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आज की वीडियो में मैं आप लोगों को
स्क्रिप्टिंग का एक ऐसा फॉर्मेट देने वाला
हूं जिसे फॉलो करके आप भी कुछ इस तरह के
व्यूज गेन कर सकते हो। डजंट मैटर आपने कभी
स्क्रिप्ट लिखी है या नहीं? लेकिन वीडियो
के एंड तक आपको स्क्रिप्ट राइटिंग के
प्रोसेस से लेके रिटेंशन ग्राफ को बढ़ाने
तक के सभी सीक्रेट्स पता होंगे। इसके लिए
आपको बस यह फोर्स टाइप फ्रेमवर्क को फॉलो
करना है। लेकिन इन फोर्स टाइप से भी पहले
मैं आप लोगों को स्क्रिप्ट राइटिंग का एक
ऐसा सीक्रेट शेयर करना चाहता हूं जो कि
बड़े क्रिएटर्स कभी नहीं करते हैं।
आप सभी को सिखाया गया है कि हुक स्क्रिप्ट
राइटिंग का पहला पार्ट होता है या रिसर्च
स्क्रिप्ट राइटिंग का पहला पार्ट होता है।
बट यह गलत नॉलेज है। क्योंकि हर एक
प्रोफेशनल स्क्रिप्ट राइटर इस सबसे भी
पहले कुछ और करता है। वो है ह्यूमन
साइकोलॉजी को समझना। YouTube पे कोई भी
आते ही सबसे पहले किसी की स्क्रिप्ट नहीं
सुनता है। वह सबसे पहली चीज जो करता है वो
है एक पैकेजिंग पे क्लिक करना और उसके बाद
उसका ब्रेन डिसाइड करता है कि उसने जो
पैकेजिंग पे क्लिक करा है जो उसे दिख रहा
है वो वर्दी है उसके टाइम के या नहीं। अगर
नहीं तो वीडियो को स्क्रॉल कर दिया जाता
है। इसलिए हर एक प्रोफेशनल स्क्रिप्ट
राइटर अपनी वीडियो की स्क्रिप्ट को
पैकेजिंग को ध्यान में रख के ही स्टार्ट
करता है। जबकि आप इसका टोटली अपोजिट करते
हो और फिर सोचते हो कि व्यूज क्यों नहीं आ
रहे हैं? स्क्रिप्ट तो मैंने अच्छी लिखी
थी। प्रॉब्लम स्क्रिप्ट में नहीं है बल्कि
यूजर साइकोलॉजी में है। एक YouTube वीडियो
की पैकेजिंग तीन चीजों से बनती है। सबसे
पहला होता है आईडिया यानी कि वीडियो किस
टॉपिक पे होने वाला है। अगर आईडिया ही
अच्छा नहीं है तो आप दुनिया का कोई भी
फ्रेमवर्क फॉलो कर लो स्क्रिप्ट राइटिंग
के लिए वीडियो नहीं चलेगी। दूसरा है
टाइटल। ये वो चीज है जो कि ऑडियंस को
वीडियो से क्या एक्सपेक्ट करना है यह
बताता है। अगर आपके टाइटल में कहीं भी बात
वीडियो के अंदर नहीं मिलती है तो अगेन
आपकी वीडियो फ्लॉप ही होगी। तीसरा है
थंबनेल। थंबनेल एक विजुअल एक्सपेक्टेशन
सेट करता है कि वीडियो के अंदर क्या
दिखेगा। एंड अगेन वीडियो की रियलिटी अगर
थंबनेल से अलग हुई तो ऑडियंस की
एक्सपेक्टेशन टूट जाएगी एंड आपकी वीडियो
फ्लॉप हो जाएगी। अगर आपकी ये तीन चीजें
फिगर आउट नहीं है तो स्क्रिप्ट लिखना शुरू
मत करना क्योंकि भले ही आप मेरे पूरे
फ्रेमवर्क को फॉलो करके किलर स्क्रिप्ट
लिख भी लोगे आपकी पैकेजिंग उस स्क्रिप्ट
को ट्रैश बना देगी। लेकिन इस साइकोलॉजी को
स्क्रिप्ट्स के अंदर कैसे अप्लाई करें?
इसको समझने के लिए आपको फ्रेमवर्क के पहले
स्टेप को समझना पड़ेगा। व्हिच इज़
YouTube पे जितनी भी वायरल वीडियोस हैं
उसके इंट्रो में सिर्फ दो ही एलिमेंट
एक्सिस्ट करते हैं। पहला है क्लिक
कन्फर्मेशन एंड दूसरा है क्रियोसिटी गैप।
एक इंट्रो का काम सिर्फ इन दो चीजों को
कवर करना होता है। लेकिन स्टिल 90% यूर्स
यह भी नहीं कर पाते हैं क्योंकि उनको पता
ही नहीं है कि इसका सही मेथड क्या है।
क्लिक कन्फर्मेशन का सीधा सा मतलब है कि
ऑडियंस को अशोरिटी देना कि जिस चीज के लिए
उन्होंने वीडियो पे क्लिक किया था वीडियो
के अंदर उनको वही मिलने वाला है। अब यह
चीज आप दो तरीके से कर सकते हो। पहला है
बोल के दूसरा है शो करके। एग्जांपल के लिए
आप मिसिस की ये दो वीडियोस देखो।
बेचारे लायन को ट्रीट नहीं किया गया तो यह
मर जाएगा। और आज ये हमारे हजारों जानवरों
में से पहला है जिसे हम बचाएंगे। देखते
हैं कैसे।
हम अब इस सुनसान आइलैंड पर फंस चुके हैं
जो कि समंदर के बीचोंबीच है और हम अगले
सात दिनों तक यहीं पर फंसे रहेंगे। और इन
दोनों ही वीडियोस के अंदर मिस्टर बीस्ट ने
विद इन थ्री टू सिक्स सेकंड्स आपको एश्योर
कर दिया कि तुमने जो वीडियो की पैकेजिंग
में देखा था वीडियो के अंदर भी वही चीज
होने वाली है विजुअली भी और बोल के भी एंड
यही सेम ट्रिक मैंने भी इस वीडियो में यूज
की है जो कि तुम देख रहे हो। आज की वीडियो
में मैं आप लोगों को स्क्रिप्टिंग का एक
ऐसा फॉर्मेट देने वाला हूं जिसे फॉलो करके
आप भी कुछ इस तरह के व्यूज गेन कर सकते
हो। इंसान का ब्रेन पेन रिवॉर्ड के
कांसेप्ट पे चलता है। अगर इंसान ने मेहनत
करी है तो उसके बदले में उसे रिवॉर्ड
चाहिए। YouTube पे आते ही यूजर को नौ
थंबनेल्स दिखते हैं और अगर उसने आपकी
वीडियो पे क्लिक करने की मेहनत करी है तो
उसका ब्रेन एक रिवॉर्ड एक्सपेक्ट कर रहा
है जो कि आपको विद इन थ्री टू सिक्स
सेकंड्स देना होता है। यही रिवॉर्ड क्लिक
कंफर्मेशन है। यूजर को पता नहीं चलता है
लेकिन इसकी वजह से वो आपकी वीडियो पे रुक
जाता है। लेकिन वीडियो पे रुकना और वीडियो
को पूरा देखना दो अलग चीजें हैं। और इसी
वजह से आपको इंट्रो में एक और चीज को कवर
करना होता है व्हिच इज क्यूरोसिटी गैप।
क्यूरोसिटी गैप का सीधा सा मतलब है गर्म
करके ठंडा छोड़ देना। यानी कि जो भी
