मुख्य बातें और शेड्यूल (Key Highlights and Schedule)
- रिवीजन सीरीज का उद्देश्य: CS प्रोफेशनल के छात्रों के लिए IBC (इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड) की संपूर्ण रिवीजन।
- कक्षा का समय और अवधि:
- समय: हर दिन रात 9:00 बजे (सोमवार से शनिवार)
- कुल सत्र: 40 से 45 सत्र, जो अक्टूबर के अंत तक चलेंगे।
- मैराथन: नवंबर में 12 घंटे की एक विशेष मैराथन क्लास।
- लाइव बनाम रिकॉर्डेड:
- कक्षा रिकॉर्डेड होगी, लेकिन यदि 50-60 से अधिक छात्र लाइव आने की इच्छा व्यक्त करते हैं, तो इसे लाइव भी लिया जा सकता है।
- कमेंट में बताएं कि आप लाइव क्लास चाहते हैं या नहीं।
- कवर किए जाने वाले विषय:
- पूरा इंस्टीट्यूट मॉड्यूल (Institute Module) आधारित रिवीजन।
- सभी प्रासंगिक केस लॉ (Case Laws) की समीक्षा।
- प्रत्येक अध्याय के अंत में स्कैनर (Scanner) से प्रश्न और उत्तर।
- राइटिंग प्रैक्टिस पर विशेष जोर।
इनसॉल्वेंसी, बैंकरप्सी और लिक्विडेशन (Insolvency, Bankruptcy & Liquidation)
इनसॉल्वेंसी (Insolvency) क्या है?
- परिभाषा: यह एक वित्तीय स्थिति (Financial State) है, जहां कोई व्यक्ति या संस्था अपने देय ऋणों (Debts) का भुगतान करने में असमर्थ हो जाता है। यह कोई अदालती घोषणा नहीं है, बल्कि एक वास्तविक स्थिति है।
- इनसॉल्वेंट (Insolvent): वह व्यक्ति या कंपनी जो इस स्थिति से गुज़र रही है।
- व्यापकता: 'इनसॉल्वेंसी' एक छत्र शब्द (Umbrella Term) है, जो व्यक्तियों, साझेदारी फर्मों, एलएलपी और कंपनियों सभी पर लागू हो सकता है।
बैंकरप्सी (Bankruptcy) क्या है?
- परिभाषा: यह एक कानूनी स्थिति (Legal Status) है, जो अदालत द्वारा घोषित की जाती है। जब किसी व्यक्ति या साझेदारी फर्म की इनसॉल्वेंसी का समाधान नहीं हो पाता, तो कोर्ट उसे बैंकरप्ट घोषित करती है।
- उपयोग: बैंकरप्सी शब्द केवल व्यक्तियों (Individuals) और साझेदारी फर्मों (Partnership Firms) के लिए उपयोग किया जाता है।
कॉर्पोरेट क्षेत्र के लिए: लिक्विडेशन और वाइंडिंग अप
- लिक्विडेशन (Liquidation): जब कोई कॉर्पोरेट पर्सन (कंपनी या एलएलपी) अपनी इनसॉल्वेंसी का समाधान नहीं कर पाता, तो उसकी संपत्तियां बेच दी जाती हैं और कर्ज चुकाया जाता है। इस प्रक्रिया को लिक्विडेशन कहते हैं।
- वाइंडिंग अप (Winding Up): लिक्विडेशन के बाद कंपनी को समाप्त करने की अंतिम प्रक्रिया को वाइंडिंग अप कहा जाता है।
IBC कोड की संरचना (Structure of IBC Code)
IBC कोड को पांच भागों (Parts) में विभाजित किया गया है:
| भाग (Part) | सेक्शन (Sections) | विषय (Subject) | | :--- | :--- | :--- | | भाग 1 | सेक्शन 1 से 3 | प्रारंभिक (Preliminary) - सभी पर लागू होता है | | भाग 2 | सेक्शन 4 से 77A | सबसे महत्वपूर्ण भाग - कॉर्पोरेट व्यक्तियों (Corporate Persons) की इनसॉल्वेंसी रेजोल्यूशन, लिक्विडेशन और वाइंडिंग अप से संबंधित। CS परीक्षा के लिए सबसे अधिक वेटेज वाला विषय। | | भाग 3 | सेक्शन 78 से 187 | व्यक्तिगत और साझेदारी फर्मों (Individuals & Partnership Firms) की इनसॉल्वेंसी रेजोल्यूशन (यह इलेक्टिव IBC में शामिल है)। | | भाग 4 | सेक्शन 188 से 223 | इनसॉल्वेंसी प्रोफेशनल, रेजोल्यूशन प्रोफेशनल, इंफॉर्मेशन यूटिलिटी आदि से संबंधित प्रावधान। | | भाग 5 | सेक्शन 224 से 255 | विविध (Miscellaneous) प्रावधान। |
भारत, यूके और यूएसए में इनसॉल्वेंसी कानून का विकास
- ऐतिहासिक पृष्ठभूमि:
- शुरुआती इनसॉल्वेंसी कानून देनदारों (Debtors) को अपराधी मानते थे और उन्हें दंडित करने पर ध्यान केंद्रित करते थे।
- आधुनिक कानून का फोकस पुनर्वास (Rehabilitation) और व्यवसाय की निरंतरता (Continuation of Business) पर है, न कि सिर्फ देनदार को खत्म करने पर।
- भारत का IBC विकास:
- IBC कोड 2016 से पहले, भारत में कई अलग-अलग कानून थे (जैसे प्रेसीडेंसी टाउन इनसॉल्वेंसी एक्ट, प्रोविंशियल इनसॉल्वेंसी एक्ट, कंपनीज एक्ट, SICA, DRT आदि), जिससे प्रक्रिया में देरी और भ्रम होता था।
- मुख्य समस्या: इनसॉल्वेंसी को हल करने में 4-5 साल लगते थे, जो व्यवसाय के लिए घातक था।
- समाधान (उपाय): सभी कानूनों को एकीकृत करके IBC कोड 2016 लाया गया, जिसका उद्देश्य समयबद्ध तरीके से इनसॉल्वेंसी का समाधान करना है। IBC के तहत रेवेन्यू रिकग्निशन और अन्य प्रमुख सिद्धांतों को समझने के लिए INS 115 रिवीजन: रिवेन्यू रिकग्निशन के फाइव स्टेप्स और स्पेशल केस समझें पर एक नज़र डालें।
IBC के मूल तत्व (Core Elements of IBC)
IBC को समझने के लिए चार मुख्य शब्दों को ध्यान में रखें:
- डेब्टर (Debtor): वह व्यक्ति या संस्था जिसने ऋण लिया है।
- क्रेडिटर (Creditor): वह व्यक्ति या संस्था जिसने ऋण दिया है।
- डेट (Debt): वह राशि जो देय है।
- डिफॉल्ट (Default): जब डेब्टर देय तिथि पर ऋण का भुगतान नहीं करता।
यह प्रक्रिया तब शुरू होती है जब क्रेडिटर द्वारा दिए गए ऋण पर डिफॉल्ट (Default) होता है और ऋण देय और भुगतान योग्य (Due and Payable) होता है।
मुख्य बातें (Key Takeaways)
- इनसॉल्वेंसी एक स्थिति है, बैंकरप्सी एक कानूनी घोषणा है।
- बैंकरप्सी केवल व्यक्तियों और साझेदारी फर्मों के लिए, जबकि लिक्विडेशन और वाइंडिंग अप कॉर्पोरेट संस्थाओं के लिए लागू होता है।
- IBC कोड के पार्ट 2 पर सबसे अधिक ध्यान दें, क्योंकि इसमें परीक्षा के लिए सबसे अधिक वेटेज है। इस संदर्भ में सम्मिश्र संख्याएँ (Complex Numbers) एक ही क्लास में पूरा कॉन्सेप्ट | NDA Maths की तरह विस्तृत समझ जरूरी है।
- डिफॉल्ट का अर्थ है कि ऋण देय है और भुगतान योग्य नहीं है।
श्री रघुनाथ तो किस बात की चिंता हमारे साथ श्री रघुनाथ को किस बात की चिंता शरण में रख दिया जब मात तो किस बात की
चिंता शरण में रख दिया जब मात को किस बात की चिंता
[प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा]
[संगीत] क्या करते हो तुम दिन रात क्यों बिन बात की चिंता किया करते हो तुम दिन रात क्यों
बिन बात की चिंता किया करते हो तुम दिन रात क्यों बिन बात की चिंता
किया करते हो तुम दिन रात क्यों बिन बात की चिंता मेरे स्वामी मेरे स्वामी मेरे स्वामी को
रहती है मेरी हर बात की चिंता स्वामी तो रहती है मेरी हर बात की चिंता हमारे साथ जग रघुनाथ को किस बात की चिंता
हमारे साथ जग रघुनाथ को किस बात की चिंता ना खाने की ना पीने की ना मरने की ना जीने की
ना खाने की ना पीने की ना मरने की ना जीने की ना खाने की ना पीने की ना मरने की ना जीने
की ना खाने की ना पीने की ना मरने की ना जीने की हर सांस रहे हर सांस रहे हर सांस में
भगवान को किस काम की चिंता रहे हर स्वास में भगवान तो किस बात की चिंता हमारे साथ जब शिवनाथ
तो किस बात की चिंता हां जी क्या हालचाल क्या हालचाल क्या हालचाल मेरे यारों मेरे दिलदारों मेरे
भिंडी मेरे शिमला मिर्च कलर के बच्चों क्या हालचाल है तुम्हारे प्रोफेशनल वालों प्रोफेशनल बोलते हैं ना एकदम ऐसा लगता है
कि भाई साहब बस अब सीएस बन ही गए एक बार हंस के दिखा दो। मतलब सोचो तुम सीएस बनने ही वाले। वैसे कुछ ही घंटे बाकी
हैं। कुछ घंटे खत्म होंगे फिर तुम सीएस बन जाओगे। जब तुम सीएस बन जाओगे तब तुम सारे भूल जाओगे। ऐसा तो नहीं करोगे ना? हां। तो
भूलना भूलना नहीं है। याद रखना। ठीक है? भूलते नहीं है। एटीट्यूड में नहीं आना कहीं कहीं एटीट्यूड में आ जाओ। ठीक है?
