वीडियो सारांश: कक्षा 12 इतिहास अध्याय 5 - यात्रियों की नज़र से (त्वरित संशोधन)
इस वीडियो में कक्षा 12 के इतिहास अध्याय 5 'थ्रू द आइज़ ऑफ द ट्रैवलर्स' (यात्रियों की नज़र से) का त्वरित संशोधन कराया गया है। मुख्य रूप से तीन यात्रियों, अलबरूनी, इब्न बतूता और फ्रांस्वा बर्नियर, के भारत के बारे में लिखे गए वृत्तांतों पर चर्चा की गई है, जिसमें सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक पहलुओं को शामिल किया गया है।
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हेलो माय डियर स्टूडेंट्स। कैसे हैं आप सभी? दिस इज आयुष चौर्य एंड वेलकम टू नेक्स्ट टॉपर ह्यूमैनिटीज। जहां हम मनाते
हैं देश का भविष्य। और मैं आपकी हिस्ट्री टीचर आप सभी का स्वागत करती हूं हमारी इस रैपिड रिवीजन सीरीज में जहां पर आज हम
रिवाइज करेंगे हमारा क्लास 12th हिस्ट्री का चैप्टर नंबर फाइव थ्रू द आईज ऑफ द ट्रैवलर। चलिए जी। तो अगर हम इस चैप्टर की
बात करें तो इस चैप्टर में हमने पढ़ना है 10थ से लेकर 17 सेंचुरी के समय तक का। और यहां पर हमें बताया जाएगा कि इंडिया को
विजिट करने जो समय-समय पर मिडीवल इंडिया में जो अलग-अलग ट्रैवलर्स आए हुए थे उन्होंने इंडिया को किस नजरिए से देखा हुआ
था और इंडिया के बारे में क्या अकाउंट जो है वो उन्होंने यहां पर प्रिपेयर करे हुए थे। तो सबसे पहले अगर हम समझे कि भाई
ट्रेवलर्स किसी भी देश में आते क्यों हैं? ठीक? तो सबसे पहले क्या बताया जाता है कि भाई या तो वो सर्च ऑफ वर्क में आ रहे हैं
कि एंप्लॉयमेंट अपॉर्चुनिटी यहां किसी भी रीजन में अच्छी खासी होती है। इस कारण से वो यहां पर आएंगे। या फिर क्योंकि उनके
रीजन में नेचुरल क्लैमिटीज हो रही हैं, डिजास्टर्स हो रहे हैं। फ्लड की सिचुएशन आ रही है। इस कारण से वो किसी नए एरिया पर
मूव कर जाते हैं। या फिर आप बोल सकते हो कि वो एज अ ट्रेडर, मर्चेंट, सोल्जर, प्री, पिल्ग्रिम्स इस तरीके से किसी नए
एरिया को, किसी नई जिंदगी को, किसी नए चीजों को घूमने के लिए विजिट करने के लिए आ जाया करते हैं। या फिर आप बोल सकते हो
कि इब्न बबतूता जैसे लोग जो सेंस ऑफ़ एडवेंचर है ना कि भाई अपने यहां तो सब कुछ बढ़िया ही है। लेकिन फिर भी दुनिया घूमना
है, देखना है। तो इस कारण से भी किसी नए लैंड की तरफ ये लोग आगे बढ़ जाया करते हैं। अब अगर हम इस चैप्टर की बात करें तो
यहां पर हमने थ्री मेन ट्रेवलर्स के बारे में पढ़ना है। तो सबसे पहले हमारे अलबरूनी, दूसरे हैं इब्नबन बबतूता और
तीसरे हैं फ्रेंकोइस बर्नियर। तो सबसे पहले अगर हम शुरुआत करें अलबरूनी के साथ तो अलबरूनी कब आए थे इंडिया में? ये आए
हुए थे 11th सेंचुरी में। किस कंट्री से आए हुए थे? ये आए हुए थे उज्बेकिस्तान से। अब जब उज्बेकिस्तान से आए हुए थे तो
इन्होंने इंडिया को देखा विजिट किया और यहां पर अपने जो भी एक्सपीरियंसेस थे ऑब्जरवेशंस थे उन सभी को उन्होंने अपनी
किताब में लिखा जिसका नाम था किताबुल हिंद। इस किताब को उन्होंने लिखा अरेबिक लैंग्वेज में और जब आए कैसे थे इंडिया में
ये बात हम सभी बहुत अच्छे से जानते हैं कि भाई ख्वारिज्म से मोहम्मद महमूद गजनी जो है जब उन्होंने वहां से अटैक किया उस जगह
पर तो वहां से वो अपने साथ कई सारे इंटेलेक्चुअल्स जो हैं स्कॉलर्स जो हैं उनको इंडिया लेकर आते हैं और इंडिया में
इन लोगों ने रहकर अपने-अपने ऑब्जरवेशंस को रिकॉर्ड किया हुआ है। तो जब अगर आप अलबरूनी की बात करेंगे तो ये महमूद गजनवी
