Turkish Invasions of India: Mahmud of Ghazni (1000-1027 CE)
This session covers the Turkish invasions of India, beginning with the Ghaznavid dynasty and focusing on Mahmud of Ghazni's 17 raids. These invasions are a critical part of the transition from ancient to medieval India, building upon foundations laid in earlier periods, such as those covered in the Comprehensive Overview of Ancient Indian History: From Prehistoric to Gupta Empire.
Key Concepts
- Ghazni Dynasty (Yamini Dynasty): Founded by Alptigin, a Turkish slave in Ghazni (Afghanistan)
- Succession: Alptigin → Subuktagin → Mahmud of Ghazni
- First Turkish Invader: Subuktagin (987 CE), who attacked King Jayapala of the Hindu Shahi dynasty
Mahmud of Ghazni's Objectives
- Primary Goals:
- Plunder wealth from India ("Golden Sparrow")
- Spread Islam in India
- Target: Temples (both for wealth and religious destruction)
- Title: "But Shikan" (Idol Breaker)
Famous Attacks
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1000 CE: First attack on Peshawar (King Jayapala)
- Battle of Peshawar (1001 CE): Mahmud defeated Jayapala, who committed suicide
- Successor: Anandapala (defeated and killed in 1008 CE)
- Successor: Trilochanapala
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1014 CE: Attack on Sthaniswara Mahadev Temple (Thanesar, Haryana)
- Destroyed the statue of Chakraswami (Lord Krishna)
- Al-Biruni accompanied this invasion (first Muslim to study Hindu Puranas)
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1018-1019 CE: Destroyed temples in Mathura, Kannauj, and Ujjain
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1020-1021 CE: Kalinjar Mission
- Ruler: Vidyadhara Chandela (only ruler Mahmud couldn't defeat)
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1025 CE (16th Attack): Somnath Temple, Gujarat
- Ruler: Bhima I (Solanki/Chalukya dynasty)
- Plundered gold and the golden door
- Jats recaptured the golden door
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1027 CE (Last Attack): Against Jats in Sindh
Legacy
- First Muslim to assume the titles "Sultan" and "Ghazi"
- Issued silver coins with Sanskrit inscriptions
- Died in 1030 CE
Mahmud's raids set the stage for later Muslim rule in India, leading to the establishment of the Delhi Sultanate. For a deeper look at how these invasions affected the religious and political landscape, see the analysis of Firoz Shah Tughlaq's Role in Delhi Sultanate's Decline & Religious Nature.
Famous Writers
- Al-Biruni: Wrote Kitab-ul-Hind (Tahqiq-e-Hind)
- Firdausi: Wrote Shahnama
- Utbi: Wrote Tarikh-e-Yamini (history of the Yamini dynasty)
- Baiqi: Wrote Tarikh-e-Subuktigin
गुड मॉर्निंग एवरीवन। गुड मॉर्निंग। बताइए कहां तक पहुंचे थे? मोहम्मद बिन कासिम कंप्लीट कर लिया था।
बहुत बढ़िया। किसी का कोई डाउट? कोई डाउट नहीं है। ऐसा कैसे हो सकता है? रजिस्टर खोला नहीं घर पे जाके? खोला था?
हमने पढ़ना शुरू किया था मेडिवल इंडिया यानी कि मध्यकालीन भारत और मेडिवल इंडिया या मध्यकालीन भारत की शुरुआत होती है 712
से और 712 से लेकर 1707 तक हम पढ़ते हैं मध्यकालीन भारत या मेडिवल इंडिया जिसकी शुरुआत हुई थी इस्लाम से। सबसे पहले हमने
बात की राइज ऑफ इस्लाम और उसके बाद हमने बात की अबाउट फर्स्ट सक्सेसफुल मुस्लिम इन्वजन इन इंडिया दैट इज अरेबियन इन्व जो
किसने किया? मोहम्मद बिन कासिम ने। और 712 से 714 ईवी तक हमने बात की मोहम्मद बिन कासिम के बारे
में और मैंने आपको बताया कि इसके बाद हमारे देश पर मुसलमानों के द्वारा दो टर्किश इन्वेशंस हुए, दो तुर्क आक्रमण हुए
जिसमें हम सबसे पहले पढ़ते हैं महमूद के बारे में जो कहां से आया? गजनी से। और यह गजनी कहां पर है? अफगानि टर्की नहीं
अफगानिस्तान में। यह था टर्किश लेकिन रूल करता था अफगानिस्तान में। और अफगानिस्तान का ही एक शहर है जो कहलाता है गजनी। यह
गजनी से आया इसलिए हम इसको महमूद ऑफ गजनी या महमूद गजनवी के नाम से जानते हैं। और इसके बाद एक और टर्किश हमारे देश पर अटैक
करने के लिए आएगा। वह भी अफगानिस्तान से आएगा जिसे हम जानते हैं मोहम्मद गौरी के नाम से। तो चलिए मेडिव इंडिया में आज सबसे
पहले हेडिंग डालेंगे। टर्किश इन्वजंस इन इंडिया या भारत में तुर्क आक्रमण। टर्किश इन्वेजंस इन इंडिया या भारत में
तुर्क टर्किश इन्वजंस इन इंडिया या भारत में तुर्क आक्रमण
और टर्किश इन्वेशंस में तुर्क आक्रमण में हम बात करेंगे सबसे पहले अबाउट महमूद ऑफ ऑफ गजनी
महमूद गजनवी के बारे में जिसकी हिंदुस्तान में एंट्री होगी 1000 में यानी कि 1000 ईसवी में और यह यहां से एग्जिट लेगा 1027
में। [नाक से की जाने वाली आवाज़] [गला साफ़ करने की आवाज़]
अभी तक हमारे देश पर जो मुस्लिम इन्वेजन हुआ था वो अरबों के द्वारा किया गया था। वो अरेबियंस के द्वारा किया गया था। और
अरबों ने ही हमारे देश को सबसे पहली बार क्या कहकर पुकारा? हिंदुस्तान। अभी तक हम केवल भारतवर्ष कहलाते थे या इंडिया कहलाते
थे। लेकिन सबसे पहली बार हमारे देश के लिए हिंदुस्तान शब्द का इस्तेमाल करने वाले
अरेबियंस हुए। लेकिन हमारे देश को हिंदुस्तान नाम देने वाले कौन हुए? पर्शियंस यानी कि ईरानी लोग। हमारे देश को
हिंदुस्तान नाम तो परर्शियंस ने दिया था। लेकिन इस नाम का इस्तेमाल सबसे पहले अरेबियंस ने किया। क्योंकि अरबों ने ही
सबसे पहले यहां पर सफल मुस्लिम इन्वेजन किए या आक्रमण किया। इसके बाद एक टर्किश एक तुर्क हमारे देश पर अटैक करने के लिए
आया। गजनी का महमूद या महमूद गजनवी। अब यह महमूद गजनवी कौन था और इसे हिंदुस्तान आने की जरूरत क्यों पड़ी? सबसे पहले हम
कांसेप्ट समझ लेते हैं। आज अफगानिस्तान में एक शहर है, एक प्लेस है वि इज नोन एज गजनी।
यह अफगानिस्तान का शहर है और आज भी है। और इसी गजनी में एक डायनेस्टी यानी कि एक वंश चला करता था जो कहलाता था गजनवित
डायनेस्टी या हिंदी में आप इसको लिखेंगे गजनी वंश या गजनी वंश को ही कहा जाता था यामिनी वंश
यामिनी डायनेस्टी या यामिनी वंश अफगानिस्तान के गजनी नामक स्थान पर या गजनी शहर में एक वंश चला करता था जो कि
गजनवी डायनेस्टी या गजनी वंश यामिनी वंश कहलाता था। एंड द फाउंडर ऑफ दिस डायनेस्टी वाज़ अ टर्किश स्लेव। इस वंश की स्थापना एक
तुर्क दास या एक तुर्क गुलाम के द्वारा की गई थी। एक टर्किश स्लेव के द्वारा की गई थी जिसका नाम था अलपतगन।
इसकी स्थापना अलपतगन नामक एक दास एक स्लेव के द्वारा की गई थी। लेकिन क्योंकि अलफ्तगीन का कोई भी पुत्र,
कोई भी बेटा, कोई भी सक्सेसर या उत्तराधिकारी नहीं था। इसीलिए अलबद्दीन के मरने के बाद इसी का एक स्लेव जो इसका
दामाद भी लगता था वही इसका उत्तराधिकारी बना और वही इसका सक्सेसर हुआ। तो ही वाज़ सक्सीडेड बाय ह स्लेव। इसका उत्तराधिकारी
इसका दास इसका गुलाम हुआ जिसका नाम था सुबुक्तगी। अलब्तगिन का उत्तराधिकारी इसका स्लेव इसका
गुलाम बना जिसका नाम था सुबुकगीन और यही सुबुक्तगिन भारत पर अटैक करने वाला सबसे पहला टर्किश
या सबसे पहला तुर्क कहलाता है। क्योंकि इसी सुबुक्तगिन ने हमारे देश पर सबसे पहला टर्किश इन्वजन किया। सबसे पहला तुर्क
आक्रमण किया क्योंकि सुबुक्तगिन भी कहां से बिलोंग करता था? तुर्की से। यानी कि टर्की से। इसीलिए हम इसको टर्किश कह रहे
हैं। लेकिन ये आ कहां से रहे हैं? और यह शासन कहां पर कर रहे हैं? अफगानिस्तान में। इसीलिए हम इसको अफगानी इन्वेशन नहीं
बोल रहे हैं। इसको टर्किश इन्वजन बोल रहे हैं। क्योंकि सारे के सारे बिलोंग कहां से करते हैं? तुर्की से या टर्की से करते
हैं। क्लियर एकदम बात? अब इस समय हिंदुस्तान की स्थिति क्या चल रही थी? अब अगर अफगानिस्तान से हमारे देश में एंट्री
होगी तो स्वाभाविक सी बात है वह कहां से होगी? पाकिस्तान के रास्ते से। जो आज पाकिस्तान है वो उस समय तो क्या था?
