Chapter 4: Basis of Accounting – A Complete Guide for Class 11th Students
This video, presented by a Chartered Accountant, covers Chapter 4: Basis of Accounting for Class 11 Commerce students. It explains the two primary ways to record financial transactions and is crucial for understanding your broader syllabus. The chapter is short but important, typically carrying a 3-mark theory question and two practical problems.
Core Concept: Two Bases of Accounting
The fundamental question is: "On what basis do we prepare accounts?" There are two main approaches:
1. Cash Basis of Accounting
- Focus: Only records transactions when cash is actually received or paid.
- Logic: Income is recorded when cash is received; expenses when cash is paid.
- Example: Rent paid for 10 months = expense of 10 months, even if 12 months' rent is due.
- Appropriate for: Small businesses, professionals, or non-profit organizations with simple operations.
2. Accrual Basis of Accounting
- Focus: Records transactions when they are earned or incurred, regardless of cash flow.
- Logic: Income is recorded when earned (even if not received); expenses when incurred (even if not paid).
- Example: Rent for 12 months is the expense, whether or not all has been paid.
- Industry Standard: Required by law for all companies; provides a true and fair view of profitability. For a deeper insight into how this accuracy applies to business structures, check out our Comprehensive Guide to Basic Accounting: The Complete Accounting Cycle Explained.
Key Differences & Typical Exam Questions
A 3-4 mark theory question often asks you to distinguish between cash and accrual bases. Key points include:
- Recognition of Credit Transactions: Accrual includes credit sales/purchases; cash does not.
- Treatment of Outstanding/Prepaid Items: Accrual accounts for outstanding expenses and prepaid expenses; cash does not.
- Profit Calculation: Accrual gives a more accurate profit figure.
- Legal Acceptability: Accrual basis is more acceptable and required by law.
Practical Application: The Four Special Items
The main adjustment points between the two methods are:
- Outstanding Expenses: Expenses incurred but not yet paid.
- Cash Basis: Not considered an expense.
- Accrual Basis: Considered an expense.
- Prepaid Expenses: Expenses paid in advance.
- Cash Basis: Considered an expense.
- Accrual Basis: Not considered an expense for the current year.
- Accrued Income (Income Earned but Not Received):
- Cash Basis: Not considered income.
- Accrual Basis: Considered income for the current year.
- Income Received in Advance (Unearned Income):
- Cash Basis: Considered income.
- Accrual Basis: Not considered income for the current year.
Step-by-Step Solved Example 1
Question (Illustration): Michael's data:
- Expenses paid: ₹1,60,000 (includes ₹40,000 prepaid)
- Expenses not yet paid (outstanding): ₹20,000
- Income received: ₹2,40,000 (includes ₹30,000 received in advance)
- Income not yet received (accrued): ₹24,000
Solution:
Scenario A: Cash Basis of Accounting
- Income = Cash received = ₹2,40,000
- Expenses = Cash paid = ₹1,60,000
- Profit (or Income) = 2,40,000 - 1,60,000 = ₹80,000
Scenario B: Accrual Basis of Accounting
- Income = Income earned during the year.
- Start with income received: ₹2,40,000
- Subtract income received in advance (not this year's): -₹30,000
- Add income earned but not received (this year's work): +₹24,000
- Total Income = ₹2,34,000
- Expenses = Expenses incurred during the year.
- Start with expenses paid: ₹1,60,000
- Subtract prepaid expenses (not this year's expense): -₹40,000
- Add outstanding expenses (this year's liability): +₹20,000
- Total Expenses = ₹1,40,000
- Profit (or Income) = 2,34,000 - 1,40,000 = ₹94,000
Step-by-Step Solved Example 2
Question (Illustration): Vijay, a consultant, earned ₹4,00,000 during the year. He received ₹3,50,000 of this. His expenses incurred were ₹1,70,000, of which ₹1,30,000 were paid (₹40,000 outstanding). He also received ₹45,000 as consultancy fees relating to the previous year and paid ₹20,000 in expenses of the last year.
Solution:
Scenario A: Cash Basis of Accounting
- Income = Cash received = ₹3,50,000 (this year) + ₹45,000 (previous year) = ₹3,95,000
- Expenses = Cash paid = ₹1,30,000 (this year) + ₹20,000 (previous year) = ₹1,50,000
- Income = 3,95,000 - 1,50,000 = ₹2,45,000
Scenario B: Accrual Basis of Accounting
- Income = Income earned this year = ₹4,00,000 (The ₹45,000 from last year is not this year's income)
- Expenses = Expenses incurred this year = ₹1,70,000 (The ₹20,000 paid for last year is not this year's expense)
- Income = 4,00,000 - 1,70,000 = ₹2,30,000
Final Takeaway
- Cash basis is simple but can give a misleading picture of financial health.
- Accrual basis is the standard for accurate accounting and is required for most businesses.
- Understanding the treatment of outstanding, prepaid, accrued, and unearned items is key to solving exam problems. To see how these concepts apply in more complex scenarios, refer to our guide on How to Generalize Transactions in Integrated Accounting Books.
Practice a few more problems from your NCERT book to master this short but important chapter. Good luck!
हेलो मेरे प्यारे बच्चों। आज की ये वीडियो हमारे क्लास 11th के अकाउंटेंसी की एक नई वीडियो है। जिसमें मैं आपके साथ एक नया
चैप्टर आज करने वाला हूं। ये वीडियो शुरू करने से पहले मैं बताना चाहता हूं कि बहुत से स्टूडेंट्स पूछ रहे थे कि सर हमें आपके
साथ और भी ज्यादा इन डेप्थ तरीके से पढ़ाई करनी है। तो मेरे प्यारे बच्चों आप हमारे चैनल की मेंबरशिप जॉइ कर सकते हो। देखो
हमारे चैनल पर नीचे जॉइन का जो बटन आ रहा है उसमें आप अपने क्लास 11th के स्पेसिफिक मेंबरशिप लेवल को अगर ज्वाइन करते हो तो
उसमें बहुत ही नॉमिनल फीस के अंदर आपको पूरा का पूरा सिलेबस मिल जाता है जिसमें अकाउंट्स और इकोनॉमिक्स मैंने आपको पूरा
का पूरा अच्छे से कवर करवा रखा है। लेकिन वो उन स्टूडेंट्स के लिए है जो पूरा अच्छे से इन डेप्थ पढ़ना चाहते हैं। अगर आप
हमारी रेगुलर इस YouTube सीरीज को फॉलो कर रहे हो और सारे लेक्चर्स अच्छे से देख रहे हो तो आपको फिर उस मेंबरशिप को ज्वॉइ करने
की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। तो वो पूरी तरह से ऑप्शनल है उन बच्चों के लिए जो जॉइ करना चाहते हैं और काफी बच्चे इसको लेकर
क्वेरी कर भी रहे थे। पर मैं आपको बता देता हूं हमारे पास 100्स ऑफ स्टूडेंट्स हैं जो उस मेंबरशिप के लेवल से अपनी
तैयारी और अपनी पढ़ाई कर रहे हैं। बाकी वीडियो शुरू करने से पहले सभी बच्चों से यही निवेदन करना चाहूंगा बच्चों कि आप
हमारे लेक्चर्स को अगर एंजॉय करते हैं अच्छे से सारी पढ़ाई करते हैं तो अपने सभी दोस्तों के साथ अपने सभी ग्रुप्स पर इसको
जरूर जरूर जरूर शेयर करना क्योंकि आज भी बहुत सारे मैक्सिमम क्लास 11th के बच्चे ऐसे हैं जिनको पता ही नहीं है कि कौन से
चैनल से हमें अपनी स्टडीज को कंप्लीट करना है। तो देखो हमने अपने पिछले लेक्चर्स के अंदर आपको चैप्टर वन टू थ्री अच्छे से
करवाया। आज हम आपके साथ एक नया चैप्टर करने वाले हैं। चैप्टर नंबर फोर। लेकिन आज का लेक्चर करने से करने के लिए आपको अपना
रजिस्टर निकालना पड़ेगा और अपना पेन निकालना पड़ेगा। क्योंकि आज मैं जो आपको सिखाने और पढ़ाने वाला हूं वो बहुत ही
रोचक रोमांचक है। तो इसीलिए आज मेरे साथ-साथ ही नोट्स बनाकर हम सारी बातों को कवर करेंगे। चलो तो सबसे पहले डालते हैं
हमारे चैप्टर नंबर फोर की हेडिंग और हेडिंग का नाम लिखना है। इस चैप्टर का नाम है बेसिस ऑफ अकाउंटिंग।
तो है तो छोटा सा चैप्टर लेकिन हम इस चैप्टर को बहुत अच्छे से कवर करेंगे। इसमें जनरली एग्जाम में तीन नंबर तक के
क्वेश्चन आ सकते हैं। जिसमें छोटा सा एक ही थ्योरी क्वेश्चन है इंपॉर्टेंट और दो प्रैक्टिकल क्वेश्चन है। तो बहुत ही छोटा
चैप्टर है। आज ही खत्म हो जाएगा। तो इस चैप्टर का नाम आप लिखो बेसिस ऑफ अकाउंटिंग। यानी कि हिंदी में इसका मतलब
है अकाउंटिंग करने का आधार क्या है? बेस क्या है? तो इसमें आप दो बफरर्केशन करना और पहले
बफरर्केशन में लिखना एक आधार को हम बोलते हैं कैश बेसिस ऑफ अकाउंटिंग। तो पहले बफरकेशन
में आप लिखना कैश बेसिस ऑफ अकाउंटिंग और दूसरे बेसिस में आप लिखना एक्रुअल
बेसिस ऑफ अकाउंटिंग। तो देखो इसमें मोटा-मोटा क्या डिफरेंस है? क्या है चैप्टर?
