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TMC Crisis,  POK Protest, Cockroach Janta Party Rally & Great Parda Debate | Teen Taal S2 Ep 160

TMC Crisis, POK Protest, Cockroach Janta Party Rally & Great Parda Debate | Teen Taal S2 Ep 160

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[00:01]

पीताल प्रेजेंटेड बाय धर्म

[00:07]

आई लव यू भी ना कह रही मासू बात भी ना

[00:11]

करनी छोड़ रही

[00:12]

तानाशाही नहीं चलेगी नहीं चलेगी नहीं

[00:14]

चलेगी

[00:15]

टिटू मेरी बहन कितते है

[00:17]

हॉट लोग होते हैं बहुत कूल

[00:21]

थैंक्स थैंक यू ताऊ मेरे लिए तारीफ की

[00:23]

आपने

[00:23]

सर सब सब लोग सबकी साले अपने दिमाग में

[00:27]

पिक्चर चल रही है जब तक जनीमा है

[00:30]

अगर पर्दा है

[00:31]

तो राज है

[00:32]

तो राज है

[00:33]

तो सिमरन भी होगी तो सिमरन भी होगी

[00:35]

जया पर्दा भी हो सकती है

[00:37]

जया पर्दा

[00:39]

तो तुमने मुझे नंगा देखा है

[00:41]

ये घूसा और घूसंड में क्या फर्क है घूसा

[00:43]

जो होता है मेरे ख्याल से थोड़ा ऊपर तक

[00:46]

मारा घूसण जो होता है घुसा करके मारा जाता

[00:48]

है मर्द की अकल पे जो पर्दा पड़ा है बहुत

[00:51]

पहले पड़ गया फिर भी किस किस टाइम में

[00:53]

पड़ा होगा कुछ पता नहीं आप इतने उसे कह

[00:57]

रहे हैं

[00:57]

बहुत सही फिर भी किस टाइम खूब पर्दा है कि

[01:00]

चिलमन से लगे बैठे हैं। वहीं पर्दा है।

[01:03]

वहीं बैठे हैं पकड़ के समझे। अरे अरे क्या

[01:06]

एक्सप्रेशन दे रहे हो?

[01:08]

अरे मैं खो रहा हूं।

[01:09]

क्लोज अप देके

[01:10]

चरमराती खाट थी सो है खड़ी खाड़े खाड़े

[01:14]

तुम भी खड़खड़ाओ मत। आपकी जीवन में कुछ

[01:17]

नहीं घट रहा।

[01:18]

एक तो जब आप हमको देख के बोलते हैं, हमको

[01:19]

अपने ऊपर डाउट।

[01:20]

अरे आपके मोमेंट्स, जीवन क्या है?

[01:22]

नहीं तो इनके जीवन में कुछ घट नहीं रहा

[01:24]

है। इनके जीवन में सब बढ़ रहा है। क्या

[01:25]

बढ़ रहा है भाई? अरे दिन

[01:27]

ब्या भाई ब्या

[01:30]

थोड़ा सा पर्दे से बाहर आइए

[01:32]

चुराने ले चेहरे की नूर ए मेरे हम नवाज

[01:37]

ऐ मेरे हुजूर

[01:41]

तीन ताल प्रेजेंटेड बाय धर्म

[01:47]

तीन ताल कैसे प्रारंभ हुआ कथा सुनिए तो

[01:52]

हुआ यह कि एक आश्रम था जिसमें वे लोग आते

[01:55]

थे तो जो जीवन में बहुत दौड़ चुके थे और

[01:57]

अब बैठने का कोई वैचारिक कारण खोज रहे थे।

[02:01]

आश्रम के मुख्य द्वार पर बड़े अक्षरों में

[02:03]

लिखा था अति कर्म से बचो विश्राम ही परम

[02:07]

तत्व है। अंदर प्रवेश करते ही बाई ओर

[02:10]

झमाझम संहिता का विशाल अदृश्य ग्रंथालय

[02:14]

था। वहां साधक किताबों के बीच सिर रखकर के

[02:18]

दिन रात ऊंघते थे। सुस्तोपनिषद के पूरा

[02:22]

पूरे 18 खंड सोह कर आश्रम के आचार्य

[02:26]

समुसकानंद

[02:28]

के चेहरे पर ऐसी शांति थी जैसे उन्होंने

[02:30]

वर्षों से किसी निर्णय को अंतिम रूप दिया

[02:34]

ही ना हो। उनके शिष्य धकेल कांत सुबह शाम

[02:38]

खुरखुंद महामंत्र का जाप करवाते थे। खुर्र

[02:42]

खुर्र खुरखुंदाय नमः आश्रम में कई विभाग

[02:46]

थे जिसमें झन्नाट साधना केंद्र सबसे

[02:49]

प्रतिष्ठित था। वहां साधक किसी काम को

[02:51]

शुरू करने का संकल्प लेते और फिर वर्षों

[02:54]

तक उसी संकल्प की महानता पर विचार करते

[02:57]

रहते। दक्षिण दिशा में झौसाचार पीठ था।

[03:02]

झौसाचार हां वहां सिखाया जाता था कि

[03:05]

व्यस्त दिखने की कला क्या होती है। आश्रम

[03:08]

के महंत टुनटुनेश्वर जी ठलुवेंद्र युग के

[03:11]

अंतिम ज्ञाता माने जाते थे क्योंकि वह

[03:14]

कनबतिया काल की पुरानी इमारत में विद्वान

[03:17]

साधुओं के कान में घंटों फुसफुसाते रहते

[03:20]

और फिर घोषणा करते कि आज नया ज्ञान

[03:23]

प्राप्त हुआ। जब पूछा जाता कि क्या ज्ञान

[03:26]

मिला तो वह कहते कि अभी शोधाधीन है।

[03:29]

रिसर्च का सब्जेक्ट सब्जेक्ट टू रिसर्च

[03:32]

है।

[03:34]

आश्रम में एक विचित्र साधु भी था। उसका

[03:37]

नाम था झबर घोंच। उसकी जटाएं इतनी विचित्र

[03:41]

थी कि तीन कबूतर, दो गिलहरियां और एक खोई

[03:44]

हुई पतंग उनमें स्थाई निवास कर जाए। लोग

[03:48]

उन्हें चलता फिरता पारिस्थिकी तंत्र भी

[03:50]

कहते थे। संध्या होते ही पूरा आश्रम मुख्य

[03:54]

प्रांगण में एकत्र होता। समुसकानंद, धकेल

[03:57]

कांत और टुनटुनेश्वर महात्मा एक स्वर में

[03:59]

घोषणा करते। जो काम आज हो सकता है वह कल

[04:02]

भी हो सकता है। जो कल हो सकता है उसके लिए

[04:05]

परसों बना ही है और फिर शंखनाद के साथ सभा

[04:09]

समाप्त हो जाती। कालांतर में उदारीकरण,

[04:12]

वैश्वीकरण, डिजिटलीकरण, स्टार्टअपीकरण,

[04:16]

एल्गोरिद्मीकरण और प्रायोजकीकरण की

[04:18]

आंधियां चली। बड़े-बड़े आश्रम उखड़े, कई

[04:22]

मठ कंटेंट बन गए। अनेक गुरु थंबनेल हो गए

[04:26]

और शिष्य नोटिफिकेशन।

[04:28]

झमाझम आश्रम भी समय की इस प्रचंड धारा से

[04:32]

अछूता ना रहा और झन्नाट साधना केंद्र ने

[04:35]

घोषणा की कि अब संकल्प लेने के बजाय उस पर

[04:38]

चर्चा की जाएगी। धीरे-धीरे आश्रम की विशाल

[04:42]

परिधि लाल दीवारों के बीच समा गई।

[04:45]

कन्वतिया काल की पुरानी इमारत अब स्टूडियो

[04:48]

कहलाने लगी। घंटों कान में फुसफुसाकर

[04:52]

शोधाधीन ज्ञान देने वाले टुनटुनेश्वर जी

[04:55]

के स्थान पर माइक के चौंगे आ गए और संध्या

[04:59]

सभा का नाम पड़ गया तीन ताल। शुरू करते

[05:02]

हैं सीजन दो एपिसोड 160 प्रेजेंटेड बाय

[05:06]

थर्माकूल कूलर्स ऋषि कमलेश ताऊ, आचार्य

[05:09]

आसिफ खान शाह और महंत कुलदीप सरदार की

[05:11]

पावन उपस्थिति में। जय हो जय हो जय हो

[05:15]

बहुत खूब यार

[05:16]

प्रणाम नमस्कार

[05:18]

जीत

[05:20]

ये लाल दीवाने थोड़ी सी सिकुड़ गई लेकिन

[05:22]

कमफी लगती है

[05:23]

हम

[05:24]

वैसे थोड़ा सा एक

[05:27]

सिकुड़ गई मतलब

[05:28]

कम छोटा बड़ा था ना अपनी प्रॉपर्टी

[05:30]

पूर्वजों का

[05:31]

हां अच्छा वैसे

[05:32]

फिर आंधियां चली ना बहुत सारी उदारीकरण

[05:35]

वैश्वीकरण

[05:36]

अभी भी आंधी चल सकती है

[05:37]

चल रही

[05:38]

यही हुआ है

[05:38]

थर्मोकल है

[05:39]

जो खोला गया था उसको कहते हैं ना ओपनिंग

[05:41]

अप दी इकॉनमी मी

[05:43]

हम

[05:43]

जैसे खोला गया ना वैसे सब कुछ बंद होता

[05:46]

गया चारों तरफ से

[05:47]

थोड़ा कैसा रहा आपका वीक

[05:49]

मेरा तो बहुत स्ट्रांग रहा

[05:51]

अच्छा

[05:53]

8%

[05:56]

नहीं मैंकि एथेनॉल का सेवन ना अपने लिए ना

[06:00]

अपनी गाड़ी के लिए अच्छा मानता हूं

[06:01]

हम

[06:02]

तो मैं

[06:03]

पर आपके पास विकल्प ही क्या है अब

[06:04]

नहीं पर वीकेंड क्या था कि वीकेंड में जो

[06:06]

है

[06:07]

दिल्ली में एक हलचल सी हुई

[06:09]

हम हम

[06:09]

सैटरडे को

[06:11]

हां कॉकरोच चों का आगमन हुआ हम

[06:14]

जो मुख्य कॉकरोच था

[06:16]

सीधा लैंड किया

[06:17]

हां

[06:17]

अभिजीत दीप के

[06:18]

उसका पदार्पण हुआ हमारे दिल्ली के

[06:20]

एयरपोर्ट पर और जो गलती

[06:25]

प्रधानमंत्री ने की थी उसे गृह मंत्री ने

[06:28]

ठीक कर दिया

[06:29]

मतलब शिक्षा मंत्री ने की थी प्रधानमंत्री

[06:31]

ने की थी पूरे सरकार ने की थी

[06:34]

उसको परमिशन दे दी कॉकरोच जनता पार्टी को

[06:36]

परमिशन दे दी गई

[06:38]

अरे जिस दिन

[06:40]

लीक हुआ था

[06:42]

क्वेश्चन पेपर नीट का पता चल गया था जिस

[06:45]

दिन

[06:46]

उस दिन इसको गंभीरता से लेते हुए श्री

[06:49]

धर्मेंद्र प्रधान जी को मतलब

[06:52]

मंत्री प्रधान को अगर प्रधानमंत्री से

[06:54]

नहीं हो

[06:55]

तो मंत्री प्रधान को आ जाना था टीवी पर और

[06:58]

कहना था

[06:59]

कि हम इसको बहुत सीरियसली ले रहे हैं। हद

[07:02]

हो गई है हर साल 2 साल में यहां वहां

[07:05]

परीक्षा पत्र लीक होते हैं। इसका सॉलिड

[07:07]

इंतजाम करेंगे। एक महीना दीजिए। इसके बाद

[07:10]

हम ऐसा ठोक बजा के ठीक कर देंगे कि कभी यह

[07:13]

शिकायत नहीं आएगी। यह बोलना था जिम्मेदारी

[07:15]

लेते हुए रिजाइन करने की जरूरत नहीं थी।

[07:18]

पर नहीं ये होता है ना कि कारपेट के अंदर

[07:21]

डालो ढको ढको जब तक खींच पाता है खींच लो।

[07:24]

बोलने में ही उन्होंने काफी समय ले लिया।

[07:25]

पहली बार दो या तीन दिन

[07:27]

चक्कर में जो है मंत्री प्रधान के चलते

[07:29]

प्रधानमंत्री तक बात पहुंच गई।

[07:30]

हम

[07:31]

और कॉकरोच आ गए। पर वो अच्छा डिसीजन हुआ

[07:36]

कि

[07:36]

अलव किया गया उनको कि जाने दो। दिन का

[07:38]

टाइम है।

[07:39]

ऐसा ही कॉकरोच नहीं निकलेगा।

[07:40]

बहुत गर्मी भी थी।

[07:41]

गर्मी बहुत ज्यादा थी।

[07:43]

पर वहां जैसे

[07:46]

ये तो स्पष्ट हुआ एक कि लेफ्ट के छात्र

[07:51]

संगठनों ने समर्थन दिया।

[07:54]

दीपांकर भट्टाचार्य भी पहुंचे। वहां पे

[07:57]

नेता सोनम

[07:58]

नफली वाले पहुंचे। जो आजादी मांगते हैं वो

[08:01]

पहुंचे।

[08:01]

सोनम वांगचुक भी पहुंचे। हालांकि वह किसी

[08:03]

राजनीतिक पार्टी से जुड़े नहीं है। पर यह

[08:06]

तो स्पष्ट हुआ कि मतलब

[08:09]

इस मसले पर लेफ्ट के समर्थन से सीजेपी को

[08:12]

गुरेज नहीं है। मतलब वो उनको अछूत नहीं

[08:14]

समझती है अपने कॉज के लिए। जैसे और

[08:18]

अंबेडकर को ले की वो लेकर के पुस्तक

[08:22]

अभिजीत दीप के आए दिखाते हुए

[08:24]

उसको ऑटोबायोग्राफी लेके आए। हम जो कभी

[08:27]

लिखी नहीं अंबेडकर ने

[08:29]

एक बंदा संविधान भी लेके आया

[08:31]

हम

[08:31]

और उसको खोला तो उसकी डायरी थी उसने कहा

[08:34]

ये मैंने लिख रखा है ये मेरा जिसमें मैंने

[08:36]

आर्टिकल लिखे हैं

[08:37]

कई रंग रूट भी आए थे अच्छे

[08:39]

बहुत अच्छे-अच्छे सुंदर

[08:40]

कॉपरेज का कपड़ा कोई बाली पहन के टिकिया

[08:42]

लगा के

[08:43]

वो 90% लोग जैसे देश के युवा हैं 90%

[08:46]

क्लूलेस थे हमारा समाज है 10% बहुत शार्प

[08:50]

थे उनके विचार बहुत मजबूत थे इस बारे में

[08:53]

कि अपने को कुछ तो करना पड़ेगा

[08:55]

हम् हम

[08:56]

लेकिन दीपके ने ऐसा सोचा नहीं होगा ना कि

[08:58]

इतना बड़ा बड़ा नहीं मतलब इतना

[09:00]

हालांकि प्रोटेस्ट ये एक बड़ा ये ये एक

[09:03]

ऐसा विषय है ना क्या कहा जाए इस प्रोटेस्ट

[09:06]

को क्या हम एक सफल और बड़ा प्रोटेस्ट कह

[09:08]

सकते हैं या नहीं

[09:09]

सफल और छोटा

[09:12]

हां शुरुआत तो ठीक ही की उन्होंने

[09:14]

नहीं नहीं शुरुआत तो उन्होंने बहुत खराब

[09:16]

की

[09:16]

उसको कंपेयर उससे कर रहे हैं

[09:17]

भारी बेइज्जती का कारण था पर प्रोटेस्ट

[09:19]

सफल हुआ सफलता क्या होता है आपका

[09:21]

ऑब्जेक्टिव क्या था पहला

[09:23]

धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें

[09:24]

उसमें नहीं वो तो जो रियल इशू है वो है कि

[09:30]

पेपर लीक की तरफ पूरे राष्ट्र का ध्यान

[09:33]

आकर्षित करना हो गया ना

[09:37]

एक दिन के लिए सारे लोग इसके बारे में बात

[09:40]

करने लगे ना कि करना पड़ेगा धर्मेंद्र

[09:42]

प्रधान को जाना चाहिए या नहीं जाना चाहिए

[09:44]

पर वो अब और भी शहरों में अलग-अलग शहरों

[09:46]

में पुणे में करेंगे और जगहों पे

[09:48]

नहीं वो तो ऑब्वियसली करना चाहेंगे

[09:50]

हम

[09:51]

पर दिल्ली में अगर इतना बड़ा पहला वाला

[09:53]

नहीं कर पाए तो दूसरा वाला शायद सीक्वल का

[09:56]

चलना बहुत मुश्किल होता है।

[09:58]

इन्होंने एक एक मुझे लगता था जैसे सोशल

[10:00]

मीडिया पे पार्टी शुरू हुई पूरे देश के

[10:03]

लोग जुड़ गए। इतने फॉलोअ हो गए। उस दिन

[10:05]

मुझे लग रहा था इनको हर शहर में बोलना

[10:07]

चाहिए था कि इतने बजे ऑनलाइन जुड़िए। थ्रू

[10:11]

वीडियो कॉल वो उससे भी बड़ा हो सकता था।

[10:14]

हर शहर से बड़े-बड़े

[10:16]

उसको संभालना बड़ा क्या?

[10:17]

क्यों? हर जगह पे लोग खड़े रहते हैं यार।

[10:19]

उनको डालना था कि हर शहर से जुड़िए। वही

[10:21]

तो भारत में इस वही सड़क पर उतरे बिना

[10:27]

प्रेशर बनता नहीं है। ऑनलाइन मान लीजिए

[10:29]

लोग ऑनलाइन को अपनी जगह पे निर्धारित

[10:31]

कीजिए एक जगह जहां जितने लोग इकट्ठा हो

[10:34]

सकते हैं युवा वो जुड़े ताकि दिखता कि

[10:36]

यहां पूरे एक नेशनल लेवल पे आपका

[10:39]

प्रोटेस्ट हुआ सिर्फ जंतरमंतर पे नहीं

[10:42]

उतना दुर्गा तो बाहर रहता ही है दिन भर

[10:44]

उतना हां उतने जो ये जनरेशन जेंजी जनरेशन

[10:48]

है उतना टाइम ऑनलाइन रहती ही है वो

[10:51]

Instagram लाइव

[10:52]

बेस्ट है सुबह सुबह अगर आप 8:30 9 बजे

[10:54]

देखते तो सिर्फ मीडिया वाले ही दिख रहे थे

[10:56]

फ्रेम में

[10:57]

हम में एक बात है

[10:59]

आप बढ़िया से वेल पब्लिसाइज करके कोई भी

[11:01]

कार्यक्रम करो 300 आप पहुंचोगे 500 मीडिया

[11:03]

पहुंच

[11:03]

800 हो गया

[11:06]

भीड़ में काउंट तो वो भी होंगे वो भी आए

[11:07]

थे

[11:08]

हमारी

[11:08]

अच्छा है संख्या बढ़ाने

[11:09]

हमारी एक साथी रिपोर्ट

[11:10]

ऐसा था यार मीडिया वाले एक दूसरे का

[11:12]

इंटरव्यू कर रहे थे

[11:13]

मतलब एक यूट्यूबर दूसरे का इंटरव्यू कर

[11:15]

रहा था

[11:16]

क्योंकि उनको आता ही नहीं था

[11:18]

उनको माइलेज चाहिए अपना नंबर चाहिए

[11:20]

एक बंदा बहुत गुस्सा था उसने कहा कि हमको

[11:22]

जंतरमंतर में परमिशन दिया है फिर भी हमको

[11:25]

सड़क से सड़क पे करवा रहे हैं तो उसको

[11:28]

रिपोर्टर ने कहा कि यहीं पे करते हैं।

[11:29]

उसके अंदर नहीं करते।

[11:30]

उसके अंदर नहीं जाते हैं।

[11:32]

इतने मतलब इतना ज्ञान लेके लोग आए हुए थे।

[11:34]

बहुत सारे मैंने तो देखे ना

[11:36]

पहली बार की सर उनका एक्सपोज़र नहीं है। 18

[11:39]

19 साल के बच्चे हैं। पहली बार देख रहे

[11:41]

हैं जंतर पहली बार गए होंगे।

[11:43]

मतलब उनको भी थोड़ा लेट लेट अस कट देम सम

[11:45]

स्लैक।

[11:46]

ये नहीं मैं तो चाहता हूं यार क्योंकि अपन

[11:48]

ने उस उम्र में जो है प्रोटेस्ट किए हैं

[11:51]

मार खाया है। वो सब करना ही चाहिए उस उम्र

[11:54]

में। तो वो प्रोसेस ना जब तक अंटिल ट्रायल

[11:57]

बाय फायर नहीं हुआ हम

[11:59]

हां तो वो

[12:00]

धूप में है कोल्ड ड्रिंक पी रहे हैं कोल्ड

[12:02]

कॉफी लाते मंगवा रहे हैं आइस्ट उसमें नहीं

[12:05]

होता प्रोटेस्ट

[12:06]

ये सरकार भी बहुत बेरहम होती है इस बात

[12:08]

प्रोटेस्ट जो है आपको एकदम जी जान लगा के

[12:10]

करना चाहिए दौड़ना चाहिए फिर जब पहला लाठी

[12:13]

बरसता है ना

[12:14]

पहले तो पुलिस वाले दोनों में धक्कामुक्की

[12:16]

होती है थोड़ी-थोड़ी

[12:16]

बैरिकेटिंग लेके

[12:17]

उसके बाद जब बजना शुरू होता है ना

[12:19]

देन यू रन एंड देन यू फॉल

[12:22]

समटाइम्स यू डोंट नो नो व्हाट टू डू तो आप

[12:24]

दीवार फाकर पीछे चले जाते हो

[12:26]

पता चलो वही पुलिस वाले

[12:27]

कभी कभी प्रिटेंड करते हो कि मैं पुलिस के

[12:29]

साथ हूं मैं उनके साथ नहीं हूं ये सब कौन

[12:32]

सिखाएगा बच्चों को

[12:34]

ऑनलाइन है आप नहीं सीख सकते ये मारियो

[12:36]

नहीं है भाई साहब

[12:36]

वो ग्राउंड पे जाके एक्सपीरियंस करना होता

[12:38]

है

[12:39]

तो बच्चों को हमेशा प्रोटेस्ट में आगे आना

[12:42]

चाहिए

[12:42]

कॉलेज के बच्चों को स्कूल के बच्चों को

[12:44]

नहीं कॉलेज के बच्चों को आगे आना चाहिए और

[12:48]

आपको फिर सीखोगे नहीं तो बड़े हो के जब

[12:50]

पुलिस मारेगी तो आपको बेइज्जती भी महसूस

[12:51]

होगी और दर्द भी

[12:53]

और ऐसे बड़े होकर पुलिस मारती है ना

[12:56]

तो आपको दर्द नहीं होता है। बेइज्जती होती

[12:57]

है।

[12:58]

किसी कॉज में मारा तो आपको दर्द होता है।

[13:01]

सिर्फ बेइज़्ज़ती नहीं प्राउड होता है कि

[13:02]

हमने खाया था डंडे। बच्चों को बताओगे यार।

[13:04]

आई थिंक

[13:05]

लेकिन सरकार बहुत बेरहम थी उस दिन।

[13:07]

मतलब कैनन वाटर ही मारते यार। मतलब

[13:10]

थोड़ा ठंडक मिल जाता।

[13:11]

हम

[13:12]

गर्मी

[13:12]

वहां पे रहता है हमेशा।

[13:13]

नहीं मारे इस बार की जान।

[13:14]

अरे ये लोग किया नहीं ना कुछ।

[13:16]

तड़पाया भी। हां। नहीं तो अरे पीसफुल

[13:19]

पीसफुल प्रोटेस्ट रखना भी एक सफलता थी कि

[13:22]

यह मेक श्योर करना कि अराजकता है

[13:24]

वो असफलता थी। देखो यह पहली बार किया।

[13:26]

पीसफुल प्रोटेस्ट रखा नहीं गया था। उनसे

[13:29]

हो ही नहीं पाता कुछ। यह देखो हकीकत को

[13:32]

मैं मानता हूं यह प्रोटेस्ट सक्सेसफुल रहा

[13:36]

क्योंकि इसने देश एक बहुत जरूरी मुद्दे की

[13:40]

ओर देश का ध्यान आकर्षित किया। सफल रहे

[13:42]

उसमें। ठीक है? धर्म धर्मेंद्र प्रधान

[13:45]

इस्तीफा दें ना दें। क्योंकि इस्तीफा

[13:48]

देंगे तो कोई दूसरा बनेगा ना। क्या ही

[13:50]

फर्क पड़ता है वो थोड़ी ना परीक्षा लेता

[13:52]

है। वो थोड़े पेपर लीक करवाते हैं। पेपर

[13:54]

लीक तो कोई शिक्षक करता है ना। हां मतलब

[13:57]

या सिस्टम से जुड़ा हुआ कोई व्यक्ति जो

[13:59]

कोई जनरली शिक्षा ही करता है।

[14:02]

ठीक है? और गुरु जो है देवता भगवान मतलब

[14:05]

गुरु गोविंद दो दाऊ काको लागे पाव

[14:07]

ताको लागो पाए बलिहारी

[14:10]

बलिहारी गुरु आपने गोविंद बताए

[14:12]

पेपर दियो

[14:13]

ठीक है तो सब धर्मेंद्र प्रधान की ओर बता

[14:17]

देते हैं और बलिहारी गुरु तो आपने थे ना

[14:20]

जिन्होंने सेट किया उन्होंने लीक किया जो

[14:23]

ले रहे हैं वो करवा रहे हैं आप बजट बनाती

[14:26]

हैं मैडम उनके पहले भी लोग बनाते थे सारे

[14:31]

लोगों को क्योंकि क्योंकि भारत एक 90% वो

[14:35]

है। समझ रहे हो ना?

[14:38]

नहीं।

[14:39]

हां समझ गए।

[14:40]

हां।

[14:40]

समझ गए ना?

[14:41]

हां।

[14:42]

जस्टिस काजू।

[14:43]

हां। तो वो क्या करते हैं? बजट एक ऐसा

[14:46]

डॉक्यूमेंट है जिसको लीक नहीं होना चाहिए।

[14:50]

सबको एक बिल्डिंग में ले जाया जाता है।

[14:53]

सबके फोन रख लिए जाते हैं। ठीक है? और फिर

[14:56]

वो वहीं रहते हैं। वहीं खाना बनता है।

[14:58]

वहीं खाते हैं। लास्ट डे में हलवा

[15:01]

हलवा बनाते हैं। स्वीट डिश क्यों? फाइनल।

[15:03]

अब कहते हैं कि अब हम उधर जा रहे हैं संसद

[15:05]

में। तुम लोग जाओ अपने घर। नीट की परीक्षा

[15:09]

है। आप जानते हो इतना इंपॉर्टेंट है। कोई

[15:11]

ना कोई कहीं ना कहीं विकेंद्रित है सब

[15:13]

कुछ। कर ही देगा।

[15:16]

सबको बिठाओ एक कमरे में।

[15:19]

फोन ले लो।

[15:22]

और कहो चलिए सेट कीजिए आप लोग। सेट हो गया

[15:27]

आप वहीं रह जब तक एग्जाम नहीं होता आप

[15:30]

कहीं नहीं जाएंगे। ठीक है? पूरे देश के

[15:33]

सेंटरों में यार बैलेट का पूरा आप बैटरी

[15:38]

और क्या है? पूरा इंतजाम ले जाते हो ना

[15:40]

विद सीसीटीवी आल्सो

[15:41]

हम

[15:42]

ईवीएम एंड ऑल

[15:43]

इतना बढ़िया टेलीकम्युनिकेशन नेटवर्क है।

[15:46]

अभी बस 11:00 बजे परीक्षा है। 10:00 बजे

[15:50]

सबको

[15:52]

भेज दिया जाए। प्रिंट कमांड यहीं से देना

[15:55]

है। सब जगह प्रिंट हो जाएगा। दे दो सब।

[15:58]

आईडिया अच्छा है। यह

[15:59]

पहुंचेगा ही नहीं। जो जो इतना टाइमली मैनर

[16:02]

में पहुंचाना है ना कि 10:00 बजे 11:00

[16:03]

बजे परीक्षा 10:00 बजे भेजना है।

[16:05]

हम

[16:06]

वो पहुंचने के सिस्टम ही फ्लॉप हो जाएंगे।

[16:08]

इतने सेंटर्स हैं। नंबर ऑफ सेंटर्स 25 लाख

[16:11]

लोग देते हैं।

[16:11]

अरे तो यहां से प्रिंट कमांड दूंगा मैं।

[16:14]

अरे हम फिजिकल लेके जा रहे हैं। इतना होने

[16:16]

के बाद भी वायु सेना के हेलीकॉप्टर्स हैं।

[16:19]

फिजिकल मतलब फिजिकल वही तो बोल रहा हूं।

[16:21]

आप तो गलत कर रहे हो ना? हां

[16:23]

आप चाहो तो हर सेंटर पे एक प्रिंटिंग मशीन

[16:27]

रख दो बस

[16:28]

वही कि क्या वो सारे सेंटर्स डिजिटली

[16:31]

इंटरनेट से एक वायबल कनेक्शन

[16:34]

तो करना पड़ेगा नहीं वही

[16:35]

नहीं अब क्या है

[16:37]

जहां पर भी मोबाइल फोन का सिग्नल जाता है

[16:40]

वो कनेक्टेड है

[16:42]

ऐसी जगहों पे एग्जाम ही मत करवाओ और मेरे

[16:45]

हिसाब से होता भी नहीं होगा नीट का एग्जाम

[16:47]

जहां मोबाइल फोन का सिग्नल नहीं है असंभव

[16:50]

सा है

[16:50]

हां पर मान लीजिए 1 घंटे पहले टेक्निकल

[16:53]

इशू आ जाएगा।

[16:54]

नहीं नहीं एक घंटे पहले लीक हो गया।

[16:56]

डिजिटल कॉपी को फॉरवर्ड करना

[16:59]

बहुत ही आसान है। हार्ड कॉपी मेरे पास एक

[17:01]

ही कॉपी है।

[17:02]

मैं तो दे ही नहीं रहा हूं ना।

[17:03]

मैं हार्ड ही कॉपी दे रहा हूं आपको।

[17:05]

प्रिंट कमांड दे रहे हो तो फैक्ट से

[17:06]

निकलेगा।

[17:07]

नहीं प्रिंट

[17:08]

प्रिंटिंग मशीन है।

[17:09]

वहां पे दूसरी जगह।

[17:10]

हर सेंटर में प्रिंटिंग मशीन।

[17:11]

उसके भी ज़ेरॉक्स हो सकता है।

[17:13]

अब इतना

[17:13]

निकाल तो निकाल ही लेंगे लोग।

[17:15]

पौ:45 बजे अगर ज़ेरॉक्स निकाल लिया है तो

[17:18]

निकाल लिया है।

[17:19]

फिर उसको अवार्ड देना चाहिए। वह तो 11:00

[17:20]

बजे ऐसे भी जब छात्र को देते हो तो लीक हो

[17:22]

ही जाता है ना।

[17:23]

हम्।

[17:24]

15 मिनट में क्या ही कर लेगा कोई?

[17:26]

आप अभी जो ले जा रहे हो हेलीकॉप्टर से

[17:28]

क्या हर सेंटर पे हेलीकॉप्टर से लेकर

[17:30]

जाओगे?

[17:31]

हां वो तो खैर एक बड़े सेंटर पे ले जाएंगे

[17:33]

और

[17:33]

फिर वहां से अलग-अलग जगहों पे जाते हैं।

[17:35]

पर एक बात है।

[17:36]

कहीं दंगा हो रहा है आर्मी बुला लो। युद्ध

[17:39]

हो रहा है आर्मी बुला लो। बाढ़ आ गई आर्मी

[17:43]

बुला लो। एयरफोर्स वाले को रेस्क्यू करने

[17:45]

के लिए बुला लो। डिफेंस फर्सेस हमने रखे

[17:48]

ही यही है। हम

[17:50]

घरेलू इस्तेमाल ज्यादा हो रहा है।

[17:52]

हां खाली बैठे हो। चलो परीक्षा

[17:54]

गिर गया है। चलो आर्मी वाला बना दो।

[17:56]

मास्टर बना रखा है आपने। हम्। फिर पश्चिम

[17:59]

बंगाल में बढ़िया

[18:02]

माहौल बना हुआ है। तो लिस्ट

[18:05]

अभी तो जब हम लोग यह रिकॉर्ड कर रहे हैं

[18:06]

बुधवार को तो एक लिस्ट भी आ गई है उन

[18:09]

सांसदों की जिन्होंने सूची

[18:11]

बागी सांसद

[18:12]

हां फिर साइन करके दिए हैं कि भ हमारा

[18:14]

सिंग अरेंजमेंट अलग हो जाए और ये लोग

[18:17]

मोस्ट लाइकली एनडीए के पक्ष में जाने वाले

[18:19]

हैं। और उसमें कई चौंकाने वाले नाम भी

[18:20]

हैं। मसलन शत्रुघ्न सिन्हा जो पहले बीजेपी

[18:25]

के साथ ही हुआ करते थे। फिर लंबे समय से

[18:27]

टीएमसी में थे और सायुनी घोष जो इस चुनाव

[18:31]

में जिनके भाषण और मीडिया इंटरव्यूज बड़े

[18:34]

चर्चित रहे और हिंदू मुस्लिम एकता और

[18:38]

सेकुलरिज्म की मजबूत मिसाल के तौर पर उनको

[18:41]

पेश किया गया था चुनाव से पहले कि देखो ये

[18:44]

ना डिगने वाली महिला

[18:46]

उनके भी दस्तखत हैं। तो

[18:49]

युसूफ पठान युसूफ पठान युसूफ पठान हालांकि

[18:52]

कोई आईडियोलॉजिकल

[18:54]

अह मतलब युसूफ पठान ने कभी ऐसा जाहिर नहीं

[18:58]

किया कि इनमें से किसी ने भी बताने में

[19:00]

जैसे आयानी घोष ने जाहिर किया है। पर

[19:04]

इतनी बड़ी टूट की अपेक्षा टीएमसी में थी

[19:07]

आपको मतलब जैसे क्या आपको यह लगता है कि

[19:10]

यह टूट इसलिए हो गई क्योंकि टीएमसी

[19:12]

वैचारिक तौर पे कहीं स्टैंड नहीं करती है।

[19:15]

एक यह आर्गुमेंट आता है बार-बार कि यार

[19:17]

कोई भी पार्टी बने। इसीलिए ठोस वैचारिकी

[19:21]

का उसके पीछे होना जरूरी है। आम आदमी

[19:23]

पार्टी का इसी आधार पर बड़ा क्रिटिसिज्म

[19:25]

होता रहा कि यह पार्टी कभी भी टूट सकती

[19:27]

है। इनकी एक आईडियोलॉजी नहीं है। लेफ्ट आज

[19:30]

बुरी हालत में पर उसकी एक क्लियर

[19:31]

आईडियोलॉजी है। कांग्रेस

[19:33]

इसी वजह से

[19:34]

उसकी बहुत अच्छी खा हालत नहीं है। लेकिन

[19:35]

उसकी एक आईडियोलॉजी है जो ऐसे मौकों पे

[19:38]

शायद

[19:40]

प्रिवेंट करती होगी इस तरह की सिचुएशन को।

[19:42]

पर एक्चुअली कर पाती है या नहीं या यह एक

[19:45]

अ क्या बोलते हैं जो सिद्धांतवादी लोग हैं

[19:48]

उनका गढ़ा हुआ एक मिथ है कि आईडियोलॉजी

[19:50]

कोई शील्ड नहीं है जो इन चीजों से बचा सके

[19:54]

क्योंकि प्रत्येक व्यक्ति की अपॉर्चुनिटी

[19:57]

अपॉर्चुनिज्म में प्रत्येक व्यक्ति की

[19:59]

आस्था जो है वो किसी भी आईडियोलॉजी को

[20:01]

ट्रांसेंट कर सकती है। अवसरवादिता जो है

[20:03]

वो ज्यादा बड़ी चीज है क्योंकि प्रत्येक

[20:06]

व्यक्ति अपना भविष्य बनाने आया है।

[20:08]

व्यक्ति केंद्रित पार्टी में जो व्यक्ति

[20:11]

कहे वही सही होता है। उसकी कोई आईडियोलॉजी

[20:14]

नहीं होती। तृणमूल जो है ममतावादी पार्टी

[20:17]

थी। ममता कहे वही संविधान है। हमारा वचन

[20:21]

ही हमारा शासन है।

[20:23]

तो ऐसी पार्टियों में यह खतरा हमेशा रहेगा

[20:26]

कि जब केंद्र

[20:30]

टूट जाएगा

[20:32]

तो फिर बिखर जाएगा।

[20:36]

भाजपा में

[20:38]

लीडर आए गए।

[20:41]

नरेंद्र मोदी भी एक दिन लीडर नहीं रहेंगे।

[20:45]

भाजपा रहेगी क्योंकि भाजपा

[20:47]

विचारधारा के साथ चलती है।

[20:48]

एक आईडियोलॉजी है इनकी। कांग्रेस में भी

[20:51]

है। कांग्रेस रहेगी। बहुत दिनों से मतलब

[20:55]

परिवार के नियंत्रण में हो तो भी कांग्रेस

[20:57]

की एक आईडियोलॉजी है। एक इतिहास है। जिन

[21:00]

पार्टियों का इतिहास उस व्यक्ति के द्वारा

[21:02]

कुछ भी हो। पहले अटल बिहारी वाजपेयी जी के

[21:05]

साथ थी। फिर अह दूसरे यूपीए में आ गई।

[21:08]

पहले एनडीए में थी, फिर यूपीए में आ गई।

[21:10]

फिर वह इंडिया अलायंस बन रहा है तो उसमें

[21:12]

थी। फिर नहीं थी। फिर नीतीश कुमार बनने

[21:15]

लगे तो उन्होंने विरोध कर दिया। कांग्रेस

[21:18]

और वो साथ नहीं लड़ते। कम्युनिस्टों के

[21:21]

साथ इंडिया अलायंस में थी। क्योंकि वह था

[21:24]

कि ममता बनर्जी डिसाइड करेंगी, पार्टी का

[21:26]

क्या होगा। जब वह कमजोर पड़ जाएंगी, वह

[21:28]

अपना सीट हार जाएंगी, उनकी पार्टी बुरी

[21:30]

तरह से हार जाएगी, तो बाकी लोगों को कोई

[21:34]

डर नहीं रहेगा ना। और अभिषेक बनर्जी का जो

[21:37]

कहिए

[21:38]

का पंजा जो था कस के रख सबको जोड़ के रखा

[21:42]

था क्योंकि

[21:44]

उस पार्टी में किसी को भी टिकट दे दिया

[21:46]

जाता था, वह जीत जाते थे। ऐसी मशीनरी थी

[21:50]

उनकी। आपने जिसको टिकट दे दिया, वह जीत

[21:52]

जाएंगे। जिनको राज्यसभा भेजना है भेज दो।

[21:54]

महाराष्ट्र का एक पुलिस ऑफिसर का बेटा जो

[21:58]

तरह-तरह के आरोपों से घिरा हुआ था। उसको

[22:01]

उन्होंने कहा कि तू सोशल मीडिया पे पॉपुलर

[22:03]

है। इसको एमपी बना देते हैं।

[22:06]

तो वो मर्जी वाली बात थी कि मीम तुमको भी

[22:10]

बना देते हैं। जून तुमको भी बना देते हैं।

[22:14]

जिस चीज को

[22:15]

एक्ट्रेस ऐसा तुम भी बन जाओ। तुम भी बन

[22:17]

जाओ। तुम लोग खुश रहो। इधर-उधर एंटरटेन

[22:19]

करते रहो लोगों को। हमारा भी एंटरटेनमेंट

[22:22]

करते रहो। दैट इज ऑल। यही था उनका कीर्ति

[22:25]

आजाद हां

[22:26]

मतलब क्या है

[22:28]

व्हाट इज योर क्लेम टू फेम

[22:31]

क्रिकेट

[22:32]

1983 वर्ल्ड कप

[22:33]

एक्सक्ट्ली क्योंकि पापा मुख्यमंत्री थे

[22:35]

टीम में हम थे बनाया क्या था भाई किया

[22:37]

क्या था टीम में

[22:39]

रन वगैरह बनाए थे वो ऐसी बात नहीं

[22:40]

क्या कितने बनाए थे भाई

[22:42]

14 बनाए होंगे

[22:43]

सात रन बनाए होंगे

[22:46]

उनका एक पीसी में उन्होंने

[22:47]

14 रन बनाए होंगे

[22:48]

हम

[22:50]

पूरे टूर्नामेंट में कितने रन बनाए थे

[22:52]

मुझे क्रिकेट में कोई इंटरेस्ट नहीं भाई

[22:54]

नहीं है ना हम

[22:55]

1983 में वही होता है ना कि भाई सपोज़ करो

[22:58]

यार कि 2011 वाले में

[23:02]

तेजस्वी उस समय खेलते थे

[23:04]

हम

[23:05]

खेलते

[23:05]

अगर फिट कर दिया गया होता उनको

[23:07]

हम

[23:08]

और काफी लोग हैं ना जो उठाते हैं वो कप

[23:11]

उसमें से सभी थोड़े ना खेलते

[23:13]

एक्स्ट्रा जो होते हैं वो भी पकड़ के खड़े

[23:14]

हो जाते हैं। कीर्ति आजाद के पापा

[23:16]

मुख्यमंत्री थे भाई और उस समय जमाना अलग

[23:20]

था

[23:22]

उनको वो बीजेपी में रहे उनकी पत्नी आम

[23:25]

आदमी पार्टी में रही कांग्रेस में रहे

[23:28]

तृणमूल में कहा ठीक है तुमको बना देते हैं

[23:31]

पिता के बड़े पद पे होने का फायदा तो

[23:33]

मिलता है

[23:34]

हां बिल्कुल मिलता है

[23:35]

वो तो हमारे यहां एक नॉर्म है ये

[23:38]

एक्सेप्शन नहीं है तो और मुझे लगता है ये

[23:41]

स्वीकार्य भी हो गया

[23:42]

उस जमाने में बहुत होता था अभी तो थोड़ी

[23:44]

आवाज भी उठती ना?

[23:45]

हां।

[23:45]

हालांकि अभी भी वह आवाज उठा के क्या कर

[23:47]

लेते हैं।

[23:47]

हां, मतलब क्रिकेट प्रशासक के तौर पर जयशा

[23:52]

बहुत सफल प्रशासकों में गिने जाएंगे। उनके

[23:55]

दौर में

[23:57]

कुछ रिफॉर्म्स भी हुए हैं और

[23:59]

पद पे होने का कारण तो उनके पिताजी हैं

[24:01]

ना।

[24:01]

हां।

[24:02]

उनके पिताजी जो हैं वो अध्यक्ष थे। गुजरात

[24:05]

क्रिकेट एसोसिएशन के।

[24:06]

हम

[24:06]

यह भी बने। तभी तो आप कम्पीट कर पाते हो।

[24:09]

हम

[24:10]

तो है तो

[24:13]

पर एक बात बताइए जैसे यह जो पार्टी हॉपिंग

[24:15]

है एक पार्टी

[24:16]

यह हॉप नहीं कर रहे

[24:18]

हां मतलब ठीक है स्विच कर रहे हैं

[24:20]

स्विच भी नहीं कर रहे

[24:21]

एनडीए में तो जा रहे हैं

[24:23]

साफ होने

[24:24]

नहीं नहीं ये

[24:25]

एनडीए को समर्थन देंगे बिल्स पर

[24:27]

इनका कहना है कि हम तृणमूल कांग्रेस हम

[24:29]

हैं।

[24:30]

अब जैसे राज्यसभा का की सांसद हैं

[24:32]

सुष्मिता देव ठीक है। उन्होंने इस्तीफा

[24:35]

दिया है। राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया है।

[24:37]

अब कोई भी वहां से वो पार्टी तय करेगी कि

[24:40]

वो किसको खड़ा करेंगे। सुष्मिता को ही

[24:41]

खड़ा

[24:42]

राज्यसभा में उनके नंबर टूटने वाले नहीं

[24:44]

है।

[24:44]

वही मैं बता रहा हूं कि

[24:45]

उन्होंने इस्तीफा दे दिया।

[24:46]

उसको अब आप टेक्निकली पार्टी हॉपिंग मत

[24:48]

कहिए। बट इट इज स्विचिंग साइड्स। ठीक है?

