Fact Check: 12th Class Semiconductor Chapter – Accuracy of Claims in Physics Lecture
Generally Credible
7 verified, 0 misleading, 0 false, 2 unverifiable out of 9 claims analyzed
समग्र विश्वसनीयता और निष्कर्ष
यह वीडियो एक शैक्षिक व्याख्यान है जो 12वीं कक्षा के सेमीकंडक्टर अध्याय को पढ़ाने का प्रयास करता है। कुल मिलाकर, वीडियो की शैक्षिक सामग्री अत्यधिक विश्वसनीय है और इसमें प्रमुख अवधारणाओं (जैसे, चालकता, ऊर्जा बैंड, इंट्रेंसिक/एक्सट्रेंसिक अर्धचालक) को सही ढंग से समझाया गया है।
हालांकि, कुछ कमियां हैं:
- चालकता/प्रतिरोधकता के आंकड़े: 'कंडक्टर के लिए रेजिस्टिविटी 10^-2 से 10^-8 ओम मीटर' का दावा मानक पाठ्यपुस्तकों से मेल नहीं खाता और भ्रामक है। यह आंकड़ा चालकता (सीमेंस प्रति मीटर) के लिए अधिक उपयुक्त हो सकता है।
- परीक्षा-विशिष्ट दावे: 2024 और 2025 के प्रश्नों के प्रकार के बारे में दावे बिना संदर्भ के हैं, हालांकि वे संभावित लगते हैं। छात्रों को इसे केवल एक सुझाव के रूप में लेना चाहिए, न कि निर्णायक स्रोत के रूप में।
वीडियो की मुख्य शक्ति इसकी सरल भाषा और याद रखने के लिए ट्रिक्स (जैसे, 'बैंगन आलू गाजर...' और 'नेपाल पाकिस्तान...') हैं, जो अवधारणाओं को स्मरणीय बनाती हैं। हालांकि, याद रखने की ये विधियां शैक्षिक रूप से मान्य नहीं हो सकतीं, लेकिन ये जानकारी को सरल बनाती हैं, बिना मूलभूत सत्य को विकृत किए।
स्कोर: 85/100 – उच्च विश्वसनीयता। अधिकांश वैज्ञानिक तथ्य सही हैं, लेकिन कुछ सांख्यिकीय डेटा और परीक्षा-संबंधी दावे सत्यापित नहीं हो पाए। वीडियो छात्रों के लिए एक उपयोगी संसाधन है, लेकिन उन्हें पाठ्यपुस्तकों से क्रॉस-रेफरेंस करने की सलाह दी जाती है।
Claims analysis
सेमीकंडक्टर की कंडक्टिविटी कंडक्टर और इंसुलेटर के बीच होती है।
यह कथन बिल्कुल सही है। सेमीकंडक्टर की विद्युत चालकता कंडक्टर (जैसे तांबा) और इंसुलेटर (जैसे रबर) के बीच होती है, जो इसकी मूल परिभाषा है।
कंडक्टर के लिए रेजिस्टिविटी 10^-2 से 10^-8 ओम मीटर होती है।
ये आंकड़े संदर्भ के बिना दिए गए हैं। सामान्यतः कंडक्टरों की प्रतिरोधकता बहुत कम (10^-8 ओम मीटर के क्रम में) होती है, लेकिन दी गई रेंज (10^-2 से 10^-8) मानक शैक्षिक स्रोतों से मेल नहीं खाती, जहां अक्सर 10^-2 से 10^-8 सीमेंस प्रति मीटर (चालकता) के लिए उपयोग होता है। यह भ्रामक हो सकता है।
सेमीकंडक्टर सामग्री सिलिकॉन और जर्मेनियम हैं।
सिलिकॉन (Si) और जर्मेनियम (Ge) सबसे आम तत्वीय अर्धचालक हैं, जिनका व्यापक रूप से इलेक्ट्रॉनिक्स में उपयोग किया जाता है। यह सही है।
कार्बन, सिलिकॉन, जर्मेनियम में एनर्जी गैप घटता है: कार्बन > सिलिकॉन > जर्मेनियम।
यह सही है। कार्बन (डायमंड) का एनर्जी गैप लगभग 5.5 eV, सिलिकॉन का 1.12 eV, और जर्मेनियम का 0.67 eV होता है। गैप नीचे जाने पर घटता है।
इंट्रेंसिक सेमीकंडक्टर में इलेक्ट्रॉन और होल की संख्या बराबर होती है।
शुद्ध (इंट्रेंसिक) अर्धचालक में, प्रत्येक टूटे हुए सहसंयोजक बंधन के लिए एक इलेक्ट्रॉन और एक होल उत्पन्न होता है, इसलिए इनकी संख्या बराबर (ne = nh = ni) होती है।
एन टाइप सेमीकंडक्टर में मेजोरिटी चार्ज कैरियर फ्री इलेक्ट्रॉन होते हैं।
पंचसंयोजक अशुद्धि (जैसे फॉस्फोरस) मिलाने पर अतिरिक्त इलेक्ट्रॉन मिलते हैं, जो बहुसंख्यक आवेश वाहक बनते हैं। यह सही है।
पी टाइप सेमीकंडक्टर में मेजोरिटी चार्ज कैरियर होल होते हैं।
त्रिसंयोजक अशुद्धि (जैसे बोरॉन) मिलाने पर इलेक्ट्रॉनों की कमी से होल बनते हैं, जो बहुसंख्यक होते हैं।
एन टाइप और पी टाइप सेमीकंडक्टर इलेक्ट्रिकली न्यूट्रल होते हैं।
यह सही है। यद्यपि अशुद्धि के कारण अतिरिक्त इलेक्ट्रॉन या होल होते हैं, डोपेंट परमाणु भी उतने ही प्रोटॉन लाते हैं, जिससे समग्र रूप से पदार्थ विद्युत उदासीन रहता है।
2024 में सेमीकंडक्टर से केस स्टडी बेस्ड क्वेश्चन पूछा गया और 2025 में न्यूमेरिकल पूछा गया।
यह दावा विशिष्ट परीक्षा (जैसे CBSE 12वीं) के पैटर्न पर आधारित है, लेकिन वीडियो में कोई स्रोत नहीं दिया गया। सामान्यतः परीक्षा पैटर्न बदल सकता है, लेकिन इस दावे की पुष्टि के लिए आधिकारिक प्रश्नपत्रों की आवश्यकता होगी। ऑनलाइन उपलब्ध नमूना प्रश्नों से यह संभव प्रतीत होता है।
हेलो एवरीवन, दिस इज रविवरा। स्वागत करता हूं आप सभी का नेक्स्ट ओवर के शानदार प्लेटफार्म पे। बेटा क्लास 12th का लास्ट
चैप्टर जिसका नाम है सेमीकंडक्टर इलेक्ट्रॉनिक्स। बेटा ये लास्ट चैप्टर जरूर है लेकिन इस चैप्टर की खास बात ये
होगी कि अब तक के आपने चैप्टर्स पढ़े हैं या नहीं पढ़े हैं उनमें बैकलग है कोई चिंता करने की जरूरत नहीं है। ये चैप्टर उन
कांसेप्ट के बिना भी पढ़ा जा सकता है। बहुत छोटे-छोटे कांसेप्ट जो यूज़ होंगे वो हम साथ-साथ ही मैं समझाता चलूंगा। तो जो पढ़ा
नहीं पढ़ा कोई बात नहीं बेटा। हर चिंता को छोड़ के इस चैप्टर में मेरे साथ-साथ बढ़ो। क्योंकि ये चैप्टर आपको सात नंबर देके
जाएगा। ये सात नंबर केस स्टडी बेस्ड क्वेश्चन के तौर में आ सकता है। जैसे कि 2024 में एक यहां से एक बड़ा केस स्टडी
बेस्ड क्वेश्चन पूछा गया था और 2025 में यहां से न्यूमेरिकल पूछा गया था दो मार्क्स का और तीन मार्क्स का। तो करंटली
जो क्वेश्चंस पूछे गए हैं वो क्वेश्चंस हम इस सेशन में करेंगे। इस वन शॉट में करेंगे और साथ-साथ थ्योरी इस तरीके से घोल के
पिला दूंगा बेटा को आपको सेमीकंडक्टर ऐसा नहीं लगेगा कि ये फिजिक्स से कुछ अजीब सा चैप्टर था। क्योंकि इसकी हवा ऐसी बनाई गई
है कि सेमीकंडक्टर इज डिफरेंट फ्रॉम फिजिक्स। इसमें कुछ फिजिक्स नहीं है। लेकिन बेटा आप बताओगे कि फिजिक्स नहीं
लॉजिक का ही काम है। बहुत सिंपल सा चैप्टर होने वाला है। तो मैं कहानी की शुरुआत करता हूं उस जमाने से जब टीवी हुआ करती थी
कुछ ऐसी बड़ी-बड़ी साइज की। जब कंप्यूटर हुआ करते थे कुछ बड़े-बड़े साइज के। तब उस जमाने में हम रेडियो से गाने सुना करते
थे। लेकिन आज के समय की बात करें बेटा तो रेडियो टीवी ये सब बहुत कम कम कम पैमाने पे यूज हो रहा है। एक मोबाइल ने इन सब की
जगह ले ली है। ले ली है ना बेटा। देखो अभी भी आप किस पे देख रहे हो? मोबाइल या लैपटॉप पे देख रहे होंगे मुझे या कोई बड़ा
वाला होगा बड़ा दोस्त होगा तो टीवी पे चढ़ा के देख रहा होगा बेटा। तो टीवी कितनी स्लिम हो गई है। देखो ना कितनी एडवांस हो
चुका है लैपटॉप। स्मार्टफोन कितना एडवांस हो चुका है आज के समय में। तो ये पूरा कमाल किसका है? ये पूरा कमाल इसी चैप्टर
का है जिसका नाम है सेमीकंडक्टर इलेक्ट्रॉनिक्स। बेटा जिसमें सेमीकंडक्टर मटेरियल का यूज किया जाएगा उसको
इलेक्ट्रिक नहीं इलेक्ट्रॉनिक्स। मैं बचपन में है ना मुझे बहुत डाउट होता था ये कि भाई इलेक्ट्रिक और इलेक्ट्रॉनिक्स में
क्या फर्क? तो जहां पर इलेक्ट्र सेमीकंडक्टर डिवाइस का यूज किया जाएगा। ऐसे इंस्ट्रूमेंट्स को हम इलेक्ट्रॉनिक्स
डिवाइस कहते हैं। ठीक है? तो इस डिवाइस का यूज से ही आज ये चीजें हो पाई है कि स्मार्टफोनस इतना एडवांस लैपटॉप ये सारी
चीजों में हम सेमीकंडक्टर चिप्स का IC का यूज करते थे। पहले जो बड़े-बड़े थे ना टीवी कंप्यूटर बड़े-बड़े रेडियोज़ उसमें एंपलीफायर
एंपलीफायर उनमें ये वैक्यूम ट्यूब का यूज़ किया जाता था। बहुत पहले के समय की बात है। हालांकि हमारी बोर्ड एग्जामिनेशन में
इस पे क्वेश्चंस नहीं पूछा गया। लेकिन हमें पता होना चाहिए कि पहले आप डब्बा टीवी के पीछे देख लें तो एक वैक्यूम ट्यूब
होगी। कोई बताएगा कि ये ट्यूब उड़ गई है। इस वजह से टीवी नहीं चल रही है। कभी आपने सुना होगा किसी कारीगर के मुंह से ये बात।
तो ये वैक्यूम ट्यूब्स होती है जो वहां पर टीवी में लगाई गई होती है और उससे टीवी काम करता है। आज के जमाने में एक छोटी सी
चिप बेटा इसीलिए तो साइज कम कम होती जा रही है। छोटी सी चिप छोटी सी आईसी। बेटा देखिए एक उंगली के एक छोटा सा एक उंगली का
इसके इसके कंपैरिजन में भी बहुत छोटा सा पार्ट है। तो सोचो कितने बड़े पैमाने पे ये कन्वर्जन हो चुका है। इसी वजह से साइज
बहुत कम कम कम मतलब स्लिम पैमाने पे हम डिवाइसेस देख रहे हैं आज के समय में। तो शुरुआत होती है सबसे पहले कि सेमीकंडक्टर
क्या है? क्या है सेमीकंडक्टर? तो छोटे स्टैंडर्ड में या फिर आपको पता होगा कंडक्टर इलेक्ट्रिसिटी का ट्रांसफर जो
अच्छा करता है उसको कंडक्टर बोलते हैं। जो इलेक्ट्रिसिटी को पास नहीं होने देता है उसको इंसुलेटर कहते हैं। तो इसकी
कंडक्टिविटी सेमीकंडक्टर की कंडक्टिविटी इन दोनों के बीच में है। कंडक्टर से कम और इंसुलेटर से
ज्यादा। यानी कि सेमीकंडक्टर आर अ मटेरियल व्हिच कंडक्टिविटी बिटवीन द कंडक्टर्स। जैसे कि सिल्वर कॉपर जैसे तार होते हैं वो
इलेक्ट्रिसिटी के वाहक होते हैं और इंसुलेटर डायमंड ग्लास उन सबके बीच में होती है इसको हम बोलेंगे ऐसे मटेरियल को
बोलेंगे सेमीकंडक्टर मटेरियल ओके सर इंसुलेटर और कंडक्टर के बीच का तो बेटा देखिए एक डेटा दे रखा है डेटा उतना काम का
नहीं है तो मैं सही बता देता हूं बेटा इस डेटा से ज्यादा क्वेश्चंस नहीं आए लेकिन फिर भी एक दिमाग में हल्का-फुल्का आईडिया
रखना कि कंडक्टिविटी की बात करें ज्यादातर हम कंडक्टिविटी की बात करते हैं या रेजिस्टिविटी की बात करते हैं ज्यादातर
एक्चुअल में रेजिस्टिविटी िटी आता है। लेकिन समझना कि रेजिस्टिविटी याद रखो। तो कंडक्टिविटी याद नहीं रखनी क्योंकि ये
दोनों एक दूसरे के रेसिप्रोकल है। ओके? तो देखो कंडक्टर के लिए रेजिस्टिविटी बहुत कम होगी। ऑब्वियसली सर और कंडक्टिविटी
रेसिप्रोकल है इसलिए बहुत अच्छी खासी होगी। कितनी है? 10 रे टू पावर 2 से 10 रे टू पावर 8 ओहम इनवर्स मीटर इनवर्स में। और
इंसुलेटर की कितनी है? इंसुलेटर की है 10 टू पावर -19 से 11 ये माइनस में है। ओके सर। याद रखना। रेजिस्टिविटी लिखो तो प्लस
में है। तो इन दोनों के बीच में हमें सेमीकंडक्टर की कंडक्टिविटी देखने को मिलती है। सेम रेजिस्टिविटी के लिए भी आप
डेफिनेशन बोल सकते हो। रेजिस्टिविटी के लिए भी बेटा सेम डेफिनेशन आप बोल सकते हो। ओके? तो एक बेसिक सी डेफिनेशन हो गई
सेमीकंडक्टर के लिए। अब कितने टाइप के सेमीकंडक्टर होते हैं हम कौन-कौन से टाइप्स पढ़ने वाले हैं। समझना इस बात को
हां बेटा। तो एक होते हैं बहुत प्योर फॉर्म में कि जिसमें हमने कोई भी कोई कचरा, कोई डोपिंग कुछ भी नहीं किया है।
कोई अशुद्धि नहीं मिलाई, कोई भेल-शेल नहीं की है। ऐसे टाइप के सेमीकंडक्टर को कहा जाता है इंट्रेंसिक सेमीकंडक्टर। क्या कहा
जाएगा? इंट्रेंसिक सेमीकंडक्टर की प्योर फॉर्म में है। प्योर फॉर्म में। तो पीरियडिक टेबल में ये जो पीली वाली पट्टी
दिख रही है ना वो सारे के सारे सेमीकंडक्टर। याद रखना बेटा। हां। तो हम ज्यादातर हालांकि बात किसकी करने वाले
हैं? पता है? ये सिलिकॉन और जर्मेनियम की बात करने वाले हैं। मैं अगर इसमें वेलेंसी की बात करूं बेटा तो यहां पर वैलेंसी होती
है +4। यहां पर हम लिखेंगे वैलेंसी +3 और इस वाले की वैलेंसी लिखेंगे +5। तो देखो बेटा ये लाइन हमारे लिए काम की है। बैंगन
आलू गाजर इन नथैला और कहे सीता जी सुनो प्रभु फिर ये नेपाल पाकिस्तान ऑस्ट्रेलिया सब भिखारी। ये लाइन हमारे लिए काम की होने
वाली है। सेमीकंडक्टर मटेरियल किसको कहेंगे? ये कार्बन के नीचे वाले दोनों देख लीजिए। सिलिकॉन और जर्मेनियम। सिलिकॉन और
जर्मेनियम हम इसका यूज करने वाले हैं। तो ज्यादातर सेमीकंडक्टर प्रॉपर्टी हमें किस में अच्छी खासी देखने को मिलती है?
सिलिकॉन और जर्मेनियम को जर्मेनियम में देखने को मिलती है। इसको एलिमेंटल फॉर्म यानी कि प्योर फॉर्म ऑफ सेमीकंडक्टर कहा
जाता है। इसी का नाम है इंट्रेंसिक सेमीकंडक्टर। ओके। सेमीकंडक्टर का ही दूसरा पार्ट जिसको कहा गया है
एक्सट्रेंसिक सेमीकंडक्टर। एक्सट्रेंसिक में क्या होता है पता है? जो इंट्रेंसिक है ना? जैसे कि प्योर फॉर्म में है। यह
प्योर फॉर्म में जो भी है। प्योर फॉर्म में या तो सिलिकॉन है। या उसी प्योर फॉर्म में या जर्मेनियम है। उसी प्योर फॉर्म में
कुछ मिला दीजिए। कुछ मिला दीजिए। यानी कि हम +3 वाली लाइन से निकाल सकते हैं। कुछ बोरोन, एलुमिनियम का ये, ये इन सब में से
कुछ मिला दिया या फिर नेपाल, पाकिस्तान, ऑस्ट्रेलिया सब भिखारी वाले में से कुछ मिला दिया। तो इस प्योर फॉर्म में कुछ
अशुद्धि कुछ डोपिंग कर लिया हमने। कुछ क्या कर दिया? कुछ अशुद्धि डाल दी, कुछ डोपिंग कर दिया बेटा। तो तब जाके हम हमें
दो एन टाइप और पी टाइप सेमीकंडक्टर मिलते हैं जिसको कहते हैं एक्सट्रेंसिक सेमीकंडक्टर। ये हम बहुत डिटेल में पढ़ने
वाले हैं। बहुत डिटेल में पढ़ने वाले हैं। तो घबराना नहीं। ये ऊपर ऊपर का एक रिव्यू है। और तीसरा होता है कंपाउंड
सेमीकंडक्टर। जैसे कि गैलियम आर्सेनिक। फिर ये सारे जो भी इंस्ट्रूमेंट दे रखे हैं ना एंथ्रेसिन, डोपेड, ये सारे के
सारे। हां ये सारे के सारे हैं बेटा वो कंपाउंड सेमीकंडक्टर है कि इसमें से कुछ ऑर्गेनिक टाइप के होंगे कुछ इनऑर्गेनिक
टाइप के होंगे। ये ज्यादातर पूछे नहीं जाते हैं डाटा इसमें से लेकिन थोड़ी हल्कीफुल्की दिमाग में आपको पता होना
चाहिए कि एक प्योर होते हैं एक इंप्योर होते हैं और तीसरे वो कंपाउंड फॉर्म में होते हैं। ओके सर। तो ये कंपाउंड
सेमीकंडक्टर का एक एग्जांपल हो जाएगा। ज्यादा डिटेल में क्या पढ़ने वाले हैं? एक प्योर पढ़ने वाले हैं और एक्सटेंसिक टाइप
के पढ़ने वाले हैं सेमीकंडक्टर। अब इसमें और डिटेलिंग के साथ पढ़ते हैं कि भाई ये सिलिकॉन या जर्मेनियम में से कौन से
इलेक्ट्रॉन हैं जो कंडक्टिसिटी पास करवाने में मदद करेंगे। ठीक है? तो हमने इसको कैटेगरी की कैटेगराइज़ किया है। जैसे कि
बैलेंस बैंड में रहने वाले इलेक्ट्रॉन हैं वो हायर एनर्जी के साथ एटम में होंगे। लेकिन इलेक्ट्रिसिटी में अपना कोई योगदान
नहीं देंगे। तो पहला समझना है बेटा दो बैंड के हिसाब से हमने इसको तोड़ा है कि ये वो इलेक्ट्रॉन कि जो एटम में हायर एनर्जी
के साथ रहते हैं। हाईएस्ट एनर्जी के साथ रहते हैं। द हाईएस्ट एनर्जी बैंड दैट नॉर्मली फील्ड विद इलेक्ट्रॉन एटम के जो
इलेक्ट्रॉन्स हैं हाईएस्ट एनर्जी वाले वो यहां रहना पसंद करते हैं। लेकिन यहां रहे हुए इलेक्ट्रॉन है वो अपना कामकाज कर रहे
हैं। इलेक्ट्रिसिटी में कोई योगदान नहीं दे रहे हैं बेटा। ठीक है? तो इलेक्ट्रॉन्स इन दिस बैंड आर नॉट आर बाउंड टू एटम्स नॉट
कंडक्ट इलेक्ट्रिसिटी। ओके? इलेक्ट्रिसिटी में इसका इनका कोई योगदान नहीं। यहां रहने वाले इलेक्ट्रॉन का कोई योगदान नहीं है
इलेक्ट्रिस इलेक्ट्रिसिटी कंडक्ट करवाने में। ओके? अगर जीरो केल्विन में मतलब इसको टेंपरेचर अगर बहुत लोअर लेवल पे जाया जाए
तो कंप्लीटली फील्ड बैलेंस बैंड हमें देखने को मिलता है। ओके, ग्रेट। ये बात समझी? अब इससे थोड़ा ऊपर कि किसी तरह से
मैं इलेक्ट्रॉन लोअर टेंपरेचर पे पूरा भरा हुआ था जीरो केल्विन पे। अगर मैं टेंपरेचर बढ़ाता जाऊं, बढ़ाता जाऊं, बढ़ाता जाऊं तो
यहीं वाले इलेक्ट्रॉन वो टेंपरेचर में से एनर्जी ले ले के ले ले के थोड़ा ऊपर चले जाएंगे और ऊपर एक बड़ा शहर है बड़ा शहर
बड़ा बैंड यानी कंडक्शन बैंड। इस कंडक्शन बैंड का नाम ही कंडक्शन से शुरू होता है। मतलब की यहां रहने वाले इलेक्ट्रॉन है वो
कंडक्टिविटी में इलेक्ट्रिसिटी पास करवाने में अपना योगदान देंगे। तो क्या होता है कंडक्शन बैंड? द एनर्जी बैंड जस्ट अबोव द
वैलेंस बैंड ये एक तरह से एनर्जी बैंड है कि जो वैलेंस बैंड से थोड़ा ऊपर है। ठीक है सर। यहां रहने वाले इलेक्ट्रॉन हैं वो
फ्री टू मूव होते हैं। जबकि यहां पर बाउंड इलेक्ट्रॉन थे एटम के अंदर। यहां पर फ्री इलेक्ट्रॉन होते हैं जो इलेक्ट्रिसिटी पास
करवाने में मदद करते हैं। ओके? से इस टाइप के एनर्जी बैंड में बेटा ऑलमोस्ट खाली हमें देखने को मिलता है लोअर टेंपरेचर पे।
और टेंपरेचर जैसे-जैसे बढ़ाओगे, वैसे इलेक्ट्रॉन वैलेंस बैंड में से उठ उठ के कहां पर आएंगे? कंडक्शन बैंड में आएंगे और
इलेक्ट्रिसिटी में अपना योगदान देंगे। इन दोनों के बीच का इन दोनों के बीच का डिफरेंस यानी कंडक्शन बैंड का मिनिमम
वैल्यू और वैलेंस बैंड का मैक्सिमम वैल्यू इन दोनों के बीच के डिफरेंस को हम एनर्जी गैप कहते हैं। एनर्जी गैप कहते हैं। तो
मिनिमम एनर्जी डिफरेंस बिटवीन द वैलेंस बैंड एंड द कंडक्शन बैंड इट्स नोन एज अ एनर्जी गैप। एनर्जी बैंड के नाम से भी
जाना जाता है। समझ समझ पा रहे हो इतनी बात? देखिए इसी के हिसाब से हम सेमीकंडक्टर को कंडक्टर को और इंसुलेटर को
डिफाइन करते हैं। जैसे कि इंसुलेटर में क्या होता है? कि भाई सारे के सारे इलेक्ट्रॉन यहां वैलेंस बैंड में रहते
हैं। और कंडक्शन बैंड जस्ट अबव नहीं है। बहुत ही ज्यादा ऊपर है। तो कितना भी टेंपरेचर बढ़ा लो लेकिन यहां वाले
इलेक्ट्रॉन क्या इस तीन इलेक्ट्रो वोल्ट जितनी एनर्जी पार करके जा पाएंगे ऊपर? नहीं जा पाएंगे। क्योंकि ये दोनों के बीच
का जो डिफरेंस है वो तीन इलेक्ट्रो वोल्ट से भी ज्यादा है। तो टेंपरेचर बहुत अच्छा खासा देने के बावजूद बहुत अच्छा खासा देने
के बावजूद भी वो कंडक्शन बैंड तक नहीं पहुंच पाएंगे। इसीलिए तो इंसुलेटर में हम बताते हैं कि टेंपरेचर बढ़ाने पे भाई
ज्यादा कोई इफेक्ट नहीं होती है कि ज्यादा वो कंडक्ट बन जाएगा। ऐसा कुछ नहीं होता है। इलेक्ट्रॉन को अगर कंडक्टर बनना है
इलेक्ट्रिसिटी को पास करवाना है तो इलेक्ट्रॉन रिक्वायर्ड हायर टेंपरेचर टू जंप फ्रॉम अ वैलेंस बैंड टू अ कंडक्शन
बैंड और नो इलेक्ट्रिकल कंडक्टिविटी। इसके पीछे का रीज़न आपने जान लिया कि दोनों के बीच का जो डिफरेंस है वो बहुत अच्छा खासा
होता है। जबकि सेमीकंडक्टर में ये एनर्जी गैप है बेटा बहुत कम होता है। 3 इलेक्ट्रो वोल्ट से भी कम होता है। जिससे लोअर
टेंपरेचर पे इलेक्ट्रिसिटी पास नहीं करवाता। लेकिन जैसे-जैसे टेंपरेचर बढ़ाओगे बेटा वैसे-वैसे यहां पर हमें इलेक्ट्रॉन
भागते हुए जंप करके कंडक्शन मिड में जाते हुए पता चल रहे हैं। जिससे हमें कंडक्टिविटी अच्छी खासी मिलेगी। ओके सर।
ये पढ़ लिया हमने। तीसरा कंडक्टर। कंडक्टर में दोनों ओवरलैप ही है। मतलब जस्ट अब वो क्या है? तुम दोनों के बीच का डिफरेंस ही
नहीं बता पाओगे। ये ओवरलैप हो जाते हैं एक दूसरे से। एक दूसरे से बेटा ये ओवरलैप हो जाते हैं। तो कंडक्शन बैंड बैलेंस बैंड
दोनों के बीच का एनर्जी गैप कुछ है ही नहीं कंडक्टर में। इसीलिए तो बताते हैं कि कंडक्टर कंडक्टिविटी का मतलब
इलेक्ट्रिसिटी का अच्छा खासा पास करता है। कंडक्टर होता है। ओके? तो, इलेक्ट्रॉन रिक्वायर्स लो टेंपरेचर। इलेक्ट्रॉन
रिक्वायर्स लो टेंपरेचर टू जंप फ्रॉम वैलेंस वैलेंस बैंड टू कंडक्शन बैंड। हायर इलेक्ट्रिकल कंडक्टिविटी होती है
कंडक्टर्स की। तो ये एनर्जी बैंड डायग्राम से हमने समझाया कि इंसुलेटर में सबसे ज्यादा डिफरेंस होता है सेमीकंडक्टर में
उससे कम और कंडक्टर में। तो खैर डिफरेंस ही नहीं होता है। दोनों ओवरलैप हो चुके हैं। करेक्ट सर। ओके। अब देखना हम यहां पर
कुछ डिफरेंस के फॉर्म में पढ़ते हैं। एक क्वेश्चन बहुत फेमस पूछा जाता है यहां पर कि कार्बन, सिलिकॉन ये कार्बन, सिलिकॉन और
जर्मेनियम इन तीनों के लिए एनर्जी गैप का डिफरेंस बताइए। ले बेटा। तो हमें ये पता है कि कार्बन इंसुलेटर में आता है। तो का
कार्बन में बेटा एनर्जी गैप ज्यादा ही होगा। कार्बन में एनर्जी गैप ज्यादा ही होगा। तो कार्बन वाला ऑप्शन कौन-कौन दिख
रहा है? या तो बी दिख रहा है या सी दिख रहा है। ठीक है? ये बी दिख रहा है या सी दिख रहा है। ओके सर। तो B और C में से कुछ
आ सकता है। यहां पर भी सी वाला ही है। ये भी आ सकता है। ये भी आ सकता है। ओके। ये मेरे ख्याल से सेम सेम ऑप्शन हो गए यहां
पर। ए और बी सी। ओके बढ़िया। तो देख एक एक ट्रिक देता हूं यहां पर। एक ट्रिक देता हूं। इसको याद रखना यहां पर। कार्बन कहे
सीता जी। ऐसे ही था ना? कहे सीता जी सुनो प्रभु। कहे सीता जी सुनो प्रभु। तो जैसे-जैसे नीचे जाओगे वैसे-वैसे ये एनर्जी
गैप है वो घटता है। एनर्जी गैप घटता है। तो कार्बन के लिए हाईएस्ट जर्मेनियम के लिए सबसे कम होगा। जर्मेनियम के लिए सबसे
कम होगा। सिलिकॉन के लिए उससे ज्यादा और कार्बन वाले के लिए उससे भी ज्यादा होगा। यहां पर भी ऐसा कुछ है? नहीं ये वाला गलत
हो जाएगा। ये वाला गलत हो जाएगा। दैट्स व्हाई द बी ऑप्शन इज़ करेक्ट। ये एक थोड़ी सी बात समझना कि जर्मेनियम के लिए सबसे कम
होता है। कितना होता है? 74 होता है। सिलिकॉन के लिए 1.1 होता है और कार्बन के लिए थ्री इलेक्ट्रो वोल्ट से भी ज़्यादा
होता है। क्योंकि वो इंसुलेटर वाली कैटेगरी में आता है। यह डिफरेंस थोड़ा सा दिमाग में रखना। और ये जो मैंने ट्रिक
बताई वो ट्रिक याद रखना क्योंकि ये क्वेश्चन पूछा गया है एक बार हमारे एग्जामिनेशन में लेकिन एक बार आ चुका है
ये थोड़ा सा ट्रिकी वाला और शब्दों वाला खेल था। तो मैंने आपको ट्रिक बता दी कि एस को इस तरह से याद रखना है हमें। ओके,
बढ़िया। अब मैं वापस आता हूं अपने पार्ट पे जहां पर हमने बात की थी कि सेमीकंडक्टर को मेरे दोस्त हमने डिवाइड किया था प्योर में
और इम्प्योर यानी कि एक्सटेंसिक सेमीकंडक्टर में। तो हम बात कर रहे हैं इंट्रेंसिक सेमीकंडक्टर की प्योर
सेमीकंडक्टर की। सुनना मेरे दोस्त बात। कि अ सेमीकंडक्टर दैट केमिकली प्योर और अ फ्री फ्रॉम अ इंप्युरिटीज़ आर नोन एज अ
इंट्रेंसिक सेमीकंडक्टर। ये डेफिनेशन हमें पहले से पता थी? पता थी गोलू भाई। ओके। फिर बात है सिलिकॉन एंड जर्मेनियम हैव अ
फोर वैलेंस इलेक्ट्रॉन। ये बात भी हमें पता है। एग्जांपल में मैंने पहले ही बता दिया था। कहे सीता जी सुनो प्रभु वो सारी
की सारी लाइन थी वो फोर वैलेंसी वाली थी। तो मैं अगर किसी एक को ड्रॉ कर लेता हूं तो इसकी फोर वैलेंसी होती है। तो ये अगल
बगल ऐसे ठीक है? ऐसे फोर वैलेंसी होती है। ओके ओके ओके। अरे ठीक है। छोड़ दो। तो, यह चार
इलेक्ट्रॉन, यह आस-पास वालों के साथ कोवेलेंट बॉन्ड में होता है। क्या होता है? आसपास वालों के साथ ऐसे कोवेलेंट
बॉन्ड में होता है। जैसे कि यह एक ठीक है? यह दूसरा। ठीक है? ऐसे ही यह यहां पर ऊपर एक के साथ बंधा हुआ होगा। ऐसे एक नीचे
वाले के साथ बंधा हुआ होगा। तो, ऐसे चारों दिशाओं में एक दूसरे के साथ ऐसे कोवेलेंट बॉन्ड से यह जुड़ा हुआ होगा। ठीक है? ये
चार वाले चारों कोवेलेंट बॉन्ड से जुड़े हुए होंगे। कोवेलेंट बॉन्ड से जुड़ा होगा। जैसे कि इस प्लस चार की बात करू तो यहां
पर एक इलेक्ट्रॉन दिया होगा। इस बॉन्ड में एक इलेक्ट्रॉन दिया होगा। इस बॉन्ड में एक इलेक्ट्रॉन दिया होगा। इस बॉन्ड में एक
इलेक्ट्रॉन दिया होगा। ओके? जबकि इसके पास वाला बगल वाला होगा वो भी ऐसे इलेक्ट्रॉन दे रहा होगा। इसने एक इलेक्ट्रॉन यहां पर
दिया होगा। एक इलेक्ट्रॉन वापस यहां पर दिया होगा। एक इलेक्ट्रॉन वापस यहां पर दिया होगा। एक इलेक्ट्रॉन यहां पर दिया
होगा। ऐसे सारे सारे इलेक्ट्रॉन एक दूसरे के साथ कोवेलेंट बॉन्ड में शेयरिंग के थ्रू ये बनते हैं। तो सिलिकॉन एंड
जर्मेनियम शेयर वन इलेक्ट्रॉन। मतलब सिलिकॉन का अलग स्ट्रक्चर ले सकते हो, जर्मेनियम का अलग स्ट्रक्चर लेते हो,
लेकिन उसमें वेलेंसी कितनी है? फोर ही है, बेटा। तो यहां पर इलेक्ट्रॉन है वो इच ऑफ इट्स फोर नियरेस्ट नेबर अपने पड़ोसी के
साथ एक-एक इलेक्ट्रॉन दे के अपने चार पड़ोसी को एक-एक इलेक्ट्रॉन का योगदान देके कि भाई एक मैं डालूंगा एक तू डाल देख
इसने एक डाला तो इसके बगल वाले ने एक डाला इसने यहां पर एक डाला तो बगल वाले ने एक डाला तो ऐसे एक-एक इलेक्ट्रॉन हर चार यहां
यहां वहां यहां यहां तो ऐसे चारों पड़ोसी को एक-एक इलेक्ट्रॉन की भागीदारी करके जोड़ीदारी बनाके ये कोवेलेंट बोर्ड से
जुड़े हुए होंगे। ओके सर। तो कोवेलेंट बोर्ड से ये जुड़े हुए हैं। ये इंट्रेंसिक सेमीकंडक्टर की बात थी। देखो अब तक सब
चीजें बढ़िया-बढ़िया। लेकिन अब कहानी में ट्विस्ट आता था। हमें सेमीकंडक्टर की कंडक्टिविटी बढ़ानी है। क्या करनी है?