ऑडियंस उम्मीद कर रही थी उसका एक छोटा सा
टीजर देना। इसको डिटेल में एक्सप्लेन करने
से पहले मैं आपको इसका एग्जांपल दिखाता
हूं मिस्टर बीस्ट की सेम वीडियो से।
हम एक स्नाइपर से जिराफ को वैक्सिननेट
करेंगे इस हेलीकॉप्टर से।
आज हम सारे जिराफ को वैक्सिनेट करके ही
रहेंगे।
लायंस को एक बदहाल ज़ से भी बचाएंगे। चलो
भागो। इससे पहले राइनो आपसी फाइट में खत्म
हो जाए। उन्हें भी रीोकेट करेंगे। इस
राइनो की लाइफ में थोड़े और साल जोड़ देते
हैं। और भी बहुत सारे अनबिलीवेबल
रेस्क्यूस जिसकी शुरुआत करेंगे इस वीडियो
की पैकेजिंग में आपको लायन दिखा था और
टाइटल में 1000 एनिमल को सेव करने की बात
की गई थी और स्टार्टिंग के 3 सेकंड में
आपको क्लिक कन्फर्मेशन भी मिल गया था।
लेकिन उसके बाद मिस्टर बीस्ट ने जिराफ
दिखाए, राइनो दिखाए, डॉग्स दिखाए, सील
दिखाए एंड बाकी काफी सारे एनिमल्स दिखाए।
यह था टीजर जिसने आपके क्यूसिटी गैप को
खोल दिया। इन जानवरों के साथ क्या हुआ
होगा? एजुकेशनल वीडियोस में क्यूरोसिटी
गैप अलग वे में क्रिएट किया जाता है। जैसे
एग्जांपल के लिए वापस से हमारे इसी वीडियो
के इंट्रो में चलते हैं। आप लोगों को 3
सेकंड का क्लिक कन्फर्मेशन देने के बाद
मैंने यह लाइंस बोली थी। डजंट मैटर आपने
कभी स्क्रिप्ट लिखी है या नहीं? लेकिन
वीडियो के एंड तक आपको स्क्रिप्ट राइटिंग
के प्रोसेस से लेके रिटेंशन ग्राफ को
बढ़ाने तक के सभी सीक्रेट्स पता होंगे।
इसके लिए आपको बस यह फोर स्टेप फ्रेमवर्क
को फॉलो करना है। यहां पर मैंने
क्यूरोसिटी गैप जनरेट कर दिया यह बोल के
कि चार स्टेप का एक फ्रेमवर्क है जो कि सब
यूज़ कर सकते हैं। एंड आप इस वीडियो को अभी
तक इसलिए देख रहे हो क्योंकि आपको
फ्रेमवर्क के वो चार पॉइंट्स चाहिए।
क्रियोसिटी गैप का यही काम होता है।
ऑडियंस को एक रीज़न देना लास्ट तक रुके
रहने के लिए। अब क्यूरोसिटी गैप जनरेट
करने के काफी सारे तरीके हैं। पहला है
फोमो। यानी कि ऑडियंस को यह रियलाइज
करवाना कि अगर उन्होंने वीडियो पूरी नहीं
देखी तो वह कुछ मिस कर देंगे। मैं अपनी
मैक्सिमम वीडियोस में इसी का यूज करता
हूं। दूसरा है रिलेटिबिलिटी। ऑडियंस के
सामने एक ऐसी सिचुएशन रख दो जिससे वो
रिलेट कर सके और फिर आगे क्या हुआ जानने
के लिए वो रुके रहे। तीसरा है फियर। कुछ
ऐसी स्टेटमेंट बोलना या कुछ ऐसा शो करना
जो कि ऑडियंस को पर्सनल लॉस का फील करवा
दे। चौथा है क्वेश्चन। क्यूरोसिटी गैप
जनरेट करने का यह सबसे सीधा मेथड है। एक
ऐसा क्वेश्चन पूछ लो जो कि जनता को पता ही
ना हो। पैरेक्ट वीडियोस के अंदर यह बहुत
ही ज्यादा यूज़ किया जाता है। और फिफ्थ है
पैटर्न इंटरप्शन। यानी कि ऑडियंस की जो
नॉर्मल बिलीफ है किसी भी चीज को लेके उसे
टोटली अपोजिट करना। दो ब्राठी अपनी
वीडियोस में यह बहुत ही ज्यादा यूज करता
है। अगर आप अपनी स्क्रिप्ट के इंट्रो में
बस यह दो चीजें कर लेते हो वो भी 30 सेकंड
के अंदर तो ऑडियंस को रियलाइज हो उससे
पहले ही वो आपकी वीडियो में खो चुके
होंगे। लेकिन यह ज्यादा देर तक नहीं
टिकेगा। क्यों? इसका रीज़न आपको स्टेप थ्री
में समझ आएगा। लेकिन उससे पहले चलते हैं
स्टेप टू पे जिसके बिना आप आगे कुछ भी
नहीं लिख सकते।
अ गुड स्क्रिप्ट राइटर इज अ गुड रिसर्चर।
और आपने अच्छी रिसर्च करी है या नहीं यह
सिर्फ एक ही चीज से डिसाइड होता है जो कि
है शॉक वैल्यू। शॉक वैल्यू बेसिकली
डिस्टेंस है बिटवीन योर नॉलेज एंड योर
ऑडियंस नॉलेज। यह डिस्टेंस जितना ज्यादा
होगा, उतना ही ज्यादा आपको ऑडियंस रिटेंशन
मिलेगा। लेकिन द क्वेश्चन इज़ शॉक वैल्यू
को इंक्रीस कैसे करें? इसके सिर्फ तीन ही
तरीके हैं। फर्स्ट इज कंज्यूमिंग। अगर
मुझे किसी ऐसे टॉपिक पे वीडियो बनानी है
जिसके बारे में मेरे पास कोई इंफॉर्मेशन
नहीं है, तो जो पहला स्टेप मुझे अपनी
रिसर्चिंग प्रोसेस में करना होगा, इट वुड
बी कंज्यूमिंग एज मच कंटेंट एज पॉसिबल।
लेकिन कंजमशन का मतलब यह नहीं है कि बस 10
YouTube वीडियोस देख ली। यू हैव टू ट्राई
कि आप सेम टॉपिक पे कितने डिफरेंट
रिसोर्सेज से या सोशल मीडिया प्लेटफार्म
से कितनी वैरायटी ऑफ इंफॉर्मेशन कलेक्ट कर
सकते हो। जब आपकी कंजमशन ज्यादा होगी वो
भी वैरायटी ऑफ रिसोर्सेज से तो आपके पास
वो इंफॉर्मेशन भी होगी जो आर्म ऑडियंस के
पास नहीं है क्योंकि उन्होंने इतनी मेहनत
नहीं की है जो कि ऑटोमेटिकली स्टॉक वैल्यू
को इंक्रीस कर देगा। डॉक्यूमेंट्री
क्रिएटर्स आर्टिकल कंज्यूम करते हैं।
सेल्फ हेल्प वाले क्रिएटर्स बुक को
कंज्यूम करते हैं। मेरे जैसे क्रिएटर्स
वर्कशॉप और कोर्सेज को कंज्यूम करते हैं।
क्योंकि यह सारी चीजें नॉर्मल ऑडियंस नहीं
करती है। सेकंड इज डूइंग। शॉक वैल्यू को
इंक्रीस करने का यह सबसे बेस्ट एंड
इफेक्टिव वे है जो कभी फेल नहीं होता है।
चैलेंज वीडियोस इसी टाइप की रिसर्च करते
हैं क्योंकि किसी भी चैलेंज को करने के
बाद जो इंफॉर्मेशन आप गेन करते हो वो आपके
एक्सपीरियंस से डिराइव होती है। उसका
एक्सेस दुनिया में किसी के पास नहीं है।
यह सारी वीडियो जो आप स्क्रीन पर देख रहे