[24:51]

टीएमसी तो छोड़ ही रहे हैं या यूपीए तो

[24:53]

छोड़ ही रहे हैं। ये क्लियर है। तो ऐसे

[24:56]

में ये थोड़ा सा अजीब कई बार नहीं होता

[24:59]

होगा। जैसे पार्टी बीजेपी के कार्यकर्ताओं

[25:01]

के लिए उन्होंने साइनी घोष का बहुत

[25:03]

क्रिटिसिज्म किया है। उनकी वैचारिकी का

[25:06]

उसी चीज का जिससे वह दूसरी तरफ स्टैंड

[25:08]

करती थी। या शत्रुघ्न सिन्हा ने के के

[25:11]

बारे में बीजेपी के नेता कार्यकर्ताओं ने

[25:13]

क्या बोला है? बट अभी वही

[25:14]

शत्रुघ्न सिन्हा ने क्या-क्या बोला है।

[25:16]

हां हां

[25:17]

बट तो ऐसे आदमी को क्या भारतीय जनता

[25:20]

पार्टी जब विजय रथ पर सवार है और आप मानते

[25:23]

हैं कि यह व्यक्ति हमारी विचारधारा के

[25:25]

एकदम उलट काम कर रहा था 5 साल में। आपको

[25:27]

आवश्यकता क्या है और क्यों है?

[25:29]

तो इसलिए तो नहीं आ रहे हैं बीजेपी में।

[25:32]

समर्थन तो देंगे ही बिल पर

[25:34]

तो दो

[25:37]

इसमें आप यह मत कहिए उसमें आम ट्विस्टिंग

[25:39]

शामिल नहीं है। ये तो

[25:40]

इस इसमें बीजेपी की जीत है।

[25:44]

कि जो आपको परसों तक गरिया रहा था वो

[25:47]

दरबान बना बैठा है। और वो उनके लिए बहुत

[25:51]

दुर्भाग्यपूर्ण है पर वो करेंगे क्या?

[25:53]

इसमें तो नहीं इसमें इसमें

[25:55]

फाइल का ही मसला नहीं है। फाइल का भी

[25:59]

दिल्ली में दिल्ली में आपने नहीं सबके लिए

[26:02]

फाइल का मसला नहीं है।

[26:05]

दिल्ली में

[26:07]

आपने उनके घर देखे हैं। उनकी लाइफ स्टाइल

[26:12]

एक लेवल पर पहुंच गई है। आप रहेंगे सांसद

[26:14]

ही। आप अपने क्षेत्र जाएंगे। आपके क्षेत्र

[26:16]

में कोई काम नहीं होगा।

[26:18]

हम्म। क्योंकि आपकी पार्टी में

[26:19]

आपके जितने गुरे थे कूटे जा चुके हैं

[26:22]

बढ़िया से

[26:23]

या उधर जा चुके हैं

[26:25]

नहीं कूटे जा चुके हैं बहुत बुरी तरह से

[26:27]

जो गुरे थे आपके मजबूत

[26:30]

आपके क्षेत्र में वहां पर सरकार बदल गई

[26:33]

आपको रेलेवेंट रहना है अगर अपने लोकसभा

[26:37]

चुनाव क्षेत्र में

[26:40]

तो आप कैसे रहेंगे साथ दे के

[26:44]

कि भाई हमारा अब उनसे कोई लेना देना नहीं

[26:46]

है अब हम हम आपको गाली नहीं देंगे। अब हम

[26:49]

आपकी प्रशंसा करेंगे।

[26:52]

हमारी सुविधाओं को

[26:53]

तभी टिकट की तो गारंटी नहीं है। अगली बार

[26:55]

सर्वाइव तो कर जाएगा।

[26:56]

टिकट चांस तो है।

[27:00]

चांस तो है कि 18 अगर शिफ्ट होते हैं

[27:04]

उसमें से चार को मिल जाए।

[27:07]

क्योंकि बीजेपी अपने को गरियाने वाले

[27:09]

कितने लोगों को टिकट दे चुकी है।

[27:11]

बिल्कुल।

[27:13]

है ना? कभी गाली दी थी।

[27:15]

हेमंता विश्व शर्मा मुख्यमंत्री हेमंत

[27:17]

विश्व शर्मा मुख्यमंत्री

[27:19]

हैं।

[27:19]

क्या दिक्कत है?

[27:20]

शुभेंदु अधिकारी मुख्यमंत्री हैं।

[27:22]

एक्सैक्टली तो उनमें से कुछ लोगों को टिकट

[27:25]

मिलेगा। कुछ को नहीं मिलेगा पर दो-ती साल

[27:28]

आराम से तो गुजर जाएगा।

[27:32]

क्योंकि अगर वो तृणमूल में रहते तो तृणमूल

[27:35]

उनको टिकट दे देती।

[27:37]

वही है कि

[27:37]

पर जीतते कैसे?

[27:40]

ऐसे में ये भी बात है कि इसमें यू लुक फॉर

[27:42]

अ बेटर डील रादर देन इलेक्शन से पहले कही

[27:45]

गई आपकी या बातें या जो बातें हैं कि हम

[27:48]

यू नो इसके खिलाफ लड़ रहे हैं। देश में ये

[27:51]

होना हम इन सिद्धांतों में यकीन रखते हैं।

[27:54]

जब कोई नेता ऐसा कहता है ये फिर से वही

[27:57]

मिसाल है कि उसके फेस वैल्यू पे कैसे हम

[27:59]

ले लें? उसको कैसे उसका यकीन कर लें। चाहे

[28:01]

किसी भी पक्ष का हो। अगर वह चुनाव के बाद

[28:05]

यह देखेगा कि मेरे करियर के लिए बेटर डील

[28:08]

क्या है? है और इस आधार पर फैसले लेगा तो

[28:10]

यह एक बड़ा राजनीति का बड़ा वैसा

[28:13]

विरोधाभास है कि व्यक्ति राजनी जिसको अपना

[28:16]

प्रतिनिधि समझता है चुनना चाहता है उससे

[28:19]

वो सम सॉर्ट ऑफ

[28:22]

सिद्धांतवादी होने की अपील करता है थोड़ा

[28:25]

सा प्रिंसिपल ड्रिवन होने की अपील अपेक्षा

[28:28]

करता है कि यार ये आदमी कुछ चीजों पे

[28:29]

स्टैंड लेगा या कम से कम जो बोलता है उस

[28:32]

पे खरा रहे

[28:33]

है ना ये नहीं कि बोले कुछ और करे कुछ

[28:36]

थोड़ा बहुत तो सब लोग

[28:36]

कुछ लोग हैं जो खरे रहते पर इससे नेताओं

[28:40]

के कहे हुए का

[28:43]

मान उसकी वैल्यू और कम नहीं होगी क्या?

[28:47]

बिल्कुल होगी। मान

[28:49]

क्या बोलते कुछ भी रहिए आप करोगे क्या?

[28:51]

मान था क्या? जनता के भी तो कहे हुए

[28:54]

का मान कहां है?

[28:55]

कम मान नहीं है ना? आपने हमको लोकसभा में

[28:58]

जिताया

[28:59]

और फिर सब बीजेपी को दे दिया वोट।

[29:01]

इसका मतलब आप पलट गए। जब आप पलट गए तो

[29:04]

मेरी ड्यूटी बनती है ना कि मैं पलटूं।

[29:07]

मैं आपकी साइड हूं ना मैं जनता।

[29:11]

अरे यार देखो मैं आपने जो है आपने मुझे

[29:15]

वोट देकर लोकसभा भेजा।

[29:17]

हां।

[29:17]

मैं लोकसभा उम्मीदवार के उम्मीदवार नहीं

[29:20]

लोकसभा में आपका प्रतिनिधि होने के नाते

[29:23]

मैंने चार विधानसभा के लिए चार

[29:25]

उम्मीदवारों के लिए प्रचार किया खूब। यह

[29:28]

सोचकर कि पिछली बार आपने मुझे वोट दिया था

[29:31]

तो आप इन्हें भी वोट देंगे। आपने उनको

[29:33]

नहीं दिया।

[29:35]

हमने जिसको नहीं देने के लिए बोला था उसको

[29:37]

दे दिया।

[29:39]

ठीक? इसका मतलब आपका मन बदल गया है

[29:42]

तो मेरा भी बदल सकता।

[29:43]

एम आई योर ट्रू रिप्रेजेंट रिप्रेजेंटेटिव

[29:45]

नाउ।

[29:46]

हम भी बदलेंगे भाई।

[29:48]

नहीं हूं ना फिर।

[29:50]

आप बदल चुके हो। मैं आप मैं तो पुराना

[29:52]

वाला हूं। सपोज़ करो आपने कहा के हमारा

[29:56]

फेवरेट रंग पीला है।

[29:59]

ठीक? तो मैं पीला लेके चला क्योंकि मैं

[30:02]

आपका प्रतिनिधि हूं। मेरी मजबूरी है। मुझे

[30:04]

नीला पहचान दो पर मैं पीला लेके चल रहा

[30:07]

हूं।

[30:08]

कल को अगर आप सब ने नारंगी ये गुलाबी थाम

[30:13]

लिया तो मैं पीला ले जाऊंगा तो आप मुझे

[30:15]

कूटेंगे ना कि तुम तो पीले यार हम लोग

[30:18]

नारंगी हो चुके हैं या गुलाबी हो चुके हैं

[30:21]

तो

[30:22]

सबसे बड़ी बात है

[30:24]

ये वाला

[30:24]

जब ये भी डिस्कशन करते हैं ना अपन ये भूल

[30:26]

जाते हैं ये सब मनुष्य भी हैं इनके अंदर

[30:30]

भी एक दिल धड़कता है

[30:31]

नहीं पर ये धड़ ज्यादा दिल विपक्ष वालों

[30:34]

का ही क्यों धड़कता है भारतीय जनता पार्टी

[30:37]

में किसका दिल धड़क रहा है या कौन मेरा

[30:39]

मतलब उस संदर्भ में जिस संदर्भ में आप कह

[30:41]

रहे हैं कि चुनाव बाद आपकी लोकसभा से

[30:46]

विधानसभा के अच्छे परिणाम नहीं आते जहां

[30:48]

से आप सांसद हैं उन सांसद उस सांसद

[30:51]

क्षेत्र में आने वाली विधानसभा में भारतीय

[30:53]

जनता पार्टी अच्छा नहीं करती। उत्तर

[30:55]

प्रदेश से कितने सांसदों के मन बदल गए?

[30:58]

बिकॉज़ द सेंटर होल्ड्स।

[31:00]

यही तो है। मुख्य बात तो यही है ना असली।

[31:02]

सेंटर से मेरा मतलब केंद्र नहीं है।

[31:04]

हम

[31:05]

केंद्र सरकार नहीं है।

[31:06]

हां हां

[31:07]

पार्टी में एक जो

[31:08]

सेंटर होल्ड्स

[31:10]

हम

[31:11]

लीडरशिप

[31:12]

सेंटर कोलैप्स करेगा ना सब कुछ भरभरा के

[31:16]

चला जाएगा। कोई किसी को नहीं पूछता है।

[31:18]

इसीलिए कहता हूं कि मनुष्य हैं सब।

[31:20]

हम

[31:21]

जब भी इन लोगों को देखो मनुष्य की तरह

[31:24]

देखो। इनकी तमन्नाएं, इनकी कुलबुलाहटें

[31:29]

वैसी ही होती है जैसे आपके दिल में है। मन

[31:31]

मार के बहुत लोग बैठे हुए हैं। बहुत सारे

[31:34]

लोग बीजेपी में भी मन मार के बैठे हुए

[31:36]

हैं।

[31:38]

उनका दिल में आग है।

[31:41]

मैं रेफरेंस समझ मैं पूछना चाह रहा हूं उस

[31:44]

व्यक्ति तक। एक सवाल मेरा यह हर जगह होता

[31:46]

है। एक सवाल मेरा तुमसे भी है कुलदीप और

[31:49]

ताऊ से भी कि हर पार्टी में आप देखते हैं

[31:51]

जैसे रिसेंटली आम आदमी पार्टी देखो चड्डा

[31:54]

साहब छोड़ के चले गए साथ में और भी लोग

[31:55]

चले गए हेमंत विश्वा कांग्रेस की थे

[31:59]

शिवेंदु अधिकारी बीजेपी में अगर आप पूरे

[32:03]

20 साल उठा के देखिए और उससे पीछे भी तो

[32:06]

शायद दो-तीन लोगों भारती गई थी वो भी वापस

[32:08]

आ गई शंकर सिंह बघेला थे इसके अलावा कोई

[32:11]

नाम नहीं इस पार्टी को छोड़ के गया हो ऐसा

[32:14]

क्या है इस पार्टी में शंकर सिंह वाघेला

[32:16]

गए थे और अभी भी

[32:17]

बाहरी हैं।

[32:18]

बाहर ही हैं। मतलब मेरा वही कहने का मतलब

[32:19]

है उमा भारती

[32:20]

त्याग लगता है भाई उसमें त्याग

[32:22]

क्या है ऐसा बीजेपी में?

[32:23]

बीजेपी में ऐसा कुछ नहीं है।

[32:25]

पार्टी में कुछ तो होगा ना ये तो छोड़ के

[32:27]

पावर सत्ता

[32:28]

बट कई साल वो पावर से भी दूर रहेंगे।

[32:30]

मैं नेता क्यों बनता हूं

[32:31]

पावर?

[32:32]

पावर के लिए

[32:33]

पावर का क्या करता हूं?

[32:35]

भोगता है कई लोग। कई लोग दुरुपयोग

[32:37]

हां सदुपयोग तो होते कभी नहीं देखा।

[32:39]

और जनता की सेवा

[32:41]

हम

[32:41]

हां मतलब क्योंकि नेता नहीं रहोगे ना खाली

[32:44]

दुरुपयोग करोगे तो जनता की सेवा कैसे

[32:47]

करूंगा मैं?

[32:48]

जनता ने बोला मेरा यहां पे एक टावर लगवा

[32:51]

दीजिए।

[32:51]

और क्या होता है? सड़कें बनवा दो, पानी दे

[32:53]

दो।

[32:53]

कैसे बनवाऊंगा मैं? अगर पावर नहीं है तो

[32:58]

कैसे करूंगा? बीजेपी के पास पावर है।

[33:00]

कांग्रेस के पास भी पावर था। समाजवादी

[33:03]

पार्टी के पास पावर था। बहुत सारे लोगों

[33:05]

के पास पावर होता है। जिसके पास पावर होता

[33:07]

है, लोग उधर जाते हैं।

[33:08]

या या ऐसे भी

[33:09]

ममता बनर्जी की पार्टी को छोड़कर शुभेंदु

[33:11]

गया था ना। हम्म।

[33:12]

एक दो लोग ऐसी स्थिति में भी जाते हैं जब

[33:15]

उनको उनके हिस्से का माल नहीं मिलता है।

[33:17]

उनको

[33:18]

उनको लगता है कि मैं ज्यादा डिर्व करता

[33:20]

हूं। कम मिल रहा है। बाहर जाऊंगा थोड़ा

[33:22]

संघर्ष करूंगा। एक दिन आई विल कम बैक।

[33:24]

शुभेंदु सत्ता के लिए नहीं आया था।

[33:27]

शुभेंदु

[33:29]

इस दिन को देखकर आया था। एक दिन ऐसा आएगा।

[33:32]

ऐसे भी लोग संघर्ष करते हैं। कुछ लोगों का

[33:34]

वह दिन आता ही नहीं है। शंकर सिंह वाघेला

[33:37]

का आया ही नहीं। हम

[33:38]

पर एक बात तो है कि पिछले 101 साल में ताऊ

[33:42]

ऐसा नहीं है कि

[33:44]

दल बदल पार्टी बदलना

[33:47]

की घटनाएं बढ़ गई हैं। ज्यादा स्वीकार्य

[33:51]

भी हो गया है जनता के बीच। पहले भी होती

[33:54]

थी। मैं ये नहीं कह रहा हूं होती नहीं थी।

[33:55]

पर उनकी फ्रीक्वेंसी बढ़ गई है। ये ऐसा

[33:58]

लगता है हमेशा। जैसे अभी लगता है कि

[34:00]

बेरोजगारी बहुत ज्यादा है।

[34:02]

महंगाई भी बहुत ज्यादा है। टेंपरेचर भी

[34:04]

बहुत हाई है। ऐसा तो कभी दिल्ली में इतना

[34:06]

हाई टेंपरेचर इतनी गर्मी कभी पड़ी नहीं

[34:08]

यार।

[34:09]

हां एक

[34:10]

मच्छर बहुत ज्यादा हो गए हैं। मैंने अपने

[34:12]

जीतेजीते इतना मच्छर नहीं देखा है। ऐसा ही

[34:14]

लगता है। पर दल बदल ये सब भाई आया राम गया

[34:18]

राम टाइप था। सुबह इधर शाम उधर एक डाटा

[34:21]

है। मैं अभी खोज के निकालता हूं। 300 या

[34:24]

350 से ज्यादा

[34:27]

एमएलए प्लस एमपीज स्विच कर चुके हैं

[34:31]

बीजेपी की तरफ

[34:32]

बीजेपी की तरफ पिछले पांच आठ सालों का वो

[34:34]

बात

[34:34]

यस यस

[34:35]

तो वो कंपेयर करेंगे अगर किसी भी 5 साल के

[34:38]

वफे में आई डोंट नो किसी एक पार्टी की ओर

[34:40]

इतना स्विच हुआ होगा

[34:41]

वैसे जब कांग्रेस पावर में थी तब भी नहीं

[34:43]

हुआ होगा इतना

[34:44]

जिस तरीके से

[34:45]

अब कांग्रेस से बहुत टूट-टूट कर क्षेत्रीय

[34:47]

दल थे उस समय लोग छोड़ कर के भी कांग्रेस

[34:50]

गए थे आए भी होंगे पर इतनी बड़ी संख्या

[34:52]

में नहीं हुआ अभी तो जैसे क्या है ना

[34:54]

आप जितने भी

[34:54]

अभी ऑर्गेनिक भी नहीं है जैसे

[34:55]

जितने भी लोग हैं ना

[34:57]

सब कांग्रेस से ही निकले हुए हैं। हां वो

[34:59]

तो है। है ना?

[35:00]

मतलब कितनी बार टूटे होंगे।

[35:03]

कितने जख्म लगे होंगे कांग्रेस के बदन पे

[35:07]

कि इतने सारे कमल खिल गए हैं देश में।

[35:10]

मतलब एक बीजेपी की बात नहीं कर रहा हूं

[35:12]

मैं।

[35:13]

तो एक पार्टी थी जनता पार्टी।

[35:15]

हम

[35:16]

उसके कितनी पार्टियां हुई?

[35:19]

जयप्रकाश नारायण ने एक आंदोलन को लीड

[35:24]

किया। उससे लालू यादव, शरद यादव, रामविलास

[35:27]

पासवान, नीतीश कुमार, मुलायम सिंह यादव

[35:31]

यस

[35:32]

है ना

[35:33]

सब राज्य में हम

[35:35]

है ना बीजेपी भी कह लो एक तरह से

[35:37]

सब ने पार्टियां बनाई

[35:39]

सब नेता निकले नेता ऐसे निकलते हैं और ऐसे

[35:42]

निकलना चाहिए अभी आपको लग रहा है कि

[35:45]

क्योंकि अपन 10 साल से देख रहे हैं ना

[35:48]

देखो नीट में क्या होता है आप एक बच्चे को

[35:52]

होश कब आता है छ सात साल

[35:56]

राइट हम

[35:57]

जो परीक्षा दे रहे हैं नीट का उनकी क्या

[35:59]

उम्र होती होगी?

[36:01]

17 20 मान लीजिए 1820 के बीच में

[36:04]

है ना

[36:04]

उन्होंने अपनी जिंदगी में बीजेपी के अलावा

[36:06]

कुछ देखा ही नहीं है। हम

[36:09]

वो जब हॉस्पिटल से निकल रहे थे तो सामने

[36:12]

मोदी जी की तस्वीर थी।

[36:13]

हम

[36:14]

स्वच्छ भारत

[36:15]

आयुष्मान भारत टाइप से।

[36:17]

ठीक है।

[36:18]

और अभी परीक्षा देके निकल रहा है। वहां पे

[36:20]

भी उनकी तस्वीर है। क्योंकि उन्होंने देखा

[36:22]

नहीं। उनको ये लगता है कि यार एक ही

[36:24]

पार्टी है,

[36:26]

एक ही प्रधानमंत्री है। आपने दो-तीन देखे

[36:28]

होंगे।

[36:29]

तुमने

[36:29]

मैंने थोड़े ज्यादा देख लिए हैं।

[36:31]

बट दैट इज

[36:32]

अटल बिहारी वाजपेई किस तरह से होश संभा

[36:34]

पीछे भी हमने देवगड़ा और आई के गुजराल

[36:36]

वगैरह भी देखे हैं।

[36:37]

मतलब देखे तो होंगे पर होश नहीं था। तो

[36:40]

अटल बिहारी वाजपेयी से होश

[36:42]

14 में पैदा हुए।

[36:43]

98

[36:44]

आठ में पैदा होते मोदी जी देख रहे होते।

[36:47]

यह सामान्य है।

[36:49]

ऐसा रिएक्शन सामान्य है। दलबदल पहले भी

[36:52]

होता था। अभी थोड़ा ज्यादा मोह है क्योंकि

[36:54]

एक पार्टी बहुत शक्तिशाली है। बाकी लोगों

[36:57]

की शक्तियां क्षीण हो गई हैं। बहुत

[37:00]

ज्यादा। आप देख लो मुख्य विपक्ष विपक्षी

[37:04]

दल जो है और बाकी लोग हैं वह एक भी नहीं

[37:08]

हो पाते हैं। ऐसी हालत में भी डीएमके ने

[37:11]

कहा है कि मुझे कांग्रेस से दूर बैठना है।

[37:15]

टीएमसी के ये लोग कह रहे हैं कि हम टीएमसी

[37:16]

के साथ नहीं बैठेंगे। समाजवादी पार्टी और

[37:19]

ये लोग सब एक साथ थे तो दो पुराने वाले

[37:21]

नहीं थे।

[37:22]

आम आदमी पार्टी नहीं थी। आम आदमी पार्टी

[37:25]

जो है वो कांग्रेस के बिल्कुल खिलाफ है

[37:26]

क्योंकि पंजाब में इलेक्शन है।

[37:28]

है ना? बहुत कॉम्प्लिकेशन है आम आदमी

[37:31]

कांग्रेस देखो राहुल गांधी

[37:35]

सबसे मजबूत नेता हैं अभी विपक्ष में

[37:37]

विपक्ष में हम

[37:38]

वो नीड के खिलाफ बोले

[37:41]

मैं नहीं मानता हूं कि वोकि मैच्योर

[37:43]

पार्टी है उन्होंने ये जायज नहीं समझा कि

[37:46]

हम रैली करेंगे और धूप में निकलेंगे।

[37:49]

हालांकि एनएसयूआई इत्यादि ने किए हैं

[37:50]

प्रदर्शन।

[37:52]

राहुल गांधी ने स्वयं

[37:55]

डिमांड किया कि धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा

[37:56]

दें। हम एक्चुअली एनएसयूआई के प्रोटेस्ट

[37:59]

में वह

[37:59]

वाटर कैनन

[38:00]

वाटर कैनन भी चला है ना उनके प्रोटेस्ट

[38:03]

में इनके प्रोटेस्ट से ज़्यादा लोग थे

[38:05]

हम

[38:05]

कॉकरोच पार्टी से ज्यादा

[38:06]

वो डंडे भी खाए

[38:09]

इनको बस ये था कि उनकी सोशल मीडिया का गेम

[38:12]

जो है वो कमजोर था इन्होंने सोशल मीडिया

[38:14]

गेम किया

[38:15]

हम

[38:15]

बढ़िया लेकिन क्या आम आदमी आम आदमी पार्टी

[38:18]

ने समर्थन दिया उनको

[38:20]

मुद्दा तो एक ही था ना

[38:22]

नीट

[38:22]

धर्मेंद्र प्रधान जी इस्तीफा दें

[38:24]

तो आपने सब सपोर्ट किया उसको आपने ने

[38:26]

सीजेपी को सपोर्ट किया। आप सभी मिलके अगर

[38:31]

राहुल गांधी के डिमांड का सपोर्ट करते तो

[38:34]

हो सकता है ना यही प्रेशर ग्रुप बड़ा हो

[38:36]

जाता।

[38:36]

सब लोग कहने लगे देखो सीजेपी एक प्रेशर

[38:38]

ग्रुप बन के आया है।

[38:39]

बहती गंगा में हाथ धो लो।

[38:41]

क्यों भाई?

[38:43]

ये इनको दिखानी पड़ेगी एकता। व्हाट यू से

[38:48]

शुड बी व्हाट यू मीन?

[38:51]

वो नहीं हो रहा है। हम लोग विपक्षी एकता

[38:53]

हम सरकार को हिला देंगे। चूल्हे हिला

[38:55]

देंगे इनकी। कैसे हिलाओगे आप? जब पंजाब

[38:58]

में अलग-अलग लड़ोगे तो हां, सारा इंतजाम

[39:01]

जो पंजाब में लड़ने के लिए हुआ हो रहा है

[39:03]

ना तो कल एक दूसरे पे बहुत गंभीर आरोप लगा

[39:06]

रहे हैं।

[39:08]

कांग्रेस को जो है उल्टा सीधा सुना रहे

[39:11]

हैं। कांग्रेस वाले भी आपको उल्टा सीधा

[39:13]

सुना रहे हैं। बट दैट इज हाउ इट इज़। बट ये

[39:15]

गेम तो चलता रहेगा ना आपके सामने। यह सब

[39:17]

कुछ नया नहीं हो रहा है।

[39:19]

खानशाह आप पक्ष में हो कि विरोध में?

[39:21]

नीट के नीट के।

[39:23]

विरोध में रहेगा आदमी यार।

[39:25]

नीट अपने आप में तुमको पता है कि कड़वा

[39:27]

होता है सच नीट तो नीट पे बात मत करो जाने

[39:32]

दो

[39:35]

नहीं और लीक के

[39:37]

फिर तो बेकार है लीक के भी विरोध में लीक

[39:39]

के भी विरोध में बेकार है फिर

[39:41]

हां

[39:41]

कोई भी चीज लीक हो जाए ना तो खराब मानो

[39:43]

उसको

[39:44]

तो खराब है वो

[39:45]

पाकिस्तान ऑक्यूपाइड कश्मीर में बगावत हो

[39:47]

रही है तो देखे आपने विजुअल्स वहां जो है

[39:51]

पुलिस और उनकी जो है रेंजर्स मिलके गोली

[39:54]

चला चला रहे हैं बेकसूर लोगों पे। पूरी

[39:56]

दुनिया में ह्यूमन राइट्स का पार्ट पढ़ाने

[39:58]

के बाद

[40:00]

ब्रिटेन के सांसदों ने चिट्ठी लिखी है

[40:02]

अपने प्राइम मिनिस्टर को कि इस पे कुछ

[40:05]

कीजिए जो है

[40:06]

ये बड़ा अच्छा लगता है यार।

[40:08]

नहीं अपने मतलब नहीं चिट्ठी-वट्टी लिखो

[40:10]

उठा के।

[40:11]

ब्रिटेन को चिंता रहती है ना। वो लोग

[40:13]

थोड़ी चिट्ठी-टि

[40:14]

मर्मस्पर्शी टाइप के हैं ना एमथी से भरे

[40:17]

हुए। वो पिक्चर में किसी बेहोश होश

[40:20]

किसी भी चीज पे वो बोलते हैं। हालांकि

[40:21]

अपने लिए तो अच्छा ही है। पाकिस्तान के

[40:23]

खिलाफ चिट्ठी लिखी जा रही है तो और लिखी

[40:25]

जाए।

[40:25]

ब्रिटेन में मीरपुर के लोग बहुत रहते हैं।

[40:28]

ब्रिटेन में एक बड़ा जो समुदाय है

[40:31]

पाकिस्तानी मुसलमानों का जो पाकिस्तानी

[40:33]

मुसलमान कहलाते हैं।

[40:34]

वो मीरपुरी समुदाय से आते हैं।

[40:36]

वो 30 तो नहीं होंगे। एमपी

[40:38]

नहीं 30 नहीं होगा।

[40:39]

प्रेशर ग्रुप होगा। प्रेशर होता है ना आप

[40:42]

ब्रिटेन के एमपी हमारे एमपी जैसे नहीं है

[40:44]

हां मतलब वो

[40:45]

कि वो बोलेंगे कि कुछ पैसा दो

[40:47]

तब

[40:47]

व्हाट इज द कॉस्ट माइट

[40:48]

सिमरनजीत सिंह ₹400 ले देते

[40:52]

तो वो नहीं है वो लोग लिख देते हैं अपना

[40:56]

कॉन्स्टिट्यूएंसी का 10 लोग चला जाएगा तो

[40:57]

लिख देंगे

[40:58]

पर उनका जो पॉलिटिकल स्ट्रक्चर है पीओके

[41:01]

का बड़ा अजीब टाइप का मतलब वो कहने को

[41:06]

स्वायत्ता ऑटोनोमी टाइप की दे रखी बट जो

[41:10]

उनकी विधान उनका अपना प्रधानमंत्री और यह

[41:12]

सब होता है। उनकी जो विधानसभा है उसमें

[41:14]

रिफ्यूजी सीटें होती हैं 12 या 14

[41:18]

और वो रिफ्यूजी सीटें उनके लिए सुरक्षित

[41:20]

हैं जो इंडिया से आए थे। मतलब जो रिफ्यूजी

[41:24]

थे। वो किसी जमाने में आए थे 47 में और वो

[41:27]

सब अब वो फैमिलीज लाहौर और कराची में

[41:30]

शिफ्ट हो के बढ़िया वो कर चुकी हैं।

[41:32]

एक्चुअली अब वो रिफ्यूजी सीट्स पर

[41:36]

पाकिस्तान किस में इस्लामाबाद में जो

[41:38]

गवर्नमेंट है वो अपने लोगों को

[41:43]

नॉमिनेट कर देती है। तो इससे क्या है कि

[41:45]

वो वहां के पावर स्ट्रक्चर में रीजनल

[41:48]

रिप्रेजेंटेशन रहता नहीं है। और आप इसको

[41:50]

ऐसे देखेंगे ना जब इस्लामाबाद में पीटीआई

[41:54]

की सरकार थी तब पीओजेके में अह की

[41:57]

विधानसभा में पीटीआई का बहुमत था। जब

[41:59]

इस्लामाबाद में मुस्लिम नून की सरकार थी

[42:02]

नवाज शरीफ वाली तब यहां मुस्लिम नून का

[42:04]

बहुमत था। जब भुट्टो की सरकार थी तब इनका

[42:08]

पीपीपी का यहां पे था। जिसकी केंद्र में

[42:10]

रहती है उसी की। इसका यह मतलब है कि वो एक

[42:14]

ऑन पेपर ऑटोनोमी है पर वो पूरी तरह से

[42:17]

इस्लामाबाद के कंट्रोल में है।

[42:18]

भाई वो हमेशा से मिलिट्री कंट्रोल में रहा

[42:20]

है।

[42:20]

हम और वहां कुछ विकास नहीं। वहां हाइड्रो

[42:23]

पावर के प्रोजेक्ट्स हैं। हाइड्रो पावर के

[42:26]

प्रोजे उनकी मांग जो है ना

[42:27]

उनकी बिजली उनको नहीं दी जाती।

[42:28]

जिसकी बिजली नहीं मिलती सारी बिजली भेजते

[42:30]

हैं। लाहौर और कराची।

[42:33]

उनका आजाद कश्मीर बोलते हैं वो लोग।

[42:35]

हां। हम

[42:36]

हमारे यहां जिस रफ्तार से विकास हुआ है उस

[42:41]

तरफ नहीं हो रहा है। वो करना भी नहीं

[42:42]

चाहते। हम

[42:43]

एक तो गवर्नमेंट के पास पाकिस्तान में

[42:45]

उतना रिसोर्स नहीं है।

[42:46]

हम

[42:47]

और दूसरा वो चाहते भी नहीं।

[42:51]

उनकी जो मांगे हैं ना जिसके लिए इतना बड़ा

[42:53]

आंदोलन हुआ है वो एवरेज टाइप मांगे हैं।

[42:55]

लेकिन आटा चाहिए। हम

[42:57]

यह भी उनकी मांगों में है।

[42:58]

आटा है।

[42:59]

हम

[42:59]

ठीक है।

[43:00]

आटा बिजली

[43:01]

हां

[43:01]

हम

[43:02]

बिजली सड़कें

[43:03]

हम

[43:03]

वो यहां पे देख रहे हैं कि वो जोजिला टनल

[43:05]

बन रहा है।

[43:06]

हम

[43:06]

दुनिया का सबसे ऊंचा पुल बन गया।

[43:08]

हम

[43:08]

हॉस्पिटल हैं। सारे एजुकेशनल इंस्टट्यूट

[43:11]

हैं।

[43:11]

श्रीनगर की लाइफ अलग है।

[43:13]

तो उनको तो ये लगता है ना कि अपन पीछे तो

[43:15]

नहीं छूट रहे। हम

[43:17]

हमको आजादी का लॉलीपॉप देके

[43:20]

कब तक खुश रखा जा सकता है? दूसरा यह भी है

[43:24]

कि हमारे कश्मीर में डेमोग्राफिक चेंज

[43:27]

नहीं हुआ है।

[43:28]

हम

[43:29]

हमने उनके वहां के जनसंख्या पर हावी होने

[43:33]

का प्रयास नहीं किया है। वहां के कश्मीर

[43:37]

यहां पे यहां के कश्मीर में आप बस नहीं

[43:38]

सकते थे। हम

[43:40]

और 370 ये सब हटने के बाद भी आप वहां पे

[43:44]

ऐसा नहीं है कि आप बच सकते हैं बहुत सारे

[43:46]

लोग ऐसा कोई इनकरेज भी नहीं किया

[43:47]

गवर्नमेंट ने

[43:49]

कश्मीरी पंडित वापस नहीं जा पाए हैं बाकी

[43:52]

लोगों की तो छोड़ो

[43:53]

हम

[43:53]

जबकि पाकिस्तान वाले हिस्से में जो

[43:55]

ऑक्यूपाइड है

[43:56]

उसमें मिलिट्री के सारे रिटायर्ड लोग घर

[43:58]

बनाते हैं वहां क्योंकि मौसम अच्छा है

[44:00]

वेदर अच्छा है और सारे पंजाब प्रांत के

[44:04]

मुख्यतः लोग वहां जाकर के बस गए हैं और

[44:06]

उनकी जो जो आबादी का अनुपात है

[44:09]

उस पे भी असर डाल रहे हैं। उससे भी उसका

[44:11]

भी उनके अंदर एक उत्साह है।

[44:14]

लेकिन डाटा तो बहुत बेसिक चीज़ है। अब तो

[44:17]

मतलब उसके दाम और कीमत और उसके उसको लेकर

[44:20]

के

[44:20]

रोड बिजली

[44:21]

38 मांगे थी उसमें ये भी है आटा बिजली

[44:24]

पिटिकल स्ट्रक्चर चेंज करने की बात थी।

[44:27]

जेएसी है ना वहां पे वो

[44:29]

इनफैक्ट वो जो प्रोटेस्ट हुए जिसमें

[44:32]

इन्होंने लोग मारे थे। उस प्रोटेस्ट को

[44:34]

ऑर्गेनाइज मतलब वो शुरू ही ऐसे हुआ कि उस

[44:36]

उन पर टेररिस्ट वाले जो कानून होते हैं वो

[44:38]

लगा दिए और अब वो आरोपियों को ढूंढ रहे

[44:42]

उसी हिसाब से खोज रहे हैं जिसको क्या

[44:44]

बोलते हैं मैन हंट हम

[44:46]

खोज खोज के गोली मार देंगे टाइप

[44:48]

पर वहां पर ये पहली बार नहीं हुआ है।

[44:50]

हां इसके पहले भी हुआ था 25 में

[44:52]

फ्रीक्वेंटली होता है वहां पर और उसका दमन

[44:55]

कर दिया जाता है

[44:56]

क्योंकि वो खुल के गोलियां मारते हैं।

[44:58]

पाकिस्तानी आर्मी अपने लोगों पे काफी

[45:01]

क्रूर है। हम

[45:03]

वो चाहे वो केपीके हो ऐसे रीजंस में सिंध

[45:06]

में भी कभी-कभी बलचिस्तान में भी खुल के

[45:09]

खेलते हैं वो

[45:11]

कोई राइट्स नहीं होता वहां

[45:12]

बलूच से याद आया कि रिवेंज आ गई है

[45:15]

धुरंधर की रिवेंज

[45:16]

Netflix पे आ गई है

[45:18]

Jio स्टार पे

[45:19]

हां Jio स्टार पे आई है

[45:21]

पर आप अब तो देख चुके हैं ना

[45:23]

दो बार और देख लिया

[45:24]

अच्छा

[45:24]

है पिक्चर मतलब

[45:26]

अपेरेंटली एक्सटेंडेड कट टाइप का है

[45:28]

हां थोड़ा कुछ-कुछ मैंने डायलॉग जो है

[45:30]

ज्यादा बड़े हुए हां

[45:31]

कुछ-कुछ बढ़े हुए हैं खुल गाली गलौज भी

[45:32]

इसमें

[45:33]

गाली में बीप लगा था इसमें बीप हटा दिया

[45:35]

तो मैं ज्यादा एंजॉय कर पा रहा हूं। अच्छा

[45:36]

अच्छा अच्छा अच्छा

[45:38]

आपकी तो प्रायोरिटीज ही अलग है मतलब

[45:41]

गाली धुरंधर में गालियों को बीप बहुत

[45:43]

स्मार्टली

[45:44]

एंड वाला फस हल्का सा बीप मार

[45:46]

नहीं वो पहले पार्ट में जो है

[45:47]

हम

[45:47]

आधा हमारे गालियों के दो हिस्से होते हैं

[45:50]

हम

[45:51]

ठीक है

[45:52]

हम

[45:52]

तो क्या बोलते हैं संधि

[45:54]

संधि

[45:55]

जो भी है

[45:56]

उपसर्ग और प्रत्यय कह लीजिए संधि विच्छेद

[45:58]

कर

[45:59]

पहले वाले में उन्होंने फर्स्ट पार्ट को

[46:00]

किया था दूसरे वाले में सेकंड पार्ट को

[46:02]

कंप्लीट किया तो आप दोनों को मिला के

[46:05]

हां फर्स्ट सेकंड में मिला के आप जोड़ लो

[46:07]

कि क्या

[46:08]

बहुत बढ़िया

[46:10]

यस

[46:11]

ये सोचा नहीं था मैंने

[46:13]

नहीं नहीं ये देखना गौर करने की बात

[46:14]

ये ताऊ ने मुझे बोला था तो मैंने ध्यान से

[46:16]

देखा तो

[46:17]

क्योंकि कई सारे जो गाली का जो गाली के दो

[46:19]

हिस्सों में एक हिस्सा

[46:21]

अह किसी पारिवारिक संबंध का होता है और एक

[46:24]

हिस्सा अश्लील होता है।

[46:26]

हम्म

[46:26]

तो आश्चर्यजनक रूप से अश्लील वाले को छोड़

[46:28]

दिया गया था।

[46:29]

अच्छा

[46:30]

एक हिस्सा में

[46:31]

टारगेट ऑफ द गाली को हटा दिया गया था।

[46:32]

पिछले वाले में टारगेट ऑफ द गाली थी।

[46:34]

अश्लील वाला हटा दिया था। वाले में दोनों

[46:36]

हटा

[46:36]

माइंड ब्लोइंग पीक डिटेलिंग बोलते हैं ना

[46:39]

अच्छा हां पीक डिटेलिंग

[46:40]

घर की वो नहीं सीन घर की याद नहीं आई तुझे

[46:44]

जस्सी

[46:44]

हां है ना या

[46:46]

लेकिन इसका बहुत मीम बने हैं

[46:47]

तो पहला यार वो जो उसका रोल किया है सर

[46:52]

टिटू मेरी बहन कित है

[46:53]

अरे वो जो नाम मेरे बीमारी लग गई है यार

[46:57]

समील जमाली

[46:58]

नहीं नहीं जो यूपी के गैंगस्टर जिसको

[47:00]

अच्छा अतिथी

[47:01]

अतीक अहमद

[47:02]

क्या एक्टिंग किया उस आदमी ने भाई

[47:04]

लहजा अच्छा पकड़ा है।

[47:05]

बहुत बढ़िया।

[47:06]

चेहरा भी पकड़ा है। चेहरा तो

[47:07]

चेहरा बॉडी सब वैसे ही

[47:09]

मजा आया। मैं इसको दो बार और देख चुका

[47:11]

हूं। मतलब एक बार में नहीं

[47:12]

हम

[47:13]

जैसे आधे घंटे रात में नींद आ रही लगा

[47:15]

लिया

[47:15]

हम

[47:16]

तो मजा आ रहा है।

[47:17]

घर में अलाउड है।

[47:18]

अकेला हो ना अभी घर पे लोग है नहीं। सो

[47:21]

अलाउड है। क्यों पूछा आपने?

[47:23]

नहीं नहीं धुरंधर जैसी पिक्चर देखना जो है

[47:25]

हां फैमिली के साथ थोड़ा दिक्कत है।

[47:27]

गाली गलौज

[47:28]

गाली गलौज से ज्यादा खून खराब है।

[47:30]

खून खराब है। बहुत भयानक खैर। अच्छा आप

[47:32]

उसमें पर्सनल व्यूइंग उसका पहला ही पर्सनल

[47:36]

व्यू नहीं है ना आपके ड्राइंग रूम में

[47:37]

ब्लड गिरेगा आपको अच्छा लगेगा सिनेमा हॉल

[47:39]

में रहता है कि दूसरे गायब मैं तो निकल

[47:40]

जाऊंगा यहां से

[47:41]

नहीं तो

[47:42]

नहीं इसमें इसमें क्या बोलते हैं

[47:43]

टीवी पे थोड़ी देखते होंगे ये लैपटॉप या

[47:45]

उस पे देखते होंगे

[47:46]

नहीं टीवी पे देखते

[47:47]

नहीं लैपटॉप पे सही कह रहे हैं

[47:48]

लैपटॉप पे पिक्चरें देखते हो

[47:50]

नहीं जैसे अभी आप

[47:51]

मेरे घर में मैं टीवी यू फिल्म यूज़ ही

[47:54]

नहीं होती है फिल्में देखने के लिए बड़े

[47:55]

शौक से

[47:56]

लैपटॉप पे कैसे देखते हो देखता हूं मैं

[48:00]

हेलीकॉप्टर गिर रहा उतर रहा है एक 52

[48:03]

मंजिला बिल्डिंग पे छोटे से लैपटॉप में

[48:05]

कैसे फिगर आउट करते हो कि 52 मंजिला है यह

[48:09]

अरे दिया सलाई की तरह होगा वो उसके ऊपर एक

[48:12]

नहीं गिर रहा होगा

[48:13]

आदत पड़ गई मुझे

[48:14]

साइज तो होना चाहिए ना पिक्चर का

[48:15]

नहीं वैसे मुझे हेलीकॉप्टर के नीचे उतरते

[48:17]

चक्कर आने लगता है तो मैं उसको स्किप मार

[48:19]

देता हूं या चेहरा घुमा लेता हूं कुछ

[48:21]

लैपटॉप भी हाइट का प्रॉब्लम है मुझे

[48:24]

वर्टिगो

[48:26]

क्या प्रॉब्लम है लाइफ

[48:27]

यू नीड अ रिफिल

[48:28]

हम्म चाय कहां है नहीं यार अभी चाय प्लीज

[48:31]

ठीक है। तो आज हम लोग पर्दे पर बात

[48:34]

करेंगे। पर्दा ऑल काइंड ऑफ़ कर्टेंस एंड

[48:37]

स्क्रीन भी एक पर्दा है ना।

[48:39]

बड़े पर्दे पर लगी फिल्म छोटे पर्दे पर

[48:41]

पर्दों पर बात होगी जो

[48:43]

पर्दा उठेगा।

[48:44]

हां

[48:45]

तो

[48:46]

पर्दाफाश भी होगा।

[48:49]

तो मतलब जिस-जिस रूप में हमने पर्दे का

[48:53]

इस्तेमाल किया देखा। घरों में पर्दा कैसे

[48:55]

आया?