चलो इधर सुनो ध्यान से। तो फाइनली फाइनली फाइनली आज से हमारी आईबीसी की रिवीजन यहां पे स्टार्ट होने जा रही है। ठीक है? आज का
सेशन मैं लाइव नहीं ले रहा। ठीक है? मैं क्यों लाइव नहीं ले रहा? मैं उसको आपको बताऊंगा। मैं लाइव क्यों नहीं ले रहा? बट
लाइव होगा या नहीं होगा ये भी आपके ऊपर डिपेंड करता है। ठीक है? बट इस आईबीसी की रिवीजन को स्टार्ट करने से पहले मैं थोड़ा
सा क्लियर कर दूं आपको कि हमारी क्लासेस कब-कब होंगी? इन रिवीजन क्लासेस में क्या-क्या करेंगे? फिर बच्चों के बहुत
सारे डाउट्स आ रहे हैं कि सर केस लॉ होंगे या नहीं होंगे? सर क्वेश्चन आंसर होंगे या नहीं होंगे? सर बिल्कुल स्टार्टिंग से
रिवीजन होगी या नहीं होगी? सर मैं आईबीसी मैंने बहुत पहले पढ़ा था। सर मैं पहली बार आईबीसी पढ़ रहा हूं। तो क्या इस रिवीजन
क्लास से मैं रिवाइज कर सकता हूं? नहीं कर सकता। सर जैसे आप टेक्स्ट में रिवीजन कराते थे। सर हमारा एग्जी आपके रिवीजन की
वजह से टेक्स्ट में निकला था। क्या सेम हमारे साथ आईबीसी के अंदर भी ऐसा हो सकता है? नहीं हो सकता। तो वो सारी की सारी
बातें पहले चार से पांच मिनट में क्लियर कर दूंगा सारे बच्चों को। देन फिर आज की हम रिवीजन स्टार्ट करेंगे। अकॉर्डिंगली हम
प्लान करेंगे। ठीक है जी। चलो एक बार अब सारे के सारे बच्चे पहले यहां पे एक बार देखो थोड़ा सा मैं आपको बता दूं
इंट्रोडक्शन के अंदर। तो पहली बात जो जितने भी बच्चे अब सीएस प्रोफेशनल के हैं ऑब्वियस सी बात है अब ओल्ड सिलेबस तो खत्म
हो चुका है। तो ओल्ड सिलेबस वाले बच्चे भी न्यू सिलेबस में आ चुके हैं और न्यू सिलेबस वाले बच्चे तो न्यू सिलेबस में हैं
ही हैं। तो सीएस प्रोफेशनल के ग्रुप नंबर टू में आपके दो पेपर हैं। एक पेपर तो आपका सीआरबीआई का है और दूसरा पेपर जो है
इलेक्टिव में आईबीसी का है। अगर आपने आईबीसी लिया हुआ है। ठीक है? अगर आपने टेक्स्ट इलेक्टिव में लिया हुआ है तो उसकी
गाइडेंस वीडियो भी मैं YouTube पर डालूंगा। बट ये ये रिवीजन क्लास उनके लिए है जिन्होंने इलेक्टिव में आईबीसी लिया
हुआ है। ठीक है जी। अब सीआरबी के अंदर जो लास्ट वाला आई है जो इनसॉल्वेंसी वाला आई है और एक इलेक्टिव पेपर में जो आईबीसी है
तो टोटल मिला के आप सब जानते हो 140 मार्क्स का है। अब ये जो बच्चे रेगुलर बैच वाले बच्चे होंगे मेरे जो सीआर और आईबीसी
वाले होंगे उनको मैंने क्लास के अंदर भी बताया था कि जो ये इन सीआरबीआई वाला आई है तो 40 नंबर का जो हमारा इनसॉल्वेंसी है
इसमें क्वेश्चन जो बनेंगे वो केस स्टडी बेस बनेंगे। हो सकता है एक दो क्वेश्चन जो बन जाए वो स्ट्रेट फॉरवर्ड बन जाए। नहीं
तो बाकी क्वेश्चन जो बनेंगे वो केस स्टडी बेस बनेंगे। बट अगर मैं आईबीसी इस वाले आईबीसी की बात करूंगा तो इस वाले आईबीसी
में सारे के सारे क्वेश्चन जो बनेंगे वो केस स्टडी बेस बनेंगे। इसमें सिंगल क्वेश्चन भी स्ट्रेट फॉरवर्ड नहीं बनेगा।
और इस पेपर को इक्टिव तो भूल के मत मान के चलना। भूल के इलेक्टिव मत मान के चलना। ये आपको पूरा पढ़ के चलना है। ठीक है? वैसे
तो जो इस बार ऑल इंडिया रैंक वन आया भूमि उसने एडवांस टैक्स लिया था मेरे कहने से उसके 80 नंबर आए थे। तो उसने इवन ये भी
कहा कि सर मैंने पास्ट ईयर ट्रेंड चेक किया कि कभी आईबीसी में 65 से ऊपर नंबर इंस्टट्यूट देता ही नहीं है। मतलब 65 70
क्योंकि इलेक्टिव में बहुत कम नंबर देता है और इलेक्टिव पेपर आजकल बहुत चैलेंजिंग हो रहे हैं क्योंकि ओपन चैलेंज है ना तो
उसने एडवांस टैक्स लिया उसके 80 नंबर है। उसने इवन वीडियो के अंदर भी बोला सर मेरा रैंक वन जो है उसका रीज़न जो जाता है टैक्स
को जाता है। बट मैं ये नहीं कह रहा कि तुम सब ने टैक्स ऑप्ट करना है। ऑब्वियस सी बात है हमारा स्कोप आईबीसी के अंदर भी है।
हमारा स्कोप हर चीज के अंदर है। जिसकी हमें नॉलेज होगी उसका स्कोप हमारे अंदर है। बट अभी मैं 140 मार्क्स के आईबीसी की
जो पेपर मैं लेता हूं उसकी रिवीजन मैं तुम्हें बहुत बढ़िया तरीके से करवा दूंगा। इतना तुम्हारे भाई का वादा है। तुम इसके
लिए बिल्कुल निश्चिंत हो जाओ। जी। ठीक है जी। तो अब सुनो ध्यान से जी। अब जो हमने क्लासेस की बात करता हूं रेगुलर क्लासेस
की तो टोटल मेरे को याद है 81 लेक्चर हमारे आईबीसी के अंदर लगे थे रेगुलर बैच में। तो 81 लेक्चर हमने आईबीसी में लगाए
थे। अप्रोक्समेट 1 डेढ़ घंटे का लेक्चर था। तो अगर आप 1 1/2 घंटे को 81 से मल्टीप्लाई करोगे अप्रोक्समेट 110 20 घंटे
का जो हमारा कंटेंट था उसको अब हमें YouTube पे जो रिवाइज करना है आप ये मान के चलो कि मैं 45 से 50 घंटे तुम्हें यहां
पे देने जा रहा हूं पूरे YouTube पे जिसमें हम बहुत बढ़िया तरीके से आईबीसी रिवाइज करेंगे। बात समझ में आ रही है? तो
मतलब जो हमने 120 घंटे में किया उसको 40 से 45 से 50 मतलब 40 से 50 घंटे की एक रेंज ले चल रहा हूं। इसके अंदर पूरा
आईबीसी बहुत बढ़िया तरीके से हम रिवाइज करेंगे। अब इसमें क्या-क्या करेंगे? जी इस मैं इसमें जो बेस बना के चलूंगा जो आपके
इंस्टट्यूट का मॉड्यूल है ना उसको मैं बेस बना के चलूंगा। तो जो भी मैं तुम्हें यहां पे दिखाऊंगा वो पूरी की पूरी रिवीजन हम
इंस्टट्यूट के मॉड्यूल से करेंगे। अब इंस्टट्यूट की कई बार लैंग्वेज कॉम्प्लिकेटेड होती है तो उसको हम सिंपल
लैंग्वेज में कन्वर्ट करेंगे। कुछ लैंग्वेज मेरी होगी। कुछ लैंग्वेज आजकल एआई का जमाना है। तो बिल्कुल स्टक
लैंग्वेज जो तुम्हें एग्जाम में लिख के आनी है, उस लैंग्वेज के बेस पे उसको हम एनालाइज करेंगे। पूरा का पूरा मॉड्यूल
आपका एक-एक टॉपिक मॉड्यूल में से कवर करूंगा। अगर इंस्टट्यूट मॉड्यूल में से क्वेश्चन बना फिर हम सारा मॉड्यूल करके
जाएंगे ताकि जब इलेक्टिव में हमें ये दिक्कत ना हो कि ये टॉपिक जो है वो किस पेज नंबर पे था। बात समझ में आ रही है? और
अगर हो सके तो मेरे साथ-साथ में इंडेक्स भी तैयार कर लेना क्योंकि मैं सिर्फ मॉड्यूल से ही कराऊंगा। जी। ठीक है? वैसे
मेरे क्लास के नोट्स भी हैं। वो मैं एक आधी बार यूज़ करूंगा। बट 99% जो हम रिवीजन करेंगे वो ऑलमोस्ट मॉड्यूल में से करेंगे।
टॉपिक जो करेंगे वो मॉड्यूल में से करेंगे। उसके बाद सर क्या हम केस लॉ करेंगे? बिल्कुल करेंगे। मॉड्यूल में
जगह-जगह पर केस लॉ दिए हैं। वो सारे केस लॉ मैं तुम्हें कराऊंगा। और इंस्टट्यूट हमारा सप्लीमेंट इशू करता है। तो
सप्लीमेंट में जो भी केस लॉ होंगे वो भी हम यहां पे रिवाइज करेंगे। फिर हर चैप्टर खत्म होने के बाद उस चैप्टर के जो भी
क्वेश्चंस एंड आंसर होंगे स्कैनर से वो क्वेश्चन भी मैं तुम्हारे YouTube पे करवा दूंगा ताकि तुम्हें इजी हो जाए कि जो हम
रिवीजन कर रहे हैं उससे क्वेश्चन आंसर भी हमारे हो रहे हैं। बस आपने एक काम करना है घर जाके उसकी राइटिंग प्रैक्टिस जरूर करके
देखनी है। उस क्वेश्चन को लिख के जरूर देखना है कि क्या वो क्वेश्चन आंसर तुमसे लिखे जा रहे हैं या नहीं लिखे जा रहे हैं।
उसके बाद टोटल सेशन मैंने आपको बता दिया। टोटल सेशन जो होंगे हमारे 40 से 45 सेशन होंगे। ठीक है? और फिर इस 45 सेशन के बाद
एक मैराथन मैं लूंगा नवंबर में। आज हमारी 13 तारीख है ना। आज हमारी 13 तारीख है। मैंने कहा था 13 तारीख से रिवीजन स्टार्ट
होगी। तो 13 तारीख आज हमारा पहला सेशन है। तो आज ही लगा लो। 13 सितंबर से लेके आने वाले 45 सेशन मंडे टू सैटरडे हमारी क्लास
हुआ करेगी। भगवान करे बीच में कोई छुट्टी ना हो। तो मंडे टू सैटरडे क्लास होगी। हमारी संडे क्लास नहीं होगी। तो हफ्ते में
छह सेशन हो गए। अकॉर्डिंगली आप 40 से 45 सेशन काउंट कर लेना। आई थिंक मेरे ख्याल से अक्टूबर के एंड तक हमारे खत्म हो
जाएंगे। देन फिर नवंबर के अंदर मैं मैराथन लेके आऊंगा आईबीसी की जो हमने इस 45 सेशन में किया उसको कोशिश करेंगे 12 घंटे में
जो मैंने 12 घंटे की मैराथन ली थी उसके अंदर हम रिवाइज करेंगे पूरा आईबीसीज। ठीक है? उसके बाद अब ये लाइव हो गया रिकॉर्डेड
होगी। आपके ऊपर डिपेंड करता है क्योंकि प्रोफेशनल के बच्चे मेजरली लाइव आते नहीं है। अभी अरुण सर ने भी क्लास ली थी तो
उन्होंने भी कहा सर 1520 बच्चे लाइव आते हैं और 15-20 भी सर पहली क्लास के अंदर आते हैं। फिर पांच बच्चे सात बच्चे आठ
बच्चे तो फिर वो मोटिवेशन नहीं मिलता। आप इस वीडियो में आप इस वीडियो के कमेंट में अगर आप लिखेंगे कि सर हम लाइव डेली आएंगे।
हम रात को 9:00 बजे मतलब 9:00 बजे क्लास होगी चाहे वो रिकॉर्डेड होगी चाहे वो लाइव होगी। अच्छा अगर लाइव क्लास होगी तो अरुण
सर के चैनल पे होगी। ठीक है? अरुण सर के चैनल पे मैं लाइव लूंगा। उसके बाद फिर मैं रिकॉर्डेड जो है ऑब्वियस सी बात है अपने
चैनल के ऊपर भी डाल दूंगा तो आप वहां से भी देख सकते हो वहां से भी वो आपके ऊपर है और जब मैं रिकॉर्डेड डालूंगा तो अरुण सर
के चैनल पे भी डालूंगा और अपने चैनल पे भी रिकॉर्डिंग डाल दूंगा तो जहां से भी आपको देखनी हो आप देख सकते हो कोई दिक्कत वाली
बात नहीं है बट डेली 9:00 बजे नोट कर लो डेली 9:00 बजे नोट कर लो टाइम फिक्स है टाइम फिक्स है डेली रात को 9:00 बजे बस ये
टाइम नोट कर लो 9:00 बजे जी अब जो जो बच्चा चाहता है कि लाइव लो तो आप कमेंट बॉक्स में लिख देना अब जितने बच्चे कमेंट
करेंगे देखते हैं कितने बच्चे कमेंट करते हैं ठीक है ना? और अगर मेरे को लगता है कि 50-60 बच्चा इंटरेस्टेड है लाइव के लिए और
डेली 50-60 बच्चा लाइव आ रहा है तो मुझे कोई दिक्कत नहीं है। मेरे को तो टाइम देना है। मैं लाइव में ले लूंगा। बट अगर मेरे
को लग रहा है कि नहीं 10-15 बच्चा इंटरेस्टेड है तो देन फिर मैं रिकॉर्ड करके डेली ये क्लास डाल दिया करूंगा। आप
उससे रिवाइज कर सकते हो। जो भी तुम्हें डाउट होंगे वो कमेंट बॉक्स में डाल देना। अगली वीडियो में तुम्हारे डाउट्स भी सॉल्व
