट्स आर यूज़्ड इन डेसिमल नंबर सिस्टम।

[02:35]

तो आप कहेंगे डेसिमल नंबर सिस्टम का बेस

[02:37]

एडिक्स हो गया 10। तो यानी कि बेस या

[02:40]

रेडिक्स का मतलब है नंबर ऑफ न्यूमरल्स

[02:43]

यूज्ड इन दैट नंबर सिस्टम। तो बेस या

[02:45]

रेडिक्स क्या हो गया? किसी भी नंबर सिस्टम

[02:47]

में जितने नंबर्स का जितने डिजिट्स का कह

[02:49]

लीजिए जितने न्यूमरल्स का या जितने

[02:52]

सिंबल्स का आपने यूज़ किया वो इसका बेस

[02:54]

एडिक्स कहलाता है। द बेस रेफर्स टू द नंबर

[02:57]

ऑफ़ यूनिक डिजिट्स इंक्लूडिंग ज़ीरो दैट अ

[02:59]

सिस्टम यूज़ज़ टू रिप्रेजेंट अ नंबर। यानी

[03:01]

बेस किन चीज़ों को रिप्रेजेंट करता है?

[03:03]

डिजिट्स यानी कि सिंबल्स को रिप्रेजेंट

[03:05]

करता है जो कि किसी नंबर सिस्टम में नंबर

[03:07]

को रिप्रेजेंट करने के लिए यूज़ किए जाते

[03:09]

हैं। मोस्ट कॉमनली यूज़्ड नंबर सिस्टम्स आर

[03:12]

डेसिमल यानी बेस 10 नंबर सिस्टम। दूसरा है

[03:14]

बाइनरी बेस टू नंबर सिस्टम। तीसरा है

[03:17]

ऑक्टल यानी बेस एट नंबर सिस्टम और लास्ट

[03:19]

है हेक्साडेेसिमल यानी कि बेस 16 नंबर

[03:22]

सिस्टम। तो हम यहां सारे ही नंबर सिस्टम

[03:24]

की बात करेंगे।

[03:26]

तो यहां सभी नंबर सिस्टम को एक्सप्लेन

[03:28]

किया गया है। तो बेसिकली अगर हम सबसे पहला

[03:30]

नंबर सिस्टम देखें जिससे हम बहुत ज्यादा

[03:33]

यूज हुए हैं वो है हमारे डेसिमल नंबर

[03:35]

सिस्टम। तो डेसिमल नंबर सिस्टम में ज़ीरो

[03:37]

से लेके नाइन तक के डिजिट्स का यूज़ किया

[03:39]

जाता है। बाय व्हिच यू कैन रिप्रेजेंट द

[03:42]

नंबर इन डेसिमल नंबर सिस्टम। और डेसिमल

[03:44]

नंबर सिस्टम में हमने चकि यहां ज़ीरो से

[03:46]

नाइन तक के डिजिट का यूज़ किया है। यानी 10

[03:48]

न्यूमेरल्स का हम यूज़ कर रहे हैं। तो

[03:50]

हमारे डेसिमल नंबर सिस्टम का बेस या

[03:52]

रेडिक्स हो जाएगा 10। दूसरा नंबर सिस्टम

[03:54]

है बाइनरी नंबर सिस्टम। हम बाइनरी नंबर

[03:56]

सिस्टम को बेस टू नंबर सिस्टम भी हम कह

[03:57]

सकते हैं। इसमें हम किसी भी डिजिट को किसी

[04:00]

भी नंबर को रिप्रेजेंट करने के लिए ज़ीरो

[04:02]

या वन का ही यूज़ करते हैं। यानी केवल टू

[04:04]

डिजिट्स आर यूज़्ड। और इसके अलावा हम देखें

[04:06]

तो इनमें हम क्या करते हैं? हमारा जो

[04:08]

वेटेज होता है वो टू की पावर में होता है।

[04:10]

जब भी आप किसी नंबर की बात करेंगे तो उस

[04:13]

नंबर में किसी भी नंबर में हम देखते हैं

[04:16]

बीच में क्या होता है? हमारा पॉइंट जिसको

[04:18]

हम कहते हैं रेडिक्स पॉइंट। क्या कहते हैं

[04:20]

इसको?

[04:22]

रेडिक्स पॉइंट। और हम देखते हैं रेडिक्स

[04:25]

पॉइंट के जब हम लेफ्ट साइड मूव करते हैं

[04:28]

और इधर जब हम राइट साइड मूव करते हैं तो

[04:30]

हम देखते हैं कि किसी भी नंबर में कोई भी

[04:32]

अगर आप नंबर ले लें तो उसमें कुछ डिजिट्स

[04:34]

या न्यूमरल होंगे। फॉर एग्जांपल मैंने कहा

[04:37]

बेटा एक नंबर है 5 2 1 और ये 5 टू 1 क्या

[04:40]

है? हमारा डेसिमल नंबर। हमने इसका बेस

[04:43]

सफिक्स में नीचे लिख दिया है। तो ये 521

[04:46]

एक नंबर है। तो आप इसको कैसे रीड करते

[04:48]

हैं? आप इसे कहेंगे मैम ये 521 लिखा है।

[04:51]

बट ये आपने रीड कैसे किया? क्योंकि आपने

[04:53]

देखा यहां ये जो डिजिट वन है ये जो यूनिट

[04:56]

यूनिट प्लेस पर है ये हमारी क्या है? वंस

[04:59]

पे है। ये हमारी 10्स पे है और ये 100 पे

[05:03]

है। यूपी बोर्ड वाले बच्चे जो हिंदी

[05:06]

मीडियम से पढ़े हैं वो इसे कैसे पढ़ेंगे?

[05:08]

इकाई पे, दहाई पे और सैकड़ा पे। यानी हम

[05:11]

देख रहे हैं कि यहां डिजिट का जो वेटेज है

[05:14]

यह डिजिट जो हमारी 5 2 1 जो हमने डिजिट

[05:17]

यूज करी है इन सभी डिजिट का अपना कुछ

[05:20]

प्लेस वैल्यू है अपना कुछ वेटेज है यानी

[05:22]

ये वन अगर यहां पर आ रहा है तो दैट मींस

[05:24]

ये क्या है इसका वेटेज होगा 10 की पावर 0

[05:27]

इसका वेटेज होगा 10 की पावर वन इसका वेटेज

[05:30]

होगा 10 की पावर 2 और इसी तरीके से हमारा

[05:33]

वेटेज बढ़ता जाता है यानी कि हम देखते हैं

[05:37]

कि हमारे किसी भी नंबर में चाहे वो किसी

[05:40]

भी नंबर नंबर सिस्टम से बिलोंग करता हो।

[05:42]

यानी ये नंबर हमारा डेसिमल नंबर सिस्टम

[05:44]

में होता या ऑक्टल में होता या बाइनरी में

[05:46]

होता या हेक्साडेसिमल में होता तो किसी भी

[05:49]

नंबर में जो ईच न्यूमरल होता है या कह

[05:52]

लीजिए ईच डिजिट होती है उसका अपना कुछ

[05:55]

प्लेस वैल्यू या उसका अपना कुछ वेटेज होता

[05:57]

है। तो डेसिमल में ये जो वेटेज होता है ये

[06:00]

10 की पावर ज़ीरो के 10 की पावर के ऑर्डर

[06:03]

में होता है। यानी 10 की पावर 0, 10 की

[06:05]

पावर 1, 10 की पावर 2 यानी कि हम देखते

[06:07]

हैं किसी भी नंबर में चाहे वो डेसिमल नंबर

[06:10]

हो, चाहे वो बाइनरी नंबर हो, चाहे वो

[06:12]

ऑक्टल नंबर हो, चाहे वो हेक्सा नंबर हो।

[06:14]

उन सभी में हम देखते हैं कि zx पॉइंट जो

[06:17]

होता है इसके होल पार्ट और फ्रैक्शनल

[06:20]

पार्ट को डिवाइड करता है। यानी हम देखते

[06:22]

हैं लेफ्ट साइड होता है होल पार्ट और यहां

[06:25]

होता है इसका फ्रैक्शनल पार्ट।

[06:28]

तो जब हम रेडिक्स पॉइंट के लेफ्ट साइड मूव

[06:31]

करते हैं तो पावर जो होती है बेस की पावर

[06:34]

के रूप में आगे इंक्रीजिंग ऑर्डर में होता

[06:36]

है। यानी r की पावर 2, r की पावर 3 ऐसे सो

[06:40]

ऑन और पॉइंट रेडिक्स पॉइंट के राइट साइड

[06:43]

अगर देखते हैं तो बेस की पावर माइनस में r

[06:46]

की पावर -1 r की पावर -2 r की पावर -3 r

[06:50]

की पावर -4 सो ऑन तो हम देखते हैं किसी भी

[06:54]

नंबर सिस्टम में हमारा जो नंबर होता है

[06:57]

उसमें एक रेडिक्स पॉइंट का यूज़ होता है।

[07:00]

डेसिमल में इसे डेसिमल पॉइंट कहेंगे।

[07:02]

बाइनरी में इसे बाइनरी पॉइंट कहेंगे।

[07:05]

ऑक्टल में इसे ऑक्टल पॉइंट कहेंगे। हेक्सा

[07:07]

में इसे हेक्सा पॉइंट कहेंगे। तो ये

[07:09]

रेडिक्स पॉइंट होल पार्ट और फ्रैक्शनल

[07:10]

पार्ट को सेपरेट करता है। रेडिक्स पॉइंट

[07:13]

के लेफ्ट साइड जब हम मूव करते हैं तो पावर

[07:15]

जो होती है बेस की पावर इंक्रीजिंग ऑर्डर

[07:18]

में होगी और रेडिक्स पॉइंट के राइट साइड

[07:20]

बेस की पावर डिक्रीजिंग यानी माइनस में

[07:22]

होती है। तो यहां सेम चीज को एक्सप्लेन

[07:24]

किया गया है। कैसे? कि हम देख रहे हैं कि

[07:27]

डेसिमल नंबर सिस्टम में क्या होती है? बेस

[07:29]

की पावर कैसी होती है? यानी 10 की पावर की

[07:32]

फॉर्म में होता है। यानी हम जो डेसिमल

[07:35]

नंबर सिस्टम लेंगे उसमें जो ईच डिजिट होगी

[07:37]

इसमें जो डिजिट हम यूज़ करेंगे उन डिजिट का

[07:41]

जो वेटेज होगा या प्लेस वैल्यू होगा वो

[07:43]

कैसी होगा? 10 की पावर में होगा। सिमिलरली

[07:45]

जब आप बाइनरी नंबर सिस्टम की बात करेंगे

[07:47]

तो बाइनरी नंबर सिस्टम में जो हम ये बिट्स

[07:49]

यूज़ कर रहे हैं 0 1 0 1 यूज़ कर रहे हैं।

[07:52]

इन सभी का जो प्लेस वैल्यू होगा वो टू की

[07:54]

पावर के ऑर्डर में होगा। इसी तरीके से

[07:57]

ऑक्टल नंबर सिस्टम हमारा ऐसा नंबर सिस्टम

[07:59]

है जिसका बेस होता है एट तो इसको बेस एट

[08:03]

नंबर सिस्टम भी कहते हैं। इसमें किसी भी

[08:05]

नंबर को रिप्रेजेंट करने के लिए हम 0 1 2

[08:08]

3 4 5 6 7 तक के डिजिट्स का यूज़ करते हैं।

[08:11]

इसमें भी जो हमारा नंबर हम रिप्रेजेंट

[08:14]

करेंगे ऑक्टल नंबर सिस्टम में उस नंबर की

[08:17]

जो प्लेस वैल्यू होगी उसमें डिजिट्स की जो

[08:19]

प्लेस वैल्यू होगी वो कहां होगी? एट की

[08:21]

पावर के ऑर्डर में होगी। यानी बेस के बेस

[08:24]

के बेस की पावर के रूप में होगी। इसी

[08:26]

तरीके से फोर्थ टाइप ऑफ़ नंबर सिस्टम इज़

[08:29]

हेक्साडेसिमल नंबर सिस्टम। हेक्साडेसिमल

[08:31]

नंबर सिस्टम एक ऐसा नंबर सिस्टम है जिसमें

[08:33]

हम किसी भी नंबर को रिप्रेजेंट करने के

[08:36]

लिए 16 डिजिट्स और सिंबल्स का यूज़ करते

[08:38]

हैं। बेसिकली इसमें ज़ीरो से नाइन तक की

[08:40]

हमारे डिजिट होती है जो कि हमारे 10

[08:43]

नंबर्स को रिप्रेजेंट करती है। तो ज़ीरो से

[08:45]

लेके नाइन तक हम इसमें डिजिट यूज़ करेंगे।

[08:48]

और फिर इसके बाद अल्फाबेट्स ए बी सी डी ई

[08:50]

एफ का यूज़ करते हैं। तो हेक्साडेसिमल नंबर

[08:52]

सिस्टम हमारा ज़ीरो से 15 तक के डिजिट 15

[08:56]

तक के डिजिट को रिप्रेजेंट कर सकता है।

[08:58]

जहां ज़ीरो से नाइन तक हम डिजिट और फिर हम

[09:01]

10 से 15 तक के लिए अल्फाबेट्स ए बी सी डी

[09:04]

ई एफ का यूज़ करते हैं। हेक्साडेेसिमल नंबर

[09:06]

सिस्टम में हमने चकि यहां पर 16 सिंबल्स

[09:09]

या कह लीजिए 16 न्यूमरस का यूज़ किया है।

[09:12]

तो इसलिए इसको हम बेस 16 नंबर सिस्टम कहते

[09:15]

हैं। यहां भी हेक्साडेेसिमल नंबर सिस्टम

[09:18]

में भी जो हम डिजिट रिप्रेजेंट करेंगे हर

[09:20]

एक डिजिट का जो प्लेस वैल्यू होगा वह 16

[09:22]

की पावर की फ़ में होगा। अब इंपॉर्टेंट है

[09:25]

आपका नंबर सिस्टम कन्वर्ज़ एग्जामिनेशन में

[09:28]

इससे बेस्ड क्वेश्चन आपसे पूछे जाते हैं।

[09:30]

दो-दो नंबर का क्वेश्चन आएंगे। बहुत इजी

[09:32]

है। इसमें आपको जरूरी नहीं है कि पूरा

[09:34]

प्रोसेस दिखाना। आप डायरेक्टली आंसर भी

[09:36]

लिखेंगे तो भी आपको दो नंबर बहुत ईज़ली मिल

[09:39]

जाएंगे। तो नंबर सिस्टम कन्वर्ज़ हालांकि

[09:41]

स्टूडेंट्स को थोड़ा सा ट्रिकी लगता है।

[09:43]

वो इसलिए लगता है कि जब तक हमें कोई चीजें

[09:45]

समझ में नहीं आती वो मुश्किल लगती है। बट

[09:47]

आप उसको अगर प्रैक्टिस में ले आते हैं तो

[09:49]

आपके लिए इतना इजी हो जाता है कि आप बहुत

[09:51]

आसानी से दो नंबर यहां से गेन कर सकते

[09:53]

हैं। तो डेसिमल नंबर नंबर सिस्टम कन्वर्ज़

[09:56]

क्या है? या इसको बेस कन्वर्ज़ भी कहते

[09:58]

हैं। इसको हम बेस कन्वर्ज़ भी कहते हैं।

[10:01]

बेस कन्वर्ज़ मेथड या नंबर सिस्टम कन्वर्ज़

[10:04]

मेथड के नाम से भी इसको जानते हैं।

[10:06]

बेसिकली बेस कन्वर्ज़ या नंबर सिस्टम

[10:08]

कन्वर्ज़ का मतलब है नंबर सिस्टम कन्वर्ज़

[10:10]

यानी एक टाइप के नंबर सिस्टम को दूसरे

[10:12]

टाइप के नंबर सिस्टम में चेंज करना। तो जब

[10:14]

भी आप एक नंबर को एक नंबर सिस्टम से दूसरे

[10:18]

नंबर सिस्टम में चेंज करते हो तो आप उसका

[10:21]

क्या चेंज कर रहे होते हैं? बेस चेंज कर

[10:22]

रहे थे। सपोज़ आपको कोई नंबर दिया है जो कि

[10:25]

डेसिमल नंबर सिस्टम से बिलोंग करता है और

[10:27]

आपको कहा जाए इस डेसिमल नंबर सिस्टम से इस

[10:30]

नंबर को बाइनरी में चेंज कर दो। तो आप बेस

[10:33]

10 का कन्वर्ज़ कर रहे हैं बेस टू में। तो

[10:34]

इसलिए इसको बेस कन्वर्ज़ भी कहा जाता है।

[10:37]

अगर हम बात करें नंबर सिस्टम कन्वर्ज़ के

[10:39]

टाइप्स की तो देयर आर 12 टाइप्स ऑफ़

[10:41]

कन्वर्ज़। कुल मिला के हमारे 12 तरह के

[10:43]

कन्वर्ज़ के क्वेश्चन आते हैं। जिनमें सारे

[10:46]

नाम जो है यहां पर लिखे हुए हैं। साथ ही

[10:49]

साथ इन सारे कन्वर्ज़ की थ्योरी भी

[10:51]

एक्सप्लेन की गई है। मैंने इसको याद रखने

[10:53]

का बहुत ही आसान तरीका आपको बताया था कि

[10:55]

अगर आपको ये याद रखना हो तो आप इसको कैसे

[10:57]

याद रख पाएंगे।

[11:00]

यहां पर नंबर सिस्टम के बारे में थोड़ी और

[11:02]

हमने इंफॉर्मेशनेशन लिखी है। इन एनी नंबर

[11:04]

सिस्टम वी हैव फाइनाइट सेट ऑफ़ सिंबल्स।

[11:06]

न्यूमरस जिनको कहते हैं। और हर एक नंबर

[11:09]

सिस्टम का हमारा कुछ बेस या रेडिक्स होता

[11:11]

है जिसे हम R से रिप्रेजेंट करते हैं। और

[11:13]

नंबर ऑफ़ सिंबल्स या नंबर ऑफ़ न्यूमरस जो हम

[11:16]

किसी नंबर सिस्टम में यूज़ करते हैं उसी को

[11:17]

हम उसका क्या कहते हैं? बेस या रेडिक्स

[11:20]

कहते हैं। नंबर में हम देखते हैं। मैंने

[11:22]

बताया अभी कि हमारे किसी भी नंबर सिस्टम

[11:25]

के जो नंबर है उसको हम पेरेंट यानी कि

[11:29]

ब्रैकेट में रिप्रेजेंट करते हैं। उसका जो

[11:31]

बेस होता है या सफिक्स में लिखा जाता है।

[11:33]

मैंने बताया था किसी भी नंबर सिस्टम में

[11:35]

जो रेडिक्स पॉइंट है उसके होल पार्ट और

[11:37]

फ्रैक्शनल पार्ट को सेपरेट करता है। और

[11:39]

किसी भी नंबर सिस्टम में नंबर को हम

[11:41]

कोफिशिएंट को मल्टीप्लाई बाय पावर ऑफ़ बेस

[11:44]

से रिप्रेजेंट कर सकते हैं। यानी जो

[11:46]

कोफिशिएंट क्या होगा? वो डिजिट या वो

[11:48]

सिंबल जो आपने इस नंबर सिस्टम में यूज़

[11:50]

किया है। जैसे कि कोई वैल्यू 3 टू फाइव

[11:53]

मैंने नंबर दे दिया। तो उसमें डिजिट क्या

[11:55]

है? एक डिजिट थ्री, दूसरी डिजिट टू, तीसरी

[11:57]

डिजिट फाइव। तो हम क्या करेंगे? ये जो

[11:59]

डिजिट है उन्हीं को हम कोफिशिएंट कहते

[12:01]

हैं। तो कोफिशिएंट को मल्टीप्लाई बाय पावर

[12:03]

ऑफ़ बेस करते हैं। ठीक है? अकॉर्डिंग टू

[12:07]

प्लेस वैल्यू। तो हर एक नंबर सिस्टम का

[12:08]

फॉर्मेट जो होता है ऑलमोस्ट कॉमन ही होता

[12:10]

है। नंबर सिस्टम में मैंने बता दिया चार

[12:12]

तरह के नंबर सिस्टम होते हैं। डेसिमल,

[12:15]

बाइनरी, ऑक्टल, हेक्सा। ठीक है? आप डेसिमल

[12:18]

नंबर सिस्टम में या किसी भी नंबर सिस्टम

[12:20]

में होल पार्ट ऑफ़ फ्रैक्शन पार्ट होता है

[12:22]

जो बाइनरी पॉइंट इसको सेपरेट करता है।

[12:24]

यहां पर आई इंपॉर्टेंट बात हमारी नंबर

[12:26]

सिस्टम कन्वर्ज़ की। नंबर सिस्टम कन्वर्ज़

[12:29]

में जैसे कि हमने बताया 12 टाइप ऑफ़

[12:30]

कन्वर्ज़ होते हैं। इसको याद रखने के तरीके

[12:32]

बहुत आसान हैं। जैसे कि सबसे पहले आप

[12:35]

बाइनरी को रेफरेंस मान लो। तो बाइनरी को

[12:37]

आपको किस में करना है? ऑक्टल में या

[12:38]

बाइनरी को आपको किस में करना हो? डेसिमल

[12:40]

में या बाइनरी को किस में करना है? हेक्सा

[12:42]

में। इसी तरीके से अब आप ऑक्टल को मान लो।

[12:45]

क्योंकि हम बेस को इंक्रीजिंग ऑर्डर में

[12:46]

ले रहे हैं। सबसे छोटा बेस किसका है?

[12:48]

बाइनरी का। टू। उससे बड़ा बेस किसका?

[12:50]

ऑक्टल का। एट। उससे बड़ा बेस किसका है?

[12:53]

डेसिमल का। 10 उससे बड़ा बेस किसका है?

[12:55]

हेक्साडेसिमल का। यानी 16। तो सबसे पहले

[12:57]

हम बाइनरी का ऑक्टल, बाइनरी का डेसिमल और

[12:59]

बाइनरी का हेक्सा। फिर ऑक्टल का बाइनरी,

[13:01]

ऑक्टल का डेसिमल और ऑक्टल का हेक्सा में।

[13:03]

अब हम डेसिमल को रेफरेंस मानेंगे। डेसिमल

[13:05]

को बाइनरी में डेसिमल को ऑक्टल में डेसिमल

[13:07]

को हेक्सा में यहां मैं हेक्सा को बाइनरी

[13:09]

हेक्सा को ऑक्टल और हेक्सा को डेसिमल में

[13:11]

चेंज कर रहा हूं। अब आप देख रहे हैं यहां

[13:13]

बेस टू को बेस 8 में बेस टू को बेस 10 में

[13:16]

बेस टू को 16 में बेस 8 को टू में बेस 8

[13:18]

को 10 में बेस 8 को 16 में इसी तरीके से

[13:21]

बेस 10 को यहां बेस टू में बेस एट में बेस

[13:24]

16 में कन्वर्ट कर रहे हैं। यहां बेस 16

[13:26]

को बेस टू में बेस एट में और बेस 10 में

[13:28]

हम कन्वर्ज़ करना चाह रहे हैं। तो कुल मिला

[13:31]

के 12 टाइप्स ऑफ़ कन्वर्ज़ टेक्निक्स आर

[13:34]

देयर।

[13:36]

अब उसके बाद हम बात करते हैं कि जो हमारा

[13:39]

ये मेथड है वो क्या होगा? तो वैसे तो 12

[13:43]

टाइप ऑफ़ कन्वर्ज़ जो है उनको वन बाय वन याद

[13:45]

रख पाना बड़ा मुश्किल होता है। तो मैंने

[13:47]

बताया था कि सिंगल मेथड से ये आप तीन

[13:50]

कन्वर्ज़ कर सकते हैं। जैसे पहला कन्वर्ज़

[13:52]

है जब आपको क्या करना हो? एनी अदर नंबर

[13:55]

सिस्टम को डेसिमल में कन्वर्ट करना हो।

[13:56]

बाय डिफ़ॉल्ट कुछ ये लिखा आ गया। आप इसको

[13:58]

इग्नोर करें। एनी अदर नंबर सिस्टम को आपको

[14:01]

किसमें चेंज करना हो? डेसिमल में चेंज

[14:03]

करना चाह रहे हो। यानी कि बाइनरी, ऑक्टल

[14:05]

या हेक्सा को किस में चेंज करना हो?