के समय पर इंडिया में आए और इन्होंने इंडिया के ऊपर जो अकाउंट लिखा उसमें कई सारे मैटर्स के ऊपर जैसे कि रिलीजन हो
गया, फिलॉसफी हो गया, एस्ट्रोनॉमी हो गया, सोशल लाइफ हो गया। इन सभी चीजों के बारे में उन्होंने अपना अकाउंट जो है वो लिखा
हुआ है। अब वहीं पर अगर हम हमारे दूसरे ट्रेवलर की बात करें यानी कि इब्नबतूता की। तो ये इंडिया में आए हुए थे 14th
सेंचुरी पर। ठीक है? 14th सेंचुरी में तो भैया आए कहां से? ये आए हुए थे टेंजियर मोरक्को से। और मोरक्को से आने के बाद
अपने सेंस ऑफ एडवेंचर के ऊपर जो सफरनामा जो किताब इन्होंने लिखी हुई थी उसका नाम था रेहला। अब रहला इन्होंने भी किस में
लिखी हुई है? अरेबिक लैंग्वेज में लिखी हुई थी। अब यहां से समझते हैं कि भाई जिस समय पर इम्रबतूता इंडिया में आए हुए थे उस
समय पर इंडिया के रूलर कौन थे? तो उस समय पर इंडिया में रूल कर रहे थे दिल्ली सल्तनत के तुगलक डायनेस्टी के मोहम्मद बिन
तुगलक। ठीक? सो मोहम्मद बिन तुगलक से ये मिलते हैं और उनसे मोहम्मद बिन तुगलक बहुत ज्यादा इंस्पायर होते हैं और इस कारण से
उन्हें दिल्ली का काजी भी वो यहां पर अपॉइंट कर दिया करते हैं। ठीक है जी। अब यहां पर अगर हम बात करें कि भाई इब्न
बतूदा को इंडिया ने किन किन मैटर्स के ऊपर उन्होंने अपनी किताबें लिखी हुई है। तो यहां पर उन्होंने इंडियन सिटीज को ऑब्जर्व
किया। इंडिया के कम्युनिकेशन सिस्टम को ऑब्जर्व किया। स्लेवरी को देखा, एग्रीकल्चर को देखा, ट्रेड को देखा। ठीक
है? तो ये सभी पैराटर्स जो हैं जिनकी बात इब्न बबतूता के अकाउंट से हमें देखने को मिलेगी। उसके बाद अगर बात करी जाए
फ्रेंकवाइज बर्नियर की तो भाई फ्रेंकइस बर्नियर जो है वो एक यूरोपियन ट्रेवलर हैं जो इंडिया में आते हैं मुगल पीरियड में।
ठीक है जी? तो इनका डेट ऑफ विजिट देखा जा रहा है 17 सेंचुरी के आसपास। ठीक है? अगर किस कंट्री से आए हुए हैं तो फ्रांस से आए
हुए हैं। और इन्होंने जो किताब लिखी हुई है उसका नाम है द ट्रेवल्स इन द मुगल एंपायर। ठीक है? तो भाई मुगल एंपायर में
आने के बाद फ्रैंकॉइस बर्नर ने जो जो भी चीजें देखी हुई है उन सभी को उन्होंने अपने फ्रांस राजा के लिए है ना उनको
एकनॉलेज किया हुआ है और यहां पर उन्होंने वो सभी चीजें अपनी फ्रेंच लैंग्वेज में लिखी हुई है। चलिए उसके बाद बात करी जाए
कि भाई जब आए हुए थे तो इंडिया में कौन रूल कर रहा था उस समय पर तो शाहजहां और उनके बेटे औरंगजेब मतलब पूरा जो 12 साल वो
यहां पर रहे हुए हैं उसमें इन्होंने ये सारे अकाउंट जो है वो अपने प्रिपेयर करे हुए हैं। शाहजहां से लेकर औरंगजेब के समय
तक ये इंडिया में रहे और दारा शिकोह जो कि एक मुगल प्रिंस थे उनके फिजिशियन बनके भी इन्होंने यहां पर काम किया हुआ था। ठीक है
जी। अब जो अकाउंट लिखा हुआ है उसका सब्जेक्ट मैटर क्या है? तो यहां पर उन्होंने बात करी हुई थी ओनरशिप ऑफ लैंड
की कि इंडिया में किस तरीके से पब्लिक ओनरशिप ऑफ लैंड होने के कारण इंडिया क्यों बहुत ही ज्यादा बैकवर्ड है? क्यों वहां पर
डेवलपमेंट नहीं हो रहा है। उसके बाद उन्होंने बात करी द काइंड ऑफ टाउनंस की कि इंडिया में जो भी टाउनंस है वो कैंप
टाउनंस होते हैं कि राजा जहां पर भी है वहीं पर डेवलपमेंट आपको देखने को मिलेगा। और जैसे ही राजा या नवाब वहां से जाएंगे
तो ऑटोमेटिकली वो जो एरिया होगा वो डेजर्टेड हो जाएगा। ठीक? तो ये सारे मैटर्स जो हैं सारी इंपॉर्टेंट चीजें जो
है वो आपको याद रखनी है क्योंकि इससे बहुत सारे एमसीक्यू जो है वो आपके यहां पर फ्रेम हो जाया करते हैं। चलिए जी अब यहां
