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जर्नल क्लास 11 वन शॉट 🎯 | लेखाशास्त्र अध्याय 3 उपशीर्षक के साथ डाउनलोड करें - CBSE 2026-27

Journal Class 11 One Shot 🎯 | Class 11 Accountancy Chapter 3 | CBSE 2026-27 | Pace Commerce

Journal Class 11 One Shot 🎯 | Class 11 Accountancy Chapter 3 | CBSE 2026-27 | Pace Commerce

PW Commerce Wallah Class 11

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[00:00]

हेलो एवरीवन एंड वेलकम टू पीडब्ल्यू

[00:02]

कॉमर्स वाला। मेरा नाम है शिवम लोटवानी

[00:04]

आल्सो नोन एस द अल्फा ऑफ अकाउंटेंसी। आज

[00:07]

आप लोगों के सामने आया हूं अपनी पहली वन

[00:10]

शॉट वीडियो लेकर। आज की इस वीडियो में

[00:12]

दोस्तों मैं रिकॉर्ड करूंगा आपके लिए एक

[00:14]

बहुत ही आसान चैप्टर जिसका नाम है जर्नल।

[00:17]

सचमुच ये चैप्टर बहुत आसान है। आप लोगों

[00:20]

ने इसको मुश्किल बना रखा है। असल में

[00:22]

जर्नल चैप्टर मुश्किल तब हमें लगता है जब

[00:26]

आइए जी आइए। आज हम मेरी क्लास में आज

[00:28]

निक्को भैया की धप्पा निको भैया ने धप्पा

[00:30]

कर दिया मेरी क्लास में बहुत बढ़िया सर

[00:31]

बहुत बढ़िया तो कैसा लग रहा है आपको

[00:33]

ऑनलाइन का एक्सपीरियंस बहुत बहुत अच्छा लग

[00:35]

रहा है सर बहुत अच्छा लग रहा है आप लोग से

[00:36]

इतना कुछ सीखने को मिलने वाला है तो आई एम

[00:38]

वेरी वेरीरी ग्लैड सर आई एम ग्लैड कि हमें

[00:39]

अल्फा अकाउंटेंसी मिले अब हम भी अल्फा हो

[00:43]

जाएंगे सो स्वीट यार सर तो कौन सा लेक्चर

[00:45]

पढ़ा रहे हो क्या करवा रहे हो सर आज आज

[00:47]

मैं पढ़ा रहा हूं ये एक बहुत ही आसान

[00:49]

चैप्टर जिसका नाम है जर्नल अच्छा इसमें

[00:51]

बड़ी दिक्कत आती है बच्चों को सो मैं मेरे

[00:54]

पास क्योंकि डाउट्स आते हैं बीकॉम तक के

[00:56]

बच्चों कि भाई जर्नल समझ में नहीं आ रहा

[00:58]

तो पहले वन शॉट में सर जर्नल को लेके जाने

[01:00]

वाला हूं। एंड सर ये तो सबसे इंपॉर्टेंट

[01:02]

चैप्टर है। मतलब जर्नल अगर आ गया तो हम

[01:04]

ऐसा कहते हैं कि आप जूनियर अकाउंटेंट बन

[01:05]

गए। बिल्कुल पूरी अकाउंटिंग ही आ गई सर।

[01:07]

पूरी अकाउंटिंग जो नॉर्मली लोग पार्ट टाइम

[01:08]

जॉब करते हैं उनके लिए भी बहुत ही बेहतरीन

[01:10]

है। वेरी वेरी तो बहुत ही बढ़िया है यार।

[01:13]

तो आज देखो दो भाई आए हैं और तबाही लाए

[01:15]

हैं और हमारे साथ दो भाई और हैं। है ना

[01:17]

सर? दो भाई और हैं। वो दोनों भी तबाही है।

[01:19]

ठीक है जी। सो अब आपके सामने निक्कू भैया

[01:22]

और अल्फा और इसके अलावा जो हमारे और गब्बर

[01:25]

सर हैं। गब्बर सर हैं। मनीष ये मनीष महाजन

[01:28]

सर हैं। जी जी तो हम चारों मिलकर तबाही

[01:30]

लाएंगे एक ट्रांसफॉर्मेशन लेकर आएंगे आप

[01:33]

लोग की पढ़ाई में और इसी के साथ आप लोग

[01:36]

बने रहिएगा इस सेशन में। सर आप ऑल द बेस्ट

[01:39]

बोल दीजिए। मुझे बिल्कुल ऑल द बेस्ट। और

[01:41]

मैं बच्चों से कहूंगा सर का बहुत बेहतरीन

[01:43]

एक्सपीरियंस है ऑफलाइन में। ऑनलाइन में ये

[01:45]

मचाने के लिए आए हैं और ये जाने जाते हैं

[01:47]

बच्चों को इस तरीके से पढ़ाने के लिए कि

[01:49]

अकाउंट्स बहुत ही इजी हलवा लगती है और

[01:50]

आपको आगे चल के ऐसा लगे कि यार क्या

[01:52]

अकाउंट्स पढ़ाई थी तो ऐसा है और सर का

[01:54]

ऑफलाइन का एक्सपीरियंस बहुत बेहतरीन है तो

[01:56]

मैं चाहूंगा कि आप ऑनलाइन में उनको इतना

[01:58]

प्यार दें इतना प्यार दें कि उन्हें लगे

[01:59]

कि यार बस जो भी नॉलेज इनके पास है वो सब

[02:01]

आप पर वार दें। बिल्कुल बिल्कुल थैंक यू

[02:04]

सो मच सर थैंक यू सो मच एकदम ये जो

[02:06]

सरप्राइज आपने दिया बहुत अच्छा लगा सर

[02:08]

मुझे अरे नहीं नहीं सर मुझे लगा कि थोड़ा

[02:09]

मैं बात कर लेता हूं नाराज तो नहीं होंगे

[02:10]

नहीं नहीं सर बिल्कुल आप एकदम एनर्जेटिक

[02:12]

लग रहे हो ऑल द बेस्ट थैंक यू सर थैंक यू

[02:15]

चलिए जी तो दोस्तों ये थे हमारे प्यारे

[02:17]

निकू भैया और एकदम से इन्होंने धप्पा कर

[02:20]

दिया मेरी क्लास में आज सो खैर बात कर रहे

[02:22]

थे हम जर्नल चैप्टर की तोेंस मैंने भी

[02:25]

बताई सर ने भी बताई आपको जर्नल चैप्टर की

[02:27]

तो ठीक है आप टाइम वेस्ट ना करते हुए आगे

[02:29]

चलते हैं और इस सेशन को आगे लेके जाते हैं

[02:31]

वीडियो थोड़ी थोड़ी सी लंबी जरूर होगी

[02:33]

लेकिन हां YouTube पर इस चैप्टर की जितनी

[02:36]

भी वीडियोस आपको दिखेंगी आप उन वीडियोस को

[02:38]

और हमारी पीडब्ल्यू की वीडियो को कंपेयर

[02:39]

कर लेना। खुद डिसाइड कर लेना कि मैक्सिमम

[02:42]

कवरेज आपको जनरल चैप्टर का कहां पर मिला

[02:44]

है? आइए जी शुरू करते हैं। सबसे पहले बात

[02:48]

करेंगे आज का गोल क्या रहने वाला है? तो

[02:50]

आज का जो गोल है टक टक टक क्या रहने वाला

[02:53]

है दोस्तों? सर आज के इस सेशन में अब

[02:56]

देखिए मुझे नहीं पता कि वीडियो कितनी लंबी

[02:57]

जाएगी। लेकिन आपसे सिर्फ एक रिक्वेस्ट है

[03:00]

वीडियो को बंद मत करना। आज जर्नल चैप्टर

[03:02]

को इतना अच्छे से ब्रेकडाउन करूंगा। आप

[03:04]

YouTube पर जाकर कोई भी वन शॉट वीडियो देख

[03:07]

लेना जर्नल की और फिर हमारी पीडब्ल्यू की

[03:09]

कॉमर्स वाला की वीडियो देख लेना जर्नल की।

[03:11]

आप खुद डिसाइड करना कि मैक्सिमम कवरेज

[03:14]

आपको जर्नल का कहां पर मिला है। मैं यहां

[03:16]

पर कुछ ऊपर ऊपर से रफादफा कराने नहीं आया

[03:19]

हूं दोस्तों। वन शॉट वीडियो जरूर है लेकिन

[03:21]

एक डिटेल्ड डिस्कशन होने वाला है जर्नल

[03:23]

चैप्टर के बारे में। तो सर अगर मैंने आज

[03:26]

तक जर्नल चैप्टर नहीं पढ़ा तो क्या इस

[03:28]

वीडियो को देखकर मेरा जनरल चैप्टर अच्छे

[03:30]

से हो जाएगा? बिल्कुल। क्या यूटीज में

[03:32]

बढ़िया मार्क्स भी आ जाएंगे? जी हां। तो

[03:35]

आइए शुरू करते हैं। आज का गोल क्या रहने

[03:38]

वाला है? सबसे पहले दोस्तों कोई जर्नल वनल

[03:40]

की बात नहीं होगी। सबसे पहले तो बात होगी

[03:43]

अबाउट द रूल्स ऑफ डेबिट एंड क्रेडिट। सबसे

[03:47]

पहले हम बात करेंगे रूल्स ऑफ डेबिट एंड

[03:49]

क्रेडिट की। दोस्तों

[03:52]

बहुत निचले स्तर से शुरुआत करेंगे। डेबिट

[03:55]

और क्रेडिट का क्या मतलब होता है? वहां से

[03:57]

शुरुआत करेंगे दोस्तों।

[04:00]

फिर हम पढ़ेंगे सिंपल एंड कंपाउंड जर्नल

[04:02]

एंट्रीज। अब ये जर्नल एंट्रीज क्या होती

[04:05]

हैं?

[04:06]

ये भी हम देख लेंगे। अच्छा आप में से अगर

[04:09]

किसी को लगता है कि यार मैंने जर्नल

[04:10]

चैप्टर वैसे पढ़ रखा है। मुझे एक क्विक

[04:13]

रिवीज़ चाहिए तो भाई इस वीडियो को 1.25X पे

[04:16]

चला लो या 1.5X पे चला लो। उससे ज्यादा मत

[04:18]

चलाना। ऐसा लगेगा बोहिमिया आ गया रैप करने

[04:21]

के लिए। ठीक है? चलिए जी। उसके बाद हम

[04:24]

पढ़ेंगे ट्रेड डिस्काउंट और कैश डिस्काउंट

[04:26]

के बारे में। एंड लास्ट बट नॉट द लीस्ट।

[04:29]

फिर हम पढ़ेंगे कुछ अफलातून ट्रांजैक्शंस।

[04:31]

अफलातून ट्रांजैक्शंस क्या होती हैं? किसी

[04:33]

बुक में मिलेंगी नहीं आपको। ये ये टर्म

[04:36]

मैंने ही बनाया है। अफलातून ट्रांजैक्शंस

[04:38]

क्या होती हैं? कुछ इंपॉर्टेंट

[04:40]

ट्रांजैक्शंस जो आपके यूटी में डल चुकी

[04:42]

हैं। आ रही हैं पेपर में वो हम पढ़ेंगे

[04:45]

दोस्तों। ये सेशन बहुत ही ज्यादा डिटेल्ड

[04:49]

सेशन होने वाला है। एक गुड नंबर ऑफ

[04:51]

क्वेश्चंस की हम प्रैक्टिस भी करेंगे और

[04:53]

बिल्कुल स्क्रैच से हम शुरू करेंगे जनरल

[04:55]

चैप्टर को। तो आइए दोस्तों शुरू करते हैं।

[04:58]

आगे चलते हैं। ये रही आज के गोल की बात।

[05:02]

चैप्टर का नाम जैसा कि मैंने आपको पहले भी

[05:05]

बता दिया। चैप्टर का नाम है जर्नल। किसी

[05:08]

बुक में ये चैप्टर नाइन होता है। अब जैसे

[05:10]

शायद अगर आप डी के गोयल सर की बुक खोलेंगे

[05:13]

तो वहां पर ये शायद आपको चैप्टर नाइन

[05:15]

मिलेगा। बेटा अगर आप टी एस ग्रेवाल सर की

[05:16]

बुक खोलेंगे तो चैप्टर नंबर एट मिलेगा।

[05:18]

अपने को क्या फर्क पड़ता है यार? अपने को

[05:20]

तो पढ़ाई करनी है। है ना? तो ये है सर

[05:23]

चैप्टर का नाम। इस चैप्टर से पहले ना एक

[05:26]

और चैप्टर होता है दोस्तों जिसका नाम है

[05:27]

रूल्स ऑफ डेबिट एंड क्रेडिट। जर्नल चैप्टर

[05:30]

को अच्छे से समझने के लिए इट इज़

[05:32]

वेरी-वेरीेंट कि हमने वो चैप्टर पढ़ा हो

[05:34]

जिसका नाम है रूल्स ऑफ डेबिट एंड क्रेडिट।

[05:37]

डेबिट और क्रेडिट के रूल्स नहीं आते तो

[05:38]

जर्नल मत पढ़ो। तो सर डेबिट और क्रेडिट के

[05:42]

रूल्स कौन सिखाएगा? मैं सिखाएगा। भाई आया

[05:44]

सिखा के जाएगा। ठीक है? और जैसा कि मुझे

[05:48]

आप प्यारे-प्यारे बच्चों ने नाम दिया है

[05:50]

दी अल्फा ऑफ अकाउंटेंसी। तो मेरे प्यारे

[05:53]

अल्फाज़

[05:55]

मेल एंड फीमेल बोथ। इस वीडियो के अंदर बने

[05:57]

रहिए। डेबिट, क्रेडिट, रूल्स, ट्रेडिशनल,

[06:01]

मॉडर्न हर किसी चीज को ब्रेकडाउन किया

[06:03]

जाएगा इस वीडियो के अंदर। आइए जी। तो जनरल

[06:06]

चैप्टर है हमारा। चैप्टर नंबर एट है ये एज

[06:09]

पर टी एस ग्रेवाल। राइट? और इसी चैप्टर के

[06:13]

अंदर 100% आपको कवरेज मिलेगा रूल्स ऑफ

[06:16]

डेबिट एंड क्रेडिट का भी। चलिए जी। सो

[06:20]

व्हाट इज़ अ जर्नल? सबसे पहले तो ये सवाल

[06:22]

डाल देते हैं ना कि हम जर्नल है क्या?

[06:24]

क्या है जर्नल? क्यों बनाऊं मैं जर्नल?

[06:26]

व्हाट इज़ अ जर्नल? आइए दोस्तों, पढ़ते हैं

[06:27]

जरा। क्या है ये जर्नल? जर्नल? जर्नल इज़ अ

[06:31]

प्राइमरी बुक ऑफ अकाउंट्स।

[06:34]

आपने पढ़ा होगा कि अकाउंटिंग इज एन आर्ट

[06:36]

ऑफ रिकॉर्डिंग। नाउ इफ अकाउंटिंग इज एन

[06:38]

आर्ट ऑफ रिकॉर्डिंग अगर अकाउंटिंग रिकॉर्ड

[06:41]

करने की एक कला है तो कहां करोगे रिकॉर्ड?

[06:44]

यहां करोगे रिकॉर्ड टैटू बनाओगे या

[06:45]

दीवारों पे लिखोगे। कहां करोगे रिकॉर्ड?

[06:48]

रिकॉर्ड करेंगे एक किताब के अंदर। एक

[06:51]

सिस्टमैटिक ऑर्डर के अंदर। और दोस्तों कोई

[06:55]

भी ट्रांजैक्शन जो होती है वो मैं ऐसे ही

[06:58]

रिकॉर्ड नहीं कर देता। मुझे सबूत चाहिए

[07:00]

उसके लिए। मुझे उस ट्रांजैक्शन का सबूत

[07:02]

चाहिए कि ये ट्रांजैक्शन सच में हुई है कि

[07:04]

नहीं। और सबूत के लिए हम बनाते हैं सोर्स

[07:06]

डॉक्यूमेंट्स या वाउचर्स। सोर्स

[07:07]

डॉक्यूमेंट्स या वाउचर्स बनने के बाद सबसे

[07:10]

पहली वो किताब जिसके अंदर ट्रांजैक्शन

[07:12]

पहली बार रिकॉर्ड की जाती है उस किताब का

[07:14]

नाम है जर्नल। तो सर वो जो एकाउंटिंग

[07:16]

इक्वेशन हमने पढ़ा था कि एसेट्स आर इक्वल

[07:19]

टू लायबिलिटीज़ प्लस कैपिटल। क्या वो

[07:21]

रिकॉर्डिंग नहीं है? नहीं है भाई। रियल

[07:24]

लाइफ में अकाउंटिंग इक्वेशन जैसी कोई चीज

[07:26]

है हीच नहीं। प्रैक्टिकल लाइफ में

[07:28]

एकाउंटिंग इक्वेशन प्रिपेयर नहीं की जाती।

[07:30]

एकाउंटिंग इक्वेशन चैप्टर तो तुम्हें

[07:32]

इसलिए समझाया गया है ताकि तुम्हारे इस

[07:35]

दिमाग में ये चीज आकर बैठ जाए कि एसेट्स

[07:38]

आर ऑलवेज इक्वल टू कैपिटल प्लस

[07:40]

लायबिलिटीज़। एकाउंटिंग इक्वेशन की नॉलेज

[07:42]

का यूज़ बहुत है इस चैप्टर के अंदर और आगे

[07:45]

भी। लेकिन एकाउंटिंग इक्वेशन में वो

[07:47]

फॉर्मल रिकॉर्डिंग का तरीका वो नहीं है

[07:48]

दोस्तों। फॉर्मल रिकॉर्डिंग तो यहां होती

[07:50]

है यहां इस प्यारी सी किताब के अंदर जिसका

[07:53]

नाम है जर्नल। आइए पढ़ते हैं। जर्नल इज अ

[07:57]

प्राइमरी बुक ऑफ अकाउंट्स। तो सर बाद में

[07:58]

सेकेंडरी बुक्स भी होने वाली हैं क्या

[08:00]

कुछ? हां। जर्नल के बाद पोस्टिंग होती है।

[08:02]

कॉपी पेस्ट करते हैं हम एक दूसरी किताब के

[08:05]

अंदर जिसका नाम है लेजर। ठीक है? चलिए जी।

[08:08]

सो जर्नल इज़ अ प्राइमरी बुक ऑफ़ बुक ऑफ़

[08:10]

अकाउंट्स वेयर ट्रांजैक्शंस आर रिकॉर्डेड

[08:12]

फॉर द फर्स्ट टाइम। ट्रांजैक्शंस को पहलीप

[08:16]

पहली बार रिकॉर्ड करने के लिए जनरल ये

[08:19]

किताब होती है। विद द हेल्प ऑफ सोर्स

[08:22]

डॉक्यूमेंट्स और वाउचर्स। सोर्स

[08:24]

डॉक्यूमेंट्स या वाउचर्स की मदद से हम

[08:26]

जर्नल के अंदर ट्रांजैक्शंस को रिकॉर्ड

[08:28]

करते हैं। द ट्रांजैक्शंस गेट रिकॉर्डेड

[08:30]

इन क्रोनोलॉजिकल ऑर्डर। क्रोनोलॉजिकल

[08:33]

ऑर्डर आप क्रोनोलॉजी समझिए। एक के बाद एक

[08:36]

एक के बाद एक ट्रांजैक्शंस रिकॉर्ड होती

[08:37]

हैं जर्नल के अंदर। पहले जो पहले घटित हुई

[08:40]

है फिर उसके बाद वाली फिर उसके बाद वाली।

[08:42]

इस तरह से। डेली बेसिस पर ट्रांजैक्शंस

[08:44]

रिकॉर्ड होती हैं जर्नल के अंदर। जी। एंड

[08:47]

इट गिव्स डिटेल्स अबाउट दी अकाउंट्स।

[08:51]

भाई मुझे तो नहीं पता अकाउंट्स क्या होते

[08:53]

हैं। अकाउंट्स मुझे तो नहीं पता क्या होते

[08:55]

हैं। तो क्या मैं बिल्कुल स्क्रैच से समझ

[08:58]

सकता हूं कि अकाउंट्स क्या होते हैं?

[08:59]

बिल्कुल समझ सकता है बेटा तू। आजा देख ले

[09:02]

प्यारे आजा। ये देखो इधर अकाउंट्स क्या

[09:05]

होते हैं? ये है अकाउंट। ये जो बला है ना

[09:08]

ये ये पीली पीली ये जो तुम्हारी आंखों पे

[09:10]

प्रकाश डाल रहा है ना ये ये है अकाउंट।

[09:14]

मुझे अगर कोई चीज रिकॉर्ड करनी है। ध्यान

[09:16]

से समझना मेरी बात बेटा। मुझे अगर कोई चीज

[09:19]

रिकॉर्ड करनी है।

[09:22]

मैं बाहर गया खेलने। मुझे लगी प्यास।

[09:25]

मैंने पी ली कोल्ड ड्रिंक अपने पड़ोस में

[09:27]

लाला की दुकान से लेकर और वो मुझे जानता

[09:30]

था। मेरे पिताजी को भी जानता था। तो मैंने

[09:32]

कहा लाला जी ये कोल्ड ड्रिंक मैंने पी ली।

[09:35]

और पैसे मेरे पे अभी नहीं है। खाते में

[09:37]

लिख देना। खाते में लिख देना। मेरा बापू

[09:39]

अपने आप पे कर देगा आपको। खाते में लिख

[09:42]

देना। यह बहुत शब्द सुना होगा आपने। है

[09:44]

ना? कि अभी पैसे नहीं आएगा। खाते में लिख

[09:45]

दे। खाते में लिख दे भाई। खाता क्या है?

[09:47]

खाता यह है। यह यह है अकाउंट। इसको कहते

[09:53]

हैं हम अकाउंट।

[09:55]

यानी अकाउंट एक ऐसी स्टेटमेंट है, एक

[09:58]

डब्बा है जहां पर मुझे चीजों को रिकॉर्ड

[10:00]

करना है। खत्म हो गई बात। खत्म हो गई।

[10:01]

इससे ज्यादा नहीं है। मुश्किल नहीं है,

[10:04]

बिल्कुल भी नहीं है। सो, डेबिट और क्रेडिट

[10:07]

का मतलब आप लोग को समझाने से पहले आई एम

[10:10]

गोना शो यू व्हाट इज़ एन अकाउंट। सो अकाउंट

[10:12]

इज़ अ समराइज्ड स्टेटमेंट वेयर

[10:14]

ट्रांजैक्शंस रिलेटिंग टू अ पर्टिकुलर हेड

[10:17]

आर रिकॉर्डेड एट वन प्लेस। अकाउंट एक ऐसी

[10:20]

स्टेटमेंट है जहां पर किसी एक हेड से जुड़ी

[10:23]

हुई ट्रांजैक्शंस को एक जगह पर रिकॉर्ड

[10:25]

किया जाता है। फॉर एग्जांपल मैं दुकानदार

[10:27]

हूं। तुम मेरी दुकान से कुछ खा पी के गए

[10:30]

या सामान खरीद के गए। पैसा तुमने दिया

[10:32]

नहीं और तुम मुझे यह कह के चले गए, गोली

[10:34]

पिला के चले गए तुम मुझे कि अकाउंट में

[10:36]

लिख दो सर। तो मैं तुम्हारा खाता खोलूंगा

[10:40]

ना। तुम्हारा खाता मैं इस तरह से खोलूंगा।

[10:43]

सपोज योर नेम इज चिंटू। तो मैं चिंटू के

[10:46]

नाम पर एक खाता खोल दूंगा। यहां पर इस तरह

[10:48]

से चिंटूस अकाउंट। दिस विल बी चिंटूस

[10:50]

अकाउंट। यस दिस विल बी दोस्तों चिंटूज़

[10:54]

अकाउंट। मैंने मैंने क्या करा? मैंने एक

[10:57]

फॉर्मेट बनाया। टी शेप का फॉर्मेट है ये।

[10:59]

ये आपको टी दिख रहा होगा। है ना? ये यहां

[11:01]

से लेकर ये देखो दोस्तों ये टी शेप का

[11:04]

मैंने एक फॉर्मेट बनाया। क्यों? अरे भाई

[11:08]

टी शेप के इस फॉर्मेट ने इस पूरी जगह को

[11:09]

दो पार्ट्स में डिवाइड कर दिया ना। एक

[11:11]

लेफ्ट पार्ट हो गया, एक राइट पार्ट हो

[11:12]

गया, जो लेफ्ट पार्ट होता है उसको डेबिट

[11:14]

साइड कहते हैं। जो लेफ्ट पार्ट होता है

[11:17]

उसी को डेबिट साइड कहते हैं। सर नहीं हमने

[11:20]

तो वो रूल पढ़ा था। स्कूल में टीचर ने

[11:22]

बताया था कि डेबिट वो होता है जो आता है।

[11:25]

और क्रेडिट वो होता है जो जाता है। ऐसा

[11:27]

कुछ भी नहीं है भाई। डेबिट और क्रेडिट का

[11:29]

मतलब वो नहीं है।

[11:32]

डेबिट का मतलब नहीं है कि जो चीज आ रही है

[11:34]

वो डेबिट होती है। जो जा रही है वो

[11:35]

क्रेडिट होती है। अगर आने वाली चीज डेबिट

[11:37]

होती है तो फिर जब तुम्हारे अकाउंट में

[11:39]

तुम्हारे बैंक अकाउंट में पैसे आते हैं तो

[11:41]

पापा के फोन पे मैसेज क्यों आता है कि योर

[11:43]

अकाउंट हैज़ बीन क्रेडिटेड विद अ सम ऑफ़ 500

[11:45]

600।

[11:47]

अगर आने वाली चीज डेबिट है तो फिर पैसे

[11:50]

आने पर तो बैंक का मैसेज ये तो नहीं आना

[11:51]

चाहिए ना कि योर अकाउंट हैज़ बीन

[11:53]

क्रेडिटेड।

[11:54]

अगर क्रेडिट का मतलब जाने वाली चीज है तो

[11:57]

फिर जब मेरे बैंक अकाउंट से पैसे कटते हैं

[11:59]

तो वह मैसेज क्यों आता है कि योर अकाउंट

[12:01]

हैज़ बीन डेबिटेड। ऐसा क्यों होता है? तो

[12:04]

डेबिट और क्रेडिट का मतलब आना जाना यह

[12:07]

नहीं है। डेबिट और क्रेडिट का मतलब आसान

[12:10]

भाषा में डेबिट इज़ नथिंग बट द लेफ्ट साइड

[12:14]

ऑफ़ एन अकाउंट। एंड क्रेडिट इज़ द राइट साइड

[12:17]

ऑफ़ एन अकाउंट। बस यह मतलब है दोस्तों

[12:20]

डेबिट और क्रेडिट का। मैं आपको बता दूं इस

[12:23]

अकाउंट से पता है फायदा क्या होगा? जैसे

[12:25]

आप मेरी दुकान के कस्टमर हो। आप पहली बार

[12:27]

मेरे से उधार लेके गए। मैं फटाफट से

[12:29]

तुम्हारे तुम चिंटू हो ना। तुम्हारे

[12:30]

अकाउंट में यहां लिख दूंगा तारीख वगैरह

[12:32]

लिख कर कि भैया ₹1000 का माल खरीद के गए

[12:34]

हो तुम मेरे से उधार। फिर उधार खरीदोगे

[12:37]

फिर लिख दूंगा ₹500। फिर उधार खरीदोगे फिर

[12:40]

लिख दूंगा ₹300। तो सर इस साइड का क्या

[12:42]

फायदा? मेरे भाई जब तू पैसा चुका के जाएगा

[12:45]

प्यारे जब आप पैसा चुका के जाओगे तो मैं

[12:48]

उस साइड लिख दूंगा। खत्म। अब समझ में आया?

[12:51]

दो साइड्स क्यों होनी चाहिए? जनरल चैप्टर

[12:54]

आएगा। आएगा अभी। डेबिट और क्रेडिट के

[12:57]

रूल्स भी शुरू होंगे। लेकिन स्क्रैच से

[12:59]

पढ़ो। उड़ा दो इस वीडियो के बाद यूटी में

[13:04]

तुम फोड़ के आने वाले हो जनरल चैप्टर को।

[13:06]

विश्वास करो मेरी बात का। ठीक है? तुम

[13:09]

जब-जब मेरी दुकान से उधार खरीद के जाओगे।

[13:12]

मैं यहां लिख दूंगा। पैसा चुका के जाओगे

[13:14]

तो ऑपोजिट साइड पे लिख दूंगा। जैसे एक दिन

[13:16]

तुम आए ₹100 चुका गए। एक दिन मैंने

[13:19]

तुम्हें फिर धर लिया तो तुम ₹400 चुका गए।

[13:21]

अब मेरे लिए पता लगाना बहुत आसान है कि

[13:23]

मुझे तुमसे कितने पैसे लेने हैं। चिंटू

[13:26]

सुन पहली बार आप 1000, 500 और 300 यानी कि

[13:30]

आप ₹1800 का माल मेरी दुकान से उधार पे ले

[13:33]

चुके हो। ₹1800 में से आपने आज तक मुझे

[13:35]

दिया क्या? ₹500। यानी मुझे इस वक्त आपसे

[13:39]

कितने रुपए लेने हैं? जल्दी बोलो जल्दी।

[13:42]

₹100

[13:44]

समझ रहे हैं आप? ₹1300 का आपका बैलेंस है।

[13:47]

यह मुझे आपसे लेना है। यह फायदा होता है

[13:51]

दोस्तों अकाउंट बनाने का। यह मतलब है

[13:53]

अकाउंट का। सर वो डेबिट क्रेडिट कुछ बता

[13:55]

रहे थे आप। हां बताता हूं। देखो ये हम तो

[13:59]

पढ़ें इस वक्त हिंदी अंग्रेजी है ना।

[14:02]

लैटिन भाषा के अंदर डेबिट वर्ड ही नहीं

[14:05]

था। एक्चुअली लैटिन भाषा के अंदर डेबिट

[14:07]

वर्ड नहीं था। वहां ये वर्ड होता था डेबर।

[14:11]

लैटिन लैंग्वेज में यह वर्ड होता था डेबर।

[14:14]

ठीक है? कौन सी भाषा में? लैटिन। लैटिन

[14:17]

बोला है मैंने ध्यान से। ठीक है? और

[14:19]

क्रेडिट जो वर्ड है ये लैटिन भाषा में

[14:22]

होता था क्रेडिटर। और हां वहां पर इस इन

[14:26]

दोनों शब्दों का मतलब होता था टू बी

[14:27]

रिसीव्ड या टू बी पेड। बट एक्चुअली ऐसा

[14:29]

नहीं है। एक्चुअली डेबिट और क्रेडिट का

[14:32]

मतलब बदलता है अलग-अलग जगहों पर। डिपेंड

[14:34]

करता है कि अकाउंट किस तरह का है। ठीक है?

[14:37]

तो डेबिट और क्रेडिट का मतलब आसान भाषा

[14:39]

में कैसे जवाब देना है? कोई हमसे पूछे। तो

[14:42]

डेबिट इज द लेफ्ट साइड ऑफ एन अकाउंट एंड

[14:44]

क्रेडिट इज द राइट साइड ऑफ एन अकाउंट। ठीक

[14:46]

है? अब ध्यान से सुनना कि जब कोई अकाउंट

[14:49]

हम प्रिपेयर करते हैं फॉर्मल रिकॉर्डिंग

[14:52]

करते वक्त जब हम कोई अकाउंट प्रिपेयर करते

[14:54]

हैं तो जो डेबिट साइड होती है ये वाली

[14:57]

उसको हम अकाउंट के ऊपर डिनोट करते हैं। इस

[14:59]

तरह से dr डॉट और जो क्रेडिट साइड होती है

[15:03]

यानी कि राइट साइड उसे हम सीआर लिखते हैं।

[15:06]

सवाल पैदा होता है कि डेबिट साइड को हम dr

[15:09]

क्यों लिख रहे हैं? है ना? अरे भाई डी आर

[15:13]

आर लेटर तो आ ही नहीं रहा इस वर्ड में। तो

[15:16]

मेरे भाई इस वर्ड में तो आ रहा है ना। तो

[15:19]

ये जो डीआर वाली जो शॉर्ट फॉर्म है ना वो

[15:21]

डेबिट से नहीं निकाली गई है। वो डेबर से

[15:24]

निकाली गई है। ठीक है?

[15:27]

इस तरह से पढ़ने वाले हैं स्क्रैच से।

[15:30]

लगता है ये सब आता है। आगे बढ़ जाओ वीडियो

[15:32]

के अंदर। लेकिन जाना नहीं है। जाना नहीं

[15:35]

है। ठीक है? जी। सीआर वाली जो शॉर्ट फॉर्म

[15:38]

है ये यहां से आई है। क्रेडिटर से क्रेडिट

[15:40]

से नहीं आई है। क्रेडिटर से आई है। यह तो

[15:43]

अकाउंट है। अब हम जब अकाउंटिंग कर रहे

[15:47]

होते हैं तो मैं एज अ शॉपकीपर एज अ

[15:50]

दुकानदार मैं कितनी चीजों के अकाउंट

[15:53]

बनाऊंगा? ये इस तरह के दिखने वाले कितने

[15:55]

अकाउंट बनाऊंगा? सैकड़ों अकाउंट बनाऊंगा

[15:57]

मैं।

[15:59]

100 150, 500 अकाउंट भी हो सकते हैं। 1000

[16:01]

भी हो सकते हैं। मैं अकाउंट बनाते चला

[16:04]

जाऊंगा। जब भी कोई चीज मेरे बिनेस में

[16:05]

इन्वॉल्व हुई, मैं उसका अकाउंट बना दूंगा।

[16:07]

मैं वेला हूं। मैं अकाउंट ही बनाता रहता

[16:09]

हूं पूरे दिन। जब भी कोई चीज इनवॉल्व होगी

[16:12]

मेरे बिज़नेस के अंदर मैं उसका अकाउंट बना

[16:14]

दूंगा। और कुछ काम ही नहीं मेरे पास। तो

[16:17]

कितने अकाउंट बनाओगे? बहुत सारे अकाउंट

[16:18]

बनाऊंगा। कितने तरह के अकाउंट्स बनाओगे?

[16:20]

ये सवाल है। कि कितने टाइप्स के अकाउंट्स

[16:23]

होते हैं? इस पे बात करते हैं दोस्तों।

[16:27]

कितने टाइप्स के अकाउंट्स होते हैं? देखिए

[16:30]

जब आप एकाउंटिंग इक्वेशन पढ़ रहे थे तो

[16:32]

आपने पढ़ा था कि एसेट्स आर ऑलवेज इक्वल टू

[16:37]

कैपिटल

[16:38]

प्लस लायबिलिटीज।

[16:41]

यही पढ़ा था ना आपने कि एसेट्स आर ऑलवेज

[16:44]

इक्वल टू कैपिटल प्लस लायबिलिटीज़। तो बस

[16:48]

समझ जाओ बिज़नेस के अंदर आपके कोई भी एसेट

[16:52]

अगर इन्वॉल्व हुई खाता खोल देना। अपने

[16:55]

बिज़नेस की एसेट्स पे कंट्रोल चाहते हो कि

[16:57]

नहीं? तो जितनी भी एसेट्स आपके बिजनेस के

[16:59]

अंदर हैं, सबका खाता खोलो। सबको रिकॉर्ड

[17:01]

करो। सबको रिकॉर्ड करो।

[17:04]

लैंड, बिल्डिंग, प्लांट, मशीनरी, कैश,

[17:06]

डेटर, स्टॉक, इन्वेंटरी सारी एसेट्स का

[17:09]

अकाउंट खोल दो। अकाउंटिंग इक्वेशन में भी

[17:11]

हम ये काम करते ही थे। तो ये तो याद

[17:13]

रहेगा। और किसका खाता खोलना है? अपने पैसे

[17:15]

का। अपनी पूंजी का। मालिक की कैपिटल का

[17:18]

अकाउंट ओपन करना है सर। मालिक की कैपिटल।

[17:21]

और किसका अकाउंट ओपन करना है सर? बेटा,

[17:23]

कर्जे आउटसाइड लायबिलिटीज़।

[17:27]

लायबिलिटीज का अकाउंट ओपन करना है आपको।

[17:28]

जितनी भी लायबिलिटीज हैं आपके सर पर सबका

[17:31]

अकाउंट ओपन करना है। तो यह तीन तरह के

[17:33]

अकाउंट ओपन कर लोगे पक्का? कैसे करना है

[17:36]

भाई सिखाएगा अभी। ये तीन तरह के अकाउंट्स

[17:38]

ओपन करने हैं। इसके अलावा भी तीन तरह के

[17:40]

अकाउंट्स ओपन करने हैं। वो क्या बताता

[17:42]

हूं। बेटा आज तक आपने सीखा था कि जो

[17:45]

एक्सपेंसेस होते हैं

[17:49]

जो एक्सपेंसेस होते हैं

[17:52]

या लॉसेस भी आप उन्हें कैपिटल में से

[17:54]

माइनस कर देते थे पर ऐसा फॉर्मल एकाउंटिंग

[17:57]

में नहीं होता। पूरे साल हम खर्चों को भी

[17:59]

रिकॉर्ड करते हैं। कैपिटल में माइनस नहीं

[18:01]

करते। कैपिटल में छेड़खानी नहीं करते। तो

[18:04]

एक्सपेंसेस का एक अलग रिकॉर्ड मुझे मेंटेन

[18:06]

करना है। मैं एक्सपेंसेस का अलग खाता

[18:08]

खोलूंगा। अकाउंट ओपन करूंगा और सर और मैं

[18:11]

रेवेन्यूज़ को अलग से रिकॉर्ड करूंगा

[18:12]

दोस्तों।

[18:14]

रेवेन्यूस को अलग से रिकॉर्ड करूंगा मैं।

[18:17]

अब आप अब आप पता है क्या सोच रहे हो कि

[18:20]

जनरल चैप्टर की मैंने एक और एक आधी और भी

[18:22]

वीडियो देखी थी। वहां तो ऐसे नहीं पढ़ाया

[18:24]

जा रहा था। दोस्तों हर टीचर का पढ़ाने का

[18:27]

तरीका अलग है। मैं थोड़ा सा वैसा पढ़ाता

[18:30]

हूं। अच्छा!

[18:32]

ठीक है? तो देखो अब जरा आराम आराम से।

[18:36]

एक्सपेंसेस को कैपिटल में से माइनस करते

[18:38]

थे। अभी नहीं करना। एक्सपेंसेस का अलग

[18:40]

रिकॉर्ड मेंटेन करना है। ओके? रेवेन्यूस

[18:42]

का अलग रिकॉर्ड मेंटेन करना है। और तो और

[18:45]

जो हम ड्रॉइंग करते हैं जो हम बिजनेस में

[18:47]

से पैसा विड्रॉ करते हैं उसको भी हम

[18:49]

कैपिटल में से माइनस कर देते थे ना

[18:50]

अकाउंटिंग इक्वेशन में। ऐसा नहीं करना। तो

[18:52]

कितने तरह के अकाउंट हो गए? छह तरह के

[18:54]

अकाउंट हो गए। ये ये देखो। छह तरह के

[18:57]

अकाउंट हो गए। एसेट्स,

[19:00]

लायबिलिटीज,

[19:01]

कैपिटल, एक्सपेंसेस,

[19:04]

रेवेन्यूज़ और ड्रॉइंग। छह तरह के अकाउंट

[19:08]

हो गए।

[19:10]

अब कोई भी खाता अगर आप बनाओगे तो कैसे

[19:13]

डिसाइड करोगे कि कब डेबिट साइड पे चीजें

[19:16]

रिकॉर्ड करनी है और कब क्रेडिट साइड पे।

[19:18]

सोचने वाली बात है दोस्तों। यह आपके सामने

[19:21]

एक अकाउंट था। यह मैंने बनाया था। चिंटू

[19:24]

का अकाउंट। चिंटू मेरी दुकान का कस्टमर

[19:26]

था। तो ऐसा क्यों हुआ कि जबजब वो मुझसे

[19:29]

सामान खरीद के गया, जबजब मैंने चिंटू को

[19:31]

सेल करी तो मैंने डेबिट साइड रिकॉर्ड करा

[19:35]

और जब-जब चिंटू ने मुझे कैश दिया, पेमेंट

[19:38]

दी तो मैंने क्रेडिट साइड रिकॉर्ड करा।

[19:40]

ऐसा क्यों? इसका उल्टा भी तो हो सकता था।

[19:42]

ऐसा भी तो हो सकता था कि जब वो मुझसे उधार

[19:45]

खरीद के जाता तो मैं क्रेडिट साइड लिखता

[19:48]

और जब पैसे देकर जाता तो मैं डेबिट साइड

[19:50]

लिखता। ऐसा भी हो सकता था दोस्तों। लेकिन

[19:52]

मैंने ऐसा ही क्यों करा? क्योंकि इसके

[19:54]

पीछे कुछ ना कुछ नियम है। बड़े बुजुर्ग

[19:56]

कुछ नियम बना के गए हैं जिन्होंने

[19:58]

अकाउंटेंसी सब्जेक्ट बनाया है। यस। तो वो

[20:02]

नियम क्या हैं? उन नियमों को उन रूल्स को

[20:05]

ही हम कहते हैं रूल्स ऑफ डेबिट एंड

[20:08]

क्रेडिट। जर्नल तो बहुत बाद में आता है।

[20:10]

जर्नल चैप्टर असल में क्यों दिक्कत देता

[20:13]

है हमें? क्योंकि हम सीधा जर्नल चैप्टर को

[20:15]

उठा लेते हैं। हम ईगो पे ले लेते हैं कि

[20:17]

जर्नल चैप्टर काहे नहीं समझ में आएगा। अरे

[20:19]

मेरे भाई नहीं आएगा समझ में। जब तक रूल्स

[20:22]

ऑफ डेबिट एंड क्रेडिट पर अपनी पकड़ मजबूत

[20:24]

नहीं कीजिएगा तब तक जनरल चैप्टर समझ में

[20:27]

नहीं आएगा। तो रूल्स ऑफ डेबिट एंड क्रेडिट

[20:30]

कहां है? यहां है। इसी वीडियो में है, आ

[20:33]

रहे हैं और उसके बाद जर्नल भी आ रहा है।

[20:35]

ठीक है? तो रूल्स क्या हैं जी? सबसे पहले

[20:40]

मैं आपको मॉडर्न रूल्स समझाना चाहता हूं।

[20:42]

बहुत पहले कुछ रूल्स और भी आए थे। सबसे

[20:44]

पहले तो ट्रेडिशनल क्लासिफिकेशन आई थी।

[20:47]

उसके बाद एक सिंपल उसको मॉडिफाई कर दिया

[20:49]

गया था। मॉडर्न क्लासिफिकेशन के अंदर। सो

[20:51]

फर्स्ट ऑफ़ ऑल आई एम गना टेल यू मॉडर्न

[20:53]

क्लासिफिकेशन। क्योंकि चीजें जल्दी समझ

[20:54]

में भी आना जरूरी है। ठीक है ना? चीजें

[20:57]

जल्दी समझ में भी आना जरूरी है। वरना तुम

[20:59]

इस वीडियो को बंद नहीं कर दोगे। है ना?

[21:00]

वरना तुम गाना नहीं चला लोगे YouTube पे

[21:02]

कोई बढ़िया सा। ठीक है? चलो। मॉडर्न

[21:04]

क्लासिफिकेशन ऑफ़ अकाउंट्स। क्या कहती है

[21:06]

मॉडर्न क्लासिफिकेशन? मॉडर्न क्लासिफिकेशन

[21:09]

कहती है कि अकाउंट्स छह तरह के होते हैं।

[21:11]

तो ये तो शिवम भैया ने भी बताया था अभी

[21:12]

थोड़ी देर पहले। अभी बताया था। और वो छह

[21:15]

तरह के अकाउंट्स कहां है? ये रहे। एसेट,

[21:18]

लायबिलिटी, कैपिटल, रेवेन्यू, एक्सपेंस और

[21:21]

ड्रॉइंग। हो गए छह तरह के अकाउंट्स। अब

[21:24]

रूल क्या है? ध्यान से सुनना। रूल क्या है

[21:28]

दोस्तों? सपोज़ मेरे यहां फर्नीचर है मेरी

[21:32]

दुकान के अंदर और मुझे उसको रिकॉर्ड करना

[21:34]

है। रिकॉर्ड करने के लिए क्या करूं?

[21:35]

अकाउंट बनाऊंगा। तो ये लो मैंने फर्नीचर

[21:37]

का अकाउंट बना दिया। अभी इस सबको गोली

[21:39]

मारो। यह देखो मैंने फर्नीचर

[21:43]

का अकाउंट बना दिया। फर्नीचर का अकाउंट

[21:45]

बना दिया मैंने। ये देखो टी शेप का

[21:47]

फॉर्मेट होता है ना ये। अब तुम मुझे इस

[21:50]

बात का जवाब दो कि फर्नीचर का अकाउंट तो

[21:52]

मैंने बना दिया। अब मैं फर्नीचर जब

[21:55]

खरीदूंगा तो किस साइड रिकॉर्ड करूंगा?

