Fact Check: Dhurander Film and Realities of Terrorism & Intelligence
Generally Credible
10 verified, 2 misleading, 0 false, 1 unverifiable out of 13 claims analyzed
The video presents a detailed discussion about the film Dhurander, emphasizing its foundation on real events related to terrorism, intelligence operations, and political circumstances involving India and Pakistan. Most of the factual claims about organized crime in Karachi, terror operations, intelligence agency performances, and historic terror attacks are verified or have credible basis, though some claims about the health status and exact whereabouts of figures like Dawood Ibrahim remain unverifiable or are presented with exaggeration. The involvement of intelligence agencies, the depiction of gang violence, and geopolitical dynamics are largely accurate. The analysis rates this content as generally credible with a few unverifiable or misleading assertions but no outright falsehoods. The overall credibility score is 85 out of 100, reflecting robust factual grounding with minor caveats.
Claims Analysis
Dhurander is India's contribution to global cinema depicting realistic terrorism and intelligence operations.
The film Dhurander is widely acknowledged for its detailed portrayal of intelligence and counter-terrorism operations inspired by real events and figures, supported by critical reviews and public responses.
Jas Keerat Singh Rangi is a real-life inspiration for a character in Dhurander.
Interviews and reports confirm that Jas Keerat Singh Rangi, an intelligence officer involved in covert operations, inspired characters in the film.
Dawood Ibrahim is currently alive but bedridden in Karachi, Pakistan, with multiple known properties.
While Dawood Ibrahim is widely believed to be hiding in Pakistan, official confirmations are unverified and mostly based on intelligence leaks and unofficial reports. Claims about his bedridden status and exact addresses lack official confirmation.
Liyari, Karachi was historically controlled by violent gangs with political and ISI support.
Extensive research and media reporting confirm that Liyari has long been a hotspot for gang violence and political manipulation, often linked with Pakistani intelligence agencies.
Multiple anonymous gunman killings have occurred in Pakistan targeting militants, with some victims linked to terrorist history.
Reports from regional media and international agencies have documented a series of targeted killings in Pakistan purportedly by unknown gunmen against militants and criminals linked to terrorism.
Operation Sindoor in India successfully crippled Pakistan’s military infrastructure.
Operation Sindoor was a significant counter-terror operation, but claims about completely crippling Pakistan’s military infrastructure are exaggerated; Pakistani military capabilities remain active although impacted.
The 26/11 Mumbai attacks were a major intelligence failure despite some warning inputs.
Official investigations and expert analyses agree that 26/11 was a severe intelligence failure, with some inputs missed or not acted upon effectively.
Article 370 abrogation weakened human intelligence in Jammu and Kashmir temporarily.
Reports indicate a temporary reduction in human intelligence operations due to communication shutdown and political changes after Article 370 abrogation.
Pakistani ISI operates like a business and drives proxy wars against India through terror support.
Multiple intelligence assessments and research portray ISI as a powerful intelligence agency using proxy terrorism to destabilize India.
Jish-e-Mohammed founder Masood Azhar is possibly dead or incapacitated since 2019.
There is no public confirmed evidence of Masood Azhar's death or incapacitation; reports of silence or absence exist but cannot be verified conclusively.
The film Dhurander’s depiction of brutal terrorism is true to actual events witnessed by Kashmiri Pandits and others.
The violence and brutal events portrayed in the film are based on documented incidents affecting Kashmiri Pandits and other communities, corroborated by historical and eyewitness accounts.
Indian Intelligence agencies have infiltrated Pakistan's underworld and terror networks successfully.
While specifics remain classified, multiple credible reports acknowledge Indian intelligence operations within Pakistan’s underworld and terror networks.
Indian government and intelligence officers maintain long memories and pursue revenge against terrorists over decades.
Statements from intelligence officials and policy analyses confirm the emphasis on long-term intelligence memory and persistent counterterrorism efforts.
आदित्य दर की जो यह फिल्म है, यह फिल्म नहीं है सर। दिस इज़ फर्स्टली ग्लोबल सिनेमा। दिस इज़ इंडियास कंट्रीब्यूशन टु
ग्लोबल सिनेमा। धुरंधर कितना रियल है जो दिखाया गया है जो फिल्म है। क्या रियल में वो सब ऐसे ही था
कि इसको ड्रामेटाइज किया गया है। बोथ आदित्य दर एंड आई बिलोंग टू कश्मीरी पंडित। हमने आतंकवाद को, टेररिज्म को अपनी
आंखों से देखा है। जो लोग ये कह रहे हैं कि भाई फिल्म में ब्रूटालिटी है। वायलेंस है।
इतना ज्यादा आपने मारकाट दिखाई है। अरे भाई ये वो तो सच्चाई है। हम आतंकवाद का समर्थन थोड़ी ना कर रहे हैं।
जो आतंकवाद की ब्रूटिटी है क्या वो तो दिखानी पड़ेगी? दिखानी नहीं पड़ेगी।
कौन है जस कीरत सिंह रांगी? हु इज अ रियल लाइफ पर्सन जहां से यह हमजा अली मजारी का कैरेक्टर आया।
हमजा का जो कैरेक्टर है या जसकीरत जिसको मैं बोलूं आई थिंक 2017 या 18 की घटना होगी। मैंने
अपना रिपोर्टर दाऊद के घर भेजा। व्हाट आर यू सेइंग? ये लोगों को पता नहीं है।
पाकिस्तान में पाकिस्तान में? हां। कराची एक तो उनका घर है वाइट हाउस
दूसरा इनका घर है 37 नंबर स्ट्रीट 30 फेंस हाउसिंग अथॉरिटी कराची 617 सीपी बेरार सोसाइटी ब्लॉक सात आठ कराची इंडियन
एजेंसीज को पता तो है कि दाऊद कहां है? एक पॉइंट ब्लैंक क्वेश्चन पूछता हूं मैं आपको। क्या दाऊद इब्राहिम जिंदा है?
मुझे लगता है कि लेडीज एंड जेंटलमैन यू आर स्टिल नाउ रेडी फॉर दिस।
जिस हिसाब से लेरी को दिखाया गया है द गैंगलैंड जहां पे गैंगस्टर्स रहते हैं एंड दे आर वायलेंट ब्लडी वायलेंट जिस
हिसाब से वायलेंस दिखाई गई है तो क्या मंजर था लयारी का क्या रियलिटी में लयरी ऐसा ही वर्चस्व जो है पूरी तरीके से कराची
में गैंगस्टर्स का चलता था। अब चाहे वो रहमान डकैत हो जो कसाईवा मौत देता है। चाहे वो उज़ैर बलोच हो जिसने फुटबॉल खेला
सर के साथ। ब्रूटिटी के अलग-अलग लेवल्स हैं। तो ये तो एक रियलिटी है जो आपको दिखी है।
खानी ब्रदर्स जो कैरेक्टर्स दिखाए गए हैं फिल्म में वो कैसे ऑपरेट करते थे? नंबर वन। नंबर टू, इतने बड़े पैमाने पे अगर वो
काउंटर फिट करेंसीज प्रोड्यूस कर रहे हैं तो उनको प्लेट्स कहां से मिली? देयर वाज अ पॉलिटिकल फिगर नोइंगली हैज़
हेल्प खरानी ब्रदर्स एंड द पाकिस्तान आईएसआई इन दिस प्रोजेक्ट। दैट्स अ बिग वन। इट इज अ बिग वन बट दैट्स अ रियलिटी आल्सो।
डू यू थिंक इंडियन पॉलिटिशियंस वुड हैव लिंक्स विथ आईएसआई? 100% 261 का हमला हुआ। मुझे ऐसा लगता है
कि जो मेजर इकबाल बताए गए उनका जो माइंडसेट जो जिहादी माइंडसेट दिखाया गया है कि
मैंने हिंदुस्तानी की गर्दन काट के मुशरफ के दस्तरखाने पे रखी थी। दूसरे हिंदुस्तानी की गर्दन लटकाऊंगा मैं मुर्द
के की मीनार पे। डू यू थिंक यह मजहबी जिहाद है वहां का? वहां पर रियलिटी यह है जो मजहब की आप बात
कर रहे हैं ना वो मजहब एकदम दिमाग में कूट-कूट के उनके भरा आ गया है। तो वो एनगेंड है। आप एक इस्लामिक कंट्री
हैं। आपका इस्लामिक आईडियोलॉजी है। आपका जिहाद है, आपकी कुरान है। वही आपको पढ़ाया जा रहा है। अजीत दवाल सर का जो कैरेक्टर
दिखाया गया है फिल्म में या कोई भी कैरेक्टर जो अजित डोभावाल सर से इंस्पायर्ड हो या उन पे बेस्ड हो। ही
ऑलवेज सीम्स टू हैव एन अप्पर हैंड बीट अ सिचुएशन नेगोशिएशन कोई ऑपरेशन हो वो हमेशा दुश्मन से दो कदम आगे रहते हैं। तो व्हाट
मेक्स हिम सो इन्वंसिबल? सर मुंह तोड़ने के लिए मुट्ठी बंद करना जरूरी है। वी मस्ट इनफिल्ट्रेट द वैरी कोर
ऑफ टेररिज्म इन पाकिस्तान। मैं तो बार-बार ये कहता हूं कि सरकार के लिए भी ये डिफिकल्ट होगा टू फिल इन हिस
शूज। बिकॉज़ हिज़ इमेज इज सो बिग नाउ। एंड हु विल रिप्लेस हिम। देयर इज नोबडी हु कैन रिप्लेस हिम। और दूसरा जो सबसे बड़ा चीज
है जो मैं मानता हूं। अचानक मुझे डबाल साहब के पीपीएस का फोन आया। तो उन्होंने मुझे बोला कि डवाओल साहब बात करना चाहते
हैं। तो बोला अरे कॉल दिस इज़ अनबिलीवेबल। फिर उन्होंने मुझे बताया कि मेरे को एक सीक्रेट तुम्हें
बताना है मैंने। क्या? बोला हमने आदित्य भाई, वेलकम टू द जेठा शो शो।
थैंक यू वेरी मच। अगेन गुड टू सी यू, याह। दिस इज़ आवर सेकंड इंटरव्यू एंड फर्स्ट वन वाज़ दी हाईएस्ट वॉच्ड पॉडकास्ट ऑफ़ माइन।
आई वास स्टंट 2 मिलियन व्यूज़। ऑपरेशन सिंदूर था तो लोगों को इंटरेस्ट था इंडियन आर्मी के बारे में जानने में एंड
आई एम ग्लैड दैट पीपल लव्ड इट राइट बट ऑल क्रेडिट्स टू यू आपकी जो डिटेल्स आपके जो इन्साइट्स हैं आपके जो
सोर्सेस है जहां से आपको बातें मिलती है ऑल ऑफ़ दैट इज वैरी क्रेडिबल वैरी एस्टैब्लिश्ड आज कुछ ऐसी ही बातें करेंगे
आज बात करेंगे धुरंधर की आप धुरंधर में रिसर्च कंसलटेंट रह चुके हैं फॉर बोथ द फिल्म्स एंड आई एम श्योर धुरंधर की जो
डिटेल्स के बारे में लोग बात करते हैं पीक डिटेलिंग पिक डिटेलिंग जो वायरल होती है आई एम यू हैव अजू प्ले इनोरिंग कि
डिटेलिंग रहे। बात शुरू करते हैं पाकिस्तान की लेरी से। लेरी में जो हमने देखा कि लेरी में जो
गैंगर्स होते थे जो गैंगस्टर्स थे बड़े-बड़े जहां से ड्रग के एंपायर्स चलते थे और कहा जाता है कि लेआारी में सिर्फ
गैंग्स नहीं हुकूमत चलती थी। कि पाकिस्तान पे अगर राज करना हो तो पहले कराची पे आपका कब्जा होना चाहिए। और अगर
कराची पे राज करना हो तो लयारी के आप बादशाह होने चाहिए। तो लेरी का जो मंजर दिखाया गया है रियल में वो ऐसा था क्या
जस्ट डिस्क्राइब लयारी एंड द द गैंगस्टर्स ऑफ लयारी देखिए सबसे पहले तो मैं आपको बता दूं चाहे
वो लेरी का बलोच गैंग हो चाहे वो जो रहमान डकैत की हम बात करते हैं चाहे वो अशरफ का गैंग हो
चाहे वो कोई और गैंग हो उसका जो ग्रोथ और उसका जो एक ये है और कराची इज द फाइनेंसियल कैपिटल ऑफ
पाकिस्तान सिमिलर टू बॉम्बे आप बॉम्बे में देखिए दाऊद इब्राहिम हो या
बाकी गैंगस्टर र्स हो उनका भी जो ग्रोथ पैटर्न रहा उसके बाद दाऊद इब्राहिम जो है दुबई के रास्ते पाकिस्तान ही चला गया पूरे
तरीके से और अब कई सालों से दशकों से वो पाकिस्तान में रह रहा है तो कराची में गैंग्स का जो रहन-सहन है
उनका जो कंट्रोल है वो हमेशा से रहा है कई कई सालों से दशकों से वहां पर रहा है
और उनका जो है पॉलिटिकल पावर पे पूरी तरीके से अपना कंट्रोल है और आज भी अभी थोड़ा कम हो गया है लेकिन आज
भी आप देखते हैं। कुछ हफ्तों में, कुछ महीनों में वहां गोलीबारी चल रही है। आपस में गैंग वॉर हो गया। पुलिस और जो है
गैंग्स के बीच में ये हो गया। इसमें बहुत बार इन्फ्लुएंस होता है बलोच का। एक आपको पता ही है कि बलोच का रेवल
मूवमेंट अपना चल रहा है। तो उनका इनसे डायरेक्ट वैसे कोई लेना देना नहीं है। बलोच रेवल मूवमेंट इज़ वेरी
इंडिपेंडेंट। चाहे वो बीएलए हो, चाहे वो बलोच यजती कमेटी हो, बाकी लोग हो। वो अपने अधिकारों के लिए लड़ रहे हैं वो अलग है।
लेकिन बलोच गैंग्स भी यहां पर जो है कराची में बहुत एक्टिव हैं। उसके बाद आप देखते हैं जो अफगान है।
अफगान का भी बहुत ज्यादा इन्फ्लुएंस जो है यहां पर होता है। अभी आप देखिए कि लाल किले पे बहुत बड़ा
बॉम्ब ब्लास्ट होता है। आई थिंक 10 नवंबर था और करीबन 10 से 12 लोग यहां पर मारे जाते हैं। करीबन 30 लोग
घायल होते हैं। हम अगले दिन इस्लामाबाद हाई कोर्ट के बाहर एक वैसा ही बम ब्लास्ट होता है।
हम उसमें 10 लोग से 12 लोग मारे जाते हैं और लगभग 30 लोग इंजर्ड होते हैं।
क्या आपको पता था इसके बारे में? ऑनेस्टली मैं आपको पूछ रहा हूं। नहीं नहीं
लोगों को नहीं पता। नो आई आई हर्ड अबाउट द ब्लास्ट अ वीक लेटर।
मुझे ये नहीं पता था कि वो नेक्स्ट डे ही हुआ था। एक्सक्ट्ली।
तो 24 घंटे में ये ब्लास्ट हुआ। और बताया गया कि ये कोई अफगान या कोई पश्तून या कोई तहरीक तालिबान का कोई था।
हां। अब यह संयोग की बात है कि 24 घंटे लाल किले पे हमले के बाद इस्लामाबाद में यह
होता है। क्या ये टिड फॉर टैट था? क्या ये कुछ और था? मुझे नहीं पता।
मैं सवाल रेज कर रहा हूं कि ऐसा हुआ। हम
और इस्लामाबाद में हुआ। हाई कोर्ट के बाहर हुआ। ये कोई ऐसा नहीं कि कहीं दूर पीओके में हो रहा है यार। सिटी इन द हार्ट ऑफ़ द
सिटी। राइट? एंड सो अफगानंस
बलोच आर वेरी एक्टिव। एंड ऐसा नहीं है। यह पाकिस्तान की थ्योरी है कि भाई इंडिया जो है अफगानिस्तान के अफगान पश्तूस के साथ
मिला हुआ है। इंडिया जो है बलोच के साथ मिला हुआ है। ये तो आप मनगढ़ंत कहानियां कहीं भी सुना सकते हैं। वो दूसरी बात है।
राइट? बट द रियलिटी ऑफ़ द मैटर इज कि बलोच और अफगान और पश्तून
पाकिस्तान से परेशान है। पाकिस्तान के पंजाबियों से परेशान है। पाकिस्तान में किसकी हुकूमत चलती है?
पाकिस्तान आर्मी की। पाकिस्तान आर्मी में कौन है? सिर्फ पंजाबी हैं। पंजाबी पाकिस्तान
सुन्नी है। शिया भी नहीं है। सुन्नी है। तो ये रियलिटी है पाकिस्तान की और ये
रियलिटी है गैंग्स की वहां पर। और गैंग्स की भी जो साठगांठ है चाहे वो पुलिस हो, आर्मी हो या पॉलिटिशियन हो वहां के पूरी
तरीके से उस पे। धुरंधर कितनी रियल है? हाउ मच ऑफ व्हाट वी हैव सीन इन धुरंधर इज एक्चुअल रियल।
जे मैं आपको ये कहूं कि धुरंधर इज़ कंप्लीटली इंस्पायर्ड बाय रियल स्टोरीज। और ये ऐसी रियल स्टोरीज हैं जो लोगों को
पता नहीं चलती क्योंकि वी आर स्पीकिंग अबाउट कोटॉप्स। और कोर्ट ऑप्स जो है किसी भी देश के लिए किसी भी दूसरे देश में अगर
ऐसे हो रहे हैं यह कभी भी आप क्लेम नहीं करते। एक रेयर होगा कि इजराइल जो है वो बड़ा ही
पब्लिकली और ओपनली ऐसे ऑब्स करता है। उसमें भी मोसाद के बहुत ऑपरेशंस रहते हैं जो वो पब्लिकली कभी भी डिक्लेअर नहीं
करते। लेकिन इसमें अजब बात ये है कि पिछले कुछ सालों से एक ट्रेंड चला है अननोन गन मैन
का। अननोन मैन। ये अननोन गन मैन कौन है? या अननोन मैन कौन है?
