369 का कॉन्सेप्ट जब मैंने पहली बार अपनी लाइफ में सुना था ना तो उस टाइम मेरे को लगा कि भाई यह तो सुपरस्टिशन है। पर जब
मेरे को यह पता चला ना कि 369 का कॉन्सेप्ट एक्चुअली निकोला टेस्ला ने दिया है। फिर मेरे को बड़ा अजीब लगा क्योंकि
निकोला टेस्ला कोई ऐसा इंसान नहीं है भाई कि कुछ भी बोल देगा। वो इंसान वो है जिसकी वजह से मैं वीडियो बना रहा हूं। आप देख
रहे हो। मतलब यह कि जो मॉडर्न डे वाई-फाई है ना वह उसी की वजह से है। उस इंसान ने यह इलेक्ट्रिसिटी बनाई है जिसकी वजह से हम
यह सारा कुछ क्रिएट कर पा रहे हैं। जो एसी इलेक्ट्रिसिटी होती है ना जैसे डीसी और एसी दो इलेक्ट्रिसिटी होती है। डीसी करंट
वो होता है जो मान लो आप इन्वर्टर रख रखा है अपने घर में आपने जैसे बैटरी से करंट आता है और एसी वो होता है जब आप कहीं भाई
आपने छत्तीसगढ़ में या हजारों किलोमीटर दूर कोई इलेक्ट्रिसिटी का प्लांट बना रखा है। वहां से इलेक्ट्रिसिटी बन के आपके घर
तक आ रही है। तो निकोला टेस्ला ने वह एसी करंट को एक्चुअल में सॉल्व करा था। और सरप्राइजिंग चीज़ यह थी कि जब मैं 369 के
कॉन्सेप्ट को मैंने वैसे बेसिकली पहले ये बताना जरूरी है कि भाई 369 का कॉन्सेप्ट है क्या? 369 ये जो तीन नंबर्स है ना ये
यूनिवर्स की चाबी हैं। मतलब अगर आपको कुछ भी यूनिवर्स से करवाना है उन उन एनर्जीज़ को अट्रैक्ट करना है कि वो आपके लिए काम
करना शुरू करें तो आपको 3 6 9 का कांसेप्ट फॉलो करना पड़ेगा। मतलब एक सिंपल एक एक्सप्लेनेशन इसकी ये है कि भ आपको जो भी
चाहिए आप उसको सुबह उठने के बाद 6:00 बजे लिखो फिर आप 9:00 बजे लिखो फिर दोपहर के 3:00 बजे फिर शाम के 6:00 बजे और फिर इसी
इसी हिसाब से आप 369 के एक पर्टिकुलर रेश्यो में लिखते चले जाओ और वो चीज जो है वो आपको दिख जाएगी कि यूनिवर्स जो है उस
चीज को आपकी लाइफ में अट्रैक्ट करना उसने शुरू कर चुका है। अब मेरे को सुपरस्टीशियस लगी लेकिन फिर जब निकोला टेस्ला का
कांसेप्ट आया कि भ उस आदमी ने ये दिया है और स्पेशली एक और बात थी जब मैंने पढ़ना शुरू करा तो मेरे को पता चला कि भाई जो
डीसी इलेक्ट्रिसिटी होती है ना तो डीसी में सिंपल था कि मोटर से इलेक्ट्रिसिटी जनरेट होती थी। अब आप उसमें चाहे तेल बर्न
करके कर लो या जैसे भी कर लो और वो सीधे लोगों के घर में सप्लाई कर दी जाती थी। थॉमस एलवा एडिसन मतलब हमने जितनी भी अपनी
साइंस की किताबें पढ़ी है ना सिलेबस में एक तो मेरा ना भरोसा एक्चुअली स्कूल सिस्टम और एजुकेशन सिस्टम से क्यों ज्यादा
उठा क्योंकि आप थॉमस अलवा एडिसन को बहुत ही अच्छे इंसान की तरह देखोगे हमेशा कि भाई उसने बल्ब का इन्वेंशन करा बहुत बड़ा
साइंटिस्ट और बहुत ही बढ़िया आदमी है ना पर निकोला टेस्ला का नाम ना पूरे स्कूल सिस्टम में सो फार अब तो पता नहीं मुझे
क्या सीन है पर कभी किसी को बताया ही नहीं गया जबकि हमारे घर में आने वाली इलेक्ट्रिसिटी उसकी दी हुई है थॉमस अलवा
एडिसन ने डीसी इलेक्ट्र इलेक्ट्रिसिटी पे ही बिज़नेस क्रिएट करा था। और थॉमस एल्व एडिसन ने पूरी कोशिश करी कि निकोला टेस्ला
की एसी इलेक्ट्रिसिटी जो है वो पॉपुलर नहीं होनी चाहिए। इनफैक्ट उसके खिलाफ काफी कॉनस्परेसी करी। जैसे अब मान लो एसी
इलेक्ट्रिसिटी क्या होती है? आपके घर में बिजली आ रही है बाहर से। अगर आप उसमें हाथ डालोगे तो ऑब्वियसली आपको करंट इतनी तेज
लगेगा। या फिर ऐसे मान लो कि जो वो 11,000 की लाइन आती है जहां से इलेक्ट्रिसिटी सप्लाई होती है। 11,000 की लाइन के आसपास
भी जो बंदा होगा ना तो उसको लपेट सकती है वह इलेक्ट्रिसिटी। लेकिन डीसी में ऐसा नहीं होता। होता है इन्वर्टर से जो
इलेक्ट्रिसिटी आ रही है उसमें बंदा बंदे को लपेट नहीं सकते वह अपनी तरफ है ना खींच के तो उसने इस तरीके की पीआर करी थॉमस
अलवा एडिशन ने कि भाई निकोला टेस्ला का जो एसी है वो तो बहुत डेंजरस है वो तो पूरी ह्यूमैनिटी को खत्म कर देगा इतना डेंजरस
है और इतनी गंदी पीआर करने के बाद में भी चलो ठीक है उस टाइम पे करी आज के टाइम पे भी किसी भी सिस्टम में आपको निकोला टेस्ला
की तारीफ करते हुए चीजें मिलती ही नहीं है पर खैर इस सबका 369 से क्या कांसेप्ट है वो मैं आपको समझाता हूं। बात यह है कि
थॉमस अलवा एडिसन ने एक मोटर रखी, एक कोइल यूज़ करी और उससे डीसी करंट बनाया। ठीक? टेक्निकल में ज्यादा जा नहीं रहा। निकोला
टेस्ला हमेशा यह मानते थे कि 369 जो है वो हायर डायमेंशंस के नंबर है। वो हम ह्यूमंस के या हम जो बायोलॉजिकल लाइफ है ना उसके
नंबर्स नहीं है। उस इंसान ने लिटरली ती एक की जगह तीन कॉइल रख के बोला कि अब करके देखो और तुम्हारा जो है एसी करंट बनना
शुरू हो गया। अगर निकोला टेस्ला का एसी कॉन्सेप्ट नहीं आया होता तो ऐसे मान लो कि हर घर में ना एक जनरेटर होता जो अपनी
इलेक्ट्रिसिटी खुद बना रहा है और आप उसमें तेल डाल के उसको चलाते। मतलब यह सारा विकास हुआ ही नहीं होता। बहुत ही रिच लोग
अफोर्ड कर पाते हैं कि वो एक पंखा भी चला पा रहे हैं अपने घर पे। अब इतने बड़े इन्वेंशन का उस इंसान ने इस चीज से आंसर
निकाल लिया कि थ्री जो है वो हायर डायमेंशन का नंबर है। मतलब ये कि इलेक्ट्रिसिटी भी तो एनर्जी है ना एक
तरीके से। हम ह्यूमन लाइफ की तरह मैटर नहीं है। तो एनर्जीस के जो नंबर है वो 1 2 नहीं 1 2 4 5 नहीं है। वो 3 69 है। तो आप
तीन कॉइल रख दो और उससे जो है शुरू हो गया इलेक्ट्रोमैग्नेटिज्म। सिंपल लैंग्वेज में एसी करंट का डेवलपमेंट हो गया। मतलब एसी
करंट का डेवलपमेंट नहीं हुआ। एसी करंट को आराम से यूज़ करने का पूरा इन्वेंशन हो गया। तो ऑब्वियसली उस इंसान को कुछ तो पता
