परिचय
इस वीडियो में CBSE बोर्ड परीक्षा के लिए मिनिएचर पेंटिंग्स का सम्पूर्ण रिवीजन प्रस्तुत किया गया है। यह सामग्री पिछले वर्ष का है लेकिन अभी भी पूरी तरह से प्रासंगिक एवं उपयोगी है। वीडियो में विभिन्न मिनिएचर स्कूल्स, पेंटिंग्स, उनकी विशेषताएँ, और मानव जीवन मूल्य स्पष्ट किए गए हैं। साथ ही राष्ट्रीय ध्वज और स्वतंत्रता संग्राम में भारतीय कला की भूमिका पर भी चर्चा है। यह विषय, जैसे कि 2025 के इंटरनेशनल रिलेशनस के न्यूज़हाल 25 महत्वपूर्ण सवाल से जुड़ी गहरी समझ प्रदान करता है।
मिनिएचर स्कूल की मुख्य विशेषताएं
राजस्थानी स्कूल
- 16वीं से 19वीं सदी तक विकसित
- भारतीय धार्मिक ग्रंथ, लोक कथाएं, प्रेम कविताएँ जैसे विषय
- मुख्य पेंटिंग्स: मारू रागिनी, राधा बनी ठनी, भरत मीट राम, चौगान प्लेयर, कृष्णा ऑन स्विंग
- चमकदार रंगों का उपयोग, विस्तृत पोशाक और आभूषण चित्रण
पहाड़ी स्कूल
- 17वीं से 19वीं सदी तक दलदली पहाड़ी क्षेत्र में विकसित
- मुगल और राजस्थानी कला से प्रेरित
- मुख्य पेंटिंग्स: नंद यशोदा, कृष्णा विद गोपीज
- द्रव्य, प्रकृति और स्थानीय संस्कृति के अनुरूप थीम
मुगल स्कूल
- 16वीं से 19वीं सदी, फारसी, भारतीय और यूरोपीय कला का संयोजन
- प्रमुख सम्राट: बाबर, हुमायूं, अकबर, जहांगीर, शाहजहां, औरंगजेब
- मुख्य पेंटिंग्स: कृष्णा लिफ्टिंग माउंट गोवर्धन, फाल्कन ऑन बर्ड ड्रेस, कबीर एंड रायदास, मैरिज प्रोसेशन ऑफ दारा शिको
- विस्तारपूर्ण पोर्ट्रेट, सजावटी बॉर्डर, कैलग्राफी
डेकन स्कूल
- 16वीं से 19वीं सदी, दक्षिण भारत में विकसित
- फारसी मीनारवाद, स्थानीय परंपरा तथा वॉल पेंटिंग का मिश्रण
- प्रमुख केंद्र: बीजापुर, अहमदनगर, गोलकोंडा, हैदराबाद, तंजोर
- मुख्य पेंटिंग्स: चांद बीबी प्लेइंग पोलो, हजरत निजामुद्दीन आलिया और अमीर खुसरो
- लंबी आकृतियां, बोल्ड विवरण, सामाजिक व सांस्कृतिक दृश्यों का चित्रण
बंगाल स्कूल ऑफ आर्ट
- 20वीं सदी की शुरुआत में कोलकाता व शांतिनिकेतन से उत्पन्न
- भारतीय पारंपरिक चित्रकला का पुनरुद्धार और पश्चिमी प्रभाव का संयोजन
- प्रमुख कलाकार: अभिंद्रनाथ टैगोर, गगनेंद्रनाथ टैगोर, नंदलाल बोस, अमृता शेरगिल
- मुख्य पेंटिंग्स: जर्नीज, मदर एंड चाइल्ड, हल्दी ग्राइंडर्स, मदर टेरेसा
- मुख्य तकनीक: वॉश तकनीक, सूक्ष्म रंग संयोजन, मानव भावनाओं की अभिव्यक्ति
स्वतंत्रता संग्राम में भारतीय कलाकारों का योगदान
- कला के माध्यम से राष्ट्रीय जागरूकता और स्वदेशी आंदोलन को बढ़ावा
- अभिंद्रनाथ टैगोर की 'भारत माता' पेंटिंग ने सम्पूर्ण देश को प्रेरित किया
- अमृता शेरगिल, पूर्ण घोष, नंदलाल बोस, गगनेंद्रनाथ टैगोर जैसे कलाकारों ने सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों को चित्रित किया
- नंदलाल बोस द्वारा दांडी मार्च का चित्रण और जलियांवाला बाग पर कार्टून्स इस संदर्भ में, कला से संबंधित और गहरे विषयों को समझने के लिए क्लास 10 इंग्लिश में 90+ अंक कैसे प्राप्त करें परीक्षा अध्ययन 2026 से पढ़ना उपयोगी होगा।
भारतीय राष्ट्रीय ध्वज का विकास
- 1906: पहली बार तिन रंगों का ध्वज (हरा, पीला, लाल) कोलकाता में पेश
- 1921: वेनकैया पिंगल द्वारा त्रिरंगा ध्वज, जिसमें चरखा मध्य में
- 1947: वर्तमान ध्वज जिसमें सेफरन, सफेद, हरा रंग और अशोक चक्र शामिल
- रंगों का अर्थ: सेफरन (शौर्य), सफेद (शांति), हरा (समृद्धि)
आधुनिक भारतीय कला के मुख्य ट्रेंड्स
प्रमुख पेंटिंग्स
- राजा रवि वर्मा की 'राम वेंकुशिंग द प्राइड ऑफ़ द ओशियन'
- जामिनी रॉय की 'मदर एंड चाइल्ड'
- अमृता शेरगिल की 'हल्दी ग्राइंडर्स'
- एमएफ हुसैन की 'मदर टेरेसा'
आधुनिक मूर्तियां
- डिप्टी रॉय चौधरी का 'ट्रॉफ ऑफ लेबर'
- रामकिकर की 'सांथल फैमिली'
- अमरनाथ सहगल का 'क्राइस एंड हर्ट'
- पीवी जानकीराम की 'गणेशा'
ग्राफिक प्रिंट्स
- सोमनाथ होरे की 'चिल्ड्रन' (भुखमरी, युद्ध का भय)
- ज्योति भट्ट की 'देवी'
- अनुपम सूद द्वारा 'ऑफ वॉल्स' (गरीबी और महिला स्थिति पर)
- लक्ष्मण गोडे पेपर का 'मैन, वुमेन एंड ट्री'
परीक्षा में सफलता के सुझाव
- एनसीईआरटी के मुख्य पाठ्यक्रम पर ध्यान दें, अतिरिक्त साहित्य से भ्रमित न हों
- प्रत्येक प्रश्न के अनुरूप उत्तर लिखें, मुख्य बिंदुओं को अंडरलाइन करें
- काले पेन का प्रयोग करें, साफ और व्यवस्थित हस्ताक्षर रखें
- प्रेजेंटेशन पर ध्यान दें, प्रश्नों के हिसाब से उत्तरों का वर्गीकरण करें यहाँ पर KVS NVS Exam Preparation: English Grammar Essentials & Live Classes आपके व्याकरण कौशल को सुधारने में मदद कर सकता है, जो लेखन में विशेष कर परीक्षा में उपयोगी होगा।
निष्कर्ष
यह वीडियो मिनिएचर पेंटिंग्स, भारतीय कला के स्कूल, स्वतंत्रता संग्राम में कला की भूमिका, तथा राष्ट्रीय ध्वज के विकास को संपूर्ण रूप से कवर करता है। बोर्ड परीक्षा में उत्कृष्ट अंक प्राप्त करने के लिए इस वीडियो का उठाया गया कंटेंट अत्यंत लाभकारी है। नियमित रिवीजन और समझदारी से उत्तर लेखन से सफलता सुनिश्चित होगी।
शुभकामनाएँ!
हाय एवरीवन कैसे हैं आप सब? बोर्ड एग्जाम अब बहुत पास आ गया है। देखो पिछले कुछ दिनों में मुझे बहुत सारे डीम्स और
कमेंट्स मिले हैं कि जिसमें स्टूडेंट्स पूछ रहे हैं या डिमांड कर रहे हैं कि मैम एक सॉलिड रिवीजन वीडियो चाहिए जिसमें सब
कुछ कवर हो जाए। एक ही वीडियो में हम सब समझ लें। वन शॉर्ट टाइप्स। तो मैं आपके लिए कंप्लीट वन शॉट रिवीज़ लेकर आई हूं। अब
एक बात मैं ऑनेस्टली बता दूं। ये वीडियो मैंने लास्ट ईयर रिकॉर्ड किया था। लेकिन टेंशन मत लो। यह 100% रेलेवेंट है क्योंकि
सीबीएसई सिलेबस सेम है। कोई मेजर चेंज नहीं हुआ है इस साल। एग्जाम पैटर्न वही है जिसमें एट हमें एमसीक्यूस आ रहे हैं। टू
मार्क्स के क्वेश्चंस आ रहे हैं। देन सिक्स मार्क्स के क्वेश्चंस आ रहे हैं। इंपॉर्टेंट टॉपिक्स कहें, पेंटिंग्स कहें,
कांसेप्ट्स कहें, टाइप्स ऑफ क्वेश्चन कहें, सब सेम है। पिछले साल के स्टूडेंट्स को भी इससे बहुत हेल्प मिला था। तो इसीलिए
मैंने सोचा कि यह प्रूवन कंटेंट है। सो आपके साथ भी शेयर कर दूं। ऑलरेडी इफेक्टिव है। लेकिन इससे पहले कि मैं सिलेबस रिवीजन
शुरू करवाऊं। मुझे पता है कि आपके बहुत सारे डाउट्स हैं। कमेंट्स में सेम क्वेरीज बार-बार आ रही हैं। सो हर एक को बच्चा
पर्सनली रिप्लाई नहीं कर पाते हैं। सो पहले वो सब मैं क्लियर कर देती हूं जल्दी से। फिर हम रिवीजन की तरफ चले जाएंगे।
लेकिन अगर किसी स्टूडेंट को लगता है कि उसके डाउट्स नहीं है और वो डायरेक्टली यूनिट वन से रिवीजन शुरू करना चाहता है तो
आप यह स्किप कर सकते हैं क्वेरी राउंड। सो सुनिए एक-एक डाउट को अब क्लियर करते हैं। क्वेरी नंबर वन मैम ओरिजिन एंड डेवलपमेंट
में क्या लिखना है? देखें ओरिजिन का मतलब होता है कब शुरू हुआ? कहां शुरू हुआ? टाइम पीरियड और ज्योग्राफिकल लोकेशन। जैसे
राजस्थानी स्कूल था 16 टू 19थ और पहाड़ी है 17 टू 19थ। तो डेवलपमेंट का मतलब होता है कि कैसे इन्वॉल्व हुआ? इनिशियली क्या
था? किसका इन्फ्लुएंस था? क्या चेंजेस आए? रूलर्स ने क्या-क्या करवाया? कैसे डेवलपमेंट हुआ? और क्या कैरेक्टरिस्टिक्स
रहे? फॉर एग्जांपल जब मैं मुगल की बात करती हूं तो ओरिजिन 16 सेंचुरी को हुआ। फिर हुमायूं आया, पर्शियन इन्फ्लुएंस आया,
अकबर आया तो पोर्ट्रेचर बना, रियलिज्म आया, डिपार्टमेंट एस्टैब्लिश हुआ। जहांगीर का टाइम में आया। तो हमने बात की कि नेचर
और फ्लोरा एंड फोना पे बहुत फोकस हुआ। शाहजहां आया तो आर्ट डेकोरेटिव ज्यादा हो गया। औरंगजेब के टाइम पे डिक्लाइन हो गया।
सो सिंपल फ़ूला है। ओरिजिन मतलब टाइम, प्लेस, इनिशियल इन्फ्लुएंस। डेवलपमेंट चेंजेस ओवर द टाइम मेजर रूलर्स की बात कर
दें एवोल्यूशन स्टाइल कर दें और अगर आपको लगता है कि इतना सब लर्न नहीं होता तो सिंपली आपको टाइम पीरियड लिखना है।
इन्फ्लुएंस लिखना है। नेम ऑफ द सब स्कूल्स लिख के जाना है और फ्यू कैरेक्टरिस्टिक्स लिख दें तब भी मार्क्स मिल जाएंगे। क्वेरी
नंबर टू स्कूल्स के कैरेक्टरिस्टिक्स मिक्स हो जाते हैं। क्या करें? बिल्कुल नॉर्मल है क्योंकि आर्ट में इन्फ्लुएंसेस
आते हैं। कंफ्यूजन अवॉइड करने के लिए हर स्कूल के कॉमन फीचर्स पहले अलग कर लो जो सब स्कूल्स के सेम है। फिर एक-एक दो-दो
फीचर्स जो पर्टिकुलरली उस स्कूल का है वो कर लें। ये भी मैंने वीडियोस में बहुत क्लियरली समझाया है। जैसे लाइंस हो गया,
कलर्स हो गया, डिप्शन ऑफ़ बर्ड्स एंड एनिमल्स हो गया, गारमेंट्स हो गया। ये सब पॉइंट सबके सेम है। क्वेरी नंबर थ्री।
क्या एनसीईआरटी थोरली पढ़नी चाहिए फुल मार्क्स के लिए? एनसीईआरटी देखिए इंपॉर्टेंट है लेकिन थोरली का मतलब लाइन
बाय लाइन रट्टा नहीं है। बहुत सी पेंटिंग्स एनसीईआरटी में है जो सिलेबस का पार्ट नहीं है। क्लास 12th सिलेबस का
पार्ट नहीं है। जब हम बोर्ड की बात कर रहे हैं। सो अगर आप दूसरे पब्लिशर की बुक्स भी पढ़ रहे हैं तो कोई प्रॉब्लम नहीं है। सब
कवर हो जाता है। और अगर एनसीईआरटी पढ़ रहे हैं तो ऑफिशियल सिलेबस क्लास 12th बोर्ड का देख के पढ़ें जिसका वीडियो मेरे चैनल
में है। क्वेरी नंबर फोर हर पेंटिंग का सिरका लिखना जरूरी है। कंपलसरी नहीं है। लेकिन हेल्पफुल है। अगर एग्जैक्ट पता है
तो लिखें नहीं पता है तो आप सेंचुरी मेंशन कर सकते हैं जैसे 17th सेंचुरी या अहम पीरियड लिख सकते हैं जैसे राजस्थानी
पीरियड या रूलर का उसका टाइम पीरियड लिख सकते हैं जैसे अकबरर्स पीरियड जहांगीरस पीरियड स्कूल का जनरल जो टाइम वो है वो भी
आप मेंशन कर दो जैसे पहाड़ी स्कूल तो गलत सिरका लिखने से बेटर है कि थोड़ा जनरल लिखना पूछा जाए तभी लिखो अदरवाइज मत लिखो
क्वेरी नंबर फाइव टू टू मार्क्स और सिक्स मार्क्स के आंसर की लेंथ कितना होना चाहिए? लेंथ डायरेक्टली मार्क्स से
रिलेटेड होती है बच्चा। सीबीएसई टू मार्क्स के लिए हमसे 100 वर्ड्स की डिमांड करता है। सिक्स मार्क्स के लिए 200 से 250
वर्ड्स के बीच में लिखना होता है हमें। टू मार्क्स मतलब कंसाइज एंड टू द पॉइंट। सिक्स मार्क्स मतलब डिटेल्ड एंड
कॉम्प्रिहेंसिव। नेक्स्ट क्वेरी। सीयूईटी में कुछ पेंटिंग्स हैं जो क्लास 12th बोर्ड में
नहीं। कंफ्यूजन हो रहा है। बिल्कुल सही। सीयूईटी और बोर्ड का सिलेबस स्लाइटली डिफरेंट है। तभी मैंने कहा एनसीईआरटी अगर
पढ़ रहे हो ना तो माइंडफुली पढ़ना। कुछ पेंटिंग सीईटी में है जो बोर्ड्स में नहीं है हमारे सिलेबस में। वो आपके क्लास 12th
के लिए नहीं चाहिए हमें। सीयूईटी के लिए अलग से प्रिपेयर करना पड़ेगा। वहां सिलेबस ब्रॉडर है। राइट नाउ बोर्ड पर फोकस करो।
सीयूईटी बाद में देख लेना। कंफ्यूजन अवॉइड करने के लिए अगेन मैं कह रही हूं चैनल पर ऑफिशियल सिलेबस की वीडियो है। वो आप चेक
कर लीजिएगा। क्वेरी नंबर सेवन एलिमेंट्स और प्रिंसिपल्स ऑफ हार्ट पढ़ना जरूरी है। लर्न करने हैं। आपको डायरेक्ट क्वेश्चन
इनमें से नहीं आएगा बट अंडरस्टैंडिंग तो चाहिए क्योंकि आर्ट के स्टूडेंट हैं आप। अगर क्वेश्चन क्लियरली बोले कि डिस्कस
एलिमेंट्स एंड प्रिंसिपल्स इन दिस पेंटिंग। सो एलिमेंट क्या होता है? लाइन, शेप, कलर, टेक्सचर, स्पेस। प्रिंसिपल्स
क्या होते हैं? बैलेंस, रिदमम, यूनिटी, एफेसिस। सो पेंटिंग के कॉन्टेक्स्ट में एक्सप्लेन कर दो ना जो हम वैसे भी बच्चा
हम लिखते ही हैं। एप्रिसिएशन या एस्थेटिकल पैरामीटर में आप क्या लिखते हो? यही लिखते हो ना कि लाइंस बहुत फ्लुएंट है, बहुत कलर
ब्राइट है, वेल बैलेंस्ड कंपोज़शन है। सो ये वही तो है। ये वही एलिमेंट्स एंड प्रिंसिपल्स हैं। तो वो घुमा के पूछा गया
है कंफ्यूज नहीं होना। जैसे हमें हम कहें कि इन दिस मुगल मिनिएचर लाइंस आर डेलिकेट, प्रिसाइज़। द कंपोज़शन शोज़ सिमिट्रिकल
बैलेंस विद फिगर प्लेस्ड इक्वली ऑन बोथ साइड्स। लेकिन अगर क्वेश्चन सिर्फ डिस्क्राइब या जनरल आ जाता है तो आप
सिंपली डिस्क्राइब कर दो कि कलर कंपोज़िशन सब्जेक्ट मैटर लिखने का तरीका बदलेगा। कंटेंट वही है। एलिमेंट्स प्रिंसिपल्स
स्पेसिफिकली मेंशन करने की जरूरत नहीं है जब तक पूछा ना जाए। क्वेरी नंबर एट मेघदूत अलग पेंटिंग है। ननंद यशोदा अलग है। हमारी
बुक में कुछ है। किसी की बुक में कुछ है। आपके चैनल में कुछ है। कौन सी याद करें? आप एनसीईआरटी पढ़ रहे हैं तो वो लिख दें।
दूसरी कोई पब्लिशर की बुक पढ़ रहे हैं वो लिख दें। जो एग्जामिनर्स हैं ना उनको भी पता है कि अलग-अलग बुक्स में अलग
पेंटिंग्स हैं। सेम आर्टिस्ट का है, सेम स्टाइल है, सेम थीम है। कुछ उसमें चेंज नहीं होने वाला। प्रेजेंटेशन अलग है। सो
एग्जामिनर्स को भी पता है कि किस बुक में क्या है। कोई आपकी पेंटिंग को गलत नहीं करेगा। नेक्स्ट एजशन रीज़ क्वेश्चन गलत हो
जाता है। क्या करें? देखो सबसे पहले तो असर्शन रीज़ ना थोड़ा सा ट्रिकी होता है। उसका पैटर्न समझें। स्टेप वन क्या करना
है? असर्शन को सेपरेटली चेक करो। ट्रू है या फॉल्स। स्टेप टू। फिर रीज़ को चेक करो कि ट्रू है या फॉल्स। स्टेप थ्री। अगर
दोनों ट्रू हैं तो चेक करो आर एक्चुअली ए को एक्सप्लेन कर रहा है। चाहे ना बिकॉज़ लगा के देख लो। आपको सीक्वेंस समझ आ
जाएगा। रीज़ एक्चुअली असशन को एक्सप्लेन कर रहा है या नहीं। तो आंसर ए होगा अगर एक्सप्लेन कर रहा है। इसकी थोड़ा सा
प्रैक्टिस कुछ क्वेश्चंस की कर लो। सैंपल पेपर में से आपको पैटर्न समझ आ जाएगा। क्वेरी नंबर 10। मैम आपने कहा क्वेश्चन
जिस तरह से पूछा जाए आंसर वैसे लिखना है। इसका क्या मतलब? इसका मतलब यह है कि क्वेश्चन की डिमांड को समझो। डिफाइन या
डिस्क्राइब विजुअल डिटेल बताओ। कलर, फिगर, कंपोजिशन क्या बना है पेंटिंग में? सब्जेक्ट मैटर है तो थीम या टॉपिक
डिस्क्राइब करना है कुछ लाइंस में। ह्यूमन लाइफ वैल्यू है तो वो पेंटिंग सोसाइटी को क्या मैसेज देती है? उस तरह से हमको लिखना
है। चारप लाइंस में। एनालाइज़ मतलब सब्जेक्ट मैटर, ह्यूमन लाइफ वैल्यू, डिस्क्रिप्शन। यह पहले भी मैंने बोला है
आप सबको। अ एस्थेटिकल पैरामीटर मतलब पेंटिंग की ब्यूटी को आपने एक्सप्लेन करना होता है ऑन द बेसिस ऑफ प्रिंसिपल्स
एलिमेंट्स ऑफ आर्ट वही लाइन कलर के बेसिस पे क्वेश्चन में जो वर्ब यूज़ होता है ना वो आपके आंसर राइटिंग स्टाइल डिसाइड करता
है थोड़ा सा ये दिमाग में रख लेना क्वेश्चन जब पढ़ो तो जो पूछा जाता है उसको अंडरलाइन कर लो कीवर्ड्स आइडेंटिफाई कर लो उसके
अकॉर्डिंग आंसर का स्ट्रक्चर करो क्वेरी नंबर 11 इंटरनल चॉइस है तो क्या कुछ चैप्टर्स हम स्किप कर सकते हैं। मैं ये
कहूंगी बेटा रिस्क मत लो। इंटरनल चॉइस का मतलब है जो आपको सेक्शन बी में टू टू क्वेश्चंस दिए जा रहे हैं। जिसमें से आपको
वन अटेम्प्ट करना है और सेक्शन सी में भी आपको थ्री क्वेश्चंस आएंगे जिनमें से दो करना है। लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि
हम पूरा चैप्टर ही छोड़ दें। अगर उस चैप्टर में से एमसीक्यू आ गया। अगर इंटरनल चॉइस में दोनों क्वेश्चन उसी चैप्टर से
रिलेटेड हुए तो उसमें क्या करेंगे आप? रिस्क ज्यादा है इस चक्कर में। क्वेरी नंबर 12 सिलेबस में जो सब स्कूल
मेंशंड है सिर्फ वही करने हैं या एक्स्ट्रा भी तो सिर्फ सिलेबस पर जो है उसी पर फोकस करना है। टाइम लिमिटेड है जो
सिलेबस में है उसको स्ट्रांग करो एक्स्ट्रा मत जाओ। कॉम्पिटिटिव एग्जाम्स के लिए बात अलग होता है बेटा बट बोर्ड्स
के लिए जो सिलेबस है उसी में से ही आता है। क्वेरी नंबर 13 पेंटर्स के बारे में अलग से पढ़ना है क्या? देखो बहुत डिटेल
में आपको पढ़ने की जरूरत नहीं है। ज्यादा से ज्यादा सब पार्ट्स में यह आ जाता है कि उसके आर्टिस्टिक स्टाइल के बारे में बता
दो या वह जो पेंटर कलर यूज करता है वह बता दो। तो वो तो आप पेंटिंग से भी कर सकते हैं। आपको पता है वो किस टाइम पीरियड का
आर्टिस्ट है। आपको पता है कि वो किस टेक्निक में काम करता था। आपको पता है कि वो किस थीम पे काम बना रहा है। तो ये सब
तो आप पेंटिंग से भी कर सकते हो। एक्स्ट्रा इतना डिटेल में उसका हिस्ट्री लर्न करने की जरूरत नहीं है। क्वेरी नंबर
14 कितना डिटेल में पढ़ना चाहिए? बेसिक या डीप मेरे हिसाब से बच्चा बैलेंस्ड चाहिए बोर्ड्स के लिए कॉन्सप्चुअल क्लेरिटी
ज़्यादा इंपॉर्टेंट है। एग्ज़ाम जो आपकी एग्जांपल्स हैं वो रेडी रखें। बेसिक स्ट्रांग हो तो मार्क्स आ जाते हैं। अब एक
इंपॉर्टेंट टिप इस बार के एग्जाम के लिए। डार्क पेन यूज़ करो। उससे लिखना जरूरी है। जैसा कि आपको पता है कि इस बार ऑनलाइन
चेकिंग है। ऑनलाइन चेकिंग में आंसर शीट स्कैन होनी है। अगर लाइट पेन यूज़ करोगे तो स्कैन कॉपी में फेडेड दिख सकता है। यूज़
गुड क्वालिटी पेन। टेस्ट कर लो पहले। एक पेज लिख के फोन से स्कैन करके देख लो। क्लियर हो जाएगा। लाइट ब्लू पेन अवॉइड
करना। जेल पेन को मतलब वो भी अवॉइड करना। जो स्मज हो जाते हैं। जैसे हाथ से फैल जाता है ना कई बार वो भी मत करना।
पेंसिल्स कम से कम यूज़ करो। उससे लिखना नहीं है। अंडरलाइनिंग हाईलाइट करके जा सकते हैं। और हैंडराइटिंग भी आपको थोड़ा
क्लियर और बड़ा रखना। हर आंसर के बाद प्रॉपर स्पेस दो। एग्जामिनर को पढ़ने में तकलीफ नहीं होना चाहिए। स्क्रीन पे
प्रेजेंटेशन मैटर्स नीड लिखना है। अंडरलाइनिंग करनी है। सीक्वेंस में पेपर अटेम्प्ट करना है। सो अब चलो कंप्लीट
सिलेबस रिवाइज़ करते हैं। ये वीडियो आपका फुल ऑफिशियल सिलेबस ऑफ़ सीबीएसई को कवर करेगा। नोटबुक रेडी रखो। इंपॉर्टेंट
पॉइंट्स आप नोट कर सकते हैं। अगर चाहें पॉज कर सकते हो बीच में। अगर कोई टॉपिक फिर से रिवाइज करना है। स्पीड एडजस्ट आप
कर सकते हैं। अगर जल्दी समझना है 1.25 या 1.5x की स्पीड पर। सो, लास्ट फ्यू डज़ हैं। टेंशन नहीं, फोकस चाहिए। अब बस कांसेप्ट
रिवाइज़ करने हैं और कॉन्फिडेंस बिल्ड करना है। यह वन शॉट आपका क्विक रिवीज़ पार्टनर है। इसे प्रॉपर्ली यूज़ करो। लेट्स स्टार्ट
द रिवीज़। ऑल द बेस्ट फॉर योर बोर्ड्स। तो चैप्टर वन हमारा मेन स्कूल आएगा राजस्थानी स्कूल ऑफ मिनिएचर पेंटिंग। बहुत सी
वीडियोस हमने अलग-अलग चैप्टर पे बनाई है। बहुत डिटेल्ड में बनाई है। जो वो बच्चे वहां से देखना चाहे वो वो भी कर सकते हैं।
बट वन शॉर्ट वीडियो में उतना ही पढ़ाया जाएगा जितना हमें सिलेबस के लिए रिक्वायर्ड है। या शॉर्ट में आपको थोड़ा
क्रिस्प आप कहें कि नोट्स जिस तरह से मैं दे सकती हूं वो मैं इसमें आपको प्रोवाइड करूंगी। राजस्थानी स्कूल ऑफ मिनिएचर
पेंटिंग कोई भी चैप्टर आपको करना है तो सबसे पहले हमें किन पॉइंट्स का ध्यान रखना है? देखें चैप्टर पढ़ने से पहले आपको
क्वेश्चंस का फॉर्मेट पता होना चाहिए। हमें या तो एमसीक्यूस आ रहे हैं या हमें टू मार्क्स का क्वेश्चन रहेगा या हमें
रहेगा सिक्स मार्क्स का क्वेश्चन या सब पार्ट्स में थ्री थ्री मार्क्स के टू सब पार्ट्स रह सकते हैं इक्वेशन के। सो हमें
अगर कोई भी चैप्टर पढ़ना है तो उसका फर्स्ट क्वेश्चन हमें पढ़ना है ओरिजिन एंड डेवलपमेंट।
सेकंड हमें पढ़ना है कैरेक्टरिस्टिक्स और थर्ड हमको पढ़ना है उसकी पेंटिंग्स।
सो ये हमें बहुत ध्यान से लर्न करनी है चीजें। सो सबसे पहले ओरिजिन एंड डेवलपमेंट अगर हम पढ़ें तो उसमें फर्स्ट पॉइंट रहेगा
16th टू 19th सेंचुरी एडी। ये टाइम पीरियड है। और तीन मिनिएचर स्कूल्स का सेम टाइम पीरियड है 16 टू 19th। अगर ये ईयर किसी को
लर्न नहीं होता तो मैंने पहले भी एक टिप्स में अपने बोला था कि आप 10थ में किस ऐज ग्रुप में थे तो 16 तो वहां से याद रख
लीजिएगा कि 16 टू 19थ का ये टाइम पीरियड है। और फिर हम बात करते हैं कि राजस्थानी पे इन्फ्लुएंस किस चीज का था? तो
राजस्थानी जो था ना इट्स प्राइमरीली इन्फ्लुएंस्ड बाय इंडियन ट्रेडिशन इंक्लूडिंग इंडियन रिलीजियस टेक्स्ट,
इंडियन एपिक्स, लव पोएट्री, फोक आर्ट एंड म्यूजिक थीम्स। सो बेसिकली यह जो स्कूल था ना यह टोटली प्योर इंडियन आर्ट था। इंडिया
के ही एपिक्स, इंडिया की ही स्टोरी, इंडिया के ही रिलजन इस सब पे ये बेस्ड था। और लेटर ऑन इस पे इन्फ्लुएंस मुगल्स का
आया है। सो लेटर इन्फ्लुएंस्ड फॉर मुगल स्टाइल आल्सो। सो नेक्स्ट हमारा पॉइंट रहता है थीम्स। थीम्स होते हैं सब्जेक्ट
मैटर कि अब हम पढ़ें। सबसे पहले हमने ये पढ़ा कि 16 टू 19 सेंचुरी का इसका टाइम पीरियड है। इसको राजपूताना स्कूल भी कहा
जाता है क्योंकि राजपूत राजाओं के अंडर ये डेवलप हुआ था और प्योर इंडियन स्कूल भी कहा जाता है इसको। बट लेटर ऑन मुगल का
इन्फ्लुएंस इस पे आया था ड्यू टू चेंज पॉलिटिकल कंडीशंस। सो थीम्स में आता है कि किन टॉपिक्स पे पेंटिंग्स बनी है। तो
प्राइमरली अगर हम जो देखें तो मेन जो थीम्स निकल के आते हैं वो है रिलीजियस एंड माइथोलॉजिकल।
रिलीजियस होता है जो भगवान या देवी देवताओं के ऊपर जितने भी थीम्स बने हैं जिसमें आता है भक्ति थीम रामायण महाभारत
भगवत पुराण या शिव पुराण पे और दुर्गा महात्म पे पेंटिंग्स बनी है। फिर आता है हिस्टोरिकल। हिस्टोरिकल होता है जो राजे
महाराजाओं से रिलेटेड स्टोरीज या उनके इलस्ट्रेशंस रही हो। सो इसमें उन्होंने क्या-क्या बनवाया है? किंग्स एंड क्वींस
उनकी डेली एक्टिविटीज हो गई। कोर्ट सीन हो गए, हिस्टोरिक मूवमेंट्स हो गई, हंटिंग सीन हो गए, वॉर्स एंड विक्ट्रीज हो गई,
डांस, म्यूजिक परफॉर्मेंससेस, रिचुअल्स, फेस्टिवल्स, पिकनिक्स एंड वेडिंग प्रोसेशंस। सो अपने हर तरह का जो भी उनके
डेली रूटीन होता था, तो उसमें जो जो इंपॉर्टेंट इवेंट्स हैं वो उन्होंने जैसे हम एल्बम्स तैयार करते हैं। जैसे हम
फोटोग्राफ्स खींच के रखते हैं तो उन्होंने ये पेंटिंग्स बनवा के अपनी एल्बम्स बनवाई थी। लिटरेरी लिटरेरी होती हैं जो लिटरेचर
पर बेस्ड हो। मतलब लिटरेचर कोई भी पोएट्री के ऊपर उसकी इलस्ट्रेशन बनाना। अब इसमें दो तरह का काम हुआ है। डिवोशनल भी हुआ है,
रोमांटिक भी हुआ है। सो आर्ट वर्क बेस्ड ऑन लिटरेचर इंक्लूडिंग रोमांटिक एंड डिवोशनल पोएट्री लाइक गीत गोविंद, रस
मंजरी, रसिक प्रिया एंड कवि प्रिया। सो इन पे पेंटिंग्स बनी है। इसके अलावा रागमाला पेंटिंग जो है वो भी इसका बहुत एक मेन थीम
हम प्राइमरी थीम कंसीडर कर सकते हैं राजस्थानी पेंटिंग्स का। रागमाला पेंटिंग्स होती है रागों की माला। जिस तरह
से आप कहें कि इमोशंस एसोसिएटेड विद द राग्स व्हिच कैन बी फेल्ट थ्रू सिंगिंग और प्लेइंग इंस्ट्रूमेंट आर डिप्टेड इन दीज़
पेंटिंग। जो राग गाने या बजाने से जो इमोशन हमें महसूस होती है वो उस उन इमोशंस को पेंटिंग के थ्रू दिखाया गया था। सो आप
बेसिकली समझे कि म्यूजिकिकल नोट्स के ऊपर ये पेंटिंग सिंबॉलिक पेंटिंग्स बनी है सिंपल वे में। सो दीज़ पेंटिंग आर द
सिंबॉलिक रिप्रेजेंटेशन ऑफ़ रागाज़ इन ह्यूमन फॉर्म। 12मासा। 12 मींस 12 मासा मींस मंथ्स। सो 12 मंथ्स के ऊपर जो
पेंटिंग्स बनी हैं उनको 12मासा पेंटिंग कहा जाता है। अब हम नेक्स्ट पॉइंट पे आते हैं कि इसके सब स्कूल्स कौन-कौन से थे? तो
सब स्कूल में आते हैं मेवाड़, बूंदी, किशनगढ़, जयपुर, जोधपुर, बीकानेर। सो ये सिक्स स्कूल्स हैं जो सब स्कूल हम कंसीडर
कर सकते हैं। अगर आपको लर्न करने में दिक्कत होती है तो जैसे एम बी, के, जे, जे जे, बी तो ये भी आप शॉर्ट फॉर्म याद कर
सकते हैं। सो दैट इससे आपको याद रहेगा। और ये जो टेबल आप स्क्रीन पे देख रहे हैं इसमें आप देखें मेवाड़ के नीचे लिखा हुआ
है मारू रागिनी किशनगढ़ के नीचे है राधा बनी ठनी जो जिसके जो पेंटिंग आपके सिलेबस में है वो नीचे दी गई है बट बूंदी की नहीं
है राजा अनिरुद्ध सिंह हारा पहले होती थी इस साल सिलेबस में यह पेंटिंग नहीं है। सो फिलहाल मारू रागिनी राधा बनी ठनी भरत मीट
राम एट चित्रकूट चौगन प्लेयर एंड कृष्णा ऑन स्विंग पेंटिंग्स इसमें हैं। अब हम पहली पेंटिंग पढ़ें कि मारू रागिनी इसमें
क्या बना है और इन पेंटिंग्स को हमने किस तरीके से लर्न करना है। तो देखिए हमें क्वेश्चंस जो आ रहे हैं हमें क्वेश्चंस
में से ये भी पूछा जाता है कि उनका अटायर कैसा है? बैकग्राउंड्स कैसी हैं? कितनी फिगर्स बनी है? किस तरह से सीन का डिप्शन
है? किस थीम के ऊपर बना है? सो ये सब छोटी-छोटी चीजें हमें याद करनी है। अब याद कैसे रह सकती हैं? सबसे पहले विजुअली
देखें। आप विजुअली इन चीजों को समझें कि हमने जो चीज देख लेते हैं ना वो कभी भूलता नहीं है। तो जब मैं ये समझा रही हूं तो
आपने पेंटिंग को बहुत ध्यान से देखना है। तो कुछ पॉइंट्स ये जो हम टाइटल आर्टिस्ट सब स्कूल मीडियम कलेक्शन इसको हम टेबल
कहते हैं अपनी आर्ट की लैंग्वेज में। सो ये टेबल आपकी बुक्स में पीछे भी बने होंगे जहां माइंड मैपिंग के लिए दे रखा है और ये
मैंने आगे भी कहा है कि आप लोग अपने पास एक टेबल बना के रखें कि आप उनमें से ये सब पेंटिंग्स लर्न करेंगे नेम्स एंड ऑल। सो
ये जो फर्स्ट पेंटिंग है मारू रागिनी ये साहिबद्दीन की बनी है। मेवाड़ इसका सब स्कूल है। मीडियम एंड टेक्निक में वाटर
कलर टेंपरा कलेक्शन नेशनल म्यूजियम न्यू दिल्ली। सो वाटर कलर टेंपरा भी सबका सेम है। नेशनल म्यूजियम न्यू दिल्ली भी सबका
सेम है। सो ये बिना सोचे समझे आपने ये सब मिनिएचर्स में इस तरह से लिख जाना है। कलेक्शन दो-तीन पेंटिंग्स के चेंज है
लेकिन बहुत कम है। वो आप अलग से कर सकते हैं। बाकी सब में आप नेशनल म्यूजियम न्यू दिल्ली लिख के जा सकते हैं। सो सबसे पहले
हम इस पेंटिंग का थीम या सब्जेक्ट मैटर पढ़ेंगे कि ये पेंटिंग किस टॉपिक पर बेस्ड है। तो ये जो है जैसे कि नाम से सजेस्ट हो
रहा है मारू रागिनी। तो रागिनी वर्ड क्या है? अभी मैंने बोला रागमाला सीरीज तो वहीं से आपको क्लियर हो जाता है कि ये रागमाला
सीरीज पर पेंटिंग बनी है और उसके अलावा फोकलोर ढोला मारू मतलब उनकी लोकथा पर आधारित है जो ढोला मारू की एक लोकथा है
राजस्थान में उसके ऊपर ये पेंटिंग बेस्ड है। वर्टिकल पेंटिंग है जो आप देख पा रहे हैं यहां पे और मिनिएचर डिपिक्ट द लव
स्टोरी ऑफ़ ढोला मारू व्हिच इज़ वेरी वेल नोन इन राजस्थान। नेक्स्ट है हमारा कंपोजिशन या
डिस्क्रिप्शन। अब बहुत बुलेट पॉइंट्स में मैं यहां समझा रही हूं आपको कि इसमें क्या-क्या बना है। आप ध्यान से देखें तो
यह वर्टिकल पेंटिंग है। किंग एंड क्वीन राइडिंग ऑन द कैमल। आपको दिख रहे होंगे। टू मेल एंड स्कॉट्स आर रनिंग अलोंग द साथ
में यह दोनों घूम रहे हैं। यह साथ जा रहे हैं। वन मेल अटेंडेंट इज़ लीडिंग द कैमल। यह इसके आगे है। अ हंटिंग डॉग इज़ आल्सो
देयर। यह यहां पे दिख रही है इमेज। कैमल इज़ वेल डेकोरेटेड। आप इसका ऑर्नामेंटेशन देखें।
वेल डेकोरेटेड एंड इन फुल एंथूजियाज़्म। एंथूज़ियाज़्म देखें मूवमेंट में है। एक रिदममिक फॉर्म में वो एनिमल एनाटॉमी बनाई
गई है। कैलग्राफ इज़ रिटन ऑन द टॉप डीप ब्लू स्काई ये दे रखा है एंड येलो एंड ग्रीन बैकग्राउंड है। सिर्फ ये आपको लिखना
है। अब बच्चा अगर हम इस पेंटिंग को ध्यान से देख लें। तो मुझे आप बताएं कि इसमें कोई रट्टा मारने की जरूरत तो है नहीं। आप
वैसे भी लिख के जा सकते हैं। अभी हमने क्या पढ़ा? एक किंग एंड क्वीन कैमल पर हैं। दो अटेंडेंट आगे खड़े हैं। एक अटेंडेंट
कैमल के आगे भाग रहा है। एक रनिंग डॉग वहां पे दिखाया है। और कैमल को बड़े एंथूज़ियाज़्म में दिखाया गया है। एक रिदमम
में दिखाया गया है। और इससे भी ज्यादा डिटेल में अगर आप जाना चाहें तो आप गमेंट्स के ऊपर लिख सकते हैं कि
ब्यूटीफुली डेकोरेटेड या डिजाइनिंग गमेंट्स की हुई हुई है। और जिस तरह से अटायर वो लोग राजस्थानी पहनते थे। वही
यहां पे दिखाया है। डी ब्लू स्काई है। बैकग्राउंड आप देखें कि ग्रेडेशन टाइप में दिखाया गया है। कैलग्राफी इनका जरूर एक
बहुत इंपॉर्टेंट मेन पॉइंट होता था। ज्यादातर हम मेवाड़ की पेंटिंग्स में देखते हैं कि येलो बैकग्राउंड के ऊपर
ब्लैक कलर की कैलग्राफी दी जाती थी। तो ये यहां पे भी आपको क्लियरली दिख रही है। सो वो सेम फीचर यहां पे भी दिखाई दे रहा है।
और अब एक और टर्मिनोलॉजी जो हमें पेपर में आती है वो है ह्यूमन लाइफ वैल्यू। मतलब हमें इस पेंटिंग से क्या शिक्षा मिलती है?