कर दूंगा। बाकी मेरे को लाइव लेने के अंदर मजा आता है क्योंकि एग्जी में 3400 बच्चा लाइव होता है तो हम लाइव ले लेते हैं बट
प्रोफेशनल के अंदर ट्रेनिंग होती है बच्चों के बहुत सारे मतलब बैचेस होते हैं तो इसलिए प्रोफेशनल में बहुत कम बच्चा
लाइव लेता है जी ठीक है बाकी आप मेरे को बताएंगे तो मुझे कोई दिक्कत नहीं है लाइव लेने के लिए भी कमेंट लिख देना जितने
कमेंट आएंगे मैक्सिमम या लाइक्स जितने आएंगे उसके मेरे को पता लग जाएगा आप इंटरेस्टेड है या नहीं है जी ठीक है चलो
तो ये पूरा पैटर्न आपको समझ में आ गया जी तो हम सब कुछ कंप्लीट करेंगे तो ये लगा लो ये एग्जॉस्टिव रिवीजन होने वाली है इसमें
सर थ्योरी थ्योरी नहीं होने वाली केस लॉ भी, क्वेश्चंस भी, प्रोविजन भी सब कुछ हम रिवीजन करने की कोशिश करेंगे। पर ऑब्वियस
सी बात है जो रेगुलर बैच में होता है वो एक अलग लेवल का है। बट इसमें कोशिश करूंगा उसी को कंसाइज करके तुम्हें फटाफट से मैं
वो चीजें रिकॉल करवा दूं जो हमने रेगुलर बैच में किया था। आज ठीक है आ जाओ। अब इसी के साथ ही हम आज अपनी रिवीजन यहां पे
स्टार्ट करने जा रहे हैं। आ जाओ मेरे दोस्तों। ये लो जी। लो जी। अब आपका सबसे पहला चैप्टर हम यहां पे इनसॉल्वेंसी का
रिवाइज करने जा रहे हैं। ये आपका मॉड्यूल है। तो हम यहीं से इसकी रिवीजन करके चलेंगे। अब सबसे पहले यहां पे आ जाओ। ठीक
है? इधर देखो ध्यान से। अब एक बार फटाफट से आओ। अब सबसे पहले थोड़ा सा ना बेस समझ लो कि हम कैसे रिवाइज कर रहे हैं। याद करो
जब हमने सीआर का पेपर स्टार्ट किया था ना तो उसके अंदर मैंने कहा था कि एक तो आपका होता है इनसॉल्वेंसी।
ठीक है? एक मैंने फिर आपको कहा था एक होता है आपका बैंककरप्सी ठीक है जी और एक फिर यहां पर होता है
लिक्विडेशन ठीक है और एक फिर यहां पे होता है वाइंडिंग अप तो ये मान के चलो कि हमारे
सिलेबस में जो हमारा आईबीसी है 140 मार्क्स का उसमें इनोल्वेंसी बैंकरप्सी लिक्विडेशन वाइंडिंग अप ये सारी बातें
हैं। ठीक है? अब मैं थोड़ा सा बेस क्लियर कर दूं जो ये वर्ड्स लिखे हैं इन वर्ड्स का मतलब क्या है? देन फिर मैं यहां पे
इंट्रोडक्शन के ऊपर आऊंगा कि बैंकरप्स वर्ड कहां से आया। ठीक है? अब इनसॉल्वेंसी का मतलब समझो। इनसॉल्वेंसी का मतलब आई
थिंक सबको पता होगा। इनसॉल्वेंसी का मतलब क्या होता है? इनसॉल्वेंसी एक स्टेट है। इनसॉल्वेंसी एक स्टेट है जिसमें कोई पर्सन
जो डेप्ट ड्यू हो चुका है और जो डेप्ट पेएबल है बट वो पे करने के अनेबल हो चुका है उसको इनसोल्वेंसी वाली कैटेगरी में डाल
दें। मतलब ऐसा कोई भी डेप्ट जो ड्यू एंड पेएबल है बट सामने वाला पर्सन उसको पे करने में अनेबल हो चुका है तो हम ये बोलते
हैं कि वो इनसॉल्वेंसी वाली कैटेगरी में आ गया। अच्छा इनसॉल्वेंसी जो है ना ये कैटेगरी जो है ये कोई कोर्ट डिक्लेअ नहीं
करता। मतलब यह हमारी अवस्था है। यह हमें पता होती है। एक बात मेरे को सोच के बताओ कि जितने बच्चे भी इस टाइम इस वीडियो को
देख रहे हैं, आप मेरे को कमेंट करके बताना क्या इनसॉल्वेंसी और इनसॉल्वेंट दोनों सेम चीजें होती हैं? मतलब क्योंकि ना कई बार
मुंह से वर्ड निकलता है इनसॉल्वेंट या कई बार मुंह से वर्ड निकलता है इनसॉल्वेंसी। तो क्या इनसॉल्वेंसी और इनसॉल्वेंट दोनों
सेम चीजें होती हैं। आंसर इज़ नो। इनसॉल्वेंसी जो है वो एक सिचुएशन है। वो एक अवस्था है। और जो पर्सन इस सिचुएशन से
गुजर रहा है उसको इनसॉल्वेंट बोलते हैं। मान लो फॉर एग्जांपल लेट्स एन एग्जांपल मान लो एक पर्सन है मिस्टर X है। अब
मिस्टर X ने फॉर एग्जांपल PNB बैंक के पैसे देने हैं। PNB बैंक ने मिस्टर X को पैसे दिए हैं और मिस्टर X कह रही है मैं
पे करने के अनेबल हूं। मेरे पास तुम्हें देने के पैसे नहीं है। अब मेरे पास तुम्हें देने के पैसे नहीं है। तो x जो है
वो जिस सिचुएशन से गुजर रहा है उसको हम क्या बोलेंगे? इनसॉल्वेंसी बोलेंगे। और x को हम क्या नाम देंगे? इनसॉल्वेंट नाम
देंगे। बस ये बात ध्यान दो। अच्छा एक बात मैं एक और बताओ। क्या ये इनसॉल्वेंसी वर्ड हम सिर्फ इंडिविजुअल के लिए यूज कर सकते
हैं या पार्टनरशिप फर्म के लिए यूज कर सकते हैं या एलएलपी के लिए वर्ड यूज कर सकते हैं या किसी कंपनी के लिए वर्ड यूज़
कर सकते हैं या ये वर्ड हम सबके लिए कर सकते हैं। हम सबके लिए कर सकते हैं। मतलब इनसॉल्वेंसी वर्ड जो है ना वो एक तरह का
अंब्रेला है। मतलब एक बहुत वाइड टर्म है। इसमें सब लोग कवर हो जाते हैं। भाई सिंपल सी बात है। डेप्ट पे करने के अनेबल तो कोई
भी हो सकता है ना। भाई फॉर एग्जांपल मान लो कंपनी ने लोन लिया हो। अब अगर कंपनी ने कोई लोन लिया और कंपनी डेप्ट पे करने के
अनेबल हो गई तो कंपनी इनॉल्वेंसी वाली कैटेगरी में आ गई। पार्टनरशिप फर्म ने लोन लिया पार्टनरशिप फर्म डेप्ट पे करने में
अनेबल हो गई तो पार्टनरशिप फर्म इनसॉल्वेंसी वाली कैटेगरी में आ गई। एक इंडिविजुअल ने लोन लिया इंडिविजुअल डेप्ट
पे करने के अनेबल हो गया तो इंडिविजुअल इनसॉल्वेंसी वाली कैटेगरी में आ गया। तो ये दिमाग में मत लेके आना कि सिर्फ ये
कॉर्पोरेट केस में है। मैं इसलिए कह रहा हूं जितने बच्चे सामने बैठे हैं ऑब्वियस सी बात है सारा का सारा बच्चा कंपनी
सेक्रेटरी वाला होगा। अब तुम सब सीएस कर रहे हो तो दिमाग में लगता है कंपनी सेक्रेटरी तो हमें कंपनी की इनॉल्वेंसी
संभालनी है। तो ये वर्ड जो है कंपनी के लिए होता है। आंसर इज नो। वो बात एक अलग है कि हमें आगे जाके काम कंपनी का करना
है। हमारे पास कंपनी के इंसॉल्वेंसी के केसेस आएंगे। वो बात अलग है। हमारे पास इंडिविजुअल के इनॉल्वेंसी के केसेस नहीं
आएंगे। बट इंडिविजुअल की इनॉल्वेंसी भी होती है। और याद करो जो बच्चे रेगुलर बैच वाले हैं या आपने कहीं से भी क्लासेस ली
हैं। याद नहीं आ रहा कि इनसॉल्वेंसी का लॉ जो है आईबीसी कोड जो हम पढ़ेंगे यहां पे उसको पांच पार्ट्स में डिवाइड किया हुआ
है। याद करो थोड़ा सा कि जो हमारा आईबीसी कोड बना हुआ है उसके पांच पार्ट है ना अगर आपको थोड़ा बहुत याद आ रहा हो। याद करो
मैंने कहा था एक पार्ट नंबर वन होता है। फिर एक पार्ट नंबर टू होता है। फिर एक पार्ट नंबर थ्री होता है। फिर एक पार्ट
नंबर फोर होता है। फिर एक पार्ट नंबर फाइव होता है। याद आ रहा है कुछ आपको थोड़ा-थोड़ा। फिर पार्ट नंबर वन के अंदर
सेक्शन नंबर वन टू थ्री होते हैं। फिर पार्ट नंबर टू के अंदर सेक्शन फोर से लेकर 77 ए तक होते हैं। फिर पार्ट नंबर थ्री
में सेक्शन 78 से लेकर 187 तक होते हैं। फिर पार्ट नंबर फोर में सेक्शन 188 से लेकर 223 तक होते हैं। फिर पार्ट नंबर फोर
में 224 से लेकर 255 तक होते हैं। ये सभी सेक्शन होते हैं। और फिर पार्ट नंबर वन तो होता है प्रीलिमिनरी जो सबके ऊपर
एप्लीकेबल होता है। फिर पार्ट नंबर टू जो सबसे मेन है जो एक सीएस के लिए मतलब यह लगा लो सीएस की जान है जो जो सबसे जरूरी
है तुम्हें समझना वह पार्ट नंबर टू है सेक्शन फोर से लेकर 77 और जिन्होंने अभी तक पेपर दिए हैं प्रोफेशनल में तो उनको
पता होगा पार्ट नंबर टू कितना इंपॉर्टेंट है। यह बात आपको मैंने रेगुलर बैच के अंदर भी कहा था कि अगर मान लो 40 नंबर का
आईबीसी है तो 40 में से कम से कम 25 नंबर की वेटेज पार्ट नंबर टू की है। कम से कम 25 नंबर की वेटेज और वही 100 नंबर के
आईबीसी में कम से कम 60 से 70 नंबर की वेटेज पार्ट नंबर टू की है। तो पार्ट नंबर टू आपका बहुत अच्छे से होना चाहिए क्योंकि
पार्ट नंबर टू में क्या है कि अगर कोई कॉर्पोरेट पर्सन है उसकी इंसॉल्वेंसी और उसकी इनॉल्वेंसी का रेोल्यूशन और वो
लिक्विडेशन और वो वाइनिंग अप ये सारी बातें जो है पार्ट नंबर टू में है। मतलब एक कॉर्पोरेट पर्सन की पूरी की पूरी
पिक्चर जो है अगर वो इनॉल्वेंसी में चला गया उसकी इनॉल्वेंसी को रिॉल्व कैसे करेंगे? अगर इनॉल्वेंसी रॉल्व नहीं होती
तो फिर उसके अगेंस्ट में लिक्विडेशन कैसे स्टार्ट होगा? फिर लिक्विडेशन के बाद वाइंड अप कैसे होगा? तो ये सारी की सारी
बातें पार्ट नंबर टू के अंदर आती हैं। और हमें आगे जा के काम करना इसका है। भाई हम जो सीएस बनने वाले हैं हमें कंपनी का काम
करना है। तो हमारे लिए पार्ट नंबर टू सबसे मेन है। फिर पार्ट नंबर थ्री। अब ये पार्ट नंबर थ्री जो है ना यह तुम्हारे सीआर वाले
आईबीसी में नहीं है। यह सीआरबीआई के अंदर नहीं है। जो इक्टिव वाला ईबीसी है उसके अंदर हमारा पार्ट नंबर थ्री है। यह
इंडिविजुअल और पार्टनरशिप फर्म की जो इंसॉल्वेंसी है उसको रिॉल्व कैसे करेंगे? पार्ट नंबर थ्री है।
क्या बात समझ में आ रही है ना? तो सिंपल सी बात है। ये पार्ट नंबर थ्री जो है ये इंडिविजुअल और पार्टनरशिप फर्म की
इनॉल्वेंसी को रॉल्व करने का। जो इलेक्टिव के अंदर है जो सीआर वाली आईबीसी में नहीं पढ़ना ना हमें रिवाइज करना। फिर पार्ट
नंबर फोर ये जो है इसके अंदर क्या है? इनॉल्वेंसी प्रोफेशनल कौन होता है? इंटेरियम रेोल्यूशन प्रोफेशनल कौन होता
है? रेोल्यूशन प्रोफेशनल कौन होता है? इंफॉर्मेशन यूटिलिटी क्या होती है? ये सारी की सारी बातें जो भी आपके मेन
पॉइंट्स निकल के आते हैं वो सारे पार्ट नंबर फोर है। एंड फिर पार्ट नंबर फाइव जो है वो मिसलेनियस है। जी। क्या बात समझ में
आ रही है? तो ये बात तो समझ में आ गया होगा कि इनसॉल्वेंसी वर्ड जो है हम सबके लिए यूज़ करते हैं। और इनसॉल्वेंसी कोई
कोर्ट की डिक्लेरेशन नहीं है। ये हमारी सिचुएशन है। ये हमें खुद पता लगती है कि अगर हम किसी को डेप्ट पे करने में इनेबल
हो गए हैं तो हम इनसॉल्वेंसी वाली कैटेगरी में आ चुके हैं। अच्छा अब सुनो ध्यान से। इनोलॉल्वेंसी वाली कैटेगरी में आ गए। अब
आपको मैं थोड़ा सा और बता दूं। अभी इनॉल्वेंसी वाली कैटेगरी में आने के बाद ना दो चीजें होती हैं। दो चीजें क्या हैं?