[48:57]

थिएटर पर्दा क्या होता था? पर्दा कैसे शहर

[48:59]

में आके कर्टन बन गया या

[49:00]

हां हां

[49:01]

चीक वगैरह बन गया

[49:02]

हां तो अलग-अलग तरह के पदे भाई साहब तो

[49:05]

पहले तो घरों में साड़ियों से सिलेले जाते

[49:07]

थे हमें याद है

[49:08]

और पूजा घरों के पर्दे अलग होते थे

[49:10]

आओ जल्दी अभी यहीं का बता रहे हो

[49:11]

उस पे बात होगी और फिर बाजार खबर में सपना

[49:13]

गुर्जर जी आएंगी साक्षात मतलब खबर में

[49:16]

आएंगी यहां नहीं आएंगी और फिर प्राणों से

[49:18]

प्रिय तीन तालियों की चिट्ठियां तो हैं ही

[49:20]

पर पहले एक छोटा सा ब्रेक का

[49:22]

पायलट्स पड़े थे पानी में और उनको

[49:24]

रेस्क्यू किसने किया एक ड्रोन बोट में

[49:27]

सेकंड वर्ल्ड वर्ल्ड वॉर में भी ड्रोन

[49:29]

दिखते हैं।

[49:29]

आपके रोंगटे खड़े हो जाएंगे। सरकार के एक

[49:31]

बहुत सीनियर ऑफिशियल थे। सिक्योरिटी

[49:34]

एडवाइस की वजह से उनके ऑफिस को हटाया गया।

[49:37]

वहां से एक अलग जगह पे लगाए क्योंकि उनको

[49:40]

यह डर था कि कोई ड्रोन उड़ा के मतलब

[49:43]

सीनियर लीडरशिप को टारगेट कर सकते हैं।

[49:51]

लीजिए तीन ताल देखो सुन रहे हैं आप। आज तक

[49:54]

रेडियो पर ताऊ खानचा सरदार के साथ

[49:57]

प्रेजेंटेड बाय थर्मकूल कूलर्स

[50:00]

बुजुर्गों की दवा बुजुर्गों की दवा और

[50:03]

थर्मोकूल की हवा

[50:05]

दिल की यार इस टाइप के मुझसे क्यों नहीं

[50:08]

लिखवाते हैं स्लोगन

[50:09]

बहुत अच्छा

[50:09]

मैं भी लिख सकता हूं मेरे ये एडवरटाइजिंग

[50:12]

में जाने का मन था मेरा एक बार ऐसे पंच

[50:14]

लाइंस लिखूं

[50:16]

यार एक बात मुझे समझ में नहीं आती

[50:18]

थर्मोकूल में जो है ना एक चीज है जब भी

[50:21]

थर्मो आता है ना तो एक हॉटनेस की की

[50:23]

फीलिंग आती है।

[50:24]

थर्मल है ना थर्मस आदमी को लगता है कि

[50:27]

हां हां ठंड आती है आदमी अपने थर्मल

[50:29]

मैं विचार कर रहा था कि यार थर्मोक कूल ये

[50:31]

दोनों चीज एक साथ कैसे हो सकता है फिर

[50:34]

मुझे लगा

[50:36]

कि जो हॉट लोग होते हैं बहुत कूल

[50:40]

कूल

[50:41]

थैंक्स थैंक यू ताऊ मेरे लिए तारीफ की

[50:44]

आपने

[50:44]

सर सब लोग सबकी साले अपने दिमाग में

[50:48]

पिक्चर चल रही है

[50:50]

जब तक जनीमा आए हम

[50:52]

तो मुझे लगा कि नहीं

[50:54]

दैट इज वै कूल

[50:56]

हम

[50:57]

हॉट इज कूल

[50:58]

हां

[51:00]

कूल

[51:01]

पहले ये जैसे अब तो ये खैर थर्मोकूल

[51:04]

कंपेरेटिवली थोड़ा साइलेंट कम आवाज करने

[51:07]

वाला कूलर है हमारे वो वाले जो कूलर हुआ

[51:10]

करते थे वाले

[51:12]

उनका एक बड़ा फायदा था उस आवाज का कि घर

[51:14]

के झगड़े कभी बाहर नहीं आते थे

[51:16]

आवाज

[51:17]

पड़ोसियों को पता नहीं लगता था कि कूलर

[51:19]

चला दिया आपने और फिर आप झगड़िए इसलिए कई

[51:22]

झगड़ा शुरू हो जाता था तो हम लोग समझते थे

[51:24]

यार घर में झगड़ा हो रहा है माता-पिता के

[51:25]

भी तो कूलर चला देते थे जल्दी से लेकिन

[51:27]

झगड़े की वजह क्या होती थी दिमाग का गर्म

[51:29]

होना थर्मोकूल आपको ठंडा करके रखता है

[51:31]

झगड़े की कोई गुंजाइश

[51:32]

अरे आवाज जब कूलर कम करता है ना तो आपके

[51:35]

घर की तृणमूल के अंदर कल कलह है

[51:37]

हम

[51:38]

किसी को पता चलता पहले चलता था

[51:41]

नहीं

[51:42]

हैं आदमी पार्टी तोड़ लेता था तब पता चलता

[51:44]

था

[51:45]

बिकॉज़ कूलर चल रहा होता था गर्मी लग रही

[51:47]

होती थी जैसे-जैसे गर्मी बढ़ी पार्टी के

[51:49]

अंदर

[51:50]

वैसे-वैसे कूलर हवा तेज तीन से चार चार से

[51:52]

पांच पे कर दिया। बाहर किसी को खबर ही

[51:54]

नहीं है। पार्टी टूटने वाली है।

[51:56]

अच्छा इनकी कूलर की भी कोई विचारधारा नहीं

[51:59]

होती। वैसे आप देखो तो

[52:00]

कूलर की

[52:01]

क्योंकि लेफ्ट और राइट स्विंग होता रहता

[52:02]

है।

[52:03]

और नहीं पता सेंटर में भी रोक दो आप।

[52:05]

हां नहीं रुकता नहीं है। रोक

[52:07]

सेंटर में रोक सकते हैं।

[52:08]

अच्छा स्विंग को रोक दीजिए।

[52:09]

या तो रुकेगा तो सेंटर में वरना

[52:11]

कहीं पे भी रोक सकते हैं। आप चाहे तो

[52:12]

लेफ्ट राइट भी कर रहे हैं।

[52:13]

सेंटर में भी रोक दीजिए।

[52:14]

मनुष्य को लेफ्ट और राइट के बीच में

[52:17]

स्विंग करते रहना चाहिए। हम

[52:20]

यह ध्यान रखना काहे के लिए अगर आप राइट लो

[52:24]

हम

[52:24]

फिर राइट लो फिर राइट लो

[52:26]

तो आप गोल चक्कर घूमते रह जाओगे और आपका

[52:28]

डिस्प्लेसमेंट जीरो हो जाएगा डिस्टेंस

[52:30]

बढ़ता जाएगा फिजिक्स की बात

[52:32]

मूवमेंट इज नॉट ऑलवेज प्रोग्रेस

[52:35]

तो क्या करें

[52:36]

कभी लेफ्ट लो कभी राइट लो

[52:38]

वाह

[52:39]

बेसिस मुद्दा

[52:40]

राइट

[52:41]

है ना

[52:42]

कभी भी लेफ्ट जो है 30 30 साल तक लेफ्ट

[52:46]

लेते रहो

[52:47]

हम

[52:47]

फिर राइट राइट ले लो हम

[52:49]

आगे से राइट

[52:50]

हां फिर लेफ्ट ले लो ओवरऑल एवरेज आपका

[52:54]

सेंटर में रहेगा हम

[52:56]

कभी भी हां

[52:57]

तो मुझे लगता है कमजोर

[52:59]

इनका ऐसा नहीं है कि विचारधारा नहीं है

[53:01]

मतलब कूलर की ये लोहियावादी हैं

[53:06]

लोहे के आते थे ना पहले

[53:08]

लोहियावादी

[53:08]

और इसीलिए हवा के वितरण में भी समाजवादी

[53:11]

हैं।

[53:11]

हां

[53:11]

वाह

[53:13]

पॉइंट

[53:14]

और जो ऊपर जाता है ना वही नीचे आता है।

[53:16]

मोटर लगा है नीचे।

[53:18]

हम्।

[53:18]

पानी आ रहा है ऊपर।

[53:19]

ठीक है। वही है विचार और धारा।

[53:21]

हां। ठीक है?

[53:23]

वाह।

[53:24]

यह ध्यान रखना।

[53:26]

विचारधारा।

[53:27]

विचारधारा हमेशा चलायमान रहे। नहीं तो

[53:29]

उसमें मच्छर

[53:30]

पनप

[53:31]

हो जाते हैं। जिससे डेंगू और मलेरिया हो

[53:33]

सकता है।

[53:33]

हम

[53:34]

है ना? तो विचारधारा बनाए रखने के लिए

[53:38]

थर्मोकूल

[53:39]

में एक मोटर लगाएं।

[53:41]

हम हैं।

[53:42]

क्या विचार है आपका?

[53:44]

इसके बारे में। कमजोर हो गई तृणमूल

[53:46]

पावरफुल है थर्मकोल

[53:47]

सारा पावर धारा का धारा रह गया

[53:52]

पर मुझे अभी भी हनीकॉम बोलते हैं ना इसको

[53:55]

ये जो टेक्नोलॉजी गत्ते उसकी जगह

[53:57]

जो खस की जगह पर

[53:58]

हां मुझे इसके इसके नोमेनक्लेचर पे अभी भी

[54:01]

मैं मैंने सोचा था मैं रिसर्च करूंगा

[54:03]

पढूंगा है क्या चीज

[54:04]

तुम हर बार यही कहता हूं मैं

[54:05]

मैं नहीं कर पाया अब मैं क्या है

[54:08]

वो जो मधुम

[54:09]

उसको बोलते हैं ना वो उसको भी क्यों बोलते

[54:11]

हैं

[54:12]

नहीं नहीं उस तरह की डिजाइन है इसका

[54:13]

कॉम्ब क्या क्या है उसमें?

[54:15]

कौम है?

[54:15]

कंघी नहीं है ना उसमें?

[54:16]

हनी है उसमें। हनी स्टोरेज होता है।

[54:19]

में हनी होता है ना।

[54:20]

इसका जो डिजाइन है ना गत्ते का वो उस

[54:22]

छत्ते की तरह है। वो ये कहते हैं।

[54:24]

नहीं वो तो है ही नहीं है।

[54:26]

इसमें गत्ता नहीं है। छत्ता है।

[54:27]

छत्ता नहीं ये गत्ता है। छत्ता नहीं है।

[54:30]

छत्ता है भाई। गत्ता तो गत्ता होता है।

[54:32]

गत्ता छत्ते की तरह है।

[54:34]

ओरिजिनल छत्ता नहीं है। नहीं समझे तुम।

[54:37]

मुझे कुछ पत्ता नहीं है भाई।

[54:40]

जो भी है कूलर बहुत जानदार है।

[54:42]

सत्ते पे सत्ता है।

[54:45]

सत्ते पे सत्ता है।

[54:46]

और इस पे शहर में

[54:49]

है।

[54:50]

कपड़ा लगता है।

[54:51]

शहर तोलकाता है।

[54:53]

तो तृणमूल वालों का शहर हुआ करता था।

[54:56]

अभी भी है। वहां रह तो रहे ना वो।

[54:58]

लेकिन कुछ ये जो शहर होता है ना

[55:00]

उसमें क्या होता है जब आप उसको वो शहर ना

[55:05]

सेंटेंस में रूप बदलता है। जैसे आप

[55:08]

कलकत्ते जा रहे हो। हम्म।

[55:10]

है ना? आप पटने जा रहे हैं।

[55:12]

पटने जा रहे हैं।

[55:14]

आप गए हो कभी? पटने?

[55:19]

कुछ शहरों में ये है।

[55:20]

बोलते बोलते रुक गए कुछ। हां।

[55:21]

मैं पटने जा रहा हूं।

[55:23]

लेकिन आप दिल्ली में नहीं मैं दिल्ली जा

[55:25]

रहा हूं। नहीं कह सकते आप।

[55:26]

हम्म।

[55:26]

दिल्ली से पटने की सीधी फ्लाइट है।

[55:28]

हां।

[55:29]

हम्म।

[55:29]

लेकिन पटने से दिल्ली गई है।

[55:31]

हम आई लव कोलकाता।

[55:35]

आई लव कोलकाता। कैसे हो गया? क्या आपका?

[55:37]

गालिब ने कहा था यार।

[55:38]

अच्छा वो पेंशन लेने जाते थे ना हम

[55:41]

दिल्ली से पेंशन लेने जाते थे।

[55:43]

कल एक तीन टू ने मारा हाय हाय

[55:49]

वो लेकिन वो भी बड़ा ऐसे देखें तो बहुत

[55:53]

घटिया पर काफी पोएटिक मैं फोनेटिक्स शब्द

[55:58]

इस्तेमाल कर लूं। फिर किया तुमने आज

[56:00]

महीना तुम्हारा पूरा नहीं

[56:01]

तो वो पटना बहाने वो हो जाएगा एक बार हां

[56:04]

पटना बहाने वो चाहेगा सटना

[56:07]

हम

[56:08]

ये भी बढ़िया वो है

[56:12]

इसके गहरे अर्थ हैं मतलब उसमें देखो तो आप

[56:14]

बिल्कुल

[56:15]

है ना मतलब छोटे बिहार अविभाजित बिहार के

[56:20]

छोटे शहर से अगर कोई आपको पटना लेकर के जा

[56:23]

रहा हो तो बड़े उसको आपसे हां

[56:26]

और सटना शब्द भी बहुत आंचलिक है। मैं तो

[56:31]

पहली बार अपने किसी बिहार के रूममेट से एक

[56:34]

बार सुना था कि यार पोस्टर साटे हो।

[56:36]

हां साटना बोलते हैं।

[56:37]

मैंने कहा मतलब बनाए हो बनाने का

[56:39]

पोस्टिना।

[56:40]

हां आई नो बाद में पता चला। वो साटना जो

[56:43]

है

[56:43]

हम

[56:44]

बढ़िया वो भी शब्द है चिपकाने के लिए।

[56:46]

साटना सुपाटा

[56:48]

चलो खैर अब बढ़े।

[56:50]

पर्दे की ओर बढ़े। इस वैसे जैसे हर एक चीज

[56:56]

पर हमने 90ज के मध्यवर्गीय घरों में

[57:02]

धूल और इत्यादि गंदगी से बचाने के लिए

[57:05]

कवर्स बनाए थे ना फ्रिज कवर आप या तो हम

[57:09]

बनाते थे या वो बिकते थे टीवी का कवर

[57:12]

इनफैक्ट टीवी का तो पर्दा भी होता था

[57:14]

हां टीवी का तो लकड़ी वाला भी होता था

[57:16]

लकड़ी वाला पर्दा एक तो होता था इनके यहां

[57:18]

वो नहीं होता था तो एक वो रस्सी वाला भी

[57:20]

होता था एक पर्दा जिसको बाकायदा खुला घर

[57:22]

में बना होता था वो ये मान्यता थी कि

[57:25]

स्क्रीन को धूल नहीं जमने देगा वरना

[57:27]

स्क्रीन साफ करनी पड़ती।

[57:28]

स्क्रीन के आगे एक स्क्रीन होनी चाहिए।

[57:30]

हां हां वही वही पर्दे से फीलिंग आती थी।

[57:32]

आपने यह पर्दा हटाया। फिर हम

[57:34]

देखो सिनेमा हॉल में भी जो जिस पर्दे पे

[57:36]

पिक्चर दिखाई जाती थी उसके आगे एक पर्दा

[57:38]

पर्दा होता था।

[57:39]

हमें हमेशा नाटक

[57:42]

या कहानियां देखने की जो आदत रही है वो दो

[57:46]

पर्दों के बीच के स्पेस में रही है। तो

[57:50]

टीवी कितना भी छोटा रहा ब्लैक एंड वाइट

[57:52]

वाला उसमें हमने एक पर्दा लगा लिया आपने

[57:54]

सुनाई।

[57:56]

वो तो होता है कि

[57:59]

घूंघट जो है ना हटता भी है तो दोनों तरफ

[58:03]

रहता है।

[58:03]

हम

[58:05]

हम

[58:06]

सर इधर रहता है।

[58:07]

साइड में रहता है।

[58:08]

तो आप जो देखते हो ना आपको दोनों तरफ जो

[58:10]

है पैरेलल एक पर्दा जो कभी भी बंद हो सकता

[58:14]

है। का एहसास बना रहना चाहिए। हम

[58:17]

ऐसी कोई भी बहुमूल्य चीज सुंदर चीज

[58:21]

पर्दा हटने के बाद भी पर्दे का एहसास नहीं

[58:26]

हटना

[58:26]

वो बना रहता है कि पर्दा है

[58:29]

इसीलिए घूंघट के पट खोल तब मिलेगी मुक्ति

[58:33]

हम

[58:34]

गोपालदास नीरज ने कहा है

[58:36]

पट मतलब दरवाजा

[58:38]

पर्दा दरवाजा भी होता है

[58:41]

नहीं

[58:43]

पट मतलब पर्दा और पटना मतलब मतलब

[58:47]

पर्दा हो जाना

[58:48]

पर्दाना

[58:49]

सेट हो जाना

[58:50]

यानी पटना यानी खुला शहर है पर्दा

[58:53]

अच्छा मुझे पटना मतलब पटाने वाला

[58:55]

पाटन था वो

[58:57]

पहले पाटन था

[58:59]

पाटन मतलब

[59:00]

पाट जो है ना वो

[59:03]

जहां राज्य का केंद्र होता था वो राजपाट

[59:08]

संभालना

[59:09]

अच्छा अच्छा अच्छा

[59:10]

मतलब राज्य और राजधानी

[59:12]

पाटलिपुत्र

[59:13]

पाटलिपुत्र जो है वो वो हम

[59:16]

उसी से आया पाट पाटन है राजस्थान गुजरात

[59:19]

में वो कभी उसकी राजधानी हुआ करती थी हम

[59:23]

तो पाटन पटना जो है वो पाटली पुत्र पाटन

[59:27]

था फिर

[59:28]

पाटना पाटन पटना हो गया

[59:32]

पर्दा जो है वो पट

[59:34]

हम

[59:34]

पर ये

[59:35]

चित्रपट

[59:36]

चित्रपट

[59:37]

हां ये आप सही कहा

[59:38]

सिनेमा का पर्दास वो पहला पर्दास

[59:41]

सिल्वर स्क्रीन

[59:42]

यस

[59:42]

अंग्रेजी में उसको सिल्वर स्क्रीन कहते

[59:44]

हैं पर पहले कोई सिल्वर होता था

[59:47]

कपड़े का नहीं

[59:48]

कपड़े नहीं होता था

[59:49]

जिसमें लाइट नहीं होती थी इतनी ना

[59:50]

सिल्की सिल्की कपड़े होते थे वो

[59:52]

प्रोजेक्शन में इतनी लाइट नहीं होती थी तो

[59:54]

सिल्वर एलुमिनियम टाइप का कुछ होता था

[59:56]

नहीं कपड़े होते थे सिल्की वो

[59:58]

तो उसका कलर सिल्वर होता था वाइट नहीं

[59:59]

होता था

[60:00]

इसलिए उसको सिल्वर स्क्रीन

[60:01]

ब्राइटनेस ज्यादा देता था वो

[60:02]

पर वो तो चला गया फिर वाइट वाला हो गया

[60:05]

लेकिन नाम एक बार रखा जाता है ना

[60:08]

सिल्वर स्क्रीन पे देखिए

[60:09]

तो फिर रखा जाता पहले अनाउंसमेंट होता था

[60:12]

सिल्वर स्क्रीन पे देखिए आज की फिल्म

[60:14]

हम

[60:15]

जो भी फिल्म का नाम होता था

[60:16]

और सिनेमा सिनेमा को हम बोलते हैं

[60:18]

ब्लॉकबस्टर सिनेमा है

[60:19]

हम

[60:19]

ब्लॉकबस्टर युद्ध की चीज है

[60:21]

हम

[60:22]

जैसे अभी बंकर बस्टर होता है ना

[60:25]

हम

[60:25]

बंकर को तोड़ देता है वो तो एक बॉम्ब होता

[60:28]

था जो ब्लॉकबस्टर मतलब एक ब्लॉक मोहल्ले

[60:30]

का एक ब्लॉक को उड़ा देगा भाई एक घर नहीं

[60:32]

बल्कि एक ब्लॉक उड़ा देगा

[60:33]

सिनेमा में ही नाम क्यों

[60:34]

तो उस बॉम्ब को कहते थे ब्लॉकबस्टर

[60:36]

हम

[60:37]

अरे जो हिला के रख दिया उसको ब्लॉकबस्टर

[60:39]

किसी ने कह दिया तो अब जो है वो चला रहा

[60:40]

है।

[60:40]

ब्लॉकबस्टर हो गया है।

[60:42]

हम

[60:42]

तो बंकर बस्टर का

[60:44]

पूर्वज है वो।

[60:45]

पूर्वज है वो।

[60:47]

पर जैसे

[60:48]

अपने ख्याल का रूपला पर्दा बहुत अच्छा था

[60:50]

यार। आई लव दैट ट्रांसलेशन है ना रुपहला

[60:53]

पर्दा।

[60:54]

रुपह पहले पर्दे पर देखिए।

[60:55]

नहीं नहीं रजतप भी बोलते थे।

[60:58]

क्या बात कर रहे हैं?

[60:59]

हां भाई। रजतपट भी बोलते थे। पत्रिकाओं

[61:03]

में

[61:03]

यानी जागरण वगैरह नहीं किया था।

[61:04]

पत्रिकाओं में सिल्वर स्क्रीन के लिए रजत

[61:06]

पट यूज किया जाता था।

[61:09]

फिर बाद में वो चित्रपट तो खैर

[61:11]

जैसे मुझे एक अनुवाद बड़ा मजेदार लगता था।

[61:14]

वैसे आज अनुवाद की चर्चा नहीं है पर

[61:16]

एलबीडब्ल्यू का पग बाधा

[61:17]

हम

[61:18]

सिंपल क्लीन

[61:20]

पग बाधा

[61:22]

लेकिन पर्दा जो है ना

[61:24]

हम

[61:25]

उसके पहले का पर्दा है

[61:27]

पर्दा प्रथा

[61:29]

उसके भी पहले जाइए तो जो कार्विंग

[61:33]

गुफा की दीवार पे हमारे पूर्वज कर रहे थे

[61:37]

हिरन बना रहे थे

[61:38]

केव पेंटिंग बोलते थे उसे

[61:39]

नहीं वो तो पेंटिंग नहीं उकेर करके कुछ जो

[61:43]

हां

[61:44]

चित्र

[61:46]

वो तो वो भी एक किस्म का मतलब विजुअल जैसे

[61:51]

पर्दा अभी जो स्क्रीन जो है मतलब

[61:53]

कैनवस था वो

[61:54]

हां

[61:55]

हां हां कैनवस

[61:55]

कैनवस था

[61:56]

हां

[61:56]

पर्दा नहीं था पर्दा जो है ना प्रथा है

[62:00]

जो

[62:02]

आपके

[62:05]

सभी समाजों में एक तरह से

[62:06]

हम

[62:07]

महिलाओं को सुरक्षित रखने के लिए

[62:10]

हम

[62:10]

क्योंकि महिलाओं को प्रॉपर्टी के रूप में

[62:13]

देखा जाता था तो उनको दूसरों से आप जैसे

[62:17]

बहुमूल्य चीजें जो होती हैं वो छुपा लेते

[62:19]

हो

[62:20]

तो उनको छुपाने के लिए था पर्दा

[62:22]

घूंघट

[62:23]

यहां पे उतना प्रचलित नहीं था बिकॉज़ यहां

[62:26]

पे प्रचुर मात्रा में सब कुछ उपलब्ध थी

[62:28]

लूट पार्ट जो है उस तरह का नहीं होता था

[62:31]

पर जब आपको बाहर से लोग आए खास करके

[62:37]

अरब और सेंट्रल एशिया से

[62:38]

हम

[62:40]

उनके पास ऑलरेडी एक पर्दा दा का सिस्टम था

[62:44]

जो

[62:45]

बुर्का वगैरह जो होते थे

[62:47]

वो सब तो बाद के इनोवेशन है। तरह डिफरेंट

[62:49]

संस्कृतियों से आई हैं। कहीं पे बुर्का

[62:51]

था, कहीं पे नकाब था, कहीं पे हिजाब था,

[62:54]

कहीं पे

[62:56]

थोड़ा और भी कम था। पर्दा लेकिन एक था।

[63:00]

पर्दा का मतलब क्या बोले? एक दो दो लोगों

[63:04]

के बीच में एक स्क्रीन हम

[63:08]

स्क्रीन ही है वो

[63:09]

और वो

[63:11]

एक व्यवस्था थी जो कि यहां पे लोगों ने

[63:15]

फिर यहां के राजा लोगों ने खास करके अपने

[63:18]

घर में लागू किया कि भाई कोई लोग आएंगे तो

[63:21]

रानी साहिबा उनकी

[63:23]

सहेलियां जो थी

[63:24]

वो जो हैं सहेलियां नहीं

[63:27]

दासी

[63:28]

दासियां भी

[63:30]

इनके फिल इन द ब्लैंक्स में गेस मरते रहते

[63:33]

मजा आता है ना रानियां या उनके परिवार के

[63:36]

लोग जो है वो एक तो जनाना महिलाओं के लिए

[63:38]

जो एक कॉर्नर है उधर रहेंगी अगर

[63:40]

सामने आएंगी तो उनके चेहरे पे

[63:43]

एक स्क्रीन रहेगा आपके और मेरे बीच में एक

[63:45]

स्क्रीन रहेगा वो पर्दा

[63:47]

जो है फिर विक्टोरियन टाइम में

[63:49]

चेहरा तो खुला था पर और भी बदन जो है वो

[63:52]

फुल ढकने का

[63:53]

वो भी एक पर्दे का

[63:54]

का ही सिस्टम था कि

[63:56]

ब्रिटेन में हम

[63:58]

हमारे यहां

[64:01]

जब इलेक्शन होता हम लोग बोलते हैं उसको

[64:04]

मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट हम

[64:07]

मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट बोलते हैं।

[64:08]

पहली बार वाला जो आपने बोला वो गृह मंत्री

[64:10]

जी की तरह बोला एकदम ऐसे ही बोलते हैं।

[64:12]

दूसरा वाला तो सही था। पहले वाला

[64:14]

एमसीसी लागू होता है हमारे यहां। ब्रिटेन

[64:17]

में पर्दा लागू होता है।

[64:18]

ब्रिटेन में उसको पर्दा बोलते हैं।

[64:20]

कि पर्दा इज एन इफेक्ट।

[64:23]

मतलब जिस दिन के बाद से अब जब चुनाव की

[64:26]

घोषणा हो गई है और नई सरकार बनने तक पर्दा

[64:29]

प्रथा जो है वहां

[64:30]

लागू हो जाए। लागू होती है पी ए आर डी ए

[64:32]

पी यू आर डी

[64:33]

पी यू आर डी

[64:34]

डी एच

[64:36]

यहीं से गया है वो शब्द

[64:37]

हम

[64:37]

क्योंकि भारत उनका उनके साम्राज्य का एक

[64:39]

बहुत बड़ा हिस्सा

[64:40]

ये तो हमारे यहां भी जैसे चुनाव होता है

[64:42]

हाथी वाती सबको पर्दा कर देते हैं ना

[64:43]

हां हां जितने

[64:45]

तो वहां पे पर्दा सिस्टम लागू होता है अब

[64:47]

वहां पे इसका विरोध हो रहा है कि भाई

[64:49]

सिस्टम का नाम जो है ना

[64:51]

कुछ हां आयातित ही नहीं एक ऐसी प्रथा से

[64:55]

जुड़ा है जो कंजर्वेटिव मानी जाती है जो

[64:57]

जो हां जो सेक्सिस्ट है थोड़ा

[65:01]

ओल्ड फैशन है कह लीजिए

[65:02]

रिजिड है और फ्रीडम के थोड़ा अगेंस्ट है

[65:06]

तो वहां पर कुछ-कुछ जगहों पर उसका नाम

[65:08]

कुछ-कुछ डिपार्टमेंट्स ने चेंज कर दिया

[65:10]

और उसको पर्दा कहते हैं वो लोग

[65:12]

भारतीय प्रेम का आधा इतिहास जो है पर्दा

[65:16]

हटाने में ही गया है। जैसे आप देखिए चिलमन

[65:20]

जो शब्द है

[65:22]

सही जगह लेना चिलमन

[65:23]

आपका मन चिल है अभी इस समय कि नहीं

[65:26]

ये जो चिलमन है गेसू है क्या है वो आप लोग

[65:29]

बताइए ना आपके जमाने में

[65:30]

जो दुश्मन है दुश्मन है हमारी हां

[65:34]

कितनी सुंदर दुल्हन है हमारी इस टाइप का

[65:36]

ही कुछ गाना है ना वो

[65:37]

मेरे ख्याल से हैं

[65:39]

तो वही है भावार्थ वही है

[65:41]

कितनी शर्मीली दुल्हन है हमारी ऐसा ही

[65:43]

मोहम्मद रफी का है शायद

[65:45]

मोहम्मद रफी साहब ने गाया है

[65:46]

और एक वो ये होता था उस समय जो कि इस

[65:49]

चिलमन से

[65:50]

बिल्कुल पर्दा ही है

[65:52]

हम

[65:52]

बिल्कुल पर्दा है वो

[65:54]

हम

[65:55]

हां हां बिल्कुल

[65:56]

कि तुम मुझसे जो छुपा रहे हो पर्दा कर रहे

[65:57]

हो

[65:58]

इस चिलमन से वो झांके और इस चिलमन से वंके

[66:00]

इसको चिलमन ही कहते हैं जो घूंघट को ऐसे

[66:02]

पकड़ के रखते हैं

[66:03]

इस चिलमन से वो झांके और उस चिलमन से वो

[66:06]

झांके तो ये एक शायर थे वो तीन बार इसको

[66:08]

दोहराते हैं इस चिलमन से वो झांके और उस

[66:10]

चिलमन से वो आग झांके तो कोई खड़ा हो के

[66:13]

सुनने वालों में से बोलता है लगाओ आग

[66:15]

चिलमन को न ये झांके

[66:18]

सुना होगा ये तो आपने नहीं

[66:20]

सुना है बहुत दिनों पहले

[66:21]

हां

[66:22]

पर ये चिलमन का कांसेप्ट इंटरेस्टिंग था

[66:25]

उसमें आप देखिए कितने गीत लिखे गए हैं इधर

[66:28]

प्रेमी खड़ा है इधर प्रेमिका और बीच में

[66:31]

चिलमन रूपी दीवार है अब प्रेमी प्रेमिका

[66:34]

को झलक देख पा रहा है चिलमन कई बार उस तरह

[66:38]

का थोड़ा पारदर्शी होता है कि कोई खड़ा है

[66:40]

यह पता चल जाए पर वो झलक ही है चेहरा नहीं

[66:43]

देख पा रहा है और फिर वो लिख रहा है या गा

[66:45]

रहा छन छन के दीदार होता है ना? हां वही

[66:48]

वही यस लाइटिंग अगर अच्छी हो पीछे से तो

[66:52]

उसका बहुत

[66:53]

छिछला सा वो पर्दा होता है चिलमन जो होता

[66:55]

है जिसमें आप हल्का-हल्का दिख रहे हो

[66:56]

झनी झनी टाइप होता है

[66:59]

ट्रांसपेरेंट टाइप से होता है जिसमें आपको

[67:01]

हुस्न छन छन के बाहर निकलता रहे

[67:04]

हां

[67:05]

आगे

[67:07]

अजीज मियां को याद करो

[67:09]

सब याद आ जाएगा

[67:11]

तो ये

[67:11]

छान कर लेते हैं भाई

[67:14]

बहुत सारे लोग होते हैं उनको पसंद आता पता

[67:17]

है ऐसे ही हम

[67:20]

नहीं ये बात सच है वैसे मतलब

[67:24]

आप लोग खैर थोड़ा बेहतर बताएंगे पर कलाई

[67:28]

देख ली प्रेमिका की तीन दिन तक मस्त है हम

[67:32]

है ना

[67:33]

वही इश्क होता है

[67:34]

कि उस समय

[67:36]

चेहरा देखना तो बहुत बड़ी बात थी छत पर

[67:38]

उसकी एक झलक मिल गई

[67:40]

और यहां आपने देखा और आपने देखा कि

[67:43]

Instagram पे डीपी नहीं लगाई है। आप फॉलो

[67:45]

रिक्वेस्ट एक्सेप्ट नहीं करते हैं। वो ये

[67:47]

इस जनरेशन में वो पेशेंस नहीं है कि

[67:52]

झलक अगर सीमित भी है तब भी खूबसूरत है।

[67:56]

अधिक की चाह पर पिछली बार बात हुई थी ना

[67:58]

कि

[68:00]

पूरा देख लेने की जो ऑब्सेशन है ना कि यार

[68:04]

दिख जाए एक बार वो चेहरा भी दिख जाए। वो

[68:07]

पहले नहीं था। पहले तो हम हमारे पिता माता

[68:10]

की जो शादियां हुई हैं तो बिना एक दूसरे

[68:12]

का चेहरा देखे हुई हैं।

[68:13]

पहले कहते थे ना कि आंखें चार हो गई।

[68:17]

बस

[68:17]

हां आंख मिल गई बस ठीक है।

[68:19]

और वो

[68:20]

शर्म इतनी थी ना

[68:21]

खिड़की से

[68:22]

खिड़की से आंखें चार हो गई। यहां तो वोट

[68:25]

डालेंगे।

[68:26]

हां।

[68:26]

हालांकि खिड़की में हमारे यहां पर्दा भी

[68:28]

होता है।

[68:29]

हम्म

[68:29]

दरवाजों में भी पर्दा होता है।

[68:30]

हर जगह पर्दा ही पर्दा था पहले। बल्कि

[68:33]

पखानों में पर्दे होते थे। जिनके दरवाजे

[68:35]

नहीं होते थे।

[68:36]

हां हां। हां

[68:36]

अभी भी है

[68:38]

क्योंकि वो जो अपना स्वच्छ भारत अभियान है

[68:41]

शौचालय वाला

[68:42]

दरवाजा लगाना

[68:42]

उसमें दरवाजा नहीं आया है

[68:44]

पर्दा है

[68:45]

तो उसमें जैसे

[68:46]

पर्दा बाय द वे बेटर है

[68:48]

हवा चल गई तो

[68:48]

नहीं हवा चली गई वो अंदर ईंट ऐसे दबा के

[68:50]

रखते हैं नीचे ऐसे उसका लेकिन उसका हवा चल

[68:53]

गई तो क्या

[68:55]

नहीं नहीं वो हो सकता है ना

[68:56]

अंदर ईंट रहती

[68:56]

अरे भाई वो आदमी खेत में रहता था कल

[68:59]

हम

[68:59]

हवा ही हवा थी

[69:00]

क्या हवा चल गई

[69:02]

लेकिन उसका फंडा

[69:02]

उसको तो खेत से उसमें किया गया है

[69:04]

नहीं वो पर्दा गिरा के कर रहा है। यही

[69:07]

काफी है।

[69:08]

यही काफी है। और उसमें एक फंडा है। जब वो

[69:11]

बिजी होगा वो टॉयलेट तो पर्दा ढका रहेगा।

[69:14]

जब वो खाली होगा तो हटा रहेगा।

[69:16]

बस समझ गए? उल्टा है।

[69:18]

ओ जैसे ओपन क्लोज्ड होता है बाहर विदेश

[69:20]

के।

[69:20]

नॉक करने की जरूरत नहीं है।

[69:23]

करोगे काम।

[69:25]

नॉक करने की जरूरत नहीं है। नॉक करने की

[69:28]

जगह नहीं है। नहीं तो इमेजिन करो।

[69:30]

स्पेस किधर है?

[69:31]

इमेजिन करो कि अतुल उस इस वाले टॉयलेट में

[69:34]

पर्दे वाले में बैठ के अपना काम कर रहे

[69:36]

हो। हम तुम लड़ रहे हैं फिजिकली। हां

[69:39]

और बह जाओ उसी में दोनों लोग।

[69:42]

सपोर्ट ही नहीं मिलेगा ना तुम्हें।

[69:43]

हां पर्दे के साथ तो बाहर आ जाएंगे।

[69:45]

खतरनाक है।

[69:46]

यार ये टॉयलेट वहां होते हैं जहां दो

[69:48]

लोगों के लड़ने की संभावना नहीं होती।

[69:50]

क्योंकि जगह ही नहीं होती। दो बैल लड़

[69:52]

सकते हैं।

[69:54]

ठीक है?

[69:56]

वो हम ऐसा इमेजिन करते हैं ना हम फ्लैट

[69:59]

में रहते हैं जिसमें कि अटैच्ड बाथरूम

[70:00]

होता है। तो हमको लगता है कि सर वहां पे

[70:02]

दूर-दूर तक कुत्ता हो सकता है झांक के

[70:04]

गुजर जाए कि क्या हो रहा है इधर?

[70:06]

क्वार्टर की जो हम बात करते थे रहने वाले

[70:07]

वहां कुछ ऐसे क्वार्टर थे जिनमें टॉयलेट

[70:10]

में पर्दे लगते थे। दरवाजे का पैसा ही

[70:11]

नहीं था। उसके बाद क्योंकि सस्ता भी था वो

[70:14]

₹300 ₹200 महीने में क्या मिलेगा आपको? हम

[70:17]

तो वो भी रहता था। पर चिलमन के साथ आई आई

[70:20]

सपोज कि चिलमन का जो दृश्य होता होगा उसके

[70:24]

साथ भारी कल्पनाशीलता की जरूरत

[70:27]

पहले इमेजिनेशन करके ही आदमी खुश रहता था

[70:30]

जीता था प्रेम के लिए इमेजिनेशन की बहुत

[70:34]

जरूरत है वही प्रेम

[70:35]

वो उर्वर प्रेम माना जाता है जिसमें

[70:37]

इमेजिनेशन अनंत हो और टाइम पास भी अच्छा

[70:39]

होता हो

[70:39]

तसवुर

[70:40]

तसवुर

[70:42]

तसवुर और तखल

[70:43]

तखयु

[70:44]

तखयु के करिश्मे हैं बुलंदी है ना बस्ती

[70:48]

वो होता था। अब तो आप किसी को देखते हैं।

[70:50]

Instagram में प्रोफाइल चेक कर रहे हैं।

[70:51]

Facebook पे जाके देख रहे हैं। हर जगह

[70:53]

ढूंढ रहे हैं। 36 फोटो 36000 फोटो देख

[70:56]

लिया। टैग-वैग करके देख लिया कि कहां-कहां

[70:58]

टैग होगा। लेकिन आप मानते थे जैसे दिखा जो

[71:02]

हां हां दिखा दिखा। उसकी मां थी। उसकी

[71:03]

छोटी बहन थी। बड़ी बहन थी। चाची की लड़की।

[71:05]

जैसे हम लोगों को भालू दिखा था और हमने

[71:07]

माना कि मानना है।

[71:08]

नहीं भालू दिखा था।

[71:09]

हां आप मानते ही थे ना। जानते तो नहीं थे

[71:11]

कि भालू है।

[71:12]

नहीं जानते थे तब आपको कैसे? वो उसी को

[71:14]

मानना कहते हैं।

[71:15]

किसी दिन भालू आएगा ईश्वर है। ये आप मानते

[71:17]

हैं।

[71:17]

किसी दिन भालू आएगा बोलेगा हां ताऊ हम

[71:19]

इन्हें दिखे थे। आप यकीन मान लो आपने वो

[71:22]

सुना है फरीद अयाज वाला सुना ही होगा।

[71:25]

हमने बेपर्दा तुझे माह जभी देख लिया।

[71:30]

याद है अब ना कर पर्दा के

[71:34]

भी देख लिया।

[71:36]

फिर क्या है? लोग देखेंगे वहां। हमने यहीं

[71:40]

देख लिया।

[71:41]

ठीक होता था।

[71:42]

ऐसा माना जाता है। तेरे दीदार की थी

[71:44]

तमन्ना तब हमको, लोग देखेंगे वहां हमने

[71:47]

यहीं देख लिया।

[71:48]

ऐसा माना जाता है कि वहां जो अर्श पे बैठे

[71:52]

हुए साहब हैं

[71:54]

द बिग बॉस

[71:56]

उनके और आपके बीच एक पर्दा है।

[71:59]

जिसको आप वहां जाकर के देखोगे पर आपने

[72:01]

यहां देख लिया।

[72:02]

हां। तो कुछ लोग ये कहेंगे हमने तुम्हें

[72:04]

स्पिरिचुअल जर्नी जो है वो एक हर लहजा

[72:07]

बशक्ले बुते अयार बरामद।

[72:10]

हर लहजा बशक्लेर

[72:12]

बनाबत और यह

[72:14]

के ना तू खुदा है ना मेरा तू खुदा है ना

[72:17]

मेरा इश्क फरिश्तों जैसा

[72:20]

दोनों इंसान हैं

[72:21]

तो हां हां

[72:22]

तो इतने क्यों इतने हिजाबों में मिले

[72:25]

जिस तरह सूखे हुए फूल किताबों में मिले

[72:28]

हां तो

[72:29]

हमको ये लगता है कि जो खुदा है और हमारे

[72:32]

बीच में एक हिजाब एक पर्दा है

[72:35]

हम

[72:36]

और वो पर्दे में छुपा हुआ है वह हमको को

[72:39]

उस दिन दर्शन देगा जिस दिन हमारा हिसाब

[72:43]

करेगा। मतलब ऑर्डर ऑर्डर फिर

[72:45]

मतलब मर के जो ऊपर जाएंगे

[72:47]

नहीं नहीं मर के ऊपर नहीं जाता कोई

[72:50]

तो हिजाब कहां करेंगे

[72:52]

हश्र के दिन होगा यहां कबर में अजाब आएगा

[72:56]

पहले और वो बिलियंस ऑफ इयर्स हो सकता है

[72:59]

बंदे का मूड नहीं सुनने का अभी इतने लोग

[73:02]

मर गए नहीं सुन रहे केस जो है उसका नहीं

[73:04]

सुनते तो यहीं पे रहोगे अंदर और यहां पे

[73:08]

बहुत रोज चलेगा रोज

[73:12]

जबकि जजमेंट नहीं हो रहा है। अंडर ट्रायल

[73:14]

हो आप।

[73:14]

हां, यह यहां पे भी सिस्टम है भाई। जो

[73:16]

हिसाब

[73:17]

अंडर ट्रायल को जेल में कैदी की तरह रखा

[73:20]

जाता है।

[73:21]

लेकिन ये गलत है।

[73:22]

ये गलत है। आप मर गए आपका हिसाब किताब

[73:24]

फ़ौरन करो।

[73:25]

नहीं पर ये तो होता नहीं है। एक्चुअली

[73:26]

फास्ट ट्रैक चाहते हो आप।

[73:28]

मानने की बात है। नहीं नहींस्ट ट्रैक कुछ

[73:30]

लोगों ने कहा कि नहीं नहीं अगर तुम किसी

[73:31]

को मार के चले जाओगे तो तुमको फास्ट ट्रैक

[73:33]

मिल जाएगा।

[73:34]

हम

[73:34]

ठीक है। इसके चलते बहुत सारे लड़के जो हैं

[73:36]

वो

[73:37]

घोर वाले चक्कर में

[73:38]

हां अरे इतने वतने के चक्कर में लग जाते

[73:39]

हैं। वो भी गलत है। कुछ नहीं होता। अभी

[73:41]

आपका इनडेफिनेट पीरियड के लिए एप्लीकेशन

[73:43]

पेंडिंग है तो उसमें होता है कि आप पर्दा

[73:46]

जो है उसी दिन उठेगा एक दिन उठेगा

[73:49]

फिर भेद

[73:50]

तब तक आप देख नहीं पाओगे

[73:51]

उसी दिन भेद खुलेगा

[73:52]

हां

[73:53]

उसी दिन भेद खुलेगा पर्दा जो उठ गया तो

[73:55]

भेद वो खुल जाएगा

[73:56]

पूछो हां ये भी तो था पर्दा जो उठ गया तो

[73:59]

भेद खुल जाएगा आगे अल्लाह मेरी तौबा

[74:04]

हां

[74:06]

एक पर्दा होता है मर जाना

[74:08]

हम हैं

[74:08]

पर्दा कर गए

[74:09]

पर्दा कर गए हैं?

