Light: The Basics
Light is a form of energy that is not visible itself but enables us to see objects. It travels in a straight line (rectilinear propagation) at a speed of 3 × 10⁸ m/s and can travel through a vacuum.
Reflection of Light
Reflection is the bouncing back of light rays when they strike a surface. For a deeper dive into the principles behind this, see our guide on Understanding the Reflection of Electromagnetic Waves: A Comprehensive Guide.
Key Terms in Reflection (Ray Diagram)
- Incident Ray: The ray that strikes the surface.
- Reflected Ray: The ray that bounces off.
- Normal: An imaginary line perpendicular to the surface at the point of incidence.
Laws of Reflection
- Angle of incidence (∠i) = Angle of reflection (∠r)
- The incident ray, reflected ray, and normal all lie in the same plane.
Lateral Inversion
This is the phenomenon where the left and right sides of an object appear reversed in a mirror. Example: The word "AMBULANCE" is written backwards on vehicles so it appears correctly in rear-view mirrors.
Plane Mirror Characteristics
- Forms a virtual and erect image.
- Image size = Object size.
- Image distance = Object distance from the mirror.
- Focal length = Infinite.
Spherical Mirrors
Spherical mirrors are of two types:
- Concave Mirror: Converging mirror (caves in like a cave). Used for magnifying images.
- Convex Mirror: Diverging mirror (bulges out). Always forms small, virtual images.
To better understand the geometry and principles that govern these mirrors, refer to Understanding Geometrical Optics: Principles, Mirrors, and Lenses.
Important Terms for Spherical Mirrors
- Pole (P): The midpoint of the reflecting surface.
- Center of Curvature (C): The center of the sphere of which the mirror is a part.
- Radius of Curvature (R): Distance from P to C.
- Principal Axis: The line passing through P and C.
- Principal Focus (F): The midpoint of C and P.
- Focal Length (f): Distance from P to F.
- Aperture: The diameter of the reflecting surface.
Key Relation: R = 2f (Radius of Curvature = 2 × Focal Length)
Rules for Ray Diagrams (Concave & Convex)
- A ray parallel to the principal axis passes through (or appears to pass through) the focus (F).
- A ray passing through the focus becomes parallel to the principal axis.
- A ray passing through the center of curvature (C) reflects back along the same path.
- A ray striking the pole (P) reflects at the same angle to the principal axis.
Image Formation by Concave Mirror (with the "Candle" Trick)
Use the counting trick with positions marked 1 to 6 from Infinity to the Pole:
| Object Position | Image Position | Nature of Image | Size | | :--- | :--- | :--- | :--- | | 1. At Infinity | At F | Real & Inverted | Highly Diminished | | 2. Beyond C (Between ∞ and C) | Between C and F | Real & Inverted | Diminished | | 3. At C | At C | Real & Inverted | Same Size | | 4. Between C and F | Beyond C | Real & Inverted | Enlarged | | 5. At F | At Infinity | Image not formed (as per updated NCERT) | - | | 6. Between P and F | Behind the mirror | Virtual & Erect | Enlarged |
Key Insight for Answering Questions:
- Real images are inverted and formed on the left (in front) of the mirror.
- Virtual images are erect and formed on the right (behind) the mirror.
Image Formation by Convex Mirror
Convex mirrors have only two main cases. They always form a virtual, erect, and diminished image.
- Object at Infinity: Image at F (point-sized, virtual).
- Object Anywhere Else: Image is formed between P and F (behind the mirror).
Uses of Mirrors
- Concave: Shaving mirrors, dentist mirrors, headlights, solar furnaces.
- Convex: Rear-view mirrors (vehicles), security mirrors (shops/hotels) for a wider field of view.
Sign Convention & Mirror Formula
Sign Convention
- All distances measured from the pole (P).
- Left side (in front of mirror): Negative
- Right side (behind mirror): Positive
- Upward direction: Positive
- Downward direction: Negative
Standard Terms
- u: Object distance (always negative for real objects)
- v: Image distance
- f: Focal length (concave = negative, convex = positive)
- h₀: Object height (positive if above axis)
- hᵢ: Image height (positive if above axis)
Mirror Formula
1/v + 1/u = 1/f
Magnification (m)
m = hᵢ / h₀ = -v / u
- m < 0: Image is real and inverted.
- m > 0: Image is virtual and erect.
- |m| > 1: Image is enlarged.
- |m| < 1: Image is diminished.
Numerical Examples & Practice Questions
Example 1: Magnification
An object of height 15 cm placed in front of a concave mirror. The image is 45 cm tall and real.
- h₀ = +15 cm (upright)
- hᵢ = -45 cm (inverted, so negative)
- m = hᵢ / h₀ = -45 / 15 = -3
Example 2: Erect Image in Concave Mirror
To obtain an erect (virtual) image using a concave mirror (f = 10 cm), where should the object be placed?
Answer: The object must be placed between the pole (P) and the focus (F), i.e., at a distance less than 10 cm from the mirror.
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साइंस से डर लग रहा है ना? अरे बट व्हाई टू फियर व्हेन योर प्रशांत भैया इज हियर। सो हाय एवरीवन मैं हूं आप सभी का अपना
प्रशांत भैया और फिर से आ गया हूं एक नए वन शॉट के साथ और चैप्टर का नाम है लाइट। हां ये वही चैप्टर है जिससे कि तुम घबराते
रहते हो, डरते रहते हो। भैया न्यूमेरिकल सॉल्व नहीं हो पाते आज हो जाएंगे। भैया ये रे डायग्राम कैसे बनाऊं? एक ऐसी ट्रिक
बताऊंगा कि तूने सोची नहीं होगी। है ना? तो इस पूरे चैप्टर को वन शॉट के अंदर फनी तरीके से मजेदार तरीके से इंटरेस्टिंग
तरीके से और बहुत सारे सवाल लगाएंगे। ये सवाल तुम्हारे एग्जाम्स के अंदर बोर्ड एग्जाम्स के अंदर, स्कूल एग्जाम्स के अंदर
रिपीट होने के चांसेस बहुत ज्यादा हाई हैं। ठीक है? सब कुछ करेंगे डिटेल में। है ना? बस तू इतना ध्यान रख। व्हाई टू फियर
व्हेन योर प्रशांत भैया इज़ हियर। ठीक है? जबजब तुझे प्रॉब्लम आएगी ना, तेरा भाई यहां पर खड़ा है। ठीक है? तेरा बड़ा भाई
यहां पर खड़ा है। तुझे उतनी लोड नहीं लेनी है। मैं हूं। चलो जी। बहुत बढ़िया क्या ही बैनर बनाया है। देख रहे हो कितना सुंदर लग
रहा हूं मैं। वैसे मैं सुंदर हूं ही बट ठीक है। चलो जी। आज हम क्या-क्या करने वाले हैं? टॉपिक्स क्या-क्या कवर करने
वाले हैं? सारे टॉपिक्स जो जो आपके एनसीईआरटी के अंदर हैं जैसे कि रिफ्लेक्शन ऑफ लाइट, स्फेरिकल मिरर, साइन कन्वेंशन,
न्यूमेरिकल करेंगे, रिफ्रेक्शन ऑफ लाइट करेंगे। फिर लेंस भी पढ़ेंगे और पावर ऑफ लेंस भी पूरा का पूरा कंप्लीट कर रहे
होंगे। ठीक है? मजेदार तरीके से पढ़ेंगे। नोट्स आपको Telegram पे अपलोड हो जाएंगे। या फिर मैं डिस्क्रिप्शन में भी लिंक डाल
दूंगा। है ना? तो नोट्स बाद में पर बाद में पहले लेक्चर देखना। बाद में नोट्स डाउनलोड करना। अभी नोट के पीछे मत भागो।
है ना? वैसे पता है मुझे तो उन स्टूडेंट्स के लिए सबसे ज्यादा बुरा लगता है जो कि क्लास में बैठ के नोट्स बनाते हैं और उनका
दोस्त जब उनसे पूछता है ना कि भाई नोट्स दे दे तो अच्छी खासी फोटोज लेते हैं और नोट्स भेज देते हैं। पर वहीं पर जब वो
स्टूडेंट्स किसी और से नोट्स मांगते हैं। है ना? भाई यार मैंने नोट्स नहीं बनाए। मुझे नोट्स दे दे तो उनकी मदद कोई नहीं
करता। है ना? उनके लिए बुरा लगता है यार। चलो कोई बात नहीं पर मैं अच्छा इंसान हूं। मैं नोट्स दूंगा। आ जाओ। स्टार्ट करते
हैं। लाइट क्या है? रोशनी भैया हमारे जीवन में तो अंधकार है। अरे नहीं नहीं जीवन में उजाला हो जाएगा तेरे भी। पहले समझ लाइट
क्या है? तो लाइट क्या है? लाइट इज अ फॉर्म ऑफ एनर्जी। बड़ी बेसिक सी चीज है। एक एनर्जी की क्या है? फॉर्म है। एक बड़ा
फन फैक्ट बताता हूं आपको कि लाइट इटसेल्फ इज नॉट विज़िबल। यानी हम लाइट को देख नहीं सकते। लाइट की वजह से हम सब कुछ देख सकते
हैं। क्या बात समझ में आई? अब देखो, लाइट की स्पीड सबको पता होगी। 3 * 10 रे टू पावर 8 मीटर पर सेकंड। छोटी-छोटी क्लासेस
से पढ़ते आ रहे हैं। ओहो छोटी क्लासेस में तो तुमने पढ़ाई करी कहां थी? रोस्ट नहीं कर रहा हूं बेटा। ठीक है? है ना? उसके
अलावा लाइट जो है वो रेक्टिलिनियर मोशन करती है। रेक्टिलिनियर मोशन क्या होता है? यानी वो सीधी चलती है। है ना? वो भी
तुम्हारे प्रशांत भाई की तरह सीधा है एकदम। ठीक है? तो रेक्टिलिनियर प्रोपगेशन यानी लाइट जो होती है एकदम सीधी जाती है।
उसके अलावा लाइट कैन आल्सो ट्रैवल इन वैक्यूम। वो भी हमने ऑलरेडी छोटी क्लासेस के अंदर, नाइंथ क्लास के अंदर, एथ क्लास
के अंदर पढ़ रखा था। अब आते हैं मेन मुद्दे की तरफ जो कि है रिफ्लेक्शन। भैया ये रिफ्लेक्शन का है? ये क्या नया
फिनोमिना है? मैंने कहा ज्यादा लोड नहीं लेनी। रिफ्लेक्शन क्या है? टिक टिक टिक टिक टिक टिक यानी बाउंसिंग बैक ऑफ लाइट।
यानी लाइट आई आई आई आई आई टकराई और चली गई। है ना? लाइट आई टकराई चली गई। देखते हैं बेटा क्या है रिफ्लेक्शन ऑफ़ लाइट। द
फिनोमिना ऑफ़ बाउंसिंग बैक ऑफ लाइट रे व्हेन दे स्ट्राइक ऑन दी सरफेस ऑफ़ अ ऑब्जेक्ट। है ना? जब लाइट आई टकराई और चली
गई। है ना? उसी प्रकार से जैसे वो भी तुम्हारी जिंदगी में आई थी, टकराई थी और चली गई थी। ठीक है? उसी प्रकार से लाइट भी
आई, टकराई और चली गई। अब बहुत बेसिक चीजें ऑलरेडी पढ़ चुके हो। नहीं पढ़ा है तो बता देता हूं। यहां पर ना एक रे डायग्राम है।
इस रे डायग्राम को थोड़ा ज़ूम करता हूं। उससे आपको क्लेरिटी मिलेगी। देखो तीन चीजें होती हैं। सबसे पहले होती है
इंसिडेंट रे। पहले ये डायग्राम क्लियर दिख रहा है ना सबको? चलो इंसिडेंट रे। ये जो है ये है आपकी इंसिडेंट रे। यानी ये आई आई
आई आई आई। ठीक है? अब यहां पर था एक प्लेन सरफेस। क्या था बेटा? प्लेन सरफेस। इस पे टकराई और टकरा के चली गई। उसको हम बोलते
हैं रिफ्लेक्टेड रे। क्या बोलते हैं? रिफ्लेक्टेड रे। अब एक इमेजिनरी लाइन ड्रॉ करी जाती है। है ना? एक इमेजिनरी लाइन
ड्रॉ करी जाती है और उसको हम बोलते हैं नॉर्मल। क्या बोलते हैं? नॉर्मल। वो नॉर्मल क्या होता है? एक इमेजिनरी लाइन
परपेंडिकुलर टू दी सरफेस। ये जो सरफेस था इसके एक परपेंडिकुलर ड्रॉ करी जाती है। परपेंडिकुलर समझते हो ना? 90° हां। तो एक
परपेंडिकुलर ड्रॉ करी जाती है। उसको हम बोलते हैं नॉर्मल। ठीक है? तो तीन चीजें हैं रिफ्लेक्टेड रे, अ इंसिडेंट रे और
नॉर्मल। ठीक है? तो ये तीन चीजें ये आपको होपफुली पता होनी चाहिए कि इंसिडेंट रे क्या होता है? रिफ्लेक्टेड रे क्या होता
है? है ना? और नॉर्मल क्या होता है? नॉर्मल क्या है? इमेजिनरी लाइन परपेंडिकुलर टू दी सरफेस। बहुत बढ़िया
भैया। ये तो बहुत बेसिक चीजें हैं। मैंने कहा रुको जरा सबर करो। अभी टफ टफ चीजें भी दिखाऊंगा। ऐसे क्वेश्चन दिखाऊंगा जो कि
बोर्ड एग्जाम में डिट्टो छप के आते हैं। ठीक है? आ जाओ आ जाओ। देखो, दो लॉज़ हैं रिफ्लेक्शन के। व्हाट आर दी लॉज़ ऑफ
रिफ्लेक्शन? बेसिक दो लॉज़ हैं। पहला लॉ क्या बोलता है? लॉ ये बोलता है कि एंगल ऑफ इंसिडेंस एंगल ऑफ रिफ्लेक्शन के बराबर
होगा। अब तुम बोलोगे भैया इंसिडेंस एंगल क्या है ये? मैं कहता हूं दिखा देता हूं। देखो इस डायग्राम को ध्यान से देखो। एंगल
ऑफ इंसिडेंस क्या होता है? वो एंगल जो कि इस लाइन ये क्या है? इंसिडेंट रे। और ये क्या है? नॉर्मल है। इनके बीच का ये जो
एंगल तुम देख पा रहे हो इसको हम बोलते हैं एंगल आई। यानी एंगल ऑफ इंसिडेंस। सिमिलरली इसके और इसके बीच का जो एंगल है इसको हम
बोलते हैं एंगल r यानी एंगल ऑफ रिफ्लेक्शन। बेसिक है। तो भाई पहला रूल ये बोलता है कि जो दोनों एंगल है ना ये बराबर
हैं। ये बदलेंगे नहीं। है ना? ये तुम्हारे दोस्त की तरह नहीं है बेटा ये। ये सेम रहेंगे। ये बदलेंगे नहीं। ये एकदम सेम
रहेंगे। धोखाधड़ी नहीं करेंगे। ये दोनों सेम रहेंगे आपस में। तो पहला लॉ यही बोलता है एंगल ऑफ इंसिडेंस इज़ इक्वल्स टू दी
एंगल ऑफ रिफ्लेक्शन। दूसरा लॉ क्या बोलता है? दूसरा लॉ ये बोलता है कि जो तीनों रेज तुम देख रहे हो ना टिंग टिंग टिंग टिंग
टिंग टिंग टिंग टिंग टिंग टिंग टिंग टिंग तो ये जो तीन रेज तुम देख पा रहे हो ना ये तीनों की तीनों एक ही प्लेन पे लाई करेंगी
भैया प्लेन क्या होता है वो वाला प्लेन प्लेन यानी एक सरफेस तो तुम देख सकते हो ये तीनों की तीनों एक ही सरफेस पे हैं।
जैसे कि मान लो एक कागज है। है ना? कागज के ऊपर इंसिडेंट रे, रिफ्लेक्टेड रे और नॉर्मल। तीनों एक ही प्लेन पे क्या है?
लाई करेंगी। ठीक है जी? तो ये याद रखना आपका सेकंड लॉ इंसिडेंट रे रिफ्लेक्टेड रे एंड नॉर्मल क्या लाई करती हैं? एक है ना
एक ही प्लेन पे लाई करते हैं। चलो जी ये दो चीजें समझ आ गई क्या सबको? जल्दी से फटाफट से बता दो। अच्छा एक चीज याद रखना
अपने लेक्चर में ना जोश मीटर कितना है? वो तुम्हारा हाई रहना चाहिए। यानी एनर्जी मीटर क्या है? है ना? तो अपना जोश एकदम
हाई रहना चाहिए। जब तुम्हारा मास्टर यहां पर खड़ा होकर तुम्हें एनर्जी से पढ़ा सकता है। तो यार बेटा तुम क्यों नहीं है ना?
तुम क्यों लोड ले रहे हो यार? थोड़ी एनर्जी रखनी है एकदम हाई एनर्जी। जी वरना मैं रोस्ट कर देता हूं बेटा बहुत रोस्ट कर
एक तो मारता भी बहुत हूं बेटा बॉडी बना ली बॉडी बॉडी बना ली मारता हूं और हूं डंबलवंबल भी रखता हूं तो इसमें एनर्जी
हाईए रखना चलो जी आ जाओ अब बात करते हैं एक नए टॉपिक की जिसका नाम है मतलब एक डेफिनेशन है एक टर्म होती है लेटरल
इन्वर्जन हैं ये क्या है लेटरल इन्वर्जन है राइट का लेफ्ट लेफ्ट का राइट मतलब एक बार शीशे में जाकर खड़े हो जाओ जाओ जाओ
फटाफट जाओ जाओ जाओ शीशे में खड़े हो जाओ राइट हाथ उठाओ शीशे में कौन सा हाथ उठा लेफ्ट हाथ उठा उठा कि नहीं उठा? अगर
तुम्हारा राइट ही उठा बेटा तो इसका मतलब या तो शीशे में गड़बड़ है या तो बेटा तुम में गड़बड़ है। थोड़ा तांत्रिक वंत्रिक
बुला लो घर पे। ठीक है? लेटरल इन्वर्जन क्या होता है? एक ऐसा फिनोमिना जिसमें जब हम मिरर में राइट चीज देखते हैं तो वो
हमें लेफ्ट चीज मिरर में दिखाई देती है। ठीक है? तो क्या है? लेटरल इन्वर्जन इज़ दी फिनोमिना व्हेयर लेफ्ट एंड राइट साइड्स ऑफ
एन ऑब्जेक्ट अपीयर रिवर्स्ड। है ना? अपीयर रिवर्स यानी उल्टे हो जाते हैं। इसका सबसे बड़ा एग्जांपल क्या इसका सबसे बड़ा
एग्जांपल है एंबुलेंस। एंबुलेंस जो होती है ना उनप हमेशा उल्टा लिखा जाता है। आपने अगर देखा हो कभी एंबुलेंस तो उस पे जो
एंबुलेंस है वो उल्टा लिखते हैं। पता है क्यों? क्योंकि मान लो मैं गाड़ी चला रहा हूं। पीछे एंबुलेंस है। मैं शीशे से
देखूंगा तो शीशे में वो एंबुलेंस मुझे सीधा दिखाई देगा। समझ रहे हो? है ना? इस वजह से एंबुलेंस में उल्टा एंबुलेंस लिखा
जाता है। तो एक क्वेश्चन भी पूछा जाता है कभी कबभार। व्हाट डू यू मीन बाय लेटरल इन्वर्शन? व्हाई इज एंबुलेंस रिटर्न
लेटरली इनवर्टेड? उल्टा क्यों लिखा जाता है? ताकि जो आगे गाड़ी वाला है वो शीशे में देखे और उसे एंबुलेंस दिख जाए और वो
रास्ता दे दे। है ना? एंबुलेंस को जल्दी है भाई जल्दी जाना है। ऑब्वियस सी बात है। ठीक है? चलो जी। अच्छा अब बात करते हैं
प्लेन मिरर की। वही मिरर जिसमें कि राइट का लेफ्ट, राइट का हां वही वाला। तो प्लेन मिरर हम सबके घर में है। उसके कुछ फीचर्स
बताओ। कैरेक्टरिस्टिक्स बताओ। है ना? क्या-क्या फीचर्स हो सकते हैं प्लेन मिरर के? चलो आ जाओ। प्लेन मिरर को थोड़ा सा
फीचर-चर खेलते हैं। देखो भाई सबसे पहले प्लेन मिरर में जितनी भी इमेज बनती हैं वो वर्चुअल बनती है। भैया ये वर्चुअल क्या
है? वर्चुअल यानी नकली। बेटा समझ दो प्रकार की इमेज एक रियल इमेज असली इमेज। एक वर्चुअल इमेज जो कि वर्चुअल दुनिया में
है ना? जैसे कि फॉर एग्जांपल फॉर एग्जांपल है ना? तुमने उसको मैसेज करा रिप्लाई नहीं आया। नहीं आया रिप्लाई तो बात नहीं हो
पाई। रियल दुनिया में बात नहीं हो पाई पर वर्चुअल दुनिया में तो बात हो सकती है ना? नकली दुनिया, सपनों की दुनिया। उसी प्रकार
से जो इमेज बनती है यहां पर प्लेन मिरर में वो कैसे बनती है? वो हमेशा वर्चुअल बनती है ना कि रियल। अच्छा एक चीज याद
रखना और इसको ना कहीं पर दिमाग के अंदर डाल के रख लो। रियल रियल का बड़ा भाई इनवर्टेड रियल का बड़ा भाई इनवर्टेड। यानी
जो भी इमेज रियल होगी वो पता है कैसी होगी? वो उल्टी होगी। उल्टी। कैसी होगी बेटा? उल्टी। ठीक है? और वर्चुअल वर्चुअल
वर्चुअल का बड़ा भाई बेटा कौन? वर्चुअल का बड़ा भाई इरेक्ट। इरेक्ट यानी सीधी। इरेक्ट यानी सीधी। ठीक है बेटा? कैसी
होगी? एकदम सीधी। बहुत बढ़िया। है ना? तो जब भी इमेज वर्चुअल बनेगी वो सीधी बनेगी। जब भी रियल बनेगी उल्टी बनेगी। ठीक है? अब
तुम खुद बताओ तुम शीशे में जाकर खड़े हो जाओ और देखो खुद को। क्या तुम्हारी इमेज सीधी बन रही है? अगर सीधी क्या बोल रहे
हो? नहीं बन रही। बेटा सीधी ही बन रही। बेटा नहीं बन रही तो फिर वही कॉल करें तांत्रिक। ठीक है? ऑब्वियस सी बात है।
सीधी ही बन रही होगी। है ना? कैसे? क्यों सीधी बनेगी? क्योंकि वो वर्चुअल इमेज है। तो वर्चुअल इमेज हमेशा कैसी बनती है बेटा?
इरेक्ट बनती है। बहुत बढ़िया। अच्छा आपके प्लेन मिरर में इमेज कैसी बनती है? लेटरली इनवर्टेड। अभी बताया टुम टुम बता दिया।
चलो आगे देखते हैं। अगला पॉइंट क्या है? सेम साइज ऑफ दी इमेज। यानी जो इमेज का साइज होगा वो ऑब्जेक्ट के साइज के सेम है।
जाके तुम सामने खड़े हो गए। तो जितनी तुम्हारी हाइट है उतनी ही आपको मिरर में दिखाई दे रही होगी। क्या ये बात सत्य है?