गवर्नमेंट कहती है इनोवलेंसी वाली कैटेगरी में कौन आया? ये बताओ। हेलो भाई साहब। ओए ओए इधर देखो ध्यान से। इधर देखो। अब
इनसॉल्वेंसी वाली कैटेगरी में कौन आया? अब गवर्नमेंट ने कहा अगर इनसॉल्वेंसी वाली कैटेगरी में इंडिविजुअल आया या
इनसॉल्वेंसी वाली कैटेगरी में पार्टनरशिप फर्म आई। तो अगर इनसॉल्वेंसी वाली कैटेगरी में इंडिविजुअल आया या इनसॉल्वेंसी वाली
कैटेगरी में पार्टनरशिप फर्म आई तो गवर्नमेंट ये बात कहना चाहती है कि भैया उसके अगेंस्ट में जो प्रोसीडिंग स्टार्ट
होंगी वो बैंकरप्स की होंगी। मतलब बैंककरप्सी जो हम वर्ड यूज़ करते हैं वो सबके लिए नहीं करते। आगे जाके तुम यहां पर
पढ़ोगे वो स्पेसिफिकली इंस्टट्यूट के मॉड्यूल में साफ-साफ लिखा है कि बैंककरप्सी वर्ड जो है हम जो यूज़ करेंगे
ओनली फॉर द इंडिविजुअल और पार्टनरशिप अकाउंट। तो सर अगर मान लो कोई कंपनी इनॉल्वेंसी वाली कैटेगरी में जा रही है तो
उसके लिए हम वर्ड कौन सा यूज करेंगे? लिक्विडेशन। उसके लिए फिर हम वर्ड यूज़ करेंगे
लिक्विडेशन का। उसके अगेंस्ट जो प्रोसीडिंग स्टार्ट होंगी वो लिक्विडेशन की स्टार्ट होंगी। जी। तो आप समझ सकते हो
आपके दिमाग में फिर यहां पर क्लिक हो गया होगा कि हमारे लिए लिक्विडेशन के प्रोविजन मोरेंट है इन कंपैरिजन टू बैंककरपसी
क्योंकि हमें काम कंपनीज़ के करने हैं। फिर अगर बैंककरपसी की प्रोसीडिंग चल रही हैं। अब अगर मान लो बैंकरप्सी की प्रोसीडिंग
कंप्लीट हो जाती हैं। फिर फाइनल कंक्लूजन जो होता है फिर वो बैंककरप्ट होता है। फिर लास्ट में क्या होता है? बैंककरप्ट। एक
वर्ड सुना होगा बैंककरप्ट। और बैंककरप्ट हम वर्ड यूज करते हैं अगेन इंडिविजुअल और पार्टनरशिप फर्म के लिए कंपनी वाले केस
में एक वर्ड यूज करते हैं वाइंडिंग अगर आपको याद आ रहा हो तो बात समझ में आ रही है तो थोड़ा सा ना अपने दिमाग में एक
डायग्राम लेके चलना मतलब अपने दिमाग में एक हिरार के लेके चलना ताकि तुम कंफ्यूज ना हो क्योंकि ना कई बार पूरा एबीसी लॉ
पढ़ लिया बच्चे को यही पल्ले नहीं पड़ रहा कि बैंकरप्सी किसके लिए पढ़ रहा हूं बैंकरप्ट किसको बोल रहा हूं फिर
लिक्विडेशन किसके लिए पढ़ रहा हूं या बाइंडिंग अप किसके लिए पढ़ रहा हूं तो आप थोड़ा सा हिरार के लेके चलना कि भैया
इनसॉल्वेंसी अगर अगर मैं इनॉल्वेंसी की बात करूंगा तो इंसॉल्वेंसी वर्ड जो है ये तो एक अंब्रेला है। मतलब इंसॉल्वेंसी वर्ड
ये सबके लिए यूज करते हैं। फिर इनसॉल्वेंसी से बफरर्केशन होना स्टार्ट होता है कि इनॉल्वेंसी वाली कैटेगरी में
इंडिविजुअल या पार्टनरशिप फर्म गई है या इनसॉल्वेंसी वाली कैटेगरी में जो है वो कंपनी गई है। मतलब कॉर्पोरेट पर्सन गया।
ठीक है? अब कॉर्पोरेट पर्सन के अंदर ऑब्वियस सी बात है एलएलपी भी यहां पे आ जाता है। ठीक है? अब अगर यह इनसॉल्वेंसी
वाली कैटेगरी में गया तो फिर यहां पे लिक्विडेशन की बातें होती हैं। फिर यहां पे नॉर्मली वाइंडिंग अप की बातें होती
हैं। और अगर इंडिविजुअल और पार्टनरशिप फर्म की बातें होती हैं तो फिर यहां पे गवर्नमेंट कहती है यहां पे बैंककरप्ट्स की
बातें होती हैं। फिर यहां पे बैंककरप्ट की बातें होती हैं। इस तरह से हमारी नॉर्मली प्रोसीडिंग काम करती है। ये दिमाग में
लेके चलना आज। यहां तक क्लियर है? पक्का? पक्का। अब दोबारा से रिवीजन की रिक्वायरमेंट तो नहीं पड़ेगी। चलो अब
थोड़ा सा आगे बढ़ते हैं। अब थोड़ा सा यहां पर आ जाओ। मॉड्यूल पे आओ। जी। अब इंट्रोडक्शन देखो। अब इंट्रोडक्शन में ये
बता रखा है कि जो ये बैंककरप्सी वर्ड है ये बैंकरप्सी वर्ड आया कहां से? क्या ये पेपर के अंदर बनता है? नहीं बनता। ठीक है?
बट थोड़ा सा बेसिक है। तुम्हें आईडिया होना चाहिए कि ओरिजिन कहां से बना? तो बैंकरप्सी वर्ड आप याद करो आपको मैंने
रेगुलर बैच के अंदर भी बताया था कि बैंककरप्सी वर्ड जो है इटली में एक ब्रिज था। उस ब्रिज पे एक धंधा होता था। और वहां
पर अगर कोई पर्सन डिफॉल्ट कर देता था तो उसका बेंच तोड़ देते थे। और उस बेंच तोड़ने को हम बोलते थे बैंकरारोटा।
क्या बोलते थे? गाली नहीं देनी। बैंकर रोटा बैंकरोटा तो वहां से यह माना गया कि बकरप्स का इवोल्यूशन हुआ कि बैंककरप्सी का
ओरिजिन जो है वो वहां से हुआ। जी जैसे याद है आपको जब हम एग्जीक्यूटिव में टैक्स की बात करते थे तो हम बोलते थे टैक्स का
ओरिजिन कहां से हुआ? एक लैटिन वर्ड था लैटिन वर्ड टैक्सो। तो लैटिन वर्ड टैक्सो से टैक्स का ओरिजिन हुआ। तो सेम बैंकरप्स
वर्ड का जो ओरिजिन हुआ अगर आप चेक करोगे देखो यहां पे लिखा हुआ है तो द वर्ड बैंकरप्सी इज़ वाइडली बिलीव्ड टू हैव
ओरिजनेटेड फ्रॉम एन इटालियन फ्रेज़ दैट इज़ बैंकर रोटा बैंका मींस बेंच बैंका मींस बेंच और रोटा मींस ब्रोकन तो उस बेंच को
ब्रोकन तोड़ना इट इज़ बिलीव दैट वर्ड बैंककरप्सी ओरिजनेटेड फ्रॉम द ट्रेड दैट वाज़ कैरिड आउट ऑन द पोंटेक्यो इज़ ए
मेडिसिवल्स सेगमेंटल आर्क ब्रिज ओवर द आर्क ओवर द आर्नो रिवर इन फ्लोरेंस इटली। इटली में
मतलब एक रिवर के ऊपर एक ब्रिज था। उस ब्रिज पे एक बिज़नेस होते थे। इन इटली इफ ए बैंकर हु कंडक्टेड हिज मार्केट प्लेस
ट्रांजैक्शन ऑन ए बेंच वाज़ अनेबल टू मीट बिज़नेस ऑब्लिगेशन वाज़ इन डे हिज़ बेंच वाज़ ब्रोकन इन ए सिंबॉलिक शो। मतलब एक
सिंबॉलिक शो था कि हां भाई यह बंदा फेलियर हो गया। एंड हिज़ एबिलिटी टू कंटिन्यू। दिस एक्ट बैंकर रोटा और ब्रेकिंग द बेंच इज़
बिलीव्ड टू हैव इवॉल्वड इंटू द मॉडर्न कॉन्सप्ट ऑफ़ बैंकरप्सी। यह बस तुम्हें जब तुम आगे टीचिंग में जाओगे तब तुम्हें
समझाने के काम आएगा। अदरवाइज़ एग्जाम में किसी काम का नहीं है कि बैंकरप्सी का ओरिजिन कहां से हुआ ना वो तुमसे एग्जाम
में पूछेंगे। क्या बात मेरी समझ में आ रही है ना? एग्जीक्यूटिव लेवल पे बात एक अलग होती है। बट प्रोफेशनल लेवल पे नॉलेज
बेस्ड क्वेश्चन बनते हैं। ठीक है ना? कॉनंसेप्चुअल बेस क्वेश्चन बनते हैं। ये तो एक बिल्कुल बेस है। उसके बाद देखो फिर
यहां पे फिर उसने बोला जी बैंकरप्सी का जो जो ये लॉ लेकर आए इस बैंकरप्सी के लॉ का रीज़ क्या है? मतलब गवर्नमेंट ये लॉ क्यों
लेकर आई बैंककरप्सी का लॉ? तो वो कह रहे हैं जी रोल ऑफ द रोल ऑफ द लॉ ए फॉर्मल बकरप्सी इज़ अ प्रोसेस इज़ टू ले डाउन। रूल
ऑफ द प्रोसीजर इंटू व्हिच द कॉन्फ्लिक्ट इज़ चैनलाइज़ एंड रिजल्ट इज़ अ सॉल्यूशन। भाई सिंपल सी बात है। ये लोग किस लिए लेकर आए
कि जो दो लोगों के बीच में डिस्प्यूट है उसको चैनलाइज करें और इसका सॉल्यूशन फाइंड आउट करें। अच्छा अब ये बात एक छोटी सी और
ध्यान देना जी। एक छोटी सी बात ये और ध्यान देना जो रेगुलर बैच वाले बच्चे होंगे। तो ये बातें हमने पहली दूसरी क्लास
में डिस्कस की थी जो आपको दोबारा सुनने को मिल रही हैं। और मैं अगेन बोल दूं ये मत कहना सीधा केस स्टडी करा दो। देखो मेरा
रिवीजन कराने का तरीका सेम रहेगा जो मैं टेक्स्ट में करवाता था बिल्कुल ओरिजिन से क्योंकि YouTube पे सिर्फ मेरे रेगुलर बैच
वाले बच्चे नहीं। YouTube पे बहुत सारे बच्चे और भी हैं जो कई बार क्लासेस नहीं ले पाते। तो बिल्कुल हम बेस से ले चलेंगे,
ओरिजिन से ले चलेंगे और हर वीडियो के एंड में अपने कमेंट में बताना जरूर तुम्हें क्लास कैसी लगी। देखो एक्सिम में तो तुम
बहुत सारे मैसेज करते थे। तुम मुझे बहुत मोटिवेट करते थे एक्सिम में। ये मैं बता रहा हूं सर। और अगर प्रोफेशनल में भी तुम
अगर मुझे ऐसे मोटिवेट करोगे ना मैं गारंटी दे रहा हूं तुम्हारे दिमाग से मैं आईबीसी का डर ही खत्म कर दूंगा। और फिर जब यह हो
गया देन फिर हम बात करेंगे सीआर की जी। यह तुम्हारे भाई का वादा है। सर एक्स में जो वादा किया था वह निभाते थे ना। सेम यहां
पर होगा। पर आपके लाइक्स और कमेंट बहुत इंपॉर्टेंट बन जाते हैं प्रोफेशनल के लिए। क्योंकि प्रोफेशनल के बच्चे थोड़े से बड़े
हो जाते हैं। वह कमेंट नहीं करते। तो उससे थोड़ा सा मोटिवेशन डगमगा जाता है बस। ठीक है? जैसे आपको मोटिवेशन की नीड होती है ना
ऐसे हमें भी मोटिवेशन की नीड होती है। बात ध्यान रखना। जी। अब सुनो ध्यान से। अब एक बात मेरे को सोच के बताओ। अब मैं थोड़ा सा
आपको बता दूं। बैंकरप्स हो या इनसॉल्वेंसी हो। देखो वो कह रहे हैं कि सॉल्यूशन फाइंड आउट करना है। मतलब अगर दो लोगों के बीच
में डिस्प्यूट है तो एक प्रोसेस है कि उसको चैनलाइज करने का और एक सॉल्यूशन फाइंड आउट करने का। आप मेरे को बताओ कि दो
लोग कौन से निकल के आ रहे हैं? दो लोग कौन आप ये बात मान के चलो जो अगर किसी को आईबीसी लॉ अच्छे से समझना है या रिवाइज
करना है ना चार चीज ध्यान रखना चार चीजें बस अगर ये चार चीजें तुम दिमाग में लेके चलते हो तुम्हें कभी कोई दिक्कत नहीं
आएगी। चार टर्म्स तुम्हें दिमाग में लेके चलनी है। एक तो टर्म्स तुम्हें दिमाग में लेके चलनी है डेटर।
एक टर्म तुम्हें दिमाग में लेके चलनी है क्रेडिटर। एक टर्म तुम्हें दिमाग में ले चलनी है डे और फिर एक टर्म तुम्हें दिमाग
में ले चलनी है डिफॉल्ट बस मतलब यह दिमाग में ले चलो क्रेडिटर ने डेटर को डे दिया और डेटर ने उस डेप्ट में डिफॉल्ट कर दिया
तो बस वहां पे इनसॉल्वेंसी की स्टार्टिंग हो गई अब वो डेप्ट कितने का हो डिफॉल्ट कितने का हो वो सारी बातें बाद की बेस
क्या है अब 1 करोड़ से ऊपर का डिफॉल्ट हो तो इनॉल्वेंसी लॉ लगेगा वो ज्ञान अभी नहीं मेरे को देना वो ज्ञान आगे रख के सेक्शन
नंबर फोर में डिस्कस करेंगे। अभी बस एक बेस बना के चलो। बेस क्या है? सामने क्रेडिटर है। इधर डेटर है। क्रेडिटर ने
डेटर को डेप्ट दिया। डेटर ने इस डे में डिफॉल्ट कर दिया। अब इस डेटर ने डिफॉल्ट किया। अब इस डेटर को क्रेडिटर इंसॉल्वेंसी
के लॉ में घसीट के लेके जाएगा। तो ये इनसॉल्वेंसी और इसी का सॉल्यूशन फाइंड आउट करना। वो कह रहा है बैंकरप्सी का लॉ बस ये
बताता है। कि जो भी तुम बैंककरप्सी का लॉ पढ़ने जा रहे हो। ये इसीलिए प्रोसेस ये इसीलिए तैयार किया गया ताकि दो लोगों को
बिठा के हम सॉल्यूशन फाइंड आउट कर सकें। आगे देखो जी अब देखो उसने बोला है अब द ऑब्जेक्टिव ऑफ द बैंकरप्सी प्रोसेस
ऑब्जेक्टिव क्या है बैंकरप्सी प्रोसेस का इज टू क्रिएट ए प्लेटफार्म एक प्लेटफार्म तैयार करना किसका फॉर नेगोशिएशन बिटवीन
क्रेडिटर्स एंड एक्सटर्नल फाइनेंसर व्हिच कैन क्रिएट द पॉसिबिलिटी ऑफ़ सच रिअरेंजमेंट
ठीक है क्रेडिटर्स पुट मनी इनू डेप्ट ध्यान रखना क्रेडिटर्स पुट मनी इनू डे इन्वेस्टमेंट टुडे इन रिटर्न फॉर द
प्रॉमिस टू फिक्स फ्यूचर कैश फ्लो अब क्या होता है क्रेडिटर्स क्या करते हैं पैसा देते अब सोच के बोलना यार मैंने तुम्हें
₹100 दिए तो मैंने तुम्हें ₹100 दिए। आपने कहा सर मुझे ₹100 की जरूरत है। मैंने तुम्हें ₹100 दिए। आपने कहा सर मैं आपको
₹120 लौटा दूंगा एक महीने के बाद। मैंने इसलिए ₹100 दिए ना भाई मेरे को लगा कि मैं तुम्हें ₹100 दे रहा हूं। तुम मुझे 1
महीने के बाद ₹120 वापस करोगे। अब मैंने तुम्हें ₹100 दिए इसलिए कि तुमने ₹120 वापस करोगे। बट अगर मेरे ₹120 डूब गए। यह
भी तो रिस्क है ना। अगर मेरे ₹120 डूब गए तो यह भी तो रिस्क यहां पर निकल के आ रहा है। तो वही तो यहां पर वह कहना चाह रहा
है। कह रहा है बट द रिटर्न एक्सपेक्टेड ऑन दी इन्वेस्टमेंट आर स्टिल अनसर्टेन बिकॉज़ एट द टाइम ऑफ रीपेमेंट। बिकॉज़ एट द टाइम
ऑफ़ रीपेमेंट द सेलर। सेलर मतलब डेटर मतलब वो तुम्हारी बात हो रही है। क्या हो रहा है ये लाइट को?
