Complete Thermodynamics & Thermochemistry Concepts Explained
Introduction to Thermodynamics
- Thermodynamics studies energy flow and changes within a system and its surroundings.
- Focuses on macroscopic properties, ignoring microscopic details.
- Classical thermodynamics laws apply to systems in or moving between equilibrium states.
Key Thermodynamic Terms
- System: Part of the universe under observation (e.g., hot tea in a cup).
- Surroundings: Everything outside the system that can interact with it.
- Boundary: Real or imaginary wall separating system and surroundings.
- Universe: System + surroundings.
Types of Systems
- Open System: Exchanges matter and energy with surroundings (e.g., boiling water).
- Closed System: Exchanges energy but not matter (e.g., sealed heated can).
- Isolated System: No exchange of matter or energy (e.g., thermos flask).
Walls Between System and Surroundings
- Adiabatic Wall: No heat transfer (Q=0).
- Diathermic Wall: Allows heat transfer.
Thermodynamic Properties
- Intensive Properties: Independent of system size (temperature, pressure, density).
- Extensive Properties: Depend on system size (mass, volume, internal energy).
- Ratio of two extensive properties yields an intensive property (e.g., density = mass/volume).
State and Path Functions
- State (Point) Functions: Depend only on current state (internal energy, enthalpy, entropy).
- Path Functions: Depend on the process path (work, heat).
First Law of Thermodynamics
- Energy conservation principle: ΔU = Q - W
- Internal energy (U) changes due to heat (Q) added to system and work (W) done by system.
- Heat is energy transfer due to temperature difference.
- Work is energy transfer when force causes volume change.
Work Done in Different Processes
- Reversible Process: Infinitely slow, system remains near equilibrium.
- Irreversible Process: Rapid, system not in equilibrium during process.
- Work done depends on external pressure; for reversible processes external pressure ≈ internal pressure.
Enthalpy (H)
- H = U + PV
- Useful for processes at constant pressure.
- Change in enthalpy (ΔH) equals heat exchanged at constant pressure.
Heat Capacity
- Heat capacity (C) relates heat added to temperature change: Q = C ΔT
- Depends on system size, composition, and nature.
- Molar Heat Capacity: Heat required to raise 1 mole by 1°C.
- Specific Heat Capacity: Heat required to raise 1 gram by 1°C.
Calorimetry
- Experimental technique to measure heat changes in physical and chemical processes.
- Bomb Calorimeter: Measures heat at constant volume; used for combustion heat.
- Coffee Cup Calorimeter: Measures heat at constant pressure; used for reactions in aqueous solutions.
Standard States and Enthalpy Changes
- Standard state: Most stable physical form at 1 atm and 25°C.
- Standard enthalpy of formation (ΔH_f°): Heat change forming 1 mole of compound from elements in standard states.
- Standard enthalpy of reaction (ΔH_r°): Sum of enthalpies of formation of products minus reactants.
- Enthalpy of combustion: Heat released when 1 mole of substance combusts completely.
Bond Dissociation and Atomization Enthalpy
- Bond dissociation enthalpy: Energy to break 1 mole of specific bonds in gaseous molecules.
- Atomization enthalpy: Energy to convert 1 mole of substance from standard state to gaseous atoms.
Spontaneity and Entropy
- Spontaneous process: Occurs without external influence.
- Entropy (S): Measure of disorder/randomness.
- Spontaneous processes tend to increase total entropy (system + surroundings).
- Entropy change related to reversible heat transfer: ΔS = Q_rev / T
Gibbs Free Energy (G)
- G = H - TS
- ΔG < 0: Spontaneous process.
- ΔG = 0: Equilibrium.
- ΔG > 0: Non-spontaneous.
- Relates enthalpy, entropy, and temperature to predict spontaneity.
Third Law of Thermodynamics
- Entropy of a perfect crystal at absolute zero is zero.
Summary
This lecture provides a detailed understanding of thermodynamics and thermochemistry fundamentals, including energy transfer, system classifications, thermodynamic laws, enthalpy, heat capacity, calorimetry, spontaneity, entropy, Gibbs free energy, and their applications in chemical reactions and physical processes. Practical examples and problem-solving approaches are included to aid exam preparation and conceptual clarity.
For a deeper understanding of these concepts, consider exploring the following resources:
- Understanding Thermodynamics: A Comprehensive Overview
- Understanding Internal Energy in Thermodynamics: A Comprehensive Guide
- Understanding PV Diagrams and Enthalpy in Thermodynamics
- Understanding Gibbs Free Energy: The Correct Definition of Entropy
- Understanding Internal Energy: Heat and Work in Thermodynamics
सर ये रात की हो रही है अभी 2:48 2:48 और सर जी देखो मेहनत कर रहे हैं सर अरे सर लेक्चर जाना है क्या
हां ये थर्मोडायनेमिक्स जाना है कि यहां पर एनर्जी कैसे फ्लो कर रही है और एनर्जी के फ्लो होने से सिस्टम में क्या-क्या
चेंजेस आ रहे हैं और सिस्टम के अलावा जैसे मान लीजिए यहां पर ये है तो इसके अंदर ये वाला जो पार्ट है ये मेरा सिस्टम है। दिस
इज माय सिस्टम। काइनेटिक एनर्जी प्लस पोटेंशियल एनर्जी का जो सम है दैट इज इक्वल्स टू दी इंटरनल एनर्जी ऑफ दी
सिस्टम। इस टेरर का काम है हीट को प्रॉपर्ली डिस्ट्रीब्यूट करना। हे गाइस वेलकम टू दिस लार्जेस्ट एंड द मोस्ट
इंपैक्टफुल लेवल प्लेटफार्म दैट इज़ फिजिक्स व्ल्लाह। तो मेरे सारे के सारे प्यारे-प्यारे
भाइयों और बहनों मैं कामना करता हूं कि आप लोग बहुत ही ज्यादा स्वस्थ मस्त और बेहतरीन से होंगे। तो आज मेरे प्यारे
दोस्तों मैं आपको कराने जा रहा हूं थर्मोडायनेमिक्स एंड थर्मोकेमिस्ट्री इन वन शॉट। तो मैं ये कह सकता हूं कि ये वन
ऑफ द बेस्ट लेक्चर्स है इस चैप्टर के ऊपर। आराम से बढ़िया से हर एक चीज को ध्यान से सुनना। ठीक है? न्यूमेरिकल्स को सॉल्व
करना। कुछ मैं आपको होमवर्क में भी दूंगा। उनके आंसर्स कमेंट सेक्शन में जरूर से करना। तो एकदम बढ़िया तरीके से मैं आपको
ये चैप्टर पढ़ाऊंगा। एकदम बढ़िया तरीके से सब कुछ ओवर हो जाएगा। बस वीडियो को पूरा स्टार्ट से लेकर आखरी तक जरूर देखना। ठीक
है? जी सुनील भाई। तो आप क्या पढ़ाएंगे? सबसे पहले मैं आपको बताऊंगा कि थर्मोडायनेमिक्स है क्या या
थर्मोडायनेमिक्स से रिलेटेड टर्म्स कौन-कौन से हैं। फिर उसके बाद फर्स्ट लॉ ऑफ़ थर्मोडायनेमिक्स। फिर उसके बाद वर्क डन
इन डिफरेंट प्रोसेससेस। अब अगेन क्योंकि हम क्लास 11th एनसीईआरटी पे फोकस कर रहे हैं तो वही प्रोसेससेस की बात करूंगा जो
कि बुक में है। उसके अलावा बहुत सारे हो सकते हैं। बट टू द सिलेबस बात करेंगे। उसके बाद बात करेंगे हम लोग एंथैल्पी के
बारे में। उसके बाद हीट कैपेसिटी के बारे में। फिर कैलोरीमेट्री के बारे में। एंथैल्पी चेंजज़ इन फिजिकल एंड केमिकल
प्रोसेससेस के बारे में। उसके बाद स्पॉनटेनिटी के बारे में। उसके बाद स्पॉनटेटिनिटी एंड एंट्रॉपी के बारे में
एंड गिब्स फ्री एनर्जी एंड स्पॉनटेटिनिटी के बारे में। बीच में हमारा सेकंड लॉ थर्मोडायनेमिक्स और थर्ड लॉ
थर्मोडायनेमिक्स भी आएगा। तो ये सारी चर्चा हमारे आज के इस पर्टिकुलर लेक्चर में होने वाली है। तो सबसे पहले स्टार्ट
करते हैं विद दी इंट्रोडक्शन विद द इंट्रोडक्शन टू दी थर्मोडायनेमिक्स एंड द थर्मोडायनेमिक टर्म्स। तो सुनील भाई यहां
पर थर्मोडायनेमिक्स एक्चुअली में है क्या? देखिए थर्मोडायनेमिक्स आपकी वो ब्रांच है साइंस की जो यहां पर किस चीज से रिलेट
करती है? वो यहां पर रिलेट करती है कि एनर्जी का फ्लो किस तरीके से हो रहा है। ध्यान से देखिए। उसको ये फोकस है कि यहां
पर एनर्जी कैसे फ्लो कर रही है और एनर्जी के फ्लो होने से सिस्टम में क्या-क्या चेंजेस आ रहे हैं। हाउ एनर्जी फ्लोस एंड
चेंजेस विद इन अ सिस्टम। ठीक है ना? एक पर्टिकुलर सिस्टम के अंदर किस तरीके से एनर्जी आ रही है, जा रही है,
आने से क्या परिवर्तन हुआ? जाने से क्या परिवर्तन हुआ? थर्मोडायनेमिक्स को सिर्फ इसी चीज से फर्क पड़ता है। किससे फर्क
पड़ता है? एक पर्टिकुलर सिस्टम से एनर्जी आ रही है, जा रही है। आने और जाने से क्या उसमें परिवर्तन आ रहा है? थर्मोडायनेमिक्स
सिर्फ इसी चीज पे फोकस करता है। ठीक है? यहां पर इसको बिल्कुल भी मतलब नहीं है कि माइक्रोस्कोपिक लेवल पर क्या हो रहा है।
यह अभी हम जो पढ़ रहे हैं दैट इज अ माइक्रोस्कोपिक स्टडी। एनर्जी सिस्टम में आई या सिस्टम से गई तो सिस्टम में क्या
परिवर्तन आया प्रॉपर्टीज में उतनी बात आप करोगे। उसके बाद क्लासिकल थर्मोडायनेमिक्स के
जितने भी लॉज़ हैं, द क्लासिकल थर्मोडायनेमिक लॉज़ आर मोस्ट डायरेक्टली एप्लीकेबल टू द सिस्टम्स दैट आर इदर इन
इक्वि इक्विलिब्रियम और चेंज इन अ वे दैट मूव्स फ्रॉम दी वन इक्विलिब्रियम स्टेट टू अनदर। अगेन, जितने भी अभी हम चीजों के
बारे में चर्चा करेंगे, जो भी हम क्लासिकल थर्मोडायनेमिक्स के लॉज़ की बात कर रहे हैं, वो सारे के सारे जो भी लॉज़ आपके
होंगे, याद रखिएगा उनको तभी लगाना जब आपका सिस्टम इक्विलिब्रियम में हो। या वो जब मूव कर रहा है तो इस तरीके से मूव कर रहा
है कि वो इक्विलिब्रियम की स्टेट को अटेन करना चाहता है। तो बहुत इंपॉर्टेंट है। द क्लासिकल थर्मोडायनेमिक लॉज़ आर मोस्ट
डायरेक्टली एप्लीकेबल टू द सिस्टम्स दैट आर इदर इन इक्विलिब्रियम और चेंज इन अ वे दैट मूव्स फ्रॉम दी वन इक्विलिब्रियम
स्टेट टू अनदर। तो ये दो इंपॉर्टेंट बातें आपके दिमाग में रहनी चाहिए। सवाल आ सकता है एमसीक्यू में कि जितने क्लासिकल
थर्मोडायनेमिक लॉज़ हैं वो कैसे सिस्टम पे अप्लाई होते हैं जो इक्विलिब्रियम में है या जो कि ऐसी स्टेट में मूव कर रहे हैं कि
वो इक्विलिब्रियम में आ जाएंगे। ठीक है जी सुनील भैया डन है डन है जी
अब देखिए यहां पर हमारे पास आते हैं थर्मोडायनेमिक टर्म्स। तो चार इंपॉर्टेंट टर्म्स हैं। सबसे पहला हमारे पास है
सिस्टम, देन है सराउंडिंग, देन है यूनिवर्स एंड देन है हमारे पास बाउंड्री। अब वन बाय वन इन चीजों को हम समझते हैं।
व्हाट इज दी मीनिंग ऑफ द सिस्टम? सिस्टम मैं किसको बोलूंगा सुनील भैया? अब ये सिस्टम वो नहीं है। सिस्टम पे सिस्टम वो
वाला सिस्टम नहीं। सिस्टम यहां पे क्या है? मान लीजिए हमारे पास एक कप है और उसके अंदर गर्म चाय पड़ी है। एंड अगर हमारी
पूरी जो स्टडी है वो इस चाय के ऊपर होने वाली है तो यहां पर यूनिवर्स का वो पार्ट जिस पर हम अपनी इन्वेस्टिगेशन कर रहे हैं
या जो हमारी ऑब्जरवेशन के अंडर में है दैट इज कॉल्ड एज अ सिस्टम। अ सिस्टम इन द थर्मोडायनेमिक्स रेफर्स टू द पार्ट ऑफ
यूनिवर्स अंडर ऑब्जरवेशन। यानी यूनिवर्स का वो हिस्सा जो हमारे ऑब्जरवेशन के अंडर में है दैट इज कॉल्ड एज अ सिस्टम। और
सिस्टम के अलावा जैसे मान लीजिए यहां पर ये है तो इसके अंदर ये वाला जो पार्ट है ये मेरा सिस्टम है। दिस इज़ माय सिस्टम।
जिस पे मैं अपनी एनालिसिस कर रहा हूं। जिस पर मैं ऑब्जर्व कर रहा हूं या जो मेरे इन्वेस्टिगेशन के अंडर में दैट इज दी
सिस्टम। सिस्टम के अलावा सिस्टम के अलावा जो भी है यूनिवर्स का हिस्सा वो सारा का सारा क्या
है? वो सारा का सारा यहां पर सराउंडिंग है। सिस्टम के अलावा जो बचे वो सारा का सारा सराउंडिंग है। एवरीथिंग इज
सराउंडिंग। सो पार्ट ऑफ यूनिवर्स अदर देन दी सिस्टम इज बेसिकली कॉल्ड एज सराउंडिंग। लेकिन लेकिन लेकिन लेकिन लेकिन हमारी
पढ़ाई के दौरान प्रैक्टिकल पर्पस के दौरान सराउंडिंग उसको घोषित किया जाता है जो सिस्टम से डायरेक्ट कनेक्ट में हो। उसका
नेबर हो। जैसे मान लीजिए अगर मैंने बोला कि ये मेरा सिस्टम है तो इसके अलावा बाकी सब सराउंडिंग हो गया। इवन अंटार्कटिका,
अमेरिका सब सराउंडिंग हो गया। पर क्या इसका डायरेक्ट इफेक्ट अमेरिका या अंटार्कटिका पे पड़ेगा?
इसका डायरेक्ट इफेक्ट इसकी इमीडिएट ये जो नेबरहुड है इसमें पड़ेगा। तो प्रैक्टिकल पर्पस के लिए अगर यह सिस्टम है तो इसके
आसपास का एरिया सराउंडिंग है। क्योंकि इसमें जो भी परिवर्तन आएंगे उससे रिलेटेड जो भी चेंज आएंगे इसकी नियर बाय
सराउंडिंग्स में आने वाले हैं। आपको मैं समझा पा रहा हूं। तो फॉर प्रैक्टिकल पर्पस देखिए लिखा भी है मैंने। फॉर ऑल
प्रैक्टिकल पर्पस द सराउंडिंग्स आर दैट पोर्शन ऑफ द रिमेनिंग यूनिवर्स व्हिच कैन इंटरेक्ट विद द सिस्टम व्हिच इज़ एक्चुअली
द रीज़ और द स्पेस इन द नेबरहुड ऑफ द सिस्टम। यह बात बहुत इंपॉर्टेंट है कि प्रैक्टिकल पर्पस के लिए सराउंडिंग वो
एरिया है वो एरिया है जो सिस्टम से इज़ द इट इज़ एक्चुअली द रीजन आप कह सकते हैं रीजन स्लैश स्पेस। इन द नेबरहुड ऑफ द
सिस्टम। ठीक है? इट इज़ एक्चुअली द रीजन और स्पेस इन द नेबरहुड ऑफ द सिस्टम। यानी कि इसकी
जस्ट जस्ट इमीडिएट सराउंडिंग्स जो इससे डायरेक्ट कांटेक्ट में है। प्रैक्टिकल पर्पस के लिए आप इसी को सराउंडिंग मानोगे
ना। अब आपका चाय का कप गरम है। है ना? तो इससे रिलेटेड जो भी चेंजज़ आ रहे हैं, सराउंडिंग में आ रहे होंगे। अब
अंटार्कटिका में थोड़ी चेंजज़ आ रहे होंगे। ये यूएस में थोड़ी आ रहे होंगे। तो वो सब भी सराउंडिंग है लेकिन प्रैक्टिकल पर्पस
के लिए सराउंडिंग उसको मानेंगे जो कि इसके जस्ट टच में हो जस्ट आसपास में हो। इमीडिएट सराउंडिंग्स बोल सकते हैं।
अब यूनिवर्स सिस्टम एंड सराउंडिंग को मिलाकर हम लोग क्या बोलते हैं? यूनिवर्स। सिस्टम प्लस सराउंडिंग को जोड़ के बनता है
क्या? यूनिवर्स। ठीक? अब एक और टर्म आता है। अब जैसे फॉर एग्जांपल सुनील भाई तुमने बोला कि यह सिस्टम है। मैंने कहा हां भाई
यह सिस्टम है। सुनील भाई तुमने कहा यह वाला पार्ट सराउंडिंग है जो इसके इमीडिएट नेबरहुड है। मैंने कहा हां तो सुनील भाई
फिर ये क्या है? ये जो बकर का ये वाला हिस्सा है ये वाला जो हिस्सा है ये वाला हिस्सा क्या है? ये जो हाईलाइटेड हिस्सा
है ये क्या है? ये क्या है दोस्तों? ये वाला जो हिस्सा है ये देखो ये वाला हिस्सा ये क्या है? दिस इज कॉल्ड एज दी बाउंड्री
और दी वॉल। समझे? जी सुनील भैया। सो द सिस्टम इज सेपरेटेड फ्रॉम द सराउंडिंग बाय अ रियल और इमेजिनरी वॉल कॉल्ड दी
बाउंड्री। तो सिस्टम और सराउंडिंग को सेपरेट करने के लिए या तो यह रियल या फिर कुछ केसेस में इमेजिनरी बाउंड्री होती है।
हम मान लेते हैं कि देयर इज़ एन इमेजिनरी बाउंड्री दैट इज़ सेपरेटिंग दी सिस्टम एंड दी सराउंडिंग्स। अब जैसे कि आगे चल के आप
फ्लूइड मैकेनिक्स में है ना फ्लो प्रॉब्लम्स को करते हैं। वॉल्यूम फ्लो प्रॉब्लम्स को। तो वहां पे जैसे मान लीजिए
एक बड़ा सा ऐसे रीजन है। है ना? जिसमें कोई चीज़ फ्लो कर रही है। तो हम एक स्पेसिफिक रीजन में ये मान लेते हैं कि ये हमारा
सिस्टम है। हम सारी प्रॉब्लम्स को एनालाइज़ यहां करेंगे। तो हम एक इमेजिनरी बाउंड्री ड्रॉ कर देते हैं कि ये मेरा सिस्टम है।
बाकी सब सराउंडिंग है। तो समटाइ्स वी नीड टू इमेजिन कि ये मेरा सिस्टम बाकी सब सराउंडिंग। ठीक है? ये चार इंपॉर्टेंट
टर्म्स समझ में आ गए? सिस्टम वो है थर्मोडायनेमिक्स में जो कि ऐसा पार्ट है यूनिवर्स का दैट इज़ अंडर दी ऑब्जरवेशन और
अंडर दी इन्वेस्टिगेशन। अपार्ट फ्रॉम सिस्टम सब सराउंडिंग है। सिस्टम प्लस सराउंडिंग से मिलके बनता है यूनिवर्स।
प्रैक्टिकल पर्पस के लिए सराउंडिंग हम उसको मानते हैं जो कि सिस्टम से जस्ट इमीडिएट यानी कि टच वाली सराउंडिंग से
नेबरहुड में है उसको हम सराउंडिंग घोषित करते हैं। और बाउंड्री रियल या इमेजिनरी हो सकती है जो सिस्टम और सराउंडिंग को
सेपरेट करती है। समझ गए? जी। अब यहां पर है ना दो तरीके की बाउंड्रीज देखने के लिए मिलेगी आपको। बहुत इंपॉर्टेंट है। अब
प्रॉपर्टी देखिए। हीट ट्रांसफर बिटवीन दी सिस्टम एंड सराउंडिंग्स। हीट ट्रांसफर बिटवीन दी सिस्टम एंड
सराउंडिंग्स। तो इसके लिए हमारे पास एक है एडियाबेटिक वॉल और एक है डायथर्मिक वॉल। अब अगर हमारे सिस्टम और सराउंडिंग के बीच
में एडियाबेटिक वॉल लगी हुई है। ये सिस्टम है। ये सराउंडिंग है। इसके बीच में एक एडियाबेटिक वॉल है। तो एडियाबेटिक वॉल
क्या करती है कि यहां पर वो प्रिवेंट करती है कि कोई भी हीट ट्रांसफर यहां पर नहीं होगा। यानी कि सिस्टम और सराउंडिंग के बीच
में जो हीट ट्रांसफर है यानी कि जो q है दैट इज इक्वल टू 0 हीट ट्रांसफर इक्वल्स टू 0 हो जाएगा।
बोले हीट ट्रांसफर होने ही नहीं दूंगी मैं। सो q विल बी इक्वल्स टू 0 मतलब हीट ट्रांसफर को ज़ीरो कर देगा। सरल भाषा में
लिखना चाहें तो आप डायरेक्टली लिख सकते हैं कि हीट ट्रांसफर इज = 0 सिंपल। यहां पर कोई भी हीट एक्सचेंज नहीं हो
पाएगा। लेकिन अगर डायथर्मिक वाल है तो अलाउस द हीट ट्रांसफर बिटवीन द सिस्टम एंड
सराउंडिंग। अगर ऐसी दीवार लगी है जो कि हीट ट्रांसफर होने देगी सिस्टम और सराउंडिंग के बीच में तो उस दीवार को
डायथर्मिक वॉल बोलेंगे। ठीक है? जी। उसके बाद व्हाट इज द इफ़ेक्ट ऑन द सिस्टम? सिंपल सी बात है। नो हीट एक्सचेंज ड्यूरिंग द
प्रोसेस हीट कैन फ्लो इंटू और आउट ऑफ द सिस्टम। यही सिंपल सा इफ़ेक्ट है यहां पर। ठीक है? एग्जांपल्स जैसे कि इंसुलेटेड
वॉल्स फॉर एग्जांपल स्टाइरोफोम, फाइबर ग्लास, थर्मोस फ्लास्क, थर्मस थर्मस फ्लास्क के बारे में सुना है कि नहीं सुना
है? अरे हम लोग ठंड में सुनील भैया उसके अंदर चाय रखते हैं काफी देर तक गर्म रहती है या गर्म पानी रखते हैं। काफी देर तक
गर्म रहता है। तो उसकी जो वॉल्स हैं दीज़ आर एडियाबेटिक वॉल्स। अगर आपने मान लीजिए वो बोतल देखी है वो
इंसुलेटेड बॉटल्स भी आती है मार्केट में जो पानी को काफी देर तक गर्म रखती है तो इनकी जो वॉल्स है एक तरीके से एडियाबेटिक
वॉल है बिकॉज़ ये हीट ट्रांसफर बिटवीन द सिस्टम एंड सराउंडिंग होने नहीं दे रही है इसीलिए ही तो पानी गर्म है चाय गर्म है या
आपने मान लीजिए ठंडा पानी डाल दिया तो ठंडा का ठंडा रहेगा बिकॉज़ देयर इज़ नो हीट ट्रांसफर बिटवीन दी सिस्टम एंड सराउंडिंग
लेकिन ये बहुत ज्यादा लंबे समय तक नहीं होता कि तुमने 200 साल रख दिया तब भी पानी गर्म रहेगा नहीं
हीट ट्रांसफर होता है बहुत धीरे धीरे धीरे-धीरे होता है। तो तुम्हारी चाय 3 से 4 घंटे गर्म रह सकती है या पानी तीन से 4
घंटे गर्म रह सकता है। उसके बाद धीरे-धीरे वो भी क्या होता जाएगा? ठंडा होता जाएगा। है ना? जी।
अब डायथर्मिक वाल्स जैसे मान लीजिए मेटल की वॉल्स हैं तो मेटल्स तो अच्छे कंडक्टर ऑफ हीट होते ही हैं। आपने गर्म किया तो
फटाफट से हीट को ट्रांसफर कर देंगे। तो मेटल की वॉल्स ऑलवेज ऑलवेज डायथर्मिक वॉल्स। इसको ऐसे समझ सकते हैं ये लड़कों
की दोस्ती है और ये लड़कियों की दोस्ती है। मान लीजिए मेरा एक दोस्त है लड़का उसको मैंने कोई बात बताई
कुछ बताया यह किसी को भी नहीं बताएगा लेकिन मान लीजिए यही लड़कियां लड़कियां दोस्त हो या मेरी कोई फीमेल फ्रेंड हो
मैंने उसको बताया वो 10 लोगों को बता देगी ईजीली ट्रांसफर हो जाएगी इनफार्मेशन डायथर्मिक वाल 10 लोगों को और बता दिया
बात यानी कि हीट ट्रांसफर और अगर लड़का है एड़िया बैठेगी तो बात ट्रांसफर नहीं होगी समझ गए हां ये चलिए महाभारत में एक श्राप
मिला था कि औरतें अपने पेट में कोई बात नहीं रख पाएंगी। इसलिए वो बातें स्प्रेड कर देती हैं। चलिए उस बात पे तो नहीं
जाएंगे। बट काम ना करता हूं एडियाबेटिक और डायथर्मिक आपको अच्छी तरीके से दोस्तों क्लियर हो गया है। चलिए फिर आगे चलते हैं।
अब टाइप्स ऑफ सिस्टम समझा दीजिए सुनील भैया। सिस्टम पे सिस्टम तुम तो पढ़ाते जा रहे हो। सिस्टम पे सिस्टम है रे।
तो सिस्टम भी हमारे पास तीन प्रकार के हैं। मेजरली मेजरली ओपन क्लोज्ड और आइसोलेटेड। अब यह किस बेसिस पर होता है कि
भाई मास और एनर्जी का एक्सचेंज बिटवीन द सिस्टम एंड सराउंडिंग के बेसिस पर तीन प्रकार के हमारे पास सिस्टम आते हैं। पहला
सिस्टम है मेरे दोस्तों ओपन सिस्टम। अब ओपन सिस्टम क्या होता है? ये जितना भी एक्सचेंज हो रहा है बिटवीन बिटवीन सिस्टम
एंड सराउंडिंग की बात हो रही है। बात समझ गए? बात समझ गए? दिस इज़ बिटवीन दी सिस्टम एंड दी सराउंडिंग। इनके बीच में बात हो
रही है। तो मैटर का एक्सचेंज बिटवीन दी सिस्टम एंड सराउंडिंग। मैटर का एक्सचेंज बिटवीन दी सिस्टम एंड सराउंडिंग। मैटर का
एक्सचेंज बिटवीन दी सिस्टम एंड सराउंडिंग। तो अगर मान लीजिए हमारे पास ओपन सिस्टम है। लेट्स सपोज इफ वी हैव एन ओपन सिस्टम।
तो क्या सिस्टम और सराउंडिंग के बीच में मैटर एक्सचेंज होगा? 100% होगा। अगर ओपन सिस्टम में हम बात करते हैं कि
सिस्टम और सराउंडिंग के बीच में क्या एनर्जी का यानी कि हीट और वर्क का एक्सचेंज होगा। तो याद रखिएगा यस इनका भी
एक्सचेंज होगा। अभी हीट और वर्क के बारे में और डिटेल में हम चर्चा करेंगे। वैसे आप कक्षा नौवीं 10वीं में पढ़ के आए हैं।
उसी चीज को थोड़ा सा अच्छे से और समझेंगे। तो ओपन सिस्टम क्या होता है? मैटर और एनर्जी दोनों सिस्टम और सराउंडिंग के बीच
में एक्सचेंज हो सकता है। ऐसा सिस्टम ऐसा सिस्टम फॉर एग्जांपल मैं अगर किसी को ओपन सिस्टम बोल रहा हूं तो सिस्टम और
सराउंडिंग के बीच में मैटर का एक्सचेंज और एनर्जी का एक्सचेंज आसानी से हो सकता है। जैसे कि मेरे पास एक बोइलिंग पॉट ऑफ वाटर
है। तो यहां पर बोइलिंग पॉट ऑफ वाटर में क्या है? मान लीजिए कि मैंने ना एक ऐसे पॉट रख दिया है जिसके अंदर मैंने पानी रखा
है। उसको मैं गर्म कर रहा हूं। तो क्या यहां पर ये गर्म होगा? यस हीट एक्सचेंज हो रहा है। कुछ पानी वेपर बन के वापस
एटमॉस्फेयर में जाएगा यानी कि सराउंडिंग में जाएगा। एग्री करते हैं कि नहीं करते? जी बिल्कुल जाएगा। तो एनर्जी और मैटर का
एक्सचेंज दोनों का एक्सचेंज चल रहा है सिस्टम और सराउंडिंग के बीच में। ठीक है ना? तो जैसे कि वाटर वेपर एस्केप्स एंड
हीट फ्रॉम द स्टो रेस द वाटर टेंपरेचर। तो सिंपल सी बात है। ओपन सिस्टम का मतलब है कि सिस्टम और सराउंडिंग के बीच में मैटर
और एनर्जी दोनों का एक्सचेंज ईजीली पॉसिबल है। अब अगर हम दूसरे सिस्टम की बात करें, सेकंड प्रकार के सिस्टम की बात करें। सो
दैट इज अ क्लोज्ड सिस्टम। अब क्लोज्ड सिस्टम में क्या होता है? सिस्टम और सराउंडिंग के बीच में मैटर का एक्सचेंज जो
होता है वो बेसिकली रुक जाता है। बोले मैटर एक्सचेंज नहीं होगा। लेकिन एनर्जी का एक्सचेंज आसानी से हो
सकता है। अब आप मान लीजिए कि आपके पास एक क्लोज्ड कैन है और उस क्लोज्ड कैन के अंदर एक सूप है और आप उस क्लोज्ड कैन में जो
सूप है उसको गर्म कर रहे हैं। अब एनर्जी का ट्रांसफर तो हो रहा है पर क्योंकि कैन पूरा क्लोज्ड है तो उससे कोई भी सूप
इवापोरेट करके एटमॉस्फियर में नहीं जा रहा है। अब जैसे इसी को अगर मैं क्लोज सिस्टम
बनाना चाहूं तो मेरे पास क्या है ना मैं एक पॉट के अंदर पानी लिया है इसको गर्म कर रहा हूं तो एनर्जी का ट्रांसफर हो रहा है
और मैंने ऊपर से पॉट को ढक दिया तो अब पानी मेरा यहां से एस्केप नहीं कर सकता इन द फॉर्म ऑफ वेपर तो यहां पर मेरे पास एक
भगोना था एक बर्तन था जिसमें मैंने पानी लिया मैंने गर्म करना स्टार्ट किया गर्म करना स्टार्ट किया तो पानी इवापोरेट करके
सराउंडिंग में चला जाएगा लेकिन अगर मैंने प्लेट रख दी तो ये पानी इवापोरेट करके नहीं बाहर जा पाएगा जैसे ही
पानी उड़ेगा प्लेट के ऊपर ठंडा हो हो के वापस नीचे गिर जाएगा। तो यहां पर मैंने मैटर के एक्सचेंज को यानी कि मास के
एक्सचेंज को तो रोक दिया सराउंडिंग से लेकिन एनर्जी का एक्सचेंज हो रहा है। अब यहां पर मैंने ये एक और एग्जांपल दिया। अ
सील्ड कैन ऑफ सूप बीन हीटेड। तो नो मैटर एस्केप्स बट हीट एंटर्स द कैन थ्रू हीटिंग। तो सिंपल सी बात है जिसके अंदर
एनर्जी का एक्सचेंज हो लेकिन मास का एक्सचेंज नहीं हो सिस्टम सराउंडिंग के बीच में। दैट इज़ अ क्लोज सिस्टम। अब एक और आता
है हमारे पास। एक और आता है हमारे पास आइसोलेटेड सिस्टम। आइसोलेटेड सिस्टम। अब आइसोलेटेड सिस्टम क्या होता है? सुनील भाई
यह सुन के थोड़ा एकदम भौकाली सा लग रहा है। सुन के थोड़ा भौकाली सा लग रहा है। क्या है ये? आइसोलेटेड सिस्टम। आइसोलेटेड
सिस्टम एक ऐसा सिस्टम है जिसमें कि सिस्टम और सराउंडिंग के बीच में ना तो मैटर का एक्सचेंज होता है ना ही एनर्जी का
एक्सचेंज होता है। जैसे अ थर्मोस फ्लास्क। उसमें मैंने क्या कर दिया? उस थर्मोस फ्लास्क के अंदर मैंने भैया गरम चाय भर
दी। उसको टाइटली बंद कर दिया। अब ना तो चाय का इवापोरेशन हो सकता है कि वो बाहर जाए और ना ही हीट एनर्जी अंदर आ सकती है
बाहर जा सकती है। तो एनर्जी का एक्सचेंज भी रोक दिया और मैंने मास का एक्सचेंज भी रोक दिया। तो इसको क्या बोलते हैं? इसको
बोलते हैं आइसोलेटेड सिस्टम। इसको क्या बोलते हैं? आइसोलेटेड सिस्टम। ना तो एनर्जी का एक्सचेंज होगा सिस्टम और
सराउंडिंग के बीच में और ना ही मैटर का एक्सचेंज होगा सिस्टम और सराउंडिंग के बीच में। अब जैसे कि एक परफेक्टली इंसुलेटेड
थर्मोस। यही मैंने अभी आपको बताया। द थर्मोस्ट डज़ंट एक्सचेंज हीट और मैटर सो दैट द टेंपरेचर ऑफ़ लिक्विड इनसाइड रिमेंस
दी कॉन्स्टेंट। लेकिन याद रखिए ये ज्यादा लंबे समय तक नहीं रहता। इसमें हीट एक्सचेंज होता है
बहुत धीरे धीरे धीरे धीरे धीरे धीरे धीरे धीरे धीरे होता है। समझ गए आप? जी।
अब यहां पर एक और इंपॉर्टेंट बात कि इनमें कौन-कौन सी वॉल हो सकती है? अब दिमाग लगाना। ओपन सिस्टम में क्या सिस्टम और
सराउंडिंग के बीच में एनर्जी एक्सचेंज हो सकता है? हो सकता है। तो कौन सी वॉल होगी? डायथर्मिक होगी।
क्लोज सिस्टम में क्या एनर्जी का एक्सचेंज हो सकता है? सिस्टम सराउंडिंग के बीच में? अ सुनील भाई तुमने बताया एनर्जी एक्सचेंज
हो सकता है? हां तो डायथर्मिक ही होगी। आइसोलेटेड सिस्टम में क्या एनर्जी का एक्सचेंज हो सकता है? सिस्टम और सराउंडिंग
के बीच में हीट एनर्जी का हो सकता है क्या एक्सचेंज? बताओ। नहीं हो सकता है। एडियाबेटिक वाली। तो इस तरीके से हमको
इनको डिफाइन करना होता है। अब यह सवाल को ट्राई कीजिए। अगर मैं आपको देता हूं ये एनसीआरटी का सवाल है। मैं बोलता हूं
आइडेंटिफाई करें इसमें ओपन सिस्टम कौन सा है? क्लोज कौन सा है? आइसोलेटेड कौन सा है? तो देखिए डायग्राम को एनालाइज करते
हैं। पहले केस में डायग्राम क्या बोल रहा है कि ये अगर मान लीजिए सिस्टम है और ये सराउंडिंग है तो सिस्टम और सराउंडिंग के
बीच में मैटर एक्सचेंज हो रहा है। एनर्जी का एक्सचेंज भी हो रहा है। तो पहला वाला कौन सा केस है मेरे राजा? पहला वाला हमारे
पास है ओपन सिस्टम। पहला वाला कौन सा है? ओपन सिस्टम। दूसरे केस की बात करते हैं राजा। यहां पर सिस्टम और सराउंडिंग के बीच
में एनर्जी का एक्सचेंज तो हो रहा है। पर ये कह रहा है कि मैटर का एक्सचेंज नहीं हो रहा। मैटर अंदर का अंदर ही रहेगा। नो
मैटर एक्सचेंज बिटवीन द सिस्टम एंड सराउंडिंग। हेंस इट इज़ अ क्लोज्ड सिस्टम।
तीसरे पर आते हैं। सिस्टम और सराउंडिंग के बीच में ना तो मैटर का एक्सचेंज होगा, ना ही एनर्जी का
एक्सचेंज होगा। सो दैट मींस इट इज़ एन एग्जांपल ऑफ एन आइसोलेटेड सिस्टम। अरे मैं समझा पा रहा हूं कि नहीं समझा पा रहा? मैं
समझा पा रहा हूं कि नहीं समझा पा रहा। ओपन सिस्टम, क्लोज सिस्टम, आइसोलेटेड सिस्टम। काम ना करता हूं। समझ में आ रहा होगा
दोस्तों को। ठीक है? अब बात करते हैं यहां पे टाइप्स ऑफ प्रॉपर्टीज के बारे में। तो दो प्रकार की
प्रॉपर्टीज होती है। एक इंटेंसिव होती है और दूसरी हमारे पास एक्सटेंसिव होती है। इंटेंसिव और एक्सटेंसिव प्रॉपर्टीज अब
हमारे पास क्या-क्या होती है? सुनील भाई जल्दी से बता दीजिए। ध्यान से देखना। ध्यान से देखना। ध्यान से देखना। इंटेंसिव
प्रॉपर्टीज वो होती हैं जो कि इंडिपेंडेंट होती हैं ऑन द अमाउंट ऑफ़ सब्सटेंस और दी साइज ऑफ़ द सिस्टम। यानी कि वो प्रॉपर्टीज
जो सिस्टम में कितना अमाउंट ऑफ मैटर है या क्या सिस्टम का साइज है उस पे फर्क नहीं पड़ता उसको।
ऐसी प्रॉपर्टीज जिनको फर्क ही नहीं पड़ता कि तुम्हारे सिस्टम में कितना पदार्थ है। या तुम्हारे सिस्टम की क्या साइज है उनको
फर्क नहीं पड़ रहा। ऐसी प्रॉपर्टीज को बोलते हैं हम लोग इंटेंसिव प्रॉपर्टी। तुम्हारा एक सिस्टम है। उसके अंदर कितना
पदार्थ है या उस सिस्टम की क्या साइज है उसको फर्क ही नहीं पड़ रहा। जैसे मान लो कि यहां पर मैं एक स्टूडियो के अंदर हूं।
इसका तापमान मैंने सेट कर रखा है 20° सेल्सियस। अभी मैं स्टूडियो को आधा काट दूंगा तो आधे पार्ट का भी 20 रहेगा। इधर
वाले पार्ट का भी 20 रहेगा। तुम उसको उसको कितने भी पार्ट्स में काटो टेंपरेचर उसका उतना ही रहेगा। अरे टेंपरेचर में फर्क पड़
रहा है क्या? अरे तुमने दो भाग में काट दिया। आधे का 10° सेल्सियस आधे का 10° सेल्सियस। ऐसा तो नहीं होगा ना?
तो ये सारी जो प्रॉपर्टीज हैं, दीज़ आर बेसिकली कॉल्ड एज इंटेंसिव प्रॉपर्टीज। जैसे कि टेंपरेचर हो गया, प्रेशर हो गया,
कंसंट्रेशन हो गया, पीएच हो गया। अब ऐसा थोड़ी होता है किसी सॉल्यूशन का पीए जो है मान लो मेरे पास मैं कह रहा हूं इस
सॉल्यूशन का जो पीए है वो आपके पास दो है एसिडिक है तो मैं कहूंगा अच्छा आधा बकर में डाल लूं तो अब आधा जो है वो कम हो गया
आधा जो है वो बढ़ गया ऐसा तो नहीं होगा मान लो कि हमारे पास इस पर्टिकुलर सॉल्यूशन का मान लो पीएच जो है वो सात है
अब मैं क्या आधा निकाल लूंगा इसको तो क्या आधे का पीए क्या आधा हो जाएगा क्या इसका आधा इसका आधा हो जाएगा क्या नहीं होगा ना
सेम ही पीए रहेगा तो यहां पर अमाउंट ऑफ सब्सटांस और साइज ऑफ़ सिस्टम पे डिपेंडेंट नहीं है ये प्रॉपर्टीज इनको फर्क नहीं
पड़ता। लेकिन ऐसी प्रॉपर्टीज़ जो कि इस चीज़ पे डिपेंडेंट है। दीज़ आर डिपेंडेंट ऑन द अमाउंट ऑफ़ द सब्सटेंस और दी साइज़ ऑफ़ द
सिस्टम। दीज़ आर कॉल्ड एज़ दी एक्सटेंसिव प्रॉपर्टीज़। जैसे फॉर एग्जांपल फॉर एग्जांपल मैंने
बोला आपको वॉल्यूम, मास, मोल्स, एंथैल्पी, हीट कैपेसिटी, इंटरनल एनर्जी, एंथ्रोपी ये सारी की सारी एक्सटेंट ऑफ द सिस्टम पे
डिपेंड करती है। दीज़ डिपेंड्स ऑन द एक्सटेंट ऑफ द सिस्टम। उस सिस्टम में कितना पदार्थ है? उसका क्या साइज है? उन
सब चीजों पर डिपेंड करती है। अब जैसे कि फॉर एग्जांपल फॉर एग्जांपल फॉर एग्जांपल मैंने सिस्टम
में क्या करा? मैंने बोला कि सिस्टम के अंदर थ्री मोल्स ऑफ़ गैस थे। मैंने थ्री मोल्स और और डाल दिए। तो नंबर ऑफ़ मोल्स बढ़
गए ना? ऑब्वियसली। तो दीज़ डिपेंड्स अपॉन दी अमाउंट ऑफ़ सब्सटांस और दी साइज ऑफ़ दी सिस्टम। ठीक है? जी सुनील भैया। अब इनके
कुछ इंपॉर्टेंट रूल्स हैं जिनको आपको जानना बहुत ज्यादा जरूरी है। ध्यान से फोकस करना। तीन इंपॉर्टेंट बातें यहां पे
बताऊंगा आपको जो आपके काम आएगी। सबसे पहली चीज जितनी भी इंटेंसिव प्रॉपर्टीज हैं, जितनी भी इंटेंसिव प्रॉपर्टीज हैं, ध्यान
से देखो। इंटेंसिव प्रॉपर्टीज आर नॉन एडिटिव। लेकिन एक्सटेंसिव प्रॉपर्टीज आर एडिटिव।
मतलब क्या है भैया? ये तो ऊपर से निकल गई बात। इंटेंसिव प्रॉपर्टीज जो आपके पास होती
हैं, दीज़ आर नॉन एडिटिव बट एक्सटेंसिव प्रॉपर्टीज आर एडिटिव। क्या मतलब है? मान लो मैं तुमको बोलता हूं एक सॉल्यूशन
का पीएच जो है एक सॉल्यूशन का जो पीए है वो बेसिकली चार है। ए सॉल्यूशन का पीए चार है और बी सॉल्यूशन का जो पीए है वो
बेसिकली आठ है। मैं दोनों सॉल्यूशन को मिक्स कर देता हूं। तो क्या पीए सॉल्यूशन का 12 हो जाएगा?
12 हो जाएगा क्या? नहीं होगा ना? सो दिस इज नॉट नॉट नॉट पॉसिबल। यह बिल्कुल भी पॉसिबल नहीं है। अरे इंटेंसिव प्रॉपर्टीज
हमारी एडिटिव नहीं होती। भाई एक सॉल्यूशन का पीए चार है। दूसरे का भैया आठ है। जोड़ दिया तो 12 थोड़ी हो जाएगा। ऐसा थोड़ी
होगा 12 हो जाएगा। है ना? हां। लेकिन एक्सटेंसिव प्रॉपर्टीज एडिटिव है। इसका क्या मतलब है? जैसे मान लो कि एक सब्सटांस
का मास है चार, दूसरे का मास है चार। दोनों को अगर हमने एक के ऊपर एक रख दिया तो क्या हो जाएगा? आठ हो जाएगा। टोटल हम
कहेंगे भैया टोटल 8 कि.ग्र. हो गया। किसी चीज का मास चार है, किसी का चार है। हमने जोड़ दिया तो कितना हो जाएगा? आठ हो
जाएगा। एडिटिव प्रॉपर्टीज हैं। ठीक है? जी। ये बहुत इंपॉर्टेंट पॉइंटर है। ये बहुत इंपॉर्टेंट पॉइंटर है। द रेश्यो ऑफ़
टू एक्सटेंसिव प्रॉपर्टीज इज़ एन इंटेंसिव प्रॉपर्टी। यानी कि दो एक्सटेंसिव प्रॉपर्टीज का रेश्यो जो होता है वो एक
इंटेंसिव प्रॉपर्टी बनकर आती है। जैसे कि फॉर एग्जांपल कंसंट्रेशन ऑफ सॉल्यूशन है। तो कंसंट्रेशन ऑफ अ सॉल्यूशन इज़ अ रेश्यो
ऑफ़ दी मोल्स ऑफ़ द सॉल्यूशन बाय द वॉल्यूम ऑफ़ सॉल्यूशन इन लीटर। ये आपने पढ़ा है। अब मुझे बताइए जो मोल है वो बेसिकली कैसा है?
सुनील भैया मोल एक्सटेंसिव प्रॉपर्टी है। EP लिख रहा हूं। वॉल्यूम कैसी है? एक्सटेंसिव प्रॉपर्टी है। एक्सटेंसिव
प्रॉपर्टी बाय एक्सटेंसिव प्रॉपर्टी विल गिव यू इंटेंसिव प्रॉपर्टी। IP इंटेंसिव प्रॉपर्टी है और ये दोनों
एक्सटेंसिव थे। तो क्या बोला मैंने? दो एक्सटेंसिव प्रॉपर्टी का रेश्यो क्या होता है दोस्त? एक इंटेंसिव प्रॉपर्टी होती है।
ठीक है? द रेश्यो ऑफ़ टू एक्सटेंसिव प्रॉपर्टीज इज़ एन इंटेंसिव प्रॉपर्टी। मेरी बात क्लियर हुई क्या? मेरी बात
क्लियर हुई क्या? इसी प्रॉपर्टी की एक एप्लीकेशन बताऊं क्या? इसी प्रॉपर्टी की एप्लीकेशन। इसी प्रॉपर्टी की एप्लीकेशन है
ये वाला। तीसरा पॉइंटर जो है इसी की एक एप्लीकेशन है। यह बोलता है कि जितनी भी स्पेसिफिक
प्रॉपर्टीज यानी कि पर यूनिट मास पे बात कर रही है जो भी प्रॉपर्टी एंड मोलर यानी कि पर यूनिट मोल पे जो बात कर रही है
प्रॉपर्टीज से स्पेसिफिक प्रॉपर्टीज का मतलब क्या होता है? जैसे मैंने बोला कि फॉर एग्जांपल मैंने बोला स्पेसिफिक
वॉल्यूम। व्हाट इज़ स्पेसिफिक वॉल्यूम? वॉल्यूम पर यूनिट मास। यही मतलब हुआ ना भाई। इसका क्या मतलब है?
यही मतलब हुआ। अगर मैं बोल रहा हूं मोलर कंसंट्रेशनंस तो इसका मतलब है कि पर यूनिट मोल पे बात कर रहा हूं कंसंट्रेशन की। यही
मतलब हुआ ना? जी। तो ये सारी की सारी प्रॉपर्टीज इंटेंसिव होती है। अब अगर आप यहां पर ऊपर वाले लॉजिक को इस
पे पटक देंगे तो ये आंसर भी हो जाएगा। तो जहां पे आपको स्पेसिफिक वर्ड दिखता है स्पेसिफिक हीट कैपेसिटी, स्पेसिफिक
वॉल्यूम है ना? मोलर हीट कैपेसिटी जैसे भी मोलर शब्द दिख जाए स्पेसिफिक दिख जाए चुपचाप दिमाग लगा दिमाग में लगा लेना कि
सारे के सारे इंटेंसिव होंगी इंटेंसिव होंगी इंटेंसिव होंगी इंटेंसिव होंगी इंटेंसिव होंगी जैसे फॉर एग्जांपल
स्पेसिफिक वॉल्यूम क्या होता है व्हाट इज़ स्पेसिफिक वॉल्यूम स्पेसिफिक वॉल्यूम v इक्व टू वॉल्यूम पर यूनिट मास यानी कि v /
m ये v है बाय m तो स्पेसिफिक का मतलब क्या होता है पर यूनिट मास अगर मैंने बोला स्पेसिफिक वॉल्यूम तो वॉल्यूम पर यूनिट
मास यानी वॉल्यूम डिवाइडेड बाय द मास। वॉल्यूम पर यूनिट मास इज़ अ स्पेसिफिक वॉल्यूम। अब देखो दिमाग लगाते हैं। ये
इंटेंसिव बोल रहा है। हां। अब तुम ऊपर वाली प्रॉपर्टी को ही यहां पे लगा दोगे तो लग जाएगी। कैसे? वॉल्यूम क्या है?
एक्सटेंसिव प्रॉपर्टी। मास क्या है? एक्सटेंसिव प्रॉपर्टी। एक्सटेंसिव प्रॉपर्टी बाय एक्सटेंसिव प्रॉपर्टी विल
गिव इंटेंसिव प्रॉपर्टी। तो ऊपर वाली का ही इसी ही प्रॉपर्टी का एप्लीकेशन है। तो जितनी भी स्पेसिफिक
प्रॉपर्टीज और मोलर प्रॉपर्टीज होती हैं, दीज़ आर नथिंग बट इंटेंसिव इन नेचर। चलो बहुत बढ़िया। अब एक सवाल को सॉल्व
करेंगे तो ज्यादा अच्छे से समझ में आएगा। सवाल दिया है। मैं हट जा रहा हूं। आप लोग इस सवाल को सॉल्व करेंगे। कंसीडर अ 10
लीटर टैंक ऑफ वाटर एट द रूम टेंपरेचर। एक 10 लीटर का टैंक है पानी का रूम टेंपरेचर के ऊपर। यानी कि 25° सेल्सियस के ऊपर। ये
बोल रहा है द वाटर हैज़ अ मास ऑफ़ 10 कि.ग्र. इसके अंदर जो वाटर है इसका मास है 10 कि.ग्र. व्हिच ऑफ़ द फॉलोइंग प्रॉपर्टीज
आर इंटेंसिव एंड व्हिच आर एक्सटेंसिव। अब इसमें से कौन-कौन सी प्रॉपर्टीज इंटेंसिव है एंड एक्सटेंसिव है। है ना? तो टेंपरेचर
ऑफ़ वाटर। टेंपरेचर ऑफ़ वाटर जो है वो इंटेंसिव है कि एक्सटेंसिव है। ये इंटेंसिव है। इसको फर्क नहीं पड़ता कि
सिस्टम का क्या एक्सटेंट है या कितना अमाउंट ऑफ मैटर है। उसको फर्क नहीं पड़ता। वॉल्यूम ऑफ वाटर को तो 100% फर्क पड़ता
है। कितना पानी है उस पर तो बिल्कुल 100% फर्क पड़ता है। एक्सटेंसिव है। मास ऑफ वाटर 100% एक्सटेंसिव प्रॉपर्टी है।
डेंसिटी ऑफ़ वाटर। अब देखो डेंसिटी क्या होता है? डेंसिटी का मतलब होता है हमारे पास। अब देखो यहां पे हमें कांसेप्ट को
लगाना है। डेंसिटी क्या होता है? सुनील भाई मास बाय वॉल्यूम होता है। अच्छा मास बाय वॉल्यूम होता है। जी बिल्कुल सही बात
है। मास कैसी प्रॉपर्टी एक्सटेंसिव के इंटेंसिव सुनील भाई एक्सटेंसिव प्रॉपर्टी है। वॉल्यूम कैसी प्रॉपर्टी एक्सटेंसिव की
इंटेंसिव एक्सटेंसिव प्रॉपर्टी है। तो खुद दिल से बता बेटा डेंसिटी क्या होगा? अरे 100% क्लियर है सुनील भाई। डेंसिटी क्या
होगा? डेंसिटी होगा। इंटेंसिव प्रॉपर्टी। क्या होगा? इंटेंसिव प्रॉपर्टी हो जाएगा। यही तो है। ये देखो। द रेश्यो ऑफ़ टू
एक्सटेंसिव प्रॉपर्टीज इज़ एन इंटेंसिव प्रॉपर्टी। तो, यह एक्सटेंसिव प्रॉपर्टी बाय एक्सटेंसिव प्रॉपर्टी विल गिव
इंटेंसिव प्रॉपर्टी। एंड देन वी हैव दी प्रेशर ऑफ दी वाटर। तो प्रेशर ऑफ दी वाटर अगेन इट डज़ नॉट डिपेंड्स अपॉन दी एक्सटेंट
ऑफ द सिस्टम। ठीक है ना? तो इंटेंसिव होगा। ये देखो। इंटेंसिव इंटेंसिव है ना? एक्सटेंसिव एक्सटेंसिव
डन। क्लियर है बात? तो ये इंटेंसिव हो गया। ये इंटेंसिव हो गया। एक्सटेंसिव एक्सटेंसिव इंट एक्सटेंसिव बाय एक्सटेंसिव
का रेश्यो होता है इंटेंसिव। तो कामना करता हूं ये पांचों सवाल आपको अच्छी तरीके से समझ में आ गए होंगे। इसके बाद एक बहुत
ही सरल सी बात बहुत सिंपल सी बात कि स्टेट फंक्शन और पॉइंट फंक्शन हमारे पास क्या होते हैं? देखिए स्टेट फंक्शन या बेसिकली
पॉइंट फंक्शन आपके पास क्या होते हैं? और दूसरे होते हैं बेसिकली पाथ फंक्शन। बहुत सिंपल सी बात आपको बताता हूं। तुम अभी
11वीं क्लास में हो। कुछ बच्चे 11वीं क्लास में, कुछ बच्चे 12वीं क्लास में होंगे जो मेरे लेक्चर को देखते हैं। 12वीं
वाले बालक भी देखते हैं। मुझे पता है। अब सुनना तुमको आज तुम्हारे रिश्तेदारों ने यहां पर
ऑब्जर्व किया। इस इस पॉइंट पे ऑब्जर्व किया। इस पॉइंट पे ऑब्जर्व किया कि तुम्हारे पास क्या नॉलेज है? तुमने कितना
फेम अर्न किया, कितना पैसा अर्न किया? सब कुछ देखा। अभी तो कुछ अर्न नहीं किया होगा। बट वो हर चीज़ में देखेंगे कि भाई
एकेडमिक करिकुलम में क्या किया? एक्स्ट्रा करिकुलम में क्या किया? वो सब यहां देखा। फिर आज से सीधा 5 साल बाद देखेंगे। यहां
पे यहां पे एनालाइज करेंगे। फिर सीधा यहां एनालाइज करेंगे। फिर 5 साल बाद यहां देखेंगे। अब तुम यहां से यहां तक कैसे
पहुंचे उनको फर्क नहीं पड़ता। तुम यहां से यहां तक कैसे पहुंचे उनको फर्क नहीं पड़ता। कितनी मेहनत करी? कौन सा पाथ लिया?
कितनी एंजायटी थी? कितना स्ट्रेस है? कोई फर्क नहीं पड़ता। यहां पे ऑब्जर्व किया। फिर सीधा यहां ऑब्जर्व किया। दीज़ आर कॉल्ड
एज द पॉइंट फंक्शनंस। तुमने बीच में क्या रास्ता लिया था यहां तक जाने के लिए उसको फर्क नहीं पड़ता। समझ रहे हो? जी। तो
पॉइंट फंक्शन क्या होता है या स्टेट फंक्शन क्या होता है? हम ऐसी प्रॉपर्टीज की बात करेंगे जो डिपेंड करती है करंट
स्टेट ऑफ सिस्टम जो करंट स्टेट ऑफ सिस्टम पे डिपेंड करती है। ये पाथ इंडिपेंडेंट है। इसको फर्क नहीं पड़ता है। आपने यहां
तक आने के लिए कौन सा रास्ता चुना इसको फर्क नहीं पड़ता। यह सीधा करंट स्टेट पे देखती है आपको। जैसे कि फॉर एग्जांपल
इंटरनल एनर्जी, टेंपरेचर, प्रेशर, वॉल्यूम, एंट्रॉपी, एंथैल्पी। इंटरनल एनर्जी, टेंपरेचर, प्रेशर, वॉल्यूम,
एंट्रॉपी, एंथैल्पी ये सारे के सारे आपके पास स्टेट या फिर पॉइंट फंक्शन हैं। इनको बिल्कुल फर्क नहीं पड़ता कि आप फाइनल से
मतलब अभी इनिशियल से फाइनल पे आए हो, फिर आगे जा रहे हो। इनको कोई फर्क नहीं पड़ता आप कैसे आए। ये इनिशियल स्टेट देखेंगे,
फाइनल स्टेट देखेंगे। बात खत्म। समझ गए आप? जी। थोड़ा सा ऐसे कर्व के थ्रू समझे। तो मान लीजिए ये आपकी इनिशियल स्टेट
है। अभी आपकी करंट स्टेट ये है। मान लीजिए थोड़ी देर के बाद या कुछ सालों के बाद आपकी करंट स्टेट ये होगी। तो ये यहां पे
एनालाइज़ करेंगे और यहां पे एनालाइज़ करेंगे। इनको इन पॉइंट से फर्क पड़ता है। अब आपने यहां तक जाने के लिए ये वाला
रास्ता चुना था या आपने यह वाला रास्ता चुना था या आपने यह वाला रास्ता चुना था। कोई फर्क नहीं पड़ता। डज़ंट मैटर। दीज़ आर
पाथ इंडिपेंडेंट प्रॉपर्टीज। इनको फर्क पड़ता है इनिशियल और फाइनल स्टेट से। समझ में आ गई मेरी बात? जी। पाथ फंक्शन होता
है डिपेंड्स ऑन द स्पेसिफिक प्रोसेस और द पाथ टेकन। ये डिपेंड करता है कि आपने कौन सा रास्ता लिया है उस पे डिपेंड करेगी।
पाथ डिपेंडेंट यानी कि वर्क और हीट। अब देखिए अगर आपने मान लीजिए ये वाला पाथ चुना। ये वाला पाथ चुना। ये वाला ये वाला
पाथ चुना तो आपका वर्क डन ये है। अगर आपने ये वाला पाथ चुना है तो आपका वर्क डन ये है। इस एरिया अंडर द कर्व जो हो जाएगा ना
दिस एरिया अंडर द कर्व दिस इज द वर्क डन। तो वर्क जो आप कर रहे हैं वर्क जो आप कर रहे हैं वर्क जो आप कर रहे हैं वो किस पे
डिपेंड करता है? आपने कौन सा रास्ता चुना है? आपने रास्ता ये वाला चुना है या रास्ता ये वाला चुना है? समझ में आ रही है
कि नहीं आ रही है बात? ये देखो पाथ डिपेंडेंट चीज समझ में आ रही है कि नहीं आ रही है ये देखो जैसे फॉर एग्जांपल अगर मान
लीजिए यहां से स्टार्ट किया था यहां गए और फिर यहां गए यहां से स्टार्ट किया था यूं और यूं गए या
फिर आपने यहां से स्टार्ट किया था यूं गए और फिर यूं आए अब ये इनिशियल और फाइनल स्टेट पे डिपेंड
नहीं करेगा ये पाथ पे डिपेंड करेगा आप गए तो देखो यहां से इनिशियल पॉइंट था ये बेसिकली फाइनल पॉइंट था आपका ये इनिशियल
पॉइंट था और ये बेसिकली फाइनल पॉइंट था। तो आप यूं गए या यूं गए इससे फर्क पड़ता है। तो डिपेंड्स अपॉन द पाथ टेकन। समझ में
आ गई बात? जी सुनील भाई अगर ये सारी बातें समझ में आ रही है तो एक बार कमेंट सेक्शन में आय भैया लगाना ना भूलें। सारे के सारे
दोस्त फटाफट से कमेंट सेक्शन में लगा देंगे। आय भैया यह पहला टॉपिक यहां पर होता है खत्म 37 मिनट के अंदर। ठीक है जी
सुनील भाई। चलिए आगे चलते हैं। लेट्स स्टार्ट अनदर टॉपिक तुला गया ना मैं
सॉरी फर्स्ट लॉ ऑफ़ थर्मोडायनेमिक्स। अब फर्स्ट लॉ ऑफ़ थर्मोडायनेमिक्स क्या है? उसको
समझने से पहले थोड़ी सी बेसिक बातें करते हैं। हीट क्या होती है सुनील भाई? वर्क क्या होता है सुनील भाई? हैं? इंटरनल
एनर्जी क्या होती है सुनील भाई? ये क्या है? इंटरनल एनर्जी। हीट वर्क आया फलाना ढिमकाना क्या है ये? बताता हूं।
सबसे पहले सबसे पहले हीट क्या है? बचपन से पढ़ते आ रहे हो हीट। अच्छा इसको है ना कैपिटल q से रिप्रेजेंट कर सकते हो या
बेसिकली स्मॉल q से भी रिप्रेजेंट कर सकते हो। कोई फर्क नहीं पड़ता। ठीक है ना? हां। सो व्हाट इज हीट? इट इज़ नथिंग बट द एनर्जी
ट्रांसफरर्ड टू और फ्रॉम द सिस्टम ड्यू टू अ टेंपरेचर डिफरेंस। सो, व्हाट इज हीट एनर्जी? यह
आपको समझना पड़ेगा। हीट एनर्जी यानी कि आपके पास एक ऐसी प्रकार की ऊर्जा है वह बेसिकली सिस्टम के
अंदर या सिस्टम के बाहर तब जाती है जब सिस्टम और सराउंडिंग के बीच में एक टेंपरेचर डिफरेंस हो। तो ऐसी एनर्जी द
एनर्जी व्हिच इज़ ट्रांसफर टू और फ्रॉम अ सिस्टम ड्यू टू द टेंपरेचर डिफरेंस। मान लीजिए आपके पास सिस्टम है। आपके पास
सराउंडिंग है। मैं एक केस ऐसा इमेजिन करता हूं। एक केस ऐसा इमेजिन करता हूं कि मेरे पास एक भगोने के अंदर पानी है जो कि रूम
टेंपरेचर पर 25 डिग्री सेल्सियस पे। मैंने फ्रिज को खोला और मैंने फ्रीजर में पानी को रख दिया। अब हीट कहां से कहां फ्लो
करेगी दिमाग लगाओ। हमारा जो बर्तन है वो टेंपरेचर है 25° सेल्सियस। और जो सराउंडिंग यानी जो फ्रीजर है उसका तापमान
मैं मान लेता हूं कि 0 डिग्री सेल्सियस है। अब हाई टेंपरेचर है पानी और लो टेंपरेचर है फ्रीजर। तो यहां से हीट
एनर्जी फ्रीजर की तरफ जाएगी। पानी धीरे-धीरे क्या होता जाएगा? ठंडा होता जाएगा। तो हीट एनर्जी बेसिकली कहां से
कहां फ्लो करती है? हीट एनर्जी फ्लो करती है बेसिकली फ्रॉम अ बॉडी ऑफ़ हाई टेंपरेचर टू दी बॉडी ऑफ़ लोअर टेंपरेचर। तो जब भी एक
टेंपरेचर डिफरेंस होगा तो सिस्टम से सराउंडिंग में या सराउंडिंग से सिस्टम में हीट एनर्जी का फ्लो होता है। ठीक है ना?
