🚀 From Zero to Hero: Neeraj's Inspiring Tech Journey
Neeraj's story is a masterclass in resilience, smart work, and the power of self-belief. Growing up in a middle-class family in Ambala, he faced financial constraints, his school fees were often late, and he had no exposure to technology or fashion. Despite this, he developed a mindset of not burdening his parents, even declining an iPhone after scoring 94% in 12th grade, opting for a budget Samsung phone instead.
🛠️ The Coding Awakening
- Early Struggles: Started learning HTML and PHP but realized copying from Google was more effective than memorizing.
- Mentorship: A mentor, Aman, taught him to understand how things work rather than just learning syntax.
- First Job: Worked at Aman's company on real apps and freelance projects, including a project for Alt Balaji.
🎥 The YouTube Experiment
- Gaming Phase: Recorded gaming videos at a friend's house without editing, uploading via college Wi-Fi.
- Comedy/Channel Failures: Tried comedy and movie review channels but got hit with copyright strikes.
- Roasting Phase: Inspired by CarryMinati, started roasting content, but earned only ₹10K-₹20K per month.
💼 The Tech Career Pivot
- The Bluff: During COVID, he lied on his resume about knowing Node.js, studied it intensely for a month, and barely passed a DSA interview.
- Manager's Gamble: The manager liked his setup and proactive attitude, hiring him despite the failed DSA round.
- Work Ethic: Within 3 months, his entire team depended on him. He worked day and night, earning a reputation that reached the CEO.
- Salary Hikes: From ₹10 LPA to ₹15 LPA (3 months), then ₹18 LPA. Finally, he received a ₹60 LPA offer after switching companies.
📈 Instagram & Content Breakthrough
- Tech Content Focus: Instead of following trends, he shared his real coding struggles and "jugad" solutions. This aligns with the approach discussed in Transforming Your Side Hustle Journey: Insights for 2025, where authenticity and value-driven content lead to long-term growth.
- First Promotion: Earned ₹30,000 from a brand in November 2024, which shocked his parents.
- Brand Growth: His reel went viral (30 million views), proving that authentic, value-driven content pays off.
🧠 Key Takeaways
- Mindset Over Money: Neeraj never asked for extras; his focus was on skills and solving problems.
- Learn by Doing: Coding is about understanding and applying, not just reading tutorials.
- The Power of Jugad: His street-smart approach to solving problems made him a standout engineer. For more on navigating tech careers from unique backgrounds, see Navigating Career Paths: Insights from An IIT-IIM Graduate and Entrepreneur.
- Authentic Content: Sharing real struggles and knowledge attracts a loyal audience.
- Persistence: After multiple failed YouTube attempts (gaming, comedy, roasting), he finally found his niche in tech education.
💬 Final Advice
"Don't just learn for a job, develop a passion for tech. If you love it, you'll naturally go the extra mile and become indispensable. And when you share your genuine journey, people will connect." This echoes the insights from From Engineering to Acting: A Versatile Journey of Passion and Planning, where passion and planning combine to create extraordinary career paths.
