भारत-रूस संबंधों की प्रासंगिकता
भारत-रूस संबंध 2025 में 23वें शिखर सम्मेलन के दौरान फिर से उत्थान पर आए। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा से दोनों देशों के बीच विश्वास, पारस्परिक सम्मान और रणनीतिक संयोजन को नया आयाम मिला। इस सम्मेलन में कई समझौते हुए जो द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत बनाते हैं।
23वें भारत-रूस शिखर सम्मेलन के मुख्य परिणाम
- द्विपक्षीय व्यापार लक्ष्य: वित्त वर्ष 2025 में 68 बिलियन अमेरिकी डॉलर के व्यापार के साथ 2030 तक 100 बिलियन डॉलर का लक्ष्य तय किया गया। यह Impact of Donald Trump's 2024 Presidential Win on Indian Economy, Jobs, and Trade पर भी प्रभाव डाल सकता है।
- राष्ट्रीय मुद्राओं का प्रयोग: डॉलर निर्भरता कम करने हेतु द्विपक्षीय व्यापार में राष्ट्रीय मुद्राओं के उपयोग को बढ़ावा।
- नए संपर्क मार्ग: चेन्नई से वलादीवस्त तक समुद्री मार्ग, उत्तरी समुद्री मार्ग और अंतरराष्ट्रीय उत्तर दक्षिण परिवहन गलियारा जैसे प्रोजेक्टों पर सहमति।
- ऊर्जा व निवेश: 12 नए परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के विकास सहित ऊर्जा क्षेत्र में निवेश वृद्धि, जिसकी विस्तृत जानकारी के लिए देखें INS 115 रिवीजन: रिवेन्यू रिकग्निशन के फाइव स्टेप्स और स्पेशल केस समझें।
- मीडिया व संस्कृति: रूस टुडे के भारतीय संस्करण का शुभारंभ और भारत द्वारा रूसी नागरिकों को 30 दिन का मुफ्त ई-टूरिस्ट वीज़ा।
भारत-रूस संबंधों का विकास चरणवार
- प्रारंभिक वर्ष (1947-1955): आज़ादी के बाद राजनैतिक संबंध स्थापित, भिलाई व बोकारो स्टील प्लांट की स्थापना।
- शीत युद्ध काल (1955-1991): सामरिक, आर्थिक और कूटनीतिक सहयोग बढ़ा, 1971 की संधि और कुडनकुलम परमाणु संयंत्र समझौता।
- शीत युद्ध के बाद (1991-2000): सोवियत संघ का विघटन और भारत की आर्थिक उदारीकरण से संबंधों में कुछ गिरावट, 1993 में मित्रता एवं सहयोग संधि।
- रणनीतिक साझेदारी (2000 से आगे): 2000 में रणनीतिक साझेदारी की स्थापना; 2021 में रक्षा एवं विदेश मंत्रियों की द्विपक्षीय वार्ता।
सहयोग के प्रमुख क्षेत्र
- भू-राजनीतिक: संयुक्त राष्ट्र, ब्रिक्स, एससीओ और जी20 में सहयोग; बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था का समर्थन।
- रणनीतिक: चीन की क्षेत्रीय प्रसार नीति विरोधी प्रयास, अंतरराष्ट्रीय उत्तर दक्षिण परिवहन गलियारों का विकास।
- सैन्य: रक्षात्मक उपकरणों का 36% आयात रूस से, संयुक्त सैन्य अनुसंधान जैसे ब्रह्मोस मिसाइल प्रोजेक्ट।
- आर्थिक: द्विपक्षीय व्यापार, मुक्त व्यापार समझौते की प्रक्रिया को तेज़ करना।
- वैज्ञानिक: गगनयान मिशन हेतु प्रशिक्षण, क्वांटम कंप्यूटिंग और जैव प्रौद्योगिकी में सहयोग।
भारत के लिए महत्व
- राजनीतिक स्थिरता और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता हेतु रूस का समर्थन।
- आर्थिक रूप से फार्मास्युटिकल निर्यात में रूस की प्रमुखता।
- ऊर्जा सुरक्षा में रूस से सस्ता कच्चा तेल।
- क्षेत्रीय स्थिरता हेतु अफगानिस्तान में शांति प्रयास।
मौजूदा चुनौतियाँ
- भारत-अमेरिका बढ़ता सहयोग जो रूस के साथ कूटनीतिक जटिलता खड़ी करता है।
- रूस का चीन और पाकिस्तान के साथ रिश्तों में वृद्धि।
- भारत-रूस व्यापार में भारी व्यापार घाटा (लगभग 58.9 बिलियन अमेरिकी डॉलर)।
- रक्षा सहयोग में इंटरऑपरेबिलिटी की कमी और अमेरिकी प्रतिबंध (कात्सा)।
- मध्य एशिया में भू-राजनीतिक अस्थिरता।
आगे की राह
- मजबूती व विश्वास बढ़ाना, राजनैतिक व आर्थिक क्षेत्रों में विविधता लाना।
- मुक्त व्यापार समझौते को जल्द से जल्द अंतिम रूप देना व निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाना।
- आतंकवाद विरोधी सम्मिलित प्रयास और तकनीकी नवाचारों में सहयोग बढ़ाना।
- सॉफ्ट पावर व सांस्कृतिक आदान-प्रदान को प्रोत्साहन। इस संदर्भ में भारतीय संस्कार और सूरदास के भजन: जीवन के 16 संस्कार भी उपयोगी संसाधन हैं।
निष्कर्ष
वर्तमान वैश्विक तनावों के बावजूद भारत-रूस संबंध स्थिर और महत्वपूर्ण हैं। दोनों देशों की मित्रता भविष्य में रणनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भारत की प्रगति में सहायक सिद्ध होगी। प्रधानमंत्री मोदी के शब्दों में, "रूसी सर्दियों में तापमान कितना भी नकारात्मक हो, भारत-रूस मित्रता सदैव सकारात्मक रहेगी।"