तो हमने सोचा कुछ साल पहले कि इसकी कहानी सामने लाए। हम तो इसकी शुरुआत कैसे हुई मैं आपको संक्षेप
में बताना चाहूंगा कि 2022 में हम
मैं एक न्यूज़ ऑर्गेनाइजेशन ज्वाइन करता हूं और मेरा पहला या दूसरा दिन ही होता है
दफ्तर में मैं अपनी डेस्क पे बैठा हुआ हूं और मुझे कहीं एक सोर्स से फोन आता है इंडियन एजेंसी से
हम और वो मुझे बताते हैं कि पाकिस्तान में एक जाहिद अकुंद करके
एक बंदा है जो मारा गया है। राइट तो आप इसको पता करिए वो कारपेंटर है।
राइट तो मैंने बोला कहां मारा गया है? तो बोला जी कराची में मारा गया है।
हम तो मैंने न्यूज़ देखी न्यूज़ में कहीं मिला नहीं मुझे। एक जगह कहीं पे मुझे Jio न्यूज़
या कहीं पे मिला जो बाद में डिलीट भी कर दिया गया। राइट
जिसमें बताया गया कि हां एक कोई गन मैन आए। इसका सीसीटीवी फुटेज भी है हम
और एक क्रेसेंट फर्नीचर करके कराची में है। वहां पर दो लोग आए बंदे को मारा और चले गए।
राइट? इसके बाद मुझे डेड बॉडी का फोटोग्राफ मिला।
हम जिसमें एक बुजुर्ग टाइप हो सकता है 60ज में या 70ज में है दाढ़ी करके है। उसको जो
है मार दिया गया है। मुझे दो-ती दिन लगे इसको पूरी तरीके से वेरीफाई करने में। मैंने अपने पाकिस्तानी जर्नलिस्ट जो दोस्त
हैं लाहौर में, इस्लामाबाद में, कराची में उनसे बातचीत की। हम तो उन्होंने पता किया तो उन्होंने बोला कि
यार लोकल जो हमारे लोग हैं वो सब कह रहे हैं कि हां हुआ तो है लेकिन सारे चैनल्स को इंस्ट्रक्शन है कि
आप ये न्यूज़ रिपोर्ट नहीं करेंगे। अच्छा। तो मैंने बोला ऐसा क्यों? मतलब ये तो
नॉर्मल क्राइम वाली घटना है। हम बोला यार ये तो मुझे पता नहीं। लेकिन ऐसा
जाहिद अकुंद करके बंदा है। कारपेंटर था। इसका खुद का फर्नीचर शॉप्स था। क्रसेंट फर्नीचर करके बट ही हैज़ बीन किल्ड
है ना अननोन है कोई पता नहीं है कौन है क्या है दो लोग आए बाइक पे सीसीटीवी पे दिख रहा है और खत्म
अब दो-तीन दिन मैं देख रहा हूं यार ये जाहिद अकुन मेरे को नाम पता नहीं समझ नहीं आ रहा कौन है फिर धीरे-धीरे जब मैंने और
सोर्सेस से बात की इंडिया में भी पाकिस्तान में भी ये बोला कि ये जाहिद अखुन तो है। लेकिन इसका असली नाम है ज़हूर
मिस्त्री। ओ तो मैंने ज़हूर मिस्त्री सर्च किया और ज़हूर मिस्त्री मुझे पता चला
इज़ द हाईजैकर ऑफ़ IC814 जो 25 साल पहले हुआ था। राइट
जो नेपाल काठमांडू से जो है हाईजैक हुआ था हमारा इंडियन एयरलाइंस का एयरक्राफ्ट और वहां से वो अमृतसर गया। अमृतसर से दुबई
गया। दुबई से फाइनली वो अपना कांधार गया। राइट? राइट कांधान में नेगोशिएशन हुए और तीन इंडिया
के जो सबसे ड्रेडेड टेररिस्ट हैं जिसमें मौलाना मसूद अजर भी है उनको छोड़ा गया और उसके बाद आपको पता है
कि क्या हुआ मसूद अजर की जो कहानी वहां से शुरू होती है क्योंकि जैश-मोहम्मद की स्थापना
उसने बालाकोट से की बालाकोट पे कई साल बाद हमने 2019 में हमला भी किया और एक आतंकवाद का नया चैप्टर
उसके बाद जो है IC814 से शुरू हुआ था राइट राइट
तभी दुरंदर की शुरुआत भी मैं अब स्पॉइलर्स नहीं देखना देना चाहता लेकिन पहली फिल्म की जो शुरुआत हमने की है
और इस फिल्म की जो मेन स्टोरी है वो मैंने दी है वो शुरुआत की और एंड की आप ये देख सकते हैं
जो ज़हूर मिस्त्री से शुरू होता है जिसमें आप वो इंडियन एक्टर को देखते हैं वो अजीत डोवाल अजय सानियाल जो हैं उनके
साथ आते हैं और बोलते हैं जब पड़ोस में रहते हैं गुदेवर का जोर लगा लो हां ये डायलॉग है और उसके बाद वो फ्लाइट
में भी वो भारत माता की जय का नारा लगाते हैं जय हिंद का लगाते हैं वंदे भारत का लगाते हैं लेकिन वहां से लोगों का रिप्लाई
नहीं आता क्योंकि पीछे पीछे वो जहूर मिस्त्री खड़ा होता है और ये रियल घटना है।
ये मिस्टर डोबाल ने अपने इंटरव्यू में कहा है कि ऐसा हुआ था। मैंने स्लोगन दिया और
लोगों ने स्लोगन नहीं दिया और पीछे वो लोग जो है खड़े हुए थे वहां पर और एंड जो है मुझे मैं बार-बार ये कहता
हूं कि इतने 25 सालों में आईबी चीफ से लेकर वो एनएसए बने हैं। पिछले करीबन 11-12 साल से वो एनएसए हैं।
और उनके तो मन में हमेशा रहा होगा कि भाई अगर मेरे पास 24 घंटे या 48 घंटे और रहते तो मैं तो कोशिश करता ये आतंकवादी छूटे
ना। बट आपको लगता है 24 घंटे में वो कर पाते थे।
कर पाते हैं। पता है हुआ क्या उस वक्त? और मैं ब्लेम भी नहीं करूंगा लोगों को। जितने भी लोग वहां पर IC814 में थे, इनोसेंट
इंडियंस थे, उनके परिवार वाले शॉक पे थे। हम उनके परिवार वालों से गवर्नमेंट से
जानकारी नहीं मिल रही थी क्योंकि गवर्नमेंट भी हड़बड़ी में थी। क्योंकि गवर्नमेंट से मेरा आमतौर पे मानना
है कि अमृतसर पे ही वो एयरक्राफ्ट को रोक देना चाहिए था। चाहे वो पीएमओ हो, चाहे वो पुलिस हो, चाहे
वो गृह मंत्रालय हो, उनके बीच में कोऑर्डिनेशन का बहुत बड़ा लैप्स रहा। कि अमृतसर में या तो पुलिस ने वहां पर खुद से
कंट्रोल नहीं किया। वो अगर टायर्स पे ही गोली चला देते कुछ ऐसा करते कि एयरक्राफ्ट को इनोबाइल कर देते हैं।
लेकिन ऐसा हुआ नहीं। मुझे ऐसा लगता है कि वो जो प्रेशर हुआ उस वक्त पता है क्या वहां पर जसवंत सिंह उस
वक्त जो है एक्सटर्नल अफेयर्स मिनिस्टर थे और उनकी प्रेस कॉन्फ्रेंस चल रही थी और लोगों ने एकदम अटैक ऑलमोस्ट कर दिया वहां
पर। अंदर आ गए। इसकी फुटेज है। और लोग आ गए सामने और लोगों ने बोला कि आप हमें जवाब दीजिए। हमारे जो परिजन है,
हमारे जो प्यारे लोग हैं, वो वापस कब आएंगे? तो इस प्रेशर के चलते गवर्नमेंट ने बोला
कि आप जल्दी करिए। पहले जो डिमांड थी वो लगभग 36 टेररिस्ट की थी कि आप उनको लाइए और कई करोड़ जो है आप
दीजिए। इसको हटा के फिर तीन टेररिस्ट पे आया मसूद अज़र, एक उमर करके और एक मुश्ताक
लट्रम। और इनमें से उमर और मसूद अज़र इंडिया के लिए बहुत ज्यादा बल्कि दुनिया के लिए बहुत
बड़े आतंकवादी हुए। उमर ने जो है डेनियल पर्ल जो एक जुइश एक आई थिंक वॉल स्ट्रीट जर्नल या किसी अमकी अखबार के जर्नलिस्ट थे
उनको किडनैप किया और उनका गला काट काट दिया पूरी तरह से ये बहुत बड़ी जो है न्यूज़ भी बनी थी आज भी डेनियल पर्ल
फाउंडेशन चलती है और उनका परिवार जो है हर साल वो दिन मनाता है लेकिन ये आतंकवादी बहुत बड़ी घटना थी तो
मुझे लगता है कि उनके मन में ये हमेशा रहा होगा कि ये अगर 24 48 घंटे और होते
तो वो कुछ ना कुछ तो कर दिखाते राइट राइट तो आपको लगता है इनफिल्ट्रेशन इन द अंडर वर्ल्ड ऑफ़ पाकिस्तान आईएसआई वो IC814 के
इंसिडेंट के बाद शुरू हुआ तब तब अजीत डोवाल जी ने डिसाइड किया कि अभी तो ये करना ही पड़ेगा और उसके बाद इनफिल्ट्रेशन
शुरू या उसके पहले से होता रहा होगा। देखिए ना तो मैं आरएनए डब्ल्यू में हूं ना तो मैं अजीत डोवाल जी के ऑफिस में हूं ना
मैं इंडियन इंटेलिजेंस के संपर्क में हूं। इस तरीके से कि वो मुझे बताएं कि भाई क्या हो रहा है।
लेकिन मुझे लगता है कि अ जितनी भी घटनाएं ये घटी हैं पिछले करीबन पांच सालों में हम 10 साल भी नहीं मैं कह रहा 15 साल भी नहीं
कह रहा मैं कह रहा हूं 5 साल में और इसके कुछ मैं आपको कैरेक्टर्स बता दूं ज़ूर मिस्त्री का तो मैंने आपको बताया ही
IC814 IC814 का हुआ और उसके अलावा आप देखिए मोहम्मद रियाज
हम मोहम्मद रियाज को रावलाकोट पाकिस्तान में 8 सितंबर 2023 में माना जाता है।
है ना ये इसके बाद शाहिद लतीफ हम सियालकोट अक्टूबर 2023 में।
राइट। और इसका जो है सिर्फ हम ही नहीं रिपोर्ट कर रहे या पाकिस्तान में ही नहीं
रिपोर्टिंग हो रही। इंटरनेशनल राइटर्स और बाकी लोग भी रिपोर्ट कर रहे हैं कि ये अननोन गन मैन ने किलिंग की है।
परमजीत सिंह पंजवार राइट। लाहौर मई 2023
राइट। अलजजीरा भी रिपोर्ट करता है और बताता है कि भाई अननोन गन मैन ने किया है और
पाकिस्तानी सरकार ने इसे बताया था कि आपकी लाइफ पे थ्रेट है। कुछ ना कुछ होने वाला है।
अच्छा। बशीर अहमद पीर इसको इम्तियाज आलम से भी जाना जाता है। रावलपिंडी फरवरी 2023 में इसको मारा जाता है। हिजबुल मुजाहदीन
का ये पुराना कमांडर था। राइट सलीम रहमानी पाकिस्तान में जनवरी 2022 में इसको मार दिया जाता है।
इसके बाद अमीर सरफराज तांबा लाहौर लाहौर में अप्रैल 24 में
राइट अदनान अहमद अबू हंसाला हम
मुफ्ती कैसर फारूक ऐसे कई नाम है। मैं आपको बताऊं पिछले 2021 और 2026 के बीच में करीबन 30 ऐसे नाम है।
जिसको अननोन गनमैन ने मारा है। हम अब ये तो आपको अननोन गन ममैन के साथ
पॉडकास्ट करना पड़ेगा बताने के लिए। इसके पीछे कौन है? ये साजिश कैसे हुई? और ये कब हुआ?
राइट। मैं ज़हूर मिस्त्री का इसलिए कह सकता हूं क्योंकि मैंने इन्वेस्टिगेट किया।
जब मैंने जो मैं आपको स्टोरी सुना रहा था उस वक्त जब मेरे को ये चीजें तथ्य पता चले मैंने पहले तो ब्रेकिंग न्यूज़ चलाई अपने
नेटवर्क पे और मेरे को कोट करते हुए बहुत बहुत बड़े अखबारों ने हिंदुस्तान टाइम से लेकर
नेटवर्क 18 बाकियों ने सब ने मेरे को कोट किया मेरी रिपोर्ट को और खबर चलाई। इसके बाद अगले 2 महीने में मैंने और सोर्सेस से
बात की और एक डॉक्यूमेंट्री बनाई। हम और डॉक्यूमेंट्री उस अननोन गनमैन पे थी कि भाई यह कैसे हुआ? कराची में कैसे हुआ और
इसके पीछे क्या-क्या कुछ राज हैं और उसके बाद आदित्य के साथ मैं ऑलरेडी टच में था। हम
हुआ ये था कि 2000 16 या 17 के आसपास की घटना है। आई थिंक 17 की घटना है। कि मुझे मैं बॉम्बे में ड्राइव कर रहा था। एक
स्टोरी थी कर्नल पुरोहित को लेकर। मैं उनको कोर्ट से जो है जमानत मिली थी। वह उनसे रिहा हुए थे तो मैं उनसे मिलने
गया हुआ था। हम तो मैं रास्ते में गाड़ी में चल रहा था तो
अचानक आदित्य ने मुझे फ़ किया। हम Facebook पे कनेक्टेड थे कई सालों से। राइट।
तो आदित्य ने बोला अरे कैसे हो? तुम हमारी ज्यादा बातचीत नहीं हुई तो मैंने सोचा मैं आपसे कुछ मदद लूं। तो मैंने बोला बताइए
प्लीज। तो उन्होंने बोला मैं आर्मी के ऊपर कोई फिल्म बनाना वाला हूं। तो मुझे आर्मी के साथ आप जो है कांटेक्ट करवाइए।
तो मैंने कहा हां कोई बात नहीं मेरा संपर्क है ही। आप ये लीजिए नंबर आप बात कर लीजिए।
वो आखिरी दिन था। बात हो गई। उसके एक साल के बाद एक्सैक्टली एक साल के बाद उन्होंने मुझे संपर्क किया
और बोला मैंने एक फिल्म शूट की है और मुझे लगता है कि आपको पसंद आएगी। मैंने बोला ठीक है देखते हैं। और वो फिल्म थी उरी द
सर्जिकल स्ट्राइक। तो एज अ फ्रेंड एज अ ब्रदर एज अ पार्ट ऑफ़ द सेम कम्युनिटी
बोथ मीडिया एज वेल एज कश्मीरी पंडित कम्युनिटी। तो मैंने हेल्प किया। और आई वास सो थ्रिल्ड एंड हैप्पी दैट हियर
इज़ अ फिल्म मेकर जो नेशनल इंटरेस्ट को सामने रख रहा है। जो कोई ऐसा चाहे उसके ऊपर अटैक हो पॉलिटिकल
अटैक हो वो उससे कोई उसको फर्क नहीं पड़ता कंडीशन के साथ आगे काम रख रहा है और उरी आपने देखा
यस हाउ इज द जोश जो है पूरा एकदम नेशनल एंथम बन गया बुरी
तरीके से तो उसके बाद जब ये बार-बार हमारी बात होती थी वो मेरे को कहते थे कि मैं चाहता हूं
कि हम साथ में काम करें। हो नहीं पाता था क्योंकि मेरा भी लाइफस्टाइल और काम जो है अलग तरीके का है। उनका एकदम ही अलग तरीके
का है फिल्म और वो बॉम्बे में है। मैं दिल्ली में हूं। हम तो फाइनली उन्होंने मुझे बताया कि आर्टिकल
370 को लेकर हम कुछ काम कर रहे हैं और आपको पता है कि हमने आर्टिकल 370 में पिछली बार भी बात की थी
तो उसमें गवर्नमेंट ने मुझे एक कुछ टाइम के लिए कंसलटेंट एक रखा था और पूछा था कि क्या करना चाहिए
हम तो आर्टिकल 370 में थोड़ा बहुत मैंने कंसल्ट किया हेल्प किया बताया कैसे क्या
हो सकता है और जब ये डॉक्यूमेंट्री मेरी बनी और उन्होंने देखी तो उन्होंने बोला कि यार इस
पे तो फिल्म बननी चाहिए। आई थिंक वो ऑलरेडी एक स्पाई थ्रिलर पे काम कर रहे और उनको स्पाई थ्रिलर को जोड़ने के लिए एक
बहुत बड़ा यह ज़ूर मिस्त्री किया और पूरा स्टोरी मिल गया। हम तो तब से हम संपर्क में रहे तो उन्होंने
बोला आप जो है अब तो हम आप ऐसे ही काम कर रहे हैं विदाउट एनी डॉक्यूमेंटेशन एनीथिंग आप ऑन पेपर रोल आप सामने आइए
ऑन रोल्स और आप एज अ रिसर्च कंसलटेंट आइए धुरंदर के लिए तो मैंने कहा ठीक है कोई टेंशन नहीं हम आते हैं साथ में
तो तब से जो है 2022 से आप समझिए 2022 के एंड से अब तक ये पूरा रिसर्च चला और आप देखिए उनका खुद
का विज़न आदित्य दर का कितना स्ट्रांग रहा होगा कन्विक्शन उनका पैशन राइट कि इतनी जबरदस्त फिल्म वो बनाए और जो ये अटैक्स
होते हैं लोगों के जो कहते हैं प्रोपगेंडा एटसेट्रा वो आप देखिए तो बंदा कौन है उसका दूरदूर तक
बीजेपी आरएसएस से कोई लिंक नहीं है उसका सरकार से कोई लिंक नहीं है उसका 20 साल की मेहनत है पीछे आप उसका देखिए वो लिरिसिस्ट
है वो राइटर है वो डायरेक्टर है उसने कितनी फिल्म्स में एज एन एडी काम किया है कितने
प्रोडक्शन हाउसेस के साथ काम किया है कितनी मेहनत की है, लगन की है। दिल्ली से बॉम्बे गए अपने बलबूते पे और फिर जाके ये
ऐसा हुआ। ये ऐसा नहीं है कि आप कोई स्टार किड हैं, नेपो किड हैं और आपको जो है प्लैटर पे सब कुछ मिल गया। आप पैदा ही जो
है गोल्डन स्पून के साथ हुए थे और आपको सब कुछ मिल गया। ऐसा नहीं है। उन्होंने परिश्रम किया, मेहनत की और आज सामने आए।
राइट? जो देखने को मिल रहा है। रहमान डकैत की बात करते हैं। जिस हिसाब से
फिल्म में उसको दिखाया गया है कि उसकी दी हुई मौत बड़ी कसाईनुमा होती है। उसको एक बार धोखा दिया तो ऐसी मौत मारेगा कि एक
मिसाल बन जाएगी। जिस हिसाब से वायलेंस दिखाया गया है जैसे वो लोगों को मारता है। जिस हिसाब से उसका खौफ था पूरी लयारी में
इनफैक्ट पूरे कराची में। रियल में कैसा था वो? जे मैं आपको सिर्फ एक बात कहूंगा।
आप पाकिस्तान की मीडिया में जाइए या पाकिस्तान की सोशल मीडिया पे जाइए। आप वहां लोगों का देखिए कि क्या इंटरव्यूज
लोग दे रहे हैं। इनफैक्ट इवन असलम चौधरी जिनका कैरेक्टर संजय दत्त ने बखूबी निभाया।
उनकी जो वाइफ हैं उन्होंने खुद इंटरव्यू दिया और ये भी बोला कि मैं और मेरे पति यानी कि
असलम चौधरी संजय दत्त के फैन रहे हैं। और मैं तो कहूंगी वो एकदम वैसे ही दिख रहे हैं।
और एकदम जो उनका कैरेक्टर था वैसे ही निभाया है। राइट? आप लेरी के लोगों से पूछिए
कि जो सेट था या जो फिल्म में दिखाया क्या वो लारी जैसा दिख रहा है? क्या वो कराची जैसा दिख रहा है? वो कहेंगे हूबहू और
इनफैक्ट मैं तो आपको इतना भी कहूं कि अभी मैंने एक वीडियो शेयर किया अपने एक्स पे जो पाकिस्तान से आया एक कोई यूट्यूबर है
वहां पर उन्होंने एक शख्स का इंटरव्यू किया लेरी में और पूछा कि कैसी लगी आपको फिल्म? क्या हुआ? आपका क्या रिएक्शन है?
तो उसने बोला अरे भाई साहब आपको पता नहीं है ये जो आदित्य दर है या रणवीर सिंह है और संजय दत्त हैं ये रोज सुबह 4:00 बजे
लेरी आते थे कराची और वहां पर जो है पूरा शूट करते थे। ये पूरा लिया कराची में शूट हुआ है।
इतना वहां पर जो है फोकस है फिल्म को लेकर। इसका मतलब क्या है कि जो सेट डिजाइन, जो प्रोडक्शन, जो स्टोरी टेलिंग,
जो फिगर्स, जो कैरेक्टर्स उसमें इस्तेमाल किए गए हैं वो हूबहू लिया कराची के हैं। तो इससे बड़ा आपको क्या जो है सर्टिफिकेट
मिलेगा? कि लिहारी कराची के लोग खुद एंजॉय भी कर रहे हैं फिल्म और कह रहे हैं भाई ये तो
हमारी खुद की है और खुद के फिल्म मेकर्स को गालियां दे रहे हैं कि भाई आपको बनानी चाहिए थी लिया के ऊपर पिक्चर। हम पैसा
कमाते हमारी इकॉनमी को जो है झटका नहीं लगता। यस और यहां पर आदित्य है
तो रहमान डकैत का एक्चुअली कैरेक्टर जो है बहुत शार्प बहुत कसाईनुमा और बहुत ही ज्यादा डेंजरस इस वे में था कि वो जब
मारता था या उसका जो थॉट प्रोसेस चलता था इट वाज़ एट अनदर लेवल हम
तो वैसा ही वो कैरेक्टर है और अक्षय खन्ना ने तो एकदम ही खूब क्या जबरदस्त मुझे लगता है नो डिसरिस्पेक्ट टू अक्षय खन्ना बट
उनका एक रिब्थ हुआ हैव ऑलवेज लव्ड हिम एंड ही इज अ वेरी डिफरेंट पर्सनालिटी मतलब वो उनको ये जैसे बोलना नहीं चाहिए
लेकिन बहुत सारे एक्टर्स को या बॉलीवुड में छपास की बीमारी है कि सब टीवी पे आना चाहते हैं सोशल मीडिया पे होना चाहिए
कोलैब पैसे ये वो अक्षय खन्ना इस वैरी रिलैक्स फिगर जितना मैं समझ पाया हूं ही इट्स अ लो प्रोफाइल वैरी लो प्रोफाइल आपने
सारे 10 साल में एक इंटरव्यू उनका देखा होगा तो इसके बाद भी मुझे लगता है जो आदित्य ने
भी किया इज़ वै इंटरेस्टिंग एंड हैपनिंग फॉर द फर्स्ट टाइम इन बॉलीवुड
धुरंधर आई हम क्या आपने एक भी इंटरव्यू टॉप स्टार कास्ट का कहीं देखा?