[14:07]

डेसिमल में। यानी बेस टू का कन्वर्ज़ बेस

[14:09]

10 में हो या बेस एट का कन्वर्ज़ बेस 10

[14:12]

में हो या बेस 16 का कन्वर्ज़ बेस 10 में

[14:14]

हो। इन सभी के लिए आपको एक ही मेथड का यूज़

[14:17]

करना है। तो यानी इसमें हम बाइनरी टू

[14:19]

डेसिमल, ऑक्टल टू डेसिमल, हेक्सा टू

[14:21]

डेसिमल तीनों जो कन्वर्ज़ है वो एक ही बारे

[14:23]

में समझ लेंगे। मैंने बताया था इसको क्या

[14:25]

करना है? जो भी नंबर सिस्टम आपको दे रखा

[14:27]

हो। यानी बाइनरी को करना हो, ऑक्टल को

[14:30]

करना हो या हेक्सा को करना हो। उस नंबर

[14:32]

सिस्टम में हम क्या करेंगे? हर एक डिजिट

[14:34]

को कैसे लिखेंगे? कोफिशिएंट मल्टीप्लाई

[14:37]

बाय बेस की पावर और हर एक टर्म को ऐड कर

[14:40]

देंगे। जैसे एक एग्जांपल यहां पर लिखा हुआ

[14:42]

है।

[14:44]

बाइनरी का एक एग्जांपल है जो कि है हमारा

[14:46]

1001.11

[14:49]

तो आप देख रहे हैं यहां क्या है? बीच में

[14:50]

रेडिक्स पॉइंट है। रेडिक्स पॉइंट का मतलब

[14:53]

है लेफ्ट साइड हमारा बाइनरी नंबर का होल

[14:55]

पार्ट दिया है और राइट साइड हमारा

[14:57]

फ्रैक्शनल पार्ट दिया है। तो हम क्या

[14:59]

करेंगे? पॉइंट के इस तरफ जो हमारे डिजिट

[15:02]

लिखे हैं, बिट लिखे हैं यानी कोफिशिएंट

[15:03]

लिखे हैं, उसको मल्टीप्लाई बाय बेस की

[15:05]

पावर इसको भी मल्टीप्लाई बाय बेस की पावर

[15:07]

इसको भी मल्टीप्लाई बाय बेस की पावर और

[15:10]

कैसे? अकॉर्डिंग टू प्लेस वैल्यू। तो पहला

[15:12]

डिजिट जो है वन तो वन को मल्टीप्लाई

[15:15]

करेंगे 2 की पावर ज़ीरो से। मैंने बताया था

[15:16]

बाइनरी में क्या होती है? डिजिट का प्लेस

[15:19]

वैल्यू टू की पावर के पॉइंट के राइट साइड

[15:21]

इंक्रीजिंग ऑर्डर में। पॉइंट के लेफ्ट

[15:23]

साइड डिक्रीजिंग ऑर्डर में होता है। दूसरी

[15:25]

बिट है ज़ीरो। ज़ीरो को मल्टीप्लाई बाय 2 की

[15:27]

पावर वन। तीसरी डिजिट है वन। वन को

[15:29]

मल्टीप्लाई बाय 2 पावर 2। अगर एक और डिजिट

[15:32]

होती तो भी आप इसे आगे लिखते। हर एक टर्म

[15:34]

को हमें ऐड करना है। तो पहली टर्म हमारी

[15:37]

क्या आ जाएगी? इसको यहां सॉल्व कर लेते

[15:39]

हैं क्योंकि ये पता नहीं क्या हो गया।

[15:43]

इसको लिख लेते हैं दोबारा।

[15:50]

यहां यह हो गया 1 की 1 * 4 2 की पावर 2

[15:56]

कितना हो गया 4 प्लस दूसरा हो गया 0 * 2

[16:00]

की पावर 1 यानी कि टू तीसरा हो गया 1 *

[16:04]

बाय 2 की पावर 0 यानी कि 1 और पॉइंट के इस

[16:08]

साइड हम लिख रहे हैं 1 * बाय 0.5 क्यों?

[16:13]

क्योंकि 2 की पावर -1 का मतलब है 1/2 और 1

[16:16]

को क्या लिख सकते हैं? 0.5 नेक्स्ट टर्म

[16:19]

है 1 * बाय 2 की पावर -2 और 2 पावर -2 का

[16:25]

मतलब है 1 / 4 जो कि हो जाएगा 0.25।

[16:29]

ठीक है? अब हमें क्या करना है? इन सभी

[16:31]

टर्म्स को ऐड करना है। पहली टर्म आ गई 4,

[16:34]

दूसरी टर्म आ गई 0, तीसरी टर्म आ गई वन।

[16:37]

और पॉइंट के इस तरफ जब हम जा रहे हैं, तो

[16:40]

हम देख रहे हैं यह आ गया 0.5

[16:43]

और यह आ गया हमारा क्या?

[16:46]

1 * 0.5 तो ये हो गया 0.25 तो हमारा होल

[16:51]

पार्ट क्या आ गया? 5 और फ्रैक्शनल पार्ट

[16:54]

क्या आ गया?

[16:56]

75 और यही हमारा क्या हो जाएगा? आंसर हो

[17:00]

जाएगा।

[17:02]

ठीक है? तो हम देख रहे हैं हमने क्या

[17:05]

टेक्निक यूज़ करी? जो भी हमें गिवन नंबर

[17:07]

सिस्टम में किसी भी नंबर सिस्टम में हमें

[17:09]

जो नंबर दिया है जैसे यहां पहला जो

[17:11]

एग्जांपल हमने किया है बाइनरी को डेसिमल

[17:13]

में तो हमने बाइनरी में जो हमें नंबर दिया

[17:16]

था उसके हर एक डिजिट को लिखा और उसे

[17:18]

अकॉर्डिंग टू प्लेस वैल्यू उसमें हम बेस

[17:20]

की पावर से उसे मल्टीप्लाई करते चले गए।

[17:22]

सिमिलर टेक्निक इज़ एप्लीकेबल फॉर अदर नंबर

[17:25]

सिस्टम। यानी कि अगर हमें अब ऑक्टल को

[17:28]

डेसिमल में करना है। हमें हेक्सा को

[17:30]

डेसिमल में करना है तो भी हम सेम टेक्निक

[17:32]

लगाएंगे।

[17:34]

अब उसके अलावा हमारा कन्वर्जन है। अब आपको

[17:37]

क्या करना हो? यदि हमें कन्वर्ट करना हो

[17:39]

किसको? अगर हमें कन्वर्ट करना हो किसको?

[17:46]

डेसिमल को एनी अदर नंबर सिस्टम में। ठीक

[17:50]

है?

[17:53]

डेसिमल टू एनी अदर नंबर सिस्टम। यहां लिख

[17:56]

देते हैं। अब यह हमारा क्या हो गया?

[17:59]

डेसिमल टू

[18:02]

एनी

[18:04]

अदर नंबर सिस्टम

[18:08]

जो हमने अभी प्रीवियस क्वेश्चन ये डिस्कस

[18:11]

किया है इसमें हमने जो ये एग्जांपल लिया

[18:13]

है ये एग्जांपल था हमारा जब हम क्या चेंज

[18:16]

कर रहे हैं जब हम बाइनरी को डेसिमल में

[18:18]

चेंज कर रहे हैं। इसी तरीके से अगर हम एक

[18:20]

और एग्जांपल ले लें। हम एग्जांपल ले लें

[18:24]

जो कि नंबर है 23 ऑक्टल का नंबर है और इसे

[18:29]

चेंज कीजिए किसमें? डेसिमल में। तो सेम

[18:31]

टेक्निक लगाएंगे। पहली डिजिट क्या है? 3 *

[18:35]

बेस की पावर 8 0 दूसरा टर्म है 2 * 8 पावर

[18:39]

1 तो ये कितना हो गया? 2 * 8 और ये हो गया

[18:43]

3 * 1 तो ये कितना हो गया? 8 * 2 = 16 और

[18:47]

ये हो गया थ्री इक्व टू आ गया 19 आंसर

[18:51]

डेसिमल का क्या आ गया 19 आ गया क्लियर तो

[18:55]

चाहे हेक्सा हो ऑक्टल हो या बाइनरी हो सेम

[18:58]

टेक्निक लगाएंगे अगर मान लीजिए आपको दिया

[19:01]

होता हेक्सा नंबर और हेक्सा को चेंज करने

[19:04]

के लिए कहा जाता किस में डेसिमल में चेंज

[19:07]

कीजिए तो आप इस क्वेश्चन को कैसे करेंगे

[19:10]

तो इसका भी सेम स्यूशन सेम टेक्निक से हम

[19:12]

करेंगे पहली डिजिट है वन दूसरी डिजिट है a

[19:16]

का मतलब होता है 10 तो 10 को मल्टीप्लाई

[19:19]

बाय करेंगे 16 की पावर 0 से और वन को

[19:21]

मल्टीप्लाई बाय करेंगे 16 की पावर 1 से तो

[19:24]

ये हो जाएगा 1 * 16 और ये हो जाएगा 10 *

[19:28]

16 की पावर 0 यानी कि वन तो ये बन गया 16

[19:32]

और ये बन गया 10 तो आंसर आ गया 26 जो कि

[19:36]

डेसिमल का

[19:38]

तो आप देख रहे हैं चाहे बाइनरी टू डेसिमल

[19:41]

हो ऑक्टल टू डेसिमल हो या हेक्सा टू

[19:43]

डेसिमल हो सेम मेथड ही हम फॉलो करते हैं।

[19:46]

अब नेक्स्ट कन्वर्शन जो है नेक्स्ट मेथड

[19:49]

हमारा आता है। नेक्स्ट मेथड हमारे बाकी के

[19:52]

या तीन तो हमने टेक्निक समझ ली। बाइनरी टू

[19:55]

डेसिमल। फिर हमने पढ़ लिया ऑक्टल टू

[19:57]

डेसिमल। फिर हमने पढ़ लिया हेक्सा टू

[19:59]

डेसिमल। यहां हम तीन जो कन्वर्ज़ है वो एक

[20:04]

ही सिंबल मेथड से पढ़ेंगे जिसमें हम

[20:06]

डेसिमल टू एनी अदर नंबर सिस्टम। डेसिमल टू

[20:09]

एनी अदर नंबर सिस्टम का मतलब है जब आपको

[20:11]

क्या करना हो? जब आपको डेसिमल को चेंज

[20:15]

करना हो किस में?

[20:18]

बाइनरी में।

[20:20]

जो अभी पढ़ा है ना ठीक उसका उल्टा डेसिमल

[20:23]

को बाइनरी में। या आपको करना हो क्या?

[20:26]

डेसिमल को ऑक्टल में या आपको करना हो

[20:31]

डेसिमल को हेक्सा में। यानी आप डेसिमल को

[20:35]

एनी अदर नंबर सिस्टम में चेंज करना चाह

[20:37]

रहे हैं। तो हमारी क्या मेथड इसमें हमें

[20:40]

फॉलो करना है? तो मैंने बताया था इसमें

[20:43]

होल पार्ट और फ्रैक्शनल पार्ट के लिए

[20:45]

हमारी अलग-अलग तरीके हैं। तो होल पार्ट के

[20:49]

लिए हम क्या करते हैं और फ्रैक्शनल पार्ट

[20:52]

के लिए हमें क्या करना है? दोनों का

[20:56]

एक बार तरीका बता देते हैं। क्या है? तो

[20:59]

होल पार्ट के लिए हम क्या करते हैं?

[21:03]

होल पार्ट के लिए जो हमारा डेसिमल नंबर

[21:05]

सिस्टम जो भी हमारा डेसिमल नंबर होता है

[21:08]

उस डेसिमल नंबर को डिवाइड करते हैं किससे?

[21:11]

दूसरे नंबर के बेस से। फॉर एग्जांपल

[21:14]

डेसिमल को बाइनरी में चेंज करना है। तो

[21:16]

डेसिमल के होल पार्ट को आप बाइनरी के बेस

[21:18]

यानी टू से डिवाइड करेंगे। ठीक? अब इसमें

[21:21]

क्या करना है? आपको बेस से डिवाइड करते

[21:24]

समय जो हमारे रिमेंडर है उनको क्या करना

[21:28]

है? रिमेंडर

[21:30]

को नोट डाउन

[21:35]

ठीक है और कब तक करना है आपको जब तक आपका

[21:40]

जो रिमेंडर है

[21:44]

वो लेस देन क्या ना आ जाए आपके डेसिमल से

[21:49]

या फिर क्या ना हो जाए कंप्लीट डिवीजन ना

[21:52]

हो जाए कंप्लीटली डिवाइड हो जाए जब तक आप

[21:55]

डिवीजन करते रहेंगे

[21:59]

तो इसमें हम क्या करेंगे? होल पार्ट है

[22:01]

उसको दिए गए बेस से डिवाइड करेंगे। कब तक

[22:03]

करेंगे? जब तक हमारा जो रिमाइंडर है वो

[22:05]

डेसिमल नंबर से या तो छोटा ना आ जाए या

[22:07]

हमारा डेसिमल नंबर कंप्लीटली डिवाइड ना हो

[22:09]

जाए। इस केस में जो हमारे रिमाइंडर है

[22:11]

उनको नोट डाउन करते जाते हैं और रिमाइंडर

[22:14]

को हम अपवर्ड यानी बॉटम टू

[22:19]

टॉप

[22:21]

नीचे से ऊपर की तरफ जो हमारी रिमाइंडर बिट

[22:24]

है उनको लिख देते हैं। वही हमारा आंसर हो

[22:26]

जाता है। नेक्स्ट है हमारा क्या है?

[22:28]

फ्रैक्शन पार्ट। फ्रैक्शनल पार्ट के लिए

[22:30]

हम क्या करेंगे? जो डेसिमल नंबर है उसको

[22:34]

हम मल्टीप्लाई करेंगे किससे? बेस से। ठीक

[22:37]

है? बेस से मल्टीप्लाई करते जाएंगे और जो

[22:41]

एक्स्ट्रा बिट होंगे नोट डाउन दी नोट डाउन

[22:44]

दी एक्स्ट्रा बिट एक्स्ट्रा बिट क्या आएगी

[22:46]

हमारा डेसिमल पार्ट जो है ये फ्रैक्शनल

[22:49]

पार्ट है फ्रैक्शनल पार्ट यानी इट कंटेन

[22:52]

रेडिक्स पॉइंट इसमें रेडिक्स पॉइंट होगा

[22:54]

तो रेडिक्स पॉइंट के लेफ्ट राइट साइड जो

[22:56]

भी हमें डिजिट मिलेगी उसको हम एक्स्ट्रा

[22:58]

बिट काउंट करेंगे तो उसको हमें क्या करना

[23:00]

है नोट डाउन दी एक्स्ट्रा

[23:06]

डिजिट जो एक्स्ट्रा डिजिट डिजिट है उसको

[23:08]

नोट करना है और अप टू थ्री स्टेप आपको

[23:14]

क्या करना है मल्टीप्लिकेशन करना है या

[23:17]

फिर जब तक हमारा प्रोडक्ट क्या ना आ जाए

[23:22]

0 0 ना हो जाए प्रोडक्ट टर्म आपकी क्या ना

[23:26]

हो जाए जीरो ना हो जाए फिर आप क्या करेंगे

[23:29]

यह जो आपने एक्स्ट्रा बिट लिखी है इनको

[23:32]

टॉप से बॉटम की तरफ लिख देते हैं और यही

[23:36]

आपका आंसर होगा।

[23:38]

क्लियर? मेथड समझना इंपॉर्टेंट है क्योंकि

[23:42]

तीनों टेक्निक में यही एप्लीकेबल है। चाहे

[23:45]

आप डेसिमल को बाइनरी करें, डेसिमल को

[23:48]

ऑक्टल करें या डेसिमल को हेक्सा करें।

[23:53]

हमें एक क्वेश्चन दे रखा है। ए केटी में

[23:55]

हमें क्वेश्चन है 5162 जो कि डेसिमल नंबर

[23:58]

है। इसको चेंज करना है बाइनरी में। तो

[24:01]

हमने नंबर को लिखा 5162 और हमें चेंज करना

[24:04]

है बाइनरी में। तो हम बेस टू से डिवाइड

[24:06]

करेंगे। जब हमने टू से डिवाइड किया। पहले

[24:08]

स्टेप में हमारा आंसर आया 2581 कंप्लीटली

[24:10]

डिवाइड हो गया। तो रिमाइंडर हो गया ज़ीरो।

[24:12]

फिर दोबारा टू से डिवाइड किया। फिर हमने

[24:14]

देखा कि कंप्लीटली डिवाइड नहीं हुआ।

[24:16]

रिमाइंडर बचा वन। फिर टू से डिवाइड करा।

[24:18]

तो इस तरीके से हम इसका सक्सेसिव डिवीज़

[24:21]

करते जाते हैं। और हम देख रहे हैं लास्ट

[24:23]

में हमारी एक बिट बच गई जो कि वन है। वन

[24:26]

कंप्लीटली यानी अब हमारा आगे टू से डिवाइड

[24:29]

नहीं हो सकता। क्योंकि जो हमारा नंबर है

[24:31]

वन वो डिवाइड किए जाने वाले नंबर से क्या

[24:33]

हो गया? छोटा हो गया। तो रिमाइंडर जब

[24:36]

हमारा क्या हो जाए? यह डेसिमल से नहीं

[24:38]

सॉरी बेस से इसको कनेक्ट कर लेना। जब

[24:40]

हमारे किससे छोटा हो जाए? जब हमारा

[24:41]

रिमाइंडर बेस से जब तक छोटा ना हो जाए।

[24:44]

जिस बेस से आप डिवाइड करें जब तक उससे

[24:46]

छोटा ना हो जाए। तो हमने देखा यहां वन आ

[24:48]

गया। रिमाइंडर अब आगे वो डिवाइड नहीं हो

[24:50]

सकता। तो यहां पे हमें इंक्लूड करना है।

[24:53]

इंक्लूडिंग रिमाइंडर जो हमारा लास्ट स्टेप

[24:55]

में रिमाइंडर अगर बच गया है कंप्लीट डिवीज़

[24:58]

नहीं हुआ तो उसको भी लेंगे। तो नीचे से

[25:01]

मैंने बताया था बॉटम टू टॉप। बॉटम टू टॉप

[25:04]

यानी नीचे से हम ये सारी बिट को नोट करते

[25:06]

जाएंगे और वही आपका आंसर हो जाएगा। तो

[25:08]

हमने नोट किया तो रिमाइंडर ये वाला भी

[25:10]

हमें इंक्लूड करना है। तो 1 0 1 फिर हमारा

[25:15]

4 टाइम 0 फिर हमारा 1 0 फिर 1 0 फिर 1 0

[25:19]

यही हमारा आंसर हो जाएगा। तो चाहे डेसिमल

[25:23]

टू बाइनरी हो बेटा या आपका डेसिमल टू

[25:26]

ऑक्टल हो या डेसिमल टू हेक्सा हो। यही

[25:28]

मेथड आपको फॉलो करना होगा। क्लियर? यहां

[25:31]

डेसिमल टू ऑक्टल का एक क्वेश्चन जो कि एक

[25:33]

केटीयू में आया है। 6273 हमारा डेसिमल

[25:36]

नंबर है व्हिच हैज़ टू बी कन्वर्टेड इनू अ

[25:39]

ऑक्टल नंबर सिस्टम। यानी बेस 10 को बेस एट

[25:41]

में कन्वर्ट कर रहे हैं। तो आप देख रहे

[25:43]

हैं एट से डिवाइड किया। जब हमने एट से

[25:45]

डिवाइड किया तो हमारा रिमाइंडर बचा वन।

[25:47]

फिर हमने एट से डिवाइड किया। अब हम जब एट

[25:49]

से डिवाइड करेंगे तो रिमाइंडर हमारा 0 1 0

[25:52]

1 नहीं आएगा। रिमाइंडर हमारा 2 4 3 कुछ भी

[25:55]

आ सकता है। सेवन तक का कोई भी डिजिट आ

[25:58]

सकता है। क्योंकि जब आप उसको किस में

[25:59]

कन्वर्ट कर रहे हैं? ऑक्टल में ऑक्टल में

[26:01]

सात से बड़ा कोई भी डिजिट हमारा नहीं

[26:03]

होगा। तो रिमाइंडर में आप देखेंगे 0 1 2 3

[26:06]

4 5 6 7 तक के नंबर आपको देखने को

[26:08]

मिलेंगे। तो यहां पर लास्ट में हमारा

[26:10]

लास्ट स्टेप में बचा वन। तो हमने वही

[26:13]

स्कीम फॉलो की 1 4201 यही हमारा आंसर हो

[26:16]

जाएगा। इसी तरीके से हम हेक्सा को भी

[26:20]

डेसिमल को भी हेक्सा में चेंज कर सकते

[26:22]

हैं। तो ये हमारे छह कन्वर्ज़ कंप्लीट हुए।

[26:25]

उसके बाद सातवां कन्वर्ज़ है हमारा क्या?