भाई साहब लाइट ना भाग जाए। सेलर मतलब डेटर। वो तुम्हारी बात हो रही है। तो मेक रीपेमेंट एस प्रॉमिस। या तो तुम मुझे टाइम
से पेमेंट कर दोगे। या तो तुम मुझे टाइम से पेमेंट कर दोगे। क्लास तो सही चल रही है ना? हां। या तो क्या होगा? तुम मुझे
टाइम से पेमेंट कर दोगे। अब या तो मुझे टाइम से पेमेंट कर दोगे और और ही मे डिफॉल्ट एंड डज़ नॉट मेक द पेमेंट। या तो
मुझे टाइम से पेमेंट नहीं करोगे या तो मुझे पेमेंट ही नहीं करोगे। तो व्हेन दिस हैपन व्हेन दिस हैपन द डेटर इज़ कंसीडर
इनसॉल्वेंट। ध्यान रखना। दैट डेटर इज़ कंसीडर। डेटर इज़ कंसीडर इनॉल्वेंट अदर देन केस ऑफ़ आउटस्टेट फ्रॉड। अब फ्रॉड के अलावा
और भी तो केस हो सकते हैं। अब ये तो चलो देखो सिंपल सी बात है। तुमने मेरे पैसे नहीं दिए। तुमने मेरा फ्रॉड कर दिया। एक
बात तो ये हो गई। बट फ्रॉड के अलावा तुम्हारा पैसे ना देने का रीज़न क्या हो सकता है? ये क्वेश्चन तुम्हारे एग्जाम के
अंदर बन सकता है। ये लगा लो जी। इस क्वेश्चन को आप साथ-साथ हाईलाइट कर लेना। ये मॉड्यूल खोल के बैठ जाना। जी। मॉड्यूल
सबके पास है ना? तो मॉड्यूल सबके पास है। मॉड्यूल खोल के बैठ जाना। जहां-जहां मैं हाईलाइट कराऊंगा। जहां-जहां मैं ये
अंडरलाइन कर रहा हूं। ये कलर वलर कर रहा हूं तो कलर वलर साथ में करते रहना। लगना चाहिए तुमने मॉड्यूल पढ़ा है। ये बात ध्यान
दो जी। तो यहां पे इसको हाईलाइट कर लेना। अब वो कह रहे हैं कि फ्रॉड के अलावा दो रीज़न और हो सकते हैं कि सामने वाला बंदा
पेमेंट नहीं कर रहा। पहला रीज़न क्या है? फाइनेंशियल फेलियर। दूसरा रीज़न क्या है? बिज़नेस फेलियर। अच्छा फाइनेंशियल फेलियर
का मतलब ये होता है कि अगर कैश फ्लो के बीच में मिसमैच हो रहा है। कैश फ्लो के बीच में मिसमैच कैसे हो रहा है? जैसे मान
लो मैं किसी को सामान बेचता हूं। अब मैंने हेलो भाई साहब। ओए इधर मैं किसी को सामान बेच रहा हूं। तो मैंने सामने वाले को
सामान बेचा तो मैंने बोला कि तू मेरे को ना पेमेंट 90 दिन में कर दियो और जिससे मैं सामान खरीद रहा हूं वो मेरे से पैसे
30 दिन के अंदर मांग रहा है तो क्या मेरा मिसमैच नहीं हो जाएगा क्या मैं उसको पैसे दे पाऊंगा नहीं दे पाऊंगा नहीं दे पाऊंगा
पैसे भाई सामने से मुझे 90 दिन के अंदर आने हैं। देने मुझे 30 दिन के अंदर है। तो मेरे पास पैसा कहां से आएगा? तो
फाइनेंशियल फेलियर हो गया ना मेरे पास भाई। अब जब तक मैंने बिजनेस स्टार्ट किया तब तक तो मैं देता गया, देता गया, देता
गया। बट एक टाइम ऐसा आएगा कि मैं सामने वाले को तो उधार दे रहा हूं। बट मेरे पास देने के पैसे ही नहीं है ना। अब जब देने
के पैसे ही नहीं है। और मान लो फॉर एग्जांपल सामने वाला बंदा भी डिफॉल्ट कर गया तो मैं कैसे बिज़नेस चलाऊंगा? इसको
बोलते हैं फाइनेंशियल फेलियर। कि बिजनेस में कोई दिक्कत नहीं है। बिजनेस मेरा बिल्कुल सही है। बहुत ध्यान से सुनना सर।
बिजनेस मेरा बिल्कुल्क सही है। बिजनेस में दिक्कत नहीं आ रही। और बहुत सारी कंपनी ऐसी होती हैं जिनके बिजनेस में दिक्कत
नहीं है बट वह फाइनेंशियल मैनेजमेंट नहीं कर पाते। तो उसने बोला एक तो ये रीज़न हो सकता है। दूसरा है बिजनेस फेलियर।
तुम्हारा बिजनेस ही खत्म है। बिजनेस ही बेकार है। बिज़नेस चल ही नहीं सकता। याद है वो शार्क टेक इंडिया। शार्क इंडिया के
अंदर वो एक आया था बंदा वो शिप लाइन वाला वो कहता था भाई साहब इसको भी कैप पहना दूंगा। तो अशर अशनीर ग्रोवर ने कहा था भाई
क्या कर रहा है तू? कह रहा भाई तेरा बिजनेस मॉडल ही खराब है। जबकि उसने बाद में बिजनेस खड़ा करके दिखाया था। उसकी फिर
वो YouTube पर वीडियो भी आई थी कि देखो मैंने बिजनेस खड़ा करके दिखाया कि मेरे आज एयरपोर्ट पे आज कई सारे एयरपोर्ट के ऊपर
मेरे बिक रहे हैं। बट मैं कहना क्या चाह रहा हूं कि अशनीर ग्रोवर ने क्या वर्ड यूज़ किया था कि तेरा बिजनेस मॉडल ही खराब
है। अब उसने ये नहीं बोला कि फाइनेंसियल दिक्कत आएगी। भाई बिज़नेस मॉडल ही खराब है। तेरा बिज़नेस ही नहीं चलेगा। जीरो। और एक
वो जो आया था वो क्या नाम है उसका नाभि वाला वो कह रहा था कि फेंटसी कि क्या फेंटसी क्या फेंटसी तो सारे भाई साहब वो
शाक घूम रहे थे फिर उसने कहा अरे गोल नाभि गोल नाभि करने के लिए उसने एक इंस्ट्रूमेंट निकाला बताओ भाई साहब किसी
ने सोचा भी नहीं होगा तो सब सब शाक ने बोला था भाई साहब क्या कर रहे हो दुनिया में इतनी बड़ी-बड़ी प्रॉब्लम है उसका इलाज
करो नाभि का इलाज कर रहे हो कि नाभि गोल कैसी होगी तो उन्होंने बोला तेरा बिजनेस मॉडल ही खराब है तो बिजनेस फेलियर का मतलब
यह होता है अब अगर बिजनेस फेलियर हो गया तो भी आप डेप्ट पे करने के इनेबल हो जाओगे क्योंकि बिजनेस ही नहीं चल रहा। कस्टमर ही
नहीं आ रहे। पैसा मैंने लगा रखा है। अब जहां से मैंने पैसा उठा रखा है वो बिजनेस ही काम नहीं करेगा तो उनको पैसा देना
पड़ेगा ना तो वो बिज़नेस फेलियर वाली कैटेगरी में आ जाएगा। अच्छा तो देखो यहां पे जी। तो दो तरीके होते मतलब फ्रॉड के
अलावा सामने वाले बंदे ने पैसा मार लिया फ्रॉड से। बट फ्रॉड के अलावा भी दो रीज़न हो सकते हैं उसके पैसे मारने के। या तो
फाइनेंशियल फेलियर या बिजनेस फेलियर। तो आपके एग्जाम में क्वेश्चन बन सकता है दो नंबर के अंदर सीआरबीआई के अंदर कि भैया
फ्रॉड के अलावा कौन से रीज़न हो सकते हैं मतलब इनसॉल्वेंसी में जाने के तो दो या तो फाइनेंशियल फेलियर हो गया या बिजनेस
फेलियर हो गया ठीक है अब उसके बाद देखो फिर यहां पे क्या है जी वो कह रहा है साउंड बैंककरप्स प्रोसेस इज़ वन ए साउंड
बैंककरप्सी प्रोसेस इज़ वन द हेल्प द हेल्प क्या हेल्प करता है क्रेडिटर्स एंड डेटर्स रियलाइज़ एंड एग्री वेदर द एंटिटी इज़ फाइन
फेसिंग फाइनेंस शशियल फेलियर और बिज़नेस फेलियर। दिस इज़ेंट टू अलाउ बोथ पार्टी टू रियलाइज़ द मैक्सिमम वैल्यू ऑफ़ द बिनेस इन
द इनोवेंसी। मतलब यह दोनों सामने बैठ जाओ। अब तुम बताओ कि हां भाई किस तरह से कितनी मैक्सिमम रिकवरी कर सकते हो। ये बैंकरप्सी
प्रोसेस आपको एक तरीका बताता है बस। तो ये पॉइंट नंबर है इंट्रोडक्शन। क्लियर हो गया? कि क्या पढ़ने वाले हो तुम? क्या
रिवाइज करने वाले हो? क्लियर है? चलो अब अगले पॉइंट पर आओ। जी। फिर इनसॉल्वेंसी बैंकरप्सी एंड लिक्विडेशन कांसेप्ट। तो
इनसॉल्वेंसी का मतलब मैंने आपको बता ही दिया जी। इनसॉल्वेंसी क्या है? इनसॉल्वेंसी एक स्टेट है। अब उस स्टेट में
क्या होता है? जहां पे एसेट्स आपकी जहां पे जहां पे एसेट्स आर सफिशिएंट टू पे हिज डेप्ट और हरल इनेबिलिटी टू पे हिज डेप्ट।
मतलब सिंपल सी बात है कि या तो आपकी लायबिलिटीज़ ज्यादा है, एसेट कम है या आप डेप्ट पे करने के इनेबल हो चुके हो। द
टर्म इनसॉल्वेंसी इज़ यूज़ इन ए। ठीक है? रिस्ट्रिक्टेड सेंस टू एक्सप्रेस द इनबिलिटी ऑफ ए पार्टी टू पे हिज़ डेप्ट एज़
दे बिकम ड्यू इन द ऑर्डिनरी कोर्स ऑफ़ बिज़नेस। यह सबसे मेन बात है जी। ये मैं अपने ये बच्चा कह रहा है सर बहुत धीरे
नहीं चल रहे गाबा सर आप भगाओ गाबा सर मैं थांबा थांबा थांबा भागेंगे भागेंगे टेंशन
मत लो ठीक है नहीं पहले एक बार थोड़ा बेस क्लियर कर लो क्योंकि आपने पता नहीं आईबीसी कब पढ़ा होगा मुझे भी आईडिया नहीं
है आपने कब पढ़ा होगा तो सुनो ध्यान से मैं कहना क्या चाह रहा हूं। अब वही ये पॉइंट यहां पे ध्यान देना कि अगर कोई
पर्सन वो कह रहा है आप डेप्ट पे करने के इनेबल हो गए। कौन सा डे पे करने के इनेबल हो गए? अब एक बात मेरे को बताओ यार सारे
बच्चे एक बात मेरे को बताना। मेरा पूरी क्लास से क्वेश्चन है। हेलो भाई साहब इधर पूरी क्लास से मेरा क्वेश्चन है। क्वेश्चन
ये निकल के आ रहा है कि मान लो मैंने तुम्हें पैसे दिए। मैंने कहा 1 महीने का टाइम दे रहा हूं। मुझे पैसे वापस कर देना।
1 महीने का टाइम दे रहा हूं। और मैंने 10 दिन के बाद तुमसे पैसे मांग लिए। तुमने कहा मेरे पास पैसे नहीं है। मैं तुम्हें
पैसे नहीं दे पाऊंगा अभी। तुमने कहा 10 दिन के बाद मेरे पास पैसे नहीं है। मैं तुम्हें पैसे नहीं दे पाऊंगा। मैंने