था इस कांसेप्ट में। फिर जब मैंने इसमें और डिटेल में पता लगाने की कोशिश करी तो काफी सारी चीजें मेरे को दिखाई दी। और मेन
चीज यह है कि थॉमस अल्वड एडिसन ने कोशिश करी एसी को दबाने की लेकिन ऐसा कुछ हो नहीं पाया क्योंकि आप आप इन्वेंशन को दबा
नहीं सकते। आप इवोल्यूशन को दबा नहीं सकते। डीसी फैक्ट्रीज जो है वो बंद हो गई। वो बंद हुई तो ऑब्वियसली एसी के बाद में
तो ऑब्वियसली नई इंडस्ट्रीज क्रिएट हुई, नई जॉब्स क्रिएट हुई। और जो पुराने स्किल सेट्स थे वो धीरे-धीरे इरिलेवेंट होने लग
गए। और यही यूनिवर्स का नियम है। पुरानी चीजें इरिलेवेंट हो जाती हैं। यही पैटर्न हमेशा फॉलो होता है। आज के टाइम पे एआई और
डाटा यह दुनिया के जो है यह स्किल्स आज के जो है वो ट्रेंड बन चुके हैं। वर्ल्ड इकनमिक फोरम का कहना है कि 2030 तक 92
मिलियन जॉब्स खत्म हो जाएंगी। और अच्छी चीज यह है कि 170 मिलियन जॉब्स क्रिएट होंगी जो एआई से रिलेटेड होंगी। आईएमएफ का
भी यही कहना है। 40% जॉब्स ऐसी होंगी जो डायरेक्टली एआई जिनको रिप्लेस कर देगा। आप चाहे एक वर्किंग प्रोफेशनल हो जो अपने
करियर में स्टक फील कर रहा है। चाहे वह इंसान हो जिसके पास अभी फिलहाल जॉब नहीं है। आपको उन स्किल्स को तो मास्टर करना ही
पड़ेगा या अडॉप्ट तो करना ही पड़ेगा जिनको मार्केट बूस्ट कर रहा है या खुद सपोर्ट कर रहा है। डेटा साइंस और एआई वो स्किल्स हैं
जो आज के मार्केट को डिफाइन कर रही हैं। हमारे खुद के नीति आयोग की यह प्रेडिक्शन है कि 40 लाख नई जॉब्स क्रिएट होंगी एआई
और डाटा रिलेटेड। अच्छी चीज़ यह है कि आप टेक बैकग्राउंड से हो या नहीं हो फर्क नहीं पड़ता क्योंकि इन जॉब्स की या इन
स्किल्स को अचीव करने के लिए आपको कोडिंग आए यह जरूरी नहीं है। आप यह जो स्किल्स है ना वो 5 महीने की ठीक से मेहनत करने के
बाद अचीव कर सकते हो थ्रू अ प्रोग्राम अ कोर्स बाय HCL बैंक Googvi प्लस आईआईटीएम प्रवर्तक। डाटा साइंस कोर्स है यह। और HCL
GV में HCL वह कंपनी है जिसके बाद में या जो इंडिया में जो आईटी सेक्टर क्रिएट हुआ है ना उसमें HCL की जो हिस्ट्री है कभी आप
पढ़ के देखना आपको समझ में आएगा कि इट वाज़ द बैकबोन ऑफ इंडियन आईटी ग्रोथ। इस कोर्स के थ्रू आप Python, एसक्यूएल, मशीन
लर्निंग, डीप लर्निंग से लेके मॉडल डिप्लॉयमेंट तक आप सीखोगे वो भी इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स से थ्रू ऑनलाइन क्लासेस। आप 10
से ज्यादा इंडस्ट्री ग्रेड प्रोजेक्ट्स क्रिएट करोगे और उनको डिप्लॉय भी करोगे और यह प्रोजेक्ट्स वह होंगे जो आज इंडस्ट्री
की रिक्वायरमेंट है। इनके पास 1000 से ज्यादा हायरिंग पार्टनर्स हैं जो प्लेसमेंट में असिस्ट करते हैं और आपको
मिलता है आईआईटीएम प्रवर्तक का प्रेस्टीजियस सर्टिफिकेट साथ में। तो बात सिर्फ इतनी सी है कि जो टेक्नोलॉजी के साथ
में इवॉल्व करता है ना वही रेलेवेंट रहता है। अपने करियर के लिए सही डिसीजन लो HCL GV का फ्री कंसल्टेशन आप बुक कर सकते हो।
लिंक मेरे डिस्क्रिप्शन में है। आराम से एक्सप्लोर करो। खैर बैक टू द टॉपिक। अब देखो यूनिवर्स की चाबी 369 पे है या नहीं
है यह समझने से पहले ना आपको फिजिक्स के बारे में थोड़ा समझना पड़ेगा। फिजिक्स क्या है एक्चुअली साइंस के बारे में।
लोगों को ना एक बहुत बड़ी गलतफहमी होती है कि भाई साइंस वर्सेस गॉड है। मतलब या तो साइंस एक्सिस्ट करती है या फिर गॉड
एक्सिस्ट करता है। भाई वो डिबेट बहुत पुरानी थी। वो तब की डिबेट थी जब क्लासिकल फिजिक्स थी उसके बाद जब जब से क्वांटम
फिजिक्स सामने आई ना फिर गॉड और साइंस के बीच में डिबेट नहीं बची। इनफैक्ट अल्बर्ट आइंस्टाइन खुद यह मानते थे मतलब उससे बड़ा
इंसान तो कोई भी नहीं है ना क्वांटम फिजिक्स को जानने में या स्टार्ट करने में वह इंसान यह बोल रहा है कि मेरे हिसाब से
गॉड जो है वो इस यूनिवर्स का एक्चुअली हिस्सा है कोई इंसान नहीं है मतलब यूनिवर्स ही गॉड है उनका सिंपल कांसेप्ट
यह था तो भाई ये जो थोड़े बहुत साइंस पढ़ लेते हैं ये साइंस और गॉड की डिबेट करवाना शुरू कर देते हैं वो आदमी जिसने सब कुछ
पता कर रखा है वो तो नहीं करता डिबेट वो तो मानता खैर मैं बताता हूं आपको सीन क्या है ये ये सारी डिबेट शुरू कहां से हुई थी
एक्चुअली बात यह है कि क्लासिकल फिजिक्स एक चीज है क्वांटम फिजिक्स एक चीज है क्लासिकल फिजिक्स ये प्रूव कर रही थी कि
गॉड एक्सिस्ट नहीं करता और उसका खैर बहुत ही वैलिड रीज़ंस थे। लोगों को लगता है कि न्यूटन जो है उसके सिर पे सेब गिर गया और
उसने ग्रेविटी का इन्वेंशन कर दिया। नहीं वन ऑफ द मेजर कंट्रीब्यूशन ऑफ न्यूटन जो थी वो ग्रेविटी नहीं थी। मतलब ग्रेविटी
ऑब्वियसली थी पर ग्रेविटी से अलावा जो दिया उन्होंने क्लासिकल फिजिक्स का पूरा मॉडल वो थी। उसको सिंपल भाषा में समझाता
हूं। क्या थी वो क्लासिकल फिजिक्स और न्यूटन के टाइम न्यूटन उसमें मेन साइंटिस्ट मान लो और बाकी जो साइंटिस्ट
हैं वो उनके टीममेट्स मान लो तो उस पर्टिकुलर एरा में उस उस टाइम में दो चीजों की डिस्कवरी हुई थी। एक तो पार्टिकल
और दूसरा वेव मतलब एक तरीके से ऐसे समझो मैं जो हूं वो मैटर हूं। यह मैटर है, यह मैटर है, सब कुछ मैटर है जो आपको दिख रहा
है। और जो लाइट है या जो एनर्जीज़ हैं वह वेव हैं। ये चीज क्लासिकल फिजिक्स ने बता दी कि भई ये वेव है, या पार्टिकल है।
सिंपल है। न्यूटन ने मोशन के लॉज़ दिए। मोशन के लॉज़ मतलब सबसे बड़ी सबसे बड़ा जो लॉ जो दुनिया को पता होता है, वो कौन सा है?