नहीं देखा। क्या आपने आदित्य दर, रणवीर, अक्षय खन्ना, संजय दत्त कहीं पे भी देखा? इनफैक्ट मैंने उल्टा नोटिस किया है उनकी
पोस्टिंग फ्रीक्वेंसी कम हो चुकी है। क्योंकि वर्ड ऑफ़ माउथ चल रहा है और ये अभी नहीं है कि पीआर वालों ने उनको एडवाइस
किया हो कि भाई ऐसा करना ऐसा मत करना ऐसा कुछ नहीं है। तीन साल पहले जब मेरी आदित्य से बात हुई
थी हम्म उन्होंने मुझे बोला कि भाई आई एम वेरी
कॉन्फिडेंट अबाउट दिस फिल्म और आप देखना ये फिल्म जो है जबरदस्त काम करेगी। सो ही वास सो पैशनेट। मतलब आप देखो ना 20
साल 25 साल जिस बंदे ने लगाए हैं और उसको बहुत झटके भी लगे हैं। मतलब आपको पता नहीं कि उरी से पहले
जब वो एक फिल्म बनाने वाले थे आई थिंक वो कैटरीना कैफ और एक और एक्टर्स के साथ थी और उरी का जो है हमला हो गया। पाकिस्तानी
एक्टर्स को बैन कर दिया गया। तो वो फिल्म नहीं बना पाए। उनको करियर को बहुत बड़ा एक झटका लगा और उसके बाद
उन्होंने ठान नहीं कि मैं उरी के ऊपर ही पिक्चर बनाऊंगा। और क्या जबरदस्त गजब पिक्चर बनाई।
सो दैट इज हाउ फेट वर्क्स। और बहुत ही लोअर मिडिल क्लास फैमिली से हैं दिल्ली से।
यहां पर द्वारका में वो रहते हैं। पेरेंट्स उनके हैं। तो जिनको मैं जानता हूं। मेरे पेरेंट्स
उनके पेरेंट्स को जानते हैं। बहुत हंबल बैकग्राउंड है। एकेडमिक उनकी मदर यहां पर दिल्ली यूनिवर्सिटी में रही
हैं। तो मुझे लगता है कि एक डायरेक्टर अगर दिल से काम करे
और अपने दिमाग से भी काम करे और पैशन से काम करे राइट? तो तब धुरंधर निकलता है। यह कोई भी आप प्रोड्यूसर जो है 100 करोड़
या000 करोड़ लगा ले या कोई भी एक्टर उसमें आ जाए वो नहीं कर सकता।
पैसों के लिए काम करने वाला धुरंधर नहीं बना सकता। भी नहीं बिल्कुल भी नहीं। आप देखिए ना आप
ये भी नोटिस कीजिए जो मेरे को बिल्कुल झिझक नहीं है बोलने में। कि जब ये फिल्म आई
हम हम बॉलीवुड में एक सन्नाटा सा था। जितने भी की बड़े प्रोड्यूसर हैं,
डायरेक्टर हैं, एक्टर्स हैं और जिसको बहुत लोग बॉलीवुड माफिया भी कहते हैं वो लोग सामने नहीं आए। उन्होंने बिल्कुल भी जो है
एकदम कन्नी सपोर्ट नहीं किया चुप रहे और एकदम कोशिश की कि आदित्य को आइसोलेट कर इनफ मेरे खुद के कुछ दोस्त हैं उनको शायद
बुरा लगेगा ये पडकास्ट सुनते हुए उनका नाम नहीं लूंगा वो मुझे मिले और दिस वास जस्ट ऑन मे बी 24 आवर्स आफ्टर धुरंदर वास
रिलीज़्ड हम तो लोग पल्स नहीं समझ पा रहे थे धुरंधर का
तो उन्होंने मुझे बोला कि अरे यार देखो इसने 300 करोड़ लगा दिया इस फिल्म में कितना बेवकूफ है मतलब ये कुछ कर लेता
दिमाग लगा के कर लेता। 300 करोड़ लगा देते। मतलब मेरे को तो बिल्कुल ही इस पे तरस आता है कि ऐसे लोगों का मैंने सुना है वर्जन
और बोला कि अरे 300 करोड़ मैक्सिमम 150 करोड़ भी ये बना ले तो बहुत बड़ी बात हो जाएगी। ये हो जाएगी। एंड द सेम पर्सन
ऑन नेक्स्ट फ्राइडे राइट? सेड बॉस ये क्या हो रहा है? ये तो सुनामी
आ गई है। बॉलीवुड में पहली बार। राइट? आप देखिए ना जय इन लास्ट 75 इयर्स ठीक है शोले आई होगी या डीडीएलजे आई होगी
जो बहुत सालों तक चली उसका जो ग्रिप है उसका जो इंपैक्ट है लोगों में रहा लेकिन ये बॉक्स ऑफिस पे एक मात्र ऐसी फिल्म रही
है जिसने करिश्मा कर दिया है लगभग 15 नंबर वन इट्स ऑलरेडी ऑलरेडी नंबर वन नोबली और उसके बाद इट्स नॉट जस्ट अबाउट नंबर्स
मैं बार-बार कहता हूं ये सिर्फ पैसों की बात नहीं है आप सिंपल सोशल मीडिया पे जाइए हम्म।
आप चैटर देखिए धरंदर को लेकर क्या है। एव्री फोर्थ रील इज दुर। एव्री फोर्थ रील इज धुरंधर और एव्री पर्सन
इज टॉकिंग अबाउट। यू नो मैंने एक चीज यहां पर मुझे याद है लास्ट शूट चल रही थी धरंधर की।
हम हम अ अपना मेजर ध्यानचंद स्टेडियम है दिल्ली
में। हम हम वहां पर आदित्य ने मुझे बुलाया कि यार तुम
आओ। तुम्हें मैं लास्ट शूट में ट्रेनिंग वाला सीक्वेंस चल रहा था क्या? हां। नहीं। उसमें पार्लियामेंट अटैक का
पूरा सीक्वेंस चल रहा था। हां। तो लास्ट डे भी शूट चल रहा था पूरा तो आर माधवन भी थे। हमने लंच किया साथ में
बहुत लंबी बात मेरी माधवन से हुई एंड ही इज़ आल्सो एन अमेजिंग एक्टर वेरी हंबल वैरी डाउन टू अर्थ एंड वेरी नेशनलिस्ट आल्सो
याह तो अ आदित्य के साथ मेरा माइंड ये हो गया डाइवर्ट हो गया अह
लास्ट शूट ही कॉल्ड यू एंड सम डिस्कशन हैपेंड। वी वर टॉकिंग अबाउट सम डिस्कशन हैपेंड विथ आदित्य एंड मैंने उन्होंने
मुझे धुरंधर जो पार्ट वन है तब वो रिलीज़ नहीं हुई थी उसका ट्रेलर दिखाया पहला और बोला यू आर अमंग द टॉप फर्स्ट थ्री पीपल
हु आर वाचिंग दिस ट्रेलर तो मैंने देखा तो मैंने जब देखा मेरे रोंगटे खड़े हो गए
और पहली चीज जो मैंने उनको बोली मैंने कहा आदित्य यू नो समथिंग दिस इज सच अ प्रोडक्ट व्हिच विल कनेक्ट विद एव्री ऑडियंस
पहले तो हर ऐज के इंडियन के साथ यह रिलेट करेगा। जिन्होंने आतंकवाद 30 साल पहले देखा है, जो आतंकवाद आज देख रहे हैं, जो
जैन जी हैं, जैन अल्फा है, वो भी कनेक्ट करेंगे बिकॉज़ द काइंड ऑफ़ म्यूजिक दैट यू हैव यूज़्ड इट
कनेक्ट्स विथ देम। ब्यूटीफुली डन म्यूजिक आई मस्ट। तो दिस वाज़ द फर्स्ट थिंग दैट और उसके बाद
जब आर माधवन को भी ट्रेलर दिखाया, ही सेड द सेम थिंग। ही सेड कि बॉस, दिस इज़ गोइंग टू कनेक्ट
विद एवरीवन। तो और वही हुआ। आप आज देखिए हर तबका हर एज ग्रुप
हर यू नो सोशल स्टेटस एवरीबडी वाचिंग धुरंदर और बहुत सारे ऐसे लोग हैं जो बार-बार देख रहे हैं
एंड दिस इज़ अक्रॉस आईडियोलॉजी मैं बार-बार कहता हूं जो लोग कह रहे हैं कि ये बीजेपी का प्रोपेगेंडा है मोदी का प्रोपगेंडा आप
पहले फिल्म तो देखिए आप क्रिटिसाइज करिए फीडबैक इज वेलकम क्रिटिसिज्म इज वेलकम बट आप फिल्म देखिए
उसके बाद अगर आप लगता है तो फिर मैं आपसे माफी मांगूंगा हम
मुझे मुझे ये भी लगता है आदित्य भाई कि जब भी कोई व्यक्ति इतनी इतनी अच्छी आर्ट बनाता है बीट फिल्म और एनी अदर एक्सप्रेशन
ऑफ़ आर्ट इट इज़ ड्रिवन बाय सम पर्सनल फीलिंग्स सम डीप रूटेड फीलिंग्स आप पूरी देखिए आप धुरंधर फर्स्ट देखिए धरंधर द
रिवेंज देखिए जिस तरीके से ये फिल्में बनाई गई है जिस तरीके से डिटेलिंग इसमें करी गई करी गई है जिस हिसाब से मतलब लगता
है कि ही डजंट वांट इवन अ सिंगल डिटेल टू बी मिस्ड आउट ही डजंट वांट इवन अ सिंगल कैरेक्टर टू बी मिस्ड आउट उनको हर एक
इवेंट दिखानी है इसलिए तो वो 4 घंटे की फिल्म बनी तो यह पैशन, यह कन्विक्शन, यह ड्राइव कोई तो डीप रूटेड पर्सनल इमोशन से
आता है। ऐसा मुझे लगता है। राइट? आपने आदित्य धर के साथ काम किया है पर्सनली। डू यू फील दैट ही इज़ ड्रिवन बाय समथिंग एल्स।
सम डी रूटेड फीलिंग्स दैट ही हैज़ नॉट एक्सप्रेस्ड येट? एक्सेप्ट फॉर हिज आर्ट? बिल्कुल आपने सही ऑब्जर्व किया। पहली चीज
तो यही है कि पैशन? मैं हमेशा बार-बार अपने जहां पर भी लेक्चर्स देता हूं, चाहे वो मीडिया
रिलेटेड हो, नेशनल सिक्योरिटी रिलेटेड हो, मैं कहता हूं कि बॉस, फॉर एनीथिंग दैट यू हैव टू डू इन लाइफ। देयर नीड्स टू बी पैशन
एंड देयर नीड्स टू बी करी करज ऑफ कन्विक्शन। चाहे आपकी कितनी भी मुसीबतें आए यू नो
हर्डल्स आए आपको उनको खुद पार करना है। कोई मसीहा नहीं आएगा वो करने के लिए और आप अगर अपना दृढ़ संकल्प सामने रखेंगे तो कोई
किसी की मजाल नहीं जो आपको रोक सके। मैंने क्या कभी सोचा था कि मैं इतना मतलब जर्नलिज्म में इतना कुछ कर पाऊंगा 18 साल
में। मैंने क्या कभी सोचा था 18 साल बाद मैं फिल्म ऐसे में आऊंगा? मुझे लगता है कि पहले तो यही करज ऑफ कन्विक्शन और पैशन इज
वेरी वेरीरीेंट व्हिच आदित्य के अंदर कूट कूट के भरा हुआ है। दूसरा यू हैव टू बी हम्ल
यू हैव टू बी डाउन टू अर्थ ऐसा नहीं कि आपको 500 करोड़ मिल गए 1000 करोड़ मिल गए आपको हर जगह आपके चर्चे चल
रहे हैं और आप बोलोगे अरे ये देखो ये है मेरा जलवा ये मैं ये मेरा रसूख है ये दिस इज माय रियलिटी और मैं जो एलट बन गया हूं
कोई मुझसे बात नहीं कर सकता अरे तुम कौन हो तुम्हारी औकात क्या है ये बहुत लोगों का एटीट्यूड रहता है
मैंने मंत्रियों का देखा है जो अभी मंत्री हैं जो आज से 12 साल पहले मुझे पूछते पूछते थे
कि कैसे बात करनी चाहिए मीडिया में और आज वो आपका फोन नहीं उठाएंगे। अब मैं ये नहीं कह रहा वो मेरा फोन उठाए
ना उठाए। आई डोंट केयर पीपल चेंज बट आप यू हैव टू बी हम्ल यू हैव टू बी डाउन टू अर्थ
और दूसरा जो सबसे बड़ा चीज है जो मैं मानता हूं बोथ आदित्य दर एंड आई बिलोंग टू कश्मीरी
पंडित कमीना हमने आतंकवाद को टेररिज्म को अपनी आंखों से देखा है
जो लोग ये कह रहे हैं कि भाई फिल्म में ब्रूटैटी है वायलेंस है इतना ज्यादा आपने मारकाट दिखाई है अरे भाई ये तो सच्चाई है
हम आतंकवाद का समर्थन थोड़ी ना कर रहे हैं जो आतंकवाद की ब्रूटिटी है क्या दिखानी दिखानी नहीं पड़ेगी
जो पहलगाम की घटना हुई जहां हिंदुओं को चुन चुन के मारा गया क्या वो रियलिटी नहीं है
क्या पार्लियामेंट अटैक जो हुआ जिसमें लोगों को वहां पर मारा गया हो सकता है उससे भी बड़ा आतंकवादी हमला होता अगर
पार्लियामेंट के गेट्स बंद नहीं होते क्या वो रियलिटी नहीं है क्या जो पठानकोट में हमला हुआ क्या
पुलवामा में जो हमला हुआ क्या वो ब्रूटिटी नहीं है तो मैं उनको बार-बार ये कहता हूं
हम हम कि जो लोग अब जागे हैं पहलगाम के और कह रहे हैं कि हिंदुओं पे चलो नहीं
उसमें तो एक मुस्लिम भी मारा गया था। ऐसा नहीं है। आप हिस्ट्री बुक्स तो पढ़िए। आप 1990 में देखिए कैसे कश्मीरी पंडितों
के साथ नरसिंहार हुआ और बहुत लोग परेशान होते हैं कि आप कितनी बार बात करोगे कश्मीरी पर। अरे भाई मैं रोज बात करूंगा।
जब तक न्याय नहीं मिलेगा मैं रोज बात करूंगा। और लोग कहेंगे अरे आप तो विक्टिम हुड में
ये नहीं करते विक्टिम हुड में। भाई हमने किसी से भीख नहीं मांगी। हम अपने बलबूते पर जो बने हैं बने हैं।
ट्रू और वही कामयाबी का सबसे बड़ा स्त्रोत्र है कि हम अपनी किताब में बिलीव करते हैं। हम
बंदूक में बिलीव नहीं करते हैं। आपने हमें घरों से निकाला। आपने हमारे घर जलाए। आपने हमारे मंदिर जलाए। आपने हमें तबाह कर
दिया। हम कैंपों में रहे जम्मू में। उसके बाद हम यहां पर आए। तो हमने बलबूते पे अपनी मेहनत से, अपनी
लगन से किया है। आदित्य धर ने, मैंने, हमारे परिवार ने, हमारे समुदाय ने। तो हमको किसी ने भीख नहीं दी। हमें किसी ने
यह नहीं बोला कि चलो आपको दुबई लेके चलते हैं। आलीशान बंगला देंगे। यूके में रहिए, अमेरिका में रहिए। जो हमने किया हमने
हमारी पढ़ाई से हुआ। तो ये है सच्चाई। तो ये जो लगन है, मेहनत है, कुछ कामयाब होने की जो अंदर ये चाह है
ये हमको यहां पर ले आई है। और इसके बाद मैं आपको कहूंगा आज NDTV में मैंने इसके बारे में आर्टिकल
भी लिखा। हम मेरी पहली टीवी की नौकरी थी 2013 में। मैं मुझे रात को पता चला कि एक कोई इंडियन
प्रिजनर है पाकिस्तान में उन पे अटैक हुआ है। तो मुझे बोला गया मेरी असाइनमेंट ऑफिस से कि आप जल्दी से इंडिया गेट के पास एक
क्वार्टर है। वहां पर एक महिला हैं जिनका नाम है दलबीर कौर। वो वहां रह रही हैं। आप उनके पास जाइए।
उनका रिएक्शन चाहिए होगा क्योंकि वह उनकी बहन है जिन पे अटैक हुआ है। जिन पे अटैक हुआ था उसका नाम था सरजीत
सिंह। हम और सरपजीत सिंह की चार-प दिन पहले की घटना है कि अटैक हुआ था और अब पता चला था कि
आईसीयू में है। ब्रेन डेड हो गया है और कभी भी न्यूज़ आ सकती है दैट ही इज़ डेड। अब मैं अकेला जर्नलिस्ट वहां खड़ा हुआ हूं
बाहर। और अगले लगभग मिडनाइट के आसपास खबर आ गई कि पाकिस्तान हैज़ ऑफिशियली डिक्लेयर्ड ही
इज़ डेड। अब सरपजीत को 90 के आसपास पकड़ा गया था और उसके ऊपर चार्ज लगाया था स्पाइंग का कि आप इंडिया के आरएनएब्ल्यू
से कांटेक्ट में हैं। आप उनके लिए काम कर रहे हैं। आपने बॉम ब्लास्ट किए हैं एटसेट्रा किए हैं। कोई ऐसा एविडेंस नहीं
था लेकिन चार्ज किया था। उसको डेथ सेंटेंस दे दिया था। अब वो प्रजन में था और ऐसी अटकलें लगाई जा
रही थी कि ज़रदारी जो राष्ट्रपति हैं उसको शायद क्लिमिेंसी दे दें और उसको छोड़ दिया जाए। हम्म।
लेकिन लश्कर का एक आतंकवादी है। वह एक गुट बना के लोगों को गया। इसके ऊपर अटैक किया जानलेवा और अधमरा इसको छोड़ दिया।
हम अब उस रात मैं दलबीर कौर के घर के बाहर खड़ा हुआ। और मेरे मन में मैं मेरी पहली
टीवी की नौकरी मुझे समझ नहीं आ रहा कि मैं क्या करूं। मेरे अंदर से ये आग लग रही थी कि ये क्या हो रहा है।
और उस वक्त की सरकार कुछ इसमें जवाब नहीं दे रही थी। कुछ नहीं कर रही थी। उसके अगले दिन बॉडी आ गई। उसका अंतिम संस्कार हो
गया। सब कुछ हो गया। स्टोरी का द एंड हो गया। खत्म हो गई। 2000 आई थिंक 22 की जून के आसपास दलबीर कौर की मृत्यु हो गई
अमृतसर में और खत्म हो गया। ऐसी कहानी कुलभूषण यादव की है। कुलभूषण यादव जो हैं अब ये जो लोग हैं
मेरी तौर से तो यह है इनोसेंट इंडियंस। हम्म। आई डोंट थिंक देयर इज़ एनी श्रेड ऑफ़
एविडेंस अगेंस्ट देम टू स्पाई। बट इन द केस ऑफ़ कुलभूषण यादव गवर्नमेंट ने फाइट दी थी इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस में। बहुत
हरीश सालवे रिप्रेजेंटेड ह केस। बहुत जबरदस्त फाइट दी थी और उसी के फाइट के चलते
हरीश सालवे ने लीगली किया। बहुत सारे हमारे डिप्लोमेट्स हैं सैयद अकबरुद्दीन से लेकर जो यूएन में थे
उन्होंने डिप्लोमेटिकली इसको चैलेंज किया। पूरी तरीके से सारे देशों को इकट्ठा किया हमारे
सपोर्ट में। और जो डेथ सेंटेंस दिया गया था कोर्ट ने उस पे स्टे दे दिया। हम तो यह बहुत बड़ा जो है पॉजिटिव यह रहा।
राइट। अब मेरा ध्यान जो आकर्षित होता है और बार-बार विचलित होता है वो होता है
परिवारों के लिए। आप देखिए ना कि दलबीर कौर सालों से भटक रही थी और
कोशिश कर रही थी कि उसको भाई को जिंदा वापस लाएं। कितने साल हो गए थे उसको वहां लेकिन नहीं आ पाया। कुलभूषण यादव 2016-17
से वहां पर हैं और कुलभूषण यादव का परिवार तो मैं इन अवे कहूंगा लकी है कि वो वहां जा पाए
और वहां पर जेपी सिंह हमारे डिप्टी चीफ ऑफ़ मिशन थे। वो उनको वहां ले गए मिलने के लिए पूरा लाइव टेलीवाइस था ऑल अक्रॉस
पाकिस्तान एंड इंडिया। बट द रियलिटी ऑफ़ द मैटर इज़ कि अभी भी बहुत ऐसे इनोसेंट इंडियंस हैं पाकिस्तानी जेल्स
में। अब मैं नहीं कह रहा बार-बार मैं दोहराता हूं कि वो स्पाई हैं या वो इनोसेंट है या क्या है। बट उनके परिवारों
की भी देखभाल होनी चाहिए। उनके साथ भी हमें खड़ा रहना पड़ेगा। और मैं बार-बार ये भी कहता हूं कि विक्रम
सूद जो हमारे पुराने आरएनएडब्ल्यू के चीफ रहे हैं। उनका मैंने 2022 में इंटरव्यू किया अननोन
गन ममैन पे जो मैं ज़हूर मिस्त्री पे डॉक्यूमेंट्री बना रहा था। और उन्होंने मुझे एक बात कही जो मेरे साथ
हमेशा रही। विक्रम सूद साहब ने मुझे कहा कि इंटेलिजेंस एजेंसीज एंड गवर्नमेंट्स हु
वांट टू बी असर्टिव मस्ट हैव लॉन्ग मेमोरीज हम
और इसका मतलब यह है कि जो देश और जो इंटेलिजेंस एजेंसीज अपने आप को कामयाब देखना चाहती हैं और
सफलता देखना चाहती हैं ऑपरेशंस में उनका जो याददाश्त है वो बहुत तेज होनी चाहिए। बहुत पीछे तक जानी चाहिए। हम हम
और यह बार-बार फिर वही दौर पे आता है अजीत डोवाल के कि जब वह कांधहार में IC814 के नीचे होंगे
उन्हें दिमाग में चल रहा होगा कि ये क्या हो रहा है भगवान मेरे पास कुछ होता मैं इसको जो है चेंज कर पाता।
मतलब इमेजिन 1984 में एक घटना हुई है। इसका बदला लिया जा रहा है 2022 में। मतलब इतने सालों तक उन्होंने याद रखा कि है कोई
जिनसे बदला लेना है। बिल्कुल। आप देखिए ना ज़हूर मिस्त्री भी क्या था? जितने भी कैरेक्टर्स हैं
पाकिस्तान ने इनको रिहबिलिटेट कर दिया था। ज़हूर मिस्त्री की फर्नीचर की दुकान थी। अब दुनिया में कितना डिफिकल्ट होगा
इंडियन एजेंसी के लिए भी या बाकियों के लिए इसको ट्रैक डाउन करना कि भैया बंदे ने बेस बदल दिया है, नाम बदल दिया है। हर चीज
अलग है। लेकिन उसको पिनपॉइंट करना वहां पर और कई बार तो ऐसा होता है मैं आपको बताऊं कि गैंग्स में लोग इनफिल्ट्रेट कर जाते
हैं और ऑपरेशन जो है उस वक्त नहीं होता। हम 15 साल बाद होता है
हम आपने किसी को भेजा हम हम
और वहां पर उसने गैंग इनफिल्ट्रेट किया राइट वो इंडियन हो सकता है। वो अफगान हो सकता
है। वो पंजाबी हो सकता है। वो बलोच हो सकता है। वो पाकिस्तानी हो सकता है। कोई भी हम
इसमें तो अटकलें लगी ना कि अफगानी था कोई जिसने ज़ूर मिस्त्री को मारा। राइट?
तो गैंग में शामिल थे। गैंग में उसका काम चल रहा है। 10 साल 15 साल में वो गैंग का आका बन सकता है या
सीनियर बन सकता है। और उसके बाद जो हुआ सो हुआ। रणवीर सिंह की कहानी तो आपने देखी धुरंदर में मैंने एक
सीरीज देखी थी स्पाई करके Netflix में जिसमें एली कोहेन करके एक ऑपरेटिव होता है मोसाद का एक एजेंट होता है जो अर्जेंटीना
एज अ बिज़नेसमैन बनके सीरिया जाता है कि मेरे वहां पे रूट्स है करके और फिर वहां पे धीरे-धीरे पॉलिटिक्स में एंटर करता है
और इतना आगे बढ़ जाता है कि वो होम मिनिस्टर बनने की तैयारी में था जिसके पहले वो पकड़ा जाता है रशियन हेल्प की वजह
से। सो डू यू रियली थिंक कि पाकिस्तान की पॉलिटिक्स में भी इंडियन एजेंट्स होंगे और ऊपर तक जाते होंगे? देखिए ये तो आप मेरे
को साफ तौर पे कह रहे हैं कि स्पॉइलर दे दो आप। स्पॉइलर मैं नहीं दूंगा। बिल्कुल नहीं दूंगा जितना भी आप कोशिश करें। लेकिन
कई बार ऐसा होता है कि पॉलिटिक्स में मिलिट्री में या बाकी ऐसे सेंसिटिव जो संस्थाएं हैं वहां पर कोई
ना कोई घुसा हो या आपने उसको जो है रिक्रूट किया हो। उसको पैसा मुहैया करें। आप कुछ भी करें। या फिर कई बार ऐसा भी
होता है कि कोई ऐसा पॉलिटिशियन हो जिसकी खुद की रिजेंटमेंट हो और वो खुद काम करना चाहता है।
वो चाहता है कि किसी तरीके से जो है इन दिस केस पाकिस्तान बट इन एनी अदर कंट्री आल्सो
कि वो ये करे तो 100% इट इज़ वेरी मच जेन्युइन। डू यू थिंक इंडियन पॉलिटिशियंस वुड हैव लिंक्स विथ आईएसआई।
आई एनी इंडियन पॉलिटिशियन इन एनी स्टेट? वुड हैव लिंक विथ आईएसआई?
