Introduction to Nationalism in Europe
The lecture begins by introducing the concept of nationalism and its emergence in Europe, highlighting the visionary imaginations of artists like Frederick Sorlio who depicted a democratic and republican world challenging monarchic rule.
The French Revolution and Its Impact
- 1789 French Revolution: Marked the shift from monarchy to democracy.
- Key reforms: abolition of absolute monarchy, introduction of equality, new national symbols like the tricolor flag, language, and anthem.
- Rise and rule of Napoleon Bonaparte (1799-1815): brought reforms like the Napoleonic Code (equality before law, property rights, standardized measures), but centralized power as emperor.
- Napoleon’s expansionism ended with his defeat at the Battle of Waterloo (1815).
Conservatism and the Congress of Vienna (1815)
- Post-Napoleon, European monarchs restored traditional authority and social hierarchies.
- The Treaty of Vienna reestablished boundaries and monarchies but allowed confederations to persist.
- Secret societies and liberal nationalists emerged underground to oppose conservatism.
Age of Revolutions (1830-1848)
- Series of uprisings in France, Belgium, and Greece aimed at liberal reforms and independence.
- July Revolution in France led to constitutional monarchy under Louis-Philippe.
- Belgium separated from the United Kingdom of the Netherlands.
- Greek War of Independence received European support, culminating in an independent Greece by 1832.
Cultural Nationalism and the Role of Language
- Romanticism fostered national sentiment through arts, literature, and folklore.
- Language became a key symbol of identity, as seen in Polish resistance against Russian language imposition.
Economic Hardships and Popular Revolts
- Growing population and unemployment led to food scarcity and urban overcrowding.
- 1848 Paris Revolution resulted in the establishment of the French Republic and expanded voting rights and labor protections.
- Silesian Revolt and worker uprisings highlighted social discontent.
Middle-Class Liberalism and Political Demands
- Middle class demanded constitutional governance, freedom of press and association, but restricted voting rights primarily to property-owning men.
- The 1848 Frankfurt Parliament attempted German unification but failed due to lack of support from peasants and royal rejection.
Unification of Germany and Italy
- Germany: Under King William I and Chancellor Otto von Bismarck, Prussia unified German states through wars with Denmark, Austria, and France, resulting in the German Empire (1871).
- Italy: Victor Emmanuel II and Count Cavour led diplomatic and military efforts to unite disparate states; by 1861, Italy was unified with the surrender of papal territories.
The British Case
- Gradual unification of England, Scotland, Wales, and Ireland through acts and annexations, marked by religious and ethnic complexities.
Visualization of Nations through Art
- National identities were personified in allegorical female figures to inspire patriotism and unity.
Nationalism and Imperialism
- Nationalism evolved into imperialism with powerful nations seeking to dominate smaller states, especially in the Balkans.
- This tension contributed to conflicts leading up to the First World War. See The Dark Side of Nationalism in World War One Explained for more on this subject.
- Post-war anti-imperial movements fostered the resurgence of national independence struggles. Further insights can be found in The Aftermath of World War I: Pathways to Conflict and the Rise of Totalitarianism.
Conclusion
This comprehensive overview links historical events, cultural movements, and political changes that fostered nationalism in Europe, setting the stage for modern nation-states and global conflicts.
For a broader understanding of the period's intellectual backdrop, see The Enlightenment: Transforming European Thought and Society.
For students preparing for board exams, understanding these interconnected events and their consequences is crucial for grasping European history's nationalist movements and their legacy.
हेलो एवरीवन आज से हम एक नई सीरीज स्टार्ट करने जा रहे हैं जिसमें हम हर एक चैप्टर को बहुत ही कम टाइम में कवर करेंगे ताकि
आप लोगों की प्रिपरेशन बोर्ड एग्जाम के लिए काफी अच्छे से हो सके वह भी बहुत ही कम टाइम में तो आज की वीडियो में हम पढ़ने
वाले हैं क्लास 10थ हिस्ट्री के फर्स्ट चैप्टर को जिसका नाम है द राइज ऑफ नेशनलिज्म इन
यूरोप देखो हमारे चैप्टर की शुरुआत होती है 1848 से 184 में क्या होता है फ्रेडरिक सोरियो नाम के एक फ्रांस आर्टिस्ट थे तो
उन्होंने क्या किया था अपनी इमेजिनेशन से चार पिक्चर्स बनाई थी जिनको बोला गया द पैक्ट बिटवीन नेशंस जिसमें से यह जो
पिक्चर आप देख रहे हो इस पिक्चर में फ्रेडरिक सोरियो एक डेमोक्रेटिक एंड रिपब्लिक वर्ल्ड की कल्पना कर रहे हैं