[21:58]

लेफ्ट राइट। और अगर उसी फर्नीचर को बेच

[22:01]

दूंगा तो किस साइड रिकॉर्ड करूंगा? इसके

[22:03]

पीछे कुछ ना कुछ रूल होता होगा ना। तो मैं

[22:06]

बताता हूं क्या रूल है। किसी भी एसेट को

[22:09]

जब आप परचेस करोगे तो उस एसेट के खाते में

[22:13]

जब आप उसको रिकॉर्ड करोगे तो डेबिट साइड

[22:15]

पे रिकॉर्ड करोगे। फर्नीचर खरीदते वक्त

[22:18]

सपोज़ ₹1 लाख का फर्नीचर आपने खरीदा है तो

[22:20]

आप उस ₹1 लाख के फर्नीचर की खरीदारी को इस

[22:23]

साइड रिकॉर्ड करोगे।

[22:25]

और ₹1 लाख के फर्नीचर को सपोज़ अगर आप बाद

[22:28]

में ₹1 लाख में ही बेच देते हो सपोज़। तो

[22:30]

आप क्रेडिट साइड पे रिकॉर्ड करोगे। यानी

[22:33]

फर्नीचर जब आपने खरीदा

[22:36]

खरीदा

[22:37]

तो यहां रिकॉर्ड करा और जब बेचा तो यहां

[22:40]

रिकॉर्ड करा। क्यों? ऐसा कुछ रूल होता है

[22:44]

क्या? हां होता है भाई। रूल होता है। रूल

[22:45]

होता है। ये रहा रूल। ये रहा वो रूल

[22:49]

दोस्तों।

[22:50]

एसेट का रूल। एसेट का रूल है। किसी भी

[22:54]

एसेट का खाता खोलने का। तो यह रूल फॉलो

[22:57]

करने का कि एसेट अगर बिनेस में इनक्रीस हो

[23:00]

रही है तो डेबिट साइड रिकॉर्डिंग होगी।

[23:01]

डिक्रीज हो रही है तो क्रेडिट साइड

[23:03]

रिकॉर्डिंग होगी।

[23:05]

एसेट का यह रूल है। पर सारी चीजें जो हम

[23:09]

रिकॉर्ड करने वाले हैं वो सारी एसेट्स

[23:10]

नहीं होने वाली। मालिक की कैपिटल भी

[23:12]

रिकॉर्ड होगी, रेवेन्यूस भी रिकॉर्ड

[23:14]

होंगे, एक्सपेंसेस भी रिकॉर्ड होंगी,

[23:16]

ड्रॉइंग्स भी रिकॉर्ड होंगी, लायबिलिटीज़

[23:18]

भी रिकॉर्ड होंगी। तो सबका रूल अलग-अलग

[23:20]

है। खत्म हो गया। एक सिंपल सी

[23:23]

क्लासिफिकेशन हमने पढ़ ली जिसका नाम है

[23:25]

मॉडर्न क्लासिफिकेशन।

[23:27]

ये रहा। सर। सर एसेट का रूल है एसेट बढ़ेगी

[23:30]

तो डेबिट साइड रिकॉर्ड करना, घटेगी तो

[23:32]

क्रेडिट साइड रिकॉर्ड करना।

[23:34]

लायबिलिटीज़ का रूल ऑपोजिट है। ऑफ कोर्स

[23:37]

क्यों ना हो क्योंकि लायबिलिटी और एसेट एक

[23:38]

दूसरे के बिल्कुल अपोजिट होती है ना यार।

[23:41]

तो लायबिलिटी का रूल उल्टा है। लायबिलिटी

[23:43]

का खाता खोल रहे हो आप। जैसे मेरे सर पे

[23:44]

कर्जा है तो मैं भी तो उसको रिकॉर्ड

[23:46]

करूंगा ना। तो मैं उस कर्जे के अकाउंट के

[23:49]

अंदर जब वो कर्जा बढ़ रहा होगा तो मैं

[23:52]

रिकॉर्ड करूंगा क्रेडिट साइड पे। और अगर

[23:54]

कम हो जाएगा मेरा कर्जा तो मैं रिकॉर्ड

[23:56]

करूंगा डेबिट साइड पे। एज सिंपल एज दैट।

[23:59]

अभी मजा उतना नहीं आएगा जब तक क्वेश्चंस

[24:03]

हम नहीं फोड़ेंगे। एक के बाद एक, एक के बाद

[24:05]

एक क्वेश्चंस को जब तक हम ब्रेक डाउन नहीं

[24:06]

करेंगे तब तक मजा नहीं आएगा। ठीक है? इस

[24:10]

वक्त आप इस वीडियो को अगर लेट कर देख रहे

[24:13]

हो भाई, खड़े हो के बैठ जाओ। रजिस्टर हाथ

[24:15]

में रखो। पेन हाथ में रखो सुंदर सा। और जो

[24:19]

भी चीज इंपॉर्टेंट लगे, वीडियो पॉज, नोट

[24:21]

डाउन। वीडियो पॉज, नोट डाउन। अगर वादा कर

[24:23]

रहा हूं कि जर्नल चैप्टर बढ़िया से कवर हो

[24:26]

जाएगा इस वीडियो में तो सचमुच कवर हो

[24:28]

जाएगा। ठीक है? चलिए

[24:32]

कैपिटल का क्या रूल है? ओनर की कैपिटल अगर

[24:35]

ओनर रिकॉर्ड कर रहा है अपनी बुक्स के अंदर

[24:37]

तो कैपिटल का क्या रूल है? सर कैपिटल का

[24:39]

रूल है कैपिटल भी बढ़ेगी तो क्रेडिट साइड,

[24:41]

कम होगी तो डेबिट साइड। अब जो सेम रूल

[24:43]

कैपिटल का है वही रेवेन्यू का भी है।

[24:47]

क्योंकि रेवेन्यूस भी कैपिटल वाले कॉलम

[24:48]

में ऐड ही होते थे ना वैसे तो। पर

[24:50]

एक्सपेंसेस का रूल उल्टा है। ड्रॉइंग का

[24:52]

रूल उल्टा है। सर याद नहीं हो रहा। याद

[24:53]

रखने का कोई जुगाड़ टेक्नोलॉजी है? है?

[24:56]

बिल्कुल है। यह देखो

[24:59]

जुगाड़ टेक्नोलॉजी बिल्कुल है दोस्तों।

[25:02]

2 मिनट में बता दूंगा और चीजें हो जाएंगी

[25:05]

क्लियर आपको। ठीक है? 2 मिनट में चीजें

[25:08]

क्या हो जाएंगी? क्लियर।

[25:11]

तो जरा लिखते हैं क्लियर वर्ड को।

[25:14]

क्लियर?

[25:17]

बस निकल गया रूल। अब देखो इधर सी फॉर

[25:21]

कैपिटल ऑफ द बिजनेस

[25:23]

एल फॉर लायबिलिटीज

[25:27]

दोस्तों ई फॉर एक्सपेंसेस

[25:30]

ए स्टैंड फॉर एसेट्स एंड आर स्टैंड्स फॉर

[25:34]

द रेवेन्यू बन गया रूल इंक्रीस डिक्रीज का

[25:39]

अलग-अलग रूल है वो तो चलो छोड़ो लेकिन

[25:41]

अकाउंट्स कितने तरह के होते हैं छह तरह के

[25:43]

होते हैं पांच भी याद रख लोगे तो छठा याद

[25:45]

हो जाएगा पांच तरह के अकाउंट्स याद रखो

[25:48]

पांच एक 2 3 4 5 जुगाड़ क्लियर क्लियर

[25:52]

वर्ड से निकल के आते हैं आपके पांच तरह के

[25:54]

अकाउंट्स कैपिटल लायबिलिटी एक्सपेंस एसेट

[25:56]

और रेवेन्यू खत्म ठीक है अच्छा जी अब इनके

[26:00]

रूल के बारे में बात कर लेते हैं इंक्रीज

[26:02]

का अलग रूल है डिक्रीज का अलग रूल है ठीक

[26:04]

है कैपिटल सी से स्टार्ट होती है तो

[26:07]

इंक्रीज होने पर क्रेडिट होती है समझ में

[26:09]

आ गई बात अब कैपिटल बिजनेस के लिए तो एक

[26:12]

तरह से लायबिलिटी है तो फिर जो कैपिटल का

[26:15]

रूल है वही लायबिलिटी का भी है वही

[26:16]

रेवेन्यू का भी है और इन दोनों का ऑपोजिट

[26:19]

रूल है डेबिट और डेबिट। खत्म हो गई बात।

[26:22]

यानी कैपिटल का अगर आप अकाउंट बना रहे हो

[26:25]

और कैपिटल इंक्रीस हो रही है तो क्रेडिट

[26:27]

साइड रिकॉर्ड होगी। डिक्रीज होने पर डेबिट

[26:29]

साइड रिकॉर्ड होगी।

[26:31]

लायबिलिटी दोस्तों इनक्रीस होने पर

[26:33]

क्रेडिट तो डिक्रीज होने पर डेबिट।

[26:36]

एक्सपेंसेस इंक्रीज़ होने पर डेबिट।

[26:38]

डिक्रीज़ होने पर क्रेडिट। एसेट्स इंक्रीज़

[26:40]

होने पर डेबिट। डिक्रीज़ होने पर क्रेडिट।

[26:42]

रेवेन्यू इंक्रीज़ होने पर क्रेडिट।

[26:44]

डिक्रीज़ होने पर डेबिट। खत्म हो गई बात।

[26:46]

एक अकाउंट छोड़ दिया सर आपने ड्रॉइंग। हां

[26:49]

हां ड्रॉइंग कैपिटल को घटाती है ना तो

[26:50]

ड्रॉइंग का अपोजिट रूल हो गया फिर। अगर आप

[26:53]

ड्रॉइंग का अकाउंट बना रहे हो।

[26:56]

अगर आप किसी भी ड्रॉइंग का अकाउंट बना रहे

[26:58]

हो और वो ड्रॉइंग इंक्रीस हो रही है तो

[27:00]

डेबिट साइड रिकॉर्ड कर देना। डिक्रीज होने

[27:01]

पर क्रेडिट साइड रिकॉर्ड कर देना। खत्म हो

[27:03]

गई बात।

[27:05]

तो रूल्स ऑफ डेबिट एंड क्रेडिट आधा खत्म

[27:08]

हो गया। यहां से हमारे आंसर्स आ जाते हैं

[27:11]

ईजीली। बट एक और क्लासिफिकेशन है जिसको हम

[27:13]

ट्रेडिशनल क्लासिफिकेशन बोलते हैं। उसको

[27:16]

हम अभी कवर कर लेंगे थोड़ी देर में। जर्नल

[27:19]

बहुत आसान है यार। डेबिट और क्रेडिट के

[27:21]

रूल्स की वजह से फंसता है हमारा जर्नल

[27:23]

चैप्टर। सीधा तो उठाना ही नहीं होता जर्नल

[27:25]

चैप्टर को। इट्स लाइक कि आपको लेटर्स की

[27:27]

नॉलेज नहीं है और आप सेंटेंस फॉर्मेशन पे

[27:29]

खेल रहे हो। समझ रहे हो? इट्स लाइक कि

[27:31]

अंग्रेजी पढ़ना नहीं आता। इट्स लाइक हिंदी

[27:33]

पढ़ना नहीं आता। लेकिन हिंदी कवि सम्मेलन

[27:35]

में जाके बैठ गए हो। ये ऐसा है। ठीक है?

[27:38]

तो इसलिए रूल्स ऑफ डेबिट एंड क्रेडिट को

[27:40]

पढ़ना बहुत जरूरी है। अब एक एमसीक्यू है

[27:43]

आपके सामने। पीछे डेबिट और क्रेडिट के

[27:46]

रूल्स आपने सीख लिए ना? तो इस एमसीक्यू का

[27:48]

जवाब दो ना फिर। करो वीडियो पॉज और जवाब

[27:51]

सोचो इसका। फिर रिज्यूम कर लेना।

[27:55]

डैश विल बी रिकॉर्डेड ऑन द डेबिट साइड ऑफ

[27:57]

एन अकाउंट। निम्नलिखित में से क्या है जो

[28:00]

किसी अकाउंट में डेबिट साइड रिकॉर्ड होता

[28:03]

है। यह अकाउंट हो गया और अकाउंट की ये हो

[28:05]

गई डेबिट साइड लेफ्ट साइड। ठीक है? सर

[28:08]

इंक्रीज इन एसेट हां इंक्रीज इन एसेट होता

[28:11]

है डेबिट साइड पर रिकॉर्ड डिक्रीज इन

[28:14]

लायबिलिटी इंक्रीज इन इक्विटी इक्विटी का

[28:16]

तो मुझे मतलब ही नहीं पता और ऑल ऑफ दीज़ एक

[28:19]

तो ये ऑल ऑफ़ दीज़ जब आता है ना किसी

[28:21]

एमसीक्यू में हमें लगता है हां यही तो

[28:22]

आंसर है। और फिर हम फटाफट से उस एमसीक्यू

[28:25]

को टिक करके फटाफट फेल हो के फटाफट बाहर आ

[28:27]

जाते हैं। ठीक है? सो आराम से देखो। कोई

[28:31]

एसेट जब इंक्रीस होती है तो हां उसकी

[28:33]

रिकॉर्डिंग डेबिट साइड होती है। अभी पीछे

[28:35]

बताया था मैंने। एसेट इंक्रीज होती है तो

[28:37]

डेबिट, डिक्रीज होती है तो क्रेडिट। और

[28:40]

कोई लायबिलिटी जब डिक्रीज हो रही होती है

[28:42]

तो भी रिकॉर्डिंग डेबिट साइड ही होती है।

[28:44]

यस।

[28:48]

और जब इक्विटी इनक्रीज हो रही होती है।

[28:51]

ठीक है? इक्विटी जब इनक्रीस हो रही होती

[28:54]

है।

[28:56]

इक्विटी बिनेस की कैपिटल को बोलते हैं

[28:58]

दोस्तों।

[29:00]

कैपिटल जब इनक्रीज हो रही होती है तो

[29:02]

डेबिट साइड पर रिकॉर्डिंग नहीं होती है।

[29:05]

क्योंकि कैपिटल का रूल यह रहा। कैपिटल

[29:07]

इनक्रीज होती है तो रिकॉर्डिंग क्रेडिट

[29:08]

साइड होती है। तो ये तो गलत हो गया।

[29:11]

इंक्रीज इन इक्विटी इज़ द रॉन्ग ऑप्शन। ये

[29:13]

दोनों लेकिन करेक्ट हैं। एसेट बढ़ना और

[29:15]

लायबिलिटी घटना दोनों डेबिट होता है। ये

[29:17]

देखो आप। एसेट का बढ़ना भी डेबिट और

[29:21]

लायबिलिटी का घटना भी डेबिट। तो ए और बी

[29:25]

दोनों करेक्ट हैं। एंड बी बोथ आर करेक्ट।

[29:27]

सो ऑप्शन डी ऑल ऑफ दीज़ नहीं है। ऑप्शन डी

[29:30]

है बोथ ए एंड बी।

[29:33]

ठीक है? सो बोथ ए एंड बी आर करेक्ट। आगे

[29:36]

चलते हैं दोस्तों। एक और एमसीक्यू है। डैश

[29:39]

मींस अ क्रेडिट। क्रेडिट

[29:42]

एसेट का इंक्रीज़ होना। ना जी ना। एसेट का

[29:45]

इंक्रीज़ होना तो डेबिट होता है। अभी पीछे

[29:46]

पढ़ा तो था। तो ये तो गलत है। लायबिलिटी का

[29:49]

इंक्रीज़ होना। हां ये क्रेडिट होता है। ये

[29:51]

क्रेडिट होता है। इक्विटी यानी कैपिटल का

[29:54]

डिक्रीज़ होना तो डेबिट होता है। तो ये भी

[29:55]

गलत हो गया। लायबिलिटी का डिक्रीज होना भी

[29:57]

डेबिट होता है। सो ओनली ऑप्शन बी इज

[29:59]

करेक्ट दोस्तों। डैश मींस अ क्रेडिट। आ

[30:02]

रहा है समझ में?

[30:04]

बने रहो थोड़ा सा और आगे चलो। अब क्वेश्चन

[30:08]

करने की कोशिश करते हैं जरा हम। देखिए

[30:10]

जरा। अब आपके सामने क्वेश्चन आ गया है।

[30:13]

आपके सामने एक क्वेश्चन आ गया है। जरा इस

[30:15]

क्वेश्चन को ध्यान से पढ़ो। आपको पता है

[30:18]

एकाउंटिंग इक्वेशन में भी आपने सीखा होगा

[30:20]

कि कोई भी ट्रांजैक्शन जब होगी तो मिनिमम

[30:22]

दो चीजों पे वो इफ़ेक्ट डालेगी ही डालेगी।

[30:25]

अकाउंटिंग इक्वेशन में आपने पढ़ा होगा

[30:27]

जैसे बिजनेस स्टार्ट करा तो कैश बढ़ा

[30:28]

कैपिटल बढ़ी फर्नीचर खरीदा कैश घट गया

[30:32]

फर्नीचर बढ़ गया तो दो चीजों पे इफेक्ट आ

[30:36]

रहा है हर ट्रांजैक्शन मिनिमम दो चीजों पे

[30:38]

पे इफेक्ट डालती ही डालती है हर

[30:40]

ट्रांजैक्शन मिनिमम दो अकाउंट्स को इफेक्ट

[30:43]

करती ही करती है दोस्तों देखो अब जरा

[30:46]

ध्यान से मजा आएगा एनालाइज़ द फॉलोइंग

[30:49]

ट्रांजैक्शंस एंड स्टेट व्हिच अकाउंट विल

[30:52]

बी डेबिटेड और क्रेडिटेड हमें इन सारी

[30:54]

सारी ट्रांजैक्शंस को एनालाइज करके यह

[30:56]

बताना है कि कौन सा अकाउंट डेबिट होगा और

[30:59]

कौन सा अकाउंट क्रेडिट होगा। आसान है।

[31:01]

बहुत आसान है। देखो जरा आप ध्यान से।

[31:06]

सर

[31:07]

सबसे पहला गौरांश स्टार्टेड बिज़नेस विद

[31:10]

कैश ऑफ ₹1 लाख। गौरांश नाम के व्यक्ति ने

[31:14]

बिजनेस स्टार्ट करा और कैश लगा दिया

[31:17]

बिजनेस के अंदर। कितने रुपए? ₹1 लाख।

[31:21]

अब यह सारी ट्रांजैक्शन धीरे धीरे

[31:22]

धीरे-धीरे आती जाएंगी।

[31:24]

ठीक है? अब समझो जरा कि कैसे हमें करनी है

[31:27]

पढ़ाई।

[31:29]

सबसे पहली ट्रांजैक्शन।

[31:32]

सबसे पहली ट्रांजैक्शन में कौन सी दो

[31:34]

चीजों पे फर्क पड़ेगा? खुद सोच के बताना।

[31:37]

छह तरह के अकाउंट ओपन हो सकते हैं। छह तरह

[31:39]

की चीजें हो सकती हैं। एसेट, लायबिलिटी,

[31:42]

कैपिटल, एक्सपेंस, रेवेन्यू और ड्रॉइंग।

[31:44]

रूल तुम्हें पता है। नहीं तो पीछे जाके एक

[31:47]

बार फिर से पढ़ लो। रूल तुम्हें पता है।

[31:50]

अब बताओ जरा बिजनेस अगर स्टार्ट कर रहा

[31:51]

हूं मैं तो मुझे कौन से दो खाते खोल देने

[31:55]

चाहिए रिकॉर्डिंग के लिए? सर बिज़नेस

[31:57]

स्टार्ट करने पर कैश आ रहा है बिज़नेस के

[31:59]

अंदर। यानी एक कैश का खाता खोल देना

[32:01]

चाहिए। क्यों? क्योंकि कैश एसेट है और

[32:03]

सारी एसेट्स का खाता खोलते हैं हम। हां,

[32:06]

एक कैश का खाता मुझे खोल देना चाहिए। और

[32:09]

मुझे लगता है एक मुझे कैपिटल का अकाउंट भी

[32:11]

ओपन कर देना चाहिए। सो, फर्स्ट अकाउंट

[32:13]

व्हिच आई एम गोइंग टू ओपन इज़ कैश अकाउंट

[32:16]

एंड द अदर इज़ कैपिटल अकाउंट।

[32:19]

तो एक हो गया जी कैश अकाउंट दूसरा हो गया

[32:23]

सर कैपिटल अकाउंट।

[32:25]

अब जरा देखते हैं कि कैश अकाउंट और कैपिटल

[32:28]

अकाउंट ओपन तो चलो हमने कर दिया। सपोज ये

[32:30]

चलो कैश अकाउंट ओपन कर दिया आपने। ये आपने

[32:32]

कैपिटल अकाउंट ओपन कर दिया। लेकिन

[32:34]

रिकॉर्डिंग कैसे होगी? कैश के अकाउंट में

[32:36]

रिकॉर्डिंग डेबिट साइड या क्रेडिट साइड?

[32:39]

कैपिटल के अकाउंट में रिकॉर्डिंग क्रेडिट

[32:40]

साइड या डेबिट साइड? सोचने वाली बात है।

[32:43]

तो सबसे पहले तो आप यह समझो के

[32:48]

इस ट्रांजैक्शन के अंदर यह दो अकाउंट्स

[32:51]

इनवॉल्वड हैं। यस और नो।

[32:55]

दो अकाउंट्स इनवॉल्वड हैं। सो कैश अकाउंट

[32:58]

के अंदर यह रिकॉर्डिंग किस साइड होनी

[33:00]

चाहिए? खुद सोचो। बिजनेस आज शुरू हो रहा

[33:03]

है सर? तो बिजनेस के अंदर कैश नामक एसेट

[33:07]

बढ़ रही है या कम हो रही है? बिजनेस के

[33:10]

अंदर कैश इनक्रीस हो रहा है या डिक्रीज हो

[33:12]

रहा है? क्या है जवाब आपका? सर बिजनेस के

[33:15]

अंदर कैश इनक्रीज हो रहा है। और कैश की

[33:17]

जात क्या है? कैश क्या है? कैश एसेट है।

[33:22]

और एसेट का रूल तुम्हें पता है कि एसेट

[33:24]

अगर बिजनेस के अंदर कभी भी बढ़ रही होगी

[33:27]

तो हम उसे किस साइड रिकॉर्ड करेंगे? डेबिट

[33:29]

साइड। यानी बिजनेस स्टार्ट करने की वजह से

[33:32]

चूंकि कैश बढ़ रहा है तो कैश के अकाउंट

[33:35]

में रिकॉर्डिंग होगी डेबिट साइड।

[33:38]

और एक और जगह रिकॉर्डिंग करनी पड़ेगी।

[33:40]

क्योंकि कैश अगर बिज़नेस में आ रहा है तो

[33:42]

कैपिटल के फॉर्म में आ रहा है। कैपिटल के

[33:44]

अकाउंट में रिकॉर्डिंग मैं बता देता हूं।

[33:46]

क्रेडिट साइड होगी। कारण है जी ये देख लो

[33:51]

कैपिटल। कैपिटल अगर इंक्रीस होती है तो

[33:53]

रिकॉर्डिंग क्रेडिट साइड होती है। ये रीज़न

[33:56]

है। समझ में आ रही है बात? चीजें शुरू में

[34:00]

हो सकता है मुश्किल लगे या ये भी हो सकता

[34:02]

है कुछ बच्चों को आसान लगे। जिनको आसान लग

[34:05]

रहा है वो फटाफट से कमेंट करो नीचे। अल्फा

[34:07]

अल्फा अल्फा अल्फा अल्फा ए एल पी एच ए और

[34:10]

जिन्हें मुश्किल लग रहा है थोड़ा सा बने

[34:12]

रहो क्योंकि चैप्टर भी तो फिर ऐसा है ना

[34:14]

यार चैप्टर भी तो ऐसा है ना कि पूरी 11th

[34:17]

क्लास की अकाउंटेंसी में रोल है इसका और

[34:19]

ये अगर समझ में आ गया तो पूरी क्लास 11th

[34:22]

की अकाउंटिंग तुम्हारे वश में है।

[34:24]

तुम्हारे कब्जे में है और 12th में भी

[34:25]

बहुत यूज़ है। तो इन्वेस्ट करो अपना

[34:28]

प्रेशियस टाइम इन्वेस्ट करो। लगे रहो।

[34:31]

प्रैक्टिस करो मेरे साथ। चीजें समझ में

[34:33]

आएंगी।

[34:35]

सो कैपिटल के अकाउंट में रिकॉर्डिंग

[34:37]

क्रेडिट साइड होगी क्योंकि कैपिटल बढ़ रही

[34:38]

है। कैपिटल बढ़ रही है तो रिकॉर्डिंग

[34:40]

क्रेडिट साइड

[34:43]

बस। तो फर्स्ट ट्रांजैक्शन के अंदर दो

[34:45]

अकाउंट्स इनवॉल्वड हैं। कैश अकाउंट में

[34:47]

रिकॉर्डिंग होगी डेबिट साइड और कैपिटल

[34:50]

अकाउंट में रिकॉर्डिंग होगी क्रेडिट साइड।

[34:52]

खत्म हो गई बात। ठीक है दोस्तों? अब चलते

[34:56]

हैं सेकंड ट्रांजैक्शन की तरफ कि सेकंड

[34:58]

ट्रांजैक्शन क्या हुई है इस बिनेस के

[34:59]

अंदर? तो सेकंड ट्रांजैक्शन में ही

[35:02]

डिपॉजिटेड इनू बैंक फॉर ओपनिंग एन अकाउंट

[35:05]

₹0000 लाख अपने घर से लाया गौरांश और ₹1

[35:08]

लाख में से उसने कहा ₹00 जरा अब बिजनेस के

[35:11]

नाम पर एक बैंक अकाउंट ओपन करा देते हैं।

[35:13]

ठीक है? बिजनेस के नाम पर दुकान के नाम पर

[35:16]

एक बैंक अकाउंट उसने ओपन करा दिया और

[35:17]

उसमें ₹00 उसने डिपॉजिट कर दिया। क्या

[35:21]

लगता है? सेकंड ट्रांजैक्शन में मुझे

[35:23]

कौन-कौन से अकाउंट्स में यह रिकॉर्ड करना

[35:25]

चाहिए?

[35:26]

थोड़ा सा अकाउंटिंग इक्वेशन वाला दिमाग

[35:28]

चलाओ।

[35:30]

बिजनेस में पैसा आ गया। यानी कैश के कॉलम

[35:32]

में पैसा पड़ा है। कैपिटल के कॉलम में

[35:34]

पैसा पड़ा है। अब बैंक अकाउंट ओपन कराओगे

[35:36]

भाई। बैंक अकाउंट ओपन कराओगे तो कैश कम

[35:38]

नहीं हो जाएगा। क्योंकि तुम ₹2000 डिपॉजिट

[35:41]

कर रहे हो बैंक में। कैश कम हो जाएगा और

[35:43]

वही बैंक बैलेंस के रूप में बढ़ जाएगा।

[35:45]

दोनों ही हमारे लिए एसेट हैं। तो दो जगह

[35:48]

रिकॉर्डिंग होगी कैश अकाउंट में और बैंक

[35:50]

अकाउंट में। ट्रांजैक्शन ही इतनी ज्यादा

[35:53]

करवा दूंगा ना कि कुछ बच बचेगा ही नहीं।

[35:56]

ट्रांजैक्शंस ही इतनी तुम लोग मेरे साथ

[35:58]

प्रैक्टिस कर लोगे क्योंकि कुछ बचेगा ही

[36:00]

नहीं। ठीक है? तो सेकंड ट्रांजैक्शन के

[36:03]

अंदर दो अकाउंट्स इनवॉल्वड हैं। सेकंड

[36:06]

ट्रांजैक्शन के अंदर दो अकाउंट्स का

[36:07]

इन्वॉल्वमेंट है। वन इज़ कैश अकाउंट।

[36:11]

अच्छा अकाउंट की शॉर्ट फॉर्म ये होती है

[36:13]

दोस्तों। एंड द अदर वन इज़ बैंक अकाउंट।

[36:15]

अकाउंट की शॉर्ट फॉर्म एल सी। कैश अकाउंट

[36:19]

और बैंक अकाउंट। सर तो कैश अकाउंट नया

[36:22]

खोलेंगे हम हर बार। नहीं भाई एक अकाउंट

[36:24]

खुल चुका है। उसी में रिकॉर्डिंग करेंगे

[36:25]

जाकर। ठीक है? तो कैश अकाउंट और बैंक

[36:29]

अकाउंट दो अकाउंट हैं। कहां रिकॉर्डिंग

[36:31]

होनी चाहिए? कैश भी एसेट है और बैंक भी

[36:34]

एसेट है इस बार तो। इस बार तो दोनों की ही

[36:37]

सेम क्लास है। तो एसेट का रूल बताओ क्या

[36:40]

होता है? जल्दी बताओ एसेट का रूल क्या

[36:41]

होता है? बढ़ने पर डेबिट। कम होने पर

[36:45]

क्रेडिट। तो इस ट्रांजैक्शन में कौन सी

[36:48]

एसेट बढ़ रही है? यस, यह वाली। तो बैंक

[36:51]

अकाउंट में रिकॉर्डिंग होगी डेबिट साइड और

[36:53]

कैश अकाउंट में रिकॉर्डिंग होगी क्रेडिट

[36:55]

साइड। निकल रहा है ना रूल? अब जर्नल

[36:58]

एंट्री आराम से हो जाएगी। ठीक है? आराम से

[37:01]

जनरल एंट्री जिन जिन्होंने पहले थोड़ा

[37:03]

बहुत जनरल चैप्टर पढ़ रखा है। पढ़ रखा है

[37:05]

वो बता पाएंगे कि इस ट्रांजैक्शन की जनरल

[37:08]

एंट्री क्या होगी? बैंक अकाउंट डेबिट टू

[37:09]

कैश अकाउंट। ऐसे क्विकली जनरल एंट्रीज

[37:12]

बनेंगी। अगर डेबिट और क्रेडिट के रूल्स पे

[37:14]

अच्छी मजबूत पकड़ आपकी होगी। ठीक है?

[37:18]

थर्ड ट्रांजैक्शन दोस्तों।

[37:21]

थर्ड ट्रांजैक्शन में क्या लिखा है? परचेस

[37:23]

फर्नीचर फॉर ₹15,000 फर्नीचर खरीद लिया

[37:26]

हमने। फिर से दो एसेट्स का इन्वॉल्वमेंट

[37:29]

है। आने वाली चीज फर्नीचर हमारे पास आ रहा

[37:31]

है। वो भी एक एसेट है और बदले में जाएगा

[37:33]

कैश तो वो भी एक एसेट है। तो इन दोनों

[37:35]

एसेट्स का हम अकाउंट ओपन करेंगे। एक

[37:38]

फर्नीचर अकाउंट

[37:41]

और दूसरा कैश अकाउंट। अच्छा देखते हैं सर

[37:45]

फर्नीचर के अकाउंट में रिकॉर्डिंग तुम लोग

[37:47]

सही जवाब देते हो कि नहीं। अब बताओ जरा

[37:49]

फर्नीचर खरीदा है मैंने। तो दो अकाउंट्स

[37:51]

का इन्वॉल्वमेंट है इस ट्रांजैक्शन में।

[37:54]

एक फर्नीचर और एक कैश। है ना? अब मुझे बता

[37:57]

दो फटाफट से कि कहां रिकॉर्डिंग डेबिट

[37:59]

साइड होगी और कहां क्रेडिट साइड।

[38:02]

फर्नीचर खरीदा और फर्नीचर का खाता खोल

[38:03]

दोगे ना फिर। और कैश का जो खाता ऑलरेडी

[38:06]

खुला पड़ा है उसमें भी रिकॉर्ड करोगे इस

[38:07]

चीज को। क्योंकि कैश जा रहा है और फर्नीचर

[38:09]

आ भी रहा है। तो क्या लगता है?

[38:14]

यस। फर्नीचर के अकाउंट में रिकॉर्डिंग

[38:15]

होगी सर डेबिट साइड और कैश के अकाउंट में

[38:18]

रिकॉर्डिंग होगी क्रेडिट साइड। रीजन साथ

[38:20]

के साथ बताते हुए चलता हूं। दोनों ही एसेट

[38:23]

हैं।

[38:25]

दोनों ही एसेट हैं। और एसेट का रूल होता

[38:29]

है बढ़ने पर डेबिट। कम होने पर क्रेडिट।

[38:32]

तो समझ जाओ ना यह वाली एसेट बढ़ रही है

[38:34]

इसलिए डेबिट। और यह वाली एसेट कम हो रही

[38:36]

है इसलिए क्रेडिट।

[38:37]

सिंपल। आगे चलें। आगे चलें। देखो अब जरा।

[38:42]

अब अब थोड़ा सा मुश्किल है सर क्योंकि अब

[38:46]

हमने खरीदे हैं गुड्स।

[38:49]

अब हमने खरीदे हैं गुड्स। गुड्स का मतलब

[38:52]

क्या होता है? जिस चीज में हम डील करते

[38:54]

हैं। जिस चीज का हम धंधा करते हैं, उसका

[38:57]

मतलब होता है गुड्स। आज तक अब तक तीन

[39:00]

ट्रांजैक्शन में गुड्स का इन्वॉल्वमेंट

[39:02]

नहीं था। गुड्स का सीन थोड़ा सा अलग है।

[39:06]

गुड्स का केस थोड़ा सा अलग है। गुड्स के

[39:09]

बारे में कुछ बताना चाहता हूं आपको। कुछ

[39:12]

सिखाना चाहता हूं आपको गुड्स के बारे में।

[39:14]

सर गुड्स की कहानी थोड़ी सी अलग चलेगी।

[39:18]

गुड्स या फिर स्टॉक जब आप खरीदोगे बिजनेस

[39:20]

के लिए तो उसकी कहानी थोड़ी सी अलग चलेगी।

[39:24]

देखो गुड्स के साथ दो चीजें हो सकती हैं।

[39:26]

या तो आप गुड्स को खरीदोगे

[39:29]

या फिर आप गुड्स को बेचोगे।

[39:32]

यही तो होता है। या तो हम गुड्स खरीदते

[39:34]

हैं या बेचते हैं। तो असल में गुड्स

[39:37]

खरीदने पर ना आपको गुड्स का नाम नहीं

[39:38]

लेना। गुड्स बेचने पर भी गुड्स का नाम

[39:41]

नहीं लेना। एक्चुअली क्या है कि जब

[39:43]

अकाउंटिंग इक्वेशन हम पढ़ते थे तो हम

[39:45]

देखते थे कि भ स्टॉक जो है स्टॉक का हम

[39:48]

कॉलम खोलते हैं और आता है तो उस कॉलम में

[39:50]

डाल देते हैं। जाता है तो उस कॉलम में से

[39:52]

माइनस कर देते हैं। पर एक्चुअली नहीं होता

[39:53]

ऐसा प्रैक्टिकल लाइफ में ऐसा नहीं होता।

[39:56]

हमें एक्चुअल अकाउंट एक्चुअल अकाउंटिंग

[39:58]

करते वक्त रिकॉर्डिंग करते वक्त गुड्स या

[40:01]

स्टॉक के केस में अगर आप खरीद रहे हो ना

[40:04]

तो आप परचेजेस अकाउंट ओपन करोगे हमेशा

[40:10]

फर्नीचर खरीदोगे तो फर्नीचर अकाउंट ओपन

[40:12]

करोगे लैंड खरीदोगे तो लैंड अकाउंट ओपन

[40:13]

करोगे बिल्डिंग खरीदोगे तो बिल्डिंग

[40:15]

अकाउंट ओपन करोगे लेकिन गुड्स खरीदोगे तो

[40:18]

परचेजेस अकाउंट ओपन करोगे वादा करो वादा

[40:20]

करो ठीक है गुड्स खरीदोगे तो परचेजेस

[40:24]

अकाउंट ओपन करोगे हमेशा गुड्स को अलग रखा

[40:27]

गया है बाकी की एसेट्स से। ऐसे ही अगर

[40:30]

बेचोगे तो सेल्स अकाउंट ओपन करना है आपको।

[40:34]

और मैं आपको बता दूं कि ऐसा क्यों है? सर

[40:37]

देखो पहले तो लॉजिक समझ लो, रूल समझ लो कि

[40:40]

परचेजेस अकाउंट में रिकॉर्डिंग डेबिट साइड

[40:43]

होगी। जब भी गुड्स खरीदोगे।

[40:46]

और बेचोगे तो परचेज अकाउंट का मतलब ही

[40:49]

नहीं है। सेल्स अकाउंट ओपन करना है और

[40:51]

वहां पर रिकॉर्डिंग होगी क्रेडिट साइड।

[40:54]

सुनो अकाउंटिंग इक्वेशन में स्टॉक का कॉलम

[40:58]

खोलते थे जिसको हम एसेट की तरह ट्रीट करते

[41:00]

थे। लेकिन यहां पर हम गुड्स को एसेट की

[41:03]

तरह ट्रीट ही नहीं करते। पूरे साल पूरे

[41:06]

साल जब भी हम गुड्स खरीदते हैं तो हम उसको

[41:08]

ट्रीट करते हैं लाइक एन एक्सपेंस। परचेजेस

[41:12]

को हम एक्सपेंस की तरह ट्रीट करते हैं

[41:14]

दोस्तों। और सेल्स को हम रेवेन्यू की तरह

[41:17]

ट्रीट करते हैं।

[41:21]

सेल्स को हम रेवेन्यू की तरह ट्रीट करते

[41:22]

हैं। अच्छा एक्सपेंस बढ़ने पर क्या रूल

[41:25]

होता है? एक्सपेंस वाले कॉलम में क्या रूल

[41:27]

होता है? एक्सपेंस बढ़ने पर डेबिट इसीलिए

[41:29]

परचेस अकाउंट डेबिट हो रहा है। रेवेन्यू

[41:31]

का क्या रूल होता है? रेवेन्यू बढ़ने पर

[41:33]

क्या होता है? क्रेडिट। इसलिए सेल्स

[41:35]

अकाउंट क्रेडिट हो रहा है। सो

[41:39]

परचेजेस अकाउंट हमेशा डेबिट होता है गुड्स

[41:43]

खरीदते वक्त। और गुड्स बेचते वक्त सेल्स

[41:46]

अकाउंट का इन्वॉल्वमेंट होता है और वो

[41:48]

अकाउंट क्रेडिट होता है गुड्स बेचते वक्त।

[41:50]

ये ध्यान रखना एसेट वाला लॉजिक यहां पर

[41:53]

नहीं चलेगा।

[41:55]

ठीक है? ये है सर गुड्स के केस में।

[41:57]

भूलोगे तो नहीं। वादा करते हो पकी प्रॉमिस

[42:00]

करते हो। ठीक है? सो गुड्स के केस में

[42:04]

गुड्स का अकाउंट ओपन ही नहीं करना। स्टॉक

[42:06]

का अकाउंट ओपन ही नहीं करना। गुड्स अगर

[42:09]

खरीद रहे हो हमेशा परचेजेस अकाउंट करके

[42:12]

ओपन करना है आपको। कौन सा अकाउंट ओपन करना

[42:14]

है? जल्दी से बता दो। परचेजेस अकाउंट। यस।

[42:18]

इस तरह से आपको अकाउंट ओपन करना है। और

[42:21]

अगर गुड्स बेच रहे हो तो हमेशा कौन सा

[42:23]

अकाउंट ओपन करना है? सेल्स अकाउंट। ध्यान

[42:26]

रखना।

[42:28]

सेल्स अकाउंट ओपन करना है। गुड्स बेचते

[42:30]

वक्त। याद रहेगा? पक्का। चलें अब अपने

[42:34]

क्वेश्चन को कंटिन्यू करें।

[42:37]

हमारा क्वेश्चन यहां था कि हमने गुड्स

[42:39]

खरीदे ₹5,000 के। ₹5,000 के हमने गुड्स

[42:42]

खरीदे। फोर्थ ट्रांजैक्शन में क्या लगता

[42:45]

है? क्या लगता है? अगर आपने ₹5,000 के

[42:48]

गुड्स खरीदे हैं तो एक अकाउंट तो

[42:49]

डेफिनेटली पता है कौन सा ओपन करना है? अभी

[42:51]

बताया गुड्स खरीदने पर। यस। कौन सा

[42:54]

अकाउंट? परचेजेस अकाउंट।

[42:59]

है ना? क्योंकि खर्चा है। गुड्स की

[43:01]

खरीदारी को खर्चे की तरह ट्रीट करना है।

[43:03]

इसका लॉजिक बताऊंगा। इसका लॉजिक एक्चुअली

[43:06]

आता है। चैप्टर नंबर 18 19 से आता है। सो

[43:08]

अभी के लिए गुड्स की खरीदारी को हम

[43:10]

एक्सपेंस मानते हैं। तो परचेजेस अकाउंट

[43:13]

ओपन हो गया। एक तो अब खुद सोचो गुड्स

[43:15]

खरीदने से तुम्हारी जेब से क्या जाएगा?

[43:17]

पैसा तो कैश अकाउंट। अगेन कैश अकाउंट इज़

[43:20]

इनवॉल्व्ड। कैश अकाउंट।

[43:24]

अब ध्यान से देखो कि परचेजेस अकाउंट और

[43:27]

कैश अकाउंट में रिकॉर्डिंग किस तरफ होगी?

[43:30]

परचेस अकाउंट तो डेफिनेटली डेबिट होगा।

[43:32]

अभी बताया सर ने कि गुड्स खरीदने पर हमेशा

[43:35]

परचेजेस अकाउंट ओपन होगा और डेबिट होगा।

[43:38]

सो परचेज अकाउंट में रिकॉर्डिंग होगी

[43:40]

डेबिट साइड। तो फिर तो डेफिनेटली कैश

[43:43]

अकाउंट में रिकॉर्डिंग क्रेडिट साइड होनी

[43:44]

चाहिए। हां कैश अकाउंट में रिकॉर्डिंग

[43:47]

क्रेडिट साइड होनी चाहिए। यस। और क्यों ना

[43:50]

हो? क्योंकि गुड्स खरीदने पर कैश जो कि एक

[43:53]

एसेट है वो कम हो जाती है। और एसेट का रोल

[43:57]

क्या है? कम होने पर क्रेडिट।

[44:00]

एक ट्रांजैक्शन में दोनों अकाउंट्स डेबिट

[44:02]

नहीं होंगे कभी भी। दोनों अकाउंट्स

[44:04]

क्रेडिट भी नहीं होंगे। एक डेबिट तो दूसरा

[44:06]

क्रेडिट। डबल एंट्री बुक कीपिंग। टू

[44:08]

आस्पेक्ट्स ऑफ अकाउंटिंग। समझ में आ रही

[44:11]

है बात? पक्का?

[44:14]

और दोनों का लॉजिक अलग-अलग जगह से आएगा

[44:16]

बेटा। जैसे परचेस अकाउंट डेबिट क्यों करा

[44:18]

मैंने? इसका लॉजिक आ रहा है एक्सपेंस वाले

[44:20]

कॉलम से। लेकिन इसकी जात कुछ और है। इसका

[44:24]

लॉजिक आ रहा है एसेट वाले कॉलम से। तो

[44:26]

दोनों का लॉजिक अलग-अलग जगह से आ रहा है।

[44:28]

मैं आपको फिर से बताना चाहता हूं दोस्तों।

[44:30]

ये देखिए आप परचेज अकाउंट को डेबिट करा

[44:33]

मैंने। ये वाला डेबिट नहीं करा मैंने। ये

[44:35]

वाला डेबिट करा। एक्सपेंस है ना परचेस।

[44:37]

एक्सपेंस बढ़ने पर डेबिट होता है। और

[44:40]

मैंने कैश अकाउंट को क्रेडिट क्यों करा?

[44:42]

उसका लॉजिक यहां से है। कैश एसेट है। कम

[44:44]

हो रही थी गुड्स खरीदने की वजह से। इसलिए

[44:46]

मैंने क्रेडिट कर दिया। क्लियर हो रही है

[44:49]

बात? पक्का?

[44:53]

सो ये रही हमारी फोर्थ ट्रांजैक्शन। अब

[44:56]

चलते हैं जी फिफ्थ ट्रांजैक्शन पे। फिफ्थ

[44:59]

ट्रांजैक्शन में क्या हुआ है? परचेस्ड

[45:01]

गुड्स फ्रॉम मिस्टर विहान ₹15,000

[45:06]

इसका मतलब क्या है? पहले भी गुड्स ही

[45:09]

खरीदे थे। अभी भी गुड्स ही खरीद रहे हैं

[45:10]

हम। तो पहले भी किसी इंसान से ही खरीदे

[45:13]

होंगे या किसी दुकान से खरीदे होंगे या

[45:16]

फिर इंसान का नाम क्यों गिवन है?

[45:19]

ताकि आपको यह समझ में आ जाए कि इस बार

[45:21]

गुड्स हमने नकद नहीं खरीदे। इस बार हमने

[45:24]

गुड्स उधार खरीदे हैं। दोस्तों जब भी किसी

[45:26]

ट्रांजैक्शन के अंदर किसी पर्सन का नाम आ

[45:29]

जाए, तो समझ जाइए कि वो ट्रांजैक्शन कैश

[45:31]

बेसिस पर नहीं हुई है। वो ट्रांजैक्शन

[45:33]

क्रेडिट बेसिस पर हुई है। वो उधार की

[45:35]

ट्रांजैक्शन है। तो ये जो लिखा है ना

[45:37]

परचेज्ड गुड्स फ्रॉम मिस्टर विहान तो समझ

[45:40]

जाओ मिस्टर विहान से आपने उधार खरीदे हैं

[45:42]

फिर गुड्स। उधार खरीदे हैं आपने मिस्टर

[45:44]

विहान से गुड्स। और अगर मिस्टर विहान से

[45:47]

आपने गुड्स उधार खरीदे तो मतलब आपने पैसा

[45:49]

देना है मिस्टर विहान को कुछ टाइम बाद तो

[45:51]

मिस्टर विहान आपके लिए क्या बन जाएगा?