न्यूटन का। थर्ड लॉ ऑफ़ मोशन कि हर एक्शन का एक रिएक्शन होता है। और वो एक्चुअली ये नहीं कह रहा था कि भ मैं अगर तुम्हें कुछ
उल्टा बोल दूंगा, तुम मुझे उल्टा बोल दोगे। वो वो नहीं कह रहा था। उसका कहने का मतलब यह था न्यूटन साहब का और ऐसा नहीं है
कि मैं रेस्पेक्ट नहीं दे रहा। न्यूटन बहुत इंपॉर्टेंट आर्मी थे। द ग्रेट साइंटिस्ट। तो उनका कहना यह था कि आज इस
टाइम पे मान लो मेरा हाथ है। मेरे हाथ कान पे पड़ा। कान पे पड़ते ही मेरा मेरा मुंह इधर हो गया। अब इस हाथ के अंदर पार्टिकल्स
क्या होते हैं कि इस हाथ में छोटे-छोटे छोटे छोटे-छोटे पार्टिकल्स होंगे जिनसे हमारा यह हाथ बना है। मेरे गाल पे भी
पार्टिकल्स होंगे। मतलब यह है कि जब ये सारे पार्टिकल्स यहां टकराए तो मेरा गाल इधर हुआ। हवा में भी थोड़ा जो पार्टिकल्स
होंगे वो भी हिले। मतलब यह कि पार्टिकल्स के एक्शन की वजह से रिएक्शन होता है कुछ और पार्टिकल्स का। अगर इसे बहुत ही सिंपल
वे में बोलें तो पूरी दुनिया में पार्टिकल्स और एनर्जी ही हैं। मतलब वेव्स हैं। तो पार्टिकल अभी इस मिली सेकंड पे
क्या कर रहे हैं? अगर हमें पता हो तो हम फ्यूचर प्रेडिक्ट कर सकते हैं सीधे-सीधे। एक्चुअली एक मैथमेटिशियन था लैब्लास जो
मैथमेटिक्स के कोर में अच्छे खासे मैथमेटिक्स पढ़ रहे होंगे उनको बहुत अच्छे से पता है। तो लैप्लास ने ना एक एक्चुअली
एक एक्सपेरिमेंट थॉट एक्सपेरिमेंट दिया था और वो यह था कि अगर इस दुनिया में डीमन है ना कोई है ना डेविल है कोई तो उसको पावर
हाथ में पावर उसके होने की जरूरत नहीं है। क्योंकि उसको सिर्फ अगर यह पता है कि इस टाइम पर पूरी दुनिया के पार्टिकल्स किस
पोजीशन में हैं और 1 मिली सेकंड बाद वह किस तरफ जा रहे हैं तो वो फ्यूचर प्रेडिक्ट कर सकता है साफ-साफ क्योंकि भाई
हर चीज का एक एक्शन का रिएक्शन है। तो बस उस डीमन को यह पता होना चाहिए कि सारे पार्टिकल्स इस टाइम पे कहां है और क्या कर
रहे हैं। सिंपल एज सिंपल एज दैट। और पूरी दुनिया जो है वो मैटर से बनी हुई है। तो अगर आपने पार्टिकल्स को प्रेडिक्ट कर लिया
तो बात बहुत सिंपल हो गई ना। पूरी दुनिया में यूनिवर्स में जो भी हो रहा है वो एज सच कोई उसमें ह्यूमन उसमें किसी बाहर की
ताकत का कोई इंटरवेंशन है ही नहीं। यह सब कुछ जो हो रहा है यह फ्री विल भी नहीं है। मतलब यह रैंडमनेस है। मतलब यह ऑलरेडी
डिसाइडेड है। क्योंकि आपके जो पार्टिकल्स अभी कुछ कर रहे हैं वो फ्यूचर में क्या करेंगे वो पहले ही पता है। मतलब यह कि गॉड
का कांसेप्ट एग्जिस्ट ही नहीं करता। और एक्सिस्ट करता भी है तो फर्क नहीं पड़ता क्योंकि यह यूनिवर्स जो है वह एक क्लोज्ड
बंद बॉक्स है। यहां पर जो हो रहा है वह अब से 1 मिली सेकंड पहले हुआ जो था उसका नतीजा है एज सिंपल एज दैट। और क्लासिकल
फिजिक्स इस चीज को प्रूफ करने में काफी सक्सेसफुल भी थी। बड़े टर्म्स में मतलब ऐसे कि अगर मेरा हाथ लगा तो थप्पड़, हाथ
इधर, मुंह इधर गया। ये तो ट्रू है। ये तो पता चल रहा है हमें कि एक्शन का रिएक्शन होता है। और यहीं से क्लासिकल फिजिक्स ने
एक्चुअली भगवान का जो कांसेप्ट है ना जहां वो साइंस और गॉड की डेबेट आती है उसको टोटली बंद कर दिया। मतलब यह है कि साइंस
एक्सिस्ट करती है। गॉड एक्सिस्ट नहीं करता। और यह बहुत बड़ी डिबेट उस टाइम के लिए इसलिए थी क्योंकि जो लेप्लास की मैंने
बात बताई ना आपको उस टाइम पे जो दुनिया में एक तरीके से रिवॉल्यूशन चल रहा था ना वो फ्री विल का चल रहा था। मतलब लोग जो है
वो वॉर लड़ रहे थे यूरोप में और लड़ाईयां ऐसी थोड़ी हमें डेमोक्रेसी या फ्री विल मिली है। कहीं तो लड़ाई हुई होगी ना इस
बात को लेके। रिवॉल्यूशन हुआ होगा तब जाके फ्री विल मिली है। तो वो कहीं ना कहीं लोग फ्री विल के लिए लड़ रहे थे। उनका सों का
मोटिवेशन खत्म हो गया कि अगर हमारे फ्री विल नहीं है तो फिर बात ही क्या है। फिर सेंस ही क्या है? जो भी हो रहा है वह एक
रैंडमनेस है। या फिर ऐसे मान लो अगर गॉड एक्सिस्ट नहीं करता या फिर गॉड का कोई इंटरफेरेंस इस दुनिया में है ही नहीं तो
फिर सारे रिलीजंस का भी जो आईडियोलॉजीस है वो डिस्ट्रॉय हो रही थी। लेकिन फिर आए कुछ गिनती के साइंटिस्ट जैसे हजनबर्ग
अनसर्टेनिटी प्रिंसिपल करके आपने साइंस में सुना होगा। हमारे फिजिक्स वाले टीचर ने बहुत बोरिंग तरीके से पढ़ाया। अल्बर्ट
आइंस्टाइन जैसे लोग और निकोरा टेस्ला जैसे लोग। बात ये हुई कि चलो ठीक है। अब अगर तुमने बता ही दिया है क्लासिकल फिजिक्स ने
कि भाई तुम सारा फ्यूचर प्रेडिक्ट कर सकते हो तो फिर इन पार्टिकल्स को प्रेडिक्ट करने की कोशिश ही कर लेते हैं। मान लो
