एआई रोड मैप 2026: शुरुआत से मास्टरी तक की पूरी गाइड
🤖 AI रोड मैप 2026: परिचय और कहानी
लक्ष्य: शुरुआत से 2026 के अंत तक AI को पूरी तरह मास्टर करना। समस्या: AI फील्ड बहुत विशाल है, जिससे शुरुआती लोगों को सही दिशा और ऑर्डर समझ नहीं आता, जिससे वे बर्नआउट का शिकार हो जाते हैं।
🏏 प्रेरणादायक कहानी: फोकस की ताकत
2017 में एक क्रिकेट मैच में सुपरफैन सुधीर कुमार को देखकर वक्ता को एहसास हुआ कि स्पष्टता (Clarity) और फोकस (Focus) ही सफलता की कुंजी है। कई चीजें आजमाने के बजाय एक ही क्षेत्र (Teaching & AI) पर ध्यान केंद्रित करने से वे सफल हुए। मुख्य सीख: AI सीखने के लिए जैक ऑफ ऑल ट्रेड्स नहीं, बल्कि मास्टर ऑफ वन बनना है।
🗺️ AI रोड मैप की संरचना
रोड मैप को दो मुख्य भागों में बांटा गया है:
- Foundation (नींव): वो टॉपिक जो सभी जॉब प्रोफाइल्स के लिए जरूरी हैं।
- Specializations (विशेषज्ञता): तीन अलग-अलग करियर ट्रैक, जिनमें से कोई एक चुनना है।
🎯 तीन स्पेशलाइज़ेशन ट्रैक
ये तीन ट्रैक लगभग 90% AI जॉब रोल्स को कवर करते हैं:
- ML Engineering (एमएल इंजीनियरिंग): विशिष्ट समस्याओं के समाधान के लिए मॉडल बनाना (जैसे, Swiggy के लिए डिलीवरी टाइम प्रेडिक्शन)।
- LLM Engineering (एलएलएम इंजीनियरिंग): बड़े लैंग्वेज मॉडल्स (LLMs) को बनाना और ट्रेन करना।
- AI Engineering (एआई इंजीनियरिंग): पहले से बने LLMs का उपयोग करके इंटेलिजेंट सॉफ्टवेयर बनाना।
ध्यान दें: यहां डेटा एनालिस्ट और डेटा इंजीनियर के जॉब प्रोफाइल को कवर नहीं किया गया है, क्योंकि इन्हें Adjacent (सहायक) जॉब्स माना गया है।
🏗️ फेज़ 1: फाउंडेशन (Foundation) - 2.5-3 महीने
1. प्री-रिक्विज़िट (Pre-requisites):
पायथन (Python)
क्यों जरूरी: AI की प्रमुख प्रोग्रामिंग भाषा। क्या सीखें:
- Core Fundamentals: Syntax, Variables, Loops, Functions, Comments, Docstrings.
- Data Structures: List, Dictionary, String, Tuple, Set (विशेषकर पहले तीन पर फोकस).
- Pythonic Way of Coding: Map, Reduce, Filter जैसे फंक्शन्स।
- Object-Oriented Programming (OOP): Classes, Objects, Constructors, Instance/Class Variables.
- Error Handling: Try-Except ब्लॉक्स, Debugging.
- Modules & Packages: Import, Create modules, Virtual Environments (pip/uv).
- File Handling: CSV, JSON फाइल्स पढ़ना/लिखना, OS, Pathlib modules.
- Libraries: NumPy, Pandas (Data Manipulation), Matplotlib, Seaborn (Visualization).
- EDA (Exploratory Data Analysis): डेटा को समझने की प्रक्रिया।
- Advanced: Async Programming (asyncio), FastAPI (API बनाने के लिए), Pydantic (डेटा वैलिडेशन).
SQL
क्यों जरूरी: कंपनियां अपना टेबुलर डेटा SQL डेटाबेस में रखती हैं। क्या सीखें:
- Fundamentals: Database, Tables, Rows, Columns, Keys.
- CRUD Commands: Insert, Update, Delete.
- Core Querying: SELECT, FROM, WHERE, DISTINCT, Filtering, Aggregations (GROUP BY), JOINs.
- Subqueries & Window Functions: कॉम्प्लेक्स डेटा विश्लेषण के लिए।
- Integration with Python: डेटाबेस से Python में डेटा लाना।
- Performance: Query Optimization, Indexes.
गणित (Mathematics)
क्यों जरूरी: मॉडल को समझने और उसे ऑप्टिमाइज़ करने के लिए। इसे "AI के संदर्भ में" पढ़ें, अलग से नहीं। क्या सीखें:
- Linear Algebra: Scalars, Vectors, Matrices, Tensors (डेटा को रिप्रेजेंट करने के लिए).
- Calculus: Derivatives, Gradients (खासकर Differential Calculus), Chain Rule (Deep Learning के लिए).
- Optimization: Gradient Descent, Learning Rate, Loss Functions.
- Probability & Statistics: Distributions (PDF, PMF), Bayes Theorem, Descriptive & Inferential Statistics.
- Advanced (जरूरत पड़ने पर): Information Theory (Entropy), Distance Measures (Euclidean, Manhattan).
सॉफ्टवेयर एसेंशियल्स (Software Essentials)
क्यों जरूरी: AI Development, Software Development से जुड़ा है। क्या सीखें:
- Version Control: Git & GitHub (Branching, Merging, Pull Requests).
- Development Environment: IDEs, Virtual Environments, Environment Variables.
- APIs & Services: REST APIs, HTTP Methods, JSON Handling.
क्लाउड फंडामेंटल्स (Cloud Fundamentals)
क्यों जरूरी: अपने मॉडल को डिप्लॉय (Deploy) करने के लिए। क्या सीखें:
- Cloud Basics (Public/Private Cloud), Core Services (Compute, Storage, Networking).
- Concepts: Virtual Machines, Containers, Auto-scaling. (यह चैटGPT से सीखा जा सकता है और यह पूरी तरह ऑप्शनल है)
AI कोडिंग/वाइब कोडिंग (AI Coding)
की सलाह: पहले Python और SQL बिना AI टूल्स के सीखें, फिर प्रोडक्टिविटी बढ़ाने के लिए Cursor, Claude Code या Codex जैसे टूल्स का इस्तेमाल करें।
2. मशीन लर्निंग (Machine Learning)
क्यों जरूरी: LLMs के जमाने में भी, कंपनियों को रोजाना नैरो टास्क (जैसे, स्पैम डिटेक्शन, ETA प्रेडिक्शन) सॉल्व करने होते हैं, जिसके लिए ML ही सबसे अच्छा टूल है। क्या सीखें:
- Fundamentals: ML क्या है? Supervised, Unsupervised, Reinforcement Learning.
- Problem Formulation: एक प्रॉब्लम को ML समस्या में कैसे बदलें?
- Data Preprocessing: डेटा को साफ और तैयार करना।
- Common Algorithms: Regression (Linear), Classification (Logistic, Decision Trees, Random Forest, SVM), Clustering (K-Means).
- Model Evaluation: Accuracy, Precision, Recall, F1-Score, Confusion Matrix.
- Overfitting/Underfitting & Regularization.
- Ensemble Methods & Feature Engineering.
🚀 फेज़ 2: स्पेशलाइज़ेशन (Specialization) - आपकी पसंद
प्री-रिक्विज़िट और ML पूरा करने के बाद, इन तीन में से कोई एक ट्रैक चुनें:
ट्रैक 1: ML इंजीनियरिंग (ML Engineering Track)
- लक्ष्य: Data Scientist या ML Engineer बनना।
- सीखें: Advanced ML Algorithms, Feature Engineering, Model Deployment, MLOps (ML Pipeline Management).
ट्रैक 2: LLM इंजीनियरिंग (LLM Engineering Track)
- लक्ष्य: बड़े लैंग्वेज मॉडल बनाने वाली टीम का हिस्सा बनना। इस संदर्भ में एजेंटिक AI और लैंग ग्राफ पर पूरी प्लेलिस्ट का परिचय जैसे अत्याधुनिक विषयों को समझना मददगार हो सकता है।
- सीखें: Transformer Architecture, Fine-Tuning LLMs, Training at Scale (Distributed Training), RAG (Retrieval-Augmented Generation).
ट्रैक 3: AI इंजीनियरिंग (AI Engineering Track)
- लक्ष्य: LLMs का उपयोग करके इंटेलिजेंट सॉफ्टवेयर बनाना।
- सीखें: Prompt Engineering, LLM APIs (OpenAI, Claude), Building AI Agents, Function Calling, LangChain/LlamaIndex.
📚 रिसोर्सेज और आगे की राह
वीडियो के अंत में (अंतिम 10 मिनट में) आपको हर टॉपिक के लिए exact resources (कोर्सेज, बुक्स, YouTube चैनल) दिए जाएंगे। फिलहाल इस रोड मैप को समझना और एक ट्रैक पर फोकस करने का निर्णय लेना सबसे महत्वपूर्ण है। एक बार जब आप बुनियादी बातों में माहिर हो जाएं, तो 2026 में डेव्स के लिए AI युग की सबसे ज़रूरी स्किल्स और करियर रोडमैप को देखना न भूलें।
निष्कर्ष: इस रोड मैप को फॉलो करें, धैर्य रखें, और फोकस बनाए रखें। 2026 तक आप AI को मास्टर करने की राह पर होंगे।
हाय गाइस, माय नेम इज नितेश एंड यू आर वेलकम टू अ वेरी स्पेशल वीडियो। अब वीडियो का टाइटल और थंबनेल देख के शायद आपको
ऑलरेडी समझ में आ गया होगा कि इस वीडियो में आपको क्या देखने को मिलने वाला है। बट एक बार मैं अपनी साइड से कांटेक्ट सेट
करना चाहता हूं। एक बार आई वुड लाइक टू टेल यू कि इस वीडियो के थ्रू मेरा क्या गोल है। सो मेरा गोल बहुत सिंपल है। मैं
आपके सामने एआई का एक ऐसा रोड मैप लाना चाहता हूं जो कि ऑर्गेनाइज्ड हो, वेल रिसर्च्ड हो और जीरो नॉइस वाला हो। और इस
रोड मैप के पीछे मेरा मोटिव यह है कि जो भी बिगिनर इस रोड मैप को फॉलो करें एंड टू एंड बाय द एंड ऑफ 2026 नॉट ओनली उनको एआई
अच्छे से आ जाए बट वो एआई को कंप्लीटली मास्टर कर ले। दिस इज द गोल ऑफ दिस वीडियो और ये कॉन्टेक्स्ट मैं अर्ली ऑन ही सेट
करना चाहता हूं। अब वीडियो को शुरू करते हैं। अब वीडियो की शुरुआत में मैं आपको यह बता के बोर नहीं करूंगा कि आपको एआई क्यों
सीखना चाहिए। मुझे ऐसा लगता है कि वो आपको ऑलरेडी पता है। इंस्टेड व्हाट आई विल डू इज कि पहले एक बार मैं आपको अपना व बताता
हूं कि मुझे यह वीडियो क्यों बनाना पड़ा। इसके पीछे दो प्राइमरी रीज़ंस हैं। पहला रीज़न है डिमांड। सो अभी साल शुरू हुआ है
वी आर इन फ पॉइंट पे कुछ ऐसा सेंटीमेंट है कि बहुत सारे लोग सोच रहे हैं कि उनको एआई सीखना
चाहिए और उन्होंने एआई सीखना शुरू भी किया। तो बहुत सारे जो बिगिनर्स हैं वो हमारे चैनल पर आए और उन्होंने देखा कि
हमारे चैनल पर बहुत सारा कंटेंट ऑलरेडी अवेलेबल है। बट उन्होंने हमें यह बताया कि द प्रॉब्लम इज कि जो भी कंटेंट है वो वेल
स्ट्रक्चरर्ड तरीके से डिफाइंड नहीं है। तो एज अ बिगिनर उनको ये समझ में नहीं आ रहा कि किस ऑर्डर में क्या चीजें कवर करनी
चाहिए। एंड आई कैन टोटली अंडरस्टैंड इफ यू आर अ बिगिनर द एंटायर फील्ड ऑफ़ एआई माइट सीन डोंटिंग बिकॉज़ देयर आर सो मेनी थिंग्स
टू लर्न। तो द गोल बिहाइंड दिस रोड मैप इज़ टू ऑर्गेनाइज़ दिस इनेशन इंटू अ प्रॉपर रोड मैप। सो दैट अगर कोई बिगिनर आए तो स्टेप
बाय स्टेप इस इनेशन इस रोड मैप को फॉलो करें और एआई को सीख जाए। तो दिस इज फर्स्ट मोटिव एंड द सेकंड मोटिव इज क्लेरिटी।
क्लेरिटी फॉर मसेल्फ। सो जो भी लोग रेगुलरली इस चैनल को फॉलो करते हैं उनको पता होगा कि मैंने इस साल की शुरुआत में
आप लोगों से एक प्रॉमिस किया था कि मुझे 2026 में एआई को कंप्लीटली अपने चैनल पर पढ़ाना है, कवर करना है। हर टॉपिक मुझे
आपको कवर करके देना है। अब ये करने के लिए मुझे पर्सनली पता होना चाहिए कि क्या-क्या चीजें किस ऑर्डर में पढ़ानी है। एंड दैट
इज व्हाई मैंने ये रोड मैप क्रिएट किया। नॉट ओनली दिस रोड मैप विल हेल्प यू गाइस बट इट विल आल्सो गाइड मी कि क्या चीजें
मुझे और कवर करनी है और वो किस ऑर्डर में कवर करनी है। एंड दिस इज व्हाई आई एम क्रिएटिंग दिस रोड मैप। एंड दिस इज व्हाई
आई एम क्रिएटिंग दिस वीडियो। तो आई रियली होप आपको व्हाई समझ में आ गया। अब आगे बढ़ने के पहले वीडियो को शुरू करने के
पहले रोड मैप बताने के पहले मैं आपके सामने एक छोटी सी कहानी रखना चाहता हूं। जो मेरी ही लाइफ का एक छोटा सा इंसिडेंट
है। अब आई नो आप सोच रहे होंगे कि रोड मैप बताऊं ना यार। कहानी क्यों सुना रहे हो? बट ट्रस्ट मी इस वीडियो इस रोड मैप के
कॉन्टेक्स्ट में ये कहानी बहुत इंपॉर्टेंट है। सो प्लीज एक बार थोड़े पेशेंस के साथ आप इसे सुनो। सो यह बात है 2017-1 के
आसपास की। व्हेन आई वास स्टेइंग इन कोलकाता और यह ऐसा टाइम था मेरी लाइफ का जब मैं अपनी लाइफ में बहुत सारी चीजें
ट्राई कर रहा था। मैंने एक दो स्टार्टअप आइडियाज एक्सप्लोर किए जो कि चले नहीं। मैंने फ्रीलांसिंग भी ट्राई किया बट वहां
मुझे बहुत ज्यादा क्लाइंट्स नहीं मिले। मैंने टीचिंग भी बहुत ट्राई की। मैं ऑफलाइन कॉलेजेस में जाकर पढ़ाता था। बट
अनफॉर्चुनेटली तब कोई स्टूडेंट्स मुझसे पढ़ने नहीं आते थे। तो अगर मैं समराइज करूं अपने उस फेस को, अपने लाइफ के उस फेस
को तो उस पॉइंट पे आई वास ट्राइंग आउट अ लॉट ऑफ थिंग्स बट कुछ भी काम नहीं कर रहा था। और ऐसा दो-ती सालों से चल रहा था। एंड
दैट इज व्हाई मैं धीरे-धीरे थोड़ा फ्रस्ट्रेट होने लगा। और इवेंचुअली मैंने यह डिसाइड किया कि आई शुड टेक अ ब्रेक। और
कुछ दिनों तक कुछ भी नहीं करते हैं। बैठते हैं, चीजों को सोचते हैं, समझते हैं और फिर कुछ करेंगे। और इस फेज में मैंने वो
चीजें करनी शुरू की जो मुझे एक्चुअली अच्छी लगती थी। जैसे कि वन ऑफ देम वाज़ क्रिकेट जो कि मुझे खेलना भी पसंद है,
देखना भी पसंद है। तो आई थॉट कि चलो एक काम करते हैं। अभी इफ आई रिमेंबर करेक्टली 2017 नवंबर दिसंबर का टाइम था। अ श्रीलंका
इंडिया का टेस्ट मैच हो रहा था और वो टेस्ट मैच कोलकाता में हो रहा था। तो आई थॉट कि चलो मैंने कभी स्टेडियम में जाके
मैच नहीं देखा है। आई विल गो एंड वॉच अ मैच। तो मैं पहुंच गया स्टेडियम में और मैं मैच देखने लगा। फॉर्चूनेटली सिंस इट
वाज़ अ टेस्ट मैच तो बहुत ज्यादा भीड़ नहीं थी जितना आपको इस इमेज में दिखाई दे रहा होगा। बट आई वाज़ एंजॉयंग द एक्सपीरियंस।
आई वाज़ एबल टू सी माय अ क्रिकेटर्स, हमारी टीम के जो क्रिकेटर्स आई वाज़ एबल टू सी विराट कोहली एंड अदर प्लेयर्स। तो मेरे
लिए इट वाज़ अ वेरी वेरी गुड साइड। तो आई वास वाचिंग दिस मैच एंड तभी सडनली से मेरे पीछे जिस स्टैंड में मैं बैठा हुआ था वहां
पर बहुत शोर होने लगा। मैंने पीछे मुड़ के देखा तो पता चला कि हमारे स्टैंड में ये भाई साहब आए हुए थे। आई एम प्रीटी श्योर
अगर आपने क्रिकेट फॉलो किया होगा तो आपको पता ही होगा ये कौन है। हिज नेम इज सुधीर कुमार इनको इंडियन क्रिकेट का सुपर फैन
बुलाया जाता है। ही इज ऑलमोस्ट अ सेलिब्रिटी नाउ और ही केम देयर बिकॉज़ ये हर इंडिया के मैच में आते हैं। तो मैंने
पीछे मुड़ के देखा तो सभी लोग एकदम पगला गए कि यार दिस गाय हैज़ अराइव्ड और सब लोग फिर इसके साथ फोटो खिंने चले गए और एक-एक करके
सब लोग सेल्फी ले रहे थे और मैच चल रहा था। मैं नहीं गया सेल्फी लेने। इंस्टेड मेरे दिमाग में एक बहुत ही वियर्ड थॉट आया
और थॉट कुछ ये था कि मैं ये सोचने लगा कि यार इसके आते ही लोग पागल हो के इसके पीछे क्यों चले गए? इसके साथ सेल्फी क्यों
खिंचाने लग गए? मैं भी तो यहां बैठा हूं। मेरे साथ तो किसी ने सेल्फी नहीं खिंचाई। आई नो इट्स अ वियर्ड थॉट बट मेरे दिमाग
में आया और मैंने खुद को इस बंदे के साथ कंपेयर करना शुरू कर दिया। मेरे दिमाग में ये सब थॉट्स आने लग गए कि यार अगर बात
करें पढ़ाई लिखाई की तो शायद हो सकता है मैंने इससे ज्यादा पढ़ाई लिखाई की हो। अगर बात करें स्किल्स की तो शायद मैं इससे
ज्यादा स्किल्ड हूं। आई कैन मेक वेबसाइट्स। आई कैन मेक Android एप्स। अगर बात करें टैलेंट की तो हो सकता है मैं
क्रिकेट में भी इसको बीट कर दूं। देयर इज अ चांस बट स्टिल ये बंदा ज्यादा सक्सेसफुल है इस पॉइंट पे वर्सेस मी जिसने ब्रेक ले
रखा है बिकॉज़ मेरी लाइफ में कुछ भी क्लिक नहीं कर रहा। और उस मोमेंट ऑनवर्ड्स मेरा वो मैच पूरा खराब हो गया। मैंने बीच में
ही छोड़ दिया और मैं निकल गया वहां से घर के लिए। मैं बस में बैठा था तब भी मेरे दिमाग में यही सारा थॉट आ रहा था कि यार
ऐसा क्यों है? बचपन से हमें यही पढ़ाया गया कि आप जितना पढ़ोगे अच्छे से, जितने अच्छे मार्क्स स्कोर करोगे, आपकी लाइफ
उतनी सॉर्टेड रहेगी आगे चलके। बट यहां पे मुझे दो एग्जांपल्स दिख रहे हैं। जहां पे एक बंदे ने शायद कम पढ़ाई की वो ज्यादा
सक्सेसफुल है। वर्सेस एक बंदे जिसने ज्यादा पढ़ाई की वो कम सक्सेसफुल है। और इस पर्टिकुलर थॉट ने मुझे बहुत परेशान
किया। और ट्रस्ट मी मैंने अगले दो-तीन दिन इस चीज के बारे में सोचने की कोशिश की कि व्हाट इज द रीज़न दैट दिस गाय इज मोर
सक्सेसफुल देन मी। एंड इवेंचुअली मुझे इसका आंसर मिला। एंड द आंसर वाज़ वेरी सिंपल। द आंसर वाज़ क्लेरिटी एंड फोकस। सो,
मेरी लाइफ में उस पॉइंट पे क्लेरिटी और फोकस नहीं था। आई वाज़ ट्राइंग आउट डिफरेंट थिंग्स। अगर थोड़ा भी काम नहीं कर रहा था
तो मैं छोड़ के दूसरी चीज में लग जा रहा था। मैं स्टार्टअप भी चलाने की कोशिश कर रहा था। मैं फ्रीलांसर भी बन रहा था। मैं
टीचर भी बन रहा था। एंड दैट इज व्हाई आई वास नॉट गुड एट एनी ऑफ़ देम। वेयर एज अगर बात करें सुधीर की तो उसके दिमाग में बहुत
क्लेरिटी थी कि उसको कुछ नहीं करना है। उसको इंडिया के हर मैच में जाना है बॉडी पेंट करके और उसको पैशनेटली इंडियन टीम को
चेयर करना है। और यह शायद वो पांच छ सालों से कर रहा था। एंड दैट इज व्हाई ही वाज़ वेरी फोकस्ड। और उस क्लेरिटी और उस फोकस
की वजह से ही बिकम व्हाट ही इज। अब तो वो और भी बड़ा सेलिब्रिटी बन गया है। बट वो पर्टिकुलर छोटा इंसिडेंट मेरी लाइफ में इट
बिकम अ टर्निंग पॉइंट। 2017 से अब 2026 आ गया है। पिछले 9 साल मैंने ये मंत्रा कंप्लीटली फॉलो किया है। दैट आई विल हैव
क्लेरिटी एंड आई शुड हैव फोकस। मैंने 2017 के बाद दोबारा स्टार्टअप चलाने की कोशिश नहीं की। नेवर ट्राइड फ्रीलांसिंग। एक चीज
जिसमें मैं सच में अच्छा था, मैंने उसी को पकड़ा व्हिच वास टीचिंग। और मैंने टीचिंग में भी सिर्फ एक पर्टिकुलर टॉपिक को पकड़ा
व्हिच वास मशीन लर्निंग एंड एआई। और पिछले छ आठ सालों से मैं इसी के ऊपर कंसिस्टेंटली काम कर रहा हूं। एंड ट्रस्ट
मी नाउ आई फील कि आई एम मच बेटर। जैसा मैं 2017 में था उसके कंपैरिजन में आई एम इन अ मच बेटर स्टेट राइट नाउ। अब आई नो आपके
दिमाग में क्वेश्चन आ रहा होगा कि ठीक है जो भी आप बोल रहे हो इट साउंड्स लॉजिकल बट इस वीडियो और इस ए रोड मैप के कॉन्टेक्स्ट
में ये कैसे रिलेटेड है? तो चलो अब मैं आपको ये भी बताता हूं कि कैसे ये पूरी कहानी इस रोड मैप से कनेक्टेड है। अब
रिलेशन क्या है कि एi की जो फील्ड है ना वो बहुत ही एक्साइटिंग है। बट एक्साइटिंग होने के साथ ही साथ बहुत ही वास्ट भी है।
वास्ट होने से मेरा मतलब है कि एi के अंदर बहुत सारी सब फील्ड्स एक्सिस्ट करती हैं। जैसे कि मशीन लर्निंग हुआ, डीप लर्निंग
हुआ, जनरेटिव एआई हुआ, एनएलपी एंड कंप्यूटर विज़न हुआ। और सिंस बहुत सारी सब फील्ड्स एक्सिस्ट करती हैं। हर सबफील्ड के
साथ उसका कॉरेस्पोंडिंग जॉब रोल भी एक्सिस्ट करता है। बट द प्रॉब्लम इज कि जब एक बिगिनर इस फील्ड में एआई की फील्ड में
एंटर करता है तो वो किसी एक पर्टिकुलर सब फील्ड पे फोकस ना करके किसी एक पर्टिकुलर जॉब प्रोफाइल पे फोकस ना करके पूरा का
पूरा एआई एक साथ कवर करना चाहता है। सो दैट वो किसी भी जॉब प्रोफाइल के लिए एलिजिबल हो। मतलब मैंने ऐसे स्टूडेंट से
बात की है जिन लोगों ने साथ ही साथ डेटा साइंटिस्ट बनने के लिए भी प्रिपरेशन किया। डेटा इंजीनियर बनने के लिए भी प्रिपरेशन
किया। डेटा एनालिस्ट बनने के लिए भी प्रिपरेशन किया। और इवेंचुअली ये हुआ इन इस इस तरह के स्टूडेंट्स के साथ कि
उन्होंने बहुत सारा करिकुलम पढ़ने की कोशिश की। एंड इवेंचुअली दे रियलाइज़ दैट इट इज़ इंपॉसिबल एंड विद इन फाइव टू सिक्स
मंथ्स दे हैड अ बर्न आउट एंड दे हैड टू क्विट। एंड दिस इज़ द बिगेस्ट प्रॉब्लम दैट आई हैव सीन जो बिगिनर्स फेस करते हैं इन द
फील्ड ऑफ़ एआई। द प्रॉब्लम इज़ लैक ऑफ क्लेरिटी एंड फोकस। ऑनेस्टली अगर आप एआई सीखना चाहते हो तो यहां पर भी सुधीर वाला
अप्रोच ही काम करता है कि आपको एक फील्ड पिक करनी है। एक सब फील्ड पिक करनी है। एक जॉब प्रोफाइल पिक करना है और फिर उसके
अराउंड अपना प्रिपरेशन प्लान करना है। सो दैट आप बर्न आउट ना हो। आपको जैक ऑफ ऑल ट्रेड्स नहीं बनना है। आपको मास्टर ऑफ वन
बनना है। और हमारा जो रोड मैप है ना वो एग्जैक्टली यही काम करता है। हमारा रोड मैप आपको क्लेरिटी प्रोवाइड करता है। और
हमारा रोड मैप ये एक्सपेक्ट नहीं करता कि आप सब कुछ पढ़ो। एंड दिस इज द बिगेस्ट यूएसपी ऑफ द रोड मैप दैट आई एम गोइंग टू
शेयर विद यू। अब आई नो आप सोच रहे होंगे कि ऐसा कैसे हमारे रोड मैप में क्या डिफरेंस है? तो द
बिगेस्ट डिफरेंस इज़ द डिज़ाइन ऑफ़ द रोड मैप। मैंने इस रोड मैप को दो पार्ट्स में डेवलप किया है। फर्स्ट पार्ट में मैं आपको
फाउंडेशंस के बारे में बताऊंगा। ऐसी चीजें ऐसे टॉपिक्स जो सभी को पता होना चाहिए इरिस्पेक्टिव ऑफ देयर जॉब प्रोफाइल्स। एंड
सेकंड पार्ट में मैं आपको स्पेशलाइजेशंस के बारे में बताऊंगा। जहां पर आप किसी एक सिंगल जॉब प्रोफाइल को पिक करके उसके
हिसाब से अपना प्रिपरेशन करोगे। अब आई नो आप सोच रहे होंगे कि कौन-कौन से स्पेशलाइजेशनंस हम कवर करेंगे। तो हम इस
रोड मैप में प्रिसाइजली तीन अलग स्पेशलाइजेशनंस कवर करेंगे। बट वो 90% जॉब रोल्स को कैटर करते हैं। पहला
स्पेशलाइजेशन है एमएल इंजीनियरिंग ट्रैक जहां पे आप डेटा साइंटिस्ट या फिर मशीन लर्निंग इंजीनियर बनने की कोशिश करोगे। अ
ये वो ट्रैक है जहां पर आप मशीन लर्निंग एआई में नैरो प्रॉब्लम्स को सॉल्व करते हो। स्पेसिफिक प्रॉब्लम्स किसी कंपनी की
पर्टिकुलर प्रॉब्लम को सॉल्व कर रहे हो। फॉर एग्जांपल SWGI चाह रहा है कि उनका डिलीवरी टाइम का प्रेडिक्शन थोड़ा और
एक्यूरेट हो पाए। तो दिस इज़ अ नैरो प्रॉब्लम। तो इस तरह की प्रॉब्लम्स को आप यहां पे सॉल्व करते हो। सेकंड
स्पेशलाइजेशन इज़ एलएम एलएलएम इंजीनियरिंग ट्रैक जहां पे आप ये जो बड़े लार्ज स्केल लैंग्वेज मॉडल्स हैं इनको कैसे बनाया जाता
है? इनको कैसे ट्रेन किया जाता है वो सीखते हो। सो दैट आप इन बड़ी इंजीनियरिंग टीम का पार्ट बन पाओ। एंड द थर्ड ट्रैक इज़
एआई इंजीनियरिंग ट्रैक। जहां पे आप ये सीखते हो कि इन बने हुए एलएलएम्स की हेल्प से आप कैसे इंटेलिजेंट सॉफ्टवेयर्स बना
सकते हो। एंड ट्रस्ट मी अगर आप इन तीनों में से भी किसी भी एक फील्ड को क्रैक कर लेते हो तो एआई की फील्ड में जॉब लेना
आपके लिए बहुत आसान हो जाएगा। इंस्टेड अगर आप सब कुछ कवर करने जाओगे तो इवेंचुअली आप इन तीनों में से कुछ भी नहीं सीखोगे। एंड
दिस इज द यूएसपी ऑफ़ दिस रोड मैप। अब रोड मैप शुरू करने के पहले एक डिस्क्लेमर भी मैं देना चाहूंगा। यहां पे कुछ पर्टिकुलर
जॉब प्रोफाइल्स को हम कवर नहीं कर रहे हैं। जैसे कि डेटा एनालिस्ट की जॉब प्रोफाइल एंड डेटा इंजीनियर की जॉब
प्रोफाइल। आई अग्री दैट दीज़ टू जॉब प्रोफाइल्स आर आल्सो वैरीेंट इन द फील्ड ऑफ़ एआई। बट इनको मैं थोड़ा एडजेसेंट जॉब
प्रोफाइल्स मानता हूं। यह डायरेक्ट एआई की जॉब प्रोफाइल्स नहीं है। दे आर एडजेसेंट जॉब प्रोफाइल्स जो एआई जॉब प्रोफाइल्स को
हेल्प करती है। उनके काम को फैसिलिटेट करती हैं। अगर आपके दिमाग में ये आ रहा है कि हम कौन-कौन सी एग्जैक्ट जॉब प्रोफाइल्स
को टारगेट करेंगे विथ द हेल्प ऑफ दिस रोड मैप? तो वो मैं आपके सामने रखता हूं। ये तीन सेट ऑफ जॉब प्रोफाइल्स को हम लोग
टारगेट कर रहे हैं। आपके स्क्रीन पे अभी ये जो सेट ऑफ जॉब प्रोफाइल्स हैं, इनमें से अगर आप किसी भी एक जॉब प्रोफाइल को
टारगेट कर रहे हो तो हमारा रोड मैप विल हेल्प यू अ लॉट। ठीक है? तो एक बार वीडियो पॉज कर लो और देख लो इनमें से कौन सा जॉब
प्रोफाइल है जो आप इंटरेस्टेड हो जिसके लिए और अगर उनमें से कोई भी एक आपको पसंद है या आप उसके बारे में ऑलरेडी जानते हो
और उसको पर्स्यू करना चाहते हो तो दिस इज द रोड मैप दैट यू शुड फॉलो। सो आई रियली होप मैंने इस पूरे वीडियो का अभी तक
कॉन्टेक्स्ट सही से सेट कर दिया। अब मैं आपका और टाइम नहीं लूंगा एंड नाउ वी विल एक्चुअली डाइव इंटू द रोड मैप। आई विल शो
यू द एक्चुअल रोड मैप और उसको हम लोग एक-एक करके डिस्कस करेंगे। सो दिस लेडीज एंड जेंटलमैन इज आवर एआई रोड मैप फॉर
2026। अ इसको मैंने बिल्ड किया है यूजिंग दिस प्लेटफार्म कॉल्ड रोडmapsh और इस प्लेटफार्म को यूज़ करने का रीज़न ये था कि
इस प्लेटफार्म को बनाया ही गया है रोड मैप्स क्रिएट करने के लिए तो देयर आर सम वेरी गुड फीचर्स जो मैंने यूटिलाइज भी किए
हैं। अगर मैं आपको एक क्विक ओवरव्यू दूं एक ज़ूम आउट वर्जन दिखाऊं रोड मैप का तो आपको ऑलरेडी रोड मैप का स्ट्रक्चर समझ में
आएगा। सो शुरू में जो आपको दिखाई दे रहा है एक लीनियर स्ट्रक्चर वो है फाउंडेशन वाला पार्ट जो सभी को सीखना चाहिए। और फिर
उसके बाद आप देखोगे कि हमारा रोड मैप तीन ब्रांचेस में डिवाइड हो जा रहा है। वन ब्रांच कैटरिंग टू वन ट्रैक, वन
स्पेशलाइजेशन। तो अब मैं क्या करने वाला हूं? मैं एक-एक करके इस पूरे रोड मैप को आपके सामने डिकोड करूंगा। एक इंपॉर्टेंट
चीज मैं डिकोड करने के प्रोसेस में आपको एग्जैक्ट रिसोर्सेज नहीं बताऊंगा कि कौन सा टॉपिक कहां से पढ़ना है। वो इंफॉर्मेशन
मैं आपको वीडियो के लास्ट में दूंगा। फिलहाल मेरा गोल है आपके सामने एक बहुत लॉजिकल तरीके से इस रोड मैप को प्रेजेंट
करना। सो दैट आपके दिमाग में ये आईडिया पूरी तरह से क्लिक कर जाए कि व्हाट आर द थिंग्स एंड व्हाट आर द व्हाट इज द ऑर्डर
जिसमें आपको चीजों को करना है। ठीक है? तो वो मैं सबसे पहले करके आपको दिखाता हूं। सो लेट्स स्टार्ट विद आवर रोड मैप। सो ये
रोड मैप शुरू होता है प्रीरक्वज़िट से जो सिंपली इस क्वेश्चन का आंसर देता है कि एआई की फील्ड में जॉब्स लेने के लिए आपको
पहले से क्या-क्या चीजें आनी चाहिए। तो इसमें सबसे पहली जो चीज आती है जो सबसे इंपॉर्टेंट है मेरे हिसाब से वो है
Python। Python एज़ यू नो इज़ अ प्रोग्रामिंग लैंग्वेज। और ये एक ऐसा प्रोग्रामिंग लैंग्वेज है जो एआई की
दुनिया ने कंप्लीटली अडॉप्ट कर लिया है। एआई की दुनिया में देयर इज नो सेकंड लैंग्वेज जिसके थ्रू डेवलपमेंट होती है।
पython इज द ओनली ऑप्शन। जैसे हार्डवेयर प्रोग्रामिंग के लिए सी बहुत यूज़ किया जाता है। एंटरप्राइज सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट
के लिए जावा बहुत यूज़ किया जाता है। वेब डेवलपमेंट के लिए जावास्क्रिप्ट बहुत यूज़ किया जाता है। सिमिलरली आप ऐसे समझो कि इफ
यू वांट टू बी अ एi डेवलपर Python इज़ योर गो टू लैंग्वेज। ये आपको मास्टर करना पड़ेगा। और ये लोगों को पता चल चुका है।
दैट इज व्हाई बहुत सारे स्टूडेंट्स मुझे अप्रोच करके पूछते हैं कि सर हमें कितना पाइthon आना चाहिए? क्या हमें एक
सॉफ्टवेयर ले डेवलपर जितना पाइthon आना चाहिए या फिर हम उससे कम में भी काम चला सकते हैं। तो मैं एक काम करता हूं मैं
आपको क्विकली बताता हूं कि आपको इस पूरे रोड मैप को कवर करने के लिए कितना पाइथन सीखने की जरूरत है। सो अगर आप इस रोड मैप
को ओपन करोगे और Python के ऊपर क्लिक करोगे तो ये साइड से एक पॉपअप निकल के आएगा जहां पे मैंने सारे पॉइंटर्स बता रखे
हैं कि आपको क्या-क्या सीखना चाहिए Python में। मैं आपको एक-एक करके वॉक थ्रू देता हूं। तो सबसे पहले आपको Python के कोर
फंडामेंटल्स आने चाहिए। जैसे आप कोई भी प्रोग्रामिंग लैंग्वेज सीखते हो। बिल्कुल सिमिलरली आपको Python को भी सीखना है। द
ओनली अ गुड पार्ट इज़ कि Python इज़ लाइक वन ऑफ़ द ईज़िएस्ट लैंग्वेज लैंग्वेज टू लर्न। ठीक है? यहां पे चीजें बहुत आसान है इन
कंपैरिजन टू लेट्स से C++ या jवा। अ तो सीखना क्या-क्या है? आपको सबसे पहले Python का सिंटेक्स पता होना चाहिए। कैसे
आप पाइथन में कोड लिखते हो यहां पे इंडेंटेशन बहुत मैटर करता है। अनलाइक अदर लैंग्वेज। तो उसके साथ बिगिनर्स थोड़ा
स्ट्रगल करते हैं। तो ये कॉन्सेप्ट्स आपको पता होने चाहिए। फिर जो भी फंडामेंटल्स हैं जो किसी भी प्रोग्रामिंग लैंग्वेज में
होते हैं जैसे कि वेरिएबल्स, डेटा टाइप्स, टाइप कास्टिंग ये सब आपको पता होना चाहिए। यूजर से इनपुट कैसे लिया जाता है, कमेंट्स
कैसे लिखे जाते हैं? डॉक स्ट्रिंग्स का कांसेप्ट क्या होता है? ये सब आपको पता होना चाहिए। उसके बाद आप थोड़ा भी ज्यादा
कॉम्प्लेक्स प्रोग्राम लिख रहे हो जहां पे ब्रांचिंग की जरूरत है या लूप चलाने की जरूरत है। तो कैसे इफ एल्स लिखा जाता है?
कैसे अलग-अलग टाइप के लूप्स चलाए जाते हैं? ये आपको पता होना चाहिए। उसके बाद अपने फंक्शन अपने कोड को मॉड्यूलर कैसे
बनाओ। छोटी-छोटी चीजों के लिए अलग फंक्शन कैसे लिखो? ये आपको पता होना चाहिए। तो ये हो गए आपके पाइthन के कोर फंडामेंटल्स।
इसके बिना आप आगे कुछ भी नहीं कर सकते। उसके बाद सेकंड नंबर पे आपको Python के जो बिल्ट इन डेटा स्ट्रक्चर्स हैं उनके बारे
में आईडिया होना चाहिए। पython में जो डेटा टाइप्स बोले जाते हैं दूसरे लैंग्वेज में यहां पे उसको हम डेटा स्ट्रक्चर बोल
रहे हैं। तो Python में जो डेटा स्ट्रक्चर्स हैं दे आर वेरी-वेरी पावरफुल। और आपको कुछ बहुत पावरफुल बिल्ट इन
फंक्शनंस देते हैं जिनकी हेल्प से आप काफी कुछ विदाउट ज्यादा कोड लिखे खुद से कर सकते हो। तो जो मेन आपके डेटा स्ट्रक्चर्स
हैं वो है लिस्ट, टपल्स, सेट्स, डिक्शनरीज एंड स्ट्रिंग्स। इनमें से मैं तीन पे बहुत फोकस करने को बोलूंगा। लिस्ट हुआ और
डिक्शनरीज हुआ और स्ट्रिंग्स हुआ। ये आपको बहुत यूज़ करने को मिलेंगे और दूसरे के कोड में भी आपको ये बहुत दिखाई देगा। उसके बाद
एक बार जब आप फंडामेंटल सीख लो तो थोड़ा सा आपको पाइथनिक वे ऑफ़ कोड लिखने के ऊपर काम करना चाहिए। सो पाइथonिक वे ऑफ़ राइटिंग
कोड क्या होता है कि Python इज़ बेसिकली इस तरीके से डेवलप किया गया है Python को कि बहुत कम कोड लिख के भी आप बहुत ज्यादा
लॉजिक एक्सप्रेस कर सकते हो। तो इसी को थोड़ा पाइथनिक वे ऑफ़ राइटिंग कोड बोला जाता है। तो Python में आपको बहुत सारे इस तरह
के फंक्शनंस मिलेंगे जो काइंड ऑफ़ रैपर्स हैं अराउंड कॉम्प्लेक्स लॉजिक जैसे कि मैप रिड्यूस फिल्टर इनके थ्रू आप 10 लाइन का
कोड एक सिंगल फंक्शन कॉल पे कर सकते हो। तो इस तरह की बहुत सारी चीजें पाइथन में अवेलेबल हैं। मैं नहीं बोलूंगा कि
सीधे-सीधे आप इसको सीखो। बट ओवर टाइम आपको दूसरे का कोड पढ़-पढ़ के ये सीखना चाहिए। बिकॉज़ अगर आप इन चीजों को नहीं पढ़ोगे तो
इसके बिना भी आप कोड कर सकते हो। बट आपको ज्यादा लाइंस ऑफ कोड लिखने पड़ेंगे सेम चीज को करने के लिए। और सेकंड जब आप किसी
दूसरे एक्सपीरियंस डेवलपर का कोड पढ़ोगे तो वहां पे आप थोड़ा स्ट्रगल कर सकते हो कि ये क्या लिख दिया सामने वाले ने। ठीक है? तो
उस सेंस में दिस इज़ नॉट अप फ्रंट इंपॉर्टेंट बट ओवरटाइम आपको इसके ऊपर काम करना चाहिए। उसके बाद नेक्स्ट आता है वन
ऑफ़ द मोस्ट इंपोर्टेंट थिंग्स दैट यू हैव टू लर्न इन पाइथन। दैट इज़ ऑब्जेक्ट ओरिएंटेड प्रोग्रामिंग। सो ऑब्जेक्ट
ओरिएंटेड प्रोग्रामिंग इज़ अ वे ऑफ़ राइटिंग कोड। इट्स अ पैराडाइम। जहां पे आप सॉफ्टवेयर के अंदर रियल वर्ल्ड को मैप
करने की कोशिश करते हो विथ द कॉन्सेप्ट ऑफ क्लासेस एंड ऑब्जेक्ट्स। अगेन समथिंग जो सिर्फ पाइथन में नहीं होता। बाकी के
प्रोग्रामिंग लैंग्वेज में भी है। द गुड थिंग इज़ कि Python में जो ओपी का इंप्लीमेंटेशन है वो थोड़ा सा और स्लिम है।
तो उतनी ज्यादा चीजें आपको नहीं पढ़नी। उतने ज्यादा कांसेप्ट्स आपको नहीं पढ़ने जितना लेट्स से जावा में पढ़ना पड़ेगा। बट
स्टिल बहुतेंट है। अ जो भी आप लाइब्रेरीज़ यूज़ करोगे या खुद की लाइब्रेरीज़ कभी फ्यूचर में बनाओगे तो वहां पे आपको ये
ओपपी वाला कांसेप्ट बहुत हेल्प करता है। तो क्या-क्या पढ़ना है? क्लासेस एंड ऑब्जेक्ट्स। कंस्ट्रक्टर्स क्या होते हैं?