बढ़ानी है। तो जैसे ही मैं टेंपरेचर बढ़ाऊंगा। जैसे ही मैं टेंपरेचर बढ़ाऊंगा, इसके अंदर जो बॉन्ड में भागीदारी से जुड़े
हुए इलेक्ट्रॉन है ना अपने पड़ोसी के साथ, जैसे ही टेंपरेचर बढ़ाऊंगा, बोलेगा अरे मैं तो चला हूं मुझे तेरे साथ कोई भागीदारी
नहीं बनानी है। मैं चला झोला उठा के। फकीर आदमी हूं चला जाऊंगा। मुझे क्या मिल गया? टेंपरेचर मिल गया। तो जैसे ही टेंपरेचर
बढ़ाते हैं। एज़ द टेंपरेचर इनक्रीस, थर्मल एनर्जी कॉज इलेक्ट्रॉन्स टू ब्रेक अवे। ये थर्मल एनर्जी की वजह से
इलेक्ट्रॉन यहां से टूटता है। जैसे कि पहले यहां पर इलेक्ट्रॉन था। अब वो इलेक्ट्रॉन टूट के कहीं और चला गया होगा।
अब इलेक्ट्रॉन कहीं टूट के चला गया होगा। मान लीजिए ये इलेक्ट्रॉन टूट के यहां से चला गया। ठीक है? ये इलेक्ट्रॉन भाग निकल
रहा है। ओके। तो मैंने सिर्फ एक समझाने के लिए बताया। ये इफेक्ट सब में होती होगी। ठीक है? और बड़े पैमाने पे हो जाएगी। एक को
बताओ ऐसे बहुत सारे में हो रही होगी। एक एटम और ऐसे बहुत सारे में हो रही होगी। ठीक है? तो वो बड़े स्ट्र मतलब स्पीशीज के
फॉर्म में बहुत बड़े पैमाने पे हो जाएगी। लेकिन हम एक का एग्जांपल से समझते हैं। तो होगा ये कि जहां से ये भागा वहां पर बन
गया होल। क्या हो गया? वहां पर बन गया होल। ये होल एक तरह से इफेक्टिव पॉजिटिव चार्ज की तरह बिहेव करता है। जैसे कि यहां
पर एक इलेक्ट्रॉन था लेकिन अब वो चला गया। तो ऐसा बिहेव ऐसा लग रहा है कि यहां पर अब पॉजिटिव चार्ज हो गया है। पॉजिटिव चार्ज
हो गया जिसकी वजह से इलेक्ट्रॉन को खा गया होगा। ऐसा समझना कि ये होल है वो एक्चुअल में है नहीं। है नहीं वो पॉजिटिव होल होल
है बेटा। इलेक्ट्रॉन था वो चला गया तो नेगेटिविटी हट गई बेटा। तो अब वो ऐसा बोलेंगे कि सामने वाला पॉजिटिव हो गया।
पॉजिटिव नहीं बेटा उसके अंदर से नेगेटिविटी भागी। इलेक्ट्रॉन भाग गया। लेकिन हमें प्रतीत होता है कि वो पॉजिटिव
चार्ज है। ऐसा दिखता है ऐसा इफेक्ट होता है कि वो पॉजिटिव चार्ज है। इसलिए हम बोलेंगे कि इसका इफेक्टिव चार्ज होल का
होता है +e जितना। Okay, और इलेक्ट्रॉन का कितना है? इलेक्ट्रॉन का माइनस जितना मतलब की देख, अब इस स्पीशीज़ में आप ध्यान से
देखो तो एक +e भी है और एक माइनस भी है। +e क्या काम कर रहा होगा और माइनस क्या कर रहा होगा? दोनों इसमें इलेक्ट्रिसिटी
दोनों मुक्त हैं। दोनों मुक्त है मुक्त मतलब फ्री हैं। जैसे ही कोई एनर्जी आएगी, जैसे ही कोई करंट आएगा ये करंट को पास
करवाने में अपनी हेल्प मतलब हेल्प करेंगे, खुद हेल्प करेंगे कैसे? क्योंकि ये अब फ्री है देख। कोई दूसरा इलेक्ट्रॉन आएगा
वो इसकी जगह ले लेगा और इलेक्ट्रॉन यहां से भाग निकलेगा। यहां पर होल क्रिएट हो जाएगा। देख ये इलेक्ट्रॉन आया। यहां पर
जुड़ गया। ये भर गई स्पेस भर गया। ये होल स्पेस भर गया। लेकिन यहां पर होल क्रिएट हो गए। तो ऐसा लग रहा है कि होल भी भाग
रहा है और ये फ्री इलेक्ट्रॉन था वो भी भाग रहा है। समझ रहे हो मेरी बात? क्या हो रहा है यहां पर? होल भी भाग रहा है और
फ्री इलेक्ट्रॉन भी भाग रहा है। तो ये दोनों होल्स आर दैट क्रिएटेड एट एंड बी फिल्ड बाय अ ट्रांजिशन ऑफ वैलेंस
इलेक्ट्रॉन फ्रॉम द नेबर। पड़ोस वाला कोई इलेक्ट्रॉन आया। होल की जगह ली और होल दूसरी जगह क्रिएट जहां से वो आया वहां पर
भी तो एक जगह जगह खाली हो जाएगी। तो यहां पर वापस एक होल बन जाएगा। ओके? इलेक्ट्रॉन्स एंड होल्स आर द एनर्जी एंड
चार्ज कैरियर। तो इस पूरी घटना में मैंने आपको बताया कि भाई फ्री इलेक्ट्रॉन और ये होल दोनों बेटा दोनों का मूवमेंट हमें
देखने को मिलता है और ये दोनों इलेक्ट्रिसिटी पास करवाने में हेल्प करते हैं। इसलिए दोनों एक तरह से एनर्जी कैरियर
है। दोनों चार्ज कैरियर है। तो दोनों की वजह से हमें सेमीकंडक्टर इस प्योर सेमीकंडक्टर में एनर्जी मिलती है। इसलिए
जो नेट करंट लिखा जाता है वो इलेक्ट्रॉन प्लस होल का लिखा जाएगा। इलेक्ट्रॉन इस डायरेक्शन में भाग रहे हैं बेटा। तो करंट
की डायरेक्शन उल्टी हो जाती है और होल तो पहले से ही इस डायरेक्शन में भाग रहे हैं तो होल की डायरेक्शन तो एज इट इज ही हम
लेंगे। तो ये करेंट ड्यू टू होल दोनों का समेशन करेंगे हमें नेट करंट मिल जाएगा। समझ पा रहे हो? अब इसमें एक चीज़ ध्यान में
रखने वाली है कि मान लीजिए कि टेंपरेचर बढ़ा दिया तो क्या जरूरी है यहां पर कि इलेक्ट्रॉन की संख्या
और होल की संख्या सेम सेम रहेगी। देखो जब टेंपरेचर सेम ही था, जब टेंपरेचर सेम ही था मतलब बहुत लोअर लेवल पे था। तब सारी
स्थिति कंट्रोल में थी। सब कोवेलेंट बॉन्ड में बंधे हुए थे। टेंपरेचर बढ़ाया वैसे-वैसे एक इलेक्ट्रॉन ने अपनी जगह खाली
की। तो एक इलेक्ट्रॉन निकला एक होल बना। दूसरा इलेक्ट्रॉन निकला दूसरा होल बना। तो ये कुछ ऐसी घटना है कि होल और इलेक्ट्रॉन
दोनों जोड़ी में उत्पन्न हो रहे हैं। जहां से इलेक्ट्रॉन निकला वहां पर होल बन गया। तो ये दोनों सेम अमाउंट में होंगे। ठीक
है? और एक ऐसा ऐसा टेंपरेचर भी आ जाएगा, ऐसा थर्मल इक्विलिब्रियम का स्टेट भी आ जाएगा कि रेट ऑफ जनरेशन और रेट ऑफ
रिकॉम्बिनेशन सेम हो जाएगा। जैसे कि इलेक्ट्रॉन निकल के बाहर निकल गया लेकिन दूसरा कोई इलेक्ट्रॉन वो होल जो बना हुआ
है ना उसमें फील कर जा रहा है। रिकॉम्बिनेशन कर जा रहा है। अब वो दूसरा जहां से निकला वहां पर भी तो होल बना। तो
जनरेट भी साथ-साथ हो रहा है और रिकॉम्बिनेशन भी साथ-साथ हो रहा है। तो ये बता रहे हैं बेटा आजादी के समय की उस बात
कि जितने मारोगे उतने खड़े हो जाएंगे। जितने मारोगे उतने खड़े हो जाएंगे बेटा। तुम एक निकालोगे यहां पर होल एक बन जाएगा।
तो ये बात याद रखना कि जितने नंबर ऑफ इलेक्ट्रॉन होंगे उतने नंबर ऑफ होल होंगे और यही इंट्रिंसिक सेमीकंडक्टर की
कंसंट्रेशन के नाम से जाना जाता है। किसकी बात कर रहे हैं हम? प्योर सेमीकंडक्टर इंट्रसिक सेमीकंडक्टर की बात कर रहे हैं।
एग्जांपल याद रखना बेटा तुम जितने मारोगे मैं उतने खड़े करूंगा। ओके? अब बात आ रही है आगे एक्सट्रेंसिक सेमीकंडक्टर की ओर।
क्या है ये एक्सट्रिंसिक सेमीकंडक्टर? हमने पहले पढ़ा वैसे ही कि भाई ये है ना अशुद्धि ऐड कर दी। अब अशुद्धि दो तरीके से
ऐड की जाएगी। एक तो अगल वाले से अशुद्धि आ सकती है। बगल वाले से अशुद्धि आ सकती है। तो पहले तो अपने हीरो को आइडेंटिफाई करो।
ये रहा अपना हीरो। अपना हीरो है वो सिलिकॉन जर्मेनियम ही है। याद रखना अपना हीरो कौन है? अपना हीरो सिलिकॉन और
जर्मेनियम है। ये रहा अपना हीरो। इसकी वैलेंसी कितनी है? +4। इसकी वैलेंसी +4 है। अब इसके बगल वाला एक बार देख लिए। ये
रहा बोरोन वाला। बोरोन एलुमिनियम ये वाली लाइन बैंगन आलू गाजर इन थैला इसका +3 है वैलेंसी ओके और नेपाल पाकिस्तान
ऑस्ट्रेलिया सब भिखारी वाले की +5 है तो +3 ऐड करोगे बेटा तो देख एक एक इलेक्ट्रॉन मुझे कम लग रहा है जितना +4 होना चाहिए था
एक इलेक्ट्रॉन कम लग रहा है तो इलेक्ट्रॉन होल की पेयर में इलेक्ट्रॉन और होल की पेयर में मुझे लग रहा है कि एक इलेक्ट्रॉन
कम है यहां पर एक इलेक्ट्रॉन कम है तो हम उसका उल्टा बोलेंगे इलेक्ट्रॉन कम मतलब की होल ज्यादा होल ज्यादा होल ज्यादा मतलब
पॉजिटिव चार्ज ज्यादा पॉजिटिव ज्यादा यानी कि पी टाइप तो याद रखना बेटा कि बैंगन आलू गाजर इन थैला वाले में से कोई ऐड किया
जाएगा तो पी टाइप बैंगन आलू गाजर इन थैला वाले में से ऐड किया जाएगा तो पी टाइप ओके तो अगर कंफ्यूजन हो रहा हो तो याद रखना
भोपाल भोपाल से क्या हो जाएगा बी भोपाल से ब मतलब बैंगन आलू गाजर इन थैला और भोपाल पी आया ना पी यानी पी टाइप ओके बढ़िया फिर
पांच नंबर वाला देखना नेपाल पाकिस्तान ऑस्ट्रेलिया सब भिखारी वैलेंसी कितनी है पांच अब इसके कॉम्बिनेशन में आप ध्यान से
देखो बेटा तो इलेक्ट्रॉन और होल की जोड़ी जैसे ही ऐड करोगे आपको पता चलेगा इलेक्ट्रॉन इसमें ज्यादा है। इलेक्ट्रॉन
इसमें ज्यादा है। चार होने चाहिए थे। कितने हैं इसके पास? पांच है। तो अगर चार नंबर वालों में पांच ऐड करोगे तो एक
इलेक्ट्रॉन आपको एक्स्ट्रा मिलेगा। एक इलेक्ट्रॉन आपको एक्स्ट्रा मिलेगा। ओके? एक इलेक्ट्रॉन एक्स्ट्रा मिलेगा। तो
इलेक्ट्रॉन एक्स्ट्रा है दैट्स व्हाई वी नीड टू से इट्स अ n टाइप। n यानी नेगेटिविटी। देख होल से पॉज़िटिविटी तो पी
टाइप। इलेक्ट्रॉन से नेगेटिविटी तो एन टाइप। अपने काम के लिए दोनों हैं। तो एन टाइप इसलिए नाम दिया गया है एन टाइप।
करेक्ट? चमका है बेटा। इसका कोई फार्मूला बनाया जाए? अरे नहीं यार एक का याद रखोगे दोनों दूसरा ऑटोमेटिकली याद रह जाएगा।
नेपाल-पाकि ऑस्ट्रेलिया सब भिखारी वाला +5 +5 यानी कि हो जाएगा n टाइप। ओके? वैसे भी n सेम मैच ही तो कर रहा है। n नेपाल
पाकिस्तान ऑस्ट्रेलिया सब भिखारी n टाइप। ओके? समझना। अब एक्सटेंसिक सेमीकंडक्टर मैंने आपको ऊपर ऊपर से बता दिया कि डोपिंग
करनी है। कुछ अशुद्धि ऐड करनी है। लेकिन अगर पूछ ले बेटा पूरा का पूरा एक्सट्रेंसिक सेमीकंडक्टर एक्सप्लेन
कीजिए। तो व्हाट वी नीड टू राइट अ फॉर्म्ड बाय अडिंग अ स्मॉल कंट्रोलोल्ड अमाउंट ऑफ अ इंप्युरिटीज़ टू एन इंट्रेंसिक
सेमीकंडक्टर। बहुत सिंपल तरीके से और सेम मैनर में लिखना है। ऐसा नहीं कि बस ऐड कर दिया। कंट्रोलोल्ड वे में ऐड करना है
इंप्युरिटीज़। और इंप्युरिटीज़ भी ऐसे कि कई सारे हैं। मतलब लाख में एक एटम हमने ऐड किया है किसका? नाइट्रोजन का, फास्फोरस का
या एल्युमिनियम का। ठीक है? 10 रेज़ टू पावर से जर्मेनियम थे। उसमें हमने एक ऐड किया है। तो अशुद्धि अशुद्धि कब कहलाएगी?