हम ये समझना चाह रहे हैं इस चैप्टर के माध्यम से। हमारा ऑब्जेक्टिव यह है कि दुनिया में अकाउंटिंग करने का आधार क्या
है? व्हाट इज द बेस? तो अकाउंटिंग करने का प्यारे बच्चों जो बेस होता है वो दो तरह से डिफाइन किया
जाता है। एक को बोलते हैं कैश बेसिस और दूसरे को बोलते हैं एक्रूल बेसिस। क्या अंतर है सर? चलो तो मैं आपको अंतर बताता
हूं। कैश बेसिस एक ऐसा बेसिस होता है जिसमें हम सिर्फ कैश के हिसाब से अकाउंटिंग करते
हैं। अब आप सोचोगे सर कैश के हिसाब से क्या मतलब? आइए एक एग्जांपल से समझने का प्रयास करते हैं। फॉर एग्जांपल
मैं एक पूरा अकाउंटिंग ईयर बना लेता हूं। एक पूरे एकाउंटिंग ईयर में हमारे कितने महीने होते हैं? आप जानते हैं 12 महीने
होते हैं। 2 महीने, 3 महीने, 4 महीने, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11 और 12। तो ये मैंने पूरा का पूरा एक अकाउंटिंग ईयर बना दिया
12 महीनों का और मैं अपने ही एग्जांपल से आपको समझा दूंगा बड़ी आसानी से आप समझ जाओगे। मैं हर महीने ₹1 लाख ₹1 लाख रेंट
पे करता हूं। क्योंकि जहां पर मैं पढ़ाता हूं जो जगह है मेरे पास जो मैंने किराए पर ले रखी है तो मुझे हर महीने मेरा लैंड
लॉर्ड मुझसे ₹1 लाख रेंट लेता है तो वो फिक्स है तो मान लेते हैं मैंने अपने लैंड लॉर्ड को ₹1 लाख रेंट पे कर दिया क्या कर
दिया पे कर दिया कैश दे दिया हिंदी भी लिख देता हूं कैश पे कर दिया अब दूसरे महीने मैंने फिर से ₹1 लाख रेंट
पे कर दिया। तीसरे महीने मैंने फिर से ₹1 लाख रेंट पे कर दिया। चौथे महीने भी कर दिया, पांचवें महीने भी कर दिया, छठे
महीने भी कर दिया, सातवें महीने भी कर दिया, आठवें महीने भी कर दिया, नौवें महीने भी कर दिया और 10वें महीने भी कर
दिया। तो मान लेते हैं मैंने अपने लैंड लॉर्ड को हर महीने रेंट पे कर दिया। हर महीने रेंट पे कर दिया। तो अगर आप थोड़ी
सी गणित लगाएंगे और आपसे पूछा जाए बताओ बच्चों मैंने कितना रेंट पे कर दिया? मेरा रेंट का एक्सपेंस कितना है? तो बच्चा
कहेगा सर रुको अभी जोड़ के बताता हूं। रुको बस तो बच्चा कहेगा सर ₹1 लाख 1 लाख 1 लाख फिर 1 लाख 1 लाख 1 लाख फिर 1 लाख 1
लाख 1 लाख 1 लाख आपने ₹1 लाख पे कर दिए हैं। वेरी गुड बच्चों। शाबाश। तो अपने लिए तालियां बजा लो एक बार कमेंट
सेक्शन में। वेरी गुड। तो आपने बिल्कुल सही बताया कि भाई मैंने कितना कैश पे कर दिया है? ₹1 लाख। तो मेरा खर्चा हो गया ₹1
लाख। वेरी गुड। लेकिन अब एक गंभीर चर्चा करेंगे आप और मैं मिलजुलकर। मैं तो चार्टर्ड अकाउंटेंट हूं
तो आपके साथ गंभीर चर्चा ही करूंगा। मैंने 11वें महीने का जो रेंट था ₹1 लाख वो पे नहीं करा और 12वें महीने का भी जो
रेंट था ₹1 लाख मैंने पे नहीं करा। यानी कि मोटा-मोटी अगर बात करूं तो मैंने ₹ लाख अभी तक रेंट पे नहीं करा।
और शायद आपको याद हो आप में से कुछ बच्चे ऐसे होंगे जो रेगुलरली मेरे साथ पढ़ाई कर रहे हैं। वह यह जानते होंगे कि अगर हम कोई
पैसे पे नहीं करते तो हम उसको कहते हैं क्या कहते हैं? आउटस्टैंडिंग रेंट या आउटस्टैंडिंग जो भी होगा। हालांकि इस
एग्जांपल में आउटस्टैंडिंग रेंट कहेंगे। ₹ लाख। इसका मतलब है कि हमने ₹ लाख रेंट पे नहीं करा। अब बड़े ध्यान से क्रिटिकल बात
सुननी और समझनी है। अब अगर मैं आपसे यह पूछूं कि बच्चों यह बताओ
कि मेरा इस साल का रेंट का एक्सपेंस कितना होना चाहिए? ये बताना है आपको। देयर इज़ अ डिफरेंस इन द टर्मिनोलॉजी।
मैं आपसे यह नहीं पूछ रहा कि मैंने कितना रेंट एक्सपेंस पे कर दिया। मैं यह नहीं पूछ रहा। मैं यह पूछ रहा हूं कि मेरा इस
साल रेंट एक्सपेंस कितना होना चाहिए? अगर मैं हर महीने ₹1 लाख रेंट देता हूं तो लॉजिकली
1 साल का यानी 12 महीने का रेंट कितना होना चाहिए? यह पूछ रहा हूं। तो मुझे ऐसा लगता है आप में से कुछ बच्चे क्या उत्तर
देंगे? बताओ भाई कमेंट सेक्शन में कि इस साल का मेरा रेंट क्या होना चाहिए? तो आप कहोगे सर इस साल का आपका रेंट 12 महीने के
हिसाब से तो 12 लाख होना चाहिए। वेरी गुड। तो जो जो बच्चा ये सोच रहा है तो वेरी गुड। अपने आप को शाबाशी दो। बिल्कुल सही
सोच रहे हो आप। तो मेरे प्यारे बच्चों पूरी दुनिया में दो तरह से अकाउंटिंग करने का तरीका है। देखो अब एक तरीका तो है कि
हम सोचें कि रेंट का एक्सपेंस कितना? तो बच्चा कह सकता है कि सर आपने ₹1 लाख पे किया है। पे कर दिया तो आपका खर्चा ₹1 लाख
और हो सकता है दूसरा बच्चा कहे कि सर आपका रेंट कितना होना चाहिए 1 साल का? तो दूसरा बच्चा कहे सर आपका तो 1 महीने का रेंट है
1 लाख तो 12 महीने का रेंट 12 लाख होना चाहिए। अब पे करा हो ना करा हो वो तो कोई बात नहीं। लेकिन होना तो 12 लाख चाहिए।
दूसरा बच्चा ये कर रहा है अकाउंटिंग। तो पूरी दुनिया में मेरे प्यारे बच्चों दो तरह से अकाउंटिंग की जा सकती है। इस पहले
वाले तरीके को कहते हैं कैश बेसिस। यानी कि कैश बेसिस जो होता है वो ये सिर्फ यह देखता है कि आप कितना कैश पे कर रहे हो या
कितना कैश आ रहा है। बस। तो पहली वाली अकाउंटिंग सिर्फ यह देखती है कि कितना कैश पे करा या आया।
लेकिन जो दूसरे वाली अकाउंटिंग है एक्रुअल वाली वो यह देखती है कि कितना होना चाहिए। तो दोनों बातों में फर्क है मेरे प्यारे
बच्चों जैसे उदाहरण के तौर पर हम कहते हैं कि बच्चों मैंने सफेद शर्ट पहनी है। लेकिन अगर मैं कह दूं थोड़ा सा इसको
ट्विस्ट करके कि बच्चों मुझे काली शर्ट पहननी चाहिए। तो बस बात फर्क हो गई। ऐसे ही कैश बेसिस में हम ये देखते हैं कि