इंस्टेंस एंड क्लास वेरिएबल्स क्या होते हैं? जो भी टिपिकल चीज़ हैं। आप एक बार गो थ्रू करोगे आपको समझ में आ जाएगा। उसके
बाद एक और बहुत इंपॉर्टेंट चीज़ जो मैंने एज अ बिगिनर शुरू में नहीं सीखा था। बट ओवर टाइम मैंने रियलाइज़ किया कि इट इज़
वेरी वेरीरीेंट। आपको पता होना चाहिए। एंड दैट थिंग इज़ एरर हैंडलिंग। सो होता क्या है कि जब आप आगे चलके सॉफ्टवेयर लिखोगे एज
एन एआई बेस्ड सॉफ्टवेयर लिखोगे तो वहां पे ऐसे एच केसेस आएंगे जहां पे आपका कोड फट जाएगा। और कोड फटने के लिए आपको एज अ
प्रोग्रामर उसको एलगेंटली हैंडल करना पड़ता है। और वो तभी होता है जब आप प्रॉपर्ली एरर को हैंडल करो। तो एरर हैंडलिंग इज़
समथिंग जो आपको पता होना चाहिए। एंड साथ ही साथ डीबगिंग ये भी एक बहुत इंपॉर्टेंट चीज है जो आपको आना चाहिए। अगेन नॉट
समथिंग जो आपको एकदम डे वन पे सीखना चाहिए। बट ओवर टाइम आपको ये सारी चीजें आनी चाहिए। उसके बाद गोइंग फॉरवर्ड आप
बहुत सारे मॉड्यूल्स एंड पैकेजेस के साथ काम करोगे। तो कैसे वो करना है वो आपको पता होना चाहिए। हाउ टू यूज़ इंपोर्ट
स्टेटमेंट, हाउ टू क्रिएट मॉड्यूल्स एंड पैकेजेस, वर्चुअल एनवायरमेंट्स कैसे बनाए जाते हैं? डिपेंडेंसी मैनेजमेंट कैसे किया
जाता है? विथ द हेल्प ऑफ पिप या फिर अभी आपका यूवी बोल के एक नया पैकेज मैनेजर आया है। इस तरह की चीजों के साथ आपको काम करना
आना चाहिए। नेक्स्ट इज़ फाइल हैंडलिंग एंड सीरियलाइजेशन। अ ये टिपिकल सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट में मे बी उतना यूज़फुल नहीं है।
बट ए डेवलपमेंट में इट्स सुपर यूज़फुल बिकॉज़ आप पूरे टाइम एक्सटर्नल फाइल्स के साथ काम करते हो। फॉर एग्जांपल आप अपने
कंपनी के डेटा पे फॉरकास्टिंग कर रहे हो। सम काइंड ऑफ प्रेडिक्शन कर रहे हो। तो आपको सबसे पहले कंपनी का डेटा चाहिए।
कंपनी का डेटा सीएसवी फॉर्मेट में है। तो आपको उसको पहले लोड करके पाइथन में लाना पड़ेगा। तो इसके लिए यू नीड टू अंडरस्टैंड
हाउ टू हैंडल फाइल्स। तो फाइल हैंडलिंग इज़ एब्सोलुटलीेंट। अलग-अलग टाइप की फाइल्स के साथ काम करना आपको आना चाहिए। सबसे ज्यादा
आई वुड रिकमेंड CSV एंड JSN के साथ आप काम करना सीखो। और उसके बाद अलग-अलग डायरेक्टरीज के साथ कैसे काम करना है उसके
लिए वी हैव सम मॉड्यूल्स इन Python सो ओएस इज़ वन पाथव इज़ वन इसके साथ आपको काम करना आना चाहिए। एंड यू शुड आल्सो नो हाउ टू
लॉग फाइल्स। ठीक है? तो लॉगिन का कांसेप्ट भी आपको पता होना चाहिए। तो ये हो गया आपका Python का काइंड ऑफ़ सिलेबस। इतना
आपको आना चाहिए। जिस ऑर्डर में मैंने बताया उस ऑर्डर में आप सीखो। जो चीजें मैंने बोली आप बाद में कर सकते हो। आप बाद
में करो और यू विल बी गुड टू गो। Python सीखने के बाद आपको नेक्स्ट कुछ ऐसी लाइब्रेरीज सीखनी पड़ेंगी जो आप कह सकते
हो कि एआई डेवलपमेंट के लिए बहुत ज्यादाेंट है। उनमें से जो सबसे पहली लाइब्रेरी है वो है nपाई। अ nपाई स्टैंड्स
फॉर न्यूमेरिकल पाइथन। इसकी हेल्प से आप क्या कर सकते हो कि आप Python में न्यूमेरिकल कंप्यूटिंग परफॉर्म कर सकते
हो। सो होता क्या है कि Python के जो खुद के डेटा स्ट्रक्चर्स हैं वो काइंड ऑफ थोड़े स्लो हैं। Python इन जनरली भी माना जाता
है कि थोड़ा स्लो होता है एग्जीक्यूशन के टाइम। तो इसी कमी को सॉल्व करने के लिए nपाई बोल के लाइब्रेरी आई और nपाई में आप
क्या कर सकते हो? बहुत बड़ा डेटा के साथ भी बहुत कम टाइम में ऑपरेशंस परफॉर्म कर सकते हो। स्पेशली मैथमेटिकल ऑपरेशंस। एंड
एज यू नो एi में यू हैव टू डू अ लॉट ऑफ़ मैथमेटिकल ऑपरेशंस। दैट इज़ व्हाई nपाई इज़ लाइक अ फंडामेंटल लाइब्रेरी। आगे आप इसके
जो भी लाइब्रेरीज़ पढ़ोगे एआई में वो सब की सब NPI के टॉप पे बनी हुई है। दैट इज़ व्हाई नमई को सीखना इज़ एक्सट्रीमलीेंट।
बहुत बड़ी लाइब्रेरी नहीं है। अह कुछ स्पेसिफिक फंक्शनंस हैं जो आपको पता होने चाहिए। वहां पे मैंने लिस्ट कर दिए हैं।
तो प्लीज मेक श्योर आप nपाई सबसे पहले सीख लो। एक बार nपाई सीखने के बाद नेक्स्ट आपको मूव करना चाहिए टुवर्ड्स डेटा
एनालिसिस एंड मैनपुलेशन। सो इस पॉइंट पे आपको काफी कुछ आ गया पython में और अब आप रेडी हो कि आप किसी डेटा सेट को उठाओ और
उसके ऊपर आप एनालिसिस स्टार्ट करो। और ये काम करने के लिए जो लाइब्रेरी सबसे ज्यादा अच्छी मानी जाती है वो है पंडाज़। तो पंडाज़
इज़ वन लाइब्रेरी जिसमें आप किसी भी तरह का डेटा मैनपुलेशन, डेटा एक्सप्लोरेशन परफॉर्म कर सकते हो। आप लिटरली एक डेटा
सेट को उठा के पython में लोड करके उससे किसी भी तरह का सवाल पूछ सकते हो कि बताओ टॉप 10 रोज़ में क्या है? बॉटम 10 रोज़ में
क्या है? अ मुझे ये बताओ कि किसी पर्टिकुलर कॉलम के बेसिस पे सॉर्ट करने पे डेटा कैसा दिखाई देगा? यू अंडरस्टैंड जो
भी डेटा एनालिसिस रिलेटेड ऑपरेशंस हैं वो परफॉर्म करने के लिए पंडाज़ इज़ एक्सट्रीमली गुड। तो पंडाज़ इज़ समथिंग जिसके बिना आपको
आगे काम नहीं चलेगा। तो पंडाज़ यू हैव टू लर्न। उसके बाद आता है डेटा विजुअलाइज़ेशन। व्हिच इज़ अगेन समथिंग वेरीेंट। डेटा में
अगर कुछ पैटर्न्स हैं तो मोस्टली वो हिडन रहते हैं और वो तभी सरफेस पे आते हैं जब आप उनके अराउंड ग्राफ्स प्लॉट करते हो।
उनको विजुअली इंस्पेक्ट करते हो। और यह काम करने के लिए दो लाइब्रेरीज आई वुड रिकमेंड। वन इज़ मैट प्लॉट लिब एंड सेकंड
इज़ सीबॉन। इन दोनों की हेल्प से आप Python के थ्रू चार्ट्स बना सकते हो और किसी भी तरह का चार्ट बना सकते हो। तो किसी भी तरह
का डेटा आपके पास है। कैटेगोरिकल डेटा है, न्यूमेरिकल डेटा है, मिक्सचर है, दिस लाइब्रेरी विल हेल्प यू। इतना कुछ सीखने
के बाद आपको जो नेक्स्ट चीज़ सीखनी चाहिए वो है हाउ टू परफॉर्म इडीए यूजिंग Python? ईडीए स्टैंड्स फॉर एक्सप्लोरेटरी डेटा
एनालिसिस एंड दिस इज़ द फर्स्ट स्टेप दैट डेटा साइंटिस्ट्स डू। आपको किसी भी तरह का मॉडल बनाना है। आप उसके पहले डेटा को
समझते हो। अगर आप डेटा को ही नहीं समझोगे तो आप उसके ऊपर किसी भी तरह का प्रेडिक्टिव मॉडल नहीं बना सकते। तो ईडीए
इज़ दैट प्रोसेस जिसको यूज़ करके डेटा साइंटिस्ट डेटा एनालिस्ट डेटा को समझते हैं। तो आप ऑलरेडी Python सीख चुके हो। आप
अलग-अलग लाइब्रेरी सीख चुके हो डेटा मैनपुलेशन के लिए। तो दिस इज़ द राइट टाइम वेयर यू टेक सम डेटा फ्रॉम इंटरनेट और
उसके ऊपर आप इडीए परफॉर्म करना सीखो। ठीक है? तो ये हो गया आपका नेक्स्ट स्टेप। उसके बाद देयर आर सर्टेन अदर बिल्ट इन
पाइथन लाइब्रेरीज जो आपको काइंड ऑफ आनी चाहिए या आप उसके साथ थोड़े कंफर्टेबल होने चाहिए। ओएस मैंने ऊपर नाम लिया था। सिस्टम
लाइब्रेरी हुआ, पाथलिब हुआ, डेट टाइम एंड टाइम हुआ। स्पेशली अगर आप टाइम बेस्ड डेटा के साथ काम कर रहे हो। लॉगिंग हुआ। अगर आप
किसी भी तरह का डेवलपमेंट परफॉर्म कर रहे हो तो वहां पे लॉग्स जनरेट करना। तो दीज़ आर सम स्टैंडर्ड लाइब्रेरीज़ जो आपको बहुत
हाई आरओआई देंगी। बट अगेन मैं रिकमेंड नहीं करूंगा डे वन पे एकदम इसको सीखने को। अ जैसे-जैसे ज़रूरत पड़ती जाए आप इन
लाइब्रेरीज़ को सीखते जा सकते हो। बट मैंने यहां पे रोड मैप में मेंशन कर दिया है। उसके बाद एक और चीज़ जो आपको आनी चाहिए
स्पेशली जब आप थोड़े एडवांस स्टेजेस में हो इस रोड मैप के वो है हाउ टू डू अ सिंक्रोनस प्रोग्रामिंग यूज़ इन Python।
जनरली आप जो कोड लिखते हो Python में वो सिंक्रोनस होता है। बट जो भी प्रोडक्शन ग्रेड एप्लीकेशनेशंस आप बिल्ड करोगे
इवेंचुअली और जब आप कंपनीज़ में काम करोगे तो वहां पे आपको असंक्रोनस प्रोग्रामिंग करनी पड़ती है। जहां पे आपका एक सर्वर जो
आपने लिखा है वो एक साथ मल्टीपल क्लाइंट्स को हैंडल कर पाए। तो वहां पे असिंक्रोनस प्रोग्रामिंग बहुत हेल्प करती है। दिस इज
एन एडवांस टॉपिक अगेन समथिंग जो आपको डे वन पे नहीं भी आता है तो काम चल जाएगा। बट जैसे-जैसे आप इस रोड मैप के एंड पे
पहुंचोगे तो आपको ये टॉपिक करना चाहिए। सीखना चाहिए। बिकॉज़ आपको दूसरों के प्रोजेक्ट्स में दूसरों के कोर्स में ये
टॉपिक दिखने लग जाएगा। तो अगेन इसको आप लेटर के लिए रख सकते हो। उसके अलावा दो और लाइब्रेरीज मैं आपको रिकमेंड करूंगा जो
आपको डेफिनेटली सीखनी चाहिए। बिकॉज़ ये आपको आगे चलके बहुत देखने को मिलेगा। वन इज फास्ट एपीआई जहां पे आप पython की
हेल्प से प्रोडक्शन ग्रेड एपीआई बनाना सीखते हो। तो जब आप अपने मशीन लर्निंग मॉडल्स को एक्सपोज करोगे यूज़र्स के पास तो
वहां पे आप उनको एपीआई के थ्रू एक्सपोज करते हो। तो वो पूरा का पूरा जो कोड लिखा जाता है वो फ़ास्ट एपीआई में लिखा जाता है।
इनफैक्ट ये कंपनीज़ भी इसी लाइब्रेरी को यूज़ करती हैं प्रोडक्शन ग्रेड एप्लीकेशनेशंस बनाने के लिए। तो इन दैट
सेंस फ़ास्ट एपीआई इज़ अ वैरीेंट लाइब्रेरी। एंड सेकंड वन इज़ Pyidentich अगेन समथिंग जो बहुत यूज़ किया जाता है। Python में खुद
का कोई डेटा वैलिडेशन नहीं होता है। इस लाइब्रेरी को यूज़ किया जाता है डेटा वैलिडेशन परफॉर्म करने के लिए। तो अगेन ये
दो लाइब्रेरीज आपको डेफिनेटली सीखनी चाहिए। क्या एकदम शुरू में सीखनी चाहिए? नहीं। इसको आप बाद के लिए बचा के रखो। बट
जब भी आपको इसकी जरूरत दिखाई दे एक हफ्ते का टाइम निकाल के आप इसको सीख लो। ये बहुत इंपॉर्टेंट है। नटशेल में आप जब पाइथन की
अपनी जर्नी कंप्लीट करो तो आपको इन क्वेश्चंस को आंसर करना होगा कि क्या आप Python में क्लीन एंड रीडेबल कोड लिख पा
रहे हो? क्या आप मॉड्यूलर डिज़ाइन कर पा रहे हो एक एप्लीकेशन का? क्या आप लॉगिन एंड मॉनिटरिंग का माइंडसेट रखते हो? और
क्या आप दूसरे लोगों का कोड ईज़ली पढ़ पा रहे हो कि नहीं? अगर इन क्वेश्चंस का आंसर यस है तो यू आर ऑलरेडी रेडी और आप आगे बढ़
सकते हो इस रोड मैप में। पython के बाद जो नेक्स्ट प्रीरक्व्विजिट आपको आना चाहिए वो है सीक्वल। अ अनलाइक पython सीक्वल एi के
हर जॉब प्रोफाइल मेंेंट नहीं होता बट बहुत सारे जॉब प्रोफाइल्स के लिए बहुतेंट है। स्पेशली ऐसे जॉब प्रोफाइल्स में जहां पे
आप टेबुलर डेटा के साथ डील कर रहे हैं। बिकॉज़ आज की डेट में मेजॉरिटी ऑफ़ द कंपनीज़ अपना टेबुलर डेटा स्टोर करने के लिए
सीक्वल डेटाबेसिस यूज़ करती है। तो दैट इज़ व्हाई आपको सीक्वल के साथ काम करना आना चाहिए। एआई की फील्ड में ये एक फेमस कहावत
है कि अगर आपको सीक्वल नहीं आता तो आप अपने डेटा के लिए हमेशा किसी और पे डिपेंड करोगे। तो उस सेंस में इट इज़ वेरी
वेरीरीेंट। तो लेट मी क्विकली टेल यू कि आपको सीक्वल में कितनी चीजें आनी चाहिए और क्या-क्या टॉपिक्स आपको पढ़ने हैं? तो
सबसे पहले आपको सीक्वल के फंडामेंटल्स आने चाहिए। व्हिच स्टार्ट्स विद डेटाबेस कि डेटाबेस क्यों एक्सिस्ट करते हैं? रिलेशनल
डेटाबेस क्या है? नॉन रिलेशनल डेटाबेस क्या हैं? टेबल्स रो कॉलम्स का कांसेप्ट, कीज़ का कांसेप्ट, बेसिक सीक्वल का
सिंटेक्स। उसके बाद कैसे आप क्रड कमांड्स रन कर सकते हो। इंसर्ट, अपडेट, डिलीट। उसके बाद आप टेबल का स्कीमा कैसे बनाते हो
इसके बारे में आपको थोड़ा आईडिया होना चाहिए। इंडेक्सेस का कांसेप्ट, नॉर्मलाइजेशन, डीनॉर्मलाइजेशन का कांसेप्ट
ये सब आपको थोड़ा पता होना चाहिए ऑन अ वेरी कॉनसेप्चुअल लेवल। बहुत डीप में जाने की जरूरत नहीं है। यू नॉट गोइंग टू बिकम अ
डेटाबेस एडमिनिस्ट्रेटर। तो बस थ्योरी लेवल पे आपको पता होना चाहिए। उसके बाद जो आपका कोर क्वेरिंग होती है सीक्वल में वो
आपको पता होनी चाहिए। सेलेक्ट फ्रॉम वेयर डिस्टिंक्ट या आई एम प्रीटी श्योर। आपने शायद सुना भी होगा ऑलरेडी। उसके बाद कैसे
आप डेटा को फिल्टर करते हो बेस्ड ऑन डिफरेंट कंडीशंस कैसे आप एग्रीगेशंस परफॉर्म करते हो कैसे आप ग्रुपिंग परफॉर्म
करते हो उसके बाद कैसे आप मल्टीपल टेबल्स को ज्वॉइ करते हो ये आपको पता होना चाहिए हाउ डू यू राइट सब क्वेरीज इफ यू आर
डीलिंग वि कॉम्प्लेक्स डेटा और उसके अराउंड आपको कॉम्प्लेक्स क्वेरीज लिखनी है तो हाउ डू ब्रेक इट डाउन इंटू सब क्वेरीज
उसके बाद आता है प्रोबेबबली सबसेेंट चीज जो एज अ डेटा पर्सनल आपको पता होनी चाहिए वो है विंडो फंक्शनंस दीज़ आर लाइक स्पेशल
फंक्शंस जो डेटा एनालिसिस के लिए यूज किए जाते हैं और मल्टीपल विंडो फंक्शनंस एक्सिस्ट करते और यहां पे आपको काफी टाइम
देना है। मैंने यहां पे लिस्ट ऑफ फेमस विंडो फंक्शनंस लिख रखे हैं। बट इसके अलावा भी एक्सिस्ट करते हैं। एक बार जब आप
विंडो फंक्शन सीख जाओ उसके बाद आपको क्या करना चाहिए? अलग-अलग डेटा सेट्स टेबल्स के साथ डेटा क्लीनिंग एंड ट्रांसफॉर्मेशन के
स्टेप्स को परफॉर्म करना चाहिए जस्ट टू प्रैक्टिस योर विंडो फंक्शन स्किल्स। ठीक है? तो सुपरेंट। उसके बाद एक बार जब आप ये
बेसिक लेवल सीख जाओ। उसके बाद आपको थोड़ा परफॉर्मेंस एंड ऑप्टिमाइजेशन पे फोकस करना चाहिए। जहां पे आप ये सीखते हो कि कैसे आप
अपनी सीक्वल क्वेरीज को और ज्यादा ऑप्टिमाइज कर सकते हो कि वो और कम टाइम ले और बड़े डेटा सेट के साथ भी सही से
रिजल्ट्स दे पाए। इन चीजों के ऊपर आपको फोकस करना चाहिए। दिस इज समथिंग जो मैं आपको एकदम बिगिनर लेवल पे सजेस्ट नहीं
करूंगा। थोड़ा टाइम स्पेंड कर लिया। थोड़ा आगे बढ़ गए रोड मैप में और फिर जब जरूरत पड़ी तब आप पीछे आकर के इसको कवर कर सकते
हो। उसके बाद थोड़ा एनालिटिकल थिंकिंग विथ सीक्वल यह काइंड ऑफ़ देयर आर सर्टेन बुक्स जो मैं आपको आगे चलके बताऊंगा। उन बुक्स
के ऊपर आप थोड़ा फोकस करोगे तो वहां पे इन चीजों के बारे में बता रखा है कि हाउ डू यू हैव अ एनालिटिकल माइंडसेट टू यूज़
सीक्वल इन ऑर्डर टू सॉल्व डेटाबेस प्रॉब्लम्स। ठीक है? अलग-अलग सीक्वल डायलेक्ट्स होते हैं। उनके ऊपर भी आपको
थोड़ा कमांड होना चाहिए। जैसे पोस्ट सीक्वल है, माय सीक्वल है, सीक्वल आइट है। ये सारे के सारे डेटाबेस फॉलो तो सीक्वल
को ही करते हैं। बट थोड़ा बहुत आपको प्लस माइनस चेंजेस दिखाई देंगे इनके सीक्वल इंप्लीमेंटेशन में। तो ओवर टाइम आगे चलके
आपको कोशिश करना चाहिए जब आप प्रोजेक्ट्स चूज़ कर रहे हो तो अलग-अलग फ्लेवर वाले आप सीक्वल बेस्ड प्रोजेक्ट्स चूज़ करो जिससे
आपको अलग-अलग डायलक्ट्स का एक काइंड ऑफ एक्सपीरियंस हो जाए। उसके बाद ये अगली चीज़ बहुतेंट है। हाउ डू यू इंटीग्रेट सीक्वल
विद Python? बिकॉज़ ये आप बहुत करोगे। आपका डेटा डेटाबेस में है बट आप उसको फेच करके लाओगे Python में और फिर आगे का जो सारा
काम है वो आप Python में करोगे। तो ये जो इंटीग्रेशन है ये आपको डेफिनेटली सीखना चाहिए। जैसा मैंने बोला अलग-अलग डेटाबेस
का फ्लेवर आपको ले लेना चाहिए। और इसमें दोनों टाइप के डेटाबेस आप ऑन प्रमिस डेटाबेस और क्लाउड वेयर हाउसेस जो हैं
जैसे कि बिग क्वेरी रेड शिफ्ट स्नोफ्लेक इनका भी आपको थोड़ा सा आईडिया होना चाहिए। अगेन समथिंग जो मैं आपको शुरू में करने को
नहीं बोलूंगा बट आगे डाउन द लाइन आपको ये सीखना चाहिए। एट द एंड अगेन आपको खुद से ही क्वेश्चन पूछने है कि क्या आप इन
क्वेश्चंस को यस में आंसर कर पा रहे हो कि नहीं? आर यू एबल टू राइट रीडेबल सीक्वल क्वेरीज? आर यू एबल टू ब्रेक कॉम्प्लेक्स
क्वेरीज इनटू स्टेप्स। कमेंट्स लिखते हो कि नहीं? अलग-अलग सीक्वल वर्जनिंग आप कर पाते हो कि नहीं? एंड आर यू एबल टू डीबग
योर सीक्वल क्वेरीज इफ एनीथिंग गोस रोंग? ये चीजें आपको आनी चाहिए। ठीक है? तो दिस इज द अमाउंट ऑफ सीक्वल दैट यू हैव टू लर्न
इन ऑर्डर टू क्रैक दिस रोड मैप। पाइthन और सीक्वल के बाद जो नेक्स्ट प्रीरेक्सिजिट है वो है मैथमेटिक्स। एंड ट्रस्ट मी अ वी
कैन से दैट ये सबसे ज्यादा डरावना प्रीरक्व्विजिट है। बिकॉज़ इससे रिलेटेड मुझे सबसे ज्यादा क्वेश्चंस और डाउट्स आते
हैं स्टूडेंट की तरफ से कि क्या सर मैथमेटिक्स इंपॉर्टेंट है। और अगर इंपॉर्टेंट है तो हमें कितना मैथमेटिक्स
आना चाहिए इन ऑर्डर टू मेक अ करियर इन एआई। इफ आई कैन गिव योर शॉर्ट आंसर द आंसर वुड बी इट इज एक्सट्रीमलीेंट नॉट सेइंग कि
आपको हर चीज आनी चाहिए मैथमेटिक्स में बट देयर आर सर्टेन टॉपिक्स जो आपको बिल्कुल अच्छे तरीके से आने चाहिए। अदरवाइज आप
बहुत ज्यादा अच्छे तरीके से चीजें नहीं कर पाओगे। एकदम सिंपल अगर मैं एनालॉजी दूं तो पython सीक्वल को आप एi के वर्ल्ड में
हैंड्स और लेग्स की तरह ट्रीट कर सकते हो जिसकी हेल्प से आप मूव करोगे। चीजें परफॉर्म करोगे। बट मैथमेटिक्स विल बी योर
आई जिसके थ्रू आप चीजों को देख पाओगे। ठीक है? बहुत लोग इस टॉपिक को स्किप कर देते हैं या बहुत फोकस नहीं करते हैं और वो आगे
बढ़ जाते हैं एंड दे इवेंचुअली रियलाइज कि यार हम बहुत अच्छे तरीके से मॉडल बिल्डिंग नहीं कर पा रहे हैं या फिर अगर हमें बोला
जाए कि हमारा मॉडल का एक्यूरेसी इज़ 85% तो हम उसको 87 90% तक भी नहीं ले जा पा रहे हैं बिकॉज़ हमारे पास वो समझ नहीं है वो
मैथमेटिकल अंडरस्टैंडिंग नहीं है जो रिक्वायर्ड होता है इस तरह के काम के लिए। तो चलो मैं आपको क्विकली बताता हूं कि
किस-किस टॉपिक के ऊपर आपको फोकस करना चाहिए और किस ऑर्डर में आपको चीजें करनी चाहिए। सबसे पहले आपको लीनियर अलजेब्रा के
बारे में काफी आईडिया होना चाहिए। सो लीनियर अलजेब्रा इज ऑल अबाउट रिप्रेजेंटिंग नंबर्स इन डिफरेंट-डिफरेंट
कंस्ट्रक्ट्स। सो स्केलर्स हुए, वेक्टर्स हुए, मैट्रिसेस हुए, टेंसर्स हुए। तो डेटा साइंस एआईएमएल में आपको पूरे टाइम जो आपका
डेटा है उसको सही फॉर्म में रिप्रेजेंट करना होता है। सो दैट आप उसके ऊपर सही ऑपरेशंस लगा पाओ। वन सिंपल एग्जांपल दैट
आई कैन गिव यू इज़ कि जो एक इमेज आप देखते हो उस इमेज को आप बहुत आसानी से एक मैट्रिक्स के फॉर्म में रिप्रेजेंट कर
सकते हो। और फिर उसके ऊपर जो आप फिल्टर्स अप्लाई करते हो Instagram वगैरह पे दोज़ फिल्टर्स आर नथिंग बट मैट्रिक्स ऑपरेशंस
जो आप अपने ओरिजिनल इमेज मैट्रिक्स के ऊपर अप्लाई कर रहे हो। तो यू कैन सी कि कैसे आप डेटा को रिप्रेजेंट करते हो इन द फॉर्म
ऑफ मैट्रिससेस या फिर हायर डायमेंशन में टेंसर्स और फिर उन्हीं के ऊपर आपको मैनपुलेशंस परफॉर्म करने होते हैं
मैथमेटिकल मैनपुलेशन और ये सब कुछ लीनियर अलजेब्रा में होता है। एंड दैट इज़ व्हाई दिस इज़ द फर्स्ट थिंग दैट यू शुड लर्न। अ
नॉट सेइंग कि आपको बहुत डीपली कोई स्टैंडफोर्ड का कोर्स फॉलो करना चाहिए जहां पे 40-50 घंटे का कंटेंट है। उतना
डीपली आपको सीखने की जरूरत नहीं है। बहुत ही आपको टारगेटेड तैयारी करनी है। करनी चाहिए जहां पे आप एआई स्पेसिफिक चीजें
सीखो। तो यहां पे मैंने वो टॉपिक्स लिख दिए हैं जो आपको सीखने चाहिए। मैं एंड में वीडियो के आपको रिसोर्सेज भी बता दूंगा।
लीनियर अलजेब्रा सीखने के बाद जो सेकंड चीज आपको सीखनी चाहिए वो है कैलकुलस। अगेन कैलकुलस में आपको सब कुछ सीखने की जरूरत
नहीं है। आपको ज्यादा फोकस करना होता है डिफरेंशियल कैलकुलस के ऊपर। इंटीग्रल कैलकुलस मैंने नहीं देखा यूज़ होते हुए। तो
यू नीड टू लर्न अबाउट थिंग्स लाइक डेरिवेटिव्स एंड ग्रेडियंट्स, हाउ टू परफॉर्म पार्शियल डेरिवेटिव्स, चेन रूल
बहुतेंट है। ये सारी चीजें एक्चुअली डीप लर्निंग में बहुत यूज़ होती है। तो ये सब आपको आना चाहिए। द कांसेप्ट ऑफ लोकल एंड
ग्लोबल मिनीमा। ये सब आप आगे बहुत यूज़ करोगे। फिर वहीं से आपका ऑप्टिमाइजेशन के अलग-अलग कांसेप्ट्स होते हैं। ग्रेडियंट
डिसेंट एल्गोरिदम है। लर्निंग रेट कैसे काम करता है? कॉस्ट एंड लॉस फंक्शन का कांसेप्ट क्या है? ये सब आपको पता होना
चाहिए। ठीक है? तो दिस इज़ द सेकंड थिंग दैट यू हैव टू लर्न। उसके बाद आती है प्रोबेबिलिटी जो कि बहुतेंट है। बिकॉज़ अ
एआईएमएल डेटा साइंस में आप क्या कर रहे होते हो कि आप अलग-अलग डेटा डिस्ट्रीब्यूशन के साथ डील कर रहे होते
हो। तो बिफोर हैंड आपको आईडिया होना चाहिए कि व्हाट आर द डिफरेंट काइंड ऑफ़ डेटा डिस्ट्रीब्यूशन प्रोबेबिलिटी
डिस्ट्रीब्यूशन। सो दैट जब आप उनको देखो तो आप पहचान पाओ। तो यहां पे मैंने कुछ कॉमन प्रोबेबिलिटी के जो कांसेप्ट्स हैं
जैसे कि रैंडम वेरिएबल क्या होता है? प्रोबेबिलिटी डिस्ट्रीब्यूशन क्या होता है? पीएमएफ, पीडीएफ क्या होता है?
एक्सपेक्टेशंस एंड वेरियंस क्या होता है? ये सब बता रखा है। ये सब आपको सीखना चाहिए। ये बेस थ्योरम है। देयर सर्टेन
एल्गोरिदम्स जो बेस थ्योरम के ऊपर बेस्ड हैं। लाइकलीहुड एंड प्रोबेबिलिटी का कांसेप्ट। ये सब कुछ ऐसी चीजें हैं जो आप
आगे चल के बहुत सुनोगे, देखोगे। तो ये आपको पता होनी चाहिए। उसके बाद आता है स्टैटिस्टिक्स व्हिच इज़ वेरी क्लोजली
रिलेटेड टू डेटा एनालिसिस। जब आपके पास एक डेटा है तो आप उसके ऊपर कैसे डेटा एनालिसिस परफॉर्म करोगे? आपने डेटा
एनालिसिस परफॉर्म किया तो हाउ डू यू जज कि डेटा एनालिसिस सही है? आपने मॉडल बिल्ड किया तो हाउ डू यू नो कि वो पॉपुलेशन के
ऊपर भी सही बैठेगा? ये सारी चीजों की टेस्टिंग आप स्टैटिस्टिक्स में करते हो। तो यहां पे आपको दोनों तरह का
स्टैटिस्टिक्स आना चाहिए। यू यू हैव टू नो डिस्क्रिप्टिव स्टैटिस्टिक्स। यू आल्सो हैव टू नो इनफरेंशियल स्टैटिस्टिक्स। तो
ये दोनों चीजें आपको आनी चाहिए। ये भी यहां पे मेंशंड है। तो ये जो चार टॉपिक्स हैं ये आपको थोड़े अच्छे से पढ़ने होते हैं।
इसके अलावा कुछ ऐसे टॉपिक्स हैं जो बहुत स्पेसिफिक हैं टू सर्टेन एल्गोरिदम्स बट वो आपको आगे देखने को मिल सकते हैं। तो
मैं आपको एकदम शुरू में आगे के टॉपिक्स सीधे पढ़ने को नहीं बोलूंगा। ये ऐसे टॉपिक्स हैं जिनकी आपको जब जरूरत पड़े तो
आप पढ़ लेना। जैसे कि इंफॉर्मेशनेशन थ्योरी में आपको कुछ टॉपिक्स पढ़ने हैं। जैसे कि एंट्रॉपी, क्रॉस एंट्रॉपी, केएल
डायवर्जेंस। तो देयर आर सर्टेन मशीन लर्निंग एल्गोरिदम्स जो इन टॉपिक्स के ऊपर रिलाई करते हैं। अ ज्योमेट्री एंड
डिस्टेंस मेजर्स इक्विलिबडियन डिस्टेंस क्या होता है? मेन हट एंड डिस्टेंस क्या होता है? तो अगेन देयर आर सर्टेन
एल्गोरिदम्स जो इन डिस्टेंससेस को यूज़ करते हैं इंटरनली। तो आपको पता होने चाहिए मल्टीवेरिएंट डिस्ट्रीब्यूशन कैसे काम
करते हैं? अ कोवेरियंस मैट्रिक्स का क्या काम होता है? उसका क्या इंटरप्रिटेशन है? एंड लास्टली अ कॉन्सेप्ट्स लाइक मैट्रिक्स
फैक्टराइजेशन एंड डीकंपोज़शन व्हिच इज़ अगेन यूज़्ड इन सर्टेन एल्गोरिदम्स लाइक पीसी एक्सट्रा। तो दिस इज़ लाइक ऑल ऑफ़
मैथमेटिक्स दैट यू हैव टू लर्न। इसके अलावा इसके बाहर आपको जाने की जरूरत नहीं है। और इसमें भी आपको सब कुछ एकदम शुरुआत
में पढ़ने की जरूरत नहीं है। आप टारगेटेड पढ़ाई करो। उतनी ही चीजें पढ़ो जो आपको एआई की फील्ड में रिक्वायर्ड है। उसके
बाहर जाने की जरूरत नहीं है। बिकॉज़ मैंने लोगों को ये गलती करते हुए देखा है कि शुरू में ही उन्होंने खुद को दो-ती महीने
का टाइम दे दिया कि हम दो-ती महीने पूरा सिर्फ मैथमेटिक्स पे फोकस करेंगे। और मैथमेटिक्स भी वो एकदम ऐसे पढ़ रहे हैं
जैसे कोई जनरल मैथमेटिक्स की क्लास है। इंस्टेड व्हाट यू शुड डू इज़ कि आपको मैथमेटिक्स एआई के कॉन्टेक्स्ट में पढ़ना
चाहिए। तब आप उसको बेटर समझ पाओगे। डोंट वरी बाय द एंड ऑफ दिस वीडियो मैं आपको कुछ रिसोर्सेज प्रोवाइड करूंगा जिसकी हेल्प से
आप एआई के कॉन्टेक्स्ट में मैथमेटिक्स अच्छे से सीख पाओगे। द नेक्स्ट प्रीरक्व्विज इज़ सॉफ्टवेयर एसेंशियल्स। अब
आप बोलोगे कि एआई में हम सॉफ्टवेयर के चीजें क्यों पढ़ेंगे? द आंसर इज़ वेरी सिंपल। एआई डेवलपमेंट इज़ एन एडजेसेंट
फील्ड टू सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट। इट्स नॉट कंप्लीटली डिफरेंट। अ लॉट ऑफ़ थिंग्स आर ओवरलैपिंग। दैट इज़ व्हाई आपको सॉफ्टवेयर
डेवलपमेंट के कुछ एसेंशियल जो कंस्ट्रक्ट्स हैं, जो वर्क फ्लोस हैं वो आपको पता होने चाहिए। क्या-क्या
एक्सैक्टली मैं आपको बता देता हूं। सबसेेंट चीज जो आपको पता होनी चाहिए वो है वर्जन कंट्रोल। बेसिकली आपको गिट एंड गिटब
के फंडामेंटल सॉर्टेड होने चाहिए। ठीक है? कैसे आप ब्रांचिंग मर्जिंग करते हो, कैसे पुल रिक्वेस्ट भेजते हो, कैसे कोड रिव्यूज
किए जाते हैं, कॉन्फ्लिक्ट कैसे मर्ज किया जाता है? ये सब कुछ आपको आना चाहिए। और अच्छी बात ये है कि ये सब सीखने में आपको
ज्यादा टाइम लगेगा नहीं। यू जस्ट नीड अ टू थ्री आवर का ट्यूटोरियल जहां पे आप डिटेल में एक बार चीजों को देख लो और एक-दो
सैंपल कोड रेपोजिटरीज पे काम कर लो। एंड दैट्स इट। उसके बाद आप आगे तक इस चीज का फायदा उठाते रहोगे। ठीक है? अपार्ट फ्रॉम
वर्जन कंट्रोल डेवलपमेंट एनवायरमेंट कैसे सेटअप करना है उसके ऊपर भी आपको आईडिया होना चाहिए। यू हैव टू हैव सम आईडिया
अराउंड आईडीस। उसके बाद वर्चुअल एनवायरमेंट सेटअप करना, डिपेंडेंसी मैनेजमेंट कैसे किया जाता है? एनवायरमेंट
वेरिएबल्स को कैसे हैंडल किया जाता है? प्रोजेक्ट स्ट्रक्चर कैसे सेटअप किया जाता है? और रिप्रोड्यूसेबल सेटअप्स कैसे बनाए
जाते हैं। सो दैट आप एक प्रोजेक्ट से दूसरे प्रोजेक्ट में उसको रिप्रोड्यूस कर पाओ। ये आपको पता होना चाहिए। एंड लास्टली
यू शुड नो हाउ टू वर्क विद एपीआईस एंड सर्विसेस। तो रेस्ट एपीआईस आप बहुत ज्यादा यूज़ करोगे। आपको पता होना चाहिए रेस्ट
एपीआईस क्या होती है? कैसे काम करती है? उनके साथ कैसे इंटरेक्ट करना है? अलग-अलग एचटीटीपी मेथड्स एंड स्टेटस कोड्स अगेन
बहुत कॉमन चीज है। jसon की हैंडलिंग कैसे की जाती है? एरर हैंडलिंग का क्या सीन है? रेट लिमिटिंग का क्या सीन है? ये सब कुछ
ऐसी चीजें हैं जो आपको डे इन डे आउट देखने को मिलेंगी। और इसीलिए आपको शुरू में ही इसके बारे में आईडिया हो जाना चाहिए। इफ
यू आर कमिंग फ्रॉम अ सॉफ्टवेयर बैकग्राउंड मोस्ट ऑफ द चीजें आपको ऑलरेडी पता होंगी। इफ यू आर कमिंग फ्रॉम अ नॉनटेक बैकग्राउंड
तब आपको यहां पे थोड़ा एफर्ट लगाना पड़ सकता है। जो नेक्स्ट प्रीरक्व्विजिट मैंने ऐड किया है इस रोड मैप में वो है क्लाउड
फंडामेंटल्स। अब बहुत लोग अपने रोड मैप्स में क्लाउड को एज अ फंडामेंटल एज अ प्रीरक्वज़िट ऐड नहीं करते हैं। मैंने किया
है। उसका सिंपल रीज़न यह है कि मैंने अपने एक्सपीरियंस में ये देखा है कि आपको कभी भी किसी भी टाइप का मॉडल डिप्लॉय करना है
या उसके अराउंड कोई एप्लीकेशन या एपीआई बना के डिप्लॉय करना है। तो सबसे स्ट्रेट फॉरवर्ड जो सशन रहता है वो क्लाउड ही रहता
है। या तो आप एडब्ल्यूएस यूज़ करते हो या Azure करते हो या जीसीपी करते हो। बट आपको इवेंचुअली क्लाउड पे जाना ही पड़ता है। तो
उसका थोड़ा आईडिया अगर आपको शुरू से हो तो बाद में आपको डर कम लगता है। क्योंकि मैंने अपने स्टूडेंट्स में ये चीज नोटिस
की है कि दे आर वेरी गुड अराउंड कॉनसेप्चुअल थिंग्स। बट जैसे ही मैं उनको बोलता हूं कि नाउ वी हैव मेड दिस
प्रोजेक्ट एंड अब उसको हम डिप्लॉय करेंगे। तो जैसे ही वो डिप्लॉयमेंट वर्ड सुनते हैं जैसे ही क्लाउड का नाम सुनते हैं तो एक
खौफ आ जाता है उनके मन में और मैं चाहता हूं कि वो आपके अंदर ना आए। उसके लिए थोड़ी फमिलियरिटी अगर आपके पास शुरू से
होगी तो वो बहुत अच्छी बात होगी। ठीक है? तो क्लाउड में आपको ज्यादा कुछ नहीं पढ़ना शुरू में। इनफैक्ट आप शुरू में थ्योरिटिकल
लेवल पे भी चीजें अगर देख लो तो इट वुड बी ग्रेट। जैसे कि क्लाउड के बेसिक्स क्या हैं? क्लाउड कंप्यूटिंग क्या होता है?
व्हाट आर द डिफरेंट सर्विस मॉडल्स? पब्लिक प्राइवेट हाइब्रिड क्लाउड क्या होता है? रीजंस अवेलेबिलिटी जो ज़ों्स ये सब के जो
कांसेप्ट्स हैं ये आपको थोड़े बहुत आईडिया होने चाहिए। ये लिटरली आप चैट जीपीटी पे जाके जस्ट आस्क दीज़ क्वेश्चंस और बोलो कि
एक्सप्लेन दिस इन सिंपल टर्म्स। आपको काफी आईडिया लग जाएगा। एक सिंपल चैट जीपीटी सेशन के बेसिस पे। अ कोर क्लाउड सर्विसेस
क्या-क्या है? कंप्यूट सर्विस होता है, स्टोरेज सर्विस होता है, नेटवर्किंग सर्विस होता है। ये सब के बारे में आपको
आईडिया होना चाहिए। वर्चुअल मशीनंस क्या होती हैं? कंटेनर्स क्या होते हैं? ऑटो स्केलिंग लोड बैलेंसिंग का कांसेप्ट क्या
होता है? ये सब ऐसी चीजें हैं जो सामने वाला बोलता है तो बहुत इंटेलिजेंट साउंड करता है। बट एक्चुअली दे आर वेरी सिंपल
टर्म्स जो आप भी बहुत आसानी से सीख सकते हो इवन एज अ बिगिनर। ठीक है? स्टोरेज फंडामेंटल्स हो गया, नेटवर्किंग के थोड़े
बेसिक्स हो गए। तो ये जो लिस्ट ऑफ टॉपिक्स हैं इनके साथ आप एक चैट जीपीटी सेशन कर लो बस। एंड ट्रस्ट मी दैट इज़ आल्सो सफिशिएंट।
फ्यूचर में जब आप जाके क्लाउड एक्चुअली यूज़ करोगे अपने प्रोजेक्ट्स को डिप्लॉय करने के लिए तो वहां पे आपको डर नहीं
लगेगा। बिकॉज़ आपको एक फेयर आईडिया पहले से हो चुका होगा। ठीक है? बट अगेन दिस इज़ कंप्लीटली ऑप्शनल। अगर आप थोड़ा कम टाइम
में इस रोड मैप को करना चाहते हो तो यू कैन स्किप दिस वन। और जो लास्ट प्रीरेक्विज़िट मैंने रखा है वो है एआई
कोडिंग। अब आप इसको एआई कोडिंग बोल लो या वाइब कोडिंग बोल लो या एजेंटिक कोडिंग बोल लो। इस पॉइंट पे ये सारे टर्म्स ब्लरी
हैं। और रफली एक ही चीज मीन करते हैं कि आप एआई मॉडल्स को यूज़ कर रहे हो टू यू नो राइट फास्टर कोड। मोर एफिशिएंट कोड। अब
ऑनेस्टली यहां पे मैं आपको ज्यादा नहीं बता सकता कि आपको क्या-क्या पढ़ना है। बिकॉज़ मैं खुद इस चीज में अभी एक्सपर्ट
नहीं हूं। मैं खुद इन टूल्स को एक्सप्लोर कर रहा हूं। बट जितना मैं इनको एक्सप्लोर कर रहा हूं मुझे ये तो समझ में आ रहा है
कि ये डेफिनेटली आपको ज्यादा प्रोडक्टिव बना सकते हैं। दैट इज व्हाई इसको स्किप करने की गलती मत करना। बट साथ ही साथ आप
ये गलती भी मत करना कि आप पाइथन भी नहीं सीख रहे और सीधे आप एआई कोडिंग टूल्स के ऊपर डिपेंड कर रहे हो टू डू थिंग्स। इससे
क्या होगा? आप फिलहाल छोटे-मोटे प्रोजेक्ट्स तो बना लोगे। आगे चलके जब आपको डीपर अंडरस्टैंडिंग चाहिए होगी डीबग
करने के लिए या चीजों को और ऑप्टिमाइज करने के लिए वहां पे आप एकदम फेल कर जाओगे। सो मेरा सजेशन ये रहेगा कि पहले
Python सीक्वल विदाउट किसी एआई कोडिंग टूल सीखो। और एक बार जब आप सीख जाओ उसके बाद आप एi कोडिंग टूल्स को भी डेफिनेटली अपने
वर्क फ्लो में लेके आओ। ऑप्शंस क्या-क्या हैं? आपके पास स्ट्रेट फॉरवर्ड ऑप्शंस हैं कि आप कर्सर यूज़ कर सकते हो या फिर क्लॉट
कोड यूज़ कर सकते हो या फिर आपका ओपन एi का कोडक्स है उसको भी यूज़ कर सकते हो। कोई भी एक टूल पकड़ो सबको सीखने की जरूरत नहीं है।
कोई एक टूल पकड़ के उसके साथ टाइम स्पेंड करो और वो देखो आप डेफिनेटली आपको हेल्प करेगा आपकी प्रोडक्टिविटी के साथ। तो ये
छह चीजें मुझे लगता है कि आपको करनी चाहिए जब आप एआई सीखने उतर रहे हो। दीज़ आर लाइक द कोर प्रीरक्व्विज़िट्स अकॉर्डिंग टू मी।
यहां पर आपको दो से 2 1/2 महीने लग जाएंगे। तीन भी लग सकते हैं। बट 3 मंथ्स में मैं आपको गारंटी देता हूं कि अगर आप
यहां पर टाइम अच्छा स्पेंड करते हो विदाउट थिंकिंग टू मच कि आगे क्या करना है तो ये आपको आगे बहुत हेल्प करेगा। वो एक फेमस
कोट आपने शायद सुना होगा कि अगर आपको 6 घंटे के अंदर पेड़ काटना है तो 4 घंटे आपको अपनी आरी को शार्पन करने में लगाना
चाहिए। ये बिल्कुल वही फिलॉसोफी है कि यह प्रीरक्व्विजिट्स अगर आपने सॉर्ट कर लिया तो आगे आपको बहुत आसानी रहेगी। तो प्लीज
मेक श्योर आप इसको स्किप किए बिना जल्दबाजी किए बिना अच्छे से करके आगे बढ़ो। अब प्रीरेक्विजिट्स करने के बाद जो
सबसे पहली चीज आपको करनी है इस रोड मैप में वो है मशीन लर्निंग। अब आई नो आप क्या सोच रहेगे कि सर मशीन लर्निंग तो अब
पुराना हो गया है। अब तो एलएलएम्स आ गए हैं। क्या अब भी मशीन लर्निंग यूज़ होती है? क्या अब भी हमें मशीन लर्निंग पढ़ना
चाहिए? तो मैं आपको ये डिटेल में एक्सप्लेन करता हूं। बट पहले एक शॉर्ट आंसर दे देता हूं कि आज की डेट में भी फॉर
सर्टेन एआई बेस्ड जॉब रोल्स मशीन लर्निंग इज़ एब्सोलुटलीेंट। और इंडस्ट्री में आज भी मशीन लर्निंग को उतना ही यूज़ किया जा रहा
है जितना पहले किया जाता था। तो मशीन लर्निंग काेंस कम नहीं हुआ है। कुछ और नई चीजें जरूर आ गई हैं जो अभी फिलहाल ज्यादा
लाइमलाइट में हैं। बट इवेंचुअली आपको दिखाई देगा कि मशीन लर्निंग कहीं जाने वाला नहीं है। मशीन लर्निंग इज एट द हार्ट
ऑफ एi इन टुडेेस एआई लैंडस्केप। ठीक है? तो सबसे पहले मैं आपको डिटेल में समझाता हूं कि क्यों आज भी मशीन लर्निंग बहुत
यूज़फुल चीज है। सो एआई में आप दो तरह के टास्क परफॉर्म करते हो। एक को हम बुलाते हैं नैरो टास्क और दूसरे को हम बुलाते हैं
जनरल टास्क। थोड़ा टाइम लेके मैं इन दोनों को समझाता हूं। सो नैरो टास्क ऐसे टास्क हैं जहां पर आप ऐसे सिस्टम्स बिल्ड करते
हो जो एक सिंगल स्पेसिफिक प्रॉब्लम को सॉल्व करते हैं। फॉर एग्जांपल अगर आप एक मॉडल बना रहे हो जो फेस डिटेक्शन करेगा तो
यह मॉडल सिर्फ इसी टास्क के लिए बनाया गया है। इसके अलावा आप इस मॉडल को किसी और टास्क के लिए इंप्लीमेंट नहीं कर सकते।
सिमिलरली ईटीए प्रेडिक्शन आप यह पता करना चाहते हो कि किसी Uber की कैब को एक ट्रिप कंप्लीट करने में कितना
टाइम लगेगा। या फिर एक और एग्जांपल हो गया स्पैम डिटेक्शन। जहां पर आप एक मेल का कंटेंट पढ़ के यह बताना चाहते हो या
प्रेडिक्ट करना चाहते हो कि वह मेल स्पैम है या नहीं। तो इन तीनों ही टास्क के लिए जो मॉडल्स आप बनाओगे वो नैरो टास्क को
सॉल्व कर रहे हैं। वो एक ही टास्क के लिए बनाए गए हैं और उसी टास्क में उसको आप इंप्लीमेंट कर सकते हो। उन मॉडल्स को आप
किसी भी दूसरी जगह इंप्लीमेंट नहीं कर सकते। इसका ठीक ऑोजिट होता है जनरल टास्क। जनरल टास्क में आप ऐसे मॉडल्स बिल्ड करते
हो जो एक से ज्यादा प्रॉब्लम्स को साथ में सॉल्व कर सकते हैं। फॉर एग्जांपल आप एक पर्सनल असिस्टेंट बना रहे हो विद द हेल्प
ऑफ सम एलएलएम। तो अब यही पर्सनल असिस्टेंट आपका कैलेंडर हैंडल कर रहा है। यही आपका मेल
हैंडल कर रहा है। यही आपका पर्सनल फाइनेंस हैंडल कर रहा है। तो यू कैन सी ये एक सिंगल मॉडल कई तरह के टास्क आपको करके दे
रहा है। आपका जो एलएलएम होता है वो खुद में कई तरह के टास्क सॉल्व कर सकता है। राइट? अगर आप चाहो तो इससे टेक्स्ट जनरेशन
करवा सकते हो। क्वेश्चन आंसरिंग करवा सकते हो। आप इससे सेंटीमेंट एनालिसिस करवा सकते हो। कई तरह के एनएलपी टास्क आपका ये मॉडल
आपको करके दे देगा। तो एआई में ये दो अलग टाइप की फिलॉसफीस एक्सिस्ट करती हैं। अब हुआ क्या है आजकल कि एलएलएम्स के आने के
बाद से ये जनरल टास्क वाली जो कैटेगरी है ये थोड़ी ज्यादा सरफेस पे आ गई है। इसको थोड़ा ज्यादा लाइमलाइट मिलने लग गया है।
इसीलिए कैंडिडेट्स को ऐसा लगता है कि भाई सिर्फ इसी के बारे में पूछा जा रहा है और कंपनीज़ को ये नैरो टास्क पे काम करने वाले
एल्गोरिदम्स और मेथोडोलॉजीस की जरूरत नहीं है। बट ऐसा नहीं है। द थिंग इज कि आज भी इंडस्ट्री में ऑलमोस्ट सभी कंपनीज़ को डे
टू डे बेसिस पर ये नैरो टास्क सॉल्व करने पड़ते हैं। अब sविg Zomato को एट एनी मोमेंट ये ईटीएफ प्रेडिक्शन मॉडल चाहिए ही
पड़ेगा। राइट? Gmail को ये स्पैम डिटेक्शन मॉडल चाहिए ही पड़ेगा। और आप ऐसा नहीं कर सकते कि नैरो टास्क को सॉल्व करने के लिए
आप एलएलएम जैसे टूल्स को यूज़ करो। बिकॉज़ एलएलएम एक ऐसा टूल है जो अलग-अलग तरह के टास्क में अच्छा है। बट किसी स्पेशलाइज़्ड
टास्क में वो किसी स्पेशलाइज़्ड मॉडल को बीट नहीं कर सकता। आज भी एक टेबुलर डाटा के ऊपर एक्सजी बूस्ट का जो परफॉर्मेंस
होगा आई डोंट थिंक कोई एलएलएम उसको बीट कर सकता है। एंड दैट इज व्हाई मशीन लर्निंग एंड डीप लर्निंग बहुत यूज़ की जाती है
एक्सटेंसिवली। इट्स जस्ट कि फिलहाल वो उतने लाइमलाइट में नहीं है। जिसकी वजह से ऐसा लग रहा है कि अब एमएलडीएल तो पुराना
हो गया और इसके बारे में कोई बात नहीं कर रहा। बट साइलेंटली जो पूरा का पूरा फाउंडेशन बिल्ड हुआ है आज के एआई का वो
इन्हीं एमएलडीएल एल्गोरिदम्स के ऊपर बिल्ड हुआ है। तो अगर आप इसको इग्नोर करके डायरेक्टली मूव कर रहे हो इस तरफ एलएलएम
वाली तरफ तो आप बहुत बड़ी गलती करोगे। एंड दैट इज़ व्हाई मेरे रोड मैप में द फर्स्ट थिंग यू हैव टू लर्न आफ्टर कंप्लीटिंग द
प्रीरक्वज़िट्स इज़ मशीन लर्निंग। तो आई रियली होप मैं आपको कन्विंस कर पाया कि आपको मशीन लर्निंग क्यों सीखनी चाहिए। अब
नाउ दैट यू आर कन्विंस्ड। मैं आपको बताता हूं कि मशीन लर्निंग में आपको क्या-क्या पढ़ना है। सो मशीन लर्निंग में सबसे पहले
आपको पढ़ना पड़ता है मशीन लर्निंग के फंडामेंटल्स के बारे में। बाय फंडामेंटल्स आई मीन ऐसी चीजें जो सारी की सारी मशीन
लर्निंग एल्गोरििदम्स का बेस फॉर्म करती हैं। मैं आपको बताता हूं एक्सक्टली आपको क्या-क्या पढ़ना पड़ेगा। सबसे पहले आपको
ये समझना पड़ेगा कि मशीन लर्निंग एक्सैक्टली है क्या? आप मशीन लर्निंग को कंपेयर करते हो विथ अदर टेक्निक्स दैट
एक्सिस्ट इन एआई। आप उसको कंपेयर करते हो ट्रेडिशनल प्रोग्रामिंग से। एंड यू गेट एन आईडिया एंड ओवरव्यू कि मशीन लर्निंग
एक्सैक्टली है क्या? सिंपलेस्ट फॉर्म में। उसके बाद आप टाइप्स ऑफ मशीन लर्निंग पढ़ते हो जहां पे आप सुपरवाइज्ड मशीन लर्निंग,
अनसपरवाइज मशीन लर्निंग, सेमी सुपरवाइज मशीन लर्निंग, रीइंफोर्समेंट लर्निंग ये सारी चीजें क्या होती इनके बारे में पढ़ते
हो। बिकॉज़ ये ऐसे टर्म्स हैं जो थ्रूउ आपको इस रोड मैप में आगे देखने को मिलेंगे। एक बार ये समझ जाने के बाद आप
मशीन लर्निंग प्रॉब्लम फॉर्मुलेशन के ऊपर जाते हो कि एक गिवन प्रॉब्लम को मशीन लर्निंग कैसे फॉर्मुलेट करता है? क्या वो
रिग्रेशन प्रॉब्लम है या फिर क्लासिफिकेशन प्रॉब्लम है। अगर क्लासिफिकेशन प्रॉब्लम है तो क्या बाइनरी क्लासिफिकेशन प्रॉब्लम
है या मल्टी क्लास क्लासिफिकेशन प्रॉब्लम है। इसके अलावा और भी कुछ प्रॉब्लम फॉर्मुलेशनंस होती हैं। जैसे क्लस्टरिंग
हुआ या फिर एनॉर्मली डिडक्शन हुआ या रिकमेंडेशन प्रॉब्लम्स हुई। तो ये आप एक ओवरव्यू लेते हो इस स्टेज पे। उसके बाद आप
थोड़े प्रैक्टिकल एस्पेक्ट पे आ जाते हो और यहां पे आप सीखते हो कि कैसे आप एक बेसिक मॉडल बिल्ड करते हो मशीन लर्निंग में। हाउ
डू यू स्प्लिट योर डेटा? व्हाई डू यू क्रिएट ट्रेंड एंड वैलिडेशन सेट्स? डेटा लीकेज का कांसेप्ट क्या है? क्रॉस
वैलिडेशन का कांसेप्ट क्या है? ये सारी चीजें आप यहां पे थ्योरिटिकल लेवल पे कवर करते हो। उसके बाद आप मॉडल के अराउंड बात
करते हो। मॉडल के पैराटर्स क्या होते हैं? हाइपर पैरामीटर्स क्या होते हैं? हाइपोथेसिस स्पेस क्या है? डिसीजन
बाउंड्रीज क्यों एक्सिस्ट करती हैं? लीनियर वर्सेस नॉन लीनियर मॉडल्स क्या होते हैं? ये सारी चीजें आप यहां पे पढ़ते
हो। फिर यू आल्सो स्टडी अबाउट लॉस फंक्शनंस इवैल्यूएशन मैट्रिक्स जिससे आपको ये पता चलता है कि किसी मशीन लर्निंग मॉडल
का परफॉर्मेंस कैसा रहा। फिर देयर इज़ वनेंट फंडामेंटल टॉपिक जो पूरे मशीन लर्निंग में आपको देखने को मिलता है वो है
बायस वेरियंस स्टेट ऑफ जहां पे आप ओवर फिटिंग और अंडर फिटिंग का कांसेप्ट पढ़ते हो और उसके अराउंड की मैथमेटिक्स पढ़ते हो।
और फाइनली आप यहां पर एक एंड टू एंड ML वर्क फ्ल्लो बना के देखते हो जिससे ये जो भी कांसेप्ट्स आपने पढ़े हैं उनको आप
प्रैक्टिकली रियलाइज करने की कोशिश करते हो। तो ये हो गया फंडामेंटल्स जो आपको पढ़ना है मशीन लर्निंग में। फंडामेंटल्स के
बाद नेक्स्ट आता है फीचर इंजीनियरिंग। फीचर्स क्या होते हैं वो मैं आपको जल्दी से बता देता हूं। मशीन लर्निंग में आप
डेटा के साथ काम करते हो। डेटा में आपके पास इनपुट कॉलम्स होते हैं और आपका टारगेट एज एन आउटपुट कॉलम्स होते हैं। और आपका
काम होता है इन इनपुट और आउटपुट कॉलम्स के बीच में एक मैथमेटिकल रिलेशनशिप निकालने का। अब ये जो इनपुट कॉलम्स हैं इनको ही हम
फीचर्स बुलाते हैं। एंड द प्रॉब्लम इज़ कि रियल वर्ल्ड डेटा में जो फीचर्स आपको मिलते हैं उनमें बहुत तरह की परेशानियां
होती हैं। और आप डायरेक्टली उसके ऊपर मशीन लर्निंग एल्गोरिदम्स अप्लाई नहीं कर सकते। तो ये जो पूरा एक्ट है जहां पे आप अपने
गिवन डेटा में जो फीचर्स हैं उनको इंप्रूव करते हो इन ऑर्डर टू इंप्रूव द मॉडलिंग परफॉर्मेंस इसी को फीचर इंजीनियरिंग
बुलाया जाता है। अब मजेदार फैक्ट ये है कि जब लोग मशीन लर्निंग के बारे में सुनते हैं तो उनको ऐसा लगता है कि मोस्टली डेटा
साइंटिस्ट लोग ज्यादातर टाइम मॉडल बिल्डिंग कर रहे होते होंगे। बट इन रियलिटी किसी भी डेटा साइंटिस्ट से जब आप
बात करो तो उनका 70 टू 80% टाइम फीचर इंजीनियरिंग में जाता है। फीचर्स को मॉडलिंग के लिए सही बनाने में जाता है।
एंड दैट इज व्हाई दिस पर्टिकुलर टॉपिक इज वेरी वेरीेंट। तो मैं आपको एक बार बताता हूं इसमें क्या-क्या आपको पढ़ना होता है।
इसमें सबसे पहले आपको समझना होता है कि फीचर इंजीनियरिंग है क्या? ठीक है? उसके बाद आप डेटा को कैसे समझते हो? न्यूमेरिकल
डेटा, कैटेगोरिकल डेटा, ऑर्डिनल डेटा, टेक्सचुअल डेटा, टेंपोरल डेटा, कंटीन्यूअस और डिस्क्रीट वेरिएबल्स क्या होते हैं?
