शंघाई सहयोग संगठन (SCO) का परिचय
- 2001 में स्थापित एक बहुपक्षीय अंतरराष्ट्रीय संगठन
- उद्देश्य: न्यायसंगत बहुकेंद्रीय विश्व व्यवस्था बनाना, पश्चिमी व अमेरिकी प्रभुत्व को संतुलित करना
- प्रारंभ में 'शंघाई फाइव' के रूप में 1996 में रूस और चीन के नेतृत्व में बनाया गया
SCO का ढांचा और कार्यप्रणाली
- सदस्यों में रूस, चीन, भारत, पाकिस्तान, कजाकिस्तान, किरगिस्तान, तजाकिस्तान, उज्बेकिस्तान, ईरान, बेलारूस शामिल हैं
- दो प्रमुख संस्थाएं: सचिवालय (बीजिंग स्थित) और RATs (आतंकवाद, पृथक्करण, उग्रवाद के खिलाफ सहयोग)
- CХS (राज्याध्यक्ष परिषद) सर्वोच्च निर्णयकारी होता है, जो साल में एक बार बैठक करता है
- निर्णय सहमति से लिए जाते हैं, जिससे कभी-कभी निर्णय लेना चुनौतीपूर्ण होता है
भारत के लिए SCO की महत्ता
- क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को बढ़ावा देना विशेषकर सेंट्रल एशिया के साथ
- अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन मार्ग (INSTC) जैसे महत्त्वपूर्ण कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट्स प्रदान करता है
- आतंकवाद, पृथक्करण और उग्रवाद के खिलाफ साझा मंच
- पाकिस्तान के आतंकवाद समर्थक गतिविधियों का वैश्विक मंच पर प्रदर्शन
- सांस्कृतिक आदान-प्रदान, व्यापार तथा सुरक्षा सहयोग के अवसर
- अधिक जानकारी के लिए देखें 2025 के इंटरनेशनल रिलेशंस के न्यूज़हाल 25 महत्वपूर्ण सवाल
समसामयिक चुनौतियां और मुद्दे
- चीन-रूस प्रभुत्व और इसके साथ जुड़े लोकतांत्रिक देश की कमी
- पाकिस्तान के समर्थन और उसके आतंकवादियों के मुद्दे
- निर्णय प्रक्रिया में बहुमत की बजाय सहमति की आवश्यकता leading to स्तंभन
- पश्चिमी देशों द्वारा SCO को एंटी-वेस्ट प्लेटफॉर्म के रूप में देखना
- संगठन की आर्थिक पहलें अपेक्षित रूप में विकसित नहीं हो पाईं
- यहां भारतीय आर्थिक योजनाओं का संदर्भ उपयोगी हो सकता है: Comprehensive Guide to Economic Planning in India: History, Models & Reforms
SCO के प्रमुख पहल और भविष्य की दिशा
- आतंकवाद के खिलाफ RATs के माध्यम से इंटेलीजेंस शेयरिंग और संयुक्त एक्सरसाइज
- एंटी-ड्रग सेन्टर और संयुक्त सुरक्षा केंद्र की स्थापना
- सांस्कृतिक पूंजी और पर्यटन को प्रोत्साहन देने वाले पहल
- भारत की अध्यक्षता में 2023 से सहयोग में नया आयाम
- 2025-26 में 25 वर्ष पूरा होने पर स्थिर विश्व और विकास के लिए सहयोग की वकालत
निष्कर्ष
शंघाई सहयोग संगठन (SCO) भारत के सामरिक और आर्थिक हितों को समर्थन देते हुए क्षेत्रीय स्थिरता और बहुपक्षीय सहयोग की दिशा में महत्वपूर्ण मंच प्रदान करता है। हालांकि इसमें चुनौतियां हैं, विशेषकर निर्णय लेने में और चीन-रूस के प्रभुत्व के कारण, फिर भी भारत की सक्रिय भागीदारी से SCO की भूमिका वैश्विक राजनीति में स्थिरता लाने में बढ़ रही है। यह संगठन भारत को सेंट्रल एशिया के साथ पुरानी सांस्कृतिक और सामरिक कड़ियों को पुनर्जीवित करने का अवसर भी देता है।
- अधिक गहन समझ हेतु देखें: Complete Guide to the Indian Constitution: Key Points and Insights
और इस पर्टिकुलर वीडियो में ये तीन बातें आज आप समझेंगे। पहली बात हम स्ट्रक्चर और फंक्शनिंग ऑफ दी एसइओ को समझेंगे। देन हम
इंडिया के इंटरेस्ट को समझेंगे कि क्या इंडिया के इंटरेस्ट्स हैं स्ट्रेटेजिकली इन द एसइओ एंड देन हम एनालाइज करेंगे
कंटेंपररी इशूज़ को। अगर आप एक ऐसे स्टूडेंट हैं जो कि सेल्फ स्टडी कर रहे हैं। तो हमने ना डिस्क्रिप्शन में एक
स्टडी प्लानर बनाया है जो कि आपके काम आएगा अगर आप सेल्फ स्टडी करना चाहते हैं। तो 1996 में चाइना और रशिया दोनों मिलके
बनाते हैं एक क्लब बाय द नेम ऑफ़ शेंग फाइव। एक बड़ी फंडामेंटल बात है एसइओ की कि एसइओ कहता है कि हम ना तीन इविल्स को
वी वांट टू फाइट द थ्री इविल्स। वो थ्री इवल्स कौन से हैं? जिओपॉलिटिकल ऑब्जेक्टिव्स। एसइओ का मेन गोल क्या है?
एक जस्ट पॉलीिसेंट्रिक वर्ल्ड ऑर्डर बनाना ताकि वेस्टर्न डोमिनेंस को और अमेरिकन हेजमिनी को काउंटर किया जा सके। तो यानी
कि आप देख सकते हैं कि कंबोडिया से लेके ऑल द वे फ्रॉम लाओस कंबोडिया से लेके ऑल द वे अप टू टर्की तक बिकॉज़ टर्की भी एक
डायलॉग पार्टनर है। इतना वाइड एक्सपेंस है एससीओ का। व्हेन वी स्पीक अबाउट द शंघाई कोऑपरेशन
ऑर्गेनाइजेशन सो देयर इज़ अ वेरी फेमस थिंग व्हिच कम्स टू माय माइंड इज दैट वेयर ज्योग्राफी मीट्स जियोपॉलिटिक्स एंड
सिक्योरिटी मीट स्ट्रेटजी एनीथिंग एंड एवरीथिंग रिलेटेड टू दी शघाई कोऑपरेशन ऑर्गेनाइजेशन वो आपको इस वीडियो में मिलने
वाली है। वीडियो को जरूर देखिए। इस वीडियो को सेव कर लेना, लाइक भी कर लेना और शेयर भी करना ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों की
मदद की जा सके। एंड कमेंट सेक्शन में जरूर बताना टुवर्ड्स द एंड द वीडियो। कि आपको यह वीडियो कैसा लगता है? नाउ मैं इसके
बारे क्यों बात कर रहा हूं? बिकॉज़ शघाई कोऑपरेशन ऑर्गेनाइजेशन एक बहुत इंपॉर्टेंट टॉपिक है। एज़ फार एज़ आवर यूपीएससी
प्रीलिम्स एंड मेंस इज़ कंसर्न। और इस पर्टिकुलर वीडियो में ये तीन बातें आज आप समझेंगे। पहली बात हम स्ट्रक्चर और
फंक्शनिंग ऑफ़ द एसइओ को समझेंगे। देन हम इंडिया के इंटरेस्ट को समझेंगे कि क्या इंडिया के इंटरेस्ट है। स्ट्रेटेजिकली इन
द एसइओ। एंड देन हम एनालाइज करेंगे कंटेंपरेरी इशूज़ को। क्या-क्या कंटेंपररी इशूज़ हैं जो कि रिवॉल्व कर रहे हैं इन द
डिस्कशंस ऑफ दी शघाई कोऑपरेशन ऑर्गेनाइजेशन। रेलेवेंस ऑफ़ द टॉपिक यूपीएससी जीएस टू, इंटरनेशनल
ऑर्गेनाइजेशंस। जीएस टू में आपको पता है आईआर के चार क्वेश्चंस आते हैं एव्री ईयर इन द मेंस और एक क्वेश्चंस इंटरनेशनल
ऑर्गेनाइजेशन से रिलेटेड होता ही होता है। इस टॉपिक से रिलेटेड चार बारी यूपीएससी ने मेंस में क्वेश्चन पूछा है। मैं आपको भी
दिखाऊंगा 1 मिनट में। और प्रीलिम्स में भी क्वेश्चंस देखने को मिलते हैं इंटरनेशनल ऑर्गेनाइजेशन से रिलेटेड और एसइओ कई बारी
यूपीएससी के प्रीलिम्स में पूछा जा चुका है। तो यहां पे देख सकते हैं कि मेंस में चार बारी क्वेश्चन एसइओ से रिलेटेड और
सेंट्रल एशिया से रिलेटेड आया है टू बी वेरी प्रिसाइज़ 2023, 21, 18 एंड 2024। अगर आप देखें तो 2023 एंड 21 में एसइओ से
डायरेक्ट रिलेशन में क्वेश्चन आया है। एक और बात आपको बताना चाहता हूं कि आगे बढ़ने से पहले अगर आप एक ऐसे स्टूडेंट हैं जो कि
सेल्फ स्टडी कर रहे हैं तो हमने ना डिस्क्रिप्शन में एक स्टडी प्लानर बनाया है जो कि आपके काम आएगा अगर आप सेल्फ
स्टडी करना चाहते हैं और आप वो इंपॉर्टेंट टॉपिक्स को प्रायोरिटाइज कर सकते हैं अपनी सेल्फ स्टडी में तो वो स्टडी प्लानर को
डाउनलोड कर लीजिएगा। ये डिस्क्रिप्शन बॉक्स में लिंक दिया गया है। नाउ एसइओ की अगर हम बात करें तो एसइओ एक परमानेंट इंटर
गवर्नमेंटल इंटरनेशनल ऑर्गेनाइजेशन है जिसको इस्टैब्लिश किया गया था जून 2001 में। जरा सर बात क्या थी? आपको थोड़ा सा
एक बैकड्रॉप देता हूं। देखिए 1991 में क्या हुआ? डिसइीग्रेशन ऑफ यूएसएसआर हुआ। और इस डिसइीग्रेशन के बाद यूएसएसआर का जो
सक्सेसिव स्टेट था रशिया वो एक जख्मी शेर की तरह बन चुका था। और 91 के बाद हमने देखा एक यूनपोलर मूवमेंट। एक यूनिपोलर
मूवमेंट में अमेरिका आ जाता है। ग्लोबल हैेजमेन अमेरिका बन जाता है। सो फ्रॉम अ बायपोलर कॉन्टेस्टेशन बिटवीन यूएसए एंड
यूएसएसआर। अब वो एक यूनिपोलर मूवमेंट अमेरिका के लिए बनता है। एंड ये भी देखा जा रहा था कि यूरोप में खास करके ईस्टर्न
यूरोप में जो कि यूएसएसआर का ही हिस्सा था। वहां पे नेटो एक्सपैंड कर रहा था। और ये होता देख जो जख्मी शेर था यानी कि
रशिया उसको पता था कि अब वो वैसे नहीं उठ पाएगा। यूएसएसआर तो नहीं रहा। अकेला रशिया भी कुछ नहीं कर पाएगा। ऑलदो अमेरिका ने
गारंटीज दिए थे कि वो नेटो को ईस्ट वर्ड एक्सपेंड नहीं करेगा। लेकिन वेल एट द एंड ऑफ़ द डे अमेरिका ने वही किया। नेटो ने जो