सो वो भी बहुत बार एग्जाम में क्वेश्चन आ जाता है और आजकल हर बुक्स में दे भी रखा है ये आपको पॉइंट। ब्यूटीफुल एंड सबटल
डिपिक्शन ऑफ़ द रॉयल कपल्स लव एंड डिवोशन टू वन अनदर ये भी लिख के जा सकते हैं। गुड बिहेवियर एंड कमिटमेंट ऑन द पार्ट ऑफ द
अटेंडेंस टू द रॉयल फैमिलीज़ वेल बीइंग। सो ये जो अटेंडेंस है उनकी ड्यूटी के ऊपर भी कि
कमिटमेंट फॉर देयर ड्यूटी। तो यह भी आप लिख के जा सकते हैं। तो यह एक बहुत सिंपल पेंटिंग है। रागमाला के ऊपर अह बेस्ड है।
और नेक्स्ट हम पेंटिंग की तरफ चलते हैं। तो नेक्स्ट जो पेंटिंग है हमारी राधा बनी ठनी। वेरी फेमस पेंटिंग। इसके ऊपर इंडियन
गवर्नमेंट ने पोस्टल स्टैंप भी इशू किया है। एंड इट्स अ पोर्ट्रेट काइंड ऑफ़ थिंग। बहुत बार पेपर में आता है कि कोई एक
पेंटिंग लिख के जाएं जिसके अगेंस्ट फ्लैट बैकग्राउंड हो। तो बहुत बार बच्चा गलती कर लेता है कि इस पेंटिंग को उसमें कंसीडर कर
देता है। ये पेंटिंग उसमें नहीं आएगी क्योंकि ये पोर्ट्रेट है। पोर्ट्रेट की ऑलमोस्ट बैकग्राउंड फ्लैट ही होती हैं।
फ्लैट बैकग्राउंड्स यूज्ड इन द पेंटिंग्स का मतलब है कि कोई कंपोज़िशन बनी है तो क्या उसमें फ्लैट बैकग्राउंड है? सो वो
पेंटिंग है हमारे सिलेबस में चौगन प्लेयर। सो आपको अगर ऐसा कुछ आता है क्वेश्चन एग्जाम में तो उसमें आपने चौगन प्लेयर को
रेफर करना है ना कि राधा बनी ठनी को। ये लास्ट ईयर का भी क्वेश्चन था और बहुत बच्चे मैंने चेकिंग में देखा था बोर्ड
चेकिंग में ये गलती करके गए हुए थे। सो नेक्स्ट पेंटिंग इज़ टाइटल राधा बनी छठ छनी आर्टिस्ट निहालचंद सब स्कूल किशनगढ़
मीडियम एंड टेक्निक वाटर कलर टेंपरा कलेक्शन नेशनल म्यूजियम न्यू दिल्ली। अब इस पेंटिंग को आप ध्यान से देखें। इसका
थीम क्या है? एक आइडियल पोर्ट्रेचर है ये। कोट डांसर ऑफ किंग सावंत सिंह। किशनगढ़ नेम्ड बनी ठनी। सो ये किशनगढ़ के किंग जो
थे सावन सिंह उनके उन्होंने इसका ये कमीशन वर्क लिया था और ये बनवाई थी पेंटिंग उनकी को डांसर थी जिसके जिसको लेके एज अ मॉडल
उसको लिया गया था और ये पेंटिंग बनाई गई थी। अब इस पेंटिंग में देखें प्रोफाइल फेस है। प्रोफाइल फेस में होता है कि मतलब ये
जो साइड पोज़ दिखाया गया है। सो प्रोफाइल फेस पीच कलर का फेस है। यस इलोंगेटेड आइज। आप देखें कि आंखें कितनी लंबी बनाई गई
हैं। हाई स्लोपिंग फॉरहेड। आप माथे पे देखें। पॉइंटेड लॉन्ग नोज थिन रेड लिप्स, लॉन्ग कर्ली हेयर बालों को
भी देखें। एंड लॉन्ग ब्यूटीफुल कार्ब्व फिंगर्स। फिंगर्स को ध्यान से देखें तो बहुत अच्छा टेपरिंग फिंगर्स बनाई गई हैं।
बहुत ही सुंदर मतलब आप इसका कहें कि अनटॉटमी दिखाई गई है। डेलीगेटली होल्डिंग द एज ऑफ़ द ओढ़नी एंड टू लोटस बड्स। एक हाथ
से उसने ओढ़नी पकड़ी है अपना दुपट्टा और एक हाथ में दो लोटस बड्स पकड़े दिखाए हैं। ओढ़नी जो है वो ट्रांसपेरेंट है। दुपट्टा
आप देखें यहां से ट्रांसपेरेंसी इज़ देयर एंड गवर्नमेंट हैज़ इशूड द पोस्टल स्टैंप विद दिस पेंटिंग। सो ये जो पॉइंट है यह
बहुत इंपॉर्टेंट पॉइंट है। और इस पेंटिंग को इंडियन मोनालिसा भी कहा जाता है। सो वो भी आप एक चीज का ध्यान रखना। ह्यूमन लाइफ
वैल्यू की अगर इस पेंटिंग की बात करें तो एन इमेज ऑफ फीमेल ओरा एंड स्टडी ऑफ कंपोज्ड एंड एट ई नेचर ऑफ ह्यूमन माइंड।
तो ह्यूमन लाइफ वैल्यू ज्यादातर उस पेंटिंग की आएगी जिसमें से कुछ ह्यूमन लाइफ वैल्यू निकल रही होगी। सो ये एक जनरल
पोट्रेचर है। बहुत खूबसूरती भरा आर्ट है। सो इसमें मुझे नहीं लगता कि इसकी ह्यूमन लाइफ वैल्यू पूछी जा सकती है। सो नेक्स्ट
पेंटिंग वेरी इंपॉर्टेंट पेंटिंग एंड वेरी ब्यूटीफुल पेंटिंग ऑफ़ राजस्थानी भरत मीट राम एट चित्रकूट। आर्टिस्ट घुमन सब स्कूल
जयपुर मीडियम एंड टेक्निक वाटर कलर टेंपरा नेशनल म्यूजियम न्यू दिल्ली। अब इस पेंटिंग को ध्यान से देखें। नंबर ऑफ़
फिगर्स आर देयर। और ये 49 फिगर्स हैं इस टोटल पेंटिंग में। सो वेरी क्राउडी कंपोज़िशन इज़ दिस। एंड इसमें आप एक चीज़ को
ध्यान दें कि रेपिटेटिव ऑफ़ या रेपीटीशन ऑफ़ फिगर्स। मतलब श्री रामचंद्र को भी बहुत बार बनाया गया है यहां पे। यहां है, यहां
पे भी है, यहां पे भी हैं। तो मल्टीपल एपिसोड्स इन सिंगल पेंटिंग इस पेंटिंग का स्पेशल फीचर है कि नरेटिव जो पेंटिंग है
वो ये वाली पेंटिंग है। मतलब एक ही पेंटिंग में सिंगल नाइन एपिसोड्स दिखाए गए हैं। अब ये इसका सब्जेक्ट मैटर क्या है?
जैसे भरत मीट राम एट चित्रकूट। जब श्री रामचंद्र जी का नाम आ गया तो आपको क्लियर हो गया कि यह रिलीजियस थीम पे है। एपिक ऑफ़
रामायण पे बनाई गई है। द सीन डिप्टेड इज़ फ्रॉम द एपिक ऑफ़ रामायण व्हेन भरत कम्स टू चित्रकूट टू मीट राम अलोंग विद हज़ थ्री
मदर्स एंड गुरु। तो जब वो अपने भाई को वापस ले जाने के लिए अयोध्या आए थे अपनी माताओं के साथ और गुरु के साथ। सो ये उस
टाइम का यह सीन दिखाया गया है। इन अ सिंगल सीन सेवरल एपिसोड्स हैव बीन डिस्प्लेड। अब ये बहुत इंपॉर्टेंट पॉइंट है। ये याद रखना
आप लोगों ने कि इसमें अलग-अलग एपिसोड्स दिखाए गए थे। अब कौन से एपिसोड्स हैं सुने और अगर आप कॉपी लेके बैठे हैं ना तो नोट
भी कर लें। सिंगल कंपोज़िशन नाइन सीनंस नौ सींस दिखाए गए हैं। एक सिंगल पेंटिंग में। 49 फिगर्स हम ऑलरेडी डिस्कस कर चुके। अब
फर्स्ट सीन में क्या है? मदर्स आर कमिंग फ्रॉम लेफ्ट। आप इधर से आते देखें। ये मदर्स आ रही हैं। राम, सीता, लक्ष्मण आर
ग्रीटिंग देम। यह उनको मिल रहे हैं। कैकई इज एंब्रेसिंग राम। यह थर्ड सीन हो गया। राम इज टचिंग द फीट ऑफ कौशल्या। यह इनके
पांव छू रहे हैं। फिफ्थ सीता इज़ शोन टॉकिंग टू कौशल्या। अब सीता माता को इनके साथ बैठे बात करते
दिखाया गया है। राम इज़ शोन लंग ऑन द फीट ऑफ हिज़ गुरु। अब यह इनके गुरु के चरण स्पर्श करते हुए दिखाया गया है। उनके पास
बैठे हैं। सेवंथ राम फेंट्स आफ्टर हियरिंग अबाउट द डेथ ऑफ हिज़ फादर। अब उनको जब यह पता चला कि दशरथ जी की मृत्यु का जब उनको
न्यूज़ मिली तो वो इधर फेंट होते हुए दिखाए हैं। सो ये वाला वो सीन है। राम सिंग एंड डिस्कसिंग समथिंग विद हज गुरु। अब ये जो
बैठे हैं ये उनको ये डिस्कस कर रहे हैं। राम लक्ष्मण एंड सीता आर बीडिंग गुड बाय टू एवरीवन। अब यह यहां पे सबको यह सब वापस
जा रहे हैं। सो आप यह चीज़ देखें कि इस सीन में अगर हम एक ध्यान से चीज़ देखें तो यहां से ये एपिसोड शुरू हुआ और ये इस तरह से
होते हुए ये सारा सीन ऐसे खत्म हो रहा है। तो आप यह बहुत एक इंपॉर्टेंट पॉइंट है कि किस तरह से मल्टीपल फिगर्स को मल्टीपल
सीनंस को एक-एक में उसको बहुत क्लियरली दिखाया गया है। यह आप देखें कि जिस तरह से डिस्कशंस करते और सब करते दिखाया है। सो,
यह बहुत सुंदर एक चीज़ इसमें हम कह सकते हैं कि है ह्यूमन लाइफ वैल्यू अगर हम इस पेंटिंग के
तो इसका डेफिनेटली क्वेश्चन आ सकता है क्योंकि बहुत इंपॉर्टेंट पेंटिंग है। और आप देखें ऑबिडियंस टू एल्डर्स इंस्ट्रक्शन
क्योंकि उन्होंने अपने माता के कहने पे राजपाठ त्याग दिया था। वन शुड वैल्यू फॉरगिवनेस। और रामचंद्र जी ने गजेस भी
नहीं रखे थे। उनको जो भी था और उन्होंने फॉरगिवनेस का भी हमें प्रेरणा दी है। लव एंड रिस्पेक्ट बिटवीन फैमिली मेंबर्स।
ब्रदरहुड की बात जब भरत उनको लेने आए हैं और भरत ने भी सिंहासन नहीं एक्सेप्ट किया था। द कैपेसिटी टू पुट अदर्स हैप्पीनेस
एंड कंफर्ट अहेड ऑफ योर ओन। सो ये इसकी बहुत सी ह्यूमन लाइफ वैल्यू निकलती हैं इस पेंटिंग की। सो, आप इनको लर्न करके जा
सकते हैं। सो, यह थी हमारी थर्ड पेंटिंग भरत, मीट राम एंड चित्रकूट। नेक्स्ट पेंटिंग की तरफ चलें। चौगन प्लेयर वेरीेंट
पेंटिंग लास्ट थ्री फोर इयर्स से हर साल इस पे क्वेश्चन आ रहा है। अ क्योंकि देखें अगर हम डेक्कन की भी बात करें तो डेक्कन
स्कूल जो है वो भी फाइव मार्क्स का है। राजस्थानी भी हमारा फाइव मार्क्स का है। तो कोई ना कोई पेंटिंग आ ही जाती है इसमें
से। सो चौगन प्लेयर मतलब पोलो खेलते हुए। चौगान कह लें या चौगन कह लें। तो पोलो खेलते हुए दिखाई गई फीमेल्स।
दाना आर्टिस्ट सब स्कूल जोधपुर मीडियम एंड टेक्निक वाटर कलर टेंपरा नेशनल म्यूजियम न्यू दिल्ली। सो इसमें अगर हम सबसे पहले
एक चीज मैं आपको दिखाना चाहूंगी। आप इस कंपोज़िशन को देखें तो आपको यह सर्कुलर कंपोज़शन लग रहा है। इस तरह से कंपोज़िशन
बैलेंस्ड की गई है। आप देखें कि ये दो फीमेल्स हैं। और ये चार फीमेल्स हैं अलग से। अगर आप इनको बहुत माइन्यूटली इस
पेंटिंग को देखें तो इनका अटायर और इनके अटायर में फर्क है। तो आपको बहुत क्लियरली विज़िबल हो जाता है कि यह दो प्रिंसेस हैं
जो अपनी फोर मेड्स के साथ ये पोलो गेम खेल रही हैं। अब ये थीम में हम पढ़ेंगे। इसका है हिस्टोरिकल पेंटिंग। और इट्स अ
हिस्टोरिकल पेंटिंग ऑफ़ टू प्रिंसेस प्लेइंग पोलो विद देयर फोर मेड्स। दिस डेमोंस्ट्रेट द रॉयल फैमिलीज़ वे ऑफ़ लाइफ़
एंड देयर एप्रिसिएशन ऑफ़ स्पोर्ट्स ऐज़ अ वाइटल कॉम्पोनेंट ऑफ़ एंजॉयमेंट। सो ये आपको बहुत बार पेपर में आ जाता है कि इस
पेंटिंग से मतलब कहां ऐसा है या कौन सी ऐसी पेंटिंग है जिसमें स्पोर्ट्स कीेंस पे है जिसमें वुमेन एंपावरमेंट की बात की गई
है या जिस वक्त पर्दा सिस्टम था वहां पे भी वुमस को खेलते हुए और घुड़सवारी करते हुए या पोलो खेलते हुए दिखाया है। सो उस
पेंटिंग में हम इसका एग्जांपल दे सकते हैं। अगर हमें किसी भी इस तरह का क्वेश्चन आता है। अब हम इस पेंटिंग को समझें तो
सर्कुलर बैलेंस्ड कंपोज़िशन जैसे मैंने आपको समझाया कि यह इस तरह से फ़िगर्स हैं। सिक्स फिगर्स हॉरिजॉन्टल पेंटिंग है ये।
सिक्स फिगर्स टू प्रिंसेस एंड फोर मेड्स आर प्लेइंग पोलो। ये दो प्रिंसेस हैं और ये हमारे फोर मेड्स हैं। सिक्स हॉर्सेज छह
घोड़े यहां पे दिखाए हैं। टू फेसिंग ईच अदर। अब ना एक एमसीक्यू में क्वेश्चन था जिसमें ये पूछा गया था कि घोड़ों की पोजीशन
क्या है? टू फेसिंग ईच अदर एंड फोर आर रनिंग इन ऑोजिट डायरेक्शन। अब यह देखें यह दोनों इस
तरफ यह भी इस तरफ जा रहा है और यह दोनों सेंटर की तरफ हैं। फ्लैट ग्रीन बैकग्राउंड है और कैलग्राफी दी गई है। सो इसके ऊपर
यहां पे चौगानबाजी ये दिया गया है इसमें बट यहां पे दिख नहीं रही वो। ठीक है? बट आप इसमें एक चीज और नोटिस करें जो मैंने
बोला था फ्लैट बैकग्राउंड। अब फ्लैट बैकग्राउंड का बहुत इंपॉर्टेंट ये पॉइंट है और ये आपने याद रखना है। जब कभी ऐसा
क्वेश्चन आता है कि किस में फ्लैट बैकग्राउंड है तो इसमें है। हल्का सा ग्रेडेशन इज़ देयर बट ऐसा कोई रिसीडिंग
प्लेेंस नहीं है। कोई आपको यह नहीं दिख रहा कि ग्राउंड है, पीछे पर्सेक्टिव में, बिल्डिंग्स है। ऐसा कुछ भी नहीं दिखाया
गया। और फ्लैट के अगेंस्ट वेल बैलेंस्ड कंपोज़िशन इज़ देयर। एंड दिस वन इज़ अगेन अ बिगस्ट ऑफ़ द पेंटर्स। ह्यूमन लाइफ वैल्यू
इसमें क्या है? है टीम वर्क एंड हेल्दी कंपटीशन टू अचीव द डिज़ायर्ड गोल्स इन लाइफ एंड कल्टीवेटिंग अ स्पिरिट ऑफ़ हेल्दी
कंपटीशन। सो ये बहुत सिंपल एक अगेन खैर हमें तो सब सिंपल ही लगती हैं। आप
लोगों को भी बहुत इजी लगेंगे अगर आप एक बारी भी ध्यान से इस चीज को देख लेंगे। सो नेक्स्ट पेंटिंग है हमारी कृष्णा ऑन
स्विंग। अगेन रिलीजियस पेंटिंग क्योंकि श्री कृष्ण के ऊपर बेस्ड है। तो आप अब इन चीजों से
ध्यान या अंदाजा लगाना शुरू कर दें। और बच्चा एक चीज और मैं कहूंगी पेपर में ऐसा कुछ भी नहीं होता कि आपने कभी कुछ आपको
बिल्कुल भी ना आता हो। जैसे हमें कोई पेंटिंग आ गई कृष्णा ऑन स्विंग आपको नहीं आती कि क्या पेंटिंग है। आपने कृष्ण जी का
अटायर तो देखा है। कृष्ण जी का बॉडी तो पता है कि ब्लू कलर बॉडी बनाई जाती थी। मोर मुकुट पहनाया जाता था। पीतांबर पहनाया
जाता है। तो कुछ भी लिख के आए। खाली क्वेश्चन नहीं छोड़ना है और हमें उन पॉइंटर्स के भी कुछ भी आप लिख देंगे तो
कुछ मार्क्स जरूर मिल जाते हैं और खाली किसी कीमत पे बोर्ड में पेपर नहीं छोड़ के आते हैं। सो कृष्ण ऑन स्विंग आर्टिस्ट
नूरुद्दीन सब स्कूल बीकानेर मीडियम एंड टेक्निक वाटर कलर टेंपरा कलेक्शन नेशनल म्यूजियम न्यू दिल्ली। सो इस पेंटिंग में
अगर हम थीम की बात करें तो रिलीजियस एंड लिटरेरी थीम आल्सो लिटरेरी भी मैं बताती हूं कि क्यों इसको बोला गया है। क्योंकि
जैसे मैंने बोला कि डिवोशनल पोएट्री पे भी पेंटिंग्स बनी है। तो यह डिवोशनल पोएट्री की ही इलस्ट्रेशन है। यह केशवदास की रसिक
प्रिया जो एक पोएट्री है उसमें से लिया गया है और उसकी ये इलस्ट्रेशन है। दिस इज़ द सीन वेयर कृष्णा एक्सीडेंटली ऑफेंड्स
राधा। यह माना जाता है कि यह वो सीन था जब राधा जी को उन्होंने नाराज कर दिया था या वो नाराज हो गई थी श्री कृष्ण जी के साथ
क्योंकि वो झूले पे किसी और को ले बैठ गए थे। तो हुस रियल लव कुड नेवर अलाउ एनीवन टू बी क्लोज टू कृष्णा। सो यह उस चीज का
एक एपिसोड है। बट आप एक चीज और ध्यान से देखें। यह तो है ही है। बट एक कमाल की बात देखें कि यह एक इनडोर सीन है और यह आउटडोर
सीन है। एक ही पेंटिंग में दो सीन्स हैं। और आप देखें इसकी डिवीज़ कैसे की गई है। यह जो माउंट बनाया गया है और इस माउंट ने
इतना खूबसूरती से इसको बैलेंस कर दिया है कि ऐसे कोई डिवीज़ दिख ही नहीं रहा कि ये अंदर का सीन है और यह बाहर का सीन है। ऐसे
वेल बैलेंस्ड कंपोज़शन इसको बना के हमें दिखाई गई है। आप देखें यह इंडोर बालकनी का कितना डिटेल्ड है। आप यह चीज देखें, यह
देखें, यह कारविंग देखें, झूला देखें। यह सब इंडोर है। और ये देखें ये ट्रीज़ वगैरह का काम ये सब आउटडोर है। तो बट कितना
बैलेंसिंग है इसमें। अब हम पेंटिंग इज़ डिवाइडेड इनू टू पार्ट्स। यस वी हैव सीन इनडोर एंड आउटडोर। यस इनडोर आउटडोर। अपर
पार्ट कृष्णा सिंग ऑन अ हेक्सागोनल स्विंग। हेक्सागोनल स्विंग है। राधा इज़ सिंग इन अ बालकनी। राधा जी बालकनी में
बैठी हैं। लोअर पार्ट कृष्णा इज़ सिंग। आप यह इधर एक बोरअ के नीचे दिखाए गए हैं। और राधा जी को दूसरे ऐसे झाड़ियों के नीचे
बैठे दिखाया गया है। और वन गोपी इज़ स्टैंडिंग इन बिटवीन बोथ आर सिंग ऑन रेड कारपेट
एंड स्टाइलाइज़ ट्रीज़ आर देयर। ये बहुत इनका एक फेमस फीचर भी है। अगर हम कहें कि स्टाइलाइज़ पेड़ बनाए जाते थे। आप ये ध्यान
से देखें तो हर पेड़ के पत्तों का स्टाइल अलग है। आप ये देखें। सो इन चीजों को स्टाइलाइजेशन कहा जाता है कि जब हम बात
करें कि जहां पेड़ बनाए गए हैं तो हर पेड़ के पत्ते को अलग तरह से दिखाया जाना उस चीज को स्टाइलाइजेशन कहा जाता है। चाहे वो
कपड़ों में हो, चाहे वो आप कह सकते हैं नेचर में हो, फ्लोराफोना में हो या आर्किटेक्चर में हो। ह्यूमन लाइफ वैल्यू
की बात करें। ह्यूमंस कमिटमेंट टू ट्रुथ एंड फीलिंग ऑफ़ बिटरेल, जेनुइन लव, डडीिकेशन एंड डिवोशन। सो यह हम इसमें लिख
के जा सकते हैं। अब हमने जो यह पेंटिंग है, हमने चारों पेंटिंग्स पढ़ लिया। अब इसमें आप यह देखें कि एक हमारा पोर्ट्रेट
है, एक हमारा जो रागरागिनी पे बेस्ड है। एक हमारा जो हिस्टोरिकल चौगन प्लेयर है और दो हमारी रिलीजियस पेंटिंग्स आ गई हैं
जिसमें कृष्णा ऑन स्विंग है एंड भरतमीट राम एंड चित्रकूट है। सो अब अगर मुझे स्टेटमेंट बेस्ड क्वेश्चन इसमें से आना हो
तो आप देखें अगर आपसे यह पूछा जाएगा कि कौन सी ऐसी पेंटिंग है कि जिसमें इनडोर और आउटडोर दिखाया गया है तो आपके माइंड में
झट से आ जाएगा कृष्णा ऑन स्विंग। अगर वो कहें कि सर्कुलर बैलेंस्ड वाली कौन सी कंपोज़शन है या फ्लैट बैकग्राउंड वाली कौन
सी क्वेश्चन कंपोज़शन है या कौन सी पेंटिंग है तो आपके माइंड में एकदम से आ जानी चाहिए चौगन प्लेयर्स और अगर पूछा जाए कि
क्राउडडी कंपोज़शन ऑफ़ राजस्थान तो हमारे माइंड में आ जाना चाहिए भरत मीट राम एट चित्रकूट नरेटिव कंपोज़िशन ऑफ़ राजस्थान भरत
मीट राम एट चित्रकूट आइडियल पोट्रेचर ऑफ़ राजस्थानी मिनिएचर राधा बनी ठनी। सो इस तरह से इन पॉइंट्स को याद करें। केस बेस
स्टडी क्वेश्चन तो बड़े आराम से निकल जाएंगे आपके। सो चलिए जल्दी से हम चलते हैं कैरेक्टरिस्टिक। कैरेक्टरिस्टिक्स
क्या होते हैं कि इंपॉर्टेंट पॉइंट्स इंपॉर्टेंट फीचर्स ऑफ़ दैट पर्टिकुलर स्कूल कि किस तरह का काम होता रहा है। और एक और
चीज मैं समझाऊं आपको। जैसे बहुत से बच्चे कंफ्यूज्ड रहते हैं कि मैम हमें क्या मेवार्ड के बारे में भी पढ़ के जाना है।
सब स्कूल्स के बारे में भी पढ़ के जाना है। तो देखें जिनका सिलेबस हो चुका है, जिनकी तैयारी फुल ऑन फुल है वो जरूर अ
एक-एक दो-दो लाइंस इन सब स्कूल्स की पढ़ लें। लेकिन अगर आपको नहीं भी आता है तो ये मेरी बात माने और समझें कि राजस्थान के जो
फीचर्स हम पढ़ रहे हैं ना वो मेवाड़ के ही फीचर्स हैं। वो बूंदी के ही फीचर्स हैं। सो उन्हीं एरियाज में जो काम हुआ है वो
राजस्थान का काम है। नो डाउट बूंदी में एक आधे दो फीचर्स होंगे जो बूंदी को मेवाड़ से अलग कर रहे होंगे। लेकिन इतना
कंपैरेटिव स्टडी हमारे सिलेबस में नहीं है प्लस टू के लेवल पे। अब हम जल्दी से बढ़ते हैं कैरेक्टरिस्टिक्स की तरफ। सो
कैरेक्टरिस्टिक में देखें अगर आप एक मिनिएचर स्कूल के कैरेक्टरिस्टिक्स कर लेंगे ना तो चारों चैप्टर्स में चले
जाएंगे। सो पहला चैप्टर आपको बहुत ध्यान से समझने की जरूरत है। सेकंड और थर्ड, फोर्थ में मैं बहुत बार कहूंगी ये हम पढ़
चुके हैं। ये हम पढ़ चुके हैं। और आपको भी लगेगा ये तो मैं सुन चुका हूं और मैं ये कर सकती हूं। तो हमने सबसे पहले
कैरेक्टरिस्टिक्स को यूं समझना है। कैरेक्टरिस्टिक का मतलब होता है स्पेशल फीचर्स। फीचर किसी भी पेंटिंग का अगर आप
माने कि आपको कुछ भी नहीं आता और मैं आपसे पूछूं कि एक पेंटिंग आपको दे दी है और आपको कुछ इंपॉर्टेंट पॉइंट्स उसके बारे
में बताने हैं कि मुझे बताएं। बहुत इसको एप्रिशिएट करें कि कैसे आप करेंगे। सो ऑब्वियसली आप कहेंगे कि इसमें लाइंस बड़ी
सुंदर लगी हैं। इसमें फिगर्स बड़ी अच्छी बनी है। रंग बड़े अच्छे भरे गए हैं। अगर आपको कुछ भी नहीं पता। फीचर्स तो यही हुए
हैं ना। कलर्स हुए, फॉर्म्स हुए, लाइंस हुए, गारमेंट्स हो गए। एनिमल्स एंड बर्ड्स जो बने हैं। अभी तक हमने क्या पढ़ा
पेंटिंग्स में? श्री रामचंद्र बने हैं, कृष्ण जी बने हैं। हिस्टोरिकल चीजें बनी हैं। कपड़े बड़े सुंदर हैं, रंग बड़े
सुंदर हैं, स्टाइलाइज्ड पेड़ बने हैं। सो ये सब कैरेक्टरिस्टिक्स ही हैं एक तरह से। सो इन्हीं को ही आपने अपनी लैंग्वेज में
लिख के जाना है। सो देखें फर्स्ट पॉइंट हम कैरेक्टरिस्टिक्स ऑफ राजस्थानी मिनिएचर्स में करेंगे। देखिए हमें सिक्स मार्क्स का
मैक्सिमम क्वेश्चन रहता है जिसमें 250 हम वर्ड लिमिट की बात करते हैं। तो अगर मैं ये मान के चलूं कि मुझे 250 से 300 वर्ड
300 मैं लर्न कर लूं क्योंकि अगर 300 लर्न करके जाऊं तो 250 लिख के आएंगे। सो अगर मैं उस हिसाब से भी करूं तो मुझे चलिए हम
10 पॉइंट्स लर्न कर लेते हैं। ठीक है? तो उसमें से अगर मुझे सात भी याद रह गए, आठ भी याद रह गए तो चलेगा।
लीनियर ब्यूटी की लाइंस बहुत सुंदर बनी है। फ्लुएंट है। यह सब मिनिएचर स्कूल में लिख के जाएंगे आप। सॉफ्टर रिदमिक एंड
फ्लूएंट लाइंस आर देयर इन राजस्थानी स्कूल। कलर स्कीम क्या है? ब्राइट ग्लोइंग आर यूज्ड इन हारमोनियस कंट्रास्ट।
प्योर ह्यूज लाइक रेड, ग्रीन एंड येलो हैव बीन यूज़्ड इन राजस्थानी मिनिएचर। गोल्ड एंड सिल्वर आर्टिस्टिकली इनकरपोरेटेड।
बहुत सुंदर यूज़ है गोल्ड एंड सिल्वर का। कभी लाइटनिंग दिखाई है, कभी कपड़ों में दिखाया है, कभी यूटेंसिल्स में दिखाया है,
कभी आर्किटेक्चर में दिखाया है। ज्वेलरी बहुत अच्छे से दिखाई गई है। सो ये सब चीजें जैसे बीटल विंग ज्वेलरी की हम बात
करते हैं बसौली की। सो ये सब चीजें आप लिख के जा सकते हैं उसमें। अब गमेंट्स मेल एंड फीमेल हाइली डेकोरेटिव। ये तो हम देख चुके
हैं कि कपड़ों का बहुत स्टाइलाइजेशन है उसमें। मेल्स ने क्या पहना है? ट्रेडिशनल कुर्ता है, पजामा है एंड राजपूत स्टाइल
पटका इज़ देयर। और फीमेल्स क्या पहने हुए हैं? लहंगा, चोली एंड ट्रांसपेरेंट दुपट्टा। नेक्स्ट हम बात करेंगे
ऑर्नामेंटेशन। देखें हमने पहले बात की लाइन की। फिर हमने बात की कि कलर्स की। फिर हमने बात की जो गारमेंट्स पहने हैं अ
फिगर्स ने। फिर हम बात करेंगे ऑर्नामेंटेशन की कि उन्होंने ज्वेलरी किस तरह से पहनी है। इयरिंग्स हैं, बैंगल्स
हैं, आमलेट्स हैं, नेकलेसेस हैं। ऑल आर रिप्रेजेंटेड। डिफरेंट काइंड्स ऑफ ज्वेलरी ऑफ क्वींस, प्रिंसेस, मेड्स एंड
कोर्टियर्स मेड अकॉर्डिंग टू द स्टैंडर्ड्स। डिफरेंस इन ज्वेलरी ऑफ़ क्वीन, प्रिंसेस
मेड्स। आप देखें कि इसमें ना एक चीज है कि जैसे मैंने चौगन प्लेयर आपको पढ़ाया और मैंने बोला कि ये दो प्रिंसेस लग रही हैं
और ये चार मेड्स हैं। कैसे लग रही हैं? कपड़ों से। ज्वेलरी का फर्क है, कपड़ों का फर्क है। इवन घोड़े जो हैं उनका
ऑर्नामेंटेशन का फर्क है। जो रानियों और राजकुमारियों के हैं उनको ज्यादा वो डेकोरेटिव बनाए गए हैं और मेड्स के कम
डेकोरेटिव बनाए गए हैं। सो ये स्टेटस का फर्क इन पेंटिंग्स में भी दिखता है। डिप्शन ऑफ़ नेचर। नेचर के नाम पे ब्यूटीफुल
एंड आइडियल लैंडस्केप्स बने हैं। वैरायटी ऑफ़ एलिमेंट्स लाइक ट्रीज़, प्लांट्स, फ्लावर्स, हिल्स, फॉरेस्ट एंड वाटर बॉडीज़
हैव बीन शोन। नेक्स्ट हम बात करें तो डिपिक्शन ऑफ बर्ड्स एंड एनिमल्स। वेरीेंट पॉइंट। हर पेंटिंग में आपको यह एनिमल या
बर्ड दिख जाएगा। हालांकि हमारे सिलेबस में सिर्फ चारप पेंटिंग्स हैं। बट अगर हम ओवरऑल देखें तो ये कैरेक्टरिस्टिक्स ओवरऑल
पेंटिंग्स के ऊपर बेस्ड होते हैं। सो डियर हॉेज, कैमल्स, स्वैंड्स, कााउस, एलीिफेंट्स आर ब्यूटीफुली पोट्रेट।
थीम्स का पॉइंट भी आप लिख के जा सकते हैं। बीच में आप जरूर ऐड करें। अगर आपको कैरेक्टरिस्टिक आता है। आप रिलीजियस
पेंटिंग, हिस्टोरिकल पेंटिंग, लिटरेरी पेंटिंग, रागमाला पेंटिंग जो हमने डिस्कस करा है स्टार्टिंग में। उसी तरह से
इबोरेटिव वे में आप लिख के जा सकते हैं कि रिलीजियस में किस तरह से रामायण, महाभारत, भगवत पुराण इन सब पे बना है। हिस्टोरिकल
में राजा महाराजों के सब लाइव इवेंट्स को दिखाया गया है। पोट्रेचर बना है। लिटरेरी में लिटरेचर है, डिवोशनल एंड रोमांटिक
पोएट्री बनी है। सो रागमाला में म्यूजिक नोट्स के ऊपर सिंबॉलिक रिप्रेजेंटेशन है। स्टाइलाइशन ऑलरेडी समझा चुकी हूं पॉइंट कि
जैसे ट्रीज़ को मैंने बताया था कि अलग-अलग पत्तों के डिज़ाइन में बनाया गया है। वो स्टाइलाइज़ेशन होता है और वह पॉइंट आपको
लिख के जाना है। क्राउडडी सीन मेनी पेंटिंग्स, फीचर, फिगर, ग्रुप टुगेदर टू डिपेक्ट मल्टीपल एपिसोड्स विद इन अ सिंगल
आर्ट वर्क। जैसे कि भरत मीट राम एट चित्रकूट। सिंबोलिज्म। सिंबोलिज्म होता है
प्रतीकात्मकता। मतलब हम किसी बात को किसी सिंबल या उसके थ्रू हम दिखाते हैं उसको। जैसे कि आपने बहुत बार सुना होगा बिल्ली
रास्ता काट जाए जी अपशगुन होता है या सांप दिख जाए तो इस तरह से होता है तो यह सिंबॉलिज्म पेंटिंग्स में भी इन्होंने
क्या किया है कि जैसे कौवे को ऊपर बिठाया है तो किसी के आने का संकेत मोर नाचता हुआ दिखाया है तो बारिश का संकेत तो इस तरह का
रिप्रेजेंटेशन इन पेंटिंग्स में भी है। सिंबॉलिक एलिमेंट फीचर प्रॉमिनेंटली विद कलर्स एंड मोटिव्स। सो ऑब्वियसली कलर्स के
थ्रू भी दिखाए गए हैं एंड मोटिव्स के थ्रू भी दिखाए गए हैं। राधा एंड कृष्णा हैव बीन डिपिक्टेड सिंबॉलिकली इन द फॉर्म ऑफ़
ह्यूमन, सोल एंड गॉड। बर्ड्स एंड एनिमल्स आर आल्सो सिंबॉलिकली रिप्रेजेंटेड स्पेशली इन रागमाला एंड 12मासा।
रागमाला बारमासा में इसलिए क्योंकि ज्यादातर सिंबॉलिक पेंटिंग है ही यह वाली। लार्ज पेंटिंग इन कंपैरिजन टू अदर सब
स्कूल। द किशनगढ़ स्कूल फीचर स्लाइटली लार्जर पेंटिंग्स। और इनको पिचवई पेंटिंग भी कहा जाता है जो बैक कर्टन की तरह यूज़
की जाती थी। नाइट सीनंस नाइट सींस आर पेंटेड इन अ वेरी अट्रैक्टिव वे। सो ये है हमारा राजस्थानी स्कूल जिसके
कैरेक्टरिस्टिक्स मुझे लगता है 10 टू 12 में आप 10 भी लर्न कर लेंगे तो बहुत है। सो सम अप अगर हम करें 16 टू 19 सेंचुरी
प्योर इंडियन आर्ट राजपूताना आर्ट थीम्स में अह अगर हम कहें रिलीजियस हिस्टोरिकल लिटरेरी रागमाला एंड बारामासा। फिर हमने
पढ़ा इनकी पांच पेंटिंग्स को। फिर हमने पढ़े इनके कुछ कैरेक्टरिस्टिक्स। दैट्स ऑल। ये चैप्टर हमारा खत्म। सो मुझे लगता
है कि आपको यह समझ आ गया होगा। अगर आ गया है तो नेक्स्ट पे चलते हैं। नेक्स्ट है पहाड़ी स्कूल ऑफ मिनिएचर पेंटिंग। वेरी
ईजी चैप्टर। सिर्फ दो पेंटिंग्स हैं हमारे सिलेबस में। टाइम पीरियड ऑलरेडी मैंने कहा कि हम लोगों को बहुत इजी है क्योंकि तीन