[74:11]

हां। मतलब अब हमारे उनके बीच में एक

[74:13]

स्क्रीन है। मतलब मरे नहीं।

[74:15]

हो

[74:15]

आदमी स्वीकार नहीं कर सकता ना। हमारे वाले

[74:17]

मर गए।

[74:18]

यह बड़ा अच्छा है वैसे। ये सम्मानजनक भी

[74:21]

है। और मतलब ये

[74:23]

अरे अंग्रेजी में है ना कि ही पास्ड अवे।

[74:25]

हां।

[74:26]

ये नहीं बोलेंगे कि ही इज डाइड।

[74:28]

पास्ड अवे। मतलब निकले हैं।

[74:30]

अभी आ जाएंगे।

[74:34]

हां। हां। उर्दू में है इंतकाल।

[74:36]

हां।

[74:37]

इंतकाल हो गया उनका।

[74:38]

इंतकाल का मतलब मर गए ना? ट्रांसफर ओ

[74:41]

इंतकाल का मतलब अरे म्यूटेशन करवाते हो

[74:43]

जाके वहां पे कागज जमीन वमीन तो इंतकाल

[74:45]

होता है ना

[74:46]

हां

[74:46]

इंतकाल का मतलब होता है कि यहां से उधर

[74:48]

चले गए

[74:49]

सोचो एक आईएएसएस ऑफिसर का

[74:51]

आप जीवन में कितनी बार इंतकाल

[74:53]

इंतकाल पे इंतकाल हो रहा है

[74:54]

और जो वो जला दिए जाते हैं वो भी कहते हैं

[74:57]

कि बैकुंठ चले गए

[74:59]

हां हम

[75:00]

परलोक की यात्रा

[75:01]

परलोक की यात्रा

[75:02]

सिधार गए

[75:02]

श्री हरि के चरणों में चले गए

[75:05]

ठीक है

[75:05]

श्री हरि तो यहां बैठे हैं

[75:06]

हम मान हम मानने को ही तैयार नहीं है कि

[75:10]

हम एक दिन नहीं रहेंगे। ठीक है?

[75:12]

नहीं है तब भी मान रहे हैं।

[75:14]

हां ये ये पर्दा हमने अपने आंखों पे डाला

[75:17]

है। वो कहते हैं ना कि वो क्या हुआ? आपका

[75:19]

वो आपका पर्दा क्या हुआ? तो उन्होंने कहा

[75:22]

कि अक्ल पे मर्दों को पड़ गया। तो मर्द

[75:24]

औरत जा जानवर मतलब जिनको थोड़ी सेंस है।

[75:28]

सबका यही पर्दा है कि हम पर्दा कर लेंगे

[75:31]

आपसे एक दिन। हम

[75:33]

ठीक है। पर हम जाएंगे नहीं।

[75:34]

अच्छा मान लो

[75:35]

आपके छाती पे मूंग द लेंगे। हम

[75:37]

जैसे मान लो कंपनी ट्रांसफर कर दे मेरा

[75:40]

मुंबई

[75:40]

इंतकाल हुआ वो

[75:41]

तो मेरा इंतकाल हो गया लोग तो रोना पीटना

[75:43]

मचा देंगे इंतकाल करके लेकिन यह नहीं

[75:44]

सोचेंगे खुद बोल रहा है तो वो एक वायरल है

[75:48]

क्लिप जिसमें एक बच्चा अपने बाप को फ़ करता

[75:51]

है कि अब्बू

[75:52]

हां

[75:55]

हुए नहीं रहे

[75:56]

वो नहीं वो खत्म हो गए

[75:57]

वो खत्म हो गए

[75:58]

कौन

[75:59]

अंगूर अंगूर खत्म हो गए

[76:03]

उसके बाद उसके पिताजी उसको सुनाते हैं

[76:06]

हां तो ये जो है ना पर्दे का सिस्टम अपना

[76:08]

अपना दुनिया में ऐसे ही बना हुआ है।

[76:11]

भाई पर्दा है

[76:13]

चांद से पर्दा कीजिए

[76:17]

कहीं चुरा चुरा ना ले चे सही है।

[76:21]

कहीं आता है

[76:22]

ये आदमी सही है। इस मामले में

[76:24]

यार तुम गाने के कहीं है। अच्छा मुझे लगा

[76:26]

कहीं

[76:27]

कहीं चुरा ना ले चेहरे पे नूर।

[76:28]

ए मेरे हमसफर

[76:30]

पर सूरज से पर्दा जरूर कीजिए। अभी जिस समय

[76:32]

जिस तरह का नूर सूरज

[76:34]

उसके लिए भाई

[76:35]

चेहरे का नूर चुरा लेगा। इसीलिए उसको

[76:36]

स्क्रीन कहते हैं।

[76:38]

हम

[76:39]

वो भी एक पर्दा है।

[76:40]

वही तो है

[76:41]

आपका आपकी चमड़ी जो आपके लिए एक पर्दा है

[76:45]

उस पर एक पर्दा है।

[76:46]

पर्दा है।

[76:47]

वरना रोस्ट हो जाएंगे आप। वो

[76:49]

पर्दे के ऊपर पर्दा होता है। चर्चिल ने

[76:53]

हम

[76:54]

आयरन कर्टन था ना।

[76:55]

हम

[76:56]

जानते हो ना?

[76:57]

हां हां वो जो

[76:59]

रूस और अमेरिका एक आयरन कर्टन था। दो

[77:01]

दुनिया दो क्या बोलते हैं उसको? दो

[77:03]

ग्रुप्स

[77:04]

हम

[77:04]

या कैंप्स या कोल्ड वॉर में

[77:08]

हां

[77:08]

तो वो आयरन कर्टन मतलब कोई उधर नहीं जा

[77:12]

सकता इधर का आदमी

[77:14]

तो वो आयरन कर्टन सही में होता है

[77:18]

कहां

[77:19]

स्टेज पर जैसे

[77:21]

कपड़े

[77:22]

जहां नाटक होता है ना वहां कपड़े वाले

[77:24]

पर्दे होते हैं। एक एक लोहे का पर्दा होता

[77:25]

है। इन केस ऑफ़ फायर

[77:29]

देखने वालों को दर्शकों को और स्टेज के

[77:32]

बीच में एक आयरन का वह गिर जाता है

[77:34]

ऑटोमेटिकली जो आयरन कर्टेन कहलाता है। वो

[77:36]

सुरक्षा के लिए था। अच्छा

[77:38]

इसलिए नहीं था कि दुनिया दो ध्रुवों में

[77:41]

बटी हुई है और इनके बीच

[77:43]

उसका कोई हां वो यूज़

[77:44]

लोहे का लोहे की दीवार

[77:46]

यहां भी कोई शीत युद्ध चल रहा है।

[77:47]

हां

[77:48]

ऐसा नहीं है पर वो था कि अगर आग ऐसी लगी

[77:52]

बेकाबू तो एक पर्दा ऐसा था जो कि ऐसे बंधा

[77:56]

होता था कि वो जल जाता था।

[77:58]

तो फिर वो दर्शकों के दर्शक दीर्घा और

[78:02]

स्टेज के बीच में एक दीवार खड़ी हो जाती

[78:04]

थी लोहे की जिसमें आग नहीं लगता था। पर

[78:07]

हिंदी पत्रकारिता में पर्दाफाश शब्द शब्द

[78:10]

का इतना ओवर यूज हुआ है कि ऐसा लगता है कि

[78:14]

होता है ना कि अधिकारी ने किया पर्दाफाश

[78:16]

या फला नेता का हुआ पर्दा

[78:19]

जर्नलिस्ट ने किया पर्दाफाश तो ऐसा लगा है

[78:21]

कि कुछ लोग सुबह उठते हैं नाश्ता करते हैं

[78:24]

पर्दाफाश करते हैं फ़श का सही अर्थ क्या है

[78:27]

उठाना

[78:28]

नहीं

[78:28]

कोई और किसी और शब्द में प्रयोग है यहश

[78:31]

हटाना

[78:32]

जैसे

[78:33]

राजफाश

[78:34]

हां

[78:35]

वही पर्दा ही

[78:37]

हम

[78:37]

राजाश करना मतलब राज

[78:39]

रिवील करने का मतलब

[78:40]

रिवील करना फास्ट करना मतलब रिवील करना

[78:42]

जैसे कल्याण बन जी ने वो

[78:44]

हम

[78:45]

फास्ट किया था ना

[78:47]

टेक्स्ट WhatsApp

[78:49]

चैट

[78:50]

नहीं नहीं वो तो

[78:51]

गैस फ़ास्ट किया था उन्होंने

[78:54]

वो

[78:54]

नहीं वो फ़ाश ही था

[78:56]

हां हम

[78:57]

अच्छा वो जो

[78:58]

पर्दा जो है वो राज भी है

[79:01]

पर्दा जो है वो राज भी है ना

[79:02]

राज को छुपाता ही पर्दा है ना

[79:04]

हां तो पर्दे का अर्थ यह है कि राज है।

[79:07]

अच्छा।

[79:08]

अगर पर्दा है

[79:09]

तो राज है

[79:10]

तो राज है

[79:10]

तो सिमरन भी होगी।

[79:12]

तो सिमरन भी होगी।

[79:13]

जय पर्दा भी हो सकती है।

[79:14]

जया पर्दा

[79:17]

हम लोग जय पर्दा ही बुलाते थे। जय पर्दा

[79:19]

पर्दा ही पर्दा बाद में आया पता।

[79:21]

अच्छा

[79:21]

आई थिंक पर्दा ही

[79:24]

जय प्रदा हम तो बाद में सुने कॉमन उसमें

[79:27]

है जया पर्दा।

[79:28]

अच्छा

[79:29]

अमर सिंह तो उसी में छुपे हुए थे।

[79:43]

अरे यार

[79:47]

अमर सिंह ने हमेशा

[79:49]

हम

[79:49]

पर्दे में रह के ही काम किया है।

[79:51]

बॉलीवुड की पर्सनालिटीज को पर्दे के रूप

[79:54]

में इस्तेमाल किया।

[79:55]

हम

[79:56]

अमिताभ बच्चन उनके लिए पर्दा थे। हम

[79:58]

जया जो पर्दा नहीं है

[80:01]

वह भी उनके लिए एक पर्दा थी।

[80:03]

जया पर्दा जो पर्दा थी

[80:05]

वह भी उनके लिए एक पर्दा थी।

[80:08]

मैं इस लिहाज से कह रहा हूं

[80:10]

हम

[80:11]

पर्दा मतलब राज

[80:13]

हम

[80:14]

उनका उनकी बॉलीवुड में पकड़ थी। वो

[80:16]

बॉलीवुड के लोगों को राजनीति में लाते थे।

[80:18]

उसका एक अलग सेलिब्रिटी होती है ना

[80:20]

सेलिब्रिटी की।

[80:21]

राज बब्बर पे भी उनका

[80:22]

राज बब्बर बहुत सारे लोगों को संजय दत्त

[80:25]

तक को उन्होंने राजनीति में इंट्रोड्यूस

[80:27]

किया। मैं इस लिहाज से बोल रहा हूं

[80:30]

कि वो

[80:31]

पर्दे में रहते थे।

[80:33]

रुपहले पर्दे से लोगों को

[80:36]

राजनीतिक पर्दे पे लाते थे।

[80:38]

राजनीति के पर्दे पे लाते थे। राजनीति के

[80:40]

स्टेज पे लाते थे। इस थिएटर में उनकी

[80:43]

एक्टिंग की जो भी कला है, जो भी उनका

[80:47]

ओरा था, उसको भुनाने का काम उन्होंने

[80:49]

विभिन्न पार्टियों के लिए किया।

[80:51]

हम

[80:52]

ऐसे समझो जया पर्दा पर्दे पे आती थी। हम

[80:58]

ठीक है।

[80:59]

फिर राजनीतिक स्टेज पे आई मैं।

[81:01]

हां। कुछ लोग समझते हैं कि औरत पर्दे की

[81:04]

चीज है।

[81:05]

औरत ही पर्दा है।

[81:06]

कुछ लोग समझते हैं कि औरत पर्दे की चीज

[81:10]

है।

[81:11]

हम

[81:13]

दोनों एक ही चीज समझते हैं। पर दोनों

[81:16]

अलग-अलग समझते हैं।

[81:18]

औरत को पर्दे में रहना चाहिए। औरत को

[81:21]

पर्दे पर रहना चाहिए। औरत पर्दे की चीज है

[81:25]

और औरत पर्दे की चीज है।

[81:27]

उस लिहाज से बोला मैं

[81:28]

पर ये जो यह वाला पर्दा है जिसको घूंघट

[81:30]

कहें या चेहरे को ढकना कहें

[81:32]

सबसे खूबसूरत पर्दा है।

[81:34]

खूबसूरत पर्दा है ये।

[81:35]

ऑफ कोर्स एक्साइटमेंट है उसमें।

[81:37]

पर इसकी अपनी भाषा तो होती थी। जैसे लोग

[81:39]

के नजरिए से आप देखिए। मतलब

[81:42]

आज हम कह सकते हैं अरे यार ये क्यों करना

[81:44]

है? ये तो एक दानूसी विचार है। पर जिस दौर

[81:47]

में ये स्वीकार्य था और इससे कोई असहज

[81:49]

नहीं होता था। मान लीजिए 40 साल पहले तो

[81:53]

50 साल पहले तब इस घूंघट की भी एक भाषा

[81:57]

होती थी कि घूंघट कितनी सावधानी से किया

[82:00]

गया है। इस समय कितना सावधान है। माथे के

[82:03]

आंख तक ढका गया है कि थोड़ा और नीचे तिरछा

[82:06]

किया गया है। अभी जल्दबाजी में लिया गया

[82:08]

है कि यहां तक लिया गया है। उससे

[82:10]

परिस्थितियां समझ में आ सकती थी। जैसे अगर

[82:12]

वो पूरा यहां तक का घूंघट है तो इसका मतलब

[82:14]

है ससुर अंदर हैं

[82:16]

या जेठ अंदर हैं। अगर यहीं तक किया है तो

[82:18]

ये है कि बहू नई है अभी। अगर हटा दिया है

[82:22]

तो इसका यह मतलब है कि घर में कोई बड़ा

[82:25]

पुरुष नहीं है या फिर रेवोल्यूशन आ चुकी

[82:27]

है। दो ही अर्थ होते थे उसके कि क्रांति आ

[82:29]

गई है। पर हम उनसे भी अंदाजा लगा लेते थे

[82:34]

कि इस समय घर की महिलाएं कितना स्वतंत्र

[82:36]

फील कर रही हैं या नहीं कर रही हैं।

[82:38]

पुरुषों की उपस्थिति घर में कितनी है या

[82:40]

नहीं कर। वो बड़ी महीन भाषा थी और पढ़

[82:43]

लेते थे। हम बालक भी थे लेकिन पढ़ लेते थे

[82:45]

कि यार अच्छा अभी लगता है मामा बैठे होंगे

[82:48]

तो छुटकी मामी जो हैं। हम

[82:52]

और कई बार होता था वो बड़ी वो तसल्ली से

[82:54]

बैठी हैं नीचे बैठी हैं जमीन

[82:56]

का भी कई अर्थ होता था जैसे आप खाना बना

[82:58]

रही हैं तो कितना नीचे रहेगा जब वो सड़क

[83:00]

पे मतलब घर में चल रही है दिखना चाहिए जब

[83:02]

वो झाड़ू लगा रही हैं जब वो खाना परोस रही

[83:05]

हैं जैसे थोड़ा ऊपर है तो कोई हो सकता है

[83:07]

पड़ोस का आया होदंड होता था

[83:09]

हां जो जो देवर लगता होगा रिश्ते में पर

[83:11]

अचानक से जेठ जी आ गए तो वो तुरंत उठ

[83:13]

जाएंगी और बड़ा कर लेंगी घूंघट

[83:16]

तो वो सावधान की मुद्रा तो

[83:18]

हां एक जैसा घूंघट नहीं होता था वो डिपेंड

[83:19]

कि आपकी सिचुएशन में या किस काम को कर रहे

[83:21]

हैं उस

[83:22]

सर ये डाटा एनालिटिक्स था उस समय का

[83:25]

शुरू के टाइम से जो उच्च वर्ग था उन्होंने

[83:29]

उसको पहले अपनाया

[83:31]

ठीक है कि रानी कर सकती है घूंघट हम

[83:36]

बाकी लोग नहीं कर सकते हम

[83:38]

ठीक है लेकिन फिर जैसे-जैसे जिनकी स्थिति

[83:40]

सुधरी उन्होंने कहा कि हम भी घूंघट करेंगे

[83:43]

हम क्या कम है क्या

[83:45]

हम

[83:46]

और फिर वो धीरे-धीरे परकोलेट होकर समाज

[83:48]

में पूरी तरह से फैल

[83:50]

लेकिन बहुत सारे बहुत सारा बहुत से

[83:54]

समुदायों में समाज के हिस्सों में यह संभव

[83:59]

ही नहीं था क्योंकि उनके यहां महिलाएं भी

[84:01]

काम करती थी। काम करने के लिए

[84:06]

सैक्रिफाइस करना पड़ता था। उनकी भी रहती

[84:08]

थी कि हम भी ढक के रहें।

[84:10]

लेकिन देन यू हैव टू अर्न योर ब्रेड। तो

[84:12]

वह जब मेहनत करती थी तो उनके सर से वह

[84:15]

कोशिश करती थी उस हाल में भी कि सर पे

[84:19]

बोझा ढो रही हैं पर घूंघट रहे।

[84:23]

इस तरह से हमने उसको इस्टैब्लिश किया था।

[84:25]

सदियां लगी होंगी।

[84:28]

इस सिस्टम को इस्टैब्लिश हुए और इसके

[84:30]

डिस्मेंटलिंग के तो कुछ ही साल हुए हैं।

[84:33]

मतलब 100 साल रख लो। है ना? आजादी के पहले

[84:36]

थोड़े पहले से हुआ होगा। नहीं तो

[84:40]

काफी टाइम तक। दूसरी बात यह थी के यह

[84:43]

बहुमूल्य वस्तु थी वस्तु ही थी

[84:47]

है ना घर की लक्ष्मी

[84:50]

तो वो था कि इसको नजरों से

[84:55]

क्या होता है कोई देख लेगा ना तो फिर वो

[84:58]

ध्यान रखेगा इसका

[85:01]

नजर छोड़ के चला जाएगा

[85:03]

फिर हो सकता है किसी दिन लूटने आ जाए जैसे

[85:06]

आप हैं घर में और आपके घर में हीरे का एक

[85:11]

टुकड़ा

[85:12]

किसी ने देख लिया कि इस अलमारी में शीशे

[85:15]

के पीछे रखा हुआ है।

[85:16]

नियत बदल जाएगी।

[85:17]

आपके सामने नहीं ले जाएगा लेकिन उसके

[85:19]

दिमाग में वो टुकड़ा रहेगा। यह भी एक डर

[85:22]

था। पहले के जमाने में ऐसा कोई सिस्टम

[85:25]

पुलिस वाला था नहीं ना कि एफआईआर करवा

[85:27]

देंगे आप।

[85:30]

तो

[85:31]

महिलाएं इसका

[85:33]

शिकार होती थी।

[85:36]

कोई शक्तिशाली आदमी,

[85:38]

कोई राजा का आदमी कोई सुल्तान है तो उसको

[85:43]

कोई चेहरा नहीं देखा है ना चेहरा देखने के

[85:46]

बाद हो सकता है कि वह बोले नहीं इसे हमारे

[85:49]

यहां भेज दो

[85:50]

हर हमले करवा देगा वो

[85:52]

इस तरह से तो धीरे-धीरे

[85:54]

ये इसको नहीं भूलना चाहिए कि ये उस युग की

[85:57]

बातें हैं जब स्त्रियों को

[86:01]

जड़ जोरू और जमीन एक ग्लास होता था

[86:05]

धन

[86:07]

मतलब गोरू भी उसमें में

[86:10]

हम

[86:11]

और

[86:12]

लापता लेडीज में उसकी

[86:15]

घूंघट की वजह से

[86:16]

घूंघट वो मतलब वो पत्नी खो जाती है तो वो

[86:18]

रविकिशन को फोटो देता है

[86:20]

घूंघट वाला ही होता है

[86:21]

घूंघट वाला उसको देख के रवििशन बड़े ध्यान

[86:23]

से देखते हैं कहते हैं बहुत खूबसूरत है बे

[86:26]

याद है वो सीन बढ़िया सीन है वो

[86:30]

क्योंकि यह भी रहता है कभी-कभी पर्दा जो

[86:33]

है सिर्फ खूबसूरती नहीं छिपाता ऐब भी छिपा

[86:37]

लेता

[86:37]

यस जैसे हम देखे थे ऐब

[86:40]

सत्यम शिवम सुंदरम

[86:41]

मतलब कि आप जैसे पान खाती हो कोई महिला

[86:44]

नहीं नहीं वैसा नहीं तुम बहुत डिटेल में

[86:46]

मत जाओ सत्यम शिवम सुंदरम तुमने मूवी देखी

[86:49]

है

[86:49]

हम

[86:50]

उसमें भी यही था ना वो घूंघट ही करके रखती

[86:52]

थी ऋषि शशि कपूर होते थे

[86:55]

लेकिन एक हातिम ताई मूवी थी

[86:58]

हम

[86:58]

उसमें याद है जितेंद्र जाता है मलिका होती

[87:01]

है बहुत खूबसूरत तो खोलता है वो तो उसको

[87:04]

मूज दाढ़ी होता है क्योंकि वो श्रापित

[87:05]

होती है आपको याद होगा तो धोखा हो गया तो

[87:08]

इसी घूंघट के चक्कर में जितेंद्र के साथ

[87:10]

ये खुद हातिम ताऊ हैं।

[87:13]

पर्दा जो है ना वो छुपाता भी है। अच्छी

[87:17]

चीजें भी पर्दा पर्दा होता है।

[87:18]

पर ताऊ यहां एक फिलॉसफिकल प्रश्न है।

[87:20]

पर्दा ढक लेता है ना

[87:22]

जैसे आपने खिड़की में पर्दा पड़ा है।

[87:23]

नहीं नहीं आप ताऊ उम्र इस विचार से जूझते

[87:27]

रहते हैं कि जीवन में कितना प्रदर्शित

[87:30]

करना है

[87:30]

हम

[87:31]

और कितना छिपाना है और यह विचार और कहां

[87:34]

प्रदर्शित करना है और कहां छिपाना है। और

[87:37]

यह भी मतलब यह मैं अह नई जनरेशन की

[87:41]

लैंग्वेज में अह किन लोगों के सामने

[87:45]

इमोशनली वनरेबल होना है या अगर

[87:50]

लेट्स से तीन दिन पहले मिले एक दोस्त के

[87:53]

सामने आप इमोशनली वल्नरेबल हो गए जिसकी एक

[87:57]

व्याख्या यह हो सकती है कि यू वर वीक दैट

[88:00]

यू आर वनरेबल। आपने अपने जीवन का कोई

[88:01]

इमोशनल किस्सा है जिसको लेकर के आप इमोशनल

[88:04]

फील करते हैं वो कह दिया तो अगले दिन आप

[88:07]

गिल्टी फील करते हैं कि यार मैं यू नो

[88:09]

मुझे आई विल हैव टू चूज़ माय फ्रेंड्स

[88:12]

वाइज़ली कि जिनके सामने मैं वनरेबल हो सकूं

[88:14]

पूरी दुनिया मेरा यह साइड नहीं देख सकती

[88:17]

व्हिच इज ट्रू आप हर किसी के सामने नहीं

[88:19]

हो सकते बट इसका सही रास्ता कहां पर खुल

[88:23]

जाएं

[88:24]

और कहां या कहीं भी खुल जाएं या कितना

[88:27]

खुलें और कैसे रोके यह पर्दा यह जो अनकाहा

[88:31]

अनदेखा पर्दा है ना कि थोड़ा खोलो थोड़ा

[88:33]

छोड़ो इसका क्या है रास्ता

[88:35]

पर्दा दो तरह का होता है

[88:38]

पर्दा द क्लॉथ

[88:40]

हम

[88:41]

पर्दा द राज

[88:44]

हम

[88:44]

राज द मिस्ट्री

[88:46]

है ना

[88:48]

आपने अपने बदन पर अभी

[88:50]

हम

[88:51]

पर्दा कर रखा है

[88:53]

शर्ट

[88:53]

आप इस दफ्तर में शर्ट को नहीं उतारेंगे

[88:56]

हम

[88:56]

मैं सपने में उतार चुका हूं बाय द वे मतलब

[88:58]

बिना बिना मैं ऑफिस आ चुका हूं बिना शर्ट

[89:01]

के।

[89:02]

सलमान।

[89:02]

ऐसा होता है ना कि आप आपके वन ऑफ दी फियर

[89:05]

में से ये है।

[89:06]

बट हम

[89:07]

ऐसा कुछ हो जाए

[89:09]

कि उतारना पड़े तो आप यहां पे सभी पुरुष

[89:12]

हैं जिन्हें आप अच्छी तरह से जानते हैं।

[89:14]

आपका मित्रवत व्यवहार है।

[89:16]

हम

[89:16]

तो आप कुर्ता उतार देंगे।

[89:18]

हम्म।

[89:19]

ठीक है। आप

[89:21]

यू विश?

[89:22]

हां।

[89:22]

मैं तो नहीं हूं। मैं नहीं।

[89:24]

अरे आप उतार दोगे।

[89:25]

मुझे नहीं भरोसा इन लोगों पे।

[89:26]

आवश्यकता पड़ जाए तो। हो सकता है ना कभी

[89:28]

आवश्यकता हो जाती है। से आपको कहीं पे

[89:30]

खुजली हो गई बहुत जबरदस्त और वो जानलेवा

[89:32]

टाइप की है तो आप कहोगे यार या वहां पे

[89:35]

कोई महिला नहीं है तो मैं उतार सकता हूं

[89:37]

या अतुल को मान लो आग लग गया तुम अपना

[89:38]

शर्ट

[89:39]

या हम हम स्विमिंग पूल में जाते हैं

[89:41]

शर्ट से मैं आग बुझा दूं

[89:42]

हां अतुल जल रहा है

[89:43]

हम स्विमिंग पूल में जाते हैं तो हम

[89:46]

उतार के

[89:46]

स्विमिंग स्वीट में जाते हैं ना

[89:47]

हां

[89:48]

हां

[89:48]

तो हमने ये देख इतना हमारा पर्दा जो है कम

[89:52]

हो गया है

[89:52]

कि हम एक दूसरे को इतने

[89:54]

करेक्ट करेक्ट करेक्ट

[89:55]

निकटता से जानते हैं कि हम

[89:59]

पर वही उन्हीं कपड़ों में आप क्या कहीं और

[90:02]

जाएंगे?

[90:03]

नहीं।

[90:04]

ऐसे लोग जिनको आप नहीं जानते उनके सामने

[90:06]

उन खड़े रहेंगे।

[90:07]

नहीं नहीं वो तो समय देश काल परिस्थिति के

[90:09]

हिसाब से क्लॉथ वाला कपड़ा

[90:12]

पर्दा

[90:12]

वो रहता है।

[90:13]

तो आपका जो दूसरा पर्दा राज होता है ना

[90:16]

वो भी समय काल परिस्थिति के

[90:19]

के अनुसार किसके सामने मैं कितना नंगा हो

[90:22]

सकता हूं। हम

[90:22]

संजीव कुमार बोलता है

[90:25]

मौसमी चटर्जी को मौसमी चटर्जी को अंगूर

[90:27]

में

[90:28]

हम

[90:29]

वो कहती है ना कि आप कपड़े बदल लीजिए हम

[90:33]

तो बोलता है कपड़े बदल के क्यों बदलने हैं

[90:35]

तो बोलती है कि

[90:36]

अरे मैंने आपको बिना कपड़ों के ऐसा नहीं

[90:39]

आप तो ऐसे कर रहे हैं जैसे मैंने आपको

[90:41]

बिना कपड़ों को नहीं देखा है तो संजय

[90:43]

कुमार कहते हैं तो तुमने मुझे नंगा देखा

[90:45]

है

[90:47]

ऐसा करके नहीं

[90:48]

तो क्योंकि वो एक्सचेंज बदल जाता है ना वो

[90:50]

नया वाला होता है वो होता है कि संजीव

[90:53]

कुमार ही है मौसमी चटर्जी के सामने वो

[90:56]

दूसरा है हम

[90:57]

तो हर आदमी कौन किसके सामने कितना इमोशनली

[91:01]

और फिजिकली पर्दा रिमूव करता है डाउन करता

[91:05]

है अप करता है जैसे लोग कहते हैं ना शर्म

[91:07]

का पर्दा ही नहीं है इसके अंदर हम

[91:09]

शर्म का पर्दा यहां तो अब लड़ाई दूसरी है।

[91:14]

अब लड़ाई

[91:15]

शर्म मिटाने की जैसे जिसे कहते हैं ना कि

[91:19]

अभी यह तो दूसरी तरह की समस्याएं हैं ना

[91:21]

जो लाइफस्टाइल है जो चैलेंजेस हैं इस

[91:24]

जनरेशन के लिए उसमें ये है कि यार मेंटल

[91:27]

हेल्थ इज अ थिंग यू माइट डिसएग्री बट

[91:30]

नहीं नहीं मेंटल हेल्थ इज अ थिंग

[91:32]

तो उसमें

[91:33]

पर्दा क्यों है फिर

[91:34]

हां तो उसमें यह चैलेंज है ना कि कहा जाता

[91:36]

है अरे यार शेयर करो बात करो ना लोगों से

[91:39]

इसका यह मतलब है कि पर्दा हटाओ पर चूज

[91:42]

वाइजली

[91:44]

किसके सामने

[91:44]

हां किसके सामने और कितना और फिर थोड़ा

[91:48]

धीरे-धीरे सो होता यह है कि कई बार शेयर

[91:52]

करते हुए आप थोड़ा कंफर्टेबल कैरिड अवे हो

[91:55]

जाते हैं ना कि

[91:56]

हम

[91:57]

देखो पर्दे मैं मेरे हिसाब से मेरे मानने

[91:59]

में या तो आप पर्दा गिरा के हमेशा रहो एक

[92:02]

बार में पर्दा उठा दो खुली किताब

[92:05]

वो होता है नंगा नहाएगा क्या

[92:07]

अब वो नंगा किताब है

[92:09]

हम

[92:09]

सीरियसली मैं पर्दा में कुछ यकीन नहीं

[92:11]

रखता मेरी बात खुला रखो। मैं बुल्ला सब

[92:14]

कुछ रखता हूं। खुला बेस्ट

[92:15]

हम लोग पूल में रहे हैं साथ में।

[92:17]

हां नहीं पर उसमें ये है

[92:19]

कि देखिए ये बहुत इंपॉर्टेंट है कि अगर

[92:21]

किसी ने कहीं पर अपने राज खोले भी और मैं

[92:26]

जानता हूं कि इसने किसी के सामने वो फलाना

[92:28]

रो चुका है। उसको मैं दोबारा ये नहीं कह

[92:31]

सकता यार तुमको कौन नहीं जानता ये। हम्।

[92:33]

तुम्हारे साथ तो ऐसा हुआ ही है। नहीं, यह

[92:35]

उसका प्रेरिवेटिव है कि वह अगेन वह

[92:37]

तुम्हारे सामने कहना चाहता है। नहीं कहना

[92:39]

चाहता है।

[92:40]

इट्स लाइक कंसेंट कि वो हर बार यस होना ही

[92:43]

मांगता है। उसी का चॉइस है।

[92:45]

शेयरिंग थिंग ना कि यू शुड वेरी प्लीज

[92:47]

शेयर।

[92:49]

ये बहुत आवश्यक नहीं है।

[92:51]

कि मन हल्का हो जाएगा। शेयर कर दोगे तो।

[92:53]

बिल्कुल होता है। होता है।

[92:54]

किसके मैं तुमसे नहीं करना चाहता।

[92:57]

मन हल्का अगर आप शेयर करोगे ना तो मन चिल

[93:00]

चिल मन यस। वो वो जो गाना था ना लाइन यार

[93:04]

से गम कह कर तो खुश हो लेकिन तुम ये क्या

[93:06]

जानो तुम दिल का रोना रोते थे वो दिल में

[93:10]

हंसता होगा

[93:13]

अब क्या सोचे क्या होना है

[93:14]

तो दैट इज

[93:15]

क्या गहरा मारा आपने

[93:16]

बहुत इंपॉर्टेंट है वो सोचना

[93:18]

कि तुम दिल का रोना रो रहे हो उसने तुमको

[93:20]

उकसाया भी

[93:22]

ठीक है शेर शेर हल्का हो जाएगा आपने हल्का

[93:25]

कर लिया

[93:26]

वो उस तब से जो है ना इतना हल्का घूम रहा

[93:28]

है उड़ रहा है

[93:29]

यार

[93:30]

वो खुश है प्रशा परेशान डजंट मैटर फॉर

[93:32]

हिम।

[93:33]

कुलदीप हंस रहा था। इसका परेशानी है या ना

[93:35]

भाई?

[93:36]

ताऊ बड़े मस्ती में रहती है। परेशान हो

[93:37]

जाए। आसिफ बड़ा मस्ती में परेशान हो जाए।

[93:39]

ये भी ये वो दौर भी है जब इंफॉर्मेशन जो

[93:42]

है ना बहुत वैलुएबल चीज है।

[93:45]

हमेशा से रहा है।

[93:46]

पता नहीं है मतलब हां होगा। बट अभी आप

[93:48]

इंफॉर्मेशन को सर्कुलेट करने के मीडियम

[93:51]

बहुत पावरफुल है।

[93:52]

बहुत ज्यादा।

[93:53]

तब मान लो किसी को किसी के बारे में कोई

[93:55]

बात चली। जैसे कि फिल्म फिल्मी दुनिया में

[93:59]

दो लोग एक दूसरे से प्रेम करते हैं। पर ये

[94:01]

छिपी हुई बात है। 70ज की बात मैं कर रहा

[94:03]

हूं। किसी को पता चला कि ऐसा

[94:05]

वो तो तब पता चलता था वो मायापुरी को बोल

[94:06]

देते थे कि हम दोनों अच्छे दोस्त हैं।

[94:08]

इवन नॉट ओनली 50 लोगों में फैलेगी नॉट

[94:11]

ओनली में तो वो एक दिन में आप देखिए

[94:13]

करोड़ों लोगों तक पहुंच रहा है। सोशल

[94:14]

मीडिया नहीं बात है ना इन फिल्में दुनिया

[94:17]

में अफेयर एक-ए साल बाद या दो-दो साल

[94:19]

10-10 साल बाद या शादी होने के बाद पता

[94:20]

चलता था कि इनके पीछे अफेयर था। उस दौर

[94:23]

में फिल्में भी साल दो साल लगता था लोगों

[94:26]

तक पहुंचने में। आज आप एक गलती करो

[94:30]

5 मिनट में पूरी दुनिया में आपकी चीजें

[94:32]

शेयर हो चुकी होती हैं। तो किससे क्या कह

[94:36]

रहे हैं आप? कहां कह रहे हैं आप? हर जगह

[94:39]

डर है।

[94:39]

ताऊ ने एक बात बोली थी कि हम दिन भर में

[94:42]

20 30 बार से ज्यादा कैमरे में कैप्चर हो

[94:44]

रहे हैं। व्हिच इज करेक्ट। हम सीसीटीवी हर

[94:46]

जगह लगे हैं। मैं कोने में पी सिगरेट पी

[94:49]

रहा हूं या किसी को कूट रहा हूं या मैं

[94:52]

बदतमीजी कर रहा हूं। बदमाशी सब कैप्चर हो

[94:54]

रहा है। 1 मिनट में आप एक्सपोज हो जाएंगे

[94:56]

कि अच्छा ये है इसका कररेक्टर।

[94:57]

हम

[94:58]

तो नहीं ये वो पर्दा जो था अब इस दुनिया

[95:00]

में खत्म हो गया है।

[95:01]

सभी आप बाय द वे आप जो कुछ कर रहे हैं वो

[95:05]

पर्दे पे अवेलेबल है।

[95:06]

यस

[95:07]

वो पर्दा हट चुकी है।

[95:08]

आप इतने बेपर्दा हो गए हैं।

[95:10]

हां।

[95:10]

अब आप पर्दे वाली बात मत कीजिए। पर्दा

[95:12]

गया।

[95:13]

मैंने पर्दाशी

[95:15]

बेपर्दा तुझे पर्दाशी देख लिया देख लिया

[95:19]

सबको अब ना कर पर्दा कि यह पर्दाशी देख

[95:22]

लिया

[95:23]

अब आपको लग रहा है कि वो था ना चिना सेठ

[95:28]

जिनके घर शीशे के होते हैं तो पर्दे वो

[95:31]

पत्थर नहीं मारा करते कुछ था ना वो दूसरे

[95:34]

जिनके घर शीशे के होते हैं

[95:35]

वो दूसरे घरों कपड़े

[95:37]

कपड़े बदलने से पहले

[95:39]

लाइट ऑफ करते हैं

[95:41]

वो दौर गया

[95:42]

अभी गया

[95:43]

पर्दा गिर गिरना

[95:46]

शो खत्म द एंड

[95:48]

उनका पर्दा गिर गया

[95:50]

शो खत्म हुआ

[95:51]

इसलिए कि वो पर्दा कर गए या नहीं

[95:52]

पर्दा कर गए मर

[95:53]

पर्दा कर गए तो वो तो चले गए

[95:54]

जीवन के रंगमंच से पर्दा कर गए

[95:56]

हां

[95:57]

पर्दा गिरना होता है कि जब सारे

[96:01]

क्लाइमेक्स हो जाता है थिएटर में

[96:03]

तो उसके बाद सामने वाला पर्दा गिर जाता है

[96:05]

लाल वाला

[96:06]

है ना

[96:06]

लाल

[96:07]

जो भी वो गिर जाता है मतलब

[96:09]

वैसे उसको बोलते हैं पर्दा बंद हो गया

[96:10]

पर्दा लग गया पर्दा एक्चुअली गिरता भी

[96:13]

नहीं पर्दा गिरना नहीं नहीं हां बोलते थे

[96:15]

जो घर घरों में

[96:16]

नहीं देखो पर्दा ऐसे होता था ना

[96:18]

हां पर्दा ऊपर से

[96:19]

गिरता था हां ऐसे आप

[96:21]

तो वो जो घर में आजकल वो पेंच कस के वो

[96:23]

उसमें लगा देते हैं ना लट्टू लट्टू में

[96:25]

वो गिर जाता

[96:26]

कई बार वो उसमें ठुसा रहता है तो वो

[96:28]

सीमेंट सही

[96:29]

नोएडा के घरों में जिसमें दीवार में कुछ

[96:32]

भी मारो भाई यहां तो हैंगर अलग ही पर्दा

[96:34]

गिरता है आम बात है अरे पर्दा गिरा

[96:36]

नोएडा में

[96:37]

फिर वो वाइट सीमेंट लाओ जो है फूंको

[96:39]

इनफैक्ट लोगों को बोलते हैं कि मतलब इट्स

[96:41]

कर्टेंस फॉर हिम्म मतलब उसका करियर खत्म

[96:43]

हो हो गया।

[96:44]

हां

[96:44]

कर्टन रेजर बोलते हैं लोग।

[96:46]

कर्टन रेजर होता है कि व्हेन

[96:48]

शुरू होना

[96:48]

पर्दा उठता है तो फिर स्टेज दिखता है

[96:51]

और कलाकार आते हैं तो व्हेन इट बिगिंस

[96:54]

कर्टेन रेजर

[96:55]

हम

[96:56]

पर ये रामलीला जो गांव में

[96:58]

मैं उसी प्रकार थी

[96:59]

जब पर्दा उसमें गिरता था तो लोग कल्पना

[97:01]

करते थे कि अभी एक दृश्य था। अब दृश्य

[97:04]

चेंज होना है ना। सेटअप चेंज होना है।

[97:07]

तो अब आदमी इमेजिन कर रहा है कि नेक्स्ट

[97:08]

सबका रामायण यहां सबको पता है। तो इमेजिन

[97:11]

कर रहा है कि यार इस समय जो है हनुमान जी

[97:12]

की पूंछ बांधी जा रही होगी पीछे। है ना?

[97:14]

और रावण के जो है वो लगाया जा रहा होगा।

[97:16]

अभी देखना है ना?

[97:18]

सब आदमी इमेजिन कर रहा है कि इस समय

[97:20]

क्या-क्या चेंज होगा।

[97:20]

अभी विभीषण सीता बनेगा।

[97:23]

क्योंकि आर्टिस्ट की कमी है।

[97:26]

वही

[97:26]

मेरा ना स्कूल में

[97:29]

दुधी में थे। तहसील जो दुद्दी का है ना हम

[97:31]

तो एक चबूतरा बना हुआ है तो एनुअल फंक्शन

[97:35]

वहीं होता था तो अपन का एक शो था विश्व

[97:38]

कन्या जिसके डायलॉग बड़े टेढ़े-मेढ़े थे तो

[97:42]

पर्दा उठा हमारा शो शुरू हुआ और डायलॉगवलग

[97:46]

सब हम लोग भूलभाल गए

[97:49]

तो जो गुरुजी लोग थे उनको लगे ये सब

[97:52]

बर्बाद कर दिए तो उन्होंने पर्दा नीचे

[97:53]

किया और पर्दे के पीछे फिर उसी जगह जम के

[97:57]

कुटाई की गई हम लोगों की धड़ाम घुसंड सब

[97:59]

चल अगर वह पर्दा उठा के किए होते ना

[98:01]

सुपरहिट शो वैसे ही हो जाता।

[98:03]

ये घूसा और घुसंड में क्या फर्क है?

[98:05]

घूसा जो होता है मेरे ख्याल से थोड़ा ऊपर

[98:08]

तक मारा। घुसण जो होता है घुसा करके मारा

[98:11]

जाता है। ऐसा मेरा मानना है।

[98:13]

पता नहीं मतलब आई

[98:14]

ये भी मेरा अपना अपना अपनी

[98:16]

आपकी अपनी व्याख्या है ये। हां पर पता

[98:19]

नहीं। पर यह जो मतलब ऐसे स्क्रीन में

[98:21]

देखें हम जो YouTube का थंबनेल है वो भी

[98:25]

एक पर्दा है।

[98:26]

हम

[98:26]

हम

[98:27]

[98:28]

आप उस पे प्ले करते हैं तब खुलता है।

[98:30]

तब खुलता है या स्किप ऐड या स्किप इंट्रो

[98:33]

जो आता है Netflix पे स्किप इंट्रो आएगा

[98:35]

या

[98:36]

वो भी पर्दा है।

[98:36]

या स्किप ऐड YouTube पे आएगा। वो भी एक

[98:39]

पर्दा ही है। क्योंकि आपके मेन उससे पहले

[98:43]

मतलब वीडियो से ठीक पहले वो चल रहा है एक

[98:45]

ऐड। आप उसको हटाना चाहते हैं। आप स्किप

[98:48]

करेंगे। फिर मेन कंटेंट शुरू होगा।

[98:50]

ये आधुनिक पर्दे हैं। इनको पर्दे की तरह

[98:52]

हमने देखा नहीं कभी पर है तो पर्दे ही

[98:54]

हैं।

[98:54]

पर्दे ही हैं। एक

[98:55]

पर्दा जो है अपना टीवी जब था 14 इंच का

[98:58]

पर्दा था वो।

[98:59]

21 इंच का हुआ 32 हुआ, 36 हुआ, 42 हुआ,

[99:04]

55 हुआ, 65 हुआ, 75, 85, 90, 100 110

[99:09]

अब तो प्रोजेक्टर आ गए।

[99:10]

बड़े-बड़े पर्दे आ गए। पर वो पर्दा ही था

[99:12]

ना?

