मैटर क्या है? (Matter in Our Surroundings) - परिचय और परिभाषा
इस अध्याय की शुरुआत देवू भैया एक मजेदार अंदाज़ में करते हैं। वे बताते हैं कि हमारे आस-पास की हर चीज़ - यह पेन, घड़ी, कुर्सी, हवा, पानी, यहाँ तक कि हम खुद - सब किसी न किसी चीज़ से बने हैं। उसी चीज़ को हम 'मैटर' (Matter) कहते हैं। मैटर की यह मूलभूत समझ Understanding Motion और Class 12 Physics: Introduction to Electrostatics and Electric Charges जैसे आगे के विषयों की नींव रखती है।
- परिभाषा: कोई भी वस्तु जिसमें द्रव्यमान (Mass) हो, जो स्थान घेरती है (Occupies Space) और जिसे हम अपनी इंद्रियों (Senses) से महसूस कर सकते हैं, उसे मैटर कहते हैं।
- उदाहरण: हवा (गैस), पानी (लिक्विड), पत्थर (सॉलिड) - ये सभी मैटर के उदाहरण हैं।
मैटर के अवयवी कण (Constituent Particles of Matter)
- मैटर बहुत ही छोटे-छोटे कणों से मिलकर बना होता है, जिन्हें अवयवी कण (Constituent Particles) कहा जाता है। इन कणों की गहरी समझ के लिए Introduction to the Atom और Atoms and Elements पढ़ना फायदेमंद रहेगा।
- ये कण इतने छोटे होते हैं कि इन्हें नंगी आँखों या सामान्य सूक्ष्मदर्शी से भी नहीं देखा जा सकता।
- एक्स्ट्रा नॉलेज: इन कणों को अणु (Molecules) और परमाणु (Atoms) भी कहा जाता है।
- ये कण ही मैटर के बिल्डिंग ब्लॉक्स (Building Blocks) होते हैं।
पदार्थ की तीन अवस्थाएँ (Three States of Matter)
मैटर की मुख्यतः तीन अवस्थाएँ होती हैं, जिन्हें हम अपनी किताबों में पढ़ते हैं। इनके अलावा प्लाज़्मा और बोस-आइंस्टाइन कंडेंसेट जैसी अन्य अवस्थाएँ भी हैं, लेकिन इस अध्याय में हम तीन मुख्य अवस्थाओं पर ध्यान केंद्रित करेंगे।
1. ठोस (Solid)
- आकार (Shape): निश्चित आकार (Definite Shape)।
- आयतन (Volume): निश्चित आयतन (Definite Volume)।
- कणों के बीच की दूरी (Intermolecular Space): बहुत कम (Negligible)। कण एक-दूसरे के बेहद करीब चिपके होते हैं।
- अंतरा-आण्विक बल (Intermolecular Force of Attraction): बहुत प्रबल (Very Strong)। ये कण एक-दूसरे से अत्यधिक प्यार करते हैं और दूर जाना नहीं चाहते।
- कणों की गति (Movement of Particles): केवल अपनी स्थिति में कंपन (Vibration) कर सकते हैं।
- संपीड्यता (Compressibility): संपीडित करना बहुत मुश्किल।
- उदाहरण: लोहा, पत्थर, लकड़ी, बर्फ।
2. द्रव (Liquid)
- आकार (Shape): कोई निश्चित आकार नहीं। यह अपने बर्तन (Container) का आकार ले लेता है।
- आयतन (Volume): निश्चित आयतन (Definite Volume)।
- कणों के बीच की दूरी (Intermolecular Space): ठोस से अधिक, लेकिन गैस से कम। कण ढीले-ढीले बंधे होते हैं।
- अंतरा-आण्विक बल (Intermolecular Force of Attraction): ठोस से कम, मध्यम (Moderate)।
- कणों की गति (Movement of Particles): कण आसानी से प्रवाहित (Flow) हो सकते हैं और आपस में टकरा सकते हैं।
- संपीड्यता (Compressibility): थोड़ा संपीडित किया जा सकता है।
- उदाहरण: पानी, दूध, तेल, जूस।
3. गैस (Gas)
- आकार (Shape): कोई निश्चित आकार नहीं।
- आयतन (Volume): कोई निश्चित आयतन नहीं। यह पूरे बर्तन को भर लेती है।
- कणों के बीच की दूरी (Intermolecular Space): बहुत अधिक (Very Large)। कण एक-दूसरे से बहुत दूर होते हैं।
- अंतरा-आण्विक बल (Intermolecular Force of Attraction): नगण्य (Negligible)। कणों में एक-दूसरे के प्रति कोई आकर्षण नहीं होता।
- कणों की गति (Movement of Particles): कण बहुत तेज़ी से और स्वतंत्र रूप से गति करते हैं।
- संपीड्यता (Compressibility): अत्यधिक संपीड्य (Highly Compressible)।
- उदाहरण: हवा, ऑक्सीजन, कार्बन डाइऑक्साइड।
महत्वपूर्ण प्रक्रियाएँ और अवधारणाएँ
1. गलनांक (Melting Point)
- परिभाषा: वह निश्चित तापमान जिस पर कोई ठोस पदार्थ पिघलकर द्रव में बदल जाता है।
- प्रक्रिया: जब ठोस को गर्म किया जाता है, तो उसके कण ऊष्मा ऊर्जा ग्रहण करते हैं और तेज़ी से कंपन करने लगते हैं। इससे अंतरा-आण्विक बल कमज़ोर हो जाता है और कण अपनी निश्चित स्थिति छोड़कर एक-दूसरे से दूर होने लगते हैं, जिससे वह द्रव बन जाता है।
- उदाहरण: बर्फ का गलनांक 0°C होता है। यहाँ बर्फ (ठोस) पिघलकर पानी (द्रव) बन जाती है।
- महत्वपूर्ण: गलनांक जितना अधिक होगा, अंतरा-आण्विक बल उतना ही प्रबल होगा। यह अवधारणा Center of Mass for Class 11 जैसे उच्च कक्षाओं के भौतिकी सिद्धांतों को समझने में भी सहायक होती है।
2. क्वथनांक (Boiling Point)
- परिभाषा: वह निश्चित तापमान जिस पर कोई द्रव पदार्थ उबलकर गैस (वाष्प) में बदल जाता है।
- प्रक्रिया: जब द्रव को गर्म किया जाता है, तो उसके कण ऊष्मा ऊर्जा ग्रहण करते हैं और बहुत तेज़ी से गति करने लगते हैं। वे अंतरा-आण्विक बल को पूरी तरह पार कर जाते हैं और गैसीय अवस्था में बदल जाते हैं।
- बुलबुले का बनना (Bubble Formation): क्वथन के दौरान ही बुलबुले दिखाई देते हैं, जो द्रव के अंदर गैस में बदलते कणों के कारण बनते हैं।
3. क्वथन और वाष्पीकरण में अंतर (Difference between Boiling and Evaporation)
- क्वथन (Boiling):
- तापमान: एक निश्चित तापमान (क्वथनांक) पर होता है।
- गति: तेज़ प्रक्रिया (Rapid Process)।
- स्थान: पूरे द्रव में एक साथ होता है (Throughout the liquid)।
- बुलबुले: बुलबुले बनते हैं (Bubbles form)।
- वाष्पीकरण (Evaporation):
- तापमान: किसी भी तापमान पर हो सकता है (Occurs at any temperature)।
- गति: धीमी प्रक्रिया (Slow Process)।
- स्थान: केवल द्रव की सतह पर होता है (Surface phenomenon)।
- बुलबुले: बुलबुले नहीं बनते (No bubbles form)।
4. संपीड्यता (Compressibility)
- परिभाषा: किसी पदार्थ को दबाने (Compress) की क्षमता।
- ट्रेंड (क्रम): गैस > द्रव > ठोस
- कारण: गैसों में कणों के बीच सबसे अधिक दूरी (इंटरमॉलिक्यूलर स्पेस) होती है, इसलिए उन्हें आसानी से दबाया जा सकता है। ठोसों में यह दूरी नगण्य होने के कारण उन्हें दबाना बहुत मुश्किल है।
**ध्यान दें:** यह समरी दिए गए ट्रांसक्रिप्ट पर आधारित है और इसमें कॉन्सेप्ट्स को उसी मजेदार और सरल भाषा में समझाने की कोशिश की गई है जो वीडियो में देवू भैया ने किया है।
भाई मैटर हो गया तुम्हारे देवू भैया का भी। लेकिन यह वाला मैटर हम पढ़ने नहीं वाले। हम कौन सा मैटर पढ़ने वाले हैं? हम
मैटर पढ़ने वाले हैं। पर्टिकुलर नेचर ऑफ मैटर हमारे आसपास जो भी चीजें होती हैं सारी की सारी किसकी बनी होती है भाई? मैटर
की। हां जी। तो नमस्कार, आदाब, सत श्री अकाल भाई। तुम्हारे देवू भैया आ चुके हैं लेकर के एक और चैप्टर का वन शॉट। मैटर
पर्टिकुलर नेचर ऑफ मैटर। क्लास एथ साइंस का ये वन शॉट रहने वाला है। एक ही वन शॉट में एक ही वीडियो में। पूरा का पूरा क्लास
एथ का साइंस का जो तुम्हारा चैप्टर है उसको कर देंगे एकदम मक्खन। कौन सा मक्खन? पराठे वाला। नहीं भाई पराठे वाला मक्खन
नहीं। कौन सा मक्खन? कोई सा भी क्वेश्चन इस चैप्टर का आएगा तुम्हारे एग्जाम में, तुम्हारे पेपर में, तो बेटे तू उसको मक्खन
तरीके से बड़े मजेदार तरीके से अटेम्प्ट कर लेगा। तेरे से वो क्वेश्चन फंसेगा नहीं। तेरे से वो क्वेश्चन छूटेगा नहीं।
ठीक है भाई। तो बिना किसी देरी के स्टार्ट करते हैं। वन शॉट बाय योर और बिलव्ड देव अग्नानी सर। तुम्हारे अपने देवू भैया। ठीक
है भाई। आ जाओ। ठीक है जी। अरे भाई साहब लगता है इनका भी मैटर हो गया। होता है ना भाई स्कूल के टाइम पर छुट्टी के टाइम पर
हमारा तो भाई बहुत होता था जब मैं स्कूल में था मतलब मैं नहीं लड़ता था तुम्हारे देवू भैया तो भाई हमेशा से एकदम एकदम एकदम
शरीफ होते हैं ना ऊपर वाला बटन यहां पर लगा करके ऐसे ऐसे वाला शरीफ बालक था मैं ठीक है श्लोक बोलता था गालियां तो मुझे
पता भी नहीं थी ठीक है भाई तो ऐसा बच्चा था मैं लेकिन अब थोड़े से हम अभी भी गालियां नहीं देते ठीक है तो हमारे पास
मैटर की जब बात होती है तो स्कूल के टाइम पर जब छुट्टी वाला टाइम होता है डिस्पर्सल टाइम होता है उस टाइम पे भाई स्कूल के
बाहर बहुत मैटर हो जाते हैं इस तरफ से आ गए 50 लड़के इसने बुला लिया 50 लड़के भाई एकदम ढिशुम होने वाली है भाई जल्दी से आजा
लड़कियां लेकर के तेरे भाई का मैटर हो गया है और लड़के आकर के क्या बोलते हैं मेरे भाई को मारा तूने भाई एक काम कर हाथ छोड़
और कुछ लोग क्या कहते हैं कॉम्प्रो कर लो कॉम्प्रो कॉम्प्रो कर लो भैया कॉम्प्रो माने कॉम्प्रोमाइज कर लो तो वो सारा मैटर
तो बेटा अलग होता है हमें जो मैटर पढ़ना है वो हमें कौन सा मैटर पढ़ना है कि हमारे आसपास इस ब्रह्मांड में इस दुनिया में कोई
भी व्यक्ति है कोई भी हमारे पास वस्तुएं हैं सारी की सारी जो चीजें हैं सारी की सारी जो हमारे पास यहां पर जो भी थिंग्स
है वो सारी किससे बनी है? मैटर से बनी है। सबकी जो नीव है, सबका जो रूट पार्टिकल है वो हमारे पास क्या है? मैटर है। मैटर
हमारे पास क्या है? चिंदिएस्ट चीज होती है जिससे एक सब्सटांस बना होता है। मेरे पास ये पेन है। मेरे पास ये घड़ी है। मेरे पास
मैं खुद हूं। किससे बना हूं? किससे बना हूं सर? सेल से बने हो। आप तो हमने बायोलॉजी में पढ़ा है सर। सेल इज़ द
फंडामेंटल यूनिट ऑफ़ लाइफ। है ना? फंडामेंटल एंड स्ट्रक्चरल यूनिट। फंक्शनल एंड स्ट्रक्चरल यूनिट ऑफ़ लाइफ। ये हमने
बायोलॉजी में पढ़ा है सर। बिल्कुल सही पढ़ा है तूने। लेकिन वो सेल भी हमारे पास मैटर का ही बना हुआ है। ठीक है? तो हर एक चीज
हमारे पास क्या है? मैटर से बनी हुई है। और मैटर किस चीज से बना है? मैटर हमारे पास उससे भी छोटे-छोटे कुछ पार्टिकल्स से
बना हुआ है। जिनको हम क्या बोलते हैं? कॉन्स्टिटुएंट पार्टिकल्स बोलते हैं। उसकी बात अभी अपन करेंगे। आ जाओ एक-एक करके
जानते हैं। सो एनीथिंग दैट हैज़ मास। हर एक चीज़ जिसके पास मास है, उसके पास वजन है। ऑक्युपाई स्पेस कुछ ना कुछ जगह लेके बैठी
है। इज़ कॉल्ड मैटर। अब देखो, तुम एटथ क्लास में तो इसकी मैटर की डेफिनेशन ये पढ़ते हो। जब तुम थोड़ा आगे चले जाओगे आगे
फर्दर क्लासेस में तो तुम इसकी प्रिसाइज डेफिनेशन जो और ज्यादा एक्यूरेट डेफिनेशन होती है वो क्या होती है? मैटर इज एनीथिंग
दैट हैज़ मास दैट हैज़ दैट एक ऑक्यूुपाई स्पेस एंड दैट कैन बी पर्सिव्ड बाय आवर सेंसेस। पर्सव्ड बाय आवर सेंसेस यानी हम
जिसको फील कर सकते हैं। हवा चल रही है। हवा चल रही है। मैं उसको फील कर पा रहा हूं। मेरे मुंह पे किसी ने पानी फेंका।
मैं फील कर पा रहा हूं। मैं लिक्विड को फील कर पाया। पानी को हवा को। गैस को फील कर पाया। कोई मेरे को आ सॉलिड पार्टिकल
मार दे। सॉलिड हाथ मार दे तो वो भी मेरे को फील होगा। सो एनीथिंग दैट कैन बी पर्सिव्ड बाय आवर सेंसेस इज़ कंसीडर्ड एज
मैटर। ठीक है भाई? तो ये हो गई हमारे पास मैटर की परिभाषा। मैटर इज़ मेड अप ऑफ एक्सट्रीमली टाइनी पार्टिकल्स। बड़े ही
चिदीच-चिंदी पार्टिकल से मैटर हमारे पास बना होता है। दीज़ पार्टिकल्स आर टू स्मॉल। बहुत छोटे होते हैं कि हम इनको अपनी नंगी
आंखों से अपनी नेकेड आइज से नहीं देख सकते। और इनफैक्ट अगर ऑर्डिनरी माइक्रोस्कोप की मैं बात करूं। नॉर्मल
माइक्रोस्कोप जो तुम्हारे पास तुम्हारे लैब्स में होता है, स्कूल केमिस्ट्री लैब्स में होता है, बायोलॉजी लैब्स में
होता है, उसके अंदर भी नहीं देख सकते। उस माइक्रोस्कोप से भी हमको नहीं दिखेगा मैटर। ठीक है? लेकिन मैटर हम जानते हैं कि
हमारे पास आसपास जो भी व्यक्ति हैं, जो भी वस्तुएं हैं सब मैटर की बनी हुई हैं। अब मैटर का देखो एक चीज है कि मॉलिक्यूल्स,
एटम्स तुम्हें तुम्हारे सिलेबस की चीज तो नहीं है, लेकिन तुमको थोड़ी एक्स्ट्रा नॉलेज के लिए बता देता हूं। तुमने सुना
जरूर होगा ये कि मैटर हमारे पास किससे बनता है? मैटर हमारे पास बनता है किससे?