करना था वो किया। बाकी कंट्रीज भी नेटो में आते गए शामिल होते गए। अब जख्मी शेर यानी कि रशिया को इस बात की भी टेंशन थी।
इस बात की भी चिंता थी कि सेंट्रल एशिया जो कि उसका बैकयार्ड है। कहीं वो नेटो के फोल्ड में ना आ जाए या कहीं वो अमेरिका के
इन्फ्लुएंस में ना आ जाए। तो जख्मी शेर ने एक चालाक लोमड़ी के साथ यानी कि चाइना के साथ ये एग्रीमेंट बनाया। ये बातचीत आगे
करी कि क्यों ना हम दोनों क्योंकि अगर आप मैप को भी देखें ध्यान से तो रशिया और चाइना के बीच में ही सेंट्रल एशिया आता है
और एक बफर बनता है रशिया और चाइना के बीच में। तो यह तय किया कि क्यों ना हम दोनों एक ऐसा यूरेशियन सिक्योरिटी अलायंस बनाएं
जो कि गारंटी कर सके कि यह एरिया वुड बी फ्री फ्रॉम एनी काइंड ऑफ कॉन्टेस्टेशन और फ्रॉम एनी इंटरफेरेंस फ्रॉम नेटो और फ्रॉम
अमेरिका। तो 1996 में चाइना और रशिया दोनों मिलके बनाते हैं एक क्लब बाय द नेम ऑफ़ शघाई फाइव। शघाई फाइव जून 2001 में
बनता है योर शघाई कोऑपरेशन ऑर्गेनाइजेशन। जब उज्बेकिस्तान आता है। सो रशिया, कजाकिस्तान, चाइना, किरगिस्तान जब तक ये
थे तब तक शघाई फाइव था। अब और सॉरी मैं यहां पे एक कंट्री मिस कर गया। रशिया, कजाकिस्तान, चाइना, तजीकिस्तान और
किरगिस्तान ये जब कजाकिस्तान, चाइना, किरगिस्तान, रशिया ये पांचों देश बनाते थे आपका शघाई को शघाई फाइव। लेकिन
उज़्बेकिस्तान के आने से ये बना शघाई कोऑपरेशन ऑर्गेनाइजेशन। ऑलराइट। सो हम आगे जाके ये भी देखेंगे कौन से कौन से मेंबर्स
आए हैं ग्रेजुअली। 2002 में जो एसइओ का चार्टर है वो साइन करा गया। ऑलराइट एट द मीटिंग्स ऑफ द काउंसिल ऑफ़ द हेड्स ऑफ़ द
स्टेट्स। कहां पे? रशिया में। सेंट पीटर्सबर्ग में। एंड दिस चार्टर्ड एंटर इंटू फोर्स इनू सेप्टेंबर 2003। अब ये जो
एसइओ का चार्टर है यानी कि इसमें वो सारे के सारे गोल्स, प्रिंसिपल्स और ऑब्जेक्टिव्स दिए गए हैं। स्ट्रक्चर बनाया
गया है कि क्या-क्या मेजर एरियाज और एक्टिविटीज होंगी ऑर्गेनाइजेशन की। तो एसइओ के चार इंपॉर्टेंट गोल्स थे। पहला
गोल था टू स्ट्रेंथन म्यूचुअल ट्रस्ट, फ्रेंडशिप एंड गुड नेबरलीनेस बिटवीन द मेंबर स्टेट्स। दूसरा था कि इफेक्टिव
कोऑपरेशन एनकरेज करनी है बिटवीन द मेंबर स्टेट्स ऑफ द एसइओ ताकि पॉलिटिक्स, सिक्योरिटी, इकोनॉमिक्स, साइंस,
ट्रांसपोर्टेशन, टूरिज्म इन सभी एरियाज में डवर्स एरियाज में कोऑपरेशन दिखा सके। केवल एक सिक्योरिटी ओरिएंटेड ब्लॉक ये ना
हो। देन नंबर थ्री टू जॉइंटली इंश्योर एंड मेंटेन पीस एंड सिक्योरिटी इन द लार्जर रीजन इन द यूरेशियन रीजन। एंड नंबर फोर एक
नए तरीके से इंटरेस्टिंगली ये सारी की सारी कंट्रीज ऑथॉरिटेरियन है। इन सारी कंट्रीज में कोई भी कंट्री नहीं थी जो कि
डेमोक्रेटिक है। लेकिन चार्टर में ये लिखा गया कि एक नया डेमोक्रेटिक फेयर और रैशन तरीका हम बनाएंगे जिसके चलते इंटरनेशनल
कोऑपरेशन में हम और बढ़ावा दे पाएंगे। एक इंपॉर्टेंट बात जो एसइओ की वन ऑफ द फाउंडिंग प्रिंसिपल्स बने वो ये था कि
रशिया और चाइना इन ऑर्डर टू कीप दी हेजमनी और टू कीप द हेजेमोनिक एंबिशंस ऑफ़ अमेरिका अवे फ्रॉम सेंट्रल एशिया दे आल्सो वांटेड
टू एडवोकेट कोर्ट अनट अ जस्ट पॉलीसेंट्रिक वर्ल्ड ऑर्डर अ जस्ट पॉलीसेंट्रिक वर्ल्ड ऑर्डर दैट दे विल बी
मल्टीपल सेंटर्स ऑफ़ पावर दैट वी बिलीव इन द आईडिया ऑफ़ मल्टीलेटरलिज्म दैट इज़ व्हाट चाइना एंड रशिया वर सेइंग एंड माइंड यू
इंडिया तब तक नहीं था यहां पे। इंडिया केम ऐज़ एन ऑब्ज़र्वर इन 2005 बट दे एडवोकेटेड द कॉज़ ऑफ़ मल्टीलेटरलिज़्म। लेट मी आल्सो टेल
यू आफ्टर द डिसइीग्रेशन ऑफ़ यूएसएसआर इट वाज़ इंडिया व्हिच वाज़ एडवोकेटिंग द कॉज़ ऑफ़ मल्टीपोलरिटी एंड मल्टीलेटरलिज़्म अलोंग
विथ अदर कोर्ट एंड कोर्ट लाइक माइंडेड कंट्रीज लाइक फ्रांस लाइक ऑस्ट्रेलिया एटसेट्रा। हाउएवर हाउएवर रशिया एंड चाइना
टेकिंग द मेंटल एंड वांटिंग टू बिकम द चैंपियंस ऑफ अ जस्ट पॉलीसेंट्रिक वर्ल्ड ऑर्डर। दिस वाज़ समथिंग व्हिच वाज़ वैरी
इंटरेस्टिंग एंड आल्सो समथिंग व्हिच वाज़ नॉट बीइंग इज़ली स्वलोड बाय द वेस्ट। सो इनिशियली इंटरनली द एसइओ एड्स टू द
शहाघाई स्पिरिट व्हिच इज म्यूचुअल ट्रस्ट म्यूचुअल बेनिफिट इक्वलिटी कंसल्टेशन रिस्पेक्टिंग फॉर डवर्सिटी ऑफ़ सिविलाइजेशन
टेरिटोरियल इंटेग्रिटी एंड सोवनिटी एंड एक्सटर्नली इट इज़ अपहोल्डिंग नॉन अलाइनमेंट नॉन टारगेटिंग एट अदर कंट्रीज
यानी कि चाइना ने बहुत क्लेवरली वही प्रिंसिपल्स यहां पे शघाई स्पिरिट में अडॉप्ट करवाए जो प्रिंसिपल्स पंचशील में
थे जो कि 1954 में नेहरू जी ने साइन किए थे चाइना के साथ। सुप्रीम डिसीजन मेकिंग बॉडी एसइओ की है काउंसिल ऑफ द हेड्स ऑफ
स्टेट्स। यह साल में एक बार मिलती है और इसमें सारे के सारे इंपॉर्टेंट इशूज़ जो हैं ऑर्गेनाइजेशन के वो तय किए जाते हैं,
डिस्कस किए जाते हैं। द काउंसिल ऑफ द हेड्स ऑफ़ द गवर्नमेंट यानी कि प्राइम मिनिस्टर ये भी साल में एक बार मिलते हैं
ताकि जो भी स्ट्रेटजी है मल्टीलिटल कोऑपरेशन की जो प्रायोरिटी एरियाज़ हैं उनको डिस्कस किए जाते हैं विद इन दी
ऑर्गेनाइजेशन। डिटरमिन किया जाता है कि क्या-क्या फंडामेंटल और टॉपिकल इशूज़ हैं इन इकोनमिक एंड अदर स्फेयर्स। और साथ के
साथ बजट अप्रूवल मिलता है फॉर दी एससीओ। इन एडिशन टू द मीटिंग्स ऑफ द सीएचएस एस एंड द सीएचजी देयर आर आल्सो मैकेनिज्म्स
फॉर मीटिंग्स ऑन फॉरेन अफेयर्स, नेशनल डिफेंस, सिक्योरिटी, इकॉनमी, ट्रेड, कल्चर, हेल्थ एटसेट्रा। एंड द काउंसिल ऑफ़
नेशनल कोऑर्डिनेटर्स इज़ दी एसइओ कोऑर्डिनेशन मैकेनिज्म। इस ऑर्गेनाइजेशन की दो इंपॉर्टेंट बॉडीज हैं। ये बात प्लीज
अभी नोट कर लेना और मुझे कमेंट सेक्शन में बताना। अगर आप यहां पे आठवें मिनट तक वीडियो में बने हुए हैं। कमेंट सेक्शन में
लिखना आर एटीएस। दो स्टैंडिंग बॉडीज हैं। एक तो सेक्रेटेरियट है बीजिंग में और दूसरा जो एग्जीक्यूटिव कमेटी है ऑफ दी
आरएटीएस। एक बड़ी फंडामेंटल बात है एसइओ की कि एसइओ कहता है कि हम ना तीन इविल्स को वी वांट टू फाइट द थ्री इविल्स। वो
थ्री इवल्स कौन से हैं? सेपरेटिज्म, टेररिज्म, एक्सट्रीमिज्म। और उसको फाइट करने के लिए इंस्टीट्यूशनली हमने ये
आरएटीएस स्ट्रक्चर बनाया हुआ है। ऑलराइट। इसके बारे में भी आगे जाके बात करेंगे। एसइओ के सेक्रेटरी जनरल और जो डायरेक्टर
हैं ऑफ द आरएटीएस एग्जीक्यूटिव कमेटी इनको अपॉइंट किया जाता है बाय द सीएचएस। व्हाट इज़ द सीएचएस? अभी हमने सीएचएस के बारे में
पढ़ा था। द काउंसिल ऑफ द हेड्स ऑफ़ द गवर्नमेंट यानी कि द काउंसिल ऑफ़ द हेड्स ऑफ़ द स्टेट्स। ये सीएचएस अपॉइंट करता है
सेक्रेटरी जनरल ऑफ़ द एसइओ एंड द डायरेक्टर ऑफ़ द आरएटीएस फॉर अ थ्री ईयर टर्म। एंड देन अलोंग विद द मेंबर कंट्रीज ऑफ़ द एसइओ।
वो भी हम उसके बारे में बात करेंगे। वो कौन सी कंट्रीज हैं। अलोंग विथ दैट कुछ ऑर्गेनाइजेशंस भी हैं जिनका एसइओ के साथ
पार्टनरशिप स्टेटस है। जैसे कि एशियान है, जैसे कि यूनेस्को है, जैसे कि एफएओ है, जैसे कि आपका यू नो सीएसटीओ है। कॉमनव्थ
ऑफ़ इंडिपेंडेंट स्टेट्स है। तो, यह 11 ऑर्गेनाइज़ेशंस हैं जो कि पार्टनरशिप स्टेटस में हैं। मेंबर्स नहीं है बट
पार्टनरशिप स्टेटस में हैं। और यह हमारे 10 मेंबर्स हैं एससीओ के जिसमें लेटेस्ट एंट्री हुई है बेलारूस की। ऑलराइट। ईरान
बना था 2023 में और बेलारूस रिसेंटली 24 में बना है मेंबर ऑफ़ द एसइओ। तो ये 10 मेंबर्स हैं एसइओ के। ऑलराइट। तो इसमें
बेलारूस, इंडिया, ईरान, कजाकिस्तान, चाइना, किरगिस्तान, पाकिस्तान, रशिया, तजाकिस्तान एंड उज़्बेकिस्तान। तो एक बहुत
फेमस एक्रोनिम है जो बहुत वायरल हुआ था सोशल मीडिया पे वो मैंने बनाया था विद माय कोलीग तो इसमें एक्रोनिम है पुट ब्रिक वो
एक्रोनिम कैसे आता है पी फॉर अबकिस्तान यू फॉर उज़्बेकिस्तान टी फॉर आपका टी फॉर तजीकिस्तान आ गया बी में बेलारूस आ गया आर
में रशिया आ गया देन आई में इंडिया भी आ गया ईरान भी आ गया सी में चाइना आ गया एंड के में किरगिस्तान एंड कजाकिस्तान आ गए तो