साथियों आप सभी को नमस्कार। 71 बीपीएससी मेंस प्रिपरेशन के शेड्यूल में करंट अफेयर सेक्शन को स्टार्ट किया गया है। करंट
अफेयर्स में आपको आईआर पढ़ना होगा, इंटरनेशनल रिलेशंस पढ़ने होंगे। नेशनल करंट अफेयर्स पढ़ना होगा आपको और स्टेट
करंट अफेयर्स यानी बिहार का करंट अफेयर्स आपको पढ़ना होगा। करंट अफेयर्स आप जानते हैं आपके मेंस एग्जाम के लिए बहुत
इंपॉर्टेंट हो जाता है। इसके अलावा जो बच्चे अब 70 बीपीएससी का इंटरव्यू देने वाले हैं उनके लिए भी ये क्लासेस
इंपॉर्टेंट हो जाती हैं। हमने अलग से एक प्लेलिस्ट बना दी है। तो आप लोग प्लेलिस्ट को फॉलो करते रहिएगा। जो बच्चे 71
बीपीएससी मेंस का एग्जाम देंगे और जो 70 बीपीएससी मेंस का इंटरव्यू देने वाले हैं। आईआर सेक्शन में हमने इंडिया अफगानिस्तान
रिलेशंस को डिस्कस कर लिया था अपनी पिछली क्लास में। आज हम इंडिया रशिया रिलेशंस को देखेंगे। भारत रशिया रिलेशंस का टॉपिक यह
क्यों आपकी आगामी एग्जाम के लिए और इंटरव्यू के लिए महत्वपूर्ण हो जाता है। उसका सीधा सा कारण है कि अभी हाल ही में
यानी इसी महीने के फर्स्ट वीक 4 से 5 दिसंबर 2025 को रशिया के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत आए थे। भारत क्यों
आए? क्योंकि भारत में 23वां भारत रू शिखर सम्मेलन का आयोजन हुआ। इस सम्मेलन में पार्टिसिपेट करने के लिए रशिया के
राष्ट्रपति व्लादमीर पुतिन ने भारत की यात्रा की और इसने दोनों देशों के बीच एक बार फिर से विश्वास पारस्परिक सम्मान और
रणनीतिक संयोजन को नया आयाम दिया। इस सम्मेलन के दौरान कई महत्वपूर्ण समझौते हुए जो भारत रूस संबंधों को और ज्यादा
प्रगाढ़ करते हैं। हम लोग उन समझौतों को देखेंगे आगे। तो सभी एक्सपेक्ट हम लोग इस टॉपिक के कवर करने वाले हैं। 23वां भारत
रूस शिखर सम्मेलन। इस सम्मेलन के दौरान जो मुख्य परिणाम निकल कर आए उन्हें देखेंगे। भारत रूस संबंधों
के विकास का जो घटनाक्रम है उस घटनाक्रम को भी समझेंगे। भारत रूस के बीच जो सहयोगात्मक क्षेत्र हैं उन क्षेत्रों को
देखेंगे। इन संबंधों के महत्व को देखेंगे। खासकर भारत के लिए भारत के लिए रूस के साथ पारस्परिक संबंध क्यों महत्वपूर्ण हो जाते
हैं? उनको समझने की कोशिश करेंगे। भारत रूस संबंधों के समक्ष मौजूदा कौन सी चुनौतियां हैं उन चुनौतियों को देखेंगे और
इन चुनौतियों का क्या आगे समाधान हो सकता है उसके लिए वे फॉरवर्ड हम लोग देखेंगे और लास्ट में इस पूरे टॉपिक के निष्कर्ष को
जानेंगे। तो एक क्वेश्चन आंसर फॉर्मेट में हम इस टॉपिक के सभी डायमेंशन को एक-एक करके कवर करने वाले हैं। तो आप लोग इस
क्लास को ध्यान से देखिएगा। जो बच्चे पहली बार इवो आईएएस के चैनल पर विजिट किए हैं, इसे सब्सक्राइब कर लें। Telegram का लिंक
हमने डिस्क्रिप्शन बॉक्स में ऐड किया है। उसे आप ज्वाइन कर लें ताकि क्लासेस आपको लगातार मिलती रहे। कोई भी क्लास आपकी मिस
ना हो। 71 बीपीएससी मेंस की प्रिपरेशन करने के लिए आप हमारे संकल्प बैच 2.0 मेंटरशिप प्रोग्राम से जुड़ सकते हैं।
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जुड़ने का प्रोसेस यहां पर दिया गया है। एक बार वीडियो को पॉज करके आप लोग देख लीजिए। चलिए हम लोग भारत रशिया संबंध को
अब डिस्कस करते हैं। भारत रशिया संबंध क्यों चर्चा में रहे? क्योंकि हाल ही में जो 23वां भारत रूस शिखर सम्मेलन जिसका
आयोजन भारत में हुआ। इस शिखर सम्मेलन में पार्टिसिपेट करने के लिए रूस के राष्ट्रपति व्लादमीर पुतिन भारत आए। भारत
की इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच विश्वास, पारस्परिक सम्मान और रणनीतिक संयोजन को एक नया आयाम दिया गया। इस
सम्मेलन के कुछ महत्वपूर्ण परिणाम आप देख सकते हैं जिसमें द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाने की बात की गई। इससे पहले 22वां
भारत रूस शिखर सम्मेलन जो रशिया में हुआ था, उस शिखर सम्मेलन के दौरान भी दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार को
बढ़ाने की बात की गई थी और इस शिखर सम्मेलन में भी भारत रूस ने 2030 तक 100 बिलियन अमेरिकी डॉलर का द्विपक्षीय
व्यापार लक्ष्य निर्धारित किया है। वित्त वर्ष 2025 में भारत रशिया के बीच जो द्विपक्षीय व्यापार रहा वह 68
बिलियन अमेरिकी डॉलर रहा। भारत रशिया के बीच वित्त वर्ष 2025 में कितना द्विपक्षीय व्यापार रहा? तो 68 बिलियन अमेरिकी डॉलर
जिसे 2030 तक कितना बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है? तो 100 बिलियन अमेरिकी डॉलर का। राइट?