का सेम है और एक का अलग है। पहाड़ी वो स्कूल है जिसका अलग है। सो पहाड़ी में अगर हम टाइम पीरियड को समझे तो 17 टू 19th
सेंचुरी एडी है। 16th राजस्थानी का था। नेक्स्ट चैप्टर है पहाड़ी तो 17th एक सेंचुरी आप आगे कर लें।
ठीक है? 17 टू 19 सेंचुरी पहाड़ी स्कूल का टाइम पीरियड है। इन्फ्लुएंस की बात करें कि किस चीज का प्रभाव था। अब आपने ये पढ़ा
है और आपको टीचर्स ने भी समझाया होगा कि पहाड़ी स्कूल जो बना था ना वो मुगल ने जब मुगल्स के राजाओं ने जब एपररर्स थे और
उन्होंने जो कट औरंगजेब आ गया था तो उसको कला में इतना रुचि नहीं था। तो बहुत से लोग वो छोड़ के और पहाड़ों पहाड़ी रीजन
में जाके छुप गए थे। और वहां पे उन्हीं कलाकारों ने जब वहां के वातावरण को देखा, उनका एनवायरमेंट देखा तो उससे इंस्पायर्ड
हुए तो कहीं ना कहीं वो मुगल का इन्फ्लुएंस है। वो राजस्थानी क्योंकि इंडियन आर्ट तो था ही। वहीं से तो मुगल भी
गया ना। तो आप अगर हमको इन्फ्लुएंस लिखना हो इस पहाड़ी का तो हम लिखेंगे राजस्थानी आर्ट। राजस्थानी आर्ट, मुगल आर्ट एंड
इंडीजीनस आर्ट। इंडीजीनस अर्थ होता है बिलोंगिंग टू दैट नेटिव प्लेस कि जहां वह हैं उस वक्त या जो कलाकारों का उस वक्त
जिस एनवायरमेंट वो थे जिस ज्योग्राफिकल कंडीशन में वो थे सो इंडीजीनियस आर्ट उसको कहा जाता है क्योंकि हर जगह का अपना एक
आर्ट होता है। ठीक है? सो इन्फ्लुएंस में ये पॉइंट बहुत अच्छे से याद कर लीजिएगा। सो अगर हम पहाड़ी स्कूल के बारे में समझें
तो डेवलप्ड इन हिली रीजंस जैसे पहाड़ों में पनपा, हिमाचल, पंजाब, वैलीज़ ऑफ जम्मू में ये स्कूल विकसित हुआ। और एक पॉइंट ये
मैं वैसे समझा देती हूं क्योंकि एज सच रेलेवेंस इतना नहीं है इसमें बट कई बार एमसीक्यूस का डर लगता है कि बहुत डीपर
नॉलेज में भी पूछे जाते हैं। तो इसलिए सिर्फ समझाती हूं कि डॉ. अनंत कुमार स्वामी ने 196 में इस स्कूल को दो स्टाइल
में दो भागों में बांटा था। एक नर्दन पेंटिंग और एक सर्दन पेंटिंग। सो नर्दन पेंटिंग में उन्होंने कांगड़ा सब स्कूल को
लिया था और बाकी में उन्होंने जम्मू वसौली गुलेर को इसमें डाला था। सो जनरल नॉलेज के लिए है ना ही भी लिखेंगे तो भी चलेगा। तो
जस्ट यू हैव टू राइट डाउन द टाइम पीरियड एंड इन्फ्लुएंस और उसके बाद सीधा आप थीम्स पे आ जाइएगा। जब आपको पूछा जाता है ओरिजिन
एंड डेवलपमेंट तो सीधा आप टाइम पीरियड लिखें। अ इन्फ्लुएंस लिखें और थीम्स पे चले जाएं। थीम्स आप देखेंगे तो सेम है
राजस्थानी जैसे। अगर आपको राजस्थानी के याद हैं कौन से थे? रिलीजियस, हिस्टोरिकल, लिटरेरी। सेम थीम्स यहां पे भी आते हैं।
तो हम जल्दी से पढ़ लेते हैं। रामायण, महाभारत, भगवत पुराण, दुर्गा सप्त पढ़ चुके हैं ऑलरेडी। पोर्ट्रेट्स ऑफ किंग्स एंड
देयर फैमिली सींस ऑफ़ ब्रेवरी, हंटिंग सींस, वॉर्स एंड विक्ट्रीज़ हो चुका। आर्ट वर्क्स बेस्ड ऑन लिटरेचर। नायक, नायिका
भेद। रिप्रेजेंटेशन ऑफ़ हीरो एंड हीरोइंस। रस मंजरी, भानुदत्ता इंस्पायर्ड बाय द वर्क ऑफ़ भानुदत्ता। रागमाला पेंटिंग
सिंबॉलिक रिप्रेजेंटेशन ऑफ़ म्यूजिक नोट्स रागाज़ एंड रागिनीज़ रीतिचित्र पेंटिंग डिपिक्शन इंस्पायर्ड बाय लोकल कल्चर एंड
12मासा पेंटिंग डिपिक्शन ऑफ़ 12 मंथ्स। अब इसमें हमारा आता है कि यह जो लिटरेरी पार्ट हमने पिछले उसमें भी राजस्थान में
भी करा था। सो ये वही है उसी का ही डिटेल डिस्क्रिप्शन। उसमें मैंने रस मंजरी रागमाला नायक नायिका भेदा वर्ड यूज़ करे
थे। बट यहां पे नायक नायिका भेदा ज्यादा हमें देखने को मिलता है। सो नेक्स्ट हम आते हैं सब स्कूल्स पर। तो यहां पे जो सब
स्कूल्स हैं बसौली, गुलेर, कांगड़ा, कुल्लू मंडी, गढ़वाल। ये पांच नाम आप याद करें और हमारे पास सिर्फ दो पेंटिंग्स
हैं। फर्स्ट कृष्णा विद गोपीस, सेकंड नन यशोदा, कृष्णा विद गिंसवेन गोइंग टू वृंदावन। अब हमको कैसे याद रखना है कि कौन
से स्कूल्स की हैं। एक है बसौली बी और एक है कांगड़ा। बसौली, गुलेर कांगड़ा। तो आप याद रखिएगा पहला बसौली की है। दूसरी
कांगड़ा की है। बसौली में मेन श्री कृष्ण की पेंटिंग है। बड़े स्वरूप की कांगड़ा में छोटे स्वरूप की पेंटिंग है। तो दोनों
ही श्री कृष्ण पर बेस्ड हैं। नंद यशोदा कृष्णा विद किसमैन गोइंग टू वृंदावन एंड कृष्णा विद गोपीज। दोनों ही श्री कृष्ण की
लीलाओं पर बेस्ड हैं पेंटिंग्स। सो फर्स्ट पेंटिंग में अगर हम देखें नंद यशोदा कृष्णा विद किसमैन गोइंग टू वृंदावन।
जिनको तो रिलिजन का थोड़ा बहुत पता है, सो उनको यह पता होगा। नंद यशोदा और उनके माता-पिता थे कृष्णा जी के और किंसमैन
होते हैं गवाले। गवालों के साथ ये वृंदावन को जाते हुए यह पेंटिंग है। आप देखें ये पूरा एक
गांव का गांव आप माइग्रेट हो रहा है उस तरफ वृंदावन की तरफ। आर्टिस्ट है नैनसुक। सब स्कूल है कांगड़ा मीडियम एंड टेक्निक
वाटर कलर टेंपरा एंड नेशनल म्यूजियम न्यू दिल्ली। सो अभी तक सब नेशनल म्यूजियम न्यू दिल्ली में ही है। यूनिट वन का थीम एंड
सब्जेक्ट मैटर है स्टोरी ऑफ भगवत पुराण जर्नी व जर्नी वाइल माइग्रेटिंग फ्रॉम गोकुल टू वृंदावन। सो इनको गोकुल से
वृंदावन की तरफ जाते हुए दिखाया है। सो ये भी कई बार एमसीक्यू में क्वेश्चन आता है कि वो कहां से कहां जा रहे हैं? सो हमें
ये याद रखना है कि वो गोकुल से वृंदावन की तरफ माइग्रेट होते हुए दिखाए हैं। अब इस कंपोज़िशन में क्या दिखाया है? है।
हॉरिजॉन्टल पेंटिंग है। डिप्टेड लॉर्ड कृष्णा चाइल्डहुड्स टाइम। सो भगवान श्री कृष्ण को बाल स्वरूप में दिखाया गया है।
ननंद इज़ शोन सिंग ऑन अ बोलो कार्ट। यहां पे बैठे दिखाए गए हैं। फ्रिल्ड अंब्रेला है। यहां पे आप ध्यान से देखें तो यशोदा
मैया को भी बैठे दिखाया गया है। इनका भी यह फ्रिल्ड आप कैनोपी टाइप कहें कि और यह बुल आर्ट में जाते दिखाए हैं। एक यह है और
एक यह है। आसपास लोग देखें गाय भी हैं। छोटा-मोटा सामान अपने सिर पे गठड़ियां रख के कोई चरखा रख के लेके जा रहा है।
रोजमर्रा का छोटा-छोटा जरूरत का सामान। और अगर आप गमेंट्स देखें तो यह देखें डिजाइनिंग ऑफ गारमेंट्स। आप क्लियरली अपनी
बुक में भी इन चीजों को देख सकते हैं। सो यही सब फीचर्स ही तो हमको लिख के जाने होते हैं। नंद शोन सिंग इन अ बुलो कार्ट।
यस विद द फ्रिल्ड अंब्रेला क्राउन अबव बिहाइंड हज़ बुल कार्ट यशोदा इज़ सिंग वि बालकृष्ण एंड रोहिणी इज़ सिंग वि बलराम। यह
रोहिणी ये वाला जो फिगर है आप देख सकते हैं और उनको बलराम के साथ बैठे दिखाया है। आप देखें यहां दो फीमेल्स हैं और दो बच्चे
बैठे दिखाए हैं। ऑल द किस मैन ऑफ़ नंदग्राम आर आल्सो अकंपनिंग टू देम। ये सब लोग भी इनके साथ जा रहे हैं। टू दिस डिवाइन जर्नी
विद देयर बिलॉन्गिंग्स। अपना सामान लेके। ऑल ह्यूमन फिगर्स आर शोन वेयरिंग ट्रेडिशनल क्लोथ्स। जो उस टाइम पे इनका
पहनावा था वही बैठे दिखाया है। बैकग्राउंड रोज़ ऑफ ट्रीज़। पीछे देखें सारे पेड़ ही पेड़ दिखाए गए हैं। सिंपल पेड़ हैं। और दो एक
पत्थर यहां देखें। ये रक्स दिखाए गए हैं। और यहां पे दो बर्ड्स भी यह बनाए गए हैं। सो वह दिखाए गए हैं यहां पे।
और क्राउडडी कंपोजशन है। हम यह कह सकते हैं कि इसमें खूब सारी भीड़ दिखाई गई है। अब ह्यूमन लाइफ वैल्यू की बात करें।
लॉयल्टी एंड लव टू योर मास्टर। क्योंकि देखें अगर कष्ट श्री कृष्ण पे आया तो उनको बचाने के लिए अपने मास्टर के साथ वो सारे
उस गांव को छोड़ के वृंदावन की तरफ जा रहे हैं। फॉलो मास्टर्स ऑर्डर फेथफुली लीडरशिप क्वालिटीज़ कि ऐसी लीडरशिप होनी चाहिए कि
लोग प्यार से भाव से आपके साथ जुड़े। सो, यह हम उसमें लिख के जा सकते हैं ह्यूमन लाइफ वैल्यू में। नेक्स्ट पेंटिंग वेरी
ब्यूटीफुल पेंटिंग कृष्णा विद गोपीस। इसमें भी एमसीक्यूस आते हैं। कितनी फिगर्स हैं? किस तरह का टायर है? बैकग्राउंड में
कौन सा कलर है? सो काफी हद तक क्योंकि जैसे मैंने बोला फाइव मार्क्स का पहाड़ी है तो सिर्फ दो ही पेंटिंग्स हैं। उन्हीं
में से ही तो क्वेश्चन आएंगे। सो अगर आपको ये दो पेंटिंग्स अच्छे से लर्न आप कर लेते हैं तो फाइव मार्क्स आपके पक्के हैं।
आर्टिस्ट मानकू सब स्कूल बसौली मीडियम एंड टेक्निक वाटर कलर टेंपरा कलेक्शन नेशनल म्यूजियम न्यू दिल्ली। इलस्ट्रेशन फ्रॉम
गीत गोविंद मतलब यह जो सीन बना है यह गीत गोविंद सीरीज बाय जयदेव वहां से लिया गया है। इट शोज़ हाउ राधा एंड कृष्णा स्टोरीज
एंड प्लेस सर्व एज अ सिंबल फॉर द सोल्स डिवोशन टू गॉड। सो किस तरह से ये अह भक्तिपूर्ण इस चित्र को बनाया गया है।
नेक्स्ट है कंपोज़िशनल अरेंजमेंट। डिस्क्रिप्शन की अगर बात करें। लॉर्ड कृष्णा इज़ द सेंटर सराउंडेड बाय एट गोपीज़
हु आर एक्सप्रेसिंग देयर लव एंड इमोशन टुवर्ड्स हिम। अब आप ध्यान से देखें तो एक बारी जनरल हम इस पेंटिंग को देखें। श्री
कृष्ण सेंटर में है। आठ गोपियां बनाई गई हैं। 1 2 3 4 5 6 7 8 पीछे एक ट्रीज का रो है पूरी। ठीक है? और इसमें अगर आप ध्यान
से देखें वही स्टाइलाइजेशन दिख रहा है ना? पेड़ों को अलग-अलग तरीके से बनाया गया। सब अलग-अलग स्टाइल है। अब इसमें हमें याद
क्या करना है इस पेंटिंग में कि पोजीशनिंग क्या-क्या है इन फिगर्स की? बैकग्राउंड किस कलर का है? फोरग्राउंड में क्या
दिखाया है? और किस तरह से इनकी पोजीशन दिखाई गई है। तो, हम जल्दी से यह समझें। कृष्णा इज़ डिप्टेड इन डार्क ब्लू। जैसे
दिखाया जाता था उनको येलो धोती पीतांबर में पहने हुए और पीकॉक फेदर ऑन हिज़ क्राउन। सो, यह मोर मुकुट पहने हुए दिखाया
है। टू गोपीज़ इंप्रेसिंग कृष्णा। यह दिखाई गई हैं दो गोपियां। थर्ड टचिंग द फीट। फोर्थ प्रेइंग इन स्टैंडिंग पोजीशन विद हर
हेड बोर्ड। फिफ्थ नीलिंग डाउन इन प्रेयर पोजीशन। यह वाली। फिफ्थ सिक्स्थ लुकिंग बैक एंड टॉकिंग टू सेवंथ वन हु इज़
होल्डिंग चौरी जो यह चौरी पकड़े हुए हैं यह आप देखें। एंड सेवंथ होल्डिंग चौरी इन हर हैंड जो हम इस तरह से भगवानों को या
चौरी झुलाई जाती है। एट्थ हैज़ अ फैन इन हर हैंड। यह वाला फोरग्राउंड नैरो नैरो स्ट्रेच ऑफ द रिवर यमुना। आगे यमुना रिवर
दिखाई गई है और पीछे वाइब्रेंट ऑरेंज कलर का बैकग्राउंड है और सब पेड़ों को बहुत स्टाइलाइज्ड वे में दिखाया गया है। सो ये
सिंपल सा इसका एक इंट्रोडक्शन है। ह्यूमन लाइफ वैल्यू की बात करें कंप्लीट एडोरेशन फेथ एंड प्योर लव कृष्णा इज़ इक्वल लव फॉर
ऑल द डिवोटीज़। अब हम बात करते हैं अह कैरेक्टरिस्टिक्स ऑफ़ पहाड़ी मिनिएचर्स। सो कैरेक्टरिस्टिक ऑफ़ पहाड़ी मिनिएचर्स में
जैसे मैंने कहा था हमने राजस्थानी पढ़ लिया है। तो पहाड़ी के भी सेम ही कैरेक्टरिस्टिक्स हम लिख के जाएंगे। अ
जैसे आप कैरेक्टरिस्टिक्स में लिख सकते हैं। सबसे पहले आप प्रोफाइल फेस या जो हमने लीनियर ब्यूटी की बात की थी। तो
लाइंस बहुत फ्लूएंट अ सुंदर लगी हैं। सॉफ्ट हैं, रिदमिक हैं एंड फ्लुएंट लाइंस आर देयर। उसके बाद जो फसेस बने हैं वो
प्रोफाइल फसेस हैं। साइड पोजेस हैं। तो वो आप पॉइंट लिख के जा सकते हैं। फिर हम ये लिख कलर्स जो यूज किए गए हैं एकदम
प्राइमरी कलर्स हैं। ब्राइट कलर्स हैं बट मिक्स्ड ह्यूज़ भी हमें पहाड़ी में दिखती हैं। पिंक्स हो गया, ग्रेस भी आगे चलके
कुल्लू मंडी में हमें दिखा है। सो वो उस तरह से वो पॉइंट भी आप लिख सकते हैं। फिर अगर हम गारमेंट्स की बात करें तो
गारमेंट्स में मेल एंड फीमेल मेल्स को अंगरखा पहने हुए, टाइट पजामी पहने हुए और टर्बन पहने हुए दिखाया है। और फीमेल्स को
हम ये कह सकते हैं लहंगा चोली ट्रांसपेरेंट चुन्नी पहने दिखाया है। थीम्स की अगर हम बात करें अगेन वही
हिस्टोरिकल रिलीजियस एंड लिटरेरी थीम हम मानेंगे। इसमें भी हम वही लिख के जाएंगे। डिप्शन ऑफ़ एनिमल्स एंड बर्ड्स की बात करें
तो सेम वे में सिंबॉलिकली भी बर्ड्स को दिखाया है। एनिमल्स को दिखाया है। और वैसे भी ब्यूटी वाइज़ भी एनिमल्स एंड बर्ड्स को
उन पेंटिंग्स में दिखाया गया है। डिप्शन ऑफ़ नेचर ब्यूटीफुल लैंडस्केप। पिक्चर रेस्क्यू लैंडस्केप्स मतलब आइडियल
लैंडस्केप्स बने हैं। इतनी खूबसूरती है इन पेंटिंग्स में नेचर की जितनी पहाड़ों की खूबसूरती थी बहुत ही अच्छे तरीके से इन
आर्टिस्ट ने रिप्रेजेंट करा है उस चीज को और फीमेल ब्यूटी भी बहुत सुंदर यहां पे दिखाई है जो फीचर्स हैं कांगड़ा के तो आप
फसेस की बात करें तो मतलब वो जो एक ब्यूटी उन्होंने दिखाई है ना वो एक्सट्रीम आप कहें कि बहुत ही सुंदर काम है उन
पेंटिंग्स में। सो डिपिक्शन ऑफ़ बर्ड्स हो गया, डिप्शन ऑफ एनिमल्स हो गया, डिप्शन ऑफ नेचर हो गया, नाइट सींस भी बहुत सुंदर
हैं। स्टाइलाइशन है, लाइटनिंग दिखाई है। सो ये सब पॉइंट्स आप लिख के जा सकते हैं। मुगल स्कूल ऑफ़ मिनिएचर पेंटिंग। तो सबसे
पहले इसका भी टाइम पीरियड हम देखेंगे। टाइम पीरियड है 16 टू 19 सेंचुरी एडी। अब मुगल्स के बारे में समझें थोड़ा सा।
ओरिजिनेटेड इन परर्शिया कंटिन्यू टू नियरली थ्री सेंचुरीज़ इन इंडिया। मुगल मिनिएचर्स आर स्मॉल। जैसे मिनिएचर पेंटिंग
स्मॉल होती हैं, वैसे यह भी थे। ब्राइटली कलर्ड ग्लोइंग कलर्स थे। हाइली सोफेस्टिकेटेड बहुत एररिस्टोक्रेटिक काम
हुआ है। इसमें डिटेल्ड कंपोज़िशन व्हिच आर द ब्लेंड ऑफ़ इस्लामिक, हिंदू, यूरोपियन विचुअल कल्चर एंड एस्थेटिक्स। इस्लामिक
क्योंकि परर्शिया से थे उसका ये इन्फ्लुएंस था। हिंदू क्योंकि जब ये इंडिया में आए यहां के आर्ट से प्रभावित
हुए तो राजस्थानी आर्ट की झलक और इंडियन आर्ट की झलक इसमें है। यूरोपियन विजुअल कल्चर एंड एस्थेटिक्स का मतलब है कि
क्रिश्चियन मिशनरीज का भी इनके कोर्ट में आना-जाना था। तो उसका इन्फ्लुएंस भी इनकी पेंटिंग्स में दिखता है। दे वर मोस्टली
यूज्ड टू इलस्ट्रेट मैनुस्क्रिप्ट एंड आर्ट बुक्स। सो इन्होंने अपने जैसे अपनी बुक्स बनवाने के लिए या जैसे अकबरनामा,
बाबरनामा जैसे एल्बम्स होती है ना उस तरह से बनवाने के लिए ये आर्ट ये लोग करते थे। मुगल स्कूल जैसे इन्फ्लुएंस में ये देखें
ये दिया है परर्शियन आर्ट, इंडियन आर्ट प्लस यूरोपियन आर्ट। अगर हमसे इन्फ्लुएंस पूछा जाता है। सो फर्स्ट मेन पॉइंट इज़ 16
टू 19 सेंचुरी एडी। सेकंड मेन पॉइंट इज़ मुगल स्कूल में इन्फ्लुएंस है परर्शियन इंडियन एंड यूरोपियन आर्ट का। ड्यूरिंग
दिस पीरियड मिनिएचर पेंटिंग रीच्ड अ न्यू डायमेंशन। यह भी हम आगे समझेंगे कि क्यों और किस वे में हम यह बात कह रहे हैं। दिस
इज़ बिकॉज़ प्रायर टू दिस मोस्टली पेंटिंग्स वर क्रिएटेड विद रिलीजियस थीम। जैसे हमने पढ़ा है राजस्थानी पीरियड। तो राजस्थानी
में क्या था कि ज्यादातर कृष्ण लीला पे पेंटिंग्स बनी है। और हमारा एसेंस ही उन पेंटिंग्स का भक्ति था। बट ड्यूरिंग दिस
टाइम इनके टाइम पे देयर वाज़ अ ग्रेट एफेसिस ऑन पोट्रेइंग द एपररर्स लाइफ। मतलब इन्होंने राजा महाराजाओं की लाइफ के ऊपर
बहुत काम किया था। और यह हमने राजस्थानी में भी पढ़ा है कि यह जो शिकार के सीन हुए या इनकी हंटिंग के हुए इनका वॉर्स एंड
विक्ट्रीज का शानोशौकर दिखाना ये मुगल के इन्फ्लुएंस से राजस्थानी में भी प्रभाव ये दिखता था पेंटिंग्स का। सच एज पोर्ट्रेट,
हंटिंग सीन, कोर्ट सींस, वेडिंग प्रोसेशन ऑल आर डिप्टेड विद ग्रेट डेकोरम एंड रॉयल्टी।
नेक्स्ट है हम इसमें पढ़ेंगे क्रोनोलॉजिकल ऑर्डर। जैसे हमने राजस्थानी पढ़ा। अ सब स्कूल्स के बेसिस पे। देन हमने पहाड़ी
पढ़ा सब स्कूल के बेसिस पे। लेकिन मुगल के टाइम पीरियड को हम एपरर्स के टाइम पीरियड के साथ पढ़ेंगे। तो जल्दी से इनका
क्रोनोलॉजिकल ऑर्डर भी समझते हैं। तो सबसे पहले बाबर आया, फिर हुमायूं आया, फिर अकबर आया, फिर जहांगीर आए, फिर शाहजहां आया,
फिर औरंगजेब था। तो बाबर के पीरियड में क्या हुआ? बाबर पहला मुगल एपरर था। बिलोंग्स टू तैमूर डायनेस्टी। हैड अ कीन
इंटरेस्ट एंड ग्रेट लाइकिंग फॉर पोएट्री, म्यूजिक एंड आर्ट। तो नीव तो इसी के टाइम पे रखी गई थी कि थोड़ा सा मतलब इसको
इंटरेस्ट था इन सब चीजों में। बेजाद वाज़ द चीफ पेंटर ड्यूरिंग द टाइम हु वाज़ कंसीडर्ड एज़ द रिफाइल ऑफ़ द ईस्ट। रफाइल
बहुत एक फेमस आर्टिस्ट हुए हैं। सो इसको उस चीज़ की उपाधि भी दी गई थी। तो मतलब बेहजाद जो था वो इनका बहुत एक फेमस
आर्टिस्ट था। बट ये ज्यादातर लड़ाइयों में बिजी रहा। तो इसलिए इतना कोई ज्यादा काम नहीं हुआ था। बट ये थोड़े से पोर्ट्रेट
जरूर बने हैं। अगला आता है हुमायूं का पीरियड। मुगल स्टाइल ऑफ़ पेंटिंग वाज़ स्टार्टेड। बाय द सेकंड मुगल एपरर
हुमायूं। तो मेन अगर हम कहें तो हुमायूं के टाइम पे एक्चुअल आर्ट शुरू हुआ था जिसे हम मुगल पीरियड थोड़ा सा मतलब कहते हैं। ही
ब्रॉट अलोंग विद हिम टू पर्शियन आर्टिस्ट। अब हुमायूं ने क्या किया? दो पर्शियन आर्टिस्ट अपने साथ लेके आया। पहला था
ख्वाजा अब्दुल समद। ये सिराज के थे और दूसरे थे मीर सैयद अली। ये तबरेज का आर्टिस्ट था। सो दीज़ आर्टिस्ट ट्रेंड
इंडियन आर्टिस्ट इन अर्ली मुगल पेंटिंग्स। सो इन लोगों ने अपने इंडियन पेंटर्स को ट्रेंड किया था। दे इनफ्यूज्ड परर्शियन
इन्फ्लुएंस इन द पेंटिंग्स। सो जो इंडियन आर्टिस्ट अपने एक स्टाइल में काम कर रहे थे, तो इन्होंने थोड़ा सा जो इनका अपना
इरानियन आर्ट था, परर्शियन आर्ट था, तो उसको इन्फ्यूज़ किया इंडियन आर्ट में। दे क्रिएटेड सेवरल पेंटिंग एल्बम्स वन ऑफ़
व्हिच इज़ दास्ताने अमीर हमजा क्रिएटेड विद द असिस्टेंट्स ऑफ़ इंडियन आर्टिस्ट व्हिच वाज़ लेटर फिनिश्ड अंडर अकबर। तो, यह शुरू
जो हुई थी दास्ताने अमीर हमजा, यह हुमायूं के टाइम पीरियड पे शुरू हुआ था। बट बनके खत्म हुआ अकबर के टाइम पीरियड पे। अब हम
बात करते हैं अकबर पीरियड वेरी इंपॉर्टेंट फज़ टर्निंग पॉइंट ऑफ मुगल आर्ट अकबर हैड अ
कीन इंटरेस्ट इन आर्ट कल्चर इंटेलेक्चुअल डिस्कोर्सेस ही फिल्ड ह कोर्ट विद पोएट्स एंड पेंटर्स एनकरेज इंटेलेक्चुअल डिबेट्स
इसको ना आर्ट का बहुत शौक था तो इसका जितना भी दरबार था कोई पोएट्स थे आपने सुना भी होगा इसके अह दरबार के किस्से ही
एस्टैब्लिश्ड अ सेपरेट डिपार्टमेंट ऑफ़ पेंटिंग अब इसने सबसे बड़ी बात क्या करी थी कि जैसे हमने पढ़ा हुमायूं अपने साथ दो
आर्टिस्ट लाया था और उसने ट्रेंड करे इंडियन आर्टिस्ट को। लेकिन अकबर ने अपने साथ एक एक उस टाइम पे एक सेपरेट
डिपार्टमेंट बनाया पेंटिंग का विथ द आर्टिस्ट ख्वाजा अब्दुल समद एज़ इट्स हेड। तो इसको हेड बना दिया। अकबर एनकरेज
टैलेंटेड आर्टिस्ट इन एव्री पॉसिबल वे रिवार्डेड देम एज़ वेल। सो अगर आपको भी रिवॉर्ड मिलेगा, एप्रिसिएशन मिलेगी तो
ह्यूमन नेचर है। हम बहुत अच्छा काम करेंगे। आर्टिस्ट हैड द फ्रीडम टू डेवलप देयर ओन स्टाइल। तो उनको एक फ्रीडम भी था।
जो जिस तरह से काम करना चाहता था कर रहा था। नो डाउट सब्जेक्ट्स उनकी मर्जी के थे। बट हां स्टाइल की बात यहां करी गई है।
डिटेल्ड कोर्ट सीन हिंदू माइथोलॉजीस परर्शियन एंड इस्लामिक थीम्स पोर्ट्रेट्स वर क्रिएटेड ड्यूरिंग अकबरर्स टाइम। सो ये
सब चीजें उसके टाइम पे बनी है। हिंदू माइथोलॉजी भी बनी है। हिस्टोरिकल लिटरली सब तरह का काम हुआ था। सो फ़ेमस
मैनुस्क्रिप्ट उसके जो हैं तारीख खानदान तैमूरिया, रम रजमानामा, रामायण, अकबरनामा, अनवर सुनहली एंड हमजानामा। सो ये कुछ
मैनुस्क्रिप्ट्स हैं जो आप पढ़ सकते हैं या नाम माइंड में रख सकते हैं। नेक्स्ट इसके अकबर के बाद टाइम पीरियड रहता है जहांगीर
का। मुगल पेंटिंग कंटिन्यूड टू ग्रो ड्यूरिंग हज़ रेन। तो इसके टाइम पे भी मुगल पेंटिंग्स बढ़ती ही गई और अच्छा काम होता
ही गया। मुगल मिनिएचर थ्राइव्ड रीच देयर पीक इन कैप्चरिंग बोथ ह्यूमन सब्जेक्ट्स एंड नेचर। अब जहांगीर को ना नेचर, रेयर
बर्ड्स, फ्लावर्स इनका बहुत शौक था। बर्ड्स, एनिमल्स, अनयूजुअल फ्लावर, पोर्ट्रेट्स वर द एसेंस ऑफ ह टाइम। सो, यह
एक पॉइंट है जो हम जहांगीर के टाइम के लिए रख सकते हैं। एक इंपॉर्टेंट पॉइंट। जहांगीर वाज़ लार्जली इन्फ्लुएंस्ड बाय
यूरोपियन पेंटिंग। अब जैसे मैंने बोला, क्रिश्चियन मिशनरीज़ का आना-जाना था। तो, यूरोपियन पेंटिंग से भी यह प्रभावित था।
और इसका एक एग्जांपल आपको अह जहांगीर होल्डिंग द पिक्चर ऑफ़ मेडोना। अब आपके सिलेबस में नहीं है, लेकिन अर्लियर होते
वो है द ब्राइटनेस एंड थ्री डायमेंशन आस्पेक्ट ऑफ़ लाइट एंड शैडो वर इंक्लूडेड इंडियन आर्ट। अब ये जो 3D इफ़ेक्ट है ना,
यह हम मानते हैं कि यूरोपियन यहां से आया था इनकी पेंटिंग्स में। जहांगीर हैड अ ट्रेंड आई फॉर पिक्चर। ट्रेंड आई फॉर
पिक्चर मतलब हम मानते हैं और ये कहा जाता है किताबों में लिखा है कि जहांगीर इतना इनवॉल्व होता था इन पेंटिंग्स में कि आपको
यह पता है कि उस टाइम पे दरबार में और एक मेन आर्टिस्ट के अंदर कुछ आर्टिस्ट काम करते थे और पेंटिंग बनती थी। कोई
कैलग्राफिक आर्टिस्ट था, कोई बॉर्डर बना रहा था, कोई फिगरेटिव अच्छा करता था, कोई एनिमल या बर्ड की पेंटिंग्स अच्छी बनाता
था। तो जहांगीर देख के यह बता देता था कि किस आर्टिस्ट ने कौन सी पेंटिंग बनाई है या क्या चीज बनाई है। सो ये इनवॉल्वमेंट
होती है किसी की। बिना इन्वॉल्वमेंट के इतनी पारखी नजर नहीं हो सकती। ड्यूरिंग दिस टाइम द डेवलपमेंट ऑफ़ ऑर्नामेंटल
बॉर्डर आर आल्सो टू प्लेस। और बॉर्डर जो पॉइंट है ना ऑर्नामेंटल बॉर्डर ये बहुत मेन पॉइंट है मुगल का जो इसको बाकी स्कूल
से अलग करता है। फेमस पेंटर ऑफिस टाइम उस्ताद मंसूर यह बर्ड पेंटर था। अबुल हसन एनिमल एंड पोर्ट्रेट पेंटर एंड बिशन दास
पोर्ट्रेट पेंटर थे। अब आते हैं शाहजहां के पीरियड पे। शाहजहां के बारे में आप सबको पता होगा। इसको आर्किटेक्चर के साथ
बहुत लगाव था। आर्किटेक्ट किंग भी इसको कहा जाता है। बट ही डिड नॉट पेट्रोनाइज़ पेंटिंग लाइक हिज़ फादर। जहांगीर की तरह
इसने उतना पेंटिंग में काम नहीं किया। जिस वजह से स्टैंडर्ड वाज़ नॉट ऐज़ हाई ऐज़ इट वाज़ इन जहांगीर टाइम। द क्वालिटी ऑफ़
पेंटिंग वाज़ मेंटेंड। अब जो दरबार था, जो आर्टिस्ट थे वो बनाते तो जा रहे थे बट द क्वालिटी वाज़ रिड्यूस्ड एंड नथिंग
एक्स्ट्राऑर्डिनरी वाज़ पेंटेड। ऑलदो शाहजहां एल्डर सन प्रिंस दारा शिको इसको फिर भी एक इंटरेस्ट था आर्ट में थोड़ा सा।
बट हिज़ प्रीमेच्योर डेथ गव अ सेट बैक टू द आर्ट ऑफ़ मिनिएचर पेंटिंग। द नंबर ऑफ हंटिंग सीन्स, वॉर रिलेटेड सीनंस
डिक्रीज्ड एंड डेकोरेटिव एलिमेंट्स बिकम मोर प्रॉमिनेंट इन द पेंटिंग। तो ज्यादा ना गोल्ड एंड सिल्वर का यूज़ होना शुरू हो
गया। ज्वेलरी बहुत ज्यादा बननी शुरू हो गई। जिस वजह से अगर बहुत ज्यादा भी गोल्ड एंड सिल्वर हो जाता है तो वो पेंटिंग में
थोड़ा सा बनावटीपन लाना शुरू कर देता है। हालांकि अगर हम शाहजहां की पेंटिंग्स देखें उस टाइम की तो वो भी बहुत सुंदर
हैं। बट इन कंपैरिजन टू अकबर और जहांगीर की हम बात करते हैं। पेंटिंग हैड एन ए इनहांस सेंस ऑफ़ रिचनेस लग्जरी
करैक्टराइज़्ड बाय रिच पिगमेंट एंड एक्सटेंसिव यूज़ ऑफ़ गोल्ड एंड सिल्वर। ड्यू टू हिज़ इंटरेस्ट इन आर्किटेक्चर। हिज़
अटेंशन टू पेंटिंग डिमिनिश्ड। कम हो गई थी। व्हिच लेड टू द डिक्रीज़ इन कोर्ट आस्क। तो ज्यादातर आर्टिस्ट मतलब कम होते
जा रहे थे क्योंकि उनको रिवॉर्ड नहीं मिल रहा था और उस वजह से और इसका इंटरेस्ट ज्यादा आर्किटेक्चर की तरफ था। द सेम
पैटर्न कंटिन्यूड एंड नथिंग एक्स्ट्राऑर्डिनरी वाज़ पेंटेड। कुछ अलग से नहीं बनाया जा रहा था। औरंगजेब पीरियड
औरंगजेब वाज़ अ कंजर्वेटिव मोस्ट पावरफुल वेल्थी मुस्लिम रूलर ऑफ़ हज़ टाइम। ही डिड नॉट एनकरेज आर्ट। दस लॉस्ट द क्वालिटी ऑफ़
मुगल पेंटिंग। सो औरंगजेब के आने से एक तरह से मुगल आर्ट जो था डिक्लाइन पर आ गया क्योंकि उसको इंटरेस्ट नहीं था इन सब
चीजों में। मोस्ट आर मोस्टली आर्टिस्ट माइग्रेटेड टू द हिल स्टेट्स। तो आर्टिस्ट यहां से इससे बच के अ हिल स्टेट्स में
जाके छिपे जहां हमने पढ़ा भी है जब हमने पहाड़ी स्कूल पढ़ा है कि जो आर्टिस्ट मुगल से माइग्रेट हो के पहाड़ों में जाके छिपे
और वहां पे जाके उन्होंने शरण ली और उन्होंने व्हिच लेटर लेड टू द इमरजेंस ऑफ़ अ न्यू स्कूल कॉल्ड द पहाड़ी स्कूल ऑफ़
मिनिएचर पेंटिंग। लेटर बहादुर शाह ट्राइड टू रिवाइव आर्ट बट आफ्टर दैट द स्कूल बिकम लाइफलेस बट वो बात नहीं बनी। सो फाइनली
ग्लोरियस पीरियड ऑफ़ मुगल मिनिएचर केम टू एन एंड मुगल आर्ट ओरिजिनेटेड विथ द मुगल। अब ये लाइन आप एंड में लिख के कंक्लूडिंग
लाइन आप लिख के जा सकते हैं। मुगल आर्ट ओरिजिनेटेड विद मुगल डेवलप्ड विद मुगल एंड एंडेड विद द मुगल रूल इन इंडिया। अब झट से
एक क्विक रिवीज़ देखें। तो बाबर, हुमायूं, अकबर, जहांगीर, शाहजहां औरंगजेब। बाबर को आर्ट में इंटरेस्ट था। बेसिकली उसने मुगल
फाउंडेशन इंडिया में नीव रखी थी। फिर आया हुमायूं। हुमायूं अपने साथ आर्टिस्ट लेके आया था। मीर सैयद अली, ख्वाजा अब्दुल समद।
वो दो आर्टिस्ट से उसने इंडियन आर्टिस्ट को ट्रेंड करा। ठीक है? मतलब उनसे ट्रेनिंग दिलवाई इंडियन आर्टिस्ट को। फिर