[99:13]

हम

[99:13]

उसको बोलते थे स्माल स्क्रीन। हम

[99:15]

हम छोटा पर्दा छोटा पर्दा

[99:17]

है ना इडियट बॉक्स भी बोलते थे

[99:19]

हां इडियट बॉक्स

[99:20]

उसको हिंदी में क्या बुद्धू बक्सा

[99:22]

याद है

[99:23]

हिंदी अखबारों में कभी-कभी आता था बुद्धू

[99:25]

बक्सा

[99:26]

हम

[99:26]

क्योंकि वो आदमी को इडियट बनाता था

[99:28]

हम

[99:30]

और

[99:30]

था क्यों कह रहे हैं

[99:32]

क्योंकि अब वो बुद्धू बक्सा नहीं कहलाता

[99:33]

है। नोबडी कॉल्स इट इडियट बॉक्स।

[99:35]

क्योंकि अपने मतलब जो बक्सा था उसमें

[99:38]

दूरदर्शन ही आता था।

[99:41]

मतलब लेज़ लेज़नेस की हद थी ना। एक ही चीज

[99:43]

आता था दूरदर्शन

[99:45]

जो कि टेलीविजन का शब्दश है मतलब शब्दश

[99:48]

नहीं अक्षरश अनुवाद

[99:49]

टेलीविजन का दूरदर्शन हां

[99:51]

अनुवाद था ऐसा कोई नाम नहीं रखा इन्होंने

[99:53]

हम

[99:54]

और उसमें जो आता था वो आता था

[99:57]

हम

[99:59]

फिर बाद मेंकि अमेरिका में ना वो मनोरंजन

[100:01]

के लिए बहुत सारे चैनल आ गए और उसमें

[100:04]

ज्यादातर मनोरंजन ही होता था। अपने जैसा

[100:06]

कृषि दर्शन इत्यादि जो है ना वो नहीं तो

[100:07]

इसलिए उन्होंने इडियट बॉक्स कहना शुरू

[100:09]

किया बिकॉज़ उससे आदमी की आईक्यू कम होती

[100:12]

थी। हम

[100:13]

सीरियसली बिकॉज़

[100:16]

रेडियो में ना व्हेन आई मैं जब बोलते हैं

[100:19]

कुछ तो आपको

[100:20]

थिएटर ऑफ़ माइंड एंड यू इमेजिन

[100:22]

हां आपको इमेजिन करना पड़ता है पर टीवी ने

[100:25]

वो दिखाना शुरू कर दिया इसलिए भी बोलने

[100:27]

लगे कि बुद्धू बक्सा है ये

[100:29]

पर वो स्क्रीन जो है

[100:32]

वो लगातार बढ़ता गया वो श्वेत श्याम ब्लैक

[100:36]

एंड वाइट से अभी जो है वो 8K टाइप

[100:40]

क्या 8K आता है ना

[100:42]

हां हम नहीं

[100:43]

के स्क्रीन आता है जो घरों में लग रहा है।

[100:45]

रंगीन चल चलचित्र कुछ होता था ना क्या

[100:47]

बोलते थे उसको ब्लैक एंड वाइट कुछ ऐसे

[100:51]

क्या बोलते थे

[100:52]

रंगीन ही बोलते थे रंगीन

[100:54]

नहीं कुछ था

[100:55]

कलर टीवी आया तो रंगीन टीवी बोलते थे थे

[100:57]

रंगीन टीवी बोलते थे

[100:58]

हां पर वो आप उन बाजारों में गए हैं जहां

[101:01]

पे लिखा होता है पर्दे ही पर्दे

[101:03]

हम

[101:04]

तिवारी टेंट हाउस

[101:05]

गद्दे ही गद्दे पर्दे ही पर्दे

[101:07]

जैसे अह ये दिल्ली में ही होता है वैसे आई

[101:11]

थिंक दिस हैज़ गॉन फ्रॉम दिल्ली टू अदर

[101:13]

सिटीज

[101:13]

हम ही ही वाला पर्दे ही पर्दे बजते ही

[101:16]

बजते

[101:16]

ही गाड़ियां

[101:17]

गाड़ियां ही गाड़ियां

[101:19]

मतलब वो क्योंकि हमारे यहां क्लियर था

[101:21]

पर्दे की दुकान है तो पर्दे ही पर्दे

[101:22]

होंगे मतलब क्या बात हुई

[101:24]

नहीं पहले गांव में

[101:25]

एक पर्दा कौन बेचता है यार पर्दे का मतलब

[101:28]

है कि वैरायटी

[101:30]

थोड़ा ही जाता है ना थोक है

[101:32]

पहले भी गांव में अभी भी बहुत कम होता है

[101:34]

कि पहले स्पेसिफिक दुकानें नहीं होती थी

[101:37]

कि पर्दे की दुकान अलग

[101:39]

सब एक ही में मिलता था उसको गारमेंट शॉप

[101:42]

बोलते थे

[101:42]

कि जाइए वहां पर्दा भी है चद्दर भी है

[101:44]

कपड़े

[101:45]

फर्निशिंग की दुकानें अलग होती थी हर जगह

[101:47]

लेकिन वहां पर्दे नहीं बिकते थे

[101:49]

नहीं नहीं

[101:49]

जो फर्निशिंग की दुकानें होती थी वहां

[101:52]

पर्दे कवर इत्यादि ये सब मिलते थे

[101:54]

नहीं वो मेरी तरफ तो नहीं था वैसा तो

[101:56]

गारमेंट वाले में आपको कपड़े मिलते थे

[101:58]

पर्दे भी व मिल जाते थे

[102:00]

और वो पर्दे का कल्चर क्या होता था पहले

[102:02]

पर्दे तो घर में पुरानी साड़ी फाड़ करके

[102:04]

पुरानी साड़ियों से

[102:05]

पुराना चद्दर टांग देते थे वही पर्दा होता

[102:07]

था कहां इतने पैसे होते थे

[102:08]

बेडशीट ही पर्दा होता था बेडशीट पुराना हो

[102:11]

गया काट के पर्दा बना दिया

[102:12]

इनफैक्ट उस दौर दौर में 90ज में घर की

[102:16]

हैसियत भी कुछ लोग इस बात से जांच आंक

[102:19]

लेते थे कि उनके यहां पर्दे घर में बन के

[102:22]

सिले हुए लगे हैं या खरीदे हुए लगे हैं।

[102:25]

तो तब बाहर से इतना कॉमन नहीं हुआ करता था

[102:28]

खरीदना और अब तो खैर इतनी वैरायटी है

[102:31]

उसमें

[102:32]

उसमें भी पुराने पर्दे

[102:33]

कंप्लीट क्या बोलते हैं जो ब्लैक

[102:35]

हां फुल ब्लैक आउट

[102:36]

फुल ब्लैक आउट पर्दे आ गए हैं

[102:38]

अब तो कॉम्बिनेशन

[102:39]

डिफरेंट लेयर्स होते हैं ना

[102:40]

लेयर्स आ गए हैं

[102:41]

अब तो मैच कराते हैं ना कैमरे में कि

[102:42]

ऐसेसे

[102:43]

हां कॉम्बिनेशन कि आपके वॉल पर क्या है

[102:46]

तीन अलग कलर एक ही डंडी में तीन तरह के

[102:48]

पर्दे लगेंगे तो मैच करेगा ये

[102:49]

अब तो वो रिमोट वाला पर्दे आ गए हैं और

[102:52]

फिर पर्दे भी उस तरह के हो गए हैं कि

[102:54]

लकड़ी की चिक बन गई है जिसको आप खींचिए तो

[102:57]

फिर वो धीरे-धीरे उठेगा।

[102:58]

अब तो आवाज मारो सीटी मारो तब भी उठने

[103:00]

लगता है। वो वाला भी आ गया वॉइस कंट्रोल।

[103:02]

नहीं वो उनके पर्दे भी जो जिस दिल्ली

[103:05]

चुनाव से पहले जो अरविंद केजरीवाल

[103:08]

के सरकारी घर की चर्चा शीश महल करके हुई

[103:11]

उसके पर्दे सुनते हैं। 13.5 लाख के थे तो

[103:14]

आवास थे।

[103:15]

वो भी रिमोट वाले ही थे। बड़े

[103:17]

अब तो यह बड़ा सब कुछ पर्दे पे झूला झूला

[103:20]

है।

[103:21]

पर्दे पे झूला डांट बहुत पड़ती थी क्योंकि

[103:23]

यह था कि पर्दा गिर जाएगा।

[103:25]

झूला कैसे झूलते पहले समझो।

[103:27]

उसको पकड़ लिया

[103:28]

नहीं।

[103:29]

और उसको पकड़ के ऐसे ऐसे

[103:30]

वो वाला नहीं

[103:31]

तो दो पर्दे होते थे। उसको नीचे से बांध

[103:33]

दो।

[103:34]

अच्छा।

[103:34]

फिर उसके बीच में बैठ के दो लोग तुमको ऐसे

[103:36]

गोल-गोल घुमा देते थे।

[103:38]

हां फिर वो चकरी की तरह।

[103:39]

फिर छोड़ते थे चकरी की तरह। क्योंकि पहले

[103:41]

सिकड़ी की तरह होता था आदमी।

[103:42]

सिकिया पहलवान बोलते थे।

[103:44]

हां। तो भारी रहेगा तो गिर जाता।

[103:46]

नोएडा में नहीं टिकेगा।

[103:47]

नोएडा में तो पर्दे नहीं टिक रहे। तुम

[103:48]

कहां टिकोगे?

[103:49]

दीवार गिर जाएगी।

[103:50]

हां।

[103:51]

मुझे अपने घर में बहुत डर लगता है कि कल

[103:53]

को कोई मान लो किसी से हाथापाई हो रहा है।

[103:55]

दीवार में टकरा रहा है। दीवार लेके आप

[103:57]

नीचे चले जाओगे बिल्डिंग के। सिर्फ उनका

[103:59]

वो लिंटर ही सही होता है। बाकी सब कुछ ध

[104:02]

मेरे नोएडा में नौरंगी फ्लैट लिए हैं।

[104:04]

अरे यार बहुत दिनों के बाद आई है।

[104:06]

इंटीरियर डेकोरेशन बहुत जबरदस्त करवाए

[104:08]

हैं। दीवार में जो है

[104:10]

हम

[104:11]

एक दीवार में ही उन्होंने 12 नीचे छह इधर

[104:15]

तीन इधर नौ लिख के

[104:17]

घड़ी

[104:18]

घड़ी दीवार में बड़ा

[104:21]

कांटा नहीं

[104:22]

हम

[104:23]

टाइम कैसे पता चलेगा? अरे वही तो रात में

[104:25]

गया वहां और फुल टाइट हां

[104:30]

टाइट उनके दोस्त भी टाइट

[104:32]

तो उसका दोस्त जो है ना मन ही मन सोचता था

[104:35]

साला इसको पता कैसे चलता है कितना बजा

[104:38]

हम

[104:39]

बहुत लास्ट लास्ट में जब उठा ना पहले उसको

[104:41]

लगा कि अभी उसने बोला थाईलैंड से लाए हैं

[104:43]

ये चिपकाए जो उसने फाइनली रात में जब

[104:46]

निकलने लगा ना उसने बोला कि टाइम क्या हुआ

[104:48]

है भाई साहब

[104:51]

यार ये घड़ी तो अच्छा तुम थाईलैंड से लाए

[104:54]

हो लेकिन पता कैसे चलता है कितना बजा हम

[104:58]

उसने बोला अरे तो वही नीचे में ना एक

[105:01]

हथौड़ा रखा था तो नौरंगी ने कहा अभी बताते

[105:04]

हैं ये देखो उठाया और बीच में ही ढ हथौड़ा

[105:08]

मारा

[105:08]

दीवार पे

[105:09]

हां उधर से नेबर बोलता है अबे रात के 2:00

[105:13]

बज रहे

[105:16]

सो जाओ पागल

[105:20]

यार नरंगी कमाल है भाई अरे ये नोएडा की

[105:23]

दीवार के बारे में है। ये हालत है। इधर

[105:27]

बजाओ तो पड़ोसी उठ जाता है।

[105:31]

एक पूजा घर का पर्दा होता था अलग।

[105:35]

वो भी घर पे ही बनाया जाता था। जैसे आज

[105:37]

बाकी पर्दों में ना ज्यादातर में वो छल्ले

[105:41]

हां पड़े रहते।

[105:42]

हां।

[105:42]

छल्ले होते थे। वो एक तो पहले वो वाला

[105:44]

छल्ले आते थे जो हुक की तरह लगते हां अब

[105:46]

जो है पर्दे के बीच में

[105:47]

अब वो बीच में गोल की तरह लगते हैं। पर

[105:49]

पूजा वाला जो पर्दा होता था ना तो वो

[105:51]

डोरी पड़ी थी

[105:52]

डोरी इस पे ही चलता था और उसको अगर आपको

[105:54]

खोलना है तो ऊपर से सरकाइए

[105:56]

वो अभी भी है यार पता नहीं उसका कैद क्या

[105:58]

मतलब घर के सारे पर्दे जो है एक तरफ तरह

[106:01]

के हैं और वो पूजा वाला सिर्फ

[106:03]

डोरी वाला

[106:03]

पर्दा उसमें स्प्रिंग वाला वो

[106:07]

डोरी है स्प्रिंग वाला

[106:08]

स्प्रिंग वाला कपड़े धागे वाला भी होता है

[106:10]

वो

[106:11]

वो स्प्रिंग वाला है यार दोनों तरफ

[106:12]

कांटियों में लगा हुआ है वो एंड इट इज़कि

[106:14]

वो वुडन है टेंपल मतलब वो जो है उसके अंदर

[106:17]

मार्बल वाली चीजें हैं पर वो बाहर वाला

[106:19]

वुडन है हम

[106:20]

और डेरेबल

[106:22]

पर ये धीरे-धीरे कल्चर मतलब घर की चीजों

[106:27]

पर जो उसको ढक कर या किसी चीज से कवर करके

[106:30]

रखने का वो था कम हो गया। हालांकि धूल और

[106:33]

उसके विकल्प भी धूल कम हो गया है ना

[106:36]

मतलब कम तो नहीं हुआ है। बढ़ा है धूल पता

[106:38]

नहीं मतलब जस्ट आपने लेकिन घरों को सा उस

[106:42]

तरह से डस्टिंग बस्टिंग का कल्चर

[106:44]

पहले क्या था ना पहले घर यूजुअली आदमी

[106:46]

खिड़की खुले रखता था। हां वही वही

[106:48]

क्योंकि अब तो बंद रहता है। हां

[106:50]

तो अब पहले के मुकाबले अब धूल कम आता है।

[106:53]

फ्रिज टीवी और वो जो आपकी ड्रेसिंग टेबल

[106:56]

है ये सब कवर किया जाता था।

[106:58]

सबको पर्दे में रखा जाता था।

[106:59]

रखा जाता था

[107:00]

और उसमें नजर लगने

[107:01]

रिमोट को पर्दे में रखा जाता था। रिमोट का

[107:03]

वो कवर

[107:04]

है ना?

[107:05]

जो आता था प्लास्टिक वाला वो चढ़े रहता

[107:07]

था।

[107:07]

पीला पड़ जाता था। वो

[107:09]

नहीं भाई आपको मार्केट में हर रिमोट के

[107:12]

लिए कवर मिलते थे। जिसमें पीछे एक टिच बटन

[107:15]

भी होता था या

[107:17]

वाला बटन होता था

[107:19]

और उसमें होता था कि ओडा का है

[107:22]

इसमें लगेगा क्या

[107:24]

Philips का है तो Philips वाला चाहिए ओडा

[107:26]

काडा वाला चाहिए

[107:26]

उसके वो सींग निकले रहते थे

[107:29]

अरे पर्दे

[107:30]

चीजें गायब हो रही है यार धीरे-धीरे

[107:32]

वो लेकिन एक बात है आदमी जब जन्म लेता है

[107:35]

अस्पताल में जन्म के समय पर्दा रहता है

[107:40]

पर्दे में जन्म लेता है और अगर उसकी

[107:43]

मृत्यु मृत्यु अस्पताल में हुई हो ओटी में

[107:46]

पर्दा रहता है हम

[107:49]

जी मतलब पर्दा जो है आपके जीवन की शुरुआत

[107:51]

से लेकर आखिर तक किसी ना किसी रूप में

[107:55]

पहला पर्दा तो मां का पेट होता है जिसके

[107:57]

अंदर आप वो वो भी पर्दा है

[107:58]

यस

[107:59]

आप निकलते हैं और पर्दा कर जाते हैं

[108:04]

हम यही है

[108:05]

पर्दा क्या बात कही पर्दे से शुरुआत पर्दा

[108:10]

ही

[108:10]

हम अकबर इलाहाबादी का है वो जो आप कह कह

[108:13]

रहे थे

[108:13]

क्या

[108:15]

मर्द की अक्ल पे पड़ गया

[108:17]

हां

[108:18]

है ना वो ऐसे कि बेपर्दा कल जो आई नजर चंद

[108:22]

बीबियां अकबर जमीन में गैरत कौमी से गढ़

[108:26]

गया पूछा जो मैंने आपका पर्दा वो क्या हुआ

[108:30]

कहने लगी कि अक्ल पे मर्दों के पर्दा गया

[108:33]

ओ हो

[108:33]

मर्द की अकल पे जो पर्दा पड़ा है बहुत

[108:36]

पहले पड़ गया

[108:37]

फिर भी किस किस टाइम में पड़ा होगा कुछ

[108:40]

पता नहीं आप इतने उसे कह रहे हैं बहुत

[108:42]

पहले फिर भी किस टाइम

[108:44]

बहुत पहले

[108:46]

और वो उसी ने फिर उनके शक्ल पे डाला

[108:51]

ये मैंडेट किया कि तुम्हारी शक्ल पे पर्दा

[108:53]

होगा जब उन्होंने ये किया तो फिर क्या हुआ

[108:57]

कि जिस चीज को आपने बचाने की कोशिश की

[109:01]

वो

[109:03]

वो लूटने का सामान हो गया। आपके पास इतनी

[109:05]

बेशकीमती चीज नहीं है। लेकिन आपने उसको ढक

[109:08]

ढक कर बेशकीमती बना दिया ताकि बाकी लोगों

[109:11]

की नजर उस पे पड़े

[109:14]

तो उसको लगे कि कुछ बेशकीमती है।

[109:17]

तो पर्दा जो है उनकी शक्ल पर डाल के आपने

[109:20]

अपनी अकल पर डाल लिया। अगर वो यूं ही जैसे

[109:23]

आप घूम रहे हो वैसे वह घूमती

[109:26]

तो मामला ही नहीं था। आपको दिन रात उसकी

[109:28]

चिंता ही नहीं सताती।

[109:30]

हम

[109:31]

है ना? तो आपने एक आपके जितने भाव की

[109:36]

वस्तु को बहुमूल्य बना दिया। बनाते गए।

[109:39]

हां।

[109:40]

क्या होता है? पर्दा आप डाल लेते हो कि

[109:43]

गर्दा नहीं पड़े।

[109:45]

वाह

[109:46]

यही उद्देश्य होता है ना। जैसे अपनी गाड़ी

[109:48]

के ऊपर डालते हैं। बारिश में नहीं

[109:50]

निकालते।

[109:50]

हम

[109:51]

मसून में इनकी गाड़ी नहीं निकलती।

[109:54]

ये खुद भीगते हैं। तो

[109:55]

गाड़ी नहीं भींगती।

[109:56]

हम

[109:57]

हां। क्योंकि पर्दे में रखा हुआ है।

[110:01]

वैल्यू किसकी है? आपकी। आपने उसको ज्यादा

[110:04]

वैल्यू दे दी। तो आपकी अक्ल पे पर्दा

[110:08]

पर्दा पड़ गया है।

[110:09]

हम

[110:10]

कहने लगी कि मर्द अक्ल पे मर्दों का पड़

[110:13]

गया। हम् मर्द मर्दों और पर्दों में

[110:16]

काफिया भी मिलता है।

[110:18]

भविष्य में कभी गज़ल कही जा सकती है। और

[110:21]

है ना मतलब सर्द

[110:25]

बहुत सारे काफी हैं। मर्द पर्द सर्द

[110:28]

खूब पर्दा है कि चिलमन से लगे बैठे हैं।

[110:31]

साफ छुपते भी नहीं

[110:33]

सामने आते भी।

[110:34]

[110:36]

गौर से दृश्य दृश्य को। देखिए आप

[110:39]

खूब पर्दा है कि

[110:42]

खूब पर्दा है कि चिलमन से लगे बैठे हैं

[110:45]

वही पर्दा है व बैठे हैं पकड़ के हमने

[110:48]

अरे अरे क्या एक्सप्रेशन दे रहे

[110:51]

अरे मैं खो रहा हूं

[110:52]

क्लोज अप देख साफ छुपते भी नहीं सामने आते

[110:56]

भी नहीं बीच का मामला है

[110:58]

ये जो ए्बग्विटी होती है ना

[111:01]

कि हम हैं भी

[111:03]

और नहीं भी

[111:03]

और नहीं भी

[111:04]

यही तो

[111:05]

हो भी नहीं और हरजा हो

[111:07]

तुम तुम एक गोरख धंधा हो

[111:10]

क्या बात है

[111:11]

तो साफ छुपते भी नहीं सामने आते भी नहीं

[111:15]

अगर साफ छुप जाएंगे तो कम से कम आप तो

[111:18]

मुक्त हो जाएंगे ना फ्री हो जाएंगे मैं

[111:20]

दूसरी जगह देख लेता हूं इधर नहीं चल रहा

[111:23]

लेकिन नहीं आपको वहीं पर एक हुक दे दिया

[111:26]

गया है

[111:26]

हम

[111:28]

कि अब आपने सैल्यूट देख लिया है तो आप

[111:30]

इमेजिन कर रहे हो

[111:32]

हम

[111:33]

कहां खो गए पता नहीं बहुत अच्छा था यार

[111:36]

पैसे नहीं है बस

[111:38]

होता यही है जैसे लोकतंत्र है

[111:41]

हम ये इसका वही मतलब है आई लव यू भी ना कह

[111:43]

रही मौसू और बात भी ना करनी छोड़ रही

[111:48]

लोकतंत्र है ना अपने देश में

[111:50]

हम पर साहब छुप भी नहीं रहा है

[111:55]

तो कुछ लोग कह रहे हैं कि नहीं रहा

[111:56]

तानाशाही नहीं चलेगी नहीं चलेगी नहीं

[111:59]

चलेगी

[112:01]

वो कहते हैं हमें तो प्रश्न पूछने का

[112:02]

अधिकार ही नहीं है सारे इंस्टिट्यूशन

[112:05]

कैप्चर हो गए हैं

[112:08]

लेकिन ऐसा नहीं है।

[112:12]

सब कुछ वैसे ही चल रहा है जैसे पहले चल

[112:14]

रहा था।

[112:15]

नेता लोग गाड़ी में पर्दा काहे लगाते थे?

[112:17]

चिलमन से लगे बैठे हैं।

[112:20]

साफ छुपते भी नहीं, सामने आते भी नहीं।

[112:23]

इसीलिए नेता लोग गाड़ी में पर्दा लगा के

[112:25]

चलते थे पहले।

[112:25]

क्योंकि फिल्म लगाना गैरकानूनी है।

[112:31]

खाली फिल्म लगाना गैरकानूनी है। आप पर्दा

[112:34]

लगा लेंगे आपको फाइन हो जाएगा। हम पता है

[112:36]

वो पर्दा लगा लेते हैं वाइट वाला क्रोशिया

[112:39]

वाला

[112:39]

क्रोशिया टाइप रहता है उसमें थोड़ा

[112:41]

जालीदार

[112:42]

को पारदर्शी बाकी छिप जाता है उसप सब

[112:45]

पर ये बताइए इसको फिल्म क्यों कहते हैं जो

[112:50]

शीशे पे लगाई जाती है आप लगाते हो फिल्म

[112:53]

नहीं

[112:54]

घर में कभी फिल्म नहीं लगाते आप देखने के

[112:56]

लिए

[112:56]

अब गाड़ी वाली बात करते घर पे कैसे चले गए

[112:58]

वो फिल्म ही होता है वो

[112:59]

हां मैंने गाड़ी को फिल्म चढ़वाया

[113:01]

वो जो रील में वो निकलता है उसको फिल्म

[113:04]

कहते हैं उसी से फिल्म आया है।

[113:05]

हां। हम भी जो ये लगाते हैं वो फिल्म ही

[113:07]

है। हां उसको फिल्म ही बोलते हैं कि

[113:09]

फिल्म जो है वो क्या है? एक जीना सा पर्दा

[113:11]

है।

[113:11]

स्क्रीन है।

[113:12]

पीपीएफ मैंने करा है भाई।

[113:15]

पेंट प्रोटेक्शन फिल्म।

[113:17]

ओ अच्छा मुझे लगा ये प्रोविडेंट फंड

[113:19]

प्राइवेट प्रोविडेंट

[113:20]

पीपीएफ वाला।

[113:21]

फिल्म जो है वो फिल्म क्या है? झिल्ली है।

[113:23]

हम

[113:24]

झिल्ली कितना सही शोध है यार इसके लिए।

[113:26]

हां ऊपर झिल्ली

[113:27]

चलो एक झिल्ली देखने चलें। चलो मैं और तुम

[113:31]

दिल्ली देखने चलें।

[113:32]

बहुत ही वाहियात इतने

[113:33]

अरे बहुत मेरे एक मित्र थे वो कहते थे यार

[113:36]

कौन सी तस्वीर लगी है शारदा में

[113:39]

तस्वीर

[113:39]

हां तो मैं हमेशा

[113:41]

हमेशा जो है ना तस्वीर लगी है समथिंग द

[113:44]

पिक्चर

[113:45]

तस्वीर लगी है

[113:47]

नहीं क्योंकि वो तस्वीर ही बोलते थे

[113:49]

हम

[113:50]

चलचित्र तो सवाल ही नहीं है

[113:52]

पर अगर सिर्फ बोला तो चित्र देखने जा रहा

[113:55]

हूं तो कैसा लगेगा चित्र देखने जा रहा है

[113:57]

तो

[113:57]

चलचित्र कुछ मूवमेंट सिनेमा हॉल में क्यों

[113:59]

जा रहा है

[114:00]

हम मूवमेंट वाले चित्र जो दिखे

[114:03]

नहीं चित्र बोलते हैं ना वो तस्वीर बोलता

[114:05]

था भाई

[114:06]

हां तस्वीर तो गलत बोलना था उनका

[114:08]

नहीं गलत क्यों है आप तो पिक्चर बोलते हो

[114:10]

कौन सी पिक्चर चल रही है

[114:12]

हम पिक्चर बोलते हैं अंग्रेजी

[114:13]

अंग्रेजी बोलो तो सही

[114:14]

नहीं नहीं अब फौरन आप आ जाते हो उसी पे

[114:16]

पिक्चर मतलब भी सही है मतलब

[114:18]

हम

[114:19]

पर्दे में फंस के गिरना बहुत कॉमन होता था

[114:22]

पहले

[114:23]

ऐसा

[114:23]

बचपन में छुटपन में आप दौड़ रहे खेले

[114:26]

पर्दा लगा हुआ है बच्चे होते थे ध्यान

[114:28]

नहीं

[114:28]

धक्के से गिर गए पर्दे में फंस गए पता पैर

[114:30]

भी उसी था आप उसी में गिर भी गए तो ले दे

[114:33]

के

[114:33]

तो पर्दा लेके गिर जाते थे

[114:34]

पर्दा लेके ही गिरता था थे आदमी

[114:36]

और पहले ना अभी भी मेरे पुराने वाले घर

[114:40]

में जो बुद्धि में है तो ताऊ समझेंगे पहले

[114:44]

पर्दे के लकड़ी का डंडा होता था और दो ऐसे

[114:47]

निकले होते थे जिसप वो रखा जाता था उसके

[114:49]

आगे शोपीस बनाया जाता था एक चौड़ा सा

[114:52]

चौकोर मतलब 1ढ़ एक फीट का होता था

[114:55]

जो ऐसे आई डोंट नो किस लिए होता था वो

[114:59]

ताकि वो डंडा ना दिखे या कुछ ऐसा होता था

[115:02]

और परदेस पे

[115:03]

वो डंडे का पैनल होता था एक जिस ऐसे कुंडी

[115:06]

लगी होती थी जिस पे डंडा ऐसे रख देते थे

[115:08]

फिर उसके आगे एक शेप बनता था

[115:10]

उसके आगे एक पैनल होता था

[115:11]

हां यस ताकि वो डंडा ना दिखे

[115:14]

हां इसीलिए होता था वो तुमने नहीं देखा

[115:16]

होगा

[115:16]

नहीं वो यहां भी होता है यहां पे भी सबके

[115:18]

जो वो

[115:20]

अच्छा वो जो मतलब उस रोड के ऊपर जो एक कवर

[115:25]

करने के लिए रहता था

[115:26]

पहले वो काफी चौड़ा होता था घुमा

[115:28]

ऑब्वियसली उसकी डेप्थ होती थी पैनल होता

[115:30]

पूरा

[115:31]

ताकि वो पर्दा कहां तक है यह दिखे नहीं

[115:34]

हम

[115:34]

अच्छा पर्दा उतारना उतारना तो चलिए आसान

[115:37]

है पर उसको लगाना भी है इसके खिलाफ घर में

[115:40]

पर्दे टांगना जो है क्या सलवट पड़ना चाहिए

[115:43]

ना उसमें मतलब एक

[115:45]

सलवट नहीं उसकी साइड

[115:46]

हां मतलब उसको प्लीट्स

[115:48]

उसको उल्टा या सीधा

[115:49]

प्लीट्स हां वो उल्टा सीधा आप जब लगा रहे

[115:51]

होते हैं उस समय आपको आईडिया नहीं आता

[115:53]

हां तो वो गोल पकड़ पकड़ के जैसे सच्चाई

[115:55]

को वो किया जाता है आपने पकड़ लिया फिर

[115:57]

आपने डाला

[115:58]

पहले पूरी रड नीचे नहीं उतारे उतारे बिना

[116:00]

हल्का सा टिल्ट करके टेढ़ा किया फिर डाला

[116:02]

फिर उसमें चूड़ी कस दी।

[116:03]

पहले ना घर में जो पर्दे बनाए थे हाथ से

[116:05]

जो पुरानी साड़ियों से या पुराने बेडशीट के

[116:08]

बनते थे तो हाइट कम होती थी मान लो

[116:11]

हम

[116:12]

तो क्या जुगाड़ होता थे?

[116:13]

नहीं

[116:14]

फिर उसमें ऐसे लंबे से डोर बनाकर नीचे

[116:16]

लटकाया जाता था।

[116:17]

अच्छा हां नीचे एक झालर सीट जाती थी। एक

[116:19]

हाथ तक और फिर वो जो ताऊ ने बोला उसको

[116:22]

बोलते थे। क्या बोलते थे ताऊ?

[116:24]

फॉल हां फॉल।

[116:26]

बेडशीट वाले पर्दे में हमेशा फॉल लगाना

[116:28]

पड़ता था। फॉल क्यों बोलते हैं उसको?

[116:29]

क्योंकि फॉल फॉल है।

[116:31]

फॉल करे सीधा है। फॉल करे नहीं ऊपर मूचड़ा

[116:34]

नहीं रह जाए।

[116:35]

फॉल जो

[116:37]

अपने कुर्तों में होता है या बाजा उसमें

[116:39]

भी फॉल कहते हैं।

[116:40]

साड़ियों में भी

[116:41]

साड़ी में तो होता ही है।

[116:42]

तो पर्दों में लगता था

[116:44]

वो भी कमाल का काम होता है।

[116:45]

वाटरफॉल

[116:46]

वॉटरफॉल

[116:47]

आपका भी

[116:49]

रीसेंट वॉटरफॉल आपने कब विजिट किया? अभी

[116:52]

शीशू में वाटरफॉल

[116:54]

बिजार खबर की ओर बढ़ते हैं।

[116:56]

बिज़ार खबर सबसे बड़े पर्दे की तो बात ही

[116:58]

नहीं हो रही है।

[116:59]

कौन पर्दा

[117:00]

इस पर्दे की

[117:02]

टीए अच्छा फोन ये भी तो एक पर्दा

[117:03]

ये छोटा हो गया है।

[117:04]

बहुत छोटा लेकिन बहुत बड़ा है।

[117:06]

ये हमेशा अब हम जेब में अपने-अपने पर्दे

[117:08]

लिए।

[117:08]

पर्दा छोटा है लेकिन देखने वाले बहुत

[117:10]

ज्यादा हैं इसको।

[117:11]

ये इसने

[117:12]

बेचैन कर देता है ये।

[117:13]

ये इतना छोटा पर्दा है। हम

[117:15]

इसने पूरी दुनिया को छुपा रखा है।

[117:18]

यस

[117:18]

आपसे

[117:20]

हम

[117:22]

बट हम तो देख रहे हैं इसको छुपा क्या रखा

[117:24]

है

[117:25]

आप इसको देख रहे हैं ना

[117:26]

दुनिया को नहीं देख रहे दुनिया आपके सामने

[117:28]

हो रही है

[117:29]

घट रहा है घट रहा है सब कुछ

[117:32]

देख नहीं रहे

[117:33]

आप नहीं देख रहे पर्दे का काम क्या है

[117:35]

छुपाना

[117:37]

यस

[117:38]

तो जब आप पर्दे पे कुछ देख रहे होते हैं

[117:40]

सब कुछ छुप रहा होता है

[117:42]

तो सब कुछ छुप रहा होता है परम ज्ञान

[117:45]

पहले

[117:47]

आदमी

[117:48]

जब दुनिया की

[117:52]

चीजों से उगता जाता था।

[117:55]

अपने जीवन को घटता देखकर अपने चारों तरफ

[118:00]

इतना कुछ होता देखकर थक जाता था। सब कुछ

[118:03]

पॉजिटिव नहीं होता था। तो दो-तीन घंटे के

[118:06]

लिए एक डिस्ट्रैक्शन ढूंढता था। तो पहला

[118:10]

पर्दा नाटक कुछ भी मतलब

[118:12]

कुछ भी थिएटर 3 घंटे वो उसको एंटरटेन होने

[118:15]

के लिए जाता था। वो डिस्ट्रैक्ट करता था।

[118:18]

उसका मन बहलाता था।

[118:21]

उसको भटकाता था। जाओ पिक्चर देखो मन।

[118:24]

तीन घंटे के बाद वह फिर धरातल पर वापस आता

[118:26]

था। उसको अपनी औकात पता चल जाती थी।

[118:29]

ये छोड़वे नहीं कर रहा है। छोटा वाला

[118:32]

पर्दा

[118:33]

खुला है तो खुले है। उठा है तो उठे।

[118:35]

दुनिया डिस्ट्रैक्शन है।

[118:38]

अब आप अपने मन को भटकाने के लिए दुनिया

[118:41]

देख लेते हो।

[118:42]

हां। अगर इससे थोड़ा टाइम मिल जाए। अब सब

[118:46]

कुछ इसी में घटित हो रहा है। खबरें भी,

[118:50]

रिश्ते भी,

[118:52]

मोहब्बतें भी, लजीज खाने का भी खरीदारी

[118:56]

वगैरह सब

[118:57]

सब कुछ यहीं घटित हो रहा है। आपकी जीवन

[119:00]

में कुछ नहीं घट रहा।

[119:01]

एक तो जब आप हमको देख के बोलते हैं, हमको

[119:03]

अपने ऊपर डाउट है।

[119:03]

अरे आपके मोमेंट्स जीवन क्या है?

[119:06]

नहीं तो इनके जीवन में कुछ घट नहीं रहा

[119:08]

है। इनके जीवन में सब बढ़ रहा है।

[119:10]

क्या बढ़ रहा है भाई?

[119:11]

अरे दिन व्याधि भाई व्याधि।

[119:16]

अपना लाइफ मोमेंट्स को जोड़ जोड़ जोड़ करके

[119:20]

बना है। हम

[119:21]

1 + 2 + 3 + 4 ऐसे अनंत इतने कोटा मिला है

[119:25]

हम सबको मोमेंट्स का कुछ अच्छे कुछ बुरे

[119:29]

वो डिस्ट्रैक्शन हो गए

[119:31]

हम

[119:32]

स्क्रीन मेन अट्रैक्शन हो गया

[119:34]

ट्रू

[119:35]

यस

[119:36]

तो आपकी जिंदगी के मोमेंट्स को चुरा रहा

[119:39]

है।

[119:41]

जैसे कि आप दुधी बाजार में जाकर

[119:45]

हम हम

[119:47]

दो प्लास्टिक के बाल्टी

[119:50]

तीन सर्फ एक्सेल

[119:52]

हम

[119:52]

वाला साबुन दो गमछा

[119:57]

एक किलो रसगुल्ला

[119:58]

कॉम्बिनेशन देखो

[119:59]

इत्यादि इत्यादि लेकर शाम में आते थे ना

[120:02]

हम

[120:02]

आपको पांच लोगों से

[120:05]

इंटरेक्शन

[120:06]

करना पड़ता था

[120:07]

और एक हसीन लड़की से

[120:09]

दीदार होता था आपका हम

[120:12]

फिर आप सपने अपने बुनते हुए घर आते थे। दो

[120:15]

आदमी रास्ते में आपको सलाम वालेकुम

[120:18]

कहते थे आप वालेकुम अस्सलाम।

[120:22]

ठीक वो चला गया।

[120:25]

सब गया।

[120:25]

एक बंदा आता है कहता है ओटीपी दीजिएगा बात

[120:28]

खत्म।

[120:29]

हमारे साथ थोड़ी हो रहा है। इसके साथ भी

[120:30]

हो रहा है। आपके साथ भी हो रहा है।

[120:32]

सबकी जिंदगी के मोमेंट चुरा रहा है। जीवन

[120:35]

में चुरा ना ले चेहरे का।

[120:39]

चुराना चेहरे का नूर। अभी जो ताऊ ने बोला

[120:42]

ना एक मूवी थी दिल तो पागल है

[120:45]

तो है ही

[120:46]

दिल दीवाना भी है

[120:47]

सुनो तो उसमें ना शाहरुख खान से प्यार

[120:50]

करती थी करिश्मा कपूर

[120:53]

तो एंड का सीन है कि मतलब वो शाहरुख से

[120:56]

प्यार करे शाहरुख मारो दीक्षित को प्यार

[120:58]

करता था तो शाहरुख खान शातिर आदमी पिक्चर

[121:00]

में शातिर मतलब आशिक आदमी लेकिन क्या झोल

[121:03]

मारा जो ताऊ ने मारा कि बुरा तो वो है

[121:06]

बुरा तुम नहीं हो बुरा मैं नहीं हूं बुरा

[121:08]

हमारा वक्त नहीं है बुरा प्यार नहीं बुरा

[121:10]

तो वो वो है ऊपर वाला जो हमें मिलाता है

[121:12]

जो हमें वो पत्थर उठा के मारने लगती है।

[121:14]

हमको भी लगा इसको उठा के हम फेंक दें

[121:17]

क्योंकि इसने सब कुछ मेरा रखा

[121:18]

फेंकने की बात नहीं है। बात ये है कि

[121:21]

बच्चों को हमारा तो कट गया ना अपने

[121:24]

मोमेंट्स हमने ले लिए।

[121:25]

बहुत कटा है भाई।

[121:26]

बोनस टाइम चल रहा है वो इधर जाए उधर जाए।

[121:28]

अल्लाह लेगा या मुल्ला लेगा?

[121:36]

ठीक है। बच्चों को क्या हो रहा है? मैं

[121:38]

पेरेंट्स को देख रहा हूं।

[121:40]

लगा के दे देते हैं उसको।

[121:42]

ठीक है?

[121:43]

छोटा सा बच्चा है।

[121:44]

बड़ा मजेदार ठीक है।

[121:46]

क्यों?

[121:46]

रटा हुआ है।

[121:47]

क्योंकि उसको लगता है कि इसको ना अभी

[121:51]

थोड़ी देर के लिए चुप करा देंगे

[121:52]

ताकि मैं मोबाइल पे लगा रहूं।

[121:54]

हां। नहीं अपन अपना ही दे देते हैं। ये

[121:57]

नहीं कह रहा हूं मैं। मैं दो दोस्त बात कर

[121:59]

रहे हैं। बच्चा कुछ करने लगा तो उसको थमा

[122:01]

दिया पेपा पे या जो भी होता है वो लगा के

[122:04]

हम मेलन होता है। एक

[122:06]

हां

[122:06]

कोकोमेलन। यस

[122:08]

वो दे दिया जाता है उसको बच्चे को

[122:10]

टेंपरेरीली चुप कराने के लिए

[122:13]

पर्दा

[122:14]

पर्दा दे दिया जाता है छोटा सा उसको

[122:17]

वो हमेशा के लिए चुप हो जाता है

[122:20]

हम

[122:21]

अब तो पेरेंट्स एक्स्ट्रा ही लगते हैं

[122:22]

बच्चों को

[122:23]

बहुत आराम से ना धीरे धीरे धीरे क्योंकि

[122:26]

वो उसका राइट था मेरी मां जब मैं चिल्लाता

[122:29]

था

[122:29]

पीट दिए जाते थे हम लोग

[122:31]

हम

[122:31]

आइदर दैट और अरे बाबू थोड़ा खिला दिया

[122:35]

इनको अभी आप जिसको उसको जिससे चुप कराने

[122:38]

की कोशिश कर रहे हो ना

[122:39]

हम

[122:39]

उससे वो चुप ही हो जाएगा।

[122:41]

हम

[122:42]

बिल्कुल क्योंकि वो बहुत कंफर्टेबल हो

[122:44]

जाता है कि स्क्रीन है। स्क्रीन विल टेक

[122:47]

केयर ऑफ मी।

[122:47]

हम

[122:48]

मुझे जरूरत नहीं है तुम्हारी।

[122:50]

इससे बचना चाहिए। पेरेंट्स क्या कर रहे

[122:52]

हैं? बच्चे उनके आठ साल के पांच साल के

[122:54]

हैं।

[122:55]

तीन

[122:55]

वो कहते हैं गेम दीजिए।

[122:56]

हम

[122:57]

तो वो कह नहीं पाते क्योंकि खुद ही मोबाइल

[122:59]

पे वो खाना खाते हैं। खाना खा रहे होते

[123:01]

हैं। मोबाइल देख रहे होते हैं। तो उनको भी

[123:04]

तो कोई वो मोरली फील नहीं करते ना कैसे

[123:08]

बोले बच्चे को कि यार मोबाइल पे मत रहा

[123:09]

करो इतनी देर तक क्योंकि खुद रह रहे हैं

[123:14]

और फिर एक जनरेशन खड़ी हो रही है जो एक

[123:17]

बिल्कुल छोटे स्क्रीन से जिसका काम आपकी

[123:20]

जिंदगी चुराना है और वो तरह-तरह की

[123:24]

समस्याएं तरह-तरह के अवसाद

[123:27]

घस जाते हैं।

[123:28]

हां क्योंकि एंटरटेनमेंट यहां होना ही

[123:30]

नहीं चाहिए। गाना यहां पे सुनना ही नहीं

[123:33]

चाहिए।

[123:33]

हम सुना है क्या?

[123:34]

बिल्कुल नहीं सुनना चाहिए। यह तो हम लोगों

[123:37]

के लिए है

[123:38]

जो निकल चुके हैं।

[123:39]

यंग लोगों को गाना यहां सुनना ही नहीं

[123:40]

चाहिए। यंग लोगों को क्रिकेट यहां देखना

[123:43]

ही नहीं चाहिए। उनको तो वहां देखना चाहिए

[123:46]

जहां हो रहा है। क्योंकि हमारे सामने इतनी

[123:49]

चीजें हो जा रही हैं। मतलबकि हमने घरों

[123:51]

में पर्दा लगा लिया है। घरों में पर्दा

[123:54]

लगा है।

[123:56]

वो ब्लैक कौन सा? ब्लैक आउट वाला टोटल कि

[123:59]

बाहर की रोशनी

[124:00]

आ ही नहीं सकती।

[124:01]

आ ही नहीं सकती। अंदर की रोशनी बाहर जा

[124:03]

नहीं सकती। दरवाजा टाइटली बंद है। एसी ऑन

[124:06]

है। घर में छोटा से लेके लैपटॉप से लेके

[124:09]

बड़ा वाला स्क्रीन सब स्क्रीन ऑन है। हम

[124:12]

पूरी दुनिया को अपने घर के अंदर पर्दों पर

[124:15]

देख रहे हैं और खिड़कियों पर पर्दा

[124:18]

डाल दे रहे हैं।

[124:19]

लगा हुआ है। बाहर जो कुछ घट रहा है। उसका

[124:22]

उसके शाहिद हम है ही नहीं। शाहिद कपूर

[124:26]

गवाह

[124:26]

वही अच्छा शाहिद मतलब

[124:28]

उसको देख नहीं पा रहे हैं।

[124:29]

हम नहीं देख पा रहे हैं। वो हमको यह लगता

[124:32]

है कि वो भी हमको नहीं देख पा रहे हैं।

[124:34]

ठीक है। कोई किसी को नहीं देख पा रहा है।

[124:37]

क्योंकि हर आदमी पर्दे को देख रहा है।

[124:41]

अगर आप पर्दे पे कुछ देख रहे हैं तो पर्दा

[124:44]

आपसे कुछ छुपा रहा है। इसीलिए जब आप खबरें

[124:50]

पर्दे पर देखते हैं,

[124:52]

हां।

[124:53]

तो खबरें नहीं होती।

[124:56]

यह व्यस्त था आज क्या?

[124:57]

जो बताया जा रहा है वह खबर नहीं है। जो

[124:59]

छुपाया जा रहा है वही ख़बर।

[125:01]

वही खबर है। तो थोड़ा सा पर्दे से बाहर

[125:05]

आइए। चुराने ले चेहरे की नूर। ए मेरे हम।

[125:11]

ए मेरे हुजूर। हुजूर। अच्छा ठीक। कौन है

[125:15]

स्पोंसर?