जी। अच्छा और देखते हैं थोड़ा सा आगे चलते हैं। अगर हमारा सिस्टम हीट एनर्जी को
अब्सॉर्ब करता है तो सिस्टम का टेंपरेचर हमारा बढ़ता है और प्रोसेस एंडोथर्मिक होता है। अगर सिस्टम हीट एनर्जी रिलीज
करता है तो टेंपरेचर डिक्रीज करता है और प्रोसेस एग्जोथर्मिक होता है। ध्यान से सुनो। अगर हमारे सिस्टम ने हीट एनर्जी
अब्सॉर्ब करी है तो सिस्टम का तापमान क्या होगा? बढ़ेगा। यानी एंडोथर्मिक। अगर सिस्टम ने हीट एनर्जी रिलीज़ करी है तो
सिस्टम का तापमान कम होगा। और प्रोसेस कैसा होगा? इसको हम कहेंगे बेसिकली एग्जोथर्मिक।
ये तो हो गई हमारे पास हीट की चर्चा। अब करते हैं हम लोग वर्क की चर्चा। वर्क क्या है? फोर्स क्रॉस डिस्प्लेसमेंट। ये तो पढ़ा
भी होगा तुमने। FD cos थीटा। ये सब पढ़ा है ना तुमने वर्क डन के बारे में। जी। कार्य करना। कार्य तो आप तब करोगे ना जब आप
एनर्जी दोगे तभी तो कार्य करोगे। बिना अह एनर्जी दिए कार्य कैसे होगा? तो कार्य को भी यहां पर हम लोग एनर्जी के टर्म्स में
डिफाइन करते हैं। इसकी यूनिट्स भी एनर्जी में ही होती है। जूल्स में ही आपने पढ़ी होगी। व्हाट इज वर्क? इट इज़ नथिंग बट दी
एनर्जी ट्रांसफरर्ड व्हेन अ सिस्टम एग्जर्ट्स फोर्स और अ फोर्स इज़ एग्जर्टेड ऑन द सिस्टम व्हिच
रिजल्ट्स इन दी वॉल्यूम चेंजज़ इन बोथ द केसेस। बहुत इंपॉर्टेंट बात है। जैसे फॉर एग्जांपल मान लीजिए मेरे पास एक ऐसा एक
ऐसा एक क्लोज्ड कंटेनर है। उसके अंदर एक गैस भरी हुई है और एक पिस्टन लगा हुआ है। अब मैं कह रहा हूं कि गैस एक्सपेंड कर रही
है। तो गैस एक्सपेंड कैसे कर रही होगी? भाई इसके अंदर जो गैस है वो इस पिस्टन के ऊपर एक फोर्स लगा रही होगी। तभी तो
एक्सपेंड कर रहा होगा। दिमाग लगा पा रहे हैं आप? समझ पा रहे हैं आप इस चीज को? तो वर्क क्या है? यानी कि
वह ऊर्जा जो जब ट्रांसफर होती है वो ऊर्जा जो तब ट्रांसफर होती है जब बेसिकली सिस्टम सराउंडिंग के ऊपर एक फोर्स लगाए या
सराउंडिंग सिस्टम के ऊपर एक फोर्स लगाए और इस फोर्स को लगाते दौरान उसके वॉल्यूम में यानी कि उसके आयतन में परिवर्तन आ जाए उसे
हम लोग कहते हैं वर्क। दोनों ही एनर्जी ट्रांसफर्ड है। एनर्जी ट्रांसफरर्ड टू और फ्रॉम द सिस्टम। यानी या तो हम सिस्टम को
एनर्जी दे रहे हैं या सिस्टम से एनर्जी जा रही है ड्यू टू द टेंपरेचर डिफरेंस दैट इज़ कॉल्ड एज हीट और एनर्जी ट्रांसफरर्ड टू दी
सिस्टम है ना एनर्जी ट्रांसफरर्ड एनर्जी ट्रांसफरर्ड उस केस में जब सिस्टम या तो
फोर्स एग्जर्ट कर रहा है या सिस्टम पे फोर्स एग्जर्ट हो रही है और इसकी वजह से वॉल्यूम में परिवर्तन आ रहा है सिस्टम के
तो इसको क्या बोलेंगे वर्क। अब मान लीजिए हमने किसी गैस को कंप्रेस किया तो हम उसके ऊपर एक फोर्स एग्जर्ट कर रहे हैं जिसकी
वजह से वॉल्यूम कम हो रहा है। या गैस एक्सपेंड कर रही है तो वो फोर्स एग्जर्ट कर रही है सिस्टम सराउंडिंग के ऊपर और वो
वहां पर भी क्या हो रहा है? वॉल्यूम में चेंजज़ आ रहे हैं। तो यहां पे जो एनर्जी ट्रांसफर होगा उसको हम बेसिकली कहेंगे
वर्क यानी कि कार्य। समझ में आ गया? जी। अब ये जो वर्क हो रहा होता है ना जैसे मान लीजिए किसी ने गैस का
एक्सपेंशन हो रहा है। तो ये वर्क किसके अगेंस्ट हो एक्सटर्नल प्रेशर के अगेंस्ट हम कार्य कर रहे हैं। भाई एटमॉस्फेयर हम
पे एक प्रेशर लगा रहा है। उसके अगेंस्ट हम क्या कर रहे हैं? कार्य कर रहे हैं। समझ में आ रही है मेरी बात? जी सुनील भैया। तो
ये छोटी-छोटी बातें आपको समझ में आनी चाहिए। इसकी और एक बेटर क्लियर पिक्चर अभी आपको आगे मिलेगी। तो ये हीट और ये हमारे
पास है वर्क। दोनों को हम लोग बोलते हैं एनर्जी इन ट्रांजिट। बोथ आर कॉल्ड एनर्जी इन ट्रांजिट। बोथ आर कॉल्ड
एनर्जी इन ट्रांजिट। एनर्जी इन ट्रांजिट। क्या है ये? एनर्जी इन ट्रांजिट है। यानी
कि ये ट्रांसफर हो रही है। दोनों की दोनों ट्रांसफर हो रही है। या तो सिस्टम से सराउंडिंग से, सराउंडिंग से सिस्टम में।
सो दीज़ आर कॉल्ड ऐज़ दी एनर्जी इन ट्रांज़िट। ऑलराइट? नाउ व्हाट इज़ इंटरनल एनर्जी? इंटरनल एनर्जी को रिप्रेजेंट करते
हैं U से। अब जैसे वर्क को रिप्रेजेंट करते हैं W से या तो स्मॉल W या कैपिटल W दोनों से आप रिप्रेजेंट कर सकते हैं।
इंटरनल एनर्जी को रिप्रेजेंट करेंगे आप U से। किससे? U से। अब इंटरनल एनर्जी क्या होती है? एक सिस्टम के अंदर जितनी भी
पार्टिकल्स की काइनेटिक एनर्जी और पोटेंशियल एनर्जी उनके सम को हम बोलते हैं क्या बोलते हैं? इंटरनल एनर्जी। इट
रिप्रेजेंट्स द टोटल एनर्जी कंटेंड विद इन द सिस्टम। दैट इज़ ड्यू टू द मोशन ऑफ़ पार्टिकल्स काइनेटिक एनर्जी एंड इंटरेक्शन
ऑफ़ द पार्टिकल्स पोटेंशियल एनर्जी। तो एक सिस्टम की जो टोटल एनर्जी है टोटल एनर्जी ऑफ द सिस्टम दैट इज कॉल्ड एज
इंटरनल एनर्जी। अ टोटल एनर्जी हो सकती है दैट इज़ बिकॉज़ ऑफ़ द मूवमेंट ऑफ़ द पार्टिकल्स। वाइब्रेशनल काइनेटिक एनर्जी,
ट्रांसलेशनल काइनेटिक एनर्जी, रोटेशनल काइनेटिक एनर्जी। दूसरा उनके बीच में जो इंटरेक्शंस हो रहे हैं, बिकॉज़ ऑफ़ द
पोटेंशियल एनर्जी। दैट इज़ कॉल्ड एज़ पोटेंशियल एनर्जी। तो इन सबका जो सम होता है दैट इज नथिंग बट दैट इज नथिंग बट दैट
इज नथिंग बट दैट इज नथिंग बट इंटरनल एनर्जी तो काइनेटिक एनर्जी प्लस पोटेंशियल एनर्जी
का जो सम है दैट इज़ इक्वल्स टू दी इंटरनल एनर्जी ऑफ दी सिस्टम। इंपॉर्टेंट बात यहां पर ये है। ये तो पहला पॉइंटर था। दूसरा
पॉइंटर ये है कि जो एब्सोल्यूट वैल्यू है इंटरनल एनर्जी की इट कैन नॉट बी मेजर्ड एंड ओनली द चेंज इन द इंटरनल एनर्जी कैन
बी मेजर्ड। यानी कि आप सिर्फ डेल्टा u को मेजर कर सकते हो। u की एब्सोल्यूट वैल्यू मेजर नहीं कर सकते। फिर से सुनना। यू कैन
नॉट मेजर द एब्सोल्यूट वैल्यू ऑफ इंटरनल एनर्जी। तो हम क्या ऑब्जर्व कर सकते हैं? आप चेंज को मेजर कर सकते हैं कि कितना
परिवर्तन आया है। ठीक है? अच्छा इंटरनल एनर्जी कब-क चेंज करती है? इंटरनल एनर्जी तब-कब चेंज कर
सकती है जब हीट और वर्क का ट्रांसफर होगा सिस्टम सराउंडिंग के बीच में। तो इंटरनल एनर्जी ऑफ़ अ सिस्टम कैन चेंज। ये कब चेंज
कर सकती है? कब चेंज कर सकती है? कब चेंज कर सकती है इंटरनल एनर्जी ऑफ़ अ सिस्टम? व्हेन हीट पाससेस इंटू और आउट ऑफ द सिस्टम
और वर्क इज़ डन ऑन और बाय द सिस्टम। जब भी एनर्जी का ट्रांसफर होगा सिस्टम सराउंडिंग के बीच में ईदर इन द फॉर्म ऑफ हीट ईदर इन
द फॉर्म ऑफ वर्क तब हमारी इंटरनल एनर्जी में परिवर्तन आ सकता है। ये एक और इंपॉर्टेंट पॉइंटर है। ध्यान से
देखिएगा। इन केस ऑफ़ आइडियल गैस इंटरनल एनर्जी ऑफ़ अ सिस्टम इज़ अ फंक्शन ऑफ़ टेंपरेचर। याद रखिएगा। इंटरनल एनर्जी जो
हमारे पास होती है इन केस ऑफ़ आइडल गैसेस इंटरनल एनर्जी इज़ अ फंक्शन ऑफ़ टेंपरेचर मतलब कि पूरी तरीके से टेंपरेचर डिपेंडेंट
होती है। याद रखिएगा इंटरनल एनर्जी इज़ अ फंक्शन ऑफ़ टेंपरेचर। टेंपरेचर बढ़ेगा इंटरनल एनर्जी बढ़ेगी। टेंपरेचर घटेगा
इंटरनल एनर्जी भी घटेगी। ठीक है? जी सुनील भाई काम ना करते हुए सारी बातें समझ में आ गई होगी। जी सुनील भाई समझ में आ गई है।
एक छोटा सा सवाल फिर पूछ लेता हूं आपसे। इंटरनल एनर्जी को आपको डिफाइन कर दिया मैंने। तो इंटरनल एनर्जी, टेंपरेचर एंड
वॉल्यूम आर स्टेट और पॉइंट फंक्शनंस। यस और नो। 3 2 1 यस याद कीजिए। अभी मैंने आपको बताया था
टेंपरेचर, प्रेशर, वॉल्यूम, इंटरनल एनर्जी आर बेसिकली दी स्टेट फंक्शनंस। टेंपरेचर, प्रेशर, वॉल्यूम, इंटरनल एनर्जी आर
बेसिकली दी स्टेट और दी पॉइंट फंक्शनंस। अरे याद है राजा? चलो अब बहुत ही मस्त चीज
केमिस्ट्री के अंदर आईयूपीएसी साइन कन्वेंशंस ये जो है ये बहुत इंपॉर्टेंट है। ध्यान
रखना दिस इज़ वेरी वेरी वेरी वेरी वेरी वेरी वेरी वेरी वेरी वेरी इंपॉर्टेंट। इसको आप याद रखेंगे।
अब ये आईयूपीएसी साइन कन्वेंशंस आपको क्या बोलते हैं? इस चीज को थोड़ा सा ध्यान से सुनना।
सबसे पहले सबसे पहले मैं आपको एक सरल तरीका बताता हूं। आपको याद हो जाएगा। याद हो जाएगा।
हीट और वर्क दोनों एनर्जी ट्रांसफरर्ड है। बोथ आर क्या है? दोनों क्या है? एनर्जी ट्रांसफर है। एनर्जी ट्रांसफर है ना? अगर
मैं हीट की और वर्क की बात करूं तो दोनों एनर्जी ट्रांसफर है। जी सुनील भैया आप अगर मान लीजिए दोनों सिस्टम के अंदर आ रहा है
तो दोनों को प्लस लगा दो। मान लो मैं बोलता हूं हीट इज ट्रांसफरर्ड फ्रॉम द सराउंडिंग टू द सिस्टम तो प्लस q कर दो।
वर्क इज डन ऑन द सिस्टम बाय द सराउंडिंग तो प्लस w कर दो। देखो शॉर्ट ट्रिक बता रहा हूं। जो भी एनर्जी तुम्हारे सिस्टम को
मिल रही है। मान लीजिए हीट एनर्जी मिल रही है। मान लीजिए वर्क मिल रहा है। वर्क भी क्या है? हीट एंड वर्क बोथ आर दी एनर्जी
ट्रांसफरर्ड। तो मान लीजिए हीट एनर्जी अगर ट्रांसफर हुई है या वर्क हुआ है सिस्टम के ऊपर तो दोनों ही केसेस में आप इसको लेंगे
पॉजिटिव वैल्यू। मेरी बात समझ में आ रही है? अगर आपका हीट इज एडेड टू द सिस्टम यानी कि अगर एंडोथर्मिक रिएक्शन या
बेसिकली आपका एंडोथर्मिक प्रोसेस हुआ है तो ये प्लसq माना जाएगा। और अगर वर्क इज डन ऑन द सिस्टम फॉर एग्जांपल व्हेन अ गैस
इज़ कंप्रेस्ड तो +W मैं सिंपल बोल रहा हूं। तो अगर आपने अपने सिस्टम को एनर्जी दी है इन द फॉर्म ऑफ हीट और इन द फॉर्म ऑफ़
वर्क तो +q एंड +w अच्छा ठीक है सुनील भाई और अगर मान लीजिए ये -q और -w आ रहा है तो ऐसा क्यों आ रहा है सुनील भाई ध्यान से
उल्टा कर दो अगर सिस्टम से हीट एनर्जी निकली है एग्जोथर्मिक रिएक्शन या प्रोसेस हुआ है
एक तो इसमें वर्क इज़ डन बाय द सिस्टम फॉर एग्जांपल व्हेन अ गैस एक्सपेंड्स अगेंस्ट अगेंस्ट एक्सटर्नल प्रेशर। तो अगर हमारे
पास सिस्टम से सराउंडिंग में हीट जाएगी या सिस्टम सराउंडिंग पे काम करेगा। दोनों नेगेटिव सराउंडिंग से सिस्टम में हीट
आएगी। सराउंडिंग सिस्टम पे काम करेगा + q + w काम खत्म। ये चार चीजें याद हो गई क्या? ये चारों साइन कन्वेंशन याद हो गए
क्या? आसान हो गया? जी सुनील भाई। चलो अब तुम रेडी हो पूरी तरीके से फर्स्ट लॉ ऑफ़ थर्मोडायनेमिक्स पे जाने के लिए। तुम्हें
यहां पर हीट क्लियर हो गया। तुम्हें यहां पे वर्क क्लियर हो गया। तुम्हें इंटरनल एनर्जी
क्लियर हो गई। तुम्हें यहां पर साइन कन्वेंशन क्लियर हो गए। अब इन सबको जब हम जोड़ेंगे तो फर्स्ट लॉ ऑफ़ थर्मोडायनेमिक्स
क्रिएट हो जाएगा। बढ़िया। अब नाउ व्हाट इज दी फर्स्ट लॉ ऑफ़ थर्मोडायनेमिक्स? सुनील भाई व्हाट इज़ दिस? फर्स्ट लॉ ऑफ़
थर्मोडायनेमिक्स कुछ नहीं है। लॉ ऑफ़ कंजर्वेशन ऑफ़ एनर्जी है। सिंपल। हैं बस। हैं बस। हां। इट इज़ नथिंग बट दी लॉ ऑफ द
कंजर्वेशन ऑफ एनर्जी। ऊर्जा के संरक्षण का नियम यानी कि लॉ ऑफ कंजर्वेशन ऑफ एनर्जी। तो फर्स्ट लॉ ऑफ़
थर्मोडायनेमिक्स कुछ नहीं है। सिंपल लॉ ऑफ़ कंजर्वेशन ऑफ़ एनर्जी है। हैं? लॉ ऑफ़ कंजर्वेशन ऑफ़ एनर्जी क्या होता है? क्या
होता है लॉ ऑफ़ कंजर्वेशन ऑफ़ एनर्जी? जल्दी से बताओ। एनर्जी इज़ नीदर क्रिएटेड। या एनर्जी इज़ नीदर क्रिएटेड नॉट डिस्ट्रॉयड।
यानी कि ऊर्जा को ना तो हम बना सकते हैं ना हम डिस्ट्रॉय कर सकते हैं। बट इट इज़ ट्रांसफॉर्म्ड फ्रॉम वन फॉर्म टू अनदर।
यानी कि एक फॉर्म से दूसरे फॉर्म में हम उसको ट्रांसफॉर्म कर सकते हैं। एग्री करते हो? जी एग्री करते हैं। यानी कि एनर्जी
कैन नॉट बी क्रिएटेड और डिस्ट्रॉयड ओनली कन्वर्टेड फ्रॉम वन फॉर्म टू दी अनदर। यानी कि ऊर्जा को ना तो हम बना सकते हैं
ना खत्म कर सकते हैं। उसको एक फॉर्म से दूसरी फॉर्म में कन्वर्ट कर सकते हैं। अरे ये तो हमको आता है सुनील भैया। इसमें
फर्स्ट लॉ थर्मोडायनेमिक्स क्या है? हम बताते हैं। हम बताते हैं राजा बेटा। यह कामना करते हैं आपको कॉन्सेप्ट नंबर वन
यहां पर क्लियर हुआ होगा। इस कांसेप्ट नंबर टू को आपको यहां पे फोकस करना है और उसके बाद यह कांसेप्ट नंबर थ्री आपकी
बुद्धि में जाएगा। ये तीन कांसेप्ट एकदम 100% क्लेरिटी लाने के लिए काफी है। अब आप देखेंगे यहां पर ध्यान से फोकस करेंगे।
यहां पर मैं मान लेता हूं कि मेरे पास इसके अंदर एक गैस भरी हुई है। आई हैव अ गैस हियर इन दिस।
आई हैव अ गैस हियर इन दिस। ठीक है ना? जी। अब यह जो गैस है, यह रैंडम डायरेक्शंस में मूव कर रहे हैं। यानी जो
गैस के पार्टिकल्स हैं, ये रैंडमली किसी भी डायरेक्शन में मूव कर रहे हैं। दे आर मूविंग इन रैंडम डायरेक्शंस। दे आर मूविंग
इन रैंडम डायरेक्शंस। दे आर मूविंग इन रैंडम डायरेक्शंस। दे आर मूविंग इन रैंडम डायरेक्शंस।
तो जो गैस के पार्टिकल्स हैं, वो क्या कर रहे हैं? वो गैस के पार्टिकल्स रैंडम डायरेक्शन में मूव कर रहे हैं। या तो वो
खुद से भिड़ते हैं या बेसिकली वो इन वॉल्स से मूव करते हैं। मतलब वॉल्स पे जाके भिड़ते हैं। तो क्या एग्जर्ट करते होंगे?
अपने दिल से बताओ। यहां पर ये गैस के पार्टिकल्स हैं। ये खुद से भी भिड़ते हैं और ये जो वॉल्स हैं चारों तरफ इनसे भी
जाके भिड़ते हैं। तो जब भिड़ते होंगे तो एक फोर्स एग्जर्ट करते होंगे पर यूनिट एरिया पे। दैट इज़ नथिंग बट प्रेशर। इसी को
प्रेशर बोलते हैं। ठीक है? जी। तो मैं यहां पर मान लेता हूं कि जो गैसेस यहां पर प्रेशर लगाती है जो
यहां पर गैसेस की वजह से जो प्रेशर है यह जो प्रेशर यहां पर है इसको बेसिकली मैं बोल देता हूं P इंटरनल
और जो ऊपर से प्रेशर यहां पर लग रहा है इसको मैं बोल देता हूं P एक्सटर्नल। ठीक है ना? P एक्सटर्नल इज़ इक्वल्स टू
यहां पर मैं ले रहा हूं PTM। क्यों सुनील भैया? यह जो ऊपर लगा हुआ है, इसका वेट मैं मान लेता हूं कि यह जो पिस्टन है, यह
वेटलेस एंड फ्रिक्शन लेस है। वेटलेस एंड फ्रिक्शन लेस पिस्टन है।
यह जो आपको पूरी असेंबली दिख रही है ना, यह वाली ये वाली जो पूरी असेंबली है यह वाली
यह वाली यह मैं मानता हूं कि मेरा वेटलेस एंड फ्रिक्शन लेस पिस्टन है। ठीक है ना? जी।
तो यहां पर जो एक्सटर्नल प्रेशर अप्लाई हो रहा होगा इसके ऊपर दैट इज इक्वल्स टू द एमॉस्फेरिक प्रेशर और अंदर से जो गैस की
तरफ से प्रेशर लग रहा है दैट इज बेसिकली पी इंटरनल। इतना समझ में आ रहा है? जी सुनील भैया समझ में आ रहा है। कोई दिक्कत
वाली बात है क्या? नहीं सुनील भैया कोई दिक्कत वाली बात नहीं है। दिस इज़ कंप्लीटली क्लियर टू ईच एंड एवरीवन ऑफ़ अस।
इतना तो हमको क्लियर है। ठीक है? अब देखिए यहां पर सिस्टम क्या हो जाएगा? ये गैस मेरा सिस्टम हो जाएगा। ये बेसिकली मेरे
पास वॉल हो जाएगी और उसके बाद सराउंडिंग जो हो जाएगी वो आसपास का एरिया हो जाएगा। है ना? यहां पे लिख देता हूं तो और आपको
अच्छी तरीके से क्लेरिटी मिल जाएगी। यानी कि ये एरिया मेरे पास क्या है? यह एरिया मेरे पास सिस्टम सॉरी सॉरी सॉरी माफी माफी
माफी माफी माफी नॉट नॉट बॉय नॉट जी बॉय नॉट जी बॉय यह हमारे पास हो जाएगा सराउंडिंग
ये वाला पूरा पार्ट हो जाएगा हमारे पास सिस्टम और ये वाला पार्ट हो जाएगा हमारे पास
बाउंड्री। अब यहां पे दो प्रकार की बाउंड्रीज हैं। एक तो ये फिक्स्ड बाउंड्री है और एक ये वाली मूवेबल बाउंड्री है। ये
पिस्टन ऊपर नीचे मूव कर सकता है। समझ रहे हो ना? है गैस का जो आपके पास कंटेनर है इसकी ये वाली जो बाउंड्रीज है
ये ये तो फिक्स्ड बाउंड्रीज है। ये वाली जो बाउंड्री है ये मूव कर सकती है। दिस कैन एक्चुअली मूव अप एंड डाउन। तो ये
मूवेबल बाउंड्री हमारे पास होगी। ठीक है? इसके बारे में अगर मैं लिखना चाहूं तो इसको बारे में मैं ऐसे भी लिख सकता हूं।
ध्यान से आप फोकस करना कि ये देखिए ये वाला जो पार्ट है ये वाला पार्ट ये वाला जो पार्ट है
अगर इसको बोलता हूं मैं A और इतने पार्ट को ध्यान से देखिए ये वाला जो पार्ट है इसको बोलता हूं B तो A और B मेरे पास क्या
हो जाएंगे? A हो जाएगा मेरे पास रिजिड बाउंड्री। और B मेरे पास क्या हो जाएगा? यह तो रिजिड
बाउंड्री है। यानी कि बिल्कुल फिक्स्ड बाउंड्री है। और यह जो पिस्टन है ना यह ऊपर नीचे मूव कर सकता है। तो ये वाली जो
बाउंड्री हो जाएगी कैसी हो जाएगी? ये वाली बाउंड्री हो जाएगी मूवेबल बाउंड्री। मैं छोटी-छोटी सारी बातें आपको क्लियर कर रहा
हूं। काम ना करता हूं समझ में आ रहा होगा। अब फिर से एक बार इस चीज को समझो। ये पूरा मेरे पास एक सेटअप है जिसके अंदर मेरे पास
एक सिलेंडर है। सिलेंडर के अंदर बेसिकली एक पिस्टन लगा हुआ है। पिस्टन यानी कि वेटलेस और फ्रिक्शनलेस पिस्टन है। पिस्टन
ऊपर नीचे मूव कर सकता है। यहां पर जो मैंने गैसेस को भरा है इसको मैंने सिस्टम बोला है। ये जो मेरे पास है ये मेरे पास
है फिक्स्ड बाउंड्री यानी कि रिजिड बाउंड्री और ये वाली जो है ये बेसिकली मेरे पास मूवेबल बाउंड्री है। इसके अलावा
जितना भी रीजन है वो आसपास का कहलाएगा सराउंडिंग। इतनी बात समझ में आ गई? जी सुनील भैया समझ में आ गई। अब आप ध्यान से
मेरी बातों पे फोकस करना। आपको मेरी सारी की सारी बातें अच्छी तरीके से समझ में आएगी। क्लियर है यहां तक? जी।
अब मैं यहां पर आपको बोल रहा हूं। मैं यहां पर आपको बोल रहा हूं कि यहां पर अपन क्या करते हैं? यहां पर अपन क्या करते
हैं? यहां पर अपन क्या करते हैं? इमेजिन करना कि यहां पर मैं q अमाउंट में हीट देता हूं सिस्टम को फ्रॉम दी सराउंडिंग।
क्या करता हूं? q अमाउंट में हीट देता हूं सराउंडिंग से सिस्टम में। इतनी बात याद हो गई क्या?
मैंने क्या कर दिया? Q अमाउंट में हीट दे दिया सराउंडिंग से सिस्टम में। अब क्या होगा?
अब क्या होगा? तुम खुद बताओ क्या होगा? अगर मैंने Q अमाउंट ऑफ हीट यहां पर सिस्टम को दे दी है तो क्या होगा? सुनील भाई,
जैसे ही आपने हीट एनर्जी बढ़ा दी, हमको इतने तो पता है कि जैसे ही आप हीट एनर्जी देंगे, तो पार्टिकल्स की काइनेटिक एनर्जी
बढ़ने लगेगी। पार्टिकल्स की काइनेटिक एनर्जी बढ़ने लगेगी। तो यहां पर हमें पता है कि इंटरनल
एनर्जी भी बढ़ने लगेगी। तो एक तो ये होगा कि जैसे ही आपने यहां पर हीट एनर्जी दी है तो पार्टिकल्स की काइनेटिक एनर्जी बढ़ने
लगेगी। अब कुछ पार्टिकल्स की काइनेटिक एनर्जी इतनी बढ़ जाएगी कि यहां पर ये जो पिस्टन है जिस पे ये जाके भिड़ रहे थे। धड़
ध अब ये और तेज जाके भिड़ेंगे। धड़ धड़ धड़ धड़ धड़ धड़ धड़ धड़ धड़ धड़ धड़ धड़ धड़ धड़ धड़ धड़ धड़ और तेज जाके भिड़ेंगे। तो यहां पर क्या हो
जाएगा? फोर्स बढ़ जाएगा। फोर्स पर यूनिट एरिया बढ़ जाएगा। यानी कि प्रेशर अंदर का क्या हो जाएगा? इंक्रीज हो जाएगा। समझे कि
नहीं समझे? जी। तो मैं यह मान के चलता हूं इनिशियली जब ये इस कंडीशन में था इक्विलिब्रियम की कंडीशन में था तो इंटरनल
प्रेशर और एक्सटर्नल प्रेशर जो थे वो बिल्कुल बराबर थे। तभी तो यहां रुका हुआ था। जो अंदर से प्रेशर गैसेस लगा रही हैं
और जो एटमॉस्फेरिक प्रेशर है वो बराबर है। तो यहां पे रुका हुआ है। अब मैंने नीचे से हीट करना स्टार्ट किया। तो Q इज एडेड टू द
सिस्टम व्हिच इंक्रीसेस द काइनेटिक एनर्जी ऑफ पार्टिकल्स। दिस इंटर्न इंक्रीसेस द इंटरनल एनर्जी ऑफ़ सिस्टम। दिस इंक्रीस एक
तो क्या करेगा? जैसे ही आपने Q अमाउंट ऑफ हीट एनर्जी दी है सिस्टम को, तो पार्टिकल्स की काइनेटिक एनर्जी बहुत
ज्यादा तेज बढ़ने लगेगी। पार्टिकल्स की काइनेटिक एनर्जी बढ़ने लगेगी। तो उससे इंटरनल एनर्जी बढ़ेगी। बिकॉज़ इंटरनल एनर्जी
इज़ नथिंग बट द सम ऑफ़ द काइनेटिक एनर्जी एंड पोटेंशियल एनर्जी ऑफ़ द सिस्टम। है ना? है ना? जो पार्टिकल्स की जितनी भी
काइनेटिक और पोटेंशियल एनर्जी का समय है दैट इंटरनल एनर्जी। तो काइनेटिक एनर्जी बढ़ने लगेगी तो इंटरनल एनर्जी बढ़ने
लगेगी। बहुत बढ़िया। अब यहां पर ये बहुत इंपॉर्टेंट बात है। दिस इनक्रीस इन काइनेटिक एनर्जी विल आल्सो इंक्रीस द
इनसाइड प्रेशर यानी कि पे इंटरनल। अब यहां पर ये जो इनक्रीस इन काइनेटिक एनर्जी हुआ है, उससे कुछ पार्टिकल्स यहां पे बहुत तेज
जाकर भिड़ रहे हैं। जिसकी वजह से इंटरनल प्रेशर भी बढ़ने लगेगा। अब इंटरनल प्रेशर अगर बढ़ने लगा है तो क्या यहां पर ये बकर
ऐसा रहेगा? नहीं। ये बकर हल्का ये ये पिस्टन यहां रहेगा। नहीं अंदर का प्रेशर बाहर वाले प्रेशर से ज्यादा है तो ये ऊपर
की तरफ मूव करेगा। और तब तक मूव करेगा जब तक कि इंटरनल और एक्सटर्नल प्रेशर बराबर ना हो जाए। यानी कि अगर ये यहां तक इस
स्टेट में मूव करता है तो अब जाके हमारे पास जो P एक्सटर्नल होगा यानी कि P एटीएम होगा वो फिर से क्या हो जाएगा? P इंटरनल
के बराबर हो जाएगा। तो ये तब तक मूव करेगा जब तक ये दोनों प्रेशर बराबर ना हो जाए। समझ रहे हैं? हेंस द पिस्टन स्टार्ट्स टू
मूव अप टिल दी इंटरनल प्रेशर इज़ इक्वल्स टू दी एटमॉस्फेरिक प्रेशर। मेरी बात समझ में आ रही है कि नहीं आ रही है? अरे ये तब
तक मूव करेंगे जब तक तुम्हारा इंटरनल प्रेशर जो है वो एटमॉस्फेरिक प्रेशर के बराबर ना हो जाए। जैसे इंटरनल प्रेशर
एक्सटर्नल प्रेशर के बराबर हो जाएगा उसके बाद पिस्टन फिर से रुक जाएगा। ठीक है? डन है। डन है। अब इस चीज के दौरान यहां पर
क्या हुआ है? अगर हम थोड़ा दिमाग लगाएं तो एनर्जी कन्वर्ज़न ही तो हो रहा है। अगर हम थोड़ा दिमाग लगाएं तो एनर्जी में कन्वर्ज़
हो रहा है ना? एनर्जी हमने दी तो यहां पर वर्क हुआ। एंड वर्क इज़ नथिंग बट अ फॉर्म ऑफ दी एनर्जी ना। एनर्जी ट्रांसफर्ड
एनर्जी ट्रांसफर्ड। जैसे ये एनर्जी ट्रांसफर हुई। ये भी एनर्जी ट्रांसफर ही तो हुआ। भाई आपने q अमाउंट ऑफ एनर्जी दी
तो इसने भी एनर्जी को ट्रांसफर कर दिया और कुछ काम कर दिया। एनर्जी ट्रांसफर ही तो है। एनर्जी इज़ नीदर क्रिएटेड नॉट
डिस्ट्रॉयड बट ट्रांसफॉर्म वन फॉर्म टू दी अनदर। एक फॉर्म से दूसरे फॉर्म में कन्वर्ट हो जाती है। अब देखो अगर आप यहां
पर समझोगे कि इनिशियल जो हमारे पास इंटरनल एनर्जी है वो U1 है और फाइनल जो है हमारे पास वो बेसिकली U2 है।
तो चेंज इन द इंटरनल एनर्जी ऑफ़ सिस्टम क्या होगा? मुझे बताओ। अगर मैं बोलता हूं इस सिस्टम की इंटरनल एनर्जी पहले U1 थी और
अब इसी सिस्टम की इंटरनल एनर्जी कितनी है? u2 है। तो U2 किसके बराबर होगा? जल्दी से बताओ
या चेंज किसके बराबर होगा? ध्यान से समझो। मैं बोलता हूं कि जो फाइनल इंटरनल एनर्जी है
वो किस चीज के बराबर होगी? यहां पे जो फाइनल इंटरनल एनर्जी है वो बराबर होगी कि भाई आपके पास इनिशियल
इंटरनल एनर्जी थी आपके पास U1 थी। प्लस आपने q अमाउंट ऑफ हीट दिया सिस्टम को। प्लस क्यों बोला मैंने? हीट एनर्जी
गिवन टू द सिस्टम इज टेकन टू बी पॉजिटिव। और काम जो हमने किया है डन बाय द सिस्टम ऑन द सराउंडिंग। तो -w हो जाएगा।
- W इस बात को समझने में किस बच्चे को दिक्कत है? मैं बोल रहा हूं कि इनिशियल यहां पर जो इंटरनल एनर्जी ऑफ़ सिस्टम है
दैट इज़ U1 और यहां पर क्या हो जाएगा? U2 हो जाएगा। तो U2 = U1 प्लस आपने क्या दी है? Q अमाउंट ऑफ हीट
एनर्जी दी है और W अमाउंट में वर्क डन किया है। तो U2 - U1 क्या हो जाएगा भैया? U2 - U1 क्या हो जाएगा?
Q - W फर्दर हो जाएगा डेल्टा U = Q - W
यही होगा जी। तो यह आपको क्या बता रहा है? यह आपको बता रहा है कि जो चेंज इन इंटरनल एनर्जी आया है यहां से यहां तक दैट इज
इक्वल्स टू द जो q अमाउंट ऑफ हीट आपने दी है - w अमाउंट में वर्क डन। q अमाउंट में आपने हीट दी है - w वर्क डन। यानी कि इससे
मैं ये समझ सकता हूं। इससे मैं ये समझ सकता हूं। इसको मैं ऐसे भी लिख सकता हूं कि q = u + w आप समझ पा रहे हैं? इसको आप
ऐसे भी लिख सकते हैं। ये भी सही है और ये भी सही है। अब आप थोड़ा दिमाग लगाइए। यहां पे
एक्चुअली में एक्सप्रेशन क्या कह रहा है? ये कह रहा है कि जो भी हीट हमने सिस्टम को दी है इसका एक पार्ट इंटरनल एनर्जी के
चेंज के लिए रिस्पांसिबल है और दूसरा पार्ट से हम काम कर रहे हैं। तो व्हनेएवर द हीट इज़ गिवन टू द सिस्टम सबसे पहले ये
पार्टिकल्स की काइनेटिक एनर्जी बढ़ाएगा। अब मान लो कि पार्टिकल्स की काइनेटिक एनर्जी बढ़ी तो इंटरनल एनर्जी में भी चेंज आएगा।
इंटरनल एनर्जी में चेंज आएगा और कुछ पार्टिकल्स यहां पर क्या करेंगे? क्योंकि काइनेटिक एनर्जी बढ़ गई है तो वो पिस्टन
के ऊपर जोर-जोर से जोर-जोर से स्ट्राइक करने लगेंगे जिसकी वजह से पिस्टन के ऊपर प्रेशर जो है इंटरनल प्रेशर बढ़ जाएगा और
वो एक्सटर्नल प्रेशर से ज्यादा हो जाएगा। तो ये बेसिकली एक्सपैंड करेगा और तब तक एक्सपैंड करेगा जब तक ये दोनों प्रेशर
बराबर ना हो जाए। अब यहां पर मैं बोलूंगा कि इंटरनल एनर्जी ऑफ़ सिस्टम जो है वो बेसिकली क्या हो गया? u2 यहां पर क्या है?
u1 है। तो जो चेंज हो जाएगा u2 = u1 + q - w हो जाएगा। + q इसलिए क्योंकि हीट अपन ने दी है। -w इसलिए क्योंकि यहां पे वर्क
सिस्टम ने किया है सराउंडिंग के ऊपर। तो u2 - u1 = q -w डेल्टा = q - w q = डेल्टा u + w सिंपल सी बात है। जो आप सिस्टम को
हीट एनर्जी यहां पर दे रहे हैं उससे वो यहां पर क्या कर रहा है? एक तो उसकी इंटरनल एनर्जी में चेंज आ रहा है। साथ ही
साथ वो यहां पर क्या कर रहा है? साथ ही साथ वो यहां क्या कर रहा है? उसी से ही काम भी कर रहा है। अरे मेरी बात समझ में आ
गई क्या भाई? मेरी बात समझ में आ गई क्या? जी सुनील भाई समझ में आ गई। अब देखो एक एक्सप्रेशन और लिखो। मान लो मैं तुमको
बोलता हूं। मान लो मैं तुमको बोलता हूं कि हीट q इज एडेड टू द सिस्टम एंड वर्क W इज़ डन ऑन द सिस्टम बाय द सराउंडिंग। तो
तुम्हारा फर्स्ट लॉ ऑफ़ थर्मोडायनेमिक्स का एक्सप्रेशन क्या होगा? तब तुम बोलोगे जो चेंज इन इंटरनल एनर्जी
आया होगा किसके बराबर होगा? Q हीट तो तुम्हारी सिस्टम में ऐड हुई है
तो वो हो जाएगा +q W वर्क डन ऑन द सिस्टम। वर्क डन ऑन द सिस्टम भी क्या होता है? पॉजिटिव होता है।
तो डेल्टा U = Q + W या फिर इसको ऐसे भी लिखते हैं कुछ लोग। डेल्टा U और इसको स्मॉल Q + W बोथ आर राइट। बोथ आर फाइन।
दोनों ही सही है। कामना करता हूं तुमको मेरी सारी बातें समझ में आ रही होगी। दोस्तों कोई दिक्कत नहीं
आ रही होगी। तुम्हारी किताब इसको लेती है जनरल फॉर्म ऑफ
जनरल फॉर्म ऑफ फर्स्ट लॉ ऑफ थर्मोडायनेमिक्स। सुनील भाई लेकिन यहां पर क्या हो रहा
होगा? अरे यहां पर कुछ नहीं हो रहा होगा कि यहां पर आपने क्या किया है? सराउंडिंग से आपने सिस्टम को हीट दे रहे हैं और साथ
ही साथ आप सराउंडिंग से सिस्टम के ऊपर काम कर रहे हैं। अगर हीट इज़ ऐडेड टू द सिस्टम तो ये +q हो जाएगा। एंड वर्क इज डन ऑन द
सिस्टम। यानी कि दोनों के दोनों सराउंडिंग से सिस्टम की तरफ आ रहे हैं। हीट एनर्जी भी सराउंडिंग से सिस्टम की तरफ आ रही है।
और वर्क डन भी सराउंडिंग से सिस्टम की तरफ हो रहा है। तो दोनों की वैल्यू पॉजिटिव हो जाएगी। और यहां पर हमारे पास हो जाएगा
चेंज इन इंटरनल एनर्जी = + q + w तो ये इसको ऐसे भी लिख सकते हैं अपन। सो दिस इज़ दी जनरल फॉर्म ऑफ़ दी फर्स्ट लॉ ऑफ़
थर्मोडायनेमिक्स। ठीक है भाई? जी सुनील भैया। चलिए यहां तक समझ में आ गया होगा। फटाफट से एक बार लिख
दीजिएगा। आए भैया इन टू द कमेंट सेक्शन कि समझ में आ गया सुनील भैया 1 घंटा 5 मिनट में दो टॉपिक्स खत्म एक सवाल लगाएंगे
फटाफट से लेट्स प्रैक्टिस फटाफट से एक सवाल लगाएंगे सवाल ये रहा बहुत बढ़िया एनसीईआरटी का सवाल है जल्दी से लगाएंगे कह
रहा है सवाल कि एक्सप्रेस द चेंज इन द इंटरनल एनर्जी ऑफ द सिस्टम यानी कि आपको डेल्टा u के बारे में चर्चा करनी है। अब
देखिए मैं कोई भी एक्सप्रेशन याद नहीं करूंगा। मैं सिर्फ और सिर्फ साइन कन्वेंशन लगाऊंगा जो मेरी बुद्धि में है उससे। अब
मैं आपको बताऊंगा कैसे? यह कह रहा है कि नो हीट इज अब्सॉर्ब बाय द सिस्टम फ्रॉम द सराउंडिंग बट वर्क इज डन ऑन द सिस्टम।
व्हाट टाइप ऑफ वॉल डस द सिस्टम हैव? तो सबसे पहले तो चेंज इन इंटरनल एनर्जी अपन बताते हैं। अब चेंज इन इंटरनल एनर्जी
हमारे पास क्या हो जाएगा? डेल्टा u अगर मुझे बताना है तो नो हीट इज़ एब्जॉर्ब बाय द सिस्टम फ्रॉम
दी सराउंडिंग्स। कोई भी हीट का एब्जॉर्प्शन नहीं हुआ है। ना हीट निकली है। तो q की तो बात नहीं होगी। बट वर्क इज
डन ऑन द सिस्टम। वर्क इज डन ऑन द सिस्टम। अब अगर वर्क इज डन ऑन द सिस्टम है तो हमारे पास ये हो जाएगा +w। कितने लोग मेरी
बात से अलाइन करते हैं? डेल्टा U = +W सिंपल। और व्हाट टाइप ऑफ़ सिस्टम अगर नो हीट इज़ एब्सॉर्ब्ड फ्रॉम द सिस्टम? तो
यहां पे जो वॉल हो जाएगी वो किस प्रकार की हो जाएगी? एडियाबेटिक वॉल हो जाएगी। कैसी वॉल हो जाएगी? एडियाबेटिक वॉल हो जाएगी।
तो इस केस में जो वर्क डन होता है उसको बोलते हैं वर्क डन इन दिस केस इज कॉल्ड वर्क डन
इन दिस केस इज़ कॉल्ड एडियाबेटिक वर्क। इसी को एडियाबेटिक वर्क
भी कहते हैं कि कोई भी हीट का ट्रांसफर ही नहीं हो रहा है। नो हीट इज़ एब्सॉर्ब बाय द सिस्टम फ्रॉम दी सराउंडिंग्स बट वर्क इज़
डन ऑन द सिस्टम। व्हाट टाइप ऑफ़ वॉल? तो अगर हमारे पास चेंज इन इंटरनल एनर्जी है तो वर्क डन ऑन द सिस्टम + w होता है तो
डेल्टा U = +W एंड कौन सी तरीके की वॉल होगी? एडियाबेटिक वॉल होगी। ठीक है? पहला डन नो वर्क इज डन ऑन द सिस्टम। नो वर्क इज़
डन ऑन द सिस्टम। यानी कि डेल्टा U की जब हम बात कर रहे होंगे तो वहां पर हम लोग वर्क की बात नहीं करेंगे। सिर्फ q की बात
करेंगे। q अमाउंट ऑफ हीट इज टेकन आउट फ्रॉम द सिस्टम एंड गिवन टू द सराउंडिंग। आप मुझे बताइए अगर सिस्टम से सराउंडिंग
में हीट जाएगी तो +q या -q अपने दिल से बताओ खुद ही बताओ सुनील भाई -q हमने तो पढ़ा है कोई भी एनर्जी अगर सिस्टम से बाहर
जाए चाहे हमारा सिस्टम से सराउंडिंग पे वर्क हो या सिस्टम से सराउंडिंग पे हीट जाए माइनस क्या लगाएंगे माइनस
अब उसके बाद व्हाट टाइप ऑफ वॉल डस द सिस्टम हैव अब यहां पर किस प्रकार की वॉल होगी व्हाट टाइप ऑफ वॉल डस द सिस्टम हैव
किस प्रकार की वॉल होगी? जल्दी से बताएं। फटाफट से बताएं किस प्रकार की वॉल होगी? अब देखिए, नो वर्क इज डन ऑन द सिस्टम बट q
अमाउंट ऑफ हीट इज़ टेकन आउट। अब यहां पर अगर हीट जा रही है, तो बेसिकली किस प्रकार की वॉल होगी? डायथर्मिक वॉल होगी। कैसी
वॉल होगी? डायथर्मिक वॉल होगी। क्लियर? जी। तीसरे पे चलते हैं। W अमाउंट ऑफ़ वर्क इज़
डन बाय द सिस्टम। W अमाउंट ऑफ वर्क इज़ डन बाय द सिस्टम। तो अगर चेंज इन इंटरनल एनर्जी लिखता हूं तो W अमाउंट ऑफ वर्क इज़
डन बाय द सिस्टम। बाय द सिस्टम। सराउंडिंग भी किया होगा। एंड Q अमाउंट ऑफ हीट इज़ सप्लाई टू द सिस्टम। Q अमाउंट ऑफ हीट इज़
सप्लाई टू द सिस्टम। सो +Q हीट सिस्टम को सप्लाई करी है तो +q वर्क इज़ डन बाय द सिस्टम। ऑन द सिस्टम नहीं है।
बाय द सिस्टम है तो माइनस का W व्हाट टाइप ऑफ सिस्टम इट कुड बी? यह किस प्रकार का सिस्टम हो सकता है? ये बेसिकली
क्लोज्ड सिस्टम होगा। अभी जैसा हमने डिस्कस किया था। दिस इज़ अ क्लोज सिस्टम। दिस इज़ द एग्जांपल ऑफ़ अ क्लोज सिस्टम। ये
देखो। ये देखो यहां पे। डेल्टा U = Q - W. सो दिस इज़ एन एग्जांपल ऑफ़ अ क्लोज सिस्टम। एनर्जी का एक्सचेंज हो
सकता है। मैटर का एक्सचेंज नहीं हो सकता। यहां पर इस सिस्टम में क्या हो सकता है? एनर्जी का एक्सचेंज हो रहा है। यानी कि q
आ रही है, वर्क डन हो रहा है। लेकिन लेकिन मैटर का एक्सचेंज नहीं हो रहा। सुनील भैया हमें ये बात समझ में आ रही है। क्लियर है?
क्लियर है? जी क्लियर है? डन है भैया। तो आए भैया लगाने में कोई हिचकिचाहट नहीं होनी चाहिए। ये तीनों के तीनों सवाल मैं
कामना करता हूं आपको अच्छी तरीके से समझ में आ गए होंगे। कांसेप्ट की एप्लीकेशन है।
चलिए अब लगाते हैं फटाफट से वर्क डन इन डिफरेंट प्रोसेससेस। जल्दी से देखते हैं कि
अलग-अलग प्रोसेससेस में किस प्रकार के काम और कार्य हमको मतलब अलग-अलग प्रोसेससेस में कैसे-कैसे वर्क डन कैलकुलेट करते हैं।
उसी प्रकार की चर्चा उसी चीज की चर्चा हमें यहां पे करनी है। अब इसको समझने के लिए हमें दो तरीके के प्रोसेससेस को समझना
पड़ेगा। एक रिवर्सिबल और एक इररिवर्सिबल। अब सुनील भाई ये क्या होते होते हैं रिवर्सिबल इरिवर्सिबल हैं सुनील भाई ये
क्या होते हैं रिवर्सिबल इरिवर्सिबल तो यहां पर अगर आपने ये तीन पॉइंटर इसके और ये तीन पॉइंटर इसके जान लिए तो आपको मजा आ
जाएगा ध्यान से देखना ध्यान से देखना ध्यान से देखना रिवर्सिबल का मतलब होता है जो कि इनफाइनाइटली स्मॉल स्टेप्स में होता
है एंड एट एनी स्टेप ऑफ द सिस्टम एंड सराउंडिंग कैन रिटर्न टू देयर ओरिजिनल स्टेट्स
यानी रिवर्सिबल प्रोसेस जो है वो बहुत स्मॉल स्मॉल स्मॉल स्मॉल स्मॉल स्टेप्स में होता है।
जिसकी वजह से हम वापस सिस्टम को उसकी ओरिजिनल कंडीशन में रिटेन कर सकते हैं। मैं क्या कह रहा हूं? इट ऑकर्स
इनफाइनाइटली स्मॉल स्टेप्स एंड हेंस एट एनी स्टेप द सिस्टम एंड सराउंडिंग्स कैन रिटर्न टू देयर ओरिजिनल स्टेट्स।
तो सिस्टम और सराउंडिंग हर पॉइंट पर इक्विलिब्रियम पर होते हैं। लेकिन ये इमेजिनरी है एंड कैन नॉट बी अचीव्ड इन द
रियल। मैं यह कह रहा हूं कि एक ऐसा प्रोसेस है उसमें मानो कि मैं उसको बिल्कुल इनफाइनाइटली स्लो स्टेप्स में करा
रहा हूं तो वहां पर जो भी चेंज आएगा उसको मैं रिवर्ट कर सकता हूं। मतलब मैंने वो वापिस जैसे फॉर एग्जांपल फॉर एग्जांपल फॉर
एग्जांपल मैंने उसके ऊपर बिल्कुल एकदम इनफाइनाइट बहुत पतले-पतले पतले इनफाइनाइटली स्मॉल वेट्स रखे हैं। अगर
मैंने एक वेट हल्का सा हटाया हल्का सा एक वेट हटाया तो ऊपर हो जाएगा। वापस वो हल्का सा वेट ऐड कर दिया वापस नीचे हो जाएगा। तो
दैट इज़ द रिवर्सिबल कि ये इनफाइनाइटली स्मॉल स्टेप्स में होता है। इसकी सबसे खास बात क्या है? दिस ऑकर्स इनफाइनाइटली स्मॉल
स्टेप्स। ये बिल्कुल इनफाइनाइटली स्मॉल स्टेप्स में होता है। एंड किसी भी स्टेप पे सिस्टम और सराउंडिंग जो है अपनी
ओरिजिनल स्टेट में रिटर्न कर सकते हैं। कोई फर्क नहीं पड़ेगा। यानी कि सिस्टम हर पॉइंट पे इक्विलिब्रियम पे है। लेकिन याद
रखना कि ये हमारे पास इमेजिनरी है एंड कैन नॉट बी अचीव्ड इन द रियल। ये असलियत में अचीव नहीं किया जा सकता। ओके? बहुत
बढ़िया। इररिवर्सिबल की अगर मैं बात करूं इररिवर्सिबल खुद से क्या कह रहा है कि अगर
आपके पास इनिशियल स्टेट से लेकर फाइनल पे गए तो आप वापस उसको अटेन नहीं कर सकते। तो यहां पर ये फाइनाइट स्टेप्स में होता है।
एंड हेंस एट एनी स्टेप द सिस्टम एंड सराउंडिंग कैन नॉट रिटर्न टू देयर ओरिजिनल स्टेट्स। इररिवर्सिबल का सिंपल मतलब ये है
कि अगर एक बार आप एक इक्विलिब्रियम स्टेट से दूसरी इक्विलिब्रियम स्टेट पे गए तो वापस फाइनल से इनिशियल पे आना इंपॉसिबल
है। ये आप नहीं कर सकते। मतलब वो सेम प्रॉपर्टीज को रिस्टोर करना पॉसिबल नहीं है।
सिस्टम इज इन इक्विलिब्रियम ओनली एट द इनिशियल एंड द फाइनल स्टेट्स। ये सिर्फ और सिर्फ इनिशियल और फाइनल स्टेट पे ही
इक्विलिब्रियम पे आएगा। और ये एक्चुअली में नेचर में होता है। दैट इज़ कॉल्ड एज द इरिवर्सिबल प्रोसेस। अभी
जैसे फॉर एग्जांपल आप समझना इंटरनल प्रेशर और एक्सटर्नल प्रेशर आपस में इक्विलिब्रियम पे है। मैं इस जो इतना
बड़ा ब्लॉक है इसको झटके से हटा दूं तो ये करके ऊपर जाके भिड़ेगा। और इस पर्टिकुलर पॉइंट पे जो हमारे पास
एक्सटर्नल प्रेशर और इंटरनल प्रेशर है वो बराबर होंगे। इसको ऐसे समझो कि यहां पर यह भी नहीं है। दिस इज़ नॉट हियर। यह नहीं है
यहां पे। और यह ऐसे ऊपर जा रहा है। यह ऊपर तक है और ऊपर तक है। ठीक? और ये यहां पर आकर रुक गया। इसका
मतलब एक्सटर्नल प्रेशर और इंटरनल प्रेशर यहां पर बराबर हो गए। तो यहां के बाद सीधा यहां आ के रुका है। यहां पे इंटरनल प्रेशर
और एक्सटर्नल प्रेशर बराबर थे तो रुका हुआ था। एकदम से ये वेट मैंने हटा दिया। झटके से ऊपर जाके गिरा। अब इंटरनल और एक्सटर्नल
प्रेशर यहां पे बराबर है। तो ये यहां पर क्या कह रहा है? ये कह रहा है कि सिस्टम इक्विलिब्रियम पे सिर्फ इनिशियल और फाइनल
स्टेट में होगा। यानी कि एक तो यहां पर इक्विलिब्रियम पे और एक यहां इक्विलिब्रियम पे है। लेकिन ये हर पॉइंट
पे इक्विलिब्रियम पे होगा। आपने बिल्कुल हल्का सा वेट हटाया बिल्कुल ऊपर जाएगा इक्विलिब्रियम में। आपने वेट डाल दिया
वापस नीचे आ जाएगा। रिवर्सिबल प्रोसेस है। तो ये हर पॉइंट पे सिस्टम इक्विलिब्रियम पे है। यहां पे सिर्फ इनिशियल और फाइनल
स्टेट पे इक्विलिब्रियम पे आएगा। ये इनफाइनाइट स्टेप्स में होता है। ये आपका एक ही झटके में होता है। एक झटके में
होगा आपका इररिवर्सिबल प्रोसेस। ठीक है? जी। क्लियर है बात? जी सुनील भैया। क्लियर है बात? जी सुनील भैया।
क्लियर है यहां तक बात? जी। अब जैसे कि यहां पर रिवर्सिबल और इररिवर्सिबल एक्सपेंशन को थोड़ा सा समझते
हैं। ये हमारे पास रिवर्सिबल एंड इररिवर्सिबल हम लोग क्या यूज़ कर रहे हैं? यहां पर हम लोग कर रहे हैं रिवर्सिबल
इरिवर्सिबल एक्सपेंशन को कंसीडर। तो मेरी पूरी बात को ध्यान से सुनना। तुमको हर एक बात अच्छी तरीके से समझ में आएगी। हर एक
बात यहां पर क्लियर होगी। अगर ईमानदारी से इस चीज को फोकस करोगे। हर एक बात समझ में आएगी। अब ध्यान से तुम लोग देखना। ध्यान
से तुम लोग देखना। हर एक बात तुमको समझ में यहां पर आएगी। तो
फॉर एग्जांपल मैं यहां पर कहता हूं यहां पर मैं कहता हूं कि एक गैस है मेरे पास। ठीक है ना? एक गैस है मेरे पास। और वो गैस
जो प्रेशर लगाती है दैट इज कॉल्ड एज दी पी इंटरनल प्रेशर। और इसको बैलेंस करने के लिए ऊपर से जो
प्रेशर लग रहा है, दैट इज कॉल्ड ऐज़ दी P एक्सटर्नल प्रेशर। और जो P एक्सटर्नल है वो बेसिकली PATM + PW
ये वाला जो वेट है ना ये W है। ठीक है ना? तो ऊपर से जो प्रेशर मेरे को लग रहा है ये ऊपर से जो प्रेशर लग रहा है एक तो
एटमॉस्फेरिक प्रेशर लग रहा है और साथ ही साथ में ये जो वेट्स हैं इनका प्रेशर लग रहा है। और अंदर से जो गैस का प्रेशर है
दैट इज कॉल्ड एज दी पी इंटरनल। ठीक जी। अब आपने क्या कर दिया? यहां पर इनको इनफाइनाइट पीसेस में बहुत स्मॉल पीसेस में
डिवाइड कर दिया। वेट डिवाइडेड इंटू एक्सट्रीमली स्मॉल पीसेस। वेट डिवाइडेड इंटू एक्सट्रीमली स्मॉल पीसेस। भाई साहब
आप इमेजिन भी नहीं कर सकते। उतने स्मॉल पीसेस के अंदर अपन ने इसको डिवाइड कर दिया है। बिल्कुल एक्सट्रीमली स्मॉल पीसेस
पीसेस पीसेस पीसेस पीसेस पीसेस में डिवाइड कर दिया है। अब मैं क्या करता हूं यहां पर यहां पर
बेसिकली मैं क्या करता हूं? ध्यान से मेरी बात को सुनना। रिमूव रिमूव अ स्मॉल रिमूव अ वेरी स्मॉल बीट। रिमूव अ वेरी
स्मॉल मीट। मान लीजिए आपने बहुत स्मॉल सा वेट यहां पर रिमूव किया। मैं यहां पर आपको क्या बोल रहा हूं कि आपके पास यहां पर एक
यहां पर आपके पास एक कंटेनर है जिसके अंदर आपके पास एक पिस्टन लगा हुआ है। अंदर यहां पर एक गैस भरी हुई है। मैं कह रहा हूं गैस
जो प्रेशर लगा रही है दैट इज़ कॉल्ड एज अ पी इंटरनल। और ऊपर से जो प्रेशर लग रहा है दैट इज बेसिकली P एक्सटर्नल जो कि यहां पर
एटमॉस्फेरिक प्रेशर और इनका जो वजन है उसके प्रेशर के बराबर है। सो P एक्सटर्नल = PTM + PW ये इनफाइनाइट पीसेस के अंदर
डिवाइडेड है। इसका एक हल्का सा इनफाइनाइट पीस को मैंने निकाल दिया। तो हल्का सा निकाल दिया तो बिल्कुल ये जरा सा ऊपर
जाएगा। बताओ जरा सा ऊपर क्यों जाएगा? तुम खुद दिमाग लगाओ जरा सा ऊपर क्यों जाएगा? अरे दादा इंटरनल प्रेशर और एक्सटर्नल
प्रेशर बराबर थे। तुमने एक्सटर्नल प्रेशर को हल्का सा कम किया। तो इंटरनल ज्यादा हो गया। तो ऊपर जाएगा। हां कि ना यार दोस्त?