उसके बाद अकबर आया। तो अकबर ने एक सेपरेट डिपार्टमेंट बनाया और उसके टाइम पे बहुत काम हुआ। जहांगीर आया। उसको रेयर बर्ड्स
एनिमल का शौक था। उसने भी बहुत काम कराया। बट जब शाहजहां आया तो उसके टाइम पे आर्किटेक्चर ज्यादा फेमस हुआ और उसने उस
तरफ उसका ध्यान ज्यादा था। इंटरेस्ट था। तो इसलिए पेंटिंग्स का लेवल नीचे आना शुरू हो गया। औरंगजेब क्योंकि कंजर्वेटिव था।
उसको आर्ट में इंटरेस्ट नहीं था। थोड़ा सा कट्टड़ वो था और उस वजह से आर्टिस्ट वहां से भाग के पहाड़ों में जाके छिपे। जहां पे
इन लोगों ने पहाड़ी स्कूल ऑफ़ मिनिएचर पेंटिंग शुरू किया। सो ये है मुगल का क्रोनोलॉजिकल ऑर्डर या ओरिजिन एंड
डेवलपमेंट हम कह सकते हैं। सो अब जल्दी से समझते हैं कैरेक्टरिस्टिक्स जो हम ऑलरेडी राजस्थानी और पहाड़ी में पढ़ चुके हैं।
सेम वो कररेक्टरिस्टिक्स आपको लगेंगे। जस्ट दो-तीन पॉइंट्स बताऊंगी जो मुगल के अलग से हैं। सो दैट अगर जब मुगल के
कैरेक्टरिस्टिक्स आते हैं तो वो दो-तीन पॉइंट्स आप आगे पहले लिख दें और बाकी सब जनरल कैरेक्टरिस्टिक्स लिख दें। प्रोफाइल
फेस सेम पॉइंट अह वेदर द फिगर्स आर फ्रंटल ऑइड पोज़। फसेस आर मोस्टली प्रोफाइल एक चश्मा वन आइड फेस लीनियर ब्यूटी सॉफ्टर
रिदमिक एंड फ्लूएंट लाइंस लाइंस बहुत सॉफ्ट रिदममिक है मिनिएचर का तो यह कमाल ही है और यह हर स्कूल में है कलर स्कीम
नेचुरल कलर यूज़ हुए हैं यह भी सब स्कूल में ऐसे ही हैं। हैव बीन यूज़्ड ब्यूटीफुली ब्राइट एंड ग्लोइंग कलर्स वर यूज़्ड गोल्ड
एंड सिल्वर तो यह भी स्पेशलिटी इन मिनिएचर्स की है। हैज़ बीन यूज़्ड आर्टिस्टिकली इन आर्किटेक्चर, यूटेंसिल
एंड ऑर्नामेंटेशन। बॉर्डर डेकोरेशन। अब यह जो पॉइंट है बॉर्डर डेकोरेशन, यह मुगल का स्पेशल फीचर
है। ऑल द पेंटिंग्स हैव बीन डेकोरेटेड विद स्पेशल बॉर्डर्स। ऑर्नामेंटेड बॉर्डर्स। अ बॉर्डर्स डोमिनेट द पेंटिंग इन सम
पेंटिंग्स। बॉर्डर्स इतने हाईलाइट कर दिए जाते थे कि यह पेंटिंग को भी डोमिनेट कर गए हैं। जैसे मैंने एक पेंटिंग का नाम
लिया था जहांगीर होल्डिंग द पिक्चर ऑफ़ मेडोना। आप इस पेंटिंग को ध्यान से देखना। अगर आप नेट पे भी देखेंगे तो बॉर्डर तीन
चार पांच बॉर्डर्स बनाए गए हैं। जिस वजह से यह डोमिनेट कर जाता है पेंटिंग को। बट ये उनकी स्पेशलिटी थी। उन लोगों को शौक था
और उन लोगों ने इस तरह का काम करवाया है। देन यूज़ ऑफ़ कैलग्राफी अगेन अ स्पेशल फीचर ऑफ़ मुगल। द यूज़ ऑफ़ कैलग्राफी विद द नेम ऑफ़
आर्टिस्ट इज़ द मेन फीचर ऑफ़ मुगल। हर पेंटिंग में आपको कहीं ना कहीं कैलग्राफी का एसेंस आपको दिख जाएगा। और वो ब्लैक कलर
में हुई है। देन थीम्स। थीम्स का भी सेम पॉइंट है। अह पेंटिंग्स ऑफन रिवॉल्वड अराउंड द थीम लाइक हिस्टोरिकल बनी है।
राजे महाराजों की माइथोलॉजिकल बनी है। रामायण, भारत, महाभारत और परर्शियन कुछ टेक्स्ट के ऊपर लिटरली बनी है। अह लिटरली
पेंटिंग्स हैं जो अह लिटरेचर के ऊपर बेस्ड हैं। बैटल सीन, हंटिंग, सीन, वाइल्ड लाइफफ़ एंड रॉयल लाइफ़ बनी है। पूरे डेकोरम के साथ
दिखाया गया है। डिप्शन ऑफ़ नेचर। नेचर इज़ सो ब्यूटीफुली डिपिक्टेड ट्रीज़ प्लांट्स, रिवर, माउंटेन, लेक एटसेट्रा हैव बीन
ग्रेसफुली डिपिक्टेड। एनिमल्स एंड बर्ड का डिपक्शन, कैमल फाइट्स, एलीिफेंट फाइट्स, अदर एनिमल्स लाइक डियर, हॉेज, गोट, टाइगर,
लायन ये सब बहुत सुंदर मुगल्स में भी बने हैं। गमेंट्स, फीमेल्स का अगेन लहंगा, चोली, ट्रांसपेरेंट दुपट्टा, मेल का
अंगरखा, चूड़ीदार, पजामा एंड डेकोरेटिव टर्बन। ऑर्नामेंटेशन इयरिंग बैंगल्स आमलेट नेकलेसेस एटसेट्रा ऑल आर रिप्रेजेंटेड
ब्यूटीफुली क्राउडडी कंपोज़शन दिस स्कूल इज़ वेरी फेमस फॉर डिपिक्टिंग क्राउडी सींस इनवॉल्विंग टू मेनी फॉर्म्स एंड फिगर्स
जिसकी एक एग्जांपल है कृष्णा लिफ्टिंग माउंट गोवर्धना आपके सिलेबस में एक ये जो 12थ नंबर वाला पॉइंट है ये भी स्पेशली
फीचर मुगल का ही है। सो आप ये तीन फीचर्स सबसे पहले लिख के जा सकते हैं। मुगल रूलर वर वेरी प्राउड ऑफ़ देयर पावर। तो उनको
बहुत शानो शौकत का अपना वो था। हेलो वाज़ मेड अराउंड देयर हेड। जैसे हम देवी देवताओं के हम गॉड्स गॉडसेस के आसपास वो
हेलो बनाते हैं ना चक्र येलो कलर का पेल येलो कलर का उनके सिर के पीछे तो ये लोग अपने शाहजहां और मतलब राजाओं के पीछे ये
लोग दिखाते थे। जिस जो आपने मैरिज प्रोसेशन ऑफ़ दशकों में भी देखा होगा कि वो पीछे निंबस या हेलो दिखाया गया है। तो यह
अपनी सुप्रीमेसी दिखाने के लिए यह लोग करते थे। फिर आप यह भी लिख सकते हैं रॉयल स्प्लेंडर। जिस तरह से शानो शौकत दिखाई गई
है पेंटिंग्स में जिसकी जोज जगह होती थी उसी-उसीीसी जगह पे उन लोगों को बिठाया जाता था। पूरा डेकोरम का ध्यान रखा जाता
था। ज्वेलरी का ध्यान रखा जाता था। कपड़ों का ध्यान रखा जाता था। आर्किटेक्चर का पेंटिंग में मतलब मार्वलस काम हुआ है इनके
टाइम पीरियड पे। अब नेक्स्ट हमने मुगल की पढ़नी है पेंटिंग्स। तो जल्दी से चार पेंटिंग्स हैं। फटाफट पढ़ लेते हैं। पहली
है कृष्णा लिफ्टिंग माउंट गोवर्धन। अगर हम थीम देखें तो कृष्णा लिफ्टिंग माउंट गोवर्धन किस टॉपिक पे है? रिलीजियस
आर्टिस्ट हैं इसके मिसकिन सब स्कूल अकबर। ये जो टेबल्स हैं ना मैं आपसे कहूंगी एक बारी टेबल एक फॉर्मेट में बना के प्रिंट
आउट अपने पास रख लें और सबसे पहले इन टेबल्स को लर्न कर छोड़ें। सो दैट आपको कोई मुश्किल ना हो। मीडियम वाटर कलर ऑन
पेपर टेक्निक टेंपरा। टाइम पीरियड अगर याद नहीं होता है तो यह काट दें और अगर हो सकता है तो कर लें।
नहीं तो आप अह मुगल जैसे अकबर टाइम लिखा है वही सफिशिएंट है। कहीं यह गलत ना लिख दें। इस चक्कर में मार्क्स कट भी सकते
हैं। तो आप यह अवॉइड करना चाहें तो अवॉइड भी कर सकते हैं। कर्टसी मेट्रोपॉलिटन म्यूजियम ऑफ़ आर्ट न्यूयॉर्क यूएसए। अब
यहां पे कुछ बच्चे कह सकते हैं कि हमारी बुक में कुछ और दिया है या अलग-अलग प्रिंट हुई हुई हैं। तो अगर तो सबकी किताबों में
यही है तो वेल एंड गुड नहीं है तो ये एनसीईआरटी में ये दे रखा है और वैसे भी इस पेंटिंग का करसी यहां पे है। सो ये ही
लर्न करके आपको जाना है। सब्जेक्ट मैटर दिस पेंटिंग मार्क्स अ रिमारकेबल एपिसोड फ्रॉम भगवत पुराण। भगवत पुराण से यह
एपिसोड लिया गया है। कृष्णा ऐज़ अ हीरो डिपिक्ट सीन अह इज़ ऑफ़ दैट टाइम व्हेन कृष्णा वंस लिफ्टेड माउंट गोवर्धना। यह तो
हर एक को पता होगा कि जब श्री कृष्ण जी ने गोवर्धन पर्वत को अपने हाथ में उठाया था तो लिटिल फिंगर में उठाया था और गोकुल के
लोगों को इंद्र देवता के प्रकोप से बचाने के लिए। सो यह वही एपिसोड यहां पे भी दिखाया गया है। अब उसका डिपिक्शन किस तरह
से है? आप ध्यान से इस पेंटिंग को देखें। श्री कृष्ण को विराट रूप में विराट रूप कैसे? आप लोगों की हाइट देखें और श्री
कृष्ण की हाइट देखें। पीतांबर येलो कलर क्लोथ्स पहने। ब्लू कलर बॉडी है। मोर मुकुट है। क्राउडी कंपोज़िशन है। खूब सारे
लोग आप देखें यहां पे दिखाए गए हैं। कैटल्स हैं, एनिमल्स दिखाए गए हैं। अब ये सारा गोवर्धन पर्वत है। ठीक है? अब इसका
ट्रीटमेंट आप देखें कि जिस तरह से जिस स्टाइल में ये दिखाया गया है उसमें पर्शियन हमें झलक दिखती है। ऊपर से स्काई
है। नीचे से भी स्काई दिख रहा है क्योंकि गोवर्धन पर्वत को उन्होंने उठाया है और बैकग्राउंड पे भी यह हाइट दिखाने के लिए
ये दिखाया गया है। आप बॉर्डर देखें तो फ्लोरल बॉर्डर है, डेकोरेटिव बॉर्डर है जो हम बात करते रहे हैं इन पेंटिंग्स में कि
इस तरह से बॉर्डर बनाए जाते थे। सो इसमें हम पहला पॉइंट पढ़ेंगे। एक्सट्रीमली ब्यूटीफुल वर्टिकल पेंटिंग। दिस पेंटिंग
इज़ पेंटेड फॉर मैनुस्क्रिप्ट हरिवंश। लॉर्ड कृष्णा शोज़ लिफ्टिंग माउंट गोवर्धन मिडिल ऑफ द मिनिएचर इन विराट रूप। विलेज
पीपल शोन फ्रॉम ऑल वॉक्स ऑफ़ लाइफ इंगेज्ड इन डिफरेंट एक्टिविटीज़ विद देयर कैटल एंड बिलोंगिंग टेकिंग शेल्टर अंडर द माउंटेन।
उनको अंदर शेल्टर लेते दिखाया गया है। लॉर्ड इंद्रा के डल्यू जो उन्होंने बारिश इतनी हो रही है उससे बचने के लिए। लॉर्ड
कृष्णा बॉडी इज़ पेंटेड इन ब्लू कलर पीतांबर धोती गार्लैंड लंबा सा जो पूरे नेक पे यह देखें बना हुआ है नीचे तक
ही इज़ वेयरिंग लॉट्स ऑफ़ ऑर्नामेंट्स माउंट गोवर्धन इज़ शोन वेरी डेकोरेटिव स्टाइल। अब गोवर्धन पर्वत को डेकोरेटिव स्टाइल में
दिखाया गया है जो मैंने यह चीज़ बताई है आपको। अह लार्ज ट्रीज़ मेनी टाइप ऑफ़ एनिमल्स सच ऐज़ डियर मंकीज़। तो, यह इसमें
दिखाए गए हैं। अगर हम ज़ूम करके इस पेंटिंग को देखते हैं। पर्शियन इफ़ेक्ट इज़ क्वाइट एविडेंट इन द मिनिएचर एंड हैंडलिंग ऑफ़ द
ह्यूज माउंटेन। अब पर्वत को दिखाने का यह जो तरीका है, यह ट्रीटमेंट ऑफ़ दिस माउंटेन। इसमें पर्शियन इफ़ेक्ट दिखता है।
द मिनिएचर इज़ डोमिनेटेड बाय ब्लू कलर एंड पर्शियन डेकोरेटिव स्टाइल। अब, यह क्वेश्चन एक बार एमसीक्यू में भी आ चुका
है कि कृष्णा लिफ्टिंग माउंट गोवर्धन में कौन सा कलर डोमिनेट कर रहा है ज्यादा? तो, यह देखें। द ब्लू कलर यहां पे उसका आंसर
रहेगा। इट इज़ ब्यूटीफुली कंपोज्ड ऑफ़ अकबर रेन शोइंग हिज़ रिस्पेक्ट एंड लव फॉर हिंदू रिलजन एंड कल्चर। सो ह्यूमन लाइफ वैल्यू
अगर हम इसमें देखें यूनिटी ड्यूरिंग द टाइम ऑफ़ एनी प्रॉब्लम फॉलो द राइट पाथ इन लाइफ बी फेथफुल एंड ट्रस्ट फॉर योर लीडर
एंड रिस्पेक्ट एंड टॉलरेंस फॉर अदर रिलजन फॉर सोशल हार्मोनी। सो कोई एक दो पॉइंट्स आप इसमें लिख के जा सकते हैं। नेक्स्ट
हमारी पेंटिंग है फेल्कन ऑन बर्ड रेस। सो पिछली जो पेंटिंग हमने पढ़ी रिलीजियस है, क्राउडडी कंपोज़शन है। श्री कृष्ण को विराट
रूप में दिखाया है। पीतांबर धोती पहने, गार्लैंड पहने और ज्वेलरी पहने, मोर मुकुट पहने और जो माउंटेन है उसमें पर्शियन
इफेक्ट है और क्राउडडी कंपोज़शन है। दो नंबर का आता है तो इतना भी सफिशिएंट है। नेक्स्ट है हमारा फेल्कन ऑन बर्ड ड्रेस।
सो, यह उस्ताद मंसूर की पेंटिंग है। जहांगीर के टाइम की पेंटिंग है। वाटर कलर पेपर, टेंपरा, महाराजा सवाई मानसिंह
म्यूजियम, सिटी पैलेस, जयपुर। दिस पेंटिंग इज़ बेस्ड ऑन जहांगीर लव फॉर बर्ड। ये मैंने समझाया था ना आपको कि उसको
एनिमल्स और बर्ड से बहुत प्यार था। रेयर बर्ड्स एनिमल्स से। सो ही वाज़ अ कीन फेल्कनर। बाज़ की पेंटिंग है। ट्रेज़र फाइंड
स्पेसिमेन ऑफ़ फेल्कन ब्रॉट फ्रॉम डिफरेंट प्लेसेस। इट वाज़ अ स्पेशल बर्ड फ्रॉम परर्शिया। सो इसलिए उसने इसकी पेंटिंग
बनाई थी क्योंकि यह स्पेशल बर्ड था और इसको गिफ्ट में मिला था। इट इज़ एन एक्सीलेंट पेंटिंग फ्रॉम जहांगीरनामा।
जहांगीरनामा मतलब जहांगीर ने जो अपनी एल्बम बनवाई थी उसमें यह पेंटिंग प्रिजर्व है। दिस इज़ द पोर्ट्रेट ऑफ़ अ ब्यूटीफुल
फेल्कन व्हिच वाज़ गिफ्टेड बाय शाह अब्बास एपरर ऑफ़ ईरान। सो इसने इसको जहांगीर को गिफ्ट किया था। इसलिए इसके लिए स्पेशल था।
तो जब एक बिल्ली ने इसको मार दिया तो उसके बाद इसने इसका पोर्ट्रेट बनवाया था। ही हैज़ पेंटेड अ टेम्ड फेल्कन रेस्टिंग ऑन अ
कुशन बर्ड रेस्ट। अब देखें ये कुशन वर्ड रेस्ट है। द फेल्कन इज़ पेंटेड इन वाइट अगेंस्ट अ येलो बैकग्राउंड। फाइंड डिटेल्स
इन अ रियलिस्टिक मैनर। रियलिस्टिक मैनर की ओरिजिनल पूरा विंग्स और आप देखें बहुत डिटेल में हर एक चीज दिखाई गई है। आंख
देखें, बीक देखें। सो उस तरह से डिटेलिंग यहां पे बॉडी का टेक्सचर देखें तो ये सब दिखाया गया है। अ फदर्स आर शोन इन ब्राउन
कलर ये वाले। शार्प वीक राउंड ब्राइट आईज पेंटेड इन शेड्स ऑफ लाइट ब्राउन एंड डीप येलो अकर
शार्पनेस ऑफ द आईज आर क्लियर क्लियरली विज़िबल एक्सप्रेस्ड ब्यूटीफुली थिन स्ट्रिंग इज़ टाइड अराउंड हिज़ नेक ये वाली
ये वाला रिंग की बात हो रही है ये जो है एंड सम सॉर्ट ऑफ़ डिस्क्रिप्शन इज़ रिटेन इन द पेंटिंग जैसे हमने बात की थी कि
कैलग्राफी लिखी रहती है। सो ये देखें यहां पे है और इवन यहां पे भी लिखा हुआ है। ये ये देखें ये सारा ये भी कैलग्राफी है
इसकी। सो जहांगीर बादशाह ऑन द टॉप ये तो पढ़ा जा रहा है। उत्तम एट द बॉटम और बहरीन यहां पे लिखा गया है। तो उत्तम मींस
एक्सीलेंट। बहरी मींस फेल्कन और जहांगीर बादशाह मतलब जहांगीर के लिए। अ ऑन द बर्ड रेस्ट ये जहां पे बर्ड बैठा है नाउरुल असर
लिखा गया है। यह उस्ताद मंसूर को उपाधि दी गई थी। सो ये उसके लिए यहां पे उन्होंने लिखा है। सो ह्यूमन लाइफ वैल्यू की अगर हम
बात करें तो लव फॉर एनिमल लाइफ गिविंग अफेक्शन एंड रिस्पेक्ट टू ऑल क्रिएचर्स ऑन अर्थ वन मस्ट प्रिजर्व गुड मेमोरीज। सो ये
एल्बम्स ही थी ना जिसके लिए वो काम करते थे और उन्होंने अपना रिकॉर्ड में रखी हैं ये चीजें। सो हम उस चीज पे लिख सकते हैं।
नेक्स्ट वेरी इंपॉर्टेंट पेंटिंग कबीर एंड रायदास। इस पे भी पेपर में बहुत बार क्वेश्चन आता है क्योंकि ये इसमें दो-तीन
तरह से क्वेश्चन बनता है। अक्सर सीबीएसई पूछती है कि आपको कैसे लगता है कि ये मुगल्स बहुत लिबरल थे और इन्होंने हिंदू
गॉड्स गॉडेसेस या सेंट्स पे पेंटिंग्स बनवाई हैं। तो उसमें या तो हम कृष्णा लिफ्टिंग की बात करके जाते हैं या हम कबीर
एंड रायदास की बात करके जाते हैं। जब सेंट्स की बात आती है तो कबीर एंड रायदास की है। और जब गॉड्स की बात आती है तो हम
कृष्णा लिफ्टिंग माउंट गोवर्धन की बात करते हैं। वेरी सिंपल पेंटिंग एंड सेकंड स्पेशल फ़ीचर ऑफ़ दिस पेंटिंग इज़ यह
मोनोक्रोमेटिक पेंटिंग है। पूरे अह मुगल में आपकी चार पेंटिंग्स हैं। चारों में से यह सिंगल पेंटिंग है जो मोनोक्रोमेटिक है।
तो, यह एमसीक्यू में भी क्वेश्चन आपको पूछा जा सकता है कि मोनोक्रोमेटिक कौन सी पेंटिंग है? सो, हम लिख सकते हैं कबीर एंड
रायदास। उस्ताद फकिरुल्ला खान आर्टिस्ट हैं। शाहजहां के टाइम की ये पेंटिंग है। वाटर कलर पेपर पे, टेंपरा पे बनी है।
नेशनल म्यूजियम न्यू दिल्ली। अगेन आई एम टेलिंग यू। यह याद नहीं होता तो आप छोड़ के जा सकते हैं। दिस पेंटिंग शोज़ टू
प्रॉमिनेंट सेंट्स ऑफ़ दैट टाइम कबीर एंड रायदास। दारा शिको बीइंग अ मुस्लिम हैड शोन हिंदू सेंट्स इन द पेंटिंग। अब इसमें
क्या है? सबसे पहले देखें हॉरिजॉन्टल पेंटिंग है बाय उस्ताद फकीरुल्ला खान। इन दिस पेंटिंग वी कैन सी टू सेंट सीटेड इन अ
टिपिकल विलेज सेंटिंग सेटिंग। जैसे पीछे ये हट सी है। ऐसा पेड़ सा है। तो ये दिया गया है। सेंट कबीर इज़ शोन वीविंग ऑन अ लम
इन अ मेडिटेटिंग मूव। तो सबसे बड़ी बात क्या है कि यह अपनी भक्ति भाव में दिखाए गए हैं। यह दोनों ही सींस। आप इनके फीचर्स
को देखें तो यह अपने काम में भक्ति में मग्न है। हिज़ फ्रेंड रायदास इज़ सिंग बसाइड हिम पीछे। बोथ आर शोन ग्रॉस इन अ कन
कन्वर्सेशन। मतलब अगर यह आपस में बात भी कर रहे हैं तो यह एक मेडिटेटिंग मूड में है। अ विलेज सीन इज़ डिपिक्टेड इन द
बैकग्राउंड। सेंटली ग्रेस इज़ क्लियरली शोन ऑन द फेस ऑफ़ बोथ द सीम्स। फाइन डिटेल्स आर यूज्ड इन ड्राइंग इन द हट रूरल एनवायरमेंट
शेड्स ऑफ येलो एंड ब्राउन अ पिक्चर शोज़ द किंग ग्रेट रिगार्ड टुवर्ड्स द पॉपुलर हिंदू सेंट्स ऑफ हिज टाइम। सो अगर वो
रिगार्ड करता था तभी उसने ये पेंटिंग्स बनवाई हैं। सो वेरी सिंपल पेंटिंग मोनोक्रोमेटिक। आपको सीपिया टोन में ही
दिख रहा होगा। टू सेंट्स हैं। चुपचाप अपने काम में लगे हैं। और इसका अगर हम अह ह्यूमन लाइफ वैल्यू की बात करें। वन शुड
लीड अ सिंपल लाइफ विद ह्यूमिलिटी। वेरियस रिलीजियस बिलीव्स कैन सर्वाइव इन अ पीसफुल एनवायरमेंट विदाउट कंपीटिंग फॉर
सुप्रीमेसी। मतलब मिलजुल के रहना चाहिए। और अलग-अलग रिलीजियस बिलीव भी सोसाइटी में बड़ा शांतिपूर्वक रह सकते हैं। डिग्निटी ऑफ़
लेबर विद द बिलीव दैट नो वर्क इज़ स्मॉल और मीनियल। यह मेन इसका है। एंड स्पिरिचुअल अटेनमेंट एंड विज़डम। वर्क इज़ वरशिप भी आप
इसको कह के जा सकते हैं। सो नेक्स्ट वेरी ब्यूटीफुल पेंटिंग ऑफ़ मुगल। मैरिज प्रोसेशन ऑफ़ दशको। वैसे तो बहुत सुंदर
पेंटिंग्स बनी है इनकी। बट जैसे मैं कहती हूं कि हमारे सिलेबस में तो पूरे ओशियन से एक ड्रॉप दिए रखे हैं। चाहे वो राजस्थानी
की बात करें, मुगल की करें, डेक्कन की करें। मैरिज प्रोसेशन ऑफ़ दारा शिको हाजी मदनी प्रोविंशियल मुगल मतलब ओधे मुगल की
पेंटिंग है। वाटर कलर ऑन पेपर टरा नेशनल म्यूजियम न्यू दिल्ली। हिस्टोरिकल पेंटिंग है क्योंकि मैरिज प्रोसेशन ऑफ़ दारा शिको।
दारा शिको शाहजहां का बेटा था। था। तो, उसके मैरिज का यह सीन है। दिस पेंटिंग रिफ्लेक्ट्स द ओपुरेंट सेलिब्रेशन ऑफ़ द
वेडिंग एंड द ग्लोरियस आउटलुक ऑफ़ द मुगल। आप एक बार ध्यान से इस पेंटिंग को देखें। एस्टोनिश्ड हो जाएंगे कि इतने छोटे से
साइज पे इतना क्राउडडी कंपोज़शन, इतने लोग, बारात और कैसे इस पेंटिंग को आप ध्यान से देखना। सेंट्रल डिवाइडेड है। एक तरफ ग्रूम
साइड, एक तरफ ब्राइट साइड। तो किस तरह से इस कंपोजशन को सेट किया गया है ये आप देख पा रहे हैं कितना भीड़ है ये फिगर जो
डांसिंग फिगर यहां पे है शाहजहां का दारा शिको का घोड़ा शाहजहां का घोड़ा ये लोग जो बारात लेके आ रहे हैं ये जो पीछे फीमेल्स
बैठी हैं एलीिफेंट पे ये ड्रम बीटर्स जो हैं ये फायर वर्क जो है सो ये इस तरह से अगर आप देखें तो यह
अगेन क्रैकर्स और यह सब फायर क्रैकर्स ये जितना भी दिखाए गए हैं आप इनके कपड़ों की डिजाइनिंग देखिएगा तो एक्सीलेंट वर्क
एक्सीलेंट वर्क। सो जल्दी से हम पढ़ते हैं इसका डिस्क्रिप्शन को। पेंटिंग इज़ हैविंग अ क्राउडेड कंपोज़शन। अगर हमसे पूछा जाता
है कि क्राउडेड कंपोज़िशन बताएं, तो या तो हम कृष्णा लिफ्टिंग माउंट गोवर्धन या मैरिज प्रोसेशन ऑफ़ दारा शिको बट कृष्णा
लिफ्टिंग से भी मैरिज प्रोसेशन हम पहले नंबर पे रखेंगे। डिवाइडेड इंटू टू सेगमेंट्स। जैसे मैंने
बोला ब्राइट साइड एंड ग्रूम साइड। पर्संस हैव बीन शोन वेटिंग इगरली टू वेलकम द ग्रूम एंड अदर एसोसिएट्स। अब देखें अब अगर
हम ध्यान से देखें आप पेंटिंग की तरफ ध्यान से देखना दारा शिको वय्स अ जूल ट्यूनिक एंड अ सेहरा राइड्स इन अ ब्राउन
स्टेलेज ये आप देखें कि दाराशिको ये वाला ये
इसने ये सेहरा पहना हुआ है ना तो आप दाराशिको में ये और शाहजहां राइड्स इन अ हॉर्स विद अ हेलो अराउंड हिज हेड तो अब ये
ये देखें ये जो निंबस और हेलो की हम बात कर रहे थे। ये देखें इनके सिर के पीछे दिखाया गया है। अब प्रोसेशन में क्या है?
इंपीरियल फैमिली मेंबर नोबल्स ऑन हॉेसेस एंड एलीफेंट्स। घुट्स घोड़ों पे बैठे हैं। एलीिफेंट्स पे बैठे हैं। ड्रम बीटर्स फायर
क्रैकर्स। म्यूजिक अकंपनी द प्रोसेशन। फायर क्रैकर्स आर शोन विद ब्यूटीफुल डिस्प्ले ऑफ़ लाइट। ब्राइट साइड वेलकम्स द
प्रोसेशन ऑफ विद कैंडल्स। बोल्ड कलर इंक्लूडिंग गोल्ड एंड सिल्वर आर यूज़्ड। इंट्रीगेट डिटेल्स ऑफ फेशियल फीचर ज्वेलरी
ड्रेस पैटर्न्स अ फ्लावर पैटर्न बॉर्डर यहां पे बनाया गया है। आप पेंटिंग का बॉर्डर देख सकते हैं। अ बॉय इज़ शोन
डांसिंग एंड एंटरटेनिंग पीपल ये वाला। दिस पेंटिंग इज़ अ यूनिक एग्जांपल ऑफ़ सुबा मुगल स्टाइल और प्रोविंशियल मुगल स्टाइल। सो
बहुत सुंदर पेंटिंग है। जितना लिखना चाहे उतना इस पेंटिंग के बारे में लिख सकते हैं। बट क्योंकि हमें तीन नंबर में या हम
बात करें दो नंबर में आता है या सब पार्ट में क्वेश्चन आता है सिक्स में से। सो उसके लिए इतना सफिशिएंट है। लेकिन अगर
आपको आता है एस्थेटिकल पैरामीटर पे आपको एप्रिशिएट करनी है पेंटिंग तो एस्थेटिकल पैरामीटर होता है ब्यूटी वाइज। आप कपड़ों
का ब्यूटी बता सकते हैं। आप फेशियल फीचर इसको अगर आप लेंसेस लगा के देखें ना तो एक-एक बाल चेहरे का भी फेशियल फीचर्स में
अगर आप कहें तो फेशियल हेयर भी इतना बारीकी में यह दिखाए गए हैं। आप फिगरेटिव की बात कर सकते हैं। आप पर्सपेक्टिव की
बात कर सकते हैं। आप बैकग्राउंड की बात कर सकते हैं। एनिमल एनाटॉमी की बात कर सकते हैं। नाइट सीन की बात कर सकते हैं। फायर
क्रैकर्स की बात कर सकते हैं। बहुत कुछ है इस पेंटिंग में बताने के लिए। तो ह्यूमन लाइफ वैल्यू पे आए म्यूचुअल रिस्पेक्ट एंड
फैमिली फंक्शन। वन शुड वेलकम द गेस्ट विद द ओपन हार्ट एंड वन शुड फॉलो डिसिप्लिन इन द कंडक्ट। सो ये था हमारा मुगल स्कूल ऑफ़
मिनिएचर पेंटिंग। अभी तक जो हमने पढ़ा जिसमें ओरिजिन एंड डेवलपमेंट पढ़ा, कैरेक्टरिस्टिक्स पढ़े और चार पेंटिंग पढ़े।
सो, अब बढ़ें डेकन स्कूल की तरफ। सो, आप पॉज़ ले सकते हैं। मैं पढ़ा रही हूं। दो मिनट ब्रेक ले लें और उसके बाद दोबारा से
सुनना शुरू कर दें। सो डेकन स्कूल ऑफ मिनिएचर पेंटिंग मार्क्स वेटेज फाइव डेकन स्कूल ऑफ ये लास्ट मिनिएचर चैप्टर है
हमारा अ यूनिट सेकंड का लास्ट चैप्टर अब इसके बारे में हम पढ़े इवॉल्वड डेकन की बात करें तो दखनी मतलब साउथ वाली साइड इवॉल्व
ड्यूरिंग द लेटर हाफ ऑफ़ 16th सेंचुरी ऑलमोस्ट एग्ज़िस्टिंग ड्यूरिंग द सेम टाइम ऐज़ मुगल आर्ट। उसी टाइम पीरियड का काम है।
हाउएवर लेटर इन द 17थ एंड 18थ सेंचुरी इट वाज़ इंक्रीज़िंगली इन्फ्लुएंस्ड ब मुगल्स टाइप। तो लेटर 17 18थ सेंचुरी के आसपास इस
पर मुगल का बहुत ज्यादा इन्फ्लुएंस आ गया था या हमें दिखता था। अब इसके मेन सेंटर्स कौन से हैं? सब स्कूल्स की बात करें
बीजापुर, अहमदनगर, गोलकोंडा, हैदराबाद एंड तंजोर। डेकन हैड इट्स ओन डिस्टिंशन इन आर्ट,
कल्चर, ड्रामेटिक्स, लिंग्विस्टिक्स, सोशल वैल्यूज़, कॉस्ट्यूम्स, रिलीजियस बिलीव्स, थॉट्स एंड आइडियाज। सो हर किसी फील्ड में
इस टाइम पे भी बहुत ही सुंदर काम हुआ है। द स्टाइल्स एंड डेकन मिनिएचर आर इन्फ्लुएंस्ड बाय परर्शियन मैनरिज्म,
इंडीजीनस आर्ट ट्रेडिशन एंड वॉल पेंटिंग्स फ्रॉम द साउथ। अब ये है इसका इन्फ्लुएंस। सो पहला है टाइम पीरियड अगेन 16 टू 19th।
इसका भी है और इसका इन्फ्लुएंस यह है जो परर्शियन स्टाइल इसमें दिखता है इंडीजीनिनस आर्ट ट्रेडिशन मतलब जो हिंदू
आर्ट अपना था इधर का और वॉल पेंटिंग फ्रॉम साउथ ये हमारा हो गया इन्फ्लुएंस और ये हो गए हमारे सब स्कूल्स तो ये तीन मेन
पॉइंट्स हैं इसके इन द मिडिल ऑफ़ 14थ सेंचुरी सम अफगान फॉलोअर्स और मोहम्मद तुगलक रिवोल्ट रिवोल्टेड एंड एस्टैब्लिश्ड
एन इंडिपेंडेंट किंगडम अंडर द बहमनी डायनेस्टी। सो ये थोड़ा हिस्ट्री है कि बहमनी सल्तनत के अंडर जो थे आपस में भी
खैर इनकी लड़ाई हो गई थी तो फिर ये आगे सब डिवाइडेड हो गए थे सब तो ये पांच सल्तनतें बनी थी जिसमें बिदार बिरार बीजापुर बिदर
बिरार बीजापुर अहमदनगर गोलकोंडा थे। सो दे यूनाइटेडली डिफिटेड द ग्रेट हिंदू किंगडम ऑफ़ विजयनगर और फिर उसके बाद ये स्कूल आगे
इन सेंटर्स में चलना शुरू हुआ। सो ये लिखने की इतनी जरूरत नहीं है। जस्ट फॉर अंडरस्टैंडिंग है। सो आप सिंपली जैसे
मैंने बोला कि ये तीन पॉइंट्स लिख दें और इनके बाद ये जो एक है कि डेकन हैड्स इट्स ओन डिस्टिंशन इन आर्ट, कल्चर, ड्रामेटिक,
लिंग्विस्टिक, सोशल वैल्यू, कॉस्ट्यूम, रिलीजियस, प्लीज, थॉट्स एंड आइडियाज लिख के जा सकते हैं। और उसके बाद हमने सब
स्कूल्स के एक-एक दो-दो पॉइंट्स ले लिए हैं। सो एक शॉर्ट नोट्स की तरह ही ये आपके पास हैं। सो, आप एज़ इट इज़ उसको लर्न करके
जा सकते हैं। सो पहला सबस्कूल है हमारा अहमदनगर। अहमदनगर में सबसे पहला एग्ज़ांपल जो है पेंटिंग का वह है वॉल्यूम ऑफ़ पोएम्स
रिटन इन द प्रज़ ऑफ़ हुसैन निजाम शाह वन अहमदनगर। सो इसके ऊपर हमें जो फर्स्ट एविडेंस मिलता है तो वो इनके ऊपर लिखा गया
है। दिस मैनुस्क्रिप्ट इज़ नोन ऐज़ तारीफ-ए-हुसैन शाही। सम ऑफ़ द फाइन एग्जांपल ऑफ़ अहमदनगर पेंटिंग्स आर हिंडोला
रागा या राघ हिंडोला। पोर्ट्रेट्स ऑफ बुरहान निजाम शाह टू ऑफ अहमदनगर। सो ये दो लाइंस ही आप अहमदनगर की लिख के जा सकते
हैं। नेक्स्ट है हमारा बीजापुर। बीजापुर की जो पेंटिंग्स थी इन बीजापुर पेंटिंग वाज़ पेट्रोनाइज्ड बाय अली आदिल शाह वन एंड
हज़ सक्सेसर इब्राहिम टू। इन द रेन ऑफ़ अली आदिल शाह वन इलस्ट्रेटेड एन इनसाइक्लोपीडिया नोन ऐज़ नजूम उल उलूम
साइंस ऑफ़ द स्टार्स। अब एक चीज़ आप समझना। अभी तक हमने राजस्थानी पढ़ा सिंपल लैंग्वेज। मुगल भी इसलिए आपको समझ आ गया
क्योंकि आपने अकबर, जहांगीर इन सबके नाम सुन रखे हैं। ये नाम आपने शायद सुन नहीं रखे और कुछ बच्चों को हिस्ट्री लर्न नहीं
होती। इसीलिए बहुत कम कट शॉट करके ये मैंने चीजें रखी हैं। आप सिर्फ ये देख लें कि अहमदनगर में क्या बना है। वो जरूर याद
कर लें क्योंकि कई बार एमसीक्यूस में आ सकता है ऐसा क्वेश्चन। सो इसमें जो बीजापुर में बना है नजूम नजूम अल उलूम पे
अ ये इनसाइक्लोपीटिया इसके ऊपर पेंटिंग्स बनी है और इस मैनुस्क्रिप्ट में 876 मिनिएचर्स हैं जिनमें से 1440 ऑर्नामेंटल
हैं और बाकी बर्ड्स एनिमल्स एंड ह्यूमन फिगर्स के ऊपर बने हैं। दीज़ इलस्ट्रेशन शो अ मार्क्ड इन्फ्लुएंस ऑफ़ म्यूरल पेंटिंग
