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भारत-रूस संबंध: 23वें शिखर सम्मेलन से भविष्य की रणनीतियाँ

भारत-रूस संबंधों की प्रासंगिकता

भारत-रूस संबंध 2025 में 23वें शिखर सम्मेलन के दौरान फिर से उत्थान पर आए। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा से दोनों देशों के बीच विश्वास, पारस्परिक सम्मान और रणनीतिक संयोजन को नया आयाम मिला। इस सम्मेलन में कई समझौते हुए जो द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत बनाते हैं।

23वें भारत-रूस शिखर सम्मेलन के मुख्य परिणाम

  • द्विपक्षीय व्यापार लक्ष्य: वित्त वर्ष 2025 में 68 बिलियन अमेरिकी डॉलर के व्यापार के साथ 2030 तक 100 बिलियन डॉलर का लक्ष्य तय किया गया। यह Impact of Donald Trump's 2024 Presidential Win on Indian Economy, Jobs, and Trade पर भी प्रभाव डाल सकता है।
  • राष्ट्रीय मुद्राओं का प्रयोग: डॉलर निर्भरता कम करने हेतु द्विपक्षीय व्यापार में राष्ट्रीय मुद्राओं के उपयोग को बढ़ावा।
  • नए संपर्क मार्ग: चेन्नई से वलादीवस्त तक समुद्री मार्ग, उत्तरी समुद्री मार्ग और अंतरराष्ट्रीय उत्तर दक्षिण परिवहन गलियारा जैसे प्रोजेक्टों पर सहमति।
  • ऊर्जा व निवेश: 12 नए परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के विकास सहित ऊर्जा क्षेत्र में निवेश वृद्धि, जिसकी विस्तृत जानकारी के लिए देखें INS 115 रिवीजन: रिवेन्यू रिकग्निशन के फाइव स्टेप्स और स्पेशल केस समझें।
  • मीडिया व संस्कृति: रूस टुडे के भारतीय संस्करण का शुभारंभ और भारत द्वारा रूसी नागरिकों को 30 दिन का मुफ्त ई-टूरिस्ट वीज़ा।

भारत-रूस संबंधों का विकास चरणवार

  • प्रारंभिक वर्ष (1947-1955): आज़ादी के बाद राजनैतिक संबंध स्थापित, भिलाई व बोकारो स्टील प्लांट की स्थापना।
  • शीत युद्ध काल (1955-1991): सामरिक, आर्थिक और कूटनीतिक सहयोग बढ़ा, 1971 की संधि और कुडनकुलम परमाणु संयंत्र समझौता।
  • शीत युद्ध के बाद (1991-2000): सोवियत संघ का विघटन और भारत की आर्थिक उदारीकरण से संबंधों में कुछ गिरावट, 1993 में मित्रता एवं सहयोग संधि।
  • रणनीतिक साझेदारी (2000 से आगे): 2000 में रणनीतिक साझेदारी की स्थापना; 2021 में रक्षा एवं विदेश मंत्रियों की द्विपक्षीय वार्ता।

सहयोग के प्रमुख क्षेत्र

  • भू-राजनीतिक: संयुक्त राष्ट्र, ब्रिक्स, एससीओ और जी20 में सहयोग; बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था का समर्थन।
  • रणनीतिक: चीन की क्षेत्रीय प्रसार नीति विरोधी प्रयास, अंतरराष्ट्रीय उत्तर दक्षिण परिवहन गलियारों का विकास।
  • सैन्य: रक्षात्मक उपकरणों का 36% आयात रूस से, संयुक्त सैन्य अनुसंधान जैसे ब्रह्मोस मिसाइल प्रोजेक्ट।
  • आर्थिक: द्विपक्षीय व्यापार, मुक्त व्यापार समझौते की प्रक्रिया को तेज़ करना।
  • वैज्ञानिक: गगनयान मिशन हेतु प्रशिक्षण, क्वांटम कंप्यूटिंग और जैव प्रौद्योगिकी में सहयोग।

भारत के लिए महत्व

  • राजनीतिक स्थिरता और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता हेतु रूस का समर्थन।
  • आर्थिक रूप से फार्मास्युटिकल निर्यात में रूस की प्रमुखता।
  • ऊर्जा सुरक्षा में रूस से सस्ता कच्चा तेल।
  • क्षेत्रीय स्थिरता हेतु अफगानिस्तान में शांति प्रयास।

मौजूदा चुनौतियाँ

  • भारत-अमेरिका बढ़ता सहयोग जो रूस के साथ कूटनीतिक जटिलता खड़ी करता है।
  • रूस का चीन और पाकिस्तान के साथ रिश्तों में वृद्धि।
  • भारत-रूस व्यापार में भारी व्यापार घाटा (लगभग 58.9 बिलियन अमेरिकी डॉलर)।
  • रक्षा सहयोग में इंटरऑपरेबिलिटी की कमी और अमेरिकी प्रतिबंध (कात्सा)।
  • मध्य एशिया में भू-राजनीतिक अस्थिरता।

आगे की राह

  • मजबूती व विश्वास बढ़ाना, राजनैतिक व आर्थिक क्षेत्रों में विविधता लाना।
  • मुक्त व्यापार समझौते को जल्द से जल्द अंतिम रूप देना व निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाना।
  • आतंकवाद विरोधी सम्मिलित प्रयास और तकनीकी नवाचारों में सहयोग बढ़ाना।
  • सॉफ्ट पावर व सांस्कृतिक आदान-प्रदान को प्रोत्साहन। इस संदर्भ में भारतीय संस्कार और सूरदास के भजन: जीवन के 16 संस्कार भी उपयोगी संसाधन हैं।

निष्कर्ष

वर्तमान वैश्विक तनावों के बावजूद भारत-रूस संबंध स्थिर और महत्वपूर्ण हैं। दोनों देशों की मित्रता भविष्य में रणनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भारत की प्रगति में सहायक सिद्ध होगी। प्रधानमंत्री मोदी के शब्दों में, "रूसी सर्दियों में तापमान कितना भी नकारात्मक हो, भारत-रूस मित्रता सदैव सकारात्मक रहेगी।"

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