पुट ब्रिक एक एक्रोनियम है जो आपको याद करवाएगा कि 10 मेंबर स्टेट्स कौन से हैं एससीओ के। देन हमारे पास दो ऑब्जर्वर
स्टेट्स हैं। एक अफगानिस्तान है, एक मोंगोलिया है। तो अगेन ये यूरेशियन रीजन की बात हो रही है। तो मंगोलिया भी आई मीन
चाइना से ऊपर आता है। अगर मैप में देखिए सेंट्रल एशिया के बगल में ही आता है। लेकिन द लार्जर सेंट्रल एशियन यूरेशियन
रीजन की बात हो रही है। देन डायलॉग पार्टनर्स एसइओ के। लेटेस्ट एंट्री इन द डायलॉग पार्टनर्स ऑफ़ द एसइओ में लाओस की
हुई है। जो कि 2025 में समिट हुआ था एसइओ का। वहां पे लाओस को एक डायलॉग पार्टनर इंडक्ट किया गया है। तो यानी कि आप देख
सकते हैं कि कंबोडिया से लेके ऑल द वे फ्रॉम लाओस कंबोडिया से लेके ऑल द वे अप टू टर्की तक बिकॉज़ टर्की भी एक डायलॉग
पार्टनर है। इतना वाइड एक्सपेंस है एससीओ का। सेकंड दिसंबर 2004 एट द 59थ प्लेनरी सेशन ऑफ़ द यूएनजीए एक रेजोल्यूशन अडॉप्ट
हुआ जिसने ऑब्ज़र्वर स्टेटस फॉर द एसइओ का एक डेज़िग्नेशन दिया इन द यूएनजीए। और ये रेजोल्यूशन ने प्रोवाइड करा एसइओ को वि द
राइट टू पार्टिसिपेट इन द सेशंस एंड आल्सो वर्क इन द जनरल असेंबली एज एन ऑब्जर्वर। नाउ एसइओ मेंटेंस अ रेगुलर इनफेशन
कांटेक्ट विथ द यूएन सेक्रेटेरियट एंड द यूएन इंस्टीटशंस व्हिच आर रिप्रेजेंटेड इन बीजिंग और हाई रैंकिंग रिप्रेजेंटेटिव्स
ऑफ़ द यूएन अटेंड करते हैं एनुअल एसइओ समिट्स और वो रोटेट होता रहता है। जो प्रेसिडेंट जो प्रेसिडेंसी है वो रोटेट
होती रहती है। एंड जो होस्ट कंट्री है जो कि एसइओ की प्रेसिडेंसी होस्ट करती है। जैसे कि 2025 में चाइना के पास
प्रेसिडेंसी है। 2023 में इंडिया के पास प्रेसिडेंसी थी। तो वह इनवाइट करते हैं यूएन को भी और यूएन के हाई रैंकिंग
ऑफिशियल्स आते हैं। एससीओ का हेड ऑफ द स्टेट काउंसिल इज़ द सुप्रीम एससीओ बॉडी। तो यहां पे डिटरमिन किया जाता है कि क्या
प्रायोरिटीज़ हैं? क्या मेजर एरियाज़ हैं? क्या-क्या एरियाज़ ऑफ़ कन्वर्जेंसेस रहेंगे? क्या-क्या फंडामेंटल इशूज़ रहेंगे फॉर द
इंटरनल अरेंजमेंट? कैसे फंक्शनिंग की जाएगी? कैसे इंटरेक्शन किया जाएगा विथ द रेस्ट ऑफ़ द वर्ल्ड। एटसेट्रा। काउंसिल
अपनी रेगुलर मीटिंग्स साल में एक बार जरूर कंडक्ट करेंगे। हेड्स ऑफ द स्टेट ऑफ काउंसिल शैल बी अ मीटिंग ऑफ़ द हेड्स ऑफ़ द
स्टेट काउंसिल विल बी चेयर्ड बाय द हेड ऑफ़ द स्टेट ऑर्गेनाइजिंग दिस रेगुलर मीटिंग। वेन्यू जो है ऑफ़ द रेगुलर मीटिंग ऑफ़ द
काउंसिल वो जनरली डिटरमिन किया जाता है रशियन अल्फाबेटिकल ऑर्डर में ऑफ द नेम्स ऑफ़ द एसइओ मेंबर स्टेट्स। तो एसइओ हेड्स
ऑफ़ द गवर्नमेंट काउंसिल अप्रूव करता है बजट ऑफ द ऑर्गेनाइजेशन। और और कंसीडर किया जाता है कि क्या-क्या मेजर इशूज़ हैं
रिलेटेड टू यू नो इकोनमिक कोऑपरेशंस, मोर स्पेयर्स ऑफ इंटरेक्शन विद इन द ऑर्गेनाइजेशन। और इस काउंसिल की भी मीटिंग
रेगुलर मीटिंग साल में एक बार जरूर होती है। हेड ऑफ़ द स्टेट काउंसिल विल बी चेयर बाय द हेड ऑफ़ द स्टेट जो कि ऑर्गेनाइज़ कर
रहा है रेगुलर मीटिंग को। यानी कि होस्ट कंट्री आ जाती है। वेनी ऑफ़ द रेगुलर मीटिंग। अगेन ये रशियन अल्फाबेटिकल ऑर्डर
के हिसाब से तय किया जाता है। और व्हेन ऑफ़ द रेगुलर मीटिंग ऑफ़ द काउंसिल विल बी विल बी डिटरमिंड बाय अ प्रायर एग्रीमेंट अमंग
दी हेड्स ऑफ़ द गवर्नमेंट। यानी कि प्राइम मिनिस्टर्स ऑफ द मेंबर स्टेट्स। देन एक काउंसिल ऑफ मिनिस्टर ऑफ़ फॉरेन
अफेयर्स भी है। जहां पे डे टू डे एक्टिविटीज के बारे डिस्कशन की जाती है। अ यू नो वहां पे आपका पूरा का पूरा एजेंडा
सेट किया जाता है कि क्या-क्या एजेंडा डिस्कस किया जाएगा। हेड्स ऑफ़ द स्टेट काउंसिल मीटिंग में। कंसल्टेशंस की जाती
है। इंटरनेशनल प्रॉब्लम्स विद इन दी ऑर्गेनाइज़ेशन। इसके बारे में डिस्कशन की जाती है। अह मैं एक बार चेक कर लूं। ऑडियो
आ रहा है? यस ऑडियो आ रहा है। कई बार होता है कि वीडियो रिकॉर्ड करते-करते ऑडियो नहीं आता होता। तो वही चेक कर रहा था। एंड
ये जो काउंसिल है द काउंसिल ऑफ मिनिस्टर ऑफ़ फॉरेन अफेयर्स यह एप्रोप्रियटली स्टेटमेंट्स देता है ऑन द बिहाफ ऑफ द
एससीओ। तो ये जो काउंसिल है दिस शैल जनरली मीट वन मंथ प्रायर टू अ मीटिंग्स ऑफ़ द हेड ऑफ़ द स्टेट काउंसिल। एक्स्ट्राऑर्डिनरी
मीटिंग्स ऑफ़ द काउंसिल ऑफ़ मिनिस्टर्स ऑफ़ फॉरेन अफेयर्स विल बी कन्व्ंड शैल बी कन्व्ड ऑन द इनिशिएटिव ऑफ़ एटलीस्ट टू
मेंबर्स। एंड अपॉन द कंसेंट ऑफ़ द मिनिस्टर ऑफ़ फॉरेन अफेयर्स ऑफ़ ऑल अदर मेंबर स्टेट्स। वेन्यू ऑफ अ रेगुलर और
एक्स्ट्राऑर्डिनरी मीटिंग ऑफ द काउंसिल शैल बी डिटरमिंड बाय म्यूचुअल एग्रीमेंट। ऑलराइट।
परमानेंट रिप्रेजेंटेटिव की बात करें तो जो परमानेंट रिप्रेजेंटेटिव है शघाई कोऑपरेशन ऑर्गेनाइजेशन मेंबर स्टेट्स का
टू द एसइओ सेक्रेटेरिएट ये अपॉइंट किया जाता है बाय द स्टेट्स इन अकॉर्डेंस विद द नेशनल रूल्स एंड द प्रोसीजर्स। फ्रॉम अमंग
द पर्संस जो कि सीनियर डिप्लोमेटिक पोजीशन होल्ड करते हैं। एंड देन ऑफ कोर्स दे विल टेक अप देयर ड्यूटीज़ फ्रॉम द टाइम अह द
एसइओ सेक्रेटरी जनरल रिसीव्स द रिटन नोटिफिकेशन ऑन देयर अपॉइंटमेंट। तो ये कुछ टेक्निकल और लीगल जॉर्गन है रिलेटेड टू दी
एसइओ जो आपके साथ में डिस्कस कर रहा हूं और परमानेंट रिप्रेजेंटेटिव एनश्योर करते हैं कि जो सेंडिंग स्टेट्स की जो
रिप्रेजेंटेशन है वो बराबर रहे। उनके इंटरेस्ट वहां पे रिप्रेजेंट किए जा सके इन अकॉर्डिंग टू द ऑब्जेक्टिव्स ऑन द
प्रिंसिपल्स ऑफ़ द एसइओ। देन परमानेंट रिप्रेजेंटेटिव पार्टिसिपेट करते हैं सेक्रेटेरियट के काम में टू प्रिपेयर
रिव्यू एंड कोऑर्डिनेट द ड्राफ्ट डॉक्यूमेंट्स जो कि सबमिट किए जाते हैं फॉर द मीटिंग्स ऑफ़ द एसइओ बॉडीज़। एंड दे
आल्सो कंट्रीब्यूट टू मेकिंग अरेंजमेंट्स फॉर इंप्लीमेंटिंग द डिसीजंस मेड बाय वेरियस एसइओ की जो बॉडीज हैं। ऑलराइट। तो
ये जो एसइओ का जो सेक्रेटेरियट है, एसइओ के जो सेक्रेटरी जनरल हैं उनको भी असिस्ट करते हैं डे टू डे मैटर्स के लिए, डेली
असिस्टेंस के लिए। एंड इंडिया की तरफ से जो परमानेंट रिप्रेजेंटेटिव है वो कौन है? इंडिया की तरफ से हैं वो एंजलीन प्रेमलता।
यह हमारी तरफ से इंडिया की तरफ से जो परमानेंट रिप्रेजेंटेटिव है टू दी एसइओ वो यह हैं। ऑलराइट। नाउ क्विकली बात करते हैं
सिग्निफिकेंस ऑफ एसइओ फॉर इंडिया। देखो प्रीलिम्स तक की अगर बात करनी है वो यहां तक हो गई है। यहां तक का जो सफर है 15वां
मिनट तक 15th मिनट एंड 25 सेकंड तक ये है आपका प्रीलिम्स का। इसके बियड हम थोड़ा में मेनस सेंट्रिक बात करेंगे। बिकॉज़ सी एज एन
एजुकेटर एज अ टीचर इट इज़ माय ड्यूटी एंड इट इज़ माय रिस्पांसिबिलिटी टू डिस्कस एवरीथिंग रिलेटेड टू द टॉपिक। चाहे वो
प्री की बात हो, चाहे वो मेंस की बात हो। हम पूरी बात डिटेल में करेंगे, खुल के करेंगे। ऑलराइट? सिग्निफिकेंस ऑफ द एसओए
फॉर इंडिया। देखो पहला है जियोपॉलिटिकल इन्फ्लुएंस एंड रीजनल कनेक्टिविटी। वैसे कोइंसिडेंस की बात देखिए कि अभी मैं
लेक्चर ले रहा हूं और आज का जो हमारा लाइव लेक्चर था फाउंडेशन लेक्चर वहां पे मैंने बहुत डिटेल में 2 एंडफ आवर्स की क्लास ली
है जहां पे मैंने सेंट्रल एशिया कवर किया है। तो हम अपनी जो फाउंडेशन क्लासेस होती हैं जो हमारे पेड बैचेस होते हैं उसमें
बहुत डिटेल में हम टॉपिक्स डिस्कस करते हैं। YouTube पे भी हम ऑब्वियसली कोशिश करते हैं कि हम हाई क्वालिटी कंटेंट लेके
आ सकें। मैं फिर कहना चाहूंगा आपको अगर आप बाय चांस सेल्फ स्टडी कर रहे हैं इस वीडियो में लेट एंटर हुए हैं तो
डिस्क्रिप्शन में जाना। वहां पे आपको एक स्टडी प्लानर मिलेगा। सेल्फ स्टडी प्लानर है फ्री ऑफ कॉस्ट है। डाउनलोड करना है।
किस लिए? बिकॉज़ अगर आप अपनी तैयारी सेल्फ स्टडी के प्रिपरेशन से कर रहे हैं। सोच रहे हैं तैयारी करने के लिए। कैसे करना
है? कौन से टॉपिक्स को ज्यादा प्रायोरिटीज देनी है। कौन से हाई यील्ड टॉपिक्स हैं? कौन से हाई प्रायोरिटी वाले टॉपिक्स हैं?