हिंदुस्तान। और हिंदुस्तान की सीमा उस समय यानी कि 1000 ईसवी में शुरू होती थी कहां से? पेशावर से।
और हम जानते हैं आज पेशावर शहर कहां पर है? पाकिस्तान में। इस समय हिंदुस्तान की सीमा शुरू होती थी
पेशावर से और पेशावर में ही एक डायनेस्टी चला करती थी। एक वंश चला करता था जो कहलाता था हिंदू शाही डायनेस्टी।
इस वंश को कहा जाता था हिंदू शाही वंश। और इसी हिंदू शाही वंश में एक हिंदू रूलर रूल किया करता था जिसका नाम था राजा
जयपाल। राजा जयपाल की कैपिटल यानी कि राजधानी हुआ करती थी वह हिंद।
राजा ताहिर की कैपिटल क्या थी? सुन तो लो पहले मैंने पूछा क्या? राजा ताहिर की कैपिटल आरोर। हमने पढ़ा था सिंध
की राजधानी आरोर थी। जब वहां पर मोहम्मद बिन कासिम ने अटैक किया। लेकिन जब तुर्कों ने अटैक किया भारत पर उस समय पेशावर से
सीमा शुरू होती थी। वहां पर हिंदू शाही वंश चल रहा था। और हिंदू शाही वंश का राजा था जयपाल और जयपाल की राजधानी थी वह हिंद।
और यहीं पर पेशावर पर ही सबसे पहला जो टर्किश इन्वजन हुआ, जो सबसे पहला तुर्क आक्रमण हुआ, वह किसने किया? सुबुकन ने। और
सुबुकन ने ही राजा जयपाल की सेना को पराजित कर दिया। इसके बाद सुबुकन ने कई बार अटैक्स किए जिसमें कई बार यह सफल हुआ
और कई बार हारा भी। लेकिन अगर आपसे पूछे कि भारत पर अटैक करने वाला सबसे पहला टर्किश अगर ऑप्शन में सुबूतगन नहीं है।
फिर तो हम बिना चिंता करे हम आंसर किसको करेंगे? महमूद गजनवी को करेंगे। लेकिन अगर महमूद गजनवी के साथ-साथ ऑप्शन में
सुबुक्तगीन भी दिया है तो फिर हमें आंसर क्या करना होगा? सुबुक्तगीन करना होगा। क्योंकि फिर क्वेश्चन पूछने वाला आपसे
आंसर क्या चाहता है? सुबुप्त गेंद क्योंकि लिखेंगे इन 987 987 ईस्वी में ही वाज फर्स्ट
टर्किश इनवेडर इन इंडिया 987 ईस्वी में यह भारत पर आक्रमण करने
वाला प्रथम तुर्क था। ही वाज़ फर्स्ट टर्किश इनवेडर इन इंडिया। यह भारत में आक्रमण करने वाला प्रथम तुर्क
था। 987 से लेकर 99798 तक सुबुकन के द्वारा कई बार पेशावर पर
अटैक किए गए जिसमें यह कई बार जीता भी और कई बार हारा भी। लेकिन 998 में 998 ईस्वी में जब इसने एक बार फिर से जाकर पेशावर पर
अटैक करने की कोशिश की तो राजा जयपाल ने इसको पेशावर के ही बाहर रोका और सुबुकद्दीन को पराजित करके इसकी हत्या कर
दी और जैसे ही इसकी हत्या हुई 998 ईस्वी में इसी का बेटा गजनी वंश या यामिनी वंश का अगला शासक बना जिसके बारे में हम पढ़
रहे हैं महमूद गजनवी शासनकाल 998 से लेकर 30 998 ईसवी से लेकर 1030 ईसवी तक गजनी
वंश या यामिनी वंश में शासन किया महमूद गजनवी ने। बातें एकदम क्लियर है सबको? ठीक है? जब हम
नोट्स बनाएं तो हमें लंबी लंबी स्टेटमेंट्स लिखने से बचना है। है ना? क्योंकि अभी तो शुरुआत ही हुई है। थोड़े
दिनों में यह सारे भर जाएंगे। है ना? जो नोटबुक और रजिस्टर आप लेकर बैठे हैं क्योंकि हिस्ट्री का सिलेबस बहुत ज्यादा
वास्ट है। है ना? बहुत ज्यादा लंबा इतिहास हमें पढ़ना है। पागल हो जाएंगे आप नाम सुनते सुनते और याद करते-करते। इतने सारे
नाम हैं। इसीलिए हमें कोशिश करनी है कि हमारे जो नोट्स हैं वह जितना ज्यादा स्पेसिफिक और जितना ज्यादा प्रिसाइज्ड
होंगे उसको याद करना उतना ही ज्यादा आसान रहेगा क्योंकि अल्टीमेटली सब कुछ याद आप ही को करना है। मुझे पहले से सब रटा रटाया
है। है ना? मुझे तो सारी बातें याद है। लेकिन जब आप याद करेंगे क्लास में बहुत मजा आएगा क्योंकि क्लास में तो आप मेरी
जुबानी सारी बात सुन रहे होंगे। लेकिन जब आप इसको जाकर घर पर याद करने की कोशिश करेंगे, पढ़ने की कोशिश करेंगे तो
आफत आएगी। अब यहां पर हमने केवल केवल एक क्या किया? फ्लो चार्ट बनाया और उसी से हमने समझ लिया कि हम क्या कहने की कोशिश
कर रहे हैं। जैसे अफगानिस्तान में जगह है गजनी। गजनी में वंश है गजनी वंश यामनी वंश। उसका फाउंडर है अलपतगन। अलपतगन का
स्लेव है सुबुकतगन और सुबुतगन का बेटा है महमूद गजनवी। और उस समय पेशावर में हिंदू शाही वंश चल रही है। राजा है जयपाल और
राजधानी है वह हिंद। अब जैसे ही 1998 में सुबुकन की मृत्यु हुई तो तुरंत उसका बेटा महमूद गजनवी गजनवी के सिंहासन पर बैठा और
कसम खाकर बैठा कि यह हर साल हिंदुस्तान पर एक आक्रमण करेगा। इसने कसम खाई थी कि यह हर साल हिंदुस्तान पर एक अटैक करेगा, एक
आक्रमण करेगा। और यही रीजन है कि फ्रॉम थाउजेंड टू 2027 1000 ईसवी से लेकर 1027 ईसवी तक ही
इनवेटेड 17 टाइम्स इन इंडिया। इसने भारत में कुल 17 बार आक्रमण किए। यह 1000 से लेकर 1027 तक यानी कि 27 सालों
में भारत पर 17 बार अटैक करेगा और आकर यहां पर रहेगा नहीं ना ही यहां पर बसेगा ना ही यहां पर कोई वंश स्थापित
करेगा ना ही यहां पर अपनी सत्ता एस्टैब्लिश करेगा हर बार गजनी से ही चलेगा यहां पर अटैकशटक करके लूटपाट करके यहां से
वापस लौट जाएगा फिर आएगा दोबारा से पैटर्न क्या रहेगा? सितंबर अक्टूबर के महीने में निकलेगा कहां से? गजनी से। कड़ाके की
सर्दियों में दिसंबर जनवरी के महीने में यहां पर आकर अटैक करेगा और मार्च अप्रैल को यहां से वापस लौट जाएगा। यह इसका
पैटर्न हुआ करता था अटैक करने का। इसने 27 साल के पीरियड में 17 बार अटैक किए। और क्यों किए? व्हाट वास द एम? या इसका
उद्देश्य क्या था? इसका एम क्या था? केवल दो एम। वैसे तो हमारे देश में जितने भी मुस्लिम
इन्वेडर्स आएंगे सब इसी उद्देश्य से आएंगे। सबसे पहला उद्देश्य है हिंदुस्तान से लूट करना।
क्योंकि हम क्या हैं? गोल्डन स्परो। हमें कहा जाता है सोने की चिड़िया और यहां पर गोल्ड और धन की कोई कमी नहीं है। पूरे के
पूरे विश्व के लिए हम सेंटर ऑफ अट्रैक्शन है। हम आकर्षण का केंद्र हैं। और कोई भी आएगा यहां पर। सबसे पहला पर्पस होगा यहां
से गोल्ड। यहां से धन लूटना। एक तो धन की लूट करने के लिए महमूद गजनवी यहां पर बार-बार अटैक करेगा। क्योंकि यह चाहता था
हिंदुस्तान से धन लूट कर खुद को इकोनॉमिकली स्ट्रांग एस्टैब्लिश करना कहां पर? सेंट्रल एशिया या मध्य एशिया में। और
दूसरा पर्पस सबका कॉमन रहेगा टू स्प्रेड इस्लाम इन इंडिया। भारत में इस्लाम धर्म का प्रचार करना।
भारत में इस्लाम धर्म का प्रचार करना। अब इसको हिंदुस्तान से लूट करनी है। अब क्योंकि लूट करनी है तो यह टारगेट बनाएगा