कार्डिनलिटी क्या होता है? फीचर का डिस्ट्रीब्यूशन कैसे समझा जाता है? ये सब चीजें आप समझते हो। उसके बाद आ जाती है
अलग-अलग फीचर इंजीनियरिंग टेक्निक्स। जैसे कि हाउ डू यू हैंडल मिसिंग वैल्यूस। जैसे बहुत सारे मशीन लर्निंग एल्गोरिदम्स हैं।
दे डोंट वर्क ऑन डेटा जहां पे मिसिंग वैल्यूज़ हैं। तो हाउ डू यू फिल देम? इसके लिए पहले आपको डेटा का डिस्ट्रीब्यूशन
समझना पड़ता है और उस डिस्ट्रीब्यूशन के हिसाब से आपको वैल्यूज़ फिल करनी पड़ती हैं। वेरी इंटरेस्टिंग पार्ट। उसके बाद आता है
एनकोडिंग कैटेगोरिकल वेरिएबल्स। सिंस मोस्टली जो मैथमेटिक जो मशीन लर्निंग एल्गोरिदम्स हैं दे आर मैथमेटिकल इन नेचर।
तो वो टेक्स्चुअल या नॉन न्यूमेरिकल डेटा के ऊपर काम नहीं कर पाते हैं। तो हाउ डू यू एनकोड देम इनू नंबर्स? ये एक बहुत
इंटरेस्टिंग चीज है। देन कम्स फीचर स्केलिंग। देयर आर सर्टेन मशीन लर्निंग एल्गोरिदम्स जो ऐसे फीचर्स के साथ अच्छे
रिजल्ट्स नहीं देते जहां पे दोनों फीचर्स के में जो स्केल का डिफरेंस है वो बहुत ज्यादा है। फॉर एग्जांपल वन फीचर इज़ एज।
सेकंड फीचर इज़ सैलरी। तो एज है जीरो से 80 के बीच में और सैलरी है थाउजेंड्स में लैक्स में। तो फिर उनको सेम स्केल पे कैसे
लाया जाए? देन हैंडलिंग आउटलाइयर्स। अ दिस इज अगेन अ वेरी इंटरेस्टिंग पार्ट जहां पे आप अपने डेटा में आउटलाइयर्स को निकालते
हो और उसको ट्रीट करते हो बिकॉज़ अगर आपके डेटा में आउट्लायर्स हुए तो फिर आपका एनालिसिस और आपका मॉडलिंग दोनों गलत जा
सकता है। फीचर ट्रांसफॉर्मेशन हाउ डू यू ट्रांसफॉर्म एकिस्टिंग फीचर्स? अ आपका कोई पर्टिकुलर फीचर अ लेट्स से लॉग नॉर्मल
डिस्ट्रीब्यूशन फॉलो करता है। हाउ डू यू ब्रिंग इट टू नॉर्मल डिस्ट्रीब्यूशन? इस तरह की चीजें। अह यू आल्सो लर्न हाउ टू
क्रिएट फीचर्स आउट ऑफ़ एक्सिज़िस्टिंग फीचर्स व्हिच इज़ अगेन वेरी इंटरेस्टिंग। अह हाउ डू यू प्रोसेस डेट एंड टाइम बेस्ड
फीचर्स? अ हाउ डू यू प्रोसेस टेक्सचुअल फीचर्स? इसके ऊपर भी काफी काम होता है। फीचर सेक्शन इज समथिंग जिसके ऊपर बहुत काम
होता है। एंड लास्ट में जब आप ये सारी टेक्निक सीख जाते हो, हाउ डू यू बिल्ड अ फीचर इंजीनियरिंग पाइपलाइन? दिस इज़
वेरीेंट बिकॉज़ ओवरऑल प्रोजेक्ट के स्ट्रक्चर में आपको एक फीचर इंजीनियरिंग पाइपलाइन बनानी होती है। तो उसके ऊपर काम
करना आप सीखते हो। एंड व्हाट आर द कॉमन पेटफॉल्स जो मोस्टली डेटा साइंटिस्ट लोग जहां पे फंस जाते हैं वो क्या है? ये सब
चीजें आप यहां पे पढ़ते हो। तो अगेन मैंने हर चीज घुस के नहीं बताई आपको। बट अगेन ये रोड मैप आपके पास है। एक बार जाओ और देखो
क्या-क्या टॉपिक्स यहां पे हैं। कोई पर्टिकुलर टॉपिक अगर आपको समझ में नहीं आ रहा है, यू कैन इजीली पेस्ट इट इनू चार्ज
जीपीटी एंड गेट अ सिंपलीफाइड एक्सप्लेनेशन। ठीक है? बट मैंने आपको एक ओवरव्यू दे दिया कि फाउंडेशंस के बाद आपको
फीचर इंजीनियरिंग के ऊपर फोकस करना होता है। नेक्स्ट आपको पढ़ना है मशीन लर्निंग का सबसेेंट एस्पेक्ट, सबसे इंटरेस्टिंग
एस्पेक्ट व्हिच इज़ मशीन लर्निंग एल्गोरिदम्स। सो यहां पे मैंने उन सारे एल्गोरििदम्स का नाम लिख दिया है जो आपको
पढ़ने हैं। ट्रस्ट मी व्हेन आई से दिस इसके बाहर आपको कुछ भी नहीं पढ़ना है। और मैं आपको साथ ही साथ ये भी बता दूंगा कि
कौन से एल्गोरिदम्स आपको अप फ्रंट पढ़ लेने चाहिए और कौन से एल्गोरिदम्स को आप बाद के लिए छोड़ सकते हो। ठीक है? तो यू
स्टार्ट योर जर्नी विद लीनियर मॉडल्स जहां पे आप लीनियर रिग्रेशन, मल्टीपल लीनियर रिग्रेशन, पॉलीनोमीयल रिग्रेशन इस तरह की
चीजें पढ़ते हो। यू आल्सो स्टडी अबाउट रेगुलराइजेशन वेयर यू स्टडी अबाउट रिच रिग्रेशन, लास्ट रिग्रेशन एंड इलास्टिक
नेट रिग्रेशन। तो ये एब्सोल्यूट बेसिक्स हैं। यहीं से आप मशीन लर्निंग एल्गोरिदम्स की पढ़ाई स्टार्ट करते हो। उसके बाद आता है
क्लासिफिकेशन एल्गोरिदम्स जहां पे आप लॉजिस्टिक रिग्रेशन पढ़ते हो। व्हिच इज़ जस्ट अ फ्लेवर ऑफ़ लीनियर रिग्रेशन इन द
डोमेन ऑफ़ क्लासिफिकेशन। के नियरेस्ट नेबर्स प्रोबेब्ली द ईज़िएस्ट मशीन लर्निंग एल्गोरिदम। नाइफ बेस्ड एंड उसके
वेरिएंट्स। वेरी इंटरेस्टिंग एल्गोरिदम प्रोबेबिलिटी बेस्ड। अ देन कम्स ट्री बेस्ड मॉडल्स जहां पे आप डिसीजन ट्री पढ़ते
हो। अह दिस इज़ लाइक द मदर ऑफ़ ऑल ट्री बेस्ड एल्गोरिदम्स। आगे आपको पढ़ना होता है रैंडम फॉरेस्ट व्हिच इज़ बेसिकली अ
कॉम्बिनेशन ऑफ़ मल्टीपल डिसीजन ट्रीज़ एंड एक्स्ट्रा ट्रीज़। ये आप बाद के लिए छोड़ सकते हो अगर कभी आगे जरूरत पड़े। अ
बूस्टिंग एल्गोरिदम्स इज़ आल्सो वेरीेंट। ये सबसे ज्यादा हाई परफॉर्मेंस एल्गोरिद्सम्स हैं मशीन लर्निंग में। तो
आपको ये तो बिल्कुल आने चाहिए। तो यू स्टार्ट विथ aटा बूस्ट जो कि अब उतना यूज़ नहीं होता है। बट स्टिल फंडामेंटल्स के
लिए आपको इसको पढ़ना चाहिए। ग्रेडियंट बूस्टिंग व्हिच इज़ लाइक अ वेरी गुड एल्गोरिदम और इसी के ऊपर आगे वाले
एल्गोरिदम्स बेस्ड हैं। XG बूस्ट मेरे हिसाब से द टॉप मशीन लर्निंग एल्गोरिदम। लाइट GBM अगेन अ वेरी स्ट्रांग कंटेंडर
एंड कैट बूस्ट फॉर कैटेगोरिकल डेटा। ये आपको तीनों पढ़ने चाहिए अप्रट। ठीक है? देन कम्स सपोर्ट वेक्टर मशीनंस। वेरी पावरफुल
एल्गोरिदम। सर्टेन सिनेरियोस में बहुत अच्छे रिजल्ट्स देता है। फिर आप आ जाते हो अनसपरवाइज लर्निंग एल्गोरिदम्स की तरफ।
अभी तक ऊपर वाले सारे सुपरवाइज थे। तो यहां पे आप पढ़ते हो के मींस फॉर क्लस्टरिंग, हायरार्कल क्लस्टरिंग एंड
डीवी स्कैन। ये तीनों आपको पढ़ने चाहिए। देन कम्स डायमेंशनलिटी रिडक्शन जिनको आप यूज़ करते हो फीचर्स को घटाने के लिए। तो
यहां पे पीसीए आपको पढ़ना चाहिए वेरीेंट इंटरव्यू के पॉइंट ऑफ व्यू से भी। कर्नल पीसी आप फिलहाल के लिए छोड़ सकते हो। अगर
जरूरत पड़े किसी इंटरव्यू में आपको लगता है तो पढ़ लो। एलडीए भी फिलहाल के लिए आप छोड़ सकते हो। टीसनी आप थ्योरेटिकल लेवल पे कवर
कर सकते हो। मैथमेटिकली काफी डेंस है। काफी डेप्थ है इस एल्गोरिदम में। तो आई वुड अवॉयड इट अप फ्रंट। आगे अगर आपके पास
टाइम हो तो आप इसको यूज़ कर सकते हो। बट इसको आप इतना पढ़ लेना कि आप इसकी हेल्प से डेटा विजुअलाइजेशन कर पाओ लोअर डायमेंशंस
में। उसके बाद एनॉर्मली डिटेक्शन जिसमें आप आइसोलेशन फॉरेस्ट, वन क्लास एसडीएम एंड लोकल आउटलाइयर फैक्टर पढ़ते हो। ये तीनों
ही आप छोड़ सकते हो। फ्यूचर में अगर आप कभी एनॉमली डिटेक्शन के ऊपर प्रोजेक्ट कर रहे हो तब आप इन एल्गोरिथम्स को पढ़ो।
प्रोबेबलिस्टिक मॉडल्स में आपको गशन मिक्सचर मॉडल्स पढ़ना है। व्हिच इज़ अगेन अ वेरी गुड एल्गोरिदम। वेरी इंटरेस्टिंग
एल्गोरिथम बट इसको ऑफर पढ़ने की जरूरत नहीं है। आगे जब जरूरत पड़े आप इसको पढ़ सकते हो। एंड लास्टली रिकमेंडेशन एंड
रैंकिंग में मैट्रिक्स फैक्टराइजेशन एंड सिंगुलर वैल्यू डीकंपोजीशन ये दोनों भी आप फिलहाल के लिए छोड़ दो। जब आगे कभी आप
रिकमेंडेशन बेस्ड कोई प्रोजेक्ट बना रहे हो या कोई रिकमेंडेशन इंजन बना रहे हो तो वहां पे आपको इन दोनों की पढ़ाई करनी पड़
सकती है और तभी आप इसको पढ़ो। ठीक है? तो दिस इज़ द लिस्ट ऑफ़ ऑल द मशीन लर्निंग एल्गोरिदम्स दैट यू हैव टू स्टडी। और
ट्रस्ट मी व्हेन आई से इन सबको मैथमेटिकली अच्छे से पढ़ने में आपको 2 से 2 1/2 महीने लग जाएंगे। इतना टाइम लग सकता है इसमें। द
नेक्स्ट थिंग दैट यू हैव टू लर्न इन मशीन लर्निंग इज एडवांस्ड कांसेप्ट्स। सो अभी तक जो भी हमने सीखा इट वास फेयरली स्ट्रेट
फॉरवर्ड बिगिनर फ्रेंडली बट देयर आर सर्टेन थिंग्स जो आपको आनी चाहिए इफ यू वांट टू बिल्ड नेक्स्ट लेवल मॉडल्स जो
प्रोडक्शन रेडी सिस्टम्स का पार्ट बनते हैं। अब अच्छी चीज ये है कि अगर आप इस पूरे सेक्शन को शुरू में कवर नहीं भी करते
हो तो चलेगा। आप बेसिक लेवल मॉडल्स बना पाओगे और उसके अराउंड सिस्टम्स भी बिल्ड कर पाओगे। बट जब आप इंटरव्यू स्टेजेस में
जा रहे हो इस रोड मैप को कंक्लूड करने जा रहे हो। आई वुड रिकमेंड आप डेफिनेटली वापस आके इस सेक्शन को कवर करो। क्या-क्या आता
है इस सेक्शन में मैं आपको बताता हूं। तो यहां पे सबसे पहले आपको हाइपर पैरामीटर ट्यूनिंग सीखना पड़ेगा। व्हाट इज द राइट
सेटिंग फॉर अ मशीन लर्निंग एल्गोरिदम जिसप वो बेस्ट आउटपुट दे रहा है, बेस्ट परफॉर्मेंस दे रहा है वो खोजना। इसमें
ग्रिड सर्च रैंडम सर्च तो बहुत ही ईजी टेक्निक्स है। ये आपको शुरू में पढ़ लेना चाहिए। बेज़ ऑप्टिमाइजेशन समथिंग जो आपको
बाद में डेफिनेटली पढ़ना चाहिए। थोड़ा कॉम्प्लेक्स है इसका मैथमेटिक्स। बट देयर आर टूल्स अवेलेबल जिसकी हेल्प से आप बहुत
आसानी से ये चीजें कर सकते हो। ठीक है? अ देन कम्स मॉडल इवैल्यूएशन एंड वैलिडेशन। क्रॉस वैलिडेशन स्ट्रेटजी, स्ट्रैटिफाइड
सैंपलिंग, टाइम सीरीज डेटा के ऊपर कैसे आप क्रॉस वैलिडेशन परफॉर्म करते हो ये सारी चीजें आपको पता होनी चाहिए। अ इंबैलेंस
डेटा को कैसे हैंडल करना है? कई बार ऐसा होता है क्लासिफिकेशन प्रॉब्लम में कि एक क्लास डोमिनेट कर जाता है दूसरे क्लास को
जिसकी वजह से मशीन लर्निंग एल्गोरिथ्म्स का जो आउटपुट है वो रिलायबल नहीं रहता है। तो उसको रिलायबल कैसे बनाया जाए? इसके लिए
बहुत तरह की टेक्निक्स एक्सिस्ट करती हैं। ये आपको पता होना चाहिए। उसके बाद ऑनसमल लर्निंग जो आपने पढ़ा मशीन लर्निंग
एल्गोरििदम्स में उसमें कुछ और एडिशनल टेक्निक्स होती हैं। ये खुद में एल्गोरििदम्स नहीं है बट एकिस्टिंग
एल्गोरिदम्स को मिक्स एंड मैच करने का तरीका है। तो यहां पे आप स्टकिंग, ब्लेंडिंग, वोटिंग, क्लासिफायर जैसी चीजें
पढ़ सकते हो। देन कम्स अ वेरीेंट थिंग इट्स कॉल्ड इंटरप्रेटेबिलिटी एंड एक्सप्लेनेबिलिटी। बेसिकली आप बिज़नेस
सिनेरियो में समझा पाओ कि आपके मशीन लर्निंग मॉडल ने कोई डिसीजन क्यों लिया। तो यहां पे आप मॉडल इंटरप्रेटेबिलिटी एंड
एक्सप्लेनेबिलिटी पढ़ते हो। देयर आर टूल्स लाइक शार्प एंड लाइम जो आपको कवर करने चाहिए। अगेन थोड़ा एडवांस स्टेजेस में ही
कवर कर रहे हो। आप इसको शुरू में कर भी लोगे तो हो सकता है कि जब आप आगे बढ़ो रोड मैप में तो इंटरव्यू स्टेजेस तक आप इसको
भूल जाओ तो इसको आप बाद के लिए रख सकते हो। मॉडल सिलेक्शन एंड कंपैरिजन इज़ आल्सो वैरीेंट। हाउ डू यू डिसाइड कि मल्टीपल
मॉडल्स जो आपने अप्लाई किए हैं एक डेटा पे किस चीज के बेसिस पे आप फाइनलाइज़ करते हो कि आउट ऑफ ऑल द पॉसिबल मॉडल्स आई विल बी
यूजिंग दिस पर्टिकुलर मॉडल इन प्रोडक्शन? ये एक बहुत डिटेल्ड स्टडी होती है। इसके बारे में भी आपको काम करना चाहिए। एंड
लास्टली हाउ डू यू स्केल मशीन लर्निंग टू ह्यूज डेटा सेट्स। ठीक है? तो बड़े डेटा सेट्स के ऊपर ट्रेनिंग कैसे होती है?
ऑनलाइन लर्निंग वाली ट्रेनिंग कैसे होती है? हाउ डू यू परफॉर्म डिस्ट्रीब्यूटेड ट्रेनिंग एंड मेमोरी वर्सेस कंप्यूटर
ट्रेड ऑक्सक्स? ये एक काइंड ऑफ मशीन लर्निंग सिस्टम डिजाइन का पार्ट है। बट इंटरव्यूज में ये बहुत पूछे जाते हैं। तो
इसके ऊपर भी आपको थोड़ा ध्यान देना पड़ेगा। ठीक है? तो ये हो गया आपका एडवांस सेक्शन मशीन लर्निंग का। एंड फाइनली ये सारी
चीजें सीखने के बाद लास्ट में आई वुड रिकमेंड दैट यू डू सम एंड टू एंड प्रोजेक्ट्स। द आईडिया बिहाइंड दिस
प्रोजेक्ट इज नॉट टू बिल्ड प्रोडक्शन ग्रेड प्रोजेक्ट्स। मतलब यह ऐसे प्रोजेक्ट्स नहीं है जो आप अपने रेज्यूुमे
में अटैच करके इंटरव्यूअर को दिखाओगे। ये प्रोजेक्ट्स मैं सिर्फ इसलिए आपको रिकमेंड कर रहा हूं सो दैट आपने अभी तक जो भी पढ़ा
मशीन लर्निंग में उसकी अंडरस्टैंडिंग को ये और कंक्रीट बनाएंगे आपके दिमाग में। ठीक है? तो यहां पे मैंने कुछ प्रोजेक्ट्स
लिस्ट डाउन कर दिए हैं कैटेगरीज़ के हिसाब से जो कि बहुत ही फेमस एंड कॉमन प्रोजेक्ट्स हैं जो आपको YouTube पे मिल
जाएंगे इंक्लूडिंग माय चैनल। ठीक है? तो वी हैव रिकमेंडेशन सिस्टम एज वन कैटेगरी। वी हैव प्रेडिक्शन एंड फॉरकास्टिंग अनदर
कैटेगरी क्लासिफिकेशन सिस्टम्स, कंप्यूटर विज़न, एनएलपी बेस्ड सिस्टम्स, एनॉमली एंड रिस्क डिटेक्शन, कस्टमर एंड बिज़नेस
इंटेलिजेंस, हेल्थ केयर एंड सोशल इंपैक्ट। और फिर कुछ क्लासिक इंटरव्यू प्रोजेक्ट्स जिनके बारे में इंटरव्यूज में सवाल पूछ
लिए जाते हैं। तो इनमें से अगर आप दो-तीन भी बना लो शुरू में तो इट वुड बी अ वेरी गुड स्टार्ट। और मैं फिर से एम्फसाइज कर
रहा हूं इस बात पे कि यह आपके फाइनल पोर्टफोलियो प्रोजेक्ट्स नहीं है। यहां पर हम एमलॉप्स जैसी टेक्निक्स इंप्लीमेंट
नहीं कर रहे हैं। यहां पे हम सिर्फ मॉडल बिल्डिंग कर रहे हैं। उसका परफॉर्मेंस इवैलुएट कर रहे हैं और मॉडल को इंप्रूव कर
रहे हैं। ठीक है? तो ये आपको करना चाहिए बट इसको इंटरव्यूअर के सामने दिखाने की जरूरत नहीं है। दिस इज़ फॉर योर ओन
अंडरस्टैंडिंग। अब मशीन लर्निंग करने के बाद अगर आप जनरली दूसरे रोड मैप्स को फॉलो करोगे तो वहां पे आपको सजेस्ट किया जाएगा
कि नेक्स्ट चीज जो आप सीखो वो होनी चाहिए डीप लर्निंग। बट मेरा रोड मैप इस मामले में थोड़ा अलग है। मैं मशीन लर्निंग के
बाद आपको एक और एडिशनल चीज सीखने की सलाह दूंगा। क्या है वो? मैं आपको बताता हूं। बट उसके पहले आपको ये समझना पड़ेगा कि
मशीन लर्निंग और डीप लर्निंग में ट्रूली डिफरेंस क्या है? सो मशीन लर्निंग इज अ सेट ऑफ़ टेक्निक्स एंड एल्गोरिदम्स
जिन्होंने टेबुलर डेटा के ऊपर बहुत अच्छा परफॉर्मेंस देना शुरू किया। एंड दैट इज व्हाई आज की डेट में भी नैरो टास्क में
जहां भी टेबुलर डेटा होता है वहां पर मशीन लर्निंग टेक्निक्स को ही इंप्लीमेंट किया जाता है। बट टेबुलर डेटा के अलावा भी देयर
आर सर्टेन डेटा मोटलिटीज़ जिनको कॉनकर करना जरूरी है रियल वर्ल्ड में। जैसे कि टेक्स्ट बहुत सारी रियल वर्ल्ड प्रॉब्लम्स
टेक्सचुअल डेटा पे बेस्ड होती हैं। वन मोर डेटा मोटलिटी जिसको कॉनकर करना बहुत जरूरी है टू सॉल्व मेनी रियल वर्ल्ड प्रॉब्लम्स
इज़ इमेज डेटा। इमेज एंड वीडियो डेटा के ऊपर भी बहुत सारे रियल वर्ल्ड प्रॉब्लम्स फॉर्मुलेट होते हैं। एंड द थर्ड वन इज
टेंपोरल डेटा। टाइम सीरीज बेस्ड डेटा जो फॉरकास्टिंग के लिए यूज किया जाता है। अब अनफॉर्चूनेटली ट्रेडिशनल मशीन लर्निंग इन
तीनों डेटा मोटलिटीज में इट वाज़ नॉट दैट ग्रेट। एंड दैट इज व्हाई जब डीप लर्निंग आया तो यह रियलाइज किया गया कि डीप
लर्निंग का जो इफेक्ट है वो इन तीन डेटा मॉडेलिटीज के ऊपर मशीन लर्निंग के कंपैरिजन में बहुत ज्यादा और बहुत पावरफुल
है। व्हिच बेसिकली मीन्स कि अगर आप इन तीन नए डेटा मॉडेलिटीज़ पे मशीन लर्निंग टेक्निक्स लगाओ वर्सेस डीप लर्निंग
टेक्निक्स लगाओ। गिवन आपके पास इनफ डेटा है। मोस्ट ऑफ़ द टाइम्स डीप लर्निंग मॉडल्स विल बीट मशीन लर्निंग मॉडल्स। बट एट द सेम
टाइम अगर आप टेबुलर डेटा के ऊपर काम करो तो टेबुलर डेटा पे आपको मशीन लर्निंग मॉडल्स जनरली गिव्स बेटर रिजल्ट्स देन डीप
लर्निंग मॉडल्स बिकॉज़ टेबुलर डेटा ऐसे भी थोड़ा कम होता है क्वांटिटी में और मशीन लर्निंग एक्सेल्स इन दोज़ सिनेरियोस तो
बहुत क्लियरली क्या हुआ ना कि दोनों ही टेक्निक्स का मार्केट बन गया इफ इट इज़ यूजुअल टेबुलर डेटा गो फॉर मशीन लर्निंग
टेक्निक्स इफ यू हैव डिफरेंट काइंड ऑफ़ डेटा मोटलिटीज़ टेक्सचुअल डेटा इमेज बेस्ड डेटा और टेंपोरल डेटा तो वहां पर डीप
लर्निंग काइंड ऑफ वर्चस्व बन गया तो अब मैं बस यह चाहता हूं कि डीप लर्निंग को पढ़ने के पहले आप इन तीनों डेटा मोटलिटीज
को भी थोड़ा सा एक्सपीरियंस करो। तो दिस इज वेयर हमारे रोड मैप में एक छोटा सा ब्रांचिंग अकर कर रहा है और मैं चाहता हूं
कि आप इन तीनों में से एटलीस्ट किसी एक डेटा मॉडलिटी को या उसके फंडामेंटल्स को समझो। ठीक है? अगर आपके पास टाइम है तो आप
दो भी सीख सकते हो। तीनों सीखना मैं रिकमेंड नहीं करूंगा। अगर आपके पास कोई ओपिनियन नहीं है तो मैं आपको सेलेक्ट करने
में हेल्प कर सकता हूं। अगर आपको जॉब पॉइंट ऑफ व्यू से देखना है तो सबसे ज्यादा जॉब्स आपको एनएलपी के डोमेन में मिलेंगे।
व्हिच इज टेक्सचुअल डेटा। ये जो पूरा एलएलएम का सिनेरियो आ गया है और ये पूरा जो एक एआई रिवॉल्यूशन आया है 2022 के बाद
से ये मोस्टली टेक्सचुअल डेटा पे बेस्ड है। ऐसा नहीं है कि इमेज डेटा पे काम नहीं हो रहा है। यू कैन सी एलएलएम्स इमेजेस भी
जनरेट कर रहे हैं। बट प्राइमरी जो यूज़ केस सॉल्व हुआ वो टेक्सचुअल डेटा के अराउंड हुआ। तो आप अगर टेक्सचुअल डेटा पे सबसे
ज्यादा फोकस करोगे तो आप अपने चांसेस भी बढ़ाओगे। सेकंड इफ यू वांट और रादर इफ यू आर इंटरेस्टेड तो आप कंप्यूटर विज़न एज एन
इमेज डेटा के डोमेन में भी काम कर सकते हो। तो दिस कैन बी योर वन एंड टू डोमेनस। ठीक है? एंड इफ यू आर वेरी टारगेटेड
टुवर्ड्स फाइनेंस तो फिर यू शुड गो विथ टाइम सीरीज वाला डेटा एपोरल डेटा। ठीक है? तो माय रिकमेंडेशन वुड बी इस पॉइंट पे जब
आप मशीन लर्निंग सीख के आए हो तो इन तीनों में से किसी एक पे फोकस करो और उसको अच्छे से सीखो और फिर आप आगे बढ़ो डीप लर्निंग
में। बिकॉज़ डीप लर्निंग में इन चीजों का फंडामेंटल्स यूज़ किया जाएगा। तो वहां पर सडनली से आपको कुछ नया ना लगे इसलिए मैं
चाह रहा हूं कि आप यहीं पे इन चीजों को कवर अप कर लो। एंड आइडियली आगे चलके इन तीन में से दो चीजें आप पढ़ के रखो। इट
वुड बी ग्रेट। जैसे फॉर मी आई कैन टेल यू माय टॉप टू वर एनएलपी एंड कंप्यूटर विज़न। बट मैंने और बहुत सारे लोगों को देखा है
जो फाइनेंस में है। दे डू अ लॉट ऑफ़ वर्क अराउंड टेंपोरल डेटा टाइम सीरीज के अराउंड। ठीक है? तो आइली होप मैं ये सबसे
पहले क्लेरिफाई कर पाया। अब मैं आपको बताता हूं कि इन तीनों डेटा मोटलिटीज़ में फंडामेंटल्स क्लियर करने के लिए आपको
एक्जेक्टली क्या-क्या पढ़ना पड़ेगा। वी विल स्टार्ट विद टेक्सचुअल डेटा, एनएलपी। सो एनएलपी में आपको चार मेजर चीजों के ऊपर
फोकस करना होता है। टेक्स्ट प्रीपिंग, टेक्स्ट रिप्रेजेंटेशन, स्टडिंग ट्रेडिशनल मॉडल्स एंड बिल्डिंग अ
एनएलपी पाइपलाइन। मैं चारों आपके सामने एक्सप्लेन करता हूं एक-एक करके। सबसे पहले आता है टेक्स्ट प्रीपिंग। सो यहां पे आप
क्या करते हो कि आपके पास जो डेटा सेट होता है वो टेक्सचुअल डेटा सेट होता है। मतलब उसमें टेक्स्ट होता है। बट
अनफॉर्चूनेटली प्रॉब्लम क्या है कि जो रियल वर्ल्ड टेक्स्ट होते हैं ना उसमें बहुत तरह का नॉइज़ होता है। बहुत तरह की
गड़बड़ होती है। उसको आप डायरेक्टली एज़ इट इज़ मशीन लर्निंग मॉडल के पास या डीप लर्निंग मॉडल के पास नहीं भेज सकते। तो
आपको क्या करना पड़ता है? बहुत तरह का प्री प्रोसेसिंग करना पड़ता है। तो यहां पे यू हैव टू लर्न ऑल दोज़ प्री प्रोसेसिंग
टेक्निक्स। सो दैट आप किसी भी तरह के डेटा को लेके आओ और उसको क्लीन कर पाओ। ठीक है? क्या-क्या यहां पे किया जाता है? टेक्स्ट
नॉर्मलाइजेशन किया जाता है। लोअर केसिंग किया जाता है। यूनिकोड नॉर्मलाइजेशन किया जाता है। पंकुएशन हटाने की टेक्निक्स हैं।
नंबर्स को हटाने की टेक्निक्स हैं। स्पेशल कैरेक्टर्स को हटाने की टेक्निक है। वाइट स्पसेस को हैंडल करने की टेक्निक्स हैं।
स्टॉपवर्ड्स के साथ कैसे डील किया जाए? कॉन्ट्रैक्शंस को कैसे हैंडल किया जाए? टोकनाइजेशन कैसे परफॉर्म किया जाए?
स्टेमिंग एंड लेमिटाइजेशन कैसे किया जाए? इमोजीस को कैसे हैंडल करना है? यूआरएल्स को कैसे हैंडल करना है? स्पेलिंग वेरिएशंस
को कैसे हैंडल करना है? ये सब कुछ आपको यहां पे सीखना होता है। एंड ट्रस्ट मी यहां पे आप बहुत टाइम स्पेंड करते हो। सो
दिस इज़ जस्ट लाइक फीचर इंजीनियरिंग जो हमने मशीन लर्निंग में पढ़ा। यहां पे ये उससे भी थोड़ा ज्यादा डिफिकल्ट हो जाता है
बिकॉज़ यू आर डीलिंग विद टेक्स्ट। वंस यू आर डन विद क्लीनिंग योर टेक्सचुअल डेटा। द नेक्स्ट प्रॉब्लम दैट यू हैव टू सॉल्व इज़
ऑफ टेक्स्ट रिप्रेजेंटेशन। सो ये शायद आपको ऑलरेडी पता हो गया होगा कि मशीन लर्निंग मॉडल्स, डीप लर्निंग मॉडल्स आर
बेसिकली मैथमेटिकल मॉडल्स एंड दे डोंट अंडरस्टैंड टेक्स्ट। तो आपको टेक्सचुअल डेटा को किसी तरीके से नंबर्स के फॉर्म
में रिप्रेजेंट करना पड़ता है। और ऐसा करने के लिए बहुत तरह की टेक्निक्स अवेलेबल हैं। सबके अपने प्रोस एंड क्स
हैं। बट एज अ स्टूडेंट आपको सब कुछ पढ़ना पड़ेगा। ठीक है? तो देयर आर टेक्निक्स सच एज बैग ऑफ वर्ड्स, एन ग्राम्स, टीएफ, आई
डीएफ, अ बाइनरी वेक्टराइजेशन, हैशिंग टेक्निक, हाउ डू यू क्रिएट वोकैबलरी? व्हाट आर स्पार्स एंड डेंस रिप्रेजेंटेशन?
तो ये सब कुछ आपको यहां पे पढ़ना पड़ता है और ये काइंड ऑफ अभी आधा ही है। ये तो बहुत बेसिक लेवल टेक्स्ट रिप्रेजेंटेशन
टेक्निक्स है। डीप लर्निंग में और भी ज्यादा आपको पढ़ना पड़ता है। एंबेडिटिंग्स एंड ऑल। तो दिस इज़ आल्सो वेरीेंट। वंस यू
नो हाउ टू क्लीन द टेक्स्ट एंड यू आल्सो नो हाउ टू रिप्रेजेंट इट इन द फॉर्म ऑफ़ नंबर्स। देन कम्स द लास्ट स्टेज व्हेयर यू
सेंड योर टेक्सचुअल डेटा टू अ मशीन लर्निंग मॉडल और अ डीप लर्निंग मॉडल। बट सिंस अभी हमने डीप लर्निंग नहीं पढ़ा है।
तो इस पॉइंट पे आप क्या कर सकते हो कि आप मशीन लर्निंग मॉडल्स के साथ काम कर सकते हो। तो नाइफ बेस इज वन एल्गोरिदम जो
टेक्सचुअल डेटा के साथ बहुत अच्छा काम करता है। बट यू कैन आल्सो यूज़ लॉजिस्टिक रिग्रेशन एंड सपोर्ट वेक्टर मशीनंस एंड
जस्ट लाइक अदर प्रॉब्लम्स प्रॉब्लम स्टेटमेंट्स बूस्टिंग एल्गोरिदम्स यहां पे भी कई बार अच्छा रिजल्ट दे देते हैं। तो
आप ये सारी चीजें ट्राई आउट कर सकते हो। एक बार जब आप ये तीनों चीजें कर लो उसके बाद द लास्ट थिंग दैट यू आर लेफ्ट विद इज़
बिल्डिंग अ कंप्लीट एनएलपी पाइपलाइन जो एंड टू एंड पूरी चीज को सॉल्व करके देगा। तो यू नो यू अंडरस्टैंड हाउ यू फॉर्मुलेट
अ प्रॉब्लम इन एनएलपी हाउ यू डू टेक्स्ट डेटा कलेक्शन कैसे ट्रेन टेस्ट स्प्लिट किया जाता है कैसे फीचर एक्सट्रैक्शन किया
जाता है कैसे मॉडल ट्रेनिंग इवैल्यूएशन किया जाता है कैसे इनफेंस पाइपलाइन सेट की जाती है अनसीन वर्ड्स को कैसे हैंडल किया
जाता है हाउ डू यू रिप्रोड्यूस पाइपलाइन इन प्रोडक्शन और हाउ डू यू अवॉइड डेटा लीकेज दीज़ आर समेंट कांसेप्ट्स जो आपको
पढ़ने चाहिए बेसिक आईडिया इज़ कैन यू बिल्ड अ एंड टू एंड एनएलपी पाइपलाइन यही मेन आईडिया है ठीक है तो इतना कुछ आपको पढ़ना
है एंड दिस इज़ नॉट एवरीथिंग इन एनएलपी दिस इज़ जस्ट द फाउंडेशन अगर अगर आप इतना पढ़ लोगे तो गोइंग फॉरवर्ड जब आप डीप लर्निंग
में दोबारा यही कांसेप्ट्स पढ़ोगे तो यू विल फील एट होम। आपको लगेगा हां इनमें काफी चीजें मुझे ऑलरेडी समझ में आती है।
तो आपको डर कम लगेगा। यही रीज़न है इस पूरे सेक्शन का। ये पूरी चीज मैंने बनाई इसीलिए सो दैट आगे चलके जब आप इनके ऊपर दोबारा
काम करो आपको ऐसा लगे कि चलो यार मेरे फंडामेंटल्स तो क्लियर है। ठीक है? तो आईली होप मैं आपको एनएलपी में समझा पाया
कि क्या-क्या पढ़ना है। अब बात करते हैं अगले डेटा मोटलिटी की। व्हिच इज़ इमेज बेस्ड डेटा। कंप्यूटर विज़न। एनएलपी की ही
तरह कंप्यूटर विज़न में भी आपको चार मेजर चीजें कवर करनी होती हैं। उसमें से सबसे पहला है इमेज बेसिक्स। जहां पे आप ये
सीखते हो कि एट अ वेरी फाउंडेशन लेवल एक इमेज होता क्या है और आप उसके ऊपर किस तरह के बेसिक ऑपरेशंस अप्लाई कर सकते हो। सो
यहां पे आप सीखते हो कि इमेज क्या होता है? कैसे आप उसको रीड कर सकते हो? उसके ऊपर राइट कर सकते हो विथ द हेल्प ऑफ
लाइब्रेरीज लाइक ओपन सीवी? हाउ डू यू कन्वर्ट एन इमेज टू ग्रे स्केल? कैसे आप कलर स्पेस कन्वर्शन कर सकते हो? हाउ डू यू
रीसाइज इमेजज़? हाउ डू यू नॉर्मलाइज योर इमेज? हाउ डू यू पुट थ्रेशहोल्ड? ये सारे बेसिक ऑपरेशंस आप करना सीखते हो। ठीक है?
उसके बाद सेकंड जो आपको चीज सीखनी होती है वो होता है फीचर डिटेक्शन। इन अ गिवन इमेज हाउ डू यू एक्सट्रैक्ट फीचर्स जिसके ऊपर
आप मॉडल्स बिल्ड कर पाओ। जैसे कि हाउ डू यू डिटेक्ट एजेस? बिकॉज़ एजेस से ही समझ में आता है कि कोई ऑब्जेक्ट प्रेजेंट है
आपके इमेज में। तो किसी भी तरह का इमेज क्लासिफिकेशन या इमेज सेगमेंटेशन करने के लिए एज डिटेक्शन इज़ वेरी इंपॉर्टेंट। तो
देयर आर डिफरेंट-डिफरेंट अह अह एल्गोरिदम्स जो बहुत सालों से अह यूज़ किए जा रहे हैं कंप्यूटर विज़न में, वह आपको
यहां पे पढ़ने पड़ते हैं। हाउ डू यू डिटेक्ट कॉर्नर एंड कीप पॉइंट डिटेक्शन? हाउ डू यू एक्सट्रैक्ट फीचर्स आउट ऑफ एन इमेज? ये भी
एक बहुत इंपॉर्टेंट टॉपिक है। तो ये सारी चीजें आप पढ़ते हो। ठीक है? एक बार जब आप फीचर डिटेक्ट करना सीख जाते हो देन यू मूव
ऑन टू थोड़ा और सीरियस लेवल इमेज ट्रांसफॉर्मेशंस? जैसे कि हाउ डू यू परफॉर्म ज्योमेट्रिक ट्रांसफॉर्मेशंस? हाउ
डू यू स्केल एन इमेज, हाउ डू रोटेट एन इमेज? उसके बाद हाउ डू यू ब्लर एन इमेज? मॉर्फोलॉजिकल ऑपरेशंस होते हैं आपके और
इंटेंसिटी ट्रांसफॉर्मेशन बेस्ड आपके कुछ ऑपरेशंस होते हैं। तो दीज़ आर लाइक डिफरेंट-डिफरेंट ऑपरेशंस जिनकी हेल्प से
आप अपने इमेज बेस्ड डेटा को अलग-अलग पर्सपेक्टिव से समझ पाते हो, देख पाते हो, मॉडल को बता पाते हो। ठीक है? और ये सारे
फंडामेंटल सीखने के बाद आता है सबसेेंट स्टेज जहां पे आप एक एंड टू एंड कंप्यूटर विज़न पाइपलाइन बनाते हो, प्रोजेक्ट्स
बिल्ड करते हो। ठीक है? तो यहां पे यू स्टार्ट विद इमेज एक्विजिशन एंड इनपुट जहां पे आप इमेज को लोड कर रहे हो, इमेज
को रीसाइज़ कर रहे हो, कलर स्पेस कन्वर्ज़ कर रहे हो। देन यू अप्लाई सम सॉर्ट ऑफ प्री प्रोसेसिंग। इफ देयर इज नॉइस यू डू
नॉइस रिडक्शन, यू परफॉर्म नॉर्मलाइजेशन, थ्रेशहोल्डिंग देन यू एक्सट्रैक्ट फीचर्स जो आपने टेक्निक्स थोड़ी देर पहले देखी।
उसके बाद यू गो ऑन टू डू फीचर रिप्रेजेंटेशन। यहां पे भी टेक्सचुअल डेटा की तरह यू हैव टू डू सम काइंड ऑफ फीचर
रिप्रेजेंटेशन। एंड लास्ट में जब आपके पास आपके फीचर्स रेडी हैं। देन यू अप्लाई मशीन लर्निंग मॉडल्स। तो कौन-कौन से मॉडल्स
यहां पे आप अप्लाई कर सकते हो? यू कैन अप्लाई लीनियर मॉडल्स। यू कैन अप्लाई एसवीएम। एसवीएम काफी यूज़ होता है इमेज
बेस्ड डेटा के ऊपर। यू कैन आल्सो अप्लाई डिस्टेंस बेस मॉडल्स लाइक के नियरेस्ट नेबर एंड हमेशा की तरह आप यहां पे ट्री
बेस मॉडल भी अप्लाई कर सकते हो। यहां पे गशन मिक्सचर मॉडल्स भी काफी यूज़ किए जाते हैं। तो ये कुछ ऐसे एल्गोरिदम्स हैं जिनकी
हेल्प से आप कंप्यूटर विज़न में प्रॉब्लम सॉल्विंग कर सकते हो। तो दिस इज़ ऑल दैट यू हैव टू लर्न बिफोर डाइविंग इंटू डीप
लर्निंग। ठीक है? ये सब अगर आप सीख के वहां जाओगे तो आप डीप लर्निंग की बहुत सारी जो पावरफुल टेक्निक्स हैं कंप्यूटर
विज़न के डोमेन में उनको सीखने में आपको परेशानी नहीं होगी। नाउ लेट्स मूव ऑन टू द थर्ड डेटा मोटलिटी वि इज टाइम सीरीज या
फिर टेंपोरल डेटा। अब यू माइट आर्ग्यू कि टेंपोरल डेटा भी तो टेबुलर डेटा ही होता है ना। तो इसको अलग मोटलिटी क्यों बोल रहे
हैं? इसको अलग मोटलिटी सिर्फ एक सॉलिड रीज़न की वजह से बोल रहे हैं। और वो ये है कि यहां पे टाइम का कांसेप्ट होता है।
यहां पे ऑर्डर का कांसेप्ट होता है। नॉर्मल टेबुलर डेटा में आप शफलिंग भी कर दो तो डेटा सेट में कोई चेंजेस नहीं
आएंगे। आप उसको मॉडल के पास भेजो परफॉर्मेंस सिमिलर ही रहेगा। बट यहां पे यू कैन नॉट शफल द डेटा। वो ऑर्डरिंग मैटर
करता है। तो दैट इज व्हाई इसको एक अलग मोटलिटी की तरह ट्रीट किया जाता है। ये खुद में एक बहुत बड़ा डोमेन है। ठीक है? तो
टाइम सीरीज फॉरकास्टिंग में भी वी कैन रफली डिवाइड द एंटायर सिलेबस इंटू फोर पार्ट्स। द फर्स्ट वन इज़ ऑब्वियसली टाइम
सीरीज एनालिसिस। यहां पे आप कोई भी फॉरकास्टिंग नहीं करते। यहां पे आपका सिंगल गोल है टू अंडरस्टैंड टेंपोरल डेटा।
ठीक है? एंड हाउ टू डू एनालिसिस ऑन टेंपोरल डेटा। तो यहां पे आप फंडामेंटल सीखते हो लाइक व्हाट इज़ टाइम सीरीज डेटा?
टाइम इंडेक्स क्या है? फ्रीक्वेंसी क्या है? है व्हाट आर द मेन कंपोनेंट्स ऑफ़ अ टाइम सीरीज डेटा थिंग्स लाइक ट्रेंड
सीज़नालिटी साइक्लिसिटी नॉइज़ हाउ डू यू डील विद एडिटिव एंड मल्टीप्लिकेटिव सीरीज स्टेशनरिटी का कांसेप्ट ऑटो कोरिलेशन का
कांसेप्ट रोलिंग स्टैटिस्टिक्स ये सारी चीजें आप यहां पे सीखते हो ठीक है उसके बाद एक बार जब आपके फंडामेंटल्स क्लियर है
एंड यू आर एबल टू डू एनालिसिस ऑन टाइम सीरीज डेटा देन यू मूव टू क्लासिकल फॉरकास्टिंग और यहां पे आपका गोल है कि
अगर आपके पास एक टाइम सीरीज बेस्ड डेटा है जिसके ऊपर आपको एक फॉरकास्टिंग प्रॉब्लम सॉल्व करनी है हाउ कैन यू क्रिएट अ
इफेक्टिव बेसलाइन बेंच लाइन स्कोर। ठीक है? तो यहां पे देयर आर डेडिकेटेड एल्गोरिदम्स जो आप यूज़ करते हो जो इंटरनली
खुद में कैपेबल है टू अंडरस्टैंड द ऑर्डर प्रेजेंट इन द डेटा। उस तरह के मॉडल्स को आप यहां पे यूज़ करते हो। यू वर्क विथ ऑटो
रिग्रेसिव मॉडल्स। यू वर्क विथ मूविंग एवरेज मॉडल्स, अरमा, अरिमा, अरिमा ये सब ये सब नाम आपने सुने होंगे। ये सब की पढ़ाई
आप यहां पे करते हो। ठीक है? एक बार जब आपने फॉरकास्टिंग सीख लिया और आपके पास एक बेसलाइन मॉडल है, बेस लाइन मैट्रिक है,
देन यू लर्न टू डू फीचर इंजीनियरिंग जिसकी हेल्प से आप अपने बेस लाइन को इंप्रूव कर सकते हो। तो अ लॉट ऑफ़ डिफरेंट काइंड्स ऑफ़
फीचर इंजीनियरिंग वेरी डिफरेंट फ्रॉम व्हाट यू स्टडी इन मशीन लर्निंग एकज़िस्ट हियर। ये आपको पढ़ना है। अगेन दिस इज़ लाइक
वेरी स्पेसिफिक टू फाइनेंस पीपल। आई वुड नॉट रिकमेंड अनलेस यू आर टारगेटिंग द फाइनेंस फॉरकास्टिंग वाला डोमेन। आप इसको
स्किप कर सकते हो। बट स्टिल इफ यू वांट टू दीज़ आर द टॉपिक्स दैट यू हैव टू फॉलो। एंड लास्टली देयर आर इवैल्यूएशन टेक्निक्स
व्हिच इज़ अगेन डिफरेंट फ्रॉम द ट्रेडिशनल मशीन लर्निंग इवैल्यूएशन टेक्निक्स। तो यहां पे अलग-अलग आपके एरर मैट्रिक्स होते
हैं। एमएई हुआ, एमएपी हुआ। दिस इज़ लाइक दिस इज़ यूज़्ड इन अ लॉट ऑफ़ आपका एस्टिमेशन वाले जो प्रॉब्लम्स होते हैं जहां पे टाइम
एस्टिमेट करना है जैसे Uber राइड का तो उस तरह की जगहों पे यू यूज़ सच मैट्रिक्स। ठीक है? तो दिस इज़ व्हाट यू स्टडी एज़ फाउंडेशन
फॉर टाइम सीरीज बेस्ड डेटा। और आगे इसको हम लोग और डिटेल में देखेंगे। जब हम इसके ऊपर डीप लर्निंग टेक्निक्स को भी अप्लाई
करना सीखेंगे। सो अभी तक आपने दो इंपॉर्टेंट चीजें कर ली है। आपने मशीन लर्निंग मास्टर कर लिया है और आपने मशीन
लर्निंग को दूसरी मोटलिटीज़ पे अप्लाई करके भी देख लिया है। अब हम आगे बढ़ेंगे अपने रोड मैप में और नेक्स्ट हम पढ़ने जा रहे
हैं एक बहुत इंपॉर्टेंट चीज जो है डीप लर्निंग। डीप लर्निंग दो रीज़ंस सेेंट है। अगर आप सिर्फ डेटा साइंस प्रोफाइल्स को
टारगेट कर रहे हो जहां पर आप नैरो टास्क सॉल्व करोगे अपनी कंपनीज़ के लिए तो वहां पे भी डीप लर्निंगेंट है। और अगर आप
एलएलएम बेस्ड कुछ भी करने जा रहे हो तो वहां पे भी डीप लर्निंग के फंडामेंटल्स बहुत ज्यादाेंट हो जाते हैं। बिकॉज़
जेएनएआई का जो इवॉल्यूशन हुआ है वो डीप लर्निंग के रास्ते पे ही हुआ है। तो इन ऑर्डर टू मास्टर जेएनएआई यू शुड आल्सो
लर्न हाउ डीप लर्निंग वर्क्स। ठीक है? तो डीप लर्निंग वाले पूरे सेक्शन को मैंने सिक्स पार्ट्स में डिवाइड किया है। उनमें
से जो सबसे पहला पार्ट है वो है फाउंडेशंस ऑफ न्यूरल नेटवर्क। ठीक है? जहां पे हम डीप लर्निंग के फंडामेंटल्स देखेंगे थ्रू
द पर्स्पेक्टिव ऑफ आर्टिफिशियल न्यूरल नेटवर्क जो कि सबसे सिंपल टाइप का न्यूरल नेटवर्क टेक्निक है। तो इसमें आपको
क्या-क्या सीखना है? सबसे पहले आपको सबसे फंडामेंटल टर्मिनोलॉजीस जो हैं डीप लर्निंग की वो आपको सीखनी है। न्यूरॉन्स
क्या होते हैं? कैसे वो बायोलॉजिकल न्यूरॉन से कनेक्टेड हैं? लेयर्स का कांसेप्ट क्या होता है? व्हाट आर वेट्स
एंड बायसेस? ये सारी चीजें आपको सबसे पहले समझनी है। उसके बाद आपको ये समझना है कि फॉरवर्ड पास का कांसेप्ट कैसे होता है और
कैसे हम फॉरवर्ड पास की हेल्प से प्रेडिक्शन करते हैं ऑन अ गिवन इनपुट। ठीक है? उसके बाद कांसेप्ट आता है एक्टिवेशन
फंक्शनंस का व्हिच इज़ वेरीेंट। यहां पे आप अलग-अलग टाइप के एक्टिवेशन फंक्शनंस स्टडी करते हो और आप ये देखते हो कि किस तरह के
सिनेरियो में आपको कौन सा एक्टिवेशन फंक्शन लगाना है। ठीक है? तो सबसे फेमस वाले हैं सिग्मॉयड एंड टैनिच बट रेल, ली
रेल और उसके जो वेरिएंट्स हैं वो भी आपको स्टडी करने हैं। एंड सेम गोज़ विद सॉफ्ट मैक्स। ठीक है? उसके बाद यू हैव टू स्टडी
व्हाट आर द डिफरेंट काइंड्स ऑफ लॉस फंक्शनंस यूज्ड इन डीप लर्निंग। सो मशीन लर्निंग से रिलेटेड ही है। एमएससी, एमएई,
क्रॉस एंट्रोपी, हिंच लॉस ये सारी चीजें आपको देखनी पड़ेंगी। ठीक है? फिर आता है प्रोबेबबली सबसेेंट डीप लर्निंग कांसेप्ट
बैक प्रेपेशन जहां पे आप ये सीखते हो कि एक न्यूरल नेटवर्क ट्रेन कैसे होता है। ठीक है? तो यहां पे आपको थोड़ा बहुत मैथ्स
जो आपने पढ़ा है पास्ट में वो यूज़ होगा। चेन रूल का इंट्यूशन आपको पता होना चाहिए। कंप्यूटेशन ग्राफ क्या होता है? ये सब
चीजें आपको पता होनी चाहिए। ग्रेडियंट कैसे फ्लो बैक करता है एक न्यूरल नेटवर्क में वो आपको पता होना चाहिए। एक बार जब आप
बैक प्रोपगेशन सीख जाओ फिर आपको सीखना है कि व्हाट आर द चैलेंजेस जिसकी वजह से आप न्यूरल नेटवर्क्स को प्रॉपर्ली ट्रेन नहीं
कर पाते। उनमें सबसे बड़ा चैलेंज है वैनिशिंग एंड एक्सप्लोडिंग ग्रेडियंट्स। ये क्यों होता है? ये आपको समझना है। अ
उसके बाद ये थोड़ी सी एडिशनल चीजें आपको और पढ़नी चाहिए। लाइक अ कैसे डीप लर्निंग यूनिवर्सल एप्रोक्सिमेशन प्रोवाइड करता
है? अ मॉडल कैपेसिटी का क्या कांसेप्ट है? डेप्थ ऑफ अ मॉडल का क्या कांसेप्ट है? विड्थ का क्या कांसेप्ट है? एंड सबसेेंट
लास्ट में आपको ये पढ़ना है कि जब आप एक डीप लर्निंग मॉडल एज एन एएनएन को ट्रेन करते हो तो वो ओवरफिट क्यों करता है?