कितना कैश पे करा या कितना कैश आया। बस ये देखते हैं। जबकि एक्रूअल बेसिस में हम देखते हैं कि कितना एक्सपेंस होना चाहिए
या मिलना चाहिए। मतलब यहां पर चाहिए वर्ड कीेंस है कि क्या होना चाहिए। अब पे कर दिया हो ना कर दिया हो उससे फर्क नहीं
पड़ता। तो एक्रूल बेसिस ऑफ अकाउंटिंग वो होती है। तो देखो एक ही एग्जांपल से दोनों तरह की एकाउंटिंग का मैंने आपको डिफरेंस
बताने की कोशिश करी है। लेकिन आपको लॉजिकली मैं बता देता हूं कि पूरी दुनिया में जो अकाउंटिंग चलती है क्योंकि आप
चैप्टर थ्री में पढ़ चुके हो। हमारी फंडामेंटल एकाउंटिंग एजम्पशन का ये कौन सा पार्ट था? थर्ड अगर आपको याद हो एक्रूअल।
तो हम हमेशा अकाउंटिंग जो करते हैं मतलब हम एज चार्टर्ड अकाउंटेंट या एज अकाउंटेंट या आप बच्चे या पूरी दुनिया के अंदर
मेजॉरिटी जो अकाउंटिंग बेसिस होता है वो एक्रूल बेसिस होता है। है ना? लेकिन फिर भी थ्योरी के लिए हमें बच्चे को बताना
पड़ता है कि बच्चों दो तरह की अकाउंटिंग होती है। एक कैश बेसिस वाली और एक एक्रुअल बेसिस वाली। जिसका सिंपल सा मीनिंग ये है
कैश बेसिस का मतलब है आपके पास कितना कैश आया या गया। ये देखते हो। लेकिन एक्रुअल बेसिस में आप देखते हो कि कितना एक्चुअल
में होना चाहिए। होने चाहिए पर फोकस करते हैं। अब पे कर दिया हो ना कर दिया हो उससे फर्क नहीं पड़ता। ठीक है? तो ये उसका मूल
डिफरेंस होता है। तो अब ऐसा करते हैं मैं आपको बताता हूं। देखो ये तो हो गई हमारी बेसिक मीनिंग और आप समझ गए। लेकिन एग्जाम
में इसका फोर नंबर का थ्योरी क्वेश्चन आता है और वो सीधा इसका डिफरेंस पूछता है कि कैश बेसिस और एक्रूल बेसिस का डिफरेंस
बताओ। थ्योरी में आता है। है ना? तो मैं आपकी स्क्रीन पर पूरा का पूरा एक टैबुलर फॉर्मेट लगाऊंगा। आप स्क्रीनशॉट ले लेना
या आपकी बुक में होगा तो मार्क कर लेना। उसमें अलग-अलग बेसिस के हिसाब से मतलब अलग-अलग पैराटर्स के हिसाब से दोनों का
डिफरेंस दिया होता है। तो वो आप स्क्रीनशॉट मेरे साथ ले ले। चलो तो ये बच्चों मैं आपको 2 मिनट के लिए
मतलब 2 मिनट तो नहीं 2 सेकंड के लिए स्क्रीन बड़ी कर रहा हूं। आपको नजर आएगा और आप चेक कर सकते हो। आप इसका स्क्रीनशॉट
लेना चाहो तो ले सकते हो या अपनी बुक में भी इसको चाहो तो मार्क कर सकते हो। ये डिफरेंस है एक्रूअल बेसिस और कैश बेसिस
का। आओ मैं आपको समझा भी देता हूं। एग्जाम में थ्योरी क्वेश्चन आता है। देखो तो दो तरह के बेसिस होते हैं। एक होता है
एक्रुअल बेसिस और एक होता है कैश बेसिस। है ना? तो जैसे अगर मैं पहले आपको कैश बेसिस समझाऊं तो देखो कैश बेसिस में हम
सिर्फ कैश वाली ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड कर लेते हैं। कैश का मतलब है या तो पैसा आया या पैसा गया।
लेकिन एक्रूल बेसिस में हम कैश के साथ-साथ क्रेडिट वाली ट्रांजैक्शन भी रिकॉर्ड करते हैं। मतलब हमें यहां पर इस बात से मतलब
नहीं है कि पैसा आया या गया। बस जो होना चाहिए वो रिकॉर्ड करेंगे। अब चाहे उधार हो तो भी रिकॉर्ड कर लेंगे। चाहे नकद हो तो
भी रिकॉर्ड कर लेंगे। तो एक्रूल बेसिस ये है। अच्छा इंपॉर्टेंट बात जो भी हम प्रॉफिट या लॉस पता लगाते हैं किसी भी
बिनेस का वो हमेशा एक्रुअल बेसिस से पता लगाते हैं। क्योंकि इससे हमेशा सही प्रॉफिट पता चलता है। तो इसीलिए देखो पहले
पूरे डिफरेंस देख लेना। इसीलिए एक्रूल बेसिस को कानून ने भी रिकॉग्नाइज़ कर रखा है। मतलब कानून भी कहता है कि भ हां सारी
कंपनियों को एक्रुअल बेसिस ही फॉलो करना पड़ेगा। क्योंकि ये सही पिक्चर दिखाता है। ये एक ट्रू पिक्चर दिखाता है। और हम भी
इसीलिए एज एन अकाउंटेंट एक्रूअल बेसिस ही फॉलो करते हैं। और इसीलिए देखो लिखा भी है कि एक्रूल बेसिस जो है वो मोर एक्सेप्टेबल
होता है। ये सबसे ज्यादा एक्सेप्टेबल है पूरी दुनिया में। और ये इसीलिए सबसे ज्यादा रिलायबल भी होता है। सारे लोग इसी
को फॉलो करते हैं। अब आप कह सोचते होंगे कि सर फिर कैश बेसिस कौन फॉलो करता है? जब सारी दुनिया एक्रूअल ही करती है तो कैश
बेसिस कौन करता है? तो वैसे तो बच्चों कैश बेसिस कोई करता नहीं है। लेकिन जनरली जो बहुत ही छोटे और बहुत ही मतलब स्मॉल
बिनेसेस होते हैं जिनको नॉलेज नहीं है। जिनको नहीं पता यार एक्रु्रूल बकर्रुअल ये सब क्या है वो तो सिंपल ये देखते हैं भाई
पैसा आया पैसा गया। चलो भैया हो गई अकाउंटिंग। तो आमतौर पर जो मतलब नॉन प्रॉफिट ऑर्गेनाइजेशंस होते हैं या जो
प्रोफेशनल्स होते हैं जिनका काम है बस भाई पैसा आया पैसा गया बात खत्म वो कैश बेसिस अकाउंटिंग करते हैं। लेकिन ध्यान रखना कोई
भी कंपनी हो कोई भी बिजनेस हो कोई भी मतलब हमारे लिए इंपॉर्टेंट बात ये है कि कैसा भी बिनेस हो वो सब एक्रुअल अकाउंटिंग ही
फॉलो करते हैं। तो ये कुछ डिफरेंस होते हैं जो हमें ध्यान रखने हैं कि भ कैश बेसिस क्या और एक्रूअल बेसिस क्या है ना
तो इसमें मेजर डिफरेंसेस जो हैं वो मैंने आपको बताए बाकी जो सेकंड पॉइंट है फोर्थ पॉइंट है वो थोड़े से टेक्निकल पॉइंट्स
हैं जो अभी हम आगे भी कवर करेंगे आपको सिखाएंगे कि क्या होता है प्रीपेड एक्सपेंस आउटस्टैंडिंग एक्सपेंस एक्र्यूड
इनकम इनकम एडवांस इन बातों को कवर करके आपको बताएंगे लेकिन अगर चार नंबर का थ्योरी क्वेश्चन आए तो आप आराम से इसमें
कोई भी चार डिफरेंस लिख सकते हो जो आपको मैंने यहां पर मार्क करें। है ना? कैश बेसिस देखो, कानून में भी इसको रिकॉग्नाइज़
नहीं किया जाता। है ना? और कैश बेसिस से हम सही प्रॉफिट का भी देखो पता नहीं लगा पाते। तो कैश बेसिस बस आप ये याद रखो कभी