जब बड़े हिस्सों में छोटी अशुद्धि ऐड करोगे। अगर पहले से ही कचरा है और उसमें कचरा डालोगे तो अशुद्धि नहीं कहलाती। तब
तो पूरा कचरा ही कहा जाएगा। ठीक है मेरे दोस्त? तो समझना अशुद्धि तब कही जाएगी जब एक कंट्रोल्ड वे में और स्मॉल अमाउंट में
हम ऐड करते हैं। और इसी प्रोसेस को डोपिंग कहते हैं। कंट्रोलोल्ड वे में करना है। ऐसा नहीं कि गंदगी फैला देनी है। अशुद्धि
बोल रहा हूं डोपिंग बोल रहा हूं। इसका मतलब ये नहीं गंदगी फैला देनी है। डोपिंग वेल मैनर में करना है गंदू भाई।
इंप्युरिटीज़ ऑफ़ एटम रिप्लेस सम लैटिस एटम। ओके? ये किसी में जैसे यहां पर +4 +4 +4 चल रहा था ना? ऐसे +4 +4 +4 ऐसे चल रहा
था। तो इस जगह पे +4 की जगह पे हो सकता है मैंने नेपाल में से नाइट्रोजन वाला ऐड किया हो तो यहां पर +5 हो जाए। +5 हो जाए।
ऐसा वो स्ट्रक्चर में अपना ऐड कर देगा। ओके ओके बढ़िया सर। तो लैटिस स्ट्रक्चर में अपना एक एटम ऐड करेगा तो कुछ इस हिसाब से
डायग्राम देखने को मिलेगा। डॉप्ड एटम क्रिएटेड अ न्यू एनर्जी लेवल्स। अरे भाई जैसे ये डॉप्ड कुछ नया ऐड किया ना तो इस
नए ऐड करने की वजह से एक नया एनर्जी लेवल बनता है। और इस नया एनर्जी लेवल को अभी डिफाइन भी करेंगे। हां। ठीक है? वो हमें
रेफरेंस देगा कि इलेक्ट्रॉन इसके इलेक्ट्रॉन यहां तक आ सकते हैं। ठीक है? वो एनर्जी गैप हमें बताएगा। वो एनर्जी का
एक बैंड हमें दिखाएगा कि यहां तक इलेक्ट्रॉन है। यहां से नीचे इलेक्ट्रॉन नहीं है। ठीक है? यहां से नीचे तक
इलेक्ट्रॉन है। यहां से ऊपर इलेक्ट्रॉन नहीं है। ओके, बढ़िया। दिस इंक्रीज़ द इलेक्ट्रिक कंडक्टिविटी, देखो। हमें तो
दोनों तरफ से विन विन कंडीशन हो गई ना? जैसे ही इलेक्ट्रॉन यहां +4 वाले में +5 वाला ऐड किया तो एक
इलेक्ट्रॉन ज्यादा मिला है। वन इलेक्ट्रॉन एक्स्ट्रा। एक्स्ट्रा इलेक्ट्रॉन मिला है। Okay? तो इलेक्ट्रॉन एक्स्ट्रा मिला तब भी
कंडक्टिविटी बढ़ी। और पहले वाले में मतलब बैंगन आलू गाजर वाला कुछ ऐड किया। तो एक इलेक्ट्रॉन कम है। एक इलेक्ट्रॉन कम तो
मतलब कोई ना कोई जोड़ीदार होगा वो सिंगल रह जाएगा। पहले वाले में सब शादीशुदा थे इंट्रेंसिक में। दूसरे वाले में नेगेटिव
मतलब मान लीजिए लड़का तो लड़का बचा हुआ रह जाएगा। एक एक्स्ट्रा लड़का है जो कंडक्टिविटी पास करवाएगा और इस वाले में
लड़का कम है तो एक लड़की बच जाएगी बेटा तो वो कंडक्टिविटी पास करवाएगी। समझ पा रहे हो मेरी दोस्त? तो दोनों में हमारे लिए तो
विनविन कंडीशन है। हमारा हेतु हमारा ऐ शादी करवाना नहीं है। हमारा ऐ जितने अलग-अलग रहे जितने सिंगल रहे तो वो
कंडक्टिविटी में अच्छा खासा पार्ट लेंगे। इलेक्ट्रिसिटी पास करवाने में अच्छा खासा पार्टिसिपेंट करेंगे। तो हमारा ऐ तो ये है
कि कंडक्टिविटी बढ़ानी है। तो दोनों केस में कंडक्टिविटी बढ़ रही है। इसलिए तो ये ये एक्सटेंसिक सेमीकंडक्टर का यूज़ और भी
बड़े पैमाने पे किया जाता है। ओके? तो दो तरीके के एक्सटेंसिक सेमीकंडक्टर मिलते हैं। मैंने पहले ही बता दिया। एक एन टाइप
दूसरा पी टाइप। कब मिलेगा एन टाइप? जब नेपाल पाकिस्तान ऑस्ट्रेलिया सब भिखारी वाले ऐड होंगे तब। कब मिलेगा पी टाइप? पी
टाइप भोपाल। बैंगन आलू गाजर इन थैला वाले ऐड होंगे तो। तो पहले लिखना बेटा कि एन टाइप यानी कि पेंटावेलेंट वाले ऐड होने
चाहिए। नेपाल, पाकिस्तान, ऑस्ट्रेलिया, सब भिखारी। पी टाइप ये पूछा गया है। मजाक नहीं कर रहा हूं मेरे दोस्त। तुम्हें लग
रहा है कि क्या ही हलवा चीज पढ़ा रहे हैं। लेकिन ये सेम क्वेश्चन मैंने 2018 में ये एग्जामिनेशन दी थी और तब यही क्वेश्चन आया
था। शायद मतलब मुझे याद है तब तक पी टाइप से पूछा गया था। लेकिन मैं एन टाइप करके आया था। गलत करके आया था। तुम्हारे सामने
क्या झूठ बताऊं बेटा? तुम तो मेरे घर के बच्चे हो। ठीक है? तब मैं गलत करके आया था। तब आपको बता रहा हूं कि इसमें गलती
मतलब क्यों? तब मैं बहुत हड़बड़ाहट में था। गलत करके आया था। इसका मतलब ये नहीं था कि मुझे पता नहीं था। मुझे दोनों चीजें
पता थी। लेकिन एग्जामिनेशन का प्रेशर ऐसा होता है कि क्या पूछा था और क्या लिख के आ गया। पता सब कुछ है लेकिन पेपर में कुछ
अलग लिख के आ जाते हैं। उस टाइम पे याद नहीं आता है। उस टाइम पे दूसरी चीजें याद आ जाती है। और मुझे सही में चीजें पता थी।
लेकिन एग्जामिनेशन के प्रेशर की वजह से पी टाइप पूछा और मैं एन टाइप लिख के आ गया था। क्या आपके साथ भी वैसी स्थिति होती
है? कि पेपर में पूछा कुछ और था। याद मुझे सब कुछ था पेपर से पहले। लेकिन पेपर जैसे ही हाथ में आया वो क्वेश्चन देखा सही
लेकिन याद नहीं आया। उस टाइम पे याद नहीं आया और मैं गलत करके आ गया छोड़ के आ गया। हुआ है कभी आपके साथ बताना। इस बारे में
भी अपन चर्चा जरूर करेंगे। एक आध वीडियो जरूर लाएंगे अगर आपकी इच्छा होगी तो। लेकिन इस चीज का ध्यान रखना। ये गलती मत
करना मेरे दोस्त। ओके? तो पी टाइप यानी कि ट्राईवेलेंट एटम। ट्राईवेलेंट एटम बैंगन आलू गाजर इन थैलाम। ओके। बताया हमें कि इट
फॉर्म्ड व्हेन पेंटावेलेंट एटम्स आर डोप्ड इंटू अ इंट्रेंसिक सेमीकंडक्टर। एक डेफिनेशन हो जाएगी छोटी सी। यहां पर
ट्राईवेलेंट ऐड की जाएगा तब एक छोटी सी डेफिनेशन हो जाएगी। अब सुनना मेरे दोस्त। देखो सब चार चार चार चार वाले थे। उसमें
एक अपना हीरा चमक रहा है। एक हीरा चमक रहा है पांच वाला। मतलब ये कौन सा एटम कौन सा बन जाएगा? ये बन जाएगा एन टाइप। एक हीरा
चमक रहा है। प्लस फाइव मतलब की एक इलेक्ट्रॉन इसका ज्यादा होगा। देख इसने आसपास सबकी बेटा चार चार चार-चार
इलेक्ट्रॉन की भागीदारी होगी लेकिन ये बोलेगा मेरे आसपास तो चार है लेकिन मेरे पास शक्ति दोनों मतलब मेरे पास आसपास चार
है लेकिन मेरे पास बेटे कितने शादी करवाने के लिए पांच है अब मैं क्या करूं एक तो कुंवारा रह जाएगा ना हां तो वही कुंवारे
की बात हो रही है देख ये अ पड़ोस वाले के साथ एक को भागीदारी करवा दिया दूसरे को इसको यहां इसके साथ जोड़ दिया तीसरे को
यहां कहीं जोड़ दिया चौथे को यहां कहीं जोड़ दिया तो जैसे चार चार की शादी हो गई एक बच जा रहा है एक बच जा रहा है एक बच जा रहा
है और वही वही बेटा जीवन में आगे निकलेगा और वही इलेक्ट्रिसिटी को पास करवाएगा। यही है वो फ्री इलेक्ट्रॉन। वही है यही है ये
पहला इलेक्ट्रॉन जो इलेक्ट्रिसिटी को पास करवाएगा। ठीक है? ओके। तो यहां पर हमें इलेक्ट्रॉन
ज्यादा देखने को मिलेगा। एज़ कंपेयर टू होल एज़ कंपेयर टू होल। क्या इसमें भी टेंपरेचर बढ़ा के होल मिला सकते हैं? हां जी। देखिए
ये है तो इंट्रेंसिक जैसा ही। मैं अगर इसका टेंपरेचर बढ़ाऊंगा तो ये वाला इलेक्ट्रॉन भी कभी ना कभी तो कांपेगा। ये
इलेक्ट्रॉन भी भागेगा दूसरी तरफ और यहां पर होल क्रिएट कर लेगा। तो मैं टेंपरेचर बढ़ाऊंगा तो वही इफेक्ट जो इंट्रेंसिक
सेमीकंडक्टर में देखने को मिलती थी वो यहां पर भी आएगी। बन सकता है। तो हमें यहां पर होल भी मिलेंगे और इलेक्ट्रॉन भी
मिलेंगे। लेकिन फ्री इलेक्ट्रॉन ज्यादा होंगे। क्यों? क्योंकि पहले से हमें पता है कि जहां जहां ये ये पेंटावेलेंटेड हुए
वहां पर पहले से ही एक इलेक्ट्रॉन ज्यादा है इस वजह से। ओके? तो कंसंट्रेशन हमें ज्यादा देखने को मिलेगी फ्री इलेक्ट्रॉन
की। जब पेंटावेलेंट में क्या होता है? एक हीरा देख ले बेटा। ये हीरा देख लीजिए बेटा। +3 वाला है हीरा। +3 वाले के पास
भाई भागीदारी करने के लिए तीन ही लड़के हैं। तीन ही एक जगह खाली रह जाएगी। कौन इसका सिंहासन लेगा? तो खाली रह जाएगा। जिस
वजह से एक होल क्रिएट हो जाएगा। ठीक है? एक होल क्रिएट हो जाएगा। अब इस होल को उभरने के लिए दूसरा कोई यहां कोशिश करेगा
जगह आने की। लेकिन जो भी कोशिश करेगा उसकी खुद की जगह खाली हो जाएगी। तो एक होल यहां पर हमें मिल ही मिल रहा है। अब ज़रा सोच
समझ के बता। क्या n टाइप मतलब नेगेटिव स्पीशीज होगी यहां पर नेट चार्ज होगा वो नेगेटिव होगा और p टाइप मतलब नेट चार्ज
इसका पॉजिटिव होगा जरा सोच जरा सोच सोच सोच सोच मैं इसका आंसर देता हूं अभी 2 मिनट में तब तक तू सोच के कमेंट सेक्शन
में लिखते जाना मुझे पता है तुम नहीं लिख रहे हो लेकिन सोच ना बेटा तब तक मैं एक और चीज समझाता हूं देखना हमें दो तरीके से
यहां पर इलेक्ट्रॉन मिलते हैं। n टाइप की बात कर रहा हूं पहले। हां, पहले मैं बात कर रहा हूं n टाइप की। एक तो मिल रहे हैं
इलेक्ट्रॉन डोपिंग की वजह से। दूसरा टेंपरेचर अगर मैंने बढ़ाया मैंने जैसे ही टेंपरेचर बढ़ाया तो इलेक्ट्रॉन और होल की
जोड़ी है वो टूटने लगेगी। तो इलेक्ट्रॉन होल पे जनरेशन होने लगेगी जिसकी वजह से हमें ये मिल रहा है। ओके। तो ये तो जोड़ी
में मिल रहा है और ये पहले से ही इलेक्ट्रॉन ज्यादा है। इस वजह से हम बताएंगे बेटा कि मेजोरिटी चार्ज कैरियर
कैरियर के रूप में यहां पर कौन होंगे? फ्री इलेक्ट्रॉन्स होंगे। ओके? और होल से वो माइनॉरिटी मतलब होल्स है सही लेकिन वो
उतना खास अच्छा खासा कंडक्टिविटी में पार्ट नहीं लेंगे क्योंकि उसकी संख्या ही बहुत कम है। पार्ट लेंगे लेकिन संख्या ही
कम है। तो क्या मेजॉरिटी कौन है यहां पर? फ्री इलेक्ट्रॉन्स है। ओके सर। ओके। क्यों इलेक्ट्रॉन ज्यादा है? उसके पीछे का रीज़न
हमने पहले ही लिख दिया क्योंकि पेंटावेलेंट के पास पहले से एक ज्यादा चार्ज है। फॉर कंडक्शन द हेंस नोन। मतलब
तो हम बता सकते हैं कि ये डोनर इंप्युरिटीज़ है। डोनर मतलब एक इलेक्ट्रॉन ज्यादा देती है। इसलिए इलेक्ट्रॉन की
कंसंट्रेशन ज्यादा है एज़ कंपेयर टू ऑल। अब बात आती है बेटा कि ये स्पीशीज है वो एन टाइप यानी नेगेटिवली चार्ज होगी तो गलत
बेटा ये एमसीक्यू में पूछ सकते हैं याद रखना बेटा कि कोई पूछे कि बेटा एन टाइप यानी नेगेटिवली चार्ज गलत देख बेटा यहां
पर एन टाइप मतलब नेपाल पाकिस्तान ऑस्ट्रेलिया सब में से कोई भिखारी सब में से कोई भिखारी नहीं है बेटा ये भिखारी
इसके साथ-साथ ही है तो इनमें से कोई ऐड हुआ होगा तो समझना मेरी बात कि ये खुद अपने पास इलेक्ट्रॉन एक एक्स्ट्रा लेके आ
रहे हैं जिसकी हम बात कर रहे हैं लेकिन लेकिन ये अपने साथ अपने साथ ये बेटा एक प्रोटॉन भी तो ज्यादा ला रहे होंगे। जैसे
कि मैं नाइट्रोजन की बात करूं यहां पर तो नाइट्रोजन क्या होता है? नाइट्रोजन से N 14 तो बेटा इस सेवन में सेवन का राज क्या
है? इसमें सेवन प्रोटॉन भी होंगे और सेवन इलेक्ट्रॉन भी होंगे। तो जितने इलेक्ट्रॉन हैं उतने प्रोटॉन भी है लेकिन प्रोटॉन की
हम यहां पर बात नहीं कर रहे। इसका मतलब ये नहीं है कि प्रोटॉन नहीं है। प्रोटॉन भी उतने ही हैं। सात नंबर के ये जितने नंबर
के इलेक्ट्रॉन हैं। तो ये इलेक्ट्रिकली न्यूट्रल ही मिलेगा। इलेक्ट्रॉन एक एक्स्ट्रा मिल रहा है। लेकिन अगर इसके
प्रोटॉन की संख्या भी काउंट करोगे तब भी वो सेम ही मिलेगी। तो ये इलेक्ट्रिकली न्यूट्रल होता है बेटा। संपूर्ण पनने समान
अवस्था में ये बात बता रहा हूं। तुम ध्यान रखना इस चीज में गलती हो सकती है। आधी जनता को दिमाग में ये होता है कि एन टाइप
यानि नेगेटिव। पी टाइप यानी पॉजिटिव। जो कि गलत है मेरे दोस्तों। ओके? समझ पा रहे हो बात? आगे बढूं कहानी को? अब बात आ रही
है पी टाइप की। पी टाइप में भी सेम प्रोसेस बेटा डोपिंग की वजह से हमें एक एक्स्ट्रा होल मिल रहा है। एक होल मिल रहा
है। ठीक है? एक इलेक्ट्रॉन क्रम है इस वजह से एक होल मिल रहा है। जैसे ही मैं टेंपरेचर बढ़ाऊंगा
जैसे ही मैं टेंपरेचर बढ़ाऊंगा। क्या इलेक्ट्रॉन्स और होल की एक जोड़ी मिलेगी? इलेक्ट्रॉन होल पेयर फॉर अ जनरेशन। ठीक है
सर। होल आर मेजोरिटी। क्योंकि होल ज्यादा है बेटा तो होल मेजोरिटी चार्ज कैरियर के रूप में होंगे और फ्री इलेक्ट्रॉन वो
माइनॉरिटी के रूप में होंगे। तो एन एच इज़ वेरी ग्रेटर देन NEE। क्या ये इलेक्ट्रिकली न्यूट्रल होते हैं? जी हां
ये इलेक्ट्रिकली न्यूट्रल होते हैं। क्योंकि एक इलेक्ट्रॉन कम हुआ तो क्या हुआ? बोरोन है बेटा। बोरोन कहां से शुरू
होता है? ऐसे ना हाइड्रोजन, हीलियम, लिथियम, बेरिलियम, बोरोन, फाइव बी 10 के आसपास या 10 या 11 के आसपास कुछ होता है।
तो समझना बेटा ये पांच इलेक्ट्रॉन ले के आया है। तो पांच प्रोटोन भी तो ले के आया है। तुम तो फोकस कहां पर? तुम कंपैरिज़न
किससे कर रहे हो? ये सिलिकॉन और जर्मेनियम से कर रहे हो। तो चार की कंपैरिज़न में तीन यानी कम है एक इलेक्ट्रॉन। लेकिन उस वो
खुद तो बेटा अपने आप में संपूर्ण है। वो अपने आप में खुद तो संपूर्ण है। इस वजह से बोलेंगे बेटा कि ये भी इलेक्ट्रिकली
न्यूट्रल ही है। भले ही ऐड किया गया हो लेकिन ये इलेक्ट्रिकली न्यूट्रल ही है। क्या समझे हो दोस्त मेरी बात? ये
थ्योरिटिकल क्वेश्चन पूछा जा सकता है। ये थ्योरिटिकली ये क्वेश्चन पूछा जा सकता है मेरे दोस्त। घबराना नहीं काम का है। अब
इसका एक फेमस फार्मूला। सुनना है मेरे दोस्त कि भाई होल की कंसंट्रेशन कितनी होगी? इसमें इलेक्ट्रॉन की कंसंट्रेशन
कितनी होगी? और अगर ये इंट्रेंसिक फॉर्म में होता या इंट्रेंसिक फॉर्म में है तो उसकी प्योर वाले एटम्स की कंसंट्रेशन
कितनी होगी? तो उन तीनों के बीच का एक रिलेशन है। चाहे वो एन टाइप हो, चाहे वो पी टाइप हो या चाहे वो प्योर ऐसा लिखा हुआ
हो मतलब ऐसा लिखा हो कि वो एक्सटेंसिक सेमीकंडक्टर है। तो इस केस में ये वैलिड है कि Ne * NH इलेक्ट्रॉन की कंसंट्रेशन
यानी कि हम लिखते हैं कि नंबर ऑफ फ्री इलेक्ट्रॉन्स पर यूनिट वॉल्यूम। याद रखना बेटा। होल की कंसंट्रेशन NH से रिप्रेजेंट
की जाती है। जिसको ऐसा भी बोला जाएगा कि नंबर ऑफ होल्स पर यूनिट वॉल्यूम। और इज इक्वल टू n आई जिसको इंट्रेंसिक
सेमीकंडक्टर के अंदर इलेक्ट्रॉन या होल की कंसंट्रेशन के नाम से जाना जाता है। अब इस पर बेस्ड बेटा बहुत प्यारे-प्यारे
क्वेश्चन और 2025 में जो क्वेश्चन आया था वो भी इसी से जुड़ा हुआ है। इसी फॉर्मूले से जुड़ा हुआ है। तो ये बात दिमाग में
बिठा के रखना मेरे दोस्त भूलना नहीं है। याद रखना। ओके। अब क्वेश्चन का सिलसिला शुरू करते हैं और जितना हमने पढ़ा है उससे
क्वेश्चन जो पूछे गए हैं वो समझते जाते हैं। सुनना पहला क्वेश्चन है। कहना एन टाइप सेमीकंडक्टर सेमीकंडक्टिंग सिलिकॉन
इज़ ऑब्टेनिंग बाय अ डोपिंग इंट्रेंसिक एस आई विद। मतलब सिलिकॉन के साथ हमें बताना है कि SI के साथ एन टाइप बनाने के लिए
हमें क्या ऐड करना चाहिए? एन टाइप बनाने के लिए हमें क्या ऐड करना चाहिए? तो बेटा, एन टाइप यानी एन। मैंने बताया था एन टाइप
को एन से याद रखना है। तो नेपाल, पाकिस्तान, ऑस्ट्रेलिया सब भिखारी वाली लाइन। तो यहां पर पाकिस्तान दे रखा है
बेटा। बाकी तो बैंगन, आलू, गाजर इनला दे रखा है। ठीक है? चमका बेटा 2024 में छोटा क्वेश्चन लेकिन देख याद होता एन एन वाला
रिलेशन तो काम में रहता। ठीक है? एक में आपको एन एन याद रखना है और दूसरे में याद रखना है बेटा। ये एन टाइप के लिए और पी
टाइप के लिए क्या याद रखना है? भोपाल। भोपाल। तो भोपाल से क्या आ जाएगा? देख भोपाल। भोपाल से बी बैंगन, आलू, गाजर इन
थैला वाला आ जाएगा। बैंगन गाजर बैंगन गाजर इन तिल क्या भाई बना रहा है तू पढ़ा रहा है या बच्चों को बहका रहा है?
[हंसी] ठीक है? तो यहां बैंगन वाले से आ जाएगा बी। तो बोरोन बोरोन वाली लाइन पूरी की
पूरी आ जाएगी और पी यानी कि पी टाइप का एग्जांपल हो जाएगा। जैसे याद रहे लेकिन दिमाग में बिठाना हां ट्रिक जैसे ही आपको
जो अच्छा लगे वैसी ट्रिक बनाओ लेकिन तुम्हे ये चीजें याद रखनी है उसको ऐसे याद रखा जाता है। ठीक है? समझने वाला पार्ट
थोड़ा और डिटेलिंग के साथ में पढ़ा रहा हूं। ओके। दूसरा क्वेश्चन हमारे पास है कि जर्मेनियम इज़ डॉप्ड विथ द आर्सेनिक।
आर्सेनिक किसकी लाइन में आ रहा था बेटा याद कर। नेपाल-पाकिस्तान ऑस्ट्रेलिया सब भिखारी वाली लाइन में आ रहा था। नेपाल
पाकिस्तान ऑस्ट्रेलिया। सब भिखारी। ठीक है? तो नेपाल, पाकिस्तान, ऑस्ट्रेलिया तो ये एन टाइप एन टाइप का रिप्रेजेंटेशन हो
जाएगा। अब एन टाइप के बोल रहे हैं कि एन टाइप ऐड करने पे क्या होता है? ठीक है? स्ट्रक्चर ऑफ अ जर्मेनियम लैटिस स्ट्रक्चर
इज़ डिस्टर्ड। स्ट्रक्चर चेंज हो जाएगा। नंबर ऑफ कंडक्शन इलेक्ट्रॉन इज़ इंक्रीज। कंडक्शन इलेक्ट्रॉन बढ़ जाएंगे। मतलब NEE
की संख्या है वो बढ़ जाएगी। थोड़ा-थोड़ा मुझे सही लग रहा है। थोड़ा-थोड़ा नहीं पूरा सही भी है। क्योंकि नंबर ऑफ इलेक्ट्रॉन N टाइप
मतलब इलेक्ट्रॉन ज्यादा होंगे। बी ऑप्शन सही लग रहा है। नंबर ऑफ़ होल्स इनक्रीज। होल्स की बात नहीं होगी बेटा। पी टाइप में
होल ज्यादा होगा ना तो एन टाइप का एग्जांपल हो जाएगा। चमका बेटा। द नंबर ऑफ़ कंडक्शन इलेक्ट्रॉन इज़ डिक्रीज। डिक्रीज
वाला केस भी नहीं आएगा। तो इस वजह से राइट ऑप्शन इज़ बी। चमक रहा है। समझ में आ रहा है मेरे दोस्तों? हटा सावन की घटा कमेंट
सेक्शन में बोल। स्वाहा। ओके। अब जो पूछा गया था 2025 की बात कर रहा था कि क्वेश्चन पूछा गया है। किस
फार्मूला पर बेस्ड क्वेश्चन पूछा गया है? कि NE * NH = ni² ये कांसेप्ट पे क्वेश्चन पूछा गया
है। ओके? फार्मूला सबको याद होगा मेरे ख्याल से और ना याद हो तो याद रखते जाना। क्वेश्चन जैसे-जैसे प्रैक्टिस करोगे
वैसे-वैसे याद रहता जाएगा। लेकिन याद रखना सबसे बड़ा पार्ट होता है कि इसका इस्तेमाल कैसे करेंगे? इसका यूज़ कैसे करेंगे?
क्योंकि लैंग्वेज से फॉर्मूले तक पहुंचना इनेशन तक वो इट्स अ बिग पार्ट। इस इस खास करके इस चैप्टर में। तो पहले पढ़ो कि अ पी
टाइप सिलिकॉन सेमीकंडक्टर इज़ मेड बाय अ डोपिंग ऑन एवरेज वन डोपेंट स्पेसमेन स्पेसिमेन इज़ अ 5 * 10 टू पावर 18 एटम्स
पर मीटर ठीक है सुनना कितने एटम्स हैं यहां पर 5 * 10 टू पावर 28 एटम्स हैं पर मीटर में।
फाइंड द नंबर ऑफ होल्स क्रिएटेड पर क्यूबिक सेंटीमीटर में एनएच इन सेंटीमीटर क्यूब निकालनी है। ओके? और बता रखा है
यहां पर कि डोपेंड्स कितने हैं? यहां पर जो डोपेंड किए गए हैं वो 5 * 10 रेज़ टू पावर से सच अ डोपेंड्स।
ठीक है? इतने यहां पर पहले से मतलब ऐड किए गए हैं। देखना एक समझना इस बात को। हां। एक 5 * 10 रे टू पावर 10 टू पावर 7
सिलिकॉन होंगे। उसमें सिर्फ और सिर्फ एक ऐड किया गया है। कौन? डोपेंट एक डोपेंट ऐड किया गया है। तो हमारे पास कितने हैं?
हमारे पास तो है 5 * 10 रेज़ टू पावर कितना बेटा? 28 है। ठीक है? 28 सिलिकॉन है। तो इसमें कितने ऐड किए गए होंगे? तो इन दोनों
का रेश्यो ले लेंगे तो हमें पता चल जाएगा कि कितने डोपेंड्स ऐड हुए हैं। ये बन रहा है P टाइप का। तभी हमें होल की बात पूछ
रहे हैं। ठीक है? एक यहां पर बता रखा है कि वन डोपेंड्स ए वो क्या दे रहा है? एक होल की आसपास एक होल देगा। मतलब एक
अशुद्धि ऐड की। वो एक होल यहां पर देगा। तो पी टाइप की बात कर रहे हैं। लेकिन समझो ये बात कि कितने एटम ऐड किए हैं अशुद्धि
के रूप में। तो एक एक डोपेन ऐड किया जा रहा है। पर कितने पे? 5 * 10 टू पावर 7 सिलिकॉन एटम में एक डोपेन ऐड किया जा रहा
है। तो हमारे पास तो 5 * 10 टू पावर 28 है। तो पहले निकालो कि डोपेन की कंसंट्रेशन कितनी है? तो जो चीजें दे रखी
है उसी हिसाब से लिखो कि नंबर ऑफ डेंसिटी सिलिकॉन के लिए इतना दे रखा है। हमारे पास टोटल इतनी है। फिर बता रखा है कि एक
डोपेंड एटम है वो 5 * 10 टू पावर 7 में डील किया गया है। तो टोटल नंबर ऑफ होल कितने होंगे? तो डोपेंड्स कंसंट्रेशन हमें
निकालनी है। कैसे निकालेंगे ये? बहुत छोटी सी चीज है बेटा। इसको डिवाइड कर लीजिए। जैसे कि ये फाइव * 10 रेज़ टू पावर 28
डिवाइड बाय हमने कर लिया क्योंकि टोटल इतने हैं उसमें से एक के लिए इतनी आ जाएगी। 10 रेज़ टू पावर 7 5 कैंसिल आउट हो
जाएगा। ये मेरे ख्याल से आ जाएगा 10 रेज़ टू पावर 7 माइनस होगा 21 ये पर मीटर में है ना पर मीटर में है। हमें किस में
निकालना है? पर सेंटीमीटर में निकालने के लिए बोला है। ये nh मिल गया हमें। nh मिल गया। पर सेंटीमीटर में निकालना था। तो 21
/ मीटर है ना? तो मीटर को हम 10 रेज़ टू पावर 6 ये सेंटीमीटर क्यूब बन जाएगा। Okay? सिक्स ऊपर जाएगा। मेरे ख्याल से 10
रेज़ टू पावर 15 सें.मी. क्यूब माइनस में ऐसा बन जाएगा। क्या हमें यही निकालना था? फाइंड द नंबर ऑफ होल्स
क्रिएटेड पर क्यूबिक सें.मी. अरे रे बाबा। यही निकालना था। यहां पर तो आगे फार्मूला यूज़ करने के बाद नौबत ही नहीं आई। तो नौबत
नहीं आई वो बात अलग है। लेकिन पहले हमें जरूरत क्या पड़ी थी कि जो चीज़ें दे रखी है उसी से तुम बताओ हमें। बताओ हमें कि होल
की कंसंट्रेशन क्या है? तो क्वेश्चन को समझना इज अ बिग पार्ट। फॉर्मूला अप्लाई करना इट्स नॉट अ बिग पार्ट। अब वो जमाना
नहीं है। पहले ऐसा था कि फार्मूला किसको याद है? जिसको याद है वो बाजी मार जाएगा। अब फार्मूला याद है लेकिन पहले सिचुएशन को
समझो। सिचुएशन में क्या पूछा है? तुम्हें एक पार्ट में ये पूछेगा, दूसरे पार्ट में ये पूछेगा और घुमा देगा पूरा का पूरा जिस
हिसाब से पेपर्स आ रहे हैं मेरे दोस्त। तो पहले क्वेश्चन को समझना। देखना यह बात मेरी पक्की है। सुन लेना इस बात को कि जब
कभी भी आसान क्वेश्चन तुम्हारे सामने फेंक देंगे सीबीएसई या एग्जामिनेशन वाले तो समझ लेना इस क्वेश्चन में कहीं ट्विस्ट नहीं
है। एक बार और पढ़ लेना। भले ही 20 सेकंड 30 सेकंड चले जाए तो चले जाए। लेकिन अगर आसान क्वेश्चन तुम्हारे सामने है तो उसको
वापस पढ़ना कि क्या सच में यही पूछ रहे हैं ना। क्रॉस वेरीफाई करना। देखना कहीं वहां पर उन्होंने बात घुमा के ना पूछ ली
हो। ठीक है? ओके। बढ़िया। परफेक्ट। आगे बढ़े बेटा। अब इसी का मतलब दूसरा पार्ट है कि ऑन द बेसिस ऑफ एनर्जी बैंड डायग्राम।
ये हालांकि 204 में एक बड़ा क्वेश्चन पूछा गया था। उसी का मैंने एक पार्ट काटा है। तो ऑन द बेसिस ऑफ़ एनर्जी बैंड डायग्राम
डिस्टिंग्विश बिटवीन द एन टाइप सेमीकंडक्टर और P टाइप सेमीकंडक्टर। हमने एक बात पहले से बता दी है। क्या पता है?
