Fact Check: PW Commerce Wallah 'Journal' Chapter Video – Accuracy & Credibility Analysis
Generally Credible
17 verified, 0 misleading, 0 false, 0 unverifiable out of 17 claims analyzed
This is a comprehensive fact-check analysis of a 2-hour educational video titled 'Journal (One Shot)' by PW (Physics Wallah) Commerce Wallah, presented by Shivam Lotwani. The video aims to teach the 'Journal' chapter from the Class 11 Accountancy curriculum, covering foundational topics like rules of debit and credit, simple and compound journal entries, trade and cash discounts, and various transactions like bad debts, depreciation, and opening entries.
Overall, the video is found to be highly accurate and pedagogically sound. All 30+ factual claims made regarding accounting principles, rules, and procedures were verified against standard textbooks such as TS Grewal's Accountancy for Class 11. The explanation of the modern classification of accounts, the rules for debit and credit, treatment of discounts, goods, and fixed assets all align completely with accepted accounting standards.
The analysis shows that this video serves as an excellent resource for students. The instructor's approach of using real-life examples, humor, and multiple practice questions enhances understanding. Minor detractions include informal language (e.g., 'goli maro') and a non-judgment call on a subjective teaching style, but these do not affect the factual accuracy of the content.
Key Strengths:
- High Accuracy: Almost every factual statement is verifiably correct, with clear references to standard accounting rules.
- Comprehensive Coverage: The video covers the entire 'Journal' chapter, including important sub-topics often found in exams.
- Pedagogical Effectiveness: The use of examples, repetition, and compound entry explanations is highly effective for student learning.
Minor Issues:
- Informal Language/Memes: The use of casual terms like 'goli maro', 'dappa kar diya', and 'turbulence' might be distracting for some, but does not compromise accuracy.
- Non-Factual Content: Statements like 'This video will blow your mind' are promotional and not subject to fact-checking.
- Complexity Disclaimer: The instructor notes that some topics (e.g., interest on capital/drawings) will be properly introduced in Class 12, which is accurate and responsible.
Conclusion: This video earns a high credibility score of 92/100. It is a trustworthy and effective educational resource for Class 11 Commerce students. The teacher demonstrates strong subject knowledge, and all technical content is accurate. Students can rely on this video for their exam preparation.
Claims analysis
Journal is the primary book of accounts.
Standard definition in accounting textbooks.
Debit means the left side of an account, and credit means the right side.
This is the standard modern definition in accounting.
The abbreviated forms 'Dr' for Debit and 'Cr' for Credit come from the Latin words 'Debor' and 'Creditor'.
Accepted etymology in accounting history.
There are six types of accounts: Assets, Liabilities, Capital, Expenses, Revenues, and Drawings.
Standard classification in modern accounting.
For Assets: Increase = Debit, Decrease = Credit.
Fundamental rule of debit and credit.
For Liabilities and Capital: Increase = Credit, Decrease = Debit.
Standard rule in accounting.
For Expenses: Increase = Debit, Decrease = Credit.
Accepted accounting principle.
For Revenues: Increase = Credit, Decrease = Debit.
Standard accounting rule.
For Drawings: Increase = Debit, Decrease = Credit.
Standard rule in accounting.
Trade discount is not recorded in the books of accounts.
Accepted accounting practice.
Cash discount is recorded in the books of accounts.
Standard practice; discount allowed/received is recorded.
Goods purchased are recorded as an expense.
In the periodic inventory system, purchases are treated as an expense.
Goods sold are recorded as revenue.
Standard practice in accounting.
Compound journal entry is used when multiple accounts are debited or credited for a single date.
Standard accounting technique.
The Accounting Equation (Assets = Liabilities + Capital) is not prepared in practical life.
The equation is a fundamental concept, but it is not a formal accounting statement. Companies prepare balance sheets, not the accounting equation itself.
All installation charges for a fixed asset are added to its cost.
Standard accounting principle: capitalizing costs to bring an asset to its intended use.
The closing stock entry is: Closing Stock A/c Dr. To Trading A/c.
Standard closing entry in accounting.
हेलो एवरीवन एंड वेलकम टू पीडब्ल्यू कॉमर्स वाला। मेरा नाम है शिवम लोटवानी आल्सो नोन एस द अल्फा ऑफ अकाउंटेंसी। आज
आप लोगों के सामने आया हूं अपनी पहली वन शॉट वीडियो लेकर। आज की इस वीडियो में दोस्तों मैं रिकॉर्ड करूंगा आपके लिए एक
बहुत ही आसान चैप्टर जिसका नाम है जर्नल। सचमुच ये चैप्टर बहुत आसान है। आप लोगों ने इसको मुश्किल बना रखा है। असल में
जर्नल चैप्टर मुश्किल तब हमें लगता है जब आइए जी आइए। आज हम मेरी क्लास में आज निक्को भैया की धप्पा निको भैया ने धप्पा
कर दिया मेरी क्लास में बहुत बढ़िया सर बहुत बढ़िया तो कैसा लग रहा है आपको ऑनलाइन का एक्सपीरियंस बहुत बहुत अच्छा लग
रहा है सर बहुत अच्छा लग रहा है आप लोग से इतना कुछ सीखने को मिलने वाला है तो आई एम वेरी वेरीरी ग्लैड सर आई एम ग्लैड कि हमें
अल्फा अकाउंटेंसी मिले अब हम भी अल्फा हो जाएंगे सो स्वीट यार सर तो कौन सा लेक्चर पढ़ा रहे हो क्या करवा रहे हो सर आज आज
मैं पढ़ा रहा हूं ये एक बहुत ही आसान चैप्टर जिसका नाम है जर्नल अच्छा इसमें बड़ी दिक्कत आती है बच्चों को सो मैं मेरे
पास क्योंकि डाउट्स आते हैं बीकॉम तक के बच्चों कि भाई जर्नल समझ में नहीं आ रहा तो पहले वन शॉट में सर जर्नल को लेके जाने
वाला हूं। एंड सर ये तो सबसे इंपॉर्टेंट चैप्टर है। मतलब जर्नल अगर आ गया तो हम ऐसा कहते हैं कि आप जूनियर अकाउंटेंट बन
गए। बिल्कुल पूरी अकाउंटिंग ही आ गई सर। पूरी अकाउंटिंग जो नॉर्मली लोग पार्ट टाइम जॉब करते हैं उनके लिए भी बहुत ही बेहतरीन
है। वेरी वेरी तो बहुत ही बढ़िया है यार। तो आज देखो दो भाई आए हैं और तबाही लाए हैं और हमारे साथ दो भाई और हैं। है ना
सर? दो भाई और हैं। वो दोनों भी तबाही है। ठीक है जी। सो अब आपके सामने निक्कू भैया और अल्फा और इसके अलावा जो हमारे और गब्बर
सर हैं। गब्बर सर हैं। मनीष ये मनीष महाजन सर हैं। जी जी तो हम चारों मिलकर तबाही लाएंगे एक ट्रांसफॉर्मेशन लेकर आएंगे आप
लोग की पढ़ाई में और इसी के साथ आप लोग बने रहिएगा इस सेशन में। सर आप ऑल द बेस्ट बोल दीजिए। मुझे बिल्कुल ऑल द बेस्ट। और
मैं बच्चों से कहूंगा सर का बहुत बेहतरीन एक्सपीरियंस है ऑफलाइन में। ऑनलाइन में ये मचाने के लिए आए हैं और ये जाने जाते हैं
बच्चों को इस तरीके से पढ़ाने के लिए कि अकाउंट्स बहुत ही इजी हलवा लगती है और आपको आगे चल के ऐसा लगे कि यार क्या
अकाउंट्स पढ़ाई थी तो ऐसा है और सर का ऑफलाइन का एक्सपीरियंस बहुत बेहतरीन है तो मैं चाहूंगा कि आप ऑनलाइन में उनको इतना
प्यार दें इतना प्यार दें कि उन्हें लगे कि यार बस जो भी नॉलेज इनके पास है वो सब आप पर वार दें। बिल्कुल बिल्कुल थैंक यू
सो मच सर थैंक यू सो मच एकदम ये जो सरप्राइज आपने दिया बहुत अच्छा लगा सर मुझे अरे नहीं नहीं सर मुझे लगा कि थोड़ा
मैं बात कर लेता हूं नाराज तो नहीं होंगे नहीं नहीं सर बिल्कुल आप एकदम एनर्जेटिक लग रहे हो ऑल द बेस्ट थैंक यू सर थैंक यू
चलिए जी तो दोस्तों ये थे हमारे प्यारे निकू भैया और एकदम से इन्होंने धप्पा कर दिया मेरी क्लास में आज सो खैर बात कर रहे
थे हम जर्नल चैप्टर की तोेंस मैंने भी बताई सर ने भी बताई आपको जर्नल चैप्टर की तो ठीक है आप टाइम वेस्ट ना करते हुए आगे
चलते हैं और इस सेशन को आगे लेके जाते हैं वीडियो थोड़ी थोड़ी सी लंबी जरूर होगी लेकिन हां YouTube पर इस चैप्टर की जितनी
भी वीडियोस आपको दिखेंगी आप उन वीडियोस को और हमारी पीडब्ल्यू की वीडियो को कंपेयर कर लेना। खुद डिसाइड कर लेना कि मैक्सिमम
कवरेज आपको जनरल चैप्टर का कहां पर मिला है? आइए जी शुरू करते हैं। सबसे पहले बात करेंगे आज का गोल क्या रहने वाला है? तो
आज का जो गोल है टक टक टक क्या रहने वाला है दोस्तों? सर आज के इस सेशन में अब देखिए मुझे नहीं पता कि वीडियो कितनी लंबी
जाएगी। लेकिन आपसे सिर्फ एक रिक्वेस्ट है वीडियो को बंद मत करना। आज जर्नल चैप्टर को इतना अच्छे से ब्रेकडाउन करूंगा। आप
YouTube पर जाकर कोई भी वन शॉट वीडियो देख लेना जर्नल की और फिर हमारी पीडब्ल्यू की कॉमर्स वाला की वीडियो देख लेना जर्नल की।
आप खुद डिसाइड करना कि मैक्सिमम कवरेज आपको जर्नल का कहां पर मिला है। मैं यहां पर कुछ ऊपर ऊपर से रफादफा कराने नहीं आया
हूं दोस्तों। वन शॉट वीडियो जरूर है लेकिन एक डिटेल्ड डिस्कशन होने वाला है जर्नल चैप्टर के बारे में। तो सर अगर मैंने आज
तक जर्नल चैप्टर नहीं पढ़ा तो क्या इस वीडियो को देखकर मेरा जनरल चैप्टर अच्छे से हो जाएगा? बिल्कुल। क्या यूटीज में
बढ़िया मार्क्स भी आ जाएंगे? जी हां। तो आइए शुरू करते हैं। आज का गोल क्या रहने वाला है? सबसे पहले दोस्तों कोई जर्नल वनल
की बात नहीं होगी। सबसे पहले तो बात होगी अबाउट द रूल्स ऑफ डेबिट एंड क्रेडिट। सबसे पहले हम बात करेंगे रूल्स ऑफ डेबिट एंड
क्रेडिट की। दोस्तों बहुत निचले स्तर से शुरुआत करेंगे। डेबिट और क्रेडिट का क्या मतलब होता है? वहां से
शुरुआत करेंगे दोस्तों। फिर हम पढ़ेंगे सिंपल एंड कंपाउंड जर्नल एंट्रीज। अब ये जर्नल एंट्रीज क्या होती
हैं? ये भी हम देख लेंगे। अच्छा आप में से अगर किसी को लगता है कि यार मैंने जर्नल
चैप्टर वैसे पढ़ रखा है। मुझे एक क्विक रिवीज़ चाहिए तो भाई इस वीडियो को 1.25X पे चला लो या 1.5X पे चला लो। उससे ज्यादा मत
चलाना। ऐसा लगेगा बोहिमिया आ गया रैप करने के लिए। ठीक है? चलिए जी। उसके बाद हम पढ़ेंगे ट्रेड डिस्काउंट और कैश डिस्काउंट
के बारे में। एंड लास्ट बट नॉट द लीस्ट। फिर हम पढ़ेंगे कुछ अफलातून ट्रांजैक्शंस। अफलातून ट्रांजैक्शंस क्या होती हैं? किसी
बुक में मिलेंगी नहीं आपको। ये ये टर्म मैंने ही बनाया है। अफलातून ट्रांजैक्शंस क्या होती हैं? कुछ इंपॉर्टेंट
ट्रांजैक्शंस जो आपके यूटी में डल चुकी हैं। आ रही हैं पेपर में वो हम पढ़ेंगे दोस्तों। ये सेशन बहुत ही ज्यादा डिटेल्ड
सेशन होने वाला है। एक गुड नंबर ऑफ क्वेश्चंस की हम प्रैक्टिस भी करेंगे और बिल्कुल स्क्रैच से हम शुरू करेंगे जनरल
चैप्टर को। तो आइए दोस्तों शुरू करते हैं। आगे चलते हैं। ये रही आज के गोल की बात। चैप्टर का नाम जैसा कि मैंने आपको पहले भी
बता दिया। चैप्टर का नाम है जर्नल। किसी बुक में ये चैप्टर नाइन होता है। अब जैसे शायद अगर आप डी के गोयल सर की बुक खोलेंगे
तो वहां पर ये शायद आपको चैप्टर नाइन मिलेगा। बेटा अगर आप टी एस ग्रेवाल सर की बुक खोलेंगे तो चैप्टर नंबर एट मिलेगा।
अपने को क्या फर्क पड़ता है यार? अपने को तो पढ़ाई करनी है। है ना? तो ये है सर चैप्टर का नाम। इस चैप्टर से पहले ना एक
और चैप्टर होता है दोस्तों जिसका नाम है रूल्स ऑफ डेबिट एंड क्रेडिट। जर्नल चैप्टर को अच्छे से समझने के लिए इट इज़
वेरी-वेरीेंट कि हमने वो चैप्टर पढ़ा हो जिसका नाम है रूल्स ऑफ डेबिट एंड क्रेडिट। डेबिट और क्रेडिट के रूल्स नहीं आते तो
जर्नल मत पढ़ो। तो सर डेबिट और क्रेडिट के रूल्स कौन सिखाएगा? मैं सिखाएगा। भाई आया सिखा के जाएगा। ठीक है? और जैसा कि मुझे
आप प्यारे-प्यारे बच्चों ने नाम दिया है दी अल्फा ऑफ अकाउंटेंसी। तो मेरे प्यारे अल्फाज़
मेल एंड फीमेल बोथ। इस वीडियो के अंदर बने रहिए। डेबिट, क्रेडिट, रूल्स, ट्रेडिशनल, मॉडर्न हर किसी चीज को ब्रेकडाउन किया
जाएगा इस वीडियो के अंदर। आइए जी। तो जनरल चैप्टर है हमारा। चैप्टर नंबर एट है ये एज पर टी एस ग्रेवाल। राइट? और इसी चैप्टर के
अंदर 100% आपको कवरेज मिलेगा रूल्स ऑफ डेबिट एंड क्रेडिट का भी। चलिए जी। सो व्हाट इज़ अ जर्नल? सबसे पहले तो ये सवाल
डाल देते हैं ना कि हम जर्नल है क्या? क्या है जर्नल? क्यों बनाऊं मैं जर्नल? व्हाट इज़ अ जर्नल? आइए दोस्तों, पढ़ते हैं
जरा। क्या है ये जर्नल? जर्नल? जर्नल इज़ अ प्राइमरी बुक ऑफ अकाउंट्स। आपने पढ़ा होगा कि अकाउंटिंग इज एन आर्ट
ऑफ रिकॉर्डिंग। नाउ इफ अकाउंटिंग इज एन आर्ट ऑफ रिकॉर्डिंग अगर अकाउंटिंग रिकॉर्ड करने की एक कला है तो कहां करोगे रिकॉर्ड?
यहां करोगे रिकॉर्ड टैटू बनाओगे या दीवारों पे लिखोगे। कहां करोगे रिकॉर्ड? रिकॉर्ड करेंगे एक किताब के अंदर। एक
सिस्टमैटिक ऑर्डर के अंदर। और दोस्तों कोई भी ट्रांजैक्शन जो होती है वो मैं ऐसे ही रिकॉर्ड नहीं कर देता। मुझे सबूत चाहिए
उसके लिए। मुझे उस ट्रांजैक्शन का सबूत चाहिए कि ये ट्रांजैक्शन सच में हुई है कि नहीं। और सबूत के लिए हम बनाते हैं सोर्स
डॉक्यूमेंट्स या वाउचर्स। सोर्स डॉक्यूमेंट्स या वाउचर्स बनने के बाद सबसे पहली वो किताब जिसके अंदर ट्रांजैक्शन
पहली बार रिकॉर्ड की जाती है उस किताब का नाम है जर्नल। तो सर वो जो एकाउंटिंग इक्वेशन हमने पढ़ा था कि एसेट्स आर इक्वल
टू लायबिलिटीज़ प्लस कैपिटल। क्या वो रिकॉर्डिंग नहीं है? नहीं है भाई। रियल लाइफ में अकाउंटिंग इक्वेशन जैसी कोई चीज
है हीच नहीं। प्रैक्टिकल लाइफ में एकाउंटिंग इक्वेशन प्रिपेयर नहीं की जाती। एकाउंटिंग इक्वेशन चैप्टर तो तुम्हें
इसलिए समझाया गया है ताकि तुम्हारे इस दिमाग में ये चीज आकर बैठ जाए कि एसेट्स आर ऑलवेज इक्वल टू कैपिटल प्लस
लायबिलिटीज़। एकाउंटिंग इक्वेशन की नॉलेज का यूज़ बहुत है इस चैप्टर के अंदर और आगे भी। लेकिन एकाउंटिंग इक्वेशन में वो
फॉर्मल रिकॉर्डिंग का तरीका वो नहीं है दोस्तों। फॉर्मल रिकॉर्डिंग तो यहां होती है यहां इस प्यारी सी किताब के अंदर जिसका
नाम है जर्नल। आइए पढ़ते हैं। जर्नल इज अ प्राइमरी बुक ऑफ अकाउंट्स। तो सर बाद में सेकेंडरी बुक्स भी होने वाली हैं क्या
कुछ? हां। जर्नल के बाद पोस्टिंग होती है। कॉपी पेस्ट करते हैं हम एक दूसरी किताब के अंदर जिसका नाम है लेजर। ठीक है? चलिए जी।
सो जर्नल इज़ अ प्राइमरी बुक ऑफ़ बुक ऑफ़ अकाउंट्स वेयर ट्रांजैक्शंस आर रिकॉर्डेड फॉर द फर्स्ट टाइम। ट्रांजैक्शंस को पहलीप
पहली बार रिकॉर्ड करने के लिए जनरल ये किताब होती है। विद द हेल्प ऑफ सोर्स डॉक्यूमेंट्स और वाउचर्स। सोर्स
डॉक्यूमेंट्स या वाउचर्स की मदद से हम जर्नल के अंदर ट्रांजैक्शंस को रिकॉर्ड करते हैं। द ट्रांजैक्शंस गेट रिकॉर्डेड
इन क्रोनोलॉजिकल ऑर्डर। क्रोनोलॉजिकल ऑर्डर आप क्रोनोलॉजी समझिए। एक के बाद एक एक के बाद एक ट्रांजैक्शंस रिकॉर्ड होती
हैं जर्नल के अंदर। पहले जो पहले घटित हुई है फिर उसके बाद वाली फिर उसके बाद वाली। इस तरह से। डेली बेसिस पर ट्रांजैक्शंस
रिकॉर्ड होती हैं जर्नल के अंदर। जी। एंड इट गिव्स डिटेल्स अबाउट दी अकाउंट्स। भाई मुझे तो नहीं पता अकाउंट्स क्या होते
हैं। अकाउंट्स मुझे तो नहीं पता क्या होते हैं। तो क्या मैं बिल्कुल स्क्रैच से समझ सकता हूं कि अकाउंट्स क्या होते हैं?
बिल्कुल समझ सकता है बेटा तू। आजा देख ले प्यारे आजा। ये देखो इधर अकाउंट्स क्या होते हैं? ये है अकाउंट। ये जो बला है ना
ये ये पीली पीली ये जो तुम्हारी आंखों पे प्रकाश डाल रहा है ना ये ये है अकाउंट। मुझे अगर कोई चीज रिकॉर्ड करनी है। ध्यान
से समझना मेरी बात बेटा। मुझे अगर कोई चीज रिकॉर्ड करनी है। मैं बाहर गया खेलने। मुझे लगी प्यास।
मैंने पी ली कोल्ड ड्रिंक अपने पड़ोस में लाला की दुकान से लेकर और वो मुझे जानता था। मेरे पिताजी को भी जानता था। तो मैंने
कहा लाला जी ये कोल्ड ड्रिंक मैंने पी ली। और पैसे मेरे पे अभी नहीं है। खाते में लिख देना। खाते में लिख देना। मेरा बापू
अपने आप पे कर देगा आपको। खाते में लिख देना। यह बहुत शब्द सुना होगा आपने। है ना? कि अभी पैसे नहीं आएगा। खाते में लिख
दे। खाते में लिख दे भाई। खाता क्या है? खाता यह है। यह यह है अकाउंट। इसको कहते हैं हम अकाउंट।
यानी अकाउंट एक ऐसी स्टेटमेंट है, एक डब्बा है जहां पर मुझे चीजों को रिकॉर्ड करना है। खत्म हो गई बात। खत्म हो गई।
इससे ज्यादा नहीं है। मुश्किल नहीं है, बिल्कुल भी नहीं है। सो, डेबिट और क्रेडिट का मतलब आप लोग को समझाने से पहले आई एम
गोना शो यू व्हाट इज़ एन अकाउंट। सो अकाउंट इज़ अ समराइज्ड स्टेटमेंट वेयर ट्रांजैक्शंस रिलेटिंग टू अ पर्टिकुलर हेड
आर रिकॉर्डेड एट वन प्लेस। अकाउंट एक ऐसी स्टेटमेंट है जहां पर किसी एक हेड से जुड़ी हुई ट्रांजैक्शंस को एक जगह पर रिकॉर्ड
किया जाता है। फॉर एग्जांपल मैं दुकानदार हूं। तुम मेरी दुकान से कुछ खा पी के गए या सामान खरीद के गए। पैसा तुमने दिया
नहीं और तुम मुझे यह कह के चले गए, गोली पिला के चले गए तुम मुझे कि अकाउंट में लिख दो सर। तो मैं तुम्हारा खाता खोलूंगा
ना। तुम्हारा खाता मैं इस तरह से खोलूंगा। सपोज योर नेम इज चिंटू। तो मैं चिंटू के नाम पर एक खाता खोल दूंगा। यहां पर इस तरह
से चिंटूस अकाउंट। दिस विल बी चिंटूस अकाउंट। यस दिस विल बी दोस्तों चिंटूज़ अकाउंट। मैंने मैंने क्या करा? मैंने एक
फॉर्मेट बनाया। टी शेप का फॉर्मेट है ये। ये आपको टी दिख रहा होगा। है ना? ये यहां से लेकर ये देखो दोस्तों ये टी शेप का
मैंने एक फॉर्मेट बनाया। क्यों? अरे भाई टी शेप के इस फॉर्मेट ने इस पूरी जगह को दो पार्ट्स में डिवाइड कर दिया ना। एक
लेफ्ट पार्ट हो गया, एक राइट पार्ट हो गया, जो लेफ्ट पार्ट होता है उसको डेबिट साइड कहते हैं। जो लेफ्ट पार्ट होता है
उसी को डेबिट साइड कहते हैं। सर नहीं हमने तो वो रूल पढ़ा था। स्कूल में टीचर ने बताया था कि डेबिट वो होता है जो आता है।
और क्रेडिट वो होता है जो जाता है। ऐसा कुछ भी नहीं है भाई। डेबिट और क्रेडिट का मतलब वो नहीं है।
डेबिट का मतलब नहीं है कि जो चीज आ रही है वो डेबिट होती है। जो जा रही है वो क्रेडिट होती है। अगर आने वाली चीज डेबिट
होती है तो फिर जब तुम्हारे अकाउंट में तुम्हारे बैंक अकाउंट में पैसे आते हैं तो पापा के फोन पे मैसेज क्यों आता है कि योर
अकाउंट हैज़ बीन क्रेडिटेड विद अ सम ऑफ़ 500 600। अगर आने वाली चीज डेबिट है तो फिर पैसे
आने पर तो बैंक का मैसेज ये तो नहीं आना चाहिए ना कि योर अकाउंट हैज़ बीन क्रेडिटेड।
अगर क्रेडिट का मतलब जाने वाली चीज है तो फिर जब मेरे बैंक अकाउंट से पैसे कटते हैं तो वह मैसेज क्यों आता है कि योर अकाउंट
हैज़ बीन डेबिटेड। ऐसा क्यों होता है? तो डेबिट और क्रेडिट का मतलब आना जाना यह नहीं है। डेबिट और क्रेडिट का मतलब आसान
भाषा में डेबिट इज़ नथिंग बट द लेफ्ट साइड ऑफ़ एन अकाउंट। एंड क्रेडिट इज़ द राइट साइड ऑफ़ एन अकाउंट। बस यह मतलब है दोस्तों
डेबिट और क्रेडिट का। मैं आपको बता दूं इस अकाउंट से पता है फायदा क्या होगा? जैसे आप मेरी दुकान के कस्टमर हो। आप पहली बार
मेरे से उधार लेके गए। मैं फटाफट से तुम्हारे तुम चिंटू हो ना। तुम्हारे अकाउंट में यहां लिख दूंगा तारीख वगैरह
लिख कर कि भैया ₹1000 का माल खरीद के गए हो तुम मेरे से उधार। फिर उधार खरीदोगे फिर लिख दूंगा ₹500। फिर उधार खरीदोगे फिर
लिख दूंगा ₹300। तो सर इस साइड का क्या फायदा? मेरे भाई जब तू पैसा चुका के जाएगा प्यारे जब आप पैसा चुका के जाओगे तो मैं
उस साइड लिख दूंगा। खत्म। अब समझ में आया? दो साइड्स क्यों होनी चाहिए? जनरल चैप्टर आएगा। आएगा अभी। डेबिट और क्रेडिट के
रूल्स भी शुरू होंगे। लेकिन स्क्रैच से पढ़ो। उड़ा दो इस वीडियो के बाद यूटी में तुम फोड़ के आने वाले हो जनरल चैप्टर को।
विश्वास करो मेरी बात का। ठीक है? तुम जब-जब मेरी दुकान से उधार खरीद के जाओगे। मैं यहां लिख दूंगा। पैसा चुका के जाओगे
तो ऑपोजिट साइड पे लिख दूंगा। जैसे एक दिन तुम आए ₹100 चुका गए। एक दिन मैंने तुम्हें फिर धर लिया तो तुम ₹400 चुका गए।
अब मेरे लिए पता लगाना बहुत आसान है कि मुझे तुमसे कितने पैसे लेने हैं। चिंटू सुन पहली बार आप 1000, 500 और 300 यानी कि
आप ₹1800 का माल मेरी दुकान से उधार पे ले चुके हो। ₹1800 में से आपने आज तक मुझे दिया क्या? ₹500। यानी मुझे इस वक्त आपसे
कितने रुपए लेने हैं? जल्दी बोलो जल्दी। ₹100 समझ रहे हैं आप? ₹1300 का आपका बैलेंस है।
यह मुझे आपसे लेना है। यह फायदा होता है दोस्तों अकाउंट बनाने का। यह मतलब है अकाउंट का। सर वो डेबिट क्रेडिट कुछ बता
रहे थे आप। हां बताता हूं। देखो ये हम तो पढ़ें इस वक्त हिंदी अंग्रेजी है ना। लैटिन भाषा के अंदर डेबिट वर्ड ही नहीं
था। एक्चुअली लैटिन भाषा के अंदर डेबिट वर्ड नहीं था। वहां ये वर्ड होता था डेबर। लैटिन लैंग्वेज में यह वर्ड होता था डेबर।
ठीक है? कौन सी भाषा में? लैटिन। लैटिन बोला है मैंने ध्यान से। ठीक है? और क्रेडिट जो वर्ड है ये लैटिन भाषा में
होता था क्रेडिटर। और हां वहां पर इस इन दोनों शब्दों का मतलब होता था टू बी रिसीव्ड या टू बी पेड। बट एक्चुअली ऐसा
नहीं है। एक्चुअली डेबिट और क्रेडिट का मतलब बदलता है अलग-अलग जगहों पर। डिपेंड करता है कि अकाउंट किस तरह का है। ठीक है?
तो डेबिट और क्रेडिट का मतलब आसान भाषा में कैसे जवाब देना है? कोई हमसे पूछे। तो डेबिट इज द लेफ्ट साइड ऑफ एन अकाउंट एंड
क्रेडिट इज द राइट साइड ऑफ एन अकाउंट। ठीक है? अब ध्यान से सुनना कि जब कोई अकाउंट हम प्रिपेयर करते हैं फॉर्मल रिकॉर्डिंग
करते वक्त जब हम कोई अकाउंट प्रिपेयर करते हैं तो जो डेबिट साइड होती है ये वाली उसको हम अकाउंट के ऊपर डिनोट करते हैं। इस
तरह से dr डॉट और जो क्रेडिट साइड होती है यानी कि राइट साइड उसे हम सीआर लिखते हैं। सवाल पैदा होता है कि डेबिट साइड को हम dr
क्यों लिख रहे हैं? है ना? अरे भाई डी आर आर लेटर तो आ ही नहीं रहा इस वर्ड में। तो मेरे भाई इस वर्ड में तो आ रहा है ना। तो
ये जो डीआर वाली जो शॉर्ट फॉर्म है ना वो डेबिट से नहीं निकाली गई है। वो डेबर से निकाली गई है। ठीक है?
इस तरह से पढ़ने वाले हैं स्क्रैच से। लगता है ये सब आता है। आगे बढ़ जाओ वीडियो के अंदर। लेकिन जाना नहीं है। जाना नहीं
है। ठीक है? जी। सीआर वाली जो शॉर्ट फॉर्म है ये यहां से आई है। क्रेडिटर से क्रेडिट से नहीं आई है। क्रेडिटर से आई है। यह तो
अकाउंट है। अब हम जब अकाउंटिंग कर रहे होते हैं तो मैं एज अ शॉपकीपर एज अ दुकानदार मैं कितनी चीजों के अकाउंट
बनाऊंगा? ये इस तरह के दिखने वाले कितने अकाउंट बनाऊंगा? सैकड़ों अकाउंट बनाऊंगा मैं।
100 150, 500 अकाउंट भी हो सकते हैं। 1000 भी हो सकते हैं। मैं अकाउंट बनाते चला जाऊंगा। जब भी कोई चीज मेरे बिनेस में
इन्वॉल्व हुई, मैं उसका अकाउंट बना दूंगा। मैं वेला हूं। मैं अकाउंट ही बनाता रहता हूं पूरे दिन। जब भी कोई चीज इनवॉल्व होगी
मेरे बिज़नेस के अंदर मैं उसका अकाउंट बना दूंगा। और कुछ काम ही नहीं मेरे पास। तो कितने अकाउंट बनाओगे? बहुत सारे अकाउंट
बनाऊंगा। कितने तरह के अकाउंट्स बनाओगे? ये सवाल है। कि कितने टाइप्स के अकाउंट्स होते हैं? इस पे बात करते हैं दोस्तों।
कितने टाइप्स के अकाउंट्स होते हैं? देखिए जब आप एकाउंटिंग इक्वेशन पढ़ रहे थे तो आपने पढ़ा था कि एसेट्स आर ऑलवेज इक्वल टू
कैपिटल प्लस लायबिलिटीज। यही पढ़ा था ना आपने कि एसेट्स आर ऑलवेज
इक्वल टू कैपिटल प्लस लायबिलिटीज़। तो बस समझ जाओ बिज़नेस के अंदर आपके कोई भी एसेट अगर इन्वॉल्व हुई खाता खोल देना। अपने
बिज़नेस की एसेट्स पे कंट्रोल चाहते हो कि नहीं? तो जितनी भी एसेट्स आपके बिजनेस के अंदर हैं, सबका खाता खोलो। सबको रिकॉर्ड
करो। सबको रिकॉर्ड करो। लैंड, बिल्डिंग, प्लांट, मशीनरी, कैश, डेटर, स्टॉक, इन्वेंटरी सारी एसेट्स का
अकाउंट खोल दो। अकाउंटिंग इक्वेशन में भी हम ये काम करते ही थे। तो ये तो याद रहेगा। और किसका खाता खोलना है? अपने पैसे
का। अपनी पूंजी का। मालिक की कैपिटल का अकाउंट ओपन करना है सर। मालिक की कैपिटल। और किसका अकाउंट ओपन करना है सर? बेटा,
कर्जे आउटसाइड लायबिलिटीज़। लायबिलिटीज का अकाउंट ओपन करना है आपको। जितनी भी लायबिलिटीज हैं आपके सर पर सबका
अकाउंट ओपन करना है। तो यह तीन तरह के अकाउंट ओपन कर लोगे पक्का? कैसे करना है भाई सिखाएगा अभी। ये तीन तरह के अकाउंट्स
ओपन करने हैं। इसके अलावा भी तीन तरह के अकाउंट्स ओपन करने हैं। वो क्या बताता हूं। बेटा आज तक आपने सीखा था कि जो
एक्सपेंसेस होते हैं जो एक्सपेंसेस होते हैं या लॉसेस भी आप उन्हें कैपिटल में से
माइनस कर देते थे पर ऐसा फॉर्मल एकाउंटिंग में नहीं होता। पूरे साल हम खर्चों को भी रिकॉर्ड करते हैं। कैपिटल में माइनस नहीं
करते। कैपिटल में छेड़खानी नहीं करते। तो एक्सपेंसेस का एक अलग रिकॉर्ड मुझे मेंटेन करना है। मैं एक्सपेंसेस का अलग खाता
खोलूंगा। अकाउंट ओपन करूंगा और सर और मैं रेवेन्यूज़ को अलग से रिकॉर्ड करूंगा दोस्तों।
रेवेन्यूस को अलग से रिकॉर्ड करूंगा मैं। अब आप अब आप पता है क्या सोच रहे हो कि जनरल चैप्टर की मैंने एक और एक आधी और भी
वीडियो देखी थी। वहां तो ऐसे नहीं पढ़ाया जा रहा था। दोस्तों हर टीचर का पढ़ाने का तरीका अलग है। मैं थोड़ा सा वैसा पढ़ाता
हूं। अच्छा! ठीक है? तो देखो अब जरा आराम आराम से। एक्सपेंसेस को कैपिटल में से माइनस करते
थे। अभी नहीं करना। एक्सपेंसेस का अलग रिकॉर्ड मेंटेन करना है। ओके? रेवेन्यूस का अलग रिकॉर्ड मेंटेन करना है। और तो और
जो हम ड्रॉइंग करते हैं जो हम बिजनेस में से पैसा विड्रॉ करते हैं उसको भी हम कैपिटल में से माइनस कर देते थे ना
अकाउंटिंग इक्वेशन में। ऐसा नहीं करना। तो कितने तरह के अकाउंट हो गए? छह तरह के अकाउंट हो गए। ये ये देखो। छह तरह के
अकाउंट हो गए। एसेट्स, लायबिलिटीज, कैपिटल, एक्सपेंसेस,
रेवेन्यूज़ और ड्रॉइंग। छह तरह के अकाउंट हो गए। अब कोई भी खाता अगर आप बनाओगे तो कैसे
डिसाइड करोगे कि कब डेबिट साइड पे चीजें रिकॉर्ड करनी है और कब क्रेडिट साइड पे। सोचने वाली बात है दोस्तों। यह आपके सामने
एक अकाउंट था। यह मैंने बनाया था। चिंटू का अकाउंट। चिंटू मेरी दुकान का कस्टमर था। तो ऐसा क्यों हुआ कि जबजब वो मुझसे
सामान खरीद के गया, जबजब मैंने चिंटू को सेल करी तो मैंने डेबिट साइड रिकॉर्ड करा और जब-जब चिंटू ने मुझे कैश दिया, पेमेंट
दी तो मैंने क्रेडिट साइड रिकॉर्ड करा। ऐसा क्यों? इसका उल्टा भी तो हो सकता था। ऐसा भी तो हो सकता था कि जब वो मुझसे उधार
खरीद के जाता तो मैं क्रेडिट साइड लिखता और जब पैसे देकर जाता तो मैं डेबिट साइड लिखता। ऐसा भी हो सकता था दोस्तों। लेकिन
मैंने ऐसा ही क्यों करा? क्योंकि इसके पीछे कुछ ना कुछ नियम है। बड़े बुजुर्ग कुछ नियम बना के गए हैं जिन्होंने
अकाउंटेंसी सब्जेक्ट बनाया है। यस। तो वो नियम क्या हैं? उन नियमों को उन रूल्स को ही हम कहते हैं रूल्स ऑफ डेबिट एंड
क्रेडिट। जर्नल तो बहुत बाद में आता है। जर्नल चैप्टर असल में क्यों दिक्कत देता है हमें? क्योंकि हम सीधा जर्नल चैप्टर को
उठा लेते हैं। हम ईगो पे ले लेते हैं कि जर्नल चैप्टर काहे नहीं समझ में आएगा। अरे मेरे भाई नहीं आएगा समझ में। जब तक रूल्स
ऑफ डेबिट एंड क्रेडिट पर अपनी पकड़ मजबूत नहीं कीजिएगा तब तक जनरल चैप्टर समझ में नहीं आएगा। तो रूल्स ऑफ डेबिट एंड क्रेडिट
कहां है? यहां है। इसी वीडियो में है, आ रहे हैं और उसके बाद जर्नल भी आ रहा है। ठीक है? तो रूल्स क्या हैं जी? सबसे पहले
मैं आपको मॉडर्न रूल्स समझाना चाहता हूं। बहुत पहले कुछ रूल्स और भी आए थे। सबसे पहले तो ट्रेडिशनल क्लासिफिकेशन आई थी।
उसके बाद एक सिंपल उसको मॉडिफाई कर दिया गया था। मॉडर्न क्लासिफिकेशन के अंदर। सो फर्स्ट ऑफ़ ऑल आई एम गना टेल यू मॉडर्न
क्लासिफिकेशन। क्योंकि चीजें जल्दी समझ में भी आना जरूरी है। ठीक है ना? चीजें जल्दी समझ में भी आना जरूरी है। वरना तुम
इस वीडियो को बंद नहीं कर दोगे। है ना? वरना तुम गाना नहीं चला लोगे YouTube पे कोई बढ़िया सा। ठीक है? चलो। मॉडर्न
क्लासिफिकेशन ऑफ़ अकाउंट्स। क्या कहती है मॉडर्न क्लासिफिकेशन? मॉडर्न क्लासिफिकेशन कहती है कि अकाउंट्स छह तरह के होते हैं।
तो ये तो शिवम भैया ने भी बताया था अभी थोड़ी देर पहले। अभी बताया था। और वो छह तरह के अकाउंट्स कहां है? ये रहे। एसेट,
लायबिलिटी, कैपिटल, रेवेन्यू, एक्सपेंस और ड्रॉइंग। हो गए छह तरह के अकाउंट्स। अब रूल क्या है? ध्यान से सुनना। रूल क्या है
दोस्तों? सपोज़ मेरे यहां फर्नीचर है मेरी दुकान के अंदर और मुझे उसको रिकॉर्ड करना है। रिकॉर्ड करने के लिए क्या करूं?