भी फॉलो वैसे नहीं करना प्रैक्टिकली। लेकिन हां, थ्योरी के लिए हम पढ़ लेते हैं। तो दो तरह के बेसिस होते हैं। कैश
बेसिस और एक्रूल बेसिस। चलो, अब आगे मेरे साथ-साथ लिखना शुरू करना। अब यहां पर बस चार हमें इंपॉर्टेंट
पॉइंट्स जो हैं उन पर डिस्कशन करना होता है। तो वो आप मेरे साथ-साथ ही नोट कर लेना।
सबसे पहला पॉइंट होता है आउटस्टैंडिंग एक्सपेंस का। वो तो मैंने आपको वैसे ऊपर एग्जांपल में दिखाया भी था। अब
आउटस्टैंडिंग एक्सपेंस क्या होता है? बस याद करते रहो। देखो हमने सारी टर्मिनोलॉजी पहले पढ़ी थी। अब जो बच्चा पुराने लेक्चर
नहीं देखेगा, रिवाइज नहीं करेगा उसको प्रॉब्लम आएगी। तो सर हम तो करते हैं तो वेरी गुड आप करते हो ना तो आपको प्रॉब्लम
नहीं आएगी। अब आउटस्टैंडिंग एक्सपेंस तो अभी हमने एग्जांपल में भी करा था। इसका मतलब था कि भ अगर आपने रेंट पे नहीं करा 2
महीने का तो उसको बोलते हैं आउटस्टैंडिंग एक्सपेंस। है ना? अब देखो ध्यान से सुनना। कैश बेसिस क्या करता है?
कैश बेसिस आउटस्टैंडिंग एक्सपेंस को कंसीडर नहीं करता। है ना? वह कंसीडर नहीं करता। वो कहता है
कैश बेसिस के हिसाब से तो कि भ 2 महीने का आपने अगर रेंट ₹ लाख नहीं दिया तो कैश बेसिस तो कहता है कि फिर मैं उसको नहीं
मानूंगा एक्सपेंस। है ना? तो वो तो इसको एक्सपेंस कंसीडर नहीं करता। कैश बेसिस वो तो कहता है आउटस्टैंडिंग एक्सपेंस इज़ नॉट
एक्सपेंस। कैश बेसिस तो यह कहता है। है ना? कहता है कि अगर आपने कैश पे नहीं करा तो फिर यह तो एक्सपेंस नहीं है। लेकिन
एक्रूल बेसिस क्या कहता है? एक्रुअल बेसिस कहता है नहीं नहीं नहीं ऐसी बात नहीं है भाई। अगर हमने पे नहीं करा तो क्या हुआ?
एक्सपेंस तो होना चाहिए। तो वो इसको एक्सपेंस मानता है। वो कहता है नहीं इट इज़ एक्सपेंस। यह तो है एक्सपेंस। तो देखो तो
दोनों में कितना मतलब मतभेद है। आउटस्टैंडिंग एक्सपेंस के ट्रीटमेंट को लेकर कैश बेसिस कहता है मैं नहीं मानूंगा
यह खर्चा नहीं है पे तो करा ही नहीं और एक्रूल बेसिस कहता है ऐसे कैसे नहीं मानेगा होना तो चाहिए खर्चा पे नहीं करा
वो अलग बात है पर है तो है ना होना तो चाहिए ना तो ये है कहानी देखो आउटस्टैंडिंग एक्सपेंस की याद रखनी है तो
आप भी लिख सकते हो ऐसा अच्छा इसी तरह नंबर टू दूसरा क्या होता है अब दिमाग लगाना मेरे प्यारे बच्चों प्रीपेड एक्सपेंस
सर ये क्या था? हम ये भी तो था। प्रीपेड एक्सपेंस क्या था? प्रीपेड एक्सपेंस होता है कि जिसमें आप पैसे पे कर देते हो। मतलब
आपने पे कर दिया। लेकिन उसका बेनिफिट कब मिलेगा? अगले साल नेक्स्ट ईयर में। है ना? जिसको सिंपल भाषा
में हम कहते थे प्रीपेड। तो पे कर दिया इन एडवांस। तो क्योंकि आपने पहले ही एडवांस में पे कर
दिया। इसीलिए नाम क्या बन गया? प्रीपेड एक्सपेंस। तो पैसे आपने इस साल दे दिए। लेकिन बेनिफिट कब मिलेगा? नेक्स्ट ईयर।
इसको बोलते हैं प्रीपेड एक्सपेंस। अच्छा आप खुद सोचो। सोचना है बस। लॉजिकली सोचना। अब कैश बेसिस क्या कहेगा? कैश
बेसिस कहेगा अच्छा पैसे दे दिए मैं कहूंगा हां पैसे तो दे दिए पे कर दिया मतलब कैश पे कर दिया यही लिख लेता हूं चलो कैश पे
कर दिया तो कैश बेसिस कहेगा हां हां हां तुमने कैश पे कर दिया तो ये तो एक्सपेंस है कैश कहेगा भाई तुमने कैश पे कर दिया ये
तो एक्सपेंस है लेकिन देखो एक्रुअल बेसिस क्या कहेगा एक्रुूल बेसिस सोचता है एक्रूल बेसिस है
बुद्धि लोग बुद्धिमान लोगों का इसीलिए लिखा था डिफरेंस में भी कि इट इज़ अ टेक्निकल पार्ट। इसके लिए टेक्निकल नॉलेज
चाहिए। अब सोचो क्या ये एक्सपेंस इस साल का होना चाहिए? सोचो क्या ये एक्सपेंस इस साल का होना
चाहिए? सोचो। हम सर बेनिफिट कब मिल रहा है? अगले साल। तो एक्सपेंस भी किस साल का होना चाहिए? अगले साल का। तो एक्रूअल
बेसिस दिमाग लगाता है। कहता है भाई यह बताओ क्या ये एक्सपेंस इस साल का होना चाहिए कि नहीं होना चाहिए? तो हम कहेंगे
नहीं नहीं यार इस साल तो नहीं होना चाहिए क्योंकि बेनिफिट तो अगले साल मिल रहा है। तो ये तो अगले साल का एक्सपेंस माना
जाएगा। है ना? तो एक्रूल बेसिस कहता है कि फिर ये एक्सपेंस नहीं है। तो पैसे भले ही आपने पे कर दिए हो एडवांस में लेकिन
एक्रुअल बेसिस कहता है ये एक्सपेंस नहीं है। इस साल का एक्सपेंस तो नहीं है कम से कम अगले साल का एक्सपेंस होगा। तो देखो
दोनों में मतभेद हो गया प्रीपेड एक्सपेंस को लेकर। इसी तरह देखो नंबर थ्री। नंबर थ्री है
एक्र्यूड इनकम। अरे सर यह क्या है? यह क्या टर्मिनोलॉजी कह रहे हो? एक्रड इनकम। अब देखो यह भी सिखाया था यह क्या होता है।
नहीं पता तो बता देता हूं। एक्रूड इनकम का मतलब होता है कि इनकम अर्नड बट नॉट रिसीव्ड।
सिंपल भाषा में इनकम तो कमा ली आपने बस पैसे नहीं मिले। मतलब ऐसे हिंदी में लिख देता हूं। कमा
लिया। बट पैसे नहीं मिले। तो इसको बोलते हैं इनकम
अर्न बट नॉट रिसीव्ड। तो देखो जी दिमाग लगाते हैं। मान लो हमें हमने किसी के लिए कुछ काम करा। तो
उसने कहा ठीक है भाई। तुमने बड़ा अच्छा काम करा। मैंने कहा बताओ भाई मेरा कमीशन देओगे? कह रहा हां हां तो मैंने कमीशन पता
है कितना कमा लिया? मेरी कमीशन की अर्निंग हो गई। मैंने उसके लिए काम करा और मेरी अर्निंग हो गई ₹1
लाख। अब मैं उससे पैसे मांग रहा हूं। मैंने कहा ला पैसे तो दे दे। कह रहा हां दे दूंगा दे दूंगा। पैसे तो दे दूंगा। अभी
कहां भागे जा रहे हैं? पैसे दे दूंगा। तो मैंने भी सोचा चलो ठीक है मिल जाएंगे भाई पैसे। तो मैंने कमा तो लिया बच्चों लेकिन