किसको? टेंपल्स को। मंदिरों को। क्यों बनाएगा? क्योंकि हमारे राजाओं का सारा सारा गोल्ड, सारा का सारा जो धन हुआ करता
था, वो किस में हुआ करता था? मंदिरों में हुआ करता था। अब मंदिर पर अटैक करने से इसके दोनों पर्पस क्या हो जाएंगे? सॉल्व
हो जाएंगे। पहला इसको धन लूटना है तो यह मंदिरों पर अटैक करके वहां से सोना, वहां से गोल्ड वहां से धन लूटेगा। और फिर
मंदिरों को ही नष्ट करवाकर, मंदिरों की ही मूर्तियां तुड़वाकर यहां पर इस्लाम धर्म का क्या करेगा? प्रचार करेगा। क्योंकि अगर
अपने प्रोडक्ट का प्रचार करना है तो ऑलरेडी एग्जिस्टिक प्रोडक्ट को क्या करना होगा? पहले मिटाना होगा, डिस्ट्रॉय करना
होगा या फिर उसकी जो साख है या उसकी जो पॉपुलैरिटी है उसको क्या करना पड़ेगा? खत्म करना पड़ेगा। तभी
यह काम हो सकता है। तो यही काम कौन करेगा आकर? महमूद गजनवी। इसीलिए भारत के इतिहास में बुत शिकन या मूर्ति भंजक या डिस्ट्रयर
ऑफ स्टचूस किसे कहा जाता है? महमूद गजनवी को। तो ध्यान रखेंगे इसी को कहा जाता है बुद्ध शिकन
या मूर्ति भंजक या
डिस्ट्रय ऑफ स्टचूस [नाक से की जाने वाली आवाज़] इसी को बुद्ध शिकन या मूर्ति भंजक कहते
हैं या डिस्ट्रॉय ऑफ स्टचूस कहते हैं। क्योंकि यही आकर मंदिरों और मूर्तियों को तुड़वाने और नष्ट करवाने का काम करेगा।
एकदम क्लियर बात। चलिए फिर हेडिंग डालिए। फेमस अटैक्स ऑफ महमूद गजनवी। महमूद गजनवी के प्रसिद्ध आक्रमण
फेमस अटैक्स या प्रसिद्ध आक्रमण 17 टैग्स किए हैं। लेकिन हमें 17 के 17
नहीं पढ़ने हैं और ना ही याद करने हैं। पहला और आखिरी हमेशा इंपॉर्टेंट रहता है। फर्स्ट एंड लास्ट और सबसे ही ज्यादा
इंपॉर्टेंट होगा गुजरात का सोमनाथ टेंपल या सोमनाथ मंदिर। क्योंकि यह कहानी आप सब ने सुनी होगी कि महमूद गजनवी ने ही गुजरात
के सोमनाथ मंदिर पर अटैक करके उसको लूटा था। क्या सबने सुना है यह बात? सुनी होगी यह बात है ना?
कुछ कुछ तो भाई कुछ कुछ तो सुना सुनाना होगा ना सारा सुना सुनाना नहीं होगा ना कुछ कुछ सुना सुनाना भी ऐसा होगा क्योंकि
स्कूल स्कूल में हम सब लोग हिस्ट्री पढ़ के आए हैं वो बात अलग है कि हमें याद दो पैसे का नहीं है हां लेकिन पढ़ा तो हम सब
ने ही है लिखेंगे फर्स्ट अटैक महमूद गजनवी का प्रथम आक्रमण जो हुआ
1000 में महमूद गजनवी अब देखो इस बात को हम पूरी की पूरी स्टेटमेंट बनाकर भी लिख सकते हैं।
लेकिन हमें स्टेटमेंट बनाकर लिखने की कोई आवश्यकता नहीं है। क्योंकि हमें एक ऐसा एग्जाम देना है जिसमें हमें फैक्ट्स याद
करने हैं। जिसमें हमें तथ्य याद करने हैं। इसीलिए हम लंबे-लंबे स्टेटमेंट्स को लिखने से बच रहे हैं। फर्स्ट अटैक इन थाउजेंड
सीई और कॉमन एरा इन पेशावर। इसने अपना सबसे पहला आक्रमण 1000 ईसवी में पेशावर के शासक
ऑब्वियसली किस पर किया? जयपाल पर। और जयपाल किस वंश का राजा है? हिंदू शाही डायनेस्टी या हिंदू शाही वंश का राजा। यह
है महमूद गजनवी का सबसे पहला इन्वेशन या सबसे पहला आक्रमण जो उसने 1000 ईसवी में पेशावर के शासक राजा जयपाल पर किया। लेकिन
इस आक्रमण का कोई भी रिजल्ट या कोई भी नतीजा नहीं निकला। अगले ही साल यह फिर आया और 1 में और 1001 ईस्वी में इसने राजा
जयपाल के साथ एक युद्ध लड़ा वि इज नोन एज बैटल ऑफ वै या इसी को कहते हैं बैटल ऑफ पेशावर
क्योंकि पेशावर की ही तो राजधानी क्या है? वह हिंद कहलाता है वह हिंद या पेशावर का युद्ध।
अब हम हिस्ट्री में जितने भी बैटल्स लिखेंगे वो सारे के सारे इसी फॉर्मेट पर लिखेंगे। यानी कि सबसे पहले ईयर उसके बाद
बैटल का नाम। इतिहास के जितने भी बैटल्स होंगे वो सब प्लेसेस के नाम से होंगे। यानी कि जगहों के नाम से होंगे। पेशावर भी
शहर है पाकिस्तान में और पेशावर की ही कैपिटल क्या है? वह हिंद जो कि एक जगह का नाम है और जिनजिन के बीच में होंगे हम उन
दोनों के नाम लिख लेंगे। जैसे कि यह हुआ किस-किस के बीच में महमूद गजनवी और राजा जयपाल के बीच में।
दोनों के नाम लिख लेंगे और जो जीतेगा उसके आगे हम राइट का निशान लगा देंगे और जो हार जाएगा
उसके आगे हम क्रॉस कर देंगे। तो हमें पता चल गया युद्ध का नतीजा क्या हुआ? महमूद गजनवी डिफिटेड जयपाल। इस युद्ध में महमूद
गजनवी ने राजा जयपाल को पराजित कर दिया। लेकिन राजा जयपाल की हत्या नहीं की बल्कि उसका मजाक बनाकर उस पर हंसकर उस पर व्यंग
करके उसे जीवित छोड़कर वापस लौट गया महमूद गजनवी लेकिन इस अपमान को सहन नहीं कर पाया कौन राजा जयपाल तो महमूद गजनवी से पराजित
होकर भाई ने आत्महत्या कर ली इसने सुसाइड कर लिया तो लिखेंगे आप आफ्टर गेटिंग डिफिटेड
आफ्टर गेटिंग डिफिटेड जयपाल कमिटेड सुसाइड पराजित होने के बाद जयपाल ने आत्महत्या कर ली।
पराजित होने के बाद जयपाल ने आत्महत्या कर ली। आफ्टर गेटिंग डिफिटेड जयपाल कमिटेड सुसाइड।
यह महमूद गजनवी से पराजित हुआ और इसने सुसाइड कर लिया। इसने आत्महत्या कर ली और जयपाल के मरते ही जयपाल का सक्सेसर यानी
कि जयपाल का उत्तराधिकारी अगला राजा बन गया आनंदपाल। जयपाल के मरने के बाद हिंदू शाही
डायनेस्टी या हिंदू शाही वंश का अगला राजा बन गया आनंदपाल जो कि राजा जयपाल का ही बेटा हुआ करता था। ऑब्वियसली राजतंत्र है
और राजतंत्र में तो राजा के मरने के बाद राजा का बेटा ही क्या बनेगा? अगला शासक बनेगा।
क्या है? यह सेकंड अटैक है। हमें मतलब कि नंबर्स नहीं याद करने हैं। हां। लेकिन 1000 के
बाद यह दूसरा आक्रमण है इसका। इसके बाद इन8 इसके बाद 108 ईस्वी में हां एक और चीज हम
यहां पर जितनी भी तारीख लिखेंगे आपको कोई याद नहीं करनी है। सिर्फ वो तारीख याद करेंगे आप इस पर मैं स्टार बनाऊंगा।
बाकी पूरा का पूरा इतिहास हमें तारीखों के साथ पढ़ना है। लेकिन आपको सारी तारीखें याद नहीं करनी है। नहीं तो आफत आपकी और
ज्यादा बढ़ जाएगी। क्योंकि तारीख आपसे याद नहीं होंगी। इसके बाद 108 ईस्वी में महमूद गजनवी अटैक्ड आनंदपाल। महमूद गजनवी ने
आनंदपाल पर भी अटैक कर दिया और लड़ा गया सेकंड बैटल ऑफ वह हिंद। सेकंड बैटल ऑफ वै या वह हिंद का दूसरा
युद्ध या वह हिंद का द्वितीय युद्ध
जो कि एक बार फिर से महमूद गजनवी और आनंदपाल के बीच में लड़ा गया और इस युद्ध में भी महमूद गजनवी डिफिटेड आनंदपाल।