[45:54]

क्रेडिटर। यस यह बन जाएगा आपका क्रेडिटर

[45:58]

और आप बन जाएंगे इसके डेटर। ये सब आपने

[46:02]

बेसिक अकाउंटिंग टर्म्स में पढ़ा होगा। तो

[46:05]

खैर अब गुड्स तो खरीदें। रिकॉर्ड तो करना

[46:07]

पड़ेगा। आओ रिकॉर्ड करते हैं फिफ्थ

[46:09]

ट्रांजैक्शन को जरा।

[46:11]

एक तो मुझे पता है भाई परचेजेस अकाउंट ओपन

[46:14]

होगा क्योंकि सर ने बता दिया था और मैंने

[46:16]

सर को पकी प्रॉमिस भी कर दिया था कि गुड्स

[46:19]

जब भी खरीदूंगा जब भी गुड्स खरीदूंगा तो

[46:22]

गुड्स का अकाउंट ओपन नहीं करूंगा परचेजेस

[46:24]

अकाउंट ओपन करूंगा तो परचेजेस अकाउंट ओपन

[46:27]

कर दिया हमने अब फिफ्थ ट्रांजैक्शन में

[46:30]

गुड्स तो आए हमारे पास लेकिन क्या हमारी

[46:32]

जेब से पैसा गया नहीं क्योंकि मैंने तो

[46:34]

मिस्टर विहान से बोला कि मैं पैसा बाद में

[46:36]

दूंगा मैंने उधार खरीदे गुड्स तो किसी से

[46:40]

पैसा पैसा लेना था तो तुम फटाफट से उसका

[46:42]

खाता खोल देते थे। याद है यह अभी

[46:44]

इंट्रोडक्शन के वक्त मैंने एक एग्जांपल

[46:46]

लिया था कि चिंटू मेरी दुकान पर आया तो

[46:48]

मैंने चिंटू का खाता खोल दिया। तो बेटा

[46:50]

ऐसे अगर किसी को पैसा चुकाना है मैंने तो

[46:52]

मैं उस उस व्यक्ति का भी खाता खोलूंगा।

[46:55]

मैं अकाउंट ओपन करूंगा। छह तरह की चीजों

[46:58]

में से कोई भी चीज अगर इनवॉल्व है मेरी

[46:59]

ट्रांजैक्शन में मैं उसका अकाउंट ओपन

[47:01]

करूंगा। मेरी लायबिलिटी है यार। मेरा

[47:03]

क्रेडिटर मेरी लायबिलिटी है। तो मैं उसका

[47:06]

भी अकाउंट ओपन करूंगा। सो एक अकाउंट ओपन

[47:08]

होगा विहान्स अकाउंट।

[47:11]

विहान का अकाउंट ओपन होगा। बता दूं कि

[47:13]

विहान आपका क्रेडिटर है

[47:17]

और क्रेडिटर हमारे लिए क्या है? लायबिलिटी

[47:19]

है। ऑफ कोर्स।

[47:21]

सो अब आप मुझे बता दीजिए क्या डेबिट और

[47:23]

क्या क्रेडिट है? जल्दी से बता दो।

[47:26]

मैंने गुड्स खरीदे विहान से। गोली मारो

[47:30]

विहान को। गुड्स तो आ रहे हैं ना। और

[47:32]

गुड्स खरीदने पर परचेज अकाउंट ओपन होता है

[47:35]

और वह डेबिट होता है। यह कंफर्म है। तो

[47:38]

भैया यह अकाउंट तो डेबिट होगा। तो फिर समझ

[47:41]

जाओ फिर इस इस अकाउंट को क्रेडिट ही होना

[47:43]

पड़ेगा। अब अगर वो डेबिट हो गया तो तो

[47:45]

बेटा विहान का अकाउंट हो जाएगा क्रेडिट।

[47:48]

कारण

[47:50]

लॉजिक निकालने की कोशिश करो जरा। ये तो

[47:52]

जुगाह टेक्नोलॉजी है कि एक डेबिट तो दूसरा

[47:55]

क्रेडिट ही होगा। लेकिन लॉजिक भी तो

[47:56]

निकालो। क्यों विहान का अकाउंट क्रेडिट

[47:58]

हुआ है? सोचो जरा इस बारे में। क्योंकि

[48:00]

विहान तुम्हारे लिए क्रेडिटर है। क्रेडिटर

[48:02]

लायबिलिटी है। लायबिलिटी का रूल है कि

[48:04]

लायबिलिटी बढ़ती है तो क्रेडिट होती है।

[48:06]

कम होती है तो डेबिट होती है दोस्तों। तो

[48:09]

इसलिए विहान का अकाउंट क्रेडिट हुआ है।

[48:11]

क्योंकि इट बिलोंग्स टू अ लायबिलिटी।

[48:15]

इट बिलोंग्स टू अ लायबिलिटी। ये एक एक तरह

[48:18]

की लायबिलिटी और लायबिलिटी का रूल है

[48:20]

बढ़ने पर क्रेडिट।

[48:22]

अब लॉजिक समझ में आ रहा है आपको? पक्का?

[48:26]

हां जी दोस्तों। तो यह है सर। पांच

[48:30]

ट्रांजैक्शंस अब तक की जर्नल चैप्टर को तो

[48:33]

तुम फोड़ दोगे यार उड़ा दोगे लेकिन डेबिट और

[48:36]

क्रेडिट के रूल्स पर ही पकड़ मजबूत नहीं है

[48:38]

तो फिर जर्नल चैप्टर नहीं हो पाएगा ना

[48:40]

बच्चे डेबिट और क्रेडिट के रूल्स पर पकड़

[48:43]

मजबूत होनी बहुत इंपॉर्टेंट है। ठीक है?

[48:46]

आगे चलते हैं अब जरा। अब जरा बेच के भी

[48:49]

दिखा देते हैं गुड्स। तो सिक्स्थ

[48:51]

ट्रांजैक्शन में वी हैव सोल्ड गुड्स ऑफ

[48:54]

₹2000। मैं आपको फिर से रिपीट करना चाहता

[48:56]

हूं। मैं बहुत पकाने वाला हूं आज के सेशन

[48:58]

में। दोस्तों गुड्स के अलावा कोई भी चीज

[49:02]

खरीदोगे ना उस चीज का नाम आएगा बेचोगे तो

[49:04]

भी। लेकिन गुड्स के केस में कहानी थोड़ी

[49:07]

अलग है। गुड्स के केस में खरीदने पर

[49:09]

परचेजेस अकाउंट बेचने पर सेल्स अकाउंट।

[49:14]

ठीक है? ये गुड्स की कहानी है। तो गुड्स

[49:17]

बेचे आपने ₹2000 के? सिक्स्थ ट्रांजैक्शन

[49:19]

में। सिक्स्थ ट्रांजैक्शन में हमने ₹2000

[49:22]

के गुड्स बेचे हैं। तो बताओ ना कौन सा

[49:25]

अकाउंट ओपन करूं? गुड्स का अकाउंट ओपन कर

[49:28]

दूं। वो तो होता ही नहीं है। गुड्स का

[49:31]

अकाउंट कभी ओपन नहीं होता भाई। गुड्स

[49:33]

खरीदने पर परचेज बेचने पर सेल्स अकाउंट।

[49:37]

तो सिक्स्थ ट्रांजैक्शन में एक तो

[49:39]

डेफिनेटली सेल्स अकाउंट ओपन होगा क्योंकि

[49:42]

गुड्स बेचे जा रहे हैं। अब खुद सोचो गुड्स

[49:44]

बेचे जा रहे हैं। पार्टी का नाम नहीं है

[49:45]

उस ट्रांजैक्शन में। पार्टी का नाम नहीं

[49:46]

है। देखो देखो देखो देखो। ये सिक्स्थ में

[49:48]

सिर्फ लिखा है सोल्ड गुड्स। किसी पार्टी

[49:50]

का नाम नहीं है। तो अगर आपने गुड्स बेचे

[49:53]

हैं तो फिर नकद बेचे। अगर पार्टी का नाम

[49:57]

नहीं है तो और अगर नकद बेचे तो आपकी जेब

[49:59]

में पैसा आ रहा है। पैसा बोले तो कैश तो

[50:00]

कैश का अकाउंट।

[50:03]

एक सेल्स अकाउंट हो गया। एक कैश अकाउंट हो

[50:05]

गया। अब सुनो जिस प्रकार गुड्स खरीदने पर

[50:09]

परचेजेस अकाउंट ओपन होता है और वो डेबिट

[50:12]

होता है। कंफर्म। ऐसे ही गुड्स बेचने पर

[50:15]

हमेशा सेल्स अकाउंट ओपन करोगे। वादा करो।

[50:18]

पिंकी प्रॉमिस करो। और सेल्स अकाउंट हमेशा

[50:21]

क्रेडिट होगा। बेचने पर सेल्स अकाउंट

[50:24]

क्रेडिट होगा। इसलिए सेल्स अकाउंट में

[50:26]

रिकॉर्डिंग मैं क्रेडिट साइड पे करूंगा।

[50:30]

और कैश अकाउंट में रिकॉर्डिंग फिर डेबिट

[50:32]

साइड ही करनी पड़ेगी। अब फिर से दोनों का

[50:34]

लॉजिक अलग-अलग जगह से आ रहा है। मैं बताता

[50:35]

हूं। ये देखो ये जो सेल है क्या बताया था?

[50:38]

क्या बताया था बड़े भाई ने? कि सेल होती

[50:41]

है रेवेन्यू। और रेवेन्यू का रूल क्या है?

[50:43]

बढ़ने पर क्रेडिट, कम होने पर डेबिट। ये

[50:45]

देख लो। अच्छा कैश क्या है? कैश एसेट है।

[50:49]

और एसेट का रूल बहुत बार बता दिया। बढ़ने

[50:51]

पर डेबिट, कम होने पर क्रेडिट। यहां से आ

[50:54]

रहा है लॉजिक। लॉजिक पता होना चाहिए।

[50:57]

लॉजिक बहुत इंपॉर्टेंट है दोस्तों। पानी

[50:59]

पी लूं थोड़ा सा। गला सूख गया तुम्हारे को

[51:01]

पकाते पकाते मेरा। ठीक है? चलो आगे की

[51:04]

ट्रांजिशन जरा देखो आप जरा। ये वाली

[51:07]

ट्रांजिशन ट्राई करो जरा। सेवंथ।

[51:20]

हां जी दोस्तों। सेवंथ ट्रांजैक्शन में

[51:23]

लिखा है सोल्ड फर्नीचर टू आराध्या 15,000

[51:28]

है ना यानी हमने फर्नीचर आराध्या को बेचा

[51:32]

है ₹15,000 का तो एक तो यह कंफर्म है कि

[51:34]

उधार बेचा होगा क्योंकि पार्टी का नाम है

[51:37]

आराध्या को उधार बेचा है। अच्छा अब अगर

[51:40]

आपने यह फर्नीचर आराध्या को उधार बेचा है

[51:42]

तो आराध्या रिश्ते में तुम्हारी क्या बन

[51:44]

जाएगी? डेटर जिसको तुम डेबिटर भी बोलते

[51:48]

हो। गलत डेटर।

[51:51]

तो आराध्या का खाता खोलना पड़ेगा ना। मुझे

[51:53]

पैसे लेने हैं फ्यूचर में उससे यार। यही

[51:54]

तो वो बोल कर गई है। यही तो आराध्या बोल

[51:57]

कर गई है कि मैं फर्नीचर लेकर जा रही हूं।

[51:59]

पैसे नहीं है मेरे पास। खाते में लिख

[52:00]

देना। तो आराध्या का खाता खोलेगा। हम

[52:03]

आराध्या का खाता खोलेंगे। उसमें रिकॉर्ड

[52:05]

करेंगे कि कितने पैसे हमें लेने हैं उससे।

[52:08]

और ₹15,000 का फर्नीचर वो हमसे खरीद के गई

[52:10]

है। ठीक है? तो आइए जरा इसको रिकॉर्ड करते

[52:13]

हैं। सिक्स्थ ट्रांजैक्शन सेवंथ

[52:14]

ट्रांजैक्शन को रिकॉर्ड करते हैं जरा।

[52:17]

सेवंथ ट्रांजैक्शन को रिकॉर्ड करते हैं।

[52:21]

क्या लगता है सेवंथ ट्रांजैक्शन में

[52:23]

क्या-क्या रिकॉर्ड होना चाहिए? एक तो

[52:25]

आराध्या मेरी कस्टमर है। मुझे उससे पैसा

[52:28]

लेना है। तो एक तो आराध्या का अकाउंट मुझे

[52:30]

लगता है ओपन होना चाहिए।

[52:35]

और

[52:37]

कौन सा अकाउंट ओपन होना चाहिए? बेचा है ना

[52:40]

आपने? सेल्स अकाउंट। रॉन्ग आंसर।

[52:46]

सेल्स अकाउंट ओपन नहीं होगा इस बार।

[52:49]

क्यों?

[52:50]

बेटा परचेजेस अकाउंट और सेल्स अकाउंट यह

[52:55]

फंडा सिर्फ गुड्स पर अप्लाई होता है और इस

[52:57]

ट्रांजैक्शन में मैंने गुड्स बेचे ही नहीं

[52:58]

है। मैंने तो फर्नीचर बेचा है।

[53:02]

मैंने तो फर्नीचर बेचा है भाई।

[53:05]

फर्नीचर के केस में कब कहा मैंने आपको कि

[53:08]

परचेजेस अकाउंट या सेल्स अकाउंट ओपन करना।

[53:10]

फर्नीचर बेचने का धंधा थोड़ी है मेरा।

[53:12]

फर्नीचर तो मेरी एक साधारण एसेट है जिसे

[53:15]

मैं बेच रहा हूं पर उधार बेच रहा हूं। ठीक

[53:18]

है? तो यहां पर फर्नीचर अकाउंट का ही नाम

[53:20]

आएगा।

[53:22]

इंटरेस्टिंग यस और नो

[53:26]

सीखने लायक मिला कुछ फर्नीचर अकाउंट का ही

[53:29]

नाम आएगा। दोस्तों जब तक किसी क्वेश्चन के

[53:31]

अंदर कह नहीं दिया जाए कि आपका धंधा किस

[53:33]

चीज का है? तो आप खुद से नहीं मान लोगे कि

[53:35]

फर्नीचर बेचने का ही धंधा है मेरा। तो

[53:37]

इसीलिए फर्नीचर मेरे लिए गुड्स नहीं है।

[53:40]

एक साधारण एसेट है। एक सेपरेट एसेट है। और

[53:45]

क्योंकि ये गुड्स नहीं है। तो मैं यहां पर

[53:48]

परचेजेस और सेल्स शब्द का इस्तेमाल नहीं

[53:50]

करूंगा। मैं एसेट का पर्टिकुलर नाम लूंगा।

[53:53]

आई विल बी पर्टिकुलर टू दैट एसेट। तो

[53:56]

आराध्या और फर्नीचर। अब जरा देखते हैं कि

[53:59]

डेबिट साइड क्या रिकॉर्ड होगा और क्रेडिट

[54:01]

साइड क्या रिकॉर्ड होगा। फर्नीचर मुझे

[54:03]

लगता है मैं बेच रहा हूं तो मेरे पास से

[54:04]

जा रहा है। एसेट कम हो रही है और एसेट कम

[54:07]

होने पर रूल क्या कहता है? जल्दी बोलो।

[54:09]

क्रेडिट।

[54:12]

ये भी मेरी एसेट है। आराध्या भी मेरे लिए

[54:15]

एक तरह की एसेट है। बिकॉज़ आराध्या बेटा

[54:18]

देखो डेटर है सबसे पहले तो मेरे लिए।

[54:21]

और डेटर की क्लास क्या होती है? एसेट। और

[54:24]

एसेट का रूल कहता है बढ़ने पर डेबिट, कम

[54:27]

होने पर क्रेडिट।

[54:29]

डेटर नामक एसेट आज तक नहीं थी आपके पास।

[54:31]

अब ये एसेट बिजनेस में इंक्रीस हुई है। तो

[54:34]

इसलिए अब आराध्या के अकाउंट में आप

[54:35]

रिकॉर्डिंग करोगे डेबिट साइड और फर्नीचर

[54:39]

के अकाउंट में रिकॉर्डिंग करोगे क्रेडिट

[54:40]

साइड। समझ में आया लॉजिक?

[54:44]

परचेजेस और सेल्स शब्द का इस्तेमाल क्यों

[54:46]

नहीं हुआ? परचेज तो देखो होना भी नहीं था

[54:48]

क्योंकि सेल हुई है इस ट्रांजैक्शन में।

[54:49]

है ना? सेल हुई है इस ट्रांजैक्शन में। वी

[54:51]

हैव सोल्ड समथिंग एंड दैट समथिंग इज़

[54:54]

फर्नीचर नॉट गुड्स। ठीक है? अगर गुड्स

[54:57]

बेचे होते तो आप

[55:00]

गुड्स बेचे होते अगर आपने तो आप देखते कि

[55:03]

भैया हम सेल्स अकाउंट ओपन करेंगे खरीदे

[55:06]

होते तो परचेसेस अकाउंट बट चकि वहां गुड्स

[55:08]

की बात नहीं हुई थी फर्नीचर की बात हुई थी

[55:10]

इसलिए ये पूरा क्लेश उस चीज पे लागू ही

[55:12]

नहीं होता ठीक है आ जाओ आ जाओ आ जाओ

[55:16]

ये रिकॉर्ड हो गया जी सेवंथ ट्रांजैक्शन

[55:18]

रिकॉर्ड हो गई एट्थ ट्रांजैक्शन अब गुड्स

[55:21]

बेच रहे हैं हम अब दिमाग की बत्ती जला

[55:24]

लेना अब गुड्स बेच रहे हैं कितने रुपए के

[55:27]

गुड्स बेच रहे हैं? 3000 पर उधार बेच रहे

[55:29]

हैं फिर से। क्योंकि पार्टी का नाम लिखा

[55:31]

है यहां पर लिखा है सोल्ड गुड्स टू नेहा।

[55:33]

नेहा को हम गुड्स बेच रहे हैं ₹3000 के।

[55:37]

तो जैसे आराध्या आपकी डेटर बनी थी। नेहा

[55:40]

भी डेटर बनेगी। यस।

[55:43]

पैसे लेने हैं ना भाई? तो एक तो नेहा का

[55:46]

अकाउंट ओपन होगा।

[55:48]

और नेहा भी डेटर है तो नेहा का अकाउंट भी

[55:50]

डेबिट हो जाएगा।

[55:55]

दूसरा अकाउंट कौन सा ओपन होगा? जल्दी

[55:56]

बताओ। जल्दी बताओ जल्दी। दूसरा अकाउंट कौन

[55:59]

सा ओपन होगा?

[56:02]

क्या बेचा? फर्नीचर, लैंड, बिल्डिंग। नो

[56:06]

गुड्स। और गुड्स बेचते हैं तो कौन सा

[56:09]

अकाउंट ओपन होता है? सेल्स अकाउंट।

[56:13]

इस बार सेल्स अकाउंट ओपन होगा। गुड्स के

[56:16]

अलावा कोई चीज बेची होती तो उस चीज का नाम

[56:19]

लेता मैं। लेकिनकि गुड्स की कहानी है तो

[56:21]

गुड्स की कहानी वो बता बताई थी ना तो जरा

[56:24]

उसका स्क्रीनशॉट ले लेना वरना मैं तो कहता

[56:26]

हूं कॉपी रजिस्टर वगैरह लेके बैठे हो ना

[56:28]

तमीज से उसको लिख लो ये बड़ा काम आने वाला

[56:30]

है आपको सेल्स अकाउंट सर सर सेल्स अकाउंट

[56:33]

में रिकॉर्डिंग किस साइड होगी जल्दी

[56:35]

क्रेडिट साइड सेल्स अकाउंट में रिकॉर्डिंग

[56:38]

होगी क्रेडिट साइड ओके

[56:42]

ये थी गुड्स की कहानी आठ ट्रांजैक्शंस हो

[56:45]

गई हैं अब चलते हैं नाइंथ ट्रांजैक्शन पे

[56:47]

नाइंथ ट्रांजैक्शन पे हमने ने पे करा है

[56:49]

बेटा विहान को ₹15,000 विहान को हम

[56:52]

₹15,000 पे कर रहे हैं दोस्तों। पे करने

[56:55]

से हमारा कर्जा कम हो जाता है। विहान को

[56:57]

देना था ना यार। याद है विहान को जानते हो

[56:59]

भूल गए? याद है? फिफ्थ ट्रांजैक्शन में

[57:01]

गुड्स खरीद के बैठे हो तुम विहान से।

[57:03]

विहान तुम्हारा क्रेडिटर है। तुम्हारे सर

[57:05]

पे बैठा हुआ है। लायबिलिटी बनकर लेकिन अब

[57:07]

तुम गए और उसको पैसा चुका के आ गए। कितने

[57:09]

पैसे चुका के आए? 15,000। देने भी 15,000

[57:12]

ही थे। पूरा मैंने चुका दिया। अब खुद

[57:14]

सोचो।

[57:16]

देखो

[57:18]

विहान कहां है? पहले ढूंढता हूं मैं। ये

[57:20]

रहा विहान।

[57:22]

जब फिफ्थ ट्रांजैक्शन हुई थी, विहान मेरा

[57:24]

क्रेडिटर बना था तो मैंने उसका खाता खोला

[57:26]

था ना कि भाई यह मेरा क्रेडिटर है। इसको

[57:29]

मैंने पैसे देने हैं। जब मेरे सर पे कर्जा

[57:32]

चढ़ा था, जब मैंने विहान का खाता खोला था,

[57:34]

तो मैंने विहान के खाते में क्रेडिट साइड

[57:36]

रिकॉर्ड करा था। सपोज़ दिस इज़ विहान का

[57:38]

अकाउंट। दिस इज़ विहान का अकाउंट। तो मैंने

[57:41]

पहले 15,000 का कर्जा यहां रिकॉर्ड करा।

[57:43]

अब अगर मैं कर्जा चुका दूंगा, तो यहां

[57:44]

रिकॉर्ड कर दूंगा।

[57:47]

कैंसिल आउट हो गई दोनों चीजें। समझ रहे हो

[57:49]

आप? मैथमेटिक्स ही तो है ही अकाउंट्स और

[57:51]

है क्या? तो विहान

[57:55]

वाला कर्जा जब आपके ऊपर चढ़ा था तो आपने

[57:58]

क्रेडिट साइड रिकॉर्ड करा था विहान के

[58:00]

खाते में। अब आप इस चीज को विहान के खाते

[58:03]

में डेबिट साइड रिकॉर्ड कर देना। विहान का

[58:04]

खाता बंद हो जाएगा। विहान का अकाउंट क्लोज

[58:06]

हो जाएगा। ठीक है? सो विहान को हम कितना

[58:10]

पे कर रहे हैं? हम विहान को 15,000 पूरा

[58:13]

का पूरा पे कर दे रहे हैं नाइंथ

[58:15]

ट्रांजैक्शन में। सो नाइंथ ट्रांजैक्शन

[58:17]

में

[58:18]

दिमाग लगाना है बेटा। कोई भी ट्रांजैक्शन

[58:22]

हो रही है ना तो पहले दिमाग लगाना है।

[58:23]

ठंडे दिमाग से सोचना है कि अगर तुम्हारा

[58:25]

ही ये बिजनेस है सोचो एक तरह से। और अगर

[58:28]

तुम्हारे साथ ये ट्रांजैक्शन हो रही है तो

[58:29]

किस चीज पे फर्क पड़ेगा? यार विहान को तुम

[58:32]

पैसे दे रहे हो। मैं कहता हूं चाहे कर्जा

[58:34]

उतार रहे हो, चाहे उसके मुंह पे फेंक के

[58:35]

मार रहे हो आप पैसे। जेब से क्या जा रहा

[58:37]

है? पैसा। तो कैश अकाउंट क्यों नहीं

[58:40]

इन्वॉल्वड होना चाहिए? है ना? सो नाइंथ

[58:42]

ट्रांजैक्शन में वन इज कैश अकाउंट

[58:45]

एंड विहान के खाते में दोबारा से रिकॉर्ड

[58:48]

करूंगा मैं। जब मेरे सर पर कर्जा चढ़ा था

[58:50]

मैंने विहान के खाते में रिकॉर्ड करा था।

[58:51]

कर्जा उतरेगा मैं फिर से विहान के खाते

[58:53]

में रिकॉर्ड करूंगा। तो विहान्स अकाउंट

[59:00]

कैश अकाउंट में रिकॉर्डिंग मुझे लगता है

[59:01]

क्रेडिट साइड करनी चाहिए मुझे और विहान के

[59:04]

अकाउंट में रिकॉर्डिंग डेबिट साइड करनी

[59:06]

चाहिए। लॉजिक बताऊं आराम से। पहले तो तुम

[59:08]

बताओ क्या होगा इसका लॉजिक?

[59:12]

लॉजिक ये है कि विहान लायबिलिटी है। पहली

[59:16]

बात तो उस वक्त लायबिलिटी बढ़ी थी तो

[59:19]

क्रेडिट साइड रिकॉर्ड किया था। आज

[59:21]

लायबिलिटी कम हो रही है तो डेबिट साइड

[59:23]

रिकॉर्ड कर रहा हूं। लायबिलिटी का रूल यही

[59:25]

कहता है ना कि लायबिलिटी बढ़ती है तो

[59:26]

क्रेडिट, कम होती है तो डेबिट। वही तो करा

[59:28]

है मैंने। और कैश मेरे लिए एसेट है। एसेट

[59:32]

का रूल उल्टा कहता है। एसेट का रूल कहता

[59:34]

है बढ़ती है तो डेबिट। कम होती है तो

[59:36]

क्रेडिट। मेरी एसेट कम हो रही है क्योंकि

[59:38]

मैं पेमेंट कर रहा हूं इसलिए क्रेडिट कर

[59:39]

रहा हूं मैं। बात समझ में आ रही है कि

[59:41]

नहीं आ रही है दोस्तों? ठीक है?

[59:44]

उसके बाद 10th ट्रांजैक्शन में रिसीव्ड

[59:48]

फ्रॉम नेहा। नेहा नाम की बच्ची

[59:52]

नेहा आपको ₹2000 देकर गई है। नेहा कौन है?

[59:54]

यह रही देखो एथ ट्रांजैक्शन के वक्त नेहा

[59:56]

को आपने माल बेचा था ना ₹3,000 का और उस

[59:58]

वक्त वो आपकी डेटर बन गई थी। आज वो आपको

[60:01]

पैसा देकर गई है। पूरा तो नहीं ₹2,000

[60:03]

देकर गई है। तो मैं ₹2,000 रिकॉर्ड कर

[60:05]

दूंगा नेहा के खाते में। यस।

[60:09]

सोचो जरा आराम से। सपोज तुम दुकानदार हो

[60:13]

और मैं नेहा हूं। ओके? जब मैं पहली बार

[60:16]

तुमसे गुड्स खरीद के गई थी तो मैंने क्या

[60:18]

कहा था कि मेरे खाते में लिख दो। गुड्स

[60:21]

लेके जा रही हूं मैं ₹3,000 के। उसके बाद

[60:23]

अगर मैं तुम्हें पैसा देने आऊंगी तो भी

[60:25]

मैं सेम सेंटेंस बोलूंगी कि ये पैसा कटवा

[60:29]

के जा रही हूं। मेरे खाते में लिख देना।

[60:31]

तो बेटा आप जब किसी से पैसा लेना है तो उस

[60:34]

व्यक्ति के खाते में लिखोगे। और अगर वो

[60:36]

लौटा के जा रहा है, चुका के जा रहा है तो

[60:38]

भी उसके खाते में लिखोगे। सो अगेन नेहा का

[60:40]

अकाउंट इनवॉल्व होगा इस ट्रांजैक्शन के

[60:42]

अंदर। राइट? 10th ट्रांजैक्शन रिसीव्ड

[60:44]

फ्रॉम नेहा ₹2000 10थ ट्रांजैक्शन रिसीव्ड

[60:49]

फ्रॉम नेहा। तो एक तो नेहा के अकाउंट में

[60:51]

मैं यह रिकॉर्ड करूंगा। और दूसरा नेहा

[60:55]

क्या देकर गई है आपको? एक एसेट देकर गई है

[60:58]

ना बेटा? जिसका नाम कैश है। तो कैश

[61:00]

अकाउंट।

[61:02]

तीन अकाउंट्स तीन तरह के अकाउंट्स पर तो

[61:04]

तुम खेल ही रहे थे ना अकाउंटिंग इक्वेशन

[61:06]

में एसेट लायबिलिटी और कैपिटल मैंने तीन

[61:09]

और चीजें ही तो बोली है बस आपको एक्सपेंस

[61:11]

रेवेन्यू और ड्रॉइंग तो काहे घबरा रहे हैं

[61:14]

नेहा का अकाउंट और कैश का अकाउंट

[61:18]

नेहा का अकाउंट और कैश का अकाउंट अब जरा

[61:20]

देखते हैं रिकॉर्डिंग कहां होनी चाहिए

[61:22]

नेहा तुम्हारी डेटर थी आज भी है लेकिन अब

[61:25]

कम हो गई है डेटर पहले मुझे 3000 लेने थे

[61:28]

उससे पर अब वो ₹2000 चुका के गई है अच्छी

[61:30]

बच्ची है तो डेटर जो कि एक एसेट है। डेटर

[61:34]

नामक एसेट बढ़ नहीं रही है, कम हो रही है।

[61:37]

इसलिए यहां पर रिकॉर्डिंग क्रेडिट साइड

[61:39]

होगी। लेकिनकि डेटर आपको पैसे देके जा रहा

[61:42]

है तो इसकी वजह से एक दूसरी एसेट है जो

[61:44]

बढ़ रही है जिसका नाम कैश है। इसलिए यहां

[61:46]

रिकॉर्डिंग डेबिट साइड होगी। कितना तो

[61:49]

इंटरेस्टिंग है ये। ठीक है? कितना तो

[61:52]

इंटरेस्टिंग है ये। जरूरी सिर्फ एक बात है

[61:55]

कि जब चीजें समझ में आने लगे तो हम यह ना

[61:58]

करें कि लैपटॉप बंद करा, मोबाइल बंद करा

[62:00]

या कुछ और खोल लिया। कोई दूसरी सोशल

[62:02]

मीडिया ऐप में आप एंगेज हो गए या सो गए।

[62:05]

अब तो चीजें समझ में आनी शुरू हुई हैं।

[62:08]

ठीक है? अब तो आपके अंदर का स्टूडेंट जाग

[62:11]

जाना चाहिए पढ़ाई करने के लिए। हां जी। सो

[62:15]

नेहा और कैश। आगे चलते हैं दोस्तों। अगली

[62:19]

ट्रांजैक्शन देखते हैं। अगली ट्रांजैक्शन

[62:21]

में नाउ वी हैव पेड रेंट। ₹6,000 का रेंट

[62:23]

पे कर दिया हमने। 11th ट्रांजैक्शन में।

[62:26]

रेंट पे करा हमने।

[62:30]

ईजी है। रेंट पे करने पर हमारे पास से

[62:32]

जाता क्या है? पहले तो ये बताओ। कैश। रेंट

[62:35]

पे करने पर हमारे पास से कैश जाएगा। सो

[62:40]

11th ट्रांजैक्शन में एक चीज जो इनवॉल्वड

[62:43]

है वो कैश है। डेफिनेटली क्योंकि रेंट पे

[62:47]

करने से कैश जाता है तो कैश के खाते में

[62:50]

मुझे ये चीज़ लिखनी पड़ेगी। अच्छा इतनी सारी

[62:52]

ट्रांजैक्शन में कैश अकाउंट कैश अकाउंट

[62:54]

बहुत बार नाम आ गया तो क्या 10 बार कैश

[62:56]

अकाउंट नया खुला है? नहीं एक ही है। उसी

[62:58]

में रिकॉर्डिंग चल रही है। लेफ्ट राइट

[63:00]

लेफ्ट राइट लेफ्ट राइट इस तरह से। अब रेंट

[63:03]

पे करने पर क्या होता था? अकाउंटिंग

[63:05]

इक्वेशन वाले चैप्टर को याद करो। रेंट पे

[63:08]

करने पर तुम कैश वाले कॉलम में से माइनस

[63:10]

करते थे और कैपिटल वाले कॉलम में से भी

[63:12]

माइनस करते थे। लेकिन दोस्तों यहां पर ऐसा

[63:15]

नहीं होगा।

[63:17]

हम एक्सपेंसेस और रेवेन्यूस को और

[63:19]

ड्रॉइंग्स को कैपिटल से अलग रखते हैं और

[63:22]

उनका अलग से खाता खोलते हैं थ्रूउ द ईयर।

[63:25]

यस। तो मैं क्या करूंगा? मैं रेंट के नाम

[63:28]

से एक सेपरेट अकाउंट ओपन करूंगा। मुझे भी

[63:32]

तो पता चले पूरे साल में रेंट के खाते में

[63:34]

कितना पैसा है? सैलरीज में कितना पे किया

[63:37]

है हमने? वेजेस में कितना पे किया है।

[63:39]

इलेक्ट्रिसिटी में कितना पे किया है। मुझे

[63:41]

भी तो इसका रिकॉर्ड चाहिए ना पूरे साल

[63:42]

में। ओके? सो कैश अकाउंट एंड रेंट अकाउंट

[63:45]

इतना समझ में आया आपको? कैश अकाउंट रेंट

[63:48]

अकाउंट। अब अब दोस्तों खुद ही सोच लो कि

[63:51]

आपने रेंट पे करा तो कैश आया कि गया? आपको

[63:56]

पता है 100 में से 90 ट्रांजैक्शंस कैश पे

[64:00]

आधारित होती हैं। कैश पे अगर आपकी पकड़

[64:02]

मजबूत है तो दूसरा अकाउंट तो जुगाड़ से भी

[64:04]

निकाल लोगे आप। लेकिन आप उतना भी तो याद

[64:06]

नहीं रखते ना। प्रॉब्लम यह है। कैश तो याद

[64:09]

रखो। कैश का रूल तो याद रखो। बढ़ने पर

[64:11]

डेबिट, कम होने पर क्रेडिट। खत्म हो गई

[64:13]

बात। तो रेंट पे करने से कैश आ रहा है कि

[64:16]

जा रहा है? जा रहा है। कम हो रहा है।

[64:17]

क्रेडिट।

[64:20]

और रेंट के अकाउंट में रिकॉर्डिंग होगी

[64:22]

डेबिट साइड। बिकॉज़ रेंट क्या है? रेंट एक

[64:24]

एक्सपेंस है। और एक्सपेंस जब भी बढ़ता है

[64:28]

रिकॉर्डिंग डेबिट साइड होती है। एक्सपेंस

[64:31]

जब भी बढ़ता है, रिकॉर्डिंग डेबिट साइड

[64:34]

होती है। अब आते हैं सर 12थ ट्रांजैक्शन

[64:37]

पे। 12th ट्रांजैक्शन में लास्ट हमें लिखा

[64:41]

है वी हैव रिसीव्ड कमीशन फ्रॉम गाबा

[64:43]

इलेक्ट्रॉनिक्स ₹1500 की हमें कमीशन मिली

[64:46]

है। हमने कोई कोई मेरे पास परचेस ऑर्डर

[64:49]

आया मेरे पास उस ऑर्डर को पूरा करने के

[64:51]

लिए टाइम नहीं है या मशीनें नहीं है या

[64:53]

बंदे नहीं है। मैंने वो ऑर्डर तुम्हें

[64:54]

दिलवा दिया। तुमने खुश होकर मुझे कमीशन दे

[64:57]

दी। इस तरह से मेरे पड़ोसी ने मुझे कमीशन

[64:59]

दे दी। ₹1500 की 12th ट्रांजैक्शन।

[65:04]

अब देखो कमीशन आ रही है लेकिन कमीशन के

[65:07]

आने से आता क्या है? आएगी तो कोई एसेट ही

[65:09]

ना। और उस एसेट का नाम फिर से क्या है?

[65:11]

कैश। सो कैश अकाउंट

[65:15]

कैश अकाउंट में रिकॉर्डिंग भी मुझे पता

[65:17]

है। डेबिट साइड होने वाली है। रिकॉर्डिंग

[65:20]

भी मुझे पता है। डेबिट साइड होने वाली है।

[65:22]

क्योंकि एसेट बढ़ गई आपकी। कमीशन का पैसा

[65:24]

आया। आपकी एसेट बढ़ गई। कैश

[65:27]

दूसरा कहां रिकॉर्ड करोगे? कैपिटल के

[65:30]

अकाउंट में तो रिकॉर्ड करना नहीं है

[65:32]

कैपिटल में बल्कि पूरे साल कोई छेड़खानी

[65:34]

करते ही नहीं है हम प्रैक्टिकल अकाउंटिंग

[65:36]

में सिर्फ कैपिटल जिस वक्त आएगी तब या जब

[65:38]

एडिशनल कैपिटल आएगी तब बाकी कुछ नहीं पूरे

[65:40]

साल

[65:42]

क्योंकि मैं सारे एक्सपेंसेस का अलग

[65:44]

अकाउंट ओपन करता हूं। मैं सारे रेवेन्यूस

[65:46]

का भी अलग अकाउंट ओपन करता हूं। सो मैं एक

[65:50]

सेपरेट अकाउंट ओपन करूंगा यहां पर जिसका

[65:53]

नाम है कमीशन रिसीव्ड।

[65:56]

जिसका नाम है कमीशन रिसीव्ड।

[65:59]

और इस अकाउंट के अंदर मैं रिकॉर्डिंग कर

[66:02]

दूंगा क्रेडिट साइड। लॉजिक साथ के साथ

[66:04]

क्लियर करते हुए चलना दोस्तों। यहां पर

[66:06]

मैं रिकॉर्डिंग क्रेडिट साइड कर रहा हूं

[66:08]

क्योंकि मेरे लिए यह रेवेन्यू है

[66:11]

और रेवेन्यू जब भी बढ़ता है तो रिकॉर्डिंग

[66:13]

क्रेडिट साइड होती है। खत्म हो गई बात।

[66:16]

कैश आपके लिए क्या है? एसेट है। एसेट जब

[66:19]

भी बढ़ती है तो रिकॉर्डिंग डेबिट साइड

[66:21]

होती है। अलग-अलग जगह से रूल आ रहा है

[66:24]

दोनों का। रूल्स एक बार फिर से पढ़ लो।

[66:26]

याद कर लो। एक पेपर पे लिख लो अपने सामने

[66:29]

और साथ के साथ मेरे ट्रांजैक्शंस देखते

[66:31]

हुए चलो।

[66:33]

सर क्वेश्चन खत्म हो गया। 12 की 12

[66:36]

ट्रांजैक्शंस हमने खत्म कर दी। ओके? आगे

[66:40]

चलते हैं। अब जरा

[66:47]

यह मैं आपको थोड़ी देर बाद बताऊंगा। अब

[66:49]

आगे चलते हैं। जर्नल के बारे में थोड़ी सी

[66:53]

बातें करते हैं। ठीक है?

[66:55]

यहां पर एक क्वेश्चन आता है हमारे सामने।

[66:58]

इस क्वेश्चन में लिखा है जर्नलाइज द

[67:01]

फॉलोइंग ट्रांजैक्शंस। ट्रांजैक्शंस तो

[67:03]

कुछ भी नहीं है। ट्रांजैक्शंस तो चलो हो

[67:05]

जाएंगी। समझ में आ जाएंगी। बट व्हाट इज अ

[67:08]

जर्नल? एक जर्नल क्या होता है? सोचने वाली

[67:12]

बात है। तो जर्नल सबसे पहले तो आपको समझना

[67:15]

पड़ेगा जर्नल का फॉर्मेट क्या है? इस तरह

[67:18]

से दोस्तों जर्नल का फॉर्मेट बनाया जाता

[67:20]

है।

[67:21]

किसी भी ट्रांजैक्शन को पहली बार रिकॉर्ड

[67:24]

किया जाता है एक फॉर्मल बुक ऑफ अकाउंट्स

[67:26]

में जिसका नाम है दोस्तों जर्नल। फॉर

[67:28]

एग्जांपल फॉर एग्जांपल जो क्वेश्चन मैंने

[67:32]

आपको अभी-अभी करवाया था। अगर आप उस

[67:34]

क्वेश्चन की ही का ही एग्जांपल लें तो उस

[67:37]

क्वेश्चन के अंदर सबसे पहली ट्रांजैक्शन

[67:39]

क्या थी? गौरांश ने बिज़नेस स्टार्ट करा

[67:41]

था। बिजनेस में कैश आया था कैपिटल के रूप

[67:45]

में। उस चीज को रिकॉर्ड करने का तरीका वह

[67:49]

नहीं है। इतनी देर से जो मैं रिकॉर्ड करने

[67:51]

का तरीका बता रहा था ऐसे थोड़ी चीजें

[67:52]

रिकॉर्ड होंगी। इतने गंदे तरीके से

[67:54]

रिकॉर्ड करोगे क्या? और आजकल तो वैसे भी

[67:57]

सॉफ्टवेयर बेस्ड अकाउंटिंग है। तो ऐसे

[67:58]

थोड़ी हो गई। ये थोड़ी अकाउंटिंग इस तरह

[68:00]

से थोड़ी अकाउंटिंग होगी। इस क्वेश्चन के

[68:03]

अंदर मैंने आपको सिर्फ यह पता लगाना

[68:04]

सिखाया कि व्हिच अकाउंट इज़ टू बी डेबिटेड

[68:07]

और व्हिच अकाउंट इज़ टू बी क्रेडिटेड।

[68:10]

अब उसको अप्लाई कैसे करते हैं? ध्यान से

[68:12]

सुनना।

[68:14]

यह जो जर्नल जर्नल चिल्ला रहे हो ना तुम

[68:17]

यह है जर्नल का फॉर्मेट।

[68:19]

कभी भी जर्नल प्रिपेयर करना है तो सबसे

[68:23]

पहले तो आपको लिखना है इन द बुक्स ऑफ

[68:30]

जो भी कंपनी का नाम है। जो भी दुकान का

[68:33]

नाम है। दुकान का नाम नहीं पता तो

[68:34]

दुकानदार का नाम जो भी है वो लिखना है

[68:36]

आपको। सो इन द बुक्स ऑफ से गौरांश

[68:42]

दुकानदार का नाम आ गया यहां पर। ठीक है?

[68:45]

इसके बाद जरा ये कॉलम्स ध्यान से देखो।

[68:48]

यहां पर डेट फॉर्मेट की बात हो रही है ना?

[68:50]

फॉर्मेट की बात हो रही है। तो यहां पर आने

[68:53]

वाली है हमारी डेट। हर ट्रांजैक्शन की डेट

[68:56]

यहां पर आने वाली है। इधर आएंगे हमारे

[68:58]

पर्टिकुलर्स यानी अकाउंट्स के नाम। कौन सा

[69:00]

अकाउंट आरला है या जाला है? इधर आएगा

[69:02]

एलएफ। एलएफ क्या होता है? इंपॉर्टेंट चीज़

[69:05]

है दोस्तों। दोस्तों एलएफ होता है लेजर

[69:07]

फोलियो।

[69:11]

जिस प्रकार जर्नल है प्राइमरी बुक ऑफ़

[69:13]

अकाउंट्स उसी प्रकार एक दूसरी बुक भी होती

[69:15]

है लेजर जो कि होती है सेकेंडरी बुक। अब

[69:18]

जर्नल में आज अगर कोई ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड

[69:20]

हो रही है तो कल को वो लेजर में भी जाएगी।

[69:21]

तो लेजर के किस पेज पर जाएगी? दैट पेज

[69:24]

नंबर इज़ गोइंग टू बी रिटन हियर। पर इसका

[69:27]

यूज़ अभी नहीं है। और आप अपने स्कूल टीचर

[69:30]

से पूछ लेना शायद वो यह भी अलाउ कर दें

[69:31]

आपको कि आप यह वाला कॉलम बनाए ही नहीं।

[69:34]

लेजर फोलियो का कॉलम ही हटा देंगे वो। ऐसा

[69:36]

भी हो सकता है। उसके बाद डेबिट अमाउंट हम

[69:40]

यहां पर लिखते हैं। क्रेडिट अमाउंट हम

[69:42]

यहां पर लिखते हैं। इस तरह से जनरल में

[69:44]

ट्रांजैक्शंस को रिकॉर्ड किया जाता है।

[69:46]

फॉर एग्जांपल 2025 में

[69:51]

फॉर एग्जांपल

[69:53]

2025 में 2025 में अप्रैल की 1 तारीख को

[69:58]

किसी व्यक्ति ने बिजनेस शुरू करा। अप्रैल

[70:01]

की 1 तारीख को किसी व्यक्ति ने बिजनेस

[70:03]

शुरू करा 2025 में। तो पहले तो मुझे इतना

[70:06]

बताओ कि कौन सी दो चीजों का इन्वॉल्वमेंट

[70:08]

है यहां पर? कौन से दो अकाउंट्स का

[70:10]

इन्वॉल्वमेंट है यहां पर? जल्दी से बता

[70:12]

दो। जी हां। कैश अकाउंट और कैपिटल अकाउंट।

[70:17]

गौरांश वाला एग्जांपल ले लो। जब बिजनेस

[70:19]

स्टार्ट होता है तो कौन से दो अकाउंट्स

[70:21]

इनवॉल्वड होते हैं?