एट हम्पी एंड लिपाक्षी एट विजयनगर। सो अगर डिटेल में समझना है तो मेरा डेकनी स्कूल ऑफ मिनिएचर पेंटिंग का वीडियो आप 10 मिनट
का है। वो भी आप सुन सकते हैं। लेकिन अगर सिर्फ आपको नोट्स और लर्निंग जैसे हम वन शॉट रिवीजन कर रहे हैं तो रिवीजन में इतना
डिटेल में मतलब कोई सेंस नहीं बनता पढ़ाने का वरना तो फिर वही डिटेल्ड चैप्टर ही हो जाएंगे। सो इसमें बीजापुर में आपको सिर्फ
ये लिखना है कि नजूम अलूम पे बनी है 876 मिनिएचर्स हैं जिसमें 1140 ऑर्नामेंटल्स हैं और इसमें हम्पी और लिपाक्षी के
मंदिरों के म्यूरल के स्टाइल हमें दिखता है। बट आर्किटेक्चरल डिटेल्स जो है वो डेक्कन के टाइम पीरियड की ही हमें मिलती
हैं। नेक्स्ट है हमारा गोलकोंडा स्कूल। अर्लियस्ट पेंटिंग गोलकोंडा में अ ग्रुप ऑफ़ फाइव चार्मिंग पेंटिंग्स अबाउट 1590
एडी। अब यह जो है ब्रिटिश म्यूजियम लंदन में पड़ी है और इन द पीरियड ऑफ़ मोहम्मद कुली कुता शाह गोलकोंडा के। सो
आउटस्टैंडिंग एग्जांपल इसके क्या है? लेडी विद माइनाबर्ड एंड पोट्रेट शोइंग अ पोएट इन अ गार्डन। सो हैदराबाद पेंटिंग इन
हैदराबाद स्टार्टेड विद द फाउंडेशन ऑफ आस आसफ जाही डायनेस्टी बाय मीर कुमरुद्दीन खान एंड निजाम उल मुल्क इन न 1724 एडी
इन्फ्लुएंस ऑफ़ द मुगल स्टाइल ऑफ़ पेंटिंग ऑन द ऑलरेडी एकज़िस्टिंग अर्ली स्टाइल ऑफ़ डेक्कन पेंटिंग इंट्रोड्यूस्ड बाय सेवरल
मुगल पेंटर्स हु माइग्रेटेड टू द डेक्कन ड्यूरिंग द पीरियड ऑफ़ औरंगजेब। अब देखें मुगल का इन्फ्लुएंस कैसे आया इस पे? जैसे
हमने पढ़ा पहाड़ी में कैसा था? क्योंकि जो लोग पहाड़ों में जाकर छिपे आर्टिस्ट जो औरंगजेब के टाइम पर भागे और पहाड़ों में
जाकर छिपे उन लोगों ने वहां पे जाकर पहाड़ी स्कूल बनाया। अब वैसे ही जो लोग यहां से दक्षिण की तरफ चले गए तो उन्होंने
वहां जाके वो डेक्कन स्कूल के अंडर उन्होंने काम किया। तो दक्षिणी चित्रकला मिनिएचर पेंटिंग। सो डेक्कन स्कूल में
इनका इन्फ्लुएंस इस तरह से हमें दिखता है। अगेन हु माइग्रेटेड टू द डेक्कन ड्यूरिंग द पीरियड ऑफ़ औरंगजेब एंड सॉर्ट पेट्रोनेज
देयर वाज़ रिस्पांसिबल फॉर द डेवलपमेंट ऑफ़ वेरियस स्टाइल ऑफ़ पेंटिंग इन द डेक्कन एट हैदराबाद एंड अदर सेंटर्स। सो एथेनिक टाइप
कॉस्ट्यूम्स हैं, ज्वेलरी है, फ्लोर एंड फना है, लैंडस्केप, रिच कलर्स। एग्जांपल इसकी है प्रिंसेस इन द कंपनी ऑफ़ मेड्स।
नेक्स्ट है तंजोर। अ स्टाइल ऑफ़ पेंटिंग कैरेक्टराइज़्ड बाय बोल्ड ड्राइंग टेक्निक ऑफ़ शेडिंग एंड यूज़ ऑफ़ प्योर एंड ब्रिलियंट
कलर्स। फ्लोरिश देयर तंजोल इन साउथ इंडिया ड्यूरिंग द लेट 18थ सेंचुरी एंड 19थ सेंचुरी एडी एग्जांपल वुडन पैनल ऑफ़ अर्ली
19 सेंचुरी शोइंग द कोरोनेशन ऑफ़ रामा। सो उनका राजतिलक का सीन यहां पे दिखाया गया है। अब अगर हमको डेकन करना है तो 16 टू 19
सेंचुरी जिस तरह से पर्शियन मैनरिज्म का इसमें इन्फ्लुएंस है। हम पी लिपाक्षी मंदिरों के म्यूरल का है। उसके बाद इन पे
वॉल पेंटिंग फ्रॉम साउथ का है और इंडीजीनस इफ़ेक्ट है। तो, यह इसका इन्फ्लुएंस हुआ। और सेम इसमें भी आप लिख सकते हैं। थीम्स
वही हैं। हिस्टोरिकल है, रिलीजियस हैं, लिटरेरी हैं। और ये सब पेंटिंग्स इसमें बारामासा ये सब बने हैं। और फ्लोर एंड
फौना तो बहुत ही बना है। और उसके अलावा बाय चांस आप सब स्कूल्स भूल जाते हैं। डिटेल नहीं आपको याद रहती तो राइट डाउन द
कैरेक्टरिस्टिक्स इन द ओरिजिन एंड डेवलपमेंट। कि इस स्टाइल का काम है तो भी आप लिख के जा सकते हैं तो भी आपको मार्क्स
मिल सकते हैं। जिन बच्चों को नेम्स या ये राजा महाराजाओं के नाम याद नहीं होते उनके लिए। सो कैरेक्टरिस्टिक जल्दी से पढ़ लेते
हैं। लीनियर ब्यूटी अगेन सेम पॉइंट फाइन फ्लूएंट एंड रिदममिक लाइंस कलर स्कीम रिच ब्रिलियंट कंप्लीट हार्मोनी गोल्ड एंड
सिल्वर हैव बीन यूज़्ड इन आर्किटेक्चर कॉस्ट्यूम ज्वेलरी एंड वेसल। अब गारमेंट्स की बात करें। हां, यहां पर आप थोड़ा सा
डिफरेंट कर सकते हैं कि यहां पर नर्दन और सर्दन दोनों स्टाइल के गारमेंट्स बने हैं। क्योंकि दक्षिण की तरफ गया। वहां का लोकल
आर्ट भी आया। नर्दन आर्टिस्ट यहां से गए जो पहाड़ों से मतलब आप मुगल की बात करें, राजस्थानी की बात करें तो यही लोग कुछ
मुगल के आर्टिस्ट यहां से गए थे। सो इसलिए नर्दन सर्दन दोनों स्टाइल के यहां पे बना है। चोली, लॉन्ग पिगटेल एंड नर्दन
कॉस्ट्यूम एंड एंड अप विद द ब्रेड्स एंड पेंडेंट्स और थोड़ा नथनी ये सब यहां पे आपको देखने को मिलेगा। प्रोफाइल फसेस ही
बने हैं। एक चश्मे फसेस हैं और कहीं-कहीं 1/2 चश्मे या 3/4 प्रोफाइल भी हैं बट रेयर बने हैं। पर्शियन यूरोपियन एंड टर्किश
इन्फ्लुएंस ये आप कैरेक्टरिस्टिक्स जो है ये आप उसमें ओरिजिन में भी लिख के जा सकते हैं। द परर्शियन इन्फ्लुएंस कैन
बी सीन द हाई होराइज़न गोल्ड, स्काई एंड लैंडस्केप, फ्लावरिंग प्लांट एंड एरोबिक पैटर्न ऑन द टॉप ऑफ़ द थ्रोन। यह इनका बहुत
एक फेमस फीचर था। यू अक्सर हर पेंटिंग में दिखता है। यूरोपियन इन्फ्लुएंस केम इन रियलिज्म इन पोट्रेचर पर्सपेक्टिव ऑफ़
डेप्थ एंड डिस्टेंस। इनफ्यूज़ ऑफ़ डेकोरेटिव एलिमेंट्स या स्टाइलाइज़ेशन। मोस्टली पेंटिंग्स आर डेकोरेटिव। सो इसमें
भी ना पेंटिंग्स आर डेक्ड अप विद फ्लोरा एंड फौना। कि बहुत जैसे राग हिंडोला बना है। तो झूला फूलों से भरा हुआ है और
जगह-जगह फूल, पौधे अलग-अलग तरह के। स्टाइलाइजेशन बहुत ज्यादा है इन पेंटिंग्स में। रिच कलर कॉस्ट्यूम्स, फ्लावर बेड्स
सब बहुत अच्छे से डेकोरेटिव बनाए गए हैं। ऑर्नामेंटेशन डेकोरेटिव ज्वेलरी विद स्टोंस, कट ग्लास एंड गोल्ड लीफ वर्क। इस
तरह का यहां पे ज्वेलरी हर तरह की बनाई गई है। सिमिट्री एंड ज्योमेट्रिकल डिज़ाइंस। ये भी इसका स्पेशल फीचर है। डिज़िंग पैटर्न
हैव ज्योमेट्री एंड टेंड टू बी वेरी सिमिट्रिकल। इनकी कुछ पेंटिंग्स तो इतना ज्यादा सिमिट्रिकल है कि आप सेंटर से काटे
आपको पता ही नहीं चलेगा। ऐसा रेप्लिका है इन पेंटिंग्स का। जैसे एक डांसर्स इनकी पेंटिंग थी। अब तो आपके सिलेबस में नहीं
है। तो अगर आप उसको कहीं सेंटर से उसको डिवाइड कर दे ना तो आपको लगेगा डिट्टो वो सिमिट्रिकल उसका रेप्लिका है। ह्यूमन फिगर
आर्किटेक्चर स्ट्रक्चर ट्री शब्स फ्लावर्स लीव्स वॉलस्टर्स कुशन फोल्ड्स ऑफ़ गारमेंट्स हैव बीन मेजर्ड प्लेसिंग
क्रिएटिंग वेरी एक्यूरेट एंड सिमिट्रिकल बैलेंस। सो ये एक इसका स्पेशल फीचर है। ह्यूमन फिगर। मेल्स जो बनाए हैं टॉल हैं,
फेयर हैं। हां, ये भी एक पॉइंट है। डेक्कन के जो फिगर्स हैं ना वो इलोंगेटेड है। बाकी स्कूल्स में हमने छोटी-छोटी फिगर्स
देखे हैं। लेकिन जब आप डेक्कन स्कूल की पेंटिंग्स देखेंगे ना, तो आपको थोड़ा लंबी फिगर्स वो दिखती हैं। इमोशनली चार्ज मेल,
वुमेन पेंटेड विथ सिलड्रिकल बॉडी, लवली फेसेस, लार्ज वाइड ओपन आइज़, बोल्ड फीचर, ब्रॉड फोरहेड, लॉन्ग नेक, ट्रायंगुलर,
स्लंटिंग वेस्ट एंड नीटली कर्व्ड फिगर्स। अ वेरी फ्यू ऑफ़ सर्वाइविंग डेकनी पेंटिंग्स वेयर द पेंटर्स सिग्नेचर। और यह
भी एक डेकन का ही फीचर है कि इसमें हमें पेंटर्स के नाम नहीं मिलते हैं। सो इसीलिए आपने देखा होगा आपके सिलेबस में जो भी
पेंटिंग है वो अननोन उसमें लिखा गया है। सो पहली पेंटिंग जो हमने पढ़नी है चांद बीबी प्लेइंग पोलो वेरी फेमस पेंटिंग। हर
साल उसमें क्वेश्चन आता है इस पेंटिंग के ऊपर। अच्छे से समझ लें। चांद बीबी प्लेइंग पोलो जिसको चौगान प्लेयर भी कहा जाता है।
अननोन आर्टिस्ट क्योंकि मैंने बोला उनके नाम हमें नहीं दिखते हैं। इसलिए हमें नहीं पता है कि किस आर्टिस्ट ने बनाई है। सब
स्कूल गोलकोंडा है। वाटर कलर पेपर टेक्निक टेंपरा कर्टसी नेशनल म्यूजियम न्यू दिल्ली। सो थीम एंड सब्जेक्ट मैटर। दिस इज़
द डिपिक्शन ऑफ़ हर स्पोर्ट इवेंट इन रॉयल फैमिली। चांद बेबी शोन प्लेइंग पोलो विद हर कंपैनियंस। यह चांद बीबी है जो वाइट
घोड़े पे है और बाकी इसके कंपैनियंस हैं। दिस पेंटिंग प्रोवाइड व्यू टू द जनरल लाइफस्टाइल ऑफ़ द डेकन एंड डिपेक्ट्स द
इंटरेस्ट ऑफ़ रॉयल वुमेन ऑफ़ दैट टाइम इन द फील्ड ऑफ़ स्पोर्ट्स। तो बहुत तरह से इस पे क्वेश्चन आता है कि वो वुमेन एंपावरमेंट
को कैसे शो करती है? स्पोर्ट्स में इंटरेस्ट को कैसे शो करती है? पर्दा सिस्टम था तब भी लेडीज़ इस तरह से गेम्स
खेल रही हैं। कैसे आपको लगता है? कौन सी ऐसी पेंटिंग है जो स्पोर्ट्स के ऊपर बनी है? सो इस तरह से किसी भी तरह से मोल्ड हो
के ये क्वेश्चन हमें आता होता है। तो आपको उसमें ये ही डेक्कन की पेंटिंग लिख के जानी है। सो इसकी अगर हम जल्दी से डिटेल
देखें तो एक बार देखें फाइव फिगर्स हैं। 1 2 3 4 फिफ्थ फिगर। फिफ्थ एज अ रेफरी या आप कहें कि गेम कंट्रोल करने वाली एक लेडी
है। और पीछे रिसीडिंग प्लेेंस हैं। आप पीछे देखें बिल्डिंग्स दिख रही हैं। ऊपर स्काई है। आगे लेक दिखाई गई है। एक्वेटिक
बर्ड्स हैं। लोटसेस हैं। तो सब कुछ बनाया गया है इस पेंटिंग में। चांद बेबी प्लेइंग पोलो इज़ अ फेमस पेंटिंग फ्रॉम गोलकोंडा।
शोन प्लेइंग पोलो विद हर थ्री मेड्स। यह देखें। वन टू थ्री। अ ऑल फोर आर सिंग ऑन हॉर्सेस एंड ड्रेस्ड इन द कलरफुल घागरास
एंड चोलीज़। चांदवी बी सिंग ऑन अ वाइट हॉर्स शोन टेकिंग ऑन अ पोलो बॉल विद हर बेंट पोश्चर। थोड़ा सा झुकी हुई है। आप
देखें ये पोलो गेंद की तरफ ये थोड़ा सा इसका झुका हुआ पोश्चर है। हॉेज़ आर शोन इन एक्शन बाय देयर अपलिफ्टेड लेग्स एंड
हुव्स। तो ये एक्शन में दिखाए गए हैं। आप देखें भागते हुए। अह पेंटेड इन डिफरेंट कलर्स। द पर्सपेक्टिव ऑफ़ द टाउन इज़
ब्यूटीफुली कंपोज़्ड। अ ह्यूज फ़ोर्ट न्यूमरस स्मॉल एंड ग्रेट बिल्डिंग्स एंड ट्रीज़ स्कैटर्ड हियर एंड देयर। फोर
ग्राउंड लोटस फ्लावर शोन इन द वाटर लेक एंड विद सिक्स वाटर बर्ड्स। इसमें ये देखिए 1 2 3 4 5 6 इन बिटवीन द कंपोज़शन। अ
फिगर इज़ शोन हु इज़ डायरेक्टिंग द गेम। यह वाली लेडी। वेल बैलेंस्ड कंपोज़िशन। आप ध्यान से देखें तो बहुत बैलेंस्ड एक
कंपोज़शन है। अपर एंड लोअर पार्ट ऑफ द पेंटिंग वाइट मार्जिनस अ विद ग्रीन एंड येलो अकर हैव बीन शोन। ओहो इसमें वो वाला
पेंटिंग सॉरी मिस हो गया। इसमें यहां पे मार्जिनस दिए हुए हैं। ओरिजिनल पेंटिंग आप देखना। यह क्रॉप हो गई है पेंटिंग यहां
पे। सो कैलग्राफी वर्क जो है तो ब्लैक इसमें मार्जिनस हैं जहां पर कैलग्राफी लिखी गई
है। इन द मिडिल ऑफ द मार्जिन येलो पार्ट हैज़ बीन डन कैलग्राफी वर्क विद ब्लैक कलर इन पर्शियन स्टाइल। द पर्शियन इंस््रिप्शन
द बैकग्राउंड चौगान बाजी चांद बीवी उसमें लिखा गया है। सो ह्यूमन लाइफ वैल्यू इसकी यह है। स्पोर्ट्स एज़ अ सोर्स ऑफ़
एंटरटेनमेंट फॉर द हेल्दी एंड फुलफिलिंग लाइफ। टीम वर्क हेल्प्स टू अचीव गोल इन लाइफ। सो अगेन मैं कहूंगी बहुत इंपॉर्टेंट
पेंटिंग है और वैसे भी देखें ना हजरत निजामुद्दीन आलिया अमीर खुसरो नेक्स्ट पेंटिंग अननोन हैदराबाद वाटर कलर ऑन पेपर
टरा नेशनल म्यूजियम न्यू दिल्ली अब ये पेंटिंग अगर हम देखें तो टू सेंट्स की पेंटिंग है हजरत निजामुद्दीन आलिया और
अमीर खुसरो। ठीक है? ये वन ऑफ़ द रनाउंड एंड द मोस्ट इन्फ्लुएंशियल सूफी सेंट ऑफ़ 13 सेंचुरी ऑफ़ इंडिया। अमीर खुसरो वाज़ हिज़
डिसाइपल। यह गुरु हैं। यह उनके शिष्य हैं। और वह भी एक रनाउंड इंडियन पोएट और स्कॉलर थे। वेरी
सिंपल पेंटिंग। सूफी हजरत निजामुद्दीन आलिया शोन लिसनिंग टू द सूफी सॉन्ग फ्रॉम ह बिलवर्ड डिसाइपल अमीर खुसरो ग्रीन एंड
पीसफुल एनवायरमेंट। अब इस पेंटिंग में सबसे इंपॉर्टेंट क्या है? गुरु शिष्य परंपरा, गुरु शिष्य सम्मान, गुरु शिष्य का
आपस में प्यार और उसके ऊपर यह पेंटिंग बनाई गई है। सो अगर हमें कहीं पे भी टीचर, डिसाइपल इस तरह का वर्ड पेपर में आता है
स्टेटमेंट बेस्ड तो आप समझ लेना इसी पेंटिंग की बात हो रही है। क्योंकि पूरे सिलेबस में और कोई पेंटिंग आपके टीचर या
शिष्य या इस तरह के ऊपर नहीं है। सो, यह हमेशा याद रखना। द सेंट इज़ शोन वेयरिंग अ ग्रीन ड्रेस हेड गियर सिंग एंड ग्रॉस्ड इन
अ ब्यूटीफुल गार्डन। अ येलो हेलो बिहाइंड हज़ हेड क्रिएट्स अ सेंस ऑफ़ पायसनेस,
स्पिरिचुअलिटी एंड ग्लोरी। दिस अमीर खुसरो शोन वियरिंग अ ब्राउन अगर टर्बन एंड रेस्ट रेड वेस्ट बैंड। दिस वन वन ट्री शोन लेटन
विद फ्रूट्स एंड फ्लावर्स। अमीर खुसरो शोन इन प्रोफाइल व्हाइल हज़रत निजामुद्दीन आलिया थ्री क्वार्टर फेस। तो इनका यह थ्री
क्वार्टर फेस दिखाया गया है। जबकि इसका साइड पोज़ दिखाया गया है इनका। अह दिस मिनिएचर एक्सप्रेससेस अ सूदिंग वाइब्स ऑफ़
म्यूजिक एंड स्पिरिचुअलिटी। रिस्पेक्ट फॉर योर गाइड, केयर फॉर योर यंगर, लर्नर एंड बिगिनर। यह ह्यूमन लाइफ वैल्यू में हम
लिखेंगे। ट्रू गाइडेंस कैन लीड अस टू द राइट पाथ एंड म्यूचुअल रिस्पेक्ट फॉर ईच अदर आर्ट एंड टैलेंट। सो, यह हमारा है अह
डेकन की सेकंड पेंटिंग और लास्ट पेंटिंग। सो इसके साथ हमारे मिनिएचर स्कूल्स ओवर होते हैं। हाय वन शॉर्ट वीडियो पार्ट वन
हम कर चुके हैं जिसमें हमने मिनिएचर स्कूल्स पढ़ लिए हैं। अब हम आएंगे पार्ट टू की तरफ जिस वॉल स्कूल कंट्रीब्यूशन ऑफ
इंडियन आर्टिस्ट इंडियन नेशनल फ्लैग एंड मॉडर्न फ्रेंड्स इन इंडियन आर्ट। सो आई होप अभी तक जितना हमने करा है वो आपको समझ
आ गया होगा। और एक चीज और मैं कहना चाहूंगी मिनिएचर स्कूल्स हैं। मैंने उसका एक 10 मिनट्स में फोर चैप्टर्स इन वन गो
वाला वीडियो भी डाला है। सो वो भी बहुत इजी है। जिन बच्चों को मिनिएचर्स का नहीं समझ आता है या नहीं क्लेरिटी है चीजों की
तो उसमें से भी आप कर सकते हैं। सो चलते से चलते हैं हम अपने नेक्स्ट यूनिट की तरफ। बंगाल स्कूल ऑफ़ आर्ट। अब सबसे पहले
आप एक चीज समझना। अभी तक हमने जो पढ़ा वो मिनिएचर स्कूल्स थे। मिनिएचर स्कूल्स मतलब एक ही तरह का काम था। एक ही स्टाइल की
पेंटिंग्स थी। कि उनके कुछ थीम्स थे। एक स्पेसिफिक काइंड ऑफ लाइंस लगी हैं। प्रोफाइल फसेस बने हैं। सो कुछ हमने एक
पर्टिकुलर काइंड ऑफ़ आर्ट पढ़ा है। लेकिन बंगाल स्कूल ऑफ़ आर्ट जो था वो थोड़ा सा टाइम पीरियड आगे का है। ये अर्लियर 20थ
सेंचुरी का आर्ट है। सो पहले मैं आपको ना एक जनरल इंट्रोडक्शन दूंगी बंगाल की। अदरवाइज़ समझ नहीं आएगा। और उसके बाद मैंने
कुछ पॉइंट्स अलग से निकाल दिए हैं जो सिर्फ सिंपली आप लर्न कर लें। तो बंगाल स्कूल ऑफ़ आर्ट पे ही आप उसके ओरिजिन एंड
डेवलपमेंट पे वो नोट्स आपके लिए हो जाएंगे। सो जल्दी से शुरू करते हैं। चैप्टर फाइव बंगाल स्कूल ऑफ आर्ट। अगर
हमको ओरिजिन एंड डेवलपमेंट क्वेश्चन आता है तो किस तरह से हमें समझना है इस चीज़ को? आर्ट इन इंडिया हैज़ अ हैड अ डिफरेंट
पर्पस प्रायर टू कमिंग टू कमिंग ऑफ़ द ब्रिटिश। इट कुड बी सीन ऑन स्टैचूज़, टेंपल्स, वॉल्स, मिनिएचर पेंटिंग दैट ऑफन
इलस्ट्रेटेड मैनुस्क्रिप्ट्स, डेकोरेशन ऑन द वॉल्स ऑफ़ मड हाउसेस इन विलेजेस अमंग मेनी अदर एग्जांपल्स। अब हम यहां पे ये
कहना चाह रहे हैं कि इंडिया में आर्ट के अलग ही मायने थे। बहुत रिच कल्चर हेरिटेज के साथ हम जी रहे थे। चाहे वो स्कल्प्चर्स
हो, पेंटिंग्स हो, अ वॉल पेंटिंग्स हो। तो किसी भी तरह के बहुत हम एक वाइब्रेंट और कल्चरर्ड एटमॉस्फियर को बिलोंग करते थे।
व्हाट फ्लोरिश्ड वाज़ द ब्रिटिश स्टाइल ऑफ़ पेंटिंग, द स्टाइल ऑफ़ एकेडेमिक रियलेंस। बट हुआ क्या कि ब्रिटिशर्स के आने से उनका
स्टाइल ओवरपा वो लोग करना शुरू हो गए। और अपनी ही तरह का आर्ट, अपनी ही तरह की पढ़ाइयां उन्होंने यहां पे करवानी शुरू कर
दी। इंडियन पेंटिंग्स वाज़ डिग्रेटेड। उनको बहुत लोअर लेवल पे आंका जाने लगा। और डिग्रेटेड इंटू वीक इमिटेशन एंड ऑलमोस्ट
रीच टू अ डेड एंड। मतलब कोई उसका वजूद नहीं रह गया। अंडर ब्रिटिश रूल इंडिया इंडियन आर्ट हैज़ रीच्ड द लोएस्ट पॉइंट ऑफ़
डेवलपमेंट। मतलब बहुत ही अह डिग्रेडेड हो गया हमारा इंडियन आर्ट। दो द सिस्टेटिक प्रोपेगेंडा एजुकेटेड इंडियंस वर कन्विंस
दैट द इंडिया हैड नो कल्चरल हेरिटेज। सो जैसे लोग उन विदेशियों के पीछे लगना शुरू हो गए और उन लोगों ने भी यह मानना शुरू कर
दिया कि इंडिया का तो कोई कल्चर हेरिटेज है नहीं। एन आर्ट मूवमेंट स्टार्टेड। अह अब उस दौरान क्या हुआ कि एक ऐसी
मूवमेंट की शुरुआत हुई। यह बहुत लंबा टाइम पीरियड था। ऐसा नहीं है कि हमने एकदम से हम इस लेवल पे पहुंच गए। सो हम क्योंकि
बंगाल स्कूल पढ़ रहे हैं तो उसके लिए सोें कि बैकग्राउंड क्या बनी कि एक तरह से हमारे इंडियन आर्ट को डिग्रेड किया जाने
लगा। यह कहा जाने लगा कि हमारा कल्चरल हेरिटेज कुछ भी नहीं है। सो कुछ एक ऐसे लोग थे कि जिनमें स्वदेशी की भावना जागी
और उन्होंने बोला और उन्होंने वो इंडियन पेंटर और आर्टिस्ट थे कि जिन्होंने अपनी आवाज उठाई अगेंस्ट द एक्टिविटीज़ ऑफ़ द
ब्रिटिश आर्ट एकेडमी। बट आल्सो स्टार्टेड सेपरेटिंग देमसेल्फ ऑन फॉलोइंग ब्लाइंडली द लाइफलेस स्टाइल ऑफ़ वेस्टर्न रियलिज्म।
हालांकि ये भी वहां पे आर्ट चल रहा था कि जो लोग वो सिखा रहे थे, कर रहे थे और उसी तरह से आगे वो बनता जा रहा था। आर्ट आगे
लोग सीखते जा रहे थे। बट कुछ लोगों ने उसके अगेंस्ट अपनी वॉइस रे करी। दिस स्टाइल ऑफ़ पेंटिंग वाज़ अ नेशनलिस्टिक
रिएक्शन अगेंस्ट द स्टाइल प्रमोटेड बाय द ब्रिटिशर्स एसोसिएटेड विद अ नेशनलिस्टिक मूवमेंट स्वदेशी। सो, यह जो एक नया स्टाइल
पनपने वाला था और थोड़ा-थोड़ा उसकी शुरुआत हो गई थी। वो एक नेशनलिस्टिक रिएक्शन था। इन दिस गुड कॉज अब सारे ही इंग्लिश मैन एक
जैसे नहीं थे। तो इसमें से ईबी हेवल का नाम जो है वो प्रिंसिपल थे गवर्नमेंट आर्ट स्कूल कोलकाता के। तो उन्होंने इंडियंस के
साथ कोऑपरेट किया। हेवल वाज़ इंट्रोड्यूस्ड टू अभिंद्रनाथ टैगोर। उस समय के बहुत फेमस आर्टिस्ट थेलकाता के। हु वाज़ वन ऑफ़ द
लीडिंग आर्टिस्ट ऑफ़ दैट पीरियड। हेवल वाज़ नॉट इन फेवर ऑफ़ द ट्रेडिशन ऑफ़ कॉपीिंग यूरोपियन पेंटिंग्स। सो हेवल खुद उस में
नहीं थे कि यूरोपियन पेंटिंग्स को इतना लादा जाए इंडियन आर्ट के ऊपर। देयरफ़ इन 194
ही स्टार्टेड गेटिंग द स्पेसिमस ऑफ़ यूरोपियन पेंटिंग एंड द वेस्टर्न रेलिक्स रिमूव्ड फ्रॉम द आर्ट गैलरी ऑफ़ द स्कूल।
तो जो उस वक्त स्कूल बने हुए थे जहां पे ये आर्ट एजुकेशन दी जा रही थी। तो वहां से उन्होंने जितने भी वेस्टर्न रेलिक्स थे और
जितनी बाहर की वो पेंटिंग्स थी यूरोपियन पेंटिंग्स उनको हटाना शुरू कर दिया और उनकी जगह अजंता बाग, इलोरा, राजपूत और
मुगल मिनिएचर्स को उधर प्लेस करना शुरू हो गया ताकि वो लोग देखें और आगे के स्टूडेंट्स देखें और इनकरेज हो उस इंडियन
आर्ट को लेके। हेवल टोल्ड हिम टू जॉइन एज अ वाइस प्रिंसिपल ऑफ़ गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ़ आर्ट्सक।
सो हेवल ने अभिंद्रनाथ टैगोर को वाइस प्रिंसिपलक के गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ आर्ट का बनाया है।
दे फर्मली बिलीव इन क्रिएटिंग अ न्यू टाइप ऑफ़ पेंटिंग दैट वाज़ टोटली अ इंडियन नॉट ओनली इन सब्जेक्ट मैटर बट आल्सो इन
स्टाइल। सिर्फ सब्जेक्ट से ही नहीं ऐसा नहीं था कि अपनी माइथोलॉजी उठा ली और सिर्फ सब्जेक्ट्स उठाए और स्टाइल वेस्टर्न
रखा। स्टाइल भी इंडियन रखा और सब्जेक्ट भी इंडियन रखे थे। ईबी हेवल एंड अभिनेंद्रनाथ टैगोर डिज़ अ करिकुलम। उन्होंने एक अलग
करिकुलम बनाया टू इंक्लूड एनकरिज टेक्निक एंड थीम्स इन इंडियन आर्ट एंड ट्रेडिशन। अभिनंद्रनाथ टैगोर लर्न वाटर कलर
टेक्निक्स। सो एक ये भी एक पॉइंट है जो आगे बंगाल में आपको कई बार एमसीक्यू में क्वेश्चन आ जाते हैं। कि कौन से ऐसे
आर्टिस्ट हैं जिन्होंने जैपनीज़ आर्टिस्ट से वो एक टेक्निक सीखा और उसको बाद में सिंथेसाइज़ किया था। सो अभिनिंद्र नाथ
टैगोर लर्न वाटर कलर टेक्निक्स फ्रॉम टू जैपनीज़ आर्टिस्ट एंड कंबाइंड द यूरोपियन वाटर कलर टेक्निक एंड क्रिएटेड अ न्यू
टेक्निक व्हिच इज़ नोन एज द वॉश टेक्निक जो बंगाल की एक फेमस टेक्निक भी बनी है। सो ये उसको शुरू करने वाले अभिंद्रनाथ टैगोर
थे। ये याद रखिएगा अगर एमसीक्यू में क्वेश्चन आता है। व्हिच बिकम द हॉलमार्क ऑफ़ द बंगाल स्कूल। द मोस्ट सक्सेसफुल
एग्जांपल्स ऑफ़ एकेडमिक स्टाइल ऑफ़ ऑइल पेंटिंग वर प्रोड्यूस्ड बाय राजा रवि वर्मा। अब जो एकेडेमिक स्टाइल एक तरह से
उस वक्त चल रहा था उसमें जो एक्सीलेंट काम किया है ना वो राजा रवि वर्मा ने किया है। अब इनका यहां जिक्र मैं क्यों कर रही हूं
क्योंकि बहुत बार इनकी भी एक पेंटिंग हमारे सिलेबस में है और बहुत बार इस पेंटिंग पे भी क्वेश्चन आता है कि कौन से
ऐसे आर्टिस्ट हैं जिन्होंने ओलियोग्राफ्स बनाए या जिन्होंने घर-घर पेंटिंग पहुंचा दी उन आर्टिस्ट की कोई एक पेंटिंग
बताएं। सो इसलिए उनका रेफरेंस मैं यहां पे दे रही हूं। सो दैट अगर ऐसा कुछ क्वेश्चन आता है तो आप जज कर लें कि किस आर्टिस्ट
की बात हो रही है। ही मास्टर द स्टाइल ऑफ़ एकेडेमिक रियलिज़्म एंड यूज़्ड टू डिपेक्ट सींस फ्रॉम पॉपुलर एपिक्स लाइक रामायण
महाभारत। सो उन्होंने भी देवी देवताओं के अपने एपिक्स के ऊपर बहुत सी पेंटिंग्स बनाई हैं। दे बिकम सो पॉपुलर दैट मेनी ऑफ़
हज़ पेंटिंग्स वर को कॉपीड ऐज़ ओलियोस एंड वर सोल्ड इन द मार्केट। जैसे कैलेंडर की फॉर्म में भी वो पेंटिंग्स को घर-घर
पहुंचाने का श्रेय ही अह राजा रवि वर्मा को जाता है। दे इवन एंटर्ड पीपल्स होम ऐज़ कैलेंडर इमेजज़। सो ये एक अलग से पॉइंट है।
ये आप ध्यान रख लीजिएगा। अब हमको अगर बंगाल को लिखना है। जैसे मैंने बोला मैं ओरिजिन एंड डेवलपमेंट के लिए ये भी आप एज़
अ नोट्स यूज़ कर सकते हैं। सो बंगाल स्कूल इज़ कंसीडर्ड ऐज़ एन इन्फ्लुएंशियल आर्ट मूवमेंट दैट ओरिजिनेटेड इन बंगाल। बंगाल
से शुरू हुई स्पेशली इन कोलकाता एंड शांतिनिकेतन इट फ्लोरिडश थ्रूउ इंडिया ड्यूरिंग द अर्ली 20थ सेंचुरी टाइम पीरियड
इसका रहा अर्ली 20थ सेंचुरी एंड वाज़ नोन ऐज़ इंडियन स्टाइल ऑफ़ पेंटिंग और यह रिवाइवलिज्म था। एक इंडियन आर्ट का एक
रिब्थ हम इसको मानते हैं। बंगाल स्कूल इज़ आल्सो कॉल्ड द रिवाइवल स्कूल। द आईडिया बिहाइंड दिस स्कूल वाज़ अ विज़ ऑफ एन
इंडिपेंडेंट इंडिया दैट वुड गेट इट्स स्ट्रेंथ फ्रॉम द रिच कल्चर हिस्टोरिकल हेरिटेज दैट इट होल्ड्स। मतलब अपना जो
हिस्ट्री है, अपना जो कल्चर है, वहीं में से ये टेक्निक्स लाए। उन्हीं में से ये सब्जेक्ट्स लाए और उन्हीं के थ्रू
उन्होंने लोगों को बताना शुरू किया कि हमारा आर्ट कितना एनरिच्ड है। बंगाल स्कूल ऑफ़ पेंटिंग ब्रॉट अ रेनसा। रेनसा का मतलब
होता है रिब्थ इन इंडियन आर्ट। द रेनिसो ऑफ़ इंडियन आर्ट स्प्रेड इन एव्री कॉर्नर। और यह हर जगह फैला कंट्री में बंगाल से
शुरू हुआ। बट बाद में बॉम्बे, मद्रास, दिल्ली और इन जगहों पे भी इनके सेंटर्स बने हैं। विद द जॉइंट एफर्ट। और अब इसमें
किसका नाम सबसे ज्यादा आता है? ईबी हेवल का भी और अभिंद्र नाथ टैगोर का भी। सो प्राइमरी इन दोनों के नाम है जिन्होंने
कंट्रीब्यूट करा है स्कूल में। बट इनके साथ भी कई आर्टिस्ट गगनेंद्र नाथ टैगोर एंड मेनी अदर्स इन इंडियन सोसाइटी ऑफ़
ओरिएंटल आर्ट वाज़ फाउंडेड हुज़ एम वाज़ टू एनकरेज टू इंडियन ट्रेडिशनल आर्ट ऑफ़ पेंटिंग विथ द हेल्प ऑफ़ प्रोग्रेसिव
आर्टिस्ट। अब हम यहां पे कह रहे हैं विथ द जॉइंट एफर्ट ऑफ़ ईबी हेवल, अभिन्नंद्रनाथ टैगोर, गगनेंद्र नाथ टैगोर एंड मेनी अदर्स
इंडियन सोसाइटी ऑफ़ एररियंटल आर्ट। सो, यह इन्होंने एक ग्रुप बनाया था जिसका एम ही था कि ट्रेडिशनल आर्ट को प्रमोट किया जाए।
अमंग द एमिनेंट डिसाइपल्स ऑफ अभिनेंद्रनाथ उनके आगे काफी शिष्य थे जिनमें से मेन आर्टिस्ट हैं नंदलाल बोस डीपी रॉय चौधरी
के वेंकटप्पा असित कुमार हलदर एमए आर चुकताई शैलेंद्रनाथ डे एंड शारदा चरण उकील विथ देयर टेक्निक्स गिव अ न्यू हाइट टू
इंडियन आर्ट अब नंद्रनाथ के साथ-साथ इन लोगों ने भी उसमें बहुत कंट्रीब्यूट किया डॉ अनंत कुमार स्वामी अब इनका नाम इसलिए
आता है क्योंकि इन्होंने अपने आर्ट को अ बाहर मतलब कंट्रीज में पहचान दिलवाई थी इन्होंने। ही अरेंज्ड सेवरल एग्िबिशन ऑफ़
इंडियन पेंटिंग्स इन अदर कंट्रीज व्हिच ऑब्टेंड एप्रिसिएशन एंड रिकॉग्निशन फॉर इंडियन आर्ट। एट द सेम टाइम लेडी हरिंघम
गॉट द पेंटिंग्स ऑफ़ अजंता कॉपीड बाय नंदलाल बोस, असित कुमार हलदर एंड के वेंकटप्पा। इन्होंने इससे कॉपीज़ पेंट
करवाई जो अपने अजंता या बाग एलोरा की थी। और उनको बाद में सेम पब्लिश्ड इन दिस इंडियन सोसाइटी लंदन।
इनफ्लुएंस ऑफ अजंता एंड बाग इज क्लियरली सीन इन बंगाल पेंटिंग्स। सो यह पॉइंट भी इसमें आ सकता है। द बंगाल पेंटर्स हैव
सक्सीडेड इन इंट्रोड्यूसिंग लीनियर डेलीगेसी रिदमम ग्रेस अजंता इंटू देयर पेंटिंग्स। अब क्यों ये इन्फ्लुएंस था?