मॉलिक्यूल्स से। मॉलिक्यूल्स से। मॉलिक्यूल्स किससे बनते हैं?
एटम से। ठीक है? मॉलिक्यूल्स को हिंदी में क्या बोला जाता है बेटा? मॉलिक्यूल्स को बोला जाता है हिंदी में अणु।
अणु। ठीक है? अणु की स्पेलिंग पता नहीं छोटा ऊ आता है, बड़ा ऊ आता है। कोई बात नहीं। हिंदी का टीचर नहीं हूं मैं। है ना
भाई? और एटम्स को हम क्या बोलते हैं? परमाणु बोलते हैं। परमाणु। ठीक है? परमाणु बोलते हैं। एटम्स को,
मॉलिक्यूल्स को बोलते हैं अणु। और इनसे मिलकर के हमारे पास बनता है मैटर। ठीक है भाई? तो समझ आ गया? अगली बार कोई बोले
तेरे भाई का मैटर हो गया। तो क्या बोलियो उसको? भैया हम नहीं आ सकते। हम तो देवू भैया का मैटर वाले चैप्टर की एक्सप्लेनेशन
देख रहे हैं। तुम जाके लड़ाई करो और कॉम्प्रो कर लो कॉम्प्रो। ठीक है भाई? तो उनको बोलना कॉम्प्रो करो। लड़ाई लड़ाई में
कुछ नहीं रखा है। ठीक है भाई। 1 मिनट में तुम्हारे देवू भैया आते हैं। आते क्या है? यहीं पर। अरे ये क्या होए? देवू भैया
शिकंजी वाले। तो जरा फॉर्म में आ जाएंगे तुम्हारे देवू भैया। शिकंजी विकंजी तो नहीं बना सकते। यहां पर तो सारे के सारे
केमिकल्स पड़े हुए हैं। स्टूडियो में आज मेरी क्लास हो रही है। ये भाई स्टूडियो है एकदम केमिकल्स वाला। तो भाई गमछा होता है
ना ये तो ऐसे नहीं ऐसे करके गमछा डाल लिया। इनकी तरह एकदम गमछा डाल लिया। तो देवू भैया शिकंजी वाले भाई तुमको कभी भी
शिकंजी भी नहीं हो तो देवू भैया की शिकंजी स्टॉल पार्ट टाइम जॉब पे आना। भाई यहां पर क्या होता है? सिर्फ ₹10 के अंदर तुमको
प्यारी-प्यारी ठंडी-ठंडी शिकंजी मिल जाएगी। कि रणबीर कपूर भाई साहब अनुष्का शर्मा मैडम भी हमने चटपट को बोला कि रणबीर
कपूर और अनुष्का शर्मा बनाना जो हमारी शिकंजी पी रहे हैं। ये देखो अनुष्का शर्मा लग रही है। ये अनुष्का शर्मा ऐसे अनुष्का
शर्मा है तो विराट कोहली कभी शादी नहीं करता। हैं भाई। ठीक है? तो यहां पर इसको लाने का मकसद क्या है? ये इस लाइड को लाने
का मकसद क्या है? जब तू शिकंजी बनाता है। तेरे पास एक गिलास होता है। ग्लास के अंदर तूने पानी डाला। ठीक है? पानी के अंदर
तूने क्या डाला? पानी के अंदर तूने क्या डाला? चीनी डाली। मसाला डाला, नींबू डाला, सोडा डाला, मिक्स कर दिया, शिकंजी तैयार।
मिक्स कर दिया, शिकंजी तैयार। तो बेसिकली उस शिकंजी को बनाने के जो इंग्रेडिएंट्स थे ये सारी चीजें थी। उसी तरीके से हमारे
पास जो मैटर बनता है, मैटर को बनाने के इंग्रेडिएंट्स तो हम नहीं कह सकते लेकिन मैटर को बनाने के लिए जो जो चीजें लगती
हैं, उनको हम क्या बोलते हैं? कॉन्स्टिटुएंट पार्टिकल्स बोलते हैं। मैटर इज कंपोज्ड ऑफ वेरी टाइनी, वेरी चिंदी
कॉन्स्टिट्यूएंट पार्टिकल्स। ठीक है? तो, अगर एक पे पीस ऑफ़ चॉक मैं ले लूं। एक छोटा सा चौक का मैं पीस ले लूं और उसको मैं
तोड़ दूं। पूरा उसका चूरा बना दूं चूुरा और तू अगर उसके चूरे के एक चिंदी से पार्टिकल को उठा दिखेगा भी नहीं। एक तूने
पार्टिकल उठाया। तू बोलेगा हां सर ये देखो ये रहा चोक का कॉन्सीटुएंट पार्टिकल। नहीं उस एक पार्टिकल के अंदर चौक के एक
पार्टिकल के अंदर भी बहुत सारे बहुत सारे थाउजेंड लैक्स ऑफ क्या होंगे? माइक्रो पार्टिकल्स होंगे जिनको हम क्या बोलते
हैं? कॉनस्टीटुएंट पार्टिकल्स बोलते हैं। तो कॉन्स्टिटुएंट पार्टिकल तू चाहे जितनी कोशिश कर ले चॉक को जितना पीस ले तू
स्मालेस्ट पार्टिकल भी जो लेके आ पाएगा ना उसके अंदर भी बहुत सारे कॉन्स्टिटुएंट पार्टिकल्स होंगे। ठीक है? तो कॉन्सीटुएंट
पार्टिकल्स तू अपनी आंखों से नहीं देख सकता। चौक का माइन्यूट सा पार्टिकल तो तू देख सकता है। छोटे-छोटा माइक्रो पार्टिकल
तो तू देख सकता है लेकिन वो उसका कॉन्सीटुएंट पार्टिकल नहीं है। ठीक है? सो इफ अ पीस ऑफ़ चॉक इज़ कंटीन्यूअसली ब्रोकन
इंटू स्मॉलर पीसेस। छोटे-छोटे पीसेस में वी इवेंचुअली गेट एक्सट्रीमली टाइनी पार्टिकल्स। हमें एक्सट्रीमली टाइनी
पार्टिकल्स मिल जाएंगे। द स्मालेस्ट पार्टिकल्स दैट मेक अप अ सब्सटांस आर कॉल्ड इट्स कॉन्सीटुएंट पार्टिकल्स। ठीक
है? तो कॉन्सीटुएंट पार्टिकल्स आर द बेसिक बिल्डिंग ब्लॉक्स ऑफ़ मैटर। ये हमारे पास बेसिक बिल्डिंग ब्लॉक्स होते हैं। यानी कि
इन्हीं से हमारे पास क्या होती है? पूरा की पूरी मैटर भाई साहब की बिल्डिंग बनी होती है। अब तू बोले कि मेरी बिल्डिंग के
अंदर ईंट लगी है, सीमेंट लगा है, सैंड लगी है, टाइल्स लगे हैं। बहुत सारी चीजें लगी है। है ना? तो वो क्या है? बिल्डिंग
ब्लॉक्स हैं तेरी बिल्डिंग के। तेरे घर के। है ना? लेकिन अगर मैं कोई सी भी चीज उठा लो। तो कोई सी भी छोटी-छोटी चीज उठा
लो, ये चीज उठा लो, कोई सी भी, ये मैटर से बनी है। और मैटर किससे बना है? कॉन्स्टिटुएंट पार्टिकल्स से। तो
कॉन्स्टिटुएंट पार्टिकल्स आर द बिल्डिंग ब्लॉक्स ऑफ़ मैटर। ओके? दे रिटेन द प्रॉपर्टीज ऑफ़ अ सब्सटांस। वो सब्सटांस की
जो प्रॉपर्टी होती है, इन्हीं कॉन्स्टिटुएंट पार्टिकल्स की वजह से ही होती है। ठीक है? क्या-क्या हो सकते हैं?
पानी के हमारे पास क्या होते हैं? वाटर मॉलिक्यूल्स होते हैं। कॉन्सीटुएंट पार्टिकल्स। शुगर के क्या होते हैं? शुगर
मॉलिक्यूल्स होते हैं। चौक के क्या होते हैं? चोक पार्टिकल्स होते हैं। आयरन के क्या होते हैं? आयरन एटम्स होते हैं। आयरन
के एटम्स होते हैं। एटम्स मॉलिक्यूल्स के बारे में जो अभी तुमको बात बताई वही चीज़ है। ओके?
ठीक है? और कॉन्स्टिटुएंट पार्टिकल्स के रिगार्डिंग हमारे पास और क्या एक्स्ट्रा बात है कि मैंने जैसे तेरे को बताया चोक
को तू जितना चाहे पीसना चाहे पीस ले। उसी तरीके से सैंड को जितना चाहे पीसना चाहे पीस ले। सैंड बोले तो रेत। रेत को तू
जितना पीसना चाहता है उतना पीस ले। लेकिन उसका जो छोटे से छोटा चिंदी से चिंदी चिंदीएस्ट पार्टिकल जो तेरे को मिलेगा वो
भी उसका कॉन्स्टिटुएंट पार्टिकल नहीं है बेटा। उसके अंदर भी तेरे को लाखों कॉन्स्टिटुएंट पार्टिकल मिलेंगे। मतलब ऑफ
कोर्स सी बात है तेरे को नहीं मिलेंगे। असल में होते हैं। उसके अंदर कॉन्सीटुएंट पार्टिकल्स बहुत सारे। ठीक है? तो यही चीज़
है। एव्री कॉन्सीटुएंट पार्टिकल इटसेल्फ कंटेन मिलियंस ऑफ़ एटम्स एंड मॉलिक्यूल्स। कूल। चंगी बातचीत, चंगी बातचीत। स्टेट्स
ऑफ मैटर हमारे पास जैसे हमारे पास हमारे देश में इतनी सारी स्टेट्स हैं उसी तरीके से मैटर की भी बहुत सारी स्टेट्स होती
हैं। मैटर की बहुत सारी स्टेट्स होते हैं। सर गलत पढ़ा दिया। इस मास्टर ने इस पॉइंट पे गलत पढ़ा दिया। बहुत सारी नहीं होती।
तीन ही होती हैं सॉलिड, लिक्विड और गैस। नहीं। बहुत सारी स्टेट्स होती हैं मैटर्स की। मैटर की। तो मैटर की हमारे पास लगभग
धरती पर जो अभी तक फाउंड करी गई है, फाइंड करी गई हैं बाय द केमिस्ट, फिजिक्स, साइंटिस्ट वो कितनी होती हैं? 15 से 22
होती हैं। 15 से 22 15 से 22 क्यों सर एक पर्टिकुलर नंबर फिक्स क्यों नहीं है? क्योंकि अभी वेरीफाई हो रही है। रिसर्च चल
रही है। ठीक है? सॉलिड, लिक्विड और गैस हमारे सिलेबस में है। हमको पढ़नी है। मगर उसके अलावा दो और होती हैं जो कि बहुत
ज्यादा फेमस हैं। प्लाज्मा और बोस आइंस्टाइन कंडेंसेट बीईसी जिसके ऊपर बोस भाई साहब ने और आइंस्टाइन भाई साहब ने
रिसर्च करी थी। उन्होंने बनाया था ये। ठीक है? ये एक पर्टिकुलर टेंपरेचर एब्सोल्यूट टेंपरेचर पर हमारे पास रहती है। ठीक है?
ज्यादा सोचना नहीं है उसके बारे में। हमको पढ़ना है तीन स्टेट्स ऑफ मैटर के बारे में।
कौन-कौन सी? केड़ी-केड़ी। एक तो हो गया हमारे पास सॉलिड।
एक हो गया हमारे पास लिक्विड। एक हो गई हमारे पास गैसेस। ठीक है? तो सॉलिड, लिक्विड और गैस। सॉलिड, लिक्विड और हमारे
पास ये गैस हो जाती है। ये हमारे पास क्या होते हैं? तीन स्टेट्स ऑफ मैटर होते हैं। टोटल देयर आर थ्री स्टेट्स ऑफ मैटर।
थ्री स्टेट्स ऑफ मैटर। ठीक है बाबू? ये तीन स्टेट्स ऑफ़ मैटर
हमारे पास होती हैं। हम जानते हैं सॉलिड क्या होती है? लिक्विड क्या होती है? गैस क्या होती है? एक-एक करके तीनों के बारे
में पढ़ेंगे। सॉलिड हमारे पास जैसे आइस को अगर मैं बोलूं आइस जो बर्फ का क्यूब होता है हमारे पास उसको पिघला दिया लिक्विड बन
गया पानी बन गया पानी को उबाल दिया गैस बन गया वाटर वेपर बन गया ठीक है तो एक ही हमारे पास जो सब्सटांस होता है उससे भी हम
ऑब्टेन कर सकते हैं उसकी तीनों स्टेट्स ठीक है हर सब्सटांस में ये पॉसिबल नहीं होता जैसे अगर मैं लोहे की बात करूं मैं
लोहे को सॉलिड फॉर्म में पकड़ सकता हूं लोहा यहां पर बहुत सारी चीजों में होगा ये इसके अंदर भी मेटल होगा ये मेरी चेन है
चेन मेरी मेटल की है मेटल को मैं पिघला सकता हूं लिक्विड फॉर्म में ला सकता हूं लेकिन मैं उसको अगर उबालूंगा बॉईल करूंगा
तो वो वेपर में कन्वर्ट नहीं हो पाएगा। ठीक है? ये चीज़ है। तो कुछ हमारे पास सब्सटेंसेस होते हैं जो कि तीनों स्टेट्स
में रह सकते हैं। कुछ सब्सटेंसेस होते हैं जो सिर्फ एक ही में रह सकते हैं। कुछ सब्सटेंसेस होते हैं जो दो में रह सकते
हैं। ठीक है? ओके? ठीक है जी। तो प्रॉपर्टीज ऑफ़ सॉलिड्स की अगर हम बात करें सॉलिड्स की। सॉलिड सॉलिड सॉलिड सॉलिड
सॉलिड सॉलिड सॉलिड। मामला एकदम सॉलिड है मामू। ठीक है? सॉलिड का मामला एकदम सॉलिड होता है। मतलब मतलब क्या है इसका? सॉलिड
होता है सॉलिड का मामला। इसका मतलब है कि सॉलिड के पास तुम चाहे जितना जोर लगा लो, जितना जोर लगा लो, जितना जोर लगा लो, तुम
उसको थोड़ा बहुत ना के बराबर, नेग्लिजिबल, नेगलिजिबल मतलब ना के बराबर, ना के बराबर उसको बिगाड़ पाओगे। ठीक है? सॉलिड के अंदर
इतनी जान होती है। सॉलिड के अंदर इतनी क्षमता होती है। ठीक है? तो अगर हम सॉलिड की बात करें, दे हैव डेफिनेट शेप। मैं अगर
किसी भी सॉलिड की बात करूं इसकी अगर बात करूं इस पेन की तो इसके पास डेफिनिट शेप है। इसके पास एक ही शेप है। ऐसा नहीं है
कि शेप धीरे-धीरे करके चेंज हो रही है। नहीं एक ही शेप है। उसकी वॉल्यूम भी एकदम सेम है। ये मेरे पास सिलडिकल सा पेन है।
सिलड्रिकल सा पेन है। सिलेंडर की मैं वॉल्यूम फाइंड कर सकता हूं? बिल्कुल फाइंड कर सकता हूं? वो भी मेरे पास फिक्स्ड है।
पार्टिकल्स आर वेरी क्लोसली पैक्ड। पार्टिकल्स जो होते हैं बहुत क्लोजली पैक्ड होते हैं। अगर मैं एक सॉलिड का
मॉलिक्यूलर डायग्राम बनाने की कोशिश करूं यहां पर तो वो क्या होगा? उसके अंदर मॉलिक्यूल्स हैं ये चिंदी-चिंदी। ये तो
मैं बहुत बड़े बना रहा हूं। सर जी आपने तो छोटा भीम की याद दिला दी। यह तो टुनटुन मौसी के लड्डू लग रहे। यह तो टुनटुन मौसी
के लड्डू लग रहे हैं। बेटा अभी कीचक बन जाऊंगा ना तेरे को पछाड़ दूंगा पहलवानपुर का हूं। कसम से बता रही हूं। ठीक है? तो
हमारे पास सॉलिड के अंदर क्या होते हैं? बहुत सारे मॉलिक्यूल्स होते हैं। जो कि हमारे पास पास पास एकदम पासपास करीब-करीब
पासपास पैक्ड होते हैं। सॉलिड के जो पार्टिकल्स हैं एकदम पासपास पासपास पैक्ड हैं। क्लोजली पैक्ड हैं। क्या है? क्लोजली
पैक्ड है। मतबल मतबल मतबल यो है कि उसके अंदर जो इंटर पार्टिकुलर स्पेसेस हैं इंटर पार्टिकल स्पेसेस हैं ये स्पेसेस ये
चिंदीचंदी स्पसेस ये चिंदी चिंदी ये चिंदी चिंदी ये चिंदीचिंदी ये चिंदीचदी ये चिंदीचंदी ये चिंदीचंदी। तो ये जो
चिंदीचिंदी से छोटे-छोटे से पार्टिकल्स के इनके बीच में स्पेसेस हैं। ये स्पेसेस बहुत कम होते हैं। बहुत कम होते हैं। ठीक
है? तो इंटर पार्टिकल्स आर क्लोजली पैक्ड एंड अपार्ट फ्रॉम दैट इंटर पार्टिकल फोर्स जो होता है इंटर पार्टिकल फोर्स ऑफ
अट्रैक्शन बहुत स्ट्रांग होता है। मतलब अट्रैक्शन मतलब प्रेम से जो अट्रैक्शन तेरे को है उससे है ना भाई चुपके-चुपके मन
ही मन में वही अट्रैक्शन की मैं बात कर रहा हूं। डिस्ट्रैक्ट हो रहा है तू। है ना? तो तेरे को तो वो अट्रैक्शन है। वैसी
ही अट्रैक्शन भाई हमारे पास सॉलिड्स को भी होती है अपने पार्टिकल्स से। एक पार्टिकल को मन ही मन प्रेम है। हम शर्मा गया है
ना? तो ऐसा वाला हमारे पास क्या है? अट्रैक्शन है। किसको? सॉलिड के पार्टिकल्स को। एक दूसरे से। ठीक है? हमारे पास