तुम्हें 1 महीने का टाइम दिया था। तो क्या आप सोच के बताना क्या इनॉल्वेंसी में कवर कर लूं? क्या मैं यह बोल दूं कि तुम
इनसॉल्वेंट हो गए? तुम्हें मेरी बात पल्ले पड़ रही है क्या? मैं यह कहना चाह रहा हूं कि भैया मैंने तुम्हें पैसा दिया। मैंने
तुम्हें 1 महीने का टाइम दिया था। मैंने तुम्हें कितने महीने का टाइम दिया था? 1 महीने का टाइम दिया था। और तुमने भाई साहब
यह बोल दिया कि मैं मैंने तुम्हें 10 दिन के बाद पैसे मांग लिए। जबकि 1 महीने का टाइम मैंने खुद दिया था। तुमने 10 दिन के
बाद बोल दिया मेरे पास पैसे नहीं है। मैं तुम्हारे पास अब पैसे अभी नहीं चुका पाऊंगा। क्या मैं इनॉल्वेंसी वाली कैटेगरी
में कवर करूं? नहीं। क्यों? क्योंकि ये डेट अभी ड्यू ही नहीं हुआ। ये ड्यू कब होगा? 1 महीने के बाद। तो जब ये ड्यू एंड
पेएबल होगा जब तुम पे करने के इनेबल हो जाओगे तब गवर्नमेंट ने कहा वो इनसॉल्वेंसी में डालना। आगे देखो। बैंकरप्सी में क्या
लिखा है? बैंकरप्सी इज़ इन द कंडीशन ऑफ इंसॉल्वेंसी। बैंकरप्सी इनॉल्वेंसी के एक कंडीशन है। इट इज़ लीगल स्टेटस। अब तुम्हें
लीगल स्टेटस मिल गया। बात समझ रहे हो? चुपके-चुपके पहले प्यार करते थे। अब मम्मी और पापा ने स्टैंप लगा दी कि हम तुम्हारी
शादी कर देंगे। फॉर्मल डिक्लेरेशन। अब कार्ड छप गए हैं। समझ रहे हो? कार्ड छप गए। पहले लॉन्ग डिस्टेंस रिलेशनशिप था।
तुम एक दूसरे को मैसेज सिर भेजते थे कि तू जहां है जैसी है। वैसे ही रहना तुम। तुम्हारा मिलना जरूरी नहीं। तुम्हारा होना
ही काफी है। ठीक है? फिर वो सामने से बोलती थी बात करो घर पे। मेरे घर में शादी के लड़का देख रहे
हैं। फिर अब्बा नहीं मानेंगे। बट फाइनली क्या हुआ? फॉर्मल डिक्लेरेशन हो गई। दोनों सीएस बन गए। सीएस बन गए। लीगल डिक्लेरेशन।
मम्मी पापा ने बोला डन। तो ये हो गई बैंकरप्सी की प्रोसीडिंग। लीगल स्टेटस मिल गया। अब देखो बैंकरप्सी प्रोसेस बिगेन विद
द फाइलिंग ऑफ ए पिटीशन इन ए कोर्ट। आपने कोर्ट में पिटीशन डाल दी बिफोर एन एप्रोप्रियट अथॉरिटी डेज़िग्नेटेड फॉर दिस
पर्पस द डेटर्स एज़ सेट एंड द इवैल्यूएटेड एंड यूज्ड टू पे द क्रेडिटर इन अकॉर्डेंस विद द लॉ। अब आगे देखो जी। देयर फॉर
व्हाइल इनसॉल्वेंसी इज़ द इनेबिलिटी टू डेटर टू रिपेयर देयर डे। द बैंकरप्स ऑन द अदर हैंड इज़ अ फॉर्मल डिक्लेरेशन ऑफ़
इनॉल्वेंसी। अब ये फॉर्मल डिक्लेरेशन है कि हां ये बंदा इनसोल्वेंसी में चला गया। इन अकॉर्डेंस विद लॉ। इनसोल्वेंसी
डिस्क्राइब ए सिचुएशन वेयर द डेटर इज़ अनेबल टू मीट हिज और हर ऑब्लिगेशन एंड बैंकरप्स अकर व्हेन ए कोर्ट डिटरमाइन
इनॉल्वेंसी। जब कोर्ट ने डिटरमाइन कर दी इनॉल्वेंसी तो फिर वो बैंकरप्सी में आ गया आज। ठीक है? आगे देखो। द टर्म इंसॉल्वेंसी
इज़ यूज़्ड फॉर इंडिविजुअल एज वेल एज ऑर्गेनाइजेशन कॉर्पोरेट। वही बात आ गई जो मैंने आपको बताई थी। इंसॉल्वेंसी वर्ड आप
सबके लिए यूज़ कर सकते हो। इंसॉल्वेंसी वर्ड आप सबके लिए यूज़ कर सकते हो। इफ इंसॉल्वेंसी इज़ नॉट रिज़ॉल्व। अगर
इनोल्वेंसी रॉल्व नहीं होती लीड बैंकरप्सी इन केस ऑफ इंडिविजुअल इन केस ऑफ इंडिविजुअल एंड लिक्विडेशन इन केस ऑफ़
कॉर्पोरेट और जब मैं बात कर रहा हूं इंडिविजुअल की तो ऑब्वियस सी बात है साथ में पार्टनरशिप फर्म की भी बात हो रही है
जी ठीक है जी तो अब लिक्विडेशन का मतलब वही हो गया लिक्विडेशन का मतलब तुम्हारी एसेट
बिकेंगी जी एसेट तुम्हारी बिकेंगी एसेट बेचेंगे फिर फाइनली वाइंडिंग अप होगा ये आपका लिक्विडेशन यहां पे निकल के आ रहा है
जी तो ये पूरा का पूरा प्रोसेस जो है वो इंट्रोडक्शन में आ गया जी क्या बात समझ में आ रही है जी अब यहां से
आओ अब ये इनसॉल्वेंस फ्रेमवर्क इन यूके, यूएसए एंड इंडिया। मतलब पहले यूके के बारे में बताएंगे, फिर यूएसए के बारे में
बताएंगे। फिर इंडिया के बारे में बताएंगे। सर क्यों बताएंगे? हमें तो इंडिया का पढ़ना होगा। नहीं अब आईसीएसआई पता है।
इंटरनेशनल भी आजकल सेमिनार चल रहे हैं। इंटरनेशनल भी कॉन्वोकेशन उनकी कन्वेंशन हो रहे हैं बाहर। अभी ऑस्ट्रेलिया में मेरे
ख्याल से अभी उनका था। तो अब उनको डालना पड़ता है ना कि अब आईसीएस भी कोई नेशनल इंस्टट्यूट नहीं है। इंटरनेशनल इंस्टट्यूट
है। तो जगह-जगह इनके सेंटर खुल चुके हैं। तो वो इनके मॉड्यूल बनते हैं तो वो इंटरनेशनल के बेस पे बनते हैं। हां भाई
इसमें आपने लिखा है या नहीं लिखा कि यूके में इनसॉल्वेंसी लॉ का ओरिजिन कैसा हुआ। यूएस में इनसॉल्वेंसी लॉ का ओरिजिन कैसा
हुआ। देन फिर आपको देखने को मिलेगा इंडिया में इनसॉल्वेंसी लॉ कैसे आया। और आपकी जानकारी के लिए बता दूं पहले यू पहले यूके
में आया। यूके को कॉपी किया यूएस ने और फिर इंडिया का जो लॉ है उसने भी यूके को कॉपी करके बनाया आज और हम गुलाम रहे यूके
के यही तो हुआ था तो हमने वहीं से इनोल्वेंसी को लॉ को उठाया और फिर धीरे-धीरे करते
करते 1909 मतलब 1909 से पहले एक और एक्ट था 1800 से स्टार्टिंग हुई थी 1800 से मतलब 1800 पे आपको दिखाऊंगा 1800 से हमारी
इंडिया में स्टार्टिंग हुई थी फिर धीरे-धीरे करते-करते यार फाइनली आईबीसी कोड 2016 जो एक यूनिफॉर्म एक्ट बन गया
सारे आईबीसी के लिए। ठीक है जी नहीं। तो मतलब अगर तुम्हें आईबीसी की नॉलेज चाहिए ना सिर्फ तुम्हें
आईबीसी कोड ही पढ़ना है। तुम्हें कंपनीज़ एक्टिव नॉलेज नहीं भी है चलेगा। सिक्योरिटी लॉ की नॉलेज नहीं भी है चलेगा।
सिर्फ आईबीसी कोड अगर उठा लोगे उसके अंदर पूरा आईबीसी समा जाता है। बस ये बात ध्यान दो। अब देखो यहां पे यूके में मोटा-मोटी
लाइनें मैंने लिखी हैं क्योंकि पेपर के अंदर यहां पे बनना है नहीं। ठीक है? बस नॉलेज होनी चाहिए। अब देखो सबसे पहले 1542
हेनरी के टाइम की बात करें। 1542 हेनरी एट एक्ट यहां पर एक बना था। दैट द फर्स्ट बैंकरप्स लॉ इन इंग्लैंड। इंग्लैंड की बात
हो रही है। डेटर वर ट्रीटेड एज क्रिमिनल एंड ऑफेंडर। अच्छा जो स्टार्टिंग में था ना यूके और यूएस में जो बकरप्सी लॉ बने थे
उसमें ना डेटर को क्रिमिनल मानते थे। मतलब क्रिमिनल मतलब कि चोर है। मतलब खत्म करो उसको। उसको उसको मारते थे। समझ गए यार? अब
का जो इनसॉल्वेंसी लॉ है इंडिया वाला इनॉल्वेंसी लॉ जितने बच्चे भी रेगुलर बैच या कहीं से भी आपने पढ़ रखा है सारे टीचर
ने एक बात ये बात बताई होगी अब का जो इनसोल्वेंसी लॉ क्या है वो क्रेडिटर्स को लेके चलता है क्योंकि क्रेडिटर्स ने पैसे
लेने हैं किससे लेने डेटर से बट वो डेटर को क्रिमिनल नहीं मान रहा डेटर की सुसाइड नहीं आत्महत्या नहीं करवा रहा वो डेटर को
रिवाइव करने की कोशिश कर रहा है यही तो है ना यार हम इनसोल्वेंसी में क्या पढ़ रहे हैं इनॉल्वेंसी रेोल्यूशन ना एक बात बताओ
नालायकों आपने सीआईआर नहीं पढ़ा हुआ क्या? सीआईआरपी क्या होता है? कॉर्पोरेट इनॉल्वेंसी रेोल्यूशन प्लान। वाइंडिंग अभी
तो बहुत बाद की बात है। वाइंडिंग अब तो लास्ट स्टेज है। बट पुराने बैंकरप्सी में कहा था पहले मार खत्म ही कर दो इसको।
रिवाइवल की तो बात इसने मेरे पैसे मारे मार मार मार इसको। मारने की बात होती थी। अब मारने मारने की बात नहीं होती। अब
गवर्नमेंट कह रही है भैया मरना मराना बाद में पहले आप उसको इनोल्वेंसी को रिॉल्व करने की कोशिश करो। रिवाइवल करने की कोशिश
करो। अगर नहीं हो रहा देन फिर वाइंडिंग अप और लिक्विडेशन की बात करेंगे तो डेटर वर ट्रीटेड एज क्रिमिनल एंड ऑफेंडर नो
डिस्चार्ज नो रिलीज फ्रॉम डेटर इवन फ्यूचर अर्निंग कुड बी सीज खत्म उसको जीरो कर देते थे अर्ली नेचर ऑफ लॉ एंटायरली
क्रेडिटर फ्रेंडली सिर्फ क्रेडिटर को ध्यान रखता था फोकस ऑन पनिशिंग डेटर एंड सीजिंग उसकी एसेट पर्पस डेप्ट कलेक्शन नॉट
रिहबिलिएशन नॉट रिहबिएशन रिहबिलिएशन की बात ही नहीं होती थी। फिर 18 सेंचुरी आई। 18थ सेंचुरी शिफ्ट हुआ। लॉ स्लोली बिगेन
टू लूज़ देयर पनिटिव नेचर। डेटर वर नॉट सीन ओनली एस ऑफेंडर। डेटर को ही ऑफेंडर मानना है। ऐसा जरूरी नहीं है। उससे अब उसको
रिवाइव करने की कोशिश की जाएगी। 1705 में फर्स्ट लॉ टू गिव डेटर द राइट टू डिस्टार। दैट इज़ फ्रेश स्टार्ट। ठीक है? याद है?