[26:27]

ऑक्टल टू बाइनरी और आठवां है बाइनरी टू

[26:29]

ऑक्टल। ऑक्टल टू बाइनरी या बाइनरी टू

[26:31]

ऑक्टल के केस में हम जो कोड यूज़ करते हैं

[26:33]

जिसका नाम है 4 टू वन। एक 4 टू वन कोड का

[26:36]

इस्तेमाल किया जाता है। क्यों? क्योंकि

[26:37]

ऑक्टल नंबर सिस्टम में सेवन से बड़ी डिजिट

[26:39]

नहीं होती। और आप देख रहे हैं जब 4 टू वन

[26:42]

को ऐड करेंगे तो सेवन ही आपका आ जाएगा।

[26:44]

इसमें हम क्या करते हैं? जैसे फॉर

[26:46]

एग्जांपल यहां बाइनरी टू ऑक्टल का कन्वर्ज़

[26:48]

दिया गया है। बाइनरी नंबर दिया है 111 1

[26:52]

इस पे हम क्या करेंगे? सभी जो बाइनरी नंबर

[26:55]

है लेफ्ट राइट साइड से हम उसके ग्रुप

[26:57]

बनाना शुरू करेंगे। तीन-तीन के ग्रुप

[26:59]

बनाएंगे। तो हमने पहला तीन बिट का ग्रुप

[27:01]

बनाया। अगला तीन बिट का ग्रुप बनाया।

[27:03]

लेकिन हमारा लास्ट ग्रुप बनाने के लिए

[27:04]

हमारे पास एक ही वन बचा है। तो इसके भी

[27:07]

तीन बिट ग्रुप बनाने के लिए हम इसमें दो

[27:09]

एक्स्ट्रा ज़ीरोज़ को ऐड कर सकते हैं। तो इस

[27:11]

तरीके से इसका भी एक ग्रुप बन गया। सभी

[27:13]

ग्रुप में हम फोर टू वन कोड की हेल्प से

[27:15]

इसको कन्वर्ट करेंगे। कैसे? वन की

[27:17]

मल्टीप्लाई वन में, टू की मल्टीप्लाई ज़ीरो

[27:19]

में, फोर की मल्टीप्लाई वन में। तो, ये

[27:20]

वाली टू वाली बिट तो ज़ीरो हो गई। तो फोर

[27:23]

और क्या हो गया ये? 4 और 1 5 इसमें आप देख

[27:26]

रहे हैं ये बीच वाली टू वाली बिट हमारी

[27:28]

ज़ीरो हो गई। 4 और 1 5 ये दोनों ज़ीरो हो गई

[27:31]

तो क्या आ गया? केवल वन। तो आंसर आया 155।

[27:35]

इसी तरीके से जब आपको ऑक्टल को बाइनरी में

[27:37]

चेंज करना हो तो ऑक्टल को बाइनरी में चेंज

[27:39]

करने के लिए हम बिल्कुल इसका अपोजिट

[27:41]

प्रोसेस लगाते हैं। यानी अब हम हर एक जो

[27:44]

ऑक्टल डिजिट है उसको लिखेंगे। हर एक ऑक्टल

[27:47]

डिजिट को तीन बिट के बाइनरी से रिप्रेजेंट

[27:49]

करेंगे। यहां हमने तीन-तीन बिट के बाइनरी

[27:51]

को जोड़ के एक ऑक्टल बिट बनाई। यहां

[27:53]

करेंगे एक ऑक्टल बिट से तीन बाइनरी बिट

[27:55]

बनानी है। तो एक ऑक्टल बिट को फोर टू वन

[27:58]

कोड की हेल्प से हमें कन्वर्ट करना है। तो

[27:59]

फाइव कब आता है? मैंने बताया था जब 1 0 1

[28:02]

हो। 4 टू 1 का मतलब है चार और एक पांच। तो

[28:04]

क्या जब ये वन हो ये वन हो ये ज़ीरो। थ्री

[28:06]

कब आएगा? जब टू और वन 1 1 हो और फोर वाली

[28:09]

बिट क्या हो? ज़ीरो। तो थ्री के लिए क्या आ

[28:11]

गया? 0 1 1 फाइव के लिए 1 0 1 यही हमारा

[28:14]

आंसर आएगा। और मैंने बताया था लेफ्ट में

[28:16]

एक्स्ट्रा बिट हमारी कोई वेटेज कैरी नहीं

[28:18]

करती। तो आप इसको ज़ीरो हटा के भी लिख सकते

[28:21]

हो। इसी तरीके से यहां पे लिख भी रखा है।

[28:24]

देखो तीन-तीन मिट के बाइनरी ग्रुप बनाते

[28:25]

हैं। इसी तरीके से हमारा एक और जो कन्वर्ज़

[28:28]

है ऑक्टल टू बाइनरी की तरह ही हेक्सा टू

[28:30]

बाइनरी या बाइनरी टू हेक्सा की अगर हम बात

[28:34]

करते हैं तो यहां हेक्सा टू बाइनरी और

[28:37]

बाइनरी टू हेक्सा के लिए हम जो कोड यूज़

[28:39]

करेंगे दैट विल बी 8421। 8421 कोड में

[28:43]

हमारा सेम मेथड होता है। जैसे कि हमने

[28:45]

ऑक्टल टू बाइनरी और बाइनरी टू ऑक्टल में

[28:47]

किया। बस अंतर बेटा क्या आ जाएगा? ऑक्टल

[28:50]

टू बाइनरी, बाइनरी टू ऑक्टल के लिए हम

[28:52]

तीन-तीन बिट के ग्रुप बनाएंगे। लेकिन यहां

[28:54]

हेक्सा टू बाइनरी और बाइनरी टू हेक्सा के

[28:56]

लिए हमें चार-चार बिट का कोड बना चार-चार

[28:58]

बिट के ग्रुप बनाने पड़ेंगे। क्योंकि हम

[29:00]

यहां फोर बिट का कोड यूज़ कर रहे हैं। तो

[29:01]

हमें यहां एक बाइनरी नंबर दिया है व्हिच

[29:03]

हैज़ टू बी कन्वर्टेड इंटू अ हेक्साडेसिमल

[29:06]

नंबर सिस्टम। यानी बेस टू को बेस 16 में

[29:08]

कन्वर्ट करना है। तो हम जो नंबर हमें दिया

[29:10]

है इसमें चार-चार बिट के ग्रुप बना लेंगे।

[29:12]

तो हम वही राइट साइड से यानी कि एलएसबी से

[29:16]

ग्रुप बनाना शुरू करेंगे। चार बिट ये हो

[29:18]

गई। ये देख रहे हो चार बिट ये चार बिट ये।

[29:20]

लेकिन लास्ट वाले में हमें डिजिट कम पड़

[29:22]

गई तो हम एक्स्ट्रा जीरो को ऐड कर लेंगे।

[29:25]

8 4 2 1 कोड लगाएंगे। बिल्कुल वैसे ही फोर

[29:28]

और टू वाली बिट क्या हो गई? 0 आठ और एक

[29:30]

क्या हो गया? नौ। यहां आप देख रहे हैं आठ

[29:33]

वाला वन है, चार वाला वन है, टू वाला जीरो

[29:35]

और वन वाला वन। तो आठ और 4 12 और एक क्या

[29:38]

हो गया? 13। यहां आप देखेंगे सारी जीरो

[29:41]

है। बाकी वन वाली वन है तो ये हो गया वन।

[29:43]

तो आंसर आ गया वन। और 13 हम हेक्साडेसिमल

[29:46]

नंबर सिस्टम में 13 नहीं लिखते। 13 की जगह

[29:49]

क्या आ जाएगा? डी। तो 1 9 यही हमारा आंसर

[29:52]

हो जाएगा।

[29:53]

बिल्कुल। वैसे ही अगर आपको क्या करना हो?

[29:56]

अब हेक्सा को चेंज करना हो किस में?

[29:59]

बाइनरी में। तो हेक्सा को बाइनरी में चेंज

[30:01]

करने के लिए हम इसका ठीक अपोजिट मार्क

[30:03]

लगाएंगे। अब हम हर एक हेक्सा डिजिट को

[30:06]

चार-चार बिट की बाइनरी में कन्वर्ट करेंगे

[30:08]

विद द हेल्प ऑफ़ 842 वन कोड। तो हमारा पहला

[30:11]

डिजिट है बी। पहला हमारा सिंबल है बी और

[30:14]

बी मैंने आपको बताया था 11 को रिप्रेजेंट

[30:16]

करता है। दूसरा है A जो कि 10 को

[30:17]

रिप्रेजेंट करेगा और टू है तो हमने इसकी

[30:20]

जगह A और B की जगह 10 और 11 लिख दिया। अब

[30:23]

10 को 81 से कन्वर्ट करेंगे तो क्या होगा?

[30:26]

आठ और दो 10 बाकी जीरो। तो आठ वाली वन, दो

[30:29]

वाली वन, चार और एक वाली जीरो कट गई। 11

[30:32]

कब होगा? 8 और 2 10 और एक 11 यानी चार

[30:35]

वाली जीरो बाकी सब वन। 84 2 की हेल्प से

[30:38]

हम टू कब बनाएंगे? जब आठ और चार वाली बिट

[30:41]

हमारी 0 हो। टू वाली वन और वन वाली भी

[30:44]

ज़ीरो रहेगी। तो इस तरीके से हमारा कन्वर्ज़

[30:46]

आ गया। 1 0 1 0 1 0 1 0 1 0 1 1 बड़ा ही

[30:50]

प्यारा सा नंबर आया अलसा। तो हम देखते हैं

[30:53]

हेक्सा टू बाइनरी। बाइनरी टू हेक्सा का

[30:55]

कन्वर्ज़ हम 4 टू 1 और 84 टू 1 कोड की

[30:58]

हेल्प से कर सकते हैं। अब लास्ट में जो दो

[31:01]

कन्वर्ज़ हमारे बचते हैं वो हैं ऑक्टल टू

[31:04]

हेक्सा और हेक्सा टू ऑक्टल। इन दो नंबर

[31:07]

सिस्टम में यानी जब भी हमें ऑक्टल को

[31:09]

हेक्सा या हेक्सा को ऑक्टल में चेंज करना

[31:11]

हो तो डायरेक्ट कन्वर्ज़ इज़ नॉट पॉसिबल। हम

[31:14]

डायरेक्टली कन्वर्ट नहीं कर सकते। हमें

[31:16]

हमेशा ऑक्टल को हेक्सा में कन्वर्ट करने

[31:19]

के लिए पहले ऑक्टल को बाइनरी में और फिर

[31:20]

बाइनरी को हम चेंज करेंगे हेक्सा में। इसी

[31:24]

तरीके से हेक्सा को ऑक्टल में चेंज करने

[31:26]

के लिए पहले हेक्सा को आपको बाइनरी में

[31:27]

चेंज करना पड़ेगा और फिर बाइनरी को हम किस

[31:30]

में चेंज करेंगे? ऑक्टल में। और ये बता

[31:32]

चुके ऑक्टल टू बाइनरी के लिए 84 421 कोड

[31:35]

का और बाइनरी को हेक्सा के लिए 8421 का।

[31:38]

हेक्सा को बाइनरी में चेंज करने के लिए 84

[31:40]

2 कोड का और बाइनरी को ऑक्टल में चेंज

[31:42]

करने के लिए 4 टू 1 कोड का इस्तेमाल कर

[31:44]

लेंगे। तो इस तरीके से हमारे टोटल 12

[31:46]

टाइप्स ऑफ कन्वर्ज़ जो है वो आ गए। उसके

[31:48]

बाद हमारे आते हैं बाइनरी में ऑपरेशंस।

[31:52]

अब यहां जो हम मेनली पढ़ने वाले हैं डिजिटल

[31:54]

इलेक्ट्रॉनिक्स में हम बाइनरी नंबर सिस्टम

[31:56]

का ही यूज़ बहुत ज्यादा करते हैं क्योंकि

[31:58]

यह बाइनरी नंबर सिस्टम की हेल्प से हम

[32:00]

डिजिटल सिग्नल को इज़ली रिप्रेजेंट कर सकते

[32:02]

हैं और इसको कंप्यूटर बहुत ईज़ली

[32:05]

अंडरस्टैंड कर सकता है। बाइनरी नंबर्स जो

[32:07]

होते हैं इन पे डिफरेंट ऑपरेशंस हम

[32:08]

परफॉर्म कराते हैं। सिमिलरली जैसे आपने

[32:11]

डेसिमल में एडिशन, सब्ट्रैक्शन,

[32:13]

मल्टीप्लिकेशन, डिवीज़ पढ़ा है, वैसे ही

[32:15]

बाइनरी नंबर्स पर भी एडिशन,

[32:17]

मल्टीप्लिकेशन, सब्ट्रैक्शन, डिवीज़ सब

[32:19]

परफॉर्म किया जा सकता है। तो हमारे चार

[32:21]

बेसिक ऑपरेशन है बाइनरी एडिशन, बाइनरी

[32:24]

सबट्रक्शन, बाइनरी मल्टीप्लिकेशन और

[32:26]

बाइनरी डिवीज़। तो यहां सबसे पहले बाइनरी

[32:30]

एडिशन से शुरू करेंगे। बाइनरी एडिशन में

[32:33]

हम जैसे कि डेसिमल नंबर में भी एक-एक

[32:36]

डिजिट को ऐड करते हैं। ठीक वैसे ही चाहे

[32:38]

कितना बड़ा बाइनरी बिट का नंबर हो। यानी

[32:40]

बाइनरी नंबर जो है वो सिंगल बिट का हो

[32:43]

सकता है। टू बिट का, थ्री बिट का, फोर बिट

[32:45]

का, फाइव बिट का, सिक्स बिट का। जैसे कि

[32:47]

आपके डेसिमल नंबर भी हो सकते हैं। सिंगल

[32:49]

डिजिट का हो, टू डिजिट का हो, थ्री डिजिट

[32:51]

का हो, फोर डिजिट का हो, फाइव डिजिट का ही

[32:53]

हो। वैसे ही हमारे बाइनरी नंबर्स भी सिंगल

[32:57]

डिजिट का, टू डिजिट का, थ्री बिट का, फोर

[32:59]

बिट का, फाइव बिट का कितना भी बड़ा हो सकता

[33:01]

है। बट जब हम एडिशन करेंगे, तो बिट बाय

[33:04]

बिट ही एडिशन करेंगे। तो हम बाइनरी नंबर्स

[33:06]

का भी जब एडिशन करते हैं डिजिटल की तरह ही

[33:11]

डिजिटल की तरह ही हम बाइनरी में भी जो

[33:14]

एडिशन करेंगे बिट बाय बिट ही करते हैं। तो

[33:17]

यहां हम जो बाइनरी एडिशन पढ़ेंगे वो सिंगल

[33:19]

बिट का पढ़ेंगे। यानी हो सकता है आपको ज़ीरो

[33:21]

को ज़ीरो में ऐड करना हो या ज़ीरो को वन में

[33:23]

या वन को ज़ीरो में या वन को वन में ऐड

[33:25]

करना हो। तो पॉसिबल कंडीशन क्या बनेगी? जब

[33:28]

ज़ीरो को ज़ीरो में ऐड करेंगे तो सम आएगा

[33:30]

ज़ीरो। यहां सम और कैरी क्या है? जब भी आप

[33:33]

हमेशा दो बिट को ऐड करते हो तो जरूरी नहीं

[33:35]

है कि आपका जो सम आए वो एक छोटी डिजिट आए।

[33:39]

जैसे कि मैंने आपसे कहा बेटा फाइव एक

[33:42]

सिंगल बिट है डिजिट डेसिमल की और दूसरी

[33:44]

हमारी एक डिजिट है सेवन। तो जब आप फाइव और

[33:46]

सेवन को ऐड करेंगे तो आपको एक नंबर मिल

[33:49]

जाएगा जो कि टू डिजिट का नंबर होगा। पांच

[33:51]

और सात को ऐड करेंगे 12 मिलेगा। तो यानी

[33:54]

जब आप सिंगल डिजिट को ऐड करते हैं तो कई

[33:56]

बार आंसर आपको टू डिजिट में मिलता है।

[33:58]

सिमिलरली बाइनरी में भी जब हम सिंगल बिट

[34:00]

को ऐड करते हैं तो हमें रिजल्ट जो मिलता

[34:02]

है वो टू बिट में मिलता है। तो जो हमारा

[34:06]

बेसिकली सम होता है कि हमने जब दो बिट को

[34:09]

जोड़ा तो हमें क्या रिजल्ट मिला वो होता है

[34:12]

सम। और एक्स्ट्रा बिट जो प्रोड्यूस होती

[34:14]

है उसको कहते हैं कैरी। तो यहां जब ज़ीरो

[34:16]

ज़ीरो को ऐड करेंगे सम आएगा ज़ीरो। कैरी भी

[34:18]

क्या आएगी? ज़ीरो। 0 वन को ऐड करेंगे तो सम

[34:21]

आएगा वन। और कैरी आएगी हमारी ज़ीरो। वन 0

[34:24]

को ऐड करेंगे सम आएगा वन। कैरी आएगी ज़ीरो।

[34:26]

1 + 1 को ऐड करेंगे तो सम आएगा ज़ीरो और

[34:29]

कैरी आएगी वन। ये इंपॉर्टेंट है। ये एडर

[34:32]

में भी आगे काम आएगी जब यूनिट टू हम

[34:33]

पढ़ेंगे। ठीक है? एग्जांपल में देख लेते

[34:36]

हैं कैसे हम एडिशन करेंगे। तो यहां एक

[34:37]

नंबर दिया है 1001 जिसमें ऐड करना है हमें

[34:41]

1100 को। तो आप देख रहे हैं दोनों ही

[34:43]

बाइनरी नंबर है। हमने दोनों नंबर को लिख

[34:45]

लिया। वन और 0 को ऐड किया रिजल्ट आया 1। 1

[34:48]

और 0 को ऐड किया रिजल्ट आया 1

[45:12]

वॉइस का इशू शायद बीच में हो गया था तो

[45:14]

दोबारा से बता देते हैं। यहां तक हम पहुंच

[45:17]

गए थे कि जो हमारे बाइनरी नंबर्स होते हैं

[45:20]

उन बाइनरी नंबर्स को हम डिफरेंट तरीके से

[45:23]

रिप्रेजेंट कर सकते हैं। जैसे कि डेसिमल

[45:25]

नंबर सिस्टम में पॉजिटिव और नेगेटिव

[45:27]

इंटीजर्स होते हैं। यानी जो नंबर है हमारा

[45:29]

पॉजिटिव भी हो सकता है और नेगेटिव भी हो

[45:31]

सकता है। ठीक वैसे ही बाइनरी नंबर भी

[45:33]

हमारा पॉजिटिव और नेगेटिव दोनों हो सकता

[45:35]

है। तो हम बाइनरी नंबर को रिप्रेजेंट कैसे

[45:37]

करते हैं? ऐसी प्रेजेंटेशन जिसमें हम केवल

[45:40]

उनके वैल्यू को रिप्रेजेंट करते हैं। उनके

[45:42]

साइन को रिप्रेजेंट नहीं करते उसको हम

[45:44]

अनसाइन रिप्रेजेंटेशन कहते हैं। और ऐसी

[45:47]

रिप्रेजेंटेशन जिसमें हम बाइनरी नंबर्स के

[45:49]

वैल्यू और साथ-साथ उनके साइन को भी

[45:51]

रिप्रेजेंट करते हैं तो उसको हम साइन

[45:53]

रिप्रेजेंटेशन कहते हैं। साइन

[45:55]

रिप्रेजेंटेशन के तीन तरीके हैं। साइन

[45:57]

मैग्नीट्यूड फॉर्म, वंस कॉम्प्लीमेंट

[45:59]

फॉर्म और टूस कॉम्प्लीमेंट फॉर्म। तो पहला

[46:01]

जो है हमारा अनसाइन रिप्रेजेंटेशन। अनसाइन

[46:03]

रिप्रेजेंटेशन जो होता है इसमें हम किसी

[46:05]

भी बाइनरी नंबर को रिप्रेजेंट करते हैं बट

[46:08]

उसके साइन को नहीं। यानी वो वैल्यू हमारी

[46:11]

पॉजिटिव है या नेगेटिव है ये पता लगाया

[46:13]

नहीं जा सकता। अनसाइन नंबर्स की जो बाइनरी

[46:16]

सिस्टम में रेंज होती है वो होती है ज़ीरो

[46:18]

से लेके 2 पावर n - 1 जहां n हमारा होता

[46:21]

है नंबर ऑफ़ बिट्स।

[46:24]

यानी कि अगर आपका नंबर टू बिट का नंबर है

[46:27]

तो उसकी रेंज होगी ज़ीरो से लेके थ्री तक।

[46:29]

कैसे? 2 पावर 2 यानी 4। 4 - 1 हो गया

[46:32]

थ्री। तो ज़ीरो से थ्री तक 3 बिट का नंबर

[46:34]

है तो 2 3 - 1 यानी ज़ीरो से लेकर 7 तक और

[46:39]

4 बिट का है तो ज़ीरो से लेकर 15 तक इसी

[46:42]

तरीके से फाइव बिट का है तो ज़ीरो से लेकर

[46:44]

31 तक सिक्स सिक्स डिजिट बिट का है तो

[46:47]

ज़ीरो से लेकर 63 तक। तो इस तरीके से हमारे

[46:50]

अलग-अलग बाइनरी नंबर की रेंज क्या होती

[46:53]

है? अलग-अलग होती है। अब जब बात करते हैं

[46:56]

हम साइन रिप्रेजेंटेशन की तो साइन नंबर्स

[46:58]

या साइन रिप्रेजेंटेशन का मतलब है जब हम

[47:01]

बाइनरी नंबर्स के वैल्यू और साथ-साथ उसके

[47:04]

साइन को भी रिप्रेजेंट करें तो ये हमारी

[47:06]

साइन रिप्रेजेंटेशन कहलाती है। साइन

[47:08]

रिप्रेजेंटेशन में पहला जो मेथड है वो है

[47:10]

sin मैग्नीट्यूड मेथड। sin मैग्नीट्यूड

[47:13]

मेथड में हम क्या करते हैं? जो भी हमारा

[47:15]

नंबर हो उसके साथ एक एक्स्ट्रा बिट को ऐड

[47:17]

करते हैं। पॉजिटिव साइन के लिए ज़ीरो और

[47:20]

अगर नंबर हमारा नेगेटिव है तो उसके लिए वन

[47:22]

बिट को इंसर्ट किया जाता है। एग्जांपल के

[47:24]

लिए जैसे कि अगर आपका नंबर फोर बिट का कोई

[47:27]

बाइनरी सिस्टम है जिसमें नंबर को आप चार

[47:29]

बिट से रिप्रेजेंट कर रहे हैं और आप फाइव

[47:31]

को रिप्रेजेंट करना करना चाह रहे हैं तो

[47:32]

फाइव बिट का बाइनरी हो जाएगा 1001। तो अगर

[47:35]

नंबर पॉजिटिव है तो ज़ीरो और नेगेटिव है तो

[47:38]

वन। तो हम क्या देख रहे हैं? पॉजिटिव नंबर

[47:42]

के लिए हमने ज़ीरो और नेगेटिव नंबर के लिए

[47:43]

हमने वन का यूज़ किया है। दूसरा मेथड है

[47:47]

हमारा क्या? वंस कॉम्प्लीमेंट मेथड। इसकी

[47:49]

भी रेंज बेटा सेम ही हो जाएगी। ठीक है? 0

[47:52]

से लेकर 2 n - 1कि यहां पर माइनस में भी

[47:55]

है तो 2 माइनस से ले - 2 n - 1 से लेकर 2

[48:00]

n - 1 से 1 तक होगी। यानी पॉजिटिव और

[48:02]

नेगेटिव दोनों को रिप्रेजेंट कर सकता है।

[48:05]

वंस कॉम्प्लीमेंट मेथड क्या है? वंस

[48:07]

कॉम्प्लीमेंट रिप्रेजेंटेशन में हम की

[48:09]

हेल्प से भी हम बाइनरी नंबर्स की पॉजिटिव

[48:11]

और नेगेटिव दोनों फॉर्म को रिप्रेजेंट कर

[48:13]

सकते हैं। यानी ये मेथड की हेल्प से या ये

[48:16]

रिप्रेजेंटेशन की हेल्प से भी आप पॉजिटिव

[48:19]

और नेगेटिव दोनों रिप्रेजेंटेशन बता सकते

[48:21]

हैं। यानी नंबर का वैल्यू और नंबर का साइन

[48:24]

दोनों ही बता सकते हैं। इसमें हम क्या

[48:26]

करते हैं? एग्जांपल की मदद से समझेंगे

[48:28]

आपको और ज्यादा इजी हो जाएगा। एग्जांपल के

[48:31]

लिए कोई एक एट बिट सिस्टम है जिसमें हम

[48:32]

नंबर 18 को रिप्रेजेंट करना चाह रहे हैं।

[48:35]

तो 18 का जो बाइनरी रिप्रेजेंटेशन है वो

[48:37]

होता है क्या? 1 0 1 0 तो ये 18 जो कि एक

[48:43]

डेसिमल नंबर है इसका बाइनरी इक्विवेलेंट

[48:46]

होता है 1 0 1 0 अब अगर हम इसे एट बिट

[48:49]

बाइनरी नंबर सिस्टम की हेल्प से ट्रांसमिट

[48:51]

करना चाह रहे हैं तो हम क्या करेंगे? इसे

[48:53]

पहले तो एट बिट का नंबर बनाएंगे। इसके साथ

[48:55]

थ्री एक्स्ट्रा बिट ऐड करेंगे। अगर ये

[48:57]

पॉजिटिव है तो इसमें हम ज़ीरोज़ ऐड करेंगे।

[48:59]

जैसे कि अभी हमने मैग्नीट्यूड

[49:01]

रिप्रेजेंटेशन में देखा तो हमने इसमें तीन

[49:03]

ज़ीरो ऐड कर दी। तो दैट मींस ये नंबर जो है

[49:05]

ये क्या है? प्लस का 18 है। अगर इसी का

[49:08]

हमें नेगेटिव फॉर्म रिप्रेजेंट करना हो तो

[49:10]

हम क्या करेंगे? इसके वैल्यू जो

[49:11]

मैग्नीट्यूड वाला पार्ट है इसका क्या कर

[49:13]

देंगे? वंस कॉम्प्लीमेंट फाइंड आउट

[49:15]

करेंगे। वंस कॉम्प्लीमेंट कैसे होता है?

[49:16]

ज़ीरो को वन में बदल दीजिए। वन को ज़ीरो

[49:18]

में। तो इसका जो मैग्नीट्यूड वाला पार्ट

[49:20]

है, इसका वंस कॉम्प्लीमेंट क्या हो जाएगा?