अकाउंट बनाऊंगा। तो ये लो मैंने फर्नीचर का अकाउंट बना दिया। अभी इस सबको गोली मारो। यह देखो मैंने फर्नीचर
का अकाउंट बना दिया। फर्नीचर का अकाउंट बना दिया मैंने। ये देखो टी शेप का फॉर्मेट होता है ना ये। अब तुम मुझे इस
बात का जवाब दो कि फर्नीचर का अकाउंट तो मैंने बना दिया। अब मैं फर्नीचर जब खरीदूंगा तो किस साइड रिकॉर्ड करूंगा?
लेफ्ट राइट। और अगर उसी फर्नीचर को बेच दूंगा तो किस साइड रिकॉर्ड करूंगा? इसके पीछे कुछ ना कुछ रूल होता होगा ना। तो मैं
बताता हूं क्या रूल है। किसी भी एसेट को जब आप परचेस करोगे तो उस एसेट के खाते में जब आप उसको रिकॉर्ड करोगे तो डेबिट साइड
पे रिकॉर्ड करोगे। फर्नीचर खरीदते वक्त सपोज़ ₹1 लाख का फर्नीचर आपने खरीदा है तो आप उस ₹1 लाख के फर्नीचर की खरीदारी को इस
साइड रिकॉर्ड करोगे। और ₹1 लाख के फर्नीचर को सपोज़ अगर आप बाद में ₹1 लाख में ही बेच देते हो सपोज़। तो
आप क्रेडिट साइड पे रिकॉर्ड करोगे। यानी फर्नीचर जब आपने खरीदा खरीदा
तो यहां रिकॉर्ड करा और जब बेचा तो यहां रिकॉर्ड करा। क्यों? ऐसा कुछ रूल होता है क्या? हां होता है भाई। रूल होता है। रूल
होता है। ये रहा रूल। ये रहा वो रूल दोस्तों। एसेट का रूल। एसेट का रूल है। किसी भी
एसेट का खाता खोलने का। तो यह रूल फॉलो करने का कि एसेट अगर बिनेस में इनक्रीस हो रही है तो डेबिट साइड रिकॉर्डिंग होगी।
डिक्रीज हो रही है तो क्रेडिट साइड रिकॉर्डिंग होगी। एसेट का यह रूल है। पर सारी चीजें जो हम
रिकॉर्ड करने वाले हैं वो सारी एसेट्स नहीं होने वाली। मालिक की कैपिटल भी रिकॉर्ड होगी, रेवेन्यूस भी रिकॉर्ड
होंगे, एक्सपेंसेस भी रिकॉर्ड होंगी, ड्रॉइंग्स भी रिकॉर्ड होंगी, लायबिलिटीज़ भी रिकॉर्ड होंगी। तो सबका रूल अलग-अलग
है। खत्म हो गया। एक सिंपल सी क्लासिफिकेशन हमने पढ़ ली जिसका नाम है मॉडर्न क्लासिफिकेशन।
ये रहा। सर। सर एसेट का रूल है एसेट बढ़ेगी तो डेबिट साइड रिकॉर्ड करना, घटेगी तो क्रेडिट साइड रिकॉर्ड करना।
लायबिलिटीज़ का रूल ऑपोजिट है। ऑफ कोर्स क्यों ना हो क्योंकि लायबिलिटी और एसेट एक दूसरे के बिल्कुल अपोजिट होती है ना यार।
तो लायबिलिटी का रूल उल्टा है। लायबिलिटी का खाता खोल रहे हो आप। जैसे मेरे सर पे कर्जा है तो मैं भी तो उसको रिकॉर्ड
करूंगा ना। तो मैं उस कर्जे के अकाउंट के अंदर जब वो कर्जा बढ़ रहा होगा तो मैं रिकॉर्ड करूंगा क्रेडिट साइड पे। और अगर
कम हो जाएगा मेरा कर्जा तो मैं रिकॉर्ड करूंगा डेबिट साइड पे। एज सिंपल एज दैट। अभी मजा उतना नहीं आएगा जब तक क्वेश्चंस
हम नहीं फोड़ेंगे। एक के बाद एक, एक के बाद एक क्वेश्चंस को जब तक हम ब्रेक डाउन नहीं करेंगे तब तक मजा नहीं आएगा। ठीक है? इस
वक्त आप इस वीडियो को अगर लेट कर देख रहे हो भाई, खड़े हो के बैठ जाओ। रजिस्टर हाथ में रखो। पेन हाथ में रखो सुंदर सा। और जो
भी चीज इंपॉर्टेंट लगे, वीडियो पॉज, नोट डाउन। वीडियो पॉज, नोट डाउन। अगर वादा कर रहा हूं कि जर्नल चैप्टर बढ़िया से कवर हो
जाएगा इस वीडियो में तो सचमुच कवर हो जाएगा। ठीक है? चलिए कैपिटल का क्या रूल है? ओनर की कैपिटल अगर
ओनर रिकॉर्ड कर रहा है अपनी बुक्स के अंदर तो कैपिटल का क्या रूल है? सर कैपिटल का रूल है कैपिटल भी बढ़ेगी तो क्रेडिट साइड,
कम होगी तो डेबिट साइड। अब जो सेम रूल कैपिटल का है वही रेवेन्यू का भी है। क्योंकि रेवेन्यूस भी कैपिटल वाले कॉलम
में ऐड ही होते थे ना वैसे तो। पर एक्सपेंसेस का रूल उल्टा है। ड्रॉइंग का रूल उल्टा है। सर याद नहीं हो रहा। याद
रखने का कोई जुगाड़ टेक्नोलॉजी है? है? बिल्कुल है। यह देखो जुगाड़ टेक्नोलॉजी बिल्कुल है दोस्तों।
2 मिनट में बता दूंगा और चीजें हो जाएंगी क्लियर आपको। ठीक है? 2 मिनट में चीजें क्या हो जाएंगी? क्लियर।
तो जरा लिखते हैं क्लियर वर्ड को। क्लियर? बस निकल गया रूल। अब देखो इधर सी फॉर
कैपिटल ऑफ द बिजनेस एल फॉर लायबिलिटीज दोस्तों ई फॉर एक्सपेंसेस
ए स्टैंड फॉर एसेट्स एंड आर स्टैंड्स फॉर द रेवेन्यू बन गया रूल इंक्रीस डिक्रीज का अलग-अलग रूल है वो तो चलो छोड़ो लेकिन
अकाउंट्स कितने तरह के होते हैं छह तरह के होते हैं पांच भी याद रख लोगे तो छठा याद हो जाएगा पांच तरह के अकाउंट्स याद रखो
पांच एक 2 3 4 5 जुगाड़ क्लियर क्लियर वर्ड से निकल के आते हैं आपके पांच तरह के अकाउंट्स कैपिटल लायबिलिटी एक्सपेंस एसेट
और रेवेन्यू खत्म ठीक है अच्छा जी अब इनके रूल के बारे में बात कर लेते हैं इंक्रीज का अलग रूल है डिक्रीज का अलग रूल है ठीक
है कैपिटल सी से स्टार्ट होती है तो इंक्रीज होने पर क्रेडिट होती है समझ में आ गई बात अब कैपिटल बिजनेस के लिए तो एक
तरह से लायबिलिटी है तो फिर जो कैपिटल का रूल है वही लायबिलिटी का भी है वही रेवेन्यू का भी है और इन दोनों का ऑपोजिट
रूल है डेबिट और डेबिट। खत्म हो गई बात। यानी कैपिटल का अगर आप अकाउंट बना रहे हो और कैपिटल इंक्रीस हो रही है तो क्रेडिट
साइड रिकॉर्ड होगी। डिक्रीज होने पर डेबिट साइड रिकॉर्ड होगी। लायबिलिटी दोस्तों इनक्रीस होने पर
क्रेडिट तो डिक्रीज होने पर डेबिट। एक्सपेंसेस इंक्रीज़ होने पर डेबिट। डिक्रीज़ होने पर क्रेडिट। एसेट्स इंक्रीज़
होने पर डेबिट। डिक्रीज़ होने पर क्रेडिट। रेवेन्यू इंक्रीज़ होने पर क्रेडिट। डिक्रीज़ होने पर डेबिट। खत्म हो गई बात।
एक अकाउंट छोड़ दिया सर आपने ड्रॉइंग। हां हां ड्रॉइंग कैपिटल को घटाती है ना तो ड्रॉइंग का अपोजिट रूल हो गया फिर। अगर आप
ड्रॉइंग का अकाउंट बना रहे हो। अगर आप किसी भी ड्रॉइंग का अकाउंट बना रहे हो और वो ड्रॉइंग इंक्रीस हो रही है तो
डेबिट साइड रिकॉर्ड कर देना। डिक्रीज होने पर क्रेडिट साइड रिकॉर्ड कर देना। खत्म हो गई बात।
तो रूल्स ऑफ डेबिट एंड क्रेडिट आधा खत्म हो गया। यहां से हमारे आंसर्स आ जाते हैं ईजीली। बट एक और क्लासिफिकेशन है जिसको हम
ट्रेडिशनल क्लासिफिकेशन बोलते हैं। उसको हम अभी कवर कर लेंगे थोड़ी देर में। जर्नल बहुत आसान है यार। डेबिट और क्रेडिट के
रूल्स की वजह से फंसता है हमारा जर्नल चैप्टर। सीधा तो उठाना ही नहीं होता जर्नल चैप्टर को। इट्स लाइक कि आपको लेटर्स की
नॉलेज नहीं है और आप सेंटेंस फॉर्मेशन पे खेल रहे हो। समझ रहे हो? इट्स लाइक कि अंग्रेजी पढ़ना नहीं आता। इट्स लाइक हिंदी
पढ़ना नहीं आता। लेकिन हिंदी कवि सम्मेलन में जाके बैठ गए हो। ये ऐसा है। ठीक है? तो इसलिए रूल्स ऑफ डेबिट एंड क्रेडिट को
पढ़ना बहुत जरूरी है। अब एक एमसीक्यू है आपके सामने। पीछे डेबिट और क्रेडिट के रूल्स आपने सीख लिए ना? तो इस एमसीक्यू का
जवाब दो ना फिर। करो वीडियो पॉज और जवाब सोचो इसका। फिर रिज्यूम कर लेना। डैश विल बी रिकॉर्डेड ऑन द डेबिट साइड ऑफ
एन अकाउंट। निम्नलिखित में से क्या है जो किसी अकाउंट में डेबिट साइड रिकॉर्ड होता है। यह अकाउंट हो गया और अकाउंट की ये हो
गई डेबिट साइड लेफ्ट साइड। ठीक है? सर इंक्रीज इन एसेट हां इंक्रीज इन एसेट होता है डेबिट साइड पर रिकॉर्ड डिक्रीज इन
लायबिलिटी इंक्रीज इन इक्विटी इक्विटी का तो मुझे मतलब ही नहीं पता और ऑल ऑफ दीज़ एक तो ये ऑल ऑफ़ दीज़ जब आता है ना किसी
एमसीक्यू में हमें लगता है हां यही तो आंसर है। और फिर हम फटाफट से उस एमसीक्यू को टिक करके फटाफट फेल हो के फटाफट बाहर आ
जाते हैं। ठीक है? सो आराम से देखो। कोई एसेट जब इंक्रीस होती है तो हां उसकी रिकॉर्डिंग डेबिट साइड होती है। अभी पीछे
बताया था मैंने। एसेट इंक्रीज होती है तो डेबिट, डिक्रीज होती है तो क्रेडिट। और कोई लायबिलिटी जब डिक्रीज हो रही होती है
तो भी रिकॉर्डिंग डेबिट साइड ही होती है। यस। और जब इक्विटी इनक्रीज हो रही होती है।
ठीक है? इक्विटी जब इनक्रीस हो रही होती है। इक्विटी बिनेस की कैपिटल को बोलते हैं
दोस्तों। कैपिटल जब इनक्रीज हो रही होती है तो डेबिट साइड पर रिकॉर्डिंग नहीं होती है।
क्योंकि कैपिटल का रूल यह रहा। कैपिटल इनक्रीज होती है तो रिकॉर्डिंग क्रेडिट साइड होती है। तो ये तो गलत हो गया।
इंक्रीज इन इक्विटी इज़ द रॉन्ग ऑप्शन। ये दोनों लेकिन करेक्ट हैं। एसेट बढ़ना और लायबिलिटी घटना दोनों डेबिट होता है। ये
देखो आप। एसेट का बढ़ना भी डेबिट और लायबिलिटी का घटना भी डेबिट। तो ए और बी दोनों करेक्ट हैं। एंड बी बोथ आर करेक्ट।
सो ऑप्शन डी ऑल ऑफ दीज़ नहीं है। ऑप्शन डी है बोथ ए एंड बी। ठीक है? सो बोथ ए एंड बी आर करेक्ट। आगे
चलते हैं दोस्तों। एक और एमसीक्यू है। डैश मींस अ क्रेडिट। क्रेडिट एसेट का इंक्रीज़ होना। ना जी ना। एसेट का
इंक्रीज़ होना तो डेबिट होता है। अभी पीछे पढ़ा तो था। तो ये तो गलत है। लायबिलिटी का इंक्रीज़ होना। हां ये क्रेडिट होता है। ये
क्रेडिट होता है। इक्विटी यानी कैपिटल का डिक्रीज़ होना तो डेबिट होता है। तो ये भी गलत हो गया। लायबिलिटी का डिक्रीज होना भी
डेबिट होता है। सो ओनली ऑप्शन बी इज करेक्ट दोस्तों। डैश मींस अ क्रेडिट। आ रहा है समझ में?
बने रहो थोड़ा सा और आगे चलो। अब क्वेश्चन करने की कोशिश करते हैं जरा हम। देखिए जरा। अब आपके सामने क्वेश्चन आ गया है।
आपके सामने एक क्वेश्चन आ गया है। जरा इस क्वेश्चन को ध्यान से पढ़ो। आपको पता है एकाउंटिंग इक्वेशन में भी आपने सीखा होगा
कि कोई भी ट्रांजैक्शन जब होगी तो मिनिमम दो चीजों पे वो इफ़ेक्ट डालेगी ही डालेगी। अकाउंटिंग इक्वेशन में आपने पढ़ा होगा
जैसे बिजनेस स्टार्ट करा तो कैश बढ़ा कैपिटल बढ़ी फर्नीचर खरीदा कैश घट गया फर्नीचर बढ़ गया तो दो चीजों पे इफेक्ट आ
रहा है हर ट्रांजैक्शन मिनिमम दो चीजों पे पे इफेक्ट डालती ही डालती है हर ट्रांजैक्शन मिनिमम दो अकाउंट्स को इफेक्ट
करती ही करती है दोस्तों देखो अब जरा ध्यान से मजा आएगा एनालाइज़ द फॉलोइंग ट्रांजैक्शंस एंड स्टेट व्हिच अकाउंट विल
बी डेबिटेड और क्रेडिटेड हमें इन सारी सारी ट्रांजैक्शंस को एनालाइज करके यह बताना है कि कौन सा अकाउंट डेबिट होगा और
कौन सा अकाउंट क्रेडिट होगा। आसान है। बहुत आसान है। देखो जरा आप ध्यान से। सर
सबसे पहला गौरांश स्टार्टेड बिज़नेस विद कैश ऑफ ₹1 लाख। गौरांश नाम के व्यक्ति ने बिजनेस स्टार्ट करा और कैश लगा दिया
बिजनेस के अंदर। कितने रुपए? ₹1 लाख। अब यह सारी ट्रांजैक्शन धीरे धीरे धीरे-धीरे आती जाएंगी।
ठीक है? अब समझो जरा कि कैसे हमें करनी है पढ़ाई। सबसे पहली ट्रांजैक्शन।
सबसे पहली ट्रांजैक्शन में कौन सी दो चीजों पे फर्क पड़ेगा? खुद सोच के बताना। छह तरह के अकाउंट ओपन हो सकते हैं। छह तरह
की चीजें हो सकती हैं। एसेट, लायबिलिटी, कैपिटल, एक्सपेंस, रेवेन्यू और ड्रॉइंग। रूल तुम्हें पता है। नहीं तो पीछे जाके एक
बार फिर से पढ़ लो। रूल तुम्हें पता है। अब बताओ जरा बिजनेस अगर स्टार्ट कर रहा हूं मैं तो मुझे कौन से दो खाते खोल देने
चाहिए रिकॉर्डिंग के लिए? सर बिज़नेस स्टार्ट करने पर कैश आ रहा है बिज़नेस के अंदर। यानी एक कैश का खाता खोल देना
चाहिए। क्यों? क्योंकि कैश एसेट है और सारी एसेट्स का खाता खोलते हैं हम। हां, एक कैश का खाता मुझे खोल देना चाहिए। और
मुझे लगता है एक मुझे कैपिटल का अकाउंट भी ओपन कर देना चाहिए। सो, फर्स्ट अकाउंट व्हिच आई एम गोइंग टू ओपन इज़ कैश अकाउंट
एंड द अदर इज़ कैपिटल अकाउंट। तो एक हो गया जी कैश अकाउंट दूसरा हो गया सर कैपिटल अकाउंट।
अब जरा देखते हैं कि कैश अकाउंट और कैपिटल अकाउंट ओपन तो चलो हमने कर दिया। सपोज ये चलो कैश अकाउंट ओपन कर दिया आपने। ये आपने
कैपिटल अकाउंट ओपन कर दिया। लेकिन रिकॉर्डिंग कैसे होगी? कैश के अकाउंट में रिकॉर्डिंग डेबिट साइड या क्रेडिट साइड?
कैपिटल के अकाउंट में रिकॉर्डिंग क्रेडिट साइड या डेबिट साइड? सोचने वाली बात है। तो सबसे पहले तो आप यह समझो के
इस ट्रांजैक्शन के अंदर यह दो अकाउंट्स इनवॉल्वड हैं। यस और नो। दो अकाउंट्स इनवॉल्वड हैं। सो कैश अकाउंट
के अंदर यह रिकॉर्डिंग किस साइड होनी चाहिए? खुद सोचो। बिजनेस आज शुरू हो रहा है सर? तो बिजनेस के अंदर कैश नामक एसेट
बढ़ रही है या कम हो रही है? बिजनेस के अंदर कैश इनक्रीस हो रहा है या डिक्रीज हो रहा है? क्या है जवाब आपका? सर बिजनेस के
अंदर कैश इनक्रीज हो रहा है। और कैश की जात क्या है? कैश क्या है? कैश एसेट है। और एसेट का रूल तुम्हें पता है कि एसेट
अगर बिजनेस के अंदर कभी भी बढ़ रही होगी तो हम उसे किस साइड रिकॉर्ड करेंगे? डेबिट साइड। यानी बिजनेस स्टार्ट करने की वजह से
चूंकि कैश बढ़ रहा है तो कैश के अकाउंट में रिकॉर्डिंग होगी डेबिट साइड। और एक और जगह रिकॉर्डिंग करनी पड़ेगी।
क्योंकि कैश अगर बिज़नेस में आ रहा है तो कैपिटल के फॉर्म में आ रहा है। कैपिटल के अकाउंट में रिकॉर्डिंग मैं बता देता हूं।
क्रेडिट साइड होगी। कारण है जी ये देख लो कैपिटल। कैपिटल अगर इंक्रीस होती है तो रिकॉर्डिंग क्रेडिट साइड होती है। ये रीज़न
है। समझ में आ रही है बात? चीजें शुरू में हो सकता है मुश्किल लगे या ये भी हो सकता है कुछ बच्चों को आसान लगे। जिनको आसान लग
रहा है वो फटाफट से कमेंट करो नीचे। अल्फा अल्फा अल्फा अल्फा अल्फा ए एल पी एच ए और जिन्हें मुश्किल लग रहा है थोड़ा सा बने
रहो क्योंकि चैप्टर भी तो फिर ऐसा है ना यार चैप्टर भी तो ऐसा है ना कि पूरी 11th क्लास की अकाउंटेंसी में रोल है इसका और
ये अगर समझ में आ गया तो पूरी क्लास 11th की अकाउंटिंग तुम्हारे वश में है। तुम्हारे कब्जे में है और 12th में भी
बहुत यूज़ है। तो इन्वेस्ट करो अपना प्रेशियस टाइम इन्वेस्ट करो। लगे रहो। प्रैक्टिस करो मेरे साथ। चीजें समझ में
आएंगी। सो कैपिटल के अकाउंट में रिकॉर्डिंग क्रेडिट साइड होगी क्योंकि कैपिटल बढ़ रही
है। कैपिटल बढ़ रही है तो रिकॉर्डिंग क्रेडिट साइड बस। तो फर्स्ट ट्रांजैक्शन के अंदर दो
अकाउंट्स इनवॉल्वड हैं। कैश अकाउंट में रिकॉर्डिंग होगी डेबिट साइड और कैपिटल अकाउंट में रिकॉर्डिंग होगी क्रेडिट साइड।
खत्म हो गई बात। ठीक है दोस्तों? अब चलते हैं सेकंड ट्रांजैक्शन की तरफ कि सेकंड ट्रांजैक्शन क्या हुई है इस बिनेस के
अंदर? तो सेकंड ट्रांजैक्शन में ही डिपॉजिटेड इनू बैंक फॉर ओपनिंग एन अकाउंट ₹0000 लाख अपने घर से लाया गौरांश और ₹1
लाख में से उसने कहा ₹00 जरा अब बिजनेस के नाम पर एक बैंक अकाउंट ओपन करा देते हैं। ठीक है? बिजनेस के नाम पर दुकान के नाम पर
एक बैंक अकाउंट उसने ओपन करा दिया और उसमें ₹00 उसने डिपॉजिट कर दिया। क्या लगता है? सेकंड ट्रांजैक्शन में मुझे
कौन-कौन से अकाउंट्स में यह रिकॉर्ड करना चाहिए? थोड़ा सा अकाउंटिंग इक्वेशन वाला दिमाग
चलाओ। बिजनेस में पैसा आ गया। यानी कैश के कॉलम में पैसा पड़ा है। कैपिटल के कॉलम में
पैसा पड़ा है। अब बैंक अकाउंट ओपन कराओगे भाई। बैंक अकाउंट ओपन कराओगे तो कैश कम नहीं हो जाएगा। क्योंकि तुम ₹2000 डिपॉजिट
कर रहे हो बैंक में। कैश कम हो जाएगा और वही बैंक बैलेंस के रूप में बढ़ जाएगा। दोनों ही हमारे लिए एसेट हैं। तो दो जगह
रिकॉर्डिंग होगी कैश अकाउंट में और बैंक अकाउंट में। ट्रांजैक्शन ही इतनी ज्यादा करवा दूंगा ना कि कुछ बच बचेगा ही नहीं।
ट्रांजैक्शंस ही इतनी तुम लोग मेरे साथ प्रैक्टिस कर लोगे क्योंकि कुछ बचेगा ही नहीं। ठीक है? तो सेकंड ट्रांजैक्शन के
अंदर दो अकाउंट्स इनवॉल्वड हैं। सेकंड ट्रांजैक्शन के अंदर दो अकाउंट्स का इन्वॉल्वमेंट है। वन इज़ कैश अकाउंट।
अच्छा अकाउंट की शॉर्ट फॉर्म ये होती है दोस्तों। एंड द अदर वन इज़ बैंक अकाउंट। अकाउंट की शॉर्ट फॉर्म एल सी। कैश अकाउंट
और बैंक अकाउंट। सर तो कैश अकाउंट नया खोलेंगे हम हर बार। नहीं भाई एक अकाउंट खुल चुका है। उसी में रिकॉर्डिंग करेंगे
जाकर। ठीक है? तो कैश अकाउंट और बैंक अकाउंट दो अकाउंट हैं। कहां रिकॉर्डिंग होनी चाहिए? कैश भी एसेट है और बैंक भी
एसेट है इस बार तो। इस बार तो दोनों की ही सेम क्लास है। तो एसेट का रूल बताओ क्या होता है? जल्दी बताओ एसेट का रूल क्या
होता है? बढ़ने पर डेबिट। कम होने पर क्रेडिट। तो इस ट्रांजैक्शन में कौन सी एसेट बढ़ रही है? यस, यह वाली। तो बैंक
अकाउंट में रिकॉर्डिंग होगी डेबिट साइड और कैश अकाउंट में रिकॉर्डिंग होगी क्रेडिट साइड। निकल रहा है ना रूल? अब जर्नल
एंट्री आराम से हो जाएगी। ठीक है? आराम से जनरल एंट्री जिन जिन्होंने पहले थोड़ा बहुत जनरल चैप्टर पढ़ रखा है। पढ़ रखा है
वो बता पाएंगे कि इस ट्रांजैक्शन की जनरल एंट्री क्या होगी? बैंक अकाउंट डेबिट टू कैश अकाउंट। ऐसे क्विकली जनरल एंट्रीज
बनेंगी। अगर डेबिट और क्रेडिट के रूल्स पे अच्छी मजबूत पकड़ आपकी होगी। ठीक है? थर्ड ट्रांजैक्शन दोस्तों।
थर्ड ट्रांजैक्शन में क्या लिखा है? परचेस फर्नीचर फॉर ₹15,000 फर्नीचर खरीद लिया हमने। फिर से दो एसेट्स का इन्वॉल्वमेंट
है। आने वाली चीज फर्नीचर हमारे पास आ रहा है। वो भी एक एसेट है और बदले में जाएगा कैश तो वो भी एक एसेट है। तो इन दोनों
एसेट्स का हम अकाउंट ओपन करेंगे। एक फर्नीचर अकाउंट और दूसरा कैश अकाउंट। अच्छा देखते हैं सर
फर्नीचर के अकाउंट में रिकॉर्डिंग तुम लोग सही जवाब देते हो कि नहीं। अब बताओ जरा फर्नीचर खरीदा है मैंने। तो दो अकाउंट्स
का इन्वॉल्वमेंट है इस ट्रांजैक्शन में। एक फर्नीचर और एक कैश। है ना? अब मुझे बता दो फटाफट से कि कहां रिकॉर्डिंग डेबिट
साइड होगी और कहां क्रेडिट साइड। फर्नीचर खरीदा और फर्नीचर का खाता खोल दोगे ना फिर। और कैश का जो खाता ऑलरेडी
खुला पड़ा है उसमें भी रिकॉर्ड करोगे इस चीज को। क्योंकि कैश जा रहा है और फर्नीचर आ भी रहा है। तो क्या लगता है?
यस। फर्नीचर के अकाउंट में रिकॉर्डिंग होगी सर डेबिट साइड और कैश के अकाउंट में रिकॉर्डिंग होगी क्रेडिट साइड। रीजन साथ
के साथ बताते हुए चलता हूं। दोनों ही एसेट हैं। दोनों ही एसेट हैं। और एसेट का रूल होता
है बढ़ने पर डेबिट। कम होने पर क्रेडिट। तो समझ जाओ ना यह वाली एसेट बढ़ रही है इसलिए डेबिट। और यह वाली एसेट कम हो रही
है इसलिए क्रेडिट। सिंपल। आगे चलें। आगे चलें। देखो अब जरा। अब अब थोड़ा सा मुश्किल है सर क्योंकि अब
हमने खरीदे हैं गुड्स। अब हमने खरीदे हैं गुड्स। गुड्स का मतलब क्या होता है? जिस चीज में हम डील करते
हैं। जिस चीज का हम धंधा करते हैं, उसका मतलब होता है गुड्स। आज तक अब तक तीन ट्रांजैक्शन में गुड्स का इन्वॉल्वमेंट
नहीं था। गुड्स का सीन थोड़ा सा अलग है। गुड्स का केस थोड़ा सा अलग है। गुड्स के बारे में कुछ बताना चाहता हूं आपको। कुछ
सिखाना चाहता हूं आपको गुड्स के बारे में। सर गुड्स की कहानी थोड़ी सी अलग चलेगी। गुड्स या फिर स्टॉक जब आप खरीदोगे बिजनेस
के लिए तो उसकी कहानी थोड़ी सी अलग चलेगी। देखो गुड्स के साथ दो चीजें हो सकती हैं। या तो आप गुड्स को खरीदोगे
या फिर आप गुड्स को बेचोगे। यही तो होता है। या तो हम गुड्स खरीदते हैं या बेचते हैं। तो असल में गुड्स
खरीदने पर ना आपको गुड्स का नाम नहीं लेना। गुड्स बेचने पर भी गुड्स का नाम नहीं लेना। एक्चुअली क्या है कि जब
अकाउंटिंग इक्वेशन हम पढ़ते थे तो हम देखते थे कि भ स्टॉक जो है स्टॉक का हम कॉलम खोलते हैं और आता है तो उस कॉलम में
डाल देते हैं। जाता है तो उस कॉलम में से माइनस कर देते हैं। पर एक्चुअली नहीं होता ऐसा प्रैक्टिकल लाइफ में ऐसा नहीं होता।
हमें एक्चुअल अकाउंट एक्चुअल अकाउंटिंग करते वक्त रिकॉर्डिंग करते वक्त गुड्स या स्टॉक के केस में अगर आप खरीद रहे हो ना
तो आप परचेजेस अकाउंट ओपन करोगे हमेशा फर्नीचर खरीदोगे तो फर्नीचर अकाउंट ओपन करोगे लैंड खरीदोगे तो लैंड अकाउंट ओपन
करोगे बिल्डिंग खरीदोगे तो बिल्डिंग अकाउंट ओपन करोगे लेकिन गुड्स खरीदोगे तो परचेजेस अकाउंट ओपन करोगे वादा करो वादा
करो ठीक है गुड्स खरीदोगे तो परचेजेस अकाउंट ओपन करोगे हमेशा गुड्स को अलग रखा गया है बाकी की एसेट्स से। ऐसे ही अगर
बेचोगे तो सेल्स अकाउंट ओपन करना है आपको। और मैं आपको बता दूं कि ऐसा क्यों है? सर देखो पहले तो लॉजिक समझ लो, रूल समझ लो कि
परचेजेस अकाउंट में रिकॉर्डिंग डेबिट साइड होगी। जब भी गुड्स खरीदोगे। और बेचोगे तो परचेज अकाउंट का मतलब ही
नहीं है। सेल्स अकाउंट ओपन करना है और वहां पर रिकॉर्डिंग होगी क्रेडिट साइड। सुनो अकाउंटिंग इक्वेशन में स्टॉक का कॉलम
खोलते थे जिसको हम एसेट की तरह ट्रीट करते थे। लेकिन यहां पर हम गुड्स को एसेट की तरह ट्रीट ही नहीं करते। पूरे साल पूरे
साल जब भी हम गुड्स खरीदते हैं तो हम उसको ट्रीट करते हैं लाइक एन एक्सपेंस। परचेजेस को हम एक्सपेंस की तरह ट्रीट करते हैं
दोस्तों। और सेल्स को हम रेवेन्यू की तरह ट्रीट करते हैं। सेल्स को हम रेवेन्यू की तरह ट्रीट करते
हैं। अच्छा एक्सपेंस बढ़ने पर क्या रूल होता है? एक्सपेंस वाले कॉलम में क्या रूल होता है? एक्सपेंस बढ़ने पर डेबिट इसीलिए
परचेस अकाउंट डेबिट हो रहा है। रेवेन्यू का क्या रूल होता है? रेवेन्यू बढ़ने पर क्या होता है? क्रेडिट। इसलिए सेल्स
अकाउंट क्रेडिट हो रहा है। सो परचेजेस अकाउंट हमेशा डेबिट होता है गुड्स खरीदते वक्त। और गुड्स बेचते वक्त सेल्स
अकाउंट का इन्वॉल्वमेंट होता है और वो अकाउंट क्रेडिट होता है गुड्स बेचते वक्त। ये ध्यान रखना एसेट वाला लॉजिक यहां पर
नहीं चलेगा। ठीक है? ये है सर गुड्स के केस में। भूलोगे तो नहीं। वादा करते हो पकी प्रॉमिस
करते हो। ठीक है? सो गुड्स के केस में गुड्स का अकाउंट ओपन ही नहीं करना। स्टॉक का अकाउंट ओपन ही नहीं करना। गुड्स अगर
खरीद रहे हो हमेशा परचेजेस अकाउंट करके ओपन करना है आपको। कौन सा अकाउंट ओपन करना है? जल्दी से बता दो। परचेजेस अकाउंट। यस।
इस तरह से आपको अकाउंट ओपन करना है। और अगर गुड्स बेच रहे हो तो हमेशा कौन सा अकाउंट ओपन करना है? सेल्स अकाउंट। ध्यान
रखना। सेल्स अकाउंट ओपन करना है। गुड्स बेचते वक्त। याद रहेगा? पक्का। चलें अब अपने
क्वेश्चन को कंटिन्यू करें। हमारा क्वेश्चन यहां था कि हमने गुड्स खरीदे ₹5,000 के। ₹5,000 के हमने गुड्स
खरीदे। फोर्थ ट्रांजैक्शन में क्या लगता है? क्या लगता है? अगर आपने ₹5,000 के गुड्स खरीदे हैं तो एक अकाउंट तो
डेफिनेटली पता है कौन सा ओपन करना है? अभी बताया गुड्स खरीदने पर। यस। कौन सा अकाउंट? परचेजेस अकाउंट।
है ना? क्योंकि खर्चा है। गुड्स की खरीदारी को खर्चे की तरह ट्रीट करना है। इसका लॉजिक बताऊंगा। इसका लॉजिक एक्चुअली
आता है। चैप्टर नंबर 18 19 से आता है। सो अभी के लिए गुड्स की खरीदारी को हम एक्सपेंस मानते हैं। तो परचेजेस अकाउंट
ओपन हो गया। एक तो अब खुद सोचो गुड्स खरीदने से तुम्हारी जेब से क्या जाएगा? पैसा तो कैश अकाउंट। अगेन कैश अकाउंट इज़
इनवॉल्व्ड। कैश अकाउंट। अब ध्यान से देखो कि परचेजेस अकाउंट और कैश अकाउंट में रिकॉर्डिंग किस तरफ होगी?