अभी ना पैसे मिले नहीं है। पैसे बाद में देगा वह लिख देता हूं। पैसे अगले साल देगा वह बाद में मिलेंगे।
तो बस ये लिखते ही ये लिखते ही कैश बेसिस देखो वो तो फैल गया। कैश बेसिस कह रहा है पैसे मिले क्या? पैसा लाया क्या? कैश
बेसिस पूछ रहा है। पैसा आया? मैं कह रहा हूं नहीं। पैसे तो नहीं मिले। तो कैश बेस कह रहा है बस बस बस बेकार है बेकार है फिर
कह रहा है फिर नहीं फिर नहीं फिर नहीं फिर नहीं कह रहा है मैं अब यह इनकम नहीं मानूंगा कह रहे पैसे तो तुम्हें मिले नहीं
मैं नहीं मान रहा इनकम तो कैश बेसिस पे ये कह रहे हैं कह रहा है मैं नहीं मानूंगा लेकिन अब दिमाग लगाओ भाई मेरे बुद्धिजीवी
आप तो एक्रूअल बेसिस वाले मुंशी हो आपको तो यह सोचना है कि क्या यह इस साल इनकम है क्या मैंने इस साल मेहनत करी क्या मैंने
इस साल काम करा क्या मैंने इस साल कमाई करी तो बच्चा कह रहा हां सर मेहनत तो करी है आपने आपने कमाई भी करी है कमीशन भी
आपने अर्न करा है तो बिल्कुल तो एक्रूल बेसिस कहता है कि हां फिर तो भाई ये इस साल की इनकम है
तो देख रहे हो डिफरेंस दोनों का मतभेद है तो ये स्पेशल पॉइंट्स हैं बस इनके बारे में आप सोचोगे तो आपको समझ भी आ जाएगा तो
यहां पर भी दोनों बेसिस में देखो मतभेद है इसको बोलते हैं एक्रूड इनकम और चौथा और आखिरी स्पेशल पॉइंट होता है।
इसको हम बोलते हैं इनकम रिसीव्ड इन एडवांस। इनकम रिसीव्ड इन एडवांस या इसको दूसरे
शब्दों में बोला जाता है अनअर्नड इनकम। अनअ अर्नड इनकम। सर इसका क्या मतलब है? इसका मतलब है हिंदी में लिख देता हूं।
पैसे मिल गए। एडवांस में मतलब जल्दी मिल गए
बट काम करोगे अगले साल हैं सर ये क्या बात हुई हां और क्या अरे कभी-कभी ऐसा जब समाज
में आपका कहते हैं ना वो चलता है मतलब क्या बोलते हैं उसको ओरा चलता है कि भैया पैसे पहले लूंगा मैं तो देखो आपने कहा
किसी को कि मैं तुम्हारा काम तो कर दूंगा पहले पैसे दो। तो उस ने कहा ठीक है भैया आप तो बहुत बड़े मतलब समाज के
कोई बहुत बड़े बाहुबली हो। तो आपको किसी ने ₹1 लाख तो दे दिया। आपको पैसे तो मिल गए। अब वो कह रहा है काम कब करोगे? आप कह
रहे अरे काम तो कर देंगे। अगले साल अभी रुको तो जरा कर देंगे। तो काम आप बाद में करोगे। ठीक है ना? काम करोगे अगले साल। बस
पैसे आपको जल्दी मिल गए। पैसे आपको पहले ही मिल गए। देखो पैसे मिल चुके हैं बच्चों। पैसे मिले तो इंग्लिश बन गई इनकम
रिसीव्ड इन एडवांस। तो अब देखो बस अब कैश बेसिस क्या कहेगा देखो वो तो उछल रहा है कैश बेसिस तो कह
रहा है कह रहा आ हा हा कह रहा है पैसे मिल गए मैं कह रहा हूं हां मिल गए मिल गए बस कैश बेसिस तो वहीं खुश हो गया कह रहा है
बस बस बस पैसे मिल गए लो भाई इनकम हो गई बस तो कैश बेसिस तो ये देखता है पैसा आ गया इनकम हो गई बात खत्म लेकिन मेरे
बुद्धिजीवी बच्चों आप सोचो एक्रूअल क्या पूछेगा? वह तो पूछेगा क्या इस साल तुमने काम करा? तो आप कहोगे नहीं।
तो क्या ये इस साल की इनकम होनी चाहिए? तो देखो आपके मन में सवाल आ गया ना यार ये क्या पूछ रहा है? तो एक्रूल बेसिस बस ये
पूछता है कि क्या ये इस साल की इनकम होनी चाहिए कि नहीं होनी चाहिए? पैसे नहीं देखना कि पैसे मिल गए सर। पैसे तो मिल गए।
पैसेवैसे नहीं होनी चाहिए कि नहीं होनी चाहिए ये देखना है। तो एक्रुूल बेसिस कह रहा है कि नहीं ये इस साल की इनकम नहीं।
तो देखा क्या मतभेद है दोनों बेसिस में तो ये चार पॉइंट्स को लेकर ही मतभेद होता है। बाकी तो ये दोनों अपना दोस्त हैं। कोई
टेंशन नहीं है। तो हमें मतलब ये चार पॉइंट्स के बारे में अच्छे से गहराई पता होनी चाहिए कि भैया इन चारों बातों को
लेकर दोनों में मतभेद हैं। और यही चैप्टर का हमारा मूल क्रक्स था कि भ कैश बेसिस ऑफ़ अकाउंटिंग तो कहता है पैसे के हिसाब से
अकाउंटिंग करूंगा। और एक्रूअल बेसिस कहता है पैसेवैसे के हिसाब से नहीं। तुम ये देखो है या नहीं है। मतलब होना चाहिए कि
नहीं होना चाहिए? लॉजिकली तो बस ये कांसेप्ट होता है। तो इसको आप क्लोज कर लो। बाकी क्वेश्चंस करते हैं तो फिर आप
समझ जाओगे। तो चैप्टर जो है वो वैसे थ्योरिटिकली तो यही था और कॉन्सेप्चुअली भी यही था। अब क्वेश्चंस पर चलते हैं। चलो
सर मजा आ गया। तो पहले एक काम करता हूं। क्वेश्चन पे जाने से पहले नीचे कमेंट करो कि सर मैंने यहां तक पूरा लेक्चर अच्छे से
देख लिया। कंप्लीट ऑल क्लियर। चलो। तो सबसे पहले क्वेश्चन करवाऊंगा आपको छोटा सा और इस क्वेश्चन से सीखेंगे कि किस
तरह का क्वेश्चन एग्जाम में आता है। तीन नंबर का एक छोटा क्वेश्चन ऐसा आता है। बहुत ही सिंपल है। बस ध्यान से देखना।
माइकल गिव्स द फॉलोइंग इनेशन अबाउट हिज इनकम एंड एक्सपेंस फॉर द ईयर। तो देखो माइकल ने हमको अपने पूरे साल के इनकम बताए
हैं और एक्सपेंस बताए हैं फॉर द ईयर। अब क्या दिया है? देखो एक्सपेंस पेड। हिंदी में मतलब है आपने पैसे पे कर दिए। लेकिन
नीचे बड़ा ही इंटरेस्टिंग पॉइंट दिया है। नीचे दिया है एक्सपेंस पेड इन एडवांस इंक्लूडेड इन 160
यानी कि ऊपर जो आपने एक्सपेंस पे करा है उसमें से 400 एडवांस में पे करा है। मतलब कि पैसे तो दे दिए लेकिन बेनिफिट कब
मिलेगा? अगले साल। देखो प्रीपेड एक्सपेंस जो अभी पॉइंट लिखवाया था। प्रीपेड एक्सपेंस। अच्छा पैसे तो दे दिए
लेकिन बेनिफिट अगले साल मिलेगा। हां। उसके बाद अगला लिखा है एक्सपेंस नॉट येट पेड। ये क्या था? अभी तक सर पैसे ही नहीं दिए
ना। अभी तक पैसे ही नहीं दिए। नॉट येट पेड। तो मतलब कौन सा एक्सपेंस है ये? आउटस्टैंडिंग एक्सपेंस। पैसे ही नहीं दिए।