दूसरा अगर आप इस सम्मेलन का परिणाम देखें तो राष्ट्रीय मुद्राओं का उपयोग करके द्विपक्षीय लेनदेन निपटान प्रणाली को
बढ़ावा देने का भी निर्णय लिया गया है। यानी डॉलर के बदले अब राष्ट्रीय मुद्राओं का प्रयोग यानी भारत जो है रशिया के साथ
रुपए में व्यापार कर सके। इस संबंध में भी यहां पर कुछ महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं कि राष्ट्रीय मुद्राओं का उपयोग करके
द्विपक्षीय लेनदेन निपटार प्रणाली को बढ़ावा दिया जाए। यानी रशिया की जो मुद्रा है उस मुद्रा से भारत के साथ व्यापार कर
सके और जो भारत की करेंसी है रुपए उसके साथ वह रशिया के साथ व्यापार कर सके। इस संबंध में भी निर्णय लिया गया है। यानी जो
डॉलर पर निर्भरता है उसको कम करने की बात यहां पर एक दूसरे देशों के द्वारा की गई है। नए संपर्क मार्ग यानी कनेक्टिविटी से
रिलेटेड कुछ इंपॉर्टेंट डिसीजन लिए गए हैं। नए संपर्क मार्ग जिसमें आप देखते हैं चेन्नई, बलादी होस्ट तक समुद्री मार्ग
बहुत इंपॉर्टेंट हो जाता है। ये सब नाम आपको याद रखने हैं। एग्जाम में जब प्रश्न पूछा जाएगा तो आपको इन सभी बातों को लिखना
होगा। लिखेंगे तभी आपको एग्जामिनर नंबर देगा। केवल नए संपर्क मार्गों को पूरा किए जाने पर सहमति जताई गई। इतना लिखेंगे तो
एग्जामिनर आपको नंबर नहीं देगा। आपको एग्जांपल कोट करने होंगे कि कौन से नए संपर्क मार्गों को पूरा किए जाने पर सहमति
जताई गई है। तो उसमें चेन्नई वलादीवस्त तक समुद्री मार्ग एक बहुत इंपॉर्टेंट मार्ग हो जाता है। उत्तरी समुद्री मार्ग
अंतरराष्ट्रीय उत्तर दक्षिण परिवहन गलियारा यह जो नए संपर्क मार्ग हैं इनको पूरा किए जाने पर सहमति जताई गई है।
अंतरराष्ट्रीय उत्तर दक्षिण परिवहन गलियारा भारत के लिए बहुत इंपॉर्टेंट हो जाता है। खासकर इस गलियारा के पूरा होने
के बाद भारत की मध्य एशिया और फिर उसके आगे यूरोप तक जो पहुंच है आसान हो जाएगी। इस सम्मेलन के दौरान प्राथमिकता वाले
क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने पर भी ध्यान दिया गया है। भारत रूस ने परमाणु ऊर्जा बुनियादी ढांचे के विकास सहित ऊर्जा
क्षेत्र में निवेश बढ़ाने पर सहमति जताई गई है। रशिया के द्वारा भारत में 12 नए परमाणु ऊर्जा संयंत्रों को इस्टैब्लिश किए
जाने पर एक निर्णय लिया गया है। तो यह भी भारत के लिए काफी इंपॉर्टेंट हो जाता है। यूरेशियन इकोनॉमी यूनियन के साथ फ्री
ट्रेड एग्रीमेंट को जल्द से जल्द अंतिम रूप देने पर भी इस सम्मेलन के दौरान सहमति जताई गई है। मीडिया सहयोग पर भी बात हुई।
रूसी राष्ट्रपति ने रूस टुडे के भारतीय संस्करण के शुभारंभ में भाग लिया। आप लोगों ने सोशल मीडिया पर देखा भी होगा।
व्लादमीर पुतिन ने न्यूज़ एंकरों के साथ सीधी बातचीत की थी। इसके अलावा रूस ने अंतरराष्ट्रीय बिग कैट अलायंस में शामिल
होने का भी निर्णय लिया और भारत ने रूसी नागरिकों को 30 दिनों का फ्री ई टूरिस्ट वीजा देने की भी घोषणा की। इस सम्मेलन के
कुछ महत्वपूर्ण परिणाम निकल कर आए। तो आप लोगों को यह सब याद रखना है। द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाने की बात हुई। 2030 तक
100 बिलियन डॉलर द्विपक्षीय व्यापार का टारगेट रखा गया है जो इस वित्त वर्ष 68 बिलियन अमेरिकी डॉलर रहा। राष्ट्रीय
मुद्राओं का उपयोग करके द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देने की बातचीत की गई है। कनेक्टिटी से रिलेटेड जो नए प्रोजेक्ट
हैं उनको पूरा करने पर सहमति जताई गई जिसमें अंतरराष्ट्रीय उत्तर दक्षिण परिवहन गलियारा, चेन्नई बलादी होस्तिक समुद्री
मार्ग, उत्तरी समुद्री मार्ग जैसे महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग शामिल हैं।
परमाणु ऊर्जा बुनियादी ढांचे के विकास जैसे कई महत्वपूर्ण और संरचनात्मक परियोजनाओं पर निवेश बढ़ाने पर भी सहमति
जताई गई है। यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को जल्द से जल्द अंतिम रूप देने पर सहमति जताई गई है।
मीडिया सहयोग पर यहां पर बातचीत हुई। रूस के द्वारा अंतरराष्ट्रीय बिग कैट अलायंस में शामिल होने का निर्णय लिया गया और
भारत की तरफ से भी रूसी नागरिकों को 30 दिन का फ्री ई टूरिस्ट वीजा देने की घोषणा की गई। राइट? अब हम आगे देखेंगे भारत
रशिया संबंधों का कैसे विकास होता है। भारत रूस संबंधों के विकास को आसानी से समझने के लिए हम विकास के घटनाक्रम को कुछ
महत्वपूर्ण चरणों में डिवाइड करके देख लेंगे। जिसमें हम पहला चरण यानी प्रारंभिक वर्षों के तौर पर 1947 से 1955 के बीच
देखेंगे। भारत-रशिया संबंध कैसे रहे, कैसे मजबूत हुए। फिर शीत युद्ध का जो काल रहा 1955 से 1991 के बीच। इस काल में देखेंगे
भारत रशिया संबंधों में किस तरीके की पृष्ठभूमि रही। फिर शीत युद्ध के बाद हम देखेंगे और फिर आगे के वर्षों में देखेंगे
कि कैसे भारत रूस संबंधों का विकास क्रम रहा है। 1947 में भारत ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन से मुक्त होता है और अपने आजादी के
वर्ष ही भारत रशिया के साथ जो उस समय सोवियत संघ था इसके साथ राजनैतिक संबंध स्थापित किए। तो 1947 में भारत सोवियत संघ
ने राजनैतिक संबंध स्थापित किए। उसके बाद 1955 में दोनों देशों के राष्ट्र नेताओं जिसमें भारत की तरफ से जवाहरलाल नेहरू और
सोवियत संघ के राष्ट्रनेता खुसव के द्वारा एक दूसरे देशों की यात्राएं की गई। यानी 1955 में भारत के प्रधानमंत्री जवाहरलाल