[49:22]

वन को ज़ीरो, ज़ीरो को वन, ज़ीरो को वन, वन

[49:24]

को ज़ीरो, ज़ीरो को वन। और नेगेटिव को

[49:26]

रिप्रेजेंट करने के लिए हमने तीन इसमें वन

[49:28]

ऐड कर दिए। तो इस तरीके से ये हमारा हो

[49:30]

जाएगा -18. सिमिलरली जब हम टूस

[49:32]

कॉम्प्लीमेंट की बात करते हैं तो टूस

[49:35]

कॉम्प्लीमेंट में भी कुछ ऐसा ही करते हैं।

[49:37]

टूस कॉम्प्लीमेंट का मतलब है अगर हमें

[49:39]

किसी नंबर का टूस कॉम्प्लीमेंट फाइंड आउट

[49:41]

करना हो तो टूस कॉम्प्लीमेंट है हम कैसे

[49:44]

फाइंड आउट करेंगे? पहले तो हम उस नंबर का

[49:47]

क्या करेंगे? वंस कॉम्प्लीमेंट करेंगे।

[49:50]

किसी नंबर का वंस कॉम्प्लीमेंट

[49:55]

प्लस उसमें क्या कर देंगे? अगर वन ऐड

[49:57]

करेंगे किसी नंबर के वंस कॉम्प्लीमेंट में

[50:00]

वन ऐड करने के बाद आपको उसका टूस

[50:02]

कॉम्प्लीमेंट मिल जाता है। तो यहां पर हम

[50:04]

क्या करते हैं? अगर हमारा नंबर पॉजिटिव है

[50:06]

तो उसमें हम ज़ीरो ऐड करेंगे और उसका

[50:08]

मैग्नीट्यूड पार्ट एज़ इट इज़ रहेगा। यानी

[50:11]

डेसिमल का जो बाइनरी इक्विवेलेंट होगा

[50:13]

वही। जैसे यहां पर हमारा 20 नंबर है जो कि

[50:15]

+20 है तो +20 के लिए हमने ज़ीरो ज़ीरो ऐड

[50:18]

की। और साथ ही साथ हमने इसके मैग्नीट्यूड

[50:20]

पार्ट को बिलकुल इसके बाइनरी के फॉर्म में

[50:22]

रिप्रेजेंट करा। बट अगर नंबर -20 होता तो

[50:25]

0 की जगह 1 और इस ये जो हमारा बाइनरी

[50:28]

पार्ट है जो कि मैग्नीट्यूड को रिप्रेजेंट

[50:29]

कर रहा है इसका टूस कॉम्प्लीमेंट

[50:30]

निकालेंगे तो इसका टूस कॉम्प्लीमेंट हो

[50:32]

जाएगा 0 1 तो इस तरीके से ये हमारा हो गया

[50:35]

टूस कॉम्प्लीमेंट रिप्रेजेंटेशन तो हम

[50:38]

किसी भी नंबर में अधिकतर जो यूज़ करते हैं

[50:41]

हमारे कंप्यूटरटर्स में प्रोसेसर में

[50:42]

टूल्स कॉम्प्लीमेंट रिप्रेजेंटेशन का यूज़

[50:44]

ज्यादा किया जाता है। उसके बाद हमारे आ

[50:46]

जाते हैं बाइनरी कोड्स। बाइनरी कोड्स क्या

[50:49]

है? जो हमारी बाइनरी संख्याएं हैं, बाइनरी

[50:51]

नंबर्स हैं, इनको हम ट्रांसमिट और रिसीव

[50:53]

करने के ड्यूरिंग ये देखते हैं कि इनमें

[50:55]

बहुत सारी एरर प्रोड्यूस हो जाती है। तो

[50:57]

इनकी चेकिंग के लिए, एरर कम करने के लिए

[51:00]

और एनालिसिस के लिए बहुत सारे काम के लिए

[51:02]

हम क्या करते हैं? बाइनरी नंबर्स को किसी

[51:04]

सूटेबल कोड में कन्वर्ट कर देते हैं। तो

[51:07]

ये हमारे कहलाते हैं बाइनरी कोड्स। तो

[51:09]

मेनली जो हमारे कोड्स हैं वो हैं बीसीडी,

[51:12]

ग्रे और अस्काई। आपके एग्जाम में जो

[51:14]

क्वेश्चन आएगा वो बीसीडी और ग्रे से ही

[51:16]

आएगा। अस से भी नहीं पूछा जाता। बीसीडी

[51:20]

यानी बाइनरी कोडेड डेसिमल क्या है? बाइनरी

[51:22]

कोडेड डेसिमल का मतलब है जब हम डेसिमल

[51:24]

नंबर को बाइनरी फॉर्म में चेंज कर दें तो

[51:26]

ये कोड हमारा बीसीडी यानी बाइनरी कोडेड

[51:29]

डेसिमल कहलाता है। बाइनरी कोडेड डेसिमल

[51:31]

में हम क्या करते हैं? हर एक डिजिट को

[51:34]

यानी डेसिमल की हर एक डिजिट को बाइनरी कोड

[51:37]

में चेंज करते हैं। जैसे कि डेसिमल का

[51:39]

ज़ीरो बराबर होता है 0 को। फोर बिट के यानी

[51:43]

ईच डिजिट यहां पे लिख दूं अगर कि यहां पर

[51:46]

हमारे बीसीडी में ईच डिजिट

[51:51]

ईच डिजिट ऑफ बाइनरी

[51:55]

ईच डिजिट ऑफ बाइनरी इज़ कन्व्टेड

[52:01]

इंटू फोर बिट कोड।

[52:06]

हर एक डेसिमल की जो डिजिट है उसको हम फोर

[52:09]

बिट के बाइनरी में चेंज करते हैं। जैसे 0

[52:12]

है तो 0 बराबर हो जाएगा 0 वही 841 कोड

[52:16]

लगाएंगे। वन है तो क्या हो जाएगा? 01 2 है

[52:18]

तो 0 1 0 थ्री है तो 0 1 1 4 है तो 0 1 0

[52:23]

5 है तो 0 1 0 1 6 है तो 0 1 0 से है तो 0

[52:27]

1 8 है तो 1 0 और नाइन है तो 1 0 1 और

[52:31]

आपको पता है डेसिमल में नाइन से बड़ा कोई

[52:33]

डिजिट आपको नहीं मिलेगा

[52:36]

ठीक है जैसे यहां नंबर दिया है 8 74 तो

[52:39]

पहला डिजिट है फोर दूसरा डिजिट है सेवन

[52:41]

तीसरा एट तो हम फोर को भी इस फोर बिट

[52:44]

कन्वर्शन से कन्वर्ट करेंगे तो फोर क्या

[52:45]

हो जाएगा 0 1 0 से क्या हो हो जाएगा 0 1 1

[52:48]

और 8 क्या हो जाएगा? 100 तो इस तरीके से

[52:50]

इसका बी सी डी का आंसर ये हो जाएगा।

[52:52]

सिमिलरली यहां 95 एक एग्जांपल दिया है। तो

[52:54]

हर एक डिजिट को कन्वर्ट करेंगे। यहां भी

[52:57]

फाइव को कन्वर्ट करेंगे तो फाइव क्या हो

[52:58]

जाएगा? 0 1 और नाइन हो जाएगा 1001। तो ये

[53:02]

इसका बीसीडी हो जाएगा। इसी तरीके से एक और

[53:04]

कोड जो है वो है डेसिमल। तो सॉरी ग्रे

[53:08]

कोड। ग्रे कोड जो है यह हमारा अनवेटेड कोड

[53:11]

है। ग्रे कोड क्या है? हमारा अनवेटेड कोड

[53:14]

है।

[53:21]

ग्रे कोड हमारा अनवेटेड कोड है जिसमें हम

[53:24]

क्या करते हैं

[53:44]

जिसमें हम देखते हैं कि जो हमारा बाइनरी

[53:48]

नंबर है उसको हम चेंज कर देते हैं एक किसी

[53:52]

दूसरे बाइनरी फॉर्म में यानी पैटर्न चेंज

[53:54]

कर देंगे बेसिकली बस तो यहां पर हम क्या

[53:57]

देख रहे हैं कैसे कंक्लूजन करते हैं इस

[53:59]

क्वेश्चन में समझते हैं एक नंबर दिया है

[54:00]

1001 1 इसका जो क्वेश्चन है आपसे पूछे

[54:03]

जाते हैं एग्जाम में 1 0 में तो पहली जो

[54:06]

बिट है उसको तो एज़ इट इज़ उतार लेंगे। फिर

[54:08]

अगली डिजिट लेने के लिए हम क्या करेंगे?

[54:10]

इस प्रीवियस बिट को नेक्स्ट बिट में ऐड

[54:12]

करेंगे। यानी 1 + 0 क्या है? वन। अगली को

[54:15]

0 + 1 क्या आया? 1 1 + 1 आया तो सम

[54:18]

उतारेंगे। कैरी को डिस्कार करेंगे। तो 1 +

[54:20]

1 क्या हो गया हमारा? 0 तो हमने एज इट इज

[54:23]

उतार लिया। इसको यहां पर भी मैं लिख देती

[54:25]

हूं। आपको और इजीली समझ में आ जाएगा।

[54:28]

यहां पर हमारा क्वेश्चन था 1 0 1 1 0 तो

[54:33]

इसमें क्या करेंगे? पहली बिट को तो एज़ इट

[54:35]

इज़ उतार लेना है। दूसरी बिट कहां मिलेगी?

[54:37]

इन दोनों को ऐड करना है। तो 1 0 क्या हो

[54:39]

गया? वन। तीसरी कैसे मिलेगी? इन दोनों को।

[54:41]

0 1 क्या हो गया? वन। फिर नेक्स्ट मिलेगी

[54:43]

चौथी 1 + 1 तो सम क्या आएगा? 0 कैरी को

[54:46]

डिस्कार करना है। 1 + 0 क्या आएगा? वन। तो

[54:49]

यही आपका आंसर हो जाएगा। बहुत इजी है।

[54:51]

आपको स्टेप्स में एक्सप्लेन नहीं करना। आप

[54:53]

सीधे इसका कन्वर्ज़ आंसर में लिख देंगे।

[54:56]

इसी तरीके से ग्रे को वापस बाइनरी में

[54:58]

चेंज भी हम करते हैं। तो बाइनरी टू ग्रे

[55:00]

और ग्रे टू बाइनरी का जो एग्जांपल है वो

[55:03]

आप ज्यादा से ज्यादा प्रैक्टिस करके जाना।

[55:06]

यहां पर हमने ग्रे टू बाइनरी का कन्वर्ज़

[55:08]

समझाया है। ये आस्काई कोड हो गए। आस्का

[55:11]

कोड का मतलब है जब हम क्या करते हैं? अपने

[55:13]

बाइनरी नंबर्स को अल्फा न्यूमेरिक कोड के

[55:15]

फॉर्म में रिप्रेजेंट करते हैं। यानी जब

[55:17]

आप बाइनरी नंबर्स को सिंबल्स कैरेक्टर

[55:19]

स्पेशल कैरेक्टर्स और न्यूमेरिकल वैल्यू

[55:22]

की हेल्प से रिप्रेजेंट करते हैं तो हमारे

[55:23]

आस्काई कोड्स कहलाते हैं। इनका पूरा नाम

[55:26]

है अमेरिकन स्टैंडर्ड कोड फॉर

[55:28]

इंफॉर्मेशनेशन इंटरचेंज। तो इसको हम शॉर्ट

[55:31]

में आस्काई कोड कहते हैं। और बहुत सारे

[55:34]

माइक्रोपर्स और माइक्रो कंप्यूटरटर्स में

[55:36]

इन आस्काई कोड्स का भी यूज़ किया जाता है।

[55:39]

इसकी जो टेबल है स्काई कोड की वो यहां पर

[55:41]

दी गई है। अब जैसे मैंने बताया

[55:42]

एग्जामिनेशन पॉइंट से ग्रे कोड और बीसीडी

[55:44]

दोनों बहुत इंपॉर्टेंट है। उसका कन्वर्ज़

[55:46]

भी एग्जाम में पूछा जाता है। अब एक

[55:48]

क्वेश्चन जो आपसे एग्जाम में पूछा गया है

[55:50]

एक केटी में वो पूछा गया है कोड कन्व्टर

[55:52]

डिज़ाइन करने के लिए। यानी कि आपको कन्वर्ट

[55:55]

करना है बाइनरी को डेसी बाइनरी को ग्रे

[55:58]

में। तो बाइनरी टू ग्रे कोड कन्व्टर आपको

[56:00]

डिजाइन करना है। तो आपने क्या करा? बाइनरी

[56:03]

टू ग्रे कोड बनाने के लिए आपने जो पॉसिबल

[56:05]

डिजिट है फोर बिट का आपने बाइनरी नंबर

[56:07]

लिया जो कि ज़ीरो ज़ीरो से लेकर वन वन तक

[56:10]

जाएगा। तो सारी पॉसिबल कंडीशन यानी फोर

[56:12]

बिट का नंबर है तो 2 की पावर 4 यानी

[56:14]

पॉसिबल कॉम्बिनेशन आपके हो जाएंगे ज़ीरो से

[56:17]

15 तक यानी 16 पॉसिबल कॉम्बिनेशन हो

[56:19]

जाएंगे। मैंने आपको बता रखा है कि पॉसिबल

[56:21]

कॉम्बिनेशन जो हम निकाल सकते हैं वो कैसे

[56:24]

निकाल सकते हैं? 2 की पावर n से। तो यहां

[56:26]

क्या हो गया? फोर। तो 2 की पावर 4 यानी

[56:28]

कितने कंडीशन हो जाएंगे? 16 पॉसिबल कंडीशन

[56:31]

बन जाएंगे। तो 16 पॉसिबल कंडीशन जो है

[56:33]

आपने बी सी डी की लिख ली जो कि 0 से 1 तक

[56:36]

जाएंगी। अब आपको इसका ग्रे कोड बनाना है

[56:40]

तो 0 का ग्रे कोड जो होगा 0 ही आएगा और 01

[56:44]

का हमारा क्या हो जाएगा? ग्रे कोड 0 1 हो

[56:47]

जाएगा। आप देख रहे हैं कि जब पूरी टेबल

[56:49]

में जब भी हम बाइनरी को ग्रे में चेंज

[56:51]

करते हैं तो केवल सिंगल बिट का चेंज

[56:53]

प्रोड्यूस होता है। आप देखिए अगली जो

[56:55]

हमारी डिजिट है वो कहती है 0 1 0 तो इसमें

[56:58]

केवल सिंगल बिट का चेंज है। अगली क्या हो

[57:00]

गई? 01 तो ग्रे कोड में कन्वर्ट किया तो

[57:02]

01 0 तो हम देखते हैं जब भी हम किसी

[57:05]

बाइनरी नंबर को ग्रे में चेंज करते हैं तो

[57:07]

सिंगल बिट चेंज ही प्रोड्यूस होता है। तो

[57:09]

हमने इसकी जो है वैसे ही टेबल रिप्रेजेंट

[57:12]

कर दी कि हमारे पॉसिबल कॉम्बिनेशन के लिए

[57:15]

क्या हमारा ग्रे कोड अ ये प्रोड्यूस

[57:18]

करेगा। अब हमें क्या करना है? बाइनरी कोड

[57:21]

के लिए ग्रे कोड कन्व्टर डिज़ाइन करना है।

[57:23]

तो ये जो टेबल है पूरी हमने लिख दी। हमारी

[57:26]

जो बाइनरी कोड्स हैं वो ए बी सी डी हो

[57:28]

जाएंगी। चार बिट और ग्रे कोड भी चार बिट

[57:30]

प्रोड्यूस होंगी। जी जी0 जी1 G2 G3 तो

[57:33]

यानी चार बिट की बाइनरी नंबर को आप चार

[57:36]

बिट के बाइनरी को एक कोड में चेंज कर रहे

[57:38]

हैं जो कि ग्रे कोड कहलाएगा। तो हम देख

[57:41]

रहे हैं इसके आउटपुट भी कितनी हो गई? चार।

[57:43]

तो इन चार आउटपुट के लिए हमने के मैप ड्रॉ

[57:45]

किया। तो जिससे पहले g0 के लिए एक्सप्रेशन

[57:48]

आया ax और b g1 के लिए एक्सप्रेशन आया cx

[57:52]

और b g 2 के लिए एक्सप्रेशन आया d एक्स और

[57:55]

c और लास्ट वाले यानी g3 के लिए

[57:58]

एक्सप्रेशन आया d तो इसका हमने सर्किट

[58:00]

अकॉर्डिंगली ड्रॉ कर दिया तो एक तरीके से

[58:02]

अगर आपके पास ट्रुथ टेबल है तो आप किसी भी

[58:05]

लॉजिक सर्किट को ड्रॉ कर सकते हैं। लॉजिक

[58:08]

सर्किट को ड्रॉ करने का जो आगे मेथड है वो

[58:11]

के मैप में भी पढ़ेंगे। अगर आपके पास किसी

[58:14]

भी लॉजिकल सर्किट का या तो बुलियन

[58:16]

एक्सप्रेशन है या फिर आपके पास उसका ट्रुथ

[58:19]

टेबल है या मिन टर्म्स नेक्स्ट टर्म में

[58:21]

फंक्शन गिवन है तो आप उसको सिंपलीफाई करके

[58:24]

उसका लॉजिक सर्किट बना सकते हैं। तो यहां

[58:26]

हमें क्या दे रखा है? हमें ट्रुथ टेबल दे

[58:28]

रखा है। ट्रुथ टेबल में हमें हम देखेंगे

[58:30]

कि कहां-कहां वन है? उस हिसाब से हमने

[58:32]

इसका एसओपी मैप बनाया है। तो हमने सबसे

[58:35]

पहले g0 देखा। g0 कहां-कहां वन है। g0 का

[58:38]

के मैप बना लिया। फिर g1 का हमने के मैप

[58:40]

देखा। कहां-कहां वन है? इसका एसओपी के मैप

[58:42]

बना लिया। सिमिलरली G2 G3 के लिए भी हमने

[58:45]

एसओपी मैप ड्रा कर लिया और इससे इसका

[58:47]

सिंपलीफाइड एक्सप्रेशन निकाल लिया और इस

[58:49]

एक्सप्रेशन की हेल्प से हमने इसका लॉजिक

[58:51]

रियलाइज़ेशन यानी कि इसका लॉजिक सर्किट भी

[58:54]

बना लिया। ये यहां से भी आप कर सकते हैं।

[58:56]

वो अगर आपको क्लियर नहीं लग रहा तो यहां

[58:58]

पे आप देखेंगे कि कैसे हमने G0, G1, G2,

[59:02]

G3 तीनों चारों के चारों जो ग्रे कोड बिट

[59:05]

है उनके लिए हमने केम मैप ड्रॉ किया। उससे

[59:07]

सिंपलीफाइड एक्सप्रेशन निकाला और फिर उसका

[59:09]

लॉजिक रियलाइज़ेशन यानी उसका लॉजिक सर्किट

[59:12]

भी ड्रॉ कर दिया।

[59:14]

क्लियर? अब नेक्स्ट हो जाता है हमारा बुलन

[59:16]

अलजेब्रा। क्योंकि हमारी जो यूनिट है इसका

[59:19]

नाम ही लॉजिक सिंपलीफिकेशन है। तो लॉजिक

[59:21]

सिंपलीफिकेशन से मतलब क्या समझ में आता है

[59:23]

आपको? पहले लॉजिक समझे कि होता क्या है?

[59:25]

जब भी हम बुलियन अलजेब्रा की बात करते हैं

[59:28]

तो बुलियन अलजेब्रा का जो यूज़ किया जाता

[59:30]

है वो हमारे बुलियन एक्सप्रेशन को

[59:31]

सिंपलीफाई करने के लिए किया जाता है। ये

[59:34]

बुलियन अलजेब्रा जो डेवलप किया गया था ये

[59:36]

हमारे जो एक लॉजिशियन थे जिनका नाम जॉर्ज

[59:40]

वूल था इन्होंने 1847

[59:43]

ईयर में क्या किया इस अह जो अलजेब्रा है

[59:46]

इसको डेवलप किया। बुलियन अलजेब्रा को जो

[59:48]

यूज़ किया जाता कि आप कह सकते हैं यह भी एक

[59:50]

बेसिकली मैथमेटिक्स है। तो बुलियन

[59:53]

अलजेब्रा इज़ अ काइंड ऑफ़ मैथमेटिक्स बाय

[59:55]

व्हिच यू कैन सॉल्व दी बुलियन

[59:57]

एक्सप्रेशनंस। तो हम जब भी किसी लॉजिक

[59:59]

सर्किटरी की बात करते हैं, किसी भी आप

[60:01]

डिजिटल सर्किट की बात करते हैं, तो डिजिटल

[60:03]

सर्किट में इनपुट और आउटपुट के बीच में

[60:06]

कुछ रिलेशन होता है। यानी इन एनी काइंड ऑफ़

[60:08]

डिजिटल सर्किट वी कैन से दैट देयर इज़ अ

[60:10]

रिलेशन बिटवीन द इनपुट एंड आउटपुट

[60:12]

वेरिएबल्स। जो भी हमारे इनपुट वेरिएबल्स

[60:14]

होंगे a b c d डी x y z जो भी आप लेट कर

[60:16]

रहे हैं और उससे कुछ आउटपुट भी प्रोड्यूस

[60:18]

करेगा तो इस इनपुट और आउटपुट में कुछ

[60:20]

रिलेशन होता है और इस लॉजिकल रिलेशन को

[60:23]

रिप्रेजेंट करते हैं हम बुलियन एक्सप्रेशन

[60:25]

की फॉर्म में। तो बुलियन एक्सप्रेशन क्या

[60:27]

है? काइंड ऑफ़ इक्वेशन है। एक प्रकार का

[60:29]

इक्वेशन हो सकता है। कह सकते हैं एक

[60:31]

प्रकार का समीकरण है जिसकी हेल्प से आप इन

[60:33]

इनपुट आउटपुट जो वेरिएबल्स हैं उनके बीच

[60:36]

क्या रिलेशनशिप है उसको आप रिप्रेजेंट कर

[60:38]

रहे हैं। तो इन बुलियन एक्सप्रेशनंस को आप

[60:40]

सिंपलीफाई कर सकते हैं विद द हेल्प ऑफ़ दिस

[60:42]

बुलियन अलजेब्रा। सो, बुलियन अलजेब्रा इज़

[60:45]

अ काइंड ऑफ़ मैथमेटिक्स बाय व्हिच यू कैन

[60:47]

सिंपलीफाई द बुलियन एक्सप्रेशनंस रिटन इन

[60:48]

द लॉजिकल रिलेशन फॉर्म। और यह बुलियन

[60:51]

एक्सप्रेशनंस क्या होते हैं? बुलियन

[60:52]

एक्सप्रेशनंस इज़ आर अ काइंड ऑफ़ इक्वेशन इन

[60:55]

व्हिच यू रिप्रेजेंट द इनपुट एंड आउटपुट

[60:58]

रिलेशनशिप। तो यहां इनपुट और आउटपुट की

[61:00]

क्या रिलेशनशिप है? उसको हम इक्वेशन फॉर्म

[61:02]

में रिप्रेजेंट कर रहे हैं। देन दिस विल

[61:03]

बी नोन ऐज़ बुलियन एक्सप्रेशन। और इस

[61:05]

बुलियन एक्सप्रेशनंस को सिंपलीफाई करने के

[61:07]

लिए हम बुलियन अलजेब्रा का यूज़ करते हैं।

[61:09]

जिसको डेवलप किया था जो बुल ने 1847 में।

[61:14]

यहां हमारे बहुत सारे रूल्स होते हैं। इन

[61:16]

रूल्स को पढ़ के ही इन रूल्स को समझ के ही

[61:18]

हम क्या करते हैं? इन रूल्स की हेल्प से

[61:20]

बुलियन एक्सप्रेशनंस को सिंपलीफाई कर सकते

[61:22]

हैं। ऑलदो प्रैक्टिकली इस मेथड का यूज़

[61:25]

बहुत ज्यादा नहीं किया जाता क्योंकि ये

[61:26]

बहुत एरर प्रू मेथड है। एरर प्रू मेथड

[61:29]

क्या है? क्योंकि जब हम इसमें सिंपलीफाई

[61:31]

करते हैं। सिंपलीफिकेशन जो होता है स्टेप

[61:32]

बाय स्टेप होता है। अगर किसी भी एक स्टेप

[61:35]

में आपकी एरर हो गई तो पूरा प्रोसेस आपका

[61:37]

एरर फुल हो जाता है। और कई बार सिंपलीफाइड

[61:40]