स्ट्रांग इंटर पार्टिकल फोर्स ऑफ अट्रैक्शन होता है। इतनी ज्यादा अट्रैक्शन है कि वो कहता है मैं तो प्रिया से दूर
जाऊंगा ही नहीं। मैं तो प्रिया के साथ ही चिपक के बैठा रहूंगा। है ना? तो वो क्या कहता है? मैं तो एकदम साथ-साथ चिपक-चिपक
के बैठा रहूंगा। मैं बहुत इनसिक्योर आदमी हूं। मैं भाई दूर नहीं जाऊंगा। मैं चिपक के बैठा रहूंगा। है ना? तो ऐसा होता है
सॉलिड्स के अंदर। ठीक है? एंटर पार्टिकल्स फोर्स ऑफ़ अट्रैक्शन जो होता है वो बहुत स्ट्रांग होता है और पार्टिकल्स कैन ओनली
वाइब्रेट अबाउट देयर मीन पोजीशन। मतलब पार्टिकल्स के पास यार स्पेस ही नहीं है। जब स्पेस ही नहीं है तो उनके पास मूव करने
की जगह ही नहीं होगी। मूव करने की जगह ही नहीं होगी तो वो क्या करेंगे? लेकिन उनको चुल है कि हमको थोड़ा हिलना डुलना तो है
भाई। एक ही जगह पे सोच तो ऐसे ही खड़ा है स्टैचू बनके। तेरे को किसी ने स्टैचू बोला और भाई ओवर करना भूल गया। तू ऐसे ही खड़ा
हुआ है। तुमको लगा वीडियो पॉज हो गई है ना? ठीक है। तो यहां पर तू ऐसे करके ही खड़ा हुआ
है। तो क्या होगा? मैटर के पार्टिकल्स जो हैं सॉलिड के जो पार्टिकल्स हैं उनको भी ऐसे तकलीफ होगी। तकलीक मतलब तफ्लीक तकलीफ
होगी। तकलीफ होगी। है ना? तो उनको भी तकलीफ होगी। तो बेसिकली वो क्या करते हैं? वो कहते हैं चलो यार जितनी थोड़ी बहुत जगह
है उसी के अंदर वाइब्रेट कर लेते हैं। वो बस अपनी जगह पर [हंसी] वाइब्रेट करते रहते हैं। इधर-उधर
हिलते डुलते नहीं हैं। ठीक है? सो पार्टिकल्स जो होते हैं सॉलिड के कैन ओनली वाइब्रेट वाइब्रेट अबाउट देयर मीन पोजीशन
कैन नॉट फ्लो सॉलिड के पार्टिकल फ्लो नहीं कर सकते क्योंकि स्पेस ही नहीं है। डिफिकल्ट टू कंप्रेस सॉलिड को कंप्रेस
करना दबा डालना दबाना बहुत ज्यादा टफ होता है। ठीक है? क्योंकि स्पेस ही नहीं है। तो मैटर के इसके पार्टिकल्स को दबाएगा तो तब
ना जब आसपास स्पेस होगा तो उसको दबाएगा। वो स्पेस में घुस जाएगा। दब जाएगा। लेकिन स्पेस ही नहीं है तो दब ही नहीं पाएगा। तो
देख ले यहां पर सॉलिड के कुछ एग्जांपल्स हैं हमारे पास। जैसे हो गया लोहा, पत्थर, लकड़ी, एलुमिनियम, बर्फ। ये सारे हमारे
पास क्या हैं? सॉलिड के एग्जांपल्स हैं। ओके जी। ओके जी। प्रॉपर्टीज ऑफ लिक्विड की अगर मैं बात करूं, लिक्विड की प्रॉपर्टीज
की यदि मैं बात करूं, अब लिक्विड क्या होता है? क्या लिक्विड के पास डेफिनेट शेप होती है? नहीं सर। ये मेरे पास लिक्विड
है। एक तो ये जिस स्टूडियो में आज मैं हूं, यहां पर केमिकल्स बहुत सारे पड़े हुए हैं। रहने देते हैं। भाई मैं जल जला ना
जाऊं। मजाक कर रहा हूं। जल कैसे जाऊंगा। तो यहां पर हमारे पास यह जो केमिकल पड़ा हुआ है। अब देखिए लिक्विड है। इसकी क्या
शेप डिफाइंड है? नहीं। सर यह क्या रसना ले आ गए आप? कौन सा है ये? ZnSO4 है भाई। जिंक सल्फेट। तो यहां पर हमारे पास क्या
है? केमिकल है। है ना? ये क्या है? लिक्विड है। डोल रहा है। इधर-उधर डोल रहा है। तुम्हें अगर दूर से नहीं दिख रहा। मैं
पास ले आता हूं। ये देखो इधर-उधर डोल रहा है। मतलब इसकी शेप फिक्स नहीं है। अभी ये देखिए सिलड्रिकल शेप का लग रहा है। मैंने
इसको टेढ़ा कर दिया। ये देखो टेढ़ा हो गया। इसकी शेप टेढ़ी हो गई। तो बेसिकली जैसा भाई कंटेनर की शेप होगी वैसी शेप ले लेगा
हमारे पास लिक्विड। लिक्विड की खुद की अपनी कोई भाई सेल्फ रिस्पेक्ट नहीं होती। इसकी खुद की अपनी कोई भी शेप नहीं होती।
तो नो डेफिनाइट शेप बट इसकी जो वॉल्यूम होती है, वॉल्यूम डेफिनाइट होती है। वॉल्यूम डिफाइंड होती है। वॉल्यूम फिक्स्ड
होती है। ठीक है भाई? ये होता है अपने पास। टेक द शेप ऑफ द कंटेनर। ये कंटेनर जिस कंटेनर में डालते हैं, उसकी शेप ले
लेता है। फ्लो इजीली बड़ी आसानी से फ्लो कर जाता है। मैंने अभी तेरे को दिखा दिया। मैं टेढ़ा-मेढ़ा कर रहा था। आसानी से ये
फ्लो कर रहा था। ठीक है? पार्टिकल्स आर लूजली पैक्ड। यहां पर पार्टिकल्स लूजली पैक्ड होते हैं। इसका मॉलिक्यूलर डायग्राम
अगर मैं बना दूं तो इसके अंदर क्या है? टुनटुन मौसी के लड्डू तो इसमें भी हैं लेकिन थोड़ा दूर-दूर है। लूजली पैक्ड है।
इनके पास जगह है इधर-उधर घूमने फिरने की। ये लड्डू क्या है? ये एक्सपायर नहीं होंगे क्योंकि इनके पास क्या है? जगह है। ठीक
है? ये हमारे पास दूर-दूर हैं। इनके बीच में जो इंटर पार्टिकल स्पेसेस हैं। इंटर पार्टिकल
इंटर पार्टिकल इंटर पार्टिकल इंटर पार्टिकल ओ इंटर पार्टिकल ओ इंटर पार्टिकल ओ इंटर पार्टिकल स्पेसेस जो है वो बहुत
सारे हैं। वो कंपैरेटिवली सॉलिड्स के मुकाबले काफी ज्यादा हैं। ठीक है? तो इंटर पार्टिकल स्पेसेस जो होते हैं इनके अंदर
वो फिर भी ज्यादा होते हैं। फोर्स ऑफ़ अट्रैक्शन क्या होता है इनके अंदर? अब इनके अंदर प्रेम का क्या सीन है? ये वो
लोग हैं। जैसे सॉलिड का क्या है? सॉलिड को पहलाप प्यार हुआ है। तू पहलाप प्यार है मेरा।
जब पहलापला प्यार होता है तो इंसान को क्या होता है कि यार जो है यही है फॉर लाइफ है ना लेकिन सॉलिड्स के साथ ऐसा है
क्योंकि सॉलिड का पहलापला प्यार है उसके साथ जो फोर्स ऑफ़ अट्रैक्शन है प्रेम है वो बहुत ज्यादा है वो दूर ही नहीं होना चाहता
ठीक है लिक्विड्स को क्या है लिक्विड्स को एक बार पहले प्यार हो चुका है उसको धोखा मिल चुका है अब वो क्या है अब वो दूसरी
बार जब प्यार कर रहा है ना वो थोड़ा लिमिटेड स्पेस के साथ कर रहा है वो कह रहा है ठीक है यार मैं तुझसे प्यार करता हूं
मेरे को तुझसे अट्रैक्शन है लेकिन थोड़ी कम है मैं थोड़े से सॉलिड जितना इतना ज्यादा प्यार नहीं कर सकता मैं थोड़ा सा
तुझसे दूर-दूर रहूंगा थोड़ा थोड़ा सा स्पेस बना के रखूंगा। ठीक है? तो इसके अंदर जो फोर्स ऑफ़ अट्रैक्शन होता है, इंटर
पार्टिकल फोर्स ऑफ़ अट्रैक्शन वो सॉलिड से वीकर होता है। सॉलिड्स के मुकाबले थोड़ा कमजोर होता है। ठीक है? स्लाइटली
कंप्रेसिबल। ये थोड़े से कंप्रेस भी हो सकते हैं। क्यों हो सकते हैं? मैं अगर इसको दबाऊंगा तो इसके बीच में जो स्पेसेस
हैं उन स्पेसेस में ये पार्टिकल्स घुसना चाहेंगे और थोड़े से दब जाएंगे। थोड़ा सा ये पीस जो है लिक्विड का ये दब जाएगा। ठीक
है? ये हमारे पास होता है। एग्जांपल्स क्या है? पानी है, दूध है, तेल है, जूस है, मरक्यूरी है। मरकरी बहुत अच्छा इसका
एग्ज़ांपल होता है। मरकरी। ठीक है? ओके जी। आगे बढ़ते हैं। गैसेस की अगर हम बात करें
अब गैसेस के साथ बहुत बुरा हुआ है। गैसेस के साथ बहुत बुरा हुआ है जीवन में। बहुत बुरा हुआ है। क्यों बुरा हुआ है, सर? अरे
बताऊंगा सारी बातें अभी बता दूं। तो गैसेस में हमारे पास क्या होता है? गैसेस की ना ही कोई डेफिनिट शेप होती है, ना ही कोई
फिक्स्ड वॉल्यूम होती है। गैस का क्या है भाई? भाई हम यहां मैं मैं यहां पे कमरे में खड़ा हूं। गैस ही गैस है। एयर ही एयर
है। एयर क्या है? गैस है। एयर इज अ मिक्सचर ऑफ गैसेस। बहुत सारी गैसेस होती हैं। ऑक्सीजन होती है, नाइट्रोजन होती है,
हाइड्रोजन होती है, कार्बन डाइऑक्साइड होती है, आर्गन होती है, कार्बन मोनोऑक्साइड होती है, नाइट्रोजन होती है।
बहुत सारी गैसेस होती हैं। है ना? और एक्सेक्ट्रा। बहुत सारी गैसेस हैं हमारे पास एयर के अंदर। तो गैसेस का क्या है? वो
चल रही हैं। उनको कोई रोकने वाला नहीं है। गैसेस पता है कौन है? गैसेस वो हैं। बाऊजी बाऊजी मुझे जाने दो बाऊजी। बाऊजी मैं रात
से बहुत प्यार करती हूं बाऊजी। तो बाऊजी क्या कहते हैं? जा सिमरन जा जी ले अपनी जिंदगी ओ लाजो है ना तो क्या है गैसेस है
हमारे पास सिमरन गैसेस को मैं क्या बोलता हूं गैसेस को मैं बोलता हूं सिमरन गैसेस को हम बोलेंगे सिमरन क्यों भाई क्योंकि
सिमरन क्या है आजाद है सिमरन अपनी जिंदगी जी रही है बढ़िया तरीके से आजाद है तो वैसे ही गैसेस हमारे पास क्या है गैसेस
हमारे पास आजाद हैं गैसेस को कोई रोकने वाला टोकने वाला नहीं है गैसेस की यदि मैं बात करूं गैसेस का यदि मैं मॉलिक्यूलर
डायग्राम बना दूं तो गैसेस के मॉलिक्यूल्स कैसे होते हैं यहां पर भी लड्डू हैं लेकिन यहां पर लड्डुओं को रोकनेटोकने वाला कोई
नहीं जहां लड्डू को प्लेट में बैठना है वो वहां बैठेगा। तो देख रहा है तू गैस के मॉलिक्यूल्स के बीच में बहुत सारा इंटर
पार्टिकल ओ इंटर पार्टिकल इंटर पार्टिकल स्पेसेस बहुत सारे हैं। बहुत बहुत सारे हैं। है ना? तो गैसेस के अंदर जो इंटर
पार्टिकल स्पेसेस होते हैं वो बहुत सारे होते हैं। कोई रोक-टोक नहीं है भाई। ये सिमरन है। आजाद है बेटा। तू देखो जहां
जाना है तू वहां जा। ठीक है? गैसेस के अंदर हमारे पास ऐसा होता है। कोई डेफिनेट शेप नहीं है। जिस कंटेनर में डालेंगे उसकी
शेप ले लेंगी। कोई डेफिनेट वॉल्यूम भी नहीं है। तू ऐसा कर सकता है क्या? तू एक बलून को पहले थोड़ा सा फुला। जैसे यहां पर
ये बलून है लेकिन ये खुलेगा पता नहीं खुलेगा। खुलेगा तो नहीं। अब ये बलून है मान ले। है
ना? अभी इसके अंदर जो एयर है इसके अंदर जो गैस है उसकी वॉल्यूम इतनी है। इस बलून जितनी है। मैं इस बलून को इतना दबा दूं।
इसकी वॉल्यूम मैंने थोड़ी सी कम कर दी। इसको अगर मैं मान ले कम फुलाता। यहां पे मेरे पास एक्स्ट्रा बलून नहीं है ना या
शायद है। नहीं है। ठीक है? तो यहां पर अगर मैं अगर इसको कम फुलाता थोड़ा सा दबा दूं इमेजिन करिए। से थोड़ा छोटा है तो क्या
होगा? तो क्या होगा? उतनी ही एयर मैंने उसके अंदर भरी है लेकिन वो थोड़ा कम फूला हुआ है। वो थोड़ा सा कम फूला हुआ है। तो
बेसिकली क्या है हमारे पास? हम जितना ज्यादा एयर को जितने स्पेस के अंदर रखना चाहेंगे उतने स्पेस में रख सकते हैं। अब
इसके अंदर एयर डिफाइंड है। ये इतना फूला हुआ है। मैंने इसको दबा दिया। इसका साइज छोटा हो गया। उसकी वॉल्यूम छोटी हो गई।
लेकिन एयर तो उसके अंदर अभी भी इतनी है। तो एयर के साथ क्या होता है? तो उसको जितनी वॉल्यूम देना चाहे तो उतनी वॉल्यूम
दे दे। उसकी वॉल्यूम भी फिक्स्ड नहीं है। नो डेफिनेट वॉल्यूम, नो डेफिनेट शेप फिल द एंटायर कंटेनर। जिस कंटेनर में डालेगा
उसको पूरा भर देंगी। ठीक है? कैन फ्लो इजीली? आराम से फ्लो कर जाती है। इधर है उधर है। उड़ता ही फिरूं इन हवाओं में कहीं।
तो हवाओं में मैं उड़ता क्यों फिर रहा हूं? क्योंकि हवा में मैं इजीली फ्लो कर सकता हूं क्योंकि हवा की प्रॉपर्टी होती है।
दैट गैसेस कैन फ्लो ईजीली। ठीक है? हाइली कंप्रेसिबल होती हैं। जितना मैं इसको कंप्रेस करना चाहूं मैं लगभग इसको फुल्ली
लगभग फुल्ली कंप्रेसिबल कर सकता हूं। कंप्रेस कर सकता हूं। क्योंकि इसके सारे मॉलिक्यूल्स एक जगह पे आ जाएंगे। पूरा का
पूरा ये कंप्रेस हो जाएगा। क्लियर है? पार्टिकल्स आर फार अपार्ट। दूर-दूर होते हैं पार्टिकल। हमको दिख रहे हैं। अब गलत
क्यों हुआ है गैस के? मैंने शुरू-शुर में बताया गैसेस के साथ बहुत गलत हुआ है। गैसेस को पहले प्यार हुआ। तू पहलाप प्यार
है मेरा। तो पहलाप प्यार हो गया। दूसरा भी हो गया। तीसरा भी हो गया। बहुत प्यार कर लिया गैसेस ने। अब उसका
भरोसा उठ चुका है। हो मुझे छोड़कर जो तुम जाओगे बड़ा पछताओगे। तो गैसेस अब पछता रही हैं। गैसेस अब पछता रही हैं। क्यों पछता
रही है? उनका प्यार से भरोसा उठ चुका है। वो कहती हैं प्यार नाम की कोई चीज नहीं है। अट्रैक्शन नाम की कोई चीज नहीं है।
फोर्स ऑफ़ अट्रैक्शन नाम की कोई चीज नहीं है। इंटर पार्टिकल फोर्स ऑफ़ अट्रैक्शन नाम की कोई चीज नहीं होती। नेगलिजिबल फोर्स ऑफ
अट्रैक्शन होता है किसके अंदर? गैसेस के अंदर। कोई अट्रैक्शन नहीं है। अपने मॉलिक्यूल्स के पास बिल्कुल नहीं रहना
चाहती। एक दूसरे से कोई प्यार नहीं है। एकदम दूर-दूर रहना चाहती हैं। अब ये प्रॉपर्टी है गैसेस की। एग्जांपल्स क्या
हैं? हवा, ऑक्सीजन, कार्बन डाइऑक्साइड, वाटर वेपर, नाइट्रोजन, कार्बन मोनोऑक्साइड, आर्गन। बहुत सारी है गैसेस।
सारी गैसेस क्या हैं हमारे पास? एग्जांपल है गैसेस का। सारे एग्जांपल्स ये सब होते हैं। ठीक है भाई? अब देखो हमने जो भी इसके
कैरेक्टरिस्टिक्स पढ़े जो भी बातें पढ़ी इन्हीं कैरेक्टरिस्टिक्स को हम इस चैप्टर में अभी आगे पढ़ने वाले हैं। ये क्या था?