से अगर हम आगे बात करें तो वन बाय वन हमारे हर एक ट्रेवलर को देखते हैं। तो सबसे पहले शुरुआत करेंगे अलबरूनी की। अब
अलबरूनी की बात करी जाए तो ही लर्न संस्कृत है ना? इन्होंने संस्कृत सीखी। फिलोसफिकल टेक्स्ट के बारे में उन्होंने
बहुत सारी चीजें हमारे इंडिया के बारे में लिखी हुई है। अब अलबरूनी एक ऐसे ट्रेवलर थे जिन्हें एक नहीं बल्कि मल्टीपल
लैंग्वेज आती है। तो ही वाज़ अ फेमस लिंग्विस्ट जिन्हें सीरियाक, अरेबिक, पर्शियन, हिब्रू, संस्कृत ये सभी लैंग्वेज
जो है वो उनमें काफी वेलर्स थे। एंड ही स्पीक अबाउट द मेनी आस्पेक्ट्स ऑफ द इंडियन सोसाइटी। ठीक है? तो अगर आप
अलबरूनी के अकाउंट्स को पढ़ेंगे तो यहां से आपको पता चलेगा कि भ इंडियन सोसाइटी के बारे में बहुत सारी चीजें जो है वो यहां
पर उन्होंने पता लगाई है। और पता लगाई कैसे है? तो ये उन्होंने लगाई हुई है अपने ब्राह्मण मित्रों के थ्रू। है ना? उनके
ब्राह्मण फ्रेंड्स जो उन्होंने यहां पर इंडिया में आकर बनाए उनसे उन्होंने इंडियन सोसाइटी के बारे में बहुत सारी चीजें समझी
हुई हैं। तो विद दी हेल्प ऑफ हिज ब्राह्मण फ्रेंड्स उन्होंने इंडिया का जो टेक्स्ट था उसे पढ़ा उसे समझा और यहां पर उन्होंने
इंडियन सोसायटी के बारे में बहुत सारी चीजें हमें बताई हुई है। तो सबसे पहले उन्होंने बताई हुई थी हमारे चतुर वर्ण
सिस्टम के बारे में। ठीक है? जो हमारी वर्ण व्यवस्था है उसके बारे में वो बताते हैं कि भाई दिस इज नॉट यूनिक टू इंडिया कि
यूनिक में जिस तरीके से सोशल ऑक्यूपेशन के बेसिस पर सोसाइटी को कैटेगराइज किया है चार वर्णों में ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य
शूद्रा दिस इज नॉट यूनिक टू इंडिया ये जरूरी नहीं है कि ये सिर्फ इंडिया में ही इंडिया के जैसे जो दूसरी सोसाइटीज है जैसे
कि पर्शियन सोसाइटीज वहां पर भी इसी तरीके का जो कैटेगराइजेशन है वो आपको इस तरीके से देखने को मिल जाया करता है। उसके बाद
जो दूसरी चीज उन्होंने यहां पर बोली वो ये थी कि भाई जो नोशन ऑफ पोल्यूशन यहां पर स्प्रेड हो रहा था कि भाई एक बार अगर आप
किसी अनटचेबल्स को देख लेते हैं छू लेते हैं तो आप भी कहीं ना कहीं आप पवित्र हो गए इंप्योर हो गए तो इस नोशन से कहीं ना
कहीं वो डिसएग्री करते हैं और ये बोलता है कि नेचर अपने आप हर एक चीज को है ना जो विंड है जो सनलाइट है वो अपने आप हर एक
चीज को क्या कर रहा है प्योर कर रहा है तो जस्ट बिकॉज़ द सीइंग और ऑब्ज़ेंस या आपको किस आपके टच से कोई भी इंसान इंप्योर नहीं
हो जाता ना आप उस चीज़ से इंप्योर हो रहे हैं ठीक है सो ही डिस अप्रूव्ड द नोशन ऑफ़ ऑफ पोल्यूशन। अब दूसरी चीज जो इसमें सबसे
इंपॉर्टेंट जिसके ऊपर आपके क्वेश्चन बन जाते हैं ज्यादातर थ्री मार्क्स के तो वो ये है कि भाई अलवरूनी जब इंडिया में आए
हुए थे तो उन्हें इंडियन टेक्स्ट को इंडियन नॉलेज को समझने के लिए उन्हें कौन-कौन से बैरियर्स को फेस करना पड़ा? तो
सबसे पहला बैरियर जो उन्होंने फेस किया दैट इज द लैंग्वेज। लैंग्वेज क्या थी बेटा? कि अगर आप संस्कृत लैंग्वेज की बात
करेंगे तो वो काफी कॉम्प्लेक्स है एज़ कंपेयर टू अरेबिक एंड परर्शियन लैंग्वेज। वहां पर हर एक टर्म के लिए एक नया कनोटेशन
यूज़ किया जाएगा। एक नया वर्ड यूज़ किया जाएगा। एक ही वर्ड के कुछ अलग-अलग मीनिंग्स थे। तो इस कारण से अलबरूनी को इस
संस्कृत टेक्स्ट को पढ़ना समझने में बहुत ज्यादा डिफिकल्टी हुई। उसके बाद दूसरी चीज कि भाई इंडिया के जो रिलीजियस बिलीफ एंड