[125:17]

थर्मोकूल

[125:18]

प्रेजेंटेड बाय

[125:19]

अच्छा प्रेजेंट

[125:20]

प्रेजेंटेड प्रेजेंटेड बाय थर्मोकूल

[125:22]

कूलर्स उसका ये एक बहुत सारे टाइप के

[125:26]

मिलते हैं थर्मोकूल उसका एक वेरिएंट

[125:29]

अवतार ये भी है अवतार प्लस

[125:30]

अवतार प्लस हां यहां रखा हुआ है

[125:32]

जिसमें जो है

[125:34]

USB है भाई दोद कूलरत

[125:37]

वैसे ये बड़ी इंटरेस्टिंग है कूलर की USB

[125:39]

जानते हो

[125:40]

USB है

[125:41]

USB

[125:42]

USB USB है दो ही बहुत बढ़िया झगड़ा ना हो

[125:46]

दो आदमी से हैं। दो इसलिए दिया कि एक है

[125:49]

मालूम तुम्हारे हां कि तुम चार्जिंग पे

[125:50]

लगाओ कि मैं चार्जिंग पे लगाऊं

[125:52]

एक के साथ एक फ्री यही होता है देखिए

[125:54]

दूरदर्शन बस दूरदृष्टि

[125:56]

और इसके हवा भी बहुत दूर तक लग जाती है

[125:58]

लोहियावादी बनिए

[126:00]

वैसे ये लोहियावादी नहीं है

[126:01]

प्लास्टिक वादी है ये

[126:02]

हां

[126:03]

पुराने पुराने कूलर

[126:05]

लोहे में जंग लग जाता था

[126:06]

और उसको पेंट भी करना पड़ता था

[126:08]

ऐसे दूरदर्शन से याद आया ब्रॉडकास्ट

[126:10]

हम

[126:12]

किसानों का दिया हुआ शब्द है

[126:14]

वो ब्रॉडकास्ट

[126:16]

कैसे भैया

[126:16]

अरे वो जब बीज फेंकते थे ना

[126:19]

हम

[126:19]

तो कास्ट जो करते थे वो ब्रॉड करते थे।

[126:22]

[126:23]

एक तो एक रोपना होता है जो कि आप मिट्टी

[126:25]

खोदते बीज डालते जो छींटते हैं उसको

[126:27]

ब्रॉडकास्टिंग कहते हैं।

[126:28]

बात है।

[126:29]

तो जब ये हुआ कि भाई ये चीज बहुत लोगों तक

[126:31]

जाएगी

[126:32]

तो उसको ब्रॉडकास्टिंग कहने लगे। तो

[126:35]

किसानों ने हमको यही नहीं दिया है।

[126:37]

पर भारत में कास्ट एक ब्रॉड विषय है। बात

[126:42]

करने के लिए इट्स वो तो है।

[126:44]

कई घंटों इस पर बात हो सकती है।

[126:46]

वरना इज द ब्रॉडकास्ट।

[126:47]

इस कूलर में जंग नहीं लगता है।

[126:49]

लेकिन ये कूलर गर्मी से जंग लड़ता है।

[126:52]

इसमें वैसे जंग नहीं लगता है।

[126:53]

हम

[126:54]

अरे यार आप तो ले लेते ना थोड़ा सा दिया।

[126:57]

नहीं अगर हम लोग जंगी बोलते हां जंग लोगों

[126:59]

के लिए दोनों और भैया एक बात देखो जो जंग

[127:01]

होती है ना

[127:02]

उससे उसके बाद जंग ही लगता है

[127:04]

जंगी लगता है भाई साहब हम

[127:06]

जांगिया हो जाता है फिर देखिए ज्यादा जंग

[127:09]

डॉनल्ड ट्रंप फन्ने मियां बन रहे थे वहां

[127:11]

गए देखिए उनके अपने पॉलिटिकल कैपिटल पे

[127:15]

जंग लग गई जंग से

[127:18]

अधर्म में ही है

[127:19]

हम

[127:20]

एक फिलॉसफर होते थे

[127:21]

हम

[127:22]

काल जंग यूंग नाम था उनका वैसे पर जे यू

[127:25]

एन जी लिखते थे

[127:26]

तो हम तो जंग ही पढ़ेंगे उनको हम

[127:29]

हमारे एक दोस्त कहूंगा विजय जंग थापा नाम

[127:32]

थापा

[127:33]

हां विजय जंग थापा

[127:35]

बहुत अच्छे इंसान है थापा साहब

[127:36]

पर ये इसकी कहानी क्या रही होगी कि मतलब

[127:39]

कभी सुनी है जैसे ये जो मेटाफर

[127:42]

क्या आ गया आ गया भाई आ गया आ गया अब पूरा

[127:44]

हो गया कृपा आ गई

[127:45]

दोनों बोल दिए मैंने इस बार देखिए हम याद

[127:47]

दिलाएंगे अगली बार भाई तुम बोलो

[127:48]

इश्तियारा कौन सा यारा

[127:51]

अरे इश्तियारा आप लोग ऐसेसे शब्द कहां से

[127:53]

लाते हो यार

[127:54]

इश्तियारा मतलब

[127:55]

मेटाफर चलो ये टापर रहता था ना

[127:58]

मेटाडोर

[127:59]

ये सबको कहता था मेटापर

[128:00]

मेटापर मेटापर एक्चुअली आई वास या आई नो

[128:04]

सो ये जो है फन्ने खान या फन्ने मियां

[128:07]

वाला

[128:09]

ये कहां जाए आया कोई है कहानी इसकी

[128:12]

फन्ने मियां होते थे ना

[128:13]

फन्ने शेख

[128:15]

हां शेख बग

[128:15]

हां फने फन्ने जैसे हमने मियां नसरुद्दीन

[128:18]

मुल्ला नसरुद्दीन का किस्सा

[128:20]

हां तो अपने आप को जो फन्ने मियां समझते

[128:22]

हैं ना

[128:22]

वो होते हैं कि

[128:25]

आपने वोट दे दिया।

[128:27]

नहीं नन्हे मियां की कहानी सुनी है जो उड़

[128:29]

जाते हैं। उड़ जाते

[128:31]

आपने तो पन्नू की भी सुनी हुई है।

[128:33]

हां

[128:35]

आप लोग तो बहुत लकी आदमी हो।

[128:38]

तो फन्ने मियां की कहानी नहीं सुना।

[128:40]

नहीं

[128:40]

वो क्या है कि फन्ने मियां की गजल सुना

[128:42]

देता हूं।

[128:43]

आहा इरशाद

[128:45]

जो इस बात पे भी है कि भाई हम क्या किसी

[128:48]

पॉलिटिशियन पे भरोसा कर सकते हैं।

[128:50]

हम

[128:51]

तो वो तो मैं आज ही मतलब आप कह रहे थे दिख

[128:54]

रहा है कितना भरोसा है। हम हम कि वो इसलिए

[128:57]

है कि कर भरोसा बाद में पछताओ मत।

[129:00]

कर भरोसा बाद में पछताओ मत।

[129:03]

चुप रहो फनेम मियां चचियाओ मत।

[129:06]

जगह आप पढ़े सुनाए थे ये

[129:08]

थोड़ा सा सुनाए थे।

[129:09]

चुप रहो फन्ने में मियां चचियाओ मत।

[129:11]

और लुर लुराते लार पर राखो लगाम।

[129:15]

ये हम नहीं बोल पाएंगे। लुरल लुराते

[129:17]

लुर लुराते लार पर

[129:20]

राखो लगाम। आप लगाम रखें।

[129:22]

लपलपाते जीभ को दुर्राओ मत।

[129:26]

टंग ट्विस्टर है ये।

[129:28]

लगाते जीभ को दुर्रा

[129:29]

हड़ाते हाड़ को

[129:31]

हड़ाते हाड़ को

[129:33]

हड़ाते हाड़ से कर सामना

[129:36]

हड़ाते हाड़ से कर सामना

[129:39]

कप कपाती का में घुस जाओ मत

[129:43]

तो नहीं आदमी

[129:46]

जब सामना मुसीबत से होता है ना

[129:48]

हाड़ मतलब हड्डी कांप जाना

[129:49]

हम

[129:50]

तो अपने ही का में घुस जाता है

[129:53]

हम चतुरमुर्त की तरह

[129:55]

हड़हड़ाते हाड़ से कर सामना

[129:58]

कपकपाती कांख में घुस जाओ मत कसमसाती रह

[130:03]

गई हर कामना

[130:05]

कसम

[130:06]

कसमसाती रह गई हर कामना

[130:08]

बिलबिलाते बोल बोले जाओ मत

[130:11]

बिलबिलाते बोल बोले जाओ मत

[130:13]

बहुत बढ़िया

[130:14]

क्योंकि आपकी कामना जो थी ना कसमसा के रह

[130:16]

गई है

[130:16]

तो बिलबिला के जो है ज्यादा

[130:18]

ज्यादा बोल मत बोलो

[130:20]

और चरमराती खाट थी

[130:22]

आ चुरचुर

[130:23]

चरमराती खाट थी

[130:25]

स्वय खड़ी

[130:27]

घटिया खड़ी हो गई है चरमराती खाट थी सो है

[130:32]

खड़ी खाड़े खाड़े तुम भी खड़खड़ाओ मत

[130:37]

क्योंकि बैठ तो सकते नहीं आपकी

[130:41]

खटिया खड़ी हो चुकी है तो दिल्ली आके

[130:43]

खड़खड़ाने से कुछ नहीं होगा

[130:45]

ओ खड़खड़ाती खाट थी चरमराती खाट थी सो है

[130:49]

खड़ी खड़ेखड़े तुम भी खड़खड़ाओ मत होते जड़ मत

[130:54]

होता है सुजान हम हम

[130:58]

होते

[130:59]

जड़ मत

[130:59]

जड़ मत होता है सुजान यूं खुजा के खाज को

[131:03]

सुझाओ मत

[131:04]

[131:06]

ये तो खुजली वाले एपिसोड में फिट हो जाता

[131:08]

है

[131:08]

हां और कुलबुलाती कोपलों को कर दफन

[131:11]

कुलकुलाती कुल

[131:12]

कोपल जब निकलती है ना जमीन से

[131:15]

उसको वापस वहीं डाल दो

[131:17]

ओके

[131:17]

कुलबुलाती कोपलों को कर दफन भरभरी भरभराती

[131:22]

भावना भड़काओ मत

[131:23]

हाय हाय भावनाओं को भड़काओ बहुत बढ़िया

[131:25]

भरभराती भावना

[131:26]

भड़काओ मत

[131:27]

भड़काओ मत खलबलाते खून को खौलाते जाओ

[131:31]

वाह

[131:31]

खलबलाते खून कोलाते

[131:33]

खौलाते जाओ

[131:34]

मिन्नतें करते हुए मिमियाओ मत

[131:36]

आय हाय हाय हाय

[131:38]

खलबलाते खून को खौलाते जाओ मिन्नतें करते

[131:42]

हुए मिमियाओ मत

[131:43]

याचिका नहीं है रण होगा याचिका नहीं है रण

[131:46]

होगा और हड़बड़ाते होश में आया है हुस्न

[131:50]

हड़बड़ाते होश में आया है हुस्न

[131:54]

बड़बड़ाते इश्क तुम सो जाओ मत।

[132:01]

मुझे लगा

[132:02]

बहुत बढ़िया

[132:03]

मतलब इसकी

[132:04]

दृश्यात्मकता मैं समझ रहा हूं।

[132:07]

हड़बड़ाते

[132:09]

होश में आया है हुस्न।

[132:11]

बताइए अब इतने समय के बाद

[132:13]

बड़बड़ाते इश्क तुम सो जाओ मत।

[132:17]

यूं खुजा के खाज को सुजाओ मत। बहुत

[132:21]

बढ़िया।

[132:21]

बहुत अच्छे।

[132:22]

तुम्हारी बात भी आ गई। थैंक यू। चुप रहो

[132:24]

पन्ने मियां

[132:26]

मत

[132:27]

बहुत बढ़िया

[132:27]

तो बेजार खबर ये है कि सोशल मीडिया पर

[132:30]

रचना गुर्जर नाम की एक महिला बड़ी चर्चा

[132:33]

में है। वो अपने इन्फ्लुएंसरर

[132:36]

सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसरर हैं। वो अपनी

[132:38]

बनाती रहती है।

[132:39]

हां अपने भारीभरकम सोने के गहनों और

[132:41]

लग्जरी लाइफस्ट के वीडियोस की वजह से

[132:43]

वायरल होती हैं। तो उनके कंटेंट में उनका

[132:45]

पारिवारिक माहौल, गांव का माहौल, रोजमर्रा

[132:48]

की गतिविधि और उनकी महंगी ज्वेलरी का

[132:51]

प्रदर्शन यह देखने को मिलता था। तो हाल

[132:54]

में रचना गुर्जर के यहां चोरी की वारदात

[132:56]

हुई।

[132:57]

मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में उनका घर

[133:01]

है और वहां से करीब 7 से 8 लाख का सोना

[133:03]

चोरी हो गया है। सोशल मीडिया पर शेयर किए

[133:06]

गए वीडियोस के मुताबिक चोरों ने घर की

[133:08]

बाउंड्री की जाली काट के प्रवेश किया और

[133:12]

परिवार के कमरे को घर बाहर से बंद कर दिया

[133:15]

और उसके बाद जो कैमरा वहां लगा था उसका

[133:17]

एंगल भी बदल दिया जिससे घटना रिकॉर्ड ना

[133:20]

हो सके और सीसी सुबह जब सीसीटीवी में और

[133:23]

सुबह जब परिवार उठा तो उन्हें पता चला कि

[133:25]

दरवाजा तो कमरा तो बाहर से बंद है और घर

[133:28]

से लाखों का सोना उनके सोते हुए चंपत

[133:33]

यह वही बात जी पर्दा उन्होंने पर्दा उठा

[133:37]

दिया था। दिखा दिया था।

[133:38]

हां यही हमने कहा था कि बहुमूल्य चीजों को

[133:41]

पर्दे में रख

[133:41]

पर्दे में रखिए। उन्होंने छोटे पर्दे पे

[133:43]

ला दिया था।

[133:44]

हां तो बस खुल गया मामला।

[133:45]

बड़ा पर्दा खुल गया।

[133:48]

देखिए पुराने जमाने में चोर को कितनी

[133:50]

मेहनत करनी पड़ती थी। पहले रेकी होती थी।

[133:52]

अब आदमी ऑफर कर रहा है भाई।

[133:53]

आदमी वहां पूरा भूगोल लिया हुआ है। यहां

[133:55]

सीसीटीवी कैमरा का मुंह इधर है तो जाके

[133:58]

पहले कैमरा का मुंह घुमा देना है। फिर

[134:00]

अच्छा जितना सोना दिख रहा है। इतनी कीमत

[134:02]

होगी उसकी। देखो स्मार्ट चोर थे वो।

[134:04]

उन्होंने देखा कि एक वीडियो में सब कुछ

[134:06]

दिखा रही है कि कहां से निकला कहां रखा

[134:07]

है। घर का पूरा माहौल दिख रहा है। कैमरे

[134:09]

दिख रहे हैं। बहुत

[134:10]

पहले आपको पान वाले से पूछना पड़ता था

[134:12]

इनके घर में कौन रहता है? भैया घर पे कब

[134:14]

कारपेंटर और इनसे पूछा जाता थे।

[134:17]

अरे इनके घर में है भी कुछ कि नहीं

[134:18]

नहीं है ये मेन बात ये है

[134:20]

लोग दिखाते नहीं थे और दिख गया तो कहते थे

[134:21]

रोल्ड गोल्ड है।

[134:23]

यार बहुत

[134:24]

हम लोग कहां से ले पाएंगे?

[134:25]

रोल्ड गोल्ड सुने हो तुम।

[134:26]

रोल्ड गोल्ड

[134:28]

नहीं देखिए बहुत दिनों बाद। थैंक यू बताओ।

[134:30]

ओल्ड ओल्ड गोल्ड

[134:31]

नहीं नहीं रोल्ड

[134:32]

रोल्ड गोल्ड रोल्ड गोल्ड इज गोल्ड। रोल्ड

[134:34]

गोल्ड इज नॉट गोल्ड।

[134:35]

यस।

[134:35]

रोल्ड

[134:36]

जिसको पानी चढ़ा हुआ बोलते हैं ना।

[134:38]

रोल्ड गोल्ड। अच्छा।

[134:39]

नकली सोने को रोल्ड गोल्ड। नकली सोने के

[134:41]

आभूषणों को रोल्ड गोल्ड बोलते थे। ये

[134:43]

रोल्ड गोल्ड है ये।

[134:44]

पानी चढ़ा।

[134:45]

तो कभी-कभी लोग असली भी पहन लेते थे।

[134:47]

पर उस समय दिखावे का युग नहीं था।

[134:49]

तो कभी-कभी लोग पूछते थे असली है। अरे

[134:51]

नहीं असली रोल्ड कहां से होगा? हम लोग

[134:52]

कहां से कर पाएंगे असली?

[134:53]

पंचवा है।

[134:54]

रोल्ड गोल्ड है।

[134:55]

रोल्ड गोल्ड है। बहुत दिनों बाद।

[134:56]

तो पहले जो है पर्दे में रखी जाती थी

[134:59]

चीजें। अगर दिख जाए तो इंकार कर दिया जाता

[135:01]

था उससे। हम

[135:02]

अब लोग खुलेआम इकरार कर रहे हैं

[135:04]

कि हमने जो हाथ में पहना है वह 2ाई किलो

[135:07]

का है।

[135:07]

हम

[135:08]

आओ ले लो तुम।

[135:09]

मुझे याद आया ओल्ड गोल्ड से

[135:11]

क्या?

[135:12]

मैं बालक था लेकिन वो जो आप कहते हैं ना

[135:15]

होश संभाल चुका था। 10 एक साल

[135:17]

11 साल

[135:18]

10 एक साल मैंने बोला आप चलिए।

[135:20]

हड़बड़ाते होश में आया था उस भाई।

[135:22]

तो तो उसमें क्या हुआ? ट्रेन में जा रहे

[135:26]

थे। अब नींद उसी समय टूट गई और रात हो गई

[135:29]

थी। होता क्या है कि ट्रेन में आदमी जब ना

[135:32]

बैग में अपनी कीमती चीज ले चल रहा हूं।

[135:34]

नींद नहीं आती है। तो उसके लगी रहती है

[135:36]

दुखदुखी। तो अच्छा एक तो यह है कि एक एक

[135:40]

दुखदुखी वाले ये होते हैं कि बैग मेरे पास

[135:42]

है कि नहीं। तो कंधे के पास रख के सोएंगे।

[135:44]

वो नॉर्मल है बहुत सारे लोग अपने

[135:46]

एक ये होते हैं कि बैग के अंदर वो चीज है

[135:48]

कि नहीं जो मैं लेके चला था। वो वाली ना

[135:50]

कि

[135:51]

बार-बार उसको चेक।

[135:52]

मैं बीच में एक बार वाशरूम गया था। तो

[135:54]

क्या हुआ पता नहीं। तो मैंने देखा कि भाई

[135:56]

साहब एक आंटी जी खोल के

[135:59]

निकाल के अपना हार देख रही हैं। बारी-बारी

[136:03]

से सोने का सब सामान। मुझे लगा यार ये

[136:06]

क्या कर रही है महिला? तो यार बड़ी

[136:07]

मूर्खता कर रही है कि मतलब प्लेन में होगा

[136:10]

आपने अगर रखा है गायब कैसे होगा। लेकिन वो

[136:13]

चार चीजें या तीन चीजें थी तो निकाल के

[136:15]

देखी कि नहीं। अब मैं बालक था तो मैंने तो

[136:17]

देख ही लिया। पर कोई चोर होता तो वो भी

[136:19]

देख।

[136:19]

बड़े होते तो क्या ही होता। फिर बालक थे

[136:22]

तो चोर भी थे। हो सकता है मन मचल जाता।

[136:24]

भाई चिनैती का हिम्मत तो बड़े होने पे भी

[136:26]

नहीं आती है।

[136:27]

अवसर अवसर इंसान को सब कुछ बना देता है।

[136:30]

बट इनके साथ सबसे अच्छा है इनको एक रील और

[136:32]

बनानी चाहिए कि सब चला गया।

[136:34]

अब बनाया ही होगा इन्होंने पर वीडियो देख

[136:36]

के नोट्स लिए होंगे चोरों ने हम

[136:39]

कि ये यार ये वाला हार गया पहना था।

[136:42]

ये वाला है ये वाला है क्या? ये वाला जो

[136:44]

दिख रहा है कुछ रह गया है।

[136:45]

हां

[136:46]

कुछ रह तो नहीं गया।

[136:47]

कई बार नहीं देखा चोर घर में घुसा और लिख

[136:50]

के लेटर कि घर में कुछ सामान रखा करो।

[136:52]

मतलब चोरों को दिक्कत होती है भाई मेहनत

[136:54]

करके घुसो कुछ नहीं इनको थैंक यू बोलना

[136:57]

बनता है

[136:57]

कि आपने चोरों को एक अच्छी राह दिखाई

[136:59]

एक समाज में ये भी था ना पहले कि धन

[137:03]

को क्योंकि समाज में आर्थिक विसंगतियां

[137:07]

होती हैं

[137:07]

हम

[137:08]

तो आदमी हमेशा कोशिश ये करता था

[137:10]

हम

[137:11]

कि मैं बराबर दिखूं

[137:12]

हम

[137:13]

हूं नहीं पर दिखूं कि मैं समाज से अलग

[137:18]

नहीं हूं। उनसे ज्यादा नहीं है मेरे पास।

[137:20]

बराबरी में खड़ा हूं मैं। मैं बराबर दिखूं

[137:23]

अब जो है आदमी बराबर नहीं दिखना चाहता।

[137:26]

ऐसा

[137:27]

हां उसने Honda City ले ली तो फिर मैं

[137:31]

डिफेंडर ले लूंगा।

[137:33]

उससे ऊपर उठना है।

[137:34]

मैं बराबर नहीं दिखना चाहता। उसका जितना

[137:36]

दिख रहा है

[137:37]

उससे ज्यादा मेरा दिखे।

[137:40]

जिसके पास पहले होता भी था वो अपना अगर

[137:44]

कुछ ज्यादा है तो वो नहीं दिखाता था। उतना

[137:46]

ही दिखाता था जितना दिख रहा है।

[137:47]

उसका उसका एक बिंब राजू श्रीवास्तव अपने

[137:53]

उसमें देते हैं कि गांव गांव लौट रहा है

[137:56]

ज्यादा तो बीच में तकियावकिया फुला के

[138:00]

ज्यादा दिखाना मत कि बहुत कमा के लौट रहा

[138:02]

है।

[138:03]

कि जो वो वाली तकिया नहीं होती है जो

[138:05]

फोल्डेबल उसमें उसको फुलाने वाले ये माना

[138:08]

जब क्योंकि ₹150 ₹200 की आती होगी। लेकिन

[138:10]

यह माना जाता है कि यह त ये ट्रेन के सफर

[138:14]

के लिए इसने अलग से एक तकिया माना जाता

[138:16]

था।

[138:17]

तो वो फुलाने वाली तकिया लिया है। इसका

[138:19]

मतलब ही हैज़ मनी

[138:20]

है कि नो राइट देयर किसी के पास नहीं है।

[138:24]

हम

[138:24]

तो ये होता था कि उसको ये ना लगे कि मैं

[138:27]

चिढ़ा रहा हूं।

[138:28]

हम

[138:28]

या मैं ऊंचा अब तो पहले धन अभी धन का

[138:32]

प्रदर्शन होता है।

[138:33]

बिल्कुल

[138:34]

ठीक है।

[138:34]

जितना है नहीं उससे ज्यादा।

[138:36]

ये सोचो मेरे इसी देश में इसी नोएडा शहर

[138:39]

में बड़े होर्डिंग लगते हैं जिसमें लिखा

[138:42]

होता है लग्जरी रेजिडेंसेस फ्लैट नहीं

[138:45]

लिखा होता यस

[138:46]

ठीक है स्टार्टिंग फ्रॉम फोर

[138:48]

और 11.6 करोड़ ऑनवर्ड्स

[138:51]

हम

[138:52]

तो आपने हर उस आदमी को बता दिया जिसके पास

[138:55]

रहने को घर नहीं है कि ये 11.6 करोड़

[138:59]

ऑनवर्ड्स का घर है। वो गुजरता तो वहीं से

[139:02]

है ना

[139:03]

बनाया भी उसी ने है।

[139:05]

गार्ड की नौकरी भी वही कर रहा है। डिलीवरी

[139:08]

देने भी वही जा रहा है। तो वह जब आपके

[139:11]

दरवाजे की घंटी बजाता है, उसको यह मालूम

[139:13]

है कि आप आपका यह घर 11.6 करोड़ से ज्यादा

[139:17]

का है तो घर में कितना होगा।

[139:19]

उसको क्या पता सब ईएमआई

[139:21]

और रही सही कसर आप अपनी धस से पूरी कर

[139:23]

देते हो।

[139:25]

आप जो इनकलिटी है इसको पर्दे में रहना था।

[139:32]

आपने पर्दा हटा दिया है।

[139:35]

आपको आप पूरी तरह से नग्न होकर

[139:38]

नुमाइश कर रहे हैं।

[139:39]

नुमाइश कर रहे हैं आप अपनी नंगई का जिसको

[139:44]

आप समझते हैं कि आप सफल हैं समाज में।

[139:50]

ये हमारे संस्कार नहीं थे।

[139:54]

ये संस्कार हमने आयातित किए हैं कि

[139:58]

मैं फ्लैट में नहीं रहता। आई लिव इन अ

[140:00]

रेजिडेंस। हम

[140:01]

नुमाइश की परंपरा अपने यहां नहीं रही।

[140:03]

मतलब वैसे वैसे

[140:04]

क्या बोलते हैं? शो ऑफ की परंपरा।

[140:06]

शो ऑफ की परंपरा।

[140:07]

बिकॉज़

[140:07]

क्योंकि नुमाइश मेले को भी बोलते हैं

[140:09]

इसलिए मैं

[140:09]

बिकॉज़ यू वांटेड टू बिलोंग

[140:11]

हम

[140:13]

अब जो है ना यू डू नॉट वांट यू वांट टू

[140:15]

बिलोंग टू सम अदर क्लास।

[140:17]

हम

[140:18]

जो आपको बिलोंग नहीं करते पर आप उसको

[140:21]

बिलोंग करना चाहते हो।

[140:23]

नहीं नहीं मैं ऊपर है। ऊपर है मैं।

[140:25]

ऊपर है मैं। हम

[140:26]

तो आप जिस जिस आप इनफैक्ट जिस सोसाइटी में

[140:29]

रहते हो यू शुड बिलोंग टू दैट सोसाइटी

[140:31]

11.6 करोड़ ही मान लिया

[140:34]

मान लिया कि वहां पे सब लोगों के घर 11.6

[140:37]

करोड़ के हैं।

[140:38]

आप जैसे सैकड़ों लोग वहां पे

[140:39]

हैं लेकिन वहां रहते हुए फिर वो वहां पर

[140:42]

डिफरेंशिएट करने के लिए

[140:43]

और चीजें ऐड करते हैं।

[140:44]

और चीजें ऐड करता है।

[140:46]

गाड़ी

[140:47]

हां कुछ ऐड कर लिया ऐसा जो कि बाकी के पास

[140:49]

नहीं है। दिस इज कॉल्ड लॉस ऑफ इनोसेंस एंड

[140:56]

मॉडेस्टी। मॉडेस्ट होना ना

[140:59]

मॉडेस्टी एक अच्छी चीज मानी जाती है।

[141:01]

ह्यूमिलिटी खत्म हो जाता है फिर।

[141:03]

तो आप फिर आपके बच्चे बड़े होते हैं उसी

[141:05]

कंपटीशन में। एंड धीरे-धीरे तीन जनरेशन

[141:08]

लगेगा। आपका समाज बिल्कुल अलग हो जाएगा।

[141:11]

ऑलरेडी हो चुका है। मैं इनफैक्ट

[141:16]

हम यह जो लग्जरी शब्द जहां-जहां आता है ना

[141:19]

मुझे थोड़ी सी कोपत होती है

[141:22]

कि थोड़ा और बढ़ ले आगे उसके बाद इस पे

[141:24]

चलें हम

[141:25]

हम

[141:27]

थोड़ा और अभी अभी बहुत गैप है

[141:30]

हम

[141:31]

थोड़ा कुछ लोगों को मिनिमम हो जाए

[141:33]

हम

[141:33]

तो फिर अपन मैक्सिमम वाले पे के बारे में

[141:36]

बात करेंगे

[141:37]

फोकस करेंगे

[141:37]

अभी आप ये लिखो ना कि अच्छे फ्लैट

[141:39]

हम

[141:40]

लग्जरी फ्लैट क्यों लिखते हो

[141:42]

11.6 करोड़ क्यों लिख रहे हो?

[141:44]

हां।

[141:45]

जिसको लेना होगा जाके ले लेगा, पूछ लेगा,

[141:47]

पता कर लेगा।

[141:48]

लेकिन ये लोग चालाक होते हैं। इनके

[141:50]

होर्डिंग हमेशा ऊपर लगे होते हैं।

[141:51]

हां हां।

[141:52]

नीचे लगे हम जैसे लोग पान खा के थूक के

[141:54]

चले जाएंगे। नहीं रहना यहां पे।

[141:55]

तो सब कुछ में ना दिस वर्ल्ड लग

[141:59]

अंदर है। एक सरबहारा

[142:01]

और क्यों छोड़ा रहो? लो।

[142:02]

चलो।

[142:03]

तो जस्ट द वर्ल्ड हमने एक बार तीन साल में

[142:04]

चर्चा। इनका इस वर्ड को ना

[142:07]

अभी हमारे देश में यह बिलोंग नहीं करता

[142:09]

है। लग्जरी नहीं क्योंकि बेसिक नहीं हुआ

[142:11]

है अभी

[142:12]

हम

[142:12]

अगर जिस दिन बेसिक सबका हो जाएगा ना तब ना

[142:15]

आप लग्जरी होंगे

[142:16]

हम

[142:16]

देन यू कैन से कि टू डिफरेंशिएट फ्रॉम यू

[142:19]

मैं देखो लग्जरियस जगह में रहता हूं मैं

[142:21]

लग्जरी वाला खाना खाता हूं आई ड्राइव इन अ

[142:24]

लग्जरी कार

[142:25]

हम

[142:25]

तब चलेगा बट बेसिक सबके पास होना चाहिए

[142:29]

जब बेसिक ही नहीं है

[142:31]

तो बहुतों के पास

[142:32]

किसको जला रहे

[142:33]

बहुतों के मतलब लार्ज मेजॉरिटी के पास

[142:35]

तब फिर आप ये लग्जरी वाला अगर रखो भी ना

[142:38]

तो लिखो को मत

[142:39]

हम

[142:41]

वो ठीक नहीं है।

[142:42]

अरे आप यहां लग्जरी छोड़िए बेसिक वाला है।

[142:44]

उस पे भी हम लिखते हैं प्रधानमंत्री आवास

[142:46]

योजना के तहत यह घर मिला है। वहां पे भी

[142:47]

बोर्ड लगा होता है जिसमें खर्च ₹60000 हुए

[142:51]

और मैं उस मैं उस कम्युनिस्ट ट्रैप पे

[142:53]

नहीं फंसा हूं कि सबको एक जैसा बराबर होना

[142:56]

चाहिए। कभी भी नहीं होगा। समाज में

[142:57]

इक्वलिटी होती नहीं है। कभी थी भी नहीं।

[142:59]

हमारे भी समाज में नहीं थी।

[143:01]

पर व्हाट डिफरशिएटेड अस संस्कार

[143:07]

कि नहीं हमारा संस्कार यह नहीं कहता है कि

[143:10]

हम इसको फ्लंट करें। है तो है इट्स अ

[143:14]

रियलिटी पर वो फ्लटिंग वाला जो कल्चर है

[143:18]

कि मेरे पास मैं अरबपति हूं तो मैं मेरी

[143:20]

शादी जो है वो 90 दिनों तक होगी

[143:24]

और देश के विभिन्न हिस्सों में होगी।

[143:27]

हल्दी उदयपुर में होगी तो संगीत जोधपुर

[143:30]

में होगा।

[143:32]

है ना?

[143:33]

जोधपुर से याद है।

[143:35]

फिर

[143:35]

हम लोग 4 तारीख को जयपुर जा रहे हैं।

[143:39]

4 जुलाई को हम लोग जयपुर में होंगे।

[143:41]

जयपुर जा नहीं रहे हैं। जयपुर में होंगे।

[143:43]

होंगे

[143:44]

4 जुलाई को।

[143:45]

टीटी स्टाफ से मिलेंगे।

[143:46]

घोषणा जो जगह की घोषणा आई थिंक टीटी स्टाफ

[143:48]

जयपुर राजस्थान चैप्टर में हो जाएगी।

[143:50]

हो जाएंगे। विजय महावर जी उसके

[143:51]

पर अभी समय है तो उसके और डिटेल्स साझा कर

[143:54]

दिए जाएंगे।

[143:55]

आगे किए जाएंगे। आई थिंक अगले एपिसोड में

[143:57]

पर हम लोग यह तय हो गया अगले एपिसोड में

[143:59]

अभी टाइम है

[144:00]

4 जुलाई को जयपुर में होंगे तो जयपुर

[144:02]

चैप्टर या जयपुर के आसपास के जिलों के जो

[144:04]

लोग हैं वो तैयार रह सकते हैं

[144:07]

और वो वहां पे कोई एपिसोड नहीं है वो मीट

[144:10]

अप है परफॉर्मेंस नहीं है

[144:11]

कोई मंचवंच टाइप का सीन नहीं है कोई एक

[144:13]

जगह

[144:14]

हां

[144:14]

अपना गलवहिया मिलन का समारोह है बस चाय पे

[144:17]

चुस्की

[144:18]

चाय पे चर्चा जो भी

[144:19]

चाय चुस्की

[144:20]

चाय चुस्की या चाय पे चर्चा जो भी कह ले

[144:23]

चाय

[144:24]

ये जो

[144:24]

आदमी चुस्की नहीं बोलता है।

[144:26]

हां भैया बिलकुल चसकी चसका लग गया है।

[144:30]

ये जो आपने बात की ना कि लोग फ्लॉन्ट करते

[144:32]

हैं। पहले फ्लॉनट करते थे उसका जवाब भी

[144:35]

होता है। अब जवाब भी नहीं है। जैसे

[144:37]

तुम्हारे पास डिफेंडर आ जाए। मेरे पास है

[144:39]

ही नहीं भाई उसके ऊपर की गाड़ी तो मैं

[144:40]

फ्लॉनट कैसे करूं? पहले था मेरे पास बंगला

[144:42]

है, पैसा है, गाड़ी है। तुम्हारे पास क्या

[144:44]

है? मेरे पास मां है। क्या बढ़िया डायलॉग

[144:47]

था वो। दीवार। डोंट बी अपोलजेटिक।

[144:51]

कि मेरे पास यह है। बट डोंट

[144:55]

ब्लंट जस्ट वो रिस्पेक्ट रखो कि नहीं यार

[144:58]

मैं क्या करूं मैं अब इतना आ गया है कि

[145:00]

मेरे पास है पर तुम्हारे पास जो है वो ठीक

[145:03]

है

[145:05]

तब आप जिस तरह से रौंदते हुए चलते हो ना

[145:08]

हम

[145:09]

और बदतमीजी करते हुए वो मत करो उससे आपका

[145:12]

इंप्रेशन जो है ना आपको लग रहा है कि आप

[145:14]

हीरो हैं पर भाई साहब ऑनेस्टली बता रहा

[145:17]

हूं जिस नजर से आपको लोग देख रहे हैं ना

[145:19]

शब्द मैं बोलना नहीं चाहता यहां पर तो डू

[145:22]

नॉट देयर विल नेवर बी इक्वलिटी

[145:24]

कभी भी लोग समान नहीं होते। दुनिया के

[145:27]

इतिहास में कभी भी समानता नहीं आई है।

[145:30]

आर्थिक समानता तो होती नहीं है। और

[145:32]

कंपटीशन का मतलब क्या है? कोई आगे बढ़ेगा

[145:34]

कोई पीछे रह जाएगा।

[145:36]

बिल्कुल।

[145:36]

पर जो आगे बढ़ गया है उसको इतना आगे नहीं

[145:41]

बढ़ जाना चाहिए कि पीछे वाले उसको दिखे ही

[145:43]

नहीं। और जब वो वापस लौटे तो हम

[145:48]

उनका वो क्या बोलते हैं उसको खैर ना पूछे।

[145:52]

दैट्स ऑल। जिंदगी की तलाश में

[145:56]

इस विषय पर आगे कभी बात और करेंगे क्योंकि

[146:00]

इसमें फिर यह प्रश्न आएगा कि क्या जरूरत

[146:04]

से अधिक धन का संचय जैसे खूब सारा धन हो

[146:07]

गया

[146:09]

उसमें ये चरित्र ही है क्या कि आप उसके

[146:13]

साथ गुरुरा जैसे ना पैसा जो है यार थोड़ा

[146:15]

अभिमान लाता ही है

[146:16]

जैसे खुदा जब हुस्न देता है तो नज़ाकत आ

[146:19]

ही जाती है

[146:19]

हां तो जब जैसे मतलब किसी को करोड़ों

[146:23]

हजारों करोड़ों रुपए मिल गए हैं। तो वो जब

[146:25]

सड़क पर चलेगा तो वो इस बात को कैसे भूल

[146:28]

सकता है कि वो हजारों करोड़ का मालिक है

[146:30]

और वो सड़क पर इस समय जितनी दूर तक देख

[146:33]

सकता है उसकी टक्कर में कोई नहीं है। और

[146:36]

जब यह बात वो कई साल तक हर रोज फील करता

[146:39]

है तो वो उसकी

[146:41]

उसकी नसों में

[146:44]

आ सकती है वो। एंड आई मतलब बहुत सारे लोग

[146:48]

मतलब मैं यह कह रहा हूं ग्राउंडेड रह जाते

[146:49]

हैं या ग्रेटफुल होते हैं।

[146:50]

वह बहुत रेयर चीज़ है।

[146:52]

रेयर है

[146:53]

लोग ये नहीं कि लोग नहीं है बट इट इज़ इट

[146:56]

इट उस तरफ होने के बाद हो सकता है कि ये

[146:59]

डिफिकल्ट भी होता हो। वो ह्यूमिलिटी को

[147:00]

मेंटेन रखना और आई डोंट नो

[147:03]

हां जरूर होता होगा।

[147:04]

हां जरूर होता होगा। अब अब जैसे आप अपना

[147:06]

प्राइवेट प्लेन अफोर्ड कर सकते हो

[147:09]

और आपको आवश्यकता भी लगती है उसकी

[147:11]

हम

[147:11]

तो आप खरीद लो

[147:13]

हम

[147:14]

कोई उसमें गलत नहीं है। आप अगर 20 करोड़

[147:17]

के फ्लैट में रह सकते हो तो रहो। मेरा है

[147:20]

कि जो पब्लिक प्रोजेक्शन होता है ना जो ऐड

[147:23]

आते हैं

[147:25]

जो सबको दिखता है अरे आपके पास 10 करोड़

[147:30]

की गाड़ी है

[147:32]

ये सबको थोड़ी ना मालूम है

[147:34]

बताइएगा नहीं लेकिन किसी को

[147:36]

हां वो सबको थोड़ी ना मालूम है आप एंजॉय

[147:38]

करो ना उसकी लग्जरी को पर जो साइकिल पे चल

[147:42]

रहा है उसको क्या मालूम ये 10 करोड़ की है

[147:44]

कि 1 करोड़ की है कि 5 लाख की है कि 10

[147:46]

लाख की है उसके लिए तो बहुत बड़ी चमचमाती

[147:48]

हुई गाड़ी है दैट्स इनफ

[147:50]

पर यहां तो वो वाले लोग हैं ना जो गाड़ी

[147:53]

पे का दाम जो है पेंट करवा दे बॉडी में

[147:55]

हम वो जो गाड़ी अगर छू जाए तो जो उतर के

[147:58]

लड़ने आते हैं तो 1ढ़ करोड़ दी गड्डी है ये

[148:01]

जितने डेंट लगे उतनी तेरी गाड़ी की वैल्यू

[148:03]

नहीं है

[148:04]

दैट इज द इशू

[148:07]

एनीवे

[148:07]

YouTube कमेंट्स

[148:08]

करेंगे सामान इस पे करेंगे हां

[148:10]

उसके साइड इफेक्ट्स पे

[148:12]

विकास सिंह ने लिखा है पिटीशन टू सेंड

[148:14]

खानचा फॉर अ फॉरेन ट्रिप इवन इफ इट इज़

[148:17]

थाईलैंड बाली सिंगापुर प्लीज लेट्स डू आवर

[148:20]

बिट मंगा ले चंदा आपके लिए

[148:24]

कह रहे हैं यार इनको भेज दो इनका पासपोर्ट

[148:26]

पे ठप्पा लगवाओ एक

[148:28]

हां यार कहीं जाना पड़ेगा

[148:29]

नहीं पासपोर्ट तो बनवा लो

[148:31]

बनवा लूंगा आप वादा कीजिए मुझे विदेश

[148:33]

घुमाएंगे एक बार

[148:34]

अरे चलो घुमा देंगे कोई दिक्कत नहीं है

[148:37]

लेट्स गो टू

[148:39]

भूटान

[148:40]

नेपाल चलेगा

[148:41]

पासपोर्ट फिर क्यों करवाना

[148:43]

अरे आधार से जहां जा सकते हो

[148:47]

नहीं यार जल्दी जल्दी मैं सोच रहा हूं

[148:48]

विदेश यात्रा कर लूं। ताऊ जाएंगे ताऊ के

[148:50]

साथ ही जाऊंगा।

[148:51]

अंकुर तिवारी कह रहे हैं फ्रॉम शबे फुरखत

[148:53]

का भूखा हूं।

[148:56]

टू शाम शाम से कांख में नमी सी है। जाएगा

[149:01]

जाएगा और नीचे जाएगा।

[149:02]

बहुत ही बढ़िया था। उन्होंने बोला था मेरे

[149:04]

बहुत ही खराब था वो।

[149:05]

लेकिन बहुत सही था। शाम से आंख में मैंने

[149:07]

कहा नमी सी है। आप बोले नहीं सामने कांक

[149:10]

से। सत्यम सिंह ने लिखा है नाइस

[149:13]

कॉम्बिनेशन विद लिबरल थॉट्स सरदार

[149:16]

कंजर्वेटिव एंड आर्टिकुलेट ताऊ एंड

[149:19]

न्यूट्रल खानचा एव्री काइंड ऑफ

[149:22]

पर्सपेक्टिव यू गेट इन वन प्लेस

[149:24]

थैंक यू

[149:26]

कंजर्वेटिव कह दिया आपको हम

[149:28]

हां मुझे लिबरल कह दिया

[149:30]

मैं तो साइलेंट हूं

[149:31]

अरे बहुत सारे लोग कह देते हैं यार वो

[149:33]

तरह-तरह की

[149:34]

आपको गालियां तो पड़ेंगी ही ना

[149:36]

आप जब जीवन में गालियां पड़ेंगी ही

[149:39]

लेकिन मैं ये कहता हूं सार्वजनिक किरण

[149:41]

कुमार को भी गालियां पड़ी थी।

[149:42]

कैसे?

[149:43]

पूरे जीवन को पड़ी थी तो उसको नहीं पड़ी।

[149:44]

क्या बात है?

[149:46]

अगला कमेंट है ब्लैंक पेपर नाम के यूजर

[149:49]

का। एक कटोरी पीली दाल की कीमत तुम क्या

[149:51]

जानो सरदार बाबू। प्रोटेस्ट में लाठी हमने

[149:54]

भी खाई है। पुरवैया चलती है तो पैर अब भी

[149:58]

हो जाते हैं बेकाबू।

[149:59]

ये बात तो है।

[150:00]

इसको कहते हैं इसको कहते थे भीतर घाई मार।

[150:03]

मेरे भी एड़ी के ठीक ऊपर।

[150:05]

लगातार

[150:06]

टेंडन में अभी भी दुखता है भाई।

[150:09]

अभी भी

[150:10]

जब पुरवाई चलती है

[150:12]

पुरवाई नहीं किसी किसी दिन थोड़ा ज्यादा

[150:13]

चल लो ना उस दिन बस पता चल जाता है

[150:16]

याद आ जाता है वो

[150:17]

आज की बात नहीं है भाई साहब 19

[150:19]

पूरा मंजर याद आता होगा

[150:20]

1991 की पड़ी है

[150:23]

अरे बाप रे

[150:24]

90 की 90 की पड़ी

[150:26]

26 36 साल हो गए

[150:28]

36 साल हो गए

[150:29]

दुर्गा बहन

[150:30]

सीआरपीएफ के डंडे जो होते हैं ना अलग लेवल

[150:32]

के होते

[150:33]

पहले वाले मजबूत भी होते थे ना

[150:34]

हां ये प्लास्टिक वाले बजते ज्यादा है

[150:36]

इसलिए बोलते हैं ना कि तुम लठ बजाओ बजते

[150:39]

हैं यह।

[150:39]

पहले लगते थे।

[150:41]

पहले लगते थे।

[150:42]

आय हाय क्या लगते थे भाई?