बिकॉज़ डीप लर्निंग मॉडल्स में ओवर फिटिंग की टेंडेंसी बहुत हाई होती है। तो ऐसा क्यों होता है ये आपको सीखना है। अगर इतनी
चीजें आप सीख जाते हो तो आपके जो फंडामेंटल्स हैं वो क्लियर हो जाएंगे और फिर हम मूव करेंगे नेक्स्ट स्टेज पे। एक
बार अगर आपने फाउंडेशन सीख लिए उसके बाद नेक्स्ट चीज जो आपको सीखनी है वो है कि कैसे आप एक गिवन न्यूरल नेटवर्क को
ऑप्टिमाइज कर सकते हो। ऑप्टिमाइज करने का मतलब होता है कि कैसे आप अपने गिवन न्यूरल नेटवर्क के परफॉर्मेंस को इंप्रूव कर सकते
हो। एंड देयर आर अ लॉट ऑफ टेक्निक्स। तो यहां पे मैंने वो सारी टेक्निक्स लिख रखी हैं। तो आपको यहां पे सबसे पहले सीखना है
कि व्हाट आर द डिफरेंट वेरिएंट्स ऑफ ग्रेडियंट डिसेंट दैट यू कैन यूज़। सो बैच वर्सेस मिनी बैच वर्सेस एसजीडी। ये आपको
सीखना होता है। लर्निंग रेट का कांसेप्ट बहुत क्रिटिकल होता है डीप लर्निंग में। तो उसके बारे में आपको काफी कुछ सीखना है।
हाउ कैन यू शेड्यूल लर्निंग रेट? स्टेप डीके, cosin डीके वार्म अप कैसे किया जाता है? ये सब आपको सीखना पड़ेगा। उसके बाद
आपको अलग-अलग ऑप्टिमाइजर्स के बारे में पढ़ना है। सच एज मोमेंटम, एडग्रड, आरmएस प्रॉप, एडमम, एडमम डब्लू ये सब आपको सीखना
पड़ेगा। उसके बाद यू आल्सो हैव टू लर्न अबाउट वेट इनिशियलाइजेशन। जो इनिशियल वेट वैल्यूज़ रहती हैं उनके ऊपर भी बहुत कुछ
डिपेंड करता है। तो आप यहां पे अलग-अलग टाइप की वेट इनिशलाइजेशन टेक्निक सीखोगे। अ यू आल्सो लर्न अ कांसेप्ट कॉल्ड
ग्रेडियंट क्लिपिंग। बैच नॉर्मलाइजेशन इज़ अगेन अ वेरीेंट कॉन्सेप्ट। ड्रॉप इज़ एन इंटरेस्टिंग कॉन्सेप्ट। अ उसके बाद अर्ली
स्टॉपिंग। अगर आपका परफॉर्मेंस इंप्रूव नहीं कर रहा मल्टीपल इवॉक्स के बाद तो यू स्टॉप द ट्रेनिंग। रेगुलराइज़ेशन जैसे मशीन
लर्निंग में बहुतेंट होता है। सिमिलरली यहां पे भी बहुतेंट होता है। एंड फाइनली यू हैव टू लर्न हाउ डू यू डू हाइपर
पैरामीटर ट्यूनिंग इन डीप लर्निंग। ठीक है? तो इसके कुछ-कुछ पैकेजेस होते हैं। वो आपको सीखने पड़ेंगे। तो ये बहुत इंपॉर्टेंट
चीज़ है। ये मतलब इतनाेंट है कि ये बहुत आगे तक आपको हेल्प करेगा। लेट्स से आप कोई अपना स्माल स्केल एलएलएम भी अगर ट्रेन कर
रहे हो ना तो यही सारे कांसेप्ट्स वहां पे अप्लाई करते हैं। ठीक है? तो ये लाइक एकदम कोर है डीप लर्निंग का। डीप लर्निंग में
जो नेक्स्ट चीज आप पढ़ोगे वो है कन्वोल्यूशनल न्यूरल नेटवर्क्स। यह स्पेशल टाइप ऑफ न्यूरल नेटवर्क्स होते हैं जिनको
यूज किया जाता है इमेज बेस्ड या वीडियो बेस्ड डेटा के लिए। और इसका रीज़न ये है कि अभी तक आपने जो न्यूरल नेटवर्क्स पढ़े हैं
एएनएन वो इमेज बेस्ड या फिर वीडियो बेस्ड डेटा के ऊपर आपको उतने अच्छे रिजल्ट्स नहीं देते। और उसका मेन रीज़न ये है कि
आपका जो इमेज बेस्ड डेटा होता है वो टूD होता है और उसके अंदर स्पेशल इनेशन छुपा हुआ होता है। और एएनएस का आर्किटेक्चर ऐसा
है कि वो इस स्पेशल इनेशन को एक्सट्रैक्ट नहीं कर पाता। दैट इज व्हाई सीएनए को यूज़ किया जाता है। बिकॉज़ उनको डिजाइन ही इस
तरीके से किया गया है कि वो इमेज डेटा के ऊपर आपको बेटर रिजल्ट्स दें। तो सीएनएन में आपको क्या पढ़ना है? सबसे पहले सीएनएन
के कोर कांसेप्ट्स पढ़ने हैं। जिसमें आता है कॉन्वोल्यूशन ऑपरेशंस, फिल्टर्स एंड कर्नल्स का कांसेप्ट, स्ट्राइड एंड
पैडिंग। यू हैव टू लर्न अबाउट फीचर मैप्स, पुूलिंग ऑपरेशन, रिसेप्टिव फील्ड का इंट्यूशन आपको पता होना चाहिए। आपको ये भी
पता होना चाहिए कि सीएनएस ट्रांसलेशन इनवेरिएंट क्यों होते हैं? दिस इज़ अ वेरीेंट इंटरव्यू क्वेश्चन। इसलिए मैंने
यहां पे इसको मेंशन कर दिया है। उसके बाद एक बार जब आप सीएनएन के फंडामेंटल्स सीख लो उसके बाद कुछ एग्जिस्टिंग
आर्किटेक्चर्स हैं जो बहुत पढ़े लिखे लोगों ने ऑलरेडी बना रखा है जिनको हम काइंड ऑफ रीयूज़ करते हैं। उनके बारे में
आपको थोड़ा पता होना चाहिए। तो यहां पे थोड़े बेसिक आर्किटेक्चर्स हैं जैसे कि लेनेट हुआ, एलेक्स नेट हुआ और कुछ और बहुत
हाई-फाई आर्किटेक्चर्स भी हैं सच एज रेज़नेट, इंसेप्शन मॉड्यूल्स, आपका मोबाइल नेट बहुत एक अच्छा आर्किटेक्चर है जो
थोड़ा लो एंड डिवाइसेस के ऊपर अच्छा रन करता है। तो ये सीएनएन आर्किटेक्चर्स का आपको आईडिया होना चाहिए। उसके बाद एक बार
जब आप ये आर्किटेक्चर्स पढ़ लो उसके बाद आपको एक बहुत इंपॉर्टेंट कांसेप्ट सीखना होता है जिसको हम बोलते हैं ट्रांसफर
लर्निंग। सो ट्रांसफर लर्निंग में क्या होता है कि आप एक ऑलरेडी ट्रेंड अ सीएनएन आर्किटेक्चर को उठाते हो और उसको फाइंड
ट्यून करते हो अपने टास्क के ऊपर। ठीक है? तो आज की डेट में जो बहुत सारा सीएनएन के ऊपर काम हो रहा है वो ट्रांसफर लर्निंग के
डोमेन में ही हो रहा है। ठीक है? तो आपको ये पूरी चीज़ सीखनी होती है कि कैसे आप एक प्री ट्रेन मॉडल को लेके आते हो? कैसे
उसको आप फाइन ट्यूनिंग या फिर फीचर एक्सट्रैक्शन के लिए यूज़ करते हो। हाउ डू यू फ्रीज़ एंड अनफ्रीज़ लेयर्स? ये सारी
चीजें आपको सीखनी होती हैं। यहां पे एक और इंपॉर्टेंट कांसेप्ट होता है डेटा आर्गुमेंटेशन का। ये भी आपको सीखना होता
है। ठीक है? ये सब कुछ सीखने के बाद एक और इंपॉर्टेंट चीज जो आपको यहां पे सीखनी है वो है विज़न ट्रांसफॉर्मर्स। ये एक
कंप्लीटली अलग टाइप ऑफ़ आर्किटेक्चर है जो विज़न डेटा के ऊपर एज इन आपके इमेज बेस्ड डेटा के ऊपर बहुत अच्छे रिजल्ट्स देता है।
बट आई वुड नॉट रिकमेंड कि आप अभी इसको सीधे पढ़ो। आई वुड रिकमेंड कि पहले आप आगे जाओ इस रोड मैप में। आप ट्रांसफार्मर
आर्किटेक्चर पढ़ो और फिर वहां से पीछे आओ और फिर आप विज़न ट्रांसफार्मर्स के बारे में पढ़ो और ये सीखो कि कैसे आप विज़न
ट्रांसफार्मर को ये कंप्यूटर विज़न टास्क के ऊपर अप्लाई करते हो। ठीक है? तो ये हो गया आपका सीएनएन से रिलेटेड सारा डिस्कशन।
सो अभी तक हमने दो टाइप के न्यूरल नेटवर्क आर्किटेक्चर देख लिए। पहला हमने देखा एएनएन जो टेबुलर डेटा के ऊपर अच्छा काम
करता है और फिर हमने देखा सीएनएन जो इमेज बेस्ड डेटा के ऊपर अच्छा काम करता है। एक थर्ड जो डेटा मॉडेलिटी हमने डिस्कस की है
वो है टेक्सुअल डेटा या फिर सीक्वेंशियल डेटा। तो अब हम उसके बारे में पढ़ाई करेंगे और अब हम देखेंगे कि सीक्वेंस
मॉडल्स में आपको क्या-क्या पढ़ना है। तो सीक्वेंस मॉडल्स सीक्वेंस मॉडल्स आर अ स्पेशल टाइप ऑफ न्यूरल नेटवर्क्स जो
स्पेसिफिकली बिल्ट है अराउंड सीक्वेंस डेटा। ठीक है? तो टेक्सचुअल डेटा इसमें सबसे प्राइम एग्जांपल आता है। तो यहां पे
आपको क्या करना है? यहां पे आपको आरएनए की पूरी फैमिली पढ़नी है। रिकरेंट न्यूरल नेटवर्क। ठीक है? तो आपको सबसे पहले
सीक्वेंशियल डेटा की मॉडलिंग कैसे की जाती है? उसका इंट्यूशन होना चाहिए। बेसिकली हाउ डू यू ब्रेक डाउन टेक्स्ट इंटू
नंबर्स। वो आपको समझना है। उसके बाद यू हैव टू लर्न आरएनएस एकदम जो सबसे कोर आरएनएस आपके आर्किटेक्चर है वो आपको सीखना
है। उसके बाद उसके ऊपर एक इंप्रूवमेंट आया था जिसको हम एलएसटीएम बुलाते हैं। वो आपको सीखना है। फिर आपका आता है जीआरयू व्हिच
इज़ अगेन एन इंप्रूवमेंट वो आपको सीखना है। और फिर आपको दो कॉन्सेप्ट्स और सीखने हैं जो कि खुद में नए आर्किटेक्चर्स नहीं है।
ये बेसिकली आपका थोड़ा-थोड़ा वेरिएशन है। एकिस्टिंग आरएनएन के ऊपर। सो बायडायरेक्शनल आरएनएस जहां पे आप दोनों
डायरेक्शन से टेक्स्ट को प्रोसेस करते हो एंड डीप आरएनएस जहां पे आप एक आरएनए के ऊपर दूसरा आरएनए स्टैक अप करते हो। ठीक
है? तो ये सब आपको पढ़ना है। हालांकि ये सारी टेक्निक्स अब थोड़े काइंड ऑफ ऑब्सोल्यूट हो गए हैं। आज की डेट में कोई
प्रोडक्शन में ये टेक्निक्स यूज़ नहीं करता टेक्सचुअल डेटा के ऊपर। बट गोइंग फॉरवर्ड जो टेक्निक्स आप पढ़ोगे जो आज यूज़ होते हैं
वो इन टेक्निक्स के ऊपर बेस्ड हैं। तो ये नॉलेज आपको होनी चाहिए। सीक्वेंस मॉडल्स के बाद आपको पढ़ना होता है सीक्वेंस टू
सीक्वेंस मॉडल्स। बेसिकली ऐसे सीक्वेंस मॉडल्स जो इस तरह के टास्क के ऊपर अप्लाई किए जाते हैं जहां पे इनपुट भी एक
सीक्वेंस है और आउटपुट भी एक सीक्वेंस है। फॉर एग्जांपल अगर आप ट्रांसलेशन परफॉर्म कर रहे हो एक लैंग्वेज से दूसरे लैंग्वेज
में कन्वर्ट कर रहे हो टेक्स्ट को तो दिस इज़ अ सीक्वेंस टू सीक्वेंस टास्क या फिर एक और एग्जांपल हुआ आपका अ टेक्स्ट
समराइजेशन। आपके पास एक बड़ा सा ऐसे है आप उसको समराइज़ कर रहे तो यहां पे इनपुट भी एक सीक्वेंस है, आउटपुट भी एक सीक्वेंस
है। तो इस तरह के प्रॉब्लम्स के ऊपर थोड़े अलग टाइप के आपके आर्किटेक्चर यूज़ किए जाते हैं। जिनको हम सीक टू सीक या
सीक्वेंस टू सीक्वेंस मॉडल्स बोलते हैं। यहां पे आपको सबसे पहले सीखना होता है एनकोडर डिकोडर आर्किटेक्चर। बहुत ही
इंपॉर्टेंट है। और आगे जितनी भी चीजें आप पढ़ोगे इसमें सीक्वेंस टू सीक्वेंस वाले पूरे पार्ट में वो सब इसी के ऊपर बेस्ड
है। तो यहां पे आपको एनकोडर, डिकोडर, आर्किटेक्चर मास्टर करना होता है। बिहाइंड द सीन्स अंदर आरएन एन एन एन एन एन एन एन
एन एन एन एलएसटीएम ही यूज़ किए जाते हैं। बट इट्स जस्ट कि दो पार्ट्स में डिवाइड हो जाता है पूरा आर्किटेक्चर। वन इज़ एनकोडर
वन इज़ डिकोडर। फिर आपको सीखना है कॉन्टेक्स्ट वेक्टर का क्या बॉटल नेक है। टीचर फोर्सिंग एक बहुतेंट कांसेप्ट है।
बीम सर्च एक इंपॉर्टेंट कांसेप्ट है। ये सारी चीजें आपको पढ़नी है। उसके बाद आता है बहुत हीेंट कांसेप्ट अटेंशन मैकेनिज्म्स।
सो देयर आर डिफरेंट-डिफरेंट अटेंशन मैकेनिज्म्स। सबसे पहले आपको पढ़ना है बानाऊ अटेंशन के बारे में। उसके बाद आपको
पढ़ना है लुआंग अटेंशन के बारे में। और फिर आ जाता है इंटरव्यू पॉइंट ऑफ व्यू से सबसेेंट कॉन्सेप्ट डीप लर्निंग का व्हिच
इज़ ट्रांसफार्मर आर्किटेक्चर। यह आपको बहुत डिटेल में पढ़ना है। तो, इसमें सबसे पहले आपको ट्रांसफार्मर काेंस और आज के
कॉन्टेक्स्ट में उसका क्या चल रहा है, यह सब कुछ पता होना चाहिए। देन यू हैव टू स्टडी द कॉन्सेप्ट ऑफ सेल्फ अटेंशन। जिसके
ऊपर ट्रांसफार्मर आर्किटेक्चर बेस्ड है। यू हैव टू लर्न अबाउट स्केल्ड डॉट प्रोडक्ट अटेंशन, मल्टीड अटेंशन, द
कॉन्सेप्ट ऑफ़ पोजीशनल एनकोडिंग्स। फिर यू हैव टू लर्न अबाउट द रेजिडुअल कनेक्शंस एंड लेयर नॉर्म जो यूज़ किया जाता है। अ
उसके बाद आपको पढ़ना है एनकोडर स्टैक एंड डिकोडर स्टैक। यह सब कुछ बेसिकली मैंने पूरे आर्किटेक्चर को ब्रेक डाउन करके यहां
पे लिख दिया है। द कॉन्सप्ट ऑफ क्रॉस अटेंशन। यह सारी चीजें आपको पढ़नी है। और एक बार जब आप ट्रांसफार्मर आर्किटेक्चर
मास्टर कर लो उसके बाद आपको ट्रांसफार्मर के कुछ वेरिएंट्स पढ़ने हैं। जैसे कि एनकोडर ओनली वेरिएंट्स में आपको बर्ड
पढ़ना है। डिकोडर ओनली वेरिएंट में आपको जीपीटी पढ़ना है। और एनकोडर डिकोडर दोनों हो तो उसके लिए आपको T5 पढ़ना है। ठीक है?
तो दिस इज़ लाइक वन ऑफ़ द मोस्टेंट पार्ट्स ऑफ़ दिस एंटायर रोड मैप। ठीक है? अगर आप कोई इंटरव्यू देने आज जाओगे ये पार्ट आप
स्किप करके जाओगे देयर इज़ अ गुड चांस कि आपका इंटरव्यू में सिलेक्शन हो ही ना। ठीक है? तो ये बहुतेंट है इसके ऊपर थोड़ा
एडिशनल फोकस देना आप। सो अभी तक जितनी भी चीजें हमने डिस्कस की डीप लर्निंग के अंदर वो सब कुछ सुपरवाइज्ड लर्निंग के अंदर आता
है। जहां पे आपके पास इनपुट भी था, आउटपुट भी था। इस तरह के डेटा पे आप काम कर रहे थे। बट डीप लर्निंग कैन आल्सो बी अप्लाई
टू अनसुपरवाइज्ड लर्निंग वेयर यू जस्ट हैव इनपुट डेटा, देयर इज़ नो आउटपुट डेटा। ठीक है? तो यहां पे आपको दो बहुतेंट डीप
लर्निंग आर्किटेक्चर्स पढ़ने होते हैं। उसमें से सबसे पहला है ऑटो एनकोडर्स। ठीक है? इसके कुछ-कुछ वेरिएशंस भी हैं। जैसे
कि वेरिएशनल ऑटो एनकोडर। ये भी एक बहुतेंट चीज है जो अगेन इंटरव्यू पॉइंट ऑफ व्यू से बहुत पूछा जाता है। अ सो ये आपको पढ़ना है।
एंड सेकंड वन मोरेंट कांसेप्ट इज़ ज्ञान। ठीक है? तो जनरेटिव एडवर्सरी नेटवर्क क्या होता है? कैसे काम करता है? ये आपको देखना
है। और इसके कुछ वेरिएंट्स हैं जैसे कि डीसी ज्ञान, साइकिल ज्ञान, स्टाइल ज्ञान। ये आपको थोड़ा सा समझना पड़ेगा। तो ये एक
टाइम पे जनरेटिव एआई शुरू होने के पहले इट वाज़ द मेन थिंग जिसकी हेल्प से आप कुछ भी जनरेट कर पाते थे। अब तो और बहुत सारी
टेक्निक्स आ गई। बट अभी भी इसके बारे में बात होती है एंड देयर आर सर्टेन मॉडल्स जो इस टेक्निक के ऊपर बेस्ड हैं। तो उस पॉइंट
ऑफ व्यू से ये दोनों आर्किटेक्चर्स इंपॉर्टेंट हो जाते हैं। थोड़ा सा डिफिकल्ट है ये दोनों ही चीजें एक्चुअली
बट स्टिल अगर आप थोड़ा फोकस करोगे तो आप इतना तो सीख जाओगे कि आप इंटरव्यू में क्वेश्चंस आंसर कर सकते हो। सो अभी तक जो
भी डीप लर्निंग हमने कवर की ये थोड़ी थ्योरिटिकल लेवल पे थी। बट अब नेक्स्ट आपको क्या करना है कि आपको डीप लर्निंग को
थोड़ा प्रैक्टिकली भी कवर करना है। और बाय प्रैक्टिकली माय आई मीन कि आप कोई एक डेटा मोटलिटी उठाओ। जैसे कि टेक्सचुअल डेटा या
फिर इमेज बेस्ड डेटा या फिर टेंपोरल डेटा और उसके ऊपर आप डीप लर्निंग टेक्निक्स अप्लाई करके देखो बाय बिल्डिंग
डिफरेंट-डिफरेंट प्रोजेक्ट्स। बट ये करने के पहले एक प्रीरेक्विज़िट स्टेप ये है कि आप पाई सीखो। पाईटच सीखने के लिए मैं
इसलिए बोल रहा हूं बिकॉज़ पिछले दो-ती सालों में पाई हैज़ बिकम द लीडिंग डीप लर्निंग फ्रेमवर्क। इसके पहले तक मोस्टली
लोग आपको सजेस्ट करते टेंसर फ्लो और केरा सीखने में। बट जब से ये एलएलएम का वेव आया है, जब से जेएनएआई का वेव आया है, आई हैव
पर्सनली सीन दिस कि पाई टॉर्च हैज़ बिकम द नंबर वन प्रेफरेंस ऑफ एंप्लॉयर्स। और अगर आप आगे चलके एलएलएम्स के साथ काम करना
चाहते हो, पाई टॉर्च इज अ मस्ट। ठीक है? तो आप क्या करो? आप सबसे पहले थोड़ा टाइम स्पेंड करो पाई टॉर्च सीखने के ऊपर। सो
यहां पे मैंने लिख रखा है आपको क्या-क्या एग्जैक्टली करना है। पाइटर्च में क्या-क्या सीखना है? दो पार्ट्स में इस
पूरी चीज को आप डिवाइड कर सकते हो। फर्स्ट पार्ट में आप पाई टटॉर्च के फंडामेंटल सीखो। जैसे कि पाई टॉर्च के बेसिक्स,
टेंसर ऑपरेशंस आप कैसे परफॉर्म करते हो? ऑटोग्रेड का कांसेप्ट, कंप्यूटेशन ग्राफ क्या होता है? एंड देन यू स्टार्ट
बिल्डिंग न्यूरल नेटवर्क्स यूजिंग पाइटच। सबसे पहले आर्टिफिशियल न्यूरल नेटवर्क बनाना सीखो। ट्रेनिंग लूप कैसे चलाया जाता
है? उसके फंडामेंटल्स आप सीखो। हाउ टू रन फॉरवर्ड पास, हाउ टू डू बैकवर्ड पास। फिर आप अलग-अलग ऑप्टिमाइज़र्स ट्राई करके देखो।
जो भी आपने डीप लर्निंग में थ्योरिटिकली पढ़ा है, उसको आप यहां पे ट्राई आउट करो। ठीक है? यू कैन लर्न अबाउट डेटा सेट एंड
डेटा लोडर्स क्लास। हाउ डू यू रन पाई ऑन GPU? उसके बाद आप क्या करो कि आप थोड़ा बहुत जो आपने सीएनएन आर्किटेक्चर्स और
सीक्वेंस मॉडल्स पढ़े हैं उनको आप इंप्लीमेंट करके देख सकते हो। तो इससे आपको थोड़ा प्रैक्टिकल स्ट्रांग होल्ड मिल
जाएगा। जैसे आप एक आरएनएन बना के उसको नेक्स्ट वर्ड प्रेडिक्टर की तरह यूज़ करके देखो या फिर आप एक सीक्वेंस टू सीक्वेंस
मॉडल बनाओ जिसकी हेल्प से आप एक छोटा मशीन लर्निंग टास्क परफॉर्म करके देखो। इस तरह की चीजें आपको यहां पे करनी चाहिए। या फिर
आप एक सीएनएन आर्किटेक्चर बना के उसको अप्लाई करो किसी इमेज क्लासिफिकेशन टास्क के तो ये सारी चीजें आपको यहां पे परफॉर्म
करनी है और आपको बस आपका गोल ये होना चाहिए कि आप पाइटorर्ज इस लेवल पे सीख जाओ कि आप पाइटorर्ज को किसी भी डीप लर्निंग
प्रोजेक्ट के ऊपर अप्लाई कर पाओ। अब डीप लर्निंग के थ्रू अलग-अलग डेटा मोटलिटीज एक्सप्लोर करने के पहले मैं एग्जैक्टली
वही बात बोलूंगा जो थोड़ी देर पहले मैंने यहां पे बोला था जब आप पहली बार अलग-अलग मोटलिटीज को एक्सप्लोर कर रहे थे कि आप एक
मोटलिटी को अच्छे से एक्सप्लोर करो या फिर एट मैक्स दो मोटलिटीज़ को एक्सप्लोर करो। तीनों को करने की जरूरत नहीं है। और आप
उसी मोटलिटी को एक्सप्लोर करो डीप लर्निंग के थ्रू जिसके ऊपर आप पहले काम कर चुके हो इस रोड मैप फॉर एग्जांपल आपने ऊपर अगर
एनएलपी के ऊपर काम किया अच्छे से तो नीचे डीप लर्निंग को आप एनएलपी के पर्सेक्टिव से पढ़ो। ठीक है? तो चलो अब देखते हैं हाउ
कैन वी डू और रादर अप्लाई डीप लर्निंग टू एनएलपी। सो यहां पे जो सबसे पहली चीज आपको पढ़नी है वो है एंबेडिंग्स। अ सो डीप
लर्निंग का सबसे पहला और सबसे इंपॉर्टेंट जो कंट्रीब्यूशन रहा है एनएलपी की फील्ड में वो रहा है एंबेडिंग्स। सो एंबेडिंग्स
आर अ टेक्निक जिसकी हेल्प से आप अगेन टेक्स्ट को नंबर्स में कन्वर्ट करते हो। बट यहां पर आप अ टेक्स्ट का सिमेंटिक
मीनिंग भी कैप्चर कर पाते हो। तो यहां पर आपको वर्ड टू वेक ग्लोव या फिर फास्ट टेक्स्ट जैसी टेक्निक्स मिलेंगी। तो आपको
ये सारी टेक्निक्स पढ़नी है और आपको सीखना है कि कैसे ये टेक्निक्स बिहाइंड द सीन्स काम करती है और यू हैव टू लर्न अदर
प्रैक्टिकल एस्पेक्ट्स एज वेल जैसे कि हाउ डू यू चूज़ कि आपके एंबेडिंग में कितने डायमेंशंस होंगे या फिर हाउ डू यू हैंडल
आउट ऑफ वोकैबलरी वर्ड्स। ठीक है? तो ये सब आपको एंबेडिंग्स में पढ़ना है। उसके बाद आप सीक्वेंस मॉडलिंग एनएलपी टास्क कर सकते
हो। ये मैंने थोड़ी देर पहले भी आपको सजेस्ट किया था पाइडर्च वाले सेक्शन में। ये एग्जैक्ट चीज आप दोबारा यहां पे कर
सकते हो। जैसे कि आपने एक टेक्स्ट क्लासिफिकेशन प्रॉब्लम उठाया और उसको आरएन की हेल्प से सॉल्व कर रहे हो। फिर आप उसी
प्रॉब्लम के ऊपर एलएसटीएम लगा के देख रहे हो कि क्या इंप्रूवमेंट है या नहीं। फिर आप सेंटीमेंट एनालिसिस का टास्क भी
सिमिलरली कर सकते हो। आप बायडायरेक्शनल आरएनएस और डीप आरएनएस अप्लाई करके देख सकते हो कि क्या ये टेक्निक्स लगाने से
वैनिला आर एलएसटीएम के ऊपर कुछ इंप्रूवमेंट आता है कि नहीं। ठीक है? एक बार सीक्वेंस मॉडलिंग के टास्क कर लिए।
उसके बाद आप सीक्वेंस टू सीक्वेंस टास्क भी कर सकते हो। लाइक लैंग्वेज ट्रांसलेशन यूजिंग एनकोडर डिकोडर मॉडल्स। टेक्स्ट
जनरेशन का टास्क हो सकता है। आपका टेक्स्ट समराइजेशन का टास्क हो सकता है। क्वेश्चन आंसरिंग का टास्क हो सकता है। ये सारी
चीजें आप यहां पे कर सकते हो। एक बार आपने सीक्वेंस टू सीक्वेंस टास्क कर लिए। उसके बाद आप ट्रांसफॉर्मर्स को अप्लाई कर सकते
हो एनएलपी टास्क में विथ द हेल्प ऑफ़ हगिंग फेस लाइब्रेरी। यहां पर आप फिर से सेम टेक्स्ट क्लासिफिकेशन, अ सीक्वेंस लेबलिंग
टास्क, लैंग्वेज ट्रांसलेशन, टेक्स्ट जनरेशन ये सब कुछ आप यहां पे परफॉर्म कर सकते हो। ठीक है? इसके अलावा इफ यू वांट
आप नेम्ड एंटिटी रिकॉग्निशन जैसे टास्क भी परफॉर्म कर सकते हो। ठीक है? तो दिस इज द मेन आईडिया। यहां पे चीजें बहुत
प्रैक्टिकल है। यहां पे कांसेप्ट्स है नहीं क्योंकि जो भी कांसेप्ट्स थे वो आपने पहले डीप लर्निंग और एनएलपी के प्राइमर
में पढ़ लिए। अब बस दोनों को मर्ज करके यू हैव टू डू प्रोजेक्ट्स एंड गेट बेटर रिजल्ट्स देन यू नो प्रीवियस टेक्निक्स।
दिस इज़ द मेन आईडिया इन दिस सेक्शन ऑफ़ द रोड मैप। नेक्स्ट हम बात करेंगे कंप्यूटर विज़न यूजिंग डीप लर्निंग की। और यहां पे
देखो मेजरली आपको तीन चीजें करनी होती हैं। वन इज़ इमेज क्लासिफिकेशन, सेकंड इज़ इमेज सेगमेंटेशन एंड थर्ड इज़ ऑब्जेक्ट
डिटेक्शन। ठीक है? अब इसी के कुछ-कुछ वेरिएंट्स होते हैं जैसे कि फेस डिटेक्शन एंड फेस रिकॉग्निशन। ये उसी के सब
प्रोजेक्ट्स हो गए। बट मोस्टली आप इन्हीं तीन प्रोजेक्ट्स के अराउंड ज्यादातर काम करते हो। तो यहां पे आपको क्या करना है?
सबसे पहले यू हैव टू लर्न हाउ टू डू इमेज क्लासिफिकेशन यूजिंग सीएनएस। उसके बाद ट्रांसफर लर्निंग के थ्रू आप इमेज
क्लासिफिकेशन कर सकते हो। तो ये चीज हालांकि वही है जो हमने थोड़ी देर पहले डीप लर्निंग में देखी बट यहां पे आप इसको
पाईज के पर्सेक्टिव से करोगे। उसके बाद आता है ऑब्जेक्ट डिटेक्शन जो शायद इस पूरे सेक्शन का सबसे बड़ा पार्ट है। यहां पे
आपको थोड़ा थ्योरी भी पढ़ना पड़ेगा। सीधे आप प्रैक्टिकल और कोड में नहीं जंप कर सकते। सो देयर आर सर्टेन मॉडल्स
स्पेसिफिकली डिज़ फॉर ऑब्जेक्ट डिटेक्शन। उनमें से जो सबसे फेमस एल्गोरिदम है वो है yलो। और उसके अलावा भी आपको आरसीएनए,
फास्ट आरसीएनए ये एल्गोरिदम्स मिलेंगे। यलो के भी बहुत सारे वेरिएंट्स हैं। तो आप इनको स्टडी करोगे और फिर उसी को आप अप्लाई
करोगे ऑन प्रोजेक्ट्स। ठीक है? एंड देन कम्स इमेज सेगमेंटेशन जहां पे आप एक गिवन इमेज के अंदर अलग-अलग ऑब्जेक्ट्स को
आइडेंटिफाई करते हो। तो इसमें भी यू लर्न सम एल्गोरििदम्स सच एज यूनिट, मास्क, आरसीएनए और उनको फिर प्रैक्टिकली यू
अप्लाई टू डिफरेंट प्रोजेक्ट्स। एंड लास्टली व्हाट यू कैन डू इज़ कि आप सेम जो आपके इमेज क्लासिफिकेशन जैसे टास्क हैं
उनको आप विज़न ट्रांसफार्मर के थ्रू भी करके देख सकते हो। ठीक है? तो, यह थोड़ा सा ऐसा डेंस टॉपिक है और यहां पे आपको टाइम
स्पेंड करना पड़ेगा। स्पेशली इफ यू आर टारगेटिंग कंप्यूटर विज़न डोमेन, तो यहां पे काफी कुछ है सीखने के लिए। एंड फाइनली
लेट्स टॉक अबाउट टाइम सीरीज फॉरकास्टिंग यूजिंग डीप लर्निंग। तो, ये भी अब एक ऐसा डोमेन है जहां पे डीप लर्निंग काफी
पेनिट्रेट कर गया है। और आज की डेट में बहुत सारा फाइनेंसियल डेटा के ऊपर डीप लर्निंग मॉडलिंग की जाती है। सो, यहां पे
सबसे पहले आप सीखते हो कि हाउ डू यू फ्रेम अ टाइम सीरीज प्रॉब्लम इन टर्म्स ऑफ़ डीप लर्निंग? हाउ डू यू प्रिपेयर योर डेटा फॉर
डीप लर्निंग? फिर आप अलग-अलग मॉडल्स ट्राई आउट करते हो। जैसे कि आरएनएन कैन बी यूज़्ड, एलएसटीएम कैन बी यूज़्ड, जीआर
जीआरयूस कैन बी यूज़्ड। इवन आपके जो सीएनएस हैं, आप वन डी कॉन्वोल्यूशन ऑपरेशन को भी यूज़ कर सकते हो फॉर टाइम सीरीज
फॉरकास्टिंग। एंड लास्टली यू आल्सो यूज़ ट्रांसफार्मर आर्किटेक्चर फॉर डूइंग टाइम सीरीज फॉरकास्टिंग। ये हालांकि थोड़ा भी
रिसर्च एरिया है। बट कुछ टाइम सीरीज स्पेसिफिक ट्रांसफार्मर आर्किटेक्चर्स भी निकल के आए हैं। आप उनको भी यहां पे स्टडी
करते हो और प्रैक्टिकली अप्लाई करते हो। एंड फाइनली यू लर्न डिफरेंट फॉरकास्टिंग स्ट्रेटजीस दैट एक्सिस्ट इन डीप लर्निंग
लाइक वन स्टेप फॉरकास्टिंग, मल्टीस्टेप फॉरकास्टिंग एंड लास्टली यू आल्सो स्टडी इवैल्यूएशन टेक्निक्स व्ह आर स्पेसिफिक टू
डीप लर्निंग। ठीक है? तो ये हो गया अपना प्रैक्टिकल एस्पेक्ट ऑफ डीप लर्निंग। ठीक है? तो अभी तक हमने जितनी भी चीजें कवर की
इस रोड मैप में ये आता है फाउंडेशन स्टेज में। ये आपको आना चाहिए आगे के स्पेशलाइजेशनंस को कवर करने के लिए। ठीक
है? तो आई होप यहां तक आपको चीजें क्लियर हैं। मैं एक बार अगर रिवाइज करा दूं तो वी स्टार्टेड विद प्रीरक्व्विजिट्स जो ऐसी
चीजें हमने कवर की जो आपको आगे हर जगह काम आएंगी। देन वी डिड मशीन लर्निंग देन हमने कुछ अदर मोटलिटीज कवर की। उनके प्राइमर
हमने लिए और उसके बाद हमने डीप लर्निंग स्टार्ट किया और डीप लर्निंग के बाद हमने प्रैक्टिकल डीप लर्निंग किया। प्रैक्टिकल
डीप लर्निंग में पहले हमने पाई टॉर्च को एज अ टूल सीखा और फिर उसी टूल को अप्लाई किया इन डिफरेंट-डिफरेंट डेटा मोटलिटीज़।
ठीक है? अब यहां से हमारा जो रोड मैप है वो ब्रांच आउट कर जाएगा इनू थ्री डिफरेंट स्पेशलाइजेशंस और अब मैं आपको बताऊंगा
हमारे पहले स्पेशलाइजेशन के बारे में। सो हमारा जो फर्स्ट स्पेशलाइजेशन है उसका नाम है एमएल इंजीनियरिंग ट्रैक और ये उन लोगों
को पढ़ना चाहिए जो इन सारे जॉब प्रोफाइल्स को टारगेट कर रहे हैं। सो इफ यू वांट टू बिकम अ मशीन लर्निंग इंजीनियर या फिर
एमएलप्स इंजीनियर या फिर डेटा साइंटिस्ट या एनएलपी इंजीनियर या कंप्यूटर विज़न इंजीनियर। तो इन जॉब प्रोफाइल्स के लिए
आपको ये एमएल इंजीनियरिंग वाला ट्रैक अच्छे से प्रिपेयर करना चाहिए। मैं सबसे पहले आपको एक बेसिक आईडिया दे देता हूं कि
इस पर्टिकुलर ट्रैक में आपको क्या पढ़ना है। व्हाट इज द कोर ऑब्जेक्टिव हियर। सो अभी तक हमने जो भी फाउंडेशन वाले लेवल पर
कवर किया हमने ये देखा कि मशीन लर्निंग को कैसे यूज़ किया जाता है टू सॉल्व प्रॉब्लम्स। डीप लर्निंग को कैसे यूज़
किया जाता है टू सॉल्व प्रॉब्लम्स। और फिर हमने इन दोनों टेक्निक्स को अप्लाई किया टू सर्टेन डिफरेंट-डिफरेंट डेटा मॉडेलिटीज़
सच एज एनएलपी, कंप्यूटर विज़न एंड टाइम सीरीज डेटा। बट अभी तक हमने सिर्फ पढ़ाई की इस चीज की और जो भी प्रोजेक्ट्स हमने
बनाए वो भी सिर्फ सीखने के हिसाब से बनाए। बट जब आप इंडस्ट्री में एज अ डेटा साइंटिस्ट या मशीन लर्निंग इंजीनियर काम
करते हो तो आपसे दो एक्सपेक्टेशंस रहती हैं। पहली एक्सपेक्टेशन तो ये रहती है कि आपको मशीन लर्निंग, डीप लर्निंग एक्सट्रा
की एक डीप नॉलेज हो, अच्छी समझ हो और आप अच्छे मॉडल्स बना पाओ। बट एक सेकंड और एक्सपेक्टेशन आपसे यह रहती है कि आप उन
मॉडल्स के अराउंड ऐसे स्केलेबल सिस्टम्स बना पाओ जिनकी हेल्प से आपके करोड़ों यूज़र्स उस सॉफ्टवेयर को यूज़ करें और फिर
भी आपका सॉफ्टवेयर बहुत अच्छा एक्सपीरियंस प्रोवाइड करें। तो ये जो एमएल इंजीनियरिंग ट्रैक है यहां पर आप एग्जैक्टली यही चीज
सीखने वाले हो दैट आप अपने ट्रेंड मॉडल मशीन लर्निंग या फिर डीप लर्निंग मॉडल के अराउंड कैसे स्केलेबल सिस्टम्स बिल्ड कर
सकते हो जो प्रोडक्शन में डिप्लॉय होंगे और उनको करोड़ों लोग यूज़ करेंगे ऑन अ डेली बेसिस। ठीक है? तो दिस इज द मेन आईडिया।
अब इस पर्टिकुलर स्पेशलाइजेशन को मैं एवरग्रीन बुलाता हूं। बिकॉज़ एआई की फील्ड में ये पर्टिकुलर स्पेशलाइजेशन चार्ट
जीपीटी एरा के पहले एग्ज़िस्ट करता था। और अभी भी चार जीपीटी के आने के बाद भी दिस इज अनटच्ड। अभी भी इसकी पढ़ाई उतनी ही
जोर-शोर से की जाती है। अभी भी इसकी डिमांड उतनी ही है। ठीक है? ऐसा नहीं हुआ है कि एलएलएम्स के आ जाने से अब ये वाली
पढ़ाई काेंस कम हो गया है। आज भी आपको मशीन लर्निंग डीप लर्निंग मॉडल्स बिल्ड करने होते हैं। बिकॉज़ बहुत सारे नैरो
टास्क ऐसे हैं एi में जिनको सिर्फ आप मशीन लर्निंग डीप लर्निंग से ही सॉल्व कर सकते हो। जैसा मैंने आपको थोड़ी देर पहले इस
रोड मैप में बताया भी। फॉर एग्जांपल लेट्स से SGI है। अब SWGI को अपने कस्टमर को कार्ड बिल्ड करने के टाइम पर बताना है कि
उनके पास ऑर्डर कितने टाइम में पहुंच जाएगा। तो ये फॉरकास्टिंग बहुतेंट है उसके बिज़नेस के लिए। तो इसके प्रेडिक्शन के लिए
आप एलएलएम्स यूज़ नहीं कर सकते। बिकॉज़ आपको ऐसे मॉडल्स चाहिए जो इस यूनिक स्पेशलाइज्ड टास्क के लिए ज्यादा अच्छा परफॉर्म करें
जो एलएलएम्स के लिए पॉसिबल नहीं है। सेकंड आपको प्रेडिक्शन करवाने टाइम भी इस तरह के सोलशंस बिल्ड करने हैं जो एट स्केल कम
कॉस्ट में काम करके दे। अब अगर आप एक प्रेडिक्शन करवा रहे हो एक एक्सडी बूस्ट मशीन लर्निंग मॉडल से वर्सेस आप
प्रेडिक्शन करवा रहे हो एक एलएलएम से आप खुद सोच के देखो कि एक एलएलएम को प्रेडिक्शन करवाने के लिए आपको जीpu लगेगा
एट स्केल अगर करोड़ों लोग उसको डेली बेसिस पे यूज़ करने लग जाए तो यू कैन अंडरस्टैंड कॉस्ट किस तरीके से भाग सकता है तो दैट इज
व्हाई आई एम सेइंग कि ये जो पर्टिकुलर स्पेशलाइजेशन है ये एवरग्रीन है। पहले भी इसके ऊपर काम चल रहा था। चार जीपीटी
एलएलएम्स के आने के बाद भी इसका उतना हीेंस है। हां, मैं यह जरूर मानूंगा कि यह थोड़ा सा अब अनसेक्सीी हो गया है।
एलएलएम्स एंड एआई इंजीनियरिंग ये जो नए बज़वर्ड्स हैं ये थोड़े ज्यादा सेक्सीी हो गए हैं। इसलिए स्टूडेंट्स को ऐसा लगता है
कि ना अब इस तरफ उतनाेंस नहीं है। इस तरफ फ्यूचर नहीं है। बट ट्रस्ट मी आज भी बहुत बड़ी-बड़ी कंपनीज़ छोटी बड़ी-छोटी सारी
कंपनीज़ को ऑन अ डेली बेसिस बहुत तरह के नैरो टास्क सॉल्व करने के लिए ये एमएलडीएल वाला पाथ फॉलो करना पड़ता है और उसके
अराउंड स्केलेबल सिस्टम्स बनाने पड़ते हैं जो आप यहीं पे सीखते हो एमएल इंजीनियरिंग ट्रैक में। ठीक है? तो आई होप आपको मैं एक
इंट्रोडक्शन दे पाया कि इस पर्टिकुलर स्पेशलाइजेशन में आप क्या करने वाले हो। अह अब अगर बात की जाए कि यहां पे आपको
सीखना क्या है? तो यहां पे आपको प्रिसाइज़ली दो बड़े टॉपिक्स के ऊपर पढ़ाई करनी है। उनमें से पहला टॉपिक है एमएल
सिस्टम डिज़ाइन और सेकंड टॉपिक है एमएल ऑप्स। आई एम प्रीटी श्योर आपने एमएलॉप्स और एमएल सिस्टम डिज़ाइन दोनों ही सुना
होगा। बहुत सारे स्टूडेंट्स को यह कन्फ्यूजन रहता है कि दोनों बिल्कुल सेम चीजें हैं। तो सबसे पहले मैं आपका यह
कन्फ्यूजन दूर कर देता हूं कि इन दोनों के बीच में क्या डिफरेंस है और फिर मैं आपको बताता हूं कि इन दोनों में आपको
एग्जैक्टली क्या-क्या पढ़ना है। अब एमएल सिस्टम डिज़ाइन और एमएल ऑफ्स के बीच का डिफरेंस हम एक एनालॉजी के थ्रू समझते हैं।
सो एनालॉजी है एक एयरपोर्ट की। अब मान लो कि आपको रिस्पांसिबिलिटी दी जाती है एक एयरपोर्ट को रन करने की। तो सबसे पहले तो
आपको ये सोचना है कि आपके की कंसीडरेशंस क्या-क्या होंगे? आपके की कंसीडरेशनंस होंगे कि सबसे पहले आपके जो भी प्लेेंस
हैं वो सेफली लैंड कर जाएं। आपके जो पैसेंजर्स हैं उनका मूवमेंट स्मूथली रहे। सिक्योरिटी कभी फेल ना हो। डिलेज़ कम से कम
हो और अगर कभी कोई पर्व त्यौहार आ रहा है तो उस टाइम पे जो भीड़ होगी उसको भी आपका एयरपोर्ट सही से मैनेज करे। इस चीज के
अराउंड आपके दिमाग में दो अलग क्वेश्चंस चलेंगे। पहला क्वेश्चन ये चलेगा कि हाउ शुड एन एयरपोर्ट बी डिज़ सो दैट इट वर्क्स
वेल? राइट? यह एयरपोर्ट को बनने के पहले का क्वेश्चन है। और दूसरा एक बार एयरपोर्ट बन जाएगा तो आपके दिमाग में क्या क्वेश्चन
आएगा? हाउ डू वी ऑपरेट एंड मेंटेन द एयरपोर्ट डे आफ्टर डे। डेली बेसिस पे एयरपोर्ट को कैसे फंक्शन करवाना है? तो
यही डिफरेंस है एमएल सिस्टम डिज़ाइन और एमएल ऑफ्स के बीच में। एमएल सिस्टम डिज़ाइन का मतलब है डिजाइनिंग द एयरपोर्ट।
एयरपोर्ट को बनाने के पहले का प्रोसेस। यहां पे आप क्या करोगे कि आप सारे के सारे आर्किटेक्चरल डिसीजंस लोगे एयरपोर्ट को
बनाने के पहले का। सिमिलरली एमएल सिस्टम डिजाइन में आप क्या करते हो? एक एमएल सिस्टम बिल्ड करने के पहले के सारे के
सारे आर्किटेक्चरल डिसीजन मेकिंग करते हो। ठीक है? एयरपोर्ट की टर्म्स में बात की जाए तो आप इसी स्टेज में सोचते हो कि
रनवेज कहां पे आप डालोगे? कितने रनवेज की जरूरत है? कितने अराइवल्स और डिपार्चर आपको हैंडल करने पड़ सकते हैं? सिक्योरिटी
चेक कैसे होगा? और पैसेंजर्स का पूरा फ्लो कैसे मैनेज होगा? पीक ट्रैफिक कैसे मैनेज करोगे? ये सब कुछ आप प्लान करते हो
ड्यूरिंग द प्लानिंग स्टेज। सिमिलरली एमएल सिस्टम डिज़ाइन भी क्या करता है? इसी तरह के क्वेश्चंस को आंसर करता है अराउंड अ
एमएल प्रोजेक्ट। आप ये सब सोचते हो कि आप बैच मशीन लर्निंग यूज़ करोगे या फिर आप रियल टाइम एमएल यूज़ करोगे। आप ऑनलाइन
इनफेंस दोगे या फिर आप ऑफलाइन प्रेडिक्शनंस दोगे। आपका डेटा कहां से आएगा? आप ट्रेनिंग में अगर कोई स्क्यू है
तो उसको कैसे रिड्यूस करोगे? कोल्ड स्टार्ट प्रॉब्लम को कैसे हैंडल करोगे? लेटेंसी, कॉस्ट, एक्यूरेसी ये सारी बातें
आप इसी स्टेज में करते हो। अब बात करते हैं एमएलप्स की। तो एक बार जब एयरपोर्ट बन जाता है तो उसके बाद जो उसको डे टू डे
बेसिस पर मैनेज करना होता है ऑपरेट करना होता है वो एमएलप्स है एक तरीके से आपका एयरपोर्ट अगर एक बार बन गया तो आप डेली
बेसिस पे क्या करोगे वहां पे आप फ्लाइट्स को शेड्यूल करोगे डिलेज़ को मॉनिटर करोगे स्टाफ्स को रिट्रेन करोगे किसी भी तरह का
सिक्योरिटी इशू को डिटेक्ट करोगे आपका वो बेल्ट अगर टूट जाता है जिस पे लगेज आ रहा है तो आप उसको फिक्स करोगे राइट सिमिलरली
एमएल के टर्म्स में अगर बात की जाए तो एमएलप्स का काम क्या होता है कि एक बार आपका सिस्टम अगर प्रोडक्शन में आ गया है
डिप्लॉय हो गया तो आप फिर उसको अच्छे से फंक्शन करवाते रहो। बहुत ज्यादा यूज़र्स आ रहे हैं तो भी आपका सिस्टम ब्रेक ना करे।
आप उसको कॉन्स्टेंटली मॉनिटर करते रहो। किसी तरह का ड्रिफ्ट अगर आ रहा है तो आप उस ड्रिफ्ट को हैंडल करो। आप अपने सिस्टम
को अपने मॉडल को रीट्रेन करो। ये सारी चीजें आपकी एमएलप्स के अंदर आती हैं। तो यही सबसे बड़ा फंडामेंटल डिफरेंस है
बिटवीन एमएल सिस्टम डिज़ाइन एंड एमएलप्स। एमएल सिस्टम डिजाइन एक प्रोजेक्ट को प्लान करने के स्टेज में आता है और एमएलप्स उसको
डिप्लॉय करने के स्टेज में आता है और ये दोनों ही चीजें बहुतेंट है। दोनों रिलेटेड हैं। बट इन दोनों की पढ़ाई थोड़ी अलग है
और आपको दोनों चीजें आनी चाहिए। और सबसेेंट बात क्या है कि अब ये जो एआई वाला एज आ गया है जहां पे ऐसे सिस्टम्स आ रहे
हैं जो आपके बिहाफ में कोड कर सकते हैं। डेटा को एनालाइज कर सकते हैं। वहां पे ये जो पर्टिकुलर पर्टिकुलर स्किल है एमएल
सिस्टम डिज़ाइन ये बहुत ज्यादा मैटर करेगा। बिकॉज़ जिन लोगों को भी सिस्टम डिजाइनिंग आती होगी वो एi से बहुत पावरफुल सिस्टम्स
बनवा सकते हैं। तो उस सेंस में दिस इज़ अ वेरीेंट टॉपिक। सो नाउ दैट यू अंडरस्टैंड द डिफरेंस। नाउ लेट्स डाइव इंटू देम और
एक-एक करके पढ़ते हैं कि इन दोनों में आपको क्या-क्या टॉपिक्स कवर करने हैं। सो एमएल सिस्टम डिज़ाइन में जो सबसे पहली चीज होती
है जिसके ऊपर सबसे ज्यादा फोकस किया जाता है वो है प्रॉब्लम फॉर्मुलेशन। यहां पे आपको क्या करना होता है? सबसे पहले एक
बिजनेस प्रॉब्लम आपको दी जाती है। फॉर एग्जांपल आपको ये बिजनेस प्रॉब्लम दी गई कि आपको अपनी कंपनी का रेवेन्यू बढ़ाना
है। फिर आप क्या करते हो? इस बिनेस प्रॉब्लम को एक एमएल ऑब्जेक्टिव में कन्वर्ट करते हो। आप यह सोचते हो कि मुझे
अगर कंपनी का रेवेन्यू बढ़ाना है तो एक तरीका यह है कि मैं यह फिगर आउट करूं कि कितने लोग हमारे कंपनी का सब्सक्रिप्शन
छोड़ के जाने वाले हैं अगले महीने और फिर मैं उनको कुछ डिस्काउंट्स दे के रोकूं। तो दिस इज़ कॉल्ड प्रॉब्लम फॉर्मुलेशन। आपको
एक बिज़नेस ऑब्जेक्टिव दिया गया कंपनी का रेवेन्यू बढ़ाना। आपने उसको एमएल ऑब्जेक्टिव में कन्वर्ट कर दिया। जहां पे
आपको कस्टमर चर्न कैलकुलेट करना है विथ द हेल्प ऑफ़ सम प्रेडिक्टिव मॉडल। सो यहां पे ये इसलिए बहुतेंट है बिकॉज़ बहुत सारी ऐसी
प्रॉब्लम्स हैं जिसमें मशीन लर्निंग अप्लाई करने की जरूरत भी नहीं है। वो मशीन लर्निंग के बिना भी सॉल्व की जा सकती है।
तो ये काइंड ऑफ़ एकेंट स्टेप है। यहां पे यू टेक अ बिज़नेस ऑब्जेक्टिव, यू कन्वर्ट इट टू एमएल और उसके बाद आप उसको सब टास्क
में ब्रेक डाउन करते हो। आप उन सारे टास्क के अराउंड जो भी कंस्ट्रेंट्स हैं, जो भी अजमशंस हैं, उसको टेस्ट करते हो। औरेंट
क्वेश्चंस पूछते हो बिफोर हैंड। ठीक है? ये आपको सबसे पहले स्टेप में करना पड़ता है। उसके बाद आता है सेकंड स्टेप डेटा
सिस्टम डिजाइन। मशीन लर्निंग, डीप लर्निंग प्रॉब्लम स्टेटमेंट्स में आपको जो सबसे इंपॉर्टेंट चीज होती है वो होती है डेटा।
बिकॉज़ इवेंचुअली आपका जो मॉडल ट्रेन होगा वो डेटा पे ही ट्रेन होगा। तो आपको डेटा के अराउंड भी बहुत सॉलिड प्लानिंग करनी
पड़ती है। स्पेशली इफ यू अ बिग ऑर्गेनाइज़ेशन और आप बहुत बड़े डेटा के साथ डील कर रहे हो तो यू हैव टू डू अ लॉट ऑफ़
थिंग्स बिफोर स्टार्टिंग। जैसे कि आपको सबसे पहले ये समझना पड़ता है कि आप अपना खुद का फर्स्ट पार्टी डेटा यूज कर रहे हो
या फिर आपको थर्ड पार्टी से डेटा लेके आना है। डेटा स्टैटिक है या फिर वो स्ट्रीम कर रहा है। ट्रेनिंग डेटा कैसा होगा? सर्विंग
डेटा कैसा होगा? उसके बाद ये सब डिसाइड करने के बाद यू डिसाइड कि डेटा कलेक्शन हम करेंगे कैसे? डेटा को स्टोर कहां पे