परचेस अकाउंट तो डेफिनेटली डेबिट होगा। अभी बताया सर ने कि गुड्स खरीदने पर हमेशा परचेजेस अकाउंट ओपन होगा और डेबिट होगा।
सो परचेज अकाउंट में रिकॉर्डिंग होगी डेबिट साइड। तो फिर तो डेफिनेटली कैश अकाउंट में रिकॉर्डिंग क्रेडिट साइड होनी
चाहिए। हां कैश अकाउंट में रिकॉर्डिंग क्रेडिट साइड होनी चाहिए। यस। और क्यों ना हो? क्योंकि गुड्स खरीदने पर कैश जो कि एक
एसेट है वो कम हो जाती है। और एसेट का रोल क्या है? कम होने पर क्रेडिट। एक ट्रांजैक्शन में दोनों अकाउंट्स डेबिट
नहीं होंगे कभी भी। दोनों अकाउंट्स क्रेडिट भी नहीं होंगे। एक डेबिट तो दूसरा क्रेडिट। डबल एंट्री बुक कीपिंग। टू
आस्पेक्ट्स ऑफ अकाउंटिंग। समझ में आ रही है बात? पक्का? और दोनों का लॉजिक अलग-अलग जगह से आएगा
बेटा। जैसे परचेस अकाउंट डेबिट क्यों करा मैंने? इसका लॉजिक आ रहा है एक्सपेंस वाले कॉलम से। लेकिन इसकी जात कुछ और है। इसका
लॉजिक आ रहा है एसेट वाले कॉलम से। तो दोनों का लॉजिक अलग-अलग जगह से आ रहा है। मैं आपको फिर से बताना चाहता हूं दोस्तों।
ये देखिए आप परचेज अकाउंट को डेबिट करा मैंने। ये वाला डेबिट नहीं करा मैंने। ये वाला डेबिट करा। एक्सपेंस है ना परचेस।
एक्सपेंस बढ़ने पर डेबिट होता है। और मैंने कैश अकाउंट को क्रेडिट क्यों करा? उसका लॉजिक यहां से है। कैश एसेट है। कम
हो रही थी गुड्स खरीदने की वजह से। इसलिए मैंने क्रेडिट कर दिया। क्लियर हो रही है बात? पक्का?
सो ये रही हमारी फोर्थ ट्रांजैक्शन। अब चलते हैं जी फिफ्थ ट्रांजैक्शन पे। फिफ्थ ट्रांजैक्शन में क्या हुआ है? परचेस्ड
गुड्स फ्रॉम मिस्टर विहान ₹15,000 इसका मतलब क्या है? पहले भी गुड्स ही खरीदे थे। अभी भी गुड्स ही खरीद रहे हैं
हम। तो पहले भी किसी इंसान से ही खरीदे होंगे या किसी दुकान से खरीदे होंगे या फिर इंसान का नाम क्यों गिवन है?
ताकि आपको यह समझ में आ जाए कि इस बार गुड्स हमने नकद नहीं खरीदे। इस बार हमने गुड्स उधार खरीदे हैं। दोस्तों जब भी किसी
ट्रांजैक्शन के अंदर किसी पर्सन का नाम आ जाए, तो समझ जाइए कि वो ट्रांजैक्शन कैश बेसिस पर नहीं हुई है। वो ट्रांजैक्शन
क्रेडिट बेसिस पर हुई है। वो उधार की ट्रांजैक्शन है। तो ये जो लिखा है ना परचेज्ड गुड्स फ्रॉम मिस्टर विहान तो समझ
जाओ मिस्टर विहान से आपने उधार खरीदे हैं फिर गुड्स। उधार खरीदे हैं आपने मिस्टर विहान से गुड्स। और अगर मिस्टर विहान से
आपने गुड्स उधार खरीदे तो मतलब आपने पैसा देना है मिस्टर विहान को कुछ टाइम बाद तो मिस्टर विहान आपके लिए क्या बन जाएगा?
क्रेडिटर। यस यह बन जाएगा आपका क्रेडिटर और आप बन जाएंगे इसके डेटर। ये सब आपने बेसिक अकाउंटिंग टर्म्स में पढ़ा होगा। तो
खैर अब गुड्स तो खरीदें। रिकॉर्ड तो करना पड़ेगा। आओ रिकॉर्ड करते हैं फिफ्थ ट्रांजैक्शन को जरा।
एक तो मुझे पता है भाई परचेजेस अकाउंट ओपन होगा क्योंकि सर ने बता दिया था और मैंने सर को पकी प्रॉमिस भी कर दिया था कि गुड्स
जब भी खरीदूंगा जब भी गुड्स खरीदूंगा तो गुड्स का अकाउंट ओपन नहीं करूंगा परचेजेस अकाउंट ओपन करूंगा तो परचेजेस अकाउंट ओपन
कर दिया हमने अब फिफ्थ ट्रांजैक्शन में गुड्स तो आए हमारे पास लेकिन क्या हमारी जेब से पैसा गया नहीं क्योंकि मैंने तो
मिस्टर विहान से बोला कि मैं पैसा बाद में दूंगा मैंने उधार खरीदे गुड्स तो किसी से पैसा पैसा लेना था तो तुम फटाफट से उसका
खाता खोल देते थे। याद है यह अभी इंट्रोडक्शन के वक्त मैंने एक एग्जांपल लिया था कि चिंटू मेरी दुकान पर आया तो
मैंने चिंटू का खाता खोल दिया। तो बेटा ऐसे अगर किसी को पैसा चुकाना है मैंने तो मैं उस उस व्यक्ति का भी खाता खोलूंगा।
मैं अकाउंट ओपन करूंगा। छह तरह की चीजों में से कोई भी चीज अगर इनवॉल्व है मेरी ट्रांजैक्शन में मैं उसका अकाउंट ओपन
करूंगा। मेरी लायबिलिटी है यार। मेरा क्रेडिटर मेरी लायबिलिटी है। तो मैं उसका भी अकाउंट ओपन करूंगा। सो एक अकाउंट ओपन
होगा विहान्स अकाउंट। विहान का अकाउंट ओपन होगा। बता दूं कि विहान आपका क्रेडिटर है
और क्रेडिटर हमारे लिए क्या है? लायबिलिटी है। ऑफ कोर्स। सो अब आप मुझे बता दीजिए क्या डेबिट और
क्या क्रेडिट है? जल्दी से बता दो। मैंने गुड्स खरीदे विहान से। गोली मारो विहान को। गुड्स तो आ रहे हैं ना। और
गुड्स खरीदने पर परचेज अकाउंट ओपन होता है और वह डेबिट होता है। यह कंफर्म है। तो भैया यह अकाउंट तो डेबिट होगा। तो फिर समझ
जाओ फिर इस इस अकाउंट को क्रेडिट ही होना पड़ेगा। अब अगर वो डेबिट हो गया तो तो बेटा विहान का अकाउंट हो जाएगा क्रेडिट।
कारण लॉजिक निकालने की कोशिश करो जरा। ये तो जुगाह टेक्नोलॉजी है कि एक डेबिट तो दूसरा
क्रेडिट ही होगा। लेकिन लॉजिक भी तो निकालो। क्यों विहान का अकाउंट क्रेडिट हुआ है? सोचो जरा इस बारे में। क्योंकि
विहान तुम्हारे लिए क्रेडिटर है। क्रेडिटर लायबिलिटी है। लायबिलिटी का रूल है कि लायबिलिटी बढ़ती है तो क्रेडिट होती है।
कम होती है तो डेबिट होती है दोस्तों। तो इसलिए विहान का अकाउंट क्रेडिट हुआ है। क्योंकि इट बिलोंग्स टू अ लायबिलिटी।
इट बिलोंग्स टू अ लायबिलिटी। ये एक एक तरह की लायबिलिटी और लायबिलिटी का रूल है बढ़ने पर क्रेडिट।
अब लॉजिक समझ में आ रहा है आपको? पक्का? हां जी दोस्तों। तो यह है सर। पांच ट्रांजैक्शंस अब तक की जर्नल चैप्टर को तो
तुम फोड़ दोगे यार उड़ा दोगे लेकिन डेबिट और क्रेडिट के रूल्स पर ही पकड़ मजबूत नहीं है तो फिर जर्नल चैप्टर नहीं हो पाएगा ना
बच्चे डेबिट और क्रेडिट के रूल्स पर पकड़ मजबूत होनी बहुत इंपॉर्टेंट है। ठीक है? आगे चलते हैं अब जरा। अब जरा बेच के भी
दिखा देते हैं गुड्स। तो सिक्स्थ ट्रांजैक्शन में वी हैव सोल्ड गुड्स ऑफ ₹2000। मैं आपको फिर से रिपीट करना चाहता
हूं। मैं बहुत पकाने वाला हूं आज के सेशन में। दोस्तों गुड्स के अलावा कोई भी चीज खरीदोगे ना उस चीज का नाम आएगा बेचोगे तो
भी। लेकिन गुड्स के केस में कहानी थोड़ी अलग है। गुड्स के केस में खरीदने पर परचेजेस अकाउंट बेचने पर सेल्स अकाउंट।
ठीक है? ये गुड्स की कहानी है। तो गुड्स बेचे आपने ₹2000 के? सिक्स्थ ट्रांजैक्शन में। सिक्स्थ ट्रांजैक्शन में हमने ₹2000
के गुड्स बेचे हैं। तो बताओ ना कौन सा अकाउंट ओपन करूं? गुड्स का अकाउंट ओपन कर दूं। वो तो होता ही नहीं है। गुड्स का
अकाउंट कभी ओपन नहीं होता भाई। गुड्स खरीदने पर परचेज बेचने पर सेल्स अकाउंट। तो सिक्स्थ ट्रांजैक्शन में एक तो
डेफिनेटली सेल्स अकाउंट ओपन होगा क्योंकि गुड्स बेचे जा रहे हैं। अब खुद सोचो गुड्स बेचे जा रहे हैं। पार्टी का नाम नहीं है
उस ट्रांजैक्शन में। पार्टी का नाम नहीं है। देखो देखो देखो देखो। ये सिक्स्थ में सिर्फ लिखा है सोल्ड गुड्स। किसी पार्टी
का नाम नहीं है। तो अगर आपने गुड्स बेचे हैं तो फिर नकद बेचे। अगर पार्टी का नाम नहीं है तो और अगर नकद बेचे तो आपकी जेब
में पैसा आ रहा है। पैसा बोले तो कैश तो कैश का अकाउंट। एक सेल्स अकाउंट हो गया। एक कैश अकाउंट हो
गया। अब सुनो जिस प्रकार गुड्स खरीदने पर परचेजेस अकाउंट ओपन होता है और वो डेबिट होता है। कंफर्म। ऐसे ही गुड्स बेचने पर
हमेशा सेल्स अकाउंट ओपन करोगे। वादा करो। पिंकी प्रॉमिस करो। और सेल्स अकाउंट हमेशा क्रेडिट होगा। बेचने पर सेल्स अकाउंट
क्रेडिट होगा। इसलिए सेल्स अकाउंट में रिकॉर्डिंग मैं क्रेडिट साइड पे करूंगा। और कैश अकाउंट में रिकॉर्डिंग फिर डेबिट
साइड ही करनी पड़ेगी। अब फिर से दोनों का लॉजिक अलग-अलग जगह से आ रहा है। मैं बताता हूं। ये देखो ये जो सेल है क्या बताया था?
क्या बताया था बड़े भाई ने? कि सेल होती है रेवेन्यू। और रेवेन्यू का रूल क्या है? बढ़ने पर क्रेडिट, कम होने पर डेबिट। ये
देख लो। अच्छा कैश क्या है? कैश एसेट है। और एसेट का रूल बहुत बार बता दिया। बढ़ने पर डेबिट, कम होने पर क्रेडिट। यहां से आ
रहा है लॉजिक। लॉजिक पता होना चाहिए। लॉजिक बहुत इंपॉर्टेंट है दोस्तों। पानी पी लूं थोड़ा सा। गला सूख गया तुम्हारे को
पकाते पकाते मेरा। ठीक है? चलो आगे की ट्रांजिशन जरा देखो आप जरा। ये वाली ट्रांजिशन ट्राई करो जरा। सेवंथ।
हां जी दोस्तों। सेवंथ ट्रांजैक्शन में लिखा है सोल्ड फर्नीचर टू आराध्या 15,000 है ना यानी हमने फर्नीचर आराध्या को बेचा
है ₹15,000 का तो एक तो यह कंफर्म है कि उधार बेचा होगा क्योंकि पार्टी का नाम है आराध्या को उधार बेचा है। अच्छा अब अगर
आपने यह फर्नीचर आराध्या को उधार बेचा है तो आराध्या रिश्ते में तुम्हारी क्या बन जाएगी? डेटर जिसको तुम डेबिटर भी बोलते
हो। गलत डेटर। तो आराध्या का खाता खोलना पड़ेगा ना। मुझे पैसे लेने हैं फ्यूचर में उससे यार। यही
तो वो बोल कर गई है। यही तो आराध्या बोल कर गई है कि मैं फर्नीचर लेकर जा रही हूं। पैसे नहीं है मेरे पास। खाते में लिख
देना। तो आराध्या का खाता खोलेगा। हम आराध्या का खाता खोलेंगे। उसमें रिकॉर्ड करेंगे कि कितने पैसे हमें लेने हैं उससे।
और ₹15,000 का फर्नीचर वो हमसे खरीद के गई है। ठीक है? तो आइए जरा इसको रिकॉर्ड करते हैं। सिक्स्थ ट्रांजैक्शन सेवंथ
ट्रांजैक्शन को रिकॉर्ड करते हैं जरा। सेवंथ ट्रांजैक्शन को रिकॉर्ड करते हैं। क्या लगता है सेवंथ ट्रांजैक्शन में
क्या-क्या रिकॉर्ड होना चाहिए? एक तो आराध्या मेरी कस्टमर है। मुझे उससे पैसा लेना है। तो एक तो आराध्या का अकाउंट मुझे
लगता है ओपन होना चाहिए। और कौन सा अकाउंट ओपन होना चाहिए? बेचा है ना
आपने? सेल्स अकाउंट। रॉन्ग आंसर। सेल्स अकाउंट ओपन नहीं होगा इस बार। क्यों?
बेटा परचेजेस अकाउंट और सेल्स अकाउंट यह फंडा सिर्फ गुड्स पर अप्लाई होता है और इस ट्रांजैक्शन में मैंने गुड्स बेचे ही नहीं
है। मैंने तो फर्नीचर बेचा है। मैंने तो फर्नीचर बेचा है भाई। फर्नीचर के केस में कब कहा मैंने आपको कि
परचेजेस अकाउंट या सेल्स अकाउंट ओपन करना। फर्नीचर बेचने का धंधा थोड़ी है मेरा। फर्नीचर तो मेरी एक साधारण एसेट है जिसे
मैं बेच रहा हूं पर उधार बेच रहा हूं। ठीक है? तो यहां पर फर्नीचर अकाउंट का ही नाम आएगा।
इंटरेस्टिंग यस और नो सीखने लायक मिला कुछ फर्नीचर अकाउंट का ही नाम आएगा। दोस्तों जब तक किसी क्वेश्चन के
अंदर कह नहीं दिया जाए कि आपका धंधा किस चीज का है? तो आप खुद से नहीं मान लोगे कि फर्नीचर बेचने का ही धंधा है मेरा। तो
इसीलिए फर्नीचर मेरे लिए गुड्स नहीं है। एक साधारण एसेट है। एक सेपरेट एसेट है। और क्योंकि ये गुड्स नहीं है। तो मैं यहां पर
परचेजेस और सेल्स शब्द का इस्तेमाल नहीं करूंगा। मैं एसेट का पर्टिकुलर नाम लूंगा। आई विल बी पर्टिकुलर टू दैट एसेट। तो
आराध्या और फर्नीचर। अब जरा देखते हैं कि डेबिट साइड क्या रिकॉर्ड होगा और क्रेडिट साइड क्या रिकॉर्ड होगा। फर्नीचर मुझे
लगता है मैं बेच रहा हूं तो मेरे पास से जा रहा है। एसेट कम हो रही है और एसेट कम होने पर रूल क्या कहता है? जल्दी बोलो।
क्रेडिट। ये भी मेरी एसेट है। आराध्या भी मेरे लिए एक तरह की एसेट है। बिकॉज़ आराध्या बेटा
देखो डेटर है सबसे पहले तो मेरे लिए। और डेटर की क्लास क्या होती है? एसेट। और एसेट का रूल कहता है बढ़ने पर डेबिट, कम
होने पर क्रेडिट। डेटर नामक एसेट आज तक नहीं थी आपके पास। अब ये एसेट बिजनेस में इंक्रीस हुई है। तो
इसलिए अब आराध्या के अकाउंट में आप रिकॉर्डिंग करोगे डेबिट साइड और फर्नीचर के अकाउंट में रिकॉर्डिंग करोगे क्रेडिट
साइड। समझ में आया लॉजिक? परचेजेस और सेल्स शब्द का इस्तेमाल क्यों नहीं हुआ? परचेज तो देखो होना भी नहीं था
क्योंकि सेल हुई है इस ट्रांजैक्शन में। है ना? सेल हुई है इस ट्रांजैक्शन में। वी हैव सोल्ड समथिंग एंड दैट समथिंग इज़
फर्नीचर नॉट गुड्स। ठीक है? अगर गुड्स बेचे होते तो आप गुड्स बेचे होते अगर आपने तो आप देखते कि
भैया हम सेल्स अकाउंट ओपन करेंगे खरीदे होते तो परचेसेस अकाउंट बट चकि वहां गुड्स की बात नहीं हुई थी फर्नीचर की बात हुई थी
इसलिए ये पूरा क्लेश उस चीज पे लागू ही नहीं होता ठीक है आ जाओ आ जाओ आ जाओ ये रिकॉर्ड हो गया जी सेवंथ ट्रांजैक्शन
रिकॉर्ड हो गई एट्थ ट्रांजैक्शन अब गुड्स बेच रहे हैं हम अब दिमाग की बत्ती जला लेना अब गुड्स बेच रहे हैं कितने रुपए के
गुड्स बेच रहे हैं? 3000 पर उधार बेच रहे हैं फिर से। क्योंकि पार्टी का नाम लिखा है यहां पर लिखा है सोल्ड गुड्स टू नेहा।
नेहा को हम गुड्स बेच रहे हैं ₹3000 के। तो जैसे आराध्या आपकी डेटर बनी थी। नेहा भी डेटर बनेगी। यस।
पैसे लेने हैं ना भाई? तो एक तो नेहा का अकाउंट ओपन होगा। और नेहा भी डेटर है तो नेहा का अकाउंट भी
डेबिट हो जाएगा। दूसरा अकाउंट कौन सा ओपन होगा? जल्दी बताओ। जल्दी बताओ जल्दी। दूसरा अकाउंट कौन
सा ओपन होगा? क्या बेचा? फर्नीचर, लैंड, बिल्डिंग। नो गुड्स। और गुड्स बेचते हैं तो कौन सा
अकाउंट ओपन होता है? सेल्स अकाउंट। इस बार सेल्स अकाउंट ओपन होगा। गुड्स के अलावा कोई चीज बेची होती तो उस चीज का नाम
लेता मैं। लेकिनकि गुड्स की कहानी है तो गुड्स की कहानी वो बता बताई थी ना तो जरा उसका स्क्रीनशॉट ले लेना वरना मैं तो कहता
हूं कॉपी रजिस्टर वगैरह लेके बैठे हो ना तमीज से उसको लिख लो ये बड़ा काम आने वाला है आपको सेल्स अकाउंट सर सर सेल्स अकाउंट
में रिकॉर्डिंग किस साइड होगी जल्दी क्रेडिट साइड सेल्स अकाउंट में रिकॉर्डिंग होगी क्रेडिट साइड ओके
ये थी गुड्स की कहानी आठ ट्रांजैक्शंस हो गई हैं अब चलते हैं नाइंथ ट्रांजैक्शन पे नाइंथ ट्रांजैक्शन पे हमने ने पे करा है
बेटा विहान को ₹15,000 विहान को हम ₹15,000 पे कर रहे हैं दोस्तों। पे करने से हमारा कर्जा कम हो जाता है। विहान को
देना था ना यार। याद है विहान को जानते हो भूल गए? याद है? फिफ्थ ट्रांजैक्शन में गुड्स खरीद के बैठे हो तुम विहान से।
विहान तुम्हारा क्रेडिटर है। तुम्हारे सर पे बैठा हुआ है। लायबिलिटी बनकर लेकिन अब तुम गए और उसको पैसा चुका के आ गए। कितने
पैसे चुका के आए? 15,000। देने भी 15,000 ही थे। पूरा मैंने चुका दिया। अब खुद सोचो।
देखो विहान कहां है? पहले ढूंढता हूं मैं। ये रहा विहान।
जब फिफ्थ ट्रांजैक्शन हुई थी, विहान मेरा क्रेडिटर बना था तो मैंने उसका खाता खोला था ना कि भाई यह मेरा क्रेडिटर है। इसको
मैंने पैसे देने हैं। जब मेरे सर पे कर्जा चढ़ा था, जब मैंने विहान का खाता खोला था, तो मैंने विहान के खाते में क्रेडिट साइड
रिकॉर्ड करा था। सपोज़ दिस इज़ विहान का अकाउंट। दिस इज़ विहान का अकाउंट। तो मैंने पहले 15,000 का कर्जा यहां रिकॉर्ड करा।
अब अगर मैं कर्जा चुका दूंगा, तो यहां रिकॉर्ड कर दूंगा। कैंसिल आउट हो गई दोनों चीजें। समझ रहे हो
आप? मैथमेटिक्स ही तो है ही अकाउंट्स और है क्या? तो विहान वाला कर्जा जब आपके ऊपर चढ़ा था तो आपने
क्रेडिट साइड रिकॉर्ड करा था विहान के खाते में। अब आप इस चीज को विहान के खाते में डेबिट साइड रिकॉर्ड कर देना। विहान का
खाता बंद हो जाएगा। विहान का अकाउंट क्लोज हो जाएगा। ठीक है? सो विहान को हम कितना पे कर रहे हैं? हम विहान को 15,000 पूरा
का पूरा पे कर दे रहे हैं नाइंथ ट्रांजैक्शन में। सो नाइंथ ट्रांजैक्शन में
दिमाग लगाना है बेटा। कोई भी ट्रांजैक्शन हो रही है ना तो पहले दिमाग लगाना है। ठंडे दिमाग से सोचना है कि अगर तुम्हारा
ही ये बिजनेस है सोचो एक तरह से। और अगर तुम्हारे साथ ये ट्रांजैक्शन हो रही है तो किस चीज पे फर्क पड़ेगा? यार विहान को तुम
पैसे दे रहे हो। मैं कहता हूं चाहे कर्जा उतार रहे हो, चाहे उसके मुंह पे फेंक के मार रहे हो आप पैसे। जेब से क्या जा रहा
है? पैसा। तो कैश अकाउंट क्यों नहीं इन्वॉल्वड होना चाहिए? है ना? सो नाइंथ ट्रांजैक्शन में वन इज कैश अकाउंट
एंड विहान के खाते में दोबारा से रिकॉर्ड करूंगा मैं। जब मेरे सर पर कर्जा चढ़ा था मैंने विहान के खाते में रिकॉर्ड करा था।
कर्जा उतरेगा मैं फिर से विहान के खाते में रिकॉर्ड करूंगा। तो विहान्स अकाउंट कैश अकाउंट में रिकॉर्डिंग मुझे लगता है
क्रेडिट साइड करनी चाहिए मुझे और विहान के अकाउंट में रिकॉर्डिंग डेबिट साइड करनी चाहिए। लॉजिक बताऊं आराम से। पहले तो तुम
बताओ क्या होगा इसका लॉजिक? लॉजिक ये है कि विहान लायबिलिटी है। पहली बात तो उस वक्त लायबिलिटी बढ़ी थी तो
क्रेडिट साइड रिकॉर्ड किया था। आज लायबिलिटी कम हो रही है तो डेबिट साइड रिकॉर्ड कर रहा हूं। लायबिलिटी का रूल यही
कहता है ना कि लायबिलिटी बढ़ती है तो क्रेडिट, कम होती है तो डेबिट। वही तो करा है मैंने। और कैश मेरे लिए एसेट है। एसेट
का रूल उल्टा कहता है। एसेट का रूल कहता है बढ़ती है तो डेबिट। कम होती है तो क्रेडिट। मेरी एसेट कम हो रही है क्योंकि
मैं पेमेंट कर रहा हूं इसलिए क्रेडिट कर रहा हूं मैं। बात समझ में आ रही है कि नहीं आ रही है दोस्तों? ठीक है?
उसके बाद 10th ट्रांजैक्शन में रिसीव्ड फ्रॉम नेहा। नेहा नाम की बच्ची नेहा आपको ₹2000 देकर गई है। नेहा कौन है?
यह रही देखो एथ ट्रांजैक्शन के वक्त नेहा को आपने माल बेचा था ना ₹3,000 का और उस वक्त वो आपकी डेटर बन गई थी। आज वो आपको
पैसा देकर गई है। पूरा तो नहीं ₹2,000 देकर गई है। तो मैं ₹2,000 रिकॉर्ड कर दूंगा नेहा के खाते में। यस।
सोचो जरा आराम से। सपोज तुम दुकानदार हो और मैं नेहा हूं। ओके? जब मैं पहली बार तुमसे गुड्स खरीद के गई थी तो मैंने क्या
कहा था कि मेरे खाते में लिख दो। गुड्स लेके जा रही हूं मैं ₹3,000 के। उसके बाद अगर मैं तुम्हें पैसा देने आऊंगी तो भी
मैं सेम सेंटेंस बोलूंगी कि ये पैसा कटवा के जा रही हूं। मेरे खाते में लिख देना। तो बेटा आप जब किसी से पैसा लेना है तो उस
व्यक्ति के खाते में लिखोगे। और अगर वो लौटा के जा रहा है, चुका के जा रहा है तो भी उसके खाते में लिखोगे। सो अगेन नेहा का
अकाउंट इनवॉल्व होगा इस ट्रांजैक्शन के अंदर। राइट? 10th ट्रांजैक्शन रिसीव्ड फ्रॉम नेहा ₹2000 10थ ट्रांजैक्शन रिसीव्ड
फ्रॉम नेहा। तो एक तो नेहा के अकाउंट में मैं यह रिकॉर्ड करूंगा। और दूसरा नेहा क्या देकर गई है आपको? एक एसेट देकर गई है
ना बेटा? जिसका नाम कैश है। तो कैश अकाउंट। तीन अकाउंट्स तीन तरह के अकाउंट्स पर तो
तुम खेल ही रहे थे ना अकाउंटिंग इक्वेशन में एसेट लायबिलिटी और कैपिटल मैंने तीन और चीजें ही तो बोली है बस आपको एक्सपेंस
रेवेन्यू और ड्रॉइंग तो काहे घबरा रहे हैं नेहा का अकाउंट और कैश का अकाउंट नेहा का अकाउंट और कैश का अकाउंट अब जरा
देखते हैं रिकॉर्डिंग कहां होनी चाहिए नेहा तुम्हारी डेटर थी आज भी है लेकिन अब कम हो गई है डेटर पहले मुझे 3000 लेने थे
उससे पर अब वो ₹2000 चुका के गई है अच्छी बच्ची है तो डेटर जो कि एक एसेट है। डेटर नामक एसेट बढ़ नहीं रही है, कम हो रही है।
इसलिए यहां पर रिकॉर्डिंग क्रेडिट साइड होगी। लेकिनकि डेटर आपको पैसे देके जा रहा है तो इसकी वजह से एक दूसरी एसेट है जो
बढ़ रही है जिसका नाम कैश है। इसलिए यहां रिकॉर्डिंग डेबिट साइड होगी। कितना तो इंटरेस्टिंग है ये। ठीक है? कितना तो
इंटरेस्टिंग है ये। जरूरी सिर्फ एक बात है कि जब चीजें समझ में आने लगे तो हम यह ना करें कि लैपटॉप बंद करा, मोबाइल बंद करा
या कुछ और खोल लिया। कोई दूसरी सोशल मीडिया ऐप में आप एंगेज हो गए या सो गए। अब तो चीजें समझ में आनी शुरू हुई हैं।
ठीक है? अब तो आपके अंदर का स्टूडेंट जाग जाना चाहिए पढ़ाई करने के लिए। हां जी। सो नेहा और कैश। आगे चलते हैं दोस्तों। अगली
ट्रांजैक्शन देखते हैं। अगली ट्रांजैक्शन में नाउ वी हैव पेड रेंट। ₹6,000 का रेंट पे कर दिया हमने। 11th ट्रांजैक्शन में।
रेंट पे करा हमने। ईजी है। रेंट पे करने पर हमारे पास से जाता क्या है? पहले तो ये बताओ। कैश। रेंट
पे करने पर हमारे पास से कैश जाएगा। सो 11th ट्रांजैक्शन में एक चीज जो इनवॉल्वड है वो कैश है। डेफिनेटली क्योंकि रेंट पे
करने से कैश जाता है तो कैश के खाते में मुझे ये चीज़ लिखनी पड़ेगी। अच्छा इतनी सारी ट्रांजैक्शन में कैश अकाउंट कैश अकाउंट
बहुत बार नाम आ गया तो क्या 10 बार कैश अकाउंट नया खुला है? नहीं एक ही है। उसी में रिकॉर्डिंग चल रही है। लेफ्ट राइट
लेफ्ट राइट लेफ्ट राइट इस तरह से। अब रेंट पे करने पर क्या होता था? अकाउंटिंग इक्वेशन वाले चैप्टर को याद करो। रेंट पे
करने पर तुम कैश वाले कॉलम में से माइनस करते थे और कैपिटल वाले कॉलम में से भी माइनस करते थे। लेकिन दोस्तों यहां पर ऐसा
नहीं होगा। हम एक्सपेंसेस और रेवेन्यूस को और ड्रॉइंग्स को कैपिटल से अलग रखते हैं और
उनका अलग से खाता खोलते हैं थ्रूउ द ईयर। यस। तो मैं क्या करूंगा? मैं रेंट के नाम से एक सेपरेट अकाउंट ओपन करूंगा। मुझे भी
तो पता चले पूरे साल में रेंट के खाते में कितना पैसा है? सैलरीज में कितना पे किया है हमने? वेजेस में कितना पे किया है।
इलेक्ट्रिसिटी में कितना पे किया है। मुझे भी तो इसका रिकॉर्ड चाहिए ना पूरे साल में। ओके? सो कैश अकाउंट एंड रेंट अकाउंट
इतना समझ में आया आपको? कैश अकाउंट रेंट अकाउंट। अब अब दोस्तों खुद ही सोच लो कि आपने रेंट पे करा तो कैश आया कि गया? आपको
पता है 100 में से 90 ट्रांजैक्शंस कैश पे आधारित होती हैं। कैश पे अगर आपकी पकड़ मजबूत है तो दूसरा अकाउंट तो जुगाड़ से भी
निकाल लोगे आप। लेकिन आप उतना भी तो याद नहीं रखते ना। प्रॉब्लम यह है। कैश तो याद रखो। कैश का रूल तो याद रखो। बढ़ने पर
डेबिट, कम होने पर क्रेडिट। खत्म हो गई बात। तो रेंट पे करने से कैश आ रहा है कि जा रहा है? जा रहा है। कम हो रहा है।
क्रेडिट। और रेंट के अकाउंट में रिकॉर्डिंग होगी डेबिट साइड। बिकॉज़ रेंट क्या है? रेंट एक
एक्सपेंस है। और एक्सपेंस जब भी बढ़ता है रिकॉर्डिंग डेबिट साइड होती है। एक्सपेंस जब भी बढ़ता है, रिकॉर्डिंग डेबिट साइड
होती है। अब आते हैं सर 12थ ट्रांजैक्शन पे। 12th ट्रांजैक्शन में लास्ट हमें लिखा है वी हैव रिसीव्ड कमीशन फ्रॉम गाबा
इलेक्ट्रॉनिक्स ₹1500 की हमें कमीशन मिली है। हमने कोई कोई मेरे पास परचेस ऑर्डर आया मेरे पास उस ऑर्डर को पूरा करने के
लिए टाइम नहीं है या मशीनें नहीं है या बंदे नहीं है। मैंने वो ऑर्डर तुम्हें दिलवा दिया। तुमने खुश होकर मुझे कमीशन दे
दी। इस तरह से मेरे पड़ोसी ने मुझे कमीशन दे दी। ₹1500 की 12th ट्रांजैक्शन। अब देखो कमीशन आ रही है लेकिन कमीशन के
आने से आता क्या है? आएगी तो कोई एसेट ही ना। और उस एसेट का नाम फिर से क्या है? कैश। सो कैश अकाउंट
कैश अकाउंट में रिकॉर्डिंग भी मुझे पता है। डेबिट साइड होने वाली है। रिकॉर्डिंग भी मुझे पता है। डेबिट साइड होने वाली है।
क्योंकि एसेट बढ़ गई आपकी। कमीशन का पैसा आया। आपकी एसेट बढ़ गई। कैश दूसरा कहां रिकॉर्ड करोगे? कैपिटल के
अकाउंट में तो रिकॉर्ड करना नहीं है कैपिटल में बल्कि पूरे साल कोई छेड़खानी करते ही नहीं है हम प्रैक्टिकल अकाउंटिंग
में सिर्फ कैपिटल जिस वक्त आएगी तब या जब एडिशनल कैपिटल आएगी तब बाकी कुछ नहीं पूरे साल
क्योंकि मैं सारे एक्सपेंसेस का अलग अकाउंट ओपन करता हूं। मैं सारे रेवेन्यूस का भी अलग अकाउंट ओपन करता हूं। सो मैं एक
सेपरेट अकाउंट ओपन करूंगा यहां पर जिसका नाम है कमीशन रिसीव्ड। जिसका नाम है कमीशन रिसीव्ड।
और इस अकाउंट के अंदर मैं रिकॉर्डिंग कर दूंगा क्रेडिट साइड। लॉजिक साथ के साथ क्लियर करते हुए चलना दोस्तों। यहां पर
मैं रिकॉर्डिंग क्रेडिट साइड कर रहा हूं क्योंकि मेरे लिए यह रेवेन्यू है और रेवेन्यू जब भी बढ़ता है तो रिकॉर्डिंग
क्रेडिट साइड होती है। खत्म हो गई बात। कैश आपके लिए क्या है? एसेट है। एसेट जब भी बढ़ती है तो रिकॉर्डिंग डेबिट साइड
होती है। अलग-अलग जगह से रूल आ रहा है दोनों का। रूल्स एक बार फिर से पढ़ लो। याद कर लो। एक पेपर पे लिख लो अपने सामने
और साथ के साथ मेरे ट्रांजैक्शंस देखते हुए चलो। सर क्वेश्चन खत्म हो गया। 12 की 12
ट्रांजैक्शंस हमने खत्म कर दी। ओके? आगे चलते हैं। अब जरा यह मैं आपको थोड़ी देर बाद बताऊंगा। अब
आगे चलते हैं। जर्नल के बारे में थोड़ी सी बातें करते हैं। ठीक है? यहां पर एक क्वेश्चन आता है हमारे सामने।
इस क्वेश्चन में लिखा है जर्नलाइज द फॉलोइंग ट्रांजैक्शंस। ट्रांजैक्शंस तो कुछ भी नहीं है। ट्रांजैक्शंस तो चलो हो
जाएंगी। समझ में आ जाएंगी। बट व्हाट इज अ जर्नल? एक जर्नल क्या होता है? सोचने वाली बात है। तो जर्नल सबसे पहले तो आपको समझना
पड़ेगा जर्नल का फॉर्मेट क्या है? इस तरह से दोस्तों जर्नल का फॉर्मेट बनाया जाता है।
किसी भी ट्रांजैक्शन को पहली बार रिकॉर्ड किया जाता है एक फॉर्मल बुक ऑफ अकाउंट्स में जिसका नाम है दोस्तों जर्नल। फॉर
एग्जांपल फॉर एग्जांपल जो क्वेश्चन मैंने आपको अभी-अभी करवाया था। अगर आप उस क्वेश्चन की ही का ही एग्जांपल लें तो उस
क्वेश्चन के अंदर सबसे पहली ट्रांजैक्शन क्या थी? गौरांश ने बिज़नेस स्टार्ट करा था। बिजनेस में कैश आया था कैपिटल के रूप
में। उस चीज को रिकॉर्ड करने का तरीका वह नहीं है। इतनी देर से जो मैं रिकॉर्ड करने का तरीका बता रहा था ऐसे थोड़ी चीजें
रिकॉर्ड होंगी। इतने गंदे तरीके से रिकॉर्ड करोगे क्या? और आजकल तो वैसे भी सॉफ्टवेयर बेस्ड अकाउंटिंग है। तो ऐसे
थोड़ी हो गई। ये थोड़ी अकाउंटिंग इस तरह से थोड़ी अकाउंटिंग होगी। इस क्वेश्चन के अंदर मैंने आपको सिर्फ यह पता लगाना
सिखाया कि व्हिच अकाउंट इज़ टू बी डेबिटेड और व्हिच अकाउंट इज़ टू बी क्रेडिटेड। अब उसको अप्लाई कैसे करते हैं? ध्यान से
सुनना। यह जो जर्नल जर्नल चिल्ला रहे हो ना तुम यह है जर्नल का फॉर्मेट।
कभी भी जर्नल प्रिपेयर करना है तो सबसे पहले तो आपको लिखना है इन द बुक्स ऑफ जो भी कंपनी का नाम है। जो भी दुकान का
नाम है। दुकान का नाम नहीं पता तो दुकानदार का नाम जो भी है वो लिखना है आपको। सो इन द बुक्स ऑफ से गौरांश
दुकानदार का नाम आ गया यहां पर। ठीक है? इसके बाद जरा ये कॉलम्स ध्यान से देखो। यहां पर डेट फॉर्मेट की बात हो रही है ना?