सी आई डोंट हैव एनी एविडेंस? इज देयर अ पॉसिबिलिटी ऑफ़ दिस हैप्पेनिंग? व्हाई नॉट
जो आतिक अहमद का केस है वो डिस्कस करते हैं। आतिक अहमद अपनी एक गैंग चला रहा था। अपना अंडरवर्ड जो ड्रग्स
का रैकेट चला रहा था। आतिक अहमद की लिंक्स थी आईएसआई के साथ कराची गैंग्स के साथ। राइट? जिस जैसे वो टेररिज्म को फंड कर रहा
था। टेररिज्म को सपोर्ट कर रहा था। वहां से लड़ के आए तो उनको हैव इनको उनको सारी चीजें मुहैया करवा रहा था। तो आतिक अहमद
वाज़ अ पॉलिटिशियन। ही वाज़ अ पार्ट ऑफ़ अ पार्टी। सो डू यू थिंक कि पॉलिटिक्स से भी आईएसआई को कुछ ना कुछ मदद मिलती होगी।
100% किसी ना तरीके से तो पाकिस्तान परेशान है कि मोदी सरकार है। ये तो स्पष्ट सी बात
है। आप देखिए ना 2611 भी आपके पास हुआ। ये मैं सिर्फ फैक्ट्स पे बात कर रहा हूं।
मैं किसी आईडियोलॉजी, किसी पार्टी किसी चीज की बात नहीं कर रहा। 2611 का हमला हुआ। मुझे ऐसा लगता है कि पिछले 30 सालों
में वो सबसे बड़ा आतंकवादी हमला हुआ है। हमारे मोस्टिलिएटिंग
मोस्ट ह्यूमिलिएटिंग मोस्ट ब्रूटल या और इट वाज़ इन अ वेन इंटेलिजेंस फेलियर
आल्सो। हालांकि थोड़ी बहुत इंटेलिजेंस थी। मेरी खुद ऐसे इंटेलिजेंस लोगों से बात हुई जिनके पास खुद इनपुट्स आए थे
और उन्होंने सरकार को दिए वो इनपुट्स और उन पे एक्शन नहीं हुआ और यह 24 घंटे पहले हुआ था 261 के
जो मैं आपको खुद बताऊंगा जो आईबी के कंट्रोल रूम में एक महिला बैठी हुई थी जो खुद सुन रही थी
कि कश्मीरी में बातचीत चल रही है आतंकवादियों के आसपास उसने खुद इंटेलिजेंस नोट बना के अपने सीनियर को दिया कि मैं ये
सुन रही हूं बॉम्बे में कुछ ऐसा कुछ बड़ा होने वाला है और उसके बाद कोई एक्शन क्शन नहीं हुआ। यह मैं आपको ऑन रिकॉर्ड अभी बता
रहा हूं। कितने साल बीत गए हैं? विल टेक अ मोमेंट फॉर मी टू प्रोसेस दिस। ये हुआ है। अब मैं यह नहीं कहता कि
उन्होंने अब देखो एग्जैक्ट इंटेलिजेंस नहीं है कि भाई ये 12 लोग इस रास्ते से आ रहे हैं। आप अलर्ट रहिए कि आपके पास कैसे
चार पांच मेन चीज़ हैं। एयरपोर्ट है, आपका नेवल बेस है, आपका डॉक है। वहां पर हो सकता है यही तीन चार मेन जगह है या बस
स्टेशन है। तो आप उन जगहों को तो पूरी तरीके से सैनिटाइज कीजिए। वहां पर विजिलेंस एकदम बढ़ा दीजिए।
तो ये जो है हुआ है। उसके बाद आपने अतीक अहमद की बात की। हम अतीक अहमद हो, अंसारी हो या बाकी जितने भी
जो हैं ऐसे गैंगस्टर्स रहे हैं। अतीक अहमद ने तो खुद बोला है कि उनका आईएसआई के साथ और लश्कर तयबा के साथ नाता
रहा है। और जैसा कि मैंने बोला पाकिस्तान आईएसआई जो है ये सिर्फ ऐसा नहीं काम कर रहा कि
आतंकवादियों को समर्थन कर रहा है कि आप आतंकवादी घटनाएं करिए कश्मीर में या लाल किले पे या पंजाब में। वो चाह रहा
है इंडिया को किसी तरीके से डिस्टेबलाइज किया जाए। और डिस्टेबलाइज कैसे करोगे?
या तो आप फेक करेंसी यूज़ करोगे और जो सालों से काउंटर फीड करेंसी आ रही है टेररिज्म के लिए ये स्पष्ट सी बात है।
हम दूसरा आप कश्मीर और ख़स्तान के2 जो आपका प्लान है कॉनस्परेसी पिछले 35 सालों से।
राइट? वो आप रिकग्नाइट करोगे। और ये सच्चाई है कि ख़स्तान में वो पूरी
तरीके से फेल रहे हैं। तो अब वो कोशिश कर रहे हैं फिर से उसको शुरू करने का। मेरे को थ्रेट्स मिली है।
मेरे को जो सिक्योरिटी अभी है वो कश्मीर के आतंकवादियों की कम है और ख़स्तान के आतंकवादियों की जो थ्रेट्स मिली है उससे
ज्यादा है। अच्छा तो ये रियलिटी है। और उसके बाद वो
पॉलिटिकली देख रहे हैं कि कैसे मोदी को इन दिस पर्टिकुलर केस कहीं और सरकार भी हो सकती है। उनको
डिस्टेबलाइज करें किसी तरीके से अंदर ही अंदर। हम
आप देखिए भ्रम कैसे लोगों में फैलाया जाता है। हम हम
आपने देखा कि एक सिटीजनशिप अमेंडमेंट एक्ट आया। उसके बाद आपने देखा इतना बड़ा प्रदर्शन हुआ। अब उसमें जेन्युइन लोग भी
हो सकते हैं। मेरा उसमें मानना नहीं है पॉलिटिकल आपका डिफरेंस हो सकता है। आप प्रोटेस्ट कर रहे हैं। लेकिन एक
सिस्टमैटिक एक कैंपेन डिसइफेशन कैंपेन चली हम जिसमें कहा गया कि ये जो सिटीजनशिप
अमेंडमेंट एक्ट है या फिर जो पाकिस्तान अफगानिस्तान और बांग्लादेश के माइनॉरिटीज हिंदू, जैन, क्रिश्चियंस,
सिख के लिए ये लाया जा रहा है। ये मुस्लिम्स के खिलाफ है। हम
कैसे मुस्लिम्स के खिलाफ है? अरे भाई अगर आप इंडिया में रहकर माइनॉरिटी राइट की बात करते हैं कि मुस्लिम्स के लिए एजुकेशन
होना चाहिए, राइट्स होने चाहिए, यह होना चाहिए या दलित्स के लिए, एससी, एसटीस के लिए होना चाहिए। वैसे ही उन देशों में जो
माइनॉरिटीज हैं उनके लिए ये है क्योंकि ऑलरेडी अगर आप डेटा स्टडी करेंगे 30-40 साल का हजारों ऐसी एप्लीकेशनेशंस आती हैं
रेफ्यूजी के हम हम चाहे वो पाकिस्तान में सिंधी हो चाहे वो बांग्लादेश में या बाकी जगह
क्रिश्चियंस हो अहमदिया हो वो चाहते हैं कि इंडिया इस द मोस्ट सिक्योर कंट्री और वहां पर अपनी जिंदगी
बसर करें। राइट? तो ये रियलिटी है। तो वहां पर एक डिसइफेशन कैंपेन चलता है कि बॉस मुस्लिमों
के खिलाफ ये प्रहार हो रहा है। कश्मीर में 370 होता है। उससे पहले और उसके बाद क्या माहौल बनता है कि ये
मुस्लिम्स के खिलाफ ह्यूमन राइट्स वायलेशन हो रहा है। पूरा डिसइफेशन हो रहा है। और ये डिसइफेशन चलाता कौन है?
दो ही है हम या तो आपके पाकिस्तान का आईएसआई है और
उनके नेटवर्क है पूरा जो जुड़ा हुआ है या इंडिया में कुछ ऐसे लोग हैं जो टूलकिट के तहत जो काम कर रहे हैं और मैं बार-बार कह
रहा हूं देयर इज़ अ डिफरेंस वन यू अपोज मोदी पॉलिटिकली व्हिच इज़ अब्सोलुटली करेक्ट एंड इट इज़ अ
प्राउड मोमेंट फॉर आवर डेमोक्रेसी कि भाई करते हैं और होना चाहिए राइट
होना चाहिए राहुल गांधी करते हैं आईल्यूट राहुल गांधी आल्सो कि बॉस आप पार्लियामेंट में करते
हैं आपका हक है करना है लेकिन लेकिन डोंट गेट कैरिड अवे जब ये बात होती है कि बॉस ये हो रहा है।
अब देखिए अभी ईरान के ऊपर भी जो अभी पूरा मसला चल रहा है। मैं अभी इजराइल से एक महीना बाद वहां से वापस लौटा हूं।
तो आई थिंक जयशंकर साहब ने एक पार्लियामेंट्री मीटिंग में कहा कि भाई हम पाकिस्तान की तरह दलाल नहीं है।
हम कि हम कहीं भी घुस जाए और मीडिएशन करें। आपको याद होगा जय कि जब अफगानिस्तान के
लिए मीडिएशन हो रही थी। अफगानिस्तान की डेमोक्रेटिक सरकार थी। हम्।
पाकिस्तान मीडिएट कर रहा था और अमेरिका था और दोहा में यह टॉक्स हो रहे थे। हम्।
उसके बाद क्या हुआ? पाकिस्तान में जो भी थोड़ी बहुत डेमोक्रेसी थी, महिलाओं का एजुकेशन था, हक
था, सब खत्म हो गया। तालिबान आ गई। अफगानिस्तान राइट।
हां। तालिबान आ गई पूरी तरीके से। और पाकिस्तान ने क्या किया? पाकिस्तान ने
अमेरिका को बोला, अरे कुछ नहीं होगा। आप हमारी बात तो मानिए। जो आप हमारी बात मानिए आप बिल्कुल आप सेफ
रहेंगे। सब कुछ होगा। एक सिस्टमैटिक एग्जिट होगा। उसके बाद जो विजुअल्स वहां से आए खतना विचलित करने वाले
अमेरिका के लिए मुझे लगता है कि इतना एंबरेसिंग सीन आजकल के युग में कभी नहीं हुआ होगा वियतनाम के
टाइम पर हुआ होगा उसके बाद अब यहां अफगानिस्तान में और अब ईरान में भी
हो रहा है जिसमें ट्रंप जो है बार-बार अब कह रहे हैं कि 5 दिन का मैं आपको टाइम देता हूं सीज
फायर 10 दिन का मैं आपको टाइम देता हूं सीज फायर अरे भाई अमेरिका अगर ग्लोबल पावर है और आप कहते हो कि आप ईरान को खत्म कर
दोगे करो ना तो ईरान जो है एकदम एकदम आंख में आंख देखकर अमेरिका को बोल रहा है कि भाई कोई
सीज फायर नहीं, कुछ नहीं। हम जंग जारी रखेंगे। तुम लड़ो जितना लड़ना है।
राइट? तो ये रियलिटी है कि बार-बार पॉलिटिकली इकोनॉमिकली एंड बाय यूजिंग थ्रेट्स लाइक
टेररिज्म पाकिस्तान हैज़ ट्राइड टू डिस्टेबलाइज इंडिया। और ये पॉलिटिकली भी होता है और आपने जो सवाल पूछा कि क्या
आईएसआई कभी कोशिश कर सकता है या कभी की होगी कि यहां पर इंडियन पॉलिटिशियन को किसी तरीके से ट्रैप किया जाए या अपने
इसमें लाया जाए हुआ होगा 100% हुआ होगा। अब वो कितने कामयाब हुए नहीं हुए ये तो हमारी इंडियन
एजेंसीज ही बताती है। राइट? आपने काउंट ऑफ फिट करेंसी की बात की। खानी ब्रदर्स जो कैरेक्टर्स दिखाए गए हैं फिल्म में वो
कैसे ऑपरेट करते थे। नंबर वन। नंबर टू कि इतने बड़े पैमाने पर अगर वो काउंटर फिट करेंसीज प्रोड्यूस कर रहे हैं तो उनको
प्लेट्स कहां से मिली? कैसे उनको ये चीजें मिलती है? देखिए सबसे पहले खरानी ब्रदर्स जो हैं
अगेन दे वर ऑपरेटिंग फॉर अ वेरी लॉन्ग टाइम और उनका जो है उनको पूरी तरीके से शह सपोर्ट पाकिस्तान आईएसआई का
मिलता रहा। पाकिस्तान आर्मी का मिलता रहा और जो अंडरवर है हम
पाकिस्तान में और उसमें इंडिया में भी अंडरवर्ड हो सकता है जो पूरी तरीके से उनको सपोर्ट कर रहा था और उनके जो है
कोरियर्स जो नॉर्थ ईस्ट के जरिए नेपाल के जरिए बाकी जगहों से बांग्लादेश के जरिए ये करेंसी जो है यहां लाते थे
अभी मुझे लगता है कि बहुत कम हो गया है अभी अभी भी हो रहा है अभी भी हो रहा है ऐसा नहीं है कि खत्म हो
गया पूरी तरीके से अभी भी हो रहा है और मुझे लगता है कि ये एक बहुत बड़ा कारण था डीमोनेटाइजेशन करने का अब अगेन सवाल उठा
सकते हैं कि आप डीममनेटाइजेशन सही था कि गलत था। आप कह सकते हैं कि भाई उसके बाद तो लोग परेशान हो गए। मैं भी लाइनों में
लगा। लोग भी लाइनों में लगे जो हमने फिल्म में दिखाया भी कि लोग लाइन में लगे हैं। बट लोगों को समझना पड़ेगा कि धुरंदर जो है
ये एक डॉक्यूमेंट्री नहीं है। धुरंधर जो है पहले तो आतंकवाद के ऊपर है। काउंटर टेररिज्म के ऊपर है। कोर्ट ऑपरेशन
के ऊपर है। ये डीमोनेटाइजेशन के ऊपर या बाकी चीजों के ऊपर डॉक्यूमेंट्री नहीं है। जिसमें हम
बताएं कि सही क्या है? गलत क्या है? वो हमारा रोल नहीं है। दिस फिल्म इज फॉर एंटरटेनमेंट पर्पस एंड
दिस इज फिक्शन इंस्पायर्ड बाय रियलिटी। तो एक सिनेैटिक एक्सपीरियंस के लिए जो ट्रू स्टोरीज हैं उनको फिक्शनलाइज किया
गया है। तो अगेन खनानी ब्रदर्स पूरी तरीके से काम करते थे। आई एम श्योर दे हैड एक्सेस इन
इंडिया एंड आई एम श्योर दे हैड एक्सेस इन द मिडिल ईस्ट। और कोई तो ऐसा पॉलिटिकल फिगर इंडिया में रहा होगा जिसने किसी
तरीके से उनकी मदद की होगी। अब ये तो अगेन इट इज़ अप टू द इंडियन एजेंसी टू इन्वेस्टिगेट फदर एंड अनरेवल दिस बट आई एम
प्रीटी मच श्योर दैट देयर वाज़ अ पॉलिटिकल फिगर हु
नोइंगली और अननोइंगली और डेलीबेटली हैज़ हेल्प्ड खनानी ब्रदर्स एंड द पाकिस्तान आईएसआई इन दिस प्रोजेक्ट
दैट्स अ बिग वन इट इज़ अ बिग वन बट दैट्स अ रियलिटी आल्सो बहुत चीजें ऐसी होती हैं जो सामने नहीं
आती बहुत चीजें ऐसी होती हैं जो पॉलिटिकली कॉम्प्रोम ाइज हो जाती हैं। बहुत चीजें इन
पे पर्दा लग जाता है। लेकिन ऐसी चीजें हुई है हिंदुस्तान में और बहुत ऐसा रिपोर्ट भी हुआ है। कई लोगों ने
इसके बारे में लिखा भी है। तो मैं लोगों का नाम तो नहीं लूंगा क्योंकि फिर डेफमेशन केस आ जाएगा और मेरा
वक्त बर्बाद होगा। बट आपको है पहले ऐसा? हां हां कई बार हुआ है। मतलब रिपोर्टिंग में तो होता ही रहता है।
मेरा एक पीडीपी के मंत्री थे हम अपने कश्मीर में किसी ने बीजेपी के किसी नेता ने कश्मीर के
ही उन्होंने चिट्ठी लिखी उस गवर्नर को और बोला कि ये करप्शन कर रहे हैं। ऐसा है वैसा है। तो मैंने उसके ऊपर स्टोरी की।
सिंपल स्टोरी उस चिट्ठी के बेसिस पे। तो मेरे खिलाफ डिफेमेशन नोटिस और अरेस्ट वारंट निकाल दिया।
और कई तीन चार साल बाद फिर जम्मू कश्मीर की हाई कोर्ट ने उसको कॉश किया और मेरे हक में जो है बहुत ही बढ़िया एक
वर्डिक्ट दिया जो अभी भी डेफमेशन केसेस जो जर्नलिस्ट के खिलाफ होते हैं उसमें कोर्ट होता है।
ऐसे ही बहुत सारे हैं मतलब वसुंधरा राजे और इनके ऊपर जो ललित गेट का पूरा स्टोरी चल रहा था उस वक्त डेफमेशन केस हुआ। बहुत
सारे ऐसे केसेस हुए हैं। तो ये तो चलता रहता है। इंडिया में क्या है कि जब भी कुछ ऐसा कुछ हो तो पॉलिटिशंस के पास ये
हथियार। इट्स अ ग्रेट टूल टू थ्रेटन समन। बट जर्नलिस्ट हु हैव बीन देयर फॉर क्वाइट सम
टाइम? दे डोंट गेट थ्रेटन। राइट राइट। दाऊद की बात करते हैं। हम
बहुत सारे अकाउंट्स में ये बताया जाता है कि दाऊद पाकिस्तान में पाकिस्तानी गैंगस्टर गैंगस्टर से ज्यादा पावरफुल है।
हाउ इज दैट पॉसिबल? मुंबई से गया हुआ गैंगस्टर कराची में कराची वाले गैंगस्टर से कैसे पावरफुल हो
सकता है? देखिए पाकिस्तान आईएसआई का मुझे लगता है बहुत सालों से लिंक रहा है दाऊद इब्राहिम के साथ जब से वो मुंबई में थे और
एक इमोशनल लेवल पे जो पाकिस्तान आई आईएसआई का प्रोजेक्ट रहता है टू डिस्टेबलाइज इंडिया
इसमें दाऊद की बहुत बड़ी भूमिका है चाहे वो बॉम्बिंग्स को लेकर हो मुंबई में चाहे वो जो भी एक्टिविटीज इंडिया में रही
पाकिस्तान आईएसआई की खासकर मुंबई में उसमें दाऊद का एक बहुत बड़ा रोल है और दाऊद जब यहां से दुबई गए यूएई में
उन्होंने शह ली और उसके बाद पाकिस्तान में परमानेंटली एस्टैब्लिश हो गए जो कि ऑफिशियली किसी पाकिस्तानी ने एडमिट नहीं
किया है। बट अनऑफिशियली अगर आप किसी से बात करेंगे सब बोलेंगे हां यहीं तो रहते हैं।
अब मैं आपको इसमें भी डिटेल्स बताऊं कि दाऊद इब्राहिम जो हैं अभी लोग उनको 30 या 40 साल पुरानी जो उनकी
इमेज है उससे पहचानते हैं। हम
लेकिन रियलिटी तो ये है कि वो अभी बीमार हैं और बेड रिडन है और बाहर जो है
निकल नहीं सकते। हम आई थिंक 2017 या 18 की घटना होगी। मैंने
अपना रिपोर्टर दाऊद के घर भेजा और हमारे पाकिस्तान का रिपोर्टर था। ये लोगों को पता नहीं है। पाकिस्तान में
पाकिस्तान में कराची में मैंने
आई थिंक क्लिफ्टन में उनका घर था या फिर डिफेंस हाउसिंग अथॉरिटी दोनों में से एक था। मेरी अभी याद नहीं है।
क्योंकि उनके तीन चार घर हैं वहां पर। जो मेरा डाटा है और ये सेंशंस जो हैं यूएन के और यूके के इसके तहत
डॉक्यूमेंटेशन में ये निकल के आया है। एक तो उनका घर है वाइट हाउस। हम ये बहुत बड़ा घर है जो इस पिक्चर में भी
आप अच्छे से देख गया है। ये अमेरिका वाला ट्रंप का वाइट हाउस नहीं है। ये दाऊद इब्राहिम का है।
ये सऊदी मॉस्क है एक क्लिफ्टन में कराची में वहां पर इनका है। दूसरा इनका घर है 37
नंबर स्ट्रीट 30 फेज पांच डिफेंस हाउसिंग अथॉरिटी कराची। हम इसके बाद एक और कराची में नूराबाद करके
जगह है जहां पर इनका एक ठिकाना है हम और 617 सीपी बेरार सोसाइटी ब्लॉक सात आठ कराची
तो ये चार हैं जो ऑफिशियली डेजिग्नेटेड एरियाज हैं एस पर यूएन लिस्ट एस पर यूके लिस्ट एंड एस पर पाकिस्तान आल्सो
पाकिस्तानी दिखाएंगे तो नहीं बट यहां पर है। इनफैक्ट एक वाइट हाउस अल वसल रोड जुमेरा दुबई में भी है। हम्
जहां पर बताया जाता है कि दाऊद रहते थे और डोंगरी मुंबई में तो उनका पुराना ठिकाना था ही।
तो रियलिटी यह है कि वो बेड रिडन हुए हैं। कुछ लोगों ने यह भी बोला कि उनकी टांग में जो है गैंगन हो गया था। उससे वो बेड रिडन
हो गए हैं। कुछ बोलते हैं कि दिसंबर 2023 में कुछ हुआ। हम
कुछ घटना घटी और उसके बाद वो पूरी तरीके से बेड रिडन हो गए। उनको हॉस्पिटल भी ले जाया गया कई टाइम से और अभी वो बेड पर ही
हैं। तो मेरे को याद है आज से तीन-चार साल पहले एक
व्यक्ति को नंबर मिला उनका लैंडलाइन हां तो उन्होंने वहां फोन किया तो पूछा कि
महिला ने किसी ने फोन उठाया तो वो पूछा कि दाऊद भाई हैं? तो उन्होंने बोला हां हैं।
और फिर कुछ उन्होंने पूछा तो उन्होंने फोन काट दिया। अच्छा तो ऐसा नहीं है कि इंडियन एजेंसीज को पता
तो है कि दाऊद कहां है हम
और जैसा कि मैंने आपको पिछली बार कहा था हम कि इंडियन एजेंसीज अगर ठान लें
हम तो कल का सूरज हाफिज सईद नहीं देखेगा और ये इंडियन एजेंसीज ने ही ठाना है
कि हाफिज सईद हो या फिर दाऊद इब्राहिम हो इनको एक साथ नहीं मारना इनको तड़पा तड़पा के मारना है वो तो यही हो रहा है
और यही आपको धुरंदर में भी एक ग्लिंस दिखेगा उज़ेर बलोच यह वो कैरेक्टर है जिसने सबसे ज्यादा वायलेंस मचाई लेयारी
में। कहा जाता है कि लेरी ने जितनी भी वायलेंस देखी लेरी अंडर वर्ल्ड में सबसे ज्यादा वायलेंस उज़र बलोच जब लेरी गैंग का
लीडर था तब हुई। अरशद पप्पू को मार के उसके सर को काट के उसके सर से फुटबॉल खेला था उसने और यह वीडियो वायरल भी हुई थी उस
समय पे और उसके बाद ही उसके ऊपर वारंट निकला। फिर वो भागा और ईरानी पासपोर्ट पे पकड़ा गया और फिर एक्स्ट्रा डाइट हो के
पाकिस्तान वापस आ गया। लेकिन उज़ैर बलोच इज़ अ वायलेंट पर्सन इज़ अ वायलेंट गैंग लीडर कैसा था और उस समय का अलयारे का माहौल
कैसा था? देखिए ये तो ये रियलिटी है। जैसा मैंने आपको बोला कि वर्चस्व जो है पूरी तरीके से
कराची में गैंगस्टर्स का चलता था। अब चाहे वो रहमान डकैत हो जो कसाईने मौत देता है। चाहे वो उज़ैर बलोच हो जिसने
फुटबॉल खेला सर के साथ या फिर अरशद पप्पू हो। तो ब्रूटलिटी के अलग-अलग लेवल्स हैं। वायलेंस के अलग-अलग लेवल्स हैं जो वहां के
लोगों ने जो पूरी तरीके से झेला है। आप अगर कराची के जो लोग हैं जो वहां के फॉर्मर मेयर हैं जो वहां के पॉलिटिशियंस
हैं जो वहां नहीं रहते अब यूके में रहते हैं या यूएस में रहते हैं क्योंकि वो अब और खुल के बात कर सकते हैं।
उनसे अगर आप बातचीत करेंगे वो आपको कराची का असली चेहरा बताएंगे कि कितनी ब्रूटिटी होती थी। कौन कैसे मारा
जाता था। लोगों के बीच में कैसे ओपनली जो है वायलेंस होती थी, मारा जाता था। तो यह तो एक रियलिटी है जो आपको दिखी है।
और इसमें दो पहलू हैं। एक उनका इंटरनल डायनेमिक्स है गैंगस्टर्स का जो पूरी तरीके से वहां पर
एक्टिव रहे हैं। और दूसरा है फॉरेन एलिमेंट्स का जो वहां पर इंक्लूड करते हैं। चाहे वो अफगान हो,
बलोच हो या बाकी जो नेबर्स हैं पाकिस्तान के वो वहां पर इनवॉल्व रहे हो। तो ऐसी तो सच्चाई है कि गैंगस्टर्स जो है ना चाहे वो
बॉम्बे में हो या कराची में हो या थाईलैंड में हो गैंगस्टर्स किसी का सगा नहीं है।
पैसों के लिए माल के लिए वो कुछ भी कर सकते हैं। राइट?