मैं कह रहा हूं इसका हल्का सा पार्ट हटाया तो एक्सटर्नल प्रेशर इंटरनल प्रेशर से क्या हो गया? कम हो गया। हल्का सा ऊपर
जाएगा। हल्का सा ऊपर जाएगा। ठीक है? मैं मानता हूं कि बहुत स्माल चेंज आया। इसमें तो बहुत ज्यादा लार्ज चेंज दिख रहा है। बट
इसको ऐसे समझो कि बहुत ज्यादा स्माल चेंज आया। बहुत ये यहां पे मान लो कि इधर है। बिल्कुल इधर। बिल्कुल हल्का सा चेंज आया।
वेरी स्माल चेंज। वेरी स्माल चेंज। ठीक है? वेरी स्माल चेंज।
इसमें बिल्कुल हल्का सा चेंज आया। ठीक है? अब मैं तुमको बोलता हूं कि यहां पे इंटरनल प्रेशर कितना होगा? जब यहां पे ड्यूरिंग
एक्सपेंशन की अगर मैं बात करता हूं जब एक्सपेंड कर रहा होगा ड्यूरिंग एक्सपेंशन मैं तुमसे पूछता हूं कि मुझे बताओ इंटरनल
प्रेशर और एक्सटर्नल प्रेशर में क्या रिलेशनशिप होगी? तो आप मुझे क्या बोलोगे कि सुनील भाई ऑब्वियसली एक्सपेंड करते समय
जो हमारे पास इंटरनल प्रेशर होगा वह एक्सटर्नल प्रेशर जो है उससे डीपी अमाउंट में ज्यादा होगा। अरे अपने दिल से बताओ
रटने वाली बात नहीं है। मैंने अगर यहां से बिल्कुल हल्का सा वेट हटा दिया तो यानी ये वाली वैल्यू हल्की सी कम हो गई। तो अब
अंदर वाला प्रेशर बाहर वाले प्रेशर से ज्यादा हो गया। तो ये ऊपर की तरफ जाएगा। तो एक्सपेंशन होते समय इंटरनल प्रेशर =
एक्सटर्नल प्रेशर + DP के बराबर होता है। होता है कि नहीं होता है? जी बिल्कुल होता है। ये जब जैसे ही ऊपर की तरफ जाएगा
क्योंकि इंटरनल प्रेशर एक्सटर्नल प्रेशर से डीपी अमाउंट में ज्यादा हो गया है। जब तक ये वापस बराबर ना हो जाए तब तक ये ऊपर
मूव करेगा। तो इसका मतलब आप कह रहे हो सुनील भैया यहां पे फिर से बराबर हो जाएगा। यस यहां पे फिर से बराबर हो जाएगा।
यहां पर यहां पर फिर से P एक्सटर्नल और यहां पर P इंटरनल फिर से बराबर है। इस केस में दे आर अगेन इक्वल। यहां पर आकर
स्टॉप हो जाएगा तो दे आर अगेन इक्वल। यहां पर फिर से इक्वल हो जाएंगे। लेकिन जब ये हल्का सा एक्सपैंड कर रहा होगा उस समय
P इंटरनल = P एक्सटर्नल + DP के बराबर होगा। तो ये बहुत स्मॉल अमाउंट है। दिस इज़ वेरी नेगिलिजिबल अमाउंट। नेग्लिजिबल
अमाउंट। तो ऐसा बोल दिया जाता है कि जो इंटरनल प्रेशर है वो लगभग बराबर है एक्सटर्नल
प्रेशर के। तो P इंटरनल को हम ऐसे भी रिप्रेजेंट करते हैं कि प्रेशर ऑफ द गैस P दैट इज समवट इक्वल्स टू दी एक्सटर्नल
प्रेशर दैट इज अप्लाइड। तो रिवर्सिबल एक्सपेंशंस जो हमारे पास होते हैं ना जो भी रिवर्सिबल एक्सपेंशंस
होते हैं उसके अंदर ये जो P एक्सटर्नल है जिसके अगेंस्ट में ये पिस्टन मूव कर रही है जिस प्रेशर के अगेंस्ट ये पिस्टन मूव
कर रही है वो आपका लगभग इंटरनल प्रेशर के बराबर हो जाता है। तो इन एक्सप्रेशनंस के डेरिवेशन को निकालते समय आप यह जो
एक्सटर्नल प्रेशर यानी कि जो P एक्सटर्नल है जिसके अगेंस्ट में हम लोग काम कर रहे हैं वो आप उसको रिप्लेस कर सकते हैं
इंटरनल प्रेशर से यानी कि P से। P इंटरनल एंड P आर सेम। P इंटरनल इज़ नथिंग बट द प्रेशर ऑफ़ गैस। P इज़ आल्सो द प्रेशर
ऑफ़ गैस। P इंटरनल और P इज़ द प्रेशर ऑफ़ गैस। P इंटरनल और P ये होता है प्रेशर ऑफ़ गैस।
ये बात मैं तुमको समझा पाया कि नहीं समझा पाया? मेरे को दिल से बताओ। यह बात मैं तुमको समझा पाया कि नहीं समझा पाया? दिल
से बताओ। मैं सिंपल सी इतनी सी बात बोल रहा हूं कि यहां पर मेरे पास पिस्टन लगा हुआ है, इसके ऊपर से जो प्रेशर लग रहा है,
दैट इज़ पी एक्सटर्नल इज़ इक्वल्स टू द एटमॉस्फेरिक प्रेशर प्लस प्रेशर ड्यू टू दीज़ वेट्स। अब ये इनफाइनाइट पीसेस में
मैंने वेट्स को डिवाइड कर रखा है। अंदर से जो प्रेशर लगा हुआ है, P इंटरनल और पी एक्सटर्नल ये दोनों बराबर है। इसीलिए
इक्विलिब्रियम में ये अपनी पोजीशन को चेंज नहीं कर रहा। मैंने हल्का सा वेट यहां पे निकाला। तो अंदर वाला प्रेशर एक्सटर्नल
प्रेशर से क्या हो जाएगा? बेसिकली ज्यादा हो जाएगा। कितने अमाउंट से ज्यादा हो जाएगा? इतने अमाउंट से ज्यादा हो जाएगा।
तो तब तक ये एक्सपैंड करेगा जब तक ये फिर से वापस क्या हो जाए? इक्वल ना हो जाए। ये एक्सपेंड करेगा। तो यहां पर बोला जाता है
कि ये अमाउंट बहुत कम है। क्योंकि इनफाइनाइट वेट हटाया तो बिल्कुल dp जो है नेग्लिजिबल है। तो p इंटरनल इज़
एप्रोक्सिममेटली इक्वल्स टू द पी एक्सटर्नल। तो यहां पर हो जाएगा P इंटरनल को हम P भी बोलते हैं। तो P इज़ इक्वल्स टू
दी एप्रोक्सिममेटली इक्वल्स टू दी P एक्सटर्नल। यानी कि जो हमारा वर्क डन हो रहा है इस एक्सटर्नल प्रेशर के अगेंस्ट जो
हम लोग यहां पर एक्सपेंड कर रहे हैं। तो P एक्सटर्नल की जगह हम लोग इंटरनल प्रेशर ऑफ़ द गैस यानी जो P है उसको भी यूज़ कर सकते
हैं। ठीक है? लगभग बराबर है ही है। अच्छा लेकिन अगर मैं यही चीज इररिवर्सिबल प्रोसेस की बात करूं अगर ये एक ही झटके
में हो गया तो इररिवर्सिबल का मतलब क्या है? जैसे कि यहां पर क्या है कि प्रोसेस इनफाइनाइटली स्लो होता है। इसलिए हर स्टेट
आपस में क्या है? इक्विलिब्रियम में है और साथ ही साथ रिवर्सिबल है। अभी अगर मैं हल्का सा वेट लगा दूं तो वापस ये पॉसिबल
है। ये दोनों आपस में रिवर्ट हो सकते हैं। दीज़ आर रिवर्सिबल। बट अगर मैं यहां पर इन दोनों स्टेट्स की
बात करूं कि ये रिवर्सिबल है तो नहीं। दीज़ आर नॉट रिवर्सिबल प्रोसेससेस। इररिवर्सिबल क्यों क्यों क्यों क्यों क्यों क्यों सुनो
सुनो सुनो अभी यहां पर इंटरनल प्रेशर जो गैस अप्लाई
कर रही है दैट इज P इंटरनल एक्सटर्नल प्रेशर जो यहां पर अप्लाई हो रहा है दैट इज़ इक्व टू एटमॉस्फेरिक प्रेशर + PW ये
वाला इस वेट की वजह से जो प्रेशर है ठीक है तो जो एक्सटर्नल प्रेशर है दैट इज़ इक्वल्स टू द एटमॉस्फेरिक प्रेशर प्लस
प्रेशर ड्यू टू दिस वेट्स और इंटरनल प्रेशर इज़ ड्यू दी प्रेशर ड्यू टू दी गैसेस। मैं एक झटके से इस वेट को हटा दूं।
मान लो मैंने क्या बोला? मैंने क्या बोला? वेट ये W वेट w इज़ रिमूव्ड। एक साथ मैंने वेट को हटा दिया।
अभी यहां पर ये दोनों प्रेशर बैलेंस थे। इसीलिए ये पिस्टन यहां पे था। मैंने इस वेट को हटा दिया। तो अब यहां पर क्या
होगा? इंटरनल प्रेशर एक्सटर्नल प्रेशर से बहुत ज्यादा हो जाएगा। इतना मेरी बात को मानते हो कि नहीं मानते हो? अरे इतना मेरी
बात को मानते हो कि नहीं मानते हो? अपने दिल से बताओ मेरी बात मानोगे कि नहीं मानोगे? तो यहां पर एक्सपेंशन के दौरान
क्या हो रहा होगा? अरे भाई मैंने इस वेट को हटा दिया। यानी कि ये PW वाला पूरा पार्ट मैंने यहां पर हटा दिया है। तो P
एक्सटर्नल इज़ इक्वल्स टू दी P एटीएम यानी एटमॉस्फेरिक प्रेशर के बराबर हो गया। अब यहां पर जो एक्सटर्नल प्रेशर है इंटरनल
प्रेशर से बहुत ज्यादा कम हो गया है। तो इंटरनल प्रेशर बहुत ज्यादा यू ऊपर जाएगा। एकदम झटके ठपाक ऊपर जाके यहां रुक गया या
इस पर्टिकुलर पॉइंट पे P एक्सटर्नल = PA atm के बराबर होगा और इंटरनल प्रेशर हो जाएगा PNT ये इंटरनल
प्रेशर ऑफ़ गैस है। तो एक्सपेंशन के दौरान तुम मुझे खुद बताओ एक्सपेंशन के दौरान जो इंटरनल प्रेशर होगा वो P एक्सटर्नल प्लस
बहुत ज़्यादा अमाउंट में चेंज इन प्रेशर था। डेल्टा P क्योंकि इतना ज्यादा तुमने हटा
दिया शक करके ऊपर जाएगा तो डेल्टा P यहां पर DP था क्योंकि तुमने स्मॉल वेट हटाया था तो P इंटरनल = P एक्सटर्नल + DP था
लेकिन यहां पर P इंटरनल = P एक्सटर्नल + डेल्टा P हो जाएगा। जी सुनील भैया। तो यहां पर जो हो जाएगा ना कि P इंटरनल जो है
दैट इज़ वेरी वेरी वेरी ग्रेटर देन दी P एक्सटर्नल। तो
यहां पर जब आप कैलकुलेशंस कर रहे होंगे तो P एक्सटर्नल के टर्म्स में करना। यहां पर आप P एक्सटर्नल यानी कि इस
एक्सटर्नल प्रेशर के अगेंस्ट पे आप काम कर रहे हैं। तो एक्सटर्नल प्रेशर को आप इंटरनल प्रेशर ऑफ गैस यानी कि P की मदद से
रिप्लेस कर सकते हैं। और इंटरनल प्रेशर ऑफ़ गैस तो P की वैल्यू निकालनी है तो PV = NRT होता है। तो P = NRT / V हो जाएगा। तो
तुम्हारे को डेरिवेशन करने होंगे तो वहां पर तुम इंटरनल प्रेशर ऑफ़ गैस को यूज़ कर सकते हो। रेदर दैन एक्सटर्नल प्रेशर।
लेकिन जब आप इररिवर्सिबल की कैलकुलेशन कर रहे होंगे तो वर्क इज़ डन अगेंस्ट द एक्सटर्नल प्रेशर। राइट? तो P एक्सटर्नल
को ही कंसीडर करना पड़ेगा। क्योंकि इंटरनल और एक्सटर्नल प्रेशर में बहुत ज्यादा डिफरेंस आ चुका है। इसी चीज को मैंने
थ्योरी के फॉर्मेट में यहां पर लिख भी दिया है। ध्यान से देखना। तुमको मेरी बातें समझ में आने लगेगी। ध्यान से देखोगे
तो समझ में आने लगेगा। मैंने लिखा है इन रिवर्सिबल प्रोसेससेस जो पी एक्सटर्नल होता है दैट इज ऑलमोस्ट इक्वल टू दी पी
इंटरनल प्रेशर व्हिच इज द प्रेशर ऑफ गैस आल्सो रिप्रेजेंटेड एज p। यानी कि जो रिवर्सिबल प्रोसेससेस हैं उसमें जो
एक्सटर्नल प्रेशर है वो लगभग इंटरनल प्रेशर ऑफ गैस के बराबर होता है। तो फिर जब हम डिराइव करते हैं ना वर्क डन इन द
रिवर्सिबल एक्सपेंशन ऑफ अ गैस। सो P एक्सटर्नल इज़ रिप्लेस्ड विद दी P इंटरनल और P वेयर P = NRT / V. अब एक्चुअली हम जो
काम कर रहे होते हैं वो एक्सटर्नल प्रेशर के अगेंस्ट कर रहे होते हैं। इतना तो तुम भी एग्री करोगे। मैं भी एग्री करूंगा। अरे
मेरे दादा हम कोई भी काम कर रहे होते हैं तो वो किसके अगेंस्ट में कर रहे होते हैं? अपने दिल से बताओ किसके अगेंस्ट में कर
रहे हो? कोई भी काम अगर हम कर रहे हैं तो एक एक्सटर्नल प्रेशर जो लगा हुआ है उसके अगेंस्ट में ही तो हम लोग फोर्स लगा रहे
हैं। अगर यहां पर ये जो पिस्टन ऊपर की तरफ फोर्स लगा के इसको ऊपर की तरफ खिसका रहा होगा कि ऊपर जा, ऊपर जा, ऊपर जा, ऊपर जा,
ऊपर जा, ऊपर जा। तो वो इस एक्सटर्नल प्रेशर की वजह से ही तो कर रहा है। मानते हो कि नहीं मानते हो? जी सुनील भैया।
तो यहां पर हम लोग क्या बोल रहे हैं कि जब आप वर्क डन का कैलकुलेशन करने के लिए प्रेशर एक्सटर्नल प्रेशर को कंसीडर करते
हैं तो आप वहां पर एक्सटर्नल प्रेशर की जगह क्या कीजिए? अगर आपको कैलकुलेशन को सिंपल करना है तो एक्सटर्नल प्रेशर की जगह
आप इंटरनल प्रेशर ऑफ़ गैस P या फिर P इंटरनल का यूज़ कर लीजिए जिसकी वैल्यू आपको नोन है। NRT / V तो यहां पे आपके लिए वर्क
डन निकालना आसान हो जाएगा। ये कह रहा हूं मैं। तो इन रिवर्सिबल प्रोसेससेस जो आपके पास P एक्सटर्नल है दिस इज ऑलमोस्ट इक्वल
टू दी P इंटरनल। तो सिंपल सी बात है जब आप वर्क डन निकाल रहे हैं P एक्सटर्नल इज़ रिप्लेस्ड विद P इंटरनल और P वेयर P = NRT
/ V समझे जी। इन रिवर्सिबल प्रोसेससेस द एक्सटर्नल प्रेशर डिक्रीज़ बाय अ स्मॉल अमाउंट
कंटीन्यूअसली। सो एज टू रिमेन इनफाइनाइटली स्मॉलर देन द इंटरनल प्रेशर एंड द गैस एक्सपेंड्स। अगर हम लोग यहां पर एक्सपेंशन
की बात कर रहे हैं तो एक्सटर्नल प्रेशर बहुत हल्का कम होगा इंटरनल प्रेशर से। तभी हल्का सा एक्सपेंड हल्का सा एक्सपेंड
हल्का सा एक्सपेंड करेगा। समझ में आ गई बात? जी सुनील भैया। अब देखिए अच्छा एक बात और याद रखना जो भी
इनफाइनाइटली स्लो प्रोसेस होता है उसको बोलते हैं क्वासीस्टैटिक। क्वासीस्टैटिक
क्वासीस्टैटिक प्रोसेस का मतलब होता है इनफाइनाइटली स्लो प्रोसेस। समझ गए? जी सुनील भैया। अब यहां पर बात
आती है डिफरेंशियल फॉर्म ऑफ़ वर्क हमारे पास क्या होगा? अब देखो यहां पर इमेजिन करो। यहां पर इमेजिन करो। इसी पर्टिकुलर
डायग्राम को इमेजिन करो। यहां से यहां पे गया होगा। तो मैं मान के चलता हूं कि इस डायग्राम को अगर मैं इमेजिन करता हूं ये
मेरे पास A स्टेट है और ये मेरे पास B स्टेट है। दिस इज B स्टेट। तो A से B पे क्या होगा? इसको थोड़ा ज़ूम करके बनाते हैं।
ये मान लेता हूं कि मैं A स्टेट में मेरा पिस्टन था। और ये बेसिकली मेरा जो है B स्टेट में
मेरा पिस्टन है। ठीक है ना? यही वाला। यही वाला। ठीक है? यह A स्टेट और B स्टेट पर आ गया। मान लो
फॉर एग्जांपल यह A स्टेट पर था इधर। और अभी ये कहां पर है? बी स्टेट पे। ध्यान से समझना। ये हल्का सा हुआ है। मैंने ज़ूम
करके बनाया ज़ूम वर्जन। ये बेसिकली A है और ये बेसिकली B है। यानी पिस्टन यहां से यहां पर एक्सपेंड किया
होगा। ऐसे ऊपर की तरफ गया होगा। जी बिल्कुल ऐसे गया होगा। तो मैं यह मानता हूं मैं ये मानता हूं
कि ये जो स्मॉल अमाउंट ऑफ डिस्टेंस इसने ट्रैवल किया होगा ये बेसिकली होगा ds डिस्टेंस वेरी स्मॉल अमाउंट ऑफ
डिस्प्लेसमेंट ये बहुत हल्का सा डिस्प्लेस हुआ होगा ऊपर की तरफ ds g और ये ds डिस्प्लेसमेंट हुआ
होगा बिकॉज़ ऑफ़ बिकॉज़ ऑफ़ फोर्स F
बिकॉज़ ऑफ़ फोर्स F एग्री करते हो कि नहीं करते हो? अरे दादा
यहां से जो बेसिकली फोर्स लगी होगी उसकी वजह से हल्का सा डिस्प्लेसमेंट आया होगा और वो फोर्स किसके बराबर होती है? फोर्स =
प्रेशर टाइम्स दी एरिया। सुनील भैया प्रेशर आपने P ले लिया। यस बिल्कुल प्रेशर जो हमारे पास है दैट इज़ P.
प्रेशर जो है बेसिकली इंटरनल प्रेशर जो लग रहा है दैट इज़ P. ठीक है? और एरिया हमारे पास क्या है? दिस
इज बेसिकली दी एरिया। एरिया A तो आप ये समझिए ये एरिया A के ऊपर एक फोर्स
लग रहा है। तो फोर्स पर यूनिट एरिया हमारे पास क्या होता है? फोर्स पर यूनिट एरिया हमारे पास होता है प्रेशर। सो फोर्स इक्व
प्रेशर इंट एरिया हो जाएगा। इतना तो बेसिक सभी को पता है। तो मैं मानता हूं कि यहां पर नीचे से जो प्रेशर लग रहा था वो
बेसिकली हमारे पास था P। सुनील भैया आप ये इंटरनल प्रेशर को तो क्या लिख सकते थे? P एक्सटर्नल + DP लिख सकते थे। मैंने
डायरेक्टली इसको सिर्फ P ले लिया है। है ना? मैंने सिंपल सी बात है। इसको सिर्फ P ले लिया है। सिर्फ P अमाउंट ऑफ़ प्रेशर ले
लिया है। दैट इज़ P। ठीक है ना बेटा? जी। तो ये जो P प्रेशर यहां पर लग रहा था इसको समझना। ये जो P प्रेशर यहां पर लग रहा था
जो P प्रेशर यहां पर लग रहा था। तो वो जो P प्रेशर लग रहा था P = फोर्स / एरिया। सो फोर्स = प्रेशर * एरिया। सो
फोर्स = प्रेशर * एरिया। और जिसकी वजह से एक स्मॉल अमाउंट में एक डिस्प्लेसमेंट आया। दैट इज़ ds। फोर्स भी इसी डायरेक्शन
में लग रहा है। ds भी इसी डायरेक्शन में लग रहा है। ठीक है? जी। तो मैं पूछता हूं कि यहां पर जो स्मॉल अमाउंट ऑफ वर्क डन
होगा जो इस केस में स्मॉल अमाउंट ऑफ वर्क हुआ है। स्मॉल अमाउंट ऑफ वर्क को अगर मुझे निकालना
है तो वो क्या हो जाएगा? अगर मैं आपसे स्मॉल अमाउंट ऑफ वर्क पूछता हूं तो वह हो जाएगा मेरे पास dw दैट इज द
स्मॉल अमाउंट ऑफ वर्क। इट इज इक्व टू fds
फोर्स टाइम्स दी डिस्प्लेसमेंट और मैं मानता हूं फोर्स भी ऊपर लग रहा है, डिस्प्लेसमेंट भी ऊपर हो रहा है। तो cos
थीटा जो है वो मेरे पास क्या हो जाएगा? cos थीटा बेसिकली ज़ीरो हो जाएगा। तो f.ds हो जाएगा। अब f की वैल्यू हमारे
पास कितनी हो जाएगी? f की वैल्यू हमारे पास हो जाएगी प्रेशर टाइम्स दी एरिया * p * a.ds हो जाएगा। अब a क्या होता है? यानी
कि ये कह रहा है a.ds तो ये तो एक वॉल्यूम बन रहा होगा ना। एक वॉल्यूम बन रहा होगा a.ds दिस इज़ नथिंग बट अ वॉल्यूम। एक
वॉल्यूम क्रिएट कर दिया। तो यहां पर a.ds हमारे पास क्या हो जाएगा? दैट इज़ स्मॉल अमाउंट ऑफ़ वॉल्यूम dv। तो डिफरेंशियल
फॉर्म ऑफ़ वर्क हमारे पास क्या आती है? dw = PDV। ये हमारे पास आती है डिफरेंशियल फॉर्म ऑफ़ वर्क। कि अगर यहां पर ये जो
स्मॉल अमाउंट ऑफ वर्क हुआ होगा इस एक्सपेंशन में वो कैसे होगा? स्मॉल अमाउंट ऑफ वर्क इज फोर्स टाइम्स दी स्मॉल अमाउंट
ऑफ डिस्प्लेसमेंट। फोर्स इक्व टू प्रेशर टाइम्स दी एरिया। सो एरिया टाइम्स दी डिस्प्लेसमेंट इज़ स्मॉल अमाउंट ऑफ़
वॉल्यूम। सो PDV दैट इज़ अ डिफरेंशियल फॉर्म ऑफ़ वर्क। ठीक है? जी। अब इसी में अगर आपसे पूछता है कि यह जब
एक्सपेंशन हो रहा था तो यह बोल रहा है कि रिवर्सिबल आइसोबिक एक्सपेंशन हो रहा है। रिवर्सिबल आइसोबिक एक्सपेंशन समझ रहे हैं
आप कि प्रेशर को ही कांस्टेंट कर दिया। मान लीजिए इसने बोला प्रेशर इज कांस्टेंट। प्रेशर इज कांस्टेंट। और कौन सा प्रेशर?
एक्सटर्नल प्रेशर इज़ कांस्टेंट। पॉइंट समझ में आया क्या? एक्सटर्नल प्रेशर इज कांस्टेंट। यानी कि
जिसके अगेंस्ट में आप कार्य कर रहे हैं, वह प्रेशर ही कांस्टेंट है। आपसे एक छोटी सी चीज पूछ रहा हूं। कोई भी काम होता है
तो वो प्रेशर के अगेंस्ट में आप काम कर रहे हैं ना। मान लीजिए सिस्टम अगर काम कर रहा है तो जो काम कर रहा है दैट इज
अगेंस्ट अ प्रेशर। ये कह रहा है आइसोबारिक। आइसोबारिक का मतलब है कि जो एक्सटर्नल प्रेशर यहां पर अप्लाई है दैट
इज़ कांस्टेंट। और उसके अगेंस्ट में अपनी जो गैस है वो एक्सपैंड कर रही है रिवर्सिबबली। तो रिवर्सिबल आइसो आइसोबारिक
एक्सपेंशन के अंदर वर्क डन क्या हो जाएगा? अब अगर मुझे टोटल वर्क निकालना है। ध्यान से देखिएगा। यहां पर साइन कन्वेंशनंस भी
हम लगाएंगे। टोटल वर्क टोटल वर्क डन बाय सिस्टम ऑन सराउंडिंग। तो टोटल वर्क डन बाय द सिस्टम ऑन द
सराउंडिंग दैट इज़ W हो जाएगा। इसको निकालने के लिए मुझे क्या करना पड़ेगा? ये स्मॉल अमाउंट ऑफ़ वर्क डन को अगर मैं
इंटीग्रेट कर दूं तो मुझे टोटल वर्क डन मिल जाएगा। तो स्मॉल अमाउंट ऑफ वर्क डन फॉर एक छोटे वॉल्यूम के लिए जो हमारे पास
था वो बेसिकली क्या था? VI टू VF मैं मान लेता हूं। नहीं छोटे वॉल्यूम के लिए क्या था?
ये हो जाएगा DW = PDV तो अगर इनिशियल से लेकर अगर फाइनल तक देखूं कि मान लीजिए इनिशियली कंडीशन जो थी वहां से लेके जो
फाइनल एक्सपेंशन हो रहा है VI से VF पे टोटल कितना हुआ? ये हमको बोल रहा है कि आइसोबिक एक्सपेंशन है। यानी कि एक्सटर्नल
प्रेशर हमारे पास कांस्टेंट है। और हमारा जो ये गैस है ये एक्सपेंड कर रहा है। तो इनिशियल वॉल्यूम मान लीजिए VI था। यहां से
ये गया बेसिकली VF तक। तो इस पर्टिकुलर केस में हम लोग क्या करेंगे? टोटल वर्क डन निकालना है जो कि W हमारे पास है। तो हम
स्मॉल अमाउंट ऑफ़ वर्क डन DW को इंटीग्रेट कर देंगे इनिशियल से फाइनल वॉल्यूम तक। अब हमारे पास DW क्या होता है? VI टू VF। ये
बेसिकली हमारे पास होता है PDV। प्रेशर कांस्टेंट है तो बाहर ले आएंगे P ये हो जाएगा हमारे पास DV VI टू VF हो जाएगा। सो
दैट कम्स आउट टू बी PV फ्रॉम VI टू VF तो ये हमारे पास हो जाएगा PVF - का VI तो ये हमारे पास हो जाएगा P डेल्टाV
ये हो जाएगा वर्क डन पर क्योंकि यहां पर सिस्टम वर्क कर रहा है सराउंडिंग पे सो दैट इज वेरी वेरीेंट टू पुट नेगेटिव साइन
इन फ्रंट ऑफ इट ठीक है ना? हां। अब यहां पर चाहे तो यहां पर भी लगा सकते थे। मैंने क्या कर दिया?
डायरेक्टली यहां पर लगा दिया। ठीक है? यहां पर भी लगा सकते हैं। कोई दिक्कत वाली बात यहां पर नहीं है। ठीक है। सुनील भैया
अगर मैं यहीं पे लगाना चाहूं तो अब यहां भी लगा सकते हैं। कोई दिक्कत नहीं है। ठीक है ना? जी।
तो यहां पर यह क्या हो जाएगा? वर्क डन। वर्क डन बाय सिस्टम। ऑन सराउंडिंग
कामना करता हूं यह बात आपको अच्छी तरीके से क्लियर हो गई होगी। उसके बाद अगर हमारे पास दूसरा प्रोसेस आता है यहां पे दिस इज़
द वेरी फर्स्ट प्रोसेस। दूसरा आता है हमारे पास रिवर्सिबल आइसोकोरिक एक्सपेंशन। आइसोकोरिक का मतलब समझते हैं वॉल्यूम इज
कांस्टेंट। यानी कि कहने का मतलब ये है वॉल्यूम इज कांस्टेंट। यानी कि अब इसी प्रोसेस के अंदर इसी प्रोसेस में अगर मैं
यहां पर इसको ब्लॉक कर दूं इसको चिपका दूं तो क्या ये ऊपर जा सकता है क्या? मैं तुमसे एक नॉर्मल बात पूछता हूं। ध्यान से
सुनना। इस पिस्टन को यहां पे चिपका दूं तो क्या ये ऊपर जाएगा क्या? वॉल्यूम में चेंज आएगा क्या? नहीं आएगा ना? तो यहां पे
वॉल्यूम कांस्टेंट हो गया ना? अपने दिल से बताओ वॉल्यूम कांस्टेंट हुआ कि नहीं हुआ? हो गया। हां। तो मुझे बताओ स्मॉल अमाउंट
ऑफ जो डिस्प्लेसमेंट होगा वो जीरो हो जाएगा। तो स्मॉल अमाउंट ऑफ वर्क डन क्या हो जाएगा?
ये बेसिकली ज़ीरो हो जाएगा। अबे डिस्प्लेसमेंट नहीं होगा ना भाई। अरे भाई डिस्प्लेसमेंट नहीं होगा ना?
अबे भाई बोलने वाला था। अच्छा नहीं लगता। अरे भाई ठीक है ना? हां। पता नहीं ये शब्द मेरे जुबान पर कैसे आने लगे हैं। नहीं आने
चाहिए। अभद्रता है। नहीं आनी चाहिए जीवन में। अरे भी नहीं आना चाहिए वैसे तो। चलिए कोई बात नहीं माफी चाहूंगा आगे चलेंगे। तो
ये जो स्मॉल अमाउंट ऑफ डिस्प्लेसमेंट है दैट इज ds है ना ये तो ज़ीरो हो जाएगा ना। अरे मैं कह रहा हूं मेरे भाई कि ये जो
पिस्टन है ये फिक्स हो गया क्योंकि वॉल्यूम वॉल्यूम चेंज ही नहीं हो रहा। चेंज इन वॉल्यूम इज़ इक्वल्स टू ज़ीरो।
वॉल्यूम इज़ कांस्टेंट। यानी कि मान लीजिए कि मैंने इस पर्टिकुलर प्रोसेस में अब मेरे जो पिस्टन है इसको बेसिकली पकड़ लिया
या मतलब उसको चिपका दिया। या एक तरीके से ऐसे होल्ड कर ले कि मूव नहीं कर सकता। अब वो मूव ही नहीं कर सकता। तो यहां पे
वॉल्यूम में जो चेंज आएगा वो बेसिकली हो ही नहीं सकता। वॉल्यूम में चेंज नहीं हो सकता। तो बेसिकली डिस्प्लेसमेंट जो स्मॉल
अमाउंट ऑफ़ डिस्प्लेसमेंट है ऊपर कहां जाएगा भाई? तो ds ज़ीरो हो गया। तो dw क्या हो जाएगा? स्मॉल अमाउंट ऑफ़ वर्क डन भी
ज़ीरो हो जाएगा। तो टोटल वर्क डन क्या हो जाएगा? वो भी ज़ीरो हो जाएगा। अरे भाई यहां पर मैं कह रहा हूं अगर मैं इसको यहां पे
फिक्स कर दूं तो क्या यहां पे वॉल्यूम में चेंज आएगा? नहीं आएगा। तो क्या ये ऊपर मूव कर सकता है? नहीं कर सकता। तो क्या यहां
पे ds की वैल्यू क्या हो जाएगी? ज़ीरो हो जाएगी। ds की वैल्यू ज़ीरो हो जाएगी। तो dw ज़ीरो हो जाएगा। dw ज़ीरो हो जाएगा। तो W भी
क्या हो जाएगा? ज़ीरो हो जाएगा। रिवर्सिबल आइसोथर्मल एक्सपेंशन। अब देखिए आइसोथर्मल का मतलब क्या है? कि यहां पर यह
कह रहा है कि टेंपरेचर ही कांस्टेंट है। द टेंपरेचर इज कांस्टेंट। द टेंपरेचर इज़ कांस्टेंट। तो अब यहां पर
अगर हमें वर्क डन निकालना है तो रिवर्सिबल आइसोथर्मल एक्सपेंशन में निकालना है तो वर्क डन बाय अ
टोटल वर्क डन बाय अ सिस्टम ऑन सराउंडिंग। टोटल वर्क डन बाय सिस्टम ऑन सराउंडिंग।
क्या बोला मैंने? टोटल वर्क डन बाय द सिस्टम ऑन द सराउंडिंग दैट इज w फिर से इंटीग्रेट करेंगे हम लोग dw को फ्रॉम vi
टू vf अब यहां पर हमारे पास क्या हो जाएगा ये हो जाएगा अगेन pdv फ्रॉम vi टू vf sin कन्वेंशन मैं आखिरी में डाल दूंगा कोई
दिक्कत नहीं है आपको लगता है डेरिवेशन के स्टार्टिंग में डालना है आप डाल सकते हो गलत नहीं है फिर से ओरली बोल के बता रहा
हूं तो दादा अगर यह हो जाएगा हमारे पास यह हो जाएगा हमारे पास यह हो जाएगा हमारे पास तो यहां पर प्रेशर कांस्टेंट है क्या?
प्रेशर कांस्टेंट है क्या? नहीं है। प्रेशर इज नॉट कांस्टेंट। अब सुनील भाई यहां पर जो हमारे पास ये
प्रेशर है जिसके अगेंस्ट में काम हो रहा होगा। जिस प्रेशर के अगेंस्ट में यहां पे काम हो रहा होगा। ये तो एक्सटर्नल प्रेशर
होना चाहिए। सुनील भाई यहां पर जिस प्रेशर के अगेंस्ट में कार्य हो रहा होगा वो तो एक्सटर्नल
प्रेशर होना चाहिए। है ना? तो ये एक्सटर्नल प्रेशर जो होगा देखिए रिवर्सिबल प्रोसेस में मैंने आपको क्या बताया कि
एक्सटर्नल प्रेशर और इंटरनल प्रेशर को हम लगभग बराबर मानते हैं। कोई भी कार्य आप कर रहे हैं जब भी सिस्टम सराउंडिंग पे काम कर
रहा है तो एक एक्सटर्नल प्रेशर के अगेंस्ट में काम कर रहा होता है। लेकिन अगर यहां पर हमारे पास रिवर्सिबल
प्रोसेस है तो एक्सटर्नल और इंटरनल प्रेशर लगभग बराबर है तो हम एक्सटर्नल प्रेशर को इंटरनल प्रेशर से रिप्लेस कर देते हैं।
यानी कि सिर्फ P से रिप्लेस कर देते हैं। और P की वैल्यू होती है NRT / V. तो जब आप यहां पर डेरिवेशन करने आएंगे तो आप सीधा
यहां पे NRT / V कर दीजिए। यानी क्या हो जाएगा? NRT / V तो ये हो जाएगा VI टू VF DV।
अब देखिए इसमें उसने क्या बोला? क्या कांस्टेंट है? नंबर ऑफ़ मोल्स ऑफ गैस जो अंदर बंद होंगे वो तो कांस्टेंट ही रहते
हैं। क्लोज सिस्टम में मैटर का एक्सचेंज तो हो ही नहीं सकता। क्लोज सिस्टम में मैटर का एक्सचेंज तो हो ही नहीं सकता। ये
कांस्टेंट ये कांस्टेंट टेंपरेचर कांस्टेंट। nrt तो पूरी तरीके से कॉन्स्टेंट है। बाहर आ जाएगा। इंटीग्रेशन
ऑफ़ VI टु VF 1 / V DV हो जाएगा। तो ये हो जाएगा हमारे पास NRT ठीक है ना? नेचुरल log lnv ये हो जाएगा VI
टू VF तो ये हो जाएगा हमारे पास NRT lnvf - lni
तो यह हमारे पास हो जाएगा nrt ln nrt ln
vf / vi अगर नेचुरल log को अगर log 10 बेस से रिप्लेस करते हैं तो ये हमारे पास हो
जाएगा 2 303 nrt
log vf / vi 2.303 nrt log vf / viई अब देखिए फाइनल एक्सप्रेशन जब आप लिखेंगे
A तो ध्यान से देखना माइनस का साइन आएगा बिकॉज़ दिस इज़ द वर्क डन बाय द सिस्टम ऑन द सराउंडिंग। तो -2.303
NRT log VF / VI दिस शुड बी द फाइनल एक्सप्रेशन। ये आपका फाइनल एक्सप्रेशन
होगा। यहां पर माइनस आपने क्यों लगाया सुनील भैया? वर्क डन वर्क डन बाय सिस्टम ऑन सराउंडिंग।
मेरी बात क्लियर हो रही है क्या? मेरी बात क्लियर हो रही है क्या? मेरी बात क्लियर हो रही है क्या? अरे समझ में आ रहा है
क्या? समझ में आ रहा है क्या? समझ में आ रहा है क्या? सो द वर्क डन बाय द सिस्टम ऑफ़ द सराउंडिंग हमारे पास क्या हो जाएगा?
-2.303 NRT LG VF/ VI दैट इज़ इक्वल्स टू दी वर्क डन ड्यूरिंग द रिवर्सिबल आइसोथर्मल एक्सपेंशन। तो रिवर्सिबल
आइसोथर्मल एक्सपेंशन में जो वर्क डन हो जाएगा दैट इज़ -2.303 NRT LG VF/ VI समझ में आई? जी सुनील भैया समझ में आई? क्या
बात है? यही बेटा अगर इररिवर्सिबल एक्सपेंशन हो जाएगा तो इसके भी बेसिकली हमारे पास दो
केसेस हो जाएंगे। फटाफट से देखेंगे। इररिवर्सिबल आइसोथर्मल एक्सपेंशन होगा और दूसरा हमारे पास इररिवर्सिबल फ्री
एक्सपेंशन होगा। सो लेट्स डिस्कस दीज़ टू केसेस। दो और केस डिस्कस करेंगे। बड़े आसान-आसान से हैं। जल्दी से देखेंगे। तो
अगर हमारे पास इररिवर्सिबल प्रोसेससेस की हम बात करते हैं। इन केस ऑफ़ इररिवर्सिबल प्रोसेससेस। मुझे अपने दिल से बताओ। हम जो
काम करते हैं, वर्क डन बाय अ सिस्टम इज डन अगेंस्ट दी एक्सटर्नल प्रेशर। पी एक्सटर्नल के अगेंस्ट काम करते हैं।
रिवर्सिबल में क्या होता है? पी एक्सटर्नल और पी इंटरनल लगभग बराबर हो जाते हैं। तो हम पी एक्सटर्नल को डायरेक्टली प्रेशर ऑफ
द गैस से रिप्लेस करके सारे सॉल्यूशन निकाल लेते हैं। इतना तो तुम भी जानते हो और मैं भी जानता हूं। मैं सीधे-सीधे ये
बोल रहा हूं। मैं सीधे-सीधे ये बोल रहा हूं कि जब हम रिवर्सिबल की बात करते हैं तो पी एक्सटर्नल और पी इंटरनल लगभग बराबर
होते हैं। वर्क इज़ डन ऑलवेज अगेंस्ट द एक्सटर्नल प्रेशर। बट क्योंकि P एक्सटर्नल P इंटरनल रिवर्सिबल में बराबर होते हैं।
तो P एक्सटर्नल को डायरेक्टली P इंटरनल यानी कि P से रिप्लेस कर देते हैं। जहां पे P = NRT / V है। ये तो सिंपल बात है।
लेकिन अगर मैं यहां पर बोलता हूं इररिवर्सिबल आइसोथर्मल एक्सपेंशन की अपने दिल पे हाथ रख के कसम खाओ।
क्या तुम्हें बात समझ में नहीं आई क्या? कि यहां पर जो इंटरनल प्रेशर होगा एक्सटर्नल प्रेशर से बहुत ज्यादा होगा।
एंड जितना भी हम काम करेंगे इररिवर्सिबल प्रोसेस में दैट इज़ डन अगेंस्ट द एक्सटर्नल प्रेशर। क्या यहां पर इंटरनल और
एक्सटर्नल प्रेशर बराबर हो सकते हैं क्या? अपने दिल से बताओ। इंटरनल प्रेशर इज़ वेरी वेरी वेरी वेरीरी ग्रेटर देन द एक्सटर्नल
प्रेशर। तो जितना भी काम होगा दैट इज़ डन अगेंस्ट द एक्सटर्नल प्रेशर। इन इररिवर्सिबल प्रोसेससेस वी यूज़ P
एक्सटर्नल व्हिच इज़ वेरी लेस एज़ कंपेयर टू दी इंटरनल प्रेशर। सो व्हाइल कैलकुलेटिंग द वर्क डन बाय द गैस इन द इरिवर्सिबल
आइसोथर्मल एक्सपेंशन वी यूज़ P एक्सटर्नल। अगर सुनील भाई हम आइसोथर्मल इररिवर्सिबल आइसोथर्मल एक्सपेंशन की बात
करेंगे तो यहां पर वर्क कैलकुलेट करते समय हमारे दिमाग में बात बिल्कुल क्लियर है कि यहां पर जो प्रेशर होगा P एक्सटर्नल ही
हमें लेना पड़ेगा। रिवर्सिबल की तरह हम P एक्सटर्नल को P इंटरनल से रिप्लेस नहीं कर सकते या प्रेशर ऑफ़ गैस से रिप्लेस नहीं कर
सकते। हमें यहां पे सीधा-सीधा P एक्सटर्नल लेना पड़ेगा। एक बार दिमाग लगाते हैं। दिमाग लगाते हैं।
यानी यहां पे जो सारा काम हो रहा है, एक्सटर्नल प्रेशर के अगेंस्ट हो रहा है। ठीक है?
यहां पे एक्सटर्नल और इंटरनल प्रेशर बराबर थे। एग्री करते हो? मैंने एकदम से वेट हटाया। तो एक्सटर्नल प्रेशर क्या हो गया?
पी एटीएम हो गया। अब ये जितना भी वर्क डन हो रहा था, वह पी एटीएम के अगेंस्ट हो रहा था। जब तक यह पी एटीएम के बराबर ना हो
जाए। जैसे यह पी एटीएम के बराबर हो गया, रुक गया। पूरा काम जब यह कर रहा था, एक्सटर्नल प्रेशर के अगेंस्ट कर रहा था।
और एक्सटर्नल प्रेशर क्या था? पी एटीएम था। क्या एक्सटर्नल प्रेशर एक बार भी चेंज हुआ?
अपने दिल से बताओ। यहां पर ये दोनों प्रेशर्स बराबर थे। यहां पे कोई काम नहीं कर रहा। ये वेट हटाया मैंने। P एक्सटर्नल
जो हो गया यानी कि एक्सटर्नल प्रेशर जो हो गया वो सीधा के सीधा एटमॉस्फेरिक प्रेशर के बराबर हो गया। इंटरनल प्रेशर एक्सटर्नल
प्रेशर से बहुत ज्यादा है। और ये तब तक यहां से लेके यहां तक मूव करेगा जब तक वापस से दोनों प्रेशर्स बराबर ना हो जाए।
तो ये जब मूव कर रहा था तो एक्सटर्नल प्रेशर की वैल्यू सिर्फ और सिर्फ एटमॉस्फेरिक प्रेशर के बराबर थी। यानी
एक्सटर्नल प्रेशर कांस्टेंट था। अपने दिल पे हाथ रखो हां या ना? तो ये सवाल पूछा जा सकता है कि किस केस में एक्सटर्नल प्रेशर
कांस्टेंट रहता है? इररिवर्सिबल प्रोसेस में एक्सटर्नल प्रेशर हमेशा कांस्टेंट रहता है जिसके अगेंस्ट में आप काम कर रहे
हो। जब तक वो इक्विलिब्रियम में नहीं आ जाएगा। जब तक वो दोनों प्रेशर्स बराबर ना हो जाए। इंटरनल और एक्सटर्नल प्रेशर बराबर
ना हो जाए तब तक वो एक्सपेंड करेगा। तो याद रखिएगा इन इररिवर्सिबल प्रोसेससेस द एक्सटर्नल प्रेशर रिमेंस कास्टेंट एंड द
इंटरनल प्रेशर इज़ एक्सट्रीमली हाई एज़ कंपेयर टू दिस व्हिच रिजल्ट्स इन द एक्सपेंशन। ये बहुत इंपॉर्टेंट बात है। ये
कॉम्पिटिटिव एग्जाम्स में डायरेक्टली पूछी जाती है कि एक पर्टिकुलर ऐसा प्रोसेस हो रहा है जिसके अंदर एक्सटर्नल प्रेशर
कांस्टेंट है। याद रखना रिवर्सिबल में तो कंटीन्यूअसली एक छोटी सी स्लेट हटाई। प्रेशर चेंज हुआ। डीपी अमाउंट से बार-बार
बार-बार बार-बार प्रेशर चेंज होता है। लेकिन इसमें क्या रहेगा? एक बार अगर तुमने बड़ा सा वेट गिरा दिया। अब यह पी
एक्सटर्नल पी एटीएम के बराबर हो गया। अब यह तब तक काम करेगा तब तक यह एक्सपेंड करेगा जब तक ये दोनों प्रेशर्स बराबर ना
हो जाए। तो एक्सटर्नल प्रेशर तो पी एटीएम ही रहा ना। वो तो चेंज नहीं हुआ ना? नहीं हुआ सुनील भाई। तो ये बात तुम्हारे दिमाग
में रहनी चाहिए। बात तुम्हारे ज़हन में रहनी चाहिए। तो आइसोथर्मल आइसोथर्मल इररिवर्सिबल एक्सपेंशन में जो
वर्क डन होगा, वह किसके अगेंस्ट होगा? सुनील भाई वह जो वर्क डन होगा वह जो वर्क डन होगा यहां पर
वो बेसिकली जो हो रहा होगा सुनील भाई वो जो हो रहा होगा वर्क डन वो एक्सटर्नल प्रेशर के अगेंस्ट हो रहा होगा और वहां पे
वॉल्यूम में जो चेंज आ रहा होगा दैट इज़ डेल्टाV तो यहां पर जो वर्क डन होगा इररिवर्सिबल केस में दैट इज़ - P एक्सटर्नल
डेल्टाV सीधा-सीधा याद रखिए माइनस क्योंकि वर्क डन बाय द सिस्टम ऑन सराउंडिंग मॉर्निंग
सुनील भाई जो वर्क डन होता है एक्सटर्नल प्रेशर के अगेंस्ट में होता है। यस वर्क डन बाय द सिस्टम ऑन द सराउंडिंग दैट वुड
बी इक्वल्स टू - p एक्सटर्नल डेल्टाV समझ में आया? समझ में आया? समझ में आया? समझ में आया? जी सुनील भाई समझ में आया?
तो यहां पर यहां पर यहां पर यहां पर ये जैसे ही हट गया था तो सिर्फ एक्सटर्नल प्रेशर पी एटीएम के बराबर हो गया। अब ये
तब तक मूव करेगा जब तक कि वापस एटीएम पी एटीएम इज़ इक्व टू पी इंटरनल प्रेशर के ना हो जाए। यानी कि एक्सटर्नल प्रेशर और
इंटरनल प्रेशर जब तक वापस बराबर ना हो जाए तब तक मूव करेगा। तो ये जब यहां से यहां तक मूव कर रहा था तो एक्सटर्नल प्रेशर
हमेशा P एटीएम के बराबर ही था। तो जो यहां पर वर्क डन हो रहा है दैट इज़ ऑलवेज इक्वल्स टू P एक्सटर्नल।
दैट इज़ इक्वल्स टू दी P एक्सटर्नल। अब क्या पी एक्सटर्नल हर केस में पी एटीएम के बराबर होगा? ऐसा नहीं है। मान लीजिए इसके
ऊपर ऐसे पांच खोखे रखे हुए थे। मैंने एक गिराया तो ऊपर गया। तो तब क्या हो जाएगा? P एक्सटर्नल = P
एटीएम + चार खोखों का वजन या पांच खोखों का वजन। एक गिरा दिया तो चार का वजन अभी भी है। तो ऐसा नहीं कि P एक्सटर्नल हमेशा
P एटीएम के बराबर ही होगा। ठीक है? ये मैंने केस ऐसा इमेजिन किया। तो यह वर्क डन इन इररिवर्सिबल प्रोसेस =
-p एक्सटर्नल डेल्टाV सुनील भैया वहां पर जो प्रेशर आपने लिया था मैंने P एक्सटर्नल को डायरेक्टली इंटरनल प्रेशर से रिप्लेस
कर दिया था। यानी कि P इंटरनल या फिर P से रिप्लेस कर दिया था रिवर्सिबल प्रोसेस के केस में। ठीक है? जी। अगर मान लीजिए यहां
पर फ्री एक्सपेंशन होता है। लेट्स सपोज इररिवर्सिबल फ्री एक्सपेंशन की यहां पर बात हो रही है। तो यहां पर कैसे होगा?
ध्यान से देखिए। अगर हमारे पास एक आइडियल गैस एक्सपैंड करती है अगेंस्ट द वैक्यूम। अब अगेंस्ट द वैक्यूम का मतलब क्या है?
अगेंस्ट द वैक्यूम का मतलब है कि नो मैटर। अब अगर अपन को एक गैस को एक्सपेंड कराना है अगेंस्ट वैक्यूम यानी कि ऊपर कोई मैटर
ही नहीं है। जैसे फॉर एग्जांपल यहां पर जो गैस का एक्सपेंशन हो रहा था अगर आप यहां पर देखोगे तो गैस का एक्सपेंशन किसके
अगेंस्ट हो रहा था? गैस के अगेंस्ट ही हो रहा था। एटॉमिक गैसेस एटमॉस्फेयर के अगेंस्ट। मिक्सचर ऑफ गैसेस के अगेंस्ट हो
रहा था। तो एटमॉस्फेयर में जो गैसेस हैं वो जो प्रेशर लगाती हैं दैट इज़ बेसिकली पी एटीएम। और साथ ही साथ एक और प्रेशर क्रिएट
करने के लिए हमने यह रख दिया। अब वैक्यूम का मतलब क्या है? कोई मैटर ही नहीं है। ना तो यहां पर यह है ना तो यहां पर गैसेस है।
कुछ भी नहीं है। तो ऊपर से प्रेशर लगा कौन रहा होगा? अरे कोई प्रेशर ही नहीं लगा रहा होगा। अगर यहां पर गैस का फ्री एक्सपेंशन
हो रहा है। यानी कि यहां पर ऊपर वैक्यूम है। तो मुझे एक बात बताओ लॉजिकली यहां पर कोई मैटर ही नहीं है ऊपर। तो इसके
ऊपर प्रेशर कौन लगा रहा होगा? कोई प्रेशर ही नहीं लगा रहा होगा। तो बिना प्रेशर के कौन सा वर्क डन भाई? कोई सिस्टम के ऊपर
प्रेशर लगाएगा तभी तो सिस्टम उसके अगेंस्ट में काम करता है ना। प्रेशर ही नहीं लग रहा तो कौन सा काम होगा दादा? प्रेशर ही
नहीं लग रहा तो कौन सा काम होगा? इफ एन आइडल गैस एक्सपैंड्स अगेंस्ट द वैक्यूम। वैक्यूम का मतलब होता है कि ऊपर कोई मैटर
ही नहीं है। ना तो कोई आपने मटेरियल रखा है। ना तो वहां पे कोई गैस है। ना तो एटमॉस्फेरिक गैसेस का जो मिक्सचर है वो
है। कुछ भी नहीं है। तो वहां से जो एक्सटर्नल प्रेशर हो गया वो क्या? ज़ीरो हो गया। सो द इररिवर्सिबल फ्री एक्स
इररिवर्सिबल एक्सपेंशन इज़ कॉल्ड द फ्री एक्सपेंशन। इस केस में एक्सटर्नल प्रेशर क्या हो
जाएगा? ज़ीरो हो जाएगा। अरे दादा एक्सटर्नल प्रेशर क्या हो जाएगा? जीरो हो जाएगा। तो देयर फॉर इररिवर्सिबल एक्सपेंशन द वर्क डन
बाय द गैस कितना हो जाएगा? जल्दी से बताओ। - P एक्सटर्नल डेल्टाV एक्सटर्नल प्रेशर ज़ीरो हो जाएगा। तो वर्क डन क्या हो जाएगा?
ज़ीरो हो जाएगा। सिंपल सी बात है। मैं बोल रहा हूं वर्क डन इरिवर्सिबल = - P एक्सटर्नल डेल्टाV एक्सटर्नल प्रेशर अगर
ज़ीरो हो जाएगा। मतलब गैस को एक्सपेंड करने के लिए जो एक्सटर्नल प्रेशर है वो ज़ीरो हो गया। क्योंकि गैस को एक्सपेंड करने के लिए
जो एक्सटर्नल प्रेशर है वहां पे तो वैक्यूम है। वैक्यूम का मतलब ना तो कोई गैस है ना कोई मटेरियल है। कुछ भी नहीं
है। कोई मैटर नहीं है। तो मैटर ही नहीं है। तो प्रेशर कौन अप्लाई करेगा? तो एक्सटर्नल प्रेशर हमारे पास ज़ीरो हो गया।
एक्सटर्नल प्रेशर अगर हमारे पास ज़ीरो हो गया तो वर्क डन वुड बी इक्वल्स टू ज़ीरो। सिंपल सी बात है। जी सुनील भैया डन है। अब
देखिए ये सारे फॉर्मूले यहां पर मैं आपके रिवीजन के लिए लेकर आ गया हूं। एक ही साथ सबको रिवाइज़ कर लेंगे। फटाफट से देखेंगे।
एक ही बार में रिवीजन हो जाएगा। तो अगर आपको कोई बोलता है वर्क डन बाय अ सिस्टम इन दी रिवर्सिबल
एंड इररिवर्सिबल आइसोबिक एक्सपेंशन रिवर्सिबल में बोल रहा है या इररिवर्सिबल में बोल रहा है दोनों में से कहीं पर भी
बोल रहा है तो वर्क डन = -p एक्सटर्नल डेल्टाV होगा - p एक्सटर्नल डेल्टाV और अगर हम रिवर्सिबल की बात करते हैं
तो इनरिवर्सिबल इनरिवर्सिबल P एक्सटर्नल
जो हमारे पास हो जाएगा। अच्छा यहां पर तो प्रेशर ही कांस्टेंट कर दिया ना। तो यहां पर इसकी बात क्या करनी? अरे आइसोबारिक है
दादा। आइसोबारिक है। आइसोबिक का मतलब क्या होता है? एक्सटर्नल प्रेशर इज़ कांस्टेंट। एक्सटर्नल प्रेशर
इज़ कांस्टेंट। अभी तो प्रूव किया था। तो चाहे हमको यहां
पर रिवर्सिबल प्रोसेस की बात कर रहा हो या मान लीजिए इररिवर्सिबल प्रोसेस की बात कर रहा हो। अगर हमारे पास एक्सटर्नल प्रेशर
जो है जिसके अगेंस्ट में अपन कार्य कर रहे हैं। दैट इज़ P एक्सटर्नल को बेसिकली P मान के चल रहा हूं। P एक्सटर्नल = P. ठीक है
ना? तो क्या हो जाएगा? वर्क डन = - P एक्सटर्नल डेल्टाV या फिर - PVF - VI अरे यही तो अभी प्रूव किया था दादा। ये देखो
ये देखो। ये देखो कहां गया? ये रहा - P डेल्टाV तो P डेल्टाV हमारे पास क्या होता है? P - P VF - VI और माइनस क्यों
है? बिकॉज़ दिस इज़ द वर्क डन बाय द सिस्टम ऑन द सराउंडिंग। अच्छा एक तो ये हो गया। दूसरा अगर इसका जस्ट अपोजिट हो जाए वर्क
डन ऑन अ सिस्टम इन द रिवर्सिबल एंड इररिवर्सिबल आइसोबारिक कंप्रेशन यानी कि कॉन्सेंट प्रेशर पर अगर अपने को कंप्रेस
किया जा रहा है तो रिवर्सिबल एंड इररिवर्सिबल आइसोबिक एक्स आइसोबारिक कंप्रेशन में बेसिकली क्या हो जाएगा इसी
को अगर आप ऐसे लिखना चाहें तो यहां पर देखिए क्या हो जाएगा वर्क डन = p एक्सटर्नल डेल्टाV दैट इज PVI - VF अब ये
वैल्यू जो हमारे पास आ जाएगी ये वैल्यू हमारे पास पॉजिटिव आ जाएगी इतनी वैल्यू यह देखिए
VI - VF क्या हो जाएगा? यह वैल्यू पॉजिटिव आएगी। सुनील भैया पॉजिटिव क्यों आएगी? कंप्रेस कर रहे हो तो इनिशियल वॉल्यूम जो
होगा वो ज्यादा होगा। कंप्रेस करने के बाद जो फाइनल वॉल्यूम होगा कम हो जाएगा। तो VI - VF का जो सम आ जाएगा यानी ये जो वैल्यू
आ जाएगी पॉजिटिव आ जाएगी। तो इस पर्टिकुलर केस में वर्क डन हमारे पास क्या आएगा? पॉजिटिव आएगा। क्यों पॉजिटिव आएगा?
क्योंकि वर्क डन बाय सराउंडिंग ऑन द सिस्टम। तो वर्क डन क्या आएगा? पॉजिटिव आएगा। या
तो आप एक्सप्रेशन को ऐसे लिख दीजिए। P एक्सटर्नल डेल्टाV दैट इज PVI - VF या आपको इसी फॉर्मेट में लिखना है तो आप इसी
फॉर्मेट में लिख सकते हैं। - P एक्सटर्नल डेल्टाV आप चाहें तो इसी फॉर्मेट में भी लिख सकते हैं। कोई दिक्कत नहीं है। यहां
पर और यहां पर वैल्यू सेम आएगी। देखो कैसे? ये हो जाएगा - P एक्सटर्नल डेल्टाV यानी कि - P VF - VI तो ये वाली वैल्यू
क्या हो जाएगी? नेगेटिव हो जाएगी। ये वाली वैल्यू क्या हो जाएगी? नेगेटिव हो जाएगी। तो नेगेटिव मल्टीप्लाई बाय नेगेटिव क्या
हो जाएगा? अपने दिल से बताना। नेगेटिव मल्टीप्लाई बाय नेगेटिव क्या होता है? गिव्स पॉजिटिव वैल्यू ऑफ़ वर्क। गिव्स
पॉजिटिव वैल्यू ऑफ़ वर्क। ये वैल्यू नेगेटिव क्यों आएगी? ये वैल्यू
नेगेटिव क्यों आएगी? यहां पे VF जो हो जाएगा दैट वुड बी लेसर दैन VI। अरे भाई साहब फाइनल वॉल्यूम इनिशियल
वॉल्यूम से कम होगा ना? कंप्रेस कर रहे हो आप। कंप्रेस कर रहे हो। तो फाइनल वॉल्यूम से हो जाएगा। इनिशियल वॉल्यूम से क्या हो
जाएगा? कम हो जाएगा। तो VF - VI अगर नेगेटिव वैल्यू आ गई तो नेगेटिव माइनस नेग नेगेटिव मल्टीप्लाई बाय नेगेटिव क्या हो
जाता है? पॉजिटिव हो जाता है। या तो ये फार्मूला लिख लो या तो फ़ूला को ऐसे लिख लो। वर्क डन पॉजिटिव आना चाहिए। ठीक है?
वर्क डन इन दी आइसोकोरिक कंडीशन। अभी मैंने आपको बताया था आइसोकोरिक कंडीशन के अंदर हमारे पास क्या हो जाएगा? ds की
वैल्यू ज़ीरो हो जाती है। तो dw की वैल्यू ज़ीरो हो जाती है। तो वर्क डन इक्व टू सीधा-सीधा हो जाएगा ज़ीरो। काम खत्म। चौथा
फार्मूला वर्क डन बाय अ सिस्टम इन द रिवर्सिबल आइसोथर्मल एक्सपेंशन ये हो जाएगा -2.303
NRT log VF/ VI अभी प्रूफ किया था वर्क डन बाय अ सिस्टम इन द वर्क डन ऑन अ सिस्टम इन अ रिवर्सिबल आइसोथर्मल कंप्रेशन अगर वर्क
डन बाय द सिस्टम है तो -2.303 NRT log VF/ VI है। वर्क डन ऑन अ सिस्टम है यानी कंप्रेशन किया जा रहा है। रिवर्सिबल
आइसोथर्मल कंप्रेशन किया जा रहा है। तो आप चाहे तो इसी फार्मूला को लिख सकते हैं। कोई दिक्कत वाली बात नहीं है। अब यहां पर
बेसिकली हमारे पास क्या हो जाएगा? ये जो वैल्यू है हमको क्या पता है कि vf इज लेसर दैन vi हो जाएगा।
कंप्रेशन में फाइनल वॉल्यूम इनिशियल वॉल्यूम से क्या होता है? कम होता है तो log vf - vi की जो वैल्यू आ जाएगी नेगेटिव
आ जाएगी। तो इसका मतलब हमारे पास क्या आ जाएगा? ये वाली वैल्यू क्या आएगी? यानी कि इसका ये मतलब है इसका ये मतलब है कि ये जो
वैल्यू हमारे पास यहां पर आने वाली है, ये आएगी नेगेटिव मल्टीप्लाई बाय नेगेटिव। तो वर्क डन क्या हो जाएगा? यहां पे वर्क डन
हो जाएगा पॉजिटिव। कितने बच्चों को बात समझ में आ रही है? मैं कह रहा हूं आप चाहें तो ये सेम
फार्मूला लिख सकते हैं। प्रॉब्लम क्या होगी? प्रॉब्लम तो ये होगी यहां पे इसको ऐसे समझो। vf और vi है। तो अगर मैं लिखना
चाहूं तो log vf - log vi लिख सकता हूं। कितना लिख सकता हूं? नहीं लिख सकता हूं। log a / b = log a - b ये तो लिख सकता हूं
ना भाई। अगर ये वाली ये यहां से आया था। देखो इधर देखो। इधर देखो। यहां पर देखो ये देखो log a - log b = log
a / b होता है ना log a - log b = log a / b है तो अगर इसी चीज को मैं लिखना चाहूं तो log के फॉर्मेट में तो log vf - log vi
हो जाएगा यहां वाला इधर देखो ये वाला log vf - log vivi हो जाएगा। अब अगर मैं आपको कहता हूं कि जो vf की जो वैल्यू है वो
बेसिकली vi से कम है तो ऑटोमेटिकली वैल्यू क्या हो जाएगी? नेगेटिव हो जाएगी। ये वैल्यू नेगेटिव, ये वैल्यू नेगेटिव। तो
ऑटोमेटिकली वर्क डन क्या हो गया? पॉजिटिव। तो वर्क डन ऑन द सिस्टम हमेशा पॉजिटिव होगा। वरना अगर आप चाह तो एक्सप्रेशन को
पॉजिटिव ही लिखे 2.30 थी NRT या log VI / VF कर दें। तो जब आप log VI - log VF करेंगे तो वैल्यू पॉजिटिव रहेगी। ये
वैल्यू पॉजिटिव रहेगी तो वर्क डन ऑटोमेटिकली पॉजिटिव रहेगा। उसके बाद छठी चीज़ ये भी मैंने आपको प्रूव
करा था। वर्क डन बाय अ सिस्टम इन एन इररिवर्सिबल आइसोथर्मल एक्सपेंशन। सो दैट इज़ इक्वल्स टू - P एक्सटर्नल डेल्टाV एंड
सातवां हमारे पास हो जाएगा वर्क डन बाय अ सिस्टम इन इररिवर्सिबल फ्री एक्सपेंशन इज़ इक्व 0 ये वर्क डन क्या हो जाएगा हमारे
पास ज़ीरो हो जाएगा तो ये सात रिलेशन आपके एग्जाम के लिए 1 2 3 4 5 6 7 जिसमें से भी पहला तीसरा जिस पे इंपॉर्टेंट मार्क कर
रहा हूं आपके एग्जाम में आ सकते हैं। एक तीन चार
छ और सात। तो, यह टोटल आपके पास पांच एक्सप्रेशन सबसे ज्यादा इंपॉर्टेंट है। अब इससे रिलेटेड जो हमारे पास ग्राफ हो
जाएगा, ग्राफ को थोड़ा सा समझ लेते हैं। बहुत बढ़िया ग्राफ है हमारे पास। रिवर्सिबल आइसोथर्मल एक्सपेंशन एंड
इरिवर्सिबल आइसोथर्मल एक्सपेंशन का ग्राफ है। ये रिवर्सिबल आइसोथर्मल एक्सपेंशन का ग्राफ है। और ये इररिवर्सिबल आइसोथर्मल
एक्सपेंशन का ग्राफ है। यानी यहां पर हमारे पास कास्टेंट टेंपरेचर पे एक गैस का एक्सपेंशन होता है। मान लीजिए सेम अमाउंट
ऑफ एक्सपेंशन हो रहा है। कॉन्सेंट टेंपरेचर पर एक गैस का एक्सपेंशन हो रहा है VI टू VF। एक एक्सपेंशन हुआ
रिवर्सिबबली। एक एक्सपेंशन हुआ इररिवर्सिबबली। फिर से सुनो। कॉन्स्टेंट टेंपरेचर पर एक गैस का एक्सपेंशन हम लोग
करवा रहे हैं। कॉन्स्टेंट टेंपरेचर पर एक गैस का एक्सपेंशन करवा रहे हैं। पहला एक्सपेंशन
रिवर्सिबली हो रहा है। दूसरा इररिवर्सिबली हो रहा है। अब ध्यान से देखो। रिवर्सिबबबली मैं मान लेता हूं कि मैं
पहले जो इनिशियल गैस का प्रेशर और वॉल्यूम था P1 और V1 था। और यहां तक जो फाइनल स्टेट है उसका जो प्रेशर और वॉल्यूम मेरे
पास है वह है P2 और V2। यह हमारे पास है प्रेशर। यह हमारे पास है वॉल्यूम। सुनील भैया ये तो प्रेशर ऑफ द
गैस है। यह प्रेशर ऑफ गैस और एक्सटर्नल प्रेशर दोनों लगभग बराबर होते हैं रिवर्सिबल में। तो आप इसमें से दोनों में
से किसी को भी मान सकते हैं। ठीक है? जी सुनील भाई जी। ये 100% हमको क्लियर है। अरे भाई रिवर्सिबल के अंदर क्या होता है?
इंटरनल प्रेशर जो होता है लगभग इक्वल टू एक्सटर्नल प्रेशर होता है। ठीक है ना? P इंटरनल या फिर P बोल सकते हैं अपन।
ठीक है ना? ये तो आपको पता ही है। डन है? तो मैं मानता हूं कि इनिशियल प्रेशर और वॉल्यूम P1 और V1 था। फाइनल P2 और V2 था।
सेम इरिवर्सिबल के केस में भी ये होगा P1 V1 और ये हो जाएगा P2 V2। गैस की बात चल रही है। अब मैं यहां पर क्या बोलता हूं कि
मान लीजिए रिवर्सिबल वाले प्रोसेस में मैंने हल्का सा वेट हटाया। हल्का सा वेट हटाया।
हल्का सा वेट हटाया तो गैस क्या करना चाहेगी? इंटरनल प्रेशर हल्का सा बड़ा है। P इंटरनल = P एक्सटर्नल + DP। अब ये तब तक
ऊपर जाएगा जब तक प्रेशर बराबर ना हो जाए। तो यहां पर इंटरनल प्रेशर बढ़ा होगा कि घटा होगा? मान लो इक्विलिब्रियम पे आने की बात
करता हूं। मैं इस स्टेट की बात करता हूं तुमसे। इधर का मुझे बताओ। यह यहां से जब यहां पर गया तो अभी मुझे
बताओ इंटरनल और एक्सटर्नल प्रेशर बराबर हुए। तो सुनील भाई एक्सटर्नल प्रेशर तो अपन ने हल्का सा कम कर दिया तो इंटरनल
प्रेशर भी तो हल्का सा कम हुआ होगा ना। दिमाग लगाने वाली बात है। अगर मैंने हल्का सा वेट हटा दिया तो इंटरनल प्रेशर = p
एक्सटर्नल + dp तो ये तब तक मूव करेगा जब तक कि इंटरनल और एक्सटर्नल बराबर ना हो जाए। यह कम हुआ है तो इसका मतलब यह भी कम
हुआ होगा। जी। तो मैं मानता हूं कि दोनों प्रेशर्स ही यहां पर क्या हुए हैं? कम हुए हैं। ठीक है? तो ऐसा इमेजिन करो कि ये
प्रेशर जब यहां पर कम हुआ था प्रेशर कम हुआ था तो गैस का वॉल्यूम तो बढ़ा था। जी गैस का वॉल्यूम बढ़ा लेकिन जब
ऐसा हुआ तो ये वापस इक्विलिब्रियम पे आ गए थे। इंटरनल और एक्सटर्नल प्रेशर बराबर हो गए थे। फिर से हमने हल्का सा वेट हटाया।
फिर से क्या हुआ? हल्का सा वेट हटाया। तो इंटरनल प्रेशर एक्सटर्नल प्रेशर से हल्का सा ज्यादा हो गया। गैस हल्की सी एक्सपैंड
करी तब तक एक्सपैंड करेगी जब तक इंटरनल एक्सटर्नल प्रेशर बराबर ना हो जाए। तो मैं मानता हूं कि इंटरनल प्रेशर यहां पर कम
हुआ होगा और वॉल्यूम बड़ी होगी। तो, यह ऐसे बार-बार मल्टीपल इक्विलिब्रियम स्टेट्स आप
देखेंगे। हर पॉइंट पर इक्विलिब्रियम स्टेट आएगी। जहां पर इंटरनल और एक्सटर्नल प्रेशर लगभग क्या हो जाएगा? वापस बराबर हो जाएगा।
अब इसी को जब हमने जोड़ दिया तो ये ऐसा कर्व हमको मिलता है। ये जो कर्व होता है हमारा इन पॉइंट्स को जोड़ के बनने के बाद
ये इस कर्व को हम बोलते हैं आइसोथर्म। क्या बोलते हैं दोस्त? आइसोथर्म।
और इस कर्व के अंडर का जो यह एरिया है, यह एरिया जो है, इसके अंडर का यह वाला जो एरिया है, एरिया अंडर दिस कर्व
यह वर्क डन है। यह वर्क डन है। रिवर्सिबल वर्क डन। क्या हो जाएगा? इसको क्या बोलेंगे? रिवर्सिबल
वर्क डन। ठीक है ना? इन आइसोथर्मल एक्सपेंशन। क्लियर हो रही है कि नहीं हो रही है बात? जी सुनील भाई
क्लियर हो रही है। ठीक है? तो यहां पर इनिशियल प्रेशर और वॉल्यूम हमारे पास था। हमने क्या कर दिया
कि हल्का सा वेट हटाया था। तो P इंटरनल एक्सटर्नल प्रेशर से हल्के से अबाउट में ज्यादा हो गया। वो तब तक एक्सपेंड करेगा
जब तक कि इंटरनल और एक्सटर्नल प्रेशर जो है दोनों के दोनों वापस बराबर ना हो जाए। अब इस पर्टिकुलर स्टेज पे आने के लिए
इंटरनल प्रेशर और एक्सटर्नल प्रेशर दोनों वापस कम हुए ना क्योंकि आपने हल्का सा एक्सटर्नल प्रेशर को घटाया। तो इंटरनल
प्रेशर बोला कि भैया मैं हल्का सा ज्यादा हो गया हूं। तो ये एक्सपेंड करेगा। इसका ये मतलब है कि इंटरनल और एक्सटर्नल प्रेशर
वापस बराबर होना चाहते हैं। बराबर हो जाएंगे। फिर से इक्विलिब्रियम आ जाएगा। तो जब प्रेशर घटा तो वॉल्यूम बढ़ा। प्रेशर
घटा, वॉल्यूम बढ़ा, प्रेशर घटा, वॉल्यूम बढ़ा, प्रेशर घटा, वॉल्यूम बढ़ा, प्रेशर घटा, वॉल्यूम बढ़ा। वॉल्यूम तो बढ़ ही रहा
था ना। जब आप यह प्रोसेस करोगे, यह प्रोसेस आप करोगे, यह प्रोसेस आप करोगे कि हल्का सा यहां पे
हटाओगे। एक्सटर्नल प्रेशर अगर हल्का सा घटाओगे, इंटरनल प्रेशर एक्सटर्नल प्रेशर से ज्यादा है। तो हल्का सा ये ऊपर की तरफ
शिफ्ट करेगा। जब दोनों प्रेशर बराबर हो जाएंगे तो इक्विलिब्रियम आएगा। तो वॉल्यूम हल्का सा बढ़ेगा कि नहीं बढ़ेगा? बिल्कुल
बढ़ेगा। तो प्रेशर घट रहा है और वॉल्यूम बढ़ रहा है। प्रेशर घट रहा है और वॉल्यूम बढ़ रहा है। प्रेशर घट रहा है और वॉल्यूम
बढ़ रहा है। प्रेशर घट रहा है, वॉल्यूम बढ़ रहा है। तो इस तरीके से ये बनेगा। और ये सारे के सारे इक्विलिब्रियम पॉइंट्स
हैं। इन सबको मैंने कनेक्ट कर दिया। है। सो दिस विल गिव माय आइसोथर्म कॉन्सेंट टेंपरेचर। एंड द एरिया अंडर दिस ग्राफ इज़
बेसिकली द रिवर्सिबल वर्क डन इन दी आइसोथर्मल एक्सपेंशन। अब अगर यही चीज अगर मैं करता हूं इररिवर्सिबल में कौन सा?