देखो इस पिक्चर को अगर आप ध्यान से देखोगे तो इसमें यह जो स्टैचू है वह है स्टैचू ऑफ लिबर्टी जो कि आजादी को दर्शा रही है इस
स्टैचू के एक हाथ में टॉर्च है और दूसरे हाथ में ह्यूमन राइट्स का एक चार्टर है और स्टैचू के सामने यानी कि जमीन पर मुनार की
सिस्टम या एब्सलूट इंस्टीट्यूशंस बिखरे पड़े हुए हैं मतलब जो राजाशाही चीजें थी जैसे कि राजाओं के मुकुट सिंहासन उनके
कपड़े यह सब जमीन पर बिखरे पड़े हुए हैं इसमें जो फ्रेडरिक सोरियो हैं वह लोगों को यह बताना चाह रहे हैं कि जो यह लंबी लाइन
में अलग-अलग नेशंस के लोग आ रहे हैं वह कैसे मोनार्की सिस्टम को डिस्ट्रॉय करते जा रहे हैं और स्टैचू लिबर्टी यानी कि
आजादी की तरफ बढ़ते जा रहे हैं यह सब देखकर उनके जो गॉड है वह बहुत खुश हो रहे हैं और उन्हें ब्लेसिंग्स दे रहे हैं तो
यह तो केवल फ्रेडरिक सोरियो की कल्पना थी लेकिन इस चैप्टर में हम वास्तव में जानेंगे कि कैसे यूरोप में अलग-अलग जगहों
पर लिबर्टी के लिए स्ट्रगल हुआ साथ में हम यह भी जानेंगे कि यूरोप में नेशनलिज्म कैसे फैला क्या-क्या चेंजेज देखने को मिले
कैसे लोगों ने नेशनलिज्म के लिए स्ट्रगल किया कैसे डायनेस्टिक रूल खत्म हुआ और कैसे नेशन स्टेट्स का एक्जिस्टेंस हुआ तो
चलिए स्टार्ट करते [संगीत] हैं फर्स्ट टॉपिक है हमारा द फ्रेंच
रेवोल्यूशन एंड द आइडिया ऑफ द नेशन दोस्तों जब 1789 में फ्रांस रेवोल्यूशन हुआ तो उसका इंपैक्ट केवल फ्रांस के ऊपर
नहीं पड़ा बल्कि उसका इंपैक्ट पूरे के पूरे यूरोप पर पड़ा क्योंकि 1789 से पहले फ्रा से मोनार्की थी मतलब किंग रूल करता
था जनता के पास बिल्कुल भी पावर नहीं थी राजा जो चाहता था फ्रांस के अंदर वही होता था लेकिन 1789 में जब फ्रांस रेवोल्यूशन
हुआ तो फ्रांस सोसाइटी में कई सारे चेंजेज आते हैं जैसे कि पावर जो थी वह मोनार्की से हटकर फ्रांस के कॉमन सिटीजंस के पास
पहुंच जाती है कई ऐसे आइडियाज इंट्रोड्यूस किए जाते हैं ताकि लोगों में यूनिटी बनी रहे जैसे कि ले पात्रे ले सिटन ताकि
फ्रांस में सभी लोगों को समान नजर से देखा जा सके थर्ड चेंज था फ्रांस के पुराने फ्लैग को हटाकर एक नया फ्लैग इंट्रोड्यूस
किया जाता है जिसमें तीन कलर थे साथ में फ्रांस लैंग्वेज को नेशनल लैंग्वेज डिक्लेयर कर दिया जाता है एक नया नेशनल
एंथम कंपोज किया जाता है अलग-अलग देशभक्ति के गीत कंपोज किए जाते हैं सिक्स चेंज था स्टेट जनरल को हटाकर नेशनल असेंबली सेटअप
की जाती है साथ में जो इंटरनल कस्टम ड्यूटीज और ड्यू पे करने पड़ते थे लोगों को उनको हटा दिया जाता है तो यह कुछ मेजर
चेंजेज थे जो कि फ्रांस में किए गए थे ड्यूरिंग द फ्रांस रेवोल्यूशन कहने का मतलब यह है कि फ्रेंच रेवोल्यूशन के बाद
फ्रांस में डेमोक्रेसी आ गई थी अब लोग इस बात से काफी ज्यादा खुश थे कि डेमोक्रेसी आ गई लेकिन डेमोक्रेसी का मजा फ्रांस में
ज्यादा टाइम तक नहीं रहता है 1799 में एक ऐसे व्यक्ति की एंट्री होती है जो कि फ्रांस से डेमोक्रेसी को हटा देता है और
सारी पावर अपने हाथ में ले लेता है उस व्यक्ति का नाम था नेपोलियन बोनापार्ट 1804 में नेपोलियन अपने आप को फ्रांस का
एंपरर डिक्लेयर कर देता है और एक सिविल कोड लेकर आता है जिसके तहत वह फ्रांस में कई सारे चेंजेज करता है इस सिविल कोड ऑफ
1804 को नेपोलियनिक कोड भी बोला जाता है तो इस कोड के तहत नेपोलियन कई सारे चेंजेज करता है जैसे कि वो इक्वलिटी बिफोर लॉ
एस्टेब्लिश करता है मतलब कानून की नजर में सब बराबर हैं सेकंड वो राइट टू प्रॉपर्टी लेकर आता है वह फ्यूड सिस्टम को खत्म कर
देता है ट्रांसपोर्ट एंड कम्युनिकेशन सिस्टम को इंप्रूव करता है वेट एंड मेजरमेंट को स्टैंडर्डाइज कर देता है साथ
में एक कॉमन करेंसी लेकर आता है और गिल्ड रिस्ट्रिक्शंस को भी हटा देता है तो यह जो इतने सारे चेंजेज किए नेपोलियन ने यह सब
देखकर लोगों को लगा कि यार नेपोलियन तो अच्छा आदमी है तो लोग नेपोलियन से काफी ज्यादा खुश हो रहे थे ऊपर से नेपोलियन
जहां-जहां भी जाता था वहां से वह मोनार्की खत्म करता जाता था यह सब देखकर लोग और ज्यादा खुश हो रहे थे शुरू शुरू में तो
लोग नेपोलियन को हार बंगर ऑफ लिबर्टी समझने लगे थे मतलब लोग समझ रहे थे कि नेपोलियन ही लिबर्टी लेकर आएगा लेकिन ऐसा
ज्यादा टाइम तक नहीं चलता है लोगों को धीरे-धीरे समझ में आने लगा था कि नेपोलियन उन्हें लिबर्टी दिलाने के लिए नहीं आया है
बल्कि वह खुद का डोमिनेशन बढ़ाने के लिए आया है क्योंकि नेपोलियन जहां-जहां भी जाता था वहां से मोनार्की तो खत्म हो रही
थी मतलब राजा को तो वो हटा देता था पर वह अपनी खुद की आर्मी वहां पर सेटअप कर देता था इसके अलावा और भी कई अदर रीजंस भी थे
जिनकी वजह से लोग नेपोलियन से नफरत करने लगे थे जैसे कि नेपोलियन ने लोगों से पॉलिटिकल
फ्रीडम छीन ली थी टैक्स बढ़ा दिया था लोगों के ऊपर सेंसरशिप लगा दी थी ऊपर से नेपोलियन जबरदस्ती लोगों को फ्रांस आर्मी
में रिक्रूट कर रहा था ऐसा वह इसलिए कर रहा था क्योंकि उसे पूरे यूरोप को कंकर करना था तो यह भी कुछ रीजंस थे जिनकी वजह
से अब लोग नेपोलियन से नफरत करने लगे थे अभी इस कहानी को फिलहाल के लिए यही रोकते हैं सेकंड टॉपिक है हमारा द मेकिंग ऑफ
नेशनलिज्म इन यूरोप दोस्तों मिड 18 सेंचुरी में यूरोप में कोई भी नेशन स्टेट नहीं था नेशन स्टेट मतलब कोई भी ऐसा रीजन
नहीं था जहां के मोस्ट ऑफ द लोग कॉमन लैंग्वेज कॉमन कल्चर कॉमन हिस्ट्री कॉमन आइडेंटिटी से बिलोंग करते हो क्योंकि उस
समय पर यूरोप में कंट्रीज तो होती नहीं थी बल्कि बड़े-बड़े एंपायर होते थे मतलब अलग-अलग भाषा बोलने वाले लोग अलग-अलग