क्योंकि जैसे मैंने कहा यह रिबर्थ ऑफ़ इंडियन आर्ट था। अब इंडियन आर्ट क्या था? अपनी म्यूरल पेंटिंग्स थी। अपने फ्रेस्कोस
थे। अपने अजंता का आर्ट था, अपना बाघ का आर्ट था, अपने मिनिएचर पेंटिंग्स तो उन सबके इन्फ्लुएंस इन पेंटिंग्स में है। द
इंपैक्ट ऑफ़ मुगल एंड राजस्थानी स्कूल इज़ आल्सो विज़िबल इन दीज़ पेंटिंग्स। द बंगाल स्कूल ऑफ़ पेंटिंग आल्सो लेड डाउन द
फाउंडेशंस टोन ऑफ़ मॉडर्न पेंटिंग्स। तो हम कहते हैं कि मॉडर्न पेंटिंग की नींव रखने वाला भी यही स्कूल था। सो ये है हमारा
ओरिजिन एंड डेवलपमेंट। थ्री मार्क्स का हो सकता है आपको सिक्स में आए तो थ्री का ये आ जाए। तो आप इसमें से कुछ
कैरेक्टरिस्टिक्स भी लिख के जा सकते हैं इसके साथ। तो इतना सा आप लर्न कर लें तो आपके लिए सफिशिएंट है। नेक्स्ट हम चलते
हैं कैरेक्टरिस्टिक्स की। बंगाल के कैरेक्टरिस्टिक्स क्या-क्या थे? तो सबसे पहले हम बात करेंगे थीम्स की। तो रिलीजियस
थीम यहां पे भी बने हैं जिसमें गणेश, शिव, पार्वती, महाकाली, कृष्ण, गोपीज, इवन द रामायण, महाभारत, बुद्धा के ऊपर और इन
सबके ऊपर थीम्स बने हैं। पेंटिंग्स बनी हैं। फिर हम बात करेंगे हिस्टोरिकल की। अब यहां पे हिस्ट्री किस तरह से बनी है? यहां
पे पेंटिंग्स हैं डेथ ऑफ़ शाहजहां बाय अभिनिंद्र नाथ टैगोर। यहां भी पेंटिंग्स हैं। जहां नारायण एंड ताज बाय एम ए आर
चुपतई। बुद्धा एंड सुजाता बाय अभनेेंद्र नाथ टैगोर। तो इस तरह के हिस्टोरिकल थीम्स पर भी पेंटिंग्स बनी हैं। देन है
पेट्रियोटिक। पेट्रियोटिक बहुत बना है यहां पे। भारत माता बाय अभिनंद्रनाथ। आगे हम कंट्रीब्यूशन ऑफ़ नेशनल आर्टिस्ट में
पढ़ेंगे। अवेकनिंग ऑफ़ मदर इंडिया बाय असित कुमार हलदर एंड मेनी अदर पेंटिंग्स ऑन थीम वर पेंटेड इन दिस स्कूल। फिर है हमारा
लिटरली लिटरेचर पर जो पेंटिंग्स हैं अगर आपने पढ़ा है तो मेघदूत आपके सिलेबस में एक पेंटिंग है वो तो टोटली लिटरेचर पर
बेस्ड है। थीम्स ऑफ इंडियन लिटरेचर आल्सो पेंटेड इन दिस स्कूल। मेघदूत बाय रामगोपाल विजयवर्गिया इज़ वेरी फेमस अंडर दिस थीम।
नेक्स्ट है सोशल थीम। सोशल मतलब जनरल। ये हमने मिनिएचर में पॉइंट नहीं पढ़ा है क्योंकि मिनिएचर में सोशल थीम्स नहीं बने
हैं। कोर्ट आर्ट था सारा कोर्ट के ऊपर ही पेंटिंग्स बनती थी। देयर इज़ एन अबंडेंस ऑफ़ सोशल एंड डेली लाइफ पेंटिंग्स इन दिस
स्कूल। हार्डवेयर मर्चेंट बेगर टिलर ऑफ सॉइल सांथल फैमिली बाय जामिनी रॉय आर सम पेंटिंग्स शो द सोशल लाइफ इन इंडिया। अब
यहां पे ना बहुत से बच्चे क्वेश्चन हमें करते हैं कि मैम साल फैमिली तो रामकिकर बैच का है। यहां भी जामिनी रॉय लिखा है।
पर मेरी बात समझें। अगर रिलीजियस थीम है तो रिलीजन पर बहुत से आर्टिस्ट बना रहे हैं। ऐसा नहीं हम कह सकते कि हमारे सिलेबस
में सिर्फ एक आर्टिस्ट की वो पेंटिंग है तो किसी और ने वो बनाई ही नहीं है। सो सेम वे सांथल फैमिली इज़ अ सब्जेक्ट ऑफ़ द
पेंटिंग। सो उसके ऊपर स्कल्प्चर्स भी बने हैं। उसके ऊपर पेंटिंग्स भी बनी है और कई आर्टिस्ट ने उसके ऊपर काम किया है। सो इस
पॉइंट को प्लीज़ क्लियर कीजिएगा और बार-बार कमेंट सेक्शन में ये चीज़ मत पूछिएगा। डिपिक्शन ऑफ़ बर्ड्स एंड एनिमल्स। बर्ड्स
एंड एनिमल्स आर रियली ब्यूटीफुल एंड एक्सप्रेसिव। जर्नीज़ एंड बाय अभिनेंद्र नाथ टैगोर। अब देखें बर्ड्स एंड एनिमल का
यहां पे डिपिक्शन भी आपके सिलेबस में है। जर्नीज़ एंड पेंटिंग देखें मार्वलस पेंटिंग है। सो इमोशनल एंड वंडरफुल साइट डियर कैट
लॉ ऑबस्टर बाय जैेमिनी रॉय एंड सम अदर पेंटिंग्स अंडर दिस थीम भी हैं। इन्फ्लुएंस ऑफ़ अजंता। हम यह भी पढ़ चुके
हैं कि सोल ऑफ़ अजंता इज़ क्लियरली विज़िबल इन बंगाल पेंटिंग्स। इंपैक्ट ऑफ़ मुगल एंड राजपूत स्टाइल ऑफ़ पेंटिंग इज़ आल्सो देयर।
नेक्स्ट इज़ अ टेक्निक। टेक्निक में हमारा पॉइंट है वॉश टेक्निक। सो वॉश टेक्निक इसकी एक हॉलमार्क था इस स्कूल का। द
जैपनीज़ वॉश टेक्निक इन वाटर कलर बिकेम द हॉलमार्क ऑफ़ द बंगाल स्कूल ऑफ़ पेंटिंग। देन स्टाइल एंड थीम। स्टाइल क्या था? फुल
ऑफ इंडियन ट्रेडिशन था। द सब्जेक्ट मैटर एंड द स्टाइल ऑफ़ स्कूल इज़ फुल ऑफ़ इंडियन ट्रेडिशनल स्टाइल ऑफ़ पेंटिंग। व्हिच वाज़
एक्चुअली द मेन एम ऑफ़ द बंगाल पेंटर्स। जिसके लिए उन्होंने यह स्कूल शुरू किया था। कलर स्कीम अट्रैक्टिव कलर स्कीम है।
कलर्स यूज्ड सॉफ्ट ग्लोइंग इन ऑर्डर टू ब्रिंग द हार्मोनी ऑफ द पेंटिंग। गॉडी कलर्स हैव नॉट एट ऑल बीन यूज्ड। क्योंकि
वॉश टेक्निक है तो बहुत ज्यादा गॉडी कलर इसमें नहीं है। बहुत सूदिंग और एस्ट्रल वर्ल्ड टाइप फीलिंग आती है। बहुत ही इस
तरह का यह सॉफ्ट और ग्लोइंग काम हुआ है। कंपोज़िशन सिंपल एंड क्लियर पेंटिंग्स जो बनी है वो आपको बहुत क्लियरली दिख जाती
हैं। हमें समझ आ जाता है कि आर्टिस्ट ने हमें क्या दिखाना चाहा है। कंपोज़िशंस आर कंटेंपरेरी एंड मोस्ट सिंपलीफाइड। अह
पेंटिंग्स आर इजी टू अंडरस्टैंड। अब यहां पर हमारे चार पेंटिंग्स हैं जिसमें से फर्स्ट पेंटिंग है एंड वेरी
इंपॉर्टेंट पेंटिंग जर्नीज़ एंड इसलिए मैंने इसको थोड़ा सा डिटेल में भी डिस्क्रिप्शन रखा है। बाकी सबका छोटा-छोटा
दे रखा है। सो अ इसका टाइटल इज़ द जर्नीज़ एंड आर्टिस्ट अभिनंद्र नाथ टैगोर वाटर कलर ऑन पेपर टेंपरा एंड वॉश। सो, यह वॉश
टेक्निक में पेंटिंग है। बंगाल स्कूल इसका टाइम पीरियड है। एंड नेशनल गैलरी ऑफ़ मॉडर्न आर्ट में यह पेंटिंग है। नेशनल
म्यूजियम नहीं नेशनल गैलरी ऑफ़ मॉडर्न आर्ट। दिस पेंटिंग शोड अ टायर्ड एंड ओवरलोडेड कैमल व्हिच हैज़ कोलैप्स्ड अंडर अ
मैसिव वेट। पोश्चर ऑफ़ द कैमल इंडिकेट्स एज़ इफ एवरीथिंग इज़ फिनिश्ड। द आर्टिस्ट इज़ शोन अ रिफ्लेक्शन ऑफ़ ह्यूमन लाइफ थ्रू दिस
पीस ऑफ़ आर्ट वर्क। अब सब्जेक्ट मैटर को समझते हैं। सब्जेक्ट मैटर क्या है? किस तरह से ये पेंटिंग इंपॉर्टेंट है? दो-तीन
तरह से। पहली बात तो यह एनिमल एनाटमी बहुत जबरदस्त है। दूसरी चीज़ इसमें जो सब्जेक्ट लिया गया है वह ह्यूमन लाइफ और अह
सिंबॉलिज़्म पे बेस्ड है। जैसे अह उस कंडीशन को दिखाया गया है। कैमल को ओवरलोडेड कैमल को जैसे एक मास्टर का एक
एंप्लई के लिए ओवर एक्सपेक्टेशंस और ओवर एक्सप्लइटेशन इसमें दिखाया गया है। सो वो भी है। दूसरा कलर्स के थ्रू जैसे सनसेट
होता हुआ दिखाया है। यहां से कैमल की लाइफ का एंड दिखाया है। सो वो भी एक सिंबॉलिक सिग्निफिकेंस इस पेंटिंग में हमें दिखता
है। सो इस तरह से काफी आस्पेक्ट्स पर यह पेंटिंग बहुत इंपॉर्टेंट है। सो दिस पेंटिंग इज़ अ मास्टर पीस पेंटेड बाय
अभिंद्र नाथ टैगोर व्हिच इज़ वेरी एक्सप्रेसिव इन एन आर्टिस्टिक विजुअल लैंग्वेज। क्योंकि एनिमल एनाटॉमी बनाना
इतना आसान नहीं है बच्चा। सो जिस तरह से ये हाफता हुआ कैमल है। इसके फेशियल एक्सप्रेशंस हैं। गिरता हुआ है पत्थरों
पे। सो वो बहुत एकस्ट्री दिखलाता है हमें आर्टिस्ट की। इट वाज़ फर्स्ट पब्लिश्ड इन प्रभासी अ बंगाली मैगज़ीन। अब ये पॉइंट भी
इसलिए रखा है मैंने क्योंकि अगर आपको एमसीक्यू में आता है कि कौन सी पेंटिंग इस तरह से पब्लिश हुई थी, तो यह वाली पेंटिंग
थी बंगाल के आर्टिस्ट की। इट क्लियरली शोज़ हाउ द लाइफ ऑफ़ अ कैमल इज़ अबाउट टू एंड आफ्टर अ लॉन्ग एंड टायरिंग जर्नी। द
बैकग्राउंड एंड द स्काई इज़ कवर्ड विद सप्टल कलर्स ऑफ येलो, ऑरेंज, रेड एंड ब्राउन इन वॉश टेक्निक व्हिच गिव द इफेक्ट
ऑफ़ सनसेट। अगर आप देखें तो ये जो इफेक्ट्स हमें दिखाए गए हैं कलर कॉम्बिनेशन। एक्सप्रेशन एंड पोश्चर ऑफ़ द कैमल लुक्स
रियल एंड लाइवली। द मैसिव लोड लेडन ऑन हिज़ बैक इज़ अ सिंबल ऑफ़ हज़ अनटाइमली अल्टीमेट एक्सप्लइटेशन। जैसे मैंने बोला कि उसके
मास्टर का अह एक्सप्लइटेशन अह उसके ऊपर वो इसमें दिखाया है। टेंपरामेंट एंड सफरिंग ऑफ़ द वीक टायर्ड हंगरी थस्टी कैमल हैव बीन
शोन अह हिज़ लिस्टलेस बॉडी बाय हिज़ हाफ ओपन आइज़ जर्नीज़ एंड हिज़ क्लेंश्ड टीथ शोइंग द डेथ। अब फेस की एनाटमी देखें आप। यह चीज़
सिलेक्शन ऑफ़ कलर इन द हार्मोनी विथ द सब्जेक्ट। सन इज़ गोइंग बिलो द होराइज़न विथ इट्स ग्लो फ़ेडिंग एंड द कैमल जर्नी ऑफ़
लाइफ हैज़ कम टु इट्स एंड। कैमल हैज़ बीन पेंटेड इन येलो ब्राउन कलर केयरिंग गुड्स ऑन हिज़ बैक। यह यहां पे दिखाए गए हैं। एंड
टाइड विद कॉर्ड्स ये शोन द कॉम्बिनेशन ऑफ़ ब्लू, ब्लैक, ब्राउन एंड येलो कलर। टिंट ऑफ़ ब्लू आल्सो हैव बीन एडेड टू द स्टोन
वेयर द कैमल इज़ अबाउट टू फॉल। यह नीचे यहां पे डार्क टोनस दिखाई गई हैं। अ द आर्टिस्ट इज़ शोइंग अ रिफ्लेक्शन ऑफ़ ह्यूमन
लाइफ थ्रू दिस पीस ऑफ़ आर्ट वर्क कि जैसे उस वक्त एक्सप्लइटेशन लोगों पे भी था। जो एंप्लाइजज़ थे उन पे भी इसी तरह से जुल्म
हो रहे थे। तो उसके लिए भी एक सरकाज़िज्म में उन्होंने यह दिखाया है। अह एंटायर पेंटिंग हैज़ अ रिदमम एंड एक्सप्रेशन। फोर
लेग्स ऑफ़ द कैमल बेंड डाउन कॉजिंग हिज़ हेड एंड नेक टू द रेस्ट ऑफ़ द ग्राउंड। हेड इज शोन स्लाइटली हाई फ्रॉम द ग्राउंड।
फोर लेग्स ऑफ द कैमल आर बेंट। डिटेल ऑफ द डाइंग कैमल आर स्टडी एक्सेप्शनली। पेंटिंग इज़ एन एक्सलेट एग्जांपल ऑफ़ वॉश टेक्निक।
सो, ह्यूमन लाइफ वैल्यू इसमें क्या है? मास्टर शुड बी काइंड एंड केयरिंग टुवर्ड्स द एनिमल। एनिमल्स लॉयल्टी टुवर्ड्स इट्स
इट्स मास्टर। सो, यह एक पेंटिंग है। हालांकि बहुत सिंपल पेंटिंग है। अगर आप पिक्चर भी ध्यान से याद कर लेंगे, तो आपको
नहीं भूलेगा यह चीज़। सो नेक्स्ट पेंटिंग है हमारी राधिका बाय एमए आर चुकतई मोहम्मद अब्दुल रहमान चुकतई वॉश टेक्निक और वाटर
कलर ऑन पेपर बंगाल स्कूल नेशनल गैलरी ऑफ़ मॉडर्न आर्ट न्यू दिल्ली इन दिस वर्टिकल पेंटिंग ये वर्टिकल पेंटिंग है अ यंग
इंडियन गर्ल्स स्टैंडिंग इन अ शाय पोश्चर दिस पेंटिंग इज़ बेस्ड ऑन हिंदू माइथोलॉजी अब इसकी
कंपोज़शन देखें बहुत सिंपल सा है आप देखें एक शाई इसमें जो शाइनेस दिखाई गई है। फ्लावर पकड़ा है, लहंगा है, चोली है, पीछे
यह लैंप है। तो, इसी तरह से एक सिंपल सा सीन बनाया गया है। बट मास्टर जो है, वो टेक्निक में है। जो यह मर्ज्ड कलर इसमें
दिखाए गए हैं। राधिका इज़ वन ऑफ़ द मोस्ट ब्यूटीफुल वॉश पेंटिंग बाय एम एआर चुकताई। वन ऑफ़ द मोस्ट गिफ्टेड आर्टिस्ट ऑफ़ इंडियन
रेनेसा। दिस इज़ अ पेंटिंग ऑफ़ एन अट्रैक्टिव इंडियन गर्ल हु इज़ शोन ऐज़ डेलिकेट ऐज़ फ्लेक्सिबल एंड फ्लेक्सिबल।
राधिका इज़ पोट्रेट वॉकिंग अवे फ्रॉम द लाइटेड लैंप इन अ ग्लूमी बैकग्राउंड। यहां से अ इफ इन अ स्टेट ऑफ़ ट्रांस राधिका इज़
शोन इन प्रोफाइल। साइड पोज़ में इसका फेस दिखाया गया है। ड्रॉन विद हर हेड डाउन। हेड थोड़ा सा नीचे है। हाफ ओपन आइज़ हैं।
शार्प आइब्रोज़ हैं। सॉफ्ट एंड डेलिकेट लाइंस हैं। पीछे जो ब्रेड करी गई है ब्लैक ड्रेसेस। यह बाल उसके नीचे बैक की तरफ आ
रहे हैं। होल्डिंग अ लोटस फ्लावर इन द बोथ द हैंड्स। दोनों हाथों में लोटस बर्ड पकड़े हुए हैं। राइट हैंड नीचे की तरफ है।
बट दूसरा हैंड ऊपर की तरफ है। और एक हनी भी इसमें बैठी हुई दिखाई है। अ शी इज़ टचिंग द फ्लावर ऑन हर फेस एंड फील द
टेंडरनेस। यहां से राधिका इज़ डिपिक्टेड वेरी डेलिकेट लाइंस इन फ्लेक्सिबल शेप विद ग्रेट ग्रेस। सो यह बहुत सिंपल सी एक
पेंटिंग है। साथ में अगर हम इसमें कपड़ों के रंग देख लें तो ऑर्नामेंट्स इसने पहने हैं। पर्ल नेकलेस है, बैंगल्स है, पेंडेंट
है, रिंग ये सब पहना हुआ है। शी लुक्स वेरी अट्रैक्टिव। रेड ब्लाउज है, पर्पल लहंगा है, येलो, ओढ़नी। आप यह भी पॉइंट्स
लिख के जा सकते हैं। अब इनको अगर आप ध्यान से देखें तो जैसे यह ऑरेंज है, यह पर्पल है, येलो है। यह कलर्स आप याद कर लें। ईच
डिटेल ऑफ ईच पोल्ड कॉस्ट्यूम हैव अ ब्यूटीफुल रिदमिक एक्सप्रेशन एंड फ्लेक्सिबिलिटी। द लैंप प्लेस्ड नियर द
कॉर्नर इज़ येट अनदर एग्जांपल ऑफ़ मुगल इन्फ्लुएंस ऑफ़ ऑन द आर्टिस्ट वर्क। बर्निंग फ्लेम एंड स्मोक फ्रॉम द लैंप आर
गोइंग अपवर्ड। शायद यहां पे आपको इतना ब्लर क्लियर नहीं होगा। बट एक्चुअल इमेज में यहां पे धुआं निकलता हुआ दिख रहा है।
लाइट ऑफ द लैंप फ्रॉम द येलो रेड विक इलुमिनेटिंग द लेडी एंड एडिंग द टच ऑफ़ डिविनिटी। द बैकग्राउंड इज़ ब्लेंड ऑफ़
फ्यूज़ कलर्स इन यूनिफॉर्म एंड टोनल ग्रेडेशन। नेक्स्ट हमारा बहुत इंपॉर्टेंट पेंटिंग अगेन शिव एंड सती नंदलाल बोस
बंगाल स्कूल मॉडर्न में ये पेंटिंग आती है। टेंपरा एंड वॉश अगेन ये वॉश कलर की पेंटिंग है। नेशनल
गैलरी ऑफ़ मॉडर्न आर्ट न्यू दिल्ली पिक्चर यहां पे थोड़ा सा डल मुझे खुद में लग रही है। बट आप बुक्स में अगर आप देखेंगे तो
हल्का सा ब्राइटन है। बट अगेन मोनोक्रोमेटिक टाइप ये पेंटिंग है। और ये अपनी माइथोलॉजी पे बेस्ड है। अगर हम
सब्जेक्ट मैटर की बात करें तो आपने यह पढ़ा होगा यह रिलीजियस थीम पे है जिसमें शिव एंड सती पे ये पेंटिंग बेस्ड है। सती
अपने फादर दक्ष के एक उन्होंने यज्ञ रखा था जिसमें चली गई थी और बिना बुलाए और वहां पे उन्होंने शिवजी को बहुत अपशब्द
कहे थे। जिस वजह से शती ने अपने आप को वहीं पे अपनी इंट्रेंसिंग पावर से भस्म कर लिया
था। सो ये वो एपिसोड है जहां पे शिव उनके बॉडी को लेके और बैठे हैं। सो ये उनके हस्बैंड के सेल्फ रिस्पेक्ट के लिए जो
उनका सैक्रिफाइस है उसके ऊपर ये पेंटिंग है। सो ये वो थीम है जिसमें ये स्टोरी बताई गई है। सो अगर हम सीधे चलें
डिस्क्रिप्शन पे तो दिस पेंटिंग डिपिक्स द डेड बॉडी ऑफ़ सती इन द आर्म ऑफ़ शिव हु इज़ शोन इन द सिंग पोजीशन। अह फॉर हिज़
रिप्रेजेंटेशन एज़ गॉड। शिवा इज़ शोन विथ द हेलो इन द बैकग्राउंड। यह दिखाया गया है। शेड ऑफ़ लाइट एंड वाइट कलर हैव बीन
डिपिक्टेड फोरहेड्स एंड बोथ फिगर्स एंड आल्सो ऑन द बॉडी ऑफ़ शिवा। यह हल्का-हल्का यह जो वाइट कलर का ये ये वाला
जो लाइट डाली गई है ना इनके ऊपर वो बताई गई है। सतीश शोन वेयरिंग साड़ी एंड आल्सो वियरिंग इयरिंग नेकलेस, आमलेट्स एंड
ब्रेसलेट। सो उन्होंने ज्वेलरा ज्वेलरी पहनी हुई है। द कलर स्कीम ऑफ़ दिस ग्रेट व गोज़ इन
मोनोक्रोमेटिक ब्राउन। सो आपको एक सिंगल टोन में मोनोक्रोमेटिक होता है सिंगल टोन में दिखाया गया सीन सिंगल कलर में उसी के
वेरियस टोंस में बैकग्राउंड हैज़ टोंस ऑफ येलो एंड ब्राउन फोरग्राउंड वलेट ब्राउन एंड वाइट्स हल्का-हल्का बीच में सब एक तरह
से येलोस में है सारी पेंटिंग लेकिन जहां पे रेड शो करना है उसमें हल्का सा रेड डाल दिया गया है। जहां ब्राउन शो करना है थोड़ा
सा ब्राउन का डेप्थ डाल दी गई है। द शेड्स ऑफ़ लाइट एंड वाइट कलर हैव बीन डिपिक्टेड ऑन द फोरहेड।
यही जो लाइट की मैंने बात की द शेड ऑफ ब्राउन टू येलो इन द बैकग्राउंड गिव डेप्थ टू द मेन फिगर। पीछे जो ब्राउन
का है सो उससे आगे की फिगर्स थोड़ा प्रॉमिनेंट होके निकल रही हैं। अगेन मोनोक्रोमेटिक पेंटिंग सीम्स टू बी
इंस्पायर्ड फ्रॉम अजंता वर्क। सो ह्यूमन लाइफ वैल्यू इसकी है सेल्फ रिस्पेक्ट एंड डिग्निटी। सो, यह माइथोलॉजिकल अह पेंटिंग
है। उसके ऊपर बेस्ड है शिव एंड सती। नेक्स्ट हमारी पेंटिंग है मेघदूत। यह लिटरेचर पर बेस्ड है। लिटरेरी पेंटिंग है।
रामगोपाल विजयवर्गीय बंगाल स्कूल वाटर कलर ऑन पेपर टेंपरा एंड वाश ललित कला एकडमी न्यू दिल्ली। सो अगर यह टाइम पीरियड आपको
नहीं याद होता है तो बेशक स्किप कर जाइएगा। सो थीम अगर हम इसका पढ़ें, द पेंटिंग मेघदूत इज़ बेस्ड ऑन द कैरेक्टर ऑफ़
मेघदूत। प्ले मेघदूत व्हिच इज़ रिटन बाय कालिदास द्वारा लिखा गया मेघदूत प्ले के ऊपर ये पेंटिंग है। अब इसमें स्टोरी क्या
है? कौन सा एपिसोड यहां पे दिखाया गया है? यह एक यक्ष की स्टोरी है। हु वाज़ एक्साइल्ड बाय हिज मास्टर किंग कुबेर
जिसको कुबेर की तरफ से एक दंड मिला था और एक साल के लिए उसको अपनी ड्यूटी से नेगलेक्शन के लिए एक उसको जैसे देश निकाला
दे दिया जाता है ना वैसे ये है। द पोयम इज़ सेट अबाउट 8 मंथ्स आफ्टर द एक्साइल। अब 8 महीने हो गए हैं और उनको अपनी बीवी से
बिछड़े हुए और वह उसकी याद में एक पासिंग क्लाउड के थ्रू एक मैसेज भेज रहा है लिख के और उसकी जो उसकी वाइफ उसका वेट कर रही
है। सो ये इसमें यह पोएट्री था जिसके ऊपर यह इलस्ट्रेशन बनाई गई है। दिस पेंटिंग इज़ डिप्टेड विथ द पेन ऑफ़ लव इन सेपरेशन।
अह व्हिच इज़ वेरी क्लियरली विज़िबल ऑन द फेस ऑफ़ यक्षा द मेल कैरेक्टर। सो उसके चेहरे पे वो दर्द साफ झलक रहा है। सो
बेसिकली अगर हमको समझना है तो यह लिटरेचर पे बेस्ड है पेंटिंग जो मेघदूत लिटरेचर है कालिदास का उसके ऊपर ली गई है। ठीक है? सो
इसमें एक यक्ष मेल फिगर को दिखाया गया है। आप देखें थोड़ा सा डिफरेंट ट्रीटमेंट ऑफ कलर है। मेल फिगर है। सिलड्रिकल बॉडी है।
ये क्लाउड्स हैं। अ ये देखें ना ये क्लाउड्स जा रहे हैं। ये वो हाथ से कुछ ताड़पत्रा पे लिख रहा है। पीछे ट्री है।
ये बर्ड्स हैं। सो इस तरह से एक एटमॉस्फेयर दिखाया गया है। यह पेंटिंग जो है ये उनकी मेघदूत सीरीज में से ली गई है।
उन्होंने एक पेंटिंग नहीं बनाई है। सीरीज़ ऑफ़ पेंटिंग्स आर देयर क्योंकि यह उनका फेवरेट सब्जेक्ट था। इसमें कम से कम
उन्होंने 50 टू 70 पेंटिंग्स बनाई हैं। इन दिस पेंटिंग अ हैंडसम मेल फिगर इज़ शोन सिंग ऑन द रॉक्स विथ द क्लाउड्स अराउंड
एंड इन अ वेरी इमोशनल मूड अह शोन विद टियर्स इन हिज़ आइज़ राइटिंग फीलिंग ऑन द रॉक विथ हिज़ राइट हैंड होल्डिंग अ वाइट
फ्लावर इन हिज़ लेफ्ट हैंड वेरी डेलिकेटली। दिस पेंटिंग इज डिप्टेड विद पेन ऑफ लव एंड सेपरेशन वि इज वेरी क्लियरली विज़िबल जो
उसके फेशियल एक्सप्रेशनंस हैं। हाफ क्लोज्ड आई हैं, थिन शेप्ड आर्म्स हैं, लॉन्ग टेपिंग फिंगर्स हैं व्हिच इज़ कॉमनली
सीन इन द ह्यूमन एनाटमी ऑफ़ बंगाल। इसी तरह का फिग्रेटिव वर्क वहां पे दिखाया जाता था। ग्रेसफुली कार्व्ड बॉडी बनाई गई है
यक्ष की। येलो कलर का उसको धोती पहने हुए और ऊपर से एक कपड़ा पहनाए हुए शोल्डर पे दिखाया है। फिगर इज़ वेयरिंग एयरिंग नेकलेस
ऑफ़ अ नेकलेस और इयरिंग पर्ल के पहने दिखाए हैं। बैकग्राउंड ऑफ़ पेंटिंग इज़ वेल कंपोज्ड विद डार्क ब्लू स्काई पीछे एंड द
फ्लाइंग बर्ड्स हट इज़ शोन बिहाइंड द क्लस्टर ऑफ़ ट्रीज़। के पीछे पेड़ों के पीछे एक हट भी दिखाई गई है। टू वेव्स लाइक
क्लाउड्स पेंटेड इन द स्काई स्वर्लिंग इंटू द कंपोज़शन फ्रॉम बैक एंड फ्रंट टुवर्ड्स ऑफ़ द क्र यक्षा। आगे और पीछे से
बादल जाते हुए दिखाए हैं। द कलर्स आर सॉफ्ट एंड लाइट गिविंग द पेंटिंग अ सबटल ग्लो। ह्यूमन फिगर इज़ ड्रॉन इन परफेक्ट
प्रोपोर्शन। सो बहुत परफेक्टली ये बनाई गई है पेंटिंग। अब हम आते हैं इसकी ह्यूमन लाइफ वैल्यू पे।
इमोशन ऑफ लोनलीनेस, इमोशन ऑफ लव, इमोशन ऑफ कमिटमेंट एंड फेथफुलनेस। सो जैसे उसके मास्टर ने उसको एग्जाइल दिया है तो उनकी
वो कमिटमेंट उसके लिए थी और वो उसके लिए वो अपनी सजा कर रहे हैं और बट फीलिंग ऑफ़ लव एंड सेपरेशन भी इसमें दिखाया है। सो,
यह ह्यूमन लाइफ वैल्यू में आ सकता है। अब ये था हमारा बंगाल जिसमें हमने पढ़ा कि क्यों इसकी जरूरत पड़ी बंगाल स्कूल को लाने
की? उसके क्या कैरेक्टरिस्टिक्स थे और कौन-कौन सी पेंटिंग्स थी। अब हम जल्दी से चलते हैं। कंट्रीब्यूशन ऑफ इंडियन
आर्टिस्ट इन द स्ट्रगल फॉर नेशनल फ्रीडम मूवमेंट। इस टॉपिक का मतलब ये है कि कौन से ऐसे कलाकार थे जिन्होंने नेशनल फ्रीडम
मूवमेंट में कंट्रीब्यूट करा या किस तरह से कंट्रीब्यूट किया है। तो पहली बात समझे यहां पे इस क्वेश्चन में बुक्स में बहुत
लंबा टेक्स्ट दे रखा है। लेकिन हमें सिर्फ ये पढ़ना है कि हमने ये समझना है कि इंडियन आर्ट जो था और ये जो आर्ट
मूवमेंट्स होती हैं या जो ये आर्ट होता है ये हमारी इमोशंस के साथ डायरेक्टली कनेक्टेड होता है। जैसे आप कोई भी मूवी
देखने जाते हैं तो नेशनल एंथम बजता है उससे पहले थिएटर्स में तो उस टाइम पे हमारे रोंगटे खड़े होते हैं। तो रोंगटे जो
खड़े हो जाते हैं तो हमारा एक इमोशनल कनेक्शन होता है ना एक पेट्रियोटिज्म की फीलिंग हम में आती है उस वक्त। सो सेम वे
इन आर्टिस्ट ने भी कुछ ऐसी पेंटिंग्स क्रिएट की जिस वजह से लोग उस मुहिम के साथ जुड़े। तो जो एक नेशनलिज्म की मूवमेंट चल
रही थी, स्वदेशी की मूवमेंट चल रही थी, उस अ उस भीड़ में, उस दौड़ में उसको सपोर्ट करें और लोग उस नेशनल फ्रीडम मूवमेंट में
उनका साथ दें। सो इसलिए कुछ आर्टिस्ट ने पेंटिंग्स बनाए। अब उनमें से हमने तीन-चार एग्जांपल्स देनी हैं और हल्का सा उसके
बारे में लिख के इस टॉपिक को खत्म करना है। तो, हम स्टार्टिंग करेंगे इस टॉपिक की। कंट्रीब्यूशन ऑफ़ इंडियन आर्टिस्ट इन द
स्ट्रगल फॉर नेशनल फ्रीडम मूवमेंट। इंडियन आर्टिस्ट प्लेड अ क्रूशियल रोल ड्यूरिंग द फ्रीडम मूवमेंट बाय यूजिंग देयर आर्ट टू
इंस्पायर पेट्रियोटिज्म। पेट्रियोटिज्म की भावना जगाने के लिए। रिफ्लेक्टिंग सोशल इशज़। क्या दिखाया उन्होंने कि उस वक्त
समाज में क्या चल रहा था? प्रमोट द एस्पिरेशन ऑफ़ द इंडियन पीपल। इन द एंड ऑफ़ 19थ एंड द बिगनिंग ऑफ़ 20थ सेंचुरी ब्रॉट
इट एन एक्सट्रीम फ़ज़ व्हिच इन्फ्लुएंस द एकज़िस्टिंग आर्टिस्ट आल्सो। दे टू चूज़ द फ्रीडम स्ट्रगल एज अ सब्जेक्ट ऑफ़ देयर
पेंटिंग एज अ काइंड ऑफ़ सर्विस ऑफ़ स्वदेशी। सो उन्होंने भी अपना फर्ज समझा इस मुहिम में अपना साथ देना एज़ अ नेशनल मूवमेंट।
देयर कंट्रीब्यूशन हेल्प्ड रेज़ अवेयरनेस, कल्टीवेट नेशनल प्राइड एंड एनकरेज कलेक्टिव एक्शन टुवर्ड्स इंडिपेंडेंस। अब
किस तरह से पहले आर्टिस्ट कौन से थे? अभिनंदनाथ टैगोर। जिन्होंने बंगाल स्कूल की शुरुआत करी। फाउंडर ऑफ बंगाल स्कूल
आर्ट इंडियन सोसाइटी ऑफ़ ओरिएंटल आर्ट्स क्रिएटेड फेमस पेंटिंग्स अ क्रिएटेड फेमस पेंटिंग भारत माता और यह पेंटिंग इतना
फेमस हुई थी ना कि कश्मीर से कन्याकुमारी तक इस पेंटिंग को लेके पैदल मार्च निकाला गया था डिपिक्टिंग इंडिया एज अ मदर गॉडेस
सिंबलाइजिंग हर एस्पिरेशन फॉर फ्रीडम भारत माता एज अ यंग वुमेन अब इसमें दिखाया क्या है भारत माता को एक यंग वुमेन समवन एट
ओरिजनेटर ऑफ द रोटी कपड़ा मकान थीम ऑफ लेटर इंडिया आपको शायद नहीं पता होगा लेकिन पुराने
उनसे पूछिएगा तो रोटी कपड़ा मकान एक ऐसा सिंबल और एक ऐसा थीम इंडिया में चला था कि जिसके ऊपर बहुत
काम और फ्रीडम मूवमेंट में बहुत काम किया गया था इस थीम के ऊपर इट शोड अ बंगाली पीज़ेंट वुमेन रेप्ड इन द सैफरन फ्रॉम हेड
टू टो ऊपर से नीचे एक रोप पहने हुए सैफरन दिखाया गया है विद फोर आर्म्स चार बाजुएं रिप्रेजेंटिंग इंडिया नीज़ अब एक में खाना
एक में क्लोथिंग एक में किताब और एक में रोज रोजरी रोजरी होती है वो माला है जो जप माला होती है ना उसको कहते हैं। हिज़ आर्ट
रिप्रेजेंटेड द इंडिया आइडिया ऑफ़ नर्चरिंग मदर सीकिंग लिबरेशन थ्रू हर चिल्ड्रन। सो ये अपने बच्चों से अपनी आजादी की मांग
कर रही है भारत माता। सो नेक्स्ट जो पेंटिंग है हमारी अमृता शेरगिल ने भी भारत माता बनाई। सो उनकी भारत माता भी बहुत
फेमस थी और उन्होंने भी अलग-अलग पेंटिंग्स के थ्रू कंट्रीब्यूट किया। उनका कंट्रीब्यूशन ये था कि उन्होंने विलेजर्स
और उस टाइम के रूलर जो इंडियन वुमेन की कंडीशन थी उनको अपनी पेंटिंग्स में दिखाया था। डिपिक्टिंग दिस डिपिक्टेड द स्ट्रगल
ऑफ़ रूरल वुमेन इन इंडिया इन हर पेंटिंग्स क्रिएटेड अ पेंटिंग शोल्ड अ पुअर पेशेंट वुमेन विद हर चिल्ड्रन हाईलाइटिंग द
सैडनेस एंड हारशियर रियलिटीज़ ऑफ़ पॉवर्टी कि उस वक्त का जो भुखमरी थी जो इतनी गरीबी थी उसके ऊपर उन्होंने वो उनकी दुर्दशा को
दिखाया था उन्होंने अपनी पेंटिंग्स में। फिर आते हैं पूर्ण घोष। इनकी भारत माता इन्होंने भी बनाई थी पूर्ण घोष ने। सो
इन्होंने जो वर्जन इनका भारत माता का था ना वो द्विजेंद्र लाल रॉय द्वारा जो लिखा गया एक भारत जननी सॉन्ग था उसके ऊपर यह
बेस्ड थी। और इलस्ट्रेशन बाय भारत माता। अब इस इलस्ट्रेशन में क्या दिखाया है? उनको एक ब्लू सी से उभरते हुए ऊपर सिर में
या क्राउनिंग ग्लोरी ऑफ़ हिमालय दिखाई है साथ में। ब्लू साड़ी पहने हैं। होल्डिंग अ शेफ ऑफ़ रिपन पेडी सिंबोलाइज़ इंडिया
एग्रीकल्चर। तो भारत के अह वो जो भूमि और एग्रीकल्चर उसके ऊपर इन्होंने ये दिखाया था। सो नेक्स्ट आते हैं नंदलाल बोस पे।
नंदलाल बोस ने भी बहुत काम किया है। जी क्रिएटेड अ फेमस लीनो कट प्रिंट ऑफ़ गांधी वॉकिंग विद हज़ विद अ स्टाफ व्हिच बिकम द
आइकॉनिक इमेज ऑफ़ नॉन वायलेंस मूवमेंट। जैसे दांडी मार्च का भी आपने देखा होगा वो जो एक है वो भी इन्हीं का है। सो ये गांधी
जी की इमेज भी इन्हीं की है। पेंटेड पोर्ट्रेट्स ऑफ़ नेशनल लीडर कंट्रीब्यूटेड टू इंपोर्ट कांग्रेस इवन बाय डेकोरेटिंग
देयर पंडाल। सो ये क्या करते थे कि जहां पे मीटिंग्स होती थी नेशनलिज्म से रिलेटेड या उस मूवमेंट से रिलेटेड वहां पे उन
पंडाल्स को सजाते थे। इस तरह की पेंटिंग्स लगाते थे कि लोग उसको देख के जैसे मैंने बोला इनकरेज्ड फील करें और उस मूवमेंट में
सपोर्ट करें। नेक्स्ट आते हैं गगनेंद्र नाथ टैगोर। गगनेंद्र नाथ टैगोर ने इनका जो फेमस है वो एक है कैरीिकचर अबाउट
जलियांवाला बाग। काम तो इन लोगों ने बहुत ज्यादा करा है बेटा। ऐसा नहीं है कि एक-एक पेंटिंग बना दी है। लेकिन क्योंकि हमें
क्वेश्चन उतना आना है। उसकी लेंथ हमारी उतनी है। तो हमारे सिलेबस में इतना है। सो इसलिए हम सिर्फ एक-एक में आर्ट वर्क बता
रही हूं। उसकी दो-दो लाइंस बता रही हूं। सो दैट आप सम अप करके उस क्वेश्चन को लिख के एज़ इट इज़ जा सकें। सो मेड अ कैरीिकचर
अबाउट द जलियांवाला बाग मसाकरे एफेसाइजिंग द ब्रूटल ट्रीटमेंट ऑफ इंडियास बाय द ब्रिटिशर्स। हज़ वर्क हाईलाइटेड द नीड ऑफ़
फ्रीडम एंड जस्टिस। नेक्स्ट हमारा है असित कुमार हलदर। असित कुमार हलदर डॉक्यूमेंटेड द केव आर्ट ऑफ़
अजंता एलोरा बाग। अब असित कुमार हलदर जैसे हमने नंदलाल बोस के बारे में पढ़ा था कि उन्होंने लेडी हरिंगम ने उनसे वह
पेंटिंग्स कॉपी कराई थी अजंता बाग की। तो इसी तरह असित कुमार हलदर ने भी वह सब काम किया था। सो हेल्पिंग अह टू ब्रिंग
एंशिएंट इंडिया आर्ट टू द वाइडर ऑडियंस। तो लोगों तक पहुंचाने के लिए उस काम कोबोरेटेड विद नंदलाल बोस एंड गेन सपोर्ट
फ्रॉम द पेट्रं्स लाइक रेली हरिंगम हु हेल्प प्रमोट देयर वर्क इन यूरोप। सो इनकी एग्िबिशन यूरोप में जाके लगी थी। इसके
अलावा विनोद बिहारी मुखर्जी एमए आर चुकतई बीरेश्वर सेन देवी प्रसाद रॉय चौधरी इनका नाम भी हम इस कंट्रीब्यूशन में रखेंगे इन
आर्टिस्ट का। पेंटेड वेरियस थीम रिलेटेड टू द स्ट्रगल अह फॉर इंडिपेंडेंस एंड देयर आर्ट वर्क ऑफन डिपिक्टेड सोशल अनरेस्ट एंड
इंस्पायर्ड द मासेस टू फाइट फॉर फ्रीडम। सो इतना ही हम कंट्रीब्यूशन ऑफ़ इंडियन आर्टिस्ट में लिख देंगे। लेकिन अगर आपको
अभिनंद्र नाथ टैगोर की कोई पेंटिंग जनरली आती है। सो हमने जर्नीज़ एंड लिखना है। तो बट अगर कंट्रीब्यूशन की बात पूछी जाती है