एक्सप्रेशन निकालना बहुत ज्यादा टाइम

[61:41]

टेकिंग भी हो जाता है। यानी बहुत टाइम

[61:43]

कंज्यूम हो जाता है। और एरर भी प्रोड्यूस

[61:45]

होने की इसमें बहुत ज्यादा पॉसिबिलिटी

[61:47]

रहती है। और स्टिल सिंपलीफाइड एक्सप्रेशन

[61:49]

निकल के नहीं आता। साथ ही साथ सिंपलीफाइड

[61:51]

एक्सप्रेशन अलग-अलग किसी का हो सकता है।

[61:53]

यानी दो अलग लोग और अगर अलग-अलग अप्रोचेस

[61:55]

को सॉल्व करेंगे तो सिंपलीफाइड एक्सप्रेशन

[61:57]

अलग-अलग आ सकता है। तो इस तरीके से इन ऑल

[62:00]

हम देखें तो बुलियन अलजेब्रा के जो रूल्स

[62:02]

हैं उनकी हेल्प से बुलियन एक्सप्रेशनंस को

[62:04]

सिंपलीफाई करना बहुत ज्यादा इफेक्टिव मेथड

[62:06]

नहीं है। इसमें जो डिफरेंट हमारे मेथड हैं

[62:09]

जैसे कि इसके जो लॉ हैं कम्युलेटिव लॉ

[62:11]

होगा। कम्युलेटिव लॉ क्या है? आप सभी ने

[62:13]

पढ़ा है। जैसे कि आपसे कहा जाए कि बेटा 2

[62:15]

+ 3 करो। तो 2 + 3 को आप 2 + 3 लिखें या 3

[62:18]

+ 2 लिखें। इट डज़ नॉट अफेक्ट दी रिजल्ट।

[62:22]

यह हमारा रिजल्ट को यानी कि जो भी आपका सम

[62:24]

आएगा उसको चेंज नहीं करेगा। यानी आप एडिशन

[62:28]

में या मल्टीप्लिकेशन में अगर इन नंबर्स

[62:30]

की पोजीशन को चेंज करते हैं तो रिजल्ट विल

[62:33]

बी सेम। सेम हमारा कम्युलेटिव लॉ एंड लॉ

[62:38]

और लॉ को रिप्रेजेंट करता है। यानी अगर

[62:40]

किन्हीं दो वेरिएबल्स की आप एंडिंग कर रहे

[62:42]

हैं या आप किन्हीं दो वेरिएबल्स की अगर आप

[62:44]

ओरिंग कर रहे हैं और उनकी पोजीशन को चेंज

[62:46]

करते हैं, देन दिस विल नॉट अफेक्ट द

[62:48]

रिजल्ट। यानी a.b को आप b. लिख सकते हैं।

[62:51]

इसी तरीके से a + b को आप b + a लिख सकते

[62:53]

हैं। तो हमारे बहुत सारे रूल ऐसे हैं जो

[62:56]

हमने मैथमेटिक्स में पढ़े हैं। नॉर्मल जब

[62:58]

आपने बचपन में मैथमेटिक्स पढ़ी होगी तो

[63:00]

उसमें भी आपने रूल पढ़ रखे हैं। इसी तरीके

[63:03]

से हमारा एक और लॉ है वो है एसोसिएटिव लॉ।

[63:05]

एसोसिएटिव लॉ ये कहता है जब भी हम एडिशन

[63:08]

करते हैं, मल्टीप्लिकेशन करते हैं तो

[63:09]

किनहीं दो टर्म के बीच ही कहते हैं जिसको

[63:11]

हम बाइनरी ऑपरेशन कहते हैं। बाइनरी का

[63:13]

मतलब मैंने आपको कहा बेटा 25 5 + 125 + 50

[63:18]

तो आप पहले क्या करेंगे? किन्हीं दो नंबर

[63:20]

को ऐड करेंगे। उसका जो रिजल्ट आएगा फिर

[63:21]

उसे तीसरे में ऐड करेंगे। यानी चाहे एडिशन

[63:24]

हो, चाहे मल्टीप्लिकेशन हो, हम हमेशा दो

[63:26]

यानी पेयर में करते हैं। आपको तीन, चार

[63:28]

यानी मोर देन टू नंबर्स का जब एडिशन करना

[63:30]

हो या मोर देन टू नंबर्स का जब

[63:32]

मल्टीप्लिकेशन करना हो तो हमारी सिंपल

[63:34]

अप्रोच यही रहती है कि पहले हम दो नंबर को

[63:35]

ऐड करेंगे। उसका जो रिजल्ट आएगा फिर उसे

[63:38]

तीसरे में ऐड करेंगे। मल्टीप्लिकेशन में

[63:39]

भी यही करते हैं। दो नंबर का

[63:40]

मल्टीप्लिकेशन करेंगे। जो रिजल्ट आएगा उसे

[63:42]

तीसरे में मल्टीप्लाई करेंगे। तो हम वो

[63:44]

कॉम्बिनेशन क्या लें? एसोसिएटिव लॉ कहता

[63:47]

है कि कॉम्बिनेशन कुछ भी हो सकता है। यानी

[63:50]

अगर 2 + 3 + 5 लिखा हो तो आप ऐसे भी कर

[63:54]

सकते हैं कि थ्री और फाइव को ऐड करके टू

[63:56]

में ऐड कर दे। यहां हमने क्या करा? दो और

[63:58]

तीन पांच। पांच में पांच ऐड करा 10। हम

[64:01]

इसको ऐसे भी तो कर सकते थे। तीन और पांच

[64:03]

आठ। आठ में दो ऐड किया 10। तो एसोसिएटिव

[64:06]

लॉ यह कहता है जब मोर देन टू वेरिएबल्स का

[64:08]

आप एंडिंग करें या मोर देन टू वेरिएबल्स

[64:10]

के पोिंग करें तो आप कोई भी कॉम्बिनेशन ले

[64:13]

सकते हैं। पेयरिंग कैसे भी कर सकते हैं।

[64:15]

यानी A.B ब्रैकेट में B.C ब्रैकेट में B.C

[64:19]

ये रिप्रेजेंट कर रहा है कि पहले आपको B

[64:20]

और C की ओरिंग करनी है। देन आपका जो

[64:22]

रिजल्ट आएगा उसकी सॉरी B और C की एंडिंग

[64:25]

करनी है। B और C की क्या करेंगे? एंडिंग

[64:27]

और जो रिजल्ट आएगा उसकी एंडिंग फिर A के

[64:30]

साथ करेंगे। तो ये लॉ ये कहता है कि जरूरी

[64:32]

नहीं है कि हमारा यही सीक्वेंस हो। हम ऐसा

[64:34]

भी कर सकते हैं कि पहले A और B की एंडिंग

[64:36]

करें। जो रिजल्ट आए उसकी C के साथ एंडिंग

[64:38]

करें। एसोसिएटिव लॉ हमारा और जो लॉ है वो

[64:43]

एसोसिएटिव लॉ हमारा और लॉजिक के लिए भी

[64:45]

काम करता है। सिमिलरली हमारा

[64:47]

डिस्ट्रीब्यूटिव लॉ और डिस्ट्रीब्यूटिव लॉ

[64:49]

आपको पता है मल्टीप्लिकेशन में हम यूज़

[64:51]

करते हैं। तो डिस्ट्रीब्यूटिव लॉ ये कहता

[64:53]

है कि जो हमारा एंड और ऑपरेशन है उसको हम

[64:56]

हर एक टर्म में डिस्ट्रीब्यूट कर सकते

[64:58]

हैं। जैसे यहां पर दिया है हमारा a डॉट

[65:00]

बाहर है ब्रैकेट के अंदर b + b दिया है।

[65:03]

तो हम इसे क्या करेंगे? a.b + a.c तो हम

[65:06]

इसको जो बाहर वाला वेरिएबल है a इसको अंदर

[65:09]

डिस्ट्रीब्यूट करेंगे। सिमिलरली और फंक्शन

[65:11]

के लिए भी हम ऐसे ही कर सकते हैं। a + b.c

[65:14]

लिखा है तो हो जाएगा a + b. + c क्लियर।

[65:18]

आइडेंटिटी लॉ क्या कहता है? कि अगर हम

[65:21]

किसी वेरिएबल की एंडिंग और ऑरिंग ज़ीरो या

[65:23]

वन के साथ कराते हैं और वही वेरिएबल हमें

[65:25]

मिल जाए जिसके साथ यानी कोई वेरिएबल a है

[65:29]

और उसके साथ आप ज़ीरो की या वन की किसी भी

[65:32]

चीज़ की एंडिंग या ऑरिंग करा रहे वही

[65:33]

वेरिएबल मिल जाए। जैसे एंडिंग के केस में

[65:36]

अगर a की एंडिंग वन के साथ करेंगे तो वही

[65:38]

वेरिएबल मिल जाएगा। यानी a की एंडिंग वन

[65:40]

के साथ की तो a ही मिल गया। तो दिस विल बी

[65:42]

नोन ऐज़ आइडेंटिटी लॉ। और के केस में क्या

[65:45]

हो जाएगा? हम a + 0 अगर करें a + 0 यानी

[65:49]

कि हमने a के साथ ऑरिंग कराई ज़ीरो की तो

[65:51]

हमें वही वेरिएबल a मिल जाएगा।

[65:54]

कॉम्प्लीमेंट लॉ क्या कहता है? अगर आपने

[65:56]

किसी वेरिएबल की एंडिंग या ऑरिंग उसी के

[65:59]

कॉम्प्लीमेंट से कराई तो क्या होगा? आपने

[66:01]

A की एंडिंग A के कॉम्प्लीमेंट से कराई तो

[66:03]

रिजल्ट क्या हो गया? ज़ीरो। आपने A की

[66:06]

ओरिंग A के कॉम्प्लीमेंट से कराई तो

[66:07]

रिजल्ट क्या आएगा? वन। ये हमारा

[66:09]

कॉम्प्लीमेंट लॉ कहलाता है। तो इस तरीके

[66:11]

से हमारे डिफरेंट लॉज़ हैं जिनकी हेल्प से

[66:14]

हम बुलियन अलजेब्रा में बुलियन एक्सप्रेशन

[66:17]

को सिंपलीफाई करते हैं। इसमें बड़ी

[66:18]

इंपॉर्टेंट है डीमॉर्गन थ्योरम। डीमॉर्गन

[66:21]

थ्योरम जो है आपसे एग्जामिनेशन में AKTU

[66:23]

में पूछी भी गई है। तो डीमॉर्गन थ्योरम

[66:25]

एडीयूवी में 2022 23 बैच में स्टूडेंट्स

[66:29]

से पूछी गई। वो 10 मार्क्स में पूछी गई

[66:31]

है। छोटी सी थ्योरम है जिनको हम ध्यान

[66:33]

नहीं देते और इन थ्योरम्स को लिख नहीं

[66:36]

पाते क्योंकि जब तक आपने इसका स्टेटमेंट

[66:38]

अच्छे से नहीं पढ़ा हो तो लिख नहीं

[66:39]

पाएंगे। तो डीमॉर्गन थ्योरम हमारी दो

[66:41]

थ्योरम है जो कि डीमॉर्गन फर्स्ट थ्योरम

[66:43]

हो और सेकंड थ्योरम कहलाती है। दोनों ही

[66:45]

थ्योरम का यूज़ हम बुलियन एक्सप्रेशन को

[66:47]

सिंपलीफाई करने के लिए करते हैं। यानी

[66:48]

बुलियन अलजेब्रा का पार्ट ही है। ये कहता

[66:51]

है पहला थ्योरम हमारा कि अगर किसी अह कोई

[66:55]

हमारा टर्म दिया है और उसमें हमारा क्या

[66:57]

है? होल एक्सप्रेशन पे बार दिया है,

[66:59]

नेगेशन दिया है। तो हम उसको इंडिविजुअल

[67:01]

नेगेशन यानी इंडिविजुअल बार और डॉट को कर

[67:04]

देंगे प्लस। यानी a.b का होल बार दिया है।

[67:07]

तो क्या हो जाएगा? a बार और डॉट का हो

[67:09]

जाएगा प्लस b बार। यानी वेरिएबल का

[67:11]

इंडिविजुअल बार हमने कर दिया और डॉट को

[67:14]

चेंज कर दिया प्लस में। सिमिलरली इसका ठीक

[67:16]

उल्टा हमारा हो जाएगा सेकंड थ्योरम जो कि

[67:19]

हमारा और ऑपरेशन के लिए है। a + b का होल

[67:21]

बार दिया हो। तो हम क्या करेंगे? a का

[67:23]

बार, b का बार और प्लस को चेंज कर देंगे

[67:26]

डॉट। अब बुलियन एक्सप्रेशनंस के जितने भी

[67:28]

सिंपलीफाई करने के जो हमारे रूल्स हैं

[67:30]

उनकी टेबल यहां पर दे रखी है।

[67:36]

ठीक है? अब ये हमारे डिफरेंट जो लॉज़ हैं

[67:40]

इसको यहां इस टेबल में हमने सम अप किया।

[67:42]

अब बेसिक लॉजिक गेट्स आ जाते हैं। हमारे

[67:44]

डिफरेंट टाइप्स ऑफ़ लॉजिक गेट्स होते हैं।

[67:46]

अगर हम लॉजिक गेट्स का क्लासिफिकेशन करें।

[67:48]

देयर आर थ्री मेन कैटेगरीज़ ऑफ़ द लॉजिक

[67:51]

गेट। फर्स्ट वन इज़ बेसिक गेट। सेकंड वन इज़

[67:53]

यूनिवर्सल अह सॉरी सेकंड वन इज़ हां

[67:55]

यूनिवर्सल गेट। थर्ड वन इज़ स्पेशल पर्पस

[67:58]

गेट। बेसिक गेट्स में हमारे आते हैं एंड

[68:00]

गेट और गेट नॉट गेट। सेकंड कैटेगरी जो है

[68:03]

जिसको स्पेशल पर्पस गेट हम कहते हैं उसमें

[68:05]

हमारे एग्जोर एग्नोर आते हैं। और

[68:07]

यूनिवर्सल गेट में हमारे आते हैं क्या?

[68:09]

नैंड और नर। तो कुल मिलाके सेवन टाइप्स

[68:12]

हमारे गेट के होते हैं। इन सेवन के सेवन

[68:14]

टाइप्स ऑफ़ गेट के ट्रुथ टेबल, इनका सिंबल,

[68:17]

इनका लॉजिक एक्सप्रेशन सारा इस टेबल में

[68:19]

गिवन है। क्योंकि ऑलरेडी आपने फिजिक्स में

[68:21]

भी पढ़ रखा है। यहां बुलियन एक्सप्रेशन का

[68:23]

ही हमारे रूल आ गए। अब हम बात करते हैं कि

[68:25]

जो हमारे बुलियन एक्सप्रेशनंस हैं उनको हम

[68:27]

किस फॉर्म में रिप्रेजेंट कर सकते हैं।

[68:29]

बेसिकली यह तो हमने समझ लिया कि बुलियन

[68:32]

एक्सप्रेशन जो होते हैं हमारे एक ऐसे

[68:34]

मैथमेटिकल इक्वेशन होते हैं जिसमें हम

[68:35]

इनपुट आउटपुट वेरिएबल्स के लॉजिकल रिलेशन

[68:38]

को रिप्रेजेंट करते हैं। अब ये जो हमारे

[68:40]

लॉजिकल रिप्रेजेंटेशन है कह लीजिए बुलियन

[68:42]

एक्सप्रेशन है इट कैन बी रिटन इन टू

[68:44]

फॉर्म्स दैट विल बी एसओपी एंड पीओएस। तो

[68:46]

बुलियन एक्सप्रेशन को राइट डाउन करने के

[68:48]

दो तरीके जो हो सकते हैं वो है हमारे

[68:50]

एसओपी एंड पीओएस। एसओपी का पूरा नाम है सम

[68:53]

ऑफ प्रोडक्ट और पीओएस का पूरा नाम है

[68:54]

प्रोडक्ट ऑफ सम। तो कैसे हम इसको एसओपी और

[68:57]

पीओएस में रिप्रेजेंट करते हैं वो हम समझ

[68:59]

लेते हैं। इन ऑल इनको आप शॉर्ट में समझो।

[69:02]

तो एसओपी का पूरा नाम सम ऑफ़ प्रोडक्ट और

[69:04]

फिर उसका पूरा नाम प्रोडक्ट ऑफ़ सम।

[69:06]

बेसिकली

[69:08]

किसी भी लॉजिकल एक्सप्रेशन को लिखने के दो

[69:10]

तरीके हो सकते हैं। या तो आप उसको

[69:12]

स्टैंडर्ड फॉर्म में लिखें। स्टैंडर्ड

[69:13]

फॉर्म यानी उसके वेरिएबल्स के फॉर्म में

[69:15]

लिखें। a बार b c बार d जितने भी वेरिएबल

[69:18]

हैं दैट कुड बी a b c d x y z और व्हाटएवर

[69:22]

इट इज़ जो भी आप ले लें तो आप इसमें जो भी

[69:25]

वेरिएबल ले रहे हैं अगर आप वेरिएबल के

[69:26]

फॉर्म में वेरिएबल और वेरिएबल के

[69:28]

कॉम्प्लीमेंट की फॉर्म में उसमें प्लस और

[69:31]

डॉट की फॉर्म में इसको रिप्रेजेंट कर रहे

[69:32]

हैं तो ये इसका स्टैंडर्ड रिप्रेजेंटेशन

[69:35]

होता है। बट अगर आप क्या करें? आउटपुट के

[69:38]

फॉर्म में इसको लिखें। आउटपुट के फॉर्म

[69:40]

में कैसे? जब आप कोई भी ट्रुथ टेबल बनाते

[69:42]

हैं तो आप देखते हैं ट्रुथ टेबल में हमारी

[69:44]

कुछ पॉसिबल कंडीशन ऑफ इनपुट होती हैं। वो

[69:47]

पॉसिबल कॉम्बिनेशन ऑफ इनपुट कैसे निकालते

[69:49]

हैं? मैंने बताया था टू टू पावर n से

[69:50]

निकालते हैं। जैसे कि अगर टू इनपुट का कोई

[69:53]

हमारा लॉजिक सर्किट है तो पॉसिबल

[69:54]

कॉम्बिनेशन विल बी फोर। थ्री इनपुट का अगर

[69:57]

कोई हमारा लॉजिक सर्किट है, पॉसिबल

[69:58]

कॉम्बिनेशन विल बी एट। एंड अगर आपका

[70:01]

पॉसिबल कॉम्बिनेशन क्या हो जाएंगे? 16।

[70:03]

अगर इनपुट आपका फोर है तो जैसे-जैसे हमारे

[70:06]

नंबर ऑफ़ इनपुट्स या नंबर ऑफ़ वेरिएबल्स

[70:08]

इंक्रीज़ करते हैं, पॉसिबल कॉम्बिनेशन

[70:09]

हमारे वैसे-वैसे ही बढ़ते चले जाते हैं। तो

[70:12]

बेसिकली किसी भी ट्रुथ टेबल में या फॉर

[70:13]

एनी काइंड ऑफ़ लॉजिक सर्किट वी कैन सी दैट

[70:16]

देयर आर सम पॉसिबल कॉम्बिनेशंस ऑफ़ इनपुट।

[70:19]

और इन पॉसिबल कॉम्बिनेशन ऑफ़ इनपुट के लिए

[70:21]

हमारा कुछ आउटपुट जनरेट होता है। वो भी

[70:24]

फिक्स होता है। जैसे कि आपके अगर 16 इनपुट

[70:27]

कंडीशन है तो उनके लिए कुछ 16 आउटपुट

[70:29]

जनरेट होगा। और आप देखते हैं कभी आउटपुट

[70:31]

आपका जीरो कभी आपका आउटपुट वन में मिलता

[70:34]

है। अगर आप आउटपुट की वन कंडीशन को कंसीडर

[70:37]

कर रहे हैं कि व्हेन आउटपुट्स आर वन आप ये

[70:40]

कंडीशन देख रहे हैं ये चेक कर रहे हैं

[70:42]

व्हेन आउटपुट्स आर वन तो उसको आप कहेंगे

[70:46]

मिन टर्म्स। उसको आप क्या कहेंगे? यू आर

[70:48]

चेकिंग दी मीन टर्म्स। राइट? उसके अलावा

[70:52]

अगर आप ट्रुथ टेबल में आउटपुट की ज़ीरो

[70:54]

कंडीशन को चेक करें। यानी व्हेन आउटपुट्स

[70:57]

आर ज़ीरो। कब कब आपका आउटपुट जीरो आया है?

[71:00]

तो आप इसे कहेंगे कि यू वी आर चेकिंग

[71:03]

मैक्स टर्म्स। तो मिन टर्म्स का मतलब है

[71:05]

कि आप आउटपुट की वन कंडीशन को चेक कर रहे

[71:07]

हैं और मैक्स टर्म का मतलब है आउटपुट की

[71:09]

आप जीरो कंडीशन को चेक कर रहे हैं। तो

[71:11]

एसओपी मिन टर्म्स की फॉर्म में लिखा जा

[71:14]

सकता है। सिमिलरली एसओ पीओएस मैक्स टर्म्स

[71:17]

की फॉर्म में लिखा जाता है और मैक्स

[71:19]

टर्म्स के लिए आप आउटपुट की ज़ीरो कंडीशन

[71:21]

चेक करते हैं। मिन टर्म्स के लिए आप

[71:22]

आउटपुट की वन कंडीशन को चेक करते हैं। या

[71:24]

फिर दूसरा हमारा स्टैंडर्ड फॉर्म हो सकता

[71:26]

है। स्टैंडर्ड फॉर्म यानी आप इसको ए बार

[71:29]

बी बार ए सी डी इन सबके फॉर्म में दिख रहा

[71:32]

है। तो ये हमारा एसओपी का स्टैंडर्ड और

[71:34]

पीओस का स्टैंडर्ड फॉर्म हो जाएगा। तो

[71:38]

यहां पर आपको एक टेबल दे रखी है। हमारी

[71:40]

ट्रुथ टेबल दी गई है जिसमें आप देख रहे

[71:42]

हैं पॉसिबल कॉम्बिनेशन ऑफ़ इनपुट हमारी तीन

[71:44]

वेरिएबल है pqr पॉसिबल कॉम्बिनेशन ऑफ़

[71:47]

इनपुट विल बी 2 की पावर 3 दैट मींस एट

[71:49]

पॉसिबल कॉम्बिनेशन ऑफ़ इनपुट्स आर देयर और

[71:52]

अकॉर्डिंग टू दीज़ इनपुट कॉम्बिनेशन सम

[71:55]

आउटपुट विल बी जनरेटेड। और वो आउटपुट भी

[71:57]

हमारी कितनी होंगी? आठ ही आउटपुट कंडीशन

[71:58]

होंगी। तो आप देख रहे हैं कहीं आपकी

[72:00]

आउटपुट जीरो है। कहीं आपकी आउटपुट वन है।

[72:02]

तो अगर आप मिन टर्म्स देखें कौन-कौन सी

[72:05]

होगी? जहां-जहां वन है। कहां है? y3 1 है।

[72:07]

y5 1 है। y 6 /7 तो मिन टर्म्स की फॉर्म

[72:11]

में कैसे लिखेंगे? m3

[72:14]

m3 m5 m 6 m7 और मैक्स टर्म कौन-कौन से हो

[72:21]

जाएंगे? जबजब ज़ीरो है। m 0 कैपिटल m

[72:24]

दिखाएंगे मैक्स टर्म को। m0 m1 m2 m4 तो

[72:30]

मिन टर्म्स विल बी फॉर दिस ट्रुथ टेबल m3

[72:34]

m5 m6 m7 एंड मैक्स टर्म्स फॉर द सेम

[72:37]

ट्रुथ टेबल m0 m1 m2 m4 हो जाएंगी। ठीक

[72:40]

है? तो अगर हम इसमें जो लॉजिकल रिलेशन है

[72:44]

उसे मिनटम से मैक्स टर्म्स की फॉर्म में

[72:46]

लिख रहे हैं तो हमारा कैनोनिकल एसओपी

[72:48]

कैनोनिकल पीओस फॉर्म कहलाएगा। और अगर हम

[72:51]

पूरे वेरिएबल्स की फॉर्म में लिख रहे हैं

[72:53]

a बार, x बार, y बार ऐसे करके तो वो हमारा

[72:56]

क्या हो जाएगा? जैसे यहां देख रहे हैं f =

[72:58]

p + q + rp p + q + r तो ये आप क्या देख

[73:02]

रहे हैं? आपका स्टैंडर्ड फॉर्म है। और साथ

[73:04]

ही साथ यहां देख रहे हैं क्या है? सम ये

[73:07]

क्या है? सम और उनका क्या हुआ? प्रोडक्ट।

[73:09]

तो प्रोडक्ट ऑफ़ सम। तो ये वाला जो हमारा

[73:12]

रिप्रेजेंटेशन है, दिस इज़ poss क्लियर? तो

[73:16]

हम इक्वेशन को देखकर या जो फंक्शन हमें

[73:18]

गिवन है उसको देखकर हम यह पता लगा सकते

[73:21]

हैं कि हमारा एसओपी है पीs है। जैसे यहां

[73:23]

पर एसओq फॉर्म का एक एग्जांपल दिया है

[73:26]

जिसमें फंक्शन को लिखा है pqr + pq

[73:30]

बारr + pqr बार ये आपको

[73:36]

यह आपको जो इन बॉक्स दिखाई दे रहा है। ठीक

[73:39]

है?