इन सभी को जानने के लिए आपको ये स्टडी प्लानर बहुत हेल्प करेगा। ऑलराइट। ओके। नंबर वन पॉइंट सिग्निफिकेंस ऑफ दी एसइओ की
बात हो रही है। पहला पॉइंट है जिओपॉलिटिकल इन्फ्लुएंस एंड रीजनल कनेक्टिविटी। देखो एसइओ के अंदर हमको एक मौका मिलता है कि हम
अपनी कनेक्ट सेंट्रल एशिया पॉलिसी को एडवांस कर सकें। हम कुछ कनेक्टिविटी लिंकेजेस पे काम कर सके। वि सेंट्रल
एशिया। हम अपने फोकस को विद इन दी एसइओ सेंट्रल एशिया के ओरिएंटेड रख सके। बिकॉज़ अक्सर ये देखा जाता है कि कंट्रीज लाइक
चाइना एंड पाकिस्तान वो इंडिया के एफर्ट्स टुवर्ड्स दी एसइओ को एंबुश करने की कोशिश करते हैं। सो देयर फॉर उस चीज से हमको
थोड़ा एक स्ट्रेंथनिंग मिलती है दैट हमारी इन्वॉल्वमेंट एसइओ में बहुत एक्टिव है। पैसिव नहीं है। हम एक फुल टाइम मेंबर हैं
एसइओ के 2017 से। पाकिस्तान भी 2017 मेंबर बना था। 2005 में हम एक ऑब्जर्वर स्टेटस था हमारा एसइओ में। एंड आल्सो हमारा एक
ऑनगोइंग कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट है 7200 कि.मी. लॉन्ग मल्टीमोडल एक हमारा प्रोजेक्ट है इंटरनेशनल नॉर्थ साउथ
ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर जो बेसिकली इंडियन ओसियन को कनेक्ट करता है विथ द कैस्पियन सी वायर द पोर्शन गल्फ एंड फदर ऑन ऑन टू
यूरोप। तो एक बहुत इंपॉर्टेंट प्रोजेक्ट है आईएएसटीसी जो हमको भी हेल्प करता है कि हम कार्गो को एक्सपोर्ट कर सकते हैं टू
रशिया टू यूरोप इंपोर्ट कर सकते हैं विदाउट रियली डिपेंडिंग अपॉन दिस वेस्ट कैनाल। सो वंस अगेन दिस रीजन सेंट्रल
एशियन रीजन जो कि एक बहुत इंपॉर्टेंट रीजन है फॉर दी एसइओ ये एक ऐसा रीजन है जिसके साथ हमारे सदियों पुराने संबंध बहुत
स्ट्रांग रहे थे हमारे हिस्टोरिकल रिलेशंस हैं यहां पे सिविलाइजेशन कनेक्ट है सेंट्रल एशिया के साथ लेकिन आज के तौर पे
अगर हम बात करें एज ऑफ़ थिंग्स स्टैंड टुडे हमारा सिर्फ दो या $ बिलियन डॉलर का ट्रेड है सेंट्रल एशिया के साथ। वेयर एस अगर हम
चाइना की बात करें चाइना का ट्रेड विद द सेंट्रल एशियन रीजन 90 बिलियन डॉलर से ज्यादा का है। सो एसइओ हमें एक इंसेंटिव
देता है कि हमारी इंगेजमेंट ज्यादा पीरियडिक हो सकती है विद द सेंट्रल एशियन कंट्रीज एंड आल्सो दैट कुड बी ओरिएंटेड
टुवर्ड्स द कंसर्न्स ऑफ़ द सेंट्रल एशियन कंट्रीज नॉट अ रियली फोकसिंग टू मच ऑन द अदर इशज़ बट आल्सो फोकसिंग ऑन द कॉमन
कन्वर्जेंस विद इन द एस विद इन द एसइओ एंड आल्सो इकोनमिक कोऑपरेशन की बात आती है। इकोनमिक कोऑपरेशन में एसइओ प्रमोट करता है
ट्रेड इन्वेस्टमेंट बिकॉज़ लेट्स अंडरस्टैंड वन थिंग एसइओ एक यूरेशियन पॉलिटिको सिक्योरिटी इकोनॉमिक ब्लॉक है।
सो इकोनॉमिक कोऑपरेशन मे बी इतनी ज्यादा सिग्निफिकेंस नहीं रखता लेकिन रखता है। और इंडिया के लिए यहां पे एवेन्यूस है कि हम
कुछ लो हैंगिंग फ्रूट्स का लेवरेज उठा सकते हैं। हम सेंट्रल एशियन कंट्रीज के साथ आईटी में एक्सपोर्ट्स बढ़ा सकते हैं।
आईटी सर्विज वहां पे सेटअप कर सकते हैं। हमारे लिए प्लेटफार्म है जहां पे हम चाइना के एंबिशियस बीआरआई प्रोजेक्ट को हम यहां
पे काउंटर कर सकते हैं और ज्यादा नए अल्टरनेटिव फ्रेमवर्क्स लेके आ सकते हैं जो कि इंडिया के नेशनल इंटरेस्ट के साथ
अलाइन करें एसइओ अलाइन करता है इंडिया की मल्टी अलाइनमेंट फॉरेन पॉलिसी के साथ जो इंडिया को एक लेवरेज देता है कि वो चाइना
रशिया दोनों के साथ अलाइ कर सकता है क्योंकि चाइना हमारा स्ट्रेटेजिक कॉम्पिटिट कॉम्पिटिट है रशिया हमारा
ट्रेडिशनल टाइम टेस्टेड फ्रेंड है तो विद इन मल्टीलिटल फ्रेमवर्क हम इन दोनों कंट्रीज के साथ इंगेज कर रहे हैं। इंडिया
को एक फोरम मिलता है कि हम कॉमन चैलेंजेस एड्रेस कर सकते हैं। जो चैलेंजेस सेंट्रल एशिया और इंडिया दोनों फेस कर रहे हैं इन
द फॉर्म ऑफ़ आतंकवाद, सेपरेटिज्म, एक्सट्रीमिज्म। जो कि बहुत इंपॉर्टेंट है भारत की नेशनल सिक्योरिटी के लिए। आल्सो
एक मौका भारत को मिलता है कि भारत यहां पे कैन कॉल द शॉट्स, कैन कॉल द ब्लफ अगेंस्ट पाकिस्तान एंड चाइना। बिकॉज़ पाकिस्तान एंड
चाइना केवल लिप सर्विस देते हैं फॉर टेररिज्म। एंड ये इंडिया को मौका मिलता है कि वी कैन से वेरी प्राउडली दैट लुक वी आर
द विक्टिम्स ऑफ़ टेररिज्म। व्हिच इज़ नॉट अ वेरी प्राउड थिंग। बट वी हैव द ओडासिटी एंड स्ट्रेंथ टू कॉल आउट इन फ्रंट ऑफ़ द
कंट्रीज व्हिच आर द पर्पट रेटर्स ऑफ़ टेररिज्म। देन स्ट्रेटेजिक अलाइनमेंट की बात आती है। पाकिस्तान के नैरेटिव को
काउंटर करना। इंडिया पाकिस्तान दोनों एसइओ के मेंबर्स हैं। और ये ऑर्गेनाइजेशन मौका ये ऑर्गेनाइजेशन एक प्लेटफार्म देता है
इंडिया को कि हम एक्सपोज कर सके पाकिस्तान के क्लेम्स को पाकिस्तान के नैरेटिव को काउंटर कर सके। चाहे वो कश्मीर की बात है,
क्रॉस बॉर्डर टेररिज्म की बात है। और हमको मौका मिलता है कि हम पाकिस्तान के इस नेक्सेस को एक्सपोज कर सकते हैं इन टर्म्स
ऑफ गिविंग टेरर गिविंग यू नो स्टेट स्पों्सर्ड फंडिंग और सपोर्टिंग द स्टेट स्पोंसर स्टेट स्पोंसर्ड टेररिज्म
आईडियोलॉजी। तो हमको ये मौका मिलता है कि हम इस मल्टीलटरल सेटिंग में पाकिस्तान को अच्छी तरह से एक्सपोज करें। ऑफ कोर्स यहां
पे हमारे टाईस भी सेंट्रल एशियन कंट्रीज के साथ रिफॉर्म होते हैं, इंप्रूव होते हैं। एजुकेशन से लेके कल्चरल एक्सचेंजेस
तक उससे लेके पीपल टू पीपल रिलेशंस। एंड एसइओ का जो आरएटीए स्ट्रक्चर है, बहुत इंपॉर्टेंट मैकेनिज्म है इन ऑर्डर टू
कॉम्बैट टेररिज्म, सेपरेटिज़्म, एक्सट्रीमिज़्म। इसको कलेक्टिवली हम कहते हैं द थ्री इविल्स विद इन दी एसइओ
फ्रेमवर्क। नाउ एसइओ का जो रोल है इन द फाइट अगेंस्ट टेररिज्म। राइट? राइट? अब इसमें पहली बात आती है इंटेलिजेंस शेयरिंग
एंड कोऑर्डिनेशन। तो ये जो आरएटीएस है ये फैसिलिटेट करता है एक्सचेंज ऑफ़ इंटेलिजेंस ऑन द टेररिस्ट एक्टिविटीज़ ऑन देयर
नेटवर्क्स एंड आल्सो फाइनेंसिंग अमंग द मेंबर स्टेट्स। हमारे लिए बहुत जरूरी है। बिकॉज़ हम थ्रेट फेस कर रहे हैं फ्रॉम इन द
फॉर्म ऑफ़ क्रॉस बॉर्डर टेररिज्म पर्टिकुलरली फ्रॉम द एलईटी फ्रॉम द जयश मोहम्मद। और ये इनेबल करता है इंडिया को
दैट वी कैन एक्सेस इनफार्मेशन ऑन द टेररिस्ट एक्टिविटीज़ इन सेंट्रल एशिया इन अफगानिस्तान। एंड रीजंस व्हिच हैव बीन
हिस्टोरिकली बीन द ब्रीडिंग ग्राउंड्स फॉर द एक्सट्रीमिस्ट ग्रुप्स अफेक्टिंग इंडिया सिक्योरिटी।
देन जॉइंट काउंटर टेररिज्म एक्सरसाइज। तो पीस मिशन के नाम से एसइओ जॉइंट मिलिट्री एंड काउंटर टेररिज्म एक्सरसाइजज़ कंडक्ट
करता है। ये एक्सरसाइजज़ मदद करते हैं इंडिया को टू स्ट्रेंथन द काउंटर टेररिज्म कैपेबिलिटीज़ एंड आल्सो टू बिल्ड ट्रस्ट
विथ अदर एसइओ मेंबर्स। इंडिया एक्टिवली पार्टिसिपेट करता है इन ड्रिल्स में विथ शोकेसेस इट्स कमिटमेंट टू रीजनल
सिक्योरिटी एंड आल्सो टू गेन ऑपरेशनल इनाइट्स। देन एससीओ का एक काउंटर टेररिज्म एक फ्रेमवर्क है। काउंटर टेररिज्म
कन्वेंशन है जो बेसिकली लीगल फ्रेमवर्क देता है मेंबर स्टेट्स को कि कैसे हमने कोऑपरेशन दिखानी है एक दूसरे के साथ इन
ऑर्डर टू प्रिवेंट डिटेक्ट एंड सप्रेस आतंकवाद इन एनी फॉर्म। और हमको इस इस कन्वेंशन से इस फ्रेमवर्क से बहुत लेवरेज
मिलता है ताकि हम एक स्ट्रांग आवाज उठा सकते हैं अगेंस्ट द परपट्रेटर ऑफ टेररिज्म जो कि इसी फोरम में बैठे हैं और उनके
टेररिस्ट फाइनेंसिंग और सेफ हेवंस जो कि पाकिस्तान ने टेररिस्ट रिजर्व्स और टेररिस्ट लाइफ सेंचुरीज बनाई हुई है।
हमारे यहां पे वाइल्ड लाइफ सेंचुरीज हैं। पाकिस्तान में टेररिस्ट लाइफ सेंचुरीज हैं। तो ये जो पनाह पाकिस्तान देता है