इररिवर्सिबल आइसोथर्मल एक्सपेंशन में अगर ये चीज करता हूं तो यहां पर मान लीजिए मेरी गैस जो थी उसका ये ये गैस का इनिशियल
प्रेशर और वॉल्यूम है। ठीक है? और उसके बाद मैंने क्या किया था? इसे झटके से इसको हटाया था। याद आ रहा है तुमको? मैंने झटके
से लोड हटाया तो शक करके ऊपर जाके भिड़ेगा और तब तक ऊपर जाएगा जब तक कि एक्सटर्नल और इंटरनल प्रेशर वापस से बराबर ना हो जाए।
ठीक है? जी सुनील भैया। जी सुनील भैया सही बात है। कोई दिक्कत नहीं है। तो मैं मानता हूं कि यहां पर वो वाली स्टेट आ गई है। तो
ये वाला जो पर्टिकुलर पॉइंट है ये आप बोलेंगे कि ये P एक्सटर्नल है। बताइए क्यों? क्योंकि ये तो तब तक ही मूव करेगा
ना जब तक ये वाला जो प्रेशर है एक्सटर्नल प्रेशर के बराबर ना हो जाए। बताइए हां या ना? अरे भाई पिस्टन तो तब तक ही मूव करता
है ना जब तक कि एक्सटर्नल प्रेशर के बराबर ना हो जाए। अपने दिल से बताओ। मैंने अगर एकदम से वो वजन हटा दिया था तो यहां पर जो
एक्सटर्नल प्रेशर था वो क्या हो गया? PTM के बराबर हो गया। तो इंटरनल प्रेशर बहुत ज्यादा हो गया। तब तक वो मूव करेगा जब तक
कि इंटरनल प्रेशर एक्सटर्नल प्रेशर के बराबर ना हो जाए। तो यहां आ के रुक गया। तो मैं मानता हूं कि ये जो P2 प्रेशर है
ये एक्सटर्नल प्रेशर के बराबर है। और एक्सटर्नल प्रेशर इररिवर्सिबल वर्क डन में कांस्टेंट रहता है। यह कांस्टेंट रहता है
कि नहीं रहता? बिल्कुल कांस्टेंट रहता है। बिल्कुल कांस्टेंट रहता है। ठीक है? जी।
अब देखिए अगर मैं देखता हूं कि यहां पर P1 V1 ये रहा ये वाला प्लॉट और ये वाला देखिए। तो अब ये वाला जो इसके अंडर में
एरिया है दिस एरिया एरिया अंडर दिस। बल वर्क डन इन द आइसोथर्मल एक्सपेंशन इररिवर्सिबल
वर्क डन इन आइसोथर्मल एक्सपेंशन अब बताइए किसका एरिया ज्यादा है? सेम अमाउंट ऑफ यहां पर V1 से लेकर V2 पे आए तो
सेम अमाउंट ऑफ़ एक्सपेंशन के लिए। सेम अमाउंट ऑफ़ एक्सपेंशन के लिए। सेम अमाउंट ऑफ़ एक्सपेंशन लेकिन किस में वर्क डन
ज्यादा हुआ? इसमें। अब पहले तो एक अच्छा एक बच्चा बोलेगा कि बहुत सारे बच्चे बोलेंगे सुनील भैया यहां से लेके यहां तक
कर्व क्यों नहीं जोड़ा? अरे यहां से यहां तक क्या अपने पास कोई इक्विलिब्रियम स्टेट थी क्या? रिवर्सिबल में तो क्या था? अपने
पास प्रोसेस बहुत इनफाइनाइट नंबर ऑफ स्टेप्स में होता है। तो ये इक्विलिब्रियम पॉइंट इक्विलिब्रियम पॉइंट इक्विलिब्रियम
पॉइंट इक्विलिब्रियम पॉइंट बहुत सारे पॉइंट्स यहां पर आते हैं। इनको जोड़ने के बाद हमको आइसोथर्म मिलता है। ये इस स्टेट
के बाद सीधा इस स्टेट में आता है इक्विलिब्रियम पे। यहां पे इक्विलिब्रियम पे है। फिर सीधा यहां इक्विलिब्रियम पे
है। इसके बीच में किसी भी स्टेट में इक्विलिब्रियम पे नहीं आता। तो इसीलिए हम इस कर्व को जोड़ नहीं सकते।
दूसरा यह जो P2 है इसी की दौड़ में वो यहां से यहां तक निकला था कि मुझे तो भैया एक्सटर्नल प्रेशर के बराबर होना है और
एक्सटर्नल प्रेशर के बराबर जैसे ही हो जाएगा तो पिस्टन वहां पर आ के रुक जाएगा। अब दिमाग लगाओ एक्सटर्नल प्रेशर पूरे टाइम
कांस्टेंट ही था। एक्सटर्नल प्रेशर में कोई चेंज आया था क्या यहां पे? अपने दिल से बताओ। एक्सटर्नल प्रेशर में कोई यहां
पे चेंज आया था क्या? नहीं। अगर तुमने यह हटा दिया तो एक्सटर्नल प्रेशर पी एटीएम के बराबर था। वह तो p एटीएम ही था। जब तक वो
यहां तक आ जाए तब भी पीएटीएम ही था। इंटरनल प्रेशर चाह रहा था कि मैं एक्सटर्नल प्रेशर के बराबर हो जाऊं।
इसीलिए तो पिस्टन को मूव करा रहा था। है ना? जी। तो ये छोटी-छोटी बातें हमारे दिमाग में रहनी चाहिए। तो यहां पर इसके
अंडर में ये जो एरिया है दिस गिव्स दी वर्क डन इरिवर्सिबल वर्क डन इन द आइसोथर्मल एक्सपेंशन। ठीक है? दस फॉर द
सेम इंक्रीस इन द वॉल्यूम वर्क डन रिवर्सिबबली इज़ ग्रेटर देन द वर्क डन इररिवर्सिबली। याद रखना अगर यह रिवर्सिबल
और इररिवर्सिबल हमारे पास आइसोथर्मल एक्सपेंशन है तो वर्क डन यहां पे ज्यादा होगा एज़ कंपेयर टू दिस।
ठीक है? चलो एक सवाल लगाते हैं। एनसीईआरटी का प्रॉब्लम 5.2। दिस इज़ अ सॉल्वड प्रॉब्लम
5.2। लेट्स सॉल्व दिस। ठीक है? अब ये क्या कह रहा है? 2 लीटर्स ऑफ़ एन आइडल गैस एट अ प्रेशर ऑफ 10 एटीएम एक्सपेंड्स
आइसोथर्मली। एक्सपेंड्स आइसोथर्मली का मतलब हो गया कि टेंपरेचर हमारे पास हो गया कांस्टेंट।
पहली बात तो ये हो गई कांस्टेंट। 2 लीटर्स ऑफ एन आइडल गैस एट अ प्रेशर ऑफ 10 एटीएम एक्सपेंड्स आइसोथर्मली ए 25° सेल्सियस
इंटू अ वैक्यूम एक्सपेंशन इन अ वैक्यूम। अच्छा एक्सपेंड्स आइसोथर्मली इन अ वैक्यूम अंटिल
इट्स टोटल वॉल्यूम इज़ 10 लीटर। हाउ मच हीट इज़ एब्सॉर्ब्ड एंड हाउ मच वर्क इज़ डन इन द एक्सपेंशन। अब देखिए, हाउ मच वर्क इज़ डन
इन द एक्सपेंशन? तो सिंपल सी बात है। इस वाले केस में वर्क डन क्या होगा? यह देखिए यह वाला जो केस है यह वर्क डन बाय सिस्टम
इन इररिवर्सिबल फ्री एक्सपेंशन। सीधी सी बात है। सीधी सी बात है। वर्क डन जो हो जाएगा हमारे पास ये इररिवर्सिबल
वाले प्रोसेस के अंदर दैट इज इक्वल्स टू 0 फ्री एक्सपेंशन हो रहा है ना? यानी कि भाई साहब वैक्यूम के अगेंस्ट में हो रहा है।
फ्री एक्सपेंशन मींस। अरे एक्सटर्नल प्रेशर क्या हो जाएगा? एक्सटर्नल प्रेशर इज़ इक्वल्स टू
ज़ीरो हो जाएगा। तो वर्क डन क्या हो जाएगा? ज़ीरो हो जाएगा। अरे जब एक्सटर्नल प्रेशर ही नहीं है भाई। कुछ किसके अगेंस्ट में
काम कर रहे हो तुम? किसके अगेंस्ट में काम कर रहे हो? ज़ीरो वर्क डन होगा। पहला दूसरा हाउ मच ऑफ द हीट इज़
एब्जॉर्ब्ड। अब देखो, फर्स्ट लॉ ऑफ़ थर्मोडायनेमिक्स का
रिलेशनशिप सेटअप करने की कोशिश करते हैं। यहां पर आइसोथर्मल है। यानी कि टेंपरेचर मेरे पास कांस्टेंट है। अब अगर मेरे पास
टेंपरेचर कांस्टेंट है, तो मेरे को इतना पता है कि चेंज इन इंटरनल एनर्जी जो हो जाएगा जीरो हो जाएगा। क्योंकि मैंने आपको
बताया था इंटरनल एनर्जी इज अ फंक्शन ऑफ टेंपरेचर। जब टेंपरेचर चेंज नहीं हो रहा तो इंटरनल एनर्जी चेंज नहीं होगी।
तो यहां पर जो डेल्टा u हो जाएगा वो बेसिकली हमारे पास क्या हो जाएगा? ज़ीरो। वर्क डन हमारे पास कितना है? वर्क डन
हमारे पास ज़ीरो है। तो भाई अगर मैं बोलता हूं कि डेल्टा u जो जनरल फॉर्म है q + w वाली तो मैं बोलता हूं ये ज़ीरो है इक्वल
टू ये q है प्लस ये ज़ीरो है तो q की वैल्यू क्या हो जाएगी? ज़ीरो हो जाएगी ना। सिंपल।
तो फ्री एक्सपेंशन का मतलब एक्सटर्नल प्रेशर ज़ीरो हो जाएगा। तो वर्क डन तो ऑटोमेटिकली इक्वल टू ज़ीरो हो जाएगा।
टेंपरेचर कांस्टेंट है। टेंपरेचर कांस्टेंट है। इसका मतलब जो इंटरनल एनर्जी है वो भी हमारे पास कांस्टेंट हो जाएगी।
तो चेंज इन इंटरनल एनर्जी हमारे पास क्या हो जाएगा? ज़ीरो हो जाएगा। इतना तो आपको पता ही है ये बात। आप आराम से इस बात को
समझ पा रहे हैं कि ये वाली चीज क्या हो जाएगी? हमारे पास ज़ीरो हो जाएगी। और ये वाली चीज़ ज़ीरो हो जाएगी। और साथ ही साथ
अगर हमारे पास वर्क डन ज़ीरो हो जाएगा तो Q क्या हो जाएगा? Q की वैल्यू भी क्या हो जाएगी? ज़ीरो हो जाएगी। फर्स्ट लॉ ऑफ़
थर्मोडायनेमिक्स से। डन है दोस्तों? बस। अब यहां पर लेंगे हम लोग एक छोटा सा ब्रेक। ठीक है? आप सब लोग को भी ले लेना
है एक छोटा सा बढ़िया सा ब्रेक। इसके बाद अपन कंटिन्यू करेंगे टुवर्ड्स दी एंथैल्पी, हीट कैपेसिटी एंड कैलोरी
मैट्री। हां जी। तो अब हम लोग चलते हैं आगे एंड लेट्स स्टार्ट आवर डिस्कशन ऑन एंथैल्पी।
तो सबसे पहली चीज आपको यहां पर क्या याद रखनी है? आपको याद रखनी है कि एंथैल्पी को हम लोग रिप्रेजेंट करते हैं विद दी लेटर
एच। किस लेटर से रिप्रेजेंट करते हैं? एच से रिप्रेजेंट करते हैं। अब आपके दिमाग में सवाल आ रहा होगा सुनील भैया इसकी
जरूरत क्या है? एंथैल्पी की जरूरत क्या है? तो अभी तक आपने जो भी हीट चेंजेस देख रहे हैं वो एक कांस्टेंट वॉल्यूम पे देख
रहे हैं। यानी कि डेल्टा u की हम बात कर रहे हैं। व्हाट इज डेल्टा u? जो भी आपको अगर आप किसी भी सिस्टम को हीट दे रहे हो
या सिस्टम से हीट रिलीज हो रही है पर यह कास्टेंट वॉल्यूम पे हो रहा है तो यहां पर इंटरनल एनर्जी में चेंज आता है। किसी भी
सिस्टम में अगर आप लोग हीट एनर्जी दे रहे हैं या सिस्टम से हीट एनर्जी निकल रही है तो वो यहां पर सिर्फ और सिर्फ डेल्टा u के
बराबर होगा। क्योंकि यहां पर क्या हो जाएगा? अगर वॉल्यूम कांस्टेंट है तो वर्क डन क्या हो जाएगा? ज़ीरो। तो डेल्टा u =
हीट एनर्जी। अब वो आ रही है या जा रही है उसके बेसिस पे आप लोग साइन कन्वेंशन देंगे +q और -q जी अभी आपने ये थोड़ी देर पहले
मेरे से पढ़ा कि नहीं पढ़ा बताइए कि हीट एब्जॉर्ब बाय अ सिस्टम एट कॉन्सेंट वॉल्यूम आइसोकोरिक सो ज़ीरो वर्क डन इट इज़
रिप्रेजेंटेड बाय दिस ये अभी आपने थोड़ी देर पहले मेरे से पढ़ा कि नहीं पढ़ा ये सवाल हमने किया नहीं किया डेल्टा u = q ये
किया था ना हमने जी बिल्कुल तो यहां पर हम लोग बात कर रहे हैं कि जो भी हीट चेंजेस हमारे हो रहे हैं वो
कांस्टेंट वॉल्यूम पे हो रहे हैं। लेकिन अगर आप यहां पर थोड़ा दिमाग लगाएंगे तो जो भी आपकी केमिकल रिएक्शनंस होती हैं
मान लीजिए मैं एक टेस्ट ट्यूब में एक रिएक्शन करवाता हूं तो टेस्ट ट्यूब में जब मैं रिएक्शन करवा रहा हूं या बकर में मैं
जब रिएक्शन करा रहा हूं या कोनिकल फ्लास्क में रिएक्शन करवा रहा हूं तो वहां पर कांस्टेंट वॉल्यूम पे रिएक्शन करवा रहा
हूं या उसमें जो ऊपर प्रेशर लग रहा है कांस्टेंट एटमॉस्फेरिक प्रेशर उस पे करा रहा हूं। उसके ऊपर एक कांस्टेंट प्रेशर लग
रहा होगा जिसे एटमॉस्फेरिक प्रेशर कहते हैं। तो यहां पर याद रखिए मोस्ट ऑफ द केमिकल रिएक्शंस आर कैरिड आउट नॉट एट
कॉन्स्टेंट वॉल्यूम बट इन अ फ्लास्क और टेस्ट ट्यूब्स अंडर दी कॉन्स्टेंट एटमॉस्फेरिक प्रेशर। तो आपको जो भी हीट
चेंजेस कैलकुलेट करने हैं मेरे दादा, उसके लिए आपको एक अनदर स्टेट फंक्शन को डिफाइन करना पड़ेगा जिसका नाम क्या है? एंथैल्पी।
तो यहां पर मैं कामना करता हूं कि आपको मेरी बात समझ में आ रही है। आपको एंथैल्पी की
नीड समझ में आ रही है कि भाई मेरे आप अभी तक किस चीज की बात कर रहे थे? अभी तक तो आप हीट चेंजज़ एट द कॉन्स्टेंट वॉल्यूम की
बात कर रहे थे। यानी कि डेल्टा U लेकिन आप मोस्ट ऑफ़ द केमिकल रिएक्शंस को जब कराते हो तो दे हैपन एट दी कॉन्स्टेंट
एटमॉस्फेरिक प्रेशर यानी कॉन्स्टेंट प्रेशर पे हो रही हैं। तो यहां पर जो भी हीट चेंजिस होंगे उसको डिस्कस करने के लिए
हम एक और स्टेट फंक्शन की बात करेंगे। दैट इज़ एंथैल्पी। ठीक है? जी बहुत बढ़िया। तो एंथैल्पी हमको क्या बताती है? एंथैल्पी
हमको बताती है हाउ मच हीट अ सिस्टम कैन एक्सचेंज विद इट्स सराउंडिंग्स अंडर द कॉनस्टेंट प्रेशर। सिंपल सी बात। एंथैल्पी
हमको क्या बताती है कि एक सिस्टम अपनी सराउंडिंग के साथ कितनी हीट या तो दे सकता है या ले सकता है कांस्टेंट प्रेशर पे।
सिंपल एंथैल्पी यही बताता है। और ये दो चीजों का कॉम्बिनेशन होता है। सो इट इज़ द कॉम्बिनेशन ऑफ़ टू थिंग्स। द वेरी फर्स्ट
इज द इंटरनल एनर्जी। इंटरनल एनर्जी क्या होती है? दिस इज़ बेसिकली द एनर्जी रिलेटेड टू द टेंपरेचर एंड दी स्टेट ऑफ सिस्टम।
दूसरा दिस आल्सो टेल्स अस दी प्रेशर वॉल्यूम एनर्जी। दैट इज़ एनर्जी रिक्वायर्ड टू मेक द स्पेस। इसको हम लोग बोलते हैं
प्रेशर वॉल्यूम एनर्जी भी बोलते हैं। PV प्रेशर वॉल्यूम एनर्जी। तो जो एंथैल्पी है वह बेसिकली दो चीजों से
बना है। पहला इंटरनल एनर्जी और दूसरा प्रेशर वॉल्यूम एनर्जी। सो द एनर्जी रिक्वायर्ड टू मेक स्पेस फॉर द सिस्टम टू
एक्सपेंड और कॉन्ट्रैक्ट एनर्जी रिक्वायर्ड फॉर द एनर्जी रिक्वायर्ड टू मेक स्पेस फॉर द सिस्टम टू एक्सपेंड और
कॉन्ट्रैक्ट। दैट इज़ दी प्रेशर वॉल्यूम एनर्जी। और इंटरनल एनर्जी के सम से बनता है हमारे पास यहां पर हमारा एंथैल्पी।
ठीक है? सो एंथैल्पी इज इक्व u + pv यानी कि इंटरनल एनर्जी प्लस प्रेशर वॉल्यूम एनर्जी। एंथैल्पी इज इक्व टू इंटरनल
एनर्जी प्लस प्रेशर वॉल्यूम एनर्जी। क्लियर है बात? जी सुनील भैया। अब देखिए अगेन यहां पर वही चीज है कि जिस प्रकार आप
इंटरनल एनर्जी को मेजर नहीं कर सकते। यू मेज़र ओनली द वैल्यूज़ ऑफ़ डेल्टा U. सिमिलरली एब्सोल्यूट वैल्यूज़ आप इसकी भी
मेज़र नहीं कर सकते। देखिए एब्सोल्यूट वैल्यू ऑफ़ एंथैल्पी इज़ डिफिकल्ट टू मेजर एंड इन थर्मोडायनेमिक्स व्हाट मैटर्स
मोस्ट इज़ दी चेंज हैपनिंग इन दी एंथैल्पी। क्या मैटर करता है? चेंज हैपनिंग इन द एंथैल्पी मैटर बिटवीन द टू फिजिकल स्टेज
ड्यूरिंग एनी द ड्यूरिंग एनी फिजिकल और केमिकल प्रोसेस। मतलब सिंपल सी बात है। मुझे h मेजर नहीं कर सकता। मैं एब्सोल्यूट
वैल्यू ऑफ़ h मेजर नहीं कर सकता मैं। तो भाई साहब मुझे मेजर करना है यहां पर डेल्टाH। सिंपल सा कांसेप्ट वेरी वेरी
सिंपल। मैं एब्सोल्यूट वैल्यू ऑफ़ एंथैल्पी मेजर नहीं कर सकता हूं। मैं डेल्टाH ही मेजर कर सकता हूं। समझ में आ गई मेरी बात?
समझ में आ गई मेरी बात? जी सुनील भैया। अब देखो बहुत सिंपल सी बात है। इसको डिराइव करके देख लेते हैं। मानते हैं कि हमारे
पास यहां पर एक बकर है। ये रहा। ठीक है? और यही सेम बकर की सेकंड कंडीशन को मैं ड्रॉ कर रहा हूं। यहां पर मैं मानता हूं
कि एक पिस्टन हमने लगा रखा है। ठीक है ना? जी। और आप मानिएगा कि यहां पर एक प्रेशर लग रहा है और सिमिलरली यहां पर भी एक
प्रेशर लग रहा है। अब आप यहां पर मानिए आप यहां पर मानिए आप यहां पर मानिए कि प्रेशर ऑफ द गैस यहां पर
P1 है। इंटरनल एनर्जी U1 है। एंथैल्पी H1 है और टेंपरेचर यहां पर जो है वो T1 है। इस कंडीशन में प्रेशर P2 है। यह U2 है। यह
T2 है और एंथैल्पी H2 है। ठीक है? डन। एक ऊपर से जो प्रेशर लग रहा है वो
कांस्टेंट प्रेशर है जिसका नाम है बेसिकली हमारे पास P क्योंकि हम लोग क्या पढ़ रहे हैं?
हीट चेंजेस एट द कांस्टेंट प्रेशर की चर्चा हो रही है सुनील भैया। तो यहां पर जो ऊपर प्रेशर लग रहा है वो कांस्टेंट
रहेगा P। तो यहां पर मैंने एक बकर ले लिया। यहां पर मैंने क्लोज्ड कंटेनर ले लिया। सॉरी। इसमें एक पिस्टन लगा हुआ है
यहां पे। ऊपर से जो प्रेशर लग रहा है दैट इज P इंटरनल प्रेशर ऑफ द गैस है P1 इंटरनल एनर्जी है U1 एंथैल्पी H1 और टेंपरेचर है
T1 अब मैं आपको बोलता हूं कि यहां पर मैंने क्या कर दिया यहां पर मैंने Q अमाउंट का हीट दे दिया सिस्टम को Q अमाउंट
का हीट दे दिया सिस्टम को तो सिस्टम क्या करेगा सिस्टम एक्सपेंड करेगा आप सब लोग एग्री करते हैं इस बात से हां या ना मैंने
Q अमाउंट ऑफ हीट एनर्जी दिया सिस्टम एक्सपेंड करेगा प्रेशर P2 U2 T2 और H2 ये सारी चीजें यहां पे होगी। अब देखिए यहां
पर हम क्या करेंगे? ध्यान से देखिए। हमको तो चेंज इन एंथैल्पी कैलकुलेट करना है। डेल्टा h कैलकुलेट करना है। हम कर लेंगे।
सबसे पहले फर्स्ट लॉ ऑफ़ थर्मोडायनेमिक्स अगर मैं यहां पर लगाता हूं अकॉर्डिंग टू फर्स्ट लॉ ऑफ़ थर्मोडायनेमिक्स। एफ एल ओ ओ
ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ टी लिख रहा हूं। फर्स्ट लॉ ऑफ़ थर्मोडायनेमिक्स मैं लिखूंगा कि चेंज इन इंटरनल एनर्जी
मेरा यहां पर क्या होगा? सबसे पहले चेंज इन इंटरनल एनर्जी यहां पर क्या हुआ होगा? भाई आपने +q अमाउंट का हीट दिया है। आपने
+q अमाउंट का हीट दिया है। और वर्क डन बाय द सिस्टम ऑन द सराउंडिंग है। तभी तो ये खींच के ऊपर गया होगा। ये ऊपर गया होगा।
तो वर्क डन इज़ बेसिकली -w। इतना तो मैं काम ना करता हूं। सभी बालकों को ये बात समझ में आ रही होगी कि डेल्टा u
= +q - w ठीक है। जी जी सुनील भाई यह बात आपकी समझ में आ रही है। यह बात समझ में आ रही है।
अब यहां पर अगर आप दिमाग लगाते हैं तो आपको समझ में आता है कि जो वर्क डन होगा वो क्या होगा?
आइसोबिक है ना रिवर्सिबल आइसोबिक एक्सपेंशन या इररिवर्सिबल आइसोबिक एक्सपेंशन दोनों के अंदर ही क्या होता है?
माइनस का p एक्सटर्नल डेल्टाV के बराबर होती है वैल्यू। जी बिल्कुल बराबर होती है। लेकिन आपने यहां पर नेगेटिव साइन
कन्वेंशन पहले ही ले लिया है। तो वापस यहां नेगेटिव वैल्यू को मत ठोक देना। ठीक है ना? डायरेक्टली इसकी वैल्यू को इसके
अंदर सब्स्टट्यूट करता हूं। सब्स्टट्यूट 2 इन वन। सब्स्टट्यूट 2 इन वन।
यहां पर आपने पहले ही -w ले लिया है। तो सिर्फ और सिर्फ मैग्नीट्यूड को एंटर कीजिएगा p एक्सटर्नल डेल्टाV।
तो यहां पर हो जाएगा हमारे पास डेल्टा u = q - का p एक्सटर्नल डेल्टा v। क्लियर है बात? जी क्लियर है। इतना होने
के बाद आपने यहां पर क्या करना है? आपको एक बात समझ में आ गई है कि P एक्सटर्नल यहां पर कितना है? P के बराबर है। तो यहां
पर क्या हो जाएगा? Q इक्व ये हो जाएगा हमारे पास डेल्टा U प्लस ये हो जाएगा हमारे पास P डेल्टाV।
इतनी बात समझने में कितनों को दिक्कत है? बताओ। भाई Q = डेल्टा U + P डेल्टाV बिकॉज़ P एक्सटर्नल इक्वल्स टू दी P। इतनी बात
क्लियर है? जी बिल्कुल क्लियर है। अब यहां पर जो हीट एडिशन हुआ है, यहां पर क्या हुआ है? हीट इज़ एब्जॉर्ब्ड।
हीट इज़ एब्जॉर्ब्ड एट कास्टेंट प्रेशर। कितने बच्चों को यहां पे दिक्कत आ रही है? अरे आपने जो हीट एब्जॉर्ब करी है वो
कांस्टेंट प्रेशर पे करी है कि नहीं करी है? जी मालिक बिल्कुल करी है। तो qp लिख सकते
हैं। सो qp = डेल्टा u + p डेल्टाV लिख सकते हैं। जी बिल्कुल लिख सकते हैं। बहुत बढ़िया।
इसको आप बोल देंगे इक्वेशन नंबर थ्री। इसको समझने में कोई दिक्कत है क्या राजा? नहीं है। कोई दिक्कत नहीं है।
अब देखिए इसी को आगे कंटिन्यू करते हैं। इसी को आगे कंटिन्यू करते हैं। सो qp = ये हो जाएगा u2 - u1 + p ये हो
जाएगा v2 - v1 तो ये हो जाएगा u2 - u1 + pv2 - का pv1 यही हो जाएगा। जी बिल्कुल यही हो जाएगा।
ये हमारे पास क्या है? QP है। ठीक है भाई साहब? जी। इसी चीज को यहां पे लिख के आते हैं। तो हो जाएगा QP = अब ये हो जाएगा।
मैं इसको ऐसे कर रहा हूं। U2 ये देखिए U2 + PV2 कर रहा हूं। तो ये हो जाएगा U2 + PV2
माइनस को कॉमन ले लिया। माइनस कॉमन ले लिया। ये माइनस और ये माइनस है तो माइनस कॉमन ले लिया। ब्रैकेट लगा के लिख दिया
मैंने। U1 + PV1 अब U2 + PV2 क्या हो सकता है? U + P अ U + PV ठीक है ना? तो ये यहां पर
क्या हो सकता है? QP = ये हो सकता है H2 - का H1 तो ये हो जाएगा QP = डेल्टाH समझ में आ गया? सो दिस इज़ बेसिकली दी चेंज
इन एंथैल्पी। अब अगर आप देखेंगे कि इक्वेशन नंबर थ्री है। इक्वेशन नंबर फोर ये है। सो फ्रॉम थ्री एंड फोर थ्री एंड
फोर से आपके पास फाइनल इक्वेशन क्या आ जाएगा? डेल्टा = डेल्टा u डेल्टा u + p डेल्टाV
सिंपल सी बात है। डेल्टाH = डेल्टा U + P डेल्टा V आ जाएगा। सिंपल सी बात है। नहीं तो अगर आप सिर्फ
इतना भी निकालना चाहते हैं कि सुनील भैया h = u + pv है। अगर चेंज निकालना है तो चेंज इन एंथैल्पी तो यहां पर भी पूरे में
चेंज आ जाएगा। सिर्फ प्रेशर कांस्टेंट है तो चेंज इन इंटरनल एनर्जी प्लस प्रेशर बार डेल्टाV।
अब समझ रहे हैं? अगर इस पूरे का अगर मैं चेंज निकालूं तो क्या हो जाएगा? चेंज इन एंथैल्पी इक्व टू चेंज इन इंटरनल एनर्जी
प्लस प्रेशर कांस्टेंट है P बार डेल्टाV। ये चीज़ यहां आ गई। इसको अपन ने प्रूव करके भी देख लिया। तो चेंज इन एंथैल्पी इज
इक्वल्स टू चेंज इन द इंटरनल एनर्जी प्लस P डेल्टाV क्योंकि यहां पर प्रेशर हमारे पास क्या हो जाएगा? दिस विल बी कास्टेंट।
तो यहां पर ये देखिए इधर ये भी एक बहुत इंपॉर्टेंट पॉइंटर है। इट इज़ेंट टू नोट दैट व्हेन द हीट इज़ एब्जॉर्ब्ड और रिलीज़्ड
बाय द सिस्टम एट कॉन्सेंट प्रेशर वी आर एक्चुअली मेज़र्ड द चेंजज़ इन एंथैल्पी। जब भी सिस्टम के अंदर हीट अगर आएगी या हीट
अगर जाएगी, अगर यह सब कुछ कॉन्स्टेंट प्रेशर पे हो रहा है, दैट मींस वी आर टॉकिंग अबाउट द चेंजज़ इन दी एंथैल्पी।
क्लियर है बात? जी सुनील भैया। आगे चलेंगे। व्हाट इज द वैल्यू ऑफ़ चेंज इन एंथैल्पी? यानी कि डेल्टाH इफ हीट एडिशन
इज़ डन एट कॉन्सेंट वॉल्यूम। कॉन्सेंट वॉल्यूम पे हो रहा है। यानी कि डेल्टाV क्या हो जाएगा? ज़ीरो हो जाएगा। तो, हमको
क्या पता है? डेल्टाH = डेल्टाH = डेल्टा U + P डेल्टाV ये वाला पूरा का पूरा टर्म ही हो जाएगा
ज़ीरो। सो डेल्टाH = डेल्टा U क्लियर है बात? व्हाट इज़ द वैल्यू ऑफ़ चेंज इन एंथैल्पी इफ द हीट एडिशन इज़ डन एटॉन्सेंट
वॉल्यूम? कॉन्स्टेंट वॉल्यूम पे करोगे तो P डेल्टाV ज़ीरो हो जाएगा। डेल्टा H = डेल्टा U हो जाएगा। उसके बाद एग्जोथर्मिक
एंड एंड एंड एंड एंड एंड एंड एंड एंड एंड एंडोथर्मिक रिएक्शंस के बारे में अगर हम चर्चा करें तो एग्जोथर्मिक एंड एंडोथर्मिक
रिएक्शंस ऑन द बेसिस ऑफ डेल्टाH हमारे पास क्या हो जाएगा? फटाफट से देखेंगे। बड़ी ही सरल सी बात है यहां पे। एग्जोथर्मिक
रिएक्शन का मतलब होता है हीट एनर्जी रिलीज़ हो रही है सिस्टम से सराउंडिंग में। एग्जोथर्मिक रिएक्शन का मतलब होता है
सिस्टम से सराउंडिंग में हीट जाना। और एंडोथर्मिक का मतलब होता है कि हीट एनर्जी इज़ गिवन और एब्सॉर्ब फ्रॉम द सराउंडिंग टू
द सिस्टम। पहले इतनी बात याद हुई? एग्जो का मतलब है एग्जिट। यानी कि सिस्टम से सराउंडिंग में हीट का एग्जिट। एग्जिट
एग्जिट होना। और अगर सराउंडिंग से सिस्टम में अगर हीट एनर्जी आ रही है, सराउंडिंग से सिस्टम में अगर हीट एनर्जी आ रही है,
एब्सॉर्ब हो रही है, सो दैट मींस दिस इज़ कॉल्ड एज दी एंडोथर्मिक प्रोसीजर। एंडोथर्मिक होगा। ये हमारे पास सिस्टम है।
सिस्टम से सराउंडिंग के अंदर अगर हीट एनर्जी जा रही है तो ये क्या हो जाएगा हमारे पास? एग्जोथर्मिक।
और अगर सराउंडिंग से सिस्टम के अंदर अगर हमारे पास हीट एनर्जी आ रही है तो दैट इज कॉल्ड एज दैट इज कॉल्ड एज दैट इज कॉल्ड एज
एंडोथर्मिक। ठीक है? जी। अब यहां पर हमारे पास डेल्टाH क्या हो जाएगा? खुद से दिल से बता दो तुम। तुमको पता है कि ये हीट एडिशन
एट द कांस्टेंट प्रेशर इज इक्व डेल्टाH = H2 - का H1 होता है। सिमिलरली हीट एडिशन एट द कॉन्सेंट प्रेशर = डेल्टाH = H2 - का
H1 होता है। अब मैं आपसे एक छोटी सी बात पूछता हूं। एग्जोथर्मिक के अंदर अगर हीट एनर्जी रिलीज हो जाएगी
तो H2 बड़ा होगा या H1 बड़ा होगा? ऑब्वियसली अगर हीट एनर्जी रिलीज हो जाएगी सिस्टम से तो जो H2 की वैल्यू है वो H1 से क्या हो
जाएगी? ऑब्वियसली कम हो जाएगी। तो यहां पर क्या हो जाएगा? H2 विल बी लेसर देन H1 हो जाएगा।
इसका मतलब जो डेल्टाH है हमारे पास वह क्या हो जाएगा? नेगेटिव हो जाएगा। तो याद रखिएगा डेल्टाH इज नेगेटिव फॉर
एग्जोथर्मिक रिएक्शंस। और अगर आप देखेंगे यहां पर देखेंगे तो अगर यहां पर हीट एनर्जी एब्जॉर्ब हो रही है तो
H2 की वैल्यू क्या हो जाएगी? तो यहां पर हो जाएगा H2 > H1 और अगर H2 > H1 हो जाएगा तो डेल्टाH क्या हो जाएगा? डेल्टाH हो
जाएगा पॉजिटिव और पॉजिटिव हो जाएगा। इसका ये मतलब है कि एंडोथर्मिक होगा। इतनी बात समझने में कोई दिक्कत? अरे भाई
कोई दिक्कत? अरे भाई कोई दिक्कत नहीं। तो सिंपल सी बात है। QP = डेल्टाH H2 - H1 अगर हमारे पास हीट एनर्जी रिलीज़ हो रही है
तो H2 की वैल्यू H1 से कम होगी। H2 की वैल्यू H1 से कम होगी। इसका मतलब ये वैल्यू नेगेटिव होगी। एग्जोथर्मिक।
अगर हमारे पास हीट एब्सॉर्ब हो रही है तो H2 की वैल्यू H1 से ज्यादा होगी। तो डेल्टा H पॉजिटिव होगा। इसका मतलब
एंडोथर्मिक। याद हो गया? जी सुनील भाई याद हो गया। कोई दिक्कत नहीं है। उसके बाद अगर हम यहां पर आगे पढ़ेंगे चेंज इन एंथैल्पी
के बारे में तो और एक मस्त बात आपको बताता हूं। एक बढ़िया एक्सप्रेशन आपको बताता हूं। सबसे पहले द डिफरेंसेस बिटवीन दी डेल्टा H
एंड डेल्टा U इज़ नॉट यूजुअली सिग्निफिकेंट फॉर सिस्टम कंसिस्टिंग ऑफ ओनली सॉलिड्स एंड लिक्विड्स। एज दे डू नॉट सफर द
वॉल्यूम चेंजेस अपॉन हीटिंग। होता क्या है कि सॉलिड्स और लिक्विड्स के अंदर इतने ज्यादा वॉल्यूम में
सिग्निफिकेंट चेंजज़ नहीं आते गर्म करने पे। आप मुझे बताइए क्या ठोस और तरल पदार्थों के वॉल्यूम में इतने ज्यादा
सिग्निफिकेंट चेंजज़ आएंगे क्या हीट करने पे? तो यहां पर याद रखिएगा कि सॉलिड और लिक्विड में इतने सिग्निफिकेंट वॉल्यूम
चेंजज़ नहीं आते हीट करने पे। तो इसीलिए जो हमारे पास डेल्टा H एंड डेल्टा U की हम बात कर रहे हैं दैट इज दैट बिकम्स मोर
मीनिंगफुल फॉर गैसेस। ठीक? जी। अब अपन एक क्या करते हैं? अपन क्या करते हैं? यहां पे ध्यान से देखना।
अपन क्या करते हैं? अपन क्या करते हैं? लेट अस कंसीडर अ रिएक्शन इनवॉल्विंग द गैसेस। लेट अस कंसीडर अ रिएक्शन
इनवॉल्विंग द गैसेस। पहला वाला पॉइंटर क्लियर है ना? पहला वाला पॉइंटर कह रहा है, द डिफरेंस बिटवीन डेल्टा H एंड डेल्टा
U इज़ नॉट सिग्निफिकेंट फॉर सिस्टम्स इन कंसिस्टिंग ऑफ़ ओनली सॉलिड्स एंड लिक्विड्स। क्योंकि सॉलिड्स एंड लिक्विड्स
के वॉल्यूम में इतने सिग्निफिकेंट चेंजज़ नहीं आते हीटिंग पे। सो दैट्स व्हाई इन दोनों चीजों का जो डिफरेंस है इतना
सिग्निफिकेंट नहीं है। बट ये मेजरली हमारे लिए इंपॉर्टेंट बन जाता है जब हम गैसेस की बात कर रहे हैं। दूसरी बात ये है कि यहां
पर अपन क्या कर रहे हैं? एक रिएक्शन ले रहे हैं जहां पर सिर्फ गैसेस हैं। अब VA जो है वो टोटल वॉल्यूम है गैसियस
रिएक्टेंट का और VB है टोटल वॉल्यूम ऑफ़ गैसियस प्रोडक्ट्स। एक रिएक्शन चल रही है। टोटल वॉल्यूम ऑफ़ गैसियस रिएक्टेंट VA टोटल
वॉल्यूम ऑफ़ गैसियस प्रोडक्ट्स VB। और NA जो है गैसियस रिएक्टेंट्स के मोल है। NB जो है गैसियस प्रोडक्ट्स के मोल्स हैं।
याद रखना रिएक्शन कांस्टेंट प्रेशर और टेंपरेचर पे हो रही है। तो अब आइडियल गैस इक्वेशन से इसको लिख लेते हैं। तो अपने
पास जो आइडियल गैस लॉ है उसके बेसिस पे हम लिखेंगे कि PVA =
NA RT. कॉन्स्टेंट कॉन्स्टेंट कॉन्स्टेंट। उसी प्रकार से PVB = NBRT क्या-क्या कांस्टेंट है हमारे पास? प्रेशर
और टेंपरेचर कांस्टेंट है इक्वेशन नंबर वन और टू में। टू में से वन को माइनस कर दीजिए। टू में से वन को अगर आप माइनस कर
देंगे तो ये आपके पास क्या आ जाएगा? PVB - का PVA = NBRT
माइनस क्या हो जाएगा? माइनस हो जाएगा सुनील भैया NART तो अगर प्रेशर को कॉमन ले लेंगे तो हो
जाएगा VB - का VA = RT कॉमन ले लिया तो ये हो जाएगा NB - का NA
ये हो जाएगा हमारे पास P डेल्टाV हो जाएगा P डेल्टाV हो जाएगा और ये वाली जो चीज हो जाएगी इसको हम बोलेंगे डेल्टाNGRT
ये हो जाएगा हमारे पास ये अब डेल्टा ng हमारे पास एक्चुअल में क्या हो गया? डेल्टा ng = नंबर ऑफ
मोल्स ऑफ गैसियस प्रोडक्ट माइनस नंबर ऑफ मोल्स ऑफ गैसियस
रिएक्टेंट्स। अरे NB - Na को डेल्टा NG बोल दिया मैंने। तो नंबर ऑफ मोल्स ऑफ द गैसियस प्रोडक्ट
माइनस नंबर ऑफ मोल्स ऑफ द गैसियस रिएक्टेंट्स डेल्टा ng डेल्टा ng डेल्टा ng डेल्टा ng ठीक है तो ये डेल्टा ng =
नंबर ऑफ मोल्स ऑफ़ द गैसियस प्रोडक्ट्स माइनस नंबर ऑफ़ मोल्स ऑफ़ गैसियस रिएक्टेंट्स NB - NA ठीक है? जी बिल्कुल
सही बात है। अब मुझे बताइए आपके पास जो इक्वेशन थी वो क्या थी? आपके पास इक्वेशन थी डेल्टाH = डेल्टाu + p डेल्टाV ये
इक्वेशन नंबर अपने पास हो गई थ्री इसकी वैल्यू को इसके अंदर डालेंगे फ्रॉम इक्वेशन थ्री हमारे पास क्या हो जाएगा
हमारे पास हो जाएगा डेल्टाH इक्व टू क्या हो जाएगा डेल्टा U + डेल्टा U प्लस ये क्या हो जाएगा भाई डेल्टाNGRT हो
जाएगा काम ही खत्म अरे काम ही खत्म। ये भी एक इंपॉर्टेंट इक्वेशन हो गई हमारे पास। सो डेल्टाH =
डेल्टा U + डेल्टा NG RT। चलिए अब चलते हैं आगे और फटाफट से सॉल्व करते हैं यहां पे एक बेहतरीन से न्यूमेरिकल को जो हमारे
पास है एनसीईआरटी का एक सॉल्वड प्रॉब्लम दैट इज़ एनसीआरटी सॉल्वड प्रॉब्लम 5.5। सवाल आपसे कह रहा है इफ वाटर वेपर इज़
अस्यूम टू बी अ परफेक्ट गैस। यानी कि जो गैसियस फॉर्म ऑफ़ वाटर होता है। दैट इज इसको मान लिया कि एक परफेक्ट गैस है। अब
ये बोल रहा है कि मोलर एंथैल्पी चेंज यानी कि यह जो डेल्टाH है चेंज इन एंथैल्पी है ये पर मोल में इसकी वैल्यू दे रखी है कि
भाई वेपराइजेशन ऑफ़ वन मोल ऑफ़ वाटर एट वन बार एट 100° सेल्सियस इज़ 41 kJ पर मोल। ठीक है? बहुत बढ़िया। कैलकुलेट द इंटरनल
एनर्जी चेंज। यानी कि डेल्टा U आपको कैलकुलेट करना है। व्हेन वन मोल ऑफ़ वाटर इज़ वेपराइज़्ड एट वन बार एंड वन बार प्रेशर
एंड 100° सेल्सियस। देखिए दोस्तों ये बहुत सिंपल सी बात कह रहा है कि आपके पास मान लीजिए 1 मोल वाटर
है और अगर आपने इसको 100° सेल्सियस या और वन बार प्रेशर पे हीट किया तो ये आपको देगा 1 मोल वाटर वेपर। यही बोल रहा है। जी
बिल्कुल। अब इसका इसने आपको डेल्टाH दे रखा है जिसको अपन ने जूल्स पर मोल में कन्वर्ट कर दिया और डेल्टा U आपसे पूछा
है। अब देखिए इसका फार्मूला आपको पता ही है। अभी आपने देखा था डेल्टाH = डेल्टा U + डेल्टा NGRT जी सुनील भैया बिल्कुल सही
है। कैलकुलेट क्या करना है दादा? कैलकुलेट क्या करना है? डेल्टा U तो डेल्टाH - का डेल्टा NGRT लगा लेंगे भाई साहब। बहुत ही
आसान भाई साहब। अच्छा मेरे को एक बात बताओ डेल्टा NG क्या हो जाएगा? नंबर ऑफ मोल्स ऑफ द गैसियस रिएक्टेंट्स एक है। एक है
माइनस नंबर ऑफ मोल्स ऑफ़ गैसियस प्रोडक्ट। गैसियस प्रोडक्ट कुछ है ही नहीं। गैसियस प्रोडक्ट कुछ नहीं है तो ज़ीरो हो जाएगा।
तो ये वाली वैल्यू कितनी आ गई? वन आ गई। तो डेल्टा NG तो वन हो गया। सो डेल्टा U = डेल्टाH हो जाएगा 41000
जूल्स पर मोल माइनस का 1 क्रॉस यूनिवर्सल गैस कांस्टेंट होता है 8.314 जूल पर मोल * केल्विन
यही इसकी वैल्यू होती है। जी भाई साहब यही इसकी वैल्यू होती है। इसकी वैल्यू जूल में थी। इसीलिए मैंने
यहां पर आपके डेल्टाH की वैल्यू को कन्वर्ट करा। आपको लगता है कि नहीं भैया हम तो इसको किलोजूल में रखेंगे। तो यहां
पर यह जो वैल्यू्यूज आएंगी इनको फर्दर आप किलोजूल में कन्वर्ट कर देते हैं। एक ही बात है कोई दिक्कत वाली बात नहीं है।
अच्छा उसके बाद डेल्टा ng r और t होता है हमारे पास 100° सेल्सियस दे रखा है। तो 373 केल्विन हो जाएगा। तो मल्टीप्लाई बाय
373 केल्विन। काम ना करता हूं समझ में आ रहा होगा। डेल्टा की वैल्यू - डेल्टा ng की वैल्यू आ गई। r की वैल्यू आ गई और t की
वैल्यू यह रही। अब क्या करोगे दादा? केल्विन से केल्विन को कट कर दोगे। यह हमारे पास कितना हो जाएगा यहां पर? यह
हमारे पास कितना हो जाएगा बेटा? ये हमारे पास कितना हो जाएगा? ये हो जाएगा 41000 जूल्स पर मोल। एप्रोक्सीमेशन से सॉल्व
करते हैं। ज्यादा बेटर रहेगा। इसको बैठ के सॉल्व करेंगे। रात हो जाएगी। इसको 10 मान लो। सीधा 10 मान लो। 10 * 373 कितना हो
जाएगा? यह हो जाएगा 3730 जूल्स पर मोल। देख रहे हो? तो कैलकुलेशन आसान हो गई।
तो ये किसके इक्वल हो जाएगा? 41,000 में से कितना माइनस करना है? 41,000 में से माइनस करना है 3730
तो ये हो जाएगा 0 ये हो जाएगा सात। ये हो जाएगा बेसिकली दो। ये हो जाएगा सात और ये हो जाएगा तीन। 37270
तो ये हो जाएगा 37270 जूल पर मोल। तो ये किलोजूल पर मोल में कितना हो जाएगा? 37.270
किलोजूल पर मोल हो जाएगा। तो 37.270 किलोजूल पर मोल में आंसर आ जाएगा। सुनील
भैया अगर मैं स्टार्टिंग में इसको किलजूल पर मोल में रखता तो मेरे भाई कोई दिक्कत नहीं है। आपको ये वाली जो वैल्यू है इसको
किलोजूल पर मोल में कन्वर्ट करना होता। माइनस करते तब भी ये सेम वैल्यू आती। करके देख लो। यही आंसर आएगा। ठीक है भाई। जी
सुनील भैया। अगली चीज पे चलें। जी सुनील भैया। तो यहां तक अगर समझ में आ गया तो एक बार कमेंट सेक्शन में सारे के सारे भाई एक
बार आई बी लगा देना। अब आगे चलते हैं। एंड लेट्स स्टार्ट विद हीट कैपेसिटी। सबसे पहली चीज जो तुमको याद रखनी है हीट
कैपेसिटी को तुम लोग रिप्रेजेंट करोगे यहां पर सी से। अब हीट कैपेसिटी पे जाने के लिए हमें क्या समझना पड़ेगा? एक बहुत
ही सिंपल सा कांसेप्ट समझना पड़ेगा। मैं तुमको बोलता हूं कि मैं सिस्टम को q अमाउंट में हीट देता हूं। लेट्स सपोज q
अमाउंट ऑफ हीट इज़ गिवन टू द सिस्टम। तो उसके टेंपरेचर में कुछ राइज आएगा। हां या ना? मैं ये बोलता हूं
कि अपन कुछ हीट देते हैं सिस्टम को। क्यों? जो कि अपीयर करेगा एज अ राइज़ इन द टेंपरेचर ऑफ द सिस्टम। एग्री करते हो कि
नहीं करते हो? इन केस कि हीट उसने एब्जॉर्ब करी है। तो यहां पर क्या मैं ये बोल सकता हूं कि जो इंक्रीस ऑफ़ द टेंपरेचर
है, दिस इज़ डायरेक्टली प्रपोर्शनल टू द हीट ट्रांसफरर्ड। हां या ना? मान लो मैंने q अमाउंट का हीट सराउंडिंग
से सिस्टम पर ट्रांसफर किया तो यहां पर एक चेंज इन टेंपरेचर आया होगा। मान लो पहले इनिशियल टेंपरेचर t1 था। फाइनल टेंपरेचर
t2 आ गया। तो चेंज इन टेंपरेचर कितना आया? t2 - t1 व्हिच इज़ डायरेक्टली प्रोपोर्शनल टू द q।
सही है? तो मैं यहां पे ये बोल सकता हूं कि जो q है दैट इज़ डायरेक्टली प्रोपोर्शनल टू द चेंज इन टेंपरेचर।
इसको हटाएंगे डायरेक्ट प्रोपोर्शनैलिटी के साइन को तो इक्वल टू एक कांस्टेंट आएगा c डेल्ट t ये जो c है ये और कुछ नहीं बट ये
आपका क्या है हीट कैपेसिटी है ये आपका क्या है हीट कैपेसिटी है क्या हो जाएगा हीट कैपेसिटी
तो अगर आप यहां पे इस जादुई इक्वेशन को देखें तो ये आपको क्या कह रही है कि आपने जो सिस्टम को हीट दी है आप उसको आसानी से
मेजर कर सकते हो अगर आपको हीट कैपेसिटी सिस्टम की पता है और चेंज इन टेंपरेचर पता है। बात खत्म। देखो कितनी बढ़िया इक्वेशन
है। ये बोल रही है कि वी कैन मेजर द हीट सप्लाइड बाय मॉनिटरिंग द टेंपरेचर राइज प्रोवाइडेड वी नो द हीट कैपेसिटी। सिंपल
सी बात है। अगर आपको हीट कैपेसिटी पता है और चेंज इन टेंपरेचर पता है कि पहले इनिशियल टेंपरेचर t1 था। अभी t2 होता है।
तो t2 - t1 यानी डेल्टा t होता है। इस आपके पास हीट कैपेसिटी है तो आपने कितनी हीट ट्रांसफर करी आप निकाल सकते हो।
आप मेरी बात समझ रहे हो कि नहीं समझ रहे हो? तो यहां पर हमारे पास एक रिलेशन आता है q = c * डेल्टा t जो हमको यह कह रहा है
कि अगर अपन ने सिस्टम को q अमाउंट में हीट दी है और उसके टेंपरेचर में मान लीजिए डेल्टा t में चेंज आया है। अगर हम उसकी
हीट कैपेसिटी जानते हैं तो हीट कैपेसिटी को अगर हम डेल्टा t से मल्टीप्लाई कर देंगे तो हम q की वैल्यू निकाल सकते हैं
कि हमने कितनी ट्रांसफर करी होगी। अच्छा एक इंपॉर्टेंट बात और यहां पर ये आती है कि जो C की वैल्यू है वो किस-किस पे
डिपेंड करती है। तो ये डिपेंड करती है आपके साइज ऑफ सिस्टम पे। ये डिपेंड करती है आपकी कंपोज़शन ऑफ सिस्टम पे और नेचर ऑफ
द सिस्टम पे। इन तीन चीजों पे डिपेंड करती है आपकी हीट कैपेसिटी की वैल्यू। क्लियर है बात? जी सुनील भैया। अब एक
लॉजिकल सवाल। यह है द मोर द वैल्यू ऑफ C इट मींस द राइज इन द टेंपरेचर विल बी लो। इट मींस द राइज़ इन द टेंपरेचर विल बी लो।
क्या ये सत्य बात है? हां या ना? मैं आपको कह रहा हूं अगर आपकी हीट कैपेसिटी की किसी भी सिस्टम की वैल्यू जो है वो ज्यादा है।
तो यहां पे जो राइज़ इन टेंपरेचर होगा वह लो होगा। यहां पे राइज़ इन द टेंपरेचर विल बी लो।
यह बात सही है। जी 100% सही है। 100% सही है। अभी मैं आपको एक एग्जांपल देता हूं। जैसे
मान लीजिए अपन ने एक सिस्टम को जो हीट ट्रांसफर करी है वो है 100 जूल्स। ध्यान से समझना। तो अपन एक केस मानते हैं
जहां पर सिस्टम की हीट कैपेसिटी कितनी है? अ एक केस में एक केस में अ दोनों में 100 रख रहे हैं अपन।
अब एक केस में C कितना है और चेंज इन टेंपरेचर कितना है देखना। एक केस में अगर ये 25 है तो ये फोर होगा
और एक केस में अगर ये 50 है तो ये टू होगा। मल्टीप्लाई करोगे तो ये q की वैल्यू आ जाएगी। q = c * डेल्टा t होता है। मैं
मान लेता हूं एक सिस्टम को 100 जूल्स की हीट एनर्जी प्रोवाइड करता हूं। तो यह मेरे पास है सिस्टम वन। यह मेरे पास है सिस्टम
वन और यह मेरे पास है सिस्टम टू। सिस्टम वन में जो हम लोग C की बात कर रहे हैं हीट कैपेसिटी मान लीजिए 25 है तो चेंज
इन टेंपरेचर होगा फोर। सिस्टम टू की हीट कैपेसिटी अगर 50 है तो चेंज इन टेंपरेचर होगा टू। तो क्या यहां पर हीट कैपेसिटी की
वैल्यू डेल्टा T की वैल्यू को डिसाइड कर रही है। जी बिल्कुल 110% कर रही है। द मोर द वैल्यू ऑफ़ C द इट मींस द राइज़ इन द
टेंपरेचर वुड बी लो। ऐसे भी तो समझ सकते हो ना। अगर आप ऐसे नहीं समझ पा रहे तो ऐसे समझ सकते हो। c = q/ डेल्टा
जितना तुम्हारा c का वैल्यू ज्यादा होगा उतना डेल्टा t का वैल्यू क्या होगा? कम होगा ना? ऑब्वियसली अगर ये c की वैल्यू
बढ़ रही है इसका मतलब ये डिनोमिनेटर वाली वैल्यू छोटी से छोटी होगी। तभी तो c की वैल्यू बढ़ रही है। जी बिल्कुल सही बात
है। तो काम ना करता हूं आपको ये बात समझ में आ रही होगी कि अगर c की वैल्यू हमारी जितनी ज्यादा होगी उतना ही डेल्टा T का
वैल्यू घटेगा। क्लियर है? क्लियर है? जी बिल्कुल क्लियर है। अब देखिए यहां पर हम लोग दूसरे
टर्मिनोलॉजी को सीख सीखते हैं। दैट इज कॉल्ड एज द मोलर हीट कैपेसिटी व्हिच इज़ कॉल्ड एज द सीएम। नाउ व्हाट इज़ मोलर हीट
कैपेसिटी? सुनील भैया यहां पे भी दो पॉइंटर पे डिस्कशन करेंगे। जल्दी से देखो। तो जो हीट कैपेसिटी हमारे पास होती है,
दैट इज़ डायरेक्टली प्रोपोर्शनल टू दी अमाउंट ऑफ सब्सटेंस। मतलब जो हीट कैपेसिटी है किसी भी सिस्टम की, दैट डिपेंड्स ऑन दी
अमाउंट ऑफ़ सब्सटेंस। यानी कि वहां पे उस सिस्टम में कितना अमाउंट ऑफ सब्सटांस यानी कि नंबर ऑफ मोल्स हैं।
तो अगर इसको हम लोग हटाते हैं तो हमारे पास क्या आ जाएगा? देयर विल बी अ कॉन्स्टेंट ऑफ़ प्रोपोर्शनैलिटी व्हिच इज़
कॉल्ड एज cm टाइम्स N. CM क्या होता है? मोलर हीट कैपेसिटी। क्या होता है ये? मोलर हीट कैपेसिटी। तो यह हम
कह रहे हैं कि हमारे पास जो हीट कैपेसिटी है दैट इज डायरेक्टली प्रोपोर्शनल टू दी अमाउंट ऑफ सब्सटेंस यानी कि n. सो c इज़
डायरेक्टली प्रोपोर्शनल टू n. इसको हटाएंगे तो कांस्टेंट ऑफ़ प्रोपोर्शनैलिटी आ जाएगा इक्वल टू CM टाइम्स N हो जाएगा।
तो मोलर हीट कैपेसिटी को अपन कैसे डिफाइन कर सकते हैं? इट इज़ द हीट नीडेड टू रेज़ द टेंपरेचर ऑफ़ 1 मोल ऑफ़ सब्सटेंस बाय 1
डिग्री सेल्सियस और 1 केल्विन। यानी हमको कितना अमाउंट ऑफ हीट एनर्जी का जरूरत पड़ेगा एक मोल सब्सटांस का एक यूनिट
टेंपरेचर बढ़ाने के लिए उसे मोलर हीट कैपेसिटी कहेंगे। फिर से सुनो। मान लो मेरे पास एक मोल सब्सटांस है। मैं एक मोल
पे बात कर रहा हूं। आई एम जस्ट टॉकिंग इन टर्म्स ऑफ़ वन मोल। मोलर और स्पेसिफिक हमने आगे बात किया था इंटेंसिव एंड एक्सटेंसिव
प्रॉपर्टी में। पर यूनिट मास पर यूनिट मोल। याद आ रहा है? पर यूनिट मास पर यूनिट मोल। यानी कि
यहां पर यहां पर यहां पर हम यहां पर बात करेंगे या तो पर यूनिट मास पे पर यूनिट मोल पे मोलर हीट कैपेसिटी हमसे क्या
कहेगा? मोलर हीट कैपेसिटी कहता है कितने हीट की मुझे जरूरत है टू रेज द टेंपरेचर ऑफ वन मोल यूनिट पर यूनिट का मतलब क्या
था? यूनिट यानी कि वन। कितनी हीट की मुझे जरूरत पड़ेगी 1 मोल सब्सटांस का 1 डिग्री सेल्सियस से टेंपरेचर बढ़ाने के लिए? दैट
इज कॉल्ड एज दी मोलर हीट कैपेसिटी। और स्पेसिफिक हीट कैपेसिटी क्या होगी? अब तुम बहुत समझदार हो।
अमाउंट ऑफ हीट एनर्जी रिक्वायर्ड टू रेज द टेंपरेचर ऑफ 1 यूनिट यानी कि पर यूनिट पर यूनिट मास यानी कि 1 किलोग्राम या 1 ग्राम
सब्सटांस के टेंपरेचर को एक यूनिट से बढ़ाने के लिए। मेरी बात समझ में आ रही है? मोलर हीट कैपेसिटी का मतलब क्या था?
कि यानी कि पर यूनिट मोल पे यानी कि 1 मोल सब्सटांस का 1 डिग्री सेल्सियस या 1 केल्विन टेंपरेचर बढ़ाने के लिए कितनी हीट
मुझे चाहिए? दैट इज़ कॉल्ड एज अ मोलर हीट कैपेसिटी। ऐसे ही स्पेसिफिक हीट यानी कि पर यूनिट मास यानी कि 1 किलोग्राम या 1
ग्राम सब्सटेंस के टेंपरेचर को 1 डिग्री सेल्सियस 1 केल्विन से बढ़ाने के लिए मुझे कितनी हीट देनी पड़ेगी? वो वाली चीज हो
जाएगी स्पेसिफिक हीट कैपेसिटी। बहुत सिंपल सी बात है। जी। तो यहां पर हम मोलर हीट कैपेसिटी को थोड़ा सा डिराइव करके देखते
हैं। सो वी नो दैट q = c टाइम्स द डेल्टा t अब यहां पर हमारे पास क्या है? इक्वेशन नंबर वन है। तो फ्रॉम इक्वेशन नंबर वन c =
टू क्या हो जाएगा? c = टू हो जाएगा cm टाइम्स n टाइम्स द डेल्टा t सो cm इक्व q / n टाइम्स द डेल्टा t दिस इज़ कॉल्ड एज
दी मोलर हीट कैपेसिटी मोलर हीट कैपेसिटी मोलर हीट कैपेसिटी मोलर हीट कैपेसिटी मोलर हीट कैपेसिटी उसके बाद स्पेसिफिक हीट
कैपेसिटी। नाउ व्हाट इज़ स्पेसिफिक हीट कैपेसिटी भाई? अरे स्पेसिफिक हीट कैपेसिटी क्या होगी? मैंने बताया था स्पेसिफिक और
मोलर प्रॉपर्टीज का मतलब क्या है? स्पेसिफिक का मतलब होता है पर यूनिट मास। और मोलर का मतलब होता है पर यूनिट मोल। तो
यहां पर स्पेसिफिक हीट कैपेसिटी क्या हो जाएगी सबसे पहले? अमाउंट ऑफ हीट रिक्वायर्ड टू रेज द टेंपरेचर ऑफ वन यूनिट
मास ऑफ अ सब्सटेंस। 1 यूनिट मास का मतलब होता है कि या तो 1 ग्राम या तो 1 किलोग्राम। अग्री करते हो कि नहीं करते
हो? जल्दी से बताओ हां या ना? पर यूनिट मास यानी कि कितनी हीट की हमें जरूरत है? कितनी हीट एनर्जी की मुझे जरूरत
पड़ेगी 1 ग्राम या 1 किलोग्राम सब्सटांस के टेंपरेचर को 1 डिग्री सेल्सियस या 1 केल्विन से बढ़ाने के लिए? उसको मैं
बोलूंगा स्पेसिफिक हीट कैपेसिटी। अब इस केस में हमारे पास क्या होता है? ध्यान से देखिए। C इज डायरेक्टली
प्रोपोर्शनल टू यानी कि जो हमारे पास हीट कैपेसिटी है दैट इज़ डायरेक्टली प्रोपोर्शनल टू द मास ऑफ़ द सब्सटेंस। तो
ये मैं कह सकता हूं कि C इज़ डायरेक्टली प्रोपोर्शनल टू M. इसको हटाएंगे तो एक कॉन्स्टेंट ऑफ़ प्रोपोर्शनलिटी आ जाएगा
स्मॉल M. सो C = CM हो जाएगा। एंड दिस स्मॉल C इज़ नथिंग बट दी स्पेसिफिक हीट कैपेसिटी। सो अगेन वही डेरिवेशन करेंगे। Q
= C टाइम्स डेल्ट T तो फ्रॉम इक्वेशन वन C की वैल्यू क्या हो जाएगी? c * M डेल्टा T स्पेसिफिक हीट
कैपेसिटी = Q/ M डेल्टा T इक्वेशन हमारे पास हो जाएगी स्पेसिफिक हीट कैपेसिटी की। इसको याद रख लेंगे।
स्पेसिफिक हीट कैपेसिटी = q / m डेल्ट मोलर हीट कैपेसिटी = q/ n डेल्टा t चलो बहुत बढ़िया बहुत बढ़िया बहुत बढ़िया
बहुत बढ़िया अब एक बढ़िया से रिलेशनशिप है। अब यहां पर आप भैया लिख के क्यों आए हो? क्योंकि समय
थोड़ा बचा ना लेक्चर नहीं तो बहुत लंबा होता जाता है। अब नाउ वी नीड टू अंडरस्टैंड द रिलेशनशिप बिटवीन सीपी एंड
सीवी फॉर एन आइडल गैस। ठीक है ना? अब सीपी और सीवी एक्चुअल में क्या होता है? थोड़ा सा उस चीज को समझ लेते हैं। अगर हम
कॉनस्टेंट वॉल्यूम की बात करेंगे तो जो हीट कैपेसिटी है दैट इज़ CV। जल्दी से बताओ। कॉनस्टेंट वॉल्यूम पे हीट कैपेसिटी
क्या हो जाएगा? CV। कॉन्स्टेंट वॉल्यूम पे हीट कैपेसिटी क्या हो जाएगा? CV। और कांस्टेंट प्रेशर पे हीट कैपेसिटी क्या हो
जाएगा? CP। तो ये हो जाएगा CV। ये हो जाएगा CP। ये हो जाएगा CV। ये हो जाएगा CP। अब इन दोनों के बीच के रिश्ता निकाल
लेते हैं CP और CV का। हीट कैपेसिटी एट कांस्टेंट प्रेशर CP, हीट कैपेसिटी एट कांस्टेंट वॉल्यूम CV। इतनी बात समझ में आ
गई? जी समझ में आ गई। अब मुझे पता है q = c डेल्टा q = c डेल्टा तो अगर कांस्टेंट प्रेशर की बात करेंगे तो q qp = cp डेल्टा
t होगा। हां या ना? अरे q = c डेल्टा t है। कांस्टेंट प्रेशर पे q की जगह qp और c की जगह cp डेल्टा t
कास्टेंट वॉल्यूम पे क्या हो जाएगा? यह हो जाएगा बेसिकली qv और यह हो जाएगा cv डेल्टा। क्लियर है बात? जी बिल्कुल क्लियर
है। तो ये तो एक्सप्रेशनंस आ गए। अब अगर मुझे क्या करना है? एक मोल आइडल गैस की मैं बात
करता हूं तो एक मोल में क्या हो जाएगा? N की वैल्यू वन हो जाएगी। तो PV = NRT क्या हो जाएगा? PV = RT हो जाएगा। अब अगर मैं
टोटल चेंज इन एंथैल्पी निकालता हूं तो डेल्टाH क्या हो जाएगा? यहां पे प्रेशर कांस्टेंट मत कर देना बेटा।
तो वो क्या होता है? डेल्टाH = डेल्टा U + P डेल्टाV कब होता है? जब प्रेशर कांस्टेंट है।
यहां पर हम क्या कर रहे हैं? टोटल एंथ ये एंथैल्पी का जो चेंज है यानी कि डेल्टा h है इट इज़ इक्व टू चेंज इन इंटरनल एनर्जी +
PV तो ये क्या हो जाएगा हमारे पास? ये क्या हो जाएगा हमारे पास? चेंज इन इंटरनल
एनर्जी प्लस चेंज इन प्रेशर टाइम्स दी वॉल्यूम। क्लियर है बात? क्लियर है बात? बहुत
धीरे-धीरे चल रहा है भाई यह। यह हैंग होने लग गया। हैंग। ठीक है?