नेहरू ने रूस की यात्रा की थी और उसी वर्ष रूस के राष्ट्र नेता खुसरेव के द्वारा भारत की यात्रा की गई थी और इस यात्रा का
ही महत्वपूर्ण परिणाम रहा। भारत में भिलाई जो वर्तमान छत्तीसगढ़ में है और बोकारो जो वर्तमान झारखंड में है। यहां पर
स्टील प्लांट को इस्टैब्लिश किया गया था। तो भारत में रशिया के सहयोग से भिलाई और बोकारो में स्टील प्लांट को स्थापित किया
गया जो इन यात्राओं का प्रत्यक्ष परिणाम था। शीत युद्ध का समय जो 1955 से 1991 के बीच आप देखते हैं। सेकंड वर्ल्ड वॉर के
बाद एक तरीके का भूराजनैतिक और वैचारिक संघर्ष था। जहां पर दो महाशक्तियां दो महाशक्तियां एक तरफ अमेरिका और दूसरी तरफ
सोवियत संघ जो वर्तमान का रूस है। ये दोनों महाशक्तियां अपने-अपने पूंजीवादी और साम्यवादी विचारधाराओं को फैलाने और
प्रभुत्व स्थापित करने के लिए संघर्ष कर रही थी। बेसिकली यही शीत युद्ध है। यहां पर पूंजीवादी गुट का नेतृत्व अमेरिका कर
रहा होता है और सोवियत संघ जो साम्यवादी विचारधारा का नेतृत्व कर रहा होता है। अपनी विचारधाराओं को वैश्विक स्तर पर
फैलाने और प्रभुत्व स्थापित करने का यह संघर्ष रहता है जो आज भी आपको देखने को मिलता है।
यहीं पर एक कांसेप्ट निकल कर आता है। गुटनिरपेक्षता की नीति। गुटनिरपेक्षता की नीति जो भारत के प्रधानमंत्री जवाहरलाल
नेहरू के द्वारा इंट्रोड्यूस किया जाता है। गुटनिरपेक्षता की नीति। इसका मतलब यह है कि हम किसी भी गुट में शामिल नहीं
होंगे। ना तो हम साम्यवादी गुट के हिस्सा बनेंगे ना ही हम पूंजीवादी गुट के हिस्सा बनेंगे। हम तटस्थ रहेंगे। हमारे जो
प्राइमरी इंटरेस्ट हैं उनको ध्यान में रखते हुए हम दोनों ही गुटों के देशों के साथ में रिलेशंस को आगे बढ़ाएंगे। हालांकि
आप जानते हैं जो कांग्रेसी विचारधारा है उसमें आपको समाजवाद की तरफ झुकाव देखने को मिलता है।
ऐसे में शीत युद्ध के समय भारत और सोवियत संघ के बीच नजदीकियां जो है और भी ज्यादा बढ़ते हैं और भी संबंध दोनों के बीच में
प्रगाढ़ होते हैं। शीत युद्ध के दौरान भारत सोवियत संघ ने मजबूत सामरिक सैन्य आर्थिक और कूटनीतिक संबंधों को डेवलप
किया। 1962 में सोवियत संघ प्रौद्योगिकी हस्तानांतरण और मिग 21 लड़ाकू विमान को स्थानीय स्तर पर मिलकर उत्पादन करने पर भी
सहमति जताई थी। 1971 का ईयर बहुत इंपॉर्टेंट हो जाता है भारत रशिया के लिए क्योंकि यहां पर शांति मित्रता और सहयोग
की संधि पर हस्ताक्षर किया जाता है। 1988 दोनों देशों ने कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र समझौते पर हस्ताक्षर किए थे।
तो शीत युद्ध के समय आप देख रहे हैं भारत और रूस के बीच जो संबंध है वह मजबूत होते हैं। शीत युद्ध के बाद का जो एरा है 1991
से 2000 के बीच आप जानते हैं 1990-91 में भारत में इकोनॉमिक क्राइसिस देखा जाता है। इस इकोनॉमिक क्राइसिस से बचने के लिए न्यू
इकोनॉमिक रिफॉर्म लाए जाते हैं। जहां पर भारत की बंद अर्थव्यवस्था को खुली अर्थव्यवस्था में बदल दिया जाता है।
उदारीकरण, वैश्वीकरण और निजीकरण की बात की जाती है। एक तरीके से भारत पूंजीवाद की तरफ अपने कदम यहां से बढ़ाता है। लाइसेंस
राज का अंत होता है। निजीकरण को बढ़ावा दिया जाता है। व्यापार उदारीकरण की यहां पर चर्चा की जाती है और फॉरेन
इन्वेस्टमेंट यहां पर ओपन कर दिया जाता है। राइट? तो बंद अर्थव्यवस्था से खुली अर्थव्यवस्था की तरफ यहां भारत आगे बढ़ता
है। यानी पूंजीवाद की तरफ अपने कदम बढ़ाता है। ऐसे में आप समझ सकते हैं कि इस टाइम पर भारत रशिया के बीच जो संबंध है वह
थोड़े से बिगड़ते हुए दिखाई देते हैं। सोवियत संघ के विघटन के बाद सोवियत संघ का विघटन भी हो जाता है 1991 में और यहीं फिर
शीत युद्ध का अंत होता है। सोवियत संघ विघटन के बाद आर्थिक चुनौतियों और बदलते वैश्विक परिदर्श के कारण भारत रूस संबंध
कमजोर होते हैं। यानी भारत एक तरफ पूंजीवाद की तरफ अपने कदम बढ़ाता है। दूसरी तरफ सोवियत संघ का भी विघटन हो जाता
है। तो ये वैश्विक परिवर्तन भारत रूस संबंधों को कमजोर करता है। 1993 में मित्रता एवं सहयोग की संधि संपन्न होती
है। दोनों देशों के बीच संबंधों को एक बार फिर से पुनर्जीवित करने का प्रयास यहां पर किया जाता है। हालांकि शीत युद्ध के बाद
का जो यह समय है 1991 से 2000 के बीच का यहां पर भारत और रूस के बीच के जो संबंध है वो थोड़े से आपको कमजोर होते हुए दिखाई
देते हैं। 1993 में कोशिश जरूर की गई थी। दोनों देशों के बीच संबंधों को पुनर्जीवित करने के लिए मित्रता एवं सहयोग की संधि
संपन्न करके। नेक्स्ट है रणनीतिक साझेदारी का चरण। 2000 में भारत रूस रणनीतिक साझेदारी पर
हस्ताक्षर करता है। यानी एक बार फिर से भारत रूस संबंध मजबूत होते हैं और ये काफी इंपॉर्टेंट हो जाता है क्योंकि भारत रूस
के बीच जो रणनीतिक साझेदारी हुई 2000 में अब 2025 में इसकी 25वीं वर्षगांठ मनाई जा रही है। इस रणनीतिक साझेदारी के 25 वर्ष
पूरे हो चुके हैं। इसके बाद की कई ऐसी घटनाएं हैं जो भारत रूस संबंध के विकास को और भी ज्यादा मजबूत करते हैं।
2021 में पहली बार भारत रूस टू प्लस टू यानी रक्षा और विदेश मंत्री की मंत्र स्तरीय वार्ता होती है। अभी हाल ही में आप
जानते हैं दोनों देशों के मध्य संबंधों को बढ़ावा देने में प्रधानमंत्री मोदी के विशिष्ट योगदान को मान्यता देते हुए
उन्हें रूस के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ऑर्डर ऑफ सेंट एंड्रो द एपोस्टल से सम्मानित किया गया। तो रूस के सर्वोच्च