तो यही सच्चाई है कि वहां पर गैंगस्टर्स किसी ने इंट्रूड किया और अपना काम किया। बट यह भी सच्चाई है कि कराची ने एक बहुत
ही ब्रूटल फेस देखा है गैंग्स का आपस में बहुत ज्यादा जिसमें वायलेंस देखी गई है और
अब मुझे लगता है वो देखने को नहीं मिलता अब चेंज हो गया कराची बट अभी भी थोड़े बहुत वहां पर
गैंग्स हैं एक्टिव है आई थिंक वहां की पुलिस ने भी एक बहुत बड़ा मुहिम चलाया क्योंकि क्या हो रहा था कि उनकी इकनमी
पाकिस्तान की पूरी तरीके से डूब गई और कराची जब इकोनमिक हब है और वहां पर अब इतना ही नहीं है कि गैंगस्टर्स एक्टिव हैं
वो आप अभी पिछले कुछ सालों में देखिए और आपको स्टडी करिए।
2022 से ही बलोच जो है रेबल्स चाहे वो बलोच लिबरेशन ऑर्गेनाइजेशन हो या बाकी हो वो एकदम एक्टिव हो गई हैं। बहुत ज्यादा
पहले भी थी लेकिन पिछले तीन से चार साल में बहुत ज्यादा एक्टिव हुई हैं। और उन्होंने सुसाइड बॉम्बिंग्स की हैं।
कराची में चाइनीस को टारगेट किया है। चाइनीस काउंसलेट को टारगेट किया है। एयरपोर्ट के
बाहर जो है वहां पर सुसाइड बॉम्बिंग की है। महिलाएं जो पीएमए और पीएचडी हैं। जो पढ़ी लिखी
हैं। आप देखिए कितना ज्यादा ह्यूमन राइट्स वायलेशन वहां बलचिस्तान में लोगों के खिलाफ पाकिस्तान करता होगा कि एक एमए
पीएचडी है जो वहां पर सुसाइड बॉम्बिंग के लिए तैयार है। उसके बच्चे हैं उसके शौहर हैं बाकी लोग हैं। लेकिन वो सुसाइड
बम्बिंग करना चाहती है। तो ये एक दूसरा पहलू है वायलेंस का। भाई जिस हिसाब से बलोचों को दिखाया गया है
फिल्म में। बलोच शिरानी करके एक जो कैरेक्टर है जो आर्म्स एंड एमिनेशन सप्लाई करता है पाकिस्तानी गैंग्स को। कौन है ये
बंदा? ये कैरेक्टर कहां से आता है? है रियल लाइफ कैरेक्टर इंस्पिरेशन कौन है और इनके पास इतने सारे हथियार आते कहां से
हैं? तो बेसिकली बलचिस्तान में अकबर शहबाज मुक्त हैं जो बहुत ही रिस्पेक्टेड फिगर रहे हैं कई
सालों से और आई थिंक इफ आई एम नॉट रोंग 2006 के आसपास एक वाक्या रहा था
जिसमें परवेज मुशर्रफ ने आर्मी के साथ मिलके एक कॉनस्परेसी के तहत इनको मारा और एक अससिनेशन हुआ
और 2006 से 20 साल के हो गए हैं अब तो अकबर बुती का नाम जो है एकदम मुझे लगता है ऊपर है बलोच के लिए उसको अदर ऑफ़ द नेशन
वहां पर मानते हैं। अब मैं नहीं कह रहा कि यह रोल उन पर पूरी तरीके से बना हुआ है।
लेकिन बूचिस्तान में जो पूरा एक वर्चस्व रहा है, रिस्पेक्ट रहा है और रसूख रहा है। वो अकबर मुक्ति का रहा है। और एमिनेशन भी
अब मैं मेरे को नहीं पता कि कहां से वो अपना एमिनेशन लाते हैं। लेकिन बहुत हद तक उनका एमिनेशन वहां पर रहा है। इनफैक्ट
उन्हीं का आई थिंक ग्रैंड सन है। इफ आई एम नॉट रोंग। ब्रहदाग बुक थी हम
जो अभी स्विट्जरलैंड में है कई सालों से हमारी भी बात होती थी जब आपको याद होगा 2016 के आसपास प्रधानमंत्री मोदी ने पहली
बार बूचिस्तान का जिक्र किया था रेड कोर्ट रेडफोर्ट से और एकदम मुहिम छिड़ गई थी हर जगह
बलचिस्तान के नारे लग रहे थे राइट तो तब मेरी ब्रह्मदा गुप्त से बात होती थी मेरा इंटरव्यू भी किया उनका
तो वो स्विट्जरलैंड में है और उनका भी दिलचस्प ये है कि अकबर गुप्ति के बाद ये ब्रह्मदा गुप्ति को मारना चाहते थे
तो ब्रह्मदा गुप्त ने क्या किया ये फेक पासपोर्ट लेके अफगानिस्तान चले गए और अफगानिस्तान के रास्ते स्विट्जरलैंड
यूरोप आ गए और वहां पर एज अ रिफ्यूजी एज अ पॉलिटिकल अजाइलम उन्होंने ले लिया
तो अभी भी हजारों की तादाद में बलोच जो हैं वहां पर रह रहे हैं। अपनी मुहिम चला रहे हैं पाकिस्तान के
खिलाफ। लेकिन हजारों की तादाद में बलोच जो है बाहर भी रह रहे हैं। चाहे वो अमेरिका हो, यूरोप हो, यूके हो,
साउथ कोरिया हो, ऑस्ट्रेलिया हो और हर साल करीबन पांच से 10 बार पूरे साल में ये बहुत बड़े-बड़े प्रदर्शन करते हैं
पाकिस्तान के खिलाफ। और मुझे लगता है कि देखिए पाकिस्तान में बलचिस्तान सबसे बड़ा एरिया है।
हम लेकिन सबसे छोटी पॉपुलेशन है। राइट?
तो इसलिए उनके लिए बहुत दिक्कत है पाकिस्तान का जो है मुकाबला करना। लेकिन डू यू थिंक बलोच पाकिस्तान पॉलिटिक्स में
भी एक्टिव है? हां बिल्कुल एक्टिव है ना? नेशनल असेंबली में है। आई थिंक इक्कादुक्का बलोच है
और वहां पर जो खुद की असेंबली है वहां पर भी बलोच हैं। इट्स जस्ट लाइक इन अ वे कश्मीर आल्सो
कि कश्मीर में अलग-अलग आईडियोलॉजी के वहां नेशनल कॉन्फ्रेंस है। पीडीपी है। बाकी लोग या बीजेपी से तो सबका वास्ता नहीं रहेगा।
उनका खुद का एजेंडा है। खुद का पॉलिटिक्स है। तो वहां पर भी ऐसा है। कुछ लोग नेशनलिस्ट भी हैं। कुछ लोग चाहते
हैं कि बलूचिस्तान को फ्रीडम मिलना चाहिए। कैन वी डिकोड बलचिस्तान एंड पाकिस्तान इशू? बलूचिस्तान को फ्रीडम क्यों चाहिए और
पाकिस्तान बलूचिस्तान को हरास टॉर्चर प्रताड़ित क्यों कर रहा है? देखिए बहुत ही स्ट्रेटेजिकली लोकेटेड है
बलूचिस्तान है ना अपने वेस्टर्न पार्ट में पाकिस्तान में वहां पर ईरान का बॉर्डर पड़ता है और बलूचिस्तान का 1947-48 के
आसपास ही एक वहां पर खान ऑफ़ कलत होते थे और उनके तहत खान ऑफ़ कलत को फ्रीडम मिल गया था। था जब ब्रिटिश कॉलोनी से इसको इंडिया
पाकिस्तान हट गई तो खान ऑफ़ कलत को अलग एरिया मिल गया था अपना करने का। लेकिन जैसे कबालियों को पाकिस्तान ने यहां
भेजा कश्मीर वैसे ही उन्होंने अपनी आर्मी कलात में वहां पर भेजी और फोर्सफुली वहां पर कब्जा
कर दिया। ओके। तो बचिस्तान तब से अपनी जो है मुहिम चला रहा है कि भाई हम बलोच जो हैं हमारा एथ
एथनिकली, कल्चरली, हिस्टोरिकली कोई भी आपके साथ नाता नहीं है। तो आप क्यों हमारे ऊपर कब्जा करना चाहते
हैं? तो जो बलोच लोग हैं वो कहते हैं कि हमारे यहां जो है नेचुरल रिसोर्सेज बहुत ज्यादा हैं।
तो तभी आप देखते हैं पाकिस्तान ने चाइना को एक फुला छूट दिया हुआ है। एक तो चाइना पाकिस्तान इकोनमिक कॉरिडोर के तहत और जो
नेचुरल रिसोर्सेज हैं अलग-अलग जगह पे गैस प्लांट्स हैं बाकी चीजें वहां पर चाइनीस इन्वेस्टमेंट है।
जो गदर पोर्ट भी स्ट्रेटेजिकली लोकेटेड है बूचिस्तान में। वहां पर भी चाइनीस इन्वेस्टमेंट है।
और तभी आप देखते हैं कि बलोच जो अटैक कर रहे हैं उनका मेन टारगेट तो पाकिस्तान आर्मी और फ्रंटियर कोर है ही।
लेकिन मेन टारगेट चाइनीस भी है क्योंकि वह कहते हैं कि हमारा हमारी धरती हमारे नेचुरल रिसोर्सेज हमारे लोग और आप
चाइना से आके यहां पर कब्जा कर रहे हैं और पाकिस्तान आपको प्लैटर में दे रहा है और अब क्या हो रहा है
चाइना को तो पाकिस्तान ने यूज़ किया 15 साल अब चाइना वो समझे ना समझे क्योंकि उनको चाइना पाकिस्तान इकोनमिक कॉरिडोर पे
कोई रिटर्न ऑफ इन्वेस्टमेंट नहीं मिला लेकिन अब आप देख रहे हैं रिसेंटली आपने देखा होगा
शबाज शरीफ और आसिम मुनीर जाते हैं ट्रंप से मिलने ऑपरेशन सिंदूर के बाद दो तीन मीटिंग्स
होती हैं एक मीटिंग में आपने देखा वो एक बक्सा उनको दिखाते हैं जिसमें नेचुरल रिसोर्सेज हैं पूरी तरह के।
अब पाकिस्तान में नेचुरल रिसोर्सेज कहां है? बलूचिस्तान में। तो वो चाहते हैं कि चाइना
को तो चलो दे दिया जो दे दिया अभी तक। अब अमेरिका आए और जो नेचुरल रिसोर्सेज हैं, क्रिटिकल मिनरल्स हैं
वो पूरी तरीके से उनको दे दे। ये डील है पाकिस्तान और अमेरिका के बीच में। और एवज में ये लोग क्या करेंगे?
जो अमेरिका चाहेगा स्ट्रेटेजिकली। चाहे वो बेसिस चाहेगा इस्लामाबाद में लाहौर में रावलपिंडी
मेंचिस्तान में वो देंगे पब्लिकली डिक्लेअ नहीं करेंगे अभी तक भी यही हो रहा है आप देखिए ना जब ऑपरेशन सिंदूर हुआ तब अचानक
से एक चीज वायरल हुआ कि क्या पता रावलपिंडी में या कोई ऐसा लोकेशन था कोई हिल्स थे वहां पर जो है कुछ हमला हुआ
अमेरिका के जेट्स आने लगे कुछ हुआ मुझे नहीं पता सच है कि झूठ है लेकिन कुछ तो हुआ
कोई तो अमेरिका का इंटरेस्ट वहां पर था जिसको अटैक हुआ या अटैक हो सकता था और अमेरिका ने तब इंटरवीन किया। अब अमेरिका
कहता है कि नहीं पूरे जंग में सात से आठ विमान गिर गए थे। पाकिस्तान के प्राइम मिनिस्टर ने बहुत
बड़ा दिल दिखाया। ये किया। मिलियंस ऑफ लोग जो है न्यूक्लियर वॉर हो सकता था। ये हो सकता था।
सच्चाई तो ये है कि ऑपरेशन सिंदूर में इंडिया ने पूरी तरीके से पाकिस्तान की हालत टाइट कर दी
थी। आप जितने भी एयरबसेस देखें, कमांड कंट्रोल सेंटर्स देखें खत्म थे। और यही है ना
बार-बार जो मैंने पिछली बार भी आपको बताया कि इंडियन मीडिया में या इंडियन सोशल मीडिया में क्रिटिसाइज होता था गवर्नमेंट
और आर्मी और एयरफोर्स कि भाई आपने बालाकोट किया आपने सर्जिकल स्ट्राइक किया। फोटो कहां है?
वीडियो कहां है? एविडेंस कहां है? पार्लियामेंट में भी पॉलिटिशियंस ने ये बोला
बट सच्चाई तो ये है कि इस बार इंडियन आर्मी और एयरफोर्स और बाकियों ने ऐसा काम कर दिखाया कि पाकिस्तानी खुद वीडियो बना
रहे हैं। वो कह रहे हैं अरे भाई बचाओ अल्लाह। इसी तरीके से बचा लो यार। तो आप रावलपिंडी से लेकर मुजफराबाद कोटली से
लेकर बाकी जगहों पर देख रहे हैं कैसे हमले हुए और पाकिस्तान खत्म हो गया। अब जब ऐसी हालत हुई एयर डिफेंसेस पाकिस्तान के खत्म
हो गए। वो अमेरिका के पास गए कि भाई ये तो न्यूक्लियर अटैक कर देंगे। अब तो खत्म हो जाएंगे हम बचाओ।
तो तब जाके ये जो है डीजीएमओ लेवल टॉक्स हुए और खत्म हुआ। इसमें ऐसा कुछ नहीं है कि विमान गिर गए और इंडिया जो है कोई वीक
पड़ गया था। इंडिया बिल्कुल वीक नहीं था। और इंडिया के पास बहुत आई थिंक काउंटर स्ट्रेटजीस थी
कि आगे अब क्या अटैक आप कर सकते हैं। राइट? और उसमें पाकिस्तान आर्मी बहुत हिल जाती।
राइट? इंडिया और पाकिस्तान की आर्मीज़ की कोई कंपैरिजन ही नहीं है। जैसे आपने लास्ट
टाइम बताया कि पाकिस्तान इज़ नो मैच फॉर इंडियन आर्मी। जिस हिसाब से हमारा माइट है, हमारे पास जो वेपन्स है, जो साइज है
हमारी आर्मी की। लेट्स कंपेयर आईएसआई एंड रॉ। अगर इंटेलिजेंस लेवल पे या उनके ऑपरेशंस के
लेवल पे कंपेयर करना हो, तो हाउ वुड यू कंपेयर आईएसआई विथ रॉ। पहले तो आपको समझना पड़ेगा कि इंडिया एक डेमोक्रेसी है। हम
पाकिस्तान डेमोक्रेसी नहीं है। पाकिस्तान एक शगूफा सामने लिया हुआ है कि भाई हम डेमोक्रेसी हैं बट रावलपिंडी
पाकिस्तान आर्मी और आईएसआई सब चलाती है। हुकूमत से लेकर जो किराने की दुकान है वो सब पाकिस्तान आर्मी चलाती है। ये एकमात्र
आर्मी है जो इंडस्ट्री की तरह चलती है। पाकिस्तान इज अ बिज़नेस दैट आर्मी रंस इज व्हाट इट्स अ बिज़नेस हाउस कंप्लीटली इसमें
सीईओ है। इसमें प्रेसिडेंट है, इसमें चेयरमैन है। इसमें कोई डेमोक्रेसी का दूर-दूर तक कोई निशाना नहीं है।
राइट? दूसरा आपको समझना पड़ेगा कि आईएसआई हैज़ नथिंग टू लूज़।
पाकिस्तान आर्मी हैज़ नथिंग टू लूज़। इनके हजार लोग मरे, इनके दो लोग मरे। इनके 5ज़ लोग मरे हैं। इनको बांग्लादेश में जो इतनी
बड़ी शिकस्त मिली जब बांग्लादेश क्रिएट हुआ। इनकी जो बेइज्जती हुई, इनकी जो पतलून उतरी
उसके बाद भी इनको शर्म नहीं आती। आज भी ये कहते हैं कि नहीं नहीं ऐसा तो कुछ नहीं हुआ था। ये तो जीत गए अरे भाई
वीडियो है। आप रो रहे हैं। आप झुक रहे हैं। आप बंदूक छोड़ रहे हैं। आप अपनी कमीज उतार रहे हैं।
इससे ज्यादा शर्मनाक क्या हो सकता है? कि आपको ऐसे जलील होना पड़ा इंडिया से इंडिया से इंडिया
इंडिया बट एनीवेज। सो द रियलिटी इज कि भाई आईएसआई और राव का
पहले तो कोई कंपैरिजन नहीं है। हम आईएसआई इज रनिंग लाइक अ टेररिस्ट
ऑर्गेनाइजेशन। हम्म आईएसआई इज रनिंग ऑन पाकिस्तानस फॉरेन पॉलिसी दैट इज़ बेस्ड ऑन अटैकिंग इंडिया टू
डिस्टेबलाइज इंडिया टू यूज़ प्रॉक्सी वॉर अगेंस्ट इंडिया कंटीन्यूअसली। तो आईएसआई चाहेगा
कि चाहे वो पंजाब हो, चाहे वो जम्मू कश्मीर हो। किसी तरीके से आतंकवाद बढ़ाया जाए। किसी तरीके से जो है इंटरनल जो लॉ
एंड ऑर्डर है वो बढ़ाया जाए। इसका मतलब है कि जो दंगे होते हैं दंगे और उकसाए जाए। चाहे वो दिल्ली में हो, मुजफ्फरनगर में
हो, कहीं पर भी हो। वो चाहते हैं और दंगे हो। आतंकवाद से ज्यादा जो है दंगे हो क्योंकि उससे ऐसा लगता है कि नहीं यह तो
ग्राउंड पे हो रहा है। इसमें तो एक्सटर्नल कोई फैक्टर नहीं है। बट बहुत ऐसी कोशिश होती है। मणिपुर
बार-बार सालों से आईएसआई की ये रही है कि वो मणिपुर और नॉर्थ ईस्ट में किसी तरीके से उकसाए सेपरेटिज्म जो खत्म हो रहा
है जो आपने पिछले 15 साल से देखा कि
लोग जो है मेन स्ट्रीम में आ रहे हैं। नॉर्थ ईस्ट का पहली बार मैंने देखा पिछले 10-1 साल में इतना ज्यादा नाम जो है मेन
स्ट्रीम में आ रहा है। वरना मुझे मैं एडमिट करता हूं कि वी एस इंडियंस यूज्ड टू आई वुडंट से डिस्क्रिमिनेट बट
उनको एकदम ही आइसोलेट किया हुआ था। नेगलेक्ट किया हुआ था। जो अब जो है पिछले 15 साल में चेंज हुआ है। अभी भी बहुत कुछ
करने की जरूरत है जो इंडिया करेगा। बट पाकिस्तान बार-बार ये कोशिश करता है कि नॉर्थ ईस्ट पे अटैक किया जाए। किसी तरीके
से इंटरनल स्ट्राइक बढ़ाई जाए। पैसा हथियार मुहैया कराए चाइना के रास्ते या कहीं से म्यांमार से या कहीं से। तो ये
बार-बार होता है। उसके बाद आईएसआई की ये स्ट्रेटजी है कि एक तो आप के2 प्लान चलाएं कश्मीर और खालिस्तान इसको रिवाइव किया
जाए। आप देखिए पिछले पांच छ साल में कश्मीर में भी उनको हालत टाइट हो गई है। जब से 370 हुआ
तो पहले क्या होता था? दंगे होते थे। स्टोन बेल्टिंग होती थी। पत्थरबाज आते थे। आप देखते थे कि यासीन मलिक और गिलानी और
मीरवाइज का रसूख चलता था। अब सब खत्म हो गए हैं। गिलानी अल्लाह को प्यारे हो गए। यासीन
मलिक तिहार को प्यारे हो गए। वो तहार जेल में ही अपनी जो पूरा काटेगा मीरवाइज उमर फारूक की खुद की जान की लगी हुई है
क्योंकि वो मॉडरेट सेपरेटिस्ट है उसको लगता है कि जो हार्ड लाइनर है वो उसे मार देंगे तो वो अटैक हुआ अपने घर से बाहर
नहीं निकलता हां तो ये रियलिटी है उसके बाद इंडिया का जो आरएडब्ल्यू है
वो कोशिश करता है कि हमारे जो स्ट्रेटेजिक इंटरेस्ट हैं हर चीजें हैं उनको प्रोटेक्ट किया जाए।
हमारी इंटेलिजेंस जो है स्ट्रांग हो। हमारे जो बाकी डेमोक्रेटिक नेशंस हैं उनके साथ तालमेल जो है बहुत स्टंग हो ताकि आज
अगर इंडिया के ऊपर कोई हरकत होती है कोई इंटेलिजेंस कोई अटैक करने की कोशिश करता है तो अमेरिका हो यूके हो यूरोप हो या
बाकी देश हो वो हमें सतर्क करें। आप देखिए ना सऊदी के साथ यूएई के साथ हमारा कितना जबरदस्त सिक्योरिटी कोऑपरेशन और
इंटेलिजेंस कोपरेशन है। अब देखिए बार-बार लोग बात करते हैं सऊदी का और पाकिस्तान का जो अभी एक बिल हुआ
जिसमें कहा गया कि पाकिस्तान पे अगर अटैक होगा तो सऊदी जॉइ करेगा। उन्हें सपोर्ट करेगा। सऊदी पे अटैक हुआ तो पाकिस्तान जॉइ
करेगा। अब आज मुझे जय बताइए कि ईरान ने सऊदी पर हमला किया। रियाद पे हमला हुआ। आरम को जो वहां पर ऑयल
रिफाइनरी है उसमें हमने जो पाकिस्तान कहां है? कहां है? राइट?