कि एनर्जी बैंड का एक डायग्राम बता दिया है। दो तरह से हमने क्लासिफाई किया था। एक क्लासिफिकेशन हमने किया था किससे? एक
क्लासिफिकेशन किया था एक प्रॉपर डायग्राम से। तो दूसरा क्लासिफिकेशन ऐसे एनर्जी बैंड डायग्राम से कर रहे हैं। एनर्जी बैंड
डायग्राम कि ये एक वैलेंस बैंड ये वहां पर एन आ कंडक्शन बैंड ऐसा दिख रहा था ये वैलेंस बैंड और ये लिखा था कंडक्शन बैंड
यहां पर इलेक्ट्रॉन रहते थे। सेमीकंडक्टर के लिए तीन इलेक्ट्रो वोल्ट से कम रहता था। कंडक्शन बैंड के लिए दो जो कंडक्टर
होता है उनके लिए ओवरलैप करता था और इंसुलेटर के लिए तीन इलेक्ट्रो वोल्ट से ज्यादा बड़ा गैप रहता था। तो ये रेश्यो
था। अब हमें बताना है यही किसके लिए? P टाइप और N टाइप सेमीकंडक्टर के लिए। ओके। ये क्वेश्चन रहने वाला है। सुनना मेरी
बात। तो अब हम पहले बात कर रहे हैं एन टाइप की और पी टाइप की साथ-साथ। हम्म, समझना इस बात को। क्या है? एन टाइप की खास
बात क्या थी? अब हम पढ़ क्या आए हैं n टाइप? इसलिए हम इस चीज़ को बहुत डिटेलिंग के साथ बता सकते हैं। एन टाइप पे खास बात
ये थी कि यहां पर इलेक्ट्रॉन ज्यादा है। क्या है? इलेक्ट्रॉन ज्यादा है। n यानी कि नंबर ऑफ इलेक्ट्रॉन एज कंपेयर टू नंबर ऑफ
होल ज्यादा है। पी टाइप यानी नंबर ऑफ होल ज्यादा है एज कंपेयर टू इलेक्ट्रॉन। मतलब कि यहां पर इलेक्ट्रॉन देने वाला ज्यादा
है। यहां पर लेने वाला ज्यादा है। समझना पी टाइप यानी होल होल यानी लेने वाला। एन टाइप यानी एन टाइप यानी इलेक्ट्रॉन।
इलेक्ट्रॉन मतलब देने वाला। इलेक्ट्रिसिटी देने वाला। ओके, बढ़िया सर। देखना ये दोनों के बीच का एनर्जी गैप था। अगर हम
सिलिकॉन कंसीडर कर रहे हैं तो 1.1 इलेक्ट्रो वोल्ट होता है और अगर हम जर्मेनियम सिलेलेक्ट कर रहे हैं तो 0.72
इलेक्ट्रो वोल्ट होता है। अब कहानी में ट्विस्ट ये है कि अब भी ये गैप बड़ा है। हमें इस गैप को छोटा करना है तो हम क्या
करेंगे? हम अशुद्धि ऐड करेंगे। क्या करेंगे? डोपिंग करेंगे। डोपिंग ऐड की। मान लीजिए पेंटावेलेंट ऐड किया। पेंटावेलेंट
ऐड किया क्या बन गया ये? एन टाइप बन गया। तो जब कभी भी एन टाइप सेमीकंडक्टर की बात करते हैं तब यहां पर
यहां पर डोनर लेवल मतलब देने वाला है वो आगे बढ़ जाता है। याद रखना बेटा देने देने वाला इससे बहुत ऊपर तक चला जाता है। ऊपर
तक चला जाता है। देख पहले कंडक्शन बैंड और वैलेंस बैंड ही थे। लेकिन अब देने वाला बढ़ जाता है। देने वाला यहां तक दे सकता
है। यहां तक यहां तक दे सकता है। क्या बड़ी बात भाई साहब। अब इलेक्ट्रॉन बढ़ गए देने वाला यहां तक डोनर लेवल तक पहुंच
गया। भाई अब इतना ही तो फासला पसंद करना है। अब इतना ही फासला उसको पसंद करना है। अब अब एनर्जी गैप और भी कम हो गया है। घट
गया है। ठीक है? तो इस चीज को याद रखना कि डोनर एनर्जी लेवल लाइज जस्ट बिलो द कंडक्शन बैंड। सीबी मतलब कि जस्ट बिलो द
कंडक्शन बैंड। सीबी मतलब कंडक्शन बैंड। सीबी मतलब कंडक्शन बेंड। ठीक है? ये पहली बात हमने पढ़ी। बहुत काम की बात है। छोटी
बात है लेकिन बहुत काम की बात है। यहां से भरपूर मात्रा में एमसीक्यूस लिखे जा सकते हैं। जितने स्टार कर सकते हो उसको उतने
स्टार कर लो। ओके? अब सुनो P टाइप में क्या था? लेने वाला। लेने वाले में खास बात क्या है? कि इलेक्ट्रॉन कंडक्शन बैंड
लेगा ना इलेक्ट्रॉन। तो अब कंडक्शन बैंड वाला है वो यहां तक एक्सेप्ट कर लेगा। भाई तुम्हें ऊपर तक पहुंचाने की जरूरत नहीं
है। तुम यहां तक पहुंचा दोगे तब भी मैं राजी हूं। तब भी मैं खुश हूं। तो जस्ट वैलेंस बैंड के ऊपर एक एक्सेप्टर लेवल
डेवलप हो गया कि यहां तक इलेक्ट्रॉन तुम पहुंचा दो। हो वैलेंस बैंड वालों तुम इलेक्ट्रॉन को यहां तक पहुंचा दो तब भी
मैं आपका काम कर दूंगा। तब भी मैं कंडक्शन कंड मतलब तब भी मैं मान लूंगा कि इलेक्ट्रॉन कंडक्शन बैंड में पहुंच चुका
है। ओके? तो एक्सेप्टर एनर्जी लेवल लाइज जस्ट अबव द वैलेंस बट बहुत काम की बात है बेटा। बहुत सुन ली ये बात। ओके? सुन ली
पुकार आपकी। अब पहले मैंने एक बात बताई पता है कि जैसे ही डोपिंग ऐड करते हैं ना तो जो पेंटावेलेंट या ट्राईवेलेंट एटम ऐड
हुआ है उसकी वजह से एक और एनर्जी बैंड मिल जाता है जिसकी वजह से एक एनर्जी लेवल मिल जाता है हमें कि जो एक कंसंट्रेशन हमें जो
इलेक्ट्रॉन के बारे में बताया गया कि इसके नीचे इलेक्ट्रॉन है इसके ऊपर वाले पार्ट में इलेक्ट्रॉन नहीं है। यहां नीचे एक
लेवल है वहां पर इलेक्ट्रॉन है। इससे ऊपर वाले पार्ट में इलेक्ट्रॉन नहीं है। उसी को कहा गया है फर्मी लेवल। तो फर्मी लेवल
इज एनर्जी लेवल दैट सेपरेट्स फील्ड एन एम्पेटी इलेक्ट्रॉन्स एनर्जी स्टेट्स। कि ये हमें बताता है कि यहां से
ऊपर इलेक्ट्रॉन नहीं है। यहां से नीचे इलेक्ट्रॉन है। ठीक है? ये थर्मल इक्विलिब्रियम पे हमें सजेस्ट करता है। तो
फर्मी लेवल वो हमें मिलता है कहां पर? एन टाइप में जस्ट बिलो द डोनर लेवल। जस्ट बिलो द डोनर लेवल। कि इसके नीचे
इलेक्ट्रॉन है। इसके ऊपर इलेक्ट्रॉन नहीं है। इसके ऊपर इलेक्ट्रॉन नहीं है तो फर्मी लेवल शिफ्टेड अपवर्ड क्लोज्ड टू कंडक्शन
बैंड। कंडक्शन बैंड के कहां से? फर्मी लेवल शिफ्टस अपवर्ड। ठीक है? ये फर्मी लेवल है वो नीचे से उठ के कहां चला गया?
ऊपर। पहले यहां तक ही था। पहले यहां तक ही था। अब नीचे से उठ के ऊपर चला गया। कहां पहुंच गया? कंडक्शन बैंड के नजदीक पहुंच
गया। कि भाई अब देखो यहां से नीचे तक यहां सब में इलेक्ट्रॉन इलेक्ट्रॉन है। ऊपर नहीं है। ऐसा बता रहा है। देखिए
इलेक्ट्रॉन यहां तक पहुंच गए तो ये फर्मी लेवल हमें वो रिप्रेजेंट करता है कि यहां पर भी आपको इलेक्ट्रॉन देखने को मिल सकते
हैं। जबकि पी टाइप में क्या कहानी है? देखिए याद रखना बेटा। देखना देने वाला ऊपर जा रहा है। देने वाला ऊपर जा रहा है। यहां
पर लेने वाला नीचे आ रहा है। लेने वाला नीचे आ रहा है। ओके? तो फर्मी लेवल शिफ्टेड डाउनवर्ड। फर्मी लेवल शिफ्टेड
डाउनवर्ड। ये फर्मी लेवल बेटा नीचे जनरेट हो गया है। और ये बता रहा है बेटा की ये जस्ट क्लोज टू वैलेंस बैंड। जस्ट क्लोज टू
वैलेंस बैंड कि भाई इसके नीचे नीचे नीचे नीचे इलेक्ट्रॉन है। ऊपर ऊपर इलेक्ट्रॉन नहीं होंगे। तो फर्मी लेवल हमें दोनों के
इलेक्ट्रॉन कहां है? कहां नहीं है उनके दोनों के बीच का एक सेपरेशन के पैमाने पे एनर्जी लेवल के बारे में बताता है।
परफेक्ट बेटा। देखना इस चीज़ में आपने दो चीज़ें नहीं पढ़ी। एक फर्मी लेवल पढ़ा है, एक डोनर एनर्जी लेवल पढ़ा है और एक्सेप्टर
एनर्जी लेवल भी पढ़ा है। तो ये कोई मतलब ऐसा नहीं कि खूंखार चीज़ है। इसको डायग्राम से ही सीखना है हमें कि क्या होता है
एक्सेप्टर लेवल? क्या होता है? जहां से एक्सेप्ट करने की नौबत आ सकती है। ठीक है? जहां से एक्सेप्ट किया जा सकता है। तो
एक्सेप्टर एनर्जी लेवल। डोनर मतलब यहां तक मैं दान पुण्य कर सकता हूं। वो लेवल यानी डोनर एक्सेप्टर लेवल। फर्मी लेवल हमें
सेपरेट बताता है कि इलेक्ट्रॉन यहां तक है। यहां तक नहीं है। ठीक है? और क्या समझा था? एन टाइप में हमने समझा था कि
एनर्जी लेवल है बेटा वो। देख डोनर वाला है वो ऊपर तक कंडक्शन बैंड के पास में चला जाएगा। यहां पर लेने वाला एक्सेप्टर लेवल
है वो नीचे तक आ जाएगा। फर्मी लेवल कंडक्शन बैंड के पास फर्मी लेवल बैलेंस बैंड के पास चमका बेटा। चमका ये
इंपॉर्टेंट थ्योरिटिकली बातें हैं लेकिन मैं बहुत सेपरेशन के साथ मतलब बहुत दोनों को सेपरेट-सेपरेट करके लाया हूं और
कंपैरिजन पॉइंट ऑफ व्यू से लाया हूं कि आपके दिमाग में एकदम बैठ जाए। ठीक है? यहां से एमसीक्यूस पूछा जाए, छोटा
क्वेश्चन, मोटा क्वेश्चन, कोई भी क्वेश्चन पूछा जाए, आपको समझ में आना चाहिए मेरे दोस्त। वरना पकड़ के मारूंगा तुम्हें।
ओके? आगे बढ़े। लीजिए बेटा। अब हम एक खंखार टॉपिक पढ़ने जा रहे हैं जिसका नाम है पी एन जंक्शन। यही वो क्रांतिकारी चीज है जहां
से सेमीकंडक्टर, चिप्स, सेमीकंडक्टर, आईसी जो इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेस हैं उनके बनने की शुरुआत होगी। हां, ये फर्स्ट स्टेप। अब
तक हम सीख रहे थे कि n टाइप क्या होता है? पी टाइप क्या होता है? अब पहले प्योर समझा, फिर n टाइप, p टाइप समझा। दो तरीके
से समझा। एक पूरा प्रॉपर सिलिकॉन कैसे चार-चार कोवेलेंट बॉन्ड से समझा केमिस्ट्री के पॉइंट ऑफ व्यू से। दूसरा
हमने एनर्जी बैंड थ्योरी से पढ़ा जो हम पढ़ रहे थे अभी फिजिक्स के पॉइंट ऑफ व्यू से। अब दोनों का कॉम्बिनेशन मतलब एक साइड P
है, एक साइड N है। दोनों को मिला दो। क्या बन गया? PN जंक्शन बन गया। जहां पर मिलेंगे उसी पार्ट को हम PN जंक्शन कहा
करते हैं। तो पहले तो एक छोटी सी प्यारी सी नन्ही सी मुन्नी सी डेफिनेशन लिखो। इट इज फॉर्म
व्हेन पी टाइप सेमीकंडक्टर एंड एन टाइप सेमीकंडक्टर आर जॉइंटेड एट टुगेदर विद इन द सेम क्रिस्टल एक ही क्रिस्टल है और
उन्हीं में बनाया जा रहा है ये एक साइड डोपिंग करके हमने n टाइप बना लिया एक साइड डोपिंग करके हमने पी टाइप बना लिया और
दोनों को जॉइंट कर दिया बस खतम बेटा अब बेटा देख n टाइप में इलेक्ट्रॉन ज्यादा पी टाइप में प्रोटो प्रोटॉन नहीं ज्यादा होल
की कंसंट्रेशन ज्यादा है होल यानी एक तरह से पॉजिटिव चार्ज की तरह बिहेव करता है एक्चुअली में है नहीं लेकिन होल मतलब खाली
जगह लग गया। ठीक है? और एक तरफ इलेक्ट्रॉन नेगेटिविटी से भरपूर आपकी तरह। तो बेटा वो तो होल को देख के अट्रैक्ट होंगे ही
होंगे। जैसे ही तुमने n टाइप और p टाइप को इकट्ठा किया दोनों एक दूसरे की तरफ अट्रैक्ट होंगे ही होंगे। दोनों होंगे
यहां पर। हां तो होगा ये बेटा कि जैसे ही तुमने बेटा दोनों को मैच करवाया। दोनों को मिक्स करवाया। अब होल इलेक्ट्रॉन को देख
के अरे हां हो सकता है कुछ-कुछ। इलेक्ट्रॉन ऐसे देख के। अरे हां होल दिख रहा है कुछ-कुछ हो सकता है तो दोनों एक
दूसरे की तरफ भाग रहे हैं। यहां से मेजॉरिटी चार्ज कैरियर इलेक्ट्रॉन है ये इलेक्ट्रॉन उठ उठ के यहां पर आ रहे हैं।
कौन? मेजोरिटी चार्ज कैरियर मेजोरिटी चार्ज कैरियर मतलब इलेक्ट्रॉन। क्योंकि भाई एन टाइप में क्या है? इलेक्ट्रॉन ही
तो है। तो ये इलेक्ट्रॉन उठ उठ के इस तरफ आ रहे है। और सेम यहां पर है खाली होल होल। खाली खली होल होल पिंकी पिंकी से
ड्रॉ करता हूं। ये होल बेटा उठ उठ के यहां पर आ रहे होंगे। ठीक है? ये होल जा रहे हैं और ये इलेक्ट्रॉन्स जा रहे हैं। तो
होल्स और ये इलेक्ट्रॉन जो दोनों में मेजॉरिटी मेजॉरिटी चार्ज कैरियर के रूप में था वह एक दूसरे की तरफ जा रहे हैं और
एक दूसरे को डिफ्यूज कर रहे हैं। समझ आ रहा है? डिफ्यूज कर रहे हैं। तो देख होल का मोमेंटम किस होल की डायरेक्शन किस तरफ
है? इस तरफ है ना बेटा। इस तरफ। p से एन की तरफ। तो होल की वजह से जो करंट मिल रहा है, दैट इज P टू। P टू N। ओके? ये P टू N।
प्लस ये होल की वजह से करंट। किस डायरेक्शन में है? P टू N। अरे बेटा जी P टु N। दूसरा इलेक्ट्रॉन N से P जा रहे
हैं। लेकिन इलेक्ट्रॉन की नेगटिव डायरेक्शन में करंट माना जाता है। तो प्लस करके प्लस करके इलेक्ट्रॉन का करंट यानी
कि P टू N। तो दोनों एक तरह से ऐसा बताएंगे कि P2 एंड P2N का करंट मिल रहा है और इसी करंट को हम बोलते हैं डिफ्यूजन
करंट। इसी करंट को हम बोलते हैं डिफ्यूजन करंट। ये किसकी वजह से? दोनों के मेजॉरिटी चार्ज कैरियर की वजह से। किसकी वजह से?
क्योंकि पहला पार्ट है वो मेजॉरिटी में खेला जाएगा। माइनॉरिटी चार्ज कैरियर बस बैठे-बैठे देख रहे हैं कि क्या हो रहा है।
बैठे-बैठे देख रहे हैं क्या हो रहा है। क्योंकि पहला पड़ाव तो यही करेंगे ना जो मेजॉरिटी में है वो काम करेंगे। वो एक
दूसरे को देख के अट्रैक्ट करेंगे। पहला पड़ाव उनका रहेगा। पहला काम उनका रहेगा। फिर माइनॉरिटी धीरे-धीरे से जगेंगे। तो
देख यहां से होल उठ उठ के इस तरफ आने लगे। इलेक्ट्रॉन उठ उठ के यहां पर आने लगे। तो कहानी में होता ये है कि बीच की जो रीजन
है ना वो फुलफिल हो जाती है। ये पूरी डिफ्यूज हो जाती है। क्या? क्योंकि समय के साथ-साथ ये इलेक्ट्रॉन उठ उठकर यहां पर,
यहां पर आने लगे, ये इलेक्ट्रॉन उठ उठकर यहां पर आने लगे, इलेक्ट्रॉन उठकर के यहां पर आने लगे। ये वाले इलेक्ट्रॉन थे वो उठ
उठकर के यहां पर आने लगे और इस साइड वाले इस साइड वाले बेटा होल थे वो उठ उठ के यहां पर आने लगे तो ये होल ये होल ये होल
ये होल ये होल ठीक है तो ये यहां पर बेटा होल्स जम गए मतलब पॉजिटिव चार्ज बच गया और इस तरफ इस तरफ इलेक्ट्रॉन्स जम गए
इलेक्ट्रॉन्स जम गए ठीक है तो एक तरफ होल्स एक तरफ इलेक्ट्रॉन ओके तो इससे हुआ क्या बेटा
ड्यू टू कंसंट्रेशन ग्रेडिएंट होल्स डिफ्यूज फ्रॉम अ पी टू एन साइड इलेक्ट्रॉन्स डिफ्यूज फ्रॉम अ n टू p साइड
और जिसकी वजह से हमें नेट करंट मिल रहा है। करंट ड्यू टू अ मेजोरिटी चार्ज कैरियर। ठीक है? इसी करंट को हम डिफ्यूजन
करंट के नाम से भी जानते हैं। डिफ्यूजन करंट के नाम से भी जानते हैं। अब देख इसी करंट की वजह से ना एक रीजन एक जमा हो गई।
जैसे कब कंटीन्यूअसली करेंट ऐसे ऐसे ऐसे बह रहा था। तो इसकी वजह से कंटीन्यूअसली होल ऐसे ऐसे ऐसे ऐसे आ रहे थे। इलेक्ट्रॉन
ऐसे ऐसे जा रहे थे। तो वो एक जगह जमा होने लगे। एक जगह क्या होने लगे बेटा? जमा होने लगे। ये इस रीजन में है ना अच्छा खासा जमा
होने लगे। इलेक्ट्रॉन्स और ये होल। तो एक रीजन बनने लगी जिसको डेप्लीशन रीजन के नाम से जानते हैं कि भाई यहां पर है ना
यहां पर है ना बेटा जम गए हैं इलेक्ट्रॉन और होल। यहां पर ऐसे जम गए हैं कि ये इलेक्ट्रॉन अब ना भागने का नाम ले रहे हैं
ना छूटने का नाम ले रहे हैं। यहां पर जम गए हैं और उल्टा ये है ना पॉजिटिव की तरह बिहेव कर रहा है होल और इलेक्ट्रॉन है वो
नेगेटिव की तरह बिहेव कर रहा है। तो ये ऐसी इलेक्ट्रिक फील्ड भी बना रहे हैं। ऐसे इलेक्ट्रिक फील्ड भी बना रहे हैं देख
पॉजिटिव से नेगेटिव की ओर इलेक्ट्रिक फील्ड भी बना रहे हैं। तो जहां पर ये ऐसी इलेक्ट्रिक फील्ड बन रही है उस रीजन को
डेपलीशन रीजन बनते हैं। जहां पर ये इलेक्ट्रॉन जमे हुए हैं, डिफ्यूज हो चुके हैं, वहां पर मतलब उस रीजन को हम बोलते
हैं डेप्लीशन रीजन। इज द रीजन नियर द पीएन जंक्शन। जहां पर ये मिल रहे हैं। ये यहां पर एक्चुअल में मिड पॉइंट था ना? तो ये
पीएन जंक्शन के नजदीक मिल रहे हैं विदाउट फ्री इलेक्ट्रॉन कि अब फ्री इलेक्ट्रॉन या होल्स मूवमेंट नहीं कर सकते। वो फिक्स्ड
हो गए हैं। डिफ्यूज हो चुके हैं, फिक्स्ड हो गए हैं। ठीक है? ओके। फॉर्म्ड ड्यू टू अ रिकॉम्बिनेशन। रिकॉम्बिनेशन हो गया। होल
उठ उठ के इस तरफ आए। इलेक्ट्रॉन उठ के इस तरफ। रिक्बिनेशन हो गया। अब वो डिफ्यूज हो गए। ऐसे यहां पर खड़ गए हैं। अब अपन नहीं
हिलेगा। जिसको जाना है वो जाए। अपनी हां मैं तो यहां पर ही रहूंगा। ऐसे ही रहूंगा। तो एक रीजन जो पूरी की पूरी बन गई उसको
डेप्रिसिशन रीजन कहते हैं। बहुत छोटी रीजन होती है। इसकी विड्थ भी वेरी करेगी। धीरे-धीरे मैं बताऊंगा उस हिसाब से। मतलब
आगे कुछ कांसेप्ट बताऊंगा। 10 रेज़ टू पावर -7 मीटर के हिसाब से इसकी विड्थ लिखी जाती है। ये विड्थ
पॉइंट 1 माइक्रो मीटर भी लिख सकते हो। 10 टू पावर 7 मीटर पे भी लिख सकते हो। ओके? यही डिप्लीशन रीजन में एक इलेक्ट्रिक
फील्ड भी जमा हो गई। ध्यान से देख बेटा। ये होल यानी पॉजिटिव चार्ज इलेक्ट्रॉन मतलब नेगेटिव। क्या इलेक्ट्रिक फील्ड बन
जा रही है इसके अंदर ही? हां यार इलेक्ट्रिक फील्ड ये तो मैंने सोचा ही नहीं था। डिप्लेशन रीजन के अंदर ही एक
इलेक्ट्रिक फील्ड बन जा रही है जो पॉजिटिव से नेगेटिव होल से इलेक्ट्रॉन की तरफ यानी n से n से
कौन सा n है। ये रहा ना n। n से p की ओर। n से p की ओर एक इलेक्ट्रिक फील्ड भी जमा होगी यहां पर। इलेक्ट्रिक फील्ड भी यहां
पर मिल रही है जो जिसकी डायरेक्शन किसकी डायरेक्शन में है? n से p की ओर इलेक्ट्रिक फील्ड की डायरेक्शन में। चमका
बेटा इतनी बात समझ में आ रही है? ये स्लाइड बहुत इंपॉर्टेंट है। मैंने बहुत समझदारी से मतलब सोच-सच के आपको बहुत
सिंपल-सिंपल पॉइंट्स में इसको तोड़ा है। क्योंकि बच्चे अक्सर कंफ्यूज हो जाते हैं। PN जंक्शन। यहां तक की सारी बात सबको समझ
में आती है। लेकिन PN जंक्शन का नाम सुनते ही अब नहीं आ रहा है। बहुत सीक्वेंस में और सिमिट्रिक वे में बता रहा हूं। ठीक है?