तुम्हें स्टार्टिंग से बताता हूं। मैं अंबाला में पैदा हुआ। बहुत नॉर्मल सी फैमिली में मिडिल क्लास फैमिली। इवन कि आई
एम नॉट ट्राइंग टू डिग्रेड एनीवन नॉट माय पेरेंट्स नॉट एनीवन। एवरीबडी ट्राइड देयर बेस्ट। मेरी फीस भी टाइम पे नहीं जाती थी।
मैं क्लास से भी बाहर खड़ा हो जाता था। और मुझे बिल्कुल जीरो नॉलेज अबाउट एनीथिंग। कैसे कपड़े पहनने हैं, कैसे बाल बनाने हैं
और मेरी फैमिली भी क्योंकि अंबाला में ही पली पड़ी थी। तो उनको भी इतना एक्सपोज़र नहीं था। बट अंबाला के हिसाब से बेस्ट था।
ठीक है? बट वही है अंबाला से ऊपर बहुत सारी चीजें हैं। देन बट अंबाला के हिसाब से उनको बेस्ट था। तो उन्होंने अपनी तरफ
से बेस्ट ट्राई किया। बट देन फाइनेंशियल प्रॉब्लम्स एंड एवरीथिंग मे बी तो वो सब चलता रहता था। बट मुझे कभी दिक्कत नहीं
आने थी। एंड स्टार्टिंग से मेरा माइंडसेट भी ऐसा था थोड़ा सा कि मुझे ना आदत नहीं थी घर वालों से पैसे लेने की। मतलब आई
यूज्ड टू बी लाइक मुझे कपड़े नहीं खरीदने हैं। मुझे एक्स्ट्रा कुछ चाहिए नहीं है। मुझे iPhone नहीं चाहिए। आई आई वास लाइक
एक बार क्या हुआ? अ व्हेन आई वाज़ इन क्लास 12th तो माय फादर आई थिंक प्रॉमिस्ड मी और मॉम
प्रॉमिस्ड मी या फॉर बोथ कि तेरे 90% से ऊपर अगर आ गए प्लस टू में हर मां-बाप लालच देते हैं तो तुझे iPhone लेके देंगे। मुझे
इतना समझ भी नहीं आता था जेन्युइनली। मेरे घर वालों के लिए बहुत बड़ी चीज थी iPhone एंड मेरे लिए भी ऑफ कोर्स बट मुझे नहीं
समझ आती थी ये चीजें कि भाई 40 50000 बड़ी अमाउंट होती है उस टाइम पे आ जाता था आई थिंक iPhone 5s वगैरह इतने में 50600 में
क्रेजी भाई गुड ओल्ड डेज तो जब मेरे मार्क्स आए 90% से ऊपर आ गए 94% आ गया आई वाज अ कॉमर्स स्टूडेंट ठीक है तो फिर
iPhone लेने की बारी आई बट मेरा खुद का ही मेरी हिम्मत नहीं हुई भाई कि मैं घर वालों को बोल सकूं कि मुझे 5000 का फोन ले 50 का
फोन ले दो तो फिर अ iPhone लेने की बारी थी बट मैंने छोटे वाले में एडजस्ट कर लिया। आई थिंक मैंने उस टाइम पे Micromax
का लिया था या फिर मैं Micromax से शिफ्ट हो के Samsung पे आ गया था। Samsung का मैंने लिया था 20-22,000 का फोन था। मुझे
ऑफ वफ कैशबैक वगैरह लगा के 16,000 के आसपास मिल गया था। वो लिया था और मेरे लिए वो बहुत बड़ी चीज़ थी। एंड देन अगेन अ मतलब
थैंक्स टू माय मॉम एंड डैड फॉर दैट। फिर मेरे पापा ने मुझे थोड़ा पुश किया। बट व्हेन आई वाज़ इन 10थ क्लास तो कि थोड़ा सीख
वेबसाइट्स कैसे बनाते हैं ये सब तो माय फादर वाज़ अ वन हु पुश मी फॉर दिस एंड उसके बाद मैंने सीखना स्टार्ट किया जब
बिल्कुल स्टार्टिंग में था तो मैं ना लर्न करता था चीजें आई वाज़ लाइक HTML लर्न कर ली आई वाज़ लाइक पीएपी लर्न कर ली बट
स्लोली एंड ग्रेजुअली आई रियलाइज़्ड एंड मुझे गाइडेंस भी अच्छी मिल गई। अमन भाई थे एक जिन्होंने सारा ऐसे समझाना शुरू किया