[73:47]

क्लियर? तो हम एसओपी या पीओएस दोनों में

[73:51]

ही अपने

[73:53]

एक्सप्रेशन को लिख सकते हैं। तो अगर आप

[73:57]

मिन टर्म्स मैक्स टर्म्स की फॉर्म में

[73:59]

दिखा रहे हैं तो वो क्या हो गया हमारा?

[74:01]

कैनोनिकल मिन टर्म्स और मैक्स टर्म फॉर्म।

[74:04]

और अगर आप वेरिएबल्स की फॉर्म में दिखा

[74:06]

रहे हैं तो ये हमारा स्टैंडर्ड फॉर्म हो

[74:09]

जाएगा। क्लियर?

[74:11]

अब उसके बाद हमारे कि हम कैसे इसको

[74:14]

सिंपलीफाई कर सकते हैं। सिंपलीफाई करने की

[74:17]

बहुत सारी टेक्निक होती है। एक तो हम बुलन

[74:19]

अलजेब्रा पढ़ चुके। ठीक है? बुलन अलजेब्रा

[74:22]

जैसा कि मैंने बताया इट इज़ अ एरर प्रोन

[74:24]

मेथड। बहुत ज्यादा टिपिकल हो जाता है। जब

[74:26]

हमारा लॉजिक एक्सप्रेशन बहुत बड़ा हो जाए

[74:28]

तो उसमें हम बुल अलजेब्रा के रूल लगाते

[74:31]

लगाते बहुत टाइम टेकिंग प्रोसेस हो जाता

[74:33]

है। प्लस एक स्टेप गड़बड़ होने पर हमारा

[74:35]

पूरा प्रोसेस ही गड़बड़ हो जाता है। तो

[74:37]

इसलिए प्रैक्टिकली हम उसको यूज़ नहीं

[74:39]

करते। प्रैक्टिकली जो मेथड हमारा यूज़ किया

[74:41]

जाता है वो है केमपैप। केम मैप को हम कार

[74:43]

नोट मैप कहते हैं। और कारनोट मैप

[74:45]

एग्जामिनेशन पॉइंट ऑफ़ व्यू से बहुत ज़्यादा

[74:47]

इंपॉर्टेंट है क्योंकि सात नंबर 10 नंबर

[74:49]

के क्वेश्चन केमप से आपसे पूछे जाते हैं।

[74:51]

तो केमप जो है जैसे कि हमने बताया बुलन

[74:53]

एक्सप्रेशन के हमारे दो तरीके हो सकते

[74:55]

हैं। एसओपी पीओएस सेम वैसे ही केमप के भी

[74:58]

दो तरीके एसओपी पीओएस हो सकते हैं। तो

[75:00]

हमारे केमैप जो होते हैं सबसे पहले देखा

[75:02]

जाए तो हम एसओपी पीओएस दो टाइप के केमप

[75:04]

होंगे। फिर अकॉर्डिंग टू इनपुट वेरिएबल्स

[75:06]

कि जिस सर्किट के लिए आप केमैप बना रहे

[75:08]

हैं उसमें कितने वेरिएबल यूज़ हो रहे हैं।

[75:10]

उस बेसिस पर हमारे केमैप टू वेरिएबल, थ्री

[75:13]

वेरिएबल, फोर वेरिएबल अप टू फाइव वेरिएबल

[75:15]

का केमप हमें पढ़ना है। ऑलदो सिक्स वेरिएबल

[75:17]

का के मैप होता है। बट हम 2 3 4 फाइव

[75:20]

वेरिएबल तक के मैप पढ़ेंगे।

[75:23]

के मैप जो होता है बेसिकली हम इसमें एक

[75:25]

टेबुलर टेबल फॉर्म में ही कह लीजिए एक

[75:28]

मैपिंग फॉर्म में ही इनपुट आउटपुट कंडीशन

[75:30]

को रिप्रेजेंट करते हैं। यानी जो पॉसिबल

[75:32]

कॉम्बिनेशन ऑफ़ इनपुट और उसके रिजल्टेंट जो

[75:34]

आउटपुट मिली है उनको हम K मैप पे

[75:36]

रिप्रेजेंट करते हैं। तो टू वेरिएबल का जो

[75:38]

K मैप है यहां एसओपी फॉर्म दिखाया है। तो

[75:40]

हम इसमें देख रहे हैं टू वेरिएबल में दो

[75:43]

हमारे क्या है? कॉलम और दो ही हमारे क्या

[75:45]

है? रो जिनसे हमें चार सेल्स मिल रहे हैं।

[75:48]

ये चार सेल्स हमारे इस सर्किट के लिए यानी

[75:51]

किसी दो इनपुट के लॉजिक सर्किट के लिए

[75:53]

पॉसिबल कॉम्बिनेशन ऑफ़ इनपुट जो कि चार हैं

[75:55]

और चार ही आउटपुट स्टेट को रिप्रेजेंट

[75:57]

करता है। हर एक सेल जो होता है उसका अपना

[75:59]

एक स्पेसिफिक नंबर होता है। यानी हर एक

[76:01]

सेल जो होता है वो स्पेसिफिक आउटपुट को

[76:03]

रिप्रेजेंट करता है जिसको हम कहते हैं

[76:05]

नंबरिंग ऑफ़ सेल्स। तो पहला इंपॉर्टेंट

[76:07]

स्टेप है डॉ दी के मैप। आपको पता होना

[76:10]

चाहिए कि जो भी एक्सप्रेशन दिया अगर एसओपी

[76:12]

में दिया तो एसओपी के मैप बनाएंगे। अगर

[76:14]

पीओएस में बनाया तो पीओएस के मैप बनाएंगे।

[76:16]

तो आपको पहले तो ये पता होना चाहिए कि

[76:17]

केमप एसओपी में बनाना है या पीओएस में

[76:20]

बनाना है। दूसरी बात कितने वेरिएबल का

[76:22]

केमप आपको बनाना है? यू हैव टू आइडेंटिफाई

[76:23]

द नंबर ऑफ़ इनपुट्स। और यू हैव टू

[76:25]

आइडेंटिफाई द नंबर ऑफ़ वेरिएबल्स।

[76:27]

अकॉर्डिंग टू नंबर ऑफ़ वेरिएबल्स यू हैव टू

[76:29]

ड्रॉ दैट सूटेबल के मैप। अगर टू का है तो

[76:32]

टू वेरिएबल बनाएंगे। थ्री वेरिएबल का है

[76:34]

तो थ्री वेरिएबल का के मैप बनाएंगे। और

[76:35]

फोर या फाइव वेरिएबल का तो फोर या फाइव

[76:37]

वेरिएबल का केमप आप बनाएंगे। यानी आपको

[76:39]

डिसाइड करना है कि Kap एसओपी में बनाए या

[76:42]

पीओएस में बनाए। कितने वेरिएबल का के मैप

[76:44]

बनाया? तो पहला इंपॉर्टेंट स्टेप है ड्रॉ

[76:46]

द केम मैप अकॉर्डिंग टू द क्वेश्चन। दूसरा

[76:49]

है नंबरिंग ऑफ़ सेल्स। जैसे कि मैंने बताया

[76:51]

हर एक केम मैप में चाहे वो टू इनपुट का

[76:53]

हो, थ्री इनपुट का हो, फोर इनपुट का या

[76:54]

फाइव इनपुट का हो। हर एक सेल जो होता है

[76:57]

वो डिफरेंट आउटपुट कंडीशन को रिप्रेजेंट

[76:58]

करता है। और हर एक सेल एक स्पेसिफिक

[77:01]

आउटपुट को रिप्रेजेंट करता है। यानी हर एक

[77:03]

सेल का अपना एक फिक्स नंबर होता है। तो

[77:05]

आपको ये नंबरिंग ऑफ़ सेल्स याद होने चाहिए।

[77:08]

उसके बाद है फिलिंग ऑफ़ केम मैप। के मैप

[77:10]

क्या फिलिंग करते हैं? अगर आप एसओपी की

[77:12]

बात कर रहे हैं तो यू हैव टू फाइंड द मिन

[77:14]

टर्म्स। यानी मिन टर्म्स जो होंगी वहां

[77:16]

वहां आप वन फिल करेंगे केमप में। यानी मिन

[77:19]

टर्म्स का मतलब है कि ये आउटपुट कंडीशन वन

[77:21]

है। तो केमप जब आप एसएमई में बनाते हैं तो

[77:24]

एसओपी के लिए वंस को फिल करते हैं केमप

[77:26]

में। और पीओएस का एक्सप्रेशन है या मैक्स

[77:29]

टर्म में अगर फंक्शन दे रखा है तो आप ज़ीरो

[77:31]

को फिल करते हैं। तो केमप फिलिंग में ये

[77:33]

भी ध्यान रखना एसओपी है तो वन भरेंगे और

[77:35]

पीएस है तो ज़ीरो भरेंगे। लास्ट में इन

[77:38]

जीरोज़ की या वंस की यानी अगर पीओएस है तो

[77:40]

जीरोज़ की ग्रुपिंग करेंगे और एसओपी है तो

[77:43]

वंस की ग्रुपिंग करेंगे। तो आप इन वन की

[77:45]

या जीरो की क्या करते हैं? ग्रुपिंग करते

[77:47]

हैं। ग्रुपिंग की हमारी पॉसिबल कंडीशन हो

[77:49]

सकती हैं। इट कुड बी ऑक्टेड, इट कुड बी

[77:51]

क्वाड और इट कुड बी पेअ और अ सिंगल वन।

[77:54]

सिंगल वन भी बचता है। तो उसका भी

[77:56]

एक्सप्रेशन लिखा जाता है। तो हम कोशिश

[77:58]

करते हैं कि हम बड़े से बड़ा लूप बनाना है।

[78:00]

बड़े से बड़ा ग्रुप बनाना है। साथ ही साथ

[78:03]

कोई भी सिंगल वन हमारा बचना नहीं चाहिए।

[78:05]

जैसे यहां थ्री वेरिएबल के, टू वेरिएबल

[78:07]

के, फाइव वेरिएबल के इन सभी के, फोर

[78:09]

वेरिएबल के मैप को कैसे बनाते हैं और उनकी

[78:13]

नंबरिंग कैसे करते हैं यहां दिखा रखा है।

[78:16]

तो आप देख रहे हो टू इनपुट का तो केम मैप

[78:18]

ऑलरेडी दिखा चुके हैं। टू इनपुट का के मैप

[78:20]

ये था हमारा प्रीवियस पेज पे। जहां दो

[78:22]

वेरिएबल a और b होंगे। a हमारे रोज़ की

[78:25]

हेल्प से हम रिप्रेजेंट कर रहे हैं B को

[78:26]

हम कॉलम की हेल्प से। तो B ज़ीरो होगा या

[78:29]

वन यानी B बार या B यहां A में भी कंडीशन

[78:32]

A ज़ीरो हो गया वन। यानी a बार या a और

[78:35]

नंबरिंग ऑफ़ सेल क्या होगी? 0 1 2 3 थ्री

[78:39]

वेरिएबल के मैप पे हमारी तीन इनपुट जो

[78:41]

होंगे हम मान रहे हैं। दिस इज़ A, B, C तो

[78:44]

हम रोज़ में रिप्रेजेंट कर रहे हैं A को और

[78:46]

कॉलम में रिप्रेजेंट कर रहे हैं B और C

[78:48]

को। तो A की कंडीशन तो वही होगी। या तो A

[78:51]

ज़ीरो होगा या वन होगा। यानी A बार या A. B

[78:53]

C की कंडीशन क्या होगी? या तो B और C

[78:55]

दोनों ज़ीरो या ज़ीरो वन या वन वन या 1 0।

[78:58]

तो चारों पॉसिबल कॉम्बिनेशन को हमने यहां

[79:01]

पर लिख दिया। नंबरिंग ऑफ सेल कैसे होगी? 0

[79:04]

1 2 3 पूरा एक कॉलम छोड़ना है। 0 1 2 3

[79:08]

फिर 4 5 6 7 तो ये हमारी नंबरिंग ऑफ़ सेल।

[79:12]

इसी तरीके से फोर वेरिएबल के मैप में हमने

[79:14]

चार वेरिएबल माने हैं A, B, C, D। तो हम

[79:17]

रोज़ में ले रहे हैं A और B, कॉलम में ले

[79:19]

रहे हैं C और D। तो हैं AB के पॉसिबल

[79:22]

कॉम्बिनेशन चार हो जाएंगे। 0 1 1 एंड 1 0

[79:25]

इसी तरीके से CD भी 0 0 1 1 0। पॉसिबल

[79:29]

कॉम्बिनेशन हमारे हो गए 16। तो आउटपुट

[79:31]

कंडीशन विल आल्सो बी 16 इन 16 आउटपुट

[79:34]

कंडीशन को हम ज़ीरो से 15 तक रिप्रेजेंट

[79:36]

करेंगे। तो नंबरिंग ऑफ़ सेल हो जाएगी 0 1

[79:39]

पूरा एक कॉलम छोड़ेंगे 2 3 4 5 फिर एक सेल

[79:43]

छोड़ेंगे 6 7 फिर हमारा पूरा एक रो छोड़ना

[79:46]

है 8 9 10 11 फिर 12 13 14 15 तो इस तरीके

[79:51]

से ज़ीरो से 15 तक की जो आउटपुट कंडीशन है

[79:53]

उसको हमने इसमें रिप्रेजेंट कर लिया।

[79:54]

सिमिलरली जो थोड़ा सा टिपिकल है हमारा

[79:56]

फाइव वेरिएबल का के मैप है जो आपको थोड़ा

[79:58]

मुश्किल लग सकता है। फाइव वेरिएबल का के

[80:00]

मैप जो है इसमें हमारे पांच वेरिएबल ए बी

[80:02]

सी डी है जिसमें a और b को हम रो से और cd

[80:07]

को हम कॉलम से रिप्रेजेंट कर रहे हैं।

[80:08]

बेसिकली जो फाइव का के मैप है उसको

[80:10]

इज़िएस्ट वे में कंसीडर करने के लिए माना

[80:12]

जाता है कि दो के मैप एक दूसरे के एडजेेंट

[80:14]

है। एक दूसरे के बराबर रखे हैं। तो cde की

[80:17]

पॉसिबल कंडीशन हो जाएगी। या तो तीनों ज़ीरो

[80:19]

या दो ज़ीरो एक वन। फिर हमारा एक वन फिर

[80:23]

बाकी 0 1 1 फिर 0 1 1 ऐसे हमारी कंडीशन हो

[80:26]

जाएंगी जिससे हम इसका के मैप बना लेंगे और

[80:29]

इसकी जो पॉसिबल कंडीशन है वो कैसे भरी

[80:31]

जाती है इसको हम भरेंगे 0 1 2 3 4 5 6 7

[80:36]

इसको मैं दोबारा लिख देती हूं। इस तरीके

[80:38]

से हम इसकी मैपिंग करेंगे। यह हो जाएगा 0

[80:43]

1 2 3 4 5 6 7 फिर यहां से 8 9 10 11 फिर

[80:52]

12 13 14 15 फिर जो इसके बराबर वाला के

[80:58]

मैप है इसको लेंगे कहां 16 17 ये 18 ये 19

[81:03]

ये 20 21

[81:06]

22

[81:09]

सॉरी

[81:10]

20 21 22 23 फिर हमारा पूरे छोड़ देंगे एक

[81:15]

कॉलम 24 25

[81:18]

26 27 फिर ये हो जाएगा 28 29 ये 30 और ये

[81:25]

31

[81:28]

ठीक है

[81:38]

तो इस तरीके से हम फाइव वेरिएबल का के मैप

[81:40]

भी डॉ कर सकते हैं और उसके नंबरिंग ऑफ़

[81:42]

सेल्स को याद रखेंगे।

[81:44]

अब इस पर बेस्ड जो क्वेश्चन आते हैं उनको

[81:47]

समझने से पहले पहले आपको ये समझना होना

[81:49]

चाहिए कि हमारी पॉसिबल कंडीशन ग्रुपिंग की

[81:51]

कैसे हो सकती है? यानी आपने केम मैप बना

[81:53]

लिया। केम मैप की आपने फिलिंग भी कर दी।

[81:55]

आपने जहां-जहां ज़ीरो भरना था, जहां-जहां

[81:57]

वन भरना था वो बना दिया। अब इसकी ग्रुपिंग

[82:00]

कैसे हो सकती है? तो ग्रुपिंग की बहुत

[82:01]

सारी कंडीशन हो सकती है। आप जो पेयर बना

[82:04]

रहे हैं या तो दो वन एक साथ हो तो पेयर

[82:06]

बनेगा। चार वन एक साथ है तो क्वाड बनेगा

[82:09]

और आठ वन एक साथ है तो ऑक्टेट बनेगा। आपको

[82:12]

कोशिश क्या करनी है कि ट्राई टू मेक

[82:15]

लार्जर ग्रुप सबसे बड़ा ग्रुप बनाना है।

[82:17]

यानी अगर वंस का या ज़ीरोज़ का ग्रुप बना

[82:19]

रहे हैं तो कोशिश करें पहले सबसे बड़ा

[82:21]

ग्रुप बने। फिर साथ-साथ आपको बना ये भी

[82:24]

कोशिश करनी है कि नंबर ऑफ़ ग्रुप कम रहें।

[82:26]

बहुत ज्यादा ग्रुप्स नहीं बनाने हैं।

[82:28]

जितने ज्यादा ग्रुप्स आप बनाएंगे

[82:30]

एक्सप्रेशन में नंबर ऑफ टर्म्स उतने

[82:31]

ज्यादा हो जाएंगे। यानी एक्सप्रेशन आपका

[82:33]

उतना लंबा हो जाएगा। साथ ही साथ आपको यह

[82:35]

भी कोशिश करनी है कि जितने भी आपको के मैप

[82:38]

में वंस दिए गए हैं या जीरो दिए गए हैं उन

[82:40]

सभी की ग्रुपिंग हो जाए। कोई भी सिंगल ना

[82:43]

बचे। इस तरीके से आपको ग्रुपिंग ऑफ़ सेल

[82:45]

करनी है। तो हमारे एक क्वेश्चन दिया गया

[82:49]

है जिसमें मिनिमाइज़ द गिवन बुलियन फंक्शन

[82:51]

यूज़िंग द K मैप जिसमें हमारा एक फंक्शन

[82:53]

दिया है ए बी सी CD। आप देख रहे हैं

[82:55]

फंक्शन को मिड टर्म्स में दे रखा है।

[82:56]

समेशन ऑफ़ m यानी मिन टर्म। तो 3 4 5 7 9

[83:01]

13 14 15 दीज़ आर द मिन टर्म्स एट वि

[83:03]

आउटपुट इज वन। हम उनको रिप्रेजेंट कर रहे

[83:06]

हैं। तो हमने K मैप बनाया। हमें पता चल

[83:08]

रहा है चार वेरिएबल का K मैप जिसमें चार

[83:10]

वेरिएबल ए बी सी डी है। हमने चार वेरिएबल

[83:12]

का K मैप एक बनाया जिसमें ज़ीरो से लेके 15

[83:14]

तक की जो कंडीशन है 0 1 2 3 4 5 6 7 फिर

[83:18]

हमारा 8 9 10 11 13 14 15 ज़ीरो से 15 तक

[83:21]

की आउटपुट कंडीशन को रिप्रेजेंट करा। जो

[83:23]

जो मिन टर्म दे रखी है वहां वहां पे हमने

[83:25]

वन फिल कर दिया। और अब हम इसकी क्या

[83:28]

करेंगे? ग्रुपिंग करेंगे। तो हम कर रहे

[83:30]

हैं ग्रुपिंग करने पर हमें क्या मिले? चार

[83:32]

पेयर मिले। एक पेयर यह, एक पेयर यह, एक

[83:35]

पेयर ये। और इस तरीके से हम देख रहे हैं

[83:37]

कोई भी हमारा सिंगल वन नहीं बच पा रहा है।

[83:39]

तो, हमारा जो इसका सिंपलीफाइड एक्सप्रेशन

[83:42]

आएगा, इस ग्रुप के लिए आ जाएगा A, BC, इस

[83:44]

ग्रुप के लिए आ जाएगा A, C, D बार, AC बार

[83:46]

D। कैसे करते हैं? जब हम सिंपलीफ़ाइड

[83:49]

एक्सप्रेशन इसका लिखते हैं इन ग्रुप के

[83:50]

लिए, तो पहले रो को फिर कॉलम को रीड

[83:53]

करेंगे। जैसे हमने इसके लिए पहले रो को

[83:55]

रीड किया। तो रो क्या है? ab और ab बार।

[83:58]

यह जो हमारा ग्रुप है, यह ab में भी लाई

[84:00]

कर रहा है, ab बार में भी लाई कर रहा है।

[84:01]

तो हमें इन दोनों का कॉमन लेना है। दोनों

[84:03]

में कॉमन क्या है? एक। फिर ये जो हमारा

[84:06]

पेयर है, हम कॉलम को रीड करेंगे। पूरी की

[84:08]

पूरी एक ही कॉलम में लाई कर रहा है C बार

[84:10]

D। तो इसका एक्सप्रेशन आ जाएगा A, C बार

[84:12]

D। तो इस तरीके से हमारा सिंपलीफाइड

[84:14]

एक्सप्रेशन इस क्वेश्चन के लिए आ जाएगा।

[84:16]

इसी तरीके से यहां फाइव वेरिएबल का एक

[84:18]

क्वेश्चन है जो कि A के 2017-18 में पूछा

[84:21]

गया था। अगर आप देख रहे हैं के मैप का कोई

[84:23]

भी क्वेश्चन सात नंबर 10 नंबर से कम का

[84:25]

नहीं आता है। इसमें बहुत ज्यादा मेहनत

[84:28]

आपको नहीं करनी। थोड़े से टॉपिक प्रैक्टिस

[84:31]

मांगेगा। ज्यादा से ज्यादा प्रैक्टिस के

[84:32]

क्वेश्चन की करेंगे तो आपको बहुत ईजीली

[84:35]

बहुत चुटकियों में इस क्वेश्चन को कर

[84:36]

देंगे। जितना टाइम आपको थ्योरी लिखने में

[84:38]

लगता है, डायग्राम बनाने में लगता है,

[84:40]

उससे आधे से भी आधा टाइम आपको केमप सॉल्व

[84:43]

करने में लगेगा। पेपर्स भरने भरने की

[84:45]

जरूरत नहीं है। क्योंकि स्टूडेंट्स को ये

[84:47]

लगता है कॉपी ज्यादा से ज्यादा भरो तो

[84:49]

ज्यादा नंबर मिलेंगे। तो इसमें पेपर भी

[84:50]

भरने की जरूरत नहीं है आपको। आप सिंपल के

[84:53]

में आप बहुत आसानी से कम स्पेस में कम

[84:55]

टाइम के साथ बहुत आसानी से ज्यादा नंबर ले

[84:58]