इसमें भी महमूद गजनवी ने आनंदपाल को पराजित कर दिया। आनंदपाल मारा गया और आनंदपाल के मरते ही उसका उत्तराधिकारी
उसका सक्सेसर बन गया अगला शासक त्रिलोचन पाल। आनंदपाल के पराजित होने के बाद और मरने के
बाद हिंदू शाही वंश का अगला रूलर अगला शासक बन गया त्रिलोचन पाल। तो हमें हिंदू शाही वंश में केवल तीन नाम
याद रखने हैं। जयपाल, आनंदपाल और त्रिलोचन पाल। यहां तक की बात एकदम क्लियर सबको। नेक्स्ट
अगला लिखेंगे इन4 ईस्वी में इन4
महमूद गजनवी अटैक्ड महमूद गजनवी अटैक्ड स्थानीश्वर महादेव टेंपल
104 ईवी में महमूद गजनवी ने स्थानीश्वर महादेव मंदिर पर आक्रमण किया। महमूद गजनवी ने स्थानीश्वर महादेव मंदिर
पर आक्रमण किया। और यह मंदिर कहां पर है? हरियाणा के थानेसर नामक स्थान पर हरियाणा में
कुरुक्षेत्र है हम सब जानते हैं और कुरुक्षेत्र में ही है थानेसर और थानेस्वर में ही है स्थानेश्वर महादेव टेंपल
जो आज हरियाणा का थानेस्वर नामक स्थान है इसे 1000 साल पहले इस जगह को स्थानेश्वर कहा जाता था और डेढ़ हजार साल पहले इसी
जगह को थाणेश्वर कहा जाता था और थाणेश्वर कभी सम्राट हर्षवर्धन की कैपिटल हुआ करती थी, राजधानी हुआ करती थी। क्या हमने
हर्षवर्धन का नाम सुना है? भारत के इतिहास का अंतिम हिंदू सम्राट कौन कहलाता है? हर्षवर्धन। पुष्यभूति डायनेस्टी पुष्यभूति
या वर्धन वंश का राजा सम्राट हर्षवर्धन। उसी की कैपिटल हुआ करती थी थाणेश्वर। वही थाणेश्वर आगे चलकर बना था स्थानेश्वर। और
यही थानेश्वर आज हरियाणा में क्या कहलाता है? थानेश्वर। इसी मंदिर पर अटैक किया महमूद गजनवी ने। मंदिर पर अटैक करके वहां
से लूटपाट की। वहां से गोल्ड लूटा और अंदर जो मूर्ति रखी थी उस मूर्ति को निकलवाकर इसने डिस्ट्रॉय करवा दिया। इसने नष्ट करवा
दिया। यही सवाल है कि बताइए जब इसने स्थानेश्वर महादेव मंदिर पर आक्रमण किया तो किस भगवान की मूर्ति को निकलवाकर इसने
नष्ट करवा दिया? महादेव। वेरी गुड। आपको नहीं लगता कि यह एग्जाम में पूछने के लिए थोड़ा सा ज्यादा
सिंपल सवाल हो गया क्योंकि नाम से ही पता चल रहा है। महादेव टेंपल में तो महादेव ही होंगे। है ना? लेकिन लिखेंगे ड्यूरिंग दिस
अटैक ही डिस्ट्रॉयड द स्टैचू ऑफ चक्र स्वामी। ही डिस्ट्रॉयड
द स्टचू ऑफ चक्र स्वामी। इसके द्वारा चक्र स्वामी की मूर्ति को नष्ट करवाया गया। और चक्र स्वामी का मतलब है
लॉर्ड कृष्णा। भगवान श्री कृष्ण की मूर्ति जो कहलाती थी चक्र स्वामी।
क्योंकि जब हम हरियाणा के कुरुक्षेत्र की बात करते हैं तो कुरुक्षेत्र के नाम से केवल और केवल दिमाग में आते हैं श्री
कृष्ण। क्योंकि महाभारत का युद्ध कुरुक्षेत्र में हुआ है और गीता का उपदेश भी श्री कृष्ण ने अर्जुन को कहां पर दिया?
कुरुक्षेत्र में दिया। इसलिए और पहले ही ऑप्शन में यही मिलेगा भगवान शिव की मूर्ति है ना? और हम जल्दबाजी में
क्या करेंगे? उसको आंसर कर देंगे। क्योंकि जब आप एग्जाम देने के लिए जाओगे या आप मॉक टेस्ट भी दोगे आप नोटिस करना केवल और केवल
सबसे ज्यादा जो अट्रैक्टिव क्वेश्चन होंगे सबसे ज्यादा जो अट्रैक्टिव सवाल होंगे वो जीएस के होंगे और सबसे ज्यादा गलती भी
हमारी कहां पे होगी जीएस में ही होगी और अट्रैक्टिव इसलिए आप अटेंप्ट जरूर करेंगे आपका छोड़ने का मन नहीं करेगा क्योंकि
जैसे ही हम जीएस का कोई भी क्वेश्चन पढ़ते हैं तो हर क्वेश्चन को पढ़ के हमें ऐसा ही लगता है
कहीं तो इसके बारे में पढ़ा था। कुछ कुछ तो इसके बारे में पढ़ा था। और फिर अगर आपके मन में जरा सा भी यह डाउट आया कि हां
मैंने इसके बारे में कुछ पढ़ा है तो यह बात तय है। चाहे आप तुक्का मार के आओ लेकिन आप क्वेश्चन छोड़ोगे नहीं। और जीएस
में हम सबसे बड़ी गलती ही क्या करते हैं? सारे क्वेश्चंस को अटेम्प्ट करने की कोशिश। और जीएस इकलौता ऐसा सेक्शन है
जिसमें आपके मार्क्स नेगेटिव में भी आ सकते हैं। खाता ही नहीं खुलेगा। है ना? नेगेटिव में मार्क्स भी आ जाते हैं जीएस
में लोगों के क्योंकि जीएस में उनको कुछ नहीं आता होता है। इसलिए हमें उस चीज से बिल्कुल बचना होगा क्योंकि जीएस का
क्वेश्चन आपको अट्रैक्ट करेगा। आपको आकर्षित करेगा। कम एंड अटेंड और अटेमप्ट मी सीरियसली। और जब आप उसमें ऑप्शंस
पढ़ेंगे तो ऑप्शन पढ़कर आपको और ज्यादा लगने लगेगा कि हां यार इसके बारे में तो मैंने पढ़ा था। आपका दिल कहेगा ऑप्शन ए इज
द राइट आंसर। फिर आप थोड़ा सा दिमाग लगाओगे। आपका दिमाग कहेगा नहीं नहीं नहीं बी है सही आंसर। अब दिल और दिमाग के बीच
में लड़ाई होगी जब आप जीएस का क्वेश्चन अटेम्प्ट करेंगे। और जैसे ही ए और बी में से आप डिसाइड ही करने वाले होंगे कि मैं
क्या आंसर करूं। तुरंत आप लॉजिक लगाना शुरू करेंगे और लॉजिकली आपको लगेगा नहीं यार ऑप्शन सी होना चाहिए और जैसे ही आप
ऑप्शन सी के पास पहुंच रहे होंगे आपको अचानक से याद आएगा पिछले लगातार चार क्वेश्चंस के आंसर सी है। अब एक और सी
नहीं होना चाहिए। डी लगाएंगे। है ना? तो ऐसा कोई काम आपको नहीं करना। अगर आता है तो ठीक है। नहीं आता है तो तुरंत आगे बढ़
जाइए। आपको नेगेटिव मार्किंग नहीं करवानी है। क्योंकि नेगेटिव मार्किंग अगर होगी तो जो मेहनत मैथ, इंग्लिश और रीजनिंग में करी
होगी उस पर भी पानी फिर जाएगा क्योंकि आपके जीएस के जो मार्क्स हैं है ना? मैंने कहा ना नेगेटिव में भी आ सकते हैं। शुरू
शुरू में तो आएंगे भी क्योंकि अभी आपने तैयारी शुरू करी है जब हम लोग आपसे मॉक्स वगैरह लेना शुरू करेंगे क्योंकि यहां पे
हर संडे को क्या होता है? मॉक टेस्ट होता है। तो हर संडे को आकर आप मॉक टेस्ट देंगे। हां। लेकिन उस मॉक टेस्ट की खास
बात ये है कि जितना सिलेबस आपका हुआ है बस उसी से रिलेटेड आपसे क्वेश्चन पूछे जाएंगे। ओवरऑल फुल मॉक आपको नहीं दिया
जाएगा। तो आप धीरे-धीरे हर वीक यह एनालाइज भी करते रहेंगे कि आपकी तैयारी कैसी चल रही है। क्योंकि हर संडे को हमने आपके लिए
मॉक टेस्ट बनाना है और आपसे मॉक टेस्ट में सवाल पूछने ही पूछने हैं। ठीक है? अब इसने इस आक्रमण में चक्र स्वामी की मूर्ति को
नष्ट कर दिया और इसी साल जिस साल इसने स्थानेश्वर महादेव मंदिर पर अटैक किया था। इसी साल महमूद गजनवी के साथ इसका एक फेमस
राइटर इसका एक प्रसिद्ध लेखक भारत आया जिसे हम जानते हैं अलबरूनी के नाम से। क्या हमने अलबरूनी का नाम कभी सुना है?