फ्रेश स्टार्ट प्रोसेस। आईबीसी के लॉ में हमने पढ़ा था कि थोड़ा सा अगर डेप्ट होता है तो फिर हम माफ भी कर सकते हैं कि भाई
एक बात बताओ यार क्या चीज क्या अच्छी है भाई एक बताओ चीज क्या अच्छी है एक तो बंदे को मार दो पैसा जीरो हो गया एक बंदे को
क्या बोलते हैं चल तू काम शुरू कर धीरे-धीरे ही सही कभी ना कभी तो देगा एक बार हम तेरे को छोड़ रहे हैं तू काम तो
शुरू कर या तो उसे काम ही शुरू ना कराओ जो पैसे हैं वो कह वो तो पहले ही कह रहा है मैं दूंगा नहीं और अगर उसको हम धंधा ही
बंद कर देंगे तो वो जीरो हो जाएगा जैसे मेरे मेरे फादर हमेशा मेरे को एक बात बोलते हैं। मैंने कहा पापा इस पर्सन से
इतने पैसे लेने हैं। तो कह रहे बेटे इकट्ठे नहीं देगा। 10 ₹100 करके दे रहा है। ले ले कुछ। यह
बिजनेस का रूल है। और अगर मैं कह दूं कि भाई साहब मेरे को इकट्ठे चाहिए। बैठा रहे मत काम करने दे उसको। ना वो काम करेगा ना
तेरे पैसे आएंगे। काम नहीं खत्म। उसको उसको काम करने का मौका दे। क्या पता तेरे ₹1 ₹100 करके कुछ तो उतरेंगे।
तो वह यहां पर कह रहे हैं फर्स्ट लॉ टू गिव डेटर टू राइट टू डिस्चार और स्टिल लार्जली फॉर द बेनिफिट ऑफ अभी भी
क्रेडिटर्स के लिए बेनिफिट था। 1711 में एडिशनल राइट फॉर डेटर बट क्रेडिटर रिमेन द प्राइमरी बेनिफिशरी। मॉडर्न इनसॉल्वेंसी
लॉ जो है वो कह रहा है फोकस इज़ नो लगर ऑन एलिमिनेटिंग डेटर। अब डेटर को एलिमिनेट नहीं करते। एम इज़ रिहबिलिएशन एंड
कंटिन्यूएशन ऑफ़ बिज़नेस इफ पॉसिबल कि हो सके तो उसका बिज़नेस कंटिन्यू रहे। बिज़नेस चलातेचलाते रहो पैसा मिल जाए। वह अच्छी
बात है। जी। तो यह यूके की बात हो रही है। ठीक है? आप यहां से भी ऐसे भी रीड कर सकते हैं। आप
अगर चाहोगे तो मैं एक Google ड्राइव का लिंक बना लूंगा। ये जो मैं समराइज फॉर्म तैयार कर रहा हूं। उसमें पीडीएफ डालता
रहूंगा। आप यहां से रिवाइज कर सकते हैं। कोई दिक्कत वाली बात नहीं है। जी। ठीक है जी। उसके बाद एक करंट रेगुलेटरी
फ्रेमवर्क इन यूके। अब यूके में करंट रेगुलेटरी फ्रेमवर्क क्या है? तो पहले तो 1986 से पहले इनसॉल्वेंसी लॉ इन यूके वास
स्क्रैचर्ड इन मेनी एक्ट मतलब स्केचर्ड इन मेनी एक्ट मतलब बहुत सारे एक्ट में डिवाइडेड था। ठीक है ना? मतलब मल्टीपल
एक्ट जैसे जैसे याद है आपको मैंने कहा था इंडिया में जो इनॉल्वेंसी लॉ था तो मल्टीपल एक्ट थे। प्रोविजनल एक्ट हो गया।
फिर प्रोविजनल इनॉल्वेंसी एक्ट हो गया। फिर एस सिक्का हो गया। फिर आपका डीआरटी और सारफेसी एक्ट हो गया। फिर कंपनीज़ एक्ट में
इनॉल्वेंसी रॉल्व होती थी। तो मल्टीपल फिर पार्टनरशिप में भी इनॉल्वेंसी रिॉल्व होती वो फाइनली कंक्लूड करके आईबीसी बनाया। ऐसे
यूके में बैंकरप्सी एक्ट 1914, डीड ऑफ अरेंजमेंट एक्ट 1914, कंपनीज़ एक्ट 1948, कंट्री कोर्ट एक्ट 1959 प्लस कॉमन लॉ एंड
इक्विटी प्रिंसिपल ये सब लॉ होते थे। प्रॉब्लम द फ्रेमवर्क वाज़ फ्रेगमेंटेड एंड कंफ्यूजिंग। वही फ्रेगमेंटेड लॉ थे जो
इंडिया के अंदर प्रॉब्लम थी। कोर रिव्यू कमेटी ने क्या किया? रिकमेंडेड ए सिंगल मॉडर्न इनॉल्वेंसी लॉ। फिर फाइनली यूके
में क्या हुआ? इंसॉल्वेंसी एक्ट बना। 1986 प्लस में इनॉल्वेंसी रूल 1986 इनएक्टेड टू यूनिफाई एंड रेगुलेट द एंटायर इनॉल्वेंसी
सिस्टम इन द यूके। अब बताओ पढ़ हम इंडिया में रहे हैं। बता हम यूके कर रहे हैं। बट रिवाइज करना है। कुछ नहीं कर सकते। जी आगे
अब ये 1986 में क्या-क्या कंसोलेटेड है? तो ये सारे एक्ट कंस इंडिविजुअल की इंसॉल्वेंसी कंपनी की इंसॉल्वेंसी। ठीक
है? ये सारी इंसॉल्वेंसी यहां पे इन्होंने कंक्लूड कर दी। फिर उस एक्ट में इन्होंने पता है क्या किए? उस एक्ट में इन्होंने
क्या किया? चैप्टर्स बनाए। ठीक है ना? अब जैसे उसमें क्या-क्या देखो उन्होंने क्या डाला? दिस मेजर इन द यूके इनोवलेंसी 1986
रिप्रेजेंट एन अटेमप्ट टू एमुलेट द रेस्क्यू कल्चर ए कररेक्टरिस्टिक्स ऑफ कॉर्पोरेट सेक्टर इन यूएस। एज अ कंपनी
वंटली अरेंजमेंट फिर एडमिनिस्ट्रेशन और एडमिनिस्ट्रेटिव रिसीवरशिप। अब कंपनी वंटली अरेंजमेंट का
मतलब इन्होंने यहां पर ये लिखा हुआ है कि भैया आपस में क्रेडिटर्स और डेटर्स बैठ जाओ। कितना पैसा दे सकते हो? कितना पैसा
कम कर सकते हो, कितना तुम छोड़ सकते हो, कितना तुम दे सकते हो? यह अरेंजमेंट इसका मैटर उस एक्ट में लिखा गया ताकि सामने बैठ
के बातचीत की जा सके। भाई सामने वाला बंदे ने 50 लाख देना। वो कह रहा मैं 30 लाख दे सकता हूं। डन 30 लाख सेटलमेंट करो। तो
देखो वही है। इट प्रोवाइड अवेयर ए कंपनी इन फाइनेंसियल डिफिकल्टी कैन कम टू ए बाइंडिंग अरेंजमेंट विद इट्स क्रेडिटर। इट
इज नेगोशिएशन ऑफ बाय कंपनी ऑफ द पे इफ द पेमेंट्स ड्यू टू ऑल इट्स क्रेडिटर और अदर फॉर्म ऑफ़ फाइनेंसियल
स्ट्रक्चरिंग एंड इट्स सब्जेक्ट टू क्रेडिटर मीटिंग एंड अप्रूवल 75 क्रेडिटर्स की 75 अप्रूवल मिल जाती है तो
फिर पेमेंट सेटलमेंट हो जाएगी एडमिनिस्ट्रेटिव इन द सेकंड ऑप्शन एडमिनिस्ट्रेटिव अपॉइंटंटेड बाय कोर्ट फिर
कोर्ट एडमिनिस्ट्रेटर अपॉइंट करेगा फिर वो सेटलमेंट कब आएगा भ तुम्हें फाइनल पेमेंट कितनी करनी है ये होता था ये सारी बातें
यूके की हो रही हैं जी एडमिनिस्ट्रेटिव फिर थर्ड ऑप्शन जो परमिट द अपॉइंट एट अपॉइंटमेंट ऑफ ए रिसीवर बाय द सर्टेन
क्रेडिटर। फिर एक क्रेडिटर रिसीवर अपॉइंट करेगा। उसके अकॉर्डिंग यहां पे काम होगा। यह सारी बातें यूके में हो रही हैं।
इंडिया में कोई ऐसी बात नहीं है। ठीक है? उसके बाद फिर यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका में। अब वो अमेरिका में बता रहे हैं।
अमेरिका के अंदर भी सेम बताएंगे। अमेरिका के अंदर भी सेम यहां पर बताएंगे। मल्टीपल एक्ट थे। इन्होंने तीनचार एक्ट बनाए पहले।
वो टेंपरेरी एक्ट बने। फिर धीरे-धीरे अच्छा फिर इसके अंदर भी देखो यहां पे देखो पहले अमेरिका बीइंग ए कॉलोनी अमेरिका
बीइंग ए कॉलोनी द यूनाइटेड किंगडम फॉललोड द इंग्लैंड बकरप्सी सिस्टम एंड लाइक द यूके सिस्टम्स मतलब वही सेम सिस्टम
इन्होंने यहां से कॉपी किया और उसके बाद फिर इन्होंने अपने इंडिया मतलब यूएस में काम करना स्टार्ट किया। फिर बैंकरप्स लॉ
इनवॉल्व इंप्रज़नमेंट अंटिल द डे वर पेड और क्रेडिटर्स एग्रीड फॉर द रिलीज़ ऑफ द डेटर। मतलब क्रेडिटर्स के हाथ में थे डेटर। जब
तक वह पेमेंट नहीं करेगा तब तक डेटर को रिलीज नहीं करेगा क्रेडिटर। यह बात होती थी पहले। द लैक ऑफ यूनिफॉर्मिटी इन
बैंकरप्सी एंड डेट इनफोर्समेंट लॉ एडवर्सली इफेक्ट द बिनेस पे इफेक्ट डलता था क्योंकि वहां पे कोई प्रॉपर लॉ नहीं
था। फिर कांग्रेस इनक्टेड टेंपरेरी बैंकरप्सी स्टच्यू 1800 1841 1857 टू डील विद इकोनमिक रिसेशन। देयर वाज़ ए नो
परमानेंट बैंकरप्सी लॉ इन यूएस। कोई परमानेंट लॉ नहीं था। जी। ठीक है? फिर बैंकरप्सी रिफॉर्म 1978 में आया सस्पेंडेड
द नेशनल बैंकरप्सी एक्ट 189 वो सस्पेंड किया पुराना और नया फिर बैंकरप्सी यहां पे लॉ स्टार्ट हो गया यूएस के अंदर एंड
एस्टैब्लिश बकरप्सी कोर्ट इन ईच डिस्ट्रिक्ट एंड मेड प्रोविजन फॉर द अपॉइंटमेंट ऑफ सेपरेट बैंकरप्सी जज अब
यहां पे देखो जी देखो जी अब यहां पे एक बार चेक करना उसके बाद फिर यहां पे हमारा इंडिया का स्टार्ट होगा जी और यहां से फिर
हम नेक्स्ट क्लास में स्टार्टिंग करेंगे तो यहीं से हमारे एग्जाम के अंदर आएगा जी ठीक है ये मान के चलो कि यहीं से हमारे
एग्जाम के अंदर आएगा जो मेन हमारे एग्जाम का पोर्शन स्टार्ट होगा ना आप ये मान के चलो यहां से हमारे एग्जाम का पोर्शन
स्टार्ट होगा ये रहा जी यहां से जी यहां से हम नेक्स्ट क्लास में स्टार्ट करेंगे यहां से हमारा फिर एक्ट स्टार्ट
देखो ये रहा सेक्शन नंबर वन सेक्शन नंबर टू फिर हमारा आईबीसी कोड स्टार्ट हो जाएगा जी यहां से जी ठीक है अच्छा आज हमारा
सैटरडे है ना तो संडे को तो क्लास नहीं होगी फिर मैं मंडे को मिलूंगा और मंडे को कैसे मिलूंगा आपके अच्छे-अच्छे अच्छे
कमेंट कैसी लगी आज आपकी क्लास कैसा लगा आपको टाइम टेबल शेड्यूल और फिर आप साथ में यह भी बताएंगे क्या आपका प्लान है
मैक्सिमम बच्चे जो बोलेंगे वो हम कर लेंगे ठीक है और रिकॉर्डेड में बस ये बेनिफिट होता है इसको स्पीड फास्ट करके भी सुन
सकते हैं लाइव में वो काम नहीं कर सकते आप ठीक है ना वो आपके ऊपर अब डिपेंड करता है आप कैसे इसको लेके चलते हैं मैंने सारा
कुछ आपके ऊपर छोड़ दिया आज ठीक है अब एक बार देखो यूएस वाला देख लो फटाफट से अब यूएस में क्या है तो वो कह रहे हैं जी इन
यूएस ऑल बैंकरप्सीज कंट्रोल बाय वन फेडरल लॉ कॉल्ड बैंकरप्सी कोड। ठीक है? इट अप्लाई यूनिफॉर्मली ऑल द स्टेट्स। इट इज़
रिटन इन इन टाइटल टाइटल 11 ऑफ द यूएस कोड। कोर्ट प्रोसीजर फॉलो द फेडरल रूल्स ऑफ़ बैंककरप्सी प्रोसीजर। अब इतने इन्होंने
क्या किया? अब चैप्टर्स बना दिए इसके अंदर। जैसे याद है इनसॉल्व इंडियन इनॉल्वेंसी में चैप्टर हैं। याद करो