एक बार बता दो फटाफट से। हां बहुत बढ़िया। है ना? बहुत सही। सारी चीज सही चल रही है। आगे देखते हैं। अगला पॉइंट। द डिस्टेंस
बिटवीन द इमेज ऑब्टेंड फ्रॉम द मिरर इज़ सेम एज द डिस्टेंस बिटवीन द ऑब्जेक्ट फ्रॉम द मिरर। समझा रहा हूं बेटा लोड नहीं
लेना। मान लो तुम मिरर से ये मिरर है। मैं यहां खड़ा हूं। ये मिरर है। मैं यहां खड़ा हूं। ठीक है? तो जो इमेज बनेगी मिरर के
पीछे वो भी उतनी ही दूर पे बनेगी जितना मैं मिरर से दूर था। है ना? मैं यहां था। इतना डिस्टेंस था। उतने ही डिस्टेंस पे
मेरी इमेज बनेगी। बस ये कह रहा है और कुछ नहीं कह रहा। ठीक है? तो ये कुछ पॉइंट्स थे। इसके अलावा एक पॉइंट जिस पे बार-बार
हर बार एमसीक्यू क्वेश्चन पूछा जाता है वो है फोकल लेंथ ऑफ प्लेन मिरर। फोकल लेंथ क्या होती है? आगे बात करेंगे। पर अभी बस
तुम याद कर लो कि हमेशा फोकल लेंथ क्या होती है? इनफाइनाइट होती है। बेटा क्या होती है? इनफाइनाइट। तो याद रखना फोकल
लेंथ ऑफ दी प्लेन मिरर इज़ इनफाइनाइट। यानी हम उसे काउंट नहीं कर सकते। यहां तक की कहानी क्या हम सबको समझ आई? फटाफट से चैट
के अंदर बोलो। अब बढ़ते हैं पीके भैया। स्मार्ट पीके भैया। स्फेरिकल मिरर की तरफ। यहां तक सारी चीजें डन है? बहुत बढ़िया,
बहुत बढ़िया। यार देखो तुम ना वो स्टूडेंट्स हो जो कि एक रात पहले पढ़ के इतने अच्छे मार्क्स लेकर आ जाते हो। है
ना? तो सोचो अगर तुमने थोड़ी सी पढ़ाई लगकर कर ली तो तुम तो भाई इतिहास रच दोगे। अपने खुद के पोटेंशियल को कम मत नापो। तुम
वो हो जो कि एक रात पहले पढ़ के अच्छे मार्क्स ले आते हो। तो यार अभी तो समय है। तुम कितने अच्छे मार्क्स ला सकते हो। है
ना? राइट। चलो भाई। तो उसी मोटिवेशन के साथ आगे बढ़ते हैं। है ना? और और ढंग से चीज़ों को समझते हुए चलेंगे। आ जाओ। देखो
स्फेरिकल मिरर दो प्रकार के हैं। एक है कॉनकेव, एक है कॉन्वेक्स। भैया यह कॉनकेव कौन? अरे बेटा देख अरे बेटा देख
देख गुफा कैसी होती है? गुफा कैसी होती है? गुफा बेटा ऐसी कुछ होती है। गुफा में कौन रहता है? भालू रहता है। सुना होगा। तो
गुफा कैसी होती है? गुफा इस प्रकार से होती है। तो कौन केव में क्या आ रहा है? केव आ रहा है। केव है ना? अगर आप ध्यान से
देखोगे तो कौन केव? केव आ रहा है। केव यानी गुफा। तो जो कॉनकेव मिरर होगा वो इस प्रकार से होगा। यानी वो गुफा की तरह
होगा। उसकी एक साइड तो क्या होगी? पॉलिश्ड। पॉलिश्ड होगी। पॉलिश्ड यानी वहां पे लाइट टकरा नहीं सकती। ठीक है? और ये जो
दूसरी साइड होगी ये क्या होगी? ये रिफ्लेक्टिंग साइड होगी। क्या होगी बेटा? रिफ्लेक्टिंग साइड। ठीक है? तो ये हो गया
कॉनकेव गुफा। दूसरा क्या? कॉन्वेक्स। तो इसका एकदम अपोजिट। क्या करो? इसका ऐसे अपोजिट बना दो। है ना? और अंदर की तरफ
पॉलिश कर दो। क्या कर दो बेटा? अंदर की तरफ पॉलिश कर दो। बहुत बढ़िया। तो ये क्या है? कॉन्वेक्स। ये क्या है? कौन? केव। केव
यानी गुफा। गुफा जैसा दिखेगा। बहुत बढ़िया। ठीक है जी। ये दो प्रकार की अपनी मिरर्स होती हैं। अब यहां पर ना आपको कुछ चीजें
कुछ इंपॉर्टेंट टर्म्स हैं जो कि आपको पता होनी चाहिए। बहुत सारी इंपॉर्टेंट टर्म्स हैं। पोल, सेंटर ऑफ़ कर्वेचर, रेडियस ऑफ़
कर्वेचर। एक-एक करके समझते हुए चलेंगे। ठीक है? मैं आपको वापस से डायग्राम पे लाता हूं। उससे आपको और क्लेरिटी मिलेगी
बेटा। ठीक है? ये है आपका कॉन्वेक्स। ये है आपका कॉनकेव। आई होप ये इमेज आपको एकदम क्लियर होगी। ये इमेज आपको क्लियरली दिखाई
दे रही होगी। आई होप मैं थोड़ी सी ब्राइटनेस कम कर देता हूं। ठीक है जी? ताकि आपकी मदद हो जाए। अब तो अब तो एकदम
बढ़िया दिखाई दे रही होगी। चलो आ जाओ। देखो ध्यान से देखना बेटा ध्यान से। पोल क्या होता है? पोल। पोल क्या होता है
भैया? पोल डांस। नहीं बेटा पोल क्या होता है? पोल होता है ये जो रिफ्लेक्टिंग सरफेस है ये
क्या है? कॉनकेव मिरर। इसका जो मिड पॉइंट है, इसका जो मिड पॉइंट है बेटा वो पोल कहलाता है। ठीक है? रिफ्लेक्टिंग सरफेस का
मिड पॉइंट पोल कहलाता है। उसके अलावा समझना बेटा। अगर ये रिफ्लेक्टिंग सरफेस था है ना? तो ये किसी ना किसी पूरे के पूरे
सर्कल का एक छोटा सा पार्ट है। है ना? अगर हम इमेजिन करें एक पूरा का पूरा सर्कल अगर हम इमेजिन करें पूरा का पूरा सर्कल तो उस
सर्कल का जो सेंटर होगा हर सर्कल का एक सेंटर होता है ना वो होगा सेंटर ऑफ कर्वेचर। क्या बोलेंगे उसको? C लिखेंगे
उसको C है ना? और ये आएगा आपका सेंटर ऑफ़ कर्वेचर। बहुत बढ़िया। बहुत बढ़िया बेटा। आगे देखो। अगर एक लाइन हम पास करें, एक
ऐसी लाइन जो कि सेंटर ऑफ कर्वेचर और पोल से पास करेगी। तो उस लाइन को अपन क्या बोलेंगे? उस लाइन को अपन बोलेंगे
प्रिंसिपल एक्सिस। ये वो वाले प्रिंसिपल नहीं है तुम्हारे स्कूल वाले बेटा। ये कौन है? प्रिंसिपल एक्सिस। ठीक है? अगली चीज
और सबसे इंपॉर्टेंट चीज सेंटर ऑफ कर्वेचर और पोल इसका जो मिड पॉइंट है, इन दोनों का जो मिड पॉइंट है यानी एक बीच का जो पोर्शन
है, उसको हम बोलते हैं क्या? फोकस। या फिर बहुत सारी किताबों के अंदर प्रिंसिपल फोकस भी लिखा जाता है। ठीक है? हम फोकस बोल रहे
हैं। ठीक है? अब ध्यान से समझना। यहां से लेकर यहां तक का डिस्टेंस कहां से? सेंटर ऑफ कर्वेचर और पोल तक का जो डिस्टेंस है,
उसको मैं बोलता हूं रेडियस ऑफ कर्वेचर। क्योंकि सेंटर से सर्कल तक का डिस्टेंस क्या होता है? रेडियस होता है। पढ़ा? अबे
पढ़ा था तुमने? हां, बहुत बढ़िया। रेडियस ऑफ कर्वेचर। और फोकस से लेकर पोल तक का जो डिस्टेंस है, इसको मैं क्या बोलता हूं?
इसको मैं बोलता हूं फोकल लेंथ। क्या बोलता हूं बेटा? फोकल लेंथ। ठीक है? फोकल लेंथ। समझ आ गया? बहुत सही। अच्छा इसके अलावा अब
तुम खुद सोचो ये क्या था? मिड पॉइंट। ये क्या था? मिड पॉइंट। तो क्या मैं बोल सकता हूं? अगर मैं फोकल लेंथ को ट्वाइस कर दूं
यानी मैं फोकल लेंथ को टू टाइम्स कर दूं तो वो किसके बराबर होगा? रेडियस ऑफ कर्वेचर के। क्या ये चीज मैं बोल सकता
हूं? हां या ना? फटाफट फटाफट। हां, बहुत बढ़िया। एक तो यार तुम ये जितने भी सीबीएसई वाले बच्चे हैं ना इनके साथ
सीबीएसई वाले जो बच्चे हैं ना वो सबसे अलग अलग हैं। अनोखे हैं। पता है क्यों? इनके साथ प्रॉब्लम यह है ना इन्हें हिंदी
लिखनी आती है और ना इन्हें इंग्लिश बोलनी आती है। है ना? दोनों जगह पे लैग कर जाते हैं। या तो भैया अच्छे से हमें इंग्लिश ही
सिखा देते बोलना या तो हिंदी लिखना दोनों ही नहीं आ पा रहा है। है ना? रिलेटेबल हो गया। तो समझ आया? कैसे हुआ? टू टाइम्स ऑफ़
फोकल लेंथ। रेडियस ऑफ़ कर्वेचर के बराबर हो गया। बहुत बढ़िया। बहुत बढ़िया। अच्छा। अब ये जो रिफ्लेक्टिंग सरफेस है ना अगर इस
रिफ्लेक्टिंग सरफेस की मैं पूरी लेंथ निकालूंगा तो वो कहलाएगा अपर्चर। क्या कहलाएगा? अपर्चर। टेंशन मत लो। सारी
डेफिनेशन आपको देखने को मिलेंगी। ये सेम चीज होती है किसके साथ? कॉन्वेक्स मिरर के साथ। किसके साथ? कॉन्वेक्स मिरर के साथ।
कॉन्वेक्स मिरर देखो कुछ इस प्रकार से होती है। ये होती है आपकी कॉन्वेक्स मिरर। ठीक है? अंदर की तरफ से क्या होती है?
देखो ऐसे पॉलिश्ड होती है। ठीक है जी? अब क्या है? सेम ये है सारी चीजें। रेडियस ऑफ़ कर्वेचर। यहां से लेकर यहां तक का जो
डिस्टेंस है वो रेडियस ऑफ़ कर्वेचर। यहां पर आएगा प्रिंसिपल फोकस और यहां से लेकर यहां तक क्या होगा? फोकल लेंथ। क्या होगा
बेटा? फोकल लेंथ। ठीक है? बहुत बढ़िया। ये बात हमें एकदम समझ आ गई है। मजा आ गया है। तो अब एक-एक करके टर्म्स को रीड करते चलते
हैं। ज्यादा लोड नहीं लेना है। आ जाओ। देखो पोल क्या है? पोल है सेंटर पॉइंट ऑफ द रिफ्लेक्टिंग सरफेस। क्या है?
रिफ्लेक्टिंग सरफेस का जो सेंटर पॉइंट है वो पोल कहलाएगा। बहुत बढ़िया। अगला। सेंटर ऑफ कर्वेचर क्या है? सेंटर ऑफ़ कर्वेचर
क्या है भैया? द सेंटर ऑफ दी स्फीयर ऑफ वि मिरर्स रिफ्लेक्टिंग सरफेस फॉर्म्स दी पार्ट। यानी वो तो छोटी सी मिरर है। उसको
अगर पूरा का पूरा सरफेस होता तो उसका जो मिड पॉइंट होता उसका जो सेंटर होता वो क्या कहलाता? हां जी सेंटर ऑफ़ कर्वेचर।
अच्छा रेडियस ऑफ़ कर्वेचर क्या है? अभी बताया। अभी बताया अब गलती नहीं करनी है। बहुत बढ़िया। प्रिंसिपल एक्सिस क्या है?
स्ट्रेट लाइन पासिंग थ्रू पोल एंड सेंटर ऑफ़ कर्वेचर। शुक करके जो निकल जाती है। अगला। प्रिंसिपल फोकस। देखो कहीं फोकस
लिखते हैं कभी कबभार प्रिंसिपल फोकस भी लिखते हैं। कंफ्यूज नहीं होना है। ठीक है? क्या है? मिड पॉइंट है। किसका मिड पॉइंट
है? बोलो बोलो बोलो बोलो। हां। सेंटर ऑफ कर्वेचर और पोल। बहुत बढ़िया। अगला फोकल लेंथ। फोकल लेंथ क्या है? बता दिया
डिस्टेंस है। लास्ट है अपर्चर। अपर्चर क्या होता है? द डायमीटर ऑफ द रिफ्लेक्टिंग सरफेस। यानी रिफ्लेक्टिंग
सरफेस की जो लेंथ है वो क्या कहलाएगा? वो कहलाता है आपका अपर्चर। वो क्या कहलाता है? अपर्चर। मुझे फटाफट से बताओ क्या ये
सारी डेफिनेशंस हमें समझ आ गई क्या? यह सारी डेफिनेशन क्या हमें समझ आई? मैं एक मिनट पानी पी लेता हूं। चलो भाई, यहां तक
समझ आ गया। तो अब फटाफट से आगे का बताओ। एक सवाल है। डिफाइन फोकल लेंथ ऑफ दी स्फेरिकल मिरर। क्या होती है फोकल लेंथ?
डिस्टेंस है कहां से कहां तक का? प्रिंसिपल फोकस से पोल तक का डिस्टेंस है। अगला हाउ इज इट रिलेटेड टू दी रेडियस ऑफ़
कर्वेचर। तो तुम्हें पता है टू टाइम्स फोकल लेंथ किसके बराबर होगी? रेडियस ऑफ़ कर्वेचर के बराबर होगी। ये हमेशा याद
रखना। ठीक है? गांठ बांध लो गांठ। है ना? गांठ बांध लेना। ठीक है? वरना पेपर में आया तो फिर कुछ भी हो सकता है। ठीक है?
हां। तो इसलिए याद कर लेना गांठवाद के। चलो अब ना अपन रूल्स रूल्स खेलते हैं। रूल्स रूल्स क्या होता है? रूल्स यानी कुछ
ऐसे रूल्स जिसकी मदद से अभी हम इमेज फॉर्मेशन करेंगे। आगे करेंगे। कुछ रूल्स समझ लेते हैं। आ जाओ। रूल नंबर वन। अ रे
पैरेलल टू दी प्रिंसिपल एक्सिस विल पास थ्रू फोकस। इसको थोड़ा सा चेंज कर देना। विल पास थ्रू फोकस और और अपीयरर्स और
अपीयरर्स टू पास थ्रू फोकस। यानी या तो असली में पास करेगी या तो हमें ऐसा लगेगा कि पास करेगी। हैं ये क्या हुआ? अभी
समझाता हूं देख डायग्राम से। तुझे सब समझ आएगा। तू इतनी लोड में या तो टेंशन तो टेंशन में कैसे आ जाते हो यार तुम? तेरा
भाई तेरे साथ खड़ा है और फिर तुम टेंशन लेते हो। आ जाओ। देखो ये है कॉनकेव। केव गुफा गुफा गुफा हां अब याद रहेगा। तो देखो
कॉनकेव पे अगर प्रिंसिपल एक्सिस के पैरेलल में कोई भी लाइट रे आती है। ठीक है? प्रिंसिपल एक्सिस के पैरेलल में कोई भी
लाइट रे आती है तो वो हमेशा कहां से पास करेगी बेटा? फोकस से। कहां से? फोकस से। कॉनकेव में। पर कॉन्वेक्स में क्या होगा?
देखना बेटा। कॉन्वेक्स जो मिरर होता है ना कॉन्वेक्स होता है डायवर्जिंग मिरर। यानी वो लाइट उसके पास आती है वो दूर भगा देता
है। ये भी उसी की तरह है। ठीक है? ये भी डायवर्ज करने में फोकस करता है। जबकि कॉनकेव क्या कर रहा है? कॉनकेव तो सबको
मिला रहा है। जबकि ये क्या कर रहा है? डायवर्ज कर रहा है। तो इसको अपन कन्वर्जिंग मिरर भी बोलते हैं। इसको हम
डायवर्जिंग भी बोलते हैं। आगे पढ़ेंगे। देखो अब अगर कोई भी लाइट रे आई ना तो हमेशा कॉन्वेक्स से वो दूर चली जाएगी।
क्या चली जाएगी? दूर। अब इट विल नॉट एक्चुअली पास थ्रू फोकस बट अपीयरर्स टू पास। अपीयर्स कैसे? देखो भाई। जब रियल
दुनिया में कोई नहीं मिल पाता तो कहां मिलता है? सपनों की दुनिया में। बहुत एक्सपीरियंस है। है ना? वर्चुअल दुनिया
में। तो पीछे ट्रैक करो, ट्रैक करो, ट्रैक करो। तो देखो फोकस से पास हुआ यानी कॉनकेव हो या कॉन्वेक्स जब भी लाइट पैरेलल होगी
तो फोकस से पास करेगी या फिर अपीयरर्स टू पास थ्रू फोकस। चलो भाई रूल नंबर वन डन ना डन डन चार रूल है बेटा। रूल नंबर टू इसका
अपोजिट अगर कोई भी लाइट रे फोकस से पास करेगी तो वो ऑटोमेटिकली पैरेलल हो जाएगी। देखते हैं। आ जाओ। जैसे कि कॉनकेव में बात
करते हैं। ये लाइट रे आई आई आई आई फोकस से देखो। फोकस से पास करी है। फोकस से और ये मिरर पे टकराई। अब ये क्या हो जाएगी? अब
ये ऑटोमेटिकली बेटा पैरेलल हो जाएगी। किसके पैरेलल? प्रिंसिपल एक्सिस के पैरेलल। अच्छा कॉन्वेक्स में क्या होगा?
देखो लाइट रे लाइट रे जा रही थी कहां पर? टुवर्ड्स फोकस। कहां पर बेटा? टुवर्ड्स। एक्चुअली में फोकस पे नहीं गई। टुवर्ड्स
फोकस। पर ये गंदा इंसान है। कॉन्वेक्स। ये डायवर्ज कर देता है। तो इसने क्या करा? यहीं पर ही बेटा फेंक दिया इसको दूर। टाटा
बाय-बाय। गुड बाय। खत्म गया। ठीक है? तो पैरेलल हो गया। ठीक है? तो, यह है आपका क्या? रूल नंबर टू। एनी रे पासिंग थ्रू दी
प्रिंसिपल फोकस विल बिकम पैरेलल टू दी प्रिंसिपल एक्सिस। रूल नंबर थ्री और सबसे ईजी रूल ईजीएस्ट रूल। देखो बेटा जो सेंटर
ऑफ कर्वेचर है ना वो है गुंडा। क्या है बेटा? गुंडा। है मेरा चश्मा कहां है? गुंडा वाला। गुंडे वाला चश्मा लाओ भाई।
गुंडे बनने के लिए चश्मा लगाना जरूरी होता है बेटा। तो सेंटर ऑफ कर्वेचर बोलता है कि भाई अगर तू मुझसे जाएगा तो मुझसे ही वापस
आएगा। अगर तू मुझसे गया तो बेटा मेरे ही रास्ते से वापस आना पड़ेगा। और यू हैव नो ऑप्शन। तो भाई सेंटर ऑफ कर्वेचर की
गुंडागर्दी है। यूपी बिहार से होगा शायद। है ना? यूपी बिहार में लेवल है। ठीक है? हां। चलो देखो। तो जैसे कि जैसे कि कॉनकेव
में कॉनकेव में अगर कोई भी देखो कोई भी लाइट रे अगर सेंटर ऑफ कर्वेचर से पास करती है। पास गई पास गई। टकराई। अब इसे वापस
इसी पाथ से आना पड़ेगा। यानी गई आई। गई आई। सेंटर ऑफ़ कर्वेचर बोलता है मेरे से ही आना पड़ेगा वापस। ये सेम चीज होती है
कॉन्वेक्स के साथ। ये कॉन्वेक्स में जो ये लाइट रे थी ना ये टुवर्ड्स सेंटर ऑफ कर्वेचर जा रही थी। अब ये वापस से इसी सेम
पाथ में मुड़ जाएगा। बहुत सिंपल है। आई होप ये क्लियर हो गया होगा। रूल नंबर रूल नंबर फोर उससे भी इजी है। अगर कोई भी लाइट रे
प्रिंस जो आपका जो पोल था ना पोल उस पोल पे किसी भी एंगल पे टकराएगी तो उसी ही एंगल पे रिफ्लेक्ट करेगी। समझाता हूं
कैसे। देखो मान लो ये पोल पे टकराई। एक एंगल बनाया होगा इसने। एंगल बनाया होगा ना बेटा। बनाया होगा ना एंगल? किसके बीच में?
ये वाला जो एंगल है। अब जब ये रिफ्लेक्ट करेगी ना तो सेम एंगल पर रिफ्लेक्ट करेगी। यानी इसका जो एंगल होगा ये एकदम सेम होगा।
ठीक है? ये एंगल जो होगा सेम होगा। ये सेम होता है आपका कॉन्वेक्स मिरर के साथ। उसमें भी आप देखो यहां पर आई टकराई एक
एंगल बनाया और उसी एंगल पे ये वापस से क्या कर गई? रिफ्लेक्ट कर गई। क्या ये चीज हमें एकदम क्लियर हो चुकी है? जल्दी से
जल्दी से। बहुत बढ़िया। बहुत बढ़िया। ये हुई ना एनर्जी लेवल बेटा हाई रखो। एनर्जी लेवल एकदम हाई रखो। है ना? चलो चलो भाई।
आगे बढ़े। अब आते हैं सबसे इंपॉर्टेंट चीज जो कि है इमेज फॉर्मेशन। क्या बेटा? इमेज फॉर्मेशन। अब हम इमेज फॉर्मेशन करेंगे। ये
पेपर में आना 1101% तय है। बाद में मत बोलना। पेपर लीक करते हो। मैं बता रहा हूं। मैं बता रहा हूं। ठीक है? तो अब अब
समझना मैं एक-एक करके इमेज फॉर्मेशन करूंगा। उसके लिए एक कैरेक्टर हमें लाना पड़ेगा। कैरेक्टर है मोमबत्ती जी।
मोमबत्ती जी है ना? मोमबत्ती जी को हमें बुलाना पड़ेगा। तो आओ मोमबत्ती जी थोड़ा सा आ जाओ भाई। तो सबसे पहले ऑब्जेक्ट भाई
ऑब्जेक्ट नहीं है। मोमबत्ती जी को इज्जत इज्जत से बोलना बेटा ऑब्जेक्ट नहीं मोमबत्ती जी। अब मोमबत्ती जी इंफिनिटी पे
हैं। इंफिनिटी यानी बहुत दूर। ओ हो हो। है ना भैया? बहुत दूर है मोमबत्ती जी हमसे। तो जब भी कोई चीज बहुत दूर होती है ना तो
उसकी जो लाइट रेज होती हैं ना वो हमेशा पैरेलल आती हैं। तो तुम खुद देखना अगर मोमबत्ती जी बहुत दूर हैं तो उसकी जो लाइट
रेज आएंगी वो कैसी आएंगी बेटा? वो आएंगी पैरेलल। कैसी आएंगी बेटा? वो आएंगी पैरेलल। हां या ना? हां या ना? और तुम्हें
पता है पैरेलल लाइट रेज़ कहां पर टकराती हैं? फोकस पे। तो इमेज कहां बनेगी? फोकस पे। कैसी इमेज बनेगी? छोटी इमेज बनेगी।
एकदम टिंगी-डिंग सी छोटी सी इमेज बनेगी। ठीक है? तो याद रखना जब भी एकदम इंफिनिटी पे होता है तो साइज़ ऑफ़ द इमेज कैसा होता
है? हाइली डिमिनिश्ड। हाइली डिमिनिश्ड यानी एकदम छोटा। ठीक है? अब समझना कुछ इंपॉर्टेंट चीज़। मिरर में एक केस समझ लो
तुम। जब भी इमेज मिरर के लेफ्ट साइड में बने। कहां पर बेटा? लेफ्ट लेफ्ट लेफ्ट लेफ्ट। तो हमेशा इमेज कैसी होगी? रियल
होगी। और रियल का बड़ा भाई कौन होता है बेटा? इनवर्टेड। और जब भी इमेज राइट में बने कहां पर? राइट में। तो इमेज कैसी
होगी? वर्चुअल होगी। और वर्चुअल का बड़ा भाई इरेक्ट। ठीक है? अब यहां पर इमेज कहां बनी है? लेफ्ट साइड में। तो याद रखना जो
इमेज बनेगी वो रियल बनेगी। और रियल का बड़ा भाई कौन है बेटा? इनवर्टेड है। सबको मालूम है। ठीक है? ये आ गया पहला केस। बाद
में ट्रिक भी बताऊंगा इनको याद करने की। अपने पे ट्रिक है पी की ट्रिक। अब इमेजिन करो। अब जो मोमबत्ती जी हैं उनको मैंने
थोड़ा नजदीक बुलाया। इंफिनिटी पे तो बहुत दूर थी वो। तो अब मोमबत्ती जी बियों्ड सी आ गई हैं। कहां पर? बियों्ड सी यानी सी के
पीछे। सी क्या है? सेंटर ऑफ कर्वेचर बेटा। ये सी सेंटर ऑफ कर्वेचर है। तुम्हारा दोस्त नहीं है। तो क्या है? इसके पीछे
मोमबत्ती जी आकर यहां पर क्या है बेटा? खड़ी हो गई हैं। अब देखो अब क्या? अब तू देख। अब तू देख अब मजा आएगा। देख। अब क्या
है? एक लाइट रे पैरेलल डाल दो। और जब भी लाइट रे पैरेलल जाएगी तो तुमको सबको पता है कि वो कहां से पास करेगी? फोकस से पास
करेगी। आया या ना? सबको मालूम। अब क्या करो बेटा? दूसरी लाइट रे को दूसरी लाइट रे को अब तुम क्या करो? ये जो सेंटर ऑफ
कर्वेचर है इससे भेज दो। क्योंकि जो लाइट रे सेंटर ऑफ कर्वेचर से जाती है वो कहां आती है? वापस सेम रास्ते पे वापस आती है।
है ना? इमेजिन करो अगर कोई लाइट रे तुमने ऐसे सेंटर ऑफ कर्वेचर पे भेजी तो वापस भी कहां से आएगी? वापस भी इसी रास्ते से ही
आएगी। हां या ना? हां या ना? ठीक है। तो ये लाइंस मिल कहां रही हैं? इस जगह पर तो इमेज कहां बनेगी? उल्टी इमेज बनेगी और ऐसी
इमेज बनेगी। अच्छा इमेज कैसी है? रियल है या वर्चुअल है? लेफ्ट साइड यानी रियल है। इमेज कैसी है? ज्यादा बड़ी तो नहीं है।
मोमबत्ती जी तो बड़ी थी। ये तो इमेज तो छोटी। ठीक है? तो हम बोल सकते हैं इमेज है डिमिनिश्ड। डिमिनिश्ड यानी छोटी। रियल और
इनवर्टेड बहुत बढ़िया। केस नंबर टू समझ आ गया बेटा। ये मिरर का केस इंपॉर्टेंट है। क्यों? क्योंकि लेंस में ना ये केस सेम
होगा। रिपीट होता है रिपीट। तो मैं इधर समझा रहा हूं। ध्यान से समझ लो बात। गुस्सा चला। ठीक है? आया। देखो। अब आता है
थर्ड केस और सबसे इंपॉर्टेंट। इंपॉर्टेंट भी लिखा है। केस क्या बताता है? केस ये बताता है अगर मैंने मोमबत्ती जी को और
नजदीक बुलाया और मैंने सेंटर ऑफ कर्वेचर पे मोमबत्ती जी को खड़ा कर दिया। अब देखना बेटा, एक लाइट ऑफ रे तो तुम पैरेलल डाल
दो। पैरेलल वाली लाइट ऑफ रे कहां से पास करती है? सबको मालूम है बेटा। हां। पता है ना? पता है कि नहीं? ठीक। अब दूसरी लाइट
रे को पता है कहां भेजो? तुम ना फोकस पे भेज दो दूसरी लाइट रे को। जब भी तुम किसी चीज को बेटा फोकस पे भेजते हो। जब भी कोई
लाइट रे फोकस से पास करती है तो क्या होती है? पैरेलल हो जाती है। पैरेलल। याद आ गया? बहुत बढ़िया। बहुत बढ़िया। तो ये
टकराएगी और ये क्या हो जाएगी? ये पैरेलल हो जाएगी और ये आएगा आएगा आएगा और ये आपस में यहां पर जाकर मिलेगा। तो इमेज जो
बनेगी वो इस डायरेक्शन में कहीं बनेगी। और इमेज पता है एग्जैक्टली कहां बनेगी? इसके नीचे। कहां पर? इसी के नीचे। जहां पर
मोमबत्ती जी थी उन्हीं के नीचे इमेज बन गई। हां। और सबसे अच्छी बात बताओ ये केस इंपॉर्टेंट क्यों है? इमेज का जो साइज
होता है वो सेम होता है। इमेज रियल होती है। इनवर्टेड होती है। बस टाटा बाय-ब गुड बाय। खत्म। आगे बढ़। चल आ जा। केस नंबर
फोर। इसके अंदर हम मोमबत्ती जी को और पास बुला रहे हैं बेटा। तो मोमबत्ती जी आ गए हैं यहां पर। है ना? सी और एफ के बीच में।
अब वही करेंगे। क्या हवन नहीं करेंगे बेटा। क्या करेंगे? लाइट रे डालेंगे और क्या करेंगे? अपने पे तो एक ही काम है।
चलो भैया। और दूसरी लाइट रे अब मैं कहां डालूं? है ना? दूसरी लाइट रे मैं कहां डालूं? अब ये है सोचने वाली बात। सोचो
बेटा जल्दी। कहां डाल सकते हैं? कहां डालें बेटा? दूसरी लाइट रे को चाहे तो तुम ऐसे फोकस से भी पास करा सकते हो। कोई
दिक्कत वाली बात नहीं है। है ना? तो अब ये क्या हो जाएगा? ये पैरेलल हो जाएगा। और ये आपस में आके कहीं पर कहीं पर आगे थोड़ा सा
इस डायग्राम को स्मूथ बनाना है ना थोड़ा सा कहीं इस जगह पर जाकर मिलेंगे यानी ये सेंटर ऑफ कर्वेचर के पीछे मिलेंगे कहां पर
सेंटर ऑफ कर्वेचर के पीछे तो इमेज जो बनेगी एक तो इमेज बड़ी बनेगी कैसी बनेगी एनलार्ज यानी इमेज बड़ी बनी रियल बनेगी
इनवर्टेड बनेगी है ना और कहां बन रही है बियनॉन्ड c कहां पर बन रहा है बियनड सी इसको मैं लिख देता हूं यहां पर बियन्ड सी
चलो भाई चार केस समझ आ गए बहुत बढ़िया आगे आते हैं अब आते हैं अपन फिफ्थ केस पे फिफ्थ केस में क्या है ना बेटा? अब मैंने
मोमबत्ती जी को और पास बुलाया और मैंने उसे फोकल पे यहां पर फोकस पे खड़ा कर दिया है। क्या करेंगे? वही करेंगे जो करते आ
रहे हैं जीवन भर से। है ना बेटा? अपने पास तो एक ही काम है। तो भैया एक लाइन पैरेलल बहुत बढ़िया। दूसरी लाइन कहां से डालूं?