प्रैक्टिससेस थे वो काफी अलग थे परर्शियन रिलीजियस बिलीफ एंड प्रैक्टिससेस से। तो यहां पर उन्हें उन्हें समझना है ना हमारा
वे ऑफ़ वरशिप, हमारा वे ऑफ़ कल्चर, कस्टम ये सभी चीजें अलबरूनी के समझने के लिए काफी मुश्किल हो रहा था। उसके बाद जो तीसरी चीज
जो तीसरा बैरियर उन्होंने फेस किया दैट इज द इनसुलरिटी ऑफ द इंडियन पापुलेशन कि इंडियन पापुलेशन जो है वो ज्यादा अपने
आईडिया थॉट्स जो है वो किसी नए व्यक्ति के साथ शेयर करना पसंद नहीं करती है। ठीक है? दे आर नॉट वेरी ओपन। तो इस कारण से
अलबरूनी जो है वो इंडियन सोसाइटी के बारे में बहुत सारी चीजें जो कॉमन मास से समझ सकता था वो यहां पर वो नहीं समझ पाए हैं।
चलिए अब इसके बाद अगर हम आगे बात करें तो यहां पर हम बात करेंगे इब्नबतूदा की। सो इब्नबतूदा हु केम इन द 34 मोरक्कोस में
इनका बर्थ हुआ था। उसके बाद इनकी जो किताब है उसका नाम है रहला। ठीक है? तो रहला द बुक ऑफ ट्रेवल इन्होंने यहां पर किताब
लिखी हुई है। ठीक है? अब इस किताब को उन्होंने अरेबिक लैंग्वेज में लिखा और इसमें उन्होंने डिटेल अकाउंट हमें
प्रोवाइड किया हुआ है 14 सेंचुरी के इंडियन सोसाइटी के बारे में। ठीक? अब कुछ बातें जो हमें इब्न बबतूता के बारे में
समझनी है वो भी देख लेते हैं। तो सबसे पहले इन्हें ग्लोब ट्रॉटर या ग्लोबल ट्रैवलर कहा जा रहा है क्योंकि भाई पूरी
दुनिया घूमने का शौक है। ऑलमोस्ट इंडिया मतलब ऑलमोस्ट वर्ल्ड जो है वो यहां पर वो घूम चुके थे। उसके बाद बात करी जाए तो भाई
घूमने का इसलिए शौक है क्योंकि उन्हें ये लगता है कि अगर व्यक्ति को सीखना है समझना है तो इंस्टेड कि वो बुक से पढ़े ज्यादा
अच्छा है कि वो चीजों को घूमे है ना ट्रैवल करें और ट्रैवल करने से उसे बहुत सारी चीजें जो है वो यहां पे बहुत सारा
नॉलेज जो है वो गेन कर सकता है। उसके बाद अगर इब्नबतूता की बात करी जाए तो भाई काफी इंटेलेक्चुअल आदमी थे वो है ना बहुत
ज्यादा उन्हें जुडिशियल नॉलेज था और इस कारण से जब मोहम्मद बिन तुगलक के राज में वो इंडिया आते हैं तो उस समय पर ही वाज़
अपॉइंटेड एस द काजी बाय द तुगलक। ठीक? उसके बाद आगे जाकर मोहम्मद बिन तुगलक सॉरी मोहम्मद बिन तुगलक जो होते हैं वो इब्न
बबतूता को एज अ एंबेसडर बनाकर मंगोल्स के यहां पर चाइना भेजा जाता है। उसके बाद ही आल्सो ट्रेवल्ड है ना कि इंडिया के अलावा
भी और भी कई सारी चीजें उन्होंने ट्रेवल करी हुई थी। जैसे अफ्रीका, अरेबिया, परर्शिया, इंडिया, चाइना, मालदीव्स, बंगाल
सुमात्रा ये सभी जगह जो है वो इब्न बबतूता ने बहुत अच्छे तरीके से ट्रैवल जो है वो इंडिया में करी हुई है। चलिए अब उसके बाद
वो चीजें जो आपको इब्नबतूता के बारे में याद ही रखनी है जिसके ऊपर क्वेश्चन बन सकता है और बनता भी है। ठीक है जी? तो वो
क्या है? सबसे पहले द एक्साइटमेंट ऑफ द अनफमिलियर कि इब्नबूता जब इंडिया में आए तो इंडिया में आके जो भी चीजें उन्होंने
देखी उन सभी चीजों को उन्होंने कंपेयर किया उन चीजों के साथ जो वो पहले देख चुके थे। तो अगर आप बात करेंगे कोकोनट की तो
कोकोनट को उन्होंने बताया कि भाई कोकोनट का ट्री कैसे दिखता है? एक खजूर के पेड़ के जैसा दिखता है और उसका जो फ्रूट है वो
एक ह्यूमन स्कल के जैसा दिख रहा है। वहीं पर अगर आप पान के पत्ते की बात करेंगे तो उसको उन्होंने कंपेयर किया ग्रेप वाइन के
साथ। ठीक है? अरेका नट की उन्होंने बात करी कि भाई जिस तरीके से जायफल होता है वैसा ही कुछ अरेका नट भी होता है। ठीक है?