इन सारी इस चैप्टर की समरी तेरे को दे चुका हूं मैं। इस चैप्टर की समरी तेरे को दे चुका हूं। इंटर पार्टिकल फोर्स ऑफ़
अट्रैक्शन और इंटर पार्टिकल स्पेसेस। इन चीजों पर पूरा चैप्टर अब आगे जो भी हम पढ़ने वाले हैं वो सारी बातें इन पर बेस्ड
होंगी। ठीक है? इंटर पार्टिकल स्पेस मैंने तेरे को ऑलरेडी बता दिया। यहां पर क्या है? ज्यादा है। यहां पर गैसेस के मुकाबले
कम है लेकिन सॉलिड्स के मुकाबले ज्यादा है और सॉलिड्स में तो नेगिजिबल है। ठीक है? तो इंटर पार्टिकल स्पेस हमारे पास यही चीज
होती है। सॉलिड्स में नेग्लिजिबल लिक्विड्स में सॉलिड्स के मुकाबले ज्यादा।
गैसेस में बहुत ज्यादा। गैसेस का भरोसा उठ चुका है। फ्रेम नाम की चीज से है ना? ये हमारे पास क्या है? इंटर पार्टिकल स्पसेस
हैं। ठीक है बाबू? ओके बाबू। ओके जी। आगे बढ़ गए। इंटर पार्टिकल फोर्स ऑफ़ अट्रैक्शन भी
मैंने तेरे को बता दिया। प्रेम सबसे ज्यादा किसको है भाई? सॉलिड को है। प्रेम सबसे ज्यादा। सॉलिड क्या करता है? सबसे
ज्यादा सबसे ज्यादा इंटर पार्टिकल्स पे वो होता है। इंटर पार्टिकल फोर्स ऑफ़ अट्रैक्शन। क्यों? बहुत प्यार है।
पहला-प्याला प्यार है। तो बहुत प्यार करेगा वो। है ना? तो वो क्या करेगा? एकदम पास पास रहेगा। तो सॉलिड्स का क्या होता
है? सॉलिड्स में इंटर पार्टिकल फोर्स ऑफ अट्रैक्शन सबसे ज्यादा देन होता है लिक्विड्स में।
देन होता है गैसेस में। ठीक है? इंटर पार्टिकल
फोर्स ऑफ अट्रैक्शन का जो ट्रेंड होता है वो ये
होता है कि सॉलिड्स में सबसे ज्यादा फिर लिक्विड्स में फिर गैसेस में। ठीक है भाई? यही चीज यहां पर लिखी हुई है। अब देख इन
इंटर पार्टिकल फोर्स ऑफ़ अट्रैक्शन और इंटर पार्टिकल जो स्पेसेस होता है इनके बेसिस पे हमें पता चलता है कि कौन सी स्टेट कौन
सी है। कौन सी स्टेट ऑफ़ मैटर, कौन सी स्टेट ऑफ़ मैटर। हम जैसे पता नहीं है मेरे को। मेरे को मेरी आंखें बंद हैं। अच्छा ये
बता ये कौन सी स्टेट ऑफ़ मैटर है? इसका मॉलिक्यूलर डायग्राम तेरे आगे है। बता ये कौन सी है? मेरे को नहीं पता चलेगा ना। जब
तक मैं देखूंगा नहीं मतलब दिखेगा तो ऑब्वियसली नहीं। लेकिन मान ले मेरे को डायग्राम दे रखा है इंटर वो उसका
मॉलिक्यूलर डायग्राम दे रखा है कि मॉलिक्यूल्स कितनी दूर-दूर हैं। है ना? तो मेरे को अगर दिख रहा है कि भाई इसके अंदर
थोड़ा-थोड़ा स्पेससेस है तो ये लिक्विड है। इसके अंदर बहुत-बहुत स्पेस है बीच में। तो ये गैस है। इसके अंदर बिल्कुल ही
स्पेस नहीं है। एकदम इनसिक्योर आदमी है। एकदम चिपक-चिपक के सारे पार्टिकल्स बैठे हैं। तो ये सॉलिड है। ठीक है? तो इनके
बेसिस पे हमको पता चलता है कौन सी स्टेट ऑफ मैटर गैस है, लिक्विड है या सॉलिड है। ठीक है? सॉलिड के अंदर इंटर पार्टिकल
स्पेससेस मिनिमम होते हैं। बेसिकली ये समरी है जो मैंने तेरे को बताया। समरी है ये। ठीक है? जो भी मैंने तेरे को बातें
बताई उनकी समरी है ये। तू इसको पढ़ सकता है। ठीक है? अपने नोट्स में भी लिखना चाहे तो बिल्कुल लिख सकता है और लिखना चाहे
क्या? इसको लिख लियो। क्योंकि पेपर में जो चार मार्क्स का है, पांच मार्क्स का क्वेश्चन अगर तुम्हारे पेपर में आता है,
तो उसके अंदर ये आएगा। देख ले चार-चार डिफरेंसेस हैं। चार मार्क्स का क्वेश्चन आएगा। हर किसी स्टेट का तेरे को एक-एक
डिफरेंस लिखना पड़ेगा। तो इट इज़ वेरीेंट। ओके? मैटर इज़ एनीथिंग दैट हैज़ मास, ऑक्यूुपाई स्पेस एंड कैन बी पर्सिव्ड बाय
आवर सेंसेस। मास एंड ऑक्युपाई स्पेस। ओके? ऑप्शन डी। कॉन्सीटुएंट पार्टिकल्स। कॉन्सीटुएंट पार्टिकल्स हमारे पास क्या
होते हैं? ये बताना है हमको। ऑक्यूुपाई नो स्पेस, कैन नॉट मूव, मेकअप मैटर, आर विज़िबल टू नेकेड आइज। मेकअप मैटर। सर,
मेकअप कहां से आ गया? मेकअप तो मेरी दीदी लगाती है। और फिर डांस करती है, शनाया, शनाया तारीफ करूं? अरे यार डिस्ट्रैक्ट हो
जाता है तू। है ना? तो मेक अप मैटर का मतलब है मैटर को बनाने वाले मैटर के जो बिल्डिंग ब्लॉक्स हैं वो क्या हैं हमारे
पास? क्या हैं? कॉन्स्टिट्यूएंट पार्टिकल्स। ओके? ओके? इन सॉलिड्स। सॉलिड्स के अंदर जो पार्टिकल्स होते हैं
वो क्या होते हैं? मूव फ्रीली। फ्रीली मूव कर लेते हैं। नहीं। वाइब्रेट एट देयर फिक्स्ड पोजीशन। यस। क्यों? क्योंकि जगह
ही नहीं है। अरे बहुत जगह है। नहीं जगह है। बहुत जगह है। नहीं जगह है। बहुत जगह है। नहीं जगह है। सॉलिड्स के अंदर कोई जगह
नहीं है। तो वो क्या करते हैं? मूव करने के नाम पे सिर्फ वाइब्रेट करते रहते हैं अपनी जगह पे। जिन
ठीक है? ओके। आगे बढ़ जाते हैं। लिक्विड्स क्या करते हैं? वाइब्रेट करते हैं अपनी जगह पे सिर्फ। ना एक्सपैंड कर जाते हैं
इनफाइनाइटली ना। नॉट ऑक्यूुपाई स्पेस। नहीं ये तो पॉसिबल ही नहीं है। हर स्टेट ऑफ़ मैटर स्पेस तो ऑक्यूुपाई करती ही है।
फ्लो यस। लिक्विड्स कैन फ्लो ईजीली। ऑप्शन डी। द फोर्स ऑफ़ अट्रैक्शन इन गैसेस। गैसेस में जो फोर्स ऑफ़ अट्रैक्शन होता है वो
कैसा होता है? भरोसा उठ चुका है प्यार नाम की चीज से मेरा। गैसेस ये कहती हैं मेरा नहीं। ठीक है? तो गैसेस का क्या है?
बहुत प्यार किया था उससे बहुत ज्यादा। लेकिन नहीं बन पाई बात। तो इसीलिए हमारा
भरोसा उठ चुका है प्यार नाम की चीज से, अट्रैक्शन नाम की चीज से, फोर्स ऑफ़ अट्रैक्शन नाम की चीज से। तो इंटर
पार्टिकल फोर्स ऑफ़ अट्रैक्शन जो होता है गैसेस में वो नेगलिजिबल होता है। मैक्सिमम बिल्कुल भी नहीं, स्ट्रांग बिल्कुल भी
नहीं, मॉडरेट बिल्कुल भी नहीं, मिनिमम होता है। ठीक है? सबसे कम होता है फोर्स ऑफ़ अट्रैक्शन गैसेस में। ओके? आगे बढ़ते
हैं। शुगर डिॉल्व्स इन वाटर बिकॉज़ शुगर वाटर के अंदर क्यों डिॉल्व हो जाती है? पानी के अंदर हमारी चीनी क्यों डिॉल्व हो
जाती है? क्योंकि इट वैनिशेस गायब हो जाती है। क्योंकि इट ऑक्युपाईज़ इंटर पार्टिकल स्पेसेस। इंटर पार्टिकल स्पेसेस ऑक्युपाई
कर लेती है। वाटर जो होता है इवापोरेट हो जाता है चीनी मिलाने पर। शुगर मेल्ट। शुगर उसके अंदर जा के मेल्ट हो जाती है। नहीं।
बेसिकली क्या होता है? शुगर जो होती है वो जाकर के शुगर के मॉलिक्यूल्स ब्रेक डाउन कर जाते हैं। टूट जाते हैं पानी के अंदर
जाकर के और जो पानी के अंदर छोटे-छोटे इंटर पार्टिकल स्पेससेस होते हैं ना उसके मॉलिक्यूल्स के बीच में वाटर मॉलिक्यूल्स
के बीच में उनकी जगह में जाकर के शुगर के मॉलिक्यूल्स भर जाते हैं। अब जैसे मैं तेरे को बताऊं ये अगर हमारे पास
मॉलिक्यूलर डायग्राम है किसका? पानी का। पानी के मॉलिक्यूल्स ये रहे इसके अंदर। पानी के अंदर क्या होती है? जगह होती है।
काफी जगह होती है। काफी जगह होती है। है ना? पानी के अंदर हमारे पास काफी जगह है।
बीच-बीच में काफी इंटर पार्टिकल स्पेसेस हैं। ठीक है? अब मैंने इसके अंदर चीनी मिला दी। यह रहा चीनी के तो चीनी इसके
अंदर-अंदर जा जा करके अपनी जगह बना लेगी। अपनी जगह बना लेगी। ठीक है? चीनी इसको कहेगी तू पहलापला प्यार
है मेरा। ठीक है? तो ये हमारे पास शुगर मॉलिक्यूल्स इस तरीके से जाके अपनी जगह बना लेंगे। तो
बेसिकली वाटर इवापोरेट तो नहीं होता लेकिन शुगर मॉलिक्यूल क्या करते हैं? ऑक्यूुपाई कर लेते हैं, जगह ले लेते हैं इंटर
पार्टिकल स्पेससेस पे। ठीक है? ओके। इंटर पार्टिकल फोर्स ऑफ फोर्सेस आर रिस्पांसिबल फॉर जो इंटर पार्टिकल फोर्सेस होते हैं
प्यार, प्रेम मगर प्रेम से। तो क्या होता है इनका? उनका भाई रिस्पांसिबल किस चीज के लिए होते हैं? वो कलर के लिए। बिल्कुल भी
नहीं यार। मैटर का कलर क्या है? मल्टीपल कलर्स हैं। अलग-अलग चीजें हैं। कलर कलर डिफाइन नहीं होता। कलर इज़ नॉट द प्रॉपर्टी
ऑफ़ मैटर। ठीक है? तो, हमारे पास शेप एंड स्टेट ऑफ़ मैटर के लिए रिस्पांसिबल होता है। टेंपरेचर के लिए होता है बिल्कुल भी
नहीं। वेट के लिए बिल्कुल भी नहीं। तो जो स्टेट ऑफ मैटर है मैंने तेरे को क्या बताया? इंटर पार्टिकल फोर्स एंड
इंटर पार्टिकल स्पेसेस। इंटरपार्टिकल स्पेसेस ये जो दो चीजें हैं इन दो चीजों के बेसिस पर हमें पता चलेगा
कि मैटर की कौन सी स्टेट है, लिक्विड है, सॉलिड है या गैस है। ठीक है? तो शेप और स्टेट ऑफ मैटर हमें पता चलेगा इंटर
पार्टिकल स्पेस और इंटरप्टिकल फोर्सेस के बेसिस पर। ठीक है? ओके जी। तो मेल्टिंग पॉइंट क्या होता है? अब तुम में से किसी
ने क्या ये फिल्म देखी है? इस फिल्म का नाम है लैला मजनू। मैंने क्लास में बच्चों से पूछा इस फिल्म देखी है किसी ने? एक
कहता है दिल वाले धनिया ले जाएंगे। दिल वाले दुल्हनिया नहीं कहता है दिल वाले धनिया ले जाएंगे। तो बेसिकली ये फिल्म है
हमारे पास लैला मजनू। और लैला मजनू में जब ये हमारे पास कैश भाई साहब मिलते हैं लैला जी से। ये मजनू भाई साहब मिलते हैं लैला
जी से बड़े समय के बाद तो वो उनको देखते ही मंत्रमुग्ध हो जाते हैं और पिघल जाते हैं एकदम पिघल जाते हैं सर
लेकिन आप यहां क्यों पिघल गए आपने किसको देख लिया किसी को नहीं किसी को नहीं ठीक है तेरे को देख के यार तेरा प्यार है ना
भाई तो हमारे पास क्या होता है कैश भाई साहब जो हमारे मजनू भाई साहब थे मजनू भाई साहब लैला मैडम को देख के एकदम पिघल जाते
हैं एकदम सेट हो जाते हैं ठीक है तो वैसे जैसे जाकिर खान भाई भी कहते हैं यहां हां मैं पिघल गया तो वैसे ही पिघल जाते जैसे
तू अपनी क्रश को देख के पिघल जाता है। है ना? तो बेसिकली हमारे पास पिघलना पिघलना [नाक से की जाने वाली आवाज़] कि हम
एक पर्टिकुलर टेंपरेचर किसी चीज को जब प्रोवाइड कर दें तो वो मेल्ट हो जाए। वो पिघल जाए। उस टेंपरेचर को प्रोवाइड करने
पे अगर सब्सटांस सॉलिड है। मेल्टिंग एक ऐसा प्रोसीजर है जो हमेशा सॉलिड टू लिक्विड होता है। गैस का इसके अंदर कोई
रोल नहीं है। गैस का इसके अंदर कोई रोल नहीं है। मेल्टिंग एक ऐसा प्रोसेस है जिसके अंदर सब्सटांस अपनी सॉलिड स्टेट से
अपनी लिक्विड स्टेट में कन्वर्ट हो जाता है। कब हो जाता है? जब उसको एक पर्टिकुलर टेंपरेचर दिया जाता है। और वो पर्टिकुलर
टेंपरेचर क्या कहलाता है? मेल्टिंग पॉइंट कहलाता है। मतलब अगर मेरे पास पानी है। बर्फ है, बर्फ। बर्फ है मेरे पास। बर्फ को
मैंने माइनस के कुछ टेंपरेचर में रखा हुआ है। -40, -20, -10, -5. इन टेंपरेचर पर मैंने रखा हुआ है। बर्फ मेरी बढ़िया जमी
रहेगी, सॉलिड रहेगी। लेकिन, मैं उसको बाहर निकाल लिया और मैं उसको 0 डिग्री टेंपरेचर पर ले आया। तो, 0° टेंपरेचर एक ऐसा
टेंपरेचर होता है जिस पर बर्फ पिघल कर के, आइस पिघल करके पानी बन जाती है। बर्फ पिघल करके पानी बन जाती है। सॉलिड टू लिक्विड
का ट्रांजिशन हो जाता है। ठीक है? तो यही हमारे पास क्या होता है? 0 डिग्री सेल्सियस क्या हुआ? उसका टेंपरेचर हुआ।
कौन सा टेंपरेचर? मेल्टिंग पॉइंट हुआ। जिस पर वो मेल्ट कर जाएगी, पिघल जाएगी। ठीक है? ये होता है हमारे पास। तो द टेंपरेचर
एट व्हिच एक ऐसा टेंपरेचर जिस पर सॉलिड हमारा बदल जाता है किसमें? लिक्विड में इज कॉल्ड इट्स मेल्टिंग पॉइंट। उसको उसका
मेल्टिंग पॉइंट कहा जाता है। ठीक है भाई? मेल्टिंग पॉइंट पर क्या-क्या चीजें होती हैं? पार्टिकल क्या करता है?