इसी साल इसी साल इसका एक फेमस राइटर या इसका एक प्रसिद्ध लेखक इसके साथ भारत आया था जिसका नाम है अलबरूनी और यह जो अलबरूनी
था यह अरबी और फारसी भाषा के साथ-साथ संस्कृत भाषा का भी महान विद्वान हुआ करता था। इसीलिए आपसे पूछेंगे बताइए हिंदू
पुराणों का अध्ययन करने वाला सबसे पहला मुस्लिम या सबसे पहला मुसलमान किसे माना जाता है? अलबरूनी को लिख लीजिएगा इसी के
साथ एक लाइन। फर्स्ट मुस्लिम हु रीड फर्स्ट मुस्लिम हु रीड हिंदू पुराणास फॉर द फर्स्ट टाइम। हिंदू पुराणों का अध्ययन
करने वाला प्रथम मुसलमान फर्स्ट मुस्लिम टू रीड हिंदू पुराणास फॉर द फर्स्ट टाइम हिंदू
पुराणों का अध्ययन करने वाला प्रथम मुसलमान किसे माना जाता है? अलबरूनी को। और हम सब जानते हैं हिंदू पुराणों की
संख्या कितनी है? अच्छा आपको यह पता है कि हिंदू धर्म में पुराण नाम की कोई चीज होती है? यह तो पता
ही होगा। मत्स्य पुराण, शिव पुराण, गरुड़ पुराण सबने पता ही है। इनकी कुल संख्या कितनी है? 18 18 तो हिंदू धर्म में
पुराणों की संख्या 18 है। हमारे पास 18 पुराण हैं और इन सबको अध्ययन करने वाला, पढ़ने वाला सबसे पहला मुस्लिम कौन कहलाता
है? अलबरूनी। क्योंकि यह संस्कृत भाषा का भी विद्वान था। इसके बाद लिखेंगे इन 2018 एंड 19
इन 2018 एंड 19 महमूद गजनवी डिस्ट्रयड मेनी टेंपल्स
महमूद गजनवी डिस्ट्रयड मेनी टेंपल्स इन मथुरा कन्नौज
एंड उज्जैन 10819 ईवी में इसने मथुरा, कन्नौज और उज्जैन के
कई मंदिर नष्ट करवाए। इसने मथुरा, कन्नौज और उज्जैन के कई मंदिर नष्ट करवाए। हम सब जानते हैं मथुरा और
कन्नौज उत्तर प्रदेश में है और उज्जैन एमपी यानी कि मध्य प्रदेश में है और इसी साल 1 2019 ईस्वी में ही इसने अपना अभियान
शुरू किया कालिंजर के खिलाफ और अगले तीन से चार वर्ष यह कालिंजर को जीतने की कोशिश करता रहा। लिखेंगे
20212 21 इसने किया कालिंजर मिशन यानी कि कालिंजर
अभियान 202021 में हुआ कालिंजर मिशन या कालिंजर अभियान वेयर इज कालिंजर साउथर्न यूपी और
नॉर्दन एमपी को क्या कहते हैं? बुंदेलखंड यानी कि उत्तर प्रदेश का जो दक्षिणी भाग है और मध्य प्रदेश का जो उत्तरी भाग है उस
क्षेत्र को क्या कहा जाता है? बुंदेलखंड कहा जाता है और बुंदेलखंड की ही राजधानी हुआ करती थी कालिंजर। बुंदेलखंड में उस
समय एक वंश चलता था जिसको चंदेला डायनेस्टी या चंदेल वंश कहते हैं। क्या हमने कभी चंदेल वंश का नाम सुना है?
अच्छा क्या हमने खजुराहो टेंपल्स का नाम सुना है? मध्य प्रदेश में है खजुराहो टेंपल्स या खजुराहो के मंदिर। इनका
निर्माण किसने करवाया? चंदेलों ने करवाया। चंदेल राजाओं ने करवाया। इस समय कालिंजर चंदेलों की राजधानी हुआ करती थी और जो
कालिंजर का किला है यह कहां पर हुआ करता था? वर्तमान में उत्तर प्रदेश में एक डिस्ट्रिक्ट है वि इज नोन एज बांदा
डिस्ट्रिक्ट और बांदा डिस्ट्रिक्ट में ही कालिंजर नामक स्थान है। वहीं पर एक किला भी है जिसको कालिंजर फोर्ट कहते हैं या
कालिंजर का किला कहते हैं। यह हमें इसलिए याद रखना है क्योंकि आगे चलकर हम कई बार इस कालिंजर फोर्ट या कालिंजर के किले का
जिक्र करेंगे। शेरशाह सूरी का नाम सुना है ना? कहां मरेगा जाकर? कालिंजर में। जब कालिंजर मिशन पर जाएगा तो अपने तोप से आग
जलता हुआ गोला फेंकेगा कालिंजर के किले पर और वह किले की दीवार से टकराकर वापस वहीं आ जाएगा जहां शेरशाह सूरी खड़ा था। जहां
पर विस्फोट होना चाहिए था वहां पर नहीं होगा। विस्फोट वहां पर होगा जहां पर शेरशाह सूरी खड़ा था। और उसी में घायल
होकर झुलसकर कौन मरेगा? शेरशाह सूरी। मुगल बादशाह हुमायूं अपना सबसे पहला अटैक किस पर करेगा? कालिंजर पर। दिल्ली का सुल्तान
शमसुद्दीन इल्तुतमिश भी कालिंजर मिशन पर जाएगा जिसको जीतने में उसकी मदद करेगी उसकी बेटी जिसका नाम था रजिया। तो कहने का
मतलब है कालिंजर का जिक्र हम कई बार करेंगे। जब महमूद गजनवी ने कालिंजर पर अटैक किया तो उस समय कालिंजर में एक चंदेल
राजा रूल किया करता था जो इतिहास में प्रसिद्ध है विद्याधर चंदेल के नाम से। इस समय कालिंजर का शासक हुआ करता था
विद्याधर चंदेल। ऑब्वियसली जो किस वंश का था? चंदेल वंश का।
अब इस मिशन को हमें क्यों याद रखना है? हमें इसलिए याद रखना है कि महमूद गजनवी ने हिंदुस्तान में 17 अटैक्स किए और सारे के
सारे अटैक्स में यह सफल भी हुआ। लेकिन एक्सेप्ट किस मिशन के? कालिंजर मिशन के। क्योंकि विद्याधर चंदेल भारत का वो इकलौता
राजा है। एकमात्र शासक है जिसे महमूद गजनवी पराजित नहीं कर सका। कहने का मतलब विद्याधर चंदेल महमूद गजनवी से नहीं हारा।
महमूद गजनवी ने सबको हराया। लेकिन वह नहीं हरा पाया विद्याधर चंदेल को और ना ही वह अधिकार कर पाया कालिंजर फोर्ट पर। कालिंजर
के किले पर अधिकार नहीं कर पाया महमूद गजनवी। इसीलिए इकलौता राजा है जो कभी भी महमूद गजनवी से नहीं हारा। ही वास
विद्याधर चंदेल। बाकी सारे के सारे अटैक्स में जीत किसकी हुई? महमूद गजनवी की। अब महमूद गजनवी का
सबसे प्रसिद्ध आक्रमण और एग्जाम के लिए सबसे ज्यादा इंपॉर्टेंट अटैक होता है इसका 16th अटैक। इसका 16वां आक्रमण जो इसने कब
किया? 1025 में यह इंपॉर्टेंट डेट है। आपको याद रखनी है और इतना इंपॉर्टेंट अटैक है कि यह भी याद
रखना है कि यह किसका कौन से नंबर का आक्रमण है? 16वें नंबर का आक्रमण जो इसने किया गुजरात के काठियावाड़ के सोमनाथ
टेंपल या सोमनाथ मंदिर पर। महमूद गजनवी ने गुजरात के सोमनाथ टेंपल या सोमनाथ मंदिर पर आक्रमण किया।
1025 ईस्वी में इसने गुजरात के सोमनाथ टेंपल या सोमनाथ मंदिर पर अटैक किया। आपसे पूछेंगे हु वाज द रूलर