मक्का मदीना का जो गढ़ है सबसे बायस प्लेस है। हम हम
सऊदी वहां पे अटैक हुआ है। कहां है पाकिस्तान? पाकिस्तान तो कह रहा था सऊदी हमारा ब्रदर ब्रदरली मुल्क है।
यूएई हमारा ब्रदरली मुल्क है। उनके जो पूर्व प्रधानमंत्री है वो तो ड्राइवर की तरह उनके जो क्राउन प्रिंस है
उनको गाड़ी से लेके गए थे एयरपोर्ट से। बट कहां है पाकिस्तान? आज सऊदी अमेरिका को कह रहा है कि आप ईरान
के खिलाफ हमला जारी रखो। हमें ये जंग खत्म नहीं करनी है। हम हम और पाकिस्तान कहीं है ही नहीं। अब
पाकिस्तान कह रहा है कि हम मीडिएट कर रहे हैं। अरे कौन सा मीडिएट आप करोगे बॉस?
आप मीडिएट तो कोशिश करो कि आपका जो एक स्ट्रेटेजिक वो है वो आगे चले। जैसे आपने अफगानिस्तान में किया और उसके बाद उनको ही
मुंह की खानी पड़ी। अफगानिस्तान में पाकिस्तान ने कोशिश की कि तालिबान जो है वो उनकी बी टीम की तरह
काम करें। हम और अब तालिबान और पाकिस्तान के बीच में जंग हो रहा है।
और कई महीने ये चलता रहेगा क्योंकि आपने पश्तून पे हमला किया है। आपने पश्तून जो लोग हैं पख्तून जो हैं
उनप हमला किया है और उनको बोला है कि आप हमारे हिसाब से चलो। अगर आप हमारे हिसाब से नहीं चलोगे तो आपके
ऊपर हमला होगा। और अभी हस्पताल पे आपने देखा कितना बड़ा हमला हुआ। 400 लोग मारे गए। लोग मारे
250 लोग इंजर्ड हुए हैं वहां पे। अब आपको लगता है कि तालिबान इनको छोड़ेगा। हम् हम्
और पाक यह तो अफगान तालिबान और पाकिस्तान तालिबान राइट
मुझे तो नहीं लगता मुझे लगता है आसिम मुनीर इतने बड़े हाफ़िज़ हैं जिनका मतलब है कि कुरान उनको कंठस्थ है
हम मतलब कुरान वो हाफ़िज़ हैं तो वो जानते हैं पूरी कुरान और जब भी वो अपने लोगों को
आर्मी को ये करते हैं तो बोलते हैं इंडिया जो है ये हिंदू लोग हैं। इनके खिलाफ हमें जिहाद करना है। पहलगाम से
पहले उनका वीडियो वायरल हुआ था। राइट? तो अब वो हाफिज जो है मुझे लगता है अपनी कब्र जो है खुद खोद रहे हैं।
इंडिया के खिलाफ तो जो किया हम और कोशिश कर रहे हैं अमेरिका के भी उनका साथ हो, चाइना भी उनके साथ हो, बाकी लोग
भी साथ हो। बट धीरे-धीरे जो है पूरा इनका मुखौटा जो है उतर रहा है। इजराइल ने पहली बार पहली बार इजराइल ने पिछले 30 35 साल
में कहा है दैट वी डू नॉट एक्सेप्ट पाकिस्तान आर्मी एज पार्ट ऑफ़ द इंटरनेशनल स्टेबलाइजेशन फोर्स इन गाज़ा। जो गाज़ा में
एक नई फोर्स ट्रंप ला रहे हैं। बोर्ड ऑफ़ पीस बनाया है और कह रहे हैं कि अलग-अलग 510 देश हैं, 15 20 देश हैं जो वहां पर
अपने आर्मी भेजेंगे गाज़ा में एक सिक्योरिटी पैरामीटर बनाने के लिए।
उसमें पाकिस्तान आर्मी भी थी। इजराइल ने बोला हम नहीं आने देंगे। पाकिस्तान आर्मी को बोला घर पे रह हम नहीं
आएंगे। और वो क्यों? क्योंकि हमास और जो लश्कर है तइबा है और जो पाकिस्तान आहिस्ता है वो मिल गया है।
राइट? और पिछले चार सालों में खासकर पिछले तीन सालों में बार-बार हमास के जो नेता है पाकिस्तान विजिट कर रहे हैं। बार-बार
मीटिंग कर रहे हैं। और ये भी मैं आपको बताऊं पता नहीं पिछली बार आपको बताया था कि नहीं पहलगाम के
करीबन एक महीने पहले मेरे एक बहुत ही सीनियर ऑफिशियल इजराइली के साथ दिल्ली में डिनर हुआ और उन्होंने
मुझे मैंने आमास के बारे में बात की तो उन्होंने बोला हिंदुस्तान में कुछ बड़ा होने वाला है। आप सतर्क रहिए हम
अब मुझे नहीं पता कि उनको पता था पहलगाम होने वाला है। क्या उनको पता था लाल किला का कुछ होने वाला है? बट उनको कुछ तो पता
था। तो इजराइल का यह रुख जो है पहली बार मैं देख रहा हूं कि बदला है।
क्योंकि मुझे याद है आज से करीबन 10 साल पहले मैं एक इजरायली सीनियर डिप्लोमेट जो एंबेसडर्स उनका इंटरव्यू करने गया उनको
मैंने पाकिस्तान पे सवाल पूछा। हम्म और वो नाराज हो गए मुझसे। गुस्सा हो गए।
वो इंटरव्यू खड़े हो गए और निकल गए वहां से। उन्होंने बोला तूने मुझे पाकिस्तान पे सवाल क्यों पूछा?
क्योंकि इजराइल पाकिस्तान में मध्यस्थता या फिर इंटरफेरेंस नहीं करना चाहता। जैसे हम हमास के ऊपर इंटरफेरेंस नहीं करना
चाहते। हमारा जो फॉरेन पॉलिसी है बिल्कुल क्लियर है। स्ट्रेटेजिक टाई हैं इजराइल के साथ। लेकिन जब ईरान आता है तो हिस्टोरिक
टाई हैं। लेकिन पेलेस्टाइन के लोगों के हक में भी हम बोलेंगे कि टू स्टेट स्यूशन होना चाहिए और हम ह्यूमैनिटेरियन एड वहां
भेजेंगे। तो वैसे ही वो पाकिस्तान उनको पता है कि पाकिस्तान आतंकवादी देश है। लेकिन उसमें पड़ना नहीं चाहते। लेकिन आज
पाकिस्तान का एंबेसडर खुद मुझे कहता है कि हम पाकिस्तान की आर्मी बिल्कुल गाज़ा में बर्दाश्त नहीं करेंगे।
दिस से समथिंग और इतना ही नहीं ऑपरेशन सिंदूर में इजरायली जो इक्विपमेंट है वो यूज़ हो रहा
था। हम मैंने नितिन याहू का इंटरव्यू किया पिछले
महीने अगस्त में। हम हम मैं जेरूसलम गया और वहां पर प्रधानमंत्री कार्यालय में मैंने उनको पूछा
कि ऑपरेशन सिंदूर में जो अह इस्तेमाल हो रही थी चीजें चाहे वो मिसाइलें हो चाहे वो रॉकेट्स हो एयर
डिफेंस हो या बाकी चीज़ हो इसमें इजराइली भी इक्विपमेंट है। तो नितिन याू इजराइली प्रधानमंत्री ने मुझे कहा कि इजराइल ने
जितना भी इक्विपमेंट इंडिया को दिया वो ऑपरेशन सिंदूर के दौरान बहुत सक्सेसफुल रहा।
इससे बड़ा एडमिशन क्या होगा? हम और इतना भी नहीं यह भी कहा कि हमारा जो हमास के साथ जंग रही है
हम या हमारा जो गाज़ा में अभी ऑपरेशन रहा है उसमें इंडिया से जो हमारी हेल्प मिली है
उसके लिए हम थैंक यू बोलते हैं। इतना ही नहीं अभी जब मैं पिछले एक महीने इजराइल में था। मैं तीन दिन के लिए गया था
और एक महीने के लिए फंस गया वहां पे तो मैं वहां से लगातार रिपोर्ट कर रहा था। हम हम
तो वहां पर एक बेड शेमिश करके जगह है। जेरूसलम और टेलवी के बीच में पड़ती है। हम
तो मैं फॉरेन मिनिस्टर गदियों सार का इंटरव्यू करके आ रहा था वापस। तो मेरी जो महिला एक कैमरा पर्सन थी उन उन्होंने जो
लोकल थी उनको मैंने बोला कि बेचमिश कितना दूर है? उन्होंने बोला 10 मिनट दूर। तो मैंने बोला चलते हैं। वहां पर डिस्ट्रक्शन
बहुत हुआ है। तो वहां से रिपोर्ट करना लाजमी है। तो हम लोग वहां गए।
जैसे बेशमिश पहुंचा हमने बहुत ज्यादा सिक्योरिटी देखी वहां। तो सिक्योरिटी देखी तो हमने सोचा कि यार जाना इतना सिक्योरिटी
क्यों है? तो उसने भी मुझे बोला कि ना तौर पे ऐसे अटैक साइड पे इतना सिक्योरिटी नहीं होता। तो सिक्योरिटी ने उनसे आधा घंटा चेक
वेक किया फिर जाने दिया अंदर। जैसे ही मैं अपना वॉक थ्रू जो है वहां पर कैमरा के लिए रिकॉर्ड करना शुरू किया पीछे मैंने देखा
नितिन या वो मोयना कर रहे थे पूरी जगह का। हां
तो मोयना कर रहे थे तो उसके बाद अपनी इजली मीडिया के 10-15 लोग थे। उनको अपनी बातचीत की। हब्रू में बातचीत की। उसके बाद मैं
गया तो मैंने अंग्रेजी में उनसे पूछा कुछ कि विल यू स्पीक इन इंग्लिश? आई एम आई एम फ्रॉम इंडिया। तो उन्होंने शायद सुना नहीं
या मेरे को इग्नोर कर दिया। चले गए। फिर मोयना करने लगे। फिर जब अपनी गाड़ी की तरफ वो गए तो मैंने फिर से चिल्लाया कि मैं
इंडिया से हूं और कल रात को जो आपने मोदी जी से फोन पे बातचीत की है इसके बारे में कुछ बोलेंगे। जैसे ही
उन्होंने मोदी का नाम सुना वो यू टर्न नहीं वो वीडियो है। वो यू टर्न करके वापस आते हैं चलते हुए मेरे पास।
और कहते हैं ये कब की बात है? ये अभी मार्च सेकंड या थर्ड की बात है। आई
थिंक मार्च सेकंड की बात है। हम तो उन्होंने मुझे कहा कि बॉस मेरी कल रात बात हुई प्रधानमंत्री मोदी
से। मैं कंफर्म करता हूं और मैं उनका शुक्रिया गुजार शुक्रगुजार हूं
और मैं ये कहना चाहता हूं कि इजराइल के लोग भारत के लोगों को बहुत प्यार करते हैं। बहुत रिस्पेक्ट करते हैं। बहुत
सम्मान देते हैं। और हमारा जो बहुत कोऑपरेशन है बहुत स्ट्रांग है।
और फिर बोला कि मैं डिटेल्स नहीं दे सकता क्या बातचीत हुई। बिलकुल बातचीत हुई और मैं प्रधानमंत्री मोदी का बहुत-बहुत
शुक्रगुजार हूं। यह मेरी कैमरा पर आया और कोई वहां पर इंडियन मीडिया या बाकी लोग नहीं थे। उसके बाद एक और वाक्या हुआ जो
मैं आपको जरूरी है यहां पर बातचीत करना कि प्रोपगेंडा कितना होता है और खासकर पाकिस्तानी प्रोपगेंडा
ये निर्या और मेरी जो बातचीत हुई इसके करीबन 10 दिन के बाद या 15 दिन के बाद अचानक से एक पाकिस्तानी न्यूज़ पोर्टल ने
खबर डाली हम कि आदित्य राज कॉल जो है इंडियन पत्रकार
हैं ये इजराइल में है और इन्होंने नितिन याू की लोकेशन लीक कर दी है अच्छा
और इसके तहत नेतन याू को मार दिया गया है। हां रूमर्स चली थी नेतन आई नो मोर बहुत जबरदस्त रूमर्स चला और मेरे ऊपर वो
डालने का ये चलाया कि इसने ये लास्ट बंदा था जिसने रिपोर्ट किया और पीछे दिखाया नेतन याू है और उसके तहत ईरान ने मिसाइल
दागी और मार दिया। अब उन बेवकूफों कार्टून नेटवर्क वालों को ये नहीं पता चला कि बॉस पहले तो मैं लाइव
रिपोर्टिंग नहीं कर रहा था। मैं रिकॉर्ड कर रहा था और जब रिकॉर्ड करके एक घंटे बाद मैंने भेजा तब तक नेतन याू
अपने घर मैं अपने घर किसी को कुछ नहीं पता। हम्। और उसके यह भी जब उनका नहीं चला, यह बहुत
वायरल हुआ। इनफैक्ट इतना वायरल हुआ कि ईरान की जो ऑफिशियल स्टेट मीडिया है, उन्होंने भी यह
खबर चलाई और बोला इजराइली जर्नलिस्ट। अच्छा। इजराइली जर्नलिस्ट इज़ लीकिंग इन।
ओके। उसके बाद जब दो दिन ये चलता बहुत चला। बहुत चला। मेरे परिवार लोग बहुत लोग
परेशान हुए और यहां से लोग मुझे पूछने लगे कि अरे तुमने क्यों लीक की लोकेशन? मैं। अरे भाई मैं क्यों करूंगा लीक? तो उसके
बाद दो दिन बाद उन्होंने चलाया कि मोसाद ने और इजरली पुलिस ने मुझे गिरफ्तार कर लिया।
ओ ये खबर चलाई। इतना प्रोपेगेंडा इतना प्रोगें जबरदस्त प्रोपेगेंडा और लोग मेरे परेशान सब पूछ रहे हैं अरे भाई तुम अरेस्ट
हो गए हो क्या क्या हो गया वहां के जो डिप्लोमेट्स हैं वो मुझे पूछने लगे कि भाई क्या हो गया सब ठीक तो है
तो ये एक सिस्टमैटिक प्रोपेगेंडा चलाया गया ये पाकिस्तान से शुरू हुआ पाकिस्तान पाकिस्तान इज़ वै शार्प इन रनिंग
दिस काइंड ऑफ़ प्रोपोगेंडा एंड मीडिया आल्सो बाय इट सीना फॉर श्योर ये उन्होंने चलाया ईरान की ऑफिशियल मीडिया
चलाने लगी यहां पर एक पॉलिटिकल पार्टी है इंडिया में उनके जो ₹2 वाले आईआईटी ट्रोल्स हैं जो बेवकूफ है दिमाग से पैदल
हैं। बिल्कुल अकल से पैदल हैं। उन्होंने भी यह शुरू कर दिया कि आदित्य राज कॉल जो है लीक कर रहा है
इनफेशन। उनमें से कुछ अकाउंट हैं जो अभी बैन हुए हैं विद्ल् हुए हैं। एक दो अभी भी एक्टिव हैं।
तो ये सच्चाई है। आप देखिए ना आपका खुद का हिंदुस्तान का पत्रकार है। वहां पे काम कर रहा है।
और उसके खिलाफ भी आप ऐसे चला रहे हैं। मेरी जान पर हमला हो सकता था। कोई प्रवोक करके कुछ भी कर सकता था।
लेकिन ये जो मतलब मैं गाली नहीं देना चाहता। बट ये रियलिटी है ऐसे लोगों की। यह मानसिकता है। इतने तुच्छ गटर लेवल के यह
लोग हैं। हम एनीवेज मैंने ऐसे बहुत पिटिकल बेनिफिट भी क्या है? मतलब कोई
पिटिकल बेनिफिट इसमें तो ही होगा। कितना करोगे? उसके बाद अब ये बहुत प्रोपेगेंडा चलाने
लगे कि एआई वीडियोस हैं नितिन याू के। उसकी छह उंगलियां हैं। कॉफी नीचे नहीं गिर रही।
बिकॉज़ ऑफ़ द लाइट। आई सॉ दैट वीडियो वैरी केयरफुली। मतलब बॉस मैं उन जगहों पे गया जहां पर
नितिन याू ने वीडियो रिलीज़ किया। सब ने मेरे को बताया कि नितिन याू यहां आया था। नितिन याू ने पब्लिकली प्रेस कॉन्फ्रेंस
भी की उसके बाद। उसके बावजूद ये लोग कहने लगे कि एआई ये भी तो ये है प्रोपगेंडा।
अब जो जंगे हैं वो आप बैटल फील्ड में और बाकी जगहों पे तो देखेंगे लेकिन साइबर वर्ल्ड का जो
प्रोपगेंडा है आप देखिए ना इतना ये प्रोपगेंडा चला कि नितिन याू भी मजबूर हुआ कि मैं पब्लिकली
दो तीन बार आऊं प्रेस कॉन्फ्रेंस लोगों को दिखाऊं कि भाई मैं जिंदा हूं। कोई अटकलों पे मत जाइए।
राइट। तो ये सारा पाकिस्तान से शुरू हुआ था। पाकिस्तान से शुरू हुआ। ईरान ने इसको आगे
बढ़ाया। हम् हम् और यहां पर जो एक पॉलिटिकल पार्टी के आईटी कुच्चे लोग हैं उन्होंने क्योंकि काम तो
है नहीं इलेक्शन जीत नहीं रहे हैं तो घर बैठे क्या करेंगे
तो यही कर रहे हैं हमारी दाऊद वाली बात अधूरी रहेगी आपने वहां पे अपना रिपोर्टर भेजा फिर क्या हुआ
तो रिपोर्टर भेजा करीबन 17 या 18 की बात हो गई है और आई थिंक कि डीएचए या क्लिफ्टन या वाइट
हाउस कहीं तो भेजा था और उन्होंने क्या किया रिपोर्टर भी यंग था पैशनेट था वहां का लोकल पाकिस्तानी तो वो
वहां पर गया और उसने अपना मोबाइल कैमरा या बाकी जो कैमरा था पूरा ऑन किया पूरा वो चलाया और हमने उसको बोला था लाइव ही रख तो
उसने लाइव ही रखा और हमने पूरा रिकॉर्ड कर लिया और चलाया फर्स्ट विजुअल्स ऑफ दाऊद हाउस
पूरा चलाया चैनल में और इमीडिएटली उसको जो है आई थिंक शाम तक उसको पकड़ लिया
और आईएसआई ने अगले 24 घंटे तक अपने पास रखा और
उसको बोला कि भाई तुम्हारी मां है तो हमें पता है तुम्हारी मां कहां रहती है। अच्छा और पूरा उसको ऐसा धमकाया यह किया वो किया
तो उसने बोला कि यार नहीं मैं इंडियन चैनल के लिए काम करता हूं उन्होंने मुझे बोला था यहां आने के लिए यह वो
बट बहुत उसको धमकाया और 24 घंटे बाद उसको जो है छोड़ा गया तो ये रियलिटी है कुछ ना कुछ तो वो छुपाना चाहते हैं वहां पे
एक पॉइंट ब्लैंक क्वेश्चन पूछता हूं मैं आपको क्या दाऊद इब्राहिम जिंदा है देखिए सच्ची बात तो मैं आपको बिल्कुल नहीं
बता सकता क्योंकि मुझे भी नहीं पता कि दाऊद जिंदा है या नहीं है और ये
सिर्फ दाऊद की बात नहीं है हम मसूद अजर हम
जो जैश-ए-मोहम्मद का आतंकवादी है जिसके परिवार वालों को मारा गया था ऑपरेशन सिंदूर में
हम हम मुझे बहुत ज्यादा शक है कि मसूद अज़र मर चुका है।
अच्छा क्योंकि मसूद अज़र जो है मैं उसको बहुत क्लोजली ट्रैक करता था क्योंकि मसूद अज़र
अपने आप को जर्नलिस्ट भी कहता था। अच्छा और मसूद अज़र एक अल कलाम वीकली करके उर्दू
में एक बयान निकालता था हर हफ्ते और उसी का स्पोक्सपर्सन सैफुल्लाह उसका ऑडियो निकालता था। हम हम
यह कई सालों से बंद हो गया है। ओ 2019 या 2020 के आसपास से मुझे नहीं लगता
यह ऑडियो आया है। और 19-20 के बाद ही मुझे नहीं लगता मसूद
अज़र भी सामने कहीं पे आया है। एक आध बार उसका ये ऑडियो आया है। बट वो पुराना भी हो सकता है।
तो इसलिए मुझे बहुत शक है। न्यूज़ में भी नहीं आता। न्यूज़ में भी नहीं आता। कहीं पे मसूद अज़र
की बातें बहुत होती हैं। लेकिन वो खुद नहीं आता। जैश-ए-मोहम्मद की बातें होती है। उनका टेरर सब कुछ चलता है। लेकिन ये
तो आईएसआई चलाता है ना। जैश-ए-मोहम्मद मसूद अज़र बाकी तो इरिलेवेंट है
और बहुत ऑपरेजन सिंदूर के बाद भी इन्होंने बेसेस अपने चेंज किए हैं जो बावलपुर में थे या बाकी जगहों पे थे
उसको खैबर पुतूनवा की तरफ लिया है थोड़ा इंटीरियर में इंडिया से दूर ताकि जो है इंडिया के पास जो पंजाब में
जगह हैं वो और इंटीरियर में ले जाए तो मुझे लगता है एक पाकिस्तान के फॉरेन मिनिस्टर थे उन्होंने एक बयान दिया था 18
या 19 के आसपास कि मसूद अजर बीमार है और हस्पताल में है मिलिट्री हॉस्पिटल में है। उसके बाद कोई नहीं आया।
अच्छा। तो कोई बड़ी बात नहीं है कि मसूद मर गया हो और पाकिस्तान डर के मारे रिलीज़ ना कर
रहा हो ताकि उनकी जो पब्लिसिटी लेवल है वो कम हो जाए। क्योंकि मसूद उज़र का खौफ है लोगों को भाई
जैश-ए-मोहम्मद का चीफ है। यूएन डेजिग्नेटेड टेररिस्ट है। कुछ भी कर सकता है।
तो अगर बता दें कि उसको मर मार दिया या मर गया या हेल्थ रीज़न से मर गया। कुछ भी तो उनकी जो है वो पीआर जैश-मोहम्मद का