मेरे हाथ में पार्टिकल्स हैं। ठीक है? मैं जब माइक्रोस्कोप से देखूंगा तो छोटे-छोटे छोटे छोटे-छोटे होता जाएगा। ठीक है? एक
टाइम पे ना आने के बाद में साइंटिस्ट को वो दिखने बंद हो गए। मतलब जो पार्टिकल्स थे ना इलेक्ट्रॉन्स मान लो या सबसे
स्मालेस्ट फॉर्म में जब वो आ गए। तो पहले साइंटिस्ट को लगा कि भाई हमारे पास माइक्रोस्कोप नहीं है तगड़ा वाला। इसलिए
दिक्कत आ रही है। बाद में उनको रियलाइज हुआ कि माइक्रोस्कोप की बात नहीं है। यह जो छोटे-छोटे पार्टिकल्स हैं ना जिससे
मैटर बनता है ये एक्चुअली अपनी स्मालेस्ट फॉर्म में जाने के बाद में एग्जिस्ट ही नहीं करते। मतलब ये पार्टिकल ही नहीं
बचते। ये क्या बन जाते हैं? एनर्जी और एनर्जी भी ऐसी नहीं कि भाई ठीक है एनर्जी बन गए। हमें दिख नहीं रहे लेकिन इस पॉइंट
पे हैं। मान लो इस पॉइंट पे है। नहीं वो प्रोबेबिलिटी वेव बन गए। इस डबल स्लिट एक्सपेरिमेंट बोलते हैं। इसको कभी पढ़
लेना। साइंस ये भी खैर हमें बहुत बोरिंग तरीके से पढ़ाया गया है। बात ये थी कि इन्होंने जो है कुछ इलेक्ट्रॉन्स को या
पार्टिकल्स बोल दो। पार्टिकल्स को इन्होंने क्या किया? मैं सिंपल तरीके से बताने के लिए साइंस को थोड़ा सिंपल करता
हूं। अगर मैं ज्यादा टेक्निकल वर्ड्स इस्तेमाल करूंगा तो दिक्कत होगी। ठीक है? तो इन्होंने क्या किया? एक परफेक्ट
एक्सपेरिमेंट का प्लेस बनाया और इलेक्ट्रॉन्स को गन के थ्रू फेंका। जब उन्हें फेंका ना आगे ना एक स्क्रीन
स्क्रीन थी और स्क्रीन से पीछे दो स्लिट थी ऐसे करके। ठीक है? तो जब इन्होंने फेंका ना तो इन्होंने आगे जाकर देखा कि वो
इलेक्ट्रॉन जो है वो आगे सीधे जाकर चिपकनी चाहिए। जब इतनी सी स्लिट का तुम्हारे पास जगह है तो भाई सीधे जाकर चिपक जाओ ना।
लेकिन वो क्या कर रहे थे? वो आराम से स्लिट के बीच में दो जगह थी। वो वेव की तरह उसमें ट्रैवल कर रहे थे और वेव की तरह
सामने जो है स्क्रीन पे जाके चिपक रहे थे। मतलब अपनी मर्जी से चिपक रहे थे। वो पार्टिकल्स की तरह बिहेव ही नहीं कर रहे
थे। एनर्जी की तरह बिहेव कर रहे थे। फिर जब उस एक्सपेरिमेंट में एक ऑब्जर्वर डाला ना वो प्रॉपर्ली ही आइसोलेटेड सिस्टम था।
लेकिन जब उसमें एक ऑब्जर्वर डाला तो इलेक्ट्रॉन्स को हमारे पार्टिकल्स को पता चल गया कि ये यूनिवर्स जो है मुझे ऑब्जर्व
कर रहा है। अब जो गन से इलेक्ट्रॉन्स फेंगे नाथ वो सीधे जाके चिपक गए स्क्रीन पे बिल्कुल सीधे। जैसे हमारे यूनिवर्स में
होता है। इस यूनिवर्स में जो होता है। अगर गन मारूंगा तो बुलेट सीधी जाएगी। पर अगर कोई ऑब्जर्व नहीं कर रहा ना तो वह कहीं भी
हो सकते हैं। उनकी प्रो मतलब वह कुछ नहीं पता उनकी एग्जैक्ट पोजीशन क्या है हमारे खुद के पार्टिकल्स की। मतलब यह है हम जो
हैं मैटर वो भी मैटर पार्टिकल्स एकिस्ट ही नहीं करते। पार्टिकल्स एक्चुअली फ्रोजन फॉर्म है एनर्जी की। यह पूरी दुनिया में
पार्टिकल्स नहीं है। एनर्जी है सिर्फ। और यह पार्टिकल्स यानी फिजिकल फॉर्म सिर्फ इसलिए एक्सिस्ट करती है क्योंकि हम हैं।
बड़ा कॉम्प्लेक्स लगेगा, फनी लगेगा। पर सच्चाई थोड़ी ऐसी अजीब सी ही है रियलिटी दुनिया की। पता नहीं क्यों हम न्यूक्लियर
बॉम्ब्स वगैरह बना रहे हैं। इतना यूनिवर्स इतना इंटरेस्टिंग है। आपने जिंदगी में कभी भी PUBG या कोई ऐसा गेम खेला है ना। तो आप
एक चीज नोटिस करोगे कि मान लो आप लॉबी में हो। लॉबी से फिर आपने ना गेम में गए। अब आप मान लो पोचिंकी में हो। तो क्या आपके
फोन में वो मैप लोड हो चुका है? जॉर्जो पुल वाला या फिर जब तुम पहुंचोगे तब लोड होगा। मतलब जब कभी कई बार ऐसा होता है ना
कि पिंग हाई आ रहे हो तो भाई जब तुमने अपना वो खोला क्या कहते हैं उसको पैराशूट तो नीचे कूद गए लेकिन सब ब्लर ब्लर आ रहा
है। क्यों? क्योंकि वो लोड नहीं हुआ। तुम्हारा डाटा स्लो है। और यह इतनी तगड़ी चीज है कि हमारे यूनिवर्स में भी एक्चुअली
यही हो रहा है। जो यह पार्टिकल्स है ना यह एनर्जी है जो फ्रीली अपनी मूव घूम रही है। यह लोड नहीं होती जब तक हम इसे लोड नहीं
करेंगे। मतलब यह अगर मैं यह हाथ चलाया मैंने तो यह हाथ चलाना किसी ने डिसाइड करा है कि यह पार्टिकल्स जो हैं वो हाथ
चलाएंगे और एक नया यूनिवर्स क्रिएट होगा। नया मतलब फ्यूचर यूनिवर्स क्रिएट होगा जिसमें ऋषभ ने हाथ चलाया था। वो पास्ट बन
गया अब तो खैर। मतलब यह कि हम लोड कर रहे हैं यूनिवर्स को। यूनिवर्स खुद से लोड नहीं हो रहा है। और यह क्लासिकल फिजिक्स
को टोटली ब्रेकडाउन करती थी। और यह बताती थी कि क्लासिकल फिजिक्स सिर्फ तब तक काम का है जब तक हम और आप ऐसे इस नॉर्मल