करेंगे? उसको वर्जन कैसे करेंगे? और आपका डेटा में किस तरह के क्वालिटी इशूज़ आ सकते हैं? डेटा को हम कैसे वैलिडेट करेंगे? और
इवेंचुअली क्या हमारे डेटा का डिस्ट्रीब्यूशन चेंज हो सकता है ओवरटाइम? इस तरह के क्वेश्चंस आप पूछते हो और इन
क्वेश्चंस को आप प्रॉपर्ली आंसर देने की कोशिश करते हो बिफोर एक्चुअली स्टार्टिंग द प्रोजेक्ट। उसके बाद आता है फीचर सिस्टम
डिज़ाइन। सो मशीन लर्निंग डीप लर्निंग में फीचर्स आर बेसिकली इनपुट डेटा गिवेन टू द सिस्टम। तो उसको प्रॉपर्ली हैंडल करना
बहुतेंट है। तो आप सबसे पहले फीचर्स के अराउंड बहुत स्टडी करते हो कि आपको जो फीचर्स लगेंगे आपके प्रोजेक्ट में क्या वो
स्टैटिक हैं या डायनेमिक हैं? रियल टाइम है या बैच हैं। क्या हमें उसके ऊपर किसी तरह का एग्रीगेशन परफॉर्म करना है कि
नहीं। ठीक है? फिर आप ये सोचते हो कि हम फीचर इंजीनियरिंग को कैसे इंप्लीमेंट करेंगे? हमारे प्रोजेक्ट में और आप इस
बारे में सोचते हो कि क्या आपको कोई फीचर स्टोर यूज़ करने की जरूरत है या नहीं प्रोजेक्ट के अंदर। तो ये सारी चीजें आप
फीचर सिस्टम डिज़ाइन में हैंडल करने की कोशिश करते हो। उसके बाद आता है प्रोबेब्ली द मोस्टेंट स्टेप ऑफ दिस
एंटायर पाइपलाइन जहां पे आप अपना मॉडलिंग स्ट्रेटजी प्लान करते हो। आप ये सोचते हो कि सबसे पहले इस प्रॉब्लम स्टेटमेंट के
ऊपर हम किस तरह का एल्गोरिदम अप्लाई करना चाहते हैं? क्या हम मशीन लर्निंग एल्गोरिदम अप्लाई करना चाहते हैं या फिर
हम डीप लर्निंग एल्गोरिदम अप्लाई करना चाहते हैं? क्या डीप लर्निंग अप्लाई करना ओवर किल तो नहीं होगा? क्या हम ऑसमल मॉडल
यूज़ करना चाहते हैं या सिंगल मॉडल यूज़ करना चाहते हैं? हमारी ट्रेनिंग स्ट्रेटजी क्या रहेगी? हम ऑफलाइन ट्रेन करना चाहते
हैं या फिर हम ऑनलाइन कंटिन्यूअल ट्रेनिंग करना चाहते हैं? हम किस फ्रीक्वेंसी पे रीट्रेन करेंगे अपने मॉडल को? कोल्ड
स्टार्ट प्रॉब्लम को कैसे हैंडल करेंगे? अगर हमारे डेटा में इमंबैलेंस है तो हम किस तरह की सैंपलिंग स्ट्रेटजीज़ यूज़
करेंगे? कौन सा लॉस फंक्शन यूज़ करेंगे? कौन से मैट्रिक्स पे हम फोकस करेंगे? अ क्या हम एक ऐसे प्रॉब्लम के ऊपर काम कर
रहे हैं जहां पे इंटरप्रेटेबिलिटी बहुत इंपॉर्टेंट है। अगर इंपॉर्टेंट है तो हम कौन से मॉडल्स को यूज़ करें? मॉडल की लाइफ
साइकिल को हम कैसे हैंडल करेंगे? मॉडल की वर्जनिंग को कैसे हैंडल करेंगे? रोल बैक कैसे करेंगे? ये सारी चीजें आप यहां पे
डिस्कस करते हो। मॉडल ट्रेन करने के बाद नेक्स्ट आता है आपका इवैल्यूएशन स्ट्रेटजी कि आप अपने मॉडल का इवैल्यूएशन कैसे
करोगे? तो यहां पे अगेन यू हैव टू आस्क अ लॉट ऑफ़ क्वेश्चंस। अगर आप ऑफलाइन इवैल्यूएशन कर रहे हो तो हाउ डू यू
परफॉर्म ट्रेन इनवैलिडेशन टेस्ट स्प्लिट्स? अगर आप टाइम सीरीज बेस्ड डेटा पे काम कर रहे हो तो हाउ डू यू डू टाइम
अवेयर स्प्लिट्स? डेटा लीकेज कैसे हैंडल कर रहे हो? क्या डेटा लीकेज हो रहा है कि नहीं सिस्टम में? कौन-कौन से मैट्रिक्स
मैटर करते हैं? आपके एमएल मैट्रिक्स अलग होंगे। आपके बिज़नेस मैट्रिक्स अलग होंगे। हाउ डू यू डिसाइड फॉर थ्रेशहोल्ड्स जो
आपके मैट्रिक में मैटर करते हैं। अगर आप ऑनलाइन इवैल्यूएशन कर रहे हो तो आप ईवी टेस्टिंग जैसी चीज को इंप्लीमेंट करना
चाहोगे। सो ये सारी चीजें इवैल्यूएशन स्ट्रेटजी के अंदर आती हैं। इवैल्यूएशन स्ट्रेटजी के बाद एक बार यू आर श्योर कि
आपने जो मॉडल ट्रेन किया है वो हर तरह के मैट्रिक पे सही उतर रहा है, खरा उतर रहा है। तो अब आता है अगला क्वेश्चन। आपको उस
मॉडल को दुनिया के सामने लेके आना है। उसको सर्व करना है। तो यहां पे बात की जाती है सर्विंग आर्किटेक्चर के बारे में।
बैच प्रेडिक्शन करना है या ऑनलाइन इनफेंस देना है। स्ट्रीमिंग इनफेंस देना है तो कैसे करना है? लेटेंसी एंड थ्रूपट के बारे
में बहुत बात होती है। मॉडल साइज कितना बड़ा होना चाहिए? उसके हिसाब से लेटेंसी कैसे वेरीरी कर रहा है? अगर हमारा मॉडल
बहुत बड़ा है तो उसके अराउंड किस तरह के हार्डवेयर कंसीडरेशंस हैं। फॉर एग्जांपल आपने एक बहुत बड़ा डीप लर्निंग मॉडल ट्रेन
किया है। तो उसके इनफ्लुएंस के लिए आपको जीpयू की जरूरत पड़ सकती है जिससे आपका कॉस्ट भाग सकता है। हाउ डू यू परफॉर्म
कैशिंग? कि बार-बार आपको सिमिलर टाइप के इनपुट के लिए बार-बार मॉडल को प्रेडिक्शन ना करवाना पड़े। आप कैश रिजल्ट्स दिखा दो।
अह उसके बाद मॉडल को आप डिप्लॉय कैसे करते हो? देयर आर डिफरेंट डिप्लॉयमेंट पैटर्न्स। ब्लू ग्रीन पैटर्न हुआ, कैनरी
रिलीज़ हुए। ये सारी चीज़ें यहीं पे डिस्कस की जाती हैं। हाउ डू यू मेक योर सिस्टम मोर रिलायबल। कैसे आप रोल बैक करोगे? अगर
कोई गड़बड़ हो जाती है। व्हाट आर द फॉल बैक स्ट्रेटजीज़? और लास्टली यू डू अ लॉट ऑफ़ कॉस्ट ऑप्टिमाइजेशन? बिकॉज़ यहां पे आप
अपने क्राउड प्लेटफॉर्म्स के साथ काम कर रहे हो। और यहां पे अगर आपने चीजों को सही से ऑप्टिमाइज़ नहीं किया तो एट स्केल आपका
कॉस्ट बहुत भाग सकता है। तो ये सारी चीजें आप सर्विंग के टाइम पे डिस्कस करते हो। सो अभी तक आपने अपने मशीन लर्निंग प्रॉब्लम
को फॉर्मुलेट किया। अपना डेटा सिस्टम डिजाइन किया। फीचर सिस्टम डिजाइन किया। अपनी मॉडलिंग स्ट्रेटजी पूरी डिसाइड की।
इवैल्यूएशन के बारे में डिस्कस किया। और फाइनली एक बार सब कुछ हो जाने के बाद आपने अपने मॉडल को डिप्लॉय कर दिया। सर्व कर
दिया। अब जो लास्ट चीज होती है वो होती है फीडबैक एंड मॉनिटरिंग। सो मशीन लर्निंग और डीप लर्निंग बेस्ड जो सिस्टम्स होते हैं
वो ट्रेडिशनल सॉफ्टवेयर से थोड़े अलग होते हैं। ट्रेडिशनल सॉफ्टवेयर में एक बार अगर आपने अपने वर्किंग सॉफ्टवेयर को डिप्लॉय
कर दिया तो वो बिल्कुल एज़ इट इज़ काम करता चला जाएगा। बट एमएलडीएल बेस्ड सिस्टम्स में क्या होता है कि ड्रिफ्ट का कांसेप्ट
होता है व्हिच बेसिकली मीन्स कि ओवर टाइम आपके मॉडल का परफॉर्मेंस डिग्रेड करता जाता है। एंड दैट इज व्हाई इट इज़ वेरीेंट
कि आप अपने सिस्टम को कॉन्सेंटली मॉनिटर करो। आप थ्रेशहोल्ड सेट करते हो अपने मैट्रिक्स के ऊपर और जैसे ही आपके
थ्रेशहोल्ड्स ब्रीच हो रहे हैं उससे नीचे जा रहा है परफॉर्मेंस तो आप क्या करते हो? आप ट्रिगर्स डाल देते हो अपने सिस्टम में
और आप अपने मॉडल को रीट्रेन करते हो। तो ये पूरी चीज बहुतेंट है। ये काइंड ऑफ एक फीडबैक लूप है जो हमेशा चलते रहता है।
ट्रेनिंग रीट्रेनिंग ट्रेनिंग रीट्रेनिंग ये पूरे टाइम होते रहती है। ठीक है? और इसके अलावा एक और चीज जो यहां पे बहुतेंट
हो जाती है वो है गवर्नेंस एंड एथिक्स। स्पेशली इफ यू आर बिल्डिंग सिस्टम्स फॉर मल्टीीनेशनल कंपनीज़ जो अलग-अलग
ज्योग्राफिकल रीजंस में ऑपरेट कर रही है। तो वहां पे इट्स वेरीेंट कि आप कंट्री बाय कंट्री बेसिस पे जो भी लॉज़ हैं इस तरह के
सॉफ्टवेयर के अराउंड उसके हिसाब से अपने सिस्टम को डिज़ाइन करो। तो ये एक एस्पेक्ट बहुत ज्यादा मैटर करता है और ये स्पेशली
आप तब सीखते हो जब आप थोड़े सीनियर पोजीशन पे या सीनियर रोल्स पर ऑपरेट करते हो। सो या ये जो अभी हमने डिस्कस किया इतनी ही
चीजें आपको पढ़नी है एमएल सिस्टम डिज़ाइन में और अब नाउ दैट यू हैव द आईडिया कि कैसे आपको एयरपोर्ट को आर्किटेक्चरली
प्लान करना है। अब डिस्कस करते हैं कि एक एयरपोर्ट को डे टू डे बेसिस पे कैसे चलाया जाता है और वो हम देखेंगे एमॉप्स की हेल्प
से। अब एमएलप्स के बारे में डिस्कस करने के पहले एक इंपॉर्टेंट चीज बता दूंगा और वह यह है कि एमएलप्स के टॉपिक्स आपको बहुत
सिमिलर लगेंगे एमएल सिस्टम डिजाइन से और वो बहुत ऑब्वियस है। हमने जस्ट डिस्कस किया कि एमएलप्स में हम जो भी करते हैं
उन्हीं चीजों के बारे में जो प्लानिंग है वो हम एमएल सिस्टम डिजाइन में करते हैं। तो दैट इज व्हाई बहुत ज्यादा ओवरलैप है बट
एमएलप्स में जो चीजें आप देखोगे वो बहुत प्रैक्टिकल पॉइंट ऑफ व्यू से होंगी। जो डिस्कशंस हमने आर्किटेक्चर लेवल पे किए थे
उनको यहां पे हम सिस्टम लेवल पे एग्जीक्यूट करेंगे। ठीक है? तो सबसे पहले अ सीक्वेंशियली अगर हम बात करें तो आता है
डेटा वर्जनिंग एमलॉप्स के अंदर। डेटा वर्जनिंग का सिंपल फंडा ये है कि आप अपने डेटा को स्टोर और वर्जन करते हो। अब आपने
कोड की वर्जनिंग सुनी होगी जहां पे आप गीब जैसे टूल्स यूज़ करते हो। मशीन लर्निंग में क्या होता है या डीप लर्निंग में क्या
होता है कि आप अपने डेटा की भी वर्जनिंग करते हो। बिकॉज़ मशीन लर्निंग सिस्टम्स में डेटा इज़ अ बिग स्टेक होल्डर। और डेटा का
कैसा है कि वो ओवरटाइम इवॉल्व करता है। राइट? अगर आपके पास अभी 100 यूज़र्स हैं आपकी वेबसाइट पे तो 6 महीने बाद वो 200 हो
सकते हैं। तो फिर आपको नेक्स्ट एमएल मॉडल जो ट्रेन करना है वो अपने अपडेटेड डेटा पे करना है। तो डेटा वर्जनिंग का कॉ कांसेप्ट
बहुत इंपॉर्टेंट हो जाता है। बिकॉज़ इससे हमें पता चलता है कि कब कौन सा डेटा किस मॉडल को ट्रेन करने के लिए यूज़ किया गया
था। ठीक है? तो दैट इज़ व्हाट डेटा वर्जनिंग इज़। यहां पे आपको पढ़ना है कि डेटा वर्जनिंग क्यों मैटर करता है। क्यों
रिप्रोड्यूसबिलिटी इंपॉर्टेंट है? आपको पढ़ना होता है कि क्या-क्या चीजें आप वर्जन कर सकते हो? डेटा सेट की वर्जनिंग की
अलग-अलग स्ट्रेटजीज़ क्या है? हाउ डू यू ट्रैक डेटा का लीनिएज? व्हाट आर द वेरियस ऑप्शंस टू स्टोर योर डेटा और उसके बाद दीज़
आर द टूल्स दैट यू एक्चुअली यूज़ इन ऑर्डर टू डू डेटा वर्जनिंग। सो डीवीसी इज़ वन टूल लेक एफएस डेल्टा लेक। ये आपके कुछ प्रॉपर
टूल्स हैं जो इंडस्ट्री में यूज़ किए जाते हैं। अगली जो इंपॉर्टेंट चीज़ एमएलप्स में आती है वो है एक्सपेरिमेंट ट्रैकिंग। अब
एक्सपेरिमेंट ट्रैकिंग का फंडा क्या है वो मैं आपको समझा देता हूं। सो मशीन लर्निंग डीप लर्निंग प्रोजेक्ट्स जब आप अप्रोच
करोगे तो आप रियलाइज करोगे कि प्रोजेक्ट को एग्जीक्यूट करने का कोई एक सेट तरीका नहीं है। यहां पे थोड़ा सा इसको आप आर्ट
की तरह ले सकते हो। देयर आर डिफरेंट वेज़ डिफरेंट पार्ट्स दैट यू कैन ट्राई। फॉर एग्जांपल आप एक कस्टमर चर्न प्रॉब्लम के
ऊपर काम कर रहे हो। तो ऐसा हो सकता है कि आप कोई ऑनसमल लर्निंग टेक्निक यूज़ करो। बट फिर वहां से रिजल्ट अच्छे नहीं आ रहे हैं।
तो व्हाट यू कैन डू इज़ यू कैन यूज़ सम अदर मशीन लर्निंग एल्गोरिदम। लेट्स से आपने एसवीएम यूज़ कर लिया। या फिर आपने अलग-अलग
एल्गोरिदम्स ट्राई करके देख लिए और परफॉर्मेंस इंप्रूव नहीं कर रहा है तो आप पीछे जाकर के कोई डिफरेंट टाइप ऑफ फीचर
इंजीनियरिंग टेक्निक यूज़ कर रहे हो। फिर आपने रियलाइज किया कि डेटा में थोड़ा इमंबैलेंस है। तो आप इमंबैलेंस डेटा को
हैंडल करने की जो भी टेक्निक्स हैं उनको एक-एक करके इंप्लीमेंट कर रहे हो। तो इस पूरे प्रोसेस में आप क्या कर रहे हो? आप
अलग-अलग एक्सपेरिमेंट्स रन कर रहे हो इन ऑर्डर टू सी कि कौन सा तरीका आपको बेस्ट रिजल्ट्स दे रहा है आपके डेटा के हिसाब
से। अब ये सारे एक्सपेरिमेंट्स कंडक्ट अगर आप करते चले जाओगे और इनको कहीं पर स्टोर नहीं करोगे तो इवेंचुअली यू विल रीच अ
प्लेस जहां पर आपने शायद 2025 एक्सपेरिमेंट्स कर डाले। बट अब आपको खुद नहीं पता है कि कौन सा वाला सबसे अच्छा
रिजल्ट देगा। बिकॉज़ आपने चीजों को सिस्टेटिकली ट्रैक नहीं किया। आपको ये भी याद नहीं है कि आपने एक्सपेरिमेंट नंबर
फोर में एक्सैक्टली डेटा का कौन सा वर्जन यूज़ किया। उसके कौन से फीचर्स को यूज़ किया। तो यही काम आप करते हो एक्सपेरिमेंट
ट्रैकिंग में। यहां पे आप एक सॉफ्टवेयर को यूज करते हो जो आपके हर एक्सपेरिमेंट को बहुत सिस्टेटिकली ट्रैक करता है। उसके
अराउंड जो भी डेटा है उसको बहुत सिस्टेटिकली ट्रैक करता है। क्या मैट्रिक्स थे? उनकी वैल्यूज़ क्या थी? डेटा
आपने कौन सा यूज़ किया? कौन सा एल्गोरिदम यूज़ किया? आपके हाइपर पैरामीटर की क्या वैल्यूज़ थी? ये सारा डेटा बहुत
सिस्टमेटिकली एक जगह पे स्टोर होता है। और सबसे अच्छी बात क्या है कि आप उस डेटा को कंपेयर कर सकते हो, एनालाइज़ कर सकते हो टू
सी द पैटर्न कि कौन सी टेक्निक्स आपको बेस्ट रिजल्ट्स तक पहुंचाएंगी। और यही मेजर फंडा है एक्सपेरिमेंट ट्रैकिंग का।
तो यहां पर आपको पढ़ना होता है कि एक्सपेरिमेंट्स होते क्या हैं? क्या-क्या आप ट्रैक कर सकते हो? हाउ डू यू कंपेयर टू
एक्सपेरिमेंट्स? हाउ डू यू कोलैबोरेट? आप एक डेटा साइंटिस्ट हो। आप अपने लैपटॉप में एक्सपेरिमेंट्स रन कर रहे हो। आपको उसको
अपने टीममेट के साथ शेयर करना है। हाउ डू यू डू दैट? तो यहां पे बहुत तरह के सॉफ्टवेयर्स हैं। उसमें जो सबसे जो हीरो
सॉफ्टवेयर है जो बहुत सारी कंपनीज़ यूज़ करती है वो है MLF फ्लो। वेट्स एंड बायसेस भी बहुत जगह पे यूज़ होता है। उसके अलावा
नेपच्यून एंड टेंसर बोर्ड भी टूल्स हैं जो इस पर्टिकुलर टास्क के लिए यूज किए जाते हैं। नेक्स्ट आता है एमएल पाइपलाइंस। सो
जब आप एक मशीन लर्निंग या डीप लर्निंग प्रोजेक्ट बिल्ड करते हो तो देयर आर वेरियस स्टेजेस जिसके थ्रू वो प्रोजेक्ट
मूव करता है। सबसे पहले आता है आपका डेटा को इंपोर्ट करने का स्टेप। उसके बाद डेटा को क्लीन करने का स्टेप, फिर आता है फीचर
इंजीनियरिंग। फिर आता है आपका मॉडलिंग का स्टेज। फिर आता है आपका इवैल्यूएशन। और फिर फाइनली अगर चीजें सही से काम नहीं कर
रही है तो यू डू अ फीडबैक लूप। ड्यू टू अ रीिट्रेनिंग। अब अच्छी चीज क्या है कि आप इन सारे स्टेप्स को एक दूसरे के साथ जोड़
सकते हो। सो दैट यह पूरा का पूरा प्रोसेस ऑटोमेटेड तरीके से भी काम कर पाए। और यही एग्जैक्ट काम हमें कम कर करके देता है
एमएल पाइपलाइंस। सो एमएल पाइपलाइंस में आप पढ़ोगे सबसे पहले कि व्हाई डस पाइपलाइंस मैटर? बिकॉज़ दे प्रोवाइड यू एन ऑप्शन ऑफ़
ऑटोमेशन। व्हाट आर द डिफरेंट पाइपलाइन स्टेजेस जो मैंने अभी जस्ट बताया। हाउ डू यू ऑर्केस्ट्रेट सच हाई लेवल पाइपलाइंस?
उसके बाद व्हाट इज द डिफरेंस बिटवीन बैच एंड कंटीन्यूअस पाइपलाइंस? हाउ डू यू डीबग अ पाइपलाइन? और फिर यहां पे जो मेन टूल्स
आप पढ़ते हो वो है एयर फ्लो, क्यूब फ्लो, प्रफेक्ट, डैक्स, इवन डीवीसी कैन एक्ट एज अ एमएल पाइपलाइन टूल। नेक्स्ट आपका आता है
मॉडल सर्विंग। ये स्टेज ऑब्वियसली आपके मॉडल के ट्रेन होने के बाद का स्टेज है जहां पे आप इवेंचुअली मॉडल को लोगों के
सामने प्रेजेंट करना चाहते हो। अब यहां पे आप मोस्टली वही चीजें पढ़ोगे। बट ऑन अ वेरी प्रैक्टिकल लेवल जो आपने एमएल सिस्टम
डिज़ाइन में देखी। व्हाट आर द डिफरेंट सर्विंग पैटर्न्स? हाउ डू यू पैकेज अ मॉडल? व्हाट आर द डिफरेंट डिप्लॉयमेंट
स्ट्रेटजीस दैट यू कैन यूज़ यू डू अ लॉट ऑफ़ वर्क अराउंड लेटेंसी थ्रू पुट एंड कॉस्ट। हाउ डू यू डू रिलायबल फॉलबैक। और यहां पे
जो आपके मेन टूल्स हैं वो है आपका केस सर्फ टॉर्च सर्फ इवन बेंटो एमएल इज़ अ वेरी गुड लाइट वेट एमएल सर्विंग फ्रेमवर्क। इवन
फ़ास्ट एपीआई कैन बी यूज़्ड टू रैप योर ML मॉडल इंटू एन एपीआई। ठीक है? तो ये भी एक इंपॉर्टेंट आस्पेक्ट है। मॉडल सर्विंग के
बाद आप मूव कर जाते हो डॉकरराइज़ेशन की तरफ। अ एक्चुअली आप मूव कर जाते हो डिप्लॉयमेंट की तरफ। जहां पे एक बहुत की
स्टेप होता है डॉकरराइजेशन। बिकॉज़ अभी तक आपका जो मॉडल है वो और जो भी आपने पाइपलाइंस वगैरह बिल्ड की है वो आपके मशीन
पे काम कर रही है। अब आपको उसको उठा करके डिप्लॉय करना है ऑन अ क्लाउड सर्वर। और ये बिल्कुल सीमलेस तरीके से हो। इसके लिए
बहुतेंट होता है कि आप अपने पूरे के पूरे सिस्टम को जो भी आपने सिस्टम बिल्ड किया है उसको आप डॉकर दो और उस डॉकरराइज्ड इमेज
को आप टेस्टिंग के लिए भी यूज़ करो। उसी को डिप्लॉयमेंट के लिए भी यूज़ करो। तो यहां पे आप पढ़ते हो कि कैसे डॉकर इज सच अ
क्रूशियल एस्पेक्ट ऑफ एमलॉप्स डॉकर फॉर मशीन लर्निंग हाउ डू यू बिल्ड सेपरेट डॉकर इमेजेस फॉर योर बिल्ड टाइम एग्जीक्यूशन
एंड रन टाइम एग्जीक्यूशन सिक्योरिटी एंड बेस्ट प्रैक्टिससेस। और यहां पे जो मेन टूल है वो बहुत ऑब्वियस है। यू स्टडी
अबाउट डॉकर एंड समटाइ्स आल्सो डॉकर कंपोज़। नेक्स्ट कम्स सीआईसीडी फॉर ऑटोमेटेड टेस्टिंग एंड डिप्लॉयमेंट। ठीक है? तो
यहां पे आप सबसे पहले पढ़ते हो कंटीन्यूअस इंटीग्रेशन। दैट इज़ सीआई फॉर ML और यहां पे आपका मेन गोल होता है कि एक ऑटोमेटेड
तरीके से कैसे आप अपने पूरे के पूरे ML पाइपलाइन को टेस्ट कर सकते हो, वैलिडेट कर सकते हो। और एक बार जब वो वैलिडेट हो जाता
है तो ऑटोमेटेड तरीके से हाउ डू यू परफॉर्म कंटीन्यूअस डेप्लॉयमेंट और हाउ डू यू प्रमोट योर मॉडल फ्रॉम वन स्टेज टू
अनदर। अभी वो डेप्थ में है फिर वो स्टेजिंग में जाएगा, प्रोडक्शन में जाएगा। और हाउ डू यू रोल बैक? ये सारी चीजें आप
यहां पे कवर करते हो। जो मेन आपके टूल्स हैं वो अगेन गेट एक्शनंस हुआ आपका जेनकिंस भी यूज होता है। आरgo सीडी हुआ गेट लैब भी
एक ऑप्शन है। मॉडल के डिप्लॉय हो जाने के बाद आता है मॉनिटरिंग का स्टेज। हमने थोड़ी देर पहले भी डिस्कस किया कि क्यों
एमएल बेस सिस्टम में मॉनिटरिंग बहुत मैटर कर जाता है। इट्स बिकॉज़ ड्रिफ्ट का कांसेप्ट है। ओवरटाइम आपके मॉडल का
परफॉर्मेंस खराब होना ही है। तो मॉनिटरिंग बहुत मैटर करता है। अब यहां पे आपको समझना होता है कि व्हाट एक्सैक्टली डू यू
मॉनिटर? इनपुट डेटा का डिस्ट्रीब्यूशन, आपके प्रेडिक्शन का डिस्ट्रीब्यूशन, आपके लेटेंसी एरर ये सारी चीजें आप यहां पे
देखते हो। इवन आप अपने बिज़नेस मैट्रिक्स को भी एनालाइज़ करते हो। डेटा का ड्रिफ्ट आप अलग मैनेज करते हो। मॉडल का परफॉर्मेंस
आप अलग मॉनिटर करते हो। और कोई अगर ऐसा सिचुएशन आ जाए जहां पे आपको लगता है कि किसी थ्रेशहोल्ड से नीचे जा रहे हैं आपके
मैट्रिक्स तो फिर अलर्टिंग का कांसेप्ट होता है जहां पे आप अपनी टीम को अलर्ट करते हो एक ऑटोमेटेड तरीके से। यहां पे जो
आपके मेन टूल्स हैं वो है एविडेंटली एआई, अराइज़ एआई और आपका प्रोमिथियस एंड एंड एंड एंड एंड एंड एंड एंड एंड एंड ग्राफाना ऐसे
जनरल टूल्स हैं। वो सॉफ्टवेयर में भी यूज़ होते हैं। बट उसको यहां पे भी आप यूज़ करते हो। और कभी-कभी बड़ी टीम्स अपनी खुद की
कस्टम लॉगिन पाइपलाइंस बनाती हैं वो एकदम अपना टेलर मेड मैट्रिक्स वगैरह को मॉनिटर करने के लिए। और मॉनिटरिंग के बाद नेक्स्ट
ऑब्वियस स्टेप जो होता है वो होता है रीट्रेनिंग। आपका मॉडल ओवरटाइम डिग्रेड कर गया उसका परफॉर्मेंस। तो अब आपको क्या
करना है? उसको रीट्रेन करना है। सो दैट ऑब्वियसली आपका जो परफॉर्मेंस है वो वापस जो आपका बेस लाइन है उस पे आ जाए। तो
रीट्रेनिंग में आप समझते हो कि कब एग्जैक्टली रीट्रेनिंग करनी चाहिए? क्या आप किसी टाइम पीरियड पे रीिट्रेन करोगे या
फिर किसी मैट्रिक के फेल करने पे रीट्रेन करोगे? यह सब आपको डिसीजन मेकिंग करनी होती है। रीट्रेनिंग के ट्रिगर्स आप
डिसाइड करते हो और उसके बाद हाउ डू यू परफॉर्म ऑटोमेटेड रीट्रेनिंग जो पाइपलाइन आपने अभी तक बनाई थी मॉडल को ट्रेन करने
के लिए। हाउ डू यू यूज़ इट टू परफॉर्म रीट्रेनिंग एज वेल। अ सो यहां पे जो मेन टूल्स हैं वो एक्सक्टली वही है जो आपने
एमएल पाइपलाइन बनाने के प्रोसेस में यूज़ की थी। एयर फ्लो क्यू फ्लो टाइप की चीजें। सो या दिस इज़ ऑल दैट यू हैव टू स्टडी इन
एमलॉप्स। अब एमलॉप्स में एक चीज मैं आपको अभी बताना चाहूंगा कि एमलॉप्स बहुत टूल्स हैवी आपका सब्जेक्ट है और एक कंपनी में जो
एमलॉप्स टूल्स यूज़ हो रहे हैं वो दूसरी कंपनी में बहुत वेरीरी कर सकते हैं। तो यहां पे आपको सबसे पहले जो फंडामेंटल्स
हैं उनकी बहुत अच्छी समझ होनी चाहिए। सो दैट अगर एक टूल आपसे ले लिया जाए और कोई दूसरा टूल आपको दे दिया जाए तो भी आप समझ
पाओ कि उसको कैसे हैंडल करना है। और इसीलिए मैं बार-बार बोलता हूं कि एमएलप्स को अगर आपको मास्टर करना है तो उसके लिए
पहले आपको एमएल सिस्टम डिज़ाइन को मास्टर करना पड़ेगा। बिकॉज़ फंडामेंटल्स यहीं से आ रहे हैं। उसके ऊपर का जो टूलिंग लेयर है
वो एमएलप्स है। ठीक है? तो फर्स्ट मास्टर एमएल सिस्टम डिज़ाइन एंड देन मूव ऑन टू एमएलप्स। यू विल ऑलवेज बिकम अ बेटर एमएल
इंजीनियर। एमएल सिस्टम डिज़ाइन एंड एमएलओप्स पढ़ने के अलावा इस पर्टिकुलर स्पेशलाइजेशन में जो एक और चीज आपको पढ़नी
है वो है एमएलप्स फॉर डीप लर्निंग सिस्टम्स। अभी तक हमने जो भी डिस्कशन किया दैट वाज़ मोस्टली अराउंड एमएल बेस्ड
सिस्टम्स। बट आपको डीएल बेस्ड सिस्टम्स के लिए भी एमएलप्स पढ़ना चाहिए। जब ये चीज मैं खुद पढ़ रहा था तो मेरे दिमाग में एक बहुत
ऑब्वियस क्वेश्चन आया कि हम एमएलओप्स फॉर डीएल को डीएलॉप्स क्यों नहीं बुलाते? आई मीन इट्स सच अ कन्वीनिएंट टर्म राइट? तो
जब मैंने थोड़ा टाइम यहां पे स्पेंड किया तो आई रियलाइज़्ड कि अलग से डीएलॉप्स नाम ना देने के पीछे कारण ये था कि एमएलप्स
फॉर डीप लर्निंग इज़ नॉट वेरी डिफरेंट फ्रॉम एमएलप्स फॉर मशीन लर्निंग। दे आर एक्चुअली वेरी क्लोज फंडामेंटली
प्रिंसिपली। जो थोड़ा बहुत डिफरेंस है ना वो इस बात से आता है कि डीप लर्निंग थोड़े और बड़े स्केल पे ऑपरेट करती है। बड़े
डेटा पे ऑपरेट करती है। ट्रेनिंग में ज्यादा टाइम लगता है। इस तरह की चीजों पे थोड़ा सा वेरिएशन है। बट जो फंडामेंटल्स
हैं वो बिल्कुल सेम है। दैट इज़ व्हाई डीएल ऑप्स टर्म नहीं आता। बट स्टिल देयर आर सर्टेन थिंग्स जो आपको अलग से सीखनी
पड़ेंगी इफ यू आर डूइंग डीएल बेस्ड प्रोजेक्ट्स। तो वो मैं आपको बता देना चाहूंगा। सबसे पहली चीज है
डिस्ट्रीब्यूटेड ट्रेनिंग। तो डिस्ट्रीब्यूटर ट्रेनिंग पढ़ने के पहले यह सब आपको थोड़ा थ्योरी पता होना चाहिए कि
क्यों डीप लर्निंग थोड़ा सा अलग है स्टैंडर्ड एमलॉप्स से क्या-क्या डिफरेंस है डीएल बेस्ड एमलपॉप्स और क्लासिकल
एमलोप्स में कब आपको डीएल बेस्ड एमलप्स की जरूरत पड़ती है अगर हम बात करें डिस्ट्रीब्यूटेड ट्रेनिंग की तो
डिस्ट्रीब्यूटेड ट्रेनिंग इज अ वे जहां पे आप एक सिंगल ट्रेनिंग टास्क को मल्टीपल मशीनंस पे एग्जीक्यूट करते हो और ऐसा
इसलिए जरूरी होता है बिकॉज़ डीप लर्निंग बेस्ड प्रोजेक्ट्स में आपका जो डेटा होता है वो ह्यूज होता है। जनरली एक मशीन पे
पूरा आप रख ही नहीं सकते। तो आप चंकिंग करके उसको अलग-अलग मशीनंस पे रखते हो और अलग-अलग मशीनंस पे पैरेलली ट्रेन करते हो।
तो दैट इज़ व्हाई वी कॉल इट डिस्ट्रीब्यूटेड ट्रेनिंग। तो यू अंडरस्टैंड फर्स्ट ऑफ़ ऑल व्हाई
डिस्ट्रीब्यूटेड ट्रेनिंग इज़ नीडेड। व्हाट आर द डिफरेंट वेज़ टू पैरेलल योर ट्रेनिंग, डेटा पैरेललिज्म, मॉडल पैरेललिज्म,
पाइपलाइन पैरेललिज्म। ये बहुतेंट है। इनफैक्ट ये सब इतनाेंट है कि आगे आप एलएलएम बेस्ड ट्रेनिंग जब पढ़ोगे, वहां पे
भी ये कॉन्सेप्ट्स यूज़ होते हैं। ठीक है? हाउ डू कम्युनिकेशन एंड सिंक्रोनाइजेशन हैपन? फॉल्ट टॉलरेंस कैसे आता है सिस्टम
में? आप 10 मशीनंस के ऊपर ट्रेनिंग कर रहे हो। एक मशीन बंद हो गई किसी रीज़न से। हाउ डू यू हैंडल दैट? हाउ डू यू स्केल
एफिशिएंटली? इसके बारे में बहुत बात की जाती है। और यहां पे आपके जो मेन टूल्स हैं वो कुछ लाइब्रेरीज़ हैं जो आपको
डिस्ट्रीब्यूटेड ट्रेनिंग का ऑप्शन देती हैं। सच एज पाई टॉर्च, डिस्ट्रीब्यूटेड, डीप स्पीड अ इवन टेंसर फ्लो का एक
डिस्ट्रीब्यूटेड वर्जन आता है। तो ये सब आपको पढ़ना पड़ता है इन डिस्ट्रीब्यूटेड ट्रेनिंग। नेक्स्ट एक इंपॉर्टेंट
कंसीडरेशन होता है चेक पॉइंटिंग। सो चेक पॉइंटिंग का फंडा क्या है कि आपके जो डीप लर्निंग ट्रेनिंग जॉब्स होते हैं वह कई
बार बहुत लंबे चलते हैं। मतलब ऐसा हो सकता है कि आपने एक मॉडल को ट्रेन करना स्टार्ट किया एंड दैट ट्रेनिंग माइट टेक डज़ और इवन
वीक्स और इवन मंथ्स। तो इन दैट केस आप ऐसा नहीं कर सकते कि आप अपने पूरे इंफ्रास्ट्रक्चर को महीनों महीनों भर रन
करते जा रहे हो उसके फुल पीक पे। उससे क्या होगा? आपके मशीनंस के परफॉर्मेंस पे असर पड़ता है। तो जनरली व्हाट यू डू इज़ यू
स्ट्रेटजाइज इन अ वे कि आप चेक पॉइंटर्स डिसाइड करते हो कि हम इतना प्रोपोर्शन में ट्रेनिंग एक स्टेज में करेंगे। फिर वहां
पे हम रुक जाएंगे और फिर आगे बढ़ के कंटिन्यू करेंगे। फिर रुक जाएंगे फिर कंटिन्यू करेंगे। दिस इज़ हाउ यू परफॉर्म
ट्रेनिंग। राइट? तो ये जो रुक जाना और वहां पे चीजों को स्टोर कर लेने का कांसेप्ट है इसी को हम चेक पॉइंटिंग
बुलाते हैं। तो यहां पे लिखा हुआ है चेक पॉइंट्स आर स्टेट स्नैपशॉट्स नॉट जस्ट फाइल्स। यहां पे आप सबसे पहले पढ़ते हो कि
चेक पॉइंटिंग क्यों क्रिटिकल है? बिकॉज़ लॉन्ग रनिंग जॉब्स हैं। हार्डवेयर फेल कर सकता है। कॉस्ट बहुत ज्यादा लग सकता है।
देन यू डिसाइड क्या एग्जैक्टली मैं चेक पॉइंट करता हूं? आप मॉडल के वेट्स चेक पॉइंट करते हो। ऑप्टिमाइजर का करंट स्टेट
चेक पॉइंट करते हो। लर्निंग रेट का शेड्यूल चेक पॉइंट करते हो। उसके बाद व्हाट आर द वेरियस चेक पॉइंटिंग
स्ट्रेटजीस? फुल वर्सेस पार्शियल चेक पॉइंट्स, फ्रीक्वेंसी ट्रेड ऑफ्स? उसके बाद हाउ डू यू रिज्यूम एंड हाउ डू यू
रिप्रोड्यूस अ चेक पॉइंट? इसके बारे में बहुत बात की जाती है। वेयर डू यू स्टोर योर चेक पॉइंट्स? इसके बारे में बहुत बात
की जाती है। तो, इसके अराउंड अगेन आपको कई लाइब्रेरीज़ मिल जाएंगी जो यह टास्क आपको करके देती हैं। सो, अगेन अ वेरीेंट
आस्पेक्ट ऑफ़ एमप्स फ्रॉम द पर्स्पेक्टिव ऑफ़ डीप लर्निंग। ट्रेनिंग के बाद आता है आपके ट्रेंड मॉडल का स्टोरेज। सो इफ यू आर
ट्रेनिंग अ बिग डीप लर्निंग मॉडल, तो जो इवेंचुअली आपको फाइनल मॉडल मिलता है, वो जीबीस में होता है। बहुत बड़ा होता है। तो
उसको स्टोर करना भी खुद में एक बहुत बड़ा कंसीडरेशन होता है। तो यहां पे यू स्टडी कि मॉडल स्टोरेज क्यों प्रॉब्लम है? व्हाट
आर द डिफरेंट मॉडल फॉर्मेट्स जिसमें आप चीजों को स्टोर कर सकते हो एफिशिएंटली। मॉडल की वर्जनिंग कैसे की जाए एट स्केल और
उसके बाद सिक्योरिटी के अराउंड भी आप थोड़ा सा चीजों को समझते हो। ठीक है? तो यहां पे अगेन यू यूज़ टूल्स सच एज एमएल
फ्लो मॉडल रजिस्ट्री या फिर हगिंग फेस हब ये सब आपने शायद नाम सुने भी होंगे। तो अगेन अ वेरीेंट कॉन्सेप्ट दैट यू हैव टू
स्टडी हियर। एंड द लास्ट थिंग इज़ ऑप्टिमाइज्ड इनफेंस। डीप लर्निंग में सिर्फ ट्रेनिंग ही बड़ी बात नहीं होती।
आपका इनफोरेंस भी जो होता है ना वो भी बहुत ट्रिकी होता है। बिकॉज़ इवन इनफोरेंस करने के लिए आपको जीपीयू की रिक्वायरमेंट
होती है और वो भी बहुत ऑप्टिमाइज तरीके से। तो यहां पे लोगों का बहुत पैसा बर्न होता है। तो यहां पे यू हैव टू फर्स्ट ऑफ़
ऑल अंडरस्टैंड व्हाई इनफेंस इज़ हार्डर दैन ट्रेनिंग। आपको ऐसे सिस्टम्स इंप्लीमेंट करने होते हैं जो हमेशा चलें और लेटेंसी
वगैरह बहुत मैटर करता है। बिकॉज़ बहुत बड़ा मॉडल है। तो रिजल्ट्स निकालने में इट माइट टेक सम टाइम। यू हैव टू अंडरस्टैंड कितना
पैसा आप खर्च रहे हो पर रिक्वेस्ट बेसिस पे। उसके बाद आप इनफेंस को ऑप्टिमाइज करने की टेक्निक्स पढ़ते हो। सच ऐज़ क्वांटाइजेशन
जहां पे आप अपने मॉडल का साइज़ थोड़ा रिड्यूस करते हो। प्रूनिंग अगेन अ वे टू रिड्यूस द साइज़ ऑफ़ योर मॉडल। डिस्टिलेशन
जहां पे आप एक टीचर मॉडल से एक स्टूडेंट मॉडल बनाते हो। कर्नल फ्यूज़ इज़ अनदर टेक्निक। उसके बाद यू आल्सो लर्न अबाउट
हार्डवेयर अवेयर इनफोरेंस। आप सीपीयू, जीपीयू, टीपीयू के बेसिस पे अलग-अलग तरीके से इनफोरेंस कैसे करना है उसके ऊपर काम
करते हो। और हाउ डू यू सर्व लार्ज मॉडल्स। थ्रूपट और लेटेंसी की यहां पे बहुत बात होती है और यहां पे बहुत सारे टूल्स हैं
जो आप यूज करते हो सच एज टेंसर आरT हुआ रन टाइम हुआ एनvीडिया ट्राइट ऑन इनफेंस सर्वर है ये सब कुछ तगड़े सॉफ्टवेयर्स हैं जो
इंडस्ट्री में यूज़ किए जाते हैं डीप लर्निंग मॉडल्स के इनफेंस के लिए सो विथ दैट अ दिस कंक्लूड्स आवर डिस्कशन अराउंड द
एमएल इंजीनियरिंग ट्रैक जैसा मैंने बोला दिस इज़ अ एवर ग्रीन ट्रैक व्हिच बेसिकली मींस जैसा इंपॉर्टेंट ये था प्रीचार
जीपीटी एरा अभी भी इतना इंपॉर्टेंट है। थोड़ा अनसेक्सीी जरूर हुआ है। बट जैसा मैंने बोला कंपनीज़ अभी भी इसके लिए बहुत
हायर कर रही हैं। सो इफ यू आर सीरियस अबाउट दिस रोल यू शुड स्टडी इन डीप एंड यू शुड मेक श्योर कि आप कोई कॉन्सेप्चुअल
गैप्स ना छोड़ो। ठीक है? सो मैं यहां पे रिसोर्सेज ऐड कर दूंगा। मैंने फिलहाल कोई रिसोर्सेज आपको नहीं बताए। बट अगेन वीडियो
के एंड में मैं आपको बताता हूं कि हाउ डू यू लर्न दीज़ टॉपिक्स इन अ वेरी एफिशिएंट मैनर। नाउ कम्स द सेकंड स्पेशलाइजेशन जो
हम इस रोड मैप में डिस्कस कर रहे हैं। और यह स्पेशलाइजेशन है एआई इंजीनियरिंग की। ठीक है? सो, दिस इज अ न्यू थिंग दैट हैज़
कम अप इन द वर्ल्ड ऑफ़ एआई पोस्ट द चैट जीबीटी एरा। और इस ट्रैक को या इस स्पेशलाइज़ेशन को आपको तब फॉलो करना चाहिए
जब आप इनमें से ऊपर लिखे हुए जॉब रोल्स में से किसी एक जॉब रोल के लिए प्रिपेयर कर रहे हो। कौन-कौन से जॉब रोल्स? इफ यू
वांट टू बिकम एन एआई इंजीनियर और अ जेनआई इंजीनियर और एलएलएमप्स इंजीनियर या फिर एजेंटिक एआई इंजीनियर। अगर ये जॉब रोल्स
को आप टारगेट कर रहे हो तो फिर आपको ये पर्टिकुलर स्पेशलाइजेशन स्टडी करना पड़ेगा। ठीक है? तो आगे जाने के पहले मैं
आपको थोड़ा सा इस स्पेशलाइजेशन के बारे में बताता हूं। सो दैट आपको थोड़ा आईडिया हो और आप थोड़ा ज्यादा अच्छे तरीके से
डिसीजन ले पाओ कि आपको ये स्पेशलाइजेशन फॉलो करना चाहिए या नहीं। सबसे पहली चीज यह है कि यह थोड़ा नया है लाइक इन
कंपैरिजन टू द प्रीवियस स्पेशलाइजेशन दैट वी डिस्कस एमएलए इंजीनियरिंग वाला दिस वन इज अ रिलेटिवली न्यू ट्रैक और यह चार्ट
जीपीटी के आने के बाद ही फेमस हुआ है। सो आप रफ्ली बोल सकते हो कि इस पॉइंट पे तीन साल पुराना है ये। सेकंड इसके पीछे का कोर
आईडिया क्या है वो मैं आपको बता देता हूं। सो चार्ट जीपीटी और उसके टाइप के जो भी सॉफ्टवेयर्स हैं वो बिहाइंड द सीन्स
एलएलएम्स के ऊपर डिपेंड करते हैं। लार्ज लैंग्वेज मॉडल्स के ऊपर। अब लार्ज लैंग्वेज मॉडल्स की सबसे बड़ी खासियत क्या
है कि दे आर फाउंडेशनल मॉडल्स। मतलब आप उसको ट्रेन करते हो किसी एक गिवन टास्क के ऊपर सच एज लैंग्वेज मॉडलिंग। बट वो फ्यूचर
में आपको मल्टीपल टास्क के ऊपर प्रेडिक्शन करके दे सकता है। सच एज क्वेश्चन आंसरिंग, टेक्स्ट समराइजेशन, सेंटीमेंट एनालिसिस।
राइट? तो ये चीज कंपनीज को पता चल गई है। एंड दैट इज व्हाई कंपनीज इन एलएलएम्स को अपने डे टू डे टास्क एग्जीक्यूट करने के
लिए यूज कर रही है। जैसे कंपनीज़ को अपना खुद का एक चार्टबॉट चाहिए। जहां पे उनकी ही कंपनी के एम्प्लाइजस इंटरनली कंपनी के
डॉक्यूमेंट्स के ऊपर बात कर पाए। या फिर Zomato जैसी कंपनीज़ अपने कस्टमर सपोर्ट को रिप्लेस करना चाहती है विथ द हेल्प ऑफ़ अ
एई एजेंट। तो ये जितने भी सॉफ्टवेयर एग्जांपल्स मैं आपको दे रहा हूं ये न्यू एज सॉफ्टवेयर्स हैं जो एलएलएम्स के ऊपर
बनते हैं और एआई इंजीनियरिंग में आप एग्जैक्टली यही काम करते हो। एआई इंजीनियरिंग वाले स्पेशलाइजेशन में आप खुद
के एलएलएम्स बिल्ड नहीं करते। इंस्टेड जो एलएलएम्स ऑलरेडी मार्केट में हैं सच एज आपका जीपीटी मॉडल हो गए ओपन एआई का या फिर
क्लॉट के मॉडल्स हो गए आपके एंथ्रोपिक के आप इन मॉडल्स को यूटिलाइज़ करके इनके टॉप पे अपना सॉफ्टवेयर बनाते हो। ठीक है? तो
दिस इज़ व्हाट वी कॉल एआई इंजीनियरिंग। और मुझे पर्सनली ऐसा लगता है कि गोइंग फॉरवर्ड इन द नेक्स्ट फाइव इयर्स इस
पर्टिकुलर फील्ड में बहुत सारी जॉब ओपनिंग्स आने वाली हैं। और देयर इज अ गुड चांस कि यहां पे एमएल इंजीनियरिंग से भी
ज्यादा नंबर ऑफ जॉब प्रोफाइल्स फ्यूचर में देखने को मिले। द ओनली प्रॉब्लम राइट नाउ इज कि इस पॉइंट पे इस पूरे के पूरे ट्रैक
के अराउंड इस पूरे के पूरे स्पेशलाइजेशन के अराउंड बहुत कंफ्यूजन है। आप एक बार ncry.com जैसी वेबसाइट पे अगर जाओगे और
जाके एi इंजीनियर जॉब रोल सर्च करोगे तो वहां पे क्या है कि कंपनीज़ को भी अभी क्लेरिटी नहीं है कि एआई इंजीनियर
एक्सैक्टली होता क्या है? सो दे राइट एवरीथिंग इन द जॉब रिस्पांसिबिलिटी सेक्शन। वो चाहते हैं कि आपको एलएलएम खुद
का ट्रेन करना भी आता हो, फाइंड ट्यून करना भी आता हो, आपको एमएलप्स भी आता हो, आपको डीप लर्निंग भी आता हो। तो इस पॉइंट
पे थोड़ा कंफ्यूजन है बट मुझे ऐसा लगता है कि ओवरटाइम इस पूरे के पूरे ट्रैक के अराउंड बहुत क्लेरिटी आ जाएगी और
इवेंचुअली जो चीज निकल के आएगी वो यही है कि एआई इंजीनियर एक ऐसा बंदा है जो मार्केट में अवेलेबल एलएलएम्स की हेल्प से
ऐसे सॉलशंस बनाता है। ऐसे सॉफ्टवेयर्स बनाता है जो कंपनी के बिजनेस को और बढ़ाने में हेल्प करें। दिस इज द मेन डेफिनेशन ऑफ
एन एआई इंजीनियर। अब इस ट्रैक के बारे में एक और इंटरेस्टिंग बात अगर आपको बताऊं इस पूरे के पूरे ट्रैक में आपको जो भी चीजें
पढ़नी है उसमें से 99% चीजों के लिए आपको ये पुरानी चीजें पढ़ने की जरूरत नहीं है। ये जो हमने अभी डिस्कस किया डीप लर्निंग,
मशीन लर्निंग, मैथमेटिक्स ये सारी चीजें आपको आनी जरूरी नहीं है। इन सबके बिना भी आप एआई इंजीनियर बन सकते हो। बट मैंने
इसलिए फाउंडेशंस को पहले रखा बिकॉज़ जैसा मैंने बोला इस पॉइंट पे जॉब मार्केट खुद कंफ्यूज्ड है और भले ही वो एआई इंजीनियर
हायर करना चाहते हैं बट दे वांट कि उस बंदे को मैथमेटिक्स भी आनी चाहिए, मशीन लर्निंग भी आनी चाहिए, डीप लर्निंग भी आनी
चाहिए। हालांकि अपने डे टू डे जॉब में वो इन चीजों को यूज़ नहीं करेगा। ऑब्वियसली Python आपको आना चाहिए। Python इज़ अ
स्ट्रांग प्रीरक्व्विज़िट। तो वो मैं नहीं बोल रहा हूं कि Python के बिना भी आप एआई इंजीनियर बन जाओगे। बट दिस इज अ वेरी
इंटरेस्टिंग थिंग दैट यू शुड नो कि अगर आप ऊपर की चीजें ना भी पढ़ो मशीन लर्निंग, डीप लर्निंग, मैथमेटिक्स ना भी पढ़ो तो भी आप
यहां पर जो भी चीजें मैं आपको बताऊंगा वो सब समझ के अपने वर्क फ्लो में इंप्लीमेंट कर सकते हो। इनफैक्ट मैं तो यहां तक बोलता
हूं कि एआई इंजीनियर इज लाइक अ स्पिरिचुअल सिबलिंग ऑफ सॉफ्टवेयर इंजीनियर। बहुत सिमिलर सा ही काम है। यहां पे आप
सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट ही कर रहे हो इन अ वे बट उसमें थोड़ा सा एक एआई का फ्लेवर है। एलएलएम्स को कैसे यूज़ करना है, लेटेंसी
को कैसे रिड्यूस करना है, इस तरह की चीजों के ऊपर आप काम करते हो। अदरवाइज इट्स वेरी वेरीरी सिमिलर टू सॉफ्टवेयर इंजीनियर एंड
दैट इज व्हाई इफ समवन इज कमिंग फ्रॉम अ सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग बैकग्राउंड उसके लिए एआई इंजीनियर बनना इज वेरी वेरीरी ईजी
वेरी वेरीरी स्मूथ अब एक काम करते हैं हम लोग ये डिस्कस करते हैं स्टेप बाय स्टेप कि टू बी अ एआई इंजीनियर आपको क्या-क्या
चीजें आनी चाहिए सो सबसे पहली चीज जो आपको आनी चाहिए वो है एलएलएम्स के अराउंड यू शुड हैव वेरी सॉलिड फाउंडेशनल नॉलेज
क्योंकि एआई इंजीनियरिंग इज ऑल अबाउट मेकिंग सॉफ्टवेयर्स इंटेलिजेंट विथ द हेल्प ऑफ एलएलएम्स तो एलएलएम्स को इन एंड
आउट समझना आपका सबसे पहला गोल है। मैं यहां पे फिर से क्लेरिफाई करना चाहूंगा कि आपको एलएलएम्स को खुद से ट्रेन करने की
जरूरत नहीं है। बट एलएलएम्स के बारे में आपको इतनी जानकारी होनी चाहिए कि आप उसके टॉप पे किसी भी तरह का सॉफ्टवेयर बना पाओ।
सो यहां पे तीन मेजर चीजें आपको कवर करनी है। उसमें से सबसे पहली चीज को मैंने बोला है एलएलएम 1001 जिसका मतलब हुआ एलएलएम के
फंडामेंटल्स। यहां पे आपको क्या-क्या सीखना है? मैं आपको बताता हूं। सबसे पहले आपको ये सीखना है कि एलएलएम होता क्या है?