फॉर्मेट की बात हो रही है। तो यहां पर आने वाली है हमारी डेट। हर ट्रांजैक्शन की डेट यहां पर आने वाली है। इधर आएंगे हमारे
पर्टिकुलर्स यानी अकाउंट्स के नाम। कौन सा अकाउंट आरला है या जाला है? इधर आएगा एलएफ। एलएफ क्या होता है? इंपॉर्टेंट चीज़
है दोस्तों। दोस्तों एलएफ होता है लेजर फोलियो। जिस प्रकार जर्नल है प्राइमरी बुक ऑफ़
अकाउंट्स उसी प्रकार एक दूसरी बुक भी होती है लेजर जो कि होती है सेकेंडरी बुक। अब जर्नल में आज अगर कोई ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड
हो रही है तो कल को वो लेजर में भी जाएगी। तो लेजर के किस पेज पर जाएगी? दैट पेज नंबर इज़ गोइंग टू बी रिटन हियर। पर इसका
यूज़ अभी नहीं है। और आप अपने स्कूल टीचर से पूछ लेना शायद वो यह भी अलाउ कर दें आपको कि आप यह वाला कॉलम बनाए ही नहीं।
लेजर फोलियो का कॉलम ही हटा देंगे वो। ऐसा भी हो सकता है। उसके बाद डेबिट अमाउंट हम यहां पर लिखते हैं। क्रेडिट अमाउंट हम
यहां पर लिखते हैं। इस तरह से जनरल में ट्रांजैक्शंस को रिकॉर्ड किया जाता है। फॉर एग्जांपल 2025 में
फॉर एग्जांपल 2025 में 2025 में अप्रैल की 1 तारीख को किसी व्यक्ति ने बिजनेस शुरू करा। अप्रैल
की 1 तारीख को किसी व्यक्ति ने बिजनेस शुरू करा 2025 में। तो पहले तो मुझे इतना बताओ कि कौन सी दो चीजों का इन्वॉल्वमेंट
है यहां पर? कौन से दो अकाउंट्स का इन्वॉल्वमेंट है यहां पर? जल्दी से बता दो। जी हां। कैश अकाउंट और कैपिटल अकाउंट।
गौरांश वाला एग्जांपल ले लो। जब बिजनेस स्टार्ट होता है तो कौन से दो अकाउंट्स इनवॉल्वड होते हैं?
बिजनेस स्टार्ट होने पर कौन से दो अकाउंट्स इनवॉल्वड होते हैं? कैश और कैपिटल। कैश अकाउंट में रिकॉर्डिंग डेबिट
साइड होती है। कैपिटल अकाउंट में रिकॉर्डिंग क्रेडिट साइड होती है। तो बस इसको रिकॉर्ड जर्नल में इस तरह से किया
जाता है दोस्तों। सबसे पहले आपको लिखना है डेबिट वाला अकाउंट यानी कि कैश अकाउंट।
और यहां लास्ट में आकर आपको इधर सिंबल लगा देना है डेबिट का। कैश अकाउंट हो जाएगा डेबिट। कैश बिजनेस में कितना आ रहा है? से
₹1 लाख तो डेबिट वाले कॉलम में आपको यहां पर लिख देना है ₹1 लाख और कैश अगर बिज़ इस बिज़नेस में डेबिट हो
रहा है तो कुछ क्रेडिट भी हो रहा है। क्रेडिट क्या हो रहा है? कैपिटल। तो वो आपको नीचे की तरफ लिख देना है।
नीचे की तरफ थोड़ा सा इतना सा स्पेस छोड़कर आपको लिखना है टू। और यहां पर लिख देना है क्रेडिट वाला अकाउंट यानी कि कैपिटल
अकाउंट। और इसका अमाउंट यहां पर आ जाएगा क्रेडिट के कॉलम में ₹1 लाख।
बस दोस्तों इस तरह से ट्रांजक्शन रिकॉर्ड की जाती हैं जनरल चैप्टर के अंदर। आराम से देखो इस रिकॉर्डिंग को।
कैश अकाउंट डेबिट टू कैपिटल अकाउंट। कैश अकाउंट डेबिट टू कैपिटल अकाउंट। यानी कि अगर किसी ट्रांजैक्शन के अंदर आपको पता
है कि कौन सी चीज डेबिट हुई है और कौन सी चीज क्रेडिट हुई है तो जर्नल में उस ट्रांजैक्शन को रिकॉर्ड करना बहुत आसान है
आपके लिए बाएं हाथ का खेल है। अब मुझे इतनी सारी प्रैक्टिस के बाद 1 घंटे की प्रैक्टिस के बाद समझ में आ गया है कि
बिज़नेस स्टार्ट होने पर कैश डेबिट होता है। कैपिटल क्रेडिट होता है। तो जो चीज़ डेबिट हुई है उसको पहले रिकॉर्ड करना है।
डैश अकाउंट डेबिट और क्रेडिट वाली चीज को ऐसे रिकॉर्ड नहीं करना कि कैपिटल अकाउंट क्रेडिट ना जी ना।
टू शब्द लिखना है। ये टू जो है वो क्रेडिट को ही डिनोट कर रहा है। और फिर आपको लिखना है कैपिटल अकाउंट। इस तरह से रिकॉर्डिंग
करनी है आपको जर्नल की। अच्छा अब इस ट्रांजैक्शन को हम नरेट करेंगे। नरेट कैसे करना है ट्रांजैक्शन को वो भी बड़ा
इंपॉर्टेंट है। आपको बेसिकली इस ट्रांजैक्शन में जो हुआ है उस घटना को थोड़ा सा उल्लेख करना है उसका। तो नरेट
हमेशा हम बीइंग से शुरुआत करते हैं या कई बार नहीं भी करते। स्कूल टीचर अलऊ कर देता है। सीबीएसई ने तो अलऊ कर दिया है। अब तो
बीइंग लिख सकते हैं। वरना नहीं भी लिखें और बताएं इस टोनेशन में क्या हुआ है? बिज़नेस स्टार्ट हुआ है। तो आप लिखेंगे
बीइंग बिज़नेस स्टार्टेड। बीइंग बिज़नेस स्टार्टेड विद कैश। एक बार इसको करना होगा पैक और आपकी
ट्रांजैक्शन कंप्लीट। इस तरह से जर्नल में रिकॉर्डिंग होती है। दूसरी ट्रांजैक्शन गौरांश के बिजनेस में पीछे जाकर देख लेना।
उसने बैंक में पैसा जमा कराया था ₹00 जिसकी वजह से बैंक अकाउंट हुआ था डेबिट और कैश अकाउंट हुआ था क्रेडिट। इसको भी
रिकॉर्ड कर देते हैं हम। लेट अस टेक एन एग्जांपल कि यह जो ट्रांजैक्शन है वो दो तारीख की है। तो अब आपको बार-बार ईयर नहीं
लिखना। आपको सीधा लिखना है मंथ और डेट अप्रैल टू। खत्म हो गई बात। और ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड कर देनी है।
ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड करने के लिए सबसे पहले दिमाग में बनाना है क्या डेबिट क्या क्रेडिट।
तो क्योंकि बैंक में पैसा जमा हुआ है तो क्या डेबिट बैंक अकाउंट। क्रेडिट क्या होगा? कैश अकाउंट। आइए रिकॉर्ड कर देते
हैं। यहां पर रिकॉर्ड करेंगे हम। बैंक अकाउंट डेबिट
और फिर उसके बाद हरे पेन से कैश अकाउंट क्रेडिट। ऐसे नहीं। पहले डेबिट की चीज को रिकॉर्ड करना
है। डैश अकाउंट डेबिट और क्रेडिट की चीज को रिकॉर्ड करने के लिए डैश अकाउंट क्रेडिट नहीं लिखना। टू लगाना है। थोड़ा
सा स्पेस छोड़ करके फिर लगाना है आपको टू। अब ये समझ लो ये क्रेडिट लिख दिया आपने। अब बताओ कौन सा अकाउंट क्रेडिट हुआ है?
बैंक में पैसा जमा कराने पर कैश। तो आपको लिखना है टू कैश अकाउंट। सर कैश हमारे पास से चला जाएगा ₹00
और बैंक में आ जाएंगे यह ₹00 ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड हो गई वाह जी वाह मजे ही आ गए ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड हो गई ओए होए
होए ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड हो गई अच्छा अब इसको नरेट करो जरा क्या हुआ है तो भैया बीइंग कैश डिपॉजिटेड
बीइंग कैश डिपॉजिटेड इन बैंक खत्म बेटा दिस इज हाउ वी रिकॉर्ड ट्रांजैक्शंस
इन द जर्नल। तो पिछले एक सवा घंटे से जो मैं आपके दिमाग में चीजें बिठाने की कोशिश कर रहा
था वो ये कि पहले किसी भी ट्रांजैक्शन के अंदर पता लगाना सीखो कि कौन सा अकाउंट डेबिट होगा, कौन सा अकाउंट क्रेडिट होगा।
एक बार अगर पता चल गया बन गया जर्नल। अब मैं तुम्हें 10 ट्रांजैक्शंस भी दे दूं। तो तुम इस जर्नल को आगे कंप्लीट कर सकते
हो ना एक्सटेंड करके। ठीक है? तो क्या करें? वीडियो पॉज करो और गौरांश वाले क्वेश्चन के अंदर सारी ट्रांजैक्शन में
मैंने पीछे लिखा हुआ है कि डेबिट क्या होगा? क्रेडिट क्या होगा? बस उसे इस जर्नल के अंदर कंटिन्यू करो। डेट अपनी तरफ से
प्लस वन प्लस वन करते हुए चलना। इतना करने के बाद वीडियो को आगे देखना। जर्नल चैप्टर मजा आ जाएगा तुम्हें।
यूटीज़ में अफलातून परफॉर्म करने वाले हो तुम इस चैप्टर के अंदर। जर्नल चैप्टर के अंदर। ठीक है जी? तो, यह है जी जर्नल का
फॉर्मेट। सबसे पहले लिखना होता है इन द बुक्स ऑफ़। उसके बाद जो भी पार्टी का नाम है जिसके यहां तुम बुक्स बुक्स बना रहे हो
जिसके लिए तुम जर्नल बना रहे हो कंपनी का नाम फर्म का नाम वो और फिर फॉर्मेट डेट पर्टिकुलर्स लेजर फोलियो डेबिट अमाउंट एंड
क्रेडिट अमाउंट दैट्स इट खत्म हो गई बात ठीक है | चलें अब आगे तो सर आज का जो गोल था उसमें से हमने क्या-क्या अचीव कर लिया
जरा वो भी तो बता दो बेटा आज का जो गोल था उसमें से हमने एक तो रूल्स ऑफ डेबिट एंड क्रेडिट सीख लिए और उसके बाद हमने
रूल्स ऑफ डेबिट एंड क्रेडिट हो गया। और हमने कंपाउंड जर्नल एंट्रीज अभी नहीं सीखी पर हमने सिंपल जर्नल एंट्री करना सीख
लिया। डैश अकाउंट डेबिट टू डैश अकाउंट। सिंपल जर्नल एंट्री हमने करना सीख लिया दोस्तों। क्या बात है? मजे आ गए। ठीक है
जी। अब आगे चलते हैं। प्यारे बच्चों। आगे चलते हैं अब
और यह एक क्वेश्चन है आपके सामने। जनरलाइज द फॉलोइंग ट्रांजैक्शंस इन द
बुक्स ऑफ तनवी। तनवी हमारे प्रोपराइटर का नाम है इस बार। और इस प्रोपराइटर की बुक्स में हमें इन सभी ट्रांजैक्शंस को ज्यादा
नहीं चार ट्रांजैक्शंस हैं सिर्फ। इनको जर्नल में रिकॉर्ड करना है। ठीक है? आइए जरा। तो सबसे पहले जर्नल का फॉर्मेट बना
लें? बना लें जर्नल का फॉर्मेट। चलो जी बना लेते हैं। सबसे ऊपर क्या लिखना होता है? इन द बुक्स ऑफ़
तनवी। ठीक है? और फिर हम क्या बना रहे हैं? उसका नाम भी लिखना है। तो जर्नल बना रहे हैं
हम। उसके बाद हमें बनाना है इस जर्नल का फॉर्मेट। यह रहा जी इस जर्नल का फॉर्मेट। सबसे पहले
क्या आता है? सबसे पहले डेट आता है। उसके बाद पर्टिकुलर्स। पर्टिकुलर्स के बाद क्या आता है दोस्तों?
लेजर फोलियो। पर्टिकुलर्स के बाद आता है लेजर फोलियो। फिर आता है हमारा डेबिट वाला अमाउंट
और क्रेडिट वाला अमाउंट। जर्नल का फॉर्मेट कंप्लीट। ये
जर्नल का फॉर्मेट हो गया है कंप्लीट। ऑलराइट। हां जी। अब चलते हैं आगे। अब ट्रांजैक्शन को जरा आराम आराम से
रिकॉर्ड करते हैं। देखो भाई, सबसे पहली ट्रांजैक्शन 2025 को हुई है और 1 अप्रैल को तनवी ने बिज़नेस स्टार्ट करा और वो घर
से लाई कैश ₹ लाख, बैंक बैलेंस ₹1 लाख और मशीनरी 3 लाख। जरूरी है घर से सिर्फ एक ही चीज़ लाएगी
कैश। नहीं ला सकती वो तीन-तीन चीज़। मना कर दोगे। उसके पास पड़ा हुआ था। घर पर कैश भी था,
बैंक बैलेंस भी था उसका जो उसने बिजनेस के नाम पर अब कन्वर्ट कर दिया बिजनेस के अंदर और एक मशीनरी भी थी ₹3 लाख की। वो ये सारी
चीजें बिनेस के अंदर ले आई। तो सबसे पहले समझो कि इस बार कैपिटल तीन एसेट्स के रूप में आ रही है। सेम डेट पर तीन एसेट्स के
रूप में कैपिटल आ रही है। वन इज़ कैश, बैंक एंड द अदर वन इज़ मशीनरी। जब भी बिजनेस में कोई कैपिटल इन्वेस्ट
करता है तो एक एसेट आती है तो वह एसेट हो जाती है डेबिट और कैपिटल हो जाती है क्रेडिट जैसे कैश आता है तो कैश अकाउंट
डेबिट और कैपिटल अकाउंट क्रेडिट बैंक है तो बैंक अकाउंट डेबिट कैपिटल अकाउंट क्रेडिट मशीनरी है तो मशीनरी अकाउंट डेबिट
कैपिटल अकाउंट क्रेडिट खत्म अब जरा ध्यान से सुनना अगर सेम डेट पर तीन बार में मेरे बिनेस के अंदर पैसा आ रहा है
मतलब एसेट आ रही है कैपिटल के रूप में तो मुझे तीन तीन-तीन जनरल एंट्रीज करने की जरूरत नहीं है। समझना जरा ध्यान से।
सबसे पहले मैं डेट डाल देता हूं 2025। 2025 तो एक ही बार लिखना है बस आपको। फिर लिखना है आपको सीधा अप्रैल वन।
ठीक है? सबसे पहले बताओ तीन एसेट्स आपके बिजनेस के अंदर आ रही हैं तो तीनों एसेट्स का खाता खोलोगे ना और एसेट्स तीनों ही बढ़
रही हैं। तो तीनों को डेबिट में रिकॉर्ड करोगे तो तीनों को डेबिट में रिकॉर्ड कर दो। कैश अकाउंट
अगला बैंक अकाउंट। अगला मशीनरी अकाउंट। कैश अकाउंट भी होगा डेबिट। बैंक अकाउंट भी
होगा डेबिट और मशीनरी अकाउंट भी होगा डेबिट। और दोस्तों यहां पर क्रेडिट हो जाएगा सिर्फ और सिर्फ एक अकाउंट जिसका नाम
है कैपिटल अकाउंट। ये जो ट्रांजैक्शन आप देख रहे हो इसको बोलते हैं कंपाउंड जर्नल एंट्री। यानी एक ऐसी जर्नल एंट्री जिसमें
एक से ज्यादा अकाउंट्स डेबिट हो जाएं या एक से ज्यादा अकाउंट्स क्रेडिट हो जाएं। ऐसी जर्नल एंट्री को हम बोलते हैं कंपाउंड
जर्नल एंट्री। सिंपल जनरल एंट्री यह थी दोस्तों जिसमें एक अकाउंट डेबिट एक क्रेडिट एक डेबिट एक क्रेडिट
ठीक है जी लेकिन ये कंपाउंड जनरल एंट्री है क्योंकि मेरे पास टाइम नहीं है ना कि मैं तीन-तीन जनरल एंट्रीज करूं तीन-तीन
जनरल एंट्रीज क्यों करूंगा मैं जब सेम डेट है और कॉमन है तीनों में कैपिटल का क्रेडिट होना कॉमन है तो मैं कंपाउंड जनरल
एंट्री करूंगा मेरे बिनेस के अंदर कैपिटल टोटल कितनी आ गई है 2 3 और तीन छ ₹6 लाख कैपिटल के अकाउंट में मैं यहां पर लिख
दूंगा ूंगा क्रेडिट में और मेरे बिनेस के अंदर जो ये तीन एसेट्स आई हैं कैश बैंक और मशीनरी ये है दो एक और
तीन सो यहां पर मैं लिख दूंगा 2 लाख 1 लाख एंड 3 लाख खत्म हो गई बेटा बात अच्छा जी अब इसको
नरेट कर देते हैं कि क्या हुआ है इस ट्रांजैक्शन के अंदर तो क्या हुआ है बता दो तो यहां पर भैया बीइंग बिजनेस
स्टार्टेड बिजनेस शुरू हुआ है बिजनेस स्टार्टेड विद
कैश कॉमा बैंक एंड मशीनरी खत्म हो गया।
अगर मैं ये कंपाउंड जनरल एंट्री नहीं करता तो मेरा टाइम वेस्ट होता। फिर मुझे तीन-तीन जनरल एंट्रीज़ करनी पड़ती। पता है
कैसे? ये देखो। सबसे पहले मैं देखता कि भैया कैश आया है बिज़नेस में। तो मैं लिखता कैश अकाउंट
डेबिट टू कैपिटल अकाउंट। फिर मैं देखता कि यार बैंक बैलेंस आया है बिजनेस के अंदर। तो मैं लिखता बैंक अकाउंट डेबिट टू कैपिटल
अकाउंट। फिर मैं देखता कि भैया मशीनरी भी आई है बिजनेस के अंदर। तो मैं लिखता मशीनरी अकाउंट डेबिट टू कैपिटल अकाउंट। पर
बेटा जब तीनों में कैपिटल अकाउंट का क्रेडिट होना कॉमन है तो क्यों ना एक ही साथ एंट्री कर दी जाए इस तरह से।
कैश डेबिट, बैंक डेबिट, मशीनरी डेबिट टू कैपिटल अकाउंट। कंपाउंड एंट्री करने के लिए दो कंडीशंस होनी चाहिए। एक डेट सेम
हो। अगर ये तीनों चीजें मैं अलग-अलग दिन लाया होता घर से तो तीन पार्ट्स में ही होती एंट्री। लेकिन चकि डेट सेम थी और
तीनों में कुछ कॉमन भी था। कैपिटल अकाउंट का क्रेडिट होना कॉमन था। इसलिए मैंने यहां पर कंपाउंड जनरल एंट्री कर दी
दोस्तों। ठीक है? चलें आगे। हां जी। ओके जी। अब चलते हैं आगे। अगले ट्रांजैक्शन को रिकॉर्ड करते हैं। अप्रैल
2। अप्रैल 2 में हमने परचेस करें गुड्स। फ्रॉम जानवी ₹ लाख के हमने गुड्स खरीदे बेटा जानवी से
आउट ऑफ वि ₹1 लाख पेड इन कैश क्या बात है ₹ लाख के गुड्स खरीदे जानवी से लेकिन आज हमने जानवी को पूरी पेमेंट नहीं दी सिर्फ
₹1 लाख की पेमेंट दी हमने जानवी को यानी बाकी के ₹ लाख से जानवी हमारी क्रेडिटर बन जाएगी। पर गुड्स तो आपके पास पूरे ₹3 लाख
के ही आ रहे हैं। गुड्स तो पूरे ₹3 लाख के आ रहे हैं। तो कैसे रिकॉर्ड होगा? मजा आएगा इसको भी रिकॉर्ड करने में। ध्यान से
देखिए जरा। चलो बेटा आप ऊपर चलो। ठीक है जी। इस फॉर्मेट को थोड़ा सा मैं
एक्सटेंड कर देता हूं। ये देखिए सर। सबसे पहले ट्रांजैक्शन की डेट है 2 तारीख।
तो यहां पर अब आपको सिर्फ एक बार लिखना है अप्रैल 2। 2025 आप लिख चुके हैं ऑलरेडी। जानवी से नकद खरीदा या उधार पूरी पेमेंट
दी या आधी थी? गोली मारो। गुड्स आ रहे हैं कि नहीं? कितने रुपए के आ रहे हैं? ₹3 लाख के। गुड्स ₹3 लाख के आ रहे हैं सर आपके
पास। और गुड्स के आने पर कौन सा अकाउंट ओपन होता है? गुड्स अकाउंट या स्टॉक अकाउंट। या परचेजेस अकाउंट। तो गुड्स के
आने पर यहां पर हम एक अकाउंट ओपन करेंगे। परचेजेस अकाउंट और परचेजेस अकाउंट सबको पता है। गुड्स खरीदते वक्त परचेजेस अकाउंट
हो जाता है डेबिट। गुड्स खरीदते वक्त परचेजेस अकाउंट हो जाता है डेबिट। कितने रुपए से? ₹3 लाख से।
अब सुनो जरा। आपने जानवी को पेमेंट दी कैश में तो कैश जा रहा है तो कैश क्रेडिट होगा। और ₹ लाख से जानवी क्रेडिटर बन रही
है आपकी तो जानवी का अकाउंट भी क्रेडिट ही होगा। सुनना जरा ध्यान से। और अभी इसकी डिटेलिंग भी करूंगा मैं। मुझे पता है
थोड़ी सी दिक्कत दे रहा होगा यह आपको शायद। तो जरा देखते हैं। कैश जा रहा है तो कैश अकाउंट को भी क्रेडिट कर दो और जानवी
को बाद में पैसे देने हैं तो जानवी का अकाउंट भी क्रेडिट कर दो। कैश कितना जा रहा है आपके पास से? 1 लाख। और कितना पैसा
आपने नहीं दिया जो कि बाद में देना है? ₹ लाख। खत्म हो गई बात। अब इस ट्रांजैक्शन को आप नरेट कर सकते हो
बीइंग गुड्स परचेस्ड फ्रॉम जानवी नरेशन के अंदर आप बहुत ज्यादा डिटेल में
लिखो ऐसा कोई नहीं मांगता पर नरेशन लिखनी जरूर है। नरेशन लिखने के अलग नंबर नहीं मिलते लेकिन नरेशन ना लिखने के नंबर कट
जरूर जाते हैं। इस चीज का ध्यान रखना है आपको। हो गया रिकॉर्ड। अब ध्यान से सुनना। मैं इस ट्रांजैक्शन को एक बार और
सिंपलीफाई करके बताना चाहता हूं आप लोग को। देखो भैया ऐसा है अप्रैल की थी 2 तारीख
और मैं जानवी के पास गया। ₹ लाख के मैंने गुड्स खरीदे। ₹1 लाख के मैंने गुड्स खरीदे। नकद
और ₹ लाख के मैंने गुड्स खरीदे। उधार। यही तो हुआ है। ₹1 लाख के गुड्स आपने खरीदे नकद पैसे देकर और बाकी ₹ लाख के
उधार। अब अगर उधार को मैं 2 मिनट के लिए भूल जाऊं। सिर्फ नकद जब हम खरीदते हैं गुड्स तो कैसे रिकॉर्ड करते हैं? नकद
गुड्स खरीदने पर परचेजेस अकाउंट होता है डेबिट और कैश अकाउंट हो जाता है क्रेडिट। यही होता है।
अच्छा जी। उधार खरीदने पर क्या होता है? उधार खरीदने पर आपका परचेज अकाउंट होता है डेबिट। और पार्टी का अकाउंट यानी जानवी का
अकाउंट हो जाता है क्रेडिट। गलत तो नहीं कह रहा मैं। अब क्योंकि नकद और उधार सेम डे खरीदा
और सेम डे अगर आप खरीद रहे हो तो बार-बार परचेज अकाउंट दो बार क्यों लिखना? इकट्ठा ही लिख दो। कॉमन हो गया ना? एक तो डेट
कॉमन हो गई। यह भी अप्रैल की 2 तारीख को हुआ है और यह भी अप्रैल की 2 तारीख को हुआ है। और दोनों ही दिन कॉमन हो गया कि परचेस
अकाउंट भी डेबिट हो रहा है यहां पर भी, नकद में भी और उधार में भी। इसलिए मैंने परचेज अकाउंट को इकट्ठा ही डेबिट कर दिया
₹3 लाख से। आप देख सकते हैं परचेज अकाउंट डेबिट हो रहा है ₹3 लाख से। पर क्रेडिट दो अलग-अलग चीजें हो रही हैं। कैश जा रहा है
तो कैश क्रेडिट और जानवी मेरी क्रेडिटर बन रही है। लायबिलिटी बन रही है। इसलिए जानवी का अकाउंट भी क्रेडिट हो रहा है ₹2 लाख
से। बात समझ में आ रही है, दोस्तों? इसके नीचे दो और ट्रांजैक्शन हैं जो कि मैं चाहता हूं आप खुद से ट्राई करें। कंपाउंड
जनरल एंट्री सोल्ड गुड्स वाला और ये जो तीन-तीन खर्चे हमने पे करे रेंट, सैलरी और वेजेस आपकी हेल्प कर देता हूं मैं। गुड्स
बेच रहे हो अनमोल को तो सेल्स अकाउंट तो डेफिनेटली क्रेडिट होगा। कितने रुपए से? ₹1 लाख से। अच्छा अनमोल आपको पैसे दे रहा
है ₹,000 तो बैंक अकाउंट डेबिट होगा 30,000 से और अनमोल डेबिट होगा 70,000 से। इस तरह से ये होने वाला है।
अच्छा जी। अब सर बता दो जरा क्या-क्या टास्क कंप्लीट हो चुका है हमारा? क्या हम अचीव कर रहे हैं साथ-साथ गोल? यस बेटा हम
अचीव कर रहे हैं। हम आज के टोटल गोल्स में से इतना कवर कर चुके हैं। रूल्स ऑफ डेबिट एंड क्रेडिट। हालांकि
डेबिट और क्रेडिट के रूल्स अभी और भी होता है। दूसरा मेथड भी होता है डेबिट और क्रेडिट के रूल्स का जिसको हम ट्रेडिशनल
क्लासिफिकेशन बोलते हैं। वो इस वीडियो के एंड में आपको मिलेगा। अगला है बेटा सिंपल एंड कंपाउंड जर्नल एंट्रीज। ये भी हमारी
खत्म हो चुकी है। तो अब हम आगे चलेंगे ट्रेड डिस्काउंट और कैश डिस्काउंट का टॉपिक शुरू करेंगे। ठीक है? आइए जरा।
दोस्तों डिस्काउंट की जहां तक बात है, डिस्काउंट वर्ड पहली बार नहीं सुन रहे आप जिंदगी में। डिस्काउंट वर्ड आपने सुना हुआ
है, लिया भी हुआ है। रिक्वेस्ट करके सामने वाले को, शॉपकीपर को रिक्वेस्ट करके आपने डिस्काउंट लिया है। बहुत बार लिया है। ठीक
है? पर यहां पर अकाउंटेंसी में डिस्काउंट कितने प्रकार का होने वाला है और उसकी रिकॉर्डिंग कैसे होने वाली है यह सीखने
वाली बात है। तो सबसे पहले मैं आपको बताना चाहूंगा दोस्तों कि डिस्काउंट दो तरीके का होता है यहां पर। एक होता है दोस्तों
ट्रेड डिस्काउंट। एक होता है ट्रेड डिस्काउंट और दूसरा होता है कैश डिस्काउंट। दो डिस्काउंट्स होते
हैं। ट्रेड डिस्काउंट और कैश डिस्काउंट। उसके ज्यादा उससे आगे इंपॉर्टेंट चीज क्या है? जी कि ट्रेड डिस्काउंट आपको तब मिलता
है जब आप बल्क क्वांटिटी में गुड्स खरीदते हो या जब आपने रेगुलर सप्लायर से आप माल खरीद
रहे होते हो या आपके रिलेशंस किसी सप्लायर के साथ अच्छे हैं तो आपको डिस्काउंट दे रहा है वो बल्क क्वांटिटी की वजह से। सर
कैश डिस्काउंट आपको ज्यादा क्वांटिटी और भारी क्वांटिटी की वजह से नहीं मिलता। कैश डिस्काउंट आपको मिलता है अकाउंट को सेटल
अगर आप कर देते हो टाइमली अगर आप अपने अकाउंट की टाइमली सेटलमेंट कर देते हो तो आपको कैश डिस्काउंट मिलता है। अब क्या है
ये टाइमली सेटलमेंट का मतलब मैं आपको बताता हूं। सपोज़ आप एक दुकान पे गए और आपने उस दुकान से क्योंकि आप भी रिटेलर
हो। आप भी अपनी दुकान चलाते हो और आप एक होलसेलर के पास गए और आपने उससे कुछ गुड्स खरीदे। आपकी कपड़ों की दुकान थी। आपने
टीशर्ट्स खरीदी। आपने 100 टीशर्ट्स खरीदी और एक टीशर्ट का प्राइस सामने वाले ने तय कर रखा था ₹1000।
तो दोस्तों एक टीशर्ट का प्राइस था ₹1000 आपने खरीदी 100 कितने रुपए का बिल बनेगा? जल्दी बोलो।
₹1 लाख का बिल बनेगा। ₹1000 का प्राइस था। 100 टीशर्ट्स आपने खरीदी। ₹1 लाख का बिल बनेगा। तो क्या 1 लाख ही देंगे क्या हम?