गेन कर लेता है हीट एनर्जी। हमने उसको गर्मी दी, टेंपरेचर दिया एक पर्टिकुलर। वो उस टेंपरेचर को एब्जॉर्ब कर लेगा। उसकी
उसकी वजह से जो हीट प्रोड्यूस होगी उस हीट को एब्जॉर्ब कर लेगा और क्या करेगा? सॉलिड के पार्टिकल और तेज-तेज़ अब वो विरोध
करेंगे। अब वो करेंगे विरोध। अब उनको प्यार पुराना लगने लगा। अब वो कह रहे हैं नहीं यार बहुत हो गया। मेरे को पास-पास
नहीं आना। मेरे को दूर होना है। हट हट हट हट। वो पहले कर रहे थे। हिलाना हिलाना हिला हिला ना हिला ना हिला हिला ना हिलाना
हिला। कवरिया अपनी जगह पे वाइब्रेट कर रहे थे। लेकिन अब वो कह रहा है प्यार पुराना हो गया। अब थोड़ी जगह चाहिए। हट जा। हट जा।
तो पहले वो अब वो और तेज-तेज़ वाइब्रेट करेंगे। पहले वो ऐसे-ऐसे वाइब्रेट कर रहे थे। अब वो ऐसे ऐसे वाइब्रेट करेंगे। विगर
असली वाइब्रेट करेंगे। है ना? बहुत तेज-तेज़ वो क्या करेंगे? वाइब्रेट करेंगे हमारे पास। तो जो फोर्स ऑफ़ अट्रैक्शन जो
होगा वो कम हो जाएगा। अब उनको प्यार पुराना लग रहा है। उनकी जो अट्रैक्शन है वो कम हो जाएगी। वीक हो जाएगी, कमजोर हो
जाएगी। पार्टिकल्स क्या करेंगे? पार्टिकल्स बिगेन लीविंग देयर फिक्स्ड पोजीशन। अपनी उनकी पार्टिकल्स की जो
फिक्स्ड पोजीशंस होंगी। अपनी-अपनी जगह पर जो पार्टिकल पड़े थे चिपक-चिपक के वो अपनी फिक्स्ड पोजीशन को छोड़ना स्टार्ट करेंगे।
एंड इनिशियली पार्टिकल्स हमारे पास कैसे थे? और अब कैसे हो जाएंगे मेल्ट होने के बाद? पहले हमारे पास पार्टिकल्स थे
चिपक-चिपक के। चिपक-चिपक के चलती हैं कभी-कभी दो राहें। ठीक है? तो पहले हमारे पास जो पार्टिकल्स
थे बड़े चिपके-चिपके पड़े हुए थे। पहले बहुत प्यार था। अब वो क्या है? उन्होंने भाई जगह बना ली। इधर-उधर हो गए। इधर-उधर
हो गए, दूर-दूर हो गए। अब क्या है? उनके बीच का जो इंटर पार्टिकल स्पेस है, वो बढ़ गया। अब वो क्या बन गए? लिक्विड बन गए। तो
मेल्टिंग के प्रोसेस में हमारे पास ये कार्य हो जाता है। इस दौरान ये सॉलिड था। अब ये लिक्विड बन चुका है।
ठीक है भाई? ऐसा हो जाता है हमारे पास। ओके? मेल्टिंग पॉइंट हमारे पास डिफरेंट-डिफरेंट सब्सटेंसेस का यहां पर
लिख रखा है। तीन सब्सटेंसेस का लिखा हुआ है। तीनों का बहुत इंपॉर्टेंट है। आइस का, यूरिया का और आयरन का। बर्फ का हमारे पास
होता है 0 डिग्री सेल्सियस। मैंने तेरे को ऑलरेडी बता दिया। यूरिया हमारे पास एक ऐसा सब्सटेंस होता है जिसके अंदर नाइट्रोजन
प्रेजेंट प्रेजेंट होती है। नाइट्रोजन का एक कंपाउंड होता है जो कि प्लांट्स के लिए बहुत ज्यादा जरूरी होता है। हमारी बॉडी
में भी यूरिया जरूरी होता है लेकिन वो प्लांट वाला अलग होता है। ठीक है? तो हमारे पास जो यूरिया होता है उसका
मेल्टिंग पॉइंट होता है 133 डिग्री सेल्सियस। आयरन का क्या होता है? 1538 डिग्री सेल्सियस। 1500 एंड 38 डिग्री
सेल्सियस। मतलब तुम अगर तुमने देखी होंगी रील्स शॉट्स वगैरह जिसके अंदर आयरन को पिघलाया जा रहा है। लाल-लाल लावा जैसा बन
गया है वो। है ना? तो बेसिकली उसके अंदर उन फैक्ट्रीज में फैक्ट्रीज बोलूं या क्या बोलूं उनको? फर्नेसेस भट्टियों में उन
भट्टियों में आयरन को इतना ज्यादा टेंपरेचर दिया जाता है 1538 डिग्री सेल्सियस तक का टेंपरेचर दिया जाता है। तब
जाके वो सॉलिड आयरन से लिक्विड आयरन में कन्वर्ट होता है। ठीक है? मेल्टिंग पॉइंट क्या है? मेल्टिंग पॉइंट जितना ज्यादा
स्ट्रंगर होगा। स्ट्रंगर द इंटर पार्टिकल फोर्सेस। जितना ज्यादा इंटर पार्टिकल फोर्स स्ट्रंगर है मतलब जितना ज्यादा
प्यार है उतना ज्यादा उस पार्टिकल का मेल्टिंग पॉइंट होगा उसके प्यार को तोड़ने के लिए उसका डिवोर्स कराने के लिए जिन
रिश्तों में प्यार ज्यादा है उनको रिश्तों को तोड़ने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ेगी ज्यादा टेंपरेचर देना पड़ेगा
ज्यादा मेल्टिंग पॉइंट होगा समझा तो यही होता है तो हायर द मेल्टिंग पॉइंट जितना ज्यादा इंटर पार्टिकल फोर्स ऑफ अट्रैक्शन
उतना ज्यादा मेल्टिंग पॉइंट हायर ठीक है भाई ये चीज है आगे बढ़ेंगे बॉइलिंग पॉइंट क्या होता है अब देख हमारे पास मेल्टिंग
का जो फंडा था वो क्या था? वो था हमारे पास सॉलिड टू लिक्विड। बॉइलिंग पॉइंट जो होता है बॉइलिंग जो प्रोसेस होता है वो
हमारे पास होता है लिक्विड टू गैस। लिक्विड टू गैस का प्रोसीजर है। इसके अंदर क्या होता है? इसके अंदर हमारे पास सॉलिड
का कोई काम नहीं है। इसके अंदर लिक्विड है। का कन्वर्ज़ हो रहा है गैस में। लिक्विड का
कन्वर्ज़ हो रहा है किसमें? गैस में कन्वर्ज़ हो रहा है। ठीक है? और ये कैसे होगा कन्वर्जन? इसको
भी अगेन ये भी हीट एब्जॉर्ब करेगा। एक पर्टिकुलर टेंपरेचर हमको इसको भी देना पड़ेगा। जिस टेंपरेचर की ये हीट एब्जॉर्ब
कर लेगा और उस टेंपरेचर पे ये क्या कहेगा? ठीक है। अब मेरा प्यार से बिल्कुल भरोसा उठ रहा है। अब मैं लिक्विड नहीं रहना
चाहता। अब मैं एकदम गैस बन जाना चाहता हूं। आजाद होना चाहता हूं। सिमरन बनना चाहता हूं। तो ये भी खुद को सिमरन बनाना
चाहता है। ये भी खुद को सिमरन बना लेता है। लिक्विड से गैस में कन्वर्ट हो जाता है। तो एक ऐसा टेंपरेचर
[नाक से की जाने वाली आवाज़] जिस पर लिक्विड खुद को चेंज कर लेता है वेपर फॉर्म में, गैस फॉर्म में इट इज
कॉल्ड एज बॉइलिंग पॉइंट। उसको क्या बोलते हैं? उस पर्टिकुलर सब्सटेंस का बोइलिंग पॉइंट कहते हैं। बोइलिंग पॉइंट और
मेल्टिंग पॉइंट दोनों बहुत इंपॉर्टेंट चीजें हैं। ठीक है? तो इनको अंडर एस्टिमेट मत करना। इन पर क्वेश्चन आएगा। तो
ड्यूरिंग बोइलिंग बोइलिंग के दौरान क्या होता है? पार्टिकल्स गेन थर्मल एनर्जी, थर्मल एनर्जी, हीट एनर्जी सेम चीज़ है।
एकदम सेम चीज़ है। कोई दिक्कत वाली बात नहीं है। ठीक है? पार्टिकल्स अगेन और दो और तेज़-तेज़ भागने लगते हैं। अब देख आग
लगने पे, टेंपरेचर लगने पे भाग क्यों रहे हैं? वो वाइब्रेट कर रहे थे वो और तेज़ वाइब्रेट करने लग गए। हिलने डोलने लग गए।
लिक्विड के अंदर भी वो मूव कर पा रहे थे पहले ऑलरेडी। अब आग लग गई। टेंपरेचर बढ़ा दिया। बॉइलिंग पॉइंट मिल गया। अब ये और
तेज भागने लगेगा। है ना? पार्टिकल्स मूव मोर फास्टर। पार्टिकल्स मूव फास्टर। इंग्लिश थोड़ी खराब है। ठीक है? पार्टिकल
मूव फास्टर और तेज क्यों भाग रहा है? क्योंकि भाई तुमने ओम शांति ओम देखी है। ओम शांति ओम में एक सीन था जिसके अंदर
शाहरुख खान एक्टर बनने जाता है। उसको बोलते हैं भाई तू जूनियर आर्टिस्ट है। एक गांव के अंदर आग लगी है। बस तेरे को एक
डायलॉग है आग। तेरे को आग बोलना है। तो वो भाग रहा होता है। गांव में आग लग रही है और वो भाग रहा है। भागो आग।
भागो [चीखने की आवाज़] आग। तो वो भी क्या करता है? वह भी हमारे पास भाग रहा होता है। तो आग हमारे पास एक
ऐसी चीज है टेंपरेचर हमारे पास एक ऐसी चीज है जो जितना ज्यादा होता है उतनी ज्यादा भगदड़ मच जाती है। सेम गोज विद द स्टेट्स
ऑफ मैटर। ठीक है? स्टेट्स ऑफ़ मैटर में भी हमारे पास ऐसा ही होता है। चाहे सॉलिड हो, लिक्विड हो या गैस हो। जितना ज्यादा हम
टेंपरेचर दे देंगे, उतना ज्यादा भगदड़ मच जाएगी। ठीक है? तो पार्टिकल्स इसलिए और तेज भाग रहे हैं। ओवरकम फोर्स ऑफ़
अट्रैक्शन। जो भी उनका थोड़ा बहुत प्यार होता है, फोर्स ऑफ़ अट्रैक्शन थोड़ा बहुत बचा हुआ होता है। ये उसको भी ओवरकम कर
लेते हैं। उसको भी कहते हैं ठीक है। अब पूरा भरोसा उठ चुका है। ठीक है? ये कहते हैं। एस्केप इंटू गैसियस स्टेट एंड देन वो
गैस के अंदर कन्वर्ट हो जाते हैं। ओके। बोइलिंग और इवापोरेशन में क्या फर्क है? तुमने सुना होगा बोइलिंग के दौरान भी
लिक्विड टू गैस होता है। इवापोरेशन में भी लिक्विड टू गैस होता है। सर फर्क क्या है फिर? बोइलिंग एक पर्टिकुलर टेंपरेचर पर
होती है। जिसको हम क्या कहते हैं? बोइलिंग पॉइंट कहते हैं। सर तो इवापोरेशन को क्या गर्मी की जरूरत नहीं है? इवापोरेशन क्या
हर सब्सटांस में हो जाएगी? नहीं। नहीं। देख इमेजिन कर बोइलिंग पॉइंट जो हमारे पास वाटर का होता है। मैं तेरे को अगर बताऊं
मैं तो बॉइलिंग पॉइंट जो वाटर का होता है वो होता है 100 डिग्री सेल्सियस। है ना? बोइल जब तक तो उसको 100° सेल्सियस जितना
वाटर को टेंपरेचर प्रोवाइड नहीं करेगा तब तक वो जलेगा नहीं तब तक मतलब वो उस वेपर स्टेट में कन्वर्ट नहीं होगा। अब सोच तूने
जैसे मतलब जमीन पे पानी गिरा दिया। धूप वाला दिन है। तेरे मौसम जो हो रखा है, टेंपरेचर जो शहर का हो रखा है, वो हो रखा
है लगभग 35 डिग्री सेल्सियस, 35 डिग्री सेल्सियस। राइट? तूने पानी गिराया एंड थोड़ी देर बाद तू देखेगा तो कि वो पानी
सूख चुका है। वो कहां गया? कहां गया? पानी का जो हमारे पास बॉईलिंग पॉइंट होता है, जब वो वेपर में कन्वर्ट होता है, वो
बॉइलिंग पॉइंट तो 100 डिग्री सेल्सियस है। लेकिन बाहर तो टेंपरेचर हमारे पास 100° सेल्सियस नहीं है। बाहर तो टेंपरेचर फिर
35° सेल्सियस है। तो फिर वो वेपर में कन्वर्ट कैसे हो गया? इवापोरेशन। उस टाइम पे हुई उसकी इवापोरेशन। सर तो फिर हम
बोइलिंग करते ही क्यों है? अरे भाई बोईलिंग हमारे पास रैपिड प्रोसेस होता है ना अगर मेरे पास इतना सारा पानी है। मैं
वेट थोड़ी करूंगा। पतीले के अंदर पड़ा हुआ है। चलो सूरज दादा जल्दी से टेंपरेचर बढ़ाओ। अभी 35° पे आओ फिर 40 पे आओ। 45 पे
आओ, 50 पे आओ, फिर 100 पे आओ और जल्दी से इसको उड़ा दो। मैं वेट थोड़ी करूंगा। अगर मेरे को मेरी चाय बनानी है, मेरे को पानी
उबालना है, तो मैं क्या उसको धूप में जा के रख दूंगा? नहीं ना। मैं उसको आग दूंगा। मैं उसको 100 डिग्री सेल्सियस पर लेके
आऊंगा। उसको बॉईल करूंगा और जल्दी से आग चाय बना लूंगा। पानी उबाल लूंगा। है ना? तो ये होता है हमारे पास बोइलिंग हमारे
पास होता है रैपिड प्रोसेस जल्दी प्रोसेस होता है जल्दबाजी वाला प्रोसेस होता है जो जल्दी हो जाता है एंड इवापोरेशन इज अ स्लो
प्रोसेस इट टेक्स टाइम ठीक है तो हमारे पास क्या है बोइलिंग होता है अकर्स थ्रू द लिक्विड लिक्विड के अंदर होता है थ्रू द
थ्रू आउट द लिक्विड मतलब जैसे अगर मेरे पास एक कंटेनर है अरे फोटो बनी तो है यहां पे ठीक है तो यहां पर हमारे पास ये कंटेनर
है इसके अंदर मैंने लिक्विड डाल रखा है तो जो हमारे पास बोइलिंग होगी वो ऊपर नीचे बीच में हर जगह पर बोइलिंग होगी हर जगह के
हमारे पास हर जगह जगह के हर जगह के इस लिक्विड कंटेनर के अंदर जो भी लिक्विड के पार्टिकल्स होंगे वो सब बॉईल होंगे। लेकिन