नागरिक सम्मान ऑर्डर ऑफ सेंट एंड्रो एपोस्टल से भारत के प्रधानमंत्री मोदी को सम्मानित किया गया। दोनों देशों के मध्य
संबंधों को बढ़ावा देने के संबंध में। 22वां भारत रूस
शिखर सम्मेलन 2024 में जो हुआ था उसमें प्रधानमंत्री मोदी मास्को गए थे शिखर सम्मेलन में और उन्होंने एक स्टेटमेंट
दिया था कि रूसी सर्दियों में तापमान कितना भी माइनस में चला जाए भारत रूस मित्रता हमेशा प्लस में रही है। यानी ये
स्टेटमेंट एक तरीके से भारत रूस संबंधों के विकास के घटनाक्रम को परिलक्षित करती है। जहां पर देखा गया कि भारत रूस संबंध
हमेशा से ही मजबूत रहे हैं। वैश्विक स्तर पर चीजें कैसी भी रही हो। अब हम लोग आगे बढ़ते हैं और अब देखते हैं
दोनों देशों के बीच सहयोग के कौन से क्षेत्र हैं। तो भू राजनीतिक सहयोग में आप बता देंगे दोनों देश संयुक्त राष्ट्र
ब्रिक्स एससीओ जी20 जैसे बहुपक्षीय मंचों पर सक्रिय रूप से सहयोग करते हैं। भारत और रूस बहुध्रुवीय
विश्व व्यवस्था की स्थापना के पक्षधर्म है। बहु ध्रुवीय विश्व व्यवस्था का मतलब एक ऐसी अंतरराष्ट्रीय प्रणाली है जहां
शक्ति कुछ देशों या समूहों के बीच बंटी होती है ना कि किसी एक देश यानी एक ध्रुविता या दो देशों यानी दो ध्रुविता के
प्रभुत्व में। शीत युद्ध के समय देखा गया दुनिया दो गुटों में बंटी थी। एक तरफ साम्यवादी गुट
जिसका नेतृत्व सोवियत संघ कर रहा होता है और दूसरी तरफ पूंजीवादी गुट जिसका नेतृत्व अमेरिका कर रहा होता है। तो इस तरीके से
शीत युद्ध के समय आपको द्विध्रुविता देखने को मिलती है और जैसे ही शीत युद्ध समाप्त होता है। एक तरीके की एक ध्रुविता वैश्विक
प्रणाली आपको देखने को मिलती है। जहां अमेरिका का प्रभुत्व आपको देखने को मिलता है। तो भारत और रूस बहुध्रुवीय विश्व
व्यवस्था की स्थापना के पक्षधर में है। जहां शक्ति कुछ देशों या समूहों के बीच में बटी हो जिसमें भारत, चीन, सोवियत संघ
और कई अन्य यूरोपीय संघ के जो देश हैं इसमें शामिल हो। तो भारत और रूस एक ध्रुविता या द्विध्रुविता
प्रणाली की जगह पर बहुध्रवी विश्व व्यवस्था की स्थापना के पक्षधर में है। इसके अलावा दोनों देश संयुक्त राष्ट्र
फ्रेमवर्क के तहत अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर व्यापक समझौते को शीघ्र अंतिम रूप देने और अपनाने की इच्छा रखते हैं। यानी
आतंकवाद को समाप्त करने की इच्छा दोनों ही देश रखते हैं। भू-राजनीतिक सहयोग में आप यह सारे पॉइंट बता सकते हैं। दोनों देश
संयुक्त राष्ट्र ब्रिक्स एसइओ जी20 जैसे बहुपक्षीय मंचों पर सक्रिय रूप से सहयोग करते हैं। दोनों ही देश बहुद्रवी विश्व
व्यवस्था की स्थापना के पक्षधर हैं। दोनों ही देश आतंकवाद को समाप्त करने के लिए संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क के तहत
अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर व्यापक समझौते को शीघ्र अंतिम रूप देने और अपनाने की इच्छा रखते हैं। रणनीतिक सहयोग में आप बता
सकते हैं कि दोनों ही देश चीन की प्रसार नीति को रोकना चाहते हैं। भारत और रूस दोनों ही अपने पड़ोस में चीन के उदय और
उसकी प्रसार नीति के संबंध में साझा चिंता रखते हैं और चीन को क्षेत्रीय आधिपत्य स्थापित करने से रोकना चाहते हैं। भारत और
रूस के नेतृत्व में जो एक प्रोजेक्ट शुरू किया गया है। अंतरराष्ट्रीय उत्तर दक्षिण परिवहन गलियारा जो चीन के बेल्ट
एंड रोड इनिशिएटसी के एक विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। तो रणनीतिक सहयोग में आप इस बात को कंसीडर कर सकते हैं कि दोनों
ही देश चीन की प्रसार नीति को रोकना चाहते हैं और उस में आप इस एग्जांपल को भी ऐड कर सकते हैं। भारत और रूस के नेतृत्व में
अंतरराष्ट्रीय उत्तर दक्षिण परिवहन गलियारा जो प्रोजेक्ट है यह चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएससी के एक विकल्प के रूप
में देखा जा सकता है। सैन्य सहयोग की बात करें तो आप जानते हैं भारत रशिया से जो अपने रक्षा उपकरण हैं उसका 36% इंपोर्ट
करता है। इसके अलावा अब दोनों देश आपसी सहयोग से रक्षा उपकरणों को डेवलप कर रहे हैं। उदाहरण के तौर पर ब्रह्मोस क्रूज़
मिसाइल और कलश्री को A के 203 असाल्ट राइफल जो दोनों देश आपस में मिलकर इन इनका
उत्पादन कर रहे हैं। तो यह सब आप एग्जांपल बता सकते हैं सैन्य सहयोग के संबंध में या खरीद बिक्री के संबंध से संयुक्त अनुसंधान
डिजाइन और उत्पादन में बदल गया है। ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल जो अब दोनों देश मिलकर आपस में बना रहे हैं। आर्थिक सहयोग
देखें तो 2024-25 यानी फाइनेंस ईयर 2025 में दोनों देशों का द्विपक्षीय व्यापार 68 बिलियन अमेरिकी डॉलर पहुंच गया है।
वैज्ञानिक और अनुसंधान सहयोग भी आपस में मिलकर किए जा रहे हैं। उदाहरण के तौर पर भारत और रूस ने भारत के पहले मानव युक्त
अंतरिक्ष मिशन गगनयान के लिए भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को प्रशिक्षित करने के लिए समझौते पर हस्ताक्षर किया है। तो भारत
का जो मानव युक्त अंतरिक्ष मिशन है गगनयान इस गगनयान मिशन में भी रशिया जो है सहयोग कर रहा है तो वैज्ञानिक और अनुसंधान सहयोग
में भी आप भारत रूस की आपसी सहयोगात्मक भूमिका को देख सकते हैं। सामरिक स्वायत्ता की रक्षा के संबंध में भारत और रूस के बीच
मजबूत संबंध दोनों देशों को क्रमशः अमेरिका और चीन पर उनकी बढ़ती निर्भरता को संतुलित करने में भी मदद करते हैं। तकनीकी