यहां पे मैंने मेंशन कर दिया है दैट कॉनसेप्चुअली आपको चीजें सीखनी है। आपको सीखना है कि लैंग्वेज मॉडलिंग क्या होता
है? नेक्स्ट टोकन प्रेडिक्शन काम कैसे करता है? उसके बाद आपको सीखना है कि नेक्स्ट टोकन प्रेडिक्ट करने से रीजनिंग
लाइक बिहेवियर कैसे आता है। उसके बाद आपको फाउंडेशनल मॉडल्स और टास्क स्पेसिफिक मॉडल्स के बीच का डिफरेंस पता होना चाहिए।
जनरेटिव एंड रिप्रेजेंटेशन मॉडल्स के बीच का डिफरेंस पता होना चाहिए। फिर थोड़ा सा आपको एक और टेक्निकल डीप ड्राइव करना है।
आपको थोड़ा सा ट्रांसफार्मर आर्किटेक्चर के बारे में जानना है। अगेन ऑन अ वेरी सिस्टम लेवल नॉट वेरी डीप। बेसिक लेवल पे
आपको समझना है। इसमें आपको क्या-क्या सीखना है मैं बताता हूं। आपको थोड़ा सा आरएनएस के बारे में जानना पड़ेगा। क्योंकि
दोज़ वर द अर्लियस्ट आर्किटेक्चर्स जो सीक्वेंस बेस्ड डेटा के ऊपर काम करते थे। उनका फेलियर का रीज़न क्या था? फिर अटेंशन
मैकेनिज्म कैसे पिक्चर में आया? और जो भी इंटरनल्स हैं आपके ट्रांसफार्मर आर्किटेक्चर के उसके बारे में आपको एक
सरफेस लेवल नॉलेज होनी चाहिए। ठीक है? यहां पे देखो मैंने लिख भी रखा है कि ये नॉलेज इसलिए भी क्रिटिकल है बिकॉज़ अगर
आपको ये आर्किटेक्चर का नॉलेज नहीं होगा तो फिर प्रॉब्लम क्या होगी कि आगे चलके जब लेटेंसी कॉस्ट या स्केलिंग के अराउंड आपको
चीजें देखनी पड़ेंगी, समझनी पड़ेंगी तो आपको फिर परेशानी होगी। दैट इज़ व्हाई ये आप पढ़ लेना। उसके बाद यू हैव टू स्टडी
अबाउट टोकनाइजेशन एंड एंबेडिंग्स। अगेन समथिंग जिसके ऊपर आपका पूरा का पूरा एलएलएम काम कर रहा है। टोकनाइजेशन क्या
है? टोकनाइजेशन मैटर क्यों करता है? टोकंस और वर्ड्स में क्या डिफरेंस है? एंबेडिंग्स क्या होती हैं? सिमेंटिक
सिमिलरिटी का इंट्यूशन क्या है? ये सारी चीजें आपको पढ़नी है। अ उसके बाद आपको थोड़ा सा एलएलएम की ट्रेनिंग के बारे में
जानना है। करके नहीं देखना है। सिर्फ जानना है। प्री ट्रेनिंग में कैसे काम होता है? डेटा कहां से आता है? इन मॉडल्स
को ट्रेन करने के लिए। फाइन ट्यूनिंग और इंस्ट्रक्शन ट्यूनिंग के बीच में क्या डिफरेंस है? आरएलएचएफ कैसे हेल्प करता है?
है मॉडर्न डे एलएलएम्स को अलाइनमेंट का कांसेप्ट क्या है? मॉडल्स हेलुसिनेट कैसे करते हैं? ये सारी चीजें आपको थोड़ी पता
होनी चाहिए। उसके बाद आपको इनफेंस के लिए क्या-क्या चीजें लगती हैं? उसके बारे में आईडिया होना चाहिए। इनफेंस मतलब जो आप
एलएलएम्स को यूज़ करके प्रेडिक्शन करवाते हो। तो देयर आर सर्टेन पैराटर्स उनके ऊपर आपको काम करना है। सच एज टेंपरेचर टॉप के
टॉप पी आपका डिटरर्मिनिस्टिक डिकोडिंग हुआ। बीम सर्च का इंट्यूशन हुआ। कॉन्टेक्स्ट लेंथ के बारे में आपको पढ़ना
है। ये सारी चीजें आपको कवर करनी है। एक बार इतना कुछ कवर करने के बाद फिर आपको थोड़ा सा मॉडल इकोसिस्टम समझना है। जैसे
कि कौन-कौन से प्रोपराइटरी एलएलएम्स हैं? कौन-कौन से ओपन सोर्स एलएलएम्स हैं? एपीआई बेस्ड वर्सेस सेल्फ होस्टेट का क्या
कांसेप्ट है? छोटे और बड़े मॉडल्स के बीच में क्या डिफरेंस होता है? क्वांटाइजेशन का क्या कांसेप्ट है? मिक्सचर ऑफ
एक्सपर्ट्स क्या होते हैं? मल्टीमोडल मॉडल्स क्या होते हैं? ये सब आपको यहां पे सीखना है। रीजनिंग वर्सेस चार्ट मॉडल्स
क्या होते हैं? उसके बाद आता है इवैल्यूएशन एंड बेंचमार्क्स। अ यहां पे यू हैव टू अंडरस्टैंड कि एलएलएम्स को कैसे
इवैल्यूएट किया जाता है। आप सुनते होंगे कि एक नया Google का एलएलएम आया है और उसने बाकी सारे एलएलएम्स को पीछे छोड़
दिया है। तो ये डिसीजन मेकिंग हो कैसे रही है कि ये आगे है कोई दूसरा एलएलएम पीछे है। किस चीज के बेसिस पे डिसीजन मेकिंग
होता है? तो यहां पे आपके एलएलएम लीडर बोर्ड्स आते हैं और अलग-अलग बेंचमार्क्स आते हैं। तो ये एमएमएलयू हुआ, जीएसएम एट
के हुआ, ह्यूमन वैल्यू हुआ। ये सब आपके बेंचमार्क्स हैं और इन बेंचमार्क्स के बेसिस पे लीडर बोर्ड्स बनते हैं। ठीक है?
तो इनके बारे में आपको थोड़ा पढ़ना है। एंड लास्टली यू हैव टू स्टडी अबाउट द लिमिटेशंस एंड फेलियर मोड्स। एलएलएम्स
कहां पे फेल कर सकते हैं? तो यू हैव टू स्टडी अबाउट हेलुसिनेशन, यू हैव टू टॉक अबाउट लर्न अबाउट कॉन्टेक्स्ट लॉस, अ डेटा
कंटैमिनेशन, डिस्ट्रीब्यूशन शिफ्ट्स, सिक्योरिटी रिस्क। ये सारी चीजों के बारे में आपको पढ़ना है। इतना अगर आपने पढ़
लिया तो फिर आगे की जो आपकी जर्नी है वो बहुत स्मूथ हो जाएगी और आप सबसे अच्छी बात यह होगी कि आप बहुत आसानी से डिसीजन
मेकिंग कर पाओगे अपने प्रोजेक्ट्स के अराउंड। एक बार एलएलएम के फंडामेंटल्स सीखने के बाद जो नेक्स्ट चीज आपको सीखनी
चाहिए वह है प्र्प्ट इंजीनियरिंग। पिछले तीन सालों में जब से चार जीपीटी और चार जीपीटी जैसे बहुत सारे एआई सॉफ्टवेयर्स
पिक्चर में आए हैं। एक चीज जो हम सब करना सीख गए हैं वो है प्र्प्टिंग। एi सॉफ्टवेयर के साथ इंटरेक्ट करने का जो
तरीका है वो यही है कि आप प्र्प्ट्स लिख करके भेजते हो और आपका एi सॉफ्टवेयर आपको पलट के रिसोंड करता है। आई गेस आप सब ने
ये बात नोटिस की होगी कि प्र्प में अगर आप थोड़ा सा भी चेंज करते हो तो आपके एलएलएम का जो रिस्पांस है वो बहुत ज्यादा चेंज हो
जाता है। छोटे-छोटे इंपैक्टफुल वर्ड्स ऐड करने से यू कैन गेट वेरी पावरफुल रिजल्ट्स। तो इफ यू आर गोइंग टू बिकम एन
एi इंजीनियर जिसका काम है एआई बेस्ड सॉफ्टवेयर्स बनाना। एलएलएम बेस्ड सॉफ्टवेयर बनाना। तो आपके लिए यह बहुत
क्रिटिकल हो जाता है कि आप प्र्प्स को इन एंड आउट समझो। सो दैट आप उसको बहुत पावरफुली अपने बनाए हुए सिस्टम में
इंटीग्रेट कर पाओ। एंड दिस इज वेयर प्र्प इंजीनियरिंग हेल्प्स यू। हालांकि ये टर्म अभी बहुत बदनाम है सोशल मीडिया में। बट
ट्रस्ट मी व्हेन आई से दिस प्र्ट इंजीनियरिंग इज अ वेरी-वेरी क्रिटिकल स्किल फॉर एन एआई इंजीनियर। तो चलो अब हम
लोग एक बार समझते हैं कि एज एन एआई इंजीनियर आपको क्या-क्या पढ़ना है प्र्प्ट इंजीनियरिंग में? तो सबसे पहले तो आपको
फंडामेंटल लेवल पर कॉनसेप्चुअल लेवल पर पता होना चाहिए कि प्र्प्ट्स होते क्या हैं और वह एलएलएम्स को कैसे अफेक्ट करते
हैं। यू हैव टू अंडरस्टैंड कि कैसे प्र्टिंग हैज़ बिकम अ सॉफ्ट प्रोग्रामिंग लैंग्वेज। यू हैव टू अंडरस्टैंड कि
एलएलएम्स आर नथिंग बट अ कंडीशनल प्रोबेबिलिटी मशीन जहां पे प्र्प्ट्स अंदर घुस के किस तरीके से चेंजेस करता है और
किस तरीके से आउटपुट को गवर्न करता है। ये सारी चीजें आपको पता होनी चाहिए। उसके बाद आपको प्र्ट का स्ट्रक्चर समझना है कि
प्र्प्ट बनता किन चीजों से है। यू हैव टू अंडरस्टैंड द डिफरेंट टाइप्स ऑफ प्र्प्ट्स दैट यू कैन सेंड टू एन एलएलएम लाइक सिस्टम
प्र्प यूजर प्र्प असिस्टेंट के क्या मैसेजेस होते हैं? उसके बाद यू हैव टू अंडरस्टैंड अबाउट रोल बेस्ड प्र्टिंग। यू
हैव टू अंडरस्टैंड हाउ डू यू मैनपुलेट कॉन्टक्स्ट विथ द हेल्प ऑफ अ प्र्प्ट। यू हैव टू अंडरस्टैंड द यूज़ ऑफ़ डीलिमिटर्स
एंड सेपरेटर्स। ये सारी चीजें आपको नेक्स्ट पढ़नी चाहिए। उसके बाद देयर आर सर्टेन डिजाइन पैटर्न्स जो बहुत यूज़फुल
रहे हैं पिछले तीन सालों में वो आपको सीखने चाहिए। सच एज जीरो शॉट प्र्टिंग या फिर फ्यू शॉट प्र्प्टिंग जहां पे आप
एग्जांपल्स दे देते हो प्र्पों्ट में और फिर आप एलएलएम को एक टास्क सॉल्व करने को देते हो। यू शुड आल्सो अंडरस्टैंड अबाउट
रोल प्र्पों्टिंग जो हमने जस्ट डिस्कस किया जहां पे आप पहले से अपने एलएलएम को एक पर्सनैलिटी दे देते हो और फिर उस
पर्सनैलिटी के बेसिस पे वो टास्क को सॉल्व करता है। यू शुड आल्सो लर्न अबाउट चेन ऑफ़ थॉट प्र्टिंग जहां पे आप एक कॉम्प्लेक्स
टास्क को स्टेप बाय स्टेप ब्रेक करवा करके सॉल्व करने को बोलते हो अपने एलएलएम को। तो दीज़ आर द थिंग्स दैट यू हैव टू लर्न
नेक्स्ट। उसके बाद यू शुड आल्सो लर्न अबाउट स्ट्रक्चरर्ड आउटपुट प्र्टिंग। यह तब काम आता है जब आपको टेक्स्चुअल आउटपुट
के बदले किसी पर्टिकुलर फॉर्मेट या स्कीमा में आउटपुट चाहिए। वो आपको यहां पे सीखना होता है। देन यू आल्सो हैव टू लर्न अबाउट
प्र्प रोबस्टनेस एंड रिलायबिलिटी। आप अलग-अलग सॉफ्टवेयर स्वीट्स हैं, टूल्स हैं जिनकी हेल्प से बहुत रिलायबल और रोबस्ट
प्रम्स लिख सकते हो। उनको स्टोर कर सकते हो। उसके अराउंड गार्डल्स बना सकते हो। ये सारी चीजें वर्जनिंग का काम कर सकते हो।
ये सारी चीजें करने के लिए आप ये सब पढ़ते हो। उसके बाद प्र्प्ट्स का इवैल्यूएशन कैसे होता है? क्या-क्या मैट्रिक्स यूज़ की
जाती है प्र्प्ट्स को इवैल्यूएट करने के लिए? ये भी एक बहुतेंट एरिया ऑफ़ स्टडी है। एंड लास्टली हाउ डू यू राइट सिक्योर एंड
सेव प्र्ट्स? हाउ डू यू सेव योर सॉफ्टवेयर फ्रॉम प्र्ट इंजेक्शन अटैक्स? या जेल ब्रेक्स अगर लोग करने की कोशिश करते हैं
तो हाउ डू यू सेव योर सॉफ्टवेयर फ्रॉम दैट? ये सारी चीजें आपको सीखनी है। तो दिस गेट्स वेरी टेक्निकल। अभी शायद आपने जो भी
सुना है या पढ़ा है वो बहुत सरफेस लेवल है। बट ट्रस्ट मी प्र्प्ट इंजीनियरिंग इज अ वेरी सीरियस फील्ड ऑफ स्टडी और एक एआई
इंजीनियर को इसके ऊपर डिसेंट कंट्रोल होना चाहिए। प्र्ट इंजीनियरिंग के बाद जो नेक्स्ट चीज आपको सीखनी पड़ेगी वो है
कॉन्टेक्स्ट इंजीनियरिंग व्हिच इज़ अगेन समथिंग दैट इज़ वेरीेंट फॉर एआई इंजीनियर्स। कॉन्टेक्स्ट इंजीनियरिंग
समझने के लिए आपको सबसे पहले कॉन्टेक्स्ट का आईडिया होना चाहिए। सो कॉन्टेक्स्ट हम बुलाते हैं उस सारे इनेशन को जो आपका मॉडल
देख सकता है व्हाइल आंसरिंग द क्वेश्चन। सो आप एक चैटबॉट जैसे सॉफ्टवेयर के साथ चैटिंग कर रहे हो तो आपने एक मैसेज डाला
तो अभी करेंटली उस मैसेज को देख के चैटबॉट को आपको रिप्लाई करना है। इस पॉइंट पे आपके चैटबॉट के पास क्या-क्या चीजों का
एक्सेस हो सकता है आप सोच के देखो। सबसे पहले तो आपने जो क्वेश्चन डाला है उसका एक्सेस होगा। उसके अलावा पास्ट में आपने
जो भी कॉन्वर्सेशन किया है इस थ्रेड में वो सारा का सारा इनेशन भी आपके एलएलएम के पास होगा। फिर पास्ट में जितने भी चैट्स
किए हैं आपने एलएलएम के साथ उससे जो मेमोरी एक्सट्रैक्ट की है एलएलएम ने अबाउट द यूजर वो इंफॉर्मेशन भी आपके एलएलएम के
पास होगा। तो ये सब कुछ मिला के आपका कॉन्टेक्स्ट बनता है। तो कॉन्टेक्स्ट इज द एंटायर इंफॉर्मेशन दैट द एलएलएम हैज़
व्हाइल आंसरिंग द क्वेश्चन। और पूरे के पूरे कॉन्टेक्स्ट के बेसिस पे ही आपका एलएलएम आपको आंसर करता है। द ओनली
प्रॉब्लम इज़ कि हर एलएलएम का एक लिमिट होता है कि इससे ज्यादा नंबर ऑफ टोकंस आप कॉन्टेक्स्ट में नहीं डाल सकते। और दिस इज़
वेयर कॉन्टेक्स्ट इंजीनियरिंग कम्स इंटू द पिक्चर। बेसिकली रियल टाइम में एक एआई इंजीनियर यह डिसाइड करता है कि उसको कौन
सी चीजें कॉन्टेक्स्ट में लेके आनी है और कौन सी चीजों को कॉन्टेक्स्ट से बाहर निकालना है। सो दैट आप हमेशा जो
थ्रेशहोल्ड है कॉन्टेक्स्ट का उसके अंदर ही ऑपरेट करो और एलएलएम आपको आपके क्वेश्चन के हिसाब से बेस्ट पॉसिबल
रिप्लाई जनरेट करके दे पाए। ठीक है? तो यही सब चीजें आपको कॉन्टेक्स्ट इंजीनियरिंग में पढ़नी है। अ सबसे पहले
आपको समझना है कि कॉन्टेक्स्ट इंजीनियरिंग होती क्या है? कॉन्टेक्स्ट का कांसेप्ट क्या है? एलएलएम्स स्टेटलेस कैसे होते
हैं? ये सारी चीजें आपको सीखनी है। उसके बाद आपको समझना है कि जब आप एक एआई बेस्ड सॉफ्टवेयर बना रहे हो तो उस सॉफ्टवेयर के
टर्म्स में कॉन्टेक्स्ट का क्या मीनिंग है? सिस्टम इंस्ट्रक्शंस हो गए, यूजर की क्वेरी हो गई, रैग सॉफ्टवेयर बना रहे हो
तो रैग से जो रिट्रीव्ड डॉक्यूमेंट्स आए, आपके कॉन्वर्सेशन हिस्ट्री हुई। आपने अगर बहुत सारे टूल्स कनेक्ट कर रखे हैं अपने
आरएलएम से तो उन टूल्स से जो टूल कॉल्स आ रहे हैं आपका स्ट्रक्चर मेटाडेटा हुआ ये सब कुछ कॉन्टेक्स्ट का पार्ट बनता है और
इसका अंडरस्टैंडिंग होना बहुत जरूरी है। उसके बाद यू लर्न अबाउट द डिफरेंट टेक्निक्स जिससे आप कॉन्टेक्स्ट को मैनेज
करते हो। सो कॉन्टेक्स्ट सेलेक्शन इज़ वन, कॉन्टेक्स्ट का कंप्रेशन इज़ वन, कॉन्टेक्स्ट का स्ट्रक्चरिंग इज़ वन, टोकन
बजट मैनेजमेंट कम्स अंडर दिस। ये सब कुछ आपको यहां पे देखना होता है। ठीक है? और शुरू में आपको एक थ्योरिटिकल
अंडरस्टैंडिंग ही चाहिए। उसके बाद जब आप कोई प्रोजेक्ट पे काम करोगे तो उस प्रोजेक्ट के हिसाब से उस प्रोजेक्ट का
स्पेसिफिक कॉन्टेक्स्ट इंजीनियरिंग किया जाता है। ठीक है? तो थोड़ा ये एडवांस टॉपिक है प्रैक्टिकली इंप्लीमेंट करने के पॉइंट
ऑफ व्यू से बट शुरू में ही आपको इसका कॉनसेप्चुअल आईडिया होना चाहिए। सो दैट आप आगे चलके कोई भी प्रोजेक्ट बनाओ आप हमेशा
ये कंसीडर करके चलो कि मेरा कॉन्टेक्स्ट को मैं कैसे हैंडल करूंगा। एक बार जब आप अपना एलएलएम बेसिक्स या फाउंडेशंस क्लियर
कर लेते हो विथ द हेल्प ऑफ दीज़ थ्री टॉपिक्स। फिर हम इस रोड मैप में आगे बढ़ते हैं और मेन जो चीज आती है एआई इंजीनियरिंग
में उसको कवर करते हैं और वो है एआई एप्लीकेशन डेवलपमेंट। बेसिकली ऐसे एप्लीकेशनेशंस बनाना जिसमें एआई की हेल्प
लग रही है। तो यहां पे भी आपको पांच छह चीजें कवर करनी है। मैं एक-एक करके आपको बताता हूं। इसमें जो सबसे कोर और
इंपॉर्टेंट चीज है वो है कि आप इन एलएलएम्स की हेल्प से ऑर्केस्ट्रेशन करना सीखो। ऑर्केस्ट्रेशन करने का सिंपल मतलब
यह है कि बिजनेस सिनेरियोस में जिस तरह के वर्क फ्लोस होते हैं, आप उन वर्क फ्लोस को बनाना सीखो विद द हेल्प ऑफ दी एलएलएम्स।
मैं आपको एक छोटा सा एग्जांपल देता हूं। मान लो आप एक कस्टमर सर्विस के लिए एक एआई प्लेटफार्म बना रहे हो। जहां पे आपके
कस्टमर्स जैसे ही मेल करेंगे तो आपका एक एलएलएम होगा। वो एलएलएम उस मेल के कंटेंट को पढ़ेगा और वो समझ जाएगा कि उसके अंदर
किसी तरीके का अभी कस्टमर रिक्वेस्ट है या फिर कस्टमर ने फीडबैक दिया है। अगर कस्टमर रिक्वेस्ट है या फिर उसने कोई इशू रेज
किया है तो आपका सिस्टम क्या करेगा? ऑटोमेटिकली एक टिकट जनरेट करेगा। वो टिकट आपके कस्टमर सपोर्ट टीम के पास जाएगा और
पलट के एक मेल ऑटोमेटिकली फ्रेम हो जाएगा जो हम कस्टमर के पास भेजेंगे। जहां पर उनको बता दिया जाएगा कि विद इन 24 आवर्स
हमारी टीम आपको कांटेक्ट करेगी। अगर आपका यूजर का जो ईमेल है वह एक तरह का फीडबैक है। तो हम फीडबैक के बेसिस पर उसको एक
सिंपल रिप्लाई करेंगे। यहां पर हम कोई टिकट जनरेट नहीं करेंगे। तो दिस इज अ प्रॉपर बिजनेस वर्क फ्लो जो बहुत सारी
कंपनीज़ को बनाना पड़ता है। इस तरह के वर्क फ्लोस हम बनाना सीखते हैं जब हम ऑर्केस्ट्रेशन की पढ़ाई करते हैं। तो अगर
आपने लैंग चेन टाइप की लाइब्रेरी का नाम सुना है तो लैंगचेन टाइप की लाइब्रेरीज आपको एग्जैक्टली यही करके देती है कि वो
मल्टीपल एल एलएलएम कॉल्स को कनेक्ट करने के आपको ऑप्शंस देती है इन वेरियस वेज़। आप सीक्वेंशली कनेक्ट कर सकते हो मल्टीपल
एलएम्स को या फिर आप पैरेलली कनेक्ट कर सकते हो। तो आप कंडीशनल लूप लगा सकते हो। तो इस तरह की चीजें आप यहां पे करते हो।
सो प्रिसाइज़ली अगर बात करें तो सबसे पहले आपको समझना होता है कि एनएलएम बेस्ड वर्क फ्लोस में ऑर्केस्ट्रेशन किया कैसे जाता
है? व्हाट आर द डिफरेंट ऑर्केस्ट्रेशन पैटर्न्स? सीक्वेंशियल वर्क फ्लोस कैसे बनाए जाते हैं? कंडीशनल राउटिंग कैसे की
जाती है? पैरेलल एग्जीक्यूशन कैसे किया जाता है? लूपिंग एंड रीटाई कैसे किया जाता है? ये सब कुछ आप यहां पे सीखते हो। फिर
यहां पे आप सीखते हो कि अगर आपको कभी अपने एलएलएम से कंट्रोलोल्ड आउटपुट चाहिए। मतलब आपको इंग्लिश टेक्स्ट बेस्ड आउटपुट के बदल
बदले आपको किसी डेटा स्कीमा के हिसाब से आउटपुट चाहिए तो वो कैसे करना है? ये आपने हालांकि प्र्प्ट इंजीनियरिंग में भी पढ़ा
था बट यहां पे आप इसको लैंगचे जैसे टूल की हेल्प से कवर करते हो। एंड लास्टली यू आल्सो लर्न हाउ कैन यू इंटीग्रेट वेरियस
टूल्स विथ योर एलएलएम बेस्ड सिस्टम। फॉर एग्जांपल आप किसी एपीआई से कनेक्ट कर सकते हो अपने एलएलएम बेस्ड सिस्टम को जहां पे
आप वेदर डेटा फैच करके ला सकते हो। क्रिकेट स्कोर्स फैच करके ला सकते हो या फिर आप अपने एलएलएम को कनेक्ट कर सकते हो
Gmail के साथ। तो ये इस तरह की चीजें आप यहां पे सीखते हो। ठीक है? तो ये बहुत इंपॉर्टेंट पार्ट है। कोई भी आप सिस्टम
बिल्ड कर रहे हो। एआई सिस्टम बिल्ड कर रहे हो, चैटबॉट हुआ या एआई एजेंट्स हुए। वहां पर आपको ऑर्केस्ट्रेशन की जरूरत पड़ती है।
नेक्स्ट जो चीज आपको सीखनी है वो है वेक्टर डेटाबेस। सो पिछले तीन सालों में ही वेक्टर डेटाबेस काफी पॉपुलर हुए हैं।
ये एकिस्ट तो पहले भी करते थे बट चार जीपीटी के आने के बाद से और एलएलएम के आने के बाद से दे हैव बिकम क्वाइट पॉपुलर। और
उसका रीज़न ये है कि जब आप रैग बेस्ड एप्लीकेशनेशंस बनाते हो व्हिच इज़ वन ऑफ द मोस्टेंट टाइप ऑफ एi एप्लीकेशन वहां पे
आपको वेक्टर डेटाबेसिस की जरूरत पड़ती है। वेक्टर डेटा बेसिस का सिंपल फंडा ये है कि यहां पे आप जो भी आपको चीजें स्टोर करनी
है उनको एज़ इट इज़ स्टोर करने के बदले आप उनको एंबेडिंग्स के फॉर्म में स्टोर करते हो। सो दैट आप फ्यूचर में उसके ऊपर
सिमेंटिक सर्च परफॉर्म कर पाओ। व्हिच इज़ इंटीग्रल कंपोनेंट ऑफ़ रैक बेस्ड वर्क फ्लोस। दैट इज़ व्हाई वेक्टर डेटाबेस आर
नाउ वेरी-वेरी पॉपुलर। तो ये भी आपको अच्छे से कवर करना है। यहां पे सबसे पहले आपको समझना है कि वेक्टर डेटाबेस होते
क्या है? कीवर्ड सर्चेस क्यों इनसफिशिएंट होते हैं? कैसे सिमेंटिक सिमिलरिटी काम करता है? एंबेडिंग्स का कांसेप्ट क्या
होता है? ये सब चीजें आपको सीखनी है। हाउ डस अ वेक्टर डेटाबेस डिफर फ्रॉम अ ट्रेडिशनल रिलेशनल डेटाबेस? अ एंबेडिंग्स
एंड वेक्टर स्पेससेस के फंडामेंटल्स आपको क्लियरली सीखने हैं। और ये सब कुछ सीखने के बाद आपको कुछ दो-तीन अलग-अलग टाइप के
वेक्टर डेटाबेस के साथ काम करना है। सबसे फेमस वाले यहां पे मैंने लिख रखे हैं। फायर्स इज़ वन। पाइनकोन इज़ लाइक अ
प्रोडक्शन ग्रेड वेक्टर डेटाबेस। वीविएट इज़ आल्सो अ गुड डेटाबेस। मिलवस एंड क्रोमा ये पांच आपके आज के सबसे फेमस डेटाबेससेस
हैं। इनमें से आई वुड रिकमेंड आप दो-तीन के साथ चीजें ट्राई करो। सो दैट आप थोड़ा बढ़िया फ्लेवर ले पाओ कि वेक्टर डेटाबेस
काम कैसे करते हैं एलएलएम बेस्ड सिस्टम्स के साथ। थर्ड आता है रैग जिसके बारे में मैं ऑलरेडी दो बार बात कर चुका हूं। रैग
इज अगेन अ वेरीेंट काइंड ऑफ़ वर्क फ्लो जो आप बिल्ड करते हो एआई इंजीनियरिंग के अंदर। रैक का कांसेप्ट बहुत सिंपल है। जो
आपके एलएलएम्स होते हैं उन एलएलएम्स का जो सबसे बड़ा ड्रॉबैक है वो ये है कि आप उनके साथ अपना प्राइवेट डेटा शेयर नहीं कर
सकते। कॉन्फिडेंशियल डेटा शेयर नहीं कर सकते बिकॉज़ वो इंफॉर्मेशन कहीं से लीक की जा सकती है। सेकंड रेस्ट्रिक्शन इज़ कि
इनका ट्रेनिंग कट ऑफ होता है। एलएलएम्स का ट्रेनिंग कट ऑफ होता है। सो सबसे रीसेंट वाले एलएलएम्स भी हो सकता है आपके 6 महीने
पहले ट्रेन हुए हो। उनके उनके पास आज का इनेशन नहीं है। दैट इज व्हाई कंपनीज़ जब अपने लिए चार्टबॉट्स बिल्ड करती हैं तो
व्हाट दे डू इज़ दे यूज़ रैक का कांसेप्ट। सो दे प्रोवाइड देयर डॉक्यूमेंट्स एज अ नॉलेज बेस टू एन एलएलएम। और हमारा एलएलएम
उन डॉक्यूमेंट्स के अंदर से इंफॉर्मेशनेशन निकाल के आपको देता है अगर आप क्वेश्चंस पूछते हो रिलेटेड टू दोज़ डॉक्यूमेंट्स।
ठीक है? तो दिस इज़ द बेसिक आईडिया बिहाइंड रैग। एंड रैग इज़ समथिंग जो आपको बिल्कुल आना चाहिए। और रैग बेस्ड सॉफ्टवेयर रैग
बेस्ड चैटबॉट कैसे काम करता है? इस तरह के प्रोजेक्ट्स आपको बिल्कुल बनाने होंगे इन ऑर्डर टू गेट अ जॉब इन एआई इंजीनियरिंग।
यहां पे आपको सबसे पहले पढ़ना है रैग के बारे में। अ रैग एलएलएम्स हेलुसिनेट क्यों करते हैं? पैरामेट्रिक मेमोरी का क्या
कांसेप्ट है? नॉन पैरामेट्रिक मेमोरी क्या होती है? अ फिर आपका रैक का पाइपलाइन एक्सैक्टली काम कैसे करता है? सो ये रही
पूरी रैक पाइपलाइन। यूजर की क्वेरी आती है। आप उसकी क्वेरी को एंबेडिंग में कन्वर्ट करते हो। उसको आप जाके सर्च करते
हो एक वेक्टर डेटाबेस से। टॉप के डॉक्यूमेंट्स फैच करके लाते हो। उसको कॉन्टेक्स्ट में डालते हो और रिस्पांस
जनरेट करते हो। ये हाई लेवल है आपका रैक पाइपलाइन। इसी को आपको डिटेल में पढ़ना है। यू हैव टू स्टडी अ लॉट अबाउट डेटा
प्रिपरेशन। अ उसके बाद देयर आर डिफरेंट-डिफरेंट रिट्रीवल स्ट्रेटजीस। सबसे सिंपल वाली है सिमिलरिटी सर्च जो
मोस्टली लोग करते हैं। बट बहुत एडवांस्ड रैक कांसेप्ट्स में रैक चैट बॉक्स में यू डू मल्टीपल रिट्रीवल स्ट्रेटजीस इन
पैरेलल। तो वो कैसे करना है वो आपको पता होना चाहिए। फाइनल कॉन्टेक्स्ट कंस्ट्रक्शन कैसे होता है जनरेशन के पहले
वो आपको सीखना है। और फिर बेसिक लेवल रैक सीखने के बाद आपको कुछ एडवांस्ड रैक पैटर्न सीखने होंगे। सच एज सेल्फ रैग,
करेक्टिव रैग, एडप्टिव रैग, ग्राफ रैग, एजेंटिक रैग। ये सब चीजें आपको सीखनी है। यू आल्सो हैव टू लर्न अबाउट इवैल्यूएशन
एंड मैट्रिक्स? चार्टबॉट तो आपने बना लिया। बट हाउ डू यू मेजर कि उसका परफॉर्मेंस कितना अच्छा है। डू यू जज इट
ऑन द बेसिस ऑफ़ डिफरेंट-डिफरेंट मैट्रिक्स। आपका रिट्रीवल प्रसीजन एंड रिकॉल इज़ वन थिंग। आंसर का फेथफुलनेस इज़ अ वेरीेंट
मैट्रिक। ग्राउंडेडनेस चेक इज़ वेरी वेरीेंट। हेलुसिनेशन कितना कर रहा है? दैट इज़ आल्सो वैरीेंट। एंड लास्टली यू हैव टू
स्टडी अबाउट फेलियर मोड्स। कहां-कहां फेल कर सकता है। सो पुअर चंकिंग डेटा ही आपने सही फीड नहीं कराया। इरिलेवेंट रिट्रीवल
वेक्टर डेटाबेस सेट था। अच्छा रिस्पांस रिटर्न हो के नहीं आया। कॉन्टेक्स्ट पूरा फुल हो गया है। तो इस तरह की चीजें आपको
पढ़नी है। रैग इज समथिंग जो आप मान के चलो कि अगर आप इंटरव्यू दे रहे हो किसी एआई इंजीनियरिंग जॉब रोल के लिए तो आपसे इसके
अराउंड क्वेश्चंस पूछे ही जाएंगे। इट इज़ दैटेंट। तो यू हैव टू प्रिपेयर अ लॉट अराउंड रैग। नेक्स्ट इज़ मेमोरी। सो मेमोरी
के अराउंड भी आपको काफी कुछ पढ़ना पड़ता है। अ मेमोरी का फंडा ये है कि जो आपके एलएलएम्स होते हैं उनमें बाय इटसेल्फ
मेमोरी का कांसेप्ट नहीं होता। बट आप जो एi सॉफ्टवेयर बनाओगे अपनी कंपनी के लिए अपने यूज़र्स के लिए उसमें आपको मेमोरी
इंटीग्रेट करनी पड़ती है। बिकॉज़ मेमोरी के होने से आपका जो सिस्टम का परफॉर्मेंस है या यूजर एक्सपीरियंस है वो एनहांस हो जाता
है। खुद सोच के देखो आप चार्ट GPT से ऑन डेली बेसिस बात करते हो। नोटिस किया होगा कि चार्ट जीpटी आपके बारे में काफी कुछ
चीजें याद रखता है और सिंस वो बहुत सारी चीजें याद रखता है तो वो आपके क्वेश्चंस के जो आंसर्स होते हैं वो बहुत पर्सनलाइज
तरीके से दे पाता है जिससे आपका यूजर एक्सपीरियंस जो है चार्ट gpटी पे वो बहुत एनहांस हो जाता है। दैट इज व्हाई अगर आप
कोई एक सिंगल चैटबॉट यूज़ करते आ रहे हो पिछले दो-ती सालों से लेट्स से चार्ट gpटी तो सडनली से आपको जेमिनाई पे मूव करने में
थोड़ी तकलीफ होती है। बिकॉज़े अभी आपको उतने अच्छे से नहीं समझता। उसकी मेमोरी अभी उतने अच्छे से काम नहीं कर रही है।
बिकॉज़ आप एक नए यूजर हो। तो उस सेंस में इफ यू आर बिल्डिंग एi बेस्ड सॉफ्टवेयर इट इज वेरी वेरीरीेंट दैट यू इंटीग्रेट द
कॉनंसेप्ट ऑफ मेमोरी बट द प्रॉब्लम इज मेमोरी खुद से होती नहीं है आपको बनानी पड़ती है तो यही सब आप पढ़ोगे मेमोरी में
यहां पे यू अंडरस्टैंड दैट एलएलएम्स आर बेसिकली स्टेटलेस व्हिच बेसिकली मीन्स दे डोंट हैव एनी मेमोरी देन यू लर्न अबाउट
मेमोरी वर्सेस कॉन्टेक्स्ट शॉर्ट टर्म मेमोरी लॉन्ग टर्म मेमोरी क्या होता है एप्लीकेशनेशंस को मेमोरी की क्यों जरूरत
होती है ये सब कुछ आपको पढ़ना है फिर टाइप्स ऑफ मेमोरी में आप शॉर्ट टर्म मेमोरी लॉन्ग टर्म मेमोरी डिटेल में
पढ़ोगे उसके बाद मेमोरी को स्टोर कहां किया जाता है इसके बारे में आप चीजें पढ़ोगे देयर आर डिफरेंट-डिफरेंट ऑप्शंस इन
मेमोरी आप स्टोर कर सकते हो, फाइल्स में स्टोर कर सकते हो, रिलेशनल डेटाबेस में कर सकते हो, वेक्टर डेटाबेसिस में कर सकते
हो। कैसे करना है वह आपको सीखना है। उसके बाद मेमोरी को कैसे रिट्रीव करके लाया जाता है उसके ऊपर आपको काम करना है। उसके
बाद अगर आपकी मेमोरी बहुत बड़ी हो गई है और आपका कॉन्टेक्स्ट को फुल कर दे रही है तो फिर उसको कंप्रेस कैसे करना है उसके
अलग-अलग टेक्निक्स हैं। उसके बाद एजेंटिक सिस्टम्स में मेमोरी को कैसे इंटीग्रेट किया जाता है वो खुद में एक बहुत बड़ी
पढ़ाई है। मेमोरी कब फेल कर जाती है इसके बारे में आपको पढ़ना है। और उसके अलावा फिर बहुत सारे टूल्स हैं जो मेमोरी
मैनेजमेंट में आपको हेल्प करते हैं। सच एज लैंग्राफ और सिमेंटिक कर्नल की मेमोरी या मेम ज़ीरो हो या सुपर मेमोरी। दीज़ आर लाइक
मेमोरी लेवल पे ऑपरेट करने वाले लाइब्रेरीज़ हैं। वेरी वेरीरी हेल्पफुल। उसके बाद आप मेमोरी को कहां स्टोर करो
उसके हिसाब से भी यू हैव गॉट मल्टीपल ऑप्शंस। मेमोरी को कैसे कैश किया जाता है उसके ऊपर भी बहुत सारे ऑप्शंस हैं। एंड
देन ऑब्ज़ ऑब्ज़वेबिलिटी एंड डिबगिंग के अराउंड भी देयर आर ऑप्शन ऑप्शंस। ठीक है? तो दीज़ आर द थिंग्स दैट यू हैव टू कवर इन
मेमोरी वाला पार्ट। नेक्स्ट एक और बहुतेंट चीज जो आपको एआई इंजीनियरिंग में पढ़ना है वो है फाइन ट्यूनिंग। अब पॉइंट ट्यूनिंग
को अगर मैं सिंपल शब्दों में बोलूं तो ये एक ऐसा प्रोसेस है जहां पे आप एक एलएलएम को उठा के उसको अपने कस्टम डेटा पे ट्रेन
करते हो। सो दैट उस एलएलएम का बिहेवियर आपके बिजनेस सिनेरियो के हिसाब से ढल जाए। फॉर एग्जांपल आप एक चार्टबॉट बना रहे हो।
एक मेडिकल चैटबॉट बना रहे हो जहां पर जो पेशेंट्स हैं वो अपने लैब टेस्ट रिपोर्ट्स अपलोड करके उसके अराउंड क्वेश्चंस पूछ
सकते हैं। अब यहां पर अगर आप सीधे-सीधे ओपन एआई के जीपीडी मॉडल्स को यूज़ करने लग जाओ तो आप एक चीज नोटिस करोगे कि आपको जो
रिप्लाई मिल रही है एज इन पेशेंट्स को जो रिप्लाई मिल रही हैं वो थोड़ी सी इनकंसिस्टेंट होंगी। वेयर एज आप चाहोगे कि
आपका जो मेडिकल चैटबॉट है वो बहुत स्ट्रिक्टली एक मेडिकल टर्मिनोलॉजी यूज़ करके रिप्लाई करें। तो आप क्या करोगे कि
आप अपने उस एलएलएम को उठाओगे और उसको आप फाइंड ट्यून करोगे मेडिकल डेटा के ऊपर। सो दैट वो समझ जाए कि मेडिकल टर्मिनोलॉजीस
क्या है और कैसे मेडिकल टर्म्स में बात की जाती है। और उसके बाद क्या होगा कि जभी भी कोई उस एलएलएम से बात करेगा तो जो आपको
टोन और आउटपुट दिखाई देगा वो बहुत कंसिस्टेंट होगा। बहुत ही मेडिकल लाइन से ओरिएंटेड होगा। राइट? तो दिस इज वन ऑफ द
मेन पर्पसेस जिसके लिए फाइन ट्यूनिंग को यूज़ किया जाता है। कंपनीज़ बेसिकली अपने ब्रांड और बिजनेस सिनेरियो के हिसाब से
एलएलएम्स को ढालने के लिए फाइन ट्यूनिंग का कांसेप्ट को यूज़ करती हैं। अब यहां पे मैं आपको एक इंपॉर्टेंट बात बताना चाहूंगा
कि इस पॉइंट पे बहुत सारे लोग जब जॉब रोल्स डालते हैं, बहुत सारी कंपनीज़ जब जॉब रोल्स डालती हैं एआई इंजीनियर के अराउंड
तो दे एक्सपेक्ट कि उन इंजीनियर्स को फाइन ट्यूनिंग भी आनी चाहिए। बट पर्सनली मुझे ऐसा लगता है कि एआई इंजीनियर्स फ्यूचर में
5 साल डाउन द लाइन फाइन ट्यूनिंग का काम नहीं करेंगे। फाइन ट्यूनिंग इज अ वेरी स्पेशलाइज टास्क जो दूसरे इंजीनियर्स के
ऊपर आना चाहिए। एआई इंजीनियर का काम इज़ नॉट डूइंग फाइन ट्यूनिंग। बट अनफॉर्चुनेटली उसको अभी मैंने इस रोड मैप
में इसलिए इंक्लूड किया है बिकॉज़ अभी पीपल एक्सपेक्ट कि जो भी एआई इंजीनियर्स आ रहे हैं मार्केट में उनको फाइन ट्यूनिंग करना
आना चाहिए। एंड आल्सो आई आई वुड लाइक टू टेल यू यहां पे कि फाइन ट्यूनिंग का जो कांसेप्ट है इसको सही से सीखने के लिए
आपको ऊपर मैंने जो चीजें बताई वो आनी चाहिए। डीप लर्निंग का कांसेप्ट आपको आना चाहिए। एलएलएम्स थोड़े इन डेप्थ आपको आने
चाहिए। ट्रांसफार्मर आर्किटेक्चर का आईडिया थोड़ा इन डेप्थ आना चाहिए। ठीक है? तो थोड़ा ये ज्यादा टेक्निकल है इन
कंपैरिजन टू अदर टॉपिक्स दैट आर प्रेजेंट इन एआई इंजीनियरिंग। बट नेवर द लेस मैं आपको बताता हूं कि आपको यहां पे क्या-क्या
पढ़ना है। सबसे पहले आपको फाइन ट्यूनिंग के फंडामेंटल्स पढ़ने हैं कि होता क्या है फाइन ट्यूनिंग? पैरामेट्रिक अडप्टेशन क्या
होता है और बिहेवियर और नॉलेज का मॉडिफिकेशन आप कैसे कर सकते हो। उसके बाद यू लर्न द डिफरेंस बिटवीन प्री ट्रेनिंग
एंड फाइन ट्यूनिंग। प्री ट्रेनिंग इज़ जहां पे आप एलएलएम को स्क्रैच से पूरा ट्रेन करते हो। बहुत बड़े डेटा सेट पे। फाइन
ट्यूनिंग इज़ बेसिकली कम डेटा सेट की हेल्प से थोड़ा लेवल पे बिहेवियरल चेंज एलएलएम के बिहेवियर में। फिर अलग-अलग फाइन ट्यूनिंग
टेक्निक्स के बारे में आप पढ़ोगे। सच एज सुपरवाइज्ड फाइन ट्यूनिंग, एसएफटी बोलते हैं इसको। आप प्रेफरेंस बेस्ड ट्यूनिंग के
बारे में पढ़ोगे। जैसे कि आरएलएचएफ या फिर डीपीओ हुआ। उसके बाद आता है वो फाइन ट्यूनिंग टेक्निक्स जो आपको सबसे ज्यादा
आने चाहिए जो आप सबसे ज्यादा करोगे और वो है पैरामीटर एफिशिएंट फाइन ट्यूनिंग जिसमें आपको लोरा और क्यू लोरा ये दोनों
फाइन ट्यूनिंग टेक्निक्स पूछी जाती हैं सबसे ज्यादा और आपको आनी भी चाहिए ठीक है उसके बाद हाउ डू यू प्रिपेयर योर डेटा फॉर
फाइन ट्यूनिंग ये आपको पढ़ना है फाइन ट्यूनिंग कैसे रैग से अलग है कैसे प्र्प इंजीनियरिंग से अलग है कब किस सिचुएशन में
क्या करना चाहिए ये आपको पता होना चाहिए हाउ डू यू इवैलुएट फाइन ट्यून मॉडल्स इसके भी आपको आईडिया होना चाहिए लास्टली हाउ डू
यू हैंडल प्रॉब्लम्स सच ऐ ओवरफिटिंग एंड कैटास्ट्रोफिक फॉर गेटिंग ये आपको पता होना चाहिए। एंड लास्टली हाउ डू यू मैनेज
दैप अप्टर जनरेटेड ड्यूरिंग द फाइन ट्यूनिंग प्रोसेस एंड हाउ डू यू डू वर्जनिंग अराउंड इट। ठीक है? और लास्ट यू
हैव टू लर्न अबाउट द डिप्लॉयमेंट ऑफ़ फाइन ट्यून मॉडल्स। आप जब मॉडल को डिप्लॉय करते हो सॉरी ट्रेन करते हो, फाइन ट्यून करते
हो उसके बाद वेयर डू यू कीप इट और हाउ डू यू डिप्लॉय इट? ये चीजें आपको यहां पे सीखनी है। ठीक है? तो थोड़ा टेक्निकल है ये
पूरी चीज बट बहुत रिवॉर्डिंग भी है। ये एक ऐसा स्किल है जिसका अभी मार्केट में बहुत डिमांड है। बहुत कम लोग इसको अच्छे से कर
पाते हैं। और जो टूल्स हैं वो अभी उतने फ्रेंडली नहीं है जितने आगे चलके हो जाएंगे। तो दिस इज़ द राइट अपॉर्चुनिटी
जहां पे आप ये स्किल एक्वायर करके अपने पियर्स से थोड़ा आगे निकल सकते हो। और जो लास्ट चीज आपको यहां पे सीखनी है एi
एप्लीकेशन डेवलपमेंट में वो है एआई ऑटोमेशन। अब यहां पे अगेन आई वुड लाइक टू क्लेरिफाई एi ऑटोमेशन एi एप्लीकेशन
डेवलपमेंट नहीं है। व्हिच बेसिकली मींस कि यहां पे आप नए एप्लीकेशंस बिल्ड नहीं करते हो। इंस्टेड आप कुछ एकिस्टिंग
एप्लीकेशनेशंस की हेल्प से वर्क फ्लोस बिल्ड करते हो। ठीक है? तो आपने शायद बिजनेस ऑटोमेशन का नाम सुना होगा। बिज़नेस
ऑटोमेशन 25 30 सालों से इंडस्ट्री में है और उसको यूज़ किया जाता है बिनेसेस का कॉस्ट रिड्यूस करने के लिए। जो भी
ट्रिवियल टास्क हैं उनको आप कोड के थ्रू एग्जीक्यूट करते हो ऑटोनॉमस तरीके से। फिर बिज़नेस ऑटोमेशन अब धीरे-धीरे रिप्लेस होता
जा रहा है एआई ऑटोमेशन से। तो बहुत सारे जो अर्लियर बिज़नेस ऑटोमेशन टास्क थे वहां पे अब एआई को डाला जा रहा है। सो दैट वो
और ज्यादा इंप्रूव कर जाए वो बिज़नेस ऑटोमेशन वर्क फ्लोस। तो अब एआई ऑटोमेशन वर्क फ्लोस आर एवरीवेयर एंड देयर आर
सर्टेन टूल्स जिनकी हेल्प से आप अपने बिजनेसेस के लिए बहुत अच्छे स्ट्रांग एआई ऑटोमेशन वर्क फ्लोस बना सकते हो। तो ये
थोड़ा सा नॉन टेक्निकल है पूरा चीज बट स्टिल यहां पे भी अभी काफी जॉब्स निकल के आ रहे हैं। तो ये आपको थोड़ा सीखना चाहिए।
यहां पे आपको सबसे पहले सीखना चाहिए बिज़नेस ऑटोमेशन क्या होता है? और एआई ऑटोमेशन क्या होता है? व्हाट आर द डिफरेंट
काइंड ऑफ़ टाइप्स ऑफ बिज़नेस वर्क फ्ल्लोस? वो सब आपको थोड़ा यहां पे सीखना चाहिए। थोड़ा थ्योरी। उसके बाद ऑटोमेशन डिज़ाइन के
क्या-क्या पैटर्न्स हैं? अह यू हैव टू लर्न अबाउट दैट। अह ट्रिगर बेस्ड ऑटोमेशन हो गए, सीक्वेंशियल टास्क ऑटोमेशन हो गए,
कंडीशनल ऑटोमेशन हो गया, लूप एंड ट्राई कैसे इंटीग्रेट किया जाता है? लूप एंड रीट्राई कैसे इंटीग्रेट किया जाता है? ये
आपको सीखना है। एंड व्हाट आर द डिफरेंट काइंड्स ऑफ़ टूल्स दैट यू कैन इंटीग्रेट टू योर वर्क फ्लोस। उसके बारे में आपको सीखना
होता है। एंड फाइनली यू हैव टू लर्न अबाउट डिफरेंट-डिफरेंट टूल्स। जैसे एनए 10 आपने शायद सुना होगा इट्स अ वैरी फेमस बिज़नेस
ऑटोमेशन। एआई ऑटोमेशन टूल जिसकी हेल्प से आप किसी भी तरह का एआई ऑटोमेशन वर्क फ्ल्लो बना सकते हो। सिमिलरली देयर इज़
jपीआर एi एंड वी आल्सो हैव mक.com तो ये तीन अभी सबसे पॉपुलर कैंडिडेट्स हैं। इन तीन में से अगर आप कोई दो भी सीख लेते हो
तो यू आर गुड टू गो। सो एक बार आपने अगर एi एप्लीकेशन डेवलपमेंट कंप्लीट कर लिया तो अब आपको एi इंजीनियरिंग रोड मैप में
नेक्स्ट टॉपिक पे मूव करना है जो कि है एजेंटिक एआई। आई एम प्रीटी श्योर आपने इसका नाम जरूर सुना होगा। बिकॉज़ पिछले एक
साल में इस टर्म के बारे में बहुत बात हो रही है। और ऐसा प्रेडिक्ट किया जा रहा है कि फ्यूचर में ऑलमोस्ट 90% ऑफ़ ऑल
सॉफ्टवेयर सिस्टम्स विल बी एजेंटिक इन नेचर। तो एजेंटिक एआई सीखना इज सुपरेंट। अब एजेंटिक एआई के बारे में अगर मैं आपको
एकदम सिंपल शब्दों में बताऊं इन हियर यू बिल्ड एजेंट्स। एआई एजेंट्स। एआई एजेंट्स क्या होते हैं? अ एकदम सिंपल वर्ड्स में
अगर एक सिस्टम के पास एलएलएम है, मेमोरी है और टूल्स हैं। तो इन तीनों चीजों को मिला के यू कैन बिल्ड एन एजेंट। एलएलएम की
हेल्प से आपका एजेंट प्लानिंग एंड रीजनिंग करता है और बेसिकली एलएलएम आपके ब्रेन का काम करते हैं। मेमोरी की हेल्प से आपका
एजेंट ये ट्रैक रखता है कि उसने अभी तक क्या-क्या सीखा है और उसको आगे क्या करना है और टूल्स की हेल्प से वो चीजें करके
देता है। ठीक है? तो ये तीन मेजर कंपोनेंट्स होते हैं किसी भी एजेंटिक एआई सिस्टम के। तो यहां पे आपको क्या-क्या
पढ़ना है? यहां पे सबसे पहले आपको थोड़ी सी थ्योरी पढ़नी है कि हाउ डू यू बिल्ड एजेंटिक एआई एप्लीकेशनेशंस? तो इसमें सबसे
पहले आपको पढ़ना है अबाउट प्लानिंग एंड रीजनिंग? हाउ डू यू यूज़ अ एलएलएम इन सच अ वे दैट इट कैन प्लान एंड रीज़न? तो यहां पे
यू हैव टू स्टडी अबाउट हाउ डू यू सेट गोल्स इन अ एलएलएम बेस्ड सिस्टम। हाउ डू यू डीकंपोज़ अ गोल इंटू सबटास्क्स? हाउ डू
यू मेक डिसीजन मेकिंग कि कौन सा टास्क किस ऑर्डर में एग्जीक्यूट करना है। देन यू हैव टू लर्न अबाउट सर्टेन रीजनिंग पैटर्न्स।
यह कुछ बहुत फेमस पेपर्स आए हैं पिछले तीन-चार सालों में जिससे एजेंटिक एआई काइंड ऑफ निकला है। तो इन पेपर्स को आपको
स्टडी करना है। इनमें चेन ऑफ थॉट बहुत ही इंपॉर्टेंट पेपर है। देन वी हैव थ्री ऑफ़ थॉट्स। रिएक्ट इज़ वन वेरीेंट
रीजनिंग मैकेनिज्म जो एलएलएम्स कर सकते हैं। देन वी आल्सो हैव रिफ्लेक्शन एंड सेल्फ क्रिटिक जहां पे एक एलएलएम अपने ही
रिस्पांस को देख के खुद का फीडबैक देता है और उसके बेसिस पे आगे का पाथ डिसाइड करता है। तो ये सब आपको पढ़ना है। उसके बाद आपको
एजेंटिक सिस्टम्स काइंड ऑफ़ आर्किटेक्चर के ऊपर भी थोड़ी पढ़ाई करनी है। सो देयर आर डिफरेंट-डिफरेंट पैटर्न्स दैट यू कैन यूज़।
वी हैव प्लानर एग्जीक्यूटिव पैटर्न, कंट्रोलर वर्कर पैटर्न, हायरार्कल प्लानिंग। देन यू आल्सो हैव मल्टी एजेंट
आर्किटेक्चर जहां पे एक सिंगल एजेंट बनाने के बदले आप एक टास्क को सॉल्व करने के लिए मल्टीपल एजेंट्स बनाते हो। मल्टीपल
एजेंट्स बनाने में भी देयर आर डिफरेंट-डिफरेंट आर्क आर्किटेक्चर दैट यू हैव टू स्टडी। देन यू आल्सो हैव टू स्टडी
अबाउट टास्क डीकंपोज़िशन स्ट्रेटजीज़। यू आल्सो हैव टू स्टडी अबाउट टूल अवेयर रीजनिंग। बेसिकली एक एजेंट को हमेशा पता
होना चाहिए कि उसके पास कौन-कौन से टूल्स हैं और फॉर एनी गिवन टास्क उसको ये आईडिया होना चाहिए कि उसको कौन सा टूल यूज़ करना
चाहिए और कैसे करना चाहिए। देन द एजेंट शुड आल्सो बी अवेयर ऑफ द स्टेट कि करेंटली उसको किन-किन चीजों के बारे में पता है और
जो जो चीजों के बारे में उसको पता है उसके बेसिस पे वो आगे के टास्क कैसे एग्जीक्यूट करेगा। देन यू आल्सो हैव टू स्टडी अबाउट द
कंस्ट्रेंट्स दैट आर अप्लाइड ऑन एन एजेंटिक सिस्टम जैसे कि बजट कंस्ट्रेंट्स हैं कि हम इतने ही टोकंस यूज़ कर सकते हैं।
हमें इतना ही कॉस्ट के अंदर सारा काम करना है। यू आल्सो हैव टू सेट सेफ्टी कंस्ट्रेंट्स कि एक एजेंट क्या कर सकता
है? क्या नहीं कर सकता है। हाउ डू यू पुट इन ह्यूमन इन द लूप? ये सारी चीजें आपको पढ़नी होती हैं। एंड लास्टली यू हैव टू
स्टडी अबाउट द फेलियर मोड्स। एक एजेंट या एजेंटिक एआई सिस्टम किस तरह के सिचुएशनंस में फेल कर सकता है सच एज वो इनफाइनाइट
लूप में फंस जाए या फिर टूल्स को हेलसिनेट करने लग जाए। तो ये सारी चीजें आपको पढ़नी है। ये पूरी चीज थोड़ी थ्योरिटिकल है। बट
आई वुड से कि आप एक बार इसको क्लॉस थ्रू कर लो। इवन अ चार्ट जीपीटी सेशन इज़ सफ्फिशिएंट। बट ये फंडामेंटल्स अगर आपके
इन प्लेस रहेंगे तो आगे आप जब एजेंटिक एआई सिस्टम्स बिल्ड करोगे तो आर्किटेक्चर लेवल पर सिस्टम लेवल पर कॉनसेप्चुअल लेवल पर
आपको परेशानी नहीं होगी। नेक्स्ट दो चीजें जो आपको पढ़नी है एजेंटिक एआई में वो ऐसी चीजें हैं जो आप ऑलरेडी पढ़ चुके हो उस
रोड मैप में आपको स्टेट एंड मेमोरी के बारे में पढ़ना है जो आपने जस्ट ऊपर पढ़ा यहां पे मेमोरी में बिल्कुल वही चीजें
काइंड ऑफ रिपीट होती हैं। कुछ भी नया नहीं है। बस उसको आप एजेंट के पर्सेक्टिव से पढ़ते हो। सिमिलरली यू आल्सो हैव टू स्टडी
अबाउट टूल यूसेज व्हिच इज अगेन समथिंग जो आपने यहां ऑर्केस्ट्रेशन में पढ़ लिया है। टूल इंटीग्रेशन एंड फंक्शन कॉलिंग।
एक्सैक्टली यही चीजें पढ़नी है। कुछ भी खास यहां पे नया नहीं है। अब बात करते हैं नेक्स्ट चीज की जो कि है एमसीपी एंड अदर
प्रोटोकॉल्स। सो एमसीपी स्टैंड्स फॉर मॉडल कॉन्टेक्स्ट प्रोटोकॉल। इट इज़ अगेन समथिंग जिसका नाम आपने शायद सुना होगा पिछले एक
साल में बिकॉज़ यह बहुत पॉपुलर हुआ है। अह एकदम सिंपल वर्ड्स में एमसीपी इज़ अ वे टू कनेक्ट योर एजेंट टू टूल्स। इट इज़ अ
स्टैंडर्डाइज्ड वे टू कनेक्ट योर एजेंट टू टूल्स विदाउट राइटिंग मच कोड। दिस इज द मेन एस्पेक्ट ऑफ एमसीपी। सो यहां पे आपको
सबसे पहले पढ़ना है कि एमसीपी क्या है? इस स्टैंडर्ड की जरूरत क्यों पड़ी? अ उसके बाद यू हैव टू स्टडी अबाउट टूल इंटरफ़ेस
स्टैंडर्डाइजेशन। अ कैसे आप किसी भी टूल के साथ अपने एजेंट को कनेक्ट कर सकते हो वाया क्लाइंट सर्वर मॉडल। अ देन यू हैव टू
लर्न अबाउट कैपेबिलिटी डिस्कवरी। कैसे जब एक टूल को आप कनेक्ट करते हो एक एजेंट के साथ तो एमसीपी की हेल्प से कैसे डिस्कवर
होता है कि आपका टूल क्या-क्या काम कर सकता है। अह देन यू आल्सो हैव टू स्टडी अबाउट सिक्योरिटी एंड आइसोलेशन बिकॉज़ दिस
इज़ अ वेरी वेरीेंट एंड प्रेसिंग इशू। अगर आपने किसी टूल को कनेक्ट कर दिया जो कि बहुत रिलायबल थर्ड पार्टी सोर्स से नहीं
आता तो वहां पे देयर इज़ अ चांस कि आपका एजेंटिक एआई सिस्टम किसी तरीके से गड़बड़ कर सकता है। तो हाउ डू यू कंट्रोल दैट?