जगहों पर बसे हुए थे तो ऐसे में उनमें नेशनलिज्म कैसे फैला कैसे उनके मन में नेशन स्टेट का आईडिया आया होगा चलिए जानते
हैं द अरिस्टो क्रेसी एंड द न्यू मिडिल क्लास दोस्तों उस समय पर यूरोप में मुख्य रूप से दो तरह के लोग रहते थे पहले
अरिस्टो क्रेट्स और दूसरे पीजेंट्स अरिस्टो क्रेट्स सोसाइटी के वेल्थी लोग थे मतलब इनके पास बहुत पैसा था इनके पास
जमीनें थी ये सोशली और पॉलिटिकली पावरफुल थे ये लोग आपस की फैमिलीज में शादी करते थे और यह लोग फ्रेंच लैंग्वेज बोलते थे
क्योंकि इनका मानना यह था कि फ्रेंच लैंग्वेज एक हाई स्टेटस लैंग्वेज है ऊपर से इनकी एक जैसी लाइफ स्टाइल थी महंगे
महंगे कपड़े पहनते थे अच्छा-अच्छा खाते थे वहीं जो पीजेंट्स थे वो सोसाइटी के गरीब लोग थे और इनके पास ना ही जमीने थी भले ही
यह मेजॉरिटी में थे पर यह पावरफुल नहीं थे क्योंकि इनके पास पैसा नहीं था अब धीरे-धीरे क्या होता है सेकंड हाफ ऑफ 18
सेंचुरी में इंडस्ट्रियल रिवोल्यूशन के चलते एक नई वर्किंग क्लास उभर के आती है जिसको बोला गया मिडिल क्लास यह लोग ना ही
ज्यादा गरीब थे और ना ही ज्यादा अमीर थे पर यह लोग एजुकेटेड थे यह एजुकेटेड इसलिए हो गए थे क्योंकि इनके पास थोड़ा बहुत
पैसा आ गया था मिडिल क्लास लोगों में आते थे बिजनेसमैन इंडस्ट्री लिट्स और अदर प्रोफेशनल्स तो यह जो मिडिल क्लास के लोग
थे इन्हीं के मन में आईडिया आता है क्या आईडिया आता है आईडिया आता है लिबरल नेशनलिज्म का मतलब लिबरलिज्म का अब यह
लिबरलिज्म क्या होता है चलिए जानते हैं व्ट डिड लिबरल नेशनलिज्म स्टैंड फॉर तो लिबरलिज्म जो वर्ड है वो एक लैटिन वर्ड
लिबर से ड्राइव किया गया है जिसका मतलब होता है फ्री मतलब यह जो मिडिल क्लास के लोग थे वह लिबरलिज्म चाहते थे मतलब फ्री
होना चाहते थे जिसके लिए मिडिल क्लास के लोग कई चीजों के लिए डिमांड कर रहे थे जैसे कि पहली डिमांड थी कि ऑटोक्रेसी रूल
खत्म होना चाहिए दूसरी डिमांड थी कि जो चर्च के लोग हैं उन्हें जो प्रिविलेजेस मिलते हैं वह खत्म होना चाहिए मतलब
क्लर्जी प्रिविलेजेस का एंड होना चाहिए तीसरा कांस्टिट्यूशन होना चाहिए और एक रिप्रेजेंटेटिव फॉर्म ऑफ गवर्नमेंट होनी
चाहिए मतलब गवर्नमेंट जनता के द्वारा चुनी जानी चाहिए तो यह सब चीजों के लिए मिडिल क्लास लोग डिमांड कर रहे थे पर दोस्तों
पता है प्रॉब्लम कहां थी प्रॉब्लम यह थी कि यह वोटिंग राइट्स की डिमांड तो कर रहे थे पर केवल मेंस के लिए वो भी ऐसे मेंस के
लिए जिनके पास प्रॉपर्टी हो और जो वुमन थी उनको तो यह वोटिंग राइट्स दिलाने के प्लान में ही नहीं थे मतलब यह वुमन को सपोर्ट
नहीं कर रहे थे तो जो मेंस विदाउट प्रॉपर्टी थे और जो वूमेन थी वो वोटिंग राइट्स के लिए यूरोप की अलग-अलग जगहों पर
प्रोटेस्ट कर रही थी वहीं दूसरी ओर यूरोप में एक और प्रॉब्लम चल रही थी प्रॉब्लम यह थी कि उस समय पर जो ट्रेडर्स थे उन्हें
ट्रेड करने के लिए काफी ज्यादा टैक्स देना पड़ता था फॉर एग्जांपल अगर उस समय पर कोई ट्रेडर एम्सबर्ग से न्यूरेमबर्ग जाता था
तो उन्हें 11 कस्टम बैरियर्स से गुजरना पड़ता था मतलब 11 जगहों पर टैक्स देना पड़ता था व भी 5-5 पर के हिसाब से तो आप
सोच सकते हो कि अगर वह इतना ज्यादा टैक्स पे करेंगे तो उन्हें काफी ज्यादा लॉस होगा तो यह एक प्रॉब्लम थी साथ में एक प्रॉब्लम
यह भी थी कि उस समय पर यूरोप में डिफरेंट टाइप्स ऑफ करेंसीज चलती थी लगभग 30 डिफरेंट टाइप्स ऑफ करेंसी चलती थी तो ऐसे
में ट्रेडर्स को प्रॉब्लम यह होती थी कि उन्हें ट्रेड करने के लिए हर स्टेट में करेंसी चेंज करनी पड़ती थी तो यह जो दो
मेजर प्रॉब्लम्स थी एक तो टैक्स की और दूसरी डिफरेंट करेंसीज की तो इन प्रॉब्लम्स का सॉल्यूशन निकल के आता है
1834 में 1834 में क्या होता है एक कस्टम यूनियन फॉर्म होता है जिसका नाम था जोल वरी
इसे स्टार्ट किया गया था प्रशिया के द्वारा बट इसमें बाद में जाकर अदर जर्मन स्टेट्स भी जॉइन हो गए थे तो जोल वीन के
फॉर्म होने से ट्रेड के अंदर काफी लिबरलाइजेशन होता है जैसे कि जोल वन के आने की वजह से जितने भी ट्रिप बैरियर्स थे
उनको हटा दिया जाता है दूसरा जितनी भी 30 डिफरेंट टाइप्स की करेंसीज चलती थी उनको रिड्यूस करके केवल दो तरह की करेंसीज में
कर दिया जाता है तीसरा रेलवे नेटवर्क को भी प्रमोट किया जाता है ताकि ट्रेड और भी आसानी से हो सके तो जोल बरीन के फॉर्म
होने की वजह से यूरोप में काफी इकोनॉमिक लिबरलाइजेशन होता है मतलब ट्रेड रिस्ट्रिक्शंस पूरी तरीके से हट गए
थे अ न्यू कंजरवेटिज्म आफ्टर 181 अब हम अपनी कहानी में वहीं वापस चलते हैं जहां हमने छोड़ा था हमने देखा था कि नेपोलियन
ने 1799 में रूल करना स्टार्ट किया था और उसका रूल 1815 तक चलता है तो अब क्वेश्चन यह अराइज होता है कि 1815 में ऐसा क्या
होता है कि नेपोलियन का रूल खत्म हो जाता है तो होता क्या है 1815 में एक फाइट होती है जिसको बैटल ऑफ वाटरलू बोला जाता है इस
फाइट में एक तरफ नेपोलियन था और दूसरी तरफ थे कई बड़े-बड़े नेशंस जैसे कि प्रूस ऑस्ट्रिया ब्रिटेन रशिया तो इस फाइट का
रिजल्ट यह आता है कि नेपोलियन इस वाटरलू की लड़ाई को हार जाता है नेपोलियन की हार के बाद जो जीते हुए नेशंस थे वह पता है
कौन थे वह कंजरवेटिव लोग थे कंजरवेटिव मतलब यह ऐसे लोग थे जिन्हें सोसाइटी में चेंजेज पसंद नहीं थे मतलब यह नहीं चाहते
थे कि मोनार्की या ऑटोक्रेसी रूल खत्म हो यह लोग चाहते थे कि यूरोप में फिर से मोनार्की आ जाए इसीलिए ये लोग क्या करते
हैं कंजरवेटिज्म लाते हैं कंजरवेटिज्म मतलब जो कुछ भी नेपोलियन ने किया था जो भी चेंजेज किए थे यूरोप में उन्हें हटाकर
पहले जैसा कर देते हैं मतलब नेपोलियन के चेंजेज को अंडू कर देते हैं जैसे कि ये मोनार्की को वापस ले आते हैं चर्च की पावर