तो यहां पर हमारे पास क्या हो जाएगा? डेल्टा PV क्या हो जाएगा? डेल्टा RT के बराबर हो जाएगा। देखो 1 मोल ऑफ़ आइडल गैस
के लिए PV = NRT N का वैल्यू वन हो जाएगा। तो PV = RT डेल्टा PV आ रहा है तो ये हो जाएगा डेल्टा RT R कास्टेंट हो जाएगा तो
ये डेल्टा H = डेल्टा U + R डेल्टा T डेल्टा H और डेल्टा U की वैल्यू कहां से आएगी? यहां से आएगी। बताओ क्यों? अब जो भी
हीट के चेंज एट कास्टेंट प्रेशर होते हैं दैट इज बेसिकली डेल्टा H तो यहां पर आ जाएगा CP डेल्टा T आ जाएगा इधर और ये हो
जाएगा बेसिकली CV डेल्टा T के बराबर डेल्टा U + R डेल्टा T डेल्टा T को कॉमन ले लेंगे तो आ जाएगा CP डेल्टा T = डेल्टा
T CV + R डेल्टा T से डेल्टा T कटेगा तो आ जाएगा CP - CV = R हो जाएगा। ये वाली बात है 1 मोल ऑफ़ आइडल गैस N = 1 तो PV = RT हो
जाएगा NRT की जगह। यहां पर चेंज इन एंथैल्पी इट इज इक्व टू चेंज
u + pv है ना? तो ये क्या हो जाएगा? चेंज ऑफ U + PV तो हो जाएगा चेंज ऑफ इंटरनल एनर्जी प्लस चेंज प्रेशर वॉल्यूम एनर्जी।
चेंज ऑफ दी प्रेशर वॉल्यूम एनर्जी। अब यहां पर चेंज ऑफ़ प्रेशर वॉल्यूम एनर्जी इक्व टू हो जाएगा चेंज ऑफ़ RT। ठीक है? R
कांस्टेंट है तो चेंज ऑफ़ टेंपरेचर। इसको फर्दर सॉल्व करेंगे। तो डेल्टा H की वैल्यू ये हो जाएगी। की डेल्टा U की
वैल्यू ये हो जाएगी यहां पर प्लेस की और डेल्टा T हमारे पास कॉमन आ जाएगा। इसको कट कर देंगे तो आ जाएगा CP - CV = R ये
एक्सप्रेशन आपको याद होना चाहिए। ऑलराइट ऑलराइट। अगली चीज़ जो हम यहां पर स्टार्ट करने वाले हैं दैट इज़ बेसिकली कॉल्ड एज़ दी
कैलोरीमेट्री। कैलोरीमेट्री में हम लोग क्या करते हैं? डेल्टा U और डेल्टा H को बेसिकली मेज़ कर सकते हैं। नाउ लेट्स
स्टार्ट दी मेज़रमेंट ऑफ द डेल्टा U एज़ वेल ऐज़ द डेल्टा H। तो कैलोरीमेट्री बहुत इंटरेस्टिंग टॉपिक है। जल्दी से देखेंगे।
पूरी तरीके से देखेंगे। मैं आपको बॉम्ब कैलोरीमीटर और कॉफी कप कैलोरीमीटर पूरा पढ़ाऊंगा। ध्यान से देखना। सो द एनर्जी
चेंजज़ एसोसिएटेड विद द फिजिकल एंड केमिकल प्रोसेससेस कैन बी मेज़र्ड बाय एन एक्सपेरिमेंटल टेक्निक कॉल्ड
कैलोरीमेट्री। तो जो भी एनर्जी चेंजेस हो रहे हैं चाहे फिजिकल प्रोसेससेस में, चाहे केमिकल प्रोसेससेस में, आप उसको अच्छे से
मेजर कर सकते हो कैलोरीमेट्री के थ्रू। और कैलोरीमेट्री में हमारे पास एक डिवाइस होता है जिसे हम बेसिकली क्या कहते हैं?
कैलोरी मीटर। तो यहां पर इन प्रोसेससेस को कराने के लिए हमारे पास एक डिवाइस है जिसका नाम क्या है? कैलोरी मीटर। फिर से
सुनो। जो भी आपके फिजिकल और केमिकल प्रोसेस यानी कि जो भी भौतिक परिवर्तन हो रहे हैं या रासायनिक परिवर्तन हो रहे हैं
उसमें जो भी ऊर्जा में परिवर्तन आ रहा है, एनर्जी चेंजेस आ रहे हैं। उन एनर्जी चेंजेस को मैं कैलोरीमेट्री में कैलकुलेट
कर सकता हूं। अब कैलोरीमेट्री के अंदर कौन से डिवाइस में? देयर इज़ अ डिवाइस व्हिच इज़ यूज्ड टू मेज़ दिस। दैट इज़ कॉल्ड ऐज़ कैलोरी
मीटर। अब दो कैलोरीमीटर होते हैं हमारे पास। एक डेल्टा U यानी कि चेंज इन इंटरनल एनर्जी
को मेजर करता है। दैट इज कॉल्ड एज दी बॉम्ब कैलोरीमीटर। दैट इज कॉल्ड एज दी बॉम्ब। बॉम्ब कैलोरीमीटर। दैट इज कॉल्ड एज
दी बॉम्ब कैलोरीमीटर। अब सबसे पहला इसके अंदर बॉम्ब होता है। तो बॉम्ब के बारे में थोड़ा सा समझते हैं बॉम्ब कैलोरीमीटर के
अंदर। तो बॉम्ब क्या होता है? इट इज़ अ स्ट्रांग सील्ड मेटल कंटेनर। यूजुअली मेड अप द स्टेनलेस स्टील दैट कैन विस्टन दी
हाई प्रेशर। एंड इट कंटेन्स अ सैंपल टू बी कंबस्टेड एंड दी एक्सेस ऑफ़ ऑक्सीजन। अब एक्चुअल में होता क्या है? व्हाट इज
बॉम्ब? व्हाट इज एक्चुअली अ बॉम्ब? तो यहां पर एक ये सील्ड मेटल का कंटेनर है। ये ये एक सील्ड मेटल का कंटेनर होता है।
ये एक सील्ड मेटल का कंटेनर होता है। व्हिच इज यूजुअली मेड अप ऑफ स्टेनलेस स्टील। तो एक काफी ज्यादा स्ट्रांग और एक
सील्ड मेटल का कंटेनर होता है जो कि स्टेनलेस स्टील से बनता है जिसको बम कहते हैं। इसके अंदर जो हमारा सैंपल है
उसको जलाया जाता है। क्लास एथ में क्या है? बच्चों को पढ़ाया जाता है हीट ऑफ कंबस्शन। कैलोरिक वैल्यू ऑफ फ्यूल। वहां
पर बताई जाती है इस फ्यूल की इतनी कैलोरिक वैल्यू है। यानी कि ये इतनी हीट रिलीज़ करता है। ये इतनी हीट रिलीज़ करता है। इतनी
हीट रिलीज़ करता है। वो हीट मेजर कहां हुई? बम कैलोरीमीटर में मेजर होती है कि उसने कितनी हीट रिलीज़ करी। समझे? तो यहां पर एक
स्ट्रांग सील्ड मेटल कंटेनर है जो कि स्टेनलेस स्टील से बड़ा होता है। इसके अंदर हमारे सैंपल को हम जलाते हैं। ये
बेसिकली कहलाता है हमारे पास बम। इतनी बात समझ में आ गई? जी बिल्कुल समझ में आ गई। अब यहां पर इसको जलाने के लिए हम लोग क्या
करते हैं? ऑक्सीजन का सप्लाई करते हैं। सो प्योर ऑक्सीजन इज़ सप्लाई टू एनश्योर द कंप्लीट कंबस्शन ऑफ़ सैंपल। यानी यहां पर
हम लोग क्या करते हैं? ये देखिए ये ऑक्सीजन का इनलेट है। यहां से ऑक्सीजन गैस को सप्लाई करते हैं। तो ये जो एकदम
बिल्कुल सील्ड कंटेनर है इसके अंदर ऑक्सीजन गैस को सप्लाई करते हैं। और यहां पर हमारा जो भी पदार्थ है उसको हम लोग
बेसिकली क्या करेंगे? यहां पे जलाएंगे। जलाने के लिए हमारे पास क्या है? ये फायरिंग लेड्स है जिसका काम है उस सैंपल
को जलाने का। समझ में आ गई क्या? ये हमारे पास है बम। यह ऑक्सीजन का सप्लाई। यह हमारा है सैंपल
और यह हमारे पास है फायरिंग लेड्स जो कि उसको जलाने में मदद करेगी। तो उसका कंप्लीट कंबस्शन हो जाएगा।
अब उसके बाद आपको यहां पर एक और चीज नजर आ रही है। ये रही इस बॉम्ब के इधर ये देखिए ये जो है ये पूरा का पूरा यहां पर क्या
है? पानी पानी पानी पानी पानी पानी पानी है। इसके चारों तरफ यहां पर क्या है? वाटर है। दैट इज कॉल्ड एज दी वाटर बाथ और वाटर
जैकेट। तो बॉम्ब इज सबमर्ज इन अ वाटर फिल्ड जैकेट। और इंसुलेटेड कंटेनर टू अब्सॉर्ब द हीट रिलीज बाय द कंबस्शन। यानी
यहां पर हम किसी भी पर्टिकुलर फ्यूल को जब जलाएंगे तो उससे जो हीट एनर्जी रिलीज होगी वो सीधा का सीधा हमारे पानी के अंदर आएगी।
यानी पानी के टेंपरेचर में कुछ तो परिवर्तन आएगा। आएगा
आएगा। तो यहां पर अगर मैं मानता हूं कि पानी के
अंदर हीट एनर्जी रिलीज होगी। तो उसके बाद आता है यहां पर यह स्टेर। स्टेर का काम यहां पर क्या है? स्टेर का काम यहां पर
हां हां हां सर। हां सर। कब जाना है ये? अभी तो सर कल ही जाना था ये।
मैं निकल रहा था। भाई रात के बज रहे हैं। क्या बज रहा है इस समय? सर ये रात के हो रही है अभी। 2:48
2:48 पौ:45 और सर जी देखो मेहनत कर रहे हैं सर। कल लेक्चर जाना है क्या?
हां ये थर्मोडायनामिक्स का जाना है सर। अच्छा ये किस क्लास का जा रहा है? ये 11थ 11
11थ का जा रहा है। हां सर। चलो भाई तुम लोग के पेपर चल रहे होंगे। ऑल
द बेस्ट भाई। अरे सर आपने बहुत मेहनत की थैंक यू बहुत बचा है। अभी बहुत बचा है। सॉरी बस करो।
थैंक यू। थैंक यू। थैंक यू सर। तो यहां पर क्या होगा दोस्तों? यहां पर हमारे पास है ये स्टीयरिंग मैकेनिज्म। ठीक है? यहां पर
हमारे पास क्या है? ये स्टीयरिंग मैकेनिज्म है। ठीक है? तो स्टीयरिंग मैकेनिज्म यहां पर क्या करेगा? इस चीज को
थोड़ा सा ध्यान से समझना। अब स्टीयरिंग मैकेनिज्म यहां पर क्या करेगा कि देखो अब देखो हुआ क्या? हीट एनर्जी यहां पर रिलीज
हुई पानी के अंदर। हीट एनर्जी यहां पर पानी के अंदर रिलीज हुई। पानी का टेंपरेचर बढ़ेगा। लेकिन मेरे
को चाहिए कि पानी का टेंपरेचर यूनिफॉर्मली बढ़े। मेरी बात समझ रहे हो कि नहीं समझ रहे हो? मैं चाहता हूं कि यहां पर पानी का
टेंपरेचर बढ़े लेकिन यूनिफॉर्मली बढ़े। इसके लिए मेरे को यहां पर चाहिए ये स्टीयरिंग मैकेनिज्म। अरे भाई ये स्टेर यहां पर जब
घूमेगा ना तो पानी का टेंपरेचर बिल्कुल यूनिफॉर्म कर देगा भाई और मेरे को यही चाहिए। आप समझो मेरे को यही चाहिए।
उसके बाद मेरे दोस्तों यहां पर हमारे पास है थर्मामीटर। अब थर्मामीटर क्या होता है? थर्मामीटर तो सभी को पता है। थर्मामीटर हम
सबको पता है। अरे भाई यहां पर जब आपका ये सैंपल जलेगा पानी के अंदर हीट एनर्जी रिलीज होगी तो पानी का टेंपरेचर बढ़ेगा।
तो पानी के अंदर जो टेंपरेचर बढ़ेगा वो मेजर करेगा थर्मामीटर। ठीक है भाई? जी। और उसके बाद है इंसुलेशन। द एंटायर अपेरेटर्स
इज़ इंसुलेटेड टू प्रिवेंट द हीट लॉस टू द सराउंडिंग्स। कहने का तात्पर्य क्या है? इस पूरे सेटअप को ऐसे अपन ने इंसुलेट किया
हुआ है। अरे हम नहीं चाहते कि हीट सराउंडिंग में जाए। इसीलिए इस पूरे सेटअप को इंसुलेट किया हुआ
है। क्या किया हुआ है? इसको ऐसे इंसुलेट किया हुआ है। ठीक है? जी समझ में आ गई बात?
थोड़ा एक्सप्लेनेशन सही लग रहा है। एकदम से अलग सर आ गए थे। तो थोड़ा सा डर गया मैं। है ना? रात को मैं 2 51 लगभग 3:00
बजे शूट कर रहा हूं। और अलक सर भी शूट कर रहे हैं। है ना? तो बड़ी सौभाग्य की बात है कि
जिनकी कंपनी है जो इतने बड़े हैं लाइफ में वो अभी तक शूट कर रहे हैं। इतनी मेहनत कर रहे हैं। तो यही मोटिवेशन है मेरे लिए भी
और आई थिंक आप लोगों के लिए भी होना चाहिए और मैं थोड़ा सा डर गया था एकदम से कि ओ ये क्या हो गया भाई? रात को 3:00 बजे अलग
सर को देख रहा हूं। थोड़ा डर गया था। बट ठीक है। एक्सप्लेनेशन समझ में आया होगा। कामना करता हूं सभी को समझ में आया होगा।
तो यहां पर आप मेरी बात समझो। अब थोड़ा सा एक्सप्लेनेशन पे आते हैं फिर से कि एक्चुअली प्रोसीजर में हो क्या रहा थोड़ा
उसको समझते हैं। तो सुनील भाई यहां पर हमारे पास सबसे पहले क्या था? देखो यहां पर हमारे पास सबसे पहले क्या था? ये हमारे
पास स्टील से बना स्टेनलेस स्टील का बना हुआ एक क्लोज्ड कंटेनर है। दैट इज़ बेसिकली कॉल्ड एज द बॉम्ब। अब इस बॉम्ब के अंदर
बेसिकली हम लोग ऑक्सीजन गैस को सप्लाई कर रहे हैं। यहां पर हम लोग बेसिकली सैंपल को जला रहे हैं। और ये रहा ये हमारे सैंपल को
जला रहे हैं। और किसकी मदद से जला रहे हैं? फायरिंग लेट्स की मदद से जला रहे हैं। प्योर ऑक्सीजन दिया। जिस चीज को
जलाना है उसका बेसिकली कंप्लीट कंबस्शन होगा। उसमें से बहुत ज्यादा हीट एनर्जी निकलेगी। हीट एनर्जी निकलेगी तो वो कहां
जाएगी? वो सीधा जाएगी बेसिकली पानी के पास और पानी के टेंपरेचर को बढ़ाएगा। अब पानी के टेंपरेचर को इवनली बढ़ाने के लिए हमारे
पास यहां पर एक स्टेर लगा होता है जो बेसिकली क्या करता है? पानी के टेंपरेचर को इवनली बढ़ाएगा। ऐसा नहीं कि हीट एक जगह
पे कंसंट्रेट हो जाए। पानी के टेंपरेचर को इवनली इंक्रीस करना। यानी हीट को प्रॉपर्ली डिस्ट्रीब्यूट करना। स्टेर का
काम है हीट को प्रॉपर्ली डिस्ट्रीब्यूट करना। उसके बाद जो भी यहां पर पानी के अंदर टेंपरेचर में इंक्रीज आएगा वो
थर्मामीटर मेजर करेगा और यहां पे इंसुलेशन लगा रखी है ताकि हीट सराउंडिंग में लूज़ ना हो। अब आप इस चीज को थोड़ा सा ध्यान से
समझना। थोड़ा सा ध्यान से समझना। थोड़ा सा ध्यान से समझना। वर्किंग अगेन। ये मैंने समझा दी। वही चीज लिखी है। द सैंपल इज़
इग्नाइटेड व्हिच अंडरगोस कंप्लीट कंबस्शन एंड रिलीज़ अ लार्ज अमाउंट ऑफ़ हीट। दिस इंक्रीसेस द टेंपरेचर ऑफ़ द बॉम्ब एंड दी
सराउंडिंग वाटर इन दी कैलोरीमीटर। सिंपल सी बात है। यहां होगा धमाका। निकलेगी हीट एनर्जी। हीट एनर्जी निकलेगी। सीधा यहां पर
पानी के तापमान को बढ़ाएगी। पानी के तापमान को बढ़ा देगी। तो हम क्या करेंगे? डेल्टा h पानी के तापमान को बढ़ा देगी तो
डेल्टा T आएगा। डेल्टा T मेजर करेंगे। सिंस द बॉम्ब कैलोरीमीटर इज़ सील्ड इट्स वॉल्यूम डज़ नॉट
चेंज दैट इज़ दी एनर्जी चेंजज़ एसोसिएटेड टू द रिएक्शंस आर मेज़र्ड एट द कॉन्स्टेंट वॉल्यूम।
आ ये क्या बोल दिया सुनील भैया? समझो। समझो। यहां पे कहीं पर भी वॉल्यूम चेंज हो रहा
है क्या? नहीं। तो सारे के सारे हीट चेंजेस कांस्टेंट वॉल्यूम पे हो रहे हैं। हीट चेंज एट कांस्टेंट वॉल्यूम इसका मतलब
हो रहा है सुनील भाई। सुनील भाई जब भी हीट चेंज एट कांस्टेंट वॉल्यूम की आप बात करेंगे यानी कि आप क्या बात कर रहे हैं?
हीट एनर्जी चेंजेस एसोसिएटेड विद रिएक्शंस आर मेजर्ड एट द कॉन्सेंट वॉल्यूम। यानी कि आप बात कर रहे हैं डेल्टा u की
है ना? जो भी हीट एनर्जी के चेंजेस यहां पर होंगे वह बेसिकली कास्टेंट वॉल्यूम पर होंगे।
यानी कि डेल्टा U मेजर करना है। क्या बात है? अब देखिए जो भी टेंपरेचर चेंज आएगा पानी
का दैट इज रिकॉर्डेड विद द थर्मामीटर ड्यूरिंग द रिएक्शन। यह आपने मेजर कर लिया होगा। तो, इससे
डेल्टा U कैसे मेजर होगा? सुनील भैया, यह समझ में नहीं आया। देख
जो भी यहां पर हो रहा है वह कांस्टेंट वॉल्यूम पर हो रहा है। जो भी हो रहा है वह कांस्टेंट वॉल्यूम पर हो रहा है। और
कांस्टेंट वॉल्यूम पे हीट एनर्जी रिलीज हो रही है कि ऐड हो रही है? पहले इतना दिमाग लगाते हैं। फ्यूल था। फ्यूल को ऑक्सीजन
मिली। फायरिंग लाइट्स की मदद से वो जला। कंप्लीट कंबस्शन हुआ। कंप्लीट कंबस्शन हुआ। एनर्जी रिलीज़ हुई। यानी कि हीट
एनर्जी रिलीज़ हुई। हीट एनर्जी रिलीज़ हुई। उसने पानी के टेंपरेचर को बढ़ाया। हीट एक जगह कंसंट्रेट ना हो। तो स्टेर ने घुमाया।
हीट यूनिफॉर्मली डिस्ट्रीब्यूट हुई। थर्मामीटर ने टेंपरेचर में चेंज को मेजर किया। वो टेंपरेचर का चेंज हमको देगा
डेल्टा T अब डेल्टा U कैसे मेजर होगा? सुनील भाई एक छोटी सी चीज बता। यहां से तू डेल्टा T मेजर कर लेगा। जी। अब
मुझे एक बात बता जो हीट रिलीज हो रही है ड्यूरिंग द कंबस्शन विल बी इक्वल टू मेरे भाई जो भी यहां पर हीट में चेंजेस आ रहे
हैं वो कांस्टेंट वॉल्यूम पे आ रहे हैं ना जो भी हीट रिलीज हो रही है एब्जॉर्ब हो रही है कांस्टेंट वॉल्यूम पे हो रही है ना
यहां इस वाले केस में तो रिलीज हो रही है फ्यूल जल रहा है तो हीट एनर्जी रिलीज़ हो रही है दैट इज़ QV अब ये जो QV है ना बेटा
ये माइनस हो जाएगा हीट एनर्जी रिलीज़्ड और ये हो जाएगा माइनस का CV डेल्टा T इतनी बात को समझने में क्या दिक्कत आई क्या
तेरे को? QV = - CV डेल्टा T और QV का मतलब होता है हमारे पास डेल्टा U बात ही खत्म हो गई। इस
तरीके से बॉम्ब कैलोरीमीटर में हम लोग मेज़मेंट करते हैं। तो यहां पर देखिएगा ना भाई ये जो QV है, यह क्या है? जो हीट
हमारी कंबस्शन से रिलीज हुई थी, हीट ऑफ कंबस्शन बोलते हैं इसको। ठीक है? और यह क्या हो जाएगा ना? यह हमारे पास हो
जाएगा स्पेसिफिक हीट कैपेसिटी एट कांस्टेंट वॉल्यूम। और ये स्पेसिफिक हीट कैपेसिटी एट कास्टेंट
वॉल्यूम किसका है? ये स्पेसिफिक हीट कैपेसिटी किसकी है? यह स्पेसिफिक हीट कैपेसिटी एट कॉन्स्टेंट वॉल्यूम किसकी है?
सुनील भाई, यह किसकी है? स्पेसिफिक हीट कैपेसिटी एट द कॉन्स्टेंट वॉल्यूम। ये आपके पास है बम
प्लस वाटर की। अब ये वाली जो वैल्यू होती है ये आपको गिवन होती है। जो भी बॉम्ब कैलोरीमीटर बना रहा होता है वो CV की
वैल्यू आपको कैलकुलेटेड देता है। ठीक है? स्पेसिफिक हीट कैपेसिटी एट दी कॉन्स्टेंट वॉल्यूम दैट इज बॉम्ब प्लस वाटर। यानी कि
ये कैलोरीमीटर की होती है। ठीक है ना? और डायरेक्टली इसको इन दोनों को मिला के बनता है कैलोरीमीटर। तो ये कैलोरीमीटर की बात
कर रहा है। तो स्पेसिफिक हीट ऑफ दी कैलोरीमीटर और डेल्टा T होता है चेंज इन टेंपरेचर ऑफ वाटर।
चेंज इन टेंपरेचर ऑफ वाटर। ठीक है भाई? चलिए। चलिए बहुत बढ़िया। तो
यहां पर इस तरीके से हम लोग डेल्टा U का मेजरमेंट कर लेंगे। कामना करता हूं सभी को ये बात समझ में आ रही होगी। क्लियर हो रही
होगी। कोई दिक्कत नहीं आ रही होगी। ठीक है? तो एक बार फिर से रिवीजन करवा देता हूं बॉम्ब कैलोरीमीटर का। एक बार फिर से
रिवीज़ करवा देता हूं बॉम्ब कैलोरीमीटर का। बॉम्ब कैलोरीमीटर के अंदर हमारे पास क्या होता है? एक स्टेनलेस स्टील का सील्ड। ये
स्टेनलेस स्टील का हमारे पास एक सील्ड आप बोल सकते हैं कंटेनर है या बेसिकली एक छोटा सा ऐसे क्लोज्ड आप बोल सकते हैं वेसल
टाइप चीज है। कंटेनर है ये। अब इस इसको बेसिकली हम लोग बोलते हैं बम जिसके अंदर यह बहुत हाई प्रेशर को झेलने का दम रखता
है। ठीक है ना? अब इसके अंदर क्या होता है? इसके अंदर बेसिकली वो सैंपल होता है जिसको हम बेसिकली जला रहे हैं। यहां पे
हमने प्योर ऑक्सीजन का सप्लाई दिया। यहां पे फायरिंग लेड्स है। इसकी मदद से हमने इस चीज को यहां पे जलाया। इस चीज को जैसे ही
जलाया इसमें से काफी ज्यादा हीट एनर्जी निकली। इसमें से जो हीट एनर्जी निकली वो सराउंडिंग वाटर के पास जाएगी और वाटर के
टेंपरेचर को बढ़ाएगी। अब पॉइंट ये है कि पानी में ऐसा नहीं हो कि हीट किसी एक जगह कंसंट्रेट हो जाए। चारों तरफ यूनिफॉर्मली
डिस्ट्रीब्यूट हो इसलिए हम बेसिकली स्टेर का इस्तेमाल करेंगे और यहां पर हीट यूनिफॉर्मली डिस्ट्रीब्यूट हो जाएगी। उसके
बाद हम लोग बेसिकली टेंपरेचर के चेंज को मेजर करेंगे कि यहां पे टेंपरेचर में क्या चेंज हुआ। अब यहां पे दिमाग लगाना कि जो
हीट एनर्जी में जो भी चेंजज़ आ रहे हैं दैट आर बीइंग टेकन प्लेस एट द कॉन्सेंट वॉल्यूम। तो यानी कि हम लोग डेल्टा U की
बात कर रहे होंगे। तो डेल्टा U = QV = - CV डेल्टा T CV हमारे पास होता है स्पेसिफिक हीट कैपेसिटी एट द कॉन्स्टेंट
वॉल्यूम। दैट इज़ फॉर दी बॉम्ब कैलोरीमीटर जो कि बॉम्ब और वाटर का इन दोनों को जोड़कर बनती है। और ये जो आपके पास स्पेसिफिक हीट
कैपेसिटी होती है ये जो आपके पास हीट कैपेसिटी होती है ये आपको गिवन होती है। ठीक है ना? सो दिस
कैपेसिटी इज़ बेसिकली गिवन। ठीक है ना? दिस कैपेसिटी इज़ बेसिकली गिवन। जैसे कि यहां पर हमने ये वाली चीज़ निकाली थी ना। यहां
पर आपको ये वाली चीज़ गिवन होती है। दिस हीट कैपेसिटी एट कां्सेंट वॉल्यूम इज़ गिवन। इसको थोड़ा सा रेक्टिफाई भी कर देता
हूं। स्पेसिफिक की जगह हीट कैपेसिटी एट कांस्टेंट वॉल्यूम मेक मोर सेंस। हीट कैपेसिटी एट कांस्टेंट वॉल्यूम रेदर दैन
स्पेसिफिक हीट कैपेसिटी। हीट कैपेसिटी एट कास्टेंट वॉल्यूम। ठीक है ना? रेदर दैन स्पेसिफिक हीट कैपेसिटी। हीट कैपेसिटी एट
कॉन्सेंट वॉल्यूम। ठीक है ना? स्पेसिफिक हीट में फिर वो क्या हो जाएगा कि ये हो जाएगा? CV इक्व टू क्या हो जाएगा? वो C *
M हो जाएगा। क्लियर है ना बात? जी। तो, यह हीट कैपेसिटी एट दी कास्टेंट
वॉल्यूम दैट इज हीट कैपेसिटी बम प्लस वाटर यानी कैलोरीमीटर की हीट कैपेसिटी की बात हो रही है। और चेंज इन टेंपरेचर इज़ दी
चेंज इन द टेंपरेचर ऑफ दी वाटर। चलो, अब नाउ लेट्स प्रैक्टिस अ क्वेश्चन। लेट्स प्रैक्टिस अ क्वेश्चन। लेट्स प्रैक्टिस अ
क्वेश्चन। तो यहां पर एक सवाल आपके सामने है। दैट इज दी एनसीआरटी प्रॉब्लम 5.6. यह सॉल्व
प्रॉब्लम आपके पास है। इसको सॉल्व करते हैं। बहुत सिंपल सा सवाल है। 1 ग्राम ऑफ़ ग्रेफाइट इज़ बर्न इन अ बॉम्ब कैलोरीमीटर
इन द एक्सिस ऑफ़ ऑक्सीजन एट 298 केल्विन एंड वन एटमॉस्फेरिक प्रेशर अकॉर्डिंग टू द इक्वेशन दिस। अब ये कह रहा है, ड्यूरिंग द
रिएक्शन टेंपरेचर राइज़ज़ फ्रॉम 298 टू 299 केल्विन। इफ द हीट कैपेसिटी ऑफ़ द बॉम्ब कैलोरीमीटर इज़ दिस, व्हाट इज़ द एंथैल्पी
चेंज फॉर दी अबव रिएक्शन एट दिस? सिंपल सा सवाल है। देखो क्या बोल रहा है। हीट कैपेसिटी गिवन है। ठीक है ना?
1 ग्राम ऑफ ग्रेफाइट इज बर्न इन द कैलोरीमीटर इज़ दिस अकॉर्डिंग टू दिस इक्वेशन इस इक्वेशन के हिसाब से चलता है।
ड्यूरिंग द रिएक्शन टेंपरेचर जो है राइज़ कर रहा है इस तरीके से। इफ द हीट कैपेसिटी ऑफ़ दिस व्हाट इज़ एंथैल्पी चेंज फॉर द अबव
रिएक्शन। ठीक है ना? एंथैल्पी चेंज फॉर अबव रिएक्शन निकालना है। यानी कि यानी कि
इस रिएक्शन के लिए एंथैल्पी चेंज निकालना है। डेल्टाH इस एक मोल ये एक मोल है भाई ध्यान रखना
हां ये एक-एक मोल है भाई एक मोल के लिए निकालना ये 1 ग्राम के लिए दे रखा है इसने बोला एंथैल्पी चेंज फॉर द अबव
रिएक्शन इस अबव रिएक्शन की बात कर रहा है यहां पे एक मोल इसका एक मोल इसका एक मोल इसका तो ये यहां पे 1 ग्राम ग्रेफाइट है
और यहां पे ये एक मोल की बात कर रहा है तो डेल्टाH आपको किसके लिए फाइंड आउट करना है वन वन मोल ऑफ
ग्रेफाइट की बर्निंग का फाइंड आउट करना है। चलिए पहले 1 ग्राम का फाइंड आउट करते हैं।
फिर 1 मोल पे आएंगे। ठीक है? तो सुनील भाई सुनील भाई हमारे पास क्या गिवन है? हमारे पास क्या गिवन है? हमारे पास
क्या गिवन है? बॉम्ब कैलोरीमीटर की बात हो रही है तो इसका ये मतलब है कि डेल्टा U जो हमारे पास होता है दैट इज QV = - का CV
डेल्टा T होता है हमारे पास। ठीक है? तो यहां पर हमको कहीं-क कैपेसिटी दे रखी
है। यस हीट कैपेसिटी दे रखी है। दिस इज़ बेसिकली द हीट कैपेसिटी ऑफ द बॉम्ब कैलोरीमीटर इज़ 20.7 kjूल
पर केल्विन। तो यह हो जाएगा हमारे पास माइनस का 20.7 किJ पर केल्विन मल्टीप्लाई बाय डेल्टा कितना हो जाएगा? 299 - 298 हो
जाएगा 1 केल्विन केल्विन से केल्विन कैंसिल आउट हो जाएगा तो माइनस का 20.7 किलो जूल्स हो जाएगा।
ये हमारे पास हो जाएगा डेल्टा U ये तो हमारे पास क्या हो जाएगा? डेल्टा U हो जाएगा। सिंपल जी तो डेल्टाH कितना हो
जाएगा? 1 मोल के लिए नहीं। अभी 1 ग्राम ग्रेफाइट की बात हो रही है। देखिए उसने आपसे क्या पूछा है? उसने आपसे
पूछा है 1 मोल के लिए बताइए। अभी मैं 1 ग्राम के लिए बता रहा हूं। इस रिएक्शन के लिए बता रहा हूं। यानी कि जो 1 ग्राम है
उसके लिए बता रहा हूं। डेल्टाH = क्या हो जाएगा? डेल्टाH = डेल्टा U + डेल्टा NGRT हो जाएगा ना ब्रो? G हो जाएगा।
तो ये डेल्टा U कितना हो जाएगा? माइनस का 20.7 हो जाएगा। प्लस डेल्टा NG कितना हो जाएगा? 1 - 1 कितना हो
जाएगा? ज़ीरो हो जाएगा कि नहीं हो जाएगा? ये देखो। डेल्टा NG निकालना है यहां पे। 1 - 1 ये तो सॉलिड हो जाएगा।
नंबर ऑफ़ मोल्स ऑफ़ गैसियस प्रोडक्ट माइनस नंबर ऑफ़ मोल्स ऑफ़ गैसियस रिएक्टेंट 1 - 1 0 हो जाएगा। ये तो हट गया। तो ये हो जाएगा
हमारे पास डेल्टाH कितना हो जाएगा? जाएगा डेल्टाH भी हमारे पास हो जाएगा। यह हो जाएगा किलो जूल्स। ठीक है? यह हमारे पास
हो गया 1 ग्राम के लिए। 1 मोल के लिए निकालना है। तो देखो ध्यान से देखना। 1 मोल कार्बन जो होता है
उसका वजन कितना होता है? 12 ग्राम होता है। उससे मानता हूं x किलजूल प्रोड्यूस होगा।
और 1 ग्राम ग्रेफाइट से कितना प्रोड्यूस होगा? माइनस का 20.7 kjूल प्रोड्यूस होगा। लॉजिक है। लॉजिक है। ध्यान से सुनो। बम
कैलोरीमीटर में डेल्टा U = QV = - CV डेल्टा T होता है। CV की वैल्यू गिवन थी। डेल्टा T हमने यहां से निकाल लिया। डेल्टा
U की वैल्यू आ गई। डेल्टा H = डेल्टा U + डेल्टा NGRT होता है। डेल्टा NG ज़ीरो हो जाएगा। तो डेल्टा H = डेल्टा U हो जाएगा 1
ग्राम के लिए। 1 ग्राम के लिए 1 मोल कार्बन में होता है। क्योंकि एक मोल क्यों? इसने बोला एंथैल्पी चेंज फॉर द अबव
रिएक्शन। फॉर द अबव रिएक्शन। अबव रिएक्शन का मतलब होता है 1 मोल की बात कर रहा है वो। 1 ग्राम की बात नहीं कर रहा। इस
इक्वेशन की बात कर रहा है वो। यानी कि 1 मोल की बात कर रहा है वो। तो 1 मोल कार्बन में 12 ग्राम जिसका बेसिकली एनर्जी
निकलेगी x 1 ग्राम में -20.7 तो x का वैल्यू कितना हो जाएगा? ये हो जाएगा 12 * ये माइनस का है। तो ये हो
जाएगा 20.7। ठीक है ना? अब देखिए। अब देखिए ये हो जाएगा 20.7 * 12
यानी कि एक तरीके से हो जाएगा 207 * 12 7 * 2 = 14 4 1 ये हो जाएगा वन ये हो जाएगा 4 ये हो जाएगा 702
ये हो जाएगा 4 842 ठीक है 2 * 7 = 14 टू कैरी ऑन वन ये हो जाएगा वन
ये हो जाएगा फोर ये हो जाएगा बेसिकली 7 0 2 ये हो जाएगा फोर ये हो जाएगा 8 4 और 2 24 2 4 8 4
तो ये हो जाएगा 240 38 4 माइनस में। ठीक है? अब यहां पर हम लोग साइंटिफिक
नोटेशन में लेकर आ जाते हैं। इसको साइंटिफिक नोटेशन में लेके आएंगे तो एक और दो आगे की तरफ आएगा। तो यहां पर हो जाएगा
ये हो जाएगा माइनस का 2.484 * 10 की पावर 2 और ये वाली वैल्यू हमारे पास क्या हो
जाएगी? किलोजूल पर मोल में आएगी। क्योंकि ये पर मोल की बात हो रही है। तो ये वाली वैल्यू हमारे
पास आ जाएगी। ठीक है ना? - का 2.484 * 10 की पावर 2 किलजूल पर मोल।
क्लियर है बात? क्लियर है बात? क्लियर है बात? ठीक है? क्लियर है? काम ना करते हुए सारी की सारी
बातें सभी को अच्छी तरीके से यहां पर क्लियर हो गई होगी। नाउ लेट्स मूव ऑन फर्दर टू मेज़रमेंट ऑफ़ डेल्टा H दैट इज़
कॉफी कप कैलोरीमीटर। अब बेसिकली कॉफ़ी कप कैलोरीमीटर हमारे पास क्या होता है? बहुत ही सिंपल सी बात है। अगर आपको डेल्टा H
मेज़र करना है यानी कि कॉफ़ी कप कैलोरीमीटर की आप यहां पर चर्चा करने जा रहे हैं। डेल्टा U बॉम्ब कप कैलोरीमीटर यहां पे
कॉफी कप कैलोरीमीटर। तो कॉफी कप कैलोरीमीटर इज़ अ सिंपल इन एक्सपेंसिव डिवाइस यूज्ड टू मेजर द हीट ऑफ रिएक्शंस
और फिजिकल प्रोसेससेस पर्टिकुलरली दोज़ ऑकरिंग एट द कॉन्सेंट प्रेशर एंड एक्वस सॉल्यूशन। देखिए बहुत इंपॉर्टेंट बात है
कि यहां पर कांस्टेंट प्रेशर पे जो भी आपके पास यहां पर हमने क्या पढ़ा था? व्हाट इज़ डेल्टा H? द हीट चेंजेस दैट आर हैपनिंग
एट दी कॉन्सेंट प्रेशर इज़ डेल्टा H राइट? जब भी अगर हमको यहां पर हीट का एक्सचेंज का देखना है कि भाई हीट एक्सचेंज बाय द
बिटवीन द सिस्टम एंड द सराउंडिंग एट कॉन्सेंट प्रेशर इसका मतलब है हम लोग डेल्टा h के मेज़मेंट की बात कर रहे हैं।
तो यहां पर ये क्या बोल रहा है? अ कॉफी कप कैलोरीमीटर इज़ अ सिंपल इन एक्सपेंसिव डिवाइस यूज़्ड टू मेज़र द हीट ऑफ रिएक्शन और
द फिजिकल प्रोसेससेस। यानी कि जितने भी फिजिकल प्रोसेससेस हैं या बेसिकली केमिकल रिएक्शन है उसके अंदर जो भी हीट में
चेंजेस आ रहे हैं मतलब कि हीट रिलीज हो रही है या हीट एब्सॉर्ब हो रही है। दैट इज टेकिंग प्लेस एट द कांस्टेंट प्रेशर ऑफ
एटमॉस्फियर एंड साथ ही साथ एक्वस सॉल्यूशन। एक्वस सॉल्यूशन मतलब ये होंगे डिॉल्व्ड इन वाटर।
अब सुनील भाई थोड़ा सा सेटअप आप अच्छी तरीके से समझा देंगे तो बहुत बढ़िया तरीके से समझ में आ जाएगा। देखिए इसके अंदर सबसे
पहले एक बाहर वाला कप होता है जिसको हम बोलते हैं स्टाइरोफोम कप। ये सबसे बाहर वाला कप होगा। ये बेसिकली बना होता है
स्टायरोफोम से। और स्टायरोफॉर्म मैंने आपको बताया था एडियाबेटिक वॉल की तरह एक्ट करता है। यानी कि एक तरीके से प्रॉपर
इंसुलेशन का काम करता है। ये यहां पर हीट एनर्जी को ना बाहर जाने देगा ना आने देगा। तो सबसे पहला द मेन बॉडी ऑफ़ कैलोरीमीटर इज़
यूजुअली अ स्टायरोफॉर्म कप। दिस मटेरियल इज़ अ गुड थर्मल इंसुलेटर। मींस ये क्या कर देगा? ये हीट एक्सचेंज को सिस्टम एंड
सराउंडिंग के बीच में मिनिमाइज कर देगा। अब इस स्टाइरोफोम के कप के अंदर आपका इनर कप होगा जिसके अंदर आपकी जो भी रिएक्शन
होने वाली है वो होगी। यानी कि यह स्टायरोफोम का कप होगा और इसके अंदर आपका दूसरा कप होगा जिसके अंदर आपकी केमिकल
रिएक्शंस हो रही होगी। एक कांच का कप होगा या बकर होगा वो स्टाइरोफोम के कप के अंदर आपने डाल दिया। तो पहला स्टाइरोफोम का कप
उसके अंदर आपका दूसरा कप इस दूसरे कप में आपकी रिएक्शंस हो रही होगी। ठीक है? ये जो आपका दूसरा कप है, यह प्लास्टिक या ग्लास
का बकर हो सकता है। जिसको आपने स्टायरोफोम के कप के अंदर रखा है। तीसरा यहां पर हमारे पास क्या होगा? यहां
पर हमारे पास होगा बेसिकली ट अह टेंपरेचर में चेंज मेज़र करने के लिए थर्मामीटर। टेंपरेचर में चेंज किसके? यह मेरे भाई
वाटर है यहां पे। और सारी रिएक्शन यहां पे वाटर के अंदर होगी। सारी रिएक्शन आपकी वाटर के अंदर होगी। जो आपका इनर बकर है
उसको आपने एक्सटर्नल स्टाइरोफ के कप में रखा। स्टायरोफॉर्म कप। उसके अंदर आपका इनर बकर उसके अंदर आपका पानी उसके अंदर आपके
रिएक्टेंट्स। उसमें आपका थर्मामीटर। ठीक है ना? ये आपका स्टायरोफॉर्म का कप। यह आपका इनर बकर उसके अंदर आपके पास पानी
पानी में होगी रिएक्शन और यहां पर टेंपरेचर में चेंज को मेजर करेगा थर्मामीटर।
ठीक है? साथ ही साथ यहां भी हमारे पास स्टीयरिंग मैकेनिज्म हुआ। स्टीयरिंग मैकेनिज्म क्या होता है? ध्यान से देखो।
स्टीयरिंग मैकेनिज्म क्या होता है? ये हमारे पास स्टीयरिंग मैकेनिज्म है। स्टेर है। ये हमारे पास स्टेर है। देखो स्टेर का
काम क्या होता है? कि हीट एक जगह कंसंट्रेट ना करे। चारों तरफ फैल जाए। ये स्टीर का काम है हमारे पास। ठीक है? और
लिड जो होती है दैट कैन बी प्लेस्ड एट द टॉप ऑफ कप टू रिड्यूस हीट लॉस टू द एनवायरमेंट। ऑल दिस इज ऑलवेज नॉट नेसेसरी।
अब इस केस में क्या होता है कि आप ऊपर एक लिड रख सकते हैं ताकि यहां पे जो हीट है वो बेसिकली लूज़ ना हो सराउंडिंग्स पे। बट
ये ऑप्शनल होता है। और टाइट लिड नहीं रखते हैं। बिल्कुल लूज लिड रखते हैं इसके ऊपर। बट दैट इज़ ऑप्शनल।
अब कॉन्स्टेंट प्रेशर कहां पे है? एटमॉस्फेरिक प्रेशर एक्ट कर रहा है ना? द एटमॉस्फेरिक प्रेशर इज़ एक्टिंग हियर।
राइट? PTM एक्ट कर रहा है। तो एक कास्टेंट प्रेशर के अंडर में हो रही है ना? तो यहां पर जो भी एनर्जी में चेंजज़ आएंगे वेदर कि
हीट सिस्टम से सराउंडिंग में जाएगी या सराउंडिंग से सिस्टम में आएगी वो कांस्टेंट प्रेशर पे हो रहे थे। तो यानी
कि डेल्टा h को मेजर कर रहे हैं। क्लियर है भाई बात? फिर से बता दूं एक बार सेटअप। कॉफी कप कैलोरीमीटर के अंदर सबसे
पहले एक स्टायरोफॉर्म का कप होता है। उसके अंदर आपका मेन बकर या फिर जो भी आपका जिस जो भी आपके पास बकर है या कांच का है
जिसके अंदर आप रिएक्शन करवा रहे हैं वो अंदर होगा। उसके बाद स्टायरोफ का होगा। स्टाइरोफ एक तरीके से एडियाबेटिक वाल की
तरह काम करेगा ताकि हीट का ट्रांसफर यहां पे रोक दे। अब ये आपका जो कांच का बकर है इसके अंदर आपके पास पानी है और उसके अंदर
आपके रिएक्टेंट्स होंगे। चाहे वो फिजिकल प्रोसेस हो सकता है। किसी साल्ट का डिसोल्यूशन अपन ने पानी में करा है।
फिजिकल प्रोसेस या कोई केमिकल रिएक्शन हो सकती है जो कि एक्वस मीडियम में हो रही है। अब यहां पे पानी का टेंपरेचर या तो
बढ़ सकता है तो घट सकता है। तो वो भी जो टेंपरेचर में चेंज आएगा वो थर्मामीटर मेजर करेगा। साथ ही साथ स्टेर लगा हुआ है ताकि
हीट एक जगह कंसंट्रेट ना करे। चारों तरफ फैल जाए। क्लियर है बात? जी। अब देखिए इसके अंदर होता क्या है? जैसे
फॉर एग्जांपल आप ये चीज समझ के चलो। फॉर एग्जांपल ये चीज समझ के चलो कि मैं मान लो एक सॉल्ट को पानी में डिॉल्व करा रहा हूं
और उसकी डिॉल्यूशन फॉर एग्जांपल एग्जोथर्मिक है। मान लीजिए मैंने डिॉल्व कराया एनहाइड्रस कॉपर सल्फेट पानी में।
जैसे ही इसको पानी में मैंने डिॉल्व करवाया तो यहां पर बहुत ज्यादा हीट इसने पानी के अंदर निकाल ली।
ठीक है? पानी का टेंपरेचर बढ़ने लगा। जी बढ़ने लगा। अब यहां पर हीट जो है वो पानी के अंदर आ रही है एट द कॉन्स्टेंट प्रेशर।
अपन को इसी चीज को मेजर करना है। आइए देखते हैं कैसे। अब कोई रिएक्शन भी हो सकती है, कुछ भी हो
सकता है। ठीक है? तो सिस्टम क्या होगा? आपका रिएक्टेंट या जो भी चीज आप डिॉल्व करवा रहे हैं या जिस भी रिएक्शन जो भी चीज
रिएक्शन शो कर रही है या जिस भी चीज को आप डिॉल्व करवा रहे हैं वो आपका रिएक्टेंट होगा। सो द रिएक्टेंट्स आर प्लेस्ड इन द
इनर कप एंड द रिएक्शन टेक्स प्लेस इन द सॉल्यूशन। द हीट प्रोड्यूस्ड और अब्सॉर्ब बाय द
रिएक्शन चेंजेस द टेंपरेचर ऑफ वाटर दैट इज सराउंडिंग इन द कप। वाटर जो है हमारा सराउंडिंग होगा और सिस्टम क्या होगा? जैसे
मान लीजिए एनहाइड्रस कॉपर सल्फेट का साल्ट डाला तो वो सिस्टम हो गया। पानी सराउंडिंग हो गया। न्यूट्रलाइजेशन रिएक्शन करी एसिड
और बेस को डाला तो वो हमारा सिस्टम हो गया और वाटर हमारा सराउंडिंग हो गया। तो यू नीड टू अंडरस्टैंड लाइक दिस। सिस्टम और
सराउंडिंग को इस तरीके से आपको समझना पड़ेगा। ठीक है? और
उसके बाद क्या होगा? टेंपरेचर चेंज ऑफ वाटर को आपको रिकॉर्ड करना है। यानी कि सिस्टम से सराउंडिंग यानी कि पानी में हीट
जा रही है या सराउंडिंग से सिस्टम में हीट आ रही है। तो उसकी वजह से पानी के जो टेंपरेचर में परिवर्तन आ रहा है वो आपको
देखना है। द हीट एब्जॉर्ब्ड और रिलीज़्ड इज़ कैलकुलेटेड बाय। अब यहां पर जो भी हीट
एब्जॉर्ब होगी या रिलीज होगी उसको कैलकुलेट करने का क्या तरीका है? लेट्स अंडरस्टैंड दिस। सबसे पहले हमारे पास है
यहां पे कांस्टेंट प्रेशर। अब इस कांस्टेंट प्रेशर पे हीट इज़ रिलीज़्ड फ्रॉम द सिस्टम टू द सराउंडिंग। या तो हीट
सिस्टम से सराउंडिंग में रिलीज़ हो सकती है या हीट एब्जॉर्ब हो सकती है सराउंडिंग से सिस्टम में।
कास्टेंट प्रेशर पर सिस्टम से सराउंडिंग में हीट रिलीज हो सकती है या सराउंडिंग से सिस्टम में हीट अब्सॉर्ब हो सकती है।
अब अगर मान लीजिए हीट रिलीज होती है तो जो भी चेंजज़ कांस्टेंट प्रेशर पे आ रहे हैं दैट इज़ QP = - का CP डेल्टा T या अगर
बेसिकली हीट एब्सॉर्ब हो रही है तो QP = CP डेल्टा T क्योंकि अगर सिस्टम में ऐड हो रही है तो पॉजिटिव होगी। सिस्टम से रिलीज़
हो रही है तो नेगेटिव होगी। तो ये QP हमारे पास क्या होता है? डेल्टाH होता है। QP हमारे पास क्या होता है?
डेल्टा H होता है। तो डेल्टाH = इस CP को हमने क्या लिख दिया? माइनस का CM ठीक है ना?
माइनस का CM डेल्टा T और ये हो जाएगा हमारे पास CM डेल्टा T है ना?
इस तरीके से हम इसको लिख सकते हैं। भाई हमने क्या पढ़ा था कि हमारे पास क्या होता है? स्पेसिफिक हीट कैपेसिटी। जो हमारे पास
हीट कैपेसिटी है, हीट कैपेसिटी इज़ इक्वल्स टु स्पेसिफिक हीट कैपेसिटी टाइम्स द मास ऑफ़ द सब्सटेंस। तो, हमने क्या कर दिया? इस
CP को रिप्लेस कर दिया विद C * M CP को रिप्लेस कर दिया विद C * M अब यहां पर हो जाएगा QP = डेल्टाH = - का
CM डेल्टा T और QP = डेल्टाH = CM डेल्टा T यहां पे साइन देखिए नेगेटिव है। यहां पे साइन देखिए पॉजिटिव है। क्योंकि यहां पे
जो हीट है वो सिस्टम से सराउंडिंग में रिलीज़ हुई है। यहां पर सराउंडिंग से सिस्टम में एब्जॉर्ब हुई है। यानी यहां पे
हीट एनर्जी पानी से एब्जॉर्ब हुई होगी। यहां पे हीट एनर्जी पानी में रिलीज़ हुई होगी।
अब यहां पे जब आपने इस एक्सप्रेशन को लिखा है तो आपको पता है ये जो C है किसको है? ये स्पेसिफिक हीट कैपेसिटी जो है ये पानी
की है। और ये मास जो है ये भी पानी का है। और ये डेल्टा T जो है चेंज इन टेंपरेचर ऑफ़ वाटर
है। समझ गए? ये डेल्टा T क्या है? ये डेल्टा T क्या है? चेंज इन टेंपरेचर ऑफ वाटर। मैं कामना करता
हूं। आपको समझ में आ रहा है। मैं कामना करता हूं। मेरे सारे भाई बहनों को ये बात समझ में आ रही है। तो यहां पर अगर आपके
पास स्पेसिफिक हीट कैपेसिटी ऑफ़ वाटर है। दैट इज़ बेसिकली 4.186 जूल पर ग्राम * डिग्री सेल्सियस। मास ऑफ़
वाटर है। चेंज इन टेंपरेचर ऑफ़ वाटर अगर आपने मेजर कर लिया तो काम हो गया। फॉर्मूले तक लेके आ रहा हूं क्या? मान लो
तुम्हारे पास क्या है? अब अगर तुमको यहां पर डेल्टाH की वैल्यू निकालनी है तो तुम नहीं निकाल सकते क्या? मान लो तुमने क्या
कर दिया? फॉर एग्जांपल तुमने एनहाइड्रस कॉपर सल्फेट को पानी में डिॉल्व करा। तुमको उसको डिॉल्व करने से पहले मास ऑफ़
वाटर पता था। तुम्हारे पास स्पेसिफिक हीट कैपेसिटी ऑफ़ वाटर की वैल्यू 4.186 है। मास ऑफ़ वाटर तुमको पता है। टेंपरेचर ऑफ़ वाटर
तुमने इनिशियली नोट करके रखा। फिर जैसे ही एनहाइड्रस कॉपर सल्फेट को डाल के तुमने डिॉल्व करवाया तो तुमने देखा कि यहां पे
चेंज इन टेंपरेचर मेरा कितना आ रहा है। तो डेल्टा T तो तुम्हारे पास आ गया। CM डेल्ट T
ठीक है? अगर यहां पे हीट रिलीज़ हो रही है क्योंकि आयन हाइड्रस कॉपर सल्फेट को डिॉल्व कराने
के बाद हीट रिलीज़ होगी। टेंपरेचर क्या हो जाएगा? बेसिकली हमारे पास बढ़ जाएगा। तो यहां पे तुम आसानी से वैल्यू निकाल
सकते हो। cm डेल्टा T आराम से निकाल सकते हो। तो इस तरीके से कॉफी कप कैलोरीमीटर की मदद से हम लोग डेल्टाH को मेजर कर सकते
हैं। एक बार ये रिवाइज़ करवा देता हूं ताकि आप लोगों को बिल्कुल भी डिफिकल्ट ना लगे। सबसे पहले हमारे पास एक स्टायरोफ का कप
होता है। स्टायरोफम कप के अंदर बेसिकली हमारे पास मेन कप होता है जिसके अंदर हमारी रिएक्शन होने वाली है। स्टाइरोफोम
का कप लेने का सिंपल सा लॉजिक यहां पर ये है कि भाई ये हमारे सिस्टम और सराउंडिंग के बीच में हीट ट्रांसफर को मिनिमाइज कर
देता है। एडियाबेटिक बॉल की तरह काम करता है। दूसरा हमारे पास जो कप है इसके अंदर बेसिकली हमारे पास रिएक्टेंट होंगे और
रिएक्टेंट पानी में होंगे। तो पानी विल एक्ट एज द सराउंडिंग एंड द रिएक्टेंट विल एक्ट एज अ सिस्टम। अब ऐसा हो सकता है किसी
रिएक्शन में पानी को हीट एनर्जी मिले और किसी रिएक्शन में ऐसा हो सकता है कि पानी से हीट एनर्जी हम लोग कैरी करें। तो दोनों
पॉसिबिलिटीज हमारे पास यहां पर हो सकती हैं। अब यहां पर हमारे पास एक थर्मामीटर होता है। मान लीजिए हमने किसी भी साल्ट को
डिॉल्व करा है। कोई भी रिएक्शन करे हीट एनर्जी अगर गई पानी के अंदर तो पानी का टेंपरेचर बढ़ेगा। तो जो भी टेंपरेचर
बढ़ेगा वो हम थर्मामीटर में नोट करेंगे और डेल्टा t को कैलकुलेट करेंगे। साथ ही साथ यहां पर हीट कहीं एक जगह कंसंट्रेट ना हो
जाए। इसलिए स्टेर मैकेनिज्म लगा हुआ होता है ताकि वो हीट को हर जगह फैलाता रहे। और इसके ऊपर रिलेट रखना एक ऑप्शनल चीज है। तो
मान लेता हूं कि फॉर एग्जांपल मैंने यहां पर एक सॉल्ट को डिॉल्व करा है जिसको डिॉल्व कराने की वजह से यहां पर टेंपरेचर
बढ़ गया पानी का। टेंपरेचर बढ़ गया तो इसको किस तरीके से कैलकुलेट कर सकता हूं? आई नो कि मेरे पास qp = - cp डेल्टा होता
है और qp = cp डेल्टा होता है। ऐसा हो सकता है कि हीट सिस्टम से सराउंडिंग में जा रही है। किसी केस में ऐसा हो सकता है
कि सराउंडिंग से सिस्टम में आ रही है। यानी पानी से सिस्टम में आ रही है। तो ये qp = डेल्टा होता है। qp = डेल्टा होता
है। ये cp इसको मैं लिख सकता हूं c टाइम्स m डेल्टा C टाइम्स mult. तो, यहां पे यह जो C है, दैट इज़ बेसिकली द स्पेसिफ़िक हीट
कैपेसिटी ऑफ़ वाटर जो कि हमारे पास होता है 4.186 J/ g * dसियस। और मास ऑफ़ वाटर हमने देख लिया। जितना भी आपके पास हो आपने लिया
उसको ले सकते हैं। डेल्टा T यानी चेंज इन टेंपरेचर आपने ले लिया। इससे आपके पास वैल्यू आ जाएगी किसकी? डेल्टा H की। ठीक
है? डन है। चलिए, कामना करता हूं दोस्तों, यहां पे आपको सारी बातें समझ में आ रही होगी। ठीक है?