उसके [गला साफ़ करने की आवाज़] बाद है इनकम रिसीव्ड। ठीक है? चलो ये तो हमको पैसे मिल गए।
फिर लिखा है इनकम रिसीव्ड इन एडवांस। यानी कि समझ गए वही हमें जो ऊपर ये पैसे मिले उसमें से कितने रुपए एडवांस में
मिले? ये एडवांस है रिसीव्ड इन एडवांस। ₹00 मतलब जो अभी-अभी समझाया था पैसे तो मिल गए लेकिन अभी हमने काम नहीं करा। काम
तो अगले साल करेंगे। पैसे मिल गए लेकिन और इनकम नॉट येट रिसीव्ड लो जी इनकम कमा तो ली लेकिन अभी तक रिसीव ही नहीं हुई यानी
कि एक्रड इनकम कमा तो लिया लेकिन रिसीव नहीं हुआ सर अभी तक। अच्छा तो देखो चारों स्पेशल पॉइंट आ गए। बस ये क्वेश्चन की चाल
होती है। चारों स्पेशल पॉइंट दे दिए। देखो प्रीपेड एक्सपेंस, आउटस्टैंडिंग एक्सपेंस, रिसीव्ड इन एडवांस और एक्र्यूड इनकम। बस
फिर क्वेश्चन देखो। कह रहा है कह रहा है इस आदमी की इनकम निकालो इफ ही अडॉप्ट्स कैश बेसिस और नंबर टू एक्रूअल बेसिस। कह
रहा है इसकी इनकम निकालो। कैश बेसिस के हिसाब से भी और एक्रल बेसिस के हिसाब से भी। तो बहुत ही सिंपल सॉल्यूशन है। आओ
पहले कैश बेसिस करते हैं। देखो कैसे करते हैं। हमें सिंपल ये देखना है इनकम निकालने के
लिए कि इसको रिसीव क्या हुआ। मतलब है ना रेवेन्यू लिख लेता हूं। चलो इसको रिसीव क्या हुआ? और इसने पे क्या करा? तो बस
हमको यह देखना है हिंदी में लिख रहा हूं कि इसको कैश मिला कितना और इसने पे करा कितना क्योंकि हम कैश
बेसिस से पहले निकाल रहे हैं। हम कौन से बेसिस से निकाल रहे हैं प्यारे बच्चों? कैश बेसिस से। अब कैश बेसिस तो बस ये
देखता है कि पैसा मिला कितना और पैसा दिया कितना? तो देखो मिला कितना? बस वो देखो रिसीव्ड वर्ड बादल बना रहा हूं। देखो लिखा
है इनकम रिसीव्ड। अरे वाह मिल गया भाई मिल गया कितना ₹40 तो बस यह तो कहेगा कितने रुपए मिले ₹40 बस
यह तो यह कहेगा और माइनस पे कितना करा पे कितना करा वो भी ढूंढो पे बादल बना रहा हूं कह रहा है एक्सपेंस पे कह रहा है भाई
हमने पे कर दिया भाई पैसे गए ₹160 पे कर दिया तो कैश बेसिस तो कोई दिमाग ही नहीं लगाता
कहता बस ये लो आ गई मेरी प्रॉफिट कह लो या इनकम कह लो आंसर आ गया बस कह रहा है पैसे मिले ₹40 और
पैसे दिए ₹160 तो 80000 मेरी कमाई हो गई कैश बेसिस तो ये कह रहा है अच्छा लेकिन एक्रूअल बेसिस देखना अभी खाल उधेड़ेगा
क्योंकि [नाक से की जाने वाली आवाज़] एक्रूल बेसिस ऐसे काम नहीं करता एक्रुअल बेसिस कहेगा नहीं यह सब क्या है ढंग से
काम करेंगे तो एक्रुअल बेसिस देखना कैसे काम करेगा एक्रुअल बेसिस कहेगा कि भाई
मैंने जो पे करा उसमें देखो पहले अगर प्रीपेड एक्सपेंस की बात करूं आपने पैसे पहले दे दिए तो वह पूछेगा अब एक्रूअल
बेसिस से बात कर रहे हैं वो पूछेगा कि क्या ये एक्सपेंस है? सोचो एक्रूअल बेसिस कह रहा है क्या ये एक्सपेंस है? तो हम
कहेंगे यार पैसे तो दे दिए लेकिन वो कह रहा है पैसे वैसे नहीं ये बताओ क्या ये इस साल का एक्सपेंस है? क्या तुमने क्या
तुम्हें बेनिफिट मिल रहा है इस साल? हम कहेंगे नहीं नहीं नहीं यह तो एक्सपेंस नहीं है तो वो कहेगा हटाओ फिर इसको यह
एक्सपेंस नहीं है इसको वो हटाएगा कहेगा ये एक्सपेंस नहीं है एक्रूअल बेसिस और आउटस्टैंडिंग एक्सपेंस क्या था मीनिंग चेक
करो लिखवाया था अब एक्रूल बेसिस कहेगा बताओ क्या ये एक्सपेंस है इस साल का हम कहेंगे यार पैसे तो नहीं दिए वो कहेगा
पैसेवैसे की बात नहीं करो ये बताओ इस साल का होना चाहिए था कि नहीं होना चाहिए था मैं कहूंगा हां होना तो चाहिए था यार बस
पे नहीं करा तो कहेगा उससे मुझे मतलब नहीं है पे नहीं करा बरा से तो वो कहेगा यह एक्सपेंस है तो एक्रूअल बेसिस की देखो चाल
ध्यान से देखना एक्रूअल बेसिस कहेगा कि भाई तुमने जो 160 पे करा है ना उसमें से 40 एक्सपेंस नहीं है मैं नहीं मानूंगा ये
एक्सपेंस नहीं है हटाओ इसको ये नहीं है एक्सपेंस लेकिन ये जो 20000 है ये एक्सपेंस है इसको
मानो कि ये है तो एक्रुअल बेसिस कहेगा कि भाई तुम्हारा एक्सपेंस जो है कितना है 140000
तो सोचो एक्रुअल बेसिस के हिसाब से हमारा खर्चा आएगा ₹140000 ये है बात तो आपको ये नोट करना पड़ेगा कि
एक्रुूल बेसिस में एक्सपेंस जो है वो कितना है 1440000 अब ऐसी इनकम की बात करेंगे देखो
अब देखो तो इनकम रिसीव कितनी हुई? देखो कितनी रिसीव हुई? 240 लेकिन अब देखो अक्रूल आपसे क्वेश्चन
पूछेगा। कहेगा इनकम रिसीव्ड इन एडवांस। इसमें ₹00 तुम्हारे को एडवांस मिला है। वो पूछ रहा है आपसे क्वेश्चन। कह रहा है बताओ
क्या ये इनकम है? मैं कहूंगा यार पैसे तो मिल गए। कहेगा पैसेवैसे नहीं मिलने से बताओ। ये बताओ तुमने क्या इस साल काम करा
है? क्या ये इस साल की कमाई है? मैं कहूंगा नहीं यार यह तो पैसे पहले मिल गए। काम तो मैं अगले साल करूंगा। तो कहेगा
नहीं नहीं फिर यह इनकम नहीं है। इसको हटाओ। यह नहीं मानूंगा मैं। तो एक्रूअल बेसिस इसको इनकम नहीं मानेगा क्योंकि आपने
पैसे तो भले ही ले लिए हो इस साल। काम अगले साल करोगे तो ये अगले साल इनकम मानी जाएगी। इस साल की इनकम नहीं मानी जाएगी।
तो एक्रूअल कह रहा है मैं नहीं मानूंगा इनकम। अच्छा। एक्रूड इनकम 24,000। अब वह पूछ रहा है क्या यह इनकम है? हम कह
रहे हैं यार कमा तो लिया बस अभी पैसे नहीं मिले। पैसे नहीं मिले। वैसे मैंने कमा लिया तो वो कहेगा पैसे नहीं मिले से मुझे
मतलब नहीं है। ये बताओ तुम्हारी इनकम है इस साल की नहीं। तुमने काम करा मैं कहूंगा हां। तुमने कमाया मैं कहूंगा हां। तो बस
एक्रूवल कहेगा फिर तो बस बात ही खत्म। तुमने अगर इस साल मेहनत करी है कमाया है तो इनकम है। पैसे नहीं मिले कोई बात नहीं।