पोल पे डाल देता हूं। सेम एंगल पे। है ना? याद करो एक ऐसे लॉ था ना कि एक एंगल पे अगर तुम पोल पे डालते हो तो उसी एंगल पे
ये क्या है? रिफ्लेक्ट करेगी। अगर तुम्हें दिख रहा हो तो ये दोनों लाइट रेज़ पैरेलल है। क्या है ये? पैरेलल। क्या पैरेलल
चीजें कभी मिलती हैं? बताओ। हां। कहां मिलती हैं? इनफाइनाइट पे। इनफाइनाइट यानी बहुत दूर। तो हम बोल सकते हैं इस केस के
अंदर इमेज फॉर्म नहीं करेगी। अब मैं ये आंसर तुम्हारे लेटेस्ट एनसीईआरटी की वजह से बोल रहा हूं। एनसीईआरटी अपडेट हो चुकी
है और उस एनसीईआरटी में कुछ करेक्शंस हुए हैं और करेक्शन में ये चीज साफ लिखी गई है कि इस केस के अंदर इमेज नहीं बनती।
स्कूल्स के अंदर बताते हैं कि हाइली एनलार्ज इमेज बनेगी। हां, इंफिनिटी में इमेज बनेगी पर
एनसीईआरटी की टेबल देखना जिसमें साफ लिखा हुआ है कि इमेज के बारे में हम कुछ नहीं बता सकते क्योंकि एक्चुअली में तो इमेज
बननी नहीं है। ठीक है? तो एनसीईआरटी में अपडेट हो गया है। मैं सिलेबस तुम्हें बता रहा हूं। अब आते हैं केस नंबर सिक्स। सबसे
इंपॉर्टेंट मोस्ट इंपोर्टेंट इसको तो गलती से भी गलत मत करना। क्या बोला मैंने? गलती से भी गलत मत करना। ठीक है? इसमें क्या है
भैया? हैं? इसमें ऐसा क्या खास है? हैं? है ना? वो एक पिक्चर आती है ना? किसने पू को मुड़ के नहीं देखा? है ना? तो उसमें
ऐसा क्या खास है? ऐसी इसमें ऐसा क्या खास है? पेपर में आएगा ये खास है। ठीक है? अब देख बेटा मैंने मोमबत्ती जी को और करीब
बुला लिया है और मोमबत्ती जी यहां पर आ गई हैं पी और एफ के बीच में। ठीक है? पीएफ के बीच में आ गई। अब क्या करूं? वही जो करता
आया हूं। सबसे पहले तो एक लाइट रे तुम यहां से डाल दो। है ना? एक लाइट रे ऐसे। है ना? अब बहुत सारे लोग बोलेंगे भैया एक
लाइट रे क्या करो? ऐसे पैरेलल डाल दो और वो ऐसे फोकस से पास करेगा। क्या ये डायग्राम सही है? तो मेरा ये मानना है ये
डायग्राम गलत है। ठीक है? क्यों? क्योंकि भाई ऑब्जेक्ट खड़ा है तो सीधे लाइट रे डालेगा। तो ऑब्जेक्ट को क्या काट के लाइट
चली जाएगी? ऑब्जेक्ट है। क्या लाइट ऑब्जेक्ट से पास करेगी? नहीं करेगी। तो यहां पर डायग्राम थोड़ा सा चेंज करते हैं।
इसी वजह से कॉम्प्लिकेट हो जाता है। हम क्या करते हैं? हम इस डायरेक्शन में ऐसे एक लाइट रे डालते हैं। कहां पर? इस
डायरेक्शन में। और ये जो डायरेक्शन है ना ये है सेंटर ऑफ कर्वेचर की डायरेक्शन। यानी लाइट यहां पर टकराती है। और सेम पाथ
पे ही क्या करती है? रिफ्लेक्ट करती है। और ऐसे सेंटर ऑफ कर्वेचर से पास करती है। ठीक है? तो इसका डायग्राम कुछ इस प्रकार
से आएगा। अब ध्यान से समझना। ये टकराया और ये वापस से सेंटर ऑफ कर्वेचर से पास करा। अब ये जो दोनों लाइट रेज़ हैं ये दूर जा
रही हैं। यानी ये कभी मिलेंगी नहीं। तो ये कहां पर देखो अगर तुम रियल दुनिया में नहीं मिल पाए तो कहां मिलते हैं? वर्चुअल
दुनिया में। तो अब हम देखेंगे कि ये दोनों लाइट रेज़ वर्चुअल दुनिया में जाकर कहीं यहां पर एक इमेज क्रिएट करेंगी। और इमेज
कैसी होगी? राइट साइड में इमेज क्रिएट हुई है। तो कैसी होगी? वर्चुअल और इरेक्ट। और कैसी होगी? हाइली एनलार्ज यानी बहुत बड़ी
इमेज होगी। ठीक है? ये रे डायग्राम इंपॉर्टेंट है और और ये वर्चुअल और इरेक्ट होती है। यह भी याद रखना। एक ही ऐसा केस
है जहां पर इमेज आपकी कैसी बनती है? वर्चुअल और इरेक्ट। क्या ये बात समझ में आई? जल्दी से बता दो चैट के अंदर। फटाफट
से बताओ। क्लियर है? बहुत बढ़िया। बहुत बढ़िया है ना? हां। हां। कोई नहीं लिखेगा कि रे डायग्राम क्रॉस है ना? मोमबत्ती जी
की प्रेम कहानी। राइट? कोई कमेंट नहीं करेगा। कोई कमेंट नहीं करेगा। अच्छा इससे मुझे याद है बहुत-ब लोग मुझसे पूछते रहते
हैं कि भैया वो अपोजिट जेंडर डिस्ट्रैक्शन हो रहा है। क्या करें? लड़के मुझसे पूछते हैं अपोजिट जेंडर डिस्ट्रैक्शन हो रहा है।
क्या करें? बेटा डीपी लगा ले। जिस दिन तेरी शक्ल रिवील हो गई उसके बाद तो वैसे भी कोई डिस्ट्रैक्शन नहीं
होगा। सामने से मैसेज आना नहीं है। ठीक है? डीपी लगा ले तू। आ जा। आ गई समझ में? पढ़ ले चुपचाप। ये तो देखो छह केसेस थे।
मुझे पता है इन छह केसेस में तुम्हारा दिमाग खराब हुआ है। पर अब मैं तुम्हें दिखाऊंगा। आईला जादू। क्या है जादू? देखो।
अब मैं एक जादू दिखाऊंगा बेटा। काउंटिंग आती है वन टू का फोर। 4 2 वो वाली काउंटिंग नहीं 1 2 3 4 वाली काउंटिंग देखो
बस तुम काउंटिंग करते जाओ यहां पर लिखो वन क्या लिखो वन है ना इस पोजीशन को मान लो इनफाइनाइट ठीक है फिर लिखो टू ठीक है फिर
इसके ऊपर लिखो थ्री फिर लिखो फोर फिर इस पे लिखो फाइव फिर इस पे लिखो ये काउंटिंग तो सबको आती है। अब यही काउंटिंग उल्टी कर
लो। उल्टी काउंटिंग भी सबको आती है। यहां से स्टार्ट कर लो। वन टू थ्री इसके नीचे फोर और इसके नीचे फाइव। भैया सिक्स कहां
गया? सिक्स के बारे में अभी भूल जाओ। देखो ये क्या है? ये पीके ट्रिक है। सारे रे डायग्राम याद करने की ट्रिक है। अब देख
तुझे देखना क्या है? नंबर वन जब भी ऑब्जेक्ट आपका वन पे होगा तो इमेज वन पे बनेगी। ऑब्जेक्ट इनफाइनाइट पे। इमेज कहां
बन रही है? देख लो। वन कहां है? फोकस पे। वन कहां है? फोकस पे। इमेज कहां बनेगी? फोकस पे। नंबर टू। जब भी ऑब्जेक्ट आपका
बियड सेंटर ऑफ कर्वेचर होगा तो इमेज कहां बनेगी? नंबर टू पे। नंबर टू कहां पर है? बिटवीन C एंड F। ठीक है? जब थ्री पे होगा
तो इमेज कहां बन रही है? थ्री पे। देख लो। जब फोर पे होगा तो इमेज कहां बन रही है? बियों्ड सी बन रही है। जब फाइव पे होगा
यानी फोकस पे होगा तो इमेज कहां बनेगी? फाइव। फाइव यानी इंफिनिटी। इंफिनिटी पे। और छठा केस तो सबसे अलग केस है। वो तो
तुम्हें याद करना ही पड़ेगा। छठे में जो इमेज बनती है वो इस तरफ बनती है। है ना? आईला
जादू। तो ये ट्रिक होती है जो कि हम यूटिलाइज़ करके ऐसे इजीली चीज़ों को याद कर लेते हैं। ठीक है? क्लियर है बेटा? ठीक
है? तो ये देखो आपकी अपडेटेड एनसीआरटी की ये अ पीडीएफ है। अब इसको ध्यान से देखना। यहां पर जो मैं आपको बता रहा था एट f कहां
पर बनती है इमेज? इंफिनिटी पे बनती है। और साफ लिखा हुआ है कि इमेज वुड नॉट बी फॉर्म्ड। यानी नेचर ऑफ द इमेज भी हम नहीं
बता सकते। और हम साइज ऑफ दी इमेज भी नहीं बता सकते क्योंकि इमेज बनेगी नहीं ना एक्चुअली में। इनफाइनाइट यानी बहुत दूर हम
बता ही नहीं सकते। ठीक है? तो ये अपडेटेड एनसीईआरटी है इसलिए मैं आपको बता रहा हूं। चलो जी। आगे बढ़ते हैं। आगे बढ़ते हैं। अब आ
रहा है एक बड़ा इंपॉर्टेंट मतलब उतना इंपॉर्टेंट नहीं कि कॉनकेव मिरर के यूजज़ क्या-क्या हैं? इस पे भी सवाल आता है।
देखो भाई कॉनकेव मिरर क्या है? एक प्रकार का कन्वर्जिंग मिरर। क्या? कन्वर्जिंग जो कि चीजों को बड़ा कर देता है। है ना? है
ना? जैसे वो डोरेमोनॉन में आता है ना बिग लाइट। उसी की तरह ये चीजों को बड़ा कर देता है। तो तुम ऐसे याद करो डोरेमोनॉन का बिग
लाइट। ठीक है? किस-किस ने देखा है डोरेमोन वैसे? देखा ही होगा। वैसे तो मैं मैंने भी अपने बचपन में देख रखा है यार। तो तुमने
भी देखा ही होगा। ठीक है? देखो कॉनकेव मिरर जो है वो चीजों को बड़ा कर देता है। तो जैसे कि शेविंग है ना दाढ़ी वाड़ी
थोड़ा सा तो उसमें आपको बड़ा चाहिए होता है इमेज आपकी। तो इस वजह से शेविंग मिरर्स के अंदर है ना लड़कियां मेकअप लगा रही
हैं। है ना? मेकअप लगा रही हो तो उसमें भी आपको थोड़ा बड़ा चाहिए। तो कॉनकेव मिरर जब चीजें हमें मैग्नीिफाई करनी होती है, बड़ा
करनी होती है तब काम आता है। उसके अलावा सोलर फर्नेस वेरीेंट। सोलर फर्नेस क्या होता एक ऐसा डिवाइस होता है जो कि सूरज की
सारी रोशनी को एक जगह पर पॉइंट करता है। कंसंट्रेट करता है। तो वहां पर भी कौन सा मिरर यूज़ होता है? याद रखना कौन सा?
कॉनकेव मिरर। ये भी इंपॉर्टेंट है हेडलाइट। तो देखो जैसे आपकी गाड़ियों की हेडलाइट होती है ना तो वो भी क्या है?
हेडलाइट जो है गाड़ियों की वो भी कॉनकेव होती है। देखो गुफा की तरह होती है। कॉनकेव मिरर की तरह वो होती है। ठीक है?
तो उसमें जो बल्ब होती है ना बल्ब वो पता है कहां पर होती है? मान लो ये बल्ब है। मान लो ये बल्ब है। बल्ब पता है कहां पर
होती है? बल्ब इज़ सिचुएटेड नियर दी फोकस। यानी ये जो बल्ब है ना ये फोकस के एकदम नजदीक होती है। कहां पर? फोकस के एकदम
नजदीक होती है बल्ब। इसको वहीं पर लगाया जाता है। इस मिरर की फोकस के एकदम नजदीक बल्ब को रखा जाता है ताकि हम दूर तक चीजों
को देख पाए। ठीक है? बहुत बढ़िया। बहुत बढ़िया। चलो। ओ ये गाड़ी कौन सी थी भाई? ये कौन सी गाड़ी है? वाह। बहुत बढ़िया लग
रही है। चलो जी। सवाल का जवाब देंगे। मेघा ओह माय गॉड। मेघा कहां जा रही हैं? मेघा जा रही है डेंटिस्ट के पास। ठीक है जी।
मेघा विजिटेड अ डेंटिस्ट इन ह क्लीनिक। शी ऑब्ज़र्व्ड दैट अ डेंटिस्ट वाज़ होल्डिंग एन इंस्ट्रूमेंट फिटेड विद अ मिरर। स्टेट दी
नेचर ऑफ दिस मिरर एंड रीज़ फॉर इट यूज़ इन द इंस्ट्रूमेंट यूज़्ड बाय डेंटिस्ट। कौन से प्रकार का मिरर डेंटिस्ट यूज़ करेंगे?
डेंटिस्ट को आपके दांत के अंदर देखना है भैया। तो इमेज उसे बड़ी चाहिए। बड़ी इमेज के लिए सिर्फ और सिर्फ कॉनकेव मिरर को यूज़
किया जाता है। सवाल में पूछ रहा है क्यों? कॉनकेव मिरर को क्यों? क्योंकि भाई कॉनकेव मिरर मैग्नीिफाई द इमेज ऑफ योर टीथ। सो
दैट डेंटिस्ट भैया देख पाएंगे और बता पाएंगे। कीड़ा लगा है दांत में बेटा। है ना? अच्छा डेंटिस्ट वाले ना सब वो वो
कराने को बोलते हैं ना। क्या बोलते हैं इनको? रूट कैनाल। रूट कैनाल करा लो रूट कैनाल। है ना? मेरे एक बार छोटा सा कीड़ा
लग गया था दांत में। डेंटिस्ट के पास गया। रूट कैनाल कराओ। रूट कैनाल? मैंने कहा अरे मत कराओ रूट कैनाल। बस फिलिंग कर दो। है
ना? चलो अगला सवाल। अ स्टूडेंट यूजज़ अ कॉनकेव मिरर टू बर्न अ पेपर बाय फोकसिंग सनलाइट आइडेंटिफाई दी पोजीशन वेयर दी पेपर
मस्ट बी प्लेस्ड। क्या बोल रहा है? ये है आपका कॉनकेव मिरर। ठीक है? और उस भाई ने एक पेपर ले रखा है और उस पेपर पे ना वो
सारी लाइट को कंसंट्रेट करना चाहता है। अच्छा सूरज बहुत दूर है। तो सूरज से लाइट कैसी आती है बेटा? पैरेलल आती है पैरेलल।
तो मुझे बताओ पैरेलल लाइट कहां पर मिलती हैं? तो ऑब्वियस सी बात है फोकस पे मिलती हैं। तो उस पेपर को हमें कहां रखना होगा?
उस मिरर के फोकस के पास। कहां पर? उस मिरर के फोकस के पास। और यही इसका सही आंसर होने वाला है। ठीक है? चलिए जी। बहुत
बढ़िया। यहां तक भी समझ आ गया। ऑल गुड। अगला सवाल देखते हैं आपकी स्क्रीन के ऊपर। बेटा ये रहा टिडिंग टिडिंग टिडिंग। चलो। अ
साइंस टीचर। ओहो पीके भैया की बात हो गई। वाह यार पीके भैया आ जाओ। प्लेस्ड अ कैंडल इन फ्रंट ऑफ कॉनकेव मिरर। स्टूडेंट
ऑब्जर्व्ड दी नेचर साइज एंड दी पोजीशन ऑफ द इमेज बाय चेंजिंग दी पोजीशन। क्वेश्चन पढ़ते हैं। व्हाट टाइप ऑफ इमेज इज फॉर्म्ड
व्हेन द ऑब्जेक्ट इज प्लेस्ड एट दी सेंटर ऑफ़ कर्वेचर? देखो मैंने क्या करा? मैंने मोमबत्ती जी को मोमबत्ती जी को कॉनकेव
मिरर के अलग-अलग पोजीशन पे रखा। पहला सवाल कि जब मैं मोमबत्ती जी को सेंटर ऑफ कर्वेचर पे रखता था तो इमेज कहां बनती थी?
सेम सेम सेम। सेंटर ऑफ़ कर्वेचर पे ही बनती थी। कैसी बनती थी? रियल बनती थी। इनवर्टेड बनती थी। बहुत बढ़िया। व्हाट विल बी दी
नेचर एंड साइज ऑफ द इमेज व्हेन कैंडल इज प्लेस्ड बिटवीन पोल एंड फोकस? लास्ट केस पोल और फोकस के बीच में जब भी हम अ
ऑब्जेक्ट को रखते हैं तो जो इमेज बनती है वो वर्चुअल बनती है, इरेक्ट बनती है और बड़ी बनती है, मैग्नीिफाइड बनती है। चलो
व्हिच टाइप ऑफ मिरर ऑलवेज फॉर्म्स अ वर्चुअल इमेज? वेरीेंट क्वेश्चन बेटा। स्टार मार्क करो। पता है आपको कौन सी ऐसी
इमेज? कौन सा ऐसा मिरर है जो कि वर्चुअल और डिमिनिश्ड यानी छोटी इमेज बनाएगा। बोलो मैं बताऊं कॉन्वेक्स। क्योंकि कॉनकेव मिरर
जो है वो हर बार वर्चुअल इमेज नहीं बनाता। वो एक ही केस में बनाता है। जबकि हम अभी आगे पढ़ेंगे जो कॉन्वेक्स होगा आपका
कॉन्वेक्स मिरर वो हमेशा कैसी बनाएगा? वर्चुअल इमेज और छोटी इमेज बनाएगा। अगला व्हाई आर कॉनकेव मिरर यूज्ड इन टॉर्च?
टॉर्च या फिर हेडलाइट्स में कहां पर क्यों यूज किए जाते हैं? क्योंकि उनका काम क्या होता है? बताओ। उनका काम क्या होता है?
मैग्नीिफाई करने का उनका काम होता है। चलिए बहुत बढ़िया। ये सारे के सारे क्वेश्चंस थे और ये आपके सारे के सारे
जवाब थे। एक क्वेश्चन और करते हैं। फिर कॉन्वेक्स मिरर की तरफ फटाफट से बढ़ते हैं। बताओ इसका आंसर। चलो भाई कौन-कौन कर
पाए इस सवाल को? बहुत इजी सवाल तो नहीं बोलूंगा। अच्छे लेवल का सवाल है। क्वेश्चन में क्या बोला है? हमें डाटा देखना है। ये
डाटा क्या है? हमने ना एक कॉनकेव मिरर को यूज़ करा है। किसको यूज़ करा है? कॉनकेव मिरर को। और मतलब अलग-अलग कॉनकेव मिरर
हैं। है ना? तीन अलग-अलग कॉनकेव मिरर हैं। एक है ए, एक है बी, एक है C। ठीक है? तो एक कॉनकेव मिरर की फोकल लेंथ है 20, एक की
है 15, एक की है 30। और हमने ऑब्जेक्ट्स को अलग-अलग लोकेशन पे रखा है। है ना? तीनों मिरर के साथ अलग-अलग। अब क्वेश्चन
में क्या बोल रहा है? इन व्हिच ऑफ़ दी अबव केसेस विल दी मिरर फॉर्म अ डिमिनिश्ड इमेज? यानी इनमें से कौन से केस के अंदर
हमेशा इमेज आपकी छोटी बनेगी? अब इसमें आपको कैलकुलेशन नहीं करनी है। आपको बस देखना है। देखो फोकल लेंथ है 20 और
ऑब्जेक्ट है कहां पर? बोलो 45 पे। यानी ऑब्जेक्ट को कहां पर रखा गया है? बोलो। अच्छा, फोकल लेंथ अगर 20 है, तो सेंटर ऑफ
कर्वेचर कहां पर होगा? सेंटर ऑफ़ कर्वेचर इसका डबल। यानी 40 पे होगा। हां या ना? हां या ना? बिल्कुल। यानी हमने ऑब्जेक्ट
को बियनड सेंटर ऑफ़ कर्वेचर रखा है। याद करो बिय्ड सेंटर ऑफ़ कर्वेचर। है ना? ये C के भी पीछे रखा है। तो जब भी हम ऑब्जेक्ट
को बिय्ड सेंटर ऑफ़ कर्वेचर रखते थे तो इमेज कैसी बनती थी बताओ? एकदम छोटी इमेज बनती थी। है ना? तो यानी इस केस के अंदर
केस नंबर वन के अंदर ही आपकी जो इमेज बनेगी बेटा वो हमेशा छोटी बनेगी। चलो बहुत बढ़िया। आगे बढ़ते हैं। लिस्ट टू प्रॉपर्टीज
ऑफ दी इमेज फॉर्म्ड इन केस टू। केस टू के अंदर कैसी इमेज बन रही है? देखते हैं। केस टू में फोकल लेंथ है 15 और ऑब्जेक्ट को
हमने 30 सें.मी. पे रखा है। देखो डबल एग्जैक्टली डबल। यानी ऑब्जेक्ट को हमने सेंटर ऑफ कर्वेचर पे रखा है। और जब भी हम
ऑब्जेक्ट को सेंटर ऑफ कर्वेचर पे रखते थे बेटा तो क्या होता था? बहुत बढ़िया। सेम इमेज बनती थी। सेम साइज रियल इनवर्टेड और
साइज क्या होता था? इमेज का एकदम सेम होता था। चलो बहुत सही। लास्ट क्वेश्चन। व्हाट इज दी नेचर एंड दी साइज ऑफ द इमेज फॉर्म्ड
बाय मिरर सी? मिरर सी जो है ये बहुत स्पेशल है बेटा। पता है क्यों? इसकी फोकल लेंथ तो 30 है पर ऑब्जेक्ट को हमने 20 पे
रखा है। यानी हमने ऑब्जेक्ट को रखा हुआ है बिय्ड मतलब बिटवीन बिटवीन f एंड p इसके बीच में ऑब्जेक्ट को रखा है। है ना?
क्योंकि ये तो कितना है? ये तो है 30। बट हमने तो 20 पे ही रख दिया। देखो काउंटिंग यहां से स्टार्ट होती है बेटा। ये ज़ीरो
होता है। तो हमने 20 पे रखा है। जबकि फोकल लेंथ कहां थी? 30 पे। तो यानी इमेज कैसी बनेगी? स्पेशल केस वर्चुअल इरेक्ट
मैग्नीिफाइड रे डायग्राम तुम्हें आता ही है। ये रे डायग्राम बहुत इंपॉर्टेंट है बेटा। ठीक है? चलो जी आगे बढ़ते हैं फटाफट
से। अब बात करते हैं कॉन्वेक्स मिरर की। कॉन्वेक्स मिरर वैसे पेपर में पूछा नहीं जाता बट फिर भी बता देता हूं। बहुत ईजी
है। बहुत सिंपल है। देखो कॉन्वेक्स मिरर के दो ही केसेस हैं। छह केसेस नहीं है। दो ही हैं। बहुत सिंपल। पहला केस या तो
मोमबत्ती जी आपकी इंफिनिटी पे हैं। दूसरा केस या तो इंफिनिटी के अलावा कहीं पर भी हैं। देखो अगर इंफिनिटी पे होंगी मोमबत्ती
जी। मान लो बहुत दूर है। तो जब भी दूर से लाइट आती है तो बताओ क्या होता है? क्या होता है? इट अपीयरर्स टू पास थ्रू फोकस।
इमेज कहां बनेगी? फोकस पे। कैसी बनेगी? छोटी बनेगी। पहली डिमिनिश्ड बनेगी। पॉइंट साइज बनेगी। और जब भी इमेज राइट साइड में
बन जाए तो याद रखना वर्चुअल और वर्चुअल का बड़ा भाई बेटा एट। क्या बात है, क्या बात है। दूसरा केस एनी डिस्टेंस कहीं पर भी हो
मोमबत्ती जी चाहे यहां है चाहे वहां है फर्क ही नहीं पड़ता। क्या करोगे? पहले लाइट रेट डालो दूर भेज दो और कहां से पास
करेगा? फोकस से पास करेगा। बहुत बढ़िया। अब एक और रूल लगाओ। कौन सा रूल लगाओगे? जो भी आता है वो सेम एंगल पे जाता है। ठीक
है? तो अब इसको ट्रैक करो। वर्चुअल दुनिया में जाओ। तो इमेज कहां बन रही है? यहां पर बन रही है। यानी अगर किसी भी फाइनाइट
डिस्टेंस पे अगर तुम ऑब्जेक्ट को रखोगे तो हमेशा इमेज बनेगी p एंड f के बीच में। कहां पर? P एंड f के बीच में। इमेज कैसी
बनेगी बेटा? वर्चुअल बनेगी, इरेक्ट बनेगी और छोटी इमेज बनेगी। कैसी बनेगी? छोटी। और इसी चीज से हमें पता चलता है कि कॉन्वेक्स
मिरर हमेशा छोटी इमेज ही बनाएगा। बड़ी नहीं बना सकता। नेवर नेवर। डिमिनिश बनाएगा, छोटी बनाएगा। ये स्मॉल लाइट है। ये बिग
लाइट नहीं है भैया। ये स्मॉल लाइट है। इसका काम ये है। ठीक है जी? यह टेबल मैं आपको दिखा देता हूं कि यह एक ऐसी टेबल है
जो कि आप रीड कर लेना बाद में। और यह एक कंपैरिजन है किनके बीच का? कॉनकेव और कॉन्वेक्स का जो कि मैंने आपको ऑलरेडी बता
रखा है। देखो मुझे पता है अभी देखकर तुम्हें ऐसा लग रहा होगा भैया इतनी सारी चीजें कैसे होंगी? याद कैसे होंगी? यार
तुम्हारे अंदर कॉन्फिडेंस नहीं है क्या? खुद के अंदर भरोसा रखो यार। है ना? अगर जिंदगी में कुछ करना है ना तो सारी चीजें
छोड़नी पड़ेंगी। या तो तुम सारी चीजें छोड़ दो। जितने भी तुम्हें WhatsApp, Facebook ये सब छोड़ो। या तो सपने देखना
छोड़ दो। ऑप्शन है तुम्हारे पास। या तो वो छोड़ो या तो सपने देखना छोड़ो। डिसीजन तुम्हारा है। मेहनत तो करनी पड़ेगी। आजा।
अच्छा यूजज़ क्या होते हैं कॉन्वेक्स मिरर के? तो कॉन्वेक्स मिरर ऐसा है स्मॉल लाइट की तरह। यानी ये इमेज को छोटा कर देता है।
तो इसका सबसे बड़ा काम आता है आपके रेयर व्यू मिरर्स के अंदर। गाड़ी में देखते हैं ना ऐसे ऐसे साइड में देखते हैं कि पीछे
कौन है? तो उस मिरर के अंदर पता है क्या होता है? रेयर व्यू मिरर के अंदर कॉन्वेक्स मिरर है जो कि आपको दूर तक का
दिखाता है। वाइडर व्यू देता है। है ना? तो पहला तो है इसका रियर व्यू। अगला है सिक्योरिटी कैमरास। जितने भी आपके
सिक्योरिटी कैमरास होते हैं या फिर आपके वो नहीं होते। होटल में गए हो तो एक नहीं होता ऐसे झांकने वाला। वो देखा है तुमने?