मुझे कि ये चीजें लर्न करने वाली नहीं होती। ये करनी होती है Google से कॉपी पेस्ट और समझनी होती है चीजें काम कैसे
करती हैं। तो मैंने फिर वो करना स्टार्ट किया। वहां पे उनकी कंपनी में मैंने जॉब भी की। फिर वहां से मैं सीखा कि कैसे रियल
एप्स पे काम करना होता है। फ्रीलांस वर्क करते होते थे वो लोग। तो मैंने प्रोजेक्ट्स भी पकड़े दो-तीन। उस टाइम पे
मैंने ऐसे ऑल्ट बालाजी के भी प्रोजेक्ट्स किया। प्रोजेक्ट तो नहीं एक ही प्रोजेक्ट पर काम किया था। तो वहां से फिर मुझे समझ
आना शुरू हुआ। एंड देन मैं YouTube भी साथ-साथ कर रहा था। मेरा एक दोस्त है शुभम कनाडा में अभी वो। तो उसने मुझे बताया
YouTube के बारे में कि ऐसा-ऐसा YouTube है। उस पे पैसे मिलते हैं। गेमिंग करता है प्यूडीफाई और वो बहुत पैसा छाप रहा है। बस
लाइक मैं भी करता हूं ट्राई। तो मेरे पास उस टाइम वाई-फाई वगैरह कुछ नहीं होता था। आई थिंक ये मैं पहले भी बता चुका हूं। बट
मेरे पास उस टाइम वाई-फाई वगैरह कुछ नहीं होता था। पैसे नहीं होते थे। मतलब घर वालों को बोलता था वाई-फाई के लिए। फादर
यूज्ड टू बी लाइक कि Jio का सिम है। 1 GB मिलता है। इनफ है। वाई-फाई की जरूरत नहीं है। बट ठीक है। वो भी अपनी तरफ से मजबूर
थे। भाई वो नहीं ऐसे फालतू स्पेंडिंग कर सकते थे। एंड देन फिर मैं क्या करता था? दोस्त के घर जाता था। वहां पे गेमिंग की
वीडियोस रिकॉर्ड करता था। उसके पास पीसी था अच्छा। मेरे पास ऐसे लैपटॉप था नॉर्मल सा। तो उसके पास गेमिंग की वीडियो रिकॉर्ड
करता था। एंड बिना एडिट किए अपने कॉलेज के वाई-फाई पे जाके अपलोड कर देता था। दैट्स हाउ आई स्टार्टेड YouTube। ठीक है? तो फिर
मुझे समझ आया कि नहीं ऐसे तो कोई नहीं देखेगा। आई थिंक इसके पीछे कमेंट्री ऐड करनी पड़ेगी। तो नहीं मिला कोई रिसोर्स।
फिर मैंने दोस्त के साथ प्लान बनाया कि हम ना एक अ कॉमेडी वाला चैनल शुरू करते हैं। हम फनी बातें करेंगे। तो हमने वो ट्राई
किया। तो वो भी नहीं चला। दोस्त इधर-उधर हो गए। व्यूज नहीं आते तो स्टार्टिंग में ऐसे डीमोटिवेशन होती है और समझ में नहीं
आता करना क्या है। हमें लगता था दो रील्स डालेंगे और उस टाइम रील्स नहीं होती थी। YouTube वीडियोस का ट्रेंड था। हमें लगता
था YouTube वीडियोस डालेंगे और भाई क्रेजी फट जाएगा एकदम यह तो पहले दिन ही हमारे तो ऐसे मिलियन व्यूज फॉलोवर्स हो जाएंगे हम
तो अमीर हो जाएंगे बट कुछ भी नहीं हुआ 500 व्यूज से ऊपर नहीं आ रहे थे एंड देन फिर मैंने तो उसके साथ टेक चैनल स्टार्ट किया
उस टाइम पे फॉरेन के यूटर्स थे एक दो उनको देखता था मेरे को नाम भी नहीं याद होनेस्टली और वो एक्सिस्ट भी नहीं करते
हैं। अ टेक्निकल गुरुजी को देखना स्टार्ट किया एंड शर्मा जी टेक करके एक थे उनको देखा और
आई थिंक उस टाइम टेक बर्नर भी नहीं था इतना इन सब टेक वालों को देखा मैंने तीखी रंजीत होता था एक उस टाइम पे अभी भी है तो
इन सबको देख के मैंने अपना खुद का टेक चैनल स्टार्ट किया बट इसके साथ-साथ मेरा ऐसे कोडिंग वोडिंग वाला सीन चल रहा था आई