उसके बारे में आपको पढ़ना है और एमसीपी पढ़ने के साथ-साथ आपको एक और प्रोटोकॉल पढ़ना है जो एमसीपी के साथ ही साथ आया था
व्हिच इज ए टू ए प्रोटोकॉल एजेंट टू एजेंट प्रोटोकॉल अ जहां पे एमसीपी इज अबाउट कम्युनिकेशन बिटवीन एन एजेंट एंड अ टूल ए
टू ए इज़ अबाउट कम्युनिकेशन बिटवीन टू एजेंट्स। ठीक है? तो ये दो प्रोटोकॉल्स हैं जो आज के एजेंटिक एआई सिस्टम्स को
पावर करते हैं। और ये दोनों आपको आने चाहिए। लास्टली आपको एजेंटिक एआई फ्रेमवर्क्स एंड लाइब्रेरीज की भी नॉलेज
होनी चाहिए। बिकॉज़ मोस्ट ऑफ द एजेंटिक एआई सिस्टम्स दैट यू बिल्ड टुडे दे आर बिल्ट यूजिंग दीज़ फ्रेमवर्क्स एंड लाइब्रेरीज़।
मैं आपको कुछ पॉपुलर फ्रेमवर्क्स एंड लाइब्रेरीज के नाम बता दे रहा हूं जो सबसे ज्यादा इंडस्ट्री में यूज़ होने वाली
लाइब्रेरी है आज की डेट में वो है Lang्राफ और Lang्राफ्ट आपको बहुत ज्यादा फ्लेक्सिबिलिटी देती है कि आप किसी भी तरह
का एजेंट आर्किटेक्चर बना सकते हो। Microsoft की एक लाइब्रेरी है ऑटोन। अ ये भी बहुत पॉपुलर है बट लनग्राफ जितनी
पॉपुलर नहीं है। देन वी हैव प्रीआई व्हिच इज लाइक अ वेरी गुड अब्स्ट्रैक्शन टू बिल्ड मल्टी एजेंट सिस्टम्स। अगर आप मल्टी
एजेंट आर्किटेक्चर ट्राई आउट करना चाहते हो तो प्रीआई बहुत छट से आपको आउट ऑफ द बॉक्स सशन देता है। लामा इंडेक्स इज़ अगेन
समथिंग जो आप ट्राई कर सकते हो। बट अगेन इफ यू हैव टू चूज़ आई वुड सजेस्ट लंग्राफ। सेम फॉर सिमेंटिक कर्नल। सेकंड थर्ड नंबर
की लाइब्रेरी है। आई वुड स्टिल सजेस्ट लंग्राफ। अ देन वी हैव एगनो व्हिच इज अगेन अ काइंड ऑफ़ अब्स्ट्रैक्शन जहां पर आपको
बहुत ज्यादा कोड लिखे बिना एजेंट्स बनाने हैं और ओपन एi का भी एक एजेंट्स एसडीके है व्हिच इज़ अगेन समथिंग जो मैंने पर्सनली
ट्राई नहीं किया है बट आई हैव सीन दैट इट हैज़ गॉट गुड रिव्यूज तो यह भी आप ट्राई आउट कर सकते हो बट अगर आपको कोई एक
लाइब्रेरी सीखनी है आउट ऑफ ऑल दीज़ इट हैज़ टू बी लैंग्राफ सबसे ज्यादा आपको इसी में सीखने को मिलेगा और सबसे ज्यादा यही यूज़
होता है इंडस्ट्री में। सो अभी तक आपने एआई इंजीनियरिंग ट्रैक में क्या-क्या पढ़ा है मैं एक बार आपको समराइज़ कर देता हूं।
सबसे पहले आपने एलएलएम के फंडामेंटल्स सीखे बिकॉज़ आगे सब कुछ उसी पर डिपेंड करता था। फिर हमने ऑर्केस्ट्रेशन सीखा जिसकी
हेल्प से आप किसी भी टाइप का वर्क फ्लो बना सकते हो। या फिर आप चाहो तो किसी भी टाइप का चैटबॉट बना सकते हो। फिर आपने
वेक्टर डेटाबसेस एंड रैक के बारे में सीखा जिसकी हेल्प से आप रैक बेस्ड चैटबॉट्स बना सकते हो। फिर आपने एजेंटिक एआई के बारे
में पढ़ा जिसकी हेल्प से आप एजेंटिक एआई सिस्टम्स बना सकते हो। तो ये दो तीन मेजर कैटेगरीज़ के बारे में अभी तक आपने पढ़ाई
की। बट एक चीज़ अभी तक कॉमन है इन सारी कैटेगरीज़ में दैट ये सारे के सारे कैटेगरीज़ को हमने प्रोटोटाइप लेवल पे ही
स्टडी किया। व्हिच बेसिकली मीन्स कि जो भी सॉफ्टवेयर आप बना रहे हो वो आप ही की मशीन पे काम कर रहा है। बट अब अगली चीज जो हम
पढ़ेंगे वो इन प्रोटोटाइप्स को प्रॉपर रियल वर्ल्ड यूज़बल प्रोडक्ट्स में कन्वर्ट कर सकता है। और वो चीज है एलएलएमप्स। ठीक है?
तो एलएलएम ऑप्स इज़ ऑल अबाउट कन्वर्टिंग योर एi सॉफ्टवेयर प्रोटोटाइप्स टू रिलायबल प्रोडक्ट्स दैट यू कैन रन एट स्केल एंड
मिलियंस ऑफ़ यूज़र्स कैन यूज़ इट। ठीक है? तो एलएलएमप्स नाम से भी आपको समझ में आ रहा होगा। इज़ काइंड ऑफ़ रिलेटेड टू एमएलओप्स जो
आपने एमएल इंजीनियर वाले ट्रैक में देखा था। द ओनली डिफरेंस इज़ यहां पे हम एलएलएम्स के साथ काम करते हैं। दैट इज़
व्हाई द नेम एलएलएमओप्स। तो यहां पे आपको तीन मेन चीजें पढ़नी होती है। पहला हाउ डू यू कन्वर्ट योर प्रोटोटाइप टू प्रोडक्ट
देन हाउ डू यू डिप्लॉय इट एंड थर्ड हाउ डू यू मैनेज इट आफ्टर डिप्लॉयमेंट। ये तीन कैटेगरीज़ में आपको मोस्टली चीजों को पढ़ना
है। सो एलएलम ऑप्स में जो सबसे पहली चीज़ आपको पढ़नी है वो है UX एंड प्रोडक्ट डिज़ाइन। जहां पर आप अपने प्रोडक्ट
प्रोटोटाइप्स को प्रोडक्ट में कन्वर्ट करना सीखते हो। सो इट इज क्वाइट सिमिलर टू सॉफ्टवेयर प्रोडक्ट डिजाइन। द ओनली
डिफरेंस इज बिकॉज़ यहां पे एआई इनवॉल्वड है। तो थोड़े से कुछ नए यूजर एक्सपीरियंस एलिमेंट्स आ जाते हैं। सो मैं आपको बताता
हूं यहां पे आपको क्या-क्या सीखना है। सबसे पहले आपको ये सीखना है कि हाउ डू यू डिज़ाइन यूआई जहां पे आपके यूज़र्स एi के
साथ इफेक्टिवली इंटरेक्ट कर पाए। जैसे कि आप यूजर को फ्री टेक्स्ट में टाइप करने का ऑप्शन देना चाहते हो या फिर उससे फॉर्म के
तरीके से इनपुट लेना चाहते हो। हाउ कैन यू क्रिएट क्रिएट अ गाइडेड वर्क फ्लो जो यूजर को बहुत आसानी से समझाए कि ये एआई
सॉफ्टवेयर काम कैसे करता है। हाउ डू यू क्रिएट मल्टीस्टेप कन्वर्सेशनल फ्लोस? ये सारी चीजें आप यहां पे सीखते हो। देयर आर
डिफरेंट टूल्स दैट दैट दैट दैट दैट दैट दै यू कैन यूज़। अगर आप बहुत सीरियस प्रोडक्ट नहीं बना रहे हो जस्ट फॉर डेमोंस्ट्रेशन
पर्पस यू वांट टू प्रेजेंट इट इन फ्रंट ऑफ़ योर कंपनी एंप्लाइजस। यू कैन यूज़ स्ट्रीमलेट और रेडियो बट अगर आप थोड़ा भी
सीरियस प्रोडक्ट बनाना चाहते हो जिसको रियल यूज़र्स यूज़ करेंगे देन रिएक्ट एंड नेक्स्ट जीएस इज़ अ वैरी गुड ऑप्शन एंड
आल्सो वर्सल एआई एसटीके कैन बी यूज़्ड। अ नेक्स्ट यू वर्क अ लॉट ऑन ट्रस्ट एंड ट्रांसपेरेंसी बिकॉज़ एआई इज़ इन्वॉल्वड तो
यहां पे ट्रस्ट इस्टैब्लिश करना बहुतेंट हो जाता है। लेट्स से यू आर बिल्डिंग अ चैट बॉट तो वहां पे आंसर्स दिखाने के
प्रोसेस में यू वुड आल्सो लाइक टू शो साइटेशंस कि आंसर हम कहां से फच करके लाए हैं कौन से सोर्सेस हैं। यू कैन आल्सो शो
अ कॉन्फिडेंस इंडिकेटर कि ए आई आंसर करने में कितना कॉन्फिडेंट था। टूल अगर आप यूज़ कर रहे हो तो बताओ कि कौन सा टूल यूज़ कर
रहे हो। बहुत क्लियर एरर मैसेजिंग रखो। यह सारी चीजें काइंड ऑफेंट हो जाती है इन ऑर्डर टू बिल्ड ट्रस्ट। नेक्स्ट टू हैंडल
लेटेंसी एंड रिस्पांसिवनेस इशूज़। आप स्ट्रीमिंग इंप्लीमेंट कर सकते हो। प्रोग्रेसिव लोडिंग इंप्लीमेंट कर सकते हो
जो बताएगा कि कितनी देर में आपको आउटपुट मिलने वाला है। यू कैन आल्सो डू अ सिंक टास्क हैंडलिंग व्हिच बेसिकली इज अ वे टू
हैंडल टास्क इन पैरेलल। अब यहां पे आपको थोड़े बैक एंड की चीजें सीखनी पड़ेंगी। सच एज सर्वर सेंट इवेंट्स, वेब सॉकेट्स का
यूसेज, फास्ट एपीआई जैसी लाइब्रेरी का यूसेज ये सब आपको सीखना पड़ेगा। एंड लास्टली यू आल्सो लर्न हाउ टू इंटीग्रेट
फीडबैक एंड कंट्रोल वो आपने देखा होगा चार जीपीटी में थम्स अप थम्स डाउन बटन रहता है हर आंसर के बाद बहुत आसानी से यूजर फीडबैक
दे सकता है एडिटेबल आउटपुट्स आप एi का जो आउटपुट है उसको एडिट करके वापस भेज पाओ यूजर करेक्शन फ्लोस का इंटीग्रेशन तो इस
तरह की चीजें आप सीखते हो और बहुत ज्यादा इसमें डीप जाके पढ़ने की जरूरत नहीं है। इनफैक्ट आप क्या कर सकते हो कि आप जितने
सॉफ्टवेयर्स यूज़ करते जाओगे आपको आईडिया लगते जाएगा कि व्हाट आर द मेन यू एलिमेंट्स एंड वर्क फ्लोस जो कंपनीज़
ऑलरेडी यूज़ कर रही हैं। प्रोटोटाइप से अ प्रोडक्ट या UX बनाने के बाद आपका नेक्स्ट कंसीडरेशन होता है डिप्लॉयमेंट जहां पे आप
अपने बने हुए सॉफ्टवेयर को ऑनलाइन लेके आते हो। सो यहां पे आपको दो-तीन चीजों का ख्याल रखना पड़ता है। सबसे पहले यू हैव टू
थिंक अबाउट द डिप्लॉयमेंट आर्किटेक्चर। जो भी आपने एलएलएम यूज़ किया है क्या आप उसको एपीआई बेसिस पर यूज करना चाहते हो या फिर
आप अपने खुद के एलएलएम्स होस्ट करके उसका इनफेंस यूज़ करना चाहते हो या फिर आप हाइब्रिड मॉडल यूज़ करना चाहते हो ये सब
डिसीजन मेकिंग होती है जो आपने बैक एंड बनाया है वो कैसे बनाया है इसके बारे में आपको सोचना पड़ता है आर यू प्लानिंग रेस्ट
एपीआई फॉर योर चैटबॉट सर्विस क्या आप अ सिंक प्रोसेसिंग यूज़ करना चाहते हो कि नहीं सो यहां पर आप फास्ट एपीआई जैसा टूल
यूज़ करते हो उसके बाद डिप्लॉयमेंट के लिए आप डॉकरराइजेशन का कांसेप्ट यूज़ करते हो। यू बेसिकली कंटेनराइज़ योर सॉफ्टवेयर और आप
उसको ही अपलोड करते हो या डिप्लॉय करते हो क्लाउड में। तो यहां पे अगेन यू हैव टू यूज़ डॉकर डॉकर कंपोज़ थोड़ा कॉम्प्लेक्स
एप्लीकेशन है तो यू माइट गो फॉर कूपनिटीज़ एज़ वेल। अ मॉडल सर्विंग आप कैसे कर रहे हो? आप अगर सेल्फ होस्टेड मॉडल यूज़ कर रहे
हो तो उसका जीपीयू इनफेंस सर्वर्स आप कहां से उठा रहे हो? उसको क्वांटाइज़ कैसे कर रहे हो? बैच वर्सेस रियल टाइम सर्विंग में
क्या सेलेक्ट कर रहे हो? ये सब कुछ आपको यहां पे हैंडल करना पड़ता है। वंस द सॉफ्टवेयर इज़ डिप्लॉयड हाउ डू यू हैंडल द
स्केलिंग एंड परफॉर्मेंस। सो यहां पे आपको स्केलिंग के बारे में पढ़ना पड़ता है। कैशिंग के बारे में पढ़ना पड़ता है। और यू
हैव टू डू लॉट ऑफ़ ऑप्टिमाइजेशनंस अराउंड लेटेंसी एंड टोकंस। देन कम्स सीआईसीडी फॉर एआई सिस्टम्स जहां पे आप अपने पूरे के
पूरे डेवलपमेंट एंड डेप्लॉयमेंट वर्क फ्लो को ऑटोमेट करने की कोशिश करते हो विथ द हेल्प ऑफ सीआईसीडी। तो जो चीजें आपने
काइंड ऑफ एमलॉप्स में पढ़ी थी उसी का एलएलएम वर्जन आप यहां पर देखते हो वाइल डूइंग द डिप्लॉयमेंट वाला पार्ट।
डिप्लॉयमेंट के बाद आता है पोस्ट डिप्लॉयमेंट स्टेज जहां पे सबसे इंपॉर्टेंट एस्पेक्ट होता है
ऑब्जरवेबिलिटी। जैसा कि मैंने आपको बताया कि एआई सॉफ्टवेयर्स थोड़े से अलग होते हैं आपके रेगुलर सॉफ्टवेयर के कंपैरिजन में।
देयर आर टू प्राइमरी रीज़ंस। पहला मोस्ट ऑफ द टाइम्स एक एआई सॉफ्टवेयर का जो परफॉर्मेंस है वह ओवरटाइ डिग्रेड करता है।
तो यू हैव टू का कॉन्सेंटली मॉनिटर। सेकंड एi बेस्ड सॉफ्टवेयर्स कैन प्रोड्यूस सेंसिटिव आउटपुट। तो आपको उसको भी पूरे
टाइम मॉनिटर करना पड़ता है। तो ऑब्जरवेबिलिटी में आप एग्जैक्टली यही काम करते हो। आप जो भी यूजर बात कर रहा है
आपके एi सॉफ्टवेयर से आप उसको एंड टू एंड ट्रेस करते हो। ठीक है? देयर आर मल्टीपल सॉफ्टवेयर्स। लैंगथ इज़ वन ऑफ़ देम जिसकी
हेल्प से आप पूरा एंड टू एंड ट्रेिंग कर सकते हो। यू आल्सो ट्राई टू मॉनिटर द टोकन कॉस्ट एंड लेटेंसी। बिकॉज़ ऐसा हो सकता है
कि बिहाइंड द सीन्स आपका मॉडल बहुत ज्यादा टोकंस खा रहा है। जिसकी वजह से आपका कॉस्ट बढ़ सकता है। या फिर कभी ऐसा हो सकता है कि
आपका मॉडल सडनली से बहुत स्लो रिस्पों्ससेस दे रहा है। जिसकी वजह से आपके जो सॉफ्टवेयर है उसका लेटेंसी बहुत
बढ़ गया है। यू आल्सो डू वर्क फ्ल्लो लेवल मॉनिटरिंग कि अगर आपके सॉफ्टवेयर में देयर आर मल्टीपल स्टेप्स इनवॉल्वड। तो आप हर
स्टेप पे क्या हो रहा है? कितना टाइम लग रहा है उसको आप मॉनिटर करने की कोशिश करते हो। यू आल्सो ट्राई टू मॉनिटर द क्वालिटी
एंड बिहेवियर ऑफ़ योर सॉफ्टवेयर। क्या हेलुसिनेशन हो रहा है कि नहीं या फिर कितनी बार जो आपका गार्ड रेल है वो ट्रिगर
हो रहा है ये सब चीजें भी बहुत मैटर करती हैं। एंड लास्टली यू डू अलर्टिंग। अगर किसी भी तरह का इंसिडेंट अकर करता है तो
आप अलर्ट्स भेजते हो। ठीक है? तो ये सब कुछ आता है ऑब्ज़वेबिलिटी के अंदर। नेक्स्ट आता है सेफ्टी एंड गार्ड रेल्स। अ सेफ्टी
एंड गार्ड रेल्स जैसा मैंने बोला बिकम्स वेरीेंट स्पेशली फॉर एआई बेस सॉफ्टवेयर्स बिकॉज़ इट कैन प्रोड्यूस एनी काइंड ऑफ
कंटेंट देयर इज नो रेस्ट्रिक्शन। तो यू हैव टू मेक श्योर कि आप वहां पर गार्ड रेल्स प्लेस करो। सो दैट आपका यूजर किसी
भी तरह का मशियस प्र्ट डाल के अनडिजायरेबल आउटपुट एक्सट्रैक्ट ना कर पाए। ठीक है? दिस इज़ स्पेशलीेंट इफ यू आर बिल्डिंग एआई
बेस सॉफ्टवेयर्स फॉर बिज़नेसेस। ठीक है? तो यहां पे आपको क्या-क्या करना पड़ता है? सबसे पहले यू हैव टू फोकस ऑन इनपुट सेफ्टी
कि आपका यूजर बहुत कंट्रोलोल्ड तरीके से ही आपके सिर्फ सॉफ्टवेयर को इनपुट प्रोवाइड कर पाए। यू हैव टू अवॉयड एनी
काइंड ऑफ़ प्र्प इंजेक्शन। यू हैव टू डू प्रॉपर इनपुट वैलिडेशन एंड सैनिटाइजेशन। देयर शुड बी अ क्लियर रोल सेपरेशन। सिस्टम
यूज़र्स एंड यूज़र्स रेगुलर यूज़र्स के बीच में। यू हैव टू आल्सो डू रेट लिमिटिंग कि कितना यूसेज इज़ अलाउड। ये सब आपने देखा भी
होगा कि क्लॉड वगैरह में देयर इज़ अ स्ट्रांग रेट लिमिटिंग। देन यू आल्सो डू वेरी स्ट्रांग आउटपुट फ़्टरिंग। आप
टॉक्सिसिटी डिटेक्शन करते हो। सेंसिटिव डेटा अगर कभी निकल के आ रहा है तो उसकी मास्किंग करते हो एंड स्ट्रक्चर्ड आउटपुट
का वैलिडेशन करते हो। राइट? यहां पे आप देखोगे कि देयर आर सर्टेन एपीआई ओपन एआई की भी ऐसी एपीआईआई है जिनको हम मॉडरेशन
एपीआई बोलते हैं। आप क्या करते हो? एज अ डेवलपर जो भी आउटपुट निकल के आ रहा है आपके मॉडल से उसको आप सीधे भेज देते हो इन
मॉडरेशन एपीआई के पास। और ये मॉडरेशन एपीआई क्या करते हैं? हर तरीके से चेक करते हैं। इनफैक्ट मैं आपको दिखाता हूं।
दिस इज़ काइंड ऑफ़ इंटरेस्टिंग ओपन एआई मॉडरेशन एपीआई। सो दिस इज लाइक एन एपीआई जहां पर आप सिंपली अपने मॉडल का आउटपुट
भेजो और यह पलट के आपको बहुत डिटेल्ड एक रिपोर्ट बना के देगा कि उस पर्टिकुलर मॉडल आउटपुट में क्या-क्या कमियां है,
क्या-क्या गड़बड़ है विथ अ कॉन्फिडेंस स्कोर। तो उसके बेसिस पर फिर आप डिसाइड कर सकते हो कि वह आउटपुट आपको यूजर को दिखाना
है या नहीं दिखाना है। टूल सेफ्टी के ऊपर भी आपको काम करना पड़ता है। बहुत सारे टूल्स अगर आपने यूज़ कर रखे हैं तो टूल्स
को कितना परमिशन देना है, कौन से आर्गुमेंट्स पास करने हैं? ये सब चीजें आप यहां पे देखते हो। ठीक है? अ नेक्स्ट इज़
प्र्प इंजेक्शन एंड जेल ब्रेक। हमने ऊपर डिस्कस भी किया था कि आप यूजर जो भी इनपुट भेज रहा है उसको कंट्रोल करते हो। बट यू
पुट एक्स्ट्रा फोकस ऑन प्र्प इंजेक्शन एंड जेल ब्रेक। बिकॉज़ ये ऐसे अटैक्स हैं जो किसी भी सिस्टम के ऊपर किए जा सकते हैं।
बिकॉज़ मोस्ट ऑफ़ द एi बेस सॉफ्टवेयर्स दे एक्सपेक्ट प्र्प फ्रॉम द यूजर एंड प्र्प्ट इज़ सिंपली रिटन इंग्लिश और प्र्प के
वेरिएशन से आपके मॉडल का आउटपुट बहुत ज्यादा चेंज किया जा सकता है। तो दिस इज़ समथिंग दैट इज़ वेरीेंट। अर्ली डेज़ में
आपको याद भी होगा कि चार्ज जीपीटी के ऊपर बहुत लोगों ने जेल ब्रेक प्र्ट लिखे थे और बहुत अजीब-अजीब आउटपुट चार्ज जीपीटी दे
देता था। बट ओवर टाइम आपने नोटिस किया होगा चार्ज जीपीटी को आप कितना भी काइंड ऑफ़ प्रोवोक करते हो चार्ज जीपीटी का
आउटपुट इज़ वेरी वेरीरी कंट्रोलोल्ड। तो वो सब कुछ तभी आता है जब आप प्र्ट इंजेक्शन एंड जेल ब्रेक टेक्निक्स के अगेंस्ट
प्रॉपर्ली प्रिपेयर करते हो अपने सिस्टम को। अह लास्टली जो भी पॉलिसीज़ आपने सेट कर रखी हैं अपने सिस्टम के लिए उसको भी फॉलो
करवाना इज़ समथिंग दैट कम्स अंडर सेफ्टी एंड गार्ड रेल्स। एंड लास्टली यू आल्सो ट्राई टू पुट ह्यूमन इन द लूप। बिकॉज़ दैट
इज द फाइनल सेफगार्ड जो आपको हर तरह के सिचुएशन से बचा सकता है। जैसे कि मैनुअल अप्रूवल वर्क फ्लोस हो गए। कभी सिचुएशन
आने पे एस्केलेशन हो जाए या फिर आपके पास एडिटेबल आउटपुट्स हो ये सारी चीजें आप प्रोवाइड करते हो ह्यूमन इन द लूप
सेफगार्ड्स में। सो द होल आईडिया इज़ टू मेक योर सॉफ्टवेयर सेफ फॉर रियल वर्ल्ड यूज़र्स। दैट इज द आईडिया जो हम यहां पे
कवर करते हैं। नेक्स्ट कम्स गवर्नेंस। अह गवर्नेंस का बेसिक फंडा यह है कि इफ यू आर वर्किंग फॉर अ बिग कंपनी, बिग मल्टीीनेशनल
कंपनी जिसका सॉफ्टवेयर अह अलग-अलग कंट्रीज में यूज़ किया जाने वाला है। तो इस तरह की कंपनीज़ के लिए आपको क्या करना पड़ता है?