हो इनमें से किसी में भी कंजशन की जरूरत
नहीं पड़ी। इन सब ने पर्सनल एक्सपीरियंस
से शॉक वैल्यू को इंक्रीस करा है। थर्ड इज
एनालाइजिंग।
यह वो मेथड है जो कि मैंने इस वीडियो में
अप्लाई करा है। इस वीडियो के लिए मुझे
एक्सपेरिमेंट नहीं करना पड़ा बल्कि अपनी
प्रीवियस स्क्रिप्ट्स को और बाकी यूर्स की
वीडियोस को एनालाइज करना पड़ा ताकि मैं वो
इंफॉर्मेशन एक फॉर्मेट में दे सकूं जो
मेरे पास पहले से ही थी। लोगों के पास
इतना टाइम नहीं है कि वो यह चीज करें जो
मैंने करी है। इसलिए मेरी स्क्रिप्ट
ऑटोमेटिकली स्टॉक वैल्यू को इंक्रीस कर
देती है। आपको अपनी रिसर्च बस इन तीन मेथड
में से किसी एक मेथड के साथ करनी है एंड
आप इली वो इंफॉर्मेशन डिलीवर कर पाओगे जो
बाकी लोगों के पास नहीं है। लेकिन सिर्फ
वैल्यूुएबल इनेशन गैदर करके आप वायरल
स्क्रिप्ट नहीं लिख सकते हो। इसके लिए
आपको नेक्स्ट स्टेप को भी सीखना पड़ेगा जो
कि स्क्रिप्ट राइटिंग का मेन पार्ट है।
स्क्रिप्ट का इंट्रो 30 सेकंड का होता है।
आउट्रो भी 30 सेकंड का होता है। लेकिन
बाकी टाइम जो चीज ऑडियंस सुन रही होती है
एंड जहां पे सबसे ज्यादा रिटेंशन ड्रॉप
होता है वो है बॉडी पार्ट। एंड इस पार्ट
में मैक्सिमम यूटर्स गलती करते हैं। इसलिए
इसे ध्यान से समझना। स्क्रिप्ट की बॉडी का
काम होता है व्यूअर्स सेटिस्फेक्शन को
अचीव करना। और इसके लिए आपको तीन चीजों पर
फोकस करना है। सबसे पहला है फ्रेमिंग,
सेकंड है पेसिंग और थर्ड है ट्रांजिशन।
लेट मी एक्सप्लेन। फ्रेमिंग का मतलब है
ओवरऑल वीडियो की स्टोरी एंड प्रेजेंटेशन।
पिछले स्टेप में आपने जो इंफॉर्मेशन
इकट्ठा की है इस स्टेप में आपको वो सारी
इंफॉर्मेशन को इस वे में अरेंज करना है कि
आपकी वीडियो एक कहानी की तरह लगे। जहां पे
हर नेक्स्ट स्टेपेंट है और स्टोरी को आगे
बढ़ा रहा है और यहीं पे 90% यूटर्स गलती
करते हैं जिसकी वजह से उनका रिटेंशन ग्राफ
या तो ऐसा होता है जहां स्टार्टिंग अच्छी
होती है। लेकिन वीडियो में आगे जाते-जाते
ऑडियंस समझ जाती है कि क्रिएटर के पास कुछ
यूनिक नहीं बचा है एंड वो वीडियो को बंद
कर देते हैं या फिर रिटेंशन ग्राफ ऐसा
होता है जहां स्टार्टिंग ही इतनी स्लो
होती है कि ऑडियंस लास्ट में जो अच्छी
इनफेशन बची है उसका वेट ही नहीं करती और
वीडियो इस मोमेंट तक बंद कर देती है। अब
इस प्रॉब्लम से बचने के लिए जो तरीका मैं
इस्तेमाल करता हूं वो है रिटेंशन डांस
जिसका ग्राफ कुछ ऐसा दिखता है जहां
स्टार्टिंग में मैं बेस्ट इनफेशन देता हूं
ताकि ऑडियंस को ट्रस्ट हो सके कि वीडियो
के अंदर कुछ यूनिक है फिर एक नॉर्मल
इंफॉर्मेशन देता हूं जो कि ऑडियंस को पता
होती है एंड देन अगेन एक यूनिक या स्पेशल
इनफेशन देता हूं और यह साइकिल चलती रहती
है एज अ रिजल्ट ऑडियंस कभी डिसाइड ही नहीं
कर पाती है कि वीडियो को कब लीव करना है।
इस मेथड को इवन मैंने इस वीडियो के अंदर
भी यूज़ किया है। वीडियो की स्टार्टिंग
में अगर आपको याद हो तो मैंने सबसे पहला
पॉइंट जो कवर किया था वो इंट्रो नहीं था
बल्कि पैकेजिंग था जो कि टेक्निकली इस
वीडियो के लास्ट में आना चाहिए था। बट
सिंस मुझे स्टार्टिंग में ऑडियंस को कुछ
नया देना था तो मैंने इस पॉइंट की
प्लेसमेंट को चेंज कर दिया। जिसके बाद
मैंने इंट्रो कवर करा जो कि मैक्सिमम
ऑडियंस को पता होता है। एंड देन मैंने
रिसर्च पार्ट को कवर करा जो कि ऑडियंस की
सबसे बड़ी प्रॉब्लम होती है। एंड नाउ मैं
बॉडी पार्ट को कवर कर रहा हूं। एंड नाउ यू
नो दैट नेक्स्ट पॉइंट विल बी अ बैगर। बट
बुलेट फों्ट्स की फ्रेमिंग के बाद भी एक
प्रॉब्लम रह जाती है वो है इंफॉर्मेशन
फ्रेमिंग। यानी कि वीडियो के अंदर जो
वर्ड्स बोलने वाले हैं उनको कैसे फ्रेम
करें। इसके लिए आप स्टोरी टेलिंग मेथड का
यूज कर सकते हो। स्टोरी टेलिंग मेथड में
सबसे पहले कॉन्टेक्स्ट को सेट किया जाता
है। फिर डिटेल दी जाती है एंड देन चैलेंज
को इंट्रोड्यूस करके एक फाइनल क्लाइमेक्स
दिया जाता है। अगर समझ नहीं आया है तो
डोंट वरी। मैं आपको इसी वीडियो के
एग्जांपल से समझाता हूं। इस वीडियो में
इंट्रो के बाद जो हमारा पहला पहरा था वो
कुछ ऐसा था। आप सभी को सिखाया गया है कि
हुक स्क्रिप्ट राइटिंग का पहला पार्ट होता
है या रिसर्च स्क्रिप्ट राइटिंग का पहला
पार्ट होता है। बट यह गलत नॉलेज है
क्योंकि हर एक प्रोफेशनल स्क्रिप्ट राइटर
इस सबसे भी पहले कुछ और करता है। वो है
ह्यूमन साइकोलॉजी को समझना। YouTube पे
कोई भी आते ही सबसे पहले किसी की
स्क्रिप्ट नहीं सुनता है। वो सबसे पहली
चीज जो करता है वो है एक पैकेजिंग पे
क्लिक करना। और उसके बाद उसका ब्रेन
डिसाइड करता है कि उसने जो पैकेजिंग पे
क्लिक करा है जो उसे दिख रहा है वो वर्ती
है उसके टाइम के या नहीं। अगर नहीं तो
वीडियो को स्क्रॉल कर दिया जाता है। इसलिए
हर एक प्रोफेशनल स्क्रिप्ट राइटर अपनी
वीडियो की स्क्रिप्ट को पैकेजिंग को ध्यान
में रख के ही स्टार्ट करता है। जबकि आप
इसका टोटली अपोजिट करते हो और फिर सोचते
हो कि व्यूज क्यों नहीं आ रहे हैं?