हां। तो वो जो होता है वो उसका नाम याद नहीं आ रहा है मुझे। वो जो होता है उसके अंदर क्या होता है आपका? कॉन्वेक्स मिरर
होता है। क्या होता है बेटा? कॉन्वेक्स मिरर होता है। क्या बात क्लियर है? जल्दी से बताओ फटाफट से। बहुत बढ़िया। सही है?
तो कॉन्वेक्स मिरर के भी यूजज़ पढ़ लिए। कॉनकेव मिरर के भी यूज़ज़ पढ़ लिए। अब आते हैं सबसेेंट। साइन कन्वेंशन। क्या बेटा?
साइन कन्वेंशन। ये बहुत इंपॉर्टेंट है। पास आ जा। ये एक ऐसा टॉपिक है जिससे न्यूमेरिकल आने ही आने हैं और ये अगर तूने
आज सीख लिया तो लेंस में भी सेम आएगा। क्या आएगा? सेम आएगा। देखो कुछ भी हो चाहे मिरर हो चाहे लेंस हो। मुझे फर्क नहीं
पड़ता। क्या नहीं पड़ता? मुझे फर्क नहीं पड़ता। चाहे मिरर हो चाहे लेंस हो। आज बता रहा हूं। जो भी चीज लेफ्ट में होगी वो
हमेशा नेगेटिव होगी। जो भी चीज राइट में होगी वो हमेशा पॉजिटिव होगी। जो भी चीज ऊपर होगी है ना? वो पॉजिटिव होगी। जो भी
चीज़ नीचे होगी वो नेगेटिव होगी। बस खत्म। टाटा बाय-बाय। गुड बाय। यही है साइन का। यही है। देखो कुछ टर्म्स समझना। U क्या
होता है? U होता है ऑब्जेक्ट का डिस्टेंस। है ना? ऑब्जेक्ट कितनी दूर है? जैसे मान लो मैंने अपनी मोमबत्ती जी को यहां पर रख
दिया। है ना? तो पोल से ये जो डिस्टेंस है ये क्या कहलाएगा? ये U कहलाएगा। ठीक है? ये क्या कहलाएगा बेटा? U कहलाएगा। ध्यान
से समझ लेना। इंपॉर्टेंट है। ठीक है? V क्या होता है? v होता है इमेज डिस्टेंस। कहां से? पोल से। तो पोल से इमेज मान लो
यहां बन रही है। तो ये जो डिस्टेंस होगा ये V हो जाएगा। और एक चीज़ होती है F। F क्या है? सबको मालूम है फोकल लेंथ। अब तो
इतनी बार पढ़ लिया। ठीक है? तो ये तीन चीजें हैं। ये आपको पता होनी चाहिए। VUF साइन कन्वेंशन पूरा का पूरा बस इतना ही
है। मैंने आपको बता दिया। अब फटाफट से आते हैं हम किसकी तरफ? कुछ फॉर्मूलेज़ की तरफ। जैसे एक मिरर फार्मूला है। बड़ा प्यारा सा
है। नन्हा मुन्ना सा है। मिरर फार्मूला ये बोलता है 1 / v + 1 / u = 1 / f. चाहे कॉनकेव मिरर हो, चाहे कॉन्वेक्स मिरर हो,
कुछ भी हो। याद रखना। दिस मिरर फार्मूला विल रिमेन सेम। ठीक है? उसके अलावा एक और चीज होती है मैग्नीिफिकेशन। अब तुम बोलोगे
भैया मैग्नीिफिकेशन क्या भला है? तो देखो ज्यादा टेंशन नहीं लेनी। मैग्नीिफिकेशन क्या है? डेफिनेशन पढ़ लो। रेफर्स टू दी
रेश्यो ऑफ़ दी हाइट ऑफ़ एन इमेज टू दी हाइट ऑफ़ एन ऑब्जेक्ट। यानी एक रेश्यो है। ये क्या है? रेश्यो। इसको हम छोटे m से
रिप्रेजेंट करते हैं। इसका फार्मूला क्या होता है? हाइट ऑफ़ इमेज डिवाइड बाय हाइट ऑफ़ ऑब्जेक्ट। बस यही है। है ना? इमेज की हाइट
और ऑब्जेक्ट की हाइट। वो मैग्नीफिकेशन। इसका एक और फ़ूला है। इसका एक और फ़ूला है। मिरर के केस में इसका एक और फ़ूला है। दैट
इज़ -V / U. याद रखना माइनस आता है। क्या आता है बेटा? माइनस आता है। - V / U इसका सेकंड फार्मूला है। इतना समझ लो। ठीक है?
तो मैग्नीफ़िकेशन क्या है? रेशियो ऑफ़ दी हाइट ऑफ़ इमेज बाय हाइट ऑफ़ दी ऑब्जेक्ट। और एक और फार्मूला है -v / U. V और U क्या
है? तुम्हें पता है। ठीक है? अब मैं न्यूमेरिकल पे बढूंगा। बट उससे पहले आपको एक चीज़ समझनी पड़ेगी कि मैग्नीिकेशन बताता
क्या है? मान लो आपका मैग्नीफिकेशन आया -3। इसका क्या मतलब है? जब भी मैग्नीिफिकेशन की वैल्यू माइनस आ जाए तो
याद रखना इमेज आपकी रियल और रियल का बड़ा भाई कौन? इनवर्टेड। बहुत बढ़िया। अच्छा अगर ये अब ये माइनस और पॉजिटिव साइन का
मतलब अलग होता है। माइनस का साइन का मतलब क्या होता है बेटा? माइनस का साइन का मतलब क्या होता है? अगर यहां +3 है। माइनस का
मतलब रियल इनवर्टेड। और पॉजिटिव अगर आ जाए मैग्नीिकेशन यानी वर्चुअल। वर्चुअल और वर्चुअल का बड़ा भाई इरेक्ट। ठीक है?
माइनस और पॉजिटिव का मतलब है रियल वर्चुअल। अब उसके आगे की जो वैल्यूज़ हैं जैसे यहां पर थ्री है। थ्री का क्या मतलब
है? कि जो इमेज बनी है ना वो तीन गुना साइज है। यानी पॉजिटिव नेगेटिव को भूल जाओ। वो सिर्फ वर्चुअल और इरेक्ट बताता
है। है ना? और रियल इनवर्टेड ये बताता है। जबकि ये जो आगे की वैल्यूज़ हैं ये बताते हैं कि कितनी बड़ी इमेज बनी है। अच्छा मान
लो अगर मैग्नीिफिकेशन आपका आ जाए - 0.1 इसका क्या मतलब है? माइनस का मतलब रियल इनवर्टेड। 0.1 का क्या मतलब है? 0.1 का
मतलब है कि इमेज छोटी बनी है। मैग्नीिफिकेशन जब वन से कम आ जाए ना तो समझ लेना कि इमेज कैसी है? छोटी है। ठीक
है? अभी अगर समझ नहीं आया तो न्यूमेरिकल सॉल्व करेंगे। उसमें क्लियर होता जाएगा। आ जाओ फटाफट से न्यूमेरिकल पे आते हैं। देखो
बेटा सॉल्व करो। सवाल क्या है? अ स्टूडेंट कंडक्ट्स एन एक्टिविटी यूजिंग अ फ्लास्क ऑफ अ हाइट 15 सें.मी. एंड अ कॉनकेव मिरर।
ठीक है? तो उसने क्या करा है? उसने एक फ्लास्क लिया है और कॉनकेव मिरर के सामने रख दिया है। फ्लास्क यानी आप कुछ भी मान
लो। और उस क्लास की हाइट हमें गिवन है। यानी हमें ऑब्जेक्ट की हाइट गिवन है जो कि है 15 सें.मी. ठीक है? अब मुझे खुद बताओ
ये मैं पॉजिटिव लूंगा या नेगेटिव लूंगा? ऑब्जेक्ट हमेशा हम सीधा रखते हैं। ऊपर रखते हैं। यानी ये कैसा होगा? पॉजिटिव। अब
ये पॉजिटिव नेगेटिव का गेम है बेटा सारा। देखो ही फाइंड्स दैट द इमेज फॉर्म्ड इज़ 45 से.मी. इन हाइट एंड रियल। क्या बोला?
रियल। जब भी इमेज आपकी रियल बनती है, रियल का बड़ा भाई कौन? उल्टा इनवर्टेड। और जब भी इमेज उल्टी बनेगी, तो मैं हाइट ऑफ इमेज
क्या बोलूंगा? पॉजिटिव या नेगेटिव? बोलो नेगेटिव। क्यों? क्यों? क्यों? क्यों? क्यों? क्योंकि उल्टी इमेज बनी ना। जो भी
चीज नीचे नेगेटिव जो ऊपर ठीक है। हमें बताना है मैग्नीिकेशन क्या होगा? अब तो कुछ सवाल में बचा ही नहीं है। हाइट ऑफ़
इमेज डिवाइड बाय हाइट ऑफ़ ऑब्जेक्ट दैट इज़ -3। तो आंसर आ जाएगा आपका कितना? -3। चलो बहुत बढ़िया। डन। ऐसे सवाल आते हैं। आगे
आते हैं। एक और सवाल पे देखते हैं। ये बड़ा ईजी सा सवाल है। अ स्टूडेंट वांट्स टू ऑब्टेन अ इरेक्ट इमेज यूजिंग अ कॉनकेव
मिरर। एक कॉनकेव मिरर है और उसे इरेक्ट इमेज बनानी है। इरेक्ट किसका भाई था? वर्चुअल का। यानी वर्चुअल इमेज बनानी है
कॉनकेव मिरर की मदद से। कैसे बन सकती है? ऑब्जेक्ट को कहां पर रखें? हमें पता है मिरर की जो फोकल लेंथ है वो है 10
सें.मी.। तुम्हें पता है अगर मैं कॉनकेव मिरर में फोकस और पोल के बीच में रखता हूं ऑब्जेक्ट को तभी इमेज वर्चुअल बनती है।
हां या ना? मालूम मालूम है कि नहीं? मालूम है। और फोकल लेंथ कितनी है? 10 सें.मी. तो अगर मैं ऑब्जेक्ट को 10 सें.मी. से कम
कहीं पर भी रख दूंगा। है ना? 10 सें.मी. से कम चाहे नौ हो, आठ हो, सात हो, कोई भी हो, तो वर्चुअल इमेज बन जाएगी। तो इसका
आंसर आएगा लेस दैन 10 सें.मी. क्या आएगा बेटा? लेस दैन 10 सें.मी. बहुत बढ़िया। बहुत बढ़िया बेटा। ये भी क्लियर हो गया।
चलो जी। और सवाल की तरफ बढ़ते हैं। अगला सवाल ₹1 करोड़ के लिए आपकी स्क्रीन पर। टिडिंग टिडिंग टिडिंग ये रहा। आ जाओ। 5
सें.मी. टॉल ऑब्जेक्ट। लिखते चलो बेटा। सबसे पहले गिवन लिख लो। है ना? कितना गिवन है? हमें हाइट कितनी गिवन है ऑब्जेक्ट की?
देख लो। 5 सें.मी. चलो जी। 1 मिनट। तो मेरी शक्ल क्या देख रहा है? क्वेश्चन खुद से सॉल्व नहीं करने हैं। प्रशांत भैया ही
करा देंगे। अच्छा खुद से सॉल्व कर। चल मेरा शक्ल देख रहा है। आया। एट अ डिस्टेंस 10 सें.मी. फ्रॉम अ कॉन्वेक्स मिरर। कौन
सा मिरर गिवन है? कॉन्वेक्स। अब आता है एक सबसे इंपॉर्टेंट गेम। और ये तुम स्टार मार्क करके अपने नोट्स में भी लिख लेना।
एक बात मुझे बताओ। ये कौन सा मिरर है? बताओ। कॉनकेव? ये कौन सा मिरर है? कॉन्वेक्स। अच्छा, कॉनकेव मिरर की फोकल
लेंथ कहां होती है? इस तरफ होती है? बिल्कुल होती है। तो इसकी फोकल लेंथ पॉजिटिव होगी या नेगेटिव होगी? जो भी चीज
लेफ्ट साइड में है वो नेगेटिव। पर कॉन्वेक्स की फोकल लेंथ कहां होती है? याद करो रे डायग्राम हमने पढ़ लिए हैं इस तरफ।
यानी इसकी जो फोकल लेंथ होगी वो हमेशा कैसी होगी? पॉजिटिव होगी। और ये है समझने वाला गेम। ये याद रखना हमेशा कि कॉनकेव
मिरर की फोकल लेंथ नेगेटिव। जबकि कॉन्वेक्स की इसकी नेगेटिव इसकी पॉजिटिव। चलो अब आते हैं वापस से क्वेश्चन की तरफ।
हमें ऑब्जेक्ट की हाइट गिवन है। हमें डिस्टेंस गिवन है ऑब्जेक्ट का। अच्छा ऑब्जेक्ट को हमेशा कहां रखते हैं? चाहे
कोई भी मिरर हो। चाहे ये मिरर हो, चाहे दूसरा मिरर हो। ऑब्जेक्ट को हमेशा लेफ्ट साइड में रखते हैं। यस और नो। यस और नो।
बिल्कुल। तो जो ऑब्जेक्ट का डिस्टेंस है, जो u है वो क्या होगा? नेगेटिव। ऑलवेज इन एनी क्वेश्चन हमेशा क्या होगा? नेगेटिव।
तो कितना गिवन है? -10 सें.मी. बहुत बढ़िया। फ्रॉम अ कॉन्वेक्स मिरर ऑफ़ फोकल लेंथ 15 सें.मी. अच्छा, कॉन्वेक्स मिरर की
फोकल लेंथ क्या होती है? अभी बताया मूर्ख बालक। अच्छा मूर्ख ना मैं प्यार से बोलता हूं। उतना लोड मत लिया करो। है ना? अपने
बीच की बात है। मूर्ख कैसे बोल दिया? बोलता रहता। ठीक है? हमें क्या बताना है? हमें पोजीशन बताना है। यानी हमें v बताना
है। v है ना? इमेज की पोजीशन बतानी है। इमेज का नेचर बताना है। साइज बताना है। देखो करना क्या होता है? पहली चीज़ v
कैलकुलेट करेंगे। कैसे v कैलकुलेट करेंगे? अभी बताया यार। क्या बात कर रहे हो यार? अभी बताया। क्या बताया अभी मैंने? अभी
मैंने बताया। बोलो। ये फार्मूला। क्या ये है फार्मूला सबको याद है? बहुत बढ़िया। अब तुम अप्लाई करते जाओ। अब बेसिक मैथ है। 1
/ v हमें निकालना है। u क्या है? -10 आ गया। ठीक है? और f की वैल्यू क्या है? बहुत बढ़िया। इसको यहां पर ट्रांसफर कर
दो। तो 1 / v की वैल्यू आ जाएगी 1/15 + 1/10। अब भैया एलसीएम लेना क्या सबको आता है? मैथ्स एलसीएम नहीं आता। कौन बोल रहा
है नहीं आता? अरे भैया मूर्ख बालक वापस आजा तू यार। एलसीएम समझाता हूं तेरे को। आजा। है ना? ऐसे लेते हैं ना एलसीएम। याद
आ गया? याद आ गया? किससे याद आया? बताओ एलसीएम लेना सिखाना पड़ रहा है। कोई बात नहीं। तो एलसीएम आ गया 30 है ना? ऐसे लेते
हैं बेटा एलसीएम। पहले देखते हैं किससे डिवाइड हो जाएंगे दोनों। फिर दोनों को वापस से डिवाइड करते जाते हैं जब तक वन ना
पहुंच जाए। ठीक है? तो ये आ गया 30 एलसीएम। अब ये 30 से कितने टाइम्स डिवाइड होता है? तो ये आ जाएगा आपका टू और ये आ
जाएगा + 3 तो फाइनल आंसर आ जाएगा आपका 5 / 30 और इसको सॉल्व करोगे तो ये आ जाएगा 1/6। ये 1/6 क्या है? किसकी वैल्यू है? ये
है 1 / v की वैल्यू। 1 / v की वैल्यू है 1/6। तो v की वैल्यू क्या होगी? टूक उल्टा कर दो। क्या कर दो? उल्टा। 6 सें.मी. यानी
ऑब्जेक्ट का हमें इमेज जो है इमेज जो है उस मिल चुकी है हमें जो कि है 6 सें.मी. ठीक है? कहां पर बनी है? 6 सें.मी. पे
इमेज बन चुकी है। बहुत बढ़िया। अब बताना है हमें नेचर। देखो जब भी क्वेश्चन में पूछा जाए नेचर बताओ। नेचर के लिए तुम्हें
सिर्फ और सिर्फ मैग्नीफिकेशन निकालना है। क्या? मैग्नीफिकेशन। मैग्नीफिकेशन क्या होता है बेटा? बोलो। -v / u v की वैल्यू
तुम्हें पता है। माइनस आ जाएगा। ये V आ जाएगा आपका क्या? 6 सें.मी. और U क्या है आपका? U क्या है आपका बेटा? U है -10, U
है आपका -10 सें.मी. अब देखो माइनस से माइनस कट गया। तो फाइनली क्या आ गया? मैग्नीफिकेशन की वैल्यू आ गई 0.6 क्या आ
गई? 0.6 पॉजिटिव का 0.6 पॉजिटिव से क्या बता रहा है ये? पॉजिटिव ये बता रहा है कि जो
इमेज बनी है वो वर्चुअल बनी है। 0.6 क्या बता रहा है? इमेज छोटी है। नन्ही-मुन्नी सी बेचारी है ना? छोटी है। अच्छा, अब
इसमें एक और चीज़ पूछी है। साइज़ ऑफ़ द इमेज। हाइट बताओ इमेज की। कैसे निकालोगे? मैग्नीफ़िकेशन तुमने निकाल लिया है।
मैग्नीफ़िकेशन आ गया है 0.6। और मैग्नीफ़िकेशन का एक और फार्मूला होता था ये। क्या बात है? और तुम्हें देखो
ऑब्जेक्ट की जो हाइट है वो ऑलरेडी गिवन है। यानी हमें ये गिवन है। ये कितनी है? ये है 5 सें.मी. तो इसको पुट कर दो ना
यहां पर। बस अब इस पांच को यहां पर मल्टीप्लिकेशन कर दो। क्या आ गया आंसर? मल्टीप्लाई तो आता होगा। कितना आ गया? 3
सें.मी. इमेज क्या आ गई? इमेज का साइज छोटा है। है ना? स्मॉल लाइट हो गई। बिग लाइट यूज़ नहीं हो पाई। तो इस प्रकार के
बहुत सारे सवाल आपके पेपर के अंदर आ रहे होते हैं। ये साइन कन्वेंशन का सारा गेम है। अगर तुमने साइन कन्वेंशन का गेम पकड़
लिया ना बेटा, तो तुम्हारी जिंदगी में मजे ही मजे हो जाएंगे। क्या हो जाएंगे बेटा? मजे ही मजे। ठीक है? आ जाओ। इसको करते
हैं। आ जाओ भाई। इस सवाल को बताओ जल्दी। कौन-कौन इसको सॉल्व कर पाया? देखो क्वेश्चन में क्या बोला है? एन ऑब्जेक्ट 4
सें.मी. इन हाइट। लिखते जाओ जो जो गिवन है। ठीक है? इमेज ऑफ द हाइट ऑफ दी ऑब्जेक्ट हमें गिवन है जो कि है 4 सें.मी.
पॉजिटिव होगा या नेगेटिव? पॉजिटिव। ऊपर है ना? हां। इज प्लेस्ड एट 15 सें.मी. इन दी फ्रंट ऑफ कॉनकेव मिरर। यानी ऑब्जेक्ट का
डिस्टेंस हमें गिवन है। क्या होगा? पॉजिटिव या नेगेटिव? बोलो। नेगेटिव। क्योंकि जो ऑब्जेक्ट होगा
वो हमेशा क्या होगा? हां, नेगेटिव होता है। ये बात तो मैं आपको बता भी चुका हूं। बहुत सही यार। क्या बात है। वेरी वेरी
गुड। अगला देखते हैं। आगे क्या गिवन है? कॉनकेव मिरर की फोकल लेंथ है 10 सें.मी. अब मुझे बताओ कॉनकेव कॉनकेव कॉनकेव इसकी
फोकल लेंथ लेफ्ट साइड यानी नेगेटिव। बहुत बढ़िया। क्या बोला है? एट व्हाट डिस्टेंस फ्रॉम द मिरर शुड अ स्क्रीन बी प्लेस्ड।
अब ये जो स्क्रीन वाले क्वेश्चन होते हैं ना इसमें कुछ नहीं पूछ रहा है। ये पूछ रहा है स्क्रीन कहां पर रखूं कि एक इमेज मिल
जाए। तो स्क्रीन वहीं पर ही तो रखोगे जहां पर जहां पर इमेज बनेगी। राइट? तो हमें v निकालना है। क्या निकालना है? V निकालना
है। है ना? उसके साथ-साथ क्या है? हमें हाइट ऑफ दी इमेज भी निकालना है। ठीक है? तो हमें एक चीज़ और निकालनी है। हाइट ऑफ़ दी
इमेज। चलो भाई, सेम क्वेश्चन है। जैसा पिछला करा। पिछला कॉन्वेक्स का था। ये कॉनकेव का है। कुछ नहीं करना। वही
फार्मूला लगा लो भैया। फार्मूला क्या है? बोलो। 1 / v + 1 / u = 1 / f है ना जी। अब देखो हमें क्या-क्या गिवन है? हमें v
निकालना है। अच्छा u हमें गिवन है। कितना है? माइनस। बहुत बढ़िया। अच्छा फोकल लेंथ भी हमें गिवन है। वो भी नेगेटिव। बड़ी
नाइंसाफी है भैया। अब इसको मैं यहां पर ले जाऊंगा तो ये क्या हो जाएगा? पॉजिटिव हो जाएगा। ठीक है? तो ये आ जाएगा 1/15 - 1/10
देखते चलो। एलसीएम एलसीएम है ना? तो एलसीएम ले लोगे तो कितना आ जाएगा? एलसीएम शायद 30 आ रहा
होगा। चेक करना। बहुत बढ़िया। ठीक है? उसके अलावा क्या आ गया अब आपका? ये आ गया टू और ये आ गया -3। ठीक है? इसको तुम सॉल्व
करोगे तो 1 / v की वैल्यू आ जाएगी -1 / 30. क्या आई? -1 / 30 और v की वैल्यू क्या होगी? रेसिप्रोकल। ठीक है? तो v की वैल्यू
आ जाएगी -30 सें.मी. -30 का क्या मतलब है? माइनस का क्या मतलब है? कि इमेज इस तरफ बनी है। यानी इमेज कैसी है? रियल है। ठीक
है? अब इसमें पूछ क्या रहा है? इसके साथ-साथ हमें पूछ रहा है कि हाइट बताओ इमेज की। तो देखो इसके लिए तुम्हें
मैग्नीफिकेशन निकालना पड़ेगा। मैग्नीफिकेशन होता है -v / u है ना? तो v क्या है? -30 u क्या है? देखो -15 है ना?