वर्ल्ड में जी रहे हैं। बस ऐसे ही जीते रहो। ज्यादा सवाल मत पूछो क्योंकि क्वांटम फिजिक्स में जब जाओगे तो ये सारी क्लासिकल
फिजिक्स के कांसेप्ट टोटली ब्रेकडाउन कर जाते हैं। अभी थोड़ा और इसकी चीजें इंटरेस्टिंग बताऊंगा मैं आपको। लेकिन
थोड़ा निगोडा टेस्ला पे आना बहुत ज्यादा जरूरी है। तो अल्बर्ट आइंस्टाइन ने एक्चुअली क्वांटम फिजिक्स की नीव काइंड ऑफ
रखी थी। उन्होंने बताया था कि भाई e = mc² कि अगर कोई भी मास जो है वो स्पीड ऑफ लाइट के से भागना शुरू कर दे तो भाई वो एनर्जी
कैलकुलेट कर सकते हो तुम उसकी। मतलब हम जो है वह फ्रोजन एनर्जीज़ हैं एक्चुअली। और आप रिलीजन में भी देखोगे ना काफी सारे
स्पेशली हिंदूइज़्म तो वह यही बोलते हैं कि हम जो है वह कुछ नहीं है। हम एनर्जी हैं। खैर अल्बर्ट आइंस्टाइन और इस लेवल के जो
ग्रेट साइंटिस्ट थे वो ये जानना चाहते थे कि यूनिवर्स क्या है? कैसे है ना? पर निकोला टेस्ला जो थे उनका दिमाग थोड़ा अलग
चलता था। वो एक्चुअली साइंटिस्ट नहीं थे। मोस्टली वो इंजीनियर थे। तो उनका यह चलता था कि मुझे यह जानने से पहले मतलब मेरे
लिए यह जानना कि यूनिवर्स क्या है? सबसे ज्यादाेंट ये है कि ये काम कैसे कर रहा है? मतलब अगर किसी ने ये यूनिवर्स क्रिएट
करा है इतना ब्यूटीफुल सा इतना कॉम्प्लेक्स सा तो उसने कुछ ना कुछ तो यूज़ करा होगा। मैथमेटिक्स टूल्स मतलब यार आप
ये सोचो ना कि एक जो कारपेंटर है अगर वो एक टेबल बनाता है तो अपना मेथड यूज़ करता है ना अपने टूल्स यूज़ करता है। तो उसने
सिंपल निकोला टेस्ला का दिमाग बस इतने में था। अगर उसने इस यूनिवर्स को क्रिएट कराया ना इस वंडरफुल यूनिवर्स को तो उसने अपने
टूल्स इस्तेमाल करें और वह टूल्स क्या है निकोला टेस्ला को वह पता करने थे और वह पता काफी हद तक निकोला टेस्ला ने कर लिया
इसीलिए हमारे पास इलेक्ट्रिसिटी है इसलिए हमारे पास वाई-फाई है और वो इंसान 369 के कांसेप्ट पे आके काफी ज्यादा अटका।
हालांकि ऑफिशियल सोर्सेस में जब देखते हैं ना तो यह पता लगता है कि भाई बोलते ऐसे हैं कि ऑफिशियली Tesla ने कभी नहीं बोला
कि 369 स्पेशल है। पर यह फालतू के डेविड है। मुझे लगता है ये रिकॉर्ड्स वगैरह डिलीट कर देते थे क्योंकि निकोला टेस्ला
के बहुत ज्यादा मतलब ना चाहने वाले लोग थे। वो साफ दिखता था निकोला टेस्ला का ऑब्जेशंस। बहुत साफ दिखता था। वो इंसान
मतलब एक ऐसे मतलब अगर उसे इस बिल्डिंग से उस बिल्डिंग जाना है ना तो वो कदम गिनेगा कितने हैं। अगर वो नौ के नौ से डिवाइड
नहीं हो रहे या थ्री से डिवाइड नहीं हो रहे तो वो कदम वापस जाएगा। तो उसका ऑब्सेशन था भाई। अब रिकॉर्ड्स में नहीं का
क्या मतलब होता है? यह तो रिकॉर्ड्स में है ना कि उसका ऑप्शन था। तो अब बात आती है कि निकोला टेसला ने ऐसा क्या पता करा कि भ
यूनिवर्स को बनाने के लिए कुछ टूल्स थे। तो कौन से टूल्स थे वो? वहीं से 369 समझ में आएगा। अब जिनके लिए भी थोड़ा ज्यादा
कॉम्प्लेक्स हो गया हो, आप बहुत ही सिंपल वे में यह समझो कि क्लासिकल फिजिक्स ने यह कह दिया कि एक तो मैटर है, एक एनर्जी है।
एनर्जी को तो उन्होंने कह दिया नॉन लिविंग है। मैटर में होते हैं पार्टिकल्स छोटे-छोटे जिनसे हम बने हैं। और उन
पार्टिकल्स की पोजीशन अगर हमें पता है और थोड़ी देर बाद वो किस किस डायरेक्शन में जा रहे हैं तो हम फ्यूचर प्रेडिक्ट कर
सकते हैं। उनका यह मानना था। लेकिन क्वांटम फिजिक्स ने जब पार्टिकल्स को देखने की कोशिश करी तो वो दिखे नहीं। वो
दिखे नहीं अपने स्मालेस्ट फॉर्म में और वो एनर्जी बन गई एक्चुअली। तो सवाल क्वांटम फिजिक्स जो क्लासिकल फिजिक्स से पूछती है
वो ये है कि ठीक है तुम पार्टिकल की करंट पोजीशन पता कर लोगे और वो किस डायरेक्शन में जा रहे हैं ये पता कर लोगे पर वो उस
डायरेक्शन में जा ही क्यों रहे हैं वो चूज़ कैसे करते हैं कि कौन से डायरेक्शन में जाना है और ये एक्चुअल में क्लासिकल
फिजिक्स के जो सबसे बड़े इंपॉर्टेंट साइंटिस्ट हैं न्यूटन के लिए ही एक्चुअली सवाल था क्यों क्योंकि उनके सिर पे जब सेब
गिरा सेब गिरने के बाद उनको ग्रेविटी का ख्याल आया तो क्लासिकल फिजिक्स ये बता सकती है कि भाई वो वहां पे काइंड ऑफ बैठे
थे सेब गिरा क्यों गिरा ग्रेविटी की वजह से गिरा। सारे पार्टिकल्स को वह कैलकुलेट कर सकते हैं और फ्यूचर प्रेडिक्ट कर सकते
हैं। प्रेडिक्ट नहीं सिमुलेट कर सकते हैं। लेकिन न्यूटन के दिमाग में ग्रेविटी का थॉट आया कैसे? क्योंकि अगर एक्शन और
रिएक्शन आप मानो पास्ट की वजह से प्रेजेंट हो रहा है और प्रेजेंट की वजह से फ्यूचर हो रहा है। तो ग्रेविटी का ख्याल आना
न्यूटन के दिमाग में इंपॉसिबल है। क्योंकि जस्ट उस मिलीसेकंड से पहले पहले जब ग्रेविटी का ख्याल आया। ग्रेविटी एग्ज़िस्ट