कामना करता हूं हर एक बात आपको अच्छी तरीके से यहां पे क्लियर हो रही होगी। तो अब चलते हैं हम लोग आगे और स्टार्ट करते
हैं हमारे डिस्कशन को ऑन दी एंथैल्पी चेंजेस इन दी फिजिकल एंड दी केमिकल प्रोसेस। तो ये सारी चीजें अब हम यहां पे
खत्म करने वाले हैं। जितने भी एंथैल्पी चेंजेस चाहे वो फिजिकल प्रोसेससेस में हो चाहे केमिकल प्रोसेससेस में हो फटाफट से
इसको खत्म करते हैं। चलिए सुनील भैया स्टार्ट कीजिए। तो सबसे पहली बात जो यहां पर हमारे पास आती है दैट इज़ कॉल्ड एज दी
स्टैंडर्ड स्टेट ऑफ़ एलिमेंट। अब दोस्तों यहां पे स्टैंडर्ड स्टेट ऑफ़ एलिमेंट हमारे पास क्या होती है? इसके दो क्राइटेरिया
हमारे पास होते हैं। दो क्राइटेरिया क्या है सुनील भैया? तो किसी भी एलिमेंट की स्टैंडर्ड स्टेट आप किसको बोलेंगे? किसी
भी एलिमेंट की स्टैंडर्ड स्टेट आप उसको बोलेंगे जो कि उसकी सबसे मोस्ट स्टेबल फिजिकल फॉर्म होगी। कौन सी? मोस्ट स्टेबल
फिजिकल फॉर्म होगी। एक एटमॉस्फियर प्रेशर और टेंपरेचर होगा 25° सेल्सियस पे। तो ये इंपॉर्टेंटली मार्क कर लीजिए। अगर आपसे
पूछा कि किसी भी एलिमेंट की स्टैंडर्ड स्टेट क्या होती है? तो उसकी सबसे स्टेबल फिजिकल फॉर्म एक एटमॉस्फियर प्रेशर और
टेंपरेचर कितना होना चाहिए? 25 डिग्री सेल्सियस। तो उस पे उस पर्टिकुलर एलिमेंट की जो सबसे स्टेबल फॉर्म होगी
थर्मोडायनेमिकली उसको हम कहेंगे स्टैंडर्ड स्टेट ऑफ एलिमेंट। इसमें एक दूसरा क्राइटेरिया भी हमारे पास आता है। इसमें
एक दूसरा क्राइटेरिया भी हमारे पास आता है। इट इज द स्टेट इन व्हिच द एलिमेंट इज मोस्ट कॉमनली फाउंड एट द रूम टेंपरेचर एंड
द प्रेशर। यानी कि हम लोग स्टैंडर्ड स्टेट ऑफ एलिमेंट उसको भी घोषित करते हैं जिसके अंदर एलिमेंट सबसे ज्यादा पाया जाता है एक
एटमॉस्फियर प्रेशर और 25° सेल्सियस पे। तो इस दो क्राइटेरिया से हम लोग स्टैंडर्ड स्टेट ऑफ एलिमेंट को डिफाइन करते हैं कि
एलिमेंट की सबसे स्टेबल स्टेट एट वन एटमॉस्फियर प्रेशर एंड 25° सेल्सियस। साथ ही साथ ये सबसे ज्यादा कॉमनली फाउंड होता
है इस पर्टिकुलर स्टेट में 25° सेल्सियस और वन एटमॉस्फेयर प्रेशर पे। तो यहां पे आपको समझ में भी आ रहा होगा कि सबसे
ज्यादा इसीलिए पाया जा रहा है क्योंकि सबसे ज्यादा स्टेबल होगा इसी पर्टिकुलर फॉर्म में। ठीक है? जी सुनील भैया। अब कुछ
एलिमेंट्स की यहां पर अगर हम स्टैंडर्ड स्टेट की बात करें तो कार्बन की जो स्टैंडर्ड स्टेट है आउट ऑफ डायमंड,
ग्रेफाइट, फ्यूलरीन, कोक सारी की सारी चाहे क्रिस्टलाइन और अमॉर्फस। जो स्टैंडर्ड स्टेट है दैट इज़ ग्रेफाइट यानी
कि कार्बन इन दी सॉलिड स्टेट। ऑक्सीजन की स्टैंडर्ड स्टेट क्या है हमारे पास? O2 गैस। नाइट्रोजन की क्या है? N2 गैस।
ब्रोमीन की क्या है? Br2 लिक्विड। आयोडीन की क्या होगी दादा? आयोडीन सॉलिड। आयरन की क्या होगी? आयरन सॉलिड। सल्फर की होगी
एसिड। और इसमें भी इसकी मोनोक्लीनिक फॉर्म की हम बात करेंगे। उसके बाद हमारे पास हो जाएगा क्लोरीन। तो ये हो जाएगा हमारे पास
गैस। तो ये स्टैंडर्ड स्टेट ऑफ एलिमेंट होती है। यानी कि एलिमेंट की सबसे स्टेबल स्टेट 25 डिग्री सेल्सियस और वन
एटमॉस्फियर प्रेशर पे जो सबसे स्टेबल स्टेट होगी इसको हम बोलेंगे स्टैंडर्ड स्टेट ऑफ एलिमेंट। इस पर्टिकुलर स्टेट में
यानी कि 25 डिग्री सेल्सियस तो वर एमॉस्फेयर प्रेशर पर सबसे ज्यादा इसी स्टेट में आपको मिलता है। अब यहां पर एक
छोटा सा एक्सेप्शन है। एक छोटा सा यहां पर एक एक्सेप्शन है। अगर हम लोग फास्फोरस की बात करते हैं तो फास्फोरस की डिफरेंट
फॉर्म्स हैं। लाइक रेड फास्फोरस है। है ना? आपके पास येलो फास्फोरस है, वाइट फास्फोरस है। अलग-अलग फॉर्म्स हैं। तो
वाइट फास्फोरस को स्टैंडर्ड स्टेट माना जाता है। पर आपके दिमाग में एक सवाल आएगा सुनील भाई 25° सेल्सियस और एक एटमॉस्फेरिक
प्रेशर पे वाइट फास्फोरस सबसे स्टेबल फॉर्म नहीं है। मुझे पता है कि नहीं है। लेकिन स्टिल इसको कंसीडर किया जाता है।
क्यों वो भी बताऊंगा। वाइट फास्फोरस इजंट द मोस्ट स्टेबल फॉर्म ऑफ़ फास्फोरस एट दी स्टैंडर्ड कंडीशंस। लेकिन इट इट इज स्टिल
कंसीडर्ड टू बी द स्टैंडर्ड स्टेट ऑफ फास्फोरस। क्यों? बिकॉज़ इट इज मोस्ट कॉमनली फाउंड एंड यूज्ड इन दी प्रैक्टिकल
सिचुएशंस। हमें पता है कि फास्फोरस की सबसे स्टेबल फॉर्म वाइट फास्फोरस नहीं है 25° सेल्सियस और वन एटमॉस्फेयर प्रेशर पे।
स्टिल मेरे दोस्तों हम इसको कंसीडर करते हैं। बिकॉज़ ये सबसे ज्यादा इसी पर्टिकुलर फॉर्म में पाया जाता है। और इसी फॉर्म में
इसकी सबसे ज्यादा कॉमन एप्लीकेशनेशंस देखी जाती है इन कंडीशंस के ऊपर। ठीक है? क्लियर है बात? क्लियर है बात? जी सुनील
भैया। अब यहां पर हमारे पास आता है एंथैल्पी चेंज ड्यूरिंग द फेस ट्रांसफॉर्मेशंस। एंथैल्पी चेंज ड्यूरिंग
दी फज़ ट्रांसफॉर्मेशंस यानी कि डेल्टाH यानी कि डेल्टा H। एंथैल्पी चेंज ड्यूरिंग दी फेस ट्रांसफॉर्मेशंस यानी कि डेल्टाH
की हम बात कर रहे हैं। अब सुनील भैया सुनील भैया यहां पर एंथैल्पी चेंज ड्यूरिंग द फेस
ट्रांसफॉर्मेशंस क्या-क्या होंगे? ध्यान से देखिए। तो तीन के बारे में हम बात करेंगे। स्टैंडर्ड एंथैल्पी ऑफ़ मेल्टिंग,
स्टैंडर्ड एंथैल्पी ऑफ़ वेपराइज़ेशन, स्टैंडर्ड एंथैल्पी ऑफ़ सब्लीमेशन। तो मेल्टिंग का मतलब क्या होता है? आप सभी को
पता है कि जब हम बात कर रहे हैं कि सॉलिड से लिक्विड स्टेट में जाने के लिए तो दैट इज कॉल्ड एज मेल्टिंग।
वेपराइजेशन का मतलब है कि यानी कि हम बात कर रहे हैं लिक्विड टू गैस और अगर किसी भी लिक्विड को गैसियस फॉर्म
में कन्वर्ट कर रहे हैं तो दैट इज कॉल्ड एज अ वेपर। सब्लिमेशन का मतलब होता है किसी भी सॉलिड को हम लोग डायरेक्टली वेपर
में कन्वर्ट कर रहे हैं। यानी कि हम लोग कन्वर्ट कर रहे हैं गैस में। तो यहां पर स्टैंडर्ड एंथैल्पी ऑफ
मेल्टिंग, स्टैंडर्ड एंथैल्पी ऑफ वेपराइजेशन, स्टैंडर्ड एंथैल्पी ऑफ सब्लीेशन।
ये क्या होता है? तो यहां पर ये क्या होता है? ध्यान से सुनना। हमें कितनी अमाउंट में हीट रिक्वायर्ड होगी टू मेल्ट वन मोल
ऑफ सॉलिड एट इट्स मेल्टिंग पॉइंट एंड वन एटमॉस्फियर ऑफ प्रेशर। ध्यान से सुनना। स्टैंडर्ड एंथैल्पी ऑफ मेल्टिंग क्या
होगी? हमें कितने अमाउंट में हीट एनर्जी देनी पड़ेगी एक मोल सॉलिड को पूरी तरीके से लिक्विड बनाने के लिए एक एटमॉस्फेरिक
प्रेशर पे। तो सुनील भाई यहां पे मेरे को ये समझ में नहीं आ रहा। एंथैल्पी वर्ड को यू यूज़ क्यों कर रहे हैं? चेंज इन
एंथैल्पी को यूज़ क्यों कर रहे हैं? डेल्टा H की बात क्यों कर रहे हैं? मेरे दादा हीट एनर्जी का एक्सचेंज कहां पर हो रहा है? वन
एटमॉस्फेयर ऑफ प्रेशर यानी कांस्टेंट प्रेशर की बात हो रही है। एटमॉस्फेरिक प्रेशर तो कांस्टेंट है ना यहां पे। तो
कांस्टेंट प्रेशर पे जब भी आपके हीट के चेंजेस होंगे तो आप उसको किस टर्म्स में बात करेंगे? डेल्टा h के टर्म्स में बात
करेंगे। करेंगे नहीं करेंगे? जी बिल्कुल करेंगे। तो यहां पर अगर एग्जांपल लेता हूं कि मेल्टिंग पॉइंट ऑफ आइस जो हमारे पास
होता है 0° सेल्सियस। प्रेशर हमारे पास है 1 एटीएम। तो कितनी अमाउंट की मुझे हीट एनर्जी देनी
पड़ेगी एक मोल सॉलिड को लिक्विड में कन्वर्ट करने के लिए उसके मेल्टिंग पॉइंट पर और वन एटमॉस्फेरिक प्रेशर पर यहां पर
इस चीज को हम बोलेंगे स्टैंडर्ड एंथैल्पी ऑफ मेल्टिंग या स्टैंडर्ड एंथैल्पी ऑफ़ मेल्टिंग या फिर इसको बोलते हैं फ्यूज़।
बोथ आर द करेक्ट टर्म्स। तो यहां पर इसको रिप्रेजेंट भी किया हुआ है। डेल्टाH ऑफ फ्यूज़ या फिर डेल्टाH ऑफ मेल्टिंग यहां पर
कितना है? 6.01 kJ पर मोल। अब ये क्या बता रहा है? ये बता रहा है एंथैल्पी में चेंजेस। ठीक है ना? यह बता रहा है
एंथैल्पी में चेंजेस कि हमको कांस्टेंट प्रेशर के ऊपर हमें कास्टेंट प्रेशर के ऊपर
कास्टेंट प्रेशर यानी कि एटमॉस्फेरिक प्रेशर पर हमें 6.01 किलजूल ऑफ हीट एनर्जी देनी पड़ेगी एक मोल आइस को वाटर बनाने के
लिए। ये इसका मतलब है। सुनील भाई तो यहां पे पॉजिटिव क्यों लिखा हुआ है? यह समझा दीजिए। यह पॉजिटिव क्यों लिखा है? अरे
दादा, हीट इज गिवन ना? हीट इज गिवन। राइट हीट इज गिवन फॉर मेल्टिंग ना एंडोथर्मिक प्रोसीजर है ना दादा आपने हीट
एनर्जी दी है एंडोथर्मिक प्रोसीजर है तो पॉजिटिव होगा कि नहीं होगा? जी बिल्कुल होगा। चलिए तो पहली बात तो हमें अच्छी
तरीके से क्लियर हो गई। अगर स्टैंडर्ड एंथैल्पी ऑफ़ वेपराइजेशन की बात करेंगे तो अगेन द अमाउंट ऑफ हीट रिक्वायर्ड टू बॉईल
वन मोल ऑफ लिक्विड एट इट्स बॉइलिंग पॉइंट एंड वन एटमॉस्फियर ऑफ़ प्रेशर। अगेन कांस्टेंट प्रेशर। अब ये देखिए कांस्टेंट
प्रेशर पे जब भी हीट चेंजेस की बात होगी यानी कि हीट दे रहे हैं या ले रहे हैं तो डेल्टाH के टर्म्स में होगी कि नहीं होगी
अपने दिल से बताओ। कांस्टेंट प्रेशर पर अगर हीट आ रही है जा रही है तो वहां पर हम लोग बात करते हैं चेंज इन एंथैल्पी की। जी
बिल्कुल सुनील भैया। तो यहां पर यही बातें हम कर रहे होंगे। बहुत बढ़िया। तो यहां पे बॉइलिंग पॉइंट ऑफ़ वाटर 100° सेल्सियस होता
है। प्रेशर हमारे पास 1 attएम होता है। डेल्टाH जो हमारे पास है डेल्टाH स्टैंडर्ड
एंथैल्पी ऑफ़ वेपराइज़ेशन। यह है +40.79 kjल् / पर मोल। अगेन हीट इज़ गिवन। इसीलिए ये पॉजिटिव है। हीट इज़ गिवन
फॉर बोइलिंग। इसीलिए हमारे लिए क्या है? पॉजिटिव है। जी सुनील भैया। सुनील भैया यहां पे
वेपराइजेशन यहां पर बोइलिंग भाई कितनी बार बता चुका हूं। वेपराइजेशन के दो टाइप्स होते हैं। एक बॉइलिंग होता है और एक
इवापोरेशन होता है। अगर किसी लिक्विड को हम लोग वेपर या गैस में कन्वर्ट करते हैं उसके बॉइलिंग पॉइंट टेंपरेचर पे तो यहां
पर उसको बोलते हैं बोइलिंग। अगर किसी लिक्विड का वेपर में कन्वर्ज़ हो रहा है लेकिन एक ऐसे टेंपरेचर पे जो कि बोइलिंग
पॉइंट से बहुत कम है तो उसे हम बोलते हैं इवापोरेशन। क्लियर है बात? जी। तीसरी हमारे पास क्या आती है? ये तो हमारे पास
थी पहली। ये हमारे पास थी दूसरी। तीसरी क्या आती है? स्टैंडर्ड एंथैल्पी ऑफ़ सब्लीमेशन। सो द अमाउंट ऑफ हीट रिक्वायर्ड
टू सब्लाइ वन मोल ऑफ़ सॉलिड एट इज़ सब्लिमेशन पॉइंट एंड वन एटमॉस्फियर ऑफ़ प्रेशर। अगेन यहां पर क्या है? कांस्टेंट
प्रेशर। अगेन यहां क्या है? अगेन यहां क्या है? कांस्टेंट प्रेशर।
तो कांस्टेंट प्रेशर पे हीट के चेंजज़ होंगे। तो चेंज इन एंथैल्पी के टर्म्स में बात करेंगे। तो हमको कितनी अमाउंट में हीट
एनर्जी देनी पड़ेगी? एक मोल सॉलिड को गैस यानी कि वेपर में कन्वर्ट करने के लिए उसके सब्लीमेशन पॉइंट पर एंड वन
एटमॉस्फेयर ऑफ़ प्रेशर यानी कि कॉन्सेंट प्रेशर पर इसको हम बोलेंगे स्टैंडर्ड एंथैल्पी ऑफ सब्लीमेशन।
अगर यहां पर हम बात करते हैं सब्लीमेशन पॉइंट ऑफ द ड्राई आइस हमारे पास 195 केल्विन होता है। प्रेशर 1 attएम है तो
स्टैंडर्ड स्टैंडर्ड स्टैंडर्ड एंथैल्पी ऑफ सब्लीमेशन हो जाएगा प्लस 25.2 kजल्स पर मोल। पर मोल की बात हो रही है। पर मोल की
बात हो रही है। पॉजिटिव क्यों है? अगेन यहां पर हमने जो हीट है वो दी है। दैट इज़ व्हाई ये पॉजिटिव
होगा। तो कामना करता हूं तीनों बातें आपको अच्छी तरीके से समझ में आई होगी। इसी का अगर उल्टा करेंगे लिक्विड टू सॉलिड तो ये
नेगेटिव हो जाएगा। गैस टू लिक्विड तो नेगेटिव हो जाएगा। गैस टू सॉलिड तो नेगेटिव हो जाएगा। क्लियर है बात? जी
अगर इतनी बात समझ में आती जाए तो सारे के सारे दोस्त एक बार आए भैया लगाते जाना कि सुनील भाई ये सारी बातें समझ में आ रही
है। किसी को कोई भी दिक्कत यहां पर नहीं आ रही है। ठीक है? जी सुनील भाई। जी सुनील भाई। डन है। सॉर्टेड है। डन है। सॉर्टेड
है। तो यहां तक सभी को सब कुछ क्लियर है? जी सुनील भाई 100% सारी चीजें हमको अच्छी तरीके से क्लियर है। अब ध्यान से देखना
हमारे पास आता है एंथैल्पी ऑफ फॉरमेशन जिसको हम लोग रिप्रेजेंट करते हैं डेल्टाHF नॉट या कुछ लोग ऐसे भी
रिप्रेजेंट करते हैं डेल्टाf h नॉट बोथ आर द करेक्ट वेज़ इसमें कोई दिक्कत नहीं है। एंथैल्पी ऑफ़ फॉर्मेशन को ये डिफाइन कर रहा
है। और सरल भाषा में कुछ लोग ऐसे भी डिफाइन कर देते हैं। ठीक है ना? ऐसे भी लिख देते हैं। दैट इज़
आल्सो फाइन। तो एंथैल्पी ऑफ़ फॉर्मेशन हमारे पास क्या होता है? सुनील भाई जल्दी से हमको बताइए। व्हाट इज एंथैल्पी ऑफ़
फॉर्मेशन? तो चेंजेस इन दी ही। चेंजेस इन हीट। चेंज इन हीट दैट टेक्स प्लेस एट द कॉन्सेंट प्रेशर। चेंज इन हीट दैट टेक्स
प्लेस एट द कॉन्सेंट प्रेशर इज़ कॉल्ड दी चेंज इन एंथैल्पी। ठीक है ना? तो जो भी हीट का एक्सचेंज होगा
एट दी कॉन्सेंट प्रेशर। हीट एक्सचेंज लिख देते हैं। हीट एक्सचेंज। हीट एक्सचेंज। ठीक है ना?
हीट एक्सचेंज दैट टेक्स प्लेस एट दी कॉन्सेंट प्रेशर। हीट एक्सचेंज दैट टेक्स प्लेस एट दी
कॉन्सेंट प्रेशर। हीट एक्सचेंज दैट टेक्स प्लेस एट दी कॉन्सेंट प्रेशर। यानी कि डेल्टाH व्हाइल दी फॉर्मेशन ऑफ़ वन मोल ऑफ़
अ कंपाउंड फ्रॉम दी एलिमेंट्स इन देयर स्टैंडर्ड स्टेट इज़ कॉल्ड दी एंथैल्पी ऑफ़ फॉर्मेशन। क्या बोला मैंने? अगर किसी भी
कंपाउंड का एक मोल बनाने के लिए उसके उन एलिमेंट से किन एलिमेंट से? स्टैंडर्ड स्टेट ऑफ एलिमेंट से। यानी कि मान लीजिए
मैं एक मोल कंपाउंड बना रहा हूं। तो वो जो एक मोल कंपाउंड हमने बनाया है उसके अंदर जो एलिमेंट्स हैं उसकी स्टैंडर्ड स्टेट से
अगर वो बन रहा है तो उसके अंदर क्या-क्या हीट में चेंजज़ आएंगे चाहे हीट रिलीज हो रही है एब्जॉर्ब हो रही है जो भी हीट में
चेंजज़ आएंगे एट कॉन्स्टेंट प्रेशर दैट इज कॉल्ड एज द एंथैल्पी ऑफ़ फॉर्मेशन। फिर से सुनो एक मोल कंपाउंड को बनाने के लिए अब
वो जो कंपाउंड है जिस भी पर्टिकुलर एलिमेंट से बना है उन एलिमेंट्स की अगर स्टैंडर्ड स्टेट से अगर वो बना है तो उसको
बनाने के लिए यहां पर जो भी हीट में चेंजिस आए होंगे चाहे हीट एब्जॉर्ब हो रही है चाहे हीट रिलीज हो रही है तो वहां पर
ये हो रही है कॉन्स्टेंट प्रेशर पर तो इसीलिए इसको हम क्या बोलेंगे एंथैल्पी ऑफ़ फॉरमेशन। अच्छा कुछ लोग यहां पे एक टर्म
और ऐड करते हैं स्टैंडर्ड एंथैल्पी ऑफ़ फॉर्मेशन। तो आप स्टैंडर्ड वर्ड लगा सकते हैं। कोई दिक्कत वाली बात नहीं है।
डन है। यह तो क्लियर हो रही है बात। पहला पॉइंटर क्लियर है सुनील भाई। दूसरा अब देखिए एक मोल की बात हो रही है तो ये हो
जाएगा किलोजूल पर मोल। क्या हो जाएगा? एंथैल्पी की यूनिट क्या हो जाएगी? किलोजूल पर मोल। अरे भाई साहब पर मोल पे आप बात कर
रहे हो ना तो यूनिट क्या हो जाएगी? किलोजूल पर मोल। क्या हो जाएगी? किलोजूल पर मोल। तो जो हीट के एक्सचेंज की आप बात
कर रहे हो कांस्टेंट प्रेशर पर कर रहे हो और साथ ही साथ एक मोल के लिए कर रहे हो तो किलोजूल पर मोल।
साथ ही साथ यहां पर हमारे पास आ जाएगा एंथैल्पी ऑफ़ फॉर्मेशन ऑफ एनी स्टैंडर्ड स्टेट ऑफ़ एलिमेंट दैट इज़ ऑलवेज इक्वल्स टू
ज़ीरो। याद रखना ये डेल्टाHF नॉट यानी कि एंथैल्पी ऑफ़ फॉर्मेशन फॉर एनी स्टैंडर्ड स्टेट ऑफ़ एलिमेंट हमेशा ज़ीरो होगा। तो अगर
मैं आपसे पूछता हूं एंथैल्पी ऑफ़ फॉर्मेशन ऑफ़ ग्रेफाइट कितना होगा? तो आप कहोगे ज़ीरो। मैं कहूंगा एंथैल्पी ऑफ़ फॉर्मेशन ऑफ़
ब्रोमीन लिक्विड कितना होगा? तो आप कहोगे ज़ीरो। क्योंकि ब्रोमीन की स्टैंडर्ड स्टेट क्या है? 25° सेल्सियस ऑफ़ वन एटमॉस्फेरिक
प्रेशर पे लिक्विड स्टेट। तो उसके लिए स्टैंडर्ड स्टेट ऑफ़ उसके लिए एंथैल्पी ऑफ़ फॉर्मेशन क्या हो जाएगा? ज़ीरो हो जाएगा।
तो एक पॉइंट, दो पॉइंट और तीन पॉइंट और मैं कामना करता हूं। आपको अच्छी तरीके से क्लियर है। कुछ एग्जांपल्स को सॉल्व करते
हैं। अब ये कह रहा है कि यहां पर आपके पास कार्बन डाइऑक्साइड बना है और ये कुछ एनर्जी निकली है। लेकिन एंथैल्पी ऑफ़
फॉर्मेशन हम कब लिखेंगे? ध्यान से सुनना। एंथैल्पी ऑफ़ फॉर्मेशन लिखने के लिए हम ये देखेंगे कि इसका एक मोल कंपाउंड बनना
चाहिए। ये एक मोल कंपाउंड बना है। एक मोल कंपाउंड का फॉर्मेशन कौन से एलिमेंट से? कार्बन से होना चाहिए।
एंड साथ ही साथ ऑक्सीजन से होना चाहिए। उनकी स्टैंडर्ड स्टेट में कार्बन की स्टैंडर्ड स्टेट क्या होती है? ग्रेफाइट।
ऑक्सीजन की स्टैंडर्ड स्टेट क्या होती है? ऑक्सीजन। तो ये बिल्कुल सही है। अब यहां पे ये कह रहा है कि + x जूल की एनर्जी
रिलीज हुई। अगर हमारे पास हीट एनर्जी रिलीज होती है यानी कि एग्जोथर्मिक प्रोसीजर है। तो जो डेल्टाHF0 हो जाएगा
डेल्टा HF नॉट का एक्सप्रेशन फॉर द फ़ेशन ऑफ़ CO2। ठीक है ना? फॉर
फॉर्मेशन ऑफ CO2 वुड बी कितना हो जाएगा? ये रिलीज हो रही है तो ये हो जाएगा -x
किलJूल पर मोल ये हो जाएगा। एंथैल्पी ऑफ फॉर्मेशन ऑफ CO2 एंथैल्पी ऑफ
फॉर्मेशन ऑफ CO2 एंथैल्पी ऑफ फॉर्मेशन ऑफ CO2 वुड बी इतना क्लियर है कि नहीं है? अब सुनील भैया आपने
कैसे लिखा? एक बार बताओ। देखिए एक मोल कंपाउंड एक मोल कंपाउंड तो एक मोल CO2 कार्बन और ऑक्सीजन से बना है। कार्बन की
स्टैंडर्ड स्टेट ग्रेफाइट ऑक्सीजन की स्टैंडर्ड स्टेट ऑक्सीजन। यस। तो इस समय पे जो भी हीट के एक्सचेंजेस आएंगे उस हीट
एक्सचेंज को कांस्टेंट प्रेशर पे हम बोलते हैं एंथैल्पी ऑफ फॉर्मेशन। तो एंथैल्पी ऑफ़ फॉर्मेशन ऑफ CO2 जो हमारे पास हो जाएगा
दैट इज -x किलजूल पर मोल। बिकॉज़ हीट एनर्जी रिलीज़ हो रही है। यानी कि प्रोसेस हमारे पास क्या है? एग्जोथर्मिक है। सो -
X किJ पर मोल हो जाएगा। उसी प्रकार आप देखिए यहां पर क्या है ना दो मोल HCL हो गए। तो सबसे पहले तो हम इसको क्या करेंगे?
एक मोल बनाएंगे। तो एक मोल बनाने के लिए टू से डिवाइड कर दिया। तो यहां पे एक मोल। यहां हो गया यह 1/2 यहां हो गया यह 1/2 और
यह हो गया बेसिकली x / 2 अगर दो मोल्स बनाने के लिए x किलजूल चाहिए था तो एक मोल बनाने के लिए x/2 किलजूल चाहिए। सिंपल सी
बात है जी। अब एक मोल बनाने के लिए इसका 1/2 मोल, इसका 1/2 मोल और इसके x/2 kज की एनर्जी रिलीज़ हो रही है। अब ध्यान से
देखिए। पहली कंडीशन तो हमने सेटिस्फाई कर ली कि एक मोल कंपाउंड यानी कि एक मोल HCL बनाने के लिए एक मोल HCL किससे बनेगा?
हाइड्रोजन से बनना चाहिए और दूसरा क्लोरीन से बनना चाहिए। हाइड्रोजन की स्टैंडर्ड स्टेट क्या है? गैस। बिल्कुल सही। क्लोरीन
की स्टैंडर्ड स्टेट क्या है? गैस। तो बिल्कुल सही है। ये बिल्कुल स्टैंडर्ड स्टेट से ही आ रहा है। वन मोल ऑफ़ कंपाउंड
फ्रॉम द एलिमेंट्स इन देयर स्टैंडर्ड स्टेट। ये आपको हमेशा चेक करना है। दिस इज़ मोस्टेंट पार्ट। तो मैंने बोला कि भाई
मेरा एक मोल HCL बन रहा है हाइड्रोजन और क्लोरीन से हाइड्रोजन की स्टैंडर्ड स्टेट H2 क्लोरीन की स्टैंडर्ड स्टेट Cl2
बिल्कुल सही है। X/2 किलJूल है। तो यहां पर हमारे पास हो जाएगा एंथैल्पी ऑफ़ फॉर्मेशन ऑफ़ HCl जो हो जाएगा वो बेसिकली
कितना हो जाएगा? वो हो जाएगा माइनस का x/ 2 kjूल पर मोल। क्लियर है भाई? जी। तीसरा अगेन इसका भी एक मोल क्रिएट करेंगे तो
यहां पर भी हो जाएगा 1/2 और यहां पर भी हो जाएगा 1/2 किससे बन रहा है? हाइड्रोजन से बन रहा है
और ब्रोमीन से बन रहा है। अब हाइड्रोजन और ब्रोमीन अपने स्टैंडर्ड स्टेट्स में होने चाहिए। तो हाइड्रोजन की स्टैंडर्ड स्टेट
तो गैसियस है। ब्रोमीन की स्टैंडर्ड स्टेट लिक्विड ये गलत हो गया। लिक्विड में होना चाहिए था। तो नो एक्सप्रेशन
ऑफ एंथैल्पी ऑफ़ फॉर्मेशन। यहां पर आप एंथैल्पी ऑफ फॉर्मेशन के एक्सप्रेशन को नहीं लिखेंगे। क्योंकि अगर
एक मोल HBr की अगर हम बात करें तो ये ये यहां पर ये क्या हो जाता? ये भी x / 2 हो जाता। ये कितना हो जाता? ये भी x / 2 हो
जाता। पहले ध्यान से सुन लो। मैंने सबसे पहले ये टू था तो इसको एक बनाया। डिवाइड बाय 2 / 2 / 2 डिवाइड बाय 2 किया। अब एक
मोल HBr में हमारे पास एलिमेंट्स कौन से? हाइड्रोजन और ब्रोमीन। तो हाइड्रोजन का स्टैंडर्ड स्टेट क्या होता है? H2 गैस।
ब्रोमीन का स्टैंडर्ड स्टेट क्या होता है? बेसिकली लिक्विड। लेकिन यहां पे गैस है इसलिए मैंने इसको कट कर दिया। तो इसके लिए
मैं डेल्टा hf नॉट का एक्सप्रेशन नहीं लिख सकता। बिकॉज़ यहां पर जो एलिमेंट्स हैं वो अपनी स्टैंडर्ड स्टेट में नहीं है। जी
सुनील भैया बहुत बढ़िया। चलो सवाल लगाओ। डेल्टाHF नॉट यानी एंथैल्पी ऑफ़ फॉर्मेशन विल नॉट बी ज़ीरो फॉर व्हिच ऑफ़ द फॉलोइंग।
अब इसमें से किसके लिए एंथैल्पी ऑफ़ फॉर्मेशन जो है वो ज़ीरो नहीं होगा। एंथैल्पी ऑफ़ फॉर्मेशन ज़ीरो किसके लिए होता
है? इट इज़ ज़ीरो फॉर स्टैंडर्ड स्टेट ऑफ एलिमेंट। ज़ीरो फॉर स्टैंडर्ड स्टेट ऑफ एलिमेंट।
तो जो भी एलिमेंट अपनी स्टैंडर्ड स्टेट में नहीं है उसके लिए ज़ीरो नहीं होगा। अरे एंथैल्पी ऑफ़ फॉर्मेशन ज़ीरो होता है
स्टैंडर्ड स्टेट ऑफ एलिमेंट के लिए। सोडियम की स्टैंडर्ड स्टेट स्टैंडर्ड स्टेट ऑफ एलिमेंट।
आप देखिए ये आइडेंटिफाई कीजिए कि स्टैंडर्ड स्टेट ऑफ एलिमेंट क्या है? सोडियम की स्टैंडर्ड स्टेट ऑफ एलिमेंट
सॉलिड है g। ब्रोमीन की लिक्विड है g। डाई कार्बन की डायमंड है? नहीं। हाइड्रोजन की गैस है g। इसका मतलब इसके लिए ज़ीरो नहीं
होगा। अरे स्टैंडर्ड स्टेट ऑफ एलिमेंट सोडियम की सॉलिड है। जी तो उसके लिए एंथैल्पी ऑफ़ फॉर्मेशन ज़ीरो होगा। इसके लिए
भी एंथैल्पी ऑफ़ फॉर्मेशन ज़ीरो होगा। इसके लिए भी ज़ीरो होगा। डायमंड के लिए ज़ीरो नहीं होगा। क्योंकि कार्बन की स्टैंडर्ड
स्टेट ऑफ़ एलिमेंट होती है ग्रेफाइट। क्लियर है? जी, क्लियर है? अगला सवाल करेंगे फटाफट से। जल्दी से देखेंगे। अगला
सवाल। व्हिच ऑफ़ द फॉलोइंग इक्वेशन रिप्रेजेंट्स द एंथैल्पी ऑफ़ फॉर्मेशन ऑफ दी कंपाउंड? इसमें से कौन सा एंथैल्पी ऑफ़
फॉर्मेशन ऑफ़ कंपाउंड को रिप्रेजेंट करता है? तो, सबसे पहले कितने मोल कंपाउंड का? 1 मोल, 1 मोल, 1 मोल और एक मोल। चलो ये ये
पहली चीज तो चारों में सेटिस्फाई हो रही है कि एक मोल बन रहा है। अब एक मोल कंपाउंड जो बन रहा है वो जिस भी एलिमेंट
से बन रहा होगा वो अपनी स्टैंडर्ड स्टेट में होना चाहिए। यानी कि एक मोल CO2 अगर बन रहा है तो वो जिस एलिमेंट से बन रहा
होगा वो अपनी स्टैंडर्ड स्टेट में होनी चाहिए। कार्बन की स्टैंडर्ड स्टेट ग्रेफाइट होनी चाहिए। यहां पे डायमंड है।
हटा दो। इसके लिए डेल्टा HF नॉट नहीं लिख सकते। हाइड्रोजन गैस ब्रोमीन लिक्विड होना चाहिए था। इसके
लिए भी नहीं लिख सकते। कार्बन ग्रेफाइट बिल्कुल सही। ऑक्सीजन लिक्विड गलत ऑक्सीजन गैस होती है स्टैंडर्ड स्टेट। हाइड्रोजन
का गैस होता है। ब्रोमीन का लिक्विड होता है। बिल्कुल सही। तो डी के लिए सही है। यहां पे ये गलत था। ये सही था। यहां पे ये
सही था। ये गलत था। यहां पे ये सही था। ये गलत था। और यहां पे दोनों सही थे। क्लियर है। समझ गए? जी। चलो फिर आगे चलें।
समझते जा रहे हो? आए भैया लगाते जाना फटाफट फटाफट आगे चलते जाएंगे। अगला एंथैल्पी ऑफ़ रिएक्शन। अब देखिए यहां पे
कुछ लोग स्टैंडर्ड शब्द को भी जोड़ देते हैं। तो आप स्टैंडर्ड शब्द लगा सकते हैं। स्टैंडर्ड एंथैल्पी ऑफ़ रिएक्शन डेल्टा HR
नॉट और कुछ लोग इसको डायरेक्टली डेल्टा ये ऐसे भी लिखते हैं और कुछ लोग इसको ऐसे भी लिखते हैं। सब सही है। कोई दिक्कत नहीं
है। ठीक है ना? हां। मतलब समझ में आना चाहिए। अब ये क्या होता है? जो भी आपका हीट एक्सचेंज हो रहा है जो भी आपका हीट
एक्सचेंज हो रहा है टोटल हीट एक्सचेंज फिर से सुनना टोटल हीट एक्सचेंज टोटल हीट एक्सचेंज टेकिंग प्लेस एट दी
कॉन्सेंट प्रेशर टेकिंग प्लेस एट दी कास्टेंट प्रेशर जो भी टोटल हीट में एक्सचेंज हो रहा है एट कॉन्सेंट प्रेशर
ड्यूरिंग अ केमिकल रिएक्शन ड्यूरिंग अ केमिकल रिएक्शन इसको हम बोलेंगे एंथैल्पी ऑफ रिएक्शन मतलब एक रासायनिक प्रतिक्रिया
के दौरान ौके पास यहां पर क्या हो रहा है? हीट एक्सचेंज हो रहा है। एक रिएक्शन के दौरान जो टोटल
हीट एक्सचेंज हो रहा है हमारे पास टोटल हीट एक्सचेंज ड्यूरिंग अ रिएक्शन। टोटल हीट एक्सचेंज ड्यूरिंग अ रिएक्शन एट
कॉन्सेंट प्रेशर। तो हम लोग बोलेंगे क्या? चेंज इन एंथैल्पी। तो टोटल हीट एक्सचेंज टेकिंग प्लेस एट द कॉन्सेंट प्रेशर
ड्यूरिंग अ केमिकल रिएक्शन इज़ कॉल्ड ऐज़ दी स्टैंडर्ड एंथैल्पी ऑफ़ रिएक्शन। इसकी यूनिट क्योंकि हम यहां पर पर मोल्स में
बात नहीं कर रहे हैं तो इसकी यूनिट हमारे पास क्या हो जाएगी? किलोजूल हो जाएगी। इसको कैलकुलेट कैसे करते हैं? अगर आपको
स्टैंडर्ड एंथैल्पी ऑफ़ रिएक्शन को आइडेंटिफाई करना है, तो आपको क्या करना पड़ेगा यहां पर? आपको क्या करना पड़ेगा?
आपको यहां पे सम करना पड़ेगा ऑफ एंथैल्पी ऑफ़ दी फॉर्मेशन ऑफ़ प्रोडक्ट्स माइनस समेशन ऑफ़ एंथैल्पी ऑफ़ दी फॉर्मेशन ऑफ़
रिएक्टेंट्स। बहुत सिंपल सा फ़ॉर्मूला है। अगर आपको स्टैंडर्ड एंथैल्पी ऑफ़ रिएक्शन को आइडेंटिफाई करना है, तो आपको समेशन ऑफ़
दी एंथैल्पी ऑफ़ फॉर्मेशन ऑफ़ प्रोडक्ट्स माइनस समेशन ऑफ़ एंथैल्पी ऑफ़ फॉर्मेशन ऑफ रिएक्टेंट्स को इसमें से इसको माइनस करना
पड़ेगा। ठीक है? तो, यहां पर मैंने एक और इंपॉर्टेंट बात भी लिखी है। ध्यान से सुनना। यहां पर एक और इंपॉर्टेंट बात भी
लिखी है। द समेशन इनवॉल्व्स द एंथैल्पीज ऑफ फॉर्मेशन फॉर ऑल प्रोडक्ट्स एंड रिएक्टेंट्स।
द समेशन इनवॉल्व्स एंथैल्पी ऑफ़ फॉर्मेशन ऑफ़ ऑल प्रोडक्ट्स माइनस एंथैल्पी ऑफ़ फॉर्मेशन ऑफ़ ऑल रिएक्टेंट्स।
लेकिन जब आप ये कर रहे होंगे कि आपने मान लीजिए प्रोडक्ट्स लिख दिए। आपने मान लीजिए रिएक्टेंट्स लिख दिए। तो
आपने उनकी एंथैल्पी ऑफ फॉर्मेशन लिख दी। मान लीजिए वहां पर दो NH3 के मॉलिक्यूल्स हैं एक रिएक्शन में। तो आपने एंथैल्पी ऑफ
फॉर्मेशन ऑफ अमोनिया को लिखते समय मल्टीप्लाई बाय टू भी करना है। क्योंकि वहां पे स्टाइशियोमेट्रिक कोफिशिएंट को भी
हम वैल्यू देते हैं। इसको अलग से मार्क कर रहा हूं। वेटेड बाय देयर स्टाइशियोमेट्रिक कोफिशिएंट्स इन द बैलेंस्ड केमिकल
इक्वेशन। मतलब आप मान लीजिए एंथैल्पी ऑफ़ फॉर्मेशन ऑफ़ प्रोडक्ट के दौरान एक प्रोडक्ट हमारे
पास था NH3। तो एंथैल्पी ऑफ़ फॉर्मेशन ऑफ़ NH3 को लिखते समय अगर वहां पे स्टाइोमेट्रिक कोफिशिएंट रिएक्शन में उसके
सामने दो लिखा है तो 2 मल्टीप्लाई बाय इट्स एंथैल्पी ऑफ़ फॉर्मेशन होगा। तीन लिखा है तो 3 * बाय द एंथैल्पी ऑफ़ फॉर्मेशन ऑफ़
दैट पर्टिकुलर प्रोडक्ट या रिएक्टेंट होगा। समझ में आ रही है बात? जी सुनील भैया। तो काम ना करता ये तीन पॉइंटर समझ
में आए होंगे। जो भी टोटल हीट में एक्सचेंज हो रहा है एट कॉन्सेंट प्रेशर ड्यूरिंग अ केमिकल रिएक्शन उसको हम बोलते
हैं एंथैल्पी ऑफ़ फॉर्मेशन। किलोजूल्स में मेजर होती है। और अगर आपको एंथैल्पी ऑफ़ फॉर्मेशन किसी भी रिएक्शन का निकालना है
तो आपको सम करना पड़ेगा। एंथैल्पी ऑफ़ फॉर्मेशन ऑफ़ प्रोडक्ट्स माइनस समेशन ऑफ़ एंथैल्पी ऑफ़ फॉर्मेशन ऑफ़ द रिएक्टेंट्स।
जब आप ये कर रहे हैं, तो अगर मान लीजिए प्रोडक्ट या रिएक्टेंट के अंदर जो आपके पास जो भी कंपाउंड्स हैं, जो भी कंपाउंड्स
आपके पास है, उनके आगे जो स्टइोमेट्रिक कोफिशिएंट्स हैं उनको आपको कंसीडर करना होता है। ठीक है? अब मैं इसको एक छोटे से
एग्जांपल से आपको बताता हूं। जैसे मान लीजिए एक रिएक्शन आपको दे रखी है। और उसका डेल्टा HR भी दे रखा है। तो फिर हम क्या
कर रहे हैं? हम क्यों कैलकुलेट कर रहे हैं? अरे हम प्रूव कर रहे हैं फार्मूला को। वी आर जस्ट प्रूविंग द फार्मूला।
ध्यान से सुनो। तो सबसे पहले सबसे पहले सबसे पहले अगर मैं रिएक्टेंट साइड का एंथैल्पी ऑफ़ फॉर्मेशन
को लिख देता हूं। क्योंकि आपका फार्मूला क्या कहता है? एंथैल्पी ऑफ़ फॉर्मेशन ऑफ़ रिएक्टेंट्स को माइनस करना है एंथैल्पी ऑफ़
फॉर्मेशन ऑफ़ प्रोडक्ट से। तो पहले मैं रिएक्टेंट्स की एंथैल्पी ऑफ़ फॉर्मेशन लिख देता हूं। तो अगर मैं लिखता हूं डेल्टाHF
नॉट फॉर नाइट्रोजन गैस और मैं लिखता हूं डेल्टाHF नॉट फॉर हाइड्रोजन गैस। मुझे बताइए एंथैल्पी ऑफ़ फॉर्मेशन फॉर दी
एलिमेंट्स इन देयर स्टैंडर्ड स्टेट क्या होता है? नाइट्रोजन की स्टैंडर्ड स्टेट गैस होती है। हाइड्रोजन की स्टैंडर्ड
स्टेट गैस होती है। तो एंथैल्पी ऑफ़ फॉर्मेशन का क्या हो जाएगा? ज़ीरो ज़ीरो हो जाएगा। तो ये वाली साइड तो पूरी ज़ीरो हो
गई। इसके एंथैल्पी ऑफ़ फॉर्मेशन पे आते हैं प्रोडक्ट का। अब मुझे बताइए एंथैल्पी ऑफ फॉर्मेशन ऑफ
एंथैल्पी ऑफ फॉर्मेशन ऑफ अगर मुझे NH3 गैस लिखना है। क्या लिखना है? NH3 गैस इसको ऐसे भी लिख सकते हैं। नहीं तो कॉमा
लगा के गैस लिख सकते हैं। ठीक है? है ना? यहां पे मैं इसकी स्टेट बता रहा हूं। आप चाहे तो ब्रैकेट बना के लिख सकते हैं। कोई
फर्क नहीं पड़ेगा। अब मुझे एंथैल्पी ऑफ़ फॉर्मेशन ऑफ़ अमोनिया गैस बताना है। तो मैं कैसे बताऊंगा? सुनील भाई एंथैल्पी ऑफ
फॉर्मेशन अगर हमें किसी भी कंपाउंड का बताना है तो सबसे पहले उसके एक मोल की बात करनी पड़ेगी। यानी कि मैं क्या करूंगा? इस
रिएक्शन को अगर एक मोल के टर्म्स में लिखना चाहूं तो पहले तो पूरी रिएक्शन को मैं क्या करूंगा यहां पे? टू से डिवाइड
करूंगा। तो ये हो जाएगा 1 / 2n2 गैस + 3 / 2h2 गैस विल गिव्स
NH3 गैस + 92 / 2 कितना हो जाएगा? 2 * 4 8 2 * 6 भाई इसको टू से इसको भी डिवाइड करना
पड़ेगा ना। तो 2 * 4 = 8 2 * 6 है ना? तो ये हो जाएगा हमारे पास 46 किल जूल्स। अरे एंथैल्पी ऑफ़ फॉर्मेशन ऑफ़ अमोनिया निकालना
है तो हमेशा एक मोल कंपाउंड के लिए होता है ना। तुम्हें तो ये सारी बातें अभी मैंने बताई। एक मोल कंपाउंड के लिए होता
है। तो एक मोल कंपाउंड के लिए होता है। एक मोल कंपाउंड हमने लिख लिया। ठीक है? डन है ये इक्वेशन? जी। अब यहां पे नाइट्रोजन और
हाइड्रोजन से बन रहा है। तो क्या दोनों अपनी स्टैंडर्ड स्टेट में? यस, नाइट्रोजन गैसियस स्टेट में, हाइड्रोजन भी गैसियस
स्टेट में। तो यहां पे आप एंथैल्पी ऑफ़ फॉर्मेशन ऑफ द रिएक्शन लिख सकते हैं। यानी कि आप एंथैल्पी ऑफ़ फॉर्मेशन ऑफ़ NH3 लिख
सकते हैं। कोई दिक्कत नहीं है। तो, एंथैल्पी ऑफ़ फॉर्मेशन ऑफ़ दिस क्या हो जाएगा? दैट विल कम आउट टू बी
-46 kJ पर मोल। क्लियर? जी। तो अगर अब मैं यहां पर डेल्टाH ऑफ दी
रिएक्शन अगर निकालता हूं तो समेशन ऑफ एंथैल्पी ऑफ फॉर्मेशन ऑफ प्रोडक्ट्स कितना है? माइनस का 46 है। जी। ओवरऑल रिएक्शन
मेरे पास यही रहेगी बेटा। इस रिएक्शन का निकालना था मुझे। है ना? हां। ऊपर वाली रिएक्शन का मत निकालने चल जाना। वो मैंने
एंथैल्पी ऑफ़ फॉर्मेशन निकालने के लिए यूज़ की है। कि एक मोल यहां पर होगा। इसके लिए मैंने निकाला है। ओवरऑल रिएक्शन तो हमारे
पास ये है। तो इस रिएक्शन में जो हीट में चेंजज़ आ रहे होंगे उसी से ही हमारा एंथैल्पी ऑफ़ रिएक्शन बनता है। तो यहां पर
देखो सबसे पहले एंथैल्पी ऑफ़ फॉर्मेशन ऑफ़ प्रोडक्ट यानी अमोनिया। अमोनिया कितना है? -46 दो मोल्स हैं। तो - का 462
माइनस ये तो ज़ीरो हो जाएगा। ज़ीरो ये तो ज़ीरो थे। ये तो ज़ीरो हो गया। तो माइनस का 46 * 2 कितना होता है? यह हो जाएगा 2 * 6
= 12 2 कैरी ऑन 4 2 8 और 9 - का 92 किलोजूल डेल्टाr
समझ में आया कि नहीं आया? समझ में आ गया? तो -46 * 2 यहां पर इसके स्टोमेट्री कोफिशिएंट को भी लेंगे। एक NH3 का -46 है।
दो का कितना हो जाएगा? -462 -92 ये देखो मैंने ये प्रूव और वेरीफाई भी कर दिया। ये देखो इतना ही आ रहा है।
काम ना करता हूं सभी को क्लियर है? अरे कामना करता हूं सभी को ये बातें क्लियर हो रही है। किसी को कोई भी दिक्कत नहीं आ रही
है सुनील भैया। चलो लेट्स प्रैक्टिस। लेट्स प्रैक्टिस। लेट्स प्रैक्टिस। लेट्स प्रैक्टिस। व्हाट विल बी दी एंथैल्पी ऑफ़
दी फॉलोइंग रिएक्शन। अब ये एंथैल्पी ऑफ़ दी फॉलोइंग रिएक्शन का मतलब आपसे क्या पूछ रहा है कि ये आपसे पूछ रहा है डेल्टा HR
पूछ रहा है। डेल्टा HR नॉट बोल सकते हैं या डेल्टा RH0 या डेल्टाHR। ठीक है? जी। ऑन द बेसिस ऑफ़ एंथैल्पी ऑफ़
फॉर्मेशन डेटा गिवन। अब एंथैल्पी ऑफ फॉर्मेशन का डाटा गिवन होगा तो एंथैल्पी ऑफ रिएक्शन निकल जाएगी। एंथैल्पी ऑफ़
फॉर्मेशन का डेट गिवन होगा तो एंथैल्पी ऑफ रिएक्शन निकल जाएगी। इस फार्मूला को लगाइए। अच्छा ये हमेशा किलोजुल्स में मेजर
होती है। किलोजूल पर मोल में मेजर नहीं होती है। मेरे से छोटी सी गलती हो गई है। इसको हटा देंगे। एंथैल्पी ऑफ़ रिएक्शन इज़
ऑलवेज मेज़र्ड इन किलोजूल। इट इज़ नॉट मेज़र्ड इन किलजूल पर मोल। तो, यहां पर आपके पास ये रिएक्शन दे रखी
है। और एंथैल्पी ऑफ़ फॉर्मेशन रिएक्टेंट और प्रोडक्ट का दे रखा है। तो, कैसे निकालोगे? एंथैल्पी ऑफ रिएक्शन इक्व टू
समेशन ऑफ एंथैल्पी ऑफ फॉर्मेशन ऑफ प्रोडक्ट। तो एंथैल्पी ऑफ फॉर्मेशन ऑफ प्रोडक्ट। एंथैल्पी ऑफ फॉर्मेशन ऑफ
प्रोडक्ट NF3 का एंथैल्पी ऑफ़ फॉर्मेशन कितना है? -13 है। माइनस का 113 प्लस
थ्री टाइम्स। अब देखो थ्री है। थ्री टाइम्स थ्री है। तो तीन बार HF का एंथैल्पी ऑफ़ फॉर्मेशन कितना हो जाएगा?
माइनस का 269 माइनस का 269 ये हमारे पास हो जाएगा एंथैल्पी ऑफ़ फॉर्मेशन ऑफ़ प्रोडक्ट का समेशन माइनस
एंथैल्पी ऑफ़ फॉर्मेशन ऑफ़ रिएक्टेंट्स का समेशन। ये जो हो जाएगी इसका एंथैल्पी ऑफ़ फॉर्मेशन कितना हो जाएगा? इसका एंथैल्पी
ऑफ़ फॉर्मेशन हो जाएगा ज़ीरो। स्टैंडर्ड स्टेट ऑफ़ एनी एलिमेंट का एंथैल्पी ऑफ़ फॉर्मेशन ज़ीरो होता है। इसका कितना हो
जाएगा? NH3 का एक ही यहां पर है। यहां पे एक ही है मोल। तो कितना हो जाएगा? NH3 का -46.2 तो ये हो जाएगा 46.2
तो ये माइनस का 113 ये हो जाएगा माइनस 269 * 3 कर दो फटाफट से। 7 2 ऊपर 18 19 20 0 2 पर 36 6 7 और 8
ठीक है ना? 3 * 9 = 27 7 2 पर 3 6 = 18 9 20 0 2 3 2 = 6 7 और 87 माइनस का 800 7 माइनस का 46.2
आठ 7 और 3 10 0 हासिल आएगी एक ये हो जाएगा बेसिकली दो 8 और 9 ये हो जाएगा 10 माइनस का 920 और यह हो जाएगा माइनस का 46.2
अच्छा 1 मिनट 1 मिनट 1 मिनट 1 मिनट 1 मिनट यह तो भाई साहब पहले ही नेगेटिव में था ना तो इधर एक और माइनस भी तो आएगा। था। ये तो
हम भूल ही गए। माइनस था ये वाला। इसके बाद ये एक और माइनस तो माइनस माइनस क्या हो जाएगा? ये प्लस हो जाएगा। ये प्लस हो
जाएगा। अब ये अगर आप यहां से सबट्रैक्ट करेंगे 920 में से 46.2 तो ये हमारे पास लगभग
कितना आना चाहिए? 20 घटाए तो हो गया 900। बाकी के आप और 20 घटाओगे तो हो गया 80 और 6 घटाओगे। तो यह 73 के आसपास आना चाहिए।
हां। यह रहा। यह 73 यह रहा। करेक्ट आंसर हमारे पास यह हो जाएगा। तो - का 873
- का 873.8 किलजूल ये इसका करेक्ट आंसर होगा। क्लियर है बात? क्लियर है बात? क्लियर है बात?
क्लियर है बात? इसका एंथैल्पी ऑफ़ फॉर्मेशन हमारे पास ज़ीरो हो जाएगा। अगर हमें डेल्टा H ऑफ़ रिएक्शन निकालना है, तो समेशन ऑफ़
एंथैल्पी ऑफ़ फॉर्मेशन ऑफ़ द प्रोडक्ट्स इन दोनों का सम करना पड़ेगा। इसको इसमें से माइनस करना पड़ेगा। अब ये माइनस करते वक्त
ये कितना था? पहले ही - 46.2 था तो माइनस माइनस प्लस हो जाएगा। प्लस हो जाएगा। तो यहां पर -873.8
kjूल हमारे पास आंसर आएगा। क्लियर होती जा रही है सारी चीजें? तो एक बार फटाफट से आए भैया लगाते जाना कि सुनील भैया यहां पे
क्लियर होती जा रही है। कोई दिक्कत वाली बात यहां पर नहीं है। चलिए फटाफट चलते हैं। एंथैल्पी ऑफ़
कंबस्शन। बहुत ही सरल सी बात है। एंथैल्पी ऑफ़ कंबस्शन। इसको ऐसे भी रिप्रेजेंट करते हैं। कुछ लोग इसको ऐसे भी रिप्रेजेंट करते
हैं। और ज्यादा सरल भाषा में करना है तो डेल्टाH कंबस्शन लिख दो। खत्म। तो यह क्या हो जाएगा? एंथैल्पी ऑफ कंबशन
हो जाएगा। एंथैल्पी ऑफ कंबस्शन हो जाएगा। एंथैल्पी ऑफ कंबस्शन हो जाएगा। एंथैल्पी ऑफ कंबस्शन हो जाएगा। ठीक है ना? यहां पर
हमने क्या पढ़ा? एंथैल्पी ऑफ़ रिएक्शन। इससे पहले हमने क्या पढ़ा? एंथ अ एंथैल्पी ऑफ़ फॉर्मेशन। तो एंथैल्पी ऑफ़ फॉर्मेशन। फिर
क्या पढ़ा? एंथैल्पी ऑफ़ रिएक्शन। फिर क्या आ गया हमारे पास? एंथैल्पी ऑफ़ कंबस्शन। अब एंथैल्पी ऑफ़ कंबशन हमको क्या कहता है? सरल
सी बात कहता है एंथैल्पी ऑफ़ कंबस्शन। कि हमारे पास भाई साहब कितना हीट इवॉल्व हो रहा है। सुनील भैया अब्सॉर्ब नहीं होगा।
नहीं बेटा कंबस्शन में हीट एनर्जी इवॉल्व होती है। बॉम्ब कैलोरीमीटर में भी देखा था ना हीट एनर्जी इवॉल्व हो रही थी। हां
कंबस्शन में हीट एनर्जी इवॉल्व होती है। हीट इवॉल्व एट द कॉन्स्टेंट प्रेशर व्हेन वन मोल ऑफ़ सब्सटेंस कंप्लीटली रिएक्ट्स
विद ऑक्सीजन। यानी कि अगर एक मोल किसी भी सब्सटेंस का अगर कंप्लीटली ऑक्सीजन से रिएक्ट करेगा तो कितना हमारे पास हीट
इवॉल्व होगा कांस्टेंट प्रेशर पे। तो उस हीट इवॉल्वड एट द कॉन्स्टेंट प्रेशर को हम लोग बोलते हैं चेंज इन दी एंथैल्पी।
हीट इवॉल्वड या हीट एब्सॉर्ब्ड एट द कॉन्सेंट प्रेशर इज़ द चेंज इन एंथैल्पी होता है। यहां पर हीट इवॉल्व एट द
कॉन्सेंट प्रेशर है। तो जो भी चेंज इन एंथैल्पी आएगा जब हम एक मोल सब्सटांस को कंप्लीटली रिएक्ट कराएंगे ऑक्सीजन से।
यानी कि एक मोल किसी भी सब्सटेंस का अगर कंप्लीटली ऑक्सीजन की प्रेजेंस में रिएक्ट करेगा, जलेगा तो वो कितनी अमाउंट में हीट
एनर्जी रिलीज करेगा एट कांस्टेंट प्रेशर? दैट इज योर डेल्टा h। ठीक है? जी सुनील भैया। अब ये यहां पर यूनिट क्या हो जाएगी?
अगेन किलोजुल्स पर मोल में हो जाएगी। अच्छा। उसके बाद कंबस्शन रिएक्शंस जो हमारे पास होती हैं, ये हमेशा आपकी
एग्जोथर्मिक रिएक्शनंस होती हैं। तो यहां पे डेल्टाH क्या हो जाएगा? क्या हो जाएगा? ये वैल्यू क्या होगी? एग्जोथर्मिक रिएक्शन
में डेल्टा H नेगेटिव होता है। तो यहां पे एंथैल्पी ऑफ कंबशन हमेशा नेगेटिव होगा। अगर आपसे कोई पूछता है कि कौन सा एंथैल्पी
नेगेटिव है हमेशा तो बोल देना एंथैल्पी ऑफ़ कंबस्शन हमेशा नेगेटिव नेगेटिव नेगेटिव नेगेटिव नेगेटिव नेगेटिव नेगेटिव होता है।
डन है सुनील भाई बोल देंगे। चलिए फिर सवाल लगाते हैं इसके ऊपर। एक बढ़िया सवाल मैं आपको देता हूं। एक बढ़िया सवाल मैं आपको
देता हूं। देखिए कह रहा है द एंथैल्पी ऑफ कंबस्शन एंथैल्पी ऑफ कंबस्शन यानी कि डेल्टा HC
नॉट है ना ऑफ ग्लूकोज़ इज़ -2808 kjूल पर मोल कैलकुलेट द हीट इवॉल्व व्हेन 9 ग्राम ऑफ दिस इज़ बर्न इन ईयर ये कह रहा
है कि ग्लूकोज़ को हमने जलाया तो -2808 kjूल पर मोल यानी कि एक मोल में इतना निकल रहा है। कहने का तात्पर्य है कि अगर हम एक
मोल ग्लूकोस की बात करते हैं तो 1 मोल ग्लूकोस का वजन कितना होता है? एक ग्लूकोस के मॉलिक्यूल का वजन होता है
180. एक मोल का वजन होता है 180 ग्राम। ग्राम मॉलिक्यूलर मास। तो उसमें एनर्जी निकलती है -2808
किलो जूल्स। पर मोल का मतलब क्या हुआ? ये 1 मोल में इतनी एनर्जी निकल रही है। यानी 1 मोल ग्लूकोस का वजन 180 ग्राम है। उसमें
इतनी एनर्जी निकलेगी। और 9 ग्राम में कितनी निकलेगी दादा? तो 9 ग्राम में निकलेगी भैया हमारे पास x। मेरी
ये बात समझ में आ रही है कि नहीं आ रही है? ये बात समझ में आ रही है कि नहीं आ रही?
यूनिटरी मेथड। अरे एक मोल ग्लूकोस में 180 ग्र. होते हैं। -2808 kजल्स ऑफ़ एनर्जी निकलेगी। अब ये 180 ग्र. कैसे आया? ये मत
पूछना मेरे से। C6H12O6 के एक मॉलिक्यूल का मास निकालो। 180 U आएगा। अगर मुझे 1 मोल का निकालना है तो मैंने सीधा 180 का
एक ग्राम लगा दिया। दैट बिकम्स माय ग्राम मॉलिक्यूलर मास। मोल कांसेप्ट में सिखा चुका हूं मैं ये बातें। तो 180 ग्र में
-2808 kजल्स आ जाएगा। 9 ग्राम में कितना आएगा? x आएगा। यूनिटरी मेथड। अरे भाई 180 ग्र. को जलाएंगे। कितना आएगा? 9 ग्राम में
कितना आएगा? x आ जाएगा। भाई 9 ग्राम को जलाते समय कितनी एनर्जी निकलेगी? x किलजूल निकलेगी। तो ये हो जाएगा
x * 180 = - का 2808 * 9 ये हो जाएगा 20 तो x = - का 2808 / 20 ठीक है ना तो टू के टेबल से 10 टाइम्स 212404
फिर उसके बाद ये आ जाएगा हमारे पास माइनस का 40.4
ठीक है ना 140.4 ये किस में आ जाएगा? किलो जूल्स में आ
जाएगा। किलोजूल में आ जाएगा। पर मोल की बात नहीं करोगे यहां पे। ठीक है ना? क्योंकि पर मोल
पे कितना आ रहा है? अगर 1 मोल ग्लूकोस को जला रहे हैं यानी कि 180 ग्राम को जला रहे हैं तो -2808 kजल्स की निकल रही है। 9
ग्राम को जलाएंगे तो इतनी एनर्जी निकलेगी। इतनी एनर्जी का आंसर ही नहीं है। तो आंसर हो जाएगा नन ऑफ दी अबव। चलो आगे चल। चलो
यह वाला सवाल तुमको होमवर्क देता हूं। इसके लिए हम तुमको हिंट देता हूं। इस वाले सवाल के लिए तुमको एक हिंट देता हूं।
ध्यान से सुनना मेरी बात को। सिर्फ सुनना आंसर आ जाएगा। देखो यहां पे क्या दे रखा है? व्हाट इज द हीट ऑफ कंबस्शन ऑफ़ मीथेन
गिविंग द फॉलोइंग रिएक्शन। यानी कि हीट ऑफ कंबस्शन का मतलब क्या हो रहा है? तुम्हें डेल्टा HC नॉट को कैलकुलेट करना है। ठीक
है? अब तुमको एंथैल्पी ऑफ फॉर्मेशन का डाटा दे रखा है। अब तुम्हारे दिमाग में क्या आना
चाहिए? एंथैल्पी ऑफ फॉर्मेशन का डाटा दे रखा है। तो एंथैल्पी ऑफ़ फॉर्मेशन के डाटा से हम लोग एंथैल्पी ऑफ़ रिएक्शन निकाल
लेंगे। अब एंथैल्पी ऑफ़ रिएक्शन निकाल लेंगे तो उससे हमारा एंथैल्पी ऑफ़ कंबस्शन कैसे आएगा? तो जब तुम इसकी एक बैलेंस्ड
इक्वेशन लिखोगे ना, सबसे पहले बैलेंस्ड इक्वेशन लिखना। जब भी आप मिथेन को जलाते हो, तो उसकी एक बैलेंस्ड इक्वेशन लिखना।
जैसे ही आप उसकी बैलेंस्ड इक्वेशन लिखेंगे तो आपको समझ में आएगा कि यहां पर आप 1 मोल मीथेन को जला रहे हैं। तो 1 मोल मीथेन को
जला रहे हैं तो जितनी भी आपके पास हीट एनर्जी रिलीज होगी दैट विल गिव योर एंथैल्पी ऑफ़ कंबस्शन। और मजे की बात ये है
कि इस रिएक्शन में एंथैल्पी ऑफ़ कंबस्शन और एंथैल्पी ऑफ़ रिएक्शन बराबर हो जाएगा। क्योंकि आप एक मोल सब्सटांस को जला रहे
हैं। तो एक मोल सब्सटांस को जलाने से जो भी आपका हीट एनर्जी रिलीज़ होगा दैट इज़ एंथैल्पी ऑफ़ कंबशन। और यहां पर जो भी टोटल
हीट एक्सचेंजेस हैं वो भी एक्चुअली में उसी के बराबर होंगे। सो दैट विल बी इक्वल टू दी एंथैल्पी ऑफ़ रिएक्शन। तो यहां पे
एंथैल्पी ऑफ़ कंबशन एंड एंथैल्पी ऑफ़ रिएक्शन बराबर हो जाएगा। तो आप डायरेक्टली एंथैल्पी ऑफ़ रिएक्शन निकाल लेना। तो आपके
पास करेक्ट आंसर आ जाएगा। ठीक है? क्लियर है बात? चलो। चलो अगर समझ में आ जाए तो एक बार आए भैया
लिख देना सारे के सारे दोस्त। थोड़ा सा आप भी ट्राई करो। तभी मजा आएगा। मैंने हिंट दे दी है सवाल को सॉल्व करने की। कामना
करता हूं। आप इज़ली अब इसको सॉल्व कर लेंगे। अगली इंपॉर्टेंट चीज़ हमारे पास आती है। हैस लॉ। बहुत ही सिंपल और सरल सी बात
कहता है। कोई भी डिफिकल्ट बात नहीं कहता। सबसे आसान लॉ है। पता है आपको मजे-मजे में क्या कहता है? ये कहता है कि द एंथैल्पी
चेंज फॉर अ रिएक्शन इज दी सेम वेदर द रिएक्शन टेक्स प्लेस इन दी वन स्टेप और थ्रू सेवरल
इंटरमीडिएट स्टेप्स। यह कह रहा है कि मान लीजिए आपके पास एक रासायनिक प्रतिक्रिया है। आप उसको एक झटके में कराओ या आप उसको
10 स्टेप्स में कराओ। जो आपका डेल्टा h आएगा ना वो सेम आएगा। क्या बोल रहा है यह? क्या बोल रहा है यह?
मान लीजिए एक रिएक्शन है। उसको आपने एक स्टेप में करा है। तो आपके पास एंथैल्पी ऑफ़ रिएक्शन की वैल्यू आती है मान लो 10।
ठीक है? 10 आती है। अब इसी रिएक्शन को आपने एक स्टेप में करा है तो वैल्यू आई दो। फिर
दूसरे में करा है तो वैल्यू आई दो। तीसरे में करा है तो वैल्यू आई दो। चौथे में करा है वैल्यू आई दो। पांचव में करा वैल्यू आई
दो। सबको ऐड कर दिया ना तो आपके पास वही फाइनल रिएक्शन आ गई। तो जो ये आपके पास एंथैल्पीस जो चेंज इन एंथैल्पी आया था।
डेल्टा H आया था हर स्टेप पर। उसको ऐड करोगे तो सेम आएगा 10। तो सिंपल सी बात है आप एक रिएक्शन को वन स्टेप में कराओ या
मल्टीपल स्टेप्स में कराओ। आप एक रिएक्शन को वन स्टेप में कराइए या आप उस रिएक्शन को मल्टीपल स्टेप्स में कराइए। एंथैल्पी
चेंज जो होगा सेम हो जाएगा। मतलब मैंने रिएक्शन को एक स्टेप में कराया। तो जो मेरा डेल्टा H आएगा उसी रिएक्शन को अगर
मैं 10 स्टेप्स में करा के फाइनल प्रोडक्ट तक आ रहा हूं। उन सबके जो भी मैं उस उसी एक रिएक्शन को अगर मैं मल्टीपल स्टेप्स
में कराते हुए फाइनल प्रोडक्ट पे आ रहा हूं तो वहां पर जो मेरा एंथैल्पी चेंज आएगा इन सबको ऐड करने पे वो इनिशियल वाले
के बराबर आएगा। तो रिएक्शन चाहे वन स्टेप में हो चाहे 10 स्टेप में हो बात सेम ही है। ठीक है? इसी से तो यही बात हमें पता
लगती है कि जो एंथैल्पी है भैया वो हमारा स्टेट फंक्शन है। एंड डिपेंड्स ओनली ऑन द इनिशियल एंड द फाइनल स्टेट्स नॉट दी पाथ
टेकन। आपने क्या बनाया है उस पे फर्क पड़ता है। आप अलग-अलग स्टेप्स पे आ रहे हो। आप एक स्टेप में आ रहे हो। आप 40
स्टेप लेके आ रहे हो। आप 5000 स्टेप लेके आ रहे हो। सेम चीज करने के लिए फर्क नहीं पड़ता। आपने क्या पाथ लिया है। इनिशियल और
फाइनल पे फर्क पड़ता है। मैंने कार्बन और ऑक्सीजन लिया था। फाइनल है कि CO2 बना। अब मैंने कार्बन और ऑक्सीजन को रिएक्ट करा के
पहले कार्बन मोनोऑक्साइड बनाया। फिर कार्बन मोनोऑक्साइड और ऑक्सीजन को रिएक्ट करा के कार्बन डाइऑक्साइड बनाया। आप किसी
भी रास्ते से आइए। आपका फाइनल प्रोडक्ट क्या है? CO2। इनिशियल क्या था? कार्बन एंड ऑक्सीजन। तो इसको इनिशियल और फाइनल से
फर्क पड़ता है। आपने कितने स्टेप लिए उससे फर्क नहीं पड़ता। आपका जो डेल्टाH आएगा वो सेम आएगा। तो कहने का मतलब ये है कि चेंज
इन एंथैल्पी फॉर दी एंटायर रिएक्शन इज़ इक्वल्स टू समेशन ऑफ़ चेंज इन एंथैल्पी फॉर द मल्टीपल स्टेप्स। अगर आप मल्टीपल
स्टेप्स में रिएक्शन को करा रहे हैं तो आप उन सारे डेल्टा एस को ऐड कर लेंगे। अब आपने एक स्टेप में करा है तो जो डेल्टा
h आएगा वो इन सबके बराबर आएगा। मतलब इन सबका समेशन कर दो। इसकी जो वैल्यू आएगी वो वन स्टेप के डेल्टा के बराबर आ जाएगी। दैट
इज़ हेस लॉ। प्रूव करके दिखाता हूं। आपको ज्यादा अच्छे से समझ में आएगा। जैसे मान लो रिएक्शन को मैंने वन स्टेप
में करा दिया। रिएक्शन इन वन स्टेप। मैंने मान लीजिए इस रिएक्शन को एक स्टेप में करवाया। कार्बन
को यानी मान लीजिए ये मेरे पास क्या था? ग्रेफाइट था। समझ लीजिएगा। ग्रेफाइट था। इसको एयर में
प्रेजेंट ऑक्सीजन की प्रेजेंस में बर्न किया। कार्बन डाइऑक्साइड बना। यहां पर बेसिकली हीट एनर्जी रिलीज हुई होगी। तो
डेल्टा H जो हमारे पास है -393 kjूल -393.5 kज पर मोल आएगा डेल्टा H नेगेटिव क्यों? क्योंकि यहां पे हीट एनर्जी रिलीज़
हो रही होगी। इसके लिए नेगेटिव है। ठीक है? जी। अब मान लीजिए रिएक्शन को मैं दो स्टेप्स में कराता हूं। ये यहां पे
रिएक्शन यह हो जाएगा बेसिकली हमारे पास स्टेप फर्स्ट।
यह हो जाएगा हमारे पास स्टेप सेकंड। सेम रिएक्शन को दो स्टेप्स में करा रहा हूं। ध्यान से सुनना। पहले कार्बन को
ऑक्सीजन से रिएक्ट करा के कार्बन मोनोऑक्साइड बनाया। यहां पर भी निकली होगी मेरे पास हीट। तो ये डेल्टा H1 हो गया
-10.5 kजल्स पर मोल। अब इसी कार्बन मोनोऑक्साइड को फर्दर ऑक्सीजन से रिएक्ट करा के बनाया
कार्बन डाइऑक्साइड। अब इस प्रोसेस में भी लिख ली होगी यहां पर हीट। तो डेल्टा H2 मेरे पास आ गया -283.0 kjूल पर मोल।
क्लियर है बात? अब ध्यान से सुन भाई। ये वन स्टेप में कराई थी हमने। डेल्टा H कितना आया? इतना आया। अब अगर इन दोनों
इक्वेशंस को फर्स्ट और इसको मान लेता हूं सेकंड। इसको मान लेता हूं फर्स्ट। दोनों को ऐड करना भाई एक बार। एक बार दोनों को
ऐड कर भाई। दोनों को ऐड कर। इन दोनों को ऐड करते हैं तो यहां पर आ जाएगा हमारे पास कार्बन सॉलिड प्लस
1 / 2O2 और 1 / 2O2 डायरेक्टली क्या लिख सकता हूं हाफ और हाफ तो हो जाएगा पूरा एक ऑक्सीजन का मॉलिक्यूल साथ में हो जाएगा
कार्बन मोनोऑक्साइड गैस लेफ्ट साइड से राइट साइड पे भी हो जाएगी कार्बन मोनोऑक्साइड गैस प्लस हो जाएगा हमारे पास
CO2 गैस यह इससे कैंसिल आउट हो जाएगा। फाइनल इक्वेशन है कार्बन प्लस ऑक्सीजन विल गिव कार्बन डाइऑक्साइड। कार्बन प्लस
ऑक्सीजन मिल गया कार्बन डाइऑक्साइड। तो रिएक्शन को एक स्टेप में करवाया या रिएक्शन को दो स्टेप्स में कराया। इनिशियल
रिएक्टेंट ये थे। फाइनल प्रोडक्ट ये था। इनिशियल रिएक्टेंट ये थे। फाइनल प्रोडक्ट ये था। तो इसके डेल्टाH भी ऐड हो जाएंगे।
यानी कि टोटल जो डेल्टाH ऑफ़ रिएक्शन हो जाएगा वो क्या हो जाएगा? डेल्टाH1 + डेल्टाH2 इट इज़ इक्व - का 110.5
और प्लस यह है माइनस का 283 तो यह कितना हो जाएगा? माइनस का 393.5 किलJूल पर मोल हो जाएगा।
393.5 kjूल पर मोल आंसर आएगा। मेरा कहने का तात्पर्य क्या है? अगर आपने रिएक्शन को एक स्टेप में कराया तो हमारे पास जो
डेल्टाH आया वो इतना आया। रिएक्शन को पहले स्टेप में कराया डेल्टाH इतना आया। रिएक्शन को दूसरे स्टेप में कराया डेल्टाH
इतना आया। अगर आप इन दोनों को ऐड कर दो तो यही रिएक्शन हो जाएगी। तो यहां पर डेल्टा H भी ऐड हो जाएगा। तब देखिए हमारे पास
क्या आएगा। तो ये यही कह रहा है कि आप रिएक्शन को एक स्टेप में कराइए। तो जो एंथैल्पी चेंज आएगा वो बराबर होगा जब आप
रिएक्शन को मल्टीपल स्टेप्स में कराएंगे। मल्टीपल स्टेप में कराया डेल्टा H1 इतना डेल्टा H2 इतना आया। दोनों को ऐड कर लो तो
फिर से ये वैल्यू आ जाएगी। ये देखो यही वैल्यू आएगी। तो ये हैश लॉ है कि एक रिएक्शन को हमने एक स्टेप में कराया या
इंटरमीडिएट स्टेप्स में कराया। एंथैल्पी चेंज सेम रहता है। अब देखो एक सवाल सॉल्व करते हैं फटाफट से। एक सवाल तुमको होमवर्क
दूंगा। इसको तुम लोग ट्राई करना। कमेंट सेक्शन में इसका आंसर करना। बहुत प्यारा सवाल है ये। एक सवाल मैं करके दिखा रहा
हूं तुमको लाइव। अब देखो ध्यान से। ये क्या बोल रहा है? कार्बन है तुम्हारे पास। ये तुम्हारे पास
है ग्रेफाइट। पहले इक्वेशन को लिख लो। ये है तुम्हारे पास ऑक्सीजन गैस। यह दे रहा है तुमको CO2 गैस।
और यहां पर जो डेल्टाH1 है वह बेसिकली माइनस का 50 किलोजूल दे रखा है। इधर हमारे पास कार्बन डायमंड है।
प्लस ऑक्सीजन गैस है। इसको जलाने से भी कार्बन डाइऑक्साइड गैस निकल रही है। और डेल्टाH2 जो हमारे पास दे रखा है। ये एक
रैंडम डाटा है। -80 किलो जूल है। वह पूछ रहा है आप मुझे डेल्टाHR
यानी एंथैल्पी ऑफ़ रिएक्शन टोटल बताइए। कब? इस रिएक्शन का एंथैल्पी ऑफ़ रिएक्शन बताइए। पहले वाले का एंथैल्पी ऑफ़ रिएक्शन है -50
किलजूल। दूसरे वाले का एंथैल्पी ऑफ़ रिएक्शन है -80 किJ। पहले वाले का एंथैल्पी ऑफ़ रिएक्शन है HR1
मान लेते हैं और HR2 मान लेते हैं। ठीक है ना? इसको HR1 और HR2 मान लेते हैं। रिएक्शन वन
रिएक्शन टू इतनाइतना। तो इस रिएक्शन का एंथैल्पी ऑफ़ रिएक्शन इतना इस रिएक्शन का एंथैल्पी ऑफ़ रिएक्शन
इतना है। इस रिएक्शन का आपसे पूछा है। अब हमें कुछ ना कुछ इसमें जुगाड़ करना पड़ेगा ताकि हम इसको बना सकें। तो मैं यहां पर
क्या करता हूं? देखिए मैं यहां पे सिंपल सा लॉजिक लगाऊंगा। मैं यहां पर एक सिंपल सा लॉजिक लगाने वाला
हूं। मैं बोलूंगा कि देखो मेरे को क्या करना है? क्या करना है मुझे? इन दोनों को जिंदा रखना है। बाकी सबको मार
देता हूं। तो मैं यहां पर बेसिक मैथमेटिक्स का यूज़ करूंगा। इसको माइनस कर दूंगा। इसको भी इसमें से माइनस कर दूंगा।
इनके साइन रिवर्स करता जा रहा हूं। माइनस माइनस क्या हो जाएगा? प्लस हो जाएगा। प्लस था तो माइनस, प्लस था तो माइनस, प्लस था
तो माइनस, माइनस था तो प्लस। साइन रिवर्स कर दिए। साइन रिवर्स करने से यहां पर क्या हो जाएगा? ये सब कैंसिल आउट हो जाएगा। आपस
में कैंसिल आउट हो जाएंगे। प्लस माइनस प्लस माइनस कैंसिल आउट हो गए। C ग्रेफाइट - C डायमंड हो जाएगा। तो मैं इसको ऐसे लिख
सकता हूं। C ग्रेफाइट - C डायमंड होगा। इसको इस तरफ ले जाऊंगा तो पॉजिटिव हो जाएगा। तो ये हो
गया कुछ ऐसे। इन दोनों को ऐड कर दिया मैंने। भाई इसके साइन को इनवर्ट करके इसमें ऐड कर दिया।
मुझे ये वाली इक्वेशन बनानी है। आप समझ रहे हो। मुझे ये वाली इक्वेशन बनानी है। तो सिंपल सी बात है। हैश लॉ क्या कहता है?