आतंकवादियों को आतंकवादी एक्टिविटी को सपोर्ट करता है। उसको एक्सपोज करने का बहुत अच्छा मौका और बहुत अच्छा प्लेटफार्म
हमको एसइओ में मिलता है। एंड देन एड्रेसिंग इमर्जिंग थ्रेट्स। नाउ इमर्जिंग थ्रेट्स में देखो एक बात समझो। अब सेंट्रल
एशिया जो है वो भी बहुत प्रॉक्सिमिटी में है टू द गोल्डन ग्रसेंट। गोल्डन गसेंट में ईरान, पाकिस्तान, अफगानिस्तान आ जाते हैं।
और ड्रग ट्रैफिकिंग की प्रॉब्लम हमारे देश में भी बहुत है। नारकोटिक स्मगलिंग हो गया, साइबर सिक्योरिटी की प्रॉब्लम हो
गया, ह्यूमन ट्रैफिकिंग की प्रॉब्लम हो गया। ये सब चीजें हमारे देश में भी बहुत हम सफर कर रहे हैं। तो यानी कि जो
इमर्जिंग थ्रेट्स हैं इनको डील कैसे किया जाए वो भी इसमें भी आरएटीएस सक्षम है और आरएटीएस मदद करता है इंडिया को और इन बाकी
कंट्रीज को कि कैसे हम ट्रैक कर सकते हैं मूवमेंट ऑफ एंटी नेशनल एंडोरियस एलिमेंट्स जो अमन शांति को बहुत वायलेट करने की
कोशिश करते हैं। चाहे वो इंडिया में हो, चाहे वो सेंट्रल एशिया में हो। लेट अस आल्सो नॉट फॉरगेट कि सेंट्रल एशिया इज
आल्सो नेबर्स टू अफगानिस्तान पाकिस्तान एंड द इनस्टेबिलिटी इन अफगानिस्तान आफ्टर द 202 एग्जिट ऑफ़ अमेरिका डिड आल्सो कॉज
रिपल्स एंड कंसर्न्स विथ सेंट्रल एशिया एंड आल्सो टू इंडिया बिकॉज़ टेररिज्म एमिनेटिंग आउट ऑफ सेंट्रल एशिया इज़ अ कॉज़
ऑफ़ कंसर्न नॉट ओनली टू साउथ एशिया बट आल्सो टू सेंट्रल एशिया। डिप्लोमेटिक लेवरेज एसइओ प्रोवाइड करता है
इंडिया को एज अ प्लेटफार्म ताकि इंडिया गार्डनर कर सके सपोज फॉर दी सपोर्ट फॉर दी एंटी टेररिज्म एजेंडा। फॉर एग्जांपल 1996
में हमने यूएन पे एक सीसीआईटी कन्वेंशन टू कॉम्बैट इंटरनेशनल टेररिज्म की बात करी थी। आज तक इस कन्वेंशन का
यूनानिमस नहीं बन पाया। इस इस कन्वेंशन का यूनानिमस कंसेंस नहीं बन पाया इस इस पर्टिकुलर कन्वेंशन का। एंड देयर फॉर हमको
इस बात की अपेक्षा है और इस बात की हमको उम्मीद भी है कि शायद एसइओ के फोरम में हम इस पर्टिकुलर कन्वेंशन के फेवर में
ओपिनियन मोबलाइज कर पाएंगे एंड ऑफ कोर्स इस कन्वेंशन को मे बी यू नो यूएन भी किसी दिन पास करें ताकि हम सिर्फ बातचीत या लिप
सर्विस ना करें आतंकवाद की बट एक कॉम्प्रहेंसिव कन्वेंशन को हम इनग्रेन करें विद इन द यूनाइटेड नेशन चार्टर ओके
सो सक्सेस एंड चैलेंजेस ऑफ़ द एसइओ फॉर इंडिया नाउ सक्सेस की बात पहले करते हैं। पहली बात इंडिया की रीजनल स्टैंडिंग को
मजबूती मिलती है। स्ट्रेंथनिंग मिलती है। इंडिया की जो एक्टिव पार्टिसिपेशन है एसइओ में चाहे वो हम 2023 में हमारे पास
प्रेसिडेंसी थी। इसके कारणवश हमारी इमेज हमारी छवि काफी इंप्रूव हुई है। बहुत बेहतर हुई है कि हम एक रिस्पांसिबल रीजनल
पावर हैं। हमें एक मौका मिला है कि हम सपोर्ट मोबिलाइज कर सकते हैं अगेंस्ट द ब्लिजरेंट एक्शंस ऑफ़ पाकिस्तान। और जो
पाकिस्तान को चाइना सपोर्ट करता आ रहा है। राइट? देन नंबर टू प्रमोटिंग अ यूनिफाइड एंटी टेररिज्म स्टैंड्स। एसइओ के
फ्रेमवर्क ने अलाउ करा है इंडिया को कि वो स्ट्रंगर मेजर्स के लिए पुश कर सकता है अगेंस्ट टेररिज्म इनडायरेक्टली पाकिस्तान
को प्रेशर करके। फॉर एग्जांपल एसइओ की डिक्लेरेशंस कंसिस्टेंटली कंडेम करती है आतंकवाद को इन ऑल इट्स फर्म्स अलाइनिंग
विथ इंडियास कॉल फॉर जीरो टॉलरेंस पॉलिसी। और इंडिया ने सक्सेसफुली एडवोकेट करा है फॉर द इंक्लूजन ऑफ़ साइबर टेररिज्म एंड
नार्को टेररिज्म इन द एसइओस एजेंटा। एंड एरियाज जहां पे पाकिस्तान कंप्लसिटली रीजनल इनस्टेबिलिटी क्रिएट कर रहा है वहां
वहां पे इंडिया कोऑपरेशन दिखाने की कोशिश कर रहा है और पब्लिक ओपिनियन भी मोबिलाइज कर रहा है। देन इंगेजिंग सेंट्रल एशिया
ताकि चाइना पाकिस्तान एक्सिस को काउंटर किया जा सके। राइट? अ देखो अब ये बहुत मुश्किल भी है सेंट्रल एशियन कंट्रीज के
लिए बिकॉज़ वो काफी डिपेंडेंट है इकोनॉमिकली चाइना के लिए। सो अब यहां पे अब ये बात भी आ जाती है कि हम अपने सॉफ्ट
पावर का कितना लेवरेज कर पाएंगे। बिकॉज़ हमारा रिलेशन सेंट्रल एशिया के साथ सॉफ्ट पावर की डायमेंशन में बहुत ज्यादा है।
बुद्धिज्म की बात करें या सिल्क रोड की बात करें बिकॉज़ इस एरिया से बहुत ट्रेड होता था। कुछ सिटीज हैं, कुछ ऐसे शहर हैं
फरगाना, समरकंद, बुखारा इन एरियाज में से फ्रॉम सेंट्रल एशिया। कितना ट्रेड होता था हमारा। ट्रेड कारवांस आते थे, जाते थे।
मर्चेंट्स वहां पे आते थे। हमारे पास किताबें हैं। हमारे पास रिकॉर्ड्स हैं कि हमारे जो ट्रेडर्स थे इन शहरों में जाते
थे, यहां से आते थे। बुद्धिज्म एक और यूनिफाइंग फैक्टर है। मुगल्स एक बहुत इंपॉर्टेंट फैक्टर रहा है। मुगल इन्वेज़ंस
अब देखिए अब सेंट्रल एशिया से मुगल्स आए। आर्यन थ्योरी भी यहीं से आती है। कितने सारे राजे महाराजे शाकाज़ की बात करें,
कुषाण एंपायर की बात करें। सो अंडरस्टैंडिंग दैट ये रीजन के साथ हमारी सॉफ्ट पावर तो बहुत है। लेकिन हार्ड पावर
आज हमारे पास बहुत कम है। हार्ड पावर डायमेंशन हमको बढ़ाना है। और हार्ड पावर डायमेंशन ऑलरेडी चाइना का बहुत ज्यादा है।
राइट? सो देयर फॉर हमारे पास कुछ इंस्टीट्यूशनल इंसेंटिव्स हैं। हमारे पास कुछ इंस्टीट्यूशनल
अ यू नो जैसे इंडिया सेंट्रल एशिया डायलॉग है। इंडिया सेंट्रल एशिया के बीच में फॉरेन मिनिस्टर्स के लेवल पे भी डायलॉग
है। इंडिया सेंट्रल एशिया के बीच में फॉर दैट मैटर एनएसए लेवल पे भी डायलॉग मैकेनिज्म है। अब ये सब डायलॉग
मैकेनिज्म्स रीइंफोर्स करते हैं हमारी रेलेवेंस को इन दी एसइओ और आल्सो एक वो जो पावर वैक्यूम जो इतने सालों से क्रिएट हुआ
था। बिकॉज़ लेट मी टेल यू वन थिंग 91 के बाद जब ये डिसइीग्रेशन ऑफ़ यूएसएसआर हुआ तो सेंट्रल एशिया बहुत लो प्रायोरिटी पे था
इंडिया के लिए बिकॉज़ रीज़न मी दैट सेंट्रल एशिया के साथ हमारा इतना इंगेजमेंट बिफोर 1991 वाज़ बिकॉज़ ऑफ़ द इंगेजमेंट विथ द
सोवियत यूनियन। एंड 1991 के बाद हमारी प्रॉब्लम ज्यादातर हमारे नेबरहुड में थी। एंड वी वर ऑक्युपाइड टू मच इन आवर नेबरहुड
कि हमने सेंट्रल एशिया को अपनी प्रायोरिटी से बाहर रखा। इट इज ओनली इन 2012 कि हमने सेंट्रल एशिया कनेक्ट सेंट्रल एशिया
पॉलिसी का निर्माण किया। 2015 में मोदी जी बने पहले प्राइम मिनिस्टर जिन्होंने पांचों के पांचों सेंट्रल एशियन कंट्रीज
को विजिट किया। एग्रीमेंट साइन करे। सो एक फ्रेश मोमेंटम टुवर्ड्स सेंट्रल एशिया हमें अभी मिला है 10-12 सालों में। लेकिन
इसके साथ हमारा हजारों साल पुराना रिश्ता है इस रीजन के साथ। टू ऐड टू दैट एसइओ हमारे प्री एकिस्टिंग इनिशिएटिव्स को और
कंसोलिडेट करने में मदद करता है। चैलेंजेस की जब बात आती है तो एक चैलेंज है कि चाइना अपना वीटो पावर यूएनएससी में यूज़
करता है टू सपोर्ट पाकिस्तान। चाइना मना करता है इंकार करता है कि पाकिस्तान बेस्ड टेररिस्ट को वो नहीं डेज़िग्नेट करेगा एज
ग्लोबली ड्रेडेड टेररिस्ट और ग्लोबली वांटेड टेररिस्ट। देन एसइओ का जो कंसेंस बेस्ड डिसीजन मेकिंग है यानी कि अगर 10
मेंबर्स हैं तो 10 के 10 एग्री करें। अगर एक भी अग्री नहीं करेगा तो वो फैसला आगे नहीं जा पाएगा। ये भी एक ऑब्सकल बनता है
कि इंडिया जब भी कोई रेजोल्यूशन पास करने की कोशिश करता है अगेंस्ट पाकिस्तान तो चाइना उसको वीटो करता है। चाइना सपोर्ट
देता है। देन विद इन द एसइओ कोई इनफोर्समेंट मैकेनिज्म एक्सिस्ट नहीं करता है जो इंश्योर कर सके कि क्या कंप्लायंस
है। कैसे हम इन लेटर एंड स्पिरिट इंश्योर कर सकते हैं एंटी टेररिज्म या सिक्योरिटी कमिटमेंट्स को। सो देयर फॉर इंडिया की
एबिलिटी बहुत रिस्ट्रिक्टिव हो जाती है इन ऑर्डर टू होल्ड पाकिस्तान अकाउंटेबल फॉर क्रॉस बॉर्डर टेररिज्म।