सकते हो।

[84:59]

तो यहां एक एक्सप्रेशन दिया है जिसमें

[85:01]

समेशन ऑफ मिन टर्म दे रखा है। वेरिएबल

[85:03]

हमें कहीं नहीं दे रखे कि a b cd है, x y

[85:05]

z है। तो आप अपनी मर्जी से कोई भी वेरिएबल

[85:07]

ले सकते हैं। तो हमने यहां फिर से वेरिएबल

[85:09]

को a b c d डी ही लेट किया है। और हमारे

[85:11]

वेरिएबल्स में हम देख रहे हैं मिड टर्म जो

[85:13]

दे रखे हैं 0 1 3 5 6 7 8 9 13 16 नहीं 13

[85:17]

नहीं है। 11 16 18 19 21 22 24 26 तो आपको

[85:22]

पता है कि जब हम फोर वेरिएबल का केएम आप

[85:24]

बनाते हैं तो ज़ीरो से 15 तक के मिन टर्म्स

[85:27]

आते हैं। अब यहां मिनट्स 15 से बड़े आ गए।

[85:29]

दैट मींस ये क्लियर है कि हमारा फोर

[85:31]

वेरिएबल का के मैप तो यहां काम नहीं

[85:33]

करेगा। तो हमें फाइव वेरिएबल का के मैप

[85:35]

बनाना पड़ेगा। क्योंकि फाइव वेरिएबल के मैप

[85:38]

में जो हमारी आउटपुट कंडीशन है वो ज़ीरो से

[85:40]

31 तक की होती है। तो हमने फाइव वेरिएबल

[85:43]

का के मैप बनाया जिसमें हमने रोज़ में AB

[85:45]

और हमने कॉलम में CDE को मार्क किया है।

[85:48]

हमारी जो डिफरेंट मिन टर्म्स हैं उनके

[85:50]

अकॉर्डिंग हमने केम मैप को फिल किया और

[85:52]

केम मैप को फिल करने पे हमने देखा कि

[85:55]

हमारा एक ग्रुप जो बन पा रहा है।

[86:00]

सबसे पहले तो एक क्वाड हमारा जो यहां पर

[86:02]

बन रहा है। ये रहा। ठीक है? दूसरा कॉर्ड

[86:06]

हमारा मैप रोलिंग से बन रहा है। मैप

[86:08]

रोलिंग हम आपको ऑलरेडी समझा चुके हैं। मैप

[86:10]

रोलिंग क्या है? कि अगर हम ये लेट करें कि

[86:13]

के मैप के टॉप और बॉटम कॉर्नर्स को टॉप और

[86:16]

बॉटम साइड को या लेफ्ट और राइट साइड को

[86:19]

मिला दें, फोल्ड कर दें तो भी ये एक ग्रुप

[86:21]

फॉर्म अप कर सकते हैं। जैसे आप देख रहे

[86:23]

हैं इसके टॉप साइड और इसकी बॉटम साइड को

[86:25]

हमने मिला दिया। तो यह भी एक क्वाड फॉर्म

[86:27]

अप कर रहा है। एक हमारा यह बन गया। ठीक

[86:29]

है? एक पेयर हमारा यह बन गया। एक पेयर

[86:33]

हमारा यह भी बन गया। एक पेयर हमारा यह बन

[86:36]

गया वर्टिकल पेयर। ठीक है? मैप रोलिंग फिर

[86:39]

एक हमने यह भी बना लिया। ठीक? एक हमारा

[86:42]

मैप रोलिंग से हमने पेयर बनाया। एक वन ये

[86:44]

एक वन ये। मैप रोलिंग से एक वन ये लिया।

[86:47]

एक वन ये लिया। तो इस तरीके से हमारे

[86:49]

कितने ग्रुप बन गए? सेवन ग्रुप्स बन गए।

[86:52]

जिनको हमने G1, G2, G3, G4, G5, G6, G7

[86:56]

लिख दिया। हर एक ग्रुप का एक सिंपलीफाइड

[86:58]

एक्सप्रेशन हमने नोट किया। कैसे करा? बाय

[87:01]

रीडिंग दी रोज़ एंड कॉलम्स। रोज़ को पढ़ेंगे,

[87:04]

फिर कॉलम को पढ़ेंगे। ठीक है? तो रोज़ कैसे

[87:06]

पढ़ी? जैसे हमने इस वाले में इस वाले क्वाड

[87:10]

के लिए देख लेते हैं। इसमें हमने रो पढ़ी।

[87:12]

कौन सी रो में लाई कर रहा है? A बार B में

[87:14]

और AB में। दोनों में कॉमन वेरिएबल क्या आ

[87:16]

रहा है? B. तो हमने क्या लिख दिया? B. फिर

[87:18]

ये क्वाड हमारे दो कॉलम में लाई कर रहा

[87:20]

है। एक कॉलम है C बार, D बार, E बार।

[87:23]

दूसरा कॉलम है C बार, D बार, E। अब इनमें

[87:25]

कॉमन क्या है? C बार, D बार। तो इसका

[87:28]

एक्सप्रेशन आ जाएगा B C बार D बार। इसीक़ी

[87:31]

से हर एक ग्रुप का सिंपलीफ़ाइड एक्सप्रेशन

[87:33]

लिखेंगे और हमारा रिज़ल्टेंट जो एक्सप्रेशन

[87:36]

है वो आ जाएगा। जैसे हमने एसओपी पढ़ा ठीक

[87:40]

वैसे ही दूसरा जो हमारा K मैप है वो है

[87:42]

POS K मैप। यानी अगर आपको क्वेश्चन जो है

[87:45]

प्रोडक्ट ऑफ़ सम की फॉर्म में लॉजिकल

[87:47]

एक्सप्रेशन दे रखा हो। या फिर आपको मैक्स

[87:50]

टर्म्स की फॉर्म में फंक्शन दे रखा हो तब

[87:52]

आपको K मैप PS फॉर्म में बनाना होगा। तो

[87:55]

पीएस फॉर्म में जो हमारा केम मैप है वो

[87:58]

यहां पर दिखा रखा है। एसओपी की तरह ही

[88:00]

हमारा पीओएस भी अह दो वेरिएबल, तीन

[88:04]

वेरिएबल, चार वेरिएबल या पांच वेरिएबल का

[88:06]

हो सकता है। तो यहां बिल्कुल सेम वही

[88:09]

तरीका है। बस नंबरिंग ऑफ़ स्टाइल्स तो

[88:10]

बिल्कुल वैसे ही है जैसे हमारी एसओपी में

[88:13]

थी। बस वेरिएबल्स को मार्क करने का तरीका

[88:15]

बदल जाएगा। पीओएस में हम ज़ीरो को विदाउट

[88:17]

बार और वन को विद बार। आपको याद हो एसओपी

[88:20]

जो था वो ज़ीरो वन था। ज़ीरो वन था तो ये B

[88:23]

बार था। ये B ये 0 1 था तो ये A बार A था।

[88:27]

बस क्या है? वही है। 0 1 0 1 PS में ज़ीरो

[88:31]

को विदाउट बार और वन को विद बार

[88:33]

रिप्रेजेंट करते हैं। बाकी नंबरिंग ऑफ़ सेल

[88:35]

वही होगा। 0 1 2 3

[88:38]

यहां थ्री वेरिएबल का के मैप है जिसमें

[88:40]

तीन वेरिएबल A, B, C हैं। हम देख रहे हैं

[88:42]

रोज़ पे हमने A को और कॉलम पे हमने B, C को

[88:45]

लिया है। पॉसिबल कंडीशन वही होंगी। ये

[88:47]

ज़ीरो, यह 1 0 1 1 0 वही है जो एसओपी में

[88:51]

थी। बस क्या होगा? ज़ीरो ज़ीरो जो है उसे हम

[88:53]

किससे रिप्रेजेंट करेंगे? विदाउट बार से।

[88:55]

और इनके बीच में क्या हो जाएगा? प्लस।

[88:57]

एसओपी में हम इसे दिखाते हैं B.B बार.c

[89:00]

बार से। तो ज़ीरो को B बार, अगली ज़ीरो को C

[89:04]

बार और इनके बीच में डॉट दिखाते हैं। POS

[89:06]

है तो ज़ीरो को विदाउट बार दिखाएंगे। केवल

[89:08]

B से ज़ीरो है तो केवल C से विदाउट बार और

[89:12]

इनके बीच क्या हो जाएगा? प्लस। तो ये हो

[89:13]

जाएगा B + C, यह B + C बार, यह B + B बार

[89:16]

+ C बार, यह B बार + C। तो इस तरीके से हम

[89:19]

पीओएस मैप भी अपना ड्रॉ कर सकते हैं। यह

[89:22]

डिपेंड करता है कि आपको एग्जामिनेशन में

[89:25]

जो क्वेश्चन पूछा जाता है वो एसओपी में

[89:27]

पूछा जा रहा है या पीओएस में पूछा जा रहा

[89:30]

है। यहां पर एक और एग्जांपल हम लेकर आए

[89:32]

हैं जिसमें हमारा फंक्शन जो है ए बी सी डी

[89:35]

दे रखा है जो कि मिन टर्म्स में दिया है।

[89:37]

ए बी सी डी से ऑब्वियसली यहां समझ में आ

[89:40]

रहा होगा आपको कि पांच वेरिएबल आपको दे

[89:42]

रखा है। यानी पांच वेरिएबल का आपको के मैप

[89:44]

बनाना है। पांच वेरिएबल का के मैप मैंने

[89:45]

बताया था। जैसे कि दो पार्ट में तोड़कर आप

[89:48]

इसको बना सकते हैं। तो यहां हमने दो

[89:50]

वेरिएबल de और दो वेरिएबल हमने BC ले लिए

[89:54]

और हमने माना एक बार A की कंडीशन क्या है?

[89:56]

ज़ीरो। ये पांच वेरिएबल का K मैप है। पांच

[89:59]

वेरिएबल में अगर हम माने कि हम एक वेरिएबल

[90:01]

को साइड रख दें। दो वेरिएबल चार वेरिएबल

[90:04]

को देखें तो हम चार वेरिएबल का K मैप हमने

[90:06]

एक बनाया। चार वेरिएबल का K मैप हमने एक

[90:08]

बनाया। अब कंडीशन अगर हम B C DE को अलग रख

[90:11]

दें तो A या तो ज़ीरो होगा या वन होगा। अगर

[90:14]

a 0 है तो bcd का एक के मैप यह बना दिया

[90:17]

और a = 1 है तो bcd का एक के मैप यह बना

[90:20]

दिया। तो a = 1 पे हमारा जो केम मैप होगा

[90:23]

यानी a बार a बार की कंडीशन पे हमारा ये

[90:26]

केम मैप होगा और a1 की कंडीशन पे हमारा ये

[90:28]

केम मैप होगा। तो जहां-जहां वेरिएबल्स में

[90:31]

ज़ीरो हो a वहां आप ये केम मैप का यूज़

[90:34]

करेंगे। और जहां-जहां वेरिएबल a की वैल्यू

[90:37]

वन हो वहां इस के मैप का यूज़ करेंगे।

[90:39]

वेरिएबल a की वैल्यू वन कब होगी? जब हमारी

[90:42]

32 पॉसिबल कंडीशन है 16 के बाद वाली यानी

[90:46]

ज़ीरो से लेके 15 तक की जो कंडीशन है वो आप

[90:48]

किस में रिप्रेजेंट करेंगे इस वाले के मैप

[90:51]

में। और 15 के बाद वाली जो कंडीशन होंगी

[90:53]

16 से लेके 31 तक वो आप रिप्रेजेंट करेंगे

[90:55]

इस वाले के मैप में। क्योंकि a जो है जब

[90:58]

हम फाइव वेरिएबल की बात कर रहे हैं। फाइव

[91:01]

वेरिएबल में 2 पावर 5 पॉसिबल कॉम्बिनेशन

[91:03]

होंगे। यानी 32 कॉम्बिनेशन होंगे। और 32

[91:06]

कॉम्बिनेशन का मतलब है आउटपुट विल बी 0 टू

[91:09]

31

[91:11]

और 0 टू 31 यानी 32 कंडीशन के लिए a 16

[91:14]

बार जीरो होगा 16 बार वन तो 0 से लेकर 15

[91:18]

तक यानी 16 बार तक तो a ज़ीरो होगा उसके

[91:20]

बाद a क्या रहेगा वन। तो हमने यहां पर यह

[91:23]

कंडीशन बना ली 01 1 1 0 वही सेम वही चल

[91:28]

रहा है जैसे हमने वहां दिखाया था डी बार ई

[91:32]

बार डी बार ई

[91:36]

और डी का बार यहां भी बी बार सी बार बी

[91:41]

बार सी बी सी और बी सी का बार आउटपुट के

[91:47]

मैप की फिलिंग बिलकुल वैसी है 0 1 2 3 4 5

[91:51]

6 7 फिर 8 9 10 11 13 अह 12 13 14 15 16

[91:58]

वैसे ही भरेंगे अगला वाला 16 17 एक छोड़

[92:01]

के 18 19 20 21 एक छोड़ के 22 23 फिर पूरा

[92:06]

रो छोड़ेंगे 24 25 26 27 28 29 30 31

[92:14]

क्लियर यहां भी वेरिएबल की सेम कंडीशन हो

[92:16]

जाएगी dc की 0 0 1 1 0 यानी कि b बार C

[92:21]

बार, B बार C, BC और BC का बार। यहां भी

[92:24]

DE की कंडीशन 0 0 1 1 0 1 1 0 यानी कि D

[92:28]

बार E, D बार E, DE और DE का बार। ये सारी

[92:32]

कंडीशन हमने फुलफिल कर दी। अब हमारे जो

[92:35]

फंक्शन में गिवन है वो क्या दे रखा है? मन

[92:37]

टर्म्स हमारी 0 5 6 8 9 10 11 16 20, 24,

[92:42]

25, 26, 27। तो हमने एज़ इट इज़ अपनी ये

[92:45]

कंडीशन जो है मन टर्म्स की फिल कर दी।

[92:47]

इसमें भी और इसमें भी। अब इसमें हमें एक

[92:50]

चीज का ध्यान रखना है। आपको ये याद रखना

[92:53]

है कि ये जो जीरो है ये बिल्कुल 16 के

[92:56]

एडजेक्टेंट सेल है। यानी 16 वाला सेल यानी

[92:59]

ज़ीरो एडजेकेंट है इसके। फोर एडजेकेंट है

[93:02]

20 के। 12 एडजेकेंट है 28 के। एट एडजेकेंट

[93:06]

है 24 के। सिमिलरली वन जो है वो यहां 17

[93:09]

के। 15 जो है एडजेकेंट 21 के। 13 एडजेकेंट

[93:13]

29 के। और नाइन एडजेकेंट है 25 के।

[93:15]

सिमिलरली यही पॉसिबल सीक्वेंस हमारे चलते

[93:18]

चले जाएंगे।

[93:20]

तो आप देख रहे हैं जब आपने इसको फिल किया

[93:22]

पहला तो हमारा क्या हो गया? ये चार वन एक

[93:25]

साथ हो गए और चार वन एक साथ। अब हमें इसे

[93:27]

देख रहे हैं तो हमें देखने में ये लग रहा

[93:29]

है कि एक क्वाड यहां बना एक क्वाड यहां

[93:32]

बना। एक्चुअली ये दोनों के मैप एक दूसरे

[93:34]

से सटे हुए हैं। तो ये जो चार चार वन यहां

[93:37]

चार वन यहां ये मिलकर एक ऑक्टेट बना रहे

[93:39]

हैं। आठ वन एक साथ है। तो ये दोनों मिलकर

[93:42]

एक ही ग्रुप बना रहे हैं जो कि क्या है?

[93:43]

एक ऑक्टेट है। फिर उसके बाद हम देख रहे

[93:46]

हैं यहां पर हमारा क्या है? ये वाली

[93:48]

कंडीशन बची वन की सिंगल यहां ये बची यहां

[93:51]

पर। तो यानी हमारा एक ग्रुप बन गया कौन

[93:54]

सा? सबसे पहले ग्रुप बाय ग्रुप देखते हैं।

[93:56]

पहला ग्रुप जो है हमारा एक वन यहां और एक

[93:58]

वन यहां। जैसे कि मैंने बताया था ये वाला

[94:00]

सेल इसके ठीक एडजेेंट है। तो ये वाला वन

[94:03]

और ये वाला वन एक ग्रुप बना रहे हैं। आप

[94:05]

देख रहे हो ग्रुप वन। ग्रुप वन। क्लियर?

[94:08]

दूसरा जो ग्रुप है ग्रुप टू हमारा यह बन

[94:11]

रहा है ग्रुप टू यह सिंगल वन बच रहा है

[94:13]

इसका कुछ नहीं हो पाएगा ग्रुप थ्री यह भी

[94:15]

सिंगल बच रहा है इसकी कहीं पेयरिंग नहीं

[94:17]

हो पा रही फिर हमारा बनेगा ग्रुप फोर

[94:20]

ग्रुप फोर हमारा कैसे बनेगा ये वाला बनेगा

[94:22]

जो कि केवल इस वाले के मैप में बन रहा है

[94:24]

एक वर्टिकल वन का पेयर बन रहा है और ग्रुप

[94:27]

फाइव ये ऑक्टेट बन रहा है तो इसका

[94:28]

सिंपलीफाइड एक्सप्रेशन हम लिख देंगे या

[94:32]

अगर इसका लॉजिक रियलाइज़ेशन आपसे पूछा जाता

[94:34]

है तो इसका लॉजिक रियलाइज़ेशन भी आप बना

[94:37]

देंगे तो सिंपलीफाइड एक्सप्रेशन प्रश्न

[94:38]

इसका एसओपी में हो जाएगा। B बार C बार D

[94:41]

बार E + A बार B बार CDE बार CD बार E और

[94:46]

प्लस A बार B बार CDE का बार + AB बार D

[94:52]

बार E + BC बार तो ये हमारा सिंपलीफाइड

[94:57]

एक्सप्रेशन आ जाएगा इस वाले

[94:59]

सर्किट के लिए। अब इसमें अगर आपसे सर्किट

[95:02]

भी बनाने के लिए पूछ लिया जाए तो अब बना

[95:04]

देंगे चार वेरिएबल लेंगे। कौन-कौन से

[95:07]

होंगे? ए बार ए बी सी डी पांच है ना ये

[95:11]

क्या हो गए ए बी सी डी ई अब इनके अगर बार

[95:16]

चाहिए तो क्या कर लो नॉट गेट लगा लो ये बन

[95:19]

गया ए बार इसी तरीके से इसका बी बार बना

[95:23]

लोगे इसका सी बार इसका डी बार और इसका ई

[95:26]

बार अगर जरूरत है कई जगह ऐसा होता है बार

[95:29]

की जरूरत नहीं होती

[95:32]

तो हमने सभी के बार भी बना लिए बाय यूजिंग

[95:35]

दी इन्वर्टर गेट अब जो जो आपसे कनेक्शन

[95:38]

पूछ रहा है पहला टर्म कैसे आएगा? B बार, C

[95:42]

बार, डी बार, ई बार। सबकी क्या करनी है?

[95:44]

एंडिंग। A को छोड़ के सबकी एंडिंग करनी

[95:47]

है। तो एक एंड गेट लगाया जिसमें ई जाएगा,

[95:50]

डी भी जाएगा, सबका बार जाएगा। ई का भी सी

[95:54]

का भी बाहर जाएगा और B का भी बार जाएगा।

[95:57]

आउटपुट। तो, यह यह जो हमारा पहला एंड गेट

[95:59]

है, क्या देगा? B'

[96:03]

C' D E' तो हमारी पहली टर्म के लिए हमने

[96:08]

एक एंड गेट लगाया। दूसरी टर्म के लिए आप

[96:10]

एक और एंड गेट लगाएंगे जो क्या दे रहा है?

[96:12]

A बार B बार C D बार E तो दूसरा एंड गेट

[96:16]

लेंगे जिसमें क्या-क्या चाहिए? A बार

[96:19]

चाहिए। A' B'

[96:23]

C D' और E

[96:26]

ठीक है? तो पकड़ लीजिए वही वही चीज़। E को

[96:30]

यहां से ले लिया। D' यहां से ले लिया। ठीक

[96:34]

है? C' यहां से ले लिया।

[96:39]

फिर उसके बाद B' यहां से ले लिया और A' भी

[96:43]

ले लिया यहां से।

[96:45]

ठीक है? फिर तीसरी टर्म के लिए ऐसे ही। और

[96:48]

लास्ट में इन सबकी क्या करनी है? और इन जो

[96:50]

सब आउटपुट आएंगे उन सब आउटपुट को एक और

[96:53]

गेट में फीड करा देना है। इसको भी इसको भी

[96:55]

जो भी आएंगी तो फाइनल आउटपुट आपको मिल

[96:58]

जाएगा। क्लियर? तो अगर आपसे केमप के

[97:01]

क्वेश्चन में ये कहा जाए कि सिंपलीफाइड

[97:04]

एक्सप्रेशन निकालो और सिंपलीफाइड

[97:06]

एक्सप्रेशन का लॉजिकल रियलाइजेशन भी बनाओ।

[97:08]

इसका लॉजिक सर्किट भी बनाओ। बहुत आसान है।

[97:10]

एक और एग्जांपल ले रखा है जिसमें चार पांच

[97:13]

इनपुट ए बी सी डी ई है जिसको हमने पीओएस

[97:16]

फॉर्म में दिखाया है। सम पाई दिखाया

[97:18]

दिखाया और कैपिटल यानी कि पीओएस में बनाना

[97:21]

है। तो ये ये मैप पीओएस में बना है।

[97:24]

ठीक है? तो सेम अप्रोच के साथ हम इसको भी

[97:27]

सॉल्व कर देंगे। लास्ट टॉपिक जो इसमें है

[97:30]

हमारा इस यूनिट में वो है टैबुलर मेथड

[97:32]

जिसको क्वीन मैक्लेक्सी मेथड भी कहते हैं।

[97:34]

जब हम फाइव वेरिएबल तक जा रहे थे के मैप

[97:37]

में तो हमने देखा जैसे-जैसे हमारे नंबर ऑफ़

[97:39]

वेरिएबल्स बढ़ते हैं तो K मैप से उसको

[97:41]

सिंपलीफाई करना भी उतना आसान नहीं होता।

[97:43]

क्योंकि आपने देखा जब हमने फाइव वेरिएबल

[97:46]

वाले क्वेश्चन करे तो हमें पेयरिंग करने

[97:47]

में थोड़ी डिफिकल्टी तो आ रही थी। तो जब

[97:50]

हमारे ऐसे लॉजिकल एक्सप्रेशन जिसमें नंबर

[97:53]

ऑफ वेरिएबल्स बहुत ज्यादा हो जाए या कह

[97:55]

लीजिए कॉम्प्लेक्स लॉजिक सर्किटरी जो होती

[97:57]

है उनको सिंपलीफाई करने के लिए हमारा केमप

[97:59]

मेथड भी बहुत ज्यादा इफेक्टिव नहीं होता।

[98:01]

तब उसके लिए हम क्वीन मैक्लेक्सी मेथड या

[98:04]

टैबुलर मेथड का यूज़ करते हैं। बेसिकली

[98:06]

यहां जो हम रिडक्शन कर रहे हैं यानी

[98:09]

लॉजिकल सर्किट्स को जो सिंपलीफाई करना है

[98:11]

सिंपलीफिकेशन की टेक्निक में हम टेबल मेथड

[98:13]

का यूज़ करते हैं। तो हम इसको टैबुलर मेथड

[98:16]

भी कहते हैं। टैबुलर मेथड के जो स्टेप्स

[98:20]

हैं वो यहां पर लिखे हुए हैं। इसके

[98:21]

स्टेप्स वैसे खास आपको काम नहीं आने हैं

[98:23]

क्योंकि इसका क्वेश्चन ही आपसे पूछा

[98:25]

जाएगा। यहां एक क्वेश्चन दिया है

[98:26]

सिंपलीफाई यूजिंग टैबुलेशन मेथड जिसमें एक

[98:29]

फंक्शन दिया है और फंक्शन में वेरिएबल आप

[98:31]

देख रहे हैं a b c d e f g सेवन वेरिएबल

[98:35]

का एक फंक्शन दिया गया है तो हमने सेवन

[98:37]

वेरिएबल का तो केमप पढ़ा भी नहीं तो यहां

[98:39]

सेवन वेरिएबल के फंक्शन को सिंपलीफाई करने

[98:42]

के लिए हम टैबुलर मेथड का यूज़ करेंगे।

[98:44]

बेसिकली टैबुलर मेथड में हम क्या करते

[98:46]

हैं? हम ग्रुप में डिवाइड करते हैं। जो

[98:48]

मिन टर्म्स हैं उनको अलग-अलग ग्रुप में

[98:50]

डिवाइड करेंगे। जैसे यहां मिन टर्म्स हमें

[98:52]

दे रखे हैं। 28 25 28 20, 52 और 60। इन

[98:57]

मिन टर्म्स का सबसे पहले हमें क्या लिखना

[98:59]

है? बाइनरी रिप्रेजेंटेशन लिखना है। सबसे

[99:02]

इंपॉर्टेंट स्टेप जो होता है कि इन मिन

[99:04]

टर्म्स का यानी 20 का 28 का और हमारा 52

[99:09]

का और 60 का क्या करेंगे हम? रियल बाइनरी

[99:13]

रिप्रेजेंटेशन करेंगे। तो बाइनरी

[99:15]

रिप्रेजेंटेशन कैसे करना है हमें?