ऑफ गुजरात दैट टाइम? इस समय गुजरात में शासन कर रहा था भीमदेव फर्स्ट या भीमदेव
प्रथम जब इसने गुजरात के सोमनाथ मंदिर पर अटैक किया उस समय गुजरात का शासक हुआ करता था
भीम फर्स्ट या भीमदेव फर्स्ट जो कि गुजरात में एक डायनेस्टी चला करती थी चालुक्य डायनेस्टी या चालुक्य वंश और गुजरात के
चालुक्यों को ही क्या कहा जाता था? सोलंकी। यह चालुक्य या सोलंकी वंश का राजा था।
और ऐसा इतिहासकार कहते हैं कि जब महमूद गजनवी गुजरात के सोमनाथ मंदिर को लूटने के लिए गया तो वह ओरिजिनली लकड़ी का बना हुआ
था और उस पर एक सोने का दरवाजा भी लगा था। जब महमूद गजनवी गुजरात के सोमनाथ टेंपल को लूटने के लिए गया तो इसने जाकर मंदिर को
नष्ट करवाया, मंदिर को तुड़वाया, वह सोने का दरवाजा वहां से लूट लिया और अंदर जितना भी गोल्ड था वह सारा का सारा लूट कर यह
उत्तर भारत की तरफ बढ़ने लगा। और जैसे ही उत्तर भारत की तरफ बढ़ने लगा राजस्थान में इसको घेर लिया। किसने? जाटों ने। और वह
सोने का दरवाजा जो यह लूट कर लाया गुजरात के सोमनाथ मंदिर से वह जाटों ने महमूद गजनवी से वापस छीन लिया। इसी बात का बदला
लेने के लिए महमूद गजनवी का लास्ट अटैक अंतिम आक्रमण किस पर होता है? जाटों पर होता है। लेकिन आपसे पूछेंगे कि बताइए
महमूद गजनवी के नष्ट करवाने के बाद सोमनाथ मंदिर का निर्माण सबसे पहली बार किसने करवाया? तो ध्यान रखेंगे भीमदेव प्रथम ने
गुजरात के सोमनाथ मंदिर का निर्माण पहली बार पत्थरों का इस्तेमाल करके करवाने वाला शासक कौन है? भीम फर्स्ट या भीम प्रथम जो
कि चालुक्य या सोलंकी वंश का राजा है। राजस्थान के सबसे फेमस हिल स्टेशंस में से एक है माउंट आबू। हम सब जानते हैं। माउंट
आबू इस फेमस फॉर। अब मैं राजस्थानियों से तो यह सवाल पूछ ही सकता हूं। है ना? आप
अरावली हिल्स के लिए वह तो जयपुर भी फेमस है। अलवर भी फेमस है। माउंट आबू इज फेमस फॉर दिलवाड़ा जैन
टेंपल्स। दिलवाड़ा जैन मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है। राजस्थान का माउंट आबू। और यह जो दिलवाड़ा जैन मंदिर है इसी राजा
भीमदेव प्रथम का एक सामंत हुआ करता था जिसका नाम था विमल शाह। उसी विमल शाह ने बनवाया था दिलवाड़ा जैन टेंपल्स को या
दिलवाड़ा के जैन मंदिरों को जिसका निर्माण वाइट मार्बल या संगमरमर से करवाया गया है। तो कहने का मतलब इसी के शासनकाल में बना
सोमनाथ मंदिर और इसी के शासनकाल में बने दिलवाड़ा जैन टेंपल्स जो कि माउंट आबू राजस्थान में है। लेकिन सोमनाथ मंदिर हर
किसी मुस्लिम इनवेडर का क्या रहेगा? फेवरेट मंदिर रहेगा। जो भी आएगा जाकर अटैक कर देगा सोमनाथ मंदिर पर और तोड़ देगा। तो
पहली बार तो सोमनाथ मंदिर का निर्माण भीम प्रथम ने करवाया। लेकिन अगर आपसे पूछे कि जिस रूप में आज हमें सोमनाथ मंदिर नजर आता
है आखिरी बार उसका निर्माण किसके द्वारा करवाया गया था? तो ध्यान रखेंगे पहली बार भीम फर्स्ट और आखिरी बार सरदार वल्लभ भाई
पटेल। तो सोमनाथ मंदिर सरदार वल्लभ भाई पटेल के द्वारा बनवाया गया है आखिरी बार।
उसके बाद डिस्ट्रॉय नहीं हुआ। अब हो भी नहीं सकता क्योंकि हम आप जानते हैं कि हम आजाद हो गए। हमें आजादी मिल गई। और हम
जानते हैं हु वास सरदार वल्लभ भाई पटेल? आयरन मैन तो टोनी स्टार्क भी है। है ना?
सरदार वल्लभ भाई पटेल फर्स्ट डेपुटी प्राइम मिनिस्टर ऑफ इंडिपेंडेंट इंडिया स्वतंत्र भारत के सबसे पहले उप
प्रधानमंत्री और स्वतंत्र भारत के सबसे पहले गृह मंत्री सूचना एवं प्रसारण मंत्री यानी कि इंफॉर्मेशन एंड ब्रॉडकास्टिंग
मिनिस्टर कौन हुए हैं? सरदार वल्लभ भाई पटेल। इन्होंने ही भारत का एकीकरण किया है। क्योंकि हमारे देश में जितनी भी देसी
रियासतें थी उन सारी के सारी देसी रियासतों को भारत संघ में मिलाने का काम किसने किया? सरदार वल्लभ भाई पटेल ने। और
जर्मनी का एकीकरण किसने किया था? बिस्मार्क ने। इसीलिए इनको कहते हैं भारत का बिस्मार्क। यह क्वेश्चन कभी जिंदगी में
नहीं आएगा कि हु इज नोन एज आयरन मैन ऑफ इंडिया? क्योंकि यह देश का बच्चा-बच्चा जानता है। एसएससी क्या पूछता है? वि
पर्सनालिटी ऑफ मॉडर्न इंडिया इज नोन एज बिस्मार्क ऑफ इंडिया। भारत का बिस्मार्क कहते हैं सरदार वल्लभ भाई पटेल को क्योंकि
बिस्मार्क वो आदमी है जिसने जर्मनी का एकीकरण किया और सरदार वल्लभ भाई पटेल वो व्यक्ति हैं जिन्होंने भारत का एकीकरण
किया। इसीलिए इनकी तुलना बिस्मार्क से होती है और इन्हें भारत का बिस्मार्क कहा जाता है और यही रीजन है कि हर साल 31 ऑफ
अक्टूबर को 31 अक्टूबर को इन्हीं के जन्मदिवस पर हम क्या मनाते हैं? नेशनल यूनिटी डे राष्ट्रीय एकता दिवस। क्योंकि
वो बर्थडे होता है किसका? सरदार वल्लभ भाई पटेल का। यहां तक की बात एकदम क्लियर। तो बस महमूद
गजनवी डिड ह लास्ट अटैक। महमूद गजनवी का अंतिम आक्रमण 12
27 ईसवी में हुआ जाटों पर सिंध के पास सिंध के पास जाटों को पराजित करके महमूद गजनवी यहां से वापस लौट गया और
जिससे पहले कि वो अगला अटैक अगला आक्रमण करने के लिए दोबारा से हिंदुस्तान में आता इन30
1030 ईस्वी में महमूद गजनवी डाइड 1030 ईस्वी में महमूद गजनवी की मृत्यु हो गई [नाक से की जाने वाली आवाज़]
इन30 महमूद गजनवी डाइड अगला पॉइंट ही वाज फर्स्ट मुस्लिम इन इंडिया
ही वास फर्स्ट मुस्लिम इन इंडिया हु हैड टेकन द टाइटल्स ऑफ सुल्तान एंड गाजी
हिंदी में लिखेंगे सुल्तान और गाजी की उपाधि लेने वाला सुल्तान और गाजी की उपाधि लेने वाला यह
प्रथम मुसलमान था। ही वाज़ फर्स्ट मुस्लिम ही वाज फर्स्ट मुस्लिम हु हैड टेकन द
टाइटल ऑफ सुल्तान एंड गाजी। अब सुल्तान तो वह उपाधि है, वो टाइटल है जो लीगली या ऑफिशियली कौन देते हैं?