अब की कहानी किसकी थी? मेजॉरिटी चार्ज कैरियर की थी कि जिसकी वजह से P टाइप के होल थे वो भाग-भाग के खड़ गए कहां पर? यहां
पर खड़ गए। बेटा ये होल्स खड़ गए हैं और एन टाइप के इलेक्ट्रॉन्स थे वो ऐसे ऐसे खड़े खड़ने लगे। ऐसे ऐसे यहां पर खड़ने लगे हैं।
देखिए इलेक्ट्रॉन यहां पर यहां पर यहां पर खड़ने लगे हैं। यहां पर यहां पर यहां पर खड़ने लगे हैं। ओके? तो एक रीजन बन गई है
पूरी की पूरी। यह नेगेटिवली चार्ज, यह नेगेटिवली चार्ज और यह पॉजिटिवली चार्ज।
ये पॉजिटिवली चार्ज। ये पॉजिटिवली चार्ज। तो पॉजिटिव से नेगेटिव की ओर, पॉजिटिव से नेगेटिव की ओर,
पॉजिटिव से नेगेटिव की ओर, पॉजिटिव से नेगेटिव की ओर, पॉजिटिव से नेगेटिव की ओर ये इलेक्ट्रिक फील्ड बन गई है। ओके? ये
इलेक्ट्रिक फील्ड बन गई है। देखना अब n टाइप के अंदर भी कुछ-कुछ होल रहे होंगे। ये क्या बोल रहे हो सर? n टाइप के अंदर तो
इलेक्ट्रॉन ही होते ना। n टाइप के अंदर होल कब से होने लगे? बेटा मैं बात कर रहा हूं माइनॉरिटी की। अब मैं बात कर रहा हूं
माइनॉरिटी की। ठीक है? मैं बात कर रहा हूं माइनॉरिटी की। तो इसके अंदर होल होंगे। हां जी यार हो सकते हैं सर। माइनॉरिटी
चार्ज कैरियर के रूप में यहां पर होल्स होंगे। और ऐसे ही पी टाइप के अंदर भी इलेक्ट्रॉन
रहे होंगे थोड़े-थोड़े अमाउंट में लेकिन इलेक्ट्रॉन तो हो रहे मतलब इलेक्ट्रॉन तो रहे ही होंगे। तो ये इलेक्ट्रॉन रहे
होंगे। ओके? समझना इस बात को। तो p टाइप के इलेक्ट्रॉन यानी माइनॉरिटी माइनरिटी चार्ज कैरियर और n टाइप के होल यानी कि n
टाइप में ज्यादा इलेक्ट्रॉन होते हैं लेकिन मैं होल की बात कर रहा हूं मैं उस माइनॉरिटी की बात कर रहा हूं तू सुन दोस्त
मेरी बात ये n टाइप वाले को इलेक्ट्रिक फील्ड जो इंड्यूस हुई है वो क्या बताएगी पता है तू चल मैं तुझे सपोर्ट करूंगा तू
चल मैं तुझे सपोर्ट करूंगा ये इलेक्ट्रिक फील्ड जो जनरेट हुई है किस से किस डायरेक्शन में n से p की
ये जो इलेक्ट्रिक फील्ड बनी है यहां पर इलेक्ट्रिक फील्ड जो बनी है वो क्या बोल रही होगी वो
वो इस होल को बोल रही होगी बेटा तू चल मेरे साथ मैं तेरे साथ हूं तुझे भी जाना है माइनॉरिटी माइनॉरिटी के बीच में भी
रिलेशन बनने जा रहा है देख ये होल को बोल रही है कि तू चल उस तरफ वाले इलेक्ट्रॉन के पास मैं तेरे साथ हूं मैं तुझे सपोर्ट
करूंगी मैं तुझे सपोर्ट करूंगी ऐसी ये इलेक्ट्रिक फील्ड बोल रही है मैं किसी को सपोर्ट नहीं कर रहा हूं ना माइनॉरिटी िटी
ना मेजॉरिटी यहां पर ये इलेक्ट्रिक फील्ड बोल रही है। ओके? सेम इलेक्ट्रिक फील्ड क्योंकि पॉजिटिव चार्ज इलेक्ट्रिक फील्ड
की डायरेक्शन में मूव करता है। पॉजिटिव चार्ज इलेक्ट्रिक फील्ड की डायरेक्शन में से मूव करता है। फोर्स एक्सपीरियंस होता
है। इस वजह से इलेक्ट्रिक फील्ड सपोर्ट कर रही होगी। ओके? अब वैसे ही इलेक्ट्रॉन को भी ये इलेक्ट्रिक फील्ड बोल रही होगी
क्योंकि इलेक्ट्रिक फील्ड ऐसे है। और इलेक्ट्रॉन है वो यहां पर है। तो इलेक्ट्रॉन को अपोजिट डायरेक्शन में फोर्स
एक्सपीरियंस होता है टू द इलेक्ट्रिक फील्ड। तो ये E * E इस डायरेक्शन में फोर्स लगेगा। यहां पर E * E इस डायरेक्शन
में फोर्स लगेगा। Okay? तो माइनॉरिटी चार्ज कैरियर को ये इलेक्ट्रिक फील्ड ऐसे मूव करवा रही है। n से p होल को और p से n
इलेक्ट्रॉन को। कौन करवा रही है? इंड्यूस्ड इलेक्ट्रिक फील्ड। किसकी वजह से इलेक्ट्रिक फील्ड मिली थी? ये डिफ्यूजन
करंट की वजह से मिल रही थी। तो शुरुआत में अच्छा खासा डिफ्यूजन करंट होगा। अच्छा खासा डिफ्यूजन करंट। अच्छा खासा डेप्लीशन
रीजन। अच्छी खासी डेप्लशन रीजन। अच्छी खासी इलेक्ट्रिक फील्ड। अच्छी खासी इलेक्ट्रिक फील्ड इट सपोर्ट्स माइनॉरिटी
चार्ज कैरियर। और इसी माइनॉरिटी चार्ज कैरियर की वजह से n टाइप के होल यानी माइनॉरिटी पी टाइप की ओर जा रहे हैं और पी
टाइप के इलेक्ट्रॉन n टाइप की ओर आ रहे है मतलब अगेन करंट की डायरेक्शन n से पी की ओर होगी तो इसकी वजह से करंट एक इंड्यूस्ड
होता है एक ड्रिफ्ट करंट हमें मिलता है कि माइनॉरिटी वाले चार्ज कैरियर भी चले हैं झोला लेके कहां से कहां एनएपी तो
माइनॉरिटी चार्ज कैरियर की वजह से यहां पर माइनॉरिटी में होल का मूवमेंट कैसा है होल्स कैसे भाग होल्स भाग रहे हैं। मैं
बता देता हूं। देख यहां पर होल्स कैसे भाग रहे हैं? होल किसके होल है बेटा? ये n टाइप वाले के होल है। कहां से कहां जा रहे
हैं? n टाइप वाले के होल हैं बेटा वो n से। p की ओर जा रहे हैं। ओके? और p टाइप के जो इलेक्ट्रॉन हैं माइनॉरिटी चार्ज
कैरियर वो कहां पर जा रहे हैं? वो जा रहे हैं बेटा p से n की ओर। ओके? लेकिन आपको पता है कि इस पे करेंट की डायरेक्शन दोनों
में अपोजिट मिलती है। ठीक है? करंट की डायरेक्शन अपोजिट मिलती है टू द इलेक्ट्रॉन। तो होल की वजह से जो करंट
मिलेगा वो n टू पी सही है और इलेक्ट्रॉन की वजह से जो करंट होगा वो इसकी इलेक्ट्रॉन की मूवमेंट की डायरेक्शन से
उल्टा होता है तो n टू पी तो इस वजह से एक ड्रिफ्ट करंट मिलता है जो एन से पी की डायरेक्शन में होता है n से p की ओर
डायरेक्शन में होता है तो ड्रिफ्ट करंट किस से मिला इस इलेक्ट्रिक फील्ड से मिला है अब धीरे धीरे धीरे डिफ्यूजन करंट है वो
कांस्टेंट हो जाएगा डिक्रीज भी लिख सकते हो और ऐसा भी लिख सकते हो धीरे-धीरे ये डिफ्यूजन करंट है वो बेटा कांस्टेंट हो
जाएगा और तब माइनॉरिटी चार्ज कैरियर है वो N से P की ओर भागने लगेंगे। बता रहा हूं बेटा। डिफ्यूज़ करंट P से N और ड्रिफ्ट
करंट बेटा N से P उल्टा है। किसकी वजह से? डिफ्यूज़ मेजॉरिटी चार्ज कैरियर। ड्रिफ्ट करंट माइनॉरिटी चार्ज कैरियर की वजह से।
भूलना नहीं बेटा। हां। डिफ्यूज़न याद रख बेटा। P से N की ओर। P से N की ओर। ड्रिफ्ट ऑटोमेटिकली याद रह जाएगा। ये
उल्टा होता है। ओके? तो करंट जनरेटेड ड्यू टू द मोमेंट ऑफ अ माइनॉरिटी चार्ज कैरियर्स इज नोन एज अ ड्रिफ्ट करंट। द
ड्रिफ्ट द डायरेक्शन ऑफ़ दिस करंट इज़ N टू P साइड जो हमने ऑलरेडी बता दी है। चमक रहा है ना बेटा। एट अ थर्मल इक्विलिब्रियम
स्टेट पे क्या हो जाएगा? दो इक्विलिब्रियम वाली कंडीशन पे दोनों इक्वल इक्वल हो जाएंगे। हां। डिफ्यूजन करंट इज़ इक्वल टू
रिप करंट। बात हो गई खत्म। पैसा हो गया हजम। खाओ पियो नाचो कूदो। मौज करो बेटा। तो ये इक्विलिब्रियम की कंडीशन हो जाएगी।
एट अ स्टेडी स्टेट हो जाएगी। परफेक्ट। कैसे पीएन जंक्शन बना है वो तुम्हें समझ में आया है क्या पीएन जंक्शन का काम तो
अभी पढ़ना बाकी है लेकिन कैसे बना है और अंदर का अंदर का मैकेनिज्म कैसे काम करता है कि ड्रिफ्ट करंट क्या होता है डिफ्यूजन
करंट क्या होता है वो समझ में आया पक्की बात ओके अब सुन पीएन जंक्शन बनता कैसे है ऐसा नहीं है बेटा कि यहां से एक पी टाइप
बना लिया किसी भाई बंधु को बोला कि तू एन एन एन एन एन एन एन एन एन एन टाइप घर से बना के लाना तू पी टाइप घर से बना के लाना
दोनों को मिला लेंगे बेटा ये घर का दाल चावल नहीं है कि दाल मैं बना के लाऊंगी रोटी तू बना के लाना
स्कूल टाइम में जब लंच स्कूल में जब लंच टाइम होगा तब साथ में बैठ के खाएंगे। ये ऐसे नहीं है कि एन टाइप तू घर से बना के
ला पी टाइप तू घर से बना के ला। नहीं ऐसा नहीं है बेटा। इसमें क्या है कि एक ही क्रिस्टल लेना है आपको। एक तरफ आपने
पेंटावेलेंट डो डोपेंड किया है। एक तरफ आपने ट्राईवेलेंट डोपिंग की है। जिसकी वजह से एक टाइप एक तरह आपको एक तरफ आपको पी
टाइप देखने को मिला है। दूसरी तरफ आपको एन टाइप देखने को मिला है। इस वजह से पीएन जंक्शन बन चुका है। अब इसको अटैचमेंट
अच्छा सा करवा दो तो ये पीएन जंक्शन बन गया। तो एक ही क्रिस्टल में तुम्हें लग रहा होगा क्या फालतू क्वेश्चन है बेटा ये
क्वेश्चन 2025 में आ चुका है एमसीक्यूस फॉर्म में मैं बताऊंगा असलरेशन एंड रीजन फॉर्म में आ चुका है तो अ पीएन जंक्शन
डायोड इज़ मेड बाय डोपिंग डिफरेंट पार्ट ऑफ अ सिंगल प्योर सेमीकंडक्टर क्रिस्टल वन साइड ऑफ़ अ ट्राइवेलेंट इंप्युरिटीज़ पी
टाइप एंड द अदर विथ अ पेंटावेलेंट इंप्युरिटीज़ एन टाइप। दिस क्रिएट्स द कंटीन्यूअस जंक्शन व्हेर द पी टाइप एंड एन
टाइप रीजंस मिड एंड फॉर्मिंग अ पीएन जंक्शन। ऐसे बनता है पीएन जंक्शन। ठीक है? ओके? लिखा मतलब अभी अभी तक ऐसे पूरा नहीं
पूछा गया है कि कैसे बनता है। लेकिन मेरे दोस्त एमसीक्यू फॉर्म में आ सकता है। याद रखना इस बात को जो कि आया हुआ है। मैं अभी
दिखाऊंगा। अभी एक डायोड का कांसेप्ट पढ़ा के अभी दिखाता हूं। ठीक है? परफेक्ट। परफेक्ट। PN जंक्शन कंप्लीट हुआ। अब उसको
थोड़ी देर के लिए साइड कर दें। अब पीएन जंक्शन को हम दो उंगलियों से बांधने वाले हैं, दो मैटेलिक कंडक्टर से बांधने वाले
हैं। मैटेलिक डंडे से बांधने वाले हैं और तब जो अरेंजमेंट बन जाती है उसको कहा जाता है डायोड जो बहुत फेमस टॉपिक है और यहां
से धड़-धड़ धड़ धड़ धड़ क्वेश्चन पूछे जाते हैं। तो डायोड इज़ द टू टर्मिनल सेमीकंडक्टर डिवाइस मेड बाय जॉइनिंग पी
टाइप और एन टाइप सेमीकंडक्टर। मतलब जो पी टाइप एन टाइप की पूरी की पूरी अरेंजमेंट थी ना ऐसे देखिए ऐसा था। यह P और ये था
बेटा N. तो हमने क्या कर दिया? एक तरफ ऐसे मैटेलिक कंडक्टर और दूसरी तरफ ऐसे मैटेलिक कंडक्टर जॉइंट कर दिया। ओके आई बी इतनी सी
बात समझ में? ओके। सर समझ गए इतनी बात? अब इसी को सिंबॉलिक रूप से लिखा जाता है। क्योंकि बार-बार थोड़ी ऐसे लिखेंगे। तो पी
को रिप्रेजेंट करने के लिए हम ऐसे डंडा यूज़ करेंगे। और N को रिप्रेजेंट करने के लिए हम वर्टिकल डंडा यूज़ करेंगे। ओके सर।
तो ये पी को रिप्रेजेंट करता है और ये एन को रिप्रेजेंट करता है। ओके। बन गया बेटा ये काम। बन गया। बन गया। ठीक है? यहां पर
डंडा नहीं करना चाहिए ऐसे। हां, ऐसे ही सीधा कर दो। ओके। ये PN जंक्शन का सिंबल हो जाता है। इसको पी डंडे को एन टाइप कहते
हैं। ओके। दिखने में कुछ ये डायोड ऐसा होता है जो आपने शायद इलेक्ट्रिक सर्किट में भी देखा होगा कहीं-कहीं पे कि
इलेक्ट्रिक सर्किट होती है ना वहां पर ऐसे छोटे-छोटे डायोड बहुत लगाए गए होते हैं। तो ये बहुत छोटे होते हैं। मैं तो आपको
जूम कर करके दिखा रहा हूं। ठीक है? इसकी खास बात क्या होती है पता है डायोड की? ऐसा तरह से समझो कि ये एक जुरासिक पार्क
है। ये जुरासिक पार्क में ना हर कोई अंदर आ सकता है। लेकिन जाएगा हर कोई नहीं बेटा। मैं किसी को ही बाहर निकलने दूंगा। जो
समझदार होगा जो सही डायरेक्शन वाला होगा उसको जाने दूंगा। कोई अपोजिट से उंगली करने आएगा, तो उसको जाने नहीं दूंगा। यह
डायोड भी कुछ तरह से ऐसे जुरासिक पार्क की टाइप से है। हर किसी को जाने नहीं दूंगा। सिर्फ यही सही रास्ते से जो आएंगे उसको
मैं सही सलामत बाहर निकलने दूंगा। वरना काट-पीट के मार डालूंगा बेटा। तो डायोड एक तरह से ऐसा डिवाइस है कि जो करंट को एक ही
डायरेक्शन में अलो करता है। दोनों डायरेक्शन मतलब तुम कभी भी आओगे कभी भी जाओगे ऐसा नहीं। एक गेट है। इसमें से जो
आएगा वो दूसरी तरफ निकल पाएगा। कहीं बीच में से एंट्री लोगे बेटा बीच में बीच में खा जाऊंगा। तुम्हें जाने नहीं दूंगा। ऐसा
डायोड बोल रहा है जुरासिक पार्क की तरह। अलाउज़ करंट इंटू अ फ्लो ओनली वन डायरेक्शन। इस प्रॉपर्टी का हम बहुत भरपूर
मात्रा में यूज़ करने वाले हैं। अब दिमाग में ये सवाल आएगा कि कब ये करंट को फ्लो करने देगा? कब यह करंट को फ्लो नहीं करने
देगा? तो मैं बता रहा हूं डायरेक्शन बेसिस पे। जब भी जब भी बेटा पी टाइप वाले को हायर पोटेंशियल पे रखते हैं। कहां पर? P
टाइप वाले को हायर पोटेंशियल पे रखते हैं। ये P टाइप सेमीकंडक्टर मतलब P टाइप ये PN जंक्शन डायोड को ये P को अगर हायर
पोटेंशियल पे सेट करते हैं और N टाइप वाले को लोअर पोटेंशियल पे सेट करते हैं। तब करंट को फ्लो करने देगा। तब ये क्या
करेगा? करंट को फ्लो करने देगा। देखिए यहां पर पॉज़िटिव टर्मिनल लिखा है। लेकिन मैं इस यहां पर लिखता हूं कि ये हायर
पोटेंशियल पे होना चाहिए। पॉजिटिव नेगेटिव से कंफ्यूज मत हो। ठीक है? ये समझने के लिए सही है। लेकिन सही में याद ऐसा रखना
चाहिए कि n टाइप यानी लोअर पोटेंशियल। लोअर पोटेंशियल पे जब सेट होगा तब इस स्थिति को कहा जाएगा फॉरवर्ड बायसिंग।
फॉरवर्ड बायसिंग ऑफ़ पीएन जंक्शन डायोड। तब ये करंट को फ्लो करने देगा। अदरवाइज़ करने नहीं देगा। ठीक है? तो यहां पर करंट फ्लो
करेगा। अगर इसका उल्टा हो तो। जैसे कि ये एन टाइप वो नेगेटिव से कनेक्ट हो गया। यानी कि यहां पर लोअर पोटेंशियल स्टेट हो
गया होगा। और p टाइप है सॉरी पी टाइप था वो लोअर पोटेंशियल सेट सेट हो गया और एन टाइप है वो बेटा वो हायर पोटेंशियल से सेट
हो गया। तो ये उल्टा कनेक्शन हो गया ना। उल्टा यानी कि n तो नेगेटिव नेगेटिव को नेगेटिव के साथ कनेक्ट करना तुमने तो
पॉजिटिव के साथ कनेक्ट कर दिया। ऐसा नहीं चल सकता। तो इस प्रोसेस को इस कनेक्शन को रिवर्स बायस कनेक्शन कहते हैं। कि जिसमें
पी टाइप है बेटा वो लोअर पोटेंशियल पे सेट कर दिया है और एन टाइप जो खुद नेगेटिव है उसको पॉजिटिव के साथ कनेक्ट कर दिया हायर
पोटेंशियल पे सेट कर दिया। नेगेटिव पॉजिटिव याद रखने के लिए सही है लेकिन एक्चुअल में हायर और पोटेंशियल का खेल
होता है यहां पर रिस्पेक्टिव में देखा है कौन हायर है और कौन लोअर है? हो सकता था कि ये -5 हो और ये -2 हो तो ये -2 बड़ा आ
जाएगा। तब भी ये रिवर्स बायस की कंडीशन सेटिस्फाई कर रही है। आगे क्वेश्चन आएगा इसलिए बता रहा हूं अभी से। ओके? यहां पर
करेंट ऑलमोस्ट ज़ीरो हो जाएगा। ठीक है? थोड़ा बहुत लीक करेगा वही करंट फ्लो कर पाएगा। अदरवाइज़ करंट को ये फ्लो करने नहीं
देगा। ओके? करंट को फ्लो करने नहीं देता है। रिवर्स बायस में करंट को फ्लो नहीं करने देगा। ओके? तो ऐसा बता सकते हो कि
अगर आइडियल सिचुएशन में मान लूं ना। आइडियल सिचुएशन, तो डायोड अगर रिवर्स बायस में है, क्या है बेटा? ना डायोड अगर
रिवर्स बायस में तो एक ओपन सर्किट की तरह बिहेव करता है। ये डायोड क्या करता है? ओपन सर्किट की तरह बिहेव करता है। देख बीच
में कुछ है ही नहीं। ये ओपन सर्किट की तरह बिहेव करता है। और अगर फॉरवर्ड बायस में मैं आइडियल कंडीशन मान लूं कि अगर डायोड
का कोई रेजिस्टेंस वगैरह कुछ भी नहीं है, पोटेंशियल डिफरेंस कुछ भी नहीं है, तो डायोड है वो एक कंडक्टिंग वायर की तरह
बिहेव करता है। क्या करता है? कंडक्टिंग। मतलब डायोड को हटा दो अगर फॉरवर्ड बायस में तो, तो वो कंडक्टिंग वायर के जैसा
बिहेव करेगा। ओके? अब दो पॉइंट यहां पर साथ-साथ लिख दिए हैं। मैं अभी इसकी डिटेल में बात बताऊंगा। लेकिन याद रहे तो बहुत
अच्छी तरीके से याद रखना। देखिए बैटरी है ना वो P टाइप मतलब पॉजिटिव के साथ कनेक्टेड है। यहां पर पॉजिटिव पॉजिटिव
चार्ज बढ़ाएगा। मतलब मेजोरिटी को सपोर्ट करने वाला कोई आ गया। सुनना बात मेरी मेरी बात सुनना। ये P टाइप क्या करेगा? यहां पर
ये पॉजिटिव चार्ज। ये यहां वाले होल को और इलेक्ट्रॉन को सपोर्ट करेगा ना? अरे भाई मैं ताकत दे रहा हूं मैं तुम्हें। सुनो एक
बात बहुत अच्छी तरीके से वापस बता रहा हूं। इसके अंदर होगा क्या? ये देख सेम पोटेंशियल पे PN जंक्शन भी
क्या है? PN जंक्शन भी क्या है? एक तरह से पोटेंशियल डिफरेंस वाला ही खेल है। पोटेंशियल डिफरेंस वाला ही खेल है। तो ये
इस डेप्लीशन रीजन को घटाता है और पोटेंशियल बैरियर को रिड्यूस करता है। अभी एक बात समझ में आ जाए तो एक बार वापस
देखना। क्योंकि मैं इसको डिटेलिंग में आने वाले दो पॉइंट में बताने वाला हूं। तो याद रखना बेटा कि अगर फॉरवर्ड बायसिंग की बात
कर रही है। फॉरवर्ड बायसिंग की बात में डेप्लीशन रीजन घटता है और पोटेंशियल बैरियर भी घटता है। पोटेंशियल बैरियर भी
घटता है। बैरियर घटेगा वो रिलेट कर सकते हैं। बैरियर घटता है तभी तो करंट अच्छा खासा फ्लो करता है। अदरवाइज़ कर नहीं सकता
है। इस पॉइंट को स्टार कर लें। डेप्लीशन रीजन क्यों घटती है? वो भी एग्जांपल से बताऊंगा। जबकि रिवर्स बायस में सुनना इस
बात को। डेप्लीशन रीजन है वो बेटा इनक्रीस करती है। क्यों उसका आंसर अभी पीछे चला है। पीछे पता चलेगा। और बैरियर पोटेंशियल
इंक्रीज़ करता है। तो बैरियर ही तो इसका नाम ही है बैरियर, बैरियर पोटेंशियल। ठीक है? तो ये बैरियर पोटेंशियल है वो इंक्रीज़
करता है ताकि करंट हमें बहुत कम मिलता है। इसी वजह से तो करंट हमें कम मिलता है। ओके? तो डेप्लीशन रीजन फॉरवर्ड बायस में
कम होती है। रिवर्स बायस में हमें बढ़ती हुई प्रतीत होती है। ठीक है? करेक्ट। करेक्ट। करेक्ट। यहां तक की बात समझ में
आई? ओके। बढ़िया। ये किसकी बात थी? फॉरवर्ड बायस और रिवर्स बायस। इसी को डिटेलिंग के साथ पढ़ते हैं। डेप्लिशन रीजन की कहानी
पढ़ते हैं। और देखो यहां पर हुआ क्या बेटा? फॉरवर्ड बायस में जब तक ये बायस बायस कुछ नहीं लगाया जाता था तो पीएन जंक्शन का
पोटेंशियल डिफरेंस ऐसा था। पोटेंशियल डिफरेंस कुछ ऐसा था। ये P का पोटेंशियल डिफरेंस और यहां पर N। ओके? ये ऐसा कुछ
पोटेंशियल डिफरेंस था। ठीक है? अब जैसे ही एक्सटर्नल एक बैटरी लगा दी, डिफरेंस अप्लाइड बाई द बैटरी रिड्यूस द पोटेंशियल
बैरियर इनसाइड दिस पीएन जंक्शन। ठीक है? एक पोलरिटी दोनों की वो अपोजिट साइड बड़ी है। इस वजह से ये पोटेंशियल बैरियर को
क्या कर देता है? कम कर देता है। इसलिए पोटेंशियल बैरियर को बेटा देख ध्यान से कम कर दिया। ठीक है? बैरियर क्या कर दिया? कम
कर दिया। बैरियर कम कर दिया मतलब कि अंदर डेप्लीशन रीजन की जो इलेक्ट्रिक फील्ड थी ना उसको कम कर दिया। पोटेंशियल बैरियर कम
कर दिया। वो इलेक्ट्रिक फील्ड को रिड्यूस कर दिया। इलेक्ट्रिक फील्ड को रिड्यूस किया वो डेप्लीशन रीजन को रिड्यूस कर दिया
है। दैट्स व्हाई वी नीड टू राइट कि एज़ द रिजल्ट द इलेक्ट्रिक फील्ड इज़ डिक्रीज एंड हेंस द डेप्लीशन रीजन इज़ श्रिंक्स।
डेप्लीशन रीजन कम होती है। ठीक है? इस घटना में हमें जो करंट मिलता है वो डिफ्यूजन वाला अच्छे खासे पैमाने पे मिलता
है। और हमें पता है कि डिफ्यूजन करंट है वो किससे कौन सी डायरेक्शन में मिलता है? पी से एन की डायरेक्शन में मिलता है।
दैट्स इट फॉर फॉरवर्ड बायसिंग। आया समझ में? आया समझ में? फॉरवर्ड बायसिंग पोटेंशियल बैरियर घटा। पोटेंशियल बैरियर
घटा। इलेक्ट्रिक फील्ड घटी। इलेक्ट्रिक फील्ड घटी। उस डेप्लिशन रीजन की साइज कम होने लगी है। तो हमें डेप्लीशन रीजन किसको
सपोर्ट कर रही थी? वो इलेक्ट्रिक फील्ड किसको सपोर्ट कर रही थी? ड्रिफ्ट वाले को। तो वो इलेक्ट्रिक फील्ड ही कम हो गई है।
ड्रिफ्ट वाले को क्या? हाफ सपोर्ट करेगी। हां। तो इसी वजह से डिफ्यूजन करंट हमें अच्छा खासा मिलेगा। और वही रीज़न भी था
इलेक्ट्रिक फील्ड का कम होने का। क्योंकि बैटरी इसी को सपोर्ट कर रही है। बैटरी इस मेजॉरिटी चार्ज वाले को सपोर्ट कर रही थी।
ओके? अब इससे उल्टा है रिवर्स बायसिंग। रिवर्स बायसिंग इससे उल्टा है। इस कहानी में क्या है? देखो पहले पोटेंशियल बैरियर
था वो इतना था जो कि हमने पहले भी देखा था जब कोई बैटरी नहीं लगाई थी। जैसे ही बैटरी लगा दी रिवर्स बायसिंग में। ये बैरियर और
बढ़ गया। बैरियर पहले था उससे भी और बढ़ गया बेटा। तो जैसे ही बेटा पोटेंशियल बैरियर बढ़ गया किसकी वजह से? एक्सटर्नल
बैटरी लगाने की वजह से। ओके। तो ये क्या करेगा? ये क्या करेगा? उल्टी बैटरी लगाइए ना। उल्टी बैटरी लगाई है। अब यहां पर
इलेक्ट्रिक फील्ड भी कैसी थी? ऐसे थी ना? P से N, N से P थी। ये इलेक्ट्रिक फील्ड थी। यहां पर बेटा होल होल होल होल होल ऐसा
था। होल होल होल होल होल ऐसा था। और यहां पर था बेटा नेगेटिव नेगेटिव नेगेटिव नेगेटिव नेगेटिव ऐसा था। तो ये इलेक्ट्रिक
फील्ड ये इलेक्ट्रिक फील्ड ये इलेक्ट्रिक फील्ड। देखना ध्यान से। यहां पर ये सपोर्ट कर रही है कि अपोज़ कर रही है? ध्यान से
देख बेटा। ये ऐसे पॉज़िटिव चार्ज यहां पर जमा होगा, जमा होगा, जमा होगा, जमा होगा, जमा होगा। तो ये और इस इलेक्ट्रिक फील्ड
को सपोर्ट कर रही है। इसी वजह से पोटेंशियल बैरियर भी बड़ा था। सेम केस यहां पर। इलेक्ट्रिक फील्ड ऐसे थी ये पॉजिटिव।
यहां वाले ऐसे थे ना उड़-उड के आए थे और वही उड़-उड के जो आए थे वो इस इलेक्ट्रिक फील्ड को बना रहे थे। तो ये पॉजिटिव वाली
इलेक्ट्रिक फील्ड ये देखो यहां पर वापिस पॉजिटिव पॉजिटिव पॉजिटिव जा रहे हैं। यहां नेगेटिव-नेगेटिव जा रहा है। तो इसी
इलेक्ट्रिक फील्ड को रिड्यूस कर रहे थे। इसी इलेक्ट्रिक फील्ड को रिड्यूस कर रहे थे। ये बैटरी की वजह से इलेक्ट्रिक फील्ड
आई है। एक्सटर्नल इलेक्ट्रिक फील्ड ऐसी लगाई थी जो रिड्यूस कर रही थी। यहां पर एक्सटर्नल इलेक्ट्रिक फील्ड इससे उल्टी ही
है। तो एक्सटर्नल भी इसको सपोर्ट कर रही है बेटा। ये एक्सटर्नल इलेक्ट्रिक फील्ड भी इसको सपोर्ट कर रही है। जिसकी वजह से
इलेक्ट्रिक फील्ड बढ़ेगी और डेप्लीशन रीजन भी बढ़ेगी। डेप्लीशन रीजन भी है उसकी विड्थ बढ़ेगी। ओके सर। तो डेप्लीशन रीजन या
इलेक्ट्रिक फील्ड क्या काम करती थी? माइनॉरिटी वाले को मूवमेंट करवाना। ड्रिफ्ट करंट को बहाना। इसी वजह से हमें
यहां पर ड्रिफ्ट करंट मिलता है। लेकिन भाई ड्रिफ्ट करंट भी कितना? कितना कितना बेटा कितना ड्रिफ्ट करंट भी कितना ना पहले ही
हमने बता दिया कि माइक्रो एंपियर में होता है ड्रिफ्ट करंट माइनॉरिटी की वजह से माइनॉरिटी कितना करंट बहा लेंगे कितना गहू
बहा लेंगे बेटा ज्यादा से ज्यादा ये बहा लेंगे बेटा माइक्रो एमीटर में तो माइक्रो एमीटर में ऑलमोस्ट ये कांस्टेंट हो जाएगा
ऑलमोस्ट ये कांस्टेंट हो जाएगा ठीक है कहानी समझ पा रहे हो ना बेटा डिफ्यूजन करंट अच्छा खासा मिलता है मिली एम्पियर
में मिलता है मिली एम्पियर में मिलता है जबकि बेटा ड्रिफ्ट करंट होता है वो माइक माइक्रो एंपियर में होता है। तो इन शॉर्ट
आपको पता ये चल गया है कि देखो फॉरवर्ड बायसिंग में बेटा मिली एंपियर में करंट मिल रहा है। इसलिए ये करंट को अलव कर रहा
है। अच्छा खासा करंट बह रहा है। जबकि रिवर्स बायसिंग में ऑलमोस्ट ये कांस्टेंट हो जाता है। वो भी माइक्रो एमीटर में तो
क्या ही खाक करंट है। बहुत कम कम कम कम करंट मिलेगा। लीकेज के फॉर्म में ये करंट मिलता है। ऐसा बता सकते हैं। समझ में आया?
कि फॉरवर्ड बायसिंग, रिवर्स बायसिंग सही में बताऊं बेटा बहुत कॉम्प्लिकेटेड होता है। लेकिन मैंने आपको कंपैरिजन पॉइंट ऑफ
व्यू से बताया कि यहां पर ये है, यहां पर ये है। एक-एक पॉइंट कंपेयर करके मैंने बताया कि क्या होता है दोनों में? ठीक है?