नवाचार में भी इनकी सहयोगात्मक भूमिका है। भारत रूस क्वांटम कंप्यूटिंग, साइबर भौतिक प्रणाली और जैव प्रौद्योगिकी सहित
अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों पर सहयोग कर रहे हैं। फॉर एग्जांपल बायोई3 पॉलिसी जो 2024 में इंट्रोड्यूस की गई थी। इसमें आप
देखेंगे आर्थिक पर्यावरणीय और रोजगार लाभ के लिए जैव प्रौद्योगिकी का लाभ उठाने के संबंध में जो बायो3 पॉलिसी 2024 में लाई
गई। इस पॉलिसी में भी रशिया जो है वो सहयोग कर रहा है। दोनों देशों की साझी संस्कृत विरासत और प्रवासी संबंध ये सब
भारत रूस के बीच के सहयोगात्मक क्षेत्र हैं जिन्हें आप बता सकते हैं। भारत रूस संबंधों
को अब आगे बढ़ाएंगे और देखेंगे भारत के लिए इनका क्या महत्व है। तो राजनीतिक महत्व में तो आप बता सकते हैं कि स्वतंत्र
भारत के इतिहास में रूस ने कभी भी भारत के हितों को नुकसान नहीं पहुंचाया है। रूस संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत
की स्थाई सदस्यता का समर्थन करता है। रूस आप जानते हैं यूएससी के जो फाइव परमानेंट मेंबर हैं उसमें रूस भी शामिल है
और रूस भारत की स्थाई सदस्यता का समर्थन करता है संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में। आर्थिक तौर पर देखें तो भारतीय
फार्मास्यूटिकल कंपनी जर्मनी को पीछे छोड़ते हुए अब रूस में शीर्ष दवा आपूर्ति के रूप में उभरी है। तो आर्थिक तौर पर भी
भारत के लिए भारत रूस संबंध काफी इंपॉर्टेंट हो जाते हैं। अब भारत का जो एक्सपोर्ट है खासकर फार्मासटिकल
प्रोडक्ट का वो अब रशिया में बढ़ रहा है। जर्मनी को पीछे छोड़ते हुए रूस में शीर्ष दवा आपूर्तकर्ता के रूप में अब ये उभर रहा
है। ऐसे में भारत को जो है आर्थिक तौर पर इसका फायदा होगा। रक्षा के संबंध में देखें तो रूस भारतीय सशस्त्र बलों के लिए
रक्षा उपकरणों का एक प्रमुख आपूर्ति करता देश है। भारत के कुल रक्षा आयात का 36% हिस्सा लगभग रूस से ही इंपोर्ट होता है।
ऊर्जा क्षेत्र के संबंध में भी भारत रूस संबंध काफी इंपॉर्टेंट हो जाते हैं भारत के लिए। रूसी आयात पर यूरोपीय प्रतिबंध जो
हाल ही में जो रशिया यूक्रेन युद्ध शुरू हुआ उसके चलते लगाए गए। ऐसे में भारत को कम ऊर्जा प्राप्त कम कम लागत पर ऊर्जा
प्राप्त करने का अवसर मिला। वैश्विक तेल कीमतों की अस्थिरता से भारत को इससे सुरक्षा मिली। उदाहरण के तौर पर रूसी तेल
अब भारत के कुल कच्चे तेल आयात का 35 से 36% हिस्सा हो गया है। कनेक्टिविटी के संबंध में देखें तो चेन्नई, ब्लदीवस्त तक
पूर्वी समुद्री गलियारा, अंतरराष्ट्रीय उत्तर दक्षिण परिवहन गलियारा जैसी विविध परियोजनाओं के माध्यम से रूस, मध्य एशिया
और यूरेशिया के साथ भारत की कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने का प्रयास कर रहा है। तकनीकी सहयोग में आप एग्जांपल के तौर पर
बता सकते हैं। कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र में रशिया सहयोग कर रहा है। भारत का जो गगन
यान मिशन है उसमें रशिया सहयोग कर रहा है और बायोथरी पॉलिसी इन सभी में रूस जो है भारत को तकनीकी सहयोग प्रदान कर रहा है।
कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र जिसे 1988 में इस्टैब्लिश किया गया था। 1988 में इस्टैब्लिश किया गया था। जिसकी ऊर्जा
उत्पादन क्षमता 2000 मेगावाट है। इसे बढ़ाकर अब 4000 मेगावाट करने का भी लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके अलावा रशिया
के सहयोग से 12 नए परमाणु ऊर्जा संयंत्रों को इस्टैब्लिश किए जाने की बात की जा रही है। क्षेत्रीय स्थिरता में भी काफी
इंपॉर्टेंट हो जाता है। भारत के लिए भारत रूस के अच्छे संबंध आतंकवाद से निपटने में क्योंकि दोनों देश साझा सहयोग करते हैं।
रूस अफगानिस्तान में शांति और स्थिरता लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है जो भारत के लिए काफी इंपॉर्टेंट हो जाता
है। तो, इस तरीके से भारत रूस संबंध भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है, वह आप इन्हें एक-एक करके बता सकते हैं। भारत-रूस
संबंधों के समक्ष अब कौन सी मौजूदा चुनौतियां हैं, उन्हें देख लेते हैं। एक तो भू-राजनैतिक चुनौती जिसमें भारत
अमेरिका के बीच जो बढ़ता सहयोग है वह भारत रूस संबंधों के समक्ष एक तरीके से कूटनीतिक जटिलता ला रहा है। भारत अपने
आर्थिक विकास संबंधी आवश्यकताओं और चीन की चुनौतियों से निपटने के लिए पश्चिमी देशों खासकर अमेरिका के साथ अपनी घनिष्ठता बढ़ा
रहा है। भारत का क्वाड में शामिल होना इसका एक एग्जांपल हो सकता है। भारत और अमेरिका के बीच बढ़ता द्विपक्षीय व्यापार
इसका एक एग्जांपल हो सकता है। चीन के बाद भारत का सर्वाधिक द्विपक्षीय व्यापार अमेरिका से ही है। तो भारत अमेरिका के बीच
बढ़ता सहयोग दोनों देशों के बीच कूटनीतिक चुनौती के तौर पर आप इसे बता सकते हैं। रूस चीन के साथ आप देख रहे हैं
जो सहयोग है वह बढ़ रहा है। खासकर रशिया यूक्रेन युद्ध के बाद दोनों देशों के बीच जो संबंध हुए और गहरे हुए हैं। रूस चीन के
बीच रशिया यूक्रेन युद्ध के बाद का द्विपक्षीय व्यापार भी बढ़ा है। 240 मिलियन अमेरिकी डॉलर के आसपास हो गया है।
वहीं भारत का द्विपक्षीय व्यापार देखें तो अभी रशिया के साथ मात्र 68 बिलियन अमेरिकी डॉलर है। रूस पाकिस्तान के मध्य भी संबंध
जो हैं बढ़ रहे हैं जो एक तरीके से भारत रूस संबंधों के समक्ष मौजूदा चुनौती के तौर पर देखे जा सकते हैं। रूस पाकिस्तान