डायवर्जन प्रायोरिटीज की बात करें। चाइना और रशिया प्रायोरिटाइज करते हैं काउंटरिंग वेस्टर्न इन्फ्लुएंस इन द एसइओ व्हाइल
इंडिया फोकसेस ऑन द साउथ एशियन सिक्योरिटी थ्रेट्स। सो ये डायवर्जेंस डाइल्यूट करता है इंडिया की एबिलिटी को टु फुल्ली लेवरेज
दी एसइओ अगेंस्ट पाकिस्तान एंड चाइना। सेंट्रल एशियन स्टेट्स। वैसे तो सपोर्टिव है इंडिया के लिए। लेकिन दे आर वैरी
कॉशियस। जब इंडिया चाइना के बीच में साइड्स लेने की बात आती है। बिकॉज़ इकोनॉमिकली सेंट्रल एशिया इज वेरी मच
डिपेंडेंट अपॉन ऑन चाइना। नाउ एसइओ पार्शियली सक्सेसफुल हुआ है फॉर इंडिया इन टर्म्स ऑफ़ चेकिंग द बिलजरेंस ऑफ़ पाकिस्तान
एंड आल्सो इन टर्म्स ऑफ़ कीपन कीपिंग अ चेक ऑन चाइनीस कंट्रोल टू पाकिस्तान। यहां पे बहुत लिमिटेड सक्सेस हमको मिला है। लेकिन
अगेन एक प्लेटफार्म है जहां पे हम पाकिस्तान के टेररिज्म और स्टेट स्पोंसर टेररिज्म एटीट्यूड को एक्सपोज कर सकते
हैं। आरएटीएस को लेवरेज कर सकते हैं। पीस मिशन जॉइंट एक्सरसाइजज़ को लेवरेज कर सकते हैं। लीगल फ्रेमवर्क जो है काउंटरिंग
टेररिज्म का उसको लेवरेज कर सकते हैं। बट इंडिया ये बात तो जरूर है कि इंडिया जब से एसइओ का मेंबर बना है वो एक्टिवली
मोबिलाइज कर रहा है एसइओ के ओपिनियन को अगेंस्ट स्टेट स्पों्सर्ड टेररिज्म। एंड यहां पे हमको चैलेंजेस आ रहे हैं। लेकिन
फिर भी हम डिटरमिन है कि हम इस मिशन पे आगे बढ़ते रहे। नाउ क्वेश्चन आता है कि व्हाई डस द वेस्ट लेबल एसइओ एज एन एंटी
वेस्ट ब्लॉक? ये एक बहुत पर्टेंट क्वेश्चन आता है। देखो पहली बात तो क्योंकि दो रिवीजनिस्ट पावर चाइना और रशिया इन्होंने
एसइओ के फोरम का निर्माण किया। अब चाइना और रशिया किसको चैलेंज करना चाह रहे हैं? जो स्टकोस्ट पावर है यानी कि अमेरिका। तो
एसइओ बीइंग लेड बाय चाइना एंड रशिया। ये दो पावर्स हु आर ऑफन एट ऑ्स विद द वेस्टर्न स्टेट दैट आल्सो मेक्स इट लुक
लाइक एन एंटी वेस्ट फोरम। ऑलदो मेरा ये पर्सनल ओपिनियन है कि ये ओवरथिंकिंग है वेस्ट की और ओवरथिंकिंग है अमेरिका की।
बिकॉज़ देखो अब इसमें तो इंडिया भी मौजूद है और इंडिया बहुत बार कह चुका है कि यार अगर हम यहां पे मौजूद हैं तो हम एंटी
वेस्ट क्यों होंगे? वैसे तो हम ना तो एंटी वेस्ट है ना तो प्रो वेस्ट हैं। वी आर नॉनवेस्ट। ये बात जयशंकर जी ने भी क्लियर
करी है। यूक्रेन वॉर के बाद बड़ा हमको पूछा जाता है कि किसके साइड हो? किसके साइड हो? तो हमने बहुत कैटेगोरिकली कहा है
कि भैया देखो हम ना तो प्रोवेस्ट हैं ना तो हम एंटीवेस्ट हैं हम नॉनवेस्ट हैं। हम एसइओ में हो, हम ब्रिक्स में हो, हम क्वाड
में हो, हमारी अपनी स्ट्रेटेजिक ऑटोनोमी है। लेकिन एसइओ को एज एन एंटी वेस्ट देखा जाता था और अभी भी देखा जाता है बिकॉज़ ऑफ़
द डोमिनेंस ऑफ़ चाइना एंड रशिया इन सेटिंग द एजेंडा ऑफ़ एसइओ। जिस बात को अब थोड़ा इंडिया भी काउंटर करने लगा है कि नहीं ऐसा
तो नहीं है कि नहीं भैया अभी अगर हम यहां पे एसइओ में बैठे हैं तो हम भी तो एजेंडा सेटर हैं एसइओ में तो हम क्यों कोई एजेंडा
सेट करने की कोशिश करेंगे जो कि अगेंस्ट अमेरिका हो या अगेंस्ट वेस्ट हो। ऑलराइट जियोपॉलिटिकल ऑब्जेक्टिव्स एसइओ का मेन
गोल क्या है? एक जस्ट पॉलीिसेंट्रिक वर्ल्ड ऑर्डर बनाना। ताकि वेस्टर्न डोमिनेंस को और अमेरिकन हेजमिनी को काउंटर
किया जा सके। तो ऑर्गेनाइजेशन का फोकस किस पे है? मल्टीपलरिटी पे है व्हिच इज़ सीन ऐज़ अ कोड फॉर सप्लांटिंग यूएस ग्लोबल लीडरशिप
एज़ नोटेड इन द एनालिसिस दैट हाईलाइट कि एसइओ का रोल क्या है इन रीशेपिंग यूरेशियन जिओपॉलिटिक्स देन मेंबरशिप एक्सपेंशन एंड
एंटी वेस्टर्न सेंटीमेंट तो अब यहां पे वेस्ट का ये कहना है कि यहां पे ऐसे मेंबर्स को एंटर करवाया जा रहा है जो कि
अमेरिका के दुश्मन है जैसे कि ईरान हो गया राइट ईरान को 2023 में मेंबरशिप मिली और ये एक नैरेटिव आता है कि एसइओ में चाइना
और रशिया अपने चमचों को अपने चमचों को अपने ही यू नो लाइक दोस्तों को एंटरटेन करना चाह रहे हैं जिनका जिनका एक कॉमन
ऑब्जेक्टिव है एंटी अमेरिका तो यानी कि मेंबरशिप एक्सपेंशन उन देशों के साथ हो रहा है जो कि एंटी अमेरिका या एंटी
वेस्टर्न सेंटीमेंट हारबर करते हैं। ये अगेन एक व्यू पॉइंट है वेस्ट का। देन मिलिट्री एंड सिक्योरिटी कोऑपरेशन देखो
एससीओ कोई फॉर्मल मिलिट्री अलायंस तो नहीं है नेटो की तरह। उसके जॉइंट मिलिट्री एक्सरसाइजज़ होते हैं। लाइक पीस मिशन,
काउंटर टेररिज्म पे फोकस किया जाता है। इंटेलिजेंस शेयरिंग पे फोकस किया जाता है। और पोटेंशियली अपोज़ करते हैं एसइओ में कि
किसी किस्म का वेस्टर्न मिलिट्री प्रेजेंस यहां पे नहीं आएगा। ये बात से यूएस को प्रॉब्लम है। वैसे यूएस को क्यों प्रॉब्लम
होनी चाहिए? जब यूएस ने गारंटी दी है कि भैया मैं नेटो को एक्सपैंड नहीं करता 1991 के बाद। उसके बाद आपने दर्जन देशों को डाल
दिया नेटो में। अब सेंट्रल एशिया पे तो रुक जाओ ना। वहां पे आके तो रुक जाओ। अब आप ऑब्वियसली आप रशिया की ईगो के साथ प्ले
करोगे। फिर रशिया की ईगो को हर्ट करोगे तो रशिया फिर ऑब्वियसली कहेगा ना कि फिर यूक्रेन जैसे मुद्दे होंगे बार-बार। तो इस
बात को लेके रशिया बहुत क्लियर है कि चलो यूरोप में तो वो कुछ नहीं कर पाया लेकिन सेंट्रल एशिया में किसी किस्म से नेटो
नहीं आएगा। अब इस बात से भी उनको प्रॉब्लम है वेस्ट को इकोनमिक एंड एनर्जी इनिशिएटिव एसइओ का इकोनमिक एजेंडा बेल्ट एंड रोड
इनिशिएटिव चाइना का एसइओ का एनर्जी क्लब। दिस इज़ सीन एज़ अ मीन्स टू इंटीग्रेट द इंटरेस्ट ऑफ़ द रशियन एंड द चाइनीज़ इकॉनमी
विद इन सेंट्रल एशिया। रादर देन आल्सो कीपिंग इन माइंड और अकोमोडेटिंग द वेस्टर्न इंटरेस्ट इन द सेंट्रल एशियन
रीजन। तो अगेन इससे एस इससे वेस्ट को प्रॉब्लम है कि एसइओ में एंटी वेस्ट प्रोपेगेंडा बढ़ाया जाता है। देन वेस्टर्न
एक्सक्लूजन यानी कि यहां से वेस्ट बिकॉज़ बेलारूस यूरोप में है बट अगेन वो ईस्टर्न पार्ट में आता है। यूरोप वेस्टर्न यूरोप
या अमेरिका इस फोर में नहीं है। और एसइओ का जो एक्सपेंशन है दैट इज़ कवरिंग मोर देन 25% ऑफ़ द वर्ल्ड्स लैंड मास एंड अराउंड
अबाउट 40-45% ऑफ़ द वर्ल्ड्स पापुलेशन। यानी कि अमेरिका और यूरोप को कंसर्न है कि एसइओ लिमिट कर सकता है उनके एक्सेस को
टू सेंट्रल एशिया। एक ऐसा रीजन जो कि बहुत क्रिटिकल है। बिकॉज़ सेंट्रल सेंट्रल एशिया एक कॉन्टेस्टेशन ग्राउंड बन चुका है आज के
टाइम पे बिटवीन पावर्स लाइक रशिया, चाइना एंड इवन अमेरिका। व्हाई? बिकॉज़ सेंट्रल एशिया में रिच ऑयल रिजर्व्स, गैस
रिजर्व्स, एनर्जी रिजर्व्स, रेयर अर्थ मिनरल्स, यूरेनियन रिजर्व्स ये सब पाए जाते हैं। जिसका फायदा माइंड यू अभी चाइना
उठाना चाहता है। क्रिटिसिज्म ऑफ द एसइओ में बात आती है। पहला पॉइंट आता है डोमिनेंस ऑफ चाइना एंड रशिया के इस पूरे
फोरम में और यह बात सही भी है। एक भी डेमोक्रेसी नहीं है। और ये बात करते हैं एक जस्ट पॉलीिसेंट्रिक वर्ल्ड ऑर्डर की।
इंडिया को छोड़ के कोई भी डेमोक्रेसी नहीं है। बाकी सब जो है ऑथॉरिटेरियन रिजीम्स हैं। देन नंबर टू इनेबिलिटी टू रॉल्व
मेंबर स्टेट डिस्प्यूट्स। अब द मोस्ट क्लियरिंग एग्जांपल इज़ कि इंडिया पाकिस्तान। चलो मैं कहता हूं कि इंडिया
पाकिस्तान की राइवलरी हर एक फोरम में साबोटाज भी नहीं होनी चाहिए। हाईजैक भी नहीं करना चाहिए उस एजेंडा को। सार्क फेल
हो गया। अब एसइओ में हम कंस्ट्रक्टिव काम करना चाहेंगे तो हम क्यों इतनाेंस दें पाकिस्तान को? व्हाई हम तो क्लियर है ना