तो माइनस ये बाहर ले लेता हूं और ये आ गया -30 बाय डिवाइड बाय -15 ठीक है ये अंदर वाले माइनस कट गए और आंसर आ गया बाहर का
एक माइनस बचा हुआ है तो आंसर आ गया -2 मैग्नीफिकेशन की वैल्यू आ गई -2 हमें क्या बताना है इमेज बतानी है इमेज तो ध्यान से
देखना बेटा ध्यान से देखना हमें ऑब्जेक्ट का हाइट गिवन है क्या गिवन है 4 सेंटीमी देखो मैग्नीफिकेशन का वही फार्मूला होता
है हाइट ऑफ दी इमेज बाय हाइट ऑफ दी ऑब्जेक्ट अब हमें ऑब्जेक्ट की हाइट गिवन है तो इसको बस मल्टीप्लाई ही तो करना है।
है ना? मैग्नीफिकेशन की वैल्यू आ गई -2। बस इसको मल्टीप्लाई कर दो। तो ये आ जाएगा आपका कितना? -2 = हाइट ऑफ इमेज बाय हाइट
ऑफ़ ऑब्जेक्ट जो कि है फोर। और इसको बस मल्टीप्लाई कर दो तो आंसर आ जाएगा -8 सें.मी. अच्छा माइनस का क्या मतलब? उल्टी
इमेज है। है ना? उल्टी इमेज है। क्या यार तुम स्मार्ट मेरे साथ रहरह के कितने स्मार्ट हो गए हो। सवाल कर दे रहे हो।
क्या बात है? प्राउड ऑफ यू। प्राउड ऑफ यू दोस्तों। बहुत अच्छा। तो ऐसे बहुत सारे सवाल हैं। प्रैक्टिस करने के लिए तुम कर
सकते हो। मैं आपको कुछ क्वेश्चन एक क्वेश्चन बेसिकली वो मैं आपको होमवर्क भी देना चाहता हूं। वो है ये वाला सवाल। इसको
आप खुद प्रैक्टिस करना। ये आपका होमवर्क है। ठीक है? कमेंट्स में बता भी सकते हो। वीडियो को अभी पॉज करके भी प्रैक्टिस कर
सकते हो। चलो जी, आगे बढ़ते हैं। अब हम आगे बढ़ेंगे किसकी तरफ? रिफ्रेक्शन ऑफ लाइट की तरफ। ठीक है? मिरर में ऐसे ही सवाल आते
हैं अलग-अलग प्रकार के। जो मैंने आपको कराए, ऐसे ही सवाल आपको पेपर में देखने को मिलेंगे। ठीक है? अब हम बढ़ते हैं
रिफ्रेक्शन में। पर उससे पहले बेटा याद रखना जोश मीटर तो डाउन नहीं है। हाई रखना यार। पता है क्यों? क्योंकि मैं तुम्हें
बोल रहा हूं कि तुम कर लोगे। पता है तुम्हें बहुत ऐसे लोग हैं जिनकी लाइफ में ये बोलने वाला कोई नहीं होता कि तू कर
लेगा यार। पर मैं तेरे साथ हूं। मैं तुझसे बोल रहा हूं तू कर लेगा। तुम कर लोगे सब। ठीक है? तो अपना बेस्ट लगाते रहो। ठीक है?
और मैं तो तुम्हारे साथ हूं इसे। चलिए। रिफ्रेक्शन ऑफ लाइट। रिफ्रेक्शन क्या होता है? बेंडिंग ऑफ लाइट होता है। क्या होता
है? बेंडिंग ऑफ लाइट। लाइट जब मुड़ जाती है, है ना? बेसिकली लाइट मुड़ती नहीं है बट वो आपको बोलने के लिए कि लाइट बेंडिंग ऑफ
लाइट जो होती है वो क्या कहलाती है वो रिफ्रेक्शन पर भैया लाइट कैसे मुड़ जाती है तो देखो भैया होता क्या है लाइट की जो
स्पीड है वो अलग-अलग है ना एयर में अलग वाटर में अलग ग्लास में अलग जैसे ही लाइट अपना मीडियम बदलती है मीडियम बदला तो
स्पीड भी बदली स्पीड बदली जिसकी वजह से लाइट हल्की सी बेंड कर जाती है देखते हैं आ जाओ तो क्या होता है रिफ्रेक्शन तो
फिनोमिना ऑफ़ बेंडिंग ऑफ रे ऑफ़ लाइट व्हेन इट एंटर्स फ्रॉम वन वन मीडियम टू अनदर। जब एक से दूसरे में जाएगा तो भैया मीडियम तो
बदलेगा। मीडियम बदलेगा तो क्या होगा? बोलो बोलो। स्पीड बदलेगी। स्पीड बदलेगी तो लाइट बेंड कर जाएगी। ठीक है? द बेंडिंग ऑफ लाइट
रे ड्यूरिंग द रिफ्रेक्शन अकर्स बिकॉज़ ऑफ़ चेंज इन स्पीड। लाइट की रफ्तार बदल जाती है। है ना? जिस वजह से वो बेंड होती है।
ठीक है? ये बात हमें समझ में आ गई है। अब कुछ इंपॉर्टेंट चीज देखो, दो प्रकार के मीडियम्स होते हैं। एक मीडियम होता है
क्या? रेयरर मीडियम। रेयरर मीडियम। और एक होता है आपका डेंसर मीडियम। डेंसर यानी डेंसर यानी जिसकी डेंसिटी ज्यादा है। जो
ताकत हो रहा है। है ना? हां। जहां तक बॉडी फ्लेक्स बॉडी है ही नहीं यार। बट मेरी बॉडी कहां है बेटा? है ना? पर ये मैं
तुमसे झूठ भी तो बोल सकता हूं। क्या पता मेरी बॉडी हो। ठीक है। चलो रेयरर और डेंसर। रेयर जो कि ज्यादा ताकतवर है। डेंस
डेंसर जो कि ज्यादा ताकतवर है। रेयर जो कि हल्का है। अब देखो बेटा जब भी लाइट रे जब भी लाइट रे आई और टकराई यहां पर। ठीक है?
रेयरर से कहां पर आई? डेंसर। तो एक नॉर्मल ड्रॉ करते हैं। ये क्या होता है बेटा? नॉर्मल। तुम्हें पता है नॉर्मल क्या होता
है? परपेंडिकुलर टू दी प्लेन। परपेंडिकुलर टू दी प्लेन। ठीक है? तो जब भी रेयरर से डेंसर में आएगी तो पता है कहां पर बेंड
करेगी? लाइट विल बेंड टुवर्ड्स नॉर्मल। ये जो नॉर्मल है ना, वैसे लाइट को देखो ऐसे जाना था। सीधी जाती है लाइट। ऐसे सीधी
जाती। पर ये जो लाइट है ये बेंड कर जाएगी नॉर्मल की तरफ। नॉर्मल की तरफ बेंड करेगी। कहां पर? नॉर्मल की तरफ। ठीक है? और इसका
अपोजिट केस होता है जब मान लो मान लो ऊपर वाला मीडियम डेंसर हो और ये रेयरर हो। ठीक है? मान लो ये लाइट आई। ये नॉर्मल बनाया।
अब ये जो लाइट है ये जाने तो ऐसे वाली थी सीधी पर अब ये जो होगी नॉर्मल के दूर चली जाएगी। 1 मिनट नॉर्मल के दूर चली जाएगी।
नॉर्मल के दूर चली जाएगी। अवे फ्रॉम द नॉर्मल भैया याद कैसे होगा? ट्रिक व्हाई टू बी वन प्रशांत भेज दे। ट्रिक क्या
बोलती है? आर डी शर्मा एक बड़ी प्यारी किताब है। तुम सब ने पढ़ी होगी मैथ में। आर डी शर्मा जी को नॉर्मल पसंद है। है ना?
आर डी शर्मा जी को नॉर्मल पसंद है। ऐसे याद करेंगे कि आर डी शर्मा को नॉर्मल पसंद है। क्या पसंद है? नॉर्मल। यानी जब भी
रेयरर से डेंसर में लाइट आएगी तो नॉर्मल की तरफ बेंड कर जाएगी। अब डी आर डीआर यानी डॉक्टर। डॉक्टर को नॉर्मल लोग पसंद नहीं
है। क्योंकि नॉर्मल होंगे तो डॉक्टर के पास क्यों आएंगे? थोड़े बीमार बीमार होंगे तभी तो आएंगे भैया। तो डॉक्टर को नॉर्मल
लोग पसंद है ही नहीं। यानी वो नॉर्मल के अवे बेंड कर जाएगी। तो डॉक्टर को नॉर्मल लॉक पसंद नहीं है। आर डी शर्मा जी जो है
उनको नॉर्मल लॉक पसंद है। चलिए जी ऐसे हम याद कर लेते हैं। ठीक है? तो ये चीज आपको याद रखनी होगी। चलो अब बढ़ते हैं आगे की
तरफ। आगे हम पढ़ते हैं। देखो कुछ मैं आपको लॉज़ बताता हूं। बेसिकली दो लॉज़ होते हैं। क्या-क्या लॉज़ होते हैं? लॉज़ ऑफ
रिफ्रेक्शन। जैसे हमने रिफ्लेक्शन में लॉ पढ़े थे वैसे ही अब हम लॉ पढ़ेंगे। लॉ नंबर वन। पहला लॉ क्या बोलता है? पहला लॉ ये
बोलता है इंसिडेंट रे। इंसिडेंट रे। अब यहां पर ना रिफ्लेक्टेड रे नहीं होती। इन रेज़ का नाम होता है रिफ्रेक्टेड। रिफ
क्योंकि रिफ्रेक्शन हो रहा है ना। हां। इंसिडेंट रे, रिफ्रेक्टेड रे और नॉर्मल ऑल लाई एट दी सेम प्लेन। वही जैसे वहां पर
इंसिडेंट रे, रिफ्लेक्टेड रे, नॉर्मल तीनों। यहां पर रिफ्लेक्टेड की जगह रिफ्रेक्टेड आ जाता है। बस टाटा बाय-ब गुड
बाय। पहला लॉ सिंपल। पहला लॉ सिंपल। बताओ जल्दी। बताओ जल्दी। इंसिडेंट रे, रिफ्रैक्टेड रे एंड नॉर्मल। इंटरफेस ऑफ द
टू मीडिया एट द पॉइंट ऑफ इंसिडेंस ऑल अलाई एट दी सेम प्लेन। यानी जहां पर ये तीनों मिलेंगे वो जो प्लेन होगा वो एक ही प्लेन
होगा। तीनों का बस इतना है। पहली स्टेटमेंट। दूसरी स्टेटमेंट सबसेेंट। दूसरी स्टेटमेंट क्या बोल रही है? इसको हम
स्नेल्स लॉ ऑफ रिफ्रेक्शन भी बोलते हैं। क्या बोलते हैं बेटा? स्नेल। क्या बोलते हैं? वो वाला स्नेल नहीं। वो वाला स्नेल
नहीं। हां। है ना? स्नेल्स लॉ ऑफ़ रिफ्रेक्शन। ये क्या बोलता है? साइन ऑफ द एंगल ऑफ इंसिडेंस। साइन
क्या होता है? एक ट्रिग्नोमेट्री आइडेंटिटी होती है। आपने शायद अभी तक पढ़ ली होगी। ट्रिग्नोमेट्री करके एक चैप्टर
होता है आपकी क्लास 10थ के अंदर ही। ठीक है? नहीं पढ़ी है तो sin मान लो एक ट्रिग्नोमेट्री आइडेंटिटी है और कुछ
वैल्यू्यूज याद कर लो। जैसे कि sin 0 की वैल्यू होती है ज़ीरो। sin 30 की वैल्यू होती है 1/2। है ना? sin 45 की वैल्यू
होती है 1 / 2। है ना? उसके अलावा sin 90 की वैल्यू क्या होती है? sin 90 की जो वैल्यू होती है वो होती है वन। ये आप बस
इतना याद कर लो। है ना? अगर आपने वैसे ट्रिग्नोमेट्री पढ़ ही लिया होगा अभी तक। ठीक है? अब समझना ये क्या बोल रहा है
स्नेल्स लॉ? कि जब भी एक लाइट आएगी तो एक एंगल बनाएगी जिसको हम बोलेंगे क्या? एंगल ऑफ इंसिडेंस। और जब रिफ्रेक्ट हो जाएगी तो
भी एक एंगल बनाएगी। उसको हम बोलेंगे एंगल ऑफ रिफ्रेक्शन। ठीक है? तो स्नेल्स लॉ ये बोलता है sin ऑफ़ एंगल ऑफ इंसिडेंस डिवाइड
बाय sin ऑफ़ एंगल ऑफ़ रिफ्रेक्शन विल ऑलवेज रिमेन कांस्टेंट। क्या बोल रहा है? क्या बोल रहा है? कि sini / sinr ये हमेशा क्या
होगा? कांस्टेंट होगा। इसकी वैल्यू हमेशा सेम होगी। ठीक है? इसकी वैल्यू हमेशा सेम होगी। यानी यानी एंगल ऑफ इंसिडेंस पता है
एंगल ऑफ रिफ्रेक्शन पता है। उनके अगर मैं sin की वैल्यू निकालूंगा और उनका रेश्यो करूंगा तो वो कांस्टेंट होगा। यही होता है
सेकंड लॉ। ये स्टेटमेंट याद रखना बेटा स्टेटमेंटेंट है। ठीक है? यहां तक क्लियर? अब समझो। अब भैया ये कांस्टेंट तो मैं समझ
गया कि कांस्टेंट होगा। पर ये कांस्टेंट होगा क्या? व्हाट विल बी दिस कांस्टेंट? तो उसका नाम है रिफ्रैक्टिव इंडेक्स। बेटा
समझना। मुझे पता है ये वाला जो टॉपिक होता है ना रिफ्रेक्शन का ये थोड़ा सा टफ होता है। है ना? ना बच्चों को समझ नहीं आ पाता।
तुम समझना मेरी बात। मैं तुम्हें समझा रहा हूं। तुम मुझे बस 10 मिनट दो। तुम्हें डिटेल में समझ आ जाएगा। पर अगर तुम नेहा
का रिप्लाई नहीं आया राहुल चैट्स पे मैसेज तो देख लेता है। अगर तुम ये करोगे बेटा तो मैं गारंटी नहीं लेता कि मैं समझा पाऊंगा।
तो थोड़ा सा फोकस 10 मिनट एकदम एकदम वो वाला फोकस चाहिए मुझे। वो वाला है ना? एकदम डिटेल वाला। देखो ये जो रेश्यो है ये
कांस्टेंट होगा। और वो जो कांस्टेंट वैल्यू होगी वो किसके बराबर होगी वो समझाऊंगा। पर उससे पहले आपको एक डायग्राम
दिखा रहा हूं। इस डायग्राम पे इसी साल तुम्हारे सीनियर्स के पेपर के अंदर सवाल आया है। रिफ्रेक्शन थ्रू दी ग्लास स्लैब।
रिफ्रेक्शन थ्रू दी ग्लास स्लैब। ठीक है? देखो ये डायग्राम बार-बार बनाने को पूछा जाता है। इसलिए इसकी प्रैक्टिस कर लेना।
एक ग्लास स्लैब क्या होता है? ग्लास से बना हुआ एक ऐसे रेक्टेंगुलर स्ट्रक्चर। ठीक है? अच्छा अब लाइट आई। मान लो ये लाइट
आई। लाइट आई। लाइट आई। यहां पर टकराई। लाइट क्या है बेटा? रेयरर। रेयरर है ना? ग्लास क्या है? ताकतवर। ग्लास एंड डेंसर।
ठीक है? आर डी शर्मा को क्या पसंद था? नॉर्मल पसंद था ना? हां। तो नॉर्मल की तरफ लाइट सीधी जाती। बट लाइट देखो नॉर्मल की
तरफ बेंड कर गई। अब ये केस स्पेशल इसलिए है क्योंकि ग्लास स्लैब में लाइट दो बार रिफ्रेक्शन करेगी। कैसे? एक बार तो यहां
पर और एक बार बाहर निकलते समय जब लाइट बाहर जाएगी। टाटा बाय-ब गुड बाय करेगी। तो देखो, अब ये लाइट जा रही थी, जा रही थी,
जा रही थी, जा रही थी। अब वापस से टकराई। अब ये जो मीडियम है ये डेंसर है। बाहर वाला मीडियम रेयरर है। डॉक्टर को क्या
नहीं पसंद था? नॉर्मल नॉर्मल लोग पसंद नहीं थे। तो नॉर्मल के ये नॉर्मल होता है बेटा। इस नॉर्मल के एकदम दूर ऐसे अपोजिट
तरफ निकल जाएगी। तो ये जो डायग्राम है ना ये डायग्राम इंपॉर्टेंट है। अब यहां पर कुछ चीजें समझने की कोशिश करो। मान लो ये
एंगल ऑफ इंसिडेंस है। ये एंगल ऑफ रिफ्रेक्शन है। ठीक है? एंगल ऑफ इंसिडेंस बड़ा होगा या एंगल ऑफ रिफ्रेक्शन बड़ा होगा?
बताओ। अरे खुद दिख रहा है तुम्हें कि ये लाइट सीधी जाने वाली थी बट ये इस तरफ बेंड हो गई। अब ये एंगल छोटा हो गया। तो याद
रखना एंगल ऑफ इंसिडेंस इज ऑलवेज इक्वल्स टू एंगल ऑफ रिफ्रेक्शन। उसके अलावा यहां पर देखना मान लो ये एंगल ऑफ रिफ्रेक्शन
है। मतलब ये एंगल r है। ये एंगल और ये एंगल हमेशा बराबर होते हैं बेटा। क्यों? मैथ्स में पढ़ा था अपोजिट एंगल। पढ़ा था।
पढ़ा था पैरेलल लाइंस के अपोजिट एंगल। हां। तो ये एंगल बराबर होंगे। मान लो अब ये R है और ये जो लास्ट वाला एंगल होगा ना ये
होता है एंगल ऑफ इमरजेंस या फिर इमर्जेंट एंगल भी बोलते हैं। और ये जो रे होती है ना इसको हम बोलते हैं इमरजेंट रे। ठीक है?
इसको हम बोलते हैं एंगल E। अब मुझे ये बताओ इसके कंपैरिजन में ये जो एंगल है ये बड़ा होगा या छोटा होगा? तो आप दिख रहा है
कि देखो लाइट दूर चली गई। ये एंगल बड़ा हो गया। तो यहां पर भी लिख लेना कि जो E होगा E वो भी बड़ा होगा R से। ठीक है? ठीक है?
अब ये डायग्राम इतना समझ आ गया। यहां पर कुछ चीजें तुम्हें समझनी पड़ेगी। इमेजिन करो अगर ये ग्लास स्लैब आता ही नहीं तो ये
लाइट सीधी सीधी सीधी सीधी सीधी सीधी जाती रहती है। फॉर एग्जांपल अगर तुम्हारी जिंदगी में मोबाइल फोन नहीं आता तो तुम
जैसे तुम बचपन में टॉपर हुआ करते थे। आज भी तुम टॉपर होते। पर तुम्हारे जीवन में कुछ गलत हुआ। मोबाइल फोन आया, इंटरनेट
आया। उसकी वजह से तुमने अपने डायरेक्शंस को बदल लिया। रोस्ट हो गया क्या? देखो उसी प्रकार से अगर मान लो यहां नहीं आता ये
ग्लास स्लैब तो लाइट एकदम सीधी जाती सीधी जाती सीधी जाती सीधी जाती ठीक है ठीक है पर लाइट अब कहां जा रही है यहां पर जा रही
है ठीक है तो इमर्जेंट रे इमर्जेंट रे ये क्या है इमर्जेंट रे इमर्जेंट रे और इंसिडेंट रे के बीच का ये जो डिस्टेंस है
ये जो पैरेलल डिस्टेंस है इसको हम बोलते हैं लेटरल डिस्प्लेसमेंट क्या बोलते हैं बेटा लेटरल डिस्प्लेसमेंट क्या है लेटरल
डिस्प्लेसमेंट पैरेलल डिस्टेंस बिटवीन इंसिडेंट रे एंड इमर्जेंट रे इज़ कॉल्ड लेटरल डिस्प्लेसमेंट। इतनी चीजें थी जो कि
आपको यहां पर पता होना चाहिए। ठीक है? डेफिनेशंस इंपॉर्टेंट है स्पेशली किसकी? लेटरल डिस्प्लेसमेंट की। इमरजेंट रे इज़
पैरेलल टू दी इंसिडेंट रे विद अ परपेंडिकुलर डिस्टेंस। क्या बोलते हैं परपेंडिकुलर डिस्टेंस को? ठीक है? याद
रहेगा? जल्दी बताओ। जल्दी बताओ। बहुत बढ़िया। समझ आ गया? एकदम सही। चलो। यहां तक की सारी चीजें क्लियर हो गई। यहां पर दो
बार रिफ्रेक्शन हो रहा है। कैसे-कैसे हो रहा है? अब तुम खुद बता सकते हो। अब वापस से आते हैं वापस से पीछे। तुम्हें याद हो
तो मैंने बोला sin ऑफ एंगल ऑफ इंसिडेंस डिवाइड बाय साइन ऑफ एंगल ऑफ रिफ्रेक्शन इज ऑलवेज कांस्टेंट। उस कांस्टेंट की वैल्यू
क्या है भैया? उस कांस्टेंट की वैल्यू है किसके बराबर? रिफ्रैक्टिव इंडेक्स के बराबर। अब ये क्या भला है यार भैया? एक
चीज समझते नहीं है। दूसरी फेंक के मारते हो। मैंने कहा तो यार फिर वही चीज़ वाई टू फियर प्रशांत भैया इज़ हिय है। देख
रिफ्रैक्टिव इंडेक्स को सबसे पहले तो हम ऐसे लिखते हैं n। और कुछ-कुछ किताबों के अंदर ऐसे u से भी लिखा जाता है। ठीक है?
ये क्या होता है? ये एबिलिटी है। ये ताकत है। तुम मुझसे पंजा लड़ाओगे। तो शायद मैं किसी-किसी को हरा दूं, किसीकिसी को मैं ना
हरा पाऊं। तो वो मेरी ताकत है। उसी प्रकार से रिफ्रैक्टिव इंडेक्स एक मीडियम की ताकत है कि वो लाइट को कितना बेंड कर पाएगा।
ठीक है? तो एक चीज आपको अपने नोट्स में नोट डाउन करना है कि रिफ्रैक्टिव इंडेक्स इज़ डायरेक्टली प्रोपोर्शनल टू बेंडिंग।
यानी जिस मीडियम की जितनी ज्यादा रिफ्रैक्टिव इंडेक्स होगा वो उतना ही ज्यादा लाइट को बेंड करेगा। ठीक है? एंड
सेकंडली रिफैक्टिव इंडेक्स इज आल्सो डायरेक्टली प्रोपोर्शनल टू डेंसिटी। यानी जिस मीडियम की ज्यादा डेंसिटी होगी ना जो
ज्यादा डेंसर होगा ऑटोमेटिकली उसकी ये जो है ना ये क्या है? रिफैक्टिव इंडेक्स वो ज्यादा होगा। ठीक है? डेंसिटी ज्यादा तो
रिफ्रैक्टिव इंडेक्स ज्यादा और बेंडिंग भी ज्यादा। अब एक इंपॉर्टेंट चीज है इट इज़ इन्वर्सली प्रोपोर्शनल टू दी स्पीड ऑफ
लाइट। यानी बेटा समझना अगर कोई मीडियम जिसका रिफैक्टिव इंडेक्स ज्यादा है तो उसमें जो लाइट है ना वो बड़ी घबराई घबराई
सी जाएगी वो रुक-रुक के जाएगी उसकी जो स्पीड है वो कम हो जाएगी जबकि कोई ऐसा मीडियम जो कि बेचारा रेयरर मीडियम जिसका
रिफ्रैक्टिव इंडेक्स कम है तो उसमें लाइट कैसे जाएगी फटाफट से फास्टफास्ट तो इसलिए याद रखना इट इज़ इन्वर्सली प्रोपोर्शनल
वेरीेंट चलिए जी चलिए जी है ना तो रिफ्रैक्टिव इंडेक्स क्या होता है वो मैं आपको बता दिया इज़ अ मेजर ऑफ हाउ मच लाइट
इज बेंट कितनी लाइट को एक मीडियम बेंट करा सकता है चलो फार्मूला क्या होता है? रिफ्रैक्टिव
इंडेक्स का? अगर तुम्हें किसी भी मीडियम का रिफ्रैक्टिव इंडेक्स निकालना है। मैं बताता हूं क्या फार्मूला है। फार्मूला है
C / V हैं। C / V ये क्या है? C है स्पीड ऑफ लाइट इन एयर। जो कि तुम्हें पता है ऑलरेडी 3 * 10 रेज़ टू पावर 8 है ना?
स्टार्टिंग में बताया था। और V क्या है? स्पीड ऑफ़ लाइट इन दैट मीडियम। यानी अगर मुझे किसी भी मीडियम का रिफ्रैक्टिव
इंडेक्स निकालना है तो मैं क्या करूंगा? स्पीड ऑफ़ लाइट डिवाइड बाय स्पीड ऑफ़ लाइट इन दैट मीडियम। उस मीडियम में लाइट की
स्पीड क्या है? इस फ़ॉर्मूले से मैं किसी भी मीडियम का रिफ्रैक्टिव इंडेक्स निकाल सकता हूं। फॉर एग्ज़ांपल, मान लो स्पीड ऑफ़
लाइट इन ग्लास इतनी है। तो बताओ रिफ्रैक्टिव इंडेक्स कितना होगा? फॉर्मूले में पुट कर लो। फ़ूले में पुट कर लो। तो
रिफ्रैक्टिव इंडेक्स कितना आ जाएगा? 3 * 10 रेज़ टू पावर 8 / 2 * 10 रे टू पावर 8। तो ये कट जाएगा। ये आ जाएगा 1.5। ठीक है?
हां। वैसे ही कटा है बेटा जैसे तुम्हारा भी कटा था। ओ सॉरी। चलो है ना? 1.5 रिफ्रैक्टिव इंडेक्स आ गया। चलिए बहुत
सही। बहुत सही। ये समझ आ गया? किसी भी मीडियम का रिफ्रैक्टिव इंडेक्स ऐसे कैलकुलेट कर सकते हैं। अब एक ऐसा टॉपिक
आता है जिससे बच्चे बहुत कंफ्यूज होते हैं। बट मैं बोल रहा हूं इससे ज्यादा सवाल नहीं आते। कंफ्यूज नहीं होना है। टॉपिक
क्या है? रिलेटिव रिफ्रैक्टिव इंडेक्स। अभी क्वेश्चन कराऊंगा बेटा। मान लो मान लो यहां पर है मीडियम वन। है ना? एयर नहीं है
मीडियम वन। अच्छा एक बात याद रखना एयर का जो रिफ्रैक्टिव इंडेक्स होता है वो हमेशा वन होता है। क्या होता है? वन होता है।
ठीक है? एयर का रिफ्रैक्टिव इंडेक्स वन होता है। यहां पर है मीडियम वन। ठीक है? यहां पर है मीडियम और और यहां पर है
मीडियम टू। ठीक है? दो मीडियम है। दोनों के रिफ्रैक्टिव इंडेक्स अलग हैं। अब मान लो क्वेश्चन में तुमसे पूछा जाए
रिफ्रैक्टिव इंडेक्स ऑफ़ मीडियम टू विद रिस्पेक्ट टू ये क्या है बेटा? wrt क्या है? हैं? ये क्या है? विद रिस्पेक्ट टू
विद रिस्पेक्ट टू मीडियम वन। तो उसका फार्मूला क्या होगा? फार्मूला बता रहा हूं। जिसकी इज्जत देते हैं उसको नीचे डाल
देते हैं। यानी विद रिस्पेक्ट टू जिसको इज्जत दे रहे हैं किसको इज्जत दे रहे हैं? मीडियम वन को विद रिस्पेक्ट टू उसको नीचे
डाल दो। यानी यानी इसका फार्मूला आएगा n2 / n1 यानी अगर तुमसे कोई बोले मीडियम टू विद रिस्पेक्ट टू मीडियम वन तो जो जिसकी
इज्जत कर रहे हैं उसको नीचे डाल दो फ़ूले में। यानी रिफ्रैक्टिव इंडेक्स ऑफ़ मीडियम टू डिवाइड बाय रिफ्रैक्टिव इंडेक्स ऑफ़
मीडियम वन। यह इसका डायरेक्टली फ़ॉर्मूला बनके आता है। अब एक और फ़ॉर्मूला है। तुम्हें याद होगा? तुम्हें याद होगा?