को रिस्टोर कर देते हैं सोशल यरार की ले आते हैं जैसे कि जो अपर क्लास लोअर क्लास का जो सिस्टम चलता था यूरोप में उसे फिर
से रिस्टोर कर देते हैं साथ में यह ऑटोक्रेटिक रूल को भी फिर से एस्टेब्लिश कर देते हैं ऊपर से यह लोग सेंसरशिप भी
लगा देते हैं मतलब कोई भी इनके अगेंस्ट में ना ही लिख सकता था और ना ही छाप सकता था इन सबके अलावा यह चारों नेशन एक ट्रीटी
भी साइन करते हैं जो कि थी ट्रीटी ऑफ बेना यह ट्रीटी 1815 में साइन की गई थी इस ट्रीटी को लीड कर रहे थे ऑस्ट्रियन चांसलर
डक इस व्यक्ति को थोड़ा याद रखना क्योंकि यह आगे भी आएगा इस ट्रीटी के तहत यूरोप में
कई सारे चेंजेज किए जाते हैं जैसे कि फ्रांस में बर्बन डायनेस्टी को फिर से रिस्टोर कर दिया जाता है दूसरा फ्रांस के
बॉर्डर पर कई सारे स्टेट्स बनाए जाते हैं ताकि फ्रांस का एक्सपेंशन ना हो सके तीसरा प्रशिया को कई सारी इंपॉर्टेंट टेरिटरीज
दे दी जाती हैं ऑन इट्स वेस्टर्न बॉर्डर चौथा ऑस्ट्रिया को नॉर्थ इटली के ऊपर कंट्रोल मिल जाता है पांचवा को पोलैंड पर
कंट्रोल मिल जाता है कहने का मतलब यह है कि इस ट्रीटी के साइन होने के बाद जो कंजरवेटिव लोग थे वह पूरी तरीके से पावर
में आ गए थे वैसे तो इन्होंने नेपोलियन के हर चेंज को चेंज कर दिया था लेकिन एक चीज थी जो कि इन्होंने अनटच रहने दी जो कि थी
कि नेपोलियन ने कन्फेडरेशों इन्होंने अनटच रहने दिया बाकी इन्होंने सब चेंज कर दिया
था द रिवोल्यूशन अब दोस्तों इस कंजरवेटिज्म से कई सारे लिबरल नेशनलिज्म लोग खुश नहीं थे इसलिए जितने भी लिबरल
नेशनलिज्म लोग थे वह अंडरग्राउंड हो गए थे ताकि वह सीक्रेट चोरी छिपी इस कंजरवेटिज्म के अगेंस्ट में लड़ सके इसके लिए इन्होंने
कई सारे सीक्रेट ग्रुप्स बनाना शुरू कर दिया था सीक्रेट ग्रुप्स बनाना इसलिए शुरू कर दिया था क्योंकि यह ओपनली कुछ नहीं कर
सकते थे क्योंकि उस समय पर पूरी पावर कंजरवेटिव लोगों के पास थी तो इन सीक्रेट ग्रुप्स बनाने के पीछे मेन इंटेंशन यूरोप
में से मोनार्की को अपोज करना और ऑटोक रूल को खत्म करना था मतलब यह लिबर्टी और फ्रीडम चाहते थे तो यूरोप में कई सीक्रेट
सोसाइटीज बनती हैं ऐसे ही एक व्यक्ति थे जिनका नाम था गुस मजनी जो कि एक इटालियन रिवोल्यूशन थे इनका जन्म 1807 में गनियो
में हुआ था इन्होंने भी दो अंडरग्राउंड सोसाइटीज बनाई थी पहली थी यंग इटली इन मसले और दूसरी थी यंग यूरोप इन बर्ने आपको
पता है दोस्तों जो गुबी मजनी थे वो सच में इतने बड़े रिवोल्यूशन थे कि इनसे वास्तव में जो सो कॉल्ड कंजरवेटिव नेशंस थे वो
इनसे डरते थे जब यह 24 साल के थे तब इन्हें जेल में भी डाला गया था इन्हीं रेवोल्यूशन एक्टिविटीज की वजह से जहां तक
कि डुक मैटरनिटी मजनी है वह हमारे सोशल ऑर्डर के लिए एक मोस्ट डेंजरस एनेमी है मतलब गुपी
भी लाइक यह डर हमें अच्छा लगा थर्ड टॉपिक है हमारा द एज ऑफ रिवोल्यूशन
1832 1848 अब आप जरा खुद सोचो कि अगर इतनी सारी सीक्रेट सोसाइटीज बनेंगी तो वह कभी ना कभी बाहर आएंगी और अगर बाहर आएंगी तो
रिवोल्यूशन भी होगा तो 1830 से लेकर 1848 का जो पीरियड है उसमें कई सारे रिवोल्यूशन होते हैं इसलिए इस पीरियड को एज ऑफ
रिवोल्यूशन बोला जाता है तो इसमें हमें तीन रिवोल्यूशन देखने हैं पहला जो कि फ्रांस में हुआ था दूसरा बेल्जियम में हुआ
था और तीसरा जो ग्रीस में हुआ था सबसे पहले हम देखते हैं फ्रांस के रेवोल्यूशन को इस रेवोल्यूशन को जुलाई रेवोल्यूशन भी
बोला जाता है क्योंकि यह जुलाई 1830 में शुरू हुआ था तो इस रिवोल्यूशन का रिजल्ट यह आता है कि जो बर्बन डायनेस्टी जिसे
कंजरवेटिव्स के द्वारा 1815 में रिस्टोर किया गया था उसे अब लिबरल रिवोल्यूशन के द्वारा फिर से हटा दिया जाता है साथ में
फ्रांस में कांस्टीट्यूशनल मोनार्की सेटअप की जाती है मतलब राजा तो रहेगा लेकिन राजा कांस्टिट्यूशन के हिसाब से काम कर करेगा
तो जो लुईस फिलिपी था उसे एक कॉन्स्टिट्यूशन मोनार्क बना दिया जाता है मतलब वह काम अपनी मर्जी से नहीं बल्कि
कॉन्स्टिट्यूशन के हिसाब से करेगा तो यह था जुलाई रेवोल्यूशन इन फ्रांस अब डुक मैटरनेट फिरर से बोल पड़ता है वह एक बात
बोलता है कि व्हेन फ्रांस स्नीजस द रेस्ट ऑफ यूरोप कचेस कोल्ड मतलब वो यह कहता है कि अगर फ्रांस छींक भी देता है ना तो पूरे
के पूरे यूरोप को झुका हो जाता है ऐसा कहने के पीछे उसके इंटेंशन यह थे वो यह बताना चाह रहा था कि कि अगर फ्रांस
रेवोल्यूशन कर देता है ना तो पूरे के पूरे यूरोप में रेवोल्यूशन की लहर आ जाती है और ऐसा था भी उसका यह कहना गलत नहीं था
क्योंकि जब फ्रांस में यह रेवोल्यूशन हुआ तो उसे देखकर जो बेल्जियम था उसमें भी रेवोल्यूशन की लहर आ जाती है तो चलिए अब
हम बेल्जियम का केस देखते हैं इसे आप एनिमेशन समझो जैसे जो बेल्जियम था वो उस समय पर यूनाइटेड किंगडम ऑफ नीदरलैंड के
कंट्रोल में आता था मतलब उसका ही पार्ट था और उस समय पर यूनाइटेड किंगडम ऑफ नीदरलैंड में मोनार्की रूल था इसलिए बेल्जियम भी
इससे अलग होना चाहता था इसीलिए जब फ्रांस में जुलाई रेवोल्यूशन हुआ तो फ्रांस को देखकर बेल्जियम में भी रिवोल्यूशन हुआ और
इसका रिजल्ट यह हुआ कि बेल्जियम अपने आप को अलग कर लेता है यूनाइटेड किंगडम ऑफ नीदरलैंड से मतलब वह अब आजाद हो जाता
है अब हम ग्रीक वॉर ऑफ इंडिपेंडेंस देखते हैं मतलब अब हम ग्रीस के रिवोल्यूशन को देखते हैं तो ग्रीस उस समय पर ऑटोमन
एंपायर का पार्ट था तो जो ग्रीक लोग थे वो फ्रीडम चाह रहे थे मतलब वो भी अपना एक अलग से नेशन स्टेट बनाना चाह रहे थे जिसके लिए
इन्होंने 1821 से ही इंडिपेंडेंस के लिए स्ट्रगल करना शुरू कर दिया था पर दोस्तों ग्रीस के नेशनलिस्ट अकेले इस लड़ाई को