नेवर थॉट क्योंकि जो देखता था वही सीखता था। मैंने देखा था मोबाइल रिव्यूज करने से इनकी स्पेक्स बताने से व्यूज आते हैं। तो
वही कर रहा हूं मैं। कोडिंग अलग से पढ़ाई कर रहा हूं। Android सीख रहा हूं। उस टाइम मैं 34 सेक्टर में चंडीगढ़ में जाता था
Android सीखने वहां पे Android सीख रहा था। वो चल रहा है। और अगेन उस टाइम पे भी मेरे को समझ नहीं आता था सीखना कैसे होता
है। मेरा दोस्त YouTube से सीख रहा था। बढ़िया और मैं जाता था इंस्टट्यूट में वो जो सिखाते थे वो सीख के घर आता था और कुछ
पल्ले नहीं पड़ रहा था। मेरी फीस वहां पे वेस्ट हो गई। तो यह सब चल रहा है साइड बाय साइड। उसके
बाद फिर वो दोस्त भी वो हो गया अलग। कनाडा चला गया। उसकी प्रायोरिटीज अलग थी। तो फिर मैंने अपना रोस्टिंग का चैनल स्टार्ट। नॉट
रोस्टिंग। मैंने मूवीज के ऊपर वीडियोस बनानी स्टार्ट की एंड YouTube के ऊपर। वो चल रही थी। बट देन कॉपीराइट उस पे बहुत
आते थे। आल्सो मैं पाइरेटेड मूवीज़ डाउनलोड करता था और उनकी क्लिप्स यूज़ करता था। तो मेरे को वहां से डर हो गया कि भाई एक दिन
एक दिन क्या हुआ? अब इकट्ठी स्ट्राइक्स आ गई भाई मेरी बहुत सारी वीडियोस पे। आई रियलाइज़ ये तो ज्यादा देर नहीं चलने वाला
क्योंकि मैं किसी और का वो कंटेंट यूज़ कर रहा हूं। एंड देन फिर मैंने कैरी मिनाटी को देखा। फिर आई रियलाइज़ कि भाई अगर कैरी
मिनाटी ऐसे रोस्ट कर रहा है तो बढ़िया लग रहा है लोगों को और मुझे बहुत मजा आता था देख के। तो मैंने फिर कैरी मिनाटी को देख
के रोस्टिंग स्टार्ट की। उसमें बढ़िया चल रहा था। बट उसमें अगेन उसमें भी कॉपीराइट कॉपीराइट आता था और कुछ मोनेटाइजेशन का
कुछ आईडिया नहीं था। महीने के ऐसे 10 2000 आ रहे हैं और मैं बहुत डीमोटिवेट हो गया भाई 10 2000 में क्या ही बनेगा साथ-साथ
वहां पे जॉब भी चले जा रही है मेरी तो जॉब से मैं लाइक ठीक-ठाक कमा रहा था भाई फ्री में स्टार्ट किया था तो 10 2000 मिलने लग
गए तो जॉब पे जॉब पे मैंने फिर स्विच मार लिया कोविड का टाइम था मैंने जॉब पे क्या किया अ जो नेक्स्ट इंटरव्यू था ना मेरा
वहां पे मैंने रे्यूमे में लिख दिया अपने कि मुझे तो सब आता है नोट जेएस वगैरह बट मैं पीएपी डेव बट मुझे नोट जेस सीखनी थी।
मेरे को खुद को मन था। मैंने ऐसे रिज्यूुमे में लिख दिया। मेरे को तो नोट js आती है। और मैंने एक छोटा सा प्रोजेक्ट
कोई बनाया हुआ था। और बट मैंने बढ़ा चढ़ा के बोल दिया सब कुछ। इंटरव्यूअर ने इंटरव्यू लिया। मैंने एक महीना फुल दबा के नोट जेएस
की प्रैक्टिस करी। जावास्क्रिप्ट पढ़ी। सीखा। इंटरव्यू ने इंटरव्यू लिया। उसने एक डीएसए का क्वेश्चन दिया। बिल्कुल खस्सी सा
क्वेश्चन था। डीएसए का। अ ऐसे कुछ क्या बोलते हैं? ऑब्जेक्ट। डिक्शनरी बोलते हैं ना इसमें। ऑब्जेक्ट दिया उसने। उसने
कहा इसमें से पता नहीं क्या की ढूंढ के दो। मिसिंग की ढूंढो। ऐसा कुछ था। आई डोंट रिमेंबर एग्जैक्टली क्या था। और मुझसे