[70:25]

बिजनेस स्टार्ट होने पर कौन से दो

[70:28]

अकाउंट्स इनवॉल्वड होते हैं? कैश और

[70:30]

कैपिटल। कैश अकाउंट में रिकॉर्डिंग डेबिट

[70:33]

साइड होती है। कैपिटल अकाउंट में

[70:34]

रिकॉर्डिंग क्रेडिट साइड होती है। तो बस

[70:36]

इसको रिकॉर्ड जर्नल में इस तरह से किया

[70:39]

जाता है दोस्तों।

[70:41]

सबसे पहले आपको लिखना है डेबिट वाला

[70:43]

अकाउंट यानी कि कैश अकाउंट।

[70:50]

और यहां लास्ट में आकर आपको इधर सिंबल लगा

[70:53]

देना है डेबिट का। कैश अकाउंट हो जाएगा

[70:56]

डेबिट। कैश बिजनेस में कितना आ रहा है? से

[70:59]

₹1 लाख तो डेबिट वाले कॉलम में आपको यहां

[71:01]

पर लिख देना है ₹1 लाख

[71:05]

और कैश अगर बिज़ इस बिज़नेस में डेबिट हो

[71:07]

रहा है तो कुछ क्रेडिट भी हो रहा है।

[71:09]

क्रेडिट क्या हो रहा है? कैपिटल। तो वो

[71:10]

आपको नीचे की तरफ लिख देना है।

[71:14]

नीचे की तरफ थोड़ा सा इतना सा स्पेस छोड़कर

[71:16]

आपको लिखना है टू। और यहां पर लिख देना है

[71:19]

क्रेडिट वाला अकाउंट यानी कि कैपिटल

[71:21]

अकाउंट।

[71:23]

और इसका अमाउंट यहां पर आ जाएगा क्रेडिट

[71:25]

के कॉलम में ₹1 लाख।

[71:29]

बस दोस्तों इस तरह से ट्रांजक्शन रिकॉर्ड

[71:31]

की जाती हैं जनरल चैप्टर के अंदर।

[71:34]

आराम से देखो इस रिकॉर्डिंग को।

[71:44]

कैश अकाउंट डेबिट टू कैपिटल अकाउंट।

[71:48]

कैश अकाउंट डेबिट टू कैपिटल अकाउंट। यानी

[71:50]

कि अगर किसी ट्रांजैक्शन के अंदर आपको पता

[71:53]

है कि कौन सी चीज डेबिट हुई है और कौन सी

[71:56]

चीज क्रेडिट हुई है तो जर्नल में उस

[71:58]

ट्रांजैक्शन को रिकॉर्ड करना बहुत आसान है

[72:01]

आपके लिए बाएं हाथ का खेल है। अब मुझे

[72:04]

इतनी सारी प्रैक्टिस के बाद 1 घंटे की

[72:06]

प्रैक्टिस के बाद समझ में आ गया है कि

[72:08]

बिज़नेस स्टार्ट होने पर कैश डेबिट होता

[72:10]

है। कैपिटल क्रेडिट होता है। तो जो चीज़

[72:12]

डेबिट हुई है उसको पहले रिकॉर्ड करना है।

[72:14]

डैश अकाउंट डेबिट

[72:17]

और क्रेडिट वाली चीज को ऐसे रिकॉर्ड नहीं

[72:19]

करना कि कैपिटल अकाउंट क्रेडिट ना जी ना।

[72:22]

टू शब्द लिखना है। ये टू जो है वो क्रेडिट

[72:24]

को ही डिनोट कर रहा है। और फिर आपको लिखना

[72:28]

है कैपिटल अकाउंट। इस तरह से रिकॉर्डिंग

[72:30]

करनी है आपको जर्नल की। अच्छा अब इस

[72:32]

ट्रांजैक्शन को हम नरेट करेंगे। नरेट कैसे

[72:34]

करना है ट्रांजैक्शन को वो भी बड़ा

[72:36]

इंपॉर्टेंट है। आपको बेसिकली इस

[72:38]

ट्रांजैक्शन में जो हुआ है उस घटना को

[72:40]

थोड़ा सा उल्लेख करना है उसका। तो नरेट

[72:43]

हमेशा हम बीइंग से शुरुआत करते हैं या कई

[72:46]

बार नहीं भी करते। स्कूल टीचर अलऊ कर देता

[72:48]

है। सीबीएसई ने तो अलऊ कर दिया है। अब तो

[72:50]

बीइंग लिख सकते हैं। वरना नहीं भी लिखें

[72:52]

और बताएं इस टोनेशन में क्या हुआ है?

[72:53]

बिज़नेस स्टार्ट हुआ है। तो आप लिखेंगे

[72:55]

बीइंग बिज़नेस स्टार्टेड।

[72:59]

बीइंग बिज़नेस स्टार्टेड विद कैश।

[73:04]

एक बार इसको करना होगा पैक और आपकी

[73:08]

ट्रांजैक्शन कंप्लीट। इस तरह से जर्नल में

[73:11]

रिकॉर्डिंग होती है। दूसरी ट्रांजैक्शन

[73:13]

गौरांश के बिजनेस में पीछे जाकर देख लेना।

[73:16]

उसने बैंक में पैसा जमा कराया था ₹00

[73:18]

जिसकी वजह से बैंक अकाउंट हुआ था डेबिट और

[73:21]

कैश अकाउंट हुआ था क्रेडिट। इसको भी

[73:23]

रिकॉर्ड कर देते हैं हम। लेट अस टेक एन

[73:25]

एग्जांपल कि यह जो ट्रांजैक्शन है वो दो

[73:28]

तारीख की है। तो अब आपको बार-बार ईयर नहीं

[73:30]

लिखना। आपको सीधा लिखना है मंथ और डेट

[73:33]

अप्रैल टू। खत्म हो गई बात। और

[73:36]

ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड कर देनी है।

[73:37]

ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड करने के लिए सबसे

[73:39]

पहले दिमाग में बनाना है क्या डेबिट क्या

[73:41]

क्रेडिट।

[73:43]

तो क्योंकि बैंक में पैसा जमा हुआ है तो

[73:46]

क्या डेबिट बैंक अकाउंट। क्रेडिट क्या

[73:47]

होगा? कैश अकाउंट। आइए रिकॉर्ड कर देते

[73:49]

हैं।

[73:51]

यहां पर रिकॉर्ड करेंगे हम। बैंक अकाउंट

[73:55]

डेबिट

[73:57]

और फिर उसके बाद हरे पेन से कैश अकाउंट

[74:01]

क्रेडिट। ऐसे

[74:04]

नहीं। पहले डेबिट की चीज को रिकॉर्ड करना

[74:07]

है। डैश अकाउंट डेबिट और क्रेडिट की चीज

[74:10]

को रिकॉर्ड करने के लिए डैश अकाउंट

[74:12]

क्रेडिट नहीं लिखना। टू लगाना है। थोड़ा

[74:14]

सा स्पेस छोड़ करके फिर लगाना है आपको टू।

[74:18]

अब ये समझ लो ये क्रेडिट लिख दिया आपने।

[74:20]

अब बताओ कौन सा अकाउंट क्रेडिट हुआ है?

[74:22]

बैंक में पैसा जमा कराने पर कैश। तो आपको

[74:24]

लिखना है टू कैश अकाउंट। सर कैश हमारे पास

[74:29]

से चला जाएगा ₹00

[74:32]

और बैंक में आ जाएंगे यह ₹00

[74:36]

ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड हो गई वाह जी वाह मजे

[74:38]

ही आ गए ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड हो गई ओए होए

[74:41]

होए ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड हो गई अच्छा अब

[74:44]

इसको नरेट करो जरा क्या हुआ है तो भैया

[74:47]

बीइंग कैश डिपॉजिटेड

[74:51]

बीइंग कैश डिपॉजिटेड इन बैंक

[74:56]

खत्म

[74:58]

बेटा दिस इज हाउ वी रिकॉर्ड ट्रांजैक्शंस

[75:01]

इन द जर्नल।

[75:03]

तो पिछले एक सवा घंटे से जो मैं आपके

[75:05]

दिमाग में चीजें बिठाने की कोशिश कर रहा

[75:07]

था वो ये कि पहले किसी भी ट्रांजैक्शन के

[75:10]

अंदर पता लगाना सीखो कि कौन सा अकाउंट

[75:12]

डेबिट होगा, कौन सा अकाउंट क्रेडिट होगा।

[75:14]

एक बार अगर पता चल गया बन गया जर्नल। अब

[75:17]

मैं तुम्हें 10 ट्रांजैक्शंस भी दे दूं।

[75:19]

तो तुम इस जर्नल को आगे कंप्लीट कर सकते

[75:21]

हो ना एक्सटेंड करके। ठीक है? तो क्या

[75:25]

करें? वीडियो पॉज करो और गौरांश वाले

[75:28]

क्वेश्चन के अंदर सारी ट्रांजैक्शन में

[75:30]

मैंने पीछे लिखा हुआ है कि डेबिट क्या

[75:32]

होगा? क्रेडिट क्या होगा? बस उसे इस जर्नल

[75:34]

के अंदर कंटिन्यू करो। डेट अपनी तरफ से

[75:36]

प्लस वन प्लस वन करते हुए चलना। इतना करने

[75:38]

के बाद वीडियो को आगे देखना। जर्नल चैप्टर

[75:42]

मजा आ जाएगा तुम्हें।

[75:44]

यूटीज़ में अफलातून परफॉर्म करने वाले हो

[75:47]

तुम इस चैप्टर के अंदर। जर्नल चैप्टर के

[75:49]

अंदर। ठीक है जी? तो, यह है जी जर्नल का

[75:51]

फॉर्मेट। सबसे पहले लिखना होता है इन द

[75:53]

बुक्स ऑफ़। उसके बाद जो भी पार्टी का नाम

[75:56]

है जिसके यहां तुम बुक्स बुक्स बना रहे हो

[75:58]

जिसके लिए तुम जर्नल बना रहे हो कंपनी का

[76:00]

नाम फर्म का नाम वो और फिर फॉर्मेट डेट

[76:04]

पर्टिकुलर्स लेजर फोलियो डेबिट अमाउंट एंड

[76:06]

क्रेडिट अमाउंट दैट्स इट खत्म हो गई बात

[76:09]

ठीक है | चलें अब आगे तो सर आज का जो गोल

[76:13]

था उसमें से हमने क्या-क्या अचीव कर लिया

[76:16]

जरा वो भी तो बता दो बेटा आज का जो गोल था

[76:19]

उसमें से हमने एक तो रूल्स ऑफ डेबिट एंड

[76:22]

क्रेडिट सीख लिए और उसके बाद हमने

[76:27]

रूल्स ऑफ डेबिट एंड क्रेडिट हो गया। और

[76:29]

हमने कंपाउंड जर्नल एंट्रीज अभी नहीं सीखी

[76:31]

पर हमने सिंपल जर्नल एंट्री करना सीख

[76:33]

लिया। डैश अकाउंट डेबिट टू डैश अकाउंट।

[76:37]

सिंपल जर्नल एंट्री हमने करना सीख लिया

[76:39]

दोस्तों। क्या बात है? मजे आ गए। ठीक है

[76:41]

जी।

[76:48]

अब आगे चलते हैं। प्यारे बच्चों।

[76:53]

आगे चलते हैं अब

[76:55]

और

[76:57]

यह एक क्वेश्चन है आपके सामने।

[77:00]

जनरलाइज द फॉलोइंग ट्रांजैक्शंस इन द

[77:02]

बुक्स ऑफ तनवी। तनवी हमारे प्रोपराइटर का

[77:06]

नाम है इस बार। और इस प्रोपराइटर की बुक्स

[77:08]

में हमें इन सभी ट्रांजैक्शंस को ज्यादा

[77:10]

नहीं चार ट्रांजैक्शंस हैं सिर्फ। इनको

[77:12]

जर्नल में रिकॉर्ड करना है। ठीक है? आइए

[77:14]

जरा। तो सबसे पहले जर्नल का फॉर्मेट बना

[77:17]

लें? बना लें जर्नल का फॉर्मेट। चलो जी

[77:20]

बना लेते हैं। सबसे ऊपर क्या लिखना होता

[77:21]

है? इन द बुक्स ऑफ़

[77:26]

तनवी।

[77:27]

ठीक है? और फिर हम क्या बना रहे हैं? उसका

[77:30]

नाम भी लिखना है। तो जर्नल बना रहे हैं

[77:32]

हम। उसके बाद हमें बनाना है इस जर्नल का

[77:35]

फॉर्मेट।

[77:37]

यह रहा जी इस जर्नल का फॉर्मेट। सबसे पहले

[77:40]

क्या आता है? सबसे पहले डेट आता है। उसके

[77:44]

बाद पर्टिकुलर्स।

[77:49]

पर्टिकुलर्स के बाद क्या आता है दोस्तों?

[77:51]

लेजर फोलियो। पर्टिकुलर्स के बाद आता है

[77:55]

लेजर फोलियो।

[77:57]

फिर आता है हमारा डेबिट वाला अमाउंट

[78:01]

और क्रेडिट वाला अमाउंट।

[78:06]

जर्नल का फॉर्मेट कंप्लीट।

[78:09]

ये

[78:14]

जर्नल का फॉर्मेट हो गया है कंप्लीट।

[78:17]

ऑलराइट। हां जी। अब चलते हैं आगे।

[78:22]

अब ट्रांजैक्शन को जरा आराम आराम से

[78:24]

रिकॉर्ड करते हैं। देखो भाई, सबसे पहली

[78:28]

ट्रांजैक्शन 2025 को हुई है और 1 अप्रैल

[78:32]

को तनवी ने बिज़नेस स्टार्ट करा और वो घर

[78:34]

से लाई कैश ₹ लाख, बैंक बैलेंस ₹1 लाख और

[78:37]

मशीनरी 3 लाख।

[78:40]

जरूरी है घर से सिर्फ एक ही चीज़ लाएगी

[78:42]

कैश। नहीं ला सकती वो तीन-तीन चीज़। मना कर

[78:44]

दोगे।

[78:46]

उसके पास पड़ा हुआ था। घर पर कैश भी था,

[78:48]

बैंक बैलेंस भी था उसका जो उसने बिजनेस के

[78:50]

नाम पर अब कन्वर्ट कर दिया बिजनेस के अंदर

[78:52]

और एक मशीनरी भी थी ₹3 लाख की। वो ये सारी

[78:55]

चीजें बिनेस के अंदर ले आई। तो सबसे पहले

[78:58]

समझो कि इस बार कैपिटल तीन एसेट्स के रूप

[79:01]

में आ रही है। सेम डेट पर तीन एसेट्स के

[79:04]

रूप में कैपिटल आ रही है। वन इज़ कैश, बैंक

[79:08]

एंड द अदर वन इज़ मशीनरी।

[79:12]

जब भी बिजनेस में कोई कैपिटल इन्वेस्ट

[79:15]

करता है तो एक एसेट आती है तो वह एसेट हो

[79:19]

जाती है डेबिट और कैपिटल हो जाती है

[79:20]

क्रेडिट जैसे कैश आता है तो कैश अकाउंट

[79:22]

डेबिट और कैपिटल अकाउंट क्रेडिट बैंक है

[79:24]

तो बैंक अकाउंट डेबिट कैपिटल अकाउंट

[79:26]

क्रेडिट मशीनरी है तो मशीनरी अकाउंट डेबिट

[79:28]

कैपिटल अकाउंट क्रेडिट खत्म

[79:31]

अब जरा ध्यान से सुनना अगर सेम डेट पर तीन

[79:35]

बार में मेरे बिनेस के अंदर पैसा आ रहा है

[79:37]

मतलब एसेट आ रही है कैपिटल के रूप में तो

[79:40]

मुझे तीन तीन-तीन जनरल एंट्रीज करने की

[79:42]

जरूरत नहीं है। समझना जरा ध्यान से।

[79:49]

सबसे पहले मैं डेट डाल देता हूं 2025।

[79:53]

2025 तो एक ही बार लिखना है बस आपको। फिर

[79:55]

लिखना है आपको सीधा अप्रैल वन।

[80:00]

ठीक है? सबसे पहले बताओ तीन एसेट्स आपके

[80:03]

बिजनेस के अंदर आ रही हैं तो तीनों एसेट्स

[80:06]

का खाता खोलोगे ना और एसेट्स तीनों ही बढ़

[80:08]

रही हैं। तो तीनों को डेबिट में रिकॉर्ड

[80:10]

करोगे तो तीनों को डेबिट में रिकॉर्ड कर

[80:11]

दो। कैश अकाउंट

[80:15]

अगला बैंक अकाउंट।

[80:18]

अगला मशीनरी अकाउंट।

[80:25]

कैश अकाउंट भी होगा डेबिट। बैंक अकाउंट भी

[80:28]

होगा डेबिट और मशीनरी अकाउंट भी होगा

[80:31]

डेबिट। और दोस्तों यहां पर क्रेडिट हो

[80:34]

जाएगा सिर्फ और सिर्फ एक अकाउंट जिसका नाम

[80:37]

है कैपिटल अकाउंट। ये जो ट्रांजैक्शन आप

[80:39]

देख रहे हो इसको बोलते हैं कंपाउंड जर्नल

[80:42]

एंट्री। यानी एक ऐसी जर्नल एंट्री जिसमें

[80:45]

एक से ज्यादा अकाउंट्स डेबिट हो जाएं या

[80:47]

एक से ज्यादा अकाउंट्स क्रेडिट हो जाएं।

[80:49]

ऐसी जर्नल एंट्री को हम बोलते हैं कंपाउंड

[80:52]

जर्नल एंट्री। सिंपल जनरल एंट्री यह थी

[80:55]

दोस्तों जिसमें एक अकाउंट डेबिट एक

[80:57]

क्रेडिट एक डेबिट एक क्रेडिट

[81:00]

ठीक है जी लेकिन ये कंपाउंड जनरल एंट्री

[81:03]

है क्योंकि मेरे पास टाइम नहीं है ना कि

[81:05]

मैं तीन-तीन जनरल एंट्रीज करूं तीन-तीन

[81:07]

जनरल एंट्रीज क्यों करूंगा मैं जब सेम डेट

[81:09]

है और कॉमन है तीनों में कैपिटल का

[81:12]

क्रेडिट होना कॉमन है तो मैं कंपाउंड जनरल

[81:15]

एंट्री करूंगा मेरे बिनेस के अंदर कैपिटल

[81:17]

टोटल कितनी आ गई है 2 3 और तीन छ ₹6 लाख

[81:21]

कैपिटल के अकाउंट में मैं यहां पर लिख

[81:22]

दूंगा ूंगा क्रेडिट में

[81:25]

और मेरे बिनेस के अंदर जो ये तीन एसेट्स

[81:27]

आई हैं कैश बैंक और मशीनरी ये है दो एक और

[81:30]

तीन सो यहां पर मैं लिख दूंगा 2 लाख 1 लाख

[81:33]

एंड 3 लाख

[81:36]

खत्म हो गई बेटा बात अच्छा जी अब इसको

[81:39]

नरेट कर देते हैं कि क्या हुआ है इस

[81:41]

ट्रांजैक्शन के अंदर तो क्या हुआ है बता

[81:43]

दो तो यहां पर भैया बीइंग बिजनेस

[81:47]

स्टार्टेड बिजनेस शुरू हुआ है बिजनेस

[81:50]

स्टार्टेड

[81:51]

विद

[81:53]

कैश कॉमा बैंक

[81:57]

एंड मशीनरी

[82:00]

खत्म हो गया।

[82:02]

अगर मैं ये कंपाउंड जनरल एंट्री नहीं करता

[82:04]

तो मेरा टाइम वेस्ट होता। फिर मुझे

[82:06]

तीन-तीन जनरल एंट्रीज़ करनी पड़ती। पता है

[82:08]

कैसे? ये देखो।

[82:10]

सबसे पहले मैं देखता कि भैया कैश आया है

[82:12]

बिज़नेस में। तो मैं लिखता कैश अकाउंट

[82:14]

डेबिट टू कैपिटल अकाउंट। फिर मैं देखता कि

[82:17]

यार बैंक बैलेंस आया है बिजनेस के अंदर।

[82:19]

तो मैं लिखता बैंक अकाउंट डेबिट टू कैपिटल

[82:21]

अकाउंट। फिर मैं देखता कि भैया मशीनरी भी

[82:24]

आई है बिजनेस के अंदर। तो मैं लिखता

[82:26]

मशीनरी अकाउंट डेबिट टू कैपिटल अकाउंट। पर

[82:29]

बेटा जब तीनों में कैपिटल अकाउंट का

[82:30]

क्रेडिट होना कॉमन है तो क्यों ना एक ही

[82:32]

साथ एंट्री कर दी जाए इस तरह से।

[82:35]

कैश डेबिट, बैंक डेबिट, मशीनरी डेबिट टू

[82:38]

कैपिटल अकाउंट। कंपाउंड एंट्री करने के

[82:40]

लिए दो कंडीशंस होनी चाहिए। एक डेट सेम

[82:43]

हो। अगर ये तीनों चीजें मैं अलग-अलग दिन

[82:46]

लाया होता घर से तो तीन पार्ट्स में ही

[82:48]

होती एंट्री। लेकिन चकि डेट सेम थी और

[82:51]

तीनों में कुछ कॉमन भी था। कैपिटल अकाउंट

[82:53]

का क्रेडिट होना कॉमन था। इसलिए मैंने

[82:55]

यहां पर कंपाउंड जनरल एंट्री कर दी

[82:56]

दोस्तों। ठीक है? चलें आगे। हां जी।

[83:02]

ओके जी। अब चलते हैं आगे। अगले

[83:05]

ट्रांजैक्शन को रिकॉर्ड करते हैं। अप्रैल

[83:07]

2। अप्रैल 2 में हमने परचेस करें गुड्स।

[83:12]

फ्रॉम जानवी

[83:14]

₹ लाख के हमने गुड्स खरीदे बेटा जानवी से

[83:17]

आउट ऑफ वि ₹1 लाख पेड इन कैश क्या बात है

[83:20]

₹ लाख के गुड्स खरीदे जानवी से लेकिन आज

[83:23]

हमने जानवी को पूरी पेमेंट नहीं दी सिर्फ

[83:25]

₹1 लाख की पेमेंट दी हमने जानवी को यानी

[83:29]

बाकी के ₹ लाख से जानवी हमारी क्रेडिटर बन

[83:32]

जाएगी। पर गुड्स तो आपके पास पूरे ₹3 लाख

[83:35]

के ही आ रहे हैं। गुड्स तो पूरे ₹3 लाख के

[83:39]

आ रहे हैं। तो कैसे रिकॉर्ड होगा? मजा

[83:40]

आएगा इसको भी रिकॉर्ड करने में। ध्यान से

[83:42]

देखिए जरा।

[83:44]

चलो बेटा आप ऊपर चलो।

[83:48]

ठीक है जी। इस फॉर्मेट को थोड़ा सा मैं

[83:51]

एक्सटेंड कर देता हूं।

[83:56]

ये देखिए सर।

[84:01]

सबसे पहले ट्रांजैक्शन की डेट है 2 तारीख।

[84:05]

तो यहां पर अब आपको सिर्फ एक बार लिखना है

[84:07]

अप्रैल 2। 2025 आप लिख चुके हैं ऑलरेडी।

[84:11]

जानवी से नकद खरीदा या उधार पूरी पेमेंट

[84:13]

दी या आधी थी? गोली मारो। गुड्स आ रहे हैं

[84:16]

कि नहीं? कितने रुपए के आ रहे हैं? ₹3 लाख

[84:20]

के। गुड्स ₹3 लाख के आ रहे हैं सर आपके

[84:23]

पास। और गुड्स के आने पर कौन सा अकाउंट

[84:26]

ओपन होता है? गुड्स अकाउंट या स्टॉक

[84:30]

अकाउंट। या परचेजेस अकाउंट। तो गुड्स के

[84:34]

आने पर यहां पर हम एक अकाउंट ओपन करेंगे।

[84:37]

परचेजेस अकाउंट और परचेजेस अकाउंट सबको

[84:40]

पता है। गुड्स खरीदते वक्त परचेजेस अकाउंट

[84:43]

हो जाता है डेबिट। गुड्स खरीदते वक्त

[84:47]

परचेजेस अकाउंट हो जाता है डेबिट। कितने

[84:49]

रुपए से? ₹3 लाख से।

[84:52]

अब सुनो जरा। आपने जानवी को पेमेंट दी कैश

[84:56]

में तो कैश जा रहा है तो कैश क्रेडिट

[84:58]

होगा। और ₹ लाख से जानवी क्रेडिटर बन रही

[85:01]

है आपकी तो जानवी का अकाउंट भी क्रेडिट ही

[85:04]

होगा। सुनना जरा ध्यान से। और अभी इसकी

[85:06]

डिटेलिंग भी करूंगा मैं। मुझे पता है

[85:08]

थोड़ी सी दिक्कत दे रहा होगा यह आपको

[85:09]

शायद। तो जरा देखते हैं। कैश जा रहा है तो

[85:14]

कैश अकाउंट को भी क्रेडिट कर दो और जानवी

[85:17]

को बाद में पैसे देने हैं तो जानवी का

[85:20]

अकाउंट भी क्रेडिट कर दो। कैश कितना जा

[85:23]

रहा है आपके पास से? 1 लाख। और कितना पैसा

[85:26]

आपने नहीं दिया जो कि बाद में देना है? ₹

[85:28]

लाख। खत्म हो गई बात। अब इस ट्रांजैक्शन

[85:31]

को आप नरेट कर सकते हो

[85:34]

बीइंग गुड्स परचेस्ड

[85:40]

फ्रॉम जानवी

[85:43]

नरेशन के अंदर आप बहुत ज्यादा डिटेल में

[85:45]

लिखो ऐसा कोई नहीं मांगता पर नरेशन लिखनी

[85:48]

जरूर है। नरेशन लिखने के अलग नंबर नहीं

[85:50]

मिलते लेकिन नरेशन ना लिखने के नंबर कट

[85:52]

जरूर जाते हैं। इस चीज का ध्यान रखना है

[85:55]

आपको। हो गया रिकॉर्ड। अब ध्यान से सुनना।

[85:58]

मैं इस ट्रांजैक्शन को एक बार और

[86:00]

सिंपलीफाई करके बताना चाहता हूं आप लोग

[86:03]

को। देखो भैया ऐसा है अप्रैल की थी 2

[86:06]

तारीख

[86:08]

और मैं जानवी के पास गया। ₹ लाख के मैंने

[86:12]

गुड्स खरीदे।

[86:16]

₹1 लाख के मैंने गुड्स खरीदे। नकद

[86:20]

और ₹ लाख के मैंने गुड्स खरीदे। उधार।

[86:25]

यही तो हुआ है। ₹1 लाख के गुड्स आपने

[86:28]

खरीदे नकद पैसे देकर और बाकी ₹ लाख के

[86:30]

उधार। अब अगर उधार को मैं 2 मिनट के लिए

[86:33]

भूल जाऊं। सिर्फ नकद जब हम खरीदते हैं

[86:35]

गुड्स तो कैसे रिकॉर्ड करते हैं? नकद

[86:38]

गुड्स खरीदने पर परचेजेस अकाउंट होता है

[86:41]

डेबिट और कैश अकाउंट हो जाता है क्रेडिट।

[86:44]

यही होता है।

[86:46]

अच्छा जी। उधार खरीदने पर क्या होता है?

[86:49]

उधार खरीदने पर आपका परचेज अकाउंट होता है

[86:52]

डेबिट। और पार्टी का अकाउंट यानी जानवी का

[86:56]

अकाउंट

[86:57]

हो जाता है क्रेडिट। गलत तो नहीं कह रहा

[87:00]

मैं। अब क्योंकि नकद और उधार सेम डे खरीदा

[87:06]

और सेम डे अगर आप खरीद रहे हो तो बार-बार

[87:08]

परचेज अकाउंट दो बार क्यों लिखना? इकट्ठा

[87:10]

ही लिख दो। कॉमन हो गया ना? एक तो डेट

[87:12]

कॉमन हो गई। यह भी अप्रैल की 2 तारीख को

[87:14]

हुआ है और यह भी अप्रैल की 2 तारीख को हुआ

[87:16]

है। और दोनों ही दिन कॉमन हो गया कि परचेस

[87:21]

अकाउंट भी डेबिट हो रहा है यहां पर भी,

[87:22]

नकद में भी और उधार में भी। इसलिए मैंने

[87:25]

परचेज अकाउंट को इकट्ठा ही डेबिट कर दिया

[87:26]

₹3 लाख से। आप देख सकते हैं परचेज अकाउंट

[87:29]

डेबिट हो रहा है ₹3 लाख से। पर क्रेडिट दो

[87:31]

अलग-अलग चीजें हो रही हैं। कैश जा रहा है

[87:33]

तो कैश क्रेडिट और जानवी मेरी क्रेडिटर बन

[87:35]

रही है। लायबिलिटी बन रही है। इसलिए जानवी

[87:37]

का अकाउंट भी क्रेडिट हो रहा है ₹2 लाख

[87:38]

से। बात समझ में आ रही है, दोस्तों? इसके

[87:41]

नीचे दो और ट्रांजैक्शन हैं जो कि मैं

[87:43]

चाहता हूं आप खुद से ट्राई करें। कंपाउंड

[87:45]

जनरल एंट्री सोल्ड गुड्स वाला और ये जो

[87:48]

तीन-तीन खर्चे हमने पे करे रेंट, सैलरी और

[87:51]

वेजेस आपकी हेल्प कर देता हूं मैं। गुड्स

[87:53]

बेच रहे हो अनमोल को तो सेल्स अकाउंट तो

[87:55]

डेफिनेटली क्रेडिट होगा। कितने रुपए से?

[87:58]

₹1 लाख से। अच्छा अनमोल आपको पैसे दे रहा

[88:01]

है ₹,000 तो बैंक अकाउंट डेबिट होगा

[88:02]

30,000 से और अनमोल डेबिट होगा 70,000 से।

[88:05]

इस तरह से ये होने वाला है।

[88:09]

अच्छा जी। अब सर बता दो जरा क्या-क्या

[88:11]

टास्क कंप्लीट हो चुका है हमारा? क्या हम

[88:13]

अचीव कर रहे हैं साथ-साथ गोल? यस बेटा हम

[88:15]

अचीव कर रहे हैं। हम आज के टोटल गोल्स में

[88:19]

से इतना कवर कर चुके हैं।

[88:23]

रूल्स ऑफ डेबिट एंड क्रेडिट। हालांकि

[88:24]

डेबिट और क्रेडिट के रूल्स अभी और भी होता

[88:27]

है। दूसरा मेथड भी होता है डेबिट और

[88:28]

क्रेडिट के रूल्स का जिसको हम ट्रेडिशनल

[88:30]

क्लासिफिकेशन बोलते हैं। वो इस वीडियो के

[88:32]

एंड में आपको मिलेगा। अगला है बेटा सिंपल

[88:34]

एंड कंपाउंड जर्नल एंट्रीज। ये भी हमारी

[88:37]

खत्म हो चुकी है। तो अब हम आगे चलेंगे

[88:39]

ट्रेड डिस्काउंट और कैश डिस्काउंट का

[88:41]

टॉपिक शुरू करेंगे। ठीक है? आइए जरा।

[88:44]

दोस्तों डिस्काउंट की जहां तक बात है,

[88:46]

डिस्काउंट वर्ड पहली बार नहीं सुन रहे आप

[88:48]

जिंदगी में। डिस्काउंट वर्ड आपने सुना हुआ

[88:50]

है, लिया भी हुआ है। रिक्वेस्ट करके सामने

[88:53]

वाले को, शॉपकीपर को रिक्वेस्ट करके आपने

[88:55]

डिस्काउंट लिया है। बहुत बार लिया है। ठीक

[88:56]

है? पर यहां पर अकाउंटेंसी में डिस्काउंट

[88:59]

कितने प्रकार का होने वाला है और उसकी

[89:01]

रिकॉर्डिंग कैसे होने वाली है यह सीखने

[89:04]

वाली बात है। तो सबसे पहले मैं आपको बताना

[89:07]

चाहूंगा दोस्तों कि डिस्काउंट दो तरीके का

[89:11]

होता है यहां पर। एक होता है दोस्तों

[89:15]

ट्रेड डिस्काउंट।

[89:18]

एक होता है ट्रेड डिस्काउंट और दूसरा होता

[89:20]

है कैश डिस्काउंट। दो डिस्काउंट्स होते

[89:24]

हैं। ट्रेड डिस्काउंट और कैश डिस्काउंट।

[89:27]

उसके ज्यादा उससे आगे इंपॉर्टेंट चीज क्या

[89:30]

है? जी कि ट्रेड डिस्काउंट आपको तब मिलता

[89:33]

है जब आप बल्क क्वांटिटी में गुड्स खरीदते

[89:36]

हो

[89:37]

या जब आपने रेगुलर सप्लायर से आप माल खरीद

[89:40]

रहे होते हो या आपके रिलेशंस किसी सप्लायर

[89:43]

के साथ अच्छे हैं तो आपको डिस्काउंट दे

[89:45]

रहा है वो बल्क क्वांटिटी की वजह से। सर

[89:47]

कैश डिस्काउंट आपको ज्यादा क्वांटिटी और

[89:49]

भारी क्वांटिटी की वजह से नहीं मिलता। कैश

[89:51]

डिस्काउंट आपको मिलता है अकाउंट को सेटल

[89:54]

अगर आप कर देते हो टाइमली अगर आप अपने

[89:57]

अकाउंट की टाइमली सेटलमेंट कर देते हो तो

[90:00]

आपको कैश डिस्काउंट मिलता है। अब क्या है

[90:03]

ये टाइमली सेटलमेंट का मतलब मैं आपको

[90:05]

बताता हूं। सपोज़ आप एक दुकान पे गए और

[90:09]

आपने उस दुकान से क्योंकि आप भी रिटेलर

[90:11]

हो। आप भी अपनी दुकान चलाते हो और आप एक

[90:13]

होलसेलर के पास गए और आपने उससे कुछ गुड्स

[90:15]

खरीदे। आपकी कपड़ों की दुकान थी। आपने

[90:18]

टीशर्ट्स खरीदी। आपने 100 टीशर्ट्स खरीदी

[90:22]

और एक टीशर्ट का प्राइस सामने वाले ने तय

[90:24]

कर रखा था ₹1000।

[90:27]

तो दोस्तों एक टीशर्ट का प्राइस था ₹1000

[90:32]

आपने खरीदी 100

[90:35]

कितने रुपए का बिल बनेगा? जल्दी बोलो।

[90:40]

₹1 लाख का बिल बनेगा। ₹1000 का प्राइस था।

[90:45]

100 टीशर्ट्स आपने खरीदी। ₹1 लाख का बिल

[90:47]

बनेगा। तो क्या 1 लाख ही देंगे क्या हम?

[90:50]

हम हिंदुस्तानी लोग हैं भाई। हमें

[90:52]

डिस्काउंट जब तक ना मिले हमें मजा नहीं

[90:54]

आता।

[90:56]

तो आपने सामने वाले से रिक्वेस्ट करी कि

[90:58]

हां ₹1000 नहीं प्लीज। तो ये जो ए ऊ करके

[91:01]

जो आप डिस्काउंट ले लेते हो ना इसको हम

[91:02]

बोलते हैं ट्रेड डिस्काउंट।

[91:05]

तो सामने वाले ने ₹1000 पर पीस रखा हुआ

[91:08]

था। कौन सा प्राइस? लिस्ट प्राइस। इसको

[91:11]

लिस्ट प्राइस कहते हैं। यानी पहली बार जब

[91:14]

आपको प्राइस बताया जाता है किसी कमोडिटी

[91:16]

का उसको हम बोलते हैं लिस्ट प्राइस। ठीक

[91:19]

है? जो उसकी प्राइस लिस्ट पे लिखा हुआ है।

[91:21]

ऐसे समझ लो आप लिस्ट प्राइस। अच्छा जी।

[91:23]

लिस्ट प्राइस के ऊपर सामने वाले ने आपको

[91:26]

डिस्काउंट दे दिया क्योंकि आप अच्छी खासी

[91:28]

भारी मात्रा में गुड्स खरीद रहे हो। भाई

[91:30]

₹1000 की एक टीशर्ट है और आप 100 खरीद रहे

[91:33]

हो। 100 टीशर्ट्स आप खरीद रहे हो। तो ₹1

[91:35]

लाख का आपका बिल है। सामने वाले ने कहा

[91:38]

ठीक है यार ₹1000 नहीं हम एक काम करते

[91:41]

हैं। एक टीशर्ट तुम्हारे लिए ₹900 की लगा

[91:43]

देते हैं। तो भैया ₹900 की एक टीशर्ट है

[91:45]

और आपको 100 टीशर्ट्स खरीदनी है। अब बताओ

[91:48]

जी आपका बिल कितने का बनेगा? अब आपका बिल

[91:50]

बनेगा ₹90,000 का। बेटा ये जो ₹90,000 का

[91:53]

प्राइस अब आपको पे करना है, इसको हम बोलते

[91:55]

हैं इनवॉइस प्राइस। आपके बिल के ऊपर यह

[91:58]

चढ़ा चढ़ा दिया जाएगा प्राइस इनवॉइस

[92:00]

प्राइस। तो आप समझ रहे हैं लिस्ट प्राइस

[92:03]

और इनवॉइस प्राइस में क्या फर्क होता है?

[92:05]

लिस्ट प्राइस वो जिसके ऊपर आपको ट्रेड

[92:08]

डिस्काउंट मिलेगा कुछ परसेंट या कुछ और

[92:11]

ट्रेड डिस्काउंट मिल जाने के बाद जो

[92:13]

प्राइस आपको पे करना है फाइनली दैट इज

[92:15]

इनवॉइस प्राइस ₹90,000। समझ में आ रही है

[92:18]

बात? एक कहानी के तौर पर मैं आपको ये चीज

[92:21]

समझाना चाहता हूं। बेटा मैं एक दुकान से

[92:24]

लाख का माल खरीदने गया। मैंने बोला कम कर

[92:26]

दो। उसने पुराने रिश्तों को देखते हुए या

[92:29]

अच्छी बल्क क्वांटिटी में माल खरीद रहा

[92:31]

हूं। इस चीज को देखते हुए उसने ₹1 लाख का

[92:34]

माल मुझे ₹90,000 का लगा दिया। बिना यह

[92:37]

पूछे कि मैं पेमेंट आज दूंगा या कल दूंगा।

[92:39]

आधी ही दूंगा या पूरी दूंगा। तो दोस्तों,

[92:42]

ट्रेड डिस्काउंट को पेमेंट से फर्क नहीं

[92:44]

पड़ता। हो सकता है मैं यह ₹90,000 का

[92:46]

मैंने मैंने ₹1 लाख का सामान ₹90,000 का

[92:48]

लगवा लिया, लेकिन हो सकता है ₹90,000 मैं

[92:50]

आज नहीं दे रहा। 2 महीने बाद दूंगा। तब भी

[92:53]

मुझे डिस्काउंट तो मिल चुका है ट्रेड

[92:55]

डिस्काउंट। अब ₹0000 देने में भी ना मुझे

[92:58]

मौत आ रही है। मुझे आफत आ रही है ₹0000 पे

[93:00]

करने में। अब मैं सामने वाले से फिर कह

[93:02]

रहा हूं कि देख लो कुछ ठीक-ठीक लगा लो कुछ

[93:03]

हो जाए तो। अब वो किलस गया। अब उसने कहा

[93:06]

बेटा अब अगर और कम पैसे देने हैं तो फिर

[93:08]

जेब ढीली करो आज ही। आज ही अगर आप अपना

[93:11]

अकाउंट सेटल कर देते हो तो मैं आपको 2 3

[93:14]

4% डिस्काउंट और दे दूंगा। उसको हम

[93:16]

बोलेंगे कैश डिस्काउंट। आई होप आपको ट्रेड

[93:19]

डिस्काउंट और कैश डिस्काउंट में फर्क समझ

[93:21]

में आ रहा होगा। अगर नहीं भी समझ में आ

[93:24]

रहा है तो एक अच्छा खासा क्वेश्चन लाया

[93:26]

हूं मैं। उसके माध्यम से मैं आपको समझाने

[93:28]

की कोशिश करूंगा। द डिफरेंस बिटवीन ट्रेड

[93:30]

डिस्काउंट एंड कैश डिस्काउंट। आइए जरा

[93:33]

देखिए ध्यान से। अभी-अभी मैंने आपको बताया

[93:36]

कि डिस्काउंट दो तरह का होता है। एक होता

[93:38]

है ट्रेड डिस्काउंट, एक होता है कैश

[93:40]

डिस्काउंट। ट्रेड डिस्काउंट देखो, हम दे

[93:43]

भी सकते हैं। हमें मिल भी सकता है। अगर आप

[93:44]

माल बेच रहे हो, आप डिस्काउंट दोगे। आप

[93:46]

खरीद रहे हो, आपको डिस्काउंट मिलेगा। सर

[93:48]

ट्रेड डिस्काउंट बल्क क्वांटिटी में माल

[93:51]

खरीदने या बेचने की वजह से दिया जाता है।

[93:54]

नंबर एक नंबर दो ट्रेड डिस्काउंट इज नॉट

[93:58]

रिकॉर्डेड इन बुक्स ऑफ अकाउंट्स। ओ तेरी

[94:02]

ट्रेड डिस्काउंट को हम बुक्स में रिकॉर्ड

[94:04]

नहीं करते। अगर ₹1 लाख की चीज थी लिस्ट

[94:07]

प्राइस के मुताबिक तुम्हें ₹90,000 की मिल

[94:09]

गई तो तुम परचेज अकाउंट डेबिट करो सीधा

[94:11]

₹90,000 से ₹10,000 के ट्रेड डिस्काउंट को

[94:14]

तुम रिकॉर्ड नहीं करोगे। अभी क्वेश्चंस

[94:16]

में देखेंगे हम इस चीज को। ठीक है? और

[94:18]

डिस्काउंट के ऊपर क्वेश्चन डल चुके हैं

[94:19]

तुम्हारी यूटी में। तो, यह टॉपिक कतई मिस

[94:22]

नहीं करना आपको। ठीक है?