के साथ द्विपक्षीय संबंधों को बढ़ाने और गहरा करने का भी इच्छुक है। रूस द्वारा पाकिस्तान को रियायती दरों पर तेल की
आपूर्ति करना इसके अलावा रूस ने पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय उत्तर दक्षिण परिवहन गलियारा में शामिल होने के लिए भी
आमंत्रित किया है। आर्थिक चुनौतियों के तौर पर देखें तो भारत का जो रूस के साथ द्विपक्षीय व्यापार है उसमें व्यापार घाटा
रहता है। वित्त वर्ष 2024-25 में भारत ने रूस को 4.9 बिलियन अमेरिकी डॉलर का निर्यात किया। जबकि रूस ने 63.8 बिलियन का
आयात किया। इस तरीके से देखें तो कुल व्यापार घाटा 58.9 बिलियन अमेरिकी डॉलर का रहा है। राइट? यानी जो द्विपक्षीय व्यापार
है उसमें भारत जो है भारत जो है रूस से रूस से इंपोर्ट बहुत ज्यादा करता है। एक्सपोर्ट बहुत कम करता है। एक्सपोर्ट
देखें तो केवल 4.9 बिलियन अमेरिकी डॉलर का है। वहीं इंपोर्ट देखें तो 63.8 बिलियन अमेरिकी डॉलर का है। इस तरीके से कुल
व्यापार घाटा भारत रूस के बीच 58.9 मिलियन अमेरिकी डॉलर का है। तो एक यह आर्थिक चुनौती भी दोनों देशों के मध्य संबंधों को
उजागर करती है। रक्षा संबंधी चुनौतियों में देखें, तो दोनों देशों के सशस्त्र बलों के बीच इंटर ऑपरेबिलिटी की कमी आपको
दिखाई देती है। जिसका एग्जांपल आप बता सकते हैं। 2022 और 2023 में भारत रूस के बीच जो सैन्य अभ्यास इंद्र होता है उसको
स्थगित कर दिया गया था। इसके अलावा भी कास्ता के जो प्रतिबंध है जो अमेरिका की तरफ से लगाए जाते हैं। यानी कोई देश जो
रूस, उत्तर कोरिया और ईरान के साथ अपने संबंधों को मजबूत करता है। इन देशों के साथ में व्यापार करता है। तो ऐसे में
अमेरिका की तरफ से जो है प्रतिबंध लगाए जाते हैं कात्सा के तहत। तो कातसा के तहत अमेरिकी प्रतिबंधों से बचने के लिए इस 400
सैन्य सौदे के बाद से देखा जा रहा है कि भारत रूस के बीच कोई बड़ा सैन्य सौदा नहीं हुआ है। सुरक्षा संबंधी चुनौतियों में यह
बातें आप बता सकते हैं। कनेक्टिविटी से जुड़ी चिंताएं भी हैं। उदाहरण के तौर पर मध्य एशिया में भू राजनीतिक अस्थिरता जैसे
अर्मेनिया और अज़र-बैजान के बीच का जो क्षेत्र है नार्गोनो काराबाक। यहां पर आपको अक्सर संघर्ष
होता हुआ दिखाई देता है। तो मध्य एशिया की जो भू राजनीतिक अस्थिरता है वो उत्तर दक्षिण परिवहन गलियारा जो इस्टैब्लिश किया
जाना है इसके कारन्वन के संबंध में भी जोखिम उत्पन्न हो गया है। तो कनेक्टिविटी से जुड़ी भी चिंताएं आपको भारत रशिया
संबंधों के बीच आपको हाल ही में देखने को मिलेंगी। इसमें भू राजनीतिक चुनौती में अमेरिका और भारत के बीच बढ़ता सहयोग, रूस
का चीन के साथ बढ़ते संबंध, रूस का पाकिस्तान के साथ बढ़ते संबंध देखे जा सकते हैं। आर्थिक चुनौतियों में भारत का
व्यापार घाटा, रूस के साथ में रक्षा संबंधी चुनौतियों में अमेरिका के द्वारा कातसा के तहत लगाए गए प्रतिबंध और भारत
रूस सशस्त्र बलों के बीच इंटर ऑपरेबिलिटी की कमी। यह बता सकते हैं। कनेक्टी से जुड़ी चिंताओं में आप बता सकते हैं। मध्य
एशिया का जो भू-राजनीतिक संघर्ष भू-राजनैतिक अस्थिरता है। अब आगे की राह क्या हो सकती है? कैसे दोनों देश जो हैं
मौजूदा चुनौतियों को सॉर्ट आउट करते हुए आपसी संबंधों को और बेहतर कर सकते हैं। तो एक तो जो विश्वास है उसको बढ़ाने की
आवश्यकता है। रूस चीन भारत अमेरिका के बीच बढ़ती नजदीकी के साथ गहराती आशंकाओं के मद्देनजर दोनों देशों को आपसी विश्वास को
मजबूत करने की अब जरूरत है। व्यापार में विविधता लाने की आवश्यकता है। भारत को प्रौद्योगिकी, फार्मास्यूटिकल्स और कृषि
जैसे क्षेत्रों का लाभ उठाकर रूस के साथ कच्चा तेल और रक्षा क्षेत्र से परे भी व्यापार का विस्तार करना चाहिए। यानी भारत
रूस के बीच जो आप व्यापार देखते हैं उसमें ज्यादातर रक्षा क्षेत्र और जो कच्चा तेल है उसमें आप देखते हैं और भारत जो है इन
चीजों का सबसे ज्यादा रशिया से इंपोर्ट करता है और हमने ऊपर बताया भी कि जो द्विपक्षी जो कुल व्यापार है 68
समथिंग मिलियन अमेरिकी डॉलर का उसमें भारत जो रूस को निर्यात करता है वह मात्र 4.9 बिलियन अमेरिकी डॉलर है बल्कि रूस से जो
आयात करता है उसका आंकड़ा 63.8 बिलियन अमेरिकी डॉलर है जिसमें कच्चा तेल और रक्षा उत्पाद जो है वो सबसे अधिक हैं। तो
व्यापार में विविधता लाने की आवश्यकता है। भारत को जो है अब अपना एक्सपोर्ट बढ़ाने की भी आवश्यकता है और भारत इस संबंध में
प्रौद्योगिकी फार्मास्यूटिकल और कृषि जैसे क्षेत्रों का लाभ उठा सकता है। भारत यूरेशियन आर्थिक संघ के साथ मुक्त व्यापार
समझौते में तेजी लाने और निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहित करने से व्यापार विविधता को बढ़ावा मिल सकता है। तो
व्यापार में विविधता लाने की आवश्यकता है। उसके लिए क्या किया जा सकता है? तो वह आप यहां बता सकते हैं। भारत यूरेशियन आर्थिक
संघ के साथ मुक्त व्यापार समझौते में तेजी लाकर और निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ाकर यह काम कर सकता है। सांस्कृतिक
मूल्यों और लोगों के बीच का जो संबंध है उसका भी विस्तार करना चाहिए। यानी भारत को अपनी सॉफ्ट पावर को जो है बढ़ाने की
आवश्यकता है। जिससे दीर्घकालिक द्विपक्षीय संबंध जो है मजबूत होंगे। इसके अलावा भी कई सारे अन्य पॉइंट भी बता सकते हैं। जैसे
आतंकवाद को लेकर दोनों देश साझा सहयोग करते हैं। तो इस दिशा में भी आगे बढ़ा जा सकता है। नवाचार और प्रौद्योगिकी