नहीं हुआ। तो उसने कहा ये तो बेकार है। बट देन मेरे मैनेजर जो था उसने मेरे से बात की एंड ही रियलाइज़ कि नहीं बंदा तो काम का
लग रहा है। बढ़िया सेटअप है इसका। और मैं क्योंकि उस टाइम गेमिंग, स्ट्रीमिंग, रोस्टिंग ये सब ट्राई कर रहा था। तो सेटअप
तो अच्छा था मेरे पास। तो ही वाज़ लाइक कि बंदा तो बढ़िया लग रहा है। एक्टिव भी है, प्रोएक्टिव है। कर ही लेगा। तो मैंने
बातोंबातों में जितना पटा सकता था पटा लिया। इंटरव्यू तो मेरा डीएसए तो राउंड क्लियर नहीं हुआ था। बट बातोंबातों में
जितना मैं पटा सकता था मैंने पटा लिया मैनेजर को। एंड लिटरली
उन्होंने बढ़िया सैलरी दे दी मुझे। 3 महीने बाद मैंने ह मांग लिया और मैंने इतना उनको अपनी टीम को अपने ऊपर डिपेंड कर
दिया था क्योंकि मुझे बहुत शौक है भाई कोडिंग का। मुझे टेक का बहुत शौक है पर्सनली। इसलिए मैं अभी भी पूरा दिन लगा
रहता हूं। दैट्स व्हाट आई एम सेइंग ना तुम जॉब के लिए जब बोलते हो ना मुझे ये आता है ये आता है जॉब मिल जाएगी तुम्हें शौक
चाहिए भाई शौक हो जाएगा ना तुम कर लोगे तुम 3 महीने में मेरी टीम मेरे पे डिपेंड हो गई बिल्कुल बहुत ज्यादा मैंने कहा अब
अब आएगा मजा फिर मैंने कहा सैलरी बढ़ाओ नहीं तो मैं चला और उस टाइम ना कोविड का टाइम बढ़िया एकदम हर कंपनी लेने को रेडी
रहती थी तो उन्होंने मेरी सैलरी बढ़ा दी फिर मेरी ऐसे सैलरी उस टाइम 10 लाख से उन्होंने 15 लाख कर दी 3 महीने 3 महीने
बाद मैंने ने बोलना स्टार्ट कर दिया। चौथे महीने में उन्होंने कर दी थी। फिर उन्होंने 15 से 18 भी कर दी। बट एकदम नाम
बना लिया था कंपनी में। सीईओ डायरेक्ट मुझसे स्टार्टअप था ना तो 1000 लोग थे कंपनी में और 1000 लोगों में भी सीईओ
डायरेक्ट नाम जानते हैं भाई मेरा। सीईओ वास लाइक नीरज को दो। ये यहां फंस रहे हैं ना। नीरज क्यों नहीं है यहां पे? नीरज को
बुलाओ। तो उन्होंने मुझसे धीरे-धीरे ऐसे प्लेटफार्म टीम में मेरे को इन्वॉल्व करना शुरू कर दिया। कुछ फटता था नीरज को बुलाओ।
ऐसा नाम हो गया था मेरा कंपनी में कि जो आजकल के लड़के बोलते हैं ना इसे यह तो जॉब भी नहीं करता अभी पूछ के देखना भाई जब मैं
जॉब करता था 200% दे रखा था अपना आज भी अपने मैनेजर को अभी 2 मिनट में कॉल करूंगा ना वो उठा के यही बोल आजा भाई कर ले हमारे
साथ जॉब दोबारा बट ऑफ कोर्स अब तो नहीं तो उस टाइम ऐसे सीईओ तक नाम पहुंच रखा है मेरी टीम में पूरी टीम के पास पुराने
MacBook थे MacBook Air था पूरी टीम के पास अकेले मेरे पास लाइक मेरी पुरानी क्लिप्स देखना पड़ी होंगी अभी भी अकेले
मेरे पास MacBook 16 इंच pro दे रखा था उन्होंने अकेले मुझे पूरी टीम में सिर्फ मेरे पास
था और मैंने एक साल जिद करके रखी कि मुझे तो चाहिए भाई और जिस दिन सीईओ ने मुझे अपना कोई काम दिया कि भाई कल क्लाइंट
मीटिंग है फटाफट हमें ये बना के दे दे बॉट उस टाइम कुछ इतना खास होता नहीं था जावास्क्रिप्ट में बनाने होते थे