करेक्ट? अब एक ग्राफ बस समझना है आईवी कैरेक्टरिस्टिक्स। फिर क्वेश्चन का सिलसिला शुरू हो जाएगा। ये ग्राफ 2024 में
पूछा गया ग्राफ है। क्या होता है फॉरवर्ड बायसिंग में और रिवर्स बायसिंग में? करंट वर्सेस पोटेंशियल का ग्राफ। करंट वर्सेस
पोटेंशियल का ग्राफ। तो बेटा, ध्यान से देखते जाना मेरे साथ-साथ। हम पहले एक्सिस पे ड्रॉ कर रहे हैं। करंट, एक्सिस पे ड्रॉ
कर रहे हैं करंट। ठीक है? y एक्सिस पे करंट और एक्स एक्सिस पे ड्रॉ कर रहे हैं पोटेंशियल। ये रहा पोटेंशियल।
ध्यान से देखते जाना, इसको समझते जाना। देख, धीरे-धीरे धीरे धीरे धीरे धीरे जैसे शुरुआत की, तो पोटेंशियल बढ़ा है, फॉरवर्ड
बायसेस की बात कर रहे हैं हम। हम फॉरवर्ड बायस की बात कर रहे हैं। जैसे जैसे-जैसे करंट बढ़ा, करंट बढ़ा, करंट बढ़ा, करंट
बढ़ाया। जैसे-जैसे पोटेंशियल बढ़ाया है, लेकिन करेंट ऑलमोस्ट ज़ीरो था। धीरे धीरे-धीरे हमने करंट वोल्टेज बढ़ाने की
कोशिश की। लेकिन फिर भी फिर भी बेटा ये ज़ीरो का ज़ीरो रहा टस से मस नहीं किया ये करंट। अब एक थ्रेशहोल्ड वैल्यू आती है जो
सिलिकॉन के लिए 0.7 होती है और 0.3 होती है जर्मेनियम के लिए। इस वैल्यू के बाद बेटा करंट फट से बहना शुरू होता है। फट से
बहना शुरू होता है। थोड़ा सा वोल्टेज बढ़ा है। अच्छा खासा करंट हमें देखने को मिलता है। तो आफ्टर द थ्रेशहोल्ड करंट इंक्रीज
रैपिडली एंड डायोड बिहेव्स लाइक अ लो रेजिस्टेंस। ये एक तरह से कंडक्टिंग वायर की तरह बिहेव करता है। उसके बाद ये
कंडक्टिंग वायर की तरह बिहेव करता है। तो हम ज्यादातर इस प्रॉपर्टी का यूज़ करते हैं। डायोड की इस प्रॉपर्टी का यूज़ करते
हैं कि वोल्टेज जितना लगाएं डायोड है वो एक तरह से कंडक्टिंग वायर की तरह बिहेव करता है। भाई कंडक्टिंग वायर ही लगा लेते।
आपने डायोड क्यों लगाया? डायोड क्यों लगाया अगर आपको कंडक्टिंग वायर ही चाहिए था तो। बेटा देखो हमें है ना ए अप्लायंसेस
में इलेक्ट्रॉनिक्स अप्लायंसेस में ऐसी जरूरत होती है कि भई करंट एक डायरेक्शन में आए तो बढ़िया है। उल्टी डायरेक्शन में
से करंट ऐसा नहीं होना चाहिए कि वापिस सोख रहा है। बिजली वापिस खींच रही है अपनी ताकत। सोचो ना कभी ऐसा हो जाए घर में कि
उस खंभे से तुम्हारे घर पे बिजली आ भी रही है। और जब कभी खंब खंबा फ्री बैठा है तो तुम्हारे घर से बिजली चुरा भी रही है। ऐसा
हो जाए तो क्या होगा भाई? हां, पानी की मोटर में ऐसा नहीं होती। कभी पाइप आपने रखी होगी तो पानी आ भी रहा था। नीचे से
ऊपर चढ़ भी रहा था। लेकिन हुआ यह कि लाइट चली गई। मोटर बंद हो गई। अब पानी ऊपर से नीचे नीचे वापस आने लगा। तो ये रिवर्स
प्रोसेस हमें नहीं करनी है। इसलिए तो डायोड का यूज़ किया जाता है कि डायोड ये फॉरवर्ड बायसिंग में करंट बहाएगा। इस
डायरेक्शन में करंट बहेगा। लेकिन कभी सामने से करंट आएगा तो बहने नहीं देगा। और वही बात यानी रिवर्स बायस की कंडीशन कि
वेरी स्मॉल रिवर्स करंट मिलता है हमें। कितना मिलता है? माइक्रो एंपियर में। देखिए यहां पर माइक्रो एम्पियर की बात की
गई है। तो पहले मतलब शुरुआत होती है इसकी कुछ ऐसे कि जैसे-जैसे वोल्टेज बढ़ता है देखो यहां पर वोल्टेज कितना बढ़ा रहे थे
हम .2.4.6 बहुत छोटा वोल्टेज बढ़ा रहे थे। तब भी हमें करंट में अच्छा खासा डिफरेंस देखने
को मिल रहा है। मतलब करंट बढ़ रहा था अच्छा खासा। यहां पर वोल्टेज देख ले बेटा। ज़ीरो से बढ़ाया 20 कुछ ज्यादा फर्क नहीं।
20 से बढ़ाया चार, 40 कुछ ज्यादा फर्क नहीं है। 40 से बढ़ाया 60 करंट ऑलमोस्ट कांस्टेंट। 60 से बड़ा है 80, कोई ज्यादा
फर्क नहीं है। 80 से बड़ा है 100. तो कोई ज्यादा फर्क नहीं है। मतलब ऑलमोस्ट करंट है वो बेटा कांस्टेंट ही है। ऑलमोस्ट
इंडिपेंडेंट ऑफ़ अप्लाइड वोल्टेज। वैसे मान लीजिए कि कांस्टेंट आ गया 100 आ गया। कोई ज़्यादा फर्क नहीं पड़ता है। 100 वोल्ट तक
कोई फर्क नहीं पड़ा है। लेकिन अगर इससे भी ज़्यादा वोल्टेज बढ़ा दिया तो तो तुम तो बेटा मारने पे तुल गए हो डायोड को। ऐसा
किसी के साथ थोड़ी करा जाता है। कि वो बेचारा सहा जा रहा है 100 वोल्टेज तक और फिर भी तुम कहोगे नहीं मैं तो दूंगा, मैं
तो दूंगा, मैं तो दूंगा। ऐसा नहीं करते ना मेरे दोस्त। तो बहुत ज्यादा ही अब वोल्टेज बढ़ा दिया आपने। बहुत ज्यादा ही वोल्टेज
बढ़ा दिया। तो यहां पर पूरा डायोड है वो टूट जाएगा। ब्रेकडाउन हो जाएगा और इस ब्रेकडाउन के बाद करंट है वो रैपिडली
इनक्रीज कर जाएगा। ठीक है? मतलब फट गया ब्लास्ट हो गया। ऐसा ही बता दीजिए डायोड। तो एट अ वेरी हाई रिवर्स वोल्टेज
ब्रेकडाउन देखने को मिलता है। ब्रेकडाउन अकर्स और उसके बाद करंट बढ़ता जाए। क्या फर्क पड़ रहा है? मतलब उसके बाद तो करंट
जा ही रहा है। समझ पाए हो इतनी बात? अब सुनना। क्या ये ओहम लॉ का पालन करते हैं? क्या होता था ओहम लॉ? भूला देखो ऐसा बता
रहा था ओहम लॉ कि I वर्सेस V का ग्राफ ड्रॉ कर लीजिए बेटा। जैसे-जैसे पोटेंशियल बढ़ेगा वैसे-वैसे करंट बढ़ेगा।
यहां पर तो ऐसा कुछ नहीं है। ये ओहम लॉ का पालन नहीं करते हैं। ऐसे ठीक है सेमीकंडक्टर ग्राफ है। वो ओहम लॉ का पालन
नहीं करते हैं। ये क्वेश्चन भी पूछा गया था एक बार। ओके। बढ़िया समझ पाए हो। कोई ऐसी चीज़ है कि जो आपको ना समझ में आए तो
कमेंट सेक्शन में जरूर बताना। मैं रिप्लाई मतलब हो सकता है थोड़े समय के बाद दूं जब भी पढूं लेकिन रिप्लाई देने की पूरी कोशिश
करूं। ओके? बढ़िया? अब हम क्वेश्चन का सिलसिला करते हैं शुरू। बहुत प्यारे-प्यारे क्वेश्चन। मैंने आपको बताया
था कि केस स्टडी बेस्ड क्वेश्चन इस चैप्टर में से दो पूछे गए हैं वो दोनों क्वेश्चन मैं करवाऊंगा इसी वन शॉट में। हां? तो
बोर्ड का एकदम कंप्लीट मटेरियल आपको मिलने वाला है। सुनना। अब द फॉलोविंग डायग्राम, द जंक्शन डायोड इज़ फॉरवर्ड बायस और अ
रिवर्स बायस। कौन से बायस में मतलब? कौन सी कंडीशन में है? तो देख बेटा, डंडा मतलब N टाइप। और ये ट्रायंगल मतलब P टाइप। देखो
ये पांच वोल्टेज, ये ज़ीरो वोल्टेज, अर्थिंग किया गया है जीरो वोल्टेज। तो यहां पर है 0 वोल्ट।
और यहां पर है प्लस में 5 वोल्ट। तो N टाइप हायर वोल्टेज पे, P टाइप लोअर वोल्टेज पे। दैट्स व्हाई वी नीड टू से
इट्स अ रिवर्स बायस कंडीशन। आरवी रवि बच्चू भाई। ओके सर, समझ गए। सीबीएसई 2023 का एक और क्वेश्चन है इन वि
मतलब आपको तो आइडेंटिफाई ऐसे ही करना है कि जो P टाइप है वो हायर वोल्टेज पे है या लोअर वोल्ट लोअर वोल्टेज पे एक दूसरे के
कंपैरिजन से देखना है। नेगेटिव पॉजिटिव से कंपेयर नहीं करना है। ठीक है? हायर और लोअर से कंपेयर करना है। तो ऐसे ये चारों
ऑप्शन एक बार क्रॉस चेक करना और आईडेंटिफाई करना कि इसमें से कौन रिवर्स बायस में होगा। ठीक है? ये आपके लिए
क्वेश्चन रहेगा। आगे बढ़ते हैं। एक और नया क्वेश्चन करते हैं। असूमिंग दैट 2023 दिल्ली 2013 में पूछा गया क्वेश्चन है।
ओके असूमिंग दैट द टू डायोडस डी 1 एंड डी टू यूज्ड इन इलेक्ट्रिक सर्किट शोन इन दिस फिगर आइडियल डायोड की बात हो रही है।
फाइंड आउट द वैल्यू ऑफ़ अ करंट फ्लोइंग थ्रू 1 ओहम रेजिस्टर। इस 1 ओहम में से कितना करंट बहेगा। पहले तो ये आइडियल
डायोड है तो इसको समझते हैं कि रिवर्स बायस में कौन है और फॉरवर्ड बायस में कौन है। ओके सुन बात कि ये रिवर्स बायस में है
या फॉरवर्ड बायस में d1 तो देखा जाए तो ये प्लस तो यहां पर आएगा प्लस ओके और ये आया नेगेटिव तो ये आया नेगेटिव तो पहला वाला
मुझे लग रहा है कि फॉरवर्ड बायस में है। हां जी सीधा-सीधा पी प्लस के साथ n नेगेटिव के साथ। दूसरा d2 देखना ध्यान से
हां ये प्लस प्लस तो बेटा ये आ गया n नेगेटिव यहां आया बेटा नेगेटिव के साथ कनेक्टेड और ये नेगेटिव यहां पर ओ भाई
साहब ये तो उल्टा हो गया देख यहां पर एन टर्मिनल है वो पॉजिटिव के साथ और पी टर्मिनल है वो नेगेटिव के साथ इट मींस
इट्स अ रिवर्स बायस और हमने पढ़ा है कि रिवर्स बायस में हम क्या कर देते हैं बैटरी को इस तार को हटा देते हैं मतलब ये
पूरा कनेक्शन हटा दिया जाएगा तो आपके पास बचेगा क्या एक कंडक्टिंग वायर ये 2 ओहम, फिर सीधा नीचे आ जाओ। ये 2 ओहम, ये 1 ओहम,
क्योंकि बीच वाला हमने हटा दिया है। बीच वाला हमने हटा दिया है। ये और नीचे आ जाओ। Okay? ये बैटरी 6 वोल्ट की बैटरी और ये आ
गया 2 ओहम। तो ये दोनों सीरीज में लग रहे हैं सीरीज और वोल्टेज हमें करंट निकालना है तो करंट I यहां से फ्लो करेगा। इस 1
ओहम में से वापस आएगा और देट करंट करंट इलेक्ट्रिसिटी की बात वापिस आ गया। हमें नहीं आता बेटा कुछ नहीं है बेटा। देख 2 ओम
और 1 ओहम। सीधा-सीधा करंट आ रहा है। सेम करंट तो रेजिस्टेंस सीरीज में ऐड किए जाएंगे। तो वोल्टेज डिवाइड बाय R
इक्विवेलेंस वोल्टेज है छह और यह 2 + 1 3 तो आ जाएगा 2 एंपियर का करंट दैट्स श्योर। आंसर दिल्ली 2013 का क्वेश्चन चुटकियों
में हमने करके दिखाया मेरे दोस्त। समझ पाए हो? या हवा में गई ये बात। क्यों यहां पर मैंने D2 को हटाया है? क्योंकि वो रिवर्स
बायस में। रिवर्स बायस में करंट आइडियल डायोड में तो जर्रा भी नहीं बचता। थोड़ा बहुत लीकेज होता है लेकिन आइडियल की बात
कर ली तो लीकेज भी नहीं होगा इसलिए हमने पूरा हटा दिया। ओके सर। ओके। एक छोटा क्वेश्चन एमसीक्यू 2025 में जो पूछा गया
था कि व्हेन अ पीएन जंक्शन डायोड इज़ अ फॉरवर्ड बायस। तो इनमें से क्या होता है? देखो वो है ना बहुत समझदारी से तुम्हें
पूछ रहे हैं क्वेश्चन। क्यों पता है? क्योंकि हर बच्चा पीएन जंक्शन में कंफ्यूज होता है। कोई रेक्टिफायर में कंफ्यूज नहीं
होगा। रेक्टिफायर में भी मुझे पता है कि कहां पर कंफ्यूज होता है। तो वहां से ही क्वेश्चन पूछते हैं। हर बार तुम कर लेना
बेटा चेक कि जहां कंफ्यूजिंग पार्ट होगा वहां वहां सीबीएसई क्वेश्चन पूछता है। लेकिन तुम्हें ये बात पता होनी चाहिए कि
जहां पर सब कंफ्यूज्ड होते हैं वहां से तुम्हारे मास्टर जी शुरू होते हैं। तो फॉरवर्ड बायस का एक कनेक्शन है कि व्हेन द
पीएन जंक्शन डायोड इज़ फॉरवर्ड बायस। देखो, ऑप्शन कितने कॉम्प्लिकेटेड हैं। कि बैरियर हाइट एंड द डेपलीशन लेयर विड्थ बोथ
इंक्रीज। क्या होता है भाई? जब फॉरवर्ड बायस में होता है, तो जब फॉरवर्ड बायस में होता है, तब क्या होता है? कि उसकी जो यह
बैरियर हाइट है, वह बढ़ती है, घटती है, डेप्लीशन रीजन बढ़ती है, घटती है। क्या होता है? तो मैंने आपको बताया था इसीलिए
है ना कंपैरिजन पॉइंट ऑफ व्यू से बताया था कि ताकि एक बार भले ही पढ़ते समय तुम्हें डिफिकल्ट लगे लेकिन जब भी इसको क्रॉस चेक
करो तुम्हें पता होना चाहिए कि फॉरवर्ड बायस में ये बैरियर पोटेंशियल की हाइट घटती है और साथ-साथ डेप्लीशन रीजन की
विड्थ भी कम होती है। तो इस क्वेश्चन का आंसर बनेगा ये रहा। बैरियर हाइट एंड डेप्लीशन रीजन बोथ डिक्रीज्ड वाला। ओके?
बोथ डिक्रीज्ड। फॉरवर्ड बायस की बात कर रहे हैं। इसी क्वेश्चन को रिवर्स बायस में उल्टा करके पूछ सकते हैं मेरे दोस्तों। तो
दिमाग में रखना किसी भी तरह से कैसे भी क्वेश्चन फेंक सकते हैं। एक-एक मार्क्स की बात है यहां पर। ओके? एक और क्वेश्चन है
व्हिच ऑफ द फॉलोइंग स्टेटमेंट्स आर नॉट ट्रू? सुन सुन सुन प्यार की धुन। यहां पर पूछा है उन्होंने नॉट ट्रू।
फॉर अ पीएन जंक्शन डायोड अंडर द रिवर्स बायस। एक फॉरवर्ड का क्वेश्चन पूछा है। एक रिवर्स का क्वेश्चन पूछा कि जो सही नहीं
है वो बताना। द करंट ऑलमोस्ट इंडिपेंडेंट ऑफ़ अप्लाइड वोल्टेज। मेरे ख्याल से सही है क्योंकि भाई अभी हमने ग्राफ देखा था वहां
पर लास्ट में देखिए 20 30 तक 100 तक लेके गए थे। वह करंट कांस्टेंट ही था। इसलिए ट्रू हो जाएगा। फिर होल्स फ्लो फ्रॉम अ पी
साइड टू एन साइड। बेटा देख। होल्स फ़्लो फ्रॉम पी साइड टू एन साइड। यहां पर समझा था हमने कि जो करंट देखने को
मिलता है वो ड्रिफ्ट की वजह से मिलता है। ड्रिफ्ट करंट मिलता है। यहां पर हमें ड्रिफ्ट करंट मिलता है। जो कैसे मिलता है?
कि p टाइप यहां पर और एन टाइप यहां पर। n टाइप के होल्स वो उठ उठ के कहां पर आते हैं? n टाइप के होल होते हैं वो उठ उठ के
आते हैं पी टाइप में। n टाइप्स के होल होते हैं वो उठ उठ के आते हैं बेटा p टाइप में। ओके? हां। तो करंट की डायरेक्शन n से
p होती है ना? एन से पी होती है। ये तो बेटा p से एन कर रहे हैं। p साइड टू एन साइड। यहां पर एन होगा। हां? यहां पर एन
होगा। टाइपिंग मिस्टेक है बेटा ये। पी टू एन साइड। तो बता रहे हैं कि होल्स फ्लो फ्रॉम अ पी साइड टू एन साइड जो कि गलत हो
जाएगा। ड्रिफ्ट करंट की बात हो रही है। माइनॉरिटी चार्ज कैरियर की बात कर रही है। यहां पर बेटा माइनॉरिटी का दबदबा होता है
रिवर्स बायस पे। तो बी स्टेटमेंट हो जाएगा गलत। बी स्टेटमेंट हो जाएगा फॉल्स। दैट्स व्हाई इट्स अ ट्रू। लेकिन जब कभी भी आप
एग्जामिनेशन में बैठे हुए हो तब भी अगर कॉन्फिडेंस नहीं आ रहा है ये ऑप्शन के ऊपर, तो दूसरे तो पढ़ लेने चाहिए। तो मैं
अभी आपको पढ़के सुनाता हूं। इलेक्ट्रिक फील्ड डेप्लशन रीजन इज़ इनक्रीज। तो ये भी सच है यहां पर। फॉरवर्ड बायस में कम होती
है। लेकिन रिवर्स बायस में बेटा ये बढ़ती है। हमने सीखी है ये बात। एंड साइड ऑफ द जंक्शन इज़ कनेक्टेड टू अ पॉजिटिव टर्मिनल
एंड अ पी साइड नेगेटिव। ये भी बात सच है यार। ये भी बात सच है। छोटे बच्चों की तरह वो फॉल्स और ट्रू दोनों साथ-साथ वाला बता
दिया। n साइड जंक्शन है वो पॉजिटिव टर्मिनल के साथ और जो P टाइप है उसको नेगेटिव। ये भी बात सच है। ओके? बढ़िया। तो
इस वजह से सही आंसर बन जाएगा किसका? बी ऑप्शन। अब एक क्वेश्चन मैंने बताया था कि 2025 में पीएन जंक्शन कैसे बनता है? उससे
रिलेटेबल क्वेश्चन है। इससे रिलेटेबल क्वेश्चन है जो असररेशन एंड रीजन टाइप में पूछा गया था। ये क्वेश्चन मैं आपके ऊपर
छोड़ रहा हूं। ठीक है मेरे दोस्त? अपने नाम के साथ ये क्वेश्चन का आंसर देना और बताना कि कितने परसेंटेज तुम लाना चाहते
हो 12th बोर्ड में। क्या पता ऊपर वाला आपकी सुन ले और आपके ऊपर मेहरबान हो जाए। उसके साथ-साथ आपकी मेहनत भी काम लगती है।
लेकिन फिर भी एक बार अपनी आइडियल कंडीशन बताना कि मुझे कितने नंबर चाहिए फिजिक्स के पेपर में। ओके? तो ये क्वेश्चन के साथ
अपना नाम, अपना नंबर, नंबर मतलब कितने नंबर आपको चाहिए लाने की कोशिश कर रहे हो और वो बताना कि मेरी एक्सपेक्टेशन ये है
और मैं उस हिसाब से मेहनत कर रहा हूं। ठीक है? लिखना ज़रूरी है। एक आपका गोल सेट होना जरूरी है। तो टारगेट गोल इस कमेंट सेक्शन
में लिखना अपना। ओके? तो अब बात कर रहे केस स्टडी बेस्ड क्वेश्चन की। देखो बहुत सारे क्वेश्चन। मैंने बताया कि पहले
थ्योरी थिरी थ्यरी निपटा लो। अब इसके धरध-धर धर-धर-धर क्वेश्चन समझते हैं। जिससे एक आईडिया पूरा का पूरा लग जाए कि
कैसे-कैसे क्वेश्चन पूछे गए हैं। तो एक केस स्टडी बेस्ड क्वेश्चन है कि अ प्योर सेमीकंडक्टर लाइक अ जर्मेनियम, सिलिकॉन
व्हेन डॉप्ड विथ अ स्मॉल अमाउंट ऑफ सूटेबल इंप्युरिटीज़ बिकम्स अ एक्सटिंजिक सेमीकंडक्टर जो कि हमें पहले से पता है।
जो कि हमें पहले से पता है। देख ज्यादातर केस में ना ये चीजें आपको पहले से पता ही होती है। तो मैं तो तुम्हें बोल रहा हूं
कि आप अवॉइड करके जा सकते हो। आप सीधे क्वेश्चंस के ऊपर जंप कर सकते हो। केस स्टडी बेस्ड क्वेश्चन करने का तरीका यही
होता है कि केस को ना पढ़ो। सीधा क्वेश्चन की ओर चले जाओ। अगर क्वेश्चन में कोई ऐसी इंफॉर्मेशन दे रखी रखी है या ऐसा क्वेश्चन
पूछा गया है कि जो बहुत अटपटा है तब वो पैराग्राफ से पूछो। अदरवाइज ये पूरी बातें जो हमने पढ़ी है ना वही की वही होगी। वही
की वही होगी। तो यहां पर बेटा मैं इसको स्किप करके आगे बढ़ रहा हूं। कोई नई बात नहीं है। मैंने पढ़ लिया बेटा कि ये वही
कहानी है एक्सट्रिंसिक सेमीकंडक्टर की जो मैंने पढ़ी है। अगर आप खुद से भी पढ़ लोगे तो पूरा का पूरा रिवीज़ हो जाएगा। चाहो तो
इसका स्क्रीनशॉट ले सकते हो। फिर आराम से भी पढ़ सकते हो। ये क्वेश्चन पूछा गया था 2024 में और इसके अंदर चार क्वेश्चन था।
एक ऑप्शनल में था जिसको मैंने पांचवा क्वेश्चन का नंबर दे के पूछा है। व्हेन जर्मेनियस इज़ जर्मेनियम इज़ डॉप्ड विथ द
पेंटावेलेंट इंप्युरिटीज़, द एनर्जी रिक्वायर्ड टू फ्री रिक्वायर्ड टू फ्री द वीकली बाउंड इलेक्ट्रॉन्स फ्रॉम डोपेंड,
फ्रॉम डोपेंड इज अबाउट। कितनी होगी? 0.001, 0.01 और 0.72 और 1.1 अब अगेन बेटा बता रहा हूं ये थीटिकल पार्ट
हो गया। थ्योरिटिकल पार्ट मतलब या तो ये डाटा देना हो या तो ये डेटा होना चाहिए इस पैराग्राफ में। ढूंढ के देखो कहीं मिले
तो। या फिर आपको पहले से पता होना चाहिए जब आप थ्योरीज़ पढ़ रहे हो तब। इन्होंने क्या पूछा वापिस पढ़ ले कि जब पेंटावेलेंट
की बात होगी किसके साथ ऐड करने में? जर्मेनियम के साथ ऐड करने में। द एनर्जी रिक्वायर्ड टू फ्री वीकली बाउंड
इलेक्ट्रॉन। मतलब इलेक्ट्रॉन को वीकली बाउंड कंडीशन में से हटाने के लिए, बाउंड से कहां ले जाना है? फ्री करना है उसको।
तब कितनी एनर्जी चाहिए होगी? देख तो जर्मेनियम के लिए ऑलरेडी पॉइंट7 इलेक्ट्रो वोल्ट होती है। जर्मेनियम में बाउंड
इलेक्ट्रॉन को हटाने के लिए 0.7 मतलब ये ईजी होता है ना इसके लिए जर्मेनियम के लिए ईजी ईजी ओ जी लो जो सुनो जी। ये ईजी
ऑलरेडी 0.7 होती है। तो जैसे ही आपने डोपिंग की तो इससे कम हो जाएगी। इससे और कम हो जाएगी। 0.72 तो पहले होती है और
उससे कम हो जाएगी। तो ये डी ऑप्शन भी कैंसर हो जाएगा। सी ऑप्शन भी कैंसिल क्योंकि पहले ही 72 तो होती है। 72 तो
पहले होती है। प्योर फॉर्म में होती है। कैसे फॉर्म में? प्योर फॉर्म में होती है। डोपिंग की आपने तो और कम हो जाएगी। डोपिंग
की वजह से और कम हो जाएगी। ईजी है वो और घट जाएगा। अब घट के कितना हो जाएगा? घट के कितना हो
जाएगा? 0.01 0.0001 बहुत दूर है। सही में हो जाता है 0.01 इलेक्ट्र वोल्ट के आसपास। तो मुझे थ्योरी नहीं पता थी लेकिन मैंने
लॉजिक से आंसर कर दिया और बात सही। हालांकि ये बात दे रखी होगी थ्योरी में। एक बार पढ़ना है इसको। तो बी ऑप्शन हो
जाएगा इसका सही आंसर। आगे का क्वेश्चन पढ़ते हैं। एट अ गिवन टेंपरेचर द नंबर ऑफ़ इंट्रेंसिक चार्ज कैरियर इन अ सेमीकंडक्टर
इज़ इतना। क्या है ये? कि चार्ज कैरियर इन अ सेमीकंडक्टर इतना। ये ni की वैल्यू दे रखी है। n होल की दे रखी है। नंबर ऑफ
इंट्रेंसिक इंट्रेंसिक मतलब ni तो ये 2 * 10 रे टू पावर 10 सेंटीमीटर दैट्स व्हाई 10 रे टू पावर -3 सेंटीमीटर में।
सेंटीमीटर माइनस में इट इज़ डॉप्ड विथ द पेंटावेलेंट इंप्युरिटीज नेपाल पाकिस्तान ऑस्ट्रेलिया सब भिखारी वाली लाइन से ऐड
किया जा रहा है किसी को। ऐज़ द रिजल्ट द नंबर ऑफ़ होल्स बिकम्स। इसकी वजह से नंबर ऑफ़ होल मिल रहे हैं बेटा। वो हो रही है 10
रेज़ टू पावर 8 * 10 रेज़ टू पावर 8 * 10 रेज़ टू पावर 3। देखिए इसमें वैल्यूज़ क्या-क्या दे रखी है वो समझना मुश्किल है।
अदरवाइज़ फार्मूला अप्लाई करना तो बहुत बच्चों का काम है। NI = N * NH NI² = N * NH बस यही फार्मूला अप्लाई करना है। वो
बड़ा पार्ट नहीं, बड़ा पार्ट ये है कि ये कैसे लिखा है? ओके। द नंबर ऑफ इलेक्ट्रॉन्स इन दिस सेमीकंडक्टर, NEE
पूछा है। NEE पूछा है। क्या इस फॉर्मूले के हिसाब से क्वेश्चन को सॉल्व किया जा सकता है? क्या लगता है तू? क्या लगता है
आपको? क्या इस फॉर्मूले के हिसाब से क्वेश्चन को सॉल्व किया जा सकता है? ले बेटा तो कैलकुलेशन खुद ही कर देते हैं।