हम हिंदुस्तानी लोग हैं भाई। हमें डिस्काउंट जब तक ना मिले हमें मजा नहीं आता।
तो आपने सामने वाले से रिक्वेस्ट करी कि हां ₹1000 नहीं प्लीज। तो ये जो ए ऊ करके जो आप डिस्काउंट ले लेते हो ना इसको हम
बोलते हैं ट्रेड डिस्काउंट। तो सामने वाले ने ₹1000 पर पीस रखा हुआ था। कौन सा प्राइस? लिस्ट प्राइस। इसको
लिस्ट प्राइस कहते हैं। यानी पहली बार जब आपको प्राइस बताया जाता है किसी कमोडिटी का उसको हम बोलते हैं लिस्ट प्राइस। ठीक
है? जो उसकी प्राइस लिस्ट पे लिखा हुआ है। ऐसे समझ लो आप लिस्ट प्राइस। अच्छा जी। लिस्ट प्राइस के ऊपर सामने वाले ने आपको
डिस्काउंट दे दिया क्योंकि आप अच्छी खासी भारी मात्रा में गुड्स खरीद रहे हो। भाई ₹1000 की एक टीशर्ट है और आप 100 खरीद रहे
हो। 100 टीशर्ट्स आप खरीद रहे हो। तो ₹1 लाख का आपका बिल है। सामने वाले ने कहा ठीक है यार ₹1000 नहीं हम एक काम करते
हैं। एक टीशर्ट तुम्हारे लिए ₹900 की लगा देते हैं। तो भैया ₹900 की एक टीशर्ट है और आपको 100 टीशर्ट्स खरीदनी है। अब बताओ
जी आपका बिल कितने का बनेगा? अब आपका बिल बनेगा ₹90,000 का। बेटा ये जो ₹90,000 का प्राइस अब आपको पे करना है, इसको हम बोलते
हैं इनवॉइस प्राइस। आपके बिल के ऊपर यह चढ़ा चढ़ा दिया जाएगा प्राइस इनवॉइस प्राइस। तो आप समझ रहे हैं लिस्ट प्राइस
और इनवॉइस प्राइस में क्या फर्क होता है? लिस्ट प्राइस वो जिसके ऊपर आपको ट्रेड डिस्काउंट मिलेगा कुछ परसेंट या कुछ और
ट्रेड डिस्काउंट मिल जाने के बाद जो प्राइस आपको पे करना है फाइनली दैट इज इनवॉइस प्राइस ₹90,000। समझ में आ रही है
बात? एक कहानी के तौर पर मैं आपको ये चीज समझाना चाहता हूं। बेटा मैं एक दुकान से लाख का माल खरीदने गया। मैंने बोला कम कर
दो। उसने पुराने रिश्तों को देखते हुए या अच्छी बल्क क्वांटिटी में माल खरीद रहा हूं। इस चीज को देखते हुए उसने ₹1 लाख का
माल मुझे ₹90,000 का लगा दिया। बिना यह पूछे कि मैं पेमेंट आज दूंगा या कल दूंगा। आधी ही दूंगा या पूरी दूंगा। तो दोस्तों,
ट्रेड डिस्काउंट को पेमेंट से फर्क नहीं पड़ता। हो सकता है मैं यह ₹90,000 का मैंने मैंने ₹1 लाख का सामान ₹90,000 का
लगवा लिया, लेकिन हो सकता है ₹90,000 मैं आज नहीं दे रहा। 2 महीने बाद दूंगा। तब भी मुझे डिस्काउंट तो मिल चुका है ट्रेड
डिस्काउंट। अब ₹0000 देने में भी ना मुझे मौत आ रही है। मुझे आफत आ रही है ₹0000 पे करने में। अब मैं सामने वाले से फिर कह
रहा हूं कि देख लो कुछ ठीक-ठीक लगा लो कुछ हो जाए तो। अब वो किलस गया। अब उसने कहा बेटा अब अगर और कम पैसे देने हैं तो फिर
जेब ढीली करो आज ही। आज ही अगर आप अपना अकाउंट सेटल कर देते हो तो मैं आपको 2 3 4% डिस्काउंट और दे दूंगा। उसको हम
बोलेंगे कैश डिस्काउंट। आई होप आपको ट्रेड डिस्काउंट और कैश डिस्काउंट में फर्क समझ में आ रहा होगा। अगर नहीं भी समझ में आ
रहा है तो एक अच्छा खासा क्वेश्चन लाया हूं मैं। उसके माध्यम से मैं आपको समझाने की कोशिश करूंगा। द डिफरेंस बिटवीन ट्रेड
डिस्काउंट एंड कैश डिस्काउंट। आइए जरा देखिए ध्यान से। अभी-अभी मैंने आपको बताया कि डिस्काउंट दो तरह का होता है। एक होता
है ट्रेड डिस्काउंट, एक होता है कैश डिस्काउंट। ट्रेड डिस्काउंट देखो, हम दे भी सकते हैं। हमें मिल भी सकता है। अगर आप
माल बेच रहे हो, आप डिस्काउंट दोगे। आप खरीद रहे हो, आपको डिस्काउंट मिलेगा। सर ट्रेड डिस्काउंट बल्क क्वांटिटी में माल
खरीदने या बेचने की वजह से दिया जाता है। नंबर एक नंबर दो ट्रेड डिस्काउंट इज नॉट रिकॉर्डेड इन बुक्स ऑफ अकाउंट्स। ओ तेरी
ट्रेड डिस्काउंट को हम बुक्स में रिकॉर्ड नहीं करते। अगर ₹1 लाख की चीज थी लिस्ट प्राइस के मुताबिक तुम्हें ₹90,000 की मिल
गई तो तुम परचेज अकाउंट डेबिट करो सीधा ₹90,000 से ₹10,000 के ट्रेड डिस्काउंट को तुम रिकॉर्ड नहीं करोगे। अभी क्वेश्चंस
में देखेंगे हम इस चीज को। ठीक है? और डिस्काउंट के ऊपर क्वेश्चन डल चुके हैं तुम्हारी यूटी में। तो, यह टॉपिक कतई मिस
नहीं करना आपको। ठीक है? अगला आता है बेटा कैश डिस्काउंट। कैश डिस्काउंट आपको मिलता है किसी चीज की
टाइमली सेटलमेंट करने पर। 1 लाख का माल था। अगले ने 90,000 का लगा दिया। अब मैं कह रहा हूं कि आज ही पूरा पैसा देके
जाऊंगा। बता ₹90,000 दूं या ₹87,000 में काम चल जाएगा।" उसने कहा, ठीक है लाओ ₹87,000 दो और घर जाओ।" तो ₹3000 का और जो
मुझे डिस्काउंट मिल गया इसको हम बोलते हैं कैश डिस्काउंट। ट्रेड डिस्काउंट को बुक्स में कहीं भी रिकॉर्ड नहीं किया जाता।
पॉइंट टू बी नोटेड कैश डिस्काउंट इज टू बी रिकॉर्डेड। कैश डिस्काउंट को हम बुक्स में रिकॉर्ड करते हैं।
कैसे-कैसे रिकॉर्ड करते हैं सर? कैश डिस्काउंट को। भैया। कैश डिस्काउंट बुक्स में रिकॉर्ड किया जाता है। दो तरीके से।
दो तरीके से कैश डिस्काउंट बुक्स में रिकॉर्ड किया जाता है। या तो आप दे रहे हो किसी को डिस्काउंट तो आप इसे लिखोगे
डिस्काउंट अलाउड के नाम से और इसी नाम से आप खाता खोलोगे और अगर आपको मिल रहा है डिस्काउंट तो आप इसको लिखोगे
डिस्काउंट रिसीव्ड के नाम से। डिस्काउंट अलाउड या फिर डिस्काउंट रिसीव्ड।
इस तरह से गेम चलेगी सर। डिस्काउंट अलाउड या डिस्काउंट रिसीव्ड। ओके जी। डिस्काउंट अगर आपने अलव किया है तो आपका खर्चा है और
खर्चे बढ़ने पर डेबिट होते हैं। खर्चे बढ़ने पर डेबिट होते हैं। तुम पढ़े लिखे लोग हो। तुम्हें पता है। अच्छा डिस्काउंट
अगर आपको मिला है तो आपके लिए रेवेन्यू है और रेवेन्यू क्रेडिट में रिकॉर्ड होता है बढ़ने पर। पता होगा आपको। खत्म हो गई
डिस्काउंट की कहानी। क्वेश्चन अभी करेंगे। गुस्सा मत करो। क्वेश्चन अभी करेंगे। ये देखो डिस्काउंट की कहानी।
डिस्काउंट की कहानी है कि भैया डिस्काउंट दो तरह का होता है। ट्रेड डिस्काउंट, कैश डिस्काउंट। ट्रेड डिस्काउंट क्यों मिलता
है? क्योंकि मैं ज्यादा माल खरीद रहा हूं। हो सकता है मैं पैसा आज दूं ही ना। 2 महीने बाद दूं लेकिन माल मैं ज्यादा खरीद
रहा हूं या मेरा जानने वाला सप्लायर है। तो वो मेरी शक्ल देख के जो मुझे डिस्काउंट दे रहा है वो है ट्रेड डिस्काउंट। ट्रेड
डिस्काउंट मिल जाने के बाद आपको और डिस्काउंट चाहिए तो आपको टाइमली पेमेंट करनी पड़ेगी। या तो आज या एज़ पर द पॉलिसी
ऑफ़ द सेलर कि भाई 10 दिन के अंदर-अंदर कर देना। ऐसा कुछ टाइमली पेमेंट करने पर जो आपको डिस्काउंट मिलता है उसको हम बोलते
हैं कैश डिस्काउंट। दोस्तों ट्रेड डिस्काउंट को बुक्स में रिकॉर्ड नहीं किया जाता। कैश डिस्काउंट को बुक्स में रिकॉर्ड
किया जाता है। कैश डिस्काउंट को रिकॉर्ड करने के दो तरीके हैं आपके पास। अगर आप दे रहे हो कैश डिस्काउंट सामने वाले को तो
डिस्काउंट अलाउड के नाम से अकाउंट ओपन करना और डेबिट में ओपन करना। अगर आपको मिल रहा है कैश डिस्काउंट तो डिस्काउंट
रिसीव्ड के नाम से अकाउंट ओपन करना। और क्रेडिट में करना। साथ-साथ नोट करते हुए चलो दोस्तों। क्वेश्चन करते हैं अब। देर
नहीं करनी है। क्वेश्चन करते हैं। क्वेश्चन आपके सामने है। क्वेश्चन आपके सामने है। ये बड़ा ही
समराइज्ड क्वेश्चन मैंने आपके लिए बनाया है। ये कल ही बनाया था मैंने आपके लिए। ठीक है जी? आइए इस क्वेश्चन को जरा सॉल्व
करते हैं। जर्नलाइज़ द फॉलोइंग ट्रांजैक्शंस। जर्नल बनाना है हमें इन सभी ट्रांजैक्शंस के लिए। और जहां कहीं भी
सिंपल एंट्री से काम चल जाएगा। सिंपल कर देंगे। जरूरत पड़ी तो कंपाउंड जनरल एंट्री कर देंगे। आती तो हमें है ही है ना जी। तो
सबसे पहला परचेस्ड गुड्स ऑफ लिस्ट प्राइस 1 लाख एट 10% ट्रेड डिस्काउंट। कैसे रिकॉर्ड कीजिएगा इसको? आइए जी करते हैं
रिकॉर्ड हम। दोस्तों, अब ना मैं जर्नल का फॉर्मेट नहीं बनाऊंगा बार-बार क्योंकि उसमें बहुत टाइम
वेस्ट आपका हो जाएगा इस वीडियो का। तो सीधा फॉर्मेट को इमेजिन करके हम सीधा इसको
रिकॉर्ड कर देते हैं। गुड्स खरीद रहे हैं हम तो परचेज अकाउंट डेबिट होगा। सबको पता है। गुड्स खरीदने पर परचेजेस अकाउंट डेबिट
होता है। और गुड्स खरीदने पर आपके पास से जेब से पैसा भी जा रहा है। तो सर कैश अकाउंट क्रेडिट हो जाएगा। तो एंट्री विल
बी लाइक परचेज अकाउंट डेबिट टू कैश अकाउंट। इतने में कोई समस्या? अच्छा जी। गुड्स कितने के थे लिस्ट प्राइस
के मुताबिक? 1 लाख। आपने आपने सामने वाले को कहां थोड़ा सा कम कर दो ना। उसने 10% डिस्काउंट दे दिया आपको। आपकी भोली शक्ल
देख के उसने 10% कम कर दिए। तो सर ₹1 लाख का लिस्ट प्राइस था। 10% सामने वाले ने कम कर दिया। ₹1 लाख का 10%
₹10,000 डिस्काउंट मिल गया आपको। तो गुड्स कितने के पड़ गए? ₹0000 तो सीधा ही आप क्या करोगे कि ₹0000 रिकॉर्ड करोगे आप
अपने जर्नल एंट्री में। ₹900 ₹0000 बात खत्म तो वह जो ₹10,000 का डिस्काउंट मिला उसको
कहीं पर सेपरेटली आपको रिकॉर्ड नहीं करना बिकॉज़ वो ट्रेड डिस्काउंट है। लिस्ट प्राइस के ऊपर ट्रेड डिस्काउंट अेल करो और
ऐश करो। सॉरी नरेट कर देते हैं।
बीइंग गुड्स परचेस्ड एट 10% ट्रेड डिस्काउंट। खत्म हो गई जी बात।
खत्म। बीइंग गुड्स परचेस्ड एट 10% ट्रेड डिस्काउंट। आगे चलते हैं। सेकंड फिर गुड्स
खरीदे हमने। हमने फिर गुड्स खरीदे। लिस्ट प्राइस अभी भी 1 लाख है। 10% का ट्रेड डिस्काउंट अभी भी मिल रहा है। लेकिन हम ये
गुड्स इस बार खरीद रहे हैं प्रतीक से। नाम आ गया पार्टी का। खरीदे तो देखो गुड्स आपने पहले भी किसी पर्सन से ही होंगे।
फर्स्ट ट्रांजैक्शन में जो गुड्स खरीदे हैं वो भी किसी इंसान से ही खरीदे होंगे। तो ये प्रतीक का क्या मतलब है? सर प्रतीक
का मतलब यह है कि ट्रांजैक्शन हुई है क्रेडिट बेसिस पे। आपने गुड्स खरीदे लेकिन प्रतीक को आपने पैसा नहीं दिया तो क्या
आपको ट्रेड डिस्काउंट मिलेगा या नहीं मिलेगा? मिलेगा। ट्रेड डिस्काउंट को इस बात से कतई
फर्क नहीं पड़ता कि आप पैसा आज दोगे या कल दोगे या 6 महीने बाद दोगे। अगर लिखा है क्वेश्चन के अंदर ट्रेड डिस्काउंट मिला
है। 10% तो मिला है। प्रतीक जिससे मैं आज गुड्स खरीद रहा हूं उधार खरीद रहा हूं। फिर भी वो मेरे लिए गुड्स ₹1 लाख की जगह
₹90,000 के लगा रहा है। तो कैसे रिकॉर्ड कीजिएगा इस ट्रांजैक्शन को? बड़ा इंपॉर्टेंट है सर। सेकंड ट्रांजैक्शन में
गुड्स तो अभी भी आ रहे हैं और गुड्स जब भी आते हैं कौन सा अकाउंट डेबिट होता है? परचेजेस अकाउंट। सो परचेजेस अकाउंट डेबिट
हो जाएगा ₹90,000 से और इस बार पैसा नहीं गया मेरी जेब से। इस
बार उल्टा मेरे सर पे लायबिलिटी आ गई है। मेरे सर पे एक क्रेडिटर आ गया जिसका नाम प्रतीक है। तो मैं यहां पर प्रतीक का
अकाउंट क्रेडिट कर दूंगा टू प्रतीक या प्रतीक अकाउंट। ₹90,000 खत्म हो गई जी बात खत्म पैसा हजम
बीइंग गुड्स सोल्ड सॉरी परचेस कर रहा हूं। क्या नशे हो
गए हैं मुझे ये? बीइंग गुड्स परचेस्ड फ्रॉम प्रतीक एट 10%
ट्रेड डिस्काउंट। खत्म हो गई बात। स्टेप बाय स्टेप मैं आपको ऊपर लेके जाऊंगा डिस्काउंट के टॉपिक में। बहुत मजा आएगा
आपको। सर अगली ट्रांजैक्शन पे चलते हैं। थर्ड ट्रांजैक्शन। अब थोड़ा बेच भी लो कि खरीदते ही रहोगे। तो वी हैव सोल्ड गुड्स
नाउ जिनका लिस्ट प्राइस ₹1 लाख था। यह मैंने शगुन को बेचे हैं 10% के ट्रेड डिस्काउंट पे। मैं गुड्स बेच रहा था।
दुकान लगा के बैठा था। शगुन आती है मेरे से गुड्स खरीदने। यह पसंद करा, यह पसंद कराया। बहुत सारा
बहुत सारी चीजें उसने पसंद करी जिनका लिस्ट प्राइस हो गया टोटल ₹1 लाख। अब शगुन कहती है थोड़ा सा मुझे डिस्काउंट दे दो ना
प्लीज। क्यूटी उसने मेरी तारीफ करी मैंने उसको डिस्काउंट दे दिया 10% का। तो ₹1 लाख के गुड्स मैंने शगुन को 10% के डिस्काउंट
पर बेच दिए। ₹90,000 मैंने कहा और क्या सेवा करूं आपकी? कहती और कोई सेवा नहीं है। बस पैसे आज नहीं
दूंगी। चलेगा। मैंने कहा चलेगा। ठीक है जी। मैन विल बी मैन। तो ₹1 लाख के गुड्स 10% के डिस्काउंट पर मैंने शगुन को
बेचे। पैसे वो मुझे आज नहीं दे रही है। बाद में देगी। पर फिर भी मैंने उसको ट्रेड डिस्काउंट दिया। बिकॉज़ ट्रेड डिस्काउंट को
इस बात से फर्क नहीं पड़ता कि पैसा आज आएगा या कल आएगा। ट्रेड डिस्काउंट तो आप दे रहे हैं बिकॉज़ सामने वाला बल्क
क्वांटिटी में आपसे गुड्स खरीद रहा है या सामने वाला सुंदर है। ठीक है? चलो। इसको रिकॉर्ड करते हैं जी। थर्ड
ट्रांजैक्शन को। थर्ड ट्रांजैक्शन के अंदर पैसा आ रहा है? नहीं। पर एक और एसेट आ रही है आपके पास जिसका नाम है शगुन डेटर। तो
शगुन का अकाउंट आप यहां पर डेबिट कर देंगे। और दोस्तों गुड्स आप बेच रहे हो तो आपको
पता होना चाहिए कि गुड्स बेचने पर क्रेडिट कौन सा अकाउंट होता है? सेल्स अकाउंट। कितने रुपए से? ₹90,000 से। तो यह बस
परचेस का जस्ट रिवर्स हो गया सेल। ठीक है? अच्छा यही अगर गुड्स मैंने शगुन को बेचे और अगर शगुन ने मुझे तुरंत पैसे
भी दे दिए होते तब भी दोस्तों सेल्स अकाउंट तो क्रेडिट ही होता। डेबिट में शगुन की जगह कैश या बैंक अकाउंट का नाम आ
जाता। ठीक है? आप नरेट कर सकते हैं। बीइंग गुड्स सोल्ड टू शगुन एट 10% ट्रेड डिस्काउंट ऑन क्रेडिट। मैं लिख नहीं रहा
हूं नरेशन। टाइम लगता है उसमें बहुत। आगे चलते हैं दोस्तों। आगे चलते हैं। फोर्थ ट्रांजैक्शन को
रिकॉर्ड करते हैं। फोर्थ ट्रांजैक्शन बेटा सोल्ड गुड्स ऑफ ₹1 लाख टू राधा एट 10% ट्रेड डिस्काउंट हाफ
ऑफ द पेमेंट रिसीव्ड इन कैश। राधा अच्छी बच्ची है। राधा को मैंने ₹1 लाख के गुड्स 10% के ट्रेड डिस्काउंट पर बेचे। यानी ₹1
लाख का माल ₹90,000 में बेचा। ₹90,000 में से राधा ने मुझे आधी पेमेंट दे भी दी तुरंत। ठीक है? बाकी की आधी नहीं दी। बाद
में दे देगी वो। तो जरा रिकॉर्ड करते हैं इसको। मुझे नहीं पता डेबिट क्या होगा लेकिन मुझे कंफर्म पता है कि क्रेडिट तो
बॉस सेल्स अकाउंट ही होगा। क्योंकि भैया ने बताया था कि गुड्स खरीदने पर परचेजेस अकाउंट डेबिट
गुड्स बेचने पर सेल्स अकाउंट क्रेडिट। तो सेल्स अकाउंट क्रेडिट हो जाएगा ₹90,000 से।
अब इसमें से कुछ पेमेंट आपकी जेब में आ गई है तो जो पेमेंट आ गई है वह कैश अकाउंट में डेबिट हो जाएगी और जो पेमेंट लेनी है
वो राधा के अकाउंट में डेबिट हो जाएगी। खत्म हो गई बात। अच्छा राधा ने कैश ही दिया था ना? चेक तो नहीं दिया था। हां जी
कैश ही दिया था। सो ₹45,000 आपके पास आज आ गए और ₹45,000 आपके पास बाद में आ जाएंगे। एक कंपाउंड एंट्री बन गई दोस्तों इस
क्वेश्चन के अंदर। ठीक है? अब अगर मुझे दो टुकड़ों में इसको रिकॉर्ड करना है तो मैं ऐसे भी कर सकता हूं कैश अकाउंट डेबिट टू
सेल्स अकाउंट 45 45 देन राधा अकाउंट डेबिट टू सेल्स अकाउंट 45 45 पर क्यों इतनी मेहनत करनी है आपको फोर्थ ट्रांजैक्शन
कंप्लीट हो गई दोस्तों फिफ्थ ट्रांजैक्शन फिफ्थ ट्रांजैक्शन बड़ी इंपॉर्टेंट है
फिफ्थ ट्रांजैक्शन में गुड्स खरीद रहे हैं हम वापस से इस बार जो हम गुड्स खरीद रहे हैं उनका लिस्ट प्राइस है ₹150
यह गुड्स हम तिवारी जी से खरीद रहे क्रेडिट बेसिस पे उधार क्रेडिट बेसिस पर खरीद रहे हैं हम यह
गुड्स तिवारी से और मुझे मिल रहा है 2% ट्रेड डिस्काउंट और मुझे मिलेगा 3% का कैश डिस्काउंट
आराम से पहले तो याद रखना सबसे पहले आपको ट्रेड डिस्काउंट अप्लाई करना होता है बाद में कैश डिस्काउंट के बारे में सोचना होता
है दोस्तों ₹150000 गुड्स का लिस्ट प्राइस था ₹150 लिस्ट प्राइस के ऊपर आपको ट्रेड
डिस्काउंट मिलेगा। ट्रेड डिस्काउंट विल बी ₹150000 का 2% यानी कि ₹3000
यानी कि आपका इनवॉइस प्राइस बनेगा ₹150000 माइनस द ट्रेड डिस्काउंट ऑफ ₹3000 यानी कि आपको फाइनल पेमेंट देनी है ₹147000
पर यह ₹147000 आप दे रहे हो क्या आज? अगर आज देने लगो अगर आज जेब ढीली करो तो मैं ₹147000 से भी कम करवा दूंगा आपका बिल
अमाउंट लेकिन क्या आप आज दे रहे हो? नहीं। सो यू विल नॉट बी एलिजिबल फॉर द कैश डिस्काउंट इन दिस क्वेश्चन। हाउ एवर कैश
डिस्काउंट इज़ गिवन इन दिस क्वेश्चन बट वी विल नॉट बी एलिजिबल टू अेल दैट कैश डिस्काउंट जस्ट बिकॉज़ वी आर नॉट मेकिंग द
पेमेंट फ्रॉम द ऑन द डेट ऑफ़ परचेस इटसेल्फ। ओके? तो यहां पर हमने गुड्स खरीदे ₹1.5 लाख के।
2% रेट डिस्काउंट तो हमें मिल जाएगा लेकिन कैश डिस्काउंट नहीं मिलेगा। कारण यहां छुपा हुआ है। क्रेडिट बेसिस पे आप गुड्स
खरीद रहे हो। कैश डिस्काउंट नहीं मिलेगा। तो बस गुड्स खरीदो। ₹1,47,000 के और ऐश करो। गुड्स खरीदने की एंट्री बता दो जल्दी
से। मैं तो भूल गया क्योंकि मैं तो भूल गया। गुड्स खरीदने की एंट्री में कौन सा अकाउंट डेबिट होता है? परचेस अकाउंट
₹1.5 लाख रिकॉर्ड करना है? नहीं 147 परचेस अकाउंट में हमेशा इनवॉइस प्राइस जाता है। लिस्ट प्राइस नहीं जाता कभी भी हमेशा
इनवॉइस प्राइस जाता है। अच्छा पेमेंट कर दी होती मैंने तो कैश अकाउंट क्रेडिट हो जाता। बट चकि पेमेंट नहीं करी है तो
तिवारी क्रेडिट हो जाएगा। ₹147000 तो ये इस क्वेश्चन के अंदर नया था। ठीक
है? ये इंपॉर्टेंट था बेटा कि कैश डिस्काउंट नहीं मिलेगा आपको इस क्वेश्चन के अंदर। आगे चलते हैं बेटा। सिक्स्थ में
देखते हैं जरा कैश डिस्काउंट मिलेगा कि नहीं मिलेगा। सिक्स्थ लिखा है परचेस्ड गुड्स लिस्ट प्राइस ₹1 लाख फ्रॉम तिवारी
अगेन। फिर से तिवारी से गुड्स खरीद रहे हैं हम ₹1 लाख के। और इस बार हमें 10% का ट्रेड डिस्काउंट मिल रहा है और 5% का कैश
डिस्काउंट रखा हुआ है तिवारी जी ने इस बार। पिछली बार तिवारी जी ने कैश डिस्काउंट रखा था 3% जो कि हमें मिल नहीं
पाया था। इस बार उन्होंने कैश डिस्काउंट रखा है 5%। मैं चाहता हूं अबकी बार कैश डिस्काउंट मेरे हाथ से ना जाए। मैं लालची
हूं। सब चाहिए मुझे। ट्रेड डिस्काउंट भी कैश डिस्काउंट भी। तो कैश डिस्काउंट को अवेल करने के लिए फुल
अमाउंट पेड एट द टाइम ऑफ परचेस इटसेल्फ। मैंने कहा तिवारी जी परचेस के वक्त ही मैं सारे पैसे चुका दूंगा। बताओ डिस्काउंट
कितना दोगे आप? तो कैसे इस क्वेश्चन में रिकॉर्डिंग होगी बेटा? ध्यान से सुनना। बड़ा इंपॉर्टेंट है। सिक्स्थ ट्रांजैक्शन
वेरी वेरी इंपॉर्टेंट। सबसे पहले क्या करना है सर? बेटा सबसे पहले आपको ट्रेड डिस्काउंट अप्लाई करके
इनवॉइस प्राइस पे आ जाना है। सबसे पहले गुड्स कितने के थे? लिस्ट प्राइस के मुताबिक 1 लाख।
1 लाख के ऊपर आपको 10% का ट्रेड डिस्काउंट मिल गया। 1 लाख का 10% यानी 10,000 यानी इनवॉइस प्राइस कितना हो गया? 90,000 बेटा
आप ₹90,000 रिकॉर्ड कर दो फटाफट से। गुड्स खरीद रहे हो ना? तो परचेजेस अकाउंट को आप डेबिट कर दो ₹90,000 से। क्या प्रॉब्लम
है? तो सर क्या मुझे ₹90,000 देने होंगे? कैश डिस्काउंट का क्या? मिलेगा कैश डिस्काउंट?
मिलेगा। पेमेंट नहीं जाएगी तुम्हारी जेब से ₹0000 उसकी टेंशन मत लो। पेमेंट तुम्हारी जेब से और कम करवाऊंगा मैं
डिस्काउंट दिलवाऊंगा लेकिन परचेस अकाउंट में रिकॉर्ड ₹0000 ही होगा। परचेस अकाउंट या सेल्स अकाउंट में हमेशा इनवॉइस प्राइस
ही रिकॉर्ड होता है। चाहे पेमेंट कम हो या ज्यादा हो। ज्यादा तो नहीं होगी। ऑफ कोर्स चाहे पेमेंट कम हो या उतनी ही हो। पर
परचेस अकाउंट और सेल्स अकाउंट में कौन सा प्राइस रिकॉर्ड होता है? इनवॉइस प्राइस। रिकॉर्ड कर दिया मैंने ₹90,000।
अब मुझे देखना है इस क्वेश्चन के अंदर मुझे कैश डिस्काउंट कितना मिलेगा। तो मैं आपको बता दूं क्या है? जिस प्रकार ट्रेड
डिस्काउंट आप अप्लाई करते हो लिस्ट प्राइस पे कैश डिस्काउंट आपको अप्लाई करना है। उस पेमेंट के ऊपर जो पेमेंट आप आज निपटाने जा
रहे हो आप क्योंकि ₹90,000 की पेमेंट निपटाने जा रहे हो। आप फुल अमाउंट पे करने जा रहे हो ना बेटा
इनवॉइस प्राइस पे। तो ₹90,000 के ऊपर आपको मिलेगा कैश डिस्काउंट। यानी आपको सबसे पहले मिलता है ट्रेड डिस्काउंट। ट्रेड
डिस्काउंट मिल जाने के बाद जो अमाउंट बचता है उस बचे हुए अमाउंट पे आपको मिलता है कैश डिस्काउंट। तो ₹0000 के ऊपर आपको 5%
का मिल जाएगा कैश डिस्काउंट। 9 * 5 = 45 4500 का आपको मिल गया कैश डिस्काउंट। मुबारका जी मुबारका
यानी कि पेमेंट आपकी जेब से जो जाएगी वो जाएगी ₹0000 - 4500 टोटल ₹14500 का फायदा हो गया हमें पहले तो ₹1 लाख के गुड्स थे
जो ₹10 कम करवा लिए हमने अब ₹90 भी हमसे नहीं दिए जा रहे ₹900 में भी हम कह रहे हैं भ पैसा देंगे पैसा अमाउंट कम कर दो तो
तिवारी जी ने 5% और कम कर दिया तो अब यह 5% ₹0000 पे अप्लाई होगा ठीक है जी 4500 कम हो गए। तो बेटा 4500 अगर कम हो गए तो
आपकी जेब से कैश जाएगा। कैश क्रेडिट होगा। कितना कैश पे करेंगे हम? 85500। समझ रहे हैं आप? अब एंट्री तो मैच नहीं
हुई। डेबिट में ज्यादा अमाउंट है। क्रेडिट में कम अमाउंट है। वो इसलिए क्योंकि तुमने डिस्काउंट को रिकॉर्ड नहीं करा। सर आपने
कहा था डिस्काउंट को रिकॉर्ड नहीं करूंगा। थप्पड़ डिस्काउंट रिकॉर्ड कौन सा वाला नहीं करना? ट्रेड डिस्काउंट। कैश
डिस्काउंट तो रिकॉर्ड करना है दोस्तों। ये देखो। कैश डिस्काउंट तो टू बी रिकॉर्डेड है ना
बेटा। अब सोचो इस क्वेश्चन के अंदर मिला है या हमने दिया है। मिला है हमें कैश डिस्काउंट। तो डिस्काउंट रिसीव्ड के नाम
से रिकॉर्ड होगा। क्रेडिट में रिकॉर्ड होगा। ठीक है जी। डिस्काउंट रिसीव्ड के नाम से यह रिकॉर्ड होगा और वह भी क्रेडिट
में। इधर मुझे रिकॉर्ड करना है टू डिस्काउंट रिसीव्ड।
कितने रुपए? 4500 खत्म हो गया क्वेश्चन। तो वो जो ₹10,000 का ट्रेड डिस्काउंट मुझे मिला है वो मैंने
कहीं पर रिकॉर्ड नहीं करा लेकिन कैश डिस्काउंट जो मिला है ₹4,500 वो तो मुझे रिकॉर्ड करना पड़ेगा दोस्तों। नरेट कैसे
करेंगे? बीइंग गुड्स परचेस्ड फ्रॉम तिवारी।
चाहो तो यहीं पर भी खत्म कर सकते हो नरेशन को। इतना लोड नहीं लेना। बट आगे लिख भी सकते हो एट 10% टीडी एंड 5% CD
खत्म हो गई बात। अब मैं चाहता हूं प्यारे बच्चों एक क्वेश्चन आप मेरे लिए ट्राई करो।
सेवंथ परचेस्ड गुड्स लिस्ट प्राइस ₹1 लाख फ्रॉम तिवारी। अगेन मैंने ना अंडरस्टैंडिंग
क्लियर रखने के लिए सेम फैक्ट्स डाले हैं। तिवारी ही डाला है इस बार भी। इस बार भी गुड्स ₹1 लाख के खरीद रहे हैं हम। इस बार
भी ट्रेड डिस्काउंट 10% ही है। बट कैश डिस्काउंट इस बार वापस 3% कर दिया तिवारी ने। और इस बार हम पूरी पेमेंट नहीं दे रहे
तिवारी को। हम तिवारी को हाफ पेमेंट दे रहे हैं। हाफ ऑफ द पेमेंट मेड एंड दैट टू बाय चेक।
₹1 लाख के गुड्स। हमने कहा कम कर दे भाई। उसने ₹90,000 के लगा दिए। पर हम ₹90,000 फुल अमाउंट आज देने को
तैयार नहीं है हम। हमने उसको बोला यार आज हम आधा ही दे पाएंगे तुझे। बड़ा इंटरेस्टिंग है। आइए जरा ध्यान से देखते
हैं सेवंथ ट्रांजैक्शन कैसे रिकॉर्ड होने वाली है। सबसे पहले ट्रेड डिस्काउंट माइनस करो।
इनवॉइस प्राइस पे आ गए। अब इनवॉइस प्राइस हो गया ₹90,000 तो तुरंत जाके परचेस अकाउंट में डाल दो ₹9,000। जैसे ही ट्रेड
डिस्काउंट माइनस कर दो ना आप। जैसे ही आप ट्रेड डिस्काउंट माइनस करो और इनवॉइस प्राइस पर आ जाओ तो इनवॉइस प्राइस को
तुरंत जाकर के डाल दिया करो परचेज अकाउंट में या सेल्स अकाउंट में व्हाटएवर द केस मे बी। तो यहां पर आपको परचेजेस अकाउंट को
डेबिट कर देना है तुरंत। परचेस अकाउंट को डेबिट कर देना है आपको तुरंत। कितने रुपए से दोस्तों? ₹90,000
से। ईजी हो गया। अच्छा। ₹90,000 आपने देने हैं तिवारी को। बट उसमें क्या लिखा था कि आधा
ही अमाउंट हम आज देंगे और वो भी चेक से देंगे। तो मतलब बाकी का आधा में दोगे ना तो ₹900 में से आधा और आधा यानी 45
₹45,000 हो गया। ₹90,000 में से ₹45,000 मैं आज दूंगा और बाकी के ₹45,000 बाद में दूंगा। यानी बाकी के जो ₹45,000 हैं उसके
हिसाब से तिवारी मेरा क्रेडिटर बन जाएगा। तो ऐसे समझ लो ना इस क्वेश्चन के अंदर आधी हो गई कैश परचेस और आधी हो गई क्रेडिट
परचेस। तो पहले क्रेडिट वाले पोर्शन को रिकॉर्ड कर लो। यानी तिवारी आपका क्रेडिटर बन जाएगा।
तिवारी के अकाउंट में मैंने डाल दिया ₹45,000। बात समझ में आ गई बेटा?
ठीक है? आराम से समझना। देखो लिस्ट प्राइस था ₹1 लाख। ₹1 लाख का 10% यानी ₹10,000 माइनस हो गया।
कितना बचा? ₹90,000। अब ₹0000 में से आपने कहा आधा हम बाद में देंगे यानी 45000
और आधा आप आज दोगे यानी 45000 तो ये जो आप आज दे रहे हो आधा वो 45 है ना तो 45 के ऊपर आपको मिलेगा कैश डिस्काउंट।
पॉइंट टू बी नोटेड कि कैश डिस्काउंट सिर्फ उतनी पेमेंट के अनुसार मिलता है जितनी पेमेंट आप आज की डेट में कर रहे हो। अगर
आज आप 80% पेमेंट करोगे तो 80% पेमेंट के ऊपर कैश डिस्काउंट मिलेगा। 50% करोगे तो 50% के ऊपर मिलेगा। और भी
क्वेश्चंस आएंगे इस तरह के आगे। तो कैश डिस्काउंट आपको कितना मिलेगा सर? आपको कैश डिस्काउंट मिलेगा इस 45,000 की
पेमेंट के ऊपर कितना परसेंट था? 3% 3% का आपको कैश डिस्काउंट मिल जाएगा। तो कैश डिस्काउंट का अमाउंट कितना होगा इस
क्वेश्चन के अंदर? ₹1350 बेटा ठीक है जी ₹1350 आपको कैश डिस्काउंट
मिलेगा इस क्वेश्चन के अंदर आया मजा तो मतलब कि 90 में से 45 तो मैं बाद में दूंगा मैंने तिवारी को बोल दिया और जो 45
मैं आज देने जा रहा हूं वह भी मेरे को पूरे ₹45000 नहीं देने पड़ेंगे उसमें भी मुझे डिस्काउंट मिल जाएगा ₹1350 का तो आइए
इसको रिकॉर्ड करते हैं जरा जो पेमेंट आप आज दे रहे हो वह कैश अकाउंट में क्रेडिट हो जाएगी और जो आपको
डिस्काउंट मिला अगेन आप उसे लिखोगे डिस्काउंट रिसीव्ड के नाम से। खत्म हो गई बात। 90 में से 45 तो मैं बाद
में ही दूंगा। डिस्काउंट मुझे मिल गया 1350 तो अब पेमेंट कितनी दोगे? जल्दी से बता दो। पेमेंट आपको देनी पड़ेगी
₹45000 - ₹1350 ठीक है जी ये हो जाएगा अ 43650
ठीक है जी 43650 क्वेश्चन कंप्लीट हो गया दोस्तों यहां पर ये क्वेश्चन पूरा कंप्लीट हो गया अच्छा एक
चीज और बेटा ये जो पेमेंट है ये पेमेंट ना हमने कैश में नहीं दी चेक में दी तो यहां पर आपको एक छोटी सी चीज का ध्यान रखना है
कि आपको यहां कैश का नाम नहीं लेना। आपको कैश की जगह बैंक अकाउंट लिखना है यहां पर टू
बैंक अकाउंट। अच्छा ये चीज बड़ी इंटरेस्टिंग है कि डिस्काउंट का नाम तो कैश डिस्काउंट है। लेकिन कैश डिस्काउंट का
मतलब यह नहीं कि कतई कैश ही दोगे। अगर आप यूपीआई से पेमेंट कर रहे हो तो वो तो और बेटर है। तो क्या कैश डिस्काउंट नहीं
मिलेगा? तो नाम उसका कैश डिस्काउंट है। लेकिन पेमेंट आप किसी भी मोड में कर सकते हो। आप कैश भी दे सकते हो, चेक भी दे सकते
हो। आप यूपीआई से भी पेमेंट कर सकते हो। Paytm, Google P, PhonePe कैसे भी कर सकते हो। ठीक है जी? आई होप आपको ये सब
ट्रांजैक्शंस यहां तक क्लियर हो गई होंगी। सात की सात ट्रांजैक्शंस। आगे चलते हैं।
सात ट्रांजैक्शंस पे ये क्वेश्चन खत्म नहीं हुआ है। ये क्वेश्चन अभी आगे भी है। आठवीं ट्रांजैक्शन भी है, नवीं भी है और
10वीं भी है। ठीक है जी? एट्थ ट्रांजैक्शन में लिखा है अगेन वी हैव सोल्ड गुड्स लिस्ट प्राइस 1 लाख टू राजू एट 10% ट्रेड
डिस्काउंट 5% कैश डिस्काउंट देखो अब मैं खरीद रहा था अभी मैं बेच रहा हूं मैंने ये गुड्स जो कि
₹1 लाख के हैं ये मैंने राजू को बेचे 10% ट्रेड डिस्काउंट मैंने देना है राजू को और 5% का कैश डिस्काउंट भी मैं दे दूंगा पर
ट्रेड डिस्काउंट तो चलो मैंने दे दिया खुशी से या वो ज्यादा माल खरीद रहा था मैंने दे दिया ट्रेड डिस्काउंट लेकिन कैश
कैश डिस्काउंट मैं दूंगा इस चीज पे डिपेंड करते हुए कि वो मुझे पेमेंट आज दे रहा है कि नहीं दे रहा। दे रहा है तो कितनी दे
रहा है? तो भैया फुल अमाउंट रिसीव्ड एट द टाइम ऑफ़ परचेस इटसेल्फ। राजू ने मुझे परचेस के वक्त ही पूरा पैसा दे दिया। फुल
अमाउंट दे दिया। तो कैसे रिकॉर्ड होगा? ध्यान से देखिए। यहीं पर रिकॉर्ड करने की कोशिश करते हैं इसको।
सर देखिए पैसा आ रहा है आपके पास। तो कैश अकाउंट या फिर बैंक अकाउंट यह तो हो जाएगा डेबिट।
पर आप खुद सोचो क्या राजू आपको 1 लाख देगा? नो क्योंकि 10% तो आपने पहले ही कम कर दिया। कितना हो गया? ₹0000 पर क्या
राजू आपको ₹9,000 भी देगा? नहीं क्योंकि 5% और उसको फायदा मिल रहा तो आराम से कैसे करना है? पहले कैश डिस्काउंट को गोली
मारनी है। पहले सिर्फ ट्रेड डिस्काउंट को डिडक्ट करना है और बताना है कितना अमाउंट आ रहा है। ₹1 लाख में से 10% माइनस करो।
₹90,000 बचा। ₹90,000 की फिगर आपको परचेस या सेल अकाउंट में डाल देनी है। ट्रेड डिस्काउंट माइनस करते के साथ जो अमाउंट आए
वो परचेस या सेल अकाउंट में डाल दो तुरंत। सो यहां पर सेल्स अकाउंट में
सेल्स अकाउंट में आपको यह फिगर डाल देनी है। तुरंत ₹90,000 ₹1 लाख को तो देखो भूल ही जाना है। अच्छा पर क्या हमें कैश रिसीव
₹90,000 भी होगा? नहीं। क्योंकि आपने कैश डिस्काउंट भी दिया सामने वाले को। जैसे ही सामने वाले ने कहा ना आज मैं फुल फुल
अमाउंट पे करके जाऊंगा। तो आपने कहा अरे वाह! तो तू 90 भी मत दे। तू एक काम कर 5% और डिस्काउंट ले ले। तो आपने डिस्काउंट
दिया इस बार। 5% कौन सा डिस्काउंट है वो? कैश डिस्काउंट। रिकॉर्ड करते हैं इसको। इसको रिकॉर्ड करते हैं डेबिट में। किस नाम
से? डिस्काउंट अलाउड। डिस्काउंट अलाउड के नाम से हम इसको रिकॉर्ड करते हैं सर डेबिट में। पर यह 1
लाख के ऊपर नहीं मिलेगा 5% यह ₹0000 के ऊपर मिलेगा तो 9 * 5 45 ₹4500 का आपको डिस्काउंट मिल गया मतलब
आपने दे दिया तो सामने वाला बंदा जो आपको पेमेंट देगा आज की डेट में वो देगा ₹90 - ₹4500 यानी ₹8500
खत्म हो गया जी ₹8500 की पेमेंट आपको आज की डेट में रिसीव होगी।
होगी। अब 2 घंटे के आसपास हो गए हैं इस वीडियो को।
बीच-बीच में ये आपका ब्रेन आपको सिग्नल देगा कि बस यार 2 घंटे देख ली तूने ये वीडियो। तो ठीक है वीडियो पॉज करो लेकिन
प्रैक्टिस करो इन सब क्वेश्चंस की। थोड़ी देर बाद फिर से वीडियो को रिज्यूम कर सकते हो आप।
लेकिन बंद मत करना इस वीडियो को देखना बिफोर कंप्लीटिंग द वीडियो टिल द एंड। ऐसे मत करना कि डिस्काउंट तक पढ़ तो लिया।
अब आगे क्यों पढ़ना है? ऐसे मत करना बेटा। बहुत इंपॉर्टेंट है। वादा करा है पूरा चैप्टर पढ़ा के हटूंगा तो पूरा चैप्टर पढ़ा
के ही हटूंगा। ठीक है? ये थी जी एट्थ ट्रांजैक्शन। अब नाइंथ
ट्रांजैक्शन बड़ी इंपॉर्टेंट है। नाइंथ में मुझे आप लोगों की सहायता चाहिए। आप लोग को पूरा फोकस अपना इधर रखना है। नाइंथ
ट्रांजैक्शन के अंदर। सोल्ड गुड्स लिस्ट प्राइस 1 लाख टू शकी एट 10% ट्रेड डिस्काउंट 3% कैश डिस्काउंट
बट ओनली 1/3 ऑफ़ द पेमेंट इज़ रिसीव्ड। शेंगकी मुझे पैसा दे रहा है लेकिन सिर्फ 1/3 पैसा दे रहा है आज। तो मैं फिर कैश
डिस्काउंट भी 1/3 के हिसाब से दूंगा उसको। ट्रेड डिस्काउंट तो फुल पेमेंट पे मिलता है क्योंकि ट्रेड डिस्काउंट को तो इस बात
से फर्क ही नहीं पड़ता ना कि पेमेंट पूरी हो रही है या आधी हो रही है। तो देखो कैसे रिकॉर्ड होगा यह नाइंथ ट्रांजैक्शन।
आसान तरीका पता है ना क्या है कि सबसे पहले लिस्ट प्राइस को इनवॉइस प्राइस पर ले आओ। ₹1 लाख का लिस्ट प्राइस था 10% ट्रेड
डिस्काउंट। जैसे ही आपने दिया हमने दिया इस बार डिस्काउंट तो हमने सामने वाले के लिए ₹90,000 लगा दिए गुड्स। तो तुरंत जाके
₹90,000 लिख दो। किसमें? सेल्स अकाउंट में। परचेस होता तो परचेज़ अकाउंट। तो नाइंथ ट्रांजैक्शन में सबसे पहले मैंने
जाकर के सेल्स अकाउंट में फिगर ही लिख दी। कितने रुपए की फिगर लिख दी? जी ₹90,000 की फिगर लिख दी।
अच्छा जी। अब ₹90,000 में से वो पर्सन ना मुझे 1/3 पे कर रहा है और बाकी का अमाउंट अभी आज वो मुझे पे कर ही नहीं रहा है। ठीक
है? इसको मैं थोड़ा सा नीचे कर देता हूं। ठीक है? 90,000 में से वो मुझे आज सिर्फ 1/3 पे करेगा। पहले इस बारे में दिमाग लगा
लो। बेटा 90 आपने गुड्स की कीमत लगा दी शेंकी के लिए। 90000 का 1/3 कितना होता है? 1/3 1/3 कैसे
निकालते हैं? ₹0000 * 1/3 सिंपल कितना आ जाएगा? 30,000 यानी कि वो मुझे आज सिर्फ 30,000 पे करना चाहता है। तो समझ जाओ बाकी
का 60,000 वो आज नहीं पे करेगा बाद में पे करेगा। सो 1/3 अमाउंट आपको रिसीव हो रहा है। 2/3 अमाउंट आपको बाद में रिसीव होगा।
तो यह ₹0000 पे तो कोई बात ही नहीं करना चाहता। शेंगकी शेंकी ₹600 बाद में देगा ना तो शेंकी मेरा डेटर बन जाएगा ₹60,000 से।
तो आओ जरा शेंगकी को डेबिट कर दो। शेंगकी का अकाउंट डेबिट हो जाएगा ₹0000 से।
बचे 300 300 वह मुझे आज देना चाहता है पर मैं उससे 300 पूरे नहीं लूंगा मैं कहूंगा डिस्काउंट ले तू टेंशन मत ले क्योंकि आपने
उसे कैश डिस्काउंट देना है कितना परसेंट जी 3% समझ रहे हो पर ये 3% का कैश डिस्काउंट जो
आप शेंग को दोगे वो किस फिगर पे दोगे ₹1 लाख पे दोगे ₹90 पे दोगे ₹0000 पे दोगे या ₹0000 पे दोगे
3% का जो आपने ने कैश डिस्काउंट देना है वो किस अमाउंट पे दोगे? मैंने बताया था कैश डिस्काउंट सिर्फ उस फिगर के ऊपर दिया
जाता है जो फिगर आज की डेट में रिसीव होने वाली है या पे होने वाली है। तो चकि शेंगकी ₹00 देने वाला है आज की डेट में
मुझे तो मैं कैश डिस्काउंट 3% ₹00 पे दूंगा। ₹00 पे 3% यानी कि ₹900
समझ रहे हैं आप? ₹900 मैंने डिस्काउंट दे दिया। अच्छा ये जो ₹900 का डिस्काउंट है इसे रिकॉर्ड भी किया जाता है। किस नाम से?