इवापोरेशन में क्या होता है? इवापोरेशन होता है सरफेस फिनोमिना। जो ऊपर वाला सरफेस है पहले उसके उसको गर्मी मिलेगी
क्योंकि गर्मी ऊपर से आ रही है। उसको गर्मी मिलेगी। उसके जो पार्टिकल्स होंगे वो इवापोरेट होंगे। फिर ऊपर वाला सरफेस
गायब नीचे वाला सरफेस की बारी। फिर उसके नीचे वाला सरफेस। फिर उसके नीचे वाला सरफेस। फिर उसके नीचे, फिर उसके नीचे, फिर
उसके नीचे, उसके नीचे। तो इस तरीके से सरफेस बाय सरफेस हमारे पास इवापोरेशन होती है। इवापोरेशन इज़ अ सरफेस फिनोमिना अकर्स
ओनली एट द सरफेस इट इज़ कॉल्ड दस इट इज़ कॉल्ड अ इट इज़ कॉल्ड एज सरफेस फिनोमिना।
ठीक है? इसको बोलते हैं अपन सरफेस फ़िनोमिना। टेक्स प्लेस एट अ फिक्स्ड टेंपरेचर। हमारे पास जो बोइलिंग होती है
वो एक फिक्स्ड टेंपरेचर पर एक पर्टिकुलर फिक्स्ड टेंपरेचर पर बोइलिंग हमारे पास होती है जो कि बॉइलिंग पॉइंट होता है। ठीक
है? बबल फॉर्मेशन बोइलिंग में होती है। क्यों होती है? क्यों होती है बबल फॉर्मेशन? ये क्वेश्चन आ सकता है। ध्यान
से सुनियो। बबल फॉर्मेशन इसलिए होती है क्योंकि जब हम पानी उबालते हैं हमने नीचे से आग दी तो नीचे वाली जो लेयर है उसको
पहले गर्मी मिली। पहले जो उसके पार्टिकल होंगे लिक्विड के वो बॉईल होना चाहेंगे। पहले ये वाले पार्टिकल जो होंगे वो बॉईल
होना चाहेंगे। ठीक है? तो इसीलिए ये वाले ये वाले पार्टिकल क्या होते हैं? अंदर लिक्विड से गैस बन जाती है और वो गैस जब
पानी के अंदर प्रेजेंट होती है तो वो गोल गोल गोल गोल गोल गोल गोल गोल बबल बना देती है। ठीक है? इसीलिए बबल बनते हैं हमारे
पास। और हमारे पास इवापोरेशन का क्या है? इवापोरेशन किसी भी टेंपरेचर पर हो सकती है। और ये स्लो प्रोसेस होता है। और हमारे
पास बोइलिंग में एक और पॉइंट ऐड कर लेते हैं। दैट इट इज अ रैपिड प्रोसेस। इट इज़ अ रैपिड। ब्रैकेट में लिख देता हूं
फास्ट। किन के लिए जिनको इंग्लिश समझ नहीं आती। फ़ास्ट प्रोसेस। [हंसी] ठीक है जी? ओके। आगे बढ़ते हैं। तो
डिफरेंशिएट बिटवीन बोइलिंग एंड इवापोरेशन। बोइलिंग और इवापोरेशन के बीच का फर्क क्या है? बोइलिंग और इवापोरेशन के बीच का फर्क
क्या है मेरे पास? ये चीज यहां पर लिखी हुई है। जो भी बातें मैंने तेरे को बताई वही सारी इसके अंदर लिखी हुई है। ये तेरे
को रीड करनी है। ये तेरे को अपने नोट्स में लिखनी है। ये इंपॉर्टेंट क्वेश्चन इसका बन के आएगा। इंपॉर्टेंट क्वेश्चन
इन एग्जाम। देखो जो भी डिफरेंशिएट वाले क्वेश्चंस मैं करवाता हूं ना जो भी डिफरेंशिएट वाले टेबल्स वगैरह मैं पीपीटी
में लगाता हूं वो सारे के सारे बहुत इंपॉर्टेंट होते हैं। पेपर में उस पर क्वेश्चन आता ही आता है। तो इसको भाई
अंडरएस्टीमेट मत किया करो। फ्री के मार्क्स हैं। आंसर का आंसर तेरे को ला करके दे दिया है। उठा के चेप के आ जाइयो
भाई पेपर में। है ना? ये चीज़ है। ठीक है? कंप्रेसिबिलिटी क्या होती है? कंप्रेसिबिलिटी मतलब कंप्रेस करने का मतलब
समझते हो? दबाव बनाना। दबाव बनाना। अब जैसे एक मिनट रुक। हम
ठीक है। हां। तो कंप्रेसिबिलिटी क्या होती है? कंप्रेसिबिलिटी अगर मैं कोई सिरिंज लूं। कोई सी मैं अगर इंजेक्शन की सिरिंज
ले लूं इंजेक्शन ले लूं सिरिंज तो मैं उसको अगर आगे से पकड़ लूं। आगे से दबा दूं। आगे से उसका छेद बंद कर दूं और फिर
मैं उसको दबाऊं। हवा है। उसके अंदर अभी कुछ भरा हुआ नहीं है। मैंने दबाऊं तो वो दब जाएगा। आराम से दब जाएगा। लगभग सारा ही
दब जाएगा। लगभग सारा दब जाएगा। अगर मैं उसके अंदर पूरा का पूरा एक चौक का पाउडर भर दूं। पूरा कस के भर दिया है। अब मैं
उसको दबाऊंगा। बिल्कुल नहीं दबेगा। बिल्कुल जरा सा चिंदी सा दबेगा। ठीक है? अब मैं उसके अंदर अगर पानी भर दूं और आगे
से पकड़ लूं तो वो क्या होगा? थोड़ा सा दबेगा। थोड़ा सा दबेगा और बाकी फिर पानी आगे नहीं निकल पाएगा और नहीं निकल पाएगा।
तो बेसिकली जो कंप्रेसिबिलिटी है वो हमको क्या बताती है कि हम किस चीज को ज्यादा कंप्रेस कर सकते हैं। हमारी
कंप्रेसिबिलिटी जितनी ज्यादा होगी ना उतना ज्यादा हमको पता चलेगा कि कौन सा स्टेट ऑफ मैटर है। अब जैसे मैं अगर सॉलिड की बात
करूं सॉलिड के अंदर जगह है ही नहीं। चॉक पाउडर में जगह है ही नहीं। सॉलिड के अंदर इंटर पार्टिकल स्पेससेस ही नहीं है। तो
अगर मैं कंप्रेस करूंगा अगर मैं दबाऊंगा तो बिल्कुल बिल्कुल बिल्कुल जरा सा दबेगा। लिक्विड की बात करूं लिक्विड के अंदर फिर
भी हैं कंपैरेटिवली तो लिक्विड भी थोड़ा सा दब जाएगा। गैसेस का क्या होगा? गैसेस के अंदर बहुत हैं। गैसेस आदाद हैं। गैसेस
कहती है आ जाओ। आ जाओ आ जाओ। कोई फर्क नहीं पड़ेगा मेरे को। तो गैसेस के अंदर इंटर पार्टिकल स्पेसेस बहुत सारे हैं। हम
दबाना चाहें लगभग पूरा भी दबा सकते हैं। ठीक है? तो ये हमारे पास रहता है। तो हमारे पास अगर मैं गैस के कंप्रेशन की बात
करूं कंप्रेसिबिलिटी गैस की तो गैस पार्टिकल्स आर फार अपार्ट। बहुत दूर-दूर होते हैं। अप्लाइंग प्रेशर। जैसे ही
प्रेशर अप्लाई करेंगे, दबाव बनाएंगे, तो उससे क्या होगा? इंटर पार्टिकल स्पेससेस के साथ क्या होगा? वो रिड्यूस हो जाएंगे।
वो रिड्यूस हो जाएंगे। हेंस गैसेस आर हाइली कंप्रेसिबल। इसीलिए जो गैसेस होती हैं वो हाइली कंप्रेसिबल होती हैं।
कंप्रेसिबिलिटी का ट्रेंड लिखवा देता हूं मैं पहले। गैसेस होती हैं सबसे ज्यादा कंप्रेसिबल।
फिर होते हैं लिक्विड्स। फिर होते हैं सॉलिड्स। यह हमारे पास क्या है? ट्रेंड ऑफ
कंप्रेसिबिलिटी है। ठीक है? ये हमारे पास कंप्रेसिबिलिटी का ट्रेंड है। ओके जी। व्हाई आर लिक्विड्स
नॉट ईजीली कंप्रेसिबल? लिक्विड्स हमारे पास ईजीली कंप्रेसिबल क्यों नहीं होते हैं? क्यों? क्योंकि लिक्विड्स के अंदर
भाई ये देखिए हमारे पास लिक्विड है। लिक्विड के अंदर फिर भी हमारे पास क्या इंटर पार्टिकल स्पेससेस कम है। फिर भी
इंटर पार्टिकल स्पसेस कम है। लो सॉलिड जितने नेगिबल नेग्लिजिबल नहीं है ना के बराबर नहीं है। लेकिन फिर भी कम है गैसेस
के मुकाबले। तो इसीलिए क्या होता है? पार्टिकल्स आर ऑलरेडी क्लोज टुगेदर। ऑलरेडी पासपास होते हैं। इसीलिए बहुत कम
स्पेस हमारे पास अवेलेबल होता है जिस स्पेस को हम दबा पाएं। ठीक है? इसीलिए ओके। आइस मेल्ट किस टेंपरेचर पर होती है
भाई? आइस हमारे पास मेल्ट हो जाती है 0 डिग्री सेल्सियस पर जो कि इसका क्या होता है? मेल्टिंग पॉइंट होता है। मेल्टिंग
पॉइंट होता है जिस पर यह आइस से बन जाती है वाटर। सॉलिड से बन जाती है
लिक्विड। ठीक है? ओके। आगे बढ़ते हैं। हायर मेल्टिंग पॉइंट। हमारे पास अगर मेल्टिंग पॉइंट
ज्यादा है। मतलब क्या है इसका? इसका मतलब हमारे पास ये है कि भाई साहब हमारे पास जो इंटर पार्टिकल फोर्स ऑफ अट्रैक्शन है वो
ज्यादा है। पार्टिकल्स हमारे पास बहुत पासपास है। बहुत ज्यादा अट्रैक्टेड है। फोर्स ऑफ अट्रैक्शन बहुत ज्यादा है। उनको
दूर-दूर करने में उनको पिघलाने में हमें थोड़ा ज्यादा मेहनत करनी पड़ेगी। ज्यादा टेंपरेचर देना पड़ेगा। मेल्टिंग पॉइंट
ज्यादा होगा। तो हायर मेल्टिंग पॉइंट मींस स्ट्रांग अट्रैक्शन। ड्यूरिंग बोइलिंग। बॉइलिंग के दौरान
पार्टिकल्स के साथ क्या होता पार्टिकल स्लो डाउन कर जाते हैं। गेन कर लेते हैं। एनर्जी स्टॉप कर देते हैं। मूविंग अपनी
फ्रीज़ हो जाते हैं। बताओ भाई गेन एनर्जी। दे गेन एनर्जी, दे गेन थर्मल एनर्जी और वो भगदड़ मच जाती है। भगदड़
भागो आ है ना ये होता है। बबल फॉर्मेशन इज़ सीन ड्यूरिंग बबल फॉर्मेशन किस दौरान देखी जाती है? बोलिंग के दौरान। इवापोरेशन में
नहीं। कंडेंसेशन में नहीं, फ्रीजिंग में, नहीं, बॉइलिंग में। हां। ठीक है? लिक्विड्स आर डिफिकल्ट टू कंप्रेस। बिकॉज़
लिक्विड्स को कंप्रेस करना टफ क्यों होता है? में मुश्किल क्यों होता है? क्योंकि भाई साहब लिक्विड्स में जो इंटर पार्टिकल
स्पेसेस होते हैं वो कम होते हैं। दे आर हैवी नहीं। दे हैव लिटिल इंटर पार्टिकल स्पेस। यस ऑप्शन नंबर बी। ओके। हाउ
टेंपरेचर अफेक्ट्स द मूवमेंट ऑफ़ पार्टिकल? देखो मैंने तुमको पहले ही बता दिया। मैं तुमको पहले जो पढ़ा चुका उसके बेसिस पर ही
हम क्या करेंगे? इस पूरे चैप्टर की अब बाकी की चीजें पढ़ेंगे। टेंपरेचर वाली चीज़ तेरे को ऑलरेडी बता दी। टेंपरेचर पे अपन
क्या करते हैं? जितनी ज्यादा टेंपरेचर, जितनी ज्यादा आग लगाएंगे, उतना ज्यादा क्या होगा? भगदड़ मचेगी उतना ज्यादा
इंटरमॉलिक्यूलर जो स्पेस होगा वो बढ़ जाएगा। इंटरमॉलिक्यूलर फोर्स ऑफ़ अट्रैक्शन जो होगा वो घट जाएगा। फोर्स ऑफ़ अट्रैक्शन
घट रहा है। दूर-दूर हो रहे हैं। है ना? तो टेंपरेचर बढ़ाने पर हमारे साथ ये होता है। तो मैटर इज मेड अप ऑफ कंटीन्यूअसली मूविंग
पार्टिकल्स। ये चीज कभी मत सोचना कि हमारे पास जो मैटर के हमारे पास पार्टिकल्स हैं। हमारे पास जो मैटर है उसके अंदर क्या होता
है? पार्टिकल्स पासपास होते हैं। बस पड़े हुए हैं। आराम फरमा रहे हैं। एकदम हमारी तरह है। आलसी
[नाक से की जाने वाली आवाज़][गला साफ़ करने की आवाज़] नोबिता नहीं है भाई पार्टिकल्स। मैटर की प्रॉपर्टी होती है। मैटर को नोबिता बनना
नहीं पसंद। मैटर को पसंद है वरना डेकी सुगी। मैं भागते रहना चाहता हूं। बता रहा हूं। मैं भाई साहब मेहनत करना चाहता हूं।
कंटीन्यूअसली मूव करते रहना चाहता हूं। मैटर को ये है। मैटर की प्रॉपर्टी ये है। ठीक है? तो मैटर हमारे पास कंटीन्यूअसली
मूव करता रहता है। जो बात तेरे को ऑलरेडी पता बता दी है मैंने। और ये चीज पता है तुम अच्छे से कब पढ़ोगे? अगर तुम 11th
क्लास में लेते हो साइंस तो तुम्हारा 11th क्लास में ही एक चैप्टर आएगा काइनेटिक थ्योरी ऑफ गैसेस उसके अंदर KTजी में। और
थर्मोडायनेमिक्स भी उसके ऊपर बेस्ड होता है। तो KTजी और थर्मोडायनेमिक्स तुम दो चैप्टर्स पढ़ोगे जो कि 11th क्लास की
फिजिक्स की बुक के शायद 11वें या 12वें चैप्टर्स हैं। 11th एंड 12th चैप्टर है 11th क्लास की फिजिक्स की
बुक के। है ना? तो, उसके अंदर तुम पढ़ोगे मैटर इज़ मेड अप ऑफ कंटीन्यूअसली मूविंग पार्टिकल्स। उसके पूरा चैप्टर का नाम होगा
पूरा चैप्टर इस चीज़ को डेडिकेटेड है काइनेटिक थ्योरी ऑफ़ गैसेस। तुम इनफैक्ट यह तक पढ़ोगे कि इस पार्टिकल्स की स्पीड कितनी
है? वेलोसिटी कितनी है इनकी? ये तक पढ़ोगे तुम। ठीक है? तो इंक्रीजिंग टेंपरेचर टेंपरेचर इंक्रीज़ करने से क्या होता है?