स्क्रिप्ट तो मैंने अच्छी लिखी थी।
प्रॉब्लम स्क्रिप्ट में नहीं है बल्कि
यूजर साइकोलॉजी में है। यह था कांटेक्ट
सेटिंग जहां पे मैंने यह बता दिया कि बैक
स्टोरी क्या है एंड आप लोगों के साथ क्या
हो रहा है। फिर मैंने डिटेल दी कि
स्क्रिप्ट राइटर्स कुछ और करते हैं एंड वो
चीज है ह्यूमन साइकोलॉजी को समझना। इस
लाइन की मदद से मैंने चैलेंज को
इंट्रोड्यूस करा जिसके बाद मैंने फाइनल
कंक्लूजन दिया। ठीक इसी वे में मैंने अपनी
वीडियो के कंटेंट का पहला पैराग्राफ लिखा
जिसने आपको इतना एंगेज करा कि आप बाकी की
वीडियो अभी तक देख रहे हो। एंड यही पैटर्न
मैंने लगभग हर एक पैरा में यूज़ किया है।
फ्रेमवर्क ओवरऑल आपकी स्क्रिप्ट को एक
रिदमम देता है। लेकिन जो चीज एक्चुअल में
ऑडियंस को वीडियो में बनाए रखती है वो है
पेसिंग। बेसिंग स्क्रिप्ट के इमोशंस को
कंट्रोल करने का काम करता है। एंड अगर
आपकी स्क्रिप्ट ऑडियंस के इमोशन को अप एंड
डाउन नहीं कर रही है तो आपकी स्क्रिप्ट
डेड है। बट अगेन द क्वेश्चन इज हाउ टू डू
इट? आंसर बहुत ही सिंपल है। यूज़ पैटर्न
इंटरप्शन। अगर स्क्रिप्ट एक ही टोन में
एंड एक ही फ्लो में चलेगी तो ऑडियंस बोर
हो जाएगी। बट अगर स्क्रिप्ट में कुछ ऐसा
एडिट हो जो कि एक्सपेक्ट नहीं किया था तो
पैटर्न इंटरप्ट होगा और ऑडियंस के इमोशन
भी। फॉर एग्जांपल इस वीडियो में जब मैं
क्यूरोसिटी गैप समझा रहा था तो मेरी पहली
लाइन ये थी क्यूरोसिटी गैप। क्यूरोसिटी
गैप का सीधा सा मतलब है गर्म करके ठंडा
छोड़ देना। एक इनेशन इंटेंस स्क्रिप्ट के
अंदर मीन पैटर्न इंटरप्ट हुआ। ऑडियंस का
इंटरेस्ट राइज हुआ एंड रिटेंशन भी बढ़ा।
यही काम आप कांटेक्ट देके भी कर सकते हो।
जैसे इस वीडियो की स्टार्टिंग में मैंने
मिस्टर बीस्ट के कुछ एग्जांपल दिए थे।
टेक्निकली मेरा पॉइंट इस लाइन पे खत्म हो
चुका था। मैं स्ट्रेट फॉरवर्ड नेक्स्ट
पॉइंट पे जा सकता था। बट पैटर्न इंटरप्ट
करना जरूरी था। एंड इवन इस पूरी वीडियो
में मैं बार-बार आपको प्रीवियस पॉइंट्स के
एग्जांपल दे रहा हूं। जस्ट टू इंट्रप्ट द
पैटर्न। अदरवाइज मैं स्ट्रेट फॉरवर्ड आके
आपको पूरा फॉर्मेट समझा सकता था। नाउ यू
नो हाउ टू फ्रेम योर स्क्रिप्ट, हाउ टू
फ्रेम योर पैरा एंड आल्सो हाउ टू कीप
ऑडियंस हुक्ड। बट आप ऑडियंस को 10 मिनट तक
अपनी वीडियो में नहीं रोक सकते अगर आपको
थर्ड पॉइंट नहीं आता है। व्हिच इज
ट्रांजिशन। ह्यूमंस का अटेंशन स्पैन 8
सेकंड का होता है। एंड स्टोरी टेलिंग का
यूज़ करके आप सिर्फ 3 मिनट तक ही इसको
एक्सटेंड कर सकते हो। लेकिन 3 मिनट के बाद
ऑडियंस बोर हो जाती है। एंड उनको दोबारा
से एक रीज़न चाहिए होता है वीडियो को देखते
रहने के लिए। इसलिए हर प्रोफेशनल
स्क्रिप्ट राइटर एक सीक्रेट ट्रिक का यूज
करता है अपनी वीडियो में वि इज सबक्स।
सबक्स पॉइंट के बीच में ट्रांजिशन के लिए
यूज किए जाते हैं। कैसे? इसी वीडियो के
एग्जांपल से समझाता हूं। सब्सक्स एक नया
मोटिव या रीजन देता है व्यूअर को आगे के
पॉइंट तक देखते रहने के लिए। एंड
स्क्रिप्ट जितनी लंबी होगी, उतने ही
ज्यादा सब्सक्स आपको यूज़ करने पड़ेंगे। सब
हुक को क्रिएट करना बहुत ही इजी है। जस्ट
मेक द ऑडियंस रियलाइज़ कि वह जो एक्सपेक्ट
कर रहे थे, वह नहीं होगा। एंड देन गिव देम
रीज़न ऑफ़ व्हाई एंड इज़ली शिफ्ट देम फ्रॉम
पॉइंट वन टू टू। अगर आप अपनी स्क्रिप्ट की
बॉडी में सिर्फ यह तीन चीजें करते हो तो
आपकी ऑडियंस आपकी वीडियो को कभी भी बंद
नहीं कर पाएगी। पर अगर आपने नेक्स्ट स्टेप
को मास्टर नहीं करा तो आपकी ऑडियंस कभी भी
आपकी दूसरी वीडियो नहीं देखेगी।
जहां आउट्रो में 90% यूटर्स लाइक एंड
सब्सक्राइब की रिक्वेस्ट कर रहे होते हैं।
वहीं सही आउट्रो लिखने की वजह से मुझे हर
साल 3 लाख से ज्यादा व्यूज गेन होते हैं।
क्योंकि प्रोफेशनल स्क्रिप्ट राइटर्स
आउट्रो में एक ट्रैप बिछाते हैं। द लूप
ट्रैप कैसे मैं एक्सप्लेन करता हूं।
आउट्रो में आपको अगेन दो चीजें करनी होती
है। सबसे पहला है समराइजिंग द वीडियो एंड
दूसरा है क्रिएटिंग अ नीड। व्यूअर सबसे
पहले जब आपकी वीडियो पे आया था तो वो एक
एक्सपेक्टेशन लेके आया था। लेकिन वीडियो
के बाद आपने व्यूअर के एक्सपेक्टेशन से
ज्यादा वैल्यू व्यूअर को प्रोवाइड कर दी
है जो कि उसके लिए ओवरलोड ऑफ इनफेशन है।
इसलिए आपको वीडियो को समराइज करना है इस
वे में कि व्यूअर सभी की पॉइंट्स को
मेमोराइज करके ही वीडियो को खत्म करें।
फॉर एग्जांपल इस वीडियो को देखने से पहले
आपके पास स्क्रिप्ट राइटिंग की कोई भी
नॉलेज नहीं थी। स्क्रिप्ट राइटिंग वीडियो
पैकेजिंग से शुरू होती है। जिसके बाद हुक
में आपको क्लिक कन्फर्मेशन देके
क्यूरोसिटी गैप क्रिएट करना होता है। एंड
देन टॉपिक के बारे में इस वे में रिसर्च
करना होता है कि शॉक वैल्यू को इंक्रीस कर
सके। जिसके बाद बॉडी में फ्रेमिंग, पेसिंग
एंड ट्रांजिशन को यूज़ करके आपको वीडियो के
आउट्रो में लूप क्रिएट करना होता है। बट
आपको स्टिल यह नहीं पता है कि ऑडियंस से
कैसे अपने थंबनेल पे क्लिक करवाएं ताकि
आपकी अच्छी तरीके से लिखी हुई स्क्रिप्ट