सुपारी भी उसी तरीके से दिखती है। उसके बाद उन्होंने बात करी इंडियन सिटीज की। तो भाई इंडियन सिटीज के बारे में उन्होंने
काफी अच्छा डिस्क्रिप्शन दिया हुआ है कि भाई ये सिटीज जो है ये काफी डेंसली पॉपुलेटेड है, प्रोस्पेरस है। म्यूजिकिकल
शोज़ होते हैं यहां पर। है ना? ताराबाद की उन्होंने बात करी थी। दिल्ली और दौलताबाद जैसे बड़े शहरों का उन्होंने डिस्क्रिप्शन
दिया हुआ था। और ये भी बताया हुआ था कि जब भी कभी भी इन्वजशन होता है, वार होता है तो उस समय पर ये जो शहर होते हैं ये
डिसरप्ट हो जाया करते हैं। चलिए अब उसके बाद जो दूसरी इंपॉर्टेंट चीज जो यहां पर इब्न बबतूता ने हमें बताई हुई है वो था उस
समय का पोस्टल सिस्टम कि भाई पोस्टल सिस्टम जो है वो काफी रैपिड था, काफी एफिशिएंट था और उसको जिस तरीके से बनाया
गया था उसके बारे में उन्होंने बहुत ही हमें वे डिस्क्रिप्शन यहां पर दिया हुआ है। तो उन्होंने हमें बताया हुआ था कि जो
पोस्टल सिस्टम है वो दो तरीके से काम कर रहा है। पहला है उल्लूब और दूसरा है यहां पर आपका दवा। सो उलूब क्या हुआ? हुआ उलूब
वो तरीका हुआ जहां पर जो कम्युनिकेशन है वो हॉर्स के थ्रू किया जा रहा है कि भाई हॉर्स पोस्ट बनाए हुए हैं यहां पर एव्री
फोर मील पर और हर एक तरीका जो है हर एक हॉर्स जो है वो एक रिले रेस की तरीके से अपना इंफॉर्मेशन जो है वो यहां पर इस
तरीके से आगे बढ़ाते हुए दिखेगा। उसके बाद दूसरा जो था वो था फूड सोल्जर का। ठीक है? कि फुट पोस्ट है कि एक इंसान दौड़ते हुए
अपने हाथ में संदेशा लेकर एक जगह से दूसरी जगह यहां पर मूव कर रहा है। तो हर माइल में है ना पर माइल थ्री स्टेशंस यहां पर
थे और ज्यादा रैपिड भी कौन सा था? ज्यादा रैपिड आपका दवा था। ठीक है? कि भले ही पैदल या दौड़ कर उसे किया जा रहा है लेकिन
रैपिड इज दवा। ठीक है जी। चलिए अब यहां पर बात करते हैं हमारे तीसरे ट्रेवलर यानी कि फ्रेंकइस बर्नर के बारे में। तो फ्रेंकइस
बर्नर जो कि फ्रांस से इंडिया आए हुए थे। ठीक है? और ये इंडिया आए किसके समय पर? तो ये आए थे इंडिया में जब रूल कर रहे थे
यहां पर मुगल्स। तो मुगल्स के समय पर इन द सर्च ऑफ अपॉर्चुनिटी ताकि उन्हें कोई ऐसी अपॉर्चुनिटी कोई ऐसा काम मिल जाए मुगल
एडमिनिस्ट्रेशन में ताकि वो मुगल एडमिनिस्ट्रेशन की सारी चीजें जो है सारे राज जो है वो फ्रांस के राजा को बता सके
और वहां पर ये बता सके कि भाई इंडिया जो है वो कितने खराब तरीके से रूल किया जा रहा है और इसके लिए जरूरी है कि फ्रांस
जैसे जो महान राज्य हैं वो इंडिया को आकर कॉलोनाइज कर ले। ठीक है? तो यहां पर इन्होंने अपना सारा के सारा वर्क जो है वो
डेडिकेट करते हैं वो लुई 14 को। ठीक है? और यहां पर उन्होंने बताया हुआ है कि किस तरीके से ईस्ट जो है वो कितना डीजनरेटेड
है, कितना खराब है एज कंपेयर टू वेस्ट। ठीक है? तो ये सारा कंपैरिजन ईस्ट और वेस्ट का उन्होंने अपने अकाउंट में यहां
पर किया हुआ है। उसके बाद द डीजनरेटेड ईस्ट में उन्होंने बताया हुआ है कि भाई अगर आप बात करेंगे तो उन्होंने अपने हर एक
अकाउंट में हर एक डिस्क्रिप्शन में हमेशा यही बताया हुआ है कि इंडिया में सारी चीजें खराब है। और यूरोप जो है फ्रांस
स्पेशली अगर आप बात करें तो वहां पर सारी चीजें जो है वो बिल्कुल बढ़िया है। वो काफी सुपीरियर है एज़ कंपेयर टू इंडिया।
देन ही टॉक अबाउट द बाइनरी अपोजिशन ठीक है कि भाई इंडिया और फ्रांस जो है दोनों के बीच में हर एक तरीके से उन्होंने कंपैरिजन
किया है और ये बताया हुआ है कि इंडिया में हर एक चीज खराब है और वही चीज अगर आप फ्रांस की बात करेंगे तो वो चीज वहां पर
बहुत बढ़िया है जैसे कि द मोड ऑफ प्रॉपर्टी एक्यूमुलेशन। ठीक है जी। उसके बाद उन्होंने बताया हुआ है कि अगर आप मुगल
सिटीज की बात करेंगे तो दीज़ आर द काइंड ऑफ़ अ कैंप टाउन। है ना? कैंपन क्या हो गया बेटा? कि जहां पर राजा है जहां पर राजा का