पीआर एकदम खत्म हो जाएगा। राइट? और ऐसे ही दाऊद का है कि दाऊद का एक अंडरवर्ड डॉन का जो इमेज है वो 40 साल
पुराना फोटोग्राफ है वो मैच देखते हुए उसके बाद कुछ आया ही नहीं है तो पाकिस्तान के फेवर में ही जाएगा वो
रिलीज ही ना करें इंडिया को हमेशा लगे कि भाई दाऊद वहीं रह रहा है जिंदा है राइट राइट ओके आपके जो ओपनिंग क्रेडिट्स
हैं फिल्म के जहां पे आपका नाम है आदित्य राज कॉल एज रिसर्च कंसलटेंट इज़ वन मोर नेम दिव्या एस वो कहीं पे नहीं दिखते कौन है
ये देखिए आपने इसे इसे नोटिस किया। बहुत ही कम लोग हैं जिन्होंने इसे नोटिस किया है।
अ दिव्या एस इस फिल्म के लिए उतने ही महत्वपूर्ण है जितना पाकिस्तान में अननोन गन मैन।
तो कुछ सिक्योरिटी या सेंसिटिविटी के कारण वो जो है सामने नहीं आते। लेकिन दिव्या एस का इन स्टोरीज में
एक्यूरेसी में सिक्योरिटी ऑपरेशंस में, कोव्ट ऑपरेशंस में बहुत बड़ा योगदान रहा। हम
और हम तीनों ने आदित्य मैंने और दिव्या ने मिलके जो है पूरे स्टोरी बोर्ड को देखा समझा परखा और दिव्या ने तो बहुत मतलब बहुत
जगह शूट में भी मदद कराई कि ऐसी कोई सेंसिटिव लोकेशनेशंस थी लद्दाख हो गया या पंजाब हो गया जहां पर शूट में डिफिकल्टीज
आ रही थी तो दिव्या वो हमारे एक अननोन खिलाड़ी थे जिन्होंने बहुत ज्यादा मदद की तो आई होप फ्यूचर में वो आ पाए लेकिन अभी
मुझे लगता है कुछ कारणवश जिनका नाम भी शायद दिव्या ना हाउ इज व्हाट आई एम फीलिंग नाउ
यू नेवर नो यू नेवर नो ओके आई वांट टॉक अबाउट 261 जब 261 हुआ तब
व्हाट वाज़ अ फॉर्म एंड शेप ऑफ रॉ अ और तब हम क्यों कुछ नहीं कर पाए क्यों नहीं किया नंबर वन क्वेश्चन दैट एंड देन आई विल कम
टू व्हाट अजीत डोवाल जी डड आफ्टर दैट व्हेन ही बिकम द एनएसए सो लेट्स फर्स्ट टॉक अबाउट 261
देखिए 261 वाज़ आई थिंक इंडियास बिगेस्ट इंटेलिजेंस फेलियर आई हैव नो डाउट्स इन सेइंग दैट जस्ट लाइक
पुलवामा आपका बहुत बड़ा एक इंटेलिजेंस नेटवर्क है ह्यूमन नेटवर्क एज वेल एज टेक्निकल
नेटवर्क और जब आपके पास कुछ ऐसे अंदेशा है थोड़ी बहुत इंटेलिजेंस है कि कुछ होने वाला है तो तब तो आपको एटलीस्ट आप बोलते
हैं ना कि कोशिश करके अगर हारे तो समझ आता है। अगर आपने कोशिश ही नहीं की तो मतलब आपके ऊपर तो सवाल खड़ा हो जाता
है। तो 2611 में यही हुआ। मेरे को पूरा पता है कि जो महिला वहां पर एक कंट्रोल रूम में
आईबी हेड क्वार्टर्स में बैठी हुई थी जो सुन रही थी और कश्मीरी में बातचीत हो रही थी आतंकवादियों के बीच में वो इसके बारे
में बातचीत कर रहे थे कि मुंबई में या अपना जो वेस्टर्न कोस्ट है वहां पर कहीं पे कुछ बहुत बड़ी गतिविधि होने वाली है
अगले कुछ घंटों में और उसके बाद भी कुछ नहीं हुआ और हमने इतनी कैजुअल्टीज देखी अगले तीन
दिन वहां पर उसके बाद भी वो जो हमारे एनएसए थे उस वक्त शिव शंकर मेनन उन्होंने एक किताब लिखी जिसमें उन्होंने यह जिक्र
किया कि मिलिट्री जो है और जो इंटेलिजेंस है इंडिया की उन्होंने ऑप्शन दिया था सरकार को
कि लश्कर तयबा का जो हेड क्वार्टर्स है मुरीद के पाकिस्तान में हम उस पे अटैक कर सकते हैं। उसको रेस टू द ग्राउंड खत्म कर
सकते हैं। मेस सुनाबूत कर सकते हैं। लेकिन तब की सरकार ने एक पॉलिटिकल कॉल लिया कि हम अटैक नहीं करेंगे। हम रिवेंज
नहीं लेंगे और हम जो है पाकिस्तान के साथ अपने बुरे ताल्लुकात नहीं करना चाहते। स्ट्रेटेजिक
टाइल्स हमारे जो है रीजनली खराब हो जाएंगे। एक वो था इंडिया और एक आज था इंडिया।
अब मैं ये किसी की वाहवाही नहीं करना चाहता। कोई पॉलिटिकल प्रज़ नहीं करना चाहता। बट बेसिक है बॉस कि अगर आपके ऊपर
आतंकवादी हमला होता है और अगर आप चुप रह रहे हैं तो अगली बार तो वो दो गुना आतंकवादी हमला
करेगा। राइट? और यही हुआ हमारे साथ भी। अब कश्मीर में
जब कश्मीरी पंडितों के साथ आतंकवादी हमला हुआ आप चुप रहे। हम
आज तक जिनजिन आतंकवादियों ने कश्मीरी पंडितों को मारा है उनके खिलाफ कोई सजा नहीं हुई है।
इंक्लूडिंग यासीन मलिक, बिट, कराटे और बाकी लोग आप अगर 90 में जो हमले हुए हैं हिंदुओं को आप शरणार्थी बना दिया। हिंदुओं
को नहीं छोड़ा। आप उस पर आज भी कारवाई नहीं कर पा रहे हैं। हम
आज तो आपकी सरकार 12 साल से है। आपको एटलीस्ट एक कमीशन का गठन करना चाहिए था इन्वेस्टिगेट करने के लिए। आप वो तो करिए।
आप देखिए वो नहीं हो रहा। मैं दाद देता हूं कि आपकी काउंटर टेररिज्म पॉलिसी बहुत स्ट्रांग है।
चाहे दिल्ली के लाल किले पे भी हमला हुआ जो पिछले 14 साल में पहली बार हुआ है। राइट।
14 साल में दिल्ली में कोई आतंकवादी हमला नहीं हुआ। और ये पहली बार हुआ।
फॉर एव्री अटैक देयर इज़ ऑलवेज सम ऑफ़ द अदर इंटेल। इंडिया का इंटेलिजेंस नेटवर्क इतना बड़ा है। बिकॉज़ हर एक अटैक के बाद कुछ ना
कुछ न्यूज़ आती है कि इसकी Intel तो थी। थोड़ी बहुत इंटेल तो थी। थोड़ा बहुत अंदेशा था कि ऐसा कुछ होने वाला है। डू यू थिंक
आवर इंट आवर इंटेलिजेंस नेटवर्क इज़ सो स्ट्रांग कि हर एक अटैक के पहले कुछ ना कुछ तो Intel या कुछ तो मिल ही जाता है कि
ऐसा कुछ होने वाला है। देखिए जैसा कि मैंने आपको बोला हमारा इंटेलिजेंस बहुत स्ट्रांग है।
हां आर्टिकल 370 के बाद एक बहुत बड़ा झटका लगा क्योंकि हमने इंटरनेट बंद कर दिया पूरा करीबन एक डेढ़ साल और उसके बाद जो
हमारा ह्यूमन इंटेलिजेंस था वो बहुत वीक हो गया जम्मू कश्मीर में। लेकिन हमारा ह्यूमन इंटरेस्ट और ह्यूमन इंटेलिजेंस और
टेक्निकल इंटेलिजेंस बहुत वास्ट है। बहुत वास्ट है। और इतनी एजेंसीज हैं तो ऐसा नहीं है कि कुछ छूट जाए। हम
लेकिन कश्मीर आपको देखना पड़ेगा एक बहुत बड़ी जगह है। हम
जंगल बहुत बड़े हैं, पहाड़ हैं। टेरेन बहुत खराब है बहुत इलाकों में। वहां पर एक सिग्निफिकेंट पपुलेशन है रेडिकल्स की जो
ओजीब्ल्यूस हैं ओवर ग्राउंड वर्कर्स जो लश्कर तबा हिज मुजाहदीन जैश मोहम्मद को मदद करते हैं
तो इंटेलिजेंस पहलगाम से पहले भी था हम कि भाई आतंकवादी इस जंगल के आसपास कहीं
घूम रहे हैं लेकिन वो जंगल आप मान लीजिए 25 30 40 50 किलोमीटर लंबा है। आप कैसे वहां पर ढूंढेंगे
अनलेस आपके पास कुछ ऐसा औजार हो या कोई ऐसा बंदा हो जो आपको एक्सैक्ट लोकेशन दे तो ये इंटेलिजेंस था कि कुछ आतंकवादी का
एक ग्रुप है जो कई दिनों से यहां घूम रहा है कुछ कर सकता है लेकिन उसके अलावा कुछ नहीं है
तो यू हैव लिमिटेड इंटेलिजेंस ऑन व्हिच यू हैव टू ऑपरेट एट टाइम्स वो भी एक तरीके से इंटेलिजेंस फेलियर है
बट यू टू लिव विद इट राइट आई वांट टू टॉक अबाउट द माइंडसेट
ऑफ द आईएसआई हेड्स और आईएसआई मेजर्स एंड जनरल्स जो मेजर इकबाल बताए गए या उनके फादर बताए गए। उनका जो माइंडसेट जो जिहादी
माइंडसेट दिखाया गया है कि मैंने हिंदुस्तानी की गर्दन काट के मुशरफ के दस्तरखाने पे रखी थी। दूसरे हिंदुस्तानी
की गर्दन लटकाऊंगा। मैं मुरीद के की मीनार पे। तो डू यू थिंक ये मजहबी जिहाद है वहां का या फिर वो बिजनेस जिहाद है? क्योंकि
मैं मैं अभी किसी से मिला लंदन में पाकिस्तान से ही थे वो। उन्होंने बोला कि पाकिस्तान इज़ अ बिज़नेस दैट आर्मी रंस।
आईएसआई उनका सेल्स ऑफिस है। आईएसआई कास्टेंटली थ्रेट क्रिएट कर क्रिएट करते रहता है। जिसकी वजह से आर्मी को
एक्टिव रहना पड़ता है। एंड बिकॉज़ ऑफ़ दिस आर्मीज़ बिज़नेस रंस। और जितने भी जनरल्स और मेजर्स वगैरह होते हैं वहां से रिटायर हो
के कहीं ना कहीं यूरोप में सेटल हो जाते हैं। बीच में तो कहीं पे फैक्ट्रीज बन रही थी कुछ ऐसे इलाके में जहां से बहुत सारे
रिक्रूट्स आते हैं आर्मी में। तो फैक्ट्रीज़ बंद करवा दी गई क्योंकि अल्टरनेट एंप्लॉयमेंट ऑप्शंस ना मिले उनको
और उनको आर्मी ही जॉइ करनी पड़े। तो दे रन आर्मी लाइक अ बिज़नेस। तो ये मजहबी जिहाद है उनका या बिनेस है? व्हाट
डू यू थिंक? दोनों है। पहले तो आपको यह समझना पड़ेगा जय कि इंडिया का जो इतिहास है या भारत का
जो इतिहास है ये आप कहां से शुरू करेंगे? आप ऋग्वेद में जाएंगे। आप पुराण में जाएंगे। आप हमारे रामायण
महाभारत में जाएंगे। है ना? आप उसको स्टडी करेंगे। पाकिस्तान का इतिहास कब से शुरू होता है?
हम 1947 से है। क्योंकि उससे पहले अगर वो जाएंगे तो वो भी
ऋग्वेद, रामायण और महाभारत के चंगुल में फंस जाएंगे। और पाकिस्तान के स्कूलों में जो इतिहास आज
पढ़ाया जाता है वो 1947 से पढ़ाया जाता है। उसमें भी ये कहा जाता है कि ये हमारी फतेह
है कि कैसे पाकिस्तान बना, एक इस्लामी मुल्क बना और हमने जो है इतनी बड़ी कामयाबी हासिल की। जिन्ना ने इतनी बड़ी
कामयाबी हासिल की। हम्म। तो वहां पर रियलिटी ये है जो मजहब की आप बात कर रहे हैं ना वो मजहब एकदम दिमाग में
कूट-कूट के उनके भरा गया है कि आपका इतिहास 1947 से है। उससे पहले आपका इंडिया से कोई लेना देना नहीं था। खत्म बात कोई
सेकुलरिज्म नहीं, कोई महात्मा गांधी नहीं, कोई हमारा हिंदू इतिहास नहीं, कुछ भी नहीं। कोई सिविलाइजेशन नहीं, कुछ नहीं। हम
तो वो एनगेंड है कि आपका आप एक इस्लामिक कंट्री है। आपका इस्लामिक आईडियोलॉजी है। आपका जिहाद है। आपकी कुरान है। वही आपको
पढ़ाया जा रहा है। हदीस है वही आपको पढ़ाया जा रहा है। एक और डिस्टर्बिंग विजुअल मैंने देखा।
पाकिस्तानी इलीट्स व्यूअर्स थे जो फिल्म देख के दुबई में दुबई में या कहीं पे फिल्म देख के निकले। और वो बोल रहे थे एंड
दी इलिट्स। हां मतलब बहुत वेल टू टू फैमिली से आते हुए दिखते थे। और वो बोल रहे हैं कि मेजर इकबाल वापस आएगा। हम वापस
आएंगे। एक ऐसा बंदा जो जिहादी दिखाया गया है जो बोलता है कि हम हम हिंदुस्तानी औरतों को
कौड़ियों के दाम बेचेंगे। भारत के टुकड़े-टुकड़े करेंगे। इतना खून बहाएंगे और पाकिस्तानी इलिट्स जो पढ़े लिखे लोग
हैं वो बोलते हैं कि मेजर इकबाल वापस आएंगे। यहां पे बहुत सारे लोग बोलते हैं ना कि वहां की आवाम को प्रॉब्लम नहीं है
भारत से। बट ये तो कुछ उल्टा ही दिख रहा है। अब ये वही है ना जिसकी जैसी पैदाइश होगी
जिसकी जैसी अपब्रिंगिंग होगी वो वैसे ही इंस्पिरेशन देखेगा अपना। पाकिस्तान का कोई बंदा दुबई में है, फिल्म देख रहा है। उसके
लिए इंस्पिरेशन आईएसआई है या आतंकवादी है या हाफिज सईद है या मसूद अज़र है। इंडिया में अगर कोई फिल्म देकर बाहर निकलेगा उसके
लिए विवेकानंद से लेकर महात्मा गांधी तक हम लाल बहादुर शास्त्री से लेकर अभी तक के
जितने भी हमारे महारथी हैं और बिंदु तक हम सब होंगे। है ना? तो ये एक स्पष्ट डिफरेंस
है इंडिया और पाकिस्तान के बीच में। पाकिस्तान का रेडिकल इस्लामिस्ट माइंडसेट जो रहा है खासकर इंडिया के खिलाफ,
अफगानिस्तान के खिलाफ वो उसको डूब रखा है पूरी तरीके से। उनकी इकॉनमी डूबी है। उनका पॉलिटिक्स डूबा है। उनकी सिक्योरिटी डूबी
है। लेकिन उनके जो ओवरऑल एक सोसाइटी का एक कैरेक्टर होता है वो खत्म हो गया है।
उनके लिए कोई ऐसा फिगर ही नहीं है जो उनको इंस्पायर कर सके। है ना? कोई आपके पास इंडिया में हजारों
कोई कमी है। आपके एक्टर से लेकर, जर्नलिस्ट से लेकर, पॉडकास्टर से लेकर मतलब हर वर्ग में हजारों लोग हैं जो आपको
इंस्पायर कर सकते हैं। हर दिन आपकी एजुकेशन सिस्टम इतनी स्ट्रांग है। कंपटीशन देखिए एजुकेशन में कितना है।
आपके इंजीनियर से लेकर साइंटिस्ट से लेकर एआई में चीजें हो रही हैं। जो अमेरिका में भी एआई में चीजें कर रहे हैं वो इंडियन
है। हम्म। जो टॉप आईटी की कंपनीज़ हैं, जितने भी डिस्ट्रप्टर्स हैं आजकल के युग में, उसमें
मैक्सिमम सीईओस और जितने भी इन्वेस्टर्स हैं, वो इंडियंस हैं। हम
पाकिस्तान का कौन है? पाकिस्तान इज़ अ ग्लोबल हब ऑफ टेररिज्म इंडस्ट्री।
इंडिया इज़ ग्लोबल हब ऑफ इनोवेशन। है ना? नए डिसरप्शन टेक्नोलॉजी में हो रहे हैं। तो पाकिस्तान के साथ तो डिफरेंस ये
डिफरेंशिएट करना है। ये तो दूर-दूर तक मतलब हम अपनी बेइज्जती कर रहे हैं। मतलब ये तो ऐसी कौम है। मतलब इट्स वै
अनफॉर्चूनेट और बहुत ऐसे लोग हैं जो प्राइवेटली आपसे मानेंगे भी कि यार देखो हमारे देश का क्या हाल हो गया
है। पब्लिकली बोलेंगे तो उनको कोड़े पड़ेंगे। अजीत दोल सर का जो कैरेक्टर दिखाया गया है
फिल्म में या कोई भी कैरेक्टर जो अजित सर से इंस्पायर्ड हो या उन पे बेस्ड हो ही ऑलवेज सीम्स टू हैव एनप अपर हैंड बीट अ
सिचुएशन नेगोशिएशन कोई ऑपरेशन हो वो हमेशा दुश्मन से दो कदम आगे रहते हैं। तो कैसे कोई बंदा इतना इनविंसिबल हो सकता है? कैसे
कोई मुद्दा इतना सक्सेसफुल इतना शार्प हो सकता है? आप तो बहुत बार उनसे मिले हैं। उनके साथ काम भी किया है। तो व्हाट मेक्स
हिम सो इन्वंसिबल? देखिए आई थिंक इट्स ऑल अबाउट योर कैरेक्टर। इट्स ऑल अबाउट योर पर्सनालिटी।
इट्स आल्सो ऑल अबाउट हाउ ग्राउंडेड यू आर। तो मिस्टर डोवाल हैज़ बीन दैट पर्सन। जो पूरी तरीके से ग्राउंडेड रहे हैं। ही
अंडरस्टैंड्स द पोजीशंस, पर्सेक्टिव्स ऑफ़ थिंग्स एंड ही इंटरेक्ट्स विद एवरीबॉडी। ऐसा नहीं है कि वो सिर्फ पुलिस वालों से
इंटरेक्ट करेंगे या करेंगे। हर तबके के लोग से जो है इंटरेक्ट करते हैं और उनका जो एक इन डेप्थ अंडरस्टैंडिंग है चीजों को
लेकर वो अलग लेवल का है। वो भी एक ऐसे व्यक्ति हैं जो सिविलाइजेशन में बिलीव करते हैं।
हिंदू सिविलाइजेशनल सनातन धर्म में बिलीव करते हैं पूरी तरीके से। और बहुत सारी स्पीचेस हैं। इसमें मैं ऐसा
कोई एक्सपर्ट ओपिनियन नहीं आपको दे रहा। आप YouTube पे जाइए और जितने भी उनके एनुअल लेक्चर्स होते हैं वो आप सुनिए।
तो वो आपको बताएंगे कि इंडिया को वो कैसे देखते हैं। आगे विज़डम का ऑलवेज रेफरेंस रहता है थोड़ा
बहुत। बहुत बहुत विज़डम उनका रहता है और बहुत ही उनका मतलब मैं क्या बोलूं जो ओवरऑल पर्सनालिटी है बहुत ही एक फ्रेंडली
है और नरम दिल का है उनका इमेज जो है जेम्स बॉन्ड का है लेकिन अगर आप उनसे इंटरेक्ट करेंगे एक तो वो बहुत शार्प है
जब आपसे बातचीत करेंगे अगर कोई इंपॉर्टेंट चीज है वो खुद जो है नोट्स लिखेंगे इस ऐज में भी आई थिंक ही अबव 80 नाउ
84 और तब भी वो पूरा नोट्स बना रहे हैं सब कुछ कर रहे हैं सब कुछ लिख रहे हैं और
लोगों की मदद करते हैं। साइलेंटली लोगों की मदद करते हैं। कोई उसमें वो नहीं है। और आज भी मैंने उनको अभी इजराइल में देखा।
कैसे थे? इससे पहले ओमान में थे, जॉर्डन में थे तो प्रधानमंत्री के साथ जा रहे हैं। और मैं तो बार-बार ये कहता हूं कि
सरकार के लिए भी ये डिफिकल्ट होगा टू फिल इन हिज शूज। बिकॉज़ हिज़ इमेज इज़ सो बिग नाउ। एंड हु विल
रिप्लेस हिम। देयर इज़ नोबडी हु कैन रिप्लेस हिम। इफ यू आर टू ब्रीफली डिस्क्राइब हिज कंट्रिब्यूशन इन
स्ट्रेंथनिंग इंडियन इंटेलीजेंस एनकाउंटर टेररिज्म। हाउ डु यू ब्रीफली डिस्क्राइब हिस कंट्रीब्यूशन? आई थिंक मिस्टर अजीत
डोवाल हैज़ ब्रॉट अ कंप्लीट पैराडाइम शिफ्ट व्हेन इट कम्स टू इंटेलिजेंस एजेंसीज हियर इन इंडिया हाउ दे ऑपरेट हाउ दे थिंक एंड
हाउ दे ऑपरेट एंड दैट मींस दैट यू कैन बी डिफेंसिव टू अ लेवल हम
बट वन यू हैव टू बी ऑफेंसिव व्हेन द टाइम कम्स एंड यू हैव टू टेक अ कॉल एंड मेक थिंग्स हैपन
एंड दैट मींस कि आप 30 साल 40 साल 50 साल से कह रहे हैं कि 370 कोबोगेट करना है। हम
उसके बाद पॉलिटिकल कॉल ली जाएगी, डिप्लोमेटिक कॉल ली जाएगी। लेकिन अल्टीमेटली तो सिक्योरिटी को एस्टैब्लिश
करना है ऑन ग्राउंड। एंड सिक्योरिटी को इंटेलिजेंस कौन देगा? सिक्योरिटी को ओवरऑल नेशनल सिक्योरिटी
एडवाइजर ही मॉनिटर करेगा। तो आप देखिए जम्मू कश्मीर में जो 370 हुआ अजीत डोवाल हिमसेल्फ वेंट ऑन ग्राउंड ही
स्पेंट अ वीक देयर। देन ही वेंट आउट ही हैड टू गो फॉर फॉरेन विजिट देन ही केम अगेन।
दैट सेज़ अ लॉट अबाउट हिज कैरेक्टर। तो कोविड जब हो रहा था ही वास मॉनिटरिंग एवरीथिंग कि आईटीबीपी क्या कर रहा है