को वो पूरा देखे। तो मेक श्योर टू वॉच दिस
वीडियो। मिलते हैं अगली वीडियो में।
Full transcript without timestamps
आज की वीडियो में मैं आप लोगों को स्क्रिप्टिंग का एक ऐसा फॉर्मेट देने वाला हूं जिसे फॉलो करके आप भी कुछ इस तरह के व्यूज गेन कर सकते हो। डजंट मैटर आपने कभी स्क्रिप्ट लिखी है या नहीं? लेकिन वीडियो के एंड तक आपको स्क्रिप्ट राइटिंग के प्रोसेस से लेके रिटेंशन ग्राफ को बढ़ाने तक के सभी सीक्रेट्स पता होंगे। इसके लिए आपको बस यह फोर्स टाइप फ्रेमवर्क को फॉलो करना है। लेकिन इन फोर्स टाइप से भी पहले मैं आप लोगों को स्क्रिप्ट राइटिंग का एक ऐसा सीक्रेट शेयर करना चाहता हूं जो कि बड़े क्रिएटर्स कभी नहीं करते हैं। आप सभी को सिखाया गया है कि हुक स्क्रिप्ट राइटिंग का पहला पार्ट होता है या रिसर्च स्क्रिप्ट राइटिंग का पहला पार्ट होता है। बट यह गलत नॉलेज है। क्योंकि हर एक प्रोफेशनल स्क्रिप्ट राइटर इस सबसे भी पहले कुछ और करता है। वो है ह्यूमन साइकोलॉजी को समझना। YouTube पे कोई भी आते ही सबसे पहले किसी की स्क्रिप्ट नहीं सुनता है। वह सबसे पहली चीज जो करता है वो है एक पैकेजिंग पे क्लिक करना और उसके बाद उसका ब्रेन डिसाइड करता है कि उसने जो पैकेजिंग पे क्लिक करा है जो उसे दिख रहा है वो वर्दी है उसके टाइम के या नहीं। अगर नहीं तो वीडियो को स्क्रॉल कर दिया जाता है। इसलिए हर एक प्रोफेशनल स्क्रिप्ट राइटर अपनी वीडियो की स्क्रिप्ट को पैकेजिंग को ध्यान में रख के ही स्टार्ट करता है। जबकि आप इसका टोटली अपोजिट करते हो और फिर सोचते हो कि व्यूज क्यों नहीं आ रहे हैं? स्क्रिप्ट तो मैंने अच्छी लिखी थी। प्रॉब्लम स्क्रिप्ट में नहीं है बल्कि यूजर साइकोलॉजी में है। एक YouTube वीडियो की पैकेजिंग तीन चीजों से बनती है। सबसे पहला होता है आईडिया यानी कि वीडियो किस टॉपिक पे होने वाला है। अगर आईडिया ही अच्छा नहीं है तो आप दुनिया का कोई भी फ्रेमवर्क फॉलो कर लो स्क्रिप्ट राइटिंग के लिए वीडियो नहीं चलेगी। दूसरा है टाइटल। ये वो चीज है जो कि ऑडियंस को वीडियो से क्या एक्सपेक्ट करना है यह बताता है। अगर आपके टाइटल में कहीं भी बात वीडियो के अंदर नहीं मिलती है तो अगेन आपकी वीडियो फ्लॉप ही होगी। तीसरा है थंबनेल। थंबनेल एक विजुअल एक्सपेक्टेशन सेट करता है कि वीडियो के अंदर क्या दिखेगा। एंड अगेन वीडियो की रियलिटी अगर थंबनेल से अलग हुई तो ऑडियंस की एक्सपेक्टेशन टूट जाएगी एंड आपकी वीडियो फ्लॉप हो जाएगी। अगर आपकी ये तीन चीजें फिगर आउट नहीं है तो स्क्रिप्ट लिखना शुरू मत करना क्योंकि भले ही आप मेरे पूरे फ्रेमवर्क को फॉलो करके किलर स्क्रिप्ट लिख भी लोगे आपकी पैकेजिंग उस स्क्रिप्ट को ट्रैश बना देगी। लेकिन इस साइकोलॉजी को स्क्रिप्ट्स के अंदर कैसे अप्लाई करें? इसको समझने के लिए आपको फ्रेमवर्क के पहले स्टेप को समझना पड़ेगा। व्हिच इज़ YouTube पे जितनी भी वायरल वीडियोस हैं उसके इंट्रो में सिर्फ दो ही एलिमेंट एक्सिस्ट करते हैं। पहला है क्लिक कन्फर्मेशन एंड दूसरा है क्रियोसिटी गैप। एक इंट्रो का काम सिर्फ इन दो चीजों को कवर करना होता है। लेकिन स्टिल 90% यूर्स यह भी नहीं कर पाते हैं क्योंकि उनको पता ही नहीं है कि इसका सही मेथड क्या है। क्लिक कन्फर्मेशन का सीधा सा मतलब है कि ऑडियंस को अशोरिटी देना कि जिस चीज के लिए उन्होंने वीडियो पे क्लिक किया था वीडियो के अंदर उनको वही मिलने वाला है। अब यह चीज आप दो तरीके से कर सकते हो। पहला है बोल के दूसरा है शो करके। एग्जांपल के लिए आप मिसिस की ये दो वीडियोस देखो। बेचारे लायन को ट्रीट नहीं किया गया तो यह मर जाएगा। और आज ये हमारे हजारों जानवरों में से पहला है जिसे हम बचाएंगे। देखते हैं कैसे। हम अब इस सुनसान आइलैंड पर फंस चुके हैं जो कि समंदर के बीचोंबीच है और हम अगले सात दिनों तक यहीं पर फंसे रहेंगे। और इन दोनों ही वीडियोस के अंदर मिस्टर बीस्ट ने विद इन थ्री टू सिक्स सेकंड्स आपको एश्योर कर दिया कि तुमने जो वीडियो की पैकेजिंग में देखा था वीडियो के अंदर भी वही चीज होने वाली है विजुअली भी और बोल के भी एंड यही सेम ट्रिक मैंने भी इस वीडियो में यूज की है जो कि तुम देख रहे हो। आज की वीडियो में मैं आप लोगों को स्क्रिप्टिंग का एक ऐसा फॉर्मेट देने वाला हूं जिसे फॉलो करके आप भी कुछ इस तरह के व्यूज गेन कर सकते हो। इंसान का ब्रेन पेन रिवॉर्ड के कांसेप्ट पे चलता है। अगर इंसान ने मेहनत करी है तो उसके बदले में उसे रिवॉर्ड चाहिए। YouTube पे आते ही यूजर को नौ थंबनेल्स दिखते हैं और अगर उसने आपकी वीडियो पे क्लिक करने की मेहनत करी है तो उसका ब्रेन एक रिवॉर्ड एक्सपेक्ट कर रहा है जो कि आपको विद इन थ्री टू सिक्स सेकंड्स देना होता है। यही रिवॉर्ड क्लिक कंफर्मेशन है। यूजर को पता नहीं चलता है लेकिन इसकी वजह से वो आपकी वीडियो पे रुक जाता है। लेकिन वीडियो पे रुकना और वीडियो को पूरा देखना दो अलग चीजें हैं। और इसी वजह से आपको इंट्रो में एक और चीज को कवर करना होता है व्हिच इज क्यूरोसिटी गैप। क्यूरोसिटी गैप का सीधा सा मतलब है गर्म करके ठंडा छोड़ देना। यानी कि जो भी ऑडियंस