नहीं लड़ रहे थे बल्कि इनको कई बेस्ट यूरोपियन लोगों का सपोर्ट मिलता है क्योंकि उनको भी ऐसा फील होता था कि ग्रीस
को इंडिपेंडेंस मिलना चाहिए साथ में कई सारे पोएट्स और आर्टिस्ट भी अपनी राइटिंग्स और पेंटिंग्स की मदद से लोगों
को प्रेरित कर कर रहे थे स्ट्रगल करने के लिए इन सबके कई सालों के स्ट्रगल के बाद फाइनली 1832 में एक ट्रीटी साइन होती है
जिसका नाम था ट्रीटी ऑफ कांस्टेंटिन पोल इस ट्रीटी के साइन होने के बाद ग्रीस एक इंडिपेंडेंट नेशन बन जाता है यहां से वॉर
तो खत्म हो गई थी लेकिन दोस्तों आपको पता है इस वॉर में ही एक व्यक्ति थे जिनका नाम था लॉर्ड बायरन यह एक इंग्लिश पोएट थे फिर
भी यह ग्रीक वॉर ऑफ इंडिपेंडेंस लड़ रहे थे ऐसा इसलिए क्योंकि इनके ग्रीक कल्चर के साथ काफी ज्यादा सेंटीमेंट जुड़े हुए थे
इसलिए यह भी इन्हें सपोर्ट कर रहे थे इन्होंने कई सारे फंड्स ऑर्गेनाइज किए थे साथ में यह वॉर लड़ने भी गए थे पर अफसोस
1824 में ही एक फीवर के चलते बीच में ही इनकी डेथ हो जाती है पर इस वॉर में इनका कंट्रीब्यूशन याद रखा
जाएगा द रोमांटिक इमेजिनेशन एंड द नेशनल फीलिंग्लेस करर दिल मिल बनाने मत लग जाना इसका मतलब
यहां अलग चीज के लिए है चलो समझाता हूं दोस्तों आपको क्या लगता है कि जो नेशनलिज्म की
फीलिंग्लेस पेंशन से आई थी नहीं बल्कि एक और चीज थी जिससे लोगों में नेशन की फीलिंग जगाई जा
रही थी वह था कल्चर इन लोगों को लगा कि हमें कल्चर के थ्रू लोगों में नेशनल की फीलिंग अराइज करनी चाहिए लोगों को इमोशनली
कनेक्ट करना चाहिए अपने कल्चर के साथ ताकि उनमें नेशनलिज्म की फीलिंग जग सके इसीलिए स्टार्ट हुआ रोमांटिसिजम रोमांटिसिजम
का मतलब होता है अ कल्चरल मूवमेंट टू डेवलप्स अ पर्टिकुलर फॉर्म ऑफ नेशनल सेंटीमेंट्स मतलब कोई भी ऐसा कल्चरल
मूवमेंट जिसकी वजह से लोगों में अपने नेशन के प्रति प्यार पैदा हो सेंटीमेंट्स जागरूक हो इसी को रोमांटिसिजम बोला जाता
है तो ऐसे कई सारे आर्टिस्ट थे जो रोमांटिसिजम फैला रहे थे अपनी आर्ट्स पोएट्री स्टोरीज और म्यूजिक्स की मदद से
ऐसे ही एक रोमांटिक जर्मन फिलोसोफर थे जॉन गॉड फ्राइड उन्होंने भी इसी कल्चर के ऊपर दो बहुत ही प्यारी बातें कही थी पहली कि
अगर आपको जानना है कि किसी नेशन का कल्चर कैसा है तो वह राजा महाराजाओं के महलों में पता नहीं चलेगा बल्कि वह आम लोगों के
बीच में रहकर पता चलेगा कि वहां का कल्चर कैसा है क्योंकि वह जर्मन फिलोसोफर थे इसीलिए उन्होंने यह बात जर्मन कल्चर के
कंटेस्ट में कही थी दूसरी बात वह कहते हैं कि जो फॉक सोंग्स होते हैं फॉक पोट्री होती हैं और जो फॉक डांसस होते हैं यह सब
ट्रू स्पिरिट होते हैं नेशन के इसीलिए उनका मानना यह था कि अगर नेशन बिल्डिंग करनी है तो लोगों को उनके फॉक कल्चर से
जोड़ना होगा आया समझ में अब दोस्तों ऐसा नहीं है कि लोगों में नेशनलिज्म की फीलिंग केवल कल्चर से ही जग रही थी बल्कि
लैंग्वेज ने भी काफी इंपोर्टेंट रोल प्ले किया नेशनलिस्ट सेंटीमेंट्स को जगाने के लिए चलो इसका एक एग्जांपल देता हूं जिससे
आपको पता चलेगा कि कैसे लोगों में लैंग्वेज की वजह से नेशनल सेंटीमेंट्स आ ग तो क्या हुआ था एंड ऑफ 18 सेंचुरी में
पोलैंड का मेजर हिस्सा रशियंस के कंट्रोल में आ गया था अब देखो सीन क्या था पोलैंड की लोग पोलिश भाषा बोलते थे रशियन लोग
रशियन भाषा बोलते थे अब चूंकि जो पोलैंड का पार्ट था वह रशिया के ऑक्यूपेशन में था तो उन्होंने क्या किया पोलिश लैंग्वेज को
स्कूलों से हटा दिया और सब जगह पर जबरदस्ती रशियन लैंग्वेज को इंपोज करना शुरू कर दिया पर पोलैंड के लोग अपनी पोलिश
लैंग्वेज को छोड़ना नहीं चाह रहे थे क्योंकि उनके उनकी लैंग्वेज के साथ सेंटीमेंट्स जुड़े हुए थे इसके लिए वह
रशियन रूल के अगेंस्ट में 1831 में लड़ाई भी करते हैं लेकिन अफसोस उन्हें दबा दिया जाता है क्योंकि रशियन रूल उस समय काफी
स्ट्रांग था पर बात यह नहीं थी कि रिजल्ट क्या हुआ बात तो यह थी कि कैसे एक लैंग्वेज भी लोगों में नेशनलिस्ट
सेंटीमेंट्स को जगा सकती है भले ही उन्हें सप्रे कर दिया गया था पर उनकी जो स्पिरिट थी अपनी लैंग्वेज के लिए जो प्यार था अपनी
कल्चरल लैंग्वेज के लिए इसी को तो रोमांटिसिजम बोला जाता है इसीलिए जो रोमांटिक आर्टिस्ट थे वह अलग-अलग चीजों को
प्रोड्यूस करते थे जैसे कि लिटरेचर विजुअल आर्ट्स म्यूजिक्स ताकि लोगों में नेशनलिस्ट सेंटीमेंट जागरुक हो सके और उन
में नेशनलिज्म की फीलिंग बरकरार रहे हंगर हार्डशिप एंड द पॉपुलर रिवॉल्ट दोस्तों 1830 का जो टाइम पीरियड था वह
यूरोप में ग्रेट इकोनॉमिक हार्डशिप लेकर आता है क्योंकि इस समय पर पॉपुलेशन तेजी से बढ़ रही थी जिस वजह से यूरोप के मोस्ट
ऑफ द पार्ट्स में अनइंप्लॉयमेंट भी तेजी से बढ़ रहा था क्योंकि जिस हिसाब से पॉपुलेशन बढ़ रही थी उस हिसाब से जॉब्स
नहीं बढ़ रही थी मतलब लोगों के पास काम नहीं था करने को इसीलिए ज्यादातर जो लोग थे व वो रूरल एरिया से निकलकर सिटीज में
जाकर रहने लगते हैं जिस वजह से सिटीज ओवर क्राउडेड हो गई थी और स्लम्स क्रिएट होने लगे थे साथ में इसी टाइम पीरियड में लोगों
की फसलें भी खराब हो गई थी जिस वजह से यूरोप में फूड प्राइसेस भी तेजी से बढ़ रहे थे और लोगों को खाने के लिए भी
स्ट्रगल करना पड़ रहा था 1848 में फ्रांस के शहर पेरिस की हालत ऐसी हो जाती है कि लोग सड़कों पर आ जाते हैं और प्रोटेस्ट
करने लगते हैं यह देखकर जो रूलर था फ्रांस का लुईस फिलिपी वह अपनी पोजीशन छोड़कर भाग जाता है राजा के भाग जाने के बाद अब सवाल
यह था कि गवर्नमेंट कौन संभाले तो फ्रांस को रन कराने के लिए एक नेशनल असेंबली फॉर्म होती है नेशनल असेंबली के फॉर्म