कोर्ट लगा हुआ है वहीं के आसपास अगर आप देखेंगे तो आपको डेवलपमेंट मिलेगा। और जैसे ही राजा उस जगह से अपनी कैपिटल को
शिफ्ट करता है या राजा वहां से जाता है तो ऑटोमेटिकली वो पूरा की पूरा एरिया जो हो जाता है वो डेजर्टेड हो जाता है। खाली हो
जाता है। ठीक है जी। अब वहीं पर अगर इनके इंपॉर्टेंट चीज की बात करें जिसके ऊपर आपको क्वेश्चन बनेगा। ठीक है? सो दैट इज द
क्वेश्चन ऑफ लैंड ओनरशिप कि लैंड ओनरशिप के बारे में यहां पर फ्रैंकॉइस बर्नर ने क्या बताया हुआ है? तो यहां पर वो बताते
हैं कि अगर आप मुगल एंपायर की बात करेंगे तो देयर वाज़ अ लैक ऑफ़ प्राइवेट प्रॉपर्टी। क्यों? क्योंकि भाई सारी की सारी
प्रॉपर्टी जो है वो किसके पास है? वो स्टेट के पास है, राजा के पास है, एपरर के पास है। ठीक है जी? तो यहां पर उन्होंने
बताया हुआ है क्योंकि सारी की सारी प्रॉपर्टी किसके पास है? क्राउन के पास है। और इस कारण से ना तो स्टेट उसका
डेवलपमेंट करता है, ना तो स्टेट उसके किसी तरीके से आगे बढ़ाने की उसकी बात करता है, प्रॉफिट को इंक्रीस करने की बात करता है।
और ना ही जो व्यक्ति जो उस पर काम कर रहा है वो इस चीज की बात करता है। क्यों? क्योंकि अगर वो प्रॉफिट को बढ़ाता भी है
तो अल्टीमेटली सारा का सारा प्रॉफिट जो है वो स्टेट यहां पर ले जाएगा। ठीक है जी। उसके बाद उन्होंने बताया हुआ है इस कारण
से क्योंकि सीधी सी बात है कि भाई पूरी की पूरी ओनरशिप किसके पास है? क्राउन के पास है। इस कारण से जो व्यक्ति जो इंडिविजुअल
वहां पर काम कर रहा है वो उस जमीन के ऊपर लॉन्ग इन्वेस्टमेंट करने के लिए रिलक्टेंट है। है ना? और इस कारण से वो जमीन जो है
उसकी प्रोडक्टिविटी जो है वो धीरे-धीरे ग्रेजुअली डिक्रीज की तरफ जा रही है। लेकिन वहीं पर अगर हम अबुल फजल जैसे
राइटर्स की बात करें जो कि मुगल एंपायर को रिप्रेजेंट कर रहे हैं। तो यहां पर उन्होंने बताया हुआ है कि अगर टैक्स लिया
भी जाता था अगर रेवेन्यू लिया भी जाता था लोगों से तो दैट इज द ओनली काइंड ऑफ अ रेनुमरेशन क्योंकि स्टेट जो है वो लोगों
को प्रोटेक्शन प्रोवाइड कर रहा है और इस कारण से है ना सिर्फ और सिर्फ इस सोवनिटी के लिए इस प्रोटेक्शन के लिए स्टेट जो है
वो लोगों से थोड़ा बहुत पैसा रेनुमरेशन जो है वो लिया जा रहा है। ठीक है जी। उसके बाद उन्होंने ये भी बताया कि इंडिया में
दो ही तरीके के लोग हैं। दो ही तरीके के ग्रुप है। एक या तो बिल्कुल क्रीम लेयर यानी कि एलट ग्रुप है या फिर बाकी के जो
पूरी की पूरी जनता है वो बिल्कुल गरीब वर्ग है। ठीक है? बिल्कुल पुअर क्लास हो गई। तो इसके लिए उन्होंने बताया हुआ है कि
इंडिया में मिडिल क्लास जैसी कोई सिचुएशन नहीं है। मिडिल क्लास जैसा कोई ग्रुप नहीं है। ना इंटेलेक्चुअल्स हैं ना आप
ब्यूरोक्रेट्स आपको देखने को मिलेंगे। या तो आपको बिल्कुल अमीर लोग मिलेंगे। ठीक है? जो क्रीम लोग हो गए और या तो फिर आपको
बिल्कुल पुअर लोग इंडिया में देखने को मिल जाएंगे। वहीं पर अगर इन्हीं की थ्योरी से इंस्पायर्ड होकर आगे जाकर कुछ और यूरोपियन
राइटर्स ने इंडिया का व्यू प्रिपेयर किया हुआ है। तो उनमें से एक है मॉनटिस्की जिन्होंने बात करी हुई थी ओरिएंटल
डिस्पोटॉटिज्म की। ठीक है? कि भाई ओरिएंट में या ईस्ट के अगर आप बात करेंगे तो वहां पर जो राजा हैं वो डिस्पॉटिक है। वो किसी
की बात नहीं सुनते। अपनी मर्जी से जो भी उन्हें राज्य अपना एडमिनिस्ट्रेशन करना है वो उस तरीके का रूल जो है वो इंडिया में
कर रहे हैं। वहीं पर अगर आप कार्ल मार्क्स की बात करेंगे। सो ही रोट अबाउट द एशियाटिक मोड ऑफ़ प्रोडक्शन जिसमें
उन्होंने ये बताया कि जो भी प्रॉफिट होता था वो सारा का सारा स्टेट जो है वो लोगों से ले रहा है। ठीक है? इसके कारण जो
वर्किंग क्लास है जो प्रोलेट्रेट क्लास है वो वहां पर अपना डेवलपमेंट नहीं कर पा रहा है। सो आर्टिस्ट हैड द नो इंसेंटिव टू