तो वो इसको इनकम मानेगा। तो अब देखो एक्रूअल बेसिस क्या कलाकारी करवाएगा। वह कहेगा
कि भैया ₹400 में से एक काम करो। पहले तो तुम ये 30000 हटाओ। यह इनकम नहीं है। इसको हटाओ। और फिर कहेगा यह 24,000 तुम्हारी
इनकम है। इसको कंसीडर करो। यह तो है। तो पता है उसकी इनकम कितनी आएगी? एक्रूअल वाले की। उसकी इनकम आएगी
2 लाख ₹34,000 अगर आप करोगे सॉल्व तो सोचो एक्रूअल वाले के हिसाब से हमारी इनकम आएगी ₹2,34,000
या रेवेन्यू कह लो और खर्चा आएगा ₹1,400 तो देयर फॉर एक्रूअल के हिसाब से अगर मैं कहूं कि हमारी क्या इनकम है या हमारा क्या
प्रॉफिट है? तो एक्रूअल के हिसाब से जो आंसर आएगा वह आएगा 234
- 1440 खर्चा तो पता है कितना आएगा सर ये आएगा 9 6000
₹6000 तो एक्रूअल ऐसे काम करता है एक्रूअल कैसे काम करता है 96 ही आएगा ना
नहीं 94 94000 1000 तो एक्रूअल ऐसे काम करता है। कहता है यह है तुम्हारी सही इनकम। कैश बेसिस तो बेकार है। वो तो देख
रहा है सिर्फ पैसे आए पैसे गए। बट उससे थोड़ी ना बात बनेगी। ये दिमाग लगाना है कि क्या होना चाहिए था और फिर उस हिसाब से
आंसर निकाल। ठीक है ना? तो ये है इसमें कलाकारी। अब एक क्वेश्चन मुझे पता है आप भी इंतजार कर रहे हो कि सर एक हम भी ट्राई
करके देखना चाहेंगे। तो बिल्कुल बिल्कुल आपको भी दिखाता हूं। पर ये क्वेश्चन आप बुक से भी देख सकते हो। बुक का एक
इलस्ट्रेशन भी है बेसिकली। इसी तरह का क्वेश्चन आता भी है। चलो एक क्वेश्चन और है इसका। सेम उसी तरह
होता है वैसे तो लेकिन एग्जाम के लिए क्योंकि तीन नंबर का पूछ लेता हूं तो ये क्वेश्चन आप देख सकते हो। ये भी आपको बुक
में इस तरह का क्वेश्चन मिल जाएगा वैसे तो। तो देखो इसमें लिखा है विजय ए कंसलटेंट ड्यूरिंग द फाइनेंसियल ईयर यह
अर्न ₹4 लाख आउट ऑफ व्हिच ही रिसीव्ड ₹3.5 लाख। तो देखो पहली लाइन पढ़ते ही मैं तो बच्चों
मतलब क्या बताऊं? कह रहा है आपने ₹4 लाख कमाए हैं। कमाए अर्न लेकिन कह रहा है उसमें से रिसीव हुए हैं
₹.5 लाख। अच्छा उसके बाद लिखा है ही अनकरर्ड एक्सपेंस ऑफ 17700 आउट ऑफ वि 40000 आर आउटस्टैंडिंग।
कह रहा है उसके एक्सपेंस है 170000 के जिसमें से 40000 अभी तक आउटस्टैंडिंग है मतलब उसने पे नहीं करा तो मतलब अगर इस बात
का थोड़ा निष्कर्ष निकालूं तो एक तरह से अगर उसने ₹170 में से ₹0000 लिखा है आउटस्टैंडिंग है पे नहीं करा तो दैट मींस
उसने ₹1300 पे करे होंगे यही मतलब इसका मतलब उसने ₹1300 पे करे होंगे फिर लिखा है ही आल्सो रिसीव्ड कंसटेंसी फी
उसको कंसटेंसी फी भी रिसीव हुई रिलेटिंग टू प्रीवियस ईयर ₹45,000 पिछले साल के ₹45,000 भी उसको रिसीव हो गए। ओके चलो हो
गए तो हो गए। एंड आल्सो पेड ₹00 एक्सपेंस ऑफ़ लास्ट ईयर। और पिछले साल के ₹00 भी उसने पे कर दिए। ठीक है? तो पे कर दिए।
पे तो देखो क्वेश्चन कह रहा है डिटरमाइन ह इनकम फॉर द ईयर फॉर ही फॉलोस कैश बेसिस और
एक्रूअल बेसिस तो कैश बेसिस मैं कराऊंगा फिर एक्रूल बेसिस आप निकालना अच्छा ठीक है सर तो कैश बेसिस तो ये कहता है कि बस ये
देखो कितना पैसा आया और कितना पैसा गया बस सिंपल ज्यादा दिमाग लगाओगे तो गलत हो जाएगा
तो पहले रिसीव्ड चेक करो कि रिसीव्ड कितना हुआ है और और फिर उसमें से पेड माइनस कर देंगे। बस कितना कैश आया और कितना कैश गया
ये देखना। तो सीधा रिसीव्ड वर्ड ही पढ़ो ना। कहां लिखा है क्वेश्चन में? रिसीव्ड। एक तो
लिखा है 3.5 लाख और कहां लिखा है? रिसीव्ड। रिसीव्ड। रिसीव्ड। और लिखा है कि ये उसको 45,000
मिले पिछले साल के। ठीक है? तो ये रिसीव्ड हो गया उसका 395 तो उसको रिसीव हुए। माइनस अब देखो पेड कहां लिखा है पेड पेड पेड पेड
पेड एक तो एक्सपेंस उसने पे करा 1330 और पेड पेड पेड ये रहा 20000 भी एक्सपेंस उसने पे करा पिछले साल का
तो मतलब उसने कुल मिलाकर पे करा ₹150000 है ना तो देखो बस सिंपल यह देखना है कितना आया कितना गया कितना रिसीव माइनस कितना
पेड तो करके देखो क्या आंसर आ रहा है तो सर ये आएगा 245000 तो देखो बुक में भी क्या आंसर दे रखा है
कैश बेसिस का 245000 तो अगर वो कैश बेसिस फॉलो करेगा तो उसका प्रॉफिट आ रहा है उसकी इनकम आ रही है
245000 लेकिन अब मेरे प्यारे बच्चे बताएंगे एक्रु्रूल बेसिस मतलब अब तो दिमाग लगाना
है कि भाई नहीं वो तो कौन सा बेसिस फॉलो करेगा? एक्रूल कि इस साल का खर्चा इस साल की इनकम कितनी होनी चाहिए।
चलो तो अब एक्रूल बेसिस में दिमाग लगाते हैं। आप भी दिमाग लगाओ। मैं भी दिमाग लगाता हूं। अब हमें यह देखना है कि भाई इस
साल का क्या है? अब यह सब बातें नहीं चलेंगी। यह हटा देते हैं। इस साल का क्या है? हमारा रेवेन्यू।
और इस साल का क्या है हमारा एक्सपेंस? इसमें दिमाग लगाएंगे। चलो तो पहले रेवेन्यू के बारे में सोचते हैं कि इस साल
की हमारी कमाई कितनी है? तो विजय कंसलटेंट कह रहा है ड्यूरिंग द ईयर अर्नड कह रहा है हमने इस साल ₹4 लाख कमाए हैं। देखो कह रहा
है ₹4 लाख इस साल जिसमें से मिले तो चलो ₹3.5 लाख थे। लेकिन भाई अपनी इस साल की बात करूं तो
अपना तो रेवेन्यू 4 लाख ही माना जाएगा ना भाई। मैंने तो 4 लाख कमा लिया इस साल। अब मिला खाली 3.5 लाख उससे क्या फर्क पड़ता
है? हम तो चलते हैं होना कितना चाहिए था 4 लाख। अच्छा फिर लिखा है ही इंकर्ड एक्सपेंस ऑफ़ ₹170। कह रहा है एक्सपेंस है
₹170 के। तो हमें तो यही मतलब है भ एक्सपेंस होना कितना चाहिए। अब पे उसमें से कितना हुआ? नहीं पे हुआ उससे हमें मतलब