तो हम भारत माता उनकी पेंटिंग लिखेंगे। क्योंकि यही एक आर्टिस्ट हैं जिनके दोनों पेंटिंग्स अपने सिलेबस में हैं। सो अब
जल्दी से नेक्स्ट टॉपिक पढ़ते हैं। एववोल्यूशन ऑफ़ इंडियन आर्टिस्ट। अ इंडियन नेशनल फ्लैग। एवववोल्यूशन ऑफ़ इंडियन नेशनल
फ्लैग एंड इट्स सिंबॉलिक सिग्निफिकेंस। सो सबसे पहले हमारे सिलेबस में थ्री स्टेजेस हैं नेशनल फ्लैग की। 196, 1921 एंड 1947।
वेरी ईजी टॉपिक। अब आपको सिर्फ यह इमेज याद रखनी है। जैसे हम फ्लैग का जो प्रोपोर्शन है वह हमारा 3:2 में आता है। 3
मीटर लेंथ रहेगी तो विड्थ इसकी रहेगी 2 मीटर। सो फर्स्ट स्टेज हम पढ़ते हैं 196। अब इस स्टेज में आप देखें अगेन ट्राई कलर
है। ये देखें रेड, येलो, रेड, येलो, ग्रीन या ग्रीन, येलो, रेड अगर हम बात करें। फर्स्ट नेशनल फ्लैग वाज़ होस्टेड ऑन सेवंथ
अगस्त 196। अ मीटिंग ऑर्गेनाइज्ड बाय कांग्रेस कमेटी इन पारसी बेगन स्क्वायर अ पार्क ऑफ
कोलकाता। इट वाज़ कंपोज्ड ऑफ़ थ्री हॉरिजॉन्टल स्ट्रिप्स ऑफ ग्रीन, येलो एंड रेड कलर। अप्पर मोस्ट स्ट्रिप एट वाइट
लोटसेस जो एट प्रोविंसेस को रिप्रेजेंट करते हैं। मिडिल येलो स्ट्रिप वंदे मातरम इसमें लिखा गया है डार्क ब्लू कलर में और
लोअर रेड स्ट्रिप में एक तरफ हमारे पास सन है और एक तरफ क्रिसेंट मून दिखाया गया है। सो ये थी हमारी फर्स्ट स्टेज जिसमें तीन
रंग एट वाइट लोटसेस वंदे मातरम सन एंड मून। अब हम सेकंड स्टेज की तरफ चलते हैं। सेकंड स्टेज वाज़ प्रिपयर्ड बाय फ्रीडम
फाइटर नेम द पिंगल वेंकैया ऑफ़ आंध्र प्रदेश ड्यूरिंग द सेशन ऑफ इंडियन नेशनल कांग्रेस इन विजयवाड़ा इन 1921। अब इसमें
क्या है? अगेन तीन रंगों का यह फ्लैग है। लेकिन ओरिजिनली जो बनाया गया था वो दो रंगों से बनाया गया था। दिस फ्लैग वाज़ मेड
ऑफ़ टू कलर्स रेड एंड ग्रीन। पहले इसमें लाल और हरा ही था। रेड स्ट्रिप रिप्रेजेंट द हिंदू कम्युनिटी एंड ग्रीन स्ट्रिप्स
रिप्रेजेंट्स द मुस्लिम कम्युनिटी। लेकिन बाद में गांधी जी ने इस पे क्या किया था? एक एडिशन करा दी थी वाइट वाइट स्ट्रिप की
जो कि रिप्रेजेंटेशन था अदर कम्युनिटीज का। बाकी जितनी भी कम्युनिटीज़ भारत में थी। एंड चरखा इन द मिडिल विद ब्लू कलर
सिंबलाइज प्रोग्रेस ऑफ़ नेशन। और इसमें एक चरखा डाल दिया गया था। सो ये थी हमारी सेकंड स्टेज। अब आते हैं थर्ड स्टेज। मुझे
नहीं लगता इसके बारे में पढ़ाने की भी जरूरत है। ये करंट हमारा नेशनल फ्लैग है। सो ऑन जुलाई 2, 1947 अ न्यू फ्लैग ऑफ़ फ्री
इंडिया वाज़ होस्टेड व्हिच वाज़ रॉप्टेड बाय द कॉन्स्टिटुएंट असेंबली। द थॉट बिहाइंड इट्स मॉडिफिकेशन वाज़ टू मेक इट
एक्सेप्टेबल टू ऑल पार्टीज़ एंड कम्युनिटीज़। दिस फ्लैग मेड अप ऑफ़ थ्री प्रोपो प्रोपोर्शनल हॉरिजॉन्टल कलर्ड
स्लिप्स। अप्पर मोस्ट सैफरन देन वाइट देन ग्रीन। और बीच में इसके अशोक चक्र बनाया गया था। अब हम पढ़ते हैं इसका सिंबॉलिक
सिग्निफिकेंस कि इन रंगों का मतलब क्या था? यह बहुत बार एमसीक्यू में भी आ जाता है और टू मार्क्स के क्वेश्चन में भी आपको
क्वेश्चन आता है। सैफरन कलर इज़ द सिंबल ऑफ़ स्ट्रेंथ, करेज, सैक्रिफाइस। इट इज़ द कॉमन एंड रिलीज़ रिलीजियसली सिग्निफिकेंट कलर ऑफ़
द रिलेशन ऑफ़ हिंदू, बुद्धिस्ट, सिख एंड जैन। सब धर्मों में इस रंग की मान्यता है। वाइट कलर ट्रुथ ऑनेस्टी, प्योरिटी, पीस ऑफ
द नेशन। ग्रीन कलर, प्रोस्पेरिटी एंड हैप्पीनेस। फेथ का यह रिप्रेजेंटेशन है। फर्टिलिटी, ग्रोथ ग्रोथ एंड ऑस्पिशियसनेस
ऑफ़ द लैंड। धर्मचक, व्हील ऑफ़ कॉस्मिक लॉ। यह आपको पता है अशोक चक्रक में से जो सारनाथ का था उसमें से लिया गया है। हैज़
बीन टेकन फ्रॉम द सारनाथ पिलर ऑफ़ अशोका। इट स्टैंड कॉन्सेंट चेंज एंड डायनेम। डायनेमिज़्म। इट रिप्रेजेंट्स द कंटीन्यूअस
प्रोग्रेस ऑफ आवर कंट्री। आपको अगर एमसीक्यू में ये आता है अगर चेंज एंड डायनेमिज़्म आता है तो उसको टिक करना है।
अगर कंटीन्यूअस प्रोग्रेस ऑफ़ आवर कंट्री आता है तो आप उसको टिक कर जाइएगा। 24 स्पोक्स इन द सेंटर रिप्रेजेंट्स 24 आवर्स
ऑफ़ द होल डे। इट आल्सो रिप्रेजेंट्स 24 आवर कमिटमेंट टू द ड्यूटी। सो अभी तक हम कर चुके हैं बंगाल कंट्रीब्यूशन ऑफ इंडियन
आर्टिस्ट एंड एववोल्यूशन ऑफ इंडियन नेशनल फ्लैग। आई होप ये टॉपिक्स भी आपको क्लियर हो गए होंगे। सो नेक्स्ट हमारा सिर्फ
लास्ट टॉपिक रह गया है। दैट इज़ द मॉडर्न ट्रेंड्स इन इंडियन आर्ट। अब मॉडर्न ट्रेंड्स इन इंडियन आर्ट क्या है? कि
मॉडर्निज्म के जब शुरुआत हो गई तो खैर वो सब आपके सिलेबस में नहीं है कि कैसे आया, क्यों आया, क्या जरूरत पड़ी? सो वो हम भी
आपको नहीं इस वक्त कराएंगे। सो हम जल्दी से हमारे सिलेबस में कुछ पेंटिंग्स हैं जो मॉडर्न पेंटिंग्स हैं अ जिसमें चार
पेंटिंग्स हैं देन ग्राफिक प्रिंट्स हैं देन स्कल्प्चर्स हैं। सो वो तीनों हमको सेक्शंस करने हैं। तो जल्दी से हम
पेंटिंग्स की तरफ चलते हैं। सो फर्स्ट पेंटिंग इज़ दैट अगेन मैं यही कहूंगी ये जो आज जितने भी आर्ट वर्क्स हैं आप इनकी
पेंटिंग्स को इमेजेस को माइंड में रखिए। आप इमेजेस माइंड में रखेंगे तो आपको बहुत इजीली ये पेंटिंग्स याद हो जाएंगी। कोई
ऐसा नहीं है, मुश्किल नहीं है। कोई रट्टा मारने की ज़रूरत नहीं है। सो, फ़ पेंटिंग हम करते हैं। रामा वेंकुशिंग द प्राइड ऑफ़ द
ओशियन। अगर मुझे कोई पेंटिंग पेपर में नहीं भी आती है, तो हमें ध्यान से समझना है हम किस टॉपिक पे बात हो रही है। रामा
वेंकुशिंग द प्राइड ऑफ़ द ओशियन। रामचंद्र जी की बात हो रही है। तो ऑब्वियसली ये रिलीजियस पेंटिंग हो गई। रामायण पे बेस्ड
होगी। इतना तो हमें कॉमन सेंस है ना। इतना तो हमें पता होगा। सो आर्टिस्ट हैं इसके राजा रवि वर्मा। लेट
19 सेंचुरी का काम है। ऑयल कलर ऑन कैनवस पर यह पेंटिंग है और चित्रशाला मैसूर कर्नाटका में इसका कलेक्शन है। सो जैसे
थीम की हम बात करते हैं हर पेंटिंग में। तो पहला इसका जो थीम है, दिस पेंटिंग इज़ अ ब्यूटीफुल माइथोलॉजिकल ऑयल पेंटिंग। टेकन
फ्रॉम वाल्मीकि रामायण वेयर राम नीड्स टू बिल्ड अ ब्रिज्ड अह सेतु टू द आइलैंड ऑफ़ लंका फॉर हिज़ आर्मी टू क्रॉस द ओशियन। अब
रामा वेंकुशिंग द प्राइड ऑफ़ द ओशियन का मतलब है कि उनके ओशियन के या अह जो पानी के देवता थे उनके अहंकार को तोड़ना। सो
इसमें वो एपिसोड है जब वो लंका की तरफ जा रहे थे और उन्होंने एक सेतु बनाना था तो आपने यह सुना होगा कि वो सेतु वो जगह नहीं
दे रहे थे और बन नहीं पा रहा था। तो उस वक्त फिर रामचंद्र जी गुस्से में आए और उन्होंने अपना बो एंड एरो निकाल के बोला
कि आप हमें रास्ता दे रहे हैं या मैं अभी के अभी तीर मार के ये सारा ओशियन ही सुखा दूं। और उस वक्त यह जो एपिसोड है, यह अह
पेंटिंग है, बनाई गई है उस एपिसोड को लेके। और इसमें वरुण देवता भी उसमें माफ़ी मांग रहे हैं श्री रामचंद्र जी से। दिस
पेंटिंग डिपेक्ट्स रामा एंगर फॉर द ओशियन फॉर नॉट गिविंग हिम अ वे टू रीच लंका। सो, इस डिस्क्रिप्शन को अगर हम ध्यान से
देखें, आप पहले पेंटिंग को देखें। श्री रामचंद्र बने हैं। बो एंड एरो। यहां पे यह रोक रहे हैं कि मत करिए। और दो इनके साथ
में फिगर्स हैं। पानी देखें जैसे फ्रॉथ की तरह ऐसे टकराता हुआ पत्थरों से। अब अगर आप ड्रामेटिकली किसी चीज को देखें कि जब हम
माने कि हमें भगवान को गुस्सा आया है तो एक गुस्सा ड्रामेटिकली एक सीन में आप कैसे दिखाएंगे? किसी नाटक में आपको दिखाना हो
तो क्या करेंगे? यही कहते हैं ना हवा बहुत तेज से बहेगी, बिजली बहुत कौंधेगी? तो आप देखें सेम एलिमेंट्स उस पेंटिंग में दिखाए
गए हैं। क्यों दिखाए गए हैं? ताकि वह फीलिंग्स हम में आ सके। हम उस तरह से कनेक्ट कर सकें और हम यह समझ सकें कि उस
वक्त क्या दिखाने की कोशिश की गई है और वो किन फीलिंग्स को उन्होंने एक्सप्रेस करा है। सो देखें ये बिजली कौंध रही है, बादल
है, पानी तेज बह रहा है और इस तरह से यह पेंटिंग दिखाई गई है। रामा हैज़ बीन शोन इन वाइट धोती ऑन अ रॉक ऑफ द शोर नियर ओशियन,
एंग्री मूड होल्डिंग अ बो इन हिज़ लेफ्ट हैंड एंड एरो इन हिज़ राइट हैंड। वांट्स द ओशियन टू इरेडिकेट दैट। उनको बोला जा रहा
है कि भाई हमें रास्ता दे दें। एंग्री राम इज़ स्टैंडिंग स्टर्नली। बहुत यूं कड़क खड़े हैं। हिज फेस शोन इन प्रोफाइल विद आइज
पपिंग आउट। गुस्से में आंखें बाहर बल्जिंग आउट करती हुई दिखाई हैं। बोल्ट ऑफ लाइटनिंग इन द डार्क क्लाउड स्काई
एनहांसेस द इफ़ेक्ट ऑफ़ द अपकमिंग रेज ऑफ़ रामा। उनका भगवान का गुस्सा दिखाने के लिए। रामा क्लोथ्स आर फ्लटरिंग टू शो द
स्ट्रेंथ ऑफ़ द विंड। मतलब हवाओं का रुख दिखाने के लिए देखें कपड़े भी उड़ते हुए दिखाए हैं। वरना कैसे सीन में पता चलेगा
कि हवा चल रही है। द वेव्स हिटिंग द रक्स एट द शोर वेयर रामा स्टैंड फ्रॉम अ फॉर्म्स अ थिक फॉर्म। ये जोर से पानी
टकराता हुआ है। एंग्री राम इज़ स्टैंडिंग स्टर्नली। हिज़ फेस शोन इन प्रोफाइल विद आइज पपिंग आउट। थ्री फिगर्स कैन बी सीन इन
द मिडिल ऑफ़ द डिस्टेंस वेव्स लॉर्ड वरुणा। रिप्रेजेंट द लार्ज फिगर इन द सेंटर। यह जो सेंटर में है लॉर्ड वरुण की पेंटिंग
है। इज़ शोन रेज़िंग बोथ हैंड्स रिक्वेस्टिंग हिम नॉट टू ड्राई द ओशियन। उनको कह रहे हैं कि हम रास्ता देते हैं।
आप प्लीज ऐसा मत करें। राजा रवि वर्मा वाज़ वन ऑफ़ द फर्स्ट इंडियन पेंटर टू यूज़ ऑयल पेंट्स। तो, यह पहले कलाकार थे जिन्होंने
ऑयल पेंट यूज़ किया है क्योंकि ऑयल पेंटिंग यूरोपियन टेक्निक है। इंडियन नहीं थी। एंड मास्टर द आर्ट ऑफ़ लिथोग्राफिक रिप्रोडक्शन
ऑफ़ माइथोलॉजिकल सब्जेक्ट्स। द पेंटिंग मेनिफेट्स द इफेक्ट ऑफ लाइट एंड शैडो क्वालिटीज ऑफ यूरोपियन स्टाइल ऑफ आर्ट। सो
अगर हम इसको ध्यान से देखें तो अगर आप फीचर्स भी देखें ना थोड़े यूरोपियन दिखते हैं। ट्रीटमेंट ऑफ़ द बॉडी कलर द कलर यूज़्ड
इन द पेंटिंग आर सूदिंग। द कंपोज़िशन इज़ वेल बैलेंस्ड एंड डायनेमिक। नेचुरल एलिमेंट्स आर आल्सो यूज़्ड टू अह टू पोट्रे
द कॉनसेप्ट एग्ज़ांपल लाइटनिंग, स्ट्रांग विंड एटसेट्रा लाइन फॉर्म प्रोपोर्शंस आर इंप्रेसिव। सो ह्यूमन लाइफ वैल्यू की बात
करें ऑलवेज डेमोंस्ट्रेट ह्यूमिलिटी एबिलिटी टू टेक एंड एग्जीक्यूट हार्ड डिसीजन इफ समबडी स्टॉप्स यू टेकिंग फॉर
टेकिंग द राइट पाथ। तो उस वे में भी आप इस पेंटिंग को लिख के जा सकते हैं कि अगर कोई आपको रास्ता आपका रोके और आप सही रास्ते
पे हैं तो उसका डट के मुकाबला करें। और यह बहुत सिंपल एक पेंटिंग है। ब्यूटीफुल वर्क। नेक्स्ट इज़ अ मदर एंड चाइल्ड। सो
फर्स्ट पेंटिंग में अगर हमें स्टेटमेंट बेस्ड क्वेश्चन आता है ना इस पेंटिंग में तो हमें क्या पूछा जाएगा कि माइथोलॉजी पे
या कुछ ऐसा जिस पे यूरोपियन इफेक्ट या ऑयल पेंटिंग जो राजा रवि वर्मा की है उसके बारे में लिख के जाएं। ठीक है? सेकंड
पेंटिंग जो है ना इसमें भी एक स्पेशल फीचर है। जामिनी रॉय की ये पेंटिंग है। वाटर कलर टेंपरा की ये पेंटिंग है। नेशनल गैलरी
ऑफ़ मॉडर्न आर्ट। सो, यह भी एक टाइमलेस पेंटिंग है। बहुत खूबसूरत सब्जेक्ट है। मदर एंड चाइल्ड। और
एक्सप्रेशन पेंटिंग इज एन एक्सप्रेशन ऑफ अनकंडीशनल लव ऑफ द मदर फॉर हर चाइल्ड। बट ये जो इसका फेमस एक चीज है ना आप स्टाइल
देखें इस पेंटिंग का। स्टाइल थोड़ा डिफरेंट है। बोल्ड लाइंस है, मोटी लाइंस हैं और एक कप शेप्ड फेसेस है। तो कहीं से ही
इंस्पायर्ड लगती है। तो बंगाल फोर कार्ड से इंस्पायर्ड है यह पेंटिंग। सो अगर हमें कहीं पे ऐसा वर्ड आता है कि वो कार्ड से
इंस्पायर्ड एक पेंटिंग बताएं तो वो हम इसमें मदर एंड चाइल्ड जामिनी रॉय के लिख के जाएंगे। सो वर्टिकल पेंटिंग है।
डिस्क्रिप्शन जल्दी से पढ़ लेते हैं। मदर इज़ शोन स्टैंडिंग एंड रिदमिक पोश्चर होल्डिंग हर बेबी इन हर लैप। मदरस हेड इज़
टिल्टेड टुवर्ड्स द चाइल्ड। इस तरफ थोड़ा सा टिल्ट हुआ हुआ है। होल्डिंग हर चाइल्ड विद हर लेफ्ट हैंड लेफ्ट साइड ऑफ़ हर
वेस्ट। अह फसेस आर कप शेप्ड। आईज आर इलोंगेटेड स्टाइलाइज्ड इन्फ्लुएंस्ड ऑफ़ पाल स्कूल ऑफ ईस्टर्न इंडिया। उस तरह का
काम हमें पाल स्कूल की तरह फीचर्स दिखते हैं। चाइल्ड आल्सो हैज़ सिमिलर आइज़ विद थिक आइब्रोज़। सो थिक आइब्रोज़ इसमें दिखाए हैं।
इनफिनिट लव बिटवीन मदर एंड हर चाइल्ड हैज़ बीन शोन। बन दिखाया है मदर के हेड में। चाइल्ड आल्सो हैड अ लिटिल बन। ऊपर दिखाया
है। मदर इज़ वेयरिंग अ साड़ी। चाइल्ड इज़ नेकेड। साड़ी हैज़ अ सिंगल लाइन बॉर्डर वेरी सिंपल इन डिज़ बैकग्राउंड फोक मोटिव्स
डिपिक्ट द सिंपलीसिटी ऑफ रूरल लाइफ वन साइड वी कैन सी अ प्लांट लाइक स्ट्रक्चर मेड अप ऑफ ओनली लाइंस। अब देखें अगर ये
सनफ्लावर भी दिखाया है तो किस तरह से जस्ट लाइंस में दिखाया है। ये सिंपलीसिटी ये मॉडर्न मूवमेंट के कैरेक्टरिस्टिक्स हैं
कि दिखाना चाहा है लेकिन सिंबॉलिकली दिखाया है। ये स्टाइल है उनका दिखाने का। द डेकोरेशन फोक मोटिव शो दैट दे हैव बीन
हैवली इन्फ्लुएंस्ड बाय बंगाल फोक ट्रेडिशन जो मैं पॉइंट कह रही थी आपसे कलर स्कीम इज़ अर्दी बट ग्लोइंग अर्दी है बट
ऐसा नहीं है कि डल है ये पेंटिंग मोस्टली इंडियन रेड येलो ऑकर ग्रीन ग्रे वर्मिलियन ब्लू लम ब्लैक हैज़ बीन यूज़्ड ब्यूटीफुली
लाइंस आर वेरी शार्प थिक एंड फुली एक्सप्रेसिव सो बंगाल फोक से ये इंस्पायर्ड है पेंटिंग थिक लाइंस हैं
सिंपल पेंटिंग है लाइंस के थ्रू ज्यादा प्ले किया गया है और अर्दी कलर में यह पेंटिंग मदर एंड चाइल्ड दिखाई गई है।
नेक्स्ट है हल्दी ग्राइंडर्स। अमृता शेरगिल का हम ऑलरेडी कंट्रीब्यूशन ऑफ इंडियन आर्टिस्ट में पढ़ चुके हैं कि
इन्होंने रूरल इमेज विलेजर्स के ऊपर फीमेल्स के ऊपर बहुत काम किया था। उनकी कंडीशंस को दिखाया सर। तो यह ऐसी आर्टिस्ट
हैं जिनके फादर जो जाट सिख थे पंजाबी और माता हंगेरियन थी और इन्होंने इंडिया में आके बहुत इंडियन पेंटिंग्स और इंडियन
वुमेन की कंडीशंस पे बहुत काम किया था। सो अगर ऐसी कोई स्टेटमेंट आती है तो अमृता शेरगिल की बात हो रही है। अगर कुछ ऐसा
स्टेटमेंट आता है कि जो घर के काम करती हुई कामकाजी महिलाओं को दिखाया गया है तो अमृता शेरगिल की आप बात समझ जाइएगा कि
उन्होंने उनकी पेंटिंग की बात हो रही है। हल्दी ग्राइंडर नॉर्मल सा स्पाइस अपने वेरीेंट स्पाइस ऑफ इंडियन किचन। सो उसके
ऊपर ये पेंटिंग बनी है। हल्दी ग्राइंडर जो टर्मरिक की बात है उसको पीसते हुए। अमृता शेरगिल आर्टिस्ट हैं। मॉडर्न पेंटिंग है।
ऑयल ऑन कैनवस है। नेशनल गैलरी ऑफ़ मॉडर्न आर्ट न्यू दिल्ली है। सो 1940 टाइम याद रहे तो करिए। नहीं याद रहता है तो मत
लिखिएगा। थीम एंड सब्जेक्ट मैटर। पेंटिंग इज़ अ ऑनेस्ट पोर्ट्रेल ऑफ़ डोमेस्टिक इंडियन हाउसहोल्ड शोज़ वुमेन डूइंग अ रूटीन
कोर ऑफ़ ग्राइंडिंग टर्मरिक कॉमन स्पाइस यूज़्ड इन एव्री इंडियन कज़न। सो यह नॉर्मल उनका रूटीन वर्क था जो वो करते हुए दिखाई
हैं। बट इसमें दिखाया क्या गया है? ध्यान से देखना जो लेडी इतना खूबसूरती से कलर कॉम्बिनेशन आपके सिलेबस में तो खैर यही एक
पेंटिंग है। लेकिन अगर आप अमृता शेरगिल का काम देखें तो आप हैरान हो जाएंगे कि जितना रियलिज्म में ये काम इन्होंने करा है। बट
स्टिल फेसेस इन्होंने यहां पे फ्लैट दिखाए हैं। क्यों फ्लैट दिखाए हैं? वो ये सिंबल सिंबॉलिज्म था कि इनका फ्यूचर डार्क में
है। ये अपने कामों में मस्त हैं। कोई इनको नहीं है कि हमको कुछ करना है, बढ़ना है, ऐसा कुछ नहीं है। जो इनको काम दे दिया गया
है, उस काम में ये सेटिस्फाइड हैं। बट फसेस इसीलिए ये इसमें लॉस्ट हैं और मतलब फ्लैट दिखाए गए हैं।
हियर वी सी द व्यू थ्रू द अह थ्रू टू ट्री ट्रंक्स दैट फ्रेम द मेन फिगर टू ब्रिंग देम इंटू फोकस। सब ये और ये ये देखें ट्री
ट्रंक हैं और इसके बीच में ये सारी कंपोज़शन सेट है। अब इसमें है अ टू वुमेन कवर्ड हेड सिंग इन
प्रोफाइल ग्राइंडिंग अ स्टोन ग्राइंडर दैट इज़ ऑपरेटेड मैनुअली इन अ ट्रेडिशनल स्टाइल। ये दो फिगर्स फीमेल्स बैठी हैं।
थ्री फिगर्स आर देयर इन द सेंटर ऑफ़ द पिक्चर। सिंग इन द प्रोफाइल। यह तीन का ग्रुप है। फोर्थ वुमेन हेड इज़ विज़िबल।
पीछे है जिसने ऐसे सिर पे हाथ रखा हुआ है। आपको दिख रहा होगा ट्रीट रंग के पीछे अ व्हिच इज़ व्हील्ड एंड अनक्लियर है। द साड़ी
वर्न बाय द लेडीज़ आर ब्राइट येलो रेड वाइट कलर कलर्स। तो ब्राइट है कपड़ों के। वेयर एज़ द ज्वेलरी वर्न इन देयर फीट इज़ शोन इन
डिटेल। पैरों की ये ज्वेलरी देखें। यह भी बहुत डिटेल में दिखाई गई है। देयर हेड हेड्स आर कवर्ड एंड फसेस आर
डार्क विद नो एफेसिस ऑन फेशियल फीचर एंड एक्सप्रेशन। वेयर ऐज़ द ज्वेलरी बोन इन देयर फीट इज़ शोन इन डिटेल। अब देखिए
ज्वेलरी को इतना डिटेल में दिखा दिया गया लेकिन फसेस के एक्सप्रेशनंस नहीं दिखाए हैं उन्होंने। द बैकग्राउंड इज़ डार्क
ब्रिंग ऑल द फोकस ऑन द फिगर इन फ्रंट। ये डार्क इसीलिए रखा गया कि फोकस इसमें आए। यह हाईलाइट होके जाएं पेंटिंग्स जिसको हम
एफेसिस कहते हैं अपने आर्ट की टर्मिनोलॉजी में। कंट्रास्ट ऑफ़ डार्क एंड ब्राइट। होल पिक्चर रिप्रेजेंट्स द एक्चुअल सेटिंग ऑफ़
अ विलेज हाउसहोल्ड एंड द लाइफ ऑफ़ रूरल इंडियन हाउसहोल्ड वुमेन। उस वक्त जो था द कलर्स आर फ्लैट एंड अर्दी इंटेंस रेड ऑकर
ब्राउन येलो ग्रीन द फीमेल फॉर्म्स आर सिंपलीफाइड एंड एब्स्ट्रैक्ट एब्स्ट्रैक्ट क्या होता है कि थोड़ा सा और
मिनिमल उसमें दिखाना और सिंपलीफाइड वे में आगे जाना एंड मॉडर्न स्टाइल में दिखाई गई हैं विद शी ब्रॉट विद हरसेल्फ थ्रू फॉरेन
अपब्रिंगिंग एंड ट्रेनिंग क्योंकि इन्होंने फॉरेन आर्टिस्ट से भी ट्रेनिंग ली थी और फिर यहां आके इन्होंने काम किया
था। द इन्फ्लुएंस ऑफ़ बसौली पेंटिंग्स एंड अदर मिनिएचर ट्रेडिशन इज़ क्वाइट विज़िबल इन द यूज़ ऑफ़ कलर इन हर वर्क स्पेशली द डिटेल
ऑफ लीव्स। पीछे पत्ते-वत्ते सब मिनिएचर स्टाइल में बनाए गए हैं। जिसमें से राजपूताना या पहाड़ी मिनिएचर्स की झलक
हमें दिखती है। सो, यह है हल्दी ग्राइंडर पेंटिंग जिसमें तीन फिगर्स फ्रंट में है ट्रायंगुलर पोज़ में और एक पीछे लेडी दिखाई
गई है। ट्री ट्रंक के बीच में से यह कंपोज़िशन सेट करी गई है। ब्राइट कलर्स हैं। बट बैकग्राउंड बहुत डार्क दिया गया
है। सो दैट उसके एम्फेसिस जो है मेन फिगर्स पर ही रहे। सिंपल लिविंग एंड हार्ड वर्क। हार्ड वर्किंग। तो यह थी फीमेल्स।
हां जी। हमारी नेक्स्ट पेंटिंग है मदर टेरेसा बाय एमएफ हुसैन टाइम पीरियड 1980 एडी अह पीरियड मॉडर्न मीडियम ऑयल ऑन कैनवस
कुछ इनकी पेंटिंग्स एक्रेलिक में भी हैं कुछ वाटर में भी हैं। सो करसी नेशनल गैलरी ऑफ़ मॉडर्न आर्ट न्यू दिल्ली। सो ये बहुत
फेमस पेंटिंग है मदर टेरेसा और इनका फेवरेट सब्जेक्ट था जिस पे इन्होंने बहुत सी पेंटिंग्स बनाई हैं। और इसमें वो कहते
हैं कि वो एक ट्रिब्यूट दे रहे हैं इस लेडी को कि जो जिन्होंने हु सर्व्ड द पुअर एंड होमलेस। सो इनके ऊपर उन्होंने ये
पेंटिंग बनाई। सो जल्दी से चलते हैं डिस्क्रिप्शन की तरफ। इट इज अ हॉरिजॉन्टल कंपोजिशन एंड डिवाइडेड इनू थ्री पार्ट्स
बाय टू अनइवन वर्टिकल पिलर्स। सो यहां पे दो पिलर्स दिखाए गए हैं। द कलर्स ऑफ द पिलर्स आर येलो एंड लाइट ब्राउन जो दिख
रहे हैं सेंटर में आपको। ऑन द लेफ्ट साइड मदर इज़ सीन टेकिंग केयर ऑफ़ एन इनफेंट ऑन हर लेफ्ट। सो पहली जो फिगर है उसने एक
छोटा बच्चा हाथ में पकड़ा है। सेंट्रल फिगर जो सीटेड मदर है उसमें एक बड़ा आदमी हेल्पलेस सिक मैन इंडियन रेड कलर में
हॉरिजॉन्टली रेस्टिंग उनके लैप में रेस्ट करते हुए दिखाया है। मदर रे हर राइट हैंड इंडिकेटिंग ब्लेसिंग जेस्चर। अब आप देखें
कि हमारे हिंदू माइथोलॉजी में भी जब भी किसी को आशीर्वाद देते हैं तो अभय मुद्रा हाथ ब्लेसिंग्स देते हुए तो उसी तरह यह भी
ब्लेसिंग्स दे रही हैं उसको। बिहाइंड द मदर हेड देयर इज़ अनदर साड़ी क्लैड हेड विद नो ब्लू बॉर्डर। अब ये जो लेडी थी ना जो
मे बीच की लेडी है उनका ब्लू बॉर्डर दिखाया गया है। वाइट साड़ी है जिससे पता चलता है कि वो मदर टेरेसा है और उसके साथ
जो है वो भी साड़ी पहनी है बट उनका ब्लू बॉर्डर नहीं है। सो ये रिप्रेजेंटेशन हो सकता है दूसरी नंस का। इट कुड बी अ सिंबल
ऑफ़ अदर नंस। अ सिंबल ऑफ़ अदर नंस हु डिड सिमिलर वर्क फॉर द पुअर एंड नीडी। इन द थर्ड पार्ट अनदर नीलिंग फिगर ऑफ अ वुमेन
इज़ शोन टचिंग द आर्म ऑफ अ सिक मैन। सो जो तीसरी फिगर यहां पे एक लेडी बैठी हुई है साइड पे उसने उसकी आर्म को पकड़े हुए सिक
मैन की आर्म को पकड़े हुए हाथ लगाते हुए दिखाया है। दिस पेंटिंग डिपिक्ट्स मदर टेरेसा इन अ सिंबॉलिक रिप्रेजेंटेशन। अब
ये लाइन को ध्यान से समझिएगा। ड्रेप्ड इन वाइट साड़ी विद ब्लू बॉर्डर टू एस्टैब्लिश हर यूनिवर्सल मददहुड फॉर व्हिच कास्ट कलर
एंड रिलजन इज़ नॉटेंट। तो वाइट साड़ी में ब्लू बॉर्डर दिखाया गया है। जिनके लिए कास्ट, कलर, रिलजन कोई मैटर नहीं करता है
और इनका फेस नहीं दिखाया गया। जहां एक आदमी इतना रियलिज्म बना सकता है। अगेन वही बात आई कि उन्होंने चेहरा नहीं दिखाया
क्योंकि वो उनके कैरेक्टर को हाईलाइट करना चाह रहे थे। उनकी शक्ल को नहीं। तो मदर टेरेसा अपने आप में एक कैरेक्टर है। वो
कैरेक्टर उनकी पहचान है। सो दिस पेंटिंग शोज़ द सेल्फलेस एंड एजलेस पर्सन। ह्यूमन लाइफ वैल्यू है अनकंडीशनल लव एंड केयर फॉर
पुअर एंड एस्टट्यूट्स। सेल्फलेस सर्विस फॉर पुअर एंड नीडी एंड राइज अबव रिलजन एंड वर्क फॉर द वेलफेयर ऑफ द सोसाइटी।
सो नेक्स्ट हमारे आते हैं स्कल्प्चर्स। अब हम पार्ट बी की तरफ। मॉडर्न ट्रेंड्स इन इंडियन आर्ट में पार्ट बी हम करते हैं
मॉडर्न स्कल्प्चर्स। अब ये भी चार स्कल्प्चर्स अपने सिलेबस में हैं। सबसे पहले तो इनके थीम्स याद कर लें कि किस-किस
टॉपिक पर हमें ये स्कल्प्चर्स हैं हमारे सिलेबस में। सो फर्स्ट जो स्कल्प्चर है ट्रफ ऑफ लेबर श्रम पर विजय तो ये लेबरर्स
के ऊपर बनाया गया है और उनके लिए डेडिकेटेड था ये स्कल्प्चर और ट्रफ ऑफ लेबर डीपी रॉय चौधरी का है ब्रोंज़ एंड
सीमेंट में है। अब ये क्यों इसका कर्टसी दो जगह है क्योंकि इसका एक रेप्लिका दो सेम स्कल्प्चर्स बने हैं। एक तो है नेशनल
गैलरी ऑफ़ मॉडर्न आर्ट न्यू दिल्ली में और एक है मैरीना बीच चेन्नई में। सो एक ब्रोंज़ का है जो मैरीना बी चेन्नई में है
और एक सीमेंट का है जो नेशनल गैलरी ऑफ़ मॉडर्न आर्ट न्यू दिल्ली में है। ट्रफ ऑफ़ लेबर स्कल्प्चर रिप्रेजेंट लेबरर्स एंड
वर्क एंड ह्यूमन स्पिरिट व्हिच ट्रफ्स ओवर हार्डशिप विद यूनिटी। दिस स्कल्प्चर आल्सो मार्क्स द सेलिब्रेशन ऑफ़ लेबर डे ऑन
फर्स्ट मई एव्री ईयर। अब यह ध्यान से देखें। बहुत ही खूबसूरत स्कल्प्चर है। स्कल्प्चर बनाने में भी मेहनत लगता है। सो
बहुत अच्छा चीज़ कार्विंग करी गई है। इनके आप बुक्स में भी देख पा रहे होंगे। सो जो ह्यूमन एनाटमी है जिस तरह से वो मसल्स
जैसे हम जोर लगा रहे हैं आपको वो जोर लगता हुआ दिख रहा होगा। जिस तरह से ये कॉम्पोज़िशन सेट करी गई है या पूरी फिगर्स
आप फिगर्स को देखें। इसका हेड जैसे एकदम जोर लगाते हुए गर्दन ऊपर उठी हुई है और ब्लॉक को हटा रहे हैं। सो बहुत कमाल का
काम है इसमें। अब डिस्क्रिप्शन पढ़ें। शोज़ फोर मैन ट्राइंग टू मूव ए रॉक। एक पत्थर को हटाते दिखाए हैं। रेंडरिंग देंस एंड
कंट्रीब्यूशन ऑफ़ ह्यूमन लेबर इन नेशन बिल्डिंग। सो, इन्होंने यह बताया है नेशन बिल्डिंग में इन लेबर का कितना रोल है।
सो, उनकोेंस देने के लिए उनके लिए डेडिकेट किया गया था। इट ड्रॉस आवर अटेंशन टुवर्ड्स द हार्ड फिजिकल वर्क ऑफ द लेबर
क्लास। सो ये जितनी मेहनत करते हैं ना उसके लिए इनको ये अह बताया गया है इस स्कल्प्चर में। देयर स्ट्रेंथ एंड एफर्ट
कैन बी फेल्ट थ्रू देयर एक्शन स्ट्रेंड बॉडी मसल। मतलब हमें ये फील हो पा रही है चीजें। जिस तरह से इनका मसल्स ये दिखाए गए
हैं बॉडी का। यह देखें जरा। दीज़ लेबर्स आर ड्रेस्ड इन लायन क्लॉथ विद टू ऑफ़ देम कवरिंग देयर हेड विद अ पीस ऑफ़
क्लॉथ। टू आर बेंट फॉरवर्ड अप्लाइंग फोर्स विद देयर हैंड्स व्हाइल द अदर टू आर यूजिंग द वुडन लॉक टू पुल द बोल्डर अवे
फ्रॉम इट्स बेस जो जिस तरह से ये कंपोज़शन सेट की गई है जिस-जिस की जोज पोजीशन है फिर वो आप लिख देंगे कि इस इस तरह से ये
दिखाए गए हैं दो को इस तरह से दो को इस तरह से दिस इज़ अ स्प्लेंडेड स्कल्प्चर डिपिक्ट्स अ इंस्पायरिंग एग्जांपल ऑफ़ टीम
वर्क ऑफ़ लेबर्स एग्रोस्ड इन द स्ट्रेनस वर्क। अब आप देखें कि मिलके ही किसी ना किसी इसका निकलता है ना अकेले तो कोई भी
इतना बड़ा पत्थर नहीं हिला पाएगा। तो एक तरह से इसमें अगर हम ह्यूमन लाइफ वैल्यू की बात करें तो यूनिटी स्ट्रेंथ की भी बात
आती है। टीम मैनेजमेंट की भी बात आती है। एक ग्रुपिज्म ग्रुपिज्म तो गलत वर्ड हो जाएगा। मतलब टीम स्पिरिट की बात इसमें आती
है। दिस स्टैचू डिपिक्ट द डिग्निटी ट्रफ ऑफ़ लेबर एक्लीफाइज़ द सोल एंड स्वेट ऑफ़ ब्लैक बैक ब्रेकिंग एफर्ट। यूनिटी इन
स्ट्रेंथ टीम वर्क एंड कोऑर्डिनेशन विन ओवर द इंपॉसिबल। सो ये भी आप इसमें लिख के जा सकते हैं। सो नेक्स्ट हमारा है सांथल
फैमिली रामकिकर वेज सीमेंट एंड कंक्रीट कला भवन शांतिनिकेतन में ये स्कल्प्चर है। अब ये हम मानते हैं कि एब्स्ट्रैक्ट या
मॉडर्न स्कल्प्चर्स का पहला या कुछ पहलुओं में से यह पहला स्कल्प्चर था। मतलब स्टार्टिंग का स्कल्प्चर जिन्होंने
मॉडर्निज्म की नींव रखी थी। सो ये बहुत लंबी फिगर्स इसमें दिखाई गई हैं। सीमेंट एंड कंक्रीट से इनकी बॉडीज रफ दिखाई गई
हैं। जो उनकी लाइफ की हार्डशिप है उसको रिप्रेजेंट करने के लिए उनके जीवन की मुश्किलों को इस मटेरियल से दिखाया गया
है। सो इसमें भी अगर हम सब्जेक्ट में देखें संथाल फैमिली संथाल ये फैमिलीज़ वो हैं जैसे जिप्सिस होते हैं ना या खानाबदोश
जो इधर से उधर घूम रहे होते हैं थोड़े काम के लिए या कहीं-कहीं जाके फिर कुछ दिन यहां रहते हैं फिर आगे चले जाते हैं। सो
उस तरह का ये दिया गया है। सो आउटडोर स्कल्प्चर है पुअर फैमिली का माइग्रेटिंग विद देयर बिलॉन्गिंग्स टू अनदर लोकेशन इन
सर्च ऑफ़ वर्क। मतलब कहीं और काम की खोज में जाने के लिए माइग्रेट कर रहे हैं। सो ध्यान से देखें किस तरह से रफ फिगर्स
दिखाई गई हैं। यह एक बंगी या जो जिस पे हम कहते हैं कि इस तरह से वुडन वो दिखाते हैं ना बमबू स्टिक्स में ऐसे
तो वो एक रखा हुआ जा रहे हैं। इट शोज़ अ सीन ऑफ़ संथाल मैन कैरिंग हज़ चिल्ड्रन डबल बास्केट जॉइ बाय अ पोल एंड हिज वाइफ डॉग
वॉकिंग अलोंग साइड। अब कौन-कौन है? एक तो यह आदमी है जिसने एक बग्गी सी उठाई है। बेंगी कहते हैं या जो भी वो जिसमें जैसे
दोनों तरफ ऐसे बमबू स्टिक से बने होते हैं ना टोकरियां लगी होती हैं आगे और पीछे और उसमें एक बच्चा बिठाया है। एक वाइफ है
उसकी और साथ में यह डॉग है। द मैन इज़ लिफ्टिंग अ बेंगी ऑन हज़ शोल्डर मेड फॉर द पर्पस ऑफ़ कैरिंग लोड्स। मतलब अपना सामान