ही नहीं करती थी एज अ थॉट इन एनी पार्टिकल। मतलब यह है कि क्वांटम फिजिक्स ने यह काइंड ऑफ प्रूव किया कि यह पार्टिकल
इन स्मालेस्ट फॉर्म जो है वह क्वांटम फिजिक्स को फॉलो करता है और वहां जिस क्वांटम फिजिक्स के जिस कांसेप्ट को वो
फॉलो कर रहा है वहीं एक्चुअली उसकी बातचीत होती है किसी हायर डायमेंशन से और उसी वजह से हम ये अजीब अजीब से डिसीजंस लेते हैं।
पर बात आती है निकोला टेस्ला की जो हम जिसके लिए हम टॉपिक क्रिएट कर रहे हैं। निकोला टेस्ला का 369 से जो काइंड ऑफ
ऑब्सेशन था वो क्या सीन था? तो अल्बर्ट आइंस्टाइन, हज़नबर्ग यह जो साइंटिस्ट थे ना यह मोस्टली उस चीज पर काम कर रहे थे कि
यूनिवर्स है क्या? पर निकोला टेस्ला थे इंजीनियर एक। साइंटिस्ट से ज्यादा वो एक इंजीनियर थे और उनका यह सीन था कि भ है
क्या? छोड़ो ये पता करो कि बनाया किस जिसने भी बनाया। ठीक है? उसे तुम गॉड बोल लो, क्रिएटर बोल लो। बनाया कैसे? मतलब
उसने कौन से टूल्स का इस्तेमा इंजीनियर तो ऐसे ही सोचता है ना। कौन से टूल्स का इस्तेमाल करा? तो निकोला टेस्ला जो है वो
ये समझ चुके थे कि स्पेस और टाइम तो है ये। देखो साफ-साफ स्पेस है, टाइम है। ठीक है? स्पेस को क्रिएट करने के लिए
ज्योमेट्री का इस्तेमाल हुआ है। ज्योमेट्री मतलब मैथमेटिक्स का इस्तेमाल हुआ है। और मैथमेटिक्स कितनी बड़ी चीज है
वो हमें ह्यूमंस को अच्छे से पता है कि कितना फायदा हमें हुआ है। तो उन्होंने जो है वो बहुत ही डीपली मैथमेटिक्स के
इक्वेशंस और उनके नंबर्स को समझने की कोशिश करी और उनको एक चीज रियलाइज हुई। वो ये रियलाइज हुई कि अगर ज़ीरो से नाइन हम
नंबर मान लें तो इन नंबर्स में ना थ्री सिक्स और नाइन का जो बिहेवियर है वो बहुत ज्यादा डिफरेंट है। वो बाकी नंबर्स की तरह
नहीं है। एक चीज होती है डिजिटल रूट। डिजिटल रूट का मतलब होता है जैसे 16 है। तो 16 जो नंबर है ना वो अपनी ओरिजिनल
फॉर्म में नहीं है। ऐसा मानते हैं डिजिटल रूट को मानने वाले। उसकी ओरिजिनल फॉर्म है 6 + 1 7 क्योंकि नंबर्स ज़ीरो से नाइन ही
है जो ओरिजिनल नंबर्स हैं। उसके बाद तो उनका कॉम्बिनेशन है एक तरीके से। और ये बात कहीं ना कहीं सच भी है। उनका
कॉम्बिनेशन ही तो है। मॉडिफिकेशन है। तो अगर ज़ीरो से नाइन तक के नंबर्स को मान लिया जाए तो निकोला टेस्सला ने ये बोला कि
अगर मैं इवोल्यूशन की थ्योरी उठाऊं। इवोल्यूशन मतलब हम ह्यूमंस कैसे बढ़े? तो एक से दो हुए दो से चार चार से छ सॉरी चार
से आठ आठ से 16 16 32 64 128 ठीक है इनका किसी का भी डिजिट डिजिटल रूट निकाल के देख लो आप 1 2 4 5 ठीक है इनका जो डिजिटल रूट
आता है वो क्या आता है वन का वन टू का टू फिर चार का चार आठ का आठ 16 का सात 28 का 32 का छठ का ज़ीरो 128 का एक मतलब इसमें
369 आएंगे ही नहीं ह्यूमन का जो इवोल्यूशन हुआ है उसमें 3 6 9 आते ही नहीं है। फिर उसने देखा कि अच्छा एक काम करता हूं थ्री
और सिक्स को और नाइन को बाद में थ्री और सिक्स को भी मैं इसी इवोल्यूशन के कांसेप्ट में डालता हूं कि लेट्स अस्यूम
कि भाई थ्री और सिक्स जो है वो कुछ स्पेशल है। जब उसने ये करा ना तो थ्री और सिक्स को डबल करने का कोई सेंस नहीं बनता
क्योंकि थ्री के बाद सिक्स आता है। तो 3 6 फिर 12 फिर 24 फिर 48 और जब आप इनके डिजिटल रूट उठा के देखोगे तो आपको पता
चलेगा कि इनके डिजिटल रूट बार-बार घूम फिर के सिर्फ तीन और छह पे ही आते हैं। मतलब वो सब जो थ्री और सिक्स के लाइन में है
एलाइनमेंट हुए हैं वो सब बार-बार थ्री और सिक्स पे ही रह जाता है। फिर उसको ज्यादा शौक तब लगा जब उसने नाइन के साथ ये करा।
नाइन को आप उसकी इव उस पे इवोल्यूशन थ्योरी लगाने की कोशिश करो और आपको पता चलता है कि नाइन कहीं नहीं जाता। वो
सुप्रीम है। वो सिर्फ नाइन पे ही लौट के आता है। इनफैक्ट आप नाइन को किसी से भी मल्टीप्लाई कर दो। किसी से भी 9 * 8 = 72
9 11 99 9 वो बार-बार लौट के नाइन पे ही आएगा। कहा आप कितना भी बड़ा नंबर सोच लो और उससे मल्टीप्लाई करके देख लो। निकोला
टेस्ला के हिसाब से यह सिर्फ एक कोइंसिडेंस नहीं था। उसका यह मानना था कि 1 2 4 5 7 8 ये जो नंबर्स हैं ना ये
ह्यूमन लाइफ और बायोलॉजिकल लाइफ ऑफ अदर स्पीशीज के नंबर्स हैं। थ्री और सिक्स कोई सुप्रीम पावर है जिनके नंबर्स हैं। और वो
थ्री और सिक्स से भी सुप्रीम जो टॉप पे है वो है नाइन। और यह चीज उसने मल्टीपल टाइम्स काइंड ऑफ प्रूव करी इन मैथमेटिक्स
के यह रूल चलता है। आप कोई भी ज्योमेट्री का शेप उठा के देख लो। ट्रायंगल ट्रायंगल के जो एंगल्स होते हैं वो कितने होते हैं?