नहीं है और कह रहा है फिर हमें कंसलटेंसी फी रिसीव हुई प्रीवियस ईयर की तो एक्रूअल वाला पूछ रहा है भाई पैसे रिसीव हुए हैं
पिछले साल के क्या ये इनकम है तो मैं कह रहा हूं हां हां पैसे मिल गए वो कह रहा है नहीं इस साल की इनकम है या नहीं ये बताओ
मैं एक्रूल बेसिस हूं मैं ये पूछ रहा हूं क्या ये इस साल कमाया तुमने तो मैं चुप हो जाऊंगा मैं कहूंगा नहीं यार इस साल तो
नहीं कमाया ये तो पिछले साल के हैं तो कहा बस फिर मैं नहीं मान रहा। ये इनकम नहीं है। और ऐसी 20,000 एक्सपेंस ऑफ़ लास्ट ईयर
ये भी पिछले साल के पे कर रहे हो। तो क्या ये इस साल का एक्सपेंस माना जाएगा? एक्रूल कहेगा नहीं मैं नहीं मान रहा। तो एक्रूअल
कहेगा भैया देखो इस साल की कमाई 4 लाख। इस साल का खर्चा 170 तो इस साल का इनकम या प्रॉफिट कितना आ गया? 230 तो एक्रुअल
बेसिस चलेगा लॉजिक पर। कैश बेसिस चलेगा कैश पर। बस। तो समझ आया मेरे दोस्तों? तो आपकी बुक में इस तरह के सवाल होंगे जैसे
यहां पर भी हैं। तो ये छोटे-छोटे क्वेश्चन आते हैं इसी तरह के। इसमें भी दो अलग-अलग क्वेश्चन बना रखे हैं। आप चाहो तो होमवर्क
में ट्राई करके देख सकते हो। तब तक आप स्क्रीनशॉट ले लेना। जैसे सेम क्वेश्चन में पहले कैश बेसिस पूछा है तो क्या आंसर
आएगा? और सेम क्वेश्चन में फिर एक्रुअल बेसिस पूछा है तो क्या आंसर आएगा? तो आपको इनकम निकालनी होती है। तो ये क्वेश्चन इस
चैप्टर में तीन नंबर के आते हैं। बाकी पूरे चैप्टर में करना क्या है देखो। पूरे चैप्टर में थ्योरी के लिए ये वाला टॉपिक
जो आपको बताया और प्रैक्टिकल में बस ऐसा क्वेश्चन आएगा जो आपको एक क्वेश्चन करवाए। एक ही क्वेश्चन देता है दोनों बेसिस से
आंसर पूछ लेता है और फिर हमारा आंसर निकल जाता है। ठीक है? चलो तो मेरे प्यारे बच्चों आई होप आपको बहुत अच्छे से समझ आया
होगा और कोई भी डाउट होगा तो नीचे कमेंट करना। बाकी वीडियो को पीछे जाके दोबारा देखना। बार-बार देखना नोट्स कंप्लीट करना।
और नेक्स्ट क्लास से क्योंकि हमें नया चैप्टर पढ़ना होगा वो बहुत इंपॉर्टेंट है। तब तक वीडियो लाइक कर देना, शेयर कर देना
अगर पसंद आए तो नहीं तो भैया कोई बात नहीं काम चलता रहेगा। ठीक है? तब तक अपना ध्यान रखना, मस्त रहना, स्वस्थ रहना। अगली
वीडियो में मुलाकात करेंगे।
The main difference lies in when transactions are recorded. Under the cash basis, income and expenses are recorded only when cash is received or paid. Under the accrual basis, transactions are recorded when income is earned or expenses are incurred, regardless of cash movement. Accrual accounting provides a more accurate financial picture and is legally required for most businesses.
Accrual basis is considered better because it gives a true and fair view of a company's profitability and financial health by recognizing all earned revenues and incurred expenses, including credit transactions. It is legally required for companies and helps in making informed decisions by matching income with related expenses in the same period, unlike cash basis which can be misleading.
Under cash basis accounting, profit is simply the total cash received as income minus the total cash paid as expenses during a period. For example, if cash received is ₹2,40,000 and cash paid is ₹1,60,000, the profit is ₹80,000. Any credit transactions or adjustments like outstanding expenses or prepaid expenses are ignored.
To convert cash basis profit to accrual basis, adjust for four special items: add outstanding expenses and accrued income, and subtract prepaid expenses and income received in advance. For example, if cash paid includes ₹40,000 prepaid, subtract it; if ₹20,000 is outstanding, add it; adjust income similarly by subtracting advance receipts and adding earned but unreceived income.
In cash basis accounting, outstanding expenses (expenses incurred but not yet paid) are not recorded as expenses until cash is paid, so they do not affect profit. In accrual basis accounting, they are considered expenses of the current year, even if unpaid, because they represent a liability incurred during that period, thus reducing profit.
Yes, cash basis accounting is often used by small businesses, professionals (like doctors or lawyers), and non-profit organizations with simple operations due to its simplicity. However, it is not legally accepted for most companies; only accrual basis is required by law for companies registered under the Companies Act to ensure accurate financial reporting and comparability.
A typical exam question asks to distinguish between cash and accrual basis, often for 3-4 marks. Students need to explain key differences like recognition of credit transactions, treatment of outstanding/prepaid items, accuracy of profit calculation, and legal acceptability. Additionally, practical problems require calculating profit under both bases using data on expenses and income with adjustments for prepaid, outstanding, accrued, and unearned items.
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