उम्मीद कर रही थी उसका एक छोटा सा टीजर देना। इसको डिटेल में एक्सप्लेन करने से पहले मैं आपको इसका एग्जांपल दिखाता हूं मिस्टर बीस्ट की सेम वीडियो से। हम एक स्नाइपर से जिराफ को वैक्सिननेट करेंगे इस हेलीकॉप्टर से। आज हम सारे जिराफ को वैक्सिनेट करके ही रहेंगे। लायंस को एक बदहाल ज़ से भी बचाएंगे। चलो भागो। इससे पहले राइनो आपसी फाइट में खत्म हो जाए। उन्हें भी रीोकेट करेंगे। इस राइनो की लाइफ में थोड़े और साल जोड़ देते हैं। और भी बहुत सारे अनबिलीवेबल रेस्क्यूस जिसकी शुरुआत करेंगे इस वीडियो की पैकेजिंग में आपको लायन दिखा था और टाइटल में 1000 एनिमल को सेव करने की बात की गई थी और स्टार्टिंग के 3 सेकंड में आपको क्लिक कन्फर्मेशन भी मिल गया था। लेकिन उसके बाद मिस्टर बीस्ट ने जिराफ दिखाए, राइनो दिखाए, डॉग्स दिखाए, सील दिखाए एंड बाकी काफी सारे एनिमल्स दिखाए। यह था टीजर जिसने आपके क्यूसिटी गैप को खोल दिया। इन जानवरों के साथ क्या हुआ होगा? एजुकेशनल वीडियोस में क्यूरोसिटी गैप अलग वे में क्रिएट किया जाता है। जैसे एग्जांपल के लिए वापस से हमारे इसी वीडियो के इंट्रो में चलते हैं। आप लोगों को 3 सेकंड का क्लिक कन्फर्मेशन देने के बाद मैंने यह लाइंस बोली थी। डजंट मैटर आपने कभी स्क्रिप्ट लिखी है या नहीं? लेकिन वीडियो के एंड तक आपको स्क्रिप्ट राइटिंग के प्रोसेस से लेके रिटेंशन ग्राफ को बढ़ाने तक के सभी सीक्रेट्स पता होंगे। इसके लिए आपको बस यह फोर स्टेप फ्रेमवर्क को फॉलो करना है। यहां पर मैंने क्यूरोसिटी गैप जनरेट कर दिया यह बोल के कि चार स्टेप का एक फ्रेमवर्क है जो कि सब यूज़ कर सकते हैं। एंड आप इस वीडियो को अभी तक इसलिए देख रहे हो क्योंकि आपको फ्रेमवर्क के वो चार पॉइंट्स चाहिए। क्रियोसिटी गैप का यही काम होता है। ऑडियंस को एक रीज़न देना लास्ट तक रुके रहने के लिए। अब क्यूरोसिटी गैप जनरेट करने के काफी सारे तरीके हैं। पहला है फोमो। यानी कि ऑडियंस को यह रियलाइज करवाना कि अगर उन्होंने वीडियो पूरी नहीं देखी तो वह कुछ मिस कर देंगे। मैं अपनी मैक्सिमम वीडियोस में इसी का यूज करता हूं। दूसरा है रिलेटिबिलिटी। ऑडियंस के सामने एक ऐसी सिचुएशन रख दो जिससे वो रिलेट कर सके और फिर आगे क्या हुआ जानने के लिए वो रुके रहे। तीसरा है फियर। कुछ ऐसी स्टेटमेंट बोलना या कुछ ऐसा शो करना जो कि ऑडियंस को पर्सनल लॉस का फील करवा दे। चौथा है क्वेश्चन। क्यूरोसिटी गैप जनरेट करने का यह सबसे सीधा मेथड है। एक ऐसा क्वेश्चन पूछ लो जो कि जनता को पता ही ना हो। पैरेक्ट वीडियोस के अंदर यह बहुत ही ज्यादा यूज़ किया जाता है। और फिफ्थ है पैटर्न इंटरप्शन। यानी कि ऑडियंस की जो नॉर्मल बिलीफ है किसी भी चीज को लेके उसे टोटली अपोजिट करना। दो ब्राठी अपनी वीडियोस में यह बहुत ही ज्यादा यूज करता है। अगर आप अपनी स्क्रिप्ट के इंट्रो में बस यह दो चीजें कर लेते हो वो भी 30 सेकंड के अंदर तो ऑडियंस को रियलाइज हो उससे पहले ही वो आपकी वीडियो में खो चुके होंगे। लेकिन यह ज्यादा देर तक नहीं टिकेगा। क्यों? इसका रीज़न आपको स्टेप थ्री में समझ आएगा। लेकिन उससे पहले चलते हैं स्टेप टू पे जिसके बिना आप आगे कुछ भी नहीं लिख सकते। अ गुड स्क्रिप्ट राइटर इज अ गुड रिसर्चर। और आपने अच्छी रिसर्च करी है या नहीं यह सिर्फ एक ही चीज से डिसाइड होता है जो कि है शॉक वैल्यू। शॉक वैल्यू बेसिकली डिस्टेंस है बिटवीन योर नॉलेज एंड योर ऑडियंस नॉलेज। यह डिस्टेंस जितना ज्यादा होगा, उतना ही ज्यादा आपको ऑडियंस रिटेंशन मिलेगा। लेकिन द क्वेश्चन इज़ शॉक वैल्यू को इंक्रीस कैसे करें? इसके सिर्फ तीन ही तरीके हैं। फर्स्ट इज कंज्यूमिंग। अगर मुझे किसी ऐसे टॉपिक पे वीडियो बनानी है जिसके बारे में मेरे पास कोई इंफॉर्मेशन नहीं है, तो जो पहला स्टेप मुझे अपनी रिसर्चिंग प्रोसेस में करना होगा, इट वुड बी कंज्यूमिंग एज मच कंटेंट एज पॉसिबल। लेकिन कंजमशन का मतलब यह नहीं है कि बस 10 YouTube वीडियोस देख ली। यू हैव टू ट्राई कि आप सेम टॉपिक पे कितने डिफरेंट रिसोर्सेज से या सोशल मीडिया प्लेटफार्म से कितनी वैरायटी ऑफ इंफॉर्मेशन कलेक्ट कर सकते हो। जब आपकी कंजमशन ज्यादा होगी वो भी वैरायटी ऑफ रिसोर्सेज से तो आपके पास वो इंफॉर्मेशन भी होगी जो आर्म ऑडियंस के पास नहीं है क्योंकि उन्होंने इतनी मेहनत नहीं की है जो कि ऑटोमेटिकली स्टॉक वैल्यू को इंक्रीस कर देगा। डॉक्यूमेंट्री क्रिएटर्स आर्टिकल कंज्यूम करते हैं। सेल्फ हेल्प वाले क्रिएटर्स बुक को कंज्यूम करते हैं। मेरे जैसे क्रिएटर्स वर्कशॉप और कोर्सेज को कंज्यूम करते हैं। क्योंकि यह सारी चीजें नॉर्मल ऑडियंस नहीं करती है। सेकंड इज डूइंग। शॉक वैल्यू को इंक्रीस करने का यह सबसे बेस्ट एंड इफेक्टिव वे है जो कभी फेल नहीं होता है। चैलेंज वीडियोस इसी टाइप की रिसर्च करते हैं क्योंकि किसी भी चैलेंज को करने के बाद जो इंफॉर्मेशन आप गेन करते हो वो आपके एक्सपीरियंस से डिराइव होती है। उसका एक्सेस दुनिया में किसी के पास नहीं है। यह सारी वीडियो जो आप स्क्रीन पर देख रहे हो इनमें से किसी में भी कंजशन की जरूरत नहीं पड़ी। इन