अगर इक्विलैटरल ट्रायंगल लोगे ना तो उसका 120° एंगल होता है एक पर्टिकुलर साइड का। 120 का सम क्या है? थ्री। आप सर्कल उठा
लो। उसका एंगल क्या है? 360। कितना? नाइन। रेक्टेंगल उठा लो। 909 ज्योमेट्री के आगे की कोई भी शेप उठाते चले जाओ। आप 369 के
बीच में ही घूमोगे। और ये चीज सिर्फ ऐसा नहीं कि इल्लुजन में थी। मैंने अभी आपको बताया था कि एसी जो मोटर थी उसमें तीन
कॉइल्स को लगाया गया था एक की जगह और उन तीन कॉइल्स को 120° एंगल पे लगाया गया था। 120 अगेन थ्री और स्पेशल चीज देखो आप कि
जो मैं कह रहा था ना कि वाई-फाई का इन्वेंशन निकोला टेस्ला ने करा तो निकोला टेस्ला का ये मानना था कि ये जितनी भी
फ्रीक्वेंसीज हैं या लाइट है, एनर्जीज़ हैं मतलब इनका 369 से बहुत तगड़ा कनेक्शन है। जैसे स्पीड ऑफ़ लाइट क्या है? 3 * 10 टू दी
पावर 8। अब 10 रेज़ टू दी पावर 8 कुछ नहीं होता। वो ज़ीरो होते हैं सारे। मतलब थ्री। फिर क्या हुआ? उसी लाइट से जो लाइट हम
देखते हैं ना उस उसी वो लाइट जो है वो कॉम्बिनेशन होता है। किस-किस का? एक्स रेज का, रेडियो वेव्स का, गामा वेव्स का हर हर
वेव का वो एक परिक उन सारी वेव्स का वो एक कॉम्बिनेशन होता है जो लाइट हमें दिखाई देती है। उन वेव्स को जब अलग करा गया तो
वही तो रेडियो वेव्स हैं ना जो हमारे कम्युनिकेशन में काम आती हैं जो वाईफाई और हमारे नेटवर्क में काम आती हैं। और यह सब
करने के बाद में निकोला टेस्ला एक्चुअली ही वास इन्वेंटिंग कि वो एक ऐसा टावर बनाएंगे जिस टावर से वो पूरी दुनिया को
इलेक्ट्रिसिटी दे सकता है बिना किसी वायर के। पर दुख की बात यह है कि उस टाइम पर जो पावरफुल लोग थे ना उन्होंने निकोला टेस्ला
को कभी सीरियसली लिया नहीं और वह इंसान मतलब अगर उनके एरा में देखा जाएगा तो प्रैक्टिकली उसको मैड ही घोषित करा जाएगा
या करा गया था। बस बात इतनी सी थी कि भाई निकोला टेसला की बातों को माना जाता है या ना माना जाता वो फर्क नहीं पड़ता। पर ऐसे
लोगों को ना यूजुअली जो बहुत ही जीनियस होते हैं। दे हैव दिस डेफिशिएंसी इनसाइड देयर सोल एंड बॉडी कि उनको ना कोई समझ
नहीं पाता। प्रॉब्लम वहां से शुरू होती है कि जब उन्हें फंडामेंटली मिसअंडरस्टुड पूरी दुनिया करे वह प्रॉब्लम
एक्चुअली वह फेस करते हैं। यह नहीं कि वो उनके दिमाग में जो आ रहा है उसका इन्वेंशन नहीं हो पा रहा। वह तो लाइफ का स्ट्रगल
है। वह सबके साथ करते हैं। पर जब इंसान को फंडामेंटली ही कोई समझ ना पाए ना, फिर वह एक आइसोलेटेड फील करता है। बड़ा क्रूल फील
करता है कि पूरा पूरी दुनिया उसके अगेंस्ट है। लास्ट में मैं एक नोट दे देता हूं आपको कि ऑफिशियली ना आप देखोगे तो आपको
पता चलेगा कि निकोला टेस्ला जो है वो यह बोला जाता है कि कोई हिस्टोरिकल रिकॉर्ड्स में यह देखने को नहीं मिलता कि निकोला
टेस्ला का 369 से कोई ज्यादा खास ऑब्सेशन था। पर यह बहुत ही बड़ी हिपोक्रेसी काइंड ऑफ है क्योंकि निकोला टेसा लास्ट में भी
जब अपने होटल में रहते थे ना तो 18 नैपकिंस ऑर्डर करते थे अपने डिनर के टाइम पे 18 क्यों 8 + 1 9 अपने घर जाते थे
अपार्टमेंट जाते थे तो एक स्पेसिफिक नंबर जो तीन छ या नौ से डिविजिबल हो उसी नंबर के नंबर ऑफ स्टेप्स लेते थे चलते हुए उस
इंसान के दिमाग में इतना कुछ चल रहा था पर ऑफिशियल डॉक्यूमेंट्स में कुछ नहीं मिलता वो उन हिसाब से बनाए जाते हैं जो पावरफुल
लोग होते हैं ना उस टाइम के वो क्या चाहते हैं दैट्स इट फट
निकोला टेस्ला का 3 6 9 कोड एक ऐसी अवधारणा है जिसके अनुसार 3, 6 और 9 'एनर्जी के नंबर्स' हैं जो ब्रह्मांड के मूलभूत सिद्धांतों को नियंत्रित करते हैं। टेस्ला के अनुसार, ये संख्याएँ हायर डायमेंशन से जुड़ी हैं और 'मैटर' के बजाय 'एनर्जी' का प्रतिनिधित्व करती हैं, जिसने AC करंट और वाई-फाई जैसी तकनीकों को जन्म दिया।
थॉमस एडिसन DC (डायरेक्ट करंट) के समर्थक थे, जबकि निकोला टेस्ला AC (अल्टरनेटिंग करंट) के प्रवर्तक थे। एडिसन ने AC करंट को खतरनाक बताकर बदनाम करने की कोशिश की, लेकिन टेस्ला का AC करंट अधिक कुशल और व्यावहारिक साबित हुआ। टेस्ला ने 3 कॉइल का उपयोग करके AC मोटर का आविष्कार किया, जो 369 कोड का एक व्यावहारिक उदाहरण है।
क्वांटम फिजिक्स में 'ऑब्जर्वर इफेक्ट' यह बताता है कि कण (particles) केवल तभी ठोस रूप लेते हैं जब उन्हें देखा जा रहा हो, जैसा कि डबल स्लिट एक्सपेरिमेंट में दिखाया गया है। इसका 369 कोड से संबंध यह है कि टेस्ला के अनुसार 3, 6, 9 एनर्जी के नंबर्स हैं जो ठोस पदार्थ के बजाय ऊर्जा को नियंत्रित करते हैं, जो क्वांटम फिजिक्स की इस अवधारणा को मजबूत करता है।
डिजिटल रूट एक गणितीय प्रक्रिया है जिसमें किसी भी संख्या के अंकों को तब तक जोड़ा जाता है जब तक एक अंक न बचे। 3, 6, 9 इस एल्गोरिथम में खास हैं क्योंकि बायोलॉजिकल लाइफ के नंबर्स (1, 2, 4, 5, 7, 8) को डबल करने पर डिजिटल रूट कभी 3,6,9 नहीं आता, जबकि 3 और 6 को डबल करने पर डिजिटल रूट हमेशा 3 और 6 पर ही लौटता है, और 9 को किसी भी संख्या से गुणा करने पर डिजिटल रूट हमेशा 9 ही रहता है।