[94:26]

अगला आता है बेटा कैश डिस्काउंट। कैश

[94:28]

डिस्काउंट आपको मिलता है किसी चीज की

[94:30]

टाइमली सेटलमेंट करने पर। 1 लाख का माल

[94:32]

था। अगले ने 90,000 का लगा दिया। अब मैं

[94:34]

कह रहा हूं कि आज ही पूरा पैसा देके

[94:37]

जाऊंगा। बता ₹90,000 दूं या ₹87,000 में

[94:39]

काम चल जाएगा।" उसने कहा, ठीक है लाओ

[94:41]

₹87,000 दो और घर जाओ।" तो ₹3000 का और जो

[94:44]

मुझे डिस्काउंट मिल गया इसको हम बोलते हैं

[94:46]

कैश डिस्काउंट। ट्रेड डिस्काउंट को बुक्स

[94:49]

में कहीं भी रिकॉर्ड नहीं किया जाता।

[94:50]

पॉइंट टू बी नोटेड कैश डिस्काउंट इज टू बी

[94:53]

रिकॉर्डेड। कैश डिस्काउंट को हम बुक्स में

[94:56]

रिकॉर्ड करते हैं।

[94:58]

कैसे-कैसे रिकॉर्ड करते हैं सर? कैश

[95:00]

डिस्काउंट को। भैया। कैश डिस्काउंट बुक्स

[95:02]

में रिकॉर्ड किया जाता है। दो तरीके से।

[95:07]

दो तरीके से कैश डिस्काउंट बुक्स में

[95:09]

रिकॉर्ड किया जाता है। या तो आप दे रहे हो

[95:12]

किसी को डिस्काउंट तो आप इसे लिखोगे

[95:14]

डिस्काउंट अलाउड के नाम से

[95:18]

और इसी नाम से आप खाता खोलोगे और अगर आपको

[95:21]

मिल रहा है डिस्काउंट तो आप इसको लिखोगे

[95:23]

डिस्काउंट रिसीव्ड के नाम से।

[95:26]

डिस्काउंट अलाउड या फिर डिस्काउंट

[95:29]

रिसीव्ड।

[95:31]

इस तरह से गेम चलेगी सर। डिस्काउंट अलाउड

[95:34]

या डिस्काउंट रिसीव्ड। ओके जी। डिस्काउंट

[95:37]

अगर आपने अलव किया है तो आपका खर्चा है और

[95:39]

खर्चे बढ़ने पर डेबिट होते हैं। खर्चे

[95:42]

बढ़ने पर डेबिट होते हैं। तुम पढ़े लिखे

[95:44]

लोग हो। तुम्हें पता है। अच्छा डिस्काउंट

[95:46]

अगर आपको मिला है तो आपके लिए रेवेन्यू है

[95:48]

और रेवेन्यू क्रेडिट में रिकॉर्ड होता है

[95:50]

बढ़ने पर। पता होगा आपको। खत्म हो गई

[95:53]

डिस्काउंट की कहानी। क्वेश्चन अभी करेंगे।

[95:55]

गुस्सा मत करो। क्वेश्चन अभी करेंगे। ये

[95:57]

देखो डिस्काउंट की कहानी।

[96:01]

डिस्काउंट की कहानी है कि भैया डिस्काउंट

[96:03]

दो तरह का होता है। ट्रेड डिस्काउंट, कैश

[96:05]

डिस्काउंट। ट्रेड डिस्काउंट क्यों मिलता

[96:07]

है? क्योंकि मैं ज्यादा माल खरीद रहा हूं।

[96:09]

हो सकता है मैं पैसा आज दूं ही ना। 2

[96:10]

महीने बाद दूं लेकिन माल मैं ज्यादा खरीद

[96:12]

रहा हूं या मेरा जानने वाला सप्लायर है।

[96:15]

तो वो मेरी शक्ल देख के जो मुझे डिस्काउंट

[96:16]

दे रहा है वो है ट्रेड डिस्काउंट। ट्रेड

[96:19]

डिस्काउंट मिल जाने के बाद आपको और

[96:21]

डिस्काउंट चाहिए तो आपको टाइमली पेमेंट

[96:24]

करनी पड़ेगी। या तो आज या एज़ पर द पॉलिसी

[96:26]

ऑफ़ द सेलर कि भाई 10 दिन के अंदर-अंदर कर

[96:29]

देना। ऐसा कुछ टाइमली पेमेंट करने पर जो

[96:32]

आपको डिस्काउंट मिलता है उसको हम बोलते

[96:34]

हैं कैश डिस्काउंट। दोस्तों ट्रेड

[96:35]

डिस्काउंट को बुक्स में रिकॉर्ड नहीं किया

[96:37]

जाता। कैश डिस्काउंट को बुक्स में रिकॉर्ड

[96:39]

किया जाता है। कैश डिस्काउंट को रिकॉर्ड

[96:41]

करने के दो तरीके हैं आपके पास। अगर आप दे

[96:44]

रहे हो कैश डिस्काउंट सामने वाले को तो

[96:46]

डिस्काउंट अलाउड के नाम से अकाउंट ओपन

[96:48]

करना और डेबिट में ओपन करना। अगर आपको मिल

[96:50]

रहा है कैश डिस्काउंट तो डिस्काउंट

[96:52]

रिसीव्ड के नाम से अकाउंट ओपन करना। और

[96:54]

क्रेडिट में करना। साथ-साथ नोट करते हुए

[96:56]

चलो दोस्तों। क्वेश्चन करते हैं अब। देर

[96:59]

नहीं करनी है। क्वेश्चन करते हैं।

[97:00]

क्वेश्चन आपके सामने है।

[97:04]

क्वेश्चन आपके सामने है। ये बड़ा ही

[97:06]

समराइज्ड क्वेश्चन मैंने आपके लिए बनाया

[97:08]

है। ये कल ही बनाया था मैंने आपके लिए।

[97:10]

ठीक है जी? आइए इस क्वेश्चन को जरा सॉल्व

[97:12]

करते हैं। जर्नलाइज़ द फॉलोइंग

[97:14]

ट्रांजैक्शंस। जर्नल बनाना है हमें इन सभी

[97:16]

ट्रांजैक्शंस के लिए। और जहां कहीं भी

[97:19]

सिंपल एंट्री से काम चल जाएगा। सिंपल कर

[97:21]

देंगे। जरूरत पड़ी तो कंपाउंड जनरल एंट्री

[97:23]

कर देंगे। आती तो हमें है ही है ना जी। तो

[97:27]

सबसे पहला परचेस्ड गुड्स ऑफ लिस्ट प्राइस

[97:30]

1 लाख एट 10% ट्रेड डिस्काउंट। कैसे

[97:33]

रिकॉर्ड कीजिएगा इसको? आइए जी करते हैं

[97:35]

रिकॉर्ड हम।

[97:41]

दोस्तों, अब ना मैं जर्नल का फॉर्मेट नहीं

[97:43]

बनाऊंगा बार-बार क्योंकि उसमें बहुत टाइम

[97:45]

वेस्ट आपका हो जाएगा इस वीडियो का। तो

[97:47]

सीधा

[97:49]

फॉर्मेट को इमेजिन करके हम सीधा इसको

[97:51]

रिकॉर्ड कर देते हैं। गुड्स खरीद रहे हैं

[97:53]

हम तो परचेज अकाउंट डेबिट होगा। सबको पता

[97:55]

है। गुड्स खरीदने पर परचेजेस अकाउंट डेबिट

[97:58]

होता है। और गुड्स खरीदने पर आपके पास से

[98:02]

जेब से पैसा भी जा रहा है। तो सर कैश

[98:04]

अकाउंट क्रेडिट हो जाएगा। तो एंट्री विल

[98:06]

बी लाइक परचेज अकाउंट डेबिट टू कैश

[98:08]

अकाउंट। इतने में कोई समस्या?

[98:10]

अच्छा जी। गुड्स कितने के थे लिस्ट प्राइस

[98:13]

के मुताबिक? 1 लाख। आपने आपने सामने वाले

[98:16]

को कहां थोड़ा सा कम कर दो ना। उसने 10%

[98:19]

डिस्काउंट दे दिया आपको। आपकी भोली शक्ल

[98:22]

देख के उसने 10% कम कर दिए।

[98:26]

तो सर ₹1 लाख का लिस्ट प्राइस था। 10%

[98:29]

सामने वाले ने कम कर दिया। ₹1 लाख का 10%

[98:31]

₹10,000 डिस्काउंट मिल गया आपको। तो गुड्स

[98:34]

कितने के पड़ गए? ₹0000 तो सीधा ही आप

[98:38]

क्या करोगे कि ₹0000 रिकॉर्ड करोगे आप

[98:40]

अपने जर्नल एंट्री में। ₹900 ₹0000 बात

[98:43]

खत्म

[98:45]

तो वह जो ₹10,000 का डिस्काउंट मिला उसको

[98:48]

कहीं पर सेपरेटली आपको रिकॉर्ड नहीं करना

[98:50]

बिकॉज़ वो ट्रेड डिस्काउंट है। लिस्ट

[98:52]

प्राइस के ऊपर ट्रेड डिस्काउंट अेल करो और

[98:55]

ऐश करो।

[98:58]

सॉरी

[98:59]

नरेट कर देते हैं।

[99:02]

बीइंग गुड्स परचेस्ड

[99:07]

एट 10%

[99:10]

ट्रेड डिस्काउंट। खत्म हो गई जी बात।

[99:16]

खत्म।

[99:18]

बीइंग गुड्स परचेस्ड एट 10% ट्रेड

[99:21]

डिस्काउंट। आगे चलते हैं। सेकंड फिर गुड्स

[99:26]

खरीदे हमने। हमने फिर गुड्स खरीदे। लिस्ट

[99:28]

प्राइस अभी भी 1 लाख है। 10% का ट्रेड

[99:32]

डिस्काउंट अभी भी मिल रहा है। लेकिन हम ये

[99:34]

गुड्स इस बार खरीद रहे हैं प्रतीक से।

[99:38]

नाम आ गया पार्टी का। खरीदे तो देखो गुड्स

[99:40]

आपने पहले भी किसी पर्सन से ही होंगे।

[99:42]

फर्स्ट ट्रांजैक्शन में जो गुड्स खरीदे

[99:44]

हैं वो भी किसी इंसान से ही खरीदे होंगे।

[99:46]

तो ये प्रतीक का क्या मतलब है? सर प्रतीक

[99:47]

का मतलब यह है कि ट्रांजैक्शन हुई है

[99:49]

क्रेडिट बेसिस पे। आपने गुड्स खरीदे लेकिन

[99:52]

प्रतीक को आपने पैसा नहीं दिया तो क्या

[99:55]

आपको ट्रेड डिस्काउंट मिलेगा या नहीं

[99:56]

मिलेगा?

[99:58]

मिलेगा। ट्रेड डिस्काउंट को इस बात से कतई

[100:01]

फर्क नहीं पड़ता कि आप पैसा आज दोगे या कल

[100:03]

दोगे या 6 महीने बाद दोगे। अगर लिखा है

[100:06]

क्वेश्चन के अंदर ट्रेड डिस्काउंट मिला

[100:07]

है। 10% तो मिला है। प्रतीक जिससे मैं आज

[100:10]

गुड्स खरीद रहा हूं उधार खरीद रहा हूं।

[100:12]

फिर भी वो मेरे लिए गुड्स ₹1 लाख की जगह

[100:15]

₹90,000 के लगा रहा है। तो कैसे रिकॉर्ड

[100:18]

कीजिएगा इस ट्रांजैक्शन को? बड़ा

[100:20]

इंपॉर्टेंट है सर। सेकंड ट्रांजैक्शन में

[100:22]

गुड्स तो अभी भी आ रहे हैं और गुड्स जब भी

[100:24]

आते हैं कौन सा अकाउंट डेबिट होता है?

[100:26]

परचेजेस अकाउंट। सो परचेजेस अकाउंट डेबिट

[100:29]

हो जाएगा

[100:33]

₹90,000 से

[100:36]

और इस बार पैसा नहीं गया मेरी जेब से। इस

[100:38]

बार उल्टा मेरे सर पे लायबिलिटी आ गई है।

[100:41]

मेरे सर पे एक क्रेडिटर आ गया जिसका नाम

[100:42]

प्रतीक है। तो मैं यहां पर प्रतीक का

[100:45]

अकाउंट क्रेडिट कर दूंगा टू प्रतीक या

[100:47]

प्रतीक अकाउंट। ₹90,000 खत्म हो गई जी बात

[100:53]

खत्म पैसा हजम

[100:56]

बीइंग

[100:57]

गुड्स

[100:59]

सोल्ड सॉरी परचेस कर रहा हूं। क्या नशे हो

[101:03]

गए हैं मुझे ये? बीइंग गुड्स परचेस्ड

[101:06]

फ्रॉम प्रतीक

[101:10]

एट 10%

[101:13]

ट्रेड डिस्काउंट। खत्म हो गई बात। स्टेप

[101:16]

बाय स्टेप मैं आपको ऊपर लेके जाऊंगा

[101:18]

डिस्काउंट के टॉपिक में। बहुत मजा आएगा

[101:22]

आपको। सर अगली ट्रांजैक्शन पे चलते हैं।

[101:24]

थर्ड ट्रांजैक्शन। अब थोड़ा बेच भी लो कि

[101:27]

खरीदते ही रहोगे। तो वी हैव सोल्ड गुड्स

[101:29]

नाउ जिनका लिस्ट प्राइस ₹1 लाख था। यह

[101:32]

मैंने शगुन को बेचे हैं 10% के ट्रेड

[101:34]

डिस्काउंट पे। मैं गुड्स बेच रहा था।

[101:37]

दुकान लगा के बैठा था। शगुन आती है मेरे

[101:39]

से गुड्स खरीदने।

[101:42]

यह पसंद करा, यह पसंद कराया। बहुत सारा

[101:44]

बहुत सारी चीजें उसने पसंद करी जिनका

[101:46]

लिस्ट प्राइस हो गया टोटल ₹1 लाख। अब शगुन

[101:48]

कहती है थोड़ा सा मुझे डिस्काउंट दे दो ना

[101:50]

प्लीज। क्यूटी उसने मेरी तारीफ करी मैंने

[101:54]

उसको डिस्काउंट दे दिया 10% का। तो ₹1 लाख

[101:57]

के गुड्स मैंने शगुन को 10% के डिस्काउंट

[102:01]

पर बेच दिए। ₹90,000

[102:04]

मैंने कहा और क्या सेवा करूं आपकी? कहती

[102:06]

और कोई सेवा नहीं है। बस पैसे आज नहीं

[102:07]

दूंगी। चलेगा। मैंने कहा चलेगा।

[102:11]

ठीक है जी। मैन विल बी मैन। तो ₹1 लाख के

[102:16]

गुड्स 10% के डिस्काउंट पर मैंने शगुन को

[102:18]

बेचे। पैसे वो मुझे आज नहीं दे रही है।

[102:20]

बाद में देगी। पर फिर भी मैंने उसको ट्रेड

[102:23]

डिस्काउंट दिया। बिकॉज़ ट्रेड डिस्काउंट को

[102:24]

इस बात से फर्क नहीं पड़ता कि पैसा आज

[102:26]

आएगा या कल आएगा। ट्रेड डिस्काउंट तो आप

[102:28]

दे रहे हैं बिकॉज़ सामने वाला बल्क

[102:30]

क्वांटिटी में आपसे गुड्स खरीद रहा है या

[102:32]

सामने वाला सुंदर है। ठीक है? चलो।

[102:37]

इसको रिकॉर्ड करते हैं जी। थर्ड

[102:39]

ट्रांजैक्शन को। थर्ड ट्रांजैक्शन के अंदर

[102:45]

पैसा आ रहा है? नहीं। पर एक और एसेट आ रही

[102:47]

है आपके पास जिसका नाम है शगुन डेटर। तो

[102:50]

शगुन का अकाउंट आप यहां पर डेबिट कर

[102:52]

देंगे।

[102:55]

और दोस्तों गुड्स आप बेच रहे हो तो आपको

[102:57]

पता होना चाहिए कि गुड्स बेचने पर क्रेडिट

[102:59]

कौन सा अकाउंट होता है? सेल्स अकाउंट।

[103:02]

कितने रुपए से? ₹90,000 से। तो यह बस

[103:06]

परचेस का जस्ट रिवर्स हो गया सेल।

[103:11]

ठीक है? अच्छा यही अगर गुड्स मैंने शगुन

[103:14]

को बेचे और अगर शगुन ने मुझे तुरंत पैसे

[103:15]

भी दे दिए होते तब भी दोस्तों सेल्स

[103:17]

अकाउंट तो क्रेडिट ही होता। डेबिट में

[103:19]

शगुन की जगह कैश या बैंक अकाउंट का नाम आ

[103:22]

जाता। ठीक है? आप नरेट कर सकते हैं। बीइंग

[103:24]

गुड्स सोल्ड टू शगुन एट 10% ट्रेड

[103:28]

डिस्काउंट ऑन क्रेडिट। मैं लिख नहीं रहा

[103:30]

हूं नरेशन। टाइम लगता है उसमें बहुत। आगे

[103:32]

चलते हैं दोस्तों।

[103:34]

आगे चलते हैं। फोर्थ ट्रांजैक्शन को

[103:36]

रिकॉर्ड करते हैं।

[103:39]

फोर्थ ट्रांजैक्शन बेटा सोल्ड गुड्स ऑफ ₹1

[103:42]

लाख टू राधा एट 10% ट्रेड डिस्काउंट हाफ

[103:47]

ऑफ द पेमेंट रिसीव्ड इन कैश। राधा अच्छी

[103:50]

बच्ची है। राधा को मैंने ₹1 लाख के गुड्स

[103:52]

10% के ट्रेड डिस्काउंट पर बेचे। यानी ₹1

[103:55]

लाख का माल ₹90,000 में बेचा। ₹90,000 में

[103:57]

से राधा ने मुझे आधी पेमेंट दे भी दी

[104:00]

तुरंत। ठीक है? बाकी की आधी नहीं दी। बाद

[104:03]

में दे देगी वो। तो जरा रिकॉर्ड करते हैं

[104:06]

इसको। मुझे नहीं पता डेबिट क्या होगा

[104:08]

लेकिन मुझे कंफर्म पता है कि क्रेडिट तो

[104:10]

बॉस सेल्स अकाउंट ही होगा।

[104:15]

क्योंकि भैया ने बताया था

[104:18]

कि गुड्स खरीदने पर परचेजेस अकाउंट डेबिट

[104:23]

गुड्स बेचने पर सेल्स अकाउंट क्रेडिट। तो

[104:27]

सेल्स अकाउंट क्रेडिट हो जाएगा ₹90,000

[104:29]

से।

[104:31]

अब इसमें से कुछ पेमेंट आपकी जेब में आ गई

[104:33]

है तो जो पेमेंट आ गई है वह कैश अकाउंट

[104:36]

में डेबिट हो जाएगी और जो पेमेंट लेनी है

[104:40]

वो राधा के अकाउंट में डेबिट हो जाएगी।

[104:43]

खत्म हो गई बात। अच्छा राधा ने कैश ही

[104:46]

दिया था ना? चेक तो नहीं दिया था। हां जी

[104:47]

कैश ही दिया था। सो ₹45,000 आपके पास आज आ

[104:51]

गए और ₹45,000 आपके पास बाद में आ जाएंगे।

[104:55]

एक कंपाउंड एंट्री बन गई दोस्तों इस

[104:56]

क्वेश्चन के अंदर। ठीक है? अब अगर मुझे दो

[104:59]

टुकड़ों में इसको रिकॉर्ड करना है तो मैं

[105:01]

ऐसे भी कर सकता हूं कैश अकाउंट डेबिट टू

[105:03]

सेल्स अकाउंट 45 45 देन राधा अकाउंट डेबिट

[105:05]

टू सेल्स अकाउंट 45 45 पर क्यों इतनी

[105:07]

मेहनत करनी है आपको फोर्थ ट्रांजैक्शन

[105:10]

कंप्लीट हो गई दोस्तों

[105:13]

फिफ्थ ट्रांजैक्शन फिफ्थ ट्रांजैक्शन बड़ी

[105:16]

इंपॉर्टेंट है

[105:19]

फिफ्थ ट्रांजैक्शन में गुड्स खरीद रहे हैं

[105:20]

हम वापस से इस बार जो हम गुड्स खरीद रहे

[105:23]

हैं उनका लिस्ट प्राइस है ₹150

[105:25]

यह गुड्स हम तिवारी जी से खरीद रहे

[105:28]

क्रेडिट बेसिस पे

[105:31]

उधार क्रेडिट बेसिस पर खरीद रहे हैं हम यह

[105:34]

गुड्स तिवारी से और मुझे मिल रहा है 2%

[105:38]

ट्रेड डिस्काउंट

[105:40]

और मुझे मिलेगा 3% का कैश डिस्काउंट

[105:45]

आराम से पहले तो याद रखना सबसे पहले आपको

[105:48]

ट्रेड डिस्काउंट अप्लाई करना होता है बाद

[105:50]

में कैश डिस्काउंट के बारे में सोचना होता

[105:51]

है दोस्तों ₹150000

[105:55]

गुड्स का लिस्ट प्राइस था

[106:00]

₹150 लिस्ट प्राइस के ऊपर आपको ट्रेड

[106:02]

डिस्काउंट मिलेगा। ट्रेड डिस्काउंट विल बी

[106:04]

₹150000 का 2%

[106:09]

यानी कि ₹3000

[106:13]

यानी कि आपका इनवॉइस प्राइस बनेगा ₹150000

[106:18]

माइनस द ट्रेड डिस्काउंट ऑफ ₹3000 यानी कि

[106:22]

आपको फाइनल पेमेंट देनी है ₹147000

[106:25]

पर यह ₹147000 आप दे रहे हो क्या आज? अगर

[106:29]

आज देने लगो अगर आज जेब ढीली करो तो मैं

[106:32]

₹147000 से भी कम करवा दूंगा आपका बिल

[106:35]

अमाउंट लेकिन क्या आप आज दे रहे हो? नहीं।

[106:39]

सो यू विल नॉट बी एलिजिबल फॉर द कैश

[106:42]

डिस्काउंट इन दिस क्वेश्चन। हाउ एवर कैश

[106:43]

डिस्काउंट इज़ गिवन इन दिस क्वेश्चन बट वी

[106:45]

विल नॉट बी एलिजिबल टू अेल दैट कैश

[106:48]

डिस्काउंट जस्ट बिकॉज़ वी आर नॉट मेकिंग द

[106:49]

पेमेंट फ्रॉम द ऑन द डेट ऑफ़ परचेस

[106:51]

इटसेल्फ। ओके?

[106:55]

तो यहां पर हमने गुड्स खरीदे ₹1.5 लाख के।

[106:58]

2% रेट डिस्काउंट तो हमें मिल जाएगा लेकिन

[107:01]

कैश डिस्काउंट नहीं मिलेगा। कारण यहां

[107:03]

छुपा हुआ है। क्रेडिट बेसिस पे आप गुड्स

[107:06]

खरीद रहे हो। कैश डिस्काउंट नहीं मिलेगा।

[107:09]

तो बस गुड्स खरीदो। ₹1,47,000 के और ऐश

[107:13]

करो। गुड्स खरीदने की एंट्री बता दो जल्दी

[107:15]

से। मैं तो भूल गया क्योंकि मैं तो भूल

[107:18]

गया। गुड्स खरीदने की एंट्री में कौन सा

[107:21]

अकाउंट डेबिट होता है? परचेस अकाउंट

[107:25]

₹1.5 लाख रिकॉर्ड करना है? नहीं 147 परचेस

[107:29]

अकाउंट में हमेशा इनवॉइस प्राइस जाता है।

[107:31]

लिस्ट प्राइस नहीं जाता कभी भी हमेशा

[107:33]

इनवॉइस प्राइस जाता है। अच्छा पेमेंट कर

[107:35]

दी होती मैंने तो कैश अकाउंट क्रेडिट हो

[107:37]

जाता। बट चकि पेमेंट नहीं करी है तो

[107:39]

तिवारी क्रेडिट हो जाएगा।

[107:46]

₹147000

[107:47]

तो ये इस क्वेश्चन के अंदर नया था। ठीक

[107:50]

है? ये इंपॉर्टेंट था बेटा कि कैश

[107:52]

डिस्काउंट नहीं मिलेगा आपको इस क्वेश्चन

[107:54]

के अंदर। आगे चलते हैं बेटा। सिक्स्थ में

[107:57]

देखते हैं जरा कैश डिस्काउंट मिलेगा कि

[107:59]

नहीं मिलेगा। सिक्स्थ लिखा है परचेस्ड

[108:03]

गुड्स लिस्ट प्राइस ₹1 लाख फ्रॉम तिवारी

[108:06]

अगेन। फिर से तिवारी से गुड्स खरीद रहे

[108:09]

हैं हम ₹1 लाख के। और इस बार हमें 10% का

[108:12]

ट्रेड डिस्काउंट मिल रहा है और 5% का कैश

[108:15]

डिस्काउंट रखा हुआ है तिवारी जी ने इस

[108:16]

बार। पिछली बार तिवारी जी ने कैश

[108:19]

डिस्काउंट रखा था 3% जो कि हमें मिल नहीं

[108:21]

पाया था। इस बार उन्होंने कैश डिस्काउंट

[108:22]

रखा है 5%। मैं चाहता हूं अबकी बार कैश

[108:25]

डिस्काउंट मेरे हाथ से ना जाए। मैं लालची

[108:27]

हूं। सब चाहिए मुझे। ट्रेड डिस्काउंट भी

[108:30]

कैश डिस्काउंट भी।

[108:32]

तो कैश डिस्काउंट को अवेल करने के लिए फुल

[108:35]

अमाउंट पेड एट द टाइम ऑफ परचेस इटसेल्फ।

[108:38]

मैंने कहा तिवारी जी परचेस के वक्त ही मैं

[108:40]

सारे पैसे चुका दूंगा। बताओ डिस्काउंट

[108:42]

कितना दोगे आप? तो कैसे इस क्वेश्चन में

[108:44]

रिकॉर्डिंग होगी बेटा? ध्यान से सुनना।

[108:47]

बड़ा इंपॉर्टेंट है। सिक्स्थ ट्रांजैक्शन

[108:50]

वेरी वेरी इंपॉर्टेंट।

[108:54]

सबसे पहले क्या करना है सर? बेटा सबसे

[108:57]

पहले आपको ट्रेड डिस्काउंट अप्लाई करके

[109:00]

इनवॉइस प्राइस पे आ जाना है। सबसे पहले

[109:04]

गुड्स कितने के थे? लिस्ट प्राइस के

[109:05]

मुताबिक 1 लाख।

[109:08]

1 लाख के ऊपर आपको 10% का ट्रेड डिस्काउंट

[109:10]

मिल गया। 1 लाख का 10% यानी 10,000 यानी

[109:14]

इनवॉइस प्राइस कितना हो गया? 90,000 बेटा

[109:16]

आप ₹90,000 रिकॉर्ड कर दो फटाफट से। गुड्स

[109:20]

खरीद रहे हो ना? तो परचेजेस अकाउंट को आप

[109:24]

डेबिट कर दो ₹90,000 से। क्या प्रॉब्लम

[109:27]

है?

[109:30]

तो सर क्या मुझे ₹90,000 देने होंगे? कैश

[109:33]

डिस्काउंट का क्या? मिलेगा कैश डिस्काउंट?

[109:35]

मिलेगा। पेमेंट नहीं जाएगी तुम्हारी जेब

[109:38]

से ₹0000 उसकी टेंशन मत लो। पेमेंट

[109:40]

तुम्हारी जेब से और कम करवाऊंगा मैं

[109:42]

डिस्काउंट दिलवाऊंगा लेकिन परचेस अकाउंट

[109:45]

में रिकॉर्ड ₹0000 ही होगा। परचेस अकाउंट

[109:48]

या सेल्स अकाउंट में हमेशा इनवॉइस प्राइस

[109:50]

ही रिकॉर्ड होता है। चाहे पेमेंट कम हो या

[109:53]

ज्यादा हो। ज्यादा तो नहीं होगी। ऑफ कोर्स

[109:55]

चाहे पेमेंट कम हो या उतनी ही हो। पर

[109:58]

परचेस अकाउंट और सेल्स अकाउंट में कौन सा

[110:00]

प्राइस रिकॉर्ड होता है? इनवॉइस प्राइस।

[110:03]

रिकॉर्ड कर दिया मैंने ₹90,000।

[110:06]

अब मुझे देखना है इस क्वेश्चन के अंदर

[110:07]

मुझे कैश डिस्काउंट कितना मिलेगा। तो मैं

[110:11]

आपको बता दूं क्या है? जिस प्रकार ट्रेड

[110:13]

डिस्काउंट आप अप्लाई करते हो लिस्ट प्राइस

[110:15]

पे कैश डिस्काउंट आपको अप्लाई करना है। उस

[110:19]

पेमेंट के ऊपर जो पेमेंट आप आज निपटाने जा

[110:21]

रहे हो आप क्योंकि ₹90,000 की पेमेंट

[110:25]

निपटाने जा रहे हो।

[110:27]

आप फुल अमाउंट पे करने जा रहे हो ना बेटा

[110:29]

इनवॉइस प्राइस पे। तो ₹90,000 के ऊपर आपको

[110:33]

मिलेगा कैश डिस्काउंट। यानी आपको सबसे

[110:37]

पहले मिलता है ट्रेड डिस्काउंट। ट्रेड

[110:39]

डिस्काउंट मिल जाने के बाद जो अमाउंट बचता

[110:42]

है उस बचे हुए अमाउंट पे आपको मिलता है

[110:44]

कैश डिस्काउंट। तो ₹0000 के ऊपर आपको 5%

[110:48]

का मिल जाएगा कैश डिस्काउंट। 9 * 5 = 45

[110:51]

4500 का आपको मिल गया कैश डिस्काउंट।

[110:53]

मुबारका जी मुबारका

[110:56]

यानी कि पेमेंट आपकी जेब से जो जाएगी वो

[110:58]

जाएगी ₹0000 - 4500 टोटल ₹14500 का फायदा

[111:04]

हो गया हमें पहले तो ₹1 लाख के गुड्स थे

[111:06]

जो ₹10 कम करवा लिए हमने अब ₹90 भी हमसे

[111:10]

नहीं दिए जा रहे ₹900 में भी हम कह रहे

[111:13]

हैं भ पैसा देंगे पैसा अमाउंट कम कर दो तो

[111:17]

तिवारी जी ने 5% और कम कर दिया तो अब यह

[111:20]

5% ₹0000 पे अप्लाई होगा ठीक है जी 4500

[111:24]

कम हो गए। तो बेटा 4500 अगर कम हो गए तो

[111:27]

आपकी जेब से कैश जाएगा। कैश क्रेडिट होगा।

[111:32]

कितना कैश पे करेंगे हम? 85500।

[111:37]

समझ रहे हैं आप? अब एंट्री तो मैच नहीं

[111:39]

हुई। डेबिट में ज्यादा अमाउंट है। क्रेडिट

[111:41]

में कम अमाउंट है। वो इसलिए क्योंकि तुमने

[111:43]

डिस्काउंट को रिकॉर्ड नहीं करा। सर आपने

[111:44]

कहा था डिस्काउंट को रिकॉर्ड नहीं करूंगा।

[111:46]

थप्पड़ डिस्काउंट रिकॉर्ड कौन सा वाला

[111:49]

नहीं करना? ट्रेड डिस्काउंट। कैश

[111:51]

डिस्काउंट तो रिकॉर्ड करना है दोस्तों। ये

[111:53]

देखो।

[111:56]

कैश डिस्काउंट तो टू बी रिकॉर्डेड है ना

[111:58]

बेटा। अब सोचो इस क्वेश्चन के अंदर मिला

[112:01]

है या हमने दिया है। मिला है हमें कैश

[112:03]

डिस्काउंट। तो डिस्काउंट रिसीव्ड के नाम

[112:05]

से रिकॉर्ड होगा। क्रेडिट में रिकॉर्ड

[112:06]

होगा। ठीक है जी। डिस्काउंट रिसीव्ड के

[112:10]

नाम से यह रिकॉर्ड होगा और वह भी क्रेडिट

[112:13]

में।

[112:16]

इधर मुझे रिकॉर्ड करना है टू डिस्काउंट

[112:19]

रिसीव्ड।

[112:23]

कितने रुपए? 4500

[112:26]

खत्म हो गया क्वेश्चन। तो वो जो ₹10,000

[112:30]

का ट्रेड डिस्काउंट मुझे मिला है वो मैंने

[112:31]

कहीं पर रिकॉर्ड नहीं करा लेकिन कैश

[112:33]

डिस्काउंट जो मिला है ₹4,500 वो तो मुझे

[112:34]

रिकॉर्ड करना पड़ेगा दोस्तों। नरेट कैसे

[112:37]

करेंगे? बीइंग गुड्स

[112:41]

परचेस्ड

[112:43]

फ्रॉम तिवारी।

[112:45]

चाहो तो यहीं पर भी खत्म कर सकते हो नरेशन

[112:48]

को। इतना लोड नहीं लेना। बट आगे लिख भी

[112:51]

सकते हो एट 10% टीडी एंड 5% CD

[112:57]

खत्म हो गई बात। अब मैं चाहता हूं प्यारे

[112:59]

बच्चों एक क्वेश्चन आप मेरे लिए ट्राई

[113:01]

करो।

[113:03]

सेवंथ

[113:05]

परचेस्ड गुड्स लिस्ट प्राइस ₹1 लाख फ्रॉम

[113:09]

तिवारी। अगेन मैंने ना अंडरस्टैंडिंग

[113:11]

क्लियर रखने के लिए सेम फैक्ट्स डाले हैं।

[113:14]

तिवारी ही डाला है इस बार भी। इस बार भी

[113:16]

गुड्स ₹1 लाख के खरीद रहे हैं हम। इस बार

[113:18]

भी ट्रेड डिस्काउंट 10% ही है। बट कैश

[113:21]

डिस्काउंट इस बार वापस 3% कर दिया तिवारी

[113:24]

ने। और इस बार हम पूरी पेमेंट नहीं दे रहे

[113:26]

तिवारी को। हम तिवारी को हाफ पेमेंट दे

[113:28]

रहे हैं। हाफ ऑफ द पेमेंट मेड एंड दैट टू

[113:31]

बाय चेक।

[113:33]

₹1 लाख के गुड्स। हमने कहा कम कर दे भाई।

[113:35]

उसने ₹90,000 के लगा दिए।

[113:38]

पर हम ₹90,000 फुल अमाउंट आज देने को

[113:41]

तैयार नहीं है हम। हमने उसको बोला यार आज

[113:43]

हम आधा ही दे पाएंगे तुझे। बड़ा

[113:45]

इंटरेस्टिंग है। आइए जरा ध्यान से देखते

[113:47]

हैं सेवंथ ट्रांजैक्शन कैसे रिकॉर्ड होने

[113:50]

वाली है।

[113:55]

सबसे पहले ट्रेड डिस्काउंट माइनस करो।

[113:58]

इनवॉइस प्राइस पे आ गए। अब इनवॉइस प्राइस

[114:01]

हो गया ₹90,000 तो तुरंत जाके परचेस

[114:03]

अकाउंट में डाल दो ₹9,000। जैसे ही ट्रेड

[114:06]

डिस्काउंट माइनस कर दो ना आप। जैसे ही आप

[114:08]

ट्रेड डिस्काउंट माइनस करो और इनवॉइस

[114:10]

प्राइस पर आ जाओ तो इनवॉइस प्राइस को

[114:12]

तुरंत जाकर के डाल दिया करो परचेज अकाउंट

[114:14]

में या सेल्स अकाउंट में व्हाटएवर द केस

[114:16]

मे बी। तो यहां पर आपको परचेजेस अकाउंट को

[114:20]

डेबिट कर देना है तुरंत।

[114:24]

परचेस अकाउंट को डेबिट कर देना है आपको

[114:26]

तुरंत। कितने रुपए से दोस्तों? ₹90,000

[114:29]

से।

[114:32]

ईजी हो गया। अच्छा। ₹90,000 आपने देने हैं

[114:35]

तिवारी को। बट उसमें क्या लिखा था कि आधा

[114:37]

ही अमाउंट हम आज देंगे और वो भी चेक से

[114:40]

देंगे। तो मतलब बाकी का आधा में दोगे ना

[114:43]

तो ₹900 में से आधा और आधा यानी 45

[114:46]

₹45,000 हो गया। ₹90,000 में से ₹45,000

[114:49]

मैं आज दूंगा और बाकी के ₹45,000 बाद में

[114:52]

दूंगा। यानी बाकी के जो ₹45,000 हैं उसके

[114:54]

हिसाब से तिवारी मेरा क्रेडिटर बन जाएगा।

[114:57]

तो ऐसे समझ लो ना इस क्वेश्चन के अंदर आधी

[114:59]

हो गई कैश परचेस और आधी हो गई क्रेडिट

[115:02]

परचेस। तो पहले क्रेडिट वाले पोर्शन को

[115:03]

रिकॉर्ड कर लो। यानी तिवारी आपका क्रेडिटर

[115:06]

बन जाएगा।

[115:11]

तिवारी के अकाउंट में मैंने डाल दिया

[115:13]

₹45,000।

[115:15]

बात समझ में आ गई बेटा?

[115:19]

ठीक है? आराम से समझना। देखो लिस्ट प्राइस

[115:23]

था ₹1 लाख।

[115:25]

₹1 लाख का 10% यानी ₹10,000 माइनस हो गया।

[115:30]

कितना बचा? ₹90,000।

[115:33]

अब ₹0000 में से आपने कहा आधा हम बाद में

[115:35]

देंगे यानी 45000

[115:38]

और आधा आप आज दोगे यानी 45000

[115:42]

तो ये जो आप आज दे रहे हो आधा वो 45 है ना

[115:46]

तो 45 के ऊपर आपको मिलेगा कैश डिस्काउंट।

[115:49]

पॉइंट टू बी नोटेड कि कैश डिस्काउंट सिर्फ

[115:51]

उतनी पेमेंट के अनुसार मिलता है जितनी

[115:54]

पेमेंट आप आज की डेट में कर रहे हो। अगर

[115:57]

आज आप 80% पेमेंट करोगे तो 80% पेमेंट के

[116:00]

ऊपर कैश डिस्काउंट मिलेगा।

[116:02]

50% करोगे तो 50% के ऊपर मिलेगा। और भी

[116:05]

क्वेश्चंस आएंगे इस तरह के आगे। तो कैश

[116:07]

डिस्काउंट आपको कितना मिलेगा सर?

[116:11]

आपको कैश डिस्काउंट मिलेगा इस 45,000 की

[116:14]

पेमेंट के ऊपर कितना परसेंट था?

[116:21]

3% 3% का आपको कैश डिस्काउंट मिल जाएगा।

[116:26]

तो कैश डिस्काउंट का अमाउंट कितना होगा इस

[116:29]

क्वेश्चन के अंदर?

[116:36]

₹1350 बेटा

[116:39]

ठीक है जी ₹1350 आपको कैश डिस्काउंट

[116:42]

मिलेगा इस क्वेश्चन के अंदर आया मजा तो

[116:45]

मतलब कि 90 में से 45 तो मैं बाद में

[116:47]

दूंगा मैंने तिवारी को बोल दिया और जो 45

[116:50]

मैं आज देने जा रहा हूं वह भी मेरे को

[116:52]

पूरे ₹45000 नहीं देने पड़ेंगे उसमें भी

[116:54]

मुझे डिस्काउंट मिल जाएगा ₹1350 का तो आइए

[116:57]

इसको रिकॉर्ड करते हैं जरा

[117:00]

जो पेमेंट आप आज दे रहे हो वह कैश अकाउंट

[117:04]

में क्रेडिट हो जाएगी और जो आपको

[117:05]

डिस्काउंट मिला अगेन आप उसे लिखोगे

[117:08]

डिस्काउंट रिसीव्ड के नाम से।

[117:11]

खत्म हो गई बात। 90 में से 45 तो मैं बाद

[117:15]

में ही दूंगा। डिस्काउंट मुझे मिल गया

[117:17]

1350 तो अब पेमेंट कितनी दोगे? जल्दी से

[117:20]

बता दो। पेमेंट आपको देनी पड़ेगी

[117:23]

₹45000

[117:26]

- ₹1350

[117:28]

ठीक है जी ये हो जाएगा अ 43650

[117:37]

ठीक है जी 43650

[117:40]

क्वेश्चन कंप्लीट हो गया दोस्तों यहां पर

[117:42]

ये क्वेश्चन पूरा कंप्लीट हो गया अच्छा एक

[117:45]

चीज और बेटा ये जो पेमेंट है ये पेमेंट ना

[117:48]

हमने कैश में नहीं दी चेक में दी तो यहां

[117:51]

पर आपको एक छोटी सी चीज का ध्यान रखना है

[117:53]

कि

[117:55]

आपको यहां कैश का नाम नहीं लेना। आपको कैश

[117:59]

की जगह बैंक अकाउंट लिखना है यहां पर टू

[118:02]

बैंक अकाउंट। अच्छा ये चीज बड़ी

[118:04]

इंटरेस्टिंग है कि डिस्काउंट का नाम तो

[118:05]

कैश डिस्काउंट है। लेकिन कैश डिस्काउंट का

[118:07]

मतलब यह नहीं कि कतई कैश ही दोगे। अगर आप

[118:10]

यूपीआई से पेमेंट कर रहे हो तो वो तो और

[118:12]

बेटर है। तो क्या कैश डिस्काउंट नहीं

[118:14]

मिलेगा? तो नाम उसका कैश डिस्काउंट है।

[118:16]

लेकिन पेमेंट आप किसी भी मोड में कर सकते

[118:18]

हो। आप कैश भी दे सकते हो, चेक भी दे सकते

[118:20]

हो। आप यूपीआई से भी पेमेंट कर सकते हो।

[118:22]

Paytm, Google P, PhonePe कैसे भी कर सकते

[118:24]

हो। ठीक है जी? आई होप आपको ये सब

[118:26]

ट्रांजैक्शंस यहां तक क्लियर हो गई होंगी।

[118:29]

सात की सात ट्रांजैक्शंस।

[118:31]

आगे चलते हैं।

[118:34]

सात ट्रांजैक्शंस पे ये क्वेश्चन खत्म

[118:36]

नहीं हुआ है। ये क्वेश्चन अभी आगे भी है।

[118:39]

आठवीं ट्रांजैक्शन भी है, नवीं भी है और

[118:41]

10वीं भी है। ठीक है जी? एट्थ ट्रांजैक्शन

[118:45]

में लिखा है अगेन वी हैव सोल्ड गुड्स

[118:47]

लिस्ट प्राइस 1 लाख टू राजू एट 10% ट्रेड

[118:52]

डिस्काउंट

[118:53]

5% कैश डिस्काउंट देखो अब मैं खरीद रहा था

[118:56]

अभी मैं बेच रहा हूं मैंने ये गुड्स जो कि

[118:59]

₹1 लाख के हैं ये मैंने राजू को बेचे 10%

[119:03]

ट्रेड डिस्काउंट मैंने देना है राजू को और

[119:05]

5% का कैश डिस्काउंट भी मैं दे दूंगा पर

[119:08]

ट्रेड डिस्काउंट तो चलो मैंने दे दिया

[119:09]

खुशी से या वो ज्यादा माल खरीद रहा था

[119:11]

मैंने दे दिया ट्रेड डिस्काउंट लेकिन कैश

[119:13]

कैश डिस्काउंट मैं दूंगा इस चीज पे डिपेंड

[119:15]

करते हुए कि वो मुझे पेमेंट आज दे रहा है

[119:17]

कि नहीं दे रहा। दे रहा है तो कितनी दे

[119:19]

रहा है? तो भैया फुल अमाउंट रिसीव्ड एट द

[119:22]

टाइम ऑफ़ परचेस इटसेल्फ। राजू ने मुझे

[119:24]

परचेस के वक्त ही पूरा पैसा दे दिया। फुल

[119:27]

अमाउंट दे दिया। तो कैसे रिकॉर्ड होगा?

[119:29]

ध्यान से देखिए। यहीं पर रिकॉर्ड करने की

[119:31]

कोशिश करते हैं इसको।

[119:36]

सर देखिए पैसा आ रहा है आपके पास। तो कैश

[119:39]

अकाउंट या फिर बैंक अकाउंट

[119:43]

यह तो हो जाएगा डेबिट।

[119:46]

पर आप खुद सोचो क्या राजू आपको 1 लाख

[119:48]

देगा? नो क्योंकि 10% तो आपने पहले ही कम

[119:51]

कर दिया। कितना हो गया? ₹0000 पर क्या

[119:52]

राजू आपको ₹9,000 भी देगा? नहीं क्योंकि

[119:55]

5% और उसको फायदा मिल रहा तो आराम से कैसे

[119:58]

करना है? पहले कैश डिस्काउंट को गोली

[120:00]

मारनी है। पहले सिर्फ ट्रेड डिस्काउंट को

[120:03]

डिडक्ट करना है और बताना है कितना अमाउंट

[120:06]

आ रहा है। ₹1 लाख में से 10% माइनस करो।

[120:09]

₹90,000 बचा। ₹90,000 की फिगर आपको परचेस

[120:12]

या सेल अकाउंट में डाल देनी है। ट्रेड

[120:14]

डिस्काउंट माइनस करते के साथ जो अमाउंट आए

[120:16]

वो परचेस या सेल अकाउंट में डाल दो तुरंत।

[120:19]

सो

[120:21]

यहां पर सेल्स अकाउंट में

[120:29]

सेल्स अकाउंट में आपको यह फिगर डाल देनी

[120:31]

है। तुरंत ₹90,000 ₹1 लाख को तो देखो भूल

[120:34]

ही जाना है। अच्छा पर क्या हमें कैश रिसीव

[120:37]

₹90,000 भी होगा? नहीं। क्योंकि आपने कैश

[120:40]

डिस्काउंट भी दिया सामने वाले को। जैसे ही

[120:42]

सामने वाले ने कहा ना आज मैं फुल फुल

[120:44]

अमाउंट पे करके जाऊंगा। तो आपने कहा अरे

[120:46]

वाह! तो तू 90 भी मत दे। तू एक काम कर 5%

[120:49]

और डिस्काउंट ले ले। तो आपने डिस्काउंट

[120:52]

दिया इस बार। 5% कौन सा डिस्काउंट है वो?

[120:54]

कैश डिस्काउंट। रिकॉर्ड करते हैं इसको।

[120:56]

इसको रिकॉर्ड करते हैं डेबिट में। किस नाम

[120:58]

से? डिस्काउंट अलाउड।

[121:05]

डिस्काउंट अलाउड के नाम से हम इसको

[121:06]

रिकॉर्ड करते हैं सर डेबिट में। पर यह 1

[121:09]

लाख के ऊपर नहीं मिलेगा 5% यह ₹0000 के

[121:11]

ऊपर मिलेगा तो 9 * 5 45

[121:16]

₹4500 का आपको डिस्काउंट मिल गया मतलब

[121:19]

आपने दे दिया तो सामने वाला बंदा जो आपको

[121:23]

पेमेंट देगा आज की डेट में वो देगा ₹90 -

[121:26]

₹4500 यानी ₹8500

[121:30]

खत्म हो गया जी

[121:32]

₹8500

[121:35]

की पेमेंट आपको आज की डेट में रिसीव होगी।

[121:37]

होगी।

[121:40]

अब

[121:41]

2 घंटे के आसपास हो गए हैं इस वीडियो को।

[121:44]

बीच-बीच में ये आपका ब्रेन आपको सिग्नल

[121:46]

देगा कि बस यार 2 घंटे देख ली तूने ये

[121:48]

वीडियो। तो ठीक है वीडियो पॉज करो लेकिन

[121:50]

प्रैक्टिस करो इन सब क्वेश्चंस की। थोड़ी

[121:52]

देर बाद फिर से वीडियो को रिज्यूम कर सकते

[121:53]

हो आप।

[121:55]

लेकिन बंद मत करना इस वीडियो को देखना

[121:59]

बिफोर कंप्लीटिंग द वीडियो टिल द एंड।

[122:03]

ऐसे मत करना कि डिस्काउंट तक पढ़ तो लिया।

[122:05]

अब आगे क्यों पढ़ना है? ऐसे मत करना बेटा।

[122:08]

बहुत इंपॉर्टेंट है। वादा करा है पूरा

[122:11]

चैप्टर पढ़ा के हटूंगा तो पूरा चैप्टर पढ़ा

[122:13]

के ही हटूंगा।

[122:15]

ठीक है?