अच्छा, इसको एक और तरीके से लिखते हैं। n21 n21 कैसे? n21। ठीक है? n21 का क्या मतलब है? n21 का मतलब क्या है? वही है
सेम। n2 / n1 इसका मतलब यही होता है बेटा सेम रख। अब देखो, तुम्हें याद है ना कि जिसका रिफ्रैक्टिव इंडेक्स ज्यादा उसमें
स्पीड ऑफ लाइट कम। यानी रिफ्रैक्टिव इंडेक्स इज़ इन्वर्सली प्रोपोर्शनल टू दी स्पीड ऑफ़ लाइट। याद होगा। तो इस फार्मूले
का n2 / n1 का एक और फार्मूला है जो कि है इसका अपोजिट यानी v1 / v2 ये क्या है? स्पीड ऑफ लाइट इन मीडियम वन डिवाइड बाय
स्पीड ऑफ लाइट इन मीडियम टू मैंने क्या करा? रेसिप्रोकल। क्यों करा? क्योंकि लाइट और रिफ्रैक्टिव इंडेक्स रेसिप्रोकल। तो ये
जो फॉर्मूलेज़ हैं ये भी तुम्हें याद रखने हैं। इस पे सवाल आते हैं। अभी दिखाऊंगा अभी। ठीक है? ठीक है? क्या बोला? जिसकी
इज्जत करो उसको नीचे डाल दो। जैसे क्वेश्चन में बोला जाए रिफ्रैक्टिव इंडेक्स ऑफ़ मीडियम वन विद रिस्पेक्ट टू टू
तो क्या लिखोगे? n1 / n2 n1 / n2 है ना? और स्पीड में उल्टा। चलो चलो बहुत बढ़िया। इसके कुछ क्वेश्चन देखते हैं। क्लेरिटी
मिलेगी। आ जाओ। क्वेश्चन देखते हैं। क्लेरिटी मिलेगी। चलो भाई इस क्वेश्चन को सॉल्व करो फटाफट। चलो भाई, कौन-कौन इसको
सॉल्व कर पाया? क्वेश्चन ईजी है। देखो, रिफैक्टिव इंडेक्स ऑफ दी वाटर इज़ 1.33। यानी हमें रिफ्रैक्टिव इंडेक्स वाटर का
गिवन है जो कि है 1.33। क्या बोल रहा है? इफ दी स्पीड ऑफ लाइट इन एयर इज दिस फाइंड दी स्पीड ऑफ लाइट इन वाटर। देखो फार्मूला
तुम्हें पता है। रिफ्रैक्टिव इंडेक्स का फार्मूला होता था c / v याद आ गया स्पीड ऑफ लाइट इन एयर डिवाइड बाय स्पीड ऑफ लाइट
इन दैट मीडियम। तो हमें वाटर का रिफ्रैक्टिव इंडेक्स गिवन है 1.33। हमें स्पीड ऑफ लाइट गिवन है दिस। हमें निकालना
क्या है? हमें वेलोसिटी यानी स्पीड ऑफ़ लाइट इन दैट मीडियम ही तो निकालना है। तो क्या करूंगा? इसको यहां भेजूंगा। इसको
यहां भेजूंगा। तो कैलकुलेशन तुम कर लेना। है ना? तुम्हारे हवाले वतन साथियों। ठीक है? कैलकुलेशन तुम कर लेना। ये तुम्हारा
आंसर आएगा। इसका ट्राई करना। कैलकुल कैलकुलेशन तो कर लो यार। चलो आ जाओ। अगला सवाल देखते हैं। अगला सवाल। द एब्सोल्यूट
रिफैक्टिव इंडेक्स। एब्सोल्यूट रिफ्रैक्टिव इंडेक्स कुछ नहीं होता। तुम ऐसे ही समझो कि रिफ्रैक्टिव इंडेक्स ही
है। ठीक है? ऑफ़ वाटर एंड ग्लास आर 4 / 3 एंड 3/2। यानी रिफैक्टिव इंडेक्स ऑफ़ वाटर इज़ 4/3। रिफ्रैक्टिव इंडेक्स ऑफ़ ग्लास इज़
3/2। ठीक है? अब क्वेश्चन में क्या बोल रहा है? विद द स्पीड ऑफ लाइट इन ग्लास। हमें ग्लास के अंदर स्पीड ऑफ लाइट गिवन
है। ठीक है भाई? क्वेश्चन देखते हैं। द स्पीड ऑफ लाइट इन वाटर विल बी पानी में स्पीड ऑफ लाइट क्या होगी? समझो। सोचो
सोचो। अच्छा एक और सेकंड पार्ट पढ़ते हैं पहले। द रिफैक्टिव इंडेक्स ऑफ़ ग्लास विद रिस्पेक्ट टू वाटर। क्या तुम्हें बता सकते
हो? जिसकी इज्जत करो नीचे डाल दो। ठीक है? तो मैं इसको लिख देता हूं। रिफ्रैक्टिव इंडेक्स ऑफ़ ग्लास डिवाइड बाय रिफ्रैक्टिव
इंडेक्स ऑफ़ वाटर। अच्छा ग्लास की भी पता है, वाटर की भी पता है। तो वैल्यू्यूज पुट कर देते हैं एक बार। आ जाओ भाई वैल्यूज़ को
पुट कर देते हैं। 3/2 डिवाइड बाय डिवाइड बाय 4 / 3 ठीक है जी? क्या आ रहा है आंसर बेटा? क्या आ रहा है आंसर? तो ये आ जाएगा
आपका 9 / 8। ठीक है? तो सेकंड पार्ट का तो हमने आंसर निकाल लिया। 9 / 8 पहला पार्ट। अब ध्यान से देखो। तुम्हें पता है।
तुम्हें पता है ये इस टर्म को ध्यान से देखो। मैं इसको क्या ध्यान से देखना बेटा। जो मैं करने जा रहा हूं अब चमत्कार सा
होगा। देखना क्या मैं इसको रेसिप्रोकल करके कुछ इस प्रकार से लिख सकता हूं। क्या किसी को कोई आपत्ति या कोई प्रॉब्लम बता
दे? कैसे कैसे हुआ? कैसे हुआ? भैया ये सवाल कैसे हुआ? देख भाई क्या करा मैंने? वेलोसिटी रेसिप्रोकल होती है। ठीक है? तो
मैं ऐसे लिख सकता हूं। इसको ऊपर डाल दिया। इसको नीचे डाल दिया। ठीक है? अब देख तुझे इसकी वैल्यू भी गिवन है। इसकी वैल्यू भी
गिवन है। और देख क्या गिवन है? ग्लास के अंदर भी वेलोसिटी गिवन है। निकालना क्या है? ये निकालना है। तो क्या अब तुम नहीं
निकाल सकते मूर्खों? बस इसको यहां पर मल्टीप्लाई में ले जाओ। बस टाटा बाय-ब खत्म। गुड बाय गया। ठीक है? इतना ईजी सवाल
था। है ना? इतनी ईजी सवाल था। ठीक है? हां। चलो भाई अगले सवाल पे बढ़ते हैं। चलो अगला सवाल देखते हैं। वैसे पता है मेरी एक
चीज मानना है कि हर एक लड़की को जीवन में एक ना एक लड़के से दोस्ती तो जरूर करनी चाहिए क्योंकि वहां पर तुम सब सीख पाओगे
कि जुगाड़ तरीके से कैसे रहा जाता है। है ना? लाइफ के अंदर दोस्ती कैसे निभाई जाती है। और लड़कों तुम्हें भी लड़कियों से
दोस्ती करनी चाहिए। अब तुम्हें रीज़न की थोड़ी ना जरूरत है। तुम्हें तो पता है तुम्हें करनी चाहिए। ठीक है? तुम्हें रीज़न
की जरूरत नहीं है। चलो हो पाए तो कर लेना। तुम्हारे भरोसा भी नहीं है मुझे। देखो क्या है? क्वेश्चन में बोल रहा है वाटर
हैज़ अ रिफ्रैक्टिव इंडेक्स 1.33 एंड अल्कोहल हैज़ अ रिफ्रैक्टिव इंडेक्स 1.36 व्हिच ऑफ दी टू मीडियम इज़ ऑप्टिकली डेंसर?
कौन ज्यादा ताकतवर? जिसका रिफ्रैक्टिव इंडेक्स ज्यादा वो ज्यादा ताकतवर। बहुत बढ़िया। तो किसका ज्यादा है? ऑब्वियस सी
बात है। 1.36 यानी अल्कोहल। अल्कोहल श्री श्री हनी पाजी जी कह के गए थे। चार बोतल बोर्ड का काम मेरा रोज का। ठीक है? तो
अल्कोहल का जो रिफ्रैक्टिव इंडेक्स है वो ज्यादा है तो वो ऑप्टिकली डेंसर ज्यादा है। ठीक है? ड्रॉ अ रे डायग्राम शो दी
पाथवे ऑफ द राइट लाइट पासिंग थ्रू वाटर टू अल्कोहल। देखो भाई ये वाटर ये अल्कोहल। अब देखना बेटा वाटर का जो रिफ्रैक्टिव
इंडेक्स है वो कम है। यानी ये रेयरर और ये डेंसर। अब तुम खुद बताओ आर डी शर्मा को क्या पसंद था? बताओ भाई आर डी शर्मा को
क्या पसंद था? अरे भैया नॉर्मल पसंद था ना? तो इस प्रकार से कुछ डायग्राम बन के आ जाएगा। लास्ट पार्ट स्टेट दी रिलेशन। ओह
हो रिलेशनशिप ही तो नहीं स्टेट कर पा रहे हैं भैया। स्टेट दी रिलेशनशिप बिटवीन दी एंगल ऑफ इंसिडेंस एंड एंगल ऑफ रिफ्रेक्शन।
वेरीेंट। देखो मान लो यहां पर है एंगल i और यहां पर है एंगल r। इनके बीच का रिश्ता बताओ। तुम्हें पता है एक फार्मूला
sini / sinr = रिफ्रेक्टिव इंडेक्स यस यस अच्छा यहां पर रिफ्रैक्टिव इंडेक्स कैसे लिखोगे
तुम कहां पर आई लाइट एयर में आई एयर सो बोल रहा हूं सॉरी अल्कोहल में आई कहां से आई? वाटर से आई है ना अगर हमें इसका
रिफ्रैक्टिव इंडेक्स लिखना है तो फार्मूला क्या होगा फार्मूला होगा रिफैक्टिव इंडेक्स ऑफ़ अल्कोहल डिवाइड बाय
रिफ्रैक्टिव इंडेक्स ऑफ वाटर। ठीक है? वो इनका नेट नेट क्या होगा? नेट रिफ्रैक्टिव इंडेक्स होगा। ठीक है? जिसमें आई डिवाइड
बाय जिससे आई है ना? जिसमें आई डिवाइड बाय जिससे आई। बोला था ना? हां चलो। तो बस लिख दो भाई। रिफ्रैक्टिव इंडेक्स की वैल्यू
क्या आ जाएगी? अल्कोहल की क्या है? अल्कोहल की है 1.36 डिवाइड बाय 1.33। तो ये जो रिलेशन है
यही रिलेशन है रिश्ता यही कहलाता है। तो आपको इस क्वेश्चन के अंदर यही लिख के आना था। ठीक है जी? तो ये रिश्ता यही कहलाता
है। है ना? ये रिश्ता कुछ नहीं कहलाता। यही कहलाता है। ठीक है? चलो मुझे पता है रिफ्रैक्टिव इंडेक्स में थोड़ी बहुत ऊपर
नीचे कभी कबभार प्रॉब्लम आ जाती है। थोड़ी प्रैक्टिस करोगे तो बेटा हो जाएगा। अब बढ़ते हैं। भाई क्या स्मार्ट लग रहे हैं
तुम्हारे पीके भैया यार हैं। हां आज तो कपड़े भी ग्रीन पहने हैं। तो बेटा मैं तो ग्रीन फ्लैग हूं। क्या हूं? ग्रीन फ्लैग।
तुम्हारी भाषा में बोलते हैं ना ग्रीन फ्लैग, रेड फ्लैग, पर्पल फ्लैग, ऑरेंज फ्लैग, सारे फ्लैग है। मैं ग्रीन हूं भाई।
चलो आओ अब पढ़ते हैं लेंस। लेंस भी दो ही प्रकार के। कॉनकेव कॉन्वेक्स। कॉनकेव कॉन्वेक्स। कॉनकेव
कॉन्वेक्स। अब देखना बेटा कॉनकेव और कॉन्वेक्स लेंस कैसे दिखेंगे? तो कॉन्वेक्स लेंस जो होता है वो कुछ इस
प्रकार से दिखता है। ठीक है बेटा? कुछ इस प्रकार से। और जो कॉनकेव लेंस है वो कुछ इस प्रकार से दिखता है। यानी हमने क्या
करा है? कॉन्वेक्स लेंस को बनाने के लिए हमने दो कॉन्वेक्स मिरर को जोड़ दिया है। अब अगर आप ध्यान से देखो यह भी कॉन्वेक्स
मिरर थी। यह भी कॉन्वेक्स मिरर थी। आपस में दोनों को जोड़ दिया। ठीक है? सिमिलरली ये दो कॉनकेव मिरर को हमने आपस में जोड़
दिया। ठीक है? तो एक कॉनकेव एक कॉन्वेक्स। अब यहां पर अपोजिट है। लेंस आर एग्जैक्टली अपोजिट ऑफ द मिरर। क्या कह रहे हो भैया?
अंग्रेजी में बड़ी भारी बात कर दी। देख समझ। जो मिरर करते थे वो लेंस नहीं करेंगे। यानी मिरर में कॉनकेव मिरर क्या
करता था? गुफा। गुफा क्या करती थी? कन्वर्ज करती थी लाइट को एक डायरेक्शन में। है ना? याद है ना? कन्वर्जिंग? हां।
पर यहां पर यहां पर ये जो कॉन्वेक्स होगा कॉन्वेक्स कैसा होगा? कन्वर्जिंग लेंस। यानी ये लाइट को कन्वर्ज करेगा। जबकि जो
कॉनकेव होगा वो क्या करेगा? वो लाइट को डायवर्ज करेगा। दूर भेजेगा। तो ये कन्वर्जिंग लेंस ये डायवर्ज अपोजिट।
अपोजिट एकदम अपोजिट। जैसा मिरर में था उसके अपोजिट लेंस। चलो है ना? अब यहां पर भी कुछ अ चीजें होती हैं। जैसे हमने वहां
पर पढ़ा था। यहां की कुछ-कुछ चीजें बदल जाती हैं। मैं आपको विद डायग्राम समझा देता हूं। मैं आपको विद डायग्राम समझा
देता हूं। देखना बेटा इस डायग्राम को देखते हैं। सबसे पहली चीज जो सेंटर होता है ना लेंस का उसको हम बोलते हैं ओ। ओ
यानी ओ नहीं वो जादू पिक्चर दिखी थी। ओ ओ ओ ओ वो वाला ओ नहीं। इसका मतलब है ऑप्टिकल सेंटर। सिमिलरली इसमें भी ऑप्टिकल सेंटर।
ठीक है भैया? अब याद रखना यहां पर यहां पर दो अलग-अलग फोकस होते हैं। एक फोकस तो राइट साइड, एक फोकस लेफ्ट साइड। ठीक है?
दो जगह फोकस है इसका। दो जगह फोकस है। जैसे तुम्हारे दोस्तों का भी दो-दो जगह फोकस रहता है। वैसे इसका भी दो जगह फोकस
है। एक यहां पर उसको हम बोलते हैं F1। और एक यहां पर उसको हम बोलते हैं F2। क्या बोलते हैं? F2। अब इस डायग्राम में एक
गलती है। क्या गलती है? ये C1 और C2 क्या है? भैया ये सेंटर ऑफ़ कर्वेचर होगा ना जो हमने मिरर में था। नहीं नहीं याद रखना।
याद रखना लेंस में लेंस में C नहीं होता, सेंटर ऑफ कर्वेचर नहीं होता। लेंस में क्या होता है? लेंस में होता है 2F1 और
2F2 मतलब वही है। बस नाम अलग है। तो पेपर में कभी भी सी मत लिखना वरना पेपर में तुम्हारा सी बन जाएगा बेटा। तो इसलिए C
नहीं लिखेंगे। 2F1 2F2 2F1 2F2 2F12f2 बहुत बढ़िया। बहुत बढ़िया यार। क्या बात है। है ना? मतलब वही है कि यहां से लेकर
यहां तक जो डिस्टेंस होगा और यहां से लेकर यहां तक जो डिस्टेंस होगा वो दोनों बराबर होंगे। ठीक है? ठीक है? और अब ये भी तुम
बोल सकते हो कि F1 विल बी क्या होगा? ट्वाइस। देखो 2F1 का क्या मतलब है? कि ये डबल हो गया। क्या हो गया? ये F1 के डबल हो
गया। बहुत बढ़िया। यहां तक की चीज़ समझ में आई? अच्छा, एक लाइन होगी जो कि ऑप्टिकल सेंटर से पास करेगी। उसका नाम भी सेम
होगा। प्रिंसिपल एक्सिस। क्या होगा? प्रिंसिपल एक्सिस। बहुत बढ़िया। ठीक है? तो अब एक-एक करके सारी डेफिनेशंस को देख लो।
वैसे डेफिनेशन पूछी नहीं जाती पेपर में बट फिर भी पहला है प्रिंसिपल एक्सिस एक इमेजिनरी स्ट्रेट लाइन बता दिया अपर्चर
यहां पर भी एक टर्म होती है अपर्चर जैसे मिरर में अपर्चर क्या होता था मिरर का रिफ्लेक्टिंग लेंथ सिमिलरली ये क्या होता
है यहां पर द डायमीटर ऑफ अ सर्कुलर आउटलाइन यानी जो सर्कुलर आउटलाइन है ना एसआई लेंस ये क्या है बोलो बोलो बोलो बोलो
कौन सा लेंस है कॉन्वेक्स इसकी जो सर्कुलर आउटलाइन आउटलाइन है ना उसका जो डायमीटर है वो अपना क्या कहला कहलाता है वो कहलाता है
अपर्चर। ठीक है? ऑप्टिकल सेंटर पता है। यहां पर सेंटर ऑफ़ कर्वेचर नाम से कुछ भी नहीं होता। याद रखना कुछ भी नहीं होता।
रेडियस ऑफ़ कर्वेचर भी कुछ नहीं होता। ठीक है? प्रिंसिपल फोकस होते हैं F1 और 2F1। F2 और 2F2 दो-दो होते हैं बेटा यहां पर।
यहां पर दो-दो हैं। चलो आगे बढ़ते हैं। अब कुछ इंपॉर्टेंट चीज़, कुछ इंपॉर्टेंट चीज़ जो कि मुझे आपको बतानी है। जैसे हमने मिरर
में रूल पढ़े थे। यहां पर भी रूल्स हैं। हां, यहां पर भी हैं। पर यहां पर कम रूल्स हैं और ईजी रूल है। और इसका जो रे
डायग्राम है वो सबसे सिंपल है। मैं लिटरली बता रहा हूं। दिल से बता रहा हूं। सबसे सिंपल है। देखो रूल नंबर वन। रूल नंबर वन
क्या बोलता है? वही सेम सेम। देख अगर तू ने मिरर समझ लिया ना तुझे लेंस में 1% प्रॉब्लम नहीं आएगी। 1% देख। अगर कोई भी
चीज पैरेलल है तो वो कहां से पास करेगी? बोल बोल बोल बोल फोकस से पास करेगी। अब यहां पर समझ लेना। ये लेंस कौन सा है? यह
लेंस कौन सा है? कन्वर्जिंग लेंस। यह क्या करेगा? लाइट को कन्वर्ज करेगा। मान लो एक लाइट यहां से आई। यह बीच की एक लाइन होती
है और इस लाइन के आगे से चीजें बेंड होने लगती हैं। तो ऐसे लाइट को बेंड कर देगा ऐसे। ठीक है? तो ये क्या करेगा? कन्वर्ज
करेगा। ठीक है? कोई भी लाइट रे अगर पैरेलल होगी इट विल पास थ्रू फोकस। अच्छा इसी चीज को अगर हम इस लेंस की मदद से देखें। ये
कौन सा लेंस है? कॉनकेव। बार-बार बोलते चलना ताकि तुम्हारी मेमोरी के अंदर प्रैक्टिस हो जाए। अब देखो इसका क्या काम
होता ये ना दूर भेज देता है। ये डायवर्जिंग लेंस है। ठीक है? तो एक्चुअली में तो फोकस से पास नहीं करेगा। पर जो
चीजें रियल में नहीं मिल पाती वो कहां मिलती है? वर्चुअल दुनिया में। तो आ जाओ भाई वर्चुअल वर्चुअल वर्चुअल वर्चुअल
वर्चुअल बहुत बढ़िया। तो f1 में f1 में जाकर क्या होगा? जब भी लाइट पैरेलल होगी फोकस से पास करेगी। वही सेम चीज है। अगला
देखते हैं। अगला आ जाओ। देखो रूल नंबर टू। वेरी सिंपल। इसका अपोजिट है। अगर कभी भी लाइट रे फोकस से पास करेगी तो फोकस बोलेगी
पैरेलल हो जा। क्या हो जा पैरेलल देखो टिंग डिंग डिंग डिंग डिंग डिंग डिंग डिंग अच्छा एक वो कार्टून आता सर निंजा हथौड़ी
डिंग डिंग डिंग डिंग डिंग डिंग डिंग डिंग ऐसे ही कुछ होता था ना डिंग डिंग डिंग डिंग डिंग डिंग हां तो ऐसे ही डिंग डिंग
डिंग डिंग डिंग डिंग डिंग डिंग डिंग अब क्या होगा पैरेलल हो जाएगी लाइट बहुत बढ़िया बेटा ये मिरर नहीं है कि लाइट वापस
से आ जाए ये लेंस है लेंस में से लाइट पास कर जाती है ठीक है आगे देख अब यहां पर देखो लाइट इज़ गोइंग टुवर्ड्स फोकस फोकस की
तरफ जा रही है तो क्या होगा? पैरेलल। क्या होगा बेटा? पैरेलल। क्या हो जाएगा? पैरेलल। बहुत बढ़िया। ये भी एक नंबर। ये
भी समझ आया। रूल नंबर टू सिंपल। रूल नंबर थ्री और आखिरी रूल सबसे इजी। यहां का गुंडा कौन? यहां का गुंडा कौन? यहां का
गुंडा है ऑप्टिकल सेंटर। ऑप्टिकल सेंटर बोलता है जो मुझसे जाएगा वो सीधा जाएगा। मुड़ेगा नहीं। जो मुझसे जाएगा वो एकदम सीधा
जाएगा। भैया मेरे से जो जाना है ना वो मुड़नाव मुड़ना नहीं है। एकदम सीधे जाओ। नो बेंडिंग। नो बेंडिंग। तो जब भी लाइट
ऑप्टिकल सेंटर से पास होगी, देयर विल बी ज़ीरो बेंडिंग। लाइट एकदम सीधी पास होगी। ठीक है? लाइट एकदम सीधी पास होगी।
सिमिलरली सिमिलरली चाहे दूसरा लेंस हो, कॉनकेव लेंस हो, लाइट सीधी पास हो गई। अब तुम ये सोचो कि ये ज़ीरो बेंडिंग क्यों आ
रही है? मैं आपको एक कांसेप्ट बता रहा हूं बेटा। याद रखना। याद रखना। तब लाइट बेंड नहीं करती। दो केस होते हैं। और ये दो केस
को नोट कर लेना। दो केस होते हैं। जब आपका एंगल ऑफ इंसिडेंट जब आपका एंगल I कितना होगा? ज़ीरो होगा। जब एंगल ऑफ इंसिडेंस
ज़ीरो होगा। और दूसरा केस ये पूछ लिया जाता है एमसीक्यू में। ठीक है? दूसरा केस। दूसरा केस क्या है? जब दोनों मीडियम एक
मीडियम से दूसरे मीडियम में लाइट जा रही है। जब दोनों मीडियम का जो रिफैक्टिव इंडेक्स हो वो सेम हो। क्या हो? सेम हो।
है ना? अगर मान लो पानी से लाइट पानी में ही जा रही है तो लाइट बेंड थोड़ी ना करेगी। दोनों का रिफ्रैक्टिव इंडेक्स सेम है। तो
ये दो केसेस होते हैं जब लाइट बेंड नहीं करती। अब ये तुम्हारा होमवर्क है। ये बताओ ऑप्टिकल सेंटर में ऐसा क्या हो रहा है इन
दोनों में से? कि लाइट जो है एकदम सीधी जा रही है। ठीक है? पेपर में नहीं पूछा जाता बट एक्स्ट्रा नॉलेज के लिए सर्च करना। चलो
ये क्या उड़ रहा है भाई आज? क्या उड़ रहा है दोस्त? मिलने आए हैं क्या? मिलने आए हो क्या मुझसे? चलो देखो। अब समझना बेटा।
कॉन्वेक्स लेंस की इमेज फॉर्मेशन आ जाओ। भाई छह केसेस हैं। जैसे कॉनकेव में छह केसेस थे। यहां पर भी सेम छह केसेस हैं।
जैसे वहां पर तुम्हें याद हो तो हमने अलग-अलग छह रे डायग्राम बनाए थे। किस में बनाए थे? कॉनकेव में। यहां पर शुक हो गया।
शुक शुक यानी उल्टा। तो यहां पर भी छह ही केस होंगे बट वो कॉन्वेक्स के होंगे। देखो केस नंबर वन ऑब्जेक्ट मोमबत्ती जी बहुत
दूर है। ओहो लो भाई मोमबत्ती जी फिर आओ। मोमबत्ती जी बहुत दूर है। एकदम इनफाइनाइट। तो जब भी कोई चीज दूर होती है बेटा तो
लाइट कैसी आती है? लाइट कैसी आती है? बताओ। बोलो भाई पैरेलल। और जब भी लाइट पैरेलल आती है तो क्या होगा? कहां पर
मिलेगी बताओ? वो मिलेंगी आपकी फोकस पे। ठीक है? तो इमेज कहां बनेगी? F2 पे। फोकस प्रिंसिपल फोकस F2। प्यारा-प्यारा नन्हा
मुन्ना F2। ठीक है? इमेज कैसी बनेगी बेटा? ये अरे क्या हो गया भैया? इमेज कैसी बनेगी बेटा? ये बताओ। इमेज कैसी बनेगी? बताओ।
अच्छा अब मैंने तुम्हें बताया लेंस और मिरर अपोजिट है। मिरर में क्या होता था? जब भी इमेज लेफ्ट साइड में बनती थी तो
क्या होता था? रियल इनवर्टेड। जब भी राइट में बनती थी वर्चुअल इरेक्ट। यहां पर अपोजिट है। एकदम अपोजिट कि जब भी इमेज
राइट साइड में बनेगी तो इमेज कैसी होगी? रियल प्लस रियल का बड़ा भाई इनवर्टेड। और जब भी लेफ्ट साइड में बनेगी तो वर्चुअल और
वर्चुअल का बड़ा भाई इरेक्ट। ठीक है? इमेज कहां बन रही है? F2 पे। राइट साइड में तो कैसी होगी? रियल इनवर्टेड। और इमेज होगी
पॉइंट साइज्ड। कैसी होगी? एकदम छोटी हाईली डिमिनेस्ट। टिन्नी मुन्नी। सारे केस सेम होंगे कॉनकेव मिरर की तरह। जो जो कॉनकेव
मिरर जिसजिस को याद है ना ये याद करने की जरूरत ही नहीं है। और यही बहुत प्यारी चीज है कि अगर तुम्हें मिरर आ गया तो ये
तुम्हें याद नहीं करना। अगला बिय्ड 2F1 जैसे वहां पर क्या होता था? बिय्ड सी यहां पर क्या होगा? बियोंड 2f1 आ जाओ मोमबत्ती
जी यार। कहां चली जाती हो? बिना बताए जाती हो मुझे। आ जाओ। लो भाई लाइट रे बनाओ। डिंग डिंग डिंग डिंग डिंग डिंग डिंग डिंग
डिंग डिंग डिंग डिंग डिंग और वो कहां टकराएगी? यहां से जाएगी। बहुत बढ़िया। अब पता है इनका रे डायग्राम बहुत सिंपल है।
एक लाइट को हमेशा पैरेलल फेंको और फोकस से पास कराओ। दूसरी लाइट रे को हमेशा ऑप्टिकल सेंटर पे फेंक दो। क्योंकि ऑप्टिकल सेंटर
से कभी भी कोई चीज मुड़ नहीं पाती। ठीक है? तो दूसरी लाइट रे को ऐसे ऑप्टिकल सेंटर से ऐसे क्या करो? ऐसे फेंक दो। यानी मैंने
क्या करा? दूसरी लाइट रे को ऐसे ऑप्टिकल सेंटर से फेंक दिया। तो ये दोनों लाइट रे कहां पर जा के मिल रही है? तो ये मिल रही
हैं F2 और 2F2 के बीच में। कहां पर? F2 और 2F2 के बीच में। अगर तुम्हें याद हो मिरर में क्या होता था? बिटवीन? बोलो बोलो बोलो
बोलो बोलो बोलो एफ एंड सी एफ एंड सी बिटवीन एफ एंड सी आपकी मिल रही होती बहुत बढ़िया बेटा। क्या बात है यार। क्या बात
है। चलो। है ना? तो वैसे ही बनेगी। इमेज कैसी बनेगी भाई? सेम है। इमेज स्मॉल बनेगी, रियल बनेगी, इनवर्टेड बनेगी, उल्टी
बनेगी। चलो ये हो गया केस नंबर टू। अब आते हैं फटाफट से केस नंबर थ्री। केस नंबर थ्री क्या है? यहां पर बुला लिया मोमबत्ती
जी को। याद करो सी पे क्या होता था? सी पे क्या होता था? सेम जगह पर इमेज बनती थी और सेम साइज की बनती थी। अब यहां पर देखना
बेटा। डिंग डिंग डिंग डिंग डिंग डिंग डिंग डिंग डिंग डिंग। ठीक है? और और यहां से एक लाइट रे को डालो। यहां से एक लाइट रे को
डालो। ये आपस में जहां पर पॉइंट में जाकर मिलेंगी तो वो जो पॉइंट होगा वो 2F2 के नीचे होगा। 2F1 पे ऑब्जेक्ट था। इमेज बनी
2F2 पे। सेम साइज बनेगा। कैसा बनेगा? एकदम सेम। सेम साइज रियल इनवर्टेड। सब कुछ सेम है। कुछ नया है ही नहीं। बस रे डायग्राम
थोड़े अलग हैं। रे डायग्राम थोड़े अलग हैं। चलो जी। अगला देखते हैं। ऑब्जेक्ट बिटवीन 2F1 एंड F1 यानी एक ऐसा ऑब्जेक्ट
जब हम ऑब्जेक्ट को कहां पर खड़ा कर दें? मोमबत्ती जी को यहां पर। याद करो जब सी और एफ के बीच में ऑब्जेक्ट होता था तो इमेज
कहां बनती थी? बिय्ड सी है ना? सिमिलरली यहां पर हम बना कर देख लेते हैं भाई डिंग डिंग डिंग डिंग डिंग डिंग डिंग डिंग डिंग
डिंग। ठीक है? और इसी प्रकार से हम इसको ऐसे करेंगे। तो जो लाइट्स जो आपस में जाकर मिलेंगी वो कुछ इस इधर मिलेंगी। यानी
बिय्ड 2F2 2F2 के पीछे बन रहा है। है ना? इमेज कैसी बनेगी? बड़ी बनेगी। लार्ज इमेज बनेगी। है ना? एकदम लार्ज इमेज बनेगी।
रियल बनेगी, इनवर्टेड बनेगी। भाई ये है ना? हां। क्या बात है यार। तुम्हें सारे केसेस याद है। वेरी गुड बेटा। एक बार
शाबाशी। आ जाओ। ऐसे मेरे को भी दे दो। मैं भी तो मेहनत कर रहा हूं। इतनी देर से खड़ा हूं। 1ढ़ घंटे से तुम्हारे सामने ऐसी उसमें
खड़ा हूं यार। हैं? बताओ यार। थोड़ी शाबाशी। मैं मैं भी तो डिर्व करता हूं बेटा। चलो अगला। वही केस। अब मान लो
मोमबत्ती जी को मैंने F1 पे लाकर खड़ा कर दिया है। मिरर में क्या होता था? इंफिनिटी। अब देखते हैं यहां पर क्या
होगा? डिंग डिंग डिंग डिंग डिंग डिंग डिंग। देखो भाई दोनों लाइट रेज़ जो है वो पैरेलल है। लाइट रेज़ पैरेलल होंगी तो कहां
मिलेंगी? इनफाइनाइट। है ना? क्या पता बेटा तुम्हारा जो जीवन है उसकी लाइट रेज़ भी इनफाइनाइट है। है ना? तुम्हारे जीवन में
तुम्हें वो कब मिलेगी? इनफाइनाइट। ठीक है? तब ऐसे ही यहां पर लाइट रेज भी इनफाइनाइट पे मिलेंगी। क्या इमेज बनेगी? इमेज विल
नॉट फॉर्म। नई एनसीईआरटी के हिसाब से बता रहा हूं बेटा। ये बच्चे ना गलत करके आएंगे। एनसीईआरटी अपडेट हो चुकी है। और
उसमें बोला है कि जब भी जब भी फोकस पे रखा जाता है ऑब्जेक्ट तो इनफाइनाइट पे इमेज बनती है। तो इमेज रियल होगी, वर्चुअल
होगी, बड़ी होगी, छोटी होगी उसके बारे में हम बोल ही नहीं सकते। हम उसके बारे में बता ही नहीं सकते। ठीक है? बहुत बढ़िया।
इनफाइनाइट पे बनेगा। बहुत सही। समझ आ गया? है ना? चलो और लास्ट केस और सबसे इंपॉर्टेंट केस स्टार मार्क कर लो बेटा।
लास्ट केस जब मैंने मोमबत्ती जी को ऑप्टिकल सेंटर ये क्या है बेटा? ऑप्टिकल सेंटर और और F1 के बीच में रखा है। अब
देखना यहां क्या होगा? ये बहुत जरूरी है बेटा। देखो पहले लाइट रे को भेजो डिंग डिंग डिंग करके और डिंग डिंग डिंग करके
ऐसे कर दो। ये क्या है भाई डिंग डिंग डिंग? चलो। और दूसरी लाइट रे को ऐसे। अब देखो ये क्या ये दोनों लाइट कहीं मिलेंगी?