जावास्क्रिप्ट में तो मैं बढ़िया हो गया था और मेरे लॉजिक स्ट्रांग थे क्योंकि स्टार्टिंग से जुगाड़ कर करके तो चीजें
बनाता था और जितने ज्यादा जुगाड़ लगाना तुम्हें आता है ना उतना तुम बड़ा बढ़िया सॉफ्टवेयर इंजीनियर प्रोग्रामर बन जाओगे
ऑनेस्टली तो मैंने बना के दे दिया उसको 6 घंटे में वो इंप्रेस कह रहा है ये लड़का तो बढ़िया है नीरज तो मैंने कहा हां और
मेरा वही सीन था भाई दिन रात काम करा लो मुझसे मैं 4:00 बजे सोके 5:00 बजे उठ के काम कर लेता था वैसा सीन था मेरा कुछ और
होता नहीं था करने को तो बढ़िया उसने मुझे दे दिया भाई बढ़िया एकदम उसने मेरी तारीफ कर दी मैनेजर के सामने मेरे मैनेजर को
मैंने पहले ही डंडा दे रखा था मेरे को तो 16 16 इंच वाला वो चाहिए MacBook Pro तो मेरे मैनेजर ने बोल दिया सीईओ को वो इतने
टाइम से लैपटॉप मांग रहा है आपने लैपटॉप नहीं दिया फिर उसने एंड देन फिर उसके बाद जब ऐसे हक वाइक बढ़िया मिल गया ना फिर
मैंने स्कीम लड़ाई कि अब तो यहां हक नहीं मिलेगा मुझे तो मेरे को या तो स्विच मारना पड़ेगा
या मुझे प्लस अपना करना पड़ेगा। एक दिन ऐसी रोस्टिंग करते-करते मेरे दिमाग में रैंडमली पता है क्या आया? मैं मुझे जब ऐसे
सामने से कॉन्फिडेंस मिलना शुरू हुआ ना अपने सीईओ से अपने मैनेजर से कि तू तो बहुत बढ़िया बंदा है। तो मैंने ऐसे स्टोरी
डाल दी एक दिन अपने रोस्टिंग वाले पेज पे कि अगर मैं अपनी कोडिंग स्किल्स भी दिखाने लग जाऊं तुम्हें तो तुम्हें मजा आएगा।
लोगों ने कहा हां तो मैंने कहा हां नॉलेज शेयर करता हूं। मेरे को तो बहुत कुछ पता है। मैं तो आया ही यहां जुगाड़ लगा के हूं
अपने रिज्यूुमे में। मैंने कहा मैं तो नॉलेज शेयर करूंगा और कोई कर भी नहीं रहा। एवरीबडी इज़ लाइक उस टाइम पे टीएसए पढ़ लो।
ये कर लो। तो मैंने डीएसए का एक क्वेश्चन सॉल्व नहीं करा था भाई आज तक। तो मैंने कहा मैं तुम्हें बताऊंगा भाई जुगाड़ कैसे
लगाते हैं। अगर जेनुइनली स्ट्रीट स्मार्ट बनना है तो मैं बताऊंगा तुम्हें। तो मैंने वो चीजें स्टार्ट की। अभी तो बहुत सारे
ऐसे अ इन्फ्लुएंसर्स हो गए हैं कोडिंग वाले। उस टाइम पे ऐसा कोई नहीं था। उस टाइम सब यही बस सिखाते थे। बैठ के टीएसए
कर लेंगे। आज टीएसए का ये क्वेश्चन आज वेब का ये मैंने बतानी शुरू की तुम्हें मैं कि टाइम सॉरी गाली के मैंने तुम्हें बतानी
शुरू करी कि कैसे जुगाड़ लगाया जाए। बस वो जब बढ़िया शुरू हुआ तो लोगों को मजा आना शुरू हुआ। एंड मेरे भाई उस टाइम मेरे
दिमाग में फिर आ गया कि अब तो डू और डाई वाली सिचुएशन है। दो महीने बचे हैं मेरे पास। नहीं ऑलमोस्ट आई थिंक 6 महीने से मैं
पढ़ाई कर रहा था। आई वास लाइक थोड़ा टाइम और बचा है। पढ़ाई कर रहा हूं। स्विच मार लूंगा हो
जाएगा। और प्लस Instagram पे एकदम इस बार दबा के पुश कर देता हूं। इतनी मेहनत नहीं डालूंगा, बैठूंगा नहीं, कंटेंट नहीं