खलीफा। और अब खलीफा कहां पर है? बगदाद में। जब हमने पढ़ा कि मोहम्मद बिन कासिम आया तो उस समय सीरिया के शासक इस्लाम के
क्या हुआ करते थे? खलीफा हुआ करते थे। लेकिन जब महमूद गजनवी आया तो उस समय बगदाद के शासक इस्लाम के खलीफा कहलाते थे। और हम
जानते हैं बगदाद किसकी राजधानी है? इराक। और इराक को ही हजार साल पहले क्या कहते थे? मेसोपोटामिया।
मेसोपोटामिया या इराक की राजधानी बगदाद और बगदाद के ही शासक क्या हुआ करते थे? खलीफा हुआ करते थे। तो ऑफिशियली सुल्तान की
उपाधि खलीफा दिया करते थे उन रूलर्स को जो रूलर्स अपने आप को रिप्रेजेंटेटिव समझा करते थे। प्रतिनिधि समझा करते थे खलीफाओं
का। लेकिन महमूद गजनवी को किसी खलीफा ने सुल्तान की उपाधि नहीं दी। इसने खुद अपने आप को क्या कहलवाया? सुल्तान। और इसने
गाजी की भी उपाधि ली। अब गाजी का मतलब क्या है? द पर्सन हु बिलीव्स इन कलमा इज अ मुस्लिम एंड द पर्सन हु डज नॉट बिलीव इन
कलमा इज काफिर। और काफिरों का नाश करने वाला योद्धा वॉरियर ही क्या कहलाता है? गाजी।
तो भारत में सुल्तान और गाजी की उपाधि सबसे पहले महमूद गजनवी ने ली और लिखेंगे ही इशूड
ही इशूड सिल्वर कॉइंस एंड ही इशूड सिल्वर कॉइंस विद संस्कृत स्क्रिप्ट्स
और इसी ने और इसी ने संस्कृत लेख वाले और इसी ने संस्कृत लेख वाले चांदी के सिक्के चलाए।
ही इशूड सिल्वर कॉइंस विद संस्कृत स्क्रिप्ट इसी ने संस्कृत लेख वाले चांदी के सिक्के चलवाए।
क्लियर एकदम बात? आखिरी चीज जो हमें महमूद गजनवी से रिलेटेड याद रखनी है। लिखेंगे फेमस राइटर्स। इसके प्रसिद्ध लेखक।
कल मैंने बुक पहले लिखवाई। कहानी बाद में सुनाई। है ना? आज हमने कहानी पहले कर ली है। अब हम जानेंगे यह सारी की सारी
जानकारी मिल कहां से रही है। है ना? क्योंकि मैंने कहा ना मैं यहां पे आकर जो भी कहूंगा उसमें एक भी बात ऐसी नहीं है जो
मैं घर से बनाकर लाऊं। सारी की सारी बातें कहीं ना कहीं पर लिखित है।
फेमस राइटर्स प्रसिद्ध [नाक से की जाने वाली आवाज़] लेखक
सबसे ज्यादा फेमस अलबरूनी और अलबरूनी ही लिखता है एक फेमस बुक जो कहलाती है किताब उल हिंद
या इसी को कहते हैं तहकीक के हिंद किताब उल हिंद को किसने लिखा? अलबर बरूनी ने लिखा। इसी बुक को तहकीक हिंद भी कहते
हैं। और तहकीक का मतलब क्या होता है? डिस्कवरी यानी कि खोज। तो हो सकता है आपको एग्जाम में क्या दिया
जाए कि बताइए हु वास द राइटर ऑफ डिस्कवरी ऑफ इंडिया या भारत की खोज नामक पुस्तक किसने लिखी तो आप आंसर क्या करेंगे
तो आप आंसर करेंगे पंडित जवाहरलाल नेहरू है ना क्योंकि अगर अगर अलबरूनी की पुस्तक पूछी जाएगी तो केवल और केवल या तो तहकीक
हिंद लिखा हुआ आएगा या फिर किताबुल हिंद लिखा लिखा हुआ आएगा। तहकीक का मतलब है डिस्कवरी। लेकिन डिस्कवरी ऑफ इंडिया
पुस्तक किसने लिखी है? पंडित जवाहरलाल नेहरू ने। समझ गए? इसका मतलब है कंफ्यूज होने की बिल्कुल जरूरत नहीं पड़ेगी। इसके
बाद महमूद गजनवी का कोर्ट राइटर महमूद गजनवी का दरबारी लेखक हुआ फिरदौसी।
इसका दरबारी लेखक हुआ फिरदौसी और फिरदौसी ने ही एक फेमस बुक लिखी जो कहलाती है शाहनामा।
महमूद गजनवी ने फिरदौसी को अपॉइंट किया शाहनामा नामक पुस्तक लिखने के लिए और महमूद गजनवी ने फिरदौसी से कहा कि आप
शाहनामा में अफरा शियाब वंश का जिक्र कीजिए और अफरा शियाब वंश के बारे में बताइए। अगर आप ऐसा करेंगे तो बदले में
आपको इनाम मिलेगा। क्योंकि सारे के सारे राइटर्स तो शासक के दरबार में होते ही इसलिए थे। उनका काम केवल क्या था? राजा की
बढ़ाई करना, तारीफें करना, चापलूसियां करना और राजा के बारे में सब पॉजिटिव पॉजिटिव लिखना। जो काम आज हमारे मीडिया
वाले करते हैं। है ना? उनका काम ही क्या है? कि वो राजा की केवल और केवल तारीफें करेंगे, प्रशंसा करेंगे और बदले में राजा
खुश होकर उन्हें इनाम देगा। इसी मोटिवेशन की वजह से वह दरबार में लेखक हुआ करते थे। महमूद गजनवी ने कहा कि आप अफरा शियाब वंश
पर एक पुस्तक लिखिए। इसके बदले में मैं आपको इनाम दूंगा। लेकिन जैसे ही इसने शाहनामा पुस्तक पूरी की तो महमूद गजनवी ने
इसको महमूद गजनवी ने इसको कोई रिवॉर्ड नहीं दिया। नाराज हुआ फिरदौसी और महमूद गजनवी का दरबार छोड़कर चला गया। इसके बाद
महमूद गजनवी का कोर्ट हिस्टोरियन यानी कि दरबारी इतिहासकार हुआ
लिखेंगे उतबी और उतबी के ही द्वारा लिखी गई प्रसिद्ध पुस्तक जो कहलाती है तारीख यामिनी
तारीख यामिनी क्योंकि हम यामिनी वंश के बारे में पढ़ रहे हैं। और यामिनी वंश की तारीख कौन लिख
रहा है? उत लिख रहा है। अब यहां पर तारीख का क्या मतलब है? क्या मतलब होता है तारीख का? शाबाश। यही
उम्मीद थी हमें आपसे। तारीख वो राइटिंग्स हुआ करती थी। वो लेख हुआ करते थे जो राइटर्स शासक के दरबार में बैठकर लिखा
करते थे। यानी कि उस शासक की दिनचर्या क्या है? पूरा का पूरा रूटीन क्या है? काफी सारे लोगों को डायरी लिखने की बीमारी
होती है। है ना? मतलब आदत होती है। ऑब्वियसली वो क्या करते हैं? सुबह से ले सोने तक जो भी कुछ करेंगे वो सारी की सारी
बातें या उसमें से कुछ इंपॉर्टेंट इंपोर्टेंट बातें अपनी डायरी में क्या कर लेंगे? नोट कर लेंगे।
है ना? बिल्कुल ऐसे ही राजा सुबह से लेकर शाम तक क्या कर रहा है? क्या नई पॉलिसी चला रहा है? कहां पर अटैक करने की
प्लानिंग कर रहा है? कितनी शादियां कर रहा है। सब कुछ वो क्या करेगा? आदमी उसके दरबार में बैठकर लिखता रहेगा। उन्हीं
लेखों को क्या कहा जाता था? तारीख। तर्किश यानी कि तुर्क परंपरा में इसको तारीख कहा जाता था। तो तारीख यामिनी को
किसने लिखा? उतवी ने लिखा। क्योंकि यह महमूद गजनवी के दरबार में ही बैठने वाला क्या है? एक इतिहासकार है। इसका मतलब
तारीख यामिनी से हमें हो सकता है कई सारी बातें सच-सच पता चलती हो। हालांकि देखो चापलूसी भरे शब्द हैं। आधे से ज्यादा
चीजों का वर्णन तो बढ़ा चढ़ाकर ही किया होगा। इतिहास में जितने भी पुस्तकें हैं और जितने भी राइटर्स हैं सबने
अतिशयोक्तियों का इस्तेमाल भरपूर किया है। क्योंकि कोई भी पुस्तक बेस्ट सेलर तभी बनेगी जब उसमें बढ़ा चढ़ाकर वर्णन किया
जाएगा। अदरवाइज लोगों को कहां स्वाद आएगा? हमें मजा भी चाहिए ना। मलिक मोहम्मद जायसी का नाम सुना है? मलिक मोहम्मद जायसी एक
एपिक लिख रहा है। यानी कि एक महाकाव्य लिख रहा है पद्मावत। और यह पद्मावत अलाउद्दीन खिलजी के
चित्तौड़ मिशन के बारे में हमें जानकारी देता है। चित्तौड़ का राजा महारावल रतन सिंह, रतन सिंह की पत्नी रानी पद्मिनी या
रानी पद्मावती। अलाउद्दीन खिलजी पद्मावती को प्राप्त करने के लिए 1303 ईस्वी में बोरिया बिस्तर और सेना लेकर कहां पहुंच
गया? चित्तौड़ पहुंच गया। अब यह पूरी की पूरी जो कहानी है हमें पता कहां से चल रही है? एक महाकाव्य से यानी कि पद्मावत से और
पद्मावत को लिख रहा है मलिक मोहम्मद जायसी और इतनी सारी अतिशयोक्तियों का इस्तेमाल कर रहा है कि उस पर बिलीव करना क्या है?