कि भैया हम पाकिस्तान के साथ नहीं किसी भी मल्टीलटरल फोरम में या ट्रायटरल फोरम में बात करेंगे। हम नहीं बुलाएंगे यूएन को।
नहीं बुलाएंगे अमेरिका को। नहीं चाहिए हमें रशिया पाकिस्तान के साथ डील करने के लिए। मतलब डिफेंस के मामले में फाइन।
बट पाकिस्तान के साथ डील करना हमको आता है। और हम इंडिविजुअली करेंगे। हमको कोई शौक नहीं है कि हम इंटरनेशनल फोरम्स पे
पाकिस्तान का हंगामा करें या पाकिस्तान का रोना लेके जाए। जैसे पाकिस्तान इंडिया के बारे कहता रहता है कि कश्मीर ले गए ये हो
गया वो हो गया। हमको इसका कोई शौक नहीं है। हम अपने आप करेंगे जो करना है। लेकिन क्रिटिसिज्म में बात आती है कि इंडिया
पाकिस्तान की राइवलरी को एसइओ नहीं रिॉल्व कर पाया। और टू बी वेरी फ्रैंक हमारी फॉरेन पॉलिसी जिस तरह से डिज़ाइन है, हम
यही चाहेंगे कि इंडिया पाकिस्तान के इश्यूज बलिटरली रिॉल्व हो किसी ऑर्गेनाइज़ेशन में नहीं।
देन यहां पे वीक इंस्टीट्यूशनलाइजेशन एंड डिलीवरी रिकॉर्ड की बात आती है। कुछ ऐसे अनाउंस्ड इनिशिएटिव जैसे कि एसइओ
डेवलपमेंट बैंक, एसइओ यूनिवर्सिटी इसको अनाउंस करने को बहुत टाइम हो गया है। लेकिन अभी तक यू नो इसको इंप्लीमेंट नहीं
करा गया है। आरएटीएस की बात करें जो कि ताशकथ में है। इसमें इंटेलिजेंस शेयरिंग की बात आती है। लेकिन फिर भी ये प्रिवेंट
नहीं कर पाया है मेजर टेररिस्ट इंसिडेंस को इन द मेंबर स्टेट्स एंड इज़ एक्यूज़्ड ऑफ़ बीइंग यूज़्ड बाय चाइना एंड सेंट्रल एशियन
रिजीम्स टू टारगेट पॉलिटिकल अपोनेंट्स। एंड देन अगेन वही एक प्रोपेगेंडा कि इसको एंटी वेस्टर्न प्लेटफार्म के तौर पर यूज़
किया जाता है रादर दन यू नो टॉकिंग अबाउट एक सिक्योरिटी और इकोनॉमिक्स और टेक्नोलॉजी और साथ के साथ रूटीनली
क्रिटिसाइज किया जाता है एक्सटर्नल इंटरफेरेंस को एंड आल्सो वेस्टर्न सेंशंस को व्हिच द वेस्ट फील्स के एक सही मायने
में एक अह रिस्पेक्ट ऑफ इंटरनेशनल ऑर्डर नहीं है। यानी कि वेस्ट का ये कहना है कि एसइओ
टॉक्स अबाउट रिवाइजिंग दी इस्टैब्लिश्ड नॉर्म्स रिवाइजिंग एंड रिफॉर्मिंग एंड रिजेक्टिंग दी आइडिया ऑफ़ यूएन ऑफ़ आईएमएफ
एंड वर्ल्ड बैंक बट वेस्ट का ये क्रिटिसिज्म भी है टुवर्ड्स दी एसइओ दैट इट इज़ एसइओ इज़ वन फोरम व्हिच इज़ नॉट रियली
रिस्पेक्टिंग द एस्टैब्लिश्ड नॉर्म्स एट द इंटरनेशनल लॉ एंड देन ह्यूमन राइट्स एंड डेमोक्रेसी डेफिशिट की बात आती है
एक्सेप्ट इंडिया कोई भी कंट्री यहां पे डेमोक्रेट नहीं है हाइब्रिड रिजीम्स हैं या अथॉरिटेरियन रिजीम्स हैं। जबकि एसइओ का
चार्टर और डिक्लेरेशन कैटेगोरिकली बात करता है कि हम वेस्टर्न ह्यूमन राइट्स वाले यू नो आइडिया को आईडियोलॉजी को हम
रिजेक्ट करते हैं। लेकिन हम डेमोक्रेसी चाहते हैं। देखो ह्यूमन राइट्स ह्यूमन राइट्स हैं। इसमें वेस्ट या ईस्ट वाली बात
नहीं होती है। चाइना की डेफिनेशन ह्यूमन राइट्स की कैन नॉट बी डिफरेंट देन अमेरिका की डेफिनेशन ऑफ़ ह्यूमन राइट्स। मानव
अधिकार की जब बात आती है तो मानव अधिकार है। कैन नॉट बी कि चाइना का मानव अधिकार कुछ और है या अमेरिका का मानव अधिकार कुछ
और है। इट कैन नॉट बी लाइक दैट। राइट? इट इज़ नेवर लाइक दैट। इकोनमिक अंडर परफॉर्मेंस डिस्पाइट लॉफ्टी
रिटोरिक अबाउट कनेक्टिविटी एंड ट्रेड इंट्रा एससीओ ट्रेड रिमेंस वेरी लो एस कंपेयर टू एशियन और और इवन कंपेयर टू द
मरकुसर इन साउथ अमेरिका चाइना के बीआरआई प्रोजेक्ट्स हैं सेंट्रल एशिया में लेकिन वो बटरल है वो ट्रूली मल्टीलेटरल नहीं है
एंड ट्रूली मल्टीलटल एसइओ इनिशिएटिव्स अभी भी वो अभी भी लाइक इतने ज्यादा मजबूत नहीं है इतने इंप्लीमेंट नहीं हुए हैं।
ओके देन एसइओ टूरिज्म एंड कल्चरल कैपिटल इनिशिएटिव इसके बारे में बात करते हैं। ये बेसिकली एक इनिशिएटिव है जो कि रोटेटिंग
तरीके से ल्च किया गया है 2022 में ताकि पीपल टू पीपल एक्सचेंजेस कल्चरल हेरिटेज और टूरिज्म अमंग मेंबर स्टेट्स को प्रमोट
किया जाए और यहां पे एक सिलेक्टेड सिटी को हाईलाइट किया जाता है एज अ हब फॉर दी एसइओ ब्रांडेड इवेंट्स फेस्टिवल्स एंड
कोलैबोरेशंस व्हिच इज़ एमिंग टू फ़स्ट म्यूचुअल अंडरस्टैंडिंग एंड इकोनमिक टाइल्स इन दी कल्चरल एंड टूरिज्म सेक्टर
ये इनिशिएटिव अलाइन करता है विथ द एसइओ चार्टर्स एफेसिस ऑन ह्यूमैनिटेरियन कोऑपरेशन अह एजुकेशन आर्ट्स एनवायरमेंटल
प्रोटेक्शन लेकिन फोकस किया जाता है ऑन प्रैक्टिकल डिलीवरेबल्स लाइक जॉइंट फेस्टिवल्स एंड टूरिज्म प्रमोशन ए वेल
अनलाइक द ब्रॉडर एसइओ इकोनमिक प्रोजेक्ट्स इट हैज़ सीन कंसिस्टेंट इंप्लीमेंटेशन विद इवेंट्स हेल्ड एनुअली डिस्पाइट द कंसेंस
बेस्ड चैलेंजेस विद इन द ऑर्गेनाइजेशन तो अनाउंस किया गया था 2022 के एसइओ समिट में इन समरकंद ये वही समिट है जहां पे मोदी जी
और प्यूटिन आमने-सामने बैठे थे और मोदी जी ने प्यूटिन को कहा था कि दिस इज़ नॉट द एयर ऑफ़ वॉर। तब यूक्रेन वॉर को शुरू हुए को
कुछ 6 सात महीने हो चुके थे और यह पोस्ट कोविड एक यू नो एक समिट हुआ था एसइओ का बिकॉज़ ऑब्वियसली कोविड के दौरान कोविड
इयर्स में 2020 में सब कुछ वर्चुअली चल रहा था और एसइओ के सेक्रेटरी जनरल ने जेंग मिंग ने डिस्क्राइब किया था एज अ न्यू
रोटेटिंग मैकेनिज्म टू रोटेट द टाइटल अमंग द मेंबर स्टेट सिटीज विद रिच हेरिटेज तो अल्टीमेटली गोल ये है कि इंट्रा एसइओ
टूरिज्म को बढ़ावा मिले एंड ज्यादा लोग घूमने फिरने आए एसइओ मेंबर स्टेट्स में ऑब्वियसली उसे इकॉनमी को भी बूस्ट मिलेगा।
सॉफ्ट पावर को लेवरेज मिलेगा। आर्ट्स, फेस्टिवल्स, यूथ एक्सचेंज प्रोग्राम के जरिए। उसके चलते इकोनॉमिक इंटीग्रेशन भी
होगा। कल्चरल साइट्स को इंटीग्रेट किया जाएगा ट्रेड कॉरिडोर्स के साथ। सो 2022-23 में वाराणसी थी जिसको डिक्लेअ किया गया
था। वाराणसी जो कि इंडिया में है। देन 2024 2023 सो आई मीन उसके बाद सब्सक्वेंटली 20242 में किंग दाऊ को
डिक्लेअ किया गया था। एंड 202526 में चोलपोन आता जो कि किरगिस्तान में है उसको डिक्लेअ किया गया है और इसको डिक्लेअ किया
गया है द रिसेंटली कंक्लूडेड समिट व्हिच हैपन इन तियांजन इन 2025 तियांजन यानी कि चाइना में जो समिट 2025 में हुआ है क्या
इंपॉर्टेंट टेक अवेज़ हैं वो भी समझ लेते हैं। नाउ अंडरस्टैंड वन थिंग पहली बात एग्रीमेंट करा गया है ऑन एसइओ एंटी ड्रग
सेंटर। ऑलराइट नाउ द फैक्ट ऑफ द मैटर इज कि सेंट्रल एशिया बीइंग वेरी क्लोज एंड इन वेरी इन यू नो क्लोज प्रॉक्सिमिटी टू यू
नो दी टू आल्सो टू दी एरियाज जहां पे हमको बहुत सारे चैलेंजेस आ रहे हैं इन टर्म्स ऑफ़ मेडिसिन इन टर्म्स ऑफ़ अह वैक्सीनंस इन
टर्म्स ऑफ़ इक्विटेबल डिस्ट्रीब्यूशन ऑफ़ मेडिसिन। तो यहां पे एग्रीमेंट साइन करे गए हैं बिटवीन द एसइओ मेंबर स्टेट्स ऑन द
एसइओ एंटी ड्रग सेंटर एंड आल्सो द यूनिवर्सल सेंटर फॉर काउंटरिंग चैलेंजज़ एंड थ्रेट्स टू सिक्योरिटी ऑफ़ द एसइओ
मेंबर स्टेट्स। नाउ एंटी ड्रग सेंटर में एक तो मेडिसिनल ड्रग्स की भी बात आती है। दूसरी बात यहां पे आती है इन टर्म्स ऑफ जो
ड्रग ट्रैफिकिंग और नारको ट्रैफिकिंग हो रही है बिकॉज़ ऑफ़ द प्रॉक्सिमिटी ऑफ़ द एसइओ मेंबर स्टेट्स टू द गोल्डन क्रिसेंट व्हिच
इज़ ईरान, पाकिस्तान, अफगानिस्तान। देन इंटरेस्टिंगली एससीओ के जॉइंट डिक्लेरेशन में पहलगाम के आतंकी हमले को भी कंडेम करा
गया है। आल्सो इस स्टेटमेंट में कंडेम करा गया है जाफर एक्सप्रेस जो जाफर एक्सप्रेस में जो अटैक हुआ था इन द बलूच रीजन इन
मार्च 2025 और जो पाकिस्तान में भी जो आतंकी हमले हुए थे उसको भी कंडेम करा गया है। लेकिन एक बहुत बड़ी बात है कि पहलगाम
के आतंकी हमलों को भी यहां पे कंडेमनेशन मिला है। वो भी तियांजन समिट में चाइना में जो मीटिंग हुआ है कि चाइना ने चलो