3 6 9 कोड का ज्यामिति से गहरा संबंध है, क्योंकि वृत्त (360°=9), त्रिभुज (120°=3), और आयत (90°=9) सभी 3,6,9 से जुड़े हैं। इसी अवधारणा का उपयोग करते हुए, टेस्ला ने AC मोटर का आविष्कार किया जिसमें 3 कॉइल को 120° (जिसका डिजिटल रूट 3 है) पर रखा गया।
निकोला टेस्ला के 369 कोड की तरह, आज AI और डेटा साइंस नई तकनीकी क्रांति ला रहे हैं। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के अनुसार 2030 तक 92 मिलियन जॉब्स खत्म होंगी और 170 मिलियन नई जॉब्स AI से संबंधित बनेंगी। यह दर्शाता है कि टेस्ला के नवाचार की भावना को अपनाकर, डेटा साइंस में करियर बनाने का यह सही समय है।
निकोला टेस्ला ने बिना तार के बिजली (वायरलेस एनर्जी) ट्रांसमिट करने की कोशिश की, जो आज के डेटा ट्रांसमिशन सिस्टम, जैसे कि इमेज प्रोसेसिंग में डेटा कंप्रेशन और OCR तकनीकों की नींव रखता है। यह दर्शाता है कि टेस्ला का दूरदर्शी दृष्टिकोण आज की वायरलेस और डिजिटल तकनीकों का आधार है।
Keep this summary
Save it to LunaNotes and it becomes a real note in your library — editable, searchable, and ready to turn into flashcards or a diagram. Free to start.
Save to LunaNotesOr summarise for another video.
This summary and transcript were automatically generated using AI with the Free YouTube Transcript Summary Tool by LunaNotes.
Related summaries
2026 में डेव्स के लिए AI युग की सबसे ज़रूरी स्किल्स और करियर रोडमैप
वीडियो में बताया गया है कि AI के बढ़ते उपयोग के बावजूद, 84% डेवलपर्स इसका उपयोग करते हैं लेकिन केवल 29% इस पर भरोसा करते हैं। कोड की गुणवत्ता गिर रही है और 'कोड चर्न' (7.1%) दोगुना हो गया है। सफलता के लिए 10 कोर स्किल्स (जैसे डीबगिंग, वर्जन कंट्रोल, सिक्योरिटी) और एक स्पष्ट 12-महीने का रोडमैप (पहले बेसिक्स, फिर फ्रेमवर्क्स, फिर प्रोजेक्ट्स) आवश्यक है।
EBAY क्रैश कोर्स: ड्रॉपशिपिंग, हंटिंग, लिस्टिंग और अकाउंट सेटअप की पूरी गाइड
यह एक व्यापक ईबे क्रैश कोर्स है जो ड्रॉपशिपिंग, प्रोडक्ट हंटिंग, प्रोफिटेबल लिस्टिंग और अकाउंट क्रिएशन को शुरू से अंत तक, प्रैक्टिकल प्रदर्शन के साथ सिखाता है। इस वीडियो में आप जानेंगे कि कैसे डॉलर्स में कमाई शुरू करें, फेक गुरुओं से बचें, और एक लॉन्ग-टर्म ऑनलाइन स्किल और बिजनेस विकसित करें।
मल्टीडायमेंशनल और 2D अर्रे: कोडिंग, इनपुट और मैट्रिक्स मल्टिप्लिकेशन
इस वीडियो में मल्टीडायमेंशनल अर्रे, विशेषकर 2D अर्रे की परिभाषा, कोडिंग, इनपुट लेना और मैट्रिक्स मल्टिप्लिकेशन की प्रक्रिया विस्तार से समझाई गई है। साथ ही, ट्रांसपोज़ मैट्रिक्स और इंडेक्सिंग के महत्वपूर्ण कॉन्सेप्ट्स को भी उदाहरणों के साथ समझाया गया है।
सम्मिश्र संख्याएँ (Complex Numbers) एक ही क्लास में पूरा कॉन्सेप्ट | NDA Maths
इस वीडियो में, प्रवीण सर सम्मिश्र संख्याओं (Complex Numbers) के पूरे अध्याय को एक ही क्लास में कवर करते हैं। यह क्लास विशेष रूप से NDA, CDS, और अन्य सैन्य परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए डिज़ाइन की गई है, जिसमें बेसिक से लेकर एडवांस कॉन्सेप्ट तक को आसान भाषा और ट्रिक्स के साथ समझाया गया है। आप इस वीडियो में इमेजिनरी नंबर, कॉम्प्लेक्स नंबर के अलजेब्रिक ऑपरेशंस, कंजुगेट, मॉड्यूलस, आर्गुमेंट, डी-मॉयवर प्रमेय, घनमूल और लोकस जैसे सभी महत्वपूर्ण टॉपिक्स को विस्तार से सीखेंगे।
क्लास 9 फिजिक्स: बल और जड़त्व के नियम विस्तार से समझें
इस वीडियो में क्लास 9 के लिए बल (Force) और जड़त्व (Inertia) के महत्वपूर्ण कॉन्सेप्ट्स को सरल और रोचक तरीके से समझाया गया है। जानिए बल के प्रकार, संतुलित और असंतुलित बल, जड़त्व के तीन प्रकार और इनके जीवन में उपयोग।
Most viewed summaries
A Comprehensive Guide to Using Stable Diffusion Forge UI
Explore the Stable Diffusion Forge UI, customizable settings, models, and more to enhance your image generation experience.
Kolonyalismo at Imperyalismo: Ang Kasaysayan ng Pagsakop sa Pilipinas
Tuklasin ang kasaysayan ng kolonyalismo at imperyalismo sa Pilipinas sa pamamagitan ni Ferdinand Magellan.
Mastering Inpainting with Stable Diffusion: Fix Mistakes and Enhance Your Images
Learn to fix mistakes and enhance images with Stable Diffusion's inpainting features effectively.
Pamamaraan at Patakarang Kolonyal ng mga Espanyol sa Pilipinas
Tuklasin ang mga pamamaraan at patakaran ng mga Espanyol sa Pilipinas, at ang epekto nito sa mga Pilipino.
How to Install and Configure Forge: A New Stable Diffusion Web UI
Learn to install and configure the new Forge web UI for Stable Diffusion, with tips on models and settings.
Found this summary useful?
Take it with you. One click puts it in your own LunaNotes library.
Save to LunaNotes