नहीं मिलेंगी। दूर ही जाई जा रही है बेटा। तो कहां पर मिलेंगी? वर्चुअल दुनिया में मिलेंगी ना भैया। हां। हां तो ऐसे वर्चुअल
दुनिया में कहीं यहां पर जाकर ये मिल जाए है ना तो इमेज कहां बनेगी बोलो इमेज लेफ्ट साइड में और जब भी कोई चीज लेफ्ट यानी
इमेज बनेगी वर्चुअल इरेक्ट प्लस लार्ज या फिर लिख सकते हो हाइली अनलार्ज ठीक है क्या ये छठा केस समझ आया जल्दी
बताओ फटाफट से क्या ये छठा केस समझ आया वेरीेंट यानी कॉनकेव मिरर और कॉन्वेक्स लेंस आर सेम दे आर अगर तुम्हें एक समझ आ
गया तो तुम्हें दूसरा भी समझ आया ना ये ठीक है और इसके जो रेड डायग्राम है बेटा वो तो स्पेशली अरे क्या हो गया भाई इसके
जो रे डायग्राम है वो तो स्पेशली बहुत ज्यादा ईजी है। राइट? चलो तो ये आपकी पूरी की पूरी समरी है। इस समरी को देखो और बताओ
इसमें क्या कोई डाउट है? चलो भाई बहुत ईजी था। समझ आ गया सबको? बहुत ईजी है। और डायग्राम्स भी सबको समझ आ गए होंगे। याद
रखना जो लास्ट केस है उसमें इमेज कैसी बनती है? एनलार्ज बनती है। बड़ी इमेज बनती है। और इमेज कैसी होती है? वर्चुअल होती
है। वर्चुअल का बड़ा भाई इरेक्ट होती है। चलो। अच्छा कॉन्वेक्स लेंस के यूजज़ क्या है? पहली चीज ये जो है ये कन्वर्जिंग लेंस
है। कन्वर्जिंग लेंस को हम एक तरीके से और बोल सकते हैं कि ये भी बिग लाइट की तरह काम करेगा। यानी ये चीजों को मैग्नीिफाई
करेगा। क्या करेगा? मैग्नीफाई। तो इसके जो यूजज़ होते हैं सबसे पहला वो होता है मैग्नीिफाइंग ग्लास। वो देखते हो तुम? ऐसा
देखा है तुमने? मैग्नीिफाइंग ग्लास से तो देखते हैं। हां। तो जो मैग्नीिफाइंग ग्लास है ना ये मैग्नीाइंग ग्लास की बेटा जरूरत
तब भी पड़ सकती है जब तुम्हें अपने नंबर देखने हो। नंबर इतने कम है कि भैया दिख ही नहीं पा रहे हैं। पर तुम मुझसे पढ़ रहे हो
तो नंबर आ जाएंगे। ठीक है? तो मैग्नीिफाइंग ग्रास के अंदर जरूरत पड़ती है। अगली चीज करेक्टिंग हाइपरमेट्रोपिया।
ये अगले चैप्टर में आप पढ़ोगे। ह्यूमन आई जब आप पढ़ोगे उसमें पढ़ोगे। अभी इसको भूल जाओ। अगली चीज यूज्ड इन माइक्रोस्कोप एंड
टेलिस्कोप। याद रखना जितने भी माइक्रोस्कोप हैं, टेलिस्कोप है क्योंकि माइक्रोस्कोप में चीज को बड़ा करना है। तो
उसमें भी आपका यही लेंस कॉन्वेक्स लेंस। कौन सा? कॉन्वेक्स लेंस जो कि मैग्नीिफाइंग की तरह काम कर रहा है। वही
यूज़ किया जाता है। ठीक है जी। क्या ये चीज समझ में आ गई? चलो बहुत सही। आगे देखते हैं। अब बात करते हैं कॉनकेव लेंस
की। किसकी बेटा? कॉनकेव लेंस की। अब याद करो कॉन्वेक्स मिरर उसमें कितने केस थे? दो केस थे। कॉनकेव लेंस दो केस कौन से
केस? सेम इंफिनिटी एनी या फिर या तो इंफिनिटी होगा या तो किसी भी डिस्टेंस पे होगा। अगर मान
लो मेरा प्यारी-प्यारी मोमबत्ती जी इंफिनिटी पे हैं। मेरी प्यारी-प्यारी मोमबत्ती जी अगर इंफिनिटी पे हैं तो लाइट
कैसे आएंगी? बेटा? लाइट बहुत दूर से आएंगी। और तुम्हें पता है कि यह ना लाइट को ऐसे दूर फेंक देता है। क्या कर देता है
ये लाइट को दूर फेंक देता है। इट विल अपीयरर्स टू मीट एट फोकस। यानी अगर मैं इसे ट्रैक करूंगा तो ये कहां पर मिलेगा?
ये ऑब्जेक्ट जो है वो फोकस पे बनेगा। है ना? तो जो इमेज बनेगी दैट विल बी ऑन फोकस। बड़ी छोटी बनेगी। कैसी बन रही है? वर्चुअल।
वर्चुअल का बड़ा भाई बोल बोल बोल बोल बोल बोल। अरे यार इरेक्ट। बहुत बढ़िया। क्या बात है। है ना? दूसरा केस मान लो मान लो
आपका जो ऑब्जेक्ट है वो किसी भी डिस्टेंस पे फाइनाइट डिस्टेंस पे है। मान लेते हैं हम हमारा ऑब्जेक्ट यहां पर। ठीक है? तो अब
देखो एक लाइट रे को तो ऐसे भेजो। तो तुम्हें पता है वो ऐसे दूर चला जाएगा। हां या ना? सबको मालूम है। बहुत बढ़िया। अच्छा
दूसरी लाइट रे को वही ये पोल नहीं है बेटा। ऑप्टिकल सेंटर है। ऑप्टिकल सेंटर से ऐसे सीधी भेज दो। ऑप्टिकल सेंटर से तो कोई
मुड़ता ही नहीं है। ऑप्टिकल सेंटर तो गुंडा है। अब इसको बैक ट्रैक करो। पीछे ट्रैक करो। तो तुम्हें दिखेगा कि इमेज यहां पर
बनेगी। ठीक है? ये कौन सा पॉइंट है? पोल। पोल नहीं है सॉरी ऑप्टिकल सेंटर और F1 तो यानी इमेज कहां पर बनेगी? F1 एंड O के बीच
में। कैसी इमेज होगी? छोटी होगी। छोटी है ना? तो याद रखना ये जो आपका लेंस है कॉनकेव लेंस ये हमेशा इमेज छोटी बनाएगा।
कभी मैग्नीिफाई बड़ी इमेज नहीं बना सकता। छोटी बनाएगा, वर्चुअल बनाएगा, इरेक्ट बनाएगा? क्या ये हमें समझ आया बेटा? जल्दी
बताओ। जल्दी बताओ। है ना? जल्दी बताओ। अच्छा एक सही बात बताना। ऐसा तुम्हारे साथ कितनी बार हुआ है कि मतलब कुछ तुम्हारे
ऐसे दोस्त तो जरूर होंगे जो कि जब तुम्हारा रिजल्ट अच्छा आता है। है ना? फिर उसके बाद वो घर जाते हैं। है ना? और घर
में जाकर वो बोलते हैं मम्मी वो मेरे ना 50 में से 20 नंबर आए हैं। तो उनकी मम्मी डांटती हैं कि इतने कम कैसे आए हैं? तो
बोलते हैं मम्मी वो राहुल के भी इतने ही आए हैं। अच्छा और क्लास के टॉपर के कितने आए? क्लास के टॉपर के 25 हाईएस्ट मार्क्स
ही 25 है मम्मी 25 ही हाईएस्ट हैं और वो तेरे बेस्ट फ्रेंड उसके मम्मी वो तो फेल हो गया और तुम्हारे 30 नंबर आए हो चाहे 50
घर पे यही बोलते हैं सब कि मम्मी वो तो मम्मी वो तो फेल हो गया क्यों उससे बच जाते हैं ना थोड़ा सा हां तुम्हारा दोस्त
तुम्हारे मार्क्स देखकर खुश है पर घर पे बेचारे को बोलना पड़ रहा है कि मम्मी फेल हुआ है वो फेल ही हो सकता है तो थोड़ा ऐसे
करना पड़ता है तुम्हारे साथ भी होता होगा है ना चलो बहुत बढ़िया आगे बढ़ते हैं आगे बढ़ते हैं यहां तक की चीज सारी समझ आ गई
चलिए चलिए कॉन्वेक्स लेंस। अच्छा ये टेबल जो है वही है टेबल एकदम शॉर्ट में यहां पर समझा रखा है। अब आते हैं यूजज़ ऑफ़ कॉनकेव
लेंस। सॉरी कॉन्वेक्स बोल रहा हूं। 1 मिनट ये क्या कर दिया भैया? ये क्या कर दिया? उल्टा लिख दिया क्या? कॉनकेव करो भैया।
बताओ भाई उधर अगर पीछे कॉन्वेक्स था, कॉनकेव था, जो भी था, उसको भी सही कर लेना। देखो भाई, कॉनकेव लेंस के क्या-क्या
यूज़ज़ हैं? कॉनकेव लेंस उल्टा का कॉनकेव लेंस उल्टा काम करेगा किसके? जो हमने पहले पढ़ा कॉन्वेक्स से। ठीक है? ये क्या करता
है? ये दूर करता है चीजों को। क्या करता है? दूर करता है। तो इसका एक काम तो होता है ये मायोपिया को करेक्ट करने के काम आता
है। ये अगले चैप्टर में पढ़ेंगे। ठीक है? यहां पर देखो ऑप्टिकल इंस्ट्रूमेंट्स जितने भी आपके ऑप्टिकल्स इंस्ट्रूमेंट्स
होते हैं बहुत सारे। स्पेशली जो मैंने आपको बताया था ना शुरू में वो जो एक होल होता है जिससे तुम देखते हो कि बाहर कौन
खड़ा है डोर के? उस होल के अंदर यही लेंस लगता है। कौन सा लेंस? कॉनकेव लेंस। चलो। उसके अलावा लेजर फ्लैश लाइट्स है ना? बहुत
सारी जितनी आपकी लेज़र्स होती हैं जिनको दूर जाना होता है। है ना? दूर ऐसे फैलना होता है। तो उसके लिए क्योंकि देखो इसका
काम क्या है? लेंस क्या करेगा? ये लेंस जो है चीजों को ऐसे फैला देगा। है ना? तो मान लो मान लो तुम्हें एक लाइट को ऐसे फैलाना
है। तो वहां पर आपका यही वाला लेंस यूज़ होने वाला है। ठीक है? जहां पर आपको लाइट को डायवर्ज करना हो। जैसे कि लेजर
फ्लैशाइट्स एंड बीम एक्सपेंडर्स। ठीक है? लेजर फ्लैशाइट्स एंड बीम एक्सपेंडर। ये आपकी टॉर्च लाइट। देखो टॉर्च लाइट का क्या
होता है? जैसे फैलना होता है। तो वहां पर कौन सा लेंस यूज़ होता है? कॉनकेव। बहुत अच्छा कंफ्यूज बेटा मुझे पता है समटाइ्स
इट इज़ कंफ्यूजिंग कॉनकेव कॉन्वेक्स कॉनकेव कॉन्वेक्स पर बेटा जब तुम उसका नंबर याद कर सकते हो इतना तो कर सकते हो ठीक है आ
जाओ भाई देखते हैं ये क्वेश्चन बड़ा प्यारा है स्टार मार्क करना देखते हैं एक स्टडी की गई है जिसमें कि तीन अलग-अलग प्रकार के
कॉन्वेक्स लेंस हैं a b c ये वही क्वेश्चन है जो कि हमने मिरर में करा था ये अलग-अलग प्रकार के कॉन्वेक्स लेंस हैं उनकी फोकल
लेंथ 15 20 और 12 ठीक है और ये ऑब्जेक्ट का डिस्टेंस है ऑब्जेक्ट को कहां पर रखा गया क्वेश्चन में पूछ रहा है इन वि वन ऑफ
दी अबव केस विल दी लेंस फॉर्म दी वर्चुअल इमेज? वर्चुअल इमेज कब बनाता है लेंस? याद करो वर्चुअल इमेज कौन सा लेंस है?
कॉन्वेक्स लेंस। कॉन्वेक्स लेंस वर्चुअल इमेज एक ही केस में बनाता है जब ऑब्जेक्ट को हम ऑप्टिकल सेंटर और F1 के बीच में रख
दें। ठीक है? अच्छा फोकल लेंथ कितनी है? फोकल लेंथ देखो इसकी 12 है। इसकी 20 है। इसकी 15 है। अगर तुम ध्यान से देखोगे पहले
केस को इसकी फोकल लेंथ 15 है। यानी यहां से लेकर यहां तक का डिस्टेंस 15 है। बट ऑब्जेक्ट को सिर्फ 10 सें.मी. पे रखा है।
है ना? अगर यहां से लेकर यहां तक का डिस्टेंस 15 है और ऑब्जेक्ट को सिर्फ 10 सें.मी. पे रखा है तो इमेज कैसी बनेगी?
हां, वर्चुअल और इरेक्ट। चलिए, पहले का आंसर मिल गया। लिस्ट टू प्रॉपर्टीज़ ऑफ़ द इमेज फॉर्म्ड इन केस टू। केस टू क्या है?
केस टू देखते हैं। फोकल लेंथ है 25 और ऑब्जेक्ट को हमने अ फोकल लेंथ है 20 और ऑब्जेक्ट को हमने 25 सें.मी. पे रखा है।
यानी यानी अगर इसको थोड़ा सा तुम इमेजिन कर पाओ बेटा जैसे कि ये देखो ये है f1 है ना जो कि कितना है? 20 सें.मी. और हमने
ऑब्जेक्ट को यहां पर रखा हुआ है। यानी यानी बिटवीन बिटवीन f1 एंड 2f1 इसके बीच में है। तो इमेज कैसी बनती थी? रियल और
इनवर्टेड तो बनती थी, बट कहां बनती थी? सोचो सोचो सोचो कहां बनती थी दिमाग लगाओ दिमाग लगाओ एक बार फटाफट से नहीं आ रहा है
यार बेटा ऐसे कैसे चलेगा यार इतने सारे रे डायग्राम बना दिए इसकी भी ट्रिक चाहिए इसकी ट्रिक भी बता दूंगा टेंशन मत लो इसकी
ट्रिक भी बता दूंगा इमेज जो बनती थी वो बनती थी बियनड 2f2f2 के पीछे बनती थी बड़ी इमेज बनती थी रियल बनती थी और बोलो हां
इनवर्टेड चलो अगला क्या है व्हाट इज दी नेचर एंड दी साइज ऑफ इमेज फॉर्म्ड बाय दी लेंस ए लेंस ए ने कैसी इमेज बनाई वर्चुअल
बनाई इरेक्ट बनाई और बड़ी बनाई, लार्ज बनाई क्योंकि केस तो तुम्हें पता ही है स्पेशल केस। चलो बहुत सारे बच्चे ट्रिक
मांग रहे हैं। तो आ जाओ भाई लेंस की भी ट्रिक दे देते हैं। आ जाओ भाई। छह केसेस की क्या ट्रिक है भैया? तो अपने पास है
पीके ट्रिक। अपने पास है पीके ट्रिक। आ जाओ भाई फटाफट से। लो भाई कुछ नहीं करना। नंबरिंग वही आपको काउंटिंग तो आती है ना
दोस्तों? अगर आपको काउंटिंग आती है तो आपको कुछ करना ही नहीं है। काउंटिंग करना है। आ जाओ भाई। काउंटिंग करते हैं। है ना?
1 2 3 ऐसे करेंगे बस। वन वन होगा इनफाइनाइट। 1 2 3 4 5 6 अब वही काउंटिंग यहां से शुरू कर दो।
क्या दिक्कत है? क्या दिक्कत है बेटा? यहां से शुरू कर दो। वही काउंटिंग। क्या करना है? देखना बेटा। देखते चलना। वन टू
थ्री फोर फाइव। फाइव होगा इनफाइनाइट पे। ठीक है? फाइव। और सिक्स्थ सिक्स्थ केस हमेशा स्पेशल होता है। सिक्स्थ में तो
इमेज ही वर्चुअल पे बनती थी। है ना? तो अब इससे मैंने तुम्हें क्या बताना चाहा? अगर ऑब्जेक्ट वन पे है यानी इनफाइनाइट पे है
तो इमेज कहां बनेगी? वन पे यानी f2 पे। बहुत बढ़िया। अगर बियनड 2f1 है तो इमेज कहां बनेगी? देखो ये देखो कहां बन रही है?
इस टू पे। यानी बिटवीन f2 और 2f2 वही है सेम चीज। अगर थ्री पर है तो इमेज कहां बनेगी? थ्री पर बनेगी। है ना? अगर फोर पर
है तो इमेज बनेगी फोर पे। अगर फाइव पे है तो इमेज बनेगी फाइव यानी इनफाइनाइट पे। आई ले जादू। आइले जादू भैया ये क्या हो गया?
जादू नहीं है बेटा। ये तो ट्रिक्स है। है ना? ये तो सिंपल-सिंपल सी ट्रिक्स हैं। आई होप आपको ये सारी चीजें समझ आ गई होगी।
चलो फटाफट से आगे बढ़ते हैं। अच्छा एक बात मुझे बताओ। एक बात मुझे बताओ कि साइन कन्वेंशन मिरर में तुम्हें समझ आया था? वो
सेम साइन कन्वेंशन तुम्हें लेंस में लगाना है। क्या था साइन कन्वेंशन? कोई भी चीज अगर लेफ्ट तो नेगेटिव, कोई भी चीज अगर
राइट तो पॉजिटिव। ऊपर पॉजिटिव, नीचे नेगेटिव। वही सेम है। कुछ भी अलग नहीं है। मैं बदलूंगा ही नहीं साइन कन्वेंशन। मैं
सेम रखूंगा और उसी से तेरे सारे न्यूमेरिकल सॉल्व करवा दूंगा। ठीक है? बस यहां पर फार्मूला बदलता है। अच्छा मिरर
फार्मूला क्या होता था? 1 / v + 1 / u = 1 / f अब यहां पर बस एक नेगेटिव का साइन आ जाता है। ये साइन याद रखना। ये जो तुम्हें
माइनस का साइन दिख रहा है ना ये बहुत इंपॉर्टेंट है। 1 / v - 1 / u 1 / f v क्या है? इमेज का डिस्टेंस ऑब्जेक्ट का
डिस्टेंस फोकल लेंथ। ठीक है? अच्छा अब मुझे तुम खुद सोच के बताओ ये वाला जो लेंस है कौन सा है? कॉन्वेक्स। इसकी फोकल लेंथ
पॉजिटिव होगी या नेगेटिव? इसकी फोकल लेंथ कहां होती है बेटा भैया? दोनों तरफ होती है। अरे नहीं नहीं इमेज कहां ये बनाता है?