[122:17]

ये थी जी एट्थ ट्रांजैक्शन। अब नाइंथ

[122:19]

ट्रांजैक्शन बड़ी इंपॉर्टेंट है। नाइंथ में

[122:21]

मुझे आप लोगों की सहायता चाहिए। आप लोग को

[122:24]

पूरा फोकस अपना इधर रखना है। नाइंथ

[122:26]

ट्रांजैक्शन के अंदर। सोल्ड गुड्स

[122:29]

लिस्ट प्राइस 1 लाख टू शकी

[122:33]

एट 10% ट्रेड डिस्काउंट 3% कैश डिस्काउंट

[122:36]

बट ओनली 1/3 ऑफ़ द पेमेंट इज़ रिसीव्ड।

[122:40]

शेंगकी मुझे पैसा दे रहा है लेकिन सिर्फ

[122:42]

1/3 पैसा दे रहा है आज। तो मैं फिर कैश

[122:44]

डिस्काउंट भी 1/3 के हिसाब से दूंगा उसको।

[122:46]

ट्रेड डिस्काउंट तो फुल पेमेंट पे मिलता

[122:48]

है क्योंकि ट्रेड डिस्काउंट को तो इस बात

[122:50]

से फर्क ही नहीं पड़ता ना कि पेमेंट पूरी

[122:51]

हो रही है या आधी हो रही है। तो देखो कैसे

[122:54]

रिकॉर्ड होगा यह नाइंथ ट्रांजैक्शन।

[122:59]

आसान तरीका पता है ना क्या है कि सबसे

[123:02]

पहले लिस्ट प्राइस को इनवॉइस प्राइस पर ले

[123:04]

आओ। ₹1 लाख का लिस्ट प्राइस था 10% ट्रेड

[123:07]

डिस्काउंट। जैसे ही आपने दिया हमने दिया

[123:09]

इस बार डिस्काउंट तो हमने सामने वाले के

[123:12]

लिए ₹90,000 लगा दिए गुड्स। तो तुरंत जाके

[123:15]

₹90,000 लिख दो। किसमें? सेल्स अकाउंट

[123:17]

में। परचेस होता तो परचेज़ अकाउंट।

[123:21]

तो नाइंथ ट्रांजैक्शन में सबसे पहले मैंने

[123:23]

जाकर के सेल्स अकाउंट में फिगर ही लिख दी।

[123:27]

कितने रुपए की फिगर लिख दी? जी ₹90,000 की

[123:30]

फिगर लिख दी।

[123:33]

अच्छा जी। अब ₹90,000 में से वो पर्सन ना

[123:35]

मुझे 1/3 पे कर रहा है और बाकी का अमाउंट

[123:38]

अभी आज वो मुझे पे कर ही नहीं रहा है। ठीक

[123:40]

है? इसको मैं थोड़ा सा नीचे कर देता हूं।

[123:47]

ठीक है? 90,000 में से वो मुझे आज सिर्फ

[123:50]

1/3 पे करेगा। पहले इस बारे में दिमाग लगा

[123:52]

लो। बेटा 90

[123:57]

आपने गुड्स की कीमत लगा दी शेंकी के लिए।

[124:00]

90000 का 1/3 कितना होता है? 1/3 1/3 कैसे

[124:04]

निकालते हैं? ₹0000 * 1/3 सिंपल कितना आ

[124:07]

जाएगा? 30,000 यानी कि वो मुझे आज सिर्फ

[124:10]

30,000 पे करना चाहता है। तो समझ जाओ बाकी

[124:14]

का 60,000 वो आज नहीं पे करेगा बाद में पे

[124:16]

करेगा। सो 1/3 अमाउंट आपको रिसीव हो रहा

[124:19]

है। 2/3 अमाउंट आपको बाद में रिसीव होगा।

[124:22]

तो यह ₹0000 पे तो कोई बात ही नहीं करना

[124:24]

चाहता। शेंगकी शेंकी ₹600 बाद में देगा ना

[124:26]

तो शेंकी मेरा डेटर बन जाएगा ₹60,000 से।

[124:29]

तो आओ जरा शेंगकी को डेबिट कर दो।

[124:39]

शेंगकी का अकाउंट डेबिट हो जाएगा ₹0000

[124:42]

से।

[124:44]

बचे 300 300 वह मुझे आज देना चाहता है पर

[124:47]

मैं उससे 300 पूरे नहीं लूंगा मैं कहूंगा

[124:49]

डिस्काउंट ले तू टेंशन मत ले क्योंकि आपने

[124:52]

उसे कैश डिस्काउंट देना है कितना परसेंट

[124:55]

जी 3%

[124:57]

समझ रहे हो पर ये 3% का कैश डिस्काउंट जो

[125:01]

आप शेंग को दोगे वो किस फिगर पे दोगे ₹1

[125:03]

लाख पे दोगे ₹90 पे दोगे ₹0000 पे दोगे या

[125:09]

₹0000 पे दोगे

[125:11]

3% का जो आपने ने कैश डिस्काउंट देना है

[125:14]

वो किस अमाउंट पे दोगे? मैंने बताया था

[125:16]

कैश डिस्काउंट सिर्फ उस फिगर के ऊपर दिया

[125:19]

जाता है जो फिगर आज की डेट में रिसीव होने

[125:21]

वाली है या पे होने वाली है। तो चकि

[125:24]

शेंगकी ₹00 देने वाला है आज की डेट में

[125:26]

मुझे तो मैं कैश डिस्काउंट 3% ₹00 पे

[125:28]

दूंगा। ₹00 पे 3%

[125:34]

यानी कि ₹900

[125:38]

समझ रहे हैं आप? ₹900 मैंने डिस्काउंट दे

[125:40]

दिया। अच्छा ये जो ₹900 का डिस्काउंट है

[125:42]

इसे रिकॉर्ड भी किया जाता है। किस नाम से?

[125:44]

जी डिस्काउंट अलाउड।

[125:50]

डिस्काउंट अलाउड के नाम से इसको रिकॉर्ड

[125:52]

किया जाता है। ₹900

[125:55]

तो समझ जाओ शेंगकी जो 90 में ले गया मेरे

[125:58]

से चीज ₹1 लाख की थी। 90 की करा गया।

[126:01]

₹90,000 की सेल हो गई। 90 में से 60 तो वह

[126:03]

बाद में ही देगा। आज 30 देने वाला था। 30

[126:06]

में से मैंने ₹900 कम कर दिए। तो ₹29,100

[126:09]

मुझे रिसीव होंगे आज।

[126:12]

तो ये ₹29,100 या तो मेरे कैश अकाउंट में

[126:15]

आ जाएंगे या बैंक अकाउंट में आ जाएंगे।

[126:19]

खत्म हो गई जी बात।

[126:22]

और एक बात बोलूं इसी के साथ डिस्काउंट का

[126:25]

टॉपिक खत्म। उड़ा दिया हमने डिस्काउंट का

[126:27]

टॉपिक पूरा। ठीक है? खत्म हो गया

[126:30]

डिस्काउंट का टॉपिक। देख सकते हैं आप आज

[126:33]

के जो हमारे गोल्स थे।

[126:37]

यह हमारे आज के गोल्स थे।

[126:40]

तो, तीन गोल्स हमने अचीव कर लिए दोस्तों,

[126:42]

मुबारक हो। हमने डेबिट और क्रेडिट के

[126:44]

रूल्स के बारे में पढ़ लिया। हमने सिंपल

[126:47]

और कंपाउंड जर्नल एंट्रीज के बारे में पढ़

[126:49]

लिया। हमने ट्रेड डिस्काउंट, कैश

[126:51]

डिस्काउंट के बारे में पढ़ लिया। तो, अब

[126:53]

क्या पढ़ने वाले हैं हम? अब हम पढ़ने वाले

[126:55]

हैं कुछ अफलातून ट्रांजैक्शंस।

[126:57]

अफलातून ट्रांजैक्शंस क्या होती हैं?

[126:59]

जिसमें कुछ इंपॉर्टेंट ट्रांजैक्शंस आती

[127:01]

हैं यार। बैंकिंग ट्रांजैक्शंस,

[127:03]

ट्रांजैक्शंस रिलेटेड टू चेक ट्रांजैक्शंस

[127:05]

रिलेटिंग टू प्रीपेड एक्सपेंस,

[127:07]

अनएक्पायर्ड एक्सपेंस और वी कैन से अक्रूड

[127:10]

इनकम, आउटस्टैंडिंग एक्सपेंस, इनकम

[127:12]

रिसीव्ड इन एडवांस, ड्रॉइंग्स

[127:15]

वगैरह-वगैरह।

[127:17]

ये सब अब हमें पढ़ना है। तो मैं क्वेश्चंस

[127:19]

की हेल्प से आपको ये सब चीजें पढ़ाने की

[127:21]

कोशिश करूंगा। आइए जी आगे चलते हैं।

[127:33]

जी दोस्तों ये है आपका अगला क्वेश्चन जो

[127:37]

हमें करना है। एक बार इस क्वेश्चन की जरा

[127:39]

थरो रीडिंग कर लीजिए आप। बढ़िया से जरा

[127:42]

रीडिंग कर लो इस क्वेश्चन की।

[127:45]

जनरलाइज़ द फॉलोइंग ट्रांजैक्शंस।

[127:52]

दोस्तों, यह जो क्वेश्चन है जिसमें लिखा

[127:54]

है जनरलाइज द फॉलोइंग ट्रांजैक्शंस इन द

[127:57]

बुक्स ऑफ चित्रंजन ऑटोमोबाइल्स।

[127:59]

इस बार हमारी फर्म का नाम है चित्रंजन

[128:01]

ऑटोमोबाइल्स। ये कुछ ट्रांजैक्शंस हैं

[128:04]

हमारे सामने और इन ट्रांजैक्शंस के माध्यम

[128:06]

से कुछ नया टॉपिक मैं आपको पढ़ाने जा रहा

[128:08]

हूं। राइट? देखते हैं जरा। ये सब सीरियल

[128:11]

वाइज़ ट्रांजैक्शन सेट करके लाया हूं मैं

[128:13]

आपके लिए ताकि दिमाग में कुछ चीजें आकर के

[128:15]

बैठ जाएं आपके। तो 2025 में मई 3 5 7 10

[128:18]

15 17 एंड 18 कुछ ट्रांजैक्शंस हैं। गुड्स

[128:21]

बेचे ये वो सो आइए जी करते हैं।

[128:26]

2025 ओह सॉरी सबसे ऊपर तो हमें लिखना होता

[128:30]

है इन द बुक्स ऑफ

[128:35]

चित्रंजन ऑटोमोबाइल्स।

[128:41]

और फिर हमें लिखना है कौन सी किताब हम बना

[128:44]

रहे हैं। तो जी जर्नल बना रहे हैं।

[128:46]

फिर हम पूरा फॉर्मेट बनाते हैं जो कि मैं

[128:48]

नहीं बनाने वाला हूं। ऑफ कोर्स। ठीक है?

[128:50]

जी। सो 2025 मई की 3 तारीख को मेरी सबसे

[128:55]

पहली ट्रांजैक्शन हुई है। इफ आई एम नॉट

[128:57]

रोंग। यस। सोल्ड गुड्स टू रवि। ₹1 लाख।

[128:59]

कितना आसान है। ₹1 लाख के गुड्स ही तो

[129:02]

बेचे हैं रवि को। कोई डिस्काउंट नहीं है।

[129:04]

क्योंकि कोई पेमेंट भी नहीं है। ना ट्रेड

[129:07]

डिस्काउंट है ना कैश डिस्काउंट, ना पेमेंट

[129:08]

है। गुड्स रवि को बेच रहे हैं। मतलब सम

[129:10]

जाहिर है उधर ही बेचे होंगे। रविज़ अकाउंट

[129:12]

डेबिट टू सेल्स अकाउंट।

[129:19]

रविज़ अकाउंट डेबिट टू सेल्स अकाउंट।

[129:25]

₹1 लाख के गुड्स हमने बेचे।

[129:29]

नेक्स्ट फटाफट से। उसके बाद 5 तारीख को

[129:33]

रिसीव्ड फ्रॉम रवि,000

[129:36]

इन फुल सेटलमेंट। ओह तेरी।

[129:42]

₹1 लाख के गुड्स मैंने रवि को बेचे थे।

[129:45]

लेकिन 5 तारीख को जब रवि पैसे देने आया तो

[129:49]

कहता यार 97000 दे दूं क्या? हमने कहा दे

[129:52]

दे 3000 बाद में दे दियो। कहता नहीं नहीं

[129:55]

आप समझे नहीं मेरी बात। 97000 में ही केस

[129:58]

खत्म करो ना। पुलिस सेटल कर दो ना मेरा

[130:01]

अकाउंट। मुझे फ्री कर दो ना। 97,000 में।

[130:04]

3,000 बचे हैं मेरे पास। मैं थोड़ा सा घूम

[130:06]

फिर के आ जाऊंगा। गर्लफ्रेंड के साथ

[130:07]

मूवी-वूवी देख के आ जाऊंगा।

[130:10]

ओके। तो बेटा जब भी फुल सेटलमेंट शब्द आ

[130:13]

जाए तो आप समझ जाइए

[130:15]

कि अकाउंट क्लोज हो गया है। मतलब मैंने

[130:18]

इनडायरेक्टली रवि को डिस्काउंट ही दे दिया

[130:21]

₹3000 का। अभी भी हम इसको कैश डिस्काउंट

[130:23]

ही बोलेंगे बेटा। आइए जरा देखते हैं कैसे

[130:25]

यह रिकॉर्ड होगा।

[130:27]

सो 5 तारीख डेट डालकर

[130:31]

5 तारीख की डेट डालकर सबसे पहले तो आपको

[130:34]

पेमेंट पकड़ लेनी है।

[130:38]

सबसे पहले आपको पेमेंट पकड़ लेनी है।

[130:40]

पेमेंट आ रही है कैश में तो कैश अकाउंट

[130:42]

डेबिट। कितने रुपए की पेमेंट आ रही है?

[130:45]

₹97,000।

[130:46]

अच्छा जी। डिस्काउंट भी दिया है आपने? हां

[130:48]

जी दिया है। तो डिस्काउंट देते हैं तो

[130:50]

डेबिट में रिकॉर्ड करते हैं। किस नाम से?

[130:52]

डिस्काउंट अलाउड।

[130:55]

डिस्काउंट अलाउड हो गया जी ₹3000।

[130:59]

अब आप ही मुझे बता दो कि रवि का अकाउंट जब

[131:02]

ओपन हुआ था डेबिट में तो ₹1 लाख से तो अब

[131:05]

रवि का अकाउंट क्लोज करने के लिए रवि के

[131:07]

अकाउंट को क्रेडिट भी ₹1 लाख से ही करना

[131:09]

पड़ेगा। यह रूल होता है। कोई अकाउंट अगर

[131:12]

ओपन हुआ है 1 लाख से तो क्लोज भी ₹1 लाख

[131:14]

से ही होगा। इसलिए रवि का अकाउंट जब आप अब

[131:16]

क्रेडिट करेंगे

[131:18]

आप जब रवि का अकाउंट क्रेडिट करेंगे

[131:22]

तो रवि का अकाउंट पूरे ₹1 लाख से आपको

[131:25]

क्रेडिट करना होगा दोस्तों ठीक है जी पूरे

[131:28]

₹1 लाख से आपको क्रेडिट करना होगा रवि का

[131:30]

अकाउंट बस जी खत्म हो गई बात तो ये था कैश

[131:33]

डिस्काउंट को अेल करने का या कैश

[131:35]

डिस्काउंट अलाउ करने का एक दूसरा तरीका जो

[131:38]

कि ट्रांजैक्शन की डेट के बाद में हो रहा

[131:41]

है और यही उल्टा भी हो सकता है यही रवि के

[131:43]

पर्सपेक्टिव फिर से अगर आप सोचोगे तो

[131:45]

फर्स्ट ट्रांजैक्शन हो जाएगी परचेजेस

[131:47]

अकाउंट डेबिट टू चितरंजन ऑटोमोबाइल्स एंड

[131:49]

देन इस वाली ट्रांजैक्शन का भी रिवर्स हो

[131:52]

जाएगा। ऑलराइट।

[131:58]

हां जी दोस्तों। तो बीच-बीच में चाय भी

[132:00]

पीते रहना है। घबराना नहीं है। ठीक है?

[132:02]

वीडियो लंबी है। मैं मानता हूं। खाते पीते

[132:04]

रहो लेकिन पढ़ते भी रहो। ओके? तो ये

[132:08]

ट्रांजैक्शन आई होप आपको समझ में आ गई

[132:10]

होगी। उसके बाद हम चलते हैं अगली

[132:13]

ट्रांजैक्शन पे। अगली ट्रांजैक्शन में 7

[132:15]

तारीख को फिर हमने गुड्स बेचे। इस बार

[132:17]

हरकेश को बेचे हमने ₹2 लाख के गुड्स 7

[132:20]

तारीख को मेन

[132:23]

मे से

[132:27]

हरकेश हमारा डेटर बन जाएगा।

[132:31]

और सेल्स अकाउंट हमारा क्रेडिट हो जाएगा।

[132:35]

कितने रुपए से? जी? ₹ लाख से।

[132:39]

ओके।

[132:42]

उसके बाद

[132:44]

10 तारीख को हमें पेमेंट भी मिल गई हरकेश

[132:46]

से। अभी पूरी नहीं मिली है। ₹1.5 लाख की

[132:49]

पेमेंट मिली है 10 तारीख को। सो मे 10

[132:52]

इसको जरा तुम लोग खुद से रिकॉर्ड करो।

[132:55]

इसको जरा खुद से रिकॉर्ड करो।

[133:01]

₹ लाख के आपने गुड्स बेचे हरिकेश को। पर

[133:05]

10 तारीख को जब वह पेमेंट देने आया तो

[133:07]

₹1.5 लाख की पेमेंट देकर गया सिर्फ। तो

[133:10]

क्या मैंने संपूर्णत राजीनामा कर लिया

[133:12]

क्या? क्या लिखा है फुल सेटलमेंट? नहीं।

[133:15]

₹00 थोड़ी छोड़ दूंगा भाई मैं अपने। तो

[133:18]

इसका मतलब फिलहाल यह है कि 2 लाख में से

[133:20]

अभी वो ₹1.5 लाख देके गया है। बाकी 500 वो

[133:22]

बाद में दे देगा ध्यान से। तो अभी जो आपके

[133:26]

पास पेमेंट आ रही है उससे आपका कैश अकाउंट

[133:29]

डेबिट हो जाएगा।

[133:32]

₹150,000

[133:35]

और

[133:37]

जो हरकेश है उसका अकाउंट क्रेडिट हो जाएगा

[133:42]

₹150,000 से और बाकी के ₹50,000 वह मुझे

[133:46]

बाद में दे देगा। ठीक है? तो कोई फुल

[133:48]

सेटलमेंट नहीं है यहां पर। यहां कोई फुल

[133:50]

सेटलमेंट नहीं है भाई। अब 15 तारीख, 17

[133:53]

तारीख और 18 तारीख मतलब 17 और 18 तो नहीं।

[133:55]

15 तारीख वाली ट्रांजैक्शन जरा आप ध्यान

[133:57]

से पढ़ो क्योंकि इसमें कुछ नया सिखाना है

[134:00]

मैंने आपको। पढ़ो जरा ध्यान से।

[134:05]

दोस्तों हरिकेश के साथ पता है क्या गेम

[134:08]

हुआ? 7 तारीख को वह हमसे गुड्स खरीद के

[134:11]

गया ₹ लाख के। 10 तारीख को वो हमें पैसे

[134:14]

भी दे गया। ₹150

[134:16]

लेकिन 15 तारीख को हरकेश हो गया

[134:18]

इनसॉल्वेंट।

[134:20]

इनसॉल्वेंट क्या होता है? दोस्तों जब किसी

[134:23]

की कंडीशन खराब हो जाती है, जब किसी पर्सन

[134:27]

के ऊपर बैंककरप्सी आ जाती है, जब कोई

[134:30]

पर्सन दिवालिया हो जाता है, जब किसी पर्सन

[134:32]

की फाइनेंसियल कंडीशन बहुत खराब हो जाती

[134:34]

है, जब किसी पर्सन की एसेट्स कम और

[134:36]

लायबिलिटीज़ ज्यादा हैं। ऐसे पर्सन को

[134:38]

दोस्तों हम बोलते हैं इनसॉल्वेंट। हरकेश

[134:41]

इनसॉल्वेंट हो गया। इसमें उसका तो नुकसान

[134:44]

है ही लेकिन उससे बड़ा नुकसान मेरा है।

[134:47]

क्या आप चाहते हो आपके डेटर जितने भी हैं

[134:49]

वो सब इनसॉल्वेंट हो जाए? मजे आ जाएंगे

[134:52]

आपको। अरे भाई डेटर वो जिनसे तुम्हें पैसे

[134:55]

लेने हैं। अब जिनसे तुम्हें पैसे लेने हैं

[134:57]

अगर वह इंसान सभी इनसॉल्वेंट हो जाए तो

[135:00]

तुम्हारा पैसा मर जाएगा। मेरा पैसा मर

[135:02]

गया। मुझे हरकेश से पहली बात तो 2 लाख

[135:06]

नहीं लेने थे। 500 ही बैलेंस बचा था। पर

[135:08]

क्या करें? वो इनसॉल्वेंट हो गया। हेंस

[135:10]

हिज अकाउंट इज़ टू बी रिटन ऑफ एज बैड डे।

[135:14]

बैड डे दोस्तों उस पैसे को कहते हैं जो

[135:16]

आपको किसी कस्टमर से लेना था और वह पैसा

[135:19]

मर गया। वह पैसा खराब हो गया। वह पैसा अब

[135:21]

कभी रिसीव नहीं होने वाला। तो बैड डेट को

[135:24]

कैसे रिकॉर्ड किया जाता है? आइए जरा ध्यान

[135:26]

से देखिए।

[135:29]

15 तारीख को मैं क्या करूंगा?

[135:33]

एक एंट्री बनाऊंगा जिसमें मैं नुकसान

[135:35]

दिखाऊंगा अपना और उस नुकसान को मैं नाम

[135:38]

दूंगा बैड डे।

[135:40]

बैड डे का अकाउंट मैं कर दूंगा डेबिट।

[135:42]

बेटा ₹50,000 से।

[135:45]

अब क्योंकि मैंने बाकी के 500 जो मुझे

[135:47]

हरकेश से लेने थे वह मरा मरा हुआ पैसा

[135:51]

मैंने घोषित कर दिया है वह तो अब हरिकेश

[135:53]

का अकाउंट बंद कर देता हूं तो इसलिए अब

[135:56]

हरिकेश का अकाउंट मैं क्रेडिट कर दूंगा

[135:59]

अब मैं हरकेश का अकाउंट क्रेडिट कर दूंगा

[136:01]

जी ₹50 से

[136:04]

दोस्तों इस तरह से हम बैड डे्स को रिकॉर्ड

[136:06]

करते हैं। कभी भी आपका पैसा डूब जाए तो

[136:09]

क्या करना है? एक तो बैड डे्स करके अकाउंट

[136:11]

डेबिट करना है और जो कस्टमर है जिस जो

[136:14]

आपका जिससे पैसे लेने हैं जो डेटर है आपका

[136:16]

डेटर का अकाउंट आपको क्रेडिट कर देना है

[136:18]

₹50 से। समझ में आ गई बात? क्यों डेटर का

[136:21]

अकाउंट क्रेडिट करें? क्योंकि बेटा जब

[136:23]

पैसा डूब ही गया तो फिर उस बंदे का खाता

[136:25]

क्यों खोल रखा है तुमने फालतू में बुक्स

[136:26]

में? इसलिए उसका खाता बंद कर दो। अब आप

[136:28]

देख सकते हैं कि हरिकेश का जो अकाउंट है

[136:31]

वो डेबिट ₹2 लाख से हुआ था और क्रेडिट एक

[136:35]

बार ₹1.5 लाख से हुआ। एक बार मैंने

[136:37]

क्रेडिट कर दिया ₹50,000 से। तो डेबिट

[136:39]

क्रेडिट बराबर हो गया। हरिकेश का अकाउंट

[136:41]

बंद हो गया। और एग्जांपल्स करवाता हूं मैं

[136:43]

आपको इसके ऊपर। आगे चलते हैं दोस्तों।

[136:46]

आप देख सकते हैं 17 तारीख सपना हु ओड

[136:51]

10,000 सपना ओल्ड मतलब उसने हमसे ले रखे

[136:54]

हैं 10,000। सपना ओल्ड 10,000 डिक्लेयर्ड

[136:58]

इनसॉल्वेंट। सपना जो मेरी डेटर है जिसने

[137:00]

मुझसे 10,000 ले रखे हैं वो भी इनसॉल्वेंट

[137:03]

हो गई। मजे आ रहे हैं मेरे को फुल। मेरे

[137:05]

जितने डेटर हैं इनसॉल्वेंट हुए जा रहे

[137:07]

हैं। जो नहीं है इनसॉल्वेंट वो भी मुझसे

[137:09]

डिस्काउंट मांग रहा है। पता नहीं क्या चल

[137:11]

रहा है ये मेरे साथ। तो सपना से मुझे

[137:13]

10,000 लेने थे वो इनसॉल्वेंट हो गई है।

[137:15]

पर देखो कई बार ऐसा भी होता है कि कोई

[137:17]

पर्सन अगर इनसॉल्वेंट हो भी गया है तो ऐसा

[137:19]

नहीं है कि बिल्कुल ही उसके पास पैसे नहीं

[137:21]

है। थोड़ा बहुत घर का सामान बेच भाई बर्तन

[137:24]

भाड़ने ये सब बेच कुछ तो पैसे दे।

[137:27]

तो इनसॉल्वेंसी का केस जब किसी बंदे पर

[137:29]

अप्लाई होता है तो फिर सरकारी तौर पर कुछ

[137:32]

पैसा उससे रिकवर किया जाता है और उसके

[137:34]

क्रेडिटर्स को दे दिया जाता है। तो सपना

[137:36]

इनसॉल्वेंट हुई पर मुझे 60 पैसे इन अ रुपी

[137:42]

रिसीव हो रहे हैं ऑफिशियल रिसीवर से।

[137:47]

सपना जिससे आपको 10,000 लेने थे कुछ तो दे

[137:51]

रही है वो। क्या दे रही है? 60 पैसे। अब

[137:54]

तुम सोच रहे होगे यह सपना क्या फूंक के

[137:56]

बैठी है क्या ₹10 के बदले में 60 पैसे दे

[137:59]

रही है यानी ₹1 भी पूरा नहीं दे रही है

[138:02]

मेरे भाई 60 पैसे नहीं लिखा सिर्फ यह एक

[138:04]

स्लैंग वर्ड है यहां लिखा है 60 पैसे इन अ

[138:08]

रुपी

[138:10]

यानी हर ₹1 के बदले में वो 60 पैसे दे रही

[138:13]

है यानी 100 पैसे के बदले में 60 पैसे दे

[138:16]

रही है तो मतलब 60% अमाउंट वो दे पा रही

[138:19]

है आज तो डूबा सिर्फ 40% अमाउंट है ठीक

[138:23]

ठीक है? तो कैसे इसको रिकॉर्ड करेंगे 17

[138:26]

तारीख वाली ट्रांजैक्शन को?

[138:30]

भैया कैश आपके पास आएगा थोड़ा बहुत।

[138:35]

कितना? 40%

[138:37]

अ सॉरी 60% यानी ₹6,000

[138:41]

और डूबा जो है उसको आप बैड डे्स की तरह

[138:44]

दिखा दोगे।

[138:47]

कितना डूबा? 40% यानी 4000 और सपना का

[138:52]

अकाउंट बंद कर दो। तो सपना के अकाउंट को

[138:54]

बंद करने के लिए आप सपना का अकाउंट

[138:56]

क्रेडिट कर दोगे ₹10,000 से।

[139:00]

तो सपना के केस में इट वाज़ नॉट अ फुल्ली

[139:03]

बैड डेप्ट। ठीक है जी? पूरी तरह से बैड

[139:05]

डेप्ट नहीं था। थोड़ा सा अमाउंट वो मुझे दे

[139:08]

रही है। 60% उसने दे दिया। ₹4000 मेरे डूब

[139:11]

गए। इसलिए मैंने सपना के अकाउंट को पूरा

[139:12]

बंद कर दिया ₹10,000 से। आई होप आपको ये

[139:14]

समझ में आ रहा होगा। आगे चलते हैं।

[139:19]

18 तारीख

[139:21]

18 तारीख बड़ी इंपॉर्टेंट है सर। आज मैं

[139:24]

जितना भी पैसा डूबा हुआ दिखा रहा हूं, मैं

[139:26]

भगवान से प्रार्थना करता हूं कि मेरे

[139:28]

जितने भी डेटर्स आज बेचारे इनसॉल्वेंट हो

[139:31]

गए हैं साल 6 महीने में या एकद साल में

[139:34]

उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो जाए। उनकी

[139:36]

फाइनेंशियल कंडीशन इंप्रूव हो जाए ताकि

[139:40]

मेरा पैसा वापस आ जाए। समझ रहे हो आप? तो

[139:43]

ऐसे ही बहुत पहले मेरा एक पैसा डूबा था वो

[139:46]

आज मुझे रिकवर हो रहा है। क्या बात है?

[139:48]

बहुत पहले कुछ साल दो साल पहले मैंने एक

[139:51]

पैसा डूबा हुआ घोषित करा था जो मुझे आज

[139:53]

रिकवर हो गया। भगवान की ऐसी कृपा हुई

[139:56]

बांके बिहारी की कि वो मुझे पैसे रिसीव हो

[139:59]

गए। क्या बात है? तो रिसीव्ड ₹700 फ्रॉम

[140:02]

मंजुलिका।

[140:04]

एक तो यह नाम थोड़ा सा मैंने भूतिया किस्म

[140:08]

का लिख दिया यहां पर। कोई बात नहीं। सो

[140:09]

रिसीव्ड ₹700 फ्रॉम मंजुलिका। जानते हो ना

[140:12]

मंजुलिका को भूल भुलैया देखी होगी आपने जी

[140:15]

तो ₹700 मुझे मंजुलिका से रिसीव हो रहे

[140:17]

हैं फॉर अ बैड डेप्ट व्हिच वाज़ रिटर्न ऑफ

[140:20]

2 इयर्स एगो

[140:22]

ये ₹700 मुझे 2 साल पहले लेने थे और उस

[140:25]

वक्त मजुला मंजुलिका की फाइनेंसियल कंडीशन

[140:28]

सही नहीं थी तो उस वक्त मैं ये पैसा बैड

[140:30]

डे की तरह शो कर चुका था जस्ट लाइक दिस

[140:32]

जस्ट लाइक दिस

[140:35]

जस्ट लाइक दिस

[140:38]

तो 2 साल पहले अब मुझे नहीं पता कितने

[140:40]

पैसे लेने थे मुझे मोजलिका उस टाइम पर हो

[140:42]

सकता है 1000 2000 लेने होंगे या जितने भी

[140:45]

लेने होंगे पर जितने भी लेने थे 2000 पहले

[140:47]

वो तो मैं पहले ही डूबा हुआ पैसा घोषित कर

[140:49]

चुका था पर आज वो आई और ₹700 दे गई जितना

[140:54]

भी उससे हुआ वो दे गई ₹700 उसने मुझे आज

[140:56]

दे दिए इसको कैसे रिकॉर्ड कीजिएगा बड़ा

[140:59]

इंपॉर्टेंट है 18 तारीख

[141:06]

सर 18 तारीख को हम कैसे रिकॉर्ड करेंगे

[141:08]

ध्यान से देखो पहली बात तो भैया पैसा आ

[141:10]

रहा है तो कैश या फिर बैंक अकाउंट

[141:14]

को आप डेबिट कर दोगे। कितने रुपए से डेबिट

[141:17]

कर दोगे? जी कैश या बैंक अकाउंट को हम

[141:19]

डेबिट कर देंगे ₹700 से।

[141:24]

क्रेडिट किसे करोगे? सोचने वाली बात है।

[141:27]

बताओ क्रेडिट किसे करोगे?

[141:30]

किसे क्रेडिट करोगे? मंजुलिका को। पर

[141:33]

मंजुलिका को तो आपने 2 साल पहले ही

[141:35]

क्रेडिट कर दिया होगा ना। क्योंकि जब भी

[141:36]

बैड डेट होती है तो हम उस वक्त ही डेटर का

[141:39]

अकाउंट बंद कर देते हैं। तो मैं फिर से

[141:42]

मंजुलिका का अकाउंट क्रेडिट करके क्यों

[141:44]

नए-नए अकाउंट ओपन कर रहा हूं? तो याद रहे

[141:46]

दोस्तों पुराना डूबा हुआ पैसा अगर अब

[141:48]

रिसीव हो जाए। अगर पुराना हुआ पुराना डूबा

[141:51]

हुआ पैसा अब आपको रिकवर हो जाए। बैड डे

[141:54]

अगर रिकवर हो रही है तो बैड डे रिकवर होने

[141:56]

पर पार्टी का नाम कतई नहीं लेना। आपको

[141:58]

एंट्री करनी है। पैसा डेबिट टू बैड डे्स

[142:01]

रिकवर्ड।

[142:04]

पैसा हो जाएगा डेबिट। और यह अकाउंट हो

[142:07]

जाएगा क्रेडिट जिसका नाम है बैड डे्स

[142:09]

रिकवर्ड।

[142:12]

तो दो नए अकाउंट्स भी मैंने आपको सिखा

[142:14]

दिए। बैड डे्स और बैड डे्स रिकवर्ड। यहां

[142:17]

पर आपको ₹700 लिख देने हैं। ये नई चीज थी

[142:20]

जी इस क्वेश्चन के अंदर। वो कह रहा था ना

[142:22]

मैं अफलातून ट्रांजैक्शंस मैं आपको कराने

[142:23]

वाला हूं। तो यही है वो। बैड डे्स और बैड

[142:26]

डे्स रिकवर्ड। यह आपने मेरे साथ सीखी है

[142:28]

इस क्वेश्चन के माध्यम से। चलें आगे।

[142:33]

रुकना नहीं है, थकना नहीं है। रुकना नहीं

[142:36]

है, थकना नहीं है क्योंकि हम सब लोग हैं

[142:38]

अल्फा। कमेंट कर दो फटाफट से अल्फा।

[142:41]

शाबाश।

[142:43]

यह अगला क्वेश्चन है जी। इसमें थोड़े से

[142:46]

चेक के ऊपर आपको ज्ञान देने वाला हूं मैं।

[142:48]

आओ जरा चेक की कहानी समझाता हूं आपको।

[142:52]

देखो भाई कई बार पेमेंट हमें चेक के

[142:56]

माध्यम से मिलती है। कई बार हमें ना चेक

[142:58]

रिसीव होता है।

[143:01]

अब जब चेक रिसीव होता है तो दो बातें

[143:03]

होंगी।

[143:04]

चेक जब रिसीव होगा तो कितनी बातें होंगी?

[143:06]

दो बातें। या तो आप चेक को सेम डेट पे जमा

[143:09]

करा दोगे या बाद में जमा कराओगे। यही तो

[143:11]

होता है। तो या तो चेक हम डिपॉजिट कर देते

[143:14]

हैं सेम डेट पे।

[143:17]

यानी जिस दिन मिला उसी दिन डिपॉजिट कर

[143:19]

दिया। वरना हम चेक को डिपॉजिट करते हैं

[143:22]

बाद में।

[143:25]

अच्छा क्वेश्चन में जब गिवन नहीं होता ना

[143:27]

कि जमा कब हुआ है चेक? जिस दिन मिला उस

[143:29]

दिन जमा हुआ या बाद में तो हम मान लेते

[143:31]

हैं जिस दिन चेक मिला उसी दिन जमा करा

[143:33]

दिया होगा। यानी ये

[143:35]

ठीक है जी।

[143:38]

चेक के केस में दो बातें हो गई। चेक या तो

[143:41]

आप सेम डे पे जमा करा दोगे या बाद में जमा

[143:44]

कराओगे। एंट्री में फर्क आएगा दोस्तों।

[143:46]

अगर जिस दिन चेक मिला उसी दिन जमा करा

[143:48]

दिया तो आप सीधा-सीधा बैंक अकाउंट को कर

[143:51]

दोगे डेबिट

[143:53]

और जो व्यक्ति आपको चेक देकर गया है

[143:56]

पार्टी

[143:58]

यानी आपका डेटर ऑफ कोर्स डेटर ही देगा

[144:00]

आपको चेक उसको आप क्रेडिट कर दोगे लेकिन

[144:04]

अगर चेक आया आज और जमा हुआ बाद में चेक

[144:08]

आया आज जमा करने का आपके पास टाइम ही नहीं

[144:11]

था पैसा ही इतना है आपके पास तो आज चेक

[144:14]

आया आप ले बैठ गए

[144:16]

आपने कहा एक हफ्ते बाद जाऊंगा जमा कराने

[144:18]

क्योंकि मेरे को और भी चेकक्स जमा कराने

[144:19]

जाना है तो एक हफ्ते बाद जाऊंगा। तो

[144:22]

क्योंकि आज मेरे पास चेक आया पर आज तो

[144:24]

मैंने उसको जमा ही नहीं कराया तो क्या आज

[144:26]

कोई जनरल एंट्री नहीं होगी क्या? गलत बात

[144:28]

हो जाएगी फिर तो ये तो अगर चेक बाद में

[144:31]

जमा कराने वाले हो तो एंट्री होगी। जिस

[144:33]

दिन आया उस दिन आप बैंक अकाउंट का नाम

[144:36]

नहीं ले सकते। आप उस दिन लिखोगे चेकक्स इन

[144:38]

हैंड।

[144:40]

चेकक्स इन हैंड का अकाउंट हो जाएगा डेबिट

[144:42]

और पार्टी का अकाउंट हो जाएगा क्रेडिट।

[144:45]

और फिर बाद में जब यह चेक आप जमा करा दोगे

[144:49]

उस वक्त उस दिन आप फिर बैंक अकाउंट को कर

[144:51]

दोगे डेबिट

[144:53]

और इस फदू एसेट को आप खत्म कर दोगे

[144:56]

क्रेडिट करके तो टू चेकक्स इन हैंड अकाउंट

[145:01]

खत्म हो गई जी बात

[145:05]

सपोज़ अगर एक चेक 15 तारीख को आपको मिला और

[145:09]

15 तारीख को ही आपने जमा करा दिया तो यह

[145:10]

एंट्री कर दो 15 तारीख को और ऐश करो लेकिन

[145:13]

अगर कोई चेक आपको मिला 15 तारीख को जमा

[145:16]

कराया आपने 20 तारीख को तो 15 तारीख को यह

[145:18]

एंट्री होगी। 20 तारीख को यह एंट्री होगी।

[145:22]

15 तारीख को बैंक का नाम क्यों नहीं लिया?

[145:24]

क्योंकि भाई चेक हाथ में है। अभी तो बैंक

[145:26]

गए ही नहीं हम तो बैंक बैलेंस कैसे बढ़

[145:28]

जाएगा?

[145:30]

हालांकि बैंक बैलेंस तो चेक जमा कराने के

[145:32]

बाद भी नहीं बढ़ता। यानी 20 तारीख को भी

[145:35]

मैं दिखा जरूर रहा हूं। बैंक अकाउंट डेबिट

[145:36]

हो रहा है। लेकिन 20 तारीख को भी बैंक

[145:38]

अकाउंट एकदम से डेबिट नहीं हो जाएगा। बट

[145:39]

मैं उतना इंतजार नहीं करता। मैं बैंक

[145:41]

अकाउंट को डेबिट तब दिखा दूंगा जब एटलीस्ट

[145:43]

मैंने चेक को जमा करा दिया हो। ठीक है जी?

[145:46]

तो ये है जी चेक की कहानी। अब क्वेश्चन

[145:48]

करने में मजा आएगा। कहां गया क्वेश्चन? ये

[145:50]

रहा क्वेश्चन।

[145:54]

पास नेसेसरी जर्नल एंट्रीज फॉर द फॉलोइंग

[145:57]

ट्रांजैक्शंस। इन सभी ट्रांजैक्शंस के ऊपर

[146:00]

आपको जर्नल एंट्रीज पास करनी है। तीन चार

[146:02]

छ और आठ। चार दिन की ट्रांजैक्शंस हैं।

[146:05]

सोल्ड गुड्स टू राहुल 50,000 20% ट्रेड

[146:08]

डिस्काउंट, 5% कैश डिस्काउंट, फुल अमाउंट

[146:10]

रिसीव्ड बाय चेक। पूरा पैसा उसने दिया है

[146:13]

मुझे चेक से। तो उसको कैश डिस्काउंट

[146:15]

मिलेगा कि नहीं? मिलेगा। रिकॉर्ड करते हैं

[146:18]

इसको।

[146:22]

जून थर्ड को रिकॉर्ड करते हैं। सर देखो

[146:24]

चेक मिला आपको जून की 3 तारीख को। अब एक

[146:28]

बात बताओ। यह जून की 3 तारीख को राहुल

[146:31]

जितना भी चेक का अमाउंट बनेगा आई डोंट नो।

[146:33]

पर जो भी चेक का अमाउंट बना उसने आपको चेक

[146:35]

दे दिया। आगे क्वेश्चन में कहीं पर भी ये

[146:38]

नहीं पता मुझे कि राहुल वाला चेक मैंने

[146:40]

जमा कब कराया।

[146:42]

पूरे क्वेश्चन खत्म हो गया। लेकिन मुझे ये

[146:44]

फैक्ट ही नहीं पता कि राहुल वाला चेक जो

[146:47]

मुझे मिला है 3 जून को वो जमा कब हुआ है।

[146:51]

तो ऐसे में मैं मान लूंगा कि जिस दिन मुझे

[146:54]

चेक मिला उसी दिन मैंने जमा करा दिया

[146:56]

होगा। इट इज डीम्ड दैट चेक हैज़ बीन

[146:59]

डिपॉजिटेड एज ऑन द डेट व्हेन द चेक वाज़

[147:02]

रिसीव्ड। ओके? तो पहले तो देखते हैं राहुल

[147:04]

हमें कितनी पेमेंट देगा। सर 500 के ऊपर

[147:07]

20% अप्लाई करो ना। कितना हुआ? 10,000

[147:10]

यानी गुड्स आपने राहुल के लिए ₹4,00 के

[147:12]

लगा दिए। तो पहले तो ₹4,00 जाके डाल दो

[147:14]

सेल्स अकाउंट में। क्लेश खत्म करो सेल्स

[147:16]

अकाउंट का।

[147:19]

ठीक है जी? ₹4,000 आपने लिख दिए सेल्स

[147:21]

अकाउंट के अंदर।

[147:23]

₹4,00 भी हम उससे लेंगे नहीं। हम उसे

[147:25]

कहेंगे चल यार 5% और कम कर दे तू। तो अब

[147:28]

कैश डिस्काउंट जो आप उसको दोगे वो ₹400 के

[147:31]

ऊपर दोगे 5% 4 * 5 20 ₹2000 डिस्काउंट

[147:35]

आपने दे दिया जिसको हम बोलते हैं

[147:36]

डिस्काउंट अलाउड।

[147:40]

डिस्काउंट अलाउड में हम दिखा देंगे जी

[147:42]

₹2,000 डेबिट में ऑफ कोर्स क्योंकि खर्चा

[147:44]

है हमारा और ₹38,000 हम कहेंगे लाविला

[147:47]

₹38,000 का चेक दे दे। सिंपल ₹00 के गुड्स

[147:51]

थे 40 के मैंने लगा दिए। 40 पे भी मैंने

[147:54]

आपको 5% का कैश डिस्काउंट दे दिया। अब आप

[147:57]

मुझे 38 तो दे दो यार। 38,000 का राहुल ने

[148:00]

मुझे चेक दे दिया। तो चेक के केस में दो

[148:04]

बातें होती हैं। या तो आप सेम डे डिपॉजिट

[148:06]

करते हो या बाद में। मेरे केस में सेम डे

[148:09]

डिपॉजिट हो गया। ऐसा मुझे मानना पड़ेगा।

[148:12]

तो सेम डे के केस में सीधा-सीधा बैंक

[148:14]

अकाउंट डेबिट और पार्टी का अकाउंट हो

[148:16]

जाएगा क्रेडिट। पर पार्टी का अकाउंट अभी

[148:18]

क्रेडिट नहीं होगा दोस्तों।

[148:20]

क्योंकि यह मेरा कस्टमर मुझे हाथों हाथ

[148:23]

चेक देकर गया है। ठीक है? अगर बाद में चेक

[148:25]

देता तो फिर डेटर का अकाउंट क्लोज होता।

[148:27]

तो यहां पर सीधा-सीधा बैंक अकाउंट डेबिट

[148:29]

हो जाएगा।

[148:32]

₹38,000 से।

[148:35]

ठीक है जी? अब आगे चलते हैं। जून 4

[148:43]

और जून 6

[148:47]

और जून 8। अब यह करना है जरा हमें। अच्छा

[148:50]

एक और चीज सॉरी सॉरी सॉरी 3 तारीख को हम

[148:54]

बैंक अकाउंट में नहीं लिखेंगे। असल में यह

[148:55]

पॉइंट मैंने पढ़ा नहीं।

[148:58]

राहुल वाला चेक हमें गिवन है एक्चुअली कि

[149:01]

हमने 6 तारीख को जमा कराया राहुल का चेक।

[149:03]

तो फिर तीन और 6 तारीख को दो बार हमें

[149:05]

ट्रांजैक्शन करनी होगी। 3 तारीख को उस केस

[149:07]

में हम इसे बोलेंगे चेकक्स इन हैंड।

[149:12]

ठीक है? और बाद में जब जमा कराएंगे तो फिर

[149:14]

बैंक अकाउंट। अच्छा जी। जून की 4 तारीख को

[149:17]

हमें परम से पेमेंट रिसीव हो रही है चेक

[149:19]

से।

[149:25]

तो परम जो आपको पैसे दे रहा है इस बात को

[149:28]

जरा ध्यान से पकड़ो। अच्छा परम वाली जो

[149:30]

ट्रांजैक्शन है वो 4 तारीख को भी और 8

[149:32]

तारीख को भी है। 8 तारीख को तो चलो डिसऑनर

[149:34]

है। सिर्फ 4 तारीख वाली ट्रांजैक्शन देखो

[149:36]

आप। सिर्फ और सिर्फ परम एक व्यक्ति है जो

[149:39]

आपको ₹2000 चेक से देकर गया है। क्यों

[149:42]

देकर गया है?