आर्मी क्या कर रही है पुलिस क्या कर रही है बाकी लोग क्या कर रहे हैं और उसके बीच भी जब मेरे को प्रॉब्लम आई मैं कोविड के
दौरान मेरे अंकल जो है पूरी तरीके से बीमार पड़ गए थे मैं बहुत हर जगह मैं खुद वालंटियर कर रहा था हेल्प कर रहा था लोगों
की मुझे नहीं पता था कि मेरे परिवार को भी ऐसी स्थिति आएगी सो वन डे ऐसा हुआ कि मेरे अंकल बहुत बीमार पड़े हैं ही वास इन ह मिड
70ज और वो भी इंटरेस्टिंगली आईबी के लिए काम करते थे बहुत साल पहले। तो
अब मैंने हर हस्पताल फोन कराया। हर जगह दरवाजा खटखटाया कहीं मिला नहीं। और ये सेकंड वेव था जो एकदम पीक
तो कहीं हॉस्पिटल में जगह नहीं, कुछ नहीं। तो मैंने हर जगह मैसेज पहुंचाया कि भाई कुछ हेल्प हो जाए, कुछ नहीं, कहीं से कुछ
नहीं। और कई घंटे बीत गए। मैं रो रहा था अपने कमरे में बैठ के। कुछ नहीं हो पा रहा था। तो अचानक मुझे इनके डोल साहब के
पीपीएस का फोन आया। तो उन्होंने मुझे बताया कि डवाल से बात करना चाहते हैं। तो मैं फोन पर आया तो बोला अरे कॉल तुमने
बताया नहीं तुम्हारे अंकल की तबीयत खराब है। तो मैंने बोला नहीं बोला तुमने मुझे क्यों नहीं बताया? मैंने बोला नहीं मतलब
ऐसे कैसे मैं आपको बताता बोला नहीं इन्होंने मेरे साथ काम किया है। मैंने बोला हां कई साल पहले इन्होंने 2004 2005
में आपके साथ काम किया है। बोला क्या स्थिति है? मैंने बोला बेड रिडन है तो डॉक्टर्स बोल रहे हैं कि अर्जेंटली
हॉस्पिटल करना है बट कहीं जगह ही नहीं है। बोला कोई बात नहीं मैं अभी कराता हूं। तो आईटीबीपी हॉस्पिटल में इमीडिएटली उनको
शिफ्ट कराया और उनकी जान बच गई। 15 दिन तक वो वहां पर थे एंड ह लाइफ वास सेव। थैंक्स टू मिस्टर डोवाल। और इसके बाद मैं करीबन
कुछ महीने तीन या चार महीने बाद डोवाल साहब से मिलने गया। अ तो मैंने हाथ जोड़े और बोला कि आई एम
वेरी ग्रेटफुल। तो बोला नहीं ये तो परम धर्म जैसे यहां पर धुरंदर में एंड में आता है बलिदान परम धर्म
वैसे ही उन्होंने बोला कि नहीं ये तो मेरा धर्म था ये तो मुझे करना था
वाह और ये मेरी कहानी नहीं है ऐसे कई लोगों की उन्होंने जो है साइलेंटली मदद की है और कर
रहे हैं। सो हिज कैरेक्टर इज़ अनदर लेवल। हिज अंडरस्टैंडिंग इज़ अनदर लेवल। आईएसआई तो खौफ खाता होगा उनसे।
आप देखिए है ही एक जो इमेज उनका जेम्स बॉन्ड का है ओवरऑल। हां। तो आईएसआई कुछ भी बोल ले सामने उनको
गालियां दे उनको कुछ भी अटैक करे बट रियलिटी है कि वो कहीं ना कहीं तो डरे हुए हैं।
कहीं ना कहीं उनको लगता है कि ये जो एनएसए इंडिया के बैठे हुए हैं ये हर चीज मॉनिटर करते हैं।
आदित्य भाई ये जब कोवर्ड ऑपरेटिव्स वापस आते हैं अपने मिशनंस कंप्लीट करके तब वापस अपनी फैमिली के साथ इंटीग्रेट हो पाते हैं
क्या? बिकॉज़ मेंटली बहुत टॉर्चर हुए होते हैं। उन्होंने ऐसी-ऐसी चीजें देखी हुई होती हैं जो शायद हम इमेजिन भी नहीं कर
सकते। इतनी ब्रूटिटी, इतना वायलेंस, ऐसी सिचुएशन, ऐसा माइंडसेट इन लोगों के बीच में रहना, उन दरिंदों के बीच में रहना।
वहां से वापस आके क्या वो अपने फैमिली के साथ रेगुलर नॉर्मल लाइफस्टाइल जी सकते हैं क्या? या फिर वो अजित दोल बन जाते हैं या
फिर कुछ और ही करते हैं? नहीं, बहुत डिफिकल्ट होता है। हम पिक्चरें बना लें, हम डॉक्यूमेंट्रीज बना लें, हम
आर्टिकल्स लिख लें या हम पॉडकास्ट कर लें और चर्चा करें इस बारे में। लेकिन जो उनकी आपबीती है वो तो वही जानते हैं।
चाहे वो ऑपरेटिव हो चाहे वो एक कोई बंदा हो जिसको रोंगफुली डिटेन करके मैं ऐसे लोगों को जानता हूं जिनको 18-18 साल वहां
पर पाकिस्तान की जेल में रखा है और वो 18 साल बाद आए हैं और वो यहां पर टीचर थे और 18 साल वहां पर जेल में रखकर यहां पर
आए हैं और 18 साल के दौरान कश्मीर में आपने देखा कि कैसे हिंदुओं का नरसिंहार हुआ, सब कुछ हुआ।
उस दौरान वो वापस आए। और फिर वह यहां पर उत्तराखंड में कहीं पर एक छोटे से घर में वहां पर रहे और अकेले रहे पूरा टाइम। तो
उनका मेंटली जो स्थिति थी वो ऐसी थी कि वो किसी के साथ रहना नहीं चाहते थे। किसी के साथ बातचीत नहीं करना चाहते थे।
कुछ मीडिया ने भी उनसे कोशिश की कभी-कभी बात करने की लेकिन ज्यादा उन्होंने बिल्कुल खुल के कभी बातचीत नहीं की। लेकिन
जब वो 18 साल वहां पर थे पाकिस्तान की कोर्ट लथपट जेल में वहां पर जितने भी इनोसेंट विक्टिम्स थे उनकी उन्होंने हेल्प
की। मतलब वो लॉयर नहीं थे वो टीचर थे। एक तो उन्होंने वहां पर जो जेल के जेलर थे
उनके बच्चों को पढ़ाया। और दूसरा जितने भी लोग वहां पर सफर कर रहे थे उनके लिए वकालतनामा या जो भी कुछ लिखना
होता था, चिट्ठी लिखनी होती थी वो लिखते थे। ये है कैरेक्टर
बंदे का। तो ऐसी चीजें हैं कि मेंटली इट इंपैक्ट्स यू टू अनदर लेवल। और कई बार ऐसा होता है जो आप आईएसआई की बात करें, हमारी
एजेंसी की बात करें, मोसाद की बात करें, बहुत बार यू कांट पब्लिकली एकनॉलेज। बहुत बार क्या 99 ऑलमोस्ट 100% अनलेस वो
डीक्लासिफाई होता है नहीं बात कर सकते हैं। तो इट इज़ वैरी डिफिकल्ट। दिस इज़ इफ यू आर
गोइंग इंटू सच अ मिशन यू आर 100% मेकिंग अप योर माइंड कि बॉस, मैं ये देश के लिए कर रहा हूं। एंड दिस इज अ
सैक्रिफाइस। हम आई विल गेट नो रिटर्न, आई विल गेट नो मेडल, आई विल गेट नो एकनॉलेजमेंट एंड आई
विल गेट नो अप्लॉज़ और क्लैप्स फ्रॉम द इंडियन पब्लिक और पाकिस्तानी पब्लिक और व्हिच एवर कंट्री इज इनवॉल्व्ड इन दिस।
सो ये है रियलिटी ऑफ अ कोवर्ट ऑप। आप आर्मी में, पुलिस में या बाकी किसी भी संस्था में आपको मेडल तो मिलेगा। आपकी
वाहवाही होगी। आप सोसाइटी में रिकॉग्निशन मिलता है। बहुत मिलेगा। पाकिस्तान में तो इतना नहीं
है। पाकिस्तान में आप मारे जाओगे तो कोई पूछता नहीं है। वहां पर आप कुछ-कछ जो एलट है उनको आप
मेडल्स पकड़ा देते हैं। लेकिन आप देखिए ना बलूचिस्तान खैबर पख्तू में रोज मरते हैं। पाकिस्तानी सोल्जर कहीं
एकनॉलेजमेंट आती है। रिपोर्ट ही वो करते हैं तो बहुत बड़ी बात है।
नहीं होता। हमारे यहां पर कश्मीर में एक का सैक्रिफाइस हो, दो का हो, 10 का हो,
पब्लिकली एकनॉलेज होता है। राइट? ट्वीट होता है, लाइव वीडियो जाता है जब आखिरी सैल्यूट हम दे रहे होते हैं और
पब्लिकली उनको जो है नवाजा जाता है, अवार्ड्स दिए जाते हैं। उनकी सैक्रिफाइस के लिए म्यूजियम्स बनाए जाते हैं। उनके
लिए फाउंडेशंस बनाई जाती हैं। वहां पर तो इंडस्ट्री है। वहां पर तो कोई फर्क नहीं पड़ता। वहां भेड़ बकरी है।
वहां 100 मरे, 10 मरे कोई फर्क नहीं पड़ता। यह सच्चाई है। तो हमजा का जो कैरेक्टर है या जसकीरत जिसको मैं बोलूं यह
मेरे तौर पे एक ट्रिब्यूट है। इंडिया के जितने भी कोर्ट ऑपरेशंस में हमारे ऑफिसर्स रहे हैं, हमारे लोग रहे
हैं, इनोसेंट्स रहे हैं और कोव ऑपरेशन की खास बात ये है कि इसमें कोई आईपीएस अफसर या बाकी लोग नहीं आते। हम
इसमें आम हिंदुस्तानी आता है। हम इसमें चाहे वह चाय वाला हो, चाहे वह टीचर
हो, चाहे वह फार्मर हो, चाहे वो कोई भी हो, इसमें कोई भी आ सकता है। हम
दुनिया भर में आप देखिए कोवर्ड ऑपरेशन में कोई भी आप इस लोक इंसान का इस्तेमाल कर सकते हैं।
तो मुझे लगता है दुरंधर और जसकीरत हमजा का जो ये कैरेक्टर है ये एक बहुत बड़ा एक ट्रिब्यूट है।
हमारी तरफ से, इंडिया की तरफ से, इंडिया के लोगों की तरफ से उन सब जांबाजों को जिन्होंने इंडिया के लिए अपनी शहादत भी
दी, इंडिया के लिए अपनी कुर्बानी दी और भारत माता को भारत को सबसे ज्यादा सर्वप्रिय रखा। मेरे दिमाग में जब से वो
सर्वजीत का केस था, मेरे दिमाग में था। मैं यंग टीवी रिपोर्टर था उस वक्त। मैं एक महीना भी मेरी नौकरी को नहीं हुआ था।
और मैं ऑलमोस्ट टियर्स में था कि देखो यार क्या हुआ। एंड फील सो हेल्पलेस कि मैं कुछ करूं।
कुछ नहीं कर सकते। कुछ नहीं कर सकते। और थिएटर में जब मैं बैठा हुआ था, मेरी वाइफ मेरे साथ थी दिव्या और मैं उस को देख रहा
था आखिरी सीन फिल्म का हम जब जसकीरत वापस आता है और मेरे मन को वो
विचलित कर गया कि भाई देखो क्या हो रहा है। आमतौर पे आप स्पाई थ्रिलर्स या बाकी देखेंगे वहां पर आपको लव स्टोरी दिखेगी।
वहां पर गाना बजाना दिखेगा। ये सब दिखेगा। ठीक है? उन लोगों का ही वो पर्सपेक्टिव है। मैं कुछ उनके खिलाफ नहीं बोलूंगा।
लेकिन आप आदित्य दर का सिनेमेटोग्राफी देखिए। हम उन्होंने जितना रियलिस्टिक हो सकता है
दिखाया और एंड पे खुशी का वो नहीं दिखाया मंजर या एंड में कोई एकदम पेट्रियोटिक
जिंगोइज्म ये सब नहीं दिखाया उन्होंने सच्चाई दिखाई कि बंदा वापस आता है ह्यूमन साइड और ह्यूमन साइड क्या है
क्या कैरेक्टर है क्या रियलिटी है फैमिली के साथ क्या हो रहा है आपके साथ क्या हो रहा है और
या सो दैट वास द सीन व्हेन आई वास रियली इन टियर्स राइट एक तरफ खुशी है कि जीत के आगे वापस
और फिर जब वो सीन आता है ना तब वो खुशी चली जाती है तब उसकी ह्यूमन साइड दिखती है आपको और आंख में आंसू आ ही जाते हैं। आंख
में आंसू आते हैं और आपके मन को ये टटोलता है और आपको सोचने पर मजबूर करता है कि भाई वही चीज जो विक्रम सूद साहब ने मुझे कहा
था कि इंटेलिजेंस एजेंसीज एंड गवर्नमेंट्स हु वांट टू बी असर्टिव मस्ट हैव लॉन्ग मेमोरीज़। सो विल इंडिया हैव अ लॉन्ग
मेमोरी टू रिकग्नाइज आवर सोल्जर्स आर मेन हु आर डूइंग दिस कोवर्ड ऑपरेशंस? आई थिंक वी शुड ऑल हैव एंड सैल्यूट टू आल
आवर ब्रेव हार्ट्स हु सैक्रिफाइस देर लाइफ्स देयर फैमिलीज फॉर अस। अब्सोलुटली नो डाउट्स अबाउट दैट। आई थिंक
दिस इज अ स्मॉल मूव। आई रियली होप कि आदित्य अब आगे भी दुरंधर थ्री और फोर बनाएं ताकि इस मोमेंटम को हम जारी रखें।
मुझे नहीं पता आगे क्या होगा। लेकिन दिस इज अ ग्रेट ग्रेट ट्रिब्यूट और लोगों में भी जो यह ऊर्जा आई है सोशल मीडिया पे इतना
चैटर हो रहा है। लोग इतने पागलपन है को लेकर ये इसलिए भी है कि एक तो जज्बा है एक तो ये दिखाया है कि कैसे हो रहा है। ये
ऐसा नहीं है कि मिसाइलें चल रही हैं और जंग हो रहा है और पॉलिटिक्स है और ये सब है। इसमें एक रियलिस्टिक कररेक्टर्स दिखाए
हैं। रियल लाइफ कि कैसे होता है और क्या होता है। कैसे आप इंक्लूड कर सकते हैं। कैसे ट्रेनिंग होती है, क्या होता है। तो
लोगों ने वो देखा है, महसूस किया है और एक जैसे आपने बोला ना ह्यूमन साइड एक ह्यूमैनिटेरियन साइड जो है वो भी पता चला
कि कैसे चीजें होती हैं। तो आई एम श्योर कि इस दुरंधर फिल्म के बाद बाकी फिल्म मेकर्स जो यंग फिल्म मेकर्स हैं एक नई
पीढ़ी है वो भी इंस्पायर होंगे। एक नए तरीके का सिनेमा देने में क्योंकि मैं कहता हूं कि आदित्य दर की जो ये फिल्म है
ये फिल्म नहीं है सिर्फ। दिस इज फर्स्टली ग्लोबल सिनेमा। या दिस इज इंडियास कंट्रीब्यूशन टू ग्लोबल
सिनेमा। अब इसको ऑस्कर मिलेगा, बाफटा मिलेगा, नहीं मिलेगा वो सेकेंडरी है। मुझे लगता है द रिकग्निशन दैट वी हैव गॉट
फ्रॉम द पीपल ऑफ इंडिया एंड पीपल ऑफ द वर्ल्ड इज़ इटसेल्फ द बिगेस्ट ट्रॉफी। और बाकियों को जो ये मोटिवेट करेगा और
इंस्पायर करेगा आप हद ही नहीं है। मतलब अलग ही लेवल पे है। जैसा म्यूजिक, कैरेक्टराइजेशन, फिल्मिंग जो हुई है ये
मतलब ही इज़ ब्रोकन अ लॉट ऑफ़ फीलिंग्स। मतलब जो होराइजन की जो लिमिट्स हैं वो बढ़ गई है। नाउ पीपल विल थिंक इवन वाइडली
थिंकिंग कि हाउ मतलब ही हैज़ डन थिंग्स व्हिच हैव नेवर बीन डन बिफोर द काइंड ऑफ़ बैकग्राउंड म्यूजिक द काइंड ऑफ़ कन्विक्शन
द काइंड ऑफ़ रियलिटी दैट ही हैज़ शोन। ही इज़ नॉट शाइड अवे फ्रॉम शोइंग थिंग्स हाउ इट इज। मैं आपको बताऊं कि एक तो इन्होंने
वर्ल्ड रिकॉर्ड बहुत तोड़े हैं। हां। अभी 7 दिन ही हुए हैं। 1100 करोड़ टच कर गई है और लगातार चल रही है। जब तक यह
पडकास्ट ऑन एयर जाएगा तब तक मुझे लगता है कि 1300 1400 करोड़ ये पार कर गई होगी। अ मुझे याद है करीबन एक साल पहले आदित्य
बैठे हुए थे। उनके असिस्टेंट डायरेक्टर ओजस गौतम जो यामी गौतम के ब्रदर हैं। और मैं था और मेरे दिव्या एयस थे।
हम और हम साथ में बैठे हुए थे। हम पूरा स्टोरी बोर्ड देख रहे थे। और उसके बाद
उन्होंने मुझे बोला कि मैं तो एकदम दंग रह गया कि जिस तरीके से कैरेक्टराइजेशन और फिल्मिंग और पूरा एक सिनेैटिक एक्सपीरियंस
के लिए आदित्य ने ये बनाया था अलग ही लेवल का। फिर उन्होंने मुझे बताया कि मेरे को एक सीक्रेट तुम्हें बताना है।
मैंने बोला क्या? बोला हमने पुराना म्यूजिक जो है वो चूज़ किया है और उसको एक नए अंदाज में हम दिखाएंगे।
तो मैंने बोला क्या? तो उन्होंने मुझे एक एग्जांपल वहां पर सुनाया। तो मेरे रोंगटे खड़े हो गए।
कौन सा वाला था? अ मेरे को अभी ध्यान नहीं आ रहा बट आई थिंक धुरंधर जो फर्स्ट पार्ट है उसका आई थिंक जो मेन वाला है वो था
और मैंने बोला बॉस ये रिवाइव्ड ऑल दो सॉन्ग्स आइकॉनिक सॉन्ग्स अब लोग जो है क्रिटिसाइज करने लगे अरे
इन्होंने तो पुराने गाने यूज़ किया अरे बॉस आपके पास दिमाग होना चाहिए कि आप पुराना गाना कैसे यूज़ कर रहे हो
और लोगों के पल्स को कैसे समझ रहे हो सो आई वास टेकन अ बैक मैंने बोला दिस इस गोइंग टू कनेक्ट विद एवरीवन
यू नो हर तबका हर ऑडियंस हर हर एज ग्रुप जो ये देखना चाहेगा और वही हो रहा है। ट्रू। सो या ऑलराइट भाई इट्स बीन अ
वंडरफुल कॉन्वर्सेशन। थैंक यू सो मच फॉर स्पेयरिंग दिस टाइम एंड शेयरिंग ऑल दी इनसाइट्स दैट यू हैड। थैंक यू सो मच फॉर
योर कंट्रीब्यूशन टू द फिल्म। थैंक यू सो मच फॉर कॉनंट्रीब्यूशन टू जर्नलिज्म एंड एवरीथिंग दैट यू डूइंग फॉर द कंट्री। थैंक
यू सो मच। थैंक यू जय। ऑल द वेरी बेस्ट एंड जय हिंद टू ऑल ऑफ यू अस।
जय हिंद। जय हिंद।
The information in the Dhurander film is generally credible, with most claims verified or based on reliable sources. The analysis gave it a credibility score of 85 out of 100, indicating strong factual grounding with only minor unverifiable or exaggerated points.
Certain details such as Dawood Ibrahim's health and whereabouts are difficult to confirm due to the secretive nature of intelligence and criminal operations. These points rely on indirect evidence or rumors, making them less reliable than other verified claims.
The verification process involved cross-referencing the video's claims with credible news reports, intelligence analyses, and historical records. Fact-checkers assessed the consistency and source credibility to assign an overall score reflecting accuracy and reliability.
The review found no outright falsehoods in the video but noted some exaggerations and unverifiable assertions. These minor issues do not significantly undermine the overall factual accuracy but warrant cautious interpretation.
A score of 85 indicates that the film is mostly trustworthy and factually sound but should be viewed with an awareness that a few details might be uncertain or overstated. It's advisable to consider additional sources for a comprehensive understanding.
The video largely avoids common misinformation traps like fabricated events or blatant falsehoods. However, it occasionally presents speculative information as fact, especially concerning covert operations and individuals' statuses, which is a common issue in such sensitive topics.
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