क्या आपने उसको मल्टीपल स्टेप्स में कराया? या अगर आप इसको सिंगल स्टेप में कराएं तो आपका जो डेल्टा H आएगा वो
बेसिकली क्या आना चाहिए? सेम आना चाहिए। यही तो वो कहता है ना कि आप किसी रिएक्शन को अगर आपने मान लीजिए मल्टीपल स्टेप्स
में कराया है या उसी रिएक्शन को आप एक सिंगल स्टेप में करवा दें तो जो डेल्टा h आएगा हमारे पास चेंज इन एंथैल्पी जो आएगा
वो सिंगल स्टेप वाले का या जो चेंज इन एंथैल्पी आपने रिएक्शन वन रिएक्शन टू रिएक्शन थ्री रिएक्शन फोर इन सबका ऐड कर
लीजिए तो वो डेल्टा h ऑफ़ द सिंगल स्टेप रिएक्शन के बराबर आएगा। क्लियर है? अब मैं क्या कर रहा हूं ना इसको इनसे बनाने की
कोशिश कर रहा हूं। तो मैंने क्या कर दिया यहां पे सबको ऐसे माइनस कर दिया। साइन इनवर्ट कर दिए सबके। साइन इनवर्ट कर दिया
दादा। जी कर दिए। ये सब तो कैंसिल आउट हो गए। ये बचा था। c ग्रेफाइट - c डायमंड है। तो डायमंड को इधर भेज दिया। ये इक्वेशन
ऐसे हो गई। अब ये देखिए डेल्टाH R हमारे पास इस रिएक्शन का क्या हो जाएगा? ये दोनों भी ऐड होंगे। 80 और -50 तो ये हो
जाएगा प्लस का 30 किलJ। काम खत्म। इस तरीके से हैस लॉ के सवाल हमें करने
होते हैं। यह आपके पास यहां पर होमवर्क है। समझ में आ जाए तो लिख देना एक बार आए भैया कि
सुनील भाई तुम्हारी बातें समझ में आ रही है। कोई दिक्कत नहीं आ रही है। डन है। उसके बाद हमारे पास आती है बॉन्ड
डिसोसिएशन एंथैल्पी यानी कि ये डेल्टाH बॉन्ड नॉट या फिर इसको ऐसे भी लिख सकते हैं डेल्टा H
बॉन्ड एंथैल्पी। ठीक है? या फिर डेल्टाH
बॉन्ड ऐसे भी लिख देते हैं कुछ लोग। ठीक है? है ना? तो यहां पर ये क्या है? बॉन्ड डिसोसिएशन तुम्हें क्या समझा रहा है? यानी
कि हम लोग बॉन्ड को तोड़ रहे होंगे। बॉन्ड को तोड़ रहे होंगे। बॉन्ड को तोड़ रहे होंगे। बॉन्ड को तोड़ रहे होंगे। है ना?
जी। इट इज दी एनर्जी रिक्वायर्ड टू ब्रेक वन मोल ऑफ अ स्पेसिफिक बॉन्ड। यानी कि कितनी हमें ऊर्जा चाहिए? एक मोल।
किसी भी स्पेसिफिक बॉन्ड के एक मोल सब्सटांस को तोड़ने के लिए होमोलाइटिकली अब होमोलिटिकली का क्या मतलब होता है? इट
इज दी होमोलिटिक फज़। मैं अभी बताऊंगा। होमोलिटिक फज़ क्या होता है? वो मैं आपको बताऊंगा। होमोलिटिकली
इन अ मॉलिक्यूल इन द गैसियस स्टेट टू फॉर्म प्रीगियस एटम्स। मतलब क्या है?
इट इज़ दी एनर्जी रिक्वायर्ड टू ब्रेक वन मोल ऑफ अ स्पेसिफिक बॉन्ड। होमोलिटिकली इन अ मॉलिक्यूल इन अ गैसियस
स्टेट। मान लीजिए हमारे पास एक मॉलिक्यूल है जो कि गैसियस स्टेट में है। थोड़ा सा इससे समझते हैं। एक हमारे पास मॉलिक्यूल
है गैसियस स्टेट में जिसका नाम है हाइड्रोजन जो कि हमारे पास गैसियस स्टेट में कुछ इस प्रकार है। जिसका स्ट्रक्चर
कुछ ऐसा होता है कि ये एक इलेक्ट्रॉन है। ये एक इलेक्ट्रॉन है और आपस में एक-एक इलेक्ट्रॉन को शेयर करते हैं।
मॉलिक्यूल इन गैसियस स्टेट। मॉलिक्यूल इन गैसियस स्टेट। मान लेता हूं मैं हाइड्रोजन है। हाइड्रोजन इज़ अ मॉलिक्यूल इन द गैसियस
स्टेट। और हाइड्रोजन जो मेरे पास मॉलिक्यूल इन द गैसियस स्टेट है उसमें एक-एक इलेक्ट्रॉन हाइड्रोजन एटम्स के बीच
में शेयरर्ड है। क्लियर है बात? जी। सो हाइड्रोजन एटम्स ये बेसिकली मॉलिक्यूल इन द गैसियस स्टेट है
हमारे पास। जी। अब मैं क्या करता हूं? इसको होमोलिटिकली तोड़ने की बात करता हूं। होमोलिटिकली तोड़ने का मतलब है मान लीजिए
मैंने इसका बॉन्ड तोड़ा। ये इलेक्ट्रॉन इसका इसके पास है। ये इसका इसके पास है। यानी कि ये इसके पास रहेगा और ये इसके पास
रहेगा। मतलब मैंने बॉन्ड को इस तरीके से तोड़ा है कि ये इलेक्ट्रॉन इसके पास, ये इलेक्ट्रॉन इसके पास। हेट्रोलिटिक नहीं
किया है कि भाई मैंने बॉन्ड तोड़ा तो ये वाला जो इलेक्ट्रॉन है ये भी ले गया और ये वाला इलेक्ट्रॉन भी ये ले गया। इक्वल
शेयरिंग हुई। ये टूटा तू तेरा ले जा तू तेरा ले जा। तो इसके टूटने से यहां पर क्या बनेगा? एक ये गैसियस एटम बनेगा। और
दूसरा एक और फ्री गैसियस एटम बनेगा। फ्री गैसियस एटम बनेंगे। तो होगा क्या? मॉलिक्यूल इन गैसियस स्टेट। फॉर एग्जांपल
हाइड्रोजन गैस का मॉलिक्यूल गैसियस स्टेट में था। इसका मैंने होमोलिटिक फज़ करा है। तो फ्री गैसियस एटम्स मिले। अब ये चीज जब
आप एक मोल के स्पेसिफिक बॉन्ड के लिए करोगे तो उसके लिए कितनी एनर्जी लगेगी? ये तो एक मॉलिक्यूल के लिए था। अगर ऐसे ही एक
मोल के लिए आपको करना हो कि एक मोल हाइड्रोजन गैस है। उसके अंदर एक मोल मॉलिक्यूल्स में आपको बॉन्ड तोड़ने के लिए
कितनी एनर्जी देनी पड़ेगी? उस चीज को हम बोलेंगे बॉन्ड डिसोसिएशन एंथैल्पी। अब आपसे एक छोटा सा सवाल पूछता हूं। बॉन्ड
डिसोसिएशन एंथैल्पी में आप हमेशा एनर्जी दोगे तो इसका जो एंथैल्पी चेंज होगा हमेशा पॉजिटिव होगा या नेगेटिव होगा? हमेशा
पॉजिटिव होगा। एंथैल्पी ऑफ़ कंबस्शन हमेशा नेगेटिव आता है क्योंकि हीट एनर्जी हमेशा रिलीज़ होती है। एंथैल्पी ऑफ़ कंबस्शन हमेशा
नेगेटिव होता है क्योंकि हीट एनर्जी वहां पे रिलीज़ होती है। ऐसे ही बॉन्ड डिसोसिएशन एंथैल्पी हमेशा पॉजिटिव होगा। इट्स वैल्यू
इज़ एक्सप्रेस्ड एज अ पॉजिटिव वैल्यू। क्यों? क्योंकि यहां पर एनर्जी देनी पड़ रही है।
क्या बात है? इसकी यूनिट हमारे पास क्या हो जाएगी? यूनिट विल बी किलोजूल पर मोल। क्या हो जाएगी यूनिट? किलोजूल पर मोल।
क्योंकि एक मोल सब्सटांस का स्पेसिफिक बॉन्ड तोड़ रहे हैं ना हम। वन मोल ऑफ़ अ स्पेसिफिक बॉन्ड तोड़ रहे हैं। तो दैट्स
व्हाई किलोजूल पर मोल। अब यहां पर हमारे पास बॉन्ड डिसोसिएशन एंथैल्पी और एंथैल्पी ऑफ रिएक्शन के अंदर
भी कुछ एक इस तरीके से हमारे पास रिलेशनशिप है। सो द स्टैंडर्ड एंथैल्पी ऑफ़ रिएक्शन इज़ रिलेटेड टू द बॉन्ड एंथैल्पीज़
ऑफ रिएक्टेंट्स एंड प्रोडक्ट्स इन द गैसियस फेस रिएक्शंस एज़ क्योंकि यहां पे हम लोग बात कर रहे हैं मॉलिक्यूल्स इन
गैसियस स्टेट की। तो जैसे एंथैल्पी ऑफ़ रिएक्शन एंथैल्पी ऑफ़ फॉर्मेशन से कनेक्टेड थी। उसी तरीके से एंथैल्पी ऑफ़ रिएक्शन
बॉन्ड डिसोसिएशन एंथैल्पी से भी कनेक्टेड है। बस ये थोड़ा सा रिलेशन उल्टा हो जाता है। वहां पे समेशन ऑफ़ एंथैल्पी ऑफ़
फॉर्मेशन ऑफ़ प्रोडक्ट माइनस समेशन ऑफ़ एंथैल्पी ऑफ़ फॉर्मेशन ऑफ़ रिएक्टेंट्स होता है। राइट? यहां पर उल्टा हो जाएगा। समेशन
ऑफ़ बॉन्ड एंथैल्पीज़ ऑफ़ रिएक्टेंट्स माइनस समेशन ऑफ़ बॉन्ड एंथैल्पीज़ी ऑफ़ प्रोडक्ट्स। सिर्फ उल्टा हो जाएगा। यहां पर अगर आपको
निकालना है एंथैल्पी ऑफ़ रिएक्शन। सो, दिस इज़ द एंथैल्पी ऑफ़ रिएक्शन। दिस इज़ द एंथैल्पी ऑफ़ रिएक्शन। इसको ऐसे भी
रिप्रेजेंट कर सकते हैं। इसको ऐसे भी रिप्रेजेंट कर सकते हैं। तो ये जो एंथैल्पी ऑफ रिएक्शन है, स्टैंडर्ड
एंथैल्पी ऑफ़ रिएक्शन दैट इज़ इक्वल्स टू द समेशन ऑफ़ बॉन्ड एंथैल्पीज़ ऑफ़ रिएक्टेंट्स माइनस दी समेशन ऑफ़ बॉन्ड एंथैल्पीज़ ऑफ़ दी
प्रोडक्ट्स। ठीक है भैया? ये फार्मूला लगा लेंगे। अच्छा इसी के अंदर मेरे पास एक कांसेप्ट
आता है जो कि हमारे पास होता है मीन बॉन्ड डिसोसिएशन एंथैल्पी। अब ये मीन बॉन्ड डिसोसिएशन एंथैल्पी क्या होती है? समझो।
मेरे पास CH4 है। तो CH4 में कितने कार्बन और हाइड्रोजन के बॉन्ड्स हैं? सुनील भाई? CH4 में तो चार हैं।
चार है। तो सबसे पहले ये वाला बॉन्ड टूटेगा मान लो तो बनेगा CH3+ एक हाइड्रोजन का फ्री एटम हो जाएगा ना ये गैसियस एटम।
फिर ये बॉन्ड टूटेगा तो हो जाएगा CH2 + H। फिर ये बॉन्ड टूटेगा तो हो जाएगा CH+ H। फिर ये एक और बॉन्ड टूटेगा तो हो जाएगा C
+ H। तो इन सबकी बॉन्ड डिसोसिएशन एंथैल्पीज जो हमारे पास आएंगी वो अलग-अलग आएंगी। जी
बिल्कुल अलग-अलग आएगी। देयर फॉर अपन इन सबको जब ऐड करेंगे तो ये वैल्यू हमारे पास कितनी हो जाएगी? ये
वैल्यू हमारे पास इतनी हो जाएगी। मतलब पहले बॉन्ड को तोड़ने के लिए इतनी एनर्जी, दूसरे बॉन्ड को तोड़ने के लिए इतनी, तीसरे
को तोड़ने के लिए इतनी और चौथे को तोड़ने के लिए इतनी। ऐड कर लिया तो टोटल डेल्टा कितना आ जाएगा? इतना आ जाएगा।
पर अगर मैं आपसे पूछता हूं कि मुझे CH बॉन्ड को तोड़ने की एक वैल्यू चाहिए। आप क्या कर रहे हो? पहले CH बॉन्ड को तोड़ने
की ये वैल्यू, दूसरे को तोड़ने की ये वैल्यू, तीसरे को तोड़ने की वैल्यू, चौथे को तोड़ने की वैल्यू। अब ये डेटा अगर मैं
किसी को दूं कि भाई मैंने पहला बॉन्ड तोड़ा था तो ये था, दूसरा तोड़ा तो ये था, तीसरा तोड़ा तो ये था, चौथा तोड़ा तो ये
था। तो कंफ्यूज हो जाएगा सामने वाला कि भाई साहब एक CH बॉन्ड जो सिमिलर बॉन्ड है उसको तोड़ने के लिए आप चार वैल्यूज़ पटक के
मार रहे हो मेरे थोपड़े पे। मैं कैसे समझूं? तो मैं कहूंगा सर आप एक काम कीजिए। इसका आपने टोटल निकाल लिया। हां। इसको
डिवाइड बाय 4 कर दीजिए। एक एवरेज वैल्यू मैं आपको दे देता हूं कि CH बॉन्ड को तोड़ने के लिए एवरेज इतनी एनर्जी हमें
देनी पड़ेगी। तो इसके लिए यहां पर आता है ये मीन बॉन्ड एंथैल्पी का कांसेप्ट कि भाई साहब आपके पास अगर ये ऐसे एक ही कंपाउंड
के अंदर एक ही मॉलिक्यूल में CH बॉन्ड चार थे। चारों के हमारे पास बॉन्ड डिसोसिएशन एंथैल्पीज़ अलग-अलग थी। तो जो टोटल यहां पर
बॉन्ड डिसोसिएशन एंथैल्पी थी है ना वो इतनी आई। लेकिन मैं ये थोड़ी बताऊंगा कि पहले वाले के लिए इतनी थी। दूसरे के लिए
इतनी तीसरे के लिए इतनी चौथी के लिए इतनी वो कहेगा अरे भाई पागल है क्या? एक वैल्यू दे ना मेरे को। CH बॉन्ड की एक वैल्यू दे।
तो मैं कहूंगा भाई चारों को ऐड कर डिवाइड बाय फोर कर दे। ये वैली वैल्यू हो जाएगी मीन और मीन या एवरेज वैल्यू रख लें। ठीक
है? जी चलो नाउ लेट्स प्रैक्टिस दिस पर्टिकुलर क्वेश्चन। बहुत ही प्यारा सवाल। बहुत ही
मस्त सवाल है। ध्यान से आप इस सवाल को पढ़ेंगे। आपको मजा आ जाएगा। बेस्ड ऑन द वैल्यू्यूज ऑफ द बॉन्ड
डिसोसिएशन एंथैल्पी गिवन अलग-अलग बॉन्ड डिसोसिएशन एंथैल्पीज गिवन है। थोड़ा सा इसको क्लियर कर देता हूं अगर नहीं दिख
रहा। यहां पे सिंगल बॉन्ड है। यहां पर बेसिकली ट्रिपल बॉन्ड है। यहां पे सिंगल बॉन्ड यहां पे सिंगल बॉन्ड। तो ये बॉन्ड
डिसोसिएशन एंथैल्पीज़ दे रखी है। अच्छा। एंथैल्पी ऑफ़ फॉर्मेशन ऑफ़ N2H4 निकालना है। ओह भाई, बहुत बढ़िया। एंथैल्पी ऑफ फॉर्मेशन
ऑफ N2H4 निकालना है। अब अगर एंथैल्पी ऑफ फॉर्मेशन ऑफ N2H4 निकालना है तो सबसे पहले तो आपको ये पता
होना चाहिए कि एंथैल्पी ऑफ़ फॉर्मेशन एक मोल सब्सटांस के लिए निकलता है। तो एक मोल N2H4 के फॉर्मेशन जो होगा नाइट्रोजन और
हाइड्रोजन से होना चाहिए। लेकिन उनकी स्टैंडर्ड स्टेट्स में नाइट्रोजन की स्टैंडर्ड स्टेट होती है गैस। हाइड्रोजन
की स्टैंडर्ड स्टेट होती है गैस। बैलेंस कर देंगे। दो नाइट्रोजन, चार हाइड्रोजन बैलेंस्ड है। यानी वो पूछ रहा है कि इस
पर्टिकुलर रिएक्शन का आपको क्या बताना है? आपको क्या बताना है? एंथैल्पी ऑफ़ फ़ॉर्मेशन बताना है।
इस रिएक्शन का एंथैल्पी ऑफ़ फ़ॉर्मेशन आपको बताना है। यानी इस कंपाउंड का एंथैल्पी ऑफ़ फॉर्मेशन बताना है। नॉट द रिएक्शन का इस
पर्टिकुलर कंपाउंड का एंथैल्पी ऑफ़ फॉर्मेशन बताना है। अरे, एंथैल्पी ऑफ़ फॉर्मेशन ऑफ़ N2H4 का ये मतलब है कि अगर
मुझे इसका एक मोल बनाना है नाइट्रोजन और हाइड्रोजन से जिसमें नाइट्रोजन और हाइड्रोजन हमारे पास स्टैंडर्ड स्टेट में
है। यानी कि गैसियस स्टेट में है। नाइट्रोजन की स्टैंडर्ड स्टेट गैस होती है। हाइड्रोजन की स्टैंडर्ड स्टेट भी
गैसियस होती है। तो इसको बनाते समय जो भी हमारे पास हीट में चेंजज़ आएंगे दैट विल बी दी एंथैल्पी ऑफ़ फॉर्मेशन। एंथैल्पी
ऑफ़ फॉर्मेशन ऑफ़ N2H4। क्लियर है बात? जी सुनील भाई। अब मैं एंथैल्पी ऑफ़
फॉर्मेशन कैसे निकालूं? मेरे पास तो यहां पे बॉन्ड डिसोसिएशन एंथैल्पी की वैल्यू निकली है। तो हमेशा कॉमन चीज़ ढूंढो कि ऐसी
कौन सी चीज़ है जो कि बॉन्ड डिसोसिएशन एंथैल्पी से रिलेट करती है। तो वो तुमको याद आएगा कि यार अह एंथैल्पी ऑफ़ रिएक्शन
का एक फार्मूला है जो कि समेशन ऑफ़ बॉन्ड एंथैल्पीज़ ऑफ़ रिएक्टेंट्स माइनस समेशन ऑफ़ बॉन्ड एंथैल्पीज़ी ऑफ़ प्रोडक्ट है। तो
एंथैल्पी ऑफ़ रिएक्शन और एंथैल्पी ऑफ़ फॉर्मेशन में अगर तुम ढूंढोगे तो तुमको एक बात समझ में आएगी।
इसका एक मोल बनाते समय यहां पर जो भी एनर्जी चेंजेस हुए होंगे दैट इज दी एंथैल्पी ऑफ रिएक्शन। तो क्या मैं बोल
सकता हूं कि इस पर्टिकुलर रिएक्शन में जो भी मेरा एंथैल्पी ऑफ़ रिएक्शन होगा वो बेसिकली मेरा एंथैल्पी ऑफ़ फॉर्मेशन के
बराबर होगा। एग्री करते हो कि नहीं करते हो? यहां पर मेरा जो एंथैल्पी ऑफ़ रिएक्शन होगा
इसका एक मोल बन रहा है ना? तो यहां पर जो भी मेरा एंथैल्पी ऑफ रिएक्शन होगा वही तो एंथैल्पी ऑफ फॉर्मेशन
के बराबर होगा ना। इसका एक मोल बनाने के लिए जो भी हीट एक्सचेंजज़ होंगे, जो भी हीट में चेंजज़ हो रहे होंगे, दैट इज़ द
एंथैल्पी ऑफ़ फॉर्मेशन। और एंथैल्पी ऑफ़ रिएक्शन होता है टोटल हीट चेंजज़ दैट टेकिंग प्लेस एट द कॉन्स्टेंट प्रेशर
ड्यूरिंग अ रिएक्शन। तो, इस रिएक्शन के दौरान जितने भी टोटल हीट चेंजज़ होंगे, दैट इज़ डेल्टा HR नॉट, है ना? तो, दोनों तो
बराबर हैं। तो, फिर अपन क्या कर लेंगे? यहां पर अपन निकाल लेंगे कि भैया हमको ये पता है कि एंथैल्पी ऑफ़ रिएक्शन जो होता है
दैट इज़ दी समेशन ऑफ़ बॉन्ड एंथैल्पीज़ ऑफ दी रिएक्टेंट माइनस समेशन ऑफ दी बॉन्ड एंथैल्पीज़ ऑफ दी
प्रोडक्ट्स। यही हमारा सरल तरीका है। क्योंकि ये दोनों अगर आपस में यहां पर बराबर होंगे, तो हम
लोग क्या करेंगे? इससे ये निकाल लेंगे। क्योंकि ये वाली वैल्यूज़ हमारे को गिवन है। इसकी मदद से ये निकलेगा। यह निकलेगा,
तो यह एंथैल्पी ऑफ़ फ़ॉर्मेशन के बराबर होगा। सिंपल सी दिमाग लगाने वाली बात है। जी। लेकिन, यह निकालने के लिए हमको क्या
पता होना चाहिए? सबसे पहले इनके बीच में बॉन्ड्स पता होने चाहिए। तो, नाइट्रोजन के बीच में यहां पर क्या होंगे? ट्रिपल बॉन्ड
होगा। यहां पे एक लोन पेयर ऑफ इलेक्ट्रॉन। यहां पे एक लोन पेयर ऑफ इलेक्ट्रॉन। 1 2 3 4 5 6 7 8 1 2 3 4 5 6 7 8 ये आपको पता
होंगे बॉन्डिंग का। हाइड्रोजन के अंदर बेसिकली क्या हो जाएगा? अब ये एक मॉलिक्यूल का है। सवाल में दो दे
रखा है। ध्यान रखना तो दो को कंसीडर करना पड़ेगा। ठीक है ना? उसके बाद N2H4 के केस में क्या
हो जाएगा? इनके बीच में एक-एक इलेक्ट्रॉन की शेयरिंग है। ये हाइड्रोजन के साथ एक-एक इलेक्ट्रॉन की इसने शेयरिंग कर ली। N2H4
है। और ये हो गया एक और। अब देखो 1 2 3 4 नाइट्रोजन का 1 2 3 4 5 6 यह हो जाएगा 7 8
7 8 ये हो गया N2H4 का स्ट्रक्चर। अब अगर हमको यहां पर निकालना है कि डेल्टाHR0 निकालना है तो समेशन ऑफ़ द बॉन्ड एंथैल्पी
ऑफ़ द रिएक्टेंट्स। बॉन्ड एंथैल्पी ऑफ़ द रिएक्टेंट्स माफी चाहूंगा। सॉरी।
यहां पर इसका तो एक ही मोल है। इसके यहां पर दो मोल्स हैं। तो एक ये वाला बॉन्ड तोड़ने के लिए ये वाला बॉन्ड तोड़ने के
लिए 941 प्लस एक h
बॉन्ड तोड़ने के लिए 436 436 एक H बॉन्ड है। तो दो के लिए कितना हो जाएगा? 2 * 436 समेशन ऑफ बॉन्ड एंथैल्पी ऑफ रिएक्टेंट्स
तो डन हो गया माइनस समेशन ऑफ दी बॉन्ड एंथैल्पीज़ ऑफ दी प्रोडक्ट्स ये रहा। अब इसके अंदर सबसे पहले नाइट्रोजन नाइट्रोजन
का एक बॉन्ड है। नाइट्रोजन नाइट्रोजन का एक बॉन्ड है। ये रहा 159 तो ये हो जाएगा 159 + 4 * नाइट्रोजन हाइड्रोजन के चार
बॉन्ड्स हैं। नाइट्रोजन हाइड्रोजन के चार बॉन्ड्स हैं। ये रहे 398 * 4
ठीक है? इसको जब आप सॉल्व करेंगे, सो दैट विल कम आउट टू बी 62 किलोजूल।
हमारे पास ये आंसर आएगा एंथैल्पी ऑफ रिएक्शन। बट व्हेन वी आर टॉकिंग अबाउट दी डेल्टा HF नॉट तो वो पर
मोल्स में आता है। तो ये आ जाएगा 62 kjूल पर मोल। ठीक है? क्लियर है? अब यहां पर इस पर्टिकुलर टॉपिक में इस पर्टिकुलर टॉपिक
का लास्ट टॉपिक है। लास्ट टॉपिक है। लास्ट टॉपिक है। हमारे पास है एंथैल्पी ऑफ़ एटमाइजेशन।
यह हो जाएगा डेल्टाH नॉट से रिप्रेजेंट होता है। अब यहां पर एक मिसकंसेप्शन क्या है कि बॉन्ड डिसोसिएशन एंथैल्पी और
एंथैल्पी ऑफ़ एटमाइजेशन सेम है। गलत सेम नहीं है। ध्यान से सुनना। इट रेफर्स टू द एनर्जी नीडेड टू कन्वर्ट वन मोल ऑफ़
सब्सटांस फ्रॉम इट्स स्टैंडर्ड स्टेट इंटू दी एटम्स इन गैसियस फज़ मीनिंग द एटम्स आर नो लगर बॉन्डेड टू ईच अदर। अब देखिए यहां
पे कंफ्यूजन क्या आता है? लोगों को लगता है कि अरे भाई हमने तो तोड़ दिया और फ्री गैसियस एटम्स में कन्वर्ट कर दिया। तो ये
बॉन्ड डिसोसिएशन एंथैल्पी है। गलत नहीं है ऐसा। सुनना। एनर्जी नीडेड टू कन्वर्ट वन मोल ऑफ़ अ सब्सटांस इन दी स्टैंडर्ड स्टेट।
एक मोल सब्सटांस इन दी स्टैंडर्ड स्टेट से आप उसको कन्वर्ट कर रहे हैं एटम्स इन दी गैसियस फज़।
और अब वो आपस में बॉन्डेड नहीं होंगे। तो ये एक मोल सब्सटांस के लिए डिफाइंड है फर्स्ट ऑफ़ ऑल। तो ये होगी इसकी यूनिट
किलजूल पर मोल। एनर्जी नीडेड टू कन्वर्ट वन मोल ऑफ अ सब्सटेंस फ्रॉम इट्स स्टैंडर्ड स्टेट इनू द एटम्स
इन गैसियस फेस। यानी कि उसकी स्टैंडर्ड स्टेट से अपन उसको फ्री एटम्स में कन्वर्ट कर रहे हैं इन द गैसियस फेस।
समझ रहे हो आप? और वो आपस में बॉन्डेड नहीं है। तो सुनील सर ये तो बॉन्ड डिसोसिएशन एंथैल्पी हो गया। अरे बॉन्ड
डिसोसिएशन एंथैल्पी तो तब होगा ना जब एक मॉलिक्यूल गैसियस फॉर्म में हो और उसको फ्री एटम्स में कन्वर्ट कर रहे हो। मैं
बोलता हूं मान लो कि अह सोडियम की स्टैंडर्ड स्टेट क्या है? सॉलिड है। उसको Na सॉलिड से अगर मैं Na गैस में कन्वर्ट
कर रहा हूं तो ये तो एंथैल्पी ऑफ़ सब्लीमेशन हो गया ना। अरे हां या ना? हां। तो समझो इट डिपेंड्स
अपॉन द केस। इट डिपेंड्स अपॉन द केस। अगर मेरे पास हाइड्रोजन गैस है और इसको मैं ये फ्री हाइड्रोजन के गैसियस एटम्स में
कन्वर्ट कर रहा हूं। तो यहां पर मेरा एंथैल्पी ऑफ़ एटमाइजेशन मेरा बॉन्ड डिसोसिएशन एंथैल्पी के बराबर होगा।
लेकिन अगर यहां पर मेरे पास सोडियम सॉलिड है और उसको अगर मैं सोडियम गैस में कन्वर्ट कराऊं सुनील भाई सोडियम गैस में
बॉन्डेड नहीं होंगे। नहीं सोडियम सॉलिड में इनके बीच में मैटेलिक बॉन्ड है। जब आपने इसको इतनी एनर्जी दे दी कि ये सीधा
गैसेस फॉर्म में चले जाए तो नाउ दे आर नो लगरगर बॉन्डेड टू ईच अदर। तो यहां पर आपका जो एंथैल्पी ऑफ़ एटमाइजेशन है वो एंथैल्पी
ऑफ़ सब्लीमेशन के बराबर होगा। तो एक सबसे बड़ा मिसकंसेप्शन होता है कि एंथैल्पी ऑफ़ एटमाइज़ेशन हमेशा बॉन्ड डिसोसिएशन एंथैल्पी
है। ऐसा गलत है। अब ये स्टैंडर्ड स्टेट क्या है? सोडियम का। स्टैंडर्ड स्टेट ऑफ़ सोडियम इज़ सॉलिड। मेरे को सॉलिड स्टेट से
अगर मैं इसको क्या कर रहा हूं? जहां पर इनके बीच में मैटेलिक बॉन्ड है, यहां पर मैं इनको एनर्जी दे रहा हूं ताकि यहां पर
ये गैसियस स्टेट में कन्वर्ट हो सके। तो सॉलिड से गैस में जा रहा है यानी कि एंथैल्पी ऑफ़ सब्लीमेशन की बात हो रही है।
तो एंथैल्पी ऑफ़ एटमाइजेशन एंथैल्पी ऑफ़ सब्लीमेशन होगा। यहां पे एंथैल्पी ऑफ़ एटमाइजेशन बॉन्ड डिसोसिएशन एंथैल्पी होगा।
तो दोस्तों, कामना करता हूं आपको ये बात समझ में आ गई होगी। अगर ये बात यहां पे समझ में आ गई है, तो एक बार कमेंट सेक्शन
में लगा देना फटाफट से। आए भैया। अब अपन लास्ट टॉपिक को पढ़ेंगे। दोस्तों तो अब चलते हैं हम लोग आगे और फर्दर स्टार्ट
करते हैं अपने डिस्कशन को ऑन दी स्पॉनटेटिनिटी। नाउ व्हाट इज बेसिकली स्पॉनटेटिनिटी? इस चीज को बढ़िया तरीके से
हम लोग समझेंगे। अब स्पॉनटेनिटी यानी कि यहां पर हम बात कर रहे हैं स्पॉनटेनियस प्रोसेस। स्पॉनटेनियस
प्रोसेस क्या होता है सुनील भैया? ऐसा कोई भी प्रोसेस जो अपने आप हो जाए। बिना उसको अपन ने कोई भी सोर्स लगाया, कोई भी
एक्सटर्नल फोर्स या कोई भी एक्सटर्नल एजेंट लगाए बिना अगर वो प्रोसेस अपने आप हो जाए तो उसे बोलते हैं बेसिकली
स्पॉनटेनियस प्रोसेस। या मान लीजिए कोई ऐसा प्रोसेस जिसको स्टार्ट करने के लिए या ट्रिगर करने के लिए मैंने कोई चीज करी और
उसके बाद वो अपने आप हो रहा है। दैट इज़ कॉल्ड एज स्पॉनटेनियस प्रोसेस। अब मैं एग्जांपल के थ्रू भी ये समझाऊंगा आपको। तो
व्हाट इज़ स्पॉनटेनियस प्रोसेस? इट इज नथिंग बट अ थर्मोडायनेमिक प्रोसेस दैट हैपेंस ऑन इट्स ओन विदाउट द नीड ऑफ एनी
एक्सटर्नल सोर्स। यानी एक ऐसा थर्मोडायनेमिक एक ऐसा थर्मोडायनेमिक प्रोसेस जिसको स्टार्ट करने के लिए हमें
किसी भी एक्सटर्नल सोर्स की जरूरत नहीं है। अपने आप हो सकता है। या फिर या फिर या फिर इनिशियली उसको ट्रिगर करने के लिए
हमें एक्सटर्नल सोर्स की जरूरत है। लेकिन अब बाद में वो अपने आप हो सकता है। इसे हम कहते हैं स्पॉनटेनियस प्रोसेससेस। जैसे
फॉर एग्जांपल अगर इसका एग्जांपल लेता हूं मैं बर्निंग ऑफ पेपर इसका एक बहुत ही बेहतरीन सा एग्जांपल है। तो यहां पर पेपर
मेरे पास है। उसको जलाने के लिए मैंने एक बार ट्रिगर किया कि मैंने भैया यहां पे माचिस की तीली को जलाकर उसके पास में रखा
तो उस माचिस की तीली से जो यहां पर हीट एनर्जी रिलीज होगी वो बेसिकली इस पेपर के टेंपरेचर को उसके इग्निशन टेंपरेचर से ऊपर
लेकर जाएगी और पेपर में आग लग जाएगी। अब एक बार अगर पेपर में आग लगी तो उसके बाद जो हीट एनर्जी रिलीज होगी वह फर्दर जो आगे
वाला पेपर है उसके इग्निशन टेंपरेचर को बढ़ाएगी उसमें आग लगेगी। ऐसे कंटीन्यूअसली करते करते करते करते पूरा पेपर जल जाएगा।
तो मैंने तो बस एक बार माचिस की तीली यहां पर लगाई थी जिसकी वजह से पेपर का जो टेंपरेचर है उसके इग्निशन टेंपरेचर से ऊपर
टेंपरेचर अटेन किया आग लग गई। अब बाकी पेपर अपने आप जलता है। सो दैट इज़ स्पॉनटेनियस। दूसरा है जो अपने आप हो रहा
है। जैसे मान लीजिए कि अगर मैं बर्फ को रख देता हूं रूम टेंपरेचर पे। अपने आप पिघलेगी कि नहीं पिघलेगी? बर्फ को रूम
टेंपरेचर पे रख दीजिए अपने आप पिघलेगी। सो दीज़ प्रोसेससेस आर कॉल्ड एज दी स्पॉनटेनियस प्रोसेससेस। ठीक है? अब इसके
बाद इसका यहां पर अगर हम समझे तो ये प्रोसेससेस रिवर्सिबल और इररिवर्सिबल दोनों हो सकते हैं। मतलब आप इस प्रोसेस को
रिवर्ट भी कर सकते हो और नहीं भी कर सकते। जैसे फॉर एग्जांपल अगर मैं बोलता हूं कि मेल्टिंग ऑफ आइस रूम टेंपरेचर पे हो रहा
है तो ये रिवर्सिबल स्पॉनटेनियस प्रोसेस है। है ना? और अगर मैं बोल रहा हूं बर्निंग ऑफ पेपर तो ये इररिवर्सिबल
स्पॉनटेनियस प्रोसेस है। सो दीज़ प्रोसेससेस कैन बी रिवर्सिबल एज वेल एज इररिवर्सिबल।
तो फिर लोगों ने बोला कि यहां पर जो स्पॉनटेनियस प्रोसेससेस है उसके लिए जो क्राइटेरिया है वो है डिक्रीज इन
एंथैल्पी। तो लोगों ने बोला ऐसे कैसे डिक्रीज इन एंथैल्पी? बोला हर चीज क्या चाहती है? अपनी एनर्जी को मिनिमाइज करना
चाहती है। क्योंकि जब वो मिनिमाइज करेगी अपनी एनर्जी को तो वो ज्यादा स्टेबल हो जाएगी। तो लोगों ने बोला अच्छा तो बोले
जैसे कि जो रिएक्शंस होती है जिनमें कि प्रोडक्ट जब बनता है और एनर्जी रिलीज होती है तो वहां पे वो एनर्जी इसीलिए रिलीज़ हो
रही है ताकि जो प्रोडक्ट है वो ज्यादा स्टेबल हो जाए। तो उन्होंने कहा अच्छा ऐसा है। तो बोले हां। तो बोले कि केमिकल
रिएक्शंस आपकी वही स्पॉनटेनियस होंगी जिसके अंदर क्या होगा? इन अ गिवन डायरेक्शन बिकॉज़ डिक्रीज इन एनर्जी हैज़
टेकन प्लेस एज इन केस ऑफ एग्जोथर्मिक रिएक्शन। यह कह रहा है कि एक केमिकल रिएक्शन एक पर्टिकुलर डायरेक्शन में तभी
स्पॉनटेनियस होगी जब उस पर्टिकुलर डायरेक्शन में एनर्जी रिलीज़ होगी ताकि प्रोडक्ट और ज्यादा स्टेबल हो सके। यानी
कि रिएक्शन एग्जोथर्मिक होगी। यही तो कह रहा है। अ केमिकल रिएक्शन इज़ स्पॉनटेनियस इन अ गिवन डायरेक्शन बिकॉज़ डिक्रीज इन
एनर्जी इज़ टेकन प्लेस एज़ इन केस ऑफ़ एग्जोथर्मिक रिएक्शंस। तो यहां पर इन पर्टिकुलर रिएक्शंस में क्या हो रहा है?
डिक्रीज इन एंथैल्पी हो रहा है। यानी कि डेल्टाH क्या होगा? नेगेटिव। एग्जोथर्मिक रिएक्शनंस के लिए डेल्टा H होता है
नेगेटिव। तो ये कह रहे हैं कि स्पॉनटेनियस होने के लिए किसी भी केमिकल रिएक्शन की अगर हम बात कर रहे हैं या फिजिकल प्रोसेस
की बात कर रहे हैं तो वो डिक्रीज इन एनर्जी की बात कर रहा है। डिक्रीज इन एंथैल्पी की बात कर रहा है। कि जिस भी
प्रोसेस में डिक्रीज इन एंथैल्पी हो रहा होगा उस डायरेक्शन में प्रोसेस स्पॉनटेनियस होगा। यानी जिस भी पर्टिकुलर
डायरेक्शन में आपकी रिएक्शन या प्रोसेस एग्जोथर्मिक है। यानी कि हीट एनर्जी रिलीज़ हो रही है। यानी कि डेल्टा H नेगेटिव है।
वहां पे उस डायरेक्शन में प्रोसेस स्पॉनटेनियस है। यानी कि अपने आप होगा। तो लोगों ने कहा यार ये तो खतरनाक सी बात है।
बोल रहे हैं यार। बोले आप प्रूफ के साथ देखिए इसमें क्या बड़ी बात है। हाइड्रोजन और क्लोरीन गैस रिएक्ट करके HCL बना रहे
हैं। इनका जो यहां पर डेल्टा H ऑफ़ द रिएक्शन है वो नेगेटिव है। हाइड्रोजन और ऑक्सीजन गैस को अगर आप रूम टेंपरेचर पे रख
दें तो स्पॉनटेनियसली ये रिएक्ट करेंगी और ये एग्जोथर्मिक रिएक्शन है। स्पॉनटेनियसली रिएक्ट करेंगी। एग्जोथर्मिक रिएक्शन है।
थॉ ये बहुत ज्यादा रिएक्ट नहीं करेंगी। हां लेकिन अगर आपने हल्का सा इनको जला दिया एक ट्रिगर करने के लिए सोर्स दिया तो
फिर ये अपने आप होगा धमाका होता जाएगा। होता जाएगा, होता जाएगा, होता जाएगा, होता जाएगा, होता जाएगा, होता जाएगा और पूरा
मिक्सचर जल जाएगा। तो भाई साहब यहां पर भी क्या है? डेल्टाH जो है रिएक्शन का नेगेटिव है।
तो लोगों ने बोला कि अगर आपके पास डेल्टाH नेगेटिव आ रहा है यानी कि अगर आपका चेंज इन एंथैल्पी डिक्रीज हो रहा है, तभी ये
आपका स्पॉनटेनियस प्रोसेस या रिएक्शन होगी। इसको ग्राफ के थ्रू भी बताया उन्होंने कि मान लीजिए ये एंथैल्पी ऑफ़
रिएक्टेंट्स है और ये आपका एंथैल्पी ऑफ़ प्रोडक्ट्स है तो एंथैल्पी क्या हो रही है? डिक्रीज हो रही है। यानी कि डेल्टा h
क्या हो रहा है? नेगेटिव हो रहा है। तो बोला कि ये स्पॉनटेनिटी का क्राइटेरिया है कि रिएक्शन उस डायरेक्शन में प्रोसीड
करेगी या रिएक्शन उस डायरेक्शन के अंदर स्पॉनटेनियस होगी जहां पर एंथैल्पी डिक्रीज हो रही हो। लोग बोले यार ये तो
खतरनाक बात है। तो चलिए मैं आपसे सवाल पूछता हूं। आप सोचो क्या ये जरूरी है? इज़ दिस कंपलसरी ऑ नॉट? थिंक अबाउट दिस। द
ड्राइविंग फोर्स फॉर अ केमिकल रिएक्शन टू बी स्पॉनटेनियस इज़ ओनली द डिक्रीज इन एनर्जी यानी कि डेल्टा H नेगेटिव। यानी
रिएक्शन उसी डायरेक्शन में स्पॉनटेनियस होगा जहां पर एक डिक्रीज इन एनर्जी हो रहा होगा। यानी कि डेल्टा H नेगेटिव होगा।
रिलीज हो रही होगी एनर्जी। तो इसका करेक्ट आंसर क्या है हमारे पास? नो। करेक्ट आंसर इज़ नो। बहुत सारी केमिकल रिएक्शंस हैं जो
कि एंडोथर्मिक है लेकिन स्टिल क्या है? स्पॉनटेनियस है। अरे एंडोथर्मिक रिएक्शंस भी स्पॉनटेनियस हो सकती है। तो आप ये
क्यों बोल रहे हो कि एग्जोथर्मिक रिएक्शंस ही स्पॉनटेनियस होंगी। एंडोथर्मिक रिएक्शन यानी जिसके अंदर डेल्टा H पॉजिटिव है वो
भी स्पॉनटेनियस हो सकती है। यह एग्जांपल्स आपके सामने नाइट्रोजन और ऑक्सीजन गैस रिएक्ट करती है। है ना? कार्बन एंड
ग्रेफाइट रिएक्ट विद सल्फर टू फॉर्म कार्बन डाइस सल्फाइड। अगर आपने इन रिएक्शंस को हल्का सा ट्रिगर कर दिया तो
ये स्पॉनटेनियस रिएक्शंस है। बट दीज़ आर कौन सी? एंडोथर्मिक स्पॉनटेनियस रिएक्शंस। यानी कि ये स्पॉनटेनियस है बट एंडोथर्मिक
है। क्योंकि यहां पे डेल्टा H क्या आ रहा है? डेल्टा H ऑफ़ द रिएक्शन इज़ पॉजिटिव। तो आप यहां पर यह नहीं बोल सकते कि हमेशा
ऐसा होगा। अच्छा मेल्टिंग ऑफ आइस कैसा प्रोसेस है? मेल्टिंग ऑफ आइस स्पॉनटेनियस है ना? तो एग्जोथर्मिक है कि एंडोथर्मिक
है? अरे दादा हीट एनर्जी अब्सॉर्ब करके पिघल रहा है ना? एंडोथर्मिक हुआ ना? अरे एंडोथर्मिक हुआ कि नहीं हुआ? बिल्कुल।
तो इसीलिए देयर फॉर इट बिकम्स डिफिकल्ट। और देयर फॉर इट बिकम्स ऑब्वियस दैट व्हाइल डिक्रीज इन एंथैल्पी मे बी अ
कंट्रीब्यूटरी फैक्टर फॉर स्पॉनटेनियस प्रोसेससेस। बट दिस इज़ नॉट ट्रू। ये कॉन्ट्रिब्यूटरी फैक्टर हो सकता है कि भाई
साहब जहां पर हमारे पास एंथैल्पी में डिक्रीज होगा प्रोसेस उस डायरेक्शन में स्पॉनटेनियस होगा। ये कंट्रीब्यूटरी
फैक्टर हो सकता है बट ये हमेशा एक यूनिवर्सल फैक्टर नहीं होगा। अच्छा तो लोगों ने कहा कि जब ये चीज नहीं हो पा रही
है भैया तो हम लोग क्या करते हैं? एक और फैक्टर को यहां पर आइडेंटिफाई करने की कोशिश करते हैं। और दूसरा फैक्टर हमारे
पास कहलाता है दैट इज़ कॉल्ड एज दी दैट इज कॉल्ड एज दी एंट्रॉपी। ये क्या कहलाता है? ये कहलाता है बेसिकली एंट्रॉपी। अब
एंट्रॉपी क्या होता है? आइए इसको इस एग्जांपल से समझने की कोशिश करते हैं। तो यहां पर हमारे पास आप मानेंगे कि यहां
पर हमारे पास क्या है? ये एक बकर है जिसके अंदर हमारे पास क्या है? ये देखिए। इस पर्टिकुलर पार्ट में हमारे पास गैस ए है।
और इस पर्टिकुलर पार्ट में हमारे पास गैस बी है। दोनों के बीच में एक दीवार रख रखी है हमने। यह ऑर्डरली अरेंजमेंट ऑफ बी।
ऑर्डरली अरेंजमेंट ऑफ A। बिल्कुल ऑर्डरली अरेंजमेंट है। जी बिल्कुल। ऑर्डरली अरेंजमेंट है या नहीं? अपने दिल
से बताओ एक ऑर्डरली अरेंजमेंट है या नहीं है? अगर मैं बोलता हूं यह मेरे पास है गैस बी और ये मेरे पास है गैस ए। एक ऑर्डरली
अरेंजमेंट में है दोनों। मतलब ऐसा है ना कि यहां पे घूम फिर रहे होंगे पार्टिकल्स। यहां पे भी घूम फिर रहे होंगे। लेकिन
तुमको पता है अगर तुमने यहां पे हाथ डाला तो गैस बी के पार्टिकल्स निकलेंगे। और अगर तुमने यहां हाथ डाला तो गैस ए के
पार्टिकल्स निकलेंगे। इसका तो मतलब समझ रहे हो? अगर मैंने यहां हाथ डाला तो गैस ए के पार्टिकल्स। यहां डाला तो गैस बी के
पार्टिकल्स। इतना तो समझ में आया? जी। मैं तुमको बोलता हूं तुम यहां से दीवार को हटा दो। ये पार्टीशन को रिमूव कर दो। अब मेरे
दोस्त क्या होगा? ये हाई कंसंट्रेशन में यहां पे यहां पे लो कंसंट्रेशन में तो ये इस डायरेक्शन में जाएगी। ये इस डायरेक्शन
में जाएगी। ये अपोजिट डायरेक्शंस में मूव करना स्टार्ट कर देंगी। और कुछ ऐसा हो जाएगा। तो एक मेरे को बात
बताओ। अब अगर तुम इसके अंदर हाथ डालोगे तो क्या तुमको जरूरी है? A के मॉलिक्यूल्स
मिलेंगे। ऐसा हो सकता है A के मॉलिक्यूल्स ज्यादा मिले। B के मॉलिक्यूल कम मिले। तुमने हाथ से उठाया या हाथ से उठाया तो B
के मॉलिक्यूल ज्यादा मिले। A के मॉलिक्यूल कम मिले। ऐसा हो सकता है। अब मुझे बताओ ये अपने आप हुआ कि नहीं हुआ? मैंने पार्टीशन
हटाया। ये अपने आप आपस में मिले या मैंने बोला मिलने के लिए? सुनील भाई आपने पार्टीशन हटाया अपने आप हुए। यानी कि
प्रोसेस स्पॉनटेनियस है। और स्पॉनटेनियस प्रोसेस हो रहा था तो ये आपस में मिक्स हो गए। यानी कि देखिए सिस्टम कैसा हो गया?
डिसऑर्डर्ड हो गया। ये कैसा हो गया? डिसऑर्डर या यहां पर जो हम बोल सकते हैं केओस जो है
वह बेसिकली क्या हो गया? इनक्रीज हो गया इस इस सेटअप में। सब आपस में इधर टेढ़े-मेढ़े टेढ़े-मेढ़े मिक्स
हो गए। एक डिसऑर्डर और कॉस बढ़ गया। तो यहां पर स्पॉनटेनिटी के लिए मैं दूसरा क्राइटेरिया बोलूं कि जब हमारे सिस्टम का
डिसऑर्डर या कॉस बढ़ेगा तो वो प्रोसेस स्पॉनटेनियस होगा। डिक्रीज इन एंथैल्पी एक क्राइटेरिया हो सकता है।
लेकिन दूसरा क्राइटेरिया क्या है? यह मैंने हटाया। ये अपने आप मिक्स हो गए। अपने आप मिक्स हो गए। यानी कि स्पॉनटेनियस
था। यानी कि स्पॉनटेनियस होने का एक क्राइटेरिया यह भी है कि जितना ज्यादा डिसऑर्डर बढ़ेगा, जितना ज्यादा केस बढ़ेगा,
उतना ही ज्यादा क्या होगा? प्रोसेस स्पॉनटेनियस होगा। सो इन एन आइसोलेटेड सिस्टम देयर इज़ ऑलवेज अ टेंडेंसी फॉर द
सिस्टम्स एनर्जी टू बिकम मोर डिसऑर्डर्ड और केओटिक एंड दिस कुड बी अ क्राइटेरिया फॉर स्पॉनटेनियस चेंज। यानी कि ये
स्पॉनटेनियस था। अपने आप हुआ और यहां पर जितना ज्यादा ये अपने आप हुआ उससे क्या हो रहा है? ये क्यों हो रहा है? अपने आप हुआ
और यहां पर पार्टिकल्स रैंडमली इधर टेढ़े-मेढ़े टेढ़े-मेढ़े इधर-उधर अरेंज हो गए। क्लॉज़ बढ़ गया। यानी क्लास 11th ए के बच्चे
इधर थे। क्लास 11th बी के बच्चे इधर थे। अब अपन ने बोल दिया कि दीवार हट गई। अब ये आपस में युद्ध कर रहे हैं। भिड़ गए आपस
में। बिल्कुल एक डिसऑर्डर और एक कस बढ़ गया है। तो स्पॉनटेनियस प्रोसेससेस का एक क्राइटेरिया यह होता है कि जितना ज्यादा
डिसऑर्डर और कस होगा उतना ही वो प्रोसेस स्पॉनटेनियस होगा। समझ में आया? जी। तो, यहां पर हम लोग एक
और फंक्शन को डिफाइन करते हैं। एक और यहां पर चीज को डिफाइन करते हैं। दैट इज़ कॉल्ड एज़ एंट्रॉपी। एंट्रॉपी इज़ रिप्रेजेंटेड
बाय S व्हिच इज़ अ मेजर ऑफ़ द डिग्री ऑफ़ रेंडमनेस और दी डिसऑर्डर इन द सिस्टम। यानी सिस्टम में जितना ज्यादा डिसऑर्डर या
जितना ज्यादा सिस्टम केटिक है या पार्टिकल्स जितने ज्यादा रैंडम ओरिएंटेशंस में आ सकते हैं जितना ज्यादा ये होगा उतनी
ही ज्यादा एंट्रॉपी होगी। जितना ये कम होगा जितना ऑर्डरली अरेंजमेंट होगा उतनी एंट्रॉपी कम होगी। सरल भाषा में लड़कों के
रूम की एंट्रॉपी बहुत ज्यादा होती है। चीजें अस्त-व्यस्त पड़ी है। है ना? पैंट इधर पड़ी है। पैंट के ऊपर शर्ट पड़ी है।
है ना? कोई चीज कहीं, कोई चीज कहीं, कोई चीज कहीं, कोई चीज कहीं उतनी ज्यादा एंट्रॉपी है। लड़कियों के रूम में
एंट्रॉपी उतनी कम होती है। सब कुछ अरेंज्ड होता है। मेरे रूम की भी खैर एंट्रॉपी कम है। सब कुछ अरेंज्ड मिलेगा आपको। पर
यूजुअली लड़कों के केस में क्या होता है ना कि एंट्रॉपी रूम की ज्यादा होती है। अरे भाई पानी की बोतल कहां है? पानी की
बोतल बड़ी बिस्तर के नीचे है। बिस्तर कहां है? जमीन के अंदर ऐसा। एंट्रॉपी ज्यादा है।
अच्छा ये तो हो गई पहली बात। अब जैसे अदर थर्मोडायनेमिक प्रॉपर्टीज हमारे पास है। एंथैल्पी, इंटरनल एनर्जी। उसी प्रकार
एंट्रॉपी भी एक स्टेट और पॉइंट फंक्शन है। यानी कि इनिशियल और फाइनल स्टेट पर डिपेंड करता है। पाथ आपने क्या लिया? उसमें फर्क
नहीं पड़ता उसको। तो क्या आप इसकी एब्सोल्यूट वैल्यू निकाल सकते हो? नहीं आप इसकी एब्सोल्यूट वैल्यू नहीं निकाल सकते।
आप मेजर कर सकते हो चेंजज़ इन एंट्रॉपी। यू कैन नॉट मेजर द एब्सोल्यूट वैल्यू ऑफ़ एंट्रॉपी। यू कैन ओनली मेजर द चेंजज़ इन दी
एंट्रॉपी। दैट इज़ डेल्टाS। बहुत इंपॉर्टेंट बात। बहुत इंपॉर्टेंट बात। स्टार लगा देना।
अगर अगर रिएक्टेंट से प्रोडक्ट पे जाते हुए मैं बोलूं कि जो प्रोडक्ट्स बने हैं यहां पर
प्रोडक्ट्स के बनने का डिसऑर्डर और क्यों ज्यादा है। क्या बोल रहा हूं मैं? इफ द स्ट्रक्चर ऑफ द प्रोडक्ट्स इज वेरी मच
डिसऑर्डर्ड देन दैट ऑफ द रिएक्टेंट्स। यानी रिएक्टेंट्स का जो स्ट्रक्चर है वो बेसिकली बहुत ऑर्डर्ड है या रिएक्शन के जो
जो रिएक्टेंट्स हैं वो बहुत ही ऑर्डरली अरेंजमेंट में है। लेकिन जो प्रोडक्ट बन रहा है उसमें बहुत डिसऑर्डर या कस एक
रैंडम अरेंजमेंट है। तो रिएक्शन इधर भागने की कोशिश करेगी डिसऑर्डर की तरफ। देयर विल बी अ रिजल्टेंट इंक्रीस इन एंट्रॉपी। दिस
फेवर्स द स्पॉनटेनिटी ऑफ़ द रिएक्शन। सिंपल सी बात है। अगर स्ट्रक्चर ऑफ़ प्रोसेस अ प्रोडक्ट बहुत ज्यादा डिसऑर्डर है देन द
रिएक्टेंट्स तो एक रिजल्टेंट इंक्रीस हो रहा है एंट्रॉपी में। रिएक्टेंट से प्रोडक्ट में जाते समय एक एंट्रॉपी में
इंक्रीज हो रहा है। और यही एक क्राइटेरिया है स्पॉनटेनिटी का। यानी जितना ज्यादा डिसऑर्डर होगा जितना ज्यादा डिसऑर्डर है,
कओस है, रैंडम अरेंजमेंट है, उतनी ज्यादा एंट्रॉपी है। और रिएक्शन बोल रही है कि जितना ज्यादा एंट्रॉपी बढ़ेगा, मैं तो उसी
डायरेक्शन में भागूंगी। मैं भागूं उस डायरेक्शन में जहां एंट्रोपी बढ़े। मेरे मुंह में गाना आ रहा था। मैं
नाचूं बिन पायल घुंघरू टूट गए तो क्या? पता नहीं क्यों ये गाना आया। ठीक है? चलो। अब एक सिंपल सी बात है। एक
सिंपल सी बात है। एक सिंपल सी बात है। फॉर अ गिवन सब्सटेंस द सॉलिड स्टेट इज़ द स्टेट ऑफ़ लोएस्ट एंट्रॉपी। व्हाइल द गैसियस
स्टेट इज़ द स्टेट ऑफ़ हाईएस्ट एंट्रॉपी। दिमाग लगाओ। ऑब्वियस सी बात है। सॉलिड स्टेट में क्या है? एक रैंडम अरेंजमेंट कम
होगा। एक स्ट्रक्चर अरेंजमेंट यहां पर क्या होता है? ज्यादा होता है। ये सॉलिड स्टेट है। और गैसेस स्टेट में क्या है?