हम्म देख बेटा पहले वैल्यू लिखता हूं Ni की। तो उसका स्क्वायर हो जाएगा। तो ये 2 * 2 तो 4 * 10 रेज़ टू पावर 10 यानी 20।
डिनोमिनेटर में आ जाएगा NH वाला टर्म यानी कि 8 * 10 टू पावर 3। ओके सर ये आ गया एन ई ये एन ई क्या आई इतनी बात समझ में हां
बढ़िया सर अब देख काटापीटी करते चलना काटापीटी करते चलना ये पावर कितनी है थ्री है थ्री है 20 17 तो ये मिल जाएगा बेटा
ध्यान से सुनते जाना चार और डिवाइड बाय तो ये हो जाएगा फाइव .5 * 10 रे टू पावर 17 तो 16 के फॉर्म में लिखूंगा तो 5 * 10 टू
पावर 16 ये आ जाएगा मीटर मीटर नहीं है बेटा सारे आंसर सेंटीमीटर में थे तो ये सेंटीमीटर क्यूब में आएगा और ट्विस्ट ये
है कहानी में कि ऑप्शन सारे मीटर क्यूब में है दोस्त। तो 5 * 10 रेज़ टू पावर 16 यह मीटर क्यूब में जैसे ही आप कन्वर्ट
करोगे बेटा, तो यह हो जाएगा देखो ऐसे 5 * 10 रेज़ टू पावर 16। अब सेंटीमीटर क्यूब में से मीटर क्यूब में जाओगे। मीटर क्यूब
में जाओगे तो 10 रेज़ टू पावर नीचे डिनोमिनेटर में लिखते हैं 10 रेज़ टू पावर -6 जो ऊपर आएगा ऊपर आएगा तो प्लस हो
जाएगा। तो 10 रेज़ टू पावर 5 * 10 रेज़ टू पावर 22 मीटर हो जाएगा। ले बेटा 5 * 10 टू पावर 22 डी ऑप्शन इज़ करेक्ट। देख सही
बताऊं तो यहां पर एग्जामिनेशन ने है ना आपके ऊपर दया रखी। अदरवाइज वो अगर दे देते 5 * 10 टू पावर 16 और सेंटीमीटर में माइनस
सेंटीमीटर में तो आधी जनता वो टिक करके आती। जबकि इन्होंने इंफॉर्मेशन दे रखी है वो कैसी है? सेंटीमीटर में दे रखी है। तो
गलत हो जाता है ना मेरे दोस्त। तो याद रखना इस छोटी-छोटी गलतियां लेकिन समझना इस यूनिट के पहले की कहानी यूनिट के यूनिट की
कहानी को गलत मत करना वरना ये पूरा किया धरा पानी में चला जाएगा। ओके? आगे बढ़ते हैं एक और क्वेश्चन इसी का है। ड्यूरिंग द
फॉर्मेशन ऑफ पीएन जंक्शन क्या होता है? जब पीएन जंक्शन बनना शुरू होता है तब इलेक्ट्रॉन्स डिफ्यूज फ्रॉम अ पी साइड
इंटू एन साइड एंड होल डिफ्यूज फ्रॉम अ n रीजन इंटू पी रीजन। ये क्या बात हुई भाई? इलेक्ट्रॉन एन से एन से पी की ओर जाएंगे।
n से p की ओर जाएंगे। ठीक है? बोथ इलेक्ट्रॉन डिफ्यूज फ्रॉम अ n रीजन नहीं ये तो गलत ही है। इलेक्ट्रॉन डिफ्यूज
फ्रॉम अ एन रीजन इंटू पी रीजन। हां सही है। देखो इलेक्ट्रॉन n में ज्यादा होते हैं तो n से p की ओर जाते हैं। सही लग रहा
है। और होल्स p में ज्यादा होते हैं तो ये p से n की ओर जाएंगे। तो सी ऑप्शन सही लग रहा है। बाकी बोथ p रीजन में डिफ्यूज
होंगे। ये तो बात सरासर झूठ है। तो सी ऑप्शन सटीक लग रहा है इसमें। ओके? आगे का एक इक्वेशन। इनिशियली ड्यूरिंग द फॉर्मेशन
ऑफ़ पीएन जंक्शन जब बनना शुरू होता है तब क्या होगा? डिफ्यूज़न करंट अच्छे खासे अमाउंट में होगा और ड्रिफ्ट करंट है वह
बहुत छोटा होगा। इनिशियल की सिचुएशन है। जो एक डायग्राम मैंने डॉ किया था ना कि इनिशियल में डिफ्यूज़न ज़्यादा, ड्रिफ्ट
बहुत कम। धीरे-धीरे ड्रिफ्ट डेवेलप होगा। डिफ्यूज़न करंट धीरे-धीरे कॉन्स्टेंट हो जाएगा। वहां से आया हुआ क्वेश्चन। और इसी
में एक लास्ट क्वेश्चन इस केस स्टडी बेस्ड क्वेश्चन का कि अ प्योर प्योर सिलिकॉन क्रिस्टल हैविंग अ 5 * 10 रेज़ टू पावर 28
एटम पर मीटर इज़ डॉप्ड विथ अ वन पीपीएम। अब सुनना दोस्त। तो वन पीपीएम मतलब क्या? 10 रेज़ टू पावर सिक्स, 10 रेज़ टू पावर सिक्स।
तो ये डोपेंड की बात है हां बेटा ये कितना डॉप किया गया कंसंट्रेशन ऑफ एंटी मनी। नेपाल, पाकिस्तान, ऑस्ट्रेलिया सब भिखारी
वाली बात से है? हां जी ये। तो ये इलेक्ट्रॉन की कंसंट्रेशन ऐसे निकाल सकते हैं कि 5 * 10 रेज़ टू पावर 28 था। उसमें
कितना ड्रॉप किया गया है? 1 ppm 1 ppm मतलब 10 रेज़ टू पावर सिक्स। तो ये बन जाएगा 5 * 10 रेज़ टू पावर 22 मीटर इनवर्स।
मीटर क्यूब इनवर्स लिखा है। ओके? फिर इफ द कंसंट्रेशन ऑफ अ होल्स इन द डोप्ड क्रिस्टल इज फाउंड टू बी 4.5 * 10
टू पावर 9 मीटर एंड क्वेश्चन में ही दे रखा है 4.5 * 10 रे टू पावर 9 मीटर क्यूब माइनस में। देन
इंट्रेंसिक चार्ज कैरियर सिलिकॉन की बताइए बेटा। ni निकालनी है हमें। ni निकालनी है। क्या निकाली जा सकती है? जी हां। ni²
= ne * nh हमें क्या चाहिए? ni चाहिए। तो ni = अंडर रूट में ne * nh दोनों के बीच का मल्टीप्लिकेशन और फिर हम कर लेंगे इनका
रूट। जैसे ही ये प्रोसेस निपटाते हैं जैसे ही कैलकुलेशन करते हैं इसका आंसर बनेगा बी 1.5 * 10 टू पावर 16। तो ये एक शानदार
क्वेश्चन था। केस स्टडी बेस्ड क्वेश्चन था an जंक्शन पर बेस्ड। क्या समझ में आया? अरे आया तो हटा सावन की घटा और कमेंट
सेक्शन में लिख बेटा स्वाहा। तो बेटा पढ़ने जा रहे हैं एक इंपॉर्टेंट टॉपिक, एक हॉट टॉपिक ऑफ द चैप्टर जिसका नाम है
रेक्टिफायर। एक बच्चे ने मुझे बताया था कि यहां से एक सोनपुरी की छड़ी आती है। उस सोनपुरी की छड़ी से हम आईएमपी की लाइन लगा
सकते हैं। तो बेटा ये मोस्ट आईएमपी टॉपिक ऑफ द चैप्टर जिसका नाम है रेक्टिफायर। क्या काम करता है ये? जिसका इस जैसा इसका
नाम है, वैसा इसका काम है रेक्टिफाई करने का। कि इससे पहले वाले चैप्टर्स में हमने अल्टरनेटिंग करंट के बारे में पढ़ा था। तो,
यह अल्टरनेटिंग करंट को डीसी डायरेक्ट करंट में कन्वर्ट करने का काम करता है रेक्टिफायर। देखना। इसमें हम अल्टरनेटिंग
यानी दो डायरेक्शन, ऊपर नीचे, ऊपर नीचे, पॉजिटिव, नेगेटिव, पॉजिटिव, नेगेटिव। दोनों साइकिल हमें मिलती है। उसका
डायरेक्ट करंट में करंट। तो, कुछ-कुछ डायोड का यूज़ करेंगे। क्योंकि डायोड की खास बात तो वही थी कि फॉरवर्ड बायस में
करंट को फ्लो करने देगा, रिवर्स बायस में करंट को फ्लो नहीं करने देगा। तो इसी का यूज़ करेंगे कि इट वर्क्स ऑन अ
यूनीडायरेक्शनल प्रॉपर्टी ऑफ़ अ पी एन जंक्शन डायोड। कितने टाइप के रेक्टिफायर होते हैं? दो टाइप के मेनली रेक्टिफायर
होते हैं। हमारी एनसीईआरटी के हिसाब से हमने क्लासिफाई किया है। एक हाफ वेव रेक्टिफायर कि जो पूरी साइकिल को नहीं सर।
ऐसी पूरी साइकिल होगी ना तो पूरी साइकिल इनपुट में से वो आधी साइकिल को ही कन्वर्ट कर पाएगी। पूरी साइकिल को नहीं कर पाएगी।
ऐसे को हमने हाफ वेव रेक्टिफायर कहा है। ठीक है? इसमें एक डायोड का यूज़ करेंगे और कन्वर्ट ओनली हाफ साइकिल ऑफ द इनपुट। ओके?
दूसरा है फुल वेव रेक्टिफायर। फुल वेव रेक्टिफायर मतलब कि देखो इनपुट वही है दो डायरेक्शनल। ये अल्टरनेटिंग एक पॉजिटिव एक
नेगेटिव। ये इनपुट। लेकिन आउटपुट दोनों का मतलब ढंग डंग दोनों हाफ साइकिल को कंवर्ट कर देगा डायरेक्ट करंट में एक डायरेक्शन
में। दोनों पॉजिटिव पॉजिटिव। पहले हम देखो, इनपुट पॉज़िटिव, नेगेटिव। पॉज़िटिव, नेगेटिव। यहां पर पॉज़िटिव मिल रहा था, फिर
नील मिल रहा था। यहां पर दोनों पॉज़िटिव-पॉज़िटिव। इस फुल वेव रेक्टिफायर में हम दो डायोड का यूज़ करेंगे। और
हालांकि हमारे सिलेबस में नहीं है, लेकिन फोर डायोड वाला भी रेक्टिफायर बनाया जा सकता है। हम तो बस सिंपल वाली कहानी
पढ़ेंगे। दो डायोड की। जो भी बहुत काम की है बेटा, यहीं से आगे फोर डायोड वाला कांसेप्ट गया था। ओके? कन्वर्ट बोथ हाफ ऑफ
अ एसी साइकिल इंटू अ डीसी। अब ये कैसे होगा? उसके डायरेक्शन कैसी लिखी जाएगी और कैसा इसका एक्चुअल में रेक्टिफायर का
डायग्राम आता है वो समझने के लिए आगे बढ़ते हैं। तो पहला यानी कि हाफ वेव रेक्टिफायर। देख ये यहां तक का पूरा पार्ट
है ना बेटा वो ट्रांसफार्मर है जो हम पढ़ के आ चुके हैं। अब आपने वो चैप्टर नहीं पढ़ा हुआ अल्टरनेटिंग करंट वाला। तो
थोड़ा-थोड़ा दिमाग में रखना। मेरे ऊपर भरोसा रखना कि जो मैं बोलूंगा सच बोलूंगा। सच के सिवा कुछ नहीं बोलूंगा। तो ये
ट्रांसफॉर्मर है बेटा। यह क्या काम करता है? तो इनपुट में से जो मैग्नेटिक जो भी सिग्नल दोगे वो आगे पहुंचाने का काम कौन
कर रहा है? ट्रांसफार्मर कर रहा है। ठीक है? ये डिपेंड करेगा नंबर ऑफ कोइल्स के ऊपर। तो हमने यहां से वेल अरेंज्ड सारी
मटेरियल लिया आइडियल ट्रांसफार्मर लिया है। जिससे जितना भी इनपुट आ रहा है वो आउटपुट आगे ट्रांसफर हो रहा है। तो बेटा
ध्यान से सुन। इनपुट में एक बार पॉजिटिव साइकिल आई तो ऊपर पॉजिटिव, नीचे नेगेटिव। अब सेम ट्रांसफार्मर है वो इन दोनों का
फ्लक्स लिंकेज होता है और सेम आगे ट्रांसफॉर्म कर देता है तो एक ऊपर वाला पॉजिटिव नीचे वाला नेगेटिव बीच में एक
बल्ब जॉइंट किया है बल्ब यानी कि हमारे लिए रेजिस्टेंस हमारे लिए लोड हो जाएगा जो बल्ब फ्लो करेगा इसका मतलब कि करंट मिल
रहा है बल्ब फ्लो नहीं करेगा इसका मतलब कि करंट नहीं मिल रहा है ओके तो ये फर्स्ट हाफ साइकिल के लिए बात हो रही है ध्यान से
देखना बेटा मेरे लाल मेरे गोपाल ये फर्स्ट साइकिल क्योंकि अल्टरनेटिंग करंट क्या है अल्टरनेटिंग करंट मतलब कि दो धारी तलवार
पहले ऐसा ऐसा पॉजिटिव चलेगा। फिर ऐसे नेगेटिव चलेगा। पहली लाइन मैं है ना ग्रीन से करता हूं क्योंकि मैंने पहले ग्रीन से
रिप्रेजेंट किया है। तो ये पहली साइकिल फर्स्ट हाफ साइकिल तो ये पॉजिटिव में घूम रहा है। ठीक है? ये पहली कहानी पॉजिटिव तो
पॉजिटिव। तो बेटा सुन यहां पर ये जो पहला डायोड लगाया हुआ है यहां पर जो पहला डायोड लगाया हुआ है क्या वो फॉरवर्ड बाय स्थिति
में है? इस घटना में क्या वो फॉरवर्ड बाय स्थिति में है? हां यार। देखो, अब पहली वाली कहानी के लिए फॉरवर्ड बायस में। तो
करंट कुछ ऐसे बहेगा। सुनना सुनना सुनना करंट। देखो यहां फॉरवर्ड बायस में से करंट बहा बहा बहा बहा करंट वापस आया आया है।
लौट गया। तो करंट बह रहा है। ठीक है? डायोड ने करंट को जाने दिया तो आपको फर्स्ट साइकिल के लिए करंट मिल रहा है।
आउटपुट मिल रहा है। ईएमएफ मिल रहा है। जैसे ही अल्टरनेटिंग करंट है वो अपनी डायरेक्शन चेंज करता है। अब देखिए नेगेटिव
से आया। अब बेटा ये नेगेटिव से आया। क्योंकि अल्टरनेटिंग करंट का काम ही क्या है? बेटा डायरेक्शन चेंज करना। एक बार
पॉज़िटिव तो पॉज़िटिव के लिए आपको आउटपुट मिला एक बार नेगेटिव। तो अब नेगेटिव के लिए सुन। यहां पर आई नेगेटिव और ये
पॉज़िटिव। बेटा ये बना नेगेटिव और यह बना पॉज़िटिव। नेगेटिव और पॉज़िटिव। ध्यान से सुनते जाना है बेटा नेगेटिव, नेगेटिव,
पॉज़िटिव, पॉज़िटिव। क्या यह रिवर्स बायस में हो गया? अरे मेरे दोस्त और जब कभी भी डायोड रिवर्स बायस में होता था तो करंट को
बहने नहीं देता था। इस वजह से दूसरी साइकिल में दूसरे हाफ साइकिल में हमें करंट नहीं मिल रहा है। सेम अब वापस
पॉजिटिव साइकिल की बात आएगी। देख बेटा ये फर्स्ट हाफ साइकिल ऊपर वाली पॉजिटिव। ठीक है? तो ये फर्स्ट वापस पॉजिटिव साइकिल आई।
तो करंट को बहने देगा ये d1 बहने दिया। आउटपुट हमें कुछ मिल रहा है। आउटपुट कुछ हमें मिल रहा है। ओके सर। और दूसरे में
मेरे दोस्त, मेरे भाई, दूसरे में वापस वो साइकिल चेंज होती है। यह देख ले बेटा रिवर्स बायस वाली कंडीशन के हिसाब से ज़ीरो
हो जाएगा। क्या आपको समझ में आया? यहां पर ग्राफ कुछ कैसा मिल रहा है? पॉजिटिव साइकिल के लिए करंट मिल रहा है, आउटपुट
मिल रहा है, लेकिन नेगेटिव साइकिल के लिए नील बटा सन्नाटा, ज़ीरो। फिर पॉजिटिव साइकिल के लिए आपको कुछ मिल रहा है। फिर
नेगेटिव के लिए नील बटा सन्नाटा ज़ीरो। कुछ नहीं। ठीक है? नेगेटिव के लिए ज़ीरो ज़ीरो ज़ीरो हो रहा है। इसीलिए तो मैंने बताया कि
हाफ वेव रेक्टिफायर में मेरे दोस्त आउटपुट में आपको हाफ साइकिल का कुछ आउटपुट मिलेगा। आधी हाफ साइकिल के लिए कोई भी
आउटपुट नहीं मिलेगा जो बात हमने पहले ही लिख ली थी। ठीक है? कि ओनली वर्क्स ऑन अ कन्वर्ट्स ओनली वन हाफ ऑफ अ एसी साइकिल
इंटू डीसी। ये था हाफ वेव रेक्टिफायर। अब देख हमारा दिमाग तो पहले से शकुन मामा वाला है। तो हम क्या करेंगे? कि यहां पर
दिमाग लगा के कुछ और तिडकम लगाते हैं कि भाई हमें आधी-आधी साइकिल में थोड़ी खेलना है। हम पूरा पैसा दे रहे हैं तो पूरा करंट
मिलना चाहिए। जी रहे। मिलना चाहिए ना? पूरा आउटपुट मिलना चाहिए। तो हम कुछ वैसे इसको यूज़ करें। मतलब ऐसी कुछ तिरकम लगाते
हैं कि जिससे पूरा यूज़ हो सके। ओके? डायग्राम इसका अच्छे से देखना हो तो देखना। ये ट्रांसफार्मर ही है। यहां से
एसी आएगा और वही ट्रांसफॉर्म हो के आगे जाएगा और इसके साथ हमने डायोड लगा दिया और ये लोड लगा दिया है। दोनों डायग्राम आप
ड्रॉ कर सकते हो। एक एनसीईआरटी में ऐसा दे रखा है। ठीक है? केस में कोई नया नहीं है। ट्रांसफार्मर पहले हम ऐसे भी ड्रॉ किया
करते थे। तो कंफ्यूज मत होना। जो मजा आए वैसे ड्रॉ कर सकते हो। ओके। अब बात आ रही है फुल वेव रेक्टिफायर की। देखो जो भी
मैंने चीज बताई है ना वो सेम टू सेम यहां पर लिखी हुई है। अब ऐसा कंफ्यूजन हो जाए कि कैसे लिखना है। ले बेटा पूरा का पूरा
मैंने बता दिया कि कैसे पॉजिटिव हाफ साइकिल के लिए आपको आउटपुट मिलेगा। कैसे नेगेटिव हाफ साइकिल के लिए आउटपुट नहीं
मिलेगा। डिट्टो टू डिट्टो एग्जामिनेशन में कैसे लिखना है वो भी बता दिया। और बहुत आसान लैंग्वेज में। जरूरी नहीं एनसीईआरटी
की लैंग्वेज हो। जरूरी वो हो कि काम की बात वहां पर एक्सप्लेन की होनी चाहिए। ओके? ठीक। अब बात आ रही है फुल वेव
रेक्टिफायर की तो सिस्टम वही की वही है। बस हमने क्या लगा लिया? दो डायोड वाली सिस्टम लगा दिए। क्या लगा दी बेटा? दो
डायोड वाली सिस्टम लगा दी। बेटा देखिए डायोड d2 ये दो डायोड लगा दिए डी टू और ये डायोड लगा दिया d1। ठीक है? d1 d2 दो
डायोड हमने यहां पर अटैच कर दिए हैं। अब बीच में से एक तार निकाला मेरे दोस्त। सुनना। बीच में से सेंटर टेप करके हमने एक
तार निकाला है। यह बल्ब है। यह सेंटर टेप करके तार निकाला। डग डग डग डग [हंसी] ड्रिंग डग डग डग डुक डशिंग
ठीक है? ये सेंटर टेप करके तार निकाला। ए यहां से ऊपर उठा लिया इसलिए टच ना करें। देख करंट बहेगा तभी जब उसको आने का रास्ता
भी होगा और जाने का रास्ता होगा। अदरवाइज़ करंट नहीं बहता है। तो हम पहले वाले की बात करते हैं। हम पहले वाले की बात करते
हैं। ठीक है? हम इसमें डिटेल में बात करेंगे पहले लेकिन अरेंजमेंट समझ लेना। क्या होगा पता है कि कंटीन्यूअसली यह
इनपुट है ना वो चेंज होगा। जैसे-जैसे इनपुट चेंज होगा वैसे-वैसे ट्रांसफार्मर की दूसरी तरफ ये चेंज होगा। ये जैसे ही
चेंज होगा बेटा तो एक पहले फॉरवर्ड बायस में होगा। थोड़ी देर बाद रिवर्स बायस में हो जाएगा। एक जैसे यहां पर नीचे भी होगा।
पहले थोड़ा रिवर्स बायस में होगा फिर फॉरवर्ड बायस में। तो कंटीन्यूअसली ये अपनी डायरेक्शन चेंज करते रहेंगे। तो कोई
एक वर्किंग कंडीशन में होगा। कोई एक वर्किंग कंडीशन में नहीं होगा। जैसे कि मैं साइकिल बताऊं फर्स्ट हाफ साइकिल के
लिए। ठीक है? हम बात कर रहे हैं फर्स्ट हाफ साइकिल के लिए। फर्स्ट हाफ साइकिल के लिए मैं बात कर रहा हूं। ये हमें इनपुट
दिया गया है। फर्स्ट हाफ साइकिल सुनना मेरे दोस्त बताने वाला हूं सबसे इंपॉर्टेंट बात। तो फर्स्ट हाफ साइकिल के
लिए बेटा ये पॉजिटिव नेगेटिव। ये पॉजिटिव बना ये नेगेटिव बना। सुन सुन इस बाबा सुन। प्यार की धुन देखना बेटा देख ये पूरी
अरेंजमेंट है ऐसी। ये पूरी अरेंजमेंट है ऐसी। डुक डुकुक डुक डुक डुकुक डुक डुक डुक डुक डुक डुकुक डुकुक डुकुक डुक डुकुक डुक
डुक डुक ये डुक डुक डुक डुक डुक डुक डुक डुक डुक डुक डुक डुक डुक डुक इसमें से फॉरवर्ड बायस पे कौन रहेगा रिवर्स बायस
में कौन रहेगा सीधी बात है सर यहां पर जो d1 दे रखा है वो फॉरवर्ड बायस में रहेगा क्यों क्योंकि देख बेटा ये पी पॉजिटिव के
साथ यहां पर पी नेगेटिव के साथ तो ये रिवर्स बायस में हो जाएगा ये कनेक्शन फेक हो जाएगा ये कनेक्शन काम का नहीं रहेगा
क्यों क्योंकि डीड टू है वो रिवर्स बायस में डिड टू रिवर्स बायस में तो उसको क्रॉस करके हटा दीजिए वो काम का नहीं रहेगा
आएगा। ओके? अब जो करंट बहेगा वो उसकी डायरेक्शन कैसे आएगी? सुन ना बेटा सुन ना। सुनना। देख जो करंट आया डंग डंग डंग डंग
डंग डंग डंग डंग डिंग डिंग डिंग डिंग डिंग डिंग यहां से बाहर डिंग डिंग डिंग डिंग डिंग डिंग डिंग सेंटर टेप वाले से डिंग
डिंग डिंग डिंग डिंग डिंग डिंग डिंग डिंग डिंग डिंग डिंग [हंसी] डिंग डिंग डिंग डिंग डिंग डिंग डिंग डिंग डिंग डिंग डिंग
डिंग डिंग डिंग डिंग डिंग डिंग डिंग डिंग डिंग डिंग डिंग डिंग डिंग डिंग हा ऊपर उठा लिया इससे। फिर डिंग डिंग डिंग डिंग डिंग
और ये सेंटर टेप कर दिया। क्या करंट का पाथ आपको समझ में आया? लिखने की जरूरत है क्या कि पाथ कैसा हुआ? फर्स्ट हाफ साइकिल
के लिए बात है। किसके लिए बात है मेरे दोस्त? फर्स्ट हाफ साइकिल के लिए यह बात है। ठीक है? देख ले वापस एक बार बता देता
हूं। करंट कैसे आया देख पॉजिटिव वाले के लिए पहले सोचा जाएगा डिंग डिंग डिंग डिंग डिंग डिंग डिग
मज़ा आ रहा है। डिंग डिंग डिंग डिंग डिंग डिंग डिंग डिंग डिंग डिंग ये करंट ऐसे फ्लो किया है। ओके। डी टू वाला बीच में से
हट गया है। तो पहले के लिए हमें कुछ आउटपुट मिल रहा है। ठीक है? ये आउटपुट किसकी वजह से मिला? पहले डायोड की वजह से
मिला। D1 की वजह से मिला। करेक्ट सर। परफेक्ट। बढ़िया। आया समझ में? लिखते जाना बेटा। आटा सावन की घटा। समझ में आया तो
लिखते जाना। स्वाहा। अब दूसरी हाफ साइकिल के लिए कि जहां पर मेरे दोस्त ऊपर वाला बन रहा था नेगेटिव
और नीचे वाला बन रहा था पॉज़िटिव। अल्टरनेटिंग का मीनिंग ही तो वही होता है यार। कि वो कंटीन्यूअसली अपनी डायरेक्शन
चेंज करता रहता है। अल्टरनेटिंग। हां जी। तो डायरेक्शन चेंज की। अब पूरी सर्किट समझ लीजिए बेटा। यहां पर ये था। डुक डुक डुक
डुक डुक D1 D1 डायोड ये आया D2 डायोड। ओके ये आया D2 डायोड। सुनना मेरे दोस्त करंट फ्लो किया है। करंट यहां पर फ्लो कर
रहा है। हम क्या पहला वाला रिवर्स बायस पे चला जाएगा? जी। चाहता तो है करंट जाना यहां से। लेकिन वो रिवर्स बायस में हो
जाएगा ना। ये P पॉजिटिव नेगेटिव के साथ कनेक्टेड है। दैट्स व्हाई वी नीड टू राइट इट्स अ रिवर्स बायस। ये रिवर्स बायस में
है। जबकि D2 है वो पॉजिटिव के साथ कनेक्टेड है। तो D2 यहां पर हो जाएगा फॉरवर्ड बायस। तो D2 फॉरवर्ड बायस में है।
और D1 है वो हो जाएगा रिवर्स बायस में। ओके? तो D2 को हटा देंगे। जो करंट फ्लो करेगा वो किससे करेगा? जो करंट फ्लो करेगा
वो बेटा जी करेगा वो बेटा जी करेगा किससे? D2 वाले से। तो देख करंट आया। सुनना बेटा। करंट आया। डग
डग डग डग डग डग ड इससे पास हुआ। डिग अब सेंटर टेप वाले से डिग [हंसी]
डिंग डिंग डिंग डिंग डिंग ये सेंटर टेप कर गया। क्या करंट मिला कि नहीं मिला? पहले हाफ हाफ साइकिल वाले में करंट नहीं मिल
रहा था लेकिन इसमें मिल रहा है जी मेरे दोस्त। मिल रहा है हमें करंट। दैट्स वाई वी नीड टू सेट दिस पॉइंट कि हमें दूसरी
साइकिल के लिए भी करंट मिल रहा है आउटपुट मिल रहा है d2 तो ऐसे पहली साइकिल पॉजिटिव साइकिल के लिए d1 काम करेगा दूसरी हाफ
साइकिल के लिए d2 काम करेगा तब तक d1 रेस्ट कर लेगा तो ऐसे अल्टरनेटिंग में ये काम करते रहेंगे और हमें डायरेक्ट करंट
मतलब एक डायरेक्शन वाला करंट देते जाएंगे हालांकि इसका मैग्नीट्यूड अभी भी कांस्टेंट नहीं हुआ है नहीं हुआ
मैग्नीट्यूड ऐसे 5 वोल्ट तो 5 वोल्ट ऐसे कांस्टेंट नहीं हुआ है वो लेकिन ज़ीरो से पांच पहले ये माइन -5 से +5 तक वेरीरी हो
रहा था। अब ये 0 से पांच में वेरीरी करने लगा है। अब ये 0 से पांच में वेरीरी करने लगा है। क्या आ रही है मेरे दोस्त? ये बात