इंप्रूव द क्वालिटी ऑफ़ देयर मैन्युफैक्चरर्स बिकॉज़ द प्रॉफिट इज़ एप्रोप्रिएटेड बाय द स्टेट। और
मैन्युफैक्चरर्स जो हैं लेकिन ये भी बताया गया कि भाई भले ही इंडिया में सारी चीजें है ना मुगल एडमिनिस्ट्रेशन में अगर आप बात
करोगे कि सारा का सारा प्रॉफिट जो है वो स्टेट ले रहा है लेकिन उसके बावजूद अगर आप इंडिया का टेक्सटाइल देखोगे इंडिया का
आर्ट एंड क्राफ्ट देखोगे तो ये जो है ये वर्ल्ड में कहीं ना कहीं अपनी पहचान बना रहा है। सो मैन्युफैक्चरर्स आर
एक्सपोर्टेड इन द एक्सचेंज ऑफ़ द गोल्ड एंड सिल्वर इन द प्रिशियस मेटल दैट फ्लोट टू द इंडिया। ठीक है? तो ये दोनों
कंट्राडिक्टरी ओपिनियन जो है वो यहां पर आपको बताए गए हैं। अब यहां पर कुछ और चीजें हैं जिनके ऊपर और क्वेश्चन आपसे बन
सकते हैं। दैट इज़ द वुमेन स्लेव सती एंड लेबर कि इन लोगों के बारे में इन ट्रेवलर्स ने क्या बताया हुआ है? तो अगर
हम बात करें इब्नबतूता की तो उन्होंने हमें स्लेव्स के बारे में इनफेशन दी हुई है कि स्लेव्स जैसे कमोडिटी सेल करी जाती
है वैसे ही स्लेव्स भी मार्केट में सेल करे जा रहे हैं या फिर एक्सचेंज करे जा रहे हैं एज अ गिफ्ट। उसके बाद कुछ काफी
ट्रेंड होते हैं स्लेव्स जो म्यूजिक और डांस वगैरह परफॉर्म करते हैं रॉयल फैमिलीज में। ठीक है? वेडिंग वगैरह में ये चीजें
कर रही हैं। उसके साथ फीमेल स्लेव्स भी होती हैं जो कुछ समय पर है ना कभी-कभी जो राजा होते हैं जो नवाब होते हैं वो उन्हें
एज अ स्पाई के तरीके से यूज़ कर रहे हैं। ठीक है? कि जब भी उन्हें कोई चीजें पता लगानी होती है अपने नोबल्स के बारे में,
अपने एडमिनिस्ट्रेटर्स के बारे में तो वो उनके घर में उन्हें एज अ डोमेस्टिक स्लेव बनाकर एक डोमेस्टिक हेल्प बनाकर उनके घरों
में अप्लाई कर देते हैं। उन्हें छोड़ देते हैं और वहां से सारी इंफॉर्मेशन जो होती है वो इन स्लेव्स के थ्रू राजा तक आ जाया
करती है। वहीं पर अगर आप सती प्रैक्टिस की बात करेंगे तो बर्नियर हमें बता रहे हैं कि इंडिया में सती जो है वो एक तरीके की
इनह्यूमन प्रैक्टिस जो इंडिया में प्रैक्टिस हो रही है। जहां पर कुछ महिलाएं तो इस डेथ को चेयरफुली एम्ब्रेस कर रही
हैं। लेकिन वहीं पर अगर आप बात करेंगे तो कुछ छोटी-छोटी बच्चियां जो हैं उन्हें जबरदस्ती उस फनूनल पायर के ऊपर धकेल दिया
जा रहा है। उन्हें वहां पर मार दिया जा रहा है। ठीक है जी। चलिए और यहां पर बर्निया ने एक पहला सती जो देखा हुआ था वो
देखा हुआ था उन्होंने लाहौर में। अब वहीं पर अगर हम बात करें तो इन तीन मेन ट्रेवलर्स के अलावा भी और भी कई सारे
ट्रेवलर्स थे जो इंडिया में आए हुए जिन्होंने अपने डिटेल अकाउंट जो है वो हमें इंडिया के बारे में प्रोवाइड किया
हुआ है। तो सबसे पहले अगर हम पर्शियन ट्रेवलर की बात करें तो वो हैं अब्दुल रजाक जो कि इंडिया में आते हैं। कॉजिक में
आते हैं और कॉजिक में पहले तो आकर उन्हें चीजें काफी अलग लग रही थी। स्ट्रेंज लग गई थी। लेकिन बाद में जब उन्होंने एक टेंपल
देखा तो उन्हें ये बात समझ में आई एक आइडल हाउस को देखकर कि भाई ऐसी चीज जो है वो उन्होंने पूरी दुनिया में इसके अलावा कहीं
भी नहीं देखी हुई है। चलिए उसके बाद अगर हम पोर्चुगीज़ ट्रेवलर की बात करें तो 1498 में वास्कोडि गामा के सी रूट को डिस्कवर
करने के बाद 1500 से कई सारे ट्रेवल्स इंडिया में आ रहे हैं और उनमें से एक हुए ड्वार्टे बारबोसा जिन्होंने यहां पर आपको
विजयनगर एंपायर की ट्रेड की सोसाइटी के बारे में बहुत सारी डिटेल इनेशन जो है वो हमें यहां पर प्रोवाइड करी हुई है। वहीं
पर अगर हम बात करें डच, इंग्लिश और फ्रेंच ट्रेवलर की तो ये यहां पर 1600 के आसपास आपको आते हुए दिखेंगे। जिनमें से सबसे
फेमस है वो एक जूसट रॉबर्ट नोबेली जो कि एक इटालियन ट्रेवलर हैं। हु ट्रांसलेटेड द इंडियन टेक्स्ट द यूरोपियन लैंग्वेज। वहीं