उठाने के लिए। लविंगली प्लेस्ड हज़ बेबी। अपने बच्चे को बिठाया है फ्रंट स्केल पैन में इस्टैब्लिश बैलेंस। द वुमेन इज़ वॉकिंग
बसाइड द मैन एंड हैज़ अ लोड ऑन हर हेड। सिर पे उसने कुछ सामान रखा है। होल्डिंग अ चाइल्ड टू द लेफ्ट साइड। एक बच्चा उस लेडी
ने अपने दाई बाई तरफ पकड़ा है। इट इज़ एविडेंट फ्रॉम द इनसफिशिएंट बॉडी क्लिंग क्लोथ्स एंड लिटल लगेज दैट दे आर
एक्सट्रीमली पुअर। सो, यह भी पॉवर्टी के ऊपर स्कल्प्चर है। तो, इसमें आपको दिख रहा है कि गरीबी है। बिल्कुल मिनिमल सामान है।
कुछ है ही नहीं इन लोगों के पास। द मैन इज़ वेयरिंग अ रोल्ड अप गमछा। उसने सिर पे बांधा है।
लेडी ने एक मैट सी अपने टॉप बास्केट में डाल रखी है। फोल्ड करके। स्कल्प्चर इज प्लेस्ड ऑन अ लो पेडेस्टल मेकिंग अस फील
एज वी आर द पार्ट ऑफ़ द सेम स्पेस। नीचे एक पेडेस्टल पे बनाया गया है। सिग्निफिकेंस ऑफ़ दिस वर्क इज़ दैट इज़ इट इज़ रिगार्डेड ऐज़
द फर्स्ट पब्लिक मॉडर्निस्ट स्कल्प्चर इन इंडिया। यह भी स्टेटमेंट को थोड़ा माइंड में
रखिएगा। द आर्टिस्ट हैज़ अवॉयडेड ट्रेडिशनल मीडियम लाइक मार्बल, वुड, स्टोन एंड प्रेफर
सीमेंट एंड द सिंबल ऑफ मॉडर्नाइजेशन। तो इसने बाकी मार्बल वार्ब का यूज़ नहीं किया है। आप देखिए मटेरियल भी कौन सा यूज़ किया
है जो बिल्कुल आसपास मिलने वाला और सीमेंट कंक्रीट और पेबल्स से उसने यह बनाया है। द फिगर टेक्सचर बॉडी हैव अ सिंबॉलिक
सिग्निफिकेंस कंट्रास्ट विद द सराउंडिंग एनवायरमेंट एज़ वेल। क्योंकि कंट्रास्ट हम कैसे समझा पा रहे हैं? जैसे इसकी बॉडीज़ तो
बहुत रफ हैं। बट पीछे बड़ा एक शांत एनवायरमेंट है। ग्रीनरी है। आप यह देखें जरा पीछे। सो, यह भी एक कंट्रास्ट है
इसमें। द फिगर्स आर टॉलर देन अ नॉर्मल ह्यूमन लाइफ। थोड़ा लंबी जैसे मैंने बोला था उन्होंने दिखाई हैं फिगर्स। अब ह्यूमन
लाइफ वैल्यू की बात करें तो फैमिली वैल्यू ऑफ़ टुगेदरनेस एंड यूनिटी, केयर लव एंड अफेक्शन ऑफ़ पेरेंट्स टुवर्ड्स देयर
चिल्ड्रन। नेक्स्ट अगेन पॉवर्टी पे है। क्राइस एंड हर्ड अमरनाथ सहगल ब्रोंज़ नेशनल
गैलरी ऑफ मॉडर्न आर्ट न्यू दिल्ली क्राइस एंड हर्ड अनसुनी पुकार या ऐसा कुछ हां ऐसा ही द स्कल्प्चर क्राइस एंड हर्ट
डिपिक्स अ पुअर फैमिली हु हैव रे देयर हैंड्स एंड आर शाउटिंग फॉर हेल्प इन द टाइम ऑफ़ डिस्ट्रेस। तरह से गुहार लगाते
हुए, पुकारते हुए कि बहुत यह बुरी कंडीशन में हैं और एक हेल्प के लिए ऑलमाइटी से एक हेल्प मांग रहे हैं। देयर एक्सप्रेशनंस
आल्सो सिंबलाइज़ देयर सफरिंग एक्सप्लइटेशन ऑफ़ देम बाय द सोसाइटी। इट शोज़ द इनजस्टिन एंड एक्सप्लइटेशन डन बाय रिच एंड पावरफुल
पीपल हु हैव बीन एक्सप्लइटिंग द वीकर सेक्शन ऑफ़ द सोसाइटी फ्रॉम अ लॉन्ग टाइम। जैसे बड़े लोग वीकर सेक्शन वालों का फायदा
उठाते हैं, एक्सप्लइट करते हैं। सो उसके लिए या उस थीम को इन्होंने इस स्कल्प्चर में रिप्रेजेंट किया है। अब इसका डिप्शन
किस तरह से है? इन दिस द आर्टिस्ट हैव डिपिक्टेड द डिप्लोरेबल कंडीशन ऑफ़ अ फैमिली कंसिस्टिंग ऑफ़ मैन, वुमेन एंड अह
चाइल्ड। अब देखें कि तीन फिगर्स हैं। एक मैन है, एक लेडी है और एक चाइल्ड है। आर्टिस्ट है शोन पॉवर्टी एंड इट्स इफेक्ट
बाय दीज़ फिगर। अब यहां पे पॉवर्टी अब जैसे पिछले स्कल्प्चर में हमने देखा कैसे पॉवर्टी दिखाई है? बहुत कम सामान, रफ
टेक्सचर बॉडीज़ और इस तरह से जाते हुए। अब यहां पे पॉवर्टी कैसे दिखाई है? होलो फेसेस। एबनॉर्मल सी फिगर्स हैं। लंबी ऐसे
कराते हुए, हाथ ऊपर उठाए हुए। ऑल द थ्री फिगर्स हैव रे देयर हैंड्स, हेड्स एंड हैंड एज़ इफ ट्राइंग टू ऑलमाइटी
टू हेल्प देम इन देयर टाइम ऑफ़ डिस्ट्रेस। मतलब भगवान से यह प्रे कर रहे हैं कि हमारी मदद करें। द फिगर्स स्कल्पेड हियर
आर टॉल, स्ट्रेच्ड विद होलो डल, मीक एंड डिस्टोर्टेड फसेस। आप फसेस को ध्यान से देखें।
एग्नी में ऐसा मतलब इस तरह से फेस बनाए गए हैं। क्योंकि उस तरह की फीलिंग आपने दिलवानी थी। लॉन्ग फिगर्स विद होलो डेंस्ड
चीक्स डिफॉर्म्ड फेसेस एंड रेड्ड हैंड्स टू स्काई एज इफ स्क्रीमिंग। ओह गॉड नोबडी केयर्स अबाउट अस ऑन दिस प्लेनेट वेयर देयर
इज़ अ एक्सप्लइटेशन ट्रेनी एंड करप्शन एंड दे आर इजी प्रे। मतलब वह बहुत इजी एक टारगेट है। जैसे हमने पहले भी
बोला कि बड़े लोग छोटों का यह जिस तरह से एक्सप्लइटेशन दिखाया गया है। द स्क्रीम ऑफ़ द स्टैचू सो लाउड दैट इन 1958 अमरनाथ सेगल
अवार्डेड प्रेसिडेंट ऑफ़ इंडिया गोल्ड प्लेग अवार्ड। सो, यह इतना फेमस इनका स्कल्प्चर हुआ था ना कि इसके ऊपर इन्हें
यह अवार्ड भी मिला था। तो, यह भी एक बार माइंड में रख लीजिएगा। बाय चांस अगर ऐसा स्टेटमेंट बेस्ड आपको क्वेश्चन आता है।
एंपैथी एंड लव टुवर्ड्स द पुअर एंड द नीडी नीड फॉर इकोनॉमिक इक्वलिटी इन सोसाइटी। नेक्स्ट इज़ द गणेशा। वेरी सिंपल स्कल्प्चर
रिलीजियस है। इसमें कुछ ऐसा आपके लिए मुश्किल नहीं है। गणेशा पी वी जानकीराम ऑक्सीडाइज्ड कॉपर
टिन एंड वायर्स नेशनल गैलरी ऑफ़ मॉडर्न आर्ट न्यू दिल्ली। सो द थीम इज़ द स्कल्प्चर गणेशा इज़ एन एब्स्ट्रैक्ट
स्कल्प्चर डिपिक्ट्स द हिंदू गॉड लॉर्ड गणेशा। अब इसमें ऑक्सीडाइज्ड कॉपर टिन एंड वायर में दिखाया गया है। आप ध्यान से
देखें किस तरह से वायर्स का प्ले है यहां पे। उसके थ्रू ये स्कल्प्चर बनाया गया है। अब
इसका डिस्क्रिप्शन अगर हम पढ़ते हैं। गणेशा इज़ अ फेमस वर्क इन ऑक्सीडाइज्ड कॉपर टू डायमेंशनल और फ्रंटल प्लेन। फ्रंट में है
यह। सो स्कल्प्चर डिपेक्ट्स लॉर्ड गणेशा इन डांसिंग पोश्चर विद सिक्स हैंड्स होल्डिंग
वीना टू हैंड होल्डिंग अ शंख चक्र गधा एंड पद्म इन द अदर फोर हैंड्स लॉर्ड गणेशा बॉडी इज़ बैलेंस्ड ऑन द लेफ्ट फुट बेंट
एट द नी द राइट लेग इज़ आल्सो बेंट रेस्टिंग क्लोज टू द एंकल टू द लेफ्ट वन ट्रंक इज़ अ ब्रॉड एंड फ्लैट प्लेन ये
देखें एक ये टांग है ये टांग है ये वीना दोनों हाथों से पकड़ी है। बाकी चार हाथ पीछे हैं। तो टोटल सिक्स हैंड्स हो गए।
ऐसे फोल्डेड इमेज है। वीना पकड़े हैं। शंख चक्र गधा पद्म पकड़े हुए हैं। द स्कल्प्चर इज़ द एमल्गमेशन ऑफ़ फोक एंड ट्रेडिशनल
क्राफ्टमैनशिप। सो वेरी सिंपल डिस्क्रिप्शन इसका। लव एंड डिवोशन फॉर द डिवाइन। आप ह्यूमन लाइफ वैल्यू लिख के जा
सकते हैं। अब आते हैं हमारे लास्ट टॉपिक की तरफ। ग्राफिक प्रिंट्स मॉडर्न ट्रेंड्स इन इंडियन आर्ट्स। सो पहला ग्राफिक प्रिंट
हमारा जो है उससे पहले एक बारी अगर आप रिवाइज करना चाहें तो चार स्कल्प्चर थे जिसमें से तीन तो ऑलमोस्ट हमारा अ एक ट्रफ
ऑफ लेबर लेबरर्स के ऊपर दो पॉवर्टी के ऊपर हैं जिसमें सांथल फैमिली आ गया क्राइस एंड हर्ट आ गया। फिर फोर्थ हमारा रिलीजियस था
जिसमें हमने गणेशा को पढ़ा। अब हम आते हैं ग्राफिक प्रिंट्स की तरफ। तो ग्राफिक प्रिंट्स में सबसे पहला प्रिंट है हमारा
पढ़ेंगे चिल्ड्रन। चिल्ड्रन में पहला चिल्ड्रन सोमनाथ होरे एचिंग एंड एक्वेटिन कॉपर प्लेट
अ नेशनल गैलरी ऑफ़ मॉडर्न आर्ट न्यू दिल्ली द आर्टिस्ट हैड डिपिक्टेड पेन स्ट्रगल्स स्टार्वेशन सफरिंग वंड्स ड्यूरिंग द वॉर
एंड बंगाल बंगाल फेमिन अब ये एक लड़ाई हुई थी या आप कहें कि यह एक फेस रहा है कि जिसके ऊपर या आप एक तरह से
यह भी कह सकते हैं कि ये भी अह जो ग्राफिक प्रिंट है, यह पॉवर्टी पे बेस्ड है। द प्रिंट इज़ अबाउट द इनजस्टिस ऑफ़ द सोसाइटी
टुवर्ड्स द वीकर एंड द इनोसेंट पीपल। सो, यह भी उसी थीम पे है जो हमने लगभग क्राइस एंड हर्ट में पढ़ा है। बट फर्क ये है वो
स्कल्प्चर है और यह ग्राफिक प्रिंट है। इन दिस प्रिंट फाइव मेक फिगर्स स्टैंडिंग क्लोज टू ईच अदर। पांच फिगर्स हैं। आसपास
खड़ी हैं। प्रिंट इज़ कंपोज्ड इन ब्लैक एंड वाइट। पांच फिगर ये देखें। एक दो तीन चार ये पिछली और ये पांच
एज अ प्रोटेस्ट अगेंस्ट द रिच एंड रूलिंग क्लास चिल्ड्रन आर एबनॉर्मली थिन एब्नॉर्मली थिन अब आप ये फिगर्स देखें ऐसा
क्या एनाटमी होता है कभी क्या बट आप ये भी देखें कि जो कुपोषण के शिकार होते हैं माल न्यूट्रिशन तो उनके जो टमीज़ होते हैं वो
ब्लोटेड स्टमक होते हैं। तो उसी तरह से एक ब्लोटेड स्टमक यहां पे भी दिखाया गया है कि उसी बच्चे का रिब केजेस ब्लोटेड
स्टमकक्स लार्ज हेड सिर भी बड़े-बड़े दिखाए गए हैं। हॉरिफाइंग होलो आई शोन सफरिंग फ्रॉम स्टारवेशन। भुखमरी के शिकार
चाइल्ड इज़ ड्रेस्ड एंड नीगर क्लोथ्स वेयरिंग अ नेकलेस। गले में पहना है। मदर हु इज़ आल्सो माल नरिश्ड इज़ स्टैंडिंग
बिहाइंड देम विद हर प्रोटेक्टिव हैंड ऑन देयर शोल्डर। बैकग्राउंड देयर अपीयर अ टॉल गोसली फिगर विद हैंड्स ऑन बोथ द साइड्स ऑफ
द हेड। ये वाली फिगर गर्ल विद हर बैक इज़ स्टैंडिंग ऑन द लेफ्ट साइड ऑफ़ द कंपोज़शन। द ह्यूमन फॉर्म्स आर डिवाइडेड इन
क्यूबिस्टिक स्टाइल ज्योमेट्रिक प्लेन। सो क्यूबिज़्म एक मूवमेंट रही है यूरोपियन आर्ट में। सो क्यूबिस्टिक स्टाइल फॉर्म
में ये फिगर्स हैं। आप बस इतना लर्न कर लें। बहुत डिटेल में जाने की जरूरत नहीं है। सो टोटल फाइव फिगर्स हैं।
भुखमरी पे यह है। पॉवर्टी पे यह पेंटिंग प्रिंट है। और जिस तरह से बॉडीज दिखाई गई हैं, उसका डिस्कशन आप करके जा सकते हैं।
और बाकी कंपोज़िशन एक्सप्लेन करते हैं। एम्पथी एंड लव फॉर दोज़ हु आर इन नीड। ह्यूमन लाइफ वैल्यू में बात है कि हमें
उनके अह प्यार या एक एंपथी हमें उन लोगों के साथ रखनी चाहिए। उनकी हेल्प करनी चाहिए। इकोनॉमिक इक्वलिटी इज़ रिक्वायर्ड
इन सोसाइटी सो दैट एवरीवन हैज़ एक्सेस टू द बेसिक एसेंशियल सच ऐज़ फ़ूड, क्लोथ एंड शेल्टर। अगेन वही रोटी, कपड़ा और मकान हर
एक के लिए होना चाहिए। और यह एक कोशिश समाज में जरूर होनी चाहिए कि इतना ज्यादा मतलब इनकलिटी सोसाइटी में नहीं होना
चाहिए। नेक्स्ट हमारा है देवी बाय ज्योति भट्ट एजिंग ब्रास प्लेट नेशनल गैलरी ऑफ़ मॉडर्न आर्ट न्यू दिल्ली। अब ये
जो प्रिंट है ना ये थोड़ा मेडिटेशन तांत्रिक और इस सबके ऊपर है। उस फिलॉसफी के ऊपर है। ठीक है? सो द पोट्रेट
ऑफ़ देवी शक्ति इज़ सेंट्रली प्लेस्ड एज आइकॉनिक इमेज। डिटेल में समझना है तो हमने अपनी अह पेंटिंग्स जहां पे अह जनरल हमने
अपलोड करे हैं अपने लेक्चर्स उसमें हैं। जल्दी में क्योंकि हम वन शॉट वीडियो कर रहे हैं तो इसमें सिंपली मैं समझाती हूं
कि जैसे मेडिटेशन के लिए हम ये एक टर्म यूज़ होती है कुंडलिनी। सो उसके ऊपर ये पेंटिंग बेस्ड है। प्रिंट बेस्ड है। एक
आइकॉनिक इमेज है जो जिसका फेस दुर्गा की तरह लिया गया है। आप ध्यान से देखें। और यह सर्पेंटाइन फॉर्म है ऐसा।
सो यह उस चीज को उस तरह से आगे हम पढ़ेंगे कि कैसे रिप्रेजेंट किया गया है। टू डायमेंशनली ऑफ वर्ड मोटिव्स अराउंड द
पोट्रेट एक्सप्रेससेस द तांत्रिक फिलॉसफी। अब ये जो प्ले है ना प्ले मतलब ये जो बनाया गया है। अब इसमें
देवी देखें और ये सब फिगर्स देखें। ये सब फिगरेटिव भी हैं, सिंबल्स भी हैं, लिखा हुआ भी है, फॉर्म्स भी हैं, टेक्सचर्स भी
हैं। तो सब तरह का ये दिखाया गया है काम। द पावर लाइज़ इन द फॉर्म ऑफ़ कुंडलिनी सर्पेंट गॉडेस हु लाइज़ अ स्लीप इन द बेस
ऑफ़ द स्पाइन कॉइल्ड देयर अह 3 एंड हाफ टाइम अराउंड द फर्स्ट चक्र। अब यह माना जाता है कि हम सबके अंदर सबसे बेस जो
हमारा चक्र होता है वहां पे एक कुंडलिनी की शक्ति होती है जो जागृत होती है विद मेडिटेशन। सो उसका यह रिप्रेजेंटेशन
दिखाया गया है इस पेंटिंग में। द कॉम्पोज़िशन इज़ अ कॉम्बिनेशन ऑफ़ टू रेक्टेंगल्स
मेड विद द कॉइलिंग एंड स्पायरलिंग सर्पेंटाइन फॉर्म ऑफ़ कुंडलिनी। ये वाली फॉर्म। ये जो येलो में दिख रहा है आपको। द
अपर रेक्टेंगल हैज़ अ बोल्ड फेस सेंटर लाइक दुर्गा। यह वाला फेस एंड द लोअर हैज़ टू सर्कल्स। नीचे दो सर्कल्स दिखाए गए हैं।
जिसमें ह्यूमन फिगर बनी है सेपरेटेड बाय अ टेल। ये वाली अ ब्रिलियंट वर्मिलियन बिंदी कैचेस द आई
ऑन द फोरहेड। ये जो फेस देवी के फेस के ऊपर है। रेक्टेंगुलर सिंबोलाइजिंग इंडियननेस एंड वुमेन हेड। बड़ी बार ये भी
अह एमसीक्यू में आता है कि यह बिंदी क्या रिप्रेजेंट करती है? तो यह इंडियननेस एंड वुमेन हेड को रिप्रेजेंट करती है। द वाइड
ओपन आइज़ टिपिकली लाइक दैट ऑफ़ दुर्गा आइडल। दुर्गा की तरह यह आइज बनाई गई हैं। ऑन ईच साइड देवी हैड द शेप ऑफ़ डेकोरेटिव
पेंडेंट। देयर इज़ अ इंटरेस्टिंग राइटिंग ऑन बोथ द पेंडेंट्स। वन हैज़ द आर्टिस्ट नेम ऑन इट। जहां पे ज्योति भट्ट भी दिखेगा
आपको लिखा हुआ। अब बुक्स में ध्यान से देखिएगा। एंड दूसरे में सीडो तांत्रिक कुंडलिनी रिटन अह दूसरे में यह लिखा हुआ
है। अह देंस ऑफ़ स्पिरिचुअलिटी ये इसका ह्यूमन लाइफ वैल्यू आ सकता है। एंड वी कैन बिकम
वन विद द डिवाइन एंड यूनियन विद सुप्रीम एंड अल्टीमेट गोल ऑफ़ एनी ह्यूमन बीइंग। मतलब अल्टीमेटली तो हमारा यही होता है ना
भगवान के साथ एक मिलना और वह उस हायर गोल की तरफ हमें जाना। सो ये उसका एक ह्यूमन लाइफ वैल्यू आप मान सकते हैं। सो नेक्स्ट
वेरी इंपॉर्टेंट ग्राफिक प्रिंट ऑफ फॉल्स। एनसीईआरटी में दे रखा है कि ये एक विडो का मतलब कुछ बुक्स में दे रखा है कि ये एक
विडो की पेंटिंग है। प्रिंट है। यह वो चीज है कि इसमें अगर कोई लेडी विडो हो जाती है तो उसके आफ्टर लाइफ उसका क्या है? तो
इंडिया में इस तरह का माना जाता था कि पुराने जमाने में उसके लिए कुछ भी नहीं रहता था। तो वो भी एक बुराई थी। सोशल हम
कहते हैं इनजस्टिस था जो विद टाइम चीजें इंप्रूव हुई हैं। बट यह पेंटिंग उस थीम पे बनी है।
और हम दूसरे बुक्स के हिसाब से देखें तो यह पेंटिंग पॉवर्टी के ऊपर भी है कि गरीबी का और वो बचपन याद कर रही है कि शादी से
पहले का क्या टाइम था और उसके बाद वो फ्रीडम नहीं। उसके बाद वो लाइफ का वो चाम नहीं। सो वो उस पे भी आ सकती है। अगर आपको
कोई विडो के ऊपर पूछता है कोई पेंटिंग तो आपने ऑफ वॉल्स देनी है। अगर आप में वाइट साड़ी और इस तरह से कोई पॉवर्टी पे
पेंटिंग पूछी जाती है तो भी आपने ऑफ वॉल्स ही देनी है। ऑफ वॉल्स बाय अनुपम सूद लिथोग्राफ नेशनल गैलरी ऑफ़ मॉडर्न आर्ट।
दिस वर्क इज़ ऑफन इंटरप्रेटेड ऐज़ अ रिप्रेजेंटेशन ऑफ़ पॉवर्टी एंड लोनलीनेस। प्रिंट इज़ रिमेंबेंस ऑफ़ द पास्ट डेज़ ऑफ़ हर
चाइल्डहुड। और सिंपल सी ये लेडी है। आप ध्यान से देखना। बाद में हम जल्दी से डिस्क्रिप्शन पढ़ लेंगे।
प्रिंट देखें लेडी की साड़ी कितना रियलिज्म में है। फोल्ड्स देखें फेस अगेन खाली क्योंकि आइडेंटिटी लॉस्ट है इसलिए
पीछे एक पवेलियन की तरह यह चर्च ये मंदिर दिखाया गया है हवेली की तरह। आगे यह चाइल्ड लाइक आर्ट है बचपन की कहानियां। सो
एक मेमोरी लेन की तरह। और ये आदमी एक यहां पे बहुत रियलिज्म में उसकी लेग्स दिखाई गई हैं। अब ये सोया है या डेड है। ये दोनों
तरह से रिप्रेजेंटेशन हो सकता है। ऑफ वॉल इज़ अ मोस्ट सिंबॉलिक एंड मीनिंगफुल ग्राफिक प्रिंट। इट इज़ मोनोक्रोमेटिक।
सिंगल टोन में बना है। लिथोग्राफी है। वुमेन इज़ शोन विद बेयर फीट सिंग ऑन वन साइड। खाली मतलब नंगे पांव बैठी है।
वेयरिंग ए अनटाइडी लुकिंग साड़ी। फेस हैज़ बीन शोन विद ब्लैक कलर विदाउट एनी एक्सप्रेशन। मींस शी हैज़ नो एग्ज़िस्टेंस
नाउ इन दिस लिविंग वर्ल्ड और शी हैज़ लॉस्ट हर सिग्निफिकेंस। जैसे मैंने बोला उसकी खुद की कोई आइडेंटिटी नहीं रह गई है।
इसलिए उसका फेस इस तरह से ब्लैक दिखाया गया है। ऑन हर बैक देयर इज़ अ ब्रिक्ड वॉल विदाउट प्लास्टर। सम फोर्क टाइप वाइट
लाइंस ड्राइंग आर डिस्प्लेड ऑन वॉल एज़ इफ देयर वर स्क्रिबल आर्ट डन बाय स्मॉल चिल्ड्रन। जैसे बोला मेमोरी लेन में उसकी
अपनी पुरानी यादें। तो बचपन में द इन द फोर ग्राउंड लोअर पोर्शन ऑफ़ अ मेल फिगर इन अ परफेक्ट एनाटॉमिकल बैलेंस अह इज़ शोन
नियर द वुमेन हु अपेयर एज़ इफ ही वर इन अ डीप स्लीप और डेड। सम ऑफ़ द टेंपल लाइक स्कल्प्चर्स आर आल्सो विज़िबल फ्रॉम द बैक
ऑफ़ द वॉल। यह वाली। दिस इज़ अ पावरफुल वर्क अगेंस्ट द इनह्यूमन रूल्स ऑफ़ आवर सोसाइटी। इट इज़ द प्रोटेस्ट अगेंस्ट द सोसाइटी फॉर
सच डिस्क्रिमिनेशन द वुमेन फॉर द वुमेन। सो ये अनुपम सूद ने इस तरह से फीमेल कंडीशंस के ऊपर ये काम
किया था। नीड फॉर सोशल इक्वलिटी अगेन फॉर वुमेन इन आवर सोसाइटी। सो ये वो ग्राफिक प्रिंट है। बहुत बार इस पे भी क्वेश्चन
आता है। तो थोड़ा इसको करके जाइएगा। अगेन यह वेरी सिंपल ग्राफिक प्रिंट। लास्ट ग्राफिक प्रिंट है। और अभी तक इतना पेशेंस
के साथ सुनने के लिए। थैंक यू। एंड मैन वुमेन एंड ट्री के लक्ष्म गॉड पेपर एचिंग एंड एक्वेटिंग नेशनल गैलरी ऑफ़ मॉडर्न आर्ट
न्यू दिल्ली वेरी वेरी सिंपल ग्राफिक प्रिंट कुछ इसमें लर्न करने वाली बात नहीं है। दो फिगर्स हैं। मेल फीमेल बैठे हैं।
तीन पेड़ एक तरफ हैं। एक पेड़ एक तरफ है। इसने साउथ इंडियन ड्रेसेस पहनी हमें दिखती हैं। नथनी है। इयरिंग्स हैं। ये सब पहने
हैं और इसने एक शर्ट सी पहनी है। सो मतलब सिंपल सी एक ग्राफिक प्रिंट है। याद कर लें। इट इट्स अ डिपिक्शन ऑफ़ विलेज लाइफ
बेस्ड ऑन आर्टिस्टिक मेमोरीज़ ऑफ़ रूरल एंड ट्राइबल लाइफ फ्रॉम चाइल्डहुड या अपना एडल्टहुड जो उसको याद है आर्टिस्ट को उसने
वो एक नेचर के सराउंडिंग्स में खुद को बनाया है। वर्टिकल प्रिंट एक्सप्रेससेस ह्यूमन इमोशन एंड डीप अटैचमेंट टू द नेचर।
वर्टिकल ग्राफिक प्रिंट है। एक्सप्रेससेस ह्यूमन इमोशन एंड डीप अटैचमेंट विथ द नेचर। मैन एंड वुमेन सीम्स टू बी इन डीप
कन्वर्सेशन एज़ इफ़ दे हैव फ़ॉरगॉटन अबाउट द आउटसाइड वर्ल्ड एंड बिकम वन विथ द नेचर। सो आराम से अपनी बातों में खोए हुए बनाए
गए हैं। बैकग्राउंड रूलर सीन का है जिसमें एक तरफ चार पेड़ हैं, एक तरफ तीन पेड़ हैं, एक तरफ एक पेड़ है। लेफ्ट साइड थ्री ट्रीज़,
राइट साइड हैव अ ब्रांचज़ ओनली एट द टॉप ऑफ़ द ट्रंक। पीछे ऊपर। फोर ग्राउंड ऑफ़ द राइट साइड वुमेन क्लैड इन अ साड़ी, सिंग अंडर द
सिंगल ट्री। शी इज़ वेयरिंग ट्रेडिशनल ऑर्नामेंट्स लाइक नोज़, रिंग, नेकलेस, टू बैंगल्स, आर्म्स। मैन इज़ सिंग ऑोजिट टू हर
अंडर अनदर ट्री लुकिंग एट हर। बोथ ऑफ़ देम आर सेपरेटेड बाय स्मॉल प्लांट्स एंड फ्लावर्स एंड श्रब्स। दे आर सिंपल
विलेजर्स ऑफ़ साउथ इंडिया। सॉफ्ट पैेट ऑफ़ मोनोक्रोमेटिक ग्रेज़ इन व्हिच ह्यूमन एंड नेचर इज़ कंप्लीटली इन हार्मोनी। सो नेचर
और उनको एक कंप्लीट हार्मोनी में दिखाया गया है। सिंपल ग्रेस का एक ये प्रिंट बनाया गया है। लाइट ब्लू ग्रीन कलर यूज्ड
टू डिप द होल प्रिंट एक्सप्रेसिवली एंड इंप्रेसिवली। सो ब्लूस, ग्रीस, ग्रेस एक ही तरह के टोंस में ये प्रिंट बना है। लव
टुवर्ड्स नेचर सिंपल लिविंग बिकमिंग वन विद नेचर। सो, अभी तक हमने एक बार सारा सिलेबस रिवाइज़ कर लिया है। अब आप एक चीज
का ध्यान रखें। जब आप पढ़ें तो अभी तक तो आप पढ़ ही चुके होंगे बट स्टिल जिनको नहीं समझ आया था तो मुझे लगता है कि अब वो समझ
आ जाएगा। अगेन मैं कह रही हूं कि फोर चैप्टर्स एंड वन गो वीडियो भी है जिसमें चारों मिनिएचर्स आपको एकदम से याद हो
जाएंगे। यहां से भी नोट्स आप उठा सकते हैं। अब आते हैं बात कि हमें क्वेश्चंस किस तरह से आ रहे हैं। क्वेश्चंस हमें
एमसीक्यूस सब्जेक्ट मैटर्स मैंने पहले भी बोला है। अगर आप सब्जेक्ट मैटर सबके कर लेंगे एमसीक्यूस ऑलमोस्ट निकल जाते हैं।
केस बेस स्टडी क्वेश्चन सब सब्जेक्ट मैटर में से पूछे जाते हैं। क्योंकि थीम कैसा है? कौन सा एक स्पेशल फीचर है? उसमें से
उन्होंने लेके स्टेटमेंट्स डाली होती हैं। फिर हमें ओरिजिन एंड डेवलपमेंट का क्वेश्चन आएगा। या हमें ज्यादातर
पेंटिंग्स के ऊपर ही आ रहे हैं। सो पेंटिंग्स आर्ट वक्स अच्छे से लर्न करें। जितना लेंथ चाहिए उतना लेंथ लिख के जाएं।
पेपर नीट करें। कोशिश करें सेक्शन वाइज़ करें। अगर आपको लगता है कि आपको सेक्शन ए, सेक्शन बी, सेक्शन सी वाले ऑर्डर में नहीं
चलना है। तो अगर आप सेक्शन सी पहले कर रहे हैं तो सारा करें। ऐसा ना हो एक क्वेश्चन सेक्शन सी फिर सेक्शन बी में आए। वो
बिल्कुल भी अलाउड नहीं है। बिल्कुल ऐसा मत कीजिएगा। कटिंग आप लोग बहुत करते हैं वो बिल्कुल मत कीजिएगा। उसके नंबर कटते हैं
बेटा। नीट पेपर होगा तो फुल ऑन फुल बड़े आराम से मिल सकता है। सो अंडरलाइनिंग मेन पॉइंट्स की जरूर करके जाएं। फिर जिस
फॉर्मेट में क्वेश्चन पूछा है उस फॉर्मेट में करें। अगर आपको थ्री पार्ट्स में पूछा है अगर वहां पे पूछा गया है कि पहले
सब्जेक्ट मैटर एंड ह्यूमन लाइफ वैल्यू दें। तो मार्क करें आप उसमें लिखें सब्जेक्ट मैटर। अंडरलाइन करें सब्जेक्ट
मैटर को। फिर उसके नीचे सॉल्व करें उस क्वेश्चन को। ऐसे ही ह्यूमन लाइफ वैल्यू के सब हेडिंग दें। फिर उसको सॉल्व करें।
सो इस तरह से पेपर को नीट करके जाएं। ऑर्डर में करके जाएं। और अगेन मैं कह रही हूं अगर आपको ऑर्डर चेंज करना है तो पूरा
सेक्शन इकट्ठा आप सॉल्व करेंगे। ये नहीं होगा कंटिन्यू टू पेज नंबर दिस दिस दिस। इस तरह की चीजें मत कीजिएगा। सो आई थिंक
कि एंड आई होप कि आपको यह क्लेरिटी हो गया होगा सिलेबस का। विश यू ऑल द बेस्ट फॉर योर बोर्ड एग्जाम। थैंक यू
मिनिएचर पेंटिंग्स का रिवीजन मुख्य रूप से राजस्थानी, पहाड़ी, मुगल, डेकन, और बंगाल स्कूल ऑफ आर्ट पर आधारित है। प्रत्येक स्कूल की अपनी विशिष्ट विषय-वस्तु, रंग प्रयोग, और चित्रण की शैली होती है जो परीक्षा में अक्सर पूछी जाती है। उदाहरण के लिए, राजस्थानी स्कूल में चमकदार रंग एवं विस्तृत पोशाक दर्शाई जाती है जबकि मुगल स्कूल में फारसी और यूरोपीय कला का संयोजन देखने को मिलता है।
स्वतंत्रता संग्राम में कलाकारों जैसे अभिंद्रनाथ टैगोर, अमृता शेरगिल, और नंदलाल बोस ने कला के ज़रिए राष्ट्रीय जागरूकता और स्वदेशी आंदोलन को बढ़ावा दिया। उदाहरण के लिए, अभिंद्रनाथ टैगोर की 'भारत माता' पेंटिंग ने देशभर में प्रेरणा उत्पन्न की, और नंदलाल बोस ने दांडी मार्च व जलियांवाला बाग जैसे ऐतिहासिक घटनाओं के चित्रण से विरोध की भावना जगाई। इस तरह कला स्वतंत्रता संग्राम का एक महत्वपूर्ण माध्यम बनी।
भारतीय राष्ट्रीय ध्वज का विकास 1906 में तीन रंगों (हरा, पीला, लाल) के ध्वज से शुरू होकर 1947 के वर्तमान त्रिरंगा तक हुआ है, जिसमें सेफरन, सफेद, हरा रंग और अशोक चक्र शामिल हैं। सेफरन शौर्य का प्रतीक है, सफेद शांति का और हरा समृद्धि का। इस ध्वज ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम और राष्ट्रीय पहचान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
मिनिएचर पेंटिंग्स की तैयारी में एनसीईआरटी के मुख्य पाठ्यक्रम पर ध्यान देना जरूरी है ताकि परीक्षा से संबंधित मूल विषय अच्छी तरह समझ आ सकें। साथ ही, चित्रों और उनके विवरण को नियमित रूप से रिवाइज करें और प्रत्येक स्कूल की विशिष्ट विशेषताओं को नोट करें। उत्तर लेखन में साफ, सटीक और प्रश्न के अनुसार मुख्य बिंदुओं को हाइलाइट करना भी सफलता के लिए महत्वपूर्ण है।
आधुनिक भारतीय कला में प्रमुख ट्रेंड्स में राजा रवि वर्मा, जामिनी रॉय, अमृता शेरगिल, एमएफ हुसैन के चित्र और डिप्टी रॉय चौधरी, रामकिकर, अमरनाथ सहगल की मूर्तियां शामिल हैं। इन कलाकारों ने पारंपरिक और आधुनिक तकनीकों का संयोजन कर मानव भावनाओं और सामाजिक मुद्दों को अभिव्यक्त किया है, जैसे 'मदर एंड चाइल्ड' और 'ट्रॉफ ऑफ लेबर'।
इस वीडियो के अनुसार, अच्छी तैयारी के लिए एनसीईआरटी के मुख्य पाठ्यक्रम पर जोर देना चाहिए और अतिरिक्त साहित्य से भ्रमित नहीं होना चाहिए। उत्तरों को प्रश्न अनुसार साफ और व्यवस्थित प्रकार से लिखें, काले पेन का प्रयोग करें, और मुख्य बिंदुओं को अंडरलाइन करें। इसके अलावा, अच्छे प्रेजेंटेशन और उत्तरों को वर्गीकृत करने से भी परीक्षा में सफलता मिलती है।
Heads up!
This summary and transcript were automatically generated using AI with the Free YouTube Transcript Summary Tool by LunaNotes.
Generate a summary for freeRelated Summaries
बिहार बोर्ड 12वीं के लिए 40 नंबर फिक्स करने का बेहतरीन तरीका
इस वीडियो में काजू मैम ने बिहार बोर्ड 12वीं के छात्रों के लिए मात्र एक लेक्चर से 40 नंबर फिक्स करने की पूरी रणनीति साझा की है। निबंध, मैच द कॉलम, एप्लीकेशन, प्रिसेस राइटिंग सहित सभी महत्वपूर्ण टॉपिक्स को आसान भाषा में समझाते हुए, यह सेशन छात्रों को परीक्षा में बेहतर अंक पाने का प्रभावी तरीका सिखाता है।
ईएमआई यूनिट 4: करंट और पोटेंशियल ट्रांसफॉर्मर का संपूर्ण परिचय
इस वीडियो में विद्युत इंजीनियरी के महत्वपूर्ण टॉपिक्स जैसे करंट ट्रांसफॉर्मर (CT), पोटेंशियल ट्रांसफॉर्मर (PT) और उनके कार्य, फेजर डायग्राम, रेशियो और फेज एंगल एरर सहित डिजिटल वोल्ट मीटर और कैथोड रे ऑसिलोस्कोप (CRO) की संक्षिप्त समीक्षा की गई है। यह एक वन-शॉट रिवीजन है जो परीक्षा की तैयारी के लिए अत्यंत उपयोगी है।
क्लास 10 इंग्लिश में 90+ अंक कैसे प्राप्त करें परीक्षा अध्ययन 2026 से
यह वीडियो क्लास 10 के छात्रों के लिए परीक्षा अध्ययन 2026 के उपयोग से इंग्लिश विषय में 90 प्लस अंक प्राप्त करने के सर्वोत्तम तरीकों का गाइड करता है। इसमें मॉडल प्रश्न पत्र, बोर्ड परीक्षा के पिछले वर्ष के प्रश्न, और प्रमुख टॉपिक्स पर फ़ोकस करके बेहतर तैयारी की रणनीतियाँ साझा की गई हैं।
दिल्ली यूनिवर्सिटी के B.Com छात्रों के लिए कंपनी अधिनियम का वन-शॉट रिवीजन गाइड
दिल्ली यूनिवर्सिटी के B.Com छात्रों के लिए कंपनी अधिनियम के महत्वपूर्ण टॉपिक्स का संक्षिप्त रिवीजन।
स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग में CCTV और प्रोजेक्ट प्रबंधन
इस वीडियो में, अजय ने स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की है, जिसमें CCTV सिस्टम का उपयोग, प्रोजेक्ट प्रबंधन की तकनीकें, और निर्माण प्रक्रिया के दौरान ध्यान देने योग्य महत्वपूर्ण बिंदु शामिल हैं। यह जानकारी इंजीनियरिंग छात्रों और पेशेवरों के लिए अत्यंत उपयोगी है।
Most Viewed Summaries
Kolonyalismo at Imperyalismo: Ang Kasaysayan ng Pagsakop sa Pilipinas
Tuklasin ang kasaysayan ng kolonyalismo at imperyalismo sa Pilipinas sa pamamagitan ni Ferdinand Magellan.
A Comprehensive Guide to Using Stable Diffusion Forge UI
Explore the Stable Diffusion Forge UI, customizable settings, models, and more to enhance your image generation experience.
Pamamaraan at Patakarang Kolonyal ng mga Espanyol sa Pilipinas
Tuklasin ang mga pamamaraan at patakaran ng mga Espanyol sa Pilipinas, at ang epekto nito sa mga Pilipino.
Mastering Inpainting with Stable Diffusion: Fix Mistakes and Enhance Your Images
Learn to fix mistakes and enhance images with Stable Diffusion's inpainting features effectively.
Pamaraan at Patakarang Kolonyal ng mga Espanyol sa Pilipinas
Tuklasin ang mga pamamaraan at patakarang kolonyal ng mga Espanyol sa Pilipinas at ang mga epekto nito sa mga Pilipino.