[99:18]

यह सेवन बिट का एक नंबर है भाई। सात सात

[99:21]

पॉसिबल कॉम्बिनेशन होंगे। यानी 60 बिट हो

[99:24]

जाएंगी। ए बी सी डी हमारा क्या-क्या होगा?

[99:27]

तो हम इसे कैसे करेंगे? इसे हम जो आपको

[99:30]

बताया था कि बाइनरी कैसे होता है? 2 की

[99:32]

पावर 0, 2 की पावर 1, 2 पावर 2, 2 की पावर

[99:35]

3, 2 पावर 4, 2 की पावर 5, 2 6 एंड सो ऑन।

[99:39]

यानी 2 पावर ज़ीरो का मतलब है वन। 2 पावर 1

[99:41]

का मतलब है टू। 2 पावर 2 का मतलब है फोर।

[99:44]

2 पावर 3 का मतलब है एट। 2 पावर 4 का मतलब

[99:47]

है 16। 2 5 का मतलब है 32। इसका मतलब है

[99:50]

64। इसका मतलब अगर हम जाएंगे तो कितना हो

[99:53]

जाएगा? 128 इसके आगे अगर हम जाएंगे तो

[99:56]

हमारा 256 है ना ऐसे बढ़ता चला जाएगा। तो

[100:00]

हम देखते हैं ऐसे बढ़ता चला जाता है। तो

[100:02]

हम क्या करते हैं? जब इनको ऐड करते हैं तो

[100:04]

हमें ये मिलना चाहिए। तो 20 कब मिलेगा? जब

[100:06]

16 और चार को ऐड करेंगे। 16 और चार को ऐड

[100:09]

करने का मतलब है

[100:12]

हम क्या करेंगे? ये वाली भी जीरो पहली

[100:14]

वाली। दूसरी भी क्या होएगी? जीरो। तीसरी

[100:17]

क्या होगी? वन। चौथी भी क्या होगी? जीरो।

[100:20]

पांचवी हो जाएगी वन और छठी सातवीं भी क्या

[100:22]

हो जाएगी? 0 तो इसका जो बाइनरी

[100:25]

रिप्रेजेंटेशन आप देख रहे हो 0 1 0100

[100:28]

कैसे बनाया है पहले आपको ये पता होना

[100:30]

चाहिए बाइनरी रिप्रेजेंटेशन कैसे करेंगे

[100:32]

मन टर्म से इसी तरीके से 28 और 28 कब

[100:35]

बनेगा बेटा 28 कब बनेगा 16 और 4 20 और 28

[100:39]

तो मुझे क्या करना है वन वाली ज़ीरो और टू

[100:43]

वाली भी ज़ीरो और चार वाली तो चाहिए तो वन

[100:46]

वन आठ वाली भी चाहिए तो वन 16 वाली भी

[100:49]

चाहिए वन और बाकी सब क्या हो गए ज़ीरो तो

[100:52]

इसका बाइनरी रिप्रेजेंट ेशन हो गया 0100

[100:55]

इसी तरीके से हमें 52 का बनाना है तो 64

[100:58]

तो बड़ा हो जाएगा हमें 32 का कॉम्बिनेशन

[101:00]

लेना पड़ेगा तो 32 और आठ क्या हो जाएगा 32

[101:05]

और 16 को जोड़ लीजिए कितना हो जाएगा 48

[101:08]

नहीं 32 और छ 38 और 10 48 हां 32 और 16

[101:12]

क्या हो गया 48 अब 48 में हमें क्या बनाना

[101:15]

है 52 बनाना है तो ये ये ये ले लेंगे तो

[101:18]

क्या हो गया वन वाला जीरो दो वाला भी जीरो

[101:22]

चार वाला वाला वन आठ वाला 0 16 वाला वन 32

[101:26]

वाला वन तो कितना हो गया 1 2 3 4 5 6 और

[101:28]

अगली हमारी सातवीं भी क्या हो गई 0 इसी

[101:32]

तरीके से आपको 60 बनाना है तो फिर 32 का

[101:35]

कॉम्बिनेशन लेंगे तो 32 और 16 कितना हो

[101:38]

गया 32 और 10 42 और 6 48 और हमें बनाना है

[101:42]

क्या

[101:44]

48 और 4 52 और 8 60 यानी इन सबको वन कर

[101:49]

दें तो क्या हो जाएगा 0 1 1 1 0

[101:55]

वही आप देख रहे हो यही बाइनरी

[101:56]

रिप्रेजेंटेशन हमने यहां पे ली। तो टैबुलर

[101:58]

फॉर्म में सबसे पहले इंपॉर्टेंट चीज़ है कि

[102:00]

आपको जो मिन टर्म्स दे रखे हैं उनका

[102:02]

बाइनरी रिप्रेजेंटेशन आप बना पाएं। तो

[102:04]

यहां हमने 20 का बाइनरी रिप्रेजेंटेशन हो

[102:06]

गया 0 0 1 0 1 0 और 28 का हो गया 01 1 0

[102:11]

52 का हो गया 0 1 0 1 0 60 का हो गया 0 1

[102:15]

1 0 अब हमने क्या करा? इनको अलग-अलग ग्रुप

[102:18]

में डिवाइड किया अकॉर्डिंग टू नंबर ऑफ़

[102:20]

वंस। तो हम देख रहे हैं 20 में केवल दो ही

[102:22]

वन है। 20 में केवल क्या है? दो ही वन है।

[102:26]

28 में तीन वन है। इसके अलावा 52 में भी

[102:29]

तीन वन है। तो ये दोनों तो एक ग्रुप में आ

[102:31]

जाएंगे क्योंकि इसमें भी तीन वन है। इसमें

[102:33]

भी तीन वन है। और यहां देख रहे हैं हमारे

[102:36]

चार वन है। तो यहां ग्रुप की कैटेगरी बनी

[102:38]

तीन। एक ऐसा ग्रुप जिसमें केवल दो वन है।

[102:41]

एक ऐसा ग्रुप जिनमें तीन वन है और एक ऐसा

[102:43]

ग्रुप जिसमें ऐसा मिनटम है जिसमें चार वन

[102:45]

है। तो पहला बना ग्रुप ज़ीरो जिसमें मिनटम

[102:48]

20 आएगा क्योंकि इसमें केवल दो ही वन है।

[102:51]

दूसरा ग्रुप आएगा ग्रुप वन जिसमें तीन

[102:53]

मिनट्स तीन वंस हैं जिसमें मिनट्स आएंगे

[102:56]

20 52। तीसरा ग्रुप बनेगा ऐसा मिनटम आएगा

[103:01]

जिसमें जिसमें चार वन हो। अब ये हमारे

[103:03]

ग्रुप बहुत सारे भी हो सकते हैं। हो सकता

[103:05]

है कुछ ऐसी कंडीशन आए जिसमें एक ग्रुप बने

[103:08]

जिसमें कोई भी वन ना हो। सारी बिट जीरो

[103:11]

जीरो हो। भाई हमारी पॉसिबल कॉम्बिनेशन ऑफ़

[103:13]

इनपुट हो सकती है ना जिसमें चारों जिसमें

[103:15]

सातों के सातों ज़ीरो हो। 0 हो सकता है। और

[103:18]

कुछ ऐसा हो जिसमें सिंगल वन हो। एक ग्रुप

[103:21]

ऐसा बन जाए जिसमें टू वन हो एक ग्रुप ऐसा

[103:22]

बन जाए। तो हमारे बहुत सारे ग्रुप भी बन

[103:25]

सकते हैं। हमारे इस क्वेश्चन के अकॉर्डिंग

[103:26]

हमारे तीन ग्रुप बन गए। ग्रुप ज़ीरो, ग्रुप

[103:28]

वन, ग्रुप टू। ग्रुप ज़ीरो में हमारा आता

[103:30]

है 20 मिनटम जिसमें दो वन है। ग्रुप वन

[103:34]

में आते हैं दो मिनटम 28 52 जिसमें थ्री

[103:36]

वन है। ग्रुप टू में आता है 60 मिनट टर्म

[103:39]

जिसमें हमारे कितने हैं? चार वन हैं। तो

[103:41]

हमने सबसे पहले क्या करा? इनके ग्रुपिंग

[103:44]

कर ली। अब हम देखते हैं इनको भी इन ग्रुप

[103:48]

को हमें और मिनिमाइज करना है। इस टेबल को

[103:50]

हम एक और टेबल में कन्वर्ट करेंगे जिसमें

[103:53]

हमारे मिन टर्म्स में हम कॉमन पार्ट

[103:55]

देखेंगे। यानी अगर हमें देखना है कि जो

[103:57]

हमारा मिडम 20 है क्या अगर हम सिंगल बिट

[104:00]

चेंज को भ हम देख रहे हैं बिट का चेंज है

[104:02]

ये बिल्कुल अलग पैटर्न है ये बिल्कुल अलग

[104:04]

ये बिल्कुल अलग पैटर्न तीन ग्रुप में

[104:06]

डिवाइड कर दिया पर हम देखेंगे अगर हम

[104:08]

सिंगल बिट चेंज को नेगलेक्ट कर दें मान

[104:10]

लें कि अगर एक बिट का अंतर है तो चल जाएगा

[104:12]

बाकी इनमें क्या कुछ कॉमन है तो हम

[104:14]

देखेंगे क्या 2028 के साथ कोई पेयर बना

[104:17]

सकता है क्या 20 52 के साथ कोई पेयर बना

[104:20]

सकता है तो हम देखते हैं कि जब 20 की

[104:22]

पेयरिंग आप 28 के साथ कर रहे हैं तो

[104:24]

बिल्कुल सेम C भी इसका देखो A ज़ीरो B भी

[104:27]

ज़ीरो C भी वन और D वन है। F भी ज़ीरो जी भी

[104:31]

ज़ीरो। बाकी सारी बिट पैटर्न चेंज है। सेम

[104:33]

है। बस केवल इस वाली बिट में अंतर है।

[104:37]

यानी अगर हम सिंगल बिट चेंज को एक्सेप्ट

[104:39]

कर लें तो 20 और 28 की पेयरिंग हो सकती

[104:42]

है। इसी तरीके से 20 और 52 को देखें। ये

[104:45]

ज़ीरो ये भी ज़ीरो। ये ज़ीरो पर ये वन है। ये

[104:48]

वन तो ये भी वन। ये ज़ीरो तो ये भी ज़ीरो।

[104:50]

ये वन तो ये भी वन। ये भी ज़ीरो, ये भी

[104:52]

ज़ीरो। ये भी ज़ीरो। तो इसमें हम देख रहे

[104:53]

हैं केवल B बिट में चेंज है। है ना? तो 20

[104:56]

की जो पेयरिंग है वो 28 और 52 के साथ हो

[105:00]

सकती है। अगर हम 20 की पेयरिंग 28 के साथ

[105:03]

कर रहे हैं तो हम देख रहे हैं डी बिट

[105:04]

इसमें अनकॉमन है। डी बिट दोनों में एक

[105:06]

जैसी नहीं है। उसको हमने डैश कर दिया। इसी

[105:09]

तरीके से 20 और 52 की जब हम पेयरिंग कर

[105:11]

रहे हैं तो हम देख रहे हैं इसमें बी बिट

[105:13]

कॉमन नहीं है। बाकी सब ठीक है। तो बी को

[105:15]

भी हमने डैश से रिप्लेस कर दिया। इसी

[105:17]

तरीके से हमने 20 की तो पेयरिंग कर ली। अब

[105:19]

हम 28 की देखेंगे कि क्या 28 52 के साथ

[105:22]

पेअर बना सकता है? क्या 28 60 के साथ बना

[105:25]

सकता है? इस तरीके से 52 को देखेंगे कि ये

[105:28]

हमारा इसके साथ बना सकता है नहीं बना

[105:29]

सकता। तो हमने टर्म को रिड्यूस कर लिया।

[105:32]

अब हमने तीन ग्रुप को दो ग्रुप में बांट

[105:34]

लिया। हमने देखा 20 और 28 का ग्रुप पेयर

[105:38]

बन सकता है। अगर हम डी बिट को नेगलेक्ट

[105:39]

माने। 20 और 52 का बन सकता है। अगर हम डी

[105:42]

बिट को कंसीडर ना करें। सिमिलर 28 और 60

[105:46]

52 और 60 का भी पेयर बन सकता है अगर हम बी

[105:49]

बिट और डी बिट को ना कंसीडर करें। अब हम

[105:52]

इसको इन ग्रुप को फिर रिड्यूस करना है। अब

[105:55]

हम देखेंगे अगर हम सिंगल बिट की बजाय टू

[105:57]

बिट का देखें। यानी क्या इनकी भी पेयरिंग

[106:00]

फर्दर और हो सकती है? तो हम देख रहे हैं

[106:02]

कि इन सभी में 2028 में देखो ये सारी बिट

[106:07]

सेम है। ये सारी बिट सेम है। ये बिल्कुल

[106:09]

सेम है। ये बिल्कुल सेम है। ये बिल्कुल

[106:11]

सेम है। गड़बड़ कहां है? ये पूरा सेम ये

[106:14]

पूरा सेम है। ये सब सेम है। ये सब सेम है।

[106:17]

ये सब सेम है। गड़बड़ कहां है? B और D

[106:20]

बिटवीन। क्योंकि आप देख रहे हैं यहां इस

[106:23]

वाले ग्रुप में B ज़ीरो है। इस वाले ग्रुप

[106:25]

में वन। इस वाले ग्रुप में D ज़ीरो, इस

[106:27]

वाले ग्रुप में वन। अगर हम फिर से इन बिट

[106:30]

को कंसीडर ना करें तो हम देखते हैं कि

[106:32]

हमें कौन-कौन सी टर्म मिल गई। A C E, F,

[106:37]

G।

[106:38]

तो, यहां हमने देखा ग्रुप A को एक सिंगल

[106:41]

ही ग्रुप बना लिया। तो 20 28 52 और 60 में

[106:44]

से यानी 20 28 52 60 में से हमारा A0 C1

[106:48]

E1 F0 सभी में सेम है। बस B और D बिट क्या

[106:52]

है? इनमें अलग-अलग है। तो इस तरीके से हम

[106:55]

इसका सिंपलीफाइड एक्सप्रेशन जो लिख सकते

[106:58]

हैं वो आ जाएगा क्या? f = a ज़ीरो है तो

[107:02]

उसे a बार से दिखा दिया। b कॉमन नहीं है

[107:05]

तो b को छोड़ दो। c1 है तो विदाउट बार से

[107:07]

रिप्रेजेंट कर दिया। d हमने ड लिया तो d

[107:10]

को कंसीडर ही मत करो। e को हमने विदाउट

[107:13]

बार ले लिया। f जीरो है तो f का बार ले

[107:15]

लिया। g 0 है तो g का बार लिया। तो इस

[107:18]

तरीके से इस फंक्शन का जो सिंपलीफाइड

[107:20]

एक्सप्रेशन आ गया वो आ गया a बार c e f

[107:24]

बार g बार। क्लियर? तो इस तरीके से ये

[107:27]

हमारा लास्ट टॉपिक टैबुलर मेथड भी हमने

[107:29]

कंप्लीट करा दिया। आई होप सारी चीजें आपको

[107:32]

बहुत अच्छे से समझ में आ गई होगी। इन पूरी

[107:35]

वन शॉट क्लास को आपको और बेटर अंडरस्टैंड

[107:37]

करने के लिए बहुत जरूरी है कि आप ज्यादा

[107:39]

से ज्यादा क्वेश्चन को प्रैक्टिस करें।

[107:41]

साथ-साथ जो चीजें आपको एक बार में समझ में

[107:42]

नहीं आई उसको बार-बार आप रिवाइज़ करें और

[107:45]

हमारी जो रेगुलर क्लासेस हैं उनको भी जरूर

[107:47]

देख लें। कंप्लीट कोर्स जो है वह

[107:48]

एप्लीकेशन पर अवेलेबल है। तो आप हमारा

[107:50]

एप्लीकेशन जेई क्लासेस BTech आज ही

[107:52]

डाउनलोड कर लें जो कि Play Store पर

[107:54]

अवेलेबल है। तो हमारे एप्लीकेशन पर आपको

[107:56]

सारी ही चीज़ें यानी इसके हमारे डिजिटल

[107:59]

इलेक्ट्रॉनिक्स के जो कंप्लीट लेक्चर्स

[108:00]

हैं यूनिट वन के वो आपको मिल जाएंगे और

[108:02]

बाकी यूनिट के लेक्चर भी आपको मिल जाएंगे।

[108:04]

साथ-साथ हर एक यूनिट का वन शॉट वीडियो भी

[108:06]

आपको मिल जाएगा। अलोंग विद नोट्स यानी

[108:08]

नोट्स के पीडीएफ भी आपको मिल जाते हैं।

[108:10]

यानी अगर आप चाहते हैं कि आपका सब्जेक्ट

[108:12]

पे कमांड बहुत अच्छा हो तो जरूरी है कि आप

[108:14]

यूनिट के सारे लेक्चर्स को भी देखें और

[108:17]

फिर उसका वन शॉट से रिवीजन करें तो आपके

[108:19]

लिए बहुत ज्यादा इफेक्टिव रहेगा। ठीक है?

[108:21]

तो आज के लेक्चर को यहीं पर एंड करते हैं।

[108:23]

थैंक यू सो मच। जय हिंद जय भारत।

Keep this transcript

Save it to LunaNotes and it becomes a real note in your library — editable, searchable, and ready to turn into flashcards or a diagram. Free to start.

Save to LunaNotes

Or download subtitles for another video.

32K+ people have turned 65K+ videos into notes

“Very useful tool. I'm using it for the last couple weeks and I'm loving it so far. Makes learning on YouTube a great experience.”
Bhai Chrome Web Store review

These subtitles were extracted using the Free YouTube subtitle downloader by LunaNotes.

Related videos

JKBOSE कक्षा 12वीं रसायन विज्ञान | इलेक्ट्रोकैमिस्ट्री ONE-SHOT | Zero to Hero | Download Subtitles/Captions

JKBOSE कक्षा 12वीं रसायन विज्ञान | इलेक्ट्रोकैमिस्ट्री ONE-SHOT | Zero to Hero | Download Subtitles/Captions

इस वीडियो के लिए उपशीर्षक (सबटाइटल) डाउनलोड करें और JKBOSE कक्षा 12वीं रसायन विज्ञान के इलेक्ट्रोकैमिस्ट्री टॉपिक को आसानी से समझें। ये कैप्शन आपको 'Zero to Hero' सीरीज के हर कॉन्सेप्ट को स्पष्टता से पढ़ने और रिवीजन करने में मदद करेंगे। बिना किसी रुकावट के पढ़ाई के लिए अभी डाउनलोड करें!

Download Subtitles for Basic Chemistry Concepts | NCERT Class 11

Download Subtitles for Basic Chemistry Concepts | NCERT Class 11

Enhance your understanding of Class 11 Chemistry with downloadable subtitles for the video 'Some Basic Concepts of Chemistry in One Shot.' These captions help clarify complex topics and support better learning for CBSE 2024-25 students.

OOP 5 Subtitles Download - Abstract Classes, Interfaces, Annotations

OOP 5 Subtitles Download - Abstract Classes, Interfaces, Annotations

डाउनलोड करें OOP 5 वीडियो के लिए सटीक सबटाइटल्स और कैप्शंस, जिससे आप Abstract Classes, Interfaces, और Annotations को बेहतर समझ सकें। ये सबटाइटल्स आपकी सीखने की प्रक्रिया को आसान और प्रभावी बनाते हैं।

C Language Tutorial Subtitles for Beginners with Practice

C Language Tutorial Subtitles for Beginners with Practice

डाउनलोड करें C Language Tutorial के लिए सबटाइटल्स और कैप्शन्स, जिससे यह वीडियो और भी समझने में आसान हो जाता है। नोट्स और प्रैक्टिस प्रश्नों के साथ यह सीखने का आपका अनुभव बेहतर बनाएं।

Download Class 10th Marathi Grammar Marathon Subtitles | 1st Term Exam 2026 Captions

Download Class 10th Marathi Grammar Marathon Subtitles | 1st Term Exam 2026 Captions

या पूर्ण मराठी व्याकरण मॅरेथॉन व्हिडिओच्या उपशीर्षकांचा लाभ घ्या आणि दहावीच्या पहिल्या सत्राच्या परीक्षेची तयारी सुलभ करा. स्पष्ट व्याकरण संकल्पना समजून घ्या आणि तुमची अभ्यास प्रक्रिया सुधारा. आता विनामूल्य डाउनलोड करा आणि उत्तम गुण मिळवा.

Most viewed

Untertitel für 'Nicos Weg' Deutsch lernen A1 Film herunterladen

Untertitel für 'Nicos Weg' Deutsch lernen A1 Film herunterladen

Laden Sie die Untertitel für den gesamten Film 'Nicos Weg' herunter, um Ihr Deutschlernen auf A1 Niveau zu unterstützen. Untertitel helfen Ihnen, Wortschatz und Aussprache besser zu verstehen und verbessern das Hörverständnis effektiv.

Subtítulos para TIPOS DE APEGO | 6 DE COPAS Episodio 56

Subtítulos para TIPOS DE APEGO | 6 DE COPAS Episodio 56

Descarga los subtítulos para el episodio 56 de la tercera temporada de 6 DE COPAS, centrado en los tipos de apego. Mejora tu comprensión y disfruta del contenido en detalle con nuestros subtítulos precisos y accesibles.

Download Subtitles for Harvard CS50 2026 Computer Science Course

Download Subtitles for Harvard CS50 2026 Computer Science Course

Enhance your learning experience with downloadable subtitles for the Harvard CS50 2026 full computer science course. Easily follow along with lectures, improve comprehension, and access the content offline anytime. Perfect for students and enthusiasts aiming to master computer science concepts.

ดาวน์โหลดซับไตเติ้ล DMD LAND 3 The Final Land Day 1

ดาวน์โหลดซับไตเติ้ล DMD LAND 3 The Final Land Day 1

ดาวน์โหลดซับไตเติ้ลสำหรับวิดีโอ DMD LAND 3 The Final Land Day 1 เพื่อช่วยให้เข้าใจเนื้อหาได้ง่ายขึ้น และเพิ่มความสะดวกในการติดตามทุกช่วงเวลา เหมาะสำหรับผู้ชมที่ต้องการความชัดเจนและเข้าถึงข้อมูลอย่างครบถ้วน

Descarga Subtítulos para NARCISISMO | 6 DE COPAS - Episodio 63

Descarga Subtítulos para NARCISISMO | 6 DE COPAS - Episodio 63

Accede fácilmente a los subtítulos del episodio 63 de '6 DE COPAS', centrado en el narcisismo. Descargar estos subtítulos te ayudará a entender mejor el contenido y mejorar la experiencia de visualización.

Found this transcript useful?

Take it with you. One click puts it in your own LunaNotes library.

Save to LunaNotes

Start taking better notes today with LunaNotes