ढूंढूंगा। जो मुझे आता है जो मैं आज कर रहा हूं वो बना के शेयर कर दूंगा। मैंने उस टाइम पे रिएक्ट पढ़नी स्टार्ट की,
नेक्स्ट जीएस पढ़नी स्टार्ट की। उन पे वीडियोस बनाई तो मैं बना के डालने लग गया इस पे इंस्टा पे।
और 6 महीने बाद मैंने स्विच मारने के लिए शुरू कर दिया। तो मेरे पास उस टाइम पे जो आजकल ये नए-नए लड़के आके बना देते हैं ना
वीडियो की। अरे ईजी ईजी तो जॉब भी नहीं कर रहा ईजी तो ये छोटे भाई जब तू चौथी में था ना उस टाइम पे मेरे को मिला था 18 के बाद
35 एलपीए 35 एलपीए मिला था और मैंने जॉइ नहीं किया था मैंने उन्हें बोला था मुझे चाहिए 40 और
फिर उन्होंने मुझे 40 भी दिया और फिर मैंने उन्हें बोला कि 40 नहीं अब तो 50 लगेगा क्योंकि 40 तो मेरी एकिस्टिंग कंपनी
देने लग गई थी और फिर उन्होंने मेरा कॉल उठाना बंद कर दिए
तो 50 के लिए नहीं माने थे बट 40 तक तो मान गए थे। बट उसके बाद मुझे फिर एक 60 की ऑफर मिल गई
60 इट वाज़ लाइक बेस 60 तो आई वाज़ लाइक इससे बढ़िया तो कुछ नहीं है। मैंने छोड़ा और उस टाइम पे मैं ईजी
Snipेड पे डालने लग गया था कॉन्टेंट और मुझे मेरी मुझे मेरी पहली प्रमोशन मिली थी ईजी Snipेड पे नवंबर में आज से 2 साल पहले
2024 नवंबर में जिन्होंने मुझे ₹00 पे किए थे एक रील डालने के। जॉब वाला कोई प्लेटफार्म था। उन्होंने कहा लोगों को
बताओ यहां जॉब मिलती है। मैंने कहा हां ये तो बहुत बढ़िया चीज है। तो मैंने उनकी रील डाली एंड वो वायरल भी चली गई भाई रील वो
30 मिलियन पहुंच गई रील और टाइम वैसे मोनोपोली वाला भी सीन था ऑनेस्टली अभी तो हर चौथे स्क्रॉल में एक नया प्रोग्रामर
बैठा होता है। बट ठीक है। अ स्किल तो स्किल होती है। यू आर थ्रोइंग दिस ब्रो। हां भाई लपेट लो।
दिस इसको लेकर आई एम थ्रोइंग दिस। तो उस टाइम मुझे मिले थे 30,000 उसके तो फिर मैंने घर पे किसी को नहीं बताया था
प्रमोशन किया क्योंकि मुझे खुद नहीं पता होता था भाई पैसे कब आते हैं कैसे आते हैं। तो फिर जब अकाउंट में पैसे आए पापा
ने कॉल किया घर पे कि ऐसे-ऐसे इसके अकाउंट में ₹00 आए हैं। मॉम वाज़ लाइक ₹00 किस चीज के आए हैं। फिर मुझे रियलाइज़ हुआ अरे
प्रमोशन की थी ना। फिर उनको समझ आया कि हां भाई इसने प्रमोशन की थी तो ऐसेसे पैसे आते हैं Instagram से भी और
फिर बढ़िया हो।
Neeraj started learning HTML and PHP on his own, but his real breakthrough came from a mentor who taught him to understand how things work rather than just memorizing syntax. He worked at a small company on real apps and freelance projects, gained practical experience, and eventually landed a job by bluffing about knowing Node.js—then studying it intensely for a month to deliver. His proactive attitude and relentless work ethic made him indispensable, leading to rapid salary hikes and a ₹60 LPA offer after switching companies.