कंट्री टू कंट्री बेसिस पे अपने प्रोडक्ट के अंदर गवर्नेंस सेट करना पड़ता है। सो ऐसा हो सकता है कि किसी एक पर्टिकुलर
कंट्री में देयर आर मल्टीपल रेस्ट्रिकशंस जो आपके प्रोडक्ट के ऊपर अप्लाई हो रहे हैं। तो ज्योग्राफिकली यू हैव टू
अंडरस्टैंड कि किस कंट्री में किस तरह के रेस्ट्रिकशंस हैं और फिर उन रेस्ट्रिकशंस को आपको अपने एआई सॉफ्टवेयर के ऊपर
इंप्लीमेंट करना पड़ता है। ठीक है? तो यहां पे बहुत सारी चीजें हैं। अ यू हैव टू इंप्लीमेंट द डेटा सोर्सिंग पॉलिसी, डेटा
रिटेंशन रूल्स। बहुत सारा पॉलिसी जो है वह डेटा के अराउंड ही होता है। तो वह आपको सबसे पहले सेट करना पड़ता है। फिर आपको
अपने एआई सॉफ्टवेयर में एक्सेस एंड आइडेंटिटी मैनेजमेंट करना पड़ता है कि किसके पास कितना एक्सेस है। ये सब आपको
डिसाइड एंड सेट करना पड़ता है। उसके बाद मॉडल एंड प्र्प्ट के अराउंड यू हैव टू डू अ लॉट ऑफ गवर्नेंस। आपको इस तरीके से ऑडिट
लॉग सेट करने पड़ते हैं कि कल को अगर कोई गवर्नमेंट ऑफिशियल आपसे आके पूछे कि इस पर्टिकुलर इनपुट के लिए ये आउटपुट क्यों
आया तो आप उसको पूरा का पूरा वो लॉक दिखा पाओ। ये सब आपको सेट करना पड़ता है। एंड फाइनली अलग-अलग जो भी लोकलाइज़्ड कंप्लायंस
रूल्स हैं उसके हिसाब से आपको अपने सॉफ्टवेयर को ट्यून करना पड़ता है। तो ये सब कुछ थोड़ा टेक्निकल है। एंड ऑनेस्टली
मैंने खुद इसमें ज्यादा काम नहीं किया बिकॉज़ मैंने इस लेवल पे कभी एआई सॉफ्टवेयर्स बिल्ड नहीं किए हैं। बट इफ
इट्स रिक्वायर्ड दीज़ आर द थिंग्स दैट यू हैव टू स्टडी अंडर गवर्नेंस। द लास्ट थिंग दैट यू हैव टू स्टडी इन एलएलम ऑब्स इज़
मैनेज्ड एआई प्लेटफॉर्म्स। सो यह एक बहुत इंटरेस्टिंग चीज है। सो होता क्या है कि इफ यू आर वर्किंग फॉर अ बिग कंपनी एंड दे
हैव गिवेन यू अ टास्क टू डेवलप अ एई बेस्ड सॉफ्टवेयर जो बिहाइंड द सीन्स एलएलएम्स को यूज़ करेगा अपनी इंटेलिजेंस के लिए। तो
यहां पे सबसे ट्रिकी पार्ट आपके लिए ये आता है कि आप ओपन एआई या फिर एंथ्रोपिक के एलएलएम्स को डायरेक्टली एपीआई के थ्रू
एक्सेस नहीं कर सकते। बिकॉज़ इस सिचुएशन में क्या होगा कि आप जैसे ही उन मॉडल्स को यूज़ करोगे तो आप अपनी कंपनी का प्राइवेट
सेंसिटिव डेटा उस कंपनी एज एन ओपन एआई के सर्वर्स पे भेज दोगे जो कि अलाउड नहीं है। सेकंड ऑप्शन क्या बचा? सेकंड ऑप्शन ये बचा
कि आप ओपन सोर्स मॉडल्स को उठा के लाओ और उनको आप अपने सर्वर्स पे बिठाओ और फिर उसको यूज़ करो अपने एi सॉफ्टवेयर को पावर
करने के लिए। बट ये जो सेकंड वाली चीज है इसमें प्रॉब्लम यह है कि इसमें आपको बहुत ज्यादा टेक्निकल नॉलेज चाहिए और ऐसा हो
सकता है कि आप बहुत कॉस्टली तरीके से सॉफ्टवेयर को बिल्ड करो बिकॉज़ यू आर मैनेजिंग एवरीथिंग। तो थर्ड तरीका क्या
निकल के आता है कि देयर आर सर्टेन कंपनीज़ लाइक AWS, Google क्लाउड, Azure जो आपको इस चीज के लिए क्लाउड सर्विस प्रोवाइड
करते हैं। वो बोलते हैं कि हम आपकी पसंद का अ एलएलएम हमारे क्लाउड पे सेटअप कर देंगे और आपको एपीआईस भी दे देंगे और आपको
जो भी चीजें चाहिए सॉफ्टवेयर को डेवलप एंड डिप्लॉय करने के लिए वो सब कुछ हम आपको प्रोवाइड कर देंगे। एवरीथिंग विल बी
मैनेज्ड एंड टू एंड। आपको सिर्फ अपना सॉफ्टवेयर डेवलप करना है और वी प्रॉमिस कि आपका डेटा हमारे प्रिमाइससेस के बाहर नहीं
जाएगा। इनफैक्ट वी विल प्रोवाइड यू अ वर्चुअल क्लाउड या फिर इफ यू वांट यू कैन ओन अ प्राइवेट क्लाउड। तो इसी को बोला
जाता है मैनेज्ड एआई प्लेटफार्म और यहां पे आपको समझना है सबसे पहले कि मैनेज्ड एपीआई एआई प्लेटफॉर्म्स की जरूरत क्यों
है? व्हाट आर द कोर कैपेबिलिटीज़ ऑफ अ मैनेज्ड एआई प्लेटफार्म। हाउ डू यू डिप्लॉय एंड स्केल योर फीचर्स? सिक्योरिटी
एंड कंप्लायंस कैसे काम करता है? सबसे पॉपुलर मैनेज्ड एi प्लेटफॉर्म्स हैं आपके AWS बेडक Azure ओपन AI Google verर्ट AI
हगिंग फेस पे भी यू कैन डू दिस बट मोस्टली आप टॉप तीन के ऊपर ऑपरेट करते हो और अगर आपको किसी एक को पिक करना है तो आई वुड
रिकमेंड AWS बेड Rock एंड यू हैव टू आल्सो स्टडी अबाउट व्हेन टू यूज़ व्हेन नॉट टू यूज़ सच प्लेटफॉर्म्स एंड व्हाट आर द ट्रेड
ऑफ्स। ठीक है? वन ऑफ़ द बिगेस्ट ट्रेड ऑफ इज़ वेंडर लॉग इन। आप एक ही वेंडर के साथ फंस जाते हो। फिर आपको उसी की सारी सर्विज
यूज़ करनी पड़ जाती हैं। व्हिच माइट बी कॉस्टली इन द लॉन्ग रन। तो ये सारी चीजें आती हैं आपकी एलएलएम ऑब्स के अंदर। ठीक
है? विद दैट वी हैव कंप्लीटेड द सेकंड स्पेशलाइजेशन वि इज एi इंजीनियर ट्रैक। इस ट्रैक के बारे में मैं फिर से सेम बात
बोलना चाहूंगा। यह नया है बट इसमें बहुत अपॉर्चुनिटीज आने वाली है फ्यूचर में अगले 5 सालों में। इस पॉइंट पे थोड़ा सा
कंफ्यूजन है इस जॉब रोल के अराउंड कि एक एआई इंजीनियर को क्या आना चाहिए, क्या नहीं आना चाहिए। थोड़े अनरीज़नेबल से
एक्सपेक्टेशंस भी हैं। बट अगर आप इस जॉब रोल में अभी घुस जाते हो तो अगले 5 सालों में आप एक बहुत कमांडिंग पोजीशन में पहुंच
जाओगे अपने करियर में। सो आई वुड डेफिनेटली रिकमेंड कि आप इस पर्टिकुलर जॉब रोल को टारगेट करो। सो तीन में से दो
स्पेशलाइजेशनंस हमने कवर कर लिए। अब मूव करते हैं थर्ड एंड द लास्ट स्पेशलाइजेशन की तरफ। सो जो थर्ड स्पेशलाइजेशन है इस
एआई रोड मैप में वो है रिसर्च इंजीनियर ट्रैक। और ये आपको तब पढ़ना है जब आप इन जॉब प्रोफाइल्स को टारगेट करना चाहते हो।
कौन-कौन से जॉब प्रोफाइल्स? इफ यू वांट टू बिकम अ रिसर्च इंजीनियर और एन अप्लाइड साइंटिस्ट और अ रिसर्च डेटा साइंटिस्ट या
फिर रिसर्च एनएलपी इंजीनियर या फिर रिसर्च साइंटिस्ट। ये सारे टर्म्स अगर आपको टारगेट करने हैं, ये सारी जॉब प्रोफाइल्स
अगर आपको टारगेट करनी है तो फिर आपको ये स्पेशलाइजेशन पढ़ना पड़ेगा। अब इसमें क्या पढ़ना है यह डिस्कस करने के पहले एक बार
आपके साथ इस स्पेशलाइजेशन के पीछे जो कोर आईडिया है वो डिस्कस कर लेते हैं। सो इसके पहले वाले स्पेशलाइजेशन में मैंने आपको
बताया था एआई इंजीनियर वाले स्पेशलाइजेशन में कि वहां पे आप क्या करते हो कि एकिस्टिंग एलएलएम्स के ऊपर एआई बेस्ड
सॉफ्टवेयर्स बनाते हो। एआई इंजीनियर्स का यही काम होता है। तो वहां पर एलएलएम्स आर वेरी वेरी इंटीग्रल वेरीेंट क्योंकि सब
कुछ उसके ऊपर ही बनता है। यह जो थर्ड वाला स्पेशलाइजेशन है ना रिसर्च इंजीनियर ट्रैक यहां पे आप क्या करते हो कि यहां पे आप
एलएलएम्स बनाते हो। यहां पे आप एलएलएम्स के ऊपर सॉफ्टवेयर्स नहीं बनाते। यहां पे आप एलएलएम्स ही बनाते हो। सो ये जो बंदे
हैं ये जो जितनी भी जॉब प्रोफाइल्स आपको दिख रही हैं ये वो लोग हैं जो अपनी-अपनी रिस्पेक्टिव कंपनीज़ के लिए एलएलएम्स को
स्क्रैच से ट्रेन करते हैं और उनको डिप्लॉय करते हैं और उनको एट स्केल मैनेज करते हैं। तो इमेजिन योरसेल्फ वर्किंग एट
ओपन एआई और एंथ्रोपिक और उनकी कोर टीम में जाकर के आपका काम क्या होगा? उनके नेक्स्ट जनरेशन लार्ज लैंग्वेज मॉडल्स को ट्रेन
करना, डिप्लॉय करना एंड मैनेज करना। सो ये कोर आईडिया है इस पूरे स्पेशलाइजेशन का। ठीक है? अ एक दो चीजें मैं इस
स्पेशलाइजेशन के बारे में और बताना चाहूंगा। अ सिंस बहुत कम ही कंपनीज़ हैं जिनके पास ये कैपेबिलिटी है कि वो खुद के
एलएलएम्स ट्रेन कर सकती हैं। दैट इज व्हाई नंबर ऑफ जॉब प्रोफाइल्स आपको इस स्पेशलाइजेशन में कम ही देखने को मिलेंगे।
बट एक और पॉजिटिव साइड क्या है कि अगर आप यहां पे एक जॉब प्रोफाइल क्रैक कर लेते हो तो आप बहुत ज्यादा सैलरीज में खेलोगे।
मतलब यहां पे लिटरली अभी इतनी ज्यादा सैलरीज हो गई है कि यू कैन इज़ली मैच योर सैलरी विथ अ आईपीएल का प्लेयर। जितने
आईपीएल प्लेयर्स को नहीं मिलते उनसे ज्यादा सैलरीज आजकल इन रिसर्च साइंटिस्ट को मिलती है। बिकॉज़ बहुत ज्यादा कंपटीशन
है बिटवीन द बिग टेक जॉइंट्स कि हम सबसे बेस्ट टैलेंट अब्सॉर्ब करेंगे और उनकी हेल्प से हम सबसे कटिंग एज मॉडल प्रोड्यूस
करेंगे। टेक्निकली भी अगर हम बात करें तो तीनों स्पेशलाइजेशनंस में यह सबसे ज्यादा टेक्निकल एंड डेंस स्पेशलाइजेशन है। यहां
पर आपको सबसे ज्यादा टेक्निकल चीजें पढ़नी है। सबसे ज्यादा टेक्निकल चीजें करनी है। बट एट द सेम टाइम यह बहुत सेटिस्फाइंग भी
है। इफ यू आर इफ यू लव एआई देन दिस इज एक्चुअली कटिंग एट एआई। यह वो स्पेशलाइजेशन है जो एआई की पूरी फील्ड को
आगे लेके जा रही है। तो यहां पे काम करना खुद में यू विल फील लाइक यू आर एट द ड्राइविंग सीट। अब अगर बात करें पढ़ाई की
तो यहां पर मैंने पूरी की पूरी पढ़ाई को तीन पार्ट्स में डिवाइड कर दिया है। मैं आपको दिखाता हूं। सबसे पहली चीज है कि
आपको यहां पर एलएलएम्स के फाउंडेशंस को पढ़ना है। सो यहां पे आप बेसिकली ट्रांसफार्मर से लेके जो एलएलएम तक की
जर्नी है वो स्टडी करोगे। डीप लर्निंग में आपने ट्रांसफार्मर की पढ़ाई की थी। ट्रांसफार्मर्स को ही जब आप बहुत बड़े
डेटा पे प्रॉपर्ली ट्रेन करते हो तो एलएलएम्स बनते हैं। तो वो जो डिस्टेंस है बिटवीन ट्रांसफार्मर एंड एलएलएम वो आपको
समझना है सबसे पहले इन द फर्स्ट सेक्शन। उसके बाद इन द सेकंड सेक्शन व्हाट यू हैव टू डू यू हैव टू डू एलएलएम इंजीनियरिंग।
यू हैव टू लर्न अबाउट एलएम इंजीनियरिंग। दिस इज द मेन सेक्शन जहां पे आप स्क्रैच से एक एलएलएम को ट्रेन करना, फाइन ट्यून
करना, अलाइन करना, ऑप्टिमाइज करना सीखते हो। ठीक है? एंड फाइनली थर्ड सेक्शन में यू स्टडी अबाउट डिप्लॉयमेंट। एक बार आपने
अपना एलएलएम तैयार कर लिया। अब उसको आपको डिप्लॉय करना है। नॉट ओनली डिप्लॉय करना है। पोस्ट डिप्लॉयमेंट उसको सही से मैनेज
करके चलाना है। तो वो सारी चीजें आप इस थर्ड सेक्शन में पढ़ोगे। ठीक है? तो अब मैं एक काम करता हूं। मैं इन तीनों
सेक्शंस के बारे में आपको एक डिटेल्ड वॉक थ्रू देता हूं। सो लेट्स स्टार्ट विद द फर्स्ट वन एलएलएम फाउंडेशंस। जैसा मैंने
आपको बताया कि इस पूरे सेक्शन का एक ही पर्पस है कि ये आपको ट्रांसफार्मर से एलएलएम्स तक का जो इवॉल्यूशन है वो बताता
है। बहुत सारे रोड मैप्स ये पार्ट स्किप कर देते हैं। डायरेक्टली एलएलएम्स को ट्रेन कैसे करना है उसके बारे में बात
करने लगते हैं। बट मुझे ऐसा लगता है कि आपने डीप लर्निंग में ट्रांसफार्मर तक की पढ़ाई की। अब वहां से आप एलएलएम्स तक कैसे
पहुंचे वो जर्नी भी बहुत इंपॉर्टेंट है आपकी अंडरस्टैंडिंग के लिए। तो यहां पे आपको सबसे पहले क्या करना है? आपको सबसे
पहले पढ़ना है टाइप्स ऑफ ट्रांसफार्मर्स। ठीक है? तो यहां पे आप चाहो तो थोड़ा सा ट्रांसफार्मर आर्किटेक्चर रिवाइज कर सकते
हो। सो दैट आप थोड़ा बेटर तरीके से आगे बढ़ पाओ। तो तीन तरह के ट्रांसफार्मर आर्किटेक्चर्स होते हैं। एनकोडर मॉडल्स
होते हैं, डिकोडर मॉडल्स होते हैं और एनकोडर डिकोडर मॉडल्स होते हैं। और मजेदार चीज ये है कि इन तीनों में से डिकोडर
मॉडल्स ही वो मॉडल्स हैं जिनको यूज़ किया जाता है एलएलएम्स बनाने के लिए। तो आपको यहां पे ये भी पढ़ना है कि व्हाई डिकोडर
ओनली मॉडल्स डोमिनेट एलएलएम्स। ठीक है? तो ये पढ़ाई आपको सबसे पहले करनी है। उसके बाद कंटिन्यू करते हुए आपको डिकोडर ओनली मॉडल
के ऊपर ही फोकस करना है और आपको लैंग्वेज मॉडलिंग के बारे में पढ़ाई करनी है। बिकॉज़ लैंग्वेज मॉडलिंग ही वो कोर टास्क है
जिसके ऊपर एलएलएम्स को ट्रेन किया जाता है। लैंग्वेज मॉडलिंग इज़ बेसिकली नेक्स्ट वर्ड प्रेडिक्शन। तो लैंग्वेज मॉडल्स क्या
होते हैं? ऑटो रिग्रेसिव लैंग्वेज मॉडलिंग क्या होती है? उसके बाद टोकनाइजेशन एंड वोकैबलरी जनरेशन का कॉ कांसेप्ट क्या होता
है? किस तरह के ट्रेनिंग ऑब्जेक्टिव पे एलएलएम्स ट्रेन होते हैं? किस स्केल के डेटा पे ट्रेन होते हैं? एंड कॉन्टेक्स्ट
विंडो का क्या कांसेप्ट है? इतनी चीजें आपको यहां पे सबसे पहले जाननी होंगी टू मेक योर ओन एलएलएम्स और ये सारी पढ़ाई
फिलहाल थ्योरिटिकल लेवल पे है। ठीक है? ये मैं क्लेरिफाई करना चाहूंगा। इट्स नॉट लाइक इस पॉइंट पे आप सच में अपना खुद का
एलएलएम ट्रेन कर रहे हो। वो आगे है। अभी आप उसके फंडामेंटल्स पढ़ रहे हो। उसकी थ्योरी पढ़ रहे हो। उसके बाद एक बार जब
आपने ये थ्योरी पढ़ ली तो अब आपको क्या करना है? आपको थोड़ा सा कुछ एग्जिस्टिंग एलएलएम्स के साथ एक्सपेरिमेंट करना है। तो
इसके लिए आप क्या करोगे? आप हगिंग फेस पे जाओगे और हगिंग फेस पे जो कुछ पहले से पढ़े हुए प्रीट्रेंड मॉडल्स हैं, आप उनके
साथ काम करोगे। ठीक है? तो यहां पे आप सीखोगे हाउ डू यू लोड प्रीट्रेंड मॉडल्स फ्रॉम हगिंग फेस हब टोकनाइजेशन पाइपलाइन
कैसे बनाई जाती है? इनफेंस कैसे रन किया जाता है? टेक्स्ट कैसे जनरेट किया जाता है और अलग-अलग टाइप के एलएलएम आर्किटेक्चर्स
के साथ काम कैसे किया जाता है। ठीक है? ये सारी चीज आपको सीखनी है। सो दैट इस पॉइंट पे आपको थोड़ा फ्लेवर मिल जाए कि कैसे आप
एलएलएम्स के साथ इंटरेक्ट करते हो। एलएलएम के साथ एक्सपेरिमेंटेशन करने के प्रोसेस में ही आपको कुछ डिकोडिंग पैराटर्स के
बारे में पढ़ना है। सो डिकोडिंग पैरामीटर्स आर पैराटर्स जिसकी हेल्प से आप एलएलएम के आउटपुट को कंट्रोल कर सकते हो।
ठीक है? सो देयर आर डिफरेंट-डिफरेंट पैराटर्स। सो यू हैव टेंपरेचर, यू हैव टॉप के सैंपलिंग, टॉप पी सैंपलिंग, रेपेटेशन
कंट्रोल, लेंथ कंट्रोल। ये ऐसी चीजें हैं जिनकी हेल्प से आप जो आपका एलएलएम है उसका जो आउटपुट है उसकी क्रिएटिविटी, उसका
डिटरमिनिज्म वगैरह गवर्न करते हो। और ये आगे आप जब बिल्ड करोगे सॉफ्टवेयर्स अराउंड एलएलएम वहां पे ये बहुत काम आते हैं। सो
दिस इज अगेन समथिंग जो आपको अपने एक्सपेरिमेंटेशन फेस में ही करना है। आपने अभी एलएलएम से हगिंग फेस से एलएलएम को लोड
किया है। उसके ऊपर इनफेंस रन कर रहे हो। इनफेंस रन करने के साथ-साथ आप इन डिकोड डिकोडिंग पैराटर्स को वेरीरी कर करके
आउटपुट को समझते हो कि किस तरह के डिकोडिंग पैरामीटर इनपुट के लिए किस तरह का आउटपुट हमारा एलएलएम देता है। अगेन
जस्ट टू एनहांस योर अंडरस्टैंडिंग अराउंड एलएलएम्स। एंड द लास्ट थिंग दैट यू हैव टू डू हियर इज यू हैव टू इंप्लीमेंट द सेम
एलएलएम फॉर वेरियस डिफरेंट एनएलपी टास्क। सो यह शायद आपको ऑलरेडी पता होगा कि एलएलएम्स को ट्रेन तो किया गया था नेक्स्ट
वर्ड टोकन प्रेडिक्शन के लिए बट जब आप बहुत बड़े डेटा पे ये करते हो तो आपका एलएलएम कैन अंडरस्टैंड द डिटेल्स ऑफ
लैंग्वेज इटसेल्फ व्हिच बेसिकली मीन्स कि सिर्फ टेक्स्ट जनरेशन को छोड़ के भी आप और बहुत तरह के एनएलपी टास्क अपने एलएलएम से
करवा सकते हो। जैसे कि आप अगर चाहो तो सेम एलएलएम को टेक्स्ट क्लासिफिकेशन के लिए यूज कर सकते हो। सीक्वेंस लेबलिंग के लिए
यूज कर सकते हो। क्वेश्चन आंसरिंग के लिए यूज कर सकते हो। टेक्स्ट समराइजेशन के लिए यूज़ कर सकते हो। आपका लैंग्वेज ट्रांसलेशन
के लिए यूज़ कर सकते हो। तो अब आपको क्या करना चाहिए? सिंस यू आर प्लेइंग अराउंड विद एलएलएम्स। तो आप उनको ये छोटे-छोटे
डिफरेंट एनएलपी टास्क के ऊपर अप्लाई करके देखो। सबकी पाइपलाइंस थोड़ी-थोड़ी वेरीरी करती हैं। बट इन सारे टास्क के ऊपर आपको
इन एलएलएम्स को चला के देखना है। फिर अगेन आपको अंडरस्टैंडिंग डेवलप होगी कि एलएलएम्स कैसे बिहेव करते हैं अक्रॉस
डिफरेंट एनएलपी टास्क। तो ये पूरी चीज कवर करने के बाद क्या होगा कि आपकी जो जर्नी है एलएलएम से ले ट्रांसफार्मर से लेके
एलएलएम तक वो कंप्लीट हो जाएगी और एलएलएम आपको बहुत एलियन कांसेप्ट नहीं लगेगा और अब फायदा क्या है कि ये सब कुछ सीखने के
बाद जब आप अगली अगले सेक्शन में मूव करोगे व्हिच इज़ एलएलएम इंजीनियरिंग जहां पे आपको एक्चुअल एलएलएम्स को स्के स्क्रैच से
ट्रेन करना है तो आपको यहां पे कॉनसेप्चुअली बहुत आसानी होगी चीजों को समझने में। सो जैसा मैंने पहले बोला कि इस
स्पेशलाइजेशन का सबसेेंट पार्ट होता है एलएलएम इंजीनियरिंग। बिकॉज़ दिस इज़ द प्लेस वेयर यू एक्चुअली ट्रेन योर एलएलएम। यहीं
पे आपका एलएलएम क्रिएट होता है। तो यहां का जो टिपिकल वर्क फ्लो है वो कुछ ऐसा होता है कि सबसे पहले आप अपने एलएलएम को
ट्रेन करने के लिए डेटा लाते हो जो कि मैसिव स्केल पे होता है। उसके बाद आप उस डेटा को टोकनाइज करते हो और फिर उसी
टोकनाइज्ड डेटा की हेल्प से आप प्री ट्रेनिंग परफॉर्म करते हो। प्री ट्रेनिंग इज़ द प्रोसेस ऑफ़ ट्रेनिंग योर एलएलएम। और
यहां पे बहुत तरह के कंसीडरेशंस होते हैं। बहुत बड़े स्केल के हार्डवेयर के साथ आप काम करते हो। आप डिस्ट्रीब्यूटेड ट्रेनिंग
परफॉर्म करते हो। आप चेक पॉइंटिंग परफॉर्म करते हो। तो यह सारी चीजें यहां पे की जाती हैं। एक बार जब आपका मॉडल ट्रेन हो
जाता है उसके बाद आप उसको फाइंड ट्यून करते हो। फाइन ट्यून करने की दो जरूरत हो सकती है। पहला ये कि आप उसको अलाइन करना
चाहते हो ह्यूमन वैल्यूस के साथ। बिकॉज़ प्री ट्रेनिंग से जो आउटपुट मिलता है वो मॉडल डायरेक्टली रियल वर्ल्ड यूज़ के लिए
एप्रोप्रियट नहीं होता। तो आपको उसको अलाइन करना होता है विथ ह्यूमन वैल्यू। सो दैट वो सही एप्रोप्रियट आउटपुट दे जो
ह्यूमंस यूज़ कर पाएं। सेकंड ऐसा हो सकता है कि आप अपने प्रीटेंड मॉडल को किसी एक पर्टिकुलर डोमेन में अप्लाई करना चाहते हो
तो वहां पर आप उसको उस डोमेन के डेटा के ऊपर फाइंड ट्यून करते हो। तो ये भी एक बहुतेंट टास्क होता है। एक बार ये सब कुछ
करने के बाद यू इवैल्यूएट योर मॉडल कि जो भी निकल के आया है वो कितना पावरफुल है। यू टेस्ट इट ऑन डिफरेंट मैट्रिक्स एंड
बेंचमार्क्स एंड फाइनली यू परफॉर्म सम काइंड ऑफ़ ऑप्टिमाइजेशन जिसकी हेल्प से आपका जो इनफेंस है वो कम कॉस्टली हो और
ज्यादा स्पीड पे हो। सो सबसे पहले बात करते हैं डेटा फॉर एलएलएम्स की। तो यहां पे यू हैव टू स्टडी अबाउट द वेरियस डेटा
सोर्सेस जिस पे आज के एलएलएम्स ट्रेन होते हैं। दीज़ आर लाइक मैसिव स्केल डेटा सेट्स जो पूरे इंटरनेट का डेटा कंटेन करते हैं।
तो यहां पे आपके वेब पेजेस हुए, बुक्स हुए, कोड्स हुए, मल्टीलिंगुअल आपका डेटा सेट हुआ। ये सब कुछ आता है। इसके बारे में
आपको पढ़ना है। देन यू हैव टू लर्न अबाउट डेटा कलेक्शन पाइपलाइंस। हाउ डू यू एक्चुअली राइट कोड जो इतने मैसिव स्केल
डेटा को लेकर आ पाए आपके सिस्टम तक। देन यू लर्न अबाउट डेटा क्लीनिंग। ऑब्वियसली इतना मैसिव स्केल डेटा है। उसमें बहुत तरह
की कमियां होती हैं। उसको कैसे क्लीन करना है? हाउ डू यू डील डुप्लीकेट डेटा? हाउ डू यू फिल्टर डेटा? तो ये सब कुछ आपको यहां
पे सीखना होता है। एक बार डेटा को कलेक्ट करने के बाद जो अगली चीज़ आती है वो है टोकनाइजेशन। अ टोकनाइजेशन इज़
एब्सोलुटलीेंट। आप विदाउट टोकनाइजेशन अपने एलएलएम्स को प्रीिट्रेन नहीं कर सकते। तो यहां पे यू हैव टू लर्न अबाउट अ लॉट ऑफ़
थिंग्स। फर्स्ट यू हैव टू लर्न व्हाई टोकनाइजेशन इज़ नीडेड इन द फर्स्ट प्लेस। व्हाट आर द डिफरेंट टाइप्स ऑफ़ टोकनाइज़ेशन
दैट यू कैन परफॉर्म। फिर आपके कुछ टोकनाइजेशन एल्गोरिद्सम्स हैं जिनके बारे में आपको पढ़ना है। ये दोनों तरीकों से
इंपॉर्टेंट है। ये एलएलएम्स को ट्रेन करने के लिए भीेंट है और इंटरव्यू पॉइंट ऑफ व्यू से भी ये बहुतेंट है। तो यहां पे
बाइट पेयर एनकोडिंग हुआ, वर्ड पीस हुआ, सेंटेंट पीस हुआ। दीज़ आर लाइक रियली रियली फेमस टोकनाइजेशन एल्गोरिदम्स जिनके बारे
में आपको पढ़ना होता है। उसके बाद यू हैव टू लर्न अबाउट वोकैबलरी कंस्ट्रक्शन, हाउ डू यू डू एफिशिएंट टोकनाइजेशन एंड व्हाट
आर द मेन चैलेंजेस जब आप टोकन टोकनाइजेशन परफॉर्म करते हो ये आपको सीखना होता है। ठीक है? तो अगेन समथिंग दैट इज़ वेरी-वेरी
क्रूशियल फॉर दिस एंटायर प्रोसेस। देन कम्स द मोस्टेंट स्टेज ऑफ दिस एंटायर पाइपलाइन वि इज प्री ट्रेनिंग जहां पर आप
अपने एलएलएम को एक्चुअली ट्रेन करते हो। तो यहां पर सबसे पहले आप प्री ट्रेनिंग के ऑब्जेक्टिव्स सीखते हो। जैसा हमने डिस्कस
भी किया था थोड़ी देर पहले। अ बेसिकली वी डू लैंग्वेज मॉडलिंग, ऑटो रिग्रेसिव लैंग्वेज मॉडलिंग। देन यू हैव टू लर्न
अबाउट मास्क लैंग्वेज मॉडलिंग, सीक्वेंस टू सीक्वेंस ऑब्जेक्टिव्स। देन यू लर्न हाउ टू बिल्ड योर ट्रेनिंग पाइपलाइन। ये
सारा काम बाय द वे आप पाइडर्च में करते हो। और नोबडी सेइंग कि आप एक्सजेक्टली वैसा पाइपलाइन लिखो जो इंडस्ट्री में यूज़
हो रहा है। बट आप उसका एक स्केल्ड डाउन वर्जन लिख सकते हो। उससे भी आपका अंडरस्टैंडिंग डेवलप हो जाएगा। इन एनी केस
आप एकदम रियल वर्ल्ड वर्जन बना भी नहीं सकते बिकॉज़ वो स्केल का ट्रेनिंग करना आपके लिए पॉसिबल नहीं है। इट्स वे टू
कॉस्टली वे टू कॉम्प्लेक्स। बट उसका एक सिंपलीफाइड टोन डाउन वर्जन आपको सीखना है यहां पे। तो यू लर्न अबाउट ट्रेनिंग
पाइपलाइन, हाउ डू यू डू डेटा बैचिंग। अह हाउ डु यू डू सीक्वेंस पैकिंग? देन ट्रेनिंग लूप्स कैसे लिखे जाते हैं? देन
यू ऑल्सो हैव टू लर्न अबाउट स्केलिंग लॉस। व्हिच इज बेसिकली अ लॉ जिसके हेल्प से हमें ये पता चलता है कि मॉडल साइज, डेटा
सेट साइज एंड कंप्यूट तीनों आपस में कैसे रिलेटेड है और कैसे आप दो को बढ़ा के तीसरे को बढ़ा सकते हो। ठीक है? अ देन कम्स
ट्रेनिंग इंफ्रास्ट्रक्चर जहां पे आप सीखते हो अबाउट डिस्ट्रीब्यूटेड ट्रेनिंग जहां पे आपके दो-तीन इंपॉर्टेंट
कॉन्सेप्ट्स आपको सीखने होते हैं। हाउ डू यू परफॉर्म डेटा पैरेललिज्म, टेंसर पैरेललिज्म, पाइपलाइन पैरेलिज्म। एंड यू
आल्सो लर्न अबाउट स्टेबलाइजिंग द ट्रेनिंग? मतलब सिंस इतना कॉम्प्लेक्स प्रोसेस है, इतना ज्यादा पैसा इन्वॉल्व
है, इतने ज्यादा स्टेक्स हाई हैं। तो हाउ डू यू मेक श्योर कि कुछ गड़बड़ ना हो। तो यहां पे यू लर्न टेक्निक्स सच एज
ग्रेडियंट क्लिपिंग, लेबिंग रेड शेड्यूल्स, वार्म अप स्ट्रेटजीस ये सारी चीजें आपको सीखनी है। अगेन मैं यहां पे
बोलूंगा कि आपको एग्जैक्ट वो चीजें करके नहीं देखनी है जो इंडस्ट्री में हो रही है। बट उसका एक स्केल्ड डाउन वर्जन करना
है। और आईडिया ये है कि आप कॉनसेप्चुअल लेवल पे इस पूरी चीज को मास्टर कर लो और खुद छोटे लेवल पे प्रैक्टिकली एक ट्रेनिंग
पाइपलाइन खुद का लिख पाओ और उसको ट्रेन कर पाओ। ये आपका ऑब्जेक्टिव होना चाहिए इस पूरे सेक्शन में। ट्रेनिंग के बाद आता है
फाइन ट्यूनिंग का स्टेज जहां पे आप दो चीजें करते हो। जैसा मैंने बताया किसी एक पर्टिकुलर डोमेन के लिए आप अपने मॉडल को
अडप्ट करते हो तो यहां पे यू हैव टू लर्न टेक्निक्स सच एज सुपरवाइज्ड फाइन ट्यूनिंग डोमेन अप्टेशन पीएफटी उसमें दो वेरिएंट्स
हैं लोरा एंड क्यू लोरा ये दोनों आपको सीखना होता है और उसके बाद आपको देखना होता है कि आपका फाइन ट्यूनिंग में किस
तरह के चैलेंजेस आ सकते हैं। अगेन दिस इज़ वैरी प्रैक्टिकल और ये आपको एक्चुअली करना होता है। यहां पे आप क्या कर सकते हो कि
आप किसी प्री ट्रेड मॉडल को उठा के ला सकते हो हगिंग फेस से और उसके ऊपर अपने लेवल पे लोरा क्यू लोरा अप्लाई करके फाइन
ट्यूनिंग परफॉर्म कर सकते हो। तो ये सब ये एक ऐसी चीज है जो इंडस्ट्री में बहुत पूछा जाता है। इफ यू आर ट्राइंग टू ब्रेक इंटू
दिस पर्टिकुलर रोल इंटरव्यू में इसके अराउंड आपसे बहुत क्वेश्चंस पूछे जाएंगे। अ सेकंड इसी में आता है अलाइनमेंट।
अलाइनमेंट इज़ आल्सो अ फॉर्म ऑफ फाइन ट्यूनिंग जहां पे आप एक रॉ प्रीटन मॉडल को इस तरीके से फाइन ट्यून करते हो कि वो
रियल वर्ल्ड सिचुएशन में ह्यूमन वैल्यूस के साथ अलाइन हो जाए। हार्मफुल कंटेंट ना निकाले। इस तरह की चीजें आप करते हो। तो
अलाइनमेंट की जरूरत क्यों है? आपका प्रेफरेंस डेटा कलेक्शन कैसे होता है? रिवॉर्ड मॉडलिंग क्या होती है? ऊपर जो
आपने रिइंफोर्समेंट लर्निंग पढ़ी थी वो यहीं पे अप्लाई होती है। आरएलएचएफ इज़ अ फेमस एल्गोरिदम। अ डीपीओ इज़ अगेन अ फेमस
एल्गोरिदम। और फिर आपको पढ़ना होता है कि व्हाट आर द डिफरेंट फेलियर मोड्स जो अकर कर सकते हैं व्हेन यू आर डूइंग अलाइनमेंट।
तो ये सब कुछ आपको पढ़ना है फाइन ट्यूनिंग के अंदर। फाइन ट्यूनिंग के बाद अगली चीज़ है इवैल्यूएशन। इवैल्यूएशन से आपको ये पता
चलता है कि जो मॉडल आपने ट्रेन किया है या फिर फाइन ट्यून किया है उसका परफॉर्मेंस कैसा है रियल वर्ल्ड सिचुएशंस में। और
इसके लिए आप दोनों तरह का इवैल्यूएशन करते हो। आप इंट्रेंसिक इवैल्यूएशन करते हो ऑन सर्टेन मैट्रिक्स। और उसके बाद आप कुछ
बेंचमार्क्स के अगेंस्ट पे इवैल्यूएशन करते हो। एलएलएम्स को इवैलुएट करना थोड़ा सा ट्रिकी है बिकॉज़ एलएलएम्स बहुत तरह के
काम कर सकते हैं। तो उनको बहुत तरह की चीजों पे इवैलुएट करना पड़ता है। दैट इज व्हाई बहुत तरह के आपने एलएलएम लीडर
बोर्ड्स भी सुने होंगे। तो देयर आर डिफरेंट-डिफरेंट बेंचमार्क्स जिनके ऊपर आपको अपने एलएलएम को टेस्ट करना होता है।
ग्लू इज वन एमएमएलयू बिग बेंच ह्यूमन इवल जीएसएम 8 के इस तरह के बहुत सारे बेंचमार्क्स हैं। तो उन बेंचमार्क्स के
ऊपर आपको अपने एलएम को इवैल्यूएट करना पड़ता है। टास्क बेस्ड इवैल्यूएशन भी होता है। ह्यूमन इवैल्यूएशन भी होता है। एंड
फाइनली यू डू फेलियर एनालिसिस कि हुआ क्या? इवेंचुअली व्हाट्स द रिजल्ट। ठीक है? तो अगेन समथिंग व्हिच इज़ वेरीेंट। और
इसके बिना आप सीधे अपने मॉडल को आगे नहीं भेज सकते फॉर डिप्लॉयमेंट। इस पूरे पाइपलाइन में जो सबसे आखिरी चीज़ आती है वो
है ऑप्टिमाइजेशन। और ऑप्टिमाइजेशन आप दोनों लेवल पर करते हो। आप एलएलएम्स को ट्रेन के करने के टाइम भी ऑप्टिमाइज करते
हो और इनफेंस के टाइम के लिए भी ऑप्टिमाइज करते हो। सो ट्रेनिंग टाइम में आप इसलिए ऑप्टिमाइज करते हो क्योंकि अगर आप
ऑप्टिमाइज नहीं करोगे तो आपका ट्रेनिंग कॉस्ट बहुत ज्यादा हो सकता है और ट्रेनिंग टाइम भी बहुत ज्यादा लग सकता है। तो देयर
आर सर्टेन टेक्निक्स जो आपको यहां पे पढ़नी है सच एज मिक्स्ड प्रसीजन ट्रेनिंग। अ ग्रेडियंट चेक पॉइंटिंग इज़ नॉट
एग्जैक्टली अ ऑप्टिमाइजेशन टेक्निक बट इट इज़ समथिंग जो आपको हेल्प करता है ट्रेनिंग के प्रोसेस में। अह देन यू डू मेमोरी
ऑप्टिमाइजेशन। यू डू कंप्यूट ऑप्टिमाइजेशन। फिर आप आर्किटेक्चर लेवल पे भी ऑप्टिमाइजेशन कर सकते हो। जैसे मिक्सचर
ऑफ़ एक्सपर्ट्स बोल के एक टेक्निक है जिसकी हेल्प से आप एक बार में अपने एलएलएम के सारे पैरामीटर्स को एक्टिवेट नहीं करते।
तो उसकी हेल्प से आप क्या कर सकते हो? थोड़े लाइट मॉडल्स बना सकते हो। इनफेंस के टाइम के लिए भी ऑप्टिमाइजेशन टेक्निक्स
हैं सच एज क्वांटाइजेशन जहां पे आप बेसिकली अपने जो पैरामीटर वैल्यूज़ हैं उनको आप कम प्रसीजन में मेमोरी में स्टोर
करते हो। तो जिससे आपका सेम मॉडल थोड़े कम मेमोरी में रन हो सकता है। उसके आप उसके ऊपर आप इनफेंस चला सकते हो। अह केवी कैश
अह स्पेकुलेटिव डिकोडिंग दीज़ आर ऑल वेरीेंट एलएलएम ऑप्टिमाइजेशन टेक्निक्स एंड अगेन आई वुड से दिस दिस इज़ अगेन
समथिंग जस्ट लाइक फाइन ट्यूनिंग व्हिच इज़ आस्क्ड अ लॉट ड्यूरिंग इंटरव्यूज़। तो ये सब कुछ आपको आना चाहिए। इनके बारे में
आपको डिटेल में नॉलेज होनी चाहिए। तो ये हो गया आपका एलएलएम इंजीनियरिंग का सेक्शन जहां पे आपने एक एलएलएम को स्क्रैच से
ट्रेन किया, फाइन ट्यून किया, इवैल्यूएट किया और फाइनली उसको ऑप्टिमाइज किया फॉर परफॉर्मेंस। अब मूव करते हैं इस
स्पेशलाइजेशन के थर्ड सेक्शन की तरफ जहां पर हम हमारे ट्रेंड या फिर फाइन ट्यूंड एलएलएम को डिप्लॉय करेंगे। तो यहां पे
सबसे पहली चीज जो होती है वो होती है मॉडल स्टोरेज। जो भी आपने मॉडल ट्रेन किया है उसको आप कहीं पे स्टोर करोगे। दिस इज़ द
फर्स्ट स्टेप। तो यू हैव टू लर्न अबाउट मॉडल चेक पॉइंट्स। फिर व्हाट आर द डिफरेंट फॉर्मेट्स इन व्हिच यू गेट द मॉडल? मॉडल
की वर्जनिंग कैसे करनी है? इफ इन केस आप मल्टीपल ट्रेनिंग्स रन कर रहे हो। मॉडल को कहां पे आप स्टोर कर सकते हो फाइनली? और
मॉडल को डिस्ट्रीब्यूट कैसे करना है? इसमें अब ये डिपेंड करता है कि आप प्रोपराइटरी रखना चाहते हो अपने मॉडल को
या फिर आप उसको ओपन सोर्स करना चाहते हो। तो देयर आर वेरियस वेरियस ऑप्शंस। तो ये सारी चीजें आपको यहां पे सबसे पहले पढ़नी
है। उसके बाद आता है सबसेेंट स्टेप इनफरेंस के लिए व्हिच इज मॉडल सर्विंग। तो मॉडल सर्विंग का सिंपल मतलब है कि आप मॉडल
को अब लोड कर रहे हो और उसको यूज करके यूजर इनफेंस या फिर प्रेडिक्शन करवा सकता है। तो यहां पे आपको सबसे पहले पढ़ना है
अबाउट इनफेंस आर्किटेक्चर ऑनलाइन इनफेंस या फिर बैच इनफेंस हाउ डू यू लोड मॉडल्स फॉर इनफेंस जीpयू में कैसे लोड किया जाता
है? मॉडल को कैसे वार्म अप किया जाता है? लेजी लोडिंग का कांसेप्ट जब सामने की रिक्वेस्ट आ रही होती है उसको आप कैसे
हैंडल करते हो? हाउ डू यू हैंडल द परफॉर्मेंस? उसको कैसे ऑप्टिमाइज किया जाता है? एंड फाइनली यहां पे आपको कुछ
इनफेंस फ्रेमवर्क्स के बारे में पढ़ना है। सच एज वी एलएलएम जो एक्सक्टली यही काम आपको करके देते हैं। ठीक है? फिर आपका
एनvीडिया का ट्राइट ऑन इनफेंस सर्वर भी है। टेंसर आर्ट भी है। दीज़ आर लाइक सम फेमस एलएलएम इनफेंस फ्रेमवर्क्स। बट इसमें
से सबसे ज्यादा जो यूज़ होता है इंडस्ट्री में वो है आपका वीएलएलएम जिसके बारे में आप आई गेस पढ़ना चाहिए आपको। मॉडल सर्विंग
के बाद नेक्स्ट चीज होती है एपीआई डेवलपमेंट। सो आपने मॉडल को लोड कर लिया है जीपीयू में और इट इज़ रेडी फॉर
इनफोरेंस। अब आप क्या करोगे? यूजर का जो रिक्वेस्ट है उसको फेच करके लाओगे और आप अपने मॉडल को एक एपीआई में रैप अप कर
दोगे। तो यूजर का रिक्वेस्ट एपीआई हैंडल करेगा। एपीआई उस रिक्वेस्ट को वीएलएम जैसी सर्विस के पास भेजेगा। वीएलएम जैसी सर्विस
आपकी जीपीयू के अंदर रखे हुए मॉडल को हैंडल कर रही है। तो वहां से प्रेडिक्शन वापस आएगा और एपीआई के थ्रू ही यूजर के
पास वापस जाएगा। तो ये पूरा का पूरा फ्लो आप डिजाइन करते हो। तो यहां पे यू लर्न अबाउट हाउ टू डिजाइन इनफेंस एपीआईस। व्हाट
आर द वेरियस एपीआई फ्रेमवर्क्स दैट आर अवेलेबल। फास्ट एपीआई हुआ, जीआरपीसी हुआ, स्ट्रीमिंग कैसे इंप्लीमेंट करना है,
ऑथेंटिकेशन एंड रेट लिमिटिंग कैसे इंप्लीमेंट करना है, एपीआई को इंटीग्रेट कैसे करना है? ये सब कुछ यहां पे पढ़ना है।
हालांकि ये थोड़ा सॉफ्टवेयर साइड का काम ज्यादा है। इफ यू आर अ रिसर्च इंजीनियर आपसे इतना ज्यादा ये एक्सपेक्ट नहीं किया
जाता। बट अगेन सिंस यू आर ट्राइंग टू ब्रेक इंटू द इंडस्ट्री। आई वुड रिकमेंड आप ये पूरा फ्लो एक बार सीखो ताकि आपको एक
ऊपर हो ओवरव्यू एकदम हाई लेवल ओवरव्यू हो जाए कि पूरी चीज एंड टू एंड कैसे काम करती है। एपीआई को डेवलप करने के बाद आता है
आपका डिप्लॉयमेंट। आप दोनों चीजों को डिप्लॉय करते हो। आपने जो वीएलएलएम वाली सर्विस में मॉडल को रैप कर रखा है इनसाइड
अ जीpu कंटेनर उसको भी आप ऑनलाइन लेके आते हो और आप अपनी एपीआई सर्विस जो आपने लिखी है अलग से फास्ट एपीआई में उसको भी आप
ऑनलाइन लेके आते हो तो यहां पे यू हैव टू लर्न अबाउट कांसेप्ट्स सच एज कंटेनराइजेशन ऑर्केस्ट्रेशन के लिए यू कैन यूज़
सर्विसेस सच एज कूपर्निटीज क्लाउड डेप्लॉयमेंट के लिए आपके पास वही Amazon Google और अजोर का ऑप्शन है और जीपीयू
इंफ्रास्ट्रक्चर के बारे में आपको थोड़ा पढ़ना पड़ता है और इफ यू आर डेप्लइंग एच एआई तो उसके लिए फिर आपको एच एंड लोकल
डिप्लॉयमेंट के बारे में पढ़ना पड़ता है जहां पे आपका जो मॉडल है वो सर्वर पे रन ना करके यूजर के डिवाइस पे रन कर रहा होता
है। तो दिस इज़ अ कंप्लीटली सेपरेट पैरेलल ब्रांच जो अगेन मैं आपको एकदम फर्स्ट टाइम में पढ़ने को सजेस्ट नहीं करूंगा। ये आपको
तब टारगेट करना चाहिए जब आप ऑलरेडी जो नॉर्मल वाला फ्लो है वो सीख चुके हो। एंड यू आर टारगेटिंग सच कंपनीज़ जो एचआई में
काम कर रही हैं। डिप्लॉयमेंट के बाद आता है आपका पोस्ट डिप्लॉयमेंट फेस बिकॉज़ आपका जो एलएलएम है वो अब ऑनलाइन आ चुका है।
यूज़र्स उससे इंटरेक्ट कर रहे हैं थ्रू अ सॉफ्टवेयर और अ एपीआई। अब उसको रिलायबली रन करना एट अ स्केल ऑफ मिलियंस वो एक बहुत
बड़ा चैलेंज होता है। तो यहां पे फिर वही मॉनिटरिंग एंड ऑब्जरवेबिलिटी के आपके कांसेप्ट्स आते हैं। यू ट्राई टू मॉनिटर
एवरीथिंग अबाउट अराउंड योर एलएलएम। उसका लेटेंसी कितना है? थ्रूपट कितना है? टोकंस आउटपुट कितना है? देन यू डू लॉकिंग एंड
एनालिटिक्स। मॉडल का परफरेंस मॉनिटरिंग भी आप करते हो। बेसिकली यहां पे ड्रिफ्ट डिटेक्शन होता है। क्वालिटी डिग्रेडेशन
होता है। कॉस्ट मैनेजमेंट बहुत ज्यादा मैटर करता है। एंड लास्टली हाउ डू यू अपडेट योर मॉडल? लेट्स से आपका नया वर्जन
आ रहा है जीपीटी 4.1 से GPT 4.2 आ रहा है तो वो पूरा का पूरा आप कैसे अपडेट करोगे वो पूरी चीज का मैनेजमेंट आप यहां पे करते
हो। तो दिस इज़ द एंटायर थिंग और ये जो पूरी चीज है ये बहुत क्लोजली रिलेटेड है विथ एमएलप्स फॉर डीप लर्निंग बिकॉज़
एसेंशियली यू आर डूइंग द सेम थिंग। तो अगर आप एमएलप्स फॉर डीएल पढ़ के आ रहे हो तो यहां पे डिप्लॉयमेंट वाला फज़ आपको काइंड
ऑफ़ इजी लगेगा। एक बार अगर आपने यह पूरा का पूरा फ्लो देख लिया फॉर एन एलएलएम तो आई वुड रिकमेंड आपको फिर क्या करना चाहिए कि
एक बार इसी फ्लो को दोबारा से करना चाहिए बट इस बार फॉर एलएमएम्स एलएमएम्स होते हैं लार्ज मल्टीमॉडल मॉडल्स ऐसे अ मॉडल्स जो
आपके मल्टीपल डोमेनस में ऑपरेट कर सकते हैं मतलब दे आर गुड विद टेक्स्ट डेटा दे आर आल्सो गुड विद इमेजेस और ऑडियो और
वीडियो ठीक है तो उनका भी फ्लो सिमिलर रहता है द ओनली डिफरेंस इज़ कि एलएमएम्स में क्या होता होता है कि आपका एक एनकोडर
और टाइड अप होता है आपके डिकोडर के साथ। तो एनकोडर का काम होता है उस दूसरे मोलिटी के डेटा को प्रोसेस करना एंड एनकोड करना
और उसका जो इंफॉर्मेशनेशन है उसको डिकोडर को पास करना। तो दैट इज द मेन डिफरेंस। तो ये भी आपको सीखना चाहिए। इसके बारे में
मैंने यहां पे काफी कुछ लिख दिया है। आप एक बार गो थ्रू करना। बट एक बार अगर आप नॉर्मल फ्लो पढ़ लो इस पूरी चीज का। उसके
बाद एलएलएम्स का तो उसके बाद आपको एलएमएम्स में भी मूव करना चाहिए। बिकॉज़ मल्टीमोडल मॉडल्स के ऊपर भी काफी कुछ चल
रहा है। अभी काफी काम चल रहा है। काफी सारे स्टार्टअप्स इस डोमेन में आ रहे हैं। एंड दैट इज व्हाई इट इज़ पॉसिबल कि जिस
कंपनी के लिए आप इंटरव्यू दे रहे हो दे माइट बी इंटरेस्टेड इन एलएमएम्स। तो यू शुड आल्सो स्टडी अबाउट एलएलएम्स एज वेल।
व्हिच इज़ वैरी क्लोजली रिलेटेड टू एलएलएम्स। बट अगेन थोड़ा सा बस आपका डिफरेंस आ जाता है बिकॉज़ ऑफ़ दैट एडिशनल
एनकोडर लेयर। विथ दिस वी विल रैप द थर्ड स्पेशलाइज़ेशन ऑफ़ आवर एआई रोड मैप। सो दैट कंक्लूड्स द एंटायर एआई रोड मैप फॉर 2026।
मैंने तीनों स्पेशलाइजेशनंस आपको बता दिए अलोंग वि द फाउंडेशन वाला पूरा पाथ एंड मुझे अब पता भी नहीं है ये कितना बड़ा
वीडियो हो चुका है दो घंटे का तीन घंटे का बट मैंने अपनी साइड से बहुत ऑनेस्ट कोशिश की है इतना नॉलेज मुझे है इस फील्ड में
मैं उसके बेसिस पे आपको एकदम ऑनेस्ट और सही रोड मैप बता पाऊं अब इस पूरी चीज में एक गड़बड़ ये हो सकती है जो मैं देखता भी
हूं कि कई बार जो रिक्रूटर्स होते हैं उनका जो जीडी होता है जॉब डिस्क्रिप्शन उसमें वो लोग इन तीनों स्पेशलाइजेशंस को
मर्ज कर देते हैं। मतलब कभी-कभी ऐसे जॉब्स आपको देखने को मिलेंगे जहां पे सेम बंदे से एक्सपेक्ट किया जा रहा है कि उसको एमएल
इंजीनियरिंग ट्रैक की चीजें आती होगी सच ऐप्स। फिर उसको खुद के एलएलएम्स ट्रेन करने भी आते होंगे और उसको एआई
इंजीनियरिंग का काम भी आता होगा। तो ऐसे जॉब डिस्क्रिप्शनंस आपको मिल सकते हैं। बट मुझे ऐसा लगता है कि धीरे-धीरे अभी सिंस
सब कुछ नया है तो बहुत लोग अभी कंफ्यूजन में जी रहे हैं इंक्लूडिंग द कंपनीज़। बट ओवर टाइम अगले दो से तीन सालों में बहुत
क्लियर करियर पार्ट्स बन जाएंगे और फ्यूचर में ये रोड मैप और अच्छे तरीके से एज करेगा। ठीक है? अब एक चीज की और बात करते
हैं। दैट इज रिसोर्सेज। अभी तक मैंने आपको इस रोड मैप में सिर्फ पाथ बताया है कि आपको किस पाथ से गुजरना है, क्या चीजें
पढ़नी है। मैंने आपके साथ ये शेयर नहीं किया है कि आपको क्या चीजें कहां से पढ़नी है। तो रिसोर्सेज की भी बात कर लेते हैं।
मैंने क्या किया है अभी ऑलरेडी इस रोड मैप में जहां-जहां पे भी हमारे खुद के वीडियोस अवेलेबल हैं कैमपस x के उनको मैंने
ऑर्गेनाइज़ कर दिया है। फॉर एग्जांपल अगर आप पाइथन वाले सेक्शन में जाओ तो वहां पे बॉटम में आपको ये रिसोर्सेज दिखने लग
जाएंगे। जैसे कि CPS X का Python का प्लेलिस्ट है। सिमिलरली अगर आप सीक्वल में जाओगे तो बॉटम में आपको
CPS X का सीक्वल प्लेलिस्ट दिखने लग जाएगा। सेम फॉर मैथमेटिक्स सॉफ्टवेयर एसेंशियल्स। मैंने हर ब्लॉग के लिए अगर
CPS X के वीडियोस अवेलेबल हैं तो वो मैंने अटैच कर दिए हैं। बहुत सारे लोग मुझसे पूछते रहते हैं कि सर आपके चैनल पे बहुत
सारे वीडियोस हैं। बट हमें समझ नहीं आता कि कौन से वीडियो को कब देखें। तो इन अ वे मैंने इस रोड मैप के थ्रू अपने चैनल के
वीडियोस को भी प्रॉपर्ली ऑर्गेनाइज कर दिया है। बट देयर आर सर्टेन सेक्शंस जहां पे आपको हमारा कंटेंट देखने को नहीं
मिलेगा। बिकॉज़ वो टॉपिक्स हमने भी अभी तक टच नहीं किए हैं। फॉर एग्जांपल अगर आप ये रिसर्च इंजीनियर वाले ट्रैक में जाओ तो
यहां पे हमने अभी तक काम नहीं किया है। ठीक है? तो एक रीजन यह भी था इस रोड मैप को बनाने का कि हम एज अ कंपनी कैमपस एक्स
एज अ कंपनी हम यह समझना चाहते थे कि हमें और कितना काम करना बाकी है और क्या काम करना बाकी है। कौन सी चीजें हैं जो हमें
अभी टच करनी है। ये ऊपर फाउंडेशन वाली चीजें हमने ऑलरेडी कर ली हैं। एआई इंजीनियरिंग वाले में हम ऑलरेडी काफी काम
कर रहे हैं पिछले एक साल से। एमएल ऑप्स पे हमारा एक बहुत अच्छा पेड कोर्स है। एमएल सिस्टम डिजाइन के ऊपर काम करना बाकी है।
सिमिलरली रिसर्च इंजीनियर वाले ट्रैक के ऊपर काम करना बाकी है। तो ये रोड मैप नॉट ओनली हमने बिगिनर्स की हेल्प करने के लिए
बनाया बट एज अ कंपनी हमारी खुद की हेल्प करने के लिए भी बनाया है। दिस विल गिव अस डायरेक्शन कि अगले एक साल में डेढ़ साल
में हमें क्या-क्या कंटेंट बनाना है। ठीक है? तो यहां पे आपसे एक रिक्वेस्ट है मेरी कि फिलहाल यहां पे हमने जो भी रिसोर्सेज
ऐड किए हैं वो सिर्फ कैमपस एक्स के रिसोर्सेज हैं। बट वी नो दिस कि और भी बहुत सारे अच्छे रिसोर्सेज इंटरनेट पे
अवेलेबल हैं। तो कमेंट्स में आप लोग जब भी आपको लगे कि किसी एक पर्टिकुलर चीज का आपको बहुत तगड़ा रिसोर्स पता है आप उसको
कमेंट्स में डालना। हमारी टीम कमेंट्स पढ़ेगी और उस रिसोर्स को रिव्यू करेगी। अगर हमें लगेगा कि वो रिसोर्स ऐड करने
लायक है इस रोड मैप में तो हम उसे ऐड भी कर देंगे। तो इन अ वे मैं आज इस रोड मैप को यहीं पे छोड़ना नहीं चाहता हूं। मैं
चाहता हूं कि ये एक लिविंग बीइंग की तरह ग्रो करे और अगले एक साल में ये अभी से भी ज्यादा पावरफुल और वैल्यू क्रिएट करने
वाला रोड मैप बन जाए। दैट इज माय गोल विथ दिस रोड मैप। ठीक है? तो आई होप आपको अभी तक जो भी मैंने डिस्कस किया वो समझ में आ
गया। एक लास्ट चीज आपके साथ और डिस्कस करना चाहूंगा कि मैंने इस रोड मैप को इस तरीके से प्लान किया था कि ये रोड मैप रोड
मैप ऑफ रोड मैप्स बने। मेरा कहने का ये मतलब है कि ये खुद में जो रोड मैप है ये पूरा का पूरा एआई कवर करता है। बट बहुत
माइन्यूट लेवल पर घुस के हर चीज यहां पे बताई हुई नहीं है। फॉर एग्जांपल फाइन ट्यूनिंग हमने अभी डिस्कस किया। तो फाइन
ट्यूनिंग में मैंने आपको एक हाई लेवल ओवरव्यू दे दिया कि आपको ये टॉपिक्स पढ़ने चाहिए। बट मैंने हर टॉपिक के बारे में
आपको नहीं बताया। कि एक्जेक्टली किस ऑर्डर में कौन से टॉपिक्स होने चाहिए। तो मैंने क्या सोचा
है कि मैं अब क्या करूंगा? मैं इसी रोड मैप से और नए रोड मैप्स क्रिएट करूंगा। फॉर एग्जांपल, व्हाट आई कैन डु इज़ कि मैं
Python का एक और रोड मैप बना सकता हूं। अ डिटेल्ड रोड मैप फॉर Python और उस Python वाले रोड मैप को मैं इस Python बटन के साथ
क्लिक कर दूंगा। तो कोई यहां पे आएगा तो उसको ये समझ में आएगा कि उसको पाइथन शुरू में पढ़ना है। बट Python के अंदर उसको
एक्जेक्टली क्या-क्या पढ़ना है ये जानने के लिए वो इस बटन पे क्लिक करेगा और रीडायरेक्ट हो जाएगा टू द पाइथन रोड मैप।
सिमिलरली आई कैन मेक अ रोड मैप फॉर सीक्वल। दैट इज़ व्हाई मैंने ये ब्लैक कलर के बटंस बनाए हैं अपने लिए। इसका ये मतलब
है कि फ्यूचर में दीज़ विल बी रिप्लेस्ड बाय देयर ओन रोड मैप्स। तो आप मुझे बताना ये आइडिया आपको कैसा लग रहा है। शुड आई डू
दिस ऑर नॉट। अ और सेम आई विल डू विथ दिस थिंग्स। जैसे एआई इंजीनियरिंग का आई विल क्रिएट अ सेपरेट रोड मैप। सिमिलरली
एमलॉप्स का आई विल क्रिएट अ सेपरेट रोड मैप। तो ये कुछ 10-12 रोड मैप्स और बनाने हैं एंड इट विल टेक सम टाइम फ्रॉम माय
एंड। बट अगले छ महीनों में ये जो रोड मैप ऑफ रोड मैप है ये कंप्लीटली रेडी हो जाएगा। और ये खुद में एक इकोसिस्टम एक
करिकुलम एक सिलेबस की तरह काम करेगा हर उस बंदे के लिए जो एआई में अपना करियर बनाना चाहता है किसी भी जॉब प्रोफाइल में। ठीक
है? तो या दैट इज माय प्लान। दैट इज द विज़न विथ दिस रोड मैप। बाकी अपनी साइड से मैं यही बोल सकता हूं कि काफी मेहनत लगी
है इस रोड मैप को बनाने में, डेवलप करने में एंड फाइनली वीडियो को शूट करने में भी एंड आई एम प्रीटी श्योर एडिट करने में भी
बहुत टाइम लगेगा। तो अगर आपको ये वीडियो पसंद आया आपको ये एफर्ट पसंद आया आप प्लीज इसको हर उस बंदे के साथ शेयर करो जो एi
में एंटर करना चाहता है। एआई के लिए प्रिपरेशन कर रहा है और आप प्लीज इस वीडियो को लाइक करो और अगर आपने इस चैनल
को सब्सक्राइब नहीं किया है प्लीज डू सब्सक्राइब बिकॉज़ इस रोड मैप के अराउंड आपको और बहुत सारा कंटेंट फ्यूचर में
देखने को मिलेगा। विथ दैट आई विल क्लोज द वीडियो। थैंक यू। बाय। मिलते है नेक्स्ट वीडियो में।
इस रोडमैप में एआई सीखने के लिए पायथन (Python) को प्रमुख प्रोग्रामिंग भाषा के रूप में और SQL को डेटाबेस के रूप में सीखने पर जोर दिया गया है। पायथन को एआई की मुख्य भाषा बताया गया है, जबकि SQL इसलिए जरूरी है क्योंकि कंपनियां अपना डेटा SQL डेटाबेस में रखती हैं, और एआई मॉडल को प्रशिक्षित करने के लिए उस डेटा तक पहुंचना आवश्यक है।
गणित इसलिए जरूरी है क्योंकि यह एआई मॉडल को समझने और उसे ऑप्टिमाइज़ (बेहतर) करने में मदद करता है। वीडियो में सलाह दी गई है कि गणित को एआई के संदर्भ में पढ़ना चाहिए, अलग-अलग विषय के रूप में नहीं, ताकि आपको पता चले कि लिनियर अलजेब्रा और कैलकुलस के कॉन्सेप्ट मॉडल ट्रेनिंग में कैसे काम आते हैं।
एलएलएम के जमाने में भी, कंपनियों को हर दिन नैरो टास्क (जैसे स्पैम डिटेक्शन, डिलीवरी टाइम प्रेडिक्शन) को हल करने की जरूरत होती है, जिनके लिए एमएल ही सबसे कारगर टूल है। एमएल सीखने से आपको समस्याओं को एमएल समस्या में बदलने, डेटा तैयार करने और मॉडल को मूल्यांकन करने का तरीका समझ आता है, जो एआई के किसी भी ट्रैक के लिए एक मजबूत नींव है।
तीन स्पेशलाइज़ेशन ट्रैक हैं: एमएल इंजीनियरिंग – जहां विशिष्ट समस्याओं के समाधान के लिए मॉडल बनाए जाते हैं; एलएलएम इंजीनियरिंग – जहां बड़े लैंग्वेज मॉडल को बनाया और ट्रेन किया जाता है; और एआई इंजीनियरिंग – जहां पहले से बने एलएलएम का उपयोग करके इंटेलिजेंट सॉफ्टवेयर बनाया जाता है। एमएल इंजीनियरिंग में मॉडल डिप्लॉयमेंट और एमएलऑप्स पर, एलएलएम इंजीनियरिंग में ट्रांसफॉर्मर आर्किटेक्चर और फाइन-ट्यूनिंग पर, जबकि एआई इंजीनियरिंग में प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग और एआई एजेंट बनाने पर फोकस होता है।
वीडियो में सलाह दी गई है कि पहले पायथन और SQL बिना एआई टूल्स के सीखें, ताकि आपकी बुनियाद मजबूत हो। इसके बाद, प्रोडक्टिविटी बढ़ाने के लिए Cursor, Claude Code या Codex जैसे टूल्स का इस्तेमाल करना फायदेमंद होगा, लेकिन शुरुआत में इन पर निर्भर नहीं रहना चाहिए।
वीडियो में एक क्रिकेट फैन की कहानी के जरिए समझाया गया है कि स्पष्टता और फोकस ही सफलता की कुंजी है। एआई सीखने के लिए जैक ऑफ ऑल ट्रेड्स नहीं, बल्कि मास्टर ऑफ वन बनना जरूरी है, यानी एक ही क्षेत्र (या तीन स्पेशलाइज़ेशन में से कोई एक) पर गहराई से ध्यान देना चाहिए, न कि हर चीज को थोड़ा-थोड़ा सीखने की कोशिश करनी चाहिए।
सॉफ्टवेयर एसेंशियल्स (जैसे Git, APIs) इसलिए जरूरी हैं क्योंकि एआई डेवलपमेंट सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट से जुड़ा है, और वर्जन कंट्रोल व एपीआई को समझना आवश्यक है। क्लाउड फंडामेंटल्स इसलिए जोड़े गए हैं क्योंकि अपने मॉडल को डिप्लॉय करने के लिए क्लाउड की बुनियादी समझ जरूरी है, हालांकि यह पूरी तरह ऑप्शनल है और इसे चैटजीपीटी से सीखा जा सकता है।
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