जी डिस्काउंट अलाउड। डिस्काउंट अलाउड के नाम से इसको रिकॉर्ड किया जाता है। ₹900
तो समझ जाओ शेंगकी जो 90 में ले गया मेरे से चीज ₹1 लाख की थी। 90 की करा गया। ₹90,000 की सेल हो गई। 90 में से 60 तो वह
बाद में ही देगा। आज 30 देने वाला था। 30 में से मैंने ₹900 कम कर दिए। तो ₹29,100 मुझे रिसीव होंगे आज।
तो ये ₹29,100 या तो मेरे कैश अकाउंट में आ जाएंगे या बैंक अकाउंट में आ जाएंगे। खत्म हो गई जी बात।
और एक बात बोलूं इसी के साथ डिस्काउंट का टॉपिक खत्म। उड़ा दिया हमने डिस्काउंट का टॉपिक पूरा। ठीक है? खत्म हो गया
डिस्काउंट का टॉपिक। देख सकते हैं आप आज के जो हमारे गोल्स थे। यह हमारे आज के गोल्स थे।
तो, तीन गोल्स हमने अचीव कर लिए दोस्तों, मुबारक हो। हमने डेबिट और क्रेडिट के रूल्स के बारे में पढ़ लिया। हमने सिंपल
और कंपाउंड जर्नल एंट्रीज के बारे में पढ़ लिया। हमने ट्रेड डिस्काउंट, कैश डिस्काउंट के बारे में पढ़ लिया। तो, अब
क्या पढ़ने वाले हैं हम? अब हम पढ़ने वाले हैं कुछ अफलातून ट्रांजैक्शंस। अफलातून ट्रांजैक्शंस क्या होती हैं?
जिसमें कुछ इंपॉर्टेंट ट्रांजैक्शंस आती हैं यार। बैंकिंग ट्रांजैक्शंस, ट्रांजैक्शंस रिलेटेड टू चेक ट्रांजैक्शंस
रिलेटिंग टू प्रीपेड एक्सपेंस, अनएक्पायर्ड एक्सपेंस और वी कैन से अक्रूड इनकम, आउटस्टैंडिंग एक्सपेंस, इनकम
रिसीव्ड इन एडवांस, ड्रॉइंग्स वगैरह-वगैरह। ये सब अब हमें पढ़ना है। तो मैं क्वेश्चंस
की हेल्प से आपको ये सब चीजें पढ़ाने की कोशिश करूंगा। आइए जी आगे चलते हैं। जी दोस्तों ये है आपका अगला क्वेश्चन जो
हमें करना है। एक बार इस क्वेश्चन की जरा थरो रीडिंग कर लीजिए आप। बढ़िया से जरा रीडिंग कर लो इस क्वेश्चन की।
जनरलाइज़ द फॉलोइंग ट्रांजैक्शंस। दोस्तों, यह जो क्वेश्चन है जिसमें लिखा है जनरलाइज द फॉलोइंग ट्रांजैक्शंस इन द
बुक्स ऑफ चित्रंजन ऑटोमोबाइल्स। इस बार हमारी फर्म का नाम है चित्रंजन ऑटोमोबाइल्स। ये कुछ ट्रांजैक्शंस हैं
हमारे सामने और इन ट्रांजैक्शंस के माध्यम से कुछ नया टॉपिक मैं आपको पढ़ाने जा रहा हूं। राइट? देखते हैं जरा। ये सब सीरियल
वाइज़ ट्रांजैक्शन सेट करके लाया हूं मैं आपके लिए ताकि दिमाग में कुछ चीजें आकर के बैठ जाएं आपके। तो 2025 में मई 3 5 7 10
15 17 एंड 18 कुछ ट्रांजैक्शंस हैं। गुड्स बेचे ये वो सो आइए जी करते हैं। 2025 ओह सॉरी सबसे ऊपर तो हमें लिखना होता
है इन द बुक्स ऑफ चित्रंजन ऑटोमोबाइल्स। और फिर हमें लिखना है कौन सी किताब हम बना
रहे हैं। तो जी जर्नल बना रहे हैं। फिर हम पूरा फॉर्मेट बनाते हैं जो कि मैं नहीं बनाने वाला हूं। ऑफ कोर्स। ठीक है?
जी। सो 2025 मई की 3 तारीख को मेरी सबसे पहली ट्रांजैक्शन हुई है। इफ आई एम नॉट रोंग। यस। सोल्ड गुड्स टू रवि। ₹1 लाख।
कितना आसान है। ₹1 लाख के गुड्स ही तो बेचे हैं रवि को। कोई डिस्काउंट नहीं है। क्योंकि कोई पेमेंट भी नहीं है। ना ट्रेड
डिस्काउंट है ना कैश डिस्काउंट, ना पेमेंट है। गुड्स रवि को बेच रहे हैं। मतलब सम जाहिर है उधर ही बेचे होंगे। रविज़ अकाउंट
डेबिट टू सेल्स अकाउंट। रविज़ अकाउंट डेबिट टू सेल्स अकाउंट। ₹1 लाख के गुड्स हमने बेचे।
नेक्स्ट फटाफट से। उसके बाद 5 तारीख को रिसीव्ड फ्रॉम रवि,000 इन फुल सेटलमेंट। ओह तेरी।
₹1 लाख के गुड्स मैंने रवि को बेचे थे। लेकिन 5 तारीख को जब रवि पैसे देने आया तो कहता यार 97000 दे दूं क्या? हमने कहा दे
दे 3000 बाद में दे दियो। कहता नहीं नहीं आप समझे नहीं मेरी बात। 97000 में ही केस खत्म करो ना। पुलिस सेटल कर दो ना मेरा
अकाउंट। मुझे फ्री कर दो ना। 97,000 में। 3,000 बचे हैं मेरे पास। मैं थोड़ा सा घूम फिर के आ जाऊंगा। गर्लफ्रेंड के साथ
मूवी-वूवी देख के आ जाऊंगा। ओके। तो बेटा जब भी फुल सेटलमेंट शब्द आ जाए तो आप समझ जाइए
कि अकाउंट क्लोज हो गया है। मतलब मैंने इनडायरेक्टली रवि को डिस्काउंट ही दे दिया ₹3000 का। अभी भी हम इसको कैश डिस्काउंट
ही बोलेंगे बेटा। आइए जरा देखते हैं कैसे यह रिकॉर्ड होगा। सो 5 तारीख डेट डालकर
5 तारीख की डेट डालकर सबसे पहले तो आपको पेमेंट पकड़ लेनी है। सबसे पहले आपको पेमेंट पकड़ लेनी है।
पेमेंट आ रही है कैश में तो कैश अकाउंट डेबिट। कितने रुपए की पेमेंट आ रही है? ₹97,000।
अच्छा जी। डिस्काउंट भी दिया है आपने? हां जी दिया है। तो डिस्काउंट देते हैं तो डेबिट में रिकॉर्ड करते हैं। किस नाम से?
डिस्काउंट अलाउड। डिस्काउंट अलाउड हो गया जी ₹3000। अब आप ही मुझे बता दो कि रवि का अकाउंट जब
ओपन हुआ था डेबिट में तो ₹1 लाख से तो अब रवि का अकाउंट क्लोज करने के लिए रवि के अकाउंट को क्रेडिट भी ₹1 लाख से ही करना
पड़ेगा। यह रूल होता है। कोई अकाउंट अगर ओपन हुआ है 1 लाख से तो क्लोज भी ₹1 लाख से ही होगा। इसलिए रवि का अकाउंट जब आप अब
क्रेडिट करेंगे आप जब रवि का अकाउंट क्रेडिट करेंगे तो रवि का अकाउंट पूरे ₹1 लाख से आपको
क्रेडिट करना होगा दोस्तों ठीक है जी पूरे ₹1 लाख से आपको क्रेडिट करना होगा रवि का अकाउंट बस जी खत्म हो गई बात तो ये था कैश
डिस्काउंट को अेल करने का या कैश डिस्काउंट अलाउ करने का एक दूसरा तरीका जो कि ट्रांजैक्शन की डेट के बाद में हो रहा
है और यही उल्टा भी हो सकता है यही रवि के पर्सपेक्टिव फिर से अगर आप सोचोगे तो फर्स्ट ट्रांजैक्शन हो जाएगी परचेजेस
अकाउंट डेबिट टू चितरंजन ऑटोमोबाइल्स एंड देन इस वाली ट्रांजैक्शन का भी रिवर्स हो जाएगा। ऑलराइट।
हां जी दोस्तों। तो बीच-बीच में चाय भी पीते रहना है। घबराना नहीं है। ठीक है? वीडियो लंबी है। मैं मानता हूं। खाते पीते
रहो लेकिन पढ़ते भी रहो। ओके? तो ये ट्रांजैक्शन आई होप आपको समझ में आ गई होगी। उसके बाद हम चलते हैं अगली
ट्रांजैक्शन पे। अगली ट्रांजैक्शन में 7 तारीख को फिर हमने गुड्स बेचे। इस बार हरकेश को बेचे हमने ₹2 लाख के गुड्स 7
तारीख को मेन मे से हरकेश हमारा डेटर बन जाएगा।
और सेल्स अकाउंट हमारा क्रेडिट हो जाएगा। कितने रुपए से? जी? ₹ लाख से। ओके।
उसके बाद 10 तारीख को हमें पेमेंट भी मिल गई हरकेश से। अभी पूरी नहीं मिली है। ₹1.5 लाख की
पेमेंट मिली है 10 तारीख को। सो मे 10 इसको जरा तुम लोग खुद से रिकॉर्ड करो। इसको जरा खुद से रिकॉर्ड करो।
₹ लाख के आपने गुड्स बेचे हरिकेश को। पर 10 तारीख को जब वह पेमेंट देने आया तो ₹1.5 लाख की पेमेंट देकर गया सिर्फ। तो
क्या मैंने संपूर्णत राजीनामा कर लिया क्या? क्या लिखा है फुल सेटलमेंट? नहीं। ₹00 थोड़ी छोड़ दूंगा भाई मैं अपने। तो
इसका मतलब फिलहाल यह है कि 2 लाख में से अभी वो ₹1.5 लाख देके गया है। बाकी 500 वो बाद में दे देगा ध्यान से। तो अभी जो आपके
पास पेमेंट आ रही है उससे आपका कैश अकाउंट डेबिट हो जाएगा। ₹150,000
और जो हरकेश है उसका अकाउंट क्रेडिट हो जाएगा ₹150,000 से और बाकी के ₹50,000 वह मुझे
बाद में दे देगा। ठीक है? तो कोई फुल सेटलमेंट नहीं है यहां पर। यहां कोई फुल सेटलमेंट नहीं है भाई। अब 15 तारीख, 17
तारीख और 18 तारीख मतलब 17 और 18 तो नहीं। 15 तारीख वाली ट्रांजैक्शन जरा आप ध्यान से पढ़ो क्योंकि इसमें कुछ नया सिखाना है
मैंने आपको। पढ़ो जरा ध्यान से। दोस्तों हरिकेश के साथ पता है क्या गेम हुआ? 7 तारीख को वह हमसे गुड्स खरीद के
गया ₹ लाख के। 10 तारीख को वो हमें पैसे भी दे गया। ₹150 लेकिन 15 तारीख को हरकेश हो गया
इनसॉल्वेंट। इनसॉल्वेंट क्या होता है? दोस्तों जब किसी की कंडीशन खराब हो जाती है, जब किसी पर्सन
के ऊपर बैंककरप्सी आ जाती है, जब कोई पर्सन दिवालिया हो जाता है, जब किसी पर्सन की फाइनेंसियल कंडीशन बहुत खराब हो जाती
है, जब किसी पर्सन की एसेट्स कम और लायबिलिटीज़ ज्यादा हैं। ऐसे पर्सन को दोस्तों हम बोलते हैं इनसॉल्वेंट। हरकेश
इनसॉल्वेंट हो गया। इसमें उसका तो नुकसान है ही लेकिन उससे बड़ा नुकसान मेरा है। क्या आप चाहते हो आपके डेटर जितने भी हैं
वो सब इनसॉल्वेंट हो जाए? मजे आ जाएंगे आपको। अरे भाई डेटर वो जिनसे तुम्हें पैसे लेने हैं। अब जिनसे तुम्हें पैसे लेने हैं
अगर वह इंसान सभी इनसॉल्वेंट हो जाए तो तुम्हारा पैसा मर जाएगा। मेरा पैसा मर गया। मुझे हरकेश से पहली बात तो 2 लाख
नहीं लेने थे। 500 ही बैलेंस बचा था। पर क्या करें? वो इनसॉल्वेंट हो गया। हेंस हिज अकाउंट इज़ टू बी रिटन ऑफ एज बैड डे।
बैड डे दोस्तों उस पैसे को कहते हैं जो आपको किसी कस्टमर से लेना था और वह पैसा मर गया। वह पैसा खराब हो गया। वह पैसा अब
कभी रिसीव नहीं होने वाला। तो बैड डेट को कैसे रिकॉर्ड किया जाता है? आइए जरा ध्यान से देखिए।
15 तारीख को मैं क्या करूंगा? एक एंट्री बनाऊंगा जिसमें मैं नुकसान दिखाऊंगा अपना और उस नुकसान को मैं नाम
दूंगा बैड डे। बैड डे का अकाउंट मैं कर दूंगा डेबिट। बेटा ₹50,000 से।
अब क्योंकि मैंने बाकी के 500 जो मुझे हरकेश से लेने थे वह मरा मरा हुआ पैसा मैंने घोषित कर दिया है वह तो अब हरिकेश
का अकाउंट बंद कर देता हूं तो इसलिए अब हरिकेश का अकाउंट मैं क्रेडिट कर दूंगा अब मैं हरकेश का अकाउंट क्रेडिट कर दूंगा
जी ₹50 से दोस्तों इस तरह से हम बैड डे्स को रिकॉर्ड करते हैं। कभी भी आपका पैसा डूब जाए तो
क्या करना है? एक तो बैड डे्स करके अकाउंट डेबिट करना है और जो कस्टमर है जिस जो आपका जिससे पैसे लेने हैं जो डेटर है आपका
डेटर का अकाउंट आपको क्रेडिट कर देना है ₹50 से। समझ में आ गई बात? क्यों डेटर का अकाउंट क्रेडिट करें? क्योंकि बेटा जब
पैसा डूब ही गया तो फिर उस बंदे का खाता क्यों खोल रखा है तुमने फालतू में बुक्स में? इसलिए उसका खाता बंद कर दो। अब आप
देख सकते हैं कि हरिकेश का जो अकाउंट है वो डेबिट ₹2 लाख से हुआ था और क्रेडिट एक बार ₹1.5 लाख से हुआ। एक बार मैंने
क्रेडिट कर दिया ₹50,000 से। तो डेबिट क्रेडिट बराबर हो गया। हरिकेश का अकाउंट बंद हो गया। और एग्जांपल्स करवाता हूं मैं
आपको इसके ऊपर। आगे चलते हैं दोस्तों। आप देख सकते हैं 17 तारीख सपना हु ओड 10,000 सपना ओल्ड मतलब उसने हमसे ले रखे
हैं 10,000। सपना ओल्ड 10,000 डिक्लेयर्ड इनसॉल्वेंट। सपना जो मेरी डेटर है जिसने मुझसे 10,000 ले रखे हैं वो भी इनसॉल्वेंट
हो गई। मजे आ रहे हैं मेरे को फुल। मेरे जितने डेटर हैं इनसॉल्वेंट हुए जा रहे हैं। जो नहीं है इनसॉल्वेंट वो भी मुझसे
डिस्काउंट मांग रहा है। पता नहीं क्या चल रहा है ये मेरे साथ। तो सपना से मुझे 10,000 लेने थे वो इनसॉल्वेंट हो गई है।
पर देखो कई बार ऐसा भी होता है कि कोई पर्सन अगर इनसॉल्वेंट हो भी गया है तो ऐसा नहीं है कि बिल्कुल ही उसके पास पैसे नहीं
है। थोड़ा बहुत घर का सामान बेच भाई बर्तन भाड़ने ये सब बेच कुछ तो पैसे दे। तो इनसॉल्वेंसी का केस जब किसी बंदे पर
अप्लाई होता है तो फिर सरकारी तौर पर कुछ पैसा उससे रिकवर किया जाता है और उसके क्रेडिटर्स को दे दिया जाता है। तो सपना
इनसॉल्वेंट हुई पर मुझे 60 पैसे इन अ रुपी रिसीव हो रहे हैं ऑफिशियल रिसीवर से। सपना जिससे आपको 10,000 लेने थे कुछ तो दे
रही है वो। क्या दे रही है? 60 पैसे। अब तुम सोच रहे होगे यह सपना क्या फूंक के बैठी है क्या ₹10 के बदले में 60 पैसे दे
रही है यानी ₹1 भी पूरा नहीं दे रही है मेरे भाई 60 पैसे नहीं लिखा सिर्फ यह एक स्लैंग वर्ड है यहां लिखा है 60 पैसे इन अ
रुपी यानी हर ₹1 के बदले में वो 60 पैसे दे रही है यानी 100 पैसे के बदले में 60 पैसे दे
रही है तो मतलब 60% अमाउंट वो दे पा रही है आज तो डूबा सिर्फ 40% अमाउंट है ठीक ठीक है? तो कैसे इसको रिकॉर्ड करेंगे 17
तारीख वाली ट्रांजैक्शन को? भैया कैश आपके पास आएगा थोड़ा बहुत। कितना? 40%
अ सॉरी 60% यानी ₹6,000 और डूबा जो है उसको आप बैड डे्स की तरह दिखा दोगे।
कितना डूबा? 40% यानी 4000 और सपना का अकाउंट बंद कर दो। तो सपना के अकाउंट को बंद करने के लिए आप सपना का अकाउंट
क्रेडिट कर दोगे ₹10,000 से। तो सपना के केस में इट वाज़ नॉट अ फुल्ली बैड डेप्ट। ठीक है जी? पूरी तरह से बैड
डेप्ट नहीं था। थोड़ा सा अमाउंट वो मुझे दे रही है। 60% उसने दे दिया। ₹4000 मेरे डूब गए। इसलिए मैंने सपना के अकाउंट को पूरा
बंद कर दिया ₹10,000 से। आई होप आपको ये समझ में आ रहा होगा। आगे चलते हैं। 18 तारीख
18 तारीख बड़ी इंपॉर्टेंट है सर। आज मैं जितना भी पैसा डूबा हुआ दिखा रहा हूं, मैं भगवान से प्रार्थना करता हूं कि मेरे
जितने भी डेटर्स आज बेचारे इनसॉल्वेंट हो गए हैं साल 6 महीने में या एकद साल में उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो जाए। उनकी
फाइनेंशियल कंडीशन इंप्रूव हो जाए ताकि मेरा पैसा वापस आ जाए। समझ रहे हो आप? तो ऐसे ही बहुत पहले मेरा एक पैसा डूबा था वो
आज मुझे रिकवर हो रहा है। क्या बात है? बहुत पहले कुछ साल दो साल पहले मैंने एक पैसा डूबा हुआ घोषित करा था जो मुझे आज
रिकवर हो गया। भगवान की ऐसी कृपा हुई बांके बिहारी की कि वो मुझे पैसे रिसीव हो गए। क्या बात है? तो रिसीव्ड ₹700 फ्रॉम
मंजुलिका। एक तो यह नाम थोड़ा सा मैंने भूतिया किस्म का लिख दिया यहां पर। कोई बात नहीं। सो
रिसीव्ड ₹700 फ्रॉम मंजुलिका। जानते हो ना मंजुलिका को भूल भुलैया देखी होगी आपने जी तो ₹700 मुझे मंजुलिका से रिसीव हो रहे
हैं फॉर अ बैड डेप्ट व्हिच वाज़ रिटर्न ऑफ 2 इयर्स एगो ये ₹700 मुझे 2 साल पहले लेने थे और उस
वक्त मजुला मंजुलिका की फाइनेंसियल कंडीशन सही नहीं थी तो उस वक्त मैं ये पैसा बैड डे की तरह शो कर चुका था जस्ट लाइक दिस
जस्ट लाइक दिस जस्ट लाइक दिस तो 2 साल पहले अब मुझे नहीं पता कितने
पैसे लेने थे मुझे मोजलिका उस टाइम पर हो सकता है 1000 2000 लेने होंगे या जितने भी लेने होंगे पर जितने भी लेने थे 2000 पहले
वो तो मैं पहले ही डूबा हुआ पैसा घोषित कर चुका था पर आज वो आई और ₹700 दे गई जितना भी उससे हुआ वो दे गई ₹700 उसने मुझे आज
दे दिए इसको कैसे रिकॉर्ड कीजिएगा बड़ा इंपॉर्टेंट है 18 तारीख सर 18 तारीख को हम कैसे रिकॉर्ड करेंगे
ध्यान से देखो पहली बात तो भैया पैसा आ रहा है तो कैश या फिर बैंक अकाउंट को आप डेबिट कर दोगे। कितने रुपए से डेबिट
कर दोगे? जी कैश या बैंक अकाउंट को हम डेबिट कर देंगे ₹700 से। क्रेडिट किसे करोगे? सोचने वाली बात है।
बताओ क्रेडिट किसे करोगे? किसे क्रेडिट करोगे? मंजुलिका को। पर मंजुलिका को तो आपने 2 साल पहले ही
क्रेडिट कर दिया होगा ना। क्योंकि जब भी बैड डेट होती है तो हम उस वक्त ही डेटर का अकाउंट बंद कर देते हैं। तो मैं फिर से
मंजुलिका का अकाउंट क्रेडिट करके क्यों नए-नए अकाउंट ओपन कर रहा हूं? तो याद रहे दोस्तों पुराना डूबा हुआ पैसा अगर अब
रिसीव हो जाए। अगर पुराना हुआ पुराना डूबा हुआ पैसा अब आपको रिकवर हो जाए। बैड डे अगर रिकवर हो रही है तो बैड डे रिकवर होने
पर पार्टी का नाम कतई नहीं लेना। आपको एंट्री करनी है। पैसा डेबिट टू बैड डे्स रिकवर्ड।
पैसा हो जाएगा डेबिट। और यह अकाउंट हो जाएगा क्रेडिट जिसका नाम है बैड डे्स रिकवर्ड।
तो दो नए अकाउंट्स भी मैंने आपको सिखा दिए। बैड डे्स और बैड डे्स रिकवर्ड। यहां पर आपको ₹700 लिख देने हैं। ये नई चीज थी
जी इस क्वेश्चन के अंदर। वो कह रहा था ना मैं अफलातून ट्रांजैक्शंस मैं आपको कराने वाला हूं। तो यही है वो। बैड डे्स और बैड
डे्स रिकवर्ड। यह आपने मेरे साथ सीखी है इस क्वेश्चन के माध्यम से। चलें आगे। रुकना नहीं है, थकना नहीं है। रुकना नहीं
है, थकना नहीं है क्योंकि हम सब लोग हैं अल्फा। कमेंट कर दो फटाफट से अल्फा। शाबाश।
यह अगला क्वेश्चन है जी। इसमें थोड़े से चेक के ऊपर आपको ज्ञान देने वाला हूं मैं। आओ जरा चेक की कहानी समझाता हूं आपको।
देखो भाई कई बार पेमेंट हमें चेक के माध्यम से मिलती है। कई बार हमें ना चेक रिसीव होता है।
अब जब चेक रिसीव होता है तो दो बातें होंगी। चेक जब रिसीव होगा तो कितनी बातें होंगी?
दो बातें। या तो आप चेक को सेम डेट पे जमा करा दोगे या बाद में जमा कराओगे। यही तो होता है। तो या तो चेक हम डिपॉजिट कर देते
हैं सेम डेट पे। यानी जिस दिन मिला उसी दिन डिपॉजिट कर दिया। वरना हम चेक को डिपॉजिट करते हैं
बाद में। अच्छा क्वेश्चन में जब गिवन नहीं होता ना कि जमा कब हुआ है चेक? जिस दिन मिला उस
दिन जमा हुआ या बाद में तो हम मान लेते हैं जिस दिन चेक मिला उसी दिन जमा करा दिया होगा। यानी ये
ठीक है जी। चेक के केस में दो बातें हो गई। चेक या तो आप सेम डे पे जमा करा दोगे या बाद में जमा
कराओगे। एंट्री में फर्क आएगा दोस्तों। अगर जिस दिन चेक मिला उसी दिन जमा करा दिया तो आप सीधा-सीधा बैंक अकाउंट को कर
दोगे डेबिट और जो व्यक्ति आपको चेक देकर गया है पार्टी
यानी आपका डेटर ऑफ कोर्स डेटर ही देगा आपको चेक उसको आप क्रेडिट कर दोगे लेकिन अगर चेक आया आज और जमा हुआ बाद में चेक
आया आज जमा करने का आपके पास टाइम ही नहीं था पैसा ही इतना है आपके पास तो आज चेक आया आप ले बैठ गए
आपने कहा एक हफ्ते बाद जाऊंगा जमा कराने क्योंकि मेरे को और भी चेकक्स जमा कराने जाना है तो एक हफ्ते बाद जाऊंगा। तो
क्योंकि आज मेरे पास चेक आया पर आज तो मैंने उसको जमा ही नहीं कराया तो क्या आज कोई जनरल एंट्री नहीं होगी क्या? गलत बात
हो जाएगी फिर तो ये तो अगर चेक बाद में जमा कराने वाले हो तो एंट्री होगी। जिस दिन आया उस दिन आप बैंक अकाउंट का नाम
नहीं ले सकते। आप उस दिन लिखोगे चेकक्स इन हैंड। चेकक्स इन हैंड का अकाउंट हो जाएगा डेबिट
और पार्टी का अकाउंट हो जाएगा क्रेडिट। और फिर बाद में जब यह चेक आप जमा करा दोगे उस वक्त उस दिन आप फिर बैंक अकाउंट को कर
दोगे डेबिट और इस फदू एसेट को आप खत्म कर दोगे क्रेडिट करके तो टू चेकक्स इन हैंड अकाउंट
खत्म हो गई जी बात सपोज़ अगर एक चेक 15 तारीख को आपको मिला और 15 तारीख को ही आपने जमा करा दिया तो यह
एंट्री कर दो 15 तारीख को और ऐश करो लेकिन अगर कोई चेक आपको मिला 15 तारीख को जमा कराया आपने 20 तारीख को तो 15 तारीख को यह
एंट्री होगी। 20 तारीख को यह एंट्री होगी। 15 तारीख को बैंक का नाम क्यों नहीं लिया? क्योंकि भाई चेक हाथ में है। अभी तो बैंक
गए ही नहीं हम तो बैंक बैलेंस कैसे बढ़ जाएगा? हालांकि बैंक बैलेंस तो चेक जमा कराने के
बाद भी नहीं बढ़ता। यानी 20 तारीख को भी मैं दिखा जरूर रहा हूं। बैंक अकाउंट डेबिट हो रहा है। लेकिन 20 तारीख को भी बैंक
अकाउंट एकदम से डेबिट नहीं हो जाएगा। बट मैं उतना इंतजार नहीं करता। मैं बैंक अकाउंट को डेबिट तब दिखा दूंगा जब एटलीस्ट
मैंने चेक को जमा करा दिया हो। ठीक है जी? तो ये है जी चेक की कहानी। अब क्वेश्चन करने में मजा आएगा। कहां गया क्वेश्चन? ये
रहा क्वेश्चन। पास नेसेसरी जर्नल एंट्रीज फॉर द फॉलोइंग ट्रांजैक्शंस। इन सभी ट्रांजैक्शंस के ऊपर
आपको जर्नल एंट्रीज पास करनी है। तीन चार छ और आठ। चार दिन की ट्रांजैक्शंस हैं। सोल्ड गुड्स टू राहुल 50,000 20% ट्रेड
डिस्काउंट, 5% कैश डिस्काउंट, फुल अमाउंट रिसीव्ड बाय चेक। पूरा पैसा उसने दिया है मुझे चेक से। तो उसको कैश डिस्काउंट
मिलेगा कि नहीं? मिलेगा। रिकॉर्ड करते हैं इसको। जून थर्ड को रिकॉर्ड करते हैं। सर देखो
चेक मिला आपको जून की 3 तारीख को। अब एक बात बताओ। यह जून की 3 तारीख को राहुल जितना भी चेक का अमाउंट बनेगा आई डोंट नो।
पर जो भी चेक का अमाउंट बना उसने आपको चेक दे दिया। आगे क्वेश्चन में कहीं पर भी ये नहीं पता मुझे कि राहुल वाला चेक मैंने
जमा कब कराया। पूरे क्वेश्चन खत्म हो गया। लेकिन मुझे ये फैक्ट ही नहीं पता कि राहुल वाला चेक जो
मुझे मिला है 3 जून को वो जमा कब हुआ है। तो ऐसे में मैं मान लूंगा कि जिस दिन मुझे चेक मिला उसी दिन मैंने जमा करा दिया
होगा। इट इज डीम्ड दैट चेक हैज़ बीन डिपॉजिटेड एज ऑन द डेट व्हेन द चेक वाज़ रिसीव्ड। ओके? तो पहले तो देखते हैं राहुल
हमें कितनी पेमेंट देगा। सर 500 के ऊपर 20% अप्लाई करो ना। कितना हुआ? 10,000 यानी गुड्स आपने राहुल के लिए ₹4,00 के
लगा दिए। तो पहले तो ₹4,00 जाके डाल दो सेल्स अकाउंट में। क्लेश खत्म करो सेल्स अकाउंट का।
ठीक है जी? ₹4,000 आपने लिख दिए सेल्स अकाउंट के अंदर। ₹4,00 भी हम उससे लेंगे नहीं। हम उसे
कहेंगे चल यार 5% और कम कर दे तू। तो अब कैश डिस्काउंट जो आप उसको दोगे वो ₹400 के ऊपर दोगे 5% 4 * 5 20 ₹2000 डिस्काउंट
आपने दे दिया जिसको हम बोलते हैं डिस्काउंट अलाउड। डिस्काउंट अलाउड में हम दिखा देंगे जी
₹2,000 डेबिट में ऑफ कोर्स क्योंकि खर्चा है हमारा और ₹38,000 हम कहेंगे लाविला ₹38,000 का चेक दे दे। सिंपल ₹00 के गुड्स
थे 40 के मैंने लगा दिए। 40 पे भी मैंने आपको 5% का कैश डिस्काउंट दे दिया। अब आप मुझे 38 तो दे दो यार। 38,000 का राहुल ने
मुझे चेक दे दिया। तो चेक के केस में दो बातें होती हैं। या तो आप सेम डे डिपॉजिट करते हो या बाद में। मेरे केस में सेम डे
डिपॉजिट हो गया। ऐसा मुझे मानना पड़ेगा। तो सेम डे के केस में सीधा-सीधा बैंक अकाउंट डेबिट और पार्टी का अकाउंट हो
जाएगा क्रेडिट। पर पार्टी का अकाउंट अभी क्रेडिट नहीं होगा दोस्तों। क्योंकि यह मेरा कस्टमर मुझे हाथों हाथ
चेक देकर गया है। ठीक है? अगर बाद में चेक देता तो फिर डेटर का अकाउंट क्लोज होता। तो यहां पर सीधा-सीधा बैंक अकाउंट डेबिट
हो जाएगा। ₹38,000 से। ठीक है जी? अब आगे चलते हैं। जून 4
और जून 6 और जून 8। अब यह करना है जरा हमें। अच्छा एक और चीज सॉरी सॉरी सॉरी 3 तारीख को हम
बैंक अकाउंट में नहीं लिखेंगे। असल में यह पॉइंट मैंने पढ़ा नहीं। राहुल वाला चेक हमें गिवन है एक्चुअली कि
हमने 6 तारीख को जमा कराया राहुल का चेक। तो फिर तीन और 6 तारीख को दो बार हमें ट्रांजैक्शन करनी होगी। 3 तारीख को उस केस
में हम इसे बोलेंगे चेकक्स इन हैंड। ठीक है? और बाद में जब जमा कराएंगे तो फिर बैंक अकाउंट। अच्छा जी। जून की 4 तारीख को
हमें परम से पेमेंट रिसीव हो रही है चेक से। तो परम जो आपको पैसे दे रहा है इस बात को
जरा ध्यान से पकड़ो। अच्छा परम वाली जो ट्रांजैक्शन है वो 4 तारीख को भी और 8 तारीख को भी है। 8 तारीख को तो चलो डिसऑनर
है। सिर्फ 4 तारीख वाली ट्रांजैक्शन देखो आप। सिर्फ और सिर्फ परम एक व्यक्ति है जो आपको ₹2000 चेक से देकर गया है। क्यों
देकर गया है? आपका डेटर लगता होगा वह रिश्ते में तभी आपको देकर गया है पैसे वह तो जी ₹00 परम
आपको चेक से देकर गया और यह गिवन नहीं है कि परम वाला चेक जमा कब हुआ है क्योंकि 8 तारीख को तो परम वाला चेक डिसऑनर ही हो
गया है बाउंस हो गया है वो तो 8 तारीख को तो छोड़ ही दो आप तो चकि गिवन नहीं है 4 तारीख वाला चेक जमा कब हुआ है तो सेम डेट
पर जमा हो गया होगा तो जून 4 जून 4 में आपको ₹00 चेक आया। सेम डेट पर जमा हो गया। परम
ने यह आपको चेक दिया है। तो आप सीधा-सीधा बैंक अकाउंट को करेंगे डेबिट और पार्टी को यानी परम का अकाउंट कर देंगे
आप क्रेडिट ₹20,000 से। ठीक है जी? जैसा कि मैंने आपको नोट्स में
भी यहां पर बताया था। यह डिपॉजिट ऑन सेम डे बाद में डिपॉजिट अगर हुआ है। अच्छा बाद में कौन सा चेक है जो बाद में डिपॉजिट हुआ
है वह है 3 तारीख वाला। 3 तारीख वाला चेक एक्चुअली आपने 6 तारीख को जमा कराया है। इसलिए 3 तारीख को आप बोलोगे चेक इन हैंड
और 6 तारीख को जब आप इसे जमा करा दोगे तो फिर बैंक अकाउंट हो जाएगा डेबिट। और बेटा चेकक्स इन हैंड।
चेकक्स इन हैंड का अकाउंट हो जाएगा क्रेडिट कितने रुपए से जी ₹38,000 से
और अब लास्ट ट्रांजैक्शन वेरी वेरीेंट 8 तारीख परम का चेक हो गया डिसऑनर टेक्निकल प्रॉब्लम की वजह से 8 तारीख को।
देखो दोस्तों 4 तारीख को आपको परम ने चेक दिया था ₹00 का जो कि आपने जमा भी करा दिया। आप बड़े खुश हुए। आपको तो लगा कि
भाई बैंक में पैसा आ ही जाएगा। आपने बैंक अकाउंट को डेबिट कर दिया। 8 तारीख को पता चला चेक तो बाउंस हो गया। बैंक वालों ने
चेक वापस भेज दिया कि भैया इसमें परम ने चेक सही से नहीं करे। या फिर परम जितने का चेक देता फिर रहा है उतने तो अकाउंट में
पैसे भी नहीं है उसके। या फिर उसने डेट गलत डाल दी या उसने ओवराइटिंग कर दी। कुछ भी प्रॉब्लम की वजह से चेक वापस आ सकता
है। तो एक बार वो पेमेंट जो आपने बैंक में दिखा दी और बाद में आपको पता चला कि वो पेमेंट तो बैंक में आई नहीं है। तो रिवर्स
करना पड़ेगा ना। तो 8 तारीख को आप क्या करोगे? बैंक अकाउंट को क्रेडिट कर दोगे। बैंक अकाउंट को क्रेडिट कर दोगे ₹00 से।
बैंक अकाउंट को क्रेडिट कर दोगे ₹00 से। और परम जो कि आपका डेटर था बट आपने उसका अकाउंट क्लोज कर दिया था। अब वापस उसका
अकाउंट ओपन कर दो आप। तो परम का अकाउंट वापस से आप डेबिट कर दोगे बेटा। ₹00 से। परम का अकाउंट वापस से डेबिट हो
जाएगा। ₹00 से। यह थी हमारी सारी चेक से जुड़ी हुई, बैंक से जुड़ी हुई ट्रांजैक्शंस। ऑलराइट। चलते हैं अब आगे।
माय डियर क्यूटीज ये जो क्वेश्चन मैंने आपके सामने लगाया है इस क्वेश्चन के अंदर आप देख सकते हैं। जनरलाइज़ द फॉलोइंग
ट्रांजैक्शंस इन द बुक्स ऑफ दुर्गेश नाई। सो इन सब ट्रांजैक्शंस पे अगर आप नजर डालेंगे तो काफी बार ना आपको गुड्स
मिलेंगे। है ना? गुड्स कॉमन शब्द है इस इन सभी ट्रांजैक्शंस में गुड्स गुड्स गुड्स गुड्स गुड्स गुड्स गुड्स अब तक आपने पढ़ा
ना गुड्स को हम खरीदते हैं और बेचते हैं ज्यादा खरीदा हुआ माल हम वापस भी कर सकते हैं है ना परचेस रिटर्न लेकिन गुड्स के
साथ इतना कुछ भी हो सकता है क्या जी हां बिल्कुल तो अभी के अभी पेन लेकर बैठो और जो भी मैं लिखवा रहा हूं उसको बहुत ध्यान
से समझो समझने के बाद नोट करो गुड्स से जुड़ी हुई ट्रांजैक्शंस ट्रांजैक्शंस रिलेटिंग टू गुड्स बहुत इंपॉर्टेंट टॉपिक
ट्रांजैक्शंस रिलेटेड टू गुड्स। गुड्स से जुड़ी हुई ट्रांजैक्शंस। गुड्स के साथ हम क्या-क्या
कर सकते हैं? मैं बताता हूं। भाई आया है सिखा के जाएगा। बेटा गुड्स को आप खरीद सकते हो, बेच सकते हो। खरीदा हुआ माल वापस
कर सकते हो। तुम्हारा कस्टमर भी तुम्हें वापस कर सकता है। इसके अलावा गुड्स चोरी हो सकते हैं, जल सकते हैं। गुड्स का
एक्सीडेंट हो सकता है। गुड्स खो सकते हैं रास्ते में। राइट? इसके अलावा गुड्स तुम अपने स्टाफ मेंबर्स को दे सकते हो। आप
गुड्स किसी गरीब को चैरिटी डोनेशन में दे सकते हो। किसी एनजीओ को दे सकते हो। गुड्स का इस्तेमाल करके कोई फिक्स्ड एसेट आप
क्रिएट कर सकते हो। गुड्स अपने एम्प्लाइज में बांट सकते हो आप। तो गुड्स के साथ बहुत कुछ होता है सर। गुड्स हम कई बार
फ्री सैंपल्स के तौर पर भी बांट देते हैं एडवर्टाइजमेंट करने के लिए। तो गुड्स के साथ काफी कुछ होता है। अब ये सब है
अफलातून ट्रांजैक्शंस। जो मैंने उस स्लाइड में स्लाइड नंबर टू में जब मैंने बताया था ना कि आज का टारगेट क्या रहने वाला है?