[150:44]

बांस का डंडा

[150:46]

तेल पिया हुआ।

[150:47]

उसके आगे एक लकड़ी का गोला

[150:50]

हां।

[150:50]

जो फिट होता था उसमें।

[150:52]

जी हां।

[150:52]

मुझे लकड़ी के गोले से लगा था साहब।

[150:54]

ताकि वो भारी पड़ेगा ना तब तंग ना साहब।

[150:58]

फिर आएगा तब मुझे मजा आएगा।

[150:59]

जिन लोगों को मैं लीड कर रहा था।

[151:01]

हम्म बाद में उनको

[151:02]

नहीं नहीं वो तो बच गए।

[151:03]

हां तो उनको आप जाके देख।

[151:05]

मैंने सबको बचा लिया था। मैं तो खुद फंस

[151:07]

गया था। मतलब वापसी

[151:09]

प्रोटेस्ट का विषय क्या था?

[151:10]

प्रोटेस्ट छात्रों का प्रोटेस्ट क्या होता

[151:12]

है?

[151:12]

नहीं फिर भी कुछ होता है ना कि

[151:14]

क्या तुम बोलते हो

[151:16]

युवा रक्त की घाटी

[151:18]

नहीं

[151:18]

युवा रक्त की गर्मी से बर्फ

[151:19]

हासिल वाले डायलॉग तुम्हारे तो गुड

[151:21]

एजुकेशन

[151:22]

यूनिवर्सिटी के खिलाफ प्रोटेस्ट नीट एंड

[151:24]

यूनिवर्सिटी

[151:25]

अपना भी एक गैंग था छोटा सा अपन उसको लीड

[151:27]

करते हुए शामिल हो गए थे

[151:29]

कोई वैचारिकी नहीं थी उसमें

[151:30]

नहीं थोड़ा सा तोड़फोड़ किया था

[151:33]

जवानी में सब कुछ

[151:34]

पुलिस को एक

[151:36]

टाइम पे अब छोड़ना पड़ता है।

[151:38]

हम

[151:38]

जब देखते हैं हाथ से बाहर निकल गया।

[151:40]

हां तो लाठी का उपयोग करना पड़ता है। अपन

[151:42]

भाग भी लिए थे। फिर जब शांत हो गया तो

[151:45]

स्टेशन की सुरक्षा के लिए पुलिस वाले खड़े

[151:47]

थे। रेलवे स्टेशन पे क्या हुआ कि एक बंदे

[151:49]

ने ना मालगाड़ी खड़ी थी। उसमें कुछ बोरा

[151:51]

रखा था। उसमें आग लगा दिया था। तो दैट इज

[151:53]

आर्सन हम

[151:54]

है ना?

[151:56]

हाथ कंगन

[151:57]

हां आर्सन हो गया था। तो फिर उसके बाद

[152:00]

मैंने कहा कि लेट्स गो एंड सी कि क्या

[152:04]

सिचुएशन है शांति व्यवस्था बहाल होने के

[152:06]

बाद तो मैं गया और वो पुलिस वाले जो हैं

[152:09]

वो डंडावंडा लेके सब खड़े थे अपना वर्दी

[152:12]

में और मैं वहीं पे जहां पे गेट था रेलवे

[152:15]

स्टेशन कंपाउंड का

[152:16]

हम

[152:17]

सड़क पर वहां पे चाय की दुकान थी जो मुझे

[152:19]

जानता था मैं उसे जानता था तो अपन वहां

[152:22]

बैठ गए हमने चाय उसको बोला कि चाय पिलाइए

[152:24]

अच्छा हां ये सुनी कहानी

[152:26]

फिर हमेशा का एक उसी ने रिवील फिर अचानक

[152:29]

एक हमला हुआ

[152:30]

आंखों से इशारा यो है यो है है ना नहीं

[152:33]

दूसरे दिन उसके कुमठी को पलट दिया गया था

[152:36]

आग लगा देना था

[152:36]

वो तो कुछ भी करते रहे

[152:39]

पर वो नहीं पर उन्होंने बच्चों ने जो

[152:42]

लड़के थे हमारे उन्होंने रात में जो है

[152:45]

सेका भी

[152:46]

अच्छा

[152:47]

सिकाई भी की

[152:48]

तो गाना आपको याद आता हूं ये जो ठंडी-ठंडी

[152:50]

औंधी है हवा कि कोई रोवे

[152:53]

भाई साहब कि कोई रौंदा हो

[152:58]

ttaf.in पर जो कमेंट्स आए हैं गबूचा ने

[153:01]

लिखा है अगर होटल में हॉस्पिटिटी होती है

[153:03]

तो हॉस्पिटल में होटिटी क्यों नहीं होती?

[153:06]

हम

[153:07]

वैलिड क्वेश्चन है यार। मतलब राघव चड्डा

[153:09]

को आप दोगे तो मुझे लगता है पार्लियामेंट

[153:10]

में पूछेंगे वो।

[153:11]

हॉस्पिटल में हॉस्पिटिटी वैसे होती है

[153:13]

आजकल।

[153:14]

हां आजकल होटल है।

[153:15]

हॉस्पिटल में होटिटी नहीं होती।

[153:17]

होटिटी नहीं होती। हॉस्पिटल में

[153:19]

हॉस्पिटिटी हो रही है। तो हॉस्पिटल में

[153:20]

होटिटी होनी चाहिए।

[153:22]

अजय यादव ने लिखा है एक सवाल क्या सपने

[153:25]

में आए बुरे और गंदे विचार के कारण खुद को

[153:27]

दोषी मानना चाहिए कि क्या यह मेरे अंदर

[153:30]

बैठे किसी बुरे अंश के बारे में बता रहा

[153:32]

है?

[153:32]

नहीं नहीं सपने तो सपने

[153:34]

सपने नहीं जागने जगे होने पर भी आपके मन

[153:37]

में आए हुए विचार आपके नहीं है। इसलिए

[153:40]

आपकी कोई रिस्पांसिबिलिटी नहीं बनती। आप

[153:43]

इसमें बिल्कुल पूरी तरह से

[153:46]

गिल्टी

[153:47]

निर्दोष हैं।

[153:48]

निर्दोष करार दिए जाते हो। हम

[153:50]

सपने क्या

[153:51]

सपने तो सपने होते हैं।

[153:52]

जागते हुए भी आपके मन में जो विचार आते

[153:54]

हैं वह आप लाते नहीं हो। उसके लिए आपकी

[153:57]

कोई जिम्मेदारी नहीं बनती। यात्री सिर्फ

[153:59]

अपने सामान के लिए जिम्मेदार होते हैं। हम

[154:01]

अपने सामान की सुरक्षा स्वयं करें।

[154:04]

वैभव दीक्षित तीन ताल लखनऊ के लाल ने लिखा

[154:08]

है ताऊ खांचा सरदार को सादर प्रणाम। तीन

[154:10]

ताल से मेरी भेंट उसके पहले एपिसोड से हो

[154:13]

गई थी। हालांकि जैसा कि आप लोग अक्सर कहते

[154:15]

हैं इंसान आलस्य का पुतला होता है। उसी

[154:17]

आलस्य के कारण मैंने काफी समय तक पुराने

[154:19]

एपिसोड नहीं सुने लेकिन पिछले तीन महीनों

[154:22]

से लगातार सुन रहा हूं। अब महसूस होता है

[154:24]

कि लोग सही कहते हैं। अपने से बड़ों की

[154:26]

बातें ध्यान से सुनो तो जीवन के बारे में

[154:28]

बहुत कुछ जानने को मिलता है। आपकी बातें

[154:30]

इतनी प्रासंगिक और आत्मीय होती हैं कि कभी

[154:32]

लगता है कि आप मुझसे दूर हैं ही नहीं। ऐसा

[154:35]

महसूस होता है जैसे ताऊ मुझे समझा रहे

[154:36]

हैं। खानशाह हंसा रहे हैं। सरदार माहौल को

[154:39]

संतुलित बनाए हुए हैं। जब भी जीवन में कोई

[154:41]

समस्या आती है तो मन में ख्याल आता है इस

[154:43]

पर ताऊ की क्या राय होती? तीन ताल ने मेरे

[154:46]

जीवन में मुस्कुराहट, समझदारी और अपनापन

[154:48]

ये तीनों रंग और गहरे किए हैं। इसके लिए

[154:50]

आपका आभार। सवाल यह है कि देश में बढ़ती

[154:53]

सांप्रदायिकता को कम करने या खत्म करने का

[154:55]

सबसे प्रभावी तरीका क्या हो सकता है? वैभव

[154:59]

दीक्षित

[155:00]

यह तरीका प्रभावी तरीका

[155:02]

हां। बहुत मुश्किल सवाल है। बहुत सारे

[155:05]

तरीके अपनाए जा रहे हैं। अगर संप्रदाय

[155:08]

खत्म हो जाए तो सांप्रदायिकता खत्म हो

[155:10]

जाएगी। लेकिन संप्रदाय खत्म नहीं होंगे।

[155:12]

क्योंकि संप्रदाय की अपनी उपयोगिता है।

[155:15]

राजनीतिक

[155:17]

राजनीति अगर विश्वास से,

[155:21]

फेथ से जिसको धर्म कहते हैं लोग, मजहब से

[155:27]

दूर हो जाए तो खत्म हो जाएगी। और लोग अगर

[155:31]

धार्मिक हो जाए तो खत्म हो जाएगी। लेकिन

[155:35]

लोग धार्मिक नहीं है। लोग पंथिक हो गए

[155:38]

हैं।

[155:40]

लोग मजहबी हो गए। तो सब धर्म जो है वो भूल

[155:43]

गए।

[155:44]

पर ये सब बातें सुनने में बहुत दार्शनिक

[155:47]

वाली लगेंगी। हम

[155:48]

धरातल पर यथार्थ के धरातल पर जो बहुत उबड़

[155:52]

खाबड़ है समतल नहीं है

[155:56]

यह

[155:59]

हर व्यक्ति के करने से होगा

[156:02]

क्योंकि समूह ने ही तो हमको यह थमाया है

[156:06]

और समूह की ताकत समूह की शक्ति जो है वो

[156:12]

उसके आगे सब सर झुकाते हैं। राजनीतिक दल

[156:15]

भी झुकाते हैं। अगर हम यह मान लें कि हम

[156:18]

अकेले हैं, एक हैं और संविधान तो सिर्फ

[156:20]

हमें रिकॉग्नाइज करता है ना। नागरिक को

[156:23]

रिकॉग्नाइज करता है।

[156:26]

तो फिर जा सकता है। पर यह सब सपने हैं।

[156:28]

सपने तो

[156:29]

जाएगा नहीं। इसलिए आपको नेविगेट करना

[156:32]

पड़ता है और कभी नीचे, कभी ऊपर, कभी कम,

[156:36]

कभी ज्यादा।

[156:39]

बैलेंस करके निकालना पड़ेगा क्योंकि साथ

[156:41]

रहना। जैसे हम एक चीज एक शब्द बार-बार

[156:43]

करते हैं। आलोचना के संदर्भ में बहुत सारे

[156:45]

पॉलिटिकल साइंटिस्ट ने लिखा है यार

[156:47]

आइडेंटिटी पॉलिटिक्स पे जो है काबू होना

[156:49]

चाहिए। लेकिन दाऊद देखिए पूरी दुनिया में

[156:54]

कोई भी ऐसा देश है जिसने ये सफल प्रयोग

[156:57]

करके दिखाया हो कि हमारे यहां लोग समाज

[157:01]

द्वारा दी गई आइडेंटिटी या जो ग्रुप

[157:03]

आइडेंटिटी है उसे आइडेंटिफाई नहीं किए

[157:05]

जाते। अमेरिका में देख लीजिए

[157:07]

अमेरिका में इंडिविजुअलिज्म बहुत ज्यादा

[157:09]

है। हां

[157:09]

इसलिए वहां पे आइडेंटिटी पॉलिटिक्स कम

[157:11]

होती थी। हम

[157:12]

लेकिन जब वो होता है ना कि अगर आप उनसे

[157:18]

धर्म ले लोगे तो कोई और बहाना ढूंढ लेगा

[157:20]

वो

[157:21]

हम

[157:21]

लड़ने का वो नई आइडेंटिटीज खोज लेता है और

[157:24]

जब सारे दुनिया में पॉलिटिकल एनालिसिस जब

[157:26]

लिखे जाते हैं कहीं भी इलेक्शंस हो वो

[157:30]

अधिकतर

[157:31]

इसी बात का एनालिसिस कर रहे होते हैं कि

[157:34]

किस आइडेंटिटी का ग्रुप इस समय क्या सोच

[157:37]

रहा है।

[157:38]

सो इट इज ऑलमोस्ट इट लुक्स इंपॉसिबल कि हम

[157:41]

आइडेंटिटी पॉलिटिक्स को खत्म या रिड्यूस

[157:44]

कर सकते हैं। लोग नई आइडेंटिटीज क्रिएट कर

[157:46]

लेंगे और उन उनका झंडा उठा ये झंडा निकाल

[157:49]

देंगे ये गिरा देंगे और एक नया झंडा उठा

[157:51]

लेंगे कि दिस इज व्हाट वी बिलीव इन फिर वो

[157:54]

एक नई आइडेंटिटी बन जाएगी

[157:55]

और ये भी है ना देखो

[157:56]

ज्यादा इसमें एक चीज क्या काम आ सकती है

[157:59]

जैसे

[158:01]

हम ऐसा देखते सोचते हैं किताबों को एक तरफ

[158:04]

करिए किताबें क्या कहती हैं किसकी पर

[158:07]

गेटिंग टू नो ईच अदर गेटिंग टू नो पीपल

[158:10]

फ्रॉम डिफरेंट साइड्स जिनको आप मानते हैं

[158:14]

कि वह दूसरी ओर हैं या वो अन्य हैं और हम

[158:17]

अन्य हैं।

[158:20]

ये खत्म नहीं कर सकता पर क्या किसी भी तरह

[158:24]

की सांप्रदायिक अप्रोच को कम तो कर सकता

[158:26]

है कि आप एटलीस्ट जान गए उनके परिवार को

[158:29]

उनके घरों में रहने वाले लोगों को उनके

[158:32]

मतलब ऑफ कोर्स आप

[158:35]

किसी भी आइडेंटिटी का कोई व्यक्ति हो तो

[158:37]

उसमें अच्छा बुरा दोनों हो सकते हैं। तो

[158:39]

आप चुन करके अपने दोस्त बनाते हैं ना कि

[158:41]

आप यार ये आदमी मुझे ठीक नहीं लगा ये मेरा

[158:43]

दोस्त नहीं है। बट कोई आदमी ठीक लगा तो वो

[158:46]

दोस्त हो सकता है। फिर आइडेंटिटी आड़े

[158:48]

नहीं आनी चाहिए। तो इस तरह से आप अगर

[158:51]

मल्टीपल आइडेंटिटीज के दोस्त बना पाएं तो

[158:55]

आप उनके

[158:57]

साथ एलिनेशन नहीं होता हुआ

[159:01]

देखेंगे।

[159:02]

देखो फियर ऑफ़ द अननोन

[159:03]

अननोन वाली जो बात है हां

[159:04]

तो जब तक हम गेटों में रहते हैं

[159:07]

हां

[159:07]

अलग-अलग रहते हैं तो आप एक दूसरे को

[159:10]

जानेंगे नहीं। हां

[159:11]

जैसे जूस के बारे में देखिए जो कार्टून

[159:13]

बनाए गए कि उनकी नाक बड़ी होती है। मतलब

[159:16]

जो भी सदियों तक उनको इतना विलेनाइज किया

[159:19]

गया कि आज तक उसकी इमेज सुधर नहीं पाई है।

[159:22]

अ एक अब जो है क्रिश्चियंस भी अभी भी जूस

[159:26]

को हेट करते हैं।

[159:27]

थोड़ा एक एनलाइटनमेंट हुआ तो उन्होंने कहा

[159:29]

कि ठीक है चलो रहने दो। पर पिछली सेंचुरी

[159:33]

तक तो जूस ऐसे ही रहते थे।

[159:35]

हम

[159:36]

मतलब वर्ल्ड वॉर टू में क्या हुआ? हम

[159:39]

यूरोप में क्या हुआ? जूस को आज भी बहुत

[159:42]

मुश्किलों का सामना है। पूरे इस्लामिक

[159:45]

वर्ल्ड में उनको एक दुश्मन की तरह ही देखा

[159:47]

जाता है।

[159:48]

और वो पूरे इस्लामिक वर्ल्ड को एक दुश्मन

[159:51]

की तरह देखते हैं। सांप्रदायिकता

[159:54]

जाएगी नहीं क्योंकि सांप्रदायिकता है तभी

[159:56]

तो आप धर्मनिरपेक्षता और

[160:00]

है।

[160:01]

नहीं तो नहीं होगी धर्मनिरपेक्षता। अंधेरा

[160:03]

है तो उजाला है।

[160:05]

सच है तो झूठ है।

[160:06]

भूत है तो भगवान

[160:07]

तो वो एक जो है स पक्ष है पर उसका होना

[160:11]

वैसे ही जरूरी है। दूसरी बात है कि आप ना

[160:14]

एक एम्पैथी से नहीं देखते हो क्योंकि

[160:16]

जिसके साथ आप रहते नहीं उसके साथ एमैथी

[160:17]

होती नहीं है।

[160:19]

हम तो हमेशा अदरिंग में ही लगे रहते हैं

[160:22]

ना कि मैं वो नहीं हूं वो मैं नहीं। तो जब

[160:25]

आप एक साथ थोड़ा टाइम भी बिताते हो

[160:28]

हम

[160:30]

तो देन यू रियलाइज कि नहीं बाकी सब कुछ

[160:33]

ठीक है। देन यू यू विल हैव कि नहीं नहीं

[160:36]

उसका तो उसके बिलीफ अलग है। मेरे बिलीफ

[160:38]

अलग हैं। है ना? मैं जिन चीजों में

[160:41]

विश्वास करता हूं करता हूं वो नहीं करता।

[160:43]

वो जिन चीजों में विश्वास करता मैं नहीं

[160:44]

करता।

[160:46]

वो तो फाइन है। वो तो आपका फेवरेट एक्टर

[160:48]

रणबीर कपूर है। दूसरे का रणवीर सिंह है।

[160:52]

हम

[160:53]

बट यू नेविगेट ना

[160:55]

टुगेदर वो है। पर

[161:00]

मैं

[161:01]

सांप्रदायिकता अगर बढ़ती है तो मुझे

[161:04]

धर्मनिरपेक्षता और पंथनिरपेक्षता के भी

[161:07]

आसार दिखते हैं कि उसके भी बढ़ने के चांस

[161:09]

हैं।

[161:11]

बैड स्पीकर की चिट्ठी बैड स्पीकर ताऊ को

[161:15]

पांव छुई खानचा को हग कुलदीप को हाईफाई जय

[161:18]

हो जय हो जय हो मैं बैड स्पीकर दिल्ली से

[161:21]

आपका वही पुराना नियमित श्रोता जो आप सब

[161:23]

से दो-तीन बार मिलकर और फोटो खिंचवाकर

[161:25]

सबूत भी जमा कर चुका है ताकि आगे चलकर कोई

[161:28]

मुकर ना सके। कुलदीप मैं बिल्कुल तुम्हारी

[161:31]

ही उम्र का हूं। आज बात मेरी नहीं मेरी 3

[161:34]

साल की बेटी पीहू की है जिसे मैंने बचपन

[161:36]

से ही घुट्टी के साथ आप तीनों की आवाजें

[161:39]

भी पिलाई हैं। गाड़ी में घर पर सफर में

[161:42]

जहां बच्चे बेबी शार्क या नर्सरी रम सुनते

[161:45]

हैं वहां पीहू ने ताऊ, कुलदीप और खानचा के

[161:48]

विश्लेषण, किस्से और ठाके सुने हैं। अब

[161:50]

उसे आप लोगों की बातें कितनी समझ आती है

[161:52]

यह तो भगवान जाने। लेकिन उसके बाल मन पर

[161:54]

आप तीनों के चेहरे ऐसे छपे हैं जैसे राशन

[161:57]

कार्ड पर सरकारी ठप्पा। वाह

[161:59]

हाल यह है कि घर का माहौल पूरी तरह बदल

[162:01]

चुका है। लल्ल एंड टॉपर कुलदीप की एंकरिंग

[162:03]

दिख जाए तो पीहू चिल्लाती है। डैडी देखो

[162:06]

आपके दोस्त आ गए। टीवी पर ताऊ किसी गंभीर

[162:09]

विषय पर देश को दिशा दिखा रहे हैं तो

[162:11]

तुरंत घोषणा करती है। डैडी ये तो आपके

[162:13]

दोस्त हैं। और अगर कहीं तीन ताल का पोस्टर

[162:15]

रील या क्लिप दिख जाए तो उसके अंतर उसके

[162:18]

भीतर का पूरा तीन तालिया जाग जाता है। फिर

[162:20]

पूरे घर को सिर पर उठाकर एक ही बात

[162:22]

दोहराती है कि डैडी आपके दोस्त आ गए। उसने

[162:25]

अपने मन में यह बात पत्थर की लकीर की तरह

[162:28]

बिठा ली है कि आप तीनों मेरे पक्के दोस्त

[162:30]

हो जो हर हफ्ते मेरे साथ बैठकर चाय पानी

[162:32]

पीते हैं। आखिर बाप की दोस्ती पर बच्चे का

[162:35]

पूरा हक होता है। अब समस्या यह है कि

[162:38]

बच्ची जिद पर अड़ गई है। उसका सीधा सवाल

[162:41]

है कि अगर यह डैडी के दोस्त हैं तो यह घर

[162:43]

क्यों नहीं आते?

[162:44]

और अगर घर नहीं आते तो मुझे इनसे मिलवाओ।

[162:46]

अब मैं 3 साल की बच्ची को कैसे समझाऊं कि

[162:49]

बेटा इनसे मिलने के लिए नोएडा ऑफिस का

[162:51]

अपॉइंटमेंट लेना पड़ता है जिसकी चाबी अतुल

[162:53]

जी के पास है।

[162:55]

इसलिए यह छोटी सी गुहार लगा रहा हूं। अगर

[162:57]

किसी दिन आप तीनों नोएडा ऑफिस में एक साथ

[163:00]

एक ही ग्रह नक्षत्र और एक ही टाइम जोन में

[163:02]

मौजूद हो और मूड थोड़ा फुर्सतिया हो तो

[163:05]

कृपया एक संकेत ड्रॉप कर दीजिए। मैं पीहू

[163:08]

को लेकर हाजिर हो जाऊंगा। कम से कम उसका

[163:09]

भरोसा तो नहीं टूटेगा कि उसके डैडी के

[163:12]

दोस्त सचमुच बड़े-बड़े स्टूडियो में बैठकर

[163:14]

न्यूज़ चलाते हैं और केवल मोबाइल की

[163:16]

स्क्रीन में कैद काल्पनिक पात्र नहीं है।

[163:19]

तीन ताल ने मेरी दुनिया में तो रौनक भरी

[163:21]

ही थी लेकिन अब मेरी बिटिया के बचपन का भी

[163:23]

यह खूबसूरत हिस्सा बन गया है। आप तीनों

[163:25]

मुरधन्यों को स्नेह ताऊ को पांव छुई खंचा

[163:28]

को हक कुलदीप को हाईफाई नोएडा बुलाने की

[163:30]

प्रतीक्षा में आपका बैड स्पीकर।

[163:33]

बहुत ही प्यारी चिट्ठी यार। पीहू को ढेर

[163:36]

सारा प्यार

[163:36]

और अतुल के नियंत्रण में है सब कुछ

[163:38]

बिल्कुल नहीं आप कुछ मत करिए बैड स्पीकर

[163:42]

भाई आप एक ईमेल कर दीजिए उस radio ast.com

[163:47]

पर आप जैसे आपकी चिट्ठी मिल गई है तो चाहे

[163:49]

तो अतुल भी अपनी तरफ से खोज के इनको ईमेल

[163:51]

कर लें या आप एक ताजा ईमेल कर दीजिए

[163:54]

हम

[163:54]

radio

[163:55]

rडियो पर अतुल तक वो सीधे ईमेल पहुंचते

[163:58]

हैं और अतुल उसमें आपसे संपर्क साध लेंगे

[164:01]

और एक तारीख वो समय आपको बता बता देंगे कि

[164:05]

आप जब नोएडा ऑफिस आ सकते हैं तो जरूर पीहू

[164:08]

से मिलवाइए हमें।

[164:09]

बिल्कुल बिल्कुल बहुत खुशी होगी।

[164:10]

पीहू बहुत सुंदर नाम है।

[164:12]

बहुत प्यारा नाम है। पीहू

[164:13]

पीहू बोले

[164:14]

तोते को कहते हैं ना

[164:16]

पीहू नहीं

[164:17]

तो पीहू है तो पक्षी ही

[164:20]

पक्षी है।

[164:21]

पीहू पक्षी की आवाज को शायद कुछ बोलते

[164:23]

हैं।

[164:24]

नहीं कुछ ऐसा है।

[164:25]

आई थिंक पीहू एक पक्षी है पर तोता नहीं

[164:28]

है।

[164:28]

अच्छा

[164:31]

मतलब वही देख रहा था मैं। वैसे कुछ

[164:33]

संदर्भों में कहा गया है कि मोरनी छोटी

[164:36]

वाली

[164:37]

पता नहीं मीठी मीठी ध्वनि को वैसे पीहू

[164:39]

बोलते हैं।

[164:40]

वो आवाज मुझे लगता है कि उसको बोलते हैं

[164:42]

किसी को।

[164:43]

अगली चिट्ठी है आतििर अरशद की।

[164:45]

नमस्कार कुलदीप भाई खान और ताऊ बड़े दिनों

[164:48]

बाद चिट्ठी लिखने का मौका मिला। बीते एक

[164:50]

एपिसोड में हाजीपुर वैशाली और केले के

[164:52]

स्टैचू की चर्चा सुनकर खुद को चिट्ठी

[164:54]

लिखने से रोक नहीं पाया। लॉ कॉलेज से पास

[164:56]

आउट होने के बाद मैं अब वकील बन चुका हूं

[164:58]

और वकालत शुरू कर दी है। इसमें मेरा

[165:01]

इंटरेस्ट तो था ही साथ ही कई दशकों का

[165:03]

खानदानी दबाव भी था। दिल्ली में पढ़े हुए

[165:06]

अंग्रेजी मूठकोट के मारे जब हम बिहार के

[165:08]

वैशाली जिला एवं सत्र न्यायालय पहुंचे तो

[165:11]

नए-नए शब्दों से हमारा परिचय हुआ। जैसे

[165:13]

कुटुंब न्यायालय तदर्थ तामिला संपुष्ट

[165:17]

मौसमात गैर मजरूआ आम गैर मजरूआ खास

[165:21]

बास्केटत पर्चा मीम जानब आदि इसी तरह

[165:25]

लोगों के नाम भी कम दिलचस्प नहीं मिले

[165:27]

उनमें सबसे विचित्र नाम मुझे लगे बोलत राय

[165:30]

बोतल राय और झुरझुरी राय सुप्रीम कोर्ट की

[165:34]

लाइव स्ट्रीम में योर लॉर्डशिप सुनने से

[165:36]

लेकर जमीनी अदालतों में जी हुजूर तक सब

[165:38]

कुछ सुन चुका हूं बहुत से वकील साहब तो

[165:40]

याचिका में श्रीमान का इस्तेमाल करते हैं।

[165:42]

चाहे न्यायाधीश महिला ही क्यों ना हो।

[165:45]

कोर्ट में बहस करने के अजीबो अजीब तरीके

[165:48]

भी रोज देखने को मिलते हैं। एक बार एक

[165:49]

वकील साहब ने मेरे सामने जज साहब से कहा

[165:52]

हुजूर रोक नहीं लगा तो दिक्कत हो जाएगा।

[165:55]

धाएधाएं जमीन बेचे जा रहा है। क्लच में ले

[165:58]

लिया है सबको।

[165:59]

ये अच्छा है। क्लच में ले लिया।

[166:01]

ये गांव में बोला जाता है। क्लच में

[166:03]

क्लच में ले लिया है सबको।

[166:05]

बहुत बढ़िया।

[166:06]

निषेधाज्ञा इन जंक्शन के पक्ष में इससे

[166:08]

बेहतर बहस मैंने आज तक नहीं सुनी।

[166:12]

अंत में वैशाली की याद में रामधारी सिंह

[166:14]

दिनकर जी की पंक्तियां वैशाली जन का

[166:16]

प्रतिपालक गण का आदि विधाता जिसे ढूंढता

[166:20]

देश आज उस प्रजातंत्र की माता जय हो जय हो

[166:23]

जय हो आपका तीन तालिया आतििर अरशद

[166:25]

भूतपूर्व क्रांतिकारी

[166:27]

क्लच में ले लिए गुरु क्लच

[166:29]

और न्यायालय के जो गैर मजरवा आम और गैर

[166:32]

मजरवा खास

[166:33]

इस तरह की जो भाषा बाय द वे वो जो लिखा

[166:35]

जाता है ना अभी भी

[166:36]

वो पुराना ही कल्चर चला रहा है

[166:38]

ऑलमोस्ट फारसी में लिखते हैं देवनागरी में

[166:40]

हम हां

[166:41]

देखो जो मुहर्रिर होते हैं हम

[166:44]

वो जब लिखते हैं तो उनकी जो भाषा होती है

[166:46]

वो बिल्कुल

[166:47]

जज भी लेते हैं इनको इतने साल की सजा

[166:48]

मुकर्रर की गई है

[166:50]

मेरे भाई साहब

[166:51]

और ज़ेर जैसे है ना

[166:53]

मेरे ज़ेररे बहस

[166:54]

हम

[166:55]

ये सब मैं बहस के बाहर कहीं नहीं सुनता

[166:57]

हूं या उर्दू चैनलों पे सुन लिया कभी-कभी

[166:59]

तो

[166:59]

लोग अभी कहते हैं जिरे बहस बहुत हुई

[167:01]

हम तो जिरा अलग है

[167:03]

हां

[167:03]

उसमें सब तो यही हुआ ना फिर ना ज़ेर ज़ेर

[167:06]

ज़बर पेश

[167:08]

जैसे आप मेरे ऐसे ना करें अली कौन से ऐसे

[167:11]

जिम चेक है? यहां तक क्या थे तुम? हमारी

[167:14]

भी पे अटक जाते हैं। ये तो जिम पे जाते ही

[167:16]

इसको लगता है।

[167:19]

बहुत बढ़िया था यार। क्लच में ले लिए तुम।

[167:21]

अगली चिट्ठी है बंजारा डोडा की।

[167:23]

क्लच में ले लिए तुमको बोलते थे कि

[167:25]

कंट्रोल में।

[167:26]

हां वो तो है

[167:26]

और डराते गियर बदल देंगे तुम्हारा।

[167:28]

हम

[167:29]

ये हड़काना होता है तुम्हारा। गियर बदल

[167:30]

देंगे।

[167:31]

ले लिया है।

[167:32]

गाड़ी को भी धमकाने में ले आए लोग।

[167:34]

बंजारा डोडा की चिट्ठी। ताऊ खानचा और

[167:37]

सरदार को जय राम जी की देखो एसो है कि

[167:39]

हमने सीजन वन से शुरू करके सीजन टू तक सब

[167:42]

निपटाए दे गए हैं। एपिसोड 138 में किस्से

[167:45]

सुने ब्रश के तो यूरोमाओ किस्सा दांत घिसन

[167:49]

वाले टूथब्रश का। बात अब ऐसे कुछ दिन पहले

[167:52]

की है जब हम किसी दूसरे शहर में एक पीजी

[167:54]

में रह थे। ऑफिस के पास होइबे के कारण

[167:57]

हमने ले लो एक शेयरिंग में पीजी एक 22 23

[168:00]

साल के नए लौंडे के साथ। तो भैया जो हम

[168:03]

रूममेट हतो उनके जाने के समस्या हति साफ

[168:06]

सफाई से भैया ना तो ट्रिमर चलाए के बाद

[168:09]

वाश बेसिन साफ करत हतो और ना ही मल त्याग

[168:12]

के बाद ससुर क्लश करत हत बाजी दायन हमने

[168:15]

कही होसे कि लल्लन नेक साफ साफ सफाई में

[168:17]

क्या समस्या है तो हमेशा कहने लगे भैया

[168:20]

करो तो हतो हमने तीन चार दाइन समझाओ ओके

[168:24]

लेकिन ससुर को नाती मानो नहीं फिर कहा तो

[168:26]

एक दिन हम नहान जा रहते तो देखो फिर इनने

[168:30]

फ्लश नहीं करो है तो हमारी सूझी तरकीब

[168:32]

हमने उठाओ टूथरस जो धरो तो भीतर हमने पहले

[168:37]

साफ करो वास बेसिन फिर साफ करो कमोड और

[168:40]

फिर हमने करो हम प्लस एक बेहतरीन गर्जना

[168:44]

के संग कि प्लस फॉर वन लास्ट टाइम अब जब

[168:48]

हम होके देखत हते शनिवार इतवार को बरस करत

[168:52]

तो लल्ला का बताएं जो खुशी होत हति का

[168:54]

बताएं

[168:55]

बहुत ही गंदा

[168:56]

फिलहाल के लाने यही हम किस्सो अगली द बताई

[168:59]

है कोई और किस्सो रिगार्ड्स बंजारा डोडा

[169:02]

डोडा इससे भयानक बदला मैंने नहीं देखा।

[169:06]

ये सही है यार।

[169:08]

इसका नाम धोधा होना चाहिए कि धो ढाला।

[169:10]

अब आज के बाद मैं डोडा बर्फी नहीं खा

[169:12]

पाऊंगा।

[169:12]

अरे मैं भ्रष्ट खैर

[169:15]

बदला अच्छा था।

[169:16]

हम मुझे पसंद आया। कई होटलों में आपकी

[169:20]

अनुपस्थिति में हम

[169:23]

जब आपके कमरे को सेट किया जाता है

[169:25]

बहुत सारी चीजें इस्तेमाल कर ली जाती है।

[169:26]

तो आपका बेसिन वेसिन बड़ा चकाचक होता है

[169:28]

जब आप जाते हैं।

[169:29]

हम

[169:30]

देखिए

[169:31]

वही एक ग्लास में आपका ब्रश पड़ा होता है।

[169:34]

म कह रहे हैं

[169:36]

कह नहीं आप मत डालिए दिमाग में। मुझे घिन

[169:38]

आने लगता है।

[169:39]

आपको पता है फिर मैं अपना ब्रश जेब में

[169:41]

लेके घूमने लगूं। मैं जहां जा रहा हूं मैं

[169:43]

नहीं छोडूंगा। लेकिन ये मैंने देखा है

[169:45]

होटलों में भी कई बार आपकी चीजें बड़े

[169:47]

होटल में नहीं करते।

[169:49]

किसे आपकी चीजें इस्तेमाल की गई परफ्यूम

[169:52]

यूज़ कर लिया गया है।

[169:53]

हां ये सब तो

[169:54]

ये सब

[169:54]

एक बार ऐसे हुआ था कि मैंने देखा था बड़ा

[169:57]

ही होटल था वो और मैं रूम लॉक था तो मैं

[170:02]

शायद नीचे कहीं गया था। तो अंदर एक महिला

[170:05]

ऑफिस उनके होटल स्टाफ रूम क्लीनिंग सर्विस

[170:08]

से तो वो

[170:11]

थी और मैंने दरवाजा खोला तो

[170:14]

घबरा गई।

[170:15]

नहीं नहीं तो चिप्स बचे हुए थे।

[170:18]

खा रही थी वो आराम से। उसमें तो अच्छी बात

[170:20]

है। कोई बात वैसी नहीं है। लेकिन पर ये जब

[170:24]

चिप्स खाने की घटना हो सकती है तो फिर

[170:26]

परफ्यूम लगाने की भी हो ही सकती है। ठीक

[170:28]

है।

[170:29]

इट इज नॉट अबाउट चिप्स।

[170:31]

हम

[170:32]

इट्स अबाउट द लाइन।

[170:34]

सोबर शराबी का पहला अध्याय।

[170:36]

अगली चीज

[170:37]

भाई साहब नाम हो तो ऐसा ही होगा।

[170:38]

सोबर शराबी। तीन ताल के थ्री मॉस्किटियर्स

[170:41]

को मेरा साष्टांग दंडवत। अब आप लोग

[170:43]

सोचेंगे भला मस्क मॉस्किटियर्स को प्रणाम

[170:45]

क्यों? देखिए ताऊ और खानचा अगर इतना लॉजिक

[170:48]

मेरे पास होता तो मैं आज खुश थोड़ी रहता।

[170:50]

बात जनवरी 2022 की है। कनाडा की हाड़

[170:54]

कपाने वाले स्नोस्टॉर्म का दौर था और मुझे

[170:58]

भारत छोड़े हुए मुश्किल से चार-प महीने

[171:00]

हुए थे। अब नियम तो आप जानते हैं। सूखा

[171:02]

कपड़ा जब पानी में जाता है तो कुछ ज्यादा

[171:04]

ही पानी सोख लेता है। मेरे साथ भी ऐसा ही

[171:06]

ओवर अब्सॉर्प्शन हुआ। सिक्योरिटी की नौकरी

[171:09]

निपटाकर रात 11:00 बजे घर लौटा। लेकिन

[171:11]

हमारे जो बुट लेगर भाई थे गुजरात में

[171:14]

डिलीवरी करने वाले देवदूत को हम यही कहते

[171:16]

हैं। वो रात 1:00 बजे पधारे। फिर क्या था?

[171:20]

पीर बाबा का दम किया हुआ पानी, दो गिलास

[171:22]

और चखना और टीवी पर जिंदगी ना मिलेगी

[171:25]

दोबारा। पारी की शुरुआत बेहद धीमी और

[171:27]

संभलकर हुई जैसे पिच पर विकेट टिकाना

[171:29]

जरूरी हो। अपनी प्राइवेसी के लिए मेरे साथ

[171:32]

बैठे दूसरे साथी को हम यहां नॉन

[171:34]

स्ट्र्राइकर कह देते हैं। करीब एक घंटे और

[171:37]

बेहद सटीक नाप के साथ कहें तो 150 ml के

[171:40]

बाद नॉन स्ट्र्राइकर अपनी धूम्रदंडिका

[171:42]

सुलगाने बालकनी में चला गया। वापस आया और

[171:45]

हॉल में गद्दे पर ऐसे पसरा कि सीधे

[171:47]

कुंभकरण मोड में चला गया। पर भला हो

[171:49]

आधुनिक टेक्नोलॉजी का जिसने सात समंदर पार

[171:52]

भी अकेलेपन का एहसास नहीं होने दिया।

[171:54]

मैंने तुरंत भारत में अपने चार दोस्तों को

[171:56]

वीडियो कॉल खटखटा दिया। कुछ देर बाद मैं

[171:58]

भी अपनी धूमधंदिका थामे बालकनी की ओर

[172:02]

बढ़ा। अब उस बालकनी के दरवाजे की एक बड़ी

[172:04]

जादुई खासियत थी। वो सिर्फ अंदर से बंद

[172:07]

होता था।

[172:08]

[172:09]

अब मैं उस वक्त होश के मुकाम पर तो था

[172:11]

नहीं कि दरवाजा बाहर से हाथ में पकड़ कर

[172:13]

खड़ा रहता। सो मैं आराम कुर्सी पर धंस गया

[172:16]

और दोस्तों से बतियाते हुए कश लगाने लगा

[172:18]

और फिर जैसे ही सिगरेट बुझाने के लिए झुका

[172:20]

मेरी बत्ती गुल। अगले दिन जब सीधे बेड पर

[172:23]

आंख खुली तो पहला ख्याल फोन का आया। आखिर

[172:26]

अभी उसकी ईएमआई बाकी थी। फोन बाजू में

[172:29]

पड़ा था। सबसे बड़ा यक्ष प्रश्न यह था कि

[172:31]

कल रात आखिर हुआ क्या? इसी आत्म मंथन के

[172:34]

बीच मेरे पेट में सबसे पहले वही हलचल हुई

[172:37]

जिसे कहते हैं वोमिटिंग।

[172:40]

तभी उन चार दोस्तों में से एक का फोन आया

[172:42]

जो कनाडा के ही एक दूसरे प्रोविंस में

[172:44]

रहता है। उसने दास्तान सुनाई। उसने बताया

[172:46]

कि रात को जब मैं धूम्रदंडिका बुझा रहा था

[172:49]

तब मैं खुद भी पूरी तरह बुझ चुका था। उस

[172:52]

वक्त बाहर का तापमान था -2 डिग्री। और पीर

[172:56]

बाबा के दमके हुए पानी के प्रभाव का आलम

[172:58]

देखिए कि आपका यह भाई सिर्फ एक टीशर्ट और

[173:00]

ट्रैक पैंट में बाहर अचेत पड़ा था। दोस्त

[173:02]

ने कहा कि अगर 5 मिनट और कॉल लेट हो जाती

[173:05]

तो मैं सीधा 911 पर कॉल घुमा देता। लेकिन

[173:08]

भला उस इंजीनियर का जिसने वह बालकनी का

[173:10]

दरवाजा बनाया था। वीडियो कॉल पर दोस्तों

[173:13]

के चीखने चिल्लाने की आवाज और खुले दरवाजे

[173:15]

से अंदर घुसती बर्फीली हवा ने आखिरकार

[173:18]

हमारे सोते हुए नॉन स्ट्राइकर को जगा

[173:20]

दिया। वो भागता हुआ बालकनी में आया। जैसे

[173:23]

ही मुझे उठाने के लिए पास पहुंचा, मैंने

[173:25]

नशे में ही एक ऐसी करवट ली कि फोन सीधे

[173:28]

नौवीं मंजिल से नीचे फ्री फॉल कर गया। खैर

[173:31]

नॉन स्ट्राइकर ने पहले मुझे घसीट कर बेड

[173:33]

पर डाला। फिर सुबह के 4:00 बजे कड़कती ठंड

[173:36]

में नीचे फोन ढूंढने भागा। ऊपर वाले की

[173:38]

असीम अनुकंपा और यूएजी के मजबूत कवर ने

[173:41]

कमाल कर दिया। फोन नीचे की गीली मिट्टी पर

[173:44]

गिरा था। इसलिए सुरक्षित बच गया। आफत यह

[173:47]

थी कि भारत और दूसरी तरफ लाइन पर बैठे

[173:49]

दोस्तों को यह नहीं पता था कि मैं जिंदा

[173:50]

हूं या नहीं। क्योंकि फोन गिरते ही

[173:52]

वाई-फाई डिस्कनेक्ट हो गया। जैसे ही नॉन

[173:55]

स्ट्र्राइकर फोन ढूंढ कर लाया, वाई-फाई

[173:56]

कनेक्ट हुआ, तड़ातड़ कॉल्स की बाढ़ आ गई,

[173:59]

तब जाकर संदेश दिया गया कि बल्लेबाज अभी

[174:02]

जीवित है। बस रिटायर्ड हर्ट होकर के वापस

[174:05]

पवेलियन लौट आया है। आपका अपना सोबर शराबी

[174:09]

जय हो। खानचा अपने अनुभव बताएं।

[174:15]

अभी हम जिंदा हैं। इसको देख के भाई बहुत

[174:17]

ही

[174:17]

भाई टेस्ट मैच के प्लेयर हैं।

[174:19]

-2 डिग्री है।

[174:22]

टीशर्ट और

[174:25]

बच गए गुरु

[174:25]

सोते रहो सोबर सोते रहो

[174:28]

लेकिन देखिए हम बोल नहीं सकते पर जान

[174:31]

क्यों बची सब जान रहे हैं नहीं नहीं ये सब

[174:33]

स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है उस दिन निकल

[174:36]

नहीं नहीं जान जो सांसद में पड़ी थी ना वो

[174:38]

भी सब जान रहे हैं क्यों पड़ी थी

[174:40]

वो भी बात है फसा है मतलब क्या बोला जाए

[174:44]

तुम ने ही जख्म दिया है तुम्ही सेवा

[174:47]

तुम्ही ने दर्द दिया है तुम ही दवा देना

[174:50]

गरीब जान के हमको ना तुम

[174:53]

दबा देना नहीं

[174:56]

ऐसा नहीं होगा कुछ और होगा दिस डजंट साउंड

[175:00]

ऐसे बिहार में हम लोग दवा ही देते हैं बाय

[175:01]

द वे मर्ज की

[175:03]

दमन का

[175:03]

हर मर्ज की भी दवा होती है

[175:07]

और डॉक्टर भी आपको दवा देते हैं

[175:09]

हम

[175:11]

गांव में कहते हैं दवा दारू चलती रहनी

[175:12]

चाहिए

[175:13]

दवा

[175:13]

वहां चीज हमारे कुत्ते है ही

[175:15]

ये क्यों कहा जाता है ताऊ

[175:17]

क्या

[175:17]

कि बीमार होने की अरे दवा दारू करो सही हो

[175:19]

जाएगा कौन कहते थे?