समझ में? हां। डायग्राम जो इंपॉर्टेंट पार्ट था मैंने सारा बता दिया। डायग्राम यहां पर ड्रॉ करना आवश्यक है। ये ग्राफ
आना चाहिए और ये डायग्राम भी आपको ड्रॉ करना समझ में आना चाहिए। ड्रॉ करना आना चाहिए। ठीक है? सेंटर टेप वाली कहानी
मैंने बता दी कि क्यों सेंटर टेप किया है। क्यों करंट को हमें बीच में पहुंचाना था। मतलब जहां से करंट निकला वहां पर वापस
जाना भी चाहिए। ये करंट यही तो चाहता है अल्टीमेटली कि मुझे कंप्लीट क्लोज़्ड पाथ में रखो तब मैं बहूंगा वरना नहीं बहूंगा
वरना नहीं बहूंगा। ओके। क्या आई इतनी सी बात समझ में? अब इसमें एक इंपॉर्टेंट क्वेश्चन कि अगर कोई एमसीक्यू पूछना
चाहेगा तो एमसीक्यू क्या पूछेगा? वो आपको सिंपल-सिंपल चीजें नहीं पूछेगा। वो आपको पूछेगा एसएचएम से रिलेट करके। क्लास 11th
के टॉपिक से रिलेटेबल करके। जैसे कि जैसे कि देखो ये पूरी साइकिल है। कोई पूछे कि भाई ये
इनपुट में पूरी साइकिल क्या है? इनपुट। पूरी साइकिल क्या है? ये है पूरी साइकिल यहां से शुरू हुआ। यहां पर खत्म हुआ। तो
ये है इसकी पूरी साइकिल ये टाइम पीरियड है t। ये टाइम पीरियड है t। कोई पूछे कि आउटपुट में पूरी साइकिल क्या है? तो मैं
क्या बोलूंगा पता है? मैं क्या? आप अपने मम्मी-पा को या अपने दोस्त को भी बोलना जो गधे से गधा हो वो भी बताएगा कि इसमें पूरी
साइकिल मतलब मुझे तो इतनी ही लग रही है। भले ही तुमने d1 d2 को अलग किया है लेकिन 0 से लेके टाइम पीरियड t ही लग रहा है।
यही है आउटपुट की पूरी साइकिल। यही है आउटपुट की पूरी साइकिल। तो पूरी साइकिल के लिए जो टाइम पीरियड है उसको मैंने t
आउटपुट लिखा है। पूरी साइकिल के लिए जो टाइम पीरियड मैंने उसको t इनपुट लिखा है। तो तुम्हें रिलेशन समझ में आ रहा है कि
आउटपुट वाले में एक साइकिल छोटी है तो टाइम पीरियड उसका आधा हो जा रहा है भाई आधे टाइम पीरियड में पूरी साइकिल बना रहा
है। तो t आउटपुट इज इक्वल टू t इनपुट डिवाइड बाय 2 बेटा ये है काम की बात क्योंकि हर बार मुझे पता है यहां बच्चे
स्किप करके टॉपिक चले जाते हैं। यहां से एमसीक्यूस अच्छे पूछे जाते हैं और या यहां पर भी सीबीएसई बहुत होशियार है कि वो टाइम
पीरियड से नहीं पूछेगा। वो पूछेगा फ्रीक्वेंसी से। जो फ्रीक्वेंसी होती है टाइम पीरियड की उल्टी। तो फ्रीक्वेंसी
आउटपुट ये टाइम पीरियड 1 / टाइम 1 / टाइम पीरियड इज़ इक्वल टू फ्रीक्वेंसी होती है। तो टाइम पीरियड इज़ इक्वल टु 1 /
फ्रीक्वेंसी। तो आपको इसका उल्टा मिल जाएगा कि फ्रीक्वेंसी आउटपुट की इससे दुगनी मिलेगी। कैसे मिलेगा? एक बार ऐसे
समझा देता हूं। देखो। 1 / फ्रीक्वेंसी आउटपुट इज़ इक्वल टु यहां पर वन एज़ इट इज़ फ्रीक्वेंसी ऑफ़ अ इनपुट और यह दुगना। अब
दोनों को कंपेयर कर लीजिए। तो फ्रीक्वेंसी ऑफ़ अ आउटपुट इज़ = टू टाइम्स ऑफ़ अ फ्रीक्वेंसी ऑफ़ अ
इनपुट। देख लीजिए बेटा। यह टाइम पीरियड इनपुट डिवाइड बाई टू इज़ इक्वल टू टाइम पीरियड
आउटपुट। और ये फ्रीक्वेंसी हो जाएगी दुगनी। ये फ्रीक्वेंसी हो जाएगी दुगनी। तो बेटा कोई क्वेश्चन उठा के पूछ ले कल कि
भाई बताओ फुल वेव रेक्टिफायर में। किसमें? फुल वेव रेक्टिफायर के लिए क्वेश्चन है। फुल वेव रेक्टिफायर के लिए। अगर इनपुट
फ्रीक्वेंसी इनपुट फ्रीक्वेंसी 50 हर्ट्ज है। बताओ तो बेटा आउटपुट फ्रीक्वेंसी कितनी होगी? आउटपुट फ्रीक्वेंसी कितनी
होगी? तो 100 हर्ट्ज हो जाएगी। किसके लिए? फुल वेव रेक्टिफायर के लिए। फुल वेव रेक्टिफायर के लिए। ओके सर। ठीक है? ये
बात समझ गए? अब इसी में और एक क्वेश्चन। किसी ने पूछ लिया मेरे दोस्त किसी ने क्या सीबीएसई तुम्हें घुमा घुमा के ये चीजें
पूछेगा कि अगर इनपुट के लिए फ्रीक्वेंसी 50 हर्ट्ज से आउटपुट आपको 100 हर्ट्ज मिल रही थी। किसके लिए? ये फुल वेव रेक्टिफायर
के लिए ये मिल रहा था ना? ठीक है? अब मुझे बताओ मैं यही सेम कांसेप्ट अप्लाई करूं किसमें? हाफ
वेव रेक्टिफायर में। तब क्या होगा? तब क्या होगा? तब बच्चे क्या बोलते हैं बताएं? तब
बच्चे बोलते हैं सर ये फुल में क्या हुआ? दुगना हो गया। दुगना हो गया ना? हां देखो दुगना हो गया। तो हाफ वेव रेक्टिफायर में
ये हो जाएगा आधा। आधा मतलब 25 25 तो तुम 25 लिखोगे 100्स लिखोगे गलत हो जाएगी बातें। क्यों? क्योंकि हाफ वेव में ऐसा
कोई कांसेप्ट है ही नहीं, बेटा। हाफ वेव के लिए तुम साइकिल देखो कैसी मिल रही थी। कोई पूछे कि इनपुट वाले का टाइम पीरियड
कितना है? यहां से ले के यहां तक ये पूरा का पूरा t इनपुट है। आउटपुट वाले के लिए टाइम पीरियड क्या है? देख ये है पूरी
साइकिल। ये देखो छंग छंग डंग डंग छंग छंग तो पूरी साइकिल ऐसी है कि ऊपर डंग सीधी लाइन ऊपर सीधी लाइन तो ये पूरा साइकिल बन
रहा है ये पूरी साइकिल बन रही है वो तो सेम सेम ही टाइम पीरियड है यहां पर टाइम पीरियड भी सेम टाइम पीरियड सेम तो
फ्रीक्वेंसी भी सेम तो इनपुट के लिए सॉरी हाफ वेव रेक्टिफायर के लिए फ्रीक्वेंसी एज इट इज़ रहेगी यहां पर फ्रीक्वेंसी का कोई
रिलेशन नहीं है किसके लिए हाफ वेव रेक्टिफायर के लिए याद रखना है बेटा कि हाफ वेव रेक्टिफायर की बात करें तो
फ्रीक्वेंसी इनपुट की जितनी होगी उतनी ही आपको आउटपुट में मिलेगी। इस फ्रीक्वेंसी में कोई चेंज नहीं होगा ना ही टाइम पीरियड
में चेंज होगा। लेकिन फुल वेव रेक्टिफायर में दुगना हो जाएगी दुगनी हो जाएगी फ्रीक्वेंसी और आधा हो जाएगा टाइम पीरियड।
यह क्वेश्चन में आ सकता है। यहां पर सोनपरी की छड़ी लगा लेना मेरे दोस्त। मुझे पता है यहां से क्वेश्चन पूछेंगे।
पूछेंगे, पूछेंगे, पूछेंगे। ठीक है? यह लगा ली मैंने सोनपरी की छड़ी। ओके। अब आगे बढ़ाता हूं। इसकी नोट्स बाद
में डाउनलोड कर लेना बेटा। Telegram चैनल पर मिल जाएगी और नोट्स बहुत सुंदर तरीके से मैंने बनवाई है। तो एक बार चैप्टर वैसे
भी पढ़ लोगे तो पूरा का पूरा रिवाइज़ हो जाएगा। अब कैसे लिखना है वो डिटेल में मैंने यहां पर एक्सप्लेन किया है। कब d1
काम करेगा? कब d2 काम करेगा? कब क्या रोल है इसमें सेंटर टेप का? एक बार अच्छे से पढ़ लेना। एवरीथिंग मतलब सारी चीज़ यहां पर
आपको क्लियर कट हो जाएगी। अब मैं बता रहा हूं बेटा कि इसका मैग्नीट्यूड अभी भी कांस्टेंट ही हुआ है। हमें जो मिल रहा है
वो ऐसे पांच पांच पांच पांच जीरो से पांच जीरो से पांच पांच से जीरो पांच जीरो से पांच ऐसे ही मिल रहा है बढ़ रहा है घट रहा
है लेकिन एक कांस्टेंट वैल्यू नहीं मिल रही है तो हमने और भी शकुनी दिमाग लगाया और बीच में लगा दिया एक कैपेसिटर बीच में
क्या लगा दिया मेरे दोस्त एक कैपेसिटर ठीक है यहां पर बल्ब है इस बल्ब के पैरलली ही हमने लगा दिया कैपेसिटर ये कैपेसिटर
क्या काम करेगा देखना जैसे ही पहले तो क्या करेगा कैपेसिटर कुछ एनर्जी खाएगा ये एनर्जी आ रही थी ये करंट आ रहा था ये करंट
आ रहा पूरा का पूरा रेक्टिफायर वाला सिस्टम आ गया। रेक्टिफायर में है क्या बेटा? ट्रांसफार्मर प्लस डायोड। ओके। तो
जैसे ही पूरा का पूरा सिस्टम था, करंट आ रहा था, करंट बह रहा था। करंट बह रहा था, करंट जा रहा था। वो सारी चीजें हो रही थी।
लेकिन अब जैसे ही कैपेसिटर जोड़ा, तो थोड़ा करंट नीचे भी गया, थोड़ा करंट यहां पर भी गया। दोनों जगह थोड़ा-थोड़ा करंट गया। तो
इनिशियली में ये कैपेसिटर है वो चार्ज होने लगा। जब यहां पर पॉजिटिव साइकिल थी, ये कैपेसिटर चार्ज होने लगा। अब थोड़ी देर
के बाद हुआ ये कि अल्टरनेटिंग करंट उसका तो नेचर ही है। क्या करना? क्या करना? डायरेक्शन चेंज करना। जिस डायरेक्शन को
यूनडायरेक्शन करने का काम रेक्टिफायर ने कर दिया है। अब बारी है कैपेसिटर की अपने दिमाग की। हां, कैपेसिटर की। सुनना। तो
जैसे ये करंट की वैल्यू कम हो रही होगी। करंट की वैल्यू कम हो रही होगी। क्यों कम हो रही है? वो हमें पता है कि वो इनपुट
साइकिल के हिसाब से वेरी कर रहा है। मैग्नीट्यूड वेरी कर रहा है। तो यहां पर कैपेसिटर का रोल रहता है। पहले ये
कैपेसिटर क्या हो गया? चार्ज हो गया। अब एक सिचुएशन पे कैपेसिटर है वो मैक्सिमम चार्ज हो गया। उसको पता चला अरे करंट की
वैल्यू तो डिक्रीज हो रही है। मैं थोड़ी एनर्जी दूंगा। मैं तो चार्ज हूं ना तो मैं डिस्चार्ज हो के इसको थोड़ी एनर्जी दूंगा।
डिस्चार्ज हो के थोड़ी एनर्जी मैं इसको सपोर्ट करूंगा। मैं इसको एनर्जी सपोर्ट करूंगा। तो इस कैपेसिटर की वजह से कुछ
ग्राफ ऐसा हो जा रहा है। देखना ध्यान से। टुकुर ऐसे टुकुर टुकुर तो ऐसे पूरा तो नहीं लेकिन ऑलमोस्ट कांस्टेंट कांस्टेंट
की कगार पे हम पहुंच गए हैं। देखिए ऐसे बड़ा फिर ऐसे ऐसे ऐसे ऑलमोस्ट कांस्टेंट कांस्टेंट की कगार
पे हम चले गए हैं। तो कैपेसिटर डिस्चार्ज होता जाएगा। एनर्जी देता जाएगा इस लोड को इस लोड को एनर्जी देता जाएगा और हमारा काम
होता जाएगा। तो कैपेसिटर एनर्जी को पहले स्टोर कर रहा है। एनर्जी खा रहा है। चार्ज स्टोर हो रहा है उसमें। फिर जब जरूरत पड़ी
तो वापस चार्ज को फेंक भी रहा है और एनर्जी दे रहा है इस लोड को ताकि वैल्यू है वो ऑलमोस्टेंट कॉन्स्टेंट कॉन्स्टेंट
पैमाने पे ही चलती रहे। समझ पाए हो? इसी सर्किट को बोलते हैं कैपेसिटर फ़िल्टर सर्किट। फुल वेव रेक्टिफायर विद द
कैपेसिटर फ़िल्टर सर्किट। ये सीबीएसई 2025 के सैंपल पेपर में क्वेश्चन है फुल वेव रेक्टिफायर का। तो याद रखना बेटा हॉटेस्ट
टॉपिक ऑफ द चैप्टर है। इसको भूलना नहीं है। बहुत अच्छी तरीके से कर लेना। थ्योरी में भी पूछा जा सकता है। एमसीक्यू में भी
आ सकता है। और केस बेस्ड स्टडी में भी पूछा जा सकता है। जी हां, देख लीजिए क्वेश्चन 2024 में पूछा गया क्वेश्चन है।
केस स्टडी बेस्ड क्वेश्चन का। हम इसको पढ़ेंगे नहीं क्योंकि अभी मैंने जो भी बात बढ़ाई है बेटा वो सेम एज इट इज़ है। सेम एज
इट इज़ बातें यहां पर बताई गई है। ठीक है? रेक्टिफिकेशन क्या होता है? वगैरह-वगैरह-वगैरह सारी बात बताई है। हाफ
वेव रेक्टिफायर, फुल वेव रेक्टिफायर बहुत संक्षिप्त में बताई है। अगर क्वेश्चन ना बने तब देख लेना। पूरा पैराग्राफ पढ़ लेना।
लेकिन बन जाएंगे ऑलमोस्ट क्वेश्चन। अब यहां पर बात है कि द रूट मीन स्क्वायर वैल्यू ऑफ अल्टरनेटिंग वोल्टेज
अप्लाई टू अ फुल वेव रेक्टिफायर v नॉट / 2 देन द रूट मीन स्क्वायर वैल्यू ऑफ द रेक्टिफाइड आउटपुट मतलब इनपुट में इनपुट
में बेटा जो दिया जा रहा है उसकी आरएमएस वैल्यू उसकी आरएमएस वैल्यू अगर v नॉट / 2 है तो आउटपुट वाले में क्या मिलेगा आउटपुट
की आरएमएस क्या मिलेगा तो बेटा याद रखना अगर पॉजिटिव साइन साइन होती है तो उसको नेगेटिव साइन और पॉजिटिव साइन मतलब उसके
मैग्नीट्यूड को उसको रेक्टिफिकेशन करने का काम रेक्टिफायर करता है। ठीक है? ये वैल्यू घटा नहीं देगा। वैल्यू को तोड़
मरोड़ नहीं देगा। तो ये आंसर सेम एज़ इट इज़ आएगा। v नॉट / 2 वैल्यू में कोई भी चेंजज़ नहीं करेगा। ठीक है? RMS वैल्यू में कोई
चेंजिस नहीं करेगा। आपने साइकिल देखी है। सेम एज इट इज़ साइकिल मिल रही थी यहां पर। सेम एज़ इट इज़ ही साइकिल मिल रही थी। देख
कहां गया? ये सेम एज इट इज़ ही साइकिल बोली है। उसमें कोई चेंजज़ नहीं है। कोई चेंजज़ नहीं है। तो सेम एज इट इज़ ही मिल रही है।
बस उसकी वैल्यू पॉजिटिव में हो जा रही है। तो V आरएमएस पे कोई फर्क नहीं पड़ेगा। ओके? दूसरा क्वेश्चन आपके सामने है कि इन अ फुल
वेव रेक्टिफायर द करंट इन अ ईच ऑफ़ अ डायोड फ्लोज़ ऑफ ईच डायोड के लिए बताया है। ईच डायोड, हां, याद रखना। कंप्लीट साइकिल
किसके लिए पहले बात की है? फुल वेव रेक्टिफायर। कंप्लीट साइकिल ऑफ़ अ इनपुट सिग्नल। क्या कंप्लीट साइकिल के लिए काम
करेगा? तो मुझे लगता है कि यह स्टेटमेंट सही है। अगर आपको भी लग रहा है और इसको ऑप्शन को आप टिक करके आ जाते हो बेटा तो
आपका मुंह मुए हो जाता है। ऐसा क्यों? क्योंकि ये बता रहे हैं ईच डायोड के लिए। तो पूरी साइकिल के लिए कोई डायोड काम नहीं
कर रहा था। दोनों अल्टरनेटिंग में काम कर रहे थे कि एक पॉजिटिव है तो एक फॉरवर्ड बायस में दूसरा रिवर्स बायस में। फिर
साइकिल नेगेटिव हुई तो दूसरा था वो फॉरवर्ड बायस में हो जा रहा है। पहला वाला रिवर्स बायस में। तो दोनों अलग-अलग हाफ
साइकिल के लिए काम कर रहे थे। यहां बता रख हाफ साइकिल ऑफ़ अ इनपुट सिग्नल हम लेस देन हाफ साइकिल ऑफ द
हां ये है ना ओनली फॉर अ पॉजिटिव हाफ साइकिल ऑफ अ इनपुट सिग्नल लेस देन द साहिब साइकिल इनपुट सिग्नल क्या ऑप्शन दे रखे
हैं हां तो ऑप्शन मतलब सही लग रहा है यहां पर कि हाफ साइकिल ऑफ अ इनपुट सिग्नल जो भी
इनपुट सिग्नल होगा उसकी हाफ साइकिल के लिए काम करेंगे। ठीक है समझ में आ रही है इतनी बात? अब देख दूसरा, ah तीसरा क्वेश्चन इसी
में कि इन अ फुल वेव रेक्टिफायर भाई ये क्वेश्चन समझ में आया ना? d1 d2 आप समझ पा रहे हो ना? पहला है वो d1 है वो इसके लिए
काम कर रहा था। d2 है। d2 फिर हाफ साइकिल के लिए काम कर रहा था। फिर d1 पास वापस हाफ साइकिल के लिए d2 टू हाफ साइकिल के
लिए। तो सर हाफ-हाफ साइकिल के लिए वो काम कर रहे थे। फुल साइकिल के लिए कोई इकलौता डायोड है वो काम नहीं कर रहा था। कोई एक
डायोड काम नहीं कर रहा था। तो इसलिए ऑप्शन बन जाएगा बी इसका ना कि ए। पूरी साइकिल के लिए अगर पूरा फुल वेव रेक्टिफायर अकेला
अकेला पूछता तो बात सही थी। लेकिन अलग-अलग पूछेंगे तो नहीं। ईच डायोड वाला खेलता ना तो ये ईच के कारण ऑप्शन नंबर बी हो गया।
ईच नहीं होता तो हम पक्का ए ऑप्शन कर देते। ओके? तीसरा क्वेश्चन इन अ फुल वेव रेक्टिफायर बोथ डायोड आर अ फॉरवर्ड बायस
एट अ सेम टाइम। हो ही नहीं सकता बेटा। एक रिवर्स में होगा, एक फॉरवर्ड में होगा। बोथ डायोड रिवर्स बायस यह भी नहीं। ऑन वन
डायोड इज़ फॉरवर्ड बायस एंड द रिवर्स बायस्ड अदर। ओके? एट अ सेम टाइम। सी ऑप्शन सही हो जाएगा। देख रहे हो ना मतलब केस
स्टडी बेस्ड क्वेश्चन में भी मतलब आसान ही क्वेश्चन है लेकिन एक बार कांसेप्ट समझ में आना चाहिए मेरे दोस्त। अब इसमें चौथा
क्वेश्चन है कि अल्टरनेटिंग वोल्टेज एंड फ्रीक्वेंसी दे रखी है 50 हर्ट्ज अप्लाई टू अ हाफ वेव रेक्टिफायर। देख फ्रीक्वेंसी
से आया हुआ क्वेश्चन। देन रिपल फ्रीक्वेंसी ऑफ़ अ आउटपुट विल बी आउटपुट की फ्रीक्वेंसी कितनी होगी? 100 25 नहीं
बेटा। हाफ वेव की बात कर रहे हैं। हाफ वेव है ना यहां पर हाफ वेव रेक्टिफायर ही है। तो हाफ के लिए फ्रीक्वेंसी सेम रहती थी।
टाइम पीरियड सेम रहता था। फुल के लिए पूछा होता तो दुगना हो जाता। 100 ऑप्शन बन जाता। ओके। आखिरी क्वेश्चन इस चैप्टर का
भी और केस स्टडी बेस्ड क्वेश्चन का ही। कि इन अ सिग्नल एज़ शोन इन द फिगर द अप्लाइड टू अ PN जंक्शन डायोड आइडेंटिफाइड द
आउटपुट अक्रॉस द आरएल। इस आरएल के अक्रॉस हमें क्या आउटपुट मिलेगा? तो पहले इनपुट को समझो। देखो पहले -5 जैसे ऐसी साइकिल
होती थी ना डंग डंग डूंग। उसकी जगह पे साइकिल कैसी है? कॉन्स्टेंट, फिर ऐसे ऊपर, फिर ऐसे नीचे। तो, पहले
-5, फिर +5, फिर यह प्लस अह -5, तो इसके लिए हमें दे रखा है सिर्फ और सिर्फ एक डायोड वाली अरेंजमेंट, एक डायोड वाली
अरेंजमेंट दे रखी है। सिर्फ और सिर्फ़ एक डायोड वाली अरेंजमेंट दे रखी है। सुनना। तो, पहले -5 के लिए, यहां पर जैसे ही -5
आएगा बेटा, तो -5 के लिए ये थोड़ी काम करेगा। यह पहली साइकिल के लिए थोड़ी काम करेगा। सुनना इसको तीन तीन पार्ट में
डिवाइड करो। यह पहला पार्ट तो पहले पार्ट के लिए तो ये काम में ही नहीं करेगा क्योंकि पहले पार्ट में ये रिवर्स बायस
में हो जाएगा। ये रिवर्स बायस में हो जाएगा। क्यों रिवर्स बायस में हो गया? आपको पता है कि -π p के साथ कनेक्टेड किया
तो बन जाएगा रिवर्स बायस। तो पहले के लिए ये काम ही नहीं करेगा। तो ये एकदम ज़ीरो। नील बटा सन्नाटा ज़ीरो। ओके? फिर दूसरे के
लिए आउटपुट को ग्रीन से रिप्रेजेंट करता हूं। फिर दूसरे के लिए +5 तो +5 के लिए सिग्नल को जाने देगा करंट को जाने देगा।
ले बेटा ऐसा कुछ सिग्नल मिल गया। वापिस -5 पे आए तो कुछ ना मिले। तो कुछ ना मिले। तो ऊपर के लिए +5 मिल रहा है। किस कंडीशन
में? दूसरे वाले पार्ट में मिल रहा है। ये दूसरे वाले पार्ट में आउटपुट मिल रहा है। पहले वाले पार्ट में तो 0 / 0 ये 0 वोल्ट
ही मिल रहा था। तो मेरे ख्याल से डी ऑप्शन एकदम करेक्ट हो जाएगा। क्या आ रही है मेरे दोस्त बात समझ में? तो ये पूरा चैप्टर था
सेमीकंडक्टर इलेक्ट्रॉनिक्स। इसमें इसमें जितने भी कांसेप्ट थे अपनी एनसीईआरटी में वो सारे कांसेप्ट मैंने बताए हैं मेरे
दोस्त। तो जो आपकी एग्जामिनेशन में आएगा 2026 में, 2027 में, 2028 में जब भी आप देख रहे हो वो सारे क्वेश्चन इसी वन शॉट
से रिलेटेबल होंगे। इससे बाहर कुछ नहीं जाएगा मेरे दोस्त। मैंने आपको कंसेप्चुअली भी सारी बात बताई है। और इसके साथ-साथ
आईएमपी क्वेश्चन की लिस्ट भी देकर जा रहा हूं कि जहां से ही आपके क्वेश्चंस देखने को मिलेंगे। इसी में थोड़ा बहुत तोड़फरोड़ के
कुछ नए पैमाने पे क्वेश्चंस बनाए जाएंगे, कुछ न्यूमेरिकल्स बनाए जाएंगे और वही आपकी एग्जामिनेशन में आएंगे। तो बहुत अच्छा लगा
दोस्त आपको पढ़ा के क्योंकि ये लास्ट चैप्टर है। तो ऐसा समझ लीजिए कि ये क्लास 12th की जर्नी थी जो मेरी आंखों के सामने
से जा रही है कि जहां पर मैंने इलेक्ट्रोस्टेटिक से शुरुआत की थी, इलेक्ट्रिक चार्ज से शुरुआत की थी और आज
मैं सेमीकंडक्टर पहुंचा हूं और इनफैक्ट मैं नहीं हम सेमीकंडक्टर पहुंचे हैं। तो बहुत सारा प्यार मिला आपकी तरफ से। उस
प्यार के लिए बेटा दिल खोल के। मैं भी आपको बधाइयां देता हूं। तो बस दिल की इच्छा यही है कि खूब मेहनत करो, खूब आगे
बढ़ो। अपना अपने मां-बाप का नाम खूब रोशन करो। ऑल द बेस्ट।
अधिकांशतः हाँ। वीडियो में सेमीकंडक्टर की मूल अवधारणाएँ जैसे चालकता, ऊर्जा बैंड, इंट्रेंसिक/एक्सट्रेंसिक अर्धचालक सही ढंग से समझाए गए हैं। हालांकि, प्रतिरोधकता के आंकड़ों (10^-2 से 10^-8 ओम मीटर) में त्रुटि है, इसलिए इन्हें पाठ्यपुस्तक से क्रॉस-चेक करना उचित होगा।
ये ट्रिक्स याद रखने में मददगार हैं, लेकिन ये शैक्षिक रूप से मान्य नहीं हैं। ये बुनियादी अवधारणाओं को विकृत किए बिना जानकारी को सरल बनाती हैं, इसलिए इन्हें मूल सिद्धांतों को समझने के बाद ही उपयोग करें।
इन दावों के लिए कोई ठोस संदर्भ नहीं दिया गया है, इसलिए इन्हें केवल सुझाव माना जाना चाहिए। छात्रों को परीक्षा पैटर्न के लिए आधिकारिक पाठ्यक्रम और पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों पर भरोसा करना चाहिए।
नहीं, इसे एक अतिरिक्त संसाधन के रूप में देखें। वीडियो विषय को सरल भाषा में समझाने में मददगार है, लेकिन पाठ्यपुस्तकों और NCERT जैसी आधिकारिक सामग्री से क्रॉस-रेफरेंस करना आवश्यक है।
दो प्रमुख कमियाँ हैं: प्रतिरोधकता का गलत आंकड़ा (चालकता के आंकड़े से भ्रम) और परीक्षा-संबंधी बिना संदर्भ के दावे। बाकी सामग्री उच्च गुणवत्ता वाली है, लेकिन ये त्रुटियाँ पूर्ण विश्वसनीयता को प्रभावित करती हैं।
हाँ, ऊर्जा बैंड सिद्धांत और इंट्रेंसिक/एक्सट्रेंसिक अर्धचालक की व्याख्या सही और स्पष्ट है। ये अवधारणाएँ मानक पाठ्यक्रम के अनुरूप हैं, इसलिए इन पर भरोसा किया जा सकता है।
बिल्कुल, यह एक उपयोगी संसाधन है। इसकी सरल भाषा और याद रखने की ट्रिक्स अवधारणाओं को समझने में मदद करती हैं, लेकिन छात्रों को इसके साथ पाठ्यपुस्तकों का उपयोग करके अपनी समझ को सुदृढ़ करना चाहिए।
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