Neeraj's family often struggled to pay his school fees on time, and he had no exposure to technology or fashion. This led him to develop a mindset of not burdening his parents—for example, he declined an iPhone after scoring 94% in 12th grade and chose a budget Samsung phone instead. These early constraints taught him to value skills over material possessions and to focus on solving problems, which later drove his success in tech.
His gaming videos were recorded without editing and uploaded via college Wi-Fi; his comedy and movie review channels got copyright strikes; and his roasting phase, inspired by CarryMinati, earned only ₹10K-₹20K per month. The turning point came when he started sharing his real coding struggles and 'jugad' solutions—authentic, value-driven content that resonated with audiences. This shift led to a reel with 30 million views and his first brand deal of ₹30,000 in November 2024.
Neeraj had lied on his resume about knowing Node.js, studied it intensely for a month, and barely passed a DSA interview. However, the manager liked his proactive attitude and the setup he had built for himself. Impressed by his initiative and potential, the manager took a gamble and hired him, which paid off—within three months, Neeraj’s entire team depended on him, and his reputation reached the CEO.
Neeraj focused on becoming indispensable through sheer hard work—within three months of his first job, his team depended on him, and he worked day and night to solve problems. This earned him a reputation that led to a raise from ₹10 LPA to ₹15 LPA in three months, then to ₹18 LPA. Finally, he switched companies, leveraging his proven track record to secure a ₹60 LPA offer.
'Jugad' refers to a street-smart, resourceful approach to solving problems with limited resources. Neeraj used this mindset to find creative workarounds in coding and to quickly learn new technologies like Node.js under pressure. Instead of following textbook methods, he adapted and experimented, which made him a standout engineer who could deliver practical solutions even in challenging situations.
Neeraj advises not to learn tech just for a job but to develop a genuine passion for it. When you love what you do, you naturally go the extra mile and become indispensable. Additionally, he emphasizes sharing your authentic journey—including struggles and failures—because people connect with real stories, which leads to both career growth and a loyal audience.
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