नामुमकिन। मलिक मोहम्मद जायसी लिख रहा है कि चित्तौड़ की महारानी रानी पद्मावती इतनी ज्यादा रूपमती, इतनी ज्यादा
सौंदर्यवान और इतनी ज्यादा खूबसूरत थी कि जब वो शरबत पान किया करती थी। जब वो शरबत पिया करती थी तो वो गले से उतरते हुए नजर
आता था। है ना? अब ऐसा तो हो ही नहीं सकता ना। यह तो इंपॉसिबल है। ट्रांसपेरेंट गला थोड़ी होगा। है ना? कि वो शरबत पहन करे।
कहने का मतलब वो सौंदर्य का बड़ा चढ़ाकर क्या कर रहा है? वर्णन कर रहा है और वही काम किया करते थे दरबार में बैठने वाले
लोग क्योंकि हर बात में अति शोक्ति और बढ़ा चढ़ाकर वर्णन करेंगे किसका राजा का हमने बहुत सारे राजाओं के बारे में सुना
है। टीपू सुल्तान की तलवार है ना मैसूर में आप जाएंगे तो वहां पर आपको टीपू सुल्तान की तलवार देखने को मिलेगी।
चार लोग मिलकर उसको उठाते हैं और सफाई करते हैं उसके और कहते हैं यह टीपू सुल्तान की तलवार है। अबे टीपू 80 किलो का
भाला महाराणा प्रताप सुना है ना 80 किलो का भाला। अब आप खुद सोचिए 80 किलो का भाला सिर्फ उठाना नहीं है। अस्त्र है वह अस्त्र
और अस्त्र का मतलब होता है जो फेंक के चलाया जाता है। वो 80 किलो का भाला फेंकना भी है। सुनने में क्या लग रहा है?
इंपॉसिबल सा लग रहा है। तो कहने का मतलब यह है कि कई बार राजा महाराजाओं को जब तोहफे दिए जाते थे, जब गिफ्ट्स दिए जाते
थे, जब मोमेंटोज़ दिए जाते थे तो उसमें इन चीजों का इस्तेमाल किया जाता था। उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती का
जन्मदिवस था तो मायावती के लिए 100 किलो का हार बनवाया गया और उसे 100 किलो का हार पहनाया गया। अबे मायावती 100 किलो का हार
पहन के कहां घूमेगी? दब के मर जाएगी वो है ना लेकिन वह क्या है सम्मान देने के लिए ऑनर देने के लिए क्या
बनवाया गया 80 किलो का भाला 40 किलो की ढाल है ना जिसको चलाया नहीं जाएगा जिसको केवल और केवल यादगार के रूप में क्या किया
जाएगा रखा जाएगा तो ऐसा कई बार हुआ करता था कि राजा महाराजाओं को खुश करने के लिए लोग उनके लिए तोहफे लेकर जाते थे गिफ्ट्स
लेकर जाते थे और उन गिफ्ट्स में ये सारी की सारी चीजें दी जाती थी जिसको प्रैक्टिकली इस्तेमाल कर पाना क्या है?
इंपॉसिबल है। और इसके बाद आखिरी राइटर एक और बंदे का नाम याद रखेंगे वैकी। और वैकी के ही द्वारा लिखी गई प्रसिद्ध
पुस्तक जो कहलाती है तारीख सुबुक्त गिन। तारीख सुबुक्त गन।
यहां तक की बात ऑल क्लियर पक्की बात तो बस दैट्स ऑल अबाउट महमूद गजनवी कल हमारी मुलाकात होगी सेम टाइम सेम जगह और कल हम
बात करेंगे मोहम्मद गौरी के बारे में कल आएगा मोहम्मद गौरी और तराइन के दूसरे युद्ध में पृथ्वीराज चौहान को हराकर यहां
पर मुस्लिम रूल एस्टैब्लिश करेगा तो कल की कहानी मोहम्मद गौरी के बारे में होगी और उसके बाद हम स्टार्ट करेंगे दिल्ली सल्तनत
त दिल्ली सल्तनत में गुलाम वंश जिसमें हम कुतुबुद्दीन ऐबक इल्तुतमिश और रजिया सुल्तान के बारे में पढ़ेंगे। चलिए
तो
Mahmud of Ghazni was a Turkish ruler of the Ghaznavid (Yamini) dynasty who led 17 raids into India between 1000 and 1027 CE. His primary objectives were to plunder India's immense wealth—often referring to it as a 'Golden Sparrow'—and to spread Islam. He specifically targeted Hindu temples for their treasures, earning him the title 'But Shikan' (Idol Breaker).
The 1025 CE attack on the Somnath Temple in Gujarat was Mahmud's 16th and most famous raid, targeting the Solanki dynasty ruler Bhima I. He plundered vast amounts of gold and the temple's golden door, which was later recaptured by the Jats. This invasion symbolized the peak of Mahmud's military iconoclasm and cemented his legacy as ‘Ghazi’ (warrior for Islam).
Vidyadhara Chandela, the ruler of the Kalinjar region, was the only Indian king whom Mahmud could not defeat during his 1020-1021 CE mission. Mahmud's failure against the Chandela dynasty highlights that not all Indian kingdoms were easily subdued, though his raids overall weakened many regional powers and paved the way for later Muslim rule.
Mahmud's raids systematically dismantled major Hindu kingdoms like the Hindu Shahi dynasty, whose King Jayapala committed suicide after defeat, and his descendants Anandapala and Trilochanapala followed. This destruction of frontier defenses and temple wealth plunder created a power vacuum, directly setting the stage for the establishment of the Delhi Sultanate by later Ghurid rulers.
Three major writers documented Mahmud's era: Al-Biruni wrote Kitab-ul-Hind (Tahqiq-e-Hind), a study of Indian culture; Firdausi composed the Persian epic Shahnama; and Utbi authored Tarikh-e-Yamini, a history of the Ghaznavid dynasty. Al-Biruni notably accompanied Mahmud on his 1014 CE invasion, becoming the first Muslim to study Hindu Puranas.
Mahmud earned the title 'But Shikan' due to his systematic destruction of Hindu and Jain temples during his raids, such as the Sthaniswara Mahadev Temple in Thanesar (1014 CE) and temples in Mathura, Kannauj, and Ujjain (1018-1019 CE). He destroyed sacred idols like the statue of Chakraswami (Lord Krishna) to assert Islamic supremacy and loot precious metals, blending religious zeal with economic plunder.
Beyond destruction, Mahmud introduced Persian and Islamic administrative practices, minted silver coins with Sanskrit inscriptions, and adopted titles like 'Sultan' and 'Ghazi' for the first time in India. His patronage of scholars like Al-Biruni and Firdausi enriched cultural exchange, even as his invasions disrupted indigenous dynasties, accelerating the shift from ancient to medieval India.
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