[149:44]

आपका डेटर लगता होगा वह रिश्ते में तभी

[149:47]

आपको देकर गया है पैसे वह तो जी ₹00 परम

[149:51]

आपको चेक से देकर गया और यह गिवन नहीं है

[149:54]

कि परम वाला चेक जमा कब हुआ है क्योंकि 8

[149:56]

तारीख को तो परम वाला चेक डिसऑनर ही हो

[149:57]

गया है बाउंस हो गया है वो तो 8 तारीख को

[149:59]

तो छोड़ ही दो आप तो चकि गिवन नहीं है 4

[150:02]

तारीख वाला चेक जमा कब हुआ है तो सेम डेट

[150:03]

पर जमा हो गया होगा तो जून 4

[150:10]

जून 4 में आपको

[150:14]

₹00 चेक आया। सेम डेट पर जमा हो गया। परम

[150:18]

ने यह आपको चेक दिया है। तो आप सीधा-सीधा

[150:20]

बैंक अकाउंट को करेंगे डेबिट

[150:26]

और पार्टी को यानी परम का अकाउंट कर देंगे

[150:28]

आप क्रेडिट

[150:30]

₹20,000 से।

[150:33]

ठीक है जी? जैसा कि मैंने आपको नोट्स में

[150:35]

भी यहां पर बताया था। यह डिपॉजिट ऑन सेम

[150:38]

डे बाद में डिपॉजिट अगर हुआ है। अच्छा बाद

[150:41]

में कौन सा चेक है जो बाद में डिपॉजिट हुआ

[150:42]

है वह है 3 तारीख वाला। 3 तारीख वाला चेक

[150:45]

एक्चुअली आपने 6 तारीख को जमा कराया है।

[150:47]

इसलिए 3 तारीख को आप बोलोगे चेक इन हैंड

[150:49]

और 6 तारीख को जब आप इसे जमा करा दोगे

[150:54]

तो फिर बैंक अकाउंट हो जाएगा डेबिट।

[150:59]

और बेटा चेकक्स इन हैंड।

[151:03]

चेकक्स इन हैंड का अकाउंट हो जाएगा

[151:05]

क्रेडिट कितने रुपए से जी

[151:08]

₹38,000 से

[151:13]

और अब लास्ट ट्रांजैक्शन वेरी वेरीेंट

[151:16]

8 तारीख परम का चेक हो गया डिसऑनर

[151:20]

टेक्निकल प्रॉब्लम की वजह से 8 तारीख को।

[151:24]

देखो दोस्तों 4 तारीख को आपको परम ने चेक

[151:27]

दिया था ₹00 का जो कि आपने जमा भी करा

[151:30]

दिया। आप बड़े खुश हुए। आपको तो लगा कि

[151:32]

भाई बैंक में पैसा आ ही जाएगा। आपने बैंक

[151:35]

अकाउंट को डेबिट कर दिया। 8 तारीख को पता

[151:37]

चला चेक तो बाउंस हो गया। बैंक वालों ने

[151:39]

चेक वापस भेज दिया कि भैया इसमें परम ने

[151:41]

चेक सही से नहीं करे। या फिर परम जितने का

[151:44]

चेक देता फिर रहा है उतने तो अकाउंट में

[151:45]

पैसे भी नहीं है उसके। या फिर उसने डेट

[151:47]

गलत डाल दी या उसने ओवराइटिंग कर दी। कुछ

[151:49]

भी प्रॉब्लम की वजह से चेक वापस आ सकता

[151:51]

है। तो एक बार वो पेमेंट जो आपने बैंक में

[151:54]

दिखा दी और बाद में आपको पता चला कि वो

[151:56]

पेमेंट तो बैंक में आई नहीं है। तो रिवर्स

[151:58]

करना पड़ेगा ना। तो 8 तारीख को आप क्या

[152:00]

करोगे? बैंक अकाउंट को क्रेडिट कर दोगे।

[152:04]

बैंक अकाउंट को क्रेडिट कर दोगे ₹00 से।

[152:09]

बैंक अकाउंट को क्रेडिट कर दोगे ₹00 से।

[152:12]

और परम जो कि आपका डेटर था बट आपने उसका

[152:14]

अकाउंट क्लोज कर दिया था। अब वापस उसका

[152:16]

अकाउंट ओपन कर दो आप। तो परम का अकाउंट

[152:20]

वापस से आप डेबिट कर दोगे बेटा।

[152:23]

₹00 से। परम का अकाउंट वापस से डेबिट हो

[152:27]

जाएगा। ₹00 से। यह थी हमारी सारी चेक से

[152:30]

जुड़ी हुई, बैंक से जुड़ी हुई

[152:32]

ट्रांजैक्शंस। ऑलराइट। चलते हैं अब आगे।

[152:41]

माय डियर क्यूटीज ये जो क्वेश्चन मैंने

[152:43]

आपके सामने लगाया है इस क्वेश्चन के अंदर

[152:45]

आप देख सकते हैं। जनरलाइज़ द फॉलोइंग

[152:47]

ट्रांजैक्शंस इन द बुक्स ऑफ दुर्गेश नाई।

[152:51]

सो इन सब ट्रांजैक्शंस पे अगर आप नजर

[152:54]

डालेंगे तो काफी बार ना आपको गुड्स

[152:56]

मिलेंगे। है ना? गुड्स कॉमन शब्द है इस इन

[152:58]

सभी ट्रांजैक्शंस में गुड्स गुड्स गुड्स

[153:01]

गुड्स गुड्स गुड्स गुड्स अब तक आपने पढ़ा

[153:04]

ना गुड्स को हम खरीदते हैं और बेचते हैं

[153:05]

ज्यादा खरीदा हुआ माल हम वापस भी कर सकते

[153:07]

हैं है ना परचेस रिटर्न लेकिन गुड्स के

[153:09]

साथ इतना कुछ भी हो सकता है क्या जी हां

[153:11]

बिल्कुल तो अभी के अभी पेन लेकर बैठो और

[153:15]

जो भी मैं लिखवा रहा हूं उसको बहुत ध्यान

[153:17]

से समझो समझने के बाद नोट करो गुड्स से

[153:21]

जुड़ी हुई ट्रांजैक्शंस ट्रांजैक्शंस

[153:23]

रिलेटिंग टू गुड्स बहुत इंपॉर्टेंट टॉपिक

[153:27]

ट्रांजैक्शंस

[153:29]

रिलेटेड टू गुड्स। गुड्स से जुड़ी हुई

[153:34]

ट्रांजैक्शंस। गुड्स के साथ हम क्या-क्या

[153:36]

कर सकते हैं? मैं बताता हूं। भाई आया है

[153:39]

सिखा के जाएगा। बेटा गुड्स को आप खरीद

[153:42]

सकते हो, बेच सकते हो। खरीदा हुआ माल वापस

[153:44]

कर सकते हो। तुम्हारा कस्टमर भी तुम्हें

[153:46]

वापस कर सकता है। इसके अलावा गुड्स चोरी

[153:49]

हो सकते हैं, जल सकते हैं। गुड्स का

[153:50]

एक्सीडेंट हो सकता है। गुड्स खो सकते हैं

[153:53]

रास्ते में। राइट? इसके अलावा गुड्स तुम

[153:56]

अपने स्टाफ मेंबर्स को दे सकते हो। आप

[153:58]

गुड्स किसी गरीब को चैरिटी डोनेशन में दे

[154:00]

सकते हो। किसी एनजीओ को दे सकते हो। गुड्स

[154:03]

का इस्तेमाल करके कोई फिक्स्ड एसेट आप

[154:05]

क्रिएट कर सकते हो। गुड्स अपने एम्प्लाइज

[154:07]

में बांट सकते हो आप। तो गुड्स के साथ

[154:09]

बहुत कुछ होता है सर। गुड्स हम कई बार

[154:10]

फ्री सैंपल्स के तौर पर भी बांट देते हैं

[154:12]

एडवर्टाइजमेंट करने के लिए। तो गुड्स के

[154:15]

साथ काफी कुछ होता है। अब ये सब है

[154:17]

अफलातून ट्रांजैक्शंस। जो मैंने उस स्लाइड

[154:20]

में स्लाइड नंबर टू में जब मैंने बताया था

[154:22]

ना कि आज का टारगेट क्या रहने वाला है?

[154:24]

मैंने कहा था कुछ अफलातून ट्रांजैक्शंस हम

[154:26]

पढ़ेंगे। यार जर्नल की अगर मैं एक वीडियो

[154:28]

बनाऊं और ईजी-इजी ट्रांजैक्शंस करा के घर

[154:30]

निकल लूं और आपको बोलूं जी हो गया जर्नल

[154:32]

मेरी तरफ से। क्या फायदा अगर वो आपके

[154:34]

एग्जाम में आएगी ना? मुद्दा क्या है?

[154:36]

मुद्दा ये है कि एग्जाम अच्छा अच्छे अच्छी

[154:39]

तरीके से हो जाए आपका। तो ट्रांजैक्शंस

[154:41]

रिलेटिंग टू गुड्स में सबसे पहले मैं आपको

[154:44]

बताना चाहूंगा कि भैया एक तो आप गुड्स

[154:47]

रिटर्न कर सकते हो।

[154:50]

आप गुड्स रिटर्न कर सकते हो। अच्छा जो कुछ

[154:53]

भी मैं ये लिखवा रहा हूं ना इसके वैसे तो

[154:55]

आपको शायद पीपीटी या पीडीएफ के फॉर्म में

[154:58]

नोट्स मिल भी जाएंगे। हमारा जो ये फ्री

[155:00]

कॉमर्स बैच है पेस कॉमर्स बैच ये आपको मिल

[155:03]

जाएगा हमारी एप्लीकेशन पर और वहां पर आपको

[155:05]

ये नोट्स मैं अपलोड भी करवा दूंगा। अगर

[155:07]

कोई समस्या आए कमेंट सेक्शन में हमें बता

[155:09]

देना। कोई कोई टेंशन वाली बात नहीं है।

[155:10]

चिल है माहौल। ओके? सो गुड्स एंड रिटर्न

[155:13]

हम कर सकते हैं। रिटर्न ऑफ गुड्स। अब देखो

[155:14]

गुड्स रिटर्न हम दो तरीके से करते हैं। एक

[155:16]

तो होता है बेटा परचेस रिटर्न।

[155:20]

एक होता है परचेजेस रिटर्न, दूसरा होता है

[155:23]

सेल्स रिटर्न। एक होता है परचेजेस रिटर्न,

[155:26]

दूसरा होता है सेल्स रिटर्न। अब इसका मतलब

[155:28]

क्या है? समझो। बेटा, खरीदा हुआ माल अगर

[155:31]

आप अपने सप्लायर को वापस कर रहे हो किसी

[155:33]

भी रीज़न से, उसको हम बोलते हैं परचेजेस

[155:35]

रिटर्न। और अगर बेचा हुआ माल आपका, कस्टमर

[155:38]

आपको वापस कर रहा है किसी भी रीज़न से,

[155:40]

उसको हम बोलते हैं सेल्स रिटर्न। ठीक है

[155:42]

जी। अच्छा, परचेस रिटर्न का एक और नाम है

[155:45]

बेटा। इसको हम रिटर्न आउटवर्ड्स भी बोलते

[155:47]

हैं। परचेस रिटर्न इज़ आल्सो कॉल्ड रिटर्न

[155:49]

आउटवर्ड्स। एंड लाइक वाइज़ सेल्स रिटर्न इज़

[155:52]

आल्सो नोन ऐज़ रिटर्न इनवर्ड्स।

[155:57]

रिटर्न इनवर्ड्स।

[155:59]

समझ रहे हो आप मेरी बात? सेल्स रिटर्न इज़

[156:01]

आल्सो कॉल्ड रिटर्न इनवर्ड्स। तो ये थी ये

[156:03]

था जी अब तक का टॉपिक। अब इसको कैसे

[156:05]

रिकॉर्ड करें? है ना? हमारा कस्टमर हमें

[156:07]

माल वापस कर दे या हम अपने सप्लायर को माल

[156:10]

वापस कर दे तो कैसे उसको रिकॉर्ड करें? ये

[156:12]

भी मैं आपको बता देता हूं। देखो भैया

[156:15]

अगर तो परचेस रिटर्न हो रहा है। अगर

[156:20]

परचेजेस रिटर्न हो रहा है तो एंट्री क्या

[156:24]

होगी? ध्यान से सुनना। अगर आप अपने

[156:26]

क्रेडिटर को माल वापस कर रहे हो तो आपकी

[156:29]

लायबिलिटी अपने क्रेडिटर के प्रति कम नहीं

[156:31]

हो जाएगी। और लायबिलिटीज जब भी कम होती है

[156:34]

तो डेबिट होती है। इसलिए आपके क्रेडिटर का

[156:37]

अकाउंट या फिर आपके सप्लायर का अकाउंट

[156:42]

डेबिट हो जाएगा दोस्तों।

[156:44]

एंड जो आपने माल वापस करा जिसको आप बोलते

[156:48]

हैं परचेजेस रिटर्न तो परचेजेस रिटर्न का

[156:51]

अकाउंट क्रेडिट हो जाएगा। खत्म हो गई बात।

[156:54]

सर मेरा मन कर रहा है परचेस रिटर्न की जगह

[156:56]

रिटर्न आउटवर्ड्स लिखने का लिख सकता हूं।

[156:58]

हां बेटा लिख सकता है। क्यूरी पाई। ठीक

[157:01]

है? सो ये था जी परचेस रिटर्न की एंट्री।

[157:03]

परचेस रिटर्न की एंट्री सिंपल है। अपने

[157:05]

क्रेडिटर को या सप्लायर को जिससे खरीदा था

[157:07]

उसे कर दो डेबिट और परचेस रिटर्न को

[157:09]

क्रेडिट करो। अनलाइक परचेजेस अकाउंट परचेस

[157:13]

रिटर्न अकाउंट इज़ ओपन ऑन द क्रेडिट साइड।

[157:16]

परचेजेस जब होती थी गुड्स की तो परचेस

[157:18]

अकाउंट होता था और वो भी डेबिट होता था।

[157:20]

माल वापस करोगे तो परचेस रिटर्न अकाउंट

[157:22]

होगा वो भी क्रेडिट होगा। अब सेल्स रिटर्न

[157:25]

की एंट्री तुम बताओ। जल्दी बताओ

[157:26]

जल्दी-जल्दी जल्दी।

[157:29]

सेल्स रिटर्न

[157:32]

सेल्स रिटर्न कौन करेगा? सेल तुमने करी

[157:34]

थी। तो सेल रिटर्न भी तुम ही करोगे क्या?

[157:36]

नहीं। सेल हमने करी थी तो रिटर्न हमारा

[157:39]

कस्टमर करेगा। हमारा कस्टमर मतलब हमारा

[157:41]

डेटर। डेटर का जब अकाउंट ओपन हुआ था तो

[157:43]

डेटर डेबिट हुआ था। लेकिन अब अगर वो मुझे

[157:45]

माल वापस कर रहा है तो मेरा डेटर कम हो

[157:48]

जाएगा। यानी डेटर का अकाउंट क्रेडिट हो

[157:50]

जाएगा। तो दोस्तों सेल्स रिटर्न की एंट्री

[157:53]

में

[157:55]

सेल्स रिटर्न की एंट्री में सेल्स रिटर्न

[157:57]

अकाउंट डेबिट हो जाता है

[158:02]

और जो बंदा आपको माल वापस कर रहा है यानी

[158:05]

आपका डेटर या कस्टमर उसका अकाउंट क्रेडिट

[158:09]

हो जाता है। एज सिंपल एज दैट। सेल जब हुई

[158:13]

थी, सेल्स अकाउंट क्रेडिट हुआ था। तो भैया

[158:16]

सेल रिटर्न जब आएगी आपके पास तो सेल्स

[158:18]

रिटर्न अकाउंट होगा और वो भी डेबिट होगा।

[158:20]

क्रेडिट नहीं होगा। यह है जी दोस्तों

[158:23]

गुड्स के साथ ये वापसी वाला गेम और

[158:25]

क्या-क्या होता है गुड्स के साथ वो भी मैं

[158:26]

आपको बताना चाहता हूं। आइए जी देखिए गुड्स

[158:30]

के साथ और क्या-क्या होता है।

[158:34]

तो ये आप देख पा रहे हैं ना? हमने गुड्स

[158:37]

खरीदे। फिर कैश विथड्रॉ कर लिया। फिर

[158:39]

गुड्स विथड्रॉ कर लिए वगैरह वगैरह वगैरह।

[158:41]

तो इन सभी केसेस में क्या होता है वो मैं

[158:43]

इसी क्वेश्चन के माध्यम से आपको बताना

[158:45]

चाहता हूं। ठीक है? वरना नोट मेकिंग की

[158:47]

प्रोसेस में क्या है? वीडियो बोरिंग हो

[158:48]

जाएगी आपके लिए। जब कह दिया भाई ने नोट्स

[158:51]

आपको मिल जाएंगे ऐप पर तो मिल जाएंगे। कोई

[158:53]

समस्या है कमेंट सेक्शन में बता देना भाई।

[158:55]

ठीक है ना? चलो जी। ये देख लो आप।

[158:58]

2025 में मई की 3 तारीख को सबसे पहले

[159:00]

गुड्स खरीद लो। चुन्नू से ₹1 लाख पेमेंट

[159:03]

चेक से हो रही है। है ना जी?

[159:06]

2025

[159:08]

मई की 3 तारीख। तीन ही थी ना? हां भाई 3

[159:11]

तारीख थी। गुड्स खरीदने हैं मुझे चुन्नू

[159:13]

से। पेमेंट करनी है मुझे चेक से ₹1 लाख

[159:15]

की। एंट्री बोलो जल्दी फटाफट। एंट्री हो

[159:18]

जाएगी परचेजेस अकाउंट डेबिट

[159:22]

टू चुन्नू।

[159:26]

सॉरी चुन्नू नहीं। पेमेंट तो कर ही दी ना

[159:29]

मैंने चेक से। तो बैंक अकाउंट क्रेडिट हो

[159:31]

जाएगा। ₹1 लाख से। ये हो गई जी गुड्स

[159:35]

खरीदने की एंट्री। बहुत ही सिंपल है। है

[159:37]

ना? है ना? है ना? बहुत सिंपल है ना? अब

[159:39]

आगे चलते हैं। 7 तारीख को मैंने विथड्रॉ

[159:41]

कर लिया। विथड्रॉ दो बार आ रहा है।

[159:43]

विथड्रॉ करने का मतलब ड्रॉइंग होता है

[159:45]

बेटा। बिज़नेस में कुछ भी इन्वेस्ट करने को

[159:47]

कहते हो कैपिटल। बिज़नेस में से कुछ भी

[159:49]

निकाल के घर लेके चले जाओगे। उसको हम

[159:51]

बोलते हैं ड्रॉइंग्स। तो मैंने अभी फिलहाल

[159:54]

विथड्रॉ करा कैश पर्सनल यूज़ के लिए। घर पे

[159:57]

मेरी बीवी चिल्ला रही थी। मुझे पैसे चाहिए

[159:59]

शॉपिंग करनी है। मैंने कहा ठीक है। ठीक है

[160:01]

भाग्यवान। मैं आपको कैश ला के दे देता हूं

[160:04]

दुकान से। तो मैंने कैश निकाल लिया पर्सनल

[160:06]

यूज के लिए ₹5000 7 तारीख को।

[160:09]

ये समझने वाली बात है बच्चों। 7 तारीख को

[160:12]

क्या एंट्री होगी? जी भैया देखो एक चीज

[160:17]

पकी प्रॉमिस करो मुझे कि याद रखोगे जब भी

[160:20]

बिनेस में से कुछ भी निकालो आप। बिज़नेस

[160:22]

में से कुछ भी निकाल सकते हो आप घर ले

[160:24]

जाने के लिए। कैश बिज़नेस के बैंक अकाउंट

[160:26]

में से पैसा निकाल सकते हो। बिज़नेस में से

[160:28]

कोई एसेट निकाल सकते हो। बिज़नेस में से

[160:30]

गुड्स निकाल सकते हो। आप कुछ भी निकाल

[160:32]

सकते हो बिज़नेस में से। दोस्तों कुछ भी

[160:34]

निकालना बिज़नेस में से उसको ड्रॉइंग कहना

[160:36]

और ड्रॉइंग को हमेशा डेबिट करना।

[160:38]

रूल भी यही कहता है ड्रॉइंग्स का अकाउंट

[160:40]

बढ़ने पर डेबिट होता है। तो ड्रॉइंग्स का

[160:43]

अकाउंट हो जाएगा डेबिट। ठीक है? कितने

[160:47]

रुपए के कितने रुपए कैश निकाला उसने?

[160:49]

₹5,000। ₹5,000 की ड्रॉइंग हो गई दोस्तों।

[160:52]

अब ये ड्रॉइंग की वजह से आपको नहीं लगता

[160:54]

हमारे बिज़नेस की एक एसेट कम हो गई। कौन

[160:56]

सी? कैश। और एसेट जब भी कम होती है तो

[160:58]

क्या होती है? क्रेडिट। यस। सो कैश अकाउंट

[161:00]

हो जाएगा क्रेडिट। ड्रॉइंग्स अकाउंट डेबिट

[161:03]

टू कैश अकाउंट ₹5,000 खत्म हो गई जी बात।

[161:07]

अब आगे चलते हैं। अगली ट्रांजैक्शन हुई है

[161:10]

दोस्तों 9 तारीख को। फिर इसने ड्रॉइंग करी

[161:13]

है। लेकिन इस बार उसने गुड्स निकाले हैं

[161:14]

डोमेस्टिक कंसमशन के लिए ₹2000 के।

[161:16]

डोमेस्टिक कंसमशन मतलब घर के इस्तेमाल के

[161:18]

लिए उसने बिज़नेस में से गुड्स निकाले हैं।

[161:20]

अगर मेरी दुकान कपड़ा बेचने की है, कपड़े

[161:23]

गारमेंट्स क्लोथ्स की मेरी दुकान है। तो

[161:25]

यार मेरे घर पे जो मेरी फैमिली है, वो भी

[161:27]

मेरी दुकान का प्रोडक्ट यूज़ कर सकती है

[161:29]

ना? और अगर मैंने सपोज अपनी दुकान में से

[161:32]

एक टीशर्ट निकाली, जींस का निकाली और

[161:35]

वगैरह वगैरह दो चार कपड़े निकाले और मेरे

[161:37]

घर के इस्तेमाल के लिए सपोज मेरे फादर को

[161:39]

यूज़ करना है। मैंने अपने फादर के लिए घर

[161:40]

ले गया। मैंने ड्रॉइंग कर ली। मैंने कहा

[161:42]

लो जी पापा आपके लिए। पैसा लूंगा क्या मैं

[161:44]

उनसे। बहुत मारेंगे मुझे। उन्होंने ही

[161:47]

कैपिटल दी थी बिज़नेस के लिए। तो ड्राइंग

[161:51]

किसी भी फॉर्म में हो सकती है। ड्राइंग के

[161:53]

तौर पर आप कैश भी निकाल सकते हो। गल्ले

[161:55]

में से पैसा निकाल के घर ले जा सकते हो।

[161:58]

वरना आप गुड्स भी निकाल सकते हो। इस बार

[161:59]

हमने गुड्स निकाले।

[162:02]

अब गुड्स निकाले ₹2000 के। मैंने आपको

[162:05]

पहले ही बता दिया था। आपने निकाला कुछ भी

[162:08]

हो।

[162:10]

आपने निकाला कुछ भी हो। ड्रॉइंग अकाउंट तो

[162:13]

डेबिट ही होगा ना ₹20,000 से। क्योंकि

[162:16]

ड्रॉइंग तो हुई है। तो ड्रॉइंग्स का

[162:18]

अकाउंट फिर से डेबिट होगा।

[162:21]

₹2000 से बेटा। अब आपको क्रेडिट उस चीज को

[162:25]

करना है जो चीज़ बिज़नेस में से गई है। क्या

[162:27]

गया है बिज़नेस में से? पहले कैश गया था 7

[162:30]

तारीख वाली ड्रॉइंग में और अब 9 तारीख

[162:32]

वाली ड्रॉइंग में बिजनेस में से क्या गया

[162:34]

है? गुड्स।

[162:36]

तो किसका अकाउंट क्रेडिट होगा? गुड्स का।

[162:40]

लेकिन गुड्स का अकाउंट तो हम कभी ओपन ही

[162:42]

नहीं करते। है ना? गुड्स की जगह पर कौन सा

[162:44]

अकाउंट डेबिट करते हैं हम खरीदते वक्त?

[162:46]

परचेजेस। तो परचेजेस अकाउंट को खाली करने

[162:50]

के लिए परचेजेस अकाउंट को क्रेडिट कर देना

[162:52]

है। खत्म। तो गुड्स अगर आपके पास से जा

[162:55]

रहे हैं किसी भी कारण से

[162:58]

सेल होने पर तो सेल्स अकाउंट ही ओपन होता

[163:00]

है। वह तो पहले पता है आपको। है ना? ऐसे

[163:02]

ही परचेस रिटर्न करने पर परचेस रिटर्न

[163:04]

अकाउंट होता है। लेकिन उसके अलावा अगर

[163:06]

किसी रीज़न से गुड्स आपके पास से जा रहे

[163:08]

हैं अदर देन सेल या अदर देन परचेस रिटर्न

[163:10]

तो आपको क्या करना है? परचेजेस अकाउंट को

[163:13]

ही उठा के क्रेडिट कर देना है। खाली कर

[163:15]

देना है। परचेजेस अकाउंट ₹2000 से। बात

[163:18]

खत्म हो गई।

[163:20]

प्रॉमिस करो कि आज के बाद अगर ड्रॉइंग

[163:22]

होगी और ड्रॉइंग में अगर गुड्स निकालेंगे

[163:24]

हम बिनेस में से तो ड्रॉइंग अकाउंट होगा

[163:27]

डेबिट और परचेजेस अकाउंट होगा क्रेडिट।

[163:29]

सिंपल हो गया। इजी हो गया। चलें आगे। चलो

[163:32]

भाई आगे चलते हैं।

[163:36]

आगे चलते हैं। अब ये 12 से लेकर 24 तारीख

[163:39]

तक गुड्स के साथ अलग-अलग अलग-अलग गेम हो

[163:42]

रही है। 12 तारीख को हमने गुड्स निकाले।

[163:44]

चैरिटी में दे दिए। 15 तारीख को हमने

[163:47]

गुड्स निकाले। ₹1000 के स्टाफ मेंबर्स में

[163:49]

बांट दिए। कितने बड़े दिल वाले हैं हम। है

[163:51]

ना? 18 तारीख को गुड्स निकाले। फ्री सैंपल

[163:53]

के तौर पर बांट दिए। 21 तारीख को गुड्स

[163:56]

निकाले और उससे ऑफिस का फर्नीचर बना डाला

[163:58]

और 24 तारीख को गुड्स चोरी कर लिए एक

[164:01]

एंप्लई ने। बहुत सारी चीजें हो गई गुड्स

[164:04]

के साथ। है ना दोस्तों? तो इन सबको कैसे

[164:06]

रिकॉर्ड करेंगे? आइए जरा देखते हैं। 12

[164:09]

तारीख।

[164:14]

देखो दोस्तों 12 तारीख को आपने गुड्स

[164:18]

निकाले ₹2000 के और चैरिटी में दे दिए।

[164:20]

फिर आपने स्टाफ में बांट दिए। फिर आपने

[164:23]

फ्री सैंपलिंग कर दी। है ना? फिर आपने

[164:25]

ऑफिस फर्नीचर तैयार कर लिया गुड्स के

[164:27]

इस्तेमाल से। आपको नहीं लगता इन सभी केसेस

[164:29]

में गुड्स तो जा ही रहे हैं ना हमारे पास

[164:31]

से। गुड्स तो जा ही रहे हैं ना यार। मैं

[164:33]

चैरिटी कर दूं, दान दे दूं, एम्प्लाइज में

[164:36]

बांट दूं तो मेरे गुड्स तो मेरे पास से जा

[164:37]

ही रहे हैं। और ये जा अलग तरीके से रहे

[164:41]

हैं। ये सेल नहीं हुई है। ये परचेस रिटर्न

[164:45]

भी नहीं हुआ है क्योंकि सेल करना तो मुझे

[164:47]

आता है। परचेस रिटर्न की एंट्री भी भैया

[164:49]

ने बताई है अभी। लेकिन ये अलग तरीके से जा

[164:51]

रहे हैं। तो ऐसे में परचेजेस अकाउंट को ही

[164:54]

उठा के क्रेडिट कर देना है।

[164:57]

हां बिल्कुल सही सोच रहे हो कि यहां से

[165:00]

लेकर और यहां तक सभी एंट्रीज में परचेजेस

[165:02]

अकाउंट उठा के क्रेडिट कर देना है क्योंकि

[165:04]

खाली करना है मुझे परचेस अकाउंट को। तो 12

[165:08]

तारीख वाली एंट्री में

[165:10]

ये तो मुझे पता है कि भैया परचेजेस अकाउंट

[165:12]

क्रेडिट होगा।

[165:15]

कितने रुपए से? 12 तारीख की एंट्री में

[165:17]

परचेस अकाउंट कितने से क्रेडिट होगा?

[165:19]

₹2000 से।

[165:23]

अच्छा डेबिट क्या करें? तो खर्चा नहीं हुआ

[165:25]

तुम्हारा। चैरिटी में दे दिए तुमने ₹2000

[165:27]

के गुड्स। तो खर्चा हो गया ना? नुकसान हो

[165:29]

गया। चैरिटी करना वैसे अच्छी बात है।

[165:31]

लेकिन बिज़नेस के लिए तो एक्सपेंस ही है

[165:33]

ये। एक्सपेंसेस इसको हम डेबिट में रिकॉर्ड

[165:35]

करते हैं। तो एक एक्सपेंस हम यहां पर

[165:37]

क्रिएट कर देंगे चैरिटी अकाउंट। तो चैरिटी

[165:40]

अकाउंट हो जाएगा बेटा डेबिट ₹2,000 से।

[165:43]

खत्म हो गई बात। ठीक है? अच्छा ऐसे ही।

[165:46]

आगे चलते हैं फिर। ये तो थी 12 तारीख।

[165:49]

उसके बाद आती है 15 तारीख।

[165:53]

ठीक है? 15 तारीख। 15 तारीख को हमने गुड्स

[165:56]

फिर निकाले ₹1000 के और स्टाफ मेंबर्स में

[165:59]

बांट दिए। स्टाफ मेंबर्स में क्यों बांटे

[166:01]

हमने? अरे यार हमारी मर्जी। दिवाली बोनस

[166:04]

के तौर पर हमने उन्हें गुड्स ही दे दिए।

[166:05]

कैश भी दिए, गुड्स भी दे दिए। एक-एक

[166:07]

लिफाफा और साथ में जिस चीज का हमारा धंधा

[166:09]

है, वो चीज हमने दे दी। सपोज हमारा

[166:11]

इलेक्ट्रॉनिक्स का बिज़नेस है, तो हमने

[166:12]

एक-एक टीवी या एक-एक एसी हर किसी एंप्लई

[166:15]

को दे दिया। जाओ ऐश करो। स्टाफ वेलफेयर

[166:18]

यार स्टाफ वेलफेयर

[166:20]

तो यहां पर इस खर्चे को हम इसी नाम से

[166:22]

दिखाएंगे दोस्तों इसी नाम से दिखाएंगे हम

[166:25]

इसको स्टाफ वेलफेयर एक्सपेंसेस

[166:30]

अकाउंट डेबिट और क्रेडिट तो तुम्हें पता

[166:32]

ही है क्या होगा जल्दी बोलो परचेजेस

[166:35]

अकाउंट

[166:36]

स्टाफ वेलफेयर अकाउंट एक्सपेंसेस अकाउंट

[166:39]

डेबिट टू परचेजेस अकाउंट कितने रुपए का

[166:41]

माल दे दिया हमने इनको

[166:43]

अ ₹1000 ₹1000 की गुड्स दे दे दिया हमने

[166:47]

इनको। चलो जी। फिर क्या हुआ है? फिर उसके

[166:50]

बाद 18 तारीख को हमने ₹3000 के गुड्स फ्री

[166:52]

सैंपल के तौर पर बांट दिए। क्यों बांटते

[166:54]

हो भाई तुम फ्री सैंपल्स के तौर पर गुड्स?

[166:56]

बताना जरा। एक कंपनी थी। अ मिल्क

[166:59]

प्रोडक्ट्स बनाती थी वो कंपनी। बेसिकली

[167:01]

मिल्क ही बनाती थी वो कंपनी। मिल्क

[167:04]

रिलेटेड प्रोडक्ट्स बेचने का उसका काम था।

[167:06]

कंपनी का मैं नाम नहीं लूंगा। लेकिन वो

[167:08]

कंपनी जब नई-नई आई थी अभी कुछ टाइम पहले

[167:10]

तो उस कंपनी ने छोटे-छोटे पैकेट्स में दूध

[167:15]

दिया था रिटेलर्स को छोटे-छोटे पैकेट्स

[167:17]

में फ्री सैंपल्स के तौर पर कि भैया ये

[167:20]

कस्टमर्स को वैसे ही दे देना जरा ताकि

[167:23]

उनके घर में इस मिल्क का स्वाद पहुंचे और

[167:27]

हमारी कंपनी की एडवरटाइजमेंट हो जाए। तो

[167:30]

फ्री सैंपलिंग हम इसीलिए करते हैं क्योंकि

[167:32]

हम अपने प्रोडक्ट को एडवर्टाइज कर रहे

[167:34]

होते हैं। तो इसीलिए बेटा ये जो आपने करा

[167:37]

है ना कौन सी तारीख को? 18 तारीख को ₹3000

[167:40]

के जो फ्री सैंपल्स बांटे हैं तो समझ जाओ

[167:42]

ये 18 तारीख को और कुछ नहीं हो रहा।

[167:44]

एडवर्टाइजमेंट हो रहा है। तो आपको

[167:46]

एडवर्टाइजमेंट का खर्चा दिखाना है।

[167:48]

एडवरटाइजमेंट अकाउंट डेबिट

[167:51]

एडवर्टाइजमेंट दिखा सकते हो। अदरवाइज

[167:53]

सेल्स प्रमोशन भी बोल सकते हो आप इसको।

[167:55]

ठीक है जी। हां जी। कितने रुपए हैं?

[167:57]

₹3000।

[167:59]

और क्रेडिट तो तुम्हें पता ही है क्या

[168:01]

होगा? जल्दी से बता दो। टाइम वेस्ट नहीं।

[168:04]

हां जी। हां जी। हां जी। परचेजेस अकाउंट

[168:06]

क्रेडिट होगा।

[168:08]

ठीक है? ₹3000 से खत्म हो गई बात। अच्छा

[168:11]

फिर क्या करा हमने? फिर ये बड़ा इंपॉर्टेंट

[168:13]

है। ₹5,000 के गुड्स यूज़ करें और ऑफिस का

[168:15]

फर्नीचर बना डाला। हमारा बिज़नेस है कच्ची

[168:18]

लकड़ी बेचने का।

[168:21]

राइट? पर लकड़ी से तो फर्नीचर भी बनता है।

[168:24]

तो हमने क्या करा? अपनी लकड़ी जो हम बेचते

[168:27]

हैं वैसे उससे अपने ऑफिस के लिए एक चेयर

[168:30]

बनवा ली या सोफा बनवा लिया या कोई और

[168:32]

फर्नीचर बनवा लिया। ऐसे और भी एग्जांपल्स

[168:34]

हो सकते हैं। अब किसी बंदा कोई बिजनेसमैन

[168:37]

है उसका बिज़नेस है बिल्डिंग मटेरियल्स का।

[168:39]

ठीक है? ईंटें, रोड़ी, बदरपुर, सीमेंट ये

[168:41]

सब बेचता है वो। तो जो ब्रिक्स हैं, ईंटें

[168:44]

वो उसके लिए गुड्स हैं। पर उन्हीं ईंटों

[168:47]

से बिल्डिंग भी तो बनाई जा सकती है। एक

[168:49]

छोटा सा कमरा भी तो बनाया जा सकता है। तो

[168:51]

इस्तेमाल हो रहा है गुड्स का और बन रही है

[168:54]

एक फिक्स्ड एसेट। तैयार हो रही है एक

[168:56]

फिक्स्ड एसेट। सोचने वाली बात है। गुड्स

[168:58]

आपके पास से जा रहे हैं लेकिन एक एसेट

[169:00]

आपके पास आ रही है।

[169:02]

तो गेस करो जरा एंट्री क्या होनी चाहिए?

[169:04]

ये 21 तारीख वाली। मई 21 की एंट्री क्या

[169:08]

होनी चाहिए?

[169:11]

बेटा मेई 21 की एंट्री में मेरे हिसाब से

[169:14]

क्योंकि एसेट तैयार हो रही है जिसका नाम

[169:16]

है फर्नीचर

[169:18]

तो फर्नीचर का अकाउंट डेबिट होना चाहिए

[169:23]

और फर्नीचर तैयार ऐ हो गया कुछ देना भी

[169:26]

पड़ा कुछ लगाना पड़ा क्या गुड्स तो गुड्स

[169:30]

गए अब जिन गुड्स का इस्तेमाल करके आपने

[169:32]

फर्नीचर ही बना डाला तो वो गुड्स अब बच

[169:34]

नहीं बिक नहीं सकते ना तो परचेज अकाउंट

[169:37]

फिर से क्रेडिट हो जाएगा फर्नीचर अकाउंट

[169:39]

डेबिट टू परचेजेस अकाउंट।

[169:41]

फर्नीचर अकाउंट डेबिट टू परचेजेस अकाउंट।

[169:44]

कितने रुपए जी? ₹5,000।

[169:48]

अच्छा और एक और देख लें। बेटा अब ये

[169:51]

₹4,000 के गुड्स स्टोल कर लिए एक एंप्लई

[169:55]

ने बदतमीज। एक एंप्लई हमारे यहां काम करता

[169:58]

था। हमें तो बड़ा विश्वास था उस बंदे पर।

[170:02]

लेकिन वो चोर निकला। उसने हमारे यहां से

[170:05]

चोरी कर ली और चोरी में क्या चुराया?

[170:07]

गुड्स चुराया। ठीक है? फिर से गुड्स चले

[170:10]

गए आपके पास से। लेकिन ये जो है ना ये ये

[170:13]

थोड़ी सी एबनॉर्मल चीज है। ऊपर की सारी

[170:15]

चीजें हमारी मर्जी से हो रही थी। चैरिटी,

[170:17]

डोनेशन, फ्री सैंपलिंग, एडवर्टाइजमेंट।

[170:19]

लेकिन ये हमारी मर्जी के बगैर हो रहा है।

[170:21]

तो एब्नॉर्मल लॉसेस को रिकॉर्ड करने का

[170:23]

तरीका थोड़ा सा अलग है। ये टॉपिक खोलता

[170:25]

हूं मैं एक बार नए सिरे से। ठीक है? हाउ

[170:28]

टू रिकॉर्ड दीज़ थिंग्स?

[170:30]

देखो जी

[170:33]

लॉस ऑफ गुड्स

[170:37]

बाय

[170:40]

थेफ्ट हो सकता है।

[170:43]

फायर हो सकता है,

[170:46]

एक्सीडेंट हो सकता है।

[170:49]

है ना? कई बार गुड्स हमारे लॉस लॉस हो

[170:52]

जाता है हमें गुड्स की वजह से। क्यों?

[170:54]

क्योंकि चोरी हो गई, एक्सीडेंट हो गया या

[170:56]

आग लग गई। अब ऐसे में अगर गुड्स हमारे पास

[170:59]

से जा रहे हैं तो कैसे रिकॉर्डिंग होगी?

[171:01]

है ना? सोचने वाली बात है। देखो बेटा

[171:04]

क्योंकि है तो यह लॉस ही तो आपको एक सिंपल

[171:06]

एंट्री बनानी है जिसमें

[171:10]

क्या हो गया ऐसे?

[171:13]

आपको एक सिंपल एंट्री बनानी है जिसमें

[171:15]

आपको लॉस बाय जो भी रीज़न है। थफ्ट्ट है तो

[171:20]

थेफ्ट, फायर है तो फायर, एक्सीडेंट है तो

[171:24]

एक्सीडेंट। जो भी रीजन है उसे डेबिट करना

[171:26]

है

[171:28]

और गुड्स आपके पास से चले गए तो परचेजेस

[171:32]

अकाउंट को क्रेडिट करना है। दैट्स इट।

[171:33]

परचेस अकाउंट को क्रेडिट कर देना है। बात

[171:35]

खत्म। ठीक है? कभी भी अगर गुड्स लॉस में

[171:40]

चले जाएं ड्यू टू थफ्ट, ड्यू टू फायर,

[171:42]

ड्यू टू एक्सीडेंट। तो ये एंट्री तो करनी

[171:45]

ही करनी है। ठीक है? अब इस एंट्री के बाद

[171:49]

गेम में आती है इंश्योरेंस कंपनी।

[171:52]

यस।

[171:53]

क्योंकि हमें पता था कि चोरी हो सकती है

[171:55]

या एक्सीडेंट हो सकता है या आग लग सकती

[171:58]

है। तो हमने गुड्स का इंश्योरेंस करा रखा

[172:01]

था पहले से ही। और इंश्योरेंस क्या होता

[172:02]

है? ये सब बिज़नेस स्टडीज में पढ़ा है आपने।

[172:04]

है ना? बेटा अगर इंश्योरेंस करा रखा था तो

[172:08]

जितना भी आपको नुकसान हुआ है या तो उतना

[172:10]

या उससे थोड़ा कम आपको क्लेम मिल जाएगा।

[172:13]

यानी पूरा नुकसान आपको झेलना नहीं पड़ेगा।

[172:17]

तो फिर कैसे रिकॉर्डिंग होगी चीजों की?

[172:20]

सोचने वाली बात है। है ना? तो आइए इस चीज

[172:23]

को समझने के लिए एक क्वेश्चन डाला है

[172:25]

मैंने।

[172:27]

ये क्वेश्चन है जी आपके सामने। ठीक है?