पार्टिकल्स एकदम रैंडमली ओरिएंटेड है। कोई कहां जा रहा है। कोई कहां जा रहा है, कोई किससे भिड़ रहा है, कोई किससे भिड़ रहा है,
कोई इधर जा रहा है, कोई उधर जा रहा है, कोई इससे भिड़ रहा है, कोई इससे भिड़ रहा है। ये गैस है। रैंडम अरेंजमेंट ज्यादा
है। तो, लोएस्ट एंट्रॉपी की स्टेट सॉलिड स्टेट है, गैसेस स्टेट, हाईएस्ट एंट्रॉपी की स्टेट
है। यस। अगर मैं आपसे बोलता हूं कि आइस जो है उसकी एंट्रॉपी ज्यादा होगी या वाटर वेपर की तो क्या कहोगे? जितना ज्यादा
रैंडमनेस जितना ज्यादा कयोटिक ऑर्डर होगा जितना ज्यादा डिसऑर्डर होगा उतना ही ज्यादा एंट्रॉपी होगा। तो वाटर वेपर में
ऐसा होता है। यानी किसी भी चीज के सॉलिड स्टेट में क्या स्ट्रक्चर अरेंजमेंट है? गैसियस स्टेट में एक रैंडम अरेंजमेंट है।
चलिए उसके बाद यहां पर हम लोग स्टार्ट करते हैं विद दी क्वांटिफिकेशन ऑफ दी एंट्रॉपी यानी कि चेंज इन दी एंट्रॉपी
डेल्टाS। अब अगर मुझे एंट्रॉपी को क्वांटिफाई करना है तो मैं एब्सोल्यूट वैल्यू ऑफ़ एंट्रोपी
तो मेजर नहीं कर सकता। मैं तो चेंज इन एंट्रॉपी को मेजर कर सकता हूं। तो आइए चेंज इन एंट्रॉपी को यहां पर मेजर करते
हैं। सबसे पहला ये पॉइंटर नंबर वन है और ये मेरे पास पॉइंटर नंबर टू है। तो मान लीजिए
कि यहां पर मैं बोलता हूं कि हीट q इज एडेड टू द सिस्टम कंटेनिंग द गैस एट दी कास्टेंट टेंपरेचर। कांस्टेंट टेंपरेचर
है। यानी कि यहां पर जो प्रोसेस है वो क्या है? आइसोथर्मल है। अब मेरी बात को थोड़ा सा ध्यान से सुनोगे तो समझ में
आएगा। इफ हीट q इज़ एडेड टू अ सिस्टम कंटेनिंग दी गैस। मतलब हमारे पास एक सिस्टम है जिसके अंदर एक गैस भरी हुई है।
इसके अंदर अपन ने हीट q को ऐड करा है। टेंपरेचर इंक्रीज नहीं होना चाहिए। टेंपरेचर इंक्रीज नहीं होना चाहिए। तो
इसका मतलब क्या हो जाएगा? हमारे पास ये हो जाएगा डेल्टा u और हमारे पास यह q अमाउंट ऑफ हीट है।
अब टेंपरेचर अगर इनक्रीज नहीं होना चाहिए तो यहां पर यह वाली वैल्यू तो क्या हो जाएगी? अगर टेंपरेचर कांस्टेंट है तो
इंटरनल एनर्जी तो टेंपरेचर पर डिपेंड करती है। टेंपरेचर चेंज नहीं होगा तो इंटरनल एनर्जी चेंज नहीं होगी तो डेल्टा u तो
ज़ीरो हो जाएगा। तो यहां पर फिर क्या है? ये जो हीट एनर्जी है, ये वर्क डन में यूज़ हो जाएगी। तो, ये
वाली वैल्यू तो हमारे पास ज़ीरो हो जाएगी। तो, यह जो Q है, यह प्योरली हमारे काम करने के इस्तेमाल में आएगा।
यानी जो पूरी की पूरी हीट एनर्जी है वर्क डन में इस्तेमाल हो जाएगी। इफ q इज द हीट एडेड टू अ सिस्टम कंटेनिंग
द गैस एट द कॉन्सेंट टेंपरेचर इट विल कंप्लीटली बी यूज्ड इन दी एक्सपेंशन ऑफ द गैस। यानी कि जो भी आपने यहां पर हीट
एनर्जी दी है, उससे हम लोग ये नहीं बोल सकते। अब जैसे मैं समझाने के लिए तुम्हें ये बताता हूं। ठीक है? समझाने के लिए
बताता हूं। तुमने हीट एनर्जी दी। पार्टिकल्स की काइनेटिक एनर्जी बड़ी होगी। लेकिन पूरी की पूरी काइनेटिक एनर्जी
उन्होंने ट्रांसफर कर दी है उसको एक्सपेंड करने के लिए। हमारे पास एक कंटेनर है। इसके अंदर एक गैस
है। इस पे लगा है पिस्टन। मैं कह रहा हूं प्रोसेस आइसोथर्मल है। आइसोथर्मल का मतलब है कि हीट एनर्जी अगर हमने दी है तो जो
काइनेटिक एनर्जी पार्टिकल्स की बड़ी होगी उसने पूरी तरीके से अपनी एनर्जी को ट्रांसफर कर दिया होगा ताकि यहां पर
पिस्टन ऊपर की तरफ जाए। वर्क डन में यूज़ कर दिया होगा। क्योंकि जो एवरेज काइनेटिक एनर्जी है दैट शुड स्टे कांस्टेंट।
क्योंकि टेंपरेचर क्या होता है? एवरेज काइनेटिक एनर्जी ऑफ पार्टिकल्स ऑफ सिस्टम। सुनील भैया लेकिन हमें तो ये पता है कि
अगर q अमाउंट ऑफ हीट एनर्जी थी तो काइनेटिक एनर्जी बढ़नी चाहिए। अरे हां तो जैसे ही वो बढ़ेगी वो पूरी की पूरी वहां
पे पिस्टन को जा के ट्रांसफर कर देगी। मान लो एक पार्टिकल की काइनेटिक एनर्जी है 20 किलोजूल। दूसरे की 20 किलजूल। तुमने हीट
ऐड करी। जस्ट एक लेमन टर्म्स में एग्जांपल दे रहा हूं। इसकी 20 से और बढ़ गई। इसकी भी 20 से और बढ़ गई। यानी दोनों की 40-40
हो गई। ये भिड़ेंगे उससे और बाकी का 20 दोनों का ट्रांसफर कर देंगे। यानी इनके पास वापस 20, इसके पास वापस 20। जितनी
बड़ी थी इसने पूरी की पूरी ट्रांसफर कर दी ताकि पिस्टन ऊपर की तरफ जाए एक्सपेंशन हो। तो इसीलिए हम क्या बोलते हैं कि टेंपरेचर
रिमेंस कांस्टेंट क्योंकि पार्टिकल्स की काइनेटिक एनर्जी कांस्टेंट ही रहती है। जितना आपने हीट दे के बढ़ाई उतना उसने
क्या कर दिया? पिस्टन को दे के मारा। पिस्टन को दे के मार के ट्रांसफर कर दी। ठीक है? जी। इफ q हीट इज एडेड टू अ सिस्टम
कंटेनिंग गैस एट दी कास्टेंट टेंपरेचर इट विल कंप्लीटली बी यूज्ड इन द एक्सपेंशन ऑफ गैस।
अब इससे क्या होगा कि वॉल्यूम ऑफ द गैस इंक्रीस करेगा। मतलब ये जो बेसिकली जो वॉल्यूम है वो तो इनक्रीस कर जाएगा। यानी
जितने रीजन में गैस थी वो बढ़ गया ना एक्सपेंशन हो गया। पहले इतने में थी मान लो अब इतने में हो गया। तो गैस का वॉल्यूम
जो है वो क्या हो गया? बढ़ गया। एंड नाउ मोर स्पेस इज़ अवेलेबल फॉर द गैस पार्टिकल्स टू अप अह ऑक्यूुपाई। दिस मींस
मोर डिसऑर्डर और केओस। अब आप बोलोगे ये क्या बोला आपने? मैं समझाता हूं। मेरे पास यहां पर एक कंटेनर है। इसमें गैस है। यहां
पे पिस्टन लगा हुआ है। q अमाउंट ऑफ हीट दी। पार्टिकल्स की काइनेटिक एनर्जी बढ़ी होगी। पर क्योंकि टेंपरेचर कांस्टेंट रखना
है। तो जितनी काइनेटिक एनर्जी बढ़ी उसने क्या कर दिया? पूरी की पूरी सप्लाई कर दी। पिस्टन यहां पर ऊपर एक्सपेंड कर दिया।
यानी यहां पर जो स्पेस ऑक्यूुपाइड है वो बेसिकली बढ़ गया गैसेस के लिए। अब अगर स्पेस ऑक्यूपाइड अगर बढ़ गया तो अब गैसेस
जो है वो ज्यादा स्पेस को ऑक्यूुपाई करेगी। तो एक ज्यादा रैंडमनेस से एक ज्यादा डिसऑर्डर नहीं हो सकता। ज्यादा
पॉसिबल ओरिएंटेशन नहीं हो सकती। बिल्कुल हो सकती है। बिल्कुल हो सकती है। पांच लोग अगर एक ऐसे मकान में रहे जहां पर दो कमरे
हैं और पांच लोग ऐसे मकान में रहे जहां पर 10 कमरे तो कहीं पर कोई भी चीज कहीं पर भी हो सकती है। डिसऑर्डर और बढ़ गया।
समझ रहे हो? जी। तो यानी कि अगर आप देखें तो जो चेंज इन एंट्रॉपी है यानी कि पहले अगर वॉल्यूम V1 था तो अब वॉल्यूम V2 है।
वॉल्यूम बढ़ेगा तो एंट्रॉपी बढ़ेगी। यानी कि जो चेंज इन एंट्रॉपी यहां पर हमारे पास आया दैट इज़ डायरेक्टली प्रोपोर्शनल टू द
हीट ट्रांसफरर्ड टू और फ्रॉम द सिस्टम रिवर्सिबबली। अब ये मैं रिवर्सिबबली टर्म्स पे ही बात करूंगा।
यानी यहां पर जो भी बातें हम करेंगे वो रिवर्सिबल हीट ट्रांसफर की ही बात होगी। यानी कि मैंने बोला कि चेंज इन एंट्रॉपी
ऑफ़ सिस्टम जो हमारे पास होगा दैट इज़ डायरेक्टली प्रोपोर्शनल टू द हीट ट्रांसफरर्ड रिवर्सिबबली।
तो चेंज इन द एंट्रॉपी ऑफ़ द सिस्टम इज़ इक्वल्स टू कांस्टेंट ऑफ़ प्रोपोर्शनलिटी वन मान के चलता हूं। सो दैट इज़ Q
रिवर्सिबल। सुनील भैया यहां पे इररिवर्सिबल आपने क्यों नहीं लिखा? देखिए रिवर्सिबल लिखा
इररिवर्सिबल नहीं लिखा समझाता हूं। चेंज इन एंट्रॉपी इज डायरेक्टली प्रोपोर्शनल टू द हीट ट्रांसफरर्ड। यानी यहां पर जो भी
एंट्रॉपी में चेंज आ रहा होगा दैट इज डायरेक्टली प्रोपोर्शनल कि हमने कितनी हीट दी है या कितनी हीट निकली है। लेकिन ये
सारा का सारा हो रहा होगा रिवर्सिबल प्रोसेससेस में। इररिवर्सिबल में क्यों नहीं? क्योंकि अगर मान लीजिए यहां पर
एंट्रॉपी ऑफ़ सिस्टम इररिवर्सिबल का आप निकालने लगेंगे तो वहां पर पता है क्या होगा?
इस हीट के अलावा क्या होगा? मान लीजिए अगर आपने हीट दी और एकदम से एक्सपेंड किया तो वहां पर जो चेंज इन एंट्रॉपी है वह सिर्फ
हीट पर डिपेंड नहीं करेगा। वो उसके अलावा किस पे डिपेंड करेगा? टर्बुलेंस पे डिपेंड करेगा क्योंकि वो एकदम से झटका खा के खुला
है। टर्बुलेंस, फ्रिक्शन इन सब पे डिपेंड करेगा। यानी जो आपकी सिस्टम की एंट्रॉपी है, मान
लो पिस्टन एक झटके से हक करके ऊपर जा रहा है। तो यहां पे टर्बुलेंस भी आ जाएगा। यहां पर फ्रिक्शन भी आ जाएगा।
तो यहां पर सिर्फ और सिर्फ हीट एनर्जी नहीं रिस्पांसिबल होगी चेंज इन एंट्रॉपी ऑफ सिस्टम के लिए। यहां पर आपका टर्बुलेंस
फ्रिक्शन यह भी रिस्पांसिबल होगा। तो अगर मैं बात कर रहा हूं यहां पर चेंज इन एंट्रॉपी ऑफ़ सिस्टम तो हीट ट्रांसफर शुड
बी डन रिवर्सिबली नॉट इररिवर्सिबबली। इररिवर्सिबल के केस में ऐसा हो जाएगा। इन इररिवर्सिबल
इररिवर्सिबल। इररिवर्सिबल प्रोसेस में ऐसा हो जाएगा। ठीक है? जी। दूसरा टेंपरेचर क्या होता है?
टेंपरेचर इज बेसिकली अ मेजर ऑफ एवरेज काइनेटिक एनर्जी ऑफ अ पार्टिकल्स ऑफ सिस्टम। व्हाट इज टेंपरेचर? जो भी सिस्टम
की एवरेज काइनेटिक एनर्जी है, दैट इज़ इक्वल्स टू टेंपरेचर। जो भी आपके पास सिस्टम के अंदर जो पार्टिकल्स हैं, उनकी
जो एवरेज काइनेटिक एनर्जी है, दैट इज़ नथिंग बट योर टेंपरेचर। ठीक है ना? तो अगर मैं आपको बोलता हूं कि मैं सेम
अमाउंट ऑफ हीट दो सिस्टम्स में ऐड करता हूं A और B में जहां पर टेंपरेचर ऑफ A जो है दैट इज लेसर दैन B ध्यान से सुनना।
दो बॉडीज हैं मेरे पास। एक 5° सेल्सियस पे एक 50° सेल्सियस पे। इसको 50 जूल दिया। इसको भी 50 जूल दिया। बताओ एंट्रॉपी में
चेंज ज्यादा कहां आएगा? ये 5° सेल्सियस पे है। ये 50° सेल्सियस पे है। इसको 50 जूल दिया। इसको भी 50 जूल हीट दिया। बताओ कहां
पर ज्यादा चेंज इन एंट्रॉपी आएगा? कहां पे डिसऑर्डर केस बढ़ेगा? सिंपल एक एग्जांपल दूं। समझ जाओगे?
मान लो एक रूम है। हॉस्टल का रूम है। जहां पर मैकेनिकल इंजीनियर्स तेज गाना बजा के पागल की तरह नाच रहे हैं। यानी ये बॉडी
पहले ही हाई टेंपरेचर पे है। तो यहां पर केओस पहले ही बहुत ज्यादा होगा। पागल की तरह नाच रहे हैं। क्योंकि बॉडी एट हाई
टेंपरेचर मींस काइनेटिक एनर्जी ज्यादा। बॉडी एट हाई टेंपरेचर मींस काइनेटिक एनर्जी ज्यादा। जो बॉडी 50° सेल्सियस पे
है तो वहां पे पार्टिकल्स की काइनेटिक एनर्जी क्या होगी? ज्यादा होगी। ज्यादा होगी। ज्यादा होगी। ज्यादा होगी। ज्यादा
होगी। ज्यादा होगी। ज्यादा होगी। तो यहां पर मैकेनिकल इंजीनियर्स का जो रूम है यहां पर हाई टेंपरेचर है। यानी कि
पार्टिकल्स की काइनेटिक एनर्जी ज्यादा है। यानी कि एंट्रॉपी ज्यादा है। पहले ही इधर-उधर इधर-उधर रैंडम डायरेक्शन में मूव
कर रहे हैं। यानी कि तेज गाने चलाकर पागल की तरह नाच रहे हैं। अब इसी के अंदर मैं क्या करूं? अपने हाथ में ब्लूटूथ स्पीकर
लेकर मैं अंदर घुसता हूं। जिसमें गाने चल रहे हैं। क्या उससे कोई फर्क पड़ेगा? थोड़ा बहुत।
लेकिन मैं एक दूसरे रूम में जाता हूं। जहां पर मैंने क्या बोला कि टेंपरेचर कम है। यानी टेंपरेचर कम है। यानी पार्टिकल्स
की एवरेज काइनेटिक एनर्जी क्या है? बहुत धीरे धीरे धीरेधी बहुत कम है। अब अगर मैं इसके अंदर जाता हूं और मैं
लाउडस्कर लेकर अंदर गया तो ये पागल की तरह नाचने लगेंगे सारे के सारे। तो इस सेम अमाउंट ऑफ हीट एनर्जी का फर्क
एक बॉडी जो कि हाई टेंपरेचर पे उस पे कम होगा। लेकिन ये सेम अमाउंट ऑफ हीट एनर्जी का फर्क उस बॉडी पे ज्यादा होगा जिसका
टेंपरेचर कम है। समझ गए? जी। सो मोर डिसऑर्डर विल बी क्रिएटेड इन द सिस्टम विद अ लोअर टेंपरेचर दैट इज A. तो टेंपरेचर इज़
अ मेजर ऑफ़ एवरेज काइनेटिक एनर्जी ऑफ़ पार्टिकल्स ऑफ़ द सिस्टम। अगर एक बॉडी हाई टेंपरेचर पे है तो यहां पे पार्टिकल्स की
काइनेटिक एनर्जी पहले ही बहुत ज्यादा है। एक बॉडी लोअर टेंपरेचर पे है तो यहां पे पार्टिकल्स की काइनेटिक एनर्जी बहुत कम
है। तो यहां पे डिसऑर्डर ज्यादा है। यहां पे डिसऑर्डर कम है। अब आपने सेम अमाउंट ऑफ हीट एनर्जी पटक दी तो यहां पर ये चेंज
ज्यादा आएगा एज़ कंपेयर टू दिस। ठीक है? जी। तो यहां पर मैं बोल सकता हूं कि जो चेंज इन एंट्रॉपी है मेरे पास डेल्टाS वो
इन्वर्सली प्रोपोर्शनल है टेंपरेचर के। चेंज इन एंट्रॉपी ऑफ़ सिस्टम इज़ डायरेक्टली प्रोपोर्शनल टू इज़ डायरेक्टली प्रोपोर्शनल
टू हीट ट्रांसफर रिवर्सिबबली। और यहां पे जो चेंज इन एंट्रॉपी ऑफ़ सिस्टम है, यानी कि डेल्टाS है हमारे पास।
ठीक है ना? डेल्टाS है। तो यहां पर अगर आप सिस्टम लिखना चाहे तो ठीक है। नहीं तो एक जनरल एक्सप्रेशन हो जाएगा। डेल्टाS इज
डायरेक्टली प्रोपोर्शनल टू Q रिवर्सिबबली। नहीं तो डेल्टाS ऑफ सिस्टम चेंज इन एंट्रॉपी ऑफ़ सिस्टम इज़ इन्वर्सली
प्रोपोर्शनल टू द टेंपरेचर। इसको अगर हम प्रोपोर्शनैलिटी के साइन को हटाएंगे। सो दैट इज़ इक्वल्स टू इक्वल। और
फिर कांस्टेंट ऑफ़ प्रोपोर्शनैलिटी मैंने वन मान लिया। तो 1 / t ठीक है? जी। यहां पे अब सिस्टम लिखना चाहे
तो ठीक है। नहीं तो कोई दिक्कत वाली बात नहीं है। ये इक्वेशन वन ये इक्वेशन हमारे पास टू।
ठीक है? जी। तो यहां पर चेंज इन एंट्रॉपी हमारे पास क्या हो जाएगा? q रिवर्सिबल अपॉन में t हो जाएगा।
कहां से? फ्रॉम इक्वेशन वन एंड टू से। ये बात समझ में आ रही है क्या? फ्रॉम इक्वेशन वन एंड इक्वेशन टू चेंज इन एंट्रॉपी = q
रिवर्सिबल अप t यह चेंज इन एंट्रॉपी ऑफ सिस्टम या सिर्फ चेंज इन एंट्रॉपी भी आप लिख सकते हैं। अभी हम सिस्टम की बात कर
रहे थे तो मैंने बोला चेंज इन एंट्रोपी ऑफ़ सिस्टम। ठीक है? छोटी-छोटी बातें समझ में आ रही है? क्लियर हो रही है? अभी यहां पर
मैंने रेफरेंस के लिए सिस्टम लिया था ना। तो इसीलिए लिखा चेंज इन एंट्रॉपी ऑफ़ सिस्टम।
ठीक है? तो क्या हो जाएगा? चेंज इन एंट्रॉपी ऑफ़ सिस्टम। अगर कंफ्यूजन हो रहा है तो लिख
सकते हो। कोई दिक्कत वाली बात नहीं है। पर यह जनरल एक्सप्रेशन भी हो जाएगा सिस्टम और सराउंडिंग के लिए। दोनों के लिए यही यूज़
करोगे। दैट इज़ Q रिवर्सिबल / T. ठीक है भाई? चलो। सो, चेंज इन एंट्रॉपी ऑफ़ सिस्टम = Q रिवर्सिबल / T यानी कि जो भी चेंज इन
एंट्रॉपी होता है, दैट इज़ डायरेक्टली प्रोपोर्शनल टू दी हीट ट्रांसफर रिवर्सिबबली एंड इन्वर्सली प्रोपोर्शनल टू
द टेंपरेचर ऑफ दैट पर्टिकुलर सिस्टम। ठीक है भाई? क्लियर है बात? क्लियर है बात? कामना करता हूं। यह बात आपको सभी को
क्लियर है। चलिए, कुछ और एडिशनल दो इंपॉर्टेंट पॉइंट्स हैं। बहुत अच्छे हैं और बहुत इंपॉर्टेंट है। ध्यान से देखना।
अब मैं आपसे पूछता हूं एंट्रॉपी फॉर अ स्पॉनटेनियस प्रोसेस कब मैक्सिमम होगा? तो एंट्रॉपी फॉर अ स्पॉनटेनियस प्रोसेस
इंक्रीसेस टिल इट रीचेस मैक्सिमम एट दी इक्विलब्रियम। याद रखिएगा।
याद रखिएगा। एंट्रॉपी किसी भी स्पॉनटेनियस प्रोसेस की तब तक बढ़ती रहेगी तब तक बढ़ती रहेगी जब तक वो इक्विलिब्रियम अटेन ना कर
ले। सो दैट विल बी मैक्सिमम एट द इक्विलिब्रियम। और इक्विलिब्रियम पर कोई भी चीज चेंज नहीं होती है। तो चेंज इन
एंट्रॉपी इक्विलिब्रियम पे क्या हो जाएगा? ज़ीरो हो जाएगा। इक्विलिब्रियम पे एवरीथिंग बिकम्स कांस्टेंट। तो एंट्रॉपी चेंज नहीं
होगी। वहां पे मैक्सिमम हो जाएगी। फिर से सुनो। फिर से सुनो। जैसे मान लो यहां पर मैंने ये हटाया। अब ये इधर दौड़ रहे थे,
ये इधर दौड़ रहे थे। तो ये इधर-उधर ऐसे-ऐसे आपस में दौड़ रहे थे। तो यहां पर जो डिसऑर्डर है इस स्पॉनटेनियस
प्रोसेस का ये बिल्कुल मैक्सिमम हो जाएगा। जिस स्पीड पे ये इधर जा रहे हैं और स्पीड पे इधर आ रहे हैं। यानी कि जब
इक्विलिब्रियम आ जाएगा उस पर्टिकुलर पॉइंट पे यहां पर सिस्टम्स का जो डिसऑर्डर है ये ये मैक्सिमम हो चुका होगा। उसके बाद फर्दर
यहां पर एंट्रॉपी में कोई परिवर्तन नहीं आएगा। तो चेंज इन एंट्रॉपी इक्विलिब्रियम पर हम मानते हैं डेल्टाS = 0। ठीक है
भैया? ये बात भी आपकी बात समझ में आ गई। उसके बाद याद रखना कि एंट्रॉपी जो होता है दैट इज़ डायरेक्टली प्रोपोर्शनल टू
टेंपरेचर। लेकिन चेंज इन एंट्रॉपी हमने क्या पढ़ा? इन्वर्सली प्रोपोर्शनल टू टेंपरेचर है। चेंज इन एंट्रॉपी इज़
इन्वर्सली प्रोपोर्शनल टू दी टेंपरेचर। लेकिन एंट्रॉपी इज़ डायरेक्टली प्रोपोर्शनल टू टेंपरेचर। जो एंट्रॉपी है वो
डायरेक्टली डिपेंड करती है टेंपरेचर पे। चेंज इन एंट्रॉपी इन्वर्सली डिपेंड करती है टेंपरेचर पे। अब आपको मस्त बात बताऊं।
इससे रिलेटेड एक सवाल जेई में आया था। ये देखिए। सी द डायरेक्ट सवाल जेई में आया था। द ट्रू स्टेटमेंट अमंग द फॉलोइंग इज़
सबसे पहला s एंड डेल्टा आर द फंक्शनंस ऑफ़ टेंपरेचर। दोनों की दोनों डिपेंड करती है ना। एक क्या है? एक यहां पर डायरेक्टली
प्रपोर्शनल है और एक इन्वर्सली प्रोपोर्शनल है। ठीक है? जी। फाइंड आउट द एंट्रॉपी फॉर द बिलो
प्रोसेससेस। यानी कि फाइंड आउट द एंट्रॉपी चेंज फॉर द बिलो प्रोसेससेस। सुनील भैया रिएक्शन इसमें से कोई भी इक्व
इक्विलिब्रियम पे क्यों नहीं है? अरे दादा इक्विलिब्रियम पे ज़ीरो हो जाएगा ना चेंज इन एंट्रॉपी। तो या तो आपका एंट्रॉपी चेंज
यहां पर रिएक्शंस के लिए पॉजिटिव आना चाहिए या नेगेटिव आना चाहिए। सुनील भैया ज़ीरो क्यों नहीं आ सकता? अरे एंट्रॉपी
चेंज ज़ीरो पे आ गया। मतलब रिएक्शन इक्विलिब्रियम पे आ गई। कोई भी रिएक्शन मैंने इक्विलिब्रियम पे आपको नहीं दी है।
नन ऑफ़ द रिएक्शन इज़ एट इक्विलिब्रियम। मैंने कुछ भी नहीं इक्विलिब्रियम पे दिया आपको। इक्विलिब्रियम पे दूंगा तो डेल्टाS
क्या हो जाएगा? ज़ीरो हो जाएगा। कोई भी चीज़ चेंज नहीं होती इक्विलिब्रियम पे। ठीक है? जी। अब यहां पे चेंज इन एंट्रॉपी पॉजिटिव
या नेगेटिव। अगर रिएक्शन ऐसे जा रही है, तो देखिए, यहां पे 1 + 3 यहां पर कितने थे? चार मोल्स थे। और यहां पर कितने हैं
हमारे पास? दो मोल्स हैं NH3 के। तो नंबर ऑफ़ मोल्स ऑफ़ गैस डिक्रीज हो गए। तो चेंज इन एंट्रॉपी ऑफ सिस्टम क्या है? पॉजिटिव
या नेगेटिव? यह ऑब्वियसली नेगेटिव हो गया। घट गया चेंज इन एंट्रॉपी। भाई चार मोल्स ज्यादा कियास या डिसऑर्डर क्रिएट करते। दो
मोल्स कम डिसऑर्डर क्रिएट करेंगे। तो डेल्टाS नेगेटिव हो गया। यहां पे एक मोल था। यहां पर एक मोल था। यहां पे एक मोल
था। यानी यहां पर टोटल अब दो मोल्स हो गए। और यहां पर हमारे पास है 1 मोल। तो 1 मोल से 2 मोल पे गए। तो डेल्टाSHS जो हो जाएगा
हमारे पास पॉजिटिव हो जाएगा। अगर हमने यहां पर डिसॉल्यूशन करा NaCl का वाटर में तो यह टूटेगा किस में? Na1+ आयंस साथ ही
साथ Cl- आयंस। और इसका हाइड्रेशन हो जाएगा। सॉल्वेशन कहते हैं जिसको पढ़ा चुका हूं।
Na1+ एक्वस साथ ही साथ Cl- एक्वस। एक NaCl का फार्मूला यूनिट पानी में
डिॉल्व होने के बाद कितने आयंस देगा? एक Na1+ एक Cl- आयंस तो नंबर ऑफ आयंस बढ़ेंगे। नंबर ऑफ आयंस बढ़ेंगे तो डिसऑर्डर कस
बढ़ेगा। तो चेंज इन एंट्रॉपी क्या हो जाएगा हमारे पास? पॉजिटिव हो जाएगा। इस सवाल को सॉल्व कीजिए। यहां पर एक मॉलिक्यूल है
हमारे पास। यहां पर दो फ्री हाइड्रोजन एटम्स हैं। तो यहां पर भी डेल्टाS क्या हो जाएगा? हमारे पास चेंज इन एंट्रॉपी क्या
हो जाएगा? पॉजिटिव हो जाएगा। यहां पे एक मॉलिक्यूल था। यहां पे दो फ्री एटम्स हैं। तो डेल्टाS पॉजिटिव। यहां पे भी डेल्टाS
पॉजिटिव। यहां पे भी डेल्टा पॉजिटिव। यहां पे डेल्टा नेगेटिव। ठीक है?
बहुत बढ़िया। उसके बाद आपको ये स्टेटमेंट बहुत इंपॉर्टेंट है। याद रखना है। बहुत इंपॉर्टेंट है। याद रखना है। बहुत
इंपॉर्टेंट है। याद रखना है। बहुत इंपॉर्टेंट है। याद रखना है कि जो टोटल एंट्रॉपी चेंज होगा
सिस्टम और सराउंडिंग का वो होता है एंट्रॉपी चेंज ऑफ द सिस्टम प्लस एंट्रॉपी चेंज ऑफ द सराउंडिंग।
जो भी टोटल चेंज इन एंट्रॉपी आ रहा है दैट इज इक्वल्स टू द एंट्रॉपी चेंज ऑफ द सिस्टम एंड एंट्रॉपी चेंज ऑफ द सराउंडिंग
एंड इट शुड ऑलवेज बी ग्रेटर दैन ज़ीरो फॉर अ स्पॉनटेनियस प्रोसेस। जो भी टोटल चेंज इन एंट्रॉपी है दैट इज़
इक्वल्स टू दी टोटल चेंज इन एंट्रॉपी ऑफ़ सिस्टम प्लस टोटल चेंज इन एंट्रॉपी ऑफ़ दी सराउंडिंग्स। इन दोनों का जो सम है दैट इज़
ग्रेटर दैन ज़ीरो फॉर अ स्पॉनटेनियस प्रोसेस। अगर यह ग्रेटर दैन 0 है दैट मींस यह स्पॉनटेनियस प्रोसेस को डिफाइन कर रहा
है। अगर आपसे बोला कि जो टोटल एंट्रॉपी चेंज है वो ज़ीरो से ज्यादा है। इसका मतलब स्पॉनटेनियस प्रोसेस की बात हो रही होगी।
सुनील भाई स्पॉनटेनियस प्रोसेस में एंट्रॉपी ऑफ़ जो चेंज इन एंट्रोपी ऑफ़ सिस्टम है, चेंज इन एंट्रोपी ऑफ़ सराउंडिंग
है दोनों को ऐड करेंगे तो ग्रेटर दैन ज़ीरो आएगा। ज़ीरो ग्रेटर दैन ज़ीरो आएगा। मान लो तुम्हान ने सोडियम को जलाया। मतलब
तुमने रूम टेंपरेचर पर रख दिया। रूम टेंपरेचर पर सोडियम को रख दिया। वो अपने आप जल रहा है। दैट इज अ स्पॉनटेनियस
प्रोसेस। अपने आप जल रहा है। अपने आप जल रहा है तो और ज्यादा हीट जनरेट करेगा। ज्यादा हीट जनरेट करेगा। तो यहां पर हम
मानते हैं कि भाई साहब और सोडियम भी जलेगा और कॉस करेगा और डिसऑर्डर क्रिएट करेगा हाई टेंपरेचर की वजह से। साथ ही साथ ये
एनर्जी सराउंडिंग में रिलीज़ करेगा तो सराउंडिंग की एंट्रॉपी को भी बढ़ाएगा। तो सिस्टम की तो बढ़ ही रही है। सराउंडिंग की
एंट्रॉपी भी बढ़ा देगा। तो इन दोनों का जो सम हो जाएगा ग्रेटर दैन 0 हो जाएगा। यही यहां पर मैंने लिखा है। एनर्जी टेंड्स टू
डिस्पर्स इन दी स्पॉनटेनियस प्रोसेससेस। सोडियम को जलाया तो वो एनर्जी क्या करेगा? एक तो खुद के अंदर भी डिस्पर्स कर रहा है
और सराउंडिंग में भी डिस्पर्स कर रहा है। जिसकी वजह से मोर कस मोर डिसऑर्डर जनरेट हो रहा है। दिस डिस्पर्शन इंक्रीसेस द
ओवरऑल रैंडमनेस और द डिसऑर्डर ऑफ़ द सिस्टम एंड इट्स सराउंडिंग्स लीडिंग टू अ पॉजिटिव टोटल एंट्रॉपी चेंज। यानी कि जो टोटल
एंट्रॉपी चेंज है ये जीरो से ज्यादा है। यानी कि पॉजिटिव है। सिस्टम और सराउंडिंग का जो एंट्रॉपी चेंज है इनका सम करोगे तो
जीरो से ज्यादा आएगा। दैट मींस इट इज अ पॉजिटिव चेंज। तो अगर फॉर एग्जांपल याद ना है तो इतना रख देना कि सोडियम को अगर रूम
टेंपरेचर पे रख दिया तो सोडियम बेसिकली अपने आप जाने लगेगा। तो यहां पे सिस्टम की एंट्रॉपी भी पॉजिटिव होगी। और क्योंकि ये
एनर्जी सराउंडिंग में भी डिस्पर्स करेगा। तो सराउंडिंग की एंट्रॉपी बढ़ेगी। दोनों के अंदर एंट्रॉपी जो चेंज आ जाएगा दोनों के
अंदर पॉजिटिव आ जाएगा। तो दैट वुड बी ग्रेटर दैन ज़ीरो। पर सुनील भैया कभी ऐसा भी तो हो सकता है कि सिस्टम की एंट्रॉपी
आपकी घटे। तो आपको पता है क्या होगा? जब भी स्पॉनटेनियस प्रोसेस होगा अगर यह वैल्यू घटेगी तो इस वैल्यू को ये बढ़ा
देगी। मतलब अगर ये 5 + 5 है ये वैल्यू एक हो गई तो ये वैल्यू ऑटोमेटिकली नौ हो जाएगी। बट ये वैल्यू बढ़ेगी ही बढ़ेगी।
ग्रेटर दैन ज़ीरो होगी स्पॉनटेनियस प्रोसेस में। कोई एग्जांपल है आपके पास इस बात का? ये देखिए एग्जांपल लेकर आया हूं आपके लिए।
क्या बात कर रहे हो आप? एग्जांपल मैं आपके लिए लेकर आया हूं। देखो हवा में बात करेंगे नहीं। इवन इफ द सिस्टम बिकम्स मोर
ऑर्डर्ड लाइक इन दी फ्रीजिंग ऑफ वाटर द हीट रिलीज्ड टू द सराउंडिंग्स इंक्रीसेस द डिसऑर्डर ऑफ द सराउंडिंग्स मोर देन द
ऑर्डरिंग ऑफ द सिस्टम रिड्यूसेस इट्स ओन एंट्रॉपी। यानी अगर मान लीजिए पानी का फ्रीजिंग होता है। पानी का फ्रीजिंग हो
रहा है तो बेसिकली हीट क्या करेगा? बताइए। हीट तो रिलीज़ कर देगा। अब दादा यह तो हीट रिलीज कर रहा है। मतलब कि सिस्टम तो मोर
ऑर्डर्ड अरेंजमेंट में जा रहा है ना। सिंपल सी इतनी बात समझो। लिक्विड टू सॉलिड जा रहा है। इसकी एंट्रॉपी क्या होगी? ये
वाली वैल्यू जो है घटेगी। मजे की बात है क्या होगा कि जब फ्रीजिंग हो रही होगी तो ये इक्वल अमाउंट में हीट सराउंडिंग में
छोड़ देगा और सराउंडिंग को बोलेगा तुम अपने डिसऑर्डर को और बढ़ा दो। तो ये वाली वैल्यू बढ़ जाएगी और ये वाली वैल्यू घट
जाएगी। तो भी क्या रहेगा? ग्रेटर दैन ज़ीरो ही रहेगा। तो स्पॉनटेनियस प्रोसेस में याद कर लीजिए जो टोटल चेंज जो टोटल हमारे पास
एंट्रॉपी चेंज है टोटल एंट्रॉपी चेंज है दैट इज़ ऑलवेज ग्रेटर दैन ज़ीरो इट्स अ पॉजिटिव वैल्यू। ठीक है? अब इसी से हमारे
पास आती है सेकंड लॉ ऑफ़ थर्मोडायनेमिक्स की एक बढ़िया सी स्टेटमेंट जो हमको क्या कहती है? द टोटल एंट्रॉपी ऑफ द यूनिवर्स
सिस्टम प्लस सराउंडिंग विल ऑलवेज इंक्रीस फॉर अ स्पॉनटेनियस प्रोसेस। यही चीज तो मैंने आपको बताया।
द टोटल एंट्रॉपी चेंज फॉर अ स्पॉनटेनियस प्रोसेस क्या हो जाएगा? विल ऑलवेज इंक्रीज द टोटल
एंट्रॉपी चेंज ऑफ़ द यूनिवर्स सिस्टम प्लस सराउंडिंग विल ऑलवेज इंक्रीस फॉर अ स्पॉनटेनियस प्रोसेस। दैट मींस इट वुड बी
ग्रेटर दैन ज़ीरो। तो अगर ये टोटल एंट्रॉपी चेंज ग्रेटर दैन ज़ीरो है तो स्पॉनटेनियस प्रोसेस। लेसर दैन ज़ीरो है तो नॉन
स्पॉनटेनियस प्रोसेस। और अगर टोटल एंट्रॉपी चेंज हमारे पास ज़ीरो है इसका मतलब हम इक्विलिब्रियम पे हैं। यानी कि
एंट्रोपी चेंज ऑफ द सिस्टम प्लस एंट्रोपी चेंज ऑफ द सराउंडिंग का जो सम आ रहा है वह जीरो के बराबर आ रहा है। यानी कि हम
इक्विलिब्रियम पे हैं। यानी कि हम इक्विलिब्रियम पे हैं। मेरे भाई यहां पे इसका ये मतलब है एंट्रॉपी चेंज ऑफ सिस्टम
प्लस एंट्रॉपी चेंज ऑफ सराउंडिंग। इनका मैग्नीट्यूड बराबर होगा। साइन उल्टा होगा। अगर यह पॉजिटिव है, नेगेटिव है, तो यह
वाली वैल्यू क्या हो जाएगी? ज़ीरो हो जाएगी। ठीक है? ये इक्विलिब्रियम पे होगा।
इक्विलिब्रियम पे हर चीज का चेंज ज़ीरो होता है। याद रख लो। डन है? जी डन है। अब देखो ये चीज प्रूव भी
कर देता हूं। सुनील भाई डेरिवेशन पहले ही लिख दिया। हां यार भाई पहले ही लिख दिया। समय लगेगा वापस लिखने में। आपका समय
ज्यादा है इसलिए पहले ही लिख दिया। अब ध्यान से समझिए। मैं यहां पर एक रिवर्सिबल आइसोथर्मल प्रोसेस को कंसीडर करता हूं। और
रिवर्सिबल आइसोथर्मल प्रोसेस में आप कंसीडर कीजिए केस ऑफ़ एक्सपेंशन का कि यहां पे गैस का एक्सपेंशन हो रहा है। सो लेट्स
अंडरस्टैंड दैट पर्टिकुलर केस। ठीक? तो यहां पर फर्स्ट लॉ ऑफ़ थर्मोडायनेमिक्स क्या हो जाएगा? बड़े समझदार व्यक्ति हैं।
चेंज इन इंटरनल एनर्जी = +q - W. इसको समझने में कोई दिक्कत है क्या भाई? यह हो जाएगा +q और यह हो जाएगा माइनस का
w। इसको समझने में कोई दिक्कत है? अगर रिवर्सिबल आइसोथर्मल प्रोसेस हमारे पास है वह भी एक्सपेंशन हो रहा है हमारे
पास तो फर्स्ट लॉ ऑफ थर्मोडायनेमिक्स का स्टेटमेंट हो जाएगा चेंज इन इंटरनल एनर्जी इक्व हीट दी है तो +q वर्क किया है तो -w
ये जो हो जाएगी वैल्यू हमारे पास क्या हो जाएगी डेल्टा u हमारे पास ज़ीरो हो जाएगा क्योंकि टेंपरेचर कांस्टेंट है
टेंपरेचर पे डिपेंड करता है इंटरनल एनर्जी अगर टेंपरेचर चेंज नहीं होगा तो इंटरनल एनर्जी चेंज नहीं होगी तो डेल्टा U हमारे
पास ज़ीरो हो जाएगा। ये हमारे पास ज़ीरो हो गया। ये हमारे पास Q है। ये वर्क डन नेगेटिव दे रखा है। अब वर्क डन क्या होता
है? ये नेगेटिव है ना? ये पहले ही नेगेटिव दे रखा है। तो एक और नेगेटिव मत लगा देना यहां पे। वर्क डन नेगेटिव है। तो नेगेटिव
वर्क डन क्या होता है? रिवर्सिबल प्रोसेस में। 2.303 NRT log V2 / V1 यही तो होता है नेगेटिव वर्क डन। भाई नेगेटिव साइन
आपने पहले ही लगा रखा है। नेगेटिव वर्क डन है ना? - W आपने पहले ही बोल दिया। तो यहां पर मैग्नीट्यूड लिख देंगे डायरेक्टली
2.303 nrt log v2 / v1 तो ये हो जाएगा q - दिस तो q रिवर्सिबल इक्व टू हमारे पास हो जाएगा 2.303 nrt log
v2 / v1 ये हो जाएगा एक्सप्रेशन gगा तो हमारे पास चेंज इन एंट्रोपी ऑफ़ सिस्टम हो जाएगा q
रिवर्सिबल / t सो दैट विल गिव मी दी एक्सप्रेशन 2.303 nr log v2 / v1 क्योंकि यहां पे नीचे ये जो t है इस t से कैंस
कैंसिल आउट हो जाएगा। तो ये हमारे पास एक्सप्रेशन आएगा। अच्छा चेंज इन एंट्रॉपी ऑफ़ सराउंडिंग क्या होगा? अब जितना हीट
आपने सिस्टम को दिया है दैट इज़ क्यों रिवर्सिबल? सराउंडिंग में तो माइनस हुआ
होगा भाई। आपके सिस्टम पे ऐड हुई है ना ये बात? अरे मेरे भाई ये सिस्टम पे ऐड हुई है।
सिस्टम पे कोई चीज ये हीट अगर ऐड हो रही है तो यहां से क्या हो रही होगी? सबट्रैक्ट हो रही होगी ना?
तो + q रिवर्सिबल बाय t तो ये -q रिवर्सिबल / t हो जाएगा। तो यह एक्सप्रेशन नेगेटिव में हो गया। तो टोटल एंट्रॉपी
चेंज क्या हो जाएगा? एंट्रॉपी चेंज ऑफ सिस्टम प्लस सराउंडिंग इक्वल टू कितना आ जाएगा? ज़ीरो आ जाएगा। ये बात समझ में आ
रही है क्या? अरे सुनील भैया टोटल एंट्रॉपी चेंज ऑफ़ सिस्टम प्लस टोटल एंट्रॉपी चेंज ऑफ़ सराउंडिंग ज़ीरो तो तब
होता है जब प्रोसेस इक्विलिब्रियम में हो। मेरे को थोड़ा सा जुकाम हो गया। उसके लिए माफी चाहूंगा। इसके लिए होता है ना ये तो।
तो एक मेरे को बात बता भाई। मैंने यह बताया कि नहीं बताया कि रिवर्सिबल प्रोसेस हर पॉइंट पे इक्विलिब्रियम पे होता है।
कांसेप्ट जोड़ना सीख। मैंने पढ़ाया था कि रिवर्सिबल प्रोसेस हर पॉइंट पे इक्विलिब्रियम पे होता है। तो
इक्विलिब्रियम पे क्या हो जाएगा? डेल्टाS टोटल क्या हो जाएगा? ज़ीरो हो जाएगा। प्रूव कर दिया। जी।
इररिवर्सिबल के लिए आप याद रखिए कि डेल्टाS टोटल जो हमारे पास हो जाएगा, इसमें चेंज इन एंट्रॉपी ऑफ़ सिस्टम प्लस
चेंज इन एंट्रॉपी ऑफ़ द सराउंडिंग शुड ऑलवेज बी ग्रेटर दैन ज़ीरो होगा। दिस विल ऑलवेज बी ग्रेटर देन 0 हो जाएगा
हमारे पास। ठीक है? क्लियर है बात? जी डन है। अब अगर आपको डेल्टा सिस्टम यहां पे निकालना है तो
पता है आपको क्या है? यही वैल्यू आ जाएगी। बताओ क्यों? अरे भाई एंट्रॉपी जो है अगर आपने सेम
अमाउंट ऑफ एक्सपेंशन करा है चाहे रिवर्सिबल में चाहे इरिवर्सिबल में तो चेंज इन एंट्रॉपी क्या बोलेगा आपको? चेंज
इन एंट्रॉपी बोलेगा भाई तूने क्या पाथ लिया है? मुझे उससे फर्क नहीं पड़ता है। ठीक है? पर चलिए अभी आप इसी पर्टिकुलर चीज
को सिलेबस के हिसाब से इतना ही आप याद रखिए। आपके लिए इतना ही अभी जरूरी है। इतना आप याद रखेंगे। डन है सुनील भाई।
अब देखिए अगली चीज पे आते हैं। दैट इज़ बेसिकली गिब्स फ्री एनर्जी एंड दी स्पॉनटेनिटी। गिब्स फ्री एनर्जी एज वेल ऐज़
दी स्पॉनटेनिटी। तो गिब्स फ्री एनर्जी और स्पॉनटेनिटी की दुनिया में हम लोग घुसते हैं हम लोग। ठीक है? अब गिप्स फ्री एनर्जी
और स्पॉनटेनिटी हमारे पास क्या होती है? अब अगर किसी भी प्रोसेस को स्पॉनटेनियस डिफाइन करना था सुनील भाई तो अभी तक हम
लोग दो चीजों की मदद ले रहे थे। कभी बोल रहे हैं डिक्रीज इन एंथैल्पी। कभी बोल रहे हैं इंक्रीज इन एंट्रॉपी।
कोई ऐसा फंक्शन बताओ जो दोनों को रिलेट कर ले। तो एक ऐसा फंक्शन जो इन दोनों को रिलेट करके हमें डायरेक्ट स्पॉनटेटिनिटी
तक लेके जाए। क्योंकि मैं एक रिएक्शन में एनालाइज करूं कि अरे भाई डेल्टा h डिक्रीज हो रहा है कि इनक्रीज हो रहा है। फिर
एनालाइज करूं कि अरे भाई एंट्रॉपी का जो चेंज है वो बढ़ रहा है कि घट रहा है। ऐसे तो बावड़ा हो जाऊंगा मैं। भाई एंट्रॉपी
बढ़ रही है। बढ़ रही है बढ़ रही है। यानी कि चेंज इन एंट्रॉपी पॉजिटिव होना चाहिए। अरे समझ रहे हो कि नहीं समझ रहे हो? कभी
तो मैं देखूं कि चेंज इन एंट्रॉपी देखूं या चेंज इन एंथैल्पी देखूं तो मैं देखूं क्या? तो भाई एक फंक्शन दे देते हैं अपन
गिव्स फ्री एनर्जी जिसकी मदद से अपन दोनों फंक्शनंस को ऑब्जर्व कर लेंगे। यानी दोनों को ही अपन ऑब्जर्व कर लेंगे। समझ रहे हो?
तो ये हमारे पास क्या है कि गिप्स फ्री एनर्जी जो है दैट इज रिप्रेजेंटेड बाय g इट इज़ अ थर्मोडायनेमिक क्वांटिटी दैट
कंबाइन द सिस्टम्स एंथैल्पी। ये सिस्टम की एंथैल्पी को भी कंबाइन करता है। टेंपरेचर को भी कंबाइन करता है और साथ ही साथ
एंट्रॉपी को भी कंबाइन करता है इंटू अ सिंगल वैल्यू। इट इज़ यूज्ड टू प्रिडिक्ट द स्पॉनटेटिनिटी ऑफ़ अ प्रोसेस। सीधी सी बात
है। कभी आप डिक्रीज इन एंथैल्पी देख रहे हो, कभी आप अ डिक्रीज इन एंथैल्पी, कभी आप इंक्रीज इन एंट्रॉपी देख रहे हो। अरे आप
परेशान हो गए हो कि पहले डिक्रीज इन एंथैल्पी देखूं। इट इज़ वन ऑफ़ द क्राइटेरिया। इंक्रीज इन एंट्रपी देखूं।
दिस इज़ वन ऑफ़ द क्राइटेरिया। एक ही थर्मोडायनेमिक अपन ने क्वांटिटी बना दी जो इन तीनों को रिलेट कर लेती है। इसको
ऑब्ज़र्व कर लिया। मतलब आपको बाकी सबको ऑब्जर्व करने की जरूरत नहीं है। अगर अपन ने इसको ऑब्जर्व कर लिया तो बाकी सबको
ऑब्जर्व करने की जरूरत नहीं है। ठीक है? तो यहां पर हमारे पास यह जो गिब्स फ्री
एनर्जी है दैट इज g यह एक एक्सटेंसिव प्रॉपर्टी है। तो ये एक्सटेंट ऑफ सिस्टम पे डिपेंड करती है और साथ ही साथ ये स्टेट
या फिर पॉइंट फंक्शन है। पाथ फंक्शन नहीं है। अब अगर मैं किसी एक सिस्टम जो कि कांस्टेंट टेंपरेचर और प्रेशर के ऊपर है।
टेंपरेचर कांस्टेंट प्रेशर कांस्टेंट है। तो अगर मैं चेंज इन गिव्स फ्री एनर्जी की बात करूं तो वो क्या होगा? इस चीज को आप
देखेंगे। अच्छा इसका जो एक्सप्रेशन होता है वो बेसिकली हमारे पास क्या होता है? अगर यह हो जाएगा तो दैट इज इक्व h
- ts हो जाएगा। h - ts हो जाएगा। तो अगर मुझे कोई बोलता है कि चेंज इन
गिब्स फ्री एनर्जी निकालना है तो टोटल चेंज इन द गिब्स फ्री एनर्जी इज इक्व टू दी चेंज इन एंथैल्पी माइनस टेंपरेचर
कांस्टेंट है तो - t डेल्टाS ये मेरे पास फाइनल एक्सप्रेशन आता है कांस्टेंट टेंपरेचर है कांस्टेंट प्रेशर है तो
डेल्टाg = डेल्टाH - का T डेल्टाS सुनील भाई लेकिन इसे स्पॉनटी कैसे बताएंगे बहुत सिंपल सा तरीका है अगर आपका डेल्टाG
जो है वो लेस < 0 है यानी कि नेगेटिव वैल्यू है सिंपल स्पॉनटेनियस प्रोसेस अगर डेल्टाG हमारा नेगेटिव वैल्यू है नेगेटिव
वैल्यू है नेगेटिव नेगेटिव नेगेटिव नेगेटिव स्पॉनटेनियस डेल्टाg अगर मेरा पॉजिटिव है स्पॉनटेनियस प्रोसेस अगर
डेल्टाG ज़ीरो है तो इक्विलिब्रियम अरे दादा डेल्टाG = डेल्टाH - का T डेल्टाS चेंज इन एंथैल्पी इक्विलिब्रियम पे क्या
हो जाएगा ज़ीरो चेंज इन एंट्रॉपी ज़ीरो हो जाएगा तो डेल्टाG भी क्या हो जाएगा ज़ीरो हो जाएगा मैंने आपको बताया था
इक्विलिब्रियम पे सारी चीजों का चेंज ज़ीरो हो जाता है तो स्पॉनटेनियस प्रोसेस नेगेटिव वैल्यू
नॉन स्पॉनटेनियस प्रोसेस में डेल्टाG की वैल्यू पॉजिटिव और इक्विलिब्रियम पे डेल्टाG ज़ीरो डन है। अब देखिए इससे हम लोग
कैसे आइडेंटिफाई करेंगे कि हमारा रिएक्शन स्पॉनटेनियस है या नहीं। मैं स्टार्टिंग के तीन बता रहा हूं। बाक़ी में आप खुद
दिमाग लगाओगे। मान लो मैं बोल रहा हूं डेल्टाH मेरा नेगेटिव है। डेल्टाH मेरा जो है चेंज इन एंथैल्पी नेगेटिव है। और यहां
पर जो मेरा चेंज इन एंट्रॉपी है वो पॉजिटिव है। तो पॉजिटिव मल्टीप्लाई बाय नेगेटिव क्या हो जाएगा? नेगेटिव नेगेटिव।
और ये भी नेगेटिव। ऐड करोगे तो ओवरऑल वैल्यू क्या आएगी? नेगेटिव आएगी। अगर डेल्टाG नेगेटिव है तो रिएक्शन
स्पॉनटेनियस होगी हर टाइम पे। यह मेरे पास मान लीजिए नेगेटिव है। डेल्टाS भी नेगेटिव है। अब यह नेगेटिव और
नेगेटिव तो यह वैल्यू पॉजिटिव हो जाएगी। ये नेगेटिव और ये पॉजिटिव वैल्यू आ रही है। तो अगर मैं बोलूं टेंपरेचर बहुत कम है
तो ये वैल्यू छोटी हो जाएगी। मान लो मैं बोल रहा हूं -20 और ये हो जाएगा +10। तो ये वैल्यू छोटी है तो ये वैल्यू क्या हो
जाएगी? नेगेटिव। तो यहां पर अगर डेल्टाS नेगेटिव हो तो डेल्टाg तब भी नेगेटिव आ सकता है कि
अगर टेंपरेचर हमारे पास क्या हो? बहुत कम हो तो रिएक्शन फिर भी स्पॉनटेनियस हो। लेकिन इसी में अगर तुम इमेजिन करो कि
डेल्टाH तुम्हारा नेगेटिव है। डेल्टाH तुम्हारा जो है वो भी नेगेटिव है। अब ये नेगेटिव और ये नेगेटिव तो ये वैल्यू तो
पॉजिटिव हो गई और ये वैल्यू नेगेटिव है। लेकिन यहां पर अगर टेंपरेचर की वैल्यू बहुत ज्यादा है। तो ये पॉजिटिव वैल्यू
नेगेटिव वैल्यू को ओवरपावर कर देगी तो डेल्टा GG क्या हो जाएगा? पॉजिटिव हो जाएगा हाई टेंपरेचर पे। तो रिएक्शन नॉन
स्पॉनटेनियस हो जाएगी। इस तरीके से बाकी सारे केसेस भी हमको दे रखे हैं। इस तरीके से हम स्पॉनटेनिटी ऑफ दी प्रोसेस और अ
रिएक्शन आइडेंटिफाई करते हैं विद द हेल्प ऑफ डेल्टाg। अब इसी से हमारे पास आता है थर्ड लॉ ऑफ़
थर्मोडायनेमिक्स। अब थर्ड लॉ ऑफ़ थर्मोडायनेमिक्स हमको क्या कहता है? सिंपल सी बात है। मैंने आपको
बोला था एंट्रॉपी सिस्टम की जो एंट्रॉपी है दैट इज डायरेक्टली प्रोपोर्शनल टू दी टेंपरेचर।
एंट्रॉपी ऑफ अ सिस्टम इज डायरेक्टली प्रोपोर्शनल टू टेंपरेचर। टेंपरेचर अगर घटाओगे एंट्रॉपी घटेगी। क्यों? अरे
टेंपरेचर क्या है? एवरेज काइनेटिक एनर्जी ऑफ़ दी पार्टिकल्स ऑफ़ सिस्टम। टेंपरेचर घटा मतलब एवरेज काइनेटिक एनर्जी घटी।
सिस्टम का डिसऑर्डर भी क्या होगा? घटेगा। तो 0 केल्विन पर बहुत सारी चीजों के लिए जो एंट्रॉपी है वो जीरो हो सकती है। सो
अकॉर्डिंग टू दिस लॉ एज द टेंपरेचर डिक्रीजसेस द एंट्रॉपी डिक्रीजसेस एंड एट ज़ीरो केल्विन एब्सोल्यूट ज़ीरो केल्विन द
एंट्रॉपी इज़ एट मिनिमम एंड ज़ीरो फॉर अ परफेक्ट रिस्ट्रल। कहने का तात्पर्य क्या है? जैसे ही टेंपरेचर घटेगा, एंट्रॉपी
घटेगी। 0 केल्विन पर एंट्रॉपी मिनिमम है और जीरो है परफेक्ट क्रिस्टल के लिए। टेंपरेचर घटा
यानी हम कह रहे हैं पार्टिकल्स की एवरेज काइनेटिक एनर्जी घटी। डिसऑर्डर घटेगा। यानी कि एक तरीके से एंट्रॉपी घटी। ये
ज़ीरो होता है एक परफेक्ट क्रिस्टल के लिए ज़ीरो केल्विन पे और मिनिमम होती है एंट्रॉपी ज़ीरो केल्विन पे। सारे
सब्सटेंसेस के लिए एंट्रॉपी कभी भी ज़ीरो नहीं हो सकती। इसके एक्सेप्शनंस भी है हमारे पास। इसके एक्सेप्शनंस भी हैं।
प्रैक्टिकल एविडेंसेस आर शोन दैट एंट्रॉपी ऑफ सॉलशंस एंड सुपर कूल्ड लिक्विड्स इज नॉट अ जीरो। सुपर कूल्ड लिक्विड यानी कि
ग्लास। इनकी एंट्रॉपी कभी भी जीरो नहीं हो सकती है एट जीरो केल्विन। ठीक है? जी। उसके बाद गिब्स फ्री एनर्जी एंड
इक्विलिब्रियम के बारे में अगर हम चर्चा करें तो फटाफट से देख लेते हैं इस चीज को। अच्छा मुझे बताइए इक्विलिब्रियम पर
डेल्टाg क्या हो जाएगा? सुनील भाई इक्विलिब्रियम पे डेल्टाG जो हो जाएगा ज़ीरो हो जाएगा। अभी मैंने प्रूव किया था
इक्विलिब्रियम पे क्या हो जाएगा? डेल्टाG क्या हो जाएगा? ज़ीरो हो जाएगा। जी बिल्कुल सही बात है। इक्विलिब्रियम पे डेल्टाG जो
हो जाएगा ज़ीरो हो जाएगा। सो दिस इंडिकेट्स द सिस्टम इज़ रीच एट द पॉइंट वेयर द फ्री एनर्जी इज़ मिनिमाइज़्ड एंड नो फर्दर
स्पॉनटेनियस चेंज ऑकर्स। अरे इक्विलिब्रियम पे फर्दर स्पॉनटेनियस चेंज रुक जाता है। यह मैंने आपको पहले भी
बताया। स्पॉनटेनियस प्रोसेस नहीं हो रहा है। चेंज इन एंट्रॉपी ज़ीरो है। चेंज इन द गिव्स फ्री एनर्जी भी ज़ीरो होगा। चेंज इन
एंथैल्पी भी ज़ीरो होगा। अब ये बोल रहा है कि मान लीजिए रिएक्शन किसी भी एक पर्टिकुलर इंस्टेंट पे है अदर
दैन इक्विलिब्रियम। द रिलेशनशिप बिटवीन द गिव्स फ्री एनर्जी डेल्टाg एंड द रिएक्शन कोट q एट एनी पॉइंट
ऑफ दी टाइम इन द रिएक्शन इज़ गिवन s तो यहां पर द रिलेशनशिप बिटवीन द गिव्स फ्री एनर्जी चेंज गिब्स फ्री एनर्जी चेंज
डेल्टाg एंड रिएक्शन कोशंट एट एनी पॉइंट इन द रिएक्शन रिएक्शन कोशंट क्या है? रिएक्शन किसी भी पर्टिकुलर पॉइंट ऑफ टाइम
पर हम एनालाइज कर रहे हैं। जहां पर अभी हम बोल रहे हैं इक्विलिब्रियम अटेन नहीं हुआ है। जब इक्विलिब्रियम अटेन हो जाता है तो
रिएक्शन कोशंट इज़ इक्वल्स टू इक्विलिब्रियम कांस्टेंट। ये मैंने इक्विलिब्रियम में बहुत अच्छे से पढ़ाया
है। तो उस पर्टिकुलर इंस्टेंट पे ये हमारे पास है डेल्टाg है ना? दैट इज़ चेंज इन द गिव्स फ्री एनर्जी। अब यह हमारे
पास क्या है? स्टैंडर्ड गिप्स फ्री एनर्जी चेंज।
यह हमारे पास है स्टैंडर्ड गिप्स फ्री एनर्जी चेंज जो कि डिफाइंड होता है एट स्टैंडर्ड टेंपरेचर एंड द प्रेशर। यानी कि
एट 25° सेल्सियस एंड 1 attएम प्रेशर। उस पे इसको हम डिफाइन करते हैं। सो डेल्टाg = डेल्टाg नॉट व्हिच इज़
स्टैंडर्ड गिव्स फ्री एनर्जी चेंज + RTNQ। अब अगर मैं मानता हूं कि रिएक्शन मेरी इक्विलिब्रियम पर आ गई है। तो रिएक्शन को
इज़ इक्वल्स टू दी इक्विलिब्रियम कांस्टेंट। इसका ये मतलब है कि रिएक्शन हम किसी भी
पर्टिकुलर पॉइंट ऑफ़ टाइम पे ऑब्ज़र्व कर रहे हैं। तो डेल्टा GG = डेल्टाG नॉट + RTLNQ। अगर रिएक्शन इक्विलिब्रियम पर आ गई
तो रिएक्शन कोशंट इज़ इक्वल्स टू द इक्विलिब्रियम कांस्टेंट एंड डेल्टा g = 0 यानी ये वैल्यू ज़ीरो हो जाएगी और ये हम
रिप्लेस कर देंगे k से तो यहां पर हमारे पास डेल्टाg नॉट हो जाएगा - rt ln k अगर आप लिखना चाहे तो इसको ऐसे भी लिख
सकते हैं माइनस का 2.303 rt लॉग 10 बेस k ये हमारे पास हो जाएगा डेल्टा
g नॉट की वैल्यू। अब इससे अपन को आगे ये भी बता सकता है कि अगर डेल्टाG नॉट जो है दैट इज़ बेसिकली लेसर दैन दी ज़ीरो तो देन k
इज़ ग्रेटर दैन वन। और अगर इक्विलिब्रियम कांस्टेंट एक से बड़ा है इट मींस इट विल फेवर दी फॉर्मेशन ऑफ़ प्रोडक्ट।
अगर डेल्टाG नॉट इज़ ग्रेटर दैन ज़ीरो। इट मींस k इज़ लेसर दैन दी वन। इट मींस इक्विलिब्रियम फेवर्स दी रिएक्टेंट्स।
यानी कि रिएक्शन भले ही इक्विलिब्रियम पे होगी बट इट विल फेवर दी फॉर्मेशन ऑफ़ रिएक्टेंट्स। यानी कि रिएक्टेंट में रहना
ही पसंद करेगी। अगर ये K से ज्यादा K की वैल्यू वन से ज्यादा है तो इक्विलिब्रियम भले ही हमारा अटेन हो गया है बट मेजरली
रिएक्शन क्या है? प्रोडक्ट्स को फॉर्म करने में ही रहना चाहती है। और अगर हमारे पास डेल्टा नॉट = 0 है। इस
चीज़ का एक बहुत बेहतरीन आईडिया मैंने आपको केमिकल और आयनिक इक्विलिब्रियम में दिया है। वहां पे जाके देखना। डेल्टाG नॉट = 0
है तो k = 1 हो जाएगा। सो द कंसंट्रेशन ऑफ रिएक्टेंट्स एंड प्रोडक्ट्स आर इक्वल एट इक्विलब्रियम।
यानी अगर K की वैल्यू ग्रेटर दैन वन है यानी कि रिएक्शन इक्विलिब्रियम पे आ गई है। बट यहां पे प्रोडक्ट्स की कंसंट्रेशन
रिएक्टेंट से ज्यादा है। भले ही रेट ऑफ़ फॉरवर्ड और बैकवर्ड रिएक्शन हमारे पास क्या है? रेट ऑफ फॉरवर्ड और बैकवर्ड
रिएक्शन बराबर हो गई है। कंसंट्रेशन दोनों की प्रोडक्ट रिएक्टेंट की कांस्टेंट है। लेकिन प्रोडक्ट की कंसंट्रेशन रिएक्टेंट
से ज्यादा है। अगर K इज़ लेस दैन वन है यानी इक्विलिब्रियम फेवर कर रहा है कि रिएक्टेंट की तरफ पे रहना चाहता है। तो
कंसंट्रेशन रिएक्टेंट की प्रोडक्ट से ज्यादा होगी। लेकिन अगर K इक्वल टू वन है। इसका मतलब रिएक्शन इक्विलिब्रियम पे आ गई
है। कंसंट्रेशन दोनों की कांस्टेंट भी है और इक्वल भी है रिएक्टेंट और प्रोडक्ट की। तो कामना करता हूं ये सारी बातें आपको
अच्छी तरीके से समझ में आ गई होगी। अब इस सवाल को होमवर्क में ट्राई कीजिएगा। कमेंट सेक्शन में मुझे आंसर दीजिएगा।
अब दोस्तों अगर अभी तक आपने मेरे ऑफिशियल Telegram चैनल को ज्वाइन नहीं किया है तो फटाफट से ऑफिशियल Telegram चैनल को ज्वाइन
कर लीजिए। लेक्चर थोड़ा सा लंबा हो गया है। माफी चाहूंगा। अभी भी मैं और डेप्थ में जा सकता था। लेकिन थोड़ा अभी भी अपने
एक्सप्लेनेशन को छोटा ही रखा है। पर देखिए चैप्टर बड़ा है। सब कुछ पढ़ाने की कोशिश करनी है तो लेक्चर बड़ा बन जाता है। इसके
लिए क्षमा चाहूंगा और जैसा मैं कहता हूं कि सुनील भैया आपके साथ है। फिजिक्स वाला साथ है तो दोनों आपके साथ हैं। बस आप
टेंशन ना लें। बढ़िया से पढ़ाई लिखाई करें। अब मिलते हैं किसी और सेशन में किसी और पर्टिकुलर क्लास में। तब तक के लिए
अपना ध्यान रखिए। खुश रहिए। हे टेल स्टे ऑसम एंड ऑलवेज से जय जय फिजिक्स वाला जय हिंद जय भारत वंदे मातरम
Thermodynamics is the study of energy flow and changes within a system and its surroundings, focusing on macroscopic properties rather than microscopic details. It is crucial for understanding how energy is transferred and transformed in physical and chemical processes, which is fundamental in fields like chemistry, physics, and engineering.
Thermodynamic systems can be classified into three types: open systems, which exchange both matter and energy with their surroundings (e.g., boiling water); closed systems, which exchange energy but not matter (e.g., a sealed heated can); and isolated systems, which do not exchange matter or energy (e.g., a thermos flask). Understanding these types helps in analyzing energy interactions.
The First Law of Thermodynamics states that the change in internal energy (ΔU) of a system is equal to the heat added to the system (Q) minus the work done by the system (W), expressed as ΔU = Q - W. This principle emphasizes that energy cannot be created or destroyed, only transformed, which is essential for analyzing energy changes in various processes.
Gibbs Free Energy (G) is a thermodynamic potential that helps predict the spontaneity of a process. It is calculated using the formula G = H - TS, where H is enthalpy, T is temperature, and S is entropy. A negative change in Gibbs Free Energy (ΔG < 0) indicates a spontaneous process, while ΔG > 0 suggests a non-spontaneous process, making it a key concept in chemical reactions.
Calorimetry is an experimental technique used to measure heat changes in physical and chemical processes. It employs devices like bomb calorimeters, which measure heat at constant volume, and coffee cup calorimeters, which measure heat at constant pressure. This technique is essential for determining enthalpy changes and understanding energy transfer in reactions.
Intensive properties are independent of the system size, such as temperature and pressure, while extensive properties depend on the system size, like mass and volume. The ratio of two extensive properties yields an intensive property, for example, density is calculated as mass divided by volume, illustrating how these properties are used to characterize systems.
Entropy (S) is a measure of disorder or randomness in a system, and it plays a crucial role in determining the spontaneity of processes. Spontaneous processes tend to increase the total entropy of the universe (system + surroundings), and the change in entropy can be related to reversible heat transfer using the equation ΔS = Q_rev / T, highlighting its importance in thermodynamic analysis.
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