होने के साथ ही फ्रांस को एक रिपब्लिक नेशन डिक्लेयर कर दिया जाता है जिसके बाद फ्रांस में 21 साल से ऊपर के सभी मेन को
वोटिंग राइट्स मिल जाते हैं साथ में राइट टू वर्क दिया जाता है मतलब फ्रांस में सबके पास काम होगा अब दोस्तों जब यह
इकोनॉमिक हार्डशिप चल रही थी तब एक और रिवॉल्ट देखने को मिला था जिसे सिलेश या रिवॉल्ट बोला जाता है सिलेश जो कि पोलैंड
का एक रीजन है तो इसमें क्या हुआ था कि कई सारे बीवर्स ने मिलकर कांट्रैक्टर्स के अगेंस्ट में रिवोल्ट कर दिया था ऐसा
उन्होंने इसलिए किया था क्योंकि कांट्रैक्टर्स ने इनकी चीजों के प्राइस गिरा दिए थे आपको पता है कि उस समय पर
इकोनॉमिक हार्डशिप चल रही थी ऊपर से यह लोग गरीब थे तो ऐसे में जब कांट्रैक्टर्स ने इनके प्राइसेस घटाए तो बीवर्स को
गुस्सा आ गया तो उन्होंने कांट्रैक्टर्स के घरों में जाकर तोड़फोड़ मचा दी और कांट्रैक्टर्स का सामान लूट लिया फिर
कांट्रैक्टर्स ने आर्मी का सपोर्ट ले लिया और एट दी एंड इस रिवोल्ट में 11 बीबस मारे गए थे तो यह था सिलेसिया रिवोल्ट इस
सिलेसिया रिवोल्ट की पूरी कहानी एक जर्नलिस्ट ने डिस्क्राइब की थी जिनका नाम था विलियम वुल्फ आया समझ
में 1848 द रिवोल्यूशन ऑफ द लिबरल्स अब दोस्तों जब सभी लोग रेवोल्यूशन कर रहे थे तो मिडिल क्लास लोग कैसे शांत रह सकते थे
तो जो मिडिल क्लास लोग थे व भी 1848 में रिवोल्यूशन कर रहे थे और यह क्यों कर रहे थे क्योंकि यह नेशन स्टेट एस्टेब्लिश करना
चाह रहे थे दूसरा यह पार्लियामेंट्री प्रिंसिपल्स की डिमांड कर रहे थे पार्लियामेंट्री प्रिंसिपल्स मतलब
कांस्टिट्यूशन होना चाहिए फ्रीडम ऑफ प्रेस होना चाहिए फ्रीडम ऑफ एसोसिएशन होना चाहिए तो इन सब चीजों की डिमांड कर रहे थे मिडिल
क्लास लोग अब हम दोस्तों जर्मन रीजन की बात करते हैं तो जर्मन रीजन के जो मिडिल क्लास लोग थे वह इन्हीं डिमांड्स को पूरा
करने के लिए एक ऑल जनरल नेशनल असेंबली बनाते हैं जिसमें वो 831 मेंबर्स को इलेक्ट करते हैं तो ये जो 831 मेंबर्स थे
वो 18 में 1848 में फ्रैंकफोर्ट पार्लियामेंट में इकट्ठे होते हैं वैसे पता है यह एक चर्च था जिसका नाम था सेंट
पोल तो उसी को इन्होंने पार्लियामेंट बना दिया था तो यह सब इकट्ठे होते हैं और एक कांस्टिट्यूशन ड्राफ्ट करते हैं जर्मन
नेशन के लिए पर दोस्तों जो यह कॉन्स्टिट्यूशन ड्राफ्ट किया था उसमें प्रॉब्लम हो गई थी प्रॉब्लम यह हो गई थी
कि इन लोगों ने पीजेंट्स बर्कर और आर्टिजंस पर इतना ज्यादा ध्यान नहीं दिया मतलब उनकी डिमांड्स को इंक्लूड नहीं किया
गया था जिस वजह से यह जो पीजेंट्स आर्टिस और वर्कर्स थे वह अपना सपोर्ट वापस ले लेते हैं जिस वजह से यह मूवमेंट थोड़ा वीक
हो जाता है लेकिन फिर भी यह मिडिल क्लास के लोग जाते हैं प्रशिया के राजा के पास अपना कॉन्स्टिट्यूशन लेके जिसमें वह
डिमांड करते हैं राजा से कि आप यह कांस्टिट्यूशन एक्सेप्ट करो मतलब आप कांस्टिट्यूशन के हिसाब से काम करो उस समय
पर जो प्रशिया का राजा था वह था फ्रेडरिक विलियम 4 आप लोग सोच रहे होंगे कि यह तो जर्मन थे ना तो यह पुरुष के राजा के पास
क्यों गए थे तो ऐसा इसलिए क्योंकि उस समय पर जर्मन नाम की कोई कंट्री थी नहीं बल्कि कई सारे जर्मन रीजंस हुआ करते थे जो कि
मोस्टली प्रशिया के ही अंडर आते थे और उस समय पर जो प्रशिया का किंग था वो था फ्रेडरिक बिलियन फोर इसीलिए ये लोग
प्रशिया के राजा के पास गए थे अब दोस्तों क्या लगता है आपको कि राजा मान गया होगा कांस्टिट्यूशन के लिए नहीं ना क्योंकि कौन
राजा चाहेगा अपनी पावर को कम करना तो राजा क्या करता है अपनी ट्रूप्स को बुलाता है और इन सबसे कहता है उठाओ अपना सामान और
निकलो यहां से मतलब किंग कांस्टीट्यूशन के आईडिया को रिजेक्ट कर देता है तो यहां पर यह मूवमेंट फेल हो जाता है लेकिन दोस्तों
भले ही यह मूवमेंट फेल हो गया था पर यह कंप्लीट फेल नहीं हुआ था इस मूवमेंट की वजह से जो यूरोप के अलग-अलग मोनार्क थे
उन्हें एक चीज समझ में आ गई थी कि व ज्यादा टाइम तक इन लिबरल्स लोगों को रोक नहीं पाएंगे कभी ना कभी तो यह मिडिल क्लास
लोग जीत ही जाएंगे तो इस डर से इन्होंने थोड़ा-थोड़ा कंसेशन देना स्टार्ट कर दिया था जैसे कि इन्होंने पहला सेफ डम और
बाउंडर लेबर को अबॉलिश कर दिया हैब्सबर्ग डोमिनेशन से और रशिया से दूसरा हंगेरियंस को ऑटोनॉमी ग्रेंट कर दी जाती है इन 186
7 नेक्स्ट टॉपिक है हमारा द मेकिंग ऑफ जर्मनी एंड इटली इस टॉपिक में हम यह जानेंगे कि जर्मनी और इटली कैसे बने थे हम
इनकी यूनिफिकेशन प्रोसेस को देखेंगे साथ में हम ब्रिटेन की यूनिफिकेशन को भी देखेंगे तो सबसे पहले शुरुआत करते हैं
जर्मनी के यूनिफिकेशन से जर्मनी कैन द आर्मी वि द आर्किटेक्ट ऑफ अ नेशन तो अभी-अभी हमने एक स्टोरी सुनी थी जिसमें जो
लिबरल लोग थे वह 1948 में अपना कांस्टिट्यूशन का आईडिया लेकर राजा के पास गए थे पर राजा ने उसे रिजेक्ट कर दिया था
मतलब यह मूवमेंट फेल हो गया था तो अब सवाल यह आता है कि फिर जर्मनी कैसे यूनिफाई हुआ होगा देखो इसे आप एनिमेशन से देखो जैसे
पहले क्या था कि कई सारे छो छोटे छोटे जर्मन स्टेट्स थे और जो प्रशिया था वह एक बड़ा जर्मन स्टेट था मतलब एक बड़ा एंपायर
था तो जो प्रशिया था उसने सोचा कि वह खुद ही अब जर्मनी को यूनिफाई करेगा ताकि वह अपना पॉलिटिकल डोमिनेशन बढ़ा सके और एक
पूरा एक बड़ा सा जर्मन नेशन बना सके इस समय पर जो प्रशिया का राजा था वह था विलियम फर्स्ट अब आप लोग कहोगे कि राजा तो
विलियम 4 था तो विलियम फर्स्ट कैसे राजा बन गया तो ऐसा इसलिए क्योंकि विलियम 4 की बीच में ही डेथ हो गई थी फिर उसके बाद
विलियम फर्स्ट को राजा बनाया गया था अब यह जो नया राजा था प्रशिया का विलियम फर्स्ट वो थोड़ा समझदार था उसने सोचा कि वैसे ही