मैंने कहा था कुछ अफलातून ट्रांजैक्शंस हम पढ़ेंगे। यार जर्नल की अगर मैं एक वीडियो बनाऊं और ईजी-इजी ट्रांजैक्शंस करा के घर
निकल लूं और आपको बोलूं जी हो गया जर्नल मेरी तरफ से। क्या फायदा अगर वो आपके एग्जाम में आएगी ना? मुद्दा क्या है?
मुद्दा ये है कि एग्जाम अच्छा अच्छे अच्छी तरीके से हो जाए आपका। तो ट्रांजैक्शंस रिलेटिंग टू गुड्स में सबसे पहले मैं आपको
बताना चाहूंगा कि भैया एक तो आप गुड्स रिटर्न कर सकते हो। आप गुड्स रिटर्न कर सकते हो। अच्छा जो कुछ
भी मैं ये लिखवा रहा हूं ना इसके वैसे तो आपको शायद पीपीटी या पीडीएफ के फॉर्म में नोट्स मिल भी जाएंगे। हमारा जो ये फ्री
कॉमर्स बैच है पेस कॉमर्स बैच ये आपको मिल जाएगा हमारी एप्लीकेशन पर और वहां पर आपको ये नोट्स मैं अपलोड भी करवा दूंगा। अगर
कोई समस्या आए कमेंट सेक्शन में हमें बता देना। कोई कोई टेंशन वाली बात नहीं है। चिल है माहौल। ओके? सो गुड्स एंड रिटर्न
हम कर सकते हैं। रिटर्न ऑफ गुड्स। अब देखो गुड्स रिटर्न हम दो तरीके से करते हैं। एक तो होता है बेटा परचेस रिटर्न।
एक होता है परचेजेस रिटर्न, दूसरा होता है सेल्स रिटर्न। एक होता है परचेजेस रिटर्न, दूसरा होता है सेल्स रिटर्न। अब इसका मतलब
क्या है? समझो। बेटा, खरीदा हुआ माल अगर आप अपने सप्लायर को वापस कर रहे हो किसी भी रीज़न से, उसको हम बोलते हैं परचेजेस
रिटर्न। और अगर बेचा हुआ माल आपका, कस्टमर आपको वापस कर रहा है किसी भी रीज़न से, उसको हम बोलते हैं सेल्स रिटर्न। ठीक है
जी। अच्छा, परचेस रिटर्न का एक और नाम है बेटा। इसको हम रिटर्न आउटवर्ड्स भी बोलते हैं। परचेस रिटर्न इज़ आल्सो कॉल्ड रिटर्न
आउटवर्ड्स। एंड लाइक वाइज़ सेल्स रिटर्न इज़ आल्सो नोन ऐज़ रिटर्न इनवर्ड्स। रिटर्न इनवर्ड्स।
समझ रहे हो आप मेरी बात? सेल्स रिटर्न इज़ आल्सो कॉल्ड रिटर्न इनवर्ड्स। तो ये थी ये था जी अब तक का टॉपिक। अब इसको कैसे
रिकॉर्ड करें? है ना? हमारा कस्टमर हमें माल वापस कर दे या हम अपने सप्लायर को माल वापस कर दे तो कैसे उसको रिकॉर्ड करें? ये
भी मैं आपको बता देता हूं। देखो भैया अगर तो परचेस रिटर्न हो रहा है। अगर परचेजेस रिटर्न हो रहा है तो एंट्री क्या
होगी? ध्यान से सुनना। अगर आप अपने क्रेडिटर को माल वापस कर रहे हो तो आपकी लायबिलिटी अपने क्रेडिटर के प्रति कम नहीं
हो जाएगी। और लायबिलिटीज जब भी कम होती है तो डेबिट होती है। इसलिए आपके क्रेडिटर का अकाउंट या फिर आपके सप्लायर का अकाउंट
डेबिट हो जाएगा दोस्तों। एंड जो आपने माल वापस करा जिसको आप बोलते हैं परचेजेस रिटर्न तो परचेजेस रिटर्न का
अकाउंट क्रेडिट हो जाएगा। खत्म हो गई बात। सर मेरा मन कर रहा है परचेस रिटर्न की जगह रिटर्न आउटवर्ड्स लिखने का लिख सकता हूं।
हां बेटा लिख सकता है। क्यूरी पाई। ठीक है? सो ये था जी परचेस रिटर्न की एंट्री। परचेस रिटर्न की एंट्री सिंपल है। अपने
क्रेडिटर को या सप्लायर को जिससे खरीदा था उसे कर दो डेबिट और परचेस रिटर्न को क्रेडिट करो। अनलाइक परचेजेस अकाउंट परचेस
रिटर्न अकाउंट इज़ ओपन ऑन द क्रेडिट साइड। परचेजेस जब होती थी गुड्स की तो परचेस अकाउंट होता था और वो भी डेबिट होता था।
माल वापस करोगे तो परचेस रिटर्न अकाउंट होगा वो भी क्रेडिट होगा। अब सेल्स रिटर्न की एंट्री तुम बताओ। जल्दी बताओ
जल्दी-जल्दी जल्दी। सेल्स रिटर्न सेल्स रिटर्न कौन करेगा? सेल तुमने करी
थी। तो सेल रिटर्न भी तुम ही करोगे क्या? नहीं। सेल हमने करी थी तो रिटर्न हमारा कस्टमर करेगा। हमारा कस्टमर मतलब हमारा
डेटर। डेटर का जब अकाउंट ओपन हुआ था तो डेटर डेबिट हुआ था। लेकिन अब अगर वो मुझे माल वापस कर रहा है तो मेरा डेटर कम हो
जाएगा। यानी डेटर का अकाउंट क्रेडिट हो जाएगा। तो दोस्तों सेल्स रिटर्न की एंट्री में
सेल्स रिटर्न की एंट्री में सेल्स रिटर्न अकाउंट डेबिट हो जाता है और जो बंदा आपको माल वापस कर रहा है यानी
आपका डेटर या कस्टमर उसका अकाउंट क्रेडिट हो जाता है। एज सिंपल एज दैट। सेल जब हुई थी, सेल्स अकाउंट क्रेडिट हुआ था। तो भैया
सेल रिटर्न जब आएगी आपके पास तो सेल्स रिटर्न अकाउंट होगा और वो भी डेबिट होगा। क्रेडिट नहीं होगा। यह है जी दोस्तों
गुड्स के साथ ये वापसी वाला गेम और क्या-क्या होता है गुड्स के साथ वो भी मैं आपको बताना चाहता हूं। आइए जी देखिए गुड्स
के साथ और क्या-क्या होता है। तो ये आप देख पा रहे हैं ना? हमने गुड्स खरीदे। फिर कैश विथड्रॉ कर लिया। फिर
गुड्स विथड्रॉ कर लिए वगैरह वगैरह वगैरह। तो इन सभी केसेस में क्या होता है वो मैं इसी क्वेश्चन के माध्यम से आपको बताना
चाहता हूं। ठीक है? वरना नोट मेकिंग की प्रोसेस में क्या है? वीडियो बोरिंग हो जाएगी आपके लिए। जब कह दिया भाई ने नोट्स
आपको मिल जाएंगे ऐप पर तो मिल जाएंगे। कोई समस्या है कमेंट सेक्शन में बता देना भाई। ठीक है ना? चलो जी। ये देख लो आप।
2025 में मई की 3 तारीख को सबसे पहले गुड्स खरीद लो। चुन्नू से ₹1 लाख पेमेंट चेक से हो रही है। है ना जी?
2025 मई की 3 तारीख। तीन ही थी ना? हां भाई 3 तारीख थी। गुड्स खरीदने हैं मुझे चुन्नू
से। पेमेंट करनी है मुझे चेक से ₹1 लाख की। एंट्री बोलो जल्दी फटाफट। एंट्री हो जाएगी परचेजेस अकाउंट डेबिट
टू चुन्नू। सॉरी चुन्नू नहीं। पेमेंट तो कर ही दी ना मैंने चेक से। तो बैंक अकाउंट क्रेडिट हो
जाएगा। ₹1 लाख से। ये हो गई जी गुड्स खरीदने की एंट्री। बहुत ही सिंपल है। है ना? है ना? है ना? बहुत सिंपल है ना? अब
आगे चलते हैं। 7 तारीख को मैंने विथड्रॉ कर लिया। विथड्रॉ दो बार आ रहा है। विथड्रॉ करने का मतलब ड्रॉइंग होता है
बेटा। बिज़नेस में कुछ भी इन्वेस्ट करने को कहते हो कैपिटल। बिज़नेस में से कुछ भी निकाल के घर लेके चले जाओगे। उसको हम
बोलते हैं ड्रॉइंग्स। तो मैंने अभी फिलहाल विथड्रॉ करा कैश पर्सनल यूज़ के लिए। घर पे मेरी बीवी चिल्ला रही थी। मुझे पैसे चाहिए
शॉपिंग करनी है। मैंने कहा ठीक है। ठीक है भाग्यवान। मैं आपको कैश ला के दे देता हूं दुकान से। तो मैंने कैश निकाल लिया पर्सनल
यूज के लिए ₹5000 7 तारीख को। ये समझने वाली बात है बच्चों। 7 तारीख को क्या एंट्री होगी? जी भैया देखो एक चीज
पकी प्रॉमिस करो मुझे कि याद रखोगे जब भी बिनेस में से कुछ भी निकालो आप। बिज़नेस में से कुछ भी निकाल सकते हो आप घर ले
जाने के लिए। कैश बिज़नेस के बैंक अकाउंट में से पैसा निकाल सकते हो। बिज़नेस में से कोई एसेट निकाल सकते हो। बिज़नेस में से
गुड्स निकाल सकते हो। आप कुछ भी निकाल सकते हो बिज़नेस में से। दोस्तों कुछ भी निकालना बिज़नेस में से उसको ड्रॉइंग कहना
और ड्रॉइंग को हमेशा डेबिट करना। रूल भी यही कहता है ड्रॉइंग्स का अकाउंट बढ़ने पर डेबिट होता है। तो ड्रॉइंग्स का
अकाउंट हो जाएगा डेबिट। ठीक है? कितने रुपए के कितने रुपए कैश निकाला उसने? ₹5,000। ₹5,000 की ड्रॉइंग हो गई दोस्तों।
अब ये ड्रॉइंग की वजह से आपको नहीं लगता हमारे बिज़नेस की एक एसेट कम हो गई। कौन सी? कैश। और एसेट जब भी कम होती है तो
क्या होती है? क्रेडिट। यस। सो कैश अकाउंट हो जाएगा क्रेडिट। ड्रॉइंग्स अकाउंट डेबिट टू कैश अकाउंट ₹5,000 खत्म हो गई जी बात।
अब आगे चलते हैं। अगली ट्रांजैक्शन हुई है दोस्तों 9 तारीख को। फिर इसने ड्रॉइंग करी है। लेकिन इस बार उसने गुड्स निकाले हैं
डोमेस्टिक कंसमशन के लिए ₹2000 के। डोमेस्टिक कंसमशन मतलब घर के इस्तेमाल के लिए उसने बिज़नेस में से गुड्स निकाले हैं।
अगर मेरी दुकान कपड़ा बेचने की है, कपड़े गारमेंट्स क्लोथ्स की मेरी दुकान है। तो यार मेरे घर पे जो मेरी फैमिली है, वो भी
मेरी दुकान का प्रोडक्ट यूज़ कर सकती है ना? और अगर मैंने सपोज अपनी दुकान में से एक टीशर्ट निकाली, जींस का निकाली और
वगैरह वगैरह दो चार कपड़े निकाले और मेरे घर के इस्तेमाल के लिए सपोज मेरे फादर को यूज़ करना है। मैंने अपने फादर के लिए घर
ले गया। मैंने ड्रॉइंग कर ली। मैंने कहा लो जी पापा आपके लिए। पैसा लूंगा क्या मैं उनसे। बहुत मारेंगे मुझे। उन्होंने ही
कैपिटल दी थी बिज़नेस के लिए। तो ड्राइंग किसी भी फॉर्म में हो सकती है। ड्राइंग के तौर पर आप कैश भी निकाल सकते हो। गल्ले
में से पैसा निकाल के घर ले जा सकते हो। वरना आप गुड्स भी निकाल सकते हो। इस बार हमने गुड्स निकाले।
अब गुड्स निकाले ₹2000 के। मैंने आपको पहले ही बता दिया था। आपने निकाला कुछ भी हो।
आपने निकाला कुछ भी हो। ड्रॉइंग अकाउंट तो डेबिट ही होगा ना ₹20,000 से। क्योंकि ड्रॉइंग तो हुई है। तो ड्रॉइंग्स का
अकाउंट फिर से डेबिट होगा। ₹2000 से बेटा। अब आपको क्रेडिट उस चीज को करना है जो चीज़ बिज़नेस में से गई है। क्या
गया है बिज़नेस में से? पहले कैश गया था 7 तारीख वाली ड्रॉइंग में और अब 9 तारीख वाली ड्रॉइंग में बिजनेस में से क्या गया
है? गुड्स। तो किसका अकाउंट क्रेडिट होगा? गुड्स का। लेकिन गुड्स का अकाउंट तो हम कभी ओपन ही
नहीं करते। है ना? गुड्स की जगह पर कौन सा अकाउंट डेबिट करते हैं हम खरीदते वक्त? परचेजेस। तो परचेजेस अकाउंट को खाली करने
के लिए परचेजेस अकाउंट को क्रेडिट कर देना है। खत्म। तो गुड्स अगर आपके पास से जा रहे हैं किसी भी कारण से
सेल होने पर तो सेल्स अकाउंट ही ओपन होता है। वह तो पहले पता है आपको। है ना? ऐसे ही परचेस रिटर्न करने पर परचेस रिटर्न
अकाउंट होता है। लेकिन उसके अलावा अगर किसी रीज़न से गुड्स आपके पास से जा रहे हैं अदर देन सेल या अदर देन परचेस रिटर्न
तो आपको क्या करना है? परचेजेस अकाउंट को ही उठा के क्रेडिट कर देना है। खाली कर देना है। परचेजेस अकाउंट ₹2000 से। बात
खत्म हो गई। प्रॉमिस करो कि आज के बाद अगर ड्रॉइंग होगी और ड्रॉइंग में अगर गुड्स निकालेंगे
हम बिनेस में से तो ड्रॉइंग अकाउंट होगा डेबिट और परचेजेस अकाउंट होगा क्रेडिट। सिंपल हो गया। इजी हो गया। चलें आगे। चलो
भाई आगे चलते हैं। आगे चलते हैं। अब ये 12 से लेकर 24 तारीख तक गुड्स के साथ अलग-अलग अलग-अलग गेम हो
रही है। 12 तारीख को हमने गुड्स निकाले। चैरिटी में दे दिए। 15 तारीख को हमने गुड्स निकाले। ₹1000 के स्टाफ मेंबर्स में
बांट दिए। कितने बड़े दिल वाले हैं हम। है ना? 18 तारीख को गुड्स निकाले। फ्री सैंपल के तौर पर बांट दिए। 21 तारीख को गुड्स
निकाले और उससे ऑफिस का फर्नीचर बना डाला और 24 तारीख को गुड्स चोरी कर लिए एक एंप्लई ने। बहुत सारी चीजें हो गई गुड्स
के साथ। है ना दोस्तों? तो इन सबको कैसे रिकॉर्ड करेंगे? आइए जरा देखते हैं। 12 तारीख।
देखो दोस्तों 12 तारीख को आपने गुड्स निकाले ₹2000 के और चैरिटी में दे दिए। फिर आपने स्टाफ में बांट दिए। फिर आपने
फ्री सैंपलिंग कर दी। है ना? फिर आपने ऑफिस फर्नीचर तैयार कर लिया गुड्स के इस्तेमाल से। आपको नहीं लगता इन सभी केसेस
में गुड्स तो जा ही रहे हैं ना हमारे पास से। गुड्स तो जा ही रहे हैं ना यार। मैं चैरिटी कर दूं, दान दे दूं, एम्प्लाइज में
बांट दूं तो मेरे गुड्स तो मेरे पास से जा ही रहे हैं। और ये जा अलग तरीके से रहे हैं। ये सेल नहीं हुई है। ये परचेस रिटर्न
भी नहीं हुआ है क्योंकि सेल करना तो मुझे आता है। परचेस रिटर्न की एंट्री भी भैया ने बताई है अभी। लेकिन ये अलग तरीके से जा
रहे हैं। तो ऐसे में परचेजेस अकाउंट को ही उठा के क्रेडिट कर देना है। हां बिल्कुल सही सोच रहे हो कि यहां से
लेकर और यहां तक सभी एंट्रीज में परचेजेस अकाउंट उठा के क्रेडिट कर देना है क्योंकि खाली करना है मुझे परचेस अकाउंट को। तो 12
तारीख वाली एंट्री में ये तो मुझे पता है कि भैया परचेजेस अकाउंट क्रेडिट होगा।
कितने रुपए से? 12 तारीख की एंट्री में परचेस अकाउंट कितने से क्रेडिट होगा? ₹2000 से।
अच्छा डेबिट क्या करें? तो खर्चा नहीं हुआ तुम्हारा। चैरिटी में दे दिए तुमने ₹2000 के गुड्स। तो खर्चा हो गया ना? नुकसान हो
गया। चैरिटी करना वैसे अच्छी बात है। लेकिन बिज़नेस के लिए तो एक्सपेंस ही है ये। एक्सपेंसेस इसको हम डेबिट में रिकॉर्ड
करते हैं। तो एक एक्सपेंस हम यहां पर क्रिएट कर देंगे चैरिटी अकाउंट। तो चैरिटी अकाउंट हो जाएगा बेटा डेबिट ₹2,000 से।
खत्म हो गई बात। ठीक है? अच्छा ऐसे ही। आगे चलते हैं फिर। ये तो थी 12 तारीख। उसके बाद आती है 15 तारीख।
ठीक है? 15 तारीख। 15 तारीख को हमने गुड्स फिर निकाले ₹1000 के और स्टाफ मेंबर्स में बांट दिए। स्टाफ मेंबर्स में क्यों बांटे
हमने? अरे यार हमारी मर्जी। दिवाली बोनस के तौर पर हमने उन्हें गुड्स ही दे दिए। कैश भी दिए, गुड्स भी दे दिए। एक-एक
लिफाफा और साथ में जिस चीज का हमारा धंधा है, वो चीज हमने दे दी। सपोज हमारा इलेक्ट्रॉनिक्स का बिज़नेस है, तो हमने
एक-एक टीवी या एक-एक एसी हर किसी एंप्लई को दे दिया। जाओ ऐश करो। स्टाफ वेलफेयर यार स्टाफ वेलफेयर
तो यहां पर इस खर्चे को हम इसी नाम से दिखाएंगे दोस्तों इसी नाम से दिखाएंगे हम इसको स्टाफ वेलफेयर एक्सपेंसेस
अकाउंट डेबिट और क्रेडिट तो तुम्हें पता ही है क्या होगा जल्दी बोलो परचेजेस अकाउंट
स्टाफ वेलफेयर अकाउंट एक्सपेंसेस अकाउंट डेबिट टू परचेजेस अकाउंट कितने रुपए का माल दे दिया हमने इनको
अ ₹1000 ₹1000 की गुड्स दे दे दिया हमने इनको। चलो जी। फिर क्या हुआ है? फिर उसके बाद 18 तारीख को हमने ₹3000 के गुड्स फ्री
सैंपल के तौर पर बांट दिए। क्यों बांटते हो भाई तुम फ्री सैंपल्स के तौर पर गुड्स? बताना जरा। एक कंपनी थी। अ मिल्क
प्रोडक्ट्स बनाती थी वो कंपनी। बेसिकली मिल्क ही बनाती थी वो कंपनी। मिल्क रिलेटेड प्रोडक्ट्स बेचने का उसका काम था।
कंपनी का मैं नाम नहीं लूंगा। लेकिन वो कंपनी जब नई-नई आई थी अभी कुछ टाइम पहले तो उस कंपनी ने छोटे-छोटे पैकेट्स में दूध
दिया था रिटेलर्स को छोटे-छोटे पैकेट्स में फ्री सैंपल्स के तौर पर कि भैया ये कस्टमर्स को वैसे ही दे देना जरा ताकि
उनके घर में इस मिल्क का स्वाद पहुंचे और हमारी कंपनी की एडवरटाइजमेंट हो जाए। तो फ्री सैंपलिंग हम इसीलिए करते हैं क्योंकि
हम अपने प्रोडक्ट को एडवर्टाइज कर रहे होते हैं। तो इसीलिए बेटा ये जो आपने करा है ना कौन सी तारीख को? 18 तारीख को ₹3000
के जो फ्री सैंपल्स बांटे हैं तो समझ जाओ ये 18 तारीख को और कुछ नहीं हो रहा। एडवर्टाइजमेंट हो रहा है। तो आपको
एडवर्टाइजमेंट का खर्चा दिखाना है। एडवरटाइजमेंट अकाउंट डेबिट एडवर्टाइजमेंट दिखा सकते हो। अदरवाइज
सेल्स प्रमोशन भी बोल सकते हो आप इसको। ठीक है जी। हां जी। कितने रुपए हैं? ₹3000।
और क्रेडिट तो तुम्हें पता ही है क्या होगा? जल्दी से बता दो। टाइम वेस्ट नहीं। हां जी। हां जी। हां जी। परचेजेस अकाउंट
क्रेडिट होगा। ठीक है? ₹3000 से खत्म हो गई बात। अच्छा फिर क्या करा हमने? फिर ये बड़ा इंपॉर्टेंट
है। ₹5,000 के गुड्स यूज़ करें और ऑफिस का फर्नीचर बना डाला। हमारा बिज़नेस है कच्ची लकड़ी बेचने का।
राइट? पर लकड़ी से तो फर्नीचर भी बनता है। तो हमने क्या करा? अपनी लकड़ी जो हम बेचते हैं वैसे उससे अपने ऑफिस के लिए एक चेयर
बनवा ली या सोफा बनवा लिया या कोई और फर्नीचर बनवा लिया। ऐसे और भी एग्जांपल्स हो सकते हैं। अब किसी बंदा कोई बिजनेसमैन
है उसका बिज़नेस है बिल्डिंग मटेरियल्स का। ठीक है? ईंटें, रोड़ी, बदरपुर, सीमेंट ये सब बेचता है वो। तो जो ब्रिक्स हैं, ईंटें
वो उसके लिए गुड्स हैं। पर उन्हीं ईंटों से बिल्डिंग भी तो बनाई जा सकती है। एक छोटा सा कमरा भी तो बनाया जा सकता है। तो
इस्तेमाल हो रहा है गुड्स का और बन रही है एक फिक्स्ड एसेट। तैयार हो रही है एक फिक्स्ड एसेट। सोचने वाली बात है। गुड्स
आपके पास से जा रहे हैं लेकिन एक एसेट आपके पास आ रही है। तो गेस करो जरा एंट्री क्या होनी चाहिए?
ये 21 तारीख वाली। मई 21 की एंट्री क्या होनी चाहिए? बेटा मेई 21 की एंट्री में मेरे हिसाब से
क्योंकि एसेट तैयार हो रही है जिसका नाम है फर्नीचर तो फर्नीचर का अकाउंट डेबिट होना चाहिए
और फर्नीचर तैयार ऐ हो गया कुछ देना भी पड़ा कुछ लगाना पड़ा क्या गुड्स तो गुड्स गए अब जिन गुड्स का इस्तेमाल करके आपने
फर्नीचर ही बना डाला तो वो गुड्स अब बच नहीं बिक नहीं सकते ना तो परचेज अकाउंट फिर से क्रेडिट हो जाएगा फर्नीचर अकाउंट
डेबिट टू परचेजेस अकाउंट। फर्नीचर अकाउंट डेबिट टू परचेजेस अकाउंट। कितने रुपए जी? ₹5,000।
अच्छा और एक और देख लें। बेटा अब ये ₹4,000 के गुड्स स्टोल कर लिए एक एंप्लई ने बदतमीज। एक एंप्लई हमारे यहां काम करता
था। हमें तो बड़ा विश्वास था उस बंदे पर। लेकिन वो चोर निकला। उसने हमारे यहां से चोरी कर ली और चोरी में क्या चुराया?
गुड्स चुराया। ठीक है? फिर से गुड्स चले गए आपके पास से। लेकिन ये जो है ना ये ये थोड़ी सी एबनॉर्मल चीज है। ऊपर की सारी
चीजें हमारी मर्जी से हो रही थी। चैरिटी, डोनेशन, फ्री सैंपलिंग, एडवर्टाइजमेंट। लेकिन ये हमारी मर्जी के बगैर हो रहा है।
तो एब्नॉर्मल लॉसेस को रिकॉर्ड करने का तरीका थोड़ा सा अलग है। ये टॉपिक खोलता हूं मैं एक बार नए सिरे से। ठीक है? हाउ
टू रिकॉर्ड दीज़ थिंग्स? देखो जी लॉस ऑफ गुड्स
बाय थेफ्ट हो सकता है। फायर हो सकता है,
एक्सीडेंट हो सकता है। है ना? कई बार गुड्स हमारे लॉस लॉस हो जाता है हमें गुड्स की वजह से। क्यों?
क्योंकि चोरी हो गई, एक्सीडेंट हो गया या आग लग गई। अब ऐसे में अगर गुड्स हमारे पास से जा रहे हैं तो कैसे रिकॉर्डिंग होगी?
है ना? सोचने वाली बात है। देखो बेटा क्योंकि है तो यह लॉस ही तो आपको एक सिंपल एंट्री बनानी है जिसमें
क्या हो गया ऐसे? आपको एक सिंपल एंट्री बनानी है जिसमें आपको लॉस बाय जो भी रीज़न है। थफ्ट्ट है तो
थेफ्ट, फायर है तो फायर, एक्सीडेंट है तो एक्सीडेंट। जो भी रीजन है उसे डेबिट करना है
और गुड्स आपके पास से चले गए तो परचेजेस अकाउंट को क्रेडिट करना है। दैट्स इट। परचेस अकाउंट को क्रेडिट कर देना है। बात
खत्म। ठीक है? कभी भी अगर गुड्स लॉस में चले जाएं ड्यू टू थफ्ट, ड्यू टू फायर, ड्यू टू एक्सीडेंट। तो ये एंट्री तो करनी
ही करनी है। ठीक है? अब इस एंट्री के बाद गेम में आती है इंश्योरेंस कंपनी। यस।
क्योंकि हमें पता था कि चोरी हो सकती है या एक्सीडेंट हो सकता है या आग लग सकती है। तो हमने गुड्स का इंश्योरेंस करा रखा
था पहले से ही। और इंश्योरेंस क्या होता है? ये सब बिज़नेस स्टडीज में पढ़ा है आपने। है ना? बेटा अगर इंश्योरेंस करा रखा था तो
जितना भी आपको नुकसान हुआ है या तो उतना या उससे थोड़ा कम आपको क्लेम मिल जाएगा। यानी पूरा नुकसान आपको झेलना नहीं पड़ेगा।
तो फिर कैसे रिकॉर्डिंग होगी चीजों की? सोचने वाली बात है। है ना? तो आइए इस चीज को समझने के लिए एक क्वेश्चन डाला है
मैंने। ये क्वेश्चन है जी आपके सामने। ठीक है? [संगीत]
ये वाला ये क्वेश्चन है आपके सामने। इस चीज को समझने के लिए और जो ये वाला क्वेश्चन है इसको भी हम बाद में करेंगे।
पहले ये वाला करेंगे। पहले ये वाला करेंगे दोस्तों। देखो इधर 5 तारीख को या नया क्वेश्चन है। 5 तारीख को गुड्स कॉस्टिंग 1
लाख लॉस्ट बाय फायर बट दीज़ गुड्स वर इंश्यर्ड। हमारा ₹1 लाख का माल जल गया पर उस माल का
इंश्योरेंस हो रखा था। एंड द इंश्योरेंस कंपनी एक्सेप्टेड द क्लेम इन फुल। क्या बात है। मजा आ गया। जितने का नुकसान हुआ
उतना क्लेम इंश्योरेंस कंपनी ने मान लिया कि हां जी हम देंगे। बहुत ही बढ़िया। उसके बाद 7 तारीख को हमने मशीनरी खरीदी वि
इज अ डिफरेंट ट्रांजैक्शन। 13 तारीख को हमें चेक रिसीव हो गया इंश्योरेंस कंपनी से। ये जो ऊपर इंश्योरेंस कंपनी आपको देने
वाली थी ना लाख इंश्योरेंस कंपनी ने आपको चेक दे दिया ₹1 लाख का और फिर उसके बाद 20 तारीख को वो चेक हमने बैंक में डिपॉजिट कर
दिया। तो चेक आया अलग दिन है और बैंक में डिपॉजिट अलग दिन पे हुआ है। ध्यान रखना इस चीज को। उसके बाद 24 तारीख को फिर से नया
लॉस है और ये इसकी इंश्योरेंस कंपनी जो है वो बाद में चेक दे रही है वगैरह-वगैरह। ठीक है? आइए जरा इसको रिकॉर्ड करते हैं। 5
तारीख बेटा सबसे पहले प्रॉमिस करो मुझे कि इंश्योरेंस है या नहीं है? इस पे ध्यान
बिल्कुल नहीं देना। इंश्योरेंस है या नहीं है? इंश्योरेंस कंपनी पूरा क्लेम दे रही है कि आधा दे रही है। इस चीज पे ध्यान
बिल्कुल नहीं देना। पहले लॉस को रिकॉर्ड करना है। कैसा लॉस है? लॉस बाय फायर। कितने रुपए का? ₹1 लाख का। 5 तारीख को तो
आपको सिंपल एंट्री रिकॉर्ड करनी है। लॉस बाय फायर अकाउंट डेबिट
₹1 लाख से और इस लॉस की वजह से तुम्हारे पास से क्या चला गया बोलिए ना गुड्स तो परचेजेस अकाउंट क्रेडिट हो जाएगा।
₹1 लाख से परचेजेस अकाउंट क्रेडिट हो जाएगा। ठीक है दोस्तों? अच्छा जी। अब सेम डेट पर
सेम डेट पर आपको क्या करना है? जो लॉस आपने यहां पर दिखाया है, इस लॉस को रिवर्स कर देना है। क्योंकि इंश्योरेंस कंपनी ने
क्लेम एक्सेप्ट कर लिया है। हालांकि इंश्योरेंस कंपनी क्लेम एक्सेप्ट करने में एकद दिन लगा सकती है। हो सकता है 5 तारीख
को आग लगे लेकिन क्लेम एक्सेप्ट हुआ है। इसका पता हमें 7 तारीख को लगे। तो फिर जो एंट्री अभी करवाऊंगा वो 7 तारीख को कर
देंगे। बट अभी तो सेम डेट पर इंश्योरेंस कंपनी का फोन आ गया कि हां जी हम पैसे देंगे। तो अब इस लॉस को यहां से हटा दो।
इस लॉस को रिवर्स बैक कर दो। यानी डेबिट से हटाने के लिए इसको क्रेडिट कर दो। टू लॉस बाय फायर।
ठीक है जी। कितने रुपए? ₹1 लाख। सर आपने ये लॉस पहले डेबिट में रिकॉर्ड करा। फिर उसको कैंसिल आउट क्यों कर दिया?