ये इमेज बनाता है इस डायरेक्शन में। राइट? राइट? हां। यानी राइट साइड में। फोकल लेंथ कैसी होगी? पॉजिटिव। अच्छा इसके साथ क्या
था? जल्दी-जल्दी बताते चलो बेटा। इसके साथ क्या है? ड्राइंग मेरी बहुत खतरनाक है बेटा। इसकी कहां बनती थी फोकल लेंथ? इस
डायरेक्शन में। तो इसकी जो फोकल लेंथ होगी वो नेगेटिव होगी। भैया ये कैसे याद करेंगे? देख चाहे मिरर हो, चाहे लेंस हो।
कॉनकेव मिरर एंड लेंस बोथ विल हैव ऑलवेज नेगेटिव फोकल लेंथ। कॉनकेव लेंस और कॉनकेव मिरर एंड कॉन्वेक्स मिरर एंड कॉन्वेक्स
लेंस विल ऑलवेज हैव पॉजिटिव फोकल लेंथ। ऐसे याद कर लो। चाहे मिरर हो लेंस हो फोकल लेंथ। सेम ही रहेगी। ठीक है? बहुत सही।
चलिए तो ये फार्मूला समझ आ गया। अच्छा यहां पर भी एक चीज़ होती है मैग्नीफिकेशन। मैग्नीिकेशन वही है। हाइट ऑफ़ इमेज डिवाइड
बाय हाइट ऑफ़ ऑब्जेक्ट। पर इसका फ़ूला बदल जाता है। इसका फ़ूला हो जाता है v / u यानी वो जो नेगेटिव का साइन था वो कट जाता है।
वो हट जाता है। ठीक है? नेगेटिव का साइन हटा दिया। बस इतना। सही है। बहुत बढ़िया। अच्छा। अब ये जो मैग्नीफिकेशन है वो क्या
बताएगा यहां पर? वही सेम चीज़ जैसे मिरर में था ना मैग्नीफिकेशन अगर नेगेटिव आया तो रियल प्लस इनवर्टेड। अगर पॉजिटिव आया
तो वर्चुअल प्लस इरेक्ट। सेम है बेटा। कुछ नहीं बदल रहा। वो कहानी पूरी सेम है। चलो अब आता है एक इंपॉर्टेंट टॉपिक।
इंपॉर्टेंट टॉपिक है पावर ऑफ द लेंस। इससे 10001% एक सवाल इजी सा आता है। पावर क्या है? मेरी पावर क्या है? मेरे में कितनी
ताकत है? सिमिलरली लेंस की पावर कहलाती है एबिलिटी टू कन्वर्ज और डायवर्ज लाइट। ये लेंस क्या करेगा? कन्वर्ज करेगा। ये लेंस
क्या करेगा? डायवर्ज करेगा। तो क्या होता है? एबिलिटी। एबिलिटी टू कन्वर्ज और डायवर्ज दी लाइट इज कॉल्ड पावर ऑफ द लेंस।
ठीक है? पावर क्या है? एबिलिटी टू कन्वर्ज या डाइव। या तो हम उसको कन्वर्ज कर देंगे या डायवर्ज कर देंगे। उसी को अपन बोलेंगे
पावर लेंस की। ठीक है? क्या बोलेंगे? पावर। अच्छा पावर का एसआई यूनिट क्या होता है? एसआई यूनिट होता है पावर का
डायोऑप्टियर। क्या होता है बेटा? डायोऑप्टियर। ठीक है? मीटर हटाओ डायोऑप्टियर। ठीक है? क्या होता है? d ये
होता है पावर का एसआई यूनिट। ठीक है जी? बहुत सही। अच्छा। अब ये ये जो पावर है इसका फार्मूला क्या होता है? तो पावर का
फार्मूला होता है 1 / f यानी 1 / फोकल लेंथ। पर याद रखना बेटा गलती होगी। फोकल लेंथ यहां पर मीटर में है। किसमें? मीटर
में और सारे सवाल के अंदर जो फोकल लेंथ होती है वो सेंटीमीटर में होती है। तुमने नोट करा होगा। तो इस फ़ूले को बदल के लिख
लो। पावर इक्व 100 / f जब f किसमें है? सेंटीमीटर में। फार्मूला क्या हो गया? 100 / f। ये फार्मूला याद रखना क्योंकि यही
यूज़ होगा। ठीक है? पावर का यूनिट क्या है? डायोप्टियर। ठीक है? अब मान लो मान लो सवाल आ जाए डिफाइन वन डायोप्टियर। डिफाइन
कर दोगे। क्या बोलोगे? वन डायोप्टियर इज़ दी पावर ऑफ़ द लेंस हुज़ फोकल लेंथ इज़ 1 मीटर। जिसकी फोकल लेंथ इस फार्मूले को
देखो। जिसकी फोकल लेंथ 1 मीटर है, उसकी पावर क्या होगी? उसकी पावर भी होगी 1 डायप्टीयर। हां या ना? हां या ना? बहुत
सही। बहुत सही। चलो। अच्छा अब ये समझना अपने दो लेंस हैं कॉन्वेक्स। कॉन्वेक्स लेंस की फोकल लेंथ पॉजिटिव होती है।
कॉनकेव की नेगेटिव होती है। इसका ये मतलब है कि जो पावर होगी कॉन्वेक्स लेंस की वो कैसी होगी? वो भी पॉजिटिव होगी। क्योंकि
भाई साफ़ पता चल रहा है ना, यार, फार्मूला क्या है? 1 / F. अब मान लो अगर फोकल लेंथ ही नेगेटिव है, तो पावर भी क्या हो जाएगी?
नेगेटिव। अगर फोकल लेंथ पॉजिटिव तो पावर भी पॉजिटिव। तो याद रखना कॉन्वेक्स लेंस की फोकल लेंथ पॉजिटिव। कॉनकेव की नेगेटिव।
बहुत बढ़िया। ये भी समझ में आ गया है ना? अब एक सवाल करते हैं। उससे आपको और क्लेरिटी मिलेगी। फोकल लेंथ ऑफ दी लेंस इज़
25 सें.मी. बताओ भाई क्या होगा? पावर क्या होगी? पावर होता है। देखो सेंटीमीटर है। हां हां पकड़े गए। फार्मूला सही पुट करना
था। क्या आएगा? 4 डायोप्टीयर। फोर डायोप्टीयर। अब क्वेश्चन में कभी कबभार ये पूछ लेता है कि एक लेंस है। एक लेंस है
उल्टा क्वेश्चन जिसकी पावर है +4 डायोप्टीयर। ठीक है? अब ये बताओ ये कौन सा लेंस है? इसकी पावर पॉजिटिव होती है।
जिसकी फोकल लेंथ पॉजिटिव। किसकी फोकल लेंथ पॉजिटिव होती थी? कॉन्वेक्स। बहुत बढ़िया। तो जो कॉन्वेक्स लेंस है वही लेंस होगा ये
+4 डायोप्टियर का। अच्छा इसी क्वेश्चन में अगर तुमसे कोई फोकल लेंथ निकालने को पूछ ले। कैसे निकालोगे? फार्मूला तुम्हें पता
है। है ना? पता है ना फार्मूला? ठीक है? अब हमें पावर पता है। पावर है 4 डायोप्टीयर। ठीक है? तो फोकल लेंथ क्या हो
जाएगी? इसको यहां ले जाओ। इसको यहां ले जाओ। तो फोकल लेंथ हो जाएगा 100 / 4 दैट इज इक्वल्स टू 25 सें.मी. देख के बताओ
क्या ये चीज़ समझ में आ गई बेटा? बहुत बढ़िया। बहुत बढ़िया। क्या बात है। चमक गया। है ना? तो ऐसे पावर और ये
फोकल लेंथ। इन सबके सवाल आ जाते हैं। कभी कबभार सवाल ऐसे भी आ जाते हैं कि ये एक लेंस है। ये कॉन्वेक्स लेंस है जिसकी पावर
है +2 डायोप्टियल। और उसको जोड़ दिया है एक कॉनकेव लेंस के साथ जिसकी पावर है -4 डायोप्टीयर। ठीक है? तो अब इनकी नेट पावर
बताओ। तो नेट पावर कैसे बताओगे? कुछ नहीं करना। दोनों को ऐड कर देना है। ये +2 ये -4 कितना आ जाएगा? नेट पावर कितनी आ
जाएगी? नेट पावर आ जाएगी -2 डायप्टर। तो ऐसे भी कभी नॉर्मल नॉर्मल क्वेश्चन आ जाते हैं। ज्यादा ईजी आते हैं। मतलब यहां से
सवाल उतने हार्ड नहीं आते। राइट? जल्दी बताओ। क्या समझ में आ गया? क्वेश्चन करो। द फोकल लेंथ ऑफ दी फोर कॉन्वेक्स लेंस
pqrs आर 20 15 5 एंड 10 सेंमी वि लेंस विल हैव ग्रेटेस्ट पावर अगर तुमने फॉर्मूले पे ध्यान दिया हो तो फार्मूला ये है जिसकी
फोकल लेंथ कम उसकी पावर ज्यादा यस और नो यार क्या कर रहा है भाई हां यस तो किसकी फोकल लेंथ सबसे कम है दिख रहा है दिख रहा
है r आर r आर आर आर र है ना? तो R जो होगा उसकी पावर सबसे ज्यादा होगी। अच्छा पावर सबसे कम किसकी
होगी वो तुम कमेंट सेक्शन में बताना। चलो आगे बढ़ते हैं। फोकल लेंथ ऑफ दी कॉन्वेक्स लेंस इज़ 10 सें.मी. इफ दी ऑब्जेक्ट इज़
प्लेस्ड 15 सें.मी. अवे फाइंड दी पोजीशन एंड नेचर। अब ये आ गए हैं न्यूमेरिकल। फटाफट से इसको सॉल्व करो। ट्राई करो सॉल्व
करने की। मैं भी करवाता हूं। कौन-कौन इसको सॉल्व कर पाया? वैसे क्वेश्चन उतना कोई टफ नहीं था। बेसिक क्वेश्चन था। देखो सबसे
पहले गिवन लिख लेते हैं। कॉन्वेक्स लेंस की फोकल लेंथ है 10 सें.मी. कॉन्वेक्स लेंस की फोकल लेंथ प्लस होती है। पॉजिटिव
होती है। बताया था ना? हां सही है। मिरर हो चाहे लेंस हो पॉजिटिव ही होती है। ठीक है? ऑब्जेक्ट जो है वो u है। ऑब्जेक्ट का
जो डिस्टेंस होता है वो हमेशा नेगेटिव होता है। ये भी बता दिया क्योंकि वो हमेशा लेफ्ट साइड में रखा जाता है। ठीक है? इमेज
बतानी है यानी हमें v बताना है और उसका नेचर। नेचर कैसे निकालते हैं? मैग्नीिफिकेशन से। ठीक है? अब देखो
फार्मूला क्या बोलता है? ये होता है बेटा फार्मूला। ये क्या होता है? लेंस फार्मूला। बहुत बढ़िया। अब इसमें बस आपको
क्या निकालना है? v निकालना है। है ना? U की वैल्यू क्या है? -1 /15 f क्या आ जाएगा? 1 / f क्या आ जाएगा? 1/10। ठीक है?
ये नेगेटिव नेगेटिव ये पॉजिटिव हो जाएगा। ये पूरा पॉजिटिव हो जाएगा। इसको यहां पर ट्रांसफर करेंगे तो नेगेटिव हो जाएगा।
देखो कैलकुलेशन जो है ना बेटा उसका सारा गेम होता है। ठीक है? ये सबका आया क्या? जल्दी बताओ। बहुत सही। अब बताओ एलसीएम
क्या आ रहा है? एलसीएम हमारा होगा 30। एलसीएम ले लिया 30 है ना? इस पे आ गया 3 - 2 तो ये आ गया आपका 1 / 30 1 / v की
वैल्यू आ गई 1 / 30 तो v की वैल्यू आ जाएगी आपकी 30 सें.मी. यानी ऑब्जेक्ट का डिस्ट ऑब्जेक्ट की जो इमेज आई है उसका
डिस्टेंस आ गया 30 सें.मी. ठीक है? किस तरफ होगा बताओ? पॉजिटिव 30 सें.मी. यानी याद करो भाई। राइट साइड कहां पर? राइट
साइड में इमेज बनी। बहुत बढ़िया। अच्छा अब नेचर बताना है। नेचर कैसे बताते हैं? मैग्नीफिकेशन से। यहां पर बेटा माइनस हट
जाता है मैग्नीिफिकेशन में याद बहुत याद है पता है तुझे याद है याद है ठीक है ठीक है हां ठीक है तो ये आ गया 30 डिवाइड बाय
u क्या है u है -15 u है -15 तो ये आ जाएगा आपका -2 कितना आ गया -2 ये माइनस क्या बता रहा है बेटा ये माइनस बता रहा है
कि इमेज रियल है इनवर्टेड है टू क्या बता रहा है कि इमेज का जो साइज है वो डबल है एज कंपेयर टू ऑब्जेक्ट समझ आया इन यादों
में खोया है बेटा एक बात याद रखना दो चीजों पे लाइफ में कभी भी विश्वास मत करना। लड़कियों की Instagram वाली डीपी पे
और लड़कों की प्यार भरी बातों पे। सारा फोकस मास्टर पे रखना। ठीक है? हां। देखो आ गया समझ में? चलो
डन है। एक और क्वेश्चन लगाते हैं भैया। मजे-मजे में और क्वेश्चन करेंगे। आ जाओ। अ ऑब्जेक्ट इज़ प्लेस्ड एट अ डिस्टेंस 15
सें.मी. फ्रॉम कॉनकेव लेंस। यानी u की वैल्यू हमें गिवन है -15। U हमेशा माइनस होगा। कॉनकेव लेंस की फोकल लेंथ। अच्छा ये
बताओ कॉनकेव लेंस की फोकल लेंथ कैसी होती है? पॉजिटिव होती है ना? हां। चाहे मिरर हो चाहे लेंस। फाइंड दी पोजीशन एंड द नेचर
ऑफ द इमेज फॉर्म। आल्सो ड्रॉ दी रे डायग्राम। कुछ नहीं बताना भाई। V निकाल दो और रे डायग्राम भी बना कर दिखा दो। ये पूछ
रहा है यार। इसमें क्या है? V निकालने के लिए भाई पुट कर दो भाई। लेंस फ़ूला की जय हो। क्या हो भाई? लेंस फ़ूला की जय हो। चलो
भाई। है ना? माइनस माइनस ये प्लस हो जाएगा। अब मैं कैलकुलेशन थोड़ी फटाफट कर रहा हूं। तो फोकस एकदम हाई रखना। अगर फोकस
हटा तो दुर्घटना घटेगी। ये आई गेस सेम ही क्वेश्चन है। ये आई गेस सेम ही क्वेश्चन है। है ना? क्योंकि सारी वैल्यू्यूज तो
सेम हैं। सारी की सारी वैल्यू्यूज तो सेम ही हैं। है ना? आई गेस ये सारी की सारी वैल्यू्यूज तो बेटा सेम ही आ रही हैं। चेक
करना जरा फटाफट से। क्या आ रहा है तुम्हारा आंसर? क्या आ रहा है आंसर? जल्दी बताओ। 1 / v - 1 / u ये है आपका कौन? 1
मिनट। 1 मिनट 1 मिनट। हमने एक चीज़ गलत कर ली है। सॉरी सॉरी सॉरी सॉरी। यह तो कॉनकेव लेंस है। कॉनकेव लेंस की फोकल लेंथ तो
भैया नेगेटिव होती है यार। क्या कर रहे हो यार? क्या कर रहे हो भाई? है ना? क्या कर रहे हो? बताओ भाई। नेगेटिव होती है यार ये
तो। ये तो भैया गलत बात है। चलो कोई बात नहीं। हमने देखा नहीं भैया। भारी मिस्टेक हो गई। माफ़ी करना। इसको माइनस कर दो। है
ना? यहां पर माइनस लगा लो। इधर भी माइनस लगा लो। ठीक है जी? अब ठीक है। अब ठीक है। खुश हो? चलो। अब एलसीएम ले लो। ठीक है जी?
30 30 ये आ गया कितना? -3 और -2 तो ये आ जाएगा -5/30 और ये आ जाएगा -1 / 6 तो यानी 1 / v की वैल्यू आई -1 /6 इसका ये मतलब है
कि जो v की वैल्यू आएगी वो आएगा -6 सें.मी. क्या आया बेटा? -6 सें.मी. क्या सबका यही आया? जल्दी बताओ। क्या सबका यही
आया? बहुत बढ़िया। बहुत बढ़िया। ये आ गया सबका। अब हमें नेचर बताना है। नेचर कैसे निकालते हैं? मैग्नीफिकेशन बेटा। और क्या?
v / u v की वैल्यू क्या है? V की वैल्यू है -6 और U की वैल्यू है -15 है ना? तो ये माइनस से माइनस कट जाएगा। ये क्या आ जाएगा
बेटा? 2 / 2 / 5 2 / 5 ये आ गया मैग्नीफिकेशन। मैग्नीफिकेशन पॉजिटिव इमेज वर्चुअल इरेक्ट। बहुत बढ़िया। बहुत बढ़िया।
अच्छा एक सवाल और था इसमें कि आल्सो ड्रॉ दी रे डायग्राम। रे डायग्राम बना के दिखा दो। है ना? रे डायग्राम तुम बना के दिखा
सकते हो। रे डायग्राम तुम खुद बना के दिखा सकते हो। ये है आपका कॉनकेव लेंस। ठीक है बेटा? और आपको पता है कि इसकी जो फोकल
लेंथ है f1 जो है वो कितनी है? 10 सें.मी. और ऑब्जेक्ट को हमने 15 सें.मी. पर रखा है। यानी ऑब्जेक्ट को हमने कहीं यहां पर
रखा है। ठीक है? तो इसका रे डायग्राम तुम खुद बनाकर ऐसे दिखा सकते हो। है ना? फोकस से पास करेगी और दूसरी लाइट रे ऑप्टिकल
सेंटर से तो इमेज जो होगी कहीं यहां पर बनेगी। है ना? इमेज कहीं यहां पर बनेगी। चलो बहुत बढ़िया। डन। तो ऐसे बहुत सारे
सवाल आते हैं। है ना? बहुत सही। चलो। ये आज का आखिरी सवाल। इसके बाद आपको एक होमवर्क क्वेश्चन दूंगा जो आप कमेंट में
बताओगे। देन हमारा चैप्टर समाप्त। ओह हो यस। क्या फीलिंग आ रही है यार। इतना बड़ा चैप्टर कर लिया आ जाओ। एन ऑब्जेक्ट इज़
प्लेस्ड एट अ डिस्टेंस 30 सें.मी. फ्रॉम द कॉन्वेक्स लेंस। एक हमारा प्यारा-प्यारा नन्हा मुन्ना सा कॉन्वेक्स लेंस है। उससे
ऑब्जेक्ट को हमने 30 सें.मी. यानी U की वैल्यू है -30 सें.मी. ठीक है जी। और क्या बोला है कि द इमेज इज फॉर्म्ड ऑन अ
स्क्रीन प्लेस 20 सें.मी. इमेज बोला है। इमेज यानी हमें V गिवन है। V क्या बोला है? कि जो इमेज बनी है वो 20 सें.मी. पे
बनी है ऑन दी अदर साइड। यानी ऑब्जेक्ट यहां था और इमेज यहां बनी है। पॉजिटिव लेंगे या नेगेटिव? गलत मत करना। राइट साइड
में पॉजिटिव। बहुत बढ़िया। तो ये आएगा प्लस का 20 सें.मी. ठीक है? क्या पूछ रहा है? कैलकुलेट दी फोकल लेंथ। बस कुछ नहीं करना।
फोकल लेंथ निकालनी है। बताओ यार भैया। हैं इतना ईजी सवाल। बताओ भाई। v की वैल्यू क्या है?
120 माइनस और ये देखो यहां पर एक और माइनस है बेटा। एक और देखो कैलकुलेशन का गेम है। मैं फिर बोल रहा हूं। सारा गेम कैलकुलेशन
माइनस माइनस प्लस तो 120 + 1 / 30 एलसीएम ले लो। एलसीएम आ जाएगा 60 का। एलसीएम देखो मेरी प्रैक्टिस है इसलिए मैं कैलकुलेशन
तेज़ कर रहा हूं। तुम्हारी प्रैक्टिस हो जाएगी समय के साथ। ठीक है? तो ये आ गया 5 / 60 फाइनली इसको डिवाइड करोगे तो यह आ
जाएगा 1 / 1 / 12 है ना? तो 1 / f की वैल्यू आ गई 1/12. तो f की वैल्यू क्या आई? f की वैल्यू आ गई 12 सें.मी. और देखो
पॉजिटिव है। पॉजिटिव का क्या मतलब है? कॉन्वेक्स लेंस है ना? कॉन्वेक्स लेंस की फोकल लेंथ तो पॉजिटिव आती है। क्या बात
है? क्या बात? चलो आ गया। आल्सो स्टेट वेदर दी इमेज इज़ रियल ऑ वर्चुअल। इमेज रियल है भैया। हमें साफ पता है। है ना? है
ना? यहां वो तो यहीं लिख दिया था कि स्क्रीन प्लेस 20 सें.मी. अवे ऑन दी अदर साइड। दूसरी तरफ इमेज बनी है। दूसरी तरफ
इमेज बनी यानी रियल इमेज है। ठीक है? अगर सेम साइड इमेज बनती तो वर्चुअल इमेज। ये था आपका ये पूरा का पूरा प्यारा सा
चैप्टर। ये रहा आपका। कमेंट करो अभी फटाफट से। मुझे क्वेश्चन सबका सॉल्व चाहिए। इतनी मेहनत से तुम्हें इतनी मेहनत से बेटा
मैंने सारी चीजें बताई हैं। यहां पर ये चैप्टर खत्म होता है। सुनो मेरी बात। अब तुमसे 2 मिनट बात करने हैं। देखो कभी
कबभार मुझे पता है तुम्हें लगता है कि ये लाइफ बहुत टफ है। ठीक है? मैं एक छोटी सी स्टोरी शेयर कर रहा हूं कि पता है तुम्हें
जब मैं अ कॉलेज में था ना तो मुझे अपनी लाइफ बहुत टफ लगती थी। एक बार मैं जा रहा था कॉलेज में तो वो जो गार्ड वाले भैया थे
ना वो मुझसे पूछ रहे कि यार इतना परेशान क्यों है? तो मैं अंदर से भरा बैठा था। मैंने उनको सुनाया। मैंने कहा अरे भैया
आपको क्या पता मेरी जिंदगी कितनी टफ है। मैं यह कर रहा हूं। वो कर रहा हूं। कुछ समझ ही नहीं आ रहा। कॉलेज मेंटेन नहीं हो
रहा है। यह है वो है। अटेंडेंस कहां से लेकर आऊं? इतनी सारी। मैंने सब कुछ सुना दिया।
वो ना मुस्कुराने लगे। वो हंसने लगे और वो मुस्कुराते हुए बोले कि प्रशांत तुझे ना पता ही नहीं है
कि टफ लाइफ क्या होती है? मुश्किल जिंदगी क्या होती है? जब आपको एक गार्ड की नौकरी करनी पड़े जिसमें आपको ₹10,000 महीना मिले
और उस ₹10,000 के अंदर आपको अपने दो बच्चों की स्कूल की फीस भरनी पड़ जाए और रात को आपको ऑटो चलाना पड़े ताकि आप अपने
घर में खाना लेके आ पाओ। वो है एक टफ लाइफ। और मैं उस दिन सुना ना यह चीज और मैं
सुनते से ही मुझे समझ आया कि यार हमारी लाइफ कहां टफ है? हमसे बहुत ऐसे लोग हैं जिनकी लाइफ हमसे 100 गुना टफ है। है ना?
और उस दिन से मैंने सोच लिया था कि यार अब चाहे कितनी परेशानी आ जाए मैं हार नहीं मानूंगा। और आज ये चीज मैं तुम्हें इसलिए
बता रहा हूं लाइफ विल बी टफ। हार नहीं माननी, डटे रहना है, खड़े रहना है। है ना? ये जुनून या जज्बात अंदर होना चाहिए। तभी
तुम एक्चुअली में हीरो बन पाओगे। तो ये ओ ये क्या फोटो लगा दी? तो लाइट क्या बोल रहा है? चैप्टर एंड करते हैं। रिफ्लेक्ट
पॉजिटिविटी, रिफ्रेक्ट नेगेटिविटी एंड ऑलवेज फोकस ऑन योर गोल। गोल पे हमेशा फोकस करेंगे ऑन दिस नोट। शुक्रिया एवरीवन। मैं
हूं आप सभी का अपना प्रशांत भैया। अगर ये वीडियो अच्छी लगी है मतलब ये पूरा का पूरा लेक्चर अच्छा लगा है तो Instagram पे एक
स्टोरी लगाकर जरूर बताना। Instagram डिस्क्रिप्शन में कि मजा आया नहीं आया, समझ आया नहीं आया? चलो टेक केयर। नेक्स्ट
लेक्चर कौन सा चाहिए? कमेंट में जरूर बताना। बाय-ब जाओ बाय।
In the Cartesian sign convention, all distances are measured from the pole (P): distances in front of the mirror (left side) are negative, and behind the mirror (right side) are positive. Upward distances are positive, downward are negative. This convention is crucial because it makes the mirror formula 1/v + 1/u = 1/f universally applicable for both concave and convex mirrors.
The word 'AMBULANCE' is written in reverse (lateral inversion) so that when viewed through a rear-view mirror (which produces a laterally inverted image), it appears correctly as 'AMBULANCE' to drivers ahead. This ensures drivers quickly recognize the vehicle and give way.
The 'candle trick' uses positions numbered 1 to 6 from infinity to the pole. For example: object at infinity gives image at F; beyond C gives image between C and F; at C gives image at C (same size); between C and F gives enlarged image beyond C; at F gives no image; between P and F gives virtual, erect, enlarged image behind mirror. Real images are inverted (left side), virtual images are erect (right side).
Magnification (m) indicates three aspects: if m is negative, the image is real and inverted; if m is positive, the image is virtual and erect. Additionally, if |m| > 1, the image is enlarged; if |m| < 1, it's diminished; and if |m| = 1, it's the same size. You calculate m as hᵢ/h₀ = -v/u.
The two laws of reflection are: (1) the angle of incidence equals the angle of reflection, and (2) the incident ray, reflected ray, and normal all lie in the same plane. These laws govern how light bounces off surfaces, enabling mirrors to form images by redirecting light rays according to these rules.
For a convex mirror, there are only two main cases. If the object is at infinity, the image forms at the focus (F) and is virtual, erect, and point-sized. For any other object position, the image always forms between the pole (P) and the focus (F) behind the mirror, and is virtual, erect, and diminished in size.
A concave mirror has a negative focal length and converges light rays, forming both real and virtual images depending on object position. A convex mirror has a positive focal length and diverges light rays, always forming a virtual, erect, and diminished image. This makes concave mirrors useful for magnification, while convex mirrors provide a wider field of view.
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