सब ने पर्सनल एक्सपीरियंस से शॉक वैल्यू को इंक्रीस करा है। थर्ड इज एनालाइजिंग। यह वो मेथड है जो कि मैंने इस वीडियो में अप्लाई करा है। इस वीडियो के लिए मुझे एक्सपेरिमेंट नहीं करना पड़ा बल्कि अपनी प्रीवियस स्क्रिप्ट्स को और बाकी यूर्स की वीडियोस को एनालाइज करना पड़ा ताकि मैं वो इंफॉर्मेशन एक फॉर्मेट में दे सकूं जो मेरे पास पहले से ही थी। लोगों के पास इतना टाइम नहीं है कि वो यह चीज करें जो मैंने करी है। इसलिए मेरी स्क्रिप्ट ऑटोमेटिकली स्टॉक वैल्यू को इंक्रीस कर देती है। आपको अपनी रिसर्च बस इन तीन मेथड में से किसी एक मेथड के साथ करनी है एंड आप इली वो इंफॉर्मेशन डिलीवर कर पाओगे जो बाकी लोगों के पास नहीं है। लेकिन सिर्फ वैल्यूुएबल इनेशन गैदर करके आप वायरल स्क्रिप्ट नहीं लिख सकते हो। इसके लिए आपको नेक्स्ट स्टेप को भी सीखना पड़ेगा जो कि स्क्रिप्ट राइटिंग का मेन पार्ट है। स्क्रिप्ट का इंट्रो 30 सेकंड का होता है। आउट्रो भी 30 सेकंड का होता है। लेकिन बाकी टाइम जो चीज ऑडियंस सुन रही होती है एंड जहां पे सबसे ज्यादा रिटेंशन ड्रॉप होता है वो है बॉडी पार्ट। एंड इस पार्ट में मैक्सिमम यूटर्स गलती करते हैं। इसलिए इसे ध्यान से समझना। स्क्रिप्ट की बॉडी का काम होता है व्यूअर्स सेटिस्फेक्शन को अचीव करना। और इसके लिए आपको तीन चीजों पर फोकस करना है। सबसे पहला है फ्रेमिंग, सेकंड है पेसिंग और थर्ड है ट्रांजिशन। लेट मी एक्सप्लेन। फ्रेमिंग का मतलब है ओवरऑल वीडियो की स्टोरी एंड प्रेजेंटेशन। पिछले स्टेप में आपने जो इंफॉर्मेशन इकट्ठा की है इस स्टेप में आपको वो सारी इंफॉर्मेशन को इस वे में अरेंज करना है कि आपकी वीडियो एक कहानी की तरह लगे। जहां पे हर नेक्स्ट स्टेपेंट है और स्टोरी को आगे बढ़ा रहा है और यहीं पे 90% यूटर्स गलती करते हैं जिसकी वजह से उनका रिटेंशन ग्राफ या तो ऐसा होता है जहां स्टार्टिंग अच्छी होती है। लेकिन वीडियो में आगे जाते-जाते ऑडियंस समझ जाती है कि क्रिएटर के पास कुछ यूनिक नहीं बचा है एंड वो वीडियो को बंद कर देते हैं या फिर रिटेंशन ग्राफ ऐसा होता है जहां स्टार्टिंग ही इतनी स्लो होती है कि ऑडियंस लास्ट में जो अच्छी इनफेशन बची है उसका वेट ही नहीं करती और वीडियो इस मोमेंट तक बंद कर देती है। अब इस प्रॉब्लम से बचने के लिए जो तरीका मैं इस्तेमाल करता हूं वो है रिटेंशन डांस जिसका ग्राफ कुछ ऐसा दिखता है जहां स्टार्टिंग में मैं बेस्ट इनफेशन देता हूं ताकि ऑडियंस को ट्रस्ट हो सके कि वीडियो के अंदर कुछ यूनिक है फिर एक नॉर्मल इंफॉर्मेशन देता हूं जो कि ऑडियंस को पता होती है एंड देन अगेन एक यूनिक या स्पेशल इनफेशन देता हूं और यह साइकिल चलती रहती है एज अ रिजल्ट ऑडियंस कभी डिसाइड ही नहीं कर पाती है कि वीडियो को कब लीव करना है। इस मेथड को इवन मैंने इस वीडियो के अंदर भी यूज़ किया है। वीडियो की स्टार्टिंग में अगर आपको याद हो तो मैंने सबसे पहला पॉइंट जो कवर किया था वो इंट्रो नहीं था बल्कि पैकेजिंग था जो कि टेक्निकली इस वीडियो के लास्ट में आना चाहिए था। बट सिंस मुझे स्टार्टिंग में ऑडियंस को कुछ नया देना था तो मैंने इस पॉइंट की प्लेसमेंट को चेंज कर दिया। जिसके बाद मैंने इंट्रो कवर करा जो कि मैक्सिमम ऑडियंस को पता होता है। एंड देन मैंने रिसर्च पार्ट को कवर करा जो कि ऑडियंस की सबसे बड़ी प्रॉब्लम होती है। एंड नाउ मैं बॉडी पार्ट को कवर कर रहा हूं। एंड नाउ यू नो दैट नेक्स्ट पॉइंट विल बी अ बैगर। बट बुलेट फों्ट्स की फ्रेमिंग के बाद भी एक प्रॉब्लम रह जाती है वो है इंफॉर्मेशन फ्रेमिंग। यानी कि वीडियो के अंदर जो वर्ड्स बोलने वाले हैं उनको कैसे फ्रेम करें। इसके लिए आप स्टोरी टेलिंग मेथड का यूज कर सकते हो। स्टोरी टेलिंग मेथड में सबसे पहले कॉन्टेक्स्ट को सेट किया जाता है। फिर डिटेल दी जाती है एंड देन चैलेंज को इंट्रोड्यूस करके एक फाइनल क्लाइमेक्स दिया जाता है। अगर समझ नहीं आया है तो डोंट वरी। मैं आपको इसी वीडियो के एग्जांपल से समझाता हूं। इस वीडियो में इंट्रो के बाद जो हमारा पहला पहरा था वो कुछ ऐसा था। आप सभी को सिखाया गया है कि हुक स्क्रिप्ट राइटिंग का पहला पार्ट होता है या रिसर्च स्क्रिप्ट राइटिंग का पहला पार्ट होता है। बट यह गलत नॉलेज है क्योंकि हर एक प्रोफेशनल स्क्रिप्ट राइटर इस सबसे भी पहले कुछ और करता है। वो है ह्यूमन साइकोलॉजी को समझना। YouTube पे कोई भी आते ही सबसे पहले किसी की स्क्रिप्ट नहीं सुनता है। वो सबसे पहली चीज जो करता है वो है एक पैकेजिंग पे क्लिक करना। और उसके बाद उसका ब्रेन डिसाइड करता है कि उसने जो पैकेजिंग पे क्लिक करा है जो उसे दिख रहा है वो वर्ती है उसके टाइम के या नहीं। अगर नहीं तो वीडियो को स्क्रॉल कर दिया जाता है। इसलिए हर एक प्रोफेशनल स्क्रिप्ट राइटर अपनी वीडियो की स्क्रिप्ट को पैकेजिंग को ध्यान में रख के ही स्टार्ट करता है। जबकि आप इसका टोटली अपोजिट करते हो और फिर सोचते हो कि व्यूज क्यों नहीं आ रहे हैं? स्क्रिप्ट तो मैंने अच्छी लिखी थी। प्रॉब्लम स्क्रिप्ट में नहीं है बल्कि यूजर साइकोलॉजी में है। यह था कांटेक्ट