पर अगर आप बात करें जीन बेप्टाइज्ड टवेनियन की जो कि एक फ्रेंच ज्वेलर हैं। इंडिया में आते हैं। छह टाइम उन्होंने
इंडिया को विजिट किया हुआ है। एंड ही कंपर्ड इंडिया टू द ईरान एंड द ऑटोमैन एंपायर। मनुकी की बात करी जाए तो यह भी एक
इटालियन डॉक्टर हैं जो कि इंडिया में आते हैं और इंडिया में आकर ही सेटल होने का डिसाइड कर लेते हैं। ठीक है जी? तो ये सभी
इंपॉर्टेंट ट्रैवलर जिनको आपको याद रखना है इस चैप्टर में जिनके ऊपर आपसे क्वेश्चन बनेंगे। अब इसके साथ ही कुछ और इंपॉर्टेंट
क्वेश्चन मैंने आपको दिए हुए हैं जो आप यहां पर प्रैक्टिस करेंगे। जैसे कि पहला है कि राइट अ नोट ऑन द किताबुल हिंद।
दूसरा कि एक्सप्लेन द ऑब्ज़ ऑब्जरवेशंस ऑफ़ देव बदूता अबाउट द सिटीज ऑफ़ द इंडिया वि द स्पेशल रेफरेंस टू दिल्ली। एंड थर्ड वन इज़
अ 12 ईयर यंग विडो एस्टोनिश बर्नियर्स डीपली व्हिच मेड हिम अ वाइब्रेंट क्रिटिक ऑफ द सती सिस्टम। एनालिसिस द स्टेटमेंट
अंडर द एविडेंस ऑफ़ द सती सिस्टम एज़ प्रोवाइडेड बाय द बर्नियर। ठीक है जी? तो ये कुछ इंपॉर्टेंट क्वेश्चन है जिन्हें
आपको प्रैक्टिस करनी है। इसके आंसर आप लिखकर मुझे डीएम कर सकते हैं। टिल देन पढ़ते रहिए, आगे बढ़ते रहिए। थैंक यू सो मच।
और अगर आप चाहे तो इसका डिटेल वीडियो भी नीचे दी हुई लिंक से वन शॉट में देख सकते हैं। थैंक यू।
इस अध्याय में मुख्य रूप से तीन प्रमुख यात्रियों - अलबरूनी, इब्न बतूता और फ्रांस्वा बर्नियर के भारत संबंधी विवरणों पर चर्चा की गई है। ये सभी यात्री विभिन्न कालखंडों में भारत आए और उन्होंने अपने लेखों में यहाँ के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक पहलुओं का गहन विश्लेषण प्रस्तुत किया।
इन तीनों यात्रियों के वृत्तांत उस समय के भारत की सामाजिक संरचना, आर्थिक स्थिति और राजनीतिक घटनाक्रमों को समझने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण स्रोत हैं। अलबरूनी ने भारतीय संस्कृति और धर्म पर, इब्न बतूता ने भारतीय समाज और बाजारों पर, जबकि बर्नियर ने मुगल साम्राज्य की राजनीति और प्रशासन पर विस्तृत जानकारी दी है। ये विवरण इतिहासकारों को उस कालखंड की एक जीवंत तस्वीर प्रस्तुत करते हैं।
यह वीडियो कक्षा 12 इतिहास के अध्याय 5 के प्रमुख बिंदुओं को एक केंद्रित और सारगर्भित रूप में प्रस्तुत करता है, जिससे आप संशोधन कम समय में पूरा कर सकते हैं। वीडियो में तीन यात्रियों के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक पहलुओं पर ध्यान केंद्रित करके उन महत्वपूर्ण विषयों को उजागर किया गया है जो अक्सर परीक्षाओं में पूछे जाते हैं।
हालाँकि तीनों ने भारत यात्रा की, लेकिन उनके दृष्टिकोण और विवरणों में भिन्नता है। अलबरूनी एक विद्वान थे जिन्होंने भारतीय ज्ञान और धर्म पर लिखा; इब्न बतूता एक यात्री थे जिन्होंने दैनिक जीवन और यात्रा मार्गों का वर्णन किया, जबकि बर्नियर एक डॉक्टर और राजनीतिक टिप्पणीकार थे जिन्होंने मुगल दरबार और प्रशासन पर ध्यान केंद्रित किया।
इस शीर्षक का तात्पर्य है कि हम किसी भी देश या युग के इतिहास को बाहरी व्यक्तियों (यात्रियों) के दृष्टिकोण से भी समझ सकते हैं। यह अध्याय हमें सिखाता है कि कैसे विभिन्न सांस्कृतिक पृष्ठभूमि और उद्देश्यों से आए यात्रियों ने भारतीय समाज को देखा और उसका विश्लेषण किया, जिससे इतिहास के एक बहुआयामी दृष्टिकोण का निर्माण होता है।
इस वीडियो के साथ दी गई जानकारी मुख्य बिंदुओं को समझने के लिए पर्याप्त है, लेकिन गहन समझ के लिए आप NCERT की किताब और अन्य विश्वसनीय स्रोतों का संदर्भ ले सकते हैं। इसके अतिरिक्त, हमारी वेबसाइट पर बिहार बोर्ड 12वीं के लिए 40 नंबर फिक्स करने का बेहतरीन तरीका जैसे मार्गदर्शिकाएँ भी उपलब्ध हैं जो आपकी परीक्षा तैयारी को और अधिक सुदृढ़ कर सकती हैं।
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