इंक्रीजिसेस पार्टिकल मूवमेंट। पार्टिकल्स की जो मूवमेंट है वो बढ़ जाती है। ठीक है? तो अगर मैं तेरे को बताऊं
मैंने टेंपरेचर बढ़ा दिया। तो क्या होगा? इंटर पार्टिकल स्पेसेस जो होंगे वो भी बढ़ जाएंगे। आईपीएस समझ जाइयो
या आईपीएस वो नहीं है यूपीएससी वाला। ठीक है? और अगर मैंने टेंपरेचर बढ़ा दिया तो एक और काम होता है मेरे पास। यहीं पे
साथ में ही लिख लेते हैं। इंटर पार्टिकल स्पेससेस तो बढ़ ही जाएंगे। साथ-साथ क्या होगा? इंटर पार्टिकल फोर्स
ऑफ अट्रैक्शन भी घट जाएगा। घटेगा। बढ़ेगा नहीं घटेगा। प्यार कम हो गया। अट्रैक्शन कम हो गई। ठीक है? तो टेंपरेचर बढ़ा,
आईपीएस बढ़ा, इंटर पार्टिकल स्पेससेस बढ़े, इंटर पार्टिकल फोर्स ऑफ़ अट्रैक्शन घट गया। ठीक है? कंफ्यूज मत होना। लेक्चर में बता
रहा हूं इसलिए बोल रहा हूं इनकी फुल फॉर्म। कंफ्यूज मत होइयो। ठीक है? ओके जी। तो रीज़न क्या है इनका? पार्टिकल्स हमारे
पास गेन कर लेते हैं। थर्मल एनर्जी यानी कि हीट एनर्जी। क्या होता है उनका? थर्मल एनर्जी इज़ कन्वर्टेड इंटू काइनेटिक
एनर्जी। थर्मल एनर्जी काइनेटिक एनर्जी में कन्वर्ट हो जाती है। पार्टिकल्स में भगदड़ मच जाती है। काइनेटिक वर्ड जहां पर भी आ
गया। काइनेटिक्स वर्ड जहां पर भी आ गया मतलब क्या है? मूवमेंट। मतबल है उसका मूवमेंट। कि हीट एनर्जी अब कन्वर्ट हो
जाएगी मूवमेंट में। पार्टिकल्स क्या होंगे? पहले अगर अपनी जगह पे वाइब्रेट कर रहे थे तो अब वो मूव करेंगे। भगदड़
भागेंगे। ठीक है? ये हो जाएगा। तो पार्टिकल्स मूव फास्टर। पार्टिकल हमारे पास और तेज भागने लगते हैं। ओके जी।
मूवमेंट ऑफ पार्टिकल्स इन डिफरेंट स्टेट्स। अलग-अलग स्टेट्स में इनकी मूवमेंट कैसी होती है? सॉलिड्स में वो
सिंपल है। वाइब्रेट करते हैं। हिलाना हिलाना हिलाना हिलाना हिलाना हिलाना हिलाना हिलाना हिला कमरिया। सॉलिड्स के
अंदर कमरियां हिलती है सिर्फ उनकी। सिर्फ वाइब्रेट करते हैं। ओके? लिक्विड्स में क्या होता है? रिस्ट्रिक्टेड मूवमेंट होती
है। क्योंकि लिक्विड्स में भी ऐसा नहीं है कि बहुत सारा स्पेस है। लिक्विड्स में भी स्पेस लिमिटेड ही है। बहुत सारा नहीं है।
ठीक है? तो इसलिए रिस्ट्रिक्टेड मूवमेंट होती है। लिमिटेड मूवमेंट होती है। कैन स्लाइड ओवर वन अनदर। वो कह रहे हैं बस
हमको मूव करने दो। हमको बस मूव करने दो। सॉलिड्स के पास तो चारा ही नहीं है। सॉलिड्स के पास तो जगह ही बहुत कम है। है
ना? बहुत कम जगह है। लिक्विड्स में क्या हो रहा है? लिक्विड्स कह रहे हैं भाई बस हमको मूव करने दो। हम बस मूव करना चाहते
हैं। फिर चाहे हम तुम्हारे ऊपर से मूव कर जाएं। हम तुम्हारे नीचे से मूव कर जाएं। हम तुम्हारे अगल से मूव कर जाए, हम
तुम्हारे बगल से मूव कर जाएं। तो लिक्विड्स का ऐसा है बस हमको मूव करने दो। और गैसेस के साथ क्या है? गैसेस के पास तो
भाई जगह की कमी ही नहीं है। इनका मोशन होता है रैंडम मोशन। रैंडम बोले तो कहीं पर भी ऐसा नहीं कि एक पर्टिकुलर डायरेक्शन
में चलूंगी। ऐसे चलूंगी। ऐसे चलूंगी। ऐसे चलूंगी या वापस ऐसे चलूंगी। एक पर्टिकुलर डायरेक्शन में नहीं। गैसेस हमारे पास किसी
भी डायरेक्शन में चल सकती है। रैंडम कभी ऐसे, कभी वैसे, कभी इधर, कभी उधर, कभी यहां, कभी ऊं। ठीक है? तो हमारे पास गैसेस
का क्या होता है? रैंडम मोशन होता है हर डायरेक्शन में इन ऑल डायरेक्शंस। कूल है? चंगी बातचीत, चंगी बातचीत। हाईएस्ट
काइनेटिक एनर्जी हमारे पास किसके पास होती है? गैसेस के मॉलिक्यूल्स के पास होती है। हाईएस्ट काइनेटिक एनर्जी अमोंग ऑल द थ्री
स्टेट्स। सबसे ज्यादा काइनेटिक एनर्जी यानी सबसे ज्यादा मूवमेंट। सबसे ज्यादा मूवमेंट। तो गैसेस के पास जगह ही बहुत है
ना। गैसेस का क्या है? प्यार से भरोसा उठ चुका है। अट्रैक्शन है नहीं। स्पेससेस भर-भर के हैं। इंटर पार्टिकल स्पेससेस
आईपीएस भर-भर के हैं। तो क्या कहते हैं भाई? भागेंगे हम तो। हम तो भागेंगे। हमारी जो काइनेटिक एनर्जी है तीनों में एकदम
सबसे ज्यादा है। हम तो रहेंगे टॉप पे। ठीक है? तो इसी तरीके से जैसे अगर गैसेस का प्यार से भरोसा उठा प्यार से दूर-दूर तक
कोसो नाता नहीं है भाई किसका? गैसेस का। तो उसी तरीके से जो प्यार से इंसान दूर रहता है ना वो अपनी लाइफ में फर्स्ट रहता
है नंबर फर्स्ट पे। ठीक है? तो वही चीज़ गैसेस के साथ भी हो रही है। वो प्यार से एकदम दूर है। फोर्स ऑफ़ अट्रैक्शन से एकदम
दूर है। तो इसीलिए उनके साथ क्या हो रहा है? वो नंबर वन पे है काइनेटिक एनर्जी के मामले में। तीनों स्टेट्स ऑफ मैटर में
सबसे ज्यादा काइनेटिक एनर्जी गैसेस के मॉलिक्यूल्स के पास है। ठीक है? तो ये हमारे पास हो रहा है। ओके? अब यहां पर
इसके अगर रियल लाइफ एग्जांपल्स की हम बात करें तो पोटैशियम परमैग्नेट जिसका हमारे पास फार्मूला क्या होता है? KMnO4। Mn
क्या है? मैंगनीज़ है। मैंगनीज़ तुमने सुना होगा एक एलिमेंट होता है। K हमारे पास क्या होता है? पोटैशियम होता है। और
मैंगनीज़ का हमारे पास एक कंपाउंड होता है। एक ऑक्साइड होती है MNO4। ठीक है? MNO4 बेसिकली हमारे पास उसकी आयनाइज़्ड फॉर्म
होती है उसके ऑक्साइड की। मतलब अगर मैं ज्यादा बताऊंगा तुमको समझ में नहीं आएगा। तो बेसिकली KMnO4 एक कंपाउंड है हमारे पास
पोटैशियम परमैगनेट जिसको हम क्या बोलते हैं? K MNO4
ऐसे लिखते हैं। ठीक है? तो KMnO4 को जब हमारे पास ये पर्पल वायलेट कलर का पर्पल या मजेंटाइश कलर का होता है। हमारे पास ये
सब्सटांस पाउडर फॉर्म होता है। इसको जब हम पानी के अंदर डालते हैं और थोड़ी देर बाद हमारे पास ये इस तरीके से डिफ्यूज होता
है। डिफ्यूज मतलब फैल जाता है। मिक्स हो जाता है। ठीक है? अच्छे से मिक्स हो जाता है और ये पानी के अंदर जो भी हमारे पास
स्पेसेस होते हैं जो भी पानी के अंदर लिक्विड के अंदर छोटे-छोटे से हमारे पास थोड़े-थोड़े स्पेससेस हैं। लिक्विड के
अंदर थोड़े-थोड़े स्पेससेस हैं तो उनके अंदर क्या करता है? जा के भर देता है। जैसे अपन ने शिकंजी में होता है। शुगर
सॉल्यूशन में होता है। जैसा दिखाया था वैसे ही इसके अंदर भी होता है। तो इससे हमको क्या पता चलता है कि लिक्विड के अंदर
फिर भी स्पेसेस होते हैं। और अगर अपन कोई सॉलिड उसके अंदर मिक्स करें, पोटैशियम परमैगनेट मिक्स करें, शुगर मिक्स करें तो
हमारे पास क्या हो जाता है? उसके अंदर जाके मिक्स हो जाती है अच्छे से। ठीक है? इस मिक्सिंग को हम क्या कहते हैं?
साइंटिफिकली इसको बोला जाता है डिफ्यूजन। डिफ्यूजन तुम आगे जाकर के पढ़ोगे। आगे की क्लासेस में डिफ्यूज़, ऑस्मोसिस क्या होता
है? ये तुम पढ़ोगे। नाइंथ में ही पढ़ लोगे। हां, नाइंथ या 10थ में पढ़ लोगे। ठीक है? या हो सकता है तुमने डिफ्यूज़ पढ़ भी रखा
हो। ठीक है? तो ये चीज़ है अपने पास। और इंसेंस स्टिक क्या होती है? अगरबत्ती। अगरबत्ती।
ठीक है? अगरबत्ती। अगरबत्ती को तुम जलाते हो या परफ्यूम तुम लगाते हो। स्टाइल में रहने का पापा डेट पे जा रहा हूं। चांटा
क्यों मारा? डेट पे जाएगा। अच्छा है ना? तो भाई क्या होता है? जब तुम परफ्यूम लगाते हो जब तुम अगरबत्ती जलाते हो तो
उसकी जो खुशबू होती है कुछ ही सेकंड्स में पूरे के पूरे रूम में फैल जाती है। क्यों होता है? क्यों होता है ऐसा? क्योंकि
हमारे पास जो परफ्यूम के पार्टिकल्स हैं वो बेसिकली क्या है? गैसियस पार्टिकल्स नहीं है। परफ्यूम के हमारे पास लिक्विड
पार्टिकल्स हैं। लेकिन हमारे पास जो इंसेंस स्टिक होती है अगरबत्ती उसके जो पार्टिकल्स होते हैं वो गैस होते हैं।
हमने जलाया वो गैस इवापोरेट हो रहा है। हमारे पास जो अगरबत्ती का सब्सटेंस है सीधा इवापोरेट हो रहा है। है ना? सीधा
क्या हो रहा है? बेसिकली गैस में कन्वर्ट हो रहा है। इवापोरेट तो नहीं करेंगे क्योंकि हमने जलाया है उसको। ठीक है? ये
हमारे पास प्रोसेस पता है क्या होता है कि सॉलिड से डायरेक्टली गैस में कन्वर्ट हो रहा है विदाउट कन्वर्शन इंटू लिक्विड
स्टेट। क्या होता है ये? इस प्रोसेस को बोलते हैं हम सब्लीमेशन। ठीक है? इसको बोलते हैं सब्लीमेशन। ठीक है? सिर्फ नाम
जान लो अभी। ओके? तो हमारे पास क्या होता है? जब हम अगरबत्ती जलाते हैं तो इसके जो वेपर्स होते हैं वो हमारे पास पूरे के
पूरे हवाओं में फैल जाते हैं। तो इससे हमको पता चलता है कि हमारे पास गैस भी गैस के अंदर जगह ले सकती है। तो अच्छे से
मिक्स हो जाती है, डिफ्यूज हो जाती है। ठीक है? और हमारे पास अगर हम बात करें आयोडीन की, आयोडीन को अगर हम रख देते हैं
ग्लास के जार में और उसको बंद कर लेते हैं तो आयोडीन के वेपर्स भी बड़ी जल्दी-जल्दी क्या होते हैं? इवापोरेट होते हैं और पूरी
की पूरी जगह ले लेते हैं ग्लास के जार के अंदर। ठीक है? इसके अलावा अगर मैं पोटैशियम परमैगनेट वाली चीज में एक और बात
तुमको बताऊं तो हॉट वाटर जब होता है हमारे पास गर्म पानी। गर्म पानी के अंदर पोटैशियम परमैग्नेट ज्यादा जल्दी मिक्स
होता है। इसके अंदर क्या है? पहले ऐसे था ठंडे पानी में फिर थोड़ा ऐसे हुआ फिर ऐसा हुआ। गर्म पानी में डालते ही ऐसा एकदम
चुटकियों में ऐसा एकदम चुटकियों में बड़ी जल्दी मिक्स हो जाएगा। क्यों? गर्म पानी में क्या है? वो गर्म है। वो हॉट है। हॉट
तो हॉट वाटर यानी हॉट वाटर यानी टेंपरेचर ज्यादा। और टेंपरेचर ज्यादा होता है तो क्या होता है? मूवमेंट तेज़ होती है। हम यह
चीज़ पढ़ चुके हैं। टेंपरेचर ज़्यादा, मूवमेंट ज़्यादा, थर्मल एनर्जी इज़ कन्वर्टेड इंटू काइनेटिक एनर्जी। काइनेटिक
एनर्जी मतलब मूव फास्टर। तो ज्यादा टेंपरेचर तो पार्टिकल्स मूव फास्ट करेंगे। जल्दी-जल्दी भागेंगे। ठीक है? और यही चीज़
जो मैंने तुमको चार चीज़ें बताई। एक ये पोटैशियम परमैग्नेट को वाटर में मिक्स करने वाला, एक अगरबत्ती का, एक हमारे पास
आयोडीन वेपर का और पोटैशियम परमैगनेट को गर्म पानी और कोल्ड वाटर में डालने का जो कंपैरिजन है। ये चार चीजें जो मैंने
तुम्हें बताई वो चारों चीजें यहां पर लिखी हुई हैं कि अगर तेरे पेपर में क्वेश्चन आ जाता है इस पर बेस्ड तो तेरा ये क्वेश्चन
रहना नहीं चाहिए, छूटना नहीं चाहिए। तेरे को ये भली-भांति पता होना चाहिए कैसे होगा। ठीक है भाई? तो ये तेरे को अपने
नोट्स के अंदर लिखना है। वेरी इंपॉर्टेंट बातचीत है। क्योंकि पेपर में आजकल डायरेक्ट डेफिनेशन वाले क्वेश्चन ज्यादा
एप्लीकेशन बेस्ड क्वेश्चंस आते हैं। तो एप्लीकेशनेशंस हैं ये सारी की सारी एग्जांपल्स हैं। ये सारे तुझे पता होने
चाहिए। ठीक है? सोप क्लीनिंग एक्शन। सोप का क्लीनिंग एक्शन क्या होता है? अब तू सोचता होगा कि भैया मिट्टी पलीत हो के आ
गए हैं। गंदा करके आ गए खुद को। साबुन से नहा लेते हैं। ओ ठंडेठंडे पानी से नहाना चाहिए। मजा आए या ना [गाना गाने की आवाज़]
आए ना चाहिए तो तू साबुन जो लगा रहा है वो साबुन तेरे चेहरे की गंदगी तेरे बदन की गंदगी तेरे चेहरे पे लगी जो ऑयली स्किन है
उसको साफ कैसे कर देता है तेरे कपड़े अगर गंदे हैं कपड़ों पे अगर ऑयल का स्टेन है किसी चीज का स्टेन है तेल गिर गया है तो
वो तेल के धाग को हटा कैसे देता है तो बेसिकली सोप का जो क्लीनिंग एक्शन होता है वो हमारे पास कुछ ऐसा होता है मान ले
कपड़े की बात नहीं करते अपुन बात कर लेते हैं स्किन की ये मेरी स्किन है। यह अगर मेरी स्किन है। इसके ऊपर तेल की ऑयल की एक
लेयर आ गई है। इसके ऊपर ऑयल की एक लेयर आ गई है। यह क्या है? ऑयल की लेयर है। ठीक है? मैंने क्या
लगाया? मैंने इसके ऊपर लगा दिया सोप। सोप को अपन बनाएंगे किसी और रंग से। यह लगा दिया मैंने इसके ऊपर सोप।
ठीक है? तो अब क्या होगा? अब इसके ऊपर ये जो मेरी स्किन थी इस स्किन के ऊपर ये जो ऑयल था सर ये ऑयल
की लेयर ऊपर कैसे उड़ गई? रुक तो जा। तो जो ऑइल की लेयर थी उस ऑइल की लेयर और स्किन की लेयर के बीच में सोप इंटरफेयर करेगा।
सोप क्या है? कबाब में हड्डी है। ऑइल भाई साहब बड़ी देर से कोशिश कर रहा था कि भाई मैं स्किन को थोड़ा सा पटा लूं। स्किन को
थोड़ा सा पटा लूं। स्किन को इंप्रेस कर लूं। बड़ी देर से उससे चिपका हुआ था। लेकिन भाई जैसे ही सोप आया। सोप आ गया कबाब में
हड्डी बनके। वो क्या आया? बीच में आया और सोइल अपने पास स्किन और ऑइल के बीच में घुस गया। एक लेयर बना दी उसने। ऑइल को
सराउंड कर लिया। उसने ऑइल को खोपचे में ले लिया। ऐसे कैसे? बहन है मेरी। इससे पंगा नहीं। ठीक है? तो सोप हमारे पास क्या है?