सेटिंग जहां पे मैंने यह बता दिया कि बैक स्टोरी क्या है एंड आप लोगों के साथ क्या हो रहा है। फिर मैंने डिटेल दी कि स्क्रिप्ट राइटर्स कुछ और करते हैं एंड वो चीज है ह्यूमन साइकोलॉजी को समझना। इस लाइन की मदद से मैंने चैलेंज को इंट्रोड्यूस करा जिसके बाद मैंने फाइनल कंक्लूजन दिया। ठीक इसी वे में मैंने अपनी वीडियो के कंटेंट का पहला पैराग्राफ लिखा जिसने आपको इतना एंगेज करा कि आप बाकी की वीडियो अभी तक देख रहे हो। एंड यही पैटर्न मैंने लगभग हर एक पैरा में यूज़ किया है। फ्रेमवर्क ओवरऑल आपकी स्क्रिप्ट को एक रिदमम देता है। लेकिन जो चीज एक्चुअल में ऑडियंस को वीडियो में बनाए रखती है वो है पेसिंग। बेसिंग स्क्रिप्ट के इमोशंस को कंट्रोल करने का काम करता है। एंड अगर आपकी स्क्रिप्ट ऑडियंस के इमोशन को अप एंड डाउन नहीं कर रही है तो आपकी स्क्रिप्ट डेड है। बट अगेन द क्वेश्चन इज हाउ टू डू इट? आंसर बहुत ही सिंपल है। यूज़ पैटर्न इंटरप्शन। अगर स्क्रिप्ट एक ही टोन में एंड एक ही फ्लो में चलेगी तो ऑडियंस बोर हो जाएगी। बट अगर स्क्रिप्ट में कुछ ऐसा एडिट हो जो कि एक्सपेक्ट नहीं किया था तो पैटर्न इंटरप्ट होगा और ऑडियंस के इमोशन भी। फॉर एग्जांपल इस वीडियो में जब मैं क्यूरोसिटी गैप समझा रहा था तो मेरी पहली लाइन ये थी क्यूरोसिटी गैप। क्यूरोसिटी गैप का सीधा सा मतलब है गर्म करके ठंडा छोड़ देना। एक इनेशन इंटेंस स्क्रिप्ट के अंदर मीन पैटर्न इंटरप्ट हुआ। ऑडियंस का इंटरेस्ट राइज हुआ एंड रिटेंशन भी बढ़ा। यही काम आप कांटेक्ट देके भी कर सकते हो। जैसे इस वीडियो की स्टार्टिंग में मैंने मिस्टर बीस्ट के कुछ एग्जांपल दिए थे। टेक्निकली मेरा पॉइंट इस लाइन पे खत्म हो चुका था। मैं स्ट्रेट फॉरवर्ड नेक्स्ट पॉइंट पे जा सकता था। बट पैटर्न इंटरप्ट करना जरूरी था। एंड इवन इस पूरी वीडियो में मैं बार-बार आपको प्रीवियस पॉइंट्स के एग्जांपल दे रहा हूं। जस्ट टू इंट्रप्ट द पैटर्न। अदरवाइज मैं स्ट्रेट फॉरवर्ड आके आपको पूरा फॉर्मेट समझा सकता था। नाउ यू नो हाउ टू फ्रेम योर स्क्रिप्ट, हाउ टू फ्रेम योर पैरा एंड आल्सो हाउ टू कीप ऑडियंस हुक्ड। बट आप ऑडियंस को 10 मिनट तक अपनी वीडियो में नहीं रोक सकते अगर आपको थर्ड पॉइंट नहीं आता है। व्हिच इज ट्रांजिशन। ह्यूमंस का अटेंशन स्पैन 8 सेकंड का होता है। एंड स्टोरी टेलिंग का यूज़ करके आप सिर्फ 3 मिनट तक ही इसको एक्सटेंड कर सकते हो। लेकिन 3 मिनट के बाद ऑडियंस बोर हो जाती है। एंड उनको दोबारा से एक रीज़न चाहिए होता है वीडियो को देखते रहने के लिए। इसलिए हर प्रोफेशनल स्क्रिप्ट राइटर एक सीक्रेट ट्रिक का यूज करता है अपनी वीडियो में वि इज सबक्स। सबक्स पॉइंट के बीच में ट्रांजिशन के लिए यूज किए जाते हैं। कैसे? इसी वीडियो के एग्जांपल से समझाता हूं। सब्सक्स एक नया मोटिव या रीजन देता है व्यूअर को आगे के पॉइंट तक देखते रहने के लिए। एंड स्क्रिप्ट जितनी लंबी होगी, उतने ही ज्यादा सब्सक्स आपको यूज़ करने पड़ेंगे। सब हुक को क्रिएट करना बहुत ही इजी है। जस्ट मेक द ऑडियंस रियलाइज़ कि वह जो एक्सपेक्ट कर रहे थे, वह नहीं होगा। एंड देन गिव देम रीज़न ऑफ़ व्हाई एंड इज़ली शिफ्ट देम फ्रॉम पॉइंट वन टू टू। अगर आप अपनी स्क्रिप्ट की बॉडी में सिर्फ यह तीन चीजें करते हो तो आपकी ऑडियंस आपकी वीडियो को कभी भी बंद नहीं कर पाएगी। पर अगर आपने नेक्स्ट स्टेप को मास्टर नहीं करा तो आपकी ऑडियंस कभी भी आपकी दूसरी वीडियो नहीं देखेगी। जहां आउट्रो में 90% यूटर्स लाइक एंड सब्सक्राइब की रिक्वेस्ट कर रहे होते हैं। वहीं सही आउट्रो लिखने की वजह से मुझे हर साल 3 लाख से ज्यादा व्यूज गेन होते हैं। क्योंकि प्रोफेशनल स्क्रिप्ट राइटर्स आउट्रो में एक ट्रैप बिछाते हैं। द लूप ट्रैप कैसे मैं एक्सप्लेन करता हूं। आउट्रो में आपको अगेन दो चीजें करनी होती है। सबसे पहला है समराइजिंग द वीडियो एंड दूसरा है क्रिएटिंग अ नीड। व्यूअर सबसे पहले जब आपकी वीडियो पे आया था तो वो एक एक्सपेक्टेशन लेके आया था। लेकिन वीडियो के बाद आपने व्यूअर के एक्सपेक्टेशन से ज्यादा वैल्यू व्यूअर को प्रोवाइड कर दी है जो कि उसके लिए ओवरलोड ऑफ इनफेशन है। इसलिए आपको वीडियो को समराइज करना है इस वे में कि व्यूअर सभी की पॉइंट्स को मेमोराइज करके ही वीडियो को खत्म करें। फॉर एग्जांपल इस वीडियो को देखने से पहले आपके पास स्क्रिप्ट राइटिंग की कोई भी नॉलेज नहीं थी। स्क्रिप्ट राइटिंग वीडियो पैकेजिंग से शुरू होती है। जिसके बाद हुक में आपको क्लिक कन्फर्मेशन देके क्यूरोसिटी गैप क्रिएट करना होता है। एंड देन टॉपिक के बारे में इस वे में रिसर्च करना होता है कि शॉक वैल्यू को इंक्रीस कर सके। जिसके बाद बॉडी में फ्रेमिंग, पेसिंग एंड ट्रांजिशन को यूज़ करके आपको वीडियो के आउट्रो में लूप क्रिएट करना होता है। बट आपको स्टिल यह नहीं पता है कि ऑडियंस से कैसे अपने थंबनेल पे क्लिक करवाएं ताकि आपकी अच्छी तरीके से लिखी हुई स्क्रिप्ट को वो पूरा देखे। तो मेक श्योर टू वॉच दिस वीडियो। मिलते हैं अगली वीडियो में।
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