[175:20]

दारू कहते थे दवा को ही। वही तो बदनाम कर

[175:24]

दिया लोगों ने। आगे चलो।

[175:26]

नहीं वो शेर बहुत अच्छा है। कैसे है वो?

[175:29]

तेरा क्या भरोसा है चारा घर?

[175:31]

हम तेरी नवाजिशें मुख्तसर

[175:34]

तेरा क्या भरोसा है चारा घर। मेरा दर्द और

[175:37]

बढ़ा ना दे।

[175:38]

नहीं वो शुरू कैसे है?

[175:39]

ये चित्रित वाला है ना चित्र।

[175:41]

मुझे छोड़ ना मतलब ये फरीदा।

[175:43]

मुझे छोड़ दे हाल पर तेरा क्या भरोसा है?

[175:46]

चार अगर तेरी नवाजिश मुफ्तर मेरा

[175:50]

मेरा दर्द और बढ़ा ना दे

[175:52]

मतलब कि भैया ऐसा हमको रहने दो जैसे हमें

[175:55]

बहुत ज्यादा दवाई इलाज करने की सहलाने की

[175:58]

मरहम लगाने की जरूरत ना पड़े

[176:00]

ये जो नवाजिश मुख्तसर है

[176:02]

तुम तो अभी 10 मिनट के लिए आए हो बेटा ये

[176:05]

पट्टी कर दे

[176:06]

और बीमार कर दोगे तो

[176:07]

हां इससे जो है जख्म हरा हो जाएगा

[176:10]

बात ना करो जख्म की

[176:12]

दर्द मंदे इश्करा दारू बजुज दीदार नी

[176:17]

चुप रहो

[176:18]

दर्दमंद इश्क रा दारू बजुज दीदार नी

[176:22]

मतलब इश्क का दर्द जिनको हुआ है उनकी दवा

[176:26]

जो है वो दीदार के अलावा कुछ नहीं है

[176:31]

हां ये तो सच है

[176:32]

काफिर इश्कम मुसलमानी मरा दरदा दरकार नी

[176:38]

काफिर इश्कम मुसलमानी मरा दरकार नी

[176:44]

मतलब

[176:46]

कि मैं इश्क में काफिर हो गया हूं। मुझे

[176:48]

मुसलमान की जरूरत नहीं है। हर रग मन तार

[176:52]

गस्ता हाजत जुन्नार नस्त कि मेरे मेरा

[176:57]

जितना रग है ना वो सब में तार

[177:01]

है

[177:02]

तो मुझे जनेयू की जरूरत नहीं है।

[177:04]

वाह

[177:05]

कहां से पढ़ते हैं साहब आप?

[177:06]

अज सरे बालने मन बरखेज ए नादा तबीब

[177:11]

तू अच्छा कर नहीं सकता। मैं अच्छा हो नहीं

[177:14]

सकता। यजी मियां कहते हैं। पर उसकी लाइन

[177:16]

ऐसे है अ सरे बालने मन बरखेज ए नादान तबीब

[177:20]

कि अरे मेरे तकिए से दूर जाओ ये डॉक्टर हम

[177:25]

नादान हो तुम

[177:27]

अज सर बालीने मन मेरे तकिए के सिराहाने से

[177:32]

दूर हटो

[177:33]

दूर हटो ए नादान डॉक्टर दर्द मंदे इश्करा

[177:38]

दारू बजुज दीदार नी

[177:41]

अच्छा लगा

[177:42]

दीदार के अलावा

[177:46]

के इस दर्दमंद का कोई दारू नहीं।

[177:48]

इलाज नहीं है।

[177:49]

दारू नहीं है। दारू तो है भाई।

[177:51]

दवा मतलब

[177:52]

हां वही

[177:52]

दर्दमंद इश्क रहा दारू बज दीदार नहीं।

[177:56]

डॉक्टर को कहा जा रहा है कि दूर हो जाओ

[177:57]

मेरे

[177:58]

मेरे सिरहाने से जाओ यार तुम।

[178:00]

तुम्हें दीदार ही

[178:01]

वही बैठा रहता था ना डॉक्टर।

[178:04]

ओ वक्त बहुत कम बचा है।

[178:06]

हम ये खैर

[178:08]

बहुत बढ़िया था। लेकिन कहां से आपको याद

[178:10]

रहता है इतना उर्दू? ये वो अमीर खुसरो है।

[178:12]

फारसी का है। कौन खुसरो का ही है।

[178:14]

क्योंकि जनेऊने के बारे में और कौन फारसी

[178:17]

में जानता है?

[178:18]

कुणाल मिश्रा की चिट्ठी जय हो। कृपया

[178:20]

एपिसोड की शुरुआत में एक जन

[178:22]

लेकिन ये बहुत अच्छा है कि हर रग जो है ना

[178:23]

मेरा वो तार है वही धागा है। तो हमको जनेऊ

[178:26]

की आवश्यकता नहीं है।

[178:28]

और मुसलमानी की भी जरूरत

[178:30]

नहीं है।

[178:30]

नहीं है क्योंकि मैं इश्क में काफिर।

[178:32]

काफिर इश्क का मुसलमान ही मरा दरकार नहीं।

[178:35]

इट डोंट नीड।

[178:37]

बहुत एंगर था उस आदमी में।

[178:39]

मोहब्बत था। नौबत में हां जो भी है

[178:42]

हम कुणाल मिश्रा ने लिखा है जय हो कृपया

[178:45]

एपिसोड की शुरुआत में एक जनहित सूचना

[178:47]

अवश्य प्रसारित किया करें। जिन श्रोताओं

[178:50]

की हाल फिलहाल में कोई सर्जरी हुई हो वे

[178:53]

पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद ही तीन ताल

[178:55]

सुने। इस पॉडकास्ट में हंसी कई बार

[178:57]

नियंत्रण से बाहर हो सकती है जिसके परिणाम

[179:00]

स्वरूप टांके खुलने की आशंका बनी रहती है।

[179:02]

बाद में जब आप डॉक्टर के पास पहुंचते हैं

[179:04]

और डॉक्टर पूछता है कि हुआ क्या था? तो

[179:07]

तीन ताल सुन रहा था जैसा कारण चिकित्सा

[179:09]

विज्ञान की पुस्तकों में दर्ज नहीं मिलता।

[179:13]

इलाही क्या कयामत है कि वो जब लेते हैं

[179:17]

अंगड़ाई।

[179:18]

इलाही क्या कयामत

[179:19]

क्या कयामत है वो जब लेते हैं अंगड़ाई।

[179:22]

मेरे सीने में जख्मों के सब टांके टूट

[179:24]

जाते हैं।

[179:25]

ओ हो हो

[179:28]

नींद नहीं आएगी आज।

[179:31]

चीर देंगे आप लोग।

[179:32]

टांके टूट गए। खोल दिया। नहीं ये मुझे

[179:35]

बहुत अच्छा लगता है कि अंगड़ाई वो ले रहे

[179:37]

हैं टांके इधर कूट रहे हैं।

[179:38]

बहुत अच्छा है।

[179:40]

तो इसी ये सारी चीज़ इश्क में होती है ताऊ।

[179:43]

हम

[179:44]

दर्द मंदे इश्करा

[179:48]

क्या बात है।

[179:48]

दर्द भरी शायरी

[179:50]

हम

[179:50]

ये यार मुझे

[179:52]

इतने उल्लास के साथ सुनाते हैं।

[179:54]

हां।

[179:55]

मुझे अतुल ने जीजा साली वाली कौन सी है?

[179:58]

टक्कर।

[179:58]

टक्कर वाली एक शायरी की किताब दी है।

[180:00]

यार मैं उसको पढ़ नहीं पाया हूं। मैं उसकी

[180:02]

उसका अध्ययन और उसका विश्लेषण करना चाहता

[180:04]

हूं।

[180:04]

पर आपसे वहां

[180:05]

क्रिटिकल

[180:05]

हां क्रिटिकल करिए और उस पर फिर इसमें

[180:07]

चर्चा करेंगे और उस जमीन पर आई एम श्योर

[180:09]

आप कुछ नया भी कह सकते हैं।

[180:11]

उस जमीन पे मैं अपने पौधे उगाऊंगा।

[180:14]

हां

[180:14]

लेकिन वो बहुत बेतरर्ती है पर हैं पौधे

[180:17]

अच्छे पौधे।

[180:18]

ठीक है।

[180:18]

मैं अपनी गइयां भेजूंगा।

[180:19]

आई लव द ग्रीस।

[180:21]

मैं चाहिए गैया भेजूंगा चरने के लिए वो

[180:23]

पौधों।

[180:25]

क्या है? साली टक्कर।

[180:27]

कहां मिलती है? बस स्टैंड पे।

[180:29]

ठीक है। खली गोरखपुर में तो मिलती होगी।

[180:32]

हां। यू शुड हैव गॉट टू कॉपीज।

[180:35]

तीन

[180:37]

हम वो पढ़ेंगे।

[180:37]

खलिय आई हैव अ कॉपी। आई विल गिव इट टू यू।

[180:41]

खलियर मुन्नू इलाहाबाद से लिखा।

[180:43]

मुन्नू

[180:43]

खलियर मुन्नू। मुन्नू मेरा भी घर का नाम

[180:45]

है। क्या बात कर रहे हैं?

[180:46]

अम्मी मेरी बुलाती थी।

[180:48]

तू आप भी खलियर ही थे।

[180:50]

हां हर आदमी खलिय समय।

[180:54]

तीन ताल के तीनों युवाओं को जय हो। मैं

[180:56]

सड़क निर्माण के क्षेत्र में कार्यरत एक

[180:59]

निजी संस्था का कर्मचारी हूं और दैनिक

[181:01]

कामकाज से संबंधित आंतरिक संचार और

[181:03]

परियोजनाओं के संदर्भ में बाहरी सरकारी

[181:05]

विभाग को भेजे जाने वाले पत्राचार की

[181:08]

ड्राफ्टिंग का कार्य पिछले तीन-चार वर्षों

[181:10]

से काफी हद तक देखता आया हूं। भाई आई एम

[181:13]

ये Google से तो नहीं ट्रांसलेट किया है।

[181:15]

पत्राचार वगैरह। विगत एक वर्ष से मैंने इस

[181:17]

बात का अवलोकन किया है कि मेरी संस्था के

[181:19]

जो लोग पहले ड्राफ्टिंग की प्रक्रिया और

[181:21]

प्रतिबद्धता के साथ सीखने की कोशिश करते

[181:23]

थे वे अब चैट जीपीटी और ग्रामरली जैसे एआई

[181:26]

टूल्स की शरण में पहुंच गए हैं। खराब तो

[181:28]

तब लगा खानचा जब एक बार एक ड्राफ्ट तैयार

[181:31]

करके मैं बॉस के पास ले गया और उन्होंने

[181:33]

उन्होंने भी कहा कि यार चैट जीपीटी पर डाल

[181:35]

कर देखो शायद और अच्छा हो जाए। वापस गया

[181:37]

तो मालूम हुआ कि एक दूसरे साथी जो विगत

[181:39]

वर्षों में मुझसे ड्राफ्टिंग पर सलाह लिया

[181:41]

करते थे। कहा चैट जीपीटी से तैयार किया

[181:43]

हुआ ड्राफ्ट पास हो गया। खराब इसलिए लगा

[181:46]

क्योंकि पहले ऐसा कभी नहीं हुआ करता था।

[181:48]

आमतौर पर मेरे द्वारा तैयार किए गए

[181:49]

ड्राफ्ट पर थोड़ी बहुत हेरफेर या मामूली

[181:52]

संशोधन के बाद उसे मंजूरी दे दी जाती थी।

[181:55]

निवेदन है कि तीनों कभी इस विषय पर बात

[181:57]

करें क्योंकि आप लोग भी जनसंचार के

[181:59]

क्षेत्र से जुड़े हैं। साथ ही मैं चाहता

[182:02]

हूं कि ताऊ क्रिटिकल थिंकिंग में लिखने की

[182:04]

प्रवृत्ति के योगदान और फ्री एसोसिएटिव

[182:06]

राइटिंग के बारे में भी बात करें। मुझे

[182:08]

लगता है कि यह चर्चा आज के समय में

[182:10]

प्रासंगिक होगी जब लिखने और सोचने की

[182:12]

प्रक्रिया धीरे-धीरे मशीनों को सौंपी जा

[182:14]

रही है और कुछ और भी बहुत कुछ लिखना चाहता

[182:17]

हूं। लेकिन आज के लिए इतना ही खलियर

[182:19]

मुन्नू इलाहाबाद जय हो जय हो जय हो

[182:21]

मुन्नू चैटिपटी सभी यूज़ कर रहे हैं यार।

[182:24]

बुराई क्या है?

[182:26]

बुरा बुराई नहीं है पर वही है कि अपन

[182:30]

पीढ़ी दर पीढ़ी ना कमजोर होते जाएंगे।

[182:32]

हम

[182:33]

सृजन

[182:35]

हम एज अ स्किल और

[182:38]

वो उस पर संकट है सृजन पर।

[182:41]

अरे भाई 10,000 वर्ड लिखते थे ना आप। 5000

[182:44]

वर्ड आप लिखते थे ना 2000, 500, 300 लिखना

[182:47]

पड़ता था ना

[182:48]

लिखते थे। अब आप आसान रास्ता चुन लेंगे और

[182:52]

ये होगा कि भाई क्यों नहीं हम चुने?

[182:54]

जब मेरे पास कार है तो मैं बैलगाड़ी से

[182:57]

क्यों जाऊं?

[182:58]

बिल्कुल।

[182:59]

यू नो बट एक्चुअली आपके पास कार थी।

[183:04]

आपके पास बैलगाड़ी ऐसा जरूरी जरूरी नहीं

[183:06]

है।

[183:06]

आपने चलाई नहीं आपको प्रॉब्लम था।

[183:08]

नहीं आपके पास कार थी। आपको ईवी दे दिया

[183:11]

गया। बैटरी से चार्ज होने वाला है।

[183:13]

अरे फिर एथेनॉल पे आएंगे यार।

[183:14]

है ना? नहीं तो आपका हैंड आई कोऑर्डिनेशन

[183:16]

गियर वियर सब भूल गए ना आप।

[183:18]

ऑटोमेटिक गाड़ी चलाने के बाद थोड़े दिनों

[183:19]

में जब आपको गियर वाली गाड़ी पकड़ा देंगे

[183:21]

तो

[183:22]

करके आवाज करेगी।

[183:23]

रुक जाएगी वो।

[183:25]

तीनों के पास वही है। ठीक है ना? तो किसी

[183:27]

नहीं वो बोल रहा हूं। यही होता है। जैसे

[183:30]

आप ये कहते हैं ना कि नहीं भूलेंगे कैसे?

[183:32]

दिक्कत होती है।

[183:32]

तो चलाए हुए हैं। भूलेंगे कैसे? लेकिन एक

[183:34]

दिन बैठ देते हैं आपको

[183:36]

बिल्कुल

[183:36]

ठीक है इट विल टेक एन आवर हाफ एन आवर यस

[183:39]

यस टू अंडरस्टैंड्री

[183:40]

ठीक बात है अगली चिट्ठी है पार्थ वृष्टि

[183:43]

पटेल की प्रिय ककुआ कमलेश कुलदीप आसिफ

[183:48]

पिछले दिनों खुजली पर आपका इतना गहन विचार

[183:52]

विमर्श सुनते हुए मुझे भी एक कहानी याद आ

[183:54]

गई हमारी जो पार्टनर हैं जब हम दोनों

[183:56]

नए-नए प्यार में पड़े थे तब मैंने सोचा कि

[183:58]

उन्हें थोड़ा बहाल करूं। गुजराती में बहाल

[184:02]

करना उस प्यार भरे स्पर्श को कहते हैं जब

[184:04]

हम किसी प्रिय व्यक्ति या वस्तु को स्नेह

[184:06]

से सहलाते हैं। तो मैंने भी उनकी पीठ पर

[184:09]

प्यार से हाथ फेरा। ऐसा जादू हुआ कि आज छ

[184:12]

साल बाद भी अगर मैं रोज उन्हें इस तरह

[184:14]

खुजली ना करूं तो वह उदास हो जाती हैं।

[184:17]

अगर हम दोनों साथ बैठे हो और मेरे हाथ

[184:19]

खाली हो तो बिना कुछ कहे ही यह समझ लिया

[184:22]

जाता है कि तुम्हारे हाथ इसी कर्म के लिए

[184:25]

बने हैं। पार्थ बढ़ाओ हाथ। सप्रेम पार्थ

[184:29]

वृष्टि पटेल। बहुत ही खूबसूरत यार।

[184:32]

ये स्क्रैच में बैक वाला था ना

[184:34]

हां

[184:35]

बस इसमें इतना ही है। आई स्क्रैच यर्स

[184:37]

वाला मामला है। ये प्यार है बहुत

[184:39]

प्यारा सा।

[184:41]

वो कहते हैं ना कि

[184:43]

रोएंगे देखकर वो बिस्तर की हर शिकन को हम

[184:48]

वो हाल लिख चला हूं करवट बदल बदल के।

[184:52]

भाई साहब

[184:52]

आंसू निकल रहे हैं रास्ते बदल बदल के। हां

[184:55]

तो वो एक इबारत तो वो होती है ना जो आपने

[184:59]

नाखून से नहीं

[185:01]

पर अपनी उंगलियों की शिराओं से

[185:05]

किसी पीठ पर उकेरी थी

[185:07]

हम

[185:08]

और वो अगर आपको याद रहता है अगर आप रोज

[185:11]

करते हैं

[185:13]

किसी को भी स्नेह से

[185:15]

हम

[185:16]

यू नो

[185:17]

तो वो जो पहले दिन का एहसास था

[185:23]

वो आज भी जिंदा है अगर

[185:24]

वो जिंदा जिंदा रह सकता है

[185:27]

क्योंकि उन्हीं क्षेत्र को वही क्षेत्र

[185:30]

छुवन से गुजरेंगे

[185:32]

जो पहले गुजर चुके हैं।

[185:36]

छूना स्पर्श जो है ना

[185:38]

वो जानवरों से लेकर सब में

[185:40]

एक फमिलियर बिल्कुल बिल्कुल

[185:42]

वो जो है ना

[185:43]

तो आपका कैट भी है ना वो भी आके आपको छूने

[185:47]

का कोशिश की कोशिश करता है और वो चाहता है

[185:49]

कि आप उसे छूए

[185:50]

सहलाएं बहाल करते रहें

[185:53]

बहाल करते रहें

[185:55]

और मोहब्बत बहाल करते रहें

[185:58]

आ मोहब्बत जिंदाबाद

[186:00]

स्पर्श स्नेह जिंदाबाद

[186:02]

अगर यही हम किए होते तो आप बोलते तुमको

[186:04]

बीम ारी है खुजाने की अपना तो प्रॉब्लम है

[186:07]

भाई

[186:07]

नहीं आदमी हमेशा देखना खुजाता अपना है

[186:10]

दूसरों को खुजली करता है

[186:12]

हम

[186:14]

या फिर तो खुज भी बोलते खुजाता अपना

[186:17]

दूसरों को खुजली करता

[186:19]

आप मुझे नहीं खुजा सकते

[186:21]

आप मेरी खुजली मिटा सकते

[186:23]

हम

[186:24]

यार वो मुझे याद आ गया वो बनाने स्केच

[186:26]

वाले और उससे कि याद है गुलजार साहब नहीं

[186:29]

कहते याद है तुमने मेरी बेस पे बैठे-बैठे

[186:32]

सिगरेट की डिबिया पे स्केच बनाया आया था।

[186:35]

आओ स्केच में पौधे में फूल आया है। आओ

[186:39]

लेकिन आप उसको कविता के भाव से पढ़ना भूल

[186:42]

जाइए। नॉर्मल पढ़ के देखिए एकदम कविता

[186:45]

लगती नहीं है।

[186:45]

जैसे उन्होंने कहा लकीर हैं तो रहने दो।

[186:47]

किसी ने गुस्से में आके खींच दी।

[186:48]

खींच दी होंगी।

[186:50]

आओ बनाए पाला खेलें। कुछ भी गुलजार की

[186:52]

कविताओं को आप भारी आवाज में पढ़ना बंद।

[186:55]

उनकी बहुत अच्छी कविताएं हैं। बहुत शानदार

[186:57]

लिरिस

[186:57]

बल्ली मारा के

[186:59]

अब जैसे वो है चलता हूं वो नहीं घोड़ा

[187:03]

अपना अरबी है। चलता है मेहरौली में पर

[187:05]

घोड़ा अपना अरबी है।

[187:07]

अ ज्योग्राफी के मामले में वो कहीं कुछ भी

[187:10]

सेट कर लेते हैं। बल्ली मारा से दरीबे तलक

[187:13]

तेरी मेरी निशानी दिल्ली में। तो वो बहुत

[187:18]

ज्यादा क्षेत्रीय हो जाते हैं। ऐसे वहां

[187:20]

पेली की जरूरत क्या थी जहां

[187:22]

गजरारे गजरारे का था ना ये

[187:24]

हां है ना

[187:25]

पर आप हाउ विल यू इस्टैब्लिश कि आई हैव एन

[187:27]

अरेबियन हॉर्स क्योंकि चल तो मेहरौली में

[187:29]

रहा है ना

[187:30]

मेहरौली बहुत जैसे चलता है वो दिल्ली में

[187:32]

भी हो सकता था या किसी बड़े शहर का हो

[187:34]

सकता है तो वो मैं कह रहा हूं

[187:35]

वो लोकलाइज कर

[187:36]

लोकलाइज करते हैं जिससे

[187:38]

ये तो हर हर राइटिंग की खूबसूरती होती है

[187:42]

पर उनकी कुछ कविताएं हैं जिनको भारी आवाज

[187:44]

में अगर आप नहीं पढ़ें ऐसे कहने के अंदान

[187:47]

कह दे तो एकदम ना ट्रिविलाइज हो जाती हैं

[187:50]

वो। खैर आई होप वो ना सुने ये मैं उनका

[187:55]

फैन हूं। हां हां नहीं क्योंकि गीली हंसी

[187:58]

जो होती है ना

[187:59]

हम

[188:00]

हम

[188:01]

वो ऐसे तो लगता है कि क्या हंसी सूखी हंसी

[188:04]

क्या होती है पर होती है ना

[188:06]

हम

[188:07]

गीली हंसी होती है

[188:08]

हम

[188:09]

होती है

[188:10]

और गीली हंसी में आंखें जो हैं वो देखने

[188:13]

लायक होती है

[188:14]

हम

[188:15]

क्योंकि आप हां

[188:17]

कैसी होती है बताइए गीली हंसी

[188:18]

क्योंकि और कहां गीला होता है हंसी में आप

[188:21]

खुश हैं

[188:23]

थोड़ा दर्द भी है

[188:24]

तो वहां गीले हो जाते आंख गीली है, हंसी

[188:27]

है। लेकिन हंसी भी है, खुशी है।

[188:30]

अच्छा वो गीली हंसी भी है। ठीक है।

[188:31]

वो गीली हंसी भी हो सकती है। हम

[188:34]

खुशी के जो आंसू निकलते हैं उसमें आप हंसे

[188:35]

तो गीली हंसी उसे कहा जा सकता है।

[188:37]

हम

[188:38]

तो अब लोगों को ऐसे लगता है यार क्या गीली

[188:40]

हंसी

[188:42]

और अगर आपको पी लिया हुआ है उस समय आप

[188:44]

वो नीली हंसी भी पीली हंसी होगी। नीली

[188:46]

हंसी पीली हंसी भी पूछ जाते सांप डस की

[188:48]

आंख नीला पड़ गया हो तो नीली हंसी उसमें

[188:50]

भी अगर आप हंस रहे हैं।

[188:52]

पीली हंसी भी है। पीली

[188:53]

नहीं पर उसका काम यही होता है ना कि जो आप

[188:57]

कल्पना नहीं कर रहे हैं कवि का काम क्या

[189:00]

है? जहां ना पहुंचे रवि

[189:02]

हम वहां पहुंचे कवि।

[189:05]

तो जहां ना पहुंचे रवि का मतलब क्या होता

[189:08]

है?

[189:08]

जल्दी द लेट। हम जहां ना पहुंचे रवि का

[189:11]

मतलब होता है जहां तक सूरज की रोशनी नहीं

[189:13]

पहुंची है

[189:14]

उधर तक पहुंचाना और एक यह मतलब भी है कि

[189:17]

कल्पनाओं से परे

[189:20]

तो आपने नहीं सोचा था

[189:22]

कि ये हो सकता है पर मैंने लिख दिया तो

[189:27]

आपने इमेजिन तो कर लिया ना

[189:28]

मेरा काम हो गया

[189:31]

कभी जिंदगी ने बोला पिंजरे में चांद ला दो

[189:34]

कभी लाल टिन देके बोला आसमा में टांग गई

[189:36]

गुलजारी लिखते थे

[189:37]

हां

[189:38]

नहीं लौटा दे अम्र टिकट टू हॉलीवुड ये

[189:41]

गुलजार का लिखा सामने आए मेरे और देखा और

[189:45]

बात भी की और मुस्कुराए भी किसी पुरानी

[189:48]

पहचान खातिर कल का अखबार था देख लिया रख

[189:51]

दिया अब बताइए कविता भी पर कविता है अभी

[189:54]

इसी को पढ़ दूंगा भारी आवाज में तो आपके

[189:56]

चेहरे पे गीली हंसी आ जाएगी

[189:57]

कमबख्त जो शब्द है वो कमबख्त वैसे गिना

[190:02]

जाता है उसका मोहब्बत से कोई लेना देना

[190:04]

नहीं लेकिन उन्होंने गाना लिखा था कमबख्त

[190:05]

इश्क है जो सारा

[190:07]

कमबख्त इश्क है जो सारा ज

[190:13]

क्या लिखा था यार और ने जो गाया है

[190:16]

मुझे मतलब खैर जीवित लोगों में वैसे तो

[190:20]

साहिर शैलेंद्र

[190:23]

मजरू साहब ये सब मेरे पसंदीदा

[190:27]

बॉलीवुड लिरिसिस्ट हैं

[190:29]

पर

[190:31]

मैं जिनको अपनी पीढ़ी का कहूंगा उसमें तो

[190:34]

गुलजार साहब ही बेस्ट

[190:35]

उसमें कोई गुलजार साहब जावेद अख्तर बट कुछ

[190:38]

ज्यादा साहब

[190:39]

कमबख्त इश्क जब आप कहते हैं ना तो आप इश्क

[190:42]

से एक फमिलियरिटी दर्शाते हैं। हम

[190:46]

इश्क से एक दोस्ताना रिश्ता भी दिखलाते

[190:48]

हैं।

[190:49]

और ये भी कि ये काबू करने इसको क्लच में

[190:52]

नहीं लिया जा सकता साहब।

[190:53]

ये कमबख्त है ये साला थोड़ा फ्री है।

[190:55]

इश्क से मेरी नजदीकियां हैं। मैं उसे

[190:58]

कमबख्त कह रहा हूं। हम

[191:00]

कमबख्त आदमी जनरली उसको कहता है जो उसको

[191:03]

बहुत प्यारा होता है। नहीं तो आप इस

[191:06]

प्यारे को कमबख्त कहने नहीं आउट ऑफ

[191:08]

कंट्रोल

[191:08]

प्यारे को भी नहीं कमबख्त बीच का शब्द है

[191:10]

जो बीच का नहीं मानता नहीं है मेरी

[191:13]

कमबख्त इश्क है जो

[191:15]

अनुशासन नहीं है वक्त खराब होता है वरना

[191:17]

सब कुछ ठीक हो जाता आदमी बोलता

[191:18]

हां

[191:19]

ठीक है अगली चिट्ठी है रोता लकड़बग्घा की

[191:23]

तीन ताल के त्रिस्तंभों को नमस्कार बोलता

[191:25]

बनारस का रहने वाला

[191:26]

क्राइंग हाई है ना क्राइंग वुल्फ होता है

[191:28]

एनीवे

[191:29]

लकड़बग्घा तो हाईना होगा

[191:30]

हाईना होगा

[191:32]

हाई ना

[191:33]

बोलो बुल आपने हाईना देखा है?

[191:36]

आपने तो देखा

[191:36]

इंडिया में स्ट्राइप हना मिलते हैं।

[191:39]

स्पॉटेड नहीं

[191:41]

मैं मूल मूलत बनारस का रहने वाला हूं और

[191:43]

दिसंबर 2022 की बात है। हम लोग भाई की

[191:45]

शादी की खरीदारी में लगे थे। तभी एक ठंडई

[191:48]

की दुकान दिखाई दी।

[191:49]

हम

[191:50]

हालांकि उस दिन तक मैंने किसी प्रकार के

[191:52]

मादक पदार्थ का सेवन नहीं किया था। लेकिन

[191:54]

दिमाग में विचार आया कि बनारस का होने के

[191:56]

नाते एक बार विजया का गोला फकना तो लगभग

[191:58]

राइट ऑफ पैसेज जैसा ही है। बस फिर क्या

[192:01]

था? दो गिलास ठंडाई के साथ दो गोले अंदर

[192:04]

कर लिए।

[192:05]

बस जय भोले।

[192:06]

उस दिन की व्यस्तता इतनी ज्यादा थी कि

[192:08]

शॉपिंग करते-करते हम लोग गोले के बारे में

[192:10]

पूरी तरह भूल गए। करीब एक घंटे बाद जब

[192:13]

सारी खरीदारी निपटाकर गाड़ी में बैठे तो

[192:15]

सर चकराने लगा। तब लगा लो हो ही गए बीमार।

[192:19]

उस समय तक यह ध्यान ही नहीं आया था कि

[192:20]

गोले ने अपना परिचय देना शुरू किया है। घर

[192:23]

पहुंचे तो बिना खाए पिए सो गए। ठंड का

[192:25]

मौसम था और रजाई ऐसी भारी कि जिस अवस्था

[192:27]

में सो जाओ उसी में पड़े रहो। करवट लेने

[192:29]

की संभावना लगभग शून्य थी। कुछ देर बाद

[192:32]

ऐसा प्रतीत हुआ कि इंद्रधनुष ने हमारे घर

[192:34]

में ही डेरा जमा लिया है।

[192:37]

और तो और इंद्रधनुष के रंग भी ऐसे ऐसे थे

[192:40]

जिनका प्रकृति में शायद अस्तित्व ही नहीं

[192:42]

है। तभी याद आया कि यह सब गोले का प्रताप

[192:45]

है। फिर क्या-क्या नहीं देखा। खुद के शरीर

[192:49]

से आत्मा निकलती दिखाई दी। उसके बाद उसे

[192:51]

किसी तरह वापस शरीर में खींचने का प्रयास

[192:54]

किया। यह पूरा घटना घटनाक्रम लगभग एक घंटे

[192:57]

तक चला। घर में किसी को पता नहीं था कि

[192:59]

मैं भांग खाकर आया हूं सिवाय भाई के और वह

[193:01]

भी शायद तब तक भूल चुका था। कुछ देर बाद

[193:03]

भाई ने आकर जगाया और बोला शाम हो गई है

[193:05]

उठो चाय और चूड़ा मटर खा लो। अब दृश्य की

[193:08]

कल्पना कीजिए। सामने वालों को दिख रहा था

[193:10]

कि मेरे बाएं हाथ में चूड़ा मटर की प्लेट

[193:12]

है। दाएं हाथ में चम्मच। लेकिन मुझे दिखाई

[193:14]

दे रहा था कि मेरे दो बाएं हाथ हैं और

[193:17]

दोनों में प्लेट है। इतना ही नहीं तीन

[193:20]

दाएं हाथ भी मौजूद थे और तीनों में चम्मच

[193:22]

था।

[193:24]

अब दुविधा यह थी कि समझ नहीं आ रहा था कि

[193:26]

किस चम्मच वाले हाथ को किस प्लेट में

[193:28]

निशाना साधने भेजूं ताकि चूड़ा मटर सही

[193:31]

तरीके से चम्मच में आए और स्वाद का आनंद

[193:33]

लिया जाए। इसी कशमकश में जिंदगी गुजरी बाद

[193:37]

मरने के मेरी मयत पे लगा है। इसी कशमकश

[193:41]

में लगभग आधा घंटा बीत गया। किसी तरह

[193:43]

स्थिति को छिपाते छिपाते समय निकाला और

[193:45]

शाम को भाइयों के साथ टहलने निकल गया।

[193:47]

इसके बाद जो भी ठेला दिखाई देता वहीं रुक

[193:50]

कर टूट पड़ता। समोसा, जलेबी, मैगी, चाय,

[193:53]

कॉफी, नींबू, चाय, चाउमीन कुछ नहीं छोड़ा।

[193:56]

कहानियां बहुत है। आज के लिए इतना ही। आप

[193:58]

लोगों की सेवा में रोता लकड़बका

[194:02]

मत रो

[194:04]

मेरे दिल याद होता होगा। चुप हो जा हुआ जो

[194:10]

हुआ। यही तो छोड़ दो गुरु जो हुआ अच्छा

[194:13]

हुआ।

[194:15]

बहुत लगभग मेरे

[194:16]

विजया हम

[194:18]

वहां विश्राम भी मिलता है।

[194:19]

क्यों है? हम्म। इसे खाकर तो विजय नहीं

[194:22]

प्राप्त की जा सकती किसी पर। आपका

[194:23]

रिफ्लेक्सेस स्लो हो जाते हैं। इट काइंड

[194:25]

बी विजय। विजया आप पर विजय नहीं सकते।

[194:28]

हावी हो जाएगी।

[194:30]

हम हां तो वही तो विजया है।

[194:33]

नहीं विजया क्यों है वो?

[194:34]

आप होते तो विजेता होते।

[194:36]

हम विजय टॉकीज़ भी बना।

[194:38]

विजया कौन है?

[194:39]

विजय टॉकीज़ भी टॉकीज़ मतलब सिनेमा हॉल

[194:41]

बनारस में। टॉकीज़ टॉकीज़ के

[194:43]

विजया कौन है?

[194:45]

विजया जो

[194:46]

वही जीती है।

[194:46]

जोसेफ विजय

[194:48]

वही जीती है। फर्स्ट एक गोली में ही

[194:53]

ठंडाई याद आ गई यार।

[194:55]

नो नो नो

[194:56]

नहीं नहीं ठंडी मिश्रांबू वाली जो फिगर

[194:58]

उसके भी मिलती है।

[194:58]

व्हाट इज मिश्रामू?

[194:59]

मिश्रांबू एक ब्रांड है।

[195:01]

ठंडाई जो है वो बोतल में आती है।

[195:03]

हां घर में बना सकते हैं उसका वर्जन।

[195:06]

दो ढक्कन नहीं होता।

[195:07]

पर वहां पे घोट करके भी आपको जो है उसमें

[195:10]

दो गोले मारने की जरूरत नहीं है। अगर आप

[195:13]

बनारस में हैं और विजया का आनंद लेना

[195:16]

चाहते हैं जो देवानंद के भाई हम

[195:18]

कोई जान

[195:19]

तो आप जो है उनको बोलिए वो मॉडेस्ट मात्रा

[195:24]

में घोट के ही दे देंगे आपके ठंडाई में ही

[195:26]

आप पी लें ये गोले मारने वाले जो होते हैं

[195:29]

ना

[195:30]

वो जगह है लहरावीर वहां पे कॉर्नर पे

[195:32]

दुकान थी शामू देते थे वो केसर वाली आ हा

[195:35]

पर क्या इसमें ऐसा तो कुछ नहीं है कि कुछ

[195:38]

वॉर वॉर में यूज़ किया जाता हो मतलब कि जो

[195:41]

हां हां हो सकता है कि मतलब जीत

[195:43]

जरूर होता है ना

[195:44]

होता होगा कुछ

[195:45]

राजाओं के समय कि ये विजय क्योंकि युद्ध

[195:47]

उसमें तरह-तरह के पदार्थों का सेवन होता

[195:49]

था। उसमें

[195:50]

वहीं से हो सकता

[195:51]

भांग धतूरा

[195:53]

एनर्जी एनर्जी देता था ना

[195:55]

और दिशासुर

[195:56]

एनर्जी से ज्यादा जरूरी होती है मृत्यु से

[195:59]

भय नहीं होना

[196:00]

हां

[196:00]

हम

[196:01]

आपको अभी जो लगता है ना वॉर ऐसे वॉर नहीं

[196:04]

होते थे।

[196:04]

पहले सामने चाकू लेके खड़े रहते थे। तलवार

[196:06]

लेके खड़े रहते थे।

[196:07]

अब भाई आपका हाथ कट जाता था।

[196:09]

दर्द होता था।

[196:12]

आप तो ये उदाहरें मौजूद थे जब

[196:15]

उसे दर्द नहीं कहते भाई भाई साहब। उसे

[196:17]

दर्द नहीं कहते।

[196:20]

दर्द होता है।

[196:21]

दर्द होता है।

[196:22]

नहीं देखो

[196:22]

दर्द तो होता है पैर में चोट लग गया

[196:24]

उसमें।

[196:25]

उसमें क्या होता था आप मस्त हो। तलवार तुम

[196:28]

लेके आओ। हम लेके आए। आओ साले आओ लगा ही

[196:31]

दिया एक दूसरे को। कट पिट गया तो

[196:32]

हल्काफुल्का दर्द वो पेन किलर का काम करता

[196:35]

था।

[196:37]

अरे मैंने बताया था मेरे चाचा थे मेोरपुर

[196:40]

एक जगह है हमारे घर से करीब। मेरपुर

[196:42]

मेयूरपुर

[196:43]

मेोर

[196:44]

तो ऐसे ही है 16 17 कि.मी. दूरी पे Suzuki

[196:47]

मैक्स बाइक आती थी ताऊ को पता होगा पूरे

[196:51]

वो अपना भांग का सेवन किए हुए थे और सीधा

[196:53]

मेरपे मोड़मोड़ हुए तो मोड़ में मुड़े उनको

[196:56]

मुड़ना दिखाई नहीं दिया पेड़ में लेके हेड

[196:58]

ऑन

[196:59]

ठीक है। पूरा नाक उनके पूरे दांत बाहरकि

[197:03]

वो सेवन किए हुए थे और एक बंदा उनके साथ

[197:06]

और था संतोष नाम था। उसको उठाए उसको बांधे

[197:10]

और हस्पताल दुधी ले चले आए अगर वो सेवन

[197:14]

नहीं हुआ होता तो उनके प्राण पखेड़ो निकल

[197:16]

सकते थे उस समय वो दर्द यही जंग वाली बात

[197:20]

डोंट ट्राई

[197:20]

नहीं नहीं मैं कह रहा हूं बिल्कुल ये गलत

[197:22]

मैं तो किस्सा बता रहा हूं

[197:23]

ऐसा नहीं है कि

[197:24]

हां इसका सेवन करके आप चले पुलिस चालान कर

[197:26]

देगी

[197:27]

नहीं अरे यार चला प्रकृति चालान कर देगी

[197:30]

चला चलाचली की वेला आ जाएगी

[197:32]

दैट इज व्हाई सेवन को थालापुर रीजन कहते

[197:34]

हैं

[197:36]

गुणनिधि शर्मा की चिट्ठी अगली ताऊ खानशाह

[197:39]

सरदार को प्रणाम। हाल में तीन ताल देखना

[197:41]

शुरू किया। रोहित शर्मा वाले एपिसोड में

[197:42]

अंग्रेजों द्वारा भारतीयों से पूछे जाने

[197:44]

वाले अजीबोगरीब सवालों की चर्चा हो रही

[197:46]

थी। तो उससे जुड़ा एक किस्सा। हाल ही में

[197:48]

हमारे पड़ोस में एक अंग्रेज दंपति रहने आए

[197:50]

हैं। उम्र हो गई कोई 50-5 साल। एक दिन

[197:53]

रविवार को उन्हें घर पर दोपहर के लिए खाने

[197:56]

पर बुलाया। रोटी का आटा गूंथते देखकर वह

[197:58]

हैरान हो गए। उन्होंने कहा कि क्या आप लोग

[198:00]

कल के लिए तैयारी कर रहे हैं? क्योंकि

[198:02]

हमारे यहां तो इस तरह का आटा रात भर रखा

[198:04]

जाता है और अगले दिन फिर इस्तेमाल किया

[198:06]

जाता है। जब हमने उन्हें बताया कि यह तो

[198:08]

अभी सब्जी के साथ खाने के लिए रोटियां

[198:12]

बनाने का आटा है तो वह बड़े उत्सुक होकर

[198:14]

देखने लगे कि इससे रोटी यानी उनकी भाषा

[198:16]

में कहें तो ब्रेड कैसे बनेगी। फिर हमने

[198:19]

बताया कि इसी आटे में आलू गोभी जैसी चीजों

[198:22]

की स्टफिंग भरकर पराठे भी बनाए जाते हैं।

[198:25]

लेकिन वह प्रदर्शन किसी और दिन के लिए

[198:26]

बचाकर रखा गया। रोटी और नमक, मिर्च,

[198:29]

अजवाइन वाले पराठे चिकन करी के साथ खाकर

[198:31]

वह बहुत खुश हुए। खाते-खाते बार-बार पूछते

[198:34]

रहे कि इतनी साधारण सामग्री से इतनी

[198:36]

अलग-अलग चीजें कैसे बन जाती हैं? जय हो जय

[198:38]

हो जय हो। गुणनिधि शर्मा तीन तालिया

[198:41]

मेलबर्न से मूल निवासी पंचकूला हरियाणा।

[198:44]

अपना देश का स्वाद ही इतना अच्छा है

[198:46]

मसालों का

[198:48]

कि कोई भी खाए।

[198:49]

रोटी उनके लिए तो अद्भुत चीज होती है ना

[198:51]

कि आपने वहीं पे आटा गदा और वहीं रोटी बना

[198:52]

ली।

[198:53]

वो तो ब्रेड खाते हैं ना।

[198:54]

नहीं तो फर्मेंट होता है वो यीस्ट। हम हम

[198:58]

यीस्ट

[198:58]

यीस्ट राइज करता है

[199:01]

हमारे यहां ईस्ट में जो है राइज करता है

[199:03]

सन

[199:04]

हम उनके यहां

[199:05]

और उसके पहले ही अपन फुला लेते हैं

[199:07]

रोटी

[199:08]

फुल का

[199:09]

तो आज की चिट्ठियां इतनी ही कुछ चिट्ठियां

[199:12]

और रह गई

[199:12]

हां हां हर बार तुम यही करते

[199:14]

अरे भैया इतनी सारी चिट्ठियां चिट्ठी के

[199:16]

एपिसोड से ज्यादा चिट्ठियां ली है आज हमने

[199:18]

चिट्ठी के एपिसोड में तो

[199:20]

चिट्ठी आई है चिट्ठी गरियाया गया है कि जो

[199:24]

है

[199:25]

धोखा कर दिया भाई

[199:27]

तो radio aaj.com पर चिट्ठियां लिखते

[199:29]

रहिए। ttstf.in पोर्टल पर भी अपनी

[199:31]

चिट्ठियां लिखते रहिए। YouTube कमेंट तो

[199:33]

आप करते ही हैं। सबसे आसान इजी तरीका

[199:35]

तुरंत सब लोगों तक पहुंच जाता है। और फिर

[199:38]

से याद दिला देते हैं कि 4 जुलाई को हम

[199:40]

लोग जयपुर में होंगे। कोई ऐसा ऑफिशियल

[199:42]

इवेंट नहीं है। बस एक शहर में होंगे।

[199:45]

हां। और

[199:46]

एक शाम चुरा लूं अगर बुरा ना लगे।

[199:48]

हां हां हां।

[199:49]

पर ये कि उसकी एक्सैक्ट डिटेल्स क्योंकि

[199:51]

जगह पे होंगे।

[199:52]

चुराना तो बहुत मुश्किल है।

[199:54]

बहुत गर्मी है वहां पे।

[199:55]

हां। गर्मी तो होगी। तो जो डिटेल्स होंगी

[199:57]

जहां पर बैठ की होगी वो बता।

[200:00]

अगले एपिसोड्स में वो जाहिर हो जाएगा।

[200:02]

बिल्कुल।

[200:02]

तो फिर तीन ताल के इस एपिसोड में इतना ही।

[200:06]

160 एपिसोड हो गए पूरे।

[200:07]

बाप रे बाप।

[200:08]

160 जो है ना

[200:10]

चलो जल्दी से।

[200:11]

हां।

[200:12]

160 अगले एपिसोड में मुलाकात हो।

[200:14]

जय हो जय हो। जय हो।

[200:18]

पीताल प्रेजेंटेड बाय धर्म मूल।

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