अलग-अलग चैप्टर नहीं है। पांच पार्ट हैं। फिर पांच पार्ट में अलग-अलग चैप्टर हैं। याद नहीं आ रहा क्या? अबे नालायको पार्ट
नंबर टू जो है सेक्शन फोर से लेकर 77 तक उसमें सात चैप्टर नहीं आते कि पहले में सेक्शन फोर कवर होगा फोर से फाइव फिर यहां
पे सेक्शन सिक्स से लेके 32 तक कवर होगा फिर 33 से 52 तक कवर होगा फिर 50 ऐसे 50 फिर 55 की सीरीज आएगी फिर आगे 56 से आगे
चलेगा चैप्टर्स नहीं अलग-अलग होते वही चैप्टर्स इन्होंने बनाए यूएस के अंदर जो फिर इंडिया वालों ने उसको फॉलो किया तो
चैप्टर्स क्या बनाए थे छह चैप्टर बनाए थे जैसे चैप्टर नंबर सेवन लिक्विडेशन कैसे होगा? नाइन मुनिसिपालिटीज के लिए अगर कोई
म्युनिसिपालिटीज को प्रॉब्लम है तो चैप्टर नंबर नाइन में आए। चैप्टर 11 रिऑर्गेनाइजेशन कंपनीज़ के लिए बनाया
इन्होंने। चैप्टर 12 फैमिली फार्मर्स और फिशरमैन जो फैमिली फार्मर्स हैं और फिशरमैन है वो चैप्टर 12 में अपनी
इनोल्वेंसी को रॉल्व करवाए। 13 वेज अर्नर प्लान जो वेज अर्नर प्लान मतलब जो लेबर है उनके लिए गवर्नमेंट ने ये बनाया। जी
इंडिविजुअल की रेगुलर इनकम के लिए। चैप्टर 15 बनाया क्रॉस बॉर्डर इनॉल्वेंसी मतलब जो बाहर वाली कंपनी मान लो मैंने बाहर वाली
कंपनी को पैसा दिया उसने पैसा डिफॉल्ट कर दिया उसकी इनॉल्वेंसी को रॉल्व कैसे करना है उसके लिए यूएस में चैप्टर 15 बनाया तो
ये यूएस का इनॉल्वेंसी लॉ है सारा हमारे किसी काम का नहीं है ठीक है जी तो ये हमारे किसी काम का है
नहीं अब यहां से फिर हिस्टोरिकल डेवलपमेंट इनॉल्वेंसी लॉ इन इंडिया अब देखो वही प्रेसिडेंसी टाउन इनॉल्वेंसी 1909 ठीक है
फिर प्रोविजनल जनरल इनसोल्वेंसी 1920 ठीक है। अब वर टू मेजर एक्ट थे उस टाइम पर। ठीक है? जो लगते थे। अब यहां पर एक तो
प्रेसिडेंसी टाउन कोलकाता के लिए लगता था और फिर बाकी अदर रेस्ट इंडिया के लिए मतलबक जो एक्चुअल में अंग्रेजों की
राजधानी थी ना आपको पता है आपको मैंने रेगुलर बैच के अंदर बताया था कि अंग्रेजों की राजधानी होती थी। तो उसके लिए अलग था
और बाकी रेस्ट इंडिया के लिए अलग था। तो यह वही कहानी इन्होंने यहां पर बता रखी है कि क्योंकि ब्रिटिश टाइम की बात है ना उस
टाइम तो अंग्रेजों का राज था हमारे देश के ऊपर देखो प्रोपेसिडेंसी टाउन इनोल्वेंसी एक्ट फिर प्रोविजनल इनोवेंसी एक्ट फिर
पार्टनरशिप एक्ट कंपनीज़ एक्ट सिक्का फिर वही डीआरटी और सारफेसी ठीक है और फिर कंपनीज़ एक्ट इन सब में इनोल्वेंसी आती है
और फिर फाइनली याद है याद करो मैंने कहा था तीन लिस्ट होती है लिस्ट वन लिस्ट टू लिस्ट थ्री एग्जीक्यूटिव में टैक्स में
इतना तो याद आ रहा होगा तो लिस्ट वन से लिस्ट वन से हमारे वो इनकम टैक्स बना था। ठीक है? और एग्रीकल्चर इनकम पे टैक्स
लिस्ट नंबर टू में था। जीएसटी किसी भी लिस्ट में नहीं था। याद है मैंने वहां पे कहा था एक लिस्ट थ्री होती है। लिस्ट थ्री
में कोई भी टैक्स नहीं है। तो इनॉल्वेंसी का लॉ लिस्ट थ्री से बना हुआ है। देखो एंट्री नंबर नाइन कॉनकरेंट लिस्ट क्योंकि
बनाने वाली दोनों हैं। इन सेवन शेड्यूल कॉन्स्टिट्यूशन जो हमारा ये है बैंकरप्सी एंड इनसॉल्वेंसी इस लिस्ट से बना हुआ है।
जी। ये आपको मैंने रेगुलर बैच के नोट्स में लिखवाया भी होगा। अगर आप चेक करोगे ये
चीजें आपने लिखी होंगी जी। ठीक है जी। फिर उसके बाद यहां पर अलग-अलग कमेटी बनाई गई। ठीक है जी। 1964 में थर्ड लॉ कमीशन 1981,
19 नरसिम्हा कमेटी बनी। ये सारी कमेटी बनी। ये कमेटीज़ भी आपके एग्जाम के लिए एलिमेंट नहीं है। फिर इस लॉ की नीड क्यों
बनी? ऑब्वियस सी बात है। नीड क्यों पड़ी? आपको मैंने कहा था बहुत सारे टाइम लगता था इंडिया में इनोल्वेंसी को रॉल्व करने में।
एक-एक कंपनी की इनोल्वेंसी को रिॉल्व करने में। 4 साल लगते थे। और ये मैं नहीं कह रहा वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट थी। 4 साल, 5
साल, छ साल एक कंपनी की इनॉल्वेंसी रिॉल्व नहीं हो रही। तो वर्ल्ड बैंक बोलता था भाई साहब इनोल्वेंसी रॉल्व कैसे होगी? फिर
अलग-अलग एक्ट में इंडिविजुअल की इनॉल्वेंसी अलग, कंपनी की इनॉल्वेंसी अलग, पार्टनरशिप फर्म की इनॉल्वेंसी अलग,
अलग-अलग एक्ट थे, अलग-अलग कोर्ट थे। तो, यह बहुत सारी प्रॉब्लम थी। और फिर जितने में इनॉल्वेंसी रॉल्व होती थी, उतने
में वो धंधा ही खत्म हो जाता था। आप खुद सोच के बताओ छ 5 साल में इनॉल्वेंसी रिॉल्व हो रही है, तो सामने वाली कंपनी से
पैसे कितने ले पाओगे? उसकी तो गुडविल ही खत्म हो गई। उसके तो आज आज के टाइम में सोशल मीडिया का जमाना है। अगर मैं 6 महीने
YouTube पे नहीं दिखूंगा मैं गायब हो जाऊंगा। लोग बच्चे मुझे भूल जाएंगे। पर ये जनरल नेचर है भाई। आप जितना दिखोगे
बार-बार उतना ही आप लोगों के दिमाग में रहोगे। दिखना बंद तो दिमाग में बंद। तो 5 साल में इनॉल्वेंसी रिॉल्व कर रहे हो।
कंपनी दिख ही नहीं रही। तो क्या कर लोगे आप उसको? इसलिए यहां पे नीड पड़ी थी यहां पे। और
फिर फाइनली इंडिया में इनोल्वेंसी लॉ लेकर आया गया। यह पुराने लॉ सारे खत्म किए गए और फिर जाके इंडिया में यहां पे लॉ लाया
गया। देखो ये साइलेंट फीचर है लॉ आर एस फ्ल्लोस। यहां पे अब ये पॉइंट निकल के आएगा। अब इसको आगे जाके देखेंगे। तो यहां
तक आज हम डिस्कस कर रहे हैं। ठीक है? अब यहां से फिर हमारा इंडिया का इनसोल्वेंसी लॉ स्टार्ट होगा। तो यहां से
फिर हम इसको स्टार्ट कर देंगे। देखो वही आ गया ना? देखो पांच पार्ट याद है? पांच पार्ट होंगे। मैंने आपको बताया भी। देखो
पार्ट नंबर टू याद है वो सेक्शन नंबर फोर से लेके 77 तक। ठीक है? अब यहां पे ऐसे 77 ए हो गया। इन्होंने 77 लिखा है। यहां 77 ए
है। देखो टोटल मिला के पांच पार्ट यहां पे निकल के आ रहे हैं। वही बात है ना? यहां से बस स्टार्ट हो गया जी आपका।
ठीक है। चलो तो फिर बाकी मुलाकात करेंगे हम मंडे को 9:00 बजे। जी। ठीक है। आपके पास संडे का भी टाइम है। आराम से मेरे को
सोच के बता देना। तब तक के लिए वीडियो देख लेना और कमेंट करके जरूर बताना आपको क्लास कैसी लगी और आप एक्साइटेड हैं या नहीं हैं
मेरे साथ आईबीसी के लिए। अकॉर्डिंगली फिर हम यहां पे आगे बढ़ेंगे। थैंक यू सो मच। गॉड ब्लेस यू। लव यू ऑल। जय हिंद। थैंक यू
सो मच। बाय-ब।
इनसॉल्वेंसी एक वित्तीय स्थिति (financial state) है, जहां कोई व्यक्ति या संस्था अपने कर्ज का भुगतान करने में असमर्थ होता है। यह एक वास्तविक स्थिति है, न कि अदालती घोषणा। वहीं, बैंकरप्सी एक कानूनी स्थिति (legal status) है, जो अदालत द्वारा घोषित की जाती है जब इनसॉल्वेंसी का समाधान नहीं हो पाता। सरल शब्दों में, इनसॉल्वेंसी समस्या है, बैंकरप्सी समाधान की कानूनी प्रक्रिया।
नहीं, बैंकरप्सी (bankruptcy) शब्द केवल व्यक्तियों (individuals) और साझेदारी फर्मों (partnership firms) के लिए उपयोग किया जाता है। कॉर्पोरेट क्षेत्र (कंपनियों और एलएलपी) के लिए, जब वे अपनी इनसॉल्वेंसी का समाधान नहीं कर पाते, तो लिक्विडेशन (Liquidation) और वाइंडिंग अप (Winding Up) की प्रक्रिया लागू होती है।
IBC कोड के पार्ट 2 (सेक्शन 4 से 77A) पर सबसे अधिक ध्यान देना चाहिए। यह भाग कॉर्पोरेट व्यक्तियों (Corporate Persons) की इनसॉल्वेंसी रेजोल्यूशन, लिक्विडेशन और वाइंडिंग अप से संबंधित है और CS प्रोफेशनल परीक्षा में इसका सबसे अधिक वेटेज है।
IBC कोड के संदर्भ में, डिफॉल्ट (Default) तब होता है जब कोई कर्जदार (debtor) देय तिथि (due date) पर कर्ज का भुगतान नहीं करता है और वह कर्ज देय और भुगतान योग्य (due and payable) होता है। यह IBC प्रक्रिया शुरू करने का आधार है।
IBC कोड 2016 से पहले, भारत में कई अलग-अलग कानून (जैसे प्रेसीडेंसी टाउन इनसॉल्वेंसी एक्ट, प्रोविंशियल इनसॉल्वेंसी एक्ट, कंपनीज एक्ट, SICA, DRT आदि) थे, जिससे प्रक्रिया में देरी और भ्रम होता था। इनसॉल्वेंसी को हल करने में 4-5 साल लगते थे, जो व्यवसाय के लिए घातक था। IBC कोड इन सभी कानूनों को एकीकृत करके समयबद्ध समाधान का लक्ष्य रखता है।
लिक्विडेशन (Liquidation) वह प्रक्रिया है जिसमें एक कंपनी या एलएलपी की संपत्तियों को बेचकर कर्ज चुकाया जाता है। जबकि वाइंडिंग अप (Winding Up) लिक्विडेशन के बाद कंपनी को कानूनी रूप से समाप्त करने की अंतिम प्रक्रिया है। सीधे शब्दों में, लिक्विडेशन संपत्ति बेचने की प्रक्रिया है, वाइंडिंग अप कंपनी खत्म करने की।
यह रिवीजन सीरीज CS प्रोफेशनल के छात्रों के लिए IBC (इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड) की संपूर्ण रिवीजन है। इसमें पूरे इंस्टीट्यूट मॉड्यूल, सभी प्रासंगिक केस लॉ, प्रत्येक अध्याय के अंत में स्कैनर प्रश्न और उत्तर, और राइटिंग प्रैक्टिस पर विशेष जोर दिया जाएगा। कक्षा हर दिन रात 9:00 बजे (सोमवार से शनिवार) होगी, कुल 40-45 सत्र होंगे, और नवंबर में एक विशेष 12 घंटे की मैराथन क्लास भी होगी।
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