के क्षेत्र में आपसी सहयोग को बढ़ाकर जो है दोनों देशों के मध्य संबंधों को और मजबूत किए जाने की आवश्यकता है। तो इस
तरीके से अब वे फॉरवर्ड में कुछ पॉइंट बता देंगे और लास्ट में आप निष्कर्ष लिख देंगे। कुल मिलाकर पश्चिमी दबाव और
यूक्रेन संकट के बावजूद भारत रूस संबंध ध्रुव तारे की भांति स्थिरता और महत्व का प्रतीक है। पीएम मोदी का स्टेटमेंट भी है।
मास्को में भारतीय प्रवासी समुदायों को संबोधित करते हुए जुलाई 204 में इन्होंने कहा था कि रूसी सर्दियों में तापमान कितना
भी माइनस में चला जाए भारत रूस मित्रता हमेशा प्लस में रही है। तो इस तरह एक पॉजिटिव व्यू लेते हुए आप इस टॉपिक को
कंक्लूड करेंगे। भारत रूस संबंधों में हमने सभी डायमेंशन को कवर किया है। क्यों चर्चा में है? 23वां भारत रूस शिखर
सम्मेलन 2025 जो हुआ इसके क्या मुख्य परिणाम निकले? भारत रूस संबंधों के विकास के पूरे घटनाक्रम को समझा। भारत रूस के
बीच जो सहयोगात्मक क्षेत्र हैं उनको देखा। भारत के लिए भारत रूस संबंधों के महत्व को समझा। क्या मौजूदा चुनौतियां हैं भारत रूस
संबंधों के समझ उनको देखा और अब क्या आगे की राह हो सकती है? इन सभी पॉइंटों को एक-एक करके हमने डिस्कस किया है। आई होप
अब क्वेश्चन पूछा जाएगा। भारत रूस संबंधों से तो आप उसे शानदार तरीके से लिख पाएंगे। 71 बीपीएससी मेंस एग्जाम की प्रिपरेशन के
लिए आप यूका आईएएस के संकल्प बैस 2.0 प्रोग्राम से जुड़ सकते हैं। जहां आपको क्लासेस सभी विषयों के नोट्स और वीकली
सेक्शनल टेस्ट के माध्यम से आपकी आंसर राइटिंग प्रैक्टिस कराई जाती है। फी स्ट्रक्चर वगैरह दिया गया है। एक बार आप
लोग यहां वीडियो को पॉज करके देख लें। कैसे ज्वाइन कर सकते हैं? उसका पूरा प्रोसेस यहां बताया गया है। बाकी कोई आपको
जानकारी लेना है तो मुझे 6306473800 पर कांटेक्ट कर सकते हैं। सीधे कॉल या WhatsApp मैसेज करके। मिलते हैं हम लोग
नेक्स्ट क्लास में। जब तक आप लोग पढ़िए। जहां है वहां सुरक्षित रहिए। अपना ख्याल रखें। धन्यवाद।
23वें भारत-रूस शिखर सम्मेलन में द्विपक्षीय व्यापार को 2030 तक 100 बिलियन डॉलर तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया, राष्ट्रीय मुद्राओं के प्रयोग को बढ़ावा देने, नए समुद्री संपर्क मार्गों का विकास जैसे चेन्नई-वलादीवस्त, उत्तरी समुद्री मार्ग, और अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा पर सहमति बनी। साथ ही ऊर्जा क्षेत्र में निवेश बढ़ाने और 12 नए परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के विकास के लिए भी समझौते हुए।
भारत-रूस संबंध प्रारंभिक वर्ष 1947-55 में स्थापित हुए जब दोनों देशों ने राजनैतिक सहयोग शुरू किया। शीत युद्ध काल (1955-1991) में सहयोग मजबूत हुआ, जिसमें 1971 की संधि और कुडनकुलम परमाणु संयंत्र जैसे प्रोजेक्ट शामिल थे। सोवियत संघ के विघटन के बाद 1991-2000 में संबंधों में कुछ गिरावट आई, लेकिन 2000 से रणनीतिक साझेदारी स्थापित हुई और दोनों देशों ने रक्षा और विदेश मंत्रियों के बीच द्विपक्षीय वार्ता शुरू की।
रूस राजनीतिक स्थिरता प्रदान करता है और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत के स्थायी सदस्य बनने के समर्थन में है। रूस भारत को सस्ता कच्चा तेल उपलब्ध कराता है, जिससे ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होती है। इसके अलावा, फार्मास्युटिकल क्षेत्र में रूस के साथ निर्यात संबंध लाभकारी हैं, और अफगानिस्तान में शांति प्रयासों में भी रूस भारत का समर्थन करता है।
भारत-रूस आर्थिक सहयोग में मुख्य चुनौतियों में भारी व्यापार घाटा (लगभग 58.9 बिलियन अमेरिकी डॉलर), मुक्त व्यापार समझौते का विलंब, और अमेरिकी प्रतिबंधों (कात्सा) के कारण रक्षा सहयोग में इंटरऑपरेबिलिटी की कमी शामिल हैं। इसके अलावा, भारत-अमेरिका बढ़ता सहयोग और रूस के चीन तथा पाकिस्तान के साथ बढ़ते रिश्ते आर्थिक व कूटनीतिक जटिलताएँ उत्पन्न कर रहे हैं।
भारत-रूस रक्षा सहयोग में सबसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट ब्रह्मोस मिसाइल है जो संयुक्त रूप से विकसित किया गया है। रूस से भारत का लगभग 36% रक्षा उपकरण आयात होता है। इसके अलावा, दोनों देश संयुक्त सैन्य अनुसंधान करते हैं और रक्षा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए लगातार कार्यरत हैं, हालांकि अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण कुछ तकनीकी चुनौतियाँ भी सामने आई हैं।
भारत-रूस संबंधों को मजबूत करने के लिए राजनैतिक और आर्थिक क्षेत्रों में विविधता लाना, मुक्त व्यापार समझौते को जल्द से जल्द अंतिम रूप देना, और निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाना जरूरी है। साथ ही आतंकवाद विरोधी सहयोग, तकनीकी नवाचारों में साझेदारी और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को भी प्रोत्साहित करना चाहिए ताकि दोनों देशों का विश्वास और सहयोग मजबूत हो सके।
सांस्कृतिक और मीडिया सहयोग भारत-रूस संबंधों को सामाजिक स्तर पर जोड़ने में सहायक है। रूस टुडे के भारतीय संस्करण की शुरुआत और भारत द्वारा रूसियों को 30 दिन का मुफ्त ई-टूरिस्ट वीज़ा प्रदान करना ऐसे कदम हैं जिनसे पारस्परिक समझ और मित्रता बढ़ती है। इसके अलावा, सांस्कृतिक आदान-प्रदान से दोनों देशों के बीच अच्छे संबंध और सामूहिक भावना का विकास होता है।
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