हमारी स्किन का बहन भाई होता है। तो वो हमको बचाता है ऐसे लोगों से। ठीक है? तो हमारे पास क्या करता है? वो ऑयल के आसपास
अपनी एक लेयर फॉर्म कर देता है और जैसे ही हम उसके ऊपर वाटर मारते हैं, पानी मारते हैं
तो पानी के साथ सोप तो जाता ही जाता है। साथ ही साथ जो ऑयल की लेयर को उसने सराउंड कर रखा होता है अपने आसपास अपने अंदर उसको
भी साथ में ले जाता है। यही चीज यहां पर फिगर में भी बनी हुई है। ऑयल पड़ा हुआ है। हमने सोप लगाया सोप उसको सराउंड कर लेगा।
फिर हमने पानी फेंका तो पानी के साथ-साथ सोप भी खुद को ले जाएगा और उसके अंदर जो ऑयल है उसको भी अपने साथ ले जाएगा और
कपड़ा साफ चमड़ी साफ स्किन साफ ठीक है यही चीज हमारे पास यहां पर भी लिखी हुई है तुम इसको बिल्कुल अच्छे से रीड कर सकते हो और
अपने नोट्स में भी लिख सकते हो| ओके जी आगे क्या है हमारे पास पोटैशियम परमैग्नेट स्प्रेड फास्टेस्ट इन सबसे तेज किस में
स्प्रेड होता है ठंडे पानी में गर्म पानी में गुनगुने पानी में या पानी में मिक्स ही नहीं होता है बता हॉट वाटर कोल्ड वाटर
आइस वाटर साल्ट वाटर हॉट वाटर में ऑप्शन ए सोप हेल्प्स इन रिमूविंग। सोप हमारे पास किस चीज में मदद करता है? क्या रिमूव करने
में हेल्प करता है सोप हमें? वाटर पार्टिकल्स को नहीं। ऑइल एंड ग्रीस को। यस। ऑइल और ग्रीस को रिमूव करने में हेल्प
करता है। मतलब क्योंकि हवा है, हवा को क्या रिमूव करना? वाटर पार्टिकल्स तो खुद ही साफ करने के काम आते हैं। साल्ट साल्ट
हमारे पास नॉर्मल पानी डालने से भी निकल जाएगा सोप की जरूरत नहीं पड़ेगी। तो सोप की जरूरत हमको तेल और ग्रीस के मामले में
पड़ती है उनको साफ करने में। ठीक है? समरी क्या है? यह पूरे के पूरे चैप्टर की हमारे पास समरी है। 1 मिनट रुकना।
यस। ये पूरे के पूरे चैप्टर की हमारे पास क्या है? समरी है। मैंने तेरे को डिफ्यूजन बताया। यानी कि डिफ्यूजन यानी फैल जाना,
मिक्स हो जाना। जैसे पोटेशियम परमैग्नेट उसके अंदर पानी में मिक्स हो गया। हवा के अंदर मिक्स हो गया। आयोडीन आयोडीन के
वेपर्स आ गए। हवा के अंदर मिक्स हो गई। अगरबत्ती अगरबत्ती का धुआं। तो ये सारी डिफ्यूजन के मामले में है। बाकी सारी
चीजें मोशन मैं तुमको बता चुका हूं। काइनेटिक एनर्जी वाला कंप्रेसिबिलिटी बता दी। फोर्स ऑफ इंटर अट्रैक्शन बता दिया।
इंटर पार्टिकल स्पेस बता दिया। आईपीएस पैकिंग बता दिया। वॉल्यूम बता दिया। शेप बता दिया। ये पूरे चैप्टर की समरी है। एक
बार इसको पढ़ लो। पूरा चैप्टर रिवाइज हो जाएगा। ठीक है? इसके अंदर बेसिकली बता रखा है कि कौन सी स्टेट के अंदर कितना-कितना
ये सारा मामला होता है। ओके जी। और इसके बाद हमारा ये लेक्चर खत्म हो चुका है। लेकिन एक चीज अभी-अभी स्टार्ट हुई है।
लेक्चर तो खत्म हो गया लेकिन एक चीज तुम्हारे हित के लिए तुम्हारी बढ़िया चीज के लिए अभी-अभी स्टार्ट हुई है। पीडब्ल्यू
ऐप पर फिजिक्स वाला के ऐप पर। क्या चीज है वो? वो है फ्री सीरीज फॉर क्लास एथ, सेवंथ एंड सिक्स्थ। क्लास एथ, क्लास सेवंथ और
क्लास सिक्स्थ के लिए साइंस, मैथ्स और एसएसटी पढ़ाने के लिए ये फैकल्टीज एथ के लिए, ये फैकल्टी सेवंथ के लिए और ये
फैकल्टी सिक्स्थ के लिए एकदम तैयार है। एकदम खुद को कस के बैठे हैं और पीडब्ल्यू के ऐप पर फिजिक्स वाला के ऐप पर ये सीरीज
ऑलरेडी स्टार्ट हो चुकी है 30th जुलाई से। तो अगर तुम थोड़े से लेट हो गए हो तो कोई बात नहीं। अभी तक ज्यादा सिलेबस कंप्लीट
नहीं हुआ है उसके अंदर। जल्दी से जाओ और इसमें एनरोल कर लो। और मजे की बात क्या है? फ्री फ्री फ्री ये एकदम मुफ्त है। ठीक
है? अगर तुमको ऐसा लगता है कि वन शॉट में बहुत जल्दी-जल्दी ऐसा होता है जो कि होता भी है। वन शॉट्स के अंदर बेसिकली वन शॉट
हमारे पास उनके लिए होते हैं जो बिल्कुल नहीं पढ़े हैं। वो पढ़ के जा रहे हैं तो अच्छे मार्क्स ले आएंगे पेपर में। लेकिन
अगर तेरे को है कि तेरे को अच्छे नहीं तेरे को बहुत अच्छे चाहिए तो वो फुल के फुल चाहिए। तो तू एक-एक लेक्चर अगर हर
चैप्टर का पढ़ना चाहता है, एक पर्टिकुलर नंबर ऑफ लेक्चर्स के साथ चैप्टर पढ़ना चाहता है। अलोंग विद द डीएचए अलोंग विद तू
उसके अंदर प्रैक्टिस पेपर भी तू चाहता है। ये सारी चीजें तेरे को मिले। रिकॉर्डेड सेशंस तेरे को मिले, मैराथोंस तेरे को
मिले। ये सारी चीजें तेरे को मिले, नोट्स मिले, प्रोवाइडेड नोट्स तेरे को अच्छे से प्रोवाइड हो। तो वो सारी चीजों के लिए तुम
फिजिक्स वाला के ऐप में जा सकते हो। ये जो फ्री सीरीज है, ये जो फ्री लेक्चर्स जा रहे हैं, इसके अंदर तुमको नोट्स भी
मिलेंगे। तुम्हें सारी की सारी वो चीजें मिलेंगी जो कि पेड बैचेस के अंदर मिलती हैं। और ये तुम्हारे लिए सिर्फ तुम्हारे
लिए फिजिक्स वाला हमेशा खड़ा हुआ है क्योंकि फिजिक्स वाला भी अपने बच्चों की वजह से ही खड़ा हुआ है। तो हमारी भी
जिम्मेदारी बनती है तुम्हारे लिए खड़े रहने की। तो इसीलिए जो बच्चे ऐप परचेस नहीं कर सकते पेड बैचेस वो इन बैचेस में
एनरोल कर सकते हैं। और एकदम मुफ्त में एकदम फ्री में पढ़ाई कर सकते हैं अपनी क्लास एथ, सेवंथ और सिक्स्थ क्लास की।
ओके? तो जल्दी से जा के एनरोल कर लो। 30 जुलाई को ही स्टार्ट हुआ है। ज्यादा टाइम नहीं हुआ है अभी। कवर कर लोगे। ओके जी?
चलो जी। तो आज की क्लास को हम करते हैं यहीं पर समाप्त। अगर ये चैप्टर पर्टिकुलेट नेचर ऑफ मैटर मैटर के बारे में समझ आ गई
सारी बातचीत तो जल्दी से कमेंट सेक्शन में हरे दिल छाप दे। तेरे देवू भैया तेरे लिए एक-एक करके एक-एक करके सारे के सारे
लेक्चर्स लाते जा रहे हैं ताकि तेरे टर्म वन के जो एग्जाम्स हैं मिड टर्म जो एग्जाम्स हैं तेरे वो बहुत अच्छे चले
जाएं। ठीक है? तो तेरे देवू भैया तेरे को कभी छोड़ेंगे नहीं। ठीक है? जल्दी से कमेंट सेक्शन को हरे दिलों से भर दो। और
अगर ये मजा आया? समझ आया यह चैप्टर? तो जल्दी से इस लेक्चर को अपने दोस्तों से भी शेयर कर दो क्योंकि भगवान सबका भला करे
मगर शुरुआत मारत करे। है ना भाई? तो इसीलिए इसको अपने दोस्तों से भी शेयर कर दो। जल्दी से छेती-छे करके हरे दिल छापो।
बाकी भाई मिलते हैं तुमसे अगले चैप्टर के वन शॉट में। आज की क्लास को करते हैं यहीं पर समाप्त। अच्छा चलता हूं। दुआओं में याद
रखना। अपने दिलो दिमाग को। सदा खुली किताब रखना। बाय बाय बाय बाय। टाटा बाय-ब लव यू ऑल।
मैटर कोई भी वस्तु है जिसमें द्रव्यमान हो, जो स्थान घेरती हो और जिसे हम अपनी इंद्रियों से महसूस कर सकते हैं। मैटर बहुत छोटे-छोटे अवयवी कणों (परमाणु या अणु) से मिलकर बना होता है, जो इसके बिल्डिंग ब्लॉक्स कहलाते हैं। उदाहरण के लिए, हवा, पानी और पत्थर सभी मैटर हैं।
ठोस में कण बहुत पास-पास चिपके होते हैं, उनके बीच अंतर-आण्विक बल सबसे प्रबल होता है, और वे केवल अपनी स्थिति में कंपन करते हैं। द्रव में कण ठोस से थोड़ी दूरी पर होते हैं, वे प्रवाहित हो सकते हैं लेकिन आयतन निश्चित रहता है। गैस में कण बहुत दूर-दूर होते हैं, आकर्षण बल नगण्य होता है, और वे पूरे बर्तन में तेज़ी से स्वतंत्र रूप से घूमते हैं।
गलनांक वह निश्चित तापमान है जिस पर ठोस पिघलकर द्रव बन जाता है; जैसे बर्फ का गलनांक 0°C होता है। क्वथनांक वह तापमान है जिस पर द्रव उबलकर गैस में बदल जाता है, जैसे पानी का क्वथनांक 100°C (सामान्य दाब पर) होता है। गलनांक और क्वथनांक जितना अधिक होता है, पदार्थ के कणों के बीच आकर्षण बल उतना ही प्रबल होता है।
क्वथन एक निश्चित तापमान पर पूरे द्रव में तेज़ी से होता है और इसमें बुलबुले बनते हैं, जबकि वाष्पीकरण किसी भी तापमान पर केवल द्रव की सतह पर धीमी गति से होता है और इसमें बुलबुले नहीं बनते। क्वथन के दौरान द्रव का तापमान स्थिर रहता है, लेकिन वाष्पीकरण में द्रव ठंडा हो सकता है।
संपीड्यता किसी पदार्थ को दबाने की क्षमता है। इसका क्रम है: गैस > द्रव > ठोस। गैसों में कणों के बीच बहुत अधिक खाली स्थान होता है, इसलिए उन्हें आसानी से दबाया जा सकता है, जबकि ठोसों में कणों के बीच दूरी लगभग नहीं होती, इसलिए वे लगभग असंपीड्य होते हैं।
पदार्थों के अवयवी कण बहुत छोटे होते हैं और विभिन्न पदार्थों में उनकी प्रकृति अलग हो सकती है, पर सभी मैटर के कणों में गति, आकर्षण बल और खाली स्थान की विशेषताएँ समान रूप से पाई जाती हैं। उदाहरण के लिए, पानी और लोहे के कण अलग-अलग हैं, लेकिन दोनों ही मैटर के नियमों का पालन करते हैं।
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