लिबरल लोग रुकेंगे तो है नहीं जर्मनी को यूनिफाई किए बिना तो इससे अच्छा उसने सोचा कि मैं ही जर्मनी को यूनिफाई करता हूं
मतलब उसे एक नेशन स्टेट बनाता हूं तो राजा अपने चीफ मिनिस्टर को बुलाता है उस समय पर राजा का जो चीफ मिनिस्टर था वह था ऑटोमन
बिस्मार्क तो राजा उससे कहता है कि जाओ जितने भी ये छोटे-छोटे जर्मन स्टेट्स हैं उन्हें प्रशिया के साथ यूनिफाई करो और एक
बड़ा सा जर्मन स्टेट बना सिंपली जर्मनी को यूनिफाई करने की रिस्पांसिबिलिटी अब ऑटोमन बिसमार को दे दी गई थी तो ऑटोमन बिसमार्क
और प्रशिया की आर्मी और ब्यूरोक्रेसी मिलकर कई वॉर्स लड़ती है ऑस्ट्रिया डेनमार्क और फ्रांस के अगेंस्ट में इनसे
क्यों लड़ती है क्योंकि यही वो नेशंस थे जो कि कई सारे जर्मन रीजंस के ऊपर कब्जा किए हुए थे इसीलिए इन तीनों के अगेंस्ट
में यह बर्स लगभग 7 सालों तक चलते हैं आखिर में प्रशिया यह बर्स जीत जाता है और जितने भी जर्मन स्टेट थे उन्हें शामिल कर
लिया जाता है और एक बड़ा जर्मन नेशन बनाया जाता है तो इस तरीके से जर्मनी का यूनिफिकेशन प्रोसेस कंप्लीट हो जाता है और
फाइनली जनवरी 187 में विलियम फर्स्ट को पूरे जर्मनी का एंपरर डिक्लेयर कर दिया जाता है आया समझ में तो यह था जर्मनी का
यूनिफिकेशन तो यह था जर्मनी का यूनिफिकेशन अब हम पढ़ते हैं इटली के यूनिफिकेशन को इटली
यूनिफाइड उस समय पर जो इटली था वह सेवन अलग-अलग स्टेट्स में बटा हुआ था जिसमें यह जो स्टेट आप देख रहे हो वह है सर्निया
पिडम केवल यही वालाला रीजन इटली प्रिंसली हाउस के कंट्रोल में था बाकी बचा हुआ इटली का सारा रीजन अलग-अलग पावर्स के कंट्रोल
में था जैसे कि जो नॉर्थन रीजन था उसमें ऑस्ट्रियन हैप्सबर्ग अंपायर रूल करता था सेंटर का जो रीजन था उसमें पॉप रूल करता
था और जो सदर्न रीजन था उसमें बर्बन किंग्स ऑफ स्पेन रूल करता था अब दोस्तों मैंने आपको एक व्यक्ति के बारे में बताया
था जिनका नाम था गुस बी मजनी इन्होंने दो सीक्रेट सोसाइटीज बनाई थी ंग इटली और ंग यूरोप नाम से आपको पता है दोस्तों यह इटली
को यूनिफाई करना चाहते थे लेकिन अफसोस जी इटली को यूनिफाई नहीं कर पाते हैं यह फेल हो जाते हैं लेकिन दोस्तों जो सार्डी या
पिडम था उसका जो किंग था वह था विक्टर इमानुएल सेकंड तो विक्टर इमानुएल सेकंड अब रिस्पांसिबिलिटी लेता है इटली को यूनिफाइड
करने की इसके लिए वह अपने चीफ मिनिस्टर को बुलाता है जिसका नाम था काउंट कैव काउंट कैवो एक काफी डिप्लोमेट व्यक्ति था इसलिए
वह फ्रांस के साथ मिलकर 18590 का इनकी काफी बड़ी वॉलेट्स की आर्मी थी जिनकी मदद से 1860 में साउथ वाले पार्ट
को भी जीत लिया जाता है अब बचा सेंटर वाला रीजन तो सेंटर वाले रीजन पर पॉप का कंट्रोल था अब यह देखकर कि नॉर्थ और साउथ
वाला रीजन दोनों इटली के कंट्रोल में आ गए हैं तो पोप वाले लोग वैसे ही डर जाते हैं और सरेंडर कर देते हैं और फाइनली
18612 को पूरे इटली का किंग बना दिया जाता है द स्ट्रेंज केस ऑफ ब्रिटेन तो अभी तक हमने जर्मनी के यूनिफिकेशन को देख लिया और
इटली के यूनिफिकेशन को देख लिया लेकिन अब हम देखते हैं ब्रिटेन के यूनिफिकेशन को देखो ब्रिटेन के यूनिफिकेशन को स्ट्रेंज
केस बोला गया है ऐसा इसलिए क्योंकि ब्रिटेन का यूनिफिकेशन एक लंबी प्रोसेस में हुआ था ऐसा नहीं हुआ था कि अचानक से
रिवॉल्ट या वॉर कर दिया हो इसलिए इसे स्ट्रेंज केस बोला जाता है देखो कैसे हुआ था पहले जो ब्रिटेन था वह चार अलग-अलग
पार्ट्स में बंटा हुआ था यह था स्कॉटलैंड यह था इंग्लैंड यह था बेल्स और यह था आयरलैंड इन सभी स्टेट्स में अलग-अलग एथनिक
आइडेंटिटी वाले लोग रहते थे जैसे कि स्कॉटलैंड में स्कॉट लोग रहते थे बेल्स में बेल्स लोग रहते थे इंग्लैंड में
इंग्लिश लोग रहते थे और आयरलैंड में आयरिश लोग रहते थे अब दोस्तों जो वेल्स था वह तो 1565 से इंग्लैंड का ही पार्ट था इंग्लैंड
में पहले पावर मोनार्की के पास थी लेकिन 1688 में मोनार्की की पावर को सीज कर दिया जाता है और सारी पावर इंग्लिश
पार्लियामेंट के पास आ जाती है तो अब इंग्लैंड क्या सोचता है कि क्यों ना इन सारी आसपास की टेरिटरीज को कैप्चर किया
जाए और एक बड़ा इंग्लिश नेशन बनाया जाए तो इसके लिए सबसे पहले इंग्लैंड स्कॉटलैंड को टारगेट करता है जिसके लिए 1707 में
स्कॉटलैंड के साथ एक एक्ट ऑफ यूनियन साइन किया जाता है जिसके बाद स्कॉटलैंड और इंग्लैंड एक हो जाते हैं और बनाते हैं
यूनाइटेड किंगडम ऑफ ग्रेट ब्रिटेन अब बारी थी आयरलैंड की तो आयरलैंड में क्या था कि दो तरह के लोग रहते थे कैथोलिक्स और
प्रोटेस्टेंट कैथोलिक मेजॉरिटी में थे प्रोटेस्टेंट माइनॉरिटी में थे यह दोनों ग्रुप्स के बीच में हमेशा टेंशन बना रहता
था तो इंग्लैंड इसी बात का फायदा उठाता है और प्रोटेस्टेंट्स को सपोर्ट करने लगता है ताकि वह इनको डोमिनेट कर सके इसके विरोध
में कई सारे कैथोलिक्स इसका अपोज करते हैं इनफैक्ट एक व्यक्ति थे जिनका नाम था वल्फ टॉन इन्होंने 1778 में इसके अगेंस्ट में
रिवोल्ट भी किया था पर इन्हें दबा दिया गया था और फाइनली 1801 में आयरलैंड को भी फोर्सफुली ब्रिटेन के कंट्रोल में ले लिया
जाता है फिर एक नया ब्रिटिश बनता है जिसमें ब्रिटिश फ्लैग था नेशनल एंथम था इंग्लिश लैंग्वेज थी और इन सबको प्रमोट
किया जाने लगा नेक्स्ट टॉपिक है हमारा विजुलाइजिंग द नेशन 18th एंड 19 सेंचुरी में जो आर्टिस्ट
होते थे उन्होंने सोचा कि क्यों ना नेशंस को विजुलाइज किया जाए मतलब नेशंस को रूप दिया जाए उनका पसो निफिट किया जाए फॉर
एग्जांपल इसे अगर हम अपने देश के साथ रिलेट करें तो हमारी इंडिया को किससे रिप्रेजेंट किया जाता है भारत माता से और