एटलीस्ट यहां पे केवल लिप सर्विस नहीं बट इफेक्टिवली इंडिया को सपोर्ट भी किया। एंड आल्सो लेट मी टेल यू वन थिंग। दिस समिट
हैपेंस एट अ टाइम इन चाइना जब चाइना को बहुत ज्यादा जरूरत थी इंडिया की बिकॉज़ बिकॉज़ ऑफ़ द टेरिफ वॉर बिकॉज़ ऑफ़ द टैरिफ
वॉर व्हिच इज़ बीइंग प्लेड डोन्ड ट्रंप इन 2025 थिंग्स वर डिज़ इन अ वेक दैट अमेरिका और दैट चाइना एंड इंडिया दे सॉर्ट ऑफ़ केम
मोर क्लोजर टू ईच अदर यूटिलाइजिंग दी ओपोरर्चुनिटी ऑफ़ द एसइओ समिट एंड आल्सो एक नई एक फ्रेश किस्म की यू नो बॉन्ड एंड
फ्रेश किस्म की फ्रेंडशिप दोनों कंट्रीज के बीच में शुरू हुई है। ऑलरेडी मार्च 2025 में कई सारे कॉन्फिडेंस बिल्डिंग
मेजर्स साइन करे गए हैं। चाइना और इंडिया के बीच में। पीपल टू पीपल रिलेशंस के बारे में काफी सारी बातचीत हुई है। यू नो कैलाश
मानसरोवर यात्रा को रिज्यूम करना या हाइड्रोलॉजिकल डेटा शेयर करना। या अब तो खैर लोग चाइना अब यू नो पीपल टू पीपल
कनेक्टिविटी के तौर पे अब हमारी फ्लाइट्स भी रिज्यूम हो चुकी है टू चाइना। अह बिकॉज़ ऑफ़ द गलवान क्लासेस इन 2020। चाइना और
इंडिया के बीच में स्टैंड ऑफ जो रहा था वो टेंशन रही थी। नाउ दैट हैज़ डी एस्केलेटेड। बट दिस एसइओ समिट वाज़ यूटिलाइज एस एन
ओपोरर्चुनिटी फॉर चाइना आल्सो टू वर्क अ वेरी पॉजिटिवली एंड वेरी यू नो लाइक इन अ वेरी यू नो कॉम्प्लीमेंट्री वे विद
इंडिया। देन थर्डली एसइओ का जो डायलॉग पार्टनर स्टेटस है टू लाओस। सो लाओस को एडमिट करा गया है एज अ डायलॉग पार्टनर और
एक यू नो सो डिसीजन वाज़ टेकन टू ग्रांट द लाओस अ पीपल डेमोक्रेटिक रिपब्लिक द स्टेटस ऑफ़ द एसइओ डायलॉग पार्टनर एंड टू
ग्रांट एसइओ ऑब्जर्वर स्टेटस विद द कॉमनव्थ ऑफ़ इंडिपेंडेंट स्टेट सीआईएस तो ये एक इंटरनेशनल ऑर्गेनाइजेशन है सीआईएस
जो कि ऑलरेडी एक पार्टनर स्टेटस उसका था विद इन द एसइओ इसको ऑब्ज़र्वर स्टेटस ऑफ़ द एसइओ मिला है। देन सिटी ऑफ़ चोलपोन आता
डेज़िज़ग्नेटेड एज़ द टूरिस्ट एंड द कल्चरल कैपिटल ऑफ़ द एसइओ फॉर 2025-26. सो 2025-26 आल्सो मार्क्स द 25थ ईयर ऑफ़ दी अह यू नो
एस्टैब्लिशमेंट ऑफ़ द एसइओ। एंड देन हमारे प्राइम मिनिस्टर मोदी जी ने प्रमो अह प्रपोज़ किया है सिविलाइज़ेशन डायलॉग फोरम।
टू एनहांस द पीपल टू पीपल टाइज़ इन द एसइओ। बिकॉज़ वंस अगेन सेंट्रल एशिया और इंडिया के बीच में सिविलाइजेशन ओल्ड रिलेशन है।
मोर देन 2000 ओल्ड, 2000 ईयर ओल्ड रिलेशन है। सो आवर प्राइम मिनिस्टर हैज़ प्रपोज्ड द फॉर्मेशन ऑफ़ अ सिविलाइज़ेशन डायलॉग फोरम।
व्हिच विल ऑफ़ कोर्स सेंटर अराउंड सेंटर अराउंड हैविंग मोर रिबर्स पीपल टू पीपल रिलेशंस एंड आल्सो मोर रिर्वस्ट रिलेशंस
इकोनॉमिकली एज़ वेल। ज़ी जिनबिंग ने प्रपोज़ कर प्रपोज़ करा है ग्लोबल गवर्नेंस इनिशिएटिव। तो चाइनीस प्रेसिडेंट जीबिंग
ने प्रपोज करा है ग्लोबल गवर्नेंस इनिशिएटिव एट द एसइओ प्लस लीडर समिट एज़ ही एडवोकेट्स नाउ दैट्स दैट्स वैरी फनी एंड
वेरी इंटरेस्टिंग दैट ही इज़ वांटिंग टू एडवोकेट एंड प्रैक्टिस मल्टीलेटरलिज्म नाउ ही सेज़ दैट लुक माई मॉडल ऑफ़ मल्टीलेटलिज़्म
इज़ मच डिफरेंट दैन दी अमेरिकन डोमिनेटेड फॉर्म ऑफ़ मल्टीलेटरलिज्म। नाउ परहैप्स चाइना इज़ वांटिंग टू क्रिएट अ पैरेलल
स्ट्रक्चर टू द यूनाइटेड नेशंस बिकॉज़ चाइना फील्स एंड व्हिच इज़ ट्रू आल्सो कि अमेरिका कंट्रोल्स यूएन। द चाइना थ्रू दिस
ग्लोबल गवर्नेंस इनिशिएटिव वांट्स टू क्रिएट अ विज़ ऑफ चाइनीस विज़न ऑफ़ मल्टीलेटलिज्म देयर बाय रिफॉर्मिंग
मल्टीलेटलिज्म एस पर द लेंस ऑफ़ चाइना एंड एसइओ की जो चेयरमैनशिप है फॉर 2025-26 दैट इज़ पास्ड ऑन टू द किर्गिगज़ रिपब्लिक व्हिच
मींस कि 2026 में जब एसइओ 25 इयर्स कंप्लीट करेगा तो प्रेसिडेंसी किरगिस्तान के पास है। और थीम क्या है? 2026 की
प्रेसिडेंसी की 25 इयर्स ऑफ़ एसइओ टुगेदर फॉर अ स्टेबल वर्ल्ड डेवलपमेंट एंड प्रोस्पेरिटी। तो सम अप इन समरी हमारी
मेंबरशिप एसइओ में कंट्रीब्यूट करती है टू आवर इंगेजमेंट एंड आल्सो टू आवर एडवोकेसी ऑफ़ मल्टीलटलिज्म एंड ऑफ कोर्स टू द सो
कॉल्ड पॉलीिसेंट्रिक वर्ल्ड ऑर्डर जो चाइना और रशिया कह रहे हैं 25 सालों से एंड आल्सो वेरीेंटली थ्रू द एसइओ हमें एक
जरिया मिल रहा है एक मीडिया मिल रहा है कि हम सेंट्रल एशियन कंट्रीज के साथ अपनी कोऑपरेशन को एनहांस कर सकें वेरीेंटली
अपनी जो 2012 में कनेक्ट सेंट्रल एशिया पॉलिसी बनाई है उसको हम एडवांस करें उसको हम और ज्यादा बढ़ावा दें एंड आल्सो सो
अपने डिफरेंसेस को हम रॉल्व कर सके मिली चाइना एट द सेम टाइम आतंकवाद सेपरेटिज्म एक्सट्रीमिज्म के खिलाफ हम अपनी आवाज
बुलंद कर सकें एक्सपोज कर सकें पाकिस्तान के डिज़ को पाकिस्तान के दो गुलापन को और पाकिस्तान के नफेरियस एक्टिविटीज को और यह
हमको मौका विद इन द एसइओ मिलता है। सो फ्रेंड्स ये था हमारा वीडियो। कैसा लगा कमेंट सेक्शन में जरूर बताना। मिलेंगे
बहुत जल्द बाकी वीडियोस में। प्लीज टेक केयर ऑफ योरसेल्फ। साइनिंग ऑफ।
SCO एक बहुपक्षीय अंतरराष्ट्रीय संगठन है जिसकी स्थापना 2001 में हुई थी। इसका मुख्य उद्देश्य न्यायसंगत बहुकेंद्रीय विश्व व्यवस्था बनाना और पश्चिमी व अमेरिकी प्रभुत्व को संतुलित करना है। यह संगठन रूस और चीन के नेतृत्व में 'शंघाई फाइव' के रूप में 1996 में शुरू हुआ था।
SCO के सदस्य देशों में रूस, चीन, भारत, पाकिस्तान, कजाकिस्तान, किरगिस्तान, तजाकिस्तान, उज्बेकिस्तान, ईरान और बेलारूस शामिल हैं। इसकी दो प्रमुख संस्थाएं सचिवालय (बीजिंग में स्थित) और RATs (आतंकवाद, पृथक्करण, उग्रवाद के खिलाफ सहयोग) हैं। सर्वोच्च निर्णयकारी संस्था राज्याध्यक्ष परिषद (CХS) है जो साल में एक बार मिलती है।
SCO भारत के लिए क्षेत्रीय कनेक्टिविटी विशेषकर सेंट्रल एशिया से जोड़ने का माध्यम है। यह आतंकवाद, पृथक्करण और उग्रवाद के खिलाफ साझा मंच प्रदान करता है और पाकिस्तान के आतंकवाद समर्थक गतिविधियों का वैश्विक स्तर पर प्रदर्शन करता है। साथ ही, यह सांस्कृतिक आदान-प्रदान, व्यापार और सुरक्षा सहयोग के अवसर भी प्रदान करता है।
SCO में चीन-रूस के प्रभुत्व के कारण लोकतांत्रिक देशों की कमी, पाकिस्तान की आतंकवाद समर्थक गतिविधियां, और निर्णय प्रक्रिया में सहमति जरूरी होने के कारण स्तंभन प्रमुख चुनौतियां हैं। इसके अलावा, कुछ पश्चिमी देश इसे एंटी-वेस्ट प्लेटफॉर्म मानते हैं और आर्थिक पहल अपेक्षित गति से विकसित नहीं हो पाईं हैं।
SCO आतंकवाद के खिलाफ RATs के माध्यम से इंटेलीजेंस शेयरिंग और संयुक्त अभ्यास करता है। यह एंटी-ड्रग सेन्टर, संयुक्त सुरक्षा केंद्र और सांस्कृतिक पर्यटन को प्रोत्साहित करता है। भारत की 2023 से अध्यक्षता से संगठन ने सहयोग का नया आयाम पाया है और 2025-26 में 25 वर्ष पूरे होने पर स्थिर विश्व और विकास के लिए सहयोग को बढ़ावा देगा।
SCO में निर्णय सहमति के आधार पर लिए जाते हैं, जिसका मतलब है कि सभी सदस्यों की सहमति जरूरी होती है। यह प्रक्रिया निर्णय लेने में स्तंभन पैदा कर सकती है क्योंकि एक या कुछ सदस्य विरोध कर सकते हैं, जिससे निर्णय लेना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
भारत SCO के माध्यम से सेंट्रल एशिया से जुड़ने के लिए अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन मार्ग (INSTC) जैसे महत्वपूर्ण कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट्स को बढ़ावा दे रहा है, जो क्षेत्रीय व्यापार और आर्थिक सहयोग को मजबूत करता है। यह प्रोजेक्ट भारत को मध्य एशियाई देशों और यूरोप के साथ बेहतर संपर्क प्रदान करता है।
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