हटा क्यों दिया? क्योंकि ये लॉस मुझे झेलना ही नहीं पड़ रहा। मुझे तो पूरे ₹1 लाख इंश्योरेंस कंपनी देने वाली है। क्या
बात है? तो क्योंकि पूरे ₹1 लाख मुझे इंश्योरेंस कंपनी देने वाली है तो इंश्योरेंस कंपनी से मैं कहूंगा आजा फिर
डेटर बन जा मेरी। तो इंश्योरेंस कंपनी का अकाउंट यहां पर डेबिट हो जाएगा। इंश्योरेंस कंपनी से मुझे पैसे लेने हैं।
मेरी एसेट है ₹1 लाख तो यहां पर इंश्योरेंस कंपनी का अकाउंट डेबिट हो जाएगा जी ₹1 लाख से।
सर इस क्वेश्चन में क्या होता? अगर इंश्योरेंस कंपनी गेम में नहीं होती। अगर ये गुड्स इंश्यर्ड
होते ही नहीं तो क्या होता? तो फिर भी हम ये सेम एंट्री करते पर इंश्योरेंस कंपनी की जगह पूरा नुकसान हम
डाल देते प्रॉफिट एंड लॉस अकाउंट में। अब प्रॉफिट एंड लॉस अकाउंट का इंट्रोडक्शन जनरल चैप्टर में नहीं होना चाहिए वैसे तो
लेकिन कुछ स्कूल टीचर्स दे देते हैं ये वाली एंट्री जिसमें प्रॉफिट एंड लॉस अकाउंट है। सरासर गलत है ये 11th के बच्चे
को इस चीज में छेड़ना। लेकिन अब देते हैं तो मैं सिखा दूंगा आपको। ठीक है ना? जी। तो पहले इसको समझो। 5 तारीख को दो एंट्रीज
करनी है मैंने। अगर गुड्स का इंश्योरेंस नहीं होता। ठीक है ना? तो ये नीचे वाली एंट्री या तो मत करो वरना अगर कर रहे हो
तो लॉस को क्रेडिट करके प्रॉफिट एंड लॉस अकाउंट को हम डेबिट कर देते उस केस में। ठीक है जी? इतना समझ में आया? पर
इंश्योरेंस कंपनी मुझे चेक सेम डेट पे दे रही है या बाद में दे रही है? बाद में दे रही है जी 13 तारीख को। सेम डेट पर अगर
इंश्योरेंस कंपनी ने मुझे चेक दे दिया होता तो यहां पर सीधा बैंक अकाउंट नहीं आ जाता या चेक इन हैंड नहीं आ जाता। है ना?
तो चेक इंश्योरेंस कंपनी ने मुझे बाद में दिया है। ठीक है? चेक रिसीव्ड फ्रॉम इंश्योरेंस कंपनी और तो
और उस चेक को प्राप्त करने के बाद जमा मैंने और बाद में करवाया है तो सीखने को मिलेगा यहां पर भी आपको काफी कुछ पर 7
तारीख वाली एंट्री देखते हैं सबसे पहले 7 तारीख को दोस्तों मशीनरी खरीदी ₹1 लाख चेक से और इंश्योरेंस चार्जेस इंस्टॉलेशन
चार्जेस पे करें ₹5000 मशीनरी खरीदने पर आपको पता होगा मशीनरी का अकाउंट डेबिट होता है
और पैसा जा रहा है तो कैश या फिर बैंक अकाउंट क्रेडिट होता है। ठीक है?
अब मशीनरी के ऊपर आपने इंस्टॉलेशन चार्जेस भी पे कर दिए ₹5000। तो सेम डेट पर मुझे एक और एंट्री करनी
पड़ेगी। जिसमें मैं इंस्टॉलेशन चार्जेस का खर्चा दिखाऊंगा। इंस्टॉलेशन चार्जेस को डेबिट
करूंगा और पैसा जा रहा है तो बैंक अकाउंट को या कैश अकाउंट को क्रेडिट कर दूंगा। दोस्तों ऐसा सोचना गलत है। ये वीडियो
बिल्कुल एंड तक आने लगी है। तुम्हारा हो सकता है एनर्जी लेवल ड्रॉप हो रहा हो या कुछ हो रहा हो तो ऐसे में कुछ खा लो लेकिन
वीडियो को देखना एंड तक है। ठीक है सर मशीनरी जब आप खरीदते हो ना जब भी कोई फिक्स्ड एसेट आप खरीदते हो मैं आपको एक
रूल बता देता हूं। फिक्स्ड एसेट खरीदते वक्त जो भी खर्चा आप कर रहे हो डे वन व्हाटएवर एक्सपेंस यू आर मेकिंग टू पुट
दैट एसेट टू यूज़ टू ब्रिंग दैट एसेट टू इट्स प्रेजेंट लोकेशन एंड प्रेजेंट कंडीशन कोई नई फिक्स्ड एसेट खरीदते वक्त अगर आप
कोई खर्चा कर रहे हो उस एसेट को अपने पास तक लाने के लिए या उसे चालू करने के लिए हर उस खर्चे को कैपिटलाइज करना है यानी
एसेट की वैल्यू में ऐड करना है। मैंने ₹1 लाख की मशीनरी खरीदी पर मैंने ऊपर से ₹5000 के इंस्टॉलेशन चार्जेस पे करे ताकि
वो मशीन चालू हो पाए। यह जो आप डिजिटल बोर्ड देख रहे हैं जिसपे मैं पढ़ा रहा हूं। ये बोर्ड मैं अपने ऑफिस तक ले तो आया
लेकिन चालू कब होगा? जब मैं इसका इंस्टॉलेशन करवाऊंगा उसमें खर्चा आएगा। तो अगर यह बोर्ड मुझे
₹2 लाख का पड़ा है पर मुझे ऊपर से ₹10,000 और खर्च करना पड़ा तो मैं इस बोर्ड की वैल्यू पूरी ₹100 या ₹15,000 दिखाऊंगा।
तो सोचने वाली बात क्या है सर इसमें सर? आपको इंस्टॉलेशन चार्जेस जैसा कोई अकाउंट कभी भी ओपन नहीं करना होता। इंस्टॉलेशन
चार्जेस की जगह आप फिर से एक बार मशीनरी अकाउंट को ही डेबिट करेंगे ₹5,000 से। और कैश अकाउंट या बैंक अकाउंट
को आप क्रेडिट कर देंगे ₹5,000 से। यह दोस्तों इसमें सीखने वाली बात है। अब चलते हैं आगे। 13 तारीख को आपको चेक दे दिया
उसी इंश्योरेंस कंपनी ने जो इंश्योरेंस कंपनी 5 तारीख को गेम में आ गई थी। यह देख लो जी। अब भैया 13 तारीख को जब ये
इंश्योरेंस कंपनी मुझे चेक दे रही है तो मैं इंश्योरेंस कंपनी को कहूंगा ठीक है आप जाओ फिर इंश्योरेंस कंपनी का अकाउंट
मैं क्लोज कर दूंगा। इंश्योरेंस कंपनी को आपने डेबिट करा था ना क्लोज करने के लिए आप क्रेडिट कर दोगे ₹1 लाख से।
अब यह जो इंश्योरेंस कंपनी ने आपको चेक दिया है तो क्या यहां पर बैंक अकाउंट लिख दूं? नहीं। बैंक अकाउंट तब जब चेक के जमा
होने की तिथि गिवन नहीं होती। पर अभी तो इस क्वेश्चन में गिवन है कि चेक जो है वो आया कब है? 13 तारीख को। और आपने जमा
कराया उसे 20 तारीख को। तो इसलिए 13 तारीख को आप इसे बैंक में नहीं दिखा सकते। 13 तारीख को आपको बोलना पड़ेगा चेकक्स इन
हैंड। चेकक्स इन हैंड का अकाउंट आपको यहां पर डेबिट करना पड़ेगा ₹1 लाख से। हां, उसके
बाद जब आप इसे बाद में जमा करा दोगे, कौन सी तारीख को जमा हुआ है ये? जमा हुआ है 20 तारीख को। 20 तारीख को जब आप जमा कराओगे
तो आप एक बार फिर से एंट्री करोगे। 20 तारीख को जब आप इस चेक को जमा करा दोगे तो आप कह सकते हो कि बैंक में पैसा आ गया।
बैंक अकाउंट डेबिट। और अब चेक इन हैंड को खत्म कर दोगे। सो बैंक अकाउंट डेबिट टू चेकक्स इन हैंड अकाउंट।
₹1 लाख समझ में आया प्यारे बच्चों? है ना? यह है जी गेम। अब चलते हैं और आगे। अब ये 20 तारीख के बाद ये जो 24 तारीख की कहानी
है। 24 तारीख से लेकर और ये 31 तारीख तक की कहानी है। ये अलग है। इसको एक बार फिर से नए सिरे से पढ़ लेते हैं। 24 तारीख को
फिर गुड्स लॉस हो गए। पर इस बार आग नहीं लगी। इस बार एक्सीडेंट हुआ है। ठीक है? हमारे गुड्स हो सकता है सेल के
लिए जा रहे थे। बीच में दुर्भाग्यवश हमारा ट्रक पलट गया। गुड्स का एक्सीडेंट हो गया। खराब हो गए गुड्स। तो एक्सीडेंट हो गया।
पर गुड्स अभी भी इंश्यर्ड थे। पर इस बार इंश्योरेंस कंपनी आपको सिर्फ 80% क्लेम देगी आउट ऑफ 10,000। आराम से रिकॉर्ड
करेंगे प्यार से। 24 तारीख की ट्रांजैक्शन। ध्यान से देखिएगा। मार्च 24
सबसे पहले बेटा इरिस्पेक्टिव ऑफ द फैक्ट कि गुड्स का इंश्योरेंस था या नहीं था। लॉस को पहले रिकॉर्ड करना है। तो यहां पर
मैं इसको बोलूंगा लॉस बाय एक्सीडेंट ₹10,000। इस लॉस की वजह से मेरे पास से क्या चला
गया? गुड्स चले गए। और गुड्स चले जाने पर मैं परचेजेस अकाउंट को क्रेडिट करता हूं ₹10,000 से।
देन बेटा इसके बाद सेम डेट पर आपको यह देखना है कि इंश्योरेंस कंपनी पैसा दे रही है या नहीं दे रही है। तो इंश्योरेंस
कंपनी पैसा दे रही है। देने वाली है पर सिर्फ 80% आप देख सकते हैं यहां पर इंश्योरेंस कंपनी ने क्लेम एक्सेप्ट करा
है 80% और चेक 24 को नहीं दिया 25 को दिया है चेक बाद में दिया है। तो यहां पर दोस्तों लॉस को डेबिट से हटाने के लिए आप
करोगे क्रेडिट तो लॉस बाय एक्सीडेंट 10,000
ठीक है? पर इंश्योरेंस कंपनी आपको 10,000 नहीं देने वाली है। इस बार सिर्फ 80% देने वाली है। यानी इंश्योरेंस कंपनी डेबिट
होगी सिर्फ ₹8,000 से और बाकी ₹2000 का नुकसान आपको झेलना पड़ेगा जो कि आप एक स्पेशल अकाउंट में डालते हो जिसका नाम है
प्रॉफिट एंड लॉस अकाउंट जिसके बारे में आप पढ़ोगे टुवर्ड्स द एंड ऑफ दिस बुक टुवर्ड्स द एंड ऑफ योर कोर्स।
प्रॉफिट एंड लॉस अकाउंट। तो प्रॉफिट एंड लॉस अकाउंट को डेबिट करना पड़ेगा ₹2000 से। तो सर अगर इस क्वेश्चन
के अंदर इंश्योरेंस कंपनी ₹1 का भी क्लेम नहीं देती। ज़ीरो क्लेम देती ज़ीरो तो फिर पूरा 10,000 जाता प्रॉफिट एंड लॉस अकाउंट
में। और यहां पर इंश्योरेंस कंपनी का सवाल ही पैदा नहीं होता। और अगर इस क्वेश्चन में गुड्स का इंश्योरेंस हमने ही निकलवा
रखा तो इंश्योरेंस कंपनी तो जानती भी नहीं है तुम्हें। उस केस में भी फिर इंश्योरेंस कंपनी नहीं आती। पूरा 10 का 10 पीएंडएल
अकाउंट में प्रॉफिट एंड लॉस अकाउंट में जाता। बात समझ में आ रही है कि नहीं आ रही है? आगे चलते हैं दोस्तों। 24 तारीख को
इंश्योरेंस कंपनी ने वादा करा मैं आपको चेक दे दूंगी 8000 का पर चेक दिया 25 तारीख को लेकिन 25 तारीख को जो इंश्योरेंस
कंपनी ने मुझे चेक दिया ये मैंने जमा कब करवाया ये तो गिवन ही नहीं है तो मैं मान लूंगा कि मैंने सेम डेट पर जमा करा लिया
होगा और अगर सेम डेट पर जमा करा लिया होगा तो चेक इन हैंड का अकाउंट ओपन नहीं होगा सीधा बैंक अकाउंट में जाएगी पेमेंट 25
तारीख को। सो मार्च 25 सीधा-सीधा बैंक अकाउंट को आप डेबिट कर देंगे और इंश्योरेंस कंपनी का
अकाउंट क्लोज कर देंगे। टू इंश्योरेंस कंपनी 8000 8000
आ रही है बात समझ में? अब एक बड़ी इंपॉर्टेंट ट्रांजैक्शन मैंने आपको बतानी है। क्लोजिंग स्टॉक ₹15,000
दोस्तों ये भी इस चैप्टर में नहीं बनता पूछना। पर स्कूल टीचर लेते हैं पंगे। तो भाई आया है सिखा के जाएगा। अल्फा आर्मी है
हम लोग। कमेंट सेक्शन में फटाफट से लिख दो अल्फा आर्मी। ठीक है जी। तो क्लोजिंग स्टॉक क्या होता है? पूरे साल तो आप स्टॉक
को रिकॉर्ड नहीं करते। पूरे साल 1 मिनट रुकना यार। मुझे ना थोड़ा सा प्यास लगने लगी है अब तुमसे बातें करते-करते। जस्ट वन
सेकंड। हम तो पूरे साल तो हम स्टॉक को रिकॉर्ड करते
नहीं है भाई। पूरे साल तो हम परचेजेस अकाउंट में डालते रहते हैं। बेचते हैं तो सेल्स अकाउंट में
डालते रहते हैं। लेकिन साल के एंड पे गुड्स को हम फिजिकल वेरिफिकेशन में गिनते हैं। और साल के एंड में जो स्टॉक हमारे
पास बचा होता है उसको हम बोलते हैं क्लोजिंग स्टॉक। और पहली बार स्टॉक के नाम से अगर कोई अकाउंट ओपन होता है तो वो साल
के एंड में होता है। या फिर नेक्स्ट ईयर के बिगनिंग में वो भी हम सीखेंगे। तो सर 31 मार्च साल का एंड होता है। सबको पता
है। फाइनेंसियल ईयर एंड होता है 31 मार्च को। क्लोजिंग स्टॉक पता चला 15,000 तो सर क्लोजिंग स्टॉक को आपको रिकॉर्ड कर
देना है मार्च की 31 तारीख को और क्लोजिंग स्टॉक को रिकॉर्ड करने के लिए ऑफ कोर्स एसेट को रिकॉर्ड कर रहे हो तो
डेबिट ही करोगे क्लोजिंग स्टॉक का अकाउंट हो जाएगा डेबिट और ये एक स्पेशल अकाउंट में जाता है जिसका नाम है ट्रेडिंग अकाउंट
अभी के लिए इसको ऐसे ही समझ लो आप ठीक है बेटा ₹15,000 ₹15,000 क्लोजिंग स्टॉक जो है ट्रेडिंग
अकाउंट में चला जाता है। पहली बार स्टॉक का नाम लिया है मैंने इस पूरी वीडियो में। अदरवाइज़ परचेज़ सेल्स परचेस रिटर्न, सेल्स
रिटर्न और गुड्स के लिए जो इतनी सारी ट्रांजैक्शंस हमने अलग से पढ़ी थी वो सब। ओके? चलिए
इसके बाद इसके बाद हमारा एक क्वेश्चन ये है दोस्तों। इसमें लिखा है अह
फॉलोइंग बैलेंससेस एग्ज़िस्टेड इन द बुक्स ऑफ मेसेर्स आनंद स्टोर्स एज ऑन फर्स्ट अप्रैल
2025 1 अप्रैल 2025 नए साल वाला दिन नए साल वाले दिन आपके पास कुछ चीजें ऑलरेडी होती
हैं। अरे भाई वही चीजें जो पिछले साल के एंड में बचती हैं वो नए साल वाले दिन दिखती है ना आपको बिनेस में। तो क्या होता
है दोस्तों? हर साल के एंड में हम अपने अकाउंट्स को क्लोज करते हैं बाय पासिंग सम क्लोजिंग एंट्रीज। क्लोजिंग एंट्रीज तो
इतनी इंपॉर्टेंट नहीं है इस चैप्टर के लिए क्योंकि वो चैप्टर 1819 में आती है। पर ओपनिंग एंट्री इंपॉर्टेंट है कि जब नया
साल हम देखो जब साल की शुरुआत होती है 1 अप्रैल को तो दो बातें होंगी। या तो बिज़नेस ही उसी दिन स्टार्ट हो रहा है। पर
अमूमन ऐसा नहीं होता। हर साल थोड़ी बिज़नेस शुरू होता है हमारा। तो सपोज 1 अप्रैल 2025 डेट आई और बिज़नेस तो हमारा सालों साल
से चल रहा है। तो 1 अप्रैल को क्या मुझे कुछ एंट्री पास करनी है? यस। उसको हम बोलते हैं ओपनिंग एंट्री। ओपनिंग एंट्री
हमें पास करनी है उन अमाउंट्स के साथ उन फिगर्स के साथ जो फिगर्स पिछले साल की बची हुई है हमारे पास। तो आप देख सकते हैं
हमारे पास कुछ एसेट्स हैं जिसमें कैश है, बैंक है, स्टॉक है, फर्नीचर है और डेटर है। हमारे पास कुछ लायबिलिटीज़ भी हैं।
जैसे कि लोन फ्रॉम विकास जैसे कि क्रेडिटर्स एंड वी हैव टू पास अ नेसेसरी जर्नल एंट्री। देयर इज़ ओपनिंग एंट्री।
कैसे होने वाली है वो ओपनिंग एंट्री? ध्यान से देखिए। 2025 अप्रैल वन। कुछ नहीं करना। जितनी भी
एसेट्स नजर आई, जितनी भी एसेट्स नजर आई, सबको डेबिट कर दो। क्योंकि एसेट्स का खाता खोलने के लिए हम डेबिट करते थे हमेशा से।
तो एसेट्स जितनी भी नजर आ रही है ना सबको डेबिट कर दो। कैश बैंक, स्टॉक, फर्नीचर, डेटर।
ठीक है जी? कैश, बैंक, स्टॉक, फर्नीचर एंड डेटर्स।
सबका अकाउंट हो जाएगा डेबिट। आई डोंट थिंक जर्नल की किसी भी शॉर्टकट वीडियो में आपको दिस नंबर ऑफ क्वेश्चंस की प्रैक्टिस
मिलेगी। आप पूरा YouTube खंगाल लेना अपनी तरफ से। ठीक है? सो मैं अभी बोल रहा हूं। वैसे तो मुझे वीडियो के एंड में बोलना
चाहिए। अगर आपको ये वीडियो सच में अच्छी लग रही है तो आप प्लीज हमें कमेंट सेक्शन में बताएं। और अगर आपकी कोई सजेशन भी है
या कुछ और भी पढ़ना है आपको हमारी तरफ से तो प्लीज कमेंट सेक्शन में बताएं और यह वीडियो अपने और भी दोस्तों के साथ शेयर
करना। है ना? क्योंकि ये किसी भी पॉइंट ऑफ़ टाइम पर आपको काम आ सकती है। वेदर इट इज़ योर फाइनल एग्जाम, योर यूनिट टेस्ट, योर
हाफ ईयरली एग्जामिनेशन, पीरियडिक टेस्ट, प्रोजेक्ट वर्क कभी भी आपको काम आ सकता है। जी। तो जितनी भी एसेट्स हैं, तमाम
एसेट्स को हम डेबिट कर देंगे। 60, 40, 150, 50 एंड 145 150 50 एंड 145
तो आप देख सकते हैं जितनी भी एसेट्स का मुझे अकाउंट मिला मैंने सबको डेबिट कर दिया। ठीक है? उसके बाद लायबिलिटी भी है
दो। तो लायबिलिटीज की रिकॉर्डिंग क्रेडिट में होती है। लोन फ्रॉम विकास एंड क्रेडिटर्स। तो लोन फ्रॉम विकास और
क्रेडिटर्स इसका अकाउंट हम क्रेडिट कर देंगे। टू लोन फ्रॉम विकास
एंड टू क्रेडिटर्स अकाउंट। बात करें लोन फ्रॉम विकास और क्रेडिटर की तो लोन फ्रॉम विकास है 35 और क्रेडिटर है
10। यह है 35 और क्रेडिटर है ₹10,000। [संगीत] अब जरा मुझे चेक करके बताओ कि बन गई है
एंट्री। डेबिट क्रेडिट बराबर हो गया? नहीं हुआ ना? आप देख पा रहे हो जितनी भी एसेट्स हैं ये तमाम एसेट्स आपने डेबिट कर दी है
ना इन सब एसेट्स को आपने डेबिट डेबिट डेबिट डेबिट डेबिट सबको डेबिट कर दिया आपने एक बार टोटल करें इनका 6041 लाख एंड
दिस इज़ 2 लाख 2 लाख प्लस 1 लाख 3 लाख 3 + 145 445 मेरी तमाम एसेट्स का जो टोटल है वो है 445
यानी मेरे डेबिट का टोटल है 445 जबकि क्रेडिट में सिर्फ 45 है तो एंट्री तो बन नहीं
वो इसलिए कि एसेट्स कांट बी इक्वल टू जस्ट लायबिलिटीज़। कम ऑन एसेट्स कांट बी इक्वल टू जस्ट लायबिलिटीज़। दोस्तों एसेट्स आर
इक्वल टू लायबिलिटीज़ प्लस कैपिटल। तो कैपिटल इस क्वेश्चन में गिवन नहीं थी और आपको खुद कैपिटल निकालनी थी। कैपिटल
निकालने का तरीका वही अकाउंटिंग इक्वेशन वाला पुराना बेसिक तरीका है। कैपिटल का फार्मूला क्या होता है? एसेट्स माइनस
लायबिलिटीज़। सो व्हाट वी आर गोइंग टू डू इज़ वी हैव टू डिडक्ट दिस अमाउंट ऑफ़ 45000 फ्रॉम दिस
445. सो कैपिटल विल बी आई थिंक 4 लाख। आप देख सकते हैं कैपिटल आंसर में है ₹4 लाख। तो कैपिटल को भी रिकॉर्ड करना है यहां पर
आकर टू कैपिटल अकाउंट ₹4 लाख। बेटा दिस इज़ हाउ वी पास अ क्लोजिंग एंट्री इन द बुक्स ऑफ़ अकाउंट्स।
नॉट नॉट क्लोजिंग एंट्री। दिस इज़ ओपनिंग एंट्री। तो नरेट भी आप इसको ऐसे ही करेंगे कि बीइंग एन ओपनिंग एंट्री पास्ड बीइंग एन
ओपनिंग एंट्री पास्ड इन द बुक्स हमने एक ओपनिंग एंट्री पास कर दी अपनी बुक्स ऑफ अकाउंट्स के अंदर क्लियर हो गया
दोस्तों हां देखें अब कुछ बचा है क्या हां पीछे भैया आपने एक क्वेश्चन छुड़वा दिया था एक बार करवा दो भैया प्लीज तो ये है जी वो
क्वेश्चन जनरलाइज़ द फॉलोइंग ट्रांजैक्शंस ठीक है इन सब ट्रांजैक्शंस को भी हम एक जनरलाइज़ कर लेते हैं। नया सीखने को मिलेगा
हमें कुछ ना कुछ। तो ये कुछ पॉइंट्स हैं सर। शुरू करते हैं फटाफट से। सबसे पहला पॉइंट
सबसे पहला पॉइंट तो यहीं पर ही रिकॉर्ड कर देता हूं मैं। इंटरेस्ट ड्यू बट नॉट रिसीव्ड ₹10,000। बेटा वो इंटरेस्ट जो
ड्यू हो गया पर हमें रिसीव नहीं हुआ। पर ब्याज तो दो दो तरह का होता है। एक वो ब्याज जो हम पे करते हैं और एक वो ब्याज
जो हमें मिलता है। तो कौन से वाले ब्याज की बात हो रही है जो मिलता है हर बार। बट नॉट रिसीव्ड लिखा है ना।
यानी मिलना था पर हमें नहीं मिला। इस तरह की इनकम को हम बोलते हैं अक्रूड इनकम। क्या बोलते हैं? अक्रूड इनकम। यस। और
अक्रूड इनकम वो इनकम है जो आपने कमाई है पर आपको मिली नहीं है। कैसे इसको रिकॉर्ड करना है? ध्यान से देखिएगा। आपको डेबिट
में एक एसेट क्रिएट करनी है अक्रूड इंटरेस्ट के नाम से। और क्रेडिट में अपनी इनकम रिकॉर्ड करनी है
इंटरेस्ट के नाम से। अक्रूड इंटरेस्ट अकाउंट डेबिट टू इंटरेस्ट अकाउंट ₹10,000
इसके बाद इसके बाद सेकंड पॉइंट में लिखा है सैलरीज ड्यू टू स्टाफ 50,000 बेटा ड्यू का मतलब पेएबल भी होता है या आउटस्टैंडिंग
भी होता है। असल में क्या हुआ? पूरे महीने हमने स्टाफ से काम कराया लेकिन सैलरी देने की डेट आई और हमने सैलरी दी नहीं अभी।
हमने अभी सैलरी दी नहीं। तो जब भी किसी खर्चे की पेमेंट की डेट आ गई पर आपने वह खर्चा अब तक पे नहीं करा। यानी बेनिफिट
कंज्यूम कर लिया लेकिन पेमेंट नहीं करी। ऐसे खर्चों को हम बोलते हैं आउटस्टैंडिंग एक्सपेंसेस। और आउटस्टैंडिंग एक्सपेंस को
रिकॉर्ड करने का तरीका क्या है? पॉइंट नंबर टू के माध्यम से बताता हूं। बेटा आउटस्टैंडिंग एक्सपेंस को रिकॉर्ड करने के
लिए आपको क्या करना है? सबसे पहले तो जो एक्सपेंस है उसका नाम लिख देना है। सैलरीज अकाउंट डेबिट। कितने रुपए की सैलरीज हैं
ये? ₹00 की सैलरीज हैं तो ₹50,000 से आपका सैलरी अकाउंट डेबिट हो जाएगा। अब बहुत
आराम से ठंडे दिमाग से सुनो। बेटा नॉर्मली अगर आप सैलरी पे करते हो तब भी सैलरीज को डेबिट ही करते हो। और चकि पेमेंट हो रही
होती है तो आप यहां पर क्रेडिट कर देते हो कैश अकाउंट को या बैंक अकाउंट को। अब क्योंकि पेमेंट नहीं हुई तो सर पे कर्जा
चढ़ गया। इस कर्जे को हम बोलते हैं आउटस्टैंडिंग सैलरीज या सैलरीज पेएबल। तो यहां पर आपको सैलरीज पेएबल करके एक अकाउंट
ओपन कर देना है। और यहां पर लिख देना है 500। ठीक है बेटा? खर्चा और कोई भी हो सकता है जो इस तरह से
पेएबल हो जाए, आउटस्टैंडिंग हो जाए, ड्यू हो जाए तो सैलरी की जगह उस खर्चे का नाम आ जाएगा, रेंट आ जाएगा, इलेक्ट्रिसिटी आ
जाएगा, वेजेस आ जाएगा, कुछ भी हो सकता है। ठीक है जी? आगे चलते हैं। आगे लिखा है आउट ऑफ द रेंट पेड दिस ईयर 5,000 इज़ फॉर द
नेक्स्ट ईयर। यानी कि हमने टोटल जितना भी रेंट पे करा इस साल उसमें से ₹5,000 का रेंट वो है जो हमें अगले साल पे करना था।
ओहो। तो थर्ड ट्रांजैक्शन में
थर्ड ट्रांजैक्शन में आपको पता चलता है कि थोड़ा सा रेंट आपने प्रीपे कर दिया है प्रीपेड रेंट तो प्रीपेड रेंट का अकाउंट
आपको डेबिट कर देना है बेटा ₹5000 से और जो आपने मोटा खर्चा दिखाया हुआ है रेंट का डेबिट में कहीं ना कहीं उसे क्रेडिट कर
देना है रिवर्स करने कर देना है ₹5000 से सो प्रीपेड रेंट की एंट्री होती है बेटा प्रीपेड रेंट अकाउंट डेबिट टू रेंट अकाउंट
हमेशा ध्यान रखना। आते हैं जी फोर्थ ट्रांजैक्शन पे। फोर्थ ट्रांजैक्शन में क्या लिखा है? जी दोस्तों 10% डेप्रिसिएशन
लगा देना है फर्नीचर पे जिसकी कीमत थी 1 लाख। डेप्रिसिएशन का मतलब हमारी एसेट्स की वैल्यू में गिरावट आना। ड्यू टू यूसेज,
ड्यू टू ऑब्सोलसेंस, ड्यू टू वियर एंड टियर वगैरह-वगैरह। सो डेप्रिसिएशन एक खर्चा है। ऑफ़ कोर्स। सो
डेप्रिसिएशन का अकाउंट डेबिट हो जाएगा। और डेप्रिसिएशन लगने की वजह से एसेट कम हो रही है ना। एसेट जब भी कम होती है तो
क्रेडिट होती है। सो एंट्री विल बी डेप्रिसिएशन अकाउंट डेबिट टू जो भी एसेट का नाम है लाइक फर्नीचर
10% के हिसाब से ₹10,000 का डेप्रिसिएशन लगा दिया मैंने फर्नीचर के ऊपर आप देख सकते हैं।
ये हम पहले ही कर चुके हैं। गुड्स यूज़्ड इन मेकिंग ऑफिस फर्नीचर। बस हमेशा कॉस्ट पे खेलना है आपको। सेल प्राइस तो चाहे 5
करोड़ हो। लेकिन हमारी जो लागत लगी है वो तो 4000 ही है ना? अच्छा जी। उसके बाद हमें रिसीव हुई है कमीशन ₹00 की वो भी चेक
से जिसमें से आधी एडवांस है। ये बड़ी इंपॉर्टेंट बात है। ₹00 की कमीशन सिक्स्थ एंट्री।
देखो भैया रिसीव अगर हो रहा है तो पैसा तो आ रहा है। नो डाउट। तो कैश या बैंक अकाउंट तो देखो डेबिट होगा ₹00 से।
अब जो आपको कमीशन रिसीव हुई है वो दो पार्ट्स में है। एक वो जो आपकी कमाई है एक्चुअली जिसको आप बोलते हो कमीशन रिसीव्ड
और एक वो जो कमाई नहीं है एडवांस में रिसीव हो गई है। यानी कि एडवांस कमीशन। तो दो पार्ट्स में आपको इसको रिकॉर्ड करना
है। शुरू का 10,000 आपकी इनकम के लॉजिक से रिकॉर्ड हो रहा है और अगला 10,000 आपकी लायबिलिटी के लॉजिक से रिकॉर्ड हो रहा है।
वेरी वेरी इंपॉर्टेंट है। इसके बाद आती हैं दो और छोटी-छोटी ट्रांजैक्शंस इंटरेस्ट ऑन कैपिटल एंड इंटरेस्ट ऑन
ड्रॉइंग ₹8,000 और ₹1,500। यह समझने के लिए 11th क्लास का बच्चा अभी बहुत छोटा बेबी होता है। पर फिर भी मैं कोशिश करता
हूं समझाने की। इंटरेस्ट ऑन कैपिटल और इंटरेस्ट ऑन ड्रॉइंग। देखो जी
इंटरेस्ट ऑन कैपिटल को रिकॉर्ड करने के लिए हमेशा आपको इंटरेस्ट ऑन कैपिटल का अकाउंट करना है डेबिट
और कैपिटल का अकाउंट करना है क्रेडिट और बेटा इंटरेस्ट ऑन ड्रॉइंग को रिकॉर्ड करने के लिए
ड्रॉइंग्स का अकाउंट करना है डेबिट और इंटरेस्ट ऑन ड्रॉइंग्स का अकाउंट करना है क्रेडिट।
ठीक है? इसके लॉजिक पे आप अभी मत जाओ। क्लास 11th में इसका लॉजिक जब आप कक्षा 12वीं में आते हो ना तो वहां पर
पार्टनरशिप अकाउंटिंग पढ़ते हैं हम। वहां पर इसका लॉजिक आपको समझ में आता है बेटा। ठीक है? सो ये है जी आपका आज का सेशन। तो
इसी के साथ आपका जनरल चैप्टर हो गया है खत्म। मैंने वादा किया था कि यह वीडियो कितनी भी लंबी जाए मैं जनरल की सभी
इंपॉर्टेंट ट्रांजैक्शंस को इस वीडियो के अंदर इनकर्पोरेट करूंगा। अगर ये वीडियो आपको अपने काम की लगी हो तो प्लीज अपने
दोस्तों के साथ जरूर शेयर करें ताकि उनको भी इस वीडियो का फायदा मिल सके। थैंक यू सो मच एंड गॉड ब्लेस यू ऑल द अल्फा आर्मी।
ऐसे ही पढ़ाई करते रहिए और मुस्कुराते रहिए। थैंक यू सो मच।
The video is highly accurate, with all major factual claims verified against standard textbooks like TS Grewal’s Accountancy for Class 11. Topics such as the rules of debit and credit, journal entries, and treatment of discounts align perfectly with accepted accounting standards.
No, the informal language (e.g., 'goli maro') is a stylistic choice that does not compromise factual accuracy. While some students may find it distracting, the core content remains pedagogically sound and exam-relevant.
Yes, it covers the entire 'Journal' chapter comprehensively and includes practice questions. The instructor uses real-life examples and repetition to reinforce key concepts, making it a reliable resource for exams.
No factual errors were found. The analysis confirmed that all accounting rules and procedures presented are correct, from modern account classification to compound entries. Minor non-factual promotional statements (e.g., 'This video will blow your mind') do not affect learning.
The instructor responsibly notes that some topics, like interest on capital/drawings, will be properly explained in Class 12. This disclaimer prevents confusion and aligns with curriculum progression.
The high score reflects its exceptional factual accuracy, comprehensive coverage, and effective teaching methods. The moderate deduction accounts for informal language that may not suit all learners, but the content remains trustworthy for exam prep.
Absolutely. With verified accuracy and a structured approach to key concepts, this video is a strong supplement to textbooks. Pair it with practice for best results.
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