क्यों किया जाता है ताकि हम जब भी भारत माता को देखें तो हमारे अंदर नेशनल सेंटीमेंट्स जागे मतलब देशभक्ति की भावना
पैदा हो और हम सबको यह लगे कि हम सब एक हैं और भारत माता हम सब की माता है ठीक इसी तरीके से जो यूरोप के अलग-अलग
आर्टिस्ट थे उन्होंने भी अपने-अपने नशंस को रूप देना स्टार्ट कर दिया अलग-अलग फीमेल फिगर्स के थ्रू जिन्हें एलोरी बोला
जाता है ताकि लोगों में नेशनलिज्म की फीलिंग्लेस को देखें ज जैसे कि फ्रांस की एलोरी बनाई गई थी मेरियन और जर्मनी की
एलोरी बनाई गई थी जर्मनिया तो इस तरीके से नेशंस को विजुलाइज किया गया था लास्ट टॉपिक है हमारा नेशनलिज्म एंड
इंपीरियल ज्म दोस्तों 19 सेंचुरी के एंड तक जो नेशनलिज्म की फीलिंग थी व इंपीरियल ज्म में कन्वर्ट होने लगती है इंपीरियल
ज्म का मतलब होता है एक ऐसी सिचुएशन जिसमें एक बड़ा नेशन छोटे-छोटे नेशंस को कैप्चर करने लगता है ताकि वह अपनी
टेरिटरीज को को एक्सपेंड कर सके और अपनी पावर को बढ़ा सके इसी को बोला जाता है इंपीरियल ज्म तो इसी इंपीरियल ज्म के ऊपर
एक केस स्टडी है जो कि है बालकांस रीजन की जहां हमें इंपीरियल ज्म देखने को मिला था तो होता क्या है बालकांस एक जगह थी यूरोप
के अंदर जो कि ऑटोमन अंपायर के अंदर आती थी बालकांस रीजंस के अंदर कई सारे स्टेट्स आते थे जैसे कि रोमानिया बल्गेरिया
अल्बानिया ग्रीस एक्सेट्रा तो क्या हुआ जो ऑटोमन अंपायर था वो धीरे-धीरे कमजोर होने लगा था मतलब उसका डिसइंटीग्रेशन हो रहा था
जिस वजह से जो बालकांस रीजन के स्टेट थे वह अपने आप को इंडिपेंडेंट करने लगे मतलब अपने-अपने अलग-अलग नेशंस बनाने लगे पर
दोस्तों यह सारे नेशंस आपस में जलते थे जिस वजह से हर एक नेशन यही चाह रहा था कि उसका पॉलिटिकल डोमिनेशन कैसे ही ना कैसे
सबसे बड़ा हो जिसके चलते यह सभी छोटे-छोटे नेशंस आपस में लड़ने लगते हैं ताकि वह ज्यादा से ज्यादा टेरिटरीज को कैप्चर कर
पाए इन सबको देखकर कई बड़े-बड़े नेशंस जैसे कि रशिया फ्रांस जर्मनी ब्रिटेन यह सब भी इस लड़ाई में शामिल हो जाते हैं और
फिर देखने को मिलता है फर्स्ट वर्ल्ड वॉर बाद में इस वॉर के खत्म होने के बाद कई सारे एंटी इंपीरियल मूवमेंट भी चलाए जाते
हैं क्योंकि एट दी एंड सबको समझ में आ जाता है कि नेशनलिज्म तो अच्छा है पर जब यह नेशनलिज्म इंपीरियल ज्म में बदल जाता
है तो वह किसी भी कंट्री के लिए अच्छा नहीं होता क्योंकि इंपीरियल ज्म के चलते वर्ल्ड ओवर फर्स्ट देखने को मिला जो कि एक
बहुत बड़ा डिजास्टर था बाद में जाकर धीरे-धीरे लोगों में नेशनल की फीलिंग फिर से जागती है क्योंकि जिन
कंट्रीज के ऊपर कब्जा किया गया था अब उनको आजादी चाहिए थी तो आज के लिए इस वीडियो में केवल इतना
ही मिलते हैं सीरीज की नेक्स्ट वीडियो में आप चाहे तो इस वीडियो को लाइक कर सकते हो और इस चैनल को भी सब्सक्राइब कर सकते हो
ताकि आपसे इस सीरीज की कोई भी वीडियो मिस ना हो तब तक के लिए टेक केयर बाय बाय [संगीत]
The 1789 French Revolution shifted power from monarchy to democracy, introducing equality and national symbols like the tricolor flag. It spread ideas of citizenship and legal reforms through the Napoleonic Code, influencing European nationalist movements by promoting sovereignty based on common identity and rights.
The 1815 Congress of Vienna restored monarchies and conservative order, redrawing European boundaries to maintain stability. Although it suppressed liberal nationalism overtly, it unintentionally fueled underground secret societies and nationalist movements that challenged the old order in coming decades.
Cultural nationalism used romantic arts, literature, and folklore to create shared national identities and pride. Language became a potent symbol, exemplified by Polish resistance to Russian language policies, fostering solidarity and a desire for political independence among oppressed groups.
The 1848 Frankfurt Parliament lacked broad support from peasants and royal elites, and middle-class delegates failed to bridge social divides. Without backing from key powers and the military, their plans for constitutional unification collapsed, showcasing the limits of liberal nationalism against entrenched authority.
Bismarck unified Germany through strategic wars against Denmark, Austria, and France, leveraging nationalist sentiment while reinforcing Prussian dominance. He combined realpolitik diplomacy with military victories, culminating in the proclamation of the German Empire in 1871 under Prussian leadership.
Rising nationalism evolved into imperialism, with powerful nations aggressively seeking dominance, especially in volatile regions like the Balkans. This fostered intense rivalries and ethnic tensions that contributed significantly to the outbreak of World War I, highlighting nationalism's complex and sometimes destructive impact.
Students should focus on understanding the link between political events, cultural movements, and social changes from the French Revolution through to the late 19th century. Reviewing key events like the 1848 revolutions, unification processes, and the role of nationalism in imperialism will provide comprehensive insights essential for exam success.
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