[172:31]

[संगीत]

[172:34]

ये वाला ये क्वेश्चन है आपके सामने। इस

[172:37]

चीज को समझने के लिए और जो ये वाला

[172:39]

क्वेश्चन है इसको भी हम बाद में करेंगे।

[172:41]

पहले ये वाला करेंगे। पहले ये वाला करेंगे

[172:44]

दोस्तों। देखो इधर 5 तारीख को या नया

[172:48]

क्वेश्चन है। 5 तारीख को गुड्स कॉस्टिंग 1

[172:51]

लाख लॉस्ट बाय फायर बट दीज़ गुड्स वर

[172:53]

इंश्यर्ड।

[172:56]

हमारा ₹1 लाख का माल जल गया पर उस माल का

[172:59]

इंश्योरेंस हो रखा था। एंड द इंश्योरेंस

[173:02]

कंपनी एक्सेप्टेड द क्लेम इन फुल। क्या

[173:04]

बात है। मजा आ गया। जितने का नुकसान हुआ

[173:08]

उतना क्लेम इंश्योरेंस कंपनी ने मान लिया

[173:10]

कि हां जी हम देंगे। बहुत ही बढ़िया।

[173:14]

उसके बाद 7 तारीख को हमने मशीनरी खरीदी वि

[173:18]

इज अ डिफरेंट ट्रांजैक्शन। 13 तारीख को

[173:20]

हमें चेक रिसीव हो गया इंश्योरेंस कंपनी

[173:22]

से। ये जो ऊपर इंश्योरेंस कंपनी आपको देने

[173:24]

वाली थी ना लाख इंश्योरेंस कंपनी ने आपको

[173:27]

चेक दे दिया ₹1 लाख का और फिर उसके बाद 20

[173:30]

तारीख को वो चेक हमने बैंक में डिपॉजिट कर

[173:32]

दिया। तो चेक आया अलग दिन है और बैंक में

[173:35]

डिपॉजिट अलग दिन पे हुआ है। ध्यान रखना इस

[173:37]

चीज को। उसके बाद 24 तारीख को फिर से नया

[173:40]

लॉस है और ये इसकी इंश्योरेंस कंपनी जो है

[173:43]

वो बाद में चेक दे रही है वगैरह-वगैरह।

[173:45]

ठीक है? आइए जरा इसको रिकॉर्ड करते हैं। 5

[173:47]

तारीख

[173:51]

बेटा सबसे पहले प्रॉमिस करो मुझे कि

[173:54]

इंश्योरेंस है या नहीं है? इस पे ध्यान

[173:56]

बिल्कुल नहीं देना। इंश्योरेंस है या नहीं

[173:58]

है? इंश्योरेंस कंपनी पूरा क्लेम दे रही

[174:00]

है कि आधा दे रही है। इस चीज पे ध्यान

[174:01]

बिल्कुल नहीं देना। पहले लॉस को रिकॉर्ड

[174:03]

करना है। कैसा लॉस है? लॉस बाय फायर।

[174:05]

कितने रुपए का? ₹1 लाख का। 5 तारीख को तो

[174:08]

आपको सिंपल एंट्री रिकॉर्ड करनी है। लॉस

[174:10]

बाय फायर

[174:13]

अकाउंट डेबिट

[174:16]

₹1 लाख से और इस लॉस की वजह से तुम्हारे

[174:19]

पास से क्या चला गया बोलिए ना गुड्स तो

[174:22]

परचेजेस अकाउंट क्रेडिट हो जाएगा।

[174:26]

₹1 लाख से परचेजेस अकाउंट क्रेडिट हो

[174:28]

जाएगा।

[174:30]

ठीक है दोस्तों? अच्छा जी। अब सेम डेट पर

[174:38]

सेम डेट पर आपको क्या करना है? जो लॉस

[174:41]

आपने यहां पर दिखाया है, इस लॉस को रिवर्स

[174:44]

कर देना है। क्योंकि इंश्योरेंस कंपनी ने

[174:46]

क्लेम एक्सेप्ट कर लिया है। हालांकि

[174:48]

इंश्योरेंस कंपनी क्लेम एक्सेप्ट करने में

[174:50]

एकद दिन लगा सकती है। हो सकता है 5 तारीख

[174:52]

को आग लगे लेकिन क्लेम एक्सेप्ट हुआ है।

[174:55]

इसका पता हमें 7 तारीख को लगे। तो फिर जो

[174:58]

एंट्री अभी करवाऊंगा वो 7 तारीख को कर

[174:59]

देंगे। बट अभी तो सेम डेट पर इंश्योरेंस

[175:01]

कंपनी का फोन आ गया कि हां जी हम पैसे

[175:02]

देंगे। तो अब इस लॉस को यहां से हटा दो।

[175:05]

इस लॉस को रिवर्स बैक कर दो। यानी डेबिट

[175:08]

से हटाने के लिए इसको क्रेडिट कर दो। टू

[175:10]

लॉस बाय फायर।

[175:13]

ठीक है जी। कितने रुपए? ₹1 लाख।

[175:17]

सर आपने ये लॉस पहले डेबिट में रिकॉर्ड

[175:19]

करा। फिर उसको कैंसिल आउट क्यों कर दिया?

[175:21]

हटा क्यों दिया? क्योंकि ये लॉस मुझे

[175:23]

झेलना ही नहीं पड़ रहा। मुझे तो पूरे ₹1

[175:25]

लाख इंश्योरेंस कंपनी देने वाली है। क्या

[175:26]

बात है? तो क्योंकि पूरे ₹1 लाख मुझे

[175:29]

इंश्योरेंस कंपनी देने वाली है तो

[175:30]

इंश्योरेंस कंपनी से मैं कहूंगा आजा फिर

[175:32]

डेटर बन जा मेरी। तो इंश्योरेंस कंपनी का

[175:35]

अकाउंट यहां पर डेबिट हो जाएगा।

[175:36]

इंश्योरेंस कंपनी से मुझे पैसे लेने हैं।

[175:39]

मेरी एसेट है ₹1 लाख तो यहां पर

[175:41]

इंश्योरेंस कंपनी का अकाउंट डेबिट हो

[175:42]

जाएगा जी ₹1 लाख से।

[175:45]

सर इस क्वेश्चन में क्या होता? अगर

[175:48]

इंश्योरेंस कंपनी

[175:50]

गेम में नहीं होती। अगर ये गुड्स इंश्यर्ड

[175:53]

होते ही नहीं तो क्या होता?

[175:56]

तो फिर भी हम ये सेम एंट्री करते पर

[175:58]

इंश्योरेंस कंपनी की जगह पूरा नुकसान हम

[176:00]

डाल देते प्रॉफिट एंड लॉस अकाउंट में। अब

[176:02]

प्रॉफिट एंड लॉस अकाउंट का इंट्रोडक्शन

[176:03]

जनरल चैप्टर में नहीं होना चाहिए वैसे तो

[176:05]

लेकिन कुछ स्कूल टीचर्स दे देते हैं ये

[176:07]

वाली एंट्री जिसमें प्रॉफिट एंड लॉस

[176:09]

अकाउंट है। सरासर गलत है ये 11th के बच्चे

[176:11]

को इस चीज में छेड़ना। लेकिन अब देते हैं

[176:13]

तो मैं सिखा दूंगा आपको। ठीक है ना? जी।

[176:15]

तो पहले इसको समझो। 5 तारीख को दो एंट्रीज

[176:18]

करनी है मैंने। अगर गुड्स का इंश्योरेंस

[176:21]

नहीं होता। ठीक है ना? तो ये नीचे वाली

[176:23]

एंट्री या तो मत करो वरना अगर कर रहे हो

[176:26]

तो लॉस को क्रेडिट करके प्रॉफिट एंड लॉस

[176:28]

अकाउंट को हम डेबिट कर देते उस केस में।

[176:31]

ठीक है जी? इतना समझ में आया? पर

[176:32]

इंश्योरेंस कंपनी मुझे चेक सेम डेट पे दे

[176:35]

रही है या बाद में दे रही है? बाद में दे

[176:37]

रही है जी 13 तारीख को। सेम डेट पर अगर

[176:39]

इंश्योरेंस कंपनी ने मुझे चेक दे दिया

[176:41]

होता तो यहां पर सीधा बैंक अकाउंट नहीं आ

[176:43]

जाता या चेक इन हैंड नहीं आ जाता। है ना?

[176:46]

तो चेक इंश्योरेंस कंपनी ने मुझे बाद में

[176:48]

दिया है। ठीक है?

[176:51]

चेक रिसीव्ड फ्रॉम इंश्योरेंस कंपनी और तो

[176:53]

और उस चेक को प्राप्त करने के बाद जमा

[176:55]

मैंने और बाद में करवाया है तो सीखने को

[176:56]

मिलेगा यहां पर भी आपको काफी कुछ पर 7

[176:59]

तारीख वाली एंट्री देखते हैं सबसे पहले 7

[177:02]

तारीख को दोस्तों मशीनरी खरीदी ₹1 लाख चेक

[177:04]

से और इंश्योरेंस चार्जेस इंस्टॉलेशन

[177:06]

चार्जेस पे करें ₹5000

[177:13]

मशीनरी खरीदने पर आपको पता होगा मशीनरी का

[177:16]

अकाउंट डेबिट होता है

[177:22]

और पैसा जा रहा है तो कैश या फिर बैंक

[177:24]

अकाउंट क्रेडिट होता है।

[177:28]

ठीक है?

[177:30]

अब मशीनरी के ऊपर आपने इंस्टॉलेशन चार्जेस

[177:32]

भी पे कर दिए ₹5000।

[177:35]

तो सेम डेट पर मुझे एक और एंट्री करनी

[177:37]

पड़ेगी।

[177:39]

जिसमें मैं इंस्टॉलेशन चार्जेस का खर्चा

[177:42]

दिखाऊंगा। इंस्टॉलेशन चार्जेस को डेबिट

[177:44]

करूंगा और पैसा जा रहा है तो बैंक अकाउंट

[177:46]

को या कैश अकाउंट को क्रेडिट कर दूंगा।

[177:48]

दोस्तों ऐसा सोचना गलत है। ये वीडियो

[177:52]

बिल्कुल एंड तक आने लगी है। तुम्हारा हो

[177:54]

सकता है एनर्जी लेवल ड्रॉप हो रहा हो या

[177:55]

कुछ हो रहा हो तो ऐसे में कुछ खा लो लेकिन

[177:58]

वीडियो को देखना एंड तक है। ठीक है सर

[178:02]

मशीनरी जब आप खरीदते हो ना जब भी कोई

[178:04]

फिक्स्ड एसेट आप खरीदते हो मैं आपको एक

[178:06]

रूल बता देता हूं। फिक्स्ड एसेट खरीदते

[178:08]

वक्त जो भी खर्चा आप कर रहे हो डे वन

[178:12]

व्हाटएवर एक्सपेंस यू आर मेकिंग टू पुट

[178:15]

दैट एसेट टू यूज़ टू ब्रिंग दैट एसेट टू

[178:18]

इट्स प्रेजेंट लोकेशन एंड प्रेजेंट कंडीशन

[178:21]

कोई नई फिक्स्ड एसेट खरीदते वक्त अगर आप

[178:24]

कोई खर्चा कर रहे हो उस एसेट को अपने पास

[178:26]

तक लाने के लिए या उसे चालू करने के लिए

[178:28]

हर उस खर्चे को कैपिटलाइज करना है यानी

[178:31]

एसेट की वैल्यू में ऐड करना है। मैंने ₹1

[178:34]

लाख की मशीनरी खरीदी पर मैंने ऊपर से

[178:37]

₹5000 के इंस्टॉलेशन चार्जेस पे करे ताकि

[178:40]

वो मशीन चालू हो पाए। यह जो आप डिजिटल

[178:42]

बोर्ड देख रहे हैं जिसपे मैं पढ़ा रहा

[178:44]

हूं। ये बोर्ड मैं अपने ऑफिस तक ले तो आया

[178:47]

लेकिन चालू कब होगा? जब मैं इसका

[178:48]

इंस्टॉलेशन करवाऊंगा

[178:50]

उसमें खर्चा आएगा। तो अगर यह बोर्ड मुझे

[178:53]

₹2 लाख का पड़ा है पर मुझे ऊपर से ₹10,000

[178:56]

और खर्च करना पड़ा तो मैं इस बोर्ड की

[178:58]

वैल्यू पूरी ₹100 या ₹15,000 दिखाऊंगा।

[179:03]

तो सोचने वाली बात क्या है सर इसमें सर?

[179:06]

आपको इंस्टॉलेशन चार्जेस जैसा कोई अकाउंट

[179:09]

कभी भी ओपन नहीं करना होता। इंस्टॉलेशन

[179:12]

चार्जेस की जगह आप फिर से एक बार मशीनरी

[179:15]

अकाउंट को ही डेबिट करेंगे

[179:19]

₹5,000 से। और कैश अकाउंट या बैंक अकाउंट

[179:23]

को आप क्रेडिट कर देंगे ₹5,000 से। यह

[179:26]

दोस्तों इसमें सीखने वाली बात है। अब चलते

[179:29]

हैं आगे। 13 तारीख को आपको चेक दे दिया

[179:32]

उसी इंश्योरेंस कंपनी ने जो इंश्योरेंस

[179:34]

कंपनी 5 तारीख को गेम में आ गई थी। यह देख

[179:37]

लो जी। अब भैया 13 तारीख को जब ये

[179:40]

इंश्योरेंस कंपनी मुझे चेक दे रही है

[179:44]

तो मैं इंश्योरेंस कंपनी को कहूंगा ठीक है

[179:46]

आप जाओ फिर इंश्योरेंस कंपनी का अकाउंट

[179:48]

मैं क्लोज कर दूंगा। इंश्योरेंस कंपनी को

[179:51]

आपने डेबिट करा था ना क्लोज करने के लिए

[179:52]

आप क्रेडिट कर दोगे ₹1 लाख से।

[179:56]

अब यह जो इंश्योरेंस कंपनी ने आपको चेक

[179:58]

दिया है तो क्या यहां पर बैंक अकाउंट लिख

[179:59]

दूं? नहीं। बैंक अकाउंट तब जब चेक के जमा

[180:05]

होने की तिथि गिवन नहीं होती। पर अभी तो

[180:08]

इस क्वेश्चन में गिवन है कि चेक जो है वो

[180:11]

आया कब है? 13 तारीख को। और आपने जमा

[180:15]

कराया उसे 20 तारीख को। तो इसलिए 13 तारीख

[180:18]

को आप इसे बैंक में नहीं दिखा सकते। 13

[180:20]

तारीख को आपको बोलना पड़ेगा चेकक्स इन

[180:22]

हैंड।

[180:24]

चेकक्स इन हैंड का अकाउंट आपको यहां पर

[180:26]

डेबिट करना पड़ेगा ₹1 लाख से। हां, उसके

[180:29]

बाद जब आप इसे बाद में जमा करा दोगे, कौन

[180:32]

सी तारीख को जमा हुआ है ये? जमा हुआ है 20

[180:34]

तारीख को। 20 तारीख को जब आप जमा कराओगे

[180:37]

तो आप एक बार फिर से एंट्री करोगे।

[180:41]

20 तारीख को जब आप इस चेक को जमा करा दोगे

[180:44]

तो आप कह सकते हो कि बैंक में पैसा आ गया।

[180:46]

बैंक अकाउंट डेबिट। और अब चेक इन हैंड को

[180:49]

खत्म कर दोगे। सो बैंक अकाउंट डेबिट टू

[180:51]

चेकक्स इन हैंड अकाउंट।

[180:54]

₹1 लाख समझ में आया प्यारे बच्चों? है ना?

[180:59]

यह है जी गेम। अब चलते हैं और आगे। अब ये

[181:03]

20 तारीख के बाद ये जो 24 तारीख की कहानी

[181:06]

है। 24 तारीख से लेकर और ये 31 तारीख तक

[181:08]

की कहानी है। ये अलग है। इसको एक बार फिर

[181:10]

से नए सिरे से पढ़ लेते हैं। 24 तारीख को

[181:13]

फिर गुड्स लॉस हो गए। पर इस बार आग नहीं

[181:16]

लगी। इस बार एक्सीडेंट हुआ है।

[181:18]

ठीक है? हमारे गुड्स हो सकता है सेल के

[181:20]

लिए जा रहे थे। बीच में दुर्भाग्यवश हमारा

[181:22]

ट्रक पलट गया। गुड्स का एक्सीडेंट हो गया।

[181:25]

खराब हो गए गुड्स। तो एक्सीडेंट हो गया।

[181:27]

पर गुड्स अभी भी इंश्यर्ड थे। पर इस बार

[181:31]

इंश्योरेंस कंपनी आपको सिर्फ 80% क्लेम

[181:33]

देगी आउट ऑफ 10,000। आराम से रिकॉर्ड

[181:36]

करेंगे प्यार से। 24 तारीख की

[181:37]

ट्रांजैक्शन। ध्यान से देखिएगा।

[181:44]

मार्च 24

[181:48]

सबसे पहले बेटा इरिस्पेक्टिव ऑफ द फैक्ट

[181:50]

कि गुड्स का इंश्योरेंस था या नहीं था।

[181:52]

लॉस को पहले रिकॉर्ड करना है। तो यहां पर

[181:54]

मैं इसको बोलूंगा लॉस बाय एक्सीडेंट

[182:00]

₹10,000।

[182:02]

इस लॉस की वजह से मेरे पास से क्या चला

[182:04]

गया? गुड्स चले गए। और गुड्स चले जाने पर

[182:06]

मैं परचेजेस अकाउंट को क्रेडिट करता हूं

[182:09]

₹10,000 से।

[182:11]

देन बेटा इसके बाद सेम डेट पर आपको यह

[182:15]

देखना है कि इंश्योरेंस कंपनी पैसा दे रही

[182:17]

है या नहीं दे रही है। तो इंश्योरेंस

[182:19]

कंपनी पैसा दे रही है। देने वाली है पर

[182:22]

सिर्फ 80% आप देख सकते हैं यहां पर

[182:24]

इंश्योरेंस कंपनी ने क्लेम एक्सेप्ट करा

[182:27]

है 80% और चेक 24 को नहीं दिया 25 को दिया

[182:29]

है चेक बाद में दिया है। तो यहां पर

[182:32]

दोस्तों लॉस को डेबिट से हटाने के लिए आप

[182:34]

करोगे क्रेडिट

[182:36]

तो लॉस बाय एक्सीडेंट

[182:39]

10,000

[182:41]

ठीक है? पर इंश्योरेंस कंपनी आपको 10,000

[182:45]

नहीं देने वाली है। इस बार सिर्फ 80% देने

[182:47]

वाली है। यानी इंश्योरेंस कंपनी डेबिट

[182:49]

होगी सिर्फ ₹8,000 से और बाकी ₹2000 का

[182:52]

नुकसान आपको झेलना पड़ेगा जो कि आप एक

[182:55]

स्पेशल अकाउंट में डालते हो जिसका नाम है

[182:56]

प्रॉफिट एंड लॉस अकाउंट जिसके बारे में आप

[182:59]

पढ़ोगे टुवर्ड्स द एंड ऑफ दिस बुक

[183:01]

टुवर्ड्स द एंड ऑफ योर कोर्स।

[183:03]

प्रॉफिट एंड लॉस अकाउंट।

[183:07]

तो प्रॉफिट एंड लॉस अकाउंट को डेबिट करना

[183:09]

पड़ेगा ₹2000 से। तो सर अगर इस क्वेश्चन

[183:11]

के अंदर इंश्योरेंस कंपनी ₹1 का भी क्लेम

[183:13]

नहीं देती। ज़ीरो क्लेम देती ज़ीरो तो फिर

[183:15]

पूरा 10,000 जाता प्रॉफिट एंड लॉस अकाउंट

[183:17]

में। और यहां पर इंश्योरेंस कंपनी का सवाल

[183:20]

ही पैदा नहीं होता। और अगर इस क्वेश्चन

[183:22]

में गुड्स का इंश्योरेंस हमने ही निकलवा

[183:23]

रखा तो इंश्योरेंस कंपनी तो जानती भी नहीं

[183:25]

है तुम्हें। उस केस में भी फिर इंश्योरेंस

[183:27]

कंपनी नहीं आती। पूरा 10 का 10 पीएंडएल

[183:29]

अकाउंट में प्रॉफिट एंड लॉस अकाउंट में

[183:30]

जाता। बात समझ में आ रही है कि नहीं आ रही

[183:32]

है? आगे चलते हैं दोस्तों। 24 तारीख को

[183:35]

इंश्योरेंस कंपनी ने वादा करा मैं आपको

[183:37]

चेक दे दूंगी 8000 का पर चेक दिया 25

[183:39]

तारीख को लेकिन 25 तारीख को जो इंश्योरेंस

[183:42]

कंपनी ने मुझे चेक दिया ये मैंने जमा कब

[183:43]

करवाया ये तो गिवन ही नहीं है तो मैं मान

[183:46]

लूंगा कि मैंने सेम डेट पर जमा करा लिया

[183:48]

होगा और अगर सेम डेट पर जमा करा लिया होगा

[183:50]

तो चेक इन हैंड का अकाउंट ओपन नहीं होगा

[183:53]

सीधा बैंक अकाउंट में जाएगी पेमेंट 25

[183:56]

तारीख को।

[183:57]

सो मार्च 25 सीधा-सीधा बैंक अकाउंट को आप

[184:02]

डेबिट कर देंगे और इंश्योरेंस कंपनी का

[184:05]

अकाउंट क्लोज कर देंगे। टू इंश्योरेंस

[184:07]

कंपनी

[184:09]

8000 8000

[184:12]

आ रही है बात समझ में? अब एक बड़ी

[184:14]

इंपॉर्टेंट ट्रांजैक्शन मैंने आपको बतानी

[184:16]

है। क्लोजिंग स्टॉक ₹15,000

[184:20]

दोस्तों ये भी इस चैप्टर में नहीं बनता

[184:23]

पूछना। पर स्कूल टीचर लेते हैं पंगे। तो

[184:27]

भाई आया है सिखा के जाएगा। अल्फा आर्मी है

[184:30]

हम लोग। कमेंट सेक्शन में फटाफट से लिख दो

[184:32]

अल्फा आर्मी। ठीक है जी। तो क्लोजिंग

[184:34]

स्टॉक क्या होता है? पूरे साल तो आप स्टॉक

[184:37]

को रिकॉर्ड नहीं करते। पूरे साल 1 मिनट

[184:40]

रुकना यार। मुझे ना थोड़ा सा प्यास लगने

[184:42]

लगी है अब तुमसे बातें करते-करते। जस्ट वन

[184:44]

सेकंड।

[184:46]

हम

[184:50]

तो पूरे साल तो हम स्टॉक को रिकॉर्ड करते

[184:52]

नहीं है भाई।

[184:54]

पूरे साल तो हम परचेजेस अकाउंट में डालते

[184:55]

रहते हैं। बेचते हैं तो सेल्स अकाउंट में

[184:58]

डालते रहते हैं। लेकिन साल के एंड पे

[185:00]

गुड्स को हम फिजिकल वेरिफिकेशन में गिनते

[185:02]

हैं। और साल के एंड में जो स्टॉक हमारे

[185:05]

पास बचा होता है उसको हम बोलते हैं

[185:06]

क्लोजिंग स्टॉक। और पहली बार स्टॉक के नाम

[185:09]

से अगर कोई अकाउंट ओपन होता है तो वो साल

[185:12]

के एंड में होता है। या फिर नेक्स्ट ईयर

[185:14]

के बिगनिंग में वो भी हम सीखेंगे। तो सर

[185:16]

31 मार्च साल का एंड होता है। सबको पता

[185:19]

है। फाइनेंसियल ईयर एंड होता है 31 मार्च

[185:21]

को। क्लोजिंग स्टॉक पता चला 15,000

[185:25]

तो सर क्लोजिंग स्टॉक को आपको रिकॉर्ड कर

[185:27]

देना है मार्च की 31 तारीख को

[185:31]

और क्लोजिंग स्टॉक को रिकॉर्ड करने के लिए

[185:33]

ऑफ कोर्स एसेट को रिकॉर्ड कर रहे हो तो

[185:36]

डेबिट ही करोगे क्लोजिंग स्टॉक का अकाउंट

[185:39]

हो जाएगा डेबिट और ये एक स्पेशल अकाउंट

[185:41]

में जाता है जिसका नाम है ट्रेडिंग अकाउंट

[185:44]

अभी के लिए इसको ऐसे ही समझ लो आप ठीक है

[185:46]

बेटा ₹15,000

[185:50]

₹15,000 क्लोजिंग स्टॉक जो है ट्रेडिंग

[185:52]

अकाउंट में चला जाता है। पहली बार स्टॉक

[185:55]

का नाम लिया है मैंने इस पूरी वीडियो में।

[185:57]

अदरवाइज़ परचेज़ सेल्स परचेस रिटर्न, सेल्स

[186:01]

रिटर्न और गुड्स के लिए जो इतनी सारी

[186:03]

ट्रांजैक्शंस हमने अलग से पढ़ी थी वो सब।

[186:06]

ओके? चलिए

[186:08]

इसके बाद

[186:11]

इसके बाद हमारा एक क्वेश्चन ये है

[186:13]

दोस्तों। इसमें लिखा है अह

[186:17]

फॉलोइंग बैलेंससेस एग्ज़िस्टेड इन द बुक्स

[186:20]

ऑफ

[186:21]

मेसेर्स आनंद स्टोर्स एज ऑन फर्स्ट अप्रैल

[186:24]

2025

[186:27]

1 अप्रैल 2025 नए साल वाला दिन नए साल

[186:32]

वाले दिन आपके पास कुछ चीजें ऑलरेडी होती

[186:34]

हैं। अरे भाई वही चीजें जो पिछले साल के

[186:36]

एंड में बचती हैं वो नए साल वाले दिन

[186:38]

दिखती है ना आपको बिनेस में। तो क्या होता

[186:40]

है दोस्तों? हर साल के एंड में हम अपने

[186:43]

अकाउंट्स को क्लोज करते हैं बाय पासिंग सम

[186:46]

क्लोजिंग एंट्रीज। क्लोजिंग एंट्रीज तो

[186:49]

इतनी इंपॉर्टेंट नहीं है इस चैप्टर के लिए

[186:51]

क्योंकि वो चैप्टर 1819 में आती है। पर

[186:54]

ओपनिंग एंट्री इंपॉर्टेंट है कि जब नया

[186:57]

साल हम देखो जब साल की शुरुआत होती है 1

[186:59]

अप्रैल को तो दो बातें होंगी। या तो

[187:01]

बिज़नेस ही उसी दिन स्टार्ट हो रहा है। पर

[187:04]

अमूमन ऐसा नहीं होता। हर साल थोड़ी बिज़नेस

[187:06]

शुरू होता है हमारा। तो सपोज 1 अप्रैल

[187:08]

2025 डेट आई और बिज़नेस तो हमारा सालों साल

[187:11]

से चल रहा है। तो 1 अप्रैल को क्या मुझे

[187:13]

कुछ एंट्री पास करनी है? यस। उसको हम

[187:15]

बोलते हैं ओपनिंग एंट्री। ओपनिंग एंट्री

[187:18]

हमें पास करनी है उन अमाउंट्स के साथ उन

[187:20]

फिगर्स के साथ जो फिगर्स पिछले साल की बची

[187:23]

हुई है हमारे पास। तो आप देख सकते हैं

[187:25]

हमारे पास कुछ एसेट्स हैं जिसमें कैश है,

[187:27]

बैंक है, स्टॉक है, फर्नीचर है और डेटर

[187:28]

है। हमारे पास कुछ लायबिलिटीज़ भी हैं।

[187:30]

जैसे कि लोन फ्रॉम विकास जैसे कि

[187:32]

क्रेडिटर्स एंड वी हैव टू पास अ नेसेसरी

[187:34]

जर्नल एंट्री। देयर इज़ ओपनिंग एंट्री।

[187:36]

कैसे होने वाली है वो ओपनिंग एंट्री?

[187:38]

ध्यान से देखिए।

[187:42]

2025 अप्रैल वन। कुछ नहीं करना। जितनी भी

[187:46]

एसेट्स नजर आई, जितनी भी एसेट्स नजर आई,

[187:49]

सबको डेबिट कर दो। क्योंकि एसेट्स का खाता

[187:52]

खोलने के लिए हम डेबिट करते थे हमेशा से।

[187:54]

तो एसेट्स जितनी भी नजर आ रही है ना सबको

[187:56]

डेबिट कर दो। कैश बैंक, स्टॉक, फर्नीचर,

[187:58]

डेटर।

[188:00]

ठीक है जी? कैश, बैंक, स्टॉक,

[188:06]

फर्नीचर

[188:08]

एंड डेटर्स।

[188:12]

सबका अकाउंट हो जाएगा डेबिट। आई डोंट थिंक

[188:17]

जर्नल की किसी भी शॉर्टकट वीडियो में आपको

[188:21]

दिस नंबर ऑफ क्वेश्चंस की प्रैक्टिस

[188:23]

मिलेगी। आप पूरा YouTube खंगाल लेना अपनी

[188:25]

तरफ से। ठीक है? सो मैं अभी बोल रहा हूं।

[188:29]

वैसे तो मुझे वीडियो के एंड में बोलना

[188:30]

चाहिए। अगर आपको ये वीडियो सच में अच्छी

[188:33]

लग रही है तो आप प्लीज हमें कमेंट सेक्शन

[188:35]

में बताएं। और अगर आपकी कोई सजेशन भी है

[188:37]

या कुछ और भी पढ़ना है आपको हमारी तरफ से

[188:39]

तो प्लीज कमेंट सेक्शन में बताएं और यह

[188:41]

वीडियो अपने और भी दोस्तों के साथ शेयर

[188:43]

करना। है ना? क्योंकि ये किसी भी पॉइंट ऑफ़

[188:45]

टाइम पर आपको काम आ सकती है। वेदर इट इज़

[188:47]

योर फाइनल एग्जाम, योर यूनिट टेस्ट, योर

[188:49]

हाफ ईयरली एग्जामिनेशन, पीरियडिक टेस्ट,

[188:51]

प्रोजेक्ट वर्क कभी भी आपको काम आ सकता

[188:53]

है। जी। तो जितनी भी एसेट्स हैं, तमाम

[188:56]

एसेट्स को हम डेबिट कर देंगे। 60, 40,

[188:59]

150, 50 एंड 145

[189:08]

150 50 एंड 145

[189:12]

तो आप देख सकते हैं जितनी भी एसेट्स का

[189:14]

मुझे अकाउंट मिला मैंने सबको डेबिट कर

[189:15]

दिया। ठीक है? उसके बाद लायबिलिटी भी है

[189:19]

दो। तो लायबिलिटीज की रिकॉर्डिंग क्रेडिट

[189:20]

में होती है। लोन फ्रॉम विकास एंड

[189:22]

क्रेडिटर्स। तो लोन फ्रॉम विकास और

[189:25]

क्रेडिटर्स इसका अकाउंट हम क्रेडिट कर

[189:27]

देंगे।

[189:34]

टू लोन फ्रॉम विकास

[189:37]

एंड टू क्रेडिटर्स अकाउंट।

[189:41]

बात करें लोन फ्रॉम विकास और क्रेडिटर की

[189:43]

तो लोन फ्रॉम विकास है 35 और क्रेडिटर है

[189:46]

10। यह है 35 और क्रेडिटर है ₹10,000।

[189:51]

[संगीत]

[189:52]

अब जरा मुझे चेक करके बताओ कि बन गई है

[189:55]

एंट्री। डेबिट क्रेडिट बराबर हो गया? नहीं

[189:58]

हुआ ना? आप देख पा रहे हो जितनी भी एसेट्स

[190:01]

हैं ये तमाम एसेट्स आपने डेबिट कर दी है

[190:04]

ना इन सब एसेट्स को आपने डेबिट डेबिट

[190:07]

डेबिट डेबिट डेबिट सबको डेबिट कर दिया

[190:09]

आपने एक बार टोटल करें इनका 6041 लाख एंड

[190:13]

दिस इज़ 2 लाख 2 लाख प्लस 1 लाख 3 लाख 3 +

[190:15]

145 445

[190:19]

मेरी तमाम एसेट्स का जो टोटल है वो है 445

[190:22]

यानी मेरे डेबिट का टोटल है 445 जबकि

[190:25]

क्रेडिट में सिर्फ 45 है तो एंट्री तो बन

[190:28]

नहीं

[190:29]

वो इसलिए कि एसेट्स कांट बी इक्वल टू जस्ट

[190:33]

लायबिलिटीज़। कम ऑन एसेट्स कांट बी इक्वल

[190:36]

टू जस्ट लायबिलिटीज़। दोस्तों एसेट्स आर

[190:38]

इक्वल टू लायबिलिटीज़ प्लस कैपिटल। तो

[190:41]

कैपिटल इस क्वेश्चन में गिवन नहीं थी और

[190:43]

आपको खुद कैपिटल निकालनी थी। कैपिटल

[190:46]

निकालने का तरीका वही अकाउंटिंग इक्वेशन

[190:48]

वाला पुराना बेसिक तरीका है। कैपिटल का

[190:50]

फार्मूला क्या होता है? एसेट्स माइनस

[190:52]

लायबिलिटीज़।

[190:54]

सो व्हाट वी आर गोइंग टू डू इज़ वी हैव टू

[190:56]

डिडक्ट दिस अमाउंट ऑफ़ 45000 फ्रॉम दिस

[190:58]

445. सो कैपिटल विल बी आई थिंक 4 लाख। आप

[191:02]

देख सकते हैं कैपिटल आंसर में है ₹4 लाख।

[191:05]

तो कैपिटल को भी रिकॉर्ड करना है यहां पर

[191:08]

आकर टू कैपिटल अकाउंट

[191:13]

₹4 लाख। बेटा दिस इज़ हाउ वी पास अ

[191:17]

क्लोजिंग एंट्री इन द बुक्स ऑफ़ अकाउंट्स।

[191:20]

नॉट नॉट क्लोजिंग एंट्री। दिस इज़ ओपनिंग

[191:22]

एंट्री। तो नरेट भी आप इसको ऐसे ही करेंगे

[191:24]

कि बीइंग एन ओपनिंग एंट्री पास्ड बीइंग एन

[191:27]

ओपनिंग एंट्री पास्ड इन द बुक्स

[191:31]

हमने एक ओपनिंग एंट्री पास कर दी अपनी

[191:33]

बुक्स ऑफ अकाउंट्स के अंदर क्लियर हो गया

[191:36]

दोस्तों हां देखें अब कुछ बचा है क्या हां

[191:41]

पीछे भैया आपने एक क्वेश्चन छुड़वा दिया था

[191:43]

एक बार करवा दो भैया प्लीज तो ये है जी वो

[191:46]

क्वेश्चन जनरलाइज़ द फॉलोइंग ट्रांजैक्शंस

[191:50]

ठीक है इन सब ट्रांजैक्शंस को भी हम एक

[191:52]

जनरलाइज़ कर लेते हैं। नया सीखने को मिलेगा

[191:54]

हमें कुछ ना कुछ। तो ये कुछ पॉइंट्स हैं

[191:56]

सर। शुरू करते हैं फटाफट से। सबसे पहला

[191:59]

पॉइंट

[192:01]

सबसे पहला पॉइंट तो यहीं पर ही रिकॉर्ड कर

[192:03]

देता हूं मैं। इंटरेस्ट ड्यू बट नॉट

[192:06]

रिसीव्ड ₹10,000। बेटा वो इंटरेस्ट जो

[192:09]

ड्यू हो गया पर हमें रिसीव नहीं हुआ। पर

[192:11]

ब्याज तो दो दो तरह का होता है। एक वो

[192:13]

ब्याज जो हम पे करते हैं और एक वो ब्याज

[192:15]

जो हमें मिलता है। तो कौन से वाले ब्याज

[192:17]

की बात हो रही है जो मिलता है हर बार। बट

[192:19]

नॉट रिसीव्ड लिखा है ना।

[192:22]

यानी मिलना था पर हमें नहीं मिला। इस तरह

[192:25]

की इनकम को हम बोलते हैं अक्रूड इनकम।

[192:27]

क्या बोलते हैं? अक्रूड इनकम। यस। और

[192:30]

अक्रूड इनकम वो इनकम है जो आपने कमाई है

[192:33]

पर आपको मिली नहीं है। कैसे इसको रिकॉर्ड

[192:35]

करना है? ध्यान से देखिएगा। आपको डेबिट

[192:38]

में एक एसेट क्रिएट करनी है अक्रूड

[192:40]

इंटरेस्ट के नाम से।

[192:43]

और क्रेडिट में अपनी इनकम रिकॉर्ड करनी है

[192:46]

इंटरेस्ट के नाम से।

[192:48]

अक्रूड इंटरेस्ट अकाउंट डेबिट टू इंटरेस्ट

[192:50]

अकाउंट ₹10,000

[192:55]

इसके बाद इसके बाद सेकंड पॉइंट में लिखा

[192:58]

है सैलरीज ड्यू टू स्टाफ 50,000 बेटा ड्यू

[193:01]

का मतलब पेएबल भी होता है या आउटस्टैंडिंग

[193:05]

भी होता है। असल में क्या हुआ? पूरे महीने

[193:07]

हमने स्टाफ से काम कराया लेकिन सैलरी देने

[193:10]

की डेट आई और हमने सैलरी दी नहीं अभी।

[193:13]

हमने अभी सैलरी दी नहीं। तो जब भी किसी

[193:16]

खर्चे की पेमेंट की डेट आ गई पर आपने वह

[193:18]

खर्चा अब तक पे नहीं करा। यानी बेनिफिट

[193:20]

कंज्यूम कर लिया लेकिन पेमेंट नहीं करी।

[193:22]

ऐसे खर्चों को हम बोलते हैं आउटस्टैंडिंग

[193:24]

एक्सपेंसेस। और आउटस्टैंडिंग एक्सपेंस को

[193:27]

रिकॉर्ड करने का तरीका क्या है? पॉइंट

[193:28]

नंबर टू के माध्यम से बताता हूं। बेटा

[193:31]

आउटस्टैंडिंग एक्सपेंस को रिकॉर्ड करने के

[193:33]

लिए आपको क्या करना है? सबसे पहले तो जो

[193:37]

एक्सपेंस है उसका नाम लिख देना है। सैलरीज

[193:40]

अकाउंट डेबिट। कितने रुपए की सैलरीज हैं

[193:43]

ये?

[193:45]

₹00 की सैलरीज हैं तो ₹50,000 से आपका

[193:48]

सैलरी अकाउंट डेबिट हो जाएगा। अब बहुत

[193:50]

आराम से ठंडे दिमाग से सुनो। बेटा नॉर्मली

[193:53]

अगर आप सैलरी पे करते हो तब भी सैलरीज को

[193:55]

डेबिट ही करते हो। और चकि पेमेंट हो रही

[193:58]

होती है तो आप यहां पर क्रेडिट कर देते हो

[194:00]

कैश अकाउंट को या बैंक अकाउंट को। अब

[194:02]

क्योंकि पेमेंट नहीं हुई तो सर पे कर्जा

[194:04]

चढ़ गया। इस कर्जे को हम बोलते हैं

[194:05]

आउटस्टैंडिंग सैलरीज या सैलरीज पेएबल। तो

[194:09]

यहां पर आपको सैलरीज पेएबल करके एक अकाउंट

[194:12]

ओपन कर देना है।

[194:15]

और यहां पर लिख देना है 500। ठीक है बेटा?

[194:18]

खर्चा और कोई भी हो सकता है जो इस तरह से

[194:20]

पेएबल हो जाए, आउटस्टैंडिंग हो जाए, ड्यू

[194:22]

हो जाए तो सैलरी की जगह उस खर्चे का नाम आ

[194:24]

जाएगा, रेंट आ जाएगा, इलेक्ट्रिसिटी आ

[194:26]

जाएगा, वेजेस आ जाएगा, कुछ भी हो सकता है।

[194:28]

ठीक है जी? आगे चलते हैं। आगे लिखा है आउट

[194:31]

ऑफ द रेंट पेड दिस ईयर 5,000 इज़ फॉर द

[194:34]

नेक्स्ट ईयर। यानी कि हमने टोटल जितना भी

[194:36]

रेंट पे करा इस साल उसमें से ₹5,000 का

[194:39]

रेंट वो है जो हमें अगले साल पे करना था।

[194:42]

ओहो।

[194:43]

तो

[194:45]

थर्ड ट्रांजैक्शन में

[194:48]

थर्ड ट्रांजैक्शन में आपको पता चलता है

[194:52]

कि थोड़ा सा रेंट आपने प्रीपे कर दिया है

[194:54]

प्रीपेड रेंट तो प्रीपेड रेंट का अकाउंट

[194:58]

आपको डेबिट कर देना है बेटा ₹5000 से और

[195:01]

जो आपने मोटा खर्चा दिखाया हुआ है रेंट का

[195:04]

डेबिट में कहीं ना कहीं उसे क्रेडिट कर

[195:06]

देना है रिवर्स करने कर देना है ₹5000 से

[195:10]

सो प्रीपेड रेंट की एंट्री होती है बेटा

[195:12]

प्रीपेड रेंट अकाउंट डेबिट टू रेंट अकाउंट

[195:14]

हमेशा ध्यान रखना। आते हैं जी फोर्थ

[195:16]

ट्रांजैक्शन पे। फोर्थ ट्रांजैक्शन में

[195:19]

क्या लिखा है? जी दोस्तों 10% डेप्रिसिएशन

[195:21]

लगा देना है फर्नीचर पे जिसकी कीमत थी 1

[195:23]

लाख। डेप्रिसिएशन का मतलब हमारी एसेट्स की

[195:26]

वैल्यू में गिरावट आना। ड्यू टू यूसेज,

[195:28]

ड्यू टू ऑब्सोलसेंस, ड्यू टू वियर एंड

[195:30]

टियर वगैरह-वगैरह। सो

[195:33]

डेप्रिसिएशन एक खर्चा है। ऑफ़ कोर्स। सो

[195:36]

डेप्रिसिएशन का अकाउंट डेबिट हो जाएगा।

[195:41]

और डेप्रिसिएशन लगने की वजह से एसेट कम हो

[195:44]

रही है ना। एसेट जब भी कम होती है तो

[195:45]

क्रेडिट होती है। सो एंट्री विल बी

[195:47]

डेप्रिसिएशन अकाउंट डेबिट टू जो भी एसेट

[195:49]

का नाम है लाइक फर्नीचर

[195:51]

10% के हिसाब से ₹10,000 का डेप्रिसिएशन

[195:54]

लगा दिया मैंने फर्नीचर के ऊपर आप देख

[195:56]

सकते हैं।

[195:58]

ये हम पहले ही कर चुके हैं। गुड्स यूज़्ड

[196:00]

इन मेकिंग ऑफिस फर्नीचर। बस हमेशा कॉस्ट

[196:03]

पे खेलना है आपको। सेल प्राइस तो चाहे 5

[196:05]

करोड़ हो। लेकिन हमारी जो लागत लगी है वो

[196:07]

तो 4000 ही है ना? अच्छा जी। उसके बाद

[196:10]

हमें रिसीव हुई है कमीशन ₹00 की वो भी चेक

[196:14]

से जिसमें से आधी एडवांस है। ये बड़ी

[196:17]

इंपॉर्टेंट बात है। ₹00 की कमीशन सिक्स्थ

[196:20]

एंट्री।

[196:24]

देखो भैया रिसीव अगर हो रहा है तो पैसा तो

[196:27]

आ रहा है। नो डाउट। तो कैश या बैंक अकाउंट

[196:30]

तो देखो डेबिट होगा ₹00 से।

[196:33]

अब जो आपको कमीशन रिसीव हुई है वो दो

[196:35]

पार्ट्स में है। एक वो जो आपकी कमाई है

[196:38]

एक्चुअली जिसको आप बोलते हो कमीशन रिसीव्ड

[196:42]

और एक वो जो कमाई नहीं है एडवांस में

[196:44]

रिसीव हो गई है। यानी कि एडवांस कमीशन।

[196:49]

तो दो पार्ट्स में आपको इसको रिकॉर्ड करना

[196:52]

है। शुरू का 10,000 आपकी इनकम के लॉजिक से

[196:55]

रिकॉर्ड हो रहा है और अगला 10,000 आपकी

[196:56]

लायबिलिटी के लॉजिक से रिकॉर्ड हो रहा है।

[196:58]

वेरी वेरी इंपॉर्टेंट है। इसके बाद आती

[197:02]

हैं दो और छोटी-छोटी ट्रांजैक्शंस

[197:03]

इंटरेस्ट ऑन कैपिटल एंड इंटरेस्ट ऑन

[197:06]

ड्रॉइंग ₹8,000 और ₹1,500। यह समझने के

[197:10]

लिए 11th क्लास का बच्चा अभी बहुत छोटा

[197:12]

बेबी होता है। पर फिर भी मैं कोशिश करता

[197:14]

हूं समझाने की। इंटरेस्ट ऑन कैपिटल और

[197:16]

इंटरेस्ट ऑन ड्रॉइंग।

[197:20]

देखो जी

[197:22]

इंटरेस्ट ऑन कैपिटल को रिकॉर्ड करने के

[197:24]

लिए हमेशा आपको इंटरेस्ट ऑन कैपिटल का

[197:28]

अकाउंट करना है डेबिट

[197:31]

और कैपिटल का अकाउंट करना है क्रेडिट

[197:38]

और बेटा इंटरेस्ट ऑन ड्रॉइंग को रिकॉर्ड

[197:40]

करने के लिए

[197:43]

ड्रॉइंग्स का अकाउंट करना है डेबिट

[197:48]

और इंटरेस्ट ऑन ड्रॉइंग्स का अकाउंट करना

[197:51]

है क्रेडिट।

[197:56]

ठीक है? इसके लॉजिक पे आप अभी मत जाओ।

[197:59]

क्लास 11th में इसका लॉजिक जब आप कक्षा

[198:01]

12वीं में आते हो ना तो वहां पर

[198:03]

पार्टनरशिप अकाउंटिंग पढ़ते हैं हम। वहां

[198:06]

पर इसका लॉजिक आपको समझ में आता है बेटा।

[198:08]

ठीक है? सो ये है जी आपका आज का सेशन। तो

[198:12]

इसी के साथ आपका जनरल चैप्टर हो गया है

[198:14]

खत्म। मैंने वादा किया था कि यह वीडियो

[198:17]

कितनी भी लंबी जाए मैं जनरल की सभी

[198:19]

इंपॉर्टेंट ट्रांजैक्शंस को इस वीडियो के

[198:21]

अंदर इनकर्पोरेट करूंगा। अगर ये वीडियो

[198:24]

आपको अपने काम की लगी हो तो प्लीज अपने

[198:26]

दोस्तों के साथ जरूर शेयर करें ताकि उनको

[198:28]

भी इस वीडियो का फायदा मिल सके। थैंक यू

[198:30]

सो मच एंड गॉड ब्लेस यू ऑल द अल्फा आर्मी।

[198:33]

ऐसे ही पढ़ाई करते रहिए और मुस्कुराते

[